Hindi Sahataya Samalayan
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জি - ২ রুল
আলস্য ভীস্থ অফিজি' থা ধরে কাজ
ইযঃ শাই। খ্রি? জাল কাল জামাত
সুলাই সৃজইজি ২ খ্রঃ।
লাল ফুৰ ৰহী জুৰি সুজা শ্রী ।
টাইম ভ্রাল অব এশিয়ায় শ্রীয়ের
জ্বীকালীই ৫ খাজা হাজার খিী হ'বস্তু স্বাহৰ ফাজলা
ও সুবী (ভাজুংখ হই হই অ হয় বা
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ভালুকার মানুষ ক্রু সুন্দহই স্ব স্নাতী
কী কঃ লাকী আর স্নান =
ইসাইকেল == বাকয় হামলা ৫ জ
আর বি ই ইহা গীবানুর জিলা স্কুচ্ছে জ স্ত্রী
স্থ’ অজ্ঞী। ভীৰ অল্প মন্ত্রী নৈ নিরু হয়ে
অত্র হাই স্থান মুন্নত দুস্কাইক্ত নলী অমী ৪
কাশঘৰ দা সূর্ষী অক্ষ্মা ও
" ছ’ি খীল অন্ধ প্রকাল স্কুলুং পুস্বাভ
তা সুখ লাল ল ! চার জঙ্গি
* = এক স্নান ভূল; জি ই ঈ ।
হল 'স্যা দূৰ মাজা - শ্রাব্য স্নালক।
হঙ্গা ? জেনে শ্রাঞ্জ জাহর শ্রীবাত্তক
বাতামহ ভুয়া লুবক ! অত্যা অজ।
আবিষ্কাৰী ইলাহ সুজা ওঞ্জে আছি।
স্বাভাও জান আলী আনা হল স্বী
ল জাব্বী
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भार पंतको
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है
माधवबिलासा
जाते दरद बढ़ेनहीं। सरीमेरी बीरजैसेतैसे इन श्रांखिन
सों दिगो अबीरपै अहीरको कनहीं२ केसरि सुरं
गहू के रंगमें रंगोंगीअाज औरगुस्लोगनकी लाज परि
हेलिबो । गाइबो बजाइबोजू नाचिबो नचाइबो जू रस
बशहवैकै हमसबी खेल खोलो ।। टाकुर कहत और
होनीतौ लहोगीबीर सक अनहानी कहौ कौनी बिधि
झोलिबो । कर कुच पेलिबो गरे में भुज मेलिबो जो
रोप्ती होरी खेलिबो तौहमतौ नलिबी ३ श्राईफाग
खेलिकैसुलिसुखसामुहे सों सुंदर सुघरीसों सनेहसर
सावैहै । केसरिके रंगभीनी चूनरी सुरंगरंग अंगनअनं
ग की तरंग दरशावै है । राजत अनोखो अाधो बदन
गुलालमढ़ो कहकिशोरस अनपछबिछावैहै। अमल
अभंग श्राछो युतउत्तसाह मानो अरुणाघटाते शशिनि-
कसत्ताहै॥घटऋतुवर्णनवसंतऋतु ॥ मधुमतवारेभारेमधु
मधुगुजरत देखि गुणीजन गीत गावत उमाहके। को-
किलनकीबबोलें करतकलोलैंागे पौनहरकालेले
छ चितचाहके।मोहनसोकबिक शिशिर तगीरी
कीन्हो वशरिलीन्होदेशरहेना उमाह के । यहजिय
जानुमानु करु ना गुमानुबालीडेरा परे बागन बसंतबाद
शाहके १ भौरनके पंजागे गंजरत कंजरसे कोकिल
नकीबसों कुहुकिउठिवायाहै। किंशुक निशानसेलसत
प्रासमानछवैववारबरछीनसों अधिकरूपछाया है।
मोहनसोकविकाम कारीगर कोपरि विविधसमीर
सोई सुरंगचलायोहै।माननीगनीमनमानगढ़ तोडिबे
माधबलास। कोसकलसमाजसोंबसंतराज श्रायोहै शिरनगीरी रिमानंद अमीरी पाय कीन्हो पतिझारदफतर सब रहीहै । बिरहपुरामें निज अमल लिखायलीन्हो हरे हरेचातुरीसों चौहदचौहद्दीहै।कोकिलनकीबनबीश मदनकी बद्दी बदि गैदनकी गिलमें गुलाबनकीगद्दी है। भेटले मिलौरीश्रालीटूटिगो गुमानगढ़ काम बादशाह के बसंतमुतसदीहै ३ डारदु मबागन बिछौना बनायल्लव को सुमन अँगला सोहैब तनभारीदै । पवनझुलावै केकीकोरबतलावैदेवकोकिल हँसावैहुलसावैकरतारी दै। उड़तपराग सो उतारोकरैराईनान कंजकलीनाय- कालतान शिरतारीदै ॥ मदनमहीपजको बालकबसंत ताहि प्रातही खेलावत गुलाबचटकारीदै ४॥ ग्रीष्मऋतु वर्णन ॥जेटकी जान जलै मृगजल हलै तैसे पौनचले जालिम जलाकनके जारसे। कहैगिरिधारी जीवजंतु तेअनंत तेवै जहांतहां छपेसबै तपे भौनभारसे ॥ अन्द रन नृतिवित्ति परीबंदरन रहेदति दंदरन सरपसंहा रेसे । मंदरन सिंदुर मदांधधूपबंधरनकंदरन कोलभील कल्हरें कल्हारेसे १ तपतम्रचंड मारतंड महिमंडल में ग्रीयमको तीन तनिवारापारहैं। कहै गिरिधारी कीचकांचसीदहनलागीभयेनदीनदनीरमदहनधारहैं। झपटै चहंघासी लपटै लपेटै लक फनीकीसी फूक पौन झूकनकी झारहैं ॥ अवांसी अटारीतपी तवासी अनि महा दावासे महल नौ पजावासे पहारह तेज सरसानेभानुभूगिरिविकानेभूरिरिकेउड़ानेदिगqधुरि ॥
माधवविलास।
दिखाने हैं। पौनके झझाने भूक आगि जनुसाने
बनमाड़ झरसाने सर सकलसुखानेहें। कोलकहलाने
सबजीव अकुलाने अति प्रातप अघाने आजि छांहन
छपाने हैं। अंदर दुराने तहखाने खसखाने लोग मून
कबिताने इमिग्रीयमबखाने, ३ सूखेसर सरितासनाका
सिंधुबेलालगु तीनिधिकानी धराभूधरबखाने और।
शाखनमें शाखामृग शकुन समेटेसमदंती मतवारे जारे
अनिलझकोराझोर॥कहेंअवधेश कैसे बीतत बियो-
गिनकी दावानल दौरा बिलोक्यो मीशाई छकोर।
कहलमचीहै कोल कच्छपककोदरलौउठगारस्मजकी
उपारसमैबढ़ीलैजोर ४॥ वर्षाऋतुबर्णन ॥ मंदिडास कॉमरे
झरोखेहार नाबदानपवन न अावैमेरो दरदबटावोरी।
जेते अासपास बागबने हैं सुगंधनके तेते अबजाय जरा
मरते कटावोरी॥बेनीर्काबकहै जोकलापिनसोराखा
चही पापी पिहाको यहि देशते हटावारी। पिया
गुगानगावो नसुनावो शार मोरन की घटा ना दिखा
वो बेगियांगन पटावारी १ कैधाविषधर खाई मीच
आई मोरनको भतल प्रकटपरीकीचह नईनई। कैमा
दौरि दादुर गोबि दरारनमें पापीपपिहाकी चोंच
पावक दहीदई । घासीराम बाक बक बाजनीकोवास
मानि कैया वहिदेशबीर पावस टईनई। कैा काम
प्रयामज के अंगते निकारिगयो जझिगयो मेघ कै
बीजुरी सतीभई २ कधी वहि देश में हमेश बरसत
मेह कैवा निजदेश बेश बादर निरिगो। कैया बक
माधवलास। दादुरन दामिनी दिखाईदेल कैधा पिक चातक मयूर गरपरिगो ॥ कै हैनकागद कलमकी रबैयेउहांकों शिवगुलामज वैये कहूंधरियो । कैधों उन गावन में सावन सुहावननाकै मनभावनको प्रावन बिरिगो३ लगी से लगाय लंक लोयन खराबकरो मारिकरो मोरन अहार मारमारेको । सुबि निहाल इनांग- रिन मंदिमंदि निह। न शारघोर मिलीझनकारेको। भेखनकी भीर सहसानन समेटिडारा भेटिडारो गरब गरूर घनकारेको । जालसों जकरि कहूं पायो जोपका रिपंख फीहाफीहा करों या पपीहा दईसारेको ४॥ शरदऋतुबर्णन ॥ ॥ फले श्रास पास कास बिमल अकासम- यो रहीन निशानी कई महिमें गरदकी। गंजत कमल दल ऊपर मधुप मैन छायसी दिखाई आनि बिरहाफ रदकी। श्रीपति रसिकलाल बाली बनमाली बिन क कूला उपाय मेराजयके दरदकी। हरद समान तनजरद भयारी मोहिं गरद करत चारू चांदनी शारदकी॥ शरद प्रकास भई पावसकी सामगई कात्तिक के मास जूह वारिद बिलात है। श्रास पास कास गुलाबास बृन्द फूले देखि सेज पै करजे शलहात निजात है ॥ सेसही बिथामें कंत बायकै पुकास्यो हार निकै अबाजभयो हर्षयुत्त गातहै। सुधि बुधि छांडीदौरि खोलकिवांडी ब्रज सांवरे बिहारी मिलि प्यारी सुखकाल है २ अमल प्रकाश उदै अम्भज सितारे तारेतारंपति तैसी प्रभा सक लसिहातेहैं। सलिलखुखाने बीथी विमल पयानेसाह २ १० माधवविलासा उदितडछाह लुगहस्य तारताते हैं। कानवधेश शोभा ভিৰি কিৰ বত্র প্রেক্ষা कबहंवित बलाहक दिलानला पदुमपरागलेले मिलउडातेहैं ३ कालभयो कानल में कछुक विकास योगस्वाती श्रास चातक विवादकछ नास भयो। नास भयोमृगदुखजन हरदासक त्रानंद चकोरबको चोरन वासभयो। वासभयो गरदशरद की अचाई जानिली- लयास खंजनको नगर श्विास भयो। वासस्योरखद জাজ ভাল জঞ্জ লুক। অত জাদুল শ্রদ্ধা सभयो । ४ हिसकतु वर्णन | श्राीतिकोतरी सवारी सेजसोधे सनास पास भीतर कयर बारे रहें। हार परे परदे गलोचन सों हॉपीभूमिजदीश दीपक सोना- नंद भरे रहैं। ताही समय कल संग युनती हेमंत श्यतु कौड़े पलका दोऊ शानद भरे रहैं । शीत दुखद पटे सनेह सुखच्चपटे लो लपटे दुशालन में कम परेर हैं १ रापटी रंगीली रंगीले दीपदान दीपैदावीह परदेश अम्बरी छिति छाई है। कहै मनवेश लेसो फारम गलीच- नकी श्राले बाले सकल दुशालन सजाई है। उचउर पंडनक्षी प्रमदा प्रमोद कासमीरीनंग राग जासों उदे उयाई है। जांच टांव हौजभरे हल हसानन के हरथा हमेशा होत हिमतु आई है २काले तनवाले मीन बालमणिलालेकंठ कालेकर कौलले विशालविवा- लेवी ! भाले बनमाले जनपाले बलशाले खलधाले रस जाले सो कलाले निपटा लेरी॥पाले हिनचाले सोब- माधवविलास। चाले मनवाले बाल शाले नौ दुशाले उमाले सो उता- लेरी। श्रगी खसकाले मणिमाले को उढाले ब्रजबाले नंदलालको हियाले लपटालेरी ३ अगर की धमृग मदको सुगन्धवार बन्चल विशाल जाल अंग डाकियनु है। कहै पदमाकर सुपौनको न गोज जहां से भीन उमगि उमंग बाकियतु है। लोग औ स्योग हित हु. ऋतु हे मंतही येते और मुखद खुहायेवाकियतु है। तानको तरंग तरूपायन तारामतेज तेल ललतासात मालताकि यहै शुशिशिरन्तु वर्णन | बारियों महलकी नहलकी सुंदीहै जहां शौ पारसलकी गोलियांतल की। जोतमोल भलकी सिरहै हालकी जोध्यालि यां श्रमलकी पल सनबमालकी। ज्वालकनिघजकी लचीली लंकबलकी वो फल समहलको प्रभा झाला झलकी। बिपरीत ललकी कहको बात कलकी तो बालै छबि छलकी दुधालेमें उद्धलकी १ भाडेजारहता रूमहादेही रहत सदा पश्चिमकी पाय पौन पालासों फटलहै। कांपत करेज सेज सोडको सुखद कहागरम गवांरकी गरूरता घटता है। बेनीकविकोपांचगानीके परसहात पीरती उतनेम नाही जियरन है। बोड़िये दुशाला तरे ताशक विशाला शिनालाश अंबाला शीतकालाना करहै २ दरदरमा और सरकार सांय तऊ थररका अंगचजत बतीसोजाना दिलखतलाश के चोहरेगलीचन सेजमखमली शाहे से शादीती जामाबालविकहै भृशमदने धुकायेस बरतनंबर- -- माधबिलास। नीतामें भागिहलयीसीजाय ॥ छाके खुरासीसी यानि सोसीसी मिगी जौलो कुच्च उकसीसी छाती छाती सोन मीसीजाय ३ नारीबिन हातनर नारी बिन हाल नर रातिलियराति उरलाये पयोधरमें। बेनीकवि शीत लसमीरकी सलाका मुनि सांकहीले सोवत कपाट दै सदनमें। पक्षीपर जोरेरहै फलफल थोरेर है पालाको प्रकासनास पास घरातलमें । बसन लपेटेरहै तऊजानु पटैरहैशिशिर समेटेरहै लेटेरहै घरमें ४ अथ घट्नंगवर्णन ॥ प्रथमपदवर्णनगंगाजीके जलमध्य कंठकेप्रमागापैठिजयि जपि सर मंत्र भानंद बढ़ावही । केशोदास घामजन शीतलहैसकरस टाडेशपांय कोटिकल पै नशावही ।। कोमलनमलभये सुंदर सुबास भये कमल निवास मन यदपि भ्रमावहो । पायो बस ब्रह्मपद पदमिनी पद- मिनी तेरेयद पदवीकोपद पैन पावही १ मंदहू चपतइंदु बधुके बरणा होतध्यारी के चरणा नवनीत हूते नरमै । सहज ललाई बरणी न जाय काशीराम चुईसी परत छवियाते मति भरमै ॥ येरी स्कुराइन की नाइन गहत जब ईगुरसों रंगदौरि जात दरवरमै । दिया है कि दीबहे बिचारि शाचै बारबार बावरीसी होरही महावरी लै करमै २ विश्व में प्रवाल में न इगुर शु- लालमें न जपा पुटपमाल में नकिन चित निहारे में। दाडिम प्रसूनमें नमून धरासनमें नइंद्रकी बधनमें न गुंज अँधियारमै । हैकुमुभारंगमेंन किंशक पतंगोन जाव- कमजीठ कंज पुंजवारि डारेमे । राधिका तिहारे पग .
माधवबिलास।
अरुणा समताको हेरिहारै कबितान पावत विचारे
मे३ जगमगे जावक जगीले जरबीले बैचों ऊपरतेभपर
प्रभाकर प्रभालची।गरबिहीन कैया शारदसरोजपंज
कैधों छबिछायेसे बनाये बिधिलालची ॥ भौनकाब
कहैरंगरतिके हरौलकै निकसे निवेरिगति गतिके
विशालची। तरूणातिहारे पग जगमग होतकैधा जग
के जलसमैनभगके मसालची२॥ अथकटिबर्णन ॥ कोऊ
कहैतत्त्व चारिक चुकेपैले अकाशहीसों कीन्हों
चतुरानन चरिहै। कोऊकहै कौनौ छलहन्दहै कहत
कोऊ बिधने बनावत बिसारेउ हरबरिहै । तेरोईसो
तनताही जाना जनेउनीस भेऊपाया महीहै गोविं
दमन धरिहै। नाभिसल करगी तरंगिणी विलिकुच
शम्भुलग पायेकै मुति पाई रिहै । उन्नत उरोजन
को भारबेशुमार कौन करत विचारपार विगतअनार
। नजरि न पायोध्यान धीरज लगावै गहे अंकहू न
पा कहंकासबिहारमै ॥ भौनकवि कहै तिथिबार
श्रौलगन जैसे प्रकटन होत बिन ज्योतिय निहारमै ।
ब्रह्मके स्वरूपते महीन कटितेरी येरीहांक किना
करें सेना परै बिचारमै २ अतक्षी मिठाई जैसी खांचे
को भांडाई जैसी स्यारकी दिठाई जैसी हीज छहरतु
है।धीरकैसाहसिक्केशोदासदास सोमुख शरकैसीयांक
अंक रंक कैसे वितुहै। सूमौसा दानत्ति मूह कौसा
ज्ञान गौरीगौर कैसा माल भेरेजान समुदित है। कौने
है सवारी वृयमानकी कुमारीप्यारी तेरीकाट निपट
१
३ । माधबिलास। कपटकसा हितुहै ३ येरीटयभानकी कुमारी तवति लखि ध्यानमेना अति सक्षम बिशालहै। कधाहर बरमें बनावजिसरी बिधिका जोरिदीन्हा अनुतार लै कि वालहै ।। माधव कहत करपरसते जान्योजात ऐनकलगायेलरिखपरै कछुहालहै। सत्यहैकि झंव्हैकि नाहीहैकिधों कछुजादू है किमबहैकि तंत्र इन्द्रजाल है ४ अथकुचवर्णन ॥ कैसेति रानीके सेंधौरेक है श्रीपत्ति ज जैसे कलधौतके सहरुह सवार हैं। कैसे कलधौतके सरोरुह सबारेकहे जैरे रूप नरके बटा बिधारेहैं। कसेरूप नरके बटासे छबिधारकहे जैसेकास अपतिके उलटेनगारेहें । कैसेकान भूपतिके उलटे नगारेकहेजैसे प्रायाप्यारी कुच उन्नत तिहारे १ कनक अनारदो तयारकरि कारीगरभरिकै श्रृंगार रसबंदनहींकीनो है। पायकै सुबास कैधालखि गुरुदास मनौ कंजको कलिन पै मधुपबाल लीनो है ॥ कैथा शम्भु अस्थिर हवै बैठेहैं मनिबैक शीशन पै जटाजूट सोहत नवी नाहै। पारी के कुचनपर काम खेलवारीमना सोना डीह लगिवे को स्याही धार दीनोहै २ कूजे कंद कि- न्दुक से बालेगज कुन कुन सम्पर सराहिकोते वारि वारि डारेहैं। चंद्रमुखी उरके उरोजनकी नो घनखि चक्रवाक श्रीफल सचि हियहारे हैं। कहै शिव- गुलाम चोखे नाखे नये नीरज से अधि ये नगारे नये नारंगी निहारे हैं । सुभा सलोने अनुहारि हर होने लोने सोनेके अनारसे निहारि निरवारे हैं ३ ॥ काक
माधवविलास।
कोक नदसे नगारे निहारियतु भार मानलती बटासे
बरदरसे । कन्दकैसे कसे तरबजे नारंगीसे चास सम्पुट
सेवालेसे अनारशीफलसे॥ कहै गिरिधारीप्रासाप्या-
रीके उरोजोऊरूप कैसीराशि महामोहनीके घरसे।
गागरिसे गंदसे गुरुज गजकुम्भजसे गुम्बजसेगुच्छसे गि-
रीगिरिवरसे॥ अथमुखबर्णनम् ॥ कोमलता कंजसे गु-
लाबते सुगन्धलेकै चन्द्रते प्रकाश सातो उदित्तउजेरोहै।
रसलै रसाननसों नीर निरवाननसों चातुरोसुजाननसों
कौतुक निबेरोहै। टाकुर सोविया मसालो बिधि
कारीगर रचना रचनहारो और सब रोहै। कुन्दन
कोरंगलै सबादुलै सुधाको बसुधाको मुखलटिक्कै बना
यो मुखतेरोहै १ ॥ एककहै अमल कमल मुखसीताज
को सककहै चन्दमुख प्रानंदका कन्दरी। हायजो क.
मलतीता शैलही में सकुचैरो चन्द जोती बासरमें द्युति
होय मन्दरी । बासरहू कमल रजनीहीमें मुखचन्द बा-
सरह रजनी बिराजै जगबन्दरी। देखो मुखभावना न
देखाई कमलचन्द ताते मुखमुखै सखि कमलेन चन्द
री २ मृगनकी मीननकी चंचलाई नखनमें हीरनकी
मोतिनकी ज्योतिहै रदन में। भाई है सिमिरिक मिठाई
सब प्रोउनमें ऊंखमें न दाखमें न स्वाद सरदून में॥ महा
वि बालमके खलेहें विशालभाल रातिदिन राजत
मसालसी सदन में। विधने गुलाबकैसे अश्कउतारि
मानां चन्द्रकी निकाई राखि प्यारीके बदन में ३ ॥
भृकुटीतनीको नकसरि बनीकालट नागिनि फनीको
१६ माधबिलास। लखि कंजफल फीकाहै। मैनकी मनीकालेन बान की अनीकाबैन चोखेरस नीकाहौस हुलसनहीकोहै। रूप रमनीका कहा रमारमनीको गजगति गमनीका सिंह जीवन साजीको है। बंदीबन्दनीको मन्दहासफन्दनी- कोमुख चन्दहू तेनीका यभान नन्दगीका है ४॥ अथ नेचवर्णनम् ॥ खेसमैनतीके हैं ल और जगतीके नरक हूं गनीकेहैं न देखे हरनीके हैं । नाहीं नैनगीके बरलसै पत्नगीकमन मैनकाज नीकनैन बानह अनीके हैं । उ- पमा नफीके बर मुखमा धनीके हसदेखे हैं नवीके मन मोहन भनीके हैं। मीन हैं न टीके खंजरीह कहीके भोर रंकजहूते नीके नैन गोप नन्दनीके हैं १ सान वरी सुन्दर कृपानसी कही न जात बानहूते बेधक बि- शेष दरशावती। कैदकै कटाक्षनसों किम्मति करन की हिम्मति हजारनकी हरय हरावती॥ भौनजि कहैचारु चिकनी चबाइन में चंचल चलाक चोटी- चक बचावती। ऐसी अनियारी अंखियान में अंजन प्रांजि प्रांगुरी अजब वै अटाक बचि श्रावती २ भृ कुटी चढ़ीके योधा मैनकी गढीकसौति दोयक दढ़ीके रंग करत रदीसे हैं। भर्भागात बिन्द्र चन्द्रमाकी श्रीर चाहरि उपमा चकोर मति पावत कदीसे हैं। को- कनद मुद्रित मलीने मृगसीनेमीन खंजननवीने हेरिहारे तेहदीसेहैं। ईशके अशीसेपैकमानके कशीसे मैनसदके मदीसे नैन तेरेसेनदीसे हैं ३॥ सकई झपाके में छपाके मनमोहैद्वग ऐसे मासमाके ना रमाके ना उमा के हैं।
माधवविलास।
हैं । दशहूदिशा के मनमा फल देनहारे करन निशा
के मिताके अब का हैं। भापक जहांतहां मीन
अल ढांकेगये हरिन हरीलहांके कवल कहांके हैं। सद
नसमाके सुखमाके उपमाके चारू चंचल चलांक नैन
बांके राधिकाके हैं ४॥ अथ केशवर्णनम् ॥ श्रीपति सेवार
कैसे सोहत शृङ्गार जैसे सोहत शृङ्गार कैसे जैसे तम
धारहैं। तमनकीधारकैसे महकत्तसार जैसलरक्तसार
कैसेजैसेवनभारहैं। घनमक भारो मोरमलबार जैसे
मारपखवार कैसे जैसे अलिहार हैं। चलिनके हारको
पन्नग कुमार जैसे पन्नग छमारकैसे जैसे तेरेबार हैं।
तमतम तामसरसादिघद तायदसी नीलक जटाबाट
र्जाद प्रजटीसी है। पजन प्रकन्दरण दीपक शिखासी
चारु हाटक टिक नोष चाक फटीसोहै। चक्कुच
दुबिच विचित्रकृतबकवेध छटी लटपाटी घटतट उप
टीमी है। विरह अशुभ्रपक्ष तीतन प्रदोषपाय पन्नगी
पिनाकी पदजि पलहीती है २ सुन्दर मजीले पर
लब्बसहजीले राधेपरमलजीले शभ कजन कजीले हैं।
बेलिनबसीले अलिनोलिन हँसीले कृपयशा में यशीले
आदि रस मेरसीले हैं। नेहपरशोले घरलेह सरशोले
अननैन चमकीले चहकोले चटकीले हैं। तेरेकच नीले
छटि छबिसों छबीले मानो पजग नगीले मैं मन्धवत
कीले हैं ३ पीदित्तन ताकतही डीदि डसिलेत अाली
फैलिकै विरहविध रोमरोम धावतो । क्षणाक में ऐसे
हाल होतेना कितेकनके कोऊ येते गाडुरी कहांते ढूं
३
माधवबिलास।
ढिलावतो।। ईश्वर दोहाई कहं होती वाकी व्यालि
नी तो काली के नथैया कान्ह काहे को कहावतो।
मुरि मुसक्यानि मंत्र जानती न राधे जीती बेनीकेउसन
ब्रजबसन न पावतो ४॥ अथ गाररसवर्णनम् ॥ चरसा क
मल तन सरस कुसुमरंग चम्या के बरणा तन गंधही
जेनहै। नारंगीली मंडीऔ उरोज बने श्रीफल बिम्ब
से अधर दंत दाहिम निजैनहै। अलि कैसो केशरंगा
कीरकैसी नासिका है कंठतो कपोत कैसो काकिला
के बैनहै। गति गजराज कौसी कटि मृगराजकोसी हा
यसो घुघुट हरिन को जैन है १ चम्पक कती सी
खिली अली अवली. वृषभानकी गली मैं चलीजात
पंथ पेखी। कामभवलासी कलाधरकी कलासील
बलासीलिये कनक लतासी अवरेखी मैं । शिवलाल
तारिखन ते ऑखिन ते वाकी चाल टरत न टारे चारु
हंसको बिशेखी मैं । छबि तनुजासी छवि दीपके उ
जासी पंचबान के धुजासी सिंधुजासी जात देखीमैं २
बानी कहिये तो वह बीनाको लियेई रहै गौरी तो
गिरीश अरांग में लगाई है। कमलान कान्हकेहि
येते उतरत अरू रम्भाने तो येती नहीं सूप अधिकाई
है। रति कहियेतो अति प्रौढा अबहीं है अस यामें
तो अलग कक लरिकाई है। फेरि फेरि बेरल
गि हेरि हेरि हास्यो नृप जानि ना परत यह कोहै
कहांबाई है ३ केरि को गासलै शिंगासनाशिंगास
ला बिगारु देह दीपति मनोहर मसालकी । ऐसे कस
माधबिलास।
१६
লীর্জা আখী স্বত্ব স্বীল অল লায়লা স্থল
रूप जालकी॥कहै गिरिधारी श्याम सारिहो सँवारे
एक बार नेक अनेकवि भयमा विशालकी। मातु
करै पाली वह मृग मदवाली बाड़ सौति मदगंजनी है
अंजनी गोपालकी ४॥ अथ संयोग शृंगार वर्णनम् ॥ अतर
लजात मृगमद पहितात जात बारिजात हारिजात
सौरभ उत्तत है। श्रीति अगार मैं अगर उदगार
ऐसी डगर बगर छबि छाजत अनन्तहै।हीकरनसख
मुख सौतिन मसी करन बदन जसीकरन जीकरनयंत्र
है। पति से रसीकरन रतिका हसीकरन सीकरन
प्यारी को मसीकरन मंत्रहै १ चन्द्राति सन्दभई
इंदमें पासोही मानिननद करेगी धोरछोडि सालबाई
है। सासु सत्तरे है जेठ पतिली रिसे है बंकवचन सुने
अरे जोर लगाधागि नौलौहै गिनती औ बिनती
इहाली देव किया काहा चाहत रहनि कुलकानिदै।
दानदेरे जानका निदान निर्दी कान्ह बक्षी सारी नि
मोहिं अब घरजानदै कुन्दकी कलोसी दंतपंक्तिको
मुदीसी दोझी बीचबीचमीसीरेखामीसी गारकिजात।
बीरीत्योरचीसीबिरचीसीतिरछीसी लखैरीसीरिख
याकैतफरीसी फरकिजात ॥रसकी नदीसी दया
निधिका नदीसीयाह चक्रित अरोसी रति डरीसीस
किजाता योद फंसीसी रोसी हातिजो कसीसी
ताजेसीसीकरवे में सुधासीसीसीढरकिजात ३ सोयेशब
लोग तुमाने भले योगा मेटो बिरहबियोग उरशानद
३
আজিজ। लपट । काहूकान डरौ परयंक मिलि परौ परिरंभ ध्यारे पारीतुम्हें कैसे कोङ हटकै लीलाधर पीतपद न्यारोकरि मरो बनमाल परिहरौ जामें नेकह न अट कै। देहरीकी बा तरफ केहार ननदपरी येहरि सँभा रूपग जेहरि नखटकै ॥ अथ वियोगशगार वर्णनम् ॥ऊब तहाइ बतही डरातही डोलतही बोलत न काहे प्रीति रोति दरित चले। कहै पदनाकार त्यों उससि उसास नसे आँसबै अपार माय झांखिन इत्तैचले ॥ौधि हीके भागमा ला रहत बतौरहोजीचही क्योंबैरीबन्धु वेदन जिलची येरे मेरे प्राणा शान्हप्यारेके चलाच लमें सबतो चले न अन्य वाहत चित्तैचले १ प्रागा प्या रोगहते प्रयानकार गया माली मानो मेरोदेहत्ते पयान प्रानकरिगे। कहै गिरिधारी तबहीते सुधि बुधि गई मानद बिनादन मन्दिर उमरियो । जाकेअंगलागि लत्यो अनितननंगसुख छांगते बिरहज्वाल जालन से जरिय। जातों को अंतर नहारनके परेहाय तास अन अंतर पहारज के परिये २ श्याम श्याम सघन बिराजैधनचारोंथोर कांश बहुतरल गगनबीच छ- हरै। दादुर श्री और बहोरनते शोरकरें मडीमहि मण्डल में महाजल लहरै। प्रीतमप्रबास तासों दाहत वियोगी बाल कोन्होंज अनंगजीर बैठी अटाकहरै। छिनक पौढ़े छिन बैठे परयंकपर छिनक मैं करै हाय हाय उठि रहरै३ श्राई सुधिपीतम की भली सुधि और सब कौन समुझावैना सहेलीकाऊसाथमैं ।
माधवबिलास।
अतिही दुचित्त चित्त लाये सने सदन मैं बैटी प्यारी
वरिकै बबन शक हाथमें॥चिषकैसी लिखीनेक डो
लति न बोलति न बिरह की मोटार दोन्ही बिधि
माथमैं । सुनत न बात सूनेहोगये सकलगात बैठीध्यान
कीन्हें मन दीन्हें प्राणनाथ मैं ४ ॥ अथहास्यरस वर्णनम् ॥
हँसी हँसि साजै देखि दूलह दिगम्बरको पाहुनी जे
प्रा हिमाचलके उछाह मैं। कहै पदमाकर सुकाह
सों कहै को कहा जोई जहां देव साहसेई तहाँ राह
मैं॥ मगनभयेई हँसै नगन महेश बढ़े और हमें येऊहूँ
साहसिके उछाह मैं। शीशपर गंगाहस भुजन भुजंगा
इसै हाँसिहीको दंगासयो नंगाके विवाह में ।। अंबर
लै सबके कदम चढ़ि बैरोजाय हास्यरसमाही को
नाहीं कब हां करें। कहै गिरिधारी नीचे खड़ी ब्रज
नारी सब अंगन उधारी बनवारीसों हहाकरै ॥ हाथ
जोरि करोदिननाथ का नमस्कार कहै ब्रजनाथ तौज़
तुम्हरे करें। बिना रबि बंदनन देहदाऊकरजोरि
बंदन करौतौदेय बसन बिदाकरैर कहा कहाँ नाथक
लिकालका जितेनहीं जानिये कितहानेक सुनतनहीं
करी।कविशिवलालदोबदीजैकौलन्याविन हाथपांव
होकैजिनकाटकीभगाकरी बिनडेरकीन्हेंमहापातक
अनेकहम घातक यमनईतेलगी औलगाकरी। पावन
पतित झूठीकीरति खुनायतेरी हायमेरी बेदन पुरानन
दगाकरी ३ लक्षणा तिहारे तो प्रतक्षगा लखैपरै बड़े २
रूमलखि लाखौन दुरतो । सांपबैलबाघ बियराखमढ़
माधर्वाबलास। बाँफिरौ गंगको प्रबाहहेरि हुबइतेभुरतो ॥ घासी रामसुकवि देवइया हरहोते कहां चंदजातो सिकिल न सकौ रंगघुरतो। गौरिजोनहोती अरबंगगिरीश कोसो सांचीसुनी भूतनाथ खयबेको न जुरतो ४॥ अथ करुणारसलिख्यते ॥ आँखन अन्हाय हायहायकै कहत सब श्रोध पुरबासीके कहायो दुख दाइये । कहैपदमाकर जलप्त युवराजीको सुरोसोकोवनी है जायजाके शीश वाहिये।मुतकपयानदारथनेतजे जोमानबाढ़योशोक सिंधुसे। कहाँलौगाहिये। मढ़मंधराककहे बनको जो भजेराम सेती यहबात केकयोकोतो न चाहिये। अक्रूर गोहन चलत मनमोहनके बसुधा विछोहन के बीजनको बोवती।कगिरिधारी धीरवारिचनावारी धीर करुगा गंभीर ब्रजमंडलविगोबती।नंदकी यशो मतिकीगोयनकी गोपिनकी बिपति बखान कौन प्रां सुनसों धोवती। चोखतीनलया चाराचरती न गैया मिलि जलकीगिरैया औचिरैया बनरोवती २ कदम की डाली ढकद औबनमाली कोपिकालीदहभीतर बियोगबीज वेगया। कहैगिरिधारीधायेनगरकेनारी नर भईभीर भारी नीरनैननतेच्वैगयो ।। नन्द नँदरानी अररानीपरें पानीबीच भोकनोक पररस शोकबीज बैगयो । यमुनासमानो अाजु ब्रजको सतन हाय यशु मति मनबिन सनब्रजवैगयो ३ कामरीपरीहै कहूं ल- कुटीडरीहै कहूं बांसुरीवरीहै अब इन्हें कौनरिहै। कहैं गिरिधारी कोरचैगो रसरासकैनविरचिबिलास ३
माधवबिलास।
वृन्दाबन में बिहरिहै ॥ यशुमतिरानी दीन बानीसों
कहत श्राजु गोरसके काज कौन गोसेवानि रिहै।
संग ग्वालबालन के खेल है को ख्यालनको लालन
बिनारी गोपालनकोरिहै ४॥ अथपुन:करुणारस ॥ ग्राह
राहे गजको अगाधै जल लियेजात बाहि पाहि भायत
भोभरिभरेडरते।धायकै गोबिन्दनाय फन्दते निफन्द
कीन्हों दीन्हांवाहबारनैसा काहिलीन्होंसरते ॥ चन्दि
काप्रसाद बिचारकरैंदेवसब देख्योहम श्रावतनामि
वाश्रधरते। वारितेमुरारि काकडेगाह श्राननते कंज
तेनिकरि कैधात्रायेकरीकरते १ उौ कोपिकाले प्रल
यकालवाले धारावर शुगडादराड धारेलगे धारैचहूंश्रीर
पर। कहें गिरिधारी अकुलाने ब्रजबासी सब पाहि
पाहि भारत पुकारते निहोरपर ॥ मोरपंखवारे रख
वारे ब्रज गाइनके ताबिनान कोऊरखवारोयहिटौर
पर। छोभरि छोहनीते उठायलीन्हों छोनीवर छा
यदीन्हों छबसों कनियांके छोरपर २ गौवग्वाल
बाल अहिगालमें समानेजाय जानतनहुते ख्याल खल
बल जूटको। कहें गिरिधारी पीछे रहिगे अकेलेका
न्ह करुणानिधान धरे करुणाविकट को ॥ देवकी
नंदन लि बदन अघासुरके पैठेश्राय पैठत्तही कीन्हों
यह ऊटको। शैलके समानबड़े फैलमेंफुलायोतन फू
लिकै पानीको फन फाटिगयो फूटको ३ जानिपरी
निकै अवाज कान्हजके कान जानिजन आपनो
अनाथकी पुकारथी । छोड्यो सिंहासनी छोड्यो
AN
माधवबिलास।
पन्नगासन ौ छोड्यो गरुड़ासन से धायो परमार
थी। नन्दन सों कविष्यारी कमला अकेली छाडि
हाथन हटयार छोड़ो छोड़ो रथ सारथी । धाये बज
राज गजराजकी अरजमानि भायेलि वाहीके मनो
रथ महारथी ४॥ अथ रोद्ररसवर्णनम् ॥ बारिवारिडारों
कुम्भकहि बिदारिडारौं मारौं मेघनादै नाजु जो
बल अनन्तहैं।। कहें पदमाकर चिकहिकोदाहिडा-
रौ डारत करेई यातुधानन को अंतही ॥अच्छहिनिर
च्छकपिलच्छवैउच्चारौं इमि तोसे तिच्छ तुच्छनको
कछवैन गंतही। जारिडाशैलंकहि उजारिडारी उप
बन फारिडारौं रावनको तोमैं हनुमन्तह। १ मारिडा
श्रनुज समेत हिखेत अाजु मेटिडारों दीरघ बचन
निजगुरुको। सोतानाथ सीतासाथ बैठेदेखो चतर
यहि मुरवसाखों शाक सबहीके उरको॥ केशादास
सबिलानिवि वासहाय केकयोके अंगअंग शाक
पुत्रज्वरको । रघुराजजूको राज सकलछिड़ाइलेउँ भर
हिं भाजु राजदेउँ प्रेत पुरको २ गोपिन सों कहत
गोपाल दानदीन्होबन जाननहिपही करौ केती उबरे
सीको । कहें गिरिधारी राजडेहि सुनाय कहा माहिं
डरपातिहा डरत न सेसीको ॥ जाके बल बिक्रम को
तुमको गुमान ताको पलमेंमिटाऊं बलविक्रमकी वेसी
को । मार्लाह पछारिडारौं फारिडारौं मुटिहि मारि
डारी कंसहि संहारिडा केसीको ३ प्यारो रामचन्द्र
कोअनैरो दूत कोथ्योबोर जासबल बाजीलागा प्रभु
माधबिलास।
के प्रमानकी । भनै भगवंत लागी रावन उदासी सब
देवन सुधासी हांकहोत हनुमानको पछिमें न श्रांच
लागो बाढिके प्रकाश लागी मागिलागी देविभागी
भीर यातुधानकी। मयता शंकलागी प्रियादौरिनं.
कलागी लंकलागी जरन जुड़ानलागी जानकी ४॥
अथ बीररस वर्णनम् ॥ चरित्रोरसमुद विहदनदहदकीन्हें
दुरघट प्रोटकोट पाय पुरपरके । कठिन करालकाल
दाडते विशालबली कोटिन कृपानगहे बीर निशिच
रके ॥ सहज अशंकबंक रहत निशंकसदा बरगौ कहां
लौं कबिनन्द बरहरके। बैन कपिबरके सुनहियहर
के सोफरके उदण्ड भजदराड रघुबर के १ साहै अस्त्र
वोड़े जेनछोड़े शीश संगरके लंगर लँगर उच्च उचके उ
तंकामैं । कहै पदमाकर त्यों हुंकरत फुकरत फैलत
फुलात फाल बांधत फलंका मैं ॥ श्रागे रघुबीर के स
मीरकेतनके संग तारीदै तड़ाक तडातड़के तमंका में।
शंकादै दशाननको हंकादै सुबंकाबीर डंकादै बिजैको
कपि कूदिपरे लंका मैं २ डहडहे डंकन के शबद निशं
कनि बहबहे शवन के सैना आनि खरके। कवि
हरिकेश इत चम्पत्तिकोलाल चल्यो उतै तुरकान दल
उड़ि घुड़िक। हाथीको उमड़माडूरायक्की घुमड़त्यों
त्यों लाली उघरत मुखवशाल बरके । फर्राकफरक
उटैभुजा अस्त्र बाहिनेको ककि ककि उटै करिब
खतरके ३ दौड़ेकालकिंकर करालकरतारी देत दोरी
कालीकिलकत सुधाके तरंगते। कहैं हरिकेश दांतपी
२६
माधवविलास।
सत खबीसदौरेदौरेमराडरीकगीवनीदर उमंडत्तेबी
रजयसिंह जंग जालिम छुकौनपर फरकाई भुज श्री
चढ़ाई भोहभंगते । भंगडारि मुखते भुजंगारि भुजते
हरयि हर दौरे गौरीडारि अरवंगते ४॥ अथ भयानकरस
लिख्यते । परि रह्यो पातको कलही कृचालीकर का
याई करित मलीन तनधारे को। देखि यमलायमु
नाकालियो नामउन होत अस्तकाल नन्दलाल रूपवा
रेको। ग्वालकबि त्योंही यसभाय्यो हाय हाय करि
कोऊ नि जाऊजो गयेत्तो मारिडारे को। दूरिकरि
देखो दीह रौरवन मंदिकरि चरकरिदेगो अंग अखि
ल हमारेको र झलकत श्रावैझड झीलम कलानिका
प्यो तमकत श्रावैतेग वाहीनी सिलाही है। कहैं पद
माकर त्यों दुंदुभी धुकारमुनि अकबकबोले योगनीम
श्री गुनाहीहै ॥ माधव को लाल कालहते बिकराल
साजि धाया सैनयेदई दईया कहा चाहीहै। कौनको
कलेऊ करैया भयो काल अस का यों परैथा
भयो गजब इलाही है २ अति बिललानी यातुधानीक
है गेहरोह रावन समान प्रान दूसरो अयानको । काहेते
न बोडखि बीसह ना सूझेउजाको सढर्मातकोही
द्रोहीभयो भगवान क्षो । सुकवि सुवंशकहै निज
गदम्बलेकै निपट निशंकै बंश नाश्यो यातुधान को।
का कीश कल्ला कूदिबलाके समान परै राबगा मह
लापर इला हनुमान को ३ माड़व उज्जैन भानि भवन
बहेलसेलों सिंगलसरोज लों परावने परत है। गौड़
माधवविलास।
बाने तिलगाने करनाटक फिरंगाने हफसाने हिम्मति
की हह हहरत है। साह के सपत शिवराज शमशेर
तेरी मुनि गढ़पती गढधीरना धरतहै । बीजापूरगोल
कुपडा श्रागरे दिलीकेबीच बाजेबाजे दिन दरवाजे उ
घरत है ४॥ अथ बिभत्सरस वर्णनम् ॥ नटको समान सर
कटभट भालुबहु दैत्यनके युत्यबीच चंदचट चटकत ।
मारे खड़ग खनन के घायबोलें भकभक योगिनीज
माति लोल घटघटघटकत ॥ सुबि सुबंश कहै गिरे
गीव झुण्डनसों रूराडन समेत मुण्ड गटगटगटकत । त
पि तपि तहां पौनतनय महाबीर असुर बिलन्द
सहि परपदयटकत १ कापि नन्दजक्के भट अवरअनन्त
नको मारि गजदतन बिदारि देहदई है। कहै गिरि
धारी सकपरे अंगभंग स्कै परे अपंग क्षिति घायल
न छई है ॥ मूटिक चागारको है कई कंस करकी है
औरको गना युत्थयुत्थनकी मईहै । प्रोशित हुरंग
तासों हारही सुरंगमि रंगनि श्राजु रगारंग भूमि
भईहै २ नौकरीकी
झोरीकन्धे अन्तनकी सेली बंचे
मुण्डन कमराडल खप्पकियो फोरिक। योगिनीज
माति जोरि झण्डबने तापससे तीरतीर बैठे हैं समार
खोरि प्रोशितनों सानिमानि गदासलुवासे खात
सकैपक पीवतबहारि घोरिघोरिकै तुलसी बैताल
भत्त सालिये मतनाथ हेरिहेरि हँसत शिवानों हाथ
जोरिकै योगिति सलिलबर बानर सलिलचर गिरि
बालिमुत्त विध विभीषणा डारेहैं। चमर पताका बड़ी
माधबिलास।
बाड़वा अनल सम रोगरिपु जामवन्त केशबिचारहै।।
बाजिधर बाजि सुरगजसे अनेकगज भरत सबन्धु इन्दु
अमृत निहारे है। सोहत सहितशेष रामचन्द्र कुशलव
जीतिक समर सिन्धु सांचेही सिधारे है ४ ॥ अथ अद्भुत
रसवर्णनम् ॥ सातदिन सातराति करि उत्पातमहा मारुत
झको तस्तारै दोहदुरखमैं। कहपदमाकर करीत्योधम
धारनई सतेथै न कान्ह कहं श्रायो रोयसख में ॥ छो
रि छिगुनेकछत्र रोसा गिरि छायराख्यो ताकेतरेगाय
गोपगोपी खरी सुखमैं। देखिदेखि मेघनकी सैन अक
लानीरहै सिन्धु में न पानी श्रौ न पानी इन्द्रमुख मैं १
माटोखात मोहनको पायो कहूं मातुर्गाह सांटीडरपा
यो प्रीति परिपाटी रिकै। कहै गिरिधारी मुख दे
खतही देखिपरे देखे अनदेखे सबलोक निरवारि॥
खल्भालागि शाचत अचम्भामानि छोहरेको अद्भुतरंग
भरे कौतुकनिहारिक । यशुत्ति चापिरही रसनारद
न नँदनन्दन दिखायो जबबदन पसारिकर यमतेडराय
गृहलोगन छिपाय सक बड़ाजाय पापीगंगरोगनकेदंगा
ते । ताहीक्षणा दिगयो पापसों पवित्रभयो सुखनके
योग लाल तरलतरंगाते॥धाय श्रापधनद बिमानलै प्र
थमनन्दीधाई आसिविधाय धारके प्रसंगाते। भंग
भरे मुखमें भुजंगधरे अंगवह गधरे शीश निकास
श्रायोगंगाते३ गोरीगरबीली जाका गमन गयंदकोसो
गरे मुकताहलको गजरा निरालावह। कम्जत कलित
दुगालतलोनाई भरे बलित उरोजनमें मृगमदनाला
1
ခြင်း
माधबिलास।
वह ॥ ग्वालकवि रविजा तिहारतोरन्हाई अाई धाई
लेनदेवनकी अलि बिशालावह । शीशदीप मृगये
पहुंचिपहिले गये पाछे श्याम रूपवै सिधारी नवबा
लावहः॥ अथ शांतिरसबर्णनम्॥दामिनी दशन चारुचंदसो
बदन देखि कामिनी सदनमोह मायामेंनफंदेरे। सुतके
मुता के बनिताके ममताके हेत धायचाय थाके अब
छांडु फरफंदैरे ॥ ध्याउ रघुनंदै करिरि दुखदंदै सुख
सम्पति अनंदै हवेहै कीरति बलंदैरे । येरेमतिमंदै सब
छांड छलछदै एक श्रानँदके कंदै रामचंदै क्योंनबंदरे
पापसोंगढीहै हाडचामसों मढ़ी है तैसेनरक कढीमहा
अशुद्ध भावभोंडीहै। मज्जामांस मनबीटरोम औसधिर
भरी कफपित्तवातके बिकार गड़ गोडीहै ॥ तापैकाम
मोहमदलोभसे ग्रसितसदा सबकाल काहू बिधिकुति
न छोड़ीहै। कहै हरदासहै भजनक्षत शुद्धनाता निपट
निकामदेह निलज निगोड़ीहै २ नातीपत नातगोत्तइष्ट
मित्रभाई बंधु और टौर भावनजू दगिसे खरेरहैं। शाल
श्री दुशालजाल नानार्माशा मुक्तमाल भूयसा अनपबैस
दूधमा भरेरहैं ॥ कांवेचले चारिहीके बांधेरहें हाथी
घोड़ पालकी पलंगपीठ अंदहूपरेरहैं । क्रनिविटभस्म
भये जितने बड़े प्रोछोटि प्रायागे अगोद धनकोटिन
घरेरहैं ३ भूयन बसन बीस रतन अनेकजाति घोड़ेपील
पालकी अनूप छविधामको। कहा नरनाह कहाभये
बादशाहकहा शाहनकेशाह जौनदेहै परिनामकी ।
देनीकनिकहै खालफालमें बितावैदिन पालखलखाले
३
३०
माधवविलास।
कैपखाले जसचामकी। सनहीकी मनरहिजातीभि
लावै जब मंदिगई अांखें तबलाबै केहिकामको ४
अथदशनायकावर्णनम् ॥ दोहा । प्रोवित पतिका खंडिताकल
हंतरितानामाबिमलुब्ध उतकंटिताबासकशय्याबाम १
खाअधीन पतिका कहत अभिसारिका बखानि ॥
बहुरि प्रवासित प्रेवमी अागतपतिका जानि २ कही
अवस्था भेदयुत दशौ नायकानाम ॥ तिनके लक्षणा
सिसब बरगाकही अभिराम ३ ॥ अथप्रोधितपतिका ॥
दोहा ॥ बालमबसबिदेशमें जोबियोग अकुलाय। प्रो
यितपतिका नायका ताहिकहत कबिराय १॥ कबित ॥
श्रालीमोहिं लागतहै वाबिन खलकखाली को मुक
तालीके विभयण करैनहीं। कहै गिरिधारी कलपरत
न केहूनेक पलिकापरेहू कल पलकपरैनहीं ॥ नदिन
घेरेघर रहत घनेरेलोग लाखनकी मौजवारे अांखन
अरैनहीं। रहत बसाई परदेशवारो प्यारो वह हियरे
हमारते बिसारे बिसरैनहीं १ लागत बसंतके सुपाती
लिखीपीतमको प्यारीपरबीनहै हमारीमुधियानवी।
कहैपदमाकर यहांकोयों हवाल बिरहानलकीज्वाल
सों दवानल ते मानवी ॥ ऊबकी उसासनको परो पर
गासा सेतो निपटउसास पौनईते पहिचानवी । नैनन
कोढंगसोअनंग पिचकारिनते
गातनको रंगपीरेपातन
तेजानवी २ विरह तिहारेलाल बिकलभईहैबाल नींद
भूखण्यास सिगरी बिसारियतुहै। चोरीकैसीबातचंद्र
माहँते छिपाइयतु बसननतानिकै बयारिवारियतुहै।
न
।
माधवविलास।
कहैतिराम कलाधरकोती कलाछिन जीवन विही
न सीनसी निहारयतुहै। बारबार सुकुमार फलनको
मालरोशी मारकै मरोरनि मरोर मारियतु है ३ प्रायो
ऋतुपावस न प्रायोति प्राणाप्यारो मेधन बरज
बाली गर्राज सुनावैना । दादुरन डपटु न बकि
बकि फोरें कान चापक बरज अबधीव दिलावैना।
बिरहा बिया मैं मैती व्याकुल परीहादेव जुगुनचम
किचित चिनगी चलावैना। कोकिला न गावै चोर
शारना मचावै धन धुडिनवाचै जोली श्यामघर श्रा
बैना ॥ अथ खंडिता ॥दोहा।। श्रान तियारतिचिरित्रा
बैंघिय परभात । दुखमंडित सारखंडिताबरणातकविश्रन
दात ॥ कवित्त । बैडीपरयंक फैनबेलीनिर शंकजहां जागी
ज्योतिजाहिर जवाहिरकी जागज्यों। कहें पदमाकर
कहूं ते नंदनंदन हूं औचकही आये अलसाये प्रेम पाये
यो। झपकोहै पलक पियाकेपीकलीक लखि झुकि
झहराय हूँननेक अनुरागै त्यो। सही मयंक सुखी
लगत न कहुती देखिकै कलंक अब येरी अंकलागे
क्यों जावक लिलार अोठ अंजनकी लीकसो है
पायन अलीक लोक लोकना बिसारिये। कविमति
राम छाती नखछत जगमगे डगमगे धगमधे सगमें न
धारिये ॥ कसको उपारतही पलकपलकयाते पलका
में पौडिनमरतिको निधारिये। लटपटे पंचशिरबात
न कहतबनै अटपटेच शिरपागके सुधारिये २ओढ़न
में काजर लगाये काहूं कामिनीको भामिनीके भौन
॥
३२
माधवबिलास।
अाये गजरके बाजते । कहै गिरिधारी सेदपानीसहि
जाली लखि नागरि सयानी वा रिमानी ब्रजराजते ॥
भैहन #वाय अनखाय रिसपायबकै बैटी मनभायेतेन
वाये नैनलाजते। चेरिया न करोये चरिव तिरियाके
लाल किरियानकरौ भलीरिया विराजते ३ पीतम
प्रभात अलसात पाये शेयभरे प्यारी कछरोब भरे
बचन उचारोना। कहै गिरिधारी उदि अादर अदाब
किया बोली मृदुमंद मुसक्याय मनुमासाना ॥ यद्यपि
सुभावनसों मिली मनभावनसों नाइको गुनाह तिया
तद्यपि न्यवारयोना ।मानिनीकेजीका मानजानिगो
मुजानजब करत बिहार हार उरते उत्तायोना॥ अथ
कल इंतरिता ॥ दोहा॥ पहिले पियो कलहर करय
जो पुनि पछिताव । कलहंतरिता कहतहैं जेजानत रस
भाव ॥ वित्त ॥ जाकेकाजबोरयो कुलकानिकोजहा
जरुजाके काज लोकलाज सकल बहायोरी। जाके
काजहांसी अंगरेजी बजबासिन की जाकेकाज नांव
कलिगांवमें धरायोरी॥कहै गिरिधारी जाकेकाजको
नयोंयेता श्राजुतासह। रिसानीलसरह्यो मनभायोरी।
सरबस अापनोदयबरबस लीन्हो हायतौन लालहाथ
ते गवारिही गँवायोरी १ कालरनदार झुकिझूमति
बितानबिछे गहबगलीवा अरु गुलगुलीगिल मैं । जगर
मगर पदमाकर मुदीनिकी फैली जगज्योति कोलि
मंदिर' अखिल में॥ श्रावत तहाई मनमोहन का लाज
मैन जैसीकछुकरी तैसीदिलहीकी दिलमैं । हेरिहार
क
।
३ ॥ माधवविलास। बिलमैंनलीन्हां हिलमिलमें रही हैं। हाय मिलमैं प्रसा केझिलमिलमैं २ ससकि ससकिहियो कसकि कस- कि उढ़ताके श्राप सोतननाकाढो भौनकोनेसों । एक तानलागे मुकतानके अनेकहार कबसे दराज काजरूपे सोनसोनेसे॥ भनत कबीन्द्र सेनाहसेगुनाह बिन कियाहै बिगार धारदारै कौन टोनेस। येरी मेरी कुतिते कलह करायेअब सुलह करावै कौन सांवरे सलोनेसे ३ विनतीकरोरीकै निहोरी करजोरीकर हाहाकै महान मनुहारी अनुसरी है। चूंघट उधारयो हौनने मुनिहास्यो वह हटिटि गयोधी अनैसी कै- सीघरोहै। कहें गिरधारी मो सनाव न रहारी अबवा- हीके मनावन की मेरेउर अरीहै । श्रापते सनाय बीर लालको बुलायलाव लालकी बलायलौटि मेरेशिर प. रीहै ॥अविप्रलुब्ध्वा ॥ दोहा ,व्याकुलहाबियोगसो सुनु पियहायनभेट । विप्रलुवातासे।कहत सूनीलवै सहेट कबित ॥ खेलको बहानाकै सहेलिनके संगचली आई कलि मन्दिरला सुंदर मजेजपर। कहै पदमाकर तहां न पियपायोतिय त्योंही तनतरही तमीपतिके तेजपर। बाढ़त विथाकी कथा काहूसों कछू न कही लर्चाक लताली गई लाजहीके लेजपर। बोरीपरी बिर्थार क- पोलपर पीरीपरी घीरीपरी घार्यागरी सीरीपरी सेज पर१प्यारकरि जीमें प्रान प्यारेके मिलापहेत आई कंज मंदिर प्रकाश चंद श्राधेके। श्रास पास आली लिये अगर गुलाबपास भवन बसन साजि सुखमास- माधविलासा मावे॥भौनकवि कहें सुनों देखिकै सुखायगई कहै ना हवाल कछु काम अंगदाधेके । दाहि गई देहविधा लाजते न कहिगई रहिगई बीरी अवखात हाथ राधे के २ सकल गार साज संगलै सहेलिनिको सुंदरी मिलन चली अानंदकेकंदको। कबि मतिराम बाल कति मनोरर्थान परयो परजंक मैनप्यारे नंदनंदको नेहते लगीहै देह दारुण दहनगेह बानके विलाकि द्रुमलिन केन्द को ॥ चंद्रको हंसत्त तव श्राओ मु- ख चंद्र अब चंद्र लाग्यो हंसन तियाके मुख चंद्रको ३ लोग नकी चोरी बनकुंजन किशोरी गई लाग्योहिय होरी हं नदीख्यो घनश्याम है ॥ कहें गिरधारी अं- ग अंगन अनंग हन्यो संगकी जनीसों सतराय बोली बामहै । वदेनासहेमोहिं बादिही बोलायलाई बिना बन माली इहांखाली परयौ धाम है॥ खाये की अ. कृती किवातेरीमति धूती श्राजु दूतीकियोरी युती मारनको कामहै ४॥अथ उतकठः ॥ दोहा । जोतिपियके मिलनको अति उत्तकंठित होयाताहि कहत उत्तकटिता कबि कोबिद सबकोय॥ कवित्त ॥ सौतिन के वासते र- हेधा औरबासते न पाये कौन गासते प्यो कस्तो त- लासतै । कहै पदमाकर सुबासते जवासते मुफूलनकी रासतै जगीहै महा सासतै॥ चांदनी बिकासते सुधा- कर प्रकासते न राखतहुलासत्तै न लावखस खासतै । पवनकरू श्रास न जाउ उठि पासत अरी गुलाब पा- सते उटाव त्रास पासते १ यमुनाके तीर बहै शीतल स.
কান্না। मीर जहां मधुकर मधुर करत मंद शोर हैं। कबि स- तिराम तहां छबिसों छबीली बेटी अंगनते फैलतिख- गंध की झकोरहै ॥ पीतम बिहारी के निहारिबेको बाटणेशी चहूंबोर दीरव दुगनि करी दौरहै। येक वोरमीन मनो येक्रबार कंजपुंज येकवोर खंजनबको- र येकवोरहै २ सारी दरदावन किनारोदार साजि प्यारी मदन मनोरथके न्योत वितबतिहै। कहै गि- रिधारी निशि चन्दउजियारी चानिज मुख चन्दकी उजारी जितवत्तिहै। डगर निहारत बिहारीज तिहा- री गेले चंचलगन मृगमद कततिहै। अनुना तटीमें बैंउिकै यकवटीचितपरी चटपटी चहुंबोर चित्तति है ३ बैठी रंगरावटो निहारीमैं पियाकोबाट आये न बिहारी भई निपट अधीर। देवकीनन्दन कहै श्याम घटाघेरिआई देखिगति प्रलयको डरानी बलबीरमै । सेज मैं सदाशिवकी मरति बनाय पजी तीन डेरतीनि हकी कीन्ही सतबीर में। पाखनमें सांवरो सुलाखन अवैबट ताखनमें लखनकी लिखी तसवीरमै ४॥ अथ बासक सज्या ॥ दोहा " मनभावन भो सेजमें भैहैं श्राजु बिखि । सजैसेय भयमा बसन बासक सज्या लेखि॥ कवित | सोरह सिंगार कै नबेलीने सहेलिन हूंकीन्ही कोल मंदिर में कपित करेहैं। कहै पदमाकर छुपा- सही गुलाब पास खासे खसखास खसबोइलके ढेरेहैं। त्यों गुलाब नीरन सों हीरनके हौजभरे दंपत्ति मिलाप हित अरती उजेर।चोखी चांदनीन पर चौसर च- ३६ माधबिलास। मोलन के चंदनकीचौकीचासचांदीके चंगेरे, १ केस- रि कनक जहां चम्पक बरणा कहां दामिनीयो दुरि जात देहकी दमकते। कबि मतिराम लोने लोचन ल- पटि लाज अरुणा कपोल कामतेजकी तमकते ॥ पग के धरत कल किंकिनि नेवर बाजै बिछिया झमकउ. है येकही झमकते। लाह सुख चाहि चितयोंचकहंस- तिचीकि परै चन्द मुस्खी निज चौककी चमकते २ बेसरि बिराजै राजै केसरिको अंगराग नखतसे फले मांग मोतीबड़े बोजके। कगिरिधारी रतिमंदिर भा- हारे लगु शासपास फैलत फुहारे छबि फोजके ॥सेज रंग मै जय सलोनी साजिवैसी बाजु साजे साजमंजु लन सरस सरोजके। लाजभरे लोचन बिलोकत पियाकोमगु मनमन करत मनोरथमनोजके ३सासुको कोहाय नंद ताहूसों रहीरिसाय जेठोहूं सोऐंटी अत्ति खेती गतिमाहीहै । देवरसों नेवर पुहावैकेमिसहिरुटी दासीसों अंगटीकी उदासी चित्त चाहीहैभनत कबीन्द्र बाल बसककीरजनी ने सजनीसुबास पास राखी मह महीहै। पैली और गैलीनाहों श्रावनकी कैली ताहि कोठरी अँध्यारोमैनोली सोइ रहीहै ४॥ अथस्वाअधीन पतिका ॥ दोहा ॥ स्वनवीन पतिकाकहति पीतम जासु अ- दीनादेखिरूप गुनशीलशुभमोहे श्यामप्रबीन॥कवित्त ॥ पीजिये सदाई सूपराबरेको प्रांखिनपैकीजियेकहाज लोकलाजकरिबोपरी मेरेहेतरद्योघरघेरे घनश्याममो हिंबीलबिलोकतहसत डरिबोपरै।। कहैगिरिधारीक.
माधवविलास।
हूंलोगचरचेंगे तो रचेंगे परपंच यातेह्यांते दरिबोपरे।
लालबजाव लजायगोचवावह्यांतीगोकुल में फकि
फंकि पांव र्धारबोपरै चाहमस्खो चंचल हसारोचित
नौल बधूतेरी चाल चंचल चित्तौनमें बसतहै। कहैपद
माकर सुचंचल चितौनहूंते प्रौझकउनोक झझकनि
में फंसतुहै । औझक उझक झझकानते सुरभि बेश
बांहीकी गहनि माहिंप्राय बिलसतुहै वांहोकी गहनि
ते सुनाहोंकी कनिायो नाहींकी कनिते सुनाहीं
निकसतुहै२ पुरबधू परबध तिनसा नजोरिडीठि तेरी
वोरहेरे हेरियत हरबरसे। कंतवै हमारे परदेशमें बि-
तायोद्यौस बीतकसे पलपल बीतत पहरमों॥ धन्यतेरो
भागभट भावतोतिहारोन्यारोतरेरंग राच्यातजैरिको
न घरसे। सौतिजन सालेतीका सालसा तिहारे बस
लालहवै रहाहै मालतीको मधुकरसों ३ जादिनतेनौल
बधू आई गौनहाई वह तादिनते लालन कहा मन
ऊटीहै। रात्यादिन बदन निहारत रहततासु तजत न
सदन बड़ोई प्रीतिजदीहै। दारतहै चौर औ सुधारत
अलक खुली खलक बिहाय लाह गोपिन की छुटी
है। मोद्यो बनमाली अलीकीजिये उपायकहा कैसी
वा बवूटी डारि दीन्ही कौनबटी है ४ ॥ अथअभिसारिका ॥
दोहा साजि सकल भयन बसन जाय जो पीतमपास।
ताहि कहत अभिसारिका जेबि बुद्धिबिलास।कबित्त ।।
मौलश्री मंजुलकी गंज क कुंजनको मोसो घनश्याम
कहिकामको कथैगयो । कहै पदमाकर अथाइनको
३
माधवविलास। ताज जि गोपगन निर्जानज गेहके पथैगयो । शोच मतिकीजै टकरानी हमजानी चित्तचंचलतिहारो द चाहके रथैगयो। छीनन छपाकर छपाकर मुखीतुचलु बदन छपाकर छपाकर अधगया अंगनमें चंदनचढ़ा- य घनसार सेतसारी क्षीरफेन ऐसीनामा उफानातहै। राजत सचिर शुचि मोतिनके पाभरन कुसुम कलित केश शोभा सरसातहै। बिति रामनाया प्यारेको मिलन चली कारकै मनोरथ न मृदुलुसक्यातहै। पोति ना लखाई निशिचंद्रकी उज्यारी मुखचंद्रकी उज्यारी तनछाहा छपिजातहैर सकल शरीर चास चंदनलित कियोकेशनमें लितललित मालतीकली। कहगिरि- धारीहै सवारी सेतसारी तैसी सोहत किनारी सेत सेत मुकतावली ॥ निकसी छबीली क्षीर सागर तरंग सेमी अंगअंग प्राजउफनात अाभाउज्वली।जामिनीजोन्हाई में मुकामिनी जोन्हाईसम ििलकै जोन्हाई में कन्हाई केमिलैचली ३ उड़ि घुर्माड़ घन?रके घसंडकीन्ह्यी निशिअंधियारीकारी सस्तन पंथका। प्यारीबन- मालीपै सिधारी बनवाही मांझसालै पंचबानपंचबान केनिखंगको॥अहिरह्यो पांवहिपांबरह्यो अहिगाह कौतुक बखानैकौन नियमभुवंगको । लीन्हेलोहलंगर ज्यों सांकरसमेत छूट्योजातहै मतंगमानौ नृपतिअनंश का ४॥ अथप्रबत्सितप्रेयसी ॥ दोहा ॥ सुनैजवानी कंतकी जो अतिव्याकुलहाय। ताहित्सित प्रेयसी कहतसुकबि सबकोय॥ कबित्त ॥ लालन तुम्हारो परदेशको चलन माधवविलास। ३४ निपलन प्रियाके जलकन रियतुहै। कहैगिरिधारी नईध्यारी पियरायगई गहिहि गोदबीच नारीधारि- यतुहै॥ मोहन ज रोसो चकचाहट बढ़ायचले मीठको दिखाय जैसेइंट मारियतुहै। कौनवहरीति कौनप्रीति सिखोप्यारे लाल काल्हिलाये गौन अाजुगौन रि- यतुहै १ कामुकुच कंचुकी साबिर बिमलहार माल- तोकेफल येवरेई कृम्भिलायगे। गालगोरी चंदनसंवास अंग अाभरन दीपक उचालतमछिति परछायगेबार धप अगर अगारवप बैंतीकहा भाजअमरेश तेरेबल सुभायगे। आईसाँझ सरस सोहाईसेज साजुयह कहत मुबाके पासुनाके नैन अायगे २ सौदिनका मारगतहां को बेगमांगी बिदा प्यारे पदमाकर प्रभातरातिबीते पर । सामुनि पियारी पिया अागम बराइबेकामामुन अन्हाय बोली श्रासन सुसीतेपर॥ बालम बिदेशोतुम जातहौ तौ जावपर सांची कहिजाब कबरोही भवन रीतेपर । पहरके भीतर दुपहर भीतरकै तीसरे पहर कैवा सांझही बितीतेपर३ मोहनललाकासुन्योचलत बिदेशभयो बाल मोहनीका चिनिपट उचाटमें परी तलबेली तन मनमें छबीलीराखे छतिपर छिनकु छिन कुपांव बादमें॥ पीतम नयन कुबलायनको चंदभयो घरीमें चलेगा मतिराम जेहि घाट में । नागरी नबेली रूपनागरी अकेली रीती गागरी लैटाढ़ी भई घाट ही के बाटमें ॥ अथ आगन पतिका ॥ दोहा॥जातिय को परदेशते पीतम पायो होय । प्रागन पति का नायका ४० माधवबिलास। ताहि कहत सब कोय॥ कबित ॥ श्रायो परदेश ते सु. हायो अति वाको चित्त मोदभरी मूति बिलोकि राज भूपकी । कहें गिरिधारी फूल मालिकासीफली फबि औरे छबि जालिकाभै बालिका अनूपकी॥उक- स्यो उरोज अरु बिकस्यो सरोजमुख ओज आई अखिल मनोज महबबकी। लाली भई तनमें खुसाली भई मन में सोमाली सईबरह बहाली सई रूपकी १ अाज दिन कान्ह अागमन को बधाये मुनि छाये मग फूलन स्वहाये थल थलके। कहें पदमाकरत्यों भारती उतारिबेको थारनमें दीपहार हीरन के छलके॥कंच. नके कलश भराये भरिपनन के तानेतुंग तोरन तहाई झला झलक। पौरिके दुवारते लगाय केलि मंदिर लौ पदमिनिपांवड़े पसारे मखमलके २ नागर बिदेशमें बि ताय बहुद्योस पाये नागरिकेहियमें हुलास निसिया- नकी। कबि मतिराम अंक भरत मयंक मुखी नेहै स रसाय रही मति मुखदानकी॥ सुबरन बोलके बतावत है सुबरन होरेनिजलावतहै छबिमुसक्यान की। प्रां. खिन ले शानदके ब्रांस उमगाय प्यारी प्यारेको दे- वावत्त सुरति मुक्तानकी ३ लटकत अाजुलट मुखपरबा- रबार मानद उमँगिरि हियेजिय थरकत । मरकत भूयन बसन चारुपै धनको परकत मनतनु चि सुचि ररकत ॥छरकत अंगअंग अंगन उछाह लोने टरकत ऐसो रूप अंगनते अरकत। सारी सिरसरकतचराक- रकरकत श्रागिअंग दरकत अखि बांई फरकत ४ । माधवविलास। अधस्वकीयानायकालिख्यते। दोहा ॥शील सुधाई सुभगता सलज सुलक्षणालक्ष । गुगाअनेक सुकियानमें पतिसेवासेंदक्ष। कबित्त कानिलौ हेरनि ौहंसनि कपोलनलैंबोनि मघर अधरानिमें लगीरहै। उमडे सकोच शील शोभा मड़ेबड़े नयन लाजबड़े लोगनकी जियमेंजगीरहैकहै गिरिधारी गुगागधी साधु सूधीसोहै कुलके विशालकी उमंग उमगीरहै। सहिये नेम जो बढ़ाइबेको हेपिया प्रेमकेबढाइबेकोपंथत्योपगीरहै शामित स्वकीय गन गुन गनतीमें तहां तेरेनामहींकी एकरेखा रेखियतुहै। कहैपदमाकर पगीयों पतिप्रेमहीमें पदमिनितासतिया तही पेखियतुहै ॥ सुबरमा रूपजैसा तैसाशील सौरमहै याहीस तिहारोतन धन्य लेखियतुहै। सोने में सुगंधना सुगंधमैं सुन्यानो सानोश्री सुगंधत्तादोनोंदेखियतुहैर दीपमस दीपति उदीपति अनपति जरूपके स्वरूप रति रूपहिहरतिहै। कहैपरताप करिमजजनसरसमनरंजन पियाकेदृग भंजन भरतिहै। ताहीसमै दूतीदिखलायो निश्चमर लिखि निपटउदास हवैउसासन भत्ति है। सारसविलोचन बिचारिचितचेति राजहंसनके बंशकी सिपारसि करतिहै ३ परमप्रवीणाताई प्रथमसमागममें प्यारीकी बिलोकिषियोभ्योतियलीनजानिकहै कबितायपति शाचमेटिबेकेकाज लिखनलगीसो चित्र श्रापनेसरोजपानिाकंभीलियो सिंहनि नलिज्यो सिंहमुत प्रायोढि कुम्भनिविदारयोनिजकुलवानि । समुझि स्वभाय चित चातुरो बिलोकि ध्यारो अंकभ- ६
माधबिलास।
रिलीन्हो निजशंक मेटिमादमानि॥अथमुग्धानायका॥दोहा॥
जोबन भागमकी उमग जाके अंगमेंहाय । मुरवा तासों
कहतहै कबिसबग्रंथ बिलोय ॥ अबित ॥ अंगन में नेक
छवि जोबनकी साहलगी देखि मनमोहै लगी मोहन
सुजानको । कहै गिरिधारी अबहीते याकी ऐसीति
दिना दशाही में रूप जितिहै जहान को ॥ गिरिवर
जीतेचले अंकुर उरोजनके भौहें बंक जीतैचली बंकर
कमानकालोचनछबीलीके शवगा परसनचलेचलेत्यों
छबीले केश छुवन छवानको १ डिन असनाई अंग
औपतिगोराई जंयुगल नितम्ब पीनताई पकरति है।
कदि खीनताई लारकाई लीनताई मुखचन्द्र में
जोन्हाई ज्योति जाल बगरतिहै॥ भनत कबीन्द्र खि
अंकुर उरोजनके पिय हिय प्रेमके खजाने से भरतिहै।
कुवरी के तन तरुणाईकी अवाती पेखि सौतिन मन
नासिवाती से परतिहै २ बिसरन लागो बालपन को
अयानप सखिल सों सयानपकी बतियां गढ़े लगी।
दृगलागे तिरछे चलन पगमंद लागे उरमें कछुक उस.
सनि सी चढे लगी। अंगनमें आई तरुणाईयोंझर्लाक
ारकाई अबदेहते हरेहरे कलगी। होललागी कति
अबछटिक छलासीज चन्द्रकी कलासी तन दीति
बढेलगी३ मंदमंद चाललागी चलन गयंदति चंदमु-
खी पानंद के कंद दरसातीहै । लागी कछु तनक
तिरीछेकरै ईछनको मृदु मुसक्यान लागी शोभा सरस
ती है। भृकुटी कमान लागी कानबंशी तानलागी ता-
।
माधवविलास। ही को वोनान लागी सुद्धि सरसातीहै। सखिन लजान लागी मोहै मन कान्हलागी हेरे हि ओर सोसुधासी बरसातीहै।॥ अथमध्या । दोहा॥जाके तनमेंलाज अरुका- मबरोबरहीय । मध्या तासों कहतहें महा सु कबिस- बकोय। कबित्त । उरज उतंगनको निनकोहार दीन्हो कंठे कंउथी दीन्हों बाजू बंद बांहको। मंदमंद गतिसों गयंद गति जीतिलीन्हो सखिहून संग लीन्हो लीन्हो चित्त चाहको॥ लाजलाजवती कोबोलावै कोलमंदिर को नेह बरजोरीकै मिलार्वात है नाहको। धाराबश मावगत पूरबको चाहत है लीन्हे जात जैसे हटि केवट पछडको रैन अंधियारीमी पावस की घटा का- री उठीअधीकारी झंका पवनकि झमाकमेकहैगि- रिधारी मनमोहन मयंकमुखी सोवै परयंक रतिरंग की रमाकमै ॥ प्यारो अंकल उर अंचल सोल क- रैोलको कलोल कामतेजकी तमाकौरद्योतमछा. य गयो दीपक बुतायतहूं कामिनी लजायरहै दामिनी दमाकमै २ कालरनदार अकि सूमा बित्तान बिछग- हब गलीचा अरू गलगली गिलमै । जगर मगर पद- माकर सुदीपनकी फैलीजगाजति कलिमंदिरअखिल मै ॥ श्रावत तहाई मनमोहनकोलाजमैन जैसी कछुक- रीतैसी दिलहीको दिलमै । हेरि हरिबिलमै नला- न्हो हिलमिलमै रही हौहाय मिलमै प्रभाकी मिल मिलमै ३ कार कनक कहां चम्पक बरनकहां दा. मिनी योर जातदेहको दमकते । बितिराम लो- माधवबिलास। ने लोचन लरिजात असया कपोल काम तेजकी तम- कते॥ पगकेवरत कल किकिनि नेवर ब. बिछिया झमक उसकहीझमकते । नाह सुखचाहिचित श्रौ- चक हँति चौकि परे चंदमुखी निज चौककीचम- कते ४॥ अथ प्रोढ़ा दोहा जो प्रबीन रतिरीति में कामक- लान उदार । प्रौढा तासों कहत्त है जाके पति अति प्यार ॥ कबिता रमति निशंक मनमोहन मयंकमुखी अं- कमेरही जोबसि नवलकिशोरके। कहैगिरिधारीसा. री रजनी ललासोंसिल कीन्हो कलि कलाकासको- तुक करोरके होत अावै यामिनी को अंत उटिजैहै कंतयाते करें कामिनी चरित चितचोरके । दीपक पुरावै मुक्तावली दुरावै कलीकौलकी चोरावै यों भो- राव चिह्न भोर के १ चहचही चहल बहूधा चासच- न्द्रनकी चन्द्रक चुनील चौक चौकन चढ़ीहै श्राब । कहै पदमाकर फराकत फरस बंद फहरि फुहारनकी फरस फवी है फाब॥ मोद मदमाती मनमोहन मिले के काज साजि मणिमन्दिर मनोज कैसी माहताब । गोल गुलगादी गलगिलमै गुलाब गुल गजक गुलाबी गुलविन्दुक गुले गुलाब २ रगमगी सेजपर जगमगी शोभा चारु मशिनमय मन्दिर मयखन अथाहकी। उदयनाथ तामें प्राणाप्यारी और प्राणाप्यारोलाल कोककी कलानि करत सराहकी ॥ किंकिणी की नीकी धुनि नपुरू ननाद सुनि सौतिन के बाढ़त बियाद बादगाहको। त्रिभुवन जीतिक उछाहकी ब- माधवविलास। अतिमानौ नौबति रसीली मनमथ बादशाहकी ३ प्रीतमप्रभात अलसात प्रायेदोसभप्यारीका रोसभरे बचन उचास्योना। कगिरिधारी उठिसादर अदाव कियो बोली मृदुमंद मुसकाय मनमायोना ॥ यद्यपि सुभावनमों मिली मनभावनसों लाहको गुनाह तियत- पि निवाखोना । माननीके जीकोमान जानिगो मुजान जब करत बिहार हार उरते उतारयोना ४ अश्य नवाला ॥दोहा॥ सुग्वाजहंडरलाजसोंकर नरतिकीचाह। ताहिन बोढानामकरिबरणात सबकबिनाह ॥ बित्त ॥ बैठी बिधुबदनी कृशादरी दरीचीबीच खींचि पीन शंकपरयंक परलैगयो । भनैपजनेश भुजलपदि ललाके लगीकपटी मुनीनी कर जघन समैगयो । गोरीगोरो भोरोमुखसाहै रत्तिभीति प्रीतिरति क्षमरत रतिअंतसो रजैगयो। मानापुखराजते पिरोजाभयोमानिकसोमा- निकभयेते नीलमनिनगहोगयो १ दूसरीहबेलीमेंनबेली को अकेली लखि लाडली ललीजो शिरमार सरिख- यानमें कहैगिरिधारीलाल लाक छबीलीबालगहि भुजमालसी लगाय करिखयानमें ॥ परवशपरी घ्यारी बरबस टोचहै उरमें गढ़ायनख नान्ही नरिखयानमें। भयेतन कपित्त प्रसेदकन छायेउटे पुलक स्वहाये श्रांश शाये अंखियान में निक्के समागमको कांपतमयंक- मुखी रतिकीन चाहनेक थिरना रहतहै। दिननकी थोरीगोरी भोरी सब बातनमें नीबी सिबांधी डोरी छोरी नाचहत है। कहै मतिरामदिन डूबेप्रागा डूनि २ ४६ माधवबिलास। आवै सामुहे बोलाय दौरि पांयन गहतहै। याही भ्रम माही पियागही निबाही हमनाही हमनाहों परछा- हीं सों कहतहै ३ लाईकेलिमन्दिर भोरायमोरि भा- मिनीको फूलगंध कैफवाम कीन्हीं पौनसखते। कंचन कलित अतिकरिते रमनीय लीन्हीगाह पीतमप्रसन सेज मुखते ॥ भनेपजनेश भुजभरत हहाकै हिये सीबीकै सिमिटिश्याम नीबीदाबि दुखते । अहि करि उलि सचोट पन्नगीसी अटिउठिरीरीमैंमरीरीहि मुख ते॥ अविपरीत ॥ दो॥ पतिपौऊपरवियाकरैबैटिरति रीत । प्रालिंगनचंबनकरैताहिकहतविपरीत॥ कवित सिसकत सांसैभरै बीधेवाहु पार्सभरै सांसैभरे रसिक रसीली चित चोजकी। कहै पदमाकर सुदोऊ बिप- रीत माह महमही मड़ीमाजा मजल मनोजकी॥ श्या- मरंग भीनी झीनी सबज कंचुकी सों फोरि निर्वास रहीहै अनी युगुर्लाकशार की। मानो रूप सागर ते उन्नत अनोखी अब प्रानि कड़ी काईफोरि कलिका सरोज की १ नथको चलान टि विकिनी कल- निहिये हारकी हलनि उर उरज उत्तंग की। लंका की लचक परयंक की सचक इतउत्त की हचक रंग रचक सुसंग की। अंगन झलक हिये नेहकी छलक कबिरामजू ललक कोक मिथुन बिहंग की। झूमत झुमक बिपरीत की घुमक चुभी तियाकीहुमक कैवा कुमक अनंग की २ रति विपरीत में रमत अलबेली लखि कुंदनकी वेलि सी सकिकै सचिजात । बेनी ॥
माधबंबिलास। कबि कहैबिहमति बत्तरात बिज्जुछटालों छहरि घन- श्याम तन रिजात ॥ मोतिनकी लरें अलकावलि के तरेलसे उघरे जरें यों मुखचंद देखि दुरिजात । श- शि मानो श्रागेडारि पाछे पांति तारनकी तमकी ज- मात्तिमै उरि लार मुरिजात ३ प्यारे विपरीत रति करै प्यारे पीतमसों दुहुनके अंगन अनंग देखि हरयै । भनत कविन्द्रवेनी पीठही पै परीडोले पन्नगीसी वाह हेम बल्लरी सो करयै ॥ नखरद खंडन चतुर नारि चु- म्बन के सीवीकरै पीवै त्योंन सीवी नेम परौ । भाल ते उर्चाट स्वेदकन परै कुचन पै इन्दुमना ईश सुधा के बंद बस्यै ॥ अथ सुरतांत दोहा॥ नेहभरे भालस भरे सकच भरे रतिरंग। ये नैना अध अधखुले जगे पगे पतिसंग॥ कथित ॥ जागी रतिरंग में रसौली अरसी- ली बैती सेजपै अकेली अाजु अादरसर्धारक । वेनी कबि बेनीके खलेहें पेंच मेचक यों पेच पेच छाये मुख मंडल बारके । ताहीमें अस्त्रको शीशफूल से अतूल छबिरोसा मुरझार्यालयो प्यारी कर रिकै। बांधी तमबंधन बिलोकि मानो दिनकर प्रात अरबिन्दन छडायो बंध लरिकै प्यारी तिरंग प्रात बैटीजीती साफ जंगअंग सुभटनको इनाम बकसतिहै। प्रांगी दई कुचन भुजनबाज बन्द दये नपर पगन बेंदीभालसो लस- ति है। मोहनसो कवि नैन अंजन अधर बीरी जघन दुकल कानफल सरति है। पाछपरे जानितानि मोह- न कटाक्षन से बारबार बंधन सों बारन कति है २ EGYA माधवबिलास। उदी अलसात करिति पतिसंग बाल हात परभातच. लीबाईयुतशंकहै ॥ लागीकाश मीरीछवि साहत सुगंध मई कुचनपै छतकूटी शीशलदै बंकहै । बालसबलित गात जमुहात मीडैदाग कंजसम हाथ मुखसहित मयंक है। मानहं कलानिधिको धौलकरिबे के हेत बारिज का नातामानि धोवत्त कलंक है ३ छटिगये सिगरे सिंगारहार टूटिगये तऊोप उलहत मलगजी सारीते। रदछद अधर कपोलनमें दानकरि नखछतछातीमें ल- गेहैं जेबिहारीते ॥ अलकें बिथुरिरहों झलकें प्रसेद कन अधखुली खुलीरही पलकै खुमारीते। देह पेराई छाई लोचन ललाई सबरातिकीजगाई भाईउत्तर अ- टारीते॥४॥ अथ ज्येष्ठा ॥ दोहा ॥ बरनत ज्येसकनिकाह यहि बिधि ब्याहीदार । कर सकपर प्यारअति दू- जीप टिप्यार ॥ कबित ॥ दोऊ छबि छाजती छ- बीली मिलि अासनपै जिनहिं बिलोकि रवी जात न जितेजित। कहै पदमाकर पिछोहै अति अादरसे छ- लिया छबीली कत बासर वितैबित ॥ सुंदे हरि सक अलबेलीके अनोखेदृग सद्ग मिचाउनेकरख्याल हत्तै हिते । नेसुक नवाय दृग धन्य धन्य दूप्तरीको औचक अचक मुख चम्बत चिचित॥१॥ पौड़ी सक सेजमें सलोनी मृगनैनी दोऊनि नाहपीतम सुधासमह बर- से। कबि मतिराम ढिगबैठो मनभावन दुहूनहिये में अरविन्द मोद सरसै ॥ पारसीदै एक को कह्यो कि निज मुख लखो अरविन्द बारिज बिलासबर दरसै।
माधवविलास।
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दर्पणा वारी जौली दर्पणा देवै ताली प्यारे प्राणाप्या-
रीके उरोज हरि परसे २ बैठी हुती प्रांगन में अं
गना अनपदोऊ उठीफाग खोलबको श्रावत बिहारी
को। देखिनन्द नन्दको अनन्दभई दोऊमि पेश्वत च
कोरीजिमि चन्दकी उमारीको॥ कहै गिरिधारीतहां
देखत दुईकोलाल डारि दीन्हो दृगन गुलाल सकना
रीको। जो लों वहका अखियानते अबीर तौली ब
लबोर पररो उरोज प्राणाप्यारीका ३ दोऊ इकटौर
जहां बैठीहै अलजमुखी प्यारो तहांबायो घोरताई ता
किनेहकी। नेह सरसाई निरसाईन छपाईछ समता
ई सुलहकी कहक ज्योमेहकी॥ भगात कबिन्द्र रंगभे
दही में अंगति एकैरंग देखिपरी दुहुनकी देहकी।
पेरीसारी देकैलाल एक बहराई पहिराई लालसारी
लालसारी जासों नेहकी ४॥ अथपरकीया।दोहा जोषिय
करैछपायक परप्रीतमसोंप्रीति । परकीयातासोंकहत
जेजानतरसरीति ॥ कबिन ॥ घातपरै कबहूं दुराय कई
मिलिजात ऐसे दुरेडरनेह कहाँला निवाहिये । प्रांखि
नको भोट चकचोहत चढाईरहै भाटीयाम श्याममुख
देखोचास र्चाहये ॥ कहै गिरिधारी पानयानी मिसि
छजैगात पवासिलोचनकीलामोनितहियोजानत
है जाननी जहान उपहासी सहि सन्दाबन वासीकी ख
वासीह के रहिये १ गोकुलके कुलके गलीके गोपगा
वनके जौलाग कळूको कछू भारतभानै नहीं। कहै प
दमाकर परोस पिछवारन के द्वारन के दौरिगुणा श्री
माधवविलासा गुणा गर्ननहीं ॥ तौलैंलि चातुर सहेलियाहि काऊ कई नीकेके निचोरै ताहि करतभी नहीं। हातोश्याम रंगमंचोराई चितचोराचोरी बोरततो बोयोपैनिचो. रत बनेलहीं २ चित्रले चितेरी चरिहेरिनि चुरियान लेके हालिये मालिनि सुपासहूं खरीरहै । जावकले नाइन गोसाइन बिमति लीन्हे सांझह सकारद्वार धो बिन भरीरहै ॥ गैयनके गोडमें गोयनकी भीरबड़ी सांवरे जिहारी जसवीरना घरीरहै। येरी यहिगांव बीच बसिबो हमारो नाहिं पत्तिनत पारिजेकी बि- पति परीरहै ३ पथिक परोसिन न पाहीत्तिनापनेको औरै उपपति के सनेह सनीरहै। लनद निगडीनित छोड़िपत्तिापनेको परै पै अर्कत परकंत सों घरीरहै। सामुनी जवानी देवरानी की कहानी कहा चेरी प्रौ चवाइन चवावसोंभरीरहै। येहि गांवबीचबसिबी हमारी नाहिं तिब्रत पारिने की बिपति परी रहै। ४ अथ उढ़ा ॥ दोहा ॥ ब्याही और पुरुष सोंप्रीति और सेकीन ऊढा तालों कहत, मुकवि सुरस परबीन । श्यामल गहीलो गात पट चटकीलो पीलो छैल गर- बीलो हिहार है निरिगो । रियो हमारो वीर धीरज हियेते अाजु रूपकी झलामालमें घंघुर उर्धार गोमर्नाचत कहैपतिव्रत्त की कहको नाली रुपको देवालो दृगहार हवै निरिगो। सारीसराश्याम प्रया- स पतरी नवसि गोरी हेरिबो हमारो मो हमारे गरे परिगो १ सूखी सरसीसी श्रम ब्याकुल बैठी है कहा । माधवविलासा नजरि लगी है लगा तोरितोरि नारख्यो मैं । बेनीका बि भोरहीते बाबरी सी घमतहै लाज कळू काज गृह काज अभिलाख्यो । ललकै हमारी जीव बोलो ना बिलोको काहे वैन अांखें मंदिरही तातेदीन भात्यो मैं। पलकै उघासै क्योज डिजायनाखिल हे शोर मतिकरै चित चोर मंदिराच्या मैं २ उरझाइ दुक्कुल द्रुमन सुरझा लागें का? लाने कांदगाह कबहूंपगन सों। कबहू नेवाज खुलेकेसन कसनलागै कबहूँ गिरन लागै संदर अगनसों। सेकलईद कैकै बाढीह रहत यों शकुंतला निपट भई व्याकुल लगनसों। सखिनको লৰি ৰষা ৰা জ্বাৰি ঘৰ নিৰি ইনি স্বীনি স্কুল ও হালক্ষ্মণী বশীর অস্থা সুস্বী সুন্নীয়- ला नचैरी चक,धा काया बाबतीतहारै हिय परत फुहारे कछुछोड़े कछुधारै जलधर जलधारैरो। ফয়ান জলি আঁজল এ স্বী ব্রাহ্মীলীজ। यकै पराबोहाथ पारी । कामकेतु काफल डोलि ভাবিক স্ত্রীর ভাষত্র জ্বল জ্বী ভাই अनढ़ा नायका॥दोहा॥प्रीतिकरैकहं मीतसोंजो अनन्या- हीबाम । ताहि अनढ़ा कहतहैं जे कविगुणा गणानास कविता ताही टौर लाल कछखेलतहेरख्याल जहांबाल कोयसन अागमन दिनरातिहै। जानत न सखीखाल- खीलखा दुहुनकी लाजमयीनयों लगन सरसाति है। उदयनाथ प्यारो इतै न्यारो गात बैटौ उतैघात गहे प्यारी कछ न्यारी अटिलातिहै। ऐचिकरअम्बर उरो ३
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माधवबिलास।
जउकसोहै रि भोहके लगोहै तिरको है तकिजाति
है १ इत्तेजिरही थोरी बैसकी किशोरी और इसे
इनहूं की बनी उििकिशोरकी। कहैगिरिधारीकर
तारकी सवारी चारुयुगयुगजीधै यह जोरो बरजोर
को॥दोऊमन कामना की गरजपजिबे के काम करत
गजानन से अरज निहोरकी। राधिका बिहारी जूसों
ब्याहकी लगन लागी लगन अगारीकीन जानीहुती
औरकी २ लालन को पिंजरा निहारि कर लालन
केबाल हाथ पटेले सखाई भरै रितवै । भगात कबिन्द्र
नैनखंजन सचावै दोऊधावै फिरि श्रावै नेहजेरीभनि-
तादाऊ मुसकात साहै देखत्त सकात दोऊ जानत न
घातको जात किर्ताकतवै। सुरुखके मिसध्यौमुसख
राखै वहीबामुवाकी औरचाहि बासुवाकी भोचित
वै३जैसीलगी हुतीबालपानसे दुहूंकी प्रीतिजैसी बनी-
हुत्तीजोरी सकही मिशालहै । जैसा हुतोमनमें मनोरथ
दुहूंके अब तैमोरि दीन्हा बिधि सुखद विशाल है ।
माधवकहत राधा ग्यासको विवाह होताहों मुनि
आइनन्दगेहयह हाल है। धोयगये सिगरे कलंक मुनि
आईली बड़ीभई हैखशाली भाग्यशाली नन्दलालहै ४
अथःगुप्तादोहा ॥ रतिकार करत दुराव जो गुप्ता कहत
सुजान । बरसातीनि प्रकारसन भूत भाव्य व्रतमान ॥
कवित्त ॥ शंकपायलेनको गुलाबक्रीबहीहै डावारीको
मजारी शीशहूंते अधिकाईहै। फूललेत करतेबिरि
छतियां में अटैछुटै छतियांते फरै बसन बनाईहै॥खंडत
माधबिलास। अधर भार जपाके कुसुम जानि करार्दाकत होतगात जातछेद छाई है। ननद जेटानी ठकुरानीवनी बैठी रहै मोहिको न देखिदेहि मोहींको पटाईहै १ पुहुपकी बा टिकामें गईती पुहुपलेन बानरकठिन सकौरिकै लप टिगो। नखन बिदारी सारी फारीमेरी मलमल की कीन्ही मैं पुकारतब कुंजन झपदिगो॥ भगिकै मरिके मैं इहांलाई शिवनाथ धरतिहै छातीरंग मुखको कपटिगो। वासभरिआई पियराई मुखछाई दौरिगेह तकाई परस्वेद में चपदियो २ अालीमें गईहाँ अाज भलि बरसाने कहं तापर नप पदमाकर तनैनी क्यों। ब्रजनितावै बनितानपै रहें फागतिनमें जोऊवमिनि राधामृग नैनीयों॥धोरिडारी केसरि सुबेरिबिलोरि डारीबोरिडारीचूर्नार चुचातिरंगनैनीज्यों।मोहिंझक झोरिडारीकंचुकी मरोरिडारी तोरिडारी कनि बि थोरिडारी बेनीस्यों ३ सामुमोहिं त्रासदैपठायो है प्रसन लेन कौतुक तहांको ताहि सगरो सुनाइहो । फापट केवरेके कंटक अर्शक का भरनके टौरटौर रहीछत छाइहा। कहै गिरिधारी कितै प्राइकै अकेली कहा अापने शरीरनकोसांसति कराइह।। मेरीबीर बीरकी दोहाई भूलियाई बाजु बाजुते नगीचे याबगीचे के न अाइहा४॥ अथवचनविदग्धान्दोहा कहतविदग्धाभांतिजे कबिसुमतिसुजान । बचनबदग्धा एकस क्रियाबिद ग्वाधान ॥ कबित ॥ अाजुहैं। कहांते उतनाहक नहानग- ई हानिभई तातेतहांमहाभय भीजिये। कहैगिरिधारी माधवबिलास। बनमांझ होतावै सांक साथ ना सहेली है अकेली हाथमोजिये॥ मैयामोहिं मारीभैया भवनते निकारी पैयापरत कन्हैया मेरो कहाकाम कीजिये। लिकह कालिन्द्री के कलमें हेरानो अायलाल मेरे छलाकोहे- राय नेक दोजिये १ अाजुदीपमालिकाको पूजनगईहै सबरैनि अँधियारीही अकेली कहा कीजिये। प्रेती पिशाचनकी नारीडोलैं घरघर धरक करंजेहात ताते भय भीजिये ॥ श्यामहिं सुनायकै कहतगोपी बारबार दीपक बुझानी मैनताने सरछोजिये । जौली घरहाई श्रावै मन्दिर ली हाहा तौल भावरी परोसिन बलाय तेरी लीजिये आई है निपट सांझ गैयागई बनमांक हांते दौरिबाई मेरोकदा कान्ह कीजिये। मैं तोहाअ- केली औरदूसरोन देखियतबनकी अँध्यारीमें अधिक भय भीजिये ॥ कबि मतिराम मनमोहनसों पुनिपुनि राधिका कहत बात सांची ये पतीजिये। कबकी है। हेति न हेरेहरिपावतिही बछराहेरानोसो हेरायनेक दीजिये ३ औघट लिन्द्री के कदम्बनके वृन्द जहां बिपुल बयारि हरित्रावनेन पावती। कारेकाधिक मिहावन करारे भारे शामा सर कीरन जहां न कड़ि श्रावती। कहत परोसिनसों बचन सुनाय श्यामै चातु रोसों प्रापना मिलनदरशावती। ऐसेठौरगाईगयाघरमें न मैयादैयामैया मोहिं मारि मारिढंढन पटावती॥अथ क्रियाविदग्धा॥ दोहा । करै वचन सोंचातुरीबचनविदग्धा होयाकक्रियासों चातुरी क्रियाविदग्धासाया।कविता ।
माधबिलास। मंजुल निकुंजनमें मंजुल महलमध्य मोतिनकी झालरै किनारिनमें कुरवन्द । प्रायगेतहाई पदमाकर पिया- रे कान्ह आनि जुरिगये त्यों चवाइनके नीके वृन्द ॥ बैटीफिरि पतरी अनतरी फिरंग कैसी पीउदै प्रबीनी दुगदृग मलै अनंदाश्रावलोकिरहीश्रादरश मंदिर में इन्द्रीवर संदर गोबिंदको मुखारन्द१रात चांदनी में बैठी चांदनी बिछौनार्कारअासपास मंडलसहेलिनके वृन्दको । ताही समय आये तहां कंजते सोहाये श्याम चारु चतुराईके पसारि फरफंद का। कहैगिरिधारी अति संदर तमाल छबि बालको दिखायो लालमंदिर अनंदका। सखिनभुराय यदुरायको उतरूदियोप्यारी नीलपटसों चोराय मुखचंदकारबासरनबीते नैनाभरि भरि री प्यारी चढ़े न अटारीौक ना पाउँगेहते। भगात कबिन्द्र कैसेदेखै दुरिसांवरेको झांवरेबदनहोत देोबन देहते ॥खिरकी न दीन्हीताकी पियासुधि कीन्ही तिया अति परबीनी छीनी छलबल छेहते। कंजी कुंज मंदिरकी पतिहि देखाय राखै कुलुफडराय यदुरायके सनेहते ३ बाईगिनाई कविराज छाती भरीबाईपीरिपरिबाईनौनिकलिलाई पासुरी। मुखि कैरकतगयो पाइयेरतीको कहूंजीको परोशाररहोमां सोहैनमांसुरी ॥ कौनयह पीरपावै कासांनहींजनावै क्षणाक्षणा कछकश्रावैरूंधतउसामुरी।श्राननकी नोट किये अाननसाबातकरै काननकी ओरकिये कानमुने बांसुरी ४॥ अथलक्षिता॥दोहा॥ प्रीतिकरै जो मीतसों स- १६ माधबिलास। खियांलखै लखाय । ताहि कहतहै लक्षिता जेप्रबीगा कविराय॥ कवित्त ॥ तेरेक्यों छपाये छप छापेदार अं- गियामें अतर गुलाबीजो लगायो रंगबागका । रदछद ऊपर दरद शरहदयेरी रदर्कारसकै कौन लग्यो रद भागको ॥ बातव निबाई प्यारे भीजत बचाई प्रीति प्रकटी स्वहाई मुखपायोनेह लागको।लालकी कुसु- म्भी लालपाग दागवारी बहै सखीकहे देतहै किशोरी अनुरागको १ भल्यो गृहकाज लोकलाजमन मोहनी को भल्या मनमोहनको मुरलीबजाइबो । अबही दिन हमें रसस्वान बातलिजैहै सजनी कहांली चंद्रहाथन दुराइबो ॥ काल्हित्तौ कलिन्द्री तीर चितयो अचान कहीदोउनको दोऊओर मुरिमुसकाइबो। दोऊपर ऐ- यादोऊ लेतहै बलैया उन्हें लगई गैया उन्हें गाग- री उठाइदो २ अबहों अकेली कडीमावत निकंजनते प्रानदसकेलि केल किये मनभायेते । कहैगिरिधारी जानीसगरी सयानी हम अंगअंग अच्छत्तन खच्छत न छायेतोनेह नन्दनन्दनको सूदेहूनमूदहात छपत छपाक र न हाथनछपायेते ॥ जुरतिनीटिहै मुर्रात मुकति कहासुरतितुरत कीन दुरति दुरायेते ३ मासीतदुरावति है काहेका सयानी करितुरति की मुरतिनछपतछया येते। कंचुकी कनिटूटीनखछतछाजतहै ओठनमेरद श्रौपलक पीकलायते ॥ माधव कहत स्टेहार औअल कखलीपलकनछाई अलसाईहैजगायेत। भरतउसासर ही नैनननवायरही मनसकुचायरहीलाजनलजायेते४ १ माधवबिलास। अथकुलटा दोश | जोअनेक नायक चहै नायकसे है चैन । कुलटा तासों कहतहैं सजैरीन दिनसैन । कवित्त । चंचल दृग अंचल चलावत चलत चाल अंचल उघा- रिकै हे बंचल सशीकरै । योवनके सदस्वपमद मत वारीभई घूमति अति युवाजनसे हसीकरै। कहै गिरिधारी वह कौतुक कह्योन जात कंकरीके लागत सिकारी नाकसी करें। डोलति बजारन बजारन फि- रति बाल हेरनमें जारन हजारन बशी करै १ दिनु- क दवारेछिन श्रावत श्रोसारेछिनचौवारे नैनसैनन स- अतहै। और गहनेन के गहक को गनावै जाकी श्रा- तुहु पहर क्षुद्रटिका बजत्त है । उपपति मंडली के मंडल की मंडति सुरतिके चमंडानते नेकुनाजरतिहै। मैनमदछाकोरीति दोयेकरिजाकी केती सासर सजा की कजाकी ना तजतिहै। योबन नबेली अलवेली रूपमानभरी हसत गबेली गोप ग्वालन से जायके। सकन बुलावै सक सैनन चलावै एक नैनन रिझावैरा- करहै उर लायकै॥ हेरत चलतअंग कारन कटासक- रि अंचल उघारि दीन्हीलर लटकायकै। बागबनशैल शैल जातना सखीहूं संग लोकलाज डारि कुल कानि बिसरायकै ३ फेरत अनोट पीछे हेरत तिरीछे बाल गैलमें करत फेल छैलको दिखायक। बात कहिले के मिस सजनी काठाढ़ी करै रजनी मिलाय को ठेकानो ठहरायकै॥भनत कबींद्र सासुननद के धागे रोसीमधी हवै रहत मानोरूधाहै उपायक। नैननके डोरेबांधियो माधवविलास। बनके जोरे मनलेत है मरोरेलचकोरे दरशायकै ४ अथ मुदिता ॥ दो० ॥ मुदितहोयजो देखि मुनिचित भाति बात। मुदितातासकहत जेबितिबदात॥ कवित्त ।। तरबंशीवटके कलिंन्दी निकट मनमोहनीखरिपाई नन्दकनंदनकी । सांकसमययनुनामें दीपकप्रकाशनको शासन बधकोदिया सालयों सदनकी॥ कहेगिरिधारी निवातमि फालेगात बर्शमान जातयह महिमामदन की। अगिया दकिगईछतिया फकिगईतियाकीस- किसरफूंदी अंगदनकीरसाखरेकी मालिनि अशीसके स्वहागभागहरायो चौसरचबेलोकोउनतही। रावरे महल परोस कोस योसबी वाकमोहिफूलन चुना- वति चुनताही ॥ सुचित सकता निम्तके निकटसर मानामुख सुंदमन्द गुनाम गुनत्तही। माइकेकी विरह की जरदी रदीकमुख लालीचड़ी बालके खुशालीके खुनतही २ वृन्दाबन बीधिन बिलोकिल गई हैजहां रा- जत्तरमालवन तालरु तमालको।कहैपदमावार निहा- रतबनाईतहां नेहनको नेसप्रेम अदभुत स्यालको॥दू- नोदूनो बाढ़त खूपनाकी निशाने अहामानंद अनपरूप काह ब्रजबालको। कुंजले कहूंको सुनो कंतको गवन लाख आगमन सो मन हरन गोपालको ३ नाह पर- देश ताके दिाजाइबेके काज साइति शोधाय शभ प- शिडत बोलायकै सुन्दर नक्षत्र बरयोगनौकरन तिथि चन्द्रजानि सामुहे सुसंगल सजायक। माधवकहत च. लीगेह ते कछुकदूरि शामिला कंतजो विदेश रहे।
माधबिलास।
५६
छायक । मनमें मुदित भई लौटिनिज धाम गई हियरे
हरयिउर अानंद बढ़ायकै ४ अथअनुसयना ॥ दो० ॥ मिटो
बिलोक कोलियल पियसां जहां मिलाय। अनुसथना
तातों कहत होय हिये सन्ताय ॥ कवित्त ॥ गुंजत मधुप
बैट मालती लतान पर बेला की सुगंध बहै परस समीर
की। डहडहीबेलीबन फैली फलबश्वत लहलहीलहरि
वायमुनाके नीरकी। मुििर सकेत कुंज नयनन प्रवाह
बाढ़यो सखी समुझाबै नेक वश्त न धीर की। आईहै
बसंत ऋतु कोकिल कलापी पापी बोलत पपीहा के
घी मैन उपचीर की १ सने घर परम परोसी के
मुजान तिय आई पुनि निकै परोसिन मनो अराति ।
कहै पदमाकर सुकांचन लतातीलच ऊंची लेति साँ-
स वा हियेमें त्यों नहीं समाति । प्राय श्राय जहांतहां
बैठि उठि जैसे तैसे दिनतो वितायो बध बीतति है कैसे
राति । ताप सरसानी देखै अति अकुलानी जऊ पति
उरानी तऊ सेज बिलानी जाति २ आई ऋतु
पावस अकाश अाठी दिशन में साहत स्वरूप जलवा-
रन को भीरको । मतिराम सुकवि कदमन की बास
युत सरस बढ़ा रस परस समीर को भौन सोनि-
कसि वृषभानकी कुमारी देख्यो तासमै सहेटालि.
कुंज गिरो तीरका । नागरि के नैननमें नीरको प्रवाह
बढ्यो देखत प्रबाह बढ्यो यमुना के नीर को ३
भयो पतिझार पतिकार में उरि गयो हतोजीन के
लि कुंज कालिंदी किनारा मैं। कहै गिरिधारी ताहि
६० माधवबिलास। देखत बिहाल भई बाल बहरानी मुकताहल ज्यों थारा मैं॥ छोटवारी कंचुकी कलित कुच कारन में लोचन तेश्रांशू गिरे उपमा बिचारा मैं। अोढ़े मेघ डम्बर बघ- म्बर अनप मानो शम्भु के स्वरूप है नहात छिन्नधारा मैं ॥ अथ गणिका ॥ गणिका तासों कहतहैं जासों धन सोंप्रीति। नृत्य गीत तिकी कलनि कति कोककी रीति ॥ कवित्त ॥ पै जार जरी की इजार पैन्है मोढ़े पटनायक हजारमें बजारमें स्वहाईहै। कहै गिरिधारी मृदुहसाबलासनसत्रासनसकौनबसहोतरसकाईहै। रीभिरीझिददैधन धनीनिरधनीभये तहांजरजातिजहां सम्पतिसवाईहै। क्योंनयाकेचलोग्रावैकंचनउलीचोपा हिकंचनकरिबिधि कंचनीबनाईहै १ सोहनीललित देशी गजरी सुघरबनी सारीमुवासारी जरीपूरबी कि- नारीहै । सिंदुरासीगमनबहारप्रति अंगनमें सारगमीकू कति बिलोकि मेघवारीहै ॥ परिश्राये नैननीर श्रा- नँदको सिंधुमानों देखि नटनागरीकी महावि भारी है। ईमन धरेहै हद निपट धनासिरीको लेनमाल वा. कोतियापिया सिधारीहै २ लाललाल पांयनकोसै जरकसी लसीहासमाल लीबेको बहार जाके जीपैहै। घेरदार पाश्चेई जार कमवाबत्ता पन्हि पीत करती रतीको रूप लीपैहै। ग्वालकवि उरजउत्तंगन प्रांगी तंग ओढ़नी सुरंगकी अांखे सरसीपैहै । सानेकीसि- रीसी बिजुरीसी निसरीसी वह चंदते चिरोसी दीसी बैठी करसी पैहै ३ प्रारसमा भारत सँभारत न शीश . ३ ६१ माधवविलास। पद गजब गुजारत गरीबनकी धारपर । कहै पद- माकर मुगंध सरसार वैसे बिथरी बिराजै बार हीरन केहारपर ॥ छाजत छबीले छितिहरि छराकी छोर भोर उदिबाई कोल मन्दिरके हारपर। एकपग भीतर सुराक देहरी पैवरेसककर कंजसककरहै किवारपर अथअन्यासम्भोगदुःखिता ॥ दो० ॥श्रानतियातनपियाके रति केलक्षणालेयिा अन्यसुरतिसांदुःखिताबरणातसुर्काबनि शोयि ॥ कवित्त ॥याहीको पठाई बड़ेोकाम कारवाई बड़ीतेरीहै बड़ाईलखो लोचन लजीलेसा। सांचोक्यों न कहै कछुमाको किधी प्रापहीको पाई बकसीसलाई बसन छबीलेसो ॥ मतिराम सुकवि संदेशो उनमा- नियतुतेरे नखशिख अंग हरय कटीलेसो । ततोहै र- सीली रस बातन बनाय जानै मेरेजान भाईरस राखि कै रसीलेसों १ बोलतन काहे येरी पछेबिन बोलो कहा पूछतही काहेभई स्वेद अधिकाई है। कहै पद- माकर सो मारगके गये अाये सांची कहमोसों श्राजु कहांगई आईहै॥ गईमाईहोतो पास सांवरे के कौन काज तेरोलिये ल्याबनसो तेरीये दोहाई है। काहेते न लाई फिर मोहन बिहारीजको बैसे वाहि ल्याऊं जैसे वाको मनल्याईहै २ कमल बदन कंभिलाना काहे श्रम बिंदु ग्रीयम दुपहरीतपन सरसाईहै। पीतपट कसातेरे कंतबकसीस दीन्ही धीरेक्यों बचन माहिं मोहनबका- ईहै। बारक्यों लगीरी तेरे प्रेमकी कहानी कही अ- रुन कपोल काहे केरि लगाई है। भूयशा अभंगका * ६२ माधबिलास। हेदौरिकै संदेश लाई श्यामतनभाई अाली भाली दुख पाईहै ३ येरीदूती कामेरी ओरते तू गईहुती मेरोयों न भई भई आपनेई काजकी। कहैगिरिधारीकत करत दुराव नहीं दुरत दुराये युति सुरति समाज की मेरे जान केलिरिमाईहै कन्हाईजूसों लाई हैहजारनको मौर्जाशरताजकी। सारी जरकसी कसी अगिया कि नारीदार बकसी विशद बकसीस ब्रजराजकी४॥ अ- थप्रेमगर्षिता ॥ दोहा जोतियोपियके प्रेमका जाहिर करे गुमान । प्रेम गर्जिता होयसा बरसातसुकवि सुजान॥ कबित्त ॥ मेरेहसे हँसतहै मेरे बोले बोलत है मोहीको जानत तनमन धन प्रानरी। कवि मतिराम मोह रेडी किहे हालिहूं में छोडिदेत बसन भुखमा पानी पान री॥ माते प्रामप्यारी केन औरकाऊ कहातोसोरिस करि कत्तिकहु कहाका स्थानरी। मैन कामिनी के मैनकाहूके न रूपरीभ काहू के सिखायोसखि प्रानो मन मानरी १ जोहमैं कहत सोई करत प्रमान पिय वाकी डीठि मेरेसंग लागिसी फिरतिहै। मेरहसेहँसत उदासते उदासहोत नेकसिरहा पानीपानना साहात है। कौन गुनरीझे मैंनजानो ककरसभाव कै. मेरे भागकी बड़ाई ठहरातहै । कुशलयों बार बार धुंघुट उघारि देखें चंद्रज्यों चकोरनको मन ललचात है २ मेरेहै रहत नित मोहींको चहत्तचित औरयेही तनसों नहित हित्तवतिहै। कहै गिरिधारी अनरसहमें रसहमें केसहून तह रसरीति रिततिहै । मेरो मुसक्यानचास माधवबिलास। चंद्रिकाको पानार आनंद बिनोदके बिलास बित वतिहै। छोड़त न निर्नादन मेरेमुख चंद्रऔर पीतम के चयन चकोर चितवतिहै ३ मेरोपति मेरे पी अधीन निशिदिन रहै मेरीओर देखिनित सन हरयतहै। मेरी प्रीति रीतिकी कहानीकहै लोगनसे मोहिंछाडि दू. सरीन नायकाचहतहै।माधव कहत मासकोककी कलानकरि मोद उपजावत रिकावत रहत है। जैसी भागि मेरीतैसी और कोन हेरीब्रज बनिताघनेरीभागि सालिनी कहतहै४॥ अथरूपगर्विता । दोहा॥श्रापइअपने रूपकी जातिय करैबखान । रूपार्वता कहतजाके रूप गुमान ॥ कवित्त ॥चंद अरबिंद बिम्ब बिगुम फगिा न्द शुक कुंदन गयंद कुंदकली निदरति है। चम्या सम्पा सम्पुट कलि घनश्याम कहा कुमकुमकानंग- राग अंगन करति है।कोकिल कपात पिक पल्लव कलिंदीपन दरके निरखि दारया छतियां बरति है। मेरे इन अंगनकी नकल बनाई विधि नकल विलोके मोहिं नकल परतिहै १ चंद्रमुख अधर निरखि हीरा दंतनको सीपहि निरिसान मुकता प्रकासेहै। बारन से बार चक असझक कंजखंज शुकवादि नासिकाते रहत्त उदासे है। मेरेसब अंगलकी समता न पाई तास कहै परसाद सबै दुखके प्रकासे हैं। काऊ नभवासी काऊ भयेथलवासी जायकाऊ बनवासी काऊ जल में निवासेहैं २ बैठीहुती जाय दुरि दीपन में पायो तहां जाहित कहो करति बीर हलधरको । भागीही डेराय V ६४ माधवबिलास। करि भवन अंधेरेलखि निपट छवानकाम्ह श्रानिगहो करको दोपति हमारी या हमारे सायकीन्हो छल दीन्हा जो बताय यहमेव घरघरको । दौरि दुरिबे के काज दीपक बुझायो सातौ गाहक भयोरी येरीमाप नेई गरको ३ उत्तर घनेरे करिरहौ रुख फेरे तिहूं घन श्यामधेरे घररिहू घरीरहै। कहैगिरिधारी मूंदेरहौ मुखचंद चारु तापर चकोरनकी चारि खरीरहै। गातनमें कबहूँ सुवासना लगाईतह अासपास अलिन कीअलिअरीर है। रैर्नािदन अंगनकी दीतिदिति नेक विपति छिपायेते न बिति परीरहै ४॥ अथमान वतो । दोहा॥करया दोयसांजोनायकसामान । मान वतीतासों कहतजेबि सुमति मुजान ॥ कबित ॥ मेवी व रहीहै सो सयम गतितेरी बाली मिथुनके काज को बिलम्ब कहाकीजिये । करक मिटाउाछे सिंह के चरनधाउकन्याके सुभाउसा विशेविर्ताजदीजिये ॥ तुलातौअतुलरूप वृश्चिककोबिपछाडि घनघनश्याम जके चरन गहीजिये । मकर न कीजै अाछ कुम्भ के गुननहरकै मोनमन मगलहाकै प्रेमरस पीजियेश्ती ली हनिबोलो जौली चातक मथर बोलै मानके मरोरनैन कोरहन खोली मैं। खबिरही खबी खसबायकी लहर दार शीतल ममीर डोलै तनक न डोली मैं ॥ कहत नेवाज मैनमन में उमगि आयो फूलिउटे उरजउत्तंगयुग चोलीमैं । किउठी कायल कसायनकहूंते श्याम देखि घनश्याम घनश्याम तास बोलीमें येरीगोप- ६५ माधबिलास। जायातसोहै न गोपजाया गोपजातियोछिपाया गोण जातिकीजै भंगना । हजै गोपजाति क्यों न हुजै गोप जातिक्यों न हूजै गोपजाति गोपजाति लीन्हे संगना ॥ मेटेगोप जाति तनभेटे गोपजाति उरफेटे गोयजातिवन सिंह यामें ढंगना। नोखीत अनंगना ज चाहैदेवअंगना सो दाढोतेरे अंगनापै तेरे सकौअंगना३श्रायोहैसयान पन गया न अयानत्तऊ नितउहि मान करिबेकी रेउ पकरी। घरघर माननीय मानतीमनायेतेवै तेरी ऐसी रीति सेतो काहूमें न जकरी ॥ निर्मातराम श्याम रूप घनश्यामलाल तेरेनैनकारओर चाहै यकटकरी। हहाकैनिहारेहन मानती हरीननैनी काहेको करतहट हरितकी लकरीक्षाअथपुरुषवियोग । कबितागाइहा मलारै औजनाइहाँ हियेमेंछकि छाइहॉछिगनीकुंज कुंजहीके कोरेमैं। कहैपदमाकर पियाइहैं। पिनालामुख सुखसो मिलाय हैं। सुगन्ध के झकोरेमें ॥ नेह सरसाइहासि- खाइहाँ जोसावन में पायहीं परीसों सुखमैनके मरोरेमैं। उरउरकायह। हियेसों हियलाइहैं। झुलायही कधी प्राणाप्यारीका हिंडोरेमैं १ राधेकी रहनि सुनिदहनि दहीहै देह नेह कैसे निरद नयन नीर बरसत । सांवरी सी मरशिमैं कांवरीसी परिगई तांवरीसी आय तहां अमबंद बरसत ॥ श्वासन ते बाइबकी ज्वालसी जरन लागी झरपि कपिभूमि दांवरीसी झरसत । अांखें खोलिबालिकह्यो ऊधोज तिहारीसोंह मेरोब्रजर्चाल- बेको अंगअंग तरसत २ गायबे बजायबेकी चरचा 8
माधबिलास।
चलावै कौन छोटेछोटे छोहरन खेलबो बिरिगो।
सवपरबाली गहे रहत उदासी खोजहांसीको सबनके
मुखनसा हेरायगो । सबहीके सुखकादेवैया महिपाल
सो शकंतलाके शोचके समुद्रमें समायगो । नारि श्री
पुसर्यालि सबही बिसारयोसुख सगरे नगरमेंनिगोड़ो
दुख छायगो ३ कंजघनी घनसे निकास दामिनीसी
बाम कुटिलकटाक्षनसों रीतातनकैगई। मेरोहिय भनि
प्रेम लिल समायकार इन्द्रीबरलैनी बीज बिरहकेचे
गई । सुधि बुधिगई तबियस बरगयो दुखन की
मोट शिरपर मेरेदैगई। जानत नाहै कौनकीहकहा
नाम वाकोडारिकै गौरी मनमोहरिलैगई ४॥श्रय
पुरुषमान कथित ॥ नंदलाल जादिन से रोस रिगये
भोसों तादिनसहोसार श्रावैर्याहटोलना। कहैगिरि-
धारी का कुंजकी गलीमेंजाय मुरली बजाय गोत
गावत्त अभाले ना ॥ येटीई अटानसा अटोइ रहत
अाली करत सनेहकी कलानकी कलालैना। रहैअन
बोले भेदमनको न खोले महामाल भरो डोल हाय
मोस हँसि बोलैना मानकरिडे बनमाली बिन
काज अाज रोतीकडू चक सखीमायैतौ परीनहीं ।
कोटिन उपाय रि बिनती अनेकांति राति सजगई
मेरी एकत्तौ सुनीनहीं ॥ माधव कहत कौल करिये
उपाय अाली दीजिये बताय अजसकती चलीनहों।
पैयां परों बोरमैं बलैयालेबो तेरीचलो लाइये मनाय
मनधारतें धरैनहीं २ अबला अधीर बुधि कहाजाने
१
माधवविलास।
७
रसभाव तुमतौ सुजान पेसामान रियलुहै। साबोल
बोलो जैसा बोलियतु बलिजाउखेदेकह. पक्षिनपाई
परियतुहै। कीजै सनमान अस बयेपान प्रानध्यारे
बिना जलयान कैसे सिंधुतरियतुहै। जालिये भोसी
हाहा रिकै परतपाय तामहरि अनरसकी बात
रियतुहै ३ खेलत हँसत पतिपतिनी सुसेजपर अति
रसबस भये अापसमैं बाडिकै । बातहीके मध्यक
बाल अपमान कीन्हा लालरिसिवाय करवटलीन्ही
डाढिकै॥ध्यारी परवील तबशेसी चतुराईकरी छाती
से लगाय पीडिक्रसी अतिगादि । श्रीफल सुफल
बिर्बाव तोंबरीके भायकुच पिर्याहय रिसकी कसक
लीन्ही काढि॥ अथदानवर्णन।कवित॥ सम्पतिसुसकी
कुबेरकी जोपावै ताहि तुरत लुटाबत बिलम्न उरथा
रैना । कहै पदमाकरसो हेमहै
हस्तिनके हलकाहजा
रनके वितबिचारैना। गंज गजबकास नहीपरघुनाथ
राववाहीगज धोखेकहं याहंदैडानाशाहीतगिरिजा
गजालनको वायरही गिरतपयतेनिजगोदतेखताना
कदिन बीते अब बाबर रहैगनना चकही वियोग
के बिबाद नारदखता है। रहयो संयोग रोज रोज यहि
भांतिन सों छपीछप है छिनछिन परखतहै। राजन
के राज महाराज ग्रीटिकैतराय करन जाकेहेम
धारबरखतहै। बारासुरसाखीदानरीतिदेखिजाकी मेरू
रहैगोन बाकी चक्रवाकीहरखतहै २ काशीसोनबास
रामदूतसों न दास कालवाससों न वास नसुपंथ संतसा-
ई माधविलास। यसे। हंसतों न छान हंस बंधास न बंशान अन्नसे नदान हालहुकुमी न हायसेसिंहसे न रनी अौक- बेर से न धनीशैल मेससों दुनीहै न उत्तमाङ माथसों। पानीगंगपायों न ज्ञानी गौरिनाथसों न मानी दश- माथसों न दानी विश्वनाथसों३ बकसि बितुगड दोम्हे झुण्डनके झुण्डनृप मुण्डनकी मालय त्यों दईहै चिप- रारीको। ग्रामदीन्हे धामदीन्हे उदक अरामदीन्हे यो- इश न दानजयातीके जीवधारीको।कहैपदमाकर करो रिनके कोशदीन्हे भीतिन भरोशदीन्हे सेसो उपकारी को।राजासिंहने दईनादायबा सक शशुनको पीटि और दीठि परनारीको अथयशवर्णनम्। कबित ॥ कैरवसों कुन्दसों कपरसों कलानिधिसों कागदसों कासमों क- पासमों निहारीहै । फाबिरही फटिकसों फेनुसे फो- हारासम उज्ज्वल तुबारासम तारासस तारीहै॥ हीरा हर गिरहंस हारसो चमेलीसम चांदीसम चरक चह. धाचारुभारीहै। मातीसमक्षीरसम बीरराजा रामच- न्द्र फैली महिमगडलमें कोरीत तिहारीहै घोरे सेत सेत जोरे रथमा सुगध साहै ध्वजा फहरात ज्यों प्रबाइ गंगपाथको। बिमल कलानिधिशों बैटो अवलोकिम- यो बिसमै कहातो पात्तरपनको साथको। पछी अज वेश तुमकोहोकिलही उन टेरिके सुनायो बड़ो बच- न सनाथको। क्षीरविते श्रावत छपाकरके पासजात होती में सुयशबीर बाबविश्वनाथको २ पजाकी समय में एक कौतुक लरखेउ जनाज मुनौ सिंह सब सुखन १ माधवविलास। को हेतहै। चिसो चित्त हवैकै पज्यो ब्रजराजे प्रभुदेस्यो पक्षिराजै र्याल जैबेको निकैत । ताहीस- मय रावरेको सुयश सुनायो कहं भयो श्यामतन सेत बसन समेतहै। कझाक झकि ताहि देखि देखि हालय देखो गरुड़ गोपालय बाजु चढ़न न देतहै ३ इन्द्रिन ज्यों हेरत फिरत गज इन्द्र अरु इन्द्रको दनुज हेरै दिगप नदीशको । भूयगा भनत सुरसरिता को हंस हेरै विधिहेरै हंसको चकोर रजनीशको ॥ साहितने सरजायों करनी करीहैजामें होतहै अचंभो कोटि देवयो तेतीसको। पावत न हेरेतेरे यशमें हेराने निज गिरिकोगिरीश गिरिजागिरीशको४॥अथसूमवर्णनम् कबित्त ॥ दर्दरो देखतकै दिलको दरद हरै देबेकोहजार लोग लाखनको दारोतो। गर्जीवदार सरदारै दारसी- पिदेता दुगुन करै को सकै व्याजते बिचारोतो॥ सु. कवि सुवंश कहै समकहै ममिनिसों श्राजुबड़ो स्वप्नमें कलंक उरवारो तो। प्रागिसी लगीथीभागिहतीबाल बच्चनकी जागि ना परोतो मैं रुपैया देयडा तो? बांधेहारकाकरी चतुरचित्त काकरी सो उसिरिया करीनरामकी कथाकरी। पापकी पिनाकरी न जाने नाक नाकरी सोहारिल की नाकरी निरंतहीननाक- री॥ऐसी समता करी नकोऊ समताकरीसे बेनीक- बिताकरी प्रकाशता सुताकरी।देवअर्चा करी न ज्ञान चर्चाकरी न दीनपै दयाकरी न वापकी गयाकरो २ जाकी अधेलो चारिपावली टुवत्रीबाट तानिदे- ।
SEANING Go माधवविलास। खे आना सेरह लखातहै। बत्तिस अधनी जाकीचा- सट पवनी ताकी सकस अठाइस जामें धेला सरसात है ॥ इकरा बिचारो सैछप्पन सुदेशयेज पांचसै सु- बाराजामें दसरी लखातहै। सबते कठिन है या बायते पियारो भैया रूपेको रुपैया दैया कापै दयोजातहै पढ़नन देत है कबित्त बाजे भावन ज बाजे चपचाप मुनि नीबसी अचै रहै। बाजे दशबीत बद्ध पविदि सकटकन मढ़शठ साखिन के चरचा मचै रहै। बाजे अफसोसकर बाजे रहिवासभरे बाजेदे भरोस दरबार में नचैरहै । बाजेसम मकादेत पाथर लगाय छाती बाजे समसाहेब सुपारियों पचैरहै ४॥ अथकृपाण वर्णनम् ॥ रिचक्र बेली शिवपालकी सहेती कैवों का अलबे- ली है नबेली महाकाल की। कैवा बलदेबके मुशल की मौसी कधी माताहै प्रचण्ड कालदण्ड बिक- रालकी॥ भगुके कुठारते कटती उत्तनेत्री का विधकी बहिन कैधाकटी बजबालकी । हरदृग ज्वाल प्रलय- कानकीकरालकवाधाकरवाल रामचंद्र महिपाल की १ रन बनभमैती भुजलतिकाप चढ़ी कढीम्यान बामीते बियम बियभरीहै । जारिपकोडसै सोत्तौ तजे प्रागा ताहीक्षा गाडुली अनेक हारे झारे नाहं भरी है॥ भनत कबिंद्रराव बुद्ध अनिरुद्ध तनै युद्धबीच या को सक तोही बसिकरीहै। तरल तिहारी तरवारप- नगीको कहतंबहै न मंवहै न यन्त्रहै नजरीहेर कला कालकूटकी तचाईतेजबाड़वको शेयफूंक धनिप्र-
॥
माधवविलास।
चराडताइ चढ़ोहै ॥ श्राईभासमानते कि पाई सानभा
समान प्रलयकी बुझाई पानीनधारकढ़ीहै । हरिहर
हरके त्रिशूल हरिचक्रह ते देरीबंश बधिबेको भलीबि
विपढ़ी है। अबदुल वहिद के नबीखां तिहारीतेग बज
के हथौरा काल कारीगर गढ़ी है ३ दाहन से दूनीतेग
लिगुनी त्रिशूलहूते चिनि ते चौगुन चलांक चक्रचा
लीते। कहैपदमाकर महीप रघनाथ राव सेसी शम
शेरशेर शत्रुन पैघालीते ॥ पांचगुनी पविते पचीसगु-
नी पाबकते प्रबल पचास शुनी प्रलय पर नालीते ।
शतगुनी सांपनसहस गुनी अापनते लाखगुनी कालते
करोरि गुनी कालीते ॥ प्रथमरस्या ॥ खसिगयोशा-
न को निशान वैसवारे बीच अाजरथ बेधि सुरलोक
की पथैगयो । कहै शिवलाल समुझावै कौन बानी
कहि दूनों महाननको जनम थैगयो । बाबहरी
सिंहत
सिधारे देवलोक हिशोक सुखभागिकै पुरा
नकी कधैगयो।।मसिलयो कालजियन को रक्ष
पाल भैयन को कलवन भानुसों अथैगयो १ सुविच
कोरन कोचंद्रमा हेरान्योकै सिरान्योभानु सुकृतसरो
जनके खानको ॥खसिपस्यो साधुनकी सीमकोसदन
कैवासागर मुखान्यो सुखशीलता सुधानको । सनतक
बोंद्र भूपखोंची भगवंत जभयो बैरवाधिब कोत्तली
का तुरकानको खटिगयो खग्गन के ख्यालको
खारो कैवी उखस्यो अवर अखिल हिंदुवान को २
समुद सुखान्यो कधी संतजन मीनन को दीननको देव
माधबिलास।
दरखत्त से उखरिगो। पराय के प्रकाश को प्रकाश
शशि क्षीणाभयो फेलिग प्रकाशतेज तमनभरिगो।
लीन्हीविशाम विश्वनाथ रामधाम श्राजु सुकृतको
भांडाभरिभूतलते दरिगो । हरिगो गुनीजनके गुनको
गुमानहाय प्राजु गुनगाहक जहानते निकरिगो ३
अाजु महादीनन को सूखिगो दयाकोसिंधु अाजुहीं
गरीबन को सबगथ लूटिगो । श्राजु द्विजराजन
को
सकल अकाजभयो आज महाराजन को धीरज जो
हटियो । मौलविकहै सबयांचक अनाथ श्राजु श्रा-
जुहीअनाथनकोकरमजोफूटिगो भूपभगवंतसुरलोकको
पयानकीन्हा श्राजुयांचकन को कलपतरू टूटिगो ४
अथषोड़शतुकांत ॥ खाती हरयाती रसजाती मदमाती हि-
येकात्ती सीलगाती टेर बिरही बिघातीकी। जाती ले
किराती मनाती न दयाती न चुपाती तालगाती न
पिराती उतपातीकी॥ पाती के भांती तौ बिसाती
जोपैसाती श्री धराती सियराती जो व्यथाती ताती
छातीकी।न्हांती छतजाती मैंनोचाती रोमपाती का-
दिवाती लै जलाती जीभ कैलिया कुजातीकी १ सं-
गति सवानकी बवानकीन मानकी मिरिके उठान
की सुकौतुक निधानकी। पट्टेफहरानकी डुपट्टे जाफ
रानकी गहनि धनुबानकी कहनि किंदुपानकी ॥
लाली मुखपानकी नरेश के ललानकी प्रभामैं उपमान
की अवध करवानको । कुंडल के कानकी कमान:-
इ तानकी मिटान मुसिक्यानकी अजब सक बान
माधबिलास। की बिनगुणा मालवारे अधरन लालवारे तिलकन भालवारे शोभामुख सारेहै।गिरिजात नालबारे मूत्ति विशालवारे चलन मरालवारे दृगति धारेहै। कारे रंगवारे प्यारे पीलेपटवारे परखीकहै लटवारे तेने मोहिं दोह डारेहै। वर परवारचित्तचोर परवारे सुनुमोर परवारे तेरेमोर परबारहै ३ हारिौ हया न कीन जी. व सयानकीन दीन दया न कोन बायकी गया- न कीन । शाम्भ अरचा न कीन ज्ञान चरचान कीन बित्त खरचा न कीच मन फरचान कीन । बारबध मा- नकीन मद्यसदा पानकीन मोहमद कानकीन भजन न कानकीन । मीतको न मानकील हितसब हानकीन हरिको ल ध्यानकीनमाधव बखानकीन ॥दोहा॥संग्रह सम्पूरगाभई माधवकृतसुखपाय । पंचदेव कीजैकृपा जगविदितहवैजायजोकोऊहिग्रंथको पढ़ि,नर मनलाय । ताहिपुत्रसम्पत्तिमदा देहैंग्रीरघुराय २ श्री माधवपरसादजू निरच्योग्रंथपुनीत । संग्रहकियअवलो किकै विविधकाव्यशुचिगीत ३ भरोसबरस ज्ञानअरू सकलकलागुणाभरि । सरलछंदपरवन्धप्रति पावन प्र यविरि ४ जाकेपटहिं जातकाड मनकेसकाव- कार। फोरऔरभाव नहीं पढ़िबोतासुत्रधार त मेंदई- सहायतालिखिबेसनलाय। श्राद्योपांतसमनः लिपि शिवरतनलवाय॥ई कवित्त । लपणापरीसों ाययो. जन सुयाशिनासएक उत्तम सिलेंडीसुखदाई है। ताकेमध्य बरसादि बसत सुजानलोग सोनो राजधा-
माधवविलास।
नी नरनाहकी सुहाईहै ॥ बिरच्यो बिचारिग्रंथ संग्रह
करीहै सक माधवप्रसाद पद सरलमें गाईहै। लेखक
सहायता दईहै शिवरतनलाल दुबे बंशजाये मनलाये
शिवपाईहै १॥
दो० यंत्रालयमुद्रिकियो जगमेंमहतप्रचार ।
हातभयोयाग्रंथको शिवकोवपाउदार १
इतिश्रीमाधवविलास समाप्तः॥
मुंशोनवलकिशोरके छापेखाने मुकाम लखनऊ में छपा
अक्टूबर सन १८८८ ई०
कापीराइट महफ़ जहै बहक इस छापेखाने के ॥
तुलसीशब्दार्थप्रकाश ॥ गोपाजदामजी रचित जिसमें सवपुराया वीर यट्शास्त्रों के मतसे सर्व कारके गढ़ाशयोंका कथन और जातक-ताजकसामुद्रिकको मुख्यवातें णित,योग,शास्त्र और बिवाह और यात्रादिके मुहूर्त और इसी प्रकार ३ असंख्य विषयह ने पुस्तकके पढ़नेसे जाने जाते हैं। प्रेमरन्न राजा शिवप्रसाद सितारॊहन्द की दादीरत्नकुंवरि रचितकेवल श्री- कृष्णा और रामचन्द्रजी की भक्तिपक्षका विषय दोहा चौपाई में है। चित्रचन्द्रिका ॥ काशीराजविरचित जिसमें पहले अनेक छन्दोंमें नायकाभेद वर्णन करके फिर उनको चित्रबद्धकरके रूप दिखायाहै ॥ पीयष्लहरी॥ पण्डित जगन्नाथजो त्रिशली कृत-अति मनोहर और पुण्यदायक काव्यमें श्रीगंगाजोको स्तुति है। गङ्गालहरी ॥ पद्माकर कृविकृत जिसमे संस्कृत गंगालहरो से गंगास्तुतिके विषय में जिनसे मनुष्य भवसागर पार उत्तरे अपूर्व कविताहै । यमुनालहरी॥ ग्वालकविरचित, जिसमें काव्यालंकारयुक्त यमुनाजीकी स्तुति है जगहिनोद ॥ पदमाकर कंविकृतं जिसमें नायकाभेदमें सर्व प्रकारके रसवर्णन किये गयेहैं ऐसी उत्तम सर्व लक्षणयुक्त काव्यको पुस्तक कोई नहीं है ।। भारतीभषण ॥ पण्डित गिरिधरदासरचित छन्दाके बनाने और नायकाभेद जानने की युक्ति रसचन्द्रोदय, व रसष्टि। उदय नाथ जी व शिवनाथ रचित इसमें सबप्रकारों के नायकाओं का भेद और उनके सर्व प्रकारके अलंकार रचित हैं छापाटप ।
भगवद्गीतानवलभाष्यका विज्ञापनपत्र । प्रकटही कि यह पुस्तक श्रीमद्भगबेद्गीता सकल निगम पुराण स्मृति सांख्यादि सारभूत परमरहस्यमीताशास्त्रका सबविद्यानिधान सोशोल्य- विनयोदायं सत्यसंगर शौर्यादिगुणसम्पन्न नरावतार महानुभाव अर्जुनको परमअधिकारीजानके हृदयनित मोइनाणार्थ सवप्रकार अपारसंसार नि- स्तारक भगवद्भक्तिमार्ग दृष्टिगोचर कराया है वहीं उक्त भगवद्गीतावज- वत्वेदान्त व योगशास्त्रान्तर्गत जिसको कि अच्छरशास्त्रवेत्तारअपनोबुद्धिसे पारनहींपासक्ते तब मन्दबुद्धी जिनको कि केवल देशभाषाही पठनपाठन करनेकी सामर्थ्य है वह कब इसके अन्तराभिप्रायको जानसक्त हैं और यह प्रत्यक्षही है कि जबतक किसी पुस्तक अथवा किसी बस्तुकाअन्तराभिप्राय अच्छेप्रकार बुद्धिमें न भासितहो तबतक आनन्द क्योंकर मिलै इसकारण सम्पूर्ण भारतनिवासी भगवद्भक्तपादाब्जरसिकजनों के चित्तानन्दार्थ व बुद्धिबोधार्थ सन्तत धर्मधुरीण सकल कलाचातुरीण सबबिद्याविलासी भगवद्भक्तयनुरागी श्रीमन्मुन्शीनवाकशोरजी सी,आई,ई ने बहुतसा धनव्ययकर फरुखाबाद निवासि स्वर्गवासि पण्डित उमादत्तजी से इस मनोरंजन वेदवेदान्तशास्त्रोपरि पुस्तक को श्रोशंकराचार्य निर्मित भाष्यानुमार संस्कृत से सरल देशभाषा में तिलकरचा नवलभाष्याख्यसे प्रभातकालिक कमलसरिस प्रफुल्लित करादिया है कि जिसको भाषामात्र के जाननेवाले पुरुषभी जानसक्ते हैं । जब छपनेका समयआया तो बहुतसे विद्वज्जन- महात्माओं की सम्मतिसे यह विचारहुआ कि इस अमूल्य व अपूर्व ग्रन्थको भाष्य में अधिकतरउत्तमतां उससमय पर होगी कि इस शंकराचार्य कृत भाष्य भाषाके साथऔर इस ग्रन्थ के टीकाकारों को टीकाभी जितनी मिलें शामिल कोजावें जिसमें उन टोकाकारों के अभिप्रायकाभी बीधहोवे इसकारण से श्रीस्वामी शंकराचार्यजीको शंकरभाष्यका तिलक व श्रोआनन्दगिरिकृत तिलक श्रीधरस्वामिकृत तिलकभी मूल श्लोकों सहितइस पुस्तक में उपस्थित है । से