Agarchand Bhairondan Sethiya Jain Parmarthik Sanstha, Bikaner
The Anglo Vernacular Middle Geography Part-iii
Front matter
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The Indian Press Series of New Geographies
THE ANGLO-VERNACULAR
-MIDDLE GEOGRAPHY
PART III
PRELIMINARI GEOGRAPHY OF ASIA
For Class II of Inglo ter nacvlar Schools
in the United Prouinces
BS
LV NORLE OJHA BA Hovs (Lond) LT (A1
Sometime Gilhrist Student Umieszty College I ordm
Profresor and lIcnd of the Department of (ypography
Furng Christian College Allahabrd
(RLVISED RIDI CDITION)
AILAVARAD
THE INDIAN PRFSS, ITD
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PC 101103
PRINTED AND PUBLISHED BY h. MITTRA, AT TITE INDIAN PRESS, LIMITLI), ALLAILABAD as man PREFACE The series provides a course in Geography smtahle she Anglo-Vernacular Middle Schools according to syllabus laid down in the school currioulum The main objects that I have kept in view in the paration of this series may be set down as follows I have endeavoured to awaken the interest of young le in the study of the world by trenting of the the home of The human side of graphy has been einphasized throughout I have pted the narrative form and bare described as fully the space in the different volumes has allowed, the eront means of livelihood, and industınal proces808 that such expressions as 'farming' lumbering,' silk ture, etc may be properly understood The treatinent 19 progressive becoming alled and bringing in inore difficult ideas as the puls advance from one class to another A largo number of simplified relief maps, climatio by and maps slowing the distribution of natural patation economic products and human occupations, Other with a large pumber of pictorial illustrations e been added to help the pupils in formin, corroot otal protures of the various parts of the world and Ho thorein moro IT AF BAD or) 1934 I. V N O
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3
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१
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1.
४०
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पून
प्रकरण
(१) एशिया की स्थिति, सामा और तिस्तार
(२) एशिया का धरातल -
(३) एाशया के समुद्र-तट
(१) एशिया की नादया।
(५) जलवायु
(६) वनस्पति
(७) एशिया के देशों का हाल, विषुवत् रेसा के पास का भाग
(5) मानसूनी हवानों से देश
(९) चीन का राज्य
(१०) जापान राज्य
(११) साइबेरिया
(१२) एशिया का पश्चिमी प्लेटो
(१३) पास पड़ोम की सैर
७३
१५.
३
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एशिया का प्रारम्भिक सूगोल
पहला प्रकरण
शिया सरी स्थिति, सीमा और विस्तार
दुनिया र नाशे या पृथ्वी के गारो को गोर न देखा तो मालूम
हागा कि माग स्थल भाग दो वडे समूहा म घंटा हुआ है। पहला
समूह नई दुनिया (Nen World) के नाम में प्रसिद्ध है।
उसमें उत्तरी श्रमरीका (North America) और दक्षिणी
अमरीका (South America) ये दो महाद्वोप है। दुमरे समृह
मे, जिसको पुरानी दुनिया (Old World) कहते हैं, न्यलक
तोर टुक्टे है। उनम स दो अफ्रीका और प्रास्ट्रलिया के महाद्वीप
हैं और तीसरे टुक्डे का नाम यूरेशिया (Eurasam) है, जिसमे
सारपोर एशिया (Europs and Asia) ये दो महाद्वीप है।
आओ, हम पहल यह देख लें कि ये दाना महाद्वीप एक
दुमरे से अलग है या नहा। यूरेशिया के प्राकृतिक नशे में
पशिया आर योरप के मध्य की सोमा को सो। यह सोमा
यूराल पर्वत (Ural fountan) और यूराल नदी (Ural
River) के बराबर बराबर चलो गई है। इस मोमा के ६
तरफ एक ही चौडा और बडा मैदान फैला हुआ है। युराल
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एशिया का प्रारम्भिक भूगाल
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The World in Hemisphereo
३ एशिया की स्थिति, मीमा और विस्तार इतना नीचा है कि उस पर म होकर एक तरफ के लोग प्रासानी से दूसरी तरफ आते जाते रहते है, इसलिए एशिया के पश्चिम में स्थल की कोई प्राकृतिक मीमा नहीं है। इस सीमा के दानो पार के निवामी एक ही जाति के हैं और एक ही राज्या के अधिकार में हैं। एशिया महाद्वीप के दक्षिणो प्रार पश्चिमी सिलसिल थोरप के दक्षिण मे अटलांटिक महासागर (Atlantic Ocean) तक फैले हुए हैं। इसलिए बनावट के अनुसार एशिया और योरप को एक हो महाद्वाप कहना ज्यादा ठीक होगा। परन्तु इन दोनो के इतिहास और सभ्यता में बहुत बड़ा अन्तर होने के कारण आरम्भ से ही ये दोनो महाद्वोप एक दूसरे से पृथक माने गये हैं। विस्तार म एशिया सब महाद्वोपा से बडा है। सारे स्थल के एक तिहाई भाग में केवल यही महाद्वीप फैला हुआ है। जन सख्या की दृष्टि स तो एशिया मारे स्थल भाग का प्राधा है क्योंकि ससार के आधे लोग यही बसे हुए हैं। इसका यह अर्थ नहीं है कि पशिया के प्रत्येक भाग मे घनी आबादी है । वास्तव में एशिया के कुछ भाग- -जैसे ऊँचे पहाड, और रेगिस्तान- प्राय निर्जन हैं परन्तु कुछ भाग-जैसे नदी के स्निारे के मैदान-अधिक उपजाऊ होने के कारण बहुत पने अावाद है। एशिया महाद्वीप ९° उचर्स अक्षाश से लकर ७७° उत्तरी अक्षाश तक फैला हुआ है। यानो एशिया का दक्षिणी भाग चिपुवत् रम्मा से बहुत समाप और उत्तरी भाग उत्तरी महासागर तक फैला हुआ है। उत्तर स दक्षिण तक यह ५,००० मील से अधिक लम्बा है इसलिए इसमे हर तरह का जल वायु पाया जाता है। एशिया ही में दुनिया के सबसे अधिक गर्म और सबस अधिक ठण्डे स्थान पाये जाते हैं। किसी स्थान के पेड पौधे उस .
४ एशिया का प्रारम्भिक भूगोल स्थान के जल-वायु पर निमर होते हैं इमलिए यहाँ लगभग हर प्रकार के पेड-पार, और पेदावार पाई जाती। एशिया में दुनिया का सवले विस्तृत साइवेरिया का नीचा मैदान है। सबसे ऊंचा पावरेस्ट पर्वत (Mt Evcrest) और मनस ऊँचा तिन्यत (Tibrt) का पठार भी इसी में स्थित है। एशिया म ओर महाद्वोपा की प्रपक्षा अधिक जातिया के लाग पार जात है। चीन और जापान के लाग मगाल जाति के हैं। दनिण पत्र में मलायन गार दक्षिण पश्चिम में काशियन तथा मेडोटनियन जाति के लोग है । दुनिया के सभी बडे बड मतो का प्रारम्भ इमी महाद्वीप। से हुपा है। द्व, हिन्दू, मुसलमान, आग्न पूजक (पारसी) ओर मनीही प्रादि मत यहा स प्रारम्भ हुए हैं। बोह-मत माननेवाला की मरया एशिया में मबस अधिक है, ये अधिस्तर पूर्वी देशों म रहते है। यदि नम एशिया महाद्वीप को सभ्यता की जननी कहे तो अनुचिन न होगा, क्योकि ससार की सभ्यता का पहले पहल यही जन्म दुमा। इसी को सीमा के अन्दर पहले पहल लागो ने नेत बोना, जानवरो को सुधारना, शहर बनाना, झौज तैयार करना और कानून बनाना मीसा। दर्शन, ज्योतिष और गणित इत्यादि प्राचीन विधात्रा का आरम्भ भी यही हुआ। जिस समर सारी दुनिया असभ्य और जगली थी, इस महा द्वीप में असूरिया, बानुल र कारस इत्यादि बडे बडे राज्य मौजूद थे और इन राज्या मे बडे बडे शक्तिशाली राजा राज्य करते थे। ये राजा लोग अपनो राज्य मीमा बढाने के लिए दूसरो जातिवालों पर प्राय आक्रमण किया करन और युद्ध में पराजित करके उन्हें अपने अधीन कर लिया करने ये। शिया के बड बड़े शहरों में
शिया की स्थिति, मामा और पितार
घड़ी इमारत पोर प्रसिद्ध बाजार थे जिनम हर प्रकार का
आराम चीज मिल सक्ती था, इसलिए इसरा तातियां दूर
में यहाँ व्यापार के लिए पाती थो। पुरास जमाने में
भारतवर्ष में सिन्ध नदी पोर पोन में हागा नदी के नियम
नाना नागो में एक राम सभ्यता विद्यमान पी।
यद्यपि इस महाद्वीप में मन्यता, रहन पान पोर नामक
पति अन्य महाद्वोपा की अपेक्षा पहजार पप पहल प्रारम
इ था, परन्तु यह अद्भुत घात है कि कुछ ममा क बाद वह
अन्नति तो एक सीमा तक पाश्र रुक गई 'प्रथवा उमम
अवनति आ गई। इसी बीच योरप मादाप के देश मतिरक
शिया में देशो से बात बट गए। वहां के रहनपाता न
देवल यह पी पिया पोर याग धन्धा कोही ना मोरया
परमसे रहो अधिक उन्नति भी कर ला। रिजली द्वागवा"
नया नि तार के सवाट दुनिया के एक सिर स मर मि
नक मनाना पाइसिविल, मोटर, ग्ल, हवाई जहाज पारन्टीमर
पाप-पड़े कारसाना में रिजली च द्वारा पडावडी मशीन
और कल चलातर चीज तैयार करना इत्यारि -इन मरनाता
का आविष्कार पश्चिमा देशों में प्रा।
मीमा-शिया महाद्वीप उत्तर, दक्षिण और पूर्व की पार
पर बडे महामागर्रा मे घिरा हुआ है। केवल पश्चिम की प्रार
यह योरप और अमामा के महाद्वीपों म मिला हश्रा
--एशिया में उत्तर म उत्तरी महासागर या श्राफटिक
महासागर (Arctic Ocean) है, विपुवत् रग से बढ़त दृर
होन व कारण वह बहत सद रहता और लगभग १० महीने तक
अमके पानी की सतह पर वफ जमी रहता है इसलिए एशिया
उत्तरी तट पर व्यापार नहीं हो सकता।
।
१
एशिया का प्रारम्भिक भूगोल
स्थान के जल-वायु पर निभर होते है इमालए यहाँ लगभग हर
प्रकार के पेड-पाध और पेदावार पाई जाती है। एशिया में दुनिया
का सवम विस्तृत सावरिया का नीचा मैदान है। सबस अचा
एवरेस्ट पर्वत (Mt Everest) और सबस ऊंचा तिब्बत
(Tihts) का पठार भी इसी में स्थित है।
एशिया म ओर महाद्वीपों की प्रपक्षा अधिक जातियों के लोग
पाय जात हैं। चीन और जापान के लाग मगाल जाति के है।
दक्षिण पन मे मलायन और दक्षिण पश्चिम में काकेशियन तथा
मेडोटनियन जाति के लाग है।
दुनिया के सभी बडे बडे मना का प्रारम्भ इसी महाद्वीप से
हुआ है। नाड, हिन्दू, मुसलमान, अग्नि पूजक (पारमी) और
ममीही यादि मत यहीं से प्रारम्भ हुए हैं। बौद्ध-मत माननगालों
की मन्या एशिया में सबसे अधिक है, ये अधिरनर पूर्वी देशां में
रहते है।
यदि हम एशिया महाद्वीप को सभ्यता की जननी कहे तो
अनुचित न होगा, क्याकि समार की सभ्यता का पहले पहल
यहो जन्म दृया। इसी का सीमा के अन्दर पहले पहल लोगों
ने खेत बाना, जानवरों को सुधारना, शहर बनाना, फौजें तैयार
करना और कानून बनाना सीसा 1 दर्शन, ज्योतिष और गणित
इत्यादि प्राचीन विद्याया का प्रारम्भ भी यही हुआ।
जिस समय सारी दुनिया श्रमभ्य और जगली थी, इस महा
द्वीप में प्रसूरिया, वाघुल पार फारस इत्यादि बडे बडे राज्य मौजूद
थे और इन राया में बड बटे शक्तिशाली राजा राज्य करते थे।
ये राजा लोग अपनो गज्य सीमा बढाने के लिए दूसग जातिवालों
पर प्राय थाकमण किया करते और युद्ध में पराजित करके उन्हें
अपने अधीन कर लिया करते थे। शिया के बड़े बड़े शहरो में
4
एशिया की स्थिति, मीमा पीर मिनार
घडाची इमारत और प्रसिद्ध पाजार थे जिनम हर प्रकार का
भागन को चीप मिल सकती था, इसलिए दूसरो जातिया दूर
दर में यहाँ व्यापार के लिए प्राती थीं। पुराने जमाने में
भारतवर्ष में सिन्ध नदी ओर चीन में झाग नदी के निचले
मैदान में लालो में एक उत्तम सभ्यता विद्यमान थी।
यद्यपि इस महाद्वीप म सभ्यता, रहन महन पार गानन
पद्धति ग्रन्च महाद्वीप की अपेक्षा फई हजार वप पहले प्रारम
गुइ थी, परन्तु यह अद्भुत बात है कि कुछ समय के बाद वह
नति वा तो एक सीमा तक आकर रुम गई प्रथवा उसम
अपनात आ गई। इसी बीच गोरप महाद्वीप के देश उन्नति
शिया के देशा में पहत नह गय। यहाँ के रहनवाता है
केवल घरों की बिगा और उद्याग धन्धो का ही नहीं मीसा
रन इसमे कही अधिक जति भी कर ला। निजला द्वारा ना
नया निना तार के मवा? दुनिया के 1 मिर स दसर मिर
नक भेजना, बाइमिफिल, मोटर, रेल, हवाई जहाज और स्टीमर
तथा चडे बडे कारखाना में बिजली के द्वारा पडी बडी मशीन
और ग्ल चलाकर चीज तैयार करना इत्यादि-इन मन चानः
का आविष्कार पश्चिमा देशा में हुआ !
मीमा--शिया महाद्वीप उत्तर, दक्षिण और पूर्व की ओर
घडे वडे महासागरा से घिरा हुआ है। केवल पश्चिम की प्रार
सहयोरप और प्रमोश के महाद्वीपोंस मिला हा
-एशिया के उत्तर में उत्तरी महासागर या श्राऊंटिक
महासागर (Arctic Ocean) है, विपुवत् रसा मे बहुत दूर
होने क कारण वह बहुत मर रहता और लगभग १८ महीने नक
उसके पानी की सतह पर बफ जमो रहती है इसलिए एशिया
में उत्तरी तट पर व्यापार नहीं हो माना।
६ 4 एशिया का प्रारम्भिा भगाल और महामागरीका अपना माफटिक महासागर बद्रत छोटा है। अगर उसे हम श्रदरांटिक महासागर (Atlantic Ocean) फा एक टुक्ला या यादी नहता यनुचित्त न होगा। वह लगभग चारो और त्वी से घिरा हुआ है। उनके एक पर तो यूगेशिया का भाग है और दृमरो अोर उत्तरी अमरोग का उत्तरी भाग है। उसके चारो तरफ की जमीन यद्यपि नीची है पर मर्द होने के कारण बिलबुल निर्जन है। पूर्व-गिया में पृव म प्रशान्त महासागर या ऐसिफिक महासागर (Pacific Oilan) है, जो मय महामागग में अधिक , चाडा है। उत्तर में रेग्गि जलडमरूमध्य (Bering Strut) पेसिफिक महासागर और श्रारटिक महासागर का मिलाता है। यह जलडमरूमध्ये बहुत तग प्रार केवल ३६ मोल चाला है। इसम दक्षिण को पार पमफिर महामागर चौडा होता चला गया है । ग्लाय को देगा ता तुमको मालूम होगा कि अगर सिंगापुर स, जो विषुवत रेया के समीप स्थित है, हम अमरीका जाना चाही तो तुम्हें प्राधो दुनिया का मफर करना पडगा। एशिया के पूर्व में कई प्रायद्वीप है जैस कमस्फटका (Kamaschatka), कोरिया (Korea) ओर इडाचीन (Indo Chama)। इसके किनार स कुछ दूरी पर द्वोपन है, जैसे म्यूगल होप- समूह (Kunle Islands), जापान द्वीपसमूह (Japan Islands), फारममा द्वीप (Formost), लूच डीपसमूह (Luchu Islands), फिलीपाइन द्वीपसमूह (Philippine Islands) और पूर्वी हिन्द द्वीपसमूह (Last Indies) | महा- द्वोप, प्रायद्वीप आर उसके द्वीपसमूहो के बीच कई सागर है। पूर्वी किनारे पर कई उपजाऊ महान है। किनारा कटा हरा है, उसके ममीप ही बहत-से द्वीप है जिनमें सव व्यापार होता है। ।
७
शया का स्थिति, मोमा पार विस्तार
पैसिफिक महासागर वहत विस्तृत है, इमलिा पहरा अमरीका म
कोई व्यापार न होता था, सरल कुछ समय स स्टीमर के कारण
थोड़ा-बहुत व्यापार होने लगा है।
दक्षिण-शिया के नक्षिण म हिन्द महासागर (Indan
Ocen) स्थित है, जिसके पश्चिम में प्रमाका और पूर्व म
आस्ट्रेलिया महाद्वाप है। यानी यह महासागर तान पार पृथ्वी
से घिरा हुआ है। एशिया के दक्षिण में मलाया (Malays),
हिन्दुस्तान (India) ओर अग्र ( luans) ये तान प्रायद्वीप
स्थित है । हिन्दुस्तान का प्रायद्वीप हिन्द महासागर के उत्तरी भाग
को दो भागो मे, यानी गाल की साटी (Bar of Benel)
ओर अरज सार (Arban Sea) म विभाजित करता है।
शया का दक्षिणी भाग न तो बहुत फटा हुआ है और न इसमे
बहुत से द्वीपसमूह हैं। भारत के दक्षिण मे फेवल एक बडा द्वीप
लका (Ceylon) है, जो पार (Palk Strait) नामक एक बहुत
ही कम गहरे जलडमरूमध्य से अलग होता है।
पश्चिम-तुम पहल पढ चुके हामि एशिया पश्चिम में
योरप आर अफ्रीका स मिला हुआ है। एशिया और योरप के
बीच में तोन मागर भो स्थित हैं। उनके नाम कास्पियन
सागर (Caspian Sen), काला मागर (Black Sea) और
रूम सागर (Alediterranean Sen) है। शिया को अफ्रीका
से एक बहुत तग स्थलडमरूमध्य जिसको स्वेज (Suez) कहते
हैं, मिलाता है और लाल सागर (Red Sta) अलग करता
है। परन्तु अव स्वेज स्थलडमरूमध्य की जगह स्वेज की नहर
चना दी गई है, जिसके द्वारा लाल सागर और रूम सागर को
जहाज आसानी मे ज्ञा मक्ते हे।
U एशिया का प्रारम्भिक भूगोल प्रश्न १-दुनिया में नकशे को देखकर कुल महाद्वीपों के नाम बतायो। -प्रत्येक महाद्वीप किन महासागरो से घिरा है। ३-एशिया और योरप दे वाचा मीमा प्राकृतिक (न्वाभाविक) खीम्स- को नहीं मानी जाती? ४---एशिया रिन बातो मे दुसरे महाद्वीप से बढकर है । अभ्यास -एशिया का एक नक्शा उनाया और उसके चारों शोर साड़ियों, समुद्रों और जलडमरूमध्यान नाम लिसो। २- नशे मे मर रहे रहे द्वीप ग्रार प्रायद्वाप दिलायो।
दृसरा प्रकरण
गिया का धगतल
एशिया के प्रातिर नामा ध्यान स दया ।
भागहरे ग स रंगा है। युधम पाला प्रो" पुत्रम गुलायी व
गग भूरा रंग। २३ तरह का कर काम गलाय गर
और नफ यार दान सा विशपता मा गड नागर
गो में गा को जा च्याप्या में गद६ उमा " मनमा
मालममा जायगाकर पकार के भिन्न भिन्न प्रकार '
उचार प्रपट करते हैं। सराया जा भागर मेगा है
पर समुद्र तल स १,००० फुद तर उंचा। य भाग नि
मैदान है। १,००० फुट म रोकर १०० फुट तय ॐन मदार
पानटो पात रंग टिपाये गये। वे पहाडी हिम्मे श्रा
टा, जो २,५०० फुट म ५,००० फुट तर ऊँचे हे
गुलान
गमग गये। और इमम भा 'अधिक ऊँचे भाग भूर T
हरे भूरे रंग म प्रकट किय गय है। इस तरह नको ग दमन
का यह अभिप्राय है कि हम ग्रह मालम हा पार किया क
मिन भिन्न भागां का धरातल कहाँ कितना ऊँचा पार यहां कितना
नीचा है। इस बात का ध्यान मग्यो के लिए इम कर
तो देखते हुए तुम रह कल्पना करा कि मैं एक गु चार या नवाः
जहाज म बैठपर घरातल स इतनी उँचाई पर चढ़ गया है किन
यहाँ में एशिया महाद्वीप एक चिट का भौति शिवाइ पड़ता है।
नीले रंग स पहला वात तुम यह त्यागे कि एशिया महाहीप
तीन पढे चीते महामागग म घिरा प्रा है। इमोत्तर में
।
.
२
।
एशिया का प्रारम्भिक भूगोल
प्रार्कटिक महासागर, पृव म पैसिफिक महासागर और दक्षिण में
हिन्दमहासागर है। पश्चिम का श्रार यह योरप से मिला हुआ
है। एक तग स्थलटमरूमध द्वारा यह अफ्रीका से भी मिला हुआ
परन्तु लाल सागर द्वाग यह उसस अलग है।
दसरे तुमको उमके यरातल को न्वाभाविक दया मालूम हो
नायगी और तुम निम्नलिग्नित भागों को देखोगे।
(१) उत्तर म वडा मैदान दूर तक फैला हुआ है।
(२) इस मैदान के दक्षिण में एक बहुत बडा पहाडी भाग हे जो
रूम मागर से पैसिफिक महासागर (Pacific Ocean)
तक फैला हुआ है।
(३) इस पहाडी हिम्से के दक्षिण में अरब, दक्षिणी भारत और
इडोचीन के प्लेटा हैं, जो प्रायद्वीपों की तरह हिन्द महासागर
मे चल गये हैं।
(४) पूर्व प्रार दानण में फुल नदियों के मेदान हैं।
(५) एशिया के पूर्व की ओर पैसिफिक महासागर में पहाली
द्वीपो की एक तार है।
उत्तरी मटान (Northern Plans on Lowlands).-
अगर हम कास्पियन सागर से उत्तर-पूर्व की ओर वेरिग
जलडमरूमध्य के समीप तक एक रेग्या सोचे ता यह रेसा
एशिया को दो भागा में विभाजित करगी। इसके दक्षिण मे तो
एशिया का मध्यम पहाडी स्थल और उत्तर में माइनरया का
बना मेंदान होगा। यह मैदान दुनिया के सबसे अधिक चौडे
मैदानों में स है और पश्चिम में योरप से होकर अटलाटिक महा
सागर के मध्य तक चला गया है तथा दोनों महाद्वीपो के चोच
की रेसा पर बहुत चौडा हो गया है। एशियाई उत्तरा मैदान
फो शकल एक बडे त्रिभुज की सी है। नकशे में मालूम हागा
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शिया का प्रारम्भिक भूगोल
कि इस मैदान में श्रोवी (R Obs), येनेसी (R Yeneses),
और लोना (R Luna) नाम की तीन बडो नदियाँ हैं। ये मध्य
के पहाडा भाग स निकल कर और उत्तर की तरफ वह कर
आरटिक महासागर में गिरतो हे। इसस हम यह फल निकाल
सक्त हैं कि इस मैदान का ढाल उत्तर की ओर है। क्वल
दक्षिणा पश्चिमी भाग में, जिसका तृरान (Turan) कहते है,
इसका ढाल पाश्चम को ओर है। यहाँ श्रम (Amu Darna)
और सर (Syr Daula) नाम को दो नदियाँ अरल नागर
(Aral Ser) में गिरतो हैं
२~-एशिया का मध्यम पर्वतीय भाग-उत्तरी मैदान
के दक्षिण म और एशिया के मध्य मे पूर्व म पश्चिम तक एक
पहुत चाडा पहाडा भाग है जो ऊंचो पहाडिया और पठारा से
घिरा हुआ है। परन्तु ये सब उँचाइ म शलग अलग है। इस
भाग म पवतणियाँ इतना अधिक है कि शायद तुम यह
समझो कि इनमे परस्पर काइ सम्बन्ध नहीं है। परन्तु • शे
को फिर से ध्यानपूर्वक दसने स मालम होगा कि ये श्रेणिया
एक दुसरी से अलग नहीं है, बल्कि एक ऊँचे और अगम चन्द्र
स, पहिये के आरा की तरह, चारा तरफ फली हुई हैं। इम उँचे
भाग को पामीर (Pamur Pintern) का पठार कहते हैं। यह
तुरान और हिन्द के मैदानों के बीच में स्थित है। यहाँ पर मध्यम
पहाडी भाग बहुत मॅक्रा हो गया है।
इस जगह पर एशिया का मध्यम पहाडी भाग दो भागों में
विभाजित हो गया है। छोटा भाग पश्चिम की पोर है, जिसम
ईरान (Iran) और अनाटोलिया (Anatolia) के
इरान के उत्तर म हिन्दुकुश (Hinda Kush) और एत्वर्ज
(Elbnre) परत है जो पामोर मे निकन हार है
पठार
शिरा का धरातन
१३
1
पनिण पश्चिम म सुलेमान पर्वत यिरयार पार जागरस
(Saaman, Kirthnr and /n8105) है जा ईरान की पूर्वो,
दक्षिणों ओर पश्चिमी मामा बनाते है । ये तानो परतभगियों
ईरान क उत्तर पश्चिम म फिर मीनिया (ACID) के
पठार पर, जो एशिया के पश्चिम र एक दूसरा पहारी पेन्द्र है,
मिलती है। प्ररमोगिया के पठार को सबसे ऊंची चाटी अरारात
पत्रत है। अनाटालिया के पठार मा पश्चिम को श्रोर तारस
(Taurus) और पान्टम (Pontus), जो परमीनिग में निकले
हुए है, घेरे
श्ररमोनिया पठार के उत्तर महाफ पर्वत काशस
(Cancasur) नामक एक परत नेणी है, जो कास्पियन नागर से
कारो सागर तक चली गई है। यह इतनी ऊँचा है कि पश्चिम
के भागो म इसरो चोटियाँ फम डरी रहती है
प्रर नरशे म पामीर मे पन को पार के पटाला भाग को
देखापागोर में पृनं मी ओर चार डे पहाट की श्रणियाँ
निकलती है। उनम सनम ज्यादा उत्तर की ओर थिरान शान
पर्वत (Than shan Mountains) है जा उत्तर-पर सो ओर
घूम जाता है। उससे आगे 7 यायलूनाय (Tablonor
Mountains) पौर स्टागोमाय (Stanovan Mountruns)
उत्तर पूर्व की श्रार घेरिंग जलडमरूमध्य तक चल गये हैं। दूसरी
श्रगो क्वीना (Kuenian Mount uns) है । यह दिलकुल
पूर्व की भार चाल तर चला गई है और उसके धागे चीन में
और पहाद पैसिफिर महासागर के समीप तर चौगय हैं।
थियान-शान और क्वानलन अरिणया के नाच में ताग्म (Thum
Basan) का ऊँचा सिन है। यह तीन पार पहाडी म घिरा
हुआ है और इसम जहाँ-तहाँ मारा पानी की बहुत-सी सील
स्थित है। तारिम नदी पश्चिम की पार पहाडो म निकलती है
१५
या का प्रारम्भिक भृगाल
और पृव को पार पहुँचकर सूप जाती है, क्योंकि यह वेसिन
एक बहुत मूगा रगिस्तान है।
तारिम के प्रेसिन के पृच म गोगी (Gobi) का रेगिस्तान है।
इममे स्थान स्थान पर रेत के पहाद और टोले हैं। यह इतना
मूना है कि मैकडो मोल तक एक भी पेड पौधा नहीं दिग्नाई
पडता।
पामार क पूर्व क पवती का तोसरी श्रणो कराकुरम (Kars.
koram) है । यपि यह ओर अणियों से लम्बाई में छोटी है,
परन्तु पहुत ऊँची है। इसमे एशिया की कई बहुत ऊँची चोटियाँ
श्रोर चौड़े ग्लेशियर हैं, जो परावर वरफ से ढके रहते है । दो
ग्लेशियर तो लगभग ४०,१० मोल लम्ब हैं। गाइविन थास्टिन
(Godwin Austin) या केहू (K.) पहाड को चोटो समुद्र
वल से २८,००० फुट ऊँची है। एवरेस्ट (Mount Everest)
पवत के बाद यह दुनिया मे सयस अधिक ऊँची चोटो हे
पामीर में पूर्व की ओर निकलो हुइ ओणयों में चौथी श्रेणी
हिमालय पर्वत (Hunalaya Mountains) को है। यह १,५००
भाल लम्बी और २०० मोल चौडो है । वास्तव में यह एक श्रेणा
नहीं है, जरन इसमें कई णियाँ हैं जो एक-दूसरो के बराबर चली
गई हैं, जिनके बीच म नदिया को गहरो घाटियाँ स्थित हैं।
हमालय' शब्द का असलो अर्थ 'वफ का घर' है। यह दुनिया के
पहाडो मे सरसे अधिक ऊचा है। इसको चोटियाँ सदा चा से
ढकी रहती हैं। एवरेस्ट पवत जा दुनिया में सबसे ऊँची चोटी
है, समुद्र के तल मे २९,१५० फुट यानो लगभग ५३ मील
ऊँची है। ४० चोटियों ५ मील तक ऊँची हैं।
हिमालय-पवतनणो और क्वीनलन पवत के मध्य म तियत
(Tibet) का पठार है जा ससार में सबसे ऊँचा योर बड़ा
है । इस पठार की सतह पर बात-सो पवेत-श्रेणियो हे,
शिया का धरातल
।
जा पर की ओर अधिक उचा है। यहा स दक्षिण की ओर
मुडकर ये इडोचीन प्रायद्वाप के दक्षिणा सिर तक चली गई हैं।
३--नदियो के मेदान-मध्य एशिया + पहाडी भाग के
दक्षिण और पूर्व मे पई नदियों क बड मैदान है, जा समुद्रतल
से बहुत ऊँचे नहीं हैं। नशे म य मैदान हर रंग स
दिसाये गये हैं। इन मैदानो मे बडी बदा नदियाँ बहती हैं।
इन्हों नदियों की लाई हुई मिट्टी स ये मदान नन हे, इमसे
बहुत उपजाऊ हैं। दक्षिण की पार जो दा मैदान है उनम पहला
मैदान दजला (Tagrus) और फरात (Luphrates) स पना
है जा आरमीनिया से निकलती है और एक साथ मिलकर
फारस को साडी में गिरती हैं। इसका मैमापोटामिया का मैदान
कहते हैं। दूसरा मैदाा भारतवष का है, जो सिध, गगा,
ब्रह्मपुन और उसकी सहायक नत्यिो स बना है। दो मैदान
इडाचीन में है--एक तो दक्षिणी ब्रह्मा का मदान, दूसरा स्याम
का मेंगन। इसा तरह जा नदियों मध्य क पहाडी भाग से
निक्लकर पूर्व को ओर चीन मे वहती है उनस भी कइ मैदान
बने हैं। उनमे से एक हााह (IR Hone-Ho) मे वना हुआ
उत्तरी चीन का मैदान है और दूसरा यॉग टिसी-क्यॉग
(R_lang tse ling) से बना हुआ मध्य चोन का मैदान ।
नदियों में लाई हुई मिट्टी से बने होने कारण ये मैदान बहुत
उपजाऊ हे और इसी लिए इसमे आवादी भी वहुत धनी है।
•४---दक्षिणो प्रायद्वीप-एशिया के दक्षिण मे तोन प्रायद्वीप
हिन्द महासागर मे चल गये है।
(१) इटोचोन (Indo Chint) के पहाडी प्रायद्वीप में कई पचत
श्रणियाँ एक दूसरी के बराबर, उत्तर स दक्षिण को श्रार,
फैली हुई हैं। इन श्रेणिया के बीच लम्बी घाटियो मे नदियाँ
बहती हैं। इस प्रायद्वीप का उत्तरी भाग अधिक चौडा है।
. 1 । । १६ एशिया का प्रारम्भिक भूगोल इसमें ब्रह्मा, स्याम, अनाम ओर कम्बाडिया के देश हैं दक्षिणा भाग का मलाया प्रायद्वीप कहते है, यह बहुत-तग हो गया है। (२) दक्खिन का पठार (Deccan) भारतवष के मैदान दाक्षण म स्थित है। यह पठार पश्चिम की ओर बहुत ऊँचा है। इसकी नदियाँ पश्चिमी घाट में निकलकर पूर्व की ओर बहती हैं, क्योकि इस पठार का ढाल पूर्व की ओर है। इसका मविस्तर वर्णन तुम पहला किताव में पढ़ चुके हो। (B) अरव (Atabra) का पठार मसोपोटामिया मदान के दक्षिण- पश्चिम में स्थित है। यह भी पश्चिम की ओर ऊंचा और पूर्व को भार ढाल है। परन्तु यह बहुत सूखा है, इसलिए इसमें नदियों नहीं हैं ५–पूर्वा द्वीपसमूह (Lastern Islands)-एशिया के पूर्व में महाद्वीप से कुछ दूरी पर द्वापों का कई श्रेणियाँ उत्तर मे दक्षिण को पार चलो गई हैं। उनमें सबसे अधिक प्रसिद्ध जापान के टापू (Japan Islands) हैं जिनको जापान सागर (St 2 of Jan) एशिया से अलग करता इन द्वीपों के उत्तर में एलोशियन द्वीपसमूह (Alutian Islands) और क्यूगइल द्वीपसमूह (Kurale Islands) है और दक्षिण लूच द्वीपसमूह (Luchu Islands) है, जा फारमोसा डीप (Tormasa) तक चले गये हैं। एशिया के दनिण-पूर्व में हिन्द पूर्वी द्वीपसमह (East Indies Islands) स्थित हैं, जिनको दक्षिणी चोर मागर (South China Sea) इडोचीन प्रायद्वीप से अलग करता है। इस समूह के मुख्य होप फिलीपाइन (Philippine Islands), TTT (Borneo) Ferrer (Celehes), जावा (Java) ओर सुमात्रा (Sumatrt) है। ये सब द्वीप पहाड है। । ।
एशिया का धरातल
२७
~प्रगर मुम मिमी हवाई जहाज मरेटर लगा से योबी नदी के
माने तक सार पग ता रास्ते में राशि पचत पठार,
भेदार श्रीर नगियों में अपर मे होरर नायागे । सिलसिलेवार
२-पामीर पे पठार को पता पेन्द्र को कहते हैं। यहां से कौर
फोन मे पयत चारोबार ले
३---क्या तुम पागे से नारकर बना सकते हो कि एशिया का सबसे
लम्या समुद्र-तट कौन-सा है?
अभ्याम
२-एशिया ये गाये में एशिया पे प्राकृतिक माग दिनायो। उनको
अलग प्रलग रगो मे रँगा पीर उनरे नाम लिखो।
२-एशिया पे एए और सारे में पहाटी धेणिया और नदिया
दिगानो और उनके नाम लिखो।
-
तोसरा प्रकरण हे . एशिया के समुद्र-तट अच्छे समुद्र-तट की विशेपतार्ये-समुद्र-तट किसे कहते १ स्थल का वह भाग जो समुद्र के किनारे होता है समुद्र तट कहा जाता है, क्याकि यहाँ पर जल स्थल-विभाग मिलते हैं। समुद्र के किनार स्थल के समीप ऐसे स्थान होने चाहिए जहा से जहाजो को थाने-जाने में सुरीता हो । यदि समुद्र- तट सीधा हो और समुद्र की लहरें किनारे पर आकर टकराती हो तो जहाजो के लिए किनार पर आकर ठहरना सतरनाक होगा। परन्तु तट कटा हुआ हो तो किनारे की दरारों में पानी रुका रहे। वहाँ हवा और लहरों का अधिक प्रभाव न पडेगा। इसलिए यहाँ जहाज निर्भयता से ठहर सकते हैं। १-अच्छा समुद्र तट होन के लिए बहुत आवश्यक बात यह है कि वह कटा हुआ हो, यानी वहाँ खाडियाँ हो, जिसस उसमें जहाज निर्भयता से ठहर मकें। खाडो मे, जिसके पास चारों ओर स्थल हाता है, हवा ओर लहरे इतनो तेज नहीं होती जितनी कि खुले समुद्र में। इसलिए यह वन्दरगाहों के लिए प्रत्यन्त लाभदायक है, यहाँ जहाज सरलता से बिना भय के लगर डाल सकते और माल असबाब उतारने या लादने के लिए कुछ दिनो तक निना हिले रुक सकते हैं। दुनिया के प्राय सभा संदरगाह साडियो में या नदियो के मुहानो पर स्थित हैं। अगर तट के समीप कोई द्वीप हो तो उसके द्वारा १८ १९ 1 एशिया के रामुद्र तट भी हवाप्रो और लहरो का जोर कम हो जाता है इसलिए ऐसे पिनारे भी बन्दरगाहा के लिए अधिक उपयोगी हैं। जैसा पढाया जा चुका है कि वम्बई का प्रसिद्ध बन्दरगाह समुद्र-तट और द्वीप के वोच में स्थित है। नशे मे देसो कि एशिया का पूर्वी किनारा बहुत कटा हुआ है। ०-दूसरी आवश्यक बात यह है कि तट के समीप समुद्र अधिक गहरा हो, जिससे बडे जहाज सरलता से उन बन्दरगाहों में आ सक क्योकि आज-कल व्यापारिक याना करने के लिए बडे बडे जहाज समुद्रों को पार करते रहते हैं। अगर तद का पानी अधिक गहरा न हो तो जहाज चन्दरगाह तक न पहुँच सकेंगे और उनको दन्दरगाह से दूर समुद्र मे लगर डालना पडेगा। ध्यान रहे कि बडे बडे जहाजों के लिए कम से कम चालीस फुट गहरे पानी की आवश्यक्ता है। हिन्दुस्तान के प्राकृतिक नकशे को देखने से शायद तुम समझो कि कच्छ की खाडी बन्दरगाहो के लिए बहुत अच्छी है। परन्तु यह साडी इतनी छिछली है कि इसमे जहाज तो क्या बडी नावें भी नहीं आ सकती इसो लिए इसमें कोई बन्दरगाह नहीं है। मद्रास के तट के समीप समुद्र बहुत कम गहरा हे इमलिए जहाज यहाँ से लगभग एक मील की दूरी पर ठहरते थे और वहाँ से लोग नाचो पर बैठकर मद्रास के तट पर आते थे। परन्तु अब सरकार ने मद्रास के समीपवाले समुद्र के भाग को गहरा फरके बन्दरगाह को इस योग्य बना दिया है कि उसमें जहाज सरलता से आ जा सकते हैं। Henterland ३-तीसरी आवश्यक बात यह है कि तट के पीछे के भाग में श्रावादी अच्छी हो। या तो मुल्क उपनाऊ हो, जिससे वहाँ अच्छी तरह स सेती-बारी हो सके और घडे बडे शहर पाये जायें, या उसके समीप सानहो जिससे वहाँ की कारीगरी प्रसिद्ध
तीसरा प्रकरण
एशिया के समुद्र-तट
अच्छे समुद्र-तट की विशेषतायें-ममुद्र-तट किसे कहते
हैं ? स्थल का वह भाग जो समुद्र के किनारे हाता है समुद्र ।
तट कहा जाता है, क्याकि यहाँ पर जल स्थल-विभाग मिलते हैं।
समुद्र के किनार स्थल के समीप ऐसे स्थान होने चाहिए
जहाँ मे जहाजों को थाने जाने में सुपीता हो। यदि ममुद्र
तट सीधा हो ओर समुद्र की लहरें किनारे पर आकर टकराती
हो तो जहाजो के लिए क्निार पर आकर ठहरना सतरनाक
होगा। परन्तु तट कटा हुआ हो तो किनारे की दरारों में पानी
रुका रहे। वहां हवा और लहरों का अधिक प्रभाव न पडेगा।
इसलिए वहाँ जहाज निर्भयता से ठहर सकते हैं।
१- अच्छा समुद्र-तट होन के लिए बहुत आवश्यक बात
यह है कि वह कटा हुआ हो, यानी वहाँ साडियों हो, जिससे
उसमें जहाज निर्भयता मे ठहर सके । खाडो में, जिसक पास
चारा शोर स्थल हाता है, हवा और लहरें उतनी तेज नहीं होती
जितनी कि खुले समुद्र मे। इसलिए यह बन्दरगाहों के लिए
अत्यन्त लाभदायक है, यहाँ जहाज सरलता से विना भय के
लगर टाल सकते और माल यसवाव उतारने या लादन
के लिए कुछ दिनों तक विना हिले रुक सकते हैं। दुनिया
के प्राय सभा बंदरगाह साडियो मे या नदियों के मुहानों पर
स्थित हैं। अगर तट के समीप काई द्वीप हो तो उसके द्वारा
-१५
एशिया के समुद्र तट
२१
अच्छे तट की विशेषताएँ मालम हो गई है इमलिए आयो अब
हम शिया के तटी की मैर कर।
पिछली पुस्तक मे तुम हिन्दुस्तान के तटो का वर्णन पढ चुने
हो, इसलिए हम अपना सफर कराची में श्रारम्भ करेंगे और
पहले पश्चिम की तरफ चलेंगे। इसके बाद रंगून से इस महाद्वीप
के पूर्वी किनारे पर याना करेंगे।
।
एशिया के समुद्र-तट (१)
कराची से स्वेज नहर (Suiz Canal) तक बल्कि उमसे
भो और प्रागे तक वंजर और रेगिस्तानी तट मिलेंगे। ये वास्तव
में एक बडे चौडे रेगिस्तान के किनारे हैं। इन मन किनारो के
Bosro
Bushire
Persia
061
Bahrens Bandar |
Is
Abbors
india
Marachi
Muspol
जीजा
Aden
Baba
चाहे जिस ओर देखो, मुलमो हुई पहाडियो या गरम रेत के
किनारे के सिवा कुछ भी न दिसाई देगा । हाँ कहाँ कहाँ पर सजूर
और ताड के पेडो को क़तार दिखाई पड़ती है।
एशिया का प्रारम्भिक भूगोल
हा। सेती-बारी के लिए जमीन तभा अच्छी हो सकती है जव वा
काफी पानी बरसता हा और जमीन पहाडो न हा। हिन्दुस्तान
और चीन के तटा पर जहाँ जहाँ नीचे मैदान है और अधिक
वो होती हैं, आबादी बहुत धनी है। अगर किसी किनार के
पोछे की जमोन भी घनी बसी हुई है ता वहाँ के लोग जहाजी
के द्वारा माल अमवाव लादत और ले जात है। परन्तु यदि
कही को पमीन बजर और देश उजाड हैं तो फिर यहाँ न तो
समुद्र के किनारे नगर बस सकते हैं और न व्यापार के लिए
दूसरे देशा स मनुष्य ही आते हैं। एशिया के नकश मे देसी,
बिलोचिस्तान और अरब के तट उजाड है इसलिए वहाँ 'प्रदन
के सिवा कोइ बडा बन्दरगाह नहीं है। साइबेरिया के उत्तर
का मैदान कडो सर्दी के कारण उजाड है इसलिए वहाँ भी कोई
प्रसिद्ध वन्दरगाह नहीं है।
अच्छे बन्दरगाह अधिस्तर नदिया के मुहान पर या उसके
समीप होते हैं। कारण यह है कि एफ ता नदी के मुहाने पर
या डेल्टा पर नदी को लाई हुई मिट्टी से भूमि वना हाती है।
इसलिए उपजाऊ होती है और यहाँ अधिकतर आबादी भी धनी
माई जाती है। दूसर, नदी के मुहाने पर जहाजा लिए ममुद्री
रास्ता यहां से प्रारम्भ होता है और नदी के द्वारा दशक
भीतर मा आना जाना लगा रहता है। इसलिए देश के भीतर
बचन योर गरोदने के लिए चीज़ नाव या जहाज क द्वाग
बन्दरगाह तक आसानी से लाई जा सस्ती है। अगर गमी
जगहों में नदो का मुहाना चौडा या गहरा न हा तो उमे सादर
गहरा कर लेते है, जिसमे बड़े जहाज आसानो मे पार ठार
मय और फिर नदियों की लाइ ई मिट्टी झाम मे चराचर
निकालत रहत है। जैसे कलकत्ता का बन्दरगाह हगला नदी के
मुहाने पर है, जो गंगा नदी को एक धार है। अब तुमका
एशिया के समुद्र तट २३ दिया है, किमी जहाज के टकराकर टूटने को समर नहीं सुनी गई। a ddd . orea अदन से पोर्ट सईद तक का समुद्र-तट-लाल सागर पर जिद्दा (Jiddah) के सिवा कोई बडा बन्दरगाह नहीं है। हज के लिए मका (afeela) जानेवाले हजारा मुसलमान हर साल इस पन्दरगाह पर उतरते हैं। मका में ही मुसल माना के पैगम्बर मुहम्मद साहय पैदा हुए थे। जाशे म देयो, लाल मागर दो रेगिस्ताना के बीच मे स्थित है इसी कारण गर्मी की ऋतु में पेरम से स्वेज नहर तक जहाज के अन्दर बहुत गमा लगती और फ्प्ट होता है। लाल सागर इन रेगिस्ताना को फाटता हुआ दूर तक स्थल में चला गया है फिर भी उसका पानी ठण्डा नहीं है और वह यहाँ के जलवायु में कोई परिवर्तन नहो पैदा करता। लाल मागर का उत्तरी भाग दो मैंफरी रगडियो में विभाजित हो गया है । पश्चिमी साडी पर स्वेज नगर (Suer) है। इसी नगर मे उत्तर की अोर स्वेज नहर पोर्ट सईद (Port Sard) को गई है। स्वेज नहर (Suez Crnal) १८६९ में बनाई गई। इसस पहते समुद्र के द्वारा इंगलिस्तान मे हिन्दुस्तान आने के लिए दक्षिणी अफ्रीका से घूमकर आना पडता था और इस ।
२ . शिया का पारम्भिर भूगोल कंगचो म अदन तक का समुद्र-नट-पराची के बाद हम उमान की साडो (Gulf of Oman) को पार करकं फारम की साडो (Persian Gulf) में ज्ञात हैं। उस साड़ी का पानी फम गहरा है। कारण यह है कि दजला (Tigris) और फरात (Duphrates) नदियाँ इस ग्राडो की गहराई को रेत "और मिट्टी मे धीरे धीरे कम कर रही हैं और इन दोना नदियो के सम्मिलित मुहाने पर उसरा नगर बसा हुआ नगर किसा समय एक प्रसिद्व बन्दरगाह था परन्तु अव समुद्र से दूर हो गया है। इस सारे किनारे पर इस नगर के मिवा कोई बड़ा नगर या बन्दरगाह नहीं है। अरन के नक्षिण में रेगिस्तानी किनारे पर अदन (Aden) का प्रसिद्ध बन्दरगाह क्या स्थित है ? अदन का बन्दरगाह एशिया के दनिण पश्चिम तट पर, एक रेगिस्तान के कोन में, छोटे से बजर प्रायद्वीप पर, स्थित है। यह बन्दरगाह बहुत खूबसूरत और मजबूत बना हुआ है। अदन के बन्दरगाह से दो लाभ हैं। एक तो यह लाल सागर ने बाहर प्रानेवाले जहाजो की रक्षा करता है, दूसरे इस मार्ग से जानेवाले जहाजो के लिए यहाँ कोयले का गोदाम रहता है इन्हीं कारणों से यह बन्दरगाह रेगिस्तानी किनारे पर बहुत प्रसिद्ध हो गया है। लाल सागर में जाने के लिए एक संपरा जलडमरूमध्य है, जिसको घामुल मन्दय (Brbel Mandeb) कहते हैं। वावुल मन्दव का अर्थ आँसुओं का दरवाजा है। परन्तु यहाँ याच में पेग्म डोप (Perim Island). पड़ जाने से दो जलसयोजक बन गये हैं। पुराने जमान में इस द्वीप स टकराकर बहुत-स जहाज टूट जाया करते थे इसी लिए इस जलडमरूमध्य को वावुल मन्दव कहने लगे। परन्तु जिस समय से अंगरेजो ने इम पर प्रकाश स्तम्भ बनवा ।
जाता ܝܝܕܪ एशिया को समुद्र-तट २५ मार्ग को तय करने में कई महीन लग जाते थे। पर मेज नहर के मार्ग द्वारा इँगलिस्तान स हिन्दुस्तान तक पा मार कवल २ हफ्ता का हा गया है। स्वेज नहर में जहाज बहत धार धार चलाया 1 कारण यह है कि यदि जहाज पूरी चाल स चलाया जारे ता लहरे तहत उठगी और उन लहरा म नहर के. किनार, जिनमें रेत हा रेत है, फटकर पाना में गिर जायग इममे नहर का गहराई कम हो जावेगी। और जहाजा को आ-जाने में कठिनता पडेगी। इस नहर से होकर प्राय हर माल ५,००० जहाज प्राते-जाते हैं, इमो कारण पोर्ट सइद बड़ कारवार का स्थान हा गया है। जहाजों का कायला देने के लिए यह स्थान बहुत प्रसिद्ध है। पोट मईद के बाद रूम सागर है। नकशे में देखा, पृथ्वी के भीतरी मागरा में यह मागर सबसे बड़ा है। इसके किनारो पर बहुत-म देश हैं और उनका जलवायु बहुत अच्छा है। पोट सईद से कुछ पूर्व की ओर घूमकर हम फिलस्तीन देश (Palestine) ओर शाम देश (Sirin) के किनारे हा किनारे कुछ छोटे छोटे चन्दरगाहो से होकर उत्तर की ओर टर्को देश तक चले जायेंगे और इसके बाद पश्चिम की आर मुड़ जायेंगे इस भाट के पास साइप्रस टापू (Ciprus Island) है। टर्को का दक्षिणी तट अधिक्तर पहाडी है, जिम पर छोटे छोटे पेरे के जगल लियाई रेंगे। बाद फिर उत्तर को ओर एशियाई टर्की को पश्चिमी छोटे प्रायद्वीप ओर इजियन सागर (Egein न-से टापू मिलेंगे। इस भाग म ममुद्र की गहराइ यहाँ पज भी पाया जाता है, इसलिए यहाँ पर बाला की नावे बहुत अधिक्ता से दिसाद दती है। निकालनेवाले स्थाना मे इसका दूमरा नम्बर है ।।
२४
एशिया का प्रारम्भिक भूगोल
-
1
Suez Canal
3
1
शिया के समुद्र-तट
०५
मार्ग को तय परने में कई महीन लग जाते थे। अब पेज नहर के
मार्ग द्वारा इँगलिस्तान स हिन्दुस्तान तक का सफर स्बल ३ हफ्ता
का हा गया है। स्वेज नहर मे जहाज बहुत धारे धारे चलाया
जाता है। कारण यह है कि यदि जहाज पूरी चाल म चलाया
जावे ता लहरे बहुत उठगी 'पौर ग्न लहरा म नहर के
किनारे, जिनमे रेत हो त है, कटकर पाना म गिर जायग इससे
नहर का गहराइ कम हो जायेगी। ओर जहाजा को आन-जाने
में कठिनता पडेगी। इस नहर से हाकर प्राय हर साल ५,०००
जहाज आते-जाने हैं, इसी कारण पोटे सइन बड़ कारयार
का स्थान हो गया है। जहाजा को कोयला देन के लिए यह
स्थान बहुत प्रमिद्ध है।
पोर्ट मईद के बाद रूम सागर है। नक्शे में देसी, पृथ्वी
के भीतरी मागरा में यह सागर सबसे बडा है। इसके किनारा
पर बहुत-से देश हैं और उनका जलवायु बहुत अच्छा है।
पोट मईद से कुछ पूर्व की ओर धूमकर हम फिलस्तीन देश
(Palestine) ओर शाम देश (Syria) के किनारे हो किनारे
कुछ छोटे छोटे बन्दरगाहा से होकर उत्तर की ओर टी देश
तक चले जायेंगे और इसके बाद पश्चिम की आर मुड़ जायेंगे
इस मोड के पास साइप्रस टापू (Cr prus Island) है। टर्की
का दक्षिणी तट अधिकतर पहाडी है, जिस पर छोटे छोटे पेडो
के जगल दिखाई देंगे। -
इसके बाद फिर उत्तर की ओर एशियाई टी की पश्चिमी
म्याडियाँ, छोट छोटे प्रायद्वीप और इजिशन मागर (Ege in
Sex) के बहुत-से टापू मिलेंगे। इस भाग म ममुद्र की गहराइ
कम है और यहाँ स्पज भी पाया जाता इसलिए यहाँ पर
स्पज निकालोवाला की नारे बहुत अधिकता से दियाद देती हैं।
दुनिया रे स्मज निकालनेवाले स्थाना मे इसका दूसरा नम्बर है।
२४
एशिया का प्रारम्भिक भूगोल
U
---
-
Suez Canal
-
पशिया के समुद्र-तट
तेल पीपी में भरकर रेल के द्वारा धातूम पहुँचाया जाता है
जहाँ मे जहाजो द्वारा दूसरे देशो को रवाना कर दिया
जाता है।
एशिया के समुद्र-तट (२)
अर तुमको एशिया के दूसरी ओर के तटा का हाल बतलाया
जाता है। प्रानो हम रगून से, जो भारतवर्ष का एक बहुत बडा
पूर्वा बन्दरगाह है, चलें
बगाल की साडी के पूर्व में मलाया प्रायद्वीप स्थित है।
रंगून से दक्षिण की ओर पी याना मलाया प्रायद्वीप के
BUHMAN
RMOSA
Karmakarka
HAANANE
SIAM
Bangkor
BRU
Sanान
Drathi
SHELECT
BORNLO
MATAA
किनारे किनारे होती है। यह प्रायद्वीप एक पर्वतश्रेणी है जो
घने जगलो से घिरी हुई है। इसका तट जगह जगह से कटा
Odessa से प्रसिद्ध है, BE-ICH Balam रा एक एशिया का प्रारम्भिक भूगोल टर्की का यह समुद्र-तट बहुत हरा-भरा है। इस पर बहुत-से छोटे छोटे बन्दरगाह है, जिनमें फलो का व्यापार बहुत होता है। इनमें से एक पडा EUROP वन्दरगाह पुराने जमाने जिसको स्मरना (Smyrna) For कहते हैं। दरदानियाल Consburhnople (Dardanelles) और Derdonelles पासफोरस (Bosphor Smyrna rus) नामो जलडमरू- मध्यो के द्वारा थोरपीन रूम एशिया स अलग UIDITERRANEWS SEE हो गया है। इन दोनो जलडमरूमध्या के बीच मारमरा सागर (Sea of Maimor) ffera है। बासफोरस जलडमरूमध्य के योरपीय भाग पर अस्तम्बूल नगर (Constratinople) स्थित है। इन दोना जलडमरूमध्यों में होकर व्यापार पर होता है। इसके बाद काला सागर (Black Sea) है। टर्की का उत्तरी तट भी पहाडी है जिस पर घने जगल हैं। नदियों के मुहानी पर कुल छोटे धन्दरगाह स्मित है, जिनमें सिनापी (Sinove), और ताजान (Tubezond) अधिक प्रसिद्ध है। काला मागर के दक्षिणा पूर्वा कोने पर जागजिया देश (Georgir) मे वातृम (Isatan) बन्दरगाह स्थित है। यहाँ म एक ग्ल को मटा पाक (Baku) को गई है । बाकू कास्पियन सागर (Casprin Sea) 'पर स्थित है, वहाँ कुआ म मिट्टी का तल निकाला जाता है। यह Port Sard Suez Canal AFRICA
एशिया के समुद्र-तट
२९
बहुत सुन्दर और मनोहर है और पूर्वी एशिया में व्यापार का
सरसे बड़ा स्थान है। मिगापुर की तरह हाँग कांग भी व्यापार
को बडी मडी है। दूसरे देशो से जो माल यहाँ श्राता है, वह
यहाँ से चारा ओर बॅटता रहता है।
हांगकांग स उत्तर की ओर चीन के समुद्र तट का रूप
अर्धवृत्त के ममान है और जगह-जगह से कटा हुआ है। इस तट
पर बात-से छोटे छोटे द्वीप और चन्दरगाह स्थित हैं।
Vladrolar
RESEAEOS
PALAN
LLONE
TWITTE
ORK
Amous
HORMOSA
Tiloma
इम समुद्र-तट के बन्दरगाहो में श्रमाय (Amov), फूच
(Foochon) और निगपा (Ninens) अधिक सुन्दर हैं। चीन
मे कुछ दूरी पर फारममा द्वीप (Tomosa) हे जो जापान के
- एशिया का प्रारम्भिक भूगोल हुआ है। इस प्रायद्वीप के पश्चिम क किनारे पर मरगोइ द्वीपसमूह (mergum Archipolngo) स्थित है और इसके बनिणा भाग और सुमात्रा के बीच में मलबा (Halacca Strant) जलडमरूमध्य स्थित है। इस प्रायद्वाप क दक्षिणी सिरे पर एक छोटे-म द्वीप म सिंगापुर (Singapore) का प्रसिद्ध बन्दरगाह स्थित है । यह धन्दरगाह अंगरेजों के अधिकार में है और दुनिया के अच्छे बन्दरगाहो मे से है। रेल के जयशन की तरह यह भी समुद्री मार्गो फा केन्द्र है। यहाँ चारा पार से माल आता ओर एक तरफ का माल दूसरी तरफ का रवाना कर दिया जाता है। जैसे, यदि काई बडा जहाज चीन मे इँगलिस्तान जा रहा हो तो वह अपना माल यहाँ उतार देगा और यहाँ से चारों पार, जहाँ जहाँ इस माल की आवश्यक्ता होगी, छोटे जहाज पहुँचा देंगे। सिंगापुर से फिर उत्तर की ओर मलाया प्रायद्वीप के दूसरे किनारे किनारे यात्रा करने के बाद स्याम की खाडो (Gull of Stam) मिलती है। यहाँ मीनाम नदो के किनार काफ नगर (Bangkok) स्थित है। इस साडी फ उत्तर मे मीनाम और मीकाग नदो के मैदान स्थित हैं। इन मैदानो के बाद 'अनाम की पहाडी के किनारे किनारे यात्रा करने से चीन मिलता है। चीन में सिझ्याग नदी (Siking) के मुहाने पर यहाँ का प्रसिद्ध बन्दरगाह कान्टन (Canton) है। इसी कान्टन बन्दरगाह के बिलकुल सामन हॉग कॉग (Iong-hong) है जो ब्रिटिश साम्राज्य का एक बड़ा महत्त्व-पूणे द्वीप है। इसी द्वीप के कारण चीन प्रोर पूर्व के दूर दर देशो से व्यापार की रक्षा होती है। यह द्वीप जिले की तरह बहुत मपवृत बना हुआ है। यहाँ अँगरेज योर हिन्दुस्तानी सिपाहियों का पहरा रहता है। अँगरेजों की उस मामुद्रिक सेना का केन्द्र भी यही जीप है जो इस भाग की रक्षा के लिए नियत है। इस द्वीप का बन्दरगाह
एशिया के समुद्र-तट
२९
बहुत सुन्दर और मनोहर है और पूर्वी एशिया में व्यापार का
सबसे बडा स्थान है। सिंगापुर की तरह हाँग कॉग भी व्यापार
को बडी मडी है। दूसरे देशो से जो माल यहाँ आता है, वह
यहाँ से चारा पोर बॅटता रहता है।
हाँग काँग मे उत्तर की ओर चीन के समुद्र तट का रूप
अर्धवृत्त के ममान है और जगह-जगह से क्टा हुआ है। इस तट
पर वहत मे छोटे छोटे द्वीप और बन्दरगाह स्थित हैं।
।
Vladivostok
ESEADE
Pers
JAPAN
STbrtANE
OR
IFILORE
3FAE
yanah
Mingpo
CHAR
ठTRE
Amous
EFORMOSA
DUATE
इस समुद्र तट के बन्दरगाहो में श्रमाय (Amov), फूच
(Foochen) ओर निगपो (Ningpo) अधिक सुन्दर हैं। चीन
से कुछ री पर फारममा द्वीप (Tormosa) है जो जापान के
एशिया का शरम्भिक भूगोल अधिकार में है। चीन म किनारे के भागा म हजारो गाँव और कसने मिलते हैं और बहुत-से स्थानो पर नगर और बन्दरगाह हैं। समुद्र-तट का सारा भाग या ता सेतो का मैदान है या पहाडी ढाल है जहाँ चाय, रशम और वान इत्यादि को सतो होती है। शाई (Shaughal) योटिसीक्याँग नदी के मुहाने पर प्रसिद्ध वन्दरगाह है। शघाई चन्दरगाह मे उत्तर की ओर पीला सागर (Yellow Sea) और पिचलो की साड़ी (Gulf of Pechill) का किनारा है। यह किनारा बहुत उपजाऊ मैदान है। पिचली की साडी मे हाग हो (R Honng-Ho) और पीहो (R Petho) नदियाँ गिरती हैं। पीहा नदी के चालीम मील ऊपर टिन्टसिन (Trentsan) नामक बन्दरगाह है। इस बन्दर- गाह के द्वारा चीन की पुरानी राजधानी पेकिन (Pekin) का व्यापार होता है। पिचली को खाडी के उत्तर में पार्टश्रार्थर (Port Arthur) बन्दरगाह है । यह जापान के अधिकार में है। पीले सागर के उत्तर में कोरिया (Korea) प्रायद्वीप को नारो में देग्यो। यह पहाडो प्रायद्वीप पूर्वी चीन सागर को जापान सागर से अलग करता है । जापान के सागर में जापानी लोग मछलियों का वडा व्यापार करते हैं। कोरिया प्रायद्वीप से उत्तर का जलवायु घहुत बदल जाता है। इम परिवतन का प्रभाव किनारे को देसकर भी मालूम हो जाता है क्योकि कोरिया प्रायद्वीप के आगे उत्तर की ओर पेडी से हरे-भरे किनारो और व्यापारिक कारदार के बाल किनारों पर वंजर और सूसे स्थान तथा चट्टान दिग्पाई पड़ती हैं। कहीं कहीं पर छोटे छोटे कमरे पोर गाँव अवश्य हैं। साइबेरिया (Siberia) के किनारे का बहुत बडा भाग रेगिस्तानी है परन्तु अरब की तरह गर्मी की अधिकता और वर्षा की कमी से उसकी यह दशा नही हुई है, बल्कि अधिक सर्दी पड़न के कारण
Beringer
न
New Siberianels
enao
Penisei
Sodof Oklos
एशिया के समुद्र तट
b
a
ROHI
Amur
ग
Vladivostone
w
एशिया का प्रारम्भिक भूगोल
हो गई है। ब्लाडीवोस्टक (Vladis ostok) बन्दरगाह
को देसो। उसमें जाडे की एतु मे वर्फ जम जाने के कारण
दो महीने तक आना-जाना नन्द रहता है। फिर भी यह पैसिफिक
महासागर में रूस का सबसे बड़ा बन्दरगाह है। इसी सडक
से वह रेल की सडक प्रारम्भ होती है, जो साइनेरिया में
होकर बम के बन्दरगाह लेनिनग्रेड (Leningrad) तक चली
गई है।
अमूर नदी के मुहाने तक का समुद्र तट कड़ी चट्टानों का
बना हुआ है। नकशे में देखकर उस द्वीप का नाम बताओ,
जा इस नदी के मुहाने के सामने स्थित है और उस अन्दरूनी
समुद्र का नाम बताया, जिसके अन्दर अमूर नदो गिरती है।
सबसे असिरी अन्दरूनी समुद्र बेरिग सागर (Boring Sea)
है । यह सागर सेल और हेल मछलियो तथा बर्फ के पहाड़ो
के लिए प्रसिद्ध है। इस समुद्र का जितना भाग एशिया में है
उतना ही अमरीका में है। बहुत से द्वीपो की उन श्रेणियों का
जो इस समुद्र को कई ओर से घेरे हुए हैं, एशिया से कोई भी
सम्बन्ध नहीं है।
एशिया के उत्तरी किनारे पर बहुत ठडक पडती है और यह
माल मे अधिकाश बफे म ढका रहता है।
प्रश्न
१-समुद्र-तट स्मि कहते हैं ?
--चन्दरगाह कायम हाने के लिए किनारे पर कौन कौन-सी
गतें होनी चाहिएँ?
३-एशिया ये कौन से तट वीगा और "गिस्तान है, कोन से
पहाडी और न मे नीचे उपजाऊ मैदानों पर स्थित है ?
गशिया के समुद्र तट
३३
-एगिया या उत्तरी रिनारा कापी स्टा हुया है। इस किनारे पर
कई बडी नदियों के नुहाते हैं और इसके पीछे की जमीन में
नीचे मैदान है। लेकिन पिर भी यहाँ बन्दरगाह नहीं हैं।
इसका कारण सतायो।
-कराची से पश्चिम की ओर यदि काले सागर तक यात्रा करें तो
किन साद्रो, जलसयोजको तथा किन नि देशो से होकर
जाना होगा और रास्ते में कौन शेन त बन्दरगाह क्या द्वीप
मिलगे
-इसी तरह रगून से पूर्व का और समुद्र के किनारे यात्रा करने से
किन किन स्थानो से जाना होगा ?
As चीन के पूर्वी किनारे पर कइ रड़े रन्दरगाह क्या स्थित है।
-
चौथा प्रकरण । एशिया की नदियां एशिया के मध्य में जो पक्तमालाप्रां का केन्द्र है, वहीं में एशिया को प्राय सभी बडी बडी नदियाँ निकली है। पहिय की धुरी मे जैसे चारा और छड जाती है, वैसे ही एशिया फी नदियां इस मध्यवर्ती केन्द्र से चारों ओर फैली हुई है। यद्यपि इस स्थान में शीत की अधिकता और भोजन की कमी के कारण अधिक प्राणी नहा रह सकते, तथापि उससे जो नदियाँ निकलती है वे लासा मनुष्यो का उपकार करती है। एशिया में इतनी अधिक नदियाँ हैं कि उनके अलग अलग वर्ग कर लेना अच्छा है। नम्शे में देखने से तुमका नदियों के चार वर्ग स्पष्ट दिखाई देंगे। एक वर्ग आर्कटिक महासागर में गिरता है, दूसरा पैसिफिक महासागर में और तीसरा हिन्द- महासागर में गिरता है। चौथे वर्ग में वे नदियाँ हैं जो किसी समुद्र में नहीं गिरती । अव हम क्रम से इन नदियो का वरणेन फरते हैं। १-आर्कटिक महासागर में गिरनेवाली नदियाँ-साइ- बेरिया में तीन मुख्य नदियों श्रोवी, येनीसी और लीना (Obi, Yenises and Lena) हैं। यह तो तुम जानते हो कि इन नदियों के नीचे का भाग लगभग वपे भर जमा रहता है, इसी लिए ये कभी कभी अपने किनारों से बाहर निकलकर बहने लगती हैं, और बडे बडे दलदल पैदा हो जाते हैं। उस हिस्से में इन नदियों से कोई लाभ नहीं होता। हॉ, दक्षिण की ओर जहाँ का जलवायु अधिक ठडा नहीं
ए
Ballhosh
एशिया की नदियाँ
Kume
(lange
R Silvano
३५
Agia--Rivers
है
एशिया का प्रारम्भिक भूगोल
है वहाँ इन नदियो को घाटियो म बहुत-सा गेहूँ पैदा होता है
ये और इनकी सहायक नदियाँ आन-जाने के लिए अच्छे मार्ग
बनाती है। इनमे नाव आसानी से चलती हैं। उत्तर को
पार, जहाँ बफ जमी रहतो है वहाँ, नाव नहीं चल सकती और
वहाँ काई व्यापार भी नही होता। अपने नक्शे में भारी.
येनीसी और लीना नदियों के मार्गा को देसों।
नकशे में देखने से तुम्ह येनीसी नदी के बेसिन में वेकाल
झोल (Lahe Bukul) दिसाइ देगी। यह एशिया में मीठे
पानी की सबसे बडी झील है। गहरी भी यह बहुत
में यह कई सप्ताह तक बर्फ से ढकी रहती है।
२-प्रशान्त महासागर में गिरनेवाली नदियों-अमूर
नदी (R Amur) मगोलिया के पहाडो स निकलती है। यह
सैकडो मील तक मगोलिया और साइबेरिया की सीमा पर
बहती हुई अत में साइबेरिया के भीतर से बहती है।
यद्यपि इसका पहाडी मार्ग बहुत लम्बा है, किन्तु मनुष्य के बहुव
कम काम का है। हाँ, नीचे उतरने पर इसके द्वारा एक बड़े
मैदान की सिचाई होती है और लगभग वर्षे के आधे समय
मे, अर्थात् जब तक यह जम नहो जाती, लोग नावों पर माल
लाते और भली भाँति व्यापार करते हैं। इसकी एक सहायक
नदो सुन्गारी (R Sungari) है जो मचूरिया (Afanchurna)
के मैदानो को सींचती है जहाँ गेहूँ की सेती होती है।
हांग हो नदी (R Hoang-Ho) उत्तरी चीन की पीली
मिट्टी के प्रसिद्ध मैदान में होकर वहती है। इसमे नावो के
द्वारा व्यापार करना असम्भव है, क्योकि कहो तो यह इतने
वेग से बहती है कि नाव डाली जाने पर उसका पता न लगे
और कही इतनी कम गहरी है कि नाव चल ही नहीं सकती।
परन्तु इसके द्वारा उन मेदानों को जल तथा उपजाऊ मिट्टी मिल
।
। एशिया की नदियाँ जाता है, जा दुनिया में सबसे अधिक घने बसे हुए हैं। इसमे बाढ पाती है। मुहाने के निकट यह विशेप कर याद पर रहता है। चीन निवासी कहते हैं कि यह भिन्न भिन्न मार्गो स बहकर समुद्र में गिरी है और जब कभी इसने पिनारों को तोडकर अपना मार्ग बदला है तब इसने बहुत हानि पहुँचाई है। इसी लिए चीन- निवासी इम नदो को 'चान की आपत्ति' के नाम से पुकारते है । यांग टिसीक्याग चीन मे सबसे यडी नदी है ।यह तिच्चत के मध्य से निकलती है और चीन के मध्यवर्ती भागों को साँचती है। यहा कारण है कि चीन का मध्यवर्ती मैदान बहुत उपजाऊ और घना यसा हुआ है। इसके अतिरिक्त यह नदो बहुत लाभदायक है, म्याकि इसके द्वारा व्यापार बहुत होता है । सी-क्याग (Si-krang) वैसी प्रसिद्ध नदो नहीं है जैसी याग टिसो-क्याग और हाग हो है। इसके कई मुहानों में से एक मुहाने पर कान्टन (Canton) का बडा बन्दरगाह स्थित है। कान्टन में लासो मनुष्य नदी मे नावो पर घर बनाकर रहते हैं इडोचीन को मेकागयोर मेनाम नदियाँमा प्रशान्त महासागर मे गिरती हैं। पहलो तिब्बत म निक्लतो है, दूसरी एक छोटी नदी है। नारी को देखकर बतलाया कि मेकाग किन किन प्रदेशो को एक दूसरे से अलग करती हैं। ये नदियाँ अपने पहाडी भाग के सघन वनों में वेग स बहती है किन्तु नीचे चलकर इन्होंने अपने मुहाने पर जो मदान बनाये हैं वे बहुत ही उपजाऊ और अत्यन्त घने बसे हुए हैं। ३-हिन्द महासागर में गिरनेवाली नदिया-शातल अरब (Shat el Arab) नदी को छोड कर जितनी नदियाँ हिन्द महासागर मे गिरतो हैं, वे सब भारतीय साम्राज्य की है। नकश का देसकर ब्रह्मा को दो नदियों, उत्तरी भारत को तीन नदियों और दकन (Deccan) की नदियों के मार्ग को ऊँगे -
है
एशिया का प्रारम्भिक भूगोल
फरात और दसला (Lupirates and Tigns) नाम को
दो नदियाँ प्रारमोनिया के पठार मे निफ्ल पर मेसोपोटामिय
(Mesopotamaa) में रहती हुई फारम की साड़ी में एक साथ
मिलार गिरती है, और उनके सगम मे शातल-प्ररव धनता है।
इन नदियों में कोई प्रमिद्ध, सहायक नदी नहीं गिरती,
मे इन प्रान्तों में कृषि के लिए नहरों की बड़ी श्रावश्यक्ता
दजला नी म बगदाद शहर तक जहाज चले जाते हैं परन्तु
फरात मे व्यापार रहुत कम होता है।
४-समुद्रों में न गिग्नेगली नदियाँ-या तो रेगिस्तानों में
पाई जाती है या ऐसी जगह म हाकर घहती हैं जिसके पास
पास की भूमि उनके बहाव स ऊँची है।
थियान-शान और क्वीन लन पहाडों के नीच एक सिन है
जिसमें ताग्मि (R Tarini) नदी पाती है। यद्यपि यह नती
लम्बाई में गगा से बड़ी है, तथापि यह लोय नार (Lob Nor)
नाम को एक झील में गिरती है। गर्मी के दिना में इस नदी में
म्यून पानी रहता है क्योंकि वर्फ पिघलती रहती है। किन्तु जाडे
मे यह कई जगह सूप जाती है। काशगर (Kashgar) ओर
यारकन्द (Yarkand) के शहर इसी नदी के किनारे बसे
1
प्रब ईरान के सटो को देखा। हम पहले लिस चुके हैं कि यह
प्याले फो तरह है । क्या इसमे कोई नदी समुद्र तक पहुँचती है ?
सवस बडी नदो का नाम हेलमट (R Ielmand) है। अफगा
निस्तान का दूसरे नम्बर का शहर कन्दहार (Kandhan) इसी
के किनारे पर बसा हुआ है। कावुल नदी इस पठार के उत्तरी
पूर्वी भाग का पानी हिन्दुस्तान की सिन्ध नदी में बहा लाती है।
अब उस बडे मैदान को ढूँढा जिसमे फेस्पियन सागर
(Caspian Sea), अरल सागर (Aral Sea) और 'पारकश
।
एशिया को नदियाँ
३९
झील (L Balkash) हे। य सभा झाल सारी हैं। कस्पियन
सागर ममुद्र की सतह से २६ फीट नीचा है। कैस्पियन सागर में
गिरनेवाली नदियाँ उत्तर से आती हैं और अरल सागर में
गिरनेवाली दक्षिण पूर्व से। बालकश झील में जो नदियों गिरती
हैं वे पूर्व से आती हैं। नकशे मे इन नदियो की खोज करो।
हम एक और नदी तुम्हें बताना चाहते हैं। वह है तो छोटी
,परन्तु मार्क की है। नकशे मे पेलिस्टाइन (Palestine) को
ढूँढो। यह भू-मध्य सागर के पूर्व मे है। यहाँ समुद्री किनारे
से कुछ दूर जाग्डन (k Jordan) नदी बहती है जो
मृतक सागर (Dead Sea) म गिरती है। धरातल का कोई
भाग इस झोल के इतना नीचा नहो है। इसकी सतह समुद्र तल
से १,३०० फीट नीची है।
२-उत्तरी एशिया के पड़े मेदान का वृत्तात लिसो। यहाँ की नदिया
का भी हाल लो।
२-नदियो से मनुष्य के कान कान से पड़े काम निगलते हैं। ये
काम साइवेरिया की नदियों से क्या न निकलते !
३-एशिया की किन नदियो से बहुत पटी जन-सरया का निर्वाह होता
है और क्यों
४-नकशे से देनार बनायो कि एशिया की कौन-कौन-सी नदियाँ
समुद्र में नहीं गिरता। ये का झोला और सागरों में गिरती हैं।
श्रभ्याम
एशिया का एक नाका खींचो और उसमें उसको पड़ी बड़ी नदिया,
पहाड और चन्दरगाह दिसलायो।
--
।
पाँचवॉ प्रकरण
-
जलवायु
हिन्दुस्तान का भूगोल पढने स तुमको भलो भाँति ज्ञात हो
गया होगा कि इसके प्रत्येक स्थान का जलवायु एक-सा नहीं
है। किसी भाग में वपा अधिक होतो हे और किसी भाग में
बहुत कम, कुछ स्थान बहुत सद रहते हैं और कुछ बहुत गर्म,
और कोई कोई स्थान ऐसे भी हैं जो कभी सद रहते हैं और
कमा गर्म। यहो दशा दुनिया के और भागा के जलवायु की है।
भिन्न भिन्न भागो का जलवायु भो भिन्न हाता है।
किसा स्थान का जलवायु मालूम करन के लिए हमें पहले
नीचे लिसो हुइ बातो का ज्ञान प्राम कर लेना चाहिए। एक तो
यह कि उस स्थान का वायु कितना गर्म या सद है, और उसको
सर्दा या गमा साल भर बराबर रहती है अथवा वप के कुछ
महोना तक सद रहता हे पार कुछ महीना मे गमे हा जाती
है। दूसरे यह कि उस स्थान की हवा नम है या सुश्क अर्थात
वहाँ पानी बरसता है या नहीं, और यदि बरसता है तो
कम या अधिक और साल के किस भाग मे | तोसरे यह कि
उस स्थान पर हवाय किस तरफ से आती हैं, और साल भर
हवाय एक हो तरफ स पातो रहती हैं या उनका रुस बदलता
रहता है। किस समय में हवाय वेग से चलती हैं और
फव हलकी। बात यह है कि किसी स्थान के जलवायु मे हमारा
मतलब हया को उस हालत से है जो गर्मो या नमो के कारण
हाती रहती है।
४०
+
जलवायु
४१
इन बातो को मालूम करने के लिए हम निम्नलिखित बात
भली भांति समझ लेनी चाहिए, क्याकि जलवायु इन्हा बातों पर
निर्भर रहता है--
१- भूमध्य रेसा से दूरी-जो स्थान भूमध्य रसा के
निस्ट हैं व उन स्थानों की अपक्षा गर्म होते है जो भूमध्य
रेखा से अधिक दूर होते हैं। इसका कारण यह है कि भूमध्य
Paralle
from the sun
Roys
Equato
Wavdsount
.
रेखा के निकटवर्ता स्थाना पर सूय्ये की किरण अधिक सोधी
पडती है, और अधिक तेजी से चमकती है। धूयों की ओर
ये किरण अधिकाधिक तिर्की होती जाती हैं, इस कारण ये
स्थान अधिक ठण्डे होते हैं।
चित्र को ध्यान से देखो, AB और CD दोनों घराबर मोटी
किरण पृथ्वी को गोल सतह पर पड़ रही हैं। भूमध्य रेखा
पर AB किरण सीधी पड़ रही हैं और उनको वुल गर्मो धरातल
के थोडे से ही भाग पर पड़ रही है, इसलिए वह भाग सूव गर्म
हो जाता है। इसके विरुद्ध, CD किरण ध्रुवों के समीपवर्ती
स्थानो पर तिहों और पृथ्वी के अधिक भाग पर पडतो है,
प
"gs
एशिया का प्राराम्भक भुगोल
इसलिए उनकी गमी धरातल क आंधक भाग पर फैलकर कम
हो जाती है और ये भाग अधिक ठण्डे रहते हैं।
एशिया महाद्वीप विपुवत रेग्मा से लेकर लगभग उत्तरी ध्रुव
नक फैला हुआ है, यही कारण है कि उसमे हर तरह क
जलवायु पाया जाता है। इसक मबस उत्तरी भाग में कडी सद
और दक्षिणा भाग में कडी गर्मी पड़ती है। बीच के भागो क
जलवायु साधारण है।
नकणे में विपुवत् रेसा से भिन्न भिन्न स्थानों की दूरी अक्षाश
रेयाश्रो के द्वारा दिसलाई जाती है, इससे हम कह सकते हैं कि
पृथ्वी के वे स्थान, जिनका अक्षाश कम या अधिक गर्म रहते हैं,
और जिनका अक्षाश अधिक है उनमे कम गर्मी होती है।
जैमे, हिन्दुस्तान के ये चारो शहर-(१) कोलम्बो, (२) मद्रास,
(8) वम्बई और (४) कलमत्ता--यद्यपि समुद्र तट पर स्थित हैं पर
सबमे बरायर गर्मो नही पडता। कोलम्बा में सबसे अधिक गर्मी
पडतो है, क्योकि उसका अक्षाश कम (७३) है। मद्रास का
अक्षाश १३° है, इस कारण वहाँ यहाँ से भी कम गर्मी पडती है।
बम्नई का अक्षाश १९° उत्तर है इसलिए वह इन दोनो स्थानी से
कम गर्म है। कलकत्त में तो इन सबसे कम गर्मी पडती है क्योंकि
उसका अक्षाश २४ है। इसी प्रकार एशिया में साइबेरिया
मवसे अधिक ठण्डा है। मध्य के देश जैसे चीन, तुकिस्तान आदि
कम मद हैं और हिन्दुस्तान, मलाया और अरब आदि दक्षिणी
देश सबसे अधिक गर्म हैं
-समुद्र से धरातल की उँचाई.
-एक ही अक्षाश के ऊँचे
स्थान नीच स्थानों से अधिक ठण्ड रहते हैं। जो स्थान जितना ही
ऊंचा होगा वह उतना ही अधिक मद होगा। जैसे, शिमला और
लाहौर भूमध्य रेसा मे लगभग वरावर दूरी पर हैं, इसलिए शायद
तुम नयाल क्रो कि इन दोनों स्थानों पर वरावर गौ होनी
जलवायु चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं है, क्यारि शिमला लाहौर में कहा अधिक ऊँचा है। इसो में वह गर्मियों की ऋतु मे भी अधिक स- रहता है। हिमालय और दूसरे ऊँचे पहाडा की ऊंचा चोटियाँ सदा ही बर्फ से ढको रहती हैं। इसका कारण यह है कि नव सूर्य चमस्ता है ता उमको किरणं हवा को गम नही पतों बल्कि उसमें प्रवेश करके प्रावो की सतह पर पडती हैं और दमे गर्म फर देती हैं। धरावल गर्ग होकर अपने ऊपर फो हया की नह को गम कर देना है, पर अधिक ऊपर की तहें ठण्डी ही रह जाती हैं। अन एशिया के प्राकृतिक नकरो को देखकर पताप्रो कि तुम्हारी समझ में तुर्किस्तान अधिक गर्म है या तिन्यत । EXI REMELY COLD COLD COOL COUNTRY 60 WARM Asia-Tandart Temperaturo ३-समुद्र से दूरी-समुद्र से समीप के स्थान उन स्थाना एशिया का प्रारम्भिक भूगोल नाडे मे कम टण्डे रहते हैं। उनाहरण के लिए बम्बई और नागपुर दो शहर त लीजिए । बम्बई ममुद्र के किनार स्थित होने के कारण गर्मी में कम गर्म और जाउ म म मर्द रहता है, इसी तरह इलाहाबाद मे गर्मो की ऋतु में अधिक गर्मी और जाडे में कलकत्ते की अपेक्षा अधिर जाटा पडता है। इसका कारण यह है कि रेत या पत्थर की अपेक्षा पानी देर में गर्म या सर्द WARM ATAU NTAIN HOT A Agra-July Temperature होता है। गर्मियों की ऋतु में समुद्र का जल गर्मी को ले लेता है और उसके ऊपर की हवा गर्म नहीं होने पाती। इसलिए जो हवायें समुद्र मे पृथ्वी की ओर चलती हैं व समुद्र के निकटवर्ती स्थान को कुछ ठण्डा कर देती ह। जाडे मे समुद्र से दूर के स्थान शीघ्र ही ठण्डे हो जाते है पर ममुद्र का पानी इतनी जल्दी ४५ " जलवायु उण्डा नही होता, इसलिए उसके ऊपर की हवा भी जल्दी ठण्डी नहीं होती और यही हवा तट पर के स्थानों को गर्म रखती है। इसलिए समुद्र के समीपवर्ती देशो की श्रीम और शरद ऋतुओं मे अधिक अन्तर नहीं होता। ऐसे जलवायु को समान या समुद्री जलवायु कहते हैं। समुद्र से दूर के देशों में प्रोप्म ऋतु अधिक गर्म और शरद् ऋतु अधिक ठण्डी होती है। अर्थात् वहाँ ग्रीम और शरद् ऋतुओं मे अधिक श्रन्तर पड़ता है। ऐसे जलवायु को स्थलीय जलवायु कहते हैं। एशिया महाद्वीप का एक बडा मध्यवर्ती भाग समुद्र के प्रभाव से बहुत दूर है, इसलिए वह गर्मियों में अत्यन्त गर्म और शीतकाल में अत्यन्त ठण्डा रहता है। पर समुद्र तट का जलवायु भोतरी दूर के स्थानों के जलवायु की अपेक्षा अधिक समान होता है। ४-वाओं का रस और वर्षा-जो हवाय ममुद्र की भार से आती है वे जलवायु का कुछ समान बना देती हैं। इसके सिया वे अपने साथ समुद्र में भाप लाती हैं, जिससे समुद्र की ओर के पहाडो ढालो पर पाती अधिक बरसता है। पहाडो के दूसरी ओर के ढाल और देश शुष्क रह जाते हैं। तुम पढ चुके हो कि जब मानसून हवाय ग्रीष्म ऋतु में हिन्द महासागर से चलकर हिमालय पहाड के दक्षिणा ढालो पर टकराती हैं तब वहाँ वर्षा बहुत अधिक होती है। और तिब्बत अत्यन्त शुष्क रह जाता है। किन्तु स्थल की ओर में समुद्र की तरफ चलनेवाली हवाय गर्मो मे गर्म और शीतकाल में ठण्डी रहती हैं, इसलिए जन स्थानों पर से ये गुजरती हैं उनको ऋतुओं के अनुसार, गर्म या मद कर देती हैं। साथ ही इन हवाओं के खुश्क रहने के कारण वर्षा विलकुल नहीं होती। अव शिया की वर्षा और हवाओं के रुप को नकश में ध्यान मे देखो। ग्रीष्म ऋतु में एशिया महाद्वीप का मध्यवर्ती
स
४६
शिया का प्रारम्भिक भूगोल
भाग यहुत गर्म हो जाता है। गमा के कारण यहाँ को इवा
हलका हार ऊपर का उठ जाती है और उसकी जगह समुद्र
ठण्डो र भारा हवा या जाता है। नकाशे में देखा कि हिन्द
महासागर की हवाय दक्षिण-पश्चिग से धरातल की पार जाती
हैं और हिमालय, व्रत्मा ओर मुडाचीन के पवतो में टकराकर
घहुत पानो बरसातो है। पर ये हवाय अरव और इंगन को
RCTIC CIRCLE
DRY
BETWEEA 10 70301
MORE THAN 30
Asia-Winter Rainfall
ओर नहीं जाता, जिससे व भाग सदेव सूखे रहते हैं। इसी
तरह प्रशान्त महासागर की हवाय दनिए पूर्व की ओर से
महाद्वीप के मध्यवर्ती स्थानों की ओर जाती है, इसलिए एशिया
के पर्चा देशा में पयोप्त पानी बरसाती हैं। दक्षिणा तटा पर वर्षा
अधिक होतो हे ओर उत्तरी तटा पर कम।
जलवाय
अब शीतकाल के नवश मे हवाओं के रुस को ध्यानपूर्वक
देखो। इस सतु मे मध्य एशिया अधिक ठण्डा हो जाता है, इस
लिए जाडे के कारण यहाँ को हया भारी हो जाती है और समुद्र
को पार चलन लगती है। ये हवा' शिया के पूर्ण शा को
ठण्डा कर देता है, पर हिमालय पर्वत के कारण हिन्दुस्तान म नहीं
R
R
Rs
DRV
JBETWEEN 1 TO 30
30-60
OVER 60
ABIT-Sanmer Rainfall
গান
के शुष्क होने के कारण पानी नहीं
परसता । एशिया मे इन हयांत्रो को, जो प्रत्येक ऋतु में अपना
रुख बदलती हैं, मानसूनी हवाये कहते है। एशिया के दक्षिणा
और पूर्वो भाग, जिन पर हवाये चलती है, मानसूनी प्रदश
कहलाते हैं। मानसूना देशा में वषा वेवल प्रोम ऋतु में
४६
एशिया का प्रारम्भिक भूगोल
माग बहुत गर्म हा जाता है। गमो के कारण यहाँ की हवा
हलको हाकर ऊपर का उठ जाती है और उसकी जगह समुद्र से
ठण्डो ओर भारा हवा आ जाता है। नशे में देखो कि हिन्द
महासागर की हवाय दक्षिण-पश्चिम से धरातल की ओर जाता
हैं बार हिमालय, ब्रह्मा ओर इंडाचीन के पत्तो से टकराकर
बहुत पानो परसाता हैं। पर ये हवाय अरव और ईरान को
*RCTIC CIRCIE
ORY
RETWEEN 105230
MORE THAN 3G
रा
Asia-Winter Runfall
ओर नहीं जाता, जिससे वे भाग सदेव सूग्वे रहते हैं। इसी
तरह प्रशान्त महासागर की हवाय दक्षिण पूर्व की ओर से
महाद्वीप के मध्यवर्ती स्थानो की धार जाती है, इसलिए एशिया
के पर्या देशा में पयोप्त पानी बरसाती है। दक्षिणा तटों पर वर्षा
अधिक हातो हे और उत्तरी तटा पर कम।
WARM TEMPERATE
TROPICAL MONSOON
जलवायु
४९
पश्चिम की ओर वह कम हो जाती है। इन हवाओं का रुख
हिन्द तथा प्रशान्त महासागरो में देखो।
COLD TEMPERATE
TEMPERATE
MONSOON
Nep-2
TERRANEAN
HOTI DESERT
EDITORIA
Asa-Climatic Regions
शीतकाल में दक्षिणी भाग गम रहता है लेकिन उत्तरीय प्रदेश
घर रहत हैं। इस मौसिम में हवाये स्थल की ओर से जल
की ओर चलती है, इस कारण वे शुष्क और ठण्डो रहती है,
और पानी नहीं बरसातों।
२--मध्य एशिया का पर्वतीय सण्ड-यह भाग हिमालय
उत्तर तथा चान के पश्चिमी पहाड़ा के पश्चिम में स्थित है
पया समुद्रा से बहुत दूर है इस कारण यहाँ, बहुत ऊँचे स्थानों के
अतिरिच, और सर जगह प्रीष्म ऋतु में अधिक गर्मी पडती है
और शरद् एतु में मारा प्रान्त बहुत सर्द हो जाता है। इस
,
एशिया का प्रारम्भिक भूगोल
हाती है। धनाम और मद्रास के तटों पर जाड़ो में थोड़ी सी
पपो हो जाती है।
एशिया के पश्चिम में रूम सागर के समीप के हिस्से को
ऐसो। इस भाग म केवल शोतकाल में रूम सागर की ओर से
पश्चिमो हवाये 'प्राता है, इसलिए रूम सागर के किनारे के देशों
में जाडों में वपो होतो है। गर्मी के मौसम में ये दवायें नहीं
चलवों, इमलिए यह मोसम सूमा रहता है।
जलवायु के अनुसार पशिया के भाग-जलवायु के
अनुसार एशिया महाद्वाप निम्नलिखित मागों में बांटा जा
मकवा है--
18--विषुवत रेसा के समीप का गर्म व सोला भाग-इस
माग में एशिया के दाक्षण पूर्व के द्वीपसमूह और मलाया प्रायद्वीप
का दक्षिणी भाग सम्मिलित है।
एशिया के प्रोष्म-एतु और शीतकाल के जलवायु फे नकशो
में एशिया के दक्षिण-पूर्व के द्वीपसमूह और मलाया प्रायद्वोप को
ध्यानपूर्वक देखो। इन स्थानों पर वर्ष भर अधिक गर्मा पठी
पार साल भर पानी परसता हे।
२-मानसून पवनो का सएड-यह माग मध्य एशिया के
पववो के दक्षिण और पूर्व में स्थित है। इसमें हिन्दुस्तान, इडाचीन,
चीन ओर जापान आदि देश सम्मिलित है। जलवायु के नकशे
को देखने से ज्ञात हागा कि ग्रीष्म ऋतु में इन स्थानों पर अधिक
गर्मी पड़ती है। इस महाद्वीप में इस मौसम म हवाये प्रशान्त
और हिन्द महासागर की और में आया करती है। ये हवाये
इन समुद्रों से अपन साथ खूप नमी लाती है और इस सम्पूर्ण
प्रान्त में खून मेह बरसाती हैं। इंडाचीन और उसके निकट के
ख्यानों में सबसे ज्यादा पानो परसता है। इसके उचर और
--
WARM TEMPERATE
HOTIO ESCAT)
TROPICAL MONSOON
जलवायु
पश्चिम की ओर वह कम हो जाती है। इन हवाओं का रुख
हिन्द तथा प्रशान्त महासागरों में देसो।
COLD TEMPERATE
:
RED-2
TERRANEAN
TEMPERATE
MONSOON
EQUATORIAL
Asa-Climatic Regions
शीतकाल म दक्षिणी भाग गम रहता है लेकिन उत्तरीय प्रदेश
घरटे रहते हैं। इस मौसिम में हवाये स्थल की ओर से जल
की ओर चलती हैं, इस कारण व शुष्क और ठण्डा रहता है,
और पानी नहा परमातों।
२-मध्य एशिया का पर्वतीय पण्ड-यह माग हिमालय
C उत्तर तथा चान व पश्चिमी पहाड़ा के पश्चिम में स्थित है
वधा समुद्रा मे बहुत दूर है इस फारए यहाँ, यहुत ऊँचे स्थानों के
भनिरिक, और सर जगह प्रीष्म ऋतु में अधिक गर्मी पडती है
धौ शरद सतु में मारा प्रान्त बहुत सर्द झा जाता है। इस
।। , । एशिया का प्रारम्भिा भूगोल भाग में, जो हवाय ग्रीष्म ऋतु में हिन्द व प्रशान्त महासागरों प्राती हैं वे किनारे के पहाडों टकराकर पानी बरसाती हैं, और इस भाग में पहुँचते पहुँचते बिलकुल शुष्क हो जाती है। शरद् ऋतु मे इस प्रान्त से बाहर की ओर ठण्डी हवायं चलने लगती हैं, इमलिए वे बहुत ही शुष्क हाती हैं। संक्षेप में इस प्रान्त मे वर्षा बहुत कम या नहाँ के वरार ही होती है। इसी से इस प्रदेश का अधिकतर भाग रगिस्तानी व उजाड है। ४-पश्चिमी शुष्क पठार--इम भाग मे रान का पठार, अरब और पशियाई काचक के ऊँचे प्रदेश आते हैं। इन स्थानों फा जलवायु शरद-, में समान रहता हे अर्थात यहाँ मामूनी ठएडक पडती है, किन्तु गर्मियों में इन भागो में अत्यधिक गर्मी पडती है। इसका कारण यह है कि इन भागा को जमीन बहुत रेतीली है और पानी बहुत हो यम बरसता है। ५-स्म सागर का जलवायवाला प्रान्त-एस भाग में एशिया के पश्चिमो और रूम सागर के तटीय भाग सम्मिलित हैं। इन स्थाना में गर्मी ओर जाडे, दोनों ही ऋतुओ मे जलवायु समान रहता है। वर्षा केवल शीतकाल में होती है। ६-उत्तरीय समान जलवायु का खण्ड-स मण्ड में सा.बेरिया का वह भाग शामिल है, जा मध्यवर्ती पर्वतों के उत्तर में स्थित है। इस भार में शोतमाल में इतनी अधिक ठण्डक पडती है कि पृथ्वी वर्फ से ढकी रहती है। ग्रीष्म ऋतु में गर्मी अधिक नही पडतो, फिर भी बफ पिघल जाती है। गर्मियों में यहाँ पर थोडी सो वर्षा भी हो जाती है। -स्टेप्स के जलवायुवाला प्रदेश, यह भाग मध्यवती पर्वतश्रेणिया के पश्चिम में स्थित है, अर्थात् इस भार म साइबेरिया के दक्षिण-पश्चिमी निचले मैदान पाते हैं। इन भागो में शग्टु जलवायु ऋतु में अत्यधिक मर्दो और गमियों में अत्यन्त गर्मी पड़ती है। वर्षा केवल गमिया म, और यह भी बहुत थोडो-सी, होती है। टुन्डा-धापटिक महासागर के किनार का जलवायु- इसमे साइबेरिया का प्राकटिक महासागर के किनारेवाला भाग शामिल है। यहाँ पर लगभग ९ महाने अत्यन्त शीत पडता है और बर्फ को मोटो तह से जमीन ढक जाती है। नदियों का जल जम जाता है। गमिया में यहाँ बहुत ही थोडी गर्मी पड़तो है और प्रोप्म-यतु बहुत छोटी होती है। गमियों के दिन बहुत लम्बे होते हैं और रात बहुत छाटी होती है। इसके ठीक विपरीत, खाड़ों में दिन बहुत छोटा होता और रात बहुत बडी होती है। प्रश्न २-जलवायु से क्या तात्पर्य है। तुम्हारे नगर का जलवायु कैसा है। उसरा कुछ बयान करो। .२ मचूरिया के जलवायु से इंडोचीन के जलवायु की तुलना करो और अन्तर का कारण बतायो। ३----मानसूनी प्रदेश में वेवत गर्मी में र्पा क्यों होती है । r-मध्य एशिया के पठार का जलवायु शुष्क क्यों हैं ? ५.--चीन और तुपिस्तान के जलवायु में क्या अन्तर है और क्यों। ६-अरब के पठार में वर्षा क्यों नहीं होती! श्रभ्यास २-एशिया का नक्शा सींचकर छोटे छोटे वीरों के द्वारा ग्रीष्म ऋतु को सानो का रुख दिसलायो। १-उसी साये में जलवायु के हिसाब से एशिया पो मिन भिन्न भागों में शादी और प्रत्येक भाग में वहां के जलवायु का नाम लिखो।
छठा प्रकरण
वनस्पति
तुमने देखा होगा कि वषा ऋतु म जब पानी बरसता है, इस
बरफ हरी हरी घास दिग्माई देतो है, किन्तु मई, जून के महीने
हारयाला का कहीं नाम भो नहीं होता। अदि तुमसे पूछा जाय
कि मई और जून के महीनो में घास क्यो नहीं उगती तो तुर
तुरन्त उत्तर दोगे कि उन महीनों में गर्मो बहुत पड़ती है और
पानी नही बरसता। इससे मालूम हुआ कि पानी ही के बरसन
म धास-पौधे उगते हैं। तुमने वर्षा ऋतु में नदी के किनारे
गेतीले भाग या पथरीली जमीन भी देखी होगो, जहाँ पानी
परसने पर भी घाम चा पौधे फम उगते हैं। क्या तुम
इसका कारण जानते हो? बात यह है कि धास-पौधो के
उगने के लिए अच्छी पामीन अत्यन्त आवश्यक है, पथरीली
लमीन या बाल के अन्दर पौधों को जड़ें नही फैलतों। इसी
प्रकार यदि तुम किसी बहुत ठडे देश में गये होगे वो तुमने
ग होगा कि वहाँ पेड़ या पौधे सर्दी की अधिकता के कारण
नहीं बढते, क्योकि उनक बढने के लिए गर्मा को भो आव
एयकता होती है। अब तुमको ज्ञात हो गया होगा कि पेड और
पौधों के बढने के लिए वर्धा, अच्छी मिट्टी और गर्मा की
अत्यन्त आवश्यकता होती है। जब तक किसी स्थान पर है
तोनों चीज अच्छी तरह न पाई जायेंगो, पेड़-पौधे अच्छा
सरह नहीं बढ सकते। यही कारण है कि जिन स्थानों पर
वर्ष भर पानी बरसता है और गर्मो भी अधिक पडतो है,
यहाँ अधिक जङ्गल पाये जाते हैं, और उन जगलों में सर्वे
५२
।
चनस्पति । पड़े और घने पेड होते हैं। परन्तु जिन स्थानों पर वर्ष के किसी भाग में थाडा-सो वा हा जातो है वहाँ वा मृतु में घास वो शीघ्र ही उग आती है किन्तु बडे बड़े पेड नहीं हो सकते। ऐसे प्रदेश को घाम मा शुष्क-ऋतु मे सूम जाती है। ऐसे प्रदेश में यदि पेड लगाय जात हे ता उनके सोंचन की भी अत्यधिक आवश्यकता हातो है। सिचाइ के विना वे शुष्क तु में शीघ्र ही मुरमा जाते हैं। इन्हीं सब बातों से हम कह सस्ते हैं कि किसी स्थान की वनस्पति वहाँ के जलवायु पर निभर है। घने जगल उन्हों स्थानों पर पाये जायेंगेजहाँ वषा अधिक हागो। घास के मैदान उन्हों स्थानो पर होंगे जहाँ यो साल के नवल एक मौसिम में होती है। इसी से शुष्क पोर मरुस्थली प्रदेशों मे ऊँटक्दारा इत्यादि पाये जाते हैं। इससे पहलवाले पाठ म तुम एशिया के भिन्न भिन्न जल- घायु का वर्णन पढ चुके हो। इससे समझ सकते हो कि जिस प्रकार एशिया के भिन्न भिन्न भागों का जलवायु भिन्न है उसी तरह पनरपति भी भिन्न होगी। मनुष्यों तथा पशुओ की जीवन-यात्रा पनस्पति पर हो निर्भर है, इसलिए हम अगल पाठ में यह मी पतलायगे कि इन भिन्न भिन्न भागो में कौन-कौन से सास जीव पाये जाते है और वहाँ मनुष्य का जीवन कैसा है। एशिया में वनस्पति-विभाग पनस्पति के अनुसार भी एशिया के उतने ही माग होग, जितने हमने इससे पहले के पाठ में जलवायु के अनुसार पवलाये हैं। इसलिए तुम्हें इससे पहले के पाठ को, जिसमें एशिया का जलवायु विभाग दिया गया है, दोहरा लेना चाहिए, और उसके बाद वनस्पति-विभाग का पाठ प्रारम्भ करना चाहिए। इस पाठ हम प्रत्येक भाग की वनस्पति के साथ साथ वहाँ के मनुष्यों तथा जीव-जन्तुओं को रहन-सहन का भी पुल हाव पवलायेंगे। .
SEMLDESERT MONSOON FORE
५४
एशिया का प्रारम्भिक भूगोल
१-उष्ण कटिबन्ध के घने वन-इस भाग में वर्ष भर गर्मी
पडती और वर्षा भो अधिक होती है। इसलिए यहाँ घने जद्गन
बहुत अधिक पाये जाते हैं। यहाँ के पेड़ अधिक ऊँचे, घड़
और पत्तियों से लदे होते हैं और वे इतने धने होते हैं कि सूर्य
की फिरण उनस छनपर पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाती।
जीव-जन्तु यहाँ के वनो में बन्दर, हाथी तथा कई प्रकार के
दूसरे शिफारी जानवर भी रहा परते हैं। बडी जातिवाले ब्रह
रोले सर्प भी बहुत अधिक पाये जाते हैं। नदियों में मगर,
मछलियाँ और घड़ियाल बहुत होते हैं। इस भाग में कीडे-मकोड़े,
UNDRA
TEMPERATE FORESTS
GRASS
.ANDS
GRASS
ILAND
STEMPERAT
SHOT DESERT &
DESERT
AND FÉMI DESERT
ឧបគឺ
UATORIAL FOREST
Aslu-Natural Vegetation
मच्छड़ और पिम्सू इतन ज्यादा पाये जाते हैं कि यहां के
निवासी पानी में लट्टे गाडर उन पर अपने रहने के लिए
घनस्पति मकान बनाते हैं। कोई कोई तो पेड़ की शाखाओं पर हो मकान चना लेते हैं। निवासी इस भाग मे तटीय मैदानो को रेत और नम पृथ्वी पर नारियल के वृक्ष अधिकता से पाये जाते हैं। कहीं कहीं मनुष्यों ने यनों को साफ कर दिया है और उन स्थानो पर धान और गन्ने को सेतो का है, और मसालों के बाग लगाये हैं। २-मानसूनी देश की वनस्पति-इस भाग म जिन स्थानों पर अधिकता स वर्षा होती है वहाँ घने वन पाये जाते हैं। सास फर यहाँ के पहाडो को घाटियो पर बहुत घने जगल हैं। इन जंगला के सागौन के पेड बहुत प्रसिद्ध है। यहाँ के पवतों और ऊँचे ढालों पर, जहाँ ठडक अधिक पडती है, देवदार और चीड की भौति के दूसरे पेड़ पाये जाते हैं । देवदार और चाड की किस्म के पेड केवल उन स्थानो पर होते हैं जहाँ का जलवायु ठडा हाता है। मानसूनी प्रदेशों में प्रत्येक स्थान पर बाँस पाया जाता है जो बहुत उपयोगी होता है । चोन में शहतूत ओर कपूर के पेड अधिक हैं। रेशम के कीडे शहतूत के पेडा पर हो पाले जाते हैं। यहाँ को सास पैदावार चायल है। इससे लाग बहुधा चावल से ही निर्वाह मो करते हैं। इस भाग के जिन मैदाना म वषा अधिक नहीं होती वहाँ के पेड एक दुसरे से दूर दूर पर होते हैं, किन्तु मानसूनी भाग के उत्तरी और पश्चिमो किनारों पर, जहाँ वर्षा और भी फम होती है, जैसे उत्तरी चीन, मरिया पोर पजार इत्यादि, षहाँ जङ्गल को जगह घास के मैदान पाय जाते हैं। इन स्थानों पर चावल की पैदावार नहीं हो सकनो, किन्तु गेहूँ, जो बाजरा इत्यादि सूर अच्छी तरह पैदा होत हे जीव-जन्तु मानसूनो वनो में प्राय वे हो जोय होते है जा उष्ण फदिवन्य में पाये जाते हैं। यहाँ के खुन और हरे मैदानों पर गाय-बैल मेड-बकरो और हिरन पाये जाते हैं। ।
Soblo Fox Menk Ermine Oxer Deor Antalopes 8Aeep Raino Creo Monkey Pak Wild 4 Poultry Bngiss kilus 40000 1200 1000 Reardeer Eskimo Doge Fiel w Rivera EUROPE Squirrel Bear kot Silkworm Heree Collle Calla Camel Goats wild florse Page प्रकार की वनस्पति पाई जा सकती है। यहाँ गर्मो की ऋतु में माग के जलवायु को ध्यान में रख कर अनुमान करो कि यहाँ किस ३-मध्यवर्ती पहाहो के रेगिस्तानो को वनस्पति-इस Stork Bullalo इससे यह भाग घना आवाद है। निवासी-इस भाग क निवासियो का सास पेशा खेवी है। एशिया का प्रारम्भिक भूगोल Sheer Boar Cormoran Leopard Hyena Mild Horse Sheep 104 .... Lion Horsa OCamol Lion Dullalo Turllas Tigar Blephant Leopardi sreko suchey Aala Blephanl Boundary Camel
घनस्पति
केवल थोडे से दिनो में भी, बहुत कम पौधे हरे रहते हैं। इस
माग में पेड बिलकुल नहीं होते। हाँ, घाटियों के बीच चरागाह
मिलते हैं और उन्हों स्थानो पर सेती मो होती है। इन स्थानो पर
पहुधा मटर को खेती होती है और कहीं कहीं पर फलवाले पर
मी पाये जाते हैं।
जीव-जन्तु-इस भाग में जानवर बहुत कम पाये जाते है।
पहाँ एक सास तरह का बैल होता है, जिसके बाल लम्बे और
झल्बेदार होते हैं । इसका नाम याक है। यहाँ बोझ लादने का
काम याक और पहाड़ी टट्टू से लिया जाता है। इनके अतिरिक्त
मेड और बकरियों भो पालो जाती है। इस भाग में जगली भेट
और बकरियाँ भी पाई जाती हैं और रीछ, भेड़िये आदि कुछ
बगली जानवर भी होते हैं।
निवासी-जिन स्थानो पर कुछ सेती हो सकती है, वही
गांव भी बसे हैं, किन्तु यहाँ के निवासी अधिकतर खाना-बदोश
है और अपने बैल, भेड और चकरिया की खूराक की खोज में
एक चरागाह से दूसरे चरागाह में फिरते रहते हैं।
४-पश्चिम के गर्म रेगिस्तानो की नस्पति-इस भाग में
फाड मग्माड के सिवा कुछ नहीं उगता । इस भाग में जहाँ
कही थोडा-सा पानी है वहो एक गाँव बसा हुआ है। उसमें
खजूर के हरे पेड और कुछ खेती भी दीस पडती है। यहां के
इन उपजाऊ भागो को नलिस्तान (Oasis) कहते हैं।
जीव-जन्तु-इन गर्म रेगिस्तानो में जीव-जन्तु बहुत कम
होते हैं। बोझ लादनेवाले जानवरों में यहाँ उँट अधिक पाय
माते हैं और अरब के घोड़े भो प्रसिद्ध हैं।
निवासी-रेगिस्तानी मुल्को में आबादी बहुत कम होती है
स्वल नसलिस्तानों में थोडे-से निवासी स्थायी रूप से घर बना-
- कर रहत हैं, नहीं वा अधिकतर यहाँ के लोग एमा में रहत पार
W एशिया का प्रारम्भिक भूगोल अपने जानवरों के चरागाह की सोज में एक स्थान से दूसरे स्थान में फिरा करते हैं । जैसे विलाचिस्तान के बहुत-से निवासी सिन्ध प्रान्त में चले जाते है और शीतकाल बीत जाने तथा ग्रीष्म स्तु प्रारम्भ होने पर लौट आते है। रेगिस्तानी के निवासियों को मुख्य भोजन रमज़र और ऊँटनी का दूध है । रेगिस्तानो के किनारों पर जो भाग फारस व एशियाई कोचक (अनाटोलिया) में स्थित है, उनमें कुछ वर्षा होती है। इसलिए वहाँ के निवासी कुछ सेती फरते हैं और उन स्थानो पर गाँव और छोटे शहर बसे हैं। ५-स्टेप्स की वनस्पति-तुम स्टेप्स का अर्थ जानते हो। यह शब्द रूसी भापा फा है, जिसका अर्थ है "विना पेडा का शुष्क मैदान" यह देश अरब और ईरान के गर्म रेगिस्तान के उत्तर में स्थित है। यहाँ ग्रीष्म ऋतु बहुत छोटी होती है। गमियाँ में, जव जाडे की बर्फ गल जाती है तर, मिट्टी में मिले हुए घास के पोज फूटने लगते हैं और यह देश मुन्दर हरी हरी धासो से जल्द हो हरा भरा हो जाता है और फूलों से सज उठता है। किन्तु शीतकाल की कठिन सर्दी और योप्म-मृतु की अत्यन्त गर्मों के कारण यहाँ के पौधे बहुत जल्द मुझो जाते हैं । जाडे भर हरियाली का कहो चिह्न तक नहीं रहता। बडे पेड ता यहाँ नाम का भी नहीं दिसाई देते। यदि कुछ पेड उगे भो, तो वे साल भर से अधिक जीवित नहीं रहते। इसका कारण यह है कि या तो वे सूर्य की गर्मी से मुनस उठते हैं या पाले से मुरमा जाते हैं। हाँ, जहाँ कहीं पानी के सोते हैं वहाँ थोड़ी-बहुत सेती होती है, परन्तु ऐसे भाग बहुत कम है। जीव-जन्तु इस माग में अधिकतर पालत जानवर जैसे ऊँट, पाड़े, भेट, पकरी श्रादि होते हैं। ये हो जानवर यहाँ के निवासियों की कुल सम्पत्ति हैं।
यनस्पति
५९
निवासी यहां के निवासी भा सानारदोश घरवाह है।
ये लोग सेमी में रहते और भेड़ बरी आदि जानवर पालते
है। उनको अपने साथ लिये हुए ये लोग चरागाह की खोज में
एक जगह से दूसरी जगह को फिरा करते हैं। य अपने जानवरों
1
POPULATION
Over Oper an mil
12543 rer iq milel
2515pcgm tel
2 pet om le
under 2 pes & mule
(Map Showing Distribution of Population in Asia)
को जाडे में दुम्मिन के मैदानों में घराते हैं और जब जाडा समाप्त
हो जाता है तथा बर्फ गलने लगती है तत्र उत्तर के मैदानों में
जाकर उन्हें चराते हैं। जाडे के दिनों में यहाँ के निवासियों का
प्रत्येक समूह अपनी घाटी में इकट्ठा हो जाता है। वे लोग अपने
जानवरों के गिरोह को भी ले आते हैं। यहाँ जो सुखो हुई घास
.
एशिया का प्रारम्भिक भूगोल
गमियों में जमा की जाती है, उस जानवरों को खिलाते और
पाटी का पाना पिलाते हैं। यहां के निवासी अधिकतर दूध,
मम्सन, मट्ठा और मास पर निर्वाह करते हैं और रहने के लिए
स्वाल और ऊन के खमे बनाते हैं।
६--रूम सागर के पिनारे की वनस्पति-किनारे के समीप
की जलवायु फलों को उपज के लिए बहुत अनुकूल है,
इसलिए यह भाग जतन, बजार नारगी, खूबानी तथा भगूर की
उपज के लिए अधिक प्रसिद्ध है। यहाँ जौ, गेहूँ इत्यादि कई प्रकार
नाजो ओर तम्बाकू को सेतो हाता है। किनारे के समीप पर्वतो
पर छोटे छोटे पेडो के वन दिखाई देते हैं। जितना ही भीतर
प्रवेश करते हैं उतनी ही वर्षा कम हाती जाती है, यहाँ तक कि
अन्त में स्टेप्स या रेगिस्तान शुरू हो जाता है।
जीव-जन्तु-यहाँ पालतू जानवरों में भेड-बकरियाँ बहुव
पाली जाता है। इनके बालों से ऊनी कपड़े बनाये जाते हैं। यहाँ
के भीतरो भागों के जगलो ओर पहाड़ियों पर जगली जानवर
पाये जाते हैं।
निवासी-इस भाग के लोग श्राघवतर रोती करते हैं। यहाँ
गांव और शहर दोनो बसे है। यहाँ के भीतरी भाग के लोग
स्टेप्म और रेगिस्तानो के निवासियों की तरह समों में रहते हैं।
७- समशीतोष्ण कटिबन्ध के वन-यह टुन्ड्रा के दक्मिन
में एक बडे चौडे वन का प्रदेश ६ । जगल न केवल योरप तक
पल्कि उत्तरी अमरीका तक चला गया है, इसलिए इसको शीताप्ण
फटिबन्ध के वन (Temperate forest belt) कहत हैं। यहाँ
ॐ वना के पेड़ दो प्रकार में है। पहले प्रकार के पेड़
माल भर पत्तो से ढरे रहते हैं। उन्हें मदावहार पेड़ कहत हैं।
दूसरे प्रकार के पेड केवल मिया में हरे भरे रहते है।
जाडे में उनके पत्ते गिर जात है। पहल प्रकार के पेद इस
पनम्पति रदेश के उत्तर में और दूसर प्रकार के इस प्रदेश में दरियन में गये जात है। यहा कातणा भार म, जिन स्थाना पर धन हाटकर खेत यनाये गये हैं यहो, गरे पद्रत पैदा हाता है। जाव-जन्तु--इन पनों में अधिस्तर जगली जानवर पाये जात है। साइरिया के पना में अत्यन्न शात पहने के कारण इन जानवरों के ऊपर बहुत सुदर समूर होता है। यह इता मुल्य- पान होता है कि ऐपल मगर न हो लिए उन जानवरों का शिकार किया जाता है। समरयाले जानवरो म रोक, लामडी और एक प्रकार की बड़ी गिलहरी है। इन जानवरों के ममूर से पने हुए फोट और लपादे यारप तथा अमरीका के शहरों में बढ़े दामों पर विकते हैं। नियासी-इस जगलो देश के निवासी अधिकतर गांवों में रहते हैं। इनके लवडी के मकान नदिया के किनारे खुला हुई बगह पर होत हैं। ये लाग पुछ जानवर भी पालव हैं और अपने नियाद के लिए जानवरों और मछलिया का शिकार करते हैं। ८-टुन्ड्रा की वनस्पति-इस भाग को भूमि शातकाल में पफ से बिलकुल ढको रहती है, केवल मोम फी छोटो ऋतु में यहाँ कुछ पौधे दिसलाई देते हैं। धर्फ के ग्लन और नदियों की बाद मे इस बड़े मैदान में बहुत दूर तक दुलदा रहता है। इस दलदल के धरातल पर काई जम जाती है और रंग-बिरंगे फूल ग आते हैं। इस कारण इसको टुन्ड्रा (Tundra) कहत हैं। दुन्द्रा यूनानी भाषा का शब्द है, जिसका अथ है "फाईवाला एलदली मैदान"। यहाँ गर्मी को छोटी ऋतु के सिवा साल भर परावल यफ से ढका रहता है। ऐसी दशा में यहाँ पेड बिलकुल महों ! सस्ते। यहां गर्मा में अनाज भी नहो वाया जाता, स्योंकि उसक पकने के लिए काफी समय नहीं रहता।
A - हेल व एशिया का प्रारम्भिक भूगोल जीव-जन्तु-वनस्पति क फम होने के कारण यहाँ मी प्रकृति के अनुसार कम होते हैं। साधारण रूप स पर पारहसिंगा या रेनडियर (Reindeer) होते हैं और ये भो गर्मो को ऋतु में रह सकते हैं। ग्रीष्म-ऋतु में यहाँ काई होती है जिसको ये जानवर हुत पसन्द करते हैं। जाई, ये दक्षिण को 'प्रोर चले जाते हैं। यहाँ माद रीब लोमडियां पाई जाती हैं। लोर ऊन ओर घालदार साल लिए उनका शिकार करते हैं। उत्तरी महासागर सोल मडलियां भी पाई जाती हैं। इस भाग फी नदियों मछलियाँ बहुत होती हैं। निनासो-तुम स्वय समझ सकते हो कि इस देश में | थादमी साल भर नही रह सकता । इमी कारण यहाँ बहुत । लोग पाये जाते है और जो थोडे-से लोग है भी वे सात पदोश हे। जाडा प्रारम्भ हाने पर ये लोग अपने बारहमि को लेकर दक्षिण को राह लत हैं और फिर गर्मो म बारहसि की सेज मे उत्तर का आर चले श्राते हैं। ये लोग बारहसि को अपो भोजन के लिए और अधिक्तर अपने ग्ल्लो के पद के लिए पकडत हैं। प्राय इन लोगो का जीवन-निर्वाह के माम पर ही निभर है, यानो या तो ये लोग मछलो पाते हैं 'चारहसिंगे का मास । केनल पालतू बारहसिंगे ही इन लोगो पूंजी हैं। यहो जानवर वर्फ पर इनको गाडियाँ खींचते हैं । इनके भोजन के लिए मास तथा दूध इकट्ठा करते हैं। इन ग्वालों से ये लोग अपने कपड़े, सेमे प्रोर फम्बल बनाते छ इनको हड़ियों के हथियार बनाते हैं। साराश यह कि टुन्डा के लोर केवल शिकारी है या । और मल्लाह दोनों है। समुद्र के धरातल पर जमो हुई का --
बनम्पति
शादी तह में छेद करस मील मदली का परड़ना इनकी
मामा का मनृत।
प्रशा
१-पड़ी तथा पौधों के उगने शोर यठो के लिए फिन फिन बलमों
को ग्रावश्यक्ता होती है।
---गाल को हरा भूत में तुम्हारे शहर या गांव में रोत माली
पड़े रहते हैं।
3-किम ऋतु में किसान गेत जोतते-बोते हैं और क्यों ?
४-शुक गमा की ऋतु में पास क्यों यहां उगती ?
५-यड़े पद शुष्क गर्मी की शुतु में क्यों नहा सूप जाते !
६---नदी किनारे की भूमि क्यो अाधक उपजाऊ होती है ?
७- पहाट के दालों पर रोती-यारी क्यो नहीं होती ?
८-नाधक ठण्डे देशों में जैसी वनस्पति होती है। यहाँ किस प्रकार
के जानवर जीवित रह सकते है ! कारण सहित यह भी बताना
कि यहां के बहुत ही यो निवासयो का क्या उद्यम है ?
९.-उप्प काटन्ध पे पो का कुछ हाल लिखा। पाम मे लाई
जानेवाली कौन-सी फसलें यहाँ पाई जाती है ?
१०-मानसूनी प्रदेश में किस प्रकार की वास्पति पाई जाती है और
किन किन भागो में यहां के सिसियों का मुख्य उद्यम
क्या है ? यहाँ कौन से जानवर पाये जाते हैं !
११-मध्यवती रेगिस्तानो चारो श्रार पर्वतो ये स्थित होने से
भीतर के वेसिनो ये जलवायु पर कौन-सा असर पड़ा?
१२-स्टेप्स के मैदान के लोगो को दिनचया वर्णन करो।
१३.-रूम सागर कनारे क देशो का जलवायु कैमा है। यहां की
वनस्पति का कुछ हाल दिसो।
१४-समशीतोष्ण कादबन्ध के पन कहाँ स्थित है ? यहाँ क वनो में
तथा गम और नम देशो के जगला में क्या अंतर है।
.
सातवॉ प्रकरण एशिया के देशों का हाल पशिया में विपुगत् रेखा के पास का भाग Shise पूर्वी द्वीपसमूह या मसाले का टापू (Dast Indies Islands)-समुद्र के दक्षिण-पूर्व में टापुत्रा की एक बहुत बड़ी घेणी प्रास्ट्रलिया तक फैली हुई है। इन टापुत्रो में वोनियो और सुमात्रा (Borneo and Sumatra) सबसे बड़े टापू है। परन्तु जावा (Java) टापू इन टापुत्रो में सबसे अधिक प्रसिद्ध है और सैलीवोस (Oolehes) और मलाफा (Afoluecas Islands) मी बहुत प्रसिद्ध टापू हैं। अपने नकाशे से इन टापुथो के नाम मालूम करा। इन टापुओ का अधिकतर माग पहाडी है। प्राय इन सब टापुओं में, रसासर सुमात्रा, जावा और योनियों में, बहुत-से ज्यालामुसी पर्वत पाये जाते हैं, जिनके कारण इनमें मूडोल पाया करते हैं। कभा कभी ये पहाड फट जाते हैं और इनसे अग्नि-वर्षा होती है। सुगाना और जागा टापुत्रा के बीच । में सहा जलडमरूमध्य है। सन् १९८३ ई० में काकाटोश्रा (Krakatos) टापु में, जो मडा जलडमरूम य में है, जाला' मुसी स ऐसा भयानक उद्गार हुआ जैसा दुनिया में कभी नहीं हुआ था। इस उद्गार मे यह टाप ताप के गोले को मॉति उड़ गया और उसको आवाज कई मो मोल तक सुनाई पड़ी। आस-पास के टापुओं के जगल रास और जलते हुए ६४ 1
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६५ एशिया के देशों का हाल पत्थरों से दब गये। भासमान के चारो ओर इसकी गर छा जाने के कारण इस टापू से मो माल की दूरी तक बिलकुल अंधेरा हो गया। दापू के उडने मे समुद्र की लहरें इतन्गे उँचा उठों कि आस पास के टापुओ के सैकडो गाँस ओर शहर निलकुल ववाह हो गये । समुद्र मे जो जहाज चल रहे थ, बोतल के वाग की भौति चकर साने ओर उछलने लगे। इसका भयानक शब्द हिन्दुस्तान, चीन और पास्ट्रेलिया में भी धीरे से मुनाई पड़ा था। नशे में ध्यान से देखा कि इस द्वीपसमूह को विपुत् रेखा लगभग दो बराबर भागो में काटती है, इसलिए ये टापू दुनिया के उन भागो में हैं जहाँ साल भर तक गर्मी पडती है। केवल यहाँ के पहाडों को ऊँचो ऊँची चोटियों सर्द रहती है। यहाँ पर साल भर बराबर वर्षा अधिक होती है। इसी से इन बापुत्रो के अधिकतर भाग में घने जङ्गल हैं। ये जगल सास कर पहाड़ों के ढालो पर पाये जाते हैं। भूमध्य रेखा पर स्थित देशों में इतने घने जङ्गल हाने हैं कि पेडों को ऊँची शासाएँ और धनी पत्तियाँ एक दूसरी से उलझ जातो हैं। इसी कारण सूरज की रोशनो पृषी पर नहीं पहुँचतो ओर पेडा के तले सदा श्रधेरा- सा रहता है। इन पेडा को जडा के पास बहुत सो लताएं उगती हैं जो पेड़ा पर चह र एक पेड स दूसर पेड तक पहुँच जाती हैं। इन लतामा की लम्बी लम्मो जनीचे की तरफ रस्सियो की भाँति लटका करती हैं। इन जगहा के पेड बहुत ऊँचे होते हैं और उन पर रग विरङ्गे फूल खिलते हैं, जिन पर हजारों तितलियाँ उडा करतो हैं। इन पर हजारों किस्म के अच्छे और सुन्दर रन के पक्षी चहचहात हैं। इसके अतिरिक्त कई तरह के सांप और बन्दर भी रहत हैं, जो एक डालो पर से दूसरी डाली पर उछलत योर फूदते हैं। मच्छडा को तरह के करोडों प्रकार के विले कीड़े-मोडे गीली जमीन में पैदा होते हैं। । 1- , pritrato XX HONG KONG Coat Gold Rubber Tobacco Spices Coffge GUAN 880669 And boy PHILIPPINE IS đó. MANIL Singapore Manila hero 45 London Hong 3690 m YAP PA с F Trallaces Iine 3 C pur BRUNEXOSV Horn एशिया का प्रारम्भिक भूगाल HUCM ocЕ А N PADANG Colombo Dalam gon MOCASSAR 37nya ors Cinta INDIAN sday? KUPANG OCEAN THURSDAY SDAY PAMOFESSY "asada East Indies, एशिया के देशो का हाल वर्षा अधिक होने से यहाँ के निचले मैदाना में चौड़ी और छिटलो नदिया तथा दलदल पैदा हो गये है। प्रतिदिन दोपहर के बाद वर्षा होने के कारण ये दलदल भी सूसने नहीं पाते । यहाँ की नदियाँ चौडो और छिछली हैं। इन नदियो पोर दलदलों में बहुत से कष्ट देनेवाले जानवर, जैसे मगर-मच्छ और घडियाल बादि पाये जाते हैं। जगला स घिरे हाने के कारण इन टापुओ को अावादी बहुत कम है, परन्तु समुद्रो किनारे पर, जहाँ लोग उस गये हैं वहाँ, खेती होतो और उपज भो अच्छी होती है। यहाँ की मुख्य उपज मसाले, चायल, मका, गन्ना, सहया, चाय, तम्बाकू और रवर है। य सब वस्तुणे यहाँ से दूसरे लेशा को भी भेजी जाती है। जगलो में अभा तक एक जगह से दूसरी जगह धूमन फिरनेवाले सानाबदोश लाग हैं। इन लोगो को अनायाम क्ला, नारियल और माबूदाना इत्यादि बहुत सी यान पोन को वस्तुएँ मिल जाती हैं। उत्तरी बोनिया और फिलिपाइन टापूका छोड कर ये मब टापू डच लोगो के अधिकार में हैं। डच लोग योरप के एक छोटे से देश हालेड के निवासी हैं। कई सो वर्ष हुए, मसाले लेन के लिए ये लोग इन टापुश्रो म आये और इन पर न्हाने अधि- कार स्थापित कर लिया। इन टापुआ म जावा का टापू सबसे प्रसिद्ध ओर बहुत धना यसा है। टच लोगा के सुप्रवन्ध स प्स टापृ के लोग बहुत परिश्रमी किमान बन गये हैं। कहा के परिश्रम से इन टापुओं में गन्ना, चावल, रहवा, चाय योर सिनकोना आदि की पैदावार अधिक होती है। ये चीजें बटाविया (Batarna) और सुसारया (Surabra) के अन्तरगाहों में, जो यहाँ के मुख्य नगर 1 -
६८
एशिया का प्रारम्भिक भूगोल
है, दूसरे देशों को भजो जाती है। हिन्दुस्तान में दूसरे देशों से
जितनो शकर आती है वह प्राय मरको सर जाया से श्रावों है।
इन टापुत्रों में रबर की सेती अधिक होती है। सिनकोना से
-
।
Prer
-
This is a canal in Batavın, tlic capital of Jarr
कुनैन बनतो हे जा मलरिया ज्वर को एक उत्तम प्रोपधि है।
दुनिया में जितनी कुनैन उपयोग में प्राती है वह सब लगभग
जावा से हो पाती है। मलाका (Molueens) और सैलोवीस
(Celches) टाप में गरम मसाले अधिक पैदा होते और दूसरे
देशा को भेजे जाते हैं।
योनियो का उत्तरी माग अँगरेजों के अधिकार में है।'
सरावक (Strawak) एक रियासत है। वहाँ मा राजा एक
अंगरेज है। फिलिपाइन टापु अमरीका के अधीन रहा परन्तु
सन् १९३३ ई० म यह सतत्र बना दिया गया। वही तम्बाकू, सन,
ला और बत अधिक पैदा
हाता । तम्बाकू से चुरुट और
र बनते हैं और सन से कागज को दक्ती तथा रस्मियाँ
$
शिया के देशों का हाल पनाई जाती है। मनीला (Manilla) इसका मुख्य नगर और राजधानी है। यहीं से ये चीज़ बाहर भेजी जाती है। Asia-Principal areas of Rubber Plantation योनियो (Borneo) का अधिकतर भाग पहाड़ों और जंग से ढका हुआ है। किनारे पर किसी किसो जगह सेती होती है। यहाँ को मुख्य चीज़, जो दूसरे देशो को भेजी जाती है, साचू दाना है। साबूदाना ताड जैसे एक सास किस्म के पेड के गूदे से निकाला जाता है। इसके पेड़ो का काटकर तने के बीच से चीर- फर अन्दर का गूदा निकाल लते हैं, फिर उस गूदे के पतले पतले टुकडे करके एक हैाज में डाल देते हैं। *सके बाद हैाज में थोडा सा पाना डालकर रौंदने हैं। अच्छी तरह रौंदने पर उस गूदे से सफेद रन के दाने निकलकर हाल के नीचे की
र्णशया का प्रारम्भिक भूगाल
छलनी-द्वारा बाहर निकल आते हैं। फिर उन दानो को घोरर
सुसा देते है और वोरो में भर कर जहाज-द्वारा दूसरे देशो में
भैज देते हैं। बोमारो म जो साबूदाना तुम साते हो वह यही है
और इसी जगह से आता है।
द्वीपसमूह के निवासी, भूमि की नमी के कारण, अपने मकान
लकडियो के बनाते हैं। ये मकान पृथ्वी से कई गज ऊँच
लट्ठों पर बनते हैं। पहले पृथ्वी में तट्टे गाड दिये जाते हैं। उन
लट्ठों पर इनके मकान होते हैं। मकान के सामने लकडी का
एक छज्जा होता है, जिस पर जमीन से, लफली या रस्सी को
सीढी के द्वारा, चढते और उतरते हैं। ये मकान इतने बडे बनाय
जात हैं कि इनमें पचास साठ श्रादमी रह सकें । 'यहाँ की
स्त्रियाँ वान काटतो, माना बनाती और कपडे धुनती है, पोर
पुरुप मछली पकडने के जाल बनाते, सेत जोतत और
घोते हैं और शिकार के लिए तलवार-और तीर-कमान
बनाते हैं।
यहाँ के निवासियो का मुख्य भोजन चावल, नारियल, कला
साबूदाना, शिकार किये हुए जानवर और मछली आदि है
ये लोग कपडे कम पहनते हैं, क्योकि यहाँ गर्मा बहुर
पड़ती है।
मलाया प्रायद्वीप (Halay Peninsuln)-यहाँ का जल
वायु, पैदावार, लोगो की रहन सहन ओर व्यवसाय पास क
टापुओ का-सा है। इस प्रायद्वीप का दक्षिणी भाग अँगरेजा
अधिकार में है और इसको स्ट्रेट सेटिलमेन्ट (Strait
Settlements) कहते हैं। यहाँ के जगल प्राधकतर रबर के
उपज के लिए प्रमिद्ध है। दुनिया में जितना ग्यर खच होता है
लगभग उसमा भाग मलाया प्रायद्वीप और पूर्या द्वोपमम
से पाता है।
। । एशिया रे मेतों या न रपर प्राज-पल यात अधिक काम में लाया जाता है। मोटर और वाईसिफिल के टायर रवर ही के पना है। पुट- बाल ये अन्दर का भाग, गरम पानी रमन के लिए थैलियां, जूतों के सल्त और मशीना के पट्टे भो इसी से बनते हैं। गाड़ियों के पाहियों पर भी रवर चढाया जाता है । इमक अतिरिक्त सैकड़ो यावश्यक कामों में रबर का उपयोग किया जाता है इस प्रायद्वीप पा दक्षिणी भाग टोन की चानो पे लिए बहुत प्रसिद्ध हो गया है। यान के भीतर स मिट्टी में मिला टुमा टीन निकलता है। मिट्टी साफ करने के बाद गलाकर उसके पत्र बनाये जाते । दुनिया में जितना टीन लगता है उसका आधा यही का होता है । यहाँ का मुख्य शहर सिगापुर (Singepore) है। यह शहर इस प्रायद्वीप पे निणी मिर के पास एक टापू पर नमा है। यह एक घडा बन्दरगाह भी है । सारी दुनिया रे जहाज यहाँ आकर ठहरते है । यहाँ पर अँगरेजो को जल-सेना मी रहती है। मनाया प्रायद्वीप ओर सरे पूर्वी टापुओ में पैदा होनेवाले ग्यर, ममाले, टीन, शस्कर, कहा, बेंत और अनन्नास वगैरह इकट्ठा करके यहा से रमरे देशो में भेजा जाता है। प्रश्न ---एशिया के पूर्वी द्वीपसमूह पे बड़े टापुत्रों के नाम बताओ! २- ज्वालामुनी पवत किसे कहते हैं। किसी प्वालामुखी परत के पटने और श्राग बरसाने का हाल वर्णन करो। -~-विषुवत रेखा के पास के जगलों के विषय में जो कुछ जानते हो वणन करो। ४-समतल मैदानो में जङ्गलों के नीचे दलदल स्या बन जाते है । ५-इन जङ्गलों में पाये नागाले जीव-जन्तुनों का हाल लिखा।
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एशिया का प्रारम्भिक भूगोल
-पूर्वी द्वीपसमुद्र के निवासियों के जीया निर्गह का मुछ
यतायो ये लोग कैसे कपड़े पहाते, कैसे घरों में रहने और
पाम करते हैं।
र, गना और मसाला पिन किन स्थानों में श्रधिमता से
जाता है।
5-जावा टापू का युछ हाल वर्णन करो।
९-प्रिलिपाइन टापू में क्या क्या लाभदायक चीजें पैदा की जाती है।
१०.-इन रापुश्नों में कौन सा अनाज पैदा किया जाता है और क्यों?
११-सिगापुर एक बडा प्रसिद्ध बन्दरगाह क्या है ?
१२-वर से जितनी यावश्यक वस्तुए यनती है उनके नाम वायो।
।
पाठवाँ प्रकरण मानसूनी हवाओं के देश इस भाग में हिन्दुस्तान, इडाचीन, चीन और जापान के द्वीप म्मिलित है। हिन्दुस्तान का हाल तो तुम पिछलो पुस्तक में हले ही पढ चुके हा। : इंडोचीन (Indo Chuna) घगाल की खाड़ी और पीन सागर के दक्षिणी भाग के बीच एक घडा प्रायद्वीप है। इस यद्वीप का उत्तरी भाग बत्त चौडा है और दतिणी भाग पतला हो गया है। इस भाग का मलाया प्रायद्वीप कहते हैं जिसका हाल तुम पिछो पाठ में पढ़ चुके हा। इसके उत्तरी भाग का नाम डोचीन है। यहाँ मानसुनी हया से पाना बरसता है। इस माग म प्रमा (Burma), स्याम (Slam), श्राम (Annam) और कम्बोडिया ( ambodia) क देश स्थित हैं। ब्रह्मा हिन्दुस्तान का एक भाग है और अँगरेजों के अधी। है। तुम हिन्दुस्तान के भूगोल म इसका हाल भी पढ़ चुके हो। अनाम भोर कम्बोडिया प्रासासियों के अधीन हैं। केवल स्याम एक स्वतन्त्र देश है। इंडाचान में मानसूना श्रावहवा होने के कारण हिन्दस्तान का तरह के मोसिम होत है। यहाँ गर्मों के मोसिम में वर्षा अधिक होती है। अधिकतर पहाडे के ढालों पर इस भाग का जलवायु बनस्पति और यहाँ के निवासियों के व्यवसाय बिलकुल ब्रह्मा के समान है। છરે
-
शिया का प्रारम्भिक भूगोल
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RENCII INDOC
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Marabanki Bangkok
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Mérgūtot composant
Archipelago
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Malacca
Singapores
Indo-China-Physical
मानसुनी हवाओ के देश स्याम (Sham)-इसफा उत्तरी भाग पहाडी प्रदेश है। झडो पर मानसूनी हवायों से वर्षा अधिक होन के कारण यह जग जगलों से ढका है। इन जगलों में मागान और बांस के पेड धिक होते हैं। यहाँ के पहाडी स्थानों से लट्ठ काटकर मीनाम (दो (R Menam) में बहा दिये जाते और येकाक (Bangkok) जमा कर लिये जाते हैं। यहाँ केले के भो बडे बडे जंगल हैं। , इन जगलों में बडे बडे जगली जीव-जन्तु, जैसे हाथी और बडा आदि, पाये जाते हैं। यहाँ सफेद हाथी भी होते हैं, जिन्हें हाँ के बादशाह बहुत आदर के साथ रसते हैं। वास्तव में ये थी सफेद नहीं होते बल्कि इनका रंग और हाथियो से कुछ 'लका होता है, इसलिए इनको सफेद हाथी कहते हैं। इन थियो के शरीर के किसी किसी भाग पर हलके रंग के बडे बडे 'ग भी होते हैं । ब्रह्मा की भाँति स्याम में भी लकडी के शहतोगें को इकट्ठा करने या एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए हाथी पाले जाते हैं। स्याम का अधिक्तर भाग नीचा मैदान है, जो मीनाम नदी की लाई हुई मिट्टी से उपजाऊ बन गया है। यहाँ चावल की सेती खूब होती है । यहाँ के लोगो का मुख्य भोजन चावल ही है। यहाँ चावल आवश्यकता से अधिक पैदा होता है इसलिए वह चीन और दूसरे देशों को भेज दिया जाता है। बैंकाफ (Bangkok) न्याम की राजधानी है। यह एक बडा शहर है और मीनाम नदी के मुहाने स कुछ उपर वसा हुआ है। यहाँ बहुत से लोगों ने नावों पर लकडो के मकान बना लिये हैं और ये नावें एक स्थान -से दूसरे स्थान को जाती हैं। शहर की दूकानें भी इन्हीं किश्तियों के मकानों में हैं। बैंकाक में चावल माफ करने और लकडो चोरने के कई कारगाने हैं।
एशिया का प्रारम्भिक भूगोल
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15
Forests
Rice cultivation
Plantation of rubber,
Vores's and
riccand ,
grazing
Indo Chuna---Products
-
मानसूना हवाओं क दश
स्थाम के निवासी ब्रह्मा के निवासियों को नरह पीली जाति
के हैं और बोद्धमत को मानते हैं
झासीसी स्टाचोन (Fronoh Indo China)-इस देश
को मुख्य नदा मीफाग (Aiokong) है। यह अधिकतर पहाड़ी
भागों से होकर बहती है। इसके मुहाने पर एक चौडा उपजाऊ
मैदान बन गया है। इसका पूणे भाग अनाम (Annam)
पहलाता है और अधिक्तर पहाड़ी है। इन पहाडी के ढाल पर
भी घने जगल हैं।
यहां के निवासियों के गाँव समुद्र के किनारे पर बने हैं जिनमें
अधिकतर मल्लाह रहते हैं। किसी किसी भाग मे चाय, रेशम
और हवा की पैदावार होती है। ये वस्तुएँ दूसरे देशो यो
मेज दी जाती हैं। अनाम का मुख्य नगर हाई (Hinos)
सोनका नदी (R Songka) पर घमा है 'पार यही मारे
फासीसा इंडोचीन की राजधानी है। मीकांग नदी का उपजाऊ
मैदान कम्बोडिया कहलाता है। यहाँ पर पायादो भी अच्छी
है और चावल अधिक पैदा होता है। इस भाग का मुख्य
नगर संगोन (Saugon) है। यह नगर मीपार नदी के डेटा
को एक धार पर है। यहाँ स चायत दुसरे शा। भेजा जाता
है। स्याम और मामीसा डा दास्याना के निवासा, प्रमा
के निवासियों को भांति, पीती जाति के हैं।
प्रश्न
१-पहोचीन में पानी से देश मिले हुए हैं।
२०भदा जगलोंग रायरी धिर पाम में लाने योग्य पेट गया है।
३-होची ये जगलो या पुष वर्णा बरो।
-स्पाम फे सफेद दामी ये विषय में जो कुछ जानते हो, पर्णा
।
एशिया का प्रारम्भिक भूगोल
1
Forests
Rice cultivation
Plantation of rubber
Foress and rice and
grazing
1
Indo Clupa- Products
मारसूना हवाओं का दश
स्याम के निवासी ब्रह्मा के निवासियों को तरह पीली जाति
के हैं और योसमत को मानते हैं।
झासीसा डायोन (French Indo Cuna)-इस देश
की मुरय नदी मीयाग (Alckong) है। यह धिकतर पहाड़ो
मागों से होकर बहती है। इसके मुहाने पर एक चौडा उपजाऊ
मैदा यन गया है। इसका पूर्यो भाग श्रनाम (Annam)
कहलाता है और अधिफ्तर पहाटी है। इन पहाडा के ढाल पर
मी घने जगल हैं।
यहाँ के निवासियों के गाँव समुद्र के किनारे पर बसे हैं जिनमें
अधिकतर ममाह रहते हैं। किसी क्सिी भाग में चाय, रेशम
और महया को पैदावार होती है। ये वस्तुएँ दूसरे देशो को
भेज दी जाती हैं। अनाम का मुरय नगर हनोई (Hanos)
सोनका नदो (R Songha) पर बसा है और यही मारे
भासीसो इंडाचीन की राजधानी है। मीकांग नदी का उपजाऊ
मैदान कम्बोडिया कहलाता है। यहाँ पर श्रावादी भी अच्छो
है और चावल अधिक पैदा होता है। इस माग का मुरय
नगर संगोन (Sangon) है। यह नगर मोकार नदी के डेल्टा
को एक धार पर है। यहाँ से चावल दुसरे दशा को भेजा जाता
है । स्याम और मासोसाटाचीन दो स्थानों के निवासी, ब्रह्मा
क निवासियों को भाँति, पोली जाति के हैं।
२-होचीन में कोर-पौन से देश मिले हुए हैं ।
२- अमा के जगले म सबसे अधिक काम में लाने योग्य पैड क्या है !
२-दोचीन से जंगलों का कुछ वर्णन करो।
४-स्याम के सफेद दायो के विषय में जो कुछ जानते हो, वर्णन करो।
A
.
-
एशिया का प्रारम्भिक भूगोल
1-इडोचीन में नदियों के मैदान और डेल्टा कहाँ कहाँ पर है !
इन स्थानों की मुख्य पेदापार क्या है।
६-बैंकाक कहाँ यसा है और क्या प्रसिद्ध है।
--सिंगापुर एक बडा बन्दरगाह क्या बन गया है।
८-अनाम की आवादी स्याम मे कम क्या है ?
अभ्यास
इसीचीन का एक नाका सौंचकर उसमें बडी नदियाँ, नगर और
मुख्य मुख्य पैदावार दिरालाया।
नवॉ प्रकरण
।
सन्ननिशील जाति के समझे जाते थे, क्योंकि इन लोगों ने उम्म
प्राज-पल दुनिया की मभ्यजातियों में बहुत पीछ रह गये हैं।
इसका स्वयाल अब इन्हें स्वय हो गया है और उन्नतिशील
जातियों का मुकाबला करने के लिए ये कोशिश भी कर रहे है।
किसा हद तक अपनी कोशिशा में उन्हें सफलता भी मिली है।
(२) मरिया (Manchurna), (३) मगोलिया (ifongohs),
चीन का राज्य (Chinese Empire)
दुनिया क सार राज्यो मे चीन के राज्य स अधिक आकर्षक
कदाचित् ही कोई राज्य हो। विस्तार के खयाल मे यह राज्य
लीसर दर्ज का है । इसम दुनिया को लगभग एक चौथाइ व्यापादी
राइ जाती है । चीन के लोग हिन्दुस्तान के निवासिया की तरह
एक बहुत पुरानी जाति के हैं। ये लोग प्राचीन काल में बहुत
समय बहुन सी वस्तुएँ ईजाद को, जब दूसर देशवाले उन वस्तुया
को या ता मिलल न जानत थे, या बहुत ही कम जानते में।
राज मासे पहले चीन ही में बनाया गया था। इमी प्रकार
पुस्तको के छापने और बारूद बनाने का पाविष्कार इन्ही लोगा
दिया। परन्तु यही चीनिवासी, भारतवासियों की भांति,
चीनी राज्य दुनिया के सबसे प्राचीन राज्यो मे से है। यह
राज्य पाँच भागों में बँटा हुआ है-(१) चीन (Chins),
१५) तिव्यत (Tibet), (चीनी तुर्किस्तान या सिनफ्याग (Sin
or Chinese Turkistan) चीनी मिलान और मंचूरिया
-
kiang
एशिया का प्रारम्भिक भूगोल Lowlands Highlands 6. Highland of Tibet Kalqan MONGOLIA PEKIN Tienls Warul Creal PROL BY FLLOIG SHI VSI PROY xungia Kafena chung Nankincón Hankow Hangctiow TOE an Wuchana y furcin Chungking 48 South China anter's Maçao) HONG KONG (Br Retreure Hanoi QHAINAN ANSOUND1744 China-Physical
इनिमको प्रसोडेण्ट रहते हैं। यही प्रेसीडेएट पादशाह का काम
फे मध्यस्थ पहाडी भाग और पैसिफिक महासागर के बीच में
पोन का राज्य
की स्थिति मानमून को हवाया के भाग में है, पारी तीन शिया
मध्यवर्ती ससे पहाडी भाग में है
धीन का राज्य हजारो घरस तक एम बादशाह
के
हाथ
में
(हा, परन्तु १९१२ म यहाँ मान्ति का प्रारम्भ हुअा जिम साद
६. एक भाग स्वतन हा गया। श्रर यहाँ पोड बादशाह नहा
हाता बल्कि प्रजा स्वय राज्य के प्रन्धक लिए कामिल या
पंचायत चुनती है । इस पंचायत का एक प्रधान चुना जाना
रता है और यह पचायत मिलकर कानून बनाती है निमम
'श का प्रवन्ध ठोक रहे। इनी पचायती हयूमत के तरीर का
सरा नाम प्रजातत्र राज्य है।
चोन खास (China Proper)
इस राज्य के भागो म सास चीन सरसे अधिक लाभदायक
और प्रसिद्ध भाग है। इस भाग की पाबाटो बहुत अधिक
और पनी है। यानी दूसरे भागो मे
थोडे-से लाग यमे हुए
है। यह शिया के तहत उपजाऊ देशा में में है। यह एशिया
भी हिन्दुस्तान की घनी आबादी में कुछ अधिक है, यानी यहाँ
की जन-सरया ४२ रोड है। परन्तु इसका कुल हिस्सा उन्य
फटिकर के उत्तर में है। नकशा देसने से मालूम होगा कि
के ग्मा हिन्दुस्तान के मध्य से होकर जाती है, परन्तु चीन
से दक्षिणी भाग मे होकर जाती है। चीन इस रेखा के उत्तर
अक्षाश तक फैला हुआ है। इसो पूर्व में पेसिफिक
महामागर है और इसका अर्द्धवृत्तरूपी किनारा लगभग
३०००० मील लम्बा है पर जगह जगह पर कटा फटा है।
८०
पशिना का प्रारम्भिक भूगोल
इसके दचिण म च इटाचीन, पश्चिम में तिब्बत और तर
म मचूरिया तथा मगालिया है। चीन ग्यास ओर मगाालया की
सीमा पर 'ची7 का दीवा" स्थित है। जिनकी गिनती दुनिया
को अद्भुत चीजा में की जाता है
इस दीवार की लम्बाई
हिमालय पर्वन की येगियो के गवर म्पात १,६००
71
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T
दा
.
yeirs ago
This 18 a portion of the Grent Chinese Wall
18 1600 miles long and was began more than 2,00€
मील है, ऊँचाई २५ से ३५ फुट तक और चौड़ाई इतनी
है कि इस पर चार घोडे वराबर वरावर आसानी से दौड़
सकते हैं। यह दीवार पत्थर और मिट्टी से बनाई गई है,
परन्तु मजबूती के लिए इमका बाहरी हिस्सा ईटो से बनाया
गया है । इस दीवार पर, थोडे थोडे फासले पर, दो-तीन मंजिल
.
पैसिफिक महासागर में गिरती है। तिन्त्रत ने ऊँचे पठाग से
चीनाराज्य
क बुज बनाये गये है। चीनियो न प्राचीन काल म तातारियो
हमला मे मुरक्षित रहा के लिए या नागार वनाई थी।
तातारा लाग मंगालिया के रहनवाल य, जा ममय ममय पर
चीन के हरे भरे उपजाउ स्थानों पर चहाई रिया करत या यह
हमार पिचलो की माडी मे आरम्भ होर रिन्नत में समाप्त
हुई है। यह टीगार जिस प्रकार मैलाना में स्थित है, उसी तरह
उन पडे ऊँचे पहाडा, गहरो घाटिगा तथा नदिया मे मा हे, जा
पिचतो की गाडी तथा तिन्वत तक स्थित है। पुगा जमाने मे
जन गाली, बास्ट और तोप 'ग्रादि का प्रयोग न हाता था,
ग्रह दोनार बरिया से बचने के लिए पहत लाभदायक और करा
माती यो।
चीन का मुल्म जो पश्चिम से पा को वहनवाली तीन
पडो नदियों (१) हाग हा (lon. Ho) (२) याग टिसी
क्याग (Yang tse kang) और (३) मोक्याग (Siki ang)
ये नदियाँ तिब्बत के पहाडो से निकलकर पर्व की ओर
क बैसिनो म बंट गया है।
करते हैं।
पृच को भार बढे हुए पहाडी भाग उपर्युक्त तीन मिना ना अलग
उत्तरी चान हाग हो नदी का बडा मैदान है। यह भाग
सलार म मरसे अधिक धना सा है और इसका अधिवाश
भाग पोल रग की मिट्टी से ढका हुआ है। उमको लोयम
(Loess) कहते हैं। यह मिट्रो मङ्गोलिया के रगिस्तान को है
जा तेज प्रोधियो द्वारा लाई जाकर यहाँ विछ गइ है। इसी
कारण उत्तरी चीन में पृथ्वी, नदी और समुद्र पोले डो पीले
दिग्याई पड़ते हैं। हाग हा शब्द का अर्थ भी 'गोला नदा" है।
इमा से यह नदी जिम समुद्र में जाकर गिरता है, इसका मी
एशिया का प्रारम्भिक भूगोल पीला सागर कहत हैं। उत्तरी चीन म, पश्चिमी भागों में, जहाँ- तहाँ इम मिट्टो की २,००० फीट मोटी तह है। इस मिट्टी कर फारण उत्तरा चीन का नोचा मैदान बहुत उपजाऊ हो गया है ।। इस भाग मे जहाँ जहाँ वर्षा होती है वहाँ हजारों वर्ष से खेती की जा रही है, फिर भी मिट्टी की शक्ति बढाने के लिए साद का आवश्यकता नही पडती। हाग हा नदी हर साल बहुत-सी मिट्टी पहाडों से बहा लाता है जिममे पीले सागर की गहराई कम होती जाती है। नीचे, मैदान मे आने पर नदी की चाल धीमी पड जाने के कारण बहुत-सी मिट्टी इस नदी की तह मे बैठती जाती है जिससे यह स्वय भी छिछली होती जाती है। फलत बाढ के समय इसक पानी मैदाना मे फेल जाता है। बाढ से देश का बचाने के लिए नदी के दोनों ओर सैकड़ों मील तक मजबूत बाँध बनाये गये है और जैस जैसे नदी की तह ऊँची हाती जाती है, वैसे वैसे वाम अधिक ऊँचे कर दिये जाते हैं। अब तो मैदान की सतह से नदी को तल अधिक ऊँचा हो गया है जिससे बाढ के समय परिपतर बांध टूट जाते हैं और हजारों गाँव तथा शहर दूब जाते और लासी जीव जान से चले जाते हैं। इसी से इस मदी को "चीन का सकट" कहते हैं। अधिकतर वाढ मे तेजी के फारण इसका रास्ता भी बदल जाता है। १८५२ ई० से पहले पह पोले सागर में गिरती थी, परन्तु उसी मन् से इसने अपना राम्ता बल दिया और पिचली को खाडी में जा गिरी जिसके फारण हजारों गाँव डूब गये और लासों जानें गई। पिछने २,५०० वर्षों में इम नदी ने लगभग ग्यारह बार अपना मुहाना घदला। उत्तरो चीन का जलवायु जाड़े में और रहता गर्मी में खूद गर्म हो जाता है। वर्षा पंजाब की भांति होती है। - - बहुत सर्ट
महासागर में गिरती है। जिस समय इस नदी के ऊपरी भाग में
पाद पाती है, इसका पानी इन मोलों में भर जाता है। इससे
नदी के मैदान को कोई हानि नहीं होती। यांग टिसी-क्याग
पीन की सबसे बड़ी नदी है। यह यहत चौडी है। इसका
सरफा गन्य
पर जलवायु गे को म्येतो पेलिए पहा मुविधाजाक है। यहाँ
की माम पैदावार गेई ही है।
यांग-दिमी-ग्याग नदी नियत से मिलकर पीन के मध्य
में बहती हुई अपने पूर्वी भाग में कई मोला से होकर पैमिकिक
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KARAN
China-Political
। एशिना का प्रारम्भिक भूगोल मदान भी बहुत उपजाऊ है। इसी कारण मध्य चीन बहुत पना रसा हुआ है। इस भाग मे श्रामदरपत इसी नदी और इसा- महायक नदियो द्वारा होती है। समुद्र से हाको (Hankor- तक बहुत बडे बडे जहाज आसानी से चले आते और छोटे छोटे जहाज तो उसके मुहाने से १,००० मोल पाई . STEADHA recs where luce is calli-zł HUL Tea Wheat " " " . " " China-Products चग (Ichang) के संकरे द तक जा साते हैं। नावें उससे कद मो मोल और आगे तक जा सकती हैं। याग टिसी-मबाग बेसिन के दक्षिण में चीन की कुल जमोन पहाडा है। इस पर भाग मे सो स्याग नदी ने चौडो पा घाटी बना टीई नकशा देखने में मालूम होगा कि कर्क रखा दक्षिणी ची और बंगाल गेनो भागो में जाती है, मिलिए दक्षिणी चीन .
भाजन चापल है इसलिए चावल सी पैगवार यहाँ सारी प्रधिक - जम जाता है। हागही नदा के धरातल पर दे पुर मोदी वर्फ माग में स्थित है। इसके उत्तरा भाग यो पोर वर्षा कम हाती जाती है। मानसून के प्रोर देशा की भॉति चीनियो का मुरय चोन का राज्य जलवायु गाल पो तरह गम पार गम है। इसी स गाल की वरह यहाँ के मैदाना और फिनाग को ग्यास पैदावार चावल है। इसके निया गन्ने और शहतूत क पंड भी गाये जाते हैं। वहाँ के पहाडो ठालो पर चाय पहतायत म पेना की जाती है। चीन के लोग चाय बहुत पसन्द करते हैं। कोई कोई तो दिन भर पानों की जगह चाय ही पिया क्रत है। पहाडी जालो में कपूर के पेड भी पाये जाते हैं जिनस कपूर पेनारिया जाता है । म चीन में गर्मो और वर्षा नगनो रम हाती है, इसी लिए मयुक्त प्रान्त आगरा अवध का तरह यहाँ मे पार चावल दोना पेर होत है। गेहूँ की मेतो जार्ड में और चावल की गर्मी म की जाती है। इस भाग में भी गना और पाम की मेती हातो है । रशम के लिए शहतूत क पेड भी बहुतायत से हात है। उत्तरा चीन मे मध्ये चीन में वपा और गर्मी महतो है, इसलिए यहाँ चावल नहीं पैदा हो सकता, परन्तु पजाव की भांति गेहूँ, जौ, पास ओर तम्बाकू बहुतायत म होती है। सारे चीन म जाडे म सूर ठड पडती है, क्याकि मध्य एशिया में ठण्डी हवाय बिना क्मिी रुकावट के चलती हैं। उत्तरी चीन म तो इतनी गर्दी पड़ती है कि नदी, नाला और पडों का पानी बर्फ की भांति जम जाती है। इस भाग म वर्ष की वर्षा हुआ करती है । मध्य चीन में नदी का पानी तो नहीं जमता, परन्तु छाटी छोटो मौला पर बर्फ जम जाती है। दक्षिणी चीन में भी सर्दी बहुत पड़ती है, परन्तु वर्फ नही जमती। चीन में गर्मी को सत्तु म वर्षा होती है क्योकि यह मानसूती CE एशिया का प्रारम्भिक भूगोल इाता है। यहां की पदावार में रेशम का दूसरा नम्बर है। दक्षिण और मध्य चीन में रेशम के कीडे पालने के लिए शहतूत के पेद लगाये जाते हैं, परन्तु उत्तरी चीन में ये कीड बलूत के पेड़ों पर होते है । शहतूत के पेड पर ये कोड जल्दी बढते हैं। जब ये कीड़े, लगभग २ इच लम्बे और उँगली के यरावर मोटे हो जाते हैं तब पत्तियों गना छोड़ देते हैं और अपने ऊपर रेशम का टार लपेटना प्रारम्भ पर देते हैं। यहाँ तक कि रेशम के तार काये फी शफल के बन जाते हैं और ये कोडे उमके अन्दर रह जाते हैं। तव यहाँ के लोग पेड़ों से गिराकर इन कायो को पानी में सवाल लेते हैं जिसस कीडे मर जाते हैं। यदि ऐसा न किया लाय तो कोडे तितली बन जायें और कोया का काटकर उड जाये तथा कटा हुआ कोया सराव हो जाय । वह रेशम कातने के काम फा नहीं रह जाता । इन कायों का उबालन के बाद लड़कियाँ इनक धार निकालकर रशम का तागा तैयार करती हैं। रेशम की खेत फरना और उमस कपड़े चुनना चीन का मुख्य काम है। चीन ही संसार भर से अधिक कमा रेशम तैयार किया जाता है। चीन में अविसश आवागमन और व्यापार नदियों-द्वार, होता है। यहाँ की नदियाँ बहुत घने बसे हुए भाग मे से होकर पूर्व की ओर बहती हैं, इसलिए वहाँ के नदी-मागे प्राचीन समय से प्रसिद्ध है। सातवों मदी में यहाँ एक घडी शाही नहर बना गई थी जो हागहों को याग-टिसी-क्याग नदी से मिलाती है। यह नहर उत्तरी मैदान के अत्यन्त धन बस हुए पूर्वी भाग से होकर घडे वडे शहरो और हजारों गाँवो के बीच मे होकर जाती है। यदि तुम यहाँ को इन नदियों में स किसो एक नदी में यात्रा करो का लगभग हर शहर के किनारे तम्हे इतनी अधिक नाव मिलगा कि मस्तुला का एक घना जङ्गल-सा दिसाइ पडेगा। ये नाव छोटी. पन --
पोन फा राय
है
House-boats on the river at Hondou
९.
। केरल दक्षिणी पहाडा के इलाकों में कुछ जगल है, और
एशिया का प्रारम्भिक भूगोल
बडी और भिन्न भिन्न प्रकार की हागी। लगभग हर नाव के
अगल भाग पर आँसे बनी हुई पायोगे, क्योंकि चीनिया का
कथन है कि बिना आगों के नावं रास्ता नहीं देस मकती । करोड़ों
चीनी नाव पर हो अपनी उम्र व्यतीत करते हैं। नावें ही उनक
मकान है। इन्ही पर ने रहते और अपने बाल बच्चों का पालन
करते हैं। कोइ कोई नाव ऐसी मिलगी जिन पर एक और तख्ता
पर थाडी सी मिट्टी की तह पर, तरकारिया का सेत वाया हुआ है
और दुसरो आर पिंजडों म मुर्गियाँ, बत्तस और धकरी या
सुअर पले हुए हैं। चीनी लोग इन्हों नावा को एक जगह से
दूसरो जगह लिय फिरते ओर म्य विक्रय करते हैं।
इन नदिया पार समुद्रो के किनारो पर मल्लाह अधिक मिलगे
इनम काई काई मलाह ना और लोगो की तरह जाल से मछली
पकडते है, परन्तु बहुतेर मछली पकड़ने के लिए एक चिडिया
पालते है जिस काग्मोरान्ट (Cormorint) कहते हैं । यह
चिडिया मावारणतया पानो के तल पर टकटकी लगाये रहती
निकाल लात माह कछला पहना देते हैं,
है और अवसर पावर डुबकी लगाती हैं और मछली को वाइन
नाकि ये मछलियों को निगल न सके। ये चिडियाँ पुर्तीली और
होशियार होती है। इन्हे अच्लो तरह मालूम है कि दिन भर
मिन्नत करन के पश्चात यह छल्ला उनकी गर्दन से निकाल दिया
नापगा और उन्हें पकड़ी हुई मछलियों में से हिस्मा मिलगा।
नदियो की यात्रा सनवाला को हर जगह फूल अधिकता स
मिलग, परन्तु उन्हें यह देयर प्राश्चर्य भी होगा कि वृक्ष पहा
कहा जाता है कि चीन में अब लडी इतनी कम रह गई
+मि चीनी अपने मुर्दे जलाने के लिए चिता भी नहीं पा
नही है
,
-
--mh
TA
7
चीन का राच
+
These 'Cormorant' birds have becnitrained to catchitish
३३
-
एशिया का प्रारम्भिक भुगोल
पावे । इसलिए चीनियो को कोरिया और जापान आदि देशो से
अपने काम के लिए लकडी मँगानी पड़ती है।
चीन में जानवर भी यहत कम हैं। उत्तरी पश्चिमी रेगिस्तानी
माग में ऊँट पाये जाते हैं। नतिणी मैदाना में, जहां वर्षा
अधिक होती है, पेत जोतने के लिए भंसे रखे जाते हैं। सुअर,
घोड़े और सच्चर प्राति आम तौर से हर जगह पाये जाते हैं।
।
A rice field in Southern Clunt Notice the stray
hats worn by the Chinese farmers
घोन हिन्दुस्तान की मांति खेतो का देश है। हिन्दुस्तानियों
की मांति ये लोग भी उसी तरह सेतीवारी किया करते है
पोर का राज्य ९३ जिस तरह हजारों वर्ष पूष इन याप-दादे किया करत थे। धान भोपामादी इतनी अधिक है कि यहां के किमाना क पास बहुत छोटे छोटे सेत है। इसलिए हिन्दुस्तान के किसानो की घरह र लोग भी गरीब है। किन्तु यहां के किसान हिन्दुस्तानी किसाना में एक पात में बढ़े हुए हैं। वह यह फि वहां के किसान पसी मिहनत मे हर विस्म को यादगावर, मैला, सो हुई पौद्ध-इकट्ठा करके सेत में हारत है जिसके कारण एक खेत से साल में तीन फमल तक पेश करते है और उसी पेत को बराबर हर साल काम में लाते हैं। इससे वहां क सतो की उपज हिन्दुस्तान के सेनों की उपज से बात अधिक होती है। सानिज पदार्थ-चीन को मिट्टी ग्यनिज पदाथा से भरी हुई है। कोई समय सा आगाचीन पानिज पदार्थो की पैदावार के लिए दुनिया में एक UST ENTERT| उत्तरी चीन के लोयम सेंटो में कोयरो की बहत बडी सान है। परंतु तोयस मिट्टी को हजारो फुट मोटो तह से दबी हुई होने के कारण इस धान सभी कोयला नहीं निकाला जाता। मध्य चौत में कोयले की कुछ छोटी छोटो सान है। चीन में लोहे की बहुत बड़ी वडी खाने हैं। एक बात बड़ी सान हांका के पास है । याक्षण-पश्चिम युभान (Yuanan) पठार मे ताँवा और दीन अधिक पाया जाता है। फान्टन शहर (Canton) के उत्तर में भी टीन मिलता है ओर हागा बन्दरगाह में यह दूसरे दशा में भेजा जाता है। इन गानों के प्रतिरक चीन में माना और चाँदी को भी यहाँ के निवासियों का रङ्ग पीला होता है। उनक बाल काले, फडे और सडे हुए होते हैं। आँसें तिरपी और नाक छोटी पया चपटी होती है। इनको दाढी में बाल बिलकुल नहीं होते। इस म के लोग चीन में तो हैं ही बल्कि जापान और के माने हैं। ।
शिया का प्रारम्भिा भगाल
इंद्राचीन म नधिक तथा साइबेरिया + किमी किमी भाग
पापाद।
Jew
These are three Chinese children of Cinton
मुख्य नगर-चीन के बडे नगर या ता समुद्रतट के बन्दरगा
है, या वे व्यापारिक केन्द्र हैं जो उपजाऊ मैदान और घाटिया में
नदिया के किनारों पर बसे हुए हैं। इनका नकशे म देवा।
पेकिन--यह उत्तरो चोन का मुख्य नगर है और पो नदा
(R Petho) पर वमा है। यह बहुत पुराना नगर है। यहाँ
लगभग सोन हजार वर्ष तक मुरय चीन को राजधानो यो पार
।
।
पाजार वगैरह और पारिलों के ठहरने की जगहें हैं, तद्न और (Tientsin) नगर का यन्दरगाह दे, जो पेफिन पाही बन्दरगाह सममा जाता। यहीं स सबस घड़ी शाही हर श्रारम्भ होती चाडो पर, ममुद्र से तेरह माल योदरा पर, स्थित है। इस शहर पी7 का राय ९५ माठ सौ थप क लगभग पोन रातो राजगनी रहो। इस समाा में भो या पहले स्यतन्त्र गग्य थी। परन्तु अब राजधानी हाँ मे नानकिग (NRNME) नगर में उठ गई है। पेरिन गिर पे धागे भार माठ पद यो यदुत मजबूत पार है जिसमें मगह जगह परमार और फाटक लग हहै। पहले इन पाटा में गत ममय ताल लगा दिये जात थे। प्राचीन काल में ६६ पहनगग मे शारपना पाटय बन्द पर दने कारवाज पारपरन्तु अय पे फाटक यन्द नहीं किये जाते । इसी दीवार के बीच से हायर मरिया को रेल गइ है। इस नगर के मध्य भाग राजभयन है। इसो नगर में अन्धो और चौड़ी इमारवें तथा पधी माफ हैं। परन्तु दूसरी तरफ ये भाग यो सड़क, जहाँ पीट नदी के मुहाने से ४० गोल के फासल पर टॅटसिन है। इस शहर को जनसत्या पनि से भा अधिक है। याग-टिमी-क्यांग नदी के डेल्टा पर कई बड़े नगर धीन मनमे यदा बन्दरगाह शधाई (Sinng hi) इमो डेल्टा की अन्दर फारम्यान और पनियां को अधिक्ता हो गई है। इनमें सूती, उनी पार रेशमी कपडा धुना जाता है । इम बन्दरगाह में यूरोप, अमरीका और हिन्दुस्तान स यडे बड जहाज व्यापार के लिए पाते हैं जिसस या चीन का सबसे बड़ा श्रौद्योगिक और व्यापारिक केन्द्र है। वहाँ मानरिग (Nanl ing) डेल्टा के सिरे पर साल कुछ दमसे के लिए बहुत प्रसिद्ध है। बहुत गरे। के गया 4 रहर रशम व्यापार
९८
एशिया का प्रारम्भिक भूगोल
आशा की जाती है कि कुछ दिनों के बाद यहाँ की खेती
बहुत उन्नति हो जायगी। मंचूरिया में जापानवाला ने रेल स्थापि
कर दी है जिसके द्वारा पोर्ट श्रार्थर (Port Arthur)
जहाज के द्वारा बहुत सा गहूँ जापान भेजा जाता है। मचूरिया
उत्तरी मैदान में मुख्य नगर हार्विन (Harban) है जो सुगान
(Sungari) नदो पर स्थित है। म नगर से ट्रास साइरिय
रेलवे भा जाती है जो मास्को (foscow) से व्लाडोवोस्ट
(Vdivostol) को गई है। हारविन से एक और रेल
दक्षिण की ओर मुकडेन (Makden) को जाती है जो मचूरि
का मुख्य नगर पार राजधानी है। यहाँ से उसकी तीन शाखा
पोटे पाथर, कोरिया और चीन को चली गई हैं।
मंचूरिया के दक्षिण म मुण्डेन के पास एक पहाड़ी जमी
है जिसमें कोयले और लोह की सानं पाई जाती हैं। यः
कोयला रेल के काम में भाता है और लोहा जापान के कारखा
में भेजा जाता है।
प्रय
१-दक्षिणी चीन, मध्य चीन और उचरी ची के जलवायु का भर
अलग वणन करो।
२-निगालसित पैदावार चीन के किन किन भागों में होती है--
चावल, गेहूँ, चाय, शहत्त के पेड़ और कपास ।
इन पैदागरों के लिए किस प्रकार क जलवायु की श्रावश्यकता
३-चावल और गेहूँ दोनों एक ही माग में क्या नहीं उगते ?
४-चीन के दौर से माग सबसे अधिक घने बसे
न से भाग सबसे कम बसे हैं और क्यो।
पापागग्य
-निगलिसित नगरों की स्पिति पतायो और यह भी मानो कि
ये उनति पर बड़े शहर क्यों हो गये है-
राको, पेकिन, कान्टन, हांग याग, रागाइ और नानकिंग।
--चूरिया पे किस किस भाग में किन किन चीजों को पता होती है।
-चूरिया में चोर और जापान से भाकर कोर से लाग से है
धीर क्यों?
अभ्यास
चीन और मंचूरिया का एक नाका बनाकर उसमें निगलिखित
दिसलायो-
९-चार मुख्य बड़ी नदियों और उनके किनारे पर पसे हुए नगर क्या
बन्दरगाह।
R-फोयले और लोहे की सानो पो फाले और लाल चिहों से अंकित
करो।
-चाय, रेशम, गेहूँ और चावल शन्दों को उन स्थानो पर लिखो,
सही ये अधिकता से उत्पन्न होते हैं।
-साल रेखा-द्वाय रेल की लाइनें दिखलायो।
दसवाँ प्रकरण 1 जापान-राज्य जापान-राज्य दुनिया के सबस प्रसिद्ध देशों में है। यह राज्य कमसफटका (Kamschatka) से दो हजार मोल दक्षिण की तरफ फारमूमा द्वीप तक फैला है। इस राज्य में (१) जापान वाम के चार बडे द्वोप, (२) कारिया, (३) फारमूसा (Formons) फा द्वीप, (४) ससालीन द्वीप का दक्षिणी आधा भाग, (4) लूच और क्यूरायल के द्वीप सम्मिलित हैं। कोरिया को छोड कर यह सारा राज्य द्वीपों ही का है एशिया के कुल निवासिया से जापानी अधिक बुद्धिमान् , पतुर ओर उन्नतिशील हैं। कुछ समय पहले जापान में किसी भी देश का निवासी नहीं आ सकता था। परन्तु अब वहाँ प्राय हर एक देश के लोग दिखाई पड़ते हैं। इसी तरह पहले यहाँ के शोग मिलकुल असभ्य थे। परन्तु श्राज-कल पश्चिमी देशां की माँति जापान में पालियामेंट को इमारत, यूनिवर्सिटियाँ, कालिज, पाठशालाय, हवाई जहाज, रेल, जहाज, बड़े बन्दरगाह, टेलीफोन, वारघर, डाकरसाने और अस्पताल आदि समो चीजें हैं जापान-राज्य के द्वीप कमसकटका के सद भाग से लेकर फारमूसा के गर्म भाग तक फैले हुए हैं। इसलिए वहाँ का जलवायु मी भिन्न प्रकार का है। परन्तु एशिया के पूर्व में होने के कारण इन द्वीपो में गर्मी में बहुत वर्षा होती है जिससे ये मानसूनी हवा के प्रान्त में गिने जाते हैं। ।
जापान-राध्य
१०१
फ्यूरायल (Karile) ओर सखालीन द्वीप (Sakhahn)
अधिक उत्तर में होने के कारण बहुत तद है। इनमे सर्दा की
अधिकता और वर्षा की कमी के कारण खतो नहीं हो मस्ती।
यहाँ क्वल थोडे से मल्लाह आगाद हैं, अन्यथा यह प्राय
सा पड़ा है।
नाड
जापान खास
जापान साम में चार बड़े द्वीप सम्मिलित हैं (१) होकेडो
पा येजो (Hokkando or Yezo), (२) हानश्यू (Honshia),
(३) शिकोक्य (Shukokin) और (४) क्यूस्यू (Kinshnu) !
इनमें हानश्यू सबसे बडा और प्रसिद्ध है। य सभी द्वाप पहाडी है
इसलिए इनमै चीन और हिन्दुस्तान की तरह बडे बडे मेटान तो
नहीं पाये जाते, परन्तु पहाडो और किनारों के बीच के भाग में
छोटे छोटे मैदान है, जहाँ घनी आबादी है और खेती भी होती
है। इन पहाडो से छोटी छोटी और तेज बहनवाला नदियां बहती
हैं जिनमे जिलो को ताकत पैदा की जाती है, जो वडे वडे नगरी
में रोशनी पहुंचाने तथा कारसाने पोर रेल चलान के काम में
आतो है । इम अतिरिक्त ये नदिया किसी काम को नहीं है,
फ्याकि ये न तो सिंचाई के लिए उपयागी हैं और न इनमें नावें
ही चलती हैं।
इन द्वीपा में बहुत-से ज्वालामुखी पवत है जिनके कारण
यहाँ भूकम्प (भूडाल) बहुत आता है। कोई दिन ऐसा नहीं जाता
का एक साधारण भूकम्प न आये। इसी म जापानी नाग (स
या लक्डी के मकान बनाते हैं। कारण यह है कि याम पोर
लकड़ी के मकानो को पम्प में अधिक हानि नहीं पहुँचती
वालामुम्बी पर्वतों में फ्युजीयामा (Faurima) सबसे प्रसिद्ध है
यह हानन्य के बीच में ।
१०२
एशिया का प्रारमिक भूगोल
MANCHURIA
Todwdstot
Hakods
23-24
PANE
JL71
am
cgdsak KOKU
SEKYUSRIE
Low Lands
High
Japan-Physical.
श्रादमी मर गये। इस भूरम्प के कारण समुद्र के पानी में भी बहुत बडो पडो लहर पैदा हुई जिससे हजारों नाव डूब गई और किनारे पर मल्लाहा के सेक्डा गाँव बरबाद है। गये। कहा जाता कि दुनिया में ऐसा पड़ा भूकम्प और कभी नहीं आया था। १०३ जापान-राज्य इस पहाड से अन उद्गार नहाँ हाता । 'प्राज-कल यह सद पड़ा हुआ है। परन्तु दा सो परस पृष इमम भाषण उद्गार हुआ करता था। इसमे का पिघला हुप्रा लावा पार राय को मोटी वह पहाड़ के किनारा में चारा पार फल जातो थी जिसस सारे ज्ञगल नष्ट हो गये और यहाँ क शहर विलउल वरवाद हा गये। यहाँ मितम्बर मन् १९२३ इममा में एक बात भयानर भुकम्प घाया था जिसके कारण यागहामा (lokohina) का बन्दर- M PTA 13 This is a road in the bucy sectiod of Tokyo गाह बिलकुल बरवाद हो गया। राजधानी टोकियो (Tokyo) का भी एक भाग बरयाद हा गया। पाथवा जगह जगह से फट गई ओर आग तग गई। हजारों मान जल गये और लाखों
१०४
एशिया का प्रारम्भिक भूगोल
जापान का जलवायु सपत्र समान है, क्योंकि यह समुद्र के
बीच मे है। परन्तु इसका दक्षिणी भाग और भागों से अधिक
गर्म है। इसका यह कारण है कि समुद्र के पानी की एक गर्म
धारा दक्षिणी किनारा स आती है, जिससे सर्दी के मौसिम में
भी किनारा धर्फ से जमने नहीं पाता। उत्तरी किनारों से शीतल
धारा आती है, इसलिए ये किनारे बर्फ से ढक जाते हैं। हानश्यू
के उत्तरी भाग में बडे कड़ाके की मर्दी पड़ती है और यहाँ
-
m
TE
+
144
"
GPATE
دفعه
NA
Mt Tojiyama in Japan
पर मेंह के सिवा वफ भी बहुत गिरती है। इससे पृथ्वी बर्फ से
ढकी रहती है। परतु ग्रीष्म ऋतु में काफी गर्मा भी पड़ती है
जिससे मारी बफ पिघल र वह जाता है। इस समय यहाँ
गेहूँ, लौ ओर राई (एक किस्म का छोटा और काला गेहूँ)
फो पैदावार होती है। हानश्यू के दक्षिणी भाग में, पश्चिमी
की तरह गर्मियों में गर्मी पड़ती और वर्षा भी अच्छी
जापानम्राज्य
नपजाऊ चना लेते हैं। यही किसान शहतूत की भी खेती करते हैं
रशम पैदा फरके संसार के सारे बाजारों को भेज देते हैं।
न बहुत थोड़े ही दिनों में उद्योग-धन्धा में काफी उन्नति कर ली
है। इन्होंने योरप के सारे आविष्कारा को सीख लिया है। बढ़े
बड़े कारखाने खोलर ये व्यापार के लिए वरह तरह की चीजें
अधिकता मे और कम लागत में तैयार करते हैं जिनके कारण
जापान के बड़े बड़े शहर योरप और अमरीका के बड़े बडे नगरों
को टकर के हो गये हैं। यहां कोयले की भी कई सानें हैं जिनसे
हिन्दुस्तान से कहीं अधिक कोयला निकाला जाता है परन्तु
इतने कोयले से जापानियों का काम नहीं चलता, इसलिए ये लोग
बरा दाती है। इसलिए यहाँ सता रानी पी जाता है।
यहाँ की मुन्य उपज पायल, पाय
और
जापान या अधिक भाग पहाड़ी है, अतएव यह जालों में
पिग हुथा है। यहाँ के चरी जन्माला में नाकीनी पत्तियों के
पेड़ अधिक है। पिनाक्षिणी जमला के पेट चौडे और गिर
जानेवाली पत्तिया महलों में बहुत-सी काम में
आनेवाली लकी घडे नगरों में, प्रतिदिन उपयाग में आरोवाली
लकडी की पोजें तथा मान और फायनाने के लिए, पहुँचाई
जाती है। जापान को पायलकाया दार्जिलिंग फी चाय से पुछ
भिन्न है । यहाँ की चाय तिर अमरीका भेजी जाती है।
जापान के सिार पदे परिश्रमी होते हैं। ये सेती फी एफ
३च भी भूमि परबाद नहीं होने देते। वे ऐसी भूमि पो बार
पार जोतकर और खाद डालकर, जहां तक हो सकता है,
और उसके पदों पर शिमलामों का पालते हैं। इस प्रकार
दुनिया भर में जितना सफेद रशम बनता है उसका सात प्रवि
सैकहा येयल जापान में पैदा होता है।
जापान के निवासो यौद्ध धर्म के अनुयायी हैं। इन लोगो
१०६ एशिया का प्रारम्भिक भूगोल मचूरिया म भो कोयला मंगाते हैं । जापान में मिट्टी के तेल के कुएं भी हैं, परन्तु इनसे जापानियों का केवल ब्रह्मा के तेल का पाँचवाँ भाग मिलता है। यहाँ तॉवा भी अधिकता से निकाला जाता है। इन चोजा के अतिरिक्त कुछ भाग में साना से सोना, घाँदी, लाहा भी निकाला जाता है। इस अतिरिक्त यहाँ ज्वाला- मुग्पा पयतों म गवक निकलती है। लकड़ो यहाँ अधिकता से पाई जाती है, इमलिए यहाँ दियासलाई के बहुत-से कारखाने पल रह हैं। यहाँ के लोग बहुत प्रसिद्व और होशियार कारीगर हैं। इसलिए धातु, चीनी मिट्टी, हाथोदाँत, रबर, रेशम और । This man is pumping wator for irrigation in Japan फाराज को यिचित्र पार अच्छो चौज तैयार करते है। मस्ती और अच्छी होने के कारण इन चोजा को दूसरे देशों में बहुत मांग है। हिन्दुस्तान का छोटे से छोटा बाजार भी ऐसा न होगा, जहाँ जापान ओ चीज न निक्नो हा।
१० जापानराज । जापानियों के मुख्य व्यवसाय म एक मल्लाहा भी है। यहाँ द्वीपों के चारों तरफ समुद्र के किनारे किनारे मल्लाहा क हजारों गाँव वसे हैं पार बड बडे मल्लाह स्टीमर के द्वारा दूर दूर के समुद्रों से नावों में मछालयो पकडकर लाते हैं जो जापान और चान के बड़े नगरा में निकली है। जापान के पास ममुद्रा से मोती मो निकाते जाते हैं। आज लता जापानी लेाग वनावटी माती मो बनाने लग हैं जो बहुत मस्ते विकते है । जापान का किनारा बहुत क्दा हुआ है. इसलिए यहाँ बहुत अच्छे बन्दरगाह हैं और इस कारण यहाँ के लाग जहाज्ञ चलाने बहुत उन्नति कर गये है। जापान के बनाये हुए दुरबानो जहाज पोरस, अमरीका और प्रास्ट्रलिया श्रादि देशा में व्यापार के लिए आने-जाते हैं। इसके अतिरिक्त दुनिया में जापान मामुद्रिक शपि के अनुसार एक है, स्थाकिसके पाम जगी जहाजा का एक बडा बेहा मौजूद है। - जापान के सभी बड़े बड नगर समुद्र के फिनार थमे है। दक्खिन पूर्व का किनारा बसेडानहाने के कारण अधिकतर दक्खिन-पूव ही में बडे नगर पाये जाते हैं । टाकियो (Tokyo) यहाँ का सबस बड़ा नगर हैं जा जापान का राजधानी भी है। यह नगर दुनिया के सबसे बड़े नगरा में गिना जाता है । यहाँ को भाषादी पञ्चीस लास है। तनिक साचो ता यह कलकत्ता की श्राबादो से लगभग दुगुनो है। यह नगर दस्तकारी का एक केन्द्र है। टोकियोका बन्दरगाह याकोहामा (Yokohama) है जो बहुत बड़ा नगर है। इसके अन्दर बहुत म कारसाने पाये नाते हैं। सन् १९२३ ई० भूपम्प से यह नगर बिलकुल नष्ट हो गया था। पर अब उसका दशा फिर पहले की तरह होती जा रही है। यही जापान का सबसे बना बन्दरगाह है। ।
एशिया का प्रारम्भिक भूगोल
7Snpmolendas letre Wher
Forests
Reca
Cont
Enpper Le
haolu
Agricultural Products of Japan
Minerals of Tavana
-
Tors man and his wife are spinning and in their
बनाने के कारखाने हैं। जापान को मुख्य समुद्री वाकत इसी
नाणा-राज्य
ओसाका (Oshka) नगर म वड व कारखान सनम अधिक
हैं जिनमे अधिकतर कपडे युने जाते हैं। इन कारखानों के लिए
अमरीका और चीन से रुई मंगाई जाती है। श्रासाका के पास
कोवे (Kobe) है। यह नगर जापान
क पटरगाहा में
own home in Japan
दूसरे दर्जे पर है और बहुत बड़ा केन्द्र भी है। क्यूश्य द्वीप
का सबसे बडा नगर नागासाकी (Nigasaki) है। इस
नगर के निकट कोयले की खाने हैं, इसलिए यहाँ जहाज
नगर में है।
जापान में रेल की मुख्य लाइने उत्तर से दक्षिण तक मुफ्त
मुख्य नगरा में में होर गई हैं।
घोनवाली की भाँति जापान के निवासी मगोल जाति के
है अब इनम एशिया की कुछ और जातियां भी मिल-जुल
गई हैं। जापानिया का डोलडोल बाटा, रग कुछ कालापन लिये
३२ पोला और प्रांग छाटी तथा चीनियो से कम सिदों
एशिया का प्रारम्भिक भुगोल
हाता है। इनके बाल कुछ कर पार खड होते हैं। छोटे कद
के हान पर भा ये लाग नडे मेहनतो होते हैं। ये लोग बहुव
मभ्य, स्वच्छ और खूबसूरत चीजों के पसन्द करनेवाले हैं।
जापानी शहरो में समारी के लिए साम कर रिक्शा काम में लाई
जाती है। यह दो पहिया को बहुत हलको गाडी होती है जिसको
आदमी रगेंचते हैं। आज कल शिमला, मसूरी और नैनीताल के
पहाडा मे भी यही गाडो (रिक्शा) मवारी के काम में लाई
खाती है।
The tea-pichers in Japan are mostly women and girls
जापानी नाला ग बहुत पसन्द करत हैं। इनके घर का
छत श्राम तोर पर नो ने रंग से रंगी रहती है। ये लाग नील
रंग का कपडा पहनना भी बहुत पसन्द करते है। इन
"न छोटे, नीचे और बहुत सादे बने होते हैं। अधिकतर
-
जापान-राज्य
इनके घरो की चहारदीवारी ऐसी बनाई जाती है कि जब चाहे
इन दोवारो को एक तरफ कर दें। घर में हवा के प्राने जाने
के लिए कभी कभी य दीवार एक तरफ कर दी जाती है। उस
ममय मकान की सारी हालत बाहर से दिखाई देती है। इन घरो
मे मेज, कुर्मी नहीं होती। फर्श पर सफद घटाई बिछो रहती है,
जो हमशा साफ रक्सी जाती है। भीतर स सारा मकान एक घडे
कमरे की तरह बनाया जाता है। रात मे, आवश्यक्ता पड़ने
पर, अलग होनेवाली लक्डी को चहारदीवारी को सोचकर कई
कमरे बना दिय जात हे पार दिन म, आवश्यक्ता पड़ने पर,
निक्लने के पश्चात् फिर चहारदीवारी कर दी जाती है। इनके
मकानो के भीतर आतिशदान नहीं होते। घरो का गर्म करने के
लिए पोतल की अँगीठो मे प्राग जलाई जाती है।
जापानी खियों अच्छे रंग के वढिया रशमी वस्त्र पहनना
बहुत पसन्द करती है। इमी तरह यहाँ के पुरपो की पोशाक
भी रेशम के लम्बे चोगे की तरह होती हैं । जापानी स्त्रियां अपने
बालों को संवारने के बाद सजावट या सुन्दरता के लिए फूल
लगाती है । गमियो के दिनो मे ये लोग चटाई के जूते और
शरद् ऋतु मे लकडी की सडाऊँ पहनते हैं। परन्तु आज-कल
पढ़े-लिखे जापानी अँगरेजी ढङ्ग के कपडे पहनत हैं।
जापानी लडका और लडकियों की पोशाक भी उनके मा-बाप
की तरह होता है। यहाँ की लडकियाँ गुडिया खेलना बहुत
पसन्द करती हैं, इसलिए इनके यहाँ गुड़िया का एक त्योहार
होता है जिसका गुडियो का त्यौहार रहते है। लडके पतग
उडाना बहुत पसन्द करते हैं। इनकी पतगे चिडिया, तितली,
मन्छड और मस्पी की शक्ल की बनी होती हैं। हर साल
पतग का भी एक त्यौहार हाता है। रात में ये लोग घरो म
रंग-बिरंगे कागजा को लालटेन जलात हैं। जापानी कुश्ती लड़ना
।
।
एशिया का प्रारम्भिक भूगोल बहुत पसन्द करते हैं और कुश्तीवाजों, कलावाजों तथा मदारियो के नमाशे बडे चार से देखते हैं। जापानियों को फूलों का बडा शौक होता है। यहाँ कोई भी ऐसा घर न मिलेगा जहाँ तरह तरह के फूलों से खिला हुआ एक छोटा-मा बगीचा न दिसाई पहे। हर साल बडे बडे नगरों में फूलों की प्रदर्शनी की जाती है। यहाँ लकडी, वाँस, पीतल, शीशा, रेशम, चाँदी और चीनो की बहुत-सी अच्छी अच्छी वस्तुएँ बनती हैं और उन पर तरह तरह के घेल बूटे और तस. वोरें बनाई या सादी जाती हैं। इन कामों में दुनिया के और कारीगर इनका सामना नहीं कर सकते । A small yıllage in Koroa फोरिया या चोजन (Korea or Chosen)-कोरिया प्राय- ५ जापान-राज्य के अधिकार में है। इसका अधिक भाग
जापानमाज्य
११३
इम पश्चिमी भाग म थोड़ा सा नीचा मैदान है। यहाँ के
रहनेवालो या मुग्य पेशा रोती है। प्रम द्वीप के पदादी भाग
में मोने पी मान है जिनस मोना निकाला जाता है। स्यूल
(Seoni) पोरिया का मुग्य नगर है। फ्यूशन (Tusan) दक्षिणी
पिनार मा मुग्य बन्दरगाह है। यहां निवासी मगोल जाति
फे है।
तवान या फारम्मा (Taur an or Torrnosr)--यह एक
पहाडीयद्वीप है। इसका अधिक भाग घने जंगलों से ढका
है। हा जगलों की मुग्य उपज कपूर है। फपूर, रपर की तरह,
'एक पेड़ के दूध में बनाया जाता है। दुनिया में जितना कपूर
फाम में लाया जाता है वह सर लगभग इमी टाप से प्राता है।
इस टाप के पश्चिम नरफ नीचे मैदान हैं। कई स्थाना पर इन
मैदानो के जगल काटकर खेत बना लिये गये हैं, जिनमें चावल,
चाय और गन्ने इत्यानि की मेती हाती है। इस प्रायद्वीप में कुछ
ऐमी गाने भी हैं जिनसे गधक निकाली जाती है। यह प्रायद्वीप
जापानियों के अधीन है।
माय एशिया का पहाडी भाग
हम पहल हा यता चुके हैं कि इस भाग में एशिया के ऊँचे
'प्लेटा स्थित हैं और पहाडों से घिरे होने के कारण ये लेटो
बहुत सूखे तथा अधिकतर रेगिस्तान हैं।
इन स्थानो के जलवायु ओर वनस्पति का हाल तुम पिछले
पाठों में पढ़ चुके हो। इस भाग में (१) मगोलिया, (२) चीनी
तुर्किस्तान और (३) तिब्बत के सूबे हैं। ये सब सूबे चीन-राज्य
के ही हिम्से माने जाते हैं, परन्तु वास्तव में ये स्वतत्र हो गये हैं।
मगोलिया (Mongolia) विस्तार में हिन्दुस्तान से बड़ा है
परन्तु यहाँ आषादी बहुत ही कम है। यहाँ की फुल आबादी
--
। यहाँ । आ है। ११४ एशिया का प्रारम्भिक भूगोल वम्बइ शहर की आबादी के बराबर भी नहीं है। इसका क्या सवव है ? कारण यह है कि यह कुल भार या तो अधिकतर रेगिस्तानी हे या कॉटों ओर ऊँटकटारा से घिरा हुआ के निवासी अधिकतर खानावदोश हैं। व अपने घोडा, भेड़ों और ऊँटों के चगने के लिए चरागाहा की खोज में इधर-उधर घूमा करते हैं। सिर्फ इस सूरे के उत्तर-पश्चिम मे, कुछ उपजाऊ घाटियों में, सेती होती है। मगोलिया का मुख्य नगर उरगा (Urg) है, जो एक छोटे-मे कसने के बराबर है। चीन से इस शहर तक मोटर के लिए एक सडक बना दो गई है जिसको बने थोडा ही समय सिनझ्याग या चीनी तुर्किस्तान (Sinkiang or Chinese Turkistan) का अधिकाश भार तारिम नदी के वेसिन (Tarun basin) में स्थित है। यह वेसिन पहाडों से घिरा हाने के कारण बहुत सूपा पार कम बसा हुआ, रेगिस्तान है। केवल पहाडों के किनारा में कुछ सेतो-बारी होती है। कारण यह है कि गर्मी के दिनों में बफ पिघल जाने पर पहाडी नदियाँ बहने लगती हैं। इस वमिन के पश्चिमी भाग मे पहाडों के किनार पर दा नगर, काशगर (Kashgar) और यारकन्ट (Tarkand), नदियों के किनारे स्थित हैं, इन्ही नगरों से होकर पूर्व की ओर पुराने व्यापारिक मार्ग चीन की ओर गये हैं। तिब्बत (I'ibet) दुनिया का सबस ऊँचा मेटो है। यह विलकुल पहाडो से घिरा हुआ है। ऊँचा होने के कारण यहाँ बहुत कडी ठण्ड पडती है। यहाँ क्सिो किसी स्थान पर मोला लम्बे-चौड़े उफ के मैदान पाये जाते हैं। इस सेटा के दक्षिण हिमा- लय पर्वत का उत्तरी भाग है, जहां सतलज और सांपो (R Sutley and R Sanpa) नामक दो वडी नदियाँ बहती हैं। -
जापानराच्य
इस
सापो नदी की घाटी में लोगो का सास पेशा सेती है।
चाटी में रहासा (Lhasa) स्थित है, जो यहाँ की राजधानी और
चडा सुन्दर नगर है। यहा योद्ध-मत के कई सुन्दर मन्दिर हैं,
क्योंकि तिम्चत के लोग बोद्ध-मत के माननेवाले हैं। इन लागो
महन्त
पौर गुरु दलाइ लामा कहलाते हैं, ल्हासा में उनका
महन्त देखने योग्य है।
*
This 19 a firm honso in Tibet
श्राम तौर से तिब्बत के लोग बहुत गरीब है। इनका भोजन
काले जौ को रोटो है। ये लोग भेडे, नकरियाँ और याक (Tak)
पालते हैं। याफ एक प्रकार का वेल है जिसके बाल बडे बडे
होते हैं। यह इन लोगो का सबसे ज्यादा फाम देनेवाला जानवर
है। जिस तरह रेगिस्तानां में ऊँट होता हे उसी तरह इस प्लेटो में
याक वाम ले जाओ प्रोर ले पाने के काम में आता है।
११६
Pits
एशिया का प्रारम्भिक भूगोल
.
Daly Lami's Palace in Tihet,
-
जापान राज्य
इसकी मोटी साल के पतन और तम्य बनाय जाते हैं और इसके
गर्स उन का कपड़ा बनता है। मादा याफ का दूध भी साया
जाता है।
प्रश्न
जापान राज्य में कौन कौन द्वीप और दीपराए सम्मिलित है !
२--जापान द्वापसमूह के जलवायु का हाल बताया।
३-नापान म रही बडी नदिया क्या नहीं हैं। यहाँ की छोटी नदियों
से लोगा को क्या लाभ पहुँचता है ?
४-जापान निवासियों के मुग्ध व्यवसाये! का कुछ हाल बताया।
५-जापान का पनी हुरद चीज़ा पे नाम पताश्रो तुमने अपने
घर या रानार में देना है।
६-जापानले ची। और मसूरिया से कोकसी चीज़ मँगाते हैं
और क्या?
अभ्यास
जापान का एव नक्शा सोचो और उसम निम्नलिखित दिसायो..
-वे भाग जहाँ चावल का उपज होती है।
२-टोरिया, यायोहामा, क्योटा, अोसाका और नागासाको नगर।
३-गयले की साने (काले निशाना से)।
, - Re- TtHeartm mmaa 14. . ग्यारहवॉ प्रकरण साइवेरिया साइग्यिा चार प्राकृतिक हिम्मो मे बांटा जा सकता है। (१) टुन्ड्रा, (२) टंगा के जगल, (३) घास के मैदान या स्टेपोज, (४) गंगस्तान या प्राधा रेगिस्तान । १-टुन्डा-पहले बता चुक है कि यह भाग माइबेरिया के उत्तर में प्राकटिक महासागर के तट पर एक बहुत सर्द पट्टी है। इस भाग मे जावन व्यतीत करना इतना कठिन है कि यह बहुत कम वमा हुआ है। यहाँ के लोगो के जीवन व्यतीत करने का . . -- , , Ibuis is a picture of one of the little villages in the Sibeuran Tundra हाल मुनकर तुम सममा गये दाग कि ये लोग रहने के लिए कितनी कठिनाई स घर बनाते हागे। ये गमियों के दिनों में एक स्थान से ११८ -
MISHRA
माइग्यिा
Redeel or wheel less carriages 'a the Tuadra region
- १२० एशिया का प्रारम्भिक भूगोल दूसरे स्थान में फिरते हैं और चमडे के बने हुए समो में रहते हैं। इनके सेमे इस प्रकार बने रहते हैं जो कि शीघ्र ही खडे किये और फौरन उसाड कर गिरा भी दिये जा सकते हैं। सेमे बनाने के लिए डण्डो का ढाँचा बनाकर उस पर चमडा मढ़ दिया जाता है। जाडे के दिनों में ये लोग, कठिन ठढक और तेज हवा से बचाने के लिए, मजबूत मकान बनाते हैं। ये मकान विलकुल वर्क के होते हैं। उसके भीतर जाने के लिए ये लोग एक सुरग की भाँति तग रास्ता बनाते हैं जिसके द्वारा घुटनो के सहारे मकान के भीतर घुसते हैं। इस ऋतु मे, सर्दी और तेज हवा से बचने के लिए, बर्फ के मकान सूव गुढ होते हैं, क्योंकि इन दिनो मे बफ विलकुल नहीं पिघलती। मकान के भीतर फर्श पर यानी भूमि पर बारह- सिंगो की खाले निछा देते हैं और गर्मी पाने के लिए मकान के बीच में अंगीठी भी जला लेते हैं। इस भाग में गाँव, शहर, मन्दिर और बाजार इत्यादि की तरह की कोई वस्तु नही है। आबादी भी यहाँ इतनी कम है कि यदि कोई मुमाफिर यहाँ सो मील तक सफर करे, तो भी बहुत कठिनाई से उसे शायद कोई मकान दिखाई दे। २-उत्तरी मेदान के जगल-टुन्ड्रा से जैसे-जैसे हम दक्षिण की ओर बढते जायें वैसे ही वैसे हमको वनस्पति में परिवर्तन दिसाई देगा। श्रारम्भ म पोदे थोडी थोडी दूर पर दिखाई देंगे। परन्तु जैस जेमे हम दक्षिण की ओर आगे बढ़ते जायें वैसे वैसे पौदे अधिक और बडे बडे दिखाई देंगे, यहाँ तक कि बढ़ते बढते बढे वडे पेडों के जङ्गल दिसाई देगे। जगलो का यह प्रान्त, जिसको टेगा रहते हैं, बहुत चौडी पट्टी के रूप मे टुन्डा भाग के दक्षिण में स्थित है और पैसिफिक महासागर से अटलाटिक महासागर तक चला गया है। । - *181 Arctic Afrind 70 100 1020 01/ lynmaan orcha . DYM 82 Timber and Furs er "abola Toing Vira: drea Com Umab roburg Sheep साइनेरिया Balhhggle MONGOLIAN REPUBLIC ostohy Younded Penang Prihuri thijs Toe Ant Horsery Morand 21 Grat Wheot Dairy Puducu Gold 54 Collon Siberi?Products १२१ - । । १२२ एशिया का प्रारम्भिक भूगोल इन जगला क नीच अच्छी लफडी बलुत पाई जाती है। उमसे कुर्मा मान की दीवार और रत श्रादि तरह तरह का सामान प्रामानी में बनाया जा मरता है। परन्तु ये जगल शेरप और एशिया के घने चमे तुम भागा मे बहुत दूर पड़ते हैं, इसलिए यहा म उन देशा के लिए लकडा ले जाना असम्भव- मा है। म भाग की सभी नदियों उत्तर की ओर पहकर प्राकटिक महामागर में गिरती हैं। इमो कारण यहाँ की लकडी पार लट्टे नदियों मे बहाकर भी दूसरे देशों को नहीं भेजे जा सकते। यहाँ के जगल इतन धन है कि संक्डों मील तक,आवादी । नही मिलती। हां, नदियों के किनारे किमी किमो स्थान पर जगल काटकर गाँव बस गये है। इन गॉगों के बीच लफडी क मकान बनाये जाते हैं और गाँवचारा उड जानवर भी पालते हैं। यहां के निवासी झोले और नदिया मे मछली मारते और जाडे में समृरतार जानबरा का शिकार भी करते हैं। साइबेरिया के इन जगलो के दक्षिण म जो जगल हैं वे भी आगे बढते हए, धीरे धीरे कम होते गये हैं। दक्षिणी किनारे से कुछ दूर पर रेल की सडक बनाइ गई है पोर इस भाग में बहुत से गाँव और नगर बस गये हैं। इस भाग में जन-मन्या. जगल की अपेक्षा अधिक है और लोग कुल खेती तथा व्यापार भी कर लेत हैं। पूर्वी माइवेरिया का पहाडी भाग नर्म लकडी के जगलो से ढका हुआ है। इन पहाडा पर सास कर अल्टाई पहाडा पर, सोना, चांदी, लोहा, ताँबा इत्यादि बहुमूल्य धातुया की साने है, परन्तु यहाँ को सानो मे अभी ये चीजें निकाली नहीं जाती। ३-स्टेपील या घास के मेदान-माइबेरिया के दक्षिण में धीरे धीरे जगल कम बने होते गये हैं। यहाँ तक कि अन्त में .
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मोनाग मासे याटफ राय माती
यह मा ! यी गशीनों द्वारा भी तो परते हैं
१२४ एशिया का प्रारम्भिक भूगोल
ओर बहुत बडे बडे खत जोतते चोते हैं। यहाँ से रूस के बड़े,
बडे नगरो में रेल द्वारा गेहूँ भेजा जाता है। इस भाग में रेल
की सडक के किनार साइबेरिया के मुख्य नगर स्थित हैं। इन
नगरों में मक्खन के कारखाने पाये जाते हैं।
रेल की सडक के समाप या किनारे साइबेरिया के जो बडे
नगर स्थित हैं, उनमें पहला ग्लाडीयोस्टक (Vladivostok)
है। यह नगर पैसिफिक महासागर के किनारे पर, ट्रास
माइबेरियन रेलवे का अन्तिम स्टेशन है। पिछले बीस वर्षों में
इस नगर में ऐसी उन्नति हुई कि इसको आयादी पहले से
तिगुनी हो गई है। जाडे में यहाँ का बन्दरगाह यदपि बफे से
जम जाता है तथापि यहाँ को बर्फ पर जहाज चलाने के लिए
जहाज मे सास तरह के मजबूत औजार लगा दिये जाते हैं
जिनसे बर्फ कट जाती है। इस तरह यह बन्दरगाह व्यापार
के लिए साल भर खुला रहता है। योरप से आनेवाली चीन
और जापान की डाक दास साइनेरियन रेलवे से इसी बदरगाह
पर उतारी जाती है।
इकुटस्क (Irkutsk) रेल का एक बडा सुन्दर नगर और
स्टेशन है। यह शहर झील काल के पश्चिम में चालीस मील
है। पूर्वो साइवेरिया का यह सबसे बड़ा हर है।
रेल को एक शासा पर टोमस्क (Tomsk) स्थित है। यह
परिचमा साइवेरिया का एक बडा शहर है। इसी शहर में एशि-
याई रूस की एक बड़ी यूनिवर्सिटी है।
ओमस्क (Omsh) व्यापारी मेलों के कारण प्रसिद्ध हो
गया है, क्योंफि इस शहर में मेले घहुत हुश्रा करते हैं।
M
Alafrai
१२५
1
Irhutsh on the Angira River
4.
This is a view in one of the villages on the
southern edge of the Taiga
The wooden houses
in these villages are nearly all alıke
The sledge
is a common means of travel in winter
Ft
. १२६ एशिया का प्रारम्भिक भूगोल रूस का अधिक व्यापार प्रसिद्ध शहरों में मेलो के द्वारा होता है । साल म नियत समय पर लाग दूर दर म भाकर पन्ः शहरो मे जमा हाते हैं और हर प्रकार का माल असनाव बेचते हैं। इन शहरा के मेले कहत अच्छे और देखने लायक होते हैं। ट-रेगिस्तानी पार अधरेगिस्तानी भाग--यह भाग टास क मदान के दक्षिण म स्थित है आर मे रूसी तुकिस्तान कहते हैं। इस भाग के मान बहुत नीचे और समुद्र में बहत दूर हैं, हम कारण यह भाग गर्मी में बहुत गर्म और जाडे म बहुत सद रहता है। यहाँ या तो वर्षा बहुत हो कम होतो है, या लगभग निलकुल नहीं होती। इस भाग में पालक्श (L Ball ish) और श्ररल (L ATil) नाम की मारे पानी की दो बडी झोले हैं। इस भाग के पूर्व की ओर के प्लेटोमो से निकलनेवाली नदियाँ इन्ही झोली में श्राकर गिरती हैं। इन झोला का पानी इमलिए मारी है कि 'जो नदियों इनमें गिरती हैं वे अपने साथ नमक का बहुत मा भाग लाती हैं। इन नदियों के कारण इन फोलो का जितना पानी मिलता है उसमे अधिक पानी, वर्षा कम होने और गर्मी अधिक पड़ने के कारण, हर साल सूस जाता है, इसी में यह धीरे धीरे छोटी भी होती जा रही हैं। अरल मे सर (जे.) और अमृ (सेहूँ) दो नदियाँ श्रार गिरती हैं। ये पूर्व की ओर के पहाडी की बर्फ के पिघलने में निकली हैं। यह कुल भाग लगभर रेतीला है। कुछ भाग मे थोडी धारो पाई जाती है, नहीं तो त, कॉटे, ऊँटकटारे ओर झरबेरी का छोडकर इस भाग में कुछ भी नहीं है। हाँ, पहाडों का किनारा और घाटियो का भाग सती बारी करने लायक है। इन स्थानों पर गेहूँ, मक्का, सई और तम्बाकू तथा कुछ फल-जैसे अगूर, ग 4 - 17 ।
साइबेरिया
नारगी, नाशपाती और अनार इत्यादि-पैदा होते हैं। यहाँ
कुछ गाँव, कसबे और नगर बसे हुए हैं। बाकी दृसरे भागो
के लोग सानाबदोश चरवाहे हैं जो घोडे, ऊँट और जानवर
पालते हैं।
यहाँ रेल की एक लाइन योरपीय रूस से, स्टेपीज़ के भाग मे
होती हुई, आई है। यह रेल जेहूँ नदी को उपजाऊ घाटी के साथ
साथ ताशकन्द (Tashkend) को चलो गई है जो रूसी
तुकिस्तान का सबसे प्रसिद्ध व्यापारिक नगर है। ताशकन्द मे
NA
The home of 2 Nomad family in Bubhara
सूता कपडा, चमडा और धातु को चीज़ बनाइ जाती हैं। इस
शहर के दक्षिण मे यह लाइन समरकन्द (Samarkand), सारा
(Bukhara) और मर्य (Ifors) हाती हुई कास्पियन सागर तक
चली गई है। बुग्यारा और मर्व पुराने जमाने से प्रसिद्ध व्यापारी
नगर
१०८ एशिया का प्रारम्भिक भूगोल
। सारा के पश्चिम में लाइन की एक शाखा
अफगानिस्तान के किनारे तक आई है। अब पेशावर या क्वेटा
से अफगानिस्तान होती हुई यदि कोई 'रेलवे लाइन रूस की
लाइन से जा मिले तो लोग रेल द्वारा हिन्दुस्तान से योरप
जाने लग और इस यात्रा में सामुद्रिक याना की अपेक्षा बहुत
कम समय लगे।
साइबेरिया के राजकीय विभाग (Political Divisions)
साइबेरिया का भाग पहल रूसी राज्य के अधीन था।
परन्तु योरप के महायुद्ध से रूस का राज्य चरवाद हो गया और
अभी तक इसकी दशा नहीं सुधरी। सैकडों वरस से यहाँ
बादशाह राज्य करते थे जिनको पदवी जार (Tsar) थी।
अन्तिम जार १९१७ में सिंहासन से उतार दिया गया और
रूसी किमानो या मजदूरों का प्रजातन्त्र राज्य स्थापित हो
गया। पुराने रूसी राज्य के अलग अलग जाति के लोगो में
से बहुतों ने अपना अलग अलग राज्य स्थापित कर लिया
है। इन स्वतत्र राज्यो में से प्रारमीनिया (Armenia),
जार्जिया (Georgia), श्राजरवायजान (Azerbaijan) और
तुकिस्तान एशिया में हैं। इनको नकशे में देखें। इन छोटी
छोटी रियासतो का सम्बन्ध अभी तक रूसी राज्य से इकरार.
नामे द्वारा स्थापित है।
वैकाल झील (Lake Baikal) से लेकर ब्लाडीवोस्टक
(Vladivostok) तक का देश पूर्वी साइबेरिया कहलाता है।
यह भाग विलकुल स्वतंत्र है। योरप के
मित्रता का सम्बन्ध है।
।
साइबेरिया
१२९
प्रक्ष
२-हिन्दुस्तान को नदियों से साइवेरिया को दियो की तुला करो
और यत्तानो कि साइबेरिया को दिया व्यापार के काम की क्या
नहीं है।
२-टुहा ये जलवायु और शिवासियों पे जीवा का कुछ हाल लिसो।
३-टेगा पे यों का कुछ हाल बतायो। यहां के निवासियो पे उद्यम
पाउछ हाल लिखो।
४--स्टेप्स दिने पहते हैं ? यहाँ पे जलवायु, वनस्पति और शिवासियों
के जीवन का कुछ हाल लिखो।
.
अभ्यास
१-साइवेरिया या नशा बनाओ। उसमें मुख्य नदियां, शहर और
रेला को दिखायो।
२-इसी नशे में साइवेरिया के प्राकृतिक भाग भी दिखानी ।
१८ पशिया का प्रारम्भिक भूगोल नगर हैं। सारा के पश्चिम में लाइन की एक शाखा अफगानिस्तान के किनारे तक आई है। अब पेशावर या क्वेटा से अफगानिस्तान हाती हुई यदि कोई रेलवे लाइन रूस की लाइन से जा मिले तो लोग रेल-द्वारा हिन्दुस्तान मे योरप जाने लग और इस यात्रा में सामुद्रिक यात्रा की अपेक्षा बहुत कम समय लगे। साइबेरिया के राजकीय विभाग (Political Divisions). माइबेरिया का भाग पहल रूसी राज्य के अधीन था। परन्तु योरप के महायुद्ध से रूस का राज्य बरबाद हो गया और अभी तक इसकी दशा नहीं सुधरी। मैकडों बरस से यहाँ बादशाह राज्य करते थे जिनकी पदवी जार (Taar) थी। अन्तिम जार १९१७ में सिंहासन से उतार दिया गया और रूसी किसानो या मजदूरों का प्रजातन्त्र राज्य स्थापित हो गया। पुराने रूसी राज्य के अलग अलग जाति के लोगों में से नहुतों ने अपना अलग अलग राज्य स्थापित कर लिया है। इन स्वतत्र राज्यो मे से श्रारमीनिया (Armenis), जार्जिया (Georgan), श्राजरवायजान (Azerbarjan) और तुकिस्तान एशिया में हैं। इनको नशे में देते। इन छोटी छोटी रियासतों का सम्बन्ध अभी तक रूसी राज्य से इकरार- नामे द्वारा स्थापित है। वैकाल झील (Lake Brikal) से लेकर ब्लाडीचोस्टक (Vladivostok) तक का देश पूर्वी साइबेरिया कहलाता है। यह भाग बिलकुल स्वतंत्र है। योरप के रूसी राज्य से इसका मित्रता का सम्बन्ध है।
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बारहवाँ प्रकरण एशिया का पश्चिमी प्लेटो एशिया के पश्चिमी भाग को हम इस प्रकार प्राकृतिक भागों में बाँट सकते हैं- (१) ईरान का प्लेटो। (0) मेमोपोटामिया का नीचा मेदान । (३) एशियाई कोचक यानी की और शाम देश का प्लेटो। (४) अरब का प्लेटो। इनमे मेसोपोटामिया को छोडकर भव हिस्से प्लेटो हैं, परन्तु येप्लेटो तिन्वत की भाँति ऊँचे नहीं हैं। एशिया के इस पश्चिमी भाग मे बहुत से देश हैं। इनके नाम नकशे मे दिये हुए हैं। नफशा देगन से तुमको यह भी मालूम हो सस्ता है कि इन प्लेटोओ पर बहुत कम और बहुत छोटी नदियाँ हैं जिससे यहाँ की आय- हवा सुश्क है। इन स्थानों का जलवायु सूसा होने का कारण यह है कि हिन्द महासागर से गर्मी में जो हवायें उत्तर-पूर्व की ओर चाती है उनकी सीमा से यह हिस्मा बाहर रह जाता है। ईरान और टर्की के पहाड़ों पर थोड़ी बहुत वर्षा, जाड़े मे, होती है । टर्की के पश्चिमी भाग मे भूमध्य सागर का जलवायु है जिसके कारण वहाँ अच्छी वर्षा होती है, उपजाऊ घाटियाँ पाई जाती हैं और नरियाँ भी बहती हैं। इन प्लेटोयो मे गर्मी के दिनो मे बहुत गर्मी पड़ती और जाड़े में जाडा भी खूब पडता है।' ग्रीष्म ऋतु में जय दिन में कड़ी गर्मी १३० TURKI STAS Tahrir SEA ORAN rresht Mabbodo Jotalokat Tehtaa jis at 440 hatut Zophtta AF CHANISTAN A 3 o BFTAD B215 पशिया का पश्चिमी प्लेटो Quettá Ehitus Busbare Ke at BALUCH Bu der Alba PERSSAN CULE hars A RADIA ARABIA ) SEA PERSIA १३३ । १३२ एशिया का प्रारम्भिक भूगोल पडती हे ता रात ठडी हो जाती है। इन प्लेटाओं के अधिकाश: भाग रेगिस्तानी हैं। कुछ हिस्सो में घास भी उगती है। इन हिस्सा के निवासी चरवाहे हैं। हाँ, पहाड के नीचे जहाँ छोटी छोटी नदियाँ पाई जाती हैं या जिन स्थानो पर कुओं से सिंचाई हो सकती है वहाँ लोग सेती-बारी करते और गेहूँ, जो वगैर बोते है। ईरान का पगर या प्लेटो तुमको पहले ही बतलाया गया है कि ईरान का प्लेटो उन उँचे पहाडो से घिरा हुआ है जो पामीर से पश्चिम की ओर निकले हुए हैं। पामीर से निकलकर हिन्दूकुश पहाड़ और इसके आगे श्रत्युर्ज पहाड (Elbarz Afte) ईरान की उत्तरी सीमा बनाते है । उसकी पूर्वी सीमा सुलेमान और किरथर से और दक्षिणी पश्चिमी सीमा जागरूस (Zagros) पर्वत से बनती है। फिर जागरूस ओर अल्बुजे पहाड की श्रेणियाँ ईरान के उत्तर- पश्चिम में आरमीनिया के प्लेटो पर मिल जाती हैं। इस तरह ईरान का प्लेटो चारो ओर ऊँचे पहाडों से घिरा हुआ है। एशिया का प्राकृतिक नकशा देखकर मालूम करो कि ईरान का प्लेटो तिब्वत के प्लेटो के बरावर ऊँचा नहीं है। इसके चारो और के पहाड छ हजार फीट से अधिक ऊँचे हैं और प्लेटो के बीच का हिस्मा इन पहाडो से बहुत ही नीचा है। ईरान के प्लेटो मे प्रसानिस्तान, फारस और बिलोचिस्तान के मुल्क हैं। इनमे से विलोचिस्तान भारत-साम्राज्य' का एक भाग है। जलवायु के अनुसार यह प्लेटो बहुत ही सूसा है। इसके गिर्द के पहाड़ों पर कुछ वर्षा हो जाती है। अल्वुर्ज पहाड की उत्तरी ढाल के हिस्से मे सबसे ज्यादा वर्षा होती है, इसलिए इस पहाड़ ।
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१३२ एशिया का प्रारम्भिक भूगोल पडती है तो गत ठंडी हो जाती है। इन प्लेटोआ के अधिकाश भाग रेगिस्तानी हैं। कुछ हिस्सो मे घास भी उगती है। इन हिस्सो के निवासी चरवाहे हैं। हॉ, पहाड के नीचे जहाँ छोटी छोटी नदियाँ पाई जाती हैं या जिन स्थानों पर कुओ से सिंचाई हो सकती है यहां लोग खेती-बारी करते और गेहूँ, जो वरौर चोते हैं। ईरान का पठार या प्लेटो तुमको पहले ही बतलाया गया है कि ईरान का प्लेटो उन ऊँचे पहाडो से घिरा हुआ है जो पामीर से पश्चिम की ओर निकले हुए हैं। पामीर से निफ्लकर हिन्दूकुश पहाड और इसके आगे अत्बुर्ज पहाड (Elburz Mts) ईरान की उत्तरी सीमा बनाते है । उसकी पूर्वी सीमा सुलेमान और किरथर से और दक्षिणी पश्चिमी सीमा जागरूस (Zagros) पर्वत से बनती है। फिर जागरूस और अल्लुजे पहाड की श्रेणियाँ ईरान के उत्तर- पश्चिम मे श्रारमीनिया के प्लेटो पर मिल जाती हैं। इस तरह ईरान का प्लेटो चारों ओर ऊँचे पहाडों से घिरा हुआ है। एशिया का प्राकृतिक नाशा देसकर मालुम करो कि ईरान का प्लेटो तिब्बत के प्लेटो के बराबर ऊँचा नहीं है। इसके चारो ओर के पहाड छ हजार फीट से अधिक ऊँचे हैं और प्लेटो के बीच का हिस्सा इन पहाडों से बहुत ही नीचा है। ईरान के प्लेटो मे अफगानिस्तान, फारस और विलोचिस्तान के मुल्क हैं। इनमे से विलोचिस्तान भारत-साम्राज्य का एक भाग है। जलवायु के अनुसार यह प्लेटो बहुत ही सूसा है। इसके गिर्द के पहाड़ों पर कुछ वर्षा हो जाती है । अल्बुर्ज पहाड की उत्तरी ढाल के हिस्से में सबसे ज्यादा वर्षा होती है, इसलिए इस पहाड़
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१३४ एशिया का प्रारम्भिक भूगोल का उत्तरी ढाल, जो कास्पियन मागर (Caspian Sea) की ओर है, जङ्गल से ढका है। जाडे में इस पहाड पर बर्फ जम जाती है। गर्मो में यह धर्फ पिघलती है। इस पहाड की धर्फ के पिघलने और कुछ वर्षा के कारण नदियाँ बह निकलती हैं। इन नदियों के कारण पहाडॉ के किनारों पर सेतो होती है। जगह जगह पर पहाडो के नीचे गाँव, फसबे पोर शहर पायाद हो गये हैं। इसी अल्बुज पहाड के दक्षिणी किनारे पर फारस की राजधानी तेहरान (Teneran) है। इसी प्रकार जागरूस पर्वत पर कुछ वर्षा हो जाती है। इस पहाड के किनारे पर भी कुछ गाँव, फसवे और शहर बसे हैं। जिस साल और वर्षों की तरह वर्षा नहीं होतो उस साल यहाँ के चश्मे सूस जाते हैं और अकाल पड़ जाता है। इसलिए किसी किसो स्थान पर नहरे चना दी गई हैं। फारसवालों ने सुरन बनाकर ये नहरे निकाली हैं। ये ऊपर से इसलिए ढकी होती है कि इनका पानी सूस न जाय । ईरान की घाटियो और उपजाऊ स्थानों में गेहूँ, बाजरा, ज्वार, तम्बाकू, अफीम, रुई और प्रमरोट, बादाम, पिस्ता, शफतालू , आलूचा तथा अंगूर आदि व सूसे व हरे फल बोय जाते हैं जिन भागो में वर्षा होने के कारण कुछ घास जम जाती है वहाँ के निवासी ऊँट, भेड, बकरियाँ और घोड़े पालते हैं, और उनसे जानवरों को चरवाही करते हैं। ऊनी कपडे पोर उम्दा कालीन लगभग सब नगरों में बनाये जाते हैं। इसके लिए फारस बहुत दिनो से प्रसिद्ध है। एशिया के कुछ पश्चिमी देशो में सवारी और बोझ लादने के काम में ऊँट आता है, क्योंकि इन देशा के लिए ऊँट ही एक ऐसा जानवर है जो कई कई दिनो तक विना चारे-पानी के सफर फर सकता है। इसके पैर के तलुवे में गद्दी की तरह मुलायम पपडा होता है जिससे यह वाल में नहीं फंस सक्ता। ,
This is a Persian dinner parts The guests are
belund, ready to serve their masters
नमक हवा में मिलकर यात्रियो और ऊँटों की नाक में घुस
है जिससे दम घुटता है। इन स्थानो में जहाँ जमीन से.
पानी के सोते निकले हैं वहाँ एक छोटा-सा
बन गया है। उस हरे-भरे मैगन को नम्बरिस्तान
एशिया का पश्चिमी सेटो
१३५
इस लेटो का वाक़ी भार रेगिस्तानो है और बहुधा यालू से
ढका है। यहाँ के रेगिस्तान की बाल में नमक का अश बहुत है।
प्राचान समय में इन रेगिस्तानो पर सारो पानी को मोल हों।
इन मोला के सूख जाने स ये नमक के रेगिस्तान हा गये हैं।
यात्रियों को इन स्थानों से जाने मे बडी कठिनता होती है क्योंकि
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serrants stand
हरा-भरा
Beated on beansiful rugs
१३६ एशिया का प्रारम्भिक भूगोल कहते है। इन नखलिस्तानो मे खेत, पृलो और फलो के वाग, शहर, मसजिने और मरा पाई जाती हैं। इन रेगिस्तानो से जानेवाला काफिला इन्हीं नखलिस्तानो में ठहरता और पानश्यकता के अनुसार नसलिस्तानो की चीजें सरीदता है। फारस के दो प्रसिद्ध नगर मशहद (Meshed) और शीराज ( Shunaz) इन्हीं नमलिस्तानों पर स्थित हैं। फारस के बीच में जागरूस पर्वत के पूर्वी किनारे पर एक घाटी में इस्फहान (Ispahan) स्थित है। किसी समय यह नगर फारस की राजधानी था। 'फारम की साडी के उत्तरी किनारे पर बूशहर (Bushure) और चन्दर श्रघास (Bandar Abbas) नाम के दो बन्दरगाह है। इन बन्दरगाहो पर योडी मी तिजारत होती है। उमान की खाडी (Gulf of Oman) का उत्तरी किनारा विलकुल वजर है. परन्तु उमके किनारे पर, जगह जगह, ताड के पेड पाये जाते हैं। अफगानिस्तान के पहाडों पर भी थोड़ी वर्षा हो जाती है और बर्फ जम जाती है। इसी कारण यहाँ भी नदियाँ पाई जाती हैं। अफगानिस्तान में कावुल नदी (R. Kabul) सबसे लाभदायक नदी है । इसी नदी की उपजाऊ घाटी मे कावुल (Kabul) नगर बसा हुआ है। कागुल ननी पूर्व की ओर सिन्ध नदी में गिरती है। नकशे मे हेलमन्ट नदी (Helmand) को देखो। यह नी कोह सफेद में निकली है और दक्षिण पश्चिम के रेगिस्तान के वीच हेलमद झील में गिरती है, जो खारी पानी की एक झील है। अफगानिस्तान के दक्षिण में एक और प्रसिद्ध नगर कन्धार (Kandahar) है। विलोचिस्तान भी अफगानिस्तान की तरह एक पहाडी प्रदेश है। इसका एक बहुत बड़ा हिस्मा रेगिस्तान है। वर्षा की कमी । ।
Radikcream
एशिया का पश्चिमी मेटो
और गर्मी की अधिकता स यहाँ भा बहुत कम पैदावार होती है।
पेड पोधे बहुत कम होते हैं। समुद्र के किनारे कहो कहा पर सजूर
Marwainmental
This 19 the market place at Quetta in Baluchistan
के पेड पाये जाते हैं। इन पेडों से एक लाभ यह है कि ये रेगिस्तानी
के अन्दर रास्ते की पोज में यात्रियों को सहायता पहुँचाते हैं।
मेसोपाटामिया का नीचा मैदान या इराक अजम
मेसोपोटामिया शब्द का अथ दोआच है। नशे में देसो
कि यह भाग ईरान और अरब के सेटोओं के बीच का नीचा मैदान
है। इस मैदान में दजला (Tigris) और फरात (Cuphrates)
दो नदियाँ बहती हैं। इसी कारण इस मैदान का मेसोपोटामिया
का मैदान कहते हैं। गगा और जमुना के मदान की ही भांति
१३६
एशिया का प्रारम्भिक भूगोल
कहते हैं। इन नखलिस्तानो मे सेत, फूलो और 'फलो के घाग,
शहर, मसजिदें और सराये पाई जाती हैं।
इन रेगिस्तानो से जानेवाला काफिला इन्ही नखलिस्तानो में
ठहरता और आवश्यकता के अनुमार नसलिस्तानो की चीजें
खरीदता है। फारस के दो प्रसिद्ध नगर मशहद (Meshed)
और शीराज ( Shiraz) इन्ही नखलिस्तानो पर स्थित हैं
फारस के बीच में जागरूस पर्वत के पूर्वी किनारे पर एक घाटी
में इस्फहान (Ispahan) स्थित है। किसी समय यह नगर
फारस की राजधानी था।
फारस की गाडी के उत्तरी किनारे पर वूशहर (Bushire)
और धन्दर प्रवास (Bandal Abbas) नाम के दो बन्दरगाह
हैं । इन चन्दरगाहो पर थोडी मी तिजारत होती है। उमान की
खाडी (Gulf of Oman) का उत्तरी किनाग बिलकुल बजर है
परन्तु उसके किनारे पर, जगह जगह, ताड के पेड पाये जाते हैं ।
अफगानिस्तान के पहाड़ों पर भी थोडी वर्षा हो जाती है और
बर्फ जम जाती है। इसी कारण यहाँ भी नदियाँ पाई जाती है।
अफगानिस्तान मे काल नदी (R Kabul) सबसे लाभदायक
नदी है । इमी नदी की उपजाऊ घाटी मे काल (IKabul) नगर
बसा हुआ है। काबुत नी पूर्व की ओर सिन्ध नदी में गिरती
है। नकशे मे हेलमन्द नदी (Helmand) को देखो। यह नदी
कोह सफेद मे निम्ती हे और दक्षिण पश्चिम के रेगिस्तान के
वीच हेतमद मील में गिरती है, जो सारी पानी की एक झील है।
अफगानिस्तान के दक्षिण में एक और प्रसिद्ध नगर कन्धार
(Kandahal) है।
बिलोचिस्तान भी अफगानिस्तान की तरह एक पहाडी प्रदेश
। इसका एक बहुत बड़ा हिस्सा रेगिस्तान है। वर्षा की कमी
+
एशिया का पश्चिमी सेटो
१३७
ओर गर्मी की अधिकता से यहाँ भा बहुत कम पैदावार होती है।
पेड पोधे बहुत कम होते हैं। समुद्र के किनारे कही कहों पर सजूर
Cuproo
This is the market place at Quetta in Baluchistan
के पेड पाये जाते हैं। इन पेडों से एक लाभ यह है कि ये रेगिस्ताना
के अन्दर रास्ते की योज मे यात्रियों को सहायता पहुंचाते हैं।
मेसोपोटामिया का नीचा मेढान या इराक अजम
मेसापोटामिया शन्द का अथ दोश्राव है। नशे में देसो
कि यह भाग ईरान और अरब के सेटोओं के बीच का नीचा मेंदान
है। इस मैदान में दजला (Tigris) और फरात (Euphrates)
दो नदियाँ बहती हैं। इमी कारण इस मैदान का मेसोपाटामिया
का मैदान कहते हैं। गगा और जमुना के मदान की ही भाँति
एशिया का प्रारम्भिक भूगोल
GRAN LATER
-
MOSŪTA
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Samarra
Baghdad
Kerbela Hilla
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Amara
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PLATEAU
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Land upto 500 ft high or lowlands
Uplands from 500 ft to 1500 ft high
Plateaux above 1500 ft
Land where Ricc and Dates are grown
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Pliysical features and cultivated arcas
एशिया का पश्चिमी प्लेटो १३९ दजला और फराव का मैदान भी द्वाबा कहलाता है। फरात और दजला दोनो नदियाँ प्रारमीनिया के पहाडों से निफ्लकर इस मैदान में वहती हैं और फारस की खाडी के पास, एक दूसरी से मिलकर, शत्तल धरय (Shatel Arab) बनाती तथा फारस की साडी में गिर जाती हैं। मेसोपोटामिया एक बहुत ही सूसा प्रदेश है। यहाँ वर्पा बहुत कम होती है । गर्मी में कडी गर्मी और जाडे में जाड़ा भी अच्छा पड़ता है। यहाँ का जलवायु सिन्ध-प्रान्त की भांति है। यदि मेसोपोटामिया में दजला और फरात नदियाँ न होती तो यह स्थान अत्यन्त ही सूखा रेगिस्तान और ऊजड होता । परन्तु, नदियों की लाई हुई मिट्टी से बना होने के कारण यह मैदान बहुत उपजाऊ है। यहाँ वर्षा बहुत कम होती है जिसके कारण केवल नदियो के किनारे पर ही खेती होती है और बाकी हिस्से में कुछ नही उगता। नदी किनारे के सेत नदी के पानी स मोचे जाते हैं। उनमें गेहूँ, मका, रुई और तम्बाकू बोई जाती है और सजूर के पेड भी बहुत हैं। इन नदियों के बीच की जो जमीन नदी से दुर स्थित है वह रेगिस्तान और ऊजड है। पुराने समय में इन नदियों से चडी घडी नहरे निकाली गई थीं जिनके कारण देश के सूसे भाग म सेती होती थी। परन्तु कई शताब्दियाँ हुई, लोगो ने इन नहरों की रक्षा करने में लापरवाही की जिससे ये नहरे बालू से भर गई। आज कल फिर लोग सोच रहे हैं कि नहरें साफ करा दी जाव और उनके प्रतिरिक और भी नहरें बनवाई जावे जिससे देश का और भाग उपजाऊ होजावे और यहाँ की पैदावार भी अधिक बढ जाने। इस नदी के उत्तरी भाग में कुछ अधिक वर्षा हो जाती है इसलिए इस भाग में घास का मैदान है। इस भाग में १४० एशिया का प्रारम्भिक भूगोल सानाबदोश लोग अपने जानवर-भेट, बकरी और ऊँट इत्यादि-चराते हैं। NIS EIN ५.. S RUNS OF MOSUL NINEVER BHARSATH RIAAJ Pore To Teheran To Daruscus --- APEMANON OLcbb (CREDADA Hind o barrogu PERSIA, KERBLLO AR R AB NA Hasir --00041 UR MOMAMERAN BASRA Engi sh Miles - ०००००००० Versand Mosopotamia-Railways and routes 3 यहाँ गाँव, ऊसवा और शहर केवल नदी के किनारे पर से हुए हैं। कारण यह है कि नदी-किनारे के सिवा क्सिी भाग में खेती-बारी नहीं होती। हर साल बरसात में जब पहाड़ों पर पानी बरसता है तो, इन नदियों में बाढ़ आ जाती है जिसके कारण कहो कही नदी का पानी चौरस मैदानों में फैल जाता है। इससे इन मदानो मे दलदल बन गये हैं जो किसी लाभ के नहीं।
। शिया का परितमी प्लेटो १४१ इस देश का मुरब नगर पगदाद (ITarhdad) दजना दो के किनारे स्थित है। यहाँ पर दाना नदिर्गण्य दूमरी के समीप हो गई है। दलला सनी यही नदी है कि घरादाद सफ होटे छोटे जहाज चलाये जाते हैं। इसी जगा पारम म आनेवाले काफिला का एक राम्ना नदी को पार परता है जिसके कारण या नगर प्राचीन काल से व्यापार का एप पेन्द्र हा गया है। पुराने जमाने में इम नगर म राजधागोया। यहां के राजा बलीका पालात थे और उनके ममय म यह घटी सुन्दर जगह थो। अलिश लैला में पही यहाँ पर इमरा पर्णन है। उत्तर की ओर पापिलो के व्यापार या एक और नगर है जिसको मांसल पाते हैं। फारस फी बादी के समीप, शत्तुल अग्य के किनारे, यसरा एक बड़ा नगर और बन्दरगाह है। समुद्री जहाज यहुत प्रामानी स घसरा तक आ मरते हैं। इराक की मुख्य पैदावार सजुर यहाँ स सहारा दूसरे देशों को भेजा जाता है। इस शहर में मिट्टी का तेल माफ करने के कारसाने है। यसरा से एक रेल की लाइन यगदाद हाती हुई मोसल को गई है। गगा-जमुना के मैदाना की भांति मेसोपोटामिया का मैदान भी दुनिया के पुराने बसे हुए और मध्य भागो में से है। हजारा धर्म हो गय कि यहाँ नाबुल और अरिया के राज्य थे। इस राज्य म बड़े बडे बादशाह राज्य परते थे। उस समय न नगरो में पड़े बडे वाग और भव्य इमारतें मौजूद थीं और इस मैदान मे बडी बडी नहरें पाई जाती थी। परन्तु श्रव बाबुल और निनवा (Ninereh) शहर के, जो अतरिया की राजधानी था, केरल मॅडहर पाको है। यह देश फई सौ बरस तक टर्को के अधीन रहा, परन्तु १९१४ के महायुद्ध के बाद अँगरेजों के अधिकार में प्रा गया। अब यहाँ अंगरजो की देख-भाल में एक स्वतन्त्र राज्य स्थापित हो गया है।
१४६ पशिया का प्रारम्भिक भूगोल दस-रेस म एक प्रजातन्त्र राज्य स्थापित हुआ। यहाँ के निवासी इस्लाम धर्म के माननवाले य । श्राज स्ल यह मुल्क बहुत उन्नत्ति कर रहा है। पड़े बड़े शहरा में नये नये कारखाने सुलते जा रहे हैं पार यहाँ के निवासा यार ग्वाला की रहन-महान म मिलते जा रह है। जैसे, पहल यहाँ स्त्रियां पर्द में रहती था परन्तु अब पर्दे का रसान बिलकुल उठ गया है। लडके ओर लडकियाँ सव पाठशालाग्रा आर कालेजो में शिक्षा पाते हैं। मर्द और औरत दोना दूकाना में नय विक्य का काम करते हैं। . पारमीनिया (Armenia)) यह टर्की के पृष म एक ऊँचा पहाडी प्लेटो है। यहाँ यारों और के पहाड श्रापर मिल गये हैं। इन पहाडा की कोई कोई चोटियां बहुत ऊँची है जो वष भर बर्फ से ढकी रहती हैं। इनमे सरस ऊँची चोटी अरारात है। यह समुद्र की सतह स सत्रह हजार पीट ऊँची है। गर्मियों में इन पहाड़ों की बर्फ पिघलने से कुछ नदियाँ बन गई हैं। इन नदियों से पहाड़ा के बीच उपजाऊ घाटियां बन गई हैं जिनमें कृषि होती है। यहाँ गल्ला, कपास, तम्बाकू, अगर और दूसरे फल पैदा हाने हैं। कुछ लोगो का मत है कि धारा- अदन नाम का धाग, जहाँ हजरत आदम पैदा हुए थे, इस प्लेटो में किसी जगह था। यहाँ बहुत धोड़े दिनो तक गर्मी पडती है परन्तु बहुत ही मनोरजक होती है। जाड़े का दिन बहुत बडा होता है और सर्दी भी बहुत पडतो है। यहाँ के पहाडों के पश्चिमी ढालों पर वर्षा भी होती है और किसी किसी स्थान पर जगल भी पाये जाते हैं। पहाडी ढाला के अधिकतर नीचे के भाग घास से ढके रहते हैं। 1 .
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१४६ एशिया का प्रारम्भिर भूगाल दस-रेस म एक प्रजातन्त्र राज्य स्थापित हश्रा। यहाँ के निवासी. इस्लाम-धर्म क माननवाल । श्राज पल यह मुल्क बहुत उन्नति पर रहा है। पडे पड़े शहरो में नय नय कारयान सुलते जा रहे हैं और यहाँ के निवासा यार ग्वाला की रहन महन में मिलने जा रहे हैं। जैस, पहल यहाँ स्त्रियां पर्द में रहती थों परन्तु अब पर्दे का ग्वाज दिलकुल उठ गया है। लडके ओर लड़कियों सब पाठशालाया और कालेजों में शिक्षा पात हैं। मद और ओरत दोना दूकाना में न्य-विनय का काम करते हैं। श्रारमीनिया (Armenia) यह टकी के पृय म एक ऊँचा पहाड़ी प्लेटो है। यहाँ चारों और क पहाड श्राफर मिल गये हैं। इन पहाडों को कोई फाई चोटियाँ नात उँचो ह जो वष भर वर्फ से ढकी रहती हैं। इनमे सबसे ऊंची चोटी अरारात है। यह समुद्र को सतह म मत्रह हजार फीट ऊँची है। गर्मियो म इन पहाड़ा की बर्फ पिघलने से कुछ नदियों बन गई हैं। इन नदिया म पहाड़ा के बीच उपजाऊ घाटियाँ बन गई हैं जिनमें कृषि होती है। यहाँ गला, कपास, तम्बाकू, अगूर और दूसरे फल पैदा हाते हैं। कुछ लोगो का मत है कि बाग-' अदन नाम का बाग, जहाँ हजरत आदम पैदा हुए थे, इस प्लेटो में किसी जगह था। यहाँ बहुत थोड़े दिनो तक गर्मी पडती है परन्तु बहुत ही मनोरंजक हाती है। जाड़े का दिन बहुत बड़ा होता है अोर सर्दी भी बहुत पडती है। यहाँ के पहाडों के पश्चिमी ढाली पर वर्षा भी होती है और किसा किसी स्थान पर जगल भी पाये जाते हैं। पहाटी ढाला के अधिकतर नीचे के भाग घास से ढके रहते हैं। -
शिया का पश्चिमी जेटा
इन घास के स्थानों में रहनेवालों का मुरय पशा भेड अकारयाँ
ঘন্য ।
बारमोनिया का मुख्य शहर अजाम (Etzerum) है। यह
फ नदा की उपनाऊ पाटो म बसा है। नडी लाई से
पहल भाग्मीनिया राज्य टर्म के प्रधान या। परन्तु इस
लड़ाई में याद अारमारिया स्थतन्त्र बना दिया गया। यहाँ
क निवामी यहत सुन्दर और स्वच्छ रग के है । ये लोग बहुत
दिन स मसीही धर्म मानते हैं ।
आनरबैजान (Averbhayan)
यह एक घाटा देश बारमोनिया और कास्पियन सागर के
घोच बसा है। इस मुल्क का अधिक भाग कर नदी को घाटी में
है। इसका मुग्य शहर याकू (Biku) है। यह शहर मिट्टी के
तेल के कुप्रा के लिए प्रसिद्ध है।
शाम या सीरिया (Syria)
यह दश अरव क पठार के उत्तर म स्थित है। इस पश्चिम
में कम मागर है। शाम देश का पचा भाग रेगिस्तानी है, लाग्न
पश्चिमो रिनार पर, जो एक निचली पट्टी है, क्यो जाडे में
होती है इसलिए यहा' जतन, नीबू, नारङ्गो, अगर, गेहूँ पोर जो
पैदा किये जात हैं।
पहले शाम दश टो सलतनत का एक सूबा था, लेकिन
महायुद्ध के पश्चात इस देश की दर रेय प्रामासिगों के हाथ में
धागद है। शाम का मुख्य नगर दमिक (Dan useus) है।
यह मसार के मनसे पुरान शहरा म माना गया है।
फिलस्तीन {Phlestine)
शाम दश के दक्षिण में फिलन्तान दश को रियासत स्थित
।यह यदात्या का परित्र श ग। इमको रानरानी
-
Agates as of Jerusalem शिया का पश्चिमी प्लेटो इन घास के स्थानों में रहनेवालों का मुरय पेगा भेड-बकरियाँ और मोनिया का मुख्य शहर अनकम (Erzerum) है । यह लहाई के बाद पारमानिया स्वतन्त्र बना दिया गया। यहाँ क नद्रा की मनाऊ घाटी म यसा है। डी लडाई से चहल आग्मीनिया गज्य के अधीन था। परन्तु इस कनिवामी बहत सन्दर और स्वच्छ रंग के है। ये लोग बहुत यह एक लाटा दश प्रारमीनिया और कास्पियन र बोच वमा है। इस मुल्क का अधिन भाग पूरनरी की घाटा में । इसका मुग्य शहर याकु (Baku) है। यह शहर मिदी के यह दश अरन फ पठार के उत्तर में स्थित है। पश्चिमी किनारे पर, जा एक निचली पड़ी है, पराना है। दिने स मसीही धर्म मानते हैं। तेल के कुया क लिए प्रमिद्ध है। शाम या सोरिया (Syrial में रूम मागर है। शाम देश का पूर्वी भाग आजरबैजान (Azerbayan) सागर 8 के । पश्चिम गिरणा है, लग्नि नाडे में हाता है इसलिए वहाँ जेदून, नीतू, पारङ्गो, पैदा फिर जाते हैं। पहल शाम देश टर्का सलतनत का महायुद्ध के पश्चात इस देश की देगरेर । श्रागड है। शाम का मुख्य नगर दमिक ( यह मसार के सरमे पुराने शहरा में माना गया फलस्तीन (Pilestine) माम दश क्षिण में फिलस्तान है। यह या ा का पति श
१४८ एशिया का प्रारम्भिक भूगोल
यरूशलम (Jerusalem) है जिसका यहटो और मसीहो पवित्र
नगर मानते हैं। महात्मा यीशु यहो पैदा हुए थे ईमाई-धर्म का
प्रारम्भ यही से हुप्रा था। फिलम्तोन का मुख्य बन्दरगाह साफा
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This is a caravan
serai in Syria, showing the
inner court sherr donkeys and camels are taking rest
(Tilfh) हैं। महापुद्व से पहले फिलस्तीन टर्की के अधीन था,
लेकिन लडाई के पश्चात इमका प्रबन्ध अँगरेजा के हाथ में
आगया। फिलम्नीन देश म होकर एक रेल की लाइन दमिश्क से
पोर्ट मईद (Post Sud) तक जाता है।
अरब का प्लेटा (Aratha)
यह प्रायद्वीप एक प्लेटा है और एशिया के दक्षिणी पश्चिमी
मे बसा है। लाल सागर और अदन की पाडी, के कारण
एशिया का पश्चिमी प्लेटा यह अफ्रीका महाद्वीप स अलग है। इसका ढाल भी दक्षिणी हिन्द प्रायद्वीप की भाँति पश्चिम से पूर्व की तरफ है। थरव का प्लेटो बिलकुल रेगिस्तान है, क्वल इसके किनारे पर पहला भाग पहाडी और उसके बाद दूसरा भाग चमत्ता हुआ रेगिस्तानी मैदान है जहाँ पर हमेशा जलती हुई रेत दिखाई पडती है। यह भाग दक्षिण की ओर फेला हुन्मा है और तीसरा भाग एक वडा नखलिस्तान है, जिसमें कई चश्मे और उनकी घाटियाँ हैं। घाटियो के ढालो पर चरागाह है, सेती बारी भी होती है और फलो के पेड लगाये जाते हैं। इसी उपजाऊ भाग फो नजद (Nerd) कहते हैं। नजद हो सारे परब में श्राबाद आर उपजाऊ कहा जाता है। रगिस्तानी स्थानो का जलवायु, जैसा हम जानते हैं, बहुत गर्म और क्रदायक होता है। इस रेगिस्तान का जलवायु भी ऐसा ही है। लेकिन नजद में अगर दिन में गर्मी पड़ती है तो रात सर्ट होती है। नजद के हर एक भाग में सजूर के पेड अधिक पाये जाते हैं। हर एक उपजाऊ भाग मे यहाँ सास तौर से खजूर के पेड़ बोये जाते हैं। अरब के कवि लोग सजूर के पेड को 'जगल का बादशाह' कहते हैं। नजद में अरब के प्रसिद्ध घोडे पाये जाते हैं जिनको वहाँ के लोग सब वस्तुओं से अधिक प्यारा समझते हैं। नजद के अतिरिक्त और कई छोटे छोटे नरालिस्तान हैं जिनम सेती बारी, फलो के बाग और खजूर के पेड लगाये जाते हैं। इन नखलिस्तानों के लोग हमेशा मकानो मे रहते हैं। याकी लोग दूसरे रेगिस्तानी मुल्कों की भांति सानाबदोश हैं और एक जगह से दूसरी जगह अपने ऊँट लिये फिरते हैं। परव के दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व के कोने पहाड़ी १ इन भागो म कुन्छ वर्षा होती है और लोग
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शिया का प्रारम्भिक भूगोल
अरब के दक्षिण पूर्व में उमान (Oman) नाम का राज्य है और
दक्षिण पश्चिम में यमन (Yemen) की रियासत है। यमन का
मुख्य शहर मोखा (Mocha) कहवा के लिए प्रसिद्ध है।
'अरब फा क्षत्रफल यद्यपि हिन्दुस्तान के क्षत्रफल के बरावर
है लेकिन यहाँ की फुल आबादी दस लास से भी कम है। इस
समय भो यहाँ ऐसे भाग है जिनमें अब तक किसी मनुष्य का
गुज़र तक नहीं हुआ। रेगिस्तान म आने-जान की कठिनाइयों
के कारण सारे अरव में एक ही बादशाह की हुकूमत नहीं
रहतो।
,
part of an oas19 in Arabra
अग्ब के निवासो, और उनमें भो सास कर बद्दी नाम के
जंगलो, बडे अतिथि सत्तार करनवाले होने हैं। अपने
मेहमाना क श्रागम लिए आपनो नान से देना इनका
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शिया या पश्चिमी सटा
मागृती काम है। ये ताग माद फुता (निस पर एक
मराती और उमर पर ऊँट फ बाल की एक श्रधा
(नन्या कपड़ा) पहनन ।। E7 सिर पर सद फेल्ट को
टोपी हाती निमके चारो भार य लाग रेशमा या सूती रस्सी
लपेटे रहत हें जिमर मिर पधा पर लटकाराते । हर एक
जाति प्रथया मुह अपर मरदार के प्रधान हाता है।
भरय के सटी के पानी सपनार व करार दो पड़े शहर
मया (Merca) और मदो (ledina) है। गीगा में
इम्लामधर्म के प्रचार परत मुहम्मद माप को मत है। मात
में कावा है और यही स्थान मुहम्मद सादय या जन्मभूमि है।
यहां हर साल हर जगह के लाग्या मुसलमान हज करन जाने
है। इसी कारण यह शहर पड़ा व्यापारिक स्थान बन गया
है। मक्षा बहुत यदा मनारलक शहर है। इसरा म पौडी
और इमारत ऊँची ऊँची पत्थर का तथा हवादार हैं। हज के
जमाने में यहाँ की चहल पहल और रोनक देने लाया हाती
है। हिन्दुरता सहज परने के लिए जानेवाले अधिकतर जहाज
पर जिहा तक जाते हैं। जिहा (Jiddah) लाल सागर पर एक
बन्दरगाह है। जिदा से ऊँट पर सवार हार गया मदीना
को जाते है। लेकिन उत्तर की तरफ से हज करन के लिए श्राने-
पाते दमिर से मदाना तक रेल पर आते है। और मदीना से
मका तक ऊँट पर जाते हैं। अरब के पश्चिमी भाग में
हिजाज (Hear) को रियासत है। मका शहर उमसी
राजधानी है।
अदन का मशहर बन्दरगाह दक्षिण पश्चिमी किनारे पर,
लाल सागर में जान स उन पहले, स्थित है। यह चन्दरगाह
अगरेजा के अधिकार में है। इसका वो पहले ही किया जा
चुका है।
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एशिया का प्रारम्भिक भूगोल
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प्रश्न
१-ईरान और अरस के पगरों में वर्षा की कमी के क्या क्या
पारण हैं।
२-नगलिस्तान किसे कहते हैं । ये रेगिस्तान के पैसे स्थानों में पाये ।
जाते हैं।
३-इंगन प्लेटोयों के निवासियों के मुग्थ्य उद्यम क्या है ?
४-टी देश या अनातोलिया वनस्पति के अनुसार किन किन भागों
में बांटा जा सस्ता है १ टों में सबसे अधिर श्रागदी पिस
भाग में है ? इस भाग के लोगा के मुख्य उद्यम कौन से है १
-नीचे लिसे स्थानों के बारे में जो जानते हो पत्तायो
नजद, काबुल की घाटी, शीराज, दमिश्क, फिलस्तीन ।
६-मेमोपोटामिया की मुख्य उपजों को बतायो और यह भी बतायो
कि वे कहाँ कहाँ पाई जाती है।
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अभ्यास
-पशिमी एशिया के एक नकशे में कुल देशों को उनकी
रागभानियों के माथ दिसायो।
- दूसरे नकशे में यह भाग इस प्रकार बाटो-(१) रेगिस्तान,
भूरे रस से, (२) पहाड़ी स्थान शोर जंगल, हरे रङ्ग से,।
(२) उपजाऊ मैदान जहाँ सेती होती है, लाल रग से,
)स के मैदान जहाँ चराई होती है, पीले रङ्गो
तेरहवा प्रकरण पास पडोस की सैर हिन्दुस्तान और एशिया के अन्य देशो का भूगोल पढते समय तुम देसने आये हो कि दुनिया के सम्पूर्ण भाग मे वनस्प- तियो और फसलो की उपज के लिए न तो अधिक वर्षा होती है और न हर स्थान में जमीन इस काविल होती है कि उस पर खेती की जाय । क्योंकि वनस्पतियों के लिए नर्म मिट्टी, अधिक गर्मी तथा चर्पा के अतिरिक्त सूर्य की रोशनी और साद की आवश्यकता है। जिस प्रकार मनुष्यो और जानवरा को समय पर खूगक मिलने की आवश्यकता होती है उसी प्रकार वनस्प- तियो को भी एक नियत समय पर इन चीजो की आवश्यकता होती है। यदि वनस्पतियो को ठीक समय पर श्रावश्यक्ता से कम अथवा अधिक गर्मी और वर्षा अथवा वाद मिलेगी तो ये मनुष्यो की तरह दुबली पतली और कमजोर हो जायेंगी। इन सब बातों के अतिरिक्त सेती की फसलें इस कारण भी खराब हो जाया करती हैं कि ये ठीक समय पर बोई और काटी नहीं जाती-या उस समय वर्षा हो जाती अथवा सिंचाई कर दी जाती है जब इन्हें पानी की बिलकुल आवश्यक्ता नहीं रहती। यदि तुम खेती प्रथा कृपिशास्त्र जानना चाहो या यह कि देहाती किसान फिस होशियारी और परिश्रम से तुम्हारे लिए तरह तरह के अनाज, कपास, तिलहन और सन श्रादि की अच्छी फसलें पैग करते हैं, तो तुम साल में क्म में १५३ “१५४ शिया का प्रारम्मिक भूगोल कम दो बार सेतो की सर करने जात्रा और अपनी सैर में तो के विषय में निम्नलिम्वित यात ज्ञात करो- (१) पसला के बोन का उचित ममय, फायदा ओर तैयारो - की दशा (1) फमला के मोचने और काटने का ममय पोर इनकी बाजार के लिए तैयार करना ढहा। (३) वर्ष के भिन्न भिन्न ममया म फमला के लायक जल वायु । येता की सैर करने के लिए तुम मितम्बर और मार्च के प्रारम्भ म और हा सके ता एक बार जुलाई के प्रारम्भ में भी जामो ता अच्छा हा। जुलाइ में सेतो की सेर-यदि तुम जुलाइ म सेतों की भैर करन जात्रा ता तुम वपा के प्रारम्भ में किसानों को लेना म उन फमला को बाते हुए देखोगे जा अधिकतर गर्मी पार बरसात में हो पनप सकती , अथवा गर्म और नर्म जलवायु में फूलता फलना है। इनम से मुख्य ज्वार, बाजरा, धान, मका, ईस, अरहर, तिल है। ये सब चीज सराफ की फसल कही जाती है। अपनी सर मे इस बात को ध्यान से देसी कि इन चीजा के लिए किमाना को सेना की तैयारी में अधिक परिश्रम नहीं करना पड़ता। पल एक वार वत जात पर दो दिय जाते । परन्तु इस बात की कोशिश और सवरतारी अवश्य करनी पडतो है कि दनक थाने में देर न हो जाय अथात् पहला या दुमगे या क हाते हो ये चोर्जो दो जाती है ताकि वा का। 'पानो सूबने से पृथ्वी का गर्मा इतनो न निकल जाय कि बीज में अखुश्रा ही न फूटे। विमान को इस बात का भी ध्यान रहता है कि वाने के बाद कहों शीघ्र वर्षा न हो जाय जिममे ग्त की मिट्टी इतनो तर हा जाय कि असुया उमे फाड र ऊपर न आमके। ମୁଁ 1