Shree Jubilee Naagari Bhandar Bikaner
Cricket Kaise Khele
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अनिल-प्रकाशन 2619-20 न्यू माक्टि, नई सडक, दिल्ली-110006
निकर
प्रस्तुति- राजेन्द्र कुमार राजीव
सशोधन-लोकेश थानी
DBP N Dall
जादक
अनिल प्रकाशन
2619-20 न्यू माफिट,
नई सहक, दिल्ली 110006
गोयल प्रिंटस, दिल्ली-110032
समरण 1989
मूल्य : 50-00
- 7-11 2 गैर, बस्सा, 12-19 20-30 31-59 1 भारतीय टेस्ट किोटका उपमद पहला टेस्ट इरसंड में, भारत में झिोट का मागमन, कलकत्ता क्रिकेट क्लब की स्थापना, मोरिपटाविष्ट क्लब मारत में प्रपम हिट मैप, इमर में प्रपम भारतीय टीम, अनेक क्रिोट क्लबों की स्पापना । मेवा और पोशाक गेंद और बल्ला, विकेट, पोशाक, क्रिकेट का मैदान और पिष। 3 क्रिकेट के नियम पुराने नियम, नये शियम। 4 पल्लेयाजी बल्लेबाज ने लिए बास हिदायते, गाउँ, निप, स्टांस, स्ट्रोक्स, फारवर्ड डिफेंस स्ट्रोक, पर डिफेंच स्ट्रोक, ड्राइय शॉट, स्ट्रेट ड्राइव, ऑफ डाइय, ऑन डाइव, एयर दाइय, बैंक फुट ड्राइय, पट शॉट्स, स्पेयरष्ट, लेट कट, स्वीप, हुक शॉट, पुल शॉट, लेग ग्लास, फुस टॉस, रन लेना। मेंदबाजी की सा स्वास्थ्य, गेंदबाज के लिए आवश्यक निर्देश, गेंदबाजी की कुछ बुनियादी बातें, मिप और रन अप का महत्व, सेज गेंदबाजी, आउट स्विग, इन स्विग, कटर, वॉफ कटर, सेंगरटर, मारर, बम्पर या बासर, बीमर, सीमर स्पिन गेंदबाजी,बाफ रिपन, मैग स्पिन, गुगमी, सॉप स्पिनर 60-83 -
6 फील्लिा
84-90
ध्यान देने योग्य या, फीशिप की गमावट ।
१ विकेटकीपिम
92-105
दमखम के लिए व्यायाम, यादव सगाने का अभ्यास,
पोशाक
8 यम्पायर का पायित्व
9 कप्तान को भूमिका
10 फिट में महिलाए भी पीछे नहीं
11 भारतीय रिफन्ट्रोल मोर
12 ोिट के गुण पाम्बा
13 पिदय के प्रमुख नये-पुराने विकेट शिसारी
106-109
110-113
114--118
119-123
124--128
129-176
साम्पाय-1 भारतीय टेस्ट निकट का उनष यद्यपि निर, एर अस्पत गति प्राप्त अन्तर्राष्ट्रीय खेल है, किन्तु गजकल पारत में भी सर्वाधिक लोकप्रिय खेल पन पुका है । मिन गिों भारतीय टि टीना टि टेस्टभेज, विश की सी टीम ये होगा है, उाति देश के कोने-कोने में किशोरों कर पद तक, इस देश की प्रतिनिधि जाने के लिए अनुसार यो और ट्रोनिस्टर पर कागेन्द्री ते दृष्टिगोचर होते हैं। के प्रतिस्ति समाचार पत्रों में वित पार पाने के लिए लोग रात की रिमति से मगर होतोपरे रहते हैं। पास में आग टिपेर प्रति पागा जाता है, जाना और किती व केशति नहीं। इसी गोक- निपता उत्तरोतर पनि हो पाई जा रही है और ऐसा लगता है कि इस शर्राष्ट्रीय प्रतिरोन हमारे देश में राष्ट्रीय सेष का राासिया है।गाएप की तोरप्रियता की स्थिति को देते हुए प्रत्येक व्यvि यह मानेझी पिसासा करेगा ािरत मेडिट का बागमन र पौर मेरो हुआ ? मोर भारतीय शिर का इतिहास क्या है? पहला टेस्ट इग्लग्ड मे प्रला गया झिरेट उदाय के विषय में यह माना गया है मिहसेन, सपणे पहले स7 1300 ई. में बनेण्ड में रेन्ट नगर के निबन्दा स्थान में खेपा गण पा। इसका प्रमाण, गड राना एस्पर प्रपम की मार- मारी से भाग्य की डायरी मे निमित स्म से उपसम्ध हुमा है। उस ोिं भारत में मिा करनीका बासना। पहो उसमे सारोबारे अधिकांश कापारीशनिटात पेमा रोये। उस समय यह प्रारमियपस्या में पापोर इसमें मा मेने मासे पोरे ही संत थे।
भारत रामायण भारत में पिटार, इलरेही ईरर इण्डिया एमसी मे पर पारिता हारा पुर दिया गया । यहा पर डहाँ पा देहरातारातरा 11721 ई० मारा- पारा हमार मिलिसकरिगामी पहाजी नादिर थे। सीrtfर ऐसारतमे गती माती शुरु कर दी। शुर में यह देश के रोगोचर ही रमाल ता पा। इट बीती ऐसार विदेशी साप होपारण तलाती। भारतीय सानेपोरस रोरु २ ति उधासीसा रन पाया । १९ र रपय समाजोरो पता सता पिरजोने साय भारत में रायरे पहले निदेट सेतो पाले भारतीयों में पारसी लोग - Pट सीरगना पुराने गिलेस रो पता परता दिएप्रथम पागे सा 1792६० रद की रशाए 7ी गई। उन दियो परदा ही भारत की राजधानी तोचिौर दही-बी पम्पगियो मेरो हालेछ बडे-रटेज पहाधिकारी ही इरा दायरदरप ऐर दिया तौर पर टि सेता रिते थे। राज- यी होने रणपही से उग्रेजो ने परत पो दर जगाो शुए किये थे। इस पर सापरत यो गरो में भी हिट का खेल डेसोतिरपि-दी और रातार तार हुवा। कोरियम सम्बई में 1818 ई. एक पारसी श्री पासलो छोटे छोटे पारा एम्दा हिट सिदार दिया। पारतय में महीं रोतर पडनी शुरू हुई। और पसी वर्ष योरिटल बारा दी गई। यह ६१८ पारपियोसी ही देर पाना मुप्परा. यही को 5 सम्पई रा'मा मदारहलाता है। पापिनियतादि दी कोई पापा नहीं पो गपितु पैसियन पान पर RTI से भारत में प्रथम क्रिकेट मैच क्रिकेट प्रचार के प्रारम्भिक दिनो मे बम्बई और पूना के दो जिम. खाना मै ऍग्लो इण्डियन' (ऐमे अग्रेज जो भारत में नौकरी करने आए थे और यही बसने लगे थे) मी क्रिकेट खेला करते थे किन्तु कई वर्षों तक यह खेल क्लबो के आपसी सदस्यों के बीच ही खेला जाता रहा । अन्त में इतिहास का वह महत्वपूर्ण दिन भी सन् 1877 ई० मे आया, जब भारत मे पहली बार दो विमिन टीमो के बीच सम्बई के जिमखाना मैदान पर पहला अन्तर्जातीय क्रिकेट मैच खेला गया । कहना न होगा कि इन दिनों टीमो में एक पारसी टीम थी और दूसरी वम्बई जिमखाना की एंग्लो- इण्डियन टीम । बम्बई जिमखाना के 168 रना के उत्तर में पारसो टीम 105 रन बनाकर 63 रनो से यह मैच खो दिया। एक एr पारी के आधार पर खेला गया यह मैच हार-जीत के मुद्दो से परे हटकर सेला जाने वाला भारत का पहला ऐतिहासिक मैच था। इग्लैण्ड में प्रथम भारतीय टीम उसी वर्ष कुछ धनी पारसिया ने मिलकर एक याजनाबाई कि एक पारसी टीम को इग्लण्ड भेजा जाए। योजना बनाना जितना सरल पा, उसको क्रियान्वित करना उतना ही कठिन । बम्बई के एक व्यापारी थी जे० एम० फामजी पटेल, जो इग्लण्ड में जाकर कई बार क्रिोट देख और खेल चुके थे, उन्होने इस काम को पूरा करने का सकल्प किया। इसम उ हैं दो मय पारसियो-श्री ए. पी० पटेल तथा श्री वी० बी० धारिया का भी पूण सह्योग प्राप्त हुआ। अत मे नौ वर्षों के प्रयत्न के बाद 12 अगस्त, सन् 1886 ई० को जापर इस योजना ने साकार रूप धारण किया । और पहली भारतीय रिकेट टीम इग्लण्ड के दौरे पर रवाना हुई। इस टीम में इंग्लैण्ड मे कुल 28 मैच खेले, जिसम एक जीता, 19 हारे और 8 अनिर्णीत समाप्त हुए । एक मात्र जीत नोरमन हस्ट का स्थानीय टीम के विरुद्ध प्राप्त हो गई। एर पारी और 62 रना से भारत की इस पहली पारसी टीम का नेतृत्व किया या डी० एच० पटेल ने।
10 इग्लैण्ड के उपत दौरे पर जाने वाली टीम के कुछ गन्य समस्यों में बल्ले- पाज पे-पी० डी० दस्तूर, ए. सी. मेषर, जे० एम० मोरनास या एस० एच० हारवार, जबकि गेंदबाज ये हो.. अम्बाटा, बी० बी० बारिया, एस० ए० भेदावर तपा एम० साम पी० बोवर मार्ग गेंद बाजी करते थे, जबकि कप्तान तथा अन्य सभी गेंदबाज डर या गंद बाजी मे निपुण थे। दो वष बाद ही सन् 1888 ई० मे पी० डी० कांगा, पे० एम. हिवेजा तथा डी० सी० पण्डाले ने मिलकर दूसरी पारसी टीग कोइला के दौरे पर भेजने में सफलता प्राप्त की। इस बार दौरा सफल रहा। दुल सेले गए 31 मैचो मे से 8 मे विषय 11 मे हार और 12 अय मैयो को अनिीत कराकर इस टीम ने यह बता दिया कि भारत में क्रिकेट बितनी तेजी से उन्नति कर रहा है। इस टीम में सन् 1886 में इग्लण्ड पाने वाली पहली टीम के पेस दो सदस्य मोरनास और हारवार शामिल किए गये थे राया करतान की जिम्मेदारी, आल राउहर एच० मी० फाग को सौपी गई पी । अन्य सदस्यो में एन० सी० वापासोला (आल राउण्डर तपा सफट कालीन विकेट कीपर) आर० डी० कपर (पल्लेबाज तपा नियमित विदेट मीपर), डी० ए० दूभाप (पल्लेबाज), एम. ई० पायरी (तेज गेंदबाज), के० भार० ईरानी (तेज गेंदबाज तया आकषक बल्लेबाज), डओ. सी. पोडले, सी० सी० मेहता (दोनो आफ नेक गेंदयाज) एव डी० एन. रायटर (पायें हाथ के तेज गेंदबाज) ये । कपूर ने 55 पारियों में 952 रन सपा दूपाप ने 24 पारियों मे 810 रन बनाकर बल्लेबाजी औसत म सबमे कपा स्थान प्राप्त किया। पकि माजी मे पायरी ने कुल 170 विरेट प्राप्त करने अन्य सभी गेंदबाजो को पीछे कर दिया और कुल 32 5फ भी लपके, विकेटकीपर कपूर से सिफ दो कंप कम । अनेक क्रिकेट क्लयों को स्थापना इग्लैंड के दो दोरों को सफलतामों तथा असफलतामो ने राष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट के प्रति तमाम नवयुवकों को आकर्षित किया और इसी उत्साह मे कई छोटे-बड़े क्रिकेट बमदों की स्थापना की गयी, जहाँ निय- मित रूप से क्रिकेटका अम्मास रिया जाने लगा। मारतीयों के नाम पर अब तक वे ही रीमें पी,जिनमें पारसी विणा- डियो के अतिरिक्त और कोई भारतीय खिलाड़ी नहीं था। इस बीच हिन्दुओ ने सगठित होकर सन् 1878 मे हिंदू किकेट पलय की स्थापना कर डाली । और इस क्लब ने अपना पहला मैप सन् 1884 में यम्बई जिमखाना के विरुद्ध खेला। उसी समय एक हिदू परमानन्ददास ने इस हिदू क्लब को आर्थिक रूप से बहुत सहायता दी । मस लव का नाम बदलकर परमानन्द जीवनदास हिदू जिगखाना रप दिया गया। दूसरी तरफ भारतीय मुसलमानो ने भी सन् 1883 मे अपना एक अलग क्लब बना लिया । और 1893 मे उसका नाम मोहम्हन जिम- खाना रखा, जिसे कुछ वर्षों के बाद इस्लाम जिमखाना के नाम से जाना जाने लगा। किन्तु गभी भी ये सभी क्लव सिर्फ अपने पलय के सदस्यों के साथ किवेट खेला करते थे और यही कारण था कि जब सन् 1890 में पी० एफ० वरनौन के नेतृत्व मे इग्लैंड की टीम ने पहली बार भारत का दौरा किया तो उसके विरुद्ध भारतीय टीम के नाम पर पारसी टीम ही मैदान में उतरी। पहली पारी में 98 7 पनाकर हालादि इग्लैण्ड ने 17 रनो की यड़त प्राप्त कर ली थी। किन्तु दूसरी पारी मे उसके सभी बल्लेबाज मात्र 61 रन बनाकर आउट हो गए। जिसमे एम० ई० पावरी ने बेहतरीन गेंदबाजी द्वारा 34 रन देकर 7 विकेट चटकाये। जीत के लिए आवश्यक रन 76 बनाते हुए 6 पारसी बल्लेबाज लावट हो गये और भारतीय निकेट के इतिहास में पहली बार किसी भारतीय टीम ने इग्लैण्ड की किसी टीम को 4 विकेट से हराकर भारत भूमि पर पहली विजय हासिल की। भारत में क्रिकेट की उन्नति के लिए एक बार फिर पारसी मागे थाये और उन्होंने उत्तरी भारत का दौरा किया। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य क्रिकेट को लोकप्रिय बनाना पा। पारसी टीम ने पटियाला मली गढ़, इलाहाबाद, मुजफ्फरपुर आदि स्थानो पर विभिन्न मैच खेले । महा- राजा पटियाला द्वारा अयोजित वाषिर उत्सवो में भी पारसी टीम ने हर वप सम्मिलित होकर पटियाला और शिमला में कई मैच खेले।
अध्याय-2 गेंद, बल्ला, मैदान और पोशाफ किसी भी घेल को सीखने से पहले उसके नियम-उपनियमों को अच्छी तरह जान लेना बहुत आवश्यक होता है । यदि पेल की बुनियाद ही कमजोर हो गई तो फिर बेल को सही तकनीक से बेलना नहीं सीखा जा सकेगा। एक अच्छे स्तर या बिलारी बनने के लिए खेल की बुनियाद और आधारशिला नियमो की जानकारी पहले भान पर लेने का अप है आधी मजिल तय कर लेना। नियमो को जानकारी पहले होने से चल सोचते परत आपको गलत और सही ढंग से खलने का अहसास शुरू से ही होगा, तो आप खेल को दोष रहित ढग से खेलने के बारPR से ही अभ्यस्त हो जाएगे । और नियमा से पहले क्रिकेट खेल के साज सामान का ज्ञान भी उतना ही जरूरी है। तो आइए, क्रिकेट खेल के नियमो उपनियमो से पहले साज-सामTT की जानकारी हासिल कीजिए। में गौर बल्ला I फिट म इस्तेमाल गेंद का भार 1559 ग्राम (3 औंस) से कम तथा 163 ग्राम (आँस) से अधिक ही होना चाहिए उसकी परिधि (क्त माप) 80 से कम और 9 से अधिक नहीं होती चाहिए। 2 बैट या बल्ले क्रिकेट के प्रारम्भ में कोई निश्चित आकार निर्धारित नहीं किया गया था। पर अब बैट के आकार-प्रकार के बारे में यह नियम है बिट मूर सहित 38 से लम्बा नहीं होना चाहिए । बैट से हत्ये से नीचे वाले भाग को चौडाई भार या पार से अधिक नहीं होनी चाहिए । मन्ले के वजन के बारे में अब तक कोई माय नियम नहीं बन सा है। यह पिताहीनी सामथ्य और समय पर
-
Rela
18 से 5 cm)
134 in
मौपचारिक
1079 cm
Au025961garir
बल्ले
छोड दिया गया है । यदि बंट बहुत भारी उपयोग में लाया जाएगा तो
खिलाडी जल्दी पफ पाएया और शॉट मारने के लिए उसे फुर्ती से सही
दिशा मे घुमा भी नहीं पाएगा । और यदि बंट हल्का होगा तो खिलाडी
उससे करारे शॉट नहीं मार पाएया। अत यह खिलाडी की सुविधा और
विदेक पर निर्भर है कि उसे बट ऐसा चुनना चाहिए जिसका भार न
कम हो न अधिक जिससे खिलाडी विना पके अच्छे और करारे शॉट
मार सके, बैट घुमाने में उसे पकावट महसूस न हो।
गिन्निया
2810
(7112cm)
28hin
17239cm)
गेद
रम्प
स्टम्प (विकेट)
बालिग क्रीज
.
रिटर्न कीज
पौपिंग क्रीज
जिट के नियमों के अनुसार पाने की मम्बाई विभिन्न वर्ग में इस
कार होनी पाहिए।
15 घौडाई पूरी लम्बाई 95 सेमी 72 सेमी 271 15॥ पतो हैसिस बल्ले फो सम्पाई 3 26 सेमी 46 सेमी 4 48 5 28 50 6 29 52 7 30 56" 8 32 56" " . " " " " 101 104 108 108 78 81॥ 86 88 " " विर-एक विकेट के लिए तीन स्टम्प काम में लाए जाते हैं। विरेट ही भीष के दोनों ओर तीन तीन स्टम्मो के दो विकेट लगे होते मिटतीनो स्टम्पो की एक-दूसरे से इतनी दूरी रखी जाती है घि उनके बीच से गेंद न निकल सके। तीनों स्टम्पो को गाडने के बाद उनकी सम्मिलित चौडाई 9' होनी चाहिए। स्टम्म गाडने के बाद विकेट की ऊचाई विना गिल्लियों के 28. (7112 से भी) तथा गिल्ली रखने के बाद अचाई 281 होनी चाहिए। raininthe 16 पोशाक-सुरक्षा की दृष्टि से क्रिकेट खिलाडी को कुछ सास किरण को पोशार पहननी पाहिए खासतौर से बल्लेबाज और विकेटकीपर तपा स्तिप मे खडे फोल्डरो को । बल्लेबाज को पैरो की सुरक्षा के लिए पड बाधने चाहिए जो घुटनो और पैर के सामन के नीचे तक के भाग को तेज गेंद वे आघात से सुरक्षित रखते हैं । पैट के अन्दर एग्नोगिना गाड अवश्य पहनना चाहिए। हापो मे स्पन के दस्ताने होने चाहिए ताकि यदि भूल से गेंद बल्ले पर न आकर मगुलियो पर लगे तो जख्मी होने का अदेगा न हो।
17 जूते ऐसे होने चाहिए कि भागते-दौडते परेशानी न हो । अन्दर से जूते काफी मुलायम होने चाहिए। क्योकि क्रिकेट का खेल दिन भर पलता है और दिन भर जूते पहने रहने से पैर की अगुलिया जूते में पकही रहती हैं, मत मुलायम जूता इन्हें दिन मर बाराम दे सकता है। मोजे मोटे तथा घुटनो तक लम्बे होने चाहिए, ताकि परो की सुरक्षा रहे। कई खिलाडी भोजे के आस-पास रवड या स्पज के पिलो रखकर तब जूते पहनते हैं ताकि गेंद के आघात से पैरो की अगुलियों को सुरक्षित रखा जा सके। सिर की सुरक्षा के लिए हैट अवश्य पहनना चाहिए। इससे सुरक्षा तो होती ही है, साथ ही धूप की चमक से आखें बची रहती हैं। क्रिकेट खिलाडी पोशाक के रूप में सफेद पैट और सफेद शर्ट, टी- पार्ट या फुल स्लीव्स की बनियान का इस्तेमाल करते हैं। पैट और खट ढोली-ढाली होनी चाहिए ताकि हाथ-पैर को अच्छी तरह हरकत करने का मौका मिले । शट का कपडा ऐसा होना चाहिए कि वह ज्यादा-से- ज्यादा पसीना सोख सकने की क्षमता रखे ! विकेट खिलाडी को शर्ट के ऊपर स्वेटर अवश्य पहनना चाहिए ताकि मैदान की हडी हवा से वह सुरक्षित रह सके । श्केिट का मैदान और पिच क्रिोट का मैदान साफ-सुथरा तथा समतल होना चाहिए । यदि मैदान पर थास हो तो उसे काटकर एक-सा कर देना चाहिए। माजकल सभी प्रथम श्रेणी मैच विकेट पर ही खेले जाते हैं। पिच की लम्बाई 22 गज होती है तथा चौडाई 10 फुट । पिष समतल, साफ और कठोर होनी चाहिए । इस पर उगी पास हटा दी जाती है । पिच कक्रीट और पानी मे भोगे हुए मसाले से तैयार की जाती है, इसके पर पानी छिडकार रोलर फिराया जाता है। पिच का जूट विधाकर भी बनाया जाता है पर आजकल ज्यादातर टफ पिचों का ही स्तेमाल किया जाता है । क्रिकेट में पिच का बुहा महत्व होता है । पिए स्लो और फास्ट बनाने के अलग अलग तरीके होते हैं । अपन तथा विरोधी टीम के पोतरा
18
गेंदबाजी कीर
(204 मीटर)
बान्तपानी और
मोर12 परमम्मी
1966 मीटर)
4 फ022 मीटर
TV 22 पज 10 पट
162012 पीx305मी)
बहरहातक
कोपिलदेगा।
4फट
1122 मी.)
Key
(122)
स्टम्प
(229 मे मी)
क्रीज, पिच आदि का माप
गुणों को देखते हुए ही पिच को फास्ट या स्लो बनाया पाग है । यते
फिटमा पिपन ज्यादा
कास्ट बनाना पाहिए और न ज्यादा स्तो
ताकि उस पर स्पिन गेंददार और फास्ट गेंदबाज दानो हो चल सके।
घम वरह का पिप एक भाग रिप कहलाता है।
पिपरे एक छोर के रेट के निषित क्षेत्र में रिसेपीर या
पागि पर कहा राधा है, इनार यम होता है और दूसरे और के
19
मैदान के मध्य पिप सपा दोनों बौर विकेट, गेंदबाज और
मल्लेवाल सापकोस्डर भी
विकेट के निश्चित क्षेत्र में बने कीज मर से गेंदबाज बोलिग करता
है। दवाब गेंद को ठप्पा पिच पर ही बिलाकर गेंद कोक देता है।
अध्याय-3
क्रिकेट के नियम
त्रिवेट नियम पनान का श्रेय एम सी सी कोरिया जाना
है। मवस पर 1744 म रिकेट के नियम बनाए गए। न
नियमा वा जहा पम्पलेट के रूप में छापा गया नहा य नियम
निनन नामर कप के रूमाना मे मी छाप गए। इन नियमा को
ब्रिक्ट जगन म
1744 की सहिता के नाम से प्रचारित किया
गया।
इन तरह -म समय से ही त्रिवेट के नियमो का जोर गार में
प्रचार प्रसार टुआ । यही नियम आगे चलकर विकट के नियमा
की आपर गिना बन ।
सन् 1787 में इग्लड के हर लदन के डारसट स्क्वायर
मे गम जाड न जपना विकेट ग्राउड स्थापित किया। साथ ही
साथ एम मी सी का स्थापना भी हुई।
तमी म एम सी मी विकेट के नियमो को स्थापित करन
वाली अधिकारिक सस्था बनी। आज भी विकेट के नियमावा
मगधा एम मी मी ही करती है ।
मन 1788 म एम मा मी न पहनी बार विकेट के नियमो
म माधन क्यिा ना। इसके वाद विकट के म् नभ्न नियमा को
मन 1947 म काफा बारा छाग गया।
कुछ वप पव एक दिवसीर या मोमित ओवरा मचा वा
बनता नई गारप्रियता वा टखकर कुछ नए परिवतन एक शिव
मीय मचा लिए अग म किए गए है।
टन मनी नियमा का अन्छा तरह जानना हर विष्ट
विवारी र यमर आदि के लिए अत्यत जावयक है।
तभी मेन वा भरपूर मजा आएगा ।
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21 (1) विकेट मच दो टीमो के बीच होता है । दोना ही टीमो मे 11 11 खिलाडी नियमित खिलाडी होते है। इसके अलावा चार-चार खिलाडी रिजव या अतिरिक्त होते । जो क्सिी खिलाडी को चोट लगने की अवस्था मे उसके स्थान पर मेलन के लिए सुरक्षित रखे जाते है । इन खिलाडियो मे 12वें खिलाडी का नाम टीम के निमित खिलाडियो के साथ घापित किया जाता है। 12वा खिलाडी किसी भी क्षण किमी क्षेत्र रक्षा के मदान से जाते ही क्षेत्र रक्षण कर सकता है। यह गेंदबाजी और वल्ले- बाजी नहीं कर सकता है। जहा और खिलाडी, क्सिी खिलाडी के घायल हो जान या बीमार हो जाने पर ही आते है। 12वा । खिलाडी मदान और पेवेलियन के बीच कमी भी आ सकता है। वही ड्रिस्व इटरवल मे पानी की ट्राली के साथ आता है । हर टीम में एक कप्तान, एक उपकप्तान एक विरेट कोपर अनिवाय रूप से होता है। कप्तान अपनी टीम का सर्वेसर्वा होता है । वही टीम या नतत्व करता है खेल की नीति निर्धारण करता है। फील्डिग जमाता है। गेंदबाजी और बल्लेबाजी का क्रम निश्चित करता है। टास करन मे अग्रणी होता है । पिच मौसम, अपन गेदवाव बल्ले- बाजो की क्षमता को देखकर गेंदबाजी करने या बल्लेबाजी करन का निणय लेता है । कप्तान की अनुपस्थिति में यह सब जिम्मे दारी उप कप्तान निभाता है। (2) खेल के मदान मे क्षेत्र रक्षण कर रही टीम के 11 खिलाडी दोनो अम्पायर और दोनो बल्लेबाजो के अतिरिक्त आर कोई नहीं रह सकता है। बल्लेबाज या क्षेत्र रक्षण कर रहे खिलाडियो के बीमार हो जाने अथवा चोट खा जान पर एवजी खिलाडी (समीट्यूट) बुलाया जा सकता है। बल्लेबाजवे घायल हो जाने पर उसे रनर दिया जाता है। जो उक्त भागने में असमय बल्लेबाज के स्थान पर दाडता है। उक्त बल्लेबाज के आउट होते ही रनर भी मदान स वाहर आ जाएगा। रन लेते समय दौडने की अवस्था मे रनर के रन आउट हो जाने की अवस्था - रनर का साथी खिलाडी ज्मिके लिए रनर दोड रहा है आउट माना जाएगा। रनर के रहते बल्लेबाज को 21 22 दौटना नहीं चाहिए। यदि बल्लेबाज रन लेन दाडता है व रनर खटा रहता है तो रन नही माना जाएगा। रनर के दौडन पर ही रन माने जाएगे। (3) एक बटिंग बीज स दूमरी बटिंग क्रीज तक पूरी तरह दौडन पर ही रन माना जाएगा। कोई भी बल्लेबाज नीज या रिटन क्रीज को बल्ले से या खुद अपन शरीर से पार कर नही लाटगा ता वह रन नही माना जाएगा। इसे शाट रन कहते है । (4) हिट की गई गेंद सीमा रेखा से बाहर सीधा टप्पा खाए तो छह रन दिए जात है। गेद सीमा के पहले या सीमा पर ही टप्पा खाकर जाए तो चार रन मान जाएग। सीमा के बाहर को आउट पील्ड कहा जाता है वहा जगर गेंद क्च भी कर ली जाए तो खिलाडी आउट नही होगा । जब तक गेंद सीमा रेखा से नहीं टकरा गती चार रन नहीं दिए जाएगे। अगर क्षेत्र रक्षक सुद सीमा मे बाहर चला जाए और गेद सीमा से न टकराए तो चार रन दिए जाएगे। (5) इमी तरह यदि बल्लेबाज गेंद को डीप में खेलकर आखिरा गेंद पर एक रन बनाकर बल्लेबाजी का अपना छोर बनाए रखना चाहता है और क्षेत्र रक्षक जानबूझ कर पर से गेंद को मामा रेखा के पार कर देता है इस अवस्था में अम्पायर को चाहिए कि क्षेत्र रक्षण कर रही टीम का दण्डित करे और भविष्य म ऐसा न बरन को चेतावनी दे । ऐसी अवस्था में उक्त बल्लवाज को अपना बनाया एक रन तो मिलेगा ही साथ में 5 रन आर मिलेंगे व बल्लेबाज का स्थान भी नहीं बदला जाएगा। (6) इम स्थिति में अगर क्षेत्र रक्षक गेद का पाछा करता है उन उता या रोकना नही और गेंद को मामा रेखा पार कर जान ना तो फिर उस स्ट्रोक से बल्लेबाज को चार रन ही -मिग सार छोर भी वाला नहीं जाएगा। छोर बल लेने के वायजन बल्लेबाज को अपन छोर पर वापस जाना पडगा। (7) अगर गेंद ओवर या हारर मीमा रेखा के पार चली जाए आर एसी अवस्था मे बल्लेबाज रन लेन दौड पड हो पर एय-दूसर को ग्रास न दिए हो यानी अपन-अपन छोर पर नही पहना | और क्षेत्र र द्वारा पील्ड करके फेंकी गई गेंद सामा रमा व पार चली जाए तो बल्लेबाज को इम अवस्था म 22 । 4 चार रन मिलेंगे। लेकिन अगर बल्लेबाज ने एक-दूसरे को मास किया हो तो एक और रन जुडकर 5 रन मिलेंगे। और अगर बल्लेबाज तीसरा रन लेने की कोशिश म एक-दूसरे सोबास फर" गए हो और गेंद सीमा रेखा पार कर जाए तो बल्लबाज को सात रन मिलेंगे। अत ओवर थो के मामले मे सतक रहना चाहिए और ध्यान रखना चाहिए कि गेंद जब ओवर यो हुई तो बल्ले बाजो ने एक-दूसरे को वास क्यिा या नहीं। (8) विकेट कीपर या गेंदबाज के हाथ मे आते ही गेंद डेड हो जाती है यानी सेल म नहीं रहती। (9) अगर गेंद बल्लेबाज के पह में फस जाए तो उस डेड मान लिया जाता है। पर अगर गेंद विकेट कीपर के पडम अटक जाए तो गेंद 'इंड नहीं मानी जाएगी। (10) निम्न अवस्था म भी गेंद डैड मानी जाएगा (क) यदि किसी कारणवश बल्लेबाज गेंद सेलन को तयार नहीं हो। (ख) यदि गेंदबाज गेंद फेंकन की निया के पहले ही गेंद गिरा दे। (ग) यदि बल्लेबाज का गेंद मिलने से पहल ही बल्लेबाज के छोर की एक या दो गिल्लया गिर जाए। नो बाल (11) बालिंग छोर पर खडा अम्पायर ऐसी किसी भी गेंद को नो बाल घोपित कर सकता है। यदि वह गेंद फेंकते समय गेंदबाज के कदमो की स्थिति मे सतुष्ट नहीं है । जस- (क) गेंदबाज का पिछला पर रिटन श्रीज के अन्दर पड़ा हो और रिटन क्रीज या रिटन ब्रीज पारवड एक्मटेंसन को नहीं छू रहा हो। (ख) फट फुट यानी अगले पर का कुछ हिस्सा (चाहे हवा मे मा जमीन मे) बौपिंग क्रीज से पीछे रहता है।
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नो बाल
(12) गेंदबाज ओवर आम गेद वे या अण्डर आम ।
बाये हाथ से गेंद करेगा या दाहिन से। आवर द विरेट फेंकेगा
या राउड ८ विकेट। इनकी जानकारी अम्पायर को पहले दी
जानी चाहिए। विना जानकारी दिए गेंद करने की स्थिति मे
अम्पायर गेंद को नो बाल द सकता है।
(13) गेंद को सही ढग से फने की जगह पो करने पर
भी गेंद को नो बाल माना जाएगा।
(14) यदि गेंदबाज गेंद फेंने से पूर्व ही बल्लेबाज के छोर
पर रन आउट करने का प्रयास करे तो नो बाल होगी।
(15) यदि गेंदबाज गेंद परने के पूर्व नान स्ट्राइकर या
अपन छोर पर बडे बल्लेबाज को रन आउट करने की कोशिश
करता है तो यदि ऐसे में कोई रन ले लिया जाता है उसे माना
जाता है और वह रन नो बाल का माना जाता है। गेंदबाज
द्वारा इस प्रकार के प्रयल दोनो बाल माना जाएगा।
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नो बाल
(16) यदि कोई नो वाल हुई हो जिसे बल्लेबाज न न खेला
हो और वह विकेट के पीछ बिना रुके सीमा पार कर जाए तो
अम्पायर नो बाल देगा माथ ही चार रन भी देगा यानी एक्स्ट्रा
के चार रन कह जायेंगे।
(17) यदि नो बाल पर खिलाडी चौका मार द तो उसे
रन मिलेगा। पर ओवर मे वह गेंद नहीं गिनी जाएगी। चित्र
देखे अगले पेज पर।
(18) यदि नो बाल पर खिलाडी रन लेते हुए रन आउट
हा जाए तो वह आउट माना जाएगा। इस स्थिति में श्रीवल्ले
बाज टीम को एक अतिरिक्त रन और गेंदबाज को अतिरिक्त
गेंद मिलेगी।
(19) गेंदवाज गेंद ओवर ६ विकेट पवैगा या राउड द
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ठीक गेंद
विकेट यह जानना बल्लेबाज का अधिकार है। इसलिए गेंदबाज
अम्पायर को विना बतलाए परिवर्तन करने पर अम्पायर नो
बाल घापित करगा।
वारगेंद
(20) यदि गेंदबाज गेंद को इतने पर फेके कि बल्लेबाज
अपनी मामाय अवस्या म उम गेंद को छू भी न पाए तो गेंद
वाइह मानी जाएगी। इस पर बल्लेबाजी कर रही टीम को एक
अतिरिक्त रन और गेंदबाज को अतिरिक्त गेंद दी जाएगी।
(21) यदि गेंद लंग और ऑफ स्टप पर बल्लेबाज के बल्ले
भी पहुव से काफी दूर हो तो गेंद को वाइड कहा जाएगा ।
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५
बाई रन
(22) यदि कोई गेंद बल्ले से विना छुए निकल जाए तो
उस पर दौडकर रन लिए जा सकते है ऐसे रनो को बाई रन
कहा जाता है। यह जरूरी नहीं है कि गेंद विकेटो या विकेट
कीपर के पास से ही गुजरे। यह रन अतिरिक्त रन माने
जाते है।
लैग बाई
(23) यदि गेंद बल्लेबाज के बल्ले को न छू कर शरीर के
किसी भी हिस्से को छूती हुई निकल गई हो-साथ मे यह शत
भी है।
(क) बल्लेबाज ने गेंद पर "गाट लगाने का प्रयास किया हो।
(ख) बल्ले ने उस गेंद से चोट लगने से अपन आपको
बचाया हो।
मेगवाई की एक स्पिनि
ST
(24) अगर बल्लेबाज कोई शाट न खेलकर गेंद का हाय या
शरीर के किसी अन्य हिस्से से जानबूझ कर डिपलेक्ट कर देता
है और वाई रन लेन को भागता है। इस स्थिति मे अम्पायर
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28 गद को डेड घोषित कर देता है। बलवान इस म्पिति में अपने विवेग पर वापिस चले जायेंगे और रन को नहीं माना जाएगा। चाह में मीमा रसा मी पार कर चुकी हो। (25) अगर बहुत तेज हवा चल रही हो तो विरेटा से मल्स हाई जा सकती है । पर ऐमा अम्पायगे द पप्तानो की सहमति से ही सम्भव है। ऐमी अवस्पा में गेंद लगन ग विवेट में जरा भी हिलने पर आउट माना जाएगा। बाउट-आउट हान की अब दस स्थितिण।। (26) तीन बोर- यदि कोई सामा प गेंद विटा से लग जाए और वेल्स म स एक भी गिर जाए ता सिलाडीक्लीन बोल्ड आउट हो जाता है। यदि गेंद बल्लेयाज के बट या पड से सगरर भी विवेट मे लगे तो भी बल्लेबाज क्लीन बोल्ड आउट माना जाएगा। ध्यान रहे अगर गेंद बल्लेबाज द्वारा मेन लिए जान के बाद स्थिर हा जा और अनजान से बल्लेबाज ये पर द्वारा विकेट मे लग जाए ता बल्लेबाज आउट नहीं होगा । क्यावि गेंद हा हो चुकी थी। (27) कंघ मा वट- गेंद वल्ले से लगकर विना जमीन पर टप्पा खाए किसी भी क्षेत्र रक्षर द्वारा क्च कर ली जाए और नच लेन पर दस सक्डि हाथ में रह । तो बल्लेबाज आउट होगा। बल्लेबाज के पड जूत से लगकर आई गेंद पर भी बल्लेबाज आउट होगा। अगर गेंद आउट फील्ड में किसी भी खिलाडी द्वारा क्च की जाए तो बल्लेबाज आउट नहीं होगा। गेट अम्पायर को छू कर भी कच की जाए तो भी बल्लेबाज आउट होगा। यदि गेंद वल्ले को छू कर बिना जमीन पर टप्पा खाए विकेट कीपर के पड मे नगे तो भी बल्लेबाज आउट होगा। (28) हेलिग द बाल- यदि वल्लेबाज गेंद का जब खेल मे हो हाथ से पक्ड ले तो वह आउट होगा । (29) हिटिंग द बाल टवाइस-यदि बल्लेबाज जानबूझ कर गेंद को दो बार टच करे तो वह आउट होगा। (30) हिट विवेट- यदि बल्लेबाज गेंद को मारने की कोशिग म अपना बल्ला विक्ट म मार दे। या उसके शरीर का 28
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कोई भी हिस्सा विकेट से टकरा जाए या गेंद खेलने के बाद रन
के दौरान भी विकेट मे बल्ला मार दे तो वह आउट होगा।
हिट विक्ट
यदि वल्लेबाज ने हिट विकेट हान से पूर्व अपना शाट पूरा
पर लिया हो तो वह आउट नही होगा।
(31) पग-बाधा-एल वी डब्लू या लंग विफोर विक्ट
को पार स्थितियो से पृष्ठ-23 पर दिए चित्र द्वारा समझा जा
सकता है।
चिन म न 1 की स्थिति में बल्लेबाज नोट आउट होता है
क्याकि उसका पर स्टप के बाहर है। चित्र न 2 की स्थिति में
बल्लेबाज आउट माना जाएगा क्योकि उसके पर स्टपा के आगे
है । चित्र न 3 में अम्पायर यदि समझता है यदि पगबाधा न
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होती तो गेंद विकेट के ऊपर से निकल जाती तो बल्लेबाज नाट
आउट होगा। यदि अम्पायर समझता है पगवाया न होती तो
गेंद सीधे विकेट मे जाती तो खिलाडी आउट होगा । चित्र 4 मे
बल्लेबाज आउट होगा नम्बर 5 मे इकदशा में बल्लेबाज नाट
आउट है कारण गेंद लेग स्टप पर टप्पा खाकर आई है । टप्प के
निशान पर ध्यान दें।
इसके अलावा एल बी डब्ल्यू के समय से गौर तलव वात
गेंद को बाउड या उछाल आर गेंद को टन पर खास ध्यान ना
चाहिए। गेंद टप्पी खाकर या स्पिन होकर विकेट से ऊपर या
दिकेटा से परे नहीं जा रही थी।
(32) आमादृष्टिग व फोला- यानी क्षेत्र रक्षण में दबाव
डालना यदि बल्लेबाज किमी क्षेत्र रक्षक को कच लेन या गेंद
पकड़ने से रोके ता वह आबस्ट्रक्सन दी फील्ड के तहत आऊट
दिया जाएगा। यदि दुघटनावश क्षेत्र रस और बल्लेबाज
टकरा जाए तो इस नियम का लाग नहीं माना जाएगा।
बन्नवाज द्वारा किमी क्षेत्र रक्षक वो गाली दना,
दुय्यवहार करना भी आवरवस्सन द फील्ड में आता है उसे
आउट दिया जा सकता है।
रन आऊट
(33) रत लेते हुए यदि कोई बल्लेवान अपनी बीज तक ना
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पहुवा हो और विकेट पो द्वारा या गेंदबाज, पौन्दर द्वारा गदस विकेट गिराया जाय तो बल्लोज आउट होता है । यदि बल्लेबाजो ने एमरे को काम न किरा हो तो ऐसे में भी वही बन्लेबाज आउट माना जा जिसमे छोर का विकट गिरा हो। यदि बल्लेबाज शाट तो माना की ओर मार और रन ले भागे यदि गें- दिपी फोर को छुकर विराट मे नगेगी तो पहले रन आउट होगा। यदि सोत्री विना निगी के छुए लगेगी तो खिलाडी रन आउट नहीं होगा। (34) म्टप माउट- यदि बल्लेबाज शाट मारते समय कोज से बाहर निकल आए और विकेट कीपर गेंद विकेटा म मार दे तो वह खिलाडी स्टप आउट होगा। बल्लेबाज के पापिग पोज से बहर होने की स्थिति में किसी भी खिलाडी द्वारा बेस गिराने की अवस्था म बल्लेबाज स्टप आउट होगा। (35) टा माउz-इस नए नियम पे अनुमार यदि बल्लेबाज के आउट होने के दो मिनट तर यति मनेबाज विकेट पर नहीं आता है तो अम्पायर उम आने वाले बल्लेबाज को टाइम्ड आउट द सकता है । (36) वल्लमान मिफ पूरी तरह बडो का बल्ला ही इमाल परेगा। किसी धातु फाइबर का बना इस्तमाल नहीं होगा। आस्ट्रेलिया के डेनिस लिलि द्वारा एल्युमीनियम के बल्ले के प्रयोग के बाद यह नियम बनाया गया है । (37) बल्ले की अधिषतम लम्बाई 965 से मी तथा चाडाई 108 से भी होती है। (38) बल्लेबाज ने ऐलमेट मरवरा पर आपा ने माना जाएगा और उसे पड जान पर बल्लेबाज गाउट हागा । (२१) मच के अनिम नरण म एक पटे पूर्व 20 मडटरी आवर यानि मौत शिवाय नोवर जायेंगे। (40) पिच पर पहले दिन रोलर नही किया जा माना है। (41) स्वोर के विषय में अतिम निाम पम्पायर करेंग । (42) आनई0ट मे घमासान मारोई भीर मगरा। 31 A 32 (43) आफ साइड मे छह से ज्यादा खिलाडी नहीं खड हो सकते है। (44) 200 रन करने के वाद, दो दा पारी के मचा मे नई गेद ली जा सकता है । पर यह गेंदबाजी कर रही टीम की अपनी इच्छा पर है । उस पर कोई दवाव नही डाला जा सकता है। (45) गेंद खो जाने या गेंद का आकार बिगड जाने पर अम्पायर उतन ओवर खेली गई गेंद ही इस्तमाल करन की इजाजत देंगे। (46) फासो मान-पाच दिनो के मच मे यदि पहले बल्ले- बाजी करन वाली टीम दूसरी टीम से 200 रन स अधिक की वढन ले ले ता वह अपनी प्रतिद्वन्द्वी टीम को फोलोआन दे सकती है । यानी उक्त टीम को एक और पारी खेलनी होगी। 200 से ज्यादा रन बनाने वाली टीम यदि फालो आन नहीं दना चाहे तो कोई बात नहीं है । तीन दिवसीय भचो मे यह अवधि 150 रतो की है। दो दिन के मच मे यह अवधि 100 रनो की है। (47) पारी की घोषणा - कप्तान अपन विवेक से जब चाहे तब पारी घोपित कर सकता है। बस एक बार पारी घापित होने के बाद पापणा वापिस नहीं ले सकता है। एक दिवसाय यानी सीमित ओवरों के अन्तर्राष्टीय मचो के नियम- (1) कधे पर आती गद को वाइड गेंद माना जाएगा। जिसम गेंदवाज को एक अतिरिक्त गेंद और बल्लेबाज टीम को अरिरिक्त रन मिलेगा (2) लग जार आफ से जरा भी बाहर जाती गेंद को वाइड माना जाएगा। (3) हर टीम को सीमित समय म अपन निश्चित ओवर फेंका हागे । कम आवर फेंकन पर टीम को नकद जुर्माना अदा करना होगा। (4) परिस्थितियो के अनुसार निश्चित ओवरो की संख्या मेरमी की जा सकती है। यह निणय दानो अम्पायरा व प्तान की महमति से लिया जाएगा। (5) पल 15 ओवर म आफ साइड में सक्ति के अच छह खिलारी रग जा 15 आवर के बाद हटा दिए जायेंगे । 32 - बल्लेबाज के लिए कुछ हिवायत बल्नेवान को सबसे पहले गाड लेना पाहिए अचात अपने माला, स्पिति विकेटों के आगे ठीक रख, बड़े होने की हो सही स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। उसके बाद फील्ड में खड़े विरोधी टीम के क्षेत्र रक्षकों पर नजर मलनी चाहिए कि वे कहा-कहां खड़े हैं या उनका कैप्टन रहे किन- पॉइटो पर पड हाने की हिदायत दे रहा है। मानी फील्ड में क्षेत्र रक्षकों का पूरा खाका बल्लेबाज के दिमाग में रहना चाहिए । क्षेत्र रक्षण खा से यानी क्षेत्र रक्षकों को स्थिति से बल्लेबाज यह यासानी से बान सकता है कि किस प्रकार की गेंद पलने के लिए उसे पार हो जाना पाहिए। हर बल्लेवान को रन बनाने के लिए दौडते समय अपने साथी को उछलती मेंद को बले में बावरकर इस ग मे गए भी महत कर देना चाहिए ताकि वह भी तुरत ही नोट परे। कहना तान्पय यह है कि मफरताना रनो Tinार जगत के लिए ना मोर के बल्लेबाजा म आपती तालमेन होना शाहिए।
34 पीछेहिटकर उछलती गेंद को इस ढग से दबाए ताकि कंचन उछले बब हम फिर गाड लेने की स्थिति पर विचार करेंगे क्योकि ऊपर तो हमने बल्लेबाज की स्थिति और खेलने की आरम्भिक सतकता का केवल एक चित्र प्रस्तुत किया था। गाड लेने की दरअसल तीन प्रमुख स्थितियां हैं जिनके अनुसार बल्लेबाज अपनी व वल्ले की स्थिति निश्चित करते हैं। स्टम्पों के आगे बल्ला रखने की स्थिति बल्लेबाज के अपने पसदी के शॉटो के अनुसार होती है। पहले तरीके मे बल्ला मध्य वाले स्टम्प की सीध मे रखा जाता है, दूसरे तरीके मे बल्ले को लंग स्टम्प की सीध में रखा जाता है तथा तीसरे तरीके मे बल्ला मिडिल और लंग स्टम्प की सीध मे रखा जाता है। पार्ड-प्रबमापको उपर्युक्त तीनों गाड लेने की स्थितियो के लाभ- हानि से ममत करा दें। यदि बल्ला मध्य स्टम्प की सीध मे रखकर बैसा पाप हो सँग की ओर शॉट मारने में तो आसानी होगी पर साप ही एल. बी. डब्ल्यू (लंग बिफोर विकेट) होने का खतग हमेशा बना रहता है। यदि आप लंग स्टम्प की सीध मे बल्ला रखकर गा लेना गा तीन तरह से लिया जा सकता है ~~मिडिल स्टम्प की सीध में (सबसे पाए), मिडिल और ग स्टम्स के बीच में (बीच मे) तथा लंग-स्टम की सीध मे (सबसे दाए) 36 पाहते हैं सो एल० ० इम्ल्यू का खतरा हो जाता रहेगा पर बल ऑफ की बोर ही शाट भारत का पास मिल पायेगा, लग की ओर शॉट मारने में कठिनाई होगी। ऐसी स्थिति मे मिडिल और नेग स्टम्प की सोध से बल्ला रखकर घेलने मे सुविधा होती है । इस स्थिति में संप और ऑफ दोनों ओर काटमारन में वासानी होगी, साथ ही एस० श्री. उम्ल्यू मारा पाउट होने का खतरा भी कम हो जाता है । अत अधिक तर बल्लेबाज तीसरी स्थिति में ही गाड लेकर सलना पसद करते है । दिप--सही तकनीक से प्रभावकारी स्ट्रोक लगाने २ लिए बल्ले को सही ढग से पकडने का तरीका भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। बिले की पकड (प्रिप) ऐसी होनी चाहिए कि सभी तरह के शॉट खेलने में आसानी हो । बल्ले के हैंडिल को मध्य में इस प्रकार पकडना चाहिए कि दोनो हाथों को हथेलियो के किनारे एक दूसरे से सटे रहें । पाहत होनी वाहिए न कि बहुत कसो हुई। यदि पकड कसी हुई होगी तो चले को पुमान में दिक्कत आ सकती है। हैडिन को मति मध्य के दराय चौड़े के नजदीक से पकडा जाएगा तो ड्राइच शॉट लगाने में माठिनाई हो सकती है। यदि बहुत ज्यादा ऊपर पहा नो बल्ले से शॉट मारने में अधिक गति मगानी पडेगी और थकावट जदीया सकती है। अत हडिस को मध्य से पाने को गान डालें। कहने में दायें हाथ की हामी नीचे तथा पापै हाप की ऊपर होनी चाहिए । बाए हाय को पका मरत तमा दाए हाय की पफर अपशात कुछ दोसी होनी ।
7 चाहिए । बाए हाप की बधी मुट्ठी का भाग सामने की ओर अर्थात गेंदबाज की ओर होना चाहिए तथा दाए हाय की मुट्ठी का बगला माण पीछे स्टम्मों की ओर होना चाहिए । दूसरे शब्दों में बाए हाथ की हथेली का माग पीछे और दाए हाय को हप्ती का भाग आगे की ओर हो । बल्ले को ऐसी सुविधा से पकड़ें कि किसी प्रकार कठिनाई न हो। स्टांस-स्टास का अर्थ है बल्ले को स्टम्मो के बागे सही स्थिति में रखकर खड़े होने का ढग बल्ले को आसानी से किसी भी ओर फुर्ती से घुमाने के लिए सही ढंग से खड़ा होना भी बहुत आवश्यक है। बल्लेबाज को अपने दोनो पैरों को क्रीम के सामानान्तर रखना चाहिए और दोनों पैरों के मध्य की दूरी भी अधिक नही रखनी चाहिए । माराम गाड लेकर सही स्टांस में खड़े होने का ढग से खडे हो पाए उतना ही फासला कम-ज्यादा रखें। जितना सम्भव हो, सनकर खड़ा होना चाहिए। घुटनो को बहुत गोडा मोहकर खड़ा होना चाहिग । बाया कधा सामने वाले विकेट जहा से गेंदबाज गेंद फेंकता है, 38 उस दिशा में होना चाहिए । बल्ले पर हापों का बोझ नही डालना पाहिए। कुछ बल्लेबाज बाए कधे की दिशा मिड मॉन की तरफ रखकर भी धोते हैं । यह तो खरे होने का तरीका इलासिक है। सही माने में पड़े होने के यही तरीके हैं। पर यह जरूरी नहीं कि बिल्कुल इन्हीं ठगों को ज्यों-का-रयों अपनाया जाए। बाप अपनी सुविधा और शारीरिक स्थिति के अनुकूल सहमता से बड़े होने का अय तरीका भी यपना सकते है। परन्तु यदि सामने स्पिन गेंदबाम गालिंग कर रहा हो तो उपर्युक्त क्सासिकी दर से खड़े होने से ही लाम हो सकता है। बटिंग मे पद सचालन 39 बाए कधे को मिड मॉन की तरफ फरफे बडे तभी होना चाहिए पर सामने तेज गेंदबाज बॉलिंग कर रहा हो। परन्तु फिर भी हर मल्ले- गाज का परा होने का ग कुछ अपनी ही विशेषता लिए होता है। खडे होने के मामले में स्पष्ट तौर पर यही कहा जा सकता है नियम विकेट के सामने खड़े न हों ताकि एल० बी० डब्ल्यू होने का खतरा हो, बाकी थोडी बहुत स्पिति बदसकर सुविधानुसार किसी भी कोण में पाए (सामने परने वाले) कधे को रखें। किसी भी पद्धति से बल्लेबाज खडे होने का अभ्यास करें पर अपनी दोनों आंखों को गेंदबाज के हाथ मे से छूटती गेंद पर केन्द्रित रखना चाहिए। ताकि गेंद के फेंकने की स्टाइल और आती हुई गेंद की बदी दिशा का ज्ञान हो सके और गल्लेवाज उसके अनुसार शॉट मारने जा तुरन्त निणय ले सके । पहले से निणय लेना कि में अरकी गेंद को हुक करूगा या फला कट लगागा rयकर भूल होगी। क्योंकि मल्सेमायतो अपने आपको पहले से निणय किए शॉट को मारने के लिए वैयार कर लेगा और गेंद कही ऐसी फेंकी गई कि सोपे हुए शॉट की पोजीयन ही नहीं बनती तो ऐसे मे बल्लेबाज गडबहाकर या तो कैच दे बैठेगा या फिर अपने स्टम्प उखडवा लेगा। तो अब आपने गार्ड लेने, वल्ले को पकडने और स्टांस यानी स्टम्मों के पास खड़े होने की मुद्रा के बारे मे जान लिया। यब हम आपको सबसे पहले बल्ले से डिफेंस अर्थात् सुरक्षात्मक ढंग से खेलना ही बताएगे । एक सपल बल्लेबाज को सुरक्षात्मक ढग से खेलना ही बेहतर है । आक्रमण का रुख भी अवश्य अपनाना पाहिए पर तभी पब थाप अपने स्टम्मों की सुरक्षा करते हुए आक्रमणात्मक खेल का प्रदर्शन करें। अत याक्रमणात्मक ढग से खेलते हुए या अपनी सुरक्षा का पूरा पूरा ध्यान रखते हुए खेलें। स्ट्रोक्स-गेंद को रक्षात्मक ग से खेलने के दो तरीके हैं-एक धारवड डिफेंस स्ट्रोक और दूसरा बैकवड डिफेंस स्ट्रोक । फारवर निफेंस मे गेंद को आगे बढ़कर रक्षात्मक ढंग से खेला जाता है और बैकवर्ड डिफेंस में पोडा पीछे हटकर गेंद को खेला जाता है। स्ट्रोक का वर्ष है गेंद को धीरे से मारना या पपथपाना । आउट होने से बचने के लिए ही स्ट्रोक प्ल का सहारा लिया जाता है या ग से सैट होने तक स्ट्रोक पो लगाए जाते हैं।
40
फारवट डिफेंसिव स्ट्रोक
पारबई जित स्ट्रोक-इस सुरक्षामा स्ट्रोक को खेलो के लिए
माती हुई गेंद के टमा बने के स्थान तक आगे बढ़कर गेंद
फारवड अटरिंग स्ट्रोक 42 को वही रोक देता है, जिससे गेंद का क वहीं टूट जाता है। फारवा डिफेंस स्ट्रोक अधिकतर उस गुडलंग्य गेंद हर लगाया जाता है जो स्टम्प को सीध में आए। वैसे गुड लैंग्य गेंद की वह स्थिति होती है कि बल्लेबाज को यह निर्णय करना कठिन हो जाता है कि इस गंद को आगे बढकर खेला जाए या पीछे हटकर । क्योकि यह पता नहीं होता कि गेंद किस ओरक । फारवड डिफेंस स्ट्रोक खेलने के लिए बल्लेबाज को ध्याा रखना चाहिये कि जैसे ही गेंदबाज गेंद फेंकने के लिये तयार हो-तो उसके हाथ से गेंद छुटते ही बल्लेबाज का बल्ला बक लिफ्ट स्थिति में पहष जाए (बैंक लिफ्ट का अप है-जब बल्लेबाज गेंद पर प्रहार करने के लिए बल्ले को पीछे ले जाते हुए उठाता है और फिर नीचे से जाते हुए गेंद पर स्ट्रोक जमाता है तो बल्ले को पीछे ले जाते हुए उठाने की स्थिति को वैकलिपट कहत है) । गेंद टप्पा खाकर जैसे ही उछले बल्लेबाय को फुर्ती से अपना बाया पैर आगे बढाकर बल्ले को नीचे की ओर से आगे लाकर गेंद पर अडा देना चाहिए। इस समय बल्लेबाज के शरीर का भार अगले पैर पर ही हो। ऐसे में पिछला पैर पजे के बल होगा। ध्यान रखें कि पिछला पर क्रीज पर रहे। उससे आगे कभी न आए धरना स्टम्प आउट का खतरा हो सकता है। गेंद पर बल्ला अहाते समय बल्ले में हत्य का मुकाम आ ओर ज्यादा हो। ऐसी स्थिति मे छनती हुई गेंद नीचे दवेगी और पास खडे क्षेत्र रक्षों को कैच लेने का अधमर नहीं मिल पायेगा। फारवह डिप्स स्ट्रोक दरअसल बल्लेबाभी का बुनियादी स्ट्रोक है अत हर बालबाज को इस स्ट्रोक का अच्छी तरह अभ्यास करना चाहिए । अधिकतर बल्लेबाजी के स्ट्रोक्स इसी स्ट्रोक पर आधारित हैं। ध्यान जि पिच पर गेंद काफी स्पिन से रही हो तो बल्ले पर गेंद भान भी स्थिति म बल्ले को पोडा पोछेधोंप में और स्वम भी योग पीछे हो जाए। ऐसी स्थिति में गेंद बल्ले से टकराकर वहीं गिर पाती है। अब माइए वरदा हिफेंस स्ट्रोक के बारे में बताए । बारिस स्टोक--देकवह हिम स्ट्रोक वस गेंद पर सगाया
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वैरफ्ट डिफेंसिव स्टोर
भाता है जो गुडलम्प से पोहो-सी शॉट माती है । मह स्ट्रोक थोड़ा' पोछ
हटर लगाया जाता है। इस स्ट्रोक मे बल्लेबाज को गैर देखने का ज्यादा
44 \- बरफुट अटरिंग स्ट्रोक समय मिल जाता है और वह स्ट्रोक को अच्छी तरह लगाने का मौका 'पा लेता है । इसमे पौधे हटन हुए पिछला पर (साया) स्टम्प और क्रीन रेलगभग बीप मे आ जाता है। पोछे हटकर स्ट्रोक सते समय इस भात का ध्यान रखें किहो हिट विरेट की स्थिति न आ जाए (हिट का भय है-यदिपीछे हरते हुए बल्लेबाज स्टम्म गिर जाते हैं तो 45 वह हिट विवेट घोषित करते हुए बाउट मान लिया जाता है)। बैकवर्ड स्ट्रोक खेलने के लिए बल्लेबाज यदि पजो के स्ट्रोक लगाने का तरीका अपनायें तो वह सबसे अच्छा तरीका माना जाता है। इस प्रकार सर्वप्रथम इन्हीं दोनो बुनियादी स्ट्रोक्स में माहिर होने का अभ्यास करना चाहिए । इन स्ट्रोको को सीखने के बाद नम्बर आता है आक्रामक गॉटों का जो रन बनाने के लिए लगाए जाते हैं। तो अब वहीं शॉटो को सही ढंग से सगाने के तरीके आपको बतायेगे। ड्राइव शाट ड्राइव शॉट याक्रामक बल्लेबाज का प्रमुख शॉट कहा जाता है। हाइव का अर्थ है-आगे की ओर धकेलना । अर्थात् गेंद को आगे की ओर शॉट मारकर मलना । हाइव शॉट आगे बढकर तथा पोछ हटकर दोनों तरीको से खेला जाता है। ड्राइव शॉट मारने के चार तरीके है जिनम शॉट मारने का बुनियादी ढग तो सब म एक मा है पर शॉट किस और खला जाता है और उन्हे घेलने के nि किस प्रकार पर आगे पीछ बटार किस तरह बल्ला युमार शॉट मारा जाता है, इसमे भिनता है । ड्रारव शॉर के प्रकार ये हैं--(1) स्ट्रेट डाइम (2) आन दादव (3) ऑफ झादव तथा (4) कवर ड्राइव । ता आदए वारी वारी स इन शॉगे को मारन के तरको पर नजर डालें। इ7 सभी शॉटों म बलवाज गेंट को खुल हायों से शक्ति तगार प्रहार करता है ताकि गेंद बाउण्ड्री व अधिक स अधिक दूर पहुंचाकर ज्यादा रा ज्यादा रन लेने की कोशिश कर सके। अश्व शांटो को लत समय चल्नवाज का यह ध्यान रखना च हिए कि उस बाया क्धा सामने गेंदबाज को आर हाना चाहिए 1स स्थिति में सुर होने से वला गेंपर सही ढग स लगता है। यदि गें' बाज को ओर सोना करके शॉट लगाया जाएगा ता शॉट गलत ढग से समा स्ट्रेट साइव--स्ट्रेट नाइव ऐसी गैर पर मारा जात है जो मिग्लि स्टम्प की ओर आ रही हो और इतने पाम में बार पिच करती हो किवाया पर आगे बढाकर उसे असानी में सेला जा सके। के टप्पा तते हा उमे याला पर लाने की कोशिश में या पीच ले जाार फर्जी गगेर ए लाए और दाए ह प से पूरी सक्ति लगाकर गेंद का दबाज 46 बारापा मार दास मार 47 न्या सामने लगे स्टम्पो की ओर धकेल दें। हाफ वाली पर हिट करने का एक फायदा यह होता है कि गेंद लगभग जमीन से लगो हुई जाती है जिससे कैच आउट होने का खतरा नहीं होता। स्टदाइव आन ड्राइव शाट इस स्ट्रोक में बल्लेबाज की स्पिति ऐसी होनी चाहिए कि उसका बामांकधा आगे बढ़ बाए पर के घुटने की सीध मे हो। बल्ले को बाए चाजू के सहारे गेंद पर लाकर दाए बाजू की शक्ति लगाकर उसे सामने की ओर हिंट करें। स्ट्रेट हाइव शॉट में गेंद से लगने के बाद खाली बल्ला विकेट को सीध में हो जाना च हिए । स्ट्रेट ड्राइव शॉट मे बैंक लिपट ज्यादा रहता है। पॉफ डाइयगेंदबाज द्वारा फेंकी गई गेंद यदि सीधी पाकर पिच करती है तब तो स्ट्रेट ड्राइव शॉट का इस्तेमाल किया जाता है। और यदि गेंद ऑफ स्टम्म के बाहर पिच करती है तो उस पर ऑफ ड्राइव शाट का इस्तेमाल किया जाता है। ऑफ ड्राइव शॉट मारने के लिए भी वक दि ज्यादा 48 है । इसमे बल्लेबाज बल्ला बैंक लिपट करते हुए फाइन सेग की ओर उठाता है और आगे की ओर लाते समय उसे पोग ऑफ की ओर तिरछा कर लेता है। सिर और कधा ऑफ को ओर का होता है। इस प्रकार पीठ का भाग गेंदबाज की ओर हो जाता है। आप भी जव ऑफ ड्राइव शॉट का अभ्यास करें तो इन र स्मितियों को मद्दे नजर अवश्य रखें। ऑफ हाइव शॉट लगाते समय क्षेत्र रक्षको की स्थिति का ध्यान अवश्य रखें। रेवल ऑफ ड्राइव मारला सोखना ही पर्याप्त नहीं बल्कि क्षेत्र रक्षकों के बीच से गेंद निकालने की क्ला भी आना चाहिए। जहा गेंद निकलने की अधिक जगह हो उसी तरफ से गेंद निकालनी चाहिए तभी इस शॉट की उपयोगिता है। ऑफ की ओर लगने वाले सभी डाव शॉट राफी खूबसूरत लगते हैं। पर जरा सी चूक से आसान कैच भी दे जाते हैं। अत इस शॉट का अभ्यास करन के लिए आफ दिशा के सभी पाइटो पर फील्डरों को घडा कर बारी-बारी से इनक वीच से गेंद निकालने या अभ्यास करना चाहिए। आन ड्राइव-जा गेंद बीच क या लग स्टम्प को सोध में आकर टमा धाए जोर लग की ओर हो जा रही हो या जाने वाली हो तो ऐसी गेंर पर आन लाइव शॉट मारा जाता है । इस शाट के लिए आवर विच गेंद बहतर होती है परन्तु पैरो पर आती इस गेंद पर तीमी नजर रखन की आवश्यकता होती है। जरा सी चूक म ही यह गेंद खतरनाक साबित हो सकती है। इम शाट को लगत समय आपका वाया पर तथा शरीर का झुकाव (सिर कधा और कोहनी आvि) मिड विकेट तथा मिड ऑन की ओर हाना चाहिए। क्योकि गेंद का भी इसी दिशा म हिट करना होता है साकि गाट मारने म आसानी हो। यांन ड्राइव शोट में दाए हाप का सहारा ज्यादा लना पड़ता है क्योकि गेंद को लग साइड को ओर घुमाने कलि दल को दायें हाथ के सहारे ही ज्यादा शक्ति प्राप्त होती है। बाकी सभी स्थितिया आफ ५ के समान ही होती हैं केवन दिशा का पर डाव--जो गेंद ऑफ स्टम्प म परे या नमी सीध में टप्पा पारर याग्निा पायाए आती है तो एस म गेंद पर कवर ड्राइव शॉट बानमाना चाहिए। यह मर ऑफ डाव की तरह का ही शाट है पर माफ व नारी ननदीक होती है छत बल्लेबाज को अपना मिर नया का अधिकतर की ओर हा मुकाए रखना चाहिए ।
। रियदि वाफि शॉट भरपूर मारा जाए। इस शॉट में कमी-कमी मार्ट . समय बल्लेबाज का पिछला पैर घुटने के बल पर हिजबाला है। पर ड्राइव एक जोखिम भरा शॉट है। क्योंकि इससोटी खारिजरह है कि इससे शॉट की दिशा गेंद की दिशा में नहीं होती बाट मालेमें परा भी बल्ले का निशाना चूका कि कैच गया। इसमे बल्लेवान का वाया पर पब के बस रस होता है ताकिट शस्ति से लग सके। वह फुट हाइव-ड्राइप शॉट जिवनी ठरह पर बाबाकर मगाये जा सकते हैं, उतने ही पैर पीछे हटाकर भी सभर पाया । पैर पोछे हटाकर ड्राइव गोट तमी रोते जाते हैं पर यद वार से दूर टप्पा याए अर्यात गेंद 'शॉट ऑफ सैन्य हो। इस मास्टर बाहर की ओर पिच करती है। कभी-कभी द स्टस की सीमेंनी फेंकी जाती है। बैक फुट नाइव लमाना जोखिम भरावास यह शॉट अच्छी तरह सोय लिया जाए तो इसमें रन बनाने की की गुनाइरा होती है। बैक फुट से ऑन ड्राइव में दायें पैर को पोधे हारे हुए रचा वैच लिफ्ट करते समय बॉफ और मिरिन स्टम की बोर धूम पानावाहित ऐसे मे सल्ले पर गायें हाप से निमन्वय रखा पाता है। इनमें बैंक लिस्ट काफी ज्यादा रखी पाती है। जसे ही गेंद शॉट ऑफ बाए, पूर्वी से पहले यात्रा दायां पैर पीछे ले जाए । इस बीच गेंद पर नजर रखते हुए उसको बैंक से सम्मान का भी काफी मौका मिल जाता है। इस स्थिति में बारके सारे पर भार दाए पैर पर मा जाता है और बापारिरीर को टैकी सही स्थिति में सतुलन दनाये रखने में सहायता देता है। पए परमाया पाइट की मोर हो जाता है। बलेको बैंक विटकर समर पर बरला गेंद पर मारले के लिए नीचे की ओर जाते हैं दोराईकोहनी मुडीह स्थिति में होती है। दायी कोहनी गरीर से नकलीहई स्थिति में होनी चाहिए। ऐसे में जद वत्ता मोहिहकरने की स्थिति में आएगा तो दाए हाप और कट का स्ट्रोक मारने में मपुर मोल मिरेगा। इस तरह यह बैंक फुट स्टाइल में बॉकटाइबर कहलाया। बैंक फुट से ऑफ की बोर लगाए गए गोट का मुन्दर सरदे ।। साप ही रामी इनके द्वारा अच्चेसा बनार ब क हैं। बक फूट स्टाइल से पर इस लाने के हिरबाने तिरको 50 गेंद की दिशा में पीछे हटा में । इसमे तनिक भी देर न वर वरना कवर ड्राइव डॉट ठीक नहीं सग पाएगा। इस स्ट्रोक में सिर तपा पाए को का शुभाय ऑफ साइट पी आर रखना पाहिए। स्क्वायर ड्राइव कवर की तरह ही लगाया जाता है। इसमे फेवल गेंद कवर के बजाय पाइट की ओर जाती है। फुट स्टाइस में स्टेट ड्राइव शॉट स्टम्प की ओर आने वाली शाट पिच गेंद पर लगाया जाता है। इस प्रकार बैंक फुट स्टाइल मे सभी तरह हाइव शॉट लगाएका सकते है। परन्तु ये शॉरस फट फुट स्टाइल के हाइव शॉटस से थोडे कठिन होते हैं और इनमे एकाग्रता और सावधानी की अपेक्षाकृत अधिक मावश्यकता पड़ती है । अत' इनका अभ्यास बहुत ही लगन से करना पाहिए। अब आप क फुट स्टाइल में लगने वाले ड्राइव शॉटस के बारे में मच्छी तरह समझ गए होंगे। मन्ट फुट स्टाइल पाय बाग बढाकर ड्राइव शोटस लगाये जाते हैं। शेष तरीका समान ही है। कट शाट्स बल्मेवानी में 'कट शॉट्स' का अपना ही महत्व है। हा गॉटो में बड़ो पूबसूरती है। कट के लिए जो गेंद ऑफ स्टम्प से परे आती है, उसे बल्लेबाज बाहे बल्ले से हल्का सा छुआ भर देता है कि गेंद दिशा बदमकर तेजी से एक ओर निकल जाती है। 'कट' करने का अर्थ है तराशना। अर्थात् इसमे गेंद की गति को रोककर विपरीत दिशा में नहीं पहचाया जाता बल्कि तेजी से आती हुई गद के किनारे बल्लेरा किनारा धुआ देने से वह अपनी गति से जाती हुई पोठी दिशा बदलकर निकल जाती है। बट माँट मारना कोई बापान काम नहीं है । जरा सी चूक से सीधा आउट कैप ही बनता है। बत क्ट शॉट उहीं गेंदों पर लगाया जाना चाहिए वो पिच बरन केवार तंजी से पाएं । तेज गेंद पर ही कट सगा पाहिए धीमी गें: पर नहीं । धीमी गेंद पर बट लगाने के लिए आपको वल्ला तेज पडेगा और बल्ले से घूमने से रट शॉट , हवी है।
51 पटिंग की एक यानगी तेज विकिटों पर कट शॉट्स (स्मदेअर कट तपा लेट कट) बहुत अच्छी तरह खेले जाते हैं। इसमे बल्ले को मलाई का मटका देकर गद पर आर छमापा जाता है । परासी ताकत लगाने से रगॉट बिगड जाता है। सवेयर फट-स्वेअर कट शोट साधारणतया बैंक फुट पर ऐला पाता है । यह शोट उस समय सगापा माता है घर में शोक सम्म से परे आ रहो हो । इसमें एक मात ध्यान देने की यह है कि सरपट
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हॉट सभी समापा जाए जब ठप्पा पो के पाद गेंद को उठान बल्लेगा।
परी तरह देख पा रहा हो । पय गेंद यस्लेवाण के काफी निकट वा
पाए भी स्मवेयर पट का इस्तेमाल करें। कुछ माहिर बल्लेवाय गेंद के
से ही मागे वर कवर पाइट के पीछे की गेंद को धूबसूरती
पर है । इसमे पल्ले को बार में किनारे पर कट
से है। यदि इसमें परा भी घूहुई और अल्ला परी किनारे से
पचाप बरा भी इधर-उधर मा कि सीधा नच उचलेगा। बस इस
शानिए गैप को यच्छी तरह समझना अति यावश्यक है।
सबर कट
। सरी दिनारे पर मर गाने के लिए पते पोका
पास सिधा उठाकर शॉट ला पाहिर जाने
उसी पिया की ओर थाप पिजमा पर यहां रखें।
पर सादर अवश्य हो कि रपे पो घुमने में तो अपरिक्षा
गही। माया पायां पैर गली या कया की दिसारित और
भरका जन पी पर पर रहना
गदै ओर र गो
पर पाने यारपाको","
पर
Prem सेट पर रोम: ही PATRIT
-टे अवती'
P
53 विश्वनाथ बर्ग यूपसूरती से लगाते हैं । इस शॉट का प्रयोग बहुत धरपर बल्लेबाज ही करते है। यह शॉट भी गंद की गति पर निर्भर होता है। तेज गेंद मा मध्यम तेज गेंदों पर भी लगाया जाता है। इसे बैकफुट पर खेलते हैं। धीमी गेंदों पर भी यह लगाया जा सकता है पर इसमे काफी सावधानी बरतनी परती है। भेट रूट का अप है-देर से लगाया गया कट । अर्थात इस घोट को कब लगाया जाता है पर गेंद बल्मेवार के पास से गुजर पाए । शॉट मगाने के लिए पिठला पैरॉफ स्टम्प की और रखा जाता है। इसमे बल्ले को केवल कसाई के झटके से घुमाया जाता है। लेट कट शॉट उस गेंद पर बेहतरीन लगता है जो गुटोग्य से पौधे टप्पा बाठी हुई आती है और बॉक स्टम्प से बहुत दूर हो तथा बिकेटों को लगभग पार करने की स्थिति में या बाए । खेट कट गाँट मारने के लिए भी काफी अभ्यास बोर अनुभव की जरूरत है। स्पोप शाट-स्वीप का वर्ष है 'गार सगाना' । मह शॉट कुछ इसी अन्दाज से लगाया जाता है जैसे हार लगाते हैं तभी इसका नाम 'स्वीप शॉट पडा। स्वीपर की वाजगा 54 स्वीप तोट उस गेंद पर सपाया जाता है जो कुछ मोर पिप हो प्पा पंग स्टम्प से बाहर टप्पा वाये। इस शोट के लिए गेंद हाफ पाली होठो कॉस करते हुए भी पॉट मगाया जाता है। इस गॉट में पैसे ही मल्मा गेंद परमाए, उसे कमाई के सहयोग से । पुमा दिया जाना चाहिए । आपका दायो पुटमा जमीन पर टिक पाता हेचौर कसाई भरपूर पूमती है, मत गरीर का सन्तुलन बनाये रखना पड़ता है। मागे वाले पैर को गेंद की टप्पे वासी दिशा की ओरमाकर मॉट मारना चाहिए। ऐसा करने से एलपी ग्ल्यू को बामा कम रहती है गयोंकि पैर काफी बागे बढ़ाने से यदि गेंद बल्ले पर न माई तो पर पर या जाती है। इस शोट को मारते समय एक बात ध्यान में रखें कि गेंद को फाइन मैग की ओर न मारकर स्ववेअर संग की बोरमारें ताकि सुरक्षित सग सके । ज्यों ही गेंद टप्पा पाकर उछते, मारे बल्ले से भरपूर शॉट मार -इस प्रकार कि गेंद बल्ले से लग कर कारन उठेवरला रवाने की बाराका रहती है। गेंद पर ऐसी स्थिति में हो जिसे पाप फुम टॉस या हाफ वासी बना सकते हों, तभी स्वीप शोट का इस्तेमाल करें। संगक तपा 'बाउट स्मिग' गेंदो पर स्वीप शॉटन लगाए को ही अच्छा है। एक शॉट---यह गोट उन्हीं गेंदों पर सगाया जाता है जो लगभग सिर की ऊंचाई सम आती है। यह शॉट जितना रोमांच पैदा करता है उतना ही खतरनाक भी होता है । यह भी रोष माती हुई गेंदो पर भली प्रकार से लगाया जा सकता है। हुक गट सराव संम्प की तपा पिछेट की सीध में ची पाती गेंदो पर पिशेयतया लगाया जाता है। हम शॉट के लिए अपना पिछला पर बॉफ स्टम्प की तरफ से जाए तपा शरीर को उसी ओर का भी दें। ऐसा करने से यदि गेंद आप पल्ले पर न था पाए तो भी आप पोट लगने के खतरे से बच सके। गेंद पर बोट मारने के लिए बंद लिफ्ट अधिक रखना चाहिए । नोर पलो का धुमाय हॉरिजटल क्रॉस रड्या है।बोफ स्टम्प के बाहर पिच करने वाली सपा सिर से बहुत कधी गेंदों पर हुक शॉट नहीं लगाना पाहिए क्योंकि ऐसी गेंद बल्ले पर पूरी तरह नहीं माने पाती और पिकेटकीपर कोच मिल पाता है।
हुक करना पुल शॉट-हुक शॉट की तरह ही लगाया जाता है । अन्तर केवम इतना है कि हुक शॉट के लिए गेंद सिर और कधों को ऊपाई तक थाती है और पुल शॉट के लिए गेंद कमर तक की ऊचाई तक आती है। पुल शॉट शॉट पित्त पालो गेंदों पर बखूबी लगाया जाता है। इसमें गेंद ऑफ स्टम्म से थोडी बाहर तथा लेग साइड तक के बीच पिप करती है । इस शॉट के लिए पिछलावर ऑफ स्टम्प की मोर ले पाएं। को गली की ओर उठाए और आगे पर गेंद की दिशा मे सदाकर रखें। बल्से को गेंद पर लाते समय दोनों वाहें तकरीबन सीधी हो पाती है। इसमें जैसे ही शॉट मारने के लिए पल्ला गेंद पर माते हैं और शॉट
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हुकाट डी फिनिशिंग
पुराहो पाया हैटो शरीरका भार दायें पर से हटकर बाए पर पर या
पाटा है।
रहो हो बाप पुल गोट का अभ्यास करें याद में ही शॉट
मामाको दवे बाको हुक घाट लगाने और समझने में ज्यादा
रजिसनहीं होती।
पदार-सर म्यास शॉट बहुत ही दम बल्लेबाज लगाते हैं।
शपदा है किसछोटकी घोड रणवी ने की पी और वह बसे
खासखोटोसमाये।
पर स्टार होटदेव पिच पर पाय गेंदों पर भली मांति लगाया
बाला दोरले प्रहार से मंगको योर मारा जाता है।
57 पुल शाट लंग ग्लास यह एक प्रकार से डिफेंस स्ट्रोक की तरह का ही शॉट है पर जसे ही गेंद पास आती है, बल्ले को टेढ़ा कर उसे लग की ओर घुमा देते हैं तो यह लग ग्लास शॉट बन जाता है । जय गेंद लेग स्टम्प से बाहर पिच करती है या स्टम्पो की सीध मे पिच करती है और गेंद के होफर लग की तरफ मुडतो है, तब लंग ग्लास शॉट लगाया जाता है। लैग ग्लास शॉट बफ फुट और फट फुट दोनो स्टाइल मे लगाया पाता है। फट फुट स्टाइस मे ग्लांस के लिए आगे वाले पैर को गेंद की दिशा को सीध मे ही बढ़ाए और बल्ले को गेंद पर लगाते ही उसका मुह स्वेभर संग और विकेटकीपर के स्थान के बीच की दिशा में घुमा है। इस तरह बल्ला लगाने से गेंद बना पाहिए, उछलना नहीं चाहिए ।
58 शॉट पिच गेंद पर पिछला पर ऑफ स्टम्प की ओर ले जाना चाहिए । और घूमते हुए बल्ले को गेंद के पास लाकर बल्ला समर लगी बोर धुमा देना चाहिए। वैर फुट ग्लास लगाने के लिए अगला पैर संग स्टम से योग आहर रखते हैं और बल्ले को आगे बढ़े परको पिडली के पीछे रखते हैं धौर गेंद के नजदीक आते ही पिछले पजे पर घूमते हुए बल्ले का मह गेंद पर लाते ही उसे संग को और धुमा देते हैं। सोट के लिए बडे अभ्यास की जरूरत होती है। फुल टॉस-उस गेंद पर गाया जाता है जो सँग साइड की ओर घुटनो से लेकर कमर तक की सचाई पर आती है। इसे क्रॉस बट स्टा- इल से खेला जाता है। शाट लगाने के लिए बाए पर को भागे बढ़ाए और शरीर का वजन उस पर डाल दें, पिछले पैर से संतुलन बनाए रखें । बल्ले को जमीन के हॉरिजटल « । गेंद पर शॉट लगाते समय दायी कलाई को घुमाते हुए इस तरह बल्ले को गेंद पर लाए कि कैप न उछलने पाए। नोची माती गेंद को फुल टॉस करने के लिए ऑन ड्राइव की तरह सीधे बल्ले से ही खेलना चाहिए। इस प्रकार ये बल्लेबाजी के कुछ प्रमुख शॉटस, कट्स आदि हैं जिनका नियमित अभ्यास करना चाहिए । सभी शॉट्स खेलने के लिए चुस्ती फुतों से काम लें तमा दृष्टि को गेंद पर, सास तौर से तेज आती गेंदों पर जमाने का अच्छा तर अभ्यास करें। क्योकि गेंद पर पद तक आप दृष्टि नहीं जमा पाएगे, पाप किसी भी शॉट को विश्वासपूर्वक खेलने में असमर्थ रहेंगे। रन लेना-प्रत्येक शॉट को मारने के बाद विकेटों के बीच रन लेने का अभ्यास कीजिए तभी शॉट सगाने का पूरा लाभ आपको मिल पाएगा। शॉट की समाप्ति पर शरीर ढीला छोडना उचित नहीं। शॉट मारते हो गेंद को अच्छी तरह देखकर कि वह कितनी दूर गई फुती म रन लेने के लिए दौड बाए। इससे शॉट सीखने के साथ-साप न लेन के लिए दोडने का अभ्यास भी साप साप होता रहेगा। रस लेने में एक बात का विशेष ध्यान रखें ताकि रन आउट होने की नौबत न आने पाए । वह यह कि यदि आपने शोट अपने सामने विटों की और जहाँ गेंदबाज होता है, मारा है तब तो रन लेने 59 SP माउट बल्ला कीज पर तो है, पर टिका हुआ नहीं है । निणय करके आपको दौड जाना चाहिए, आपके सक्त पर ही आपका दूसरा सापो भी भापको बाह लेने दौड पडेगा क्योकि वह समझ जाएगा कि गेद की दूरी के मुताबिक ही सोच समझ कर आपने दौड लगाई है। इसी प्रकार यदि मापने कोई शॉट ऐसा मारा है कि गेंद विकेटकीपर के पीछे की ओर गई है तो गेंदबाज की ओर बडा आपका बल्लेबाज साथी गेंद की दूरी के मुतायिक निर्णय लेकर दौडना शुरू कर देगा । उसे देखकर आप भी उसका स्पान लेने दौड जाएगे। इसी प्रकार यदि गेंद दायें-बा बोर जाती है दोना बल्लवाजों को एक दूसरे के सरता के मुताबिक रन लेने के लिए आपस में तालमेल इसी तालमेल के लिए जरूरी है कि बल्लेबाजी के गॉटस कटस आदि का अभ्यास करते करते रस लेने का भी उसी तेजी फुर्ती से अभ्यास करे ताकि माप अधिक से अधिक स्टेमिना बना सके और पकावट मापके पास फटकने भी न पाए। बंडाना पड़ेगा।
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गवानों के लिए कुछ ध्यायाम
हापो को गोल गोल घुमाना
कमर से पीछे की ओर झुकना
REAry
EPTAN
,
62 हापो के व्यायाम के लिए पी० टी० करना सबसे अच्छा व्यायाम है। हाथों को बारी-बारी से गोल-गोल घुमाना चाहिए । पहले हाय सामने फला ले फिर नीचे लाते हुए पीछे की ओर ले जाते हुए कपर लाए और कंधे से घुमात हुए सिर की मचाई तक लाते हुए फिर सामने को और ले आए। फिर यही व्यायाम दूसरे हाप से करें। गेंदबाजी में भी गेंद वाले हाप को सामने से नीषे पोर पीछे ले जाते हए पर लाकर फिर सामने लाते हुए गेंद को फेंका जाता है । अत हाप धुमान वाला व्यायाम बहुत ही माभदायक सिव होगा। इसी प्रकार हापों को पीछे ले जाकर (हिप के पास) दोनों हाथो को एक दूसरे से पका लें। फिर बघे हुए हाथों को पीठ की ओर मात इए घों तक लाने की कोशिश करें। इस व्यायाम से कधे पुष्ट होते हैं। इसी प्रकार की तेज गति को कोई भी एक्सरमाइश करते रहें तो क्रिकेट में गेंदबाजी के लिए भार हमेशा तत्पर बने रहेंगे । चाहे लगातार बॉसिंग करने का अवसर मिले, आप पकावट महसूस नहीं करेंगे । गेंद पाजी की प्रैक्टिस शुरू करने से पहले हायरों की मासपेगियों को पर- माने मोर लोच लाने के लिए पोडा मायाम (म्पिग, साइकलिय प्रैक्टिस, पी०टी० आदि) यवश्य कर लेना चाहिए। इससे हाप पर पुल जाते हैं और हायो को भूव करी में कोई दिक्कत नही माती। मध्याज के लिए आवश्यक निरंश-एक सफल गेंदबाज बनने के लिए आपमे कुछ खूबिया अवश्य होनी चाहिए या फिर उन धियों के मुताबिक अपने आप को ढाल लेना चाहिए । तभी माप गेंदबाजी के क्षेत्र में सफल हो पाएगे। गेंदबाज के पास सबसे बड़ी बबी यह होनी चाहिए कि वह कभी भी हिम्मत न हारे । क्योकि गेंदबाजी को कई बार असफलता का मुह दखना पड़ता है। सबसे ज्यादा आपात वाली बात होती है जब कोई गेंदबाज सही दिशा मे, सही स्थापर गेंद को पिच कराता है और फिर भी बल्लेबाज उस गेंद पर बोला या छक्का मार देता है । यहा गेंदबाज के हतोत्साह होने का मप रहता है यह सोचता है कि ठीक गेंद फैरने पर भी यह कैसे हो गया । परन्तु यह भी सही है कि यदि कोई गेंदबाज सही ढग से गेंद फेंक रहा है तो सामने वाला बल्लेबाज भी तो माहिर को सही उग से उस गेंद को फेद रहा हो। तो ऐसे
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एप सामने से यानिग एकरान 65 M आर सकेत काम करता है। गेंद को पकड ऐसी होनी चाहिए कि गेंद को घुमाव देने मे उ गलियों की हरपत में किसी प्रकार की बाधा ने पड़े। अत गद पर उगलियों की पकड पर पूरा-पूरा ध्यान देना पाहिए। आरम्भ में दौडो की एक जैसी लम्बाई र धौर मास करें। दौडने को लम्बाई फम ज्यादा करने से बारम्भ में नुकसान होता है जब अच्छा खासा अभ्यास एक ही सम्बाई से दौडकर गेंद फेंकने का हो जाए तब आवश्यकतानुसार गेंद में तेषी कम ज्यादा कर अभ्यास करें। गेद का टप्पा खिलाने का एक स्पा निमत कर उस पर फाफी समय तक अभ्यास करते रहना चाहिए तब तक जब तक गेंद सही फैकी न जान लगे । उसके वा टप्पा खिलाने का दूसरा स्पान पुनिए । इसी गेंद को उगलिया द्वारा घुमाव देने कमलग-अलग ढगो को भी बारी-बारी से धाजमाए। यदि गेंदवाज पॉगि क्रीज पर अपनी इच्छानुसार उसे डायरेक्शा देने म निपुण हो जाए तो समझ लीजिए आधी सफलता हाप लग गई। गैदबाजी के ये दोनो ही महत्वपूर्ण हिस्से हैं जिन पर अधिकार करना बहुत यावश्यक है। गेंदबाजी की कुछ युनियावी मारी~गेंदबाजी सीखने पाने बिलाडी को । शुरू-शुरू में केवल सीधो गेंदें फेंकने का अभ्यास करना चाहिए। यदि यह भारम्भ मे ही गेंद को स्पिन कराने की कोशिश मे टेडी-मेढ़ी गेंदें फैकने का अभ्य स करेगा तो दोनो ही भोर से उसे निराशा ही हाप लगेगी। आरम्भ मे उसे गेंद को तीन स्टम्पो में से किसी एक को निशाना मनावर फेकने की कोशिश करनी चाहिए । इस तरह गेंद फेंकने से जय यह पाहे उसी योर के स्टम्प को गेंद फेंककर गिरा दे तो समन भीजिए उसका सीधी गेंद माने का अभ्यास अच्छा खासा हो गया। यह नहीं होना पाहिए कि वह गेंद पाए स्टम्म को लक्ष्य पर फेके और वह लगे दाए बाले स्टम्म पर। ऐसे में उसे सताप नही कर सेना पाहिए कोई स्टम्म तो गिरा। निशाना खाली तो नहीं गया। मह सोचने वाला पिलासी भपकर भूल परेगा। उसे ऐसे में यही सोपना पाहिए कि उसका निशाना गलत सगा पयों कि वह इति स्थान पर नहीं मगा। सभी दिनाबी म धारमविश्वास जागेगा और मोक्त भी कया होगा। मदिपिताही एक ही सैम्य और एक ही आपरेशन से गेंद पर ही 66 स्थान पर टप्पा पिलाता जाए तो यह गुरु संन्य गेंद फेंको की निपुणता ही जाएगी पीर ऐसी बॉल को 'गुह लग्प पॉल' पहेंगे। गुड लय गेंद की परिभाषा पो इस तरह व्यपत किया जा सकता है। पय फैफी हुई गेंद बल्लेबाज को इस परमानी मे डाल दे कि वह द फॉरवर्ड स्ट्रोक (मागे यडकर राना) से सेले या या स्ट्रोक (पीछे हटकर पेलना) से तो ऐसी गेंद गुह लैम्प कहलाएगी। अधिकतर गेंदबाज बल्लेबाज को परेशान करने के लिए गुड लैंग्य गेंद फेंकने की कोशिश करता है। लेकिन वीप-चीच गे और ढग की गेंदें फेंफफर भी वह बल्लेबाज को भ्रमित करने की कोतिश करता है । गुह सैंप गेंद स्लो बॉलर अलग ढग से फेंकेगा तो फास्ट बॉनर अलग ढग से । अर्थात् फास्ट बॉलर की फेंकी गई गेंद फा टप्पा स्लो बॉलर की गेंद के टप्पे से कम दूरी पर पड़ेगा। इसी तरह अय प्रकार की गेंदबाजी में भी गेंद के टप्पे का स्थान बदल सकता है। फिर चतुर गेंदवान तो पल्लेबाज की ऊचाई को मद्दे नजर रखकर भी गुड लैम्प गेंद में टप्पे का अलग स्थान बनाते हैं। स्पिा बॉलर बनने के लिए भी पहले सीधी गेंद फेंने पायभ्यास जरूरी है । सीधी गेंद फेंकने के मम्यास के बाद ही स्पिन गेंद माने का अम्पास करना चाहिए। गेंद को स्पिन इराना कोई मामूली यात नहीं है। विवेट की बॉल भारी होती है और फिर मेवल स्पिन कराने से ही तो काम नहीं बनता। स्पिन कराते हुए गेंद इति स्टम्प पर भी तो लगनी चाहिए । मत स्पिन कराते हुए निशाना बैठाना फोई हसी खेल नहीं है । इसके लिए पूरी मेहनत, लगन, एकाग्रता और तपस्या की जरूरत होती है । सोधी गेंद और स्पिन गेंद मे बहुत अन्तर है । सीधी गेंद तो सीधी ही आती है स्टम्पो की ओर, पर स्मिन लेनी हुई मातुम तो ऐसी पड़ती है जसे यॉफ स्टम्प की ओर आ रही है पर वह अचानक टन लेकर लग स्टम्प पो गिरा देती है। इसी प्रकार लेग स्टम्प पी और दिपाई देती है, पर अघाना ऑफ स्टम्प की ओर मुडकर उसे गिरा देती है । या फिर घूमती हुई गेंद पर जरा भी बल्ला गलत लग गया शिकच बना । अत स्पिन गेंद जिस सरह एर बल्लेबाज को चार में टालती है उसके पौधे उस गेंदबाज की महनत और लगन पाही समाल है । गेंज वी तेजी मे परिदता लापर भी बल्लेवान २ लिए मुशिल 67 गेंद फेरने की एक वानगी 68 पैदा की जा सकती है । पहले कई तेज गेंद मरने के बाद यदि बीच में एमाध धीमी रफ्तार वाली गेंद फेंकने से बल्लेवाम गठवहाकर पल्ला सही कग से गेंद पर न लागर कैप दे सकता है। गेंदवाज पी एक खूबी यह भी होनी पाहिए कि दो पार गेंद फेंककर यह बल्लेबाज की कमजोरियो को भाप ले और फिर उही कमजोरियों को दृष्टिगत रखते हुए गेंदबाजी करे । इस प्रकार बल्लेबाज गेंदबाज पर हावी नहीं हो पाता। गेंदबाज के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उसमे यात्मविश्वास होना चाहिए । जरा-सी असफलता मिलो पर लगातार से यदि कोई उसकी गेंद पर छाया या पोका मार ले। या फिर उसकी गेंदा पर बहुत ज्यादा रन बना ले-तो ऐसे मे पवराना या हतोत्साह नहीं होना पाहिए। वरना आप अपना सेल ही भूल जाएगे। या फिर भी नहीं समझना चाहिए कि आपके सामने बहुत प्रसिद्ध बल्लेबाज हैं जिसे आप मास्ट नहीं कर पायेंगे। हमेशा यही भाव रखें कि-अमुक बल्लेबाज को तो आप अभी आकर कर देंगे। जब भी वह आपको गेंदो पर रन बनाए, आपका निश्चय और भी दृढ होता जाना चाहिए कि आप इसे आमट करके ही रहेंगे। तभी आप एक सफलतम् गेंदबाज बन सकेंगे। गेंदबाजी सीखने के लिए आपको अपने कद-काठी पर विशेष ध्यान देना चाहिए। तेज गेंदबाज बनने के लिए शरीर की लम्बाई अच्छी पासी होनी चाहिए । साढ़े पांच फुट से कम नहीं होनी चाहिए । जितनी ज्यादा लम्बाई होगी तेज गेंदबाज बनने के लिए उतना ही अच्छा होगा। मयोंकि सम्बाई इसमें काफी हद तक सहायक होती है। इसका अप यह नहीं कि कम लम्बाई तेज गेंदबाजी में बाधक होती है। पर यह निश्चित है कि यह सहायक अवश्य होती है । पत अच्छा यही है कि आप अपने शरीर की काठी के अनुरूप वह गेंदबाजी चुनें जिसमे प्राकृतिक रूप से आपका शरीर भी सहायक हो। जैसे बास्केट बाल और बॉलीबॉल ऐसे वेस हैं जिसमें शरीर की लम्बाई जितनी ज्यादा हो उतना ही अच्छा है। ठिगने कद का खिलाडो ये खेल तो खेल सकता है पर कई बातो में जहाँ लम्बाई सहायक होती है, उसका लाभ नहीं उठा पाता। । प्रिप और रन थप का महत्व गेंदबाज के लिए प्रिर अर्यात-गद की पकड और रन अप यानी एक निश्चित दूरी से विकेट तक दौडकर नाना-इन दोनों मूल बातो 69 का बड़ा महत्व है। गेंद को उगलियों द्वारा विभिन्न ढग से पकडकर फंकने से ही मेंद को सिन, फट या स्विग कराया जाया है । अन इसमे प्रिंप का बड़ा महत्व है, सबसे पहले गेंद को विभिन्न ढग से पकड़ने के तरीकों बोर केने को स्टाइल पर ध्यान देना चाहिए। इसमे किस ढग से गेंद को पकहर किस तरीके से हाय को घुमाकर गेंद को फेंकना चाहिए, इस पर विशेष ध्यान दें। याद रखें कि गेंद को सही दिशा, गति और सतुलन रन अप से ही मिलता है । अत विभिन्न प्रकार की गेंदो को फेंकने के लिए विभिन्न "दूरी के रन अप की आवश्यकता पड़ती है। यह एक गणित की तरह का प्रामाणिक फार्मूला है जिसे जब आप अपनाएगे तो पाएगे कि गेंदों को इच्छित स्थान पर पिच कराने, स्विग कराने और स्पिन कराने में रन अप की कम ज्यादा दूरी का कितना महत्व है। गेंदबाज को धीरे-धीरे दौडते हुए तेजी लानी चाहिए और उस स्थान पर बराबर नजर रखनी पाहिए जहा वह गेंद को पिच कराना चाहता है। तेज गेंदबाजो-आधुनिक क्रिकेट मे तेज गेंदबाजी महत्वपूर्ण हिस्सा है। किसी किकेट टीम में स्पिन गेंदबाज के साथ एक-दो तेज या मध्यम तेज गेंदबाज होने अति आवश्यक है। खास तौर से आरम्भ के ओपनर बल्लेबाजा को जोडी को तहस नहस करने के लिए भारम्भ मे ही तेज गेंदबाज का इसेमाल ज्यादा लाभदायक रहता है। क्योकि स्लो बॉलर भारम्भिक बल्लेबाजो को जमने का मका दन में सहायक हो सकते ऊपर बताया जा चुका है कि तेज गेंदबाजी के लिए शरीर को लम्बाई जितनी अधिक हो तेज गेंदबाजी उतनी अच्छी की जा सकती है। तेज गेंदबाजी के लिए सही रन अप तया और एक्शन की आवश्यकता होती है । ताकि गेंद सही दिशा मे जाकर सही स्थान पर पिच कराई जा गेंद को शक्ति और तेज गति प्रदान करने के लिए तज गेंद- चाजी मे लम्बे रन अप यानी लम्बी दूरी (प्रयक खिलाडी को अपनी निश्चित लम्बाई की दूरी) से गेंद फेंकना आवश्यक है। प्रारम्भ मे दौड धीरे धीरे शुरू कर जैसे क्रीज लाइन पास जाती जाए रफ्तार में तेजी 72 आउट स्विगर गेंद की परड हा स्विगर गेंद की पाड छाती मल्लेयाम की ओर रहती है जरि बाउट स्विगर गेंद मे गेंदबार का कंधा बल्लेबाज की ओर रहता है । कलाई को हल्का सा पिर को दिशा में सघकाफर बाजू पुमाता हुमा शरीर के उसी ओर आता है जयति पाउट स्विगर गेंद में गेंदबाज का बाजू घूमता हुआ शरीर क दूसरी मोर जाता है। इन स्विगर गेंद के लिए फोलारों को लग को और खड़ा किया पाता है। तीन पोलार शॉट लेग के पास, एक मिड विकेट तपा एक मिर पॉफ के पास रखते हैं। इन स्गिर में जब गेंद माफ स्टम्म से परे पिप राना हो तो ऑफ स्टम्प पर निशाना लेना होता है। इसी तरह संग स्टम्म की सीध में पिच कराना हो तो गेंद को ऑफ स्टम्प से परे ज निशाना लार फेंकना होगा। अब तो आप इन स्विगर गेंद के बारे में जान गये होगे । वित्र म गेंद की मिप को बच्छी तरह देख समाह लीजिए। कटर कटर स्टाल में जब गेंद को फेंका जाता है तो वह टप्पा खाने के 73 निपिगर दोनेाग
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75 बाद अपनी दिशा अचानक बदल देती है। इसमे गेंद को विशेष डग से पकहा जाता है। कटर मुख्य रूप से दो प्रकार से फेंकी जाती है-(1) आफ कटर तथा (2) लग कटर। ऑफ फटर-ऑफ बटर स्टाइल से गेंद फेंकने के लिए गेंद आफ साइड से अ दर की ओर आती है। ऑफ पटर गेंद साधारण मोडियम पेस पर फकी जाती है । यह एक प्रकार तेज आफ ऐक गेंद होती है । गेंद को कलाई के झटके के सहारे या लचकाकर कट कराया जाता है । ऑफ कटर मे गेंद को तेजी से फेंका जाता है। लंग कटर गेंद की पकड ऑफ कटर गेंद की पकड ऑफ कटर के लिए गेंद इस तरह पकडते हैं कि गेंद को सीवन फाईन लग की ओर है। प्रथम दोनो अगुलिया लगभग अपस में जुड़ी होती हैं । ये सीवन पर लम्बप में रखी जाती हैं। जब गेंद को तेजी से फेंका जाता है तो अगुलियो को घडी के काटे घूमो की दिशा मे घुमा 76 दिया जाता है ताकि गेंद पिच करके कट होती है। ऑफ कटर में गेंद वाज की हपेली ऑफ साइड की ओर रहनी चाहिए। ऑफ कटर गेंद ऐसे बल्लेबाज को फेंकनी चाहिए जा आफ साइड मे अदर आने वाली गेदों को खेलने में सक्षम न हो। बल्लेबाज की कमजोरिया समझकर उसी स्टाइल की गेंदें फेंकनी चाहिए । लंग कटर-लंग कटर गेंद फेंकने के लिए गें- की सीवन स्लिप दिशा की ओर रहनी चाहिए। और हथेली लैंग साइड की ओर रहनी चाहिए। लग कटर गेंद पिच होने पर लग साइड से आफ की ओर कट करती हुई जाती है । इसमे गॅदव ज को बाजू विरुद्ध दिशा मे माडकर गद को फेंकना होता है जो एक नठिन काय है। इसमे हाय की तजनी और मध्यमा अगुलिया एक दूसरे से दूरी पर हो और अगठा सजनी अगुली के लगभग नीचे रह । (चित्र मे ठीक स्थिति देखिए) याकर-ऐसी गैद जो बल्लेबाज के पैरो के पास टपा बाए, यावर गें कहलाती है । यार गेंद बल्ले के नीचे से निगलकर तजी से विस्टो मे घम जाती है। याकर गेंद बल्लवाज को गडबडा देती है। वह इसे सेलने मे अक्सर चूा जाता है। यह गेंद ठीक पॉपिग कोज पर पिच । करती है। बम्पर या बाउमर-बार एक खतरनाक स्टाइल है जा बल्ले वाज को भयमीत करने के लिए होती है । वमर शाट पिच गेंद होती है जो टपा पाते ही तेजी से उछलती है। बम्पर गेंद का इस्मल कमी कमी उचित है पर लगातार बम्पर गेंद फेंकना सेल भावना के विरुद्ध है। इस माट पिच पर सी गेंद टप्पा पाकर बल्लेबाजरे सिर पर उछलती है। यदि बल्लेबाज सिर नीचे मुकार या दाए बाए बरसे न बचे तो यह पोट प्रस्त हो सकता है। या उन्टा सीधा बस्ला आरर कैच दे बटना है। बम्पर या याउसर गेंद माने पर अधिस्तर बल्लेबार पाट दूसरर अपना यषाव करने से ही कोशिश में होता है । इससे सेल नीरस हो पाठा है। यम्मर तेज गेंदबाजों का एक बड़ा खतरनार हपिपार माना जाता है। जब बम्पर गेंद परने कोई तेज गेंदयानता है तो स्थिति वही 77 - भयावह हो जाती है। कभी गद कमर पर लगती है, तो कभी पसली तोडती है, कभी कधे छौल देती है, तो कभी सिर फोड देती है। फिर भी साहसी बल्लेवाज उहें सेलने के लिए डटे ही रहते हैं। कई बल्लेबाज आत्रात होकर मैदान छोड देते हैं । अभी हाल की पाकिस्तान यात्रा में हमारे विकेट खिलाडियो को पाकिस्तानी तज गेंदबाजो ने बम्पर और बीमर गेंदो का निशाना बनाने की अशोभनीय कोशिश की थी। पर भारतीय बल्लेबाजो न साहस के साथ उनका मुकाबला किया था। बम्पर मे गे वाम गेंद को शॉट पिच बनाकर कचौ उछाल देता है जो बल्लेबाज के सिर, धे, छाती, पसली, क्मर, हाथ आदि पर आपात करती है। वैसे अब यह नियम बना दिया गया है कि एक ओवर मे कोई भी तेज गेंदबाज दो बमर गेंदें फेंक सकता है । परन्तु यह नियम शिपिल हैं। योमर-बीमर गेंद मे तज गेंदबाज गेंद को सोधा बल्लेबाज पर फेरकर उसे आतकित करता है । यह स्थिति बम्पर से भी ज्यादा भया- वह होती है। वीमर गेंद को गेंदबाज क्रीज पर पिच नहीं कराते। यदि गेंद के आपात से बचन के लिए बल्लेबाज पॉपिंग क्रीज से हट जाए तो गेंद स्टम्प ले उहती है और बल्लेबाज आउट हो जाता है । सीमर--यदि पिच पर हरी घास हो तो गेंद को सीवन से पकडा जाता है। सीवन को बल्लेबाज की ओर लम्ब रूप में रखा जाता है। जब गेंद को बल्लेबाज की तरफ फेंका जाता है तो वह टप्पा खाकर घास और सीवन के घषण से ऐसे कोण पर मुड जाती है कि बल्लबाज समझ नहीं पाता। कभी कभी सीधी ही उठ जाती है । दरअसल यह पता नहीं चल पाता कि घास और सीवन के घषण से गेद किस ओर के हो जाएगी। मेंद की इस अनजान हरकत को न समझ बल्लबाज पवार मे पड़ जाता है। इस तरह से फेंकी गयी गेंद को 'सोमर' महा जाता है। खास बात यही है कि सीमर गेंद पास वाली पिच पर ही ठीक ढग से फेंकी जाती है। स्पिन गेंदबाजी स्पिन गेंदबाजी सीखने के लिए गेंदबाज को पहले गेंद स्पिन कराना तथा लाइन और लंग्य पर कट्रोल करना सोचना चाहिए तभी स्पिन
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79 पॉफ नेकपा ऑफ स्पिन लग ब्रेक या लग स्पिन कुछ दूर रखते हैं । अगूठे को तजनी के पास ही रखते हैं तथा गद को बाकी दो अगुलियो का आधार दिया जाता है। ऑफ स्पिन मे गेंद को स्पिन देन का काय तजनी पानी पहली अगुली करती है । ऑफ स्पिन गेंदबाज का बॉडी एक्शन बिल्कुल आउट स्विगर गेंद फेंकने जैसा होता है । इसम गेंद को ज्यादा से ज्यादा ऊचा हाय धुमाकर, स्पिन कराकर फेंकना चाहिए। इसमे गद को ऑफ स्टम्प की दिशा मे टप्पा खिलाना चाहिए। गैद की उडान और गति में परिवतन कर या गेंद को थोडा पहले या थोडा बाद में छाडने से गेद भ जो विचित्र परिवतन आता है, उससे बल्लेबाज भ्रमित हो जाता है। इसमे गेंदवाज का क्या पहले बल्लेबाज के सामने होता है। फिर अगला पैर जमावर शरीर को कमर स घुमाते हुए गेंद को स्पिन देते हुए फेंकने के बाद गेदबाज की पीठ बल्लेबाज की योर हो जाती है। और हाप जिससे गेंद को गयो, छाती के आगे से घूमता हुना शरीर के दूसरी ओर निकल जाता है। गेंद को सही पकड के लिए चित्र दखिए । सग स्पिन--इसम गेद लैग माइहपर टप्पा धाकर ऑफ की दिशा म घूमती है । लेग स्पिन फेंकने के लिए थोडा अधिक अभ्यास करना चाहिए। लेग स्पिन म गेंद फेंकते समय शरीर से परे यानी दायी ओर 78 कराने के विभिन्न तरीके सीखे जा सरते हैं। गेंद को अगुलिया और पलाई से फिरकी (पमाना) देकर उसे स्पिन कराया जाता है । घूमती हुई गद जब पिच करती है तो वह अपनी दिशा उती बोर बरलती है जिस दिशा मे उसे गेंदबाज फेंक्ते समय फिरपी देता है । स्पिन गेंदबाजी अपने पार म एक विशेष कला है। हमारे यहाँ के चार महान स्पिनर विशनसिंह बेदी, चद्रशेखर, प्रसना तयावेंकट राघवन ससार के सर्वोत्तम स्पिनर माने जाते हैं। नये उभरते स्पिनरो मे शिवलाल यादव और दिलीप दोपी हैं। एक सतुलित क्रिकेट टीम मे बल्लेबाजी के ता मध्यम तज गेंदबाज तथा दो स्पिनर होने जरूरी होते हैं यदि याप भी स्पिन गेंदबाज बनना चाहते हैं मगुलिया और कलाई के माध्यम से फिरकी देने का स्पिन गेंदबाजी के लिए बहुत लम्बे रन-अप की और न ही नयी गेंद की। जव गेंद पुरानी होकर अपनी चमक खो दे तब उससे स्पिन का काम सकता है, क्योकि ऐसी गेंद बहुत अच्छी तरह जब गेंद को स्पिन कराकर काफी चाह तो हवा मे उसका आवार घनुप जसा हो ज्यादा देर तक उडती है । एमे मे इसका पथ । धीरे धीरे नीचे गिरती है । इसे हाई ट्रेजेक्टरी जाता है । यदि गेंद अपक्षाकृत नीचा हाय उसका पथ सपाट और सीधा होता है। सर नहीं 3. रती। ऐसी गेंद को लो ट्रजेक्टरी कहते हैं। हाई ट्रेनेक्टरी की गेंद मे बल्लेबाज होती है गेंद वहा और कब आर मी बल्लवाज ममय से पहले घुमा देता है ता आइए अव स्पिन गदबानो दे प्रा स्पिन-आफ स्पिन गेंद फोन लम्वरूप म रखते हुए पकडते हैं । तजनी सनी जगुनी को सीवन र वायो ५ 79 बॉफ नेकपा ऑफ स्पिन लग येक या लेग स्पिन कुछ दूर रखते हैं । अगूठे को तर्जनी के पास ही रखते हैं या गेंद को वाकी दो अगुलिया का माधार दिया जाता है। ऑफ सिन म गेंद को स्पिन देने का काय तगनी पानी पहली अगुली बरती है । ऑफ स्पिन गेंदबाज का वॉडी एक्शन बिल्कुल आउट स्विगर गेंद फेंकने जैसा होता है। इसमे गेंद को ज्यादा से ज्यादा था हाथ धुमाकर, स्पिन फरावर फैजना पाहिए। इसमें गेंद को ऑफ स्टम्प की दिशा मे टप्पा खिलाना चाहिए । गेंद की उडान और गति में परिवतन कर या गेंद को थोडा पहले या योडा बाद में छोडने से गेंद में जो विचिन परिवतन आता है, उससे बल्लेबाज नमित हो जाता है। इसमे गेंदबाज का क्या पहले बल्लेबाज के सामने होता है। फिर अगला पर जमाकर शरीर को कमर स घुमाते हुए गेंद को स्पिन देते हुए फैकी के बाद गेंदबाज की पीठ बल्लबाज की ओर हो जाती है । और हाथ जिससे गेंद फेंकी गयी, छाती के आगे से घूमता हुआ शरीर के दूसरी ओर निकल जाता है। गेंद को सही परत के लिए चित्र देखिए। सग स्पिन-इसम गैद लैंग साइपर टप्पा पाकर ऑफ की दिशा म घूमती है । लेग स्पिन फेंकने के लिए थोडा अधिक अभ्यास करना चाहिए । लेग स्पिन म गेंद फेंकते समय शरीर से परे यानी दायी ओर 78 कराने के विभिन तरीके सीखे जा सकते है । गेंद को अगुलिया और कलाई से फिरकी (पमाना) देकर उसे स्पिन कराया जाता है । घूमती हुई गेंद जद पिच करती है तो वह अपनी दिशा उसी ओर बदलती है जिस दिशा मे उसे गेंदबाज फेंकते समय फिरकी देता है। स्पिन गेंदबाजी अपने मार म एक विशेष क्ला है। हमारे यहा के चार महान सिनर बिशनसिंह बेदी, चन्द्रशेखर, प्रसन्ना तया वेंकटराघवन ससार के सर्वोत्तम स्पिनर माने जाते हैं। नपे उमरते स्पिनरो मे शिवलाल यादव और दिलीप दोपी हैं। एक सतुलित क्रिकेट टीम मे बल्लेबाजा के अतिरिक्त दो तेज या मध्यम तेज गेंदबाज तथा दो स्पिनर होने जरूरी होते हैं । यदि बाप भी स्पिन गेंदबाज बनना चाहते हैं तो गेंद को पहले अगुलियो और कलाई के माध्यम से फिरकी देने का अभ्यास कीजिए। स्पिन गेंदबाजी के लिए बहुत लम्बे रन अप 'जरूरत नहीं पड़ती और न ही नमी गेंद को। जब गेंद पुरानी होकर खुरदरी हो जाए और अपनी चमक खो दे तब उससे स्पिन का काम अच्छी तरह लिया जा सकता है, क्योकि ऐसी गेंद बहुत अच्छो तरह स्पिन लती है । जब गद को सिसन कराकर काफी कचा हाय करके फेंका जाता है हवा में उसका आवार घनुप जसा हो जाता है और गेंट हवा म ज्यादा देर तर उडती है । ऐसे में इसका पय धनुपाकार होता है और यह धीर धीरे नीचे गिरती है । इसे हाई ट्रेजेक्टरी बाल (ऊ ची उठान) कहा जाता है । यदि गेंद अपेक्षाकृत नीचा हाय घुमाकर फकी गयी हा ता उसका पय सपाट और सीधा होता है । ऐसी गेंद हवा में ज्यादा देर तर नहीं ठहरती । ऐसी गेंद को लो ट्रजेक्टरी (नीची उठान) वाली बाल रहते हैं। हाई दे नक्टरी- गेंद मे बल्लेबाज को यह समझने म मुशिल होती है 4 गेंद पहा और वापर गिरेगी । इस असमजस म कमी rमी यलगार समय से पहले घुमा देता है या फिर समय स बार म । सा आदए अब सिन गदबानो विभिन तरीका का जान । प्राफ स्पिन-आफ स्पिन गेंद फेंगने के लिए गंद की सीवन को तारुप म रपर्ने हुए पाते हैं । जनी और मध्यमा जनिया म स तन्ना अगुती को सोरन व कार वायो यार तथा मध्यमा का सोवन स 79 D ऑफ ग्रेक या ऑफ स्पिन सग ब्रेक या लंग स्पिन कुछ दूर रयते हैं । अगूठे को तजनी पास ही रयते हैं पा गेंद को बाकी दो अगुलियो का आधार दिया जाता है। ऑफ स्पिन म गेंद को स्पिन देने का काय सजनी पानी पहली अगुली परती है । आफ स्पिन गेंदबाज का बॉडी एक्शन बिल्कुल आउट स्विगर गेंद फेंकने जैसा होता है । इसमे गेंद को ज्यादा से ज्यादा सपा हाप पुमाकर, स्पिन फरापर पाना पाहिए। इसमें गेंद को ऑफ स्टम्प की दिशा मे टप्पा खिलाना पाहिए। गेंद को उडान और गति में परिवतन कर या गेंद को गोडा पहले या योढा याद में छोडने से गेंद म जो विचित्र परिवतन आता है, उससे बल्लेबाज प्रमित हो जाता है इसमे मेंदवाज का क्या पहले बल्लेबाज के सामने होता है। फिर अगला पर जमावर शरीर को कमर स घुमात हुए गेंद को स्पिन देते हुए फेंकने के बाद गेंदबाज की पीठ बल्लबाज की बोर हो जाती है। और हाप जिससे गेंद फनी गयी, छाती ये मागे से घूमता हुआ शरीर के दूमरी ओर नियल जाता है। गेंद यो सही परड के लिए चित्र दथिए । सग स्पिन--इसम गेंद लैग माइपर टप्पा पाकर आफ की दिशा म घूमती है । लेग स्पिन फकने के लिए योग अधिष अभ्यास करना पाहिए । लेग स्पिन म गेंद फेंते समय शरीर से परे मानो दामी ओर 80 ऑफ स्पिन गेंदबाजी की एक बानगी 81 स्पिन करानी पडती है। लेग स्पिन से प्रपम तीन मगुलियो मे सीवन पाही पानी है। सोवन की दिशा माही रखी जाती है। जैसा कि चित्र में रिवाया गया है। ये तीनों अगुलियां सीवन पर अलग-अमग होनी चाहिए ताकि गेंद पर पकड सुविधाजनक हो। तीसरी अगुली गो गेंद के लगभग मीथे की बोर रहती है, गेंद को सिन कराती है। गेंद पर दवाव का कार्य तर्जनी और मध्यम अगुली से डाला जाता है। क्योंकि लंग सिन गेंद एक कठिन गेंद होती है अत अधिस्वर गेंद- वाज लैप और डायरेक्शन पर इच्छित नियत्रण बहुत कम रख पाते है। इसके लिए यदि हाय बड़ा हो पा हाय की यगुलिया लम्बी ज्यादा हों तो लेग स्पिन बहुत अच्छी तरह करायी जा सकती है। संग स्पिन में मगुलियों तथा कलाई को एक साथ तालमेल बैठाकर घुमाया जाता है। तभी गेंद अच्छा स्पिन लेती है। इसमें कलाई को घडी की सुइया घूमने की उल्टी दिशा में घुमाकर गेंद को फेंका बाता है। ठीक उसी दिशा में जिस दिशा में किसी शीशी का ढक्कन बोमा जाता है। लंग क या लैंग स्पिन गेंद में परशेखर और सुभाष गुप्ते बहुत माहिर माने जाते रहे हैं। गुगली-गुगली गेंद लगभग लेगस्पिन की तरह ही फेंकी पाती है। एक तरह से यह भी कहा जा सकता है कि गुगनी लैग सिन में का एफ खास हपियार है। गुगली स्टाइल में गेंद ऑफ साइड से मेम सादर की ओर स्सिन करती है। इसमें गेंद की पकड लैग अंक पासी होती है। शरीर का एक्शन भी सगभग सँग लेक वाला ही होता है। रेचस कमाई की दिशा में पोडा अन्तर होता है । इस प्रकार कह सकते हैं कि गुगती ऐसे प्रकार की गेंद है जो फैकी तो सँग ब्रेक की तरह जाती है पर होती बॉफ के है। इसमे हथेली की दिशा स्वेयर लंग की बोर होती है। लंग बेक गेंद फेरते हुए कभी-कभी बीष मे गेंदबाज गुगली गेंद फेंक दिया करते हैं। टार स्पिनर-टॉप स्पिनर गेंद भी संग बेक की तरह ही फेंकी पाती है । इसमे गेंद पिच होने के बाद मऑफ साइड को ओर घूमने के जाय तेजी से आगे की ओर बढ़ती है । इसमें गेंद की पकड भी लगभग मोर के समान ही होती है। केयस अन्तर इतना है कि इसमे अना- मिका अंगुली सीधे विकेट की दिशा में गेंद को स्पिन कराती है भक्ति 82 गुगली गेंद फोने का ढग जो बिल्कुल लैंग केक की तरह ही होता है मम के में वह तीसरे स्लिप की दिशा में स्पिन कराती है। इसमें संग अंक को अपेमा कताई को कुछ गली मोह दिया जाता है। इसमे गंदन बाँक की ओर न सम की मार टप्पा खाती है कि टप्पा खाकर विकेट
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सँगक या लेग स्पिन गेंद फेंकना
को और आगे बढ़ती है।
सभी प्रकार को सिन गै पिच की अवस्या को देखकर बनी
पाहिए । विस स्पिन गेंद के लिए पिच मच्छी हो उसी प्रकार पी सिन
गेंद फेंकनी पाहिए। अब आप गेंदों की पर और फेंकने का दम
समसार अम्पास आरम्भ कीजिए।
अभ्यास करते समय क्रीज के निशान लगाकर ही यम्यात करें तारि
दौदन मे फुट वक का भी सभ्यास हो पाए । ध्यान रहे दौड रे अन्तिम
परम में बागे वाला पैर पॉपिंग कोर से पीछे होना चाहिए और मनो
परीज की पिछली साइन के अदर होना चाहिए। माता परज
के नियमों का उल्लघन करने पर नो बाल परार दे रिया गया है।नो
बान से बचने के लिए पहले से मम्पास ठीक है।
मध्याय-6 फील्लिग एक बल्लेयाज का एक दवाष होना परी नहीं। इसी तरह एक गेंदबाज का बल्लेबाज होना भी उतना जरूरी नहीं। पर एक बल्लेबाज या गेंदबाज को अण्डा क्षेत्र रक्षफ (कोहर) होना पहुत जरूरी है। बिना फीस्टिग पाए उसका यच्छा बल्देवाय या गॅददाज होना कोई विशेष महत्व नहीं रपतापारण हम बठाए देते हैं। यदि कोई बेटस- मन मपनी टीम के लिए अच्छे रनों का सोर तो पडार देता है, पर परिवह फीलिंग करते समय पौने यनती गेंदों को छोट दे तो उसकारा प्राप्त रनों का स्कोर बराबर हो जाएगा। इसी प्रकार कोई दवाय दो-चार बल्लेबाजों को पाउट कर नाम कमा से, पर फीस्सिंग में दो-पार कंप छोड़ दे तो उसके द्वारा प्राप्त सहयोष पेकार हो जाएगा। हम सच माता व तो पाप फील्डिग के महत्व को समझ पर होंगे। बत केवल आप यच्छा बल्सैयार या गेंदबाज होला काफी नहीं। उसके साप उसी योग्यता का फीलर होना भी निहायत परुरी है वरना पितमा सहयोग माप अपनी टीम को देंगे उतना ही गुफरान बराव र होने के नाते पर देंगे। तोमाइए, फीलिंग की पुछ महत्वपूल बातों पर ध्याग दें। एक माछा फीलर अपने साथी गेंदबाप का एक तह से दायी हाप होता है। देारा गेंदमान को ऐती व नै मे भीमान मा हा होकिला बड़ते हीच उधाने पर फीसर उसे छोर देवो पह फीसर गेंदबाज के लिए सिर दर्द ही होगा। एकमले पीलररा तय है कि यदि यह पिफेट से दूर पड़ा है ठोपरकर से एक भी पोस्वामी में पानी काधमरजेदे। बोरसह टि २ मपदीको होकर फीलिंग कर रहा है तो एक-एकललामे पर भी मंडरा।
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-संग सिन गंदवायचे लिए फोल्डिग की अमावट
83
86 गद को रोपने का ढग ध्यान देने योग्य माते-फोल्डर को हमेशा पुस्त रहना चाहिए। जैसे ही गेंदबाज गेंद पंछने की स्पिति में आए उसे तुरन्त पोजीशन मकर सतर्क होकर खडे हो जाना चाहिए। ऐसे मे फोल्डर के दोनों हाय भागे पेट के लगभग सामने हो और दोनो हापों की झोली बनी हो। पर पुटनों से मुझे हा और छाती तथा सिर आगे की बोर मुके हों। फोल्डर को नगर बराबर बल्लेबाज पर लगी रहनी चाहिए कि वह किस योर पॉट लगाता है या गॅद उसके बल्ले से टकराकर पिस ओर रछनती है। यदि फोल्डर सतक नहीं रहेगा तो वह गेंद को रोकन या कंपनेने म असमप रहेगा। फील्डर को अच्छी फील्डिंग के लिए दोनों हापों को हथेलियो और उगलियों के बीच गेंद को सही ढग से मेलना, तेज गेंद को एक हाथ से रोककर फील्ड करना, गेंद को सही स्थान पर फेंककर पहबाना आदि 87 को अपने प्रतिदिन के अभ्यास में शामिल करना चाहिए । केवल गेंद- बाजी या बल्लेबाजी का अभ्यास ही महत्वपूर्ण नहीं है। फील्डिंग का अभ्यास हर बॉलर और बल्लेबाज को उसी लगन और मेहनत से करना चाहिए जितनी लगन और मेहनत से वे गेंदबाजी और बल्लेबाजी का अभ्यास करते हैं। फोल्डर को रोकी गई गेंद फेंकते समय इस बात का ध्यान अवश्य रखना चाहिए कि वह गेंद कहा यो करके पहचाए। यदि सामान्य स्थिति है और विरोधी टीम के बल्लेबाज अपनी अपनी जगह पर हैं तो उसे गेंद अपने विकेटकीपर को ही धो करनी चाहिए। और यदि बल्लेबाज रन ले रहे या रहा हो तो गेंद फुर्ती से उस ओर की विरेट की ओर फेके पहा के विकेट पर पहुचने में बल्लेबाज को देर हो ताकि उसे रन बाउट किया जा सके। गेंद को रोकने की प्रक्रिया में पहले तेजी से दौडकर गेंद को कवर करने की कोशिश कीजिए, उसके बाद एक पैर आगे बढ़ाकर मुकिए और गेंद को हाय मे उठाकर तुरन्त विकेटकीपर या विकेट के निकट अपने किसी भी साथी को यो कर दीजिए। कभी कभी पास से गुजरती तेज गेंद को रोकने या कंच लेने के लिए दौडने का अवसर नहीं मिल पाता । ऐसे में गेंद को पकड़ने के लिए फोल्डर डाइव लगाकर गेंद को पकडता है, हाइव लगाना कोई इतना आसान काम नहीं है । गलत गइव लगाने से हायो मे मोव वा सकती है, पर जख्मी हो सकते हैं। या फिर मुह पर चोट पा सकती है। इससे बचने के लिए सही डाइव लगाने का अभ्यास करें। फिर चाहे बाप कसी भी गाव लगाए, आपको चोट नहीं लगेगी और आप सुर- क्षित रूप से अमोन पर गिरने में माहिर हो जाएगे । अक्सर हाइव लगाकर गेंद को रोकने के मौके आते रहते हैं। खास-जोर से विकेट- कीपर के पीछे या आस-पास खडे फोल्डरो को डाइव लगाने के सबसे ज्यादा मौके आते हैं। याद रखिए जहा बदिया गेंदवाज और अच्छा फील्डर हो तो मध्ये से अच्छा धुरधर बल्लेबाज भी रनों के रास्ते बड़ी मुश्किल से निकाल पाता है। फील्डर के लिए सबसे महत्वपूग बात यह है कि उससे कमी क्षेत्र नहीं छुटना चाहिए । मान लीजिए यदि उसने एक कैच छोड दिया- 88 कंप करने का सही तरीका और यही वस्लेबाज याद में 80 90 रन बटोर लेता है तो है न यह शतरनार वात | एक गेंद को रोकने में तो ज्यादा से ज्यादा चार रन पाएंगे, पर कंघ छोड़ने की सजा बहुत बड़ी भुगतनी पड़ेगी। पदि एक आगे चहा फील्डर किसी गद को लपकने के लिए बढ़ता है की उसके आसपास या पीछे बडे फील्डर को उसे पोछे बाकर तुरन्त कपर करना चाहिए, ताकि यदि आगे वाले फौलार से झंच छुट बाए या यह गेंद न रोक पाए तो पीछे वासा फील्डर उसे लपका ले। मत प्रत्येक फील्डर को फनप (पीछे आकर कवर करना) के लिए तयार रहना चाहिए । कवर करने का ढग चित्र में देखिए । नारसम की जमावट-फील्डिंग की जमावट गॅदवानी गेंद फेंकने की स्टाइस पर निर्भर होती है। गेंदवान से गेंद फेंकने के प्रकार का पा समादर कप्तान अपने फोल्डरो को ऐसी जगह धनकर घटा करता है बहा गेंद जाने की ज्यादा सम्भावना होती है।
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बाउट' बापका हाय जमीन को छू सकता है पशर्ते कि गेंद जमीन न छुए
उपर से थाती गेंद को परडने का ढग
90 फोल्डरो के मदान मे धडे होने के जो स्थान नियत है, उनको निम्न नामो से सम्बोधित किया जाता है-- (1) पड मन (2) डीप फाइन लेग (3) लांग लेंग (4) बकवा पाहट (5) सकिड स्लिप (6) फस्ट स्लिप (7) शाट फाइन लेग तथा लेग स्लिप (8) स्वदेयर लेग (१) गली (10) कवर (11) शॉट एक्स्ट्रा पवर (12) सिली मिह मॉफ (13) फॉरवह शाट लेग (14) एक्स्ट्रा स्मास्मिर गाने पात्र मग मिरम विकट बरपा ०९१ मेगस्लिम पर ३.मेरेर मेन गप पाएट . - प्यार . ० 2 मिनिकिट हिलीपाएर कपर मिली Hिaty निमी मिरमान सिर 2 पर गेंदबाज . 2 पमा ऑफ ma मानार 0- फोटरों के खडे होने के स्थान पर चित्र मै दर्शाये गए हैं। इनमे से गैवाजी के अनुसार स्थान पुनकर केवल वहीं फोल्डरों को तैनात पिया जाता है।
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कदर (15) मिड ऑफ (16) बॉलर (17) मिड ऑन (18) मिड
विकेट (19) साग मऑफ (20) लोग ऑन ।
इही निपत स्थानो पर फोल्डर तैनात किए जाते हैं जो गेंद माने
पर इधर-उधर दौडकर गेंद रोकते और विरेट कीपर तक पहुचाकर
अपनी निश्चित जगह पर आ पाते हैं।
फोल्डिग की जमावट के विमिन चित्र हमने गेंदबाजी वाले अध्याय
मे दिए हैं जिहें देखकर आप फील्डिंग के नियत स्थानों और जमावट के
विभिन तरीको को देख सकत हैं।
अध्याय-1 विकेट कोपिंग क्षेत्ररक्षण मे बल्लेबाजों को आउट करने या रन ज्यादान देने की जिम्मेदारी सबसे ज्यादा विकेटकीपर पर होती है। फीलिंग में सबसे कठिन मेहनत का जोखिम भरा काय विरेटकीपर का ही होता है । उसे अन्य फील्डरो से कैच लपकने, गैद रोकने तथा फुर्ती से विरेट की और 'यो करने में ज्यादा माहिर होना चाहिए । डाइव लगाने में विशेष रूप से निपुण होना चाहिए। बल्लेबाज से छूटी हुई गेंद सीधे विकेटकीपर के पास हो पाती है। गेंद कभी-कभी तो इतनी तेज आती है कि उसे बल्लंबाज से निकलकर विकेटकीपर के पास माने मे एक सेकिंड के सौवें भाग से भी एम समय लगता है। बहुत तेज याती गेंद में सो यह समम एक सेकिंड से हजार भाग तक पहर जाता है । इसी से बाप अन्दाजा लगा सकते हैं कि विकेटकीपर को कितना फुर्तीला और एकाग्रचित्त होकर रहना पड़ता होगा। किसी बल्लेबाज का पर गेंद रोकते समय बरा ही कीज से बाहर 'गया कि विकेटकीपर फुर्ती से विकटों की किल्लियां उडाकर उसे आउट कर देता है। रन आउट करने का भी जिम्मा अधिकतर विकेटकीपर पर होता है। विकेटकीपर को बल्लेबाज के बल्ले पर बरावर पनी दृष्टि रखनी पडती है कि गेंद बल्ले से लगकर जाने किस दिशा मे जाए। विकेट कीपर दबाज के गेंद फेंकने के ढग और बल्लबाज की हसत पर नर रखनी पड़ती है । समझदार विकेटकीपर बल्लेबाज छोटी से छोटी भूल का भी फायदा उठा लेता है । यस उसमें पीते पी सी पुती या पहले हम उन बातो पर विचार करेंगे जो विटलीपिंग का
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विकेट के पीछे विकेट कीपर विकेट के पीछे जाने वाली
से बैठने का ढंग
गेंद को रोकने का ढग
माधार हैं, जिनको बानना हर उस खिलाड़ी के लिए जरूरी है जो
विकेटकीपर बनने की ख्वाहिश रखता है।
दमखम के लिए व्यायाम
सबसे पहले खिलाडी को अपना दमखम बढ़ाना चाहिए। जो
विकेटकीपिंग के लिए एक बुनियादी आवश्यकता है। विकेटकीपर को
धूकि सारे-सारे दिन पंजों के बल बैठे रहना पडता है । मत उसे ऐसी
एक्सरसाइज करनी चाहिए जिससे उसे पक्षों के बल बैठे रहने में यकापट
महसूस न हो।
यहाँ हम कुछ पायाम बता रहे हैं बो विकेटकीपर को नियमित
रूप से फिटनेस के लिए आवश्यक हैं।
पहला मायाम--बरे होकर परों के बीच लगभग डेढ़ फुट की
दूरी रखें। फिर धीरे-धीरे पनों के बल बुटने मोडकर बैठते बाए।
इसमे उठने-बैठने में जितना समय लगाएगे, घुटनों और जाषो मे उतना
ही अधिक दमबम पड़ेगा।
94 2 व्यायाम न.1 इसी व्यायाम मे पनों के बल खड़े होकर पहले पोडे घुटने मोर और कुछ देर के फिर पोग मुकें और उस स्पिति म पोडा में। इस प्रकार जब भी थोडा घुटने मोडे थोड़ी देर इस स्पिति में है। उठते बैठते दोनो समय इसी प्रकार करें। इस व्यायाम में शुरुमात में यापको थोडा कष्ट जहर होगा डिलियो और जापों में दर्द होगा पर दो-तीन दिन मे आदत पर जाने पर दद नहीं होगा। इस व्यायाम का समय धीरे धीरे बढ़ाए। ध्यान रहे उठते बैठते समय आपका शरीर जो के बल रहे। 2 दूसरा म्यापाम--सोधे पडे होकर दोनों परों को आपस में 95 मिसा में। फिर बिना घुटने मोर्ड कमर से भुककर हापों से परोके अगूठों को छूने या पारने की कोशिश करें। फिर हाथो को उसी अवस्या में उठाते हुए छाती के सामने लाते हुए सिर के ऊपर सोघे ले पाए । फिर दुसरा हापों को इसी क्रम में सामने लाते हुए नीचे ले पाकर परोके भगूठे छुए । लगभग दस पदह बार यह व्यायाम करें। - व्यायाम न02 3 तीसरा व्यायाम-जमीन पर बैठकर दोनों पैरों को सामने पुरने मौधे कर फैला लें। फिर पैरों को वो (v) को शक्ल में चौडा कर में। उसके बाद कमर से शरीर को मोडते हुए हापो से पैरों के अग परड़ने का प्रपल करें। शरीर को सामने सुझाते हुए सिर को जहाँ 96 व्यायाम न०3 तक हो सके जमीन से छुआने की कोशिश करें। ध्यान रखें पैरो के घुटने मुहने न पाए। यह व्यायाम भी घोडा कठिन है । हो सकता है पहले सिर जमीन पर न लग पाए या हाथ परो के अगूठ न पाह पाए । पर धीरे धीरे कोशिश करिए। 4 धोया प्यायाम-सीधे खडे हो जाए। फिर बम्प लेकर परो को वो (v) की शक्ल मे फैलाए । इसमें जन्म लेकर हाप और पैरों को एक साथ फलाकर और फिर पहले जैसी स्पिति मे लाए। इसे पी० टी० करना कहते हैं । इसे 20 25 बार करें। 5 पांचर्चा व्यायाम-जमीन पर एक ही स्थान पर पैरो को घुटनों से मोडते हुए कमर सक एक के बाद दूसरा पैर बम लेते हुए लाए । पैसे दौड लगाते समय करते हैं । अर्थात उठनते ए एक ही स्थान पर दौड लगाने का अभ्यास समभग पांच मिनट तक करें।
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व्यायाम न००
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अंगुलिपा को उस पर की अगुलियो मे घुमाने की कोशिम परें। ध्यान
रखें, और उछालते समय घुटन से मुडना नहीं चाहिए । - सी प्रकार वाया
हाप पावर बाया पर सामने उछालें और साथ में छाए । एमा कई
पार करें। इसमें शरीर के संतुलन का ध्याा रखें।
इसी प्यासाग को दूसरी तरफ से भी करें। यानी दागा नाग सामा
फैलाकर दायां पर उछासगराए र बाया हाय मामले सामर
पायां पैर उछातते हुए उसस छुपाए । अपात्र पास प्रकृति में पाया
99 8 पाठवा व्यायाम-सीधे बडे होकर शरीर को पीछे की ओर कमर और घुटनो से मोडते हुए धनुषाकार में मुकाए और ऊपर से हाथों को भी उसी दिशा मे लाते हुए पर को ऐडियो को छूने की कोशिश करें। यह व्यायाम शरीर मे घुस्ती फुर्ती लाता है। इसे भी 10-15 पार करें। इसके अलावा जन्म लेते हुए बैठक लगाना, वोटना, फुटबाल खेलना, तैरना, जम्प करना आदि व्यायाम हैं जिन्हें नियमित रूप से करने से बिलाही विकेटकीपिंग के लिए फिट हो जाता है और उसमे स्टेमिना बढ़ जाता है तथा पुस्तो-फुर्ती के साथ मास-पेशियो म लचक बाती है । साइव लगाने का अभ्यास विकेट कीपर के लिए डाइव लगाना जरूर आना चाहिए । डाइय दाए बाए या सामने की ओर लगायी जाती है। तेजी से पाती गेंद को जव दौड लगाकर पकडना कठिन हो तो पजो के बल उछलकर डाइव लगाते हुए उस गेंद को रोका था कैच किया जाता है। क्रिकेट में डाइव का बहुत महत्व है। केवल विकेटकीपर को ही नहीं सभी फोलारों को डाइव लगाने का अच्छा पासा अभ्यास होना चाहिए। फोल्डरों मे स्लिप पर बडे फोल्डरों को विशेष रूप से साष का इस्तेमाल करना पडता है। तो आइये, हाइव सीखने के लिए कुछ प्रारम्भिक सभ्यास की बावें बताए ताकि बिना चोट खाये आसानी मे डाइव लमा साइक लगाने मे मक्सर सिर, कोहनियो या घुटनो पर चोट लग सकती है। डाइप सीखने के लिए निम्न शारीरिक अभ्यास करें। । जमीन पर पजों के बल बैठें। फिर हायों को आगे फैला लें। अब सिर को सामने झुकात हुए भागे झुके और हायो की जमीन पर हपेचो के बल टेक दें। इसी प्रकार दाए बाए हाप फैलाकर लुटकने का अभ्यास करें। पहले धीर धोरे अभ्यास करें फिर तेजी से दाए बाए तथा सामने की ओर गिरकर हाथ सुरक्षित टेकने का अभ्यास करें। अब बैठक से पोडा ऊपर उठकर इसी प्रकार तीनो बोर गिरते हुए हाय जमीन पर टेवें । इस प्रकार धीरे धीरे ऊचाई वढासे हुए अभ्स 102 गइप लगाना सीखने का डाइव लगाना सीखने पहसा अभ्यास का दूसरा अभ्यास पीछे लुदकना सीखने का प्रारमिक अभ्यास । सो सरह करतं करते सुढ़कने की ऊचाई बढ़ाते जाए। अब सी अभ्यास को कुछ इस प्रकार करें कि आप सामने या दाए- पाए' गइप तो सगाए पर साप ही उछलने यात शरीर को ऐसा मोड या मटा दें कि आप हमेगा पीठ की और से ही जमीन पर पाए । इस ययास से मापसे हाप गेनो पाने के लिए खाली हो जाएंगे और पर हार्यों को गेंद परहने लिए वासी रखना पड़ेगा तो जमीन पर सुरक्षापूवफ गिरने के लिए किसका सहारा मंगे। जाहिर है इछ ऐसा परिवतन परना पडेगा जिससे सिर को सपा मगों को चोट से बचाया पा सके। उसके लिये सही तरीका है कि आप जिस ओर भी टाइप मगाएं 103 शरीर को कुछ ऐसा मटका अवश्य दें ताकि जमीन पर पीठ पगे तथा सिर ऊपर की ओर उठा रहे, पीठ के बल सुविधापूर्वक गिरा था सकता है। 2. इसी प्रकार पमो के बल बैठकर मागे की कोर झुककर पीछे (पीठ की ओर) की और सुटके। ऐसे में आपकी पीठ गोलाई लिए हुए होगी, अत मुढ़कते समय चोट नहीं लगेगी। ऐसे में हाप पर उठे रहने चाहिए और सिर छाती की ओर झुका हो ताकि अमीन पर गिरते समय वह जमीन से न टकरा सके । इस अभ्यास मे भी धीरे-धीरे लड़कने की गति बढ़ाते जाए। इसी प्रकार दाए-बाए तरफ भो नितम्बों के बल लुढ़कने का अभ्यास 3 अब अपने किसी साथी से गेंद आपकी ओर फेंकने को कहें। जैसे ही गेंद आपके पास से गुजरे, डाइव सगाकर उसे पकड़ने का अभ्यास कीजिये । गेंद अपने दाए-बाए पहले कुछ दूरी पर फिकवायें फिर पोरी- पोडी दूरी बढाते जाए जिससे डाइव लगाने की हर स्थिति का अभ्यास माएको हो जाये। इस प्रकार याप डाइव लगाने का अभ्यास कर विकेटकीपर के लिए सबसे महत्वपूर्ण गुर सीख जाए तो समझ लीजिये, लगभग आधा काम हो गया। अब आइए, विकेटकीपिंग की अय बुनियादी बातों पर विचार करें। विकेट कोपर को गद को पकरने का दंग 104 विकेटकीपर को दिकेटों के पीछे ऐसे स्थान पर बग होना चाहिए बहा से पह बल्लेबाज और गेंदबाज की हरकत को ध्यान से देख सके, साप ही उसे दाएं-बाए किसी भी मोर माने पाली गेंद का रोकने या पफरने में बाधा महो। उरो पैरों को पुटनों से मोटकर, पजों के बल बा होना पाहिए धीर पागे की ओर झुके रहना चाहिए । दोनो हाथों को आगे कर गेंद को रोकने या पकरने के लिए मोली बनाकर सतकता से खड़े होना पाहिये । पजों के साथ होने से परों मे स्प्रिंग जसी लपक बनी रहती है और गइव मगाने के लिए एकदम उसने में दिकात नहीं होती। विकेटकीपर के बड़े होने की ही स्थिति को चित्र मे देखिये । परों को उपना ही पौड़ा कर रखें जितने से बड़े होने में परेशानी न हो। गेंदबाज की बारभिक हरकत, गेंद छुटने को स्थिति, गेंद की हवा में उडान, टप्पा पाने की स्पिति और गेंद के प्रेक होने पर दिशा की स्थिति फिर बल्लेबाज की हरकत, उसके बल्ले का किस कोण में घुमाया जाना, पॉट भागने के बाद गेंद की दिशा और इसके बाद आपकी प्रतिक्रिया। इन सम पर विकेटकीपर को दृष्टि परावर गडाये रहना चाहिये तभी यह देवी से उडती हुई गेंद को नियंत्रित कर सकता है। ठेज गेंदगी के समय विकेटकीपर को विकटों से कुछ दूर खडे होना पाहिये तपा धीमी गेंदबाजी के समय विकेटो के अपेक्षाकृत पास खडा होना पाहिये। गेंद किंकने से पहले ही विकेटकीपर को अपनी सतक मुद्रा में मा पाना चाहिये। पल्लेबाज शॉट लगाते समय यदि पॉपिग क्रीज से बाहर चला गया है तो विकेटकीपर को विशेष रूप से चौकन्ना हो जाना चाहिए । शॉट लगते ही यदि गेंद विकेटो के पीछे आये तो उसे तुरन्त नित्रित कर बल्लेबाज के पॉपिंग कील मे माने से पहले ही विरेटो पर मार देना चाहिये। पल्लेबाज के एस. बी. उम्ल्यू० माउट होने की स्थिति पर विरेट- कोपर की ही नजर होनी चाहिये । यदि वह ऐसी स्थिति देखे तो तुरन्त अपील कर बल्लेबाज की स्पिति को एम्पायर को दशयि । इस प्रकार फील्डिंग के क्षत्र में विकेटकीपर का एक अपना विशेष, महत्व होता है जिसे उसे जिम्मेदारी से निभाना चाहिये । विकेटकीपर
105
फील्डिंग की जान होता है। सब फील्डर उसी के एक्शन से धीरज पाने
हैं। क्योंकि विरोधी टीम के रनों पर वही सबसे ज्यादा पुश सगा माता
है। बल्लेबाजी को आउट करने की अधिकतर आशा विकेटकीपर की
होती है । या यो भी कह सकते हैं कि अधिकतर बल्लेबाजोंग मारट
करने में विकेटकीपर का विसी-न-किसी स्प मे सहयोग होगा।
पोशाफ-विकेटकीपर को सिर पर हैट, हापों में धान
पर लंग गाड पंह अवश्य पहनना चाहिय । जत घins
लचकदार होने पाहिये । विकेटकीपर में परमेng
हल्के और आरामदेह होने चाहिये । स्पंज की पट्टियों का terai
सुरक्षा के दृष्टि से भी उत्तम होते हैं । पेटmarMant
पहनना भी अत्यन्त आवश्यक है । कई विदेशी विtzers
मुह और सिर के बचाव के लिए हैल्मेट का harifts
सामने प्लास्टिक का पारदर्शी शीशा सगाTHEATRE
मुह पर लग भी जाये तो यह प्लास्टिक की पट्टी 20rum
अध्याय 8 अम्पायर का दायित्व विकेट के मेल मे दो अम्पायर होते हैं जो खेर को नियमों के अनुसार चलाने का दायित्व लेते हैं । गेंदबाज के निमम उल्लपन पर पा बल्लेबाज को आवट देने का निणय अम्पायर ही लेते हैं। खेल की उचित सवालन नीति का दायित्व अम्पायरों के जिम्मे होता है । उहें निष्पक्ष और सही निणय देने की घोषणा करने के लिए साहस और विवेक से काम लेना चाहिए। अम्पायर को हमेशा ऐसे स्थानो पर खड़ा होना चाहिए जिससे वे सेल के हर क्षेत्र पर दृष्टि रख सकें। इसके लिए आदश स्थान होते हैं- पहला गेंदबाज के विकेट के पास खडा हो तपा दूसरा अम्मायर बल्लेबाज के लग साइड पर खडा हो तो ऐसी स्थिति में वे बल्लेबाज और गेंदबाज के प्रत्येक एक्शन और फील्ड के प्रत्येक क्षेत्र पर भी नजर रख सकते हैं। अम्पायर ने कुछ विशेष समेत होते हैं जिसे वह अपनी हायों की विभिन मुद्रा से करता है ताकि उसकी इस मूब भाषा को दूर दूर बळे दशक भी समझ सकें कि पील्ड मे क्या हुआ। यदि कोई खिलाडी अम्पायर ने निणय का उल्लघन कर आदेश नही मानता तो वह पहले टीम के कैप्टन से अनुरोध करता है कि वह उसे आदेश मानने के लिए कहे। यदि फिर भी प्रभाव न पड़े तो आयोजकों से रहार खिलाडी को फोल्ड से बाहर करवा सकता है। अम्पायर को इस बात का भी ध्यान रखना पड़ता है कि कोई खिलाडी पिच या मदान को खराब तो नहीं कर रहा । लगातार खतरनार ढग से की गई गेंदो के विरुद्ध अम्पायर गेंदबाज को चेतावनी दे सकता । यदि वह उसके आदेश का पालन न करे तो वह उसके कप्तान से कहकर उसे आगे से गेंद न फेंकने देने का अनुरोध पर उसकोगेंदबाजी से बेदखल कर सकता है।
नो बाल
प
ine
बाई
लैंगबाई
गेंद को धमकाने के लिए यदि कोई गेंद क्रोम या अय चिकना
पदाय प्रयोग करता है तो अम्पायर उसके विरुद्ध कार्यवाही कर उसे इस
कृत्य से बाॉलिंग करने से रोक सकता है।
नयी बॉल देने न देने का निणय भी अम्पायर पहली गेंद की स्थिति
देखवर लेता है। गेंद बदलने के बारे मे दोनो अम्पायर आपस में सलाह
करते हैं।
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कोई बॉलर यदि बल्लेबाजी के लिए उतरता है तो नये नियम के
अनुसार गेंदबाज उसे बाउसर या बीमर किस्म की खतरनाक बॉल नहीं
'फेंक सकता, इसका निर्देश अम्पायर बॉलर को दे देता है।
चौका
छक्का
गाट रन
बाउ सर या पाट पिप गेंदें यदि सगातार सी जाती है तो
मनापर पहले गं बाजरो फिर रप्तान को इस रोपने को रहता है।
पदिता भी प्रभाव म परे तो वह गेंदो पोषित पर ओवर
समाप्त पर देता है। मपवा गॅदवारसे गदागी म परत देनी
सलाह पप्तान को देवा है।
109
इस प्रकार से हटाया गया बॉलर फिर उस पारी में
दुबारा
बॉलिंग
नहीं कर सकता।
इसी प्रकार अन्य सामाय नियम भी अम्पायर के होते हैं जिन पर
उसे विवेक से निणय देना चाहिए ।
अम्पायर के सकेतो को चित्रो मे देखें और समझें।
अम्पायर के इन सकेतों का ज्ञान प्रत्येक क्रिकेट खिलाडी तथा दशकों
को होना चाहिए ताकि वे अम्पायर के निणय को समझ सकें और यह
पान सके कि फील्ड मे क्या हुआ।
खिलाडी द्वारा की गई अपील पर अम्पायर को ध्यान देना चाहिए।
यदि अपील उचित है तो अपील करने वाली टीम के पक्ष मे निणय देना
चाहिए।
क्रिकेट के नियम वाले भाग का सचालन भी अम्पायर द्वारा ही
होता है । अन्तिम निणय नही देता है । अत वह अध्याय भी अम्पायर
के दायित्व का भाग ही मानें।
अध्याय 9 कप्तान को भूमिका वस तो सभी सेला मे अपनी-अपनी टीम का एक कप्तान होता मोर वह अपनी देख रेख मे टीम को पिलाता है। परतु क्रिकेट सेल मे बनान की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण होती है, इस खेल मे कप्तान को लगातार सक्रिय रहना पडता है । उसे हर पत का पात रखना पड़ता है, पल पल पर उसे अपनी योजना को खेल के रुख के अनुसार बग्लना पटना है। इसमें कही भी जरा सी चूक हुई को बाजी पलट गई समझिय। विरोधी टीम के बल्लेबाजों ने आउट करने या उन पर अकुश लगाने के लिए किस प्रकार के गेंदबाज से किस तरह की गेंदें किकवाना पाग की जमावट का हर ओवर पर ध्यान रखना, विरोधी बल्लवाजा के मनोभावा और कमजोरियो का पताकर उसके अनुसार व्यूह रचना पर पैतरा बदलना, अपन बल्लेबाजो को किस क्रम से भेजना समय की नजाक्त को देखते हुए उनसे टाइम पास करने के लिए सुरक्षात्मक ढग स खिलाना या फिर घडल्ले से रन बनाने वााग्रह करना यदि मय में जीत रे आसार खत्म हो गए हो तो मैच ट्रा करवाने में लिए उसी ग से बल्लेबाजी करवाना आदि महत्वपूर्ण मुददा को कप्तान ही जिम्मेदारी से निभाता है। हार-जीत का फैसला जितना अच्छी बल्लेबाजी या गेंदबाजी पर निभर होता है, उतना ही पप्ता की कायगलता और सल-नीति पर भी निार होता है। कहा जाता है कि किट बांस का खेत है पर पिर भी घाट घेल और रणनीति का आयाजन मरत हुए पलान बनना
111
का रुख बदल सकता है। यहा गावम्बर का उदाहरण दिया जा सकता
है अब तक 47 टेस्ट मैचो मे भारतीय टीम का नेतृत्व करते हुए अपनी
कुशल सेल रणनीति से यह साबित कर दिया कि हार को न मे और
दा होते मच को जीत में कैसे बदला जा सकता है। उहाने कुल 47
टेस्ट मैचों में कप्तानी की जिसमे 9 टेस्ट जीते, 8 हारे और 30 टेस्ट
बराबर रहे।
कप्तान को खूबिया
एक गल रिकेट कप्तान को निरोधी टीम के प्रत्येक बिलाडी की
म्यूधियो और कमजोरियो से वाकिफ होना चाहिए ताकि वह उनकी
कमजोरियो स फायदा उठा सके और सूविया को दबा सकने की नीति
सपना सके।
वसे तो कप्तान को निणय करना अधिकार होता है पर एक
कुशल कप्तान को टीम के वरिष्ठ या हर उस खिलाडी से भी सलाह
लेनी चाहिये जो उचित बात कर रहा हो । एसे सहन्य पप्तान टीम
गालबे समय ता चना बना रहता है और अपने पिलापियो से इज्जत
चोर सम्मान पाता है।
मवट के समय सप्नान को अपग होस गुलद रखना चाहिए ताकि
टीम के खिलाडियो का मनोबा टूटने पाय और ये मत तक अपने
पेल का उत्कृष्ट प्रदर्शी करते रहें।
कप्तान मे गदि भिमान, सरर मा रखत अपनी ही नीति चलाने
का प्रयति रहता वह टीम का पुरसतृत्व ना पर मक्ता ।
दवानीको प्रति मे आसार TET पासडिग की जमावट
का हरा अनुभर होना गहिर भी वह ' नेतृत्व प्रकार
एका है।
112 विरोधी टीम का यदि कोई बल्लेबाज जमकर खेल रहा हो तो कप्तान को उसको कमजोरियो पर पनी दृष्टि रखनी चाहिए और उनसे कमजोरियो के पता लगते ही उनसे फायदा उठाने वाले बॉलर को बॉलिंग देकर उक्त कमजोरियों से अवगत करा देना चाहिए। कप्तान को विशेषत क्षेत्र रक्षण की व्यूह रचना का पर्याप्त अनुभव होना चाहिए । उसकी असली परख इसी मौके पर होती है। कप्तान को इतना दूरदर्शी अवश्य होना चाहिए कि वह पारी समाप्ति को घोषणा जसे जोखिम को सफलतापूर्वक उठा सके और उसके मुताबिक खेल नीति अपना सके। कप्तान का व्यवहार अपने सहयोगियो से मधुर और नम्र होना चाहिए ताकि टीम मे एकता कायम रह सके । टीम को एक्ता ही उसे सुदढ बनाती है। ये कुछ उपयुक्त गुण क्रिकेट कप्तान मे होने अति आवश्यक हैं तभी वह टीम का कुशल नेतत्व कर अच्छे से अच्छा प्रदशन अपनी टीम से करवा सकता है । कप्तान टीम को रीढ़ होती है जिस पर पूरी टीम अवलम्बित होती है। भारत के टेस्ट कप्तान भारत ने सन् 1932 मे अपना पहला टेस्ट मैच इग्लंड मे लाडस में खेला था। जिसमे भारत को हार हुई पर उसका खेल की दष्टि से प्रदशन सराहनीय पा । तब से लेकर अब तक भारत कुल 246 टेस्ट मच अय देशा के विरुद्ध घेल चुका है, इन टेस्टो का नेतृत्व 21 कप्ताना द्वारा किया गया। भारत के प्रथम क्रिकेट क्लान सी० के० नायडू थे। इन 21 कप्तानी मे सबसे सफल कप्ता सुनील गावस्कर को माना जाता है। भारतीय विमट टीम का सबसे अधिक नेतृत्व भी सुनील गावस्कर ने दिया। भारतीय टेस्ट कप्तानो या पूण पोरा बगले पृष्ठ पर दी गई तालिका से ज्ञात हो जाएगा- 113 टेस्ट जीते हारे, बराबर 0 3 0 2 1 0 1 2 6 7 1 5 8 0 1 5 0 2 1 2 2 4 0 0 1 0 4 . 1 सी० के० नायडू 4 2 महाराजा विजयनगरम 3 3 इफ्तिखारअलीखो पटोदी 3 4 लाला अमरनाप 15 5 विजय हजारे 14 6 वीनू माफ 6 7 गुलाम अहमद 3 8 पॉली उनीगर 8 9 हेमू अधिकारी 1 10 दत्त गायकवाड 4 11 पकज राय 1 12 जी० एस० रामचन्द्र 5 13 नरी का ट्रेक्टर 12 14 मसूर अलीखा पटौदी 40 15 पद्द बो 1 16 अजीत वाडेकर 16 17 श्रीनिवास वेंकटराघवन 5 18 सुनील गावस्कर 47 19 विशनसिंह बेदी 22 20 गुडप्पा विश्वनाथ 2 21 कपिलदेव 34 0 1 1 2 2 2 8 9 19 12 0 1 0 4 8 0 2 3 9 8 30 6 11 5 0 1 । 4 7 23 अध्याय-10 क्रिकेट में महिलाए भी पीछे नहीं इस बात का इतिहास साक्षी है कि महिलाओं ने उन सब कार्यों को भी बछूता नहीं छोडा जिहें उनके लिए असभव माना जाता था। युद्ध राजनीति, कुश्ती, पवतारोहण तैराकी, तलवारबाजी गोताखोरी, हवाई उडान, कार रेसिंग, कोई भी विद्या ऐसी नहीं छोडी जिसे वे न कर सकने के लिए अक्षम हों। तो फिर क्रिकेट तो उनके लिए कोई खास माने नही रखता । अय साहसी खेलों के साथ जिहे पुरुष के ही बूते का माना जाता था, क्रिकेट को भी महिलाओ ने अपनाकर यह साबित कर दिया कि वह बन पुरुषो से किसी भी रूप मे पीछे नहीं है। क्रिकेट से मर्दाने खेल को सभवत पहले इगलैंड की महिलाओ ने अपनाया । कटु आलोचनाओ और व्यग्यो के बीच भी महिलाओ ने क्रिकेट पेल बेसने के अपने उत्साह को बनाए रखा। सबसे पहला महिला क्रिकेट मंच 27 जुलाई 1945 को ब्राभले चोर हैवलीटन की महिला टीमो के बीचखला गया । यह मैच हजारो दर्शकों ने देखा और सराहा । इस मैच में हैवलीटन ने 127 तथा ब्राभले की महिला टीम ने 119 रन बनाए । इस प्रकार घोरे धीरे सारे इग्लैंड में महिला क्रिकेट लोकप्रिय होता गया। 11 जुलाई 1788 को केले ग्रीन में सरे की दो महिला विकेट टीमों में मप खेला गया जिसमे एस नारक्रास नाम खिलाडिन ने सबसे पहला शतक ठोसा। उसने 107 रन बनाए थे। उस समय प्रायः मंच विवाहित तपा अविवाहित महिला टीमों के बीच खेले जाते थे। सन् 1887 में पहले महिला क्रिकेट क्लब की स्थापना हुई जिसका नाम या म्हाइट हैदर'। शुख्यात मे इसमे श्वल 8 सदस्याए थी। दो 119 तीन वर्षों में ही यह सख्या बढ़कर 50 से ऊपर हो गई । इस सब की सबसे प्रसिद्ध पिलाडिन पी-सूसी रिडसहेल । सन् 1890 मे महिला विकेट को पूर्णरूप से स्वीकृति और पा समथन प्राप्त हुआ तथा उसे ध्यायसायिक रूप देने की योजना बनाई गई । इसके लिए 'दि ओरिजनल इग्लिश लेडी क्रिकेटर्स' नामक एसोसि- येशन का गठन दिया गया। इस बीच आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड आदि मे भी महिलाओ ने किट खेल मेचि लेना और मैच खेलना प्रारम्भ कर दिया। सन 1934 35 में इंग्लैंड की एक महिला क्रिकेट टीम ने आस्ट्रेलिया की महिला टीम के निमन्त्रण पर आस्ट्रेलिया का दौरा किया। इस दौरे मे इग्लैंड की टीम ने तीन टेस्ट मैप तथा 11 शो मैप खेले । मास्ट्रलिया से यह टीम न्यूजीलैंड पहुची। यूजीलैंड में वेवल एप टेस्ट मैच खेला गया जिसे इग्लेड ने ही जीता। आस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलते हुए इग्लह ने 2 टेस्ट मैच तपा 7 शो मंच जीते। 1935 मे महिला क्रिोट को ओवल में खेलने की अनुमति भी प्रिल गई। 1937 मे आस्ट्रेलिया की महिला टीम ने भी इग्लैट का दौरा दिया और पई मैच खेले। द्वितीय विश्व युद्ध के पारान महिला क्रिकेट की छवि कुछ धुधली पड़ गई । पर युद्ध के बाद पिर इसने जोर पपडा और 1948 में इग्लंड को महिला टीम आस्ट्रेलिया और यूजीलर के दौरे पर गई । आस्ट्रेलिया मे इसन 19 मे से 11 मैच जीते, एका में हार हुई तपा सात मैच बरावर रहे। न्यूजीतड मे आठ में से छह मैचो मे इग्लैट की टीम विजयी रही। 1951 मे महिला क्रिकेट संघ ने रजत जयती मनाई। इस वष न्यूजीलर की टीम ने इग्लेड का दौरा दिया। इस मौके पर भास्ट्रलिया की टीम को भी निमत्रित किया गया। 1969 मे इग्नह के क्रिकेट सगठा ने एक पक्षीय विकास योजना की शुरूआत को । योजना के अतर्गत कई तरह के सुधार और मेवो के आयोजन किए गए। तय से लेबर आज तक महिला क्रिकेट को लोकप्रियता बढ़ती ही गई । और आज इषड, यास्ट्रेलिया, न्यू जीलड, बेस्टइगेम तथा मारत यादि शो ने महिला क्रिकेट को बढावा देने के लिए निर तर टस्ट मैचो - .
116 फा थायोजन परने का दृढ़ निश्पय कर अपना विशेष योगदान दिया 1973 मे विश्य प्रतियोगिता के आयोजन से महिला विकेट की नीय पुस्ता हो गई। इस प्रतियोगिता मे आस्ट्रेलिया, जमका, यूजीतह, ट्रिनीडाड, इग्लर तथा अन्तर्राष्ट्रीय एकादश बादि टीमों ने भाग लिया। फाइनल मे इग्लेह और आस्ट्रेलिया का मुकाबला हुआ जिसमे इग्लैंड ने 92 रन से विजय प्राप्त की। भारत में महिला विकेट भारत में सबसे पहले क्रिकेट की शुरुआत भास्ट्रेलिया की एर स्कूल अध्यापिका ने की जिसका नाम पाएन केसीव ने 1913 में उहोंने अपने स्कूल में महिला निकेट टीम बनाई। लेकिन उनके प्रयोग को उस समय प्रोत्साहन नहीं मिला। पर विकेट खेल की लोकप्रियता को महिलागों मे विकेट के प्रति रुचि तो बढ़ ही रही थी और यदा-कदा छात्राए क्रिकेट स्कूल और कालेज स्तर पर खेलने लगी। सन् 1973 में 'राष्ट्रीय महिला क्रिकेट सगठन' की स्थापना हुई। इसी वष पूना में पहली राष्ट्रीय क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में पाच राज्यो की महिला क्रिकेट टीमो भाग लिया । महाराष्ट्र और बम्बई की टीमों के बीच फाइनल मुकाबला हुमा । इसमें बम्बई की टीम ने विजय प्राप्त की। 1975 में आस्ट्रेलिया की महिला टीम भारत माई । आस्ट्रेलिया ने भारत के साम तीन टेस्ट मैच खेले । इन टेस्ट मैचों में भारी भीड हुई। पहले टेस्ट के लिए उज्ज्वला निगम, दूसरे के लिए सुधा शाह और तीसरे टेस्ट के लिए पीरूपा दोस को कप्तान बनाया गया। इस घसा में शांता रगास्वामी भी आलराउण्डर के रूप में उभर कर आई। वह भारतीय महिला निोट की एक आधार स्तम्भ बन गई । भारत की ओर से उसने शतक जमाया। 1976 मे न्यूजीलर की महिला क्रिकेट टीम मारत बाई। इसमें पांच टेस्ट मैचों की शृखला मे न्यूजीलैंड 1-0 से जीती। चार मय छा रहे । इन दोनों मची से महिला किटोरही लोकप्रियता मिनी। सभी मनों का रेडियों से लाखों देखा हाल प्रसारित किया गया। कभी 117 चक अन्य किसी देश ने आंखो देखा हाष प्रसारित नहीं किया था।' 1976-77 में येस्टइडोज की टीम ने छह टेस्ट मैच भारत में खेले। चैस्टइडीन और भारत 1-1 से बराबर रहे । 1977 में भारत की महिला टीम पहली बार न्यूजीलैंड के दौरे पर गई। यहां केवल एक टेस्ट हुआ जो वराबर रहा। फिर आस्ट्रेलिया के एक टेस्ट मैच हुआ जिसमे आस्ट्रेलिया की टोम विमयी रही। भारत की शांता रगास्वामी एक अन्यल दर्जे की आलराउण्डर हैं। डायना ऐडल्गी, मिला चक्रवर्ती तथा राजेश्वरी बोसरिया तीनो ही बाप हाप की गेंदबाज हैं । डायना मध्यम तेज तथा स्पिन दोनों प्रकार की पॉलिंग करने में माहिर है। फौजिया खलोली श्रेष्ठ विकेटकीपर से साथ-साथ एक अच्छी बल्लेयाज भी है। 1977 मे आई वेस्टइंडीज टीम के साथ मैच खेलने के दौरान ही शता रगास्वामी ने अपो जीवन के एक हजार रन पूरे कर भारतीय महिला क्रिकेट इतिहास के स्वर्ण युग की शुरूआत की। भारत में 'रानी शासी ट्राफी तथा 'इदिरा प्रियदर्शिनी ट्राफी' मषों का प्रारम्भ हो गया। इन दोनो टूनमिटो में देश के विभिन्न क्षेत्रों से महिला क्रिोट टीमे आकर भाग लेती हैं। 1977 78 मे भारत में महिला विकेट विश्व कप का भी यायौवन किया गया। विश्व क्रिकेट में भारत का प्रदर्शन सबसे ज्यादा निराशाजनक रहा। यस देशों से स्वीकृति मिलने के बावजूद इसमे केवल आस्ट्रेलिया, इग्लश, न्यूजीलैंड और भारत ने ही भाग लिया। फलकत्ता मे इग्लैंड भारत के मध्य हुए मैच में भारत कुल 63 ल बनाकर ही आउट हो गया जबकि इग्लैंड ने एक विकेट खोपर 65 रन बनाकर मंच विकेट से जीता। पटना मे हुए भारत न्यूजीलैंड के मध्य हए मैच में भी भारत को लगभग इसी अन्तर से पराजय का मुह देखना पड़ा । निराशाजनक प्रद- बॉन कहने का कारण यह है कि पिछले मंचो में भारत ने आस्ट्रेलिया, न्यूजील तथा वेस्टइंडीज की टीमों से लगभग बराबरी की टक्कर सी थी और उसका प्रदर्शन काफी माशाजनक रहा था। इस निराशाजनक प्रदशन का एक मूल कारण यह मवाया गया oि 118 भारतीय शिट बिलाहिने पो व्यवस्थापकों से काफी माषश पी। विमेंस क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ इल्यिा की बागडोर केवल एक ही व्यक्ति के हाप में पी को अपनी सारु मोर हठवादिता के लिए मशहूर है । उनका रदया बिलाटिनो के साप सभी सहयोगी भावना का नहीं रहा । सुविधागो के नाम पर रहें हर जगह तकलीफें उठानी पड़ी। प्रसिद्ध आलराउण्डर तांता रगास्वामी ने जब 'पैडरसफसका स्वागत किया और उसे पिलाडिनों का सबसे पठा हितचिंतक कहा तो व्यवस्थापक महोदय ने 1978 के विश्व कप का तयारी की पटियाला शिविर में उसे मामत्रित नहीं किया। कुछ भय खिलाडिनो के साथ भी वैसा ही सलूक दिया गया । पुछ बिलाडिनो को तो अपनी सनक के वशीभूत हो उन सज्जन ने शिविर से वापस चले जाने को कहा। यदि पिलामो कोई अपनी निजी राय जाहिर करता है तो उसके लिए उसे दंडित किया जाना कहाँ र न्यायसगत है । तभी से महिला क्रिकेट मे एक वेयनी और तनाय पा आ गया जिससे बहुत-सी अच्छी क्रिकेट खिलाडिनों को समय से पहले हो अस्त हो पाना पहा जबकि के क्षा के लिए एक उगता हुआ सूरज साबित हो रही थी। महिला क्रिकेट एसोसिएशन का कार्यभार किसी महिला को ही सभालते रहा चाहिए।
अध्याय-11 भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड भारतीय क्रिकेट कट्रोल बोर्ड की स्पारना बडे अजीबोगरीब हग से 'बोड की स्थापना मे महाराजा पटियाला, महाराजाविजयनगरम उर्फ "विग्जी', नयाब भोपाल, महाराजा इदौर, यातायात कम्पनी (इंगमंड) के मालिक आर. ई. ग्रांट गोवन और कम्पनी के महाप्रबन्धक ऍपनी डिमलो का प्रमुख हाप रहा है। पर इनमे भी सबसे प्रमुख भूमिका दो व्यक्तियों ने निभाई, जिनके अथक परिश्रम के बस पर ही आज बोर्ड इस सुदृढ स्थिति में विद्यमान है-~-वे हैं ऐंपनी डिभैलो तथा महाराजा पटियाला । बोह का लगभग पूरा ढाचा ऍपनी हिमलो ने तैयार किया था। भारत को अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट की पक्ति मे बैठाने का कार्य भी ऐपनी द्वारा ही हुआ था। बोड को स्वीकृति प्रदान सभी की जा सकती थी, जब विभिन्न प्रदेशो से कम से कम दस क्रिकेट सगठन इसके सदस्य होते। यह महत्वपूर्ण और पेचीदा कार्य भी ऐपनी ने प्रदेशों में धूम घूमकर किया, क्योंकि वापसी रजिश, छोटे बडे का भेदभाव, भाई भतीजावाद, ईर्ष्याभाव आदि के कारण सगठनों का गठन नहीं हो पा रहा था। हिमलो ने इस क्षेत्र में भी अपना सराहनीय योगदान दिया और जगह-जगह सपठन कायम करवाए । महाराज वियागर सफ विज्जी ने भी इस दिशा में काफी सहयोग दिया। वे स्वय एक अच्छे त्रिवेट खिलाडी, कमेंटेटर और क्रिकेट सपालक थे । किट कट्रोल चोड की स्थापना और गठन के सम्बन्ध में भारतीय राजपरानो की भी वही महत्वपूर्ण भूमिका रही है। स्वतत्रता प्राप्ति के बाद क्रिकेट कट्रोल बोर्ड राजघरानों की छाया से निपसार औद्योगिक घराना के नियंत्रण में आ गया। इसमें प्रमुख ।
120 माम हैं एम० ए० पिदम्बरम, मफतलास, ए. सी० पी० टाटा, निरलान फा का बैकों ने भी खिलाडियों के हित के लिए बोर बढ़िया प्रदर्शन हेइ प्रोत्साहन के लिए अपना सहयोग दिया । इसरो खिलाडियों का मनोवस काफी बढा और में बार्षिक दृष्टि से बेफिक्र होकर अच्छा प्रदर्शन परने के प्रयल करने लगे। भारतीय क्रिकेट कट्रोल बोर्ड के सदस्यो की सम्मा भी दिनो दिन बाने सगी-और वह पूर्ण रूप से परिपक्व हो गया। अब बोड का ध्यान बिसारियों के हित के लिए, बढ़िया प्रदर्शन, उनके अभ्यास के नवीनतम साधन पुटाकर खिलाडियों की पूरी तरह से देष रेख करने लगा। पोरंकी कई अटियो को दूर किया गया ताकि अपने तहत रहने वाले विनारियों को यह सुदृढ़ निर्देशन दे सके । भारतीय क्रिकेट में बोड ने मन्तर्राष्ट्रीय नियमो के अनुसार कई महत्वपूर्ण परिवर्तन किए। उसने स्कूल व फलिज मे भी किोट पेस को बढ़ावा देने में पूर्ण सहयोग दिया। दोहारा सघालित 'सी० के. नायडू पम्पिनक्षिप' में स्कूल के 22 वर्ष से कम उस पिलगियों को देखने का मौका मिलता है। इसी वर्ग में 'कूध विहार ट्रॉफी' भी आती है। इसी तरह 14 वर्ष से कम आयु के किशोर खिलाडियो को "विजय मटे ट्रॉफी' मे खेलने का मौका मिलता है। इन प्रतियोगिताओ के मायोजन से देश को नये प्रतिभावान खिलाड़ियों को चुनने का मौका मिलता है। गावस्कर, किरमानी, कपिलदेव, करजन घावरी आदि खिलाडियो पर बोर्ड की नजर स्कूली प्रतियोगिताबो मे ही पह गई पी और उसने हें अपनी देखरेख में प्रशिक्षित करना और प्रोत्साहित करना आरम्म कर दिया। इस समय वोह के पायो क्षेत्रों-मध्य, उत्तर दक्षिण और पूर्व, परिषम मे एक-एक राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त प्रशिक्षक नियुक्त हैं। मुख्य राष्ट्रीय प्रशिक्षक के रूप में प्रसिद्ध क्रिकेट खिलाडी हेमू अधिकारी है। इन अनुभवी प्रशिक्षको से नये प्रतिभावान खिलाड़ियों को उनकोटि का तकनीकी ज्ञान प्राप्त होता है। किकेट कद्रोस पोर का हर हास गठन किया जाता है और मतदान प्रणाली से पदाधिकारियो का धुनाव होता है। रणजी ट्राफी खेलने वाले सभी राज्य, रेखदे क्रिकेट सब, सेना के किोट पहन, कलरत्ता और 121 यूनिवर्सिटी स्पोर्टस कंट्रोल बोर्ड आदि के प्रतिनिधि भारतीय क्रिकेट याट्रोल बोर्ड के पदाधिकरियो को चुनते है। क्रिकेट कट्रोल बोर्ड को अम्पायर समिति अम्पायरो को प्रशिक्षित कर प्रथम श्रेणी और टेस्ट मैचो मे अम्पायरशिप करने के लिए तयार करती है। इस प्रकार बोर्ड का गठन पूर्ण रूप से लोकतात्रिक प्रणाली से होता भारतीय राष्ट्रीय टीम के खिलाडियो का चुनाव भी बोर्ड को चयन समिति द्वारा होता है। घयन दो पहलुओ पर ध्यान रखकर किया जाता है । पहला खिलाडी फे 'फॉर्म' को मद्दे नजर रखकर, दूसरा खिलाडी के 'क्लास' को दृष्टि रखते हुए । खिलाी फाम में है या नहीं, इसका पता तो उसके ताजे पाकड़ों से पल जाता है। खिलाडी को बल्लेबाजी का औसत 50 रन से ज्यादा होना चाहिए तभी वह दृढ बल्लेबाज माना जाता है । इसी प्रकार गेंदबाज एक पारी मे तीन या चार से ज्यादा विकेट कम-से कम रन मे प्राप्त करे यही अच्छे स्तर का गेंदबाज हो सकता है। दूसरे 'क्लास' खिलाही चुनने के लिए चयन समिति की दृष्टि बडी पनी होनी चाहिए। अब हम आपको बोड के यतमान सदस्यो तथा बोड की वतमान समितियो के बारे में बताएगे । साथ ही बोर्ड के पदाधिकारियो के धर्ग भी। बोड मे एक अध्यक्ष, धार उपाध्यक्ष, मानद सचिव, सयुक्त सचिव कोषाध्यक्ष होत हैं। इसके अतिरिक्त भारतीय विकेट कट्रोल बोट मे इस समय दस समितिया है जो निम्न प्रकार हैं- 1 पायकारिणी समिति-मह समिति बोड के दनिक कार्यों को देखभाल करती है तथा बोर्ड की व्यापक नीतियो पर निणय लेती है । बोड के अध्यक्ष इस समिति के चेयरमन होते हैं। बोड के कोषाध्यक्ष तथा संयुक्त सचिव इसके सदस्य होते हैं । बम्बई क्रिकेट एसोसिएशन, क्रिकेट आफ बगाल तथा तमिलनाडु एसोसिएशन कायकारिणी के स्थाई सदस्य हैं। इसके अतिरिक्त पाष मय क्षेत्रो तथा छह टेस्ट सेन्टरों से एक एक प्रतिनिधि भी समिति का सदस्य होता है । कहने का तात्र- कार्यकारिणी समिति मे हर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व होता है। 2 चयन समिति-बोह द्वारा मायोधित विविध क्रिकेट मंचो के लिए टीम का पनाव करती है । इस समिति में पांचों क्षेत्रो-मध्य, - 122 पश्चिम तया उत्तर, दक्षिण से एक-एक प्रतिनिधि चुना जाता है । उन्ही में से एक को चेयरमैन चुन लिया जाता है । 3 सहायताप कोष समिति-इस समिति का काय कोष जमा फरना और उसके वितरण की नीति निर्धारित करना है । बोड के अध्यक्ष हो इसके चेयरमैन होते हैं। इसके अतिरिक्त कोषाध्यक्ष तथा फतेहसिंह गायकवाह और ए० एन० पोप इस समिति के ट्रम्टी हैं । चार अन्य सदस्य भी हर साल चुने जाते हैं जो किसी भी भाप एसोसिएशन के हो सकते हैं। 4 तकनीकि समिति यह समिति क्रिकेट नियमों के बारे में स्पष्टीकरण देती है अथवा परिवर्तित नियमों को एम० सी०सी० से प्राप्त कर उहें लागू करती है । इसमे पाचों क्षेत्रों-उत्तर, दक्षिण, मध्य और पूर्व, पश्चिम से एक एक प्रतिनिधि तथा एक अतिरिक्त चेयरमैन होता है। इन नियमों को बोड के सभी सदस्य प्रदेशों के क्लबों तक लागू करना और उसकी पूरी जानकारी देना इस समिति का मुख्य काय है । 5 रणजी ट्रॉफी समिति--रणजी ट्रॉफी के टूर्नामेंटो के सुचारु रूप से सपालन का काय इस समिति के जिम्मे होता है। बोर्ड के अध्यक्ष इस समिति के चेयरमैन तथा हर क्षेत्र का एक-एक प्रतिनिधि इसका मेम्बर होता है। 6 विज ट्राफी समिति—यह समिति 'वित्री ट्रॉफी' मचो (महा- राजा विजयनगरम) के आयोजन का सचालन करती है । इस समिति में मे भी बोर्ड के अध्यक्ष घेयरमन तथा प्रत्येक क्षेत्र का एक एक प्रतिनिधि सदस्य होता है। 7 प्रशिक्षण समिति-क्रिकेट के नये प्रतिभावान खिलाडियों को प्रशिक्षण देने का काय यह समिति करती है। इस समिति के अन्तगत प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन, नये खिलाडियों की खोज तथा टीम को किसी दूर्नामेंट में भेजने से पूर्व उपकी शारीरिक क्षमता का विकास करना भी इस समिति का काय है। इसमें भी पांचों क्षेत्रों का एक एक प्रति निधि तपा एक अतिरिक्त पेयरमन होता है। 8 कायक्रम निर्धारण समिति इस समिति का कार्य टूर्नामेंट के वायोजन की तारीफें और स्पान धुनना है । राष्ट्रीय सपा अन्तर्राष्ट्रीय (टेस्ट मंध) मचों के आयोजन की तिथियों का ख्याल इस समिति को 123 रखना पड़ता है । इस समिति के चेयरमैन भी बोर्ड के अध्यक्ष होते हैं तथा बोड के सदस्य एसोसिएशन से ही सात प्रतिनिधि चुन लिए जाते 9 अम्पायर समिति-इस समिति का काय विमिन मंचो के सिये अम्पायर नियुक्त करना, उनकी परिक्षाए आयोजित करता तथा उनके प्रशिक्षण की व्यवस्था करना है । इस समिति मे पापो क्षेत्रो के एक एक सदस्य तपा एक अतिरिक्त चेयरमैन प्रतिनिधि होता है। 10 सांख्यिकी समिति-इस समिति का काय विभिन मंचो मे खिलाडियो द्वारा बनाये या तोडे गए कोतिमानो तथा आकडा का सकलन करना होता है । इन आंकडो और कोतिमानो का रिकाड रखने का मुख्य काम इस समिति द्वारा होता है। इस प्रकार उपर्युक्त दस समितिया अपने-अपने कार्यों का कुशलता से निर्वाह कर क्रिकेट कंट्रोल बोड के काय सचालन में सहयोग देती हैं। बोड की सफलता का दारोमदार अधिकतर इन समितियो पर ही निभर होता है।
अध्याय-12 क्रिकेट के कुछ शब्दार्थ । क्रिकेट एक ऐसा खेल है जिसे जानने वाले या न जानने वाले दो ही प्रभावित रहते हैं । कमेट्री के दौरान जब कमेटेटर कुछ ऐसे शा का उच्चारण करता है जो कमट्रो सुनने वाले की समझ से गाहर हो उसका आधा मजा वही किरकिरा हो जाता है। बहुत से लोग ऐसे शव के नाम से तो परिचित होते हैं पर उसके सही अप का नही जानते । पर सही बात तो यह है कि यदि आपको किसी सेल से प्यार और बाप उसे खेलने या देखने का शौक रखते हैं तो थापको उस सेल एक एक बात से पूरी तरह परिचित होना चाहिए ताकि खेल का सच आनद उठाया जा सके। एक बार मेरे सामने ही ऐसा हास्यस्पद वाक्या पेश हुआ। हुमा । कि एक सज्जन क्रिकेट मेट्री सुन रहे थे। तभी कमेटेटर की आया सुनाई दी, 'और इस तरह बल्लेबाज को दो रन बाई के प्राप्त हुये बाई का नाम सुनते ही पास खड़े उनके लडके ने पूछा-पिताजी, बाई क्या करता है ? पिताजी तपाक से बोले-~-'बाई वो होता है जिसमे बल्लेबाज व रन मिल जाते हैं।' तो धाप ऐसी हास्यास्पद स्थितियों का शिकार होने से बचिए भी क्रिकेट की हर बात, हर अदा से परिचित होकर उसका वास्तविक मानन्द लीजिए। तो आइये, कुछ ऐसे प्रचलित शब्द जो क्रिकेट के नियमों, बल्लेबाजी गेंदबाजी मा क्षेत्र रक्षण से सम्बन्धित हैं, उनका सक्षिप्त अथ आपक बताए। बाउट स्विगर-हवा मे तरती हुई वह गेंद जो बल्लेबाज के ले। साइड की और से उसके आफ साइड की ओर कटती है, याउद स्थिगन कहलाती है।
125 स्टोन बालिग-रक्षात्मक ढग से सेलने वाला वह बल्लेबाज जिसका उद्देश्य रन बनाना नहीं बलि धमय काटना होता है । सडीज-अतिरिक्त रनो के लिए जैसे 'एक्स्ट्रा' शब्द का प्रयोग किया जाता है उसी तरह आस्ट्रेलिया में 'सड्रोज' शब्द का प्रयोग किया जाता है, अर्षे दोनो का एक ही है। पसागर-उस बल्लेबाज के लिए ध्यग्य रूप में इस्तेमाल होता है, जो बल्लेबाजी तो करता है पर रन बनाने का जोखिन नहीं उठाना पहाता । लांग हॉप-खराब लेंग्य की गेंद जिसमा टप्पा ऐसी कम दूरी पर माफर पडता है कि बल्लेबाज को आगे डग भर कर उस पर भरपूर प्रहार करने का मौका मिल जाता है। नेल्सन-जब बल्लेबाज को गेंद फेंकने वाले गेंदबाज की केवल उठती बहि दिखाई देती है तो इसे नेल्सा कहा जाता है । नेल्सन दर- पसल एक एडमिरल का नाम था जिसकी एक बाख और एक बाह थी उसी के आधार पर गेंदबाज की जब पीछे की बाह न दिखकर गेंदेवाली उठी वाह दिखती है तो ऐसी स्थिति को नेल्सन कहा जाता है । एकर मैन - वह बेटसमैन जो रन बनाने की कोशिश मे नही रहता बल्कि किसी तरह वह मैदान मे टिका रहे जबकि उधर उसका साथी जोखिम उठाकर भो रन बनाने की कोशिश में लगा रहता है। चाइनीज कट-बल्लेबाज के बल्ले से गेंद छूती हुई उस दिशा की घोर नहीं जाती जिधर वह खिलाडी उसे पहुचाना चाहता था। हैरोडाव-ऐसा शॉट जिसके मारने से गेंद उस स्थान पर गिरे जहा उसकी कतई उम्मीद नहीं थी। किंग पेपर-जब कोई बल्लेबाज किसी मैच की दोनो पारियो में पहली ही गेंद पर आउट हो जाता तो उसे "किंग पेयर' नाम की सजा दी जाती है। जेक पेयर-टीम का बह ग्यारहवा खिलाडी जो किसी मंच की दोनो पारियों में दिना ले बनाये ही आउट हो गया हो 'जेक पेपर' पहलाता है। साइट स्क्रीन-दबाज के ठीक पीछे एक बड़ा सफेद पर्दा (स्कीन) लगा होता है जो सफेद होता है या सफेद रंग से पोत दिया जाता है। इसी तरह का पर्दा बल्लेबाज के पीछे मैदान में भी लगा। sh 126 का उद्देश्य यही होता है कि लाल गेंद फेंकने की स्थिति में साफ दिखाई दे सके । इस प्रकार स्त्रीन लगा देने से दर्शको के रग विरगे पडो मे बल्लेबाज फो गेंद के रंग का भ्रम पैदा नहीं होता और गेंद साफ दिखाई देती है। वीमर-गेंदबाज द्वारा फेंकी गयी ऐसी गेंद जो विना टप्पा साए बल्लेबाज के सिर या चेहरे पर आ रही हो, 'बीमर' पहलाती है। वाकिंग अप-जब गेंदबाज गेंद फेंकने की बिल्कुल स्थिति मटाता है तो उसके छोर पर खडा बरलेबाज रन लेने के उद्देश्य से तैयार होकर एक दो कदम आगे बढ जाता है । ऐसी स्थिति को बैंकिंग अप कहा जाता है। यानी रन लेने के लिए तैयार रहने की स्थिति । म्लाक होल-अम्पायर से आदेश या गाड लेकर बल्लेबाज जो अपनी में अपने बल्ले के लिए जो गहरा निशा बनता है, उसे ब्लाक होल कहा जाता है । यम पाल-जब गेंद बल्लेबाज द्वारा बल्ले से प्रहार द्वारा जमीन से लगकर उष्टलती है तो एसी वाल को बमवाल कहा जाता है । कभी कभी तेज गेंद जब बल्ले से टकराकर जमीन से उछलती हुई विणी दिशा में तेजी से जाती है तो यह भ्रम हो जाता है कि गेंद बल्ले से टकराकर सीधी उछली है। यदि ऐसे में कोई क्षेत्र रक्षक गेंद को लपक ले तो निणय देना कठिन हो जाता है। गैद जमीन से लगकर उछली है या नहीं। सही निणय अम्पायर को सतकता और तीव्र दष्टि पर निभर होता है। गुगली, योसी-दाए हाप से लेग नेक गेंदबाज द्वारा पूरी कलाई घुमाकर फेंकी गई ऐसी गेंद जो पूरी फलाई के घूम जान से आपक हो जाए, गुगली या बोसी कहलाती है। घाई -जब गेंद गेदवाज द्वारा फेंकी जाप और वह वरले पा बल्ले बाज को कही न लगी हो तथा विकेटकीपर भी उस गेंद पो न रोक पाए तो ऐसे में दिए गए रन बाई' कहलाते हैं। और गेंदबाज द्वारा फेंकी गयो गेंद बल्ले या वल्लेबाज के हाथो पर न लगकर पर या मय जगह सगकर जाए तो ऐसे में बने रन 'लग बाई' पहलाते हैं। स्टास-जब बल्लेबाज विकेट के सामने अपना बल्ला रपार अपने यह होने की पोजिशन लेकर परा होता है तो इस स्पिति को स्टास 127 चहते हैं । अर्थात् बल्लेबाज की विकेट के सामने बल्ला रखकर खड़े होने की स्थिति। आस्ट्राक्टिग व फोर-बल्लेबाज द्वारा फील्डिंग में व्यवधान डालना या किसी फील्डर को अपशब्द कहना: इस नियम के उल्लघन मे बल्लेबाज को आउट घोषित किया जा सकता है। मेडन प्रोवर-यदि किसी गेंदबाज के पूरे ओवर मे बल्लेबाज एक भी रन न बना पाए तो ऐसे मओवर को मेडन कहा जाता है। कीज-क्रिकेट की 22 गज लम्बी और 10 फुट चौडी पिच के दोनो छोरो पर लगे विकेटो के चारा ओर एक निश्चित दूरी पर आयता- कार क्षेत्र लाइनो से रचा होता है जिसे क्रीज कहते हैं। बल्लेबाज इसी नोज म रहकर बल्लेबाजी करते हैं । यदि श्रीज से बाहर भी हो गए तो उहें तुरत श्रीज में आना पडता है वरना गद से स्टम्प उडाकर उसे आउट किया जा सकता है। इसी प्रकार गेदबाद भी क्रीज के अन्दर से ही बोलिंग कर सकता है । यदि वह इसका उल्लघन करे तो नो बॉल' का शिकार हो सकता है। क्रीज बोलिंग कोज, पापिंग बीज तथा रिटन क्रीज आदि नामो से रेखाक्ति होती हैं। टास-दोनो टीमो के कप्तानो के बीच अम्पायर को उपस्थिति में सिक्का उछालकर टॉस किया जाता है । जो कप्तान टास जीतता है वहीं निणम करने का अधिकारी होता है कि पहले बल्लेबाजी करे या गदवाजी। उक-जब कोई बल्लेबाज बिना रन बनाए ही माउट हो जाता है तो उस 'डक' आउट होना कहा जाता है । हाफ मॉली-गेंदबाज द्वारा फेंकी गयी गेंद बल्लेबाज के इतने निकट टुप्पा खाए कि गेंद के उछलते ही वह एक पैर बढ़ाकर उसके अधिक उठने से पहल ही शाट मार दे। यल फलाइटेव बॉल-यदि गेंदबाज गेंद को हाथ काफी ऊवा उठा- कर घुमाकर फेंकता है तो गेंद हवा मे देर तक उडती है । हाई ट्रेजेक्टरी-अच्छी मान याली गेंद वाहवा मे पथ धनुषाकार होता है । इसमे गेंद पाईसक उठती हुई धोरे धोरे नीचे गिरती है ।
128 सो देखाटरी- जब गेंद को अपेक्षाकृत कम कपा हाप करके फेंका जाता है तो इसका हवा में उडान पप सीधा सपाट रहता है। ऐसी गेंद हवा में देर तक उडान नहीं लेती । इसे लो ट्रेजेक्टरी बोल कहा जाता लिबरेट पलिंग-जब गेंदबाज द्वारा फेंकी गयो गेंद को बल्लेबाज बाले से खेलने का प्रयत्न न करके उसे जानबूमकर पंड से मार कर-- 'लैग बाई' का लाभ उठाने की नीयत से रन लेने की कोशिश करता है तो अम्पायर रन नहीं मानते । ऐसी स्थिति को हलिबरेट पडिग' कहा जाता है।
विश्व के कुछ प्रमुख नये-पुराने सिफेट खिलाडी भारत फपिल देष जमायरी 1959 पपिस देय ने जिस तेजी के साप विश्व क्रिकेट में अपने कदम बढ़ाये हैं वे किसी भी दूसरे खिलाडी के लिए ईष्या का विषय हो सकते हैं। उहोंने टेस्ट विकेट के जिन कीर्तिमानी को भग किया है ये उनकी पदभुत मालराउण्डर क्षमता को प्रवट करते हैं। कापिस ने अपा। पहला टेस्ट पारिस्ताा के मिरत फैसलाबाद में 16 माटूबर 1978 को रोला पा। सब से रोकर कपिल ने बल्ले व गेंद से कई कतिमान स्थापित किए हैं। वह भारत के एपमान ऐसे मालराठउर है जो अब तक 3000 से अधिक रन और 300 से अधिक विकेट ले चुके हैं। सबसे कम समय भ डबल 100 विकट और 1000 रलदेवल 25 टेस्टों मे बनाया जो कि एक रिकार्ड है । उन्हें विस्डन मे सम्मान सन् 1983 मे, अजुन पुरस्कार 1980, पदमश्री 1981 मे मिला। सुनील गावस्कर जाम 10 साई 1949 लिटिल मास्टर नाम से विख्यात सुनील गावस्कर आज विश्व के पोटी के बल्लेमाज बन गए हैं। उन्होंने अपने टेस्ट करियर में इसने रिकार बना डाले हैं कि अगर उनके रिफाहों पर एक पुस्तक भी छाप दी जाए सो यह भी छोटी रहेगी। अब तक विश्व के 110 वर्षों के लम्बे इतिहास पर एक निगाह गाली जाए तो अब तक का सर्वोत्तम खिलाडी पा बल्लबाजी के बादशाह का खिताद गावस्कर के पास है । शायद रिफाओं का दूसरा नाम ही गावस्कर है। तो आइए सगे हापों गावस्कर ये मुछ रिकाहों पर एक नजर डाल ली पाए । गावस्कर अब तक 130 10,000 से अधिक रापता एके है, उन्होंी 34 पराक और 45 मत मारान यगाए है। भारत की मोरसे मधिकतम टेस्टो मे कप्तानी फरन का पौरय हैं प्राप्त है। यह भय यफ मधिदराम शतकीय सालेदारियां 58 फर पुके हैं। रविशार धास्ती घम 27 गई 1962 फपिल देव के बाद रवि शास्त्री भारत पासपरो पेहतरीन बालरा उपर है। टेस्ट विकेट में शास्त्री गुरुस्य एक सिार के रूप में पाया पा पर भाग यह एक ऐसा बल्लेबारा गया है जो उपयोगी गेंदबाजी भी कर लेता है । उहें भारत के गादीवारे रूप में देखा जा रहा है। पास्ट्रेलिया के विष पैभियारिमा सिंट में शानी को चैम्पियन आफम्पियन्स रे पिता से सम्मानिस दिया गया था। यो पहले ही टेस्ट में शारनी ? एक योदर गे4 गेंद में 3 दिएट लिए । पा 1984 में उन्हें म । पुररकार से भी सम्मावि दिया गया था। 54 टेस्ट, 79 पारी 2463 रन । मोहिन्दर टागरनाथ जना 24 सितम्बर 1950 मोहिन्दर जगरनाप टेस्ट टीम में एक रोज मैदवार के रूप मे आया पा बोरमाय वह भारतीय टीम का सबसे अधिक भरोसे का बल्लेबाज पन गया है। 1982 83 के बाद से मोहिदर अमराप भारतीय बल्ले मानों का मुख्य आधार बने हुए हैं। वह माला अमाप (भूतपूर टेस्ट पिसाठी) के पुत्र हैं। इनके भाई सुरेद्र ममरनाय मो मो टेस्ट क्रिोट ऐसने गौरव प्राप्त है। मोहिन्दर अमरनाथ का सबसे बड़ा गुण उना सयम गौर हिमन गरी बल्लेबाजी है इसी कारण उन्हें सन् 1984 में विस्हन में सम्मान दिया गया पा, इस मतिरिक्त सन 1982 में भारतीय सरकार र अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित पर पड़ी है। 66 टेस्ट, 108 पारी कुल रन 4321, यौसत 44751 131 दिलीप वेंगसरफर सम्म 6स 1956 भारत द्वारा प्रस्तुत किए गए सबसे बेहतरीन बार पाकर्षक बल्ले- चाबों में से एक वैगसरकर है। बैंगसरकर ने टेस्ट क्रिकेट में कई बेहतरीन पारियो सेमी है पर गावस्कर और विश्वानाप जैसे बिसादियों के साप पेलने के कारण उसे कभी उतनी सारीफ नहीं मिसी-सिवनी कि मिलनी पाहिए पी। वैगसरकर जय अपने रग मे हो तो पहत पाकर्षक स्टोप लगाते हैं। सराव पिचो पर भी उहोंने कई यढ़िया पारियां ही हैं । यह भारतीय क्रिकेट से जुड़े किसी भी विवाद में नहीं फसे-इसलिए शास्त्री को षव उसका हक मारकर पम्बई का कप्तान बनाया गया तम भी बैंगसरकर ने रोई नाराजगी जाहिर नहीं की । लार्डस के मैदान पर यह वीन पातक बनाने वाला एकमात्र भारतीय बल्लेयाष है। 95 टेस्ट, 153 पारिया, 5951 रन, औसत 44741 मोहम्मद अजहरुद्दीन मग फरपरी 1963 1984 85 सत्र में अजहरुद्दीन तहलके के स्प में भारतीय क्रिकेट पर छा गया था। इग्लण्ड के विरुद्ध बसा मे अजहरुद्दीन 3 टेस्ट ऐसा और उसके स्कोर पे-110,48 १६ 105, 122 एव 54 नाट भाउट। इन शानदार स्कोर से अजहरुद्दीन ने अपने पहले तीन टेस्टो में लगातार 3 शतक बनाने का पदभुत रिकार बनाया। श्रीलका झी याना के दौरान अजहरुद्दीन बुरी तरह से असफल रहा । लेगिन उसके बाद फिर उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में कई शानदारपारिया खेली। उनका अब तक का उच्चतम स्कोर 199 रन है । भारत को अब भी भविष्य में उनसे कई अच्छी पारियो की उम्मीद है । 21 टेस्ट, 31 पारिया, 1461 रन, औसत 52131 सयद किरमानी मम 29 दिसम्बर 1949 100 शिकार तपा 1000 रन बनाने वाला एकमात्र भारतीय विकटकीपर । देश में उपलब सर्वश्रेष्ठ विकटकीपर है। भारत भाभी तक उनके मुकाबले का कोई विष्टकोपर नहीं ढूढ़ पाया है । बाल कट 132 वाने के बाद आस्ट्रेलिया की यात्रा करना किरमानी की सबसे बड़ी इण्डा पी और सम्भवत उनकी यह इच्छा पूरी भी हुई । अब तक वह थास्ट्रेलिया के विरुद्ध एफ शतक 101 नाट आउट भी बना चुके हैं। उहें 1980 मे अर्जुन पुरस्कार से तपा 1982 मे पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है ! टेस्ट 85, 122 पारिया, 2717 रन, धौसत 27 17, 157 कैच, 36 स्टम्प । कृष्णामाचारी श्रीकात पन्म 12 दिसम्बर 1959 दाए हाप से तेज खेलने वाला आक्रामर खिलाडी जो विश्व के किसी भी गेंदबाज के छक्के छुडा सकते हैं। श्रीकात की नीति है कि गेंद सिफ हिट भरने के लिए होती है । इस नीति के बल पर ही श्रीकात की आतिशी पारी भारत को बेहतरीन शुरूआत दे पाती है। किसी गेंद को रोकने या छोड ने मे उहें विश्वास नहीं है ये बल गेद को ढोकने मे ही उन्हें आनन्द आता है। श्रीकात जसे मात्रमक खिलाडी के कारण ही आज भारत एकदिवसीय क्रिकेट मे अपनी धाक जमाए हुए हैं। टेस्ट 28, पारियां 44,1386 रन, औसत 32231 फरसन घायरी प्रम28 फरवरी 1951 फरसन घावरी एक ऐसे गेंदबाज हैं जो तेज गेंदबाजी स्पिन गेंदबाजी मोर बल्लेबाजी सभी पर लेते थे। बम्बई का यह खब्बू गेंदबाज सोराष्ट्र की थोर से ऐसता या। उन्होंने इग्लंड के विरुद्ध अपन जीवन का सवयेष्ठ प्रदर्शन करते हुए केवल 33 पर 5 खिलाडिया को आउट किया था । बामतौर पर वह तेज गेंदबाजी करते थे। लेकिन इस टेस्ट मैच में उन्होंने स्पिन गेंदबाजो द्वारा अपने जीवन का सवप्रेष्ठ प्रदशन मिया ! टेस्ट 35, पारिया 50, औसत 23 08, रन 847, विक्ट 981 सुमाष गुप्ते लम 11 दिसम्बर 1929 मुभाष गुप्ते विश्व के सवर्थप्ट लेग र गुगली गेंदबाजी में से एक है। उहोंने वेस्ट इंडीज के विशदएक पारी में अपने जीवन का सवयेष्ठ 133 प्रदर्शन करते हुए 102 रन पर 9 विकटें ली पी। इसके अलावा उन्होंने बम्बई टीम की ओर सेसते हुए पाकिस्तान के टेस्ट खिलाडियो से भरी टीम के एक पारी के सभी 10 विकट केवल 78 रन देकर लिए। इसके अतिरिक्त यूजीलैण्ड के विरुद्ध एक बसा में उन्होंने 34 विकट लिए। 36 टेस्ट, 42 पारियां, 183 रन, 149 विकट । सलीम दुर्रानी सम 11 दिसम्बर 1934 सलीम दुर्रानी अपने समय के अलराउ कर रहे हैं । वह एक आकर्षक बल्लेबाज तो पे ही लेकिन साप मे घातक धब्बू स्पिनर भी थे। काफी तेजी से रन बनाने के कारण वह उस समय काफी लोकप्रिय थे। उन्होंने केवल 29 मिनट में सबसे सेज अधशतक बनाने का गौरव प्राप्त रिया। इसके अलावा स्पिन गेंदबाजी मे उन्होंने आस्ट्रेलिया के विरत कलकत्ता के मैदान पर केवल 73 रन पर 6 विकट लेकर अपने जीवन का सवयेष्ठ प्रदर्शन किया। बल्लेबाजी में उनका उच्चतम स्कोर 104 रन था। 29 टेस्ट, 50 पारिया, 1202 रन, 75 विकेट । गुडप्पा विश्वनाथ जाम 12 फरवरी 1949 एक ऐसे भारतीय बिलाडी जो 5000 से अधिक रन बना चुके हैं। विश्वनाथ विश्व स्तर को कलात्मक बल्लेबाज थे, वहोंने अपने पहले ही टेस्ट मे शतक बनाने का गौरव प्राप्त किया था। विश्वनाप ने दो टेस्ट मैचो में भारत को बोर से कप्तानी भी की जिसमें एक टेस्ट में भारत हार गया या तपा दूसरा टेस्ट बराबर रहा था। उन्होंने कुल 14 शतक चनाए । उनका उच्चतम स्कार 222 रन था। 61 टेस्ट, 155 पारिया, 6080 रन, औसत 41931 नारी काट्रेक्टर अन्ममाघ 1934 1960 61 मे फजल महमूद के नेतृत्व में पाक दल के भारत भ्रमण परइहें कप्तान बनाया गया था। उसके बाद इहोंने 12 टेस्ट मैचों में भारतीय टीम की कप्तानी की जिनमे भारत 2 जीता 2 हारा और 8 134 पराबर रहे। भारत का यह साबू बल्लेबाज आस्ट्रेलिया, पाकिस्तान, मेस्टाईगरीय, न्यूमीण और इंग्मय के विश्व 31 टेस्ट मैचों में ऐसा। सम् 1962 में वेस्टइडीम के विरुद्ध एक मैत्री गंप में पासी निफिस की गेंद पर पम्भीर रूप से पायल हो गए और इसके साथ ही उनपर किट पीयन भी समाप्त हो गया। 31 पारिया, 1611 रन, पोसव 30071 भगपत पावशेषर जमा 18 म,1945 माटफ का यह खिलाड़ी अपने समय का सवश्रेष्ठ बैग के गुगली दयाल पा । भारत की घोर से एक टेस्ट मृखला मे सबरो पधिर 35 पिट सेने का पोरष प्राप्त है । उन्हें पर्जुन पुरस्कार भौर पपषी से एमएस भी किया जा चुका है। इहोंने हालैण्ड के विष्ल फेवल 79 रन र विट लिए जो कि इनका सर्वश्रेष्ठ प्रदशन है। बल्लेबाजी में भी इन्होंने एक अनोखा रिकार्ड बनाया है, फेवस 58 पारियो मे सर्वाधिक शून्य 23 बार बनाकर विश्व कीर्तिमान स्थापित किया। 58 टेस्ट, 80 पारिया, 242 विरेट, 167 रन। पिशनसिंह बेदी पम्प 25 सितम्बर 1946 विराम सिंह येयी को विश्व का सवषेष्ठ धम्बू स्पिनर माना जाता है। पैदी १ पुस 22 टेस्ट मैपो में भारत का प्रतिनिधित्व किया जिनमें से भारत 6 पीता, 11 हारा और 5 बराबर रहे।दी पहले ऐसे भारतीम धिमारी जिन्होंने 200 से अधिक विकेट लिए । उहोंने कुस 266 विकेट लिए । जिसे मार में कपिल देव ने तोड़ा बेदी उन गिने पुने कामों में से है मिहोंने रणजी ट्राफी मे 300 से अधिक विरेट लिए। 67 टेस्ट, 101 पारिलो,656 रन, 266 विकेट । हेमू मधिकारी अगम 12मगारा 1919 हेमू माधिकारी में थम्चे नेतृत्व के गुण होते हुए भी केवल एक टेस्ट 135 में उन्हें पप्तान पाया गया घोर बइ टेस्ट दिल्ली में बराबर रहा पाएं हाय के बल्लेबाज सैरक मेंसार हेमू यतिवारी ने टेस्ट किट में फुल 872 रन पाए मोर 3 विकट भी मिए । रणमी द्रासी में उन्होंने 4500 से अधिक रन बनाए । फपर पोस्ट कोर पर उनकी पीलिंग सानयान यो। यह भागात राष्ट्रीय क्रिोट प्रविश 121 टेस्ट, 872 रन, 3 पिोट, 82च । सो०० गामा "म 31 RET 1895 मृत्यू 14 मरम्पर 1967 "भारत के प्रथम पान सी. ऐ० पट ने 1932 में इन पिस्ट भारतीय एस का नेतुत्व दिया । यद्यपि भारत 5 में से 3 टेस्ट हार गया फिर भी नायडू ने कुशल नेतृत्व की सर्वत्र प्रशंसा की गई और मान भी यह मा लाया है पिापडू सा मुणस रप्तार गारख को बाम तक नहीं मिला। वह एक पस्यन्त बाम गौर भानामभगवान पे जिहें भारतीय टिभीम पितामह महा जा सश्या प्रथम पणी के मैचों में उन्होंने 8000 से अधिक रन बनाये जोर समग 300 विरेट लिए । 7 टेस्ट, 350 रन, योस 25-00, 9 दिवट, 4 फैप । साला भमरनाथ पम 11 सितम्बर 1911 1933 में प्रपम टेस्ट शतक से घायुदय होने माले माला अमरनाथ भारत पुस्त, पालाम्य दूरदृष्टि रखने वाले कप्तानगाने पाये हैं। शेने कुल 15 टेस्टो मे भारत मातृत्व किया, जिनमें से पार 2 जीरा, हारा 47 बराबर रहे। यायें हाप रे बल्लेवाग और दाए हाप के मीडियम पेस में पान भारत के महानतम मिताहियों में से थे। रेडियो परदशन पर एक विशेषज्ञ के रूप में उनकी टिप्पणियां बिट क्षेत्रों में विशेष लोकप्रिय हैं। 24 टेस्ट, 878 7, 45 दिकट, 138 । माधिष गली सम्म 9 सितम्बर 1941 दाए हाप का पल्लेलाम और दाए हाय का मीडियम पेस पार आरिद बली ए शानदार माउन्टर थे। बोररक्षण में भी उन्होंनका 136 सागवार ग पाले हैं। रणजी ट्राफी में वह हैदराबाद की ओर से ऐसते पे। टेस्ट मैचों में उनका सर्वाधिक स्कोर 81 रन पा। इसके अतिरिक्त पास्ट्रेलिया के पिलाफ उहोंने शानदार गेंदबाजी करते हुए देवल 35 न देकर 6 घिसारी माउट किए वोकि राफा सवयेष्ठ प्रदर्शन पा। 29 टेस्ट, 1018 17, 47 विकट, 32 कैप । एफनापसोलकर पा 18 मार्च 1948 टेस्ट क्रिकेट का एकमात्र ऐसा खिसागे पो रेवल अमरक्षा के पगते पर टीम मे पुन लिए जाते थे। विरेट के नजदीक पर होकर माण करते हुए इहोंने कई अद्युत कंप पकड है। रेवस 27 टेस्ट मेषों में 33 कैर पकरने का मनोषा रिकार उन्होंने बनाया है । इसके अतिरिक्त टेस्ट किट में उन्होंने बल्लेबानी में एक शसफ और गेंदबाजी मैं 18 विकेट भी ली है । भनेक अवसर पर भारतीय टीम के लिए गजब का प्रदर्शन कर श्रीमान विश्वसनीय कहलाया। 27 टेस्ट, 1068 रन, 18 विकेट और 53 कैप। विजय मजरेकर पम्म 26 सितम्बर 1931 विषय मंजरेकर भारत का महान बल्लेबाज रहा है । तेज गेंदबाजी को परे विश्वसनीय ग से खेलते थे। उन्होंने वेस्टरीज पाकिस्तान, न्यूजील, आस्ट्रलिया और इंग्लैण्ड के विरुव कुल 55 टेस्ट मैच खेले थिसमे उहोंने 3000 से अधिक रन बनाए । टेस्ट क्रिकेट मे उहोंने सात पतफ भी यनाए । रणजी ट्राफी में 3686 रन और 12 शतक। 55 टेस्ट, 1209 रन, 1 विकेट, 2 स्टम्प और 19 कंप। यीन माकड पाम 124 1917 केबस 24 टेस्ट मैचों मे हमार रन सौ विष्ट प्राप्त करने का घा पौरव प्राप्त करने वाले माकड ने कुल 6 टेस्टों में भारत का मेतृत्व किया जिनमें से 5 टेस्ट पाकिस्तान के विरुद्ध बराबर रहे तपा 137 । एक टेस्ट पेस्टइमेज के विरुद्ध भारत हार गया । वीनू मा उच्च कोटी के खन्यू स्पिनर और दाए हाप में शानदार बल्लेबाज थे । गेंदबाजो मे उनका सवप्रेष्ठ प्रदशन पाकिस्तान के विरुद्ध रहा जिसमे उन्हाने फेवल 52 रन देकर 8 खिलाडियो को बाउट किया। टेस्ट किट मे बल्लेबाजी में उनका उच्चतम स्कोर 231 रन था । उहोने 5 शत भी बनाए । उन्होंने रणजी ट्राफी मे तीन हजार से अधिक रन बनाए। इन्हें पधभूषण से यसकत भी किया जा चुका है। 44 टेस्ट, 72 पारिया, 2109 रन, औसत 3147, 162 विक्ट, 33 कंच । बापू नाडकर्णी अम्म 4 अप्रल 1932 बापू नाडकर्णी सधा हुमा खन्यू स्पिनर और अत्यन्त ठोस बल्लेबाज था। वह उच्च श्रेणी के आलराउण्डर थे। उहोने इन्तण्ड, वेस्टइजीज, आस्ट्रेलिया और न्यूमोलण्ड की यात्रा की । टेस्ट क्रिोट में लगातार 21 मैहन ओवर फेंगने का आश्चयजनक रिफा स्थापित किया। यह रिकाड 1964 मे इग्लण्ड के विरुद मद्रास टेस्ट में पारणो ट्राफी में 3993 रन बनाए और 181 विजेट भो लिए। 41 टेस्ट, 1414 रन, 88 विकेट, 24 कंप। अजीत वाडेकर जग्म 1 अप्रेस 1941 मूबंदिवस अति पहली अप्रल 1941 को जमे अजीत वाडेकर ने वेस्टइंडीज व इग्लण्ड से शृखला जीतफर जो प्रतिष्ठा पाई वह दल क सादर फूट के फलस्वरूप पली 02 की पराजय से मिट्टी में मिल गई। भारत किोट के लिए यह निश्चय हो दुर्भाग्य की बात रही कि केवल एक शखला हारने पर वडकर ने टेस्ट विकेट से सायास ले लिया। पाडेकर के नेतृत्व में भारत - 4 टेस्ट जीते, 4 हारे व 8 बराबर रहे। बायें हाप पा मह बल्लेबाज निहायत अच्छा फोल्डर भी था। रणजी ट्राफी मैचो मे 12 शतको की सहायता से 4388 रन बनाए । 37 टेस्ट, 2113 रन,44 कपा 138 दिलीप सर पेसाई जाम 8 अगस्त 1940 यम्बई का यह टेस्ट खिलाडी भारत के उन गिने चुने बल्लेबाजो मे से है। जिन्होने 2000 से अधिक रन बनाए हैं। सर देगई पाकिस्तान के अतिरिक्त सभी देशो की यात्राए कर चुके हैं । उहोंने टेस्ट क्रिकेट में 5 शतक भी बनाए हैं। उनका अब तक का उच्चतम स्कोर 212 रा है। रणभी ट्राफी मैचो में 3599 रन बनाए हैं। उनका टेस्ट रिकार्ड इय प्रकार है-30 टेस्ट, 55 पारिया, 2001 रन, गौसत, 3923, 5शतक। पाली उमरीगर जन्म 28 माय 1926 पाली उमरीगर एक ठोस पल्लेबाज के साथ साप दाए हाप से सिा गेंदबाज भी थे। भारत की ओर से इहे 59 टेस्ट मैव पेलने का गौरव प्राप्त हुआ जिसमे इन्होंने 12 टेस्ट शतक भी बनाए । हाका उच्चतम स्कोर 223 रन है । न्यूजीलण्ड को छोड़कर सभी देशों की यात्र ए कर घरे हैं। प्रपम घेणी २ मंचो मे 49 शतक । रणगीत ट्राफी में 13 शतयो को सहायता से 4000 से अधिक रन पर 138 विपेट । समई पा मह हप्तान 8 मैचा में भारत का कप्तान भी रहा । पद्मश्री से अलपत। विजय हजारे पाम 11माच1915 महाराष्ट्र मे जमे विजय हजारे 14 टेस्ट मैपों में भारत प्रतिनिधिरद किया जिसमें से भारत 1 बीता 5 हागन 8 पराबर रहे। पहमी टेस्ट विषय का श्रेय भी विजय हमारे को ही है। भारतीय किट मेरा सब कालीन महान स्लेवार ने अपना जीवन एक गेंदबार रूप में गुरू पिया पा! दाए हापा यह बम्गाम टेस्ट पिट में 2000 रो यधिर न बना पुरा हमारे ने रणजी ट्राफी में 22 गोभी छहापाऐ 6312 रन बनाए और 291 विकेट लिए । गुम मो म्मद रापपेसिटीसादारी में 577 रनरेवि रिकारको स्पारित 139 किया। हजारे मीडियम पेस गेंद भी फेंकते ये योर सिा भी । हमारे ने अपम घेणी क्रिकेट में 57 शतक बनाए 11960 मे हजारे को पद्मश्री से मलकृत किया गया। 30 टेस्ट, 2192 रन, 20 विकेट, 11 केछ । पण राय धम 11 मई 1928 1959 म इग्लैण्ड के विषय द्वितीय टेस्ट से पूर्व कप्तान दा गायक- बार के परमी हो जाने के कारण साडस के मैदान पर भारत का नेतृत्व पकन राय को सौंपा गया परतु भारत पर टेस्ट 8 विकेट से हार गयो । रहोंने चीनू मांक के साथ मिलकर पहले विकेट की साझेदारी में 413 रन बनाकर विश्व रिकार्ड बनाया जो आज भी कायम है। इनकी सबसे घराप शृखला इग्लण्ड के विरुद्ध रही जिसमे वह 5 बार शून्य पर आउट हए । रणजी ट्राफी मे 5 शतको की सहायता से 5149 रा बनाए। वगाल का यह कान फुटबाल पा भी अच्छा खिलाडी था । 43 टेस्ट, 2441 रन, 1 विकेट, 16 कैच । हरापल्लो प्रसना जन्म 22 मई 1940 कर्नाटक का यह कप्तान विश्व के महानतम आफ नेक गेंदबाजो में से है । गेंद को दिशा उछाल और लेप पर अद्भुत नियत्रण । पाकिस्तान के अलावा सभी देशो को यात्रा कर चुके हैं। इन्होंने न्युमोलण्ड के विरुद्ध अपने जीवन का सवश्रेष्ट प्रदर्शन करते हुए केवल 76 रन देकर 8 विकेट लिए। आपका टेस्ट विकेट में सर्वाधिक स्कोर 37 रा है । अर्जुन पुरस्कार और पद्मश्री से अलकृत किए जा चुके हैं 149 टेस्ट, 64 पारिया, 735 रन, 189 विवेट, 18 कंच।
140 इग्लण्ड डब्ल्यू० जी० प्रेस विकेट के भीष्म पितामह के हम में विगत रहे । विलियम गिलवड ने 27 वर्ष की आयु मे प्रपम यंणी के मैच मे प्रवेश की शतक बनाकर सभी को चौंका दिया । 10 जून, 1848 को यह पैदा हुए और 40 वर्षों तक त्रिवेट के मैदानो पर छाए रहे। प्रथम थेगो में उन्होंने 54896 रन बनाए और 2876 विवेट लिए। 126 शतक उनके खाते में जमा थे--871 मध उनके हापो मे आकर पम गए थे। 22 टेस्ट मैचो में 108 रना में उनके दो शतक और 5 अघशतक शामिल हैं। वे इग्लण्ड के पहले बिलाही थे, गिहोंने एक ही मौसम में दो हजार रन बनाए। उन दिनो क्रिकेट अपने पूर्ण विकसित रूप में नहीं था, लेकिन गोले और खराब रिकेटो पर उस जमाने में यह दाढ़ी वाले खिलाडी शता चनाने के लिए प्रसिद्ध थे। भारी शरीर, लम्बे चौडे हाथ, ऊपर से लम्बी भरी हुई दाढी, इन सारी बातो से उनका व्यक्तित्व काफी रोबीला दिखता था। उनके बारे मे यह फिस्सा काफी मशहूर है कि एक बार पहली ही गेंद पर अम्पायर ने उहें आउट करार दे दिपा-बस फिर क्या था- प्रेस आखिर क्यो विकेट से हटते ? उहोने अम्पायर स कहा-यहा लोग तुम्हारी गुली उठती देखन ही मेरा खेल देखने आए हैं। फिर क्या या मेल आगे जारी रहा। कॉलिन काउड्री अधिक उम्र होने के बाद भी टेस्ट खेलते रहना कोई मासान बात नहीं, लेकिन कालिन काउड्री के लिए यह बिलकुल मासान गत रही- जसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ती गई, उनके खेल में दिन ब दिन निखार आता गया।114 टेस्ट मैचो मे खेलकर उ होंने एक कीर्तिमान बना दिया। सोबस के बाद सर्वाधिक रन बनाने का भी उनका अपना रिफाड है। 22 टेस्ट शतको की सहायता से 7700 रन होने एकत्र किए । उनकी सर्वाधिक रन सख्या 182 है।
141 टेस्ट मैचों की 63 पारियो मे 50 या 50 से अधिक रन उहाँने बनाए। 42 बार उहोने शतकीय भागीदारी की। 1957 में पीटर मे के साथ वेस्ट इण्डीज के विरुद्ध चौथे विकेट की भागीदारी मे उ होने 411 रनो का कीर्तिमान बना डाला। गेंद को मदान की किसी भी दिशा में पहुंचाना और वह भी शुद्ध और सही टेकनीक के आधार पर इसमे काउड्री सिद्धस्त रहे। स्लिप मे गया मजाल जो काउड्री के होते हुए गेंद निकल जाए। अडरवुड (हेरेक) इग्लैंड के बाए हाथ के धीमो मध्यम गति के गेंदबाज । किोट-जीवन के बारम्भ के वप मे ही पूरे सत्र मे 100 विकिट लेने वाले वे यूनतम आयु के खिलाडी थे। उन्होने अब तक खेल 85 टेस्ट मैचों में 289 विक्टि तिये हैं। 995 रन भी उहोने वनार हैं । पीटर मे 1929 अन्तिम दिन मे पीटर एक सफल और विश्वसनीय तथा सवश्रेष्ठ बल्लेबाजा मे से एक हैं । उ होने सरे से खेलते हुए प्रथम श्रेणी मैचो में प्रवेश किया। अपन टेस्ट जीवन के प्रथम टेस्ट में ही आस्ट्रेलिया के विरुद्ध खेलते हुए उहोने अपन टस्ट इतिहास को पहली शतक जमाई। उहोने 66 वार इग्लैंड टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए 106 पारियो में 13 शतको व नायाब 285 रनो के यक्तिगत सबाट प्रदशन के साप 4537 रन बनाए। प्रथम श्रणी के मवो मे 618 पारियो में 85 शतको को सहायता से 27592 रन बनाए । 'पीटर मे' दायें हाथ के सवयंष्ठ बल्लेबाज हैं। 41 बार इग्लैण्ड टीम का नेतत्व करने का इनका फीतिमान है । वे मैच में पूरी तरह छा जाते हैं। उनके आन पर लगाए गए स्ट्रोक्स विश्व स्तर होते थे जहा उनका आक्रमण आकपक ढग का पा, वही उनकी सुरक्षा पद्धति भी अहिगयो। लेन हटन लेन हटन की गिनती विश्व के सवकालीन महान बल्लेबाजों में की जाती है। जक होज को छोरगर हटन से बेहतर ओपनिंग बल्लेबाज इग्लण्ड मे नही हुआ । गाता है हटन तकनीकी दृष्टि से पूर्ण बल्ले बाज था और उसन शायद ही कभी गलत शोट लगाया हो। यह बात अत्रीय सी लगती है, किंतु हर बारे मे प्राय कही जाती है कि जब वह गाउट हमा, अपनी गलती के कारण नहीं, गेंद के अप्रत्याशित व्यव हार के कारण। पाकशायर और इग्लैण्ड के महान बल्लेबाज हरबट सटक्लिफ के शिष्य हटन का प म 23 जून, 1916 को हमा। 18 वर्ष की उम्र में हटन न पाकशायर की योर से यारसेटरशायर के विषय पहला प्रथम श्रेणी का मैच खेला और उसमे 196 रन बनाण, पितु ३ वर्ष बाद 1937 मे लाइ स में यूजीलण्ड के विरुद्ध अपना पहला टेस्ट खेला तो वह पहली पारी मे शू य और दूसरी पारी मे एक रन बना सका। लेकिन अगले व आस्ट्रेलिया के विरुद्ध उसने 3 टेस्ट मैचो की 4 पारियो मे 118 25 रनो क मीसत रो कुल 473 रन बनाए, जिसमे गोवल टेस्ट के 364 रन भी शामिल है। अगर द्वितीय महायुद्ध के कारण 7 वर्ष तक टेस्ट क्रिकेट व ६ न हुई होती, तो हटन न जाने रितने रिकार्ड कायम परता । फिर भी हटन ने 79 टेस्टों मे 5667 रन प्रतिपारी की औसत से धुल 6,971 रन बनाए जिामे 19 शतक शामिल है। गोपर (हविड) इग्लण्ड के बाए हाप पंड बल्लेबाग। यह बडी तेजी से रन बनाते हैं और गेंद हिट करने का उनका टाइमिंग बहुत ही उत्तम है। वह आक्रामर पल्लेवास है और पिच पर उतरते ही प्रहार शुरू कर देते हैं । पहोंने 90 टेस्ट मचों में 5653 रन बनाए हैं। इनमे 11 शतक व 200 अविजित का उच्चतम सोरहै। प्राहम गूच इग्लण्ड के उदीयमान बल्लेबाज, जो अब तक सेले 42 टेस्ट मैचों में 2540 रत धना पुरे है, 153 उच्चतम स्कार। इ.मेन शिवीप वियपुटरे बाद या शायर और इग्लशर न गंवार फे मन से अधिक रंगीन मिजाज और शक्ति से भरपूर शायद ही 143 । कोई दूसरा गिटर मा हो । अगर उन्होंने अपने तेज तर्रारस्वभाव और मुवान को काबू मे रखा होता तो वे अपने टेस्ट क्रिकेट के आरम्भिक दिनों मे इग्लैण्ड के लिए और अधिक सहायक होते । भारत के विरुद्ध 1952 में डिटमा ने इग्लण्ड की टीम मे नाटकीय ढग से प्रवेश किया और उस शृखला में 49 भारतीय खिलाडियो को अपनी गेंद का शिकार बनाकर इग्लश टीम मे उहोने अपने को स्थापित कर लिया। फेहद, मेन हमेशा दशकों के पहेते रहे। 1952 मे भारतीय खिलाडियों दी लेग साइड मे पीछा घरती हुई शॉट पिच गेंदो से उहोने जातरित कर दिया । ट्रमेन स्वय इस बात को अच्छे से जानते थे दशकों में बेहद लोकप्रिय रहे। 1964 में ट्र. मेन पाढ पीडितो की सहायतार्य एक मेर खेलने भारत आय । एक शाम होटल म बठकर वे अपने मित्रों से गपशप कर रहे थे। उनसे कुछ ही दूर पर दो भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी बातचीत कर रहे थे। आस्ट्रेलिया के ख्याति प्राप्त 'बिलाही मन ओनील ने द. मेन के पास जाकर कहा- 'ट्र मैन, ये तुम्हारे बारे मे बात कर रहे हैं। द्रमा का जवाब पानामन, मेरे बारे मे सारी दुनिया मे बातें हो रही हैं।' ट्रमेन की योग्यता का नमूना यह है कि ये स्टेपम टॉयसन और वेहमर जैसे महान गेंदशजो के समय में खेले और फिर भी उनका अपना एक अलग स्थान बना रहा। 67 टेस्ट मैचों में 307 विकेट लेकर उहोंने अपना नाम इग्लण्ड के महान खिलाडियों की सूची मे दज करवा लिया । ये 'माउट स्विंग गेंद के माहिर थे-~बम्पर उनका विशेष अस्त्र पा, जो थन्छे-से गच्छे बल्लेबाज को भयभीत कर देता था। 1952 से 1964 तक ये टेस्ट क्रिकेट खेले फिन्तु उाका सवश्रेष्ठ समय 1958 से 1962 तक रहा । ट्रमेन भोर स्टेयम को जोडी विश्व के सफलतम गेंद बाजो की जोडी पी गेकिन दोनो गेंदबाजो की शारीरिक बनावट, स्व भाव और स्टाईल मे जमीन आसमान का अन्तर था । सटक्लिफ हरपर्ट वाम 24 नवम्बर 1894 मृत्य 22 जनवरी 1978 यार्कशामर एव इग्लण्ड रे महानतम बल्लेबाजों में से एक। 1919 के अपने पहले सत्र से विश्व युद्ध को शुरूपात तक प्रत्येक सत्र मे 1000 भक को पार क्यिा । 1932 मे 74 13 औसत से 3336 रन तपा 144 1931 मे 9696 औसत से 3006 रन । सर होस के साप टेस्टों में 15 शतकीय साझेदारियां, इनमे से सर्वोच्च 1924-25 में-283 म (आस्ट्रेलिया के विरुद्ध मेनबोन मै) या गायर के लिए स्टक्लिफ और पर्मी होम्स ने रिकार्ड साझेदारी विरुद्ध एक्स पहले विरेट के लिए 69 शतकीय साझेदारिया-जिसमे 555 रन की रिकार सादी (विरुद्ध एसक्स 1932) भी शामिल । क्रिकेट-जीवन में 149 शतको की सहायता से 5200 औसत से 50135 रन, जबकि 54 टेस्टो मे 6073 औसत से 4555 रन । काम्पटन डोनस चाल्स स्काट जम 23 मई 1918 1936 मे पहला प्रथम श्रेणी मैच । 18 वप की आयु मे अपने पहले ही सत्र म 1004 रन । 1938 में आस्ट्रेलिया के विरुद्ध खेलने वाला इग्लण्ड का सरसे युवा खिलाडी बना और पहले ही टेस्ट मे 102 रन । काम्पटन ने उसके बाद लगातार सफलता प्राप्त की हालाकि विश्व युद्ध के कारण वह लम्बे समय तक किट न खेल सका। 1939 से 1945 तक काम्पटन भारत में भी खेला । 1944 45 के रणजी ट्रापी-फाइनल (होकर बम्बई) म 249 अविजित रन। 1947 के सत्र में इग्लण्ड मे 18 Vतको के साथ 3816 रन बनाकर तहला मचाया। टेस्टो मे सर्वोच्च स्कोर 278, जो पारिस्तान के विरुद्ध नाटिंघम टेस्ट (1954) म मात्र 290 मिनट में। यह खिलाडी आर्सेनल और इग्लण्ड के लिए फुटबाल भी सला, पर घुटने मे चोट के कारण उसका खेल जीवन बहुत ही जल्दी समाप्त । क्रिकेट जीवन में कुल 5185 औसत से 38942 रन बनाए। जैसप, गिलबर्ट लेयर्ड जम 19 मई 1874 मृत्यू ।। मई, 1955 घुआधार बल्लेबाजी के लिए विख्यात । 1902 मे आस्ट्रेलिया के विस्द ओवल टस्ट जीतने के लिए इग्लण्ड को 263 रन बनाने पै और जिस समय जैसप बल्लेबाजी करने गया स्कोर 5 विकेट पर 48 रन था, लेकिन अगले 75 मिनट म उसने पद 104 रन ठोक वर इग्लण्ड कोजीत पी राह पर डाल दिया। एक ओवर में 28 रन बनाने का अंग दो बार।
143 1903 मे ससेक्स के विरुद्ध मा 120 मिनट में दोहरा शतक (विश्व- रिफाड)। इस पारी में सर ने कुल 175 मिनट में 286 रन । म 18 टेस्टो मे 2188 मौसत से 569 रन । हेमण्ड, याल्टर रिनाल्ड मम 19 जून 1903 मृत्यु 2 साई 1965 क्रिकेट की महानतम हस्तियो मे से एफ हेमण्ड को बल्लेबाज होने के पावजूद गेंदबाज और क्षेत्ररक्षक के रूप में भी पाश्चर्यजनक सफलता । 1977 तर हैमण्ड को टेस्टों में सर्वाधिक रन बनाने का श्रेय । रहो। कुल 85 टेस्ट मैचो मे 7249 रन, 83 विकेट, उध्यतम स्कोर 336 (नाट आउट)। डेक्सटर एडवर्ड रेल्फ मम 15 मई 1935 इग्लैण्ड के आकर्षक बल्लेबाजों एवं पचित कप्तानो मे से एक। एक घल्लेबाज के रूप मे हेक्टर ने हमेशा ध्याति पाई। 1963 मे पेस्ट इण्डीज के विरुद्ध लाईस में देसटर ने 80 मिनट में 70 रा पनाए ये-इस पारी को क्रिकेट की स्मरणीय पारियो मे गिना पाठा है, जबकि 1964 मे धास्ट्रलिया के विरुद्ध टेक्सटर ने 480 मिनट में 174 रन ठोंके। क्रिकेट के अलावा गोल्फ का सच स्तरीय खिलाड़ी भी कुल 62 टेस्टों में 4089 मोसा से 4502 1 1 25 टेस्टों में इंग्लण्ड का नेतृत्व भी। एडिच जान हयू काम 21 मई 1937 चन गिने चुने बल्लेबाजों में से एक चिन्हें टेस्ट क्रिकेट में तिहरा धडक बनाने का घप। 1965 में म्यूजीलम रे विट मोइस टेस्ट में पति ने अविजित 30-32 बोरकों और इसको के शाम । इस पारी के दौरान दूसरे विकेट के लिए रिगटन के साप उसने 369 रन की साझेदारी । कुल 77 टेस्टों में 12 शतकों के पाय 4354 बोसत से 5138 रन ।
146 एडिच, विनियम जान जाम26माघ 1916 विलियम एट्रिपरे क्रिकेट-जीयन रेसपिम वप भी विस्त-गुर के फारण बेरार गए। 1947 का स सलिए सवयंष्ठ, जब कार टो- सा मे उसने 12 शतकों की सहायता से 8043 औसत से 3539 एका प्रथम श्रेणी निट मे दिव ने मुल 36,965 रन 86 शतका फो सहायता से पगाए गौर कभी कमी प्रयोग किए जान वाले मध्यम तेज गति के गेंदबाज के रूप मे 350 से अधिक यिनेट भी लिए । कुख 39 टेस्टो में 4000 बीसत से 2440 रन। माई, पास बजे जम 25 अप्रल 1872 गस्य 7 सितम्बर 1956 झाई देवल गिोट गे ही नहीं, वारा अपनी प्रतिमा के कारण फुट- माल, बी और एपलेटिस मे भी प्रसिद्ध । वैसे भाई ने इन 26 टेस्ट हो ठेले । टेस्टों की संख्या इसलिए कम रही, पयामि फाई ने हमेशा ही भास्ट्रेलिया जाने से इ कार पिया ।। 1901 वे सत्र में फ्राई लगातार 6 पारियो मे शतक बनाए थे चोर इस सन म 7867 की औमत से कुल 3147 रन ! फ्राई ने अपने रिट जीवन म 16 दोहरे शतक मार पाच पार एक ही मैच की दोनो पारियो ने शतक बनाने का श्रेय भी। 32.18 भोसत से 1223 रन । कुल 26 टेस्टो प्रेयनी, थामस विलियम भन्म 16 जून 1927 23 सत्र के क्रिकेट जीवन मे इस बरवाज ने सरनी प्रतिमा सभी को बापित विमा सौर 122 शतको सहित 47793 रन । सव येष्ठ सत्र 1956, जब 4993 बोसत से 2397 रन बनाए। 1957 में वेस्टइण्डीज विरद्ध पाष पारियो मे 11800 को मौस 147 फिकेट पितामह रणजीतसिंह "विस्टन' पहली बार सन 1896 में एक भारतीय को पप के पास सवश्रेष्ठ खिलाडियो को श्रेणी में रखा था और वह प्रतिष्ठा मिली पी महाराजा रणजीतसिंह जी को, जो उन दिनो राजी नाम से प्रसिद्ध थे। माज से करीब महत्तर साल पहले की इस ऐतिहासिक घटना के बाद कवल छह मय भारतीयो को ही यह सम्मान मिला है, पर यह उल्लेख- भोप है कि इनमे से पहले तीन खिलाडी केवल इसीलिए सम्मानित किए गए थे कि वे इंग्लंड में उस देश की तरफ से सेले पे। बाकी पार विशुद्ध रूप से 'भारतीय खिलाड़ी थे । जिहाने अपने देश की ओर से खेलकर रह कीति अजित की थी। रागी का म माज भी एक जादू का सा असर मारता है और निस्सन्देह वह क्रिकेट जगत के एक उज्ज्वल सितारे थे। "विस्टन' की सूची में स्थान पाने वाले यापने देशवासियो मे राजी न केवल सबसे पहले और उस में सबसे छोटे खिलाही थे, बल्लि सबसे महान भी थे। क्रिकेट के आकाश मे वह धूमकेतु की भाति अपनी छटा बिखेरते किन गए । जितना मश रामी को मिला, उतना शायद बहुत कम लोगों को मिलता है। यहा क कि किट के उस 'स्वर्ण युग' मे और वह भी उस खेल में जो कि निश्चय ही एक अग्रणी बैल है, राजी ने दोनो हापों से यश लूटा । यह भी सा है कि ऐसे खिलाडियो की कमी नहीं, जिन्होने कि राजा से भी अधिक रन बनाए हैं और भविष्य में भी बनाएगे, पर क्रिरेट खेलने में राजी का कोई जवाब नही था । तिने हो अवसरों पर उन्होंने बल्लेबाजी के जौहर दिखाए। उन सबका यहाँ यणन करना सम्भव नहीं है, एक ही उदाहरण पर्याप्त होगा। इग्लश मे सन 1899 फ सीजन म राजी है 3159 रन बनाए (औसत 63 18), तो लोगों ने दांतों तले उगली दबा ली। वह पहले खिलाडी थे, जिन्होने इन्सिस क्रिकेट में 3000 रन बनाने का लक्ष्य पूरा किया था। यगले वप भी उहोंने 3095 7 पीटे (मौसत 8757) राजी 892 में फैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में प्रदिष्ट हुए और अगले हा वर्षे विश्वविद्यालय की टीम के लिए पुन लिए गए और माक्सफोर्ड के विरुद्ध खेले । राजी ने 1895 में सेक्स की टीम में सेलना शुरूपिया और 1920 में इग्लैण्ड के लिए वह मतिम बार खेले । उहोने मूल 24692 रन बनाए (मोसत 5737) और 1896, 1900 तपा 1904 मे मा उनको मौसत रन सख्या सर्वाधिक थी।
148 दिलीपसिंह जी भारतीय क्रिकेट के इतिहास में दो ऐसे महान खिलाडी हए है जो भारत की ओर से कभी नहीं खेले, लेकिन इस पर भी क्रिकेट के इति हास में 'अमर खिलाडियों की संज्ञा प्राप्त कर गए । इनमें से एक क्रिकेट से राजा थे और दूसरे क्रिकेट के राजकुमार। एक चादा मे चोर दुधरे मतीजा, एक रणजीत सिंह जी ये और दूसरे दिलीपसिंह जी । ये दोनों विषारी उस युग में इलैण्ड की ओर से खेला करते थे, जिस युग को क्रिकेट का स्वर्णिम युग कहा जाता है। इन दोनों खिलारियो के बारे में भारतीय क्रिकेट मालोचको ने कम लिखा और इग्लैण्ड के आलोचकों ने ज्यापा। इन दोनों खिलाडियो की सेल पद्धति में इतनी समानता पीकि मतीने (दिलीपसिंह जी) को अपने पापा (रणजीतसिंह जी) का मा सस्करण कहा जाता था। फिर किसी भारतीय खिलाडी का इग्लण्ड में होने वाला काउण्ट्री मचो मे ससेक्स टीम का कप्तान होने का गौरव प्राप्त करना अपने आप मे कोई छोटी बात नहीं कही जा सकती थी। पर भी इंग्लैण्ड में कोई मैच होता तो दर्शकों को इग्लोष्ठ के खिलारियों का सेस देखने मे उतना आनन्द प्राप्त नहीं होता, जितना कि इन दोनो हिताश्निों का। कहा जाता है कि मोक्त के मैदान में इग्लैण्ड और आस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट मैच हो रहा था। एक सज्जन मंदान में पोरी देर से पहले। जिस समय यह घिडकी पर पट होपर टिकट खरीद रहे थे, उस सनम एक असाही सहके ने उससे कहा कि क्यों कार में पैसे घराब कर रहे हो, दिलीप यो बाउट हो गए हैं। अब पिसफा सेल देखने जा रहे हो? दिसीर सिंह का जम 13 जून, 1905 को हुआ। वह बामगर २ महाराज जुबान सिंह जी के सुपुत्र घोर रणजीत मिली सबसे हाटे भतीजे पे धोर अपने भाषा रणजीत सिंह की प्याति प्रभावित होरर ग्लिीप सिंह ने भी क्रिकेट का विसारी बनने की ठानी। पेल्टेन होम में अपनी कमी शिक्षा समाप्त र दिनोप 1 म प्रवेश पना और काउटी ससेका की ओर से रोसना शुरू पर हिनि हर मग में फसने पापा 7 मनुकरण किया और 1931 में यो हैं धनपत पीकप्तान होने का गौरप प्राप्त 149 हॉग्स (सर जॉनवरी) 1882 से 1963-प्रेस और ब्रेडमैन में बीप की अवधि में इग्लैग के यह खिलाही विश्व के सवश्रेष्ठ बल्लेयाप पे । उनको 'मास्टर के नाम से पुकारा जाता था। उन्होंने अपने खेस-जीयन में 61237 रन और 197 शतक बनाए । इतने रन और पो मही बना सका। इनमें से 98 शतक तो उन्होंने पालीसवें वष के बाद बनाए । आस्ट्रेलिया के विरुद्ध इसिड की ओर से अधिकतम (12) शतक सपा प्रपम विकिट को रोल्स के साथ साझेदारी (323) उसके रिकॉर्ड है। बैकफुट व गोली विकिटों पर उनका यात्मविश्वास भरा पेल होता पा। 61 टेस्ट मैचो मे उहाँी 5410 रन बनाए । वह कवर म्याइट पर अत्यन्त अच्छा क्षेत्ररक्षण भी करते थे। वह धीमी मध्यम गति के बच्चे गेंदबाज भी थे। लॉक (ग्राहम) जम 1929 इग्लैंड के बम्बू गेंदवान । उन्होने 174 टेस्ट विष्टि लिए । वह अनोसे शॉटेलेग फील्डर भी थे। बाद में यह आस्ट्रेलिया में पप में जाकर बस गये। उनको क्रिकेट इतिहास का सर्वोत्तम क्षेत्ररक्षक माना जा सकता है। उन्लू० जी० मेस और एफ० १० वूली को छोड़कर माय किसी की सुलना में उन्होंने अधिक खिलाडी कैच किए हैं। 1957 मे लॉक का सवयेष्ठ सीजन था और उसने 64 बिमाहियों को कच-आउट किया। वारविकशर के विट मैच में आठ खिलाडियों को कैच आउट करना भी इसमे शामिल है। 1957 में 212 विकिट 1202 रन की औसत पर हो । इग्न के त्रिोट इतिहास में सन् 1888 से इतना अच्छा प्रदर्शन और किसी का नहीं रहा था। अपने से जीवन में 2844 रन 19 23 को औसत पर बनाये और कुल 308 कैच लिय । टेस्ट क्रिकेट में 49 रेस्ट मैचा में 174 विरेट लिए । ज्योफ वायकाट 21 अक्तूबर 1940, विश्व के सवश्रेष्ठ सलामी बल्लेबाजी में से एक धीमी गति से स्कोर करने और जबरदस्त एकाग्रता के कारण मशहर। 1971 में वह इग्लैंड की क्रिकेट का एक ऐसा बलेबाज बना 150 जिसे एप त्र में 100 से अधिक औसत से रन बनाने का घेय मिला। 1967 में भारत रेविट सोस टेस्ट में अविजित 246 रन । टेस्ट क्रिकेट में इसकी ओर से मद तर सर्वाधिन रन बना पूरे हैं। उन्होंने कुल 108 मेघा मे 8114 रन बनाए जिसमे 22 शतक भो मामिल है। इयान यायम विश्व का एकमात्र ऐसा हरफनमौला खिलानी जो बल्लेशराजी करने के लिए आता है तो अच्छे से अच्छे गेंदबाजों की धुनाई कर देता है और पर बापम गेंदबाजी करते हैं उनकी तेज और स्विग सेते गेंदबाजी बल्ले- पागो के लिए परेशानी बडी पर देती है । टेस्ट किट में 4000 से अधिर 1, इसके साथ-साथ गंदपाली मे भी 350 से अधिक विरेट लेो पाले विश्व में एकमात्र हरफनमौला खिलाड़ी है। बल्लेबाजी मे होते सर्वाधिr 208 रन बनाए हैं। पाफिस्तान मासिफ इकवात 1943 पापिस्तानी टीम के कप्तान, दायें हाम के बल्लेबाज और मध्यम- तेज गेंदबाज है। उसने प्रथम येणी का क्रिकेट भारत मे हैदराबाद की ओर से 1959 60 म खेलना शुरू किया। वह लगातार 45 टेस्ट मैच पाकिस्तान के लिए खेले । लोवल में 1976 में नवों विकिट पर इग्लड के विरुद्ध 146 रन का कोर विश्व रिकाड है, उसी विकिट पर इन्तखाम मातमारे साथ 109 रनको साझेदारी भी विश्व रिकार है । उहोने 68 टेस्ट मैचो में 3575 रन बनाये और इनमे 11 शतक हैं। इतखाब आलम 1941 पाकिस्तान के खिलाटी और विश्व-स्तर के लेगक व गुगली गेंदबान । टेस्ट क्रिकेट में अपनी पहली गेंद से 1959 60 में उन्होने 161 1 के विरुद्ध । पहाटेस्ट 1974 में भारत के रिद्ध विकिट लिए और चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया । टेविस घटो ही नेट पर अभ्यास करता है। जिमनेजियम मे पाकर कसरत भी करता है । वह वेस्टइण्डीज का स्पायो गेंदबाज बनना चाहता है। वह शराब, सिगरेट सौर माय व्यसनो से दूर है। बलाइड वाल्फट कलाइड बालकट की बल्लेबाजी उनके भारीपन की तरह पी-पानी प्रभावशाल और शक्तिशाली। वह न तो वक्त की तरह सम्पूर्ण बल्ले- राज प और न हो वारेल की तरह पलात्मर । वाल्क्ट को एक अला ही लो यो। उनका क्षारमक खेल एव मनवा लौह स्तम्भ पा । वाल्कट का जम 17 जनवरी 1926 को हुआ। उन्होंने अपनी देश जिदगो चिरेट कीपिंग से शुरू की लेकिन वेवस 15 टेस्टो के बाद 195152म इमभारस होर अपना सारा ध्यान बल्लेबाजी पर लगा दिया । उहोने अपने टेस्ट क्रिकेट की शुरुवात ग्लैण्ड के विरुत बेस्ट इण्डीज म 1947 48 में पी लेकिन सही मायने म 'ट' तिक्ती ग भारत और इंग्लैण्ट के दारो के बाद शामिल हो सके। भारत के दौरेम 1948 49 म उहान लगातार 152, 68, 54, 108, 43, 11 और 16 रन (मत 6457) बनाए। 1954-55 मे आस्ट्रेलिया के विरुद्ध 47 इण्डीज म उहान पाच टेस्ट शतक बनाए जा किसी एक शृपला म मरम अधिक शतक लगाने का विश्व रिकाड है। 5 फुट और दो इच लम्बे वालट ने 44 टेस्ट मैच मेले और 5658 की औसत मे 3,798 रन बनाये जिसमें 15 शतक शामिल हैं। 15 टेस्टा को विकेट कोपिंग से उन्होंने 27 बच और 11 सिताटियों कोम आउट किया या नावाद टेस्टों में उन्होंने 26 बैच दिए। वह कभी भी मध्यम गति को दबाजी भी करते थे। दो बार टस्टों म उहाल पेन्ट इण्डोज के लिए आश्रम की शुरुवात भी की थी। विवियन रिबम उआप्तान (लीवड आइमलेंडस और समरमेट) 19521दायें हाथ के बल्लेबाज, दायें हाथ के अफ रे में बाज । पहल पम श्रेणी मर 197172 -
150
जिसे एक सत्र में 100 से अधिक औसत
1961 मे भारत के विरुद्ध लोडस टेस्ट
किट में हालेर की ओर से अब तक
उन्होंने कुल 108 मैचो मे 8114 रन
शामिल हैं।
इयान यॉथम
विश्व का एकमात्र ऐसा हरफनमौला
के लिए आता है तो अच्छे से अच्छे गेंदबाजार
पर बॉपम गेंदबाजी करते हैं उनकी सेज और
पागो के लिए परेशानी खडी कर देती है।
अघिमरा, इसके साथ-साथ गेंदबाजी मे भी
पाले विश्व के एकमात्र हरफनमौला खिलाड़ी
सर्वाधिक 208 रन बनाए हैं ।
पाकिस्तान
आसिफ इकबाल 1
पाकिस्तानी टीम के कप्तान, दायें हाय
at गेंदबाज है। उन्होने प्रथम श्रेणी का
की ओर से 1959 60 म खेलना शुरू किया।
पाकिस्तान के लिए खेले । मोवल में 1976
भविष्ट 146 रन काकोर विश्व रिवॉड है।
पालम रे साप 109 रन की साझेदारी भी)
68 टेस्ट मैचो मे 3575 रन बनाये और इनमें
इन्तखाब मालम 194
पारिस्तान के पिलाडी और विश्व-स्ता
गेंदारा टेस्ट निरेट में अपनी पहली गेंद से
151 विकिट ली। बल्लेबाजी की यनुकूल पिचों पर यही लम्बी आयधि सा बिल्कुल परिशुद्ध गेंदबाजी करते हैं। 43 टेस्ट मैचों में खेलने के बाद उनके 108 विकिट 3763 राफी औसत पर थे। फसल महमूद के वा सफलतम गेंदबाजो मे दूसरा स्थान उनका ही है। 1969 से 75 तक 17 टेस्ट मैचो मे पाकिस्तान की कप्तानी की। इकबाल कासिम 1953 बाए हाप रे पाहिस्तानी स्पिन गेंदबाप और बाए हाथ थेपल्सै- वाज । यह 44 टेस्ट मैचो मे खेल चुके हैं और 149 विपिर ले चुके हैं। इम्तियाज अहमद 1929 पाकिस्तान के बल्लेवाण तथा विकट-कीपर । उन्होंने 1954 में पहली पार इग्लैंडा दौरा किया। वह 42 टेस्ट मैचों में खेले, 2079 रन बनाये और 93 दल्लेवान पाउट किये। 1960-61 में एक विरुद्ध पाकिस्तान टीम की कप्तानी भी उन्होंने की। उनका अधिकतम सोर यूजीलैंड के विरुख लाहौर टेस्ट मे 209 रन था। फजल महमूद 1927 पाकिस्तान के तेज मध्यम गति के गेंदबाज, मटिंग विकिटो पर तो उनको खेलना लगभग असम्भव ही हो जाता था। वह दस टेस्ट मपो में पाकिस्तान टीम के कप्तान भी रहे। उस दौरे मे उन्होने 77 विक्टि केवल 1735 रन की औसत पर लिए। 1956-57 में उन्होने आस्ट्रेलिया के विरुद्ध मैच मे 13 विकिट लिये। खेल जीवन में उन्होंने 139 विपिट लिये। माजिद खान 1946 पारिस्तान के यह मलामी बल्लेबाज प्रसिद्ध क्रिकेट बिलासी पहागीर धान के पुत्र हैं। यह पारिस्तान के पहले ऐसे लेबाज है जिन्होो भोजन पूर्व 1976 मयूजीलड के विरुद्ध शतक (112) पूरा किया । उहो7 120 मिनट म 18 पौरो और 2 छक्को की सजा से यह सरलता पायी ! मामिद अच्छे आफ स्पिनर और न । 62 टस्ट-गंची भे 3931 रन बना पूर्व है। पाउट किये हैं। १ 150 जिसे एक सत्र में 100 से अधिक औसत से रन बनाने का श्रेय मिला। 1961 में भारत के विरुद लौडस टेस्ट में अविजित 246 रन। टेस्ट क्रिकेट में इग्लह की ओर से मर तर सर्वाधिक रन बना चुके हैं। उन्होंने पुल 108 मैचो मे 8114 रन बनाए जिसमे 22 शतक भी शामिल है। इयान यायम विश्व का एकमात्र ऐसा हरफनमौला खिलाडी जो बल्लेबाजी करने के लिए आता है तो अच्छे से अच्छे गेंदबाजों की धुनाई कर देता है और पर बापम दयाजी करते है उनकी तेज और स्विग लेते गेंदबाजी बल्ले पागों के लिए परेशानी खड़ी कर देती है। टेस्ट क्रिकेट में 4000 से अधिक रा, इसके साथ-साथ गेंदबाजी मे भी 350 से अधिक विकेट लेने पाले विश्य के एकमात्र हरफनमौला खिलाडी हैं। बल्लेबाजी माहोंने सर्वाधिक 208 रन बनाए हैं । पाकिस्तान आसिफ इकबाल 1943 पापिस्तानी टीम के कप्तान दायें हाय बल्लेशज और मध्यम- तेज गेंदबाज हैं। उहोने प्रथम धणी का विकेट भारत मे हैदराबाद की ओर से 1959 60 म सेलना शुरू किया। वह लगातार 45 टेस्ट मय पाकिस्तान के लिए खेले । मोदल में 1976 मे नवी विकिट पर इग्लड विपक्ष 146 रन का स्कोर विश्व रिकॉर्ड है, उसी विकिट पर इन्तजाम घाला है साथ 109 रन की साझेदारी भी विश्व रिकार है । उहोने 68 टेस्ट मैचो में 3575 रन बनाये और इनमे 11 शतक हैं। इतखाय आलम 1941 पाकिस्तान के खिलाडी और विश्व स्तर के लेगनेक व गुगती गेंदबाज । टेस्ट क्रिकेट में अपनी पहली गेंद से 195960 में उन्होंने 151 विकिट ली। बल्लेबाजो की यनुकूल पिचों पर पसी लम्बी घधि र बिल्कुल परिशुद्ध गेंदबाजी करते हैं। 43 टेस्ट मैचों मे खेसने के बाद उनके 108 विकिट 3763 राफी औसत पर पे। फजल गहमूद के बाद सफलतम गेंदबाजो मे दूसरा स्थान उनका ही है। 1969 से 75 तक 17 टेस्ट मंचो मे पाकिस्तान की कप्तानी की। इकबाल फासिम 1953 बाए हाद के पारिस्तानी स्पिन गेंदबाप और बाए हाथ के पहले- बाज । यह 44 टेस्ट मैचों मे खेल चुके है और 149 विकिट ले । इम्तियाज नहमद 1929 पाक्स्तिार के बल्लेबाम तथा विकट-कीपर । उन्होंी 1954 में पहली बार इग्लंड या दौरा किया। वह 42 टेस्ट मैचों में खेले, 2079 रा बनाये और 93 बल्लेबाष माउट किये। 1960-61 मे इसके विरुद्ध पाकिस्तान टीम की कप्तानी भी उन्होंने की। उनका अधिकतम स्पोर यूजीलैंड के विरुस लाहोर टेस्ट मे 209 रन था। फजल महमूद 1927 पाकिस्तान से ते मध्यम गति के गेंदबाज, मटिंग पिपिटो पर धो उको खेलना लगभग असम्भव ही हो जाता था। यह दस टेस्ट मैचों में पारिस्तान टीम क पप्तान भी रहे । उस दौरे में उन्होंने 77 विक्टि पेवल 1735 की मौसत पर लिए। 1956 57 में उन्होने माट्रेलिया के विरुद्ध मज मे 13 विकिट लिये। खेल जीवन में उन्होंने 139 विस्टि लिये। माजिद खान 1946 पाधिस्तान ने यह मलामी बलोबान प्रसित क्रिोट पिसाडी जहांगीर घा के पुत्र है। वह पाकिस्तान के पहले ऐसे बल्लेबाज है जिन्होंी मोन पूर्व 1976 मतोलह विष्ट शन (112) पूरा रिया। उहोते 120 मिनट में 18 पोरों और 2 छको की सहायता से यह सरलता पापी ! मामिद अच्छे ऑफ स्पिनर योर क्षेवरहार भी है। वह 62 टस-गयो में 3931 रन बना धुके हैं। 34 शिलानी होने पाउट किये हैं।
152 पासिमपारी 1948 दायें हाथ के बल्लेबाज और विकिट कीपर, पाकिस्तान म विकिट रक्षण के सार रिकार्ड उसी के हैं। मेलबन-टस्ट में 197677 मे दोगो पारिया मे शून्य पर माउट होने के साथ, कुल मिलाकर ।। थार यह जीरो पर बाउट हुए है। पाकिस्तान 56 टेस्ट मैचो में उहनि कप्तानी भी की है। उन्होंने 75 टेस्ट मैचो मे भाग लिया है और 228 विकिट ले चुके हैं, हामे 201 कैच और 27 स्टम्प किये। हनीफ मुहम्मद, 1934 पाकिस्तान के प्रसिद्ध सलामी बल्लेबाज । प्रथम श्रेणी के विकेट में 499 रन का अधिकतम स्कोर, उहोंने कराची व बहावलपुर के मध्य मैच में बनाया पा। 1958 मे इसीज के विरुद्ध उहोंने सोलह घटे 10 मिनट की सर्वाधिक लम्बी पारी भी खेली व 337 रन उन्होंने यनामे। अमीर इलाही, 1908 यह बिलाटी भारत और पाकिस्तान दोनो ही ओर स खेले। यह पहले विक्टिकीपर और तेज गेंदबाज तथा फिर लेगक गुगली गेयमाज बने। पाकिस्तान की ओर से पांच और भारत की ओर से भादलिया के विरुद्ध एक टेस्ट खेले । इसमे 17 रन बनाने । रणजी ट्रॉफी मेपो में होंगे 193 विकिट लिये 4771 रन बनाये। भय गुलर सपा पेंटेगुलर में उनके विकिट 91 सर्वाधिक है। मुदस्सर नगर, 1956 भूतपूर्व पाक खिलाडी नगर मुहम्मद ऐ बेटे, दायें हाथ के बल्लेबाम और सेन मध्यम गति के मेंदबाज । उही लाहौर में इग्लड के विरुद्ध 1977-78 में 114 रन 557 मिनट में बनाये जो विश्व का सर्मा- शिक धीमा शER | बह 49 टेस्ट मैचो में 3037 रनबा धुवे हैं पौर उन्होंने 41 विष्टि लिए है।
जायेव मियादाद पहला प्रथम श्रेणी मैच केवल 16 वर्ष माह की आयु खेला 1976 77 मे अपने पहले ही टेस्ट में न्यूजील कविन इसी शृखला के आखिरी टेस्ट मे 206 रन । जावेद मियादाम, समय पाकिस्तान के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज हैं। वह विश्व के उन गिन-चुने बल्ले- बाजो मे से है जिन्होंने अपना औसत 50 से ऊपर रखा है। अब तक 81 टेस्ट मैचो में 5891 रन बना चुके हैं। उनका अब तक का सव- श्रेष्ठ स्कोर 280 रन (नाट आउट) रहा है । जहीर अब्बास विस्हन द्वारा 1971 में सम्मानित उसके बाद 1971 में ही अपनी पहली टेस्ट यात्रा मे इग्लैह के विरुद्ध बर्मिघम टेस्ट में 274 रन । जहीर अन्बास का नाम विश्व के उन महान बल्लेबाजो मे से हैं जो 5000 से अधिक रन बना चुके हैं। अपने 74 टेस्ट मैचो मे उन्होंने 12 शतक भी मनाए हैं। मुश्ताक मोहम्मद दाए हाथ के बल्वेवाज तपा सँगक गुगली गेंदबाज । पाकिस्तान के सफलतम कप्तानो मे से एक। पहला टेस्ट 15 वष 124 दिन की आयु मे खेला-विश्व रिकाड पैकर के मजम मे पाक टीम का कप्तान । अपने 57 टेस्ट मैच मे 3643 रन, उच्चतम स्कोर 201,79 विकेट । इमरान खान इमरान की गिनती बाज श्रेष्ठ हरफनमौला खिलाडियो के साप विश्व के दूसरे नम्बर के तेज गेंदबाज के रूप में की जाती है । 130 किलोमीटर की रफ्तार से गेंद फेंककर उसे स्विग कराने की कला का बेहतरीन फनकार इमरान ही है। इमरान की गेंदबाजी में स्पीड और मूवमेट का सदन सामजस्य पाया जाता है। इमरान ने अपने 65 टेस्ट मैचो मे 2579 रन बनाए हैं और 290 विष्टि ले चुके हैं। पाक्सिानी गेंदबाजी के लिा इस स्तर तक पहुचना असभव नहीं तो कठिन अवश्य 154 25 नवम्बर 1952 कोजमे इमरान या माजिद यान के रिश्ते मे भाई हैं। पार त्रिवेट में लिए पान परिवार मादश रहेगा। वेस्टइंडीज सर गारफील्ड सोबर्स सर गारफील्ड सैट अबने सोक्स का नाम 18 जुलाई, 1936 को हुआ। सम्पूर्ण क्रिकेट इतिहास का महानतम तथा सर्वश्रेष्ठ आलराउण्डर सोबस त्रिवेट के प्रत्येक क्षेत्र पर अपने उत्कृष्ट खेल को कारण 'हरफन मौला' के नाम से अधिक लोकप्रिय हो गया था। इग्लह की काउटी मे एम० नाश के ओवर की प्रत्येक गेंद को सोबस ने सीमा पार पहुंचाकर 6 छवो लगातार लगाने का श्रेय प्राप्त किया। सोबस ने 195758 में रिग्स्टन में पाकिस्तान के विरुद्ध टेस्ट मे 365 रन (अविजित) बनाए, जो अब तक किसी खिलाडी द्वारा व्यस्तिगत रूप से टेस्ट मे बनाया गया अधिकतम स्कोर है । टेस्ट भिजट मे 8 हजार से अधिक रन तथा 200 से अधिक विकेट लेने वाला सोबर्स एकमात्र खिलाडी है। 1954 से 1971 तक टेस्ट क्रिकेट पर लगातार छाया रहने वाला सोयर्स 39 टेस्टा में वेस्ट इंडीज का कप्ता भी रह चुका है। गारफील्ड सोबस ने 93 टेस्टामें 8032 रन बनाए । उसने 160 पारी खेली तया 21 बार नाबाद रहा। 26 शतको की सहायता से उसका औसत 5778 रन प्रति पारी था। यह देखते हुए, क्रिकेट का हर कोना सोबर्स के अद्धितीय खेल से प्रकाशित है । सोवस को सर तथा नाइट को उपाधि से विभूषित किया गया है। सोबस ने एक टेस्ट में गाय और 5 विकेट लेने का कठिन काय दो बार क्यिा । सोबस ने 93 टेस्ट मैचो मे 110 कैच एव 235 विकेट लेने का गौरव भी प्राप्त कर रखा है। सोरस का 160 पारी में 21 चार अविजित रहकर 57 78 रना की औसत से 26 शतको की मदद से 8032 रन बनाए । सोवस न 39 टेस्ट मैचो में वेस्ट इण्डीज के कप्तानी पर को सम्माला और बडे ही शानदार ढग से उसका निर्वाह विया।
155 गिग्स (लैस) 1934 वेस्टइण्डीज के यह भऑफ स्पिनर गेंद को बहुत नियत्रित तरीको से ठीक उडान देकर लैम्प पर फेंकते हैं। आस्ट्रेलिया के विरुद्ध 1960-61 मे उहोंने एडिलेड मे हैट ट्रिक प्राप्त की और इसके बाद अगले वर्ष भारत के विरुद्ध 8 विकिट 38 रन पर लिए। यह उनके टेस्ट जीवन का सर्वोत्तम गेंद विश्लेषण है। 309 टेस्ट विकिट(औसत 29 09)। गोर्डन ग्रीनिज वेस्टइण्डीज के सलामी बल्लेवाज, अत्यन्त कुशल प्रहारक | गेंद को बडी कुशलता से हुक करते हैं और ऑफ साइड पर अच्छी हिट लगाते है। उन्होने 77 टेस्ट मैचो में 5509 रन बनाए हैं और उनके 13 शतक रहे,233 अधिक्तम स्कोर । ग्रिफिथ (नाल्स) 1938 वेस्टइण्डीज के इस तेज गेंदबाज ने 28 टेस्ट मैचों में 2854 की औसत पर 98 विकिट लिये। इण्डीज टीम के 1963 के इग्लंड के दौरे मे उहोने 32 टेस्ट विकिट लिए और 16 20 रन प्रति विक्टि की सोसत रही। सर फ्रेंक चारेल आप ससार के प्रसिद्ध कप्तान बल्लेबाज, गेंदबाज या हरफनमौला पर लिषी कोई भी पुस्तक उठा लें, उसमे आपको एक नाम अवश्य देखने फो मिलेगा और यह है सर फेक दागेल । शास्त्रीय पद्धति के इस बल्ले- बाज और कलात्मक गेबाज के नामोल्लेख के बिना हर पुस्तक अधूरी- सी जान पड़ती है । वह दायें हाथ के महान बल्लेबाज, बार्य हाय से गद फेंकने वाले आदश गेदबाज, अनाले क्षारक्षक और दूरदर्शी पप्तान थे । बहुत से लोग भले इस बात पर यकीन न करें, लेकिन वस्तुस्थिति यही है कि इस अनेले खिलाडी ने वेस्टइडीज क्रिकेट को गरिमा प्रदान की। उनकी उपस्थिति मात्र से नीरस मधो मे भी जान पह जानी। इतना ही नहीं वह खिलाड़ी होने के साथ साय एन्छे शिमा मास्त्री और सीनेट के सदस्य भी थे। उहाने मानचेस्टर विश्वविद्यालय 156 से स्नातक की परीक्षा पास की थी और सगभग 15 वष तक किबेट जगत मे उनरे सेल का दवदवा रहा। जब 1947 मे एलन में नेतृत्व मे इग्लैंड की टीम ने वेस्टइंडीज का दौरा रिया तब वह पहली बार प्रकाश में पाए और 1963 में पर हो निोट से सायास लिया तब उनकी अवस्या 39 थप की थी। उस पार साल बाद उनका असामायिर निधन हो गया। मा तो उनका हर स्ट्रोक लाजवार होता था, लेकिन सेटक्ट गकी सबसे बड़ी विशेषता थी। जिन लोगो ने उनको अन्तिम टेस्ट (1963 माह ट्रेफोड) देखा है, उनका कहना है कि उन जैसा शानदार लटकट लगाने वाला खिलाडी पिछले 50 वर्षों में दिखाई नहीं दिया। जिस समय उहें विस्हन के सम्मान से सम्मानित किया गया उस समय विस्हन में ये शाद लिखे गए-जहां तक बल्लेबाजी के सौदय का सवाल है, यदि कोई व्यक्ति अपने आपको उनसे बेहतर साबित करने का दावा करता है तो यह उसका दम्ग ही माना जाएगा।' 1950 मे ट्रेट ब्रिज मे खेले गए टेस्ट मे उहोंने 300 मिनटो मे 261 रन बनाए, जिसमे उहोने 35 चौके और 2 छक्के लगाए थे। कुछ लोग उनकी इस पारी को उनके जीवन की सवश्रेष्ठ पारी मानते हैं तो कुछ 1957 मे ट्रेट ब्रिज म खेली गयी पारी को, क्योकि इसमे उहोंने प्रारम्भिक बल्लेबाज की भूमिका निभाई थी। आस्ट्रेलिया में जब उ होने शतक (108 रन) बनाया था, उस समय वह घोटप्रस्त पे और लिहवाल और मिलर जैसे गेंदबाज उन पर तेज गेंदबाजी का हमला किए जा रहे थे। लेकिन जहा तक स्वय वारेल का सवाल है वह कानपुर में खेले गए टेस्ट में अपने दोहरे शतक को अपने जीवन का सवप्रेष्ठ प्रदशन मानते हैं। यह तो हुआ उनका बल्लेबाजी का पस, अब जरा उनके गेंदबाजी के रूप की भी एक झलक प्राप्त कर ली जाए। बायें हाथ से गेंदबाजी करने वाले वारेल ने सिनर के रूप मे काफी ख्याति अजित की। नये गेंद से वह सीमित और पुरानी गेंद से लेग स्पिनर पते । कई बार वह वेस्टइण्डीज की ओर से आक्रमण शुरू कर देते और एक के बाद एक विकेटो की गिल्लिया उहानी शुरू कर देते और स्कोर बोट पर निखा रहता, इग्लंड पर 59 रन था कि 'आस्ट्रेलिया 6 पर 38 रन । एक अच्छे शिकारी की तरह वह हाथो को उगलियों से ज्यादा अपने मस्तिष्क से काम लेते।
157 कांस्टेंटाइन वैस्ट इण्डीज के भूतपूर्व क्रिकेट कप्तान बोर त्रिनिदाद तथा तोबागो के लदन स्पित भूतपूर्व उच्चायुक्त 69 वर्षीय लॉड (लेरी) कास्टेंटाइन का पहली जुलाई, 1975 को देहान्त हो गया। उहें 9 जुलाई 1975 को पोर्ट ऑफ स्पेन मे पूरी रस्मो के साथ दफनाया गया। वास्टेंटाइन अपने आपमें एक सस्पा पे। वह केवल बढिया क्रिोट खिलाडी ही नही वल्कि एक मसनिक अधिकारी झाँमास्टर, यकील और राज- नीतिक भी थे। हैमण्ड, वली, डमैन, सारवृह, निमेट, फ्रीमन और यौरिलि जैसे विख्यात और उच्च दर्जे के क्रिकेट खिलाडियो मे केवल पारा एक खिलाडी थे, जिनकी बल्लबाजी गेंदबाजी घोर फोल्डिंग गणव की थी। भारत के कुछ क्रिकेट प्रेमियो को फरवरी 1953 की वह बाा याद है, जर मद्रास के चेपक मैदान में फास्टेंटाइन ने मद्रास किोट गलब के लिए दो दिवसीय मैच में श्रीलका के विष्ट भाग लिया पा। बैशा तब उनकी आयु 50 वर्ष से ऊपर थी, लेकिन खेल पर उनका पंसा ही अधिकार पा जैसा कि अपनी जवानी के दिनो मे था। फास्टेंटाइन में एक कुशल और उत्साही कप्तान को पूबियां थी, जो हर बोवर की गेंदबाजी और हर बाल के हिट किए जाने की बारीकियो को बड गौर से देखते और बाद में अपनी टीम के हर खिलादियो । जनसी धूपियो और बागियों से अवगत कराते । उनके जीवन की एक दिलचम्म घटना या- आती है-1928 में वेस्ट इन्डोज के टीम के इग्लड फेक दीया कांस्टेंटाइन जख्मी हो गए। लेकिन बावजूद डॉक्टर की सलाह और साथियों के अनुरोध के यह नदान में आ गए । मिडिलसंक्त ने छ विकिटों पर 352 रन बनाकर पी समाप्ति की घोषणा कर दी। स्टीज ने खेलना शुरू किया, नेकिन उसके लय सिलाडी केवल 797र्गे पर ही नह गए। तय कास्टैं- CTET मा सभाला और 55 मिनट मे 86 रन बनाकर सनी टोर के गिरते हुए मनोरल का सम्भाला। उसके बाद उहोंने गेंदबाजी मएमास दिधाया और पावल II रन देकर इग्लैंड को 6 विकिटें लीं। "रा पर तुर्रा यह पसरी पारी मे आटेंगरनो एक घण्टे में एक थतन मारा और हारी हुई बाजी मानन विदिटो से जीत लिया। यह पछ काल्टेंटाइन को सूरा-पूर, आत्मदिर, गतिषीलता पा मारा परिचायक है।
158 कास्टेंटाइन अपने समय का सवयंष्ठ विकेट खिलाडियों में से एक पा। बल्लेबाजी, गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण तीनो म वह निपुण था। खेलते समय यह कभी किसी केप को छोड़ने वाला न था। प्रहारक बल्ले. लायड (क्लाइव) 1944 वेस्टइण्डीज टीम के कप्तान और दाए हाय बाज। भारत के विरुद्ध 196667 मे उहोने खेल जीवन का श्रीगणेश किया। 1976 में उनके नेतत्व में वेस्ट इण्डोज ने इग्लड पर विजय पाई। उन्होने ही इस टीम को "विश्वकप क्रिकेट प्रति- योगिता मे सन 1975 और फिर 1979 मे विजय दिलवाई । उहोंने सन 1976 मे लकाशर की ओर से खेलते हुए 120 मिनट मे ही 201 रन बनाकर जेसप का तेज युगल शतव वनान का रिकाड ध्वस्त कर दिया। वह दाए हाथ से मध्यम तेज गति पर गेंद भी फेंकते हैं । इग्लैट और आस्ट्रेलिया के विरुद्ध उहाने अपन पहले टेस्ट मचो म ही शतक बनाए थे । वह बडी चुस्ती से तनाव विहीन रहबर क्षेत्ररक्षण परते हैं। उनका यो उल्लेखनीय है, गिरत पडते वह सीधे निशाने पर पेंद फेंकते हैं । ये चश्मा पहनकर खेलते हैं। उन्होंने 110 टेस्ट मच खेले हैं और इनमे 7513 रन 46 41 वी औमत पर बनाए हैं। इनमे 19 शतक भी मलविन इसाफ कालीचरण (कप्तान) गयाना, जम-माच 21, 10 91 1972 में टेस्ट पदापण-अब तर 66 टेस्ट खेलकर 4399 रन बना चुके हैं औसत 4443 सर्वा घिक स्कोर-158 इग्लैंड के विरुद्ध पोर्ट आफ स्पेन में 1974 1 12 घातक टेस्ट मषो मे। स्लिप में दस क्षेत्र रक्षर । बाए हाथ के बल्ले- वाज । भारतीय मूल के खिलाडी। धेनवन मलो जो होल्डर बारवाहोस, बम-अक्टूबर 19451 टेस्ट पदापण 19691 बरिष्ठ य अनुभवी खिलाडी। नपी तुली मध्यम गति पी गेंदबाजी म निपुण । दूसरी बार भारत भ्रमण पर। 40 टेस्ट 740 रन (ोसत 1435), सर्वाधिक स्कोर 42 यूधीलह के विरुद्ध रोट माफ स्पेन 159 19721109 टेस्ट विकेट ले चुके हैं । (औसत 3046)। सर्वोत्तम गेंदबाजी 6128 बास्ट्रेलिया के विरुद्ध पोट ऑफ स्पेन 1978 । दाएं हाय के बल्लेबाज व गेंदगज । पुरानी गेंद को 'कट' करने म निपुण । शेष फौउद महमुल वक्फस गयामा, जम जनवरी 31, 1954 1 दाए हाय के धुजाधार बल्लेबाज । प्रारम्भिक प मध्यक्रम के बल्लेबाज टीम के सर्वोत्तम क्षेत्र रक्षक । भारतीय मूल के खिलाडी। स्मिथ (गो नोल) 1933 से 1959 वेस्टइण्डीज के इस बल्लेबाज और माफ स्पिन गेंदबाज को प्रथम श्रेणी के विकेट मे पाच वप खेलने के बाद ही कार दुर्घटना में मत्यु हो गयी। उहोने एक बार 79 रन म छह छक्के और चार चौके लगाए। उन्होंने इग्लड के विरुद्ध अपने पहले टेस्ट मे 1956 मे लाग ऑन म इतनी जोर से हिट लगाई कि गेंद ने लेडीज बालकनी की छत को टाइल को तोड दिया और छह रन दिलवाये। यह छापा, लेकर को गद पर लगाया था । बनले दलब मे सन् 1958 से खेलने लगे। उनके शाट से गेंद दीवारें पार करती पडोस के पुटबॉन मदान के मध्य जा गिरी। केवल 78 मिनट मे उन्होंने शतक पूरा किया। हॉल (वेज्ले) 1937 वेस्टइंडीज के यह तेज गेंदबाज बढी लम्बी दौड लगाकर गद फेंकते थे । उहोंने 48 टेस्ट मैचो में 2638 रन की औसत पर 192 विक्टि लिये। अपने 20वें टेस्ट में ही उहोने 100वीं विक्टि ले ली थी। 1958 59 वे मारत पार दौरे मे उहोंने 16 विकिट लिये । टेस्ट मैचो मे इडोज को ओर से तिकडी जमानेवाले वह पहले खिलाडी ये । लाडरा म उहोंने सन् 63 मे लगातार 40 ओवर गेंदबाजी की ओर तेजी में कमी नहीं आने दी। उन्होंने 93 रन पर 4 विकिट लिये । कम-स कम नो बार उन्होंने विरोधी टीम को पारी में आधे से अधिक विकिट लिये 160 विस्टन डेविस घेस्टइडीज दीप समूह मे गन्ने और नारियल की ही नही तेज गेंद- धाजों की भी खेती होती है । यही कारण है कि वेस्टइटीज का गेंदबाजी आक्रमण मुख्यत तेज गेंदबाजो पर ही निभर रहता है । पहले पंकर सर्कस और फिर दक्षिण अफ्रीका को अपने उम्दा खिलाडियो को खो देने के बावजूद भी वेस्टइटीज का खजाना खाली नहीं हुआ। वेस्टइडीज के नये तेज गेंदबाजो में सबसे नया नाम विस्टन रेविस का है। डेविस ने अपने देश के लिए खेलते हुए विश्व कप क्रिकेट प्रति योगिता में पास्ट्रेलिया जैसी टीम के विरुद्ध 51 रन पर सात विकेट लेकर नया रिकार स्थापित किया। विश्व कप में मैल्कम मार्शल के अस्वस्थ होने से डेविस को आस्ट्रेलिया के विरुद्ध उतारा गया था। जब किम बज को 18 रनो पर हेविस ने कप्तान लायड के ही हापों कैच बाउट मराया तब कही जाकर लायड का विश्वास डेविस के प्रति जगा। हज के बाद रेविस ने यलप, एलम यार, मकली, सासन और हाँग का माउट किया। डेविस का विश्लेषण 103051-7 रहा जिससे वेस्टइंडीज को 101 रनों की विशाल विजय मिली। 29 वर्षीय विस्टन वाल्टर डेविस का क्रिकेट से सरक एक विचित्र सपोग है । डेविस जो विहवड दीप का रहने वाला है जा 17 वप का हो या तो किसी अपराध के कारण उसे स्कूल से निकाल दिया गया। इसके बाद वह सेंटविसेट के एक तकनीकी केन्द्र में कोमं परने के लिए गया, यहा उसकी किोट पनपी स्टायन हिल क्लव के मैनेजर ने पर विस में अपार प्रतिमा देखो तो उसे अपने क्लर से खेलने के लिए अनुर धित पर लिया। लायर लेविस डेविस के मसीहा है । सोयन हिल क्लव पोषब से रेविस की सेवाएं मिली उसके जर पांद लग गए और दो वर्षों मार में ही यह मीण मंपियन हो गई। उसे पर किसी ने सलाह दी कि त्रिवेट की दीक्षा इतर में पूरी होती है तो वह गर्मियों में इग्लर पता गया और याकंगापर में एप पसर परसर से येसने सगा। भारतीय टीम जर देस्टीरकी यात्रा पर गयीमोरपिस ने माठ 161 विकिट लिए और चमनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। डेविस पटो ही नेट पर अभ्यास करता है। जिमनेजियम मे जाकर कसरत मी करता है । वह वेस्टइण्डीज का स्पायो गेंदबाज बनना चाहता है। वह भाराब, सिगरेट और अ य व्यसनो से दूर है। क्लाइड वाल्फट कलाइड वाल्कट को बल्लेबाजी उनके भारीपन की तरह थी-पानी प्रभावशाल और शक्तिशाली । वह न तो बीवस की तरह सम्पूर्ण बल्ले- बार थे और न ही वारेन की तरह फ्लात्मक । बाल्कट की एक अलग हो पलो यो । उनका क्षात्मक सेन एव मजबूा लौह स्तम्भ था। वाल्कट का जन्म 17 जनवरी 1926 को हुआ। उन्होंने अपनी टेस्ट जिदगो विकेट कीपिंग से शुरू की लेकिन केवल 15 टेस्टो ये वाद 1951 52 में इ7 भार से मुक्त होकर अपना सारा ध्यान बल्लेबाजी पर लगा दिया । उहाने अपन टेस्ट किकेट की शुरुआत इग्लैण्ड के विरुख वेस्ट इण्डीज में 1947 48 मे दी लेकिन सही मायने म 'डम्यू' तिकडी ग भारत और इग्लैण्ड के दौरो के वाद शामिाहो सके। भारत के दौरे में 1948 49 म उहोत लगातार 152, 68, 54, 108, 43, 11 चोर 16 रन (औसत 6457) बनाए। 1954-55 मे यास्ट्रेलिया के विरुद्ध वेन्ट इण्डीज म उ होन पाच टेस्ट शतक बनाए जो किमी एक शृखला म सबसे अधिक शतक लगाने का विश्व रिकाड है। हर फुट और दो इच लम्बे वालट ने 44 टेस्ट मैच खेले और 5668 को औसत मे 3,798 रन बनाये जिसमें 15 शतक शामिल है। 15 टेस्टो की विरेट कीपिंग से उन्होंने 27 वच और 11 खिलाडियो को स्टम्म भाउट किया था। उनके वाद टेस्टो मान 25 बैच लिए । वह कभी कभी मध्यम गति की गेंदबाजी भी करते थे। दो बार टेस्टों मे उहाने वेस्ट इण्डोज के लिए आक्रमण की शुआत भी की थी। विधियन रिवर्ड्स उपमप्तान (लीवड आइमलैंस और समरसेट)। जम 7 गणे, 19521 दायें हाय के बल्लेबाज, दायें हाथ के माफक एव मध्यम गति के गेंदबाज । पहला प्रथम श्रेणी मंद 1971 72 में पिंडवई याइसवर के विरुद्ध । पहला टेस्ट 1974 मे भारत के विरुद्ध दगलोर म। 1976 162 उप से वर्ष में 11 टेस्ट मैचों में 1710 रन बनाये-एर वर्ष में सबसे अधिक जज रिपाई। 1976 में विसन द्वारा स्वश्रेष्ठ खिलायी। टेस्ट रिजाई 88 टेस्ट, 131 पारिया, 6472 रन, (मोसन 5261), उपतम 291, 20 शराफ, 28 मईशव, 85 कष, 22 विफेट (भौसठ 56.57) पार मापसे यह पूछा जाए फि बाम विश्व का नम्बर एक पल्ले- पाव कोन है, सो बाप न सो मापस्कर श नाम लेंगे, मी पपा का, नपहीर मास का और न ही डेयिह गोपर काबलि काप निश्पित पह बेपट इण्टीम में मितिमा रिपहर को ६ गावस्कर, पस, पहीर या गोवर के समक्ष गेंददामी करते समय कोई भी गेंदबाज अपनी भाशामक शामया को नहीं भूलता लेकिन अब यह विधियान रिपस के सामने माता तो उसफो एक ही कामना होती है कि विरेट पाहे मियाम मिले, लेफिन कम से कम रिपड उसकी गेंदो की धुनाई करे, उस गेंदबाषी विश्लेषण मटियामेट न पर। श्वना हाने पर भी नाप रिषड्स को केदस एम धाकर पल्लंगाय या ऐण बल्वाज नहीं कह सकते जिसकी मशा हर एक गेंद को पीटने की ही हो। उसके गाटस में असीर शक्ति ही नहीं होती बरिष उसमें फलारमफता के भी दर्शन होते हैं। रिपड्स का कोई भी साट ऐसा नहीं होता जिसका उल्नेय मिटकी रितामा मेन मिलता हो । इही सर यातों के कारण रिपस को गावस्कर, पस, बहीर मोर गोबर से इसीस माना जाता है। श्केिट में रिपर्स ने नमल एफ बल्लेबाज की हैसियत से बलि एक माफ स्पिनर और एक मुत्तम क्षेत्ररक्षा के रूप में अपना जीवन पारम्भ किया। विविया रिपर्स को पहले-पहम पर्चा 1973 में हुई पी। उस समय समरसेट कान्टी की एक टीम पेस्ट इण्डोम के दौरे पर पायो । रिपस तारा गेंदो सेसने लिए मानायी गई नीरू को देखते हए उघी दौरे दौरान ही उसे माउटरी निकेट में ऐसने का थामायण प्राण हो गया पा। इस पनौती परे थाम नण को स्वीकार पुरले ए रिपस मे पहने ही सीरन में 2000 रन बनाकर दुनिया पर में मिटमियों का ध्यान अपनी गोरीप सिपापा। इए सारे बाद तो रिपस का पाडू सर पर बोसने नपा पाटनी के चमतरी ममोदित प्रतिमा दोपहा हा गरपस्या करते थे। इसलिए पर 1974 में भारत के दौरे के 163 लिए साइव सायह को वेस्ट इम्टीम का कप्तान मनोनीत किया गया तो रिचडर्स भी टीम में एक सदस्य के रूप में चुन लिया गया। मैल्कम मार्शल पम 18 अप्रैल, 1958 दायें हाथ के तेज गेंदवाज और दाये हाप के आक्रामक बल्लेसाम, पहला प्रपम श्रेणी मैच 1977-78 मे जमका के विरुद्ध । पहला टेस्ट 1978 79 में भारत के विरुद्ध मगलोर में। इस समय विश्व के सबसे खतरनाक तेज गेंदबाज जो किसी भी बल्ले- चान के लिए मुश्किलें घडी कर सझते हैं। टेस्ट रिफाई--51 टेस्ट 1068 रन, 240 विट। डेसमड हेन्स अम 15 फरवरी 1956, दायें हाथ के बल्लेबाज । पहला प्रपम श्रेणी मैच 1977 मे जर्मया के विरुद्ध । पहला टेस्ट 1977-78 में आस्ट्रेलिया के विरुद्ध पोट आफ स्पेन में खेला जिसमें इन्होंने 61 रन बनाए। टेस्ट रिकार्ड-65 टेस्ट, 4012 रन, 9 शतक । मायकल गोर्डन निनिष के साथ वेस्ट इण्डीज के लिए ओपनिंग करते हैं। लेरी गोम्स बम 13 जुलाई, 1953, बायें हाथ के बल्लेबाज और दायें हाप के माफ स्पिनर । पहला टेस्ट 1976 में इंग्लैण्ड के विरुद्ध नाटिंधम में खेला। टेस्ट क्रिकेट योर एक दिवसीय क्रिकेट में इहोंने कई अच्छी पारिया खेली हैं। टेस्ट क्रिकेट में इनका उच्चतम स्कोर 143 रन है। टेस्ट रिफाड 60 टेस्टो में 3172 रन, 9 शतक और 13 अर्धशतक । माइकल होल्डिंग घाम 16 फरवरी, 1954, दायें हाथ के तेज गेंदबाज, पहला प्रपम घेणो मंच 19731में बारबाडोस के विरुद्ध खेला । पहला टेस्ट 1975- 76 में बास्ट्रेलिया के विरुद्ध विस्वेन में खेला। तेज गेंदबाजी के साथ- साप समय पड़ने पर अच्छी बल्लेबाजी भी कर लेते हैं। गेंदवानी में इनका धर्वश्रेष्ठ प्रदशन 8 विकेट केवल 92 रन देकर है। पुल 60 टेस्ट मचो में 910 रन, 249 विकेट।
164 आस्ट्रेलिया डान ग्रेडमेन पास्ट्रेलिया के गन पेमेन विश्व ये सवश्रष्ट बल्लेबाज है, इसमें दो राय नहीं हो सकती। बाप पाहें तो उसे क्रिकेट का बादशाह भी मान सकते हैं। यह ठीर है कि टेस्ट मैचो मे अधिक रन बनाने के मामले में रमेना सोयस, काउण्डे, मह आशिकापी पीछे छोड़ रखा है और प्रथम श्रेणी की मिट मे उनके 18069 रनो के मुकाबले कई बल्लेबाज 30000 से अधिक रन बना चुके हैं, जिसमें कि हान्स, सोबर्स यादि के साप नियन क्लोज जसा खिलाडी भी शामिल है परन्तु इससे उनकी श्रेष्ठता और महानता पर कोई आज नही माती। ये नहीं भूलना पाहिए कि इन सभी ने ग्रेडमेन से अधिक टेस्ट व प्रथम श्रेणी में मच सेल है और बोसत में सबके सब उससे कोसो पीछे हैं। हमेन का टेस्तों का 9994 प्रथम श्रेणी का 9514 औसत अभी तक महितीप है और वर्षों अद्वितीय रहने की आशा है । आशा क्या है रहेगा ही क्योकि ऐसी ममनात प्रतिभा वाले खिलाडी कम ही होते हैं। गैडमेन का वह युग या, जिसम हेराल्ड लारवुड तथा जिल बोस के अलावा पिल वोवस तया गवी गलेन सरीखे तेज गेंदबाज क्रियेट के मैदान मे मौजूद थे । अदभुत विरक्षण शक्ति वाले द्रडमेन का औसत भी उसके समान ही अदभुत तथा यातयजनक है। 5 टेम्टो की 80 पारियों में 10 बार नाबाद रहकर 29 शतको को सहायता से रेमे ने 6996 रन बनाए। उसका उच्चतम स्कोर था-334 रन तथा औसत या 9994 रन प्रति पारी। अपने पूरे किकेट जीवन मे बेसमैन ने 37 दोहरे शतक तथा छ तिहरे अद्ध शतक बनाए पे। वह सिर्फ चार रनों की कमी से 10000 का औसत प्राप्त करने से वचित इगया। सर्व कालीन बल्लेबाज ग्रेडमन किट को परिस्थितिया के अनुसार अपने को पालने में सक्षम या । ऐसे महान पिलाठी ये तत्व में आलिया को टीम एक बार भी टेस्ट शृखला नहीं हारी। देशमन दे बारे में जो कुछ लिखा पाए, वह योडा ही है। सर लियरी कास्ट टाडा ने अपनी पुस्तक ोिट इन दि सन में दिए गये रिच raer 1945 , तर के पतान केहो प्राणने 1945 में भी पुस्तक 'रिकेट मस्से टियर में वया 1956 में प्रकाशित लेाहटर की पुस्तक 'जस्ट माई स्टोरी में 165 चुनी गई विश्व एकादशो मे सर जान देडमैन टीम के आधार स्तम्भ थे। प्रथम श्रेणी की क्रिकेट में भी ट्रैडमैन ने असदिग्ध क्षमता का परिचय दिया और 338 पारियों में 19514 की मोसत से 28067 रन बनाए, जिसमे 117 शतक शामिल हैं। कप्तान के रूप में भी ऐडमन की प्रतिभा निविवाद है। उसकी कप्तानी का काल आस्ट्रेलियाई किट का स्वर्ण युग कहलाता है। ग्रेडमैन नेतृत्व मे आस्ट्रेलिया एक शृखला नही हारा । बेडमैन अत्यन्त पतुर और योग्य कप्तान था। उसने 24 टेस्ट मैचो में आस्ट्रेलिया की टीम की कप्तानी की, जिसमे 15 मे उसे विजय मिली और केवल 3 में पराजय। आर्मस्ट्राग (वारविक) 1879 से 1947 आस्ट्रेलिया के इस विशालकाय क्रिोट खिलाडी को "बिग शिप' के नाम पुकारा जाता था। वह उत्तम बल्लेबाज और धीमी लेगक गेंद फेंकते थे। 50 टेस्ट मैची म उहोने 2863 रन बनाए और 87 विकेट लिए । जोहानीजदग म दक्षिण अफ्रीका के विरुट 159 रन (अविजित) का उनका स्कोर उनके टेस्ट जीवन का सवश्रेष्ठ स्कोर था। सिडनी में 1920 म उन्होने इग्लड के विरुद्ध 158 रन बनाए । नाटिंघम मे 1902 म इग्लह के विरुद्ध मच में 47 रन पर बाठ विकिट लिए, यह उनका सवश्रेष्ठ गेंदबाजी रिकाड है। नोल हावं नील हार्वे की गिनती आस्ट्रेलिया के ही नहीं विश्व के सबकामीन महान बब्बू बल्लेबाजो में की जाती है। 194748 की शृखलामे भारत के विरुद्ध अपना टेस्ट जीवन प्रारम्भ करन याला नील हा एक त्पन्त आकषक बल्लेबाज और स्वर-नाइण्ट पर असाधारण पील्डिंग करने वाला खिलाडीपा। राबर्ट नील हार्वे का जन्म 8 अक्तूबर, 1928 को आस्ट्रेलिया के एक खिलाड़ी परिवार में हुआ। शेफील्ड शील्ड म पहले विक्टोरिया और फिर यू साउथ वेल्स की ओर से सेलने वाला नील हायें लगभग 15 वर्ष तक आस्ट्रेलिया टीम का स्तम्भ रहा । हा को आन्दैनिया की ओर 166 से सबसे अधिक 79 टेस्ट लेलले का श्रेय प्राप्त है । वह विश्व के उन गिने-धूने पल्लेयाषो मे है, जिन्होंने टेस्ट क्रिोट में 6 हजार से अधिक रन और 20 से अधिक शतक बनाए हैं। हाय ने 79 टेस्ट मैचों की 137 पारियो मे 10 बार अविजित रहकर 6149 रन मनाए, जिसमे 21 शतक और 24 अद्ध शतक शामिल थे। हार्द का उच्चतम स्पोर 205 रन था, जो उसने दक्षिण अफीका के विरुद्ध 195253 की शुषलाके मेलबोन टेस्ट मे बनाया पाहायें की प्रति पारी टेस्ट औसत 48 41 रन है। हार्वे ने अपने पशस्वी टेस्ट जीवन मे 64 कैप भी सपके और 3 विकेट भी लिए। हार्वे ने अपने 21 टेस्ट शतयो मे 8 दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध, 6 इंग्लैंड के विरुद्ध,4 भारत के विरुद्ध और तीन शतक वेस्टइण्डीज के विस्त बनाए । पपने 6149 रनो मे से 2416 रन हा ने इंग्लैंड के विरुद्ध बनाए। डान प्रेमन और मलेम हिल के अतिरिक्त अन्य किसी भास्ट्रेलियाई बल्लेबाज ने इग्लैह के विरुद इतने रन नहीं बनाए । हा ने अपना सर्वोत्तम प्रदशन दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध किया। 194930 की दक्षिण अफ्रीका यात्रा मे हा ने 1526 रन मनाए। 1952-53 की दक्षिण अफ्रीका की यात्रा मे हा ने 5 टेस्ट मैचो की शृखला में 3 शतकों और एक दिशतक की सहायता से 834 रन पनाए, जो दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध एक रिकार्ड हैं। एक शृखला में इससे अधिक रन बनाने का श्रेय सिर्फ अंडमन (इग्ला के विरुद्ध 1930 की ऋषता मे 970 रन) और हैमण्ड (आस्ट्रेलिया के विरुद्ध 1928-29 की शृखला मे 905 रन) को है। हार्वे ने इग्लंड के विरुद्ध 1962 63 की शृखला के सिंहनी टेस्ट में 6 कच भी लपके जो उसका फोल्डिंग का सवर्थष्ठ प्रदशन है। 1953 की इग्लंह यात्रा में हार्वे ने 2 हजार से अधिक रन बनाने का सम्मान प्राप्त किया। चैपल (इयान) 1943 यास्ट्रेलियाई बल्लेबाज जो अपने तेज पतरे के कारण अत्यन्त मशहूर है। उहोने 75 टेस्ट मैचो में 4286 रन की औसत पर 5345 रन बनाए । इनमें 14 पता भी हैं। उहोंने सन् 1971 मे लारी से टीम 161 की कप्तानी समालों और 30 टेस्ट मंदों मे से अपनी टीम को 15 में विजय दिलवाई। इससे पहले सॉरी के नेतृत्व में धास्ट्रेलिया की टीम गगातार पिछले नो टेस्ट मैचो में से एक मे भी विजय नहीं पा की धी। पल प्रेगरी स्टीफल पमा अगारा, 1948 इयान चंपल का छोटा भाई तथा आस्ट्रेलिया के यतमान कप्यान । फुटप २ मामले में इस समय विश्व में घपष्ट बल्लेमाण । अपने पहले ही टेट मे इग्लैण्ड के विस्त ( 187071) शतक । इयाग द्वारा कप्तान र छोरने के बाद से आस्ट्रेलिया का नेतृत्व-(केवल पैकर पास के बरसे से छोड़कर)। प्रेगरी सिडनी एसपर्ट पन 14 अप्रैल 1870 मृत्यु 31 जुलाई 1929 फितापी स्ट्रोक खेल सकने वाला आस्ट्रेलिया का एकमात्र पस्रोगष। कवर पे सर्वघष्ठ क्षेत्ररक्षकों में से एक । कुल 58 टेस्ट जिनमे से 52 इग्लैण्ड के विरुद्ध । 1909 मे ओपल मे डन्यू का स्ले के साप प्रेगरी ने पहले विकेट के लिए 135 मिनट मे 180 रन जोडे । कुल 58 टेस्टों मे 24530 औसत से 82282 रन । हिल पलेसेट 'पतम' जम18 मार्च 1877 मस्य 5 सितम्बर 1945 कुछ समीक्षको को राय में आस्ट्रेलिया का सवनेष्ठ खम्बू वल्ले. बाम । शुरू मे विकेटकीपिंग भी, पर बाद में सारा ध्यान बल्लेबाजी में । 1201 02 मे इग्लण्ड के विरुद्ध लगातार तीन पारियो म 99, 984 97 स्कोर । टेस्टो मे सर्वोच्च स्कोर 191 (विरुद्ध दक्षिणी अफ्रीका 1910 11) तथा प्रथम श्रणी क्रिकेट मे अविजित 365 रन । कुल 49 टेस्टों में 3955 औसत से 3402 रन (7 शतक)।
166 फिपेक्स, एलन एफ जम 25 मई 1897 मरप 5 सितम्बर 1972 कोई महान बल्लेबाज नही, पर एक रिकाड के कारण क्रिकेट इतिहास में विशेष स्थान । किपेवस और जे ई हुकर ने 1928 29 में मेलधोने मे न्यू साउथवेल्स के लिए विक्टोरिया के विरद्ध दसवें विस्ट के लिए 307 रन जोडे । इन 307 रनो में विपक्स का योगदान या- अविजित 260 रन । प्रथम श्रेणी क्रिकेट म औसत 57691 कुल 22 टेसों मे 1192 रन। वर्ज (पीटर) 1932 आस्ट्रेलिया के इस बल्लेबाज ने 42 टेस्ट मैच मे 2290 रन बनाए। कोवल मैदान मे 1961 मे इलण्ड के विरुद्ध 181 रा ट्रमन तथा स्टेयम की गेंदो पर उन्होने बनाय । 1964 मे उहोंने हडिग्ले मे 160 रन की अविस्मरणीय पारी खेली और टीम को विजय की ओर अग्रसर किया। माश (रोडनी) 1947 आस्ट्रेलिया के विश्वविख्यात विकेटकीपर हैं। माश ने अपने क्रिकेट जीवन मे 1000 रन और 100 कैच 25वें टेस्ट म लेने मे सफलता पाई थी। उहोने 1674 75 मे आस्ट्रलियाई त्रिवेट वप मे 64 खिलाडी आउट करके रिकॉड स्थापित किया। 96 टस्ट मैचो में 3633 रन 56 51 रन की औसत पर बनाए हैं । उसन 366 खिला डियो को आउट किया है- इनमे 344 का पर और 12 स्टम्प । उसने ती शतक भी जमाए हैं। ओल्डफोल्ड (विलियम) 1897 1976 आस्ट्रेलिया के श्रेष्ठतम मिकिटकीपरो मे गिने जाते थे। वे दो महायुद्धो के बीच की अवधि मे 54 टेस्ट मैच खेले । 130 बल्ले- बाजों को उहोने बाउट क्यिा । इनमे से 54 को स्टम्प दिया। वह अच्थे बल्लेबाज भी थे। मैलबन मे उन्होंने 1925 म एक पारी * इग्लण्ड के पाच खिलारियो को माउट किया, इनमे से 1 लपका 169 और पार स्टम्म किये थे। विस्वेन मे 1928-29 में इग्लैण्ड ने 521 रन बनाए तो आल्डफील्ड ने एक भी बाई नहीं दी। अगले टेस्ट मे इग्लैण्ड के 636 के स्कोर मे केवल दो बाई थी और इसके बाद चार पारियो मे इलैण्ड ने शृखला के 1923 रन पूरे किए ता कुल 3 बाई थी। एलन राबर्ट वोर्डर (कप्तान) 27 जुलाई 1955 को ज में इस समय एलन बौडर को विश्व के सबसे बेहतरीन बल्लेगजों में से एक गिना जाता है और आस्ट्रेलिया की टीम इस भारत यात्रा दौरा बोर्डर की बरलेबाजी पर बहुत अधिक निभर करेगी। 1985 86 में जब भारत ने आस्ट्रेलिया की थो तो बोर्डर ने 3 टेस्ट मैच मे 59 60 औसत से 298 रन बनाये थे। 1979 80 मे अब वाडर ने शिम ह ज को टीम के साथ भारत की यात्रा की थी तो उसने 6 टस्ट मैच में 1311 की औसत से 521 रन बनाए थे। इससे स्पष्ट है कि भारतीय गेंदबाजो के लिए बोडर हमेशा ही एक मुश्किल बल्लेबाज सिद्ध हुआ है। बोडर ने अपना प्रथम श्रेणी मैच 1976 77 मयू साउथ वेल्स के लिए 21 वप की उम्र में खेला था। उस बाद कभी उसने पीछे मुडकर नहीं देषा । प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उसका सर्वाधिक स्कोर 200 है जो उसने 1979 80 मे यू साउथ वेल्स के लिए क्योसलैंड क विरुद्ध बनाया था। टेस्ट किट मे उसका सर्वाधिक स्कोर 196 रन है जो 1985 में इग्लण्ड के विरुद्ध लाडस टेस्ट मे बनाया था । 1980 मे पाकिस्तान के विरुद्ध लाहौर टेस्ट में एलन बोडर ने दोनो पारियो मे शतक बनाया था-150 एवं 153 रन-एक टेस्ट की दोनों पारियो मे 150 या इससे अधिक रन बनाने वाला वह अकेला बल्लेबाज है। इस समय बोडर 84 टेस्ट मैच खेल चुका है और आस्ट्रेलियाई टीम का सबसे अनुभवी खिलाडी है । अगरी रिचर्ड जॉन मैय्यूज मजाकिया व्यक्तित्व के यू साउथ वेल्स से आये इस आलराउडर का बम 15 दिसम्बर 1959 को हुआ था । एक खिलाड़ी के रूप में मैथ्यूज का कोई मुकाबला नहीं है पर किट प्रेमियों और दशकों में 170 बीच मप्यूज थपनी हल्की फुल्की हरकतो के कारण भी बहुत लोकप्रिय है । वह बायें हाप का मात्रामक बल्लेबाज है, दायें हाथ से मॉफक गेंदबाजी करता है और कवर पर बेहद फुर्ती के साथ क्षेत्ररक्षण करता है। 1985 86 मे अपनी आस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान भारतीय टीम को इस खिलाड़ी के साथ बहुत कहा मुकाबला करना पापा। मप्यूज ने 3 टेस्ट में 4775 औसत से 1 शतक के साप 191 रन बनाये थे। डेविड रावर्ट गिल्बर्ट न्यू साउथ वेल्स के दायें हाय के इस तेज गेंदबाज का पम 19 दिसम्बर 1960 को हुआ था। इस समय आस्ट्रेलिया की टीम तेज गेंद- बाजी मे गिल्बट पर बहुत अधिक निर्भर है । गिल्बट जरूरत पड़ने पर उपयोगी बल्लेबाजी भी कर लेता है। 198586मे अब भारत ने आस्ट्रे- लिया की यात्रा की तो गिल्बट ने 2 टेस्ट मैच में 15 रन बनाये थे और 4 विकेट लिए थे। डेव गिल्बट कभी कभी बहुत तेज गेंद फेंकता है और उसका सबसे प्रमुख हपियार दायें हाप के बल्लेबाज के लिए इनस्विगर गेंद फेंकना है । ये गेंद फेंकना उसे इमरान खान ने सिखाया है जो 1984 85 के वष में यू साउप वेल्स के लिए सेला था। क्रेग जॉन मेकडरमॉट आस्ट्रेलियाई क्रिकेट में पिछले कुछ वर्षों में बड़ी तेजी से चमकने वाले दायें हाप के क्वींसलैंड राज्य के इस तेज गेंदबाज का जन्म 14 बाप्रल 1965 को हुमा था। मेक्डरमॉट सही मायने में एक तेज गेंदवाय है और उसमे भल्लेबाजों को भयभीत करने का दम है। यार गर्दै उसका प्रमुख हपियार है और अपनी गेंदो की तेजी मे परिवतन करने को कला उसने आस्ट्रेलिया के महान तेज गेंगबाज डेनिस लिली से सोधी है। 1985 86 में जब भारत ने आस्ट्रलिया की मात्रा की तो मेकहरमॉट अधिक सफल नहीं रहा था। उसने दो टेस्ट मैचो में 6666 औसत से सिफ तीन विकेट लिए। ज्योफरी राबर्ट मार्श पश्चिम बास्ट्रेलिया टीम के भरोसे के बल्लेबाज माश ने आस्ट्र.
178 लियाई टीम में एक सलामी बल्लेबाम के रूप में अपने लिए सुरक्षित स्थान बना लिया है। माध का बम 31 दिसम्बर 1958 को हमा पा और यह दायें हाथ का बल्लेबाज है। 198586 का वर्ष तो उसके लिए विशेष रूप से भाग्यशाली सिद्ध हुआ है और उसने कई शानदार पारियां खेलने के साप कई अवसरो पर डेविड बून के साथ मिलकर आस्ट्रेलिया को शानदार सुरमात दी है, यह विझट पर टिककर रन बनाने की कला जानता है इसलिए उसका विकेट लेने के लिए गेंदबाजो को अच्छी मेहनत करनी पड़ती है। धूस रोड पश्चिम आस्ट्रेलिया के इस पायें हाय के तेज गेंदबाज का नाम 1985-86 के वप के दौरान वही सेजी से चमका । वह 5 फुट 8 इच लम्बा है। और इस तरह से अपनी लम्बाई मे वह वेस्टइडीज के गारनर को भी पीछे छोड देता है। वैसे गारनर के मुकाबले मे वह बहुत हल्का फुल्का है लेकिन गेदो की तेजी मे यह गारगर का मुकाबला कर सकता । 1985 86 में भारत के विरुद्ध टेस्ट मैचो मे उसने 2954 यौसत से 11 विकेट लिए और वह आस्ट्रेलिया का सबसे सफल गेंद- बाज पा। विश्व शृखला कप में उसने 25179ोसत से 17 विकेट लिए जिसमे एक हैट ट्रिक शामिल है। साइमन पीटर डेविस विक्टोरिया टीम के इस दायें हाथ के मध्यम तेज गति के गेंदबाज का जम 8 नवम्बर 1959 को हुआ था। अभी डेविस ने सिफ एक टेस्ट मच खेला है लेकिन एकदिवसीय क्रिकेट में यह आस्ट्रेलिया के लिए बहुत अच्छा प्रदशन कर चुका है। 1985 86 के विश्व शृखला कप मे उसने 1661 औसत से 18 विकेट लिए थे और वह आस्ट्रेलिया का सबसे सफल गेंदबाज था। 198586 मे उसे भारत के विरुद्ध टेस्ट रिक्ट खेलने का मौका नहीं मिला। यह आस्ट्रेलिया की युवा टीम के साप इग्लण्ड की पात्रा कर चुका है ।
172 न्यूजीलैण्ड कागडन (बेवन अर्नेस्ट 1938) यूजीलह के ऑलराउडर । उहोंने जी० टो० हालिग के बाद 1971 72 में वेस्टइण्डीज के विरुद्ध अपनी टीम की कप्तानी की और 17 टेस्ट मैचो के बाद 1976 मे एम० टनर को कप्तानी की बागडोर सौंप दी । वह दाए हाथ से मध्यम तेज गति की गेंद फेरते हैं । यह 100 से अधिक विक्टिं प्रथम श्रेणी के मच मे ले चुके हैं । टस्ट जीवन में इग्लैंड के विरुद्ध टबिज मे उहोने 1973 मे 176 रन मनाए थे और “यूजीलैंड को विजय की स्थिति तक पहुचा दिया था, यद्यपि भवत उनकी टीम हार हो गई थी। टर्नर (ग्लेन) 1947 यूजीलैंड के इस बल्लेबाज ने 39 टेस्ट मैचो मे 2920 रन बनाए और इन 7 शतक प्राप्त किए । उनका अधिकतम स्कोर 259 रन रहा है। 40 इंच लिए हैं। । टेलर(स) 1943 न्यूजीलैंड के इस क्रिकेट खिलाडी ने 1973 तक अवकाश लेने के समय ता 111 विकिट लिए थे। इतने विकिट और किसी यूजीलड के खिलाडी ने नही लिए । उन्होंने 1971-72 को टेस्ट शृखला में वैस्ट- इण्डीज के विरुद्ध 74 रन पर 7 विकिट लिए थे। उहोंने अपन खेल- जीवन के पहले दोनी शतक टेस्ट मैचों मे ही बनाये--भारत के विरुद्ध कलकत्ता में 1965 मे 105 तथा वेस्टइण्डीज के विरुद्ध 1241 इनमे से 50 रन तीस मिनट मे ही उसने बना लिए ये जो कि अनोखा रिबाड है । उहोने कलकत्ता टेस्ट मच मे पारी में 86 रन पर विकिट भी लिय। ऐसा शानदार टेस्ट श्रीगणेश शायद और पिसी पिलाडीका नही हमा होगा। वह बाए हाथ के बल्लेदार थे और मध्यम तेज गति से दाए हाय स गेंदबाजी करते थे।
173 रोड (जॉन रिचर्ड) 1928 न्यूजीलैंड व ओटगो तथा विलिंगटन के खिलाडी, विलिंगटन को ओर से 1962-63 में उन्होंने 296 रन बनाते हुए 15 छक्के लगाए और विश्व-रिकॉह तोड दिखाया। 1955-56 मे उहोने न्यूजीलैंड टीम की कप्तानी की और उनको वेस्टइ डीज के विरुद्ध प्रथम टेस्ट-विजय दिलाई। वह लगातार 58 टेस्ट मैचो में खेले । इनमें से 34 में उप्तानी की। वह ऑलराउण्डर थे और 1954 55 में उन्होंने रेडपथ-कप और विडसर-कप क्रमश सवश्रेष्ठ बल्लेबाजी और गेंदबाजी पर जीत लिए। सटक्लिफ (बर्ट) 1923 न्यूजीलैंड खिलाडो जो विकेट-इतिहास के सबू खिलाडियो में श्रेष्ठतम माने जाते हैं । टनर को छोड अय किसी यूजीलैंड खिलाडी पी तुलना मे उहोने अधिक रन (172 3) और अधिक शतक (42) बनाए । दो बार 300 से अधिक रन बनाए । उहोंने ओटगो मे 1952- 53 मे 385 रन का जो स्कोर दिया, वह किसी पन्बू बलेवाज का अधिकतम स्कोर है। 1949 में सटक्लिफ न इग्लैंड के दौरे म 2627 रन 59 70 की औसत पर बनाये । इग्लैंड भ्रमण करने वाली रीमा मे प्रहमन ने ही इससे बेहतर रन बनाय हैं। सटक्लिफ ने अपो खेल- जीवन मे चार बार दोनों पारियो मे शतक बनाए। बर्जेस (माक) न्यूजोलेह के इस बल्लेबाज ने अपने जीवन में अब तक 30 टेस्ट खेते हैं, इनमे पाच शतकों सहित उहोते 2684 रन बनाए हैं । उनका अधिराम स्वोर 119 (अधिषित) है। यारन लोज न्यूजीलैंड के बल्लेबाज विक्टिकीपर, जो बयत उत्कृष्ट क्षेत्र रक्षक हैं। उन्होंने 12 टेस्ट मैचों में 557बनाये और 22 खिलाडियो सो सपका तमामको स्टप किया।
174 हॉयर्थ (ज्योफ) न्यूजीलह के इस बल्लेबाज ने अपने खेल-जीवन के 37 टेस्ट मषों मे 2107 रन बनाये। इनका अधिकतम स्कोर 123 रन रहा । होंने कुल 6 शतक बनाए जिसमे इनका उच्चतम स्कोर 147 रन था। भाटिनको मार्टिन को यूजीलैंड के पब तक के सर्वश्रेष्ठ खिलाडियो में से एक हैं, इन्होंने न्यूजील के लिए टेस्ट मयो मे तो कई बेहतरीन पारियां खेली ही है इसके साथ साय एक दिवसीय मैचो मे भी वह एक आका- भक खिलाडी के रूप मे उमरफर पाए हैं । माटिन को का टेस्ट मचों में अब तक का सपश्रेष्ठ स्कोर 188 रन रहा है। अब तक इन्होंने केवल 35 टेस्ट मैच ही खेले हैं जिसमें वह 4105 की मौसत से 2135 रन चना चुके हैं। इसके साथ-साथ टेस्ट क्रिकेट मे गेंदबाजी करके 13 विकेट भी ले चुके हैं। रिचर्ड हेडली विश्व के सर्वश्रेष्ठ हरफनमौला खिलाडियो मे इनका नाम भी शामिल है, तेज गेंदबाजी के साथ-साप माक्रामक बल्लेबाजी भी कर लेते है। बल्लेबाजी मे 2471 रन बना चुके हैं और गेंदबाजी में 351 विकेट केवल 69 टेस्ट मैचों मे ले चके हैं। इनका गेंदबाजी मे सवर्थष्ठ प्रदर्शन केवल 52 रन देकर 9 विकिट लेन का है। पटगोल्ड पतमान न्यूजीलैंड टीम के तेज गेंदबाज जिहोंने टेस्ट क्रिकेट के साप साप एक दिवसीय क्रिफट में भी न्यूजीलैंड के लिए अच्छी गेंदबाजी की है। टेस्ट क्रिकेट में इनका गेंदबाजी में सवश्रेष्ठ प्रदर्शन 6 विकट 73 रन पर है। अब तक कुल 32 टेस्ट मचों मे 98 विकेट ले चुके हैं।
175 दक्षिण अफ्रीका एण्डीन विलियफ रसेन 1924 दक्षिण अफ्रीका के अत्यत कुशल क्षेत्ररक्षक थे। उन्होंने अपने 28 टेस्ट मैचों मे 41 फैच लिए। केयल अन्य दक्षिण अफ्रीकी घिसाड़ियों ने ही इससे अधिक कैच लिए है । केपटाउन मे 1956-57 में दूसरे टेस्ट में उनको "हेल्ड दी बॉल" अर्थात गेंद को छू लेने के कारण भाउट घोषित किया गया । यह क्रिकेट टेस्ट इतिहास मे अनोखी मिसालो गोडार्ड ट्रेवर लोज्ले 1933 दक्षिण अफ्रीका के बाए हाय के सलामी बल्लेबाज और बाए हाप से मध्यम-तेज गति से गेंद फेंकने वाले खिल डी। उहोंने कुल 41 टेस्ट मैचों में भाग लिया जिनमें से तेरह मे कप्तानी की। टेस्ट मैचों में उन्होंने 2457 से यधिक रन और 124 से अधिक विकिट ली। 1957-58 में आस्ट्रेलिया के विरुद्ध केपटाउन टेस्ट मे अफीफा की टीम ११ रन पर बाउट हो गयी, लेकिन गोडार्ड अन्त तक बाउट नहीं हुए और उन्होंने 56 रन बनाए। 1955 में इग्लह के दौरे में 25 विकिट लिए और अतिम टेस्ट में 31 रन पर 5 विष्टि लिए । उन्होने एक मैच में तिकी अमायी और कुल 3 रन पर छह विफिट लिए । वेट जॉन हेनरी विफोर्ड 1930 दक्षिण अफ्रीका के अत्यन्त उत्कृष्ट विकिटकीपर एक बल्ले. पान । उन्होंने टेस्ट झिकेट मे 2405 रन बनाए हैं बौर 141 खिलाडियो को 50 टेस्ट-मैघों में आउट किया। यह फिाट सख्या है जो नॉट, ईवास प प्राउट ने ही प्राप्त की है । आस्ट्रेलिमा के विरुद्ध थेट ने 1951 मे 134 रन का शतक भी बनाया। एडक (नील) 1931 दाए हाय से तेज गेंद फेंकने वाले दक्षिण अफ्रीकी खिलाड़ी। प्रताविरत 1960 को टेस्ट शृखला में 26 विदिट 22 57 रन को औसत पर लिए । सन् 1955 में इंग्लैंड के बोरे पर आयी दक्षिण अफ्रीकी टीम के गेंदबाज फोल्ड ने भी 26 विष्टि टेस्ट शृदला में 2184 रन की बौसत।
176 Nut प्राक्टर (माईकल) 1946 दक्षिण अफ्रीकी ऑलराउडर हैं जो गरी सोबस के स्तर को चुनोती देते है । वह तेज गे वान भी है। परमरानिप्ठ शैली के अनुसार गलत कहे जाने वाले पाव के ऐक्शन से तेज गेंद फेंकते हैं । सन् 1969- 70 मे उहोने अपने प्रथम श्रेणी । पैचो म लगातार छह शतक जमाए । उन्होंने सात टस्ट मैच खेले और इनम 15 02 रन की औसत पर 41 टेस्ट विक्टि लिए। रोवन (एरिक) 1009 दक्षिण अफोकी प्रथम श्रणा किट म इस खिलाड़ी ने 3016 (अविजित) रन का रिकार्ड बना रखा है। करी क्प मे 277 रन (अविजित) बनाकर उसमे भी उसन रियाड बनाया। पहली बार मेर। फिर द्वितीय महायुद्ध के बाद वह 14 टेन्ट सेने। रोड्स मैदान पर उन्होंने इग्लैंड के विरुद्ध 236 व 60 (अविजित) रन बनाये। श्वात्त1875म 1918 दश अफीकी क्रिकेट तिलाही जा बासनपेट की तरह गुगली पेंगन थ । इसम बडी परिशुद्धता रहती थी जिनके कारण उनका सलना बड़ा कठिन हो जाना था। मिडनी म 1910 11 में उहाँने टेस्ट मैच में ट्रार सी. हिल आमस्या पामफाड और पटरय पाच जिलाडी केवल 6 रन देकर आउट पिए। उहान नाथमटनशर के विरुद्ध 11 रन पर छह विविट तथा एम० सी० के लिए 55 रन पर 8 विक्टि लिए । वह रपी के अन्तराष्ट्रीय खिलाटी थे और इसमे तीन बार इग्लैंड का प्रतिनिधित्व दिया। डिओलिवरा वेसिल लुइस 1931 दणि अफ्रीका के अश्वन वदाज व ऑफन्वेस बाज, जो 1960 म इग्लड म सेलने के लिए पाए । 44 टेस्ट माइग्लड की ओर म सेले, 4006 की औमत पर 2484 रन बनाए और 3955 रन की औसत पर 47 विकिट लिए। 1968 में उसके टीममयामिल लिए जान के बारे में विवाद के कारण एम० सी० मी० ने अपनी दक्षिण अशी दौरा रद्द किया। Dpa
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