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सत्यार्थ प्रकाश चतुर्दश समुल्लास में उद्धृत

Raamachandr · 2005/07/25

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॥ ओ३म् ॥ सत्यार्थ प्रकाश चतुर्दश समुल्लास में उद्धृत कुनि की आयतों का देवनागरी में उल्था और अनुवाद । ... CKE') "}, Mayapu : iii - लेखक:- तार्किक शिरोमणि श्री पं० रामचन्द्र जी, देहलवी पुस्तकालय स कांग 299e- सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा देहली द्वारा प्रकाशित प्रथमवार ३००० प्रति] नवम्बर १९४३ [मूल्य ।।

भूमिका मुसल्मान महाशयों की ओर से बहुधा यह है इससे अर्बी न जानने वाले को उस भाषाके कहा जाता है कि सत्यार्थप्रकाश के १४ वे उर्दू तर्जुमे में लिङ्ग की पहचान में भ्रम उत्पन्न समुल्लास में ओन की कई आयतों का अनुवाद हो जाता है। यथार्थ व युक्त नहीं है। आयतों की संख्या भी सबसे बड़ी बात इस संभावना का ध्यान में बहुत स्थानों पर भ्रान्त है। रखना है कि एक भाषा को दूसरी का और मैंने इस बात की सत्यता को परखने के लिए दूसरी को तीसरी का वेष धारण कराने में अनुवा- १४ वें समुल्लास का बहुत ध्यान से निरीक्षण दकसे सहसा भूल हो सकती है, जिसको. उस किया परन्तु सिवाय फुछ आयतों की संख्या सबसे पहली भाषा के विद्वान तो केवल सुन कर संबंधी भूलों के अर्थ संबंधी ऐसी कोई भूल नहीं जान सकते हैं परंतु अविद्वान नहीं जान सकते। पाई जिससे समीक्षा में कुछ अनुचित या इस्लामी इस लिए जिन महाशयों को एक भाषा से दूसरी सिद्धान्तों के विरुद्ध आक्षेप होगया हो। समीक्षा भाषा में अनुवाद करने, किताबों के लिखने, लिखाने और छपवाने का काम पड़ता रहता है अद्भुतनया सत्य व अपरिहार्य है। इस समुल्लास में दी हुई आयतों का प्राय॑ वह १४ वें समुल्लास के उद्धरणों के मार्ग में आने वाली स्पष्ट कठिनाइयों को जानते भाषानुवाद शाह रफी उद्दीन साहब देहलवी के भी हुए उदृ तर्जुमें से किया हुआ प्रतीत होता है जो यदि उनकी सत्यता की प्रशंसा करने के स्थान में निंदा कर तो यह उनका पक्षपात होगा। बेमुहावरा होने से आर्य भाषा की प्रचलित पद्धति की दृष्टि से असंबद्ध अथवा बेजोड़ है। श्री स्वामी जी महाराज ने समीक्षा के योग्य विरामों के न होने से भाषा कई स्थानों पर अन- कुनी आयतों को १५६ खण्डों में विभक्त किया र्थक सी प्रतीत होती है। इस लिए प्रा० भाषा है। जिस २ खण्ड में कुछ शंका होती है या में अनुवाद करनेवाले ने अर्थ की संभवता व हुई है उसका नीचे निराकरण करता हूं:- सार्थकता को दृष्टि में रखते हुए विरामों की खण्ड सं०८ की अंतिम आयत के अनुवाद कल्पना करली है। जहां २ इस कल्पना से कुछ में अर्बी भाषा की दृष्टि से एक भूल हो गई है। भेद हुआ है उसका निराकरण नीचे कर दिया सत्यार्थ प्र० का भाषानुवाद इस प्रकार है:- गया है। "तो उम आग से डरो कि जिसका इंधन उर्दू भाषा के लिखने व पढ़ने में यह दोष मनुष्य है और काफिरों के वास्ते पत्थर तय्यार रहा है कि छोटी "" और बड़ी "." को बिना किए गए हैं।" विवेक एक दूसरे के स्थान में लिख दिया जाता शाह रफीउद्दीन का उर्दू अनुवाद यह है।- ( ख ) "पस डरो उस आग से जो इंधन उसका हुआ है और जो ऊपर उद्धृत किया जा चुका है। भादमी हैं और पत्थर तय्यार की गई है वास्ते इस में श्री स्वामी जी की भूल तो क्या अनुवादक काफिरों के।" की भूल भी नहीं कह सकते जिसने भी न मुनि की आयत के अनुसार शाह साहब जानने की अवस्था में, बिना किसी अशुद्ध भावना के तर्जुमें का यह मतलब है:- के, केवल बुद्धि के आधार पर शाह साहब के “पस उस आग से डरो जिसका इंधन अनुवाद को सार्थक बना कर प्रा० भाषा का मनुष्य और पत्थर हैं, और जो (आग) काफिरों रूप दे दिया। के लिए तय्यार की गई है। खण्ड सं० ६ में “खालिदून" शब्द के अर्थ में वास्तव में इस भूल का कारण शाह साहब लिङ्ग का भेद हुआ है। इसका अर्थ “सदैव रहने के अनुवाद का प्रकार ही है। अकस्मात शाह वाले” हैं और “सदैव रहने वाली" नहीं है यह साहब ने "हे" क्रिया को 'आदमी" के पीछे लिख शब्द पुल्लिङ्ग है। इस भूल का कारण भी शाह साहब दिया और "पत्थर" के पीछे विराम(Comma) का तर्जुमा ही है जो इस प्रकार है:- नहीं दिया। आर्य भाषा में अनुवाद करने वाले "वास्ते उनके बीच उनके बीवियां हैं पाक ने सामान्य बुद्धि का प्रयोग करके "है" के पीछे की हुई--और बीच उनके हमेशा रहने वाले" विराम समझ लिया और "पत्थर" को आगे श्री न जानने वाला यदि उपयुक्त वाक्य का वाले टुकड़े से जोड़ दिया और "गई" को "गए" आ° भापानुवाद करे तो अर्थ की सार्थकता पढ़ लिया। इस प्रकार अनर्थक से वाक्य को "वाली” में समझेगा, "वाले" में नहीं. क्यों कि सार्थक बना दिया। उर्दू भाषा में "ये" तहतानी (छोटी) व मकानी यहां कुनि के कर्ता का मतलब “मनुष्य" (बड़ी) को एक दूसरे के स्थान पर लिख, पढ़ देने से मूर्तिपूजक और “पत्थर" से मूर्तियां है'। का आम रिवाज है। मूर्तिपूजक चेतन होने से भाग में डाले जासकते खण्ड सं० ०५-इस आयत का तर्जुमा शाह हैं और इंधन की नाईं जलसकते हैं परंतु पत्थर किया है: की मूर्तियां जड़ होने से आग का इंधन नहीं हो दोस्त रखते हैं बहुत अहले किताब में से सकतीं और न उनको कोई दुःख हो सकता है। काश कि फेर देवें तुमको पीछे ईमान तुम्हारे के इस लिए आ० भाषानुवादक ने संभवार्थ के काफ़िर हसद में" आधार पर विराम की कल्पना की-"है" के उपर्युक्त तर्जुमे का मतलब कुछ भी समझ पश्चात विराम लगाया और "पत्थर" को आगे में नहीं आता। कोई अर्वी जानने वाला भी जब वाले वाक्य से जोड़ दिया और बेमुहावर। उर्दू बेमुहावर। उर्दू तक कुनि की मूल आयत को न देखे तब तक तर्जमे को बामुहावरा श्रा० भाषा में लिख दिया सत्यार्थ जान ही नहीं सकता श्रा० भाषानुवादक जैसाकि १४ वे समुल्लास में इस समय छपा ने तो इसको कुछ मतलव वाली भी बना दिया है वह साहब ने यह समझ ( ग ) परंतु शाह साहब के तर्जुमे का तो सिर पैर ही आयत के जिस टुकड़े का अर्थ सत्यार्थ प्रकाश दिखाई नहीं देता। सत्यार्थ प्रकाश में दिए हुए में समीक्षा के लिए उद्धृत नहीं किया गया है भाषानुवाद को ही मैं जरा विस्तार से लिखता हूं उसको मैंने जहां २ श्रावश्यक समझा कोष्टक में जिससे सत्यार्थ सुगमता से में आ जावेगा। दे दिया है ताकि आयत अधूरी न रहे। सत्यार्थ ऐसा न हो कि काफ़िर लोग जिनके, ईमान प्रकाश में समीक्षित आयतों का भाषानुवाद, वालों में से (अर्थात् यहूद व नसारा में से) बहुत कहीं २ सिवाय एक दो अक्षरों के हेर फेर के, से दोस्त हैं, ईर्ष्या करके तुमको ईमान से फेर जैसा का तैसा ही रहने दिया है ताकि शाह देवे इस आयत में आए हुए “वद्द" शब्द का अर्थ रफीउद्दीन साहब देहलवी के उर्दू तर्जुमे की झलक शाह रफीउद्दीन ने “दोस्त रखते हैं" किया है इसमें मौजूद रहे जिसके आधार पर भाषानुवाद और अन्यों ने “चाहते हैं" किया है। इस शब्द किया गया है। के दोनों अर्थ है कुनि की आयतों को सही याद करने या खण्ड सं० ४०में "ईमान न लाया" के स्थान में पढ़ने के लिए इस बात का ध्यान रखें कि सस्वर "ईमान लाया" चाहिये खण्ड सं० ४१ में चाहे" और हल याथातथ्य ही पढ़ें नहीं तो स्वाद बिगड़ दृष्टि दोष से मिल गया है। जो "उसकी कुर्सी” जायगा । वाले वाक्य से पहले आए हुए वाक्य का अंतिम जहाँ : एसी '' दो मात्राएं हों उन अक्षरों शब्द है। खाण्ड सं० १११ में यह वाक्य "और को दीर्घ से कुछ लंबा पढ़े। अर्बी भाषा में कुछ शिक्षा दी हमने उस औरत को" मूल आयत कृकाक्षर ऐसे हैं जो कण्ठ की गहराई से उच्चारण में नहीं है। शाह साहब ने अथ को स्पष्ट करने के किए जाते हैं, जिनके लिए हिंदी के टाइप में नीचे लिए अपनी ओर से इस तरह बढ़ा दिया है "और बिंदी लगाने की व्यवस्था है परंतु जब वे अक्षर हिदायत दी उस औरत को" ( मज्जम ) हल भी होते हैं तो इसके लिए हिंदी इन ६ स्थलों के अतिरिक्त ऐसा कोई और के टाइप में बिंदी और हल दोनों के एक साथ स्थल दिखाई नहीं दिया जिस पर कुछ लिखने लगा देने की व्यवस्था नहीं है इसलिए यह कमी की भाषश्यकता हो। रह गई है। बहुत स्थानों पर विसर्ग से काम स्वामी जी की समीक्षा इतनी सामान्य है कि चलाया गया है। उसमें उपर्युक्त बातों से कोई दोष नहीं आता है। यदि दूसरी आवृत्ति के निकालने की आव- समीक्षा पर इन का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है श्यकता पड़ी तो जो कमी इस वार रह गई है और वह जैसी की तैसी ही रहती है। उसको उसमें दूर करने का प्रयत्न किया जायगा छापे की भूलों को छोड़ दिया गया है क्योंकि प्रत्येक भावृत्ति में वे बदल जाती हैं । पाठक ता०२८-१८-४३ स्वयं उनको सही कर लेंगे। शुक्रवार (दीपावली) रामचन्द्र देहलवी ( सू० ( २ ) उलाइक अला हुदम्मिबिहिम् व यह लोग अपने मालिक की शिक्षा पर है उलााइक हुमुल् मुक्लिहून् । (सू० २। श्रा० ५) और ये ही छुटकारा पाने वाले हैं। इन्नल्लजीन कफरू सवााउन अलैहिम् निश्चय जो काफिर हुए उन पर तेरा डराना अअञ्जतहुम् अम्लम् तुंजिर्ह म् लायोमिनून् । . या न डराना समान है वे ईमान न लावेंगे। : । श्रा०६) खतमल्लाहु अलाकुलूविहिम् व अला अल्लाह ने उनके दिलों (व) कानों पर मुहर सम्एहिम् व अला अस्वारिहिम् गिशावतुन् करदी और उनकी आँखों पर पर्दा है और उनके व लहुम् अजाबुन्अज़ीम् (सू० २ श्रा० ४ वास्ते बड़ा अजाब है। (६) फी कुलूविहिम् मरजुन् फ़ज़ादहु मुल्लाहु उनके दिलों में रोग है अल्लाह ने उनका मरज्बा। ( सू० २ । श्रा०६) रोग बढ़ा दिया। (७ अल्लजी जअल लकुमुल् अर्वा फ़िरा जिसने तुम्हारे वास्ते पृथ्वी बिछौना और शौंवस्समा विनाअन् । सू०२। श्रा० २२) आसमान की छत को बनाया। (E) इन्कंतुम् फ्री रैचिम् मिम्मा नजल्ना जो तुम उस वस्तु से संदेह में हो जो हमने अला अब्दिना फातू विमूरतिम् अपने पैग़म्बर के ऊपर उतारी तो इसके सी एक मिम्मिस्लिही वद् शुदाअकुम् मिन् सूरत ले आओ और अपने साक्षी लोगों को दुनिल्लाहि इन्तुम् स्वादिक़ीन् । पुकारो अल्लाह के बिना जो तुम सच्चे हो । ( सू० २ ; श्रा० २३ ) फ इल्लम् तअलू वलन् तफ़अलू जो तुम न कर! और कभी न करोगे तो उस फतकु.नारलती वकू.दुहन्नासु वल् हिजारा आग से डरो कि जिसका इन्धन मनुष्य और अोइद्दत् लिल् काफ़िरीन् । पत्थर है, ( जो) काफिरों के लिए तय्यार की ( सू० २ । श्रा० २४ ) गई है। (8) व परिशरिल्लज़ीन आमन् व अमि और आनन्द का सन्देसा दे उन लोगों को लुस्स्वालिहाति अन्न लहुम् जन्नातिन् कि ईमान लाए और काम किए अच्छे, यह कि तत्री मिन् तहः तिहल् अन्हार, कुल्लमा उनके वास्ते बहिश्तें हैं जिनके नीचे से चलती है रुजिकू. मिन्हा मिन् समरतिरिकन् कालू नहरे, जब उसमें से मेवों के भोजन दिये जायेंगे हाज़ल्लजी रुज़िक्ना मिन् कब्लु व तब कहेंगे कि वह वो वस्तु हैं जो हम पहले उतूविही मुतशाविहा व लहुम् फ़ीहा इससे दिये गये थे और उनके लिए पवित्र अवाजुम्मुत्वःहरतुम् व हुम् ‘फ़ीहा बीबीयां हैं, और वे सदैव वहां रहने वाले हैं। खालिन्। (सू० २ । प्रा० २५) (१०) व अल्लम आदमल्अस्माअ कुल्लहा आदम को सारे नाम सिखाए फिर फरिश्तों सुम्म अरज्वहुम् अलल् मलाइकति के सामने करके कहा जो तुम सच्चे हो मुझे फ्रकाल अम्बिऊनी विस्माइ हााउ उनके काम बताओ। लाइ इन्कुंतुम् स्वादिकीन् । (सू २। श्रा० ३१) काल या आदमु अम्बिहुम् विस्माए कहा हे आदम ! उनको उनके नाम बतादे - हिम् फलम्मा अम्बाहुम विस्माए हिम् काल तब उसने बता दिए तो खुदा ने फ़रिश्तों से अलम् अकुल्लकुम् इन्नी अअलमुगैवस्समा- कहा कि क्या मैंने तुमसे नहीं कहा था कि निश्चय ‘वाति वल् अवि व अअलमु मा तुन्दन व मैं पृथवी व आसमान की छिपी वस्तुओं को मा कुंतुम् तक्तुमून् । (सू० २ । श्रा०६३) और प्रगट छिपे कर्मों को जानता हूँ। (११) इज् कुल्ना लिल् मलााइकतिस्जुद् जब हमने फरिश्तों से कहा कि बावा आदम लिश्रादम फ़सजदू इल्ला इब्लीस अवा को दण्डवत् करो देग्या सभों ने दण्डवत् किया वस्तकबर व कान मिनल काफिरीन् । परन्तु शैतान ने न माना और अभिमान किया (सू०२ । श्रा० ३४) क्योंकि वह भी एक का फर था। (१२) व कुल्ना या आदमुस्कुन् अन्त व हमने कहा कि ऐ आदम तू और तेरी जोरू जौजुकल्जन्नत व कुला मिन्हा रग़दन् बहिश्त में रहकर आनन्द से जहां चाहो खाओ है शेतुमा वला तक्रया हाजिहिश्श- परन्तु मत समीप जागो उस वृक्ष के कि पापी स्त फतकूना मिनज्वालिमीन् । हो जाओगे। (सू० २। श्रा०३५) फ अजल्लहुमश्शैत्वानु अन्हा फ अस्वज शैतान ने उनको डिगाया और उनको बहिश्त हुमा मिम्मा काना फीहि व कुल्नःवित्वू के आनन्द से खो दिया तब हमने कहा उतरो व ज्युकुम् लिव जिवन् अदुवुन्, वलकुम् तुम्हारे में कोई परस्पर शत्रु है, तुम्हारा ठिकाना फ़िल् अर्चे मुस्तकरु न् वमताउन इला.हीन् । पृथिवी है और एक समय तक लाभ है। ( सू० २ । श्रा० ३६) फतलका आदमु मिरब्विही कलिमा आदम अपने मालिक की कुछ बातें सीख कर तिन् फताव अलैहि । ( सू० २ । श्रा० ३७) पृथिवी पर आ गया। (१३) वत्तक्कू यौमल् ता तज्जी नसुन् अन् उस दिन से डरो कि जब कोई जीव किसी नक्सिन् शैअन् वला युक़बलु मिन्हा जीव से भरोसा न रखेगा न उसकी शिफ़ारिश शफाअतुन वला योखजु मिन्हाअद्लुन् स्वीकार की जावेगी न उससे बदला लिया जावेगा बला हुम् युन्सरून् ।। (सू० २ । श्रा० ४८) और न वे सहाय पावेंगे।

( ४ ) (१४) वह अातना । ( सू०२ । आ०७३) तुम समझो। मूसल्किताब वल (और जब ) हमने मूसा को किताब और फुर्कान । (सू० २ । श्रा०५३) मोजिने (नुगोती) दिये। फकुल्ना लहुम् कूनू किरदतन् खासिईन, हमने उनको कहा कि तुम निन्दित बंदर हो जावा। फ्रजल्नाहा नकालल्लिमा नयदेहा यह एक भय दिया जो उनके सामने और वमा खल्फहा व मौएज्यतल्लिल मुत्तकीन् । पीछे थे उनको, और शिक्षा ईमानदारों को । (सू० २। श्रा०६५, ६६) (१५) कज़ालिक युहयिल्लाहुल मौता व इस तरह खुदा मुर्दो को जिलाता है और युरीकुम् आयातिही ल अल्लकुम् तुमको अपनी निशानियाँ दिखलाता है कि तअकिलून् । (१६) उलाइका अस्हावुल जन्नति, हुम् फीहा वे सदैव काल बहिश्त अर्थात बैकुण्ठ में पास खालिदून । ( सू० २ । श्रा०८२) करने वाले हैं। (१७) व इज् अखज़्ना मीसाककुम् ला अब हमने तुमसे प्रतिज्ञा कराई न बहाना नस्फिकून दिमाअकुम् व ला तुस्जूिन लोहू अपने आपस में और किसी को अपने अन्फुसकुम् मिन् दियारिकुम् सुम्म आपस के घरों से न निकालना फिर प्रतिज्ञा की अवर्तुम् व अन्तुम् सरहदन् । तुमने, इसके तुम ही साक्षी हो। सुम्मअन्तुम् हााउलाइ तकतुलून फिर तुम घे लोग हो कि अपने आपस को अन्फुस कुम् व तुखिजून फरीकम् मिन्कुम् मार डालते हो एक फ़िर के को श्राप में से घरों मिन् दियारिहिम् । ( स० २ । श्रा० ८४, ८५ उनके से निकाल देते हो। (१८) उलााइकल्लजी नश्तर बुल हयात ये वे लोग हैं कि जिन्ोंने प्रास्त्ररत के बदले ६निया बिल् आखिर्गत, फला युखा जिन्दगी यहाँ की मोल ले ली उनसे पाप कभी फफु अन्हुमुल अजाबु वलाहुम् हलका न किया जावेगा और न उनको सहायता युसरून् । ( सू० २। आ०८६) दी जावेगी। (१६) लकद आहे.ना मूमल किताब व काना निश्चय हमने मूसा को किताब दी और मिम्बादिही बिरुसुल्, व आतैना ईसन उसके पीछे हम पैग़म्बर को लाये और मरियम मयमल्वैयिनाति व ऐयद्नाहु विरूहिल के पुत्र ईसा को प्रकट मौजिजे अर्थात् दैवीशक्ति और सामर्थ्य दिये उसके साथ रूहुलवुद्म के, दुमि, अफकुल्लमा जाअकुम् रसूलुम् जब तुम्हारे पास उस वस्तु सहित पैग़म्बर आया विमा ला तह्वा अन्मुसुकुमुस्तक्चर्तुम्, फ कि जिसको तुम्हारा जी चाहता नहीं फिर तुमने फरीकन् कजन्तुम् व फरीकन् अभिमान किया एक मत को झुठलाया और एक तातुलून । ( स० ३ । आ०८७) को मार डालते हो।

( ५ ) (२०) व कानू मिन् कब्लु यस्तफ़्ति.हून और इससे पहले काफिरों पर विजय चाहते अलल् लजीन कफरू, फलम्मा जा थे. जो कुछ पहिचाना था जब उनके पास यह अहुम् मा अाफू कारः विही, फ श्राया झट काफ़िर हो गये, काफिरों पर लानन लअनतुल्लाहि अलल् काफिरीन् । है अल्लाह की । { सू० २ । आ० ८८) (२१) वुश्ग लिल् मोमिनीन । आनन्द का संदेशा ईमानदारों को। मन काना अदृवुल्लिाहि व मलााइकतिही - अल्लाह फरिश्तों, पंग़म्बरों. जिबरईल और व रुसुलिही व जिबील व मीकाल फ इन्नल्लाह मीकाइल का जो शत्रु है अल्लाह भी ऐ८ काफिरों अवुल् लिल् काफिरीन् । का शत्रु है। ( स०२ श्रा०६७,६८) (२२) वक़्लू हिवतुन् नफ़िलकुम् खत्वा और कहो कि क्षमा माँगते हैं हम क्षमा करेंगे याकुम् व सनजीदल म.हमिनीन् । तुम्हारे पाप और भलाई करने वालों के। (सू श्रा० ५८) (२३) व इज़िस्तस्का मूसा लिकोमिही फ कुल जब मूपा ने अपनी क़ौम के लिये पानी माँगा नज्यरिब विस्वाकल हजर, फन् फ़जग्न हमने कहा कि अपना असा ( दंड) पत्थर पर मिन हुग्नता अश्रता ऐना। मार उसमें से बारह चश्में बह निकले। सू० २। या ६० ) (२४) वल्लाहु यतम्म्बु विग्ह्मति ही में और गल्लाह खाम करता है जिसको चाहता यशाउ ( सु० - । श्रा० १०५ ) है माथ दया अपनी के। (२५) वद्दकमीरुम्मिन अह लिल कितापि ऐसा न हो कि का फर लोग ईर्ष्या करके लौ यरुदुनकुम् भिम् वादि ईषाानि- तुमको ईमान से फेर देवें क्यों के उनके ईमान कुम् कुफ़्फ़ारन् मदन । वालों में से बहुत से दोस्त हैं। ( मू । श्रा० १०% ) (२६) फ ऐनमा तुवल्लू फलम्न वज्हुल्लाहि । तुम जिधर अपना मुह को उधर ( सू०२ श्रा० ११५ ) अल्लाह का है। (२७) बदीउस्ममावाति वल् अर्च, व इज़ा जो श्रासमान और भूम का उत्पन्न करने- वाला है जब वो कुछ करना चाहता है । यह नहीं कज्या अम्रन् फ़ इन्नमा यकल लह कि उसको करना पड़ता है ) किन्तु उसे कहता है कुन् तयकून् । (सू० २ । श्रा० ११७) कि होजा बस हो जाता है। (२८) इज् जल्नल वैत मसावतन लिन्नासि जब हमने लोगों के लिये काबे को पवित्र व अम्नन्, वनखिजू. मिम् मकाामि स्थान मुख देने वाला बनाया तुम नमाज के लिये इब्राहीम मुस्वल्लन् ।(सू. २ । श्रा० १-५) इबराहीम के स्थान को पकड़ो।

हम को आसमान ( ६ ) (२६) मैंयर्गबु अन् मिल्लति इब्राहीम इल्ला वह कौन मनुष्य हैं जो इबराहीम के दीन से पन् सफ़िह नफ्सहू, वलकदिस्त्वनााहु फिर जावे परन्तु जिसने अपनी जान को मूर्ख फिद् दुनिया, व इन्नह फ़िल् आखि बनाया और निश्चय हमने दुनियां में उसी को रति लमिनस्स्वालिहीन् । पसन्द किया और निश्चय आखरत में वो ही ( सू० २ । श्रा० १३०) नेक है। (३०) कद् नरा तकल्लुब वहिक फिस्स- निश्चय तेरे मुख में फिरता माए फला नुवल्लियन्नक किन्लतन् देखते हैं अवश्य हम तुमे उस निबले को फेरेंगे तवाहा फ वल्लि वहिक शत्वरल् कि पसन्द करे उसको, बस अपना मुख मरिजदु. मस्जिदिल हरा-मि व हैसु माकुतुम् ल्हराम की ओर फेर, जहां कहीं तुम हो, अपना क वल्लू वुजूहकुम् शत्वरहू। ( सू० २ । श्रा० १४४) मुख उसकी ओर फेर लो। (३१) वला तकू.लू लिमैं युक्तलु फी सवी जो लोग अल्लाह के मार्ग में मारे जाते हैं लिल्लाहि अम्बातुन बल अ.ह्याउन् । उनके लिये यह मत कहो कि ये मृतक हैं किन्तु (सू० । श्रा० १५४ ). वे जीवित हैं। (३२) इन्नल्लाह शदीदुल अजाव । और यह कि अल्लाह कठोर दुःख देनेवाला है। वला तत्तविऊ खुत्बुवातिरशैतानि, शयतान के पीछे मत चलो निश्चय वो तुम्हारा इन्नहूलकुम् अवुम्मुबीन् । प्रत्यक्ष शत्रु है। इन्नमा यामुरुकुम् विस्सूइ वल फाशा-इ उसके बिना और कुछ नहीं कि बुराई और व अन् तकूलू अलल्लाहि माला तअलमून् । निर्लज्जता की आज्ञा दे और यह कि तुम कहो सू० २। श्रा० १६५, १६८, १६६ ) अल्लाह पर जो नहीं जानते। (३३) इनमा हर्रम अलेकुमुल् मैतत वद्दम तुम पर मुर्दार, लोहू और गोश्त सूअर का व लमल खिजीर, व मा उहिल्लविही हराम है और अल्लाह के बिना जिस पर कुछ लि गैरिल्लाहि । ( सू० २ । श्रा० १७३ ) पुकारा पुकारा जावे। (३४) उहिल्ल लकुम् लैलतस्स्विया मिर्रफ़सु रो.जे की रात तुम्हारे लिये हलाल की गई इला निसााइकुम्, हुन्न लिवासुल्लकुम् व कि मदनोत्सव करना अपनी बीबियों से, वे अन्तुम् लिबासुल्लहुन्न, अलिमल्लाहु अन्नकुम् तुम्हारे वास्ते पर्दा हैं और तुम उनके लिये पर्दा हो, , अल्लाह ने कुंतुम् तख़्तानून अन्फुसकुम् फताव अलैकुम् तुम चोरी करते हो व अफा अन्कुम् फल आन बाशिरूहुन्ना किया तुमको बस उनसे मिलो और दो जो अर्थात् व्यभिचार बस फिर अल्लाह ने क्षमा वन्तगू मा कतवल्लाहु लकुम्, वकुलू वश्रबू.हत्ता अल्लाह ने तुम्हारे लिये लिख दिया है अर्थात्, यतवैयन लकुमुल खैत्वुल अब्यज़ मिनल् संतान, खाओ पीओ यहाँ तक कि प्रगट हो तुम्हारे खैत्विल अस्वदि मिनल फ्रजर् । लिये काले तागे से सुपेद तागा पा रात से ज4 (सू० २ । प्रा. १८७) दिन निकले। जाना कि मार (३५) व क्रातिलू फ्री सवीलिल्लाहिल्लजीन अल्लाह के मार्ग में लड़ो उनसे जो तुमसे युकातिलूनकुम्ः लड़ते हैं। वक्तुलूहुम् हैसु सक्रिफ़्तुमूहुम् , अल् डालो तुम उनको जहाँ पायो। क़तल फित्नतु अशद्दु मिनल कत्ल से कुफ बुरा है। व कातिलूहुम् हत्ता लातकून फित्नतुन् यहाँ तक उनसे लड़ो कि कुफ्र न रहे और व यकूनद्दीनु लिल्लाहि होवे दीन अल्लाह का। फ्रमनिअतदा अलैकुम् अतदू अलैहि उन्होंने जितनी जियादती करी तुम पर विमिस्लि मतदा अलैकुम् । उतनी ही तुम उनके साथ करो। (सू० २ । श्रा० १६०, १६१, १६३, १६४ ) (३६) वल्लााहु लायु.िहब्बुल फ़साद् । अल्लाह झगड़े को मित्र नहीं रखता। (सू० २ श्रा० २०५) या ऐ युहल्लजीन आमनुख़ुलू ऐ लोगो जो ईमान लाये हो इस्लाम में फिस्सिल्मि काफ्फ़तन् । ( सू० २ । श्रा० २०८) प्रवेश करो (पूरे पूरे) (३७) वल्लाहु यर्जुकु मैंयशााउ विगरि हिमाब खुदा जिसको चाहे अनन्त रिजक देवे । (सू०२ । प्रा० २१) (३८) यस्श्रलूनक अनिल् महीजिव कुल् हुव प्रश्न करते हैं तुझसे रजस्वला को, कह वो अजन् फ तज़िलुन्निसाथ फिल् मही अपवित्र हैं पृथक रहो ऋतु समय में उनके समीप जिव, वला तकबू हुन्न ,हत्ता यत्वहुर्न मत जाओ जब तक कि वे पवित्र न हों, जब नहा फ इजा तत्वहर्न फ्रातू हुन्न मिन् हैसु लेवें उनके पास उस स्थान से जाओ खुदा ने अमर कुमुन्नााहु। आज्ञा दी। निसाउकुम् .हसुल्लकुम् फातू .हसंकुम् तुम्हारी बीवियाँ तुम्हारे लिये खेतियाँ हैं बस अन्नाशेतुम् । जाओ जिस तरह चाहो अपने खेत में। ला युआखिजुकुमुल्लाहु विल्लखि फ्री तुमको अल्लाह लाख ( बेकार, व्यर्थ ) शपथ ऐमानिकुम् ।( सू० २। श्रा० २२२, २२३, २२५) में नहीं पकड़ता। (३६) मन् जल्लजी युक्रिजुल्लााह कवन् वो कौन मनुष्य है जो अल्लाह को उधार देवे हसनन् फयुज्वाइफ़हू लहू अज्वअाफन् अच्छा बस अल्लाह द्विगुण करे उसको उसके (सु० २। श्रा०२४५) वास्ते। कसीरा।

( ८ ) (४०) फ मिन्हुम् मन् अामन व मिन् हुम् उनमें से कोई ईमान लाया और कोई मन कमा, व लीशा अग्लाहु मक् काफ़िर हुआ जो अल्लाह चाहता न लड़ते, जो सतलू व लाकिनन्लाह या अलु मा चाहता है अल्लाह करता है। युगद। (सू. २। श्रा०२५३) (४१) लहू माफ़िस्सपावाति वमा फिल् उसी के लिये है। उसकी कुरसी ने आसमान और जो कुछ आसमान और पृथवी पर है सब अचि वसिया कुर्सीयुहु स्समावाति पृथवी को समा लिया है। वल अर्व (सू०२ । ग्रा०५५) (४२) इन्नल्लाह याती विश्शम्मि मिनल अल्लाह सूर्य को पूर्व से लाता है बस तू मश्रिकि फाति विहा मिनल मग्रिवि पश्चिम से ले आ बस जो काफ़िर हैरान हुआ फ बुहितल्लजी करा, बल्लाहु ला था निश्चय अन्लाइ पापियों को मार्ग नहीं यद्दिल कौमज्वालिमीन् । दिग्वलाता। (सू ० २।५८) [४३] काल फखु.ज् अर्वश्रुतम् मिन रि कहा चार जानवों से ले उनकी सूरत पहि- फावुहुन्न इलेक, सुम्मज्अल अला चान रख, फिर हर पहाड़ पर उनमें से एक २ कुल्लि जलिम् मिन्हुन्न जुयन् टुकड़ा रख हे फिर उनको बुला दौड़ते तेरे पास सुम्मद् हुन्न यातीनक सश्रयन् । चले आवंग। ( सू०२ श्रा०२६०) [४४] योतिल हिक्मत में यशा जिसको चाहे नीति देता है। ( स २ । प्रा०६६ ) [४५] फ यरिफर लि में यशाच वह कि जिसको चाहेगा क्षमा करेगा जिसको युजियु में यशाउ, बन्लाहु अला चाहेगा दण्ड देगा क्यों क यह सब वस्तु पर कुल्लि शैइन कदीर । बलवान है। ग्रा.) [४६] कुल अउनबिउकुम् विखेरिम दिन कह इससे अच्छी और क्या परहेजगारों को जालिकुम, लिल्लजी नत्तको इन्द खबर दू कि अल्लाह की ओर से बहिश्तें हैं जिनमें रबिहिम् जन्नातुन तन्नी मिन नहरे चलनी हैं उन्हीं में सदैव रहने वाली शुद्ध तातिहल अन्हारु खानदीन कीहा घोबियां हैं. अल्लाह की प्रसन्नता से, अल्लाह व अवाजुम् मुत्व हरतुम उनको देखने ग्राता है. माश बन्दों के । रिज्यानुम्मिनल्लाहि, वल्लाहु वस्वीरूम् पिल इ.याद । सू०३ । श्रा० १४) व (१) है। (४७) इन्नद्दीन इन्दल्लाहिल इस्लाम् निश्चय अल्लाह की ओर से दीन ( मू० ३ । श्रा० १८) इसलाम (४८) वुफ़ा यत् कुल्लु नफ़लिम्मा कमबत् व प्रत्येक जीव को पूरा दिया जावेगा जो कुछ हुम् ला युज्वलमून् उसने कमाया और वे न अन्याय किये जावंगे। कुलिल्लाहुम्म मालिकल्मुल्कि तोति- कह या अल्लाह तू ही मुल्क का मालिक है ल्मुल्क मन् तशााउ व तन्जिउल्मुल्क जिसको चाहे देता है जिससे चाहे छीनता मिम्मन् तशााउ व तुइज्ज़ मन् तशााउ जिसको चाहे प्रतिष्ठा देता है जिसको चाहे वताज़िल्लु मन् तशााउ वियदिकल्खैर, अप्रनिष्ठा देता है सब कुछ अप्रतिष्ठा देता है सब कुछ तेरे ही हाथ में है इन्नक अला कुल्लि शैइन् कदीर प्रत्येक वस्तु पर तू ही बलवान है। तूलिजुल्लेल फ़िन्नहारि व तृलिजुन्न रात को दिन में और दिन को रात में पैठाता हाार फ़िल्लेल, व तुनिजुल हैय है और मृतक को जीवित से जीवित को मृतक मिनल मैंयति व तुग्विजुल मयत मिनल से निकालना है और जिसको चाहे अनन्न है , तर्जुकु मन् तशााउ विगैरि हिसाव अन्न देता है। ला यत्तखिज़िल मोमिनूनल काफिरीन मुसलमानों को उचित है कि काफिरों को आलियाअ मिन् दुनिल मोमिनीन्, व मित्र न बनावं सिवाय मुसलमानों के जो कोई यह में यफ्अल जालिका फलैसा मिनल्लाहि करें बस वह अल्लाह की ओर से नहीं । फी शैइन ( सू० ३ । श्रा० २४ । २५।२६।२७) कुल्इंकंतुम् तुहिव्व्नल्लाह फत्तविङनी जो तुम चाहते हो अल्लाह को, तो यु.हविकुमुल्लाहु व यरिफ़र्लकुम् जुनूव पक्ष करो मेरा, अल्लाह चाहेगा तुम को, और तुम्हारे पाप क्षमा करेगा। निश्चय करुणामय है। (सू० ३। आः ३०) (४६) इज़ कालतिल मलााइकतु या मर्यमु जिस समय कहा फरिश्तों ने कि ऐ मर्य्यम इन्नल्लाहस्वफ़ाकि त्र वाहरकि तुझको अल्लाह ने पसन्द किया और पवित्र किया वस्त्वफ़ाकि अला निसाइल आलमीन् ऊपर जगत् की स्त्रियों के । (मू० श्रा) (५०) (फ़ इन्नमा) यालु लह कुन फ़्यकून उम्मको कहता है कि हो बस हो जाता है। (प्रा०४६ ) मकरू व मकरल्लाहु, वल्लाहु खैरुल काफिरों ने धोखा दिया. ईश्वर ने धोग्या माकिरीन् ( सू० ३ । श्रा० ५३) दिया, ईश्वर बहुत मकर करने वाला है। कह कुम्, बल्लाहु ग़फ़रुरी हीम् मिनल ( १० ) (५१) अलैंयक्फियकुम् ऐयुमिदकुम् रब्बुकुम् क्या तुमको यह बहुत न होगा कि अल्लाह विसलासति आलाफ्रिम् तुमको तीन हजार फरिश्तों के साथ सहाय देवे । मलााइकति मुँजलीन् (सू० ३ । श्रा०१२३) (५२) वन्सुर्ना अजल कौमिल काफिरीन् और काफिरों पर हमको सहाय कर । ( सू० ३ । श्रा० १४६ ) बलिल्लााहु मौलाकुम्, व हुव खैरुन्ना अल्लाह तुम्हारा उत्तम सहायक और सिरीन् (सू० ३ । श्रा० १४६ ) कारसाज़ है। वलइन् कुतिल्तुम् फ्री सवीलिल्लाहि जो तुम अल्लाह के मार्ग में मारे जाओ या श्रोमुत्तुम् लिमरिफातुम् मिनल्लााहि मर जाओ अल्लाह की दया बहुत अच्छी है। व रहतुन् खैरुन् (मिम्मा यज्मऊन् ) ( सू० ३ । प्रा० १५६) (५३) व मा कानल्लाहु लियुत्वलिअकुम् और अल्लाह तुमको परोक्षज्ञ नहीं करता अलल गैवि वलाकिन्नल्लााह यज्तबी परन्तु अपने पैग़म्बरों से जिसको चाहे पसन्द मिरुसुलिही मैं यशााउ, फ ामिनू करे बस अल्लाह और उसके रसूल के साथ विल्लाा हि व रुसुलिही ईमान लाओ। ( सू०३ । प्रा० १७८) (५४) या ऐ युहल्लजीन आमनुस्वबिरू व ऐ ईमान वालों संतोप करो परस्पर थामे रखो बाविरू व रावित्वू, वत्तकुल्लाह ल और लड़ाई में लगे रहो अल्लाह से डरो कि तुम अल्लकुम् तुफ़्लेहून् ( सू० ३ । श्रा० १६६ ) छुटकारा पायो । (५५) तिल्क हुद्दुल्लााहि मैं युत्विइल्लाह ये अल्लाह की हदें हैं जो अल्लाह और व रसूलहू युखिल्हु जन्नातिन् नन्त्री उसके रसूल का कहा मानेगा वह बहिश्त में मिन् ताःतिहल्अन्हारु ( खालिदीना पहुंचेगा जिनमें नहरें चलती हैं और यही बढ़ा फीहा ) व जालिकल जुल्अजीम् । प्रयोजन है। (सू० ४ । श्रा० १३) व मैं यस्विल्लाह व रसूलह व यत जो अल्लाह की और उसके रसूल की आज्ञा अद्द हुदहू युखिल्हु नारन् खालि भंग करेगा और उसकी हद्दों से बाहर हो जावेगा दीना फीहा, व लहू अजावुम् मुहीन यो सदैव रहने वाली आग में जलाया जावेगा और उसके लिये खराब करने वाला दुःख है। ( सू० ४ । प्रा०१४) ( ११ ) (५६) इजल्लाह ला यज्वलिमु मिस्काल और एक त्रसरेणु के बराबर भी अल्लाह जर्रतिन्, व इन् तक हसननै युज्या अन्याय नहीं करता और जो भलाई होवे उसका इफ्हा वयोतिमिन् लदुन्हु अनन् अजीमा दुगुण करेगा उसको । ( सू० ४ । श्रा०४०) (५७) क इजा बरजु मिन् इंदिका बैयता जब तेरे पास से बाहर निकलते हैं तो तेरे त्वााइफतुम् मिन्हुम् गैरल्लज़ी तकूलु, कहने के सिवाय ( विपरीत ) सोचते हैं अल्लाह वन्लााहु यक्तुबु मा युबैयतून् उनकी सलाह को लिखता है। (सू. ४ । श्रा०८१) लहू सवीला वमा अल्लाहु अर्कसहुम् विमा कसबू, अल्लाह ने उनकी कमाई वस्तु के कारण से अतुरीदून अन् तः मन् अज्वल्लल्लाहु व उनको उलटा किया क्या तुम चाहते हो कि अल्लाह मैं युज्वलि लिल्लाहु फलन् तजिद के गुमराह किये हुए को मार्ग पर लाओ बस जिसको अल्लाह गुमराह करे उसको कदापि ( सू० ४ । प्रा०८८) मार्ग न पावेगा। (५८) (फ इल्लम् ) यकुफ़्फ़ ऐदीहुम् फ बौर अपने हाथों को न रोके तो उनको पकड़ खुजूहुम् वक्तुलूहुम् हैसु सक्रिफ़्तुमूहुम् लो और जहां पायो मार डालो। (सू०४। प्रा०६१) कान लिमोमिनिन् ऐयक्तुल मुसलमान को मुसलमान का मारना योग्य मोमिनन् ( इल्ला खत्व अन् ), व मन् नहीं जो कोई अनजाने से मार डाले बस एक कतल मोमिनन् खत्वअन् फ तःरीरु गई न मुसलमान का छोड़ना है, और खून यहा रकवतिम् मोमिनतिन् व दियातुम् (रक्त दंड ) उन लोगों की ओर सौंपी हुई जो उस मुसल्लमतुन् इला अलिही इल्ला ऐंय झौम से होवें, और तुम्हारे लिये दान कर देवे; स्स्वट्दक, ( फ इन् कान मिन् कौमिन् अद (जो की कौम से है) विल्लकुम् ) ( सू० ४ । श्रा०६२) मैं यन्तुल मोमिनम्मुतअम्मिदन फ़ और जो कोई मुसलमान को जान कर मार जजााउहू जहन्नमु खालिदन् फ़ीहा व डाले वह सदैव काल दोजन में रहेगा उस पर गजिवल्लाहु अलैहि व लअनहू । भल्लाह का क्रोध और लानत है। (सू० ४। प्रा०६३) दुष्मन की कौम कुम ( १२ ) ( ५६ ) वमैं युशाकिकिरसूल मिम्बादि मा और शिक्षा प्रकट होने के पीछे जिसने रसूल तवैयन लहुन्हुदा वयत्तविथ गर से विरोध किया और मुसलमानों से विरुद्ध पक्ष सीलिल मोमिनीन ( नुवल्लिही मा किया अवश्य हम उसको दोजख में भेजेंगे। तवल्ला ) व नुस्लिही जहन्नम् ( सू० ४ ! श्रा० ११५) (६०) मैं यक्फु.र विल्लाहि व मलाइकतिही जो अल्लाह फ़रिश्तों किताबों रसूल और व कुतुविही व रुसुलिही वल यौमिल कयामत के साथ कुफ्र करे निश्चय वह गुमराह है। आखिरि फकद् ज्वल्लज्वलालम् वईदा । इन्नल्लजीन श्रामनू सुम्म कफरू निश्चय जो लोग ईमान लाये फिर का फिर सुम्म श्रामनू सुम्म कफरू सुम्मदाद हुए फिर २ ईमान लाये पुनः फिर गये और कुफ्र.न् लम्यकुनिल्लाहु लियरिफर में अधिक बढ़े अल्लाह उनको कभी क्षमा नहीं करेगा और न मार्ग दिखलावेगा। लहुम् वला लियह दियहुम् सबीला । (सू० ४ । श्रा० १३६-३७) (६१) इनल्लाह जामिड़ल्मुनाफिकीन वल निश्चय अल्लाह बुरे लोगों और काफिरों को काफ़िरीन फ्री जहन्नम जमीआ । जमा करेगा दोजख में। इनल मुनाफिकीन युखादिऊन निश्चय बुरे लोग धोखा देते हैं अल्लाह को ल्लाह व हुव खादिउ.हुम् । धोखा देता है। या ऐयुहल्लज़ीन आमनू ला तत्त- ऐ ईमान वाला मुसलमानों को छोड़ काफिरों खिजु.ल काफ़िरीन औलियाअ मिन् को मित्र मत बनाओ। दुनिल मोमिनीन् । (सू० ४। प्रा० १४०-१४२-१४४) (६२) या ऐयुहन्नासु द. जाअकुमुर्र सूलु ऐ लोगो निश्चय तुम्हारे पास सत्य के साथ बिल् हक्कि मिर्रब्बिकुम् फ ामिनू व दा की ओर से पैग़म्बर आया बस तुम उन ( खैरल्लकुम् ) पर ईमान लाओ। इन्नमल्लाहु इलाहुन् वाहिदुन् । अल्लाह मावृद अकेला है। और उनको वह (सू० ४ श्रा० १७०-१७१ ( १३ ) (६३) हुरिमत् अलैकुमुल्मैततु बद्दमु व तुम पर हराम कियागया मुर्दार, लोह, सूअरका व ल.मुल खिज़ीर वमा उहिल्ल लिगे- मांस, जिस पर अल्लाह के बिना कुछ और पढ़ा रिल्लााहि विही वल्मुन्खनिकतु वल जावे, गला घोंटे, लाठी मारे, ऊपर से गिर पड़े, मौकू.जतु वल् मुतरद्दियतु वन्नन्वी हतु सींग मारे, और दरंद का खाया हुआ । वमा अकलस्सबुड़। । सृ० ५ । ग्रा० ३) (६४) व अक्रवतुमुल्लाह कज्वन् हसनन् और अल्लाह को अच्छा उधार दो अवश्य मैं ल उकफ़िरन्न अन्कुम् संयित्रातिकुम् तुम्हारी बुराई दर कमँगा और तुम्हें बहिश्तों वलउलिन्नकुम् जन्नातिन् । में भेजूंगा। (सू० ५ । आ० १२ । (६५) यफिरु लिमें यशााउ व युअजिबु में जिसको चाहता है क्षमा करता है जिसको यशा चाहे दुःख देता है। अताकुम् मालम् योति अ.हदम् मिनल जो कुछ किसी को भी न दिया वह आलमीन् । (मृ० ५ । प्रा० १८.००) तुम्हें दिया। (६६) अत्वीउल्लााह व अत्वी उ.मूल । आज्ञा मानो अल्लाह की और आज्ञा मानो (सूद ५ । प्रा०६२) रसूल की। (६७) अफ़ल्लााहु अम्मा मलफ़, वमन् आद अल्लाह ने माफ किया जो हो चुका और फ यन्तकिमुल्लाहु मिन्हु । जो कोई फिर करेगा अल्लाह उमसे बदला (सू० ५ । आ० ६५) लेगा। (६८) उमन् अलमु मिम्मनितरा अलल्लाहि और उस मनुष्य से अधिक पापी कौन है जो कजिवन् श्री काला ऊहिय इलेय अल्लाह पर झूठ वाँध लेता है और कहता है कि वलम् गृह. इलेहि शेउन्, व मन् काल मेरी ओर वही की गई परन्तु वही उसकी ओर नहीं की गई और जो कहता है कि मैं भी उता- सउन्जिलु मिस्ल मा अञ्जलल्लाहु । हंगा कि जैसे अल्लाह उतारता है। ( स०६ । प्रा०६४) (६६) लकद् खलानाकुम् सुम्म स्वौवर्नाकुम् अवश्व हमने तुम को उत्पन्न किया फिर सुम्म कुल्ना लिल मलाइकतिस्जुद् तुम्हारी सूरतें बनाई फिर हमने फरिश्तों से कहा लिआदम फसजद इल्ला इब्लीस, लम् किया परन्तु शयतान सिजदा करने वालों में से न कि आदम को सिजदा करो, बस उन्होंने सिजदा यकुम्मिनस्साजिदीन । हुआ।

( १४ ) काल मा मनक अल्लातस्जुद इज़ कहा जब मैंने तुझे आज्ञा दी फिर किसने अमर्तुक, काल अन खैरुम्मिन्हु खल- गेका कि तूने सिजदा न किया, कहा मैं उससे कनी मिन् नारिन् व खलकहू मिन्त्वीन् से उत्पन्न किया। अच्छा हूं तूने मुझ को आग से और उसको मिट्टी काल फाहवित्व मिन्हा फ़मा यकूनु कहा बस उसमें से उतर यह तेरे योग्य नहीं लक अन् ततकबर फीहा । है कि तू उसमें अभिमान करे। काल अन्जिानी इला यौमि युब्असून्। उठाये जायें। कहा उस दिन तक ढील दे कि कबरों में से काल इनक मिनल मुज्विरीन् । कहा निश्चय तू ढील दिये गयों से है। काल फविना अावैतनी लगाउदन्न कहा बस इसकी कसम है कि तूने मुझको गुमराह किया अवश्य मैं उनके लिये तेरे सीधे लहुम् स्विरातकल्मुस्तकीम् । मार्ग पर बैठूगा। वला तजिदु अक्सरहुम् शाकिरीन् । और प्रायः तू उनको धन्यवाद करने वाला न पावेगा काल फ्रानुज मिन्हा यज्ऊमम् मद्हरन्, कहा उससे दुर्दशा के साथ निकल अवश्य जो लमन् तविक मिन्हुम् लअम्लअन कोई उनमें से तेरा पक्ष करेगा तुम सब से दोजन जहन्नम मिन्कुम् अज्मईन् । को भरूंगा। (सू०७ । प्रा० ११ । १२ । १३ । १४ । १५ १६ । १७ । १८) (७०) इन रब्बकुमुल्लाहुल्लज़ी खलकस्समा निश्चय तुम्हारा मालिक अल्लाह है जिसने वाति वल् अर्व फ्री सित्तति ऐयामिन आसमानों और पृथिवी को छः दिन में उत्पन्न सुम्मस्तवा अलल अशि। किया फिर करार पकड़ा अर्श पर । तद् रब्बकुम् तज्जअन् दीनता से अपने मालिक को पुकारो। सू० ७ । प्रा० (५४ । ५५) (७१) वला तसौफिल अघि मुसिदीन् । मत फिरो पृथिवी पर झगड़ा करते। (सू०७। श्रा० ७४) (७२) फ अल्का अस्वााहु अश्जा हिय बस एक ही बार अपना असा डाल दिया और सुवानुम्मुबीन् । सू० ७ । (ग्रा० १०७) यह अजगर था प्रत्यक्ष। (७३) फ असल्ना अलैहि मुत्तूफ़ान वल् बस हमने उस पर मेंह तूफान भेजा टीढ़ी, जराद वल कुम्मल वज़वफ़ादिअ वद्दम चिचड़ी और मेढ़क और लोहू । फंतकम्ना मिन्हुम् फ़ अग्रकनाहुम् बस हमने उनसे बदला लिया और उनको बुबा दिया दरियाव में। । फिल यम्मि से सुबह शाम को। ( १५ ) वजावना बनी इसाईलल्वर और हमने बनी इसराईल को दरियाव से पार उतार दिया। इन्नहााउलाइ मुतब्बरुम् माहुम् फ्रीहि निश्चय वह दीन झूठा है कि जिस में हैं व वात्विलुम्माकानू यअमलून और उनका कार्य भी झूठा है। (सू० ७ । श्रा० १३३ । १३६ । १३८ । १३६ ) (७४) सौफ़ तरानी, फलम्मा तजल्ला बस तू मुझको अलवत्ता देख सकेगा जब रब्बुहू लिल् जबलि जअलहू दक्कन व प्रकाश किया उसके मालिक ने पहाड़ की ओर खर मूसा स्वडिका ( सू० ७ । प्रा० ६४३) उसको परमाणु २ किया गिर पड़ा मूसा बेहोश । (७५) वकुब्बा फ्रीनसिक तज्वरुअन् और अपने मालिक को दीनता डर से मन व खीफ़तन् वदूनल जारि मिनल कौलि में याद कर धीमी आवाज को विल् गुदूवि वल अस्वाल ( सू०७। श्रा: २०५) (७६) यस्अलूनक अनिल् अन्फाल, कलिल प्रश्न करते हैं तुझ को लूटों से कह लूटे अन्झाालु लिल्लााहि वर्समूल, फत्तकुल्लाह वास्ते अल्लाह के और रसूल के और डरो (सू०८। श्रा० १) अल्लाह से। ( ७७) व यक्त्व दााविरल काफ़िरीन् और काटे जड़ काफिरों की। (सू० ८। श्रा० ७) अन्नी मुमिदुकुम् विअल्फिम्मिनल्म मैं तुमको सहाय दू गा साथ सहम् फरिश्तों लााइकति मुर्दिफीन् ( सू० ८ । श्रा० ६ ) के पीछे २ आने वाले । स उल्की फ्री कुलूबिल्लज़ीन कफ व अवश्य में काफिरों के दिलों में भय डालूगा। फवरिबू फोकल अअनााकि वचरिबू बस मारो ऊपर गर्दनों, के मारो उनमें से मिन्हुम् कुल्ल बनानिन (सू. ८ । प्रा०१२) प्रत्येक पोरी (संधि) पर । (७८) अन्नल्लाह मअल्मोमिनीन् अल्लाह मुसलमानों के साथ है। या ऐ युहल्लज़ीन आमनुस्तजीबू ऐ लोगो जो ईमान लाये हो पुकारना स्वीकार लिल्लाहि व लिरसूल वास्ते अल्लाह के और वास्ते रसूल याऐ युहल्लज़ीन आपनू लातखूनुल्लाह ऐ लोगो जो ईमान लाये हो मत चोरी करो अल्लाह की रसूल को और मत चोरी करो अमा- वरसूल व तखूनू अमानातिकुम् नन अपनी को। व यम्कुरुल्लााहु वल्लाहु खैरुल्माकिरीन् और मकर करता था अल्लाह और अल्लाह (सू०८। श्रा० १६ । २४ । २७ । ३०) भला मकर करने वालों का है। कर के।

( १६ ) (७६) व कातिलूहुम् हत्ता लातकून फिनतुन और लड़ो उनसे यहां तक कि न रहे फितना व यकूनद्दीनु कुल्लुहू लिल्लाह अर्थात बल काफिरों का और होवे दीन तमाम ( सू० ८ । प्रा० ३६) वास्ते अल्लाह के । व अलमू इन्नमा गनिम्तुम् मिन् शैइन् फ और जानो तुम यह कि जो कुछ तुम लूटो अन्न लिल्लाहि खुमुसहू व लिरी मलि किसी वस्तु से निश्चय वास्ते अल्लाह के है पांचवां ( सू०८ । श्रा० ४१) हिस्सा उसका और वास्ते रसूल के (८०) वलौतरा इज़ यतवफ़फ़ल्लज़ीन कफरु और कभी देख तु जब काफिरों को फरिश्ते ल्मलाइकतु यज्वरिखून बुजूहहुम् व कज करते हैं मारते हैं मुख उनके और पीट अद्वारहुम्, वजूक अजावल्हरीक उनकी और कहते चखो अजाब जलने का । फ़ अलक्नाहुम्, विजुनूबिहिम् व हमने उनके पाप से उनको मारा और हमने अग्रगना आल फ़िान फिराऔन की कौम को डुबो दिया । व अइबु लहुम् मस्तत्वअतुम् मिन् और तैयारी करो वास्ते उनके जो कुछ तुम कुव्वतिन् ( सू० ८ । श्रा० ५० । ५४ । ६० ) कर सको। (८१) या ऐ युहन्नवीयु हस्बुकल्लाहु व म ऐ नबी किफायत है तुझ को अल्लाह और नित्तवअक मिनल मोमिनीन उनको जिन्होंने मुसलमानों से तेरा पक्ष किया । (सू० ८। प्रा० ६४ ६४) या ऐ युहन्नवीयु हरिज्विल मोमिनीन ऐ नवी रग़बत अर्थात चाह चस्का दे मुसल- अलल किताल, ईयकुम् मिन्कुम् इथून मानों को ऊपर लड़ाई के, जो हो तुम आदमी सन्ताप करने वाले तो पराजय करें दो म्वाविरून यग्लिब मिअतेनि ( श्रा० ६५ ) सौ का। फकुलू मिम्मा गनिम्तुम् हलालन् त्वैयि बस खाओ उस वस्तु से कि लूटा है तुमने वन वत्तकुल्लाह, इनल्लाह ग़फ़रुर्रहीम् हलाल पवित्र और डरो अल्लाह से वह क्षमा करने (प्रा०६६) वाला दयालु है। (८२) खालिदीन फीहा अबदा, फ़ीहा अबदा, इन्नल्लाह सदा रहेंगे बीच उसक, अल्लाह समीप उस इन्दहू अब्रुन् अज़ीम् के है. पुण्य बड़ा। या ऐ युहल्लजीन आमन ला तत्तखिज़ ऐ लोगो जो ईमान लाये हो मत पकड़ो बापों आवाअकुम् व इयानकुम् औलिया अपने को और भाइयों अपने को मित्र जो दोस्त इनिस्तहब्बुल कुफ्र अलल् ईमान् रखे कुफ्र को ऊपर ईमान के । सुम्म अंजलल्लाहु सकीनतह अला फिर अल्लाह ने उतारी तसल्ली अपनी ऊपर रमलिही रसूल अपने के। में से २० , - । ऊपर। ( १७ ) व अलल् मोमिनीन व अंजल जुनूदन और अपर मुसलमानों के और उतारे लश्कर लम् तरौहा व अज़्ज़बल्लज़ीन कफरू नहीं देखा तुमने उनको और अज़ाब किया उन लोगों को और यही सजा व जालिक जज़ाउल काफिरीन् । है काफिरी को सुम्म यतूबुल्लाहु मिम् वअदि नालिक फिर फिर आवेगा अल्लाह पीछे उसके अला में यशा। कातुिलुल्लज़ोन लायोमिनून विल्लाह । और लड़ाई करो उन लोगों से जो ईमान (सू०६ । श्रा० ०२ । २३ । २६ ! ७ । २६) नहीं लाते। (८३) व नानु नतरब्बस्तु विकुम् ऐं युस्वीब और हम बाट देखने बाले हैं वास्ते तुम्हारे कुमुल्लाहु विअजाविम् मिन् इन्दिही यह कि पहुंचावे तुम को अल्लाह अज़ाब अपने व विऐदीना । ( सू०६ । प्रा० ५२) पास से वा हमारे हाथों से । (८४) वअदल्लाहुल मोमिनीन वल मोमिनाति प्रतिज्ञा की है अल्लाह ने ईमान बालों से जन्नातिन् तन्नी मिन तातिहल अन्हारु और ईमान वालियौ से बहिश्तें चलती हैं नीचे खालिदीन फ़ीहा व मसाकिन त्वैयिवतन् उनके से नहरें सदेव रहने वाली बीच उसके फ्री जन्नाति अहिन्, व रिज्वानुम् मिन और घर पवित्र बीच बहिश्तों अंदन के लाहि अक्षर, जालिक हुवल फूजुल और प्रसन्नता अल्लाह की ओर बड़ी है और अज़ीम् । (सू० ६ । श्रा०७२) यह कि वह है मुराद पाना बड़ा। यस्खरून मिन्हुम्, सरितरल्ला करते हैं उनसे, ठट्ठा मिन्हुम् । ( मू०६ । प्रा०७६) ने उन से। (८५) लाकिनि मूल वल्लज़ीन आमनू मह परन्तु रसूल और जो लोग कि माथ उसके जाहद् वि अम्बालिहिम् व अन्फुमिहिम् ईमान लाये जिहाद किया उन्होंने साथ धन अपने के तथा जान अपनी के और इन्हीं लोगों व उलााइक लहुमुल् खैगन ( श्रा०८८) के लिय भलाई है। व त्ववअल्लाहु अला कुलूबिहिम् फ़हुम और मोहर रक्खी अल्लाह ने उपर दिलों ला यअलमून् । (सू०६ । आ०६३) उनके के, वस वे नहीं जानते । (८६) खुज् मिन् अम्बालिहिम् स्वदकतन् ले माल उनके से ग्वैरात कि पवित्र करे तू उनको अर्थात बाहरी और शुद्ध कर तृ उनको तुत्वः हिरुहुम् व तुज़क्कीहिम् विहा । साथ उसके अर्थात गुप्त में। इन्नल्लाहश्तरा मिनल मोमिनीन अन्फु निश्चय अल्लाह ने मोल ली है मुसलमानों सहुम् व अम्बालहुम् विअन्न लहुमुल्जन्नत से जानें उनकी और माल उनके बदले, कि वास्ते युकातिलून फी सीलिल्लाहि फ उनके बहिश्त है लड़ेंगे बीच मार्ग अल्लाह के यतुलून व युक्तलून् । बस मारंगे और मर जावेंगे। (सू०६ । श्रा० १०३, १११) बस ठट्ठा किया अल्लाह ( १८ ) (८७) या ऐ युहल्लज़ीन आमनु कातिलुल्ल ऐ लोगो जो ईमान लाये हो लड़ो उन लोगों जीन यलूनकुम् मिनल् कुमारि वल् से कि पास तुम्हारे हैं काफिरों से, और चाहिये कि पावे बीच तुम्हारे दृढ़ता। यजिद् फ्रीकुम् गिज्वः। अवला यरौन अबहुम् युफ़्तनून क्या नहीं देखते यह कि वे बलाओं में डाले फ्री कुलि भामिन् मर्रतन् औ जाते हैं हर वर्ष के एक वा दो बार, फिर वे नहीं मर्रतैनि सुम्म ला यतूबून वलाहुम् तोबा करते और न वे शिक्षा पकड़ते हैं। यज्जक्करून् । (सू० ६ । प्रा० १२३, १२६) (८८) इभ रब्बकुमुल्लाहुल्लजी खलकस्समावाति निश्चय परवरदिगार तुम्हारा अल्लाह वल् अव॑ फ्री सित्तति ऐयामिन् सुम्म जिसने पैदा किया आसमानों और पृथिवी को स्तवा अलल् अर्श, युदब्बिरुल् अम्र । बीच छ। दिन के फिर फरार पकड़ा ऊपर अर्श के (सू० १० । श्रा० ३) तदबीर करता है काम की। (८६) हुदौं वरमतुल्लिल मोमिनीन् । शिक्षा और या वास्ते मुसलमानों के । (सू० ११ । प्रा० ५७) (80) लियब्लुवकुम् ऐयुकुम् अड्सनु श्रमला परीक्षा लेवे तुम को, कौन तुम में से अच्छा वल इंक्रुन्त इनकुम् मऊमन मिम् है कर्मों में; जो कहे तू, अवश्य उठाये जाओगे वभदिल मौत के (सू० ११ । प्रा० ७) तुम पीछे मृत्यु (६१) व कील या अर्बुब्लई मा अकि व या और कहा गया ऐ पृथिवी अपना पानी निगल जा और ऐ आसमान बस कर और पानी समाउ अक्लिई व गैज्वल माउ । सूख गया। व या क्रौमि हाज़िही नाकतुल्लााहि और ऐ कौम यह है निशानी ऊंटनी लकुम् आयतन् फजरूहा ताकुल फ्री अल्लाह की वास्ते तुम्हारे बस छोड़ दो उसको अविल्लााहि (सू० ११ । श्रा० ४४ । ६४) बीच पृथिवी अल्लाह के खाती फिरे । (६२) खालिदीन फ़ीहा मा दामतिस्समावातु और सदैव रहने वाले बीच उसके जब तक कि रहें आसमान ओर पृथिवी। व अम्मलजीन सुइद् फफिल् जन्नति और जो लोग सुभागी हुए बस बहिश्त के खालिदीन फीहा मादामतिस्समावातु सदा रहने वाले हैं जब तक रहें आसमान और पल् अव । (सू० ११ । प्रा० १०७ । १०८) पृथिवी। वल् अर्च।

अर्शि । ( १६ ) (६३) इज् काल यूसुफु लिअचेहि या अवति जब यूसुफ ने अपने बाप से कहा कि ऐ वाप इन्नी रऐतु (वगैरः)। मेरे, मैंने एक स्वप्न में देखा (इत्यादि)। (सू० १२ । श्रा० ४ से ५७ तक) (६४) अल्लाहुल्लजी रफअस्समावाति विगरि अल्लाह वह है कि जिसने खड़ा किया मास- अमदिन तरौनहा सुम्मस्तवा अलल् मानों को बिना खम्बे के देखते हो तुम उसको फिर ठहरा ऊपर अर्श के। आज्ञा वर्तने वाला किया व सरखरश्शम्स वल कमर । और घाँद को। सूरज वहुवल्लजी मद्दल अर्व । और वही है जिसने बिछाया पृथिवी को । अन्जल मिनस्समाइ माअन् फ़सालत् उतारा आसमान से पानी बस बहे नाले भौ दियतुम् विद्रिहा। साथ अन्दाज अपने के। अल्लाहु यन्सुरिक लिमैंयशााउ व अल्लाह खोलता है भोजन को वास्ते जिसके यविदरु । चाहे और तंग करता है। (सू० १३ । श्रा० २ । ३ । १७ । २६) (६५) कुल इमल्लााह युजिवल्लु मैं यशााउ कह निश्चय अल्लाह गुमराह करता है जिस व यादी इलैहि मन् अनाम् । को चाहता है और मार्ग दिखाता है तर्फ अपनी उस (सू० १३ । प्रा० २७) मनुष्य मनुष्य को रुजू करता है। (१६) व जालिक अञ्जल्नाहु हुक्मन् अर इसी प्रकार उतारा हमने इस कुरान को अवीं वीयन् वलइनित्तवअत अावाहुम् जो पक्ष करेगा तू उनकी इच्छा का पीछे इसके वअद मा जापक मिनल् इल्म् । की आई तेरे पास विद्या से। फ इनमा अलैकल बलाग़ व अलेनल् बस सिवाय इसके नहीं कि ऊपर तेरे पैगाम (सू० १३ । श्रा० ३७ । ४६ ) पहुंचाना है और ऊपर हमारे है हिसाब लेना। (६७) व सखर लकुमुश्शम्स वल क्रमर और किया सूर्य चन्द्र को सदेव फिरने दाइचीन् । इबल इंसान लज्वलूमुन् कुफ़्फ़ार । निश्चय आदमी अवश्य अन्याय और पाप ( सू० १४ प्रा० ३३ । ३५) करने वाला है। (६८) फ इजा सव्वैतुहू व नफरतु फीहि बस ठीक करू मे उसको अर फूक दूबीच मिरूही फकऊलहू साजिदीन। उसके रूह अपनी से बस गिर पड़ो वास्ते उसके सिजदा करते हुए। ल रब्बि विमा श्रावैतनी लउर्जयिनम कहा ऐ रब मेरे इस कारण कि गुमराह किया लहुम् फिल् अचि वल उग्वियनहुम् तू ने मुझ को अवश्य जीनत दूंगा मैं वास्ते उनके (भज्मईन् ) ( सू० १५ । श्रा० २६ । ३६) बीच पृथिवी के और गुमराह करूँगा। हिसाव । घाले।

( २० ) पैगम्बर । जीव को जो कुछ (हह) बलकद् व अस्ना फ्री कुल्लि उम्मतिन् और निश्चय भेजे हमने बीच हर उम्मत के रसूला। इजा अग्नाहु अन्नकूल लहू कुन् फयकून् । जब चाहते हैं हम उसको, यह कहते हैं हम ( मू० १६ । श्रा० ३६ श्रा० ४०) उसको हो बस हो जाती है। (१००) व यज्अलून लिल्लाहिल बनाति और नियत करते हैं वास्ते अल्लाह के बेटियां सुब्हानहू वलहुम् मा यश्तहून् । पवित्रता है उसको और वास्ते उनके है जो कुछ (श्रा० ५७ ) चाहें। तल्लााहि लकद् अर्मल्ना । कसम अल्लाह की अवश्य भेजे हमने (सू० १६ । प्रा० ६३) पैगम्बर । (१०१) उलााइकल्लजीन तयअल्लाहु अला ये लोग वे हैं कि मोहर रक्खी अल्लाह ने कुलूविहिम् व सम्हहिम् व अब्स्वारि ऊपर दिलों उनके और कानों उनके और आंखों हिम्, व उलााइक हुमुल् गाफ़िलून् । उनकी के और ये लोग वे हैं बे खबर । वतुवमा कुल्लु नसिम् मा अमिलत और पूरा दिया जावेगा हर बहुम् ला युज्वलमून् । किया है और वे अन्याय न किये जायेंगे (सू० १३। '०८ । १५१) (१०२) वजअल्ना जहन्नम लिल्काफिरीन और किया हमने दोजख को वास्ते काफिरों हस्वीरा। के घेरने वाला स्थान। व कुल्ल इंसानिन् अल्ज़म्नाहु त्वाइ और हर आदमी को लगा दिया हमने उसको अमल नामा उसका बीच गर्दन उसकी के, और रहू फ्री उन्किही, वनुखि जुलह योमल निकालेंगे हम वास्ते उसके दिन क़यामत के एक कियामति किताबें यल्काहु मंशरा । किताब कि देग्वेगा उसको खुला हुवा । वकम् अालक्ना मिनल् कुरूनि मिम् और बहुत मारे हमने कुरनून से पीछे वअदि नूहिन् । (सू. १७ । आ०८ । १३ । १..) (१०३) व आतैना समूदन्नाकत मुस्विरतन् । और दिया हमने समूद को ऊंटनी प्रमाण । वम्तजिज़ मनिस्तत्वअत । जिसको बहका यौम नद्ऊ कुन्ल उनासिम् विइमामि जिस दिन बुलावेंगे हम सब लोगों को साथ हिम्, मन ऊतिय कितावह वियमी पेशवाओं उनके के बस जो कोई दिया गया निही ( सू» १७ । प्रा० ५६ । ६४ । ७१) अमलनामा उसका बीच दहिने हाथ उसके के। । नूह के । और बहका सके।

मौइदन् । ( २१ ) (१०४) उलााइक लहुम् जन्नातु अनिन् ये लोग हैं वास्ते उनके हैं बाग़ हमेशह रहने तची मिन् तःतिहिमुल अन्हारु युह के, चलती हैं नीचे उनके से नहरे, गहिना पहि- ल्लौनफीहा मिन् असाविर मिन् जहबिन नाये जावेंगे बीच उसके कंगन सोने के से और व यल्बसून सियाबन् खुज्वरम् मिन् पोशाक पहिनेंगे वस्त्र हरित लाही की से और सुन्दुसिन् व इस्तकिम् मुत्तकिईन ताफ्ते की से, तकिये किये हुए बीच उसके ऊपर फीहा अलल् अराइकि, निअमस्मवावु नख्तों के, अच्छा है पुण्य और अच्छी है बहिश्त लाभ उठाने की। वहसुनत् मुतफकन(म० १८ । ग्रा० ३.) (१०५) व तिल्कल करा अलक्नाहुम् लम्मा और यह बम्तियाँ हैं कि मारा हमने उनको ज्वलमू, व जअल्ना लिमालिकिहिम् जब अन्याय किया उन्होंने, और हमने उनके (मू० १८ । श्रा० ५६) मारने की प्रतिज्ञा स्थापन की। (१०६) व अम्मल गुलाामु फ़कान अववाहु और वह जो लड़का, बस थे मा बाप उसके मोमिनेनि फखशीना ऐंयुहिकहुमा ईमान वाले, बस डरे हम यह कि पकई उनको सरकशी में और कुफ्र में। त्रयानम् व कुफ्रा। हत्ता इजा बलग़ मविश्शम्सि बजदहा यहां तक कि पहुंचा जगह डूबने सूर्य की, तग्रुबु फी ऐनिन हमिअतिन् । पाया उसको डूबता था बीच चश्मे कीचड़ के। कालू या जल्कनेंनि इन्न याजूज व कहा उनने ऐजुलकरनैन निश्चय याजूज माजूज मुक्सिन फ़िल अजर्व माजूज फिसाद करने वाले हैं बीच पृथिवी ( सू० १८ । ग्रा० ८०८६ । ६४) (१०७) बकुर्फिल् कितावि मर्यम, इजिन्त और याद करो बीच किताब के मर्यम को बजत् मिन् अलिहा मकानन शर्की जब जा पड़ी लोगों अपने से मकान पूर्वी में। यन, फत्तखजत् मिन् दृनिहिम् बस पड़! उनसे इधर पर्दा बस भेजा हमने रूह हिजाबन् फ असल्ना इलेहा रूहना अपनी को अर्थात फरिश्ता. बस सूरत पकड़ी वास्ते तमस्सल लहा बशस्न सवीया। उसके श्रादमी पुष्ठ की। कालत् इन्नी अऊजु विरह्मानि मिन्क कहने लगी निश्चय मैं शरण पकड़ती है इन् कुन्त तकीयन् । रहमान की तुझ से जो है तू परहेज़गार । कहने लगा सिवाय इसके नहीं कि मैं भेजा काल इन्भमा अन रसूलु रचिकि, लि हुआ हूँ मालिक तेरे के से तो कि दे जाक अहव लकि गुलामन् जकीयन् । मैं तुझको लड़का पवित्र।

( २२ ) घगीया । कालत् अन्ना यकूनु ली ग़लामुन् व कहा कैसे होगा वास्ते मेरे लड़का, नहीं हाथ लम् यम्सस्नी वशरुन् व लम्अकु लगाया मुझको आदमी ने, नहीं मैं बुरा काम करने वाली। क हमलत्हु फन्तबजत् विही मकानन् बस गर्भित हो गई साथ उसके और जा कस्वीया। पड़ी साथ उसके मकान दूर अर्थात् जंगल में । (सू० ११ । प्रा० १६ । १७ । १८ । १६ । २० । २२) (१०८) अलम् तर अना असल्नश्शयात्वीन क्या नहीं देखा तुने यह कि भेजा हमने शय- मलल् काफिरीन तउज्जूहुम् अज़्ज़न्। तानों को ऊपर काफिरों के बहकाते हैं उनको (सू० १६ । प्रा० ८३) बहकाने कर। (१०६) व इन्नी लगफ़्फ़ारुन् लिमन् ताव और निश्चय क्षमा करने वाला हूँ वास्ते उस व आमन व अमिल स्वालिहन सुम्मः मनुष्य के तोबाः की और ईमान लाया कर्म किये तदा। (सू० २० । श्रा० ८२) अच्छे फिर मार्ग पाया। (११०) व जअल्ना फिल् अचि रवासिय और किये हमने बीच पृथिवी के पहाड़ ऐसा अन् तमीद विहिम् । न हो कि हिल जावे। (स्० २१ । प्रा० ३१) (१११) वद्धती प्रास्वनत् फर्जहा फ़्नफ्रना (और शिक्षा दी हमने उस औरत को ) और फीहा मिहिना । (सू० २१ । प्रा० ६१) दिया हमने बीच उसके रूह अपनी को। रक्षा की उसने अपने गुह्य अङ्गों की बस फूक (११२) अलम् तर अन्नल्लाह यस्जुदु लहू मन् क्या नहीं देखा तूने कि अल्लाह को सिजदा फिस्समावाति व मन् फिल् अचि करते हैं जो कोई बीच आसमानों और पृथिवी वरशम्सु वल्क्रमरू वन्नुजूमु वल् के हैं सूर्य और चन्द्र तारे और पहाड़ वृक्ष और जिवालु वश्शजरु वद्दवाबु । युहल्लौन फ्रीहा मिन् असाविर मिन् पहिनाये जावेंगे बीच उसके कंगन सोने से जहविन् व लूलुअन्, वलिवासुहुम् और मोती और पहिनावा उनका बीच उसके फ्रीहा हरीरुन् । रेशमी है। व वाहिर बैतिय लिचाइफ़ीन वल और पवित्र रख घर मेरे को वास्ते गिर्द काइमीन । फिरने वालों के और खड़े रहने वालों के। सुम्मल यज्वू तफसहुम् वल् यूत फिर चाहिये कि दूर करें मैल अपने और नुजूर हुम् वल यचोवत विल् पूरी करें भेटें अपनी और चारों ओर फिरें घर चैतिल अतीक। कदीम के। जानवर।

( २३ ) लियजकुरुस्मल्लाहि । तो कि नाम अल्लाह का याद करें। (सू० २२ । श्रा० १८ । २३ । २६ । २६ । ३४ ) (११३) सुम्म इनकुम् यौमल कियामति तुव् फिर निश्चय तुम दिन कयामत के उठाये असून। (सू० २३ । प्रा० १६) जाओगे। (११४) यौम तरहदु अलैहिम् असिनतुहुम् उस दिन कि गवाही देवेगे ऊपर उनके व ऐदीहिम् व अर्जुलुहम् विमा कानू जबाने उनकी और हाथ उनके और पांव उनके यमलून् । साथ उस वस्तु के कि थे करते। अल्लाहु नूरुस्समावाति वल् अचि, अल्लाह नूर है आसमानों का और पृथिवी मसलु नूरिही कमिश्कातिन् फीहा का, नूर उसके कि मानिन्द ताक्न की है बीच उस मिस्ववाहुन्, अल् मिस्वबाहु फी के दीप हो, और दीप यीच कंदील शीशों के है, जुजाजतिन्, अज्जुजाजतु कअन्नहा वह कंदील मानो कि तारा है चमकता, है चमकता, रोशन कौकबुन् दुरींयुन् यूकदु मिन् शजरतिन् किया जाता है दीपक वृक्ष मुबारिक जैतून के से, मुबारकतिन् जैतूनतिन् ला शर्कीय न पूर्व की ओर है न पश्चिम के समीप है, तेल तिन् वला गर्वीयतिन् यकादु जैतुहा उसका रोशन हो जावे जो न लगे उसको प्राग, युवीउ वलौलम् तम्मस्हु नारुन् रोशनी के ऊपर रोशनी, मार्ग दिखाता है नूरुन् अलानूरिन्, यःदिल्लाहु अल्लाह नूर अल्लाह नूर अपने की जिसको चाहता है। लिरिही मैं यशााउ । (सू. २४ । श्रा० २४ । ३५ ) (११५) वल्लाहु खलक कुल्ल दाब्बतिन् मिम्मा और अल्लाह ने उत्पन्न किया हर जानघर इन्, फ मिन्हुम् मैं यम्शी अला को पानी से बस कोई उनमें वह है कि जो चलता बत्वनिही । है पेट अपने के। व मैं युत्विइल्लाह वरसूलहू । और जो कोई आज्ञा पालन करे अल्लाह की रसूल उसके की। कुल् अत्वीउल्लाह व अत्वीउ मूल । करो खुदा की व रसूल उसके की। व अत्वीउसूल लअल्लकुम् तुर्हमून् । और आज्ञा पालन करो रसूल की ताकि दया (सू० ०४ । श्रा० ४५। ५२ । ५४ । ५६ ) किये जायो। -- कह आज्ञापालन (११६) व यौम तशककुस्समाउ विल्गमामि व नुज्जिलल्मलाइकतु तंजीला । और जिस दिन कि फट जावेगा आसमान साथ बदली के, और उतारे जावेंगे फरिश्ते ।

( २४ ) फला तुत्विइल काफिरीन व जाहिद् बस मत कहा मान काफिरों का और झगड़ा हुम विही जिहादने कबीरा। कर उनसे साथ झगड़ा बढ़ा। फ उलाइक युवदिलुल्लाहु सैयिाति और बदल डालता है अल्लाह बुराइयों उन हिम् हसनातिन् । की को भलाइयों से। व मन् ताव व अमिल स्वालिहन् और जो कोई तोबाः करे और कर्म करे फइनहू यतूबु इलल्लाहि मतावा। अच्छे बस निश्चय आता है तरफ अल्लाह की। (सू० : ५ । श्रा० २५ । ५२ । ७०।७१) (११७) व औहैना इला मूसा अन् अस्रि वही कि हमने तर्फ मूसा की यह कि ले चल रात को बन्दों मेरे को, निश्चय तुम पीछा किये विइबादी इन्नकुम् मुत्तवऊन् फ़ अर्मल फ़िोनु फिल् यदाइनि बस भेजे लोग फिरोन ने बीच नगरों के जमा हाशिरीन् । करने वाले। अल्लज़ी खलकनी फ़हुव और वह पुरुष कि जिसने पैदा किया मुझ को बस वही मार्ग दिखलाता है। वल्लजी हुव युत्वइमुनी व यस्क्रीनि । और वह जो ग्विलाता है मुझको पिलाता है मुझको वल्लज़ी अत्वमउ ऐयरिफरली खत्वी और वह गुरुप कि आशा रखता ह अती योमीनि। कि क्षमा करे वास्ते मेरे अपराध मेरा दिन (सू० ६ । श्रा०५२ । ५३ । ७८ । ७६ । ८२) कयामत के। (११८) मा अन्त इल्ला बशरुम् मिस्लुना, नहीं तृ आदमी (परन्तु ) मानन्द हमारी फाति विप्रायतिन इन कंत मिनम्स्वा बम ले आ कुछ निशानी जो है तृ सच्चों से। जानोगे। फहुव यादीनि । मैं यह , दिक़ीन् । ऐ काल हाज़िही नाकतुन् लहाशिवुन् । कहा यह ऊटनी है वास्त उसके पानी पीना ( सू० २६ । श्रा० १५४ । १५५) है एक बार । (११६) या मूसा इन्नहू अनल्लाहुल अजीजुल मूसा बात यह है कि निश्चय मैं अल्लाह हकीमु, अल्कि अस्वाक, फलम्मा हूँ गालिब । और डाल दे असा अपना बस जब कि देखा उसको हिलता था मानो कि वह राहा तःतज्जु कअन्नहा जानुन्, सांप है। या मूसाला तखफ, इन्नी लायखाफ़ ऐ मूसा मत डर निश्चय नहीं डरते समीप लदैयल्मुसलून् । मेरे पैगम्बर । अल्लाहु लाइलाह इल्ला हुव रब्बुल अल्लाह नहीं कोई मावूद परन्तु वह मालिके अशिल अज़ीम् । अर्श बड़े का।

दयालु है। ( २५ ) अल्ला तअलू अलैय बातूनी यह कि मत सरकशी करों ऊपर मेरे और मुस्लिमीन् । चले आओ मेरे पास मुमलमान होकर । ( सू० २७ । श्रा०६ । १० । २६ । ३१ ) (१२०) वतरल जिवाल तःसबुहा जामिदतन् और देखेगा तू पहाड़ों को, अनुमान करता वहिय तमुहू मरस्सहावि, स्वुअल्ला है तू उनको जमे हुए, और वे चले जाते हैं हिल्लज़ी अत्कन कुल्ल शैइन्, इन्नह मानिन्द चलने बादलों की, कारीगरी अल्लाह की खवीरुम् विमा तफ्लून् । जिसने दृढ़ किया हर वस्तु को निश्चय खबरदार (म० २७ । श्रा० ८८ ) है उस वस्तु से कि करते हो। (१२१) फ वकजहू मूसा फ कज्या अलैहि । बस मुष्ट मारा उसको मूसा ने बस पूरी की (सू० २८। श्रा० १५ ) आयु उसकी। काल रब्बि इन्नी ज्वलन्तु नफ़्मी कहा ऐ रब मेरे निश्चय मैंने अन्याय किया जान अपनी को बस क्षमा कर मुझको बस क्षमा फफिी फ़ग़फ़रलह, इन्नहू हुवल कर दिया उसको निश्चय वह क्षमा करने वाला ग़फूर्रहीम। (सू२८ । श्रा० १६) व रब्बुक यरटलुकु मा यशाउ व यस्तारु और मालिक तेरा उत्पन्न करता है जो कुछ ( सू० २८ । श्रा०६८) चाहता है और पसन्द करता है। (१२२) व वस्वैनल इंसान विवालिदेहि और आज्ञा दी हमने मनुष्य को साथ मा हुस्नन्, व इन् जाहदाक लितुश्रिकवी बाप के भलाई करना और जो झगड़ा करें तुझसे मा लैस लकविही इल्मुन् फला तुत्वी दोनों, यह कि शरीक लावे तू साथ मेरे उस वस्तु को, कि नहीं वास्ते तेरे साथ उसके ज्ञान, बस मत हुमा इलैय मजिंउकुम् । कहा मान उन दोनों का तर्फ मेरी है। ( सू० २६ । श्रा०८) व लकद् असल्ना और अवश्य भेजा हमने नूह को तफ कोम फ लबिस फ्रीहिम् अल्फ सनतिन् उसके कि बस रहा बीच उनके हजार वर्ष परन्तु इल्ला खम्सीन अामन् । पचास वर्ष कम। (सू० २६ । श्रा० १४ ) (१२३) अल्लाहु यन्दउल्खल्क सुम्म युईदुहू अल्लाह पहिली बार करता है उत्पत्ति, फिर दूसरी बार करेगा उसको, फिर उसी की ओर फेरे सुम्म इलैहि तुर्जऊन् । व यौम तमुस्साऋतु युब्लिसुल् और जिस दिन बर्पा अर्थात खड़ी होगी मुनिमून् । कयामत निराश होंगे पापी। नूहन् इला कौमिही जानोगे।

(२०) अम्मलजीन आमन् व अमिलुस्स्वा बस जो लोग कि ईमान लाये और काम लिहाति फहुम् फ्री रौज्वतिन् युःवरून किये अच्छे बस वे बीच बाग के सिंगार किये वलइन् अर्सन्ना रीहन् फरोहु मुस्त्र और जो भेज दें हम एक बाव बस देखें उस फरन् (लज्वल्लू मिम्बअदिही यक्फु खेती को पीली हुई। जावेगे। रून् )। । कजालिक यत्ववउल्लाहु अला कुलू इसी प्रकार मोहर रखता है अल्लाह उपर विल्लजीन ला यअलमून् । दिलों उन लोगों के कि नहीं जानते । ( सू० ३० । प्रा० ११ । १२ । १५ । ५१ । ५४ ) (१२४) तिलक आयातुल्किताबिल हकीम् । ये आयतें हैं किताब हिक्मत वाले की। खलकस्समावाति विगरि अमदिन् उत्पन्न किया आसमानों को बिना सुतून अर्थात् तरौनहा व अल्का फिल् अचि रवा खम्भे के देखते हो तुम उसको और डाले सिय अन्तमीद विकुम् । वीच पृथिवी के पहाड़ ऐसा न हो कि हिल जावे (सू०३१ । पा. २।१०) अलम् तर अन्नलाह यूलिजुल्लैल क्या नहीं देखा तूने यह कि अल्लाह प्रवेश फिन्नहारि वयूलिजुनहार फ़िल्ललि कराता है रात को बीच दिन के और प्रवेश कराता है दिन को बीन रात के। अलम् तर अन्नल फुल्क तजी फ़िल क्या नहीं देखा कि किश्तियाँ चलती हैं बीच वारि विनिमतिल्लाहि लियुरीकुम् दर्या के साथ निआमतों अल्लाह के तो कि दिख- मिन् श्रआयातिही। लावें तुमको निशानियाँ अपनी। (सू० ३१ । प्रा० २६ । ३१ ) (१२५) युदबिरुल अम्र मिनस्समाइ इलल् तदबीर करता है काम की आसमान से तर्फ अचि सुम्म यअरुजु इलैहि फ्री पृथिवी की फिर चढ़ जाता है तर्फ उसकी बीच यौमिन् कान मिनदारुहू अल्फ सनतिम् एक दिन के कि है अवधि उसकी सहन वर्ष उन वर्षों से कि गिनते हो तुम। जालिक आलिमुलौवि वश्शहादतिल यह है जानने वाला शैव का और प्रत्यक्ष का अजीजुर्रहीम् । सुम्म सव्वाहु वनफख फ्रीहि मिळहिही फिर पुष्ट किया उसको और फूका बीच उस के रूह अपनी से। कुल यतवफ़्फ़ाकुम् मलकुल मौतिल्लजी कह कब्ज करेगा तुमको फरिश्ता मौत का क्किल विकुम् । जो नियत किया गया है साथ तुम्हारे । मिम्मा तउद्न् । गालिब दयालु। घह ( २ ) वलौशेना ल आतैना कुल्ल नसिन् और जो चाहते हम अवश्य देते हम हर एक हुदाहा वलाकिन् हक्नकल्कौलु मिन्नी जीव को शिक्षा उसकी परन्तु सिद्ध हुई बात मेरी ल अम्लअन जहन्नम मिनल जिन्नति ओर से कि अवश्य भरूँगा मैं दोजख को जिनों वन्नासि अज्मईन् । से और आदमियों से इकट्ठ। (सू० ३२ । श्रा० ४।५। ६ । ११ । १३) (१२६) कुल लैंयन्फअकुमुल फ़िरारु इन् कह कि कभी न लाभ देगा भागना तुमको फरर्तुम् मिनन्मौति अविल् कलि । जो भागो तुम मृत्यु व कतल से । या निसाअन्नवीयि मैं याति मिन्कुन्न ऐ बीबियों नबी की जो कोई आवे तुम में से विफ़ाहिशतिन् मुवैयिनतिन् युवा साथ निर्लज्जता प्रत्यक्ष के दुगना किया जावेगा अफ् लहल अज़ाबु ज्वेअफेनि, व वास्ते उसके आजाब और है यह ऊपर अल्लाह कान जालिक अलल्लाहि यसीरा । के सहल । (सू. ३३ । प्रा० १६ । ३०) (१२७) वक्रर्न फ़िय्यूतिकुन्न, व अत्वेअन और अटकी रहो बीच घरों अपने के आज्ञा पालन करो अल्लाह और रसूल की ( सिवाय प्राह व रसूलहू। इसके नहीं)। फल्म्मा कड़वा जेदुम्मिन्हा व त्वरन् बस जब अदा कर ली जैद ने हाजत उससे, जनज् ना कहा लिकेला यकून ब्याह दिया हमने तुझ से उसको ताकि न होने अलन्मोमिनीन हरजुन् फी अज्वाजि ऊपर ईमान वालों के तंगी बीच वीषियों ले अड्याइहिम् इजा कज्वौ मिन्हुन्न व पालकों उनके के, जब अदा कर लें उनसे हाजत त्वरन्, वकान अमुल्लाहि मऊलन्। और है आज्ञा खुदा की की गई। माकान अलन्नवीयि मिन् हरजिन् फ़ीमा नहीं है ऊपर नबी के कुछ तंगी बीच उस वस्तु के। फरज्वलाहु लह। माकान मुहम्मदुन् अवा अहदिम् नहीं है मुहम्मद बाप किसी मर्दा का। मिरिंजालिकुम् । वम्रप्रतम् मोमिनतन् इंव्वहब नफ़्सहा और हलाल की स्त्री ईमान वाली जो देवे बिना महर के जान पानी वास्ते नबी के। लिनवीये। ढील देवे तू जिसको चाहें उनमें से और तुर्जी मन्तशाउ मिन्हुन्न व तोवी इलैक जगह देवे तर्फ अपनी जिसको चाहे, नहीं पाप मन् तशाउ, मला जुनाह अलैक । अपर तेरे।

( २८ ) बुयूतन् नवीये। बड़ा पाप। , और मुसलमान या ऐ युहल्लज़ीन आमनू लातखुलू ऐ लोगों जो ईमान लाये हो मत प्रवेश करो घरों में पैगम्बर के। व माकान लकुम् अन्तोजू रसूलल्लाहि नहीं योग्य वास्ते तुम्हारे यह कि दुःख दो वला अन् तन्किहू अज़्वाजहू मिम्बा रसूल को, यह कि निकाह करो बीबियों उसकी अदिही अवदन् । को पीछे उसके कभी। ( सू० ३३ । प्रा०३३।३७।३८।४०५०।५११५३ ) (१२८) इन्नजालिकुम् कान इन्दल्लाहि अजीमा । निश्चय यह है समीप अल्लाह के इन्नल्लजीन योजूनल्लाह व रसूलहू को और रसूल उसके को, लानत की है उनको निश्चय जो लोग कि दुःख देते हैं अल्लाह लअनहुल्लाहु। अल्लाह ने। वल्लजी योजूनल मोमिनीन वल् मोमि और वे लोग कि दुःख देते हैं मुसलमानों को औरतों को बिना इसके बुरा नाति विगैरि मक्तसबू फकदिःतमलू किया है उन्होने. बस निश्चय उठाया उन्होंने बुःतानन् व इस्मम्मुवीना। बोहतान अर्थात् झूठ और प्रत्यक्ष पाप । मल्ऊनीन, ऐनम सुकिफू उखिजू व लानत मारे, जहां पाये जायें पकड़े जावें कुत्तिलू तक्कीलन् । कतल किये जावे खूब मारा जाना । रब्बना आतिहिम् ज्वेअप्रैनि मिनल ऐ रब हमारे दे उनको द्विगुण अजाब से, अजाबि वल् अन्हुम् लअनन् कबीरा । और लानत से बड़ी लानत कर । (सू० ३३ । आ०५३ । ५७ । ५८।६१।६८) (१२६) वल्लाहुल्लजी असलरियाह फतुसीरु और अल्लाह वह पुरुप है कि भेजता है हवाओं को बस उठाती हैं बादलों को बस हांक महावन फसुनाहु इला बलदिम् लेते हैं तर्फ शहर मुर्दे की, बस जीवित किया मैयितिन् फ अहयैना विहिल् अर्व हमने साथ उसके पृथिवी को पीछे मृत्यु उसकी वअद मौतिहा, कजालिकन्नुशूरु । के, इसी प्रकार कबरों में से निकलना है। अल्लजी अहल्लना दारल्मुकामति जिसने उतारा बीच घर सदा रहने के दया मिन् फज्वलिही, ला यमस्सुना फ़ीहा अपनी से, नहीं लगती हम को बीच उसके मह- नस्वबुन् वला यमस्सुना फ्रीहा लुगूबुन् नत और नहीं लगती बीच उसके मांदगी। (सू० ३५ । श्रा०६ । ३५) (१३०) वल् कुनिल्हकीम, इन्नक लमिनल कसम है कुरान दृढ़ की निश्चय तू भेजे मुसलीन् । हुओं से है।

( २६ ) अला स्विरातिम्मुस्तकीम, तंजीलल ऊपर मार्ग सीधे के उतारा है गालिब अजीजिरहीम् । दयावान ने। (सू० ३६ । श्रा०२।३।४।५) (१३१) वनुफिख फिस्स्वरि फ़इज़ाहुम् मिनल और फूका जावेगा बीच सूर के बस नागहां अज्दासि इला रब्बिहिम् यन्सिलून । वह कबरों में से तर्फ मालिक अपने की दौड़ेंगे। व तरहदु अर्जुलुहुम् विमा कानू और गवाही देंगे पांव उनके साथ उस वस्तु यक्सिबून । के कि थे कमाते। सिवाय इसके नहीं कि आज्ञा उसकी इन्नमा अमुहू इज़ा अगद शैअन् ऐं जब चाहे उत्पन्न करना किसी वस्तु का यह यकूल लहू कुन् फयकूनु । कि कहता है वास्ते उसके कि हो जा बस हो ( सू० ३६ । श्रा, ५१ । ६५। ८२) जाती है। (१३२) युत्वाफु अलैहिम् विकासिम मिम्मइनिन फिरागा जावेगा उसके ऊपर पियाला शराब शुद्ध का। वैज्वाअ लज़्ज़तिल्लिरशारिवीन । सपैद मजा देने वाली वास्ते पीने वालों के। ( श्रा० ४५) ममीप उनके बैठी होगी नीचे प्रांख रखने व इंदहुम् कास्विरातत्त्वर्फि ईनुन् । वालियां सुन्दर आंख वालियां । क अन्न हुन्न वैज्बुम् मक्नूनुन् । मानो किये अण्डे हैं छिपाये हुए। (श्रा० ४८ । ४६ ) अफमा नानु विमैयितीन । क्या बस हम नहीं मरेंगे। व इन्न लूत्वल लामिनल मुसलीन । और अवश्य लूत निश्चय पैगम्बरों से था। इज् नज्जैनाहु व अलहू अज्मईन । जब कि मुक्ति दी हमने उसको और लोगों उसके को सब को। इल्ला अजूज़न फ़िल ग़ाबिरीन । परन्तु एक बुढ़िया पीछे रहने वालों में है। सुम्म दम्मनल आखिरीन। फिर मारा हमने औरों को। (सू० ३७ । श्रा० ४५ | ४८।४६ । ५८ । १३३ । १३४ । १३५ । १३६) (१३३) जन्नाति अनिम् मुफ़तहतन् लहुमुल् बहिश्ते हैं सदा रहने की खुले हुए हैं दर उन अवाबु । के वास्ते उनके। मुत्तकिईन फ्रीहा यद्ऊन फ़ीहा विफ़ा- तकिये किये हुए बीच उनके मंगावेंगे बीच किहतिन् कसीरतिन् व शराव । इसके मेवे और पीने की वस्तु । - मा को यह मिन त्वीन् । (.) व इन्द हुम् कास्विरातुचर्फि अत्राबुन्। और समीप होगी उनके नीचे रखने वालियाँ दृष्टि, और दूसरों से समायु। फसजदल मलाइकतु कुल्लुहुम् बस सिजदा किया फरिश्तों ने सब ने। अज्मऊन् । इल्ला इन्लीस, इस्तक्चर व कान परन्तु शयतान ने न माना अभिमान किया मिनल काफिरीन। और था काफिरों से। या इब्लीसु मनश्रक श्रन् ऐशयतान किस वातु ने रोका तुम तस्जुद लिमा खलक्तु वियदैय, अस्त कि सिजदा करे वास्ते उस वस्तु के कि बनाया मैंने साथ दोनों हाथ अपने के, क्या अभिमान किया क्वत अम् कुन्त मिनल आलीन । तूने, वा था बड़े अधिकार वालों से। काल अन खैरुम्मिन्हु, खनकनी मिन् कहा कि मैं अच्छा हूं उस वस्तु से, उत्पन्न नारिन् व खलकहू किया तूने मुझको आग से, उसको मिट्टी से । कहा बस निकल इन पासमानों में से बस काले फस्नुज् मिन्हा फ इन्नक रजीम् । निश्चय तू चलाया गया है। इम अलैक लअनती इला यौमिद्दीन् । निश्चय ऊपर तेरे लानत है मेरी दिन जजा तक। काल रिब्ध म अन्विी इला यौमि कहा ऐ मालिक मेरे ढील दे उस दिन तक युअसून । कि उठाये जावेंगे मुर्दे। काल फ इनक मिनल् मुन्वरीन् । कहा कि बस निश्चय तू ढील दिये गयों से है। इला यौमिल वनितल माअलूम् । उस दिन समय ज्ञात तक । काल फविइज्जतिक लउरिवयन्नहुम् कहा कि बस कसम है प्रतिष्टा तेरी की, कि प्रिज्मइन् । अवश्य गुमराह करूँगा उनको मैं इकट्ठ। (सू०।३८ । प्रा०५०। ५१ । ५२ । ७३ । ७४ । ७५। ७६ । ७७ । ७८ । ७४/८० । ८१।८२) (१३४) इन्नन्लाह यरिफरुज्जुनूप जमीश्रा, अल्लाह क्षमा करता है पाप सारे निश्चय इबह हुवल गफूर्रहीम् । वह है क्षमा करने वाला दयालु । वल् अर्चु जमीअन् कब्भवतुहू यौमल और पृथिवी सारी मूठी में है उसकी दिन क्रियामति वस्समावातु मत्वीयातुन् कयामत के, और आसमान लपेटे हुए हैं बीच वियमीनिही। दाहने हाथ उसके।

काम उसका। ( १ ) व अश्रक्रतिल अर्बु विनूरि रब्बिहा और चमक जावेगी पृथिवी साथ प्रकाश व युज्विल्कितावु वजिआइप मालिक अपने के, और रक्खे जावेगे कर्मपत्र विनवीयीन वश्शुहदाए वकुज्विय और लाया जावेगा पैगम्बरों को और गवाहों को (पैनहुम् विल्हक्कि) और फैसला किया जावेगा। (सू० ३६ । प्रा०५३ । ६७ । ६६) (१३५) तंजीलुनिकतााचि मिनल्लादिल अजी उतारना किताब का अल्लाह गालिब जानने जिल अलीम् । वाले की ओर से है। गाफ़िरिजम्बि व काबिलत्तौति । तमा करने वाला पापों का और स्वीकार (सू० ४० । श्रा० २।३) करने वाला तोबाः का। (१३६) फ कवाहुन्न सत्र समावातिन् की बस नियत किया उसको सात आसमान बीच यौनि व औहा फी कुल्लि समाइन् दो दिन के और डाल दिया हमने बीचे उसके अम्रहा। हत्ता इज़ा मा जाऊहा शहिद अलैहिम् यहाँ तक कि जब जावेंगे उसके पास साक्षी सम्उहुम् व अस्वारुहुम् व जुलूदुहुम् देंगे ऊपर उनके कान उनके और आंखें उनकी विमा कानू यअमलून् । और चमड़े उनके, उनके कर्म से। व कालू लिजुलूदिहिम् लिम शहिदुत्तुम् और कहेंगे वास्ते चमड़े अपने के क्यों साक्षी अलैना काल अन्त्वकनल्लाहुल्लजी दी तू ने ऊपर हमारे, कहेंगे कि बुलाया है हमको अन्त्वक कुम्न शैअन् । अल्लाह ने जिसने बुलाया हर वस्तु को । (इनलजी अहाहा ) लमुछिल्मौता । अवश्य जिलाने वाला है मुर्दो को। (सू० ४१ । प्रा० १२ । २०। २१ । ३६ ) (१३७) मकालीदुस्समावाति वल् अचि, वास्ते इसके कूजियां हैं आसमानों की और यन्सुत्युक्ति लिमैं यशाउ व पृथिवी की खोलता है भोजन जिसके वास्ते यविदरु। चाहता है और तंग करता है। यल्लुकु मा यशााउ, यहबु लिमैंय. उत्पन्न करता है जो कुछ चाहता है और शाउ इनासम् व यहबु लिमैं यशाा देता है जिसको चाहे बेटियां और देता है जिस उज्जुकूर । को चाहे बेटे। औ युजौविजुहुम् जुक्रानन् व इनासन् वा मिला देता है उनको बेटे और बेटियां व यज्अलु मैंयशााउ अकीमा। और कर देता है जिसको चाहे बाँक। १ वाला। करना। ( ३२ ) वमा कान लियशरिन् ऐंयुकल्लिम और नहीं है शक्ति किसी आदमी को कि हुल्लााहु इल्ला वह्यन् औ मिंबराइ बात करे उससे अल्लाह परन्तु जी में डालने कर हजाविन् औ युर्सिल रसूलन् । वा पीछे पर्द के से, वा भेजे फरिश्ता पैग़ाम लाने ( सू० ४१ । आ० १२ । ४६ । ५० । ५५) (१३८) वलम्मा जान ईसा बिल्चयिनाति । और जब आया ईसा साथ प्रमाण प्रत्यक्ष के । ( सू० ४३ । श्रा०६३) पकड़ो उसको बस घसीटो उसको बीचों बीच (१३६) खुजुहु अतिलूहु इलासवाइल् जहीम्। दोजन के। कज़ालिक, वज़बज्नाहुम् विहूरिन् इसी प्रकार रहेंगे और ब्याह देंगे उनको ईन् । ( सू० ४४ । श्रा० ४७ । ५४) साथ गोरियों अच्छी आंख वालियों के । (१४०) फ इजा लकीतुमुल्ल जीन कपरू फ बस जब तुम मिलो उन लोगों से कि ज्वर्वरिकावि, हत्ता इज़ा अस्खन्तुमूहुम् काफिर हुए बस मारो गर्दन उनकी यहाँ तक कि जब चूर कर दो उनको बस दृढ़ करो कैद फ़शुदु वल्वसाक। वक ऐयिम्मिन् कर्यतिन् हिय अशद्द कु और बहुत बस्तियां हैं कि वे बहुत कठिन व्वतन् मिन् कर्यतिकल्लती अखरजक थीं शक्ति में बस्ती तेरी से, जिससे निकाल दिया अालक्नाहुम् फला नास्विरलहुम् । तुझको मारा हमने उसको बस न हुआ कोई सहाय देने वाला उनका। मसलुल जन्नतिल्लती वुइदल्मुत्तकून, तारीफ उस बहिश्त की कि प्रतिज्ञा किये गये फीहा अन्हारुम्मिम्माइन् गेरि ग्रासिन् हैं परहेजगार, बीच उसके नहरे हैं बिन बिगड़े पानी की, और नहरें हैं दूध की, कि नहीं बदला व अन्हारुम्मिल्लबनिल् लम् यतरीयर् मजा उनका, और नहरे हैं शराब की मजा त्वाअमुह, व अन्हारुम्मिन् खारिल्लज़्ज़- देने वाली वास्ते पीने वालों के, और नहरें तिल लिश्शारिबीन, व अन्हारुम्मिन् शहद साफ किये गये की, और वास्ते उनके बीच उसके मेवे हैं, प्रत्येक प्रकार से दान मालिक असलिम् मुसफ्फा, व लहुम् फीहा उनके से। मिन् कुल्लिस्समराति व मरिफ़रतुम् मिर्- रब्बिहिम् । (१४१) इज़ा रुज्जतिल अर्बु रज्जन् । जब कि हिलाई जावेगी पृथिवी हिलाये जाने कर । व बुस्सतिल्जिबालु बस्सन् । और उड़ाए जावेंगे पहाड़ उड़ाने जाने कर । फकानत् हवाअन् मुम्बस्मन् । बस हो जावेंगे भुनुगे टुकड़े टुकड़े। म अस्हाबुल मैमनति, मा अस्हाबुल बस साहब दाहिनी ओर वाले क्या हैं साहब दाहनी भोर के। . - मैमनति ।

( १ ) - बोलेंगे। व अहाबुल् मश्नमति, मा अस्हाबुल और बाई ओर वाले क्या हैं बाई ओर के मश्चमति । अला सुरुरिम् मौजवूनतिन् । ऊपर पलंग सोने के तारों से बुने हुए है। मुत्तकिईन अलैहा मुतकाविलीन | तकिये किये हुए हैं ऊपर उनके आमने सामने । यत्वूफ़ अलैहिम् विल्दानुम् मुखल्लदून। और फिरेंगे ऊपर उनके लड़के सदा रहने वाले । विअक्वाचिन व अवारिक । साथ श्राबखोरों के और आफताबों के। व कासिम् मिम् मईनिन् । और प्यालों के शराब साफ से। ला युस्वदऊन अन्हा वला युंज़िफ़्न। नहीं माथा दुखाये जावेंगे उससे और न विरुद्ध व फ़ाकिहतिम् मिम्मा यतखैयरून । और मेवे उस किस्म से कि पसन्द करें। व लामि त्वैरिम् यिम्मा यश्तहून । और गोश्त जानवर पक्षियों के उस क्रिसम से कि पसन्द करें। व हुरुन् ईनुन्, काम्सालिल लूलु ओर वास्ते उनके औरतें हैं अच्छी आंखों इल मक्नून् । वाली । मानन्द मोतियों छिपाये हुओं की। व फरुशिम्मर्फअतिन् । और बिछोने बड़े। इन्ना अन्शानाहुन्न इंशाअन् । निश्चय हमने उत्पन्न किया है औरतों को फजयल्ना हुन अब्कारन् । बम किया है हमने उनको कुमारी । उरुवन् अत्राबा। सुहाग वालियां बराबर अवस्था वालियां । फमालिऊन मिन्हल बुत्वून । बस भरने वाले हो उससे पेटों को फला उक्रिसमु विमवाकिइन्भुजम् । बस कसम खाता हूँ मैं साथ गिरने तारों के। (सू. ५६ । प्रा०४।५।६।८।६। १५ से २३। ३४ से ३७ । ५३ । ७५ ) (१४२) इनल्लाह युहिब्बुल्लजीन युक़ातिलून निश्चय अल्लाह मित्र रखता है उन लोगों फ्री मवीलिही। ( म० ६५ । आ० ४) को कि लड़ते हैं बीच मार्ग उसके । (१४३) या ऐ युहन्नवीयु लिम तुहरिमु मा ऐ नबी क्यों हराम करता है उस वस्तु को कि अहल्लल्लाहु लक, तब्तगी मर्चात हलाल किया है खुदा ने तेरे लिये, चाहता है तू अज़्वाजिक, वल्लाहु गफूर हीम् । प्रसन्नता बीबियों अपनी की और अल्लाह क्षमा करने वाला दयालु है। असा रब्बुह इन त्वलककुन्न ऐं युब्दिलहू जल्दी है मालिक उसका जो वह तुमको छोड़ दे अज्याजन् खैरम् मिन्कुन मुस्लि- तो, यह कि उसको तुम से अच्छी मुसलमान और मातिन् मोमिनातिन् कानितातिन् ताइ ईमान वालियाँ बीबियाँ बदल दे सेवा करने वालियाँ नातिन् आविदातिन् साइहातिन् सेयि- तोबा करने वालियां भक्ति करने वालियाँ रोजा बातिन् व अब्कारन् । (सू० ६६ । प्रा०१५) रखने वालियां पुरुष देखी हुई और बिन देखी हुई। एक प्रकार का उत्पन्न करना। ।

सुस्त होगा। ( ३४ ) (१४४) या ऐ युहमवीयु जाहिदिल्कुफ़्फ़ार ऐ नबी झगड़ा कर काफिरों और गुप्त वल मुनाफ्रिक्रीन वालुज् अलैहिम् । शत्रुओं से और सख्ती कर ऊपर उनके । (सू० ६६ । प्रा० ) (१४५) वन्शनकतिस्समाउ फ़हिय यौमइजिन् फट जावेगा आसमान बस वह उस दिन वाहियतुन् । वल् मलकु अला अर्जाइहा, व यःमिलु और फरिश्ते होंगे ऊपर किनारों उसके के अर्श रब्बिक फ्रोकहुम् यौमइजिन् यौमइजिन् और उठावेंगे तख्त मालिक तेरे का ऊपर अपने, समानियतुन् । उस दिन आठ जन। यौम इजिन् तोअरज्वून ला तरूफा उस दिन सामने लाये जाओगे तुम न छिपी मिन्कुम् खाफियतुन् । रहेगी कोई बात छिपी हुई। फ अम्मा मन् ऊतिय किताबहू विय बस जो कोई दिया गया कर्म पत्र अपना मीनिही फ यकूलु हााउमुकऊ बीच दाहिने हाथ अपने के बस कहेगा लो पढ़ो किताचियः। कर्म पत्र मेरा। व अम्मा मन् ऊतिय किताबहू विशि- और जो कोई दिया गया कर्मपत्र बीच बांयें यालैतनी हाथ अपने के बस कहेगा हाय न दिया गया होता कितावियः। मैं कर्मपत्र अपना। सू० ६६ । श्रा०१६ । १७ । १८ । १९ । २५) (१४६) तअरुजुल् मलाइकतु वर्सहु इलैहि चढ़ते हैं फरिश्ते और रूह तर्फ़ उसकी वह फ्री यौमिन् कान मिनदारुहू खम्सीन अज़ाब होगा बीच उस दिन के कि है परिमाण अल्फ सनतिन् । उसका पचास हजार वर्ष । यौम यखजून मिनल अज्दासि सिरा- जब कि निकलेंगे कबरों में से दौड़ते हुए अन् कान्नहुम् इला नुस्वुविन् मानो कि वह बुतों के स्थानों की ओर दौड़ते हैं। यूफ्रिज्वून । ( सू० ७० । श्रा०४ । ४३ ) (१४७) कद् खलकहुम् अत्वारन् । निश्चय उत्पन्न किया तुमको कई प्रकार से। अलम् तरौ कैफ खलकल्लाहु सब्अ क्या नहीं देखा तुमने कैसे उत्पन्न किया समावातिन् त्विवाकन् । अल्लाह ने सात आसमानों को ऊपर तले। व जअलग कमर फ्रीहिन नूरन् और किया चाँद को बीच उसके प्रकाशक व जलश्शम्स सिराजा। और किया सूर्य को दीपक। २०७१ । प्रा. १४ । १५ । १६) मालिही फ़यालु लम् ऊत अम्मंसूरा। ( ३५ ) (१४८) अन्नल् मसाजिद लिल्लाहि फला यह भी मसजिदे वास्ते अल्लाह के हैं बस तद्ऊ मल्लाहि अदा। मत पुकारो साथ अल्लाह के किसी को। ( सू० ७२ । प्रा० १८) (१४६) व जुमिअश्शम्सु वल् कमरु । इकट्ठा किया जावेगा सूर्य और चांद । (सू० ७५ । प्रा०६) (१५०) व यत्वफु अलैहिम् विल्दानुम्मुखल्ल और फिरेंगे ऊपर उनके लड़के सदा रहने दून, इजा रऐतहुम् हसिब्तहुम् लूलु वाले जब देखेगा तू उनको, अनुमान करेगा तू उनको मोती बिखरे हुए। व हुल्लू असाविर मिन् फिजज़्वः, वसका और पहनाये जावेंगे कंगन चाँदी के और हुम् रब्बुहुम् शरावन त्वारा। पिलावेगा उनको रब उनका शराब पवित्र । ( सू० ७६ । प्रा० १६ । २१) (१५१) जजाअन् विफाक्रन् । बदला दिये जावेंगे कानुसार । व कासन् दिहाका। और प्याले हैं भरे हुए। यौम यकमुहु वल् मलाइकतु जिस दिन खड़े होंगे रूह और फरिश्ते सफ सफफन् । (सू० ७८ । प्रा० २६ । ३४ । ३८) (१५२) इजश्शम्सु कूविरत् । जब कि सूर्य लपेटा जावे। व इजनुजूमुन् कदरत् । और जब कि तारे गदले हो जावें। व इजल्जिबालु सुइयिरत् । और जब कि पहाड़ चलाये जावें। व इजस्समाउ कुशित्वत् । और जब आसमान की खाल उतारी जावे। (सू० ८१ । प्रा० १ ।२।३ । ११) (१५३) इज़स्समाउन् फत्वरत् । और जब कि आसमान फट जावे। व इज़ल्कवाकिबुन्तसरत् । और जब तारे झड़ जावें। व इजल्विहारु फुज्जिरत् । और जब दर्या चीरे जावें। व इजल्कुबूरु बुअसिरत् । और जब कबरें जिला कर उठाई जावें। ( सू० ८२ । श्रा० १ । २।३ । ४) (१५४) वस्समाइ जातिल्बुरूजि । कसम है आसमान चुर्जी वाले की। बल् हुव कुर्भानुम्मजीदुन् फ्री लौहिम् किन्तु वह कुरान है बड़ा बीच लौह महफूज (सुरक्षित तख्ती ) के। माफ़जिन् । (सू० ८५ । प्रा. १ । २१) बांध कर।

( ३६ ) (१५५) इन्नहुम् यकीदून कीदन् । निश्चय वे मकर करते हैं एक मकर । व अकीदु कीदन् । और मे भी मकर करता हूं एक मकर । ( सू०८६ । श्रा० १५ । १६) (१५६) व जाअरब्बुक वल् मलकु स्वफ़्फ़न् और जब आवेगा मालिक तेरा और फरिश्ते पंक्ति बाँध के। स्वफ्फन् । व जााइय यौमइजिम् विजहन्नम । और लाया जावेगा उस दिन दोजख को। (सू० ८६ । श्रा० २२ । २३ ) (१५७) फकाल लहुम् रसूलुल्लाहि नाकत बस कहा था वास्ते उनके पैगम्बर खुदा के ने, रक्षा करो ऊंटनी खुदा की को, और पानी लाहि व सुक्याहा । पिलाना उसको। फ कज्जबूहु अकरूहा, फ दम्दम बस झुठलाया उसको बस पाँव काटे उसके अलैहिम् रब्बुहुम् । बस मरी डाली ऊपर उनके रब उनके ने। (सू० ११ । प्रा० १३ । १४) (१५८) कल्ला लइल्लम् यन्तहि, लनस्फमम् यों जो न रुकेगा अवश्य घसीटेगे उसको हम विनास्वियति । साथ बालों माथे के। नास्वियतिन् काजिवतिन् खात्वि वह माथा कि झूठा है और अपराधी। अतिन्। सनउज्जनानियत । हम बुलावेंगे करिश्ते दोजन के को। ( सू० १६ । प्रा० १५ । १६ । १८) (१५६) इन्ना अंजल्नाहु फीलैंलितिल ऋद्रि । निश्चय उतारा हमने क़ुरान को बीच रात कदर के वमा अद्राक मा लैलतुल्कद्रि। और क्या जाने तू क्या है रात क़दर की । तन्जलुल्मलााइकतु वलहु फीहा उतरते हैं फरिश्ते और पवित्रात्मा बीच उसके, विइजिन रबिहिम् मिन् कुल्लि अम्रिन्। साथ आज्ञा मालिक अपने की, वास्ते हर काम के । (सू०१७ । प्रा० १।२।४)

सत्यार्थ प्रकाश चतुर्दश समुल्लास में उद्धृत

Author
Raamachandr
Title
Satyaarth Prakaash Chaturdash Samullaas Men Uddhrxt
File name
सत्यार्थ प्रकाश चतुर्दश समुल्लास में उद्धृत
Text
OCR done
Citation
1943
Published
2005/07/25
Publisher
Saarvadeshik Aary Pratinidhi Sabhaa, Dehalii
Language
Sanskrit
Pages
39
Library
University Library,gurukul Kangri Vishwavidyalaya
Classification
SOCIAL SCIENCES
DLI number
477406
Barcode
99999990173262.00
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C-DAC, Noida
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