Bharatiya Vidya Bhavan Library, Mumbai

Sabdart Sangrha

Naval Kishor · 2012/08

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. स्त्री स्वाहा १७८ १६ (अक्षरविन्यास) लिखा (अगस्ति)अगस्त्यमुनि लेख, ५७ १५ (अगाध) अथाह २४० ४५ (अक्षवती) जुआ, ५ (अगार) घर ૨૮૮ ५६ (अक्षाग्रकीलक)पहिया १५६ १२७ (अगुरु) शीशम, सेर- नहीं निकलने के लिये सई, गूगुर, कालागूगुर धूरीके किनारे में गंड़ी ६० ६२ (अगुरुशिंशपा) शीशम हुई कौल, कुलावा १६५ २३ (अग्नायी) अग्निका ४७ २४ (अक्षान्ति) असहन १४७ ९३ (अक्षि) ऑखि १२ ५४ (अग्नि) आगि १८३ ३८ (अक्षिकूटक) हाथी के १३ ५८ (अग्निकण) आगिकी नेत्रों की गोलाई चिनगारी २५३ ४५ (अक्षिगत) वेरकेयोग्य | १६२ १४ (अग्निचित) अग्निका ८३ ३१ (अक्षीव) समुद्रका नि संग्रह करनेवाला मक, सहिजन, १०४ १२४ (अग्निज्वाला)धवईवृक्ष २९ (अक्षोट) पर्वती पीलु ९ ४० (अग्निभू) कार्तिकेय वृक्ष, अखरोट है, ६६ (अग्निमन्थ)अरणीकाप्ट १९४ ८१ (अक्षौहिणी)अनीकिनी ८६ ४३ (अग्निमुखी) भिलावाँ सेनाविशेष १५५ १२५ (अग्निशिख) कुंकुम २५८ ६५ (अखण्ड)सम्पूर्ण, सब १०२ ११८ (अग्निशिखा) करि- ६० २७ (अखात)सरोवर,विना आरी, इन्द्रपुष्पी खनाया तालाव २६ १० (अग्न्युत्पात) उल्का, २५८ ६४ (अखिल) सम्पूर्ण, सब २८७ १६ (अग) पर्वत, वृक्ष, न्धी अग्निविकार धूमकेतु, आकाशसंव- अमरकोशादर्श। पृष्ठ धन, फिर , श्लोक श्लोक २५६ ५८ (अग्र) वृक्षकी चोटी, ४२ ५ (अंक्या)गोदीमें लेकर मुख्य, प्रधान पाजनेवाला मृदंग १३५ ४३ (अग्रज) ज्येष्ठभाई १४२ ७०(अंग)अवयव, सम्बो- १६० ४ (अग्रजन्मन्) ब्राह्मण १६२ ७२ (अग्रतःसर) अगुआ| १५१ १०७ (अंगद) विजायठ,घ- ૨૨૮ ७(अग्रतः) आगे जल्ला, बाजूबन्द १४१ ६४ (अग्रमांस) करेज ७२ १३ (अंगण) आँगन, अँ- ४३ (अग्निय) ज्येष्ठभाई, गना प्रधान ५(अंगना) स्त्री, सार्व- २५६ ५८ (अग्रीय) प्रधान, ज्येष्ठ भौम दिग्गज की स्त्री भाई ४५ १६ (अंगविक्षेप) लचकना ३१ २३ (अग्रेदिधिषु) ब्राह्मणी | १५४ १२२ (अंगसंस्कार) अंगोंका उदरी रखनेवाला प्रा. स्नानादिसंस्कार धो. ह्मण ना तथा चुकवाआदि ७२ (अग्रेसर) अगुआ लगाना ૨૫૬ ५८ (अग्यू) ज्येष्ठभाई, ४५ १६ (अंगहार) लचकना प्रधान २१० ३० (अंगार) अंगारा २३ (अघ) पाप, दुःख,शि- २१ २५ (अंगारक) मंगल कारादि अट्ठारहप्रकार २१० २९(अंगारथानिका)अंगेटी के व्यसन, विपत् ७८ (अंगारवल्लरी) एक प्र. ५. (अघमर्पण)सयपापका फारफा कंजा, घंधुची, नाश करनेवालामंत्र अंगिया ६७ (अन्या) गो ६६ ०(अंगाखाली) भंगरा १७ (अंक) गोदी, चिह, मुंगराज फलंक २१० २९ (अंगारशकटी) अंगेठी ४(अंकुर) अंकुर,सुवा ३२ ५(अंगीकार) स्वीकार- १८४ ५१ (अंकुश) ऑकुश २९ (अंकोट) अँकुहर, २६० १०८ (अंगाल)स्वीकार की अपरोट हुई पम्न २० दामीकार अमरकोशादर्श। पृष्ठ श्लोक श्लोक ९५१ १०८ (अंगुलिमुद्रा) मोहर | १०३ ११९ (अजशृंगी) मेढ़ाभंगी करनेकी अंगूठी जिस १५ ६७ (अजस्र ) नित्य, ल- में नाम खुदाहो वह गातार अँगूठी २२१ ७६ (अजा) वकड़ी १४५ ८२ (अंगुली) अँगुली २१२ ३६ (अजाजी) जीरा १५१ १०७ (अंगुलीयक) अंगूठी २३२, ११ (अजाजीव) गड़रिया १४३ ७१ (अंघ्रि) पैर, चरण २९८ ६१ (अजित) विष्ण,शिव ८२ (अंगुष्ठ) अंगुठा १७१ .५० (अजिन)मृगचर्म ७९ १२ (अंनिनामक) जड़ १२० २७ (अजिनपत्रा) चम- ९७ ९२ (अंघ्रिवल्लिका) सिंहपु- गूदरि च्छी, पिधवन ११६ ९ (अजिनयोनि) हरिण १५४ १२१ (अंचल) आचर कोंछा ७२ १३ (अजिर) आंगन, वि- २२० ७० (अचंडी) सीधी गौ 1 पय, रूप, रस, शब्द, - १(अचल) पर्वत स्पर्श, गन्ध, देह, मेढु- २(अचला) भूमि 1. 'का, चौतरा, वायु ४ १९ (अच्युत) विष्णु २५९ ७२ (अजिह्म) सीधा २३ (अच्युताग्रज) बलदेव १९५ ८६ (अजिह्मग) तीर,वाण, ५७. - १४ (अच्छ)निर्मल,प्रसन्न, ४४ ११ (अज्जुका) नाचने- : रीछ, भालू, स्फटिक वाली पतुरिआ, रंडी २२१ - १७६ (अज) ब्रह्मा, विष्ण, २५१०३९(अज्ञ) महामूढ़, मूर्ख महेश्वर, वकड़ा, रघु २६६ ९८ (अञ्चित) पूजित राजाका पुत्र ३ (अञ्जन) दिग्गज, का. १०७ १३९ (अजगंधिका) ववई जर ५१ ५(अजगर) अजगर | १०५ १३० (अञ्जनकेशी) पवारी ६. ३६,(अजगव) महादेवका १७ ५(अञ्जनावती) सपती- धनुप कनाम दिग्गज की स्त्री ९५। ८६ (अजड़ा)क्यवांच १४६ ८५ (अञ्जलि) अँजुरी १०९ (अजन्य) उत्पात ३४७ २(अञ्जसा) शीघ्र, जल्द १०९ १४५ (अजमोदा)अजवाइन ७४ . . . २०० साक्षात्, तत्त्वार्थ अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ ७७ + अतिशय, पूजन न्दित, ख़राब श्लोक श्लोक १०४ १२७ (अझटा) अवरी ५७ १५ (अतलस्पर्श) अथाह ८४ (अटनी) धनुष का २०८ २० (अतसी) अरसी किनारा ३४३ २४० (अति)प्रकर्प, लंघन, १(अटवी) वन,जंगल ६६. १०३ (अटरुप) रूस २७९ ३३ (अतिक्रम) निडरवीर १६८ ३८ (अटा) घूमना कीयात्रा,उलटापलट, ३८ (अश्या) घूमना घेरना ७२ १२ (अट्ट) अटारी १०९ १४६ (अतिचरा) कपिला २५५ ५४.(अणक)अधम, नि-११४ १६७ (अतिछत्र) पानीका खर ૨૮૮ ५६ (अणि) पहिया नहीं | ११० १५२ (अतिछत्रा) सौंफ निकलने के लिये धुरी १६२ ७३ (अतिजव) शीघ्र चलने के आगे लगनेवाली वाला १६८ ३६,(अतिथि) पाहुन, अ- ३७ (अणिमन) एक प्र- भ्यागत कारकी सिद्धि जिससे ५७ १४ (अतिनु)नावके लाय- छोटेसे छोटा होजाय । क जो जल न हो २५७ ६२ ( अणीयस ) बहुत ६८ १६ (अतिपथिन् ) अच्छा थोड़ा रास्ता २०८ २० (अणु)ज्यठऊसावां, १६९ ४० ( अतिपात ) अतिक- चीना, सूक्ष्म, वारीक, म, वेकायदा, उलटा छोटा पलट १२३ ३८(अण्ड) अण्डा, १५ ६७ (अतिमात्र) बहुत १४४ -७६ ( अण्डकोश)पेल्हड़ ९२ ७२,(अतिमुक्क)वसन्तीलता १२२ ३४ ( अण्डज) मछली, ८२ २६ (अतिमुक्तक) बड़ा तेंदु- पक्षी, सर्प आदि ४ (अतट) बीहड़, प-२६० ७५ (अतिरिक्त) अधिक वंत से जल गिरने का २५० ३५ (अतिवकृ) बहुत बोल- स्थान नेवाला कील, कुलाबा ८ आ, तिनिस अमरकोशादर्श। . पृष्ठ , पृष्ठ इलोक श्लोक ३८ १८ (अतिवाद)कठोरवचन २२ २७ (अत्रि) मुनिकानाम EE (अतिविपा) अतीस ३४४ २४६ (अथ,अथो) मंगळ, सं- ६७ (अतिवेल) अतिशय, शय, आरम्भ,अधिका- बहुत बेर विताकर २, अनन्तर, अन्वादेश, १९९ १०२ (अतिशक्तिता)पराक्रम प्रतिज्ञा, प्रश्न, सम्पूर्ण ६७ (अतिशय)बहुत,प्रक- २५७ ६३ (अदभ्र) अधिक प, बड़ाई |२७६ २२ (अदर्शन)लोप,विनाश २५६ ५८ (अतिशोभन) बहुतसु ८ (अदितिनन्दन) देवता न्दर १४० ६१ (अदृश) अन्धा २७७ २८ (अतिसर्जन) अधिक १८१ ३० (अदृष्ट) आगि का ल. दान गना या बहुत जलका १४० ५९ (अतिसारकिन) सितर- घरसना स रोगवाला ५० ३७ (अदृष्टि) टेढ़ीनजर ३३ (अतिसौरभ)सुगन्धवा-|३४६ १२(अद्धा)तत्वार्थ.साक्षात् ला आम ४५ १७ (अद्भुत) आश्चर्य, २६१ ७९ (अतीन्द्रिय)इन्द्रियों से अडुतरस जो न जानाजाय २४६ २० (अमर) खानेवाला ३४७ २ (अतीव)बहुत,अतिशय ३५१ २० (अद्य) आज,इससमय ४५ १५. (अत्तिका) जेठी वहिन | ७४ १ (अदि)पर्वत, वृक्ष,सूर्य २५६ ३२ (अत्यन्तकोपन) बड़ा ३ १४ (अदयवादिन् ) जिन, बौद्ध १९२ ७६ (अत्यन्तीन) बहुत च-२५५ ५४ (अधम) खराब, कोधी लने वाला न्यून, निन्दित २०२ ११६ (अत्यय) मोन, उल्लंघन, २०४ ५(अधमर्ष) करज लेने क्लेश, दोप, दण्ड वाला १५ ६७ (अत्यय)बहुत १४७ १० (अधर) नीचे का ऑठ, २५७ ६२ (अत्यल्प) बहुत थोड़ा हीन, ओठ ३०२ ७७ (अत्याहित) घड़ाभय, २४४ ११ (अधिकर्द्धि) भरापुरा, घड़ासाहस धनिक " अमरकोशादर्श। ७ पृष्ठ पृष्ठ . त्यन, श्रोक श्रोक १८९ ६३ (अधिकांग) कमरपट्टी, | १५३ ११७ (अधोंशुक) नीचे पहि- १८१ ३१ (अधिकार) प्रयन्ध,अ. रने के कपड़े अर्थात् ख्तियार, छत्रधारणा- धोती आदि दिव्यापार २१ (अधोक्षज) विष्णु १७६ ६ (अधिकृत) अधिकारी, ११७ १३ (अधोगन्ता) चूहा अतियारवाला १ (अधोभुवन) पाताल २५२ ४२ (अधिक्षिप्त) निन्दित, ९६ ८८ (अधोमार्गव) लहचि निन्दा कियागया चड़ा ७ (अधित्यका)पर्वतके ऊ-|२५० ३३ (अधोमुख) नीचे मुख परकी भूमि वाला २४४ ११ (अधिप) मालिक १७६ ६ (अध्यक्ष)अधिकारी,प्र. २४४ ११ (अधिभ) मालिक सामने ७४ १८ (अधिरोहिणी) सीढ़ी ४८ २६ (अध्यवसाय)उत्साह १५७ १३५ (अधिवासन) गन्धमा- | १६१ ९ (अध्यापक) पढ़ानेवाला ला आदि लगाना, प.| ३१ ३ (अध्याहार) तर्क, विशे. हिरना १२६ ७(अधिविन्ना) अनेक | १२६ ७ (अध्यूढा) अनेकस्त्रीवा- विवाहवाले पुरुपकी ले पुरुपकी पहिलीस्त्री, पहिली स्त्री १६७ ३४ (अध्येपणा) विनय २१० २६ (अधिश्रयणी)चूल्हा, करना ३१३ १२५ (अधिष्ठान) पहिया, १७८ १७ (अश्वग) पथिक, मु. ग्राम,प्रभाव, आक्रमण साफिर २४५ १६ (अधीन) आधीन, प- १७८ १७ (अध्वनीन) पथिक, मु. रवश साफिर २४८ २८ (अधीर)व्याकुल, घव-६८ १६ (अधन) रास्ता, मार्ग, रायाहुआ सड़क १७५ २ (अधीश्वर) महाराज १७८ १७ (अधन्य) पथिक, मु. ३५२ २३ (अधुना)अव,इसकाल साफिर २४८ २८ (अदृष्ट) लज्जायुक्त १६२ १५ (अचर) यज्ञ प विचार अमरकोशादर्श। ८ पृष्ठ . श्लोक पृष्ठ श्लोक १६४ - १६ (अध्वर्यु) यजुर्वेद का ३२२ १५७ (अनातप)छाया,साया जाननेवाला ऋत्विक २२ (अनादर) अपमान ४० २१ (अनक्षर) निन्दावचन | १३७ ५० (अनामय) रोगरहित ५. २५ (अनंग) कामदेव ८२ (अनामिका)मध्यमाक ५७ १४ (अनच्छ) गन्दा, मैला निष्ठाकेवीचकी अंगुली २१७ ६० (अनह) बैल २६५ ९४ (अनायासकृत) स. • १६ १(अनन्त) आकाश, वि, हजही किया हुआ ष्णु, शेप, सीमारहित १४ ६६ (अनारत) लगातार २(अनन्ता) पृथ्वी, यथा- १०८ १३ ( अनार्यतित) चिरा- सा, इन्द्रपुष्पी,दुव, का. यता लाशाम्ब १५२ ११२ (अनाहत) नयाकपड़ा ६ २६ (अनन्यज) कामदेव ३३७ २१८ (अनिमिप) देवता, २६१ ७९ (अनन्यवृत्ति) एकाग्र- . मछली चित्त ६.. २७ (अनिरुद्ध) अनिरुद्ध -३२० १४९ (अनय) अट्ठारह प्रकार २ १० (अनिल) गणदेवता, के व्यसन, अशुभ देव, वायु विपत ६६ (अनिश) लगातार, ३९ १५ (अनर्थक) अर्थरहित सदा ११ ५५ (अनल) अग्नि १९३ ७८ (अनीक) फौज,लड़ाई (अनवधानता)भूलभ्रम १७६ ६ (अनीकस्थ)रखवार, १५ ६७ (अनवरत) नित्य, ल- पहरेदार गातार | १६३ ७८ (अनीकिनी) चमू- २५६ ५६ (अनवस्कर) मलरहित, विशेप, साफ, शुद्ध ३४४ २४७ (अनु) पीछे, वरावरी २५६ ५७ (अनवराय) मुख्य, प्र. | २४७ २३ (अनुक) कामी धान १८ (अनुकंपा) दया १८७ ५२ (अनस्) गाड़ा, छकडा २७४ १७ (अनुकर)नकलकरना १२७ ८(अनागतार्तवा) दशवर्ष १८८ ५७ (अनुकर्ण) रथके नीचे . की कन्या का काठ अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ . ज्ञा करनेवाला बालक, श्लोक श्लोक ४३ (अनुकल्प) अप्रधान, उत्पादन,इत्संज्ञकवर्ण, दुसरीविधि, गोड़ प्रधान मनुष्य की आ- १६२ ७६ (अनुकामीन)अपनी इच्छा से चलनेवाला प्राप्त विषयके अनुसार २७ १७ (अनुकार) नकल, अ- घर्तना नुहार १५५ १२३ (अनुवोध) गन्धि मि- ४० (अनुक्रम) क्रम,काय टाना, अंग से सुगन्ध दा, तरीका का छुडाना ४६ १८ (अनुक्रोश) दया २७७ २७ (अनुभव) साक्षात्कार २६१ ७८ (अनग) पीछे ३३४ २०८ (अनुभाब) प्रताप, स- २७३ १३ (अनुग्रह) अंगीकार ज्जनों की मतिका नि- करना श्वय, अभिप्रायसूचक ७१ (अनुचर) सहाय,पीछे चेष्टा चलनेवाला ६ ८(अनुमति) कलाहीन १३५ ४३ (अनुज) छोटाभाई चन्द्रमावाली पूर्णमासी १७६ ९(अनुजीविन्) सेवक, ३७ १० (अनुयोग) प्रश्न पूछना नौकर १७७ १० (अनुरोध) भलामनाना २१० ४३ (अनुतर्पण) मद्य का ३६ १६ (अनुलाप) धार२ कहना पीना ३६० २२ (अनुलेपन)कुंकुम आदि ६५ (अनुताप) पछतावा '१७७ १२(अनुवर्तन)भलामनाना २५६ ५७ (अनुत्तम)मुख्यप्रधान ३५७ १७ (अनुवाक) वेदांग ३३० १८९ (अनुत्तर) उत्तरसे वि. ३१९ १४७ (अनुशय) बहुत दिन परीत, श्रेष्ठ का पैर, पछतावा । ७८ (अनुपद) पीछे २३४ १९ (अनुप्ण) सुस्त २३७ ३१ (अनुपदीना) मोजा २७४ १७ (अनुहार) नकल करना ४ (अनुपमा) कुमुदनाम, २८४ १३ (अनूक) स्वभाव, वंश दिग्गजकी स्त्री १६२ १२ (अनूचान) सांगोपांग, ७१ (अनुप्लव) सहायक वेद पढ़नेवाला ३०७ ६८ (अनुबन्ध) दोपों का '६५८ ६५ (अनूनक) सब २६२ .

अमरकोशादर्श। पृष्ठ ला देश , - न्धा, बहिरा पृष्ट श्लोक श्लोक ६७ ११ (अनूप) बहुत जलवा- ५६ ८(अन्तरीप) पानी के बीचकी पृथ्वी, टापू २३ ३३ (अनूरु) अरुण १५७ ११७ (अन्तरीय)नीचे पहि- २५३ ४६ (अनृजु) शठ, कुटिल- रनेके धोतीआदिकपड़े हृदय ३४९ १० (अन्तरे) मध्य ४० २१ (अनृत) असत्य, झूठ, ३६७ ३ (अन्तरेण) मध्य,विना खेती २६२ ८६ (अन्तर्गत) भूला हुआ १८२ ३४ (अनेकप) हाथी ९३ ७४ (अन्तर्गल) नीली क- २८६ : ५ (अनेहमूक) गूंगा, अ. टसरैया ७३ १४ (अन्तर्दार) खिड़की २४ १(अनेहस्) समय १९- १२ (अन्तर्धा) ढापना ७८ ५(अनोकह) वृक्ष १९ १२ (अन्ताई) ढॉपना २०२ ११६ (अन्त) मृत्यु, समाप्ति २४३ ८ (अन्तर्भनम् ) उदाम २२ (अन्तर्वनी) गर्भवती ११ (अन्तःपुर) रनिवास २४३ ६ (अन्तर्वाणि) शास्त्रज्ञ १३ ६० (अन्तक) यमराज पण्डित ३२९ १८६ (अन्तर) अवकाश,अ. १७६ ८(अन्तशिक) नोज. वधि, परिधान, वस्त्र, नाने की वस्तुका अ- अन्तर्धि, ठिपजाना, धिकारीहो भेद, तादर्थ्य, छिद्र, २३२. १० (अन्तावसायिन )नाऊ छेद,आत्मीय,अपना, २५८ ६७ (अन्तिक) समाप- विअन्त्य नावात्ययाह-२५८ ६८ (अन्तिकतम) अति र,अवसर,मध्य अन्त- निकट रात्मा, सादृश्य २९ (अन्तिका) बड़ी ब- १०(अन्तरा) मध्य हिन, चूल्ही १६ (अन्तराय, विघ्न, ख-१६२ १३ (अन्तवासिन) चांडा- ल, विद्यार्थी ६ (अन्तराल)मध्य,बीच २६१ ८१ (अन्त्य) अन्तमें हुआ १(अन्नरिक्ष) आकाश १४१ ६६ (अंत्र) ऑन H . .

अमरकोशादर्श। . पृष्ठ श्लोक श्लोक ११ (अन्दुक) हाथीचाँधने २६७ १०२ (अपचायित) पजित की जंजीर २६७ १०२ (अपचित) पूजित १४० ६१ (अन्ध) अन्धा, अँधेरा १६८ ३७ (अपचिति)लय,पूजा, ५ (अन्धकारि) शिव प्रयोजन, याचना ३(अन्धकार) अन्धेरा २५८ ६८ (अपटान्तर) संयुक्त ५१ . ३(अन्धतमस) बड़ा अ मिलाहुआ न्धेरा ५९ (अपट) रोगी २१५ १८(अन्धस्) भात २८ (अपत्य) पुत्र कन्या २६ (अन्धु) कुऑ २३ (अपत्रपा) दूमरेसे ल- ४८ (अन्न)भात,खायागया जाना २६२ ८२ (अन्य) भिन्न, दूसरा २४८ २८ (अपत्रपिष्णु) लज्जा ३६० २२ (अन्यत्) भिन्न दूसरा करनेवाला २६२ ८२ (अन्यतर)भिन्न,दूसरा ६९ १८ (अपथ) रास्तारहित ७८ (अन्वक्ष) पीछे १८ (अपथिन) रास्तारहित २६१ ७८ (अन्वक्) पीछे २५८ ६८(अपदान्तर) मिला १(अन्वय) वंश, गोत्र हुआ १५९ '१(अन्ववाय) वंश ५ (अपदिश) दिशाओं ३३ (अन्वाहार्थ)मासिक का मध्य वा कोन वाअमावास्याकी श्राद्ध ४९ ३३ (अपदेश)वहाना,पद, २६७ १०५ (अन्विष्ट) ढ़ी वस्तु ३४ (अन्वेपणा) धर्मयुक्त २५१ ३९ (अपध्वस्त) धिक्कारा कार्यकरना 'हुआ २६७ १०५ (अन्वेपित) ढूंढ़ी वस्तु ३५ २ (अपभ्रंश)अशुद्धशब्द १४ (अपकारणी) फजीहत २०१ १११ (अपयान) भागना २०१ १११ (अपक्रम) भागना २७० १ (अपरस्पर) निरन्तर ३० (अपगा) नदी चलना १४२ ७० (अपधन) अंग २९ १०६ (अपराजिता) विष्णु- २७४ १६ (अपचय) हरजाना, क्रान्ता,पटुआ । 'जबरदस्ती छीनलेना' १२१ ६८ (अपगद्धपत्क) जि- लक्ष्य, निमित्त १२ अमरकोशादर्श। पृष्ट पृष्ठ किया हुआ श्रोक सका तीर निशानासे ५४ २ (अपाम्पति) समुद्र चूकजाय २४९ १५ (अपावृत)स्वतन्त्र,खुद २६ (अपराध) पाण, कसर मुख्तियार २५ ३ (अपराक) दोपहर से | २०१ ११३ (अपासन) मारना, वध ऊपर ३४५२४८ (अपि) निन्दा,समुच्चय, ३८ (अपणी) पार्वती प्रश्न, शंका, सम्भाव- १७ (अपलाप) छिपाना ना, अनुनय, समझाना ३२ ७ (अपवर्ग) मोक्ष २६९ ११० (अपिगीर्ण ) स्तुति १६७ ३२ (अपवर्जन) दान ३८ १३ (अपवाद) निन्दा, १९ १३ (अपिधान) ढांपना आज्ञा ६५ (अपिनद्ध) कवचआ- १२ (अपवारण) ढांपना दि पहिने २ (अपशब्द)अशुद्धशब्द, १३६ ४६ (अपोराण्ड) विकलाश २६२ ८४ (अपप्ठ) उलटा २१५ १८(अपूप) पुआ २३३ १६ (अपसद)नीचमनुष्य ५५ ३ (अप) जल १३ (अपसर्प)जासूस १४ ६२ (अप्पति) वरुण २६२ ८४ (अपसव्य)दाहिनाअंग, १३ ५७ (अप्पित्त) आगि उलटा ९(अप्रकाण्ड) ढूंठ,डार- ५५ (अपस्कर) रथके सत्र हीन अंग २५९ ७२ (अप्रगुण)आकुल, घ. २६६ १६ (अपस्नात) मृतक के निमित्त स्नान किये हुये २६१ ७९ (अप्रत्यक्ष) जो न देस २७४ १६ (अपहार) हरजाना पड़े १४७ ९४ (अपांग) आंसि का | २५६ ६० (अप्रधान) गौण किनारा, नेत्रान्त, ति- ६६ ६ (अमहत) जोतानही लक वृक्ष, अंगहीन २५६ ६० (अणग्य) गौण ६४ (अपान) गुदा, वाय- | १५५ १२० (अप्लव)स्नान,नहाना विशेष २ ११ (अप्सरसोदेवताओंकी ८८ (अपामार्ग)नचिचिरा स्त्री, स्वर्गकी पतुरिआ १ घराया हुआ अमरकोशादर्श। पृष्ठ ला वृक्ष 4 पृष्ठ श्लोक श्लोक ७(अफल)न फलनेया- कर शत्रुपर चढ़ाई करना २० (अवद्ध)अर्थहीन ३.१ १५५ (अभिख्या)नाम,शोभा २५० ३६ (अवद्धमुख) अप्रिय ३१४ १२८ (अभिग्रस्त) शत्रुओंसे कहनेवाला जीतागया ६ (अवन्ध्य) फरनेवाला २७३ १३ (अभिग्रह) लड़ाई में वृक्ष पुकारना १२५ .२ (अवला) स्त्री १७ (अभिग्रहण) चोरी २६२ ८३ (अवाध) वाधारहित करना जिसको किसी तरह १७५ ११ (अभिघातिन) शत्र की पीड़ा न हो २७५ १९ (अभिचार) हिंसाकर्म, १४ (अब्ज)चन्द्रमा,शंख, जलाना या मारना कमल, धन्वन्तरि, सं-.१५९ १(अभिजन) वंश, कुल ख्याविशेष जन्मभूमि ४ १७ (अब्जयोनि) ब्रह्मा ३०३ ८१ (अभिजात) कुलीन, २० (अब्द) वर्ष, बादल पण्डित ५४ १ (अधि) समुद्र २४२ ५ (अभिज्ञ) चतुर, नि- २२८ १०५ (अब्धिकफ)समुद्रफेन पुणे ४ (अभ्रम) ऐरावत दि- २५० ६७ (अभितस्) समीप, ग्गज की स्त्री दोनोंतरफ, शीघ्र,सा- १४ १४ (अब्रह्मण्य) अवध्य कल्य, सामने, ब्राह्मणादि के दोपों ३७ ८ (अभिधान) नाम का प्रकाश करना २४ (अभिध्या)परधन लेने ११३ १६४ (अभय) खसखस गॉ. १६ (अभिनय)भाववताना ५९ (अभया) हड़ २६० ७७ (अभिनव ) नया ३८ (अभापण) मौन,चुप १७४ ५८ (अभिनिर्मुक्त)सूर्या २४७ २४ (अभिक) कामी स्त में सोनेवाला ९६ (अभिकम) निडरहो- १६७ ९५ (अभिनिर्याण) यात्रा . की इच्छा डरकी जड़ १३ अमरकोशादर्शी पृष्ठ पृ३ न,शुल, अति प्रश. श्लोक पलोक २४ (अभिनीत)द्ध,अर्जु. २५२ ४३ (अभिशस्त) कलंकी, जिसको चोरी या छि- स्त,सहज शील,न्याय नारा लगाहो युक, वस्त, मुनासिब १६७ ३४ (अभिरस्ति) मांगना ३१४ १२८ (अभिपन्न) अपराधी, ११.(अभिशाप) झूठ दोष लड़ाई में हारा,विपत्ति लगाना युक्त, महादुःखी २८८. २९(अभिषंग)शाप,अनादर २७५ २० (अभिप्राय) मनोरथ, १७१ ५० (अभिपर मदिरा ब- मतलब नाना, यज्ञोपधी का २५१ ४०(अभिभूत) टूटे.अहं. कूटना कारवाला २१२ ३९ (अभिपुत) काँजी विशे- ४६ । २२ (अभिमान)अहंकार, . प, स्वहा माड़ द्रव्यादिकृत अहंकार, | १९७ ९५ (अभिपेणन) शनु पर ज्ञान,नम्रता, हिंसा चढ़ाई करना २७३ १३ (अभियोग) लड़ाई में २६६ ११०( अभिष्टुत ) स्तुति पुकारना ३१५ १३१ (अभिरूप) सुन्दर २९९ १०५ (अभिसम्पात) लड़ाई २७६ २४ (अभिलाव) खेत से १६१ ७१ (अभिसर) सहायक अन्नका काटना १० (अभिसारिका) पति- ४८ + २८ (अमिलाप)मनोरथ की इच्छा किये हुई २४७ २२ (अभिलापुक) लोभी संकेत स्थानको जान ९४ (अभिवाद)कटोरवचन, वाली सी २४८ २८ (अभिवादक) वंदना २७४ १७ (अभिहार)चोरी करना, करनेवाला लड़ाई में पुकारना, ल. १७०१ ४४ (अभिवादन) प्रणाम ड्राई की तयारी नाम गोत्रादि पूंछकर २६८ १०७ (अभिहित) कहा हुआ प्रणाम करना २४७ २४ (अभीक) कामी ६ (अभिव्याप्ति) सर्वत्र ३४७ . १ (अभीषण) वारस्वार, फैला,सवतरफसे भरा लगातार किया गया अमरकोशादर्श । पृष्ठ श्लोक पृष्ठ - . श्लोक २५५ ५३ (अभीप्सित) प्यारा १३९ ५८ (अग्यान्तारोगी ९८ १००(अभीरु)शतावरि १६६ १०५ (अभ्यामई)लड़ाई,युद्ध ९८ १०१ (अभीरुपत्री)शतावरि २५८ ६८ (अग्यासोसमीप २७१ ६ (अभीपंग)गाली देना २०१ ११० (अभ्यासादन) डाका ३३७ २१९ (अभीपु)लगान,किरण धोखेसे दवायलेना २५५ ५३ (अभीष्ट) प्यारा | १६८ ३६ (अभ्युत्थान) किसी के २५८ ६७ (अभ्यग्र) समीप आने पर आदर पूर्वक २१५ ५० (अभ्यञ्जन) तेल । उठ खड़े होना ६ (अभ्यन्तर)बीच, मध्य १७४ ५८ (अभ्यदित) सूर्योदय १३९ ५८ (अभ्यमित)रोगी में सोनेवाला १९२, ७५ (अभ्यमि युद्ध करने | ३२ ५.(अभ्युपगाम) अंगी- त्रीण) करने के लि “कार १९२ ७५ (अभ्यमि ये शत्रुओं २७३ १३ (अभ्युपपत्ति) अनुग्रह, त्रीय) के सम्मुख अंगीकार करना १९२ ७५ ( अभ्य जानेवाला | २१४ -४७ (अभ्यूपोभूजाहुआ,ऊ- मित्र्य) २५८ ६७ (अभ्यर्ण समीप १ (अम्र)आकाश, बादल २७४ १७ (अभ्यवकर्पण)युक्ति से २२७ १०० (अभ्रक) अवरख हथियार आदि निका-८३ -३० (अभ्रपुष्प) घेत लना १०- ४७ (अभ्रमातंग) ऐरावत २०१ ११० (अभ्यवस्कन्दन)धोखे । हाथी से दवाय लेना,डाका | १० ४७(अभ्रमुवल्लभ) ऐरावत २६१ १११ (अभ्यवहृत)खायागया हाथी ३७ १० (अभ्याख्यान) मिथ्या १७ ४ (अभ्रमु) ऐरावतकीखी १३ (अनि) फसही २०० १०५ (अभ्यागम)युद्ध,लड़ाई, १८ ६-८ (अप्रिय) मेघसे उत्पन्न २१४ १२ (अभ्यागारिक)कटम्ब हुआ जलादि का पालन करनेवाला १८० २४ (अभ्रेप) नीति,इन्साफ २७७ २६ (अभ्यादान)प्रथमारंभ २११ ३३ (अमत्र)सबवर्तन,वर्तy मी, वा मुरमुरी --- - दोप लगाना अमरकोशादर्श। पृष्ठ २ श्लोक श्लोक नका साधारण नाम | २३० २ (अम्बष्ठ) वैश्यास्त्री में २ ७ (अमर) देवता ब्राह्मणसे उत्पन्न पुत्र १० ४६ (अमरावती) इन्द्रकी ९२ ७१ (अम्बष्ठा) जूही, पाठी राजधानी पहारमूल, अम्लोना ८(अमर्स) देवता १४ (अम्बा) माता १७ २६ (अमर्प)क्रोध- ८ ३८(अम्बिका) पार्वती २४९ ३२ (अमर्पण) क्रोधी ४ (अम्बु)जल, नत्रवाला २२७ १०० अमल) अवरख औषधि १३५ ४४ (अमांस) दुवल १६ (अम्बुकण) फुहारा, ३४५२४९ (अमा) साथ,समीप बौछार १७५ ४ (अमात्य मन्त्री ६. (अम्बुज)समुद्रफल ३ (अमानस्य) दुःख,अन १८. ७ (अम्बत् ) वादल मनी ८३ ३० (अम्बुवेतस) जलवेत २६ ८ (अमावस्या)अमावस्या ४० २० (अम्बूकृत) धुंकसहित २६ ८(अमावास्या)अमावस्या कहना १७७ ११ (अमित्र) शत्रु ४ (अम्भस)जल ८ (अमुत्र) जन्मान्तर ६३ ४१ (अम्भोरुह) कमल ११३ १६४ (अमृणाल) खसखस ५५ ५ (अम्मय) जल, विकार ११ ४६ (अमृत) सुधा,यज्ञशेष, ३३ यज्ञसेवचीहुई जाउरि, १८७ १४० (अम्ललोणिका) अम- मोक्ष, जल, अयाचित, लोनिया विनामागेजोमिले,घृत १०८ १४१ (अम्लवेतस)अमिल- ८६ ५८ (अमृता) अॅवरा, हड़, घेत गुर्च ९२ ७३ (अम्लान) कटसरेआ, ८(अमृतांधस) देवता पियावासा १०० १०६ (अमोघा) पारि,वा-८६ ४३ (अम्लिका) अमिली युविडंग २७ (अय) शुभभाग्य १६ ९ (अम्ल) खटाई २ ২৩ १ (अम्बर)आकाश,कपड़ा २१० ३० (अम्बरीप) खपरी १३ (अयन) आधावर्ष, सदक,रास्ता L अमरकोशादर्श। ७ पृष्ठ श्लोक श्लोक २२६ ९८ (अयस) लोहा २५२ ४४ (अरिष्टदुष्टधी) मरणा २३८ ३५ (अयप्रतिमा) लोहेकी सन्नवुद्धि मूर्ति २९ (अरुण) सूर्य, सूर्य ३५० १८ (अयि) अनुनय, सम- का सारथी, लालरंग झाना ९९ (अरुणा) अतीस सु- २०९ २५ (अयोग्र) मूसर कुमार जगहमेंमारना १४ ६५ (अर) शीघ्र २६२ ८३ (अरुंतुद) मर्मभेदी ३५७ १८ (अरघह) रहट, कुआं ८६ ४२ (अरुष्कर) भिलावां, १६४ २१ (अरणि) यज्ञमें मथि- घाव करने वाला करके जिस लकड़ी से | १३८ ५४ (अरुस्) घाव अग्नि निकालते हैं वह २६६ १०० (अरोक) तेजहीन लकड़ी २२ २९ (अर्क)सूर्य, स्फटिक, १(अरण्य) वन मदार ৩৩ १(अरण्यानी) बड़ावन | ९४ ८१ (अर्कपर्ण) मदार १४६ ८६ (अरनि) कनगुरियाको १५ (अवंध) चौद्धमत- छोड़कर मुट्ठीबंधाहाथ वाला ७३ १७ (अरर) केवाड़ ८० (अदि ) मदार ८९ ५७ (अरलु) सरिवन १७ (अर्गल) केवाड़ वन्द ६३ ३९ (अरविन्द) कमल करने का व्यड़ना ११ (अराति) शत्र २८९ २७ (अर्घ) मोल, पूजा में २५६ ७१ (अराल)राल-धूप, टेढ़ा १० (अरि) शत्रु १६७ ३५(अर्घ्य) अर्घ देने के १३ (अरित्र) पतवार ५० (अस्मेिद) दुर्गन्ध,खयर २३८ ३६ (अर्चा) पूजा, मूर्ति ८(अरिष्ट) रीठी, सौरि- तसवीर का घर, लहसुन, शुभ, २६७ १०२ (अर्चित) पूजा हुआ, अशुभ, कौआ, माठा आदर किया हुआ नींच, मदिरा, मरण | १३ ५८(अर्चिस) अग्नि की चिह्न, कंकपक्षी ज्वाला, किरण जल देना लिये जल .

अमरकोशादर्श। पृष्ठ . २७८ श्लोक श्लोक ८० (अर्जक)उजली,ववई १५१ १०६ (अर्द्धहार) १२ लरका १३ (अर्जन) उजला रंग, हार अर्जुन वृक्ष, सक्खर १५४ ११९ ( अ रुक) उटंग ल- २१९ ६७ (अर्जनी) गो २ (अर्णव) समुद्र ३५८ १९ (अर्वद) दश कोटि १० ४ (अर्णस्) जल करोड़ ६३ ७४ (अर्तगल) काले फूल | १२३ ३९ (अर्भक) बालक वाली झिण्टी पिया- ३६४३४ (अर्म) आंखिका रोग वासा २०३ १(अर्य) स्वामी, वैश्य ३२ (अर्तन) घिनाना, वा २८ (अर्यमन) सूर्य करुणा १२८ १४ (अर्या) वनियाकी स्त्री २९९ ६७ (अति)पीड़ा,धनुय की। १२८ १४ (अर्याणी) बनियाकी कोटि स्त्री २२५ ९० (अर्थ) शब्दार्थ, धन | १२८ १५(अ) बनियाकी स्त्री वस्तु,प्रयोजन,निवर्त्तन १८५ ४४ (अर्बन ) अधम, घोड़ा १६७ ३४ (अर्थना)मांगना,भीख खराब २०४ ४ (अर्थप्रयोग )व्याज, ३५० १६ (अवाक) पीछे, तीर १३९ ५९ (अर्शस) अर्शरोगयुत ५ (अर्थशास)नीतिशास्त्र १३८ ५४ (अर्शस ) बवासीर १७६ ९ (अर्थिन) नोकर,सेवक १११ १५७ (अर्शोन) सूरन--जमी २२८ १०४ (अy)शिलाजीत,गे- कन्द रू, बुद्धिमान, धनवान् १६८ ३७ (अर्हणा) पूजा २७१ ६ (अईना) भिक्षा २६७ १०२ (अहित) पूजित २६६ १७ (अर्दित) मांगाहुआ ३४५ २५१ (अलम् ) रोकना, भुप २० (अर्द्ध) आधा ण, पूर्णता, शकि १०० १०९ (अर्द्धचन्द्रा) कालाधारा १४८ ६६ (अलक) टेढ़वाल १४ (अर्द्धनाव) आधीनाव | १५ ७१ (अलका) कुवेरकीपुरी २५ ६ (अर्द्धरात्र) आधीरात १५५ १२६ (अलक) मेहावर लाह ३६६ ३२ (अर्द्धच) आधीनचा ५१ ५ (अलगर्द)पनियांसांप, .

अमरकोशादर्श। पृष्ठ इलाक पृष्ठ श्लाक रोवर डवहा करने वाला करने वाला १४६ १०० (अलंकरिष्णु) अलं- कार करने वाला,गह- २५७ ६२ (अल्पिष्ठ)बहुतथोड़ा ना पहिरने की इच्छा २५७ ६२ (अल्पीयस् ) बहुत थोड़ा १४६ १०० (अलंकर्तृ) अलंकार ७४ १८ (अवकर) करकट, कूड़ा १७३ ५७ (अवकीर्णिन् ) जिस २४६ १८ (अलंकीण) कार्य का ब्रह्मचर्य नष्ट होग- करने में समर्थ याहो, (क्षतव्रत) १४९ १०९ (अलंकार) गहना २५१ ३९ (अवकृष्ट) निकाला १०१ (अलंकृत) गहनायुक्त हुआ १४९ १०१ (अलैक्रिया) श्रृंगार ७८ ७ ( अवकेशिन ) फल करना नहीं होने वाला ६४ ८१ (अलर्क) पागल कुत्ता २२२ ७९ (अवक्रय)मोल,कीमत उजला मदार २६८ १०६ (अवगणित) अपमा- २३४ १९ (अलस) आलसी, सुस्त २६८ १०६ (अवगत) जाना हुआ २१० ३० (अलात) लुकेठी २६४ ६३ (अवगीत) निन्दित, १११ १५६ (अलावू ) लौकी वदनाम,निन्दितजनों १५ (अलि) वीछि, भ्रमर का अपवाद १४७ ९२ (अलिक)ललाट-माथ १९ ११ (अवग्रह) झूरा, हाथी ३१ (अलिञ्जर) मेटुका का मस्तक २६ (अलिन्) भ्रमर ११ (अवग्राह) झूरा,सूखा १२ (अलिन्द) चौपारि हाथी का माथा २८४ १२ (अलीक)अप्रिय,झूठी २६५ ६४ (अवचूर्णित) पीसा २५७ ६१ (अल्प) थोड़ा हुआ ४८ (अल्पतनु) छोटीदेह ४६ २३ (अवज्ञा ) अनादर वाला २६८ १०६ (अवज्ञात) अपमान १०६ १३६ (अल्पमारिप)चौराई २८ (अल्पसरस्)छोटास ५१ २(अवट)पृथ्वीकागड़हा न किया हुआ २२१ किया हुआ २० अमरकोशादर्श। पृष्ठ श्लोक किया गया किया गया पृष्ठ इलोक ४५ (अवटीट) नकचपटा | १६६ २६ (अवभृथ) यज्ञ के अन्त ८८(अवह) घांटी में जो स्नान होता है, ३३९- २२६ (अवतंस) करणफूल यज्ञान्तस्नान शिरोभूषण १३६ ४५(अवघटनकचपटा ३ (अवतमस) थोड़ा अ-२५५- ५४ (अवम) अधम, ख़राब न्धेरा २६८ १०६ (अवमत) अपमान २१६६६ (अवतोका) जिसका गर्भ गिरताहो २०० १०९ (अवमई)तहस नहस २३९ ४० (अवदंश) मद्यपीने करना में रुचि बढ़ाने वाला ४६ २३ (अवमानना)अपमान १३ (अवदान) उजला, २६८ - १०६ (अवमानित) अपमान पीला, निर्मल २७० ३ (अवदात) सुकर्म १४२ ७० (अवयव) अंग २०६ १२ (अवदारण) कुदारि १८४ ४० (अवर) हाथी का पि- ११३ १६५ (अवदाह) खसखस छला भाग २६३ ८९ (अवदीर्ण)रसीला,पि- १३५ ४३ (अवरज) छोटा भाई घला २७९ ३८ (अवरति)निवृत्ति ५४ (अवद्य)अधम,खराव २३० १(अवस्वर्ण) शूद्र ३०७ ६६ (अवधि)सीमा, विल, २६५ ९४ (अवेरीण) धिकारा समय हुआ ९४ (अवध्वस्त)पीसा हुआ ७२ १२ (अवरोध) रनिवास २७१ ४ (अवन) तृप्तकरना ७२ ११ (अवरोधन) रनिवास २५९ ७० (अवनत ) मुँह नीचे ७९ । ११ (अवरोह) वरोह, गुर्च किये, औंधा ४५ (अवनाट)नकचपटा ३८ १३ (अवर्ण) निन्दा २७ (अवनाय) गिराना | १४४ ७६ (अवलग्न) कमर ६५ ३(अवनि)पृथ्वी १३ (अवलक्ष) उजला ૨૨૨ ३६ (अवन्तिसोम )कांजी ९७' ९५ (अवाज) वकुची ६ (अवन्ध्य) फरनेवाला १८० २५ (अववाद) आज्ञा कुमढ़ा वगैरः २७७ अमरकोशादर्श। २२ - 1 गुदा, लिंग पृष्ठ श्लोक पृष्ठ श्लोक ३५० १६ (अवश्य) निश्चय |२५१ ३९ (अवासस्) नंगा २० १८ (अवश्याय)पाला,ठंढ १३० २० (अवि) पर्वत, भेंड़, ३०८ १०४ (अवष्टब्ध) आश्रित सूर्य, रजस्वला निकट, रुका, बंधा, ६७ (अविग्न) करोंदा जीताहुआ २६८ १०६ (अविन) रखाया १५४ १२१ (अवसक्थिका) पदुका ३२ ७(अविद्या) अज्ञान २७६ १ २४ (अवसर) प्रसंग मौका २४७ २३ (अविनीत) अन्यायी २८० २९ (अवसान) समाप्त, शुभस्वभाव रहित धान्यराशि,अन्त, अ- १४ ६६ (अविरत) लगातार खीर १४ ६६ (अविलम्बित) शीघ्र २६६ ९८ (अवसित) जानाहुआ| ४० २१ (अविस्पष्ट) साफ नहीं १४२ ६७ (अवस्कर) विष्ठा,वीट १२७ ११ (अवीरा) पति पुत्र र- हित स्त्री, पति, पुत्र, जिस का न हो ३० २९ (अवस्था) अवस्थान २१ (अवहार) ग्राह,घरि-२७७ २८ (अवेक्षा) वस्तुओंका यार देखना ३४ (अवहित्या) शोक में ५३ १ (अवीचि) नरकभेद मुखादि छिपाना २९८ ६१ (अव्यक्त) विष्णु, शिव २३ (अवहेलन) अपमान अप्रकट ११० १५२ (अवाक्पुप्पी) सौंफ ३४ १५ (अव्यक्तराग) थोड़ा २४५ १३ (अवाक्) नीचे मुख लाल वाला गूंगा ६५ ८६ (अव्यहा) क्यवांच २५९ ७० (अवाग्र)नीचेमुखवाला ८९ ५४ (अव्यया) हड़ १६ १(अवाची) पूर्वदिशा ३६४ ३१ (अव्यय) नाशरहित १० . २१ (अवाच्य)कहनेके यो-२१८ ६८(अव्यवहित) आड़ रहित मिलाहुआ १५१ १०७ (अवापक) हाथमें प-२१६ ५९ (अशनाया) भूख हिरने का कड़ा २९६ : २० (अशनायित) भूखा ८(अवार) पार ११।१८ (अशनि) वज . ४ ९ - ग्य नहीं २२ अमरकोशादर्श। पृष्ठ की सलाह Ra श्लोक पृष्ठ श्लोक २६९ १११ (अशित) खाया २१ २१ (अश्वयुज) अश्विनी १० (अशिश्वी) विना पुत्र ३५७ १६ (अश्ववड़ब) घोड़ा वाली स्त्री घोड़ी २३ (अशुभ) दुःख, १८५ ४६ (अश्वा) घोड़ी ६४ (अशेप) सब १८९ ६० (अश्वारोह) सवार ६४ (अशोक) शोकहीन २१ (अश्विनी) दक्षकन्या ८५ (रोहिणी) कुटकी ५२ (अश्विनीसुत)अश्वि- २२५ ९२ ( अश्मगर्भ) मरकत नीकुमार मणि १८६ ४८ (अश्वीय) घोड़ों का २२८ १०४ (अश्मज) शिलाजीत समूह २२ (अपडक्षीण) दो जनों (अश्मन्) पत्थर २६ (अश्मन्त) चूल्हा २२६ ९५ (अष्टापद) वस्त्रादि की १०३ १२२ (अश्मपुष्प) शिला. वनीहुई चौपड़,सुवर्ण १४३ ७२ (अप्ठीवत्) फीली १३९ ५६ (अश्मरी) मूत्रकृच्छू ३४७ १ (असकृत्) बारम्बार जिस से मूत्र करतेस- | १२७ १० (असती) छिनारि मय पीडाहो करक व्यभिचारिणी २२६ ६८ (अश्मसार) लोहा २६ (असतीसुत) छिनारि ११ ६६ (अथान्त)लगातार थका नहीं १४ (असन) विजयसार ९३ (अधि) तरबारआदि २४५ १७ (असमीक्ष्य कारिन् ) की नोक विना विचारे कामक- ६३ (अश्रु) आंसु रनेवाला, अविचारी ३९ १९ (अश्लील) गॅवइऑ २५६ ५६ (असार) निर्वल कम- वचन जोर ४३ (अश्व) घोड़ा ८९ (असि) तलवार ८६ ४४ (अश्वकर्णक) सांखू | १२८ १८ (असिमी) जनाने की २१ (अश्वत्य) पीपल जवान लोड़ी जित पथरचटा का पुत्र अमरकोशादर्श। २३ पृष्ठ पृष्ठ T ४६ श्लोक श्लोक १४ (असित) काला २५१ ३७ (अस्फुटवाक्) साफ २३१ ७ (असिधायक) तलवार न बोलनेवाला पर वाढधरनेवाला ३२३ १६४ (अन्न) रक,लोह-कोना १६६ ९२ (असिधेनुका) छूरी ६० (अस्त्रप) राक्षस शिकिली १४७ ६३ (अ) आंसु १९६* ९२ (असिपुत्री) छूरी २४५ १६ (अस्वच्छन्द) आधीन ७० (असिहेति) तलवार परवश बाँधनेवाला ८(अस्वप्न) देवता २०३ ११९ (अमु) प्राण २५१ ३७( अस्वर) क्रूरशब्द २०३ ११९ (असुधारण) जीवन बोलनेवाला प्राणी १७३ ५७ (अस्वाध्याय) वेदाध्य- ३ १३ (असुर) देत्य यन रहित २३ (असूक्षण) अपमान २५४ ५० (अहंयु) अहंकारवाला २४ (अस्या) गुणमें दोप २३ ३० (अहम्पति) सूर्य लगाना ४६ २२ (अहंकार) अभिमान १४० ६२ (असृग्धरा) खाल २५४ ५० (अहंकारखत्) अभि- १४१ ६४ (असृज) रक,लोह मानी २५१ ३७ (असौम्यस्वर) रूखयो- २१ २ (अहन्) दिन,अहंकारी लनेवाला, अरशब्द |१९९ १०१ (अहमहमिका) परस्प- करनेवाला राभिमान,जिस लड़ाई २ (अस्त) अस्ताचल प. मेचीरको कि मलड़ें ठाया हुआ तो वह लड़ाई ३५० १७ (अस्तम्) अदर्शन १९८ १००(अहंपूर्विका) पहिले ३५० १८ (अस्ति) होना हम पहिले हम ऐसा १३ (अस्तु) निन्दापूर्वक कहना स्वीकार ३२ ७(अहम्मति) अज्ञान ८२ (अस्त्र) हथियार २३ ३०(अति सूर्य ६८ (अस्थि) हाड़ २४ २(अहर्मुख) प्रातःकाल ४३ (अस्थिर) चञ्चल २२ २८(अहस्कर) सूर्य ७५ २४ अमरकोशादर्श। पृष्ठ भरा हुआ वराया हुआ यकसे भय ७७ २७ पृष्ठ लोक श्लोक ३४६ २५६ (अहह) खेद,आश्चर्य बुलवाना १(अहार्य) पर्वत २ (आकाश) आकाश ६ (अहि)सर्प, त्रासुर २६२ ८५ (आकीर्ष ) संकुल, १७७ ११(अहित) शत्रु,दुश्मन ५३ ११ (अहितुण्डिक ) सांप २५९ ७२ (आकुल ) आकुल घ- पकड़नेवाला * १८१ ३० (अहिभय)अपने सहा- ३०५ ९० (आनन्द ) पुकारना, रोने का शब्द कहरना २८९ ३०(अहिभुज)मोर,गरुड़ रक्षक,कठोर,युद्ध ९८ १०१ (अहेरु) शतावरि ३ (आक्रीड़) राजा जहां ३४८ ६ (अहो) विस्मय कि स्त्रियों के साथ वि- १२ (अहोरात्र)दिनरात हार करै वह स्थान ३४७ ०(अन्हाय) शीघ्र १५ (आक्रोश ) मैथुन के ३४२ २३९ (आ) स्मरण, वाक्य- निमित्त गाली देना पूरण २७१ ६ (आक्रोशन)गालीदेना २६३ ८७ (आकम्पित) कांपता ३८ १५ (आक्षरणा गालीदेना हुआ २५२ ४३ (आधारित ) कलंकी ७(आकर) खानि चोरी,याछिनारा जिस ३३८ २२० (आकर्प) जुआ,पासा, को लगाहो कपड़े आदि की वनी ८३ ३१ (आक्षीव ) सहिजन हुई चौपड़ ३८ १३ (आक्षेप)निन्दा,बुराई १४९ १९ (आकल्प) अलकार, २३५ २३ (आक्षोदन )शिकार सोना ४५ (आखण्डल) इन्द्र २७४ १५ (आकार) आभिप्राय ११७ १३ (आख) मूस, चूहा वोधक चेष्टा, आवृत्ति, ११६ ७ (आखभज)विलार इशारा,स्वरूप २३५ २३ (आखेट) शिकार ४९ ३४ (आकारगुप्ति) शोक से| ३७ ८(आरया) नाम मुखादि छिपाना २६८ १०७ (आरयात) कहाहुआ ८(आकारणा)पुकारना | ३६ ५(आरयायिका)कहानी अमरकोशादर्श। २५ पृष्ठ लड़ाई के श्लोक इलोक १६८ ३६ (आगन्तु) पाहुन, अ- २२१ ७७ (आजक) बकड़ों का भ्यागत, समूह २६ ( आगस् ) अपराध, १८५ ४४ (आजानेय) कुलीन पाप, कसूर घोड़ा ३२ ५(आग) स्वीकार २०० १०६ (आजि)संग्रामलड़ाई १६४ १८ (आग्नीध्र) ऋत्विक समभूमि भाग १४ (आग्रहायणिक) अग-२०३ १(आजीव)जीविका हन ५४ ३ (आजू) हठसे नरका: २३ (आग्रहयण) अगहन दिमें भेजना ३४२ २३८ (आङ्) थोड़ा,अभि-१८० २६ (आज्ञा) हुकुम व्याप्ति, सीमा, क्रिया २१६ ५२ (आज्य) घी योगसे उत्पन्न अर्थ १२० २६ (आदि) आड़ी पक्षी- ४५ १६ (आशिक शरीरकी चे- टाभौहआदिमटकाना २०० १०८ (आडम्बर)वाजाकाश- २४ (आशिरस)बृहस्पति ब्द बड़े हाथियोंका ग १६८ ३८ (आचमन) आचमन र्जना २१५ ४९ (आचाम) मांड़ १२० २६ (आडि) आडी ९(आचार्य) मन्त्रों की २२४ ८८ (आढ़क) चारसेर व्याख्या करने वाला | २०५ १० (आढ़किका) चारसेर १२८ . १४ (आचार्या) मंत्रों की विया चोनेवाला खेत व्याख्या करने, वाली | १०५ १३० (आढ़की) अरहर• १२८ १४ (आचार्यानी) आचा अर्ही र्यकी स्त्री २४४ १० (आय) धनी अमीर २२४ ८७ (आचित) दशभार २०५ ७ (आणचीन) अणु ज्य गाड़ीका भार ठउर सांवाका खेत १३ (आच्छादन) ढांपना २८३ १० (आतंक) रोग,सन्ताप वस्त्ररूंधना शंका ४९ ३४ (अच्छरित) सप्रयो- ३११ ११५ (आतचन) दूधमें जा- जनहास अधिकहसना वनदेना वेग तृप्तकरना . -1 २६ 1 अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ . दितिके पुन श्लोक श्लोक २५३ -४४ (आततायिन्)मारने के १५९ -१४०( आदर्श शीशा-- योग्य दर्पण: १२४ - ३४ (आतप) सूर्यका तेज़ | १२० : २६-(आदि) प्रथम-पहिल घाम | १६९ ३४ (आदिकवि) वालमीकि १८२: ३२ (आतपत्र)छाता,छतुरी| ३० २८ (आदिकारण) प्रथम ५६ :११ (आवर) उतराई-खेवा (कारण ११९:..:२२ (आतायिन्) चील्ह २.:- (आदितेय) देवता--अ- १६८:३५:(आतिथेय) अतिथिके लिये जो सिद्धहो २. ८ (आदित्य) देवता,सूर्य १६८ ..३५ (आतिथ्य) अतिथिके २७८:२९ (आदीनव) क्लेश लिये कर्म ::३०३ 5५-(आहत) आदर किया २३९५८ (आतुर) रोगी हुआ--पूजागया ४२ ५(आतोद्य) वाजा |-१६१, १९ (आदेष्ट ) यज्ञाध्यक्ष २५१"४० (आत्तगर्व)-टुटे अहं-... -यज्ञ में सर्व ऋत्विजों कारवाला जिसका अ- का:सिखाने वाला इंकार, टूटगया हो .२६१:::००(आद्य)प्रथम,पहिल ६५:८६ (आत्मगुप्ता) क्यवांच २२४ ८५ (आद्यमापक) पांचघु- ११९ २१,(आत्मघोप) कौआ . ' ,घुचीभर मासा १३१, २७ (आत्मज) पुत्र २४७ ।१(आयून) अतिभूखा ३० . २६ (आत्मन्)उद्योग,धैर्य ६१ २६ (आधार) जल ठहरने . (बुद्धि, स्वभाव, ईश्वर, .. की जगह बाँध ४८ (२८ (आधि)मनकी व्यथा १.३.१६(आत्मभू) ब्रह्मा,काम गिरही चीज,आपत्ति, देव, २४७ . २१ (आत्मम्भरि) अपनाही २६२ ८७ (आधृत) काँपताहुआ पेट भरने वाला,पेटू | १८८ ५६ (आधोरण) पीलवान् “१३० २१ (आत्रेयी) रजस्वला महावत. २८१ - ४३ (आथर्वण) अथर्वणमं -:४८ २६ (आध्यान)चिन्तापूर्वक स्मरण:- चेतः पीड़ा, आश्रय ... . प्रोंकासमूह 'अमरकोशादर्श। २७ तुरही। - •मिली वस्तु न्द पूछना पृष्ठ श्लोक पृष्ठ श्लोक ४३ '६ (आनक)बड़ानगारा, ६१ । ६०(आपगा) नदी २ (आपण) वाज़ार ५ । २२ (आनकदुन्दुभि)वसुदेव २२२ ७८ (आपणिक) बनिया २५९ ७० (आनत) मुख नीचे २५२ ४२ (आपत्प्राप्त) विपत्तिमें • (किये, औंधा परा ४२ ४ (आनद्ध)मुरजादिमृ. | १९४ ८२ (आपत्) विपत्ति "दङ्गादि, वाजा २५२ •४२ (आपन्न)विपत्तिमेंपरा: ८९ (आनन) मुख, मुह १३० । २२ (आपन्नसत्वा)गर्भिणी २६ २५ (आनन्द) खुशी, हर्ष २०४ ४ (आपमित्येक) वादेपर २९ । २५ (आनन्दथु) खुशी,हर्ष २७१ ७(आनन्दन) कुशलान- २४० १३ (आपान) मद्यपीनेकी सभा, २९८ ६३ (आनत) संग्राम, ना- १५८ -१३७ (आपीड) चोटी में प- चनेकी जगह, देशवि हिरनेकी माला शेषद्वारका २२० । ७३ (आपीन)आयन,थन ५८। १६(आनाय) जाल २१० २८ (आपूपिक) पुआ आ- १६५ २३(आनाय्य) गार्हपत्या. दि बनानेवाला ग्निसे लेकर जो द- १७७ १३ (आप्त) विश्वासी ' क्षिणाग्नि प्रवेश क- ५५, ५(आप्य) जलका बि- कारकूट १३८ ५५ आनाह) मलमूत्रका २७१ ७ (आमच्छन्न) कुशला- (निरोधे,कब्ज,लम्बाई नन्द ४० (आनुपूर्वी) क्रम, प- १४५ ११९ (आप्रपदीन) पैरतक रिपाटी लम्मा कपड़ा २१० २८ (आन्धसिक) रसोई | १५५ १२२ ( आप्लव) नहाना; परदार ३६ ५ (आन्वीक्षिकी) न्याय १७०४६ (आप्लवतिन) वेदव्रत २१४ । ४७ (आपक) चचेना,ऊँवी समाप्तकर गुरूकी आ- मुरमुरी ज्ञासे स्नान करनेवाला M राया जावे 1 अमरकोशादर्श। पृष्ठ पठाया, गिरा पहिने हुये गन्ध, हर्ष पान आदि पृष्ठ श्लोक श्लोक १५५ १२२ (आप्लाव) नहाना १४१ ६३ (आमिप) मांस, लेना स्नान भोग्य वस्तु, भोग २०६ १३ (आवन्ध) हलमें जोठ २४६ १६ (आमिपाशिन्) मांस चांधने की रस्सी-नाधा खानेवाला २५९ ७१ (आविद्ध टेढ़ा फेंका १९. ६५ (आमुक्त) झिलमादि घुमाया २७९ ३६ (आविध) वर्मा २६ .२४ (आमोद)अतिशय सु. १४९ १०१ (आभरण) गहना ३८ १५(आभापण)प्रियबोलना ३३ ११ (आमोदिन्) मुख को २ १० (आभास्वर) देवता सुगन्धित करने वाला विशेप १९७ ५७ (आभीर) अहीर ३ (आम्नाय)वेद,परम्परा । ७४ २० (आभीरपल्ली) अहीरों उपदेश ६४ ३३ (आन) आम १२८ १३ (आभीरी) अहीरिनि ८२ २७ (आम्रातक) आंवला ४ (आभील) दुःख ३८ १२(आमेडित) दो तीन १५८ १३८ (आभोग) सब वस्तु बार कहना की परिपूर्णता सब त- २५९ ६६ (आयत) लम्बा रह पूर्णता ७२ ७(आयतन) यज्ञशाला ३४ १२ (आमगन्धि) कच्चे मां-|१८१ २९ (आयति) उत्तरकाल सादिकी दुगंध प्रभाव, लम्बाई ३ (आमनस्य) दुःख २४५ १६ (आयत) आधीन, १३७ ५१ (आमय) रोग परवश १३६ ५८ (आमयविन) रोगी १५३ ११४ (आयाम) वस्त्रादि की ३६४ ३३ (आमलक) अॅवरा लम्बाई ८९ ५७ (आमलकी) अॅवरा ८२ (आयुध) हथियार १६५ ०५ (आमिता) गरम दूधमें १६० ६७ (आयुधिक ) हथि- दही मिलानेसे जोकुछ यार से जीविका करने बनतादे बाला का गांव अमरकोशादर्श। २९ पृष्ठ चल वाला पृष्ठ श्लोक श्लोक १९० ६७ (आयुधीय) हथियार करिहांव से जीविका करनेवाला| ७४ १८ (आरोहण) सीढ़ी ૨૬૩ ६ (आयुष्मन्)बड़ी आयु- ९३ ७४ (आर्तगल) काले फूल वाली झिण्टी,पिया- २०३ १२० (आयुए) आयुर्दाय, वासा काला उमर १३० २१ (आर्तव) स्त्रियोंकारज १९९ १०३ (आयोधन) संग्राम २६७ १०५ (आई) ओदा, गीला २२६ ६७ (आरकूट) पीतल २१२ ३७ (आईक) अदरख २३ (आरबंध)अमिलतास ४५ १४ (आर्य) सज्जन,श्रेष्ठ, २१२ ३६ (आरनालक) कांजी वड़ा २७९ ३८ (आरति) निवृत्ति ९(आर्यावर्त )विन्ध्या- २७७ २६ (आरम्भ) प्रथम, चल और हिमालयके आरम्भ बीचका देश २३ (आरख) शब्द २१८ ६२ (आपभ्य) वधिया कर २३८ ३५ (आरा)चमड़ा काटने ने के योग्य पैल ८(आईक) मोक्षमार्गका ३४३ २४१ (आरात्) दूर, समीप दिखाने वाला ३१३ १२५ (आराधन) साधन,प्रा. २२८ १०३ (आल) हरिताल ति, संतोप करना २०२ ११५ (आलम्भ) मारना २ (आराम) घरके पास ५ (आलय) घर का बन २९ (आलवाल) थाल्हा २१० २८ (आरातिक) रसोईवर- २३४ १९ (आलस्य)सुस्ती,सुस्त १८४ ११ (आलान)हाथीकाखूटा ४० २३ (आराव) शब्द ३८ १५ (आलाप) प्रियवोलना २४ (आरेखत) अमिलतास ६८ १५ (आलि) सेतु, सखी, १३७ ५० (आरोग्य) नीरोगता, पंकि तन्दुरुस्त ४२ ५ (आलिङ्गय) मृदंगवि- १५३ ११४ (आरोह) वस्त्रादि की शेप लम्बाई, श्रेष्ठ स्त्री की '१९५ ८५ (आलीढ़) दहिनीजांघ की छूरी ७७ १० अमरकोशादर्शी पृष्ठ . - - । . श्लोक पृष्ठ श्लोक फैला धनुषधारियों की २४८ ॥२७ (आशंसितोकहनेवाला (स्थितिविशेष २४८ २७ (आशंसु) कहनेवाला २११३१ (आलुआलू) करवा- २७५, 1 २० (-आशय) अभिप्राय, 7 ई सिकोड़कर धैठनो मतलन करवा १३॥६०(आशर) राक्षस २८२ ३ (आलोक) प्रकाश, रो- १६ १ (आशा)वड़ीआसरा, शनी, दर्शन ििदशा २७८ ३१ (आलोकन) दर्शन,दे- २१७ - १९ (आशितंगवीन) गौ- सना i: ओंको पहिले खानेका २११ ३३ (आवपन) सववर्तन मस्थान ५५।। ६ (आवर्त) भैर ३३६ २२७(आशिस)हितकींचा ७८"। ४ (आवलि) पंक्ति । (हना, सॉपके दाँत २०६ २३ (आवसित) कुनाव भू- ५२ ७ (आशीविप) सांप, साका १४ ६६ (आशु) शीघ्र,जल्द, ६२ . २९, (आवापथाल्हा • साँठी १५१ : १०७ (आवापक) हाथ के १४ ६३ (आँशुग) हवा, वायु, । कडा,कंकण,पहुंची (तीर, वीण, ६१ २९ (आवाल) थाल्हा ५६ (आशुशुक्षणि)आगि, ५७ ११४ (आविल) गन्दा,मैला अग्नि ३४९ १२(आविस)प्रकट,स्पष्टता १६ १८ (आश्चर्य) अद्भुतरस, १२ (आवुक) पिता, वाप आश्चर्य ११ १२ (आवृत्त) बहनोई १६०४ (आश्रम)ब्रह्मचर्यादि १६२ ४० (आवृत)क्रम,परिपाटी ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वा- २६४ ९०(आवृत) घिराहुआ "नप्रस्थ, संन्यास १०७ १३७ (आगेगी) विधारा १७८ १८ (आश्रय) शट से पी- ७१ ७ (आवेशन) कारीगर डितहोके किसी चल. का घर) वान् के पास छिपना ३६ (आनेशिक) पाहुन, १२ ५५ (आश्रयाश आगि, अभ्यागत ५(आर) अगीकार, न । २४ । t अमरकोशादर्श। ३१ पृष्ठ * किया गया ५ - । एक मजिल r य-प्रतिष्ठा पृष्ठ श्लोक श्लोक आज्ञाकारी ५.२५५ १५३ (आसेचनक)जिसके २६८ १०८ (आश्रुत) अगीकार PF (देसनेसे तृप्ति न हो वह वस्तु १८६४८ (आश्व ) घोडों का ३४३ ४२३९, (आम) क्रोध, पीड़ा समूह १९९ १०४ (आस्कन्दन) सग्रास १८१, १८ (आश्वत्थ) पीपलका १८६, १४८ (आस्फन्दित)घोड़की सरपटचाल १७ (आश्वयुज) कुआर १८८११२:(आस्तरण) हाथी की ૨૮ १७ (आश्विन) कुआर . F (झूल ) ११ , ५२ (आश्विनेय) अश्वि- ३०४१,८७ (आस्था) सभा,उपाय नीकुमार १७ (आस्थान) सभा १८६ ४७ (आश्वीन) घोड़ा का १६३ १७ (आस्थानी) सभा ३०६ १६३,(आस्पद) स्थान, का- २८ १६ (आपाढ)आपाढ़,ब्रह्म- चारी का दण्ड, २३७ ३४ (आस्फोटनी) वर्मा २४४ -९ (आसक्त)चित्तसे मि-: ९४ ८०(आस्फोट) मदार ९९।। १०४,(आस्फोता) विष्णु- १५६१११३९ (आसन) पीढ़ा,आस -1 1. कान्ता -- न,शत्रुको बलवान स. १४६,८९ (आस्प) मुख 1, "मझकर किला में बैठ २७५ २१(आस्पा)आसन,वैठना (रहना,हाथी, कन्धा २७८ २२९ (आसव) क्लेश २७५ • २१ (आसना) आसन ४० - ११ (आहत)असम्भावित, २५८ ६६ (आसन्न) समीप गुणाहुआ ९(आसन्दी) आसनी २४४ १० (आहतलक्षण) गुणसे ૨૪ ४२ (आसव) मद्य,दारू प्रसिद्ध १२६७-९०४ (आसादित) पाया |२००,१०५ (आव) संग्राम १९११ (आसार) मेघधारा, १६४ २१ (आहवनीय) यज्ञकी फौजका फैलाव १२०८ ,१६ (आसुरी) राई २१७ ५६.(आहार भोजन खाना - लताहुआ आसिक - । ३५५ - L v अमरकोशादर्श। पृष्ठ 4 श्लोक श्लोक २६ (आहाव) पोशाला २३४ १६ (इतर)नीचपुरुप,अन्य, ५२ ३ (आहेय) सांपकी वि- दूसरा, हेतु,प्रकरण पहड्डी आदि ३४४ २४४ (इति)प्रकाश, समाप्ति ३४७ . ५(आहो)विकल्प १६२ १४ (इतिह) लोकपरम्परा १९८ १०० (आहोपुरुपिका) अप. उपदेश नामें ऐसी सम्भावना ३६ ४ (इतिहास) पुरानीकथा कि हमी पुरुषहैं |१२७ . १०(इत्वरी) छिनारि ७ (आह्वय)नाम, संज्ञा ३५२ २३ (इदानीम्) अव, इस ८(आह्वा)नाम, संज्ञा काल ८(आह्वान) पुकारना | ७६ १३ (इम) इन्धन ३१० १११ (इन) सूर्य , राजा, . (इक्ष) ऊख, स्वामी ६८ ९८ (इक्षुगंधा) गोखरू,का- (इन्वका) मृगशिरा श, कालाकुम्हड़ा नक्षत्रके शिरमें रहने ६६ १०४ (इक्षर) तालमखाना वाले पांच छोटेनक्षत्र १११ १५६ (इक्ष्वाकु) करईलोकी ६ २८ (इंदिरा) लक्ष्मी २६० ७४ (इङ्ग) अभिप्रायवोध- ६३ ३७ (इन्दीवर) नीलकमल क चेष्टा, चलनेवाला ६८ १००(इन्दीवरी) शतावरि २७४ १५ (इङ्गित् ) अभिप्राय १९ १३ (इन्दु) चन्द्रमा योधक चेष्टा ९ ४२ (इन्द) देवों के राज ४६ (इंगुदी) गोंदी, पाँस्त्री ४५ (इन्दु) अर्जुनवृक्ष २७ (इच्छा)इच्छा,स्वाहिश ९१ ६७ (इन्द्रयव) इन्द्रयव १२७ ९ (इच्छावती) धन की १३६ ५६ (इन्द्रलुप्तक) चांईंचूई रोगी १० (इज्याशील) वारंवार १११ १५६ (इन्दवारुपी)इन्द्रायण यज्ञ करने वाला ६८ (इन्द्रसुरसम्योदी,मुंडी २१८ ६२ (इटचर) साँड़ ९१ ६८(इन्दाणिका)म्योढ़ी,मुंडी २६३ १२ (इडा) गो,भूमि,वानी, १० १६ (इन्द्राणी) इन्द्रकी स्त्री १८ १० (इन्द्रायुध) इन्द्रधनुष, ४७ इच्छावाली स्त्री युधकी स्त्री अमरकोशादर्श। ३ पृष्ठ - - विषय . श्लोक श्ले क । ३ - १२ (इन्दारि ) दैत्य २९२ ३८ (इष्टि) यज्ञ,इच्छा २० (इन्द्रावरज) विष्णु,वा- १९४ ८३ (इप्यास) धनुप मन ८(इन्द्रिय) इन्द्रिय,वीय्ये १४७ ९३ (ईक्षण) आँखि,देखना ३३ ८(इन्द्रियार्थ) रूपरसादि १३० २० (ईवणिका) शुभाशुभ जाननेवाली ७६ १३ (इन्धन) इन्धन २६९ ११० (ईडित) स्तुति किया १८२ : ३५ (इभ) हाथी हुआ २२४ १० (इभ्य) धनवान् २९९ ६८ (ईति) विदेश, वाल, १८ -१० (इरम्मद)मेघकीज्योति अण्ड,पिलही,बहिआ, २३९ ४० (इरा) मदिरा, पृथ्वी, सूखा,टीडी,मूस,सुआ वानी, जल देशी राजा, परदेशी २९६ ५६ (इरए),शून्य, ऊसर राजा इत्यादिका उ- (इर्वारु) कंकरी पद्रव २१. २३ (इल्वल)ताराविशेष | २६३ ८७ (ईरित) फेंका, पठाया ४ (इला)गौ,पृथ्वी,वानी, १३८ ५४ (ईर्म) घाव बुधकी त्री ४७ २४ (ईर्ष्या) अन्यकी बढ़ती ३४० ९ (इव) सादृश्य, समता को न सहना १७ (इप) कुआर २६६ १०९ (ईलित) स्तुति कि- ૨૩૭ ३३ (इपीका) दाथीकी आं- याहुआ खिका गोल,सराई १६ ६१ (ईली) सॉड़ा १९५ ८७ (इपु) तीर ३१ (ईश) शिव, ईशान ८८ (इपुधि) तरकस, तूणीर कोणका स्वामी १६६ १३० (इष्ट)यज्ञकर्म,वांछित, ३१ (ईशान) शिव इच्छाभरि २४४ १० (ईशित) स्वामी ११३ १६५ (इष्टकापथ) सससस ३१ (ईश्वर) शिव, स्वामी ११ (इष्टान्ध) सुगन्ध ३७ (ईश्वरी) पार्वती ९(इष्टायांद्युत) अभीष्टव-३८ ८(ईपन्) थोड़ा स्तु में लगाहुआ २०७ १४ (ईपा) हरस A ३४ अमरकोशादर्शी रसे पढ़ना . पृष्ठ श्लोक श्लोक १८३ ३८(ईपिका) हाथीके आँख १० ४६ (उच्चैःश्रवस्) इन्द्रका की गोलाई,चित्र खींच घोडा. ने वालेकी कूची १२ (उचैघुष्ट) घोपना,जो- ३४ १३ (ईपत्पाण्डु) धूसररंग "४८ २७ (ईहा) इच्छा, चाह | ३५० १७ (उचैस) उँचाई ८(ईहामृग) भेड़हा, ७६ १० (उच्छ्य) पर्वतादिकी विग उँचाई १० (उच्छाय) पर्वतादिकी ३५० १८ (3) क्रोधसे कहना उँचाई २६८ १०७ (उक्त) कहाहुआ २५९ ७० (उच्छ्रित) ऊंचा, घ- १(उनि) कहना दाहुआ, उत्पन्न, दृप्त ३६२ ३० (उक्थ)सामवेदके मंत्र- २०२ ११५ (उज्जासन) मारना विशेष ४५ १७ (उज्ज्वल) शृङ्गाररस, २१७ ५९ (उक्षन) पैल उजला ३१ (उखा) घटलोही २०३ २(उञ्छ) शीलाविनना २१४ ४५ (उख्य) घटलोही में| ७० ६ (उटज) मुनियों की पकाया अन्नादि ३३ (उग्र) शिव, शूद्रास्त्री २१ २१ (उङ) तारा में क्षत्रिय से उत्पन्न, ५६ ११ (उडुप) छोटी नाव भयकारी १२३ ३८ (उड्डीन) ऊपरका उ. ९९ १०२ (उपगन्धा) वच,अज- ड़ना वाइन २६७ १०१ (उत)वीनाहुआकपड़ा, २५९ ७० (उच्च) ऊंचा समुच्चय, ११२ १६० (उच्चटा) मायाविशेप छना, वितर्क २६२ ८३ (उच्चण्ड) शीघ्र, उत-(३४७ ५ (उताहो) विकल्प हिले २४३ ८(उत्त) अति चाहने १४२ ६७ (उच्चार) गृह, मेला वाला ८३ (उनावच) अनेक प्र-१०६ १३४ (उत्कट) मतवाला कारका, हरतरहका २९ (उत्कंग) अतिचाहना कूटी ७ , विकल्प, पूं. २६२ अमरकोशादर्श। ३५ पृष्ठ अभिमानी, बढ़ाहुआ .. 1. पृष्ठ इलोक श्लोक १२४ १३ (उत्कर) राशि, ढेर पाय,बैठेहुयेका उठा. २७३ ११ (उत्कर्प) प्रकर्ष ना, कुटुम्वकृत्य ४८. २९ (उत्कलिका) अति | ३०३ ८५ (उत्थित) उत्पन्न, चाहना, कलोल ૨૭. ३६ (उत्कार) अन्नादिका २४९ २९ (उत्पतितृ) उछलने निकालना वाला, १२० २३ (उत्क्रोश)कुररा,कुररी २४८ २९ (उत्पतिष्णु) उछलने ३३९ २२६ (उत्तंस)करणफूल,शि- वाला रोभूपण ३० ३० (उत्पत्ति) जन्म २६८ १०५ (उत्त) ओदा, गीला ६३ ३७ (उत्पल) कमल, कु- १६१, ६३ (उत्तप्त) सूखामांस मुद २५६ ५७ (उत्तम प्रधान, मुख्य, १०१. ११२ (उत्पलशारिवा).पी: अच्छा परि, कालाशाम्ब २०४, ५ (उत्तमर्ण) ऋणदेने- २०० १०६ (उत्पात) उत्पात, आ- - ( वाला महाजन १२५. ४ (उत्तमा) सवतरह से | ७२ ७ (उत्फुल्ल) फूलाहुआ , अच्छी स्त्री ५ (उत्स) झरनासे पानी १४८ ९५ (उत्तमांग) शिर गिरनेका स्थान ३३० १८६.(उत्तर) उत्तर, जवाब, १६७ ३१ (उत्सर्जन) दान ऊपर, उत्तर दिशा, ५० ३८ (उत्सव) विवाहादिकी श्रेष्ट खुशी, ऊपर उठना, १५३ ११७ (उत्तरासंग) अंगौछा, सींचना, इच्छाकी उ- त्पत्ति, आनन्दका वेग १५३ १९८ (उत्तरीय) अंगौछा,दु-१५५ १२२ (उत्सादन) उवटन २९ (उत्साह) उत्साह, हो- १५ (उत्तान) थाह, उथल सिला, राजाकी शक्ति ४१ (उत्तानाशया)दूधपीने ४५ १८(उत्साहवर्द्धन) वीर वाले, बच्चे २४३ ९ (उत्सुक) अभीष्ट वस्तु ३१२ ११७ (उत्थान) पौरुप, उ में अतिमन लगाये. . , डुपहा आदि पहा आदि अमरकाशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ श्लोक श्लोक २६८ १०७ (उत्सृष्टः) त्यागाहुआ हरण' ७६ १० (उत्सेध) पर्वतादिकी | २६८ ,१०७ (उदित) कहा हुआ 1 उँचाई, देहा उचाई १७२ (उदीची) उत्तर दिशा १४ (उदक)जल । (उदीच्य) पश्चिमोत्तर १३० , २१ (उदक्या) रजस्वला (देश, नेत्रवाला ७० (उदग्र) ऊँचा ८१ २२॥(उदुम्बर) गूलर, तांवा २८० ३९ (उदज) पशुओंको ल- १०८ १४४ (उदुम्बरपी)देतिआ, लकारना जयपाल - १ (उदधि) समुद्र । | २०९ २५ (उदूखल)ओखरी,कांडी ७ (उदन्त)वृत्तान्त,खवर २६५ ६७(उदत) वान्त,कय कि- येहुये २१६। ५५ (उदन्या) पिआस १५२ ११२ (उद्गमनीय) धोयेक- १(उदन्वत्) समुद्र पड़े ६० २६ (उदपान) कुंआ १५ ६७(उद्गाढ़) वारंवार, ७५ २ (उदय) उदयाचल १९ (उद्गातृ) सामवेद १४४ ७७ (उदर) पेट (जाननेवाला ऋत्विक १८१ १२९ (उदर्क) आगे होनेवा. २७९ ३७ (उद्गार) वान्तकरना, ला फल डाकना ४(उदवसित) घर ३५८ १९ (उद्गी १९ (उद्गीथ) सामवेद. २१६ ५३ (उदश्वित् ) माठा २६३ । ८९ (उद्गूर्ण)उठायाहुआ, जिसमें आधापानीहो शस्त्रआदि ४ (उदात्त) स्वरविशेष २७९ ३७ (उद्ग्राह) डेकारना ६४ (उदान) मुख नाकसे ३० २७ (उद्घ) अच्छा निकलने वाला वायु २७९ ३५ (उद्घन काठकाठीहा ३३० १९१ (उदार) दाता, महान, जिसपर बढ़ई लकड़ी वड़ा । काटताहै १७७ १० (उदासीन) शत्रु मित्र २३६ २७ (उद्घाटन) कुंओं से से अन्य। जल निकालने का ३७ ९(उदाहार)चिन्ता,उदा- . । यंत्र, पुर,रहट अमरकोशादर्श । ३७ पृष्ठ इलोक , - - , चाना पृष्ठ श्लोक २७७ २६ (उद्घात) प्रारंभ,शुरू, १५५ - १२२ (उद्वर्तन) उवटना १८१, २६ (उद्दान) बाँधना, १८३ ३६ (उद्वान्त) वान्त व .८४३४ (उहाल) लसोहरा मदकाहाथी २६५ ९५ (उदित) वॉधाहुआ | २०२ ११५ (उद्वासन) मारना २७१ १११ (उद्गाव) भागना ६० (उद्वाह) विवाह "५० ३८(उद्धर्प) उत्सव ११४ १६९ (उद्वेग) सुपारी का .५०, ३८ (उद्धव)उत्सव, फल,ऊवना २१० २६ (उद्धान) चूल्हा १३ (उन्दर) मूसा, उवाना २०४ ४ (उद्धार) उधारमण, ११७ १३ (उन्दुरु) मुसा कर्ज २५९ ७० (उन्नत) ऊँचा २६४ ९८(उद्धृत) कुंऑसे नि- (उन्नद्ध) अभिमानी काला जल इत्यादि २७३ १२ (उन्नये) ऊपरकोपहुंचा ३० १३० (उद्भव) जन्म (उन्नयन) ऊपरको पहुँ- २५५ ५१ (उद्भिज्ज) वृक्ष,वल्ली, घास इत्यादि |२७३ १२ (उन्नाय) ऊपर लेजाना २५५ ५१ (उद्भिद् ) वृक्ष, वल्ली| ९३ ७७ (उन्मत्त)धतूरा,पागल, घास इत्यादि सिरी २५५५१ (उद्भिद) वृक्ष, वल्ली, २०२ ११५ (उन्मथ) मारना घास इत्यादि २४७ २३ (उन्मद) पागल, सिरी २७३ ११२ (उद्मम) ऊबना, २४७ २३ (उन्मदिप्णु)पागल, २६३ ८९ (उद्यत) उठायाहुआ सिरी, शस्त्रआदि २४३ ८(उन्मनस)प्रीतियुक्त २७३ ११ (उद्यम) उद्यम-रोज अतिचाहने वाला २०२ ११५ (उन्माय)मारना, खा. ३ (उद्यान)जहांकित्रियों भरि चिडिया फसाने- के साथ राजा विहार का साधन करे,निकलना,प्रयोजन ४७ २६ (उन्माद) पागलपना ३६४ ३३ (उद्योग) उत्साह, ११० ६० (उन्मादव) पागल २० (उद्र) उद-जलविलार, २५८ ६८(उपकण्ड) समीप . . - गार, धंधा अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ श्लोक श्लोक ७२ १० (उपकारिका ) राजघर १७९ २१ (उपजाप)भेद लगाना तम्बू चगली, फूटकराना ७२ १० (उपकार्या) राजघर, ३४६ १०(उपजोप) आनन्द, खुशी १०४ १२५ (उपकुचिका) काला- २६१ १५ (उपज्ञा) प्रथम ज्ञान जीरा, गुजराती इला- पहिले पहिल जानना यची २७४, १४ (उपततृ) परसन्ताप २६ (उपकुल्या)बड़ीपीपरि १३७ ५१ (उपताप) रोग १६३ १५ (उपक्रम) जानकर ७ (उपत्यका) पर्वतके स- आरंभ करना, उपाय मीप नीचेकी भूमि पूर्वक आरंभ, राज-१०१ २८ (उपदा) भेट, नजर मंत्रीकेशीलकी परीक्षा १७९ २१ (उपधा) मन्त्री आदि चिकित्सा, की धादिसे परीक्षा ३८ १३ (उपक्रोश) निन्दा १५९ १३८ (उपधान) तकिआ २६८ १०९ (उपगत) अंगीकार ३० (उपधि) कपट, ४३ ७ (उपनाह) वीणामें तार २७८ ३० (उपगृहन) लिपटना वांधने की जगह २०२ -११९ (उपग्रह) बंधुआ, २२२ ८१ (उपनिधि) धरोहर, कैदी ३०५ ९२ (उपनिपत्) धर्म, ए. १८१ २८ (उपग्राह्य) भेंट,नजर २७५ १९ (उपन) समीपका आ- ६९ १९ (उपनिष्कर) गांव या श्रय शहर से निकलने की २६७ १०२ (उपचरित) सेवाकिया रास्ता, हुआ ९ (उपन्यास) कहने का १६५. २२ ( उपचाय्य) यज्ञ की आरम्भ, अग्नि १३३ ३५ (उपपति) जार,यार २६३ ८६ (उपचित) बढ़ाहुआ १६६ २७ (उपभृत) वा विशेष, ९५ ८७ ( उपचित्रा) भूसरी, २७५ २० (उपभोग) उपभोग,व मूसाकर्णी तना, भोगना किया हुआ- कान्त, वेदान्त र अमरकोशादर्श। पृष्ठ मीपकी जगह १ के वस्त्र गर्भ ग्रहणकरना श्लोक पृष्ठ लोक २३८ ३६ (उपमा) सादृश्य, मि- ७४ २० (उपशल्य)गॉवके स- साल ३२६ ७६ (उपमातृ) धात्री,धायी २७८ ३३ (उपशाय) क्रमसे पहर २३८ ३६ (उपमान)जिसकी मि- पहर सोनेवाले साल दीजाय वह | २६८ १०९ (उपश्रुत) अंगीकार ६०(उपयम) विवाह कियाहुआ १७४ ६०(उपयाम) विवाह १५३ ११७ (उपसव्यान) धोती १० (उपरक) चन्द्र, सूर्य आदि,नीचे पहिरने का ग्रहण दुःखसे पी- ड़ित २८ (उपसम्पन्न) यज्ञमें १८२ ३३ (उपरक्षण) पहरा,गस्त माराहुआ पशु,रसि. २६ ९(उपराग) चन्द्र, सूर्य आउर का ग्रहण २७६ २५ (उपसर)प्रथमवार २८० ३८ (उपराम) निवृत्ति ४ (उपल) पत्थर २०० १०९ (उपसर्ग) उत्पात ३६ ५ (उपलब्धार्था) कहानी २५६ ६० (उपसर्जन) अप्रधान ३१ १(उपलब्धि) बुद्धि, २२० ७० (उपस-) गर्भयोग्य २७७ २७ (उपलम्भ) साक्षात्कार काल में चलके पास ३३२ १९८ (उपला) सिटकी, जानेवाली गौ, उठी २ (उपवन)घरके पासका २३ ३२ (उपसूर्यक) परिवेष वन, सूर्यफा मण्डल ९ (उपवर्तन) देश, नगर २१२ ३५ (उपस्कर) मसाला गाँव, धुगार १५६ १३८ (उपवर्ह) तकिआ १४३ ७५ (उपस्थ) लिंग, भग १६९ ४१ (उपवस्त) उपवास १६८ ३८ (उपस्पर्श) आचमन ४१ (उपवास)व्रत २८ (उपहार) भेट,नजर ९९ (उपविपा) अतीस ३२८ १८२(उपदर) एकान्त, १७३ ५३ (उपवीत) वायकॉधेका समीप जनेऊ १८० २३ (उपाशु) एकान्त अमरकोशादर्श। . पृष्ट श्लोक पृष्ठ श्लोक . १७०४४(उपाकरण ) संस्कार | -९६.: : ८८ (उपासंग) तरकस : र पूर्वक चेदका पढ़ना तूणीर : १६६।२७ (उपाकृत) मंत्रसे सं. १९५... ९६.६उपासन) सेवा, तीर स्कारकर करके मारा चलाने का अभ्यास हुआ यज्ञपशु ... केरना १६६ १०.(उपात्यय) क्रमका उ- १६८ :.:३७ (उपासना सेवा ल्लंघन, अतिक्रम,:/२६७ १०२ (उपासित) सेवाकिया ... बेकायदा २७४ १६ (उपादान) लेना, इ २६१० (उपाहित) उल्का, न्द्रियों को विषय से धूमकेत, मिलाया खींचना, माहुआ ४८ २८(उपाधि) कुटुम्ब का ४ . २० (उपेन्द्र) विष्णु, वामन .....: (पालन करनेवाला; . १११ १५७ (उपोदिका)पोयका धर्मकी चिन्ता १६१...', ९ (उपाध्याय) पढ़ाने- ३७ ३७ ९ (उपोद्घात) आगे कहे वाला ., जानेवाले अर्थके उप- १२८ . १४(उपाध्याया) पढ़ाने " । ' कारक अर्थका वर्णन ।' वाली (उदाहरण:::: १२८ १५.(उपाध्यायानी) पढ़ाने २०५. .. ८ (उपकृष्ट) वोकर जोता: { वाले पंडितकी स्त्री: हुआखेत) १२८ : १४ (उपाध्यायी) पढ़ाने ३५१ २९ (उभयद्युम् ) दोनोंदिन - :- :: : ‘वाले पण्डितकी स्त्री- ३५१....२६ (उभयेास) दोनोंदिन २३७ ३१ (उपानह) जूता ३७ (उमा) पार्वती,अलसी १७४३. २० (उपाय) भेद, दण्ड, ३५ (उमापति) शिव : सामादाम १५० १०४ (उरसूत्रिका) नाभि १८.२८ ( उपायन) भेंट, न तिकालम्बी: मोतियों जर) ३८ १४ (उपालम्भ) उरहना ५२.:.८(उरग) साँप: १८६. .५० (उपात्त) लोटनाः | २२१ ७६ (उरण ) भेंडा s की माला अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ " तीवाला पुत्र श्लोक श्लोक १०९ १४६ (उरणाख्य)(क्ष)चकवड़ २१० ३०(उल्मक)लकेठी २२१ ७६ (उरभ्र) भेड़ा १३६ ५७ (उल्लाघ) निरोग ३४६ २५३ (उरी) विस्तार, अं. १५४ १२० (उल्लोच) चन्दवा चाँ- गीकार दनी २६८ १०८ (उररीकृत) अंगीकार ५५ ६ (उल्लोल)बड़ा हिल- कियाहुआ कोरा, लहरि ६४ (उरश्छद) कवच १३४ ३८ (उल्ल) ओझरी चर्म १४४ ७ (उरस्) छाती जिससे गर्भधारहताहे ६६ (उरसिल) सुन्दर छा- २६१ ८१ (उल्वण) स्पष्ट, साफ २१ २५ (उशनम् ) शुक्राचार्य १९२ ७६ (उरस्वत)सुन्दर छाती ११३ १६४ (उशीर) खसखस वाला ९८ ६७ (उपणा) वड़ी पीपरि ३४६ २५३ (उरी) विस्तार, अंगी- १२.५५ (उपर्वघ) आगि कार करना २४ २ ( उपस्) प्रातःकाल २५७ ६९ (उस) फैलाहुआ,बड़ा भोर, सवेरा ५१ (उरुस्कारेड़ी ३५० १८ (उपा) रातिका अन्त ५ (उर्वरा) सवअन्नों से ६ २७ (उपापति) अनिरुद्ध २६६ ९९ (उपित) जराहुआ १२ ५३ (उर्वशी) जप्सरा ७५ (उट) ऊँट १११ १५५ ( उर्वारु) कंकरी २३४ १६ (उपए) (क) मीम ३ (उर्वी) पृथ्वी ऋतु, चतर,तेज, गरम ७९ ९(उलप)घड़ीयोंडी २२ २९ (उपयरश्मि ) सूर्य ५८ १८(उलूपिन)सूस,शिशु-/- २८ १९ (उपणागम) ग्रीष्मऋतु १०(उपिएका) लपसी, ११८ १५(उलक) उल्लू गीलाभात २०९ २५ (उलूखल) कॉड़ी, ३३७ २१९ (उपणीप)पगड़ी,मुकुट ओखरी २८ १९ (उपोपगम)ग्रीम- ३४ (उलूखलक) गुग्गुल 38 ८(उल्का)तजविशेप,लूक २८ १६ (उपण) गरमी युक्त पृथ्वी मार १२ अमरकोशादर्श। पृष्ठ श्लोक श्लोक २३ ३३ (उस)किरण, बैल ५५ ५ (ऊर्मि) लहरि २१६ ६६ (उसा)गौ (१५१ १०७ (ऊमिका)अंगूठी २१४ ४५ (उख्य.) बटुलोहीमें प. २५६ ७१ (ऊर्मिमत्) टेढ़ा काया अन्न ५ (ऊप) खारीमही, लो. २६७ १०१ (उत)वीना वस्त्र नानि मट्टी २२० ७३ (ऊधस् ) आयन, थन २१२ ३६ (ऊपण) कालीमिर्च ३१४ -१२७ (ऊन) हीन, कम ६ (ऊपर)असर ३५० १८(ऊम् ) प्रश्न, पूछना ६ (ऊपरत्) ऊसर २०३ १(ऊरय) वैश्य, वनियां| २८ १८ (ऊप्मक) ग्रीष्मकातु ३४६ २५३ (ऊरी) अंगीकार करना २८ १६ (उष्मागम) घाम २६८ १०८ (ऊरीकृत) विस्तार ३(उह)तर्क, विचार,क- १४३ ७३ (ऊरु) निरोह,जांघ ल्पनाविशेष २०३ १(ऊरुज)वैश्य, नियां (ऋ) १४५ ७२ (उरूपवन ) फीली २२५ ९० (ऋक्थ) धन २८ १८ (ऊर्ज) कार्तिक २१ २१ (क्ष) सरिवन नक्षत्र, १६२ ७५ (ऊर्जस्वल) अतिशय ऋन चलवाला १०० ११० (ऋक्षगंधा) विधारा १६२ ७२ (ऊर्जस्विन) अतिशय १०० ११० (ऋक्षगंधिका) सीता- बलवाला फल, उजला कुम्हड़ा ११७ १४ (ऊर्णनाभ) मकरी ३६ ३ (ऋच) ऋग्वेद २६५ ४६ (ऊ) भेड़ों के रोम, १९५ ५(ऋच्छ) भालू ऊन, भौंहों का वीच २११ ३२ (ऋजीप) तावा,फराही २२१ ७६ (ऊर्णायु) भेडा, भेंडा २५६ ७२ (ऋजु) सीधा के ऊनका कम्बल १०(ऋजरोहित) इन्द्रध- ४२ ५ (ऊर्द्धक)मृदंगविशेष नप ४७ (ऊर्द्धजानु) ऊँचीजां- २०४ ३(ऋण ऋण, उधार,कर्ज घवाला २२ (ऋत) खेत कटजाने १३६ १७ (उर्द्धनु) ऊँची- जॉघ वाला परजो अन्न पड़ारहता है,सत्य,सच .

पृष्ठ १६२ ११ (एकगुरु) एकहीग:/११ अमरकोशादर्शी श्लोक दलोक २७८ ३२ (ऋतीया) घिनाना, से पढ़नेवाले करुणा २६१ ७९ (एकतान)एकाग्रचित्त २(ऋतु) दो महीना ४२ ३ (एकताल) वरावर वसन्तादि, स्त्री का, मिलाहुआरवर मासिकरक ९ ३९ (एकदन्त) गणेश २१ (ऋतुमती) रजस्वला ३५२ २२ (एकदा) एकसमय ૨૭ ३ (ऋते) विना, नही, ११९ २२ (एकदृष्टि) कउआ धनदेकर यजमान से २१९ ६५ (एकधुर) एकधुरका वर्ण कियागया वहनेवाला १९ (ऋत्विक यज्ञ कराने २१९ ६५ (एकधुरावह) एकभार वालापुरुप वाला, एकधुरका व. २३ (ऋद्ध) कुनाव भू- हनेवाला साका २१९ ६५ (एकधुरीण) एकभार १०१ ११२ (ऋद्धि) दवाविशेष बाला, एकधुर का व. ૨ ८(ऋभु) देवता हनेवाला २० ४५ (मुक्षिन) इन्द्र १६ (एकपदी) गली, ११७. ११ (भृश्य)हरिण विशेष मार्ग ४१ २(ऋपभ) स्वरविशेप, १५ ७० (एकपिंग) कुबेर गौकी आवाज, का- १५१ १०६ (एकयष्टिका) एकलर- कड़ासिंगी, बैल,श्रेष्ठ कीमाला ४३ (ऋषि) वेद, वशिष्ठादि २६१ ८० (एकसर्ग) एकाम- मुनि, किरण, सत्य- चित्त चोलनेवाला २१२ ६८ (एकहायनी) एकवर्ष ८७ (ऋष्यभोक्ता) क्यवाँच की बलिया ०६१ ८२ (एकाकिन् ) अकेला, २६२ ८२ (एक) अफेला,मुग्य, जिसका कोई सहाय- अन्य कन हो २६२ ८२(एकक) अकेला ७२ (एकाग्र)स्वस्थचित्त एकाग्रचित्त अमरकोशादर्श। श्लाफ पृष्ठ २६० न्दण, रासनि - कीमाला ६४ पृष्ठ श्पोक ८० (एकाग्य) एकाग्र २७२ १० (एधा) विधान चित्त ७६ (एधित) बढ़ाहुआ ६८ (एकान्त) वारंवार, २९ २३ (एनस्) पाप अतिशय ५१ (एरण्ड) रेडी ६८ (एकान्दा) एकवर्ष १०४ १.५ (एला) इलायची की वछिया १०७ १४० (एलापी) कोलि- २६१ ७६ (एकायन) एकाग्र चित्त १०३ १२१ (एलावालुक) मूसघर, ८० (एकायनगत)एकाग्र- एलुआ चित्त ३४५ २४६ (एवम् ) इसप्रकार, १५१ १०६ (एकावली) एकलर एसा, विकल्प,अंगी. कार,अनुमति, फिर, ८१ (एकप्ठील) गूमा निश्चय ८५ (एकाठीला) पाठा, २३७ ३२ (एपणिका) सोना पहारमूल तौलने का कांटा २२१ ७६ (एडक) भेंडा (ए) १०६ १४७ (एडगज) चकवेड २३५ २४ (ऐकागारिक) चोर २५१ ३८ (एडमूक) बहिरा,गूंगा| १ १८ (ऐड्गद) पॉखी का ४ (एडूक) जिसमें मज- बूती के लिये काठ १३६ ४८ (ऐड) वहिरा पत्थरआदि धरदिये ११६ ९ (ऐण) हरिणका च. जाते हैं वह दीवार मड़ाआदि ११ (एण) हरिण ९(ऐणेय) हरिणका १७ (एत) चितक्वरारंग चमड़ाआदि ३५२ २३ (पतर्हि) अब, इस १६२ १४ (ऐतिह्य) परंपरा से काल आया उपदेश ७९ १३ (एध) इन्धन ७९ (ऐन्द्रियक) प्रत्यच, ७९ १० (एचस्) इन्धन,ल. जो नेत्रसे दिखाईपड़े पड़ी १० १७ (ऐरावण) इन्द्रका हाथी . .

अमरकोशादर्श। ४५ .पृष्ठ आसौं; इससाल - श्लोक पृष्ठ श्रोक ४७ (ऐरावत)इन्द्रका हाथी (ो)- पूर्वदिशा का दिग्गज, २१७ ६० (औक्षक) बैलों का नारगी समूह १८ ९ (ऐरावती) बिजुली ३६६ ३९ ( औचिती) यथायो. ७० (ऐलविल) कुबेर ग्यता १०३ १२१ (ऐलेय) मूसघर, ए- २६६ ३६ (औचित्यं) यथायो- लुआवृक्ष . ग्यता ३७ (ऐश्वर्य) सिद्धि, २० २० (औत्तानपादि) ध्रुव ऐश्वर्या २८(आदनिक) रसोईदार ३५१ २० (ऐपम) वर्तमान वर्ष, २१ (औदरिक) भूख से पीड़ित, मरभुखा । (ो) २८० ४० (औपगवक) उपगुके ३४६ १२ (ओम) अंगीकार पुत्रोंका समूह करने में २४ (औपयिक) न्यायसे ३४० २३२ (ओक) घर, आश्रय युक्त ३४० २३२ (ओकस्) घर,आश्रय १६६ ४१ (औपवस्त) उपवास ४३ ९ (ओघ) शीघ्रहोने २२१ २२७ ७७ (औरभ्रक ) भेड़ों की वाला नाच, समूह, समूह जलकावेग १३२ २८ (औरस )अपनासे स- ४(ओकार) ओंकार वर्ण स्त्री में उत्पन्न पुत्र ३४० २३२ (ओजस्)यल,प्रकाश | १३२ २८ ( औरस्ये ) अपनासे ६३ ७६ (ओड़पुष्प) गुड़हर, सवर्णा स्त्री में उत्पन्न ओढ़उल ७(ओतु) विलार १६७ ३२ (और्द्धदैहिक) जिस ४८ (ओदन) भात में उर्द,सहद,मसुरीन २७२ है (ओप) जराना खाई 'जाय उसका वा १०६ १३५ (ओपधी) दवा, अन्न चान्द्रायणादि व्रत का १४ (ओपधीश) चन्द्रमा नाम, मरेहुयेके निमित्त १४७ ९०(ओष्ठ) ओठ, होठ १० दिनके बीच में जो M पुत्र अमरकोशार्श। पृष्ठ वस्त्र, वरेत ७८ ७८ श्लोक पृष्ठ श्लोक दानपिण्डादिक दिया १५६ १३१ (ककोलक)कवावचीनी जाय १४४ ७९ (कक्ष) कांख, खरुवादी १३ ५७ (और्ब) बड़वानल . १८४ ४२ (कच्या हाथीपर गद्दी ७ (औलुक्य) वैशेषिक आदि कसनेकी रस्सी, शास्त्र जाननेवाला हादि के अन्तर्गह, ३२९ १८५ (औशीर) चāरकी, शय्या, आसन, खस | ११८ १७ (कंक) उजली चील्ह की टट्टी १९० ६४ (कंकटक) कवच १०६ १३५ (ओपध) दवा, इलाज | १५१ १०८ (कंकण) ककना ६(औपधि) अन्न १५९ १४० (कंकतिका) ककही, ६ (औपधी)धी तेलादि कंघी सब वस्तु.अन्न १४२ ६९ (कंकाल) शरीर के २२१ ७७ (औष्ट्रक) ऊँटोंका हाड़ोंका पिंजरा समूह २०८ २० (कंगु) काँकुनि .(क) १४८ ९५(कच) बाल ३४५ २४९ (क) शिर,जल |२५५ ५५ ( कचर) मेलीवस्त २११ ३२ (कंस) पानी आदि ३४९ १४ (कचित्) अभीष्टवस्तु पीनेकावर्तन, कटोरा, का पूछना आवखोरा, ११ (कच्छ) नदी आदि के २१ (कंसाराति ) कृष्ण किनारेका देश, तुनि प- २८२. ५ (क) ब्रह्मा, सूर्य, वायु हिरना,वस्त्रका किनारा पानी,शिर ५९ २१ (कन्छप) कलुआ ३०५ ९१ (ककुद)प्रधानता,राज- ३१५ १३१ (कच्छपी) कछुई, सर. चिह्न,घेल का कन्धा सती की वीणा १४३ ७४ (ककुमती स्त्रियोंकी १३९ ५८ ( कन्लर) खाजुरोगी करिहांव ६६ ९२ (कन्तुरा) यवासा १३८ ५३ (कच्छ) खानु ५२ ६ (कंचुक) पखतर, के- तोयी, अर्जुनवृक्ष चुलि। - १ (ककुम्) दिशा ७(ककुभ) वीणाकी अमरकोशादर्श। ४७ पृष्ठ १७६ १४३ सूक्ष्म, वारीक श्लोक पृष्ट श्लोक ८(कंचकिन्) राजा वा ९५ ७९ (कठिञ्जर) ववई,पर्णास राजाकी स्त्रियों के पास २६० ७६ (कठिन ) कठिन रहनेवाला वृद्ध पुरुष १११ १५४ (कठिल्लक) करेला ७४ (कट) करिहॉव,हाथी २६० ७६ (कठोर) कठिन का गाल,चटाई,मुर्दा. २०६ २२ (कडंगर) भूसा समय २१२ ३५ (कडम्ब) शाककीडांडी ५ ( कटक) पर्वत, हाथ | ३४ १६ (कडार) पीलारंग में पहिरने का कड़ा, | २५७ ६२ (कण ) बहुत छोटा, चक्र, नितम्ब अन्न का भाग, कना १५० (कटभी) मालकांगणी ८५ (कटंवरा) कुटकी ६६ (कणा) बड़ी पीपरि, ८५ (कटम्भरा)चांदवेलि, कालाजीरा २ कुटकी ३५४ ८(कणिका) अरणी, प- ६४ (कटाक्ष) आंखिकेकोने रमाणु से देखना, तिरछीन-२०८ २१ (कणिश) बाली जर से देखना २५७ ६२ (कणीयस्) बहुतथोड़ा १६ (कटाह)कराही,कराह | २८५ १(कण्टक) सुईकीनोक, ७४ (कटि) करिहांव छोटा शत्रु,रोमांच ७५ (कटिमोथ)फूल, स्त्रियों ९७ ९३ ( कण्टकारिका) भट- के नितम्ब का पार्व- कटैया भाग ६० ६१ (कएटकिफला)कटहर ३८ (क्टी) करिहॉव,कमर १४६ ८८ (कण्ठ) गला ९(कटु )कुटकी, करू, १५० १०४ (कण्ठभूपा)कण्ठा,कंठी 1 • अकार्य, अभिमान, ११४ १ (कण्ठीरव ) सिंह तेज, पैन १३८ ५३ (कण्डू) खजुआना १५६ (कटतुम्बी)करुईलौकी १३८ ५३ (करड्या) खजुआना ८५ (कटुरोहिणी) कुटकी ६५ ८६ (कराडूरा) क्यवॉच ४० (कटफल) कायफर २१० १६ (कण्डोल) ज्यलवा, ५६ (कदंग) सरिवन छॉटा १४३ १४३ ३६६ ३३ ९५ अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ का तिल । . श्लोक श्लोक २३७ ३२(कण्डोलवीणा) किं- गिरी, नीच वीणा १३५ ४३ (कनीयस् ) आत ज. ११३ १६६ (कनृण) रोहिप जवान, छोटाभाई ६ (कथा) कथा, कहानी ३५५ । ६ ( कन्या) दूसरा घि- ६६ । १७ (कदध्वन्) कुराह,ख- छोना,मिट्टीकी भीति, रावगली कथरी ४१ ( कदम्बक)समूह,म- १११ १५७ (कन्द) सूरन, जर, रसों जमीकन्द ५ ४२ (कदम्ब) कदमवृक्ष ७६ ६ (कन्दर) गुफा २५४ ४८ (कदर्य)कृपण,कंजूस ८३ २६ (कराल)गेंठी,पहाड़ी, १०१ ११३ (कदली)केरा,हरिण- पील अखरोट विशेष २५ (कन्दर्प) कामदेव ३४७ ४ (कदाचित्)किसीकाल १९६ १० (कन्दली)हरिणविशेष में, कभी |१५९ १३९ (कन्दुक) गेंद, गोंद २४ ३५(कदुप्ण) थोड़ागरम २१० ३० (कन्दु) भट्ठी, भार १६ (कद्) पीलारंग ८८ (कंधरा) गला, गटई २५१ ३७ (कदद) चुरे वचन १३१ २४ (कन्यकाजात) विना बोलनेवाला २२६ ९४ (कनक) धत्तूरा, सुवर्ण १२६ ८(कन्या) कन्या ७ (कनकाध्यक्ष) सुवर्ण ४८ ३० (कपट) छल का अधिकारी, ख ३६ (कपर्द) शिवकी जटा जाची ३३ (कपर्दिन) शिव १८२ ३२ (कनकालुका) झारी, ७३ १७ (कपाट) केवांड गेडुआ ६८ (कपाल) शिरकी खो- ३ ७७.(कनकाय) धत्तूर पड़ी ४३ (कनिष्ठ) छोटाभाई, ३३ (कपालभृत) शिव अतिजवान,वाल,छोटा ११५ ४ (कपि) वानर १४५ ८२ (कनिष्ठा) छगुरिआ| ९५ ८७ (कपिकच्छ) क्याच ६२ (कनीनिका)ऑखि। ८१ २१ (कपित्थ) कथा १२६ व्याही कन्याका पुत्र ८ ९४२ अमरकोशादर्श। १ ९ रलाक wr . यार, ग्रीवा श्लोक २४ १६ (कपिल) पीलारंग, २७ (कमला)लक्ष्मी मुनिविशेप १७ (कमलासन) ब्रह्मा ४ (कपिला) पुण्डरीक २२८ १०६ (कमलोत्तर) कुसुम नाम दिग्गजकी स्त्री. २४७ २३ (कमितृ) कामी सीसम, गगनधरि ३८ (कम्प) कॉपना ६७ (कपिघल्ली) गजपीपरि २६० ७४ (कम्पन)कांपनेवाला १६ (कपिश) वानरके स. २६० ७४ (कम्प) कॉपनेवाला मान रंग, १५३ ११६ (कम्बल)कम्बल, ओ- २७ (कपीतन) आमला, ढनेकावस्त्र, दुशाला,डु गेंठा, सिरमा पहा आदि, गलकमरी १५ (कपोत) कबूतर २११ ३४ (कम्मि) कर्छलि १५ (कपोतपालिका) क्वू- ५९ २३ (कम्यु) शंख, खगौरा, तरों के रहनेका स्थान ककनादि, हाथी, सि. १०। १२६ (कपोतांघ्रि) बड़ी अ- रणी औषध 4 (कम्युग्रीवा) तीन रेखा १४१ ९० (कपोल) गाल जिस काठमें हो वह, क. ६२ (कफ) कफ ण्ठ,गला ६० (कफिन) कफवाला २४७ २४ (कम्र)कामी ८० (कफोणिहाथके मध्य ३२३ १६३(कर) राजकर, पोत, की गांठ वडाअन्धकार, अंधेरा, ४ (कवन्ध )जल, विना ६० (करक) अनार, करवा शिरका हुआ शरीर बरसा हुआ पाथर २१ (कमठ) कछुआ १६ १२ (करका) पत्थल, ओला २१ (कमठी) कछुई वड़नखी १७१ ४९ (कमण्डल)कमण्डल, ७ ४७ (करज)कंजा यतियों का लोटा ४७ (करंजक) कंजा २४७ २४ (कमन) कामी २१ (कस्ट) कोआ, हाथीका ३ (कमल)जल,कमल, गाल,कुसुम्मानिन्धजी. हरिण व ग्यारहे दिनका श्राद्ध ८७ ११६ ५० अमरकोशादर्शी पृष्ठ पृष्ठ ८७ श्लोक श्लोक २३७ २(करण) शूद्रा स्त्री में ९८ ९७ ( करिपिप्पली ) गज- वैश्य से उत्पन्न पुत्र, पीपरि जिससे क्रिया की जाय, १८३ ३५(करिशावक) हाथीका कारण,खेत,देह,इंद्रिय बच्चा ३५८ १८ (करण्ड) बटारी ६३ ७७ (करीर)करौल का वृक्ष, ३३ (करतोया)जिसमें सदा बांसका अँखुवा, घड़ा जल रहै, नदी विशेष २१५ '५१ (करीप)उपरी, कंडी ५० (करद)सफ़ेद खेर ४५, १८ (करुणा) दया २३८ ३५ (करपत्र )आरा २० (कर्करेट के डिला पक्षी १९६ ८१ (करपालिका) खाँडा ११९ २० (करेटु ) केडिलापक्षी १४५ ८१ (करभ) मणिवन्ध से २९५ ५२ ( करेणु) हथिनी छगुनियांतकका मध्य १४२ ६९ (करोटि) खोपरी भाग, ऊंट का बच्चा १६ (कर्क) उजलाघोड़ा १५१ १०८ (करभूषण) ककना ५९ २१ (कर्कटक) गेंगटा ६१ ६७(करमर्दक) करवंदा १११ १५५ (कर्कटी) ककरी ४८ (करम्भ) दही से साना ८१ ३६ (कर्कन्धु) वेरकेफल सत्तू २११ ३१ (कर्करी)करवा, गेडुआ, १४५ ८३ (कररह) नह, नत्र १०९ १४६ (कर्कश) कवीला सा- ७७ (करवीर) कनेर हसी, कठिन,रूखा १४५ ८२ (करशाखा) अंगुली १११ १५.” (कर्कतरु) कुम्हड़ा १८३ ३७ (करशीकर) हाथीकी १११ १५४ (कचूर) कचूर सँड़ से निकला जल १०६ १३५ ( कनूरक) कचूर ६४ ४३ (करहाट) कमलकी १४८ ६४ (क) कान जड़ १४ (कर्णजलौका) खन- ६८ ५३ (करहाटक) मयनफर खजूर ३३३ २०४ ( कराल) ऊँचे दाँतों। ५७ १२ (कर्णधार) मल्लाह वाला ऊँचा, भयानक ! १५० १०३ (कर्णवेष्टन) कुण्डल १८३ ३६ (करिणी) हथिनी ६६ (कर्णिका)अरणी,हाथी : १८२ ३४ (करिन ) हाथी कीड, २१५ દર फमल का वीच अमरकोशादर्श। पृष्ठ छ मांक श्लोक ६० (कर्णिकार) कठचम्पा २७० ३ (कर्मशूर)उत्तमकर्मी ५२ (कीरथ) जनानीगाड़ी १७५ ५(कर्मसचिव) करने २५३ १७ (कर्णजप)चुगुल,जा- वाला मुसाहिब सृस ११२ १६० (कार) वास. २३८ ३४ (कर्तरी) कतरनी ८(कर्मेन्द्रिय) हाथ पर ९ (कर्दम )बोदा,कीचड़ इत्यादि १५३ ११५ (कार्पट) फटकपड़ा ! २२४ ८६ (कर्प) १६ मासा २१२ ६८ (कपर) खोपरीका २०४ ६ (कर्षक) किसान खपटा ८९ ५९ (कर्पफुल)यदेड़ा,पासा, २२७ १०१ (कर्परी) रसात पहिया ३६५ ३५ (कपास) रुई, वन ३३० २११ (क)जीविका, क- १५६ ३१ (कर्पूर ) कपूर रसीकी आगि, छोटी १३ ६१ (कवुर) राक्षस,चित, नदी, व्यवहार, कलि- कचरारंग, सुवर्ण द्रुम,बहस १५ (कर्मकर) दास मॅजूर ४१ २ (कल) मधुरस्वर १९ (कर्मकार) धिना त. २५ (कलकल) हल्ला नस्वाहके कार्य करने २७. १७ (कलंक) कलंक, वाला अपवाद २४६ १८ (कर्मक्षम) कार्य ३२७ १७८ (कलत्र) स्त्री की क- करने में समर्थ रिहांव, स्त्री २४६ १८ (कर्मठ) कर्म समाप्त २२६ ६६ (कलधौत)सोना, चांदी करनेवाला ३५ (कलम ) हाथीका बचा २३६ ३८ (कर्मण्या) मंजूरी, १९५ ८७ (कलम्ब) शाकफा तनख्वाह डड़का,तीर, घाण १७० ४५ (कर्मन्दिन )सन्यासी ११९ १५७ (कलम्बी) केरमुआका २४६ १८ (कर्मवृत्त)कर्म समाप्त करनेवाला २०६ २४ (कलम)धान २४६. १ (कर्मशील) सदाकर्म ११८ १५ ( कलरव ) कबूतर करनेवाला १३४ ३८ (कलल) गर्भाधान के साग .

५२ अमरकोशादर्श। पृष्ठ ८ (कलाद) सोनार पृष्ठ श्लोक श्लोक चाद एकरात्रि में वीर्य १४२ ७० (कलेवर) देह और रज मिलकर जो २८४ १४ (कल्क)गृह,पाप,खरी वनता हाथी का दांत, हरी ११८ १६ (कलविंक) गौरैया २६ २२ (कल्प)न्याय, इन्साफ २११ ३१ (कलश) घड़ा विधि,वियोगशास्र रो. ६७ ६३ (कलशि) पिथवनि गरहित, सज्ज तय्यार १२० २३ (कलहंस)बतक सामग्री १६६ १०४ (कलह) समर,झगड़ा १८४ ४२ ( कल्पना) हाथी का १६ १५ (कला)सोलहवांभाग, सजाना ५४० निमिप, शिल्प, ११ ५१ (कल्पवृक्ष ) कल्पवृक्ष कारीगरी २२ (कल्पान्त) प्रलय ૨૨૨ २९ २३ (कल्मप) पाप , १९ १ (कलानिधि) चन्द्रमा ३५ १७ (कल्माप) चितकबरा ३१४ १२८ (कलाप) गहना मोर-२४ २ (कल्य) प्रातःकाल,सु. पंख, तरकस, समूह, वह,सजातेयार, निरोग काञ्ची,स्त्रीकी कमरका ३९ १८ (कल्या)शुभवाक्य भूपण २९ २५ (कल्याण) शुभ,मङ्गल २०७ १६ (कलाय) मटर ६ (कल्लोल)लहरि, हि- १९९ १०५ (कलि)संग्राम,चौथा लकोरा युग २९० ६४ (कवच) बखतर १६ (कलिका) कली १०७ १३६ (कवरी) ववई, गुह- ६७ (कलिंग)भजैटापक्षी, वाल, हींगवृचकीपत्ती इन्द्रयव, कुरैया ५४ ( कचल ) कवर,ग्रास ८९ ५६ (कलिङ्कम) बहेडा २१ २५ (कवि)शुक्र,पण्डित ४८ (कलिमारक) कटीला १८६ ४६ (कविका)लगाम कंजा ३६४ ३५ ( कविय) तोवड़ा २६२ ८५ (कलिल) दुःखसेप्रात २४ ३५ (कवोपण) थोड़ागरम १६५ २६ (कव्य)पितरोंका अन्न २३ (कलप) पाप. गन्दा २३७ ३१ (कशा)जेरचन्द,चाबुक , ८० १ . होने के योग्य अमरकोशादर्श। ५३ पृष्ठ २५२ बारीक आवाज़ ६० श्लोक श्लोक ४४ (कशहि) चावुक त ४१ २(काकली) महीनस्वर मारनेके योग्य ३१४ १३० (कशिपु) अन्न वस्त्र १०२ ११८ ( काकाही) कोआ ३५६ १३ (कशेरु) कसेरु ठोठी १४२ ६६ (कशेरुका)रीर ३५४ है (काकिणी) कौड़ी ६०० १०६ (कश्मल)मूर्छा घद- ३८ १२ (काकु ) शोच, भय हवाशी आदि से धुनिका वि- १८६ ४७ (कश्य)मदिरा,दारू, कार,स्वरभेद चाबुक मारनेके योग्य, १४७ ६१ (काकुद) नारू घोड़ा का मध्यभाग ८५ ३६ (काकेन्दु) कुचिला २३७ ३२(कप) कसोटी ६०(काकोदुम्बरिका)क- ६ (कपाय)काढ़ा,कसैला, ट्रॅवरि विलेपन ५२ ७(काकोदर) सांप ५४ ४ (कप्ट) दुःख,गहन,दुः| ५३ १० ( काकोल) हलाहल गमस्थान विष, धमिला कौआ १५६ १३० (कस्तूरी) कस्तूरी १०५ १३० (काक्षी) अरहर ३६ (कहार) कुई, या उ- २२७ ६६ (काच ) काँच, शिक- जला कमल १२० २३ (क) बकुला ५४ (काचस्थाली) पॉदरि २१ (काक) कौआ | २६३ ८६ (काचित) शिकहरमें ६८ (काकचिञ्ची) घुघुची धराहुआ ८५ ३६ (काकतिन्दुक)कुचिला २२६ १५(काशन) सुवर्ण सोना १०२ ११८ (काकनासिका) कौआ ? ६५ (काबनाह्वय)नागकेसर ठोठी २१३ ४१ (काश्चनी) हल्दी १४८ ६६ (काकपक्ष) जुलुफ १५१ १०८ (काची) स्त्रियोंकी क- ८५ ३६ (काकपीलक)कुचिला रधनी वगैरः ११० १५१ ( काकमाची) कौआ २१२ ३६ (काञ्जिक) कॉजी हाडी २०८ २२ (काण्ड)नरई,डंडा, तर, १०१ ११३ (काफमदगा) वनमंग खराब,खंड,अवसर,जल हर, नेत्ररोग, ८८ 88 ५४ अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ समूह, सज्जी . श्लोक श्लोफ १६० ६७ (काण्डपृष्ठ) हथियार २१० २८ (कादम्बिक)पुआआदि बांधकर जीविका करने बनानेवाला वाली २१० २८ (कान्दविव)पुआआदि ६६ (काण्डवत ) तीरधारी बनानेवाला केवल घाण बांधनेवाली २५२ ४२ (कान्दिशीक)डराहुआ १९१ ६६ (काण्डीर) तीरधारी | ६९ १७ (कापथ) कुमार्ग केवल बाण बांधनेवाली १६१ . ८ (कापिल)खराबरास्ता ६९ १०४ (काण्डेक्ष)तालमखाना १२४ ४४ ( कापोत) कबूतर का २४८ २६ (कातर)अधीर,व्याकुल ३७ (कात्यायनी)पार्वती, २२७ १०० (कापोताञ्जन) सुरमा आधीढ़ीस्त्री, लाल ५ २५ (काम) कामदेव, म- वस्त्र पहिरनेवाली नोरथ, यथेष्ट १२० २३ (कादम्ब) वत्तक १३ (कामन्) विना इच्छा २३६ १० (कादम्बरी) मदिरा, कीसलाह १९२ ७६ (कामगामिन्) स्वतन्त्र ८ (कादम्बिनी) मेघपंक्ति चलनेवाला । ४ (कावेय) सांप २४७ २४ (कामन) कामी १(कानन) वन ५ २३ (कामपाल) बलदेव २४ (कानीन)कुमारीका पुत्र २३७ २४ (कामयित) कामी २५५ ५१ (कान्त)सुन्दर १२५ ३ (कामिनी) उत्तमस्त्री, ११३ १६३ (कान्तारक) केतारा- बाँदा ऊख. २४७ २३ (कामुक ) कामी १०५ १२८ (कान्तलक ) तुनि १२७ ६ (कामुका) धनादिकी १२५ ३(कान्ता) सुन्दरी स्त्री इच्छावाली १८ (कान्तार) दुर्गम,चोर १२७ ६ (कामुकी) मेथुन की कांदा जिसमें हों वह इच्छाकियेहुई स्त्री १०९ १४६ (काम्पिल्य) कवीला २० १७ (कान्तिोशोभा,झलक, २३२ ८ (काम्बकिक) चरिहा. री, जिसपर वहारहो मार्ग,पड़ावन अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ करके दान ૨૮ ९ श्लोक श्लोक १८७ ५४ (काम्बल) कम्बल का समूह वहार ५ (कारु)थवई,चित्रव- ४५ (काम्बोज) काम्बोज नानेवाला देशका घोड़ा २४५ १५ (कारुणिक) दया- १०७ १३८ (काम्बोजी) मूंग वाला, मेहरबान २७० ३ (काम्यदान) कामना ४५ १८ (कारुण्य) दया | २४० ४३ (कारोत्तर) मदिराका १४२ ७२ (काय) देह, प्रजापनि तीर्थ,अनामिका कनि- २२६ ९५ (कार्तस्वर) सुवर्ण,सोना टाके मूलमें प्रजापति १७८ १४ (कार्तान्तिक) ज्योतिषी तीर्थ होताहै १७ (कार्तिक) कातिक ५४ (कायस्था) हड़ १८ (कार्तिकिक) कातिक ३० २८ (कारण) कारण,सबब ४०(कार्तिकेय) स्वामि- ३ (कारणा)पीड़ा कार्तिक २४३ ७ (कारणिक) परखने १५२ १११ (कार्पास) रुई से बना वाला हुआ कपड़ा १२२ ३५ (कारण्डव )वत्तकपक्षी .१०२ ११६ (काप्पीसी) कपास,रुई १०१ १११ ( कारवी) सौंफ, अज- २४६ १८ ( कार्म ) सदा कार्य मोदा,मोरशिखा,का- करनेवाला राजीर, हींग के वृक्षकी २७० ४ (कार्मण ) उच्चाटन पत्ती १९४ ८३ (काभक) धनुप १११ १५४ (काखेल्ल.) मेरैला २२४ ८८ (कांपए ) रुपया ५६ (कारम्भा) काकुनि २२४ ८८ (कार्पिक) रुपया २०२ ११९ (कारा) वन्दीखाना, ८६ ४४ (कार्य) साल,सांखू जेल १(काल) यमराज,सम. २८५ १५ (कारिका)नरकदण्ड, य, कालारंग विकरण,श्लोक, कार्य १३७ १९ (कालक) जिसके अं. करनेवाली गमें लशुनाकार चिह्न २८१ ४३(कारीप)कण्डियोंका हों, वह पुरुष - अमरकोशादर्श। पृष्ठ ११९ का धनुष काला तिधारा पृष्ठ श्लोक श्लोक २२ (कालकण्ठक) काला ३७ (काली) पार्वती कौआ ९८ १०१ (कालीयक) पीलाच. १०(कालकूट) हलाहल, न्दन विष, जहर ९० १०१ (कालेयक) दारुहल्दी १४१ ६६ (कालखण्ड) करेजा १०६ १३५ (काल्पक) कचूर २०२ ११६ (कालधर्म)मृत्यु,मौत २२० ७० (काल्या) मैथुन के लिये १९४ ८३ (कालपृष्ठ)कर्णराजा चलके पास जाने वाली, उठी गौ ९० (कालमेशिका)मजीठ १९० ६६ (कावचिक ) कवच, ९० (कालमेपिका)मजीठ, धारण करने वालों का समूह ९६ (कालमेपी) बकुची ६२ ३५ (कावेरी)नदी विशेष २१६ ५३ (कालशेय) गोरस, २१ २५(काव्य) शक माठा ११३ १६२ (काश) कास,कसेहरी २ (कालसूत्र) नरक वि-८४ ३५ (काश्मरी) गम्भारी शेष ३६ (काश्मर्य)ग (स) ८५ ३८ (कालस्कन्ध) तेंदुआ, भारी तमाल १०९ १४५ (काश्मीर) पुष्करमूल ९७ ९४ (काला) नील,काला- १५५ १२५ ( काश्मीरजन्मन् ) कुं. त्रिधारा, कालाजीर १५६ १२८ (कालागुरु)कालागुगुर २३ ३२ (काश्यपि )अस्ण १०३ १२२ (कालानुसाN )शिला ६५ २.(काश्यपी) पृथ्वी जीत, पीलाचन्दन ७९ १३ (काप) काठ, लकड़ी २२६ ६८ (कालायस् ) लोहा ५७ १३ (काष्टकुद्दाल) फही २८४ १५ (कालिका) मेघसमृह, २३२ ६ (काप्ठतद) बढ़ाई ५६ ११ (काष्टाम्बवाहिनी) जोगी ३२ (कालिन्दी) यमुना १ (काप्टा)दिशा,निमिप, २४ (कालिन्दीभेदन) चल. घढ़ती, स्थिति देव १०१ ११३ (काप्टीला) केला कुम,केसर देवी अमरकोशादर्श। ३ (फिरि) सुअर पृष्ठ श्लोक श्लोक १३८ ५२ (काम) छींक ३४७ ५(किम) विकल्प ३५८ १९(कासमई) रोगविशे. ३१७ ५(किमत) अतिशय वि- कल्प ११५ ५(कासर) भंसा २५४ ४८ (फिम्पचान)कृपण,सूर २८ (कासार) तालान १६ ७२ (किम्पुरुप)कुधेरके गण ३४५ २५० (किं) पूछना,निन्दा विशेष २०८ २१ (किंशारु) अन्न की ३७ ७६ किंवदन्ती ) अपयश, वाली, सीकर, घाण वदनामी ८३ २९ (किशक) छिउल २३ ३३ (किरण) किरण १७ (किकीदिन)लीलावे. २३४ २० (किरात)म्लेच्छ विशेप, राग, नीलकण्ठ जंगली आदमी २३४ १७ (किकर) दास,टहलू | १०८ १४३ (किराततिक्त)चिरायता १५२ ११० (किंकिणी) घुघरू ८(किचित्) थोड़ा १५० १०२ (किरीट) मकुट २२ (किंचुलुक) केंचुआ ३५ १७(किम्मीर)चितकबरा ४३ (किंजल्क) कमल की धर, फूल की धरि ३४६ २५३ (फिल) वार्ता, सम्भा- ११५ ४ (किटि) सुअर वना १११ १३८ ५३ (फिलास) सेहॅआं। ३५८ १८ (किण) घंटा,घावका , १५० ६२ (फिलामिन) सेहुआँ वाला ८६ (किणिही) लहचिचरा २१० २६ (किलिञ्जक) चटाई ४२ (किएपोमदिरारा चीज २९ २३ (फिलिप ) अपराध, १३ ७७ (कितव)यतरा, जुआरी ११ (किन्नर) कुरेर के गण १८५ १६ (किशोर) यउंड़ा विशेष २८२ ५६ (किकु) हाथ, वीना, ७० (किन्नरेश) कुचेर प्रकोष्ठ ५ (किम् )प्रश्न, निन्द्रा. ८० १४ (किमलय) पर विकल्प १४२ १८(समाद ६५ (किट्ट) काटि चिह २४० पाप, रोग अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ तुच्छ, किसान ला, कील श्लोक श्लोक ११२ १६१ (कीचक) पवन से चा- १४४ ७७ (कुच)स्तन, चूंची जनेवाला वॉस १५७ १३३ (कुचन्दन) लालचंदन ३३६ २१४ (कीनाश) यमराज, २५१ ३७ (कुचर)दोष कहनेवाला १४४ ७७ (कुचान) कुचका अ. ११९ २२ (कीर)सुया ग्रभाग ११ (कीर्ति) यश, कीरति, २१ २५ (कुज) मंगल ५७ (कील)अग्निकी ज्वा- २५९.७१ (कुञ्चित ) टेढ़ा ८(कुंज) हाथीदोत,घना २२१ ७३ (कीलक) टा जङ्गल ३(कीलाल) जल, रक्त १८२ ३४ (कुंजर) हाथी, श्रेष्ठ २५२ ४२ (कीलित) वॉधाहुआ २० (कुंजराशन) पीपर ४ (कीश)वानर २१२ ३९ (कुंजल) कांजी ८९ (कीशपर्णी)लहचि- ७८ ५(कुठ) वृक्ष,घड़ा चिरा २०६ १३ (कुटक) फार ६५ ३(क) पृथ्वी, पाप, नि- ९१ ६६ (कुजज) कुरैया न्दा, थोड़ा ८२ ५७ (फुटन्नट)मोथा,सरिवन १३७ ४८ (कुकर)रोगादि से ख- २५९ ७१ (कटिल) टेढ़ा राव हाथवाला ६ (कुटी) साधुकी सभा, १४३ ७५ ( कुकुन्दर) नितम्ब के मन्दिर दाग २४४ ११ (कुटम्वव्यापृत)कुटुम्ब ३३३ २०२ (कुकूल)कीलोंसे भरा का पालन करनेवाला गड़हा,भूसीकी आगि १२६ ६ (कुटुम्बिनी) पतिपुत्र १७ (कुछट) मुर्गा १२२ ३६ (कुक्कम) बनमुर्गा १२९ १९ (कुट्टनी) कुटनी १०६ १३२ (कुकर)ककरौंधा, कूकुर ७१ ६ (कट्टिम) वेधीहुईगच ७७ (कुक्षि) पेट ७४ (कुठर) संभा, जिसमें २४७ २१ (कुक्षिम्भरि ) अपना सैलर वांधीजाय ही पेट भरनेवाला,पेट् १९६ ९२ (कुठार) कुल्हरी,फरसा १५५ १२४ (कुंकुम) कुंकुम ९४ ७६ (कुठेरक)बबई, पर्णास युत स्त्री अमरकोशादर्श। ५६ पृष्ठ पृष्ठ . . विकारहो श्लोक श्लोक २२५ ८९ (कुड़व) पावभर ८१ २२. (कुद्दाल) कचनार १६ (कुहमल)कली २२९ १०८ (कुनटी) नेपाली मैन- ३५७ १७ (कुडङ्गक)वृक्ष,वौंड़ी शिल से घिरास्थान ९६ ९१ (कुनाशक) यवासा ४ (कुड्य) भीति १६७ ६३ (कुन्त) वरछी,भाला २०२ ११८ (कुणप) मुर्दा १४८ ९५ (कुन्तल) चार, वाल १०५ १२८ (कुणि) तुनि, रोगसे ९२ ७३ (कुन्द ) कुन्दफूल, प- जिसके हाथ में कुछ लांकी, विष्णु १०३ १२१ (कुन्दुरु) पलांकी २४६ १७ (कुण्ठ)आलसी,सुस्त १०४ १२४ (कुन्दुरुकी) सालक्ष १३३ ३६. (कुण्ड) वटलोही,पति २५५ ५५ (कुप्य) निन्दित, ख- के जीते दूसरे पुरुषरे. राव उपन्न पुत्र २२५ ९१ (कुप्य) सोने,चांदी से १५० १०३ (कुण्डल)कुण्डल,कान भिन्न द्रव्य तांवा आदि मेंपहिरनेका आभूषण १३८ ४८ (कुज) कुवरा २ .७ (कुण्डलिन् ) सांप १५ ६६ (कुवेर) कुवेर उत्तर १७१ ४९ (कुण्डी) कमण्डलु, दिशाका स्वामी यतियों का लोटा |१०५ १२७ (कुवेरक) तुनिका वृक्ष १६७ ३३ (कुतप) दिन का आ-८८ ५५ (कुराक्षी) पांढरि ठयां भाग,मृगके रोम ९ ४१ (कुमार) स्वामिका- से बना हुआ वस्त्र ३१ (कुतुक) कौतुक ८२ २५ (कुमारक ) वारुण २११ ३३ (कुतुप) कुप्पी ६२ ७३ ( कुमारी) घीकुमारि, २११ ३३ (कुत) कुप्पा कन्या ३१ (कुतूहल) कौतुक ३ (कमुद) उजलाकमल, १३ (कुत्सा) निन्दा नेऋत्य दिशामा दि. ५४ (कुत्सित) निन्दित, १९ १३ (कुमुदवान्धर) चन्द्रमा ११३ १६६ (कुय) झूल, कुश ४० (कुमुदिका) कायफर तिक राजपुत्र १७ ग्गज २५५ खराय ० अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ प्रक श्लोक ६३ ३९ (कुमुदिनी)कोकावेली| ११२ १५९ (कुरुविन्द) मोथा ३८ (कुमुदती) कोकावेली २२४ ८६ (कुरुविस्त ) सुवर्ण का १० (कुमुदत) बहुतकमुद वाला देश १२४ ४२ (कुल) सजातीय ज. १६४ २० (कुम्बा) यज्ञको अन्त्य- न्तुका समूह,वंश, गोत्र ज, चाण्डाल, वगेरःन ८५ ३९ (कुलक) काला तेन्दु- देखें.इसवास्ते जोटही आ, कुचिला, परवर, लगाई जाती है कुलश्रेध, शिल्पियों के ३४ (कुम्म) गुग्गुल, हाथी कुलका प्रधान के शिरकी मांसपिंडी १२७ १० (कुलटा) छिनारि, व्य- घडा,वेश्याचाज,राशि भिचारिणी भेद,कुम्भकरणकापुत्र २२७ १०२ (कुलत्थिक ) कालासु- ६ (कुम्भकार) कुम्हार, रमा २० (कुम्भसम्भव) अगस्त्य | १२६ ७ (कुलपालिका) कुल ३८ (कम्भिका) जलकुम्भी वती स्त्री ४ (कम्भिनी) पृथ्वी ६ (कुलश्रेप्छिन् कारीगरों ८५ ४० (कुम्भी) कायफर के कुलका प्रधान २१ (कुम्भीर) नाक शेष - १६० (कुलसम्भव) कुलीन लाक ७(कुलस्त्री) कुलवतीस्त्री ९ (कुरङ्ग) हरिण अच्छे खानदान की ७५ (कुरण्टक) पीली कट- औरत सरेआ १२३ ३८(कुलाय)घोसला, झोझ २३ (कुरर)कुररी,कणाकुलि, २३१ ६ (कुलाल) कुम्हार ६३ ७८ ( कुखक ) लालझट, २२७ १०२ (कुलाली)कालासुरमा सरैया ४८ (कुलिश) इन्द्रकावज ९३ ७४ (कुरुएटक) पीलीकट, ९७ ९४ (कुली) भटकटैया सरैया ३ (कुलीन) सज्जन ७४ (कुरुपक) लालकट, ५९ २१ (कुलीर) गेंगटा सरया २०८ १८ (कल्माप) कुरथी २३२ ११६ अमरकोशादर्श। - . नदी, नहर रामजीका पुत्र पृष्ठ श्लोक पृष्ट श्लोक २१२ ३९ (कुल्मापाभिपुत)कांजी जोबनताहै वह आंजन १४२ ६८ (कुल्य) हाड़, हड्डी ६, २६ (कुसुमेपु) कामदेव ३४ (कुल्या) बनाई छोटी २२८ १०६ (कुसुम्भ) वरैका फूल, कुसुम, करवा ८४ ३६ (कुवल) वेरके फल २९२ ४० (कुमूल) पेटमें अन्नरह- ६३. ३६ (कुवलय)कमल विशेष नेका स्थान २५१ ३७ (कुवाद) दोप' कहने ४८ ३० (कुसृति)शठता, कपट वाला २१२ ३८ (कुस्तुम्बुरु) धनियां २३१ . ६(कविन्द)ज्वलाहा,कोरी १७३ ५६ (कुहना) धनादिके लो. १६ (कुवेणी) मछली धरने भसे मिथ्यावात चना- का वरतन ना अथवा मिथ्या आ. ११३ १६६ (कुश) कुश,पानी, श्री चार करना अथवा अ. धर्मका आश्रयणकरना २६ (कुशल) निपुण,कल्या- ५१ १ (कुहर) विल ण,पूर्णता,कुशल,पुण्य २६ ६ (कुहू) जिसमें चन्द्र- सिखायाहुआ माकी कला न दीसपड़े २२७ ९९ (कुशी)लोहेकाविकार, वह अमावास्या फार २४५ १४ (कूकुद) सत्कारपूर्वक २३३ १२ (कुशीलव) कथक अलंकारयुक्त कन्याका ६३ : ४० (कुशेशय) कमल दान करनेवाला १०४ १२६ (कुप्ठ) कोढ़ी,कूट,श्वे. ७५ ४ (कूट) पर्वतका शिखर माया, निश्चल, यन्त्र, २०४ ४ (कुसीद) व्याज कपट, झूठी, राशि, अ. २०४ ५ (कुसीदक) व्याज पर ऋण देनेवाला, सूद खानेवाला २३६ २६ (कटयंत्र) फन्दा, पनी १७ (कुसुम) फूल २२७ १०३ (कुसुमाञ्जन) पीतल त-८७ ४७ (कूटशाल्मलि) काला पाकर उसपर घिसनेसे सेमर .२९ तकुष्ठ, छंजन , योधन (हथौड़ा) हलका अगिला भाग (कुट) फंसानेका साधन अमरकोशादर्श। . रात्रि उपवास करना पृष्ठ लोक श्लोक २६० ७३ (कूटस्थ) एकरूप ब. १४६ ८८ (कृकाटिका) घाँटी हुत कालतक स्थिर र- ५४ ४ (कृच्छ)क्लेश, दुःख,गो- हनेवाला मूत्र, गोबर,दुध, दही, २६ (कूप)कुँआं घी,कशोदक, पश्चगव्य ५६ १० (कूपक) सूखी नदी का भक्षण करके एक आदिमें पानी निका- ' लनेकेलिये खोदाहुआ| ३०२ ‘७६ (कृत )सत्ययुग,पूर्ण, गड़हा, चूहा, नाव वां- अलमर्थ धनेका खूटा, नितम्ब २१३ ४२ (कृतक)सांभरिनमक का दो गढ़ा ६८ (कृतुपुंस) अच्छातीरं- १८८ ' ५७ (कूबर ) गाड़ीमें जुआ दाज बांधनेकी लकड़ी ८२ २४ (कृतमाल)अमिलतास १४७ १२(क) भौंहोंका बीच २४२ ४ (कृतमुख) चतुर,प्रवीण १०८ १४२ (कूर्चशीर्प) जीवक २४४ १० (कृतलक्षण) गुणसे प्र. २१४ - ४४ (कूर्चिका ) दूधका वि सिद्ध कार, मूरनि ७ (कृतसापत्रिका)जिसके ४९ ३३ (कूर्दन) कूदना, लीला बहुत स्त्रियांहों उनमें करना जो पहिले ब्याही गई ८० (कूपर) गांठि, हाथके हो वह स्त्री मध्यकी गांठि १६० ६८ (कृतहस्त) अच्छा-तीरं. १५४ १९८ (कूर्पासक )अंगिया, दाज चोली १३ ५९.(कृतान्त) यमराज सि- २१ (कूर्म) कछुआ द्धान्त,भाग्य, पापकर्म ७(कूल) किनारा ६ (कृतिन)पण्डित, चतुर, १११ १५५ (कूष्माण्डक) कुम्हड़ा निपुण २० (कृकण) मुआ पक्षी, २६७ १९२ (कृत्त) काटाहुआ तीतर विशेष १७१ ५०(कृत्ति) मृगचर्म ११७ १३ (कृकलास) गिरगिट ३२ (कृत्तिवासस्)शिवः १८ (ककवाकु) मुर्गा |३२२ १५८ (कृत्या) क्रिया, ताम: १२६ अमरकोशादर्श। १३ पृष्ठ ४ श्लोक श्लोक सी देवता विशेष, ध- १६० ६ (कृष्टि) पण्डित नादिसे भेदके योग्य, १८ (कृष्ण) विष्णु. काला २ (कृत्रिम) बनाहुआकई रंग, कालीमिर्च एक वस्तु मिलाकर ६१ ६७ (कृष्णपाकफल)कर- १५६ १२६ (कृत्रिमधूपक) बनाया वेदा हुआ धूप ९७ ९६ (कृष्णफला) बकुची २५८ ६४ (कृत्स्न) सव ८६ (कृष्णभेदी) कुटकी २५४ ५० (कृषण) चुष्ट, कंजूस | ९८ (कृष्एला) घुघुची १८ (कृपा) दया ३४ १६ (कृष्णलोहित) धूमि- ८९ (कृपाण) तलवार लरंग २३७ ३४ (कृपाणी) कतरनी १२ ५५ (कृष्णवर्मन्) आगि २४५ १५ (कृपालु) दयालु मेहर ८८ ५५ (कृष्णन्ना) पारि बान ११६ ११ (कृष्णसार कालाहरिन १२ ५४ (कृपीटयोनि) आगि ९७ ९६ (कृष्णा) बड़ी पीपरि १४ (कृमि) छोटे कीड़े सोन | २०८ १९ (कृष्णिका) राई किरवा २१५ ५०(कृसर) तिल मिला १५२ १११ (कृमिकोशोत्यारेशमसे भात वा खिचड़ी बने हुये | १३७ ४९ (केकर) कंजा, कंजी १०० १०६ (कृमिघ्न) वायुविडंग ऑखवाला १५६ १२७ (कृमिज) अगुरु १२२ ३२ (केका) मोरकीयोली २५७ ६१ (कृश) पतला १२१ ३१ (कोकिन् ) मोर १२ ५५ (कृशानु) आगि ११४ १७० (केतकी) केतकी ३४ (कृशानुरेतस्) शिव | १९८ ९९ (केतन) ध्वजा, नि- २३३ १२ (कृशाश्विन) नट वास, कार्य, नेउता २०६ १३ (कृपक) फार २८७ ६० (केतु) ध्वजा, केतुग्रह २०३ २०६ ११ (कदार) खेत २०४ ६ (कृपिक) किसान फार ५७ १३ (केनिपातक) पतवार .२०४ ६ (कृपीवल) किसान (१५१ १०७ (केयूर) वजुल्ला--वि- जायठ २ (कृषि) खेती २०५ ८ (कृष्ट) जोता खेत अमरकोशादर्श । " पृछ पृष्ठ --- : श्लोक श्लोक ३५६ : २० (केरद) व्यवहार की ६३.३७ (कैरव) उजला कमल. वस्तु .१५ ७१ (कैलास) (श)पर्वत ३२ (केलि) क्रीड़ा, खेल विशप,कुनेरका स्थान ३३३ २०२ (केवल)एक,सम्पूर्ण, ५७ १५ (कैवर्त) मलाह निर्णय कियाहुआ ३२. .६ (कैवल्य) मोक्ष ११८. ९५ (केश) बार- बाल १४८ ६६ (कैशिक) वालोंका ६६.८९(केशपी)वहचिचड़ा समूह १४६ ९७ (केशंपाशी) शिखा- | १४८ ९६ (कैश्य) बालोंकासमूह 1 चोटी ११६ . ८ (कोक) भेडिआ-में- १ (केशरी) सिंह इहा, चकवा :४१ (केशव) विष्णु, अच्छे | ६४४२ (कोकनद)लाल कमल :.'-" वालोंवाला ३४ १५ (कोकनदच्छविलाल १४८ ६७ (केशवेश)वाँधेबाल, कमलकारंग पाटी ११६ - २० (कोकिल) कोयल १३६:४५ (केशिक) अच्छे वा-६ १०४ (कोकिलाक्ष) तालम: लोवाला खाना १०४१३६ (केशिनी) शंख कौड़ी ७९ १३ (कोटर ) खोडकिल. १३६ ५ (केशिन) अच्छे वा खुढिला लोंवाला १२९ १७ (कोटवी) नंगी २:२५ (केसर) कमलके फूल'१६४ ८४ (कोटि) धनुष्का- के भीतरकी जटा,ना न्तभाग, खड्गादिका ...', 'गकेसर,मोमसिरी कोना,करोरि १ (केसरिन् ) सिंह १०६ १३३ (कोटिवपी) अस्परक २२ (कैटभजित् ) विष्णु २०६ १२(कोटेश) सुगरी,सरावनि :५४० (कैडर्य)कायफर ३५७ १८ (कोट्ट) कोट ....... '३० (कैतव) जुआँ, छल १३८ ५४ (कोठ) कोढ़के चकत्ता २०६१ (केदारक)खतकासमूह १९७ ९३. कोण') चीणादि २०६ ११ (केदारिक)खेतकासमूह ... बजानेका अस्त्र, दण्डा, २०६ ११ (केदाय) खेतकासमूह तलवारका-कोना.'

अमरकोशादर्श । ३५ पृष्ठ १२३ ८४ श्लोक श्लोक ८३ (कोदण्ड) धनुप ३८ (कोश)अण्डा,सोना, १६ (कोव) कोदव चांदी,कमलकी कली, २६ (कोप) क्रोध तलवारकामियान,धन १२५ ४ (कोपना)कोधिनीस्त्री समूह ,शपथ २४९ ३२(कोपिन्) क्रोधी २९२ ४० (कोष्ठ) पेट के भीतर २६१ ७८ (कोमल) कोमल,मु. काकोठा,डहरी,घरका लायम मध्य १२३ ३६ (कोयष्टिकोटिटिहिरी २४ ३५ (कोष्ण) थोड़ा गरम १६ (कोरक) कली,कवा- २८५ १७ (कोटिक)दूरसे देख- बचीनी नेवाला १०४ १२५ (कोरंगी) गुजराती १९६ ८६ (कौक्षेयक) तलवार इलायची २३२ ९ (कौटतक्ष)प्रधानवढ़ई २०७ १६ (कोरदूप् ) कोदव २३३ १४ (कौटिक) कसाई ३६ (कोल) बैरके फल, ६० (कौएप) राक्षस छोटीनाव, सूअर ४८ ३. (कौतुक) लीला,खेल १५६ १३० (कोलक)कवावचीनी, ४८ ३१ (कौतूहल) लीला,खेल मिर्च २०५ ८ (कौदगीण) कोदव का १०५ १३० (कोलदल) ककँदनि खेत ७ (कोलम्बक) घीणाका १६१ ७० (कौन्तिक) भाला धा- सर्वाङ्ग रण करनेवाला ६८ ६७ (कोलवल्ली) गजपीपरि १०३ १२० (कौन्ती) गगनधूरि १८ ९७ (कोला) बड़ी पीपरि ३१३ १२१ (कौपीन) अकार्य,लँ- २५ (कोलाहल) हल्लागुल्ला गोटा ३६ (कोलि) वेर १६ (कौमुदी) चांदनी १६० ५(कोविद) पण्डित २९ (कौमोदकी)विष्णुकी २२ (कोविदार) कचनार गदा १५६ १३१(कोशफल)कवायचीनी १३१ २७ (कौलटिनेय) सती २६३ = (कोशातकी) परवर, लहचिचिरा , तोरई १३१ २६ (कोलटेय)सतीअसती ur भिखारिनीका पुन का अमरकोशादर्श। दोनों का पुत्र , .. श्लोक श्लोक २२१ ७५ (क्रमेलक) ऊँट २६ (कौलटेर) असती का २२२ ७८ (क्रयविक्रयक) व. निया ३११ ११६ (कौलीन)लोकापवाद, २२२ ७६ (ऋयिक) मोल लेने पशु,सर्प,पक्षी, इनका वाला युद्ध, कुलीनता २२२ ८१ (कय्य) मोल लेने की २३५ २१ (कौलेयक) कुकुर वस्तु ३४ (कौशिक) गुग्गुल उ- | १४१ ६३ (क्रव्य) मांस लूक,सर्प, पकड़नेवा- १३ ६० (क्रव्याद) राक्षस ला, विश्वामित्र १३ ६० (कव्याद्) राक्षस १११ (कौशेय) कुशवारी | २२२ ७६ (क्रायिक) मोल लेने सेवना रेशमी वस्त्र वाला ६ २६ (कौस्तुभ ) विष्णुकी ३२१ १५६ (क्रिया) आरम्भ, नि- मणि प्कृति , प्रायश्चित्त , २३८ ३५ (क्रकच) आरा शिक्षापूजन, सम्प्रधा. ६३ ७७ (क्रकर) मुआ पक्षी, रण,उपाय, कर्म,चेष्टा, करील, तीतर विशेप चिकित्सा, धात्वर्थ १५ (क्रतु) यज्ञ २४६ १% (क्रियावत्) कार्यक- ३५. (क्रतुध्वंमिन्) शिव ६ (तुभुज) देवता ४६ ३२ (क्रीड़ा) खेल २०२ ११५ (कथन) मारना २३ (कुश्)कराकुल पक्षी २०० १०७ (क्रन्दन) निन्दापूर्वक ४७ २६ (कुध)क्रोध, गुस्सा योधाओंको पुकारना, १२० २४ (कुरर) कणाकुल रोना,पुकारना ५० ३५ (ऋष्ट) रोना ३५ (कन्दित) रोना ४७ (दूसरेका अनमल १७० ४३ (क्रम) विधि वियोग चाहनेवाला, पापी, क- शास्त्र ठिन, निर्दय ४१ (क्रमुक) लाललोध, २३२ ८१(केय)मोललेनेकीवस्तु सुपारी ११५ ३(क्रोड़)शूअरकोरा,गोद ८ रने में लगाहुआ ११६ ५० २५३ - अमरकोशादर्श । पृष्ठ , 1 श्लोक श्लोक २६ (क्रोध) क्रोध तरहपकाहुआ २४९ ३२ (क्रोधन) क्रोधी ४१ २४ (काण) वीणादि का १९ (क्रोशयुग) दोकोश शब्द ६ (क्रोटु) सियार २७ ११(क्षण) तीसकला, चुप- ९३ (कोष्टविन्ना) पिठवन चाप रहना,उत्सव १०० ११० (क्रोष्ट्री) जेठीमधु ४ (क्षणदा) रात्रि ११६ २३ (क्रौञ्च) कराकुल २०१ ११४ (क्षणन) मारना ४१ (क्रौञ्चदारण) स्वामि- १८ ६ (क्षणप्रभा)बिजुली कार्तिक ६४ (क्षतज) रन, खून २७२ १० (क्लम) ग्लानि १७३ ५७ (क्षतव्रत) जिसकाब्रह्म- २७२ १० (क्लमथ) ग्लानि चर्य नष्ट होगयाहो २६८ १४५ (क्लिन्न) आदा, गीला | १८६ ५६ (क्ष) क्षत्रियास्त्री में ६० (क्लिन्नाक्ष)चौधरी आंख शूद्रले उत्पन्न पुत्र, सा- वाला' रथी ड्योढ़ीदार, बढ़ई २६६ ९९ (क्लिशित) क्लेशयुक्त १५६ २(क्षत्रिय) चत्रिय ३६ १९ (क्लिष्ट) पूर्वापर विरुद्ध १२८ १४ (क्षत्रिया)क्षत्रियकीस्त्री वाला वचन, क्लेशयुक्र | १२८ १४ ( क्षत्रियापी) क्षत्रिय १०० १०९(क्लीतक)मुरेठी,जेठीमधु की श्री. ९७ ६५ (क्लीतकिका) नील,नि- १२८ १५(भत्रियी)चत्रियकीखी घेल,कमज़ोर २५ ४(नपा)रात्रि १३४ ३९ (क्लीव) हिजरा १५ (नपाकर) चन्द्रमा २७८ २९ (क्लेश) क्लेश,तकलीफ ३१८ १४२ (क्षम)योग,समर्थ,हित ६५ (क्लोम) पेटमें स्थित ६५ ४ (क्षमा) पृथ्वी, सहना २४६ ३१ (अमित) सहनेवाला २४ (कण)वीणादिकाशब्द, २४९ ३१ (क्षन्त) सहनेवाला, शब्दकरना गामखोर ४१ २४ (कान)बीणादिका २४९ ३१ (ममिन् ) सहनेवाला शब्द २९ २२ (क्षय) प्रलय, नयीरो- २६५ ९५ (कथित) काढ़ा, अच्छी ग, हानि,नीतिजानने जल की जगह ६८ अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ट १३८ श्लोक श्लोक वालोंका त्रिवर्गस्थान, ६ २८क्षीराब्धितनया(लक्ष्मी कमती १० (क्षीरावी) दूधिया १३८ ५२ (क्षव) छींक, राई ८६ ४५ (क्षीरिका) सिन्नी १३८ ५२ (क्षवथ) खांसी ५४ २(क्षीरोद)दूधका समुद्र २६५ ९७ (क्षान्त) सहनेवाला | २४७ २३ (क्षीव) मतवाला बरदारत किया ५२ (क्षुत) छींक २४ (क्षान्ति) सहना १३८ ' ५२ (क्षत) छोक २२७ ९९ (क्षार) कांच २०८ १९ (क्षुताभिजनन) राई, १६ (क्षारक) नईकली २५४ ४८ (क्षुद्र) रुपण, कजूस, ५ (क्षारमृत्तिका) लोना क्रूर , अधन , थोड़ा, मट्टी बढ़ती ૨૨ ४३ (क्षारित) छिनारा या १५२ ११० (क्षुदघण्टिका) घुघुरू चोरीका कलंक जिस- ५९ २३ (क्षदशंख) छोटाशंख कोलगाहो वह मनुप्य ९७ ९४ (क्षदा)भटकटैआ,अं. २(क्षिति) नाश, वासस्थ गहीनास्त्री,नटी,पतु- न,पृथ्वी रिआ , मधुमाखी, ૨૭૨ ११ (क्षिपा) फेंकना,आज्ञा भाटा, वाघिनि देना २९६ ५४ (क्षुध) भूख २६३ ८७(क्षिप्त)प्रेरित,भेजाहुआ २४६ २० (क्षुधित) भूखा २४६ ३० (क्षि) निकारनंबाला ७८ ८(क्षुप) छोटाजड़बडार ६५ (क्षिप्र) जल्दी, बढ़ती वाला वन २७२ ७ (शिया)हानि,नाशहोना २०% २० (क्षुमा) अलसी ४ (क्षीर) जल, दूध ९९ १०६ (क्षुर)तालमखाना,छूरा २१४ ४४ (क्षीरविकृति) दूध का ४० (सुरक) तिलकवृक्ष फटोन ३५६ २० (क्षरम) वाण १०० ११० (क्षीरविदारी) उजला २३२ १० (सरिन्) नाऊ,हज्जाम कुम्हड़ा २३३ १६ (खुल्लक) थोड़ा,छोटा, १०० - १२० (क्षीरशुक्ला) काला कु. नीच म्हड़ा ६ क्षेत्र) सेत, स्त्री,शरीर " २०४ अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ लानेका हत्था ७ श्लोक श्लोक ३० २९ (क्षेत्रज्ञ) चैतन्य,पुरुप, ६ ३० (खगेश्वर)गरुड़ चतुर २११ ३४ (खजाका) कछुलि २०१ ६ (क्षेत्राजीव ) किसान १३७ ४९ (खञ्ज) लॅगड़ा २७३ ११ (क्षेपण) फेंकना, आ- ११८ १६ (खञ्जन) खेडरेचा ज्ञादेना ११८ १६ (खञ्जरीट) खेडरेचा १३ (क्षेपणी) डांड,नावच- ३५७ १७ (खट) अन्धकूप १६९ १३६ (खदा) खटिया, पलंग २६९ १११ (क्षेपिप्ठ) अतिशय ११५ ५ (खड्) तलवार,गेंडा २६ (क्षेम) कशल, धनहरी ११५ ५ (खदिन) गैड़ा २०६ ११ (क्षेत्र) खेतोंका समूह | २० १६ (खण्ड) टुकड़ा २ (क्षोणी) पृथ्वी ३२ (खण्डपरश) शिव १९८ ९९ (क्षोद) चून २१३ ४३ (खण्डविकार) राव, २६६ १११ (क्षोदिप्ठ) अतिशय मिश्री १२ (क्षोम) अटारी २०७ १६ (खण्डिक) मटर २२८ १०७ (क्षौद्र) शहद,ममाखी ८७ ५९ (खदिर) खयर १२ (क्षौम) अटारी,रेशमी १०८ १४१ (खदिरा) लजालू कपडा १२१ २६ (खद्योत) जुगन १७२ ५३ (क्षौर) वारवनवाना १३ (खनक) चूहा (क्ष्णुत) तेज,पैन,तीख ७६ ७ (खनि) खानि ३ (मा) पृथ्वी २०६ १२(खनित्र)कुदार,बेलचा ७४ १ (क्ष्माभूत) पर्वत,राजा ११४ १६६ (खपुर) सुपारी ५२ ९ (क्ष्वेड) विप,जहर २४ ३५ (खर)गवहा,अतिगरम २०० १०७ (क्ष्वेडा) वीरों का ग-१३६ ४६ (खरएस)सुइलार,ना. र्जना,बांसकी शलाका कवाला ३६. ३४(वेडित)वीरोंकागर्जना १३६ ४६ (खरणास)सुइलार,ना (ख) कवाला १ (ख) आकाश,इन्द्रिय, १०७ १३६ (खरपुष्पा) वबई शून्य ९६ ८८(खरमञ्जरी) लहचि- १२२ ३३ (खग) पक्षी,तीर,सूर्य चिरा ७० अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ ६१ श्लोक श्लोक ६६ (खस) चन्दाल से बोयाजानेवालाखत १११ (खराश्वा) अजमोदा ६६ ६(खिल) विन जोताखेत १३८ ५३ (ख) खजुआना १०५ १३० (खुर) ककूदनि, खुर, ११४ १७० (खर्जूर) खजूर,चांदी टाप ११४ १७० (खर्जरी) खजूर ४७ (खुरणस्) खुरसदृश ४६ (ख) वामन,बौना नाकवाला २५३ ४७ (सल) दुष्ट,खरिहान १३६ - १७ (खुरणस) खुरसदृश २४५ १७ (खलपू) बहारनेवाला नाकवाला २८१ ४२ (खलिनी)खलोंका स-| २५५ ५४ (खेट) निन्दित , ग्रह मूह, खरिहानोंका स- २८६ ४ (खेटक) ग्राम, ढाल मूह २६ (खय) खाई, परिखा १८६. ४९ (खलिन) लगाम ४६ ३३ (खेला) लीला, खेल ४९ (खलीन) लगाम ४९ (खोड) लँगड़ा ३४६ २५४ (खलु) निषेध,वाक्या- २४४ ६ (ख्यात) प्रसिद्ध, म. लंकार, जिज्ञासा,प्रा- शहूर र्थना ९३ (ख्यातगईण निन्दित २०७ १५ (खलेदारु) जो मड़नी बदनाम माड़ने के समय कि. २७२ ६ (ख्याति) प्रसिद्धि सीजगह खूटा गाइतेहैं (ग) ४२ (खल्या) खरिहानोंका १६ १ (गगन) आकाश समूह, खली का समूह ३१ (गंगा) गंगानदी २७ (खात) तालाव ३५ (गंगाधर) शिव २६९ ११० (खादित) खायाहुआ | १८२ ३४ (गज) हाथी ८८ (खारी) तीन द्रोण १८३ ३६ (गजता) हाथियों का प्रमाणविशेप झुण्ड २०६ १०(खारीक) खारी भर १०४ १२३ (गजभक्ष्या)सालवृष अन्न से बोया जाने ३९ (गजानन) गणेश ७१ ८(गा) दारूकाघर २०६ १० (खारीवाप) खारीभर ५८ १७ (गडक) मछलीविशेष २६४ . वाला खेत अमरकोशादर्श। पृष्ठ सुझाना ९ श्लोक श्लोक ३५८ १८ (गडु) गलगण्ड रोग |१३६ ४६ (गतनासिक)नकटा १३६. ४८ (गडुल) कुबरा १३७ ५१ (गद) रोग १९४ ८१ (गण)समूह,फौजकी ३६३ ३१ (गद्य) जिसमें श्लोक संख्या विशेष,गुल्म, नहों पदसमूहकीरचना शिवसेवक १८७ ५२ (गंत्री) गाड़ी १७८ २१४ (गणक) ज्योतिषी २९८ ६४ (गंध) गंध २५७ ६४ (गणनीय) गिनने के २२७ १०२ (गंधक) गंधक योग्य १०३ १२३ (गंधकुटी) तालीसपत्र २५ ६ (गणरान) रात्रियोंका वा मुरेठी समूह ३११ ११४ (गंधन) उत्साह देना ६४ ८० (गणरूप) मदार प्राणियध, अभिप्राय १०५ १२८ (गणहासक) धनहरी ३९ (गणाधिप) गणेश १०१ ११४ (गन्धनाकली)रासन ११ (गणिका)जूही, पतु. ८८ ५६ (गन्धफूली) काकुनि, रिया, हथिनी चम्पाकी कली ६६ (गणिकारिका)अरणी ७५ - ३ (गन्धमादन) पर्वत २५७ ६४ (गणित) गिनाहुआ विशेष २५७ ६४ (गणेयोगिननेके योग्य | १११ १५४ (गन्धमूली) कचूर १४७ ९० (गण्ड) गाल, हाथीका २२८ १०४ (गन्धरस) गन्धरस गाल २ ११ (गन्धर्व) देवजाति, १७ (गण्डक) गेड़ा हरिण विशेप, घोड़ा, १०८ १४१ (गण्डकारी) लजालू प्राणी,देवताओंके गा ६ (गण्डशेल) पर्वत से नेवाले, गवेयामात्र गिरेहुये भारी पत्थर ८७ ५० (गन्धर्वहस्तक)रेड,रेंडी ११२ १५९ (गण्डाली) उजलीदूध । १४ ६३ (गन्धवह) वायु,हवा १११ १५७ (गण्डी)गरिकाशाक ११६ ८२ (गन्यवहा) नाफ २२ (गराइपद) केंचआ ११ ६३ (गन्धवाह) वायु, हवा ६० २४ (गण्डूपदी) केंचई १५७ १३२ (गन्धसार) मलयागिरि ३५५ १० (गण्ड्पा) कुल्ला चन्दन ७२ अमरकोशाद। पृष्ठ पृष्ठ तप्राणी, बालक रनेकी माला श्लोक श्लोक २२७ १०२ (गन्धाश्मन) गन्धक | २४७ २२ (गर्द्धन) लोभी २२७ १०२ (गन्धिका) गन्धक १३४ ३६(गर्भ)कोपी,पेटस्थि- १०४ १२३ (गन्धिनी) तालीसपत्र वा मुरेठी १५८ १३६ (गर्भक) वालोंमें पहि- २३६ ४० (गन्धोत्तमा)दारू,मद्य १२१ २८ (गन्धोली)वरैआ, वि- ७१ (गर्भागार)घरकामध्य रनी |१३४ . .३८(गर्भाशय)ओझरीजि- २३ ३३ (गमस्ति) किरण ससे गर्भधारहता है १५ (गभीर) गहरा २२ (गर्भिणी) गर्भवतीस्त्री १६७ ६५ (गम) यात्रा, सफर जिसके लड़का होने ६५ (गमन) यात्रा सफर वालाहो ८४ ३५ (गम्भारी) गम्भारी | ११३ १६५ (गर्मुत)तृणधान्यवि- ५७ १५ (गम्भीर) गहरा शेप २६४ ६२ (गम्य) मिलनेकेयोग्य ४६ २२ (गर्व) अहंकार ५२ ९(गरल) चिप ३८ १३ (गर्हण) निन्दा २६९ १९२ (गरिप्ठ) अतिशयगरू २५५ ५४ (गह) निन्दित,खराव ६९ (गरी) वन्दाल २५१ ३७ (गहवादिन् )निन्दक, ६।३० (गरुड़) गरुड़ खराव कोलनेवाला ४ १६ (गरुड़ध्वज) विष्णु ९४६ ८८ (गल) कण्ठ,गला २३ ३२ (गरुड़ाग्रज) अरुण ६३ (गलकम्बल)बैलआदि १२३ ३७ (गरुत) पक्ष,.पंख केगलेकीलटकीखाल, ६ ३० (गरुत्मत) गरुड़ पक्षी सास्ना २२१ ७४ (गर्गरी) दही मथने २११ ३१ (गलन्तिका) करवा की महेड़ी २६७ १०४ (गलित)चुआ, गिरा ८ (गर्जित) मेघका गर्ज- २८१ ४३ (गल्या) काशोंका स- ना,मतवाला हाथी मूह,गलोंका समूह २(गत) गड़हा १० (गवयोलीलगाह,चो. ૨૨ ७७ (गर्दभ) गदहा ४३ (गर्दमाण्ड) गेंठी २०७ १०० (गरल) भैसका सींग . ग अमरकोशादर्श। ७३ पृष्ठ ७२ धकरेकी आवाज़ , आदि सियोंका समूह श्लोक श्लोक ९ गवाक्ष) झरोखा • १८४ ४० (गात्र) देह,हाथी के १५६ (गवाक्षी) डोंडककरी आगेकी जंघाकाभाग ५९ (गवीन)पुरानाखरिका १५७ १३४ (गात्रानुलेपनी)पीसा २०९ २५(गवेधु) मुनिअन्नवि- हुआसुगन्धद्रव्य,चोवा शेप, माघी सॉवाँ १६९ ३९(गाय) विश्वामित्र २०२ २५ (गवेधुका ) मुनिअन्न ४१ २६ (गान) गीत विशेष, माघी साँवाँ १(गान्धार) स्वरविशेष, १६७ ३४ (गवेपणा) ढूँढ़ना,धर्म युक्र कर्म करना ४६ (गायत्री) खयर,छन्द, २६७ १०५ (गवेपित) ढूंढ़ाहुआ मन्त्रविशेष, देवतावि- २१५ ५.(गव्य) गौओं का घी शेष २२५, ९२ (गारुत्मत)मरकतमणि २१७ ६० (गव्या)गौओंकाझुण्ड | १३० २२ (गार्मिण्य ) गर्भिणी १९ (गव्युति) दो कोश १ (गहन) वन, जंगल, १६४ २१ (गार्हपत्य)यज्ञकीअग्नि से प्राप्त होने के ८४ ३३ (गालव) लोध योग्य, गम्भीर ३५ १(गिर )वाणी,सरस्वती ६ (गह्वर) कन्दरा,दम्भ ७४ १ (गिरि) पर्वत, लीलना ६५ ४ (गहरी)पृथ्वी, निकुञ्ज ६६ १०४ (गिरिकर्णी) विष्णु- २२६ ९४ (गाङ्गेय)सुवर्ण,सोना, क्रान्ता कशेरू, भीम ११७ १३ (गिरिका) छोटीजाति ११७ (गानेरुकी)ककहीवृक्ष की मूसरी ६८ (गाढ़) बहुत २२७ १०० (गिरिज) शिलाजीत, २२ (गाणिक्य) पतुरियों अवरख,गेरू ६६ (मिरिमल्लिका) कुआ ८४ (गाण्डिव) अर्जुन का ७ ३२ (गिरिश) शिव धनुष : ७ ३२ (गिरीश) शिव १६४ ८४ (गाण्डीव) अर्जुन का २६६ ११० (मिलित) खायाहुआ धनुष ४१ २६० (गीत) गीत - 1 । का समूह १६४ " ७४ अमरकोशादर्शी पृष्ठ पृष्ठ ८० श्लोक श्लोक २६६ ११० (गीर्ण)स्तुति किया ११२. १६२ (गुन्द्र) शरपत हुआ ८८ ५५ (गुन्द्रा) काकुनि,नाग- २७३ । ११ (गीर्णि) लीलना रमोथा ૨ ६ (गीर्वाण) देवता २६३ ८९ (गुप्त) छिपाहुआ, र- २१ २४ (गीप्पति) वृहस्पति खाया हुआ ८४ ३४ (गुग्गुलु) गूगुर ३०१ -७४ (गुप्ति) भूमिकाविल, १५०० १०५ (गुच्छ)३२लरका हार, रक्षा, बन्दीखाना तृणादिका पूरा, पल्लव २७३ ११ (गुरण)उद्यम,भारा १६ (गुच्छक)फूलआदिका आदि उठाना गुच्छा २१ २४ (गुरु वृहस्पति,गर्भा- १५० १०५ (गुच्छार्द्ध) २४ लरका धानादि क्रियाकाकरा हार नेवाला,पिता ९८ ९८ (गुञ्जा) घुघुची १३० २२ (गुर्विणी) गर्भवतीस्त्री २९३ ४१ (गुड)मट्टी आदिका ब-१४३ ७२ (गुल्फ) पाँवकी गाँठि नाया गोला, गुड ९(गुल्म) Bठ, पिलद्दी, २७ (गुडपुप्प) महुआ गुच्छा, थूहा,फौज,से- २८ (गुडफल) पीलुआ नामुख ९९ १०५ (गुडा) सेंडुङ्गा ९ (गुल्मिनी) फैलीहुई ९४ ८२ (गुडूची) गुर्च बाड़ी १६५ ८५ (गुण) सत्वादि, सन्धि- ११४ १६६ (गुवाक) सुपारी विग्रहादि, धनुप का ४० (गुह) स्वामिकार्तिक रोदा, रोसईदार, रस्सी, ७६ ६ (गुहा) गुफा, पिथवनि ३२१ १५३ (गुह्य) एकान्त, लिंग, १२ (गुणवृक्षक)नावांध- ने का खूटा ११ (गुह्यक) देवजाति २६३ ८८ (गुणित) गुणाहुआ ८६ (गुह्यकेश्वर) कुबेर २६३ ८९(गुण्ठित )धूलिलपेटा २६३ ८६ (गूद) छिपाहुआ ७ (गृढ़पात्) सर्प, सांप १४३ ७३ (गुद) गंदा १७७ १३ (गूढ़पुरुप) जासूस,चार ७८ ह भग २ १५ - हुआ.

अमरकोशादर्श। ७५ पृष्ठ पृष्ठ - ११७ श्लोक श्लोक १४२ ६८ (गूथ) गृह ६५ ४ (गो) गो, बैल, स्वर्ग, २५५ ९६ (गून) हगाहुआ तीर, पशु, वाणी,वज, १०९ १४८ (गृञ्जन) लहसुन दिशा, आंखि, किरण, २४७ २२ (गृनु) लोभी पृथ्वी, जल ११९ २२ (गृध्र) गिद्ध ९९ ९९ (गोकण्टक) गोखुरू ३५५ १० (गृध्रसी)वातरोगवि- ११६ ११ (गोकर्ण) अँगूठे से ले शेप, गठियापाई कर अनामिकातक का ११० १५१ (गृष्टि) विलाईकन्द घीता, हरिणविशेष ४ (गृह) घर, स्त्री ६५ ८४ (गोकर्णी) चिनार जि- १३ (गृहगोधिका)छपकी, -सका धनुष बनताहै विस्तुइया २१७ ५८ (गोकुल ) गौओंका १५ (गृहपति) अन्नदाता, समूह मोदी ९८ ९९ (गोक्षुरक) गोखुरू २४८ २७ (गृहयालु) लेनेवाला ३३ ८(गोचर ) इन्द्रियों का विषय ३६२ ३० (गृहस्थूण)घरकीथून्ही ३६ (गृहागत) मेहमान १०३ ११९ (गोजिहा) गोभी १ (गृहाराम) घरके पास १९१ १५६ (गोडुवा) डोंडककरी यनाहुआ वाग ३५८ १८ (गोण्ड) तोंदी, नीच- १३ (गृहावग्रहणी) घरकी "जातिविशेप डेहरी ७४ १ (गोत्र)वंश,नाम,पर्वत, ३ (गृहिन) गृहस्थ पहाड़ १२४ ४४ (गृह्यक)आधीन,पाला ९ ४३. (गोत्रभिद) इन्द्र हुआ पक्षी,मृग आदि ६५ ३(गोत्रा) पृथ्वी,गोओं १५९ १३९ (मेन्द्रुक) गेंद, छोटी तकिया २०६ १४ (गोदारण) हर ४(गेह) घर | २१७ ५७ (गोदुद्द) अहीर ७६ ८(गैरिक) सोना, गेरू १११ १५६ (गोदुग्धा)जेठऊककड़ी २२८ १०४ (गैरेय) शिलाजीत वा २१७ ५८ (गोधन ) गोओं का गेरू dayi ७७ ७२ का समूह ७० अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ - उत्पन्न पुत्र घुनहा सांप y बहुत गांवोंका अधि. श्लोक श्लोक १६४ ८४ (गोधा) लोहेका द. स्वामी स्ताना २१६ ५३ (गोरस) माठा १०२ ११९ (गोधापदी) हंसपदी १४१ ६५ (गोर्द) गुदा १४७ ६२ (गोधि) ललाट ३५६ २० (गोल) गोला, वर्तुल २२ (गोधिका) गोह १३३ ३६ (गोलक) पतिके मर- २०७ १८ (गोधूम) गोहूँ जानेपर छिनारा से १०६ १३२ (गोनर्द) मोथा ४ (गोनस) छोटा सांप, २२९ १०८ (गोला) नेपाली मैन- शिल १७६ ७ (गोप)गोकादुहनेवा- ८५ ३९ (गोलीढ)कालीपाढरि ला,गोशालाकास्वामी, ९९ १०२ (गोलोमी) उजली दूब, जटामासी कारी,ठेकेदार,गन्धरस ८८ ५५ (गोवन्दिनी) काकुनि ६२(गोपति)सांड १९ (गोविन्द)विष्णु,गोष्ठा- २२८ १०४ (गोपरस) गन्धरस ध्यक्ष,गोपाली,वृहस्पति ७३ १५ (गोपानसी)छज्जा २१५ ५० (गोविप) गोबर २६८ १०६ (गोपायित) रखाया | ३६७ ४० (गोशाल) गौवों का हुआ स्थान २१७ ५७ (गोपाल) अहीर १५७ १३२ (गोशीप) जिस में क- १०१ ११२ (गोपी) कालाशाम्ब, मल के समान गन्धहो स्याह समलर वह चन्दन १६ (गोपुर) नगर का फा- ६८ १४ (गोप्ठ)गौवोंका स्थान टक, मोथा, दरवाजा १६३ १७ (गोष्ठी) सभा २३४ १७ (गोप्यक) दास, टहलू ३०६ ९३ (गोप्पद) गौओं का ५८(गोमत) गोओं का सेवित देश, गोओं के स्वामी खुरका गड़हा २१५ ५०(गोमय) गोवर २१७ ५७ (गोसंख्य) अहीर ६ (गोमायु) सियार १५० रूप (गोस्तन)चार लरका २१७ ५८ (गोमिन्) गौवों का हार अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ - , ८ की कन्या श्लोक श्लोक १०० १०७ (गोस्तनी) दाख २३ ३० (ग्रहपति) सूर्य १४ (गोस्थानक) गौओं का २४८ २७ (ग्रहीत) लेनेवाला स्थान ७४ १९ (ग्राम)गांव,वृन्द, समूह ३:१५ (गौतम) वोहमती ४६ (ग्रामणी) नाऊ, गांव ७ (गोधार) गोहका बच्चा का मालिक ११६ ७ (गाँधेय) गोहका बच्चा २३२ ९ (ग्रामतक्ष ) गांव का ११६ ७ (गोधेर) गोहका बच्चा चढ़ई ३४ १३ (गौर) लाल, उजला, २८१ ४३ (ग्रामता)गांवों का स- पीला रंग १६८ ३६ (गौरख) किसी के आने २३२ ६ (ग्रामाधीन) गॉव को पर आदरपूर्वक उठ बढ़ई खड़ेहोना ७४ २० (नामान्त)गॉवका स- ३७ (गौरी)पार्वती, दशवर्ष मीप, परोस ६७ ९४ (ग्रामीण) नील १४ (गौप्लीन) जहां पहिले ३९ १९ (ग्राम्य) भांडोंके से व- गौवो का स्थानरहाहो चन, सूअर ३०४ ८८ (ग्रन्थ) शास्त्र, द्रव्य १७४६१ (ग्राम्यधर्म) मैथुन ११२ १६२ (ग्रन्थि) गांठि, पोर १ (ग्रावन्) पर्वत, पत्थर २२९ . ११० (ग्रन्थिक) पिपरामूरि |२१६३ ५४ (ग्रास) कौर २६२ ८६ (ग्रन्थित) गुहाहुआ, ५९' २१ (ग्राह) घरिआर, लेना, १०६ १३२ (ग्रन्थिपर्ण) कुकरौंधा ग्रहण ८५ "३७ (ग्रन्थिल) कटइआ, E१ २१ (ग्राहिन) कथा करील ८८ (ग्रीवा) गटई ४० २० (ग्रस्त) कहीं अक्षर २८ .१८ (ग्रीष्म ) ज्येष्ठ आपाढ़ कहीं पद छूटा, खाया |१५० १०४ (प्रेयक) कण्ठा गया |२६९१ १११ (ग्लस्त) खाया हुआ ९.(ग्रह) ग्रहण, ४५ (म्लह) वाजीलगाना आग्रह, हठ, सूर्यादि |१३९. ५८ (ग्लान) रोगवशसे ५५ (ग्रहणीरुज) संग्रहणी रक्षीण . लेना, २४० अमरकोशादर्श। ७८ पृष्ठ पृष्ठ तार, चाहने वाला Y श्लोक श्लोक १३९ ५८ (ग्लास्नु) रोगवशसे| ४९ ३३ (धर्म) घाम, पसीना क्षीण २४६ २० (घस्मर) खया -१६ १४ (ग्लो) चन्द्रमा २४ २ (घस) दिन १४६ ८८ (घाटा) गलेकी घांटी, ३२ (घट) घड़ा, गगरी घरियारी (घटना) हाथियों का १९८ ९७ (घाण्टिक) राजाओंके कतार जगाने के लिये घण्टा २०० १०७ (घटा) हाथियोंका क- बजानेवाले २०२ ११५ (घात) मारना २३६ २७(घटीयन्त्र)पानीनिकाल २४८ २८ (घातुक) प्राणियों का ने का यन्त्र, रहट,पुर मारनेवाला, हत्यार, ३५७ १८ (घट्ट) घाट पापी, पराया अनभल ६६ १९ (घण्टापथ) राजमार्ग, सड़क ११४ १६७ (घास) घास ३९ (घण्टापाटलि) काली १४२ ७२ (घुटिका) पांवकीगांठि, पांढरि घुटना १०० १०७ (घण्टाखा)सन,सनई ३५८ १८ (घुण) घुन ७ (धन) लोहा पीटनेका ११८ १६ (क) उल्लूपक्षी हथौरा,वादर,घरिआर २४६ ३२ (पूर्णित) जिसके नेत्र कायाजा,करताल,म- निद्रासे घूमतेहों वह ध्यमनाच, बाजा, मु. पुरुष ग्दर,गझिन,कठिनता, ४५ १८ (घृणा) दया, घिनान मंजीरा २३ ३३ (घ्रणि) किरण ५(धनरस) पानी २१६ ५२ (घृत) घी,पानी, अमृत १५६ १३१ (घनसार) कपूर ३ (घृष्टि) सूअर ३९० १०९ (घनाघन)इन्द्र,प्राणि- १८५ ४३ (घोटक) घोड़ा योंका नाश करनेवाला, १४६ ८९ (घोणा) नाक, घोड़की मस हाथी, घरसने ११५ ३ (घोणिन) सूअर . नाक वाला मेष अमरकोशादर्श। ७६ पृष्ठ पृष्ठ है श्लोक श्लोक ८४ ३७ (घोण्टा) चैरके फल, १८ ६ (चक्रवाल) मण्डल, सुपारी गुंडरा,लोकालोक पर्वत २० (घोर) भयानक १२० २४ (चकाङ्ग) हंस ७४ २० (घोप) अहीरों का गॉव ६५ ८६ (चक्राही) कुटकी १०२ ११७ (घोपक) उजरे फूल ५२ ७ (चक्रिन) सांप वाली तोरई २२१ ७७ (चक्रीवत्) गदहा ३८ १२ (घोपणा)जोरसेपढ़ना ५२ ७(चक्षुःश्रवस्)सर्प,सांप १४६ ८९ (घाण)नाक,सूघाहुआ १४७ ९३ (चक्षुस) आंखि ११ (घापतर्पण)वड़ासुगंध २२७ १०२ (चक्षुष्या) कालासुरमा -२६४ ६०(घात) सूंघाहुआ २६० ७५ (चञ्चल) चञ्चल (च) १८, ९(चञ्चला) बिजली ३४३ २४० (च)श्लोक का पादपू ८८ ५१ (चञ्चु) रेंडरडी,चोंच रण करना, अन्वाचय, १९८ १९ (चटक) गवरवा समाहार, इतरेतर, स. ११९ १९ (चटका) गवरैया मुञ्चय |२२९ ११० (चटकाशिरस् ) पिप- १२३ ३५ (चकोरक) चकोर रामूरि। १६३ ७८ (चक्र) पहिया, फोज, २०८ १८ (चणक) चना राज्यादि, चाक, अस्त्र, २४९ ३२ (चण्ड) षड़ाक्रोधी भेवर १०५ १२८ (चण्डा) धनहरी १०५ १२१ (चक्रकारक) नखनाम ९३ ७६ (चण्डात) कनइल गंधद्रव्य, वडनखी १५४ ११९ ( चण्डातक) उटंग २० (चक्रपाणि) विष्णु लहेंगा १०९ ११७ (चक्रमर्दक) चकवड़ २३१ ४ (चाण्डाल)ब्राह्मणी ११२ १६० (चक्रला) मोथाविशेप में शूद्रसे उत्पन्न पुत्र १७५ २ (चक्रवर्तिन)महाराजा- २३७ ३२ (चण्डालवल्लकी)कि- धिराज गिरी ११० १५३ (चक्रवर्तिनी) चकवत ८ ३८ (चण्डिका) पार्वती २३ (चक्रवाक)चकवा - ७१ ६ (चतुःशाल)चौकोरघर, कई चौक. M १२० अमरकोशादश। पृष्ठ पृष्ठ 7 एक योगी -- श्लोक श्लोक २३४ , १६ (चतुर) चतुर ६६ (चप पारा, जल्दी, २३ (चतुरंगुल) अमिल विना अपराधके वि. तास चारे मारनेवाला ३ १६ (चतुरानन) ब्रह्मा ९ (चपला विजली,बड़ी १७४ ६१ (चतुर्भद्र)धर्मादि चतु पीपरि वर्ग से मिलाहुआ धर्म १४६ ८४ (चपेट) चटकना , ४ .-२० (चतुर्भुज) विष्णु ११७. ११ (चमर) हरिणविशेप १७४ ६१ (चतुर्वर्ग) धर्म अर्थ ८१ २२ (चमरिक) कचनार काम मोक्ष ३६५ ३५ (चमस) यज्ञकावर्तन, ६६ २१८ (चतुप्पथ) चौराहा २१९ ६६ (चतुर्हायनी) चार वर्ष ३५५ १० (चमसी)यज्ञकावर्तन, वाली गौ प्रणीतापात्र ७२ -१३-(चत्वर)आंगन, यज्ञका १९३ - ७८ (चम्) फौज, फौज- चौतरा विशेप, पृतना ३४७ ३ (चन) सवनहीं,थोड़ा | ११६ १० (चमूरु) हरिणविशेष १५७ १३२ (चन्दन) मलयचन्दन ६३ (चम्पक) चम्पा १९ १३(चन्द्र)चन्द्रमा,कवीला, ७० ३ (चय) छहरदीवार, - “कपूर, सोना, सुवर्ण समूह १२२ ३२ (चन्दक) मोरके पंखोंमें १७७ १३ (चर) चलनेवाला,जा- ऑखि के समान चिह्न सूस ६२ - (३४ (चंद्रभागा नदीविशेष | २६४ ३३ (चरक) वैद्यकके आ- १३ (चन्द्रमस्) चन्द्रमा १०४ १२४ (चन्द्रवाला) इला- १४३ ७१ (चरण) पैर,पॉव यची १७ (चरणायुध) मुर्गा (चन्दशाला) अटारी, २६१ ८१ (चरम) अन्तिम,पा. कोठा छिल ७ ३१ (चन्द्रशेखर) शिव ७५ २ (चरममाभूत)अस्ता- १९६-८९ (चन्द्रहास) तलवार (चन्द्रिका) उजेरिआ २६० ७४ (चराचर) चलनेवाला चार्य, ग्रन्थ चल अमरकोशादर्श। ८१ पृष्ठ पृष्ठ श्लोक श्लोक २६० ७४ (चरिष्णु)चलनेवाला १६७ ९६(चलित)वलीहुईफ़ोज, २४ (चर) अग्निमें हवन कॉपताहुआ करने की जाउरि, ९८ ९८ (चविक) चाव खीर ६८ १८ (चव्य) चाय ३५५ १० (चर्चरी) तारीबजाना २४० ४३ (चपफ) दारूपीनेका २ (चर्चा) विचार, च- वर्तन न्दनादिका लेपन २० (चपाल) यज्ञके खम्भ १०८ १५३ (चर्मकपा) विशेप से- के ऊपर कंकण सदृश जो काष्ठहोताहे उसका ७ (चर्मकार) चमार नाम, धरियारी ५० (चर्मन्) मृगचर्म, १९८ ९७ (चाक्रिक) राजाओं के ढाल जगानेके लिये घण्टा २३८ ३५(चर्मप्रभेदिका)चमड़ा चजानेवाला काटने का हथियार, १०७ १४० (चाहेरी) अॅमलोनिया रॉपी १६ (चाटकर) गवरयाका २३७ ३३ (चर्मप्रसेविका)भाटी, बच्चा खलाय २३७ ३२(चाण्डालिका)किंगिरी ८६ ४६ (चर्मिन्) भोजपत्र, १९८ १८ (चातक) चातक ढाल धारणारनेवाला १५९ • २ (चातुर्वर्य) ब्राह्मण, ३८ (चर्या) ध्यानादिकि. क्षत्रिय, वैश्य,शूद्र था, मानमें रहना १९२ ८३ (चाप) धनुष २६२ ११० (चर्षित) खायाचवाया १८१ ३१(चामर) चेंबर हुआ २२६ ९५ (चामीकर) सोना,सु- (चर्पणी) छिनारि वर्ण २६० ७४ (चल) चञ्चल ६३ (चाम्पेय) चम्पा, ना. २० (चलदल) पीपर गकेसर २६० ७४ (चलन) कॉपना, कॉ- १७७ १३ (चार) बाँधन, जासूस पनेवाला १४३ (चारटी)कपीला २६० ७४ (चनाचल) चञ्चल १४ (चारण)रुथिक ४२ अमरकोशादर्श। पृष्ठ , ८८ बालोंका समूह ११५ तेंदुआ एच पृष्ठ श्लोक श्लोक ५२ (चारु)सन्दर, १७ (चित्र)चितकावररंग, १५५ १२३ (चार्चिक्य)चन्दनादि अदुतरस, तसवीर का अंगमें लेपन ५१ (चित्रक) चीनवृक्ष, २८१ ४३ (चार्माण) चमड़ावा रेंडी,रेंड,माथे में ल. गायाहुआ तिलक ८(चार्याक)वौद्धमताव- २३१ ७ (चित्रकर) तसवीर लम्बी खींचनेवाला २०९ २६ (चालनी) चलनी २ (चित्रकाय) सिंह ११८ १७ (चाप) नीलकंठ २७ (चित्रकृत् ) तिनिस, ५७ (चिकित्सक) वैद्य १३७ ५० (चिकित्सा रोगकीशा-१०० १०६ (चित्रतण्डुला) वायु. न्तिका उपाय, इलाज भिरग करना ६७ ६२ (चित्रपर्णी)सिंहपुच्छी ९५ (चिकुर) वार, विना १३ ५७ (चित्रभानु) आगि, अपराधविचारे मारने सूर्य वाला २४ (चित्रशिखण्डिज) र. २१४ ४६ (चिकण)चिक्ना हस्पति ३५ (चिकस) यज्ञपात्र २२ २७ (चित्रशिखण्डिन्)म- ८६ ४३ (चिञ्चा) अमिली सर्षि १ (चित् ) बुद्धि, थोडा ६५ ८७ (चित्रा) मूसरि,जेठ- २०२ ११७ (चिता)चिता ऊ ककरी २०२ ११७ (चिति) चिता २६ (चिन्ता) स्मरण ३१ (चित्त) मन २१४ ४७ (चिपिटक) चिउरा २६ (चित्तविभ्रम)पागल १४७ ६० (चिवुक) दाढ़ी पना २४५ १७ (चिरक्रिय) कार्य में ४६ २२(चित्तसमुन्नति)सन्मान देरकरनेवाला ३१ २ (चित्ताभोग)सुखकी ११६ २२ (चिरञ्जीविन ) कौआ इच्छा १२७ ९(चिरण्टी)थोड़ेहीकाल ११७ (चित्त्या) चिता की व्याही स्त्री ४७ अमरकोशादर्श। ८३ पृष्ठ ११९ पृष्ठ श्लोक श्लोक २६० ७७ (चिरन्तन) पुराना ८४ ३३(चूत) ऑवका वृक्ष ३४७ १(चिररात्राय)बहुतकाल १५७ १३५ (चूर्ण) सुगन्धद्रव्य ४७ (चिरबिल्ल) कंजा का चूर्ण, २२० ७१ (चिरसूता) बनिगो १४८ ९६ (चूर्णकुन्तल) टेढ़ेवाल ३४७ १ (चिरस्य) बहुतमाल ३५५ ९ (चूर्णि) चूर्ण बनाना, ३४७ १ (चिराय) वहुतकाल चूली १८ (चिलिचिम) झिनामा १८३ ३८ (चलिका ) हाथी के मछरी कानों की जड़ २२ (चिल्ल) चौधरी -२३४ १७ (चेटक) दास, टहलू खिवाला, चील्ह ३४९ १२ (चेत्) पक्षान्तर १७ (चिह्न) चीन्ह ५९ (चेतकी) हरे १० (चीन) हरिणविशेष ३० ३० (चेतन) जीर ३६३ ३१ (चीर) कपड़ा ३१ (चेतना) वुद्धि २८ (चीरी) झींगर ३१ ३१ (चेतस्) मन १२१ २८ (चीरुका) झींगुर १५३ ११५ (चेल) वस्त्र, कपड़ा, ३६३ ३१ (चीवर)मुनियोंकावस्त्र अधम १०८ १४१ (चक्र)कएकप्रकार ७ (चैत्य) यज्ञ का घर की खटाई,अमिलवेत २७ १५ (चैत्र) चैतमास १०७ ११० (चक्रिका)अमलोनियां १५ ७१ ( चैत्ररथ ) कुबेर का ६० (चुल्ल) चौधरी ऑखि वगैचा वाला १५ (पैत्रिक) चैतमास २९ (चुल्लि) चूल्हिया १५३ ११५ (चैल) कपड़ा ७७ (चूचुक) चूँचीकी ढे- १०६ १३४ (चोंच) तज, खाये पुनी ३६२ ३० फलका शेप १२२ ३२ (चूडा) मोरकीचोटी, १०४ १२६ (बोरपुप्पी)शंखाकौड़ी चोटी |१५३ ११८ (चोल)अॅगिआ, चोली १५० १०२ (चूड़ामणि)चोटी का २३५ २४ (चौर) चोर मणि २३६ २५ (चौरिका) चोरी ११२ १६० (चूड़ाला)मोधाविशेष २३६ २५ (चौर्य) चोरी २७ २१० अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ श्लोक श्लोक २६७ १०४ (च्युत) चुआ, गिरा १६० ६ (छान्दस् ) वेदिक, वेद (च) को जाननेवाला ૨૨? ७६ (छगलक) वकडा ३२१ १५७ (छाया) सूर्य की स्त्री, १०७ १३७ (छगलान्त्री)विधारा कान्ति, छाया, छहर, ३२ (छत्र) छाता-छतुरी पछाई ९९ १०५ (छत्रा) सौंफ,पानीका २६७ १०३ (चित) बाटाहुआ २ (छिद) विला १०२ ११५ (छत्राकी) रासनि २६६ E. (चिदित) छेदाहुआ १४ (छद) पत्ता, पंख २६७ १०३ (छिक) काटाहुआ. १४ (बदन) पत्ता ६४ ८२ (चिनरहा) गुर्च ७३ १४ (छदि) छावना १६६ ९२ (छुरिका) छूरी ३० (छान्) कपट, छल १२४ ४४ (छेक) पलुआ पत्नी २७५ २० (छन्द) याशय,वंश, मृगआदि श्लोक,इच्छा, गायत्री २७१ ७ (छेदन) काटना खर, धनियाँ आदि वृत्त आदिवृत्त यारि, हवा २०० २० २२१ २२१ १३६ २४ (छन्दस्) भाशय वंश, १६ ७ (जगत् ) लोक, जंगम श्लोक, इच्छा, गायत्री ६५ ४ (जगती) लोक, छन्दो- विशेष, पृथ्वी २२ (छन्न) एकान्त, छाया, १४ ६४ (जगत्लाण) वायु, व. हुआ १००(बल)छल,धोखादेना २९० ६४ (जगर) कवच, पखतर १७ (छवि) शोभा,कान्ति २४० ४२ (जगल) दारूका का- ७६ (छाग) बकड़ा ढा, मदिरा का कल्क ७६ (छागी) चकड़ी ०६९ १११ (जग्ध) खायाहुआ ४४ (छात) दुर्वल, काटा २१६ ५५ (जग्धिोखाना, भोजन हुआ करना १३ (छात्र) विद्यार्थी १४३ ७४ (जधन) स्त्री की पेड (छादन) झॉपना तोंदी १८(लादित) छायाहुआ । ९० ६१ (जघनेफला) कवरि N २६६ अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ २६१ १४३ श्लोक श्लोक ८१ (जघन्य) अन्तिम, प. | १४४ ७८ (जत्रु) कन्धा और छिला, अधम, लिंग शिरकी सन्धि,हसिया इन्द्रिय ४४ १२ (जनक) पिता, वाप १३५ , ४३ (जघन्यज) छोटाभाई, २३४ २० (जनंगम) चाण्डाल शूद्र २८१ ४३ (जनता) जनों का २६० ७४ (जंगम) चलनेवाला ७३ (जंगमेतर) स्थावर,पृ. ३० ३० (जनन) वंश, सन्तति, क्षादि जन्म ७२ (जंघा) जांघ १३२. • २६ (जननी) माता ७३ (जंघाकरिक) हरकारा ६७ ९ (जनपद) देश १९२ ७३ (जंघाल)जल्द चलने १३२ २९ (जनयित्री) माता वाला, हरकारा ३७ ७ (जनश्रुति) अपयश, ११ (जटा) वृक्ष की जड़, बदनामी लिपेटेवार, जटा ४ १९ (जनार्दन) विष्णु १०६ १३४ ( जटामांसी) जटा- ७२ ९ (जनाश्रय) मण्डप मासी ३० ३०(जनि) जन्म,उत्पत्ति १०६ १३४ (जटिला) जटामासी ११० १५३ (जनी) चकवत, पुत्र ८३ ३२ (जटी) पकरिया की स्त्री ४६ (जदुल) जिसके अंग ३० ३० (जनुस्) जन्म में लशुनाकार चिह्नहो ३० ३० (जन्तु) प्राणी, जीव वह पुरुप २२ (जन्तुफल) गूलर १४४ ७७ (जठर) पेट, कठिन, ३० ३० (जन्मन्). जन्म २० १६ (जड) ठण्ठ, मूर्ख ३० ३० (जन्मिन) प्राणी,जीव ८६ (जडा) क्यवांच १७४ ६१ (जन्य) वरके मित्रह- १५५ १२५ (जतु) लाह, लाख मजोलीवाले, वराती, २१३ ४० (जतुक) हींग मनुष्यों की निन्दित १२० . २७ (जतुका) चमगूदरि बतकही,संग्राम,लड़ाई ११० १५३ (जतुकृत) चकवत ३०. ३० (जन्यु) जन्मी, प्राणी ११० १५३ (जतूका) चकवत १७१ .५० (जप) वेदाभ्यास ६५ ८६ अमरकोशादर्श। - पृष्ठ ૦૨ परोक श्लोक ७६ (जपापुष्प) गडहर का २५४ ५० (जरायुज) मनुष्य पशु आदि ३८ (जम्पती) स्त्री-पुरुष ५५ ३ (जल) पानी ६ (जवाल ) बोदा, की-८२ २८ (जलज)पहाडी, जल. महुआ,कमल,चन्द्रमा २४ (जम्बीर) जेभीरी नींबू ५९ २० (जलजन्तु)जलकेजीव ६६ (जम्बु)जामुनि, फरेंदा १८ । ७ (जलघर) चादर, मेघ का फल २(जलनिधि) समुद्र ६ (जम्बुक) सिआर, ५५ ७(जलनिर्गम) भवेर,ज- वरुण लनिकलने की नाली, १९ (जम्बू)जामुनि,फरेंदा नरदहा है का फल ३८ (जलनीली) सेवार २४ (जम्भ) जंभीरी नीचू ३६० २३ (जलपुप्प) कई कमल ४४ (जम्भमेदिन) इन्द्र आदि २४ (जम्भल) जंभीरीनींबू, ६७ ११ (जलमाय) बहुत जल २४ (जम्भीर) जंभीरीनीय वाला देश ६६ (जय)जीति, अरणी १८ ७ (जलमुच्)नादर,मेघ ५ (जलव्याल)जलका ४७ (जयन्त) इन्द्र का पुत्र सांप ६५ (जयन्ती) जाही २५ (जलाधार)ताल ६५ (जया) जाही, अरणी ६. २५ (जलाशय)ताल,गॉ. ७४ (जय्य) जिसको जीत डर की जड़ सक ५९ २३ (जलशुक्कि) सूती ३६ (जरण) जीरा १० (जलोच्छवास) वहा- ४२ (जरत) बूढ़ा नार, पऊ ६१ (जरदव) बूढाबैल २२ (जलौकस्) जोंक ४१ (जरा) बुढ़ापा २२ (जलौका) जोक ३८ (जरायु)ओझरी जिस २५० ३६ (जल्पाक) अनुचित से गर्भ धंधा रहता है बोलनेवाला ८२ ९२ २७३ १२ (जयन) जीति २१२ १३५ १३४ अमरकोशादर्श। ७ पृष्ठ पृष्ठ की स्त्री रेंदा का फल श्लोक श्लोक २६८ १०७ (जल्पित) कहाहुआ २९८ ,६१ (जातोक्ष) कलोर ६५ (जव) वेगवाला, ज- १४३ ७२ (जानु) घटुन ल्दी, शीघ्र २३२ ११ (जावाल) गड़रिया ९८५ ४५ (जवन) बड़ेवेगवाला, १३३ ३२ (जामातृ) दामाद जल्दबाज ३१८ १४२ (जामि) वहिन, कुल १५४ १२० (जवनिका) कनात (जवा) गुड़हर ८१ १९ (जाम्बव) जामुनि,फ- ४५ (जवाधिक) बड़े वेग- वाला २२६ ६५ (जाम्बूनद)लोना,सुवर्ण ६१ - ३१ (जनुतनया) गंगा १५५ १२६ (जायक) पीलाचन्दन २७५ १६ (जागर) वेच,जागना १२६ ६ (जाया) स्त्री २७५ १९ (जागरा) जागना |२३३ १२ (जायाजीव) नट, बे- २४९ ३२ (जागरित)जागनेवाला डिआ २४९ . ३२ (जागरूक)जागनेवाला १३४ ३८ (जायापति) स्त्री-पुरुष २७५ १६ (जागा) जागना १३७ ५० (जाय) दवाई, इलाज ५३ ११ (जांगलिक) विपवैद्य १३३ ३५(जार) दूसरापति,छिनार १६२ ७३ (जांधिक) हलकारा १३३ ३६ (जारज) छिनारा से ३१ (जात) जाति उत्पन्न पुत्र १२ ५४ (जातवेदस्) आगि १८ (जाल)जाल, समूह, २२६ ९५ (जातरूप)लोना,सुवर्ण १६ (जातापत्या)प्रसूता, हुईकली, दम्भ सौरिहाई स्त्री १६ (जालक)नई कली ३१ (जाति)जाति,चमेली २३३ १४ (जालिक) जालसे सामान्य, जन्म शिकार करनेवाला, १९ (जाती)जातीफल व्याध,मल्लाह १५७ १३३ (जातीफल) जायफर १०२ १९८ (जाली) चिचिंड़ा १५७ १३३ (जातीकोश) जायफर २३३ १६ (जाल्म)नीच, अवि. ३४७ ४ (जात) कदाचित् कभी चारी,विना विचार २३६ २९ (जातप) लाहकी वस्तु काम करनेवाला खिड़की, कुछ फूली अमरकोशादश। पृष्ठ वन्दाल, पर्वत पृष्ठ श्लोक श्लोक ९० (जिगी) मजीठ मूरि २४६ २० (जिघत्सु) मँखा ८२(जीवन्तिका)ॉदा,गुर्च १९३ ७७ (जित्वर) जीतनेवाला १०८ १४२ (जीवन्ती) डोड़ी, १३ (जिन) बुद्ध जीवंती ६ १३ (जिप्णु) इन्द्र,जीतने १०८ ११२ (जीवा) डोड़ी,जीवंती वाला २०३ २० (जीवातु ) सजीवन- २५९ ७१ (जिह्म) टेढ़ा,कुटिल, मूरि, जिलाना 'आलसी २३३ १४ (जीवान्तक) चिड़ी- ८ (जिझग) साँप, सर्प मार १४७ ९१ (जिह्वा) जीभ, जवान २०३ १(जीविका)जीविका, • १३५ ४२(जीन) बूढ़ापुरुष रोजगार ७ (जीमत)बादर, मेघ, २०३ २० (जीवितकाल )उत्तर, आयु २१२ ३६ (जीरक) जीरा ३८ १३ (जुगुप्सा) निन्दा १३५ ४२ (जीर्ण) वृढ़ापुरुप १०७ १३८ (जङ्ग) विधारा १५३ ११५ (जीर्णवस्त्र) पुराना २७ (जहू) नुवाविशेष कपडा २८० ३६ (जति) वेग २७२ ९ (जीर्णि) पुरानापना २८० ३६ (जूर्ति) ज्वर चुढ़ापा ३५ (जृम्भ) जमुहाई २४ (जीव)वृहस्पति,प्राणी, ५० ३५ (जम्भण) जमुहाई ४४ (जीवक) विजयसार, १६२ ७४ (जेतृ) जीतनेवाला, जीवक शत्रुके ऊपर चढ़ाई ૬૨૨ ३५ (जीवंजीव) चकोर करनेवाला ५५ ३ (जीवन) पानी,जी. २१७ ५६ (जेमन) भोजन विका, प्राणधारण १९२ ७४ (जेय) जीतने के योग्य १०८ १४२(जीवनी)डोड़ी,जीवंती १९२ ७४ (जैत्र) शत्रुके ऊपर १०८ १४२ (जीवनीया) डोड़ी, चढ़ाई करनेवाला जीवंती ७ (जैमिनीय) मीमांसा २०३ २०(जीवनौपध) सजीवन जाननेवाला ८६ अमरकोशादर्श। पृष्ट पृष्ठ . २६६ श्तोक श्लोक १४ (जैवातृक)बड़ी उमर २० १६ (ज्योत्स्ना) चाँदनी, वाला, चन्द्रमा,कुश उजेरिआ १५६ १२७ (जोगज) गूगुर ५ (ज्योत्स्नी) उजेरीरात, ३४५ २५० (जोपम् ) सुख, चुप चिचिंड़ा चाप रहना १४ (ज्योतिपिक)ज्योतिषी ५ () पण्डित १३९ ५६ (ज्वर) ज्वर, बुखार २६६ ९८ (ज्ञपित)जानाहुआ १२- ५४ (ज्वलन) आगि ९८ (ज्ञप्त) जानाहुआ ५० (चाला) आगिकी ३१. १ (ज्ञप्ति) बुद्धि १७८ १५ (ज्ञानसिद्धान्त) शास्त्री ३४ (जाति)जातिवाला १०४ १२७ (झटामला) भूमिआ- २४९ ३० (ज्ञातृ ) जाननेवाला मला अॅवरी १३३ ३५ (ज्ञातेय) जातिबालों ३४७ २ (झटिति) जल्दी, शीघू का भाव वर्ताव ६ (ज्ञान), मोक्षयद्धि ८(कमर) वाजाविशेष ९७८ १४ (ज्ञानिन् ) ज्योतिषी ३५५ १० (मल्लरी)झालरि,हुडक २ (ज्या) पृथ्वी, रोदा ५८ १९ (झप) मछली २७२ । ६ (ज्यानि )पुरानापना, १०२ १९७ (झपा) ककहीका वृक्ष, चुढ़ापा नागवला ४३ (ज्यायस्) बहुत घर्ष rey ३९ (झाटल) कालीपॉढरि वाला,चूड़ा, स्तुतिक-३६६ ३८ (झाटलि) मोर, वृक्ष रनेके योग्य,श्रेष्ठ ४० (झावुक) झाऊ १६ (ज्येष्ठ) अति श्रेष्ठ, ९३ ७५ (झिण्टी) पियावासा ज्येष्ठमहीना २२११, २६. (झिल्लिका) झींगुर १२१ २९ (ज्योतिरिङ्गण) जुगनू १२१ २९ (मीरुका) झीगुर १०९ १५० (ज्योतिप्मती) माल- ६ (८) काँगनी २३८ ३४ (टंक) पत्थरफोड़ने ३४० २२९ (ज्योतिस् ) नक्षन,प्र- की टॉकी, अहंकार को तोड़नेयाला ५ (मर) झरना - ३२) १ २७ M काश, दृष्टि १० अमरकोशादर्श। पृष्ठ श्लोफ एलोक १२३ ३६ (टिट्टिभक) टिटिहिरी ना,बहुत समाप्तवाला ७(टीका) कठिनशब्दों वाक्य, वृक्षकी जांघा, का अर्थ मायाआधिक्य,उपताप ५६ (दण्डक) सरिवन १०० १०६ (तण्डुला) वायुभिरंग (ड) १०६ १३६ (तण्डुलीय) चौराई २७३ १४ (डमर) लूटना ४ (तत) वीणा,वाजा, १३ (डमरु) डमरुवामा चौड़ाई,फैलाव १८७ ५२ (डयन) होला,जनाना ३४७ ३ (ततस्) हेतु, कारण स्थ, जनानी गाड़ी १८१ २६ (तत्काल)वर्तमानकाल ८६. ६०(हु) बड़हर २५६ १६ (तक्रिय) विना तन- ४३ ८ (डिण्डिम)वाजाविशेष स्वाह काम करनेवाला, २७३ १४ (डिम्ब) लूटना हड़ करनेवाला १२३ ३६ (डिम्भ) वालक, मूर्ख | २४३ ९(तत्पर) किसी विषय में १३५ ४१ (डिम्भा) अति छोटी लगे चित्तवाला कन्या ४३ ९(तत्त्व) धीरे २ नाचना, ५१ ५ (डुण्डभ) डैडहा तौंप समता (ढ) ९ (तया) तैसाही, समता ४२ ६ (टका) डोल, डका ३ १३ (तथागत) बौद्ध (त) २२ (तथ्य) सत्य ५३ (तक)माठा, जिसमें | ३५२ २२ (तदा)तष चौथाई पानीमिलाहो १८१ २९ (तदात्व)वर्तमानकाल ૨૮ર (तक्षक)सॉपविशेष बढ़ाई ३५२ २२ (तदानीम्) तब २३२ ९(तक्षन) बदाई १३१ २७ (तनय) पुत्र ७(तट) तीर, फिनारा १४२ ७१ (तनु)देह,मिहीं,पतला, ३० (तटिनी) नदी २८ (तडाग) ताल १९० ६४ (तनुत्र) कॅबॅच, पखतर ६ (तडित्) विजुली १४२ ७१ (तनू) देह -७ (तडित्वत्)नादर, मेघ | २६६ ६६ (तनकृत) पतला किया, ३३ (तण्डक)खेडरेचा,फे- छोला खाल,विरल अमरकोशादर्श। म कुटुम्ब का कार्य श्लोक पृष्ठ श्लोक ५४ (तनूनपात) आगि ५१ ३ (तमिस) अन्धेरा १२३ ३७ (सनूरह)पंख, पक्ष, २५ ५ (तमिस्रा) अन्धेरीरात रोम,रोवां ४ (तमी) रात २३६ २८ (तन्त) सूत | ३०५ ८९ (तमोनु)चन्द्रमा, २०७ १७ (तन्तुभ)सरसौ आगि, सूर्य १४ (तन्तुवाय) मकरी,को- ३४२ २३७ (तमोपह) चन्द्रमा, री.ज्वलाहा आगि,सूर्य ३२८ १८४ (तन्त्रस्वाधीन, तन्त्र ११५ २ (तरक्ष) चीता, तेंदुआ शास्त्र, ज्वलाहा, वस्त्र, ५(तरंग)लहर ६१ ३०(तरंगिणी) नदी १५२ ११२ (तन्त्रक) नवावस्त्र १८४ ४२ (तरण) हाथीकी झूल ६४ ८२ (तन्त्रिका) गुर्च २३ ३० (तरणि) सूर्य , घीफ- ३७ (तन्दी) निद्रा,आलस्य, मारि, नाव ५६ ११ (तरपण्य)खेवा,उतराई २८ १९ (तप) ग्रीप्मतु १५० १०२ (तरल) चञ्चल, हारके ३१ (तपन) सूर्य, नरक वीचकी पड़ीमणि विशेप २१५ ५० (तरला)लप्सी,पनिहा २२६ ६४ (तपनीय) सोना,सुवर्ण भात २७ १५ (तपस्)माघमास, कृच्छ् १४ ६५ (तरम्) वेग,पराक्रम, सान्तपनादिवत घल १५ (तपस्य) फागुन मास, |११० ६३ (तरस) मांस ४५ (तपस्विन्) तपस्वी | १८२ ७३ (तरविन्) जल्दवाज, १०६ १३४ (तपस्विनी) जटामासी वेगवाला,शरवीर २२ २६ (तमम् ) राहु, अन्धेरा, ५६ १० (तरि) नाव गुणविशेष ५ (तरु) वृष ४ (तमस्विनी) रात १३५ ४२ (तरुण) युवा जपान ६८ (तमास)तमालवृष, | १२७ ८(तरूपी) नवानन्त्री तमार ३१ ३ (तक)तर्क, विचार १५५ १२४ (तमालपत्र)तिलकवृक्ष ९० ६५ (तीरी) जाही भ्रमसे मुरझाना, . २५ अमरकोशादर्श। पृष्ठ पाँखी का वृक्ष डेबुआ . . पृष्ठ श्लोक श्लोक ८१ (तर्जनी) अंगुठे के ८६ ४६ (तापसतरु) गोंदी, पास की अंगुली ६१ (तर्णक)जल्दीका वि. ९१ ६८ (तापिच्छ) तमालवृक्ष आया बछड़ा ४० (तामरस) कमल २११ ३४ (तर्दू )कछुलिविशेष, १०४ १२७ (तामलकी) भूमिआ- मला,अॅवरी ५६ (तर्णण) तृप्त होना, २५ ५(तामसी) रात अघाना, पितरोंको ज-२२६ ६७ (ताम्रक) तांबा लादि देना ५(ताम्रकी) अञ्जननाम २१ (तर्मन) यज्ञखम्भ का दिग्गजकी स्त्री शिरा, अग्रभाग २३२ ८ (ताम्रकट्टक) ठठेर ८४ (तल) नीचे,स्वरूप, ११८ १८ (ताम्रचूड़) मुर्गा लोहेका दस्ताना १०३ १२० (ताम्बूलवल्ली) पान ३१४ १२६ (तलिन) विरल,थोडा ९०३ १२० (ताम्बूली) पान ३१५ १३० (तल्प) पलंग, अटारी, ४२ २ (तार)ऊँचासेवर,अच्छा स्त्री मोती २७ (तल्लज)अच्छा, १२ (तारकजित) स्वामि- ४८ २८ (तर्प) इच्छा, प्यास कार्तिक २६६ ९९ (तष्ट) छोलाहुआ,प २१ (तारका)नक्षत्र,आंखि का तिल, पुतली ૨૭૬ २४ (तसर) कोरीके पाई २१ २१ (तारा) नक्षत्र पसारने का नाम १३५ ४० (तारुण्य) जवानी २३५ २४ (तस्कर) चोर ३० (ताय) गरुड़, घोड़ा १० (ताण्डर) नाच २२७ १०२ (ताक्ष्यशैल, रसात ૨૨૨ २८ (तात) पिता ९(ताल)काल औरक्रिया १५ (तान्त्रिक)शास्त्रका का मान,ताड़कावृक्षा सिद्धान्त जाननेवाला, हरताल बीचकीअंगुली शास्त्री और अंगूठा से नापा १५ (तापस) नपस्सी चीता ९ तला किया अमरकोशाशे। शिरका भूपण , पृष्ठ रलोक श्लोक १५० १०३ (तालपत्रोतर्की-कन- ८५ ३६ (तिन्दुकी) तिंदुआ, १९ (तिमि) बड़ीभारी १०३ . १२३ (तालपर्णी) तालीस- मछली पत्र, मुरेठी २० (विमिगिल)तिमिको- १०३ १२१ (तालमूलिका) मूसरि खाजानेवालीमछली १५९ १४० (तालबन्तक) बैना, २६८ १०५ (तिमिन) वोदा,गीला पंखा ३ (तिमिर) अन्धेरा ५ २४ (तालांक) बलदेव ३४६ २५५ (विरस्) अन्तद्धान, ११४ १७० (ताली) आमला, ताड़ तिरछा का वृक्ष १५४ १२० (तिरस्करिणी)नात ९१ (तालु) तारू २२ (तिरस्क्रिया) अनादर, ३४४ २१५ (तावत्) सब, अवधि, ८४ ३३ (तिरीट)लोध,लपेटना, प्रमान, निश्चय ९ (तिक्त) तीत, कई १३ (तिरोधान) झांपना १११ १५५ (तिक्तक) परवर २०१ १११ (तिरोहित)छिपाहुआ २५ (तिक्तशाक) वारुण, २५० ३४ (तिर्यच् ) तिरछाजा- घरना नेवाला २४ ३५ (तिग्म) बड़ा गरम १६ (तिल) तिल २०९ २६ (तितउ) चलनी ४० (तिलक)तिलकवृक्ष, २४ (तितिक्षा) सहना तिल, पेट में स्थित २४९ ३१(तितिक्ष)पहनेवाला, जलकी जगह,ललाट गमखोर में चन्दनादिसे किया १२२ ३६ (तित्तिरि) तित्तिर तिलक, काला नमक १ (तिथि) तिथि ४६(तिलकालक) तिला २६ (तिनिश) तिनिस, तें- देहका १५७ १३३ (तिलपी)लालच. ४३ (तिन्तिड़ी) अमिली न्दन, देवीचन्दन २१२ : ३५ (तिन्तिडीक) चूक ૨૦૮ १९ (तिलपिज)निष्फल, ८५ ३८(तिन्हुक) तेंदुआ तिल । - अमरकोशादर्श। ला खेत तोदारा पृष्ठ श्टोक पृष्ट श्ताक १९.(तिलपेज) निष्फल ९७ ६५ (तुत्था)गुजरातीइला. तिल यची, नील ५(तिलित्स) सांपविशेष २२७ १०१ (तुत्थाअन) तृतिया २०४ ७ (तिल्य) तिलत्रोनेवा- १४४ ७७ (तुन्द) पेट २३४ १९ "तुन्दपरिमृज)आलसी ८४ ३३ (तिल्व) लोध १३६ ४४ (वन्दिक)बखेपेटवाला, २२ (तिष्य) पुप्यननत्र, तोदारा कलियुग (१३६ ४४ (तुन्दित)बड़े पेटवाला ५७ (तिष्यफला) अँवरा तोदारा २४ ३५ (तीक्ष्ण ) बड़ागरम, १३६ ४४ (तुन्दिन)बड़े पेटवाला, लोहा, विप, युद्ध, तेज तौदारा રૂ ३१ (तीक्ष्णगंधक)सहिजन १३६ ४४ (तुन्दिल)बडेपेटवाला ७ (तीर) किनारा ३०४ ८६ (तीर्थ) पौशाला, बौद्ध- १०५ १२७ (तुन्न) तुनि रदित शास्त्र, ऋषियों २३१ ६ (तुन्नवाय) दरजी से सेवित जल, पढ़ाने | १०५ १३१ (तुवरिका) अर्हरी वाला गुरू, काशीआ- २०० १०६ (तुमुल) परस्पर बाधा दि तीर्थ ६८ (तीव) अतिशय १११ १५६ (तुम्बी) लौकी ५४ ३ (तीनवेदना)अतिपीड़ा १८५ ४३ (तुरग) घोड़ा ३४३ २४१ (तु)भेद,निश्चय, पाद-१८५ ४३ (तुरंग) घोड़ा पूरण १८५ ४३ (तुरंगम) घोड़ा २५ (तुंग)नागकेसर, ऊंचा १६ ७२ (तुरंगवदन) किन्नर १०७ १३९ (तुंगी) चवई २७० २ (तुरायण)आसंगवचन २५६ ५६ (तुच्छ) खाली १. ४५(तुरासाह) इन्द्र ८९ (तुण्ड) मुख १५६ १२६ (तुरुक) लोचान १०२ ११६ (तुण्डिकेरी) कॅदुरू, २२४ ८७ (तुला)१०० पल १५२ १०६ (तुलाकोटि)विछिया २२७ १०१ (तुत्य) रसोत २३८ ३७ (तुल्य) बराबर, सदृश होनेवाला, युद्ध १४६ कपात अमरकोशादर्श। पृष्ठ । २ २० श्लोक श्लोक ५५ (तुल्यपान) साथपीना ११२.१६० (तृणध्वज)वाँस ३३ E (तुवर)कयाय रस ११४ १६८ (तृणराज)तारवृक्ष F8 ५८ (तुप)बहेड़ा, भूसी ६१ ६९(तृणशून्य) वेला २० १८ (तुपार) पाला ११४ १६८ (तृण्या) खरका समूह १० (तुपित) देवताविशेष ०५ ९ (तृतीयकृत) तीन वाह १८ (तुहिन) पाला जोता खेत' ८८ (तूण) तरकस १६४ ३९ (तृतीयाप्रकृति) हिजरा १६६ ८९ (तूणी) तरकस २६७ १०३ (तृप्त) हर्षित, खुशी ८८ (तूणीर) तरकस २१७ ५६ (तृप्ति) अघाना ४१ (तूद)तूत का वृक्ष ४८ २७ (तम्) पियास, इच्छा १४ ६६ (तूप)जल्दी, शीघू २४७ २३ (तृष्णच्) लोभी १२ (तूल) रुई, सहतूत २९५ ५१ (तृष्णा)पियास, इच्छा २३७ ३३ (तूलिका) सलाई ११२६१६१ (तेजन) वॉस ३२४ १६४ (तूवर) जवानी में भी ११२ १६२ (तेजनक) शरपत मोछ दाढ़ी जिसके न ९५। ८३ (तेजनी) धनुप बनाने निकली हो वह पुरुष, की बोडी, चिन्ता सींग होने के समय जि- १४० ६२ (तेजस्) काम,वीर्य, स घेलके सींग न नि प्रभाव, कान्ति, वल कलीहों वह बेल २६४ '२१ (तेजित) तेज किया १५१ ३९ (तूष्णीक) चुप रहने हुआ वाला २७८ २९ (तेम)वोदा करना ३४८ ९ (तृप्णीकम् ) चुपरहना २१४ ४४ (तेमन) कढ़ी ३४८ ९(तूप्णीम)चुप रहना २३७ ३३ (तैजसावर्तिनी) धातु २५१ ३६ (तूप्णींशील)चुप रहने गलाने की घरिआ वाला १२४ ४४ (तैचिर) तित्तिरों का ११३ १६५ (तृण)गाँडर आदि खर समूह ११४ १६९ (तृणदुम)तार,नारिकेर, १५७ १३२ (तैलपर्णिक) चन्दन- सुपारी,हिन्ताल,खजूर, विशेष केतकी, नारी १२० १२७ (तेलपायिका) गोदर - :

२६ अमरकोशादर्श। पृष्ठ 4 {-- खेत 7 पैना,चावुक '२०६ १ पृष्ठ श्लोक श्लोक २०४ ७ (तैलीन) तिलवोने का या हुआ २६८ १०६ (त्रात) रखायाहुआ १५ (तैप) पुसमाप्त ११० १५० (प्रायन्ती) चिरायता १३१ २८ (तोक) वालक का फल १९८: १८ (तोकक) चातक ११० १५० (वायमाणा)चिरायता २०७ १६ (तोक्य) हरायव का, फल ३६२ ३० (तोटक) छन्दविशेष २३६ २६ (वायुपोरांगाकी चीज ४१ (तोत्र) कोड़ाकादण्डा, ४६ २१ (नास) भय, डर १४४ ७६ (त्रिक) रीर के नीचे १२ (तोदन) पैना, चावुक तीन हाड़ोंसे वनाहुआ ६३ (तोमर) गुर्ज, गदा स्थान ५५ ५ (तोय) पानी ७५ २ (त्रिक)त्रिकूटपर्वत १०१ १११ (तोयपिप्पली) जल- २२९ १११ (त्रिकट) सोठि पीपरि पीपरि मिर्च इनसब का मि. । ७३ १ १६ (तोरण) वाहिरी दर• लान ६० २७ (त्रिका) गड़ारी ४४ ६१० (तौर्यत्रिक) नाच गान ७५ २ (त्रिकूट) त्रिकूट पर्वत घाजा इन ३ कानाम ३६७ ४१ (निखद) तीनखाटोंका २२६८ १०७ (त्यक्त) त्यागा समूह १६७ ३१ (त्याग) दान ३६७ ४१ (निसदी) तीनखाटों ४७ २३ (त्रपा) लज्जा का समूह २२८ १०५ (त्रपु)रांगा ६ (त्रिगुणारुन) तीनवार ३५ ३ (त्रयी) क् साम य- जोतासेत जुर्वेद, वेद ३६७ ११ (त्रितक्ष) तीनपढ़ाइयों २६० ७४ (वस) चलने वाला का समूह २७६ २४ (त्रसर) कोरी का पाई ३६७ ११ (त्रितक्षी) तीनदइयों पसारना,सृत लपेटना २६ (वस्तु) डरनेवाला ७ (त्रिदश) देवता २६८ १०६ (त्राण) रसाना,रसा. २ ६ (निदशालय) स्वर्ग वाजा का समूह २ अमरकोशादर्श। ९ ७ पृष्ठ पृष्ठ 7 or २ ७ श्लोक श्लोक ६ (त्रिदिव) स्वर्ग १०४ १२५ (त्रुटि) गुजराती इला' ७(त्रिदिवेश) देवता यची, सूक्ष्म, वारीक- ६१ ३१ (त्रिपथगा) गंगानदी अक्षर का रहिजाना, १०० १०८ (त्रिपुट)श्वेत निधारा, थोड़ा, संशय, कालवि, गुजराती इलायची शेप ३४ (त्रिपुरान्तक) शिव १६४ २२ (त्रेता) दक्षिणाग्नि २२९ १११ (त्रिफला) अॅवरा, हर्र, गार्हपत्य आहवनीय चहेरा इन तीनों का समूह, १ ६ (त्रिविष्टप) स्वर्ग दूसरा युग १०० १०८ (त्रिभण्डी) श्वेतत्रि- १२३ ३७ (घोदि) चोंच धारा ३. (त्र्यम्बक) शिव २५ ४ (त्रियामा) रात १५ ६९ (त्र्यम्बकसख) कुबेर ३३ (त्रिलोचन) शिव |२२९ १११ (यूपए) सोंठि पीपरि १७४ ६१ (त्रिवर्ग ) धर्म अर्थ मिर्च इन तीनों का काम,नीतिज्ञ लोगों के मिलान कृपी आदि अष्टवर्ग २२९ १०९ (वक्षीरी) वंशलोचन की हानि वृद्धि समता १०६ १३१ (त्वपत्र)तज २० (त्रिविक्रम) विष्णु ११२ १६० (त्वक्सार) वांस १०८ (त्रिवृत्) श्वेतत्रिधारा १४० ६२ (त्वच्) चकला,साल १०० १०८ (त्रिवृता) श्वेतनिधारा १०६ १३४ (त्वच) तज २५ ३ (त्रिसंध्य) दिनके तीन | ११२ १६० (स्वत्रिसार) वांस भाग २७७ २६ (चरा)वेग,जल्द ९ (त्रिसीत्य) तीनवाह १४ ६५(वरित)जल्लवाज,शीघ्र जोता सेत ४० २० (वरितोदित) शीघउ- ३१ (त्रिस्रोतस्) गंगानदी वारण कियाहुआ २०५ ६ (त्रिहल्य) तीनवाह | २६६ ६६ (लष्ट)ोलाहुआ,पतला जोता खेत कियाहुआ २१६ ६८ (निहायनी) तीनवर्ष २३२ ६ (वष्य) पदई,विपक- की गो २०५ र्मा, सूय्ये अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ श्लोक श्लोक ३४ (विप्) कान्ति,शोभा भात २३ ३० (विपांपति) सूर्य २३ ३१ (दण्ड) सूर्य के पास १९६ ९० (सोतलवारकाकब्जा रहनेवाला ग्रहविशेप, (द) ताइन, लाठी,खेलरि. १२१ २८(देश)वनकीमाछी,डांस सजादेना, एकाएकी १६० ६४ (दंशन)कॅबॅच, बखतर सैन्यका पड़ जाना ६५ (दंशित) कवच पहिरे, १३ ६० (दण्डधर) यमराज या मन्त्रादि से रक्षित | ३६ ५ (दण्डनीति)नीतिशास्त्र १२१ ५८ (दंशी) मसा २२१ ७४ (दण्डविप्कम) खंभा, ११५ ३(दंष्ट्रिन्) सुअर जिस में सैलर बाँधी २३४ १९ (दक्ष) चतुर जातीहो २६३ ८ (दक्षिण) दहिना,सीधे | २१६ ५३ (दण्डाहत) माठा स्वभाववाला, उदार, १०६ १४७ (दन) चकवड़ दिशा १३९ ५६ (दगुण) दादरोगवाला १८९ ६०(दक्षिणस्थ) सारथी, | १३९ ५९ (ददुरोगिन्) दादरोग सारथी के वंशवाले वाला १६४ २१ (दक्षिणाग्नि ) यज्ञकी ८१ २१ (दधित्य) कथा अग्नि ८१ २१ (दधिफल) कैथा । २४३ ५ (दक्षिणार्ह)दक्षिणापाने २१५ १८ (दधिसक्तु) दही से के योग्य सानासत्तू ૨૩ ५ (दक्षिणीय ) दक्षिणा ३ १२ (दनुज) असुर, दैत्य पाने के योग्य १४७ ६१ (दन्त) दांत २३५ २४ (दक्षिणेमन) जिसमृग ८७ ४९ (दन्तधावन) खयर के दहिने अंगमें व्याघ १८९ १० (दन्तभाग) हाथियों का ने वाणमाराहो अगिला भाग २४३ ५(दाक्षिण्य ) दक्षिणा ८१ २१ (दन्तशठ) केथा, जै. पाने के योग्य २६६ ६६ (दग्ध)जराहुआ १०७ ११० (दन्तराग) अंमलो- २१५. १९ (दग्धिका) जराहमा नियाँ भीरी नींबू अमरकोशादर्श। पृष्ठ २५७ श्लोक श्लोक १८२ ३४ (दन्तावल) हाथी मावास्या के दिन का १०८ १४४ (दन्तिका) देतिआ यज्ञ,पूजन १८२ ३४ (दन्तिन) हाथी ६ ( दर्शक) द्वारपाल, ८ (दन्दशूक)सर्प,सांप डयोढीदार ६१ (द) मिहीं, पतला २७८ ३१ (दर्शन) देखना २७० ३ (दम) दण्ड, इन्द्रियों ८० १४ (दल)पत्ता कानिग्रह ३३४ २०५ (दव) वन २७० ३(दमथ) इन्द्रियों का २५९ ६६ (दविष्ठ) अतिदूर, निग्रह बहुत दूर २६५ ६७ (दमित) इन्द्रियजित २५८ ६९ (दवीयस्) अतिदूर १३ ५७ (दमुनस्) आगि बहुत दूर १३४ ३८ (दम्पती) स्त्री पुरुष १४७ ९१ (दशनो दाँत ४८ ३० (दम्भ) कपट १४७ ९० (दशनवासस्) ओठ ४८ (दम्भोलि)इन्द्रकावज, ३ १४ (दशवल) बौद्ध २१८ ६२ (दम्य) जवान बछड़ा | १३५ ४३ (दशमिन्) अति घूढ़ा ४५ १८ (दया)करुणारस,रूपा. पुरुप २४५ १५ (दयालु) दयावान् ३०४ ८७ (दशमीस्थ) क्षीणराग, २५५ ५३ (दयित)प्यारा,प्रिय रसरहित, आत वृद्ध ४६ २१ (दर) भय, डर गड़हा १५३ ११४ (दशा) कपड़ाका छीरा, ९ (दरत्) म्लेच्छजाति अवस्था २५४ ४६ (दरिद्र) दरिद्री,गरीव २७७ ११ (दस्यु)चोर,शत्रु ६ (दरी) कन्दरा ११ ५२ (दस)स्वर्गवैद्य २४ (दईर) मेढ़क १२ ५६ (दहन) आगि २५ (दर्पक) कामदेव २१ (दाक्षायणी) अश्विनी १५९ १४० (दर्पण) सीसा आदि तारा ११३ १६६ (दर्भ) कुश ११९ २२ (दाक्षाय्य) गिद्ध २११ ३४ (दवि) कछुलि ६४ (दाडिम) अनार ५२ ८(दर्वीकर) सर्प, सॉप, ८७ ४९ (दाडिमपुष्पक) गुला- २६ ८ (दर्श)अमावास्या, अ नार , अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ ३ में उत्पन्न श्लोक श्लोक ३५३ ६ (दाण्डपाता) क्रिया- १६ २(दारुण) भयानक रस विशेष ९९ १०२ (दारहरिद्रा) दारुहलदी २६७ १०३ (दात)काटाहुआ २११ ३४ (दारुहस्तक) कछुलि २२ (दात्यूह) कालाकौआ विशेप २०६ १३ (दात्र) हँसिआ ११८ १८ (दार्खाघाट) कठफोर १६७ ३१ (दान) दान,हाथी का वा पक्षी मद, चौथा उपाय १०३ ११९ (दार्विका) गोभी ३ १३ (दानव)असुर, दैत्य ९९ १०२ (दार्ची) दारुहलदी ९(दानवारि) देवता ३३४ २०५ (दाव) वनकी आगि २४३ ६ (दानशौण्ड)बहुतदानी ६२ ३६ (दाविक) देविका नदी २७० ४६ (दान्त)तपस्याका क्लेश सहने वाला, इन्द्रिय- ५७ १५ (दाश) मल्लाह जित | १०५ १३१ (दाशपुर) मोथा २७० ३ (दान्ति) इन्द्रियनिग्रह २३४ १७ (दास) टहलू २५१ ४० (दापित) रुपया देकर ६३ ७४ (दासी) काले फूलका साधाहुआ मनुष्य पियायासा २२१ ७३ (दाम)ग्यरॉव, रस्सी ३६१ २७ (दासीसम) दासियों २२१ ७३ (दामनी)वरायल, डोरी २३४ १७ (दासेय) टहलू १८ (दामोदर) विष्णु २३४ १७ (दासेर) टहलू २८५ १७ (दाम्भिक) मायावी, २५१ ३६ (दिगम्बर) नंगा छली १६६ ८८ (दिग्ध) चन्दनादि ८८ (दायाद) पुत्र, भाई लिप्त,जहरीला पाण आदि २६७ १०३ (दित) काटाहुआ ६ (दार) व्याही खी ३ १२ (दितिसुत) दैत्य २८६ ५ (दारक)बालक,भेदकर १३० २३ (दिधिप) उदरी स्त्रीका ५२ • ११ (दारद) विपविशेष पति २६६ १०० (दारित) फाराहुआ १३० २३ (दिधिपू) उदरी स्त्री ७९ १३ (दारु) देवदारु, काठ २४ २ (दिन) दिन कीसभा ४ ३०४ - १२६ अमरकोशादर्श। १०१ पृष्ठ पृष्ठ ६ . श्लोक श्लोक १२५ । '३ (दिनान्त) सांझ २४. ३४ (दीप्ति) कान्ति १.१ (दिव)आकाश,स्वर्ग १०१ १११ (दीप्य) मोरशिखा २४ २(दिवस) दिन २५६ ६९ (दीर्घ) लम्बा है ४३ (दिवस्पति) इन्द्र ६० २५ (दीर्घकोशिका) झिनवाँ ૨૪૮ ६ (दिवा) दिन मछली २२ -२८ (दिवाकर) सूर्य ६ (दीर्घदर्शिन) पण्डित २३२ १० (दिवाकीर्ति) चाण्डाल ५२ ८(दीर्घपृष्ठ) मॉप, सर्प १६ (दिवान्ध) उल्लूपक्षी ८९ ५७ (दीर्घवृन्त) सरिवन ११८ १६ (दिवाभीत) उल्लू | २४५ १७ (दीर्घसूत्र) देरसे कार्य ८(दिविपद) देवता करनेवाला,बहुत सुस्त २ ७ (दिवौकम्) देवता, चा- ६१ २८ (दीर्घिका) वावली तकपक्षी ३ (दुःख) पीड़ा, तकलीफ २५४ ५० (दिव्योपपादुक)देवता | १०१ ११४ (दुःप्रधर्पिणी) वनभांटा, १६ १ (दिश) दिशा बैंगन २ (दिश्य) दिशामें उ-३५० १४ (दुःपम) निन्द्यवस्तु ६६ ९१ (दु.स्पर्श)जवासा २४ १ (दिष्ट) समय, भाग्य ९७ ६४ (दुःस्पर्शा) भटकटेया २०२ ११६ (दिष्टान्त) मौत, मृत्यु | १५२ ११३ (दुकूल) रेशमी कपड़ा ३४९ १० (दिष्ट्या) आनन्द, क. | २१५ ५१ (दुग्ध) दूध ल्याण ९८ १०८ (दुग्धिका) दूधिया १० (दीक्षित )सोमवान् १०६ १४८ (दुदुम) हराप्याज यज्ञका यजमान ६ (दुन्दुभि)नगारा, तुरही, २१५ ४८ (दीदिवि) भात जुआ • २३ ३३ (दीधिति) किरण ६९ १७ (दुरच) खराव रास्ता २५४ ४९ (दीन) गरीव, दरिद्र ९७ ६२ (दुरालभा)जवासा २८४ १४ (दीनार)मोहर,अशरफी २९ २३ (दुरित) पाप १५९ १३६ (दीप)चिराग, दीवा ३२५ १७१ ( दुरोदर ) जुआरी, २८३ ११ (दीपक) जवाइनि,प्र- बाजी, जुआ (दुर्ग) कोट त्पन्न हुआ काश, मोरकी चोटी अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ नक्षत्र, ६७ वा हिंडोला ७८ -- श्लोक श्लोक तर्पण अंगुलियों के ९५ ८७ (द्रवती) मूसरि आगे किया जाताहे १९९ १०१ (द्रविण) सामर्थ्य, वल, १४ (दैवज्ञ) ज्योतिषी धन, सोना, सुवर्ण २० ( दैवज्ञा) शुभाशुभ २२५ ६० (दव्य) धन, सत्व,जीव, जाननेवाली गुणाश्रय पृथ्वीआदि, ९ (दैवत) देवतासमूह, आग्नि देवताओं की वस्तु २ (द्राक्) जल्दी ९५ (दोला) नील, डोली १०० १०७ (द्राक्षा) दाख २६९.११२ (दाधिष्ठ)अतिशयलंवा ५.(दोपज्ञ) पण्डित,वैद्य | १०६ १३५ (द्राविडक) कचूर ६ (दोपा) रात ५ (ह) वक्ष- २५३ ४६ (-दोपैकश्) केवल | ८८ ५३ (दुकिलिम) देवदारु दोप देखनेवाला १९६ ९१ (दुघन) मुग्दर १४४ ८० (दोस्) बॉह, भुजा |३५५ ६ (दुणी) कळूही २७ (दोहद) इच्छा १४ ६५.(दुत) शीघ्र, जल्दी, १३० २१ (दोहदवती गर्भवती, पिघलाहुआ, रसीला गाभिनि ५(दुम) वृक्ष १७ (युति) शोभा,दीप्ति १५५ १२६ (दुमामय ) लाही, में- २३ ३० (द्यमणि सूर्य हावर २२५ ६० (झुम्न) धन ८९ ६० (दुमोत्पल) कठचम्पा २४० १५ (यूत) जुआ २२४ ८५ (दुवय) तौल, नाप २४० ४४ (यूतकारक) जुआखे- ४ १७ (इहिण) ब्रह्मा लानेवाला १५ (द्रोण) यीछ, द्रोणा- २४० ४४ (यूतकृत) जुआ खेल- चार्य,परिमाणविशेष, नेवाला ३२ सेरको द्रोण क- ६ (यो) स्वर्ग, आकाश ३४ (द्योत)प्रकाश, घाम | ११६ २२ (दोपकाकोडोमकोआ २१५ ५९ (द्रप्स) पतला दही २२० ७२ (दोपक्षीरा) दशसेरदूध ४९ ३२ (द्रव) खेल,भागजाना देनेवालीगो ७८ . १ अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ २२० ५६ १६० २०५ ३२ का विचार १२३ २२ ३१ श्लोक श्लोक ७२ (द्रोणदुधा) दशसेर दूध ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य देनेवाली १५ (दिजराज) चन्द्रमा ११ (द्रोणी) डोंगी नाव, १०३ १२० (दिजा) गगनधूरि नील (दिजाति) ब्राह्मण १० (द्रौणिक ) दशशेर |३१५ १३३ (दिजिह्व) सांप, चुगुल विया परनेवाला खेत १२६ ५ (द्वितीया) दूसरी ४ (द्रोहचिन्तन) शत्रुता | १८२ ३४ (दिप) हाथी १८१ २७ (दिपाय) दूना दण्ड, ३६ (द्वन्द) जोड़ा, झगरा दूनी सजा ४८(दयातिग) दुःख सु. १८२ ३४ (दिरद) हाथी खादिसेरहित,व्यासा- १२१ ३० (दिरेफ) भेवरा दिमुनि २१६ ६८ (दिव) दोबरसकी ८४ (दादशांगुल) वीता बछिया २८ (द्वादशात्मन) सूर्य | १७७ १०(दिप्) शत्रु ३ (दापर) सन्देह, ती- | १७७ १०(दिपत् ) शत्रु सरायुग २१६ ६८ (दिहायनी) दोचरस १६ (दार) दरवाजा की बछिया १६ (दार) दरवाजा ८(दीप)रेता, टापू ६ (द्वारपाल) दरचाजेकी ६१ ३० (दीपवती) नदी रक्षा करनेवाला ११५ २(दीपिन् ) बाघ ६(दास्थ) दरवाजे पर १७७ १० (द्वेपण) शत्रु स्थित रहने वाला, | १५३ ४५ (देप्योवैर करने योग्य ज्योढ़ीदार १७९ १८ (द्वैध) बलवान् शत्रु से ६ (दास्थित) दरवाजेपर मिलजाना, निर्बल श- स्थित रहनेवाला,ज्यो त्रुको मारना दीदार १८७ ५३ (देप) वायके चमड़ासे ९(दिगुणाकृत) दो वाह मढ़ा हुआ जोताखेत १६६ १५ (द्वैपायन)व्यासमुनि ३३ (दिज) पक्षी, दांत, ९ ३६ (द्वैमातुर) गणेश ७३. १७६ १७६ १७६ २०५ अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ १ (धा) पर्वत श्लोक श्वक २२६ ९७ (दराष्ट) ताँचा ७४ (ध) २ (धर णि)पृथ्वी ३५७ ९७ (धट) तुलारांशि,तराजू ६५ २ (धरा) पृथ्वी ९३ ७७(चत्तूर) धूतर २ (धरित्री) पृथ्वी २२५ ९० (धन) धन, दौलत २९ २४ (धर्म) पुण्य, धर्म- १२ ५४ (धनंजय) आगि राज,न्याय, स्वभाव, १५ ६६ (धनद) कुवर आचार,सोमपीनेवाला १०५ १२८ (धनहरी) धनहरी २८ (धर्मचिन्ता) धर्मका १५ ६९ (धनाधिप) कुबेर विचार २४४ १० (धनिन्) धनवान् १७३ ५७ (धर्मध्वजिन) पाखं. २२ (धनिप्ठा) धनिष्ठा डी, बहुरूपियाब्राह्मण नक्षत्र २१२ ३६ (धर्मापत्तन) मिर्च १६१ ६९ (धनुर्धर ) धनुपधारी ३ १३ (धर्मराज)चौड,धर्म- (धनुर्मच्य) धनुष का राज युधिष्ठिर वीच ६ (धर्मसंहिता) स्मृति, १ ३५ (धनुप्पट) चिरोंजी धर्मशास्त्र ६९ (धनुप्मन्) धनुषधारी १२७ १०(धर्पिणी) छिनारि १६४ ८३ (धनुस्) धनुष ३५ (धव) पति, खयरक्ष, २१२ ३ (धन्य) पुण्यवान्,भा मनुष्य ग्यवान्, किस्मतवर ३४ १३ (धवल) उजलारंग ६६ ६ (धन्वन्) मरुस्थल,ध. २१६ ६७ (धवला) उजली गो नुप |१६५ २५ (पवित्र) हरिणके चम- ६६ ११ (धन्वयास) जवासा ड़े का पंसा,चना १९१ ६९ (धन्विन्) धनुष १०४ १२४ (धातकी) धवई, पर्वत ११२ १६२ (धमन) नरकुल से जो पेदाहो ६५ (धमनि) नाड़ी (धातु) मेंनशिलादि, १०५ १३० (धमनी) पहारी कफादि, रस, रक्रादि, ९७ (धम्मिल)मांधेहुयेपाल, एधिव्यादि, गन्धादि ज़रा गुण, इन्द्रिय,भू आदि .

अमरकोशादर्श । १०७ पृष्ठ पृष्ठ ४ हुआ,निन्दित नक्षत्र, आगि. श्लोक श्लोक १०४ १२४ (धातुपुप्पिका)धबई ३४३ २३९ (धिक )धिकार,निन्दा १७ (धातृ) ब्रह्मा २५१ ३९ (धिकृत) विकारा ६५ ४ (धात्री) दूध पिलाने वाली, पृथ्वी, अँवरा २१ २४ (विपण) बृहस्पति २१४ ४७ (धाना) वहुरी,गुड़ध- ३१ १ (धिपणा)युद्धि नियां १५४ (धिप्राय)स्थान, घर, १६१ ६६ (धानुष्क) धनुषधारी २०८ २९ (धान्य) यवधान आदि ३१ १ (धी) बुद्धि, समझ सनधान्य ३३ ८ (धीन्द्रियोज्ञानेन्द्रिय, २१२ ३८ (धान्याक) धनियाँ मन,कर्ण,नेत्र इत्यादि २१२ ३६ (धान्याम्ल) काजी ६ (धीमत्)पण्डित, यु- ३१३ . १२३ (धामन) घर,देह, का- दिवाला न्ति,प्रभाव १२८ १२ (धीमती) अति बुद्धि १०२ ११७ (धामार्गव) लहचिचि- वाली स्त्री रा, उजरे फूल वाली १५५ १२५ (धीर) कुंकुम,पण्डित तोरई १५ (धीवर) मलाह १६५ २४ (धाय्या) आगि जला- २७६ २५ (धीशक्ति) सेवाआदि ने का मन्त्र आठप्रकार की बुद्धि, १०० सम्पदा ४९ (धारा) घोड़ों की आ-१७५ १(धीसचिव) मन्त्री, स्कन्दित आदि पांच सलाही प्रकार की चाल २६३ ८७ (धुत) काँपताहुआ ७ (धाराधर) चादर,मेघ ११ (धारासम्पात) मेघ से १८८ ५५ (धुर) गाड़ी आदिकी निरंतर जलगिरना धुरी; भारा १२० २५ ( धार्तराष्ट्र) काली- २१६ ६५ (धुरन्धर) भारकस, चोंच व काले पेरवा. घली, गाडीका पेल ले हंस 1२१९ ६५ (धुरीण)भारकम, य- ९७ ९३ (धावनी) पिथयनि सी, गादीका चल २६ (धारणा) मर्यादा ३०(धुनी) नदी अमरकोशादर्श। पृष्ठ रेशमी वस्त्र श्लोक श्लोक २१९ ६५ (धुर्य) भारकस.वली, २२० ७२ (धेनुष्या)गिरौंधरीगों, गाडीका बैल रिहनकीगई गौ २६८ १०७ (धूत) कॉपाहुआ,त्या- २१८ ६० (धैनक) धेनुओं का गाहुआ समूह २६७ १०२ (धूपायित)सन्तापित, ४१ १(धैवत) स्वरविशेप, तपाया हुआ घोड़ेकी आवाज २६७ १०२ (धूपित)सन्तापित,त-१८८ ५८ (धीरुण) सवारी पायाहुआ १५२ ११३ (धौतकौशेय) धोया २६७ ५८ (धूमकेतु) आगि, धू. ममयी उत्पाती तारा १८६ ४८ (धौरितक) घोड़े की ७ (धूमयोनि) बादल पोई चाल ३४ १६ (धूमल) धूमिल ६५ (धौरेय)वली, भारक- २८१ ४३ (धूम्या) ऑकासमूह स, धुरिहाबैल, गाड़ी १७ (धूम्याट)भुजकैलपक्षी, लेचलनेवाला चैल भुजैटा १६६ (ध्याम ) रोहिसखर १६ (धूम्र) धूमिल २० (ध्रुवोउत्तानपादराजा ३३ (धूर्जटिन) शिव का पुत्र,डार पत्ताहीन ७७ (धूत) धतूर, जुआरी, वृक्ष,सदारहनेवाला, छली, दगावाज ताराविशेप, निश्चित २१६ ६५ (धूर्वह) गाड़ीका बैल ईश, महादेव, विष्णु, १६८ ६८ (धूलि) धुरि बरगद ३४ १३ (धूसर) कुछपीलारंग १०२ ११५ (ध्रुवा) सरिवन,बट- ३०१ ७२ (धति) धारणा, धैर्य पन के समान यज्ञ. २४८ पात्र विशेप, एकन- २५ ( कृष्णज्) बीट २२० ७१ (धेन) जल्दीकी व्या १९९ ६६ (वज) झण्डा नी गौ १६३ ७८ (ध्वजिनी) फोन १८३ ३६ (धेनुका) हधिनी,नई ४० २२ (ध्वनि)शब्द २६५ ६४ (धनित)वाजताहुआ MGM २५ (घृष्ट) डीठ ૨૨૮ कार का ध्रुवा व्याई गो अमरकोशादर्श। १०६ पृष्ठ पृष्ठ १२६ गला, पक्षी नरई का समूह ६७ श्लोप श्लोष शब्दकरता हुआ ८(नग्निका) कुमारी २६७ १०४ (घस्त) चुआ, गिरा कन्या, नंगी स्त्री २१ (ध्वांत) कौवा, प. ६ ५६ (नट)सरिवन, नट ४४ १० (नटन) नाचना ४० २२ (धान)शब्द १०५ १२९ (नटी) पारी ३ (ध्वान्त) बड़ा अन्धेरा ११२ १६२ (नड)नरकुल,नरई, (न) गड़हा ३४६ ११ (न) निषेध ११४ १६८ (नडसंहति) नरकुल १०२ ११५ (नकुलेष्टा) रासनि या नरई का समूह १५३ ११५ (नक्तक) फटाकपड़ा |११४ १६८ (नड्या) नरकुल या ३४८ ६ (नवम्) रात ४७ (नक्तमाल) कंजा १० (नपत्) बहुतनरकुल ५६ २१ (नक) जलमें रहने- होनेवाला देश वाला नाक १० (नइल) बहुत नरकुल २२ २१ (नक्षत्र) नचत्र होनेवाला देश १५१ १०६ (नक्षत्रमाला) २७ मो- २५९ ७१ (नत) टेढ़ा, नम्र तियों की एक लाख | १३६ ४५(नतनासिक) नकच- पटा १५ (नक्षत्रेश) चन्द्रमा २५१ १८ (नति) नमस्कार १०५ १३० (नख) नह, ककूदनि ६१ २९ (नदी) नदी ८३ (नखर) नह १३ (नदीमातृक) जिसमें २८७ १६ (नग) वृक्ष, पर्वत नदी के जल से अन्ना- २ (नगर) शहर, ग्राम दिहो वह देश ६६ १ (नगरी) नगर, शहर ४५ (नदीसर्ज)अर्जुनवृक्ष, वरेत १२२ ३४ (नगौफस्) पक्षी २५१ २३७ ३१ (नदी)चमड़ेकीरस्सी २४० ४२ (नग्नह) दारूकावीज, १३२ २६ (ननांह)पतिकी व. मतवाला, नंगे होकर हिन, ननद पुकारना ३४४ २४७ (ननु) विरोधवचन की माला ३६ (नग्न) नंगा अमरकोशादर्शी पृष्ठ झाना, श्लोक पृष्ठ श्लोक के कहने में, पॅछना, १४ ११ (नर्तक) नाचनेवाला निश्चय,आज्ञा, समु- ४३ ८(नर्तकी) नाचनेवाली सम्बोधन १० (नर्तन) नाचना ६ २९ (नन्दक) विष्णु की ६१ ३२ (नर्मदा) नर्मदानदी तलवार ४९ ३२ (नर्मन) क्रीड़ा, खेल ४६ (नन्दन) इन्द्रकावन (नल) गॉडर १०५ १२८ (नन्दिवृक्ष) तुनि का १५ ७१ (नलकूबर) कुवेरकापुत्र वृक्ष ११३ १६४ (नलद) गॉडर १०(नन्द्यावर्त) बँगला- ५८ १८(नलमीन) चेल्वा नुमा मकान मछली १३४ ३९ (नपुंसक) हिजरा ६३ ३९ (नलिन) कमल १३२ २९ (नप्त्री) पुत्रकीलड़की ६३ ३६ (नलिनी) कमलिनी १ (नभस् )आकाश, सा- | १०५ १२८ (नली) पवारी वन १९ (नल्स) ४०० हाथ अ, १२२ ३५ (नभसंगम)पक्षी, चि- र्थात् फरलांग डिया २६० ७७ (नव) नया १७ (नमस्य)भादवमास ६४ ४३ (नवदल) नयापत्ता ६४ (नमस्वत्)वायु, हवा | २१६ ५२ (नवनीत)नेनू, मक्खन ३५० १८ (नमस्) नमस्कार ६२ ७२ (नवमल्लिका) वर्षाका २३७ १०२ (नमसित) पूजित १०६ १४१ (नमस्कारी) लजालू २२० ७१ (नवसूतिका) जल्दी १६८ ३७ (नमस्या)पूजा,खातिर की व्यानी गो २६७ १०२ (नमस्थित) पूजित १५२ ११२ (नवाम्बर) नयावस्त्र १४ (नमचिमृदन) इन्द्र २६० ७७ (नवीन) नया २७२ २१६ ५२ (नवोद्धृत) जल्दीका १४७ ६३ (नयन) आंख निकालाहुआ मक्खन १२५ १(नर)मनुष्य,आदमी २६० ७७ (नव्य) नया ५३ १(नरक) नरक २०१ १९१ (नष्ट) छिपाहुआ ७० (नवाहन) कुबेर (नष्टचेष्टता) मूछी वेला (नय) नीति अमरकोशादर्श। पृष्ट . पृष्ठ पस्वीका आगि बुझ , श्लोक श्लोक १७३ ५६ (नष्टाग्नि) जिस त- १३८ ५४ (नाड़ीव्रण) नसूर,नस पर का घाव गयाहो २४५ १६ (नाथवत्) पराधीन ६३ (नस्तित) नाथा बैल ४० २२ (नाद) शब्द २१८ ६३ (नस्योत) नाथा वैल ८३ ३०(नादेयी) जलवेत, ३४९ ११ (नहि) निषेध, नहीं नारंगी, जाही, भुंइ- ३४९ ११ (ना)निषेध, नहीं जामुनि ६ (नाक)स्वर्ग, आकाश ३४४ २४६ (नाना) अनेक, दो १५ (नाक) बेमवरि २६४ ६३ (नानारूप) अनकरूप, १०१ ११४ (नाकली) रासनि हरतरहके १४ (नाग) सॉप, हाथी, २५१ ३८ (नान्दीकर)आशीर्वाद सीसा, श्रेष्ठ युक्त स्तुति करनेवाला ६५ (नागकेसर)नागकेसर २५१ ३८ (नान्दीवादिन ) आ. २२९ १०८ (नागजिद्विका)मैन शीर्वादयुक्त स्तुति क. सिल रनेवाला १०२ ११७ (नागवला) कैंकहीवृक्ष २३२ १० (नापित)नाई,हजाम २१२ ३८ (नागर) सोंठि, कसेरू, १८८ ५६ (नाभि) राजाविशेष, नागरमोथा, पण्डित, पहिया की नाहनि, नाह, तुन्दी, ठोढ़ी मनुष्य ३४५ २५० (नाम) प्रसिद्ध, होन- ३८ (नागरंग) नारंगी हार, क्रोध, प्राप्ति, ५१ १ (नागलोक) पाताल निन्दा १२० (नागवल्ली) पान ८(नामधेय) नाम २२८ १०५ (नागसम्भव) सेंदुर ३७ ८ (नामन् ) नाम ३० (नागान्तक) गरुड़ २७२ ६ (नाय) नीति,पकाना, ४४ १० (नाट्य) नाच बालक २३२ ८(नाडिन्धम) सोनार २४४ ११ (नायक) स्वामी,रत्न ६५ (नाड़ी)नस, छःक्षण- मध्य काल, नरई १ (नारक) नरक . नगर में उत्पन्न हुआ ६ अमरकोशादर्श। श्लोक श्लोक २११ ३२ (निपाव) घड़ा, गगरी ३६० २४ (नियुत) लक्ष,लाख २४२ ४ (निपुण) चतुर, विज्ञ |२८० ११६ (नियुद्ध) बाहुयुद्ध ७ (निबन्धन) वीणा में | २३३ १७ (नियोज्य)दास,टहलू तार बांधनेका स्थान ३४५ २५२ (निर् )निश्चय निषेध २०१ ११२ (निवर्हण) मारना २५७ ६६ (निरन्तर सघन गझिन ૨૨૮ ३८ (निभ) सदृश, बराबर ५३ १(निरय) नरक २४७ २५. (निमृत) विनययुक्त, २६२ ८३ (निरर्गल)वाधारहित, सुलायममनुष्य जिसको किसीतरहकी २२२ ८० (निमय) अदलबदल तकलीफ न हो ३०१ ७६ (निमित्त) हेतु, चिह्न २६१ ८१ (निरर्थक) व्यर्थ. २६ ११ (निमेप) पलकगिरने २१५ १५ (निखग्रह) स्वाधीन का काल २७८ ३१ (निरसन) अलग क- १५ (निम्न) गहिरा रदेना ३०(निम्नगा) नदी २० (निरस्त) फेंकाहुआ ६२ (निम्ब) नीवि तीर,जल्दी कहाहुआ, २६ (निम्बतरु) वकायिनि अलग कियाहुआ ३० २८ (नियति) भाग्य २४६ ३० (निराकरिष्णु)निकाल ५६ (नियन्त)सारथी, गा- देनेवाला. ड़ी होकनेवाला ४० (निराकृत)अलगकिया ५ (नियम) व्रत, शौच, हुआ जो वेदकोपढ़ाहो सन्तोप, तपः, स्वा- १७३ ५७ (निराकृति)वेदाध्ययन ध्याय, ईश्वर, प्रणि- रहित अलग करदेना धानका नाम, कभी १३९ ५७ (निरामय) रोगहीन किसी काल विशेषादि २०६ १३ (निरीश) फारलगाने में होनेवाला उपवास, की जगह, या, फार स्नान, जपादिकर्म, ५३ २ (निर्गति) नरक की अंगीकार अशोभा १३ (नियामक) नावखे- ९१ ६८ (निर्गुण्डी) म्योड़ी, बनेवाला न्यवारी १८९ বুও अमरकोशादर्श। ११५ पृष्ठ पृष्ठ श्लोक श्लोक २०१ ११३ (निर्ग्रन्थन) मारना ૨૨ ६ (निर्वाण) मोक्ष,मुनि, ४० २३ (निर्घोप) शब्द अग्नि ७ (निर्जर) देवता २६५ ९६ (निर्वात) जिस समय १७१ १७ (निर्जितेन्द्रियग्राम)जि- वायु न बहतीहो वह तेन्द्रिय समय ५ (निर्भर) झरना १४ (निर्वाद) निन्दा,जनों ३(निर्णय) निश्चय की चतकही. २५५ ५६ (निर्णित) धोया,सफा २०१ ११३ (निर्वापन)मारडोलना २३२ १० (निर्णेजक) धोबी दुःख से भी खशी के २५ (निर्देश) आज्ञा,हुक्म साथ ३४१ २३५ (निर्वन्ध) हठ, जिद २४४ १२ (निर्वार्य)निःशंककार्य ६७(निर्भर) अतिशय करनेवाला १८३ ३६ (निर्मद)मदहीनहाथी २०१ ११३ (निर्वासन)मारना ५२ ६(निर्मुक्त) केचुलि को २६६ १०० (निर्वृत) सिद्ध,तय्यार छोडे हुये सांप २३९ ३९ (निर्वेश) मोल, भोग ९ (निर्मोक) केंचुलि तनख्वाह ८३ ३८ (निर्याण) हाथीकेने- ५१ २ (निर्व्यथन) विल त्रोंका कोर २७४ १७ (निहार) युक्रिसे शस्त्र ३१२ ११६ (निातन) वैर का का निकालना बदला लेना,दानदेना, ३३ १० (निर्हारिन) दूरतकजा. धरोहर लौटा देना ३४१ २३५ (निर्ग्रह ) दरवाजा, २३ (निर्हाद) शब्द शिरोभूपण, काढ़ाका ५ (निलय) घर रस, दीवालकी खूटी | १२४ ४० (निवह) समूह, झुण्ड ३२ (निर्वपण) दान ३०३ ८४ (निवात)निवास,वायु ३१ (निवर्णन) देखना, रहित, हथियार से . १५ (निर्वहण) समाप्त क नहीं कटनेवालावच रना, नाटककीसन्धि, १६७ ३३ (निवाप)पितरोंकेलिये मारना जो दान दिया जाये नेवाला सुगन्ध, २७८ .

अमरकोशादर्श। पृष्ठ ७० श्लोक श्लोक १५२ . ११३ (निवीत) माला की १८९ ५६ (निपादिन्) महावत तरह पहिनाहुआ य- पीलवान ज्ञोपवीत, कपड़ा का | २०१ ११२ (निपूदन) मारना किनारा २८४ १३ (निक) मोहर, छाती २६३ ८८ (निवृत) परिवादि से का भूपण, १०८ कपः घेराहुआ सोना १८२, ३३ (निवेश) सेनाका नि- ४८ ३० (निप्कृति) कपट,छल वास, पड़ाव १३० २१ (निष्कला) रजोर- ४ (निशा) रात हित स्त्री २१३ ११ (निशाख्या) हलदी २५१ ३९ (निष्कासितोनिकाला १६ (निशाटन) उल्लूपक्षी हुआ ५ (निशान्त) घर ७ (निष्कट) घरके पास १४ (निशापति) चन्द्रमा चनीहुई फुलवारी २०१ ११२ (निशारण) मारना १०४ १२५ (निष्कटि) बड़ीइला- २१३ ४१ (निशाहा) हलदी यची २६४ ९१ (निशित) तेज, पैन ७९ १३ (निप्कह) खोडकिल २५ ६ (निशीथ) आधीरात | २७६ २५ (निष्क्रम) बुद्धि की ४ (निशीथिनी) रात शक्ति ३१ ३ (निश्चय) निश्चय ४५ १५ (निष्ठा)समाप्तकरना, ७४. १८ (निःश्रेणि) काठआदि नाटककी सन्धि, सि- की सीढ़ी द्धि, नाश, अन्त ८८ (निपङ्ग) तरकस २१४ १४ (निष्ठान) कढ़ी ६६ (निपगिन) धनुपधारी २४० ३८ (निप्छीवन)थूकना २ (निपद्या) बाजार ३९ २९ (निप्र)कर्कश,कठोर ५६ ९ (निपद्धर)बोदा,कीचड़ २८० ३८ (निष्ठेव) थूकना ३ (निपध) पर्वत विशेष २८० ३८ (निप्ठेवन) थूकना १ (निपाद) हाथी की २६३ ८७ (निप्ट्यूत) फेंका, प- आवाज, स्वरविशेप, ठाया चाण्डाल. ३८ (निष्ठ्यति) थूकना २८० अमरकोशादर्श। पृष्ठ , लना श्लोर श्लोक २४२ ४ (निष्णात)जाननेवा- १२३ ३८ (नीड) झोंझ, घोंसला ला, प्रवीण १२२ ३५ (नीडोद्भव)पक्षी, चि- २६५ ९५ (निप्पक) अच्छी तरह डिया पकाहुआ ७३ १४ (नीध) वोरोनी २६६ १०० (निप्पन्न) सिद्धहुआ ८५ ४२ (नीप) कदम्बवृक्ष २७६ २४ निष्पाव) फटकना,प- ५५ ४ (नीर) पानी, जल छोरना १४ (नील) कालारंग २६६ १०० (निप्पभ) कान्तिरहित १२१ ३१ (नीलकण्ठ) मोर,शिप १५२ ११२(निष्प्रवाणि)नवाकपड़ा ११७ १४ (नीलांगु) छोटा कि ३८ (निसर्ग)स्वभाव रवा, सोनाके रवा ७४ १९ (निस्सरण) निकलना ७ ३४ (नीललोहित)शिन २०१ ११६ (निस्तहण) मारडा-१२१ २७ (नीला) माछी ५ २४ (नीलाम्पर) वलदेव २५९ ६९ (निस्तल) गोल ६३ ३७ (नीलाम्बुजन्मन्) नी. ८९ (निस्त्रिश) तलवार लकमल २१५ ४९ (निस्राव) माड़ ९२ ७० (नीलिका) न्यवारी ४० २३ (निस्वन) शब्द ९७ ९५ (नीलिनी) नील २३ (निस्वान)शब्द ९४ (नीली)नील २०१ ११४ (निहनन) मारना २७६ २३ (नीवाक) धनधान्य २२ (निहाका) गोह बटोरना २०१ ११२ (निहिंसन) मारना २०९ २५ (नीवार) तिनीपसाड़ी २३३ १६ (निहीन)नीच पुरुप आदि खरकी धान्य १७ (निलव)छिपाना,अ-१५४ १२१ (नीवी) मूलधन व विश्वास, शठता पूंजी, स्त्री के कमर में २३८ ३८ (नीकाश) सादृश्य, वत्रकीगॉठि , फुफुदी बरावरी २ (नीद) देश १६ (नीच) नीच, नाटा, १५४ ११८ (नीशार) जड़ावर के छोटा कपड़े रजाई अंगरसा ३५० १७ (नीचेस् )घोड़ा, नीचे इत्यादि ११८ अमरकोशादर्श। पृष्ठ श्लोक पृष्ठ श्लोक २० १८ (नीहार) पाला २७ (नेमि) गडारी, कुँआ ३४४ २४७ (नु) पूंछना, विकल्प की धरन , पहियाका ३८ ११ (नति) स्तति किनारा, पटी २६३ ८७ (नन्न) फेंका,पटाया, ८२ २६ (नेमिन्) तिनिशवृक्ष प्रेरित २६२ ८३ (नेकभेद)अनेकप्रकार २६० ७७ (नूतन) नया का, हरतरहका २६१ ७८ (नृन) नया २२२ ७८ (नगम) बनियाँ, नगर ४१ (नुद) तृतकाच का रहनेवाला ३४६ २४६ (नूनम् )तर्क, वस्तुका २१६ ६७ (नचिकी) अच्छी गौ निश्चय, निश्चय २२६ १०- (नेपाली)नेपाली में- १५२ १०९ (नूपुर) विछिया, प नशिल लनियां २२२ ८० (नमेय)अदलाबदला १२५ १(नृ) मनुष्य करना २१ १० (नृत्य) नाच ८१ १८ (नेयग्रोध) परगदरक्ष १७५ १ (नृप) राजा का फल १८२ ३२ (नृपलक्ष्मन्) राजा १६? ८१ (नेयायिकन्यायशात्र का उत्र जाननेवाला ३६१ २७ (नृपसभ) राजसभा, १३ ६१ (नेत) राक्षस, ३१ (नृपासन) राजगद्दी प्रदिशाका स्वामी २५३ ४७ (नृशंस) कर दूसरेका १७६ ७ (नेफिक) रुपयों का अनभल चाहनेवाला अधिकारी, खजाची ३६७ ४०(नृसेन)मनुप्योंकीसेना १६१ ७०(नेविंशिक)तलवार- २४४ ११ (नेतृ)स्वामी,मालिक धारी, तलवारबन्द १४७ ९३ (नेत्र)ऑप, रक्षकी ३१६ ११ (नो) नहीं, निषेध १० (नौ) नाव १४७ ९३ (नेत्राम्बु) आँसु १३ (नौकादगड) टॉडा, २५८ ढंयुगा १२१ ९९ (नेपथ्य) अलंकारकी, ५६ १० (नोतार्य) नायमे पार शोभा होने के योग्य पानी जड़, वन्न ६८ (नेदिष्ट) अतिसमीप अमरकोशादर्श। पृष्ठ - २६ श्लोक श्लोक ३३८ २२४ (न्यक्ष) सब, अधम, दरवाजा दोनों हाथके फैलाने १८४ ४० (पक्षभाग) पांजर हा- से बनाहुआ कुण्डल थीका, बगल ८३ ३२ (न्यग्रोध) वटवृक्ष १२३ ३७ (पक्षमूल) पखकीजर ९५ ८७ (न्यग्रोधी) मूसरि ७ (पक्षान्त) अमावास्या, २५९ ७० (न्यक्) छोटा, चौना पूर्णमासी ९१६ ११ (न्यंकु) हरिणविशेष | २५ ५ (पक्षिणी) पूर्व और पर २६३ ८८ (न्यस्त) धरोहरधरा, दिन से सयुक्र रात १२२ ३३ (पक्षिन)पक्षी, चिडया २१७ ५६ (न्याद) भोजन ३१२ १२० (पक्ष्मन) आंखकीवरी- १८० २४ (न्याय) न्याय नी, फूलोंकी धूरि,सूत २५ (न्याय्य)न्याययुक्त का बहुत पतला अश २२२ ८१ (न्यास) धरोहर २६ २३ (पंक) पाप, बोदा, १४० ६१ (न्युञ्ज) कुवरा, टेढ़ा कीचड़ ३५७ १७ (न्यूह) सामवेदका ६७ ११(पंकिल) कीचड़युक्रदेश ॐकार ४० (पंकेरुह) कमल ३१४ १२७ (न्यून) कम, निंद्य १३७ १३७ ४८(पंगु) पॅगुला (प) ४ (पंक्ति) पॉति, दशअ- ७४ २० (पकण) भिल्लों का क्षरफेचरणवाला छन्द १०२ (पचम्पचा) दारुहल्दी २६४ ९१ (पक) पका हुआ, २७२ ८ (पचा) अन्नकापकाना जल्दीनाशहोनेवाला | १२५ १ (पञ्चजन) मनुष्य १२ (पक्ष) १५दिन,पंख, २०२ ११६ (पश्चता) मृत्यु, मौत तीरका पंख, सहाय २६ ७(पञ्चदशी) अमावस, १४ (पक्षक) बगल का पूर्णमासी दरवाजा २(पञ्चनख) सिंह, पांच १(पक्षति) परीवातिथि, नखवाले जीव १(पञ्चम) स्वरविशेष, १४ (पक्षदार) वगल का कोकिलकी बोली ग्राम, २७ ७३ पंखकी जड़ १२० अमरकोशादर्श। पृष्ठ श्लोक किया हुआ, स्तुत ३५४ ली वस्तु श्लोक ५ २५ (पञ्चशर) कामदेव २६६ १०६ (पणायित) स्तुति ११५ ८१ (पञ्चशाख) हाथ ८८ ५१ (पञ्चांगुल) रेड,रेंडी २६९ १०९ (पणित) स्तुति किया ११४ १ (पञ्चास्य) सिंह हुआ, स्तुत ३६३ ३१ (पञ्जर) पिंजरा २२३ ८२ (पणितव्य) विकनेवा- ७ (पत्रिका) निःशेष पदों की व्याख्या १३४ ३९ (पण्ड) हिजरा १५३ ११६ (पट) अच्छावस्त्र १६० ५ (पण्डित) पण्डित १५३ ११५ (पटचर) पुरानावन २२३ ८२ (पण्य) विकनेवाली १४ (पटल)छप्पर,नेत्ररोग, वस्तु समूह २(पण्यवीथिका) जहां १५९ १४० (पटवासक) बुवा वाजार न हो लेकिन २०० १०८ (पटह) लड़ाई के बाजा वस्तु विकतीहो उस का शब्द का नाम १.१ १५५ (पद) परवर, घड़ाव. १२९ १५० (पण्या) मालकॉगनी तकहा, चतुर, शीघ्र, २२२ ७८ (पण्याजीव) पनियाँ नीरोग १२२ ३१ (पतग) पक्षी ७० अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ १२६ , १२६ प्रलोक श्लोक १२७ ७ (पर्तिवरा) स्वयंवर में १७८ १७ (पथिक) राही, मुमा- अपने आप पतिकी फिर इच्छा करनेवाली १६ (पथिन् ) मार्ग,रास्ता ६ (पतिव्रता) पतिव्रता ८६ ५६ (पथ्या) हर १२८ १० (पतिवनी) अहिवाती १४३ ७१ (पद) पैर, पॉव १ (पत्तन) नगर, शहर ३०६ ९३ (पद) उद्यम, रक्षा; ६६ (पत्ति)पैदल चलने- स्थान,चिह, पैर,बस्तु वाला, हाथी, रथ, १९० ६६ (पदग) पैदल घोड़ा, पैदलसिपाही ६८ १६ (पदवी) मार्ग, रास्ता जिसमें हों वह फौज १६० ६६ (पदाजि) पैदल ५ (पत्नी) व्याही स्त्री ६६ (पदाति) पैदल १४ (पत्र)पत्ता,पंख,सवारी १९० ६७ (पदिक) पैदल २३७ ३३ (पत्रपरशु) रेती,सोना १९० ६७ (पद्ग) पैदल काटने का हथियार ६८ १६ (पद्धति) मार्ग, रास्ता १५० १०३ (पत्रपाश्या) वेंदी, ७२ (पद्म) निधिविशेप, टीका कमल १२२ ३४ (पत्ररथ) पक्षी १८४ ३९ (पद्मक) हाथीके मुख १५५ १२३ (पत्रलेखा)छापविशेष पर के विन्दुओंका स- १५७ १३३ (पत्रांग)लालचन्दन, देवीचन्दन, रक्तसार १०९ १४६ (पद्मचारिणी) कपिला १५५ १२३ (पत्रांगुलि) गाल,स्तन २० (पद्मनाभ) विष्णु में स्त्रियों के किसी ग- १०९ १४५ (पद्मपत्र) पुष्करमूल न्धादिसे उरेहना २२५ ६२ (पद्मराग) लालमणि १६ (पत्रिन) पक्षी, तीर, २७ (पद्मा) कपीला औप- वाजपक्षी,धोये रेशमी धि, लक्ष्मी, भँगरा २८ (पद्माकर) कमलयुक्त शेय, कुशवारीसे वना तालाव हुआ कपड़ा १०६ १४७ (पद्माट) चकवड़ ५६ (पत्रोर्ण) सरिवन ६ २७ (पद्मालया) लक्ष्मी कपड़े, धुलाहुआ कौ- ६० .

अमरकोशादर्श। १२२ पृष्ठ ८० पृष्ठ श्लोक श्लोक १८३ ३५ (पद्मिन) हाथी २८ (परम्पराक) यज्ञपशु ६३ ३९ (पद्मिनी) कमलिनी का मारना ३६३ ३१ (पद्य) श्लोक २४५ १६ (पखत) पराधीन १६ (पद्या) मार्ग, रास्ता १९६ ९२ (परशु)फरसा, कुल्हरी ६१ (पनस) कटहर ९२ (परश्वध) फरसा, कु- २६९ १०९ (पनायित)स्तुतिकिया ल्हरी हुआ |३५१ २२ (परश्वम्) परसों २६६ १०९ (पनित) स्तुति किया २५७ ६३ (परश्शत)सौसेअधिक हुआ (परस्सहस्र) हजार से २६७ १०४ (पन्न) चुआ, गिरा ज्यादह ६ (पन्नग) सॉप १९८ १०२ (पराकम)सामर्थ्य,यल ६ ३० (पन्नगाशन) गरुड़ १७ (पराग) फूलोंकी धरि, ३ (पयस्) जल, दूध नहानेका उपकारी ग. २१५ ५१ (पयस्य)घी दहीआदि धचूर्ण, धूरि, ग्रहण ३२३ १६३ (पयोधर) चूंची,स्तन, २५० ३३ (पराइमुख) विमुख वादर १% (पराचित) दूसरे का ११ (पर) दूरि, अपने से पलुआ भिन्न, उत्तम,शत्रु २५० ३३ (पराचीन) विमुख २३४ १८ (परजात) दूसरेका प. २०१ १११ (पराजय ) लड़ाई में लुआ हारना २४५ १६ (परतन्त्र) पराधीन २०१ १११ (पराजित) हाराहुआ २४६ २० (परपिण्डाद) पराया | २४५ १६ (पराधीन) पराधीन, अन्न खानेवाला परवश २४६ २० (परानो पराये अन्नसे २० (परभृत) कोयल जीनेवाला ३४९ २०१ १११ (पराभूत) हाराहुआ २ (परायण)मिलावचन, २६ (परमान) खीर आसंगवचन ३ १६ (परमेप्टिन) ब्रह्मा २० (परारि) त्योस २३४ २१ (परमृत) कोआ १२ (परमम) अंगीकार (परमा) शोभा अमरकोशादर्श। १२३ पृष्ठ पृष्ठ . को पाया, पकाहुआ श्लोक श्लोक २५६ ५८ (पराय॑) अतिश्रेष्ठ ३७ (परिचर्या) सेवा २०१ ११२ (परासन) मारडालना १६५ २२ (परिचाय्य) यज्ञकी २०२ ११७ (परासु)मरागुआ अग्नि २३६ २५ (परास्कदिन)चोर २३४ १७ (परिचारक) दास, ट- १५४ १२१ (परिकर) परिवार, कु- टुम्ब, पलँग, पटुका २६५ ९६ (परिणत) दूसरे रूप जो कपड़ा कमर में वॉधाजाय १७४ ६०(परिणय) विवाह १५४ १२६ (परिकर्मन्) चन्दना- २७४ १५ (परिणाम) रूपका ब- दिसे अंगोंका संस्कार २७४ १६ (परिक्रम) खेलमें पाँव २४० ४६ (परिणाय) शतरंजकी से चलना गोटियोंका चलाना २७५ २० (परिक्रिया) परिवालों १५३ ११२ (परिणाह) चौड़ाई ३४९ १३ (परितस् ) सवतरफ २६३ ८८ (परिक्षित ) परिखादि २७१ ५ (परित्राण)रक्षाकरना से घिराहुआ २२२ ८० (परिदान) फेरदेना, ६१ २९ (परिखा) खॉवॉ अदलाबदली ३४२ २३६ (परिग्रह) फौजका पी- ३९ १६ (परिदेवन) रोना छा,स्त्री,परिवारवाले, १५३ ११७ (परिधान)नीचेपहिरने आदान, मूल, शाप का वस्त्र, धोती ११ (परिघ) मारडालना, २३ ३२ (परिधि) सूर्य, च. हथियारविशेय, लो- न्द्रमामें कभी २ पड़ा हुआ मण्डल, यज्ञीय १९६ ६१ (परिघातन) मारडा वृक्षकी शाखा, खेत लना, हथियारविशेष, लोहथी १८९ ६२ (परिधिस्थ) फौजकी २७६ २३ (परिचय) पहिचान रक्षाकरनेवाला १८६ ६२ (परिचर) फौजकी रक्षा २२२ ८० (परिपए) मूलधन, करनेवाला पूंजी का घेरना का घेरा अमरकोशादर्श। पृष्ठ . तरीका, - । १७० श्लोक श्लोक ११ (परिपन्थिन् ) शत्रु, दु-१७४ ५९ (परिवेतृ) जिप्तकाव ३मन डाभाई न व्याहागया ४० (परिपाटी) अनुक्रम. हो प्रथम छोटा व्या- क्रम हागयाहो तो उसका १५८ १३८ (परिपूर्णता) पूराहोना, नाम सयतरहसे पूर्णहोना २३ ३२ (परिवेप) सूर्य, च- १०५. १३१ (परिपेलव) मोथा न्द्रमामें कभी२ पड़ने २६० ७५ (परिप्लव) चञ्चल वाला मण्डल ३४२ २३८ (परिवह) राजाकेयोग्य ' ८३ ३० (परिख्याध) जलवेत, वस्तु, परिच्छद वस्त्र कठचम्पा ४६ २२ (परिभव) अनादर ४५ (परित्राज़) संन्यासी ३८ १४ (परिभाषण) उरहना १६३ १७ (परिपद) सभा २६८ १०६ (परिभूत) अपमान १४९ १०१ (परिष्कार) गहना किया हुआ १४९ १०० (परिष्कृत) अलंकृत, ३३ १०(परिमल) घसनेपर शृङ्गारकिये हुये निकलनेवालामनोहर २७८ ३० (परिप्वंग) लिपटना सुगन्ध, मलना १५ (परिसर) नदी पहाड़ २७८ ३० (परिरम्भ) लिपटना आदिका समीप २०१ ११४ (परिवर्जन)मारना २७५ २० (परिसर्प) परिवार- ४२ ३ (परिवादिनी) सात वालोंका घेरना तारोंसे धीहईवीणा । २७५ २१ (परिसा) सवतरफ २६२ ८५ (परिवापित)मुंडाहुआ फैलना १७४ ५६ (परिवित्ति) बड़ाभाई २३४ १८ (परिस्कन्द) दूसरेका न व्याहागयाहो छोटा पलुआ भाई व्याह करले तो| १८४ १२ (परिस्तोम) हाथीकी उसकेबड़भाईकोपरि- झूल विनि कहते हैं | १५८ १३८ (परिस्पन्द) शिल्पादि २४२ ११ (परिद) स्वामी, मा- की रचना, कारीगरी लिक करना अमरकोशादर्श। १२५ पृष्ठ पृष्ठ श्लोक श्लोक २३९ ३९ (परिस्तुत्)दारू,मदिरा १२० २७ (परोप्णी) गीदड़ २३९ ४० (परिलता)दारू,मदिरा ८३ ३२ (पर्कटिन्) पकरिया २४३ ७ (परीक्षक ) परखने- ९९ १०२ (पर्जनी) दारुहलदी वाला,परीक्षालेनेवाला ३१९ १४६ (पर्जन्य)गर्जता हुआ ४६ २२ (परीभाव) अनादर वादर, इन्द्र २२२ ८० (परीवर्त)अदलाबदली ८० १४ (पर्ण) पत्ता, छिउल ३८ १३ (परीवाद) निन्दा ६ (पर्णशाला) मुनियों ३१४ १२९ (परीवाप)विछौना,अ- का झोपड़ा सबाब,सबतरफवोया, ९४ ७९ (पर्णास) चबई,पर्णास बॉध, जलका आधार १५४ १२१ (पर्यङ्ग) पटुका ३२५ १६८ (परीवार) मियान, अ- १५९ १३९ (पर्यक) पलंग सवाच, जंगम १५४ १२१ (पर्यदिका) पटका,क- १० (परीवाह) नाला,नहर, मरमें वॉधनेका कपड़ा ३४ (परीष्टि) श्राद्ध के ब्रा- १६८ ३८ (पर्यटन) घूमना ह्मण की भक्ति और ६८ १५ (पर्यन्तभू)नदीपहाड़ सेवाकरना आदि का समीप २७५ २१ (परीसार) सब तरफ १६९ ४० (पर्यय) क्रमका उल्लं- फैलना घन, कुछ उलटापलट ४२ ३२ (परीहास)खेल,लीला २७५ २१ (पर्य्यवस्था)विरोध, ३५१ २० (परुत्) परु, परसाल । विगार १९ (परुप) कर्कश, कड़े, २९७ ५७ (पर्याप्त) इच्छा भर कठोर २७१ ५ (पर्याप्ति) कोई किसी १६२ (परुस्) गाठि, पोर को मारता हो उसस २०२ ११७ (परेत)मरा हुआ मय उसका हाथ पक- ५३ (परेतगज) यमराज डलेना, रक्षा करना ३५१ २१ (परेद्यवि) परदिन ४० (पर्याय) कम,तरीका, २२० ७० (परेप्ठुका) बहुत वार की व्याई गौ २०४ ३ (पर्युदंचन)ऋणलेना, २३४ १८ (पधित)दूसरेकापलुआ फर्जलेना अवसर, मौका १२६ अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ श्लोक श्लोक २४ (पर्येपणा) श्राद्ध में ८० १८ (पल्लव) पल्लव, कोमल ब्राह्मणभक्ति और सेवा । पत्ता करना २८ (पल्वल)छोटातालाय, ७४ १ (पर्वत) पहाड़ डवहा ११२ १६२ (पर्बन ) गांठि, पोर, २७६ २४ (पव)अन्नादिपछोरना, शुक्लपक्षकी अष्टमी,क- फटकना प्णकी चतुर्दशी,अमा- १४ ६४ (पवन) वायु, हवा, प- वास्या, पूर्णमासी, सं. छोरना, फटकना क्रान्ति, उत्सव પર ८ (पवनाशन) सॉप २६ ७ (पर्वसन्धि) अमावत १४ ६४ (पवमान) वायु, हवा पूर्णमासी और परीवा ११ ४८ (पवि) इन्द्रका वज्ञ की सन्धि ११३ १६६ (पवित्र) पवित्र, कुश, १४२ ६९ (पशुका) पशुड़ी पाकसाफ २२४ ८६ (पल) चौसठमासा, ५८ १६ (पवित्रक) सनका सूत धुंधुचीभर, मांस,दण्ड ७ ३१ (पशुपवि) शिव का साठिवां हिस्सा ३९ (पशुप्रेरण) पशुओं को २३१ ६ (पलगंड) चूना आदि ललकारना पोतने वाला | २२१ ७३ (पशुरज्जु) गेराँव, ज्व. ९८ (पलंकपा) गोखुरू डायल १२१ ६३ (पलल) मांस ३४३ २४२ ( पश्चात् ) पश्चिम १०९ १४७ (पलाण्ड) प्याज दिशा, अन्तमें २२ (पलाल) पैरा, पुआर ४७ २५ (पश्चात्ताप) पछताना १४ (पलाश) पत्ता,कचूर, १६ १(पश्चिम)अन्तिम,अ. छिउल खीरी ५ (पलाशिनो वक्ष, पेड़ ६६ ८ (पश्चिमोत्तर) पश्चिम १२८ १२ (पलिनी)बूढ़ी स्त्री उत्तर का देश १३५ ४१ ( पलित) बुढ़ापासे ७० ५ (पस्त्य) घर घालों की उजरौटी ९८ (पांशु)धुरि १५९ १३९ (पल्यंक) पलंग १२७ १९( पाशुला) हिनारि, २८ ६८ अमरकोशादर्श। १२७ पृष्ठ पृष्ठ ने वाला जाने वाला श्लोक श्लोक व्यभिचारिणी स्त्री ८४ (पाढा) पाठा पाँढी १२३ ३९ (पाक)बच्चा,अन्नपकाना ६४ .८० (पाठिन् ) चीत,ओप- १०४ १२६ (पाकल)कूट,औषधि- धिविशेष विशेष १८ (पाठीन) पदिनामछरी ४२ (पाकशासन) इन्द्र १४५ ८१ (पाणि) हाथ ४७ (पाकशासनि)इन्द्रका १२६ १५ (पाणिगृहीती) विवा. हिता स्त्री २७ (पाकस्थान) रसोईका २३३ १३ (पाणिघ) ताली बजा- घर २१३ ४२ (पाक्य) खारी नोन, १७४ ६० (पाणिपीडन) विवाह सज्जी २३३ १३ (पाणिवाद) ताली व. ४८ (पाखण्ड) वौद्ध क्षप- णक शास्त्रको मानने ३४ १२ (पाण्डर)कुछ पीला वाला उजलारंग २९ (पाञ्चजन्य) विष्णुका ३४ १३ (पाण्ड) कुछ पीला शंख उजलारंग २३६ २९ (पाञ्चालिका) कठ- १८७ ५४ (पाण्डकम्बलिन्)पीले पुतरी, गुड़िया गुड्डा कम्बलका वहार जिरा ३४८ ७ (पाद) संबोधन पर पड़ाहो वहरथ २५ (पाटचर)चोर, पुराना ३४ १२ (पाण्डुर) कुछ पीला कपड़ा उजलारंग १५ (पाटल) गुलाबीरंग, ३६४ ३३ (पातक)ब्रह्महत्यादि सांठी आदि कुआरी पाप "धान ५१ १ (पाताल)पाताल,बड़- २० (पाटला) फूलविशेष, वानल पाँदर २५८ २७ (पातुक) गिरनेवाला ५४ (पाटलि)लोधविशेष, ५६ ८(पात्र) दोनों किनारों पाँदरि का बीच,सुवादि, यो- २९ (पाठ) पढ़ना ग्य मनुष्यादि, बरतन ६ ८८ १२८ अमरकोशादर्श। पृष्ठ पीनेकी सभा के छोटे २ पहाड़ श्लोक श्लोक ३६७ ४२ (पात्री) बरतन स्थान ३५ (पात्रीव) यज्ञका वर-२४० ४३ (पानगोष्ठिका) दारू तनविशेष ४ (पाथस्) जल, पानी २४० १३ (पानपात्र) दारूपीने ७६ ७ (पाद)पाँव,पैर,चौथाई. का बरतन किरण, पर्वत के पास २११ ३२ (पानभाजन)पानी पी. नेका वरतन,कटोरा १५२ ११० (पादकटक) पैर के ५५ ४ (पानीय) पानी, जल कड़ा, घुघुरू ७ (पानीयशालिका) पौ- १४ (पादग्रहण) प्रणाम शाला ५. (पादप) वृक्ष १७ (पान्थोपधिक,बटोही, २१७ ५८ (पादवन्धन) गों, भेत मुसाफिर आदि २९ २३ (पाप) पाप,कूर, दूसरे १३९ : ५६ (पादवल्मीक)हाडारोग का अनभल चाहने १३८ ५२ (पादस्फोट) पैर की वाला व्यवाई ९५ ८५ (पापचेली)पाठा,पॉदरि १४२ ७१ (पादाग्र) पेरका अगि- २६ २३ (पाप्मन्) पाप लाभाग १३८ ५३ (पामन्) खाज १५२ १०६ (पादांगद)विछिया,प- १३९ ५८ (पामन) खाजुयुक्र लनियां २३३ १६ (पामर) नीचप्राणी १६० ६६ (पादात) पैदलों का १३८ ५३ (पामा) खाज समूह १५६ १२६ (पायस) देवदारु,धूप, ६६ (पादातिक) पैदल खीर २३७ ३० (पादुका) खराऊं,जूता १४३ ७३ (पाय) गुदा २३७ ३१ (पादू) जूता ८५ (पाय्य) तौल,नाप २३१ ७ (पादूकृत) चमार ५६ ८ (पार) उसपार १६८ ३५ (पायोपेर धोनेके लि-२२७ ९९ (पारद) पारा ३३५ २०९ (पारशव) शूद्रा स्त्री में ४१ (पान) दारूपीने का । २२४ ये जल ब्राह्मणसे उत्पन्न पुत्र अमरकोशादर्श। १२९ पृष्ठ पृष्ठ श्लोक . ८ का पुत्र or श्लोक हथियारविशेष २६ (पारियातक) घना १६१ ७० (पारश्वधिक) फरसा विशेष हथियार धारण करने- ७५ ३ (पारियात्रक) पर्वतः वाला विशेप १८५ ४५ (पारसीक)पारसीघोड़ा ३६ (पारिपद) शिवगण २४ (पारस्णेय) परारीस्त्री १५१ १०७ (पारिहार्य) हाथ में पहिरनेके कड़ा । २७० २ (पारायण) सम्पूर्णता ३५५ १० (पारी) हाथी के पाँव का वचन की रस्सी ११८ १५ (पारावत) कबूतर ३८ १४ (पारुष्य) कठोरवचन २७० २ (पारावतांघ्रि)मालकां-१७५ १ (पार्थिव) राजा गनी ३८(पार्वती) पार्वती: ५४ १ (पारावार) समुद्र, नदी ४० (पार्वतीनन्दन) स्वा- काइधर उधरका कि- मिकार्तिक , नारा १४४ ७६ (पाच) पाँजर, धगल, १७० ४५ (पाराशरिन्) संन्यासी पशुरियोंका समूह १७० ४५ (पारिकाक्षिन्) तपस्वी २१८ ६३ (पार्श्वग) ढयगुरी घ. ५१ (पारिजातक) देववृच- सीटामें जोताहुआ विशेप,चकायिनि १८४ ४० (पार्श्वभाग) घगल, १५० १०३ (पारितथ्य ) चोटी में पांजर लगाने की सोने की १४३ ७२ (पाणि) ऍड़ी पट्टी १७७ १०(पाणिग्राह) अपने १६६ १०(पाराशर्य) व्यास- राज के पीछे रहने मुनि वाला ७५. (पारिप्लव) चंचल ११४ १६७ (पालन) पानीकाखर २६ (पारिभद्र) कायिनि १०३ १२१ (पालबी) पलाकी ५३ (पारिभद्रक) देवदारु ३४ १४ (पालारा) हरारंग १०४ , १२६ (पारिभाव्य) कूट औ- १९७ ६३ (पालि) कोण, पांति, पध चिह २६० ८८ अमरकोशादर्श पृष्ठ - ८७ ताल, श्लोक ফুলী १०० १०८ (पालिन्दी) काला नि ६० ६२ (पिचमई) नींव सोत, त्रिधारा ८५ ४० (पिचुल) झाऊकावृक्ष, ३५३ ५ (पाल्लवा) पल्लव की मार होनेवाला खेल २२८ १०५ (पिञ्चट) रांगा १२ ५५ (पावक) आगि १२२ ३२ (पिच्छ)मोरपंख,गुच्छा १४६ ५८ (पाश) केशसमूह १७ (पिच्छा)सेमरकागोंद २४० ४५ (पाशक) पॉशा २१४ ४६ (पिच्छिल) जलयुक्र ६२ (पाशिन्) वरुण व्यंजन कढ़ीआदि १४ ८१ (पाशुपत) गूमा ८६ ४६ (पिच्छिला) सेमर,सी. २०३ २(पाशुपाल्य) पशुओं का पालना २०२ ११५ (पिञ्ज) मारडालना २८१ ४३ (पाश्या) पाशोंका स- २२७ १०३ (पिञ्जर) पिंजड़ा, हरि- मूह २६१ ८१ (पाश्चात्य) पीछे हुआ १९८ ९९ ( पिञ्जल ) घबड़ाया, (पापण्ड) सवतरहका आकुल रूप धारणकरनेवाला १४२ ६७ (पिञ्जप) कानकीमेल पाखण्डी २९० २६ (पिट) उँटवा,डेलवा ४ (पापाण) पत्थर १३८ ५३ (पिटक) फोरिआ, २३८ ३४ (पापाणदारण) टॉकी फोड़ा, प्यटारी २०(पिक) कोयलपक्षी ३१ (पिठर) बटुआ, मोथा, १६ (पिह) पीलारंग मथानी ३० (पिङ्गल) सूर्य के चा- २२६ ६८ (पिण्ड)लोहा,गन्धरस रोंओर रहनेवालामह- १५६ १२६ (पिण्डक) लोहवान विशेप, पीलारंग ५६ (पिण्डिका) नाहनिप. ४ (पिगला) वामननाम हियाकेवीचकीलकड़ी दिग्गजकी स्त्री ५२ (पिण्डीतक) मयनफ- १४४ ७७ (पिचण्ड) पेट, पशुफा ल, लोहबान अंग ૨૮૨ ९(पिण्याक) तिल की १३६ ४५ (पिचण्डिल)तोंदवाला। खरी ३४ अमरकोशादर्शन पृष्ठ जिसके अंग में लह- - खिवाला, चुन्ध -- . श्लोक श्लोक. १३७ ३४ (पितरौं) मातापिता |१३७ ४९ (पिप्ठस् )देहकातिल, ३ १६ (पितामह)ब्रह्मा,आजा २८ (पितृ) बाप, पिता, सुनाकार चिह्नहो वह पितामाता पुरुप १६७ ३३ (पितृदान) पितरों के ८४ ३५ (पियाल) चिरौंजी लिये दियाजावे १४० ६० (पिल्ल) यॊधरी ऑ- १३ ५६ (पितृपति) यमराज १३३ ३३ (पितृपितृ) पितामह, ३४ १६ (पिशङ्ग) पीलारंग आजा ११ (पिशाच) देवजाति ३ (पितृप्रसू) सन्ध्या वाले २०२ ११८ पितृवन) श्मशान १४० ६३ (पिशित) मॉस १३२ ३१ (पितृव्य)पिताकाभाई १५५ १२५ (पिशुन) केसर, कुं- १४० ६२ (पित्त) पित्त कुम, दुर्जन, चुगुल १७२ ५४ (पित्र्य)पितरोंकातीर्थ, १०६ १३३ (पिशुना) अस्परक अंगष्टा तर्जनी के बीच २१५ ४८ (पिष्टक) पूआ में पित्र्यतीर्थ होताहै २११ ३२ (पिष्टपचन)तावा' १२२ ३४ (पित्सत्) पक्षी १५९ १४० (पिटात)वुकवा' १६ । १३ (पिधान) झांपना १५९ १३६ (पीठ) पीढ़ा, पिढ़ई १६० ६५ (पिनद्ध) कवचआदि २०० १०६ (पीडन)धर्रना,मलना पहिरेहुये ५४ ३ (पीडा)दुःख,तकलीफ ३६ (पिनाक) शिवका ध- ३४ १४ (पीत) पीलारंग नुप,शूल २२७ १०३ (पीतक) हरताल. ३२ (पिनाकिन् ) शिव ५३ (पीतदारु) देवदारु २१६ ५५ (पिपासा) प्यास ६० (पीतलु) दारुहलदी, ८(पिपीलिका) चींटी सरलरक्ष ८१ २०(पिप्पल)पीपरवृक्ष २७ (पीतन) अम्बार, के. ६७ (पिप्पली) पीपरि सर,हरताल २२६ ११० (पिप्पलीमूल) पिप- ८६ ४३ (पीतसारक) विजय- रामूरि सार। - ૨૨૨ अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ट श्लोक श्लोक २१३ ४१ (पीता) हलदी ३६७ ४२ (पुटी) डव्वा १९ (पीताम्बर)विष्णु ३ (पुण्डरीक)आग्नेय १८५ ४३ (पीति) घोड़ा दिशाकादिग्गज,वाघ, ইমুক্ত ६१(पीन) मोटा आगि, उजलाकमल ५१ (पीनस) नाकरोगवि ३ १९ (पुण्डरीकाक्ष) विष्णु शेप १०५ १२७ (पुण्डर्य) स्थलकमल, ૨૨૦ ७१ (पीनोनी)मोटेथन- गुलाव वाली ११३ १६३ (पुण्ड) पौंडा,ऊख. ४९ (पीयूप) अमृत, पेयूस ९२ ७२ (पुण्ड्रक) वसन्तीलता ८२ २८ (पील) पीलुआवृक्ष, २९ २४ (पुण्य) सुकृत,सुन्दर, हाथी, वाण, फूल पावन ६५ ८५ (पीलुपी) धनुष व- | १६६ ४१ (पुण्यक)नतविशेष नाने के योग्य वौडी-१३ ६१ (पुण्यजन) राक्षस विशेप,चिनार, कुँदुरू १५ ७० (पुण्यजनेश्वर) कुवेर. २५७ ६१ (पीवन) मोटा ६ (पुण्यभूमि) आर्या- २५७ ६१ (पीवर) मोटा वर्तदेश ७१ (पीवरस्तनी) मोटेथन २४२ ३ (पुण्यवत् भाग्यवान् वाली गौ १२१ २८ (पुत्तिका)पॉखी,छोटी १२७ १० (पुंश्रली) छिनारि माछी २३४ २० (युकस) चाण्डाल २७ (पुत्र) पुत्र ३५७ -१७ (पुङ्ख) तीरकाफोंक २३६ २६ { पुत्रिका) कठपुनरी, ३५६ २० (पुगल) देह २५६ ५६ (पुगव) श्रेष्ठ १३४ ३७ (पुत्री) कन्या-पुत्र १८६ ५० (पुच्छ) पूँछ, दुम (पुद्गल) सुन्दराकार ४३ (पुञ्ज) अन्नादिका ढेर, ११७ १३ (पुनपज)मूस, चूहा ३४७ १(पुनःपुनर)बारम्बार ५५ ७ (पुटभेद) भवर ३४५ २५२ (पुनर ) फिर, भेद, १(पुटभेदन)नगर शहर, पुरी १०६ १५९ (पुनर्नवा)गदहपुन्ना गुड़िया, गुड्डा निश्चय) अमरकोशादर्श। १३३ पृष्ठ - 7 १२६ श्लोक श्लोक १४५ ८३ (पुनर्भव)नहखून, नख १४१ ६६ (पुरीतक) आँत. १३० , २३ (पुनर्भु) उदरी १४२ ६८ (पुरीप) गूह, मैला. २५ (पुन्नाग) नागकेसर २५७ ६३ (पुरु) बहुत १२५ , १ (पुंस्) पुरुष २९ (पुरुप) आत्मा, पुरुष, ६६ १(पुर )पुर, गाँव नागकेसर १ (पुर) गुग्गुल, पुर, गाँव १ . २१ (पुरुषोत्तम), विष्णु १९२ ७२ (पुरःसर) अगुआ २५७ ६३ (पुरुहू) वहुत ३४८ ७(पुरतस्) आगे ४२ (पुरुहूत) इन्द्र : ७३-१६ (पुरद्वार)नगरकाफा- १९२ ७२ (पुरोग) अगुआ टक ७२ (पुरोगम) अगुआ ४२ (पुरन्दर) इन्द्र १९२ ७२:(पुरोगामिन् )अगुआ ६ (पुरन्ध्री) स्त्री जिसके ३५९ ५१ (पुरोडास) जाउरिन पति पुत्र दोनों विद्य- विशेप मान है। ५(पुरोधम् ) पुरोहित ૨૨ ४६ (पुरोभागिन् ) केवल ३०३ २३ (पुरस्कृत) पूजित, श- दोष देखनेवाला बुओं से पीड़ित, आगे १७६ ५ (पुरोहित) पुरोहित कियाहुआ २८२ ५ (पुलाक )तुच्छधान्य, ३४४ २४५ (पुरस्तात्) पूर्वदिशा, संक्षेप भातका सीथ- चीताहुआ,पहिले,आगे ५६ ९(पुलिन) जलसे छूटा ३४६ २५७ (पुरा) प्रवन्ध, बहुत ': काल, चीताहुआ, स- २३४ २०(पुलिन्द०) म्लेच्छ- ...मीप, होनेवाला । जाति, जंगलीआदमी ५ (पुराण)पुराण भागव- १० . ४४ (पुलोमजा)इन्द्रकीस्त्री तादि,जिसमें५वातेंहों २६५ ९७ (पुपित)पोढ़ा, मोटा રંદ ७७ (पुरातन) पुराना १(पुष्कर)आकाश,जल, ४ (पुरावृत्त) इतिहास,पू. कमल, पुष्करमूल,हा- थीकी सड़, वाजाका ६९. १.(पुरी) नगरी ३४८ ७ (पुरस्) आगे हुआभाग, रेता . की कथा मुख, तीर्थविशेष १३४ अमरकोशादर्श। पृष्ठ ८० रज मान,अंजन योग्य, श्वशुर श्लोक पृष्ठ श्लोक २३ (पुष्कराह)सारस २२ (पुष्य नक्षत्र विशेष ६० २७ (पुष्करिणी) चौकोना २३६ २८ (पुस्त) मट्टी, काय, तालाब वस्त्र, चमड़ाआदि से २५६ ५८ (पुष्कल) श्रेष्ठ, बहुत लिखना चा पोतना, सुन्दर लिखना आदि कर्म २६५ ९७ (पुष्ट) पोढ़ा, मोटा,ज- ११४ १६६ (पूग) सुपारी, समूह लाहुआ १६८ ३७ (पूजा) पूजा, खातिर १७ (पुष्प) फूल, स्त्रियोंका करना २६६ ९८ (पूजित) पूजाकिया ७१ (पुष्पक) कुवेरका वि- हुआ २४२ ५ (पूज्य) पूजा करनेके २२७ १०३ (पुष्पकेनु)पीतलगरम करके उसपर घिसकर | १७१ १८(पूत) पवित्र, राशि जो बनायाजाय वह कियाहुआ अन्न अंजन ८६ ५९ (पूतना) हर्र ४ (पुष्पदन्त)वायव्य दि- ८७ ४८ (पूतिक) कॅटीलाकंजा शाका दिग्गजविशेष ८७ ४८ (प्रतिकरज) कंजा २६ (पुष्पधन्वन्) कामदेव ८८ ५४ (पूतिकाष्ठ) देवदारु, २१ (पुष्पफल) कथा सरला १८७ ५१ (पुप्परथ)सामान्यरथ, ३३ १२ (पूतिगन्धि) दुर्गन्ध मामूली गाड़ी ९६ (पूतिफली) घकुची १७ (पुष्परस) फूलकारस २१५ ४८ (पूप) पूआ ३५६ २० (पूर) जलकीधारा १० (पुष्पवत्) सूर्य, च-८६ ४६ (पूरणी)सेमर न्द्रमा २६६ ६८ (पूरित) पूरी, सव २० (पुष्पवती) रजस्वला १२५ १(पृरुप) पुरुष स्त्री २५८ ६५ (पूर्ण) पूरा, सब १८(पुप्पसमय) वसन्त १८२ ३२ (पूर्णकुम्भ) पानी से भरा पूर्णकलश, घड़ा ३० (पुप्पलिङ्) भंवरा १३० अमरकोशादर्श। १३५ पृष्ठ पृष्ठ २२ ९ (पृक्ति) छूना श्लोक श्लोक २६ ७ (पूर्णिमा) पूर्णमासी ५८ १७ (पृथुरोमन् ) मछली ३० (पूर्त) तालाबआदि २५७ ६० (पृथुल) फेलाहुआ का खुदाना ३ (पृथ्वी) भूमि,जमीन, १ (पूर्व) पहिला, पूर्व कालाजीरा, हींगवृक्ष दिशा, पुरनियाँ की पत्ती १३५ ४३ (पूर्वज)जेठाभाई १०४ १०४ १२५ (पृथ्वीका) इलायची ३ १२ (पूर्वदेव) दैत्य ५२ ६ (पृदाकु) सांप ७५ २ (पूर्वपर्वत)उदयाचल १३७ ४८ (पृश्नि) छोटे अंग पर्वत वाला ३५१ २१ (पूर्वद्युः) पूर्वका गत ६७ ९२ (पृश्निपर्णी) सिंह- दिन पुच्छी, पिथवन २६ (पूपन्) सूर्य ६ (पृपत्) जलकणा, फु- २७२ हारा ३७ १० (पृच्छा)पूछना ६ (पृपत्)जलकणा, ह- १९३ ७८ (पृतना) फौज रिण १६५ ८६ (पृपत्क) वाण,तीर ६७ ६२ (पृथक्षण)सिंहपुच्छी १४ ६४ (पृपदश्व) वायु, हवा ३१ (पृथगात्मता) प्रकृति १६५ २६ (पृपदाज्य)दहीमिला पुरुपका भेदजानना, धी अन्य विवेक, ज्ञान ७८ (पृष्ठ) पीठि, अगुआ ૨૨૨ १६ (पृथग्जन) नीच,मूर्ख १८५ ४६ (पृष्ठय) लदुआघोड़ा, २६५ ९३ (पृथग्विध)नानाप्रकार पीठियोंका समूह हरतरह १६ (पेचक) उलूकपक्षी, ३ (पृथिवी) पृथ्वी,ज़मीन हाथीकी पूंछकी जरके २१२ ३७ (पृथ) कालाजीरा, समीपका भाग जिस- हींग वृक्षकी पत्ती, फे- लाहुआ जाती है १२३ ३९ (पृथुक) पञ्चा,चूरा,चि- २३७ ३० (पेटक)प्यटारी,गुरु, उरा वृन्द ३ (पृथक्) विना से उसकी गुदा झप अमरकोशादर्श। पृष्ठ ३ (पोत्रिन्) सूअर पृष्ठ श्लोक श्लोक २३७ ३० (पेटा) प्यटारी ला भाग ३६७ ४२ (पेटी) प्यटारी २५८ ६६ (पेलव) बिरर १०५ १२७ (पौण्ड>) गुलाब २३४ १६ (पेशल) चतुर,सुन्दर १३२ २९ (पौत्री) नातिनि,पोती १२३ ३८ (पेशी) अण्डा ११३ १६६ (पौर) रोहिसखर २१४ ४५ (पैठर) बटुआमें पका | १७८ १८ (पोस्श्रेणी) राज्यके अन्न अङ्ग १३१ २५ (पैतृष्वसेय) फूफूका २६१ ८० (पौरस्त्य) पहिला पुरु- लड़का पका भाव २५ (पैतृप्वसीय) फूफूका | १४६ ८७ ( पौरुप ) ऊपर हाथ लड़का उठाना,पुरुपका काम १७२ ५४ (पत्र) पितरोंका तीर्थ, २१० २७ (पोरोगब) रसोई का अँगुष्ठ,तर्जनीकाबीच मालिक १३६ ४६ (पोगण्ड) कमती वढ़- १७२ ५१ (पौर्णमास)पौर्णमासी ती अंगवाला ११२ १६२ (पोटगल ) नरकुल, २६ ७ (पौर्णमासी)पूर्णमासी काश तिथि १२९ १५ (पोटा) पुरुषके चिह्न १५ ७० (पौलस्त्य) कुबेर वाली स्त्री २१४ ४७ (पौलि) परमल, मुर- १२३ ३६ (पोत) बच्चा, नाव, मुरा दारू पीनेका वरतन १५ (पोप) पूसमास ५७ १२ (पोतवाणिज्) नावका २२७ १०३ (पौष्पक) अजनवि. रोजगार करने वाला शेप ५७ १२ (पोतवाह) नावखेवने ३४८ ७(प्याद) सम्बोधन वाला २७ (प्रकाण्ड)अच्छा वृक्ष १९ (पोताधान)छोटे अंडा, का जांधा मछलियों का समूह २१७ ५७ (प्रकाम) इच्छाभर ३२७ १८० (पोत्र) हल और सू. ३२३ ६२ (प्रकार)भेद,सादृश्य, अरके मुखका अगि- के दिनका यज्ञ - २७ तरदः ~~ अमरकोशादर्श। पृष्ठ . .. का सूत श्लोक श्लोक २४ ३४ (प्रकाश)प्रकाश,उजे. २६३ .४४ (प्रगाढ़)अतिशय,दुःख रा,अतिप्रसिद्ध,जाहिर २५९ ७२ (प्रगुण) सीधा १८२ ३१ (प्रकीर्णक) चवर ३५१ १९ (प्रगे) प्रातःकाल "८७ ४८ (प्रकीर्य) कंजा २०२ ११९ (प्रग्रह) वधुआ,तराजू ३०.. २६ (प्रकृति)सत्वादि गु का सूत जिसको पकड़ णों की साम्यावस्था, करतौलते हैं, पगहा स्वभाव,असामी,यो- ३४२ २३६ (प्रग्राह) पगहा, तराजू' नि,लिङ्ग,स्वामी,राजा, अमात्य,मन्त्री, सुहृद्, ३६५ ३५ (प्रग्रीव) झरोखा मित्र, कोश, खजाना, ७२ १२ (प्रघण)चौपारि : राष्ट्र, देशकी भूमि, दु- ७२ १२ (अघाण) चौपारि . गमस्थान, बल, फौज | १९७ ९६ (प्रचक्र)चलीहुई फौज १४५. .. .८० (प्रकोष्ठ) हाथीकीवि- २५० ३२ (प्रचलायित) नींदसे चली गाँठिके नीचेका घूमताहुआ नेवाला भाग २५७ ६३ (प्रचुर)बहुत २७७ २६ (प्रक्रम) पहिले पहिल १४ ६२ (प्रचेतस्) वरुण आरम्भकरना ९४ (प्रचोदनी) भटकटैया १८१ ३१ (प्रक्रिया अधिकार,का- १५३ ११६ (प्रच्छदपट) ओहार नून चलाना १४ (प्रच्छन्न) खिड़की २५ (प्रकण) वीणाकाशब्द | १३८ ५५ (प्रच्छर्दिका)वान्त,उ- ४१ २५ (प्रकाण)वीणाकाशब्द छार: १९५ ८७ (प्रक्ष्वेडन)नाराच,लो- २७६ २५ (प्रजन) पहिलेपहिल गर्भ १४४ , ८० (प्रगण्ड) हाथीकी वि. १९२ ७३ (प्रजविन )जल्दबाज, चली गाँठिके ऊपरका वेगवाला भाग २९. ३२ (प्रजा)सन्तान,असामी १३६ . ४७ (प्रगतजानुक) स्पचरा, १२९ १६ (प्रजाता)प्रसृता,सौ. जिसके पैर खरावहाँ २४८ २५ (प्रगल्भवुद्धिमान्,ढीठ ४ १७ (प्रजापति)ब्रह्मा हेकातीर रिहाई ।

अमरकोशादर्श। पृष्ठ - श्लोक पृष्ठ श्लोक १३२ ३०(प्रजावती)भाईकीस्त्री १७९ २० (प्रताप) खजाना और १ (प्रज्ञा)बुद्धि,बुद्धिमती दण्डसे उत्पन्न तेज,प्र. स्त्री भाव ३१३ १२२ (प्रज्ञान) बुद्धि, चिह्न १४ ८१ (प्रतापस)उजलामदार ४७ (प्रज) ल्यचरा,जिसके | ३४४ २४४ (प्रति) प्रतिनिधि,वी- पैर खरावहों प्सा.लक्षणादि १२३ ३८ (प्रडीन) उड़ना १४९ ६. (प्रतिकर्मन) अलंका- २७६ २५ (प्रणय) नम्रता, वि रकी शोभा श्वास,मांगना,प्रेम २६२ ८४ (प्रतिकूल) उलटा,वि- ३६ ४ (प्रणव) ओंकार परीत ३६ १० (प्रणाद) प्रीतिसे उत्प- २३८ ३६ (प्रतिकृति) मूर्ति,प्रति- न्न शब्द मा,तसवीर ३५ (प्रणाली) नरिआ, प- २५५ ५४ (मतिकृष्ट) अधम,नि- 'नारी न्दित १७७ १३ (प्रणिधि)जासूस,चार, २५२ ४२ (प्रतिक्षिप्त)निन्दा कि- प्रार्थना, रवानाहोना या हुआ २६३ ८६ (प्रणिहित)प्राप्त,मिला २७७ २८ (प्रतिख्याति) बहुत, १६४ २२ (पपीत)खीर, रति- प्रसिद्ध, आउरि, संस्कारयुक्त | १९३ ७९ (प्रतिग्रह) फौजकपीछे •आगि दूसरी फौज २६९ १०९ (प्रणुत) स्तुति किया १५९ १४० (प्रतिग्राह) पीकदान हुआ २६ (प्रतिघा) क्रोध २४७ २५ (प्रणेय) वश्य, वशमें २०१ ११४ (प्रतिघातन) मारना पड़ा हुआ २३८ ३६ (प्रतिच्छाया) मूर्ति,प्र. २६० ७७ (प्रतन) पुराना तिमा,तसवीर ८४ (प्रतल)चटकना,तरू-२७७ २८ (पतिजागर होशियारी पर मिलेहुये दोनोंहाथ के साथ देखना ६ (मतानिनी)बहुतफैली २६८ १०८ (प्रतिज्ञात) अंगीकार , १४६ किया हुआ अमरकोशादर्श। १३६ पृष्ठ पृष्ठ या हुआ श्लोक श्लोक ३२ ५ (प्रतिज्ञान) स्वीकार २३८ ३६ (प्रतियातना) मूर्ति,प्र- २२२ ८१ (प्रतिदान) किसी की तिमा, तसवीर दीहुई वस्तु धरोहरको २३६ २५ (प्रतिरोधिन) चोर फेरदेना ૨૭ १० (प्रतिवाक्य) उत्तर,ज- ४१ २६ (प्रतिध्वान)शब्द होने वाव के बाद दूसरीआवाज ९९ (प्रतिविपा) अतीस २३८ ३६ (प्रतिनिधि)मूर्ति,प्रति- २७६ ३४ (प्रतिशासन) वुलाकर मा, तसवीर कही भेजना २ (प्रतिपत्) परीवा,बुद्धि १३७ ५१ (प्रतिश्याय)पीनसरोग २६८ १०८ (प्रतिपन्न) जानाहुआ | ३२० १५२ (प्रतिश्रय) सभा,आ. ३१ (प्रतिपादन) दान श्रय,अभ्युपगम २५२ ४१ (प्रतिवद्ध) निराश कि- ३२ ५ (प्रतिश्रव) स्वीकार २६ (प्रतिश्रुत) अंगीकार २७७ २७ (प्रतिवन्ध) कार्य का कियाहुआ, गूंजना रुकना २७७ २७ (प्रतिष्टम्भ) कार्य का २३८ ३६ (प्रतिविम्व) मूर्ति,प्र- रुकना तिमा ३२६ १७३ (प्रतिसर)सेनाकापछि- ४६ २० (प्रतिभय) भयानक ला भाग, रक्षाकासूत्र, २४८ २५ (प्रतिभान्वित ) बुद्धि- घावका अच्छाहोना १५४ १२० (प्रतिसीरा) कनात २४० ४४ (प्रतिभ) जिम्मेदार २५२ ४१ (प्रतिहत) निराश कि- २३८ ३६ (प्रतिमा)मूर्ति,तसवीर १८४ ३९ (प्रतिमान हाथी के दां-२३२ ११ (प्रतिहारक)इन्द्रजाली तोंका मध्यभाग,मूर्ति, ९३ ७६ (प्रतिहास) कनइल तसवीर १४२ ७० (प्रतीक) अंक, विगड़ा १६० ६५ (प्रतिमुक्त) कवचादि हुआ पहिरेहुये २०१ ११० (प्रतीकार)बेरमिटाना ३०९ १०६ (प्रतियत्न) पानेकी इ-२३८ ३८ (प्रतीकाश) सदृश,ब- च्छा, अनुकूल राबर मान्, ढीठ या हुआ .

अमरकोशादर्श। १४० पृष्ठ पृष्ठ १६ २४४ २७८ ७० श्लोक श्लोक ५ (प्रतीक्ष्य) पूजा करने | १७७ ११ (प्रत्यर्थिन्)शत्रु दुश्मन के योग्य २६९ ११०(प्रत्यवसित) खाया १ (प्रतीची)पश्चिमदिशा हुआ ६ (प्रतीत)प्रसिद्ध,हर्षित, २५२ ४० (प्रत्याख्यात) त्यागा, मशहूर जवाब दिया हुआ २ (प्रतीपदर्शिनी) स्त्री ३१ (प्रत्याख्यान)त्यागना, ७ (प्रतीर) तीर, किनारा जवावदेना ७३ १६ (प्रतीहार)दरवाजा,दा-२५१ ४० (प्रत्यादिष्ट) त्यागा,ज- रपालक, ड्योढ़ीदार वाव दिया हुआ ३२५ १६६ (प्रतीहारी) द्वारपालि. | २७८ ३१ (प्रत्यादेश) त्यागना, का,जनानेकी लोंडी जवाब देना ३ (प्रतोली) गांव भीतर १९५ ८५ (प्रत्यालीढ़) वाई जॉ. की राह, कोलिया घ फैलाकर दहिनीस- २६० ७७ (प्रत्न) पुराना मेटकर बैठना, धनुप ३५२ २३ (प्रत्यक्)पश्चिमदिशा, लेकर खड़होनेका आ- देशकाल सनविशेष ८९ (प्रत्यक्पणी) लहचि-१६३ ७९ (प्रत्यासार) कायदेस चिरा खड़ीहुई फोजका पि. ८८ (प्रत्यक्श्रेणी)मसरि, छला भाग वजदन्ती २७४ १६ (प्रत्याहार) लेलेना,इ- २६१ ७९ (प्रत्यक्ष) इन्द्रियों से ग्र- न्द्रियोंका खींचना हणके योग्य २६ (प्रत्युत्क्रम) युद्धकी त- २६० ७७ (प्रत्यग्र) नया ८(प्रत्यन्ताम्लेच्छोंकादेश २४ २ (प्रत्युपस्)प्रातःकाल ७ (प्रत्यन्तपर्वत) पर्वतके २४ २ (प्रत्यूप) प्रातःकाल समीपका छोटापर्वत |२७५ १९ (प्रत्यूह) विघ्न, खलल ३१९ १४७ (प्रत्यय)अधीन,कसम, २६१ ८० (प्रथम) पहिला, प्र- ज्ञान, विश्वास, हेतु धान १३ (प्रत्ययित) विश्वासी १६२ १३ (प्रथमकल्पिक) छोटे२ ६६ . २७७ य्यारी करना अमरकोशादर्श। १४१ पृष्ठ पृष्ठ स्त्रियों ३६ श्लोक श्लोक नये विद्यार्थी आजाका चाप २७२ ९ (प्रथा) प्रसिद्धता १०२ ११७ (प्रपन्नाड) चकवड़ २४४ ९(प्रथित) प्रसिद्ध,म-१०५ १२७ (प्रपौण्डरीक) स्थल- शहूर कमल, गुलाव ३२३ १६४ (प्रदर) वाण, भंग,प- ७ (प्रफुल्ल) फूलाहुआ राजय, लहर, ६ (प्रबन्धकल्पना) कथा कीयोनिका रोगविशेष (प्रवाल)मूंगा, अंकुर १५९ १३९ (प्रदीप) दीप, चिराग १५५ १२३ (प्रबोधन)सुगन्ध को १० (प्रदीपन) विपविशेष प्रकट करना १८१ २७ (प्रदेशन) भेंट, नजर १४ ६४ (प्रभञ्जन) वायु,हवा, १४५ ८१ (प्रदेशिनी) अँगुठाके | ३३५ २०९ (प्रभव) प्रथम ज्ञानका पासकी अंगुली स्थान, जन्मका हेतु २५ *६ (प्रदोप) सन्ध्या, सांझ २४ ३४ (प्रभा) कान्ति, तेज- २५ (प्रद्युम्न) कामदेव विशेष १११ (प्रदाव) भागना २८ (प्रभाकर) सूर्य १९९ १०३ (प्रधन) लड़ाई ३ (प्रभात) प्रातःकाल २९ (प्रधान) मुख्य मंत्री, १७९ २० ( प्रभाव ) खजाना प्रकृति, परमात्मा, म. और दण्ड से उत्पन्न हामात्रप्रकृति, बुद्धि तेज, राजाकी शक्ति ५६ (प्रधि) पहियाका कि- | १८३ ३६ (प्रभिन्न) मतवाला नारा, पुट्ठी हाथी, जिसके मद २८९ २८ (प्रपञ्च) विपरीत, बहताहो चौड़ाई २४४ ११ (प्रभु) स्वामी,मालिक १४२ ७१ (प्रपद) पैरका अगिला २५७ ६३ (प्रभूत) बहुत भाग १५७ १३६ (प्रभ्रष्टक)चोटीमें गुही ७ (प्रपा) पोशाला ७५ ४ (प्रपात) पर्वत से जल ३६ (प्रमथ) शिवके गण गिरनेका स्थान २०२ ११५ (प्रमथन) मारना ३३ (प्रपितामह) परपाजा, २२ २०१ १८८ हुई फूलकी पंकि ७ ३२ (प्रमथाधिप) शिव १३३ १४२ अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ । . मालूमहो और विचार श्लोक श्लोक २९ २४ (प्रमद) हर्ष, आनन्द २२ (प्रलय) सबकानाश, ৩৩ ३ (प्रमदवन) रानियों के मूर्छा, मरण क्रीड़ा करने का वाग १२ (मलाप)अनर्थकवचन १२५ ३ (प्रमदा) बहुतकाम- २९६ ५६ (प्रवण) क्रमसे नीची वाली स्त्री भूमि,प्रह,नम्र,चौराहा २४३ ६ (प्रमनस्) हर्पयुक्त,खुश १३५ ४२ (प्रवयस् ) बूढ़ा पुरुष २७२ १० (प्रमा) यथार्थज्ञान २५६ ५७ (प्रवह) मुख्य,प्रधान २९६ ५३ (प्रमाण) हेतु,मर्यादा, ३६ ६ (प्रवल्हिका) जिसके शास्त्र,प्रमाण,प्रमाण सुनने से और अर्थ करनेवाला, ज्ञात ૮ ३० (प्रमाद) असावधानी, करनेपर और वह क- गफलत हानी २०१ ११२ (प्रमापण) मारना , २७५ १८ (प्रवह) बाहरकीयात्रा, २७२ १० (प्रमिति) यथार्थ ज्ञान, वायु, हवा १६६ २८ (प्रमीत) यज्ञमें मारा १८७ ५२ (प्रवहण) चौड़ी लंबी हुआ पशु, मुर्दा, मरा जनानी गाड़ी हुआ १५३ ११७ (प्रवार) अंगौछा ३७ (ममीला) आलस्य ४ (प्रवारण) किसी का- २५६ ५७ (प्रमुख) मुख्य, प्रधान मनाके अर्थ दानदेना २६७ १०३ (प्रमुदित) हर्पित ७(प्रवाल ) वीणाका २४ (प्रमोद) हर्ष, आनन्द डॉडा, मूंगा, अंकुर, ४९ (प्रयत) पवित्र नया पल्लव ४५ (प्रयस्त) बड़ी यत्न से | २७५ १८ (प्रवाह)चहना, जल पकायाहुआ अन्नादि धारा २७६ २३ (प्रयाम) धनधान्यका | २०१ ११२ (प्रवासन) मारना संचय १३८ ५५ (प्रवाहिका)संग्रहणी २६ (प्रयोग) युद्धके वास्ते रोग तय्यारी करना (प्रविख्याति)- अतिप्र- २३ (प्रलम्बन) वलदेव सिद्धता २७० ও अमरकोशादर्श। १४३ पृष्ठ ८० फैला हुआ १४८ २० श्लोक श्लोक १९९- १०३ (प्रविदारण) लड़ाई, २०० १०८ (प्रसभ) हठ युद्ध २७६ २३ (प्रसर)घाव का फैलना २७५ २० (प्रविश्लेप) बड़ा वि- | १९७ ९६ (प्रसरण) फौजका फै- योग लाव . ૨૪૨ ४ (प्रवीण)निपुण,पंडित, २७२ १० (प्रसव )प्राणीकी उ- चतुर त्पत्तीका समय,जन्म, ७ (प्रवृत्ति)त्तान्त,हाल, फल, फूल,उत्पत्ति जलका वहना १५ (प्रसववन्धन) ढेपी, २६० ७६ (प्रवृद्ध) पढ़ा हुआ, कली के ऊपर कोमल पत्तोंका लपेट २५६ : ५७ (प्रवेक)उत्तम,प्रधान २६२ ८४ (प्रसव्य )उलटा, वि- ९८ (प्रवेणी)तैलादिन ल- परीत गानेसे लटरेहुये घाल, ३४९ १०(प्रसह्य) हठसे हाथी की झूल १६ (प्रसाद)अनुग्रह, प्र- १४४ ८० (प्रवेष्ट)वाह,भुजा काव्यके गुण २६१ ८१ (प्रव्यक्त) साफ १४९ ९९ (प्रसाधन) अलंकारकी १०(प्रश्न) पॅलना शोभा २७६ २५ (प्रश्रय)प्रेम १५६ ११० (प्रसाधनी) कंघी २४८ २५ (प्रश्रित) नम्र मनुष्य, | १४९ १०० (प्रसाधित) अलंकृत, सीधा भूपित ७२ (प्रष्ठ) अगुआ ११० १५२ (प्रसारिणी) अमरवौ- ६३ (प्रष्ठवाह) वैलकाढ़ने रिया, चॉदवेल का घसीटा, ठ्यगुरी २४९ ३१ (प्रसारिन् ) पसरने का घसीटनेवाला पैल वाला २२० ७० (प्रष्ठौही) गाभिन क- २४४ ९ (प्रसित) किसी काम लोरि, ओसर में दिलसे लगे हुये ५७ १४ (प्रसन्न)निर्मल १३४ ३७ (प्रसिति)बन्धन २० •१६ (प्रसन्नता)स्वच्छता ३०८ १०४ (प्रसिद्ध) प्रसिद्ध, जा- २३६ ४० (प्रसन्ना) दारू हिर, भूपित सन्नता, २१८ १४४ अमरकोशादर्श। पृष्ठ १३४ पृष्ठ श्लोक श्लोक ३७ (प्रसूजनयितारौ)माता १९४ ८२ (प्रहरण) हथियार पिता ८४ (प्रहस्त) चटकना २६ (प्रसू ) घोड़ी, माता ६० २६ (पहि) कुँऑ १२९ १६ (प्रसूता) सौरिहाई ६ (प्रहेलिका) कहानी २७२ १० (प्रसूति) जन्म वह जिसके सुनने में १२९ १६ (प्रसूतिका) प्रसूता, अर्थ और हो और वि- सौरिहाई चारने से और ३ (प्रसूतिन) दुःख २६७ १०३ (प्रहन्न हर्पित,प्रसन्न १७ (प्रसून) फूल | २५९ ७० (पॉशु) ऊँचा, लम्बा २६३ ८८(प्रसृत) फैलाहुआ, | ७० ३ (प्राकार) बॉसआदिसे पसरना घिराहुआ मकानादि १४३ ७२ (प्रसृता) जॉघ २३३ १६ (प्राकृत) नीच ९४६ ८५ (प्रसृति) पसर १६३ १८ (प्राग्वंश) यज्ञस्थान में २१० २६ (प्रसेव ) थैली, बोरा हविके घर से पूर्व दिशा ७(प्रसेवक) वीणाकी का घर मढ़ी हुई तुम्बी २५६ ५८ (प्राग्रहर) मुख्य,प्रधान ४ (प्रस्तर)पत्थर, वॉधना २५६ ५.८ (प्राग्य) मुख्य, प्रधान २७६ २४ (प्रस्ताव)प्रसंग, अव. | २७२ १० (माघार) घी आदिका सर टपकना ५ (प्रस्थ) पर्वतके ऊपर | १६८ ३६ (प्राघुपक) अभ्यागत ऊँचा चट्टान,सेर,पसर १६८ ३६ (प्राघूर्णिक) अभ्या- ७६ (प्रस्थपुष्प ) मरुआ, गत दवना ३५० १६ (प्राच् ) पूर्वकाल, पूर्व १९७ ९५ (प्रस्थान) यात्रा दिशा, पूर्वदेश २०९ २६ (प्रस्फोटन)सूप ३५४ ८(माचिका) बन की ५ (प्रस्रवण)पहाड़में जल माछी, पक्षीविशेष निकलनेका स्थान १६ १ (प्राची) पूर्वदिशा ६७ (प्रसाद) मूत ६५ ८५ (प्राचीना) पाठा,पॉदरि ६ (महर)पहर १७२ ५३ (प्राचीनावीत) दहिने ७५ ६४ अमरकोशादर्श। १४५ पृष्ठ पृष्ठ . ५ (प्राज्ञ) पण्डित श्लोक श्लोक काँधे पर रक्खा हुआ | ३४६ २५५ (प्रादुर ) नाम, प्रका. यज्ञोपवीत श होनेवाला ३ (प्राचीर) घेरा, मका- १४५ ८३ (प्रादेश) अंगुठा से नादिके चारोंओर बॉस अंगुठा के पासकी अँ- आदि का घेर गुरी तकका वीता १६९ ३६ (प्राचेतस) वाल्मीकि- १६७ ३२ (प्रादेशन) दान मुनि ३४७ ४ (प्रायम्) अनुकूलता ८(प्राच्य) पूर्व दक्षिणका ६E १८ (प्रान्तर) जहां दूरतक देश जल छाया मनुष्य न २०६ : १२ (प्राजन) कोड़ा,चावुक हों वह रास्ता १८९ ५६ (प्राजित) गाडीवान्, २६३ ८द (प्राप्स) स्थापित,रक्खा, रथवान् मिला २०२ ११७ (प्राप्तपञ्चत्व)मराहुआ १२८ १२ (प्राज्ञा) बुद्धिमती स्त्री ३१५ १३१ ( प्राप्तरूप ) पण्डित, १२८ १२ (प्राज्ञी)बुद्धिमती स्त्री २५७ ६३ (प्राज्य) बहुत ६८ (प्राप्ति) उदय, लाभ ९७६ ५ (प्राहिवाक)न्याय कर-२६४ ९२ (प्राप्य ) मिलने के नेवाला,मुकद्दमा देखने योग्य वाला २७ (प्रभृत) भेंट,नजर १४ : ६४ (प्राण ) वायुविशेप, १७३ ५६ (प्राय) सन्यासपूर्वक वल, जीव, गन्धरस, भोजन का त्याग कर- वोर ना, बहुताई, मरण के ३०(प्राणिन) शरीरधारी अर्थ जाना १९ (प्रातर) प्रातःकाल ३२० १५३ (प्रायस् )बहुताई,मृ- २३२ ११ (प्रातिहारिक) माया- वी, इन्द्रजाली मित्त अन्न छोड़ना १६२ १३ (प्राथमकल्पिक) पहिले २६६ ९७ (प्रार्थित) याचनाकिया पहिल वेदारम्भ करने हुआ वाला १५८ १३७ (प्रालम्ब) गलेसे सीधी त्यु, पाथर, मरणके नि- अमरकोशादर्श। पृष्ठ । २८ १९ (प्रावृप्) वर्षा परेत, मराहुआ ९३ (पास) साँग पृष्ठ श्लोक श्लोक लटकी हुई माला २७१ ४ (भीणन)अघाना १५. १०४ (प्रालम्बिका) नाभि २६७ १०३ (प्रीत) हर्पित, प्रसन्न तक लम्बीसोनेकीमाला २९ २४ (प्रीति) हर्ष,प्रेम १८ (पालेय) पाला २६६ ६६ (मुष्ट)जरा हुआ १५३ ११७ (पावार) ऊपर ओढ़ने ३१ १ (प्रेक्षा)बुद्धि, नाचदे- का वस्त्र खना १५२ ११३ (प्रावृत) वस्त्र का कि- १८७ ५३ (प्रैइखा डोली,हिंडोला नारा २६३ ८७ (मेखित) कॉपताहुआ २(प्रेत) नरकके प्राणी, ९५ ८५ (पाइपायपी) क्यवॉच . १९७ ३४८ ८ (मेत्य)जन्मान्तर १८८ ५७ (प्रासंग)गाडीकाजुआं ४७ २७ (प्रेमन) प्रेम,स्नेह ६४ (प्रासंग्य) लदुआ बैल २६९ १११ (प्रेप्ड)अतिशय प्यारा १० ४७ (प्रासाद) देवमन्दिर, ३३७ २१६ (प्रैप) पठाना,मलना राजाका घर २३४ १७ (प्रैष्य) दास, टहलू ७० (प्रासिक) सांग हथि- १६६ २८ (प्रोक्षण ) यज्ञमें पशु यार धारण करनेवाला २५ ३ (प्रा)दिन का पूर्व- १६६ २८ (प्रोक्षित) मारहुआ भाग यज्ञ का पशु १३३ ३५ (प्रिय) पति, दुलहा, १८६ १९ (पोथ) घोड़ाकी नाक २२ (पोप्ठपदा) पूर्वभाद्र- ४२ (प्रियक) कदमयन, पद उत्तरभाद्रपद विजयसार, काकुनि, ५८ १८ (प्रोप्पी) शहरीमछली हरिणविशेष २१ २२ (पौष्ठपद) भादामास ५५ (प्रियंग) काकुनि ७६ (प्रौढ़)वढ़ाहुआ २७ (प्रियता) स्नेह २३ ३२ (पक्ष) पकरिया, गेंठी २५० ३६ (प्रियंवद) मीठे वचन ५६ ११ (अव) छोटीनाच, मेदु- बोलनेवाला की,मोथा, पत्तखपनी, ३५ (पिपाल) चिरोंजी चाण्डाल को मारना प्यारा २६० ८८ १७ - .

अमरकोशादर्श। १४७ पृष्ठ पृष्ठ ७८ ८८ वस्तु, कमजोर श्लोक श्लोक ४ (प्लवग) वानर, मेंढक, वृक्ष सारथी ८६ ४५(फलाध्यक्ष) खिन्नी ४ (प्लवंग) वानर ७ (फलिन्) फलवालावृक्ष ३१७ १३७ (प्लवंगम)वानर,मेढ़क, ७८ ७ (फलिन) फलवाला १८ (प्लाक्ष) पकरिया का वृक्ष ८८ ५५ (फलिनी) काकुनि, इ- १४१ ६६ (श्रीहन ) पिलही न्द्रपुष्पी ८७ ४९ (प्लीहशत्रु) गुलानार ५५ (फली) काकुनि १८६ ४८ (प्त) घोड़ों की कावा ६ (फलेग्रहि) फरनेवाला चाल वृक्ष २६६ ९९ (मुष्ट) जराहुआ ५४ (फलेरुहा) पॉढरि २७२ ९ (प्लोप) जलाना ९० ६१ (फल्ग)कठ्वरि,असार (फ) २६६ ११० (पसात) खायाहुआ २१३ ४३ (फाणित) राय, खांड़ ६६ ८(फजिका) भंगिरा २६५ ६४ (फाण्ट) सहजही कि- ૫૨ ९ (फटा) सॉपका फन या हुआ ५२ ९ (फणा) सॉपका फन १५२ १११ (फाल) फार, कप्राससे ६४ ७६ (फणिञ्जक) मरुआ, चुनाहुआ कपड़ा दवना २७ १५ (फाल्गुन)फागुनमास ५२ ७ (फणिन्) सॉप २७ १५ (फाल्गुनिक) फागुन ९० (फल)ढाल,फार,फल, मास लाभ ८(फुल्ल) फूला हुआ ९० (फलक) ढाल २२८ १०५ (फेन) समुद्रफेन, फेना १६१ ७१ ( फलकपाणि) ढाल ८३ ३९ (फेनिल)रीठी, बैरका वाला २२९ १११ (फलत्रिक) त्रिफला, ११५ ६ (फेरख) सियार. हर बहेरा अॅवरा ९३ ७८ (फलपूर) विजौरानीवू २१७ ५६ (फेला) खाने से बचा ७(फलपत्) फलवाला अन्न, जूठा ७८ १६६ ६ (फेरु) सियार .१४८ अमरकोशादर्शी पृष्ठ पृष्ठ का पुत्र - ७८ , श्लोक श्लोक (ब) १३३ ३५ (वन्धुता) वन्धुओं का ६४८१ (क) बकुला, गूमा समूह . .६० ६९ (वकुल) मोमसिरी २५६ ६९ (वन्धुर) ऊंचा नीचा. ३४४ २४३ (वत) खेद,दया,संतो- १३१ २६ (वन्धुल) कुलटा स्त्री प, विस्मय, किसीको चिताकर अपने सम्मुः। ९२ ७३ (वन्धक) दुपहरिया ख करना ८६ ४४ (वधूकपुष्प) विजय- ८४. ३४ (वदर) बैरके फल सार १४२ ११६ (बदरा)कपास,बाराही- २५६ ६९ (वन्धर) ऊंचा नीचा ७(वन्ध्य) बाँझवृक्ष ८४ ३७ (बदरी) भैरवृक्ष | २१६ ६९ (वन्ध्या) वाँझ गौ १६८ ६७ (बन्दिन्) स्तुतिपाठ १२२ ३२ (वह) मोरपंख, पत्ता करने वाले, भाट १०६ १३२ (वर्हपुष्प) कुकुरौंधा २०२ . ११५ (वध) मारना १२१ ३१ (वहिण) मोर । २५२ . ४२ (बंद्ध) वाँधाहुआ १२१ ३१ (वर्हिन) मोर १३६ ४८ (वधिर) बहिरा १०६ १३२ ( बर्हिपुष्प) कुकुरौंधा २(वधू) अपनी स्त्री, प २ ९ (बहिर्मुख) देवता तोहू, स्त्री ५५ (पहिस्) आगि २५३. ४५ (वध्य) शिरकाटने के ५ २४ (वल) चलदेव , फौ योग्य ज, पराक्रम, मोटाई, (बन्धक) गिरों धरना कौआ १२७ १० (बन्धकी) छिनारि ३१ (खलज) खेत, नगरका २६ (वन्धन) चाँधना दरवाजा- २०२ - ११६ (बन्धनालय) चन्दी- २९० ३१ (वलजा)सुन्दरी स्त्री २३ (बलदेव) बलदेव. १८४ ४१ (वन्धस्तंभ) हाथी वाँ २३ (खलभद्र) बलदेव धनेका खूटा | ११० १५० (वलभद्रिका)चिरायता १३३ ३४ (वन्ध)अपनीजातिवाले का.फल. ६.२ "७३ (बन्धुजीवक)दुपहरिया २६४ ६० (बलयित्) घेराहुआ २९० खाना, जेल ५ अमरकोशादर्श। १९४९ पृष्ठ पृष्ठ । ४ गई हो वह पुरुष श्लोक श्लोक १३६ ४४ (बलवत्) बलगर ३५ १७ (वहिस्) बाहर १०० १०७ (बला) वरिआरा २५७ ६३ (बहु) बहुत २६ (बलाका) वकुली २४५ १७ (बहुकर) बहारनेवाला २००. १०८ (बलात्कार) हठ, जिद्द २५० ३६ (बहुगर्यवाच) बहुत ४४ (वलाराति) इन्द्र निन्दितबात कहने- ६ (वलाहक) वादर वाला १८१ २७ (बलि)महायज्ञविशेष, ८३ ३२ (बहुपाद) वरगद पोत,भेंट, सूखीखाल, २४३ ६ (बहुपद) बहुत देने- प्रह्लादका पौन वाला, अतिदानी २१ (वलिध्वंसिन् ) विष्णु १५२ ११३ (बहुमूल्य) बड़े मोल- १३६ ४५ (वलिन) वुढ़ापे से जि- वाला वस्त्रादि सकी खाल सिकुर १५६ १२९ (बहुरूप) राल, धूप २५७ ६३ (बहुल) बहुत, आगि, २१ (बलिपुष्ट) कौआ अँधेरापाख १३६ ४५. (बलिभ) बुढ़ापेसेजिस १०४ १२५ (बहुला) इलायची, की खाल सिकुरगई गौ, कृत्तिकानक्षत्र २०६ २३ (बहुलीकृत)वसाकररा- २१ (बलिमुज्) कौआ शि कियाहुआ अन्नादि १३७ ४९ (वलिर) कंजी आंखों-/ ८४ ३४ (बहुवारक) लसोहरा वाला २६४ ६३ (बहुविध) अनेकप्र. १ (वलिसझन्) पाताल कारका ५६ (वलीवर्द) बैल ९८ १०० (बहुमुता) शतावर २१० २७ (वल्लव) रसोईवरदार, २२० ७० (बहुसूति) बहुतवार अहीर बियाई गौ ११३ १६३ (वल्वज) बगई ६७ ६६ (वाकुची) बकुची २२० ७१ (वष्कयणी) बहुत दि- १५ ६८ (वाढ) अतिशय, स्वी. नकी व्यानी, वकेनि कार, मजबूत १६ (वहिर्दार) दरवाजे के | १९५ ८६ (बाण) तीर, वाणासुर वाहरका भाग दैत्य हो वह पुरुष 1 अमरकोशादर्श। १५० पृष्ठ ५४ का पुत्र तिक पृष्ठ पतोफ श्लोक १५२ १११ (वादर) कपाससे व- ६२ ३३ (वाहुदा) नदीविशेष नाया कपड़ा १५४ ७९ (वाहुमूल) काँख ३ (वाधा) दुःख, विरह २०० १०६ (पाहुयुद्ध) वॉहोंसे ल- १३१ २६ (वान्धकिनेय) कुलटा डाई २८ १८ (वाहुल) कार्तिक ३४ (वान्धव) जातिवाले है ४१ (बाहुलेय)स्वामिका- १९ (वाहत) भटकटैयाका (वाहिक) बाह्निकदेश १०३ १२२ (वाल) बालक, नेत्र- १८५ ४५ (वाहीक) काबुलीघो- घाला, पार, मूर्ख, ब. डा,कंकम छेड़ा ४५ ( वाह्निक ) काबुली ४९ (वालतनय) खयर घोड़ा,हींग, कुंकम ११४ १६३ (वालतृण) नयाखर, ८४ २ (विन्दु) हाथीके माथे १८६ ५० (वालधि)चारयुक पॅछ में बीचका भाग जो ११७ १३ (वालमूपिका) छोटी खाली होताहै उसको मुसरी विन्दु कहते हैं ५० (वालहस्त) वारयुक्त १९ १५ (विम्व) गोलमण्डल, पॅछ कंदरूकाफल ४५ १४ (वाला) कुमारीकन्या १०७ १३६ (विम्बिका) कुंदुरू २५४ ४८(वालिश)मूर्ख,लड़का ८३ ३२ (विल्व) बेल २२१ ७७ (वालेय) गदहा ३० २८(वीज)कारण,काम शुक्र ९६ १० (वालेयशाक) भेंगरा ६४ ४३ (वीजकोश)कमलके ४० (वाल्य) लड़कपना बिया. '३१४ १३० (वाष्प) वाफ, आँसु ७८ (वीजपूर) विजोरानींबू २१३ ४० (वाप्पिका) हीगकेवच | २०५ ८ (वीजाकृत) वोकर जो- की पत्ती तागया खेत ८० (बाहु) वॉह, भुजा २ (वीज्य) कुल में उत्पन्न १७५ १ (वाहुज) चत्रिय, स- ४६ १९ (वीभत्स) रसविशेष, हलवाहुको क्रूर अमरकोशादर्श। पृष्ठ १४१ ८५ ७६ १७३ २४६ पृष्ठ दलोक श्लोक ६४ ८१ (क) गुमा जगानेवाले ६४ (बुक्का) करेजा ८१ २० (बोधिहम) पीपरवृक्ष ૨ १३ (बुद्ध) जाना, माना, | २२८ १०४ (बोल)गन्धरस, चोर बौद्ध २२ २८ (अध्न) सूर्य १ (बुद्धि)बुद्धि, समझ | १६० ३ (ब्रह्मचारिन् ब्रह्मचा- १९ (बुद्बुद) बुल्ला री, ब्रह्मचर्य आश्रममें ५(बुध) पण्डित, बूढ़ा, रहनेवाला बुध, चौथाग्रह ४१ (ब्रह्मण्य) पीपरसदृश २६८ १०८ (बुधित) जाना, माना वृक्षविशेय, तृत १२ (बुध्न)जर ५५ (ब्रह्मत्व) ब्रह्ममें मिल ५४ (वभुक्षा) भूख जाना २० (बुभुक्षित ) मँखा १०६ १४५ (ब्रह्मदी) अजवाइनि २०६ २२ (बुस) भूसा ४१ (ब्रह्मदारु)पीपर सदृश ३६४ ३४ (वुस्त) भूजामॉस, क- वृक्ष, तूत टहरका झोथरा, नव ३ १६ (ब्रह्मन् ) ब्रह्मा, वेद, अक्षरके चरणकाछन्द यथार्थ वस्तु, तप, ब्रा- ६७ ९३ (बृहती) भटकटैया, ह्मण बनभॉटा ५३ १० (ब्रह्मपुत्र) विपरिशेप, २०० १०७ (बंहित) हाथीका ग- अधिक्षय जना ३०८ १०३ (ब्रह्मवन्धु ) निन्दित २५७ ६० (बृहत् )पड़ा,फैलाहुआ ब्राह्मण १५३ ११७ (वृहतिका)ऊपरओ- १७३ ५५ (ब्रह्मभूय) ब्रह्म में मिल दनेका वस्त्र, अॅगौछा जाना १३६ ४४ (बृहत्कुक्षि) वड़ेपेटवा- १६३ १६ (ब्रह्मयज्ञ) वेदका पाठ करना ५५ (वृहद्भानु) आगि ४२ (ब्रह्मवर्चस) सदाचार २४ (वृहस्पति) वृहस्पति पालन और वेदाभ्या- ९७ (वोधकर)स्ततिकरके स करने से जो तेज प्रात कालमें राजाको बढ़ताहै उसका नाम . ला, तोदारा १५२ अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ जानने वाला मिल जाना श्लोक श्लोक ७ (ब्रह्मवादिन् )वेदान्त २६९ ११० (भक्षित) खाया हुआ २१० २८ (भक्ष्यकार) पुमा आ- ४२ (ब्रह्मविन्दु) वेद पढ़ते दि बनानेवाला समय मुखसे निकला १४३ ७६ (भग) योनि, शोभा, हुआ थूक का बूंद इच्छा,माहात्म्य, परा १७३ ५५. (ब्रह्मसायुज्य)ब्रह्म में क्रम,यल, सूर्य, कीर्ति | १३६ ५६ (भगन्दर) गुदाके पास ६ २६ (ब्रह्मसू) कामदेव का फोड़ा १७३ ५३ (ब्रह्मसूत्र) चांयें काँधे ३ १३ (भगवत) जैनमती जनेऊ का नाम १३२ २९ (भगिनी) वहिन ४२ (ब्रह्माञ्जलि) वेदपाठके | ५५ ५(भङ्गलहरी समयकी हुई अञ्जली २०८ २० (भङ्गा) भाँग, पटुआ- १७० ४३ (ब्रह्मासन) ध्यान,योग विशेष जिसके सन का आसन से टाट वा भंगराव- २६ २१ (ब्राझकल्प) देवताओं नताहै के दो हजार युग, बा-३५४ ८(भनि) टेढ़ाई हमतीर्थ, अंगुष्ठके मूल १८० २४ (भजमान) फैसला, में ब्राह्मतीर्थ होता है न्यायसे जो वस्तु ली ४ (माझण) ब्राह्मण जावे ६६ ८९ (ब्राह्मणयष्टिका)भंगरा १८९ ६१ (भट)योधा,लड़नेवाला ८९ (ब्राह्मणी) भैंगरा २१४ ४५ (भटिव) शूल में छेद ४१ (बाह्मण्य)ब्राह्मणों का कर भुनाहुआ मांस समूह १३ (भट्टारको राजा ३६ (ब्राझी) लोकमातावि-| ४४- १३ (भट्टिनी) दूसरी रानी शेप,वाणी,सोमवल्लरी | १०१ ११४ (भण्टाकी)बैंगन,बन: भाँटा २१ (भ) नक्षत्रगण ६३ (भण्डिल) सिरसा का ४८ (भक्त) भात वृक्ष २४६ २० (भक्षक) खवैया ६६ .६१ (भण्डी) मजीठ . ४४ अमरकोशादर्श। पृष्ठ ३५ (भर्तृ) पति, दुलहा, वैल ९१ ८ पृष्ठ श्लोक श्लोक ६१ (भण्डीरी) मजीठ २५ (भद्र) कल्याण, धारण करनेवाला,पो. १७२ ५३ (भद्रकरण)वार बन- पण करनेवाला चाना १२ (भर्तृदारक) राजपुत्र १८२ ३२ (भद्रकुम्भ) पूर्णकलश ४४ १३ (भर्तृदारिका) राजक- ५३ (भद्रदास) देवदारु न्या ३६ (भद्रपर्णी) गम्भारी १४ (भर्त्सन) फजीहत ११० १५३ (भद्रवला) चाँदवेल | २२६ ९४ (भर्मन्) सोना, सु. ११२ १६० (भद्रमुस्तक) नागर- वर्ण, मॅजूरी, दरमहा मोथा ९१५ ५ (भल्ल) भालू,रीछ ६७ (भद्रयव) इन्द्रयव,कु. ८५ ४२ (भल्लातकी) भिलॉवा रैआ का फल ११५ ४ (भल्नुक) भालू, रीछ १५७ १३२ (भदश्री) मलयचन्दन ११५ ५ (भालूक) भालू १८२ ३१ (भद्रासन) राजगद्दी ३५ (भव) शिव, जन्म, २१ (भय) डर, भय चेम, संसार २० (भयंकर)भयानकरस, ५ (भरन) घर डराने वाला ३८ (भवानी) पार्वती ४२ (भय दुत) डरा हुआ २६ (भविक) कल्याण ४५ १७ (भयानक) जिसके दे.'२४९ २६ (भवितृ) होनेवाला खने आदि से डर हो, २१९ २६ (भविष्णु) होनेवाला भयानक रस २६ (भव्य)कल्याण,कुशल ६७ (भर) यहुत २३५ २२ (भपक)कुत्ता,कूकर રૂ6. ३९ (भरण)मॅजूरी,दरमहा २३७ ३३ (भत्रा)भाठी,सलॉयत २३९ ३९ (भरण्य) मॅजूरी, दर-१०३ १२० (भस्मगंधिनी)गगन महा धरि २४६ ६३ (भस्मगा)सीसम १६ (भरण्यभुज) मॅजूर. १५ (भरत) नट ३०० ६६ (भस्मन्.) भसम, ऐ. १६ (भरद्वाज)भरदूलपक्षी २४ ३४ (मा) कान्ति, शोभा ८ , ६० २३३ उपर्य, राख ३४ (भग) शिव १५४ अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ " श्लोक श्लोक २५५ ८९ (भाग) तौलनेका बाँट २१ २५ (भार्गव) शुक्राचार्य २८ (भागधेय) पोत, कर, ११२ १५८ (भार्गवी) दूब भाग्य ८९ (भार्गी) भगरा १३३ ३२ (भागिनेय)भने,भॉजा १२६ ६ (भा-) व्याही स्त्री ३१ (भागीरथी) गंगा १३४ ३८ (भाप्पती) स्त्री पुरुष ३० २८ (भाग्य) भाग्य, शुभा- ४४ १२ (भाव) पण्डित,मनका शुभकर्म विकार,सत्ता,स्वभाव, २११ ३३ (भाजन) वर्तन अभिप्राय, चेष्टा, आ. २११ ३३ (भारड) वर्तन,घोड़ेका त्मा,जन्म आभूषण, वनियां का ४६ २१ (भावबोधक) मनकी मूलधन बात जनानेवाला १७ (भाद) भादोमास १५७ १३५ (भावित सुगन्धित ब- २८ १७ (भाद्रपद)भादौमास स्तुसे भिगोईहुई वस्तु, २१ २२ (भाद्रपदा) पूर्व और उ छयोंकीहुई वस्तु,पाया त्तरभाद्रपद नक्षत्र हुआ ३१ (भानु) सूर्य,किरण २९ २६ (भावक)कल्याण १२५ ४ (भामिनी) क्रोधिनीस्त्री ३५ १ (भापा)बानी २२४ ८७ (भार) २० तुलाभर १ (भापित) वचन,कहा ७ (भारतवर्ष) हिमालय हुआ और विन्ध्यपर्वत के ३६३ ३९ (भाप्यसूत्रोंका अर्थ ३६ (भास)शोभा,कान्ति १ (भारती) वानी, सर २२ २८ (भास्कर) सूर्य स्वती २२ २९ (भास्वत्) सूर्य १०२ ११६ (भारदाजी) वनकपास २७२ ६ (भिक्षा)भीखमाँगना, २३७ ३० (भारयष्टि) वहिंगी सेवा,भीख,मंजुरी २३३ १५ (भारवाह) बोझा लेच. १७० ४५ (भिक्षु) संन्यासी २६ (भिक्षकी) भिखिया- १५ (भारिक) वोझालेचल- रिनि १६ (मिच) खण्ड, हिस्सा २३ मध्यका देश लने वाला ने नाला अमरकोशादर्श। पृष्ठ ५(भिदा) फूटना . श्लोक श्लोक ४ (भित्ति)भीति,दीवाल ५२ ६ (भुजंगम) सांप २७१ १०२ ११५ (भुजंगाक्षी) रासनि ४८ (भिदुर) इन्द्रका वज १४१ ७(भुजशिरस्) कन्धा ६१ ( भिन्दिपाल) ढेल- १५४ ७७ (भुजान्तर) कोरा,गोद वॉसी २३४ १७ (भुजिप्य) दास, टहलू २६२ ८२ (भिन्न) अलग, दूसरा, ५५ ३ (भुवन) जल, लोक चीगहुआ २(भ) पृथ्वी ५७ (भिपज्ञ) वैद्य ११ (भूत) देवयोनिवि- २.१५ ४९ (भिस्सटा) जराहुआ शेप, प्राप्त, पाया, प्रा- भात णी, बीता कालादि, ४८ (भिस्सा) भात उचित, पृथिव्यादिप- ४६ २१ (भी) भय, डर चभूत, सत्य ४६ २१ (भीति) भय, डर ४ (भूतधात्री) पृथ्वी ३५ (भीम) भयानक,शिव २२९ १११ (भूतकेश)जटामासी १२५ ३.(भीरु)डरनेवाली स्त्री, ९२ ७१ (भूतवेशी) सफ़ेदफूल डरनेवाला की नेवारी २४८ २६ (भीरुक) डरनेवाला ३०६ १०५ (भूतात्मन्) ब्रह्मा,देह ९८ १०१ (भीरुपत्री) शतावरि ८९ ५८ (भूतावास) बहेड़ा २६ (भीलुक) डरनेवाला ८ ३७(भूति) ऐश्वर्य,सिद्धि, २० (भीपण) भयानक भस्म,राख २० (भीम) भयानक ૨૮૩ ८(भूतिक) चिरायता, ६१ ३१ (भीम) गंगानदी गन्धतृण, कुकरमुत्ता २६९ १११ (भुक्त) खायाहुआ ६२ (भुग्न) टेढ़ा, पीड़ा | ११५ ३ (भूदार) सूअर युक, टूटाहुआ १६० ४ (मृदेव) ब्राह्मण १४४ ८० (भुज)भजा,वाह,हाथ १०८ १४३ (भूनिम्म) चिरायता ५२ ६ (भुजग) सॉप १ (भूप) राजा ૫૨ ६ (भुजंग) सॉप ७० (भपदी) वेला ३१ (भुजंगमुह) मोर ६० (अमृत) पहाड़राजा ३२ (भूतेश) शिव १५६ अमरकोशादर्श। पृष्ठ ૨૦૨ पृष्ठ श्लोक श्लोक ६५ २ (भूमि) पृथ्वी,जमीन २३९ ३८ (भृति) मँजरी ३८ (भूमिजम्बुका)नारंगी, २३३ १५ (मृतिभुज्ञ) मँजूर भुइँजामुनि २३४ १७ (मृत्य) दास, टहलू १ (भूमिस्पृश् ) वैश्य, २३९ ३८ (भृत्या) मैंजूरी पनियां ६६ (भृश) बहुत २५७ ६३ (भूयस् ) फिर, बहुत, ५९ २४ (भेक) मेढ़क अधिक २४ (भेकी) मेढुकी २५७ ६३ (भूयिष्ठ) बहुत, प्रचुर १७९ २१ (भेद)फरक डालना २५७ ६३ (भरि) बहुत, सोना, २६६ १०० (भेदित) फाराहुआ विष्णु, हर, ब्रह्मा २२ (भेरी) नगारा, १०८ १४३ (भूरिफेना) सेहुड़ावि. (भेपक)कुकुर, कुत्ता शेष १३७ ५० (भेपज)दवाई,इलाज ६ (भरिमाय) सियार १७१ ५० (भैक्ष) भिक्षासमूह, ६१ ६६ (भूरुण्डी) घुइयां भिक्षाका ढेर ४६ (भूर्ज) भोजपत्र १६ (भैरव).देखनेसेडरा- १४९ १०१ (भूपण) गहना,शृंगार नेवाला,भयानक रस करना ५० (भैपज)दवाई,इलाज १४६ १०० (भूपित) शृंगारकिये २८८ २३ (भोग) सुख, स्त्रीआदि २९ (सूप्ण) होनेवाला का पालन, साँप का ११४ १६७ (भूस्तृण) खरविशेष फणा, शरीर ४ (भृगु) पर्वत से जल- ३०० ६६ (भोगवती) साँपों की गिरने का स्थान नदी और नगरी १०६ १३४ (मूंग) भुजकैल,भु- ५२ . ८ (भोगिन् ) साँप जैटा, तज, भंवरा १२६ ५ (भोगिनी) राजाकी ११० १५१ (भंगराज) भंगरा अन्य स्त्रियां जिन का १८२ अभिषेक न हुआहो झारी २१६ ५५ (भोजन) भोजन २९ (भंगारी) झींगुर ३४८ ७ (भोर) सम्बोधन २३३ १५ (भृतक) मँजूर २१ २५.(भौम) मंगल ર૪૨ ३२ (भंगार) पानी पीनेकी अमरकोशादर्श। १५७ पृष्ठ पृष्ठ श्लोक श्लोक १७६ ७(भौरिक) सोनेका अ- रण किया पुरुष नाच- धिकारी नेवाला २३ (भ्रंश)भ्रष्ट होना,गि- ५० ३७ (भृकुटि) टेढ़ीभौंह रना १४७ ९२ (भू) भौंह ११ (भ्रकुंस) स्त्री का वेष ४४ ११ (भृकुंस) स्त्रीवेषधारी धारण किये पुरुप ना- पुरुष नाचनेवाला चनेवाला ५० ३७ (भूकुटि) टेढ़ीभौंह ५० ३७ (भ्रकुटि) टेढ़ी भौंह १३४• ३६ (भ्रूण ) स्त्री का गर्भ, ૨૨ ४ (भ्रम) अयथार्थ ज्ञान, चालक जलका भेवर, भ्रान्ति | १८० २३ (भ्रेप) अन्याय, वेइ- १२१ ३० (भ्रमर) भँवरा न्साफी १४८ ९६ (भ्रमरक) माथेपर झुके (म) हुये चाल २१५ ५० (म्रक्षण) तेल २७२ ६ (भ्रमि) भ्रान्ति ५९ २० (मकर) मगर,घड़ियार २६७ १०४ (भ्रष्ट) चुआ, गिरा ६ २६ (मकरध्वज) कामदेव १४९ १०१ (भ्राजिष्णु) अलंकारा- ८० १७ (मकरन्द) फूलों का रस दिसे अति शोभित १४६ १४० (मकर) सीसा, ऐना १३४ ३६ (भ्रातरौं) भाई बहिन २०७ १७ (मकुष्ठक)चनमूंग,मोठ १०८ १४४ (मकलक) वज्रदन्ती १३३ ३६ (भ्रातृज) भतीजा १२१ २७ (मक्षिका) ममाखी की १३२ ३० (भ्रातृजाया) भौजाई माछी १३३ ३६ (भ्रातभगिनी) भाई १६३ १५ (मख) यज्ञ वहिन १९८ ९७ (मगध) वंशपरम्परा ३१९ १४५ (भ्रातृव्य) भतीजा,शत्रु वखाननेवाला,यशक- १३३ ३६ (भ्रात्रीय) भतीजा हनेवाला ३२ ४ (भ्रान्ति)अयथार्थज्ञान, ९ ४२ (मघवत्) इन्द्र शुबहा २९ २५ (मंगल) कल्याण ११ (मुकुंस) स्त्रीकावेप धा- २०७ १७ (मंगल्यक) मसुरी (भ्रातृ) भाई ३४७ २ (मस) शीघ्र ३० (भ्राष्ट्र) खपरी ४४ १५८ अमरकोशांदर्श। पृष्ठ पृष्ठ श्लोक श्लोक १५६ १२८ (मंगल्या) कालागूगुर १७५ २ (मण्डलेश्वर) ४०००० ३० २७ (मचर्चिका) अच्छा कोशका राजा ७९ १२ (मज्जन)तार,हीरू,हड्डी २३२ १० (मण्डहारक) कलवार के भीतरकामांस, गूढा १४९ १०० (मण्डित)अलंकारयुक्त, १५९ १३६ (मच) खटिया, पलंग शृंगार कियेहुये १३ (मझरि) मञ्जरी, वार ५९ २४ (मण्डूक) मेढ़क ९६ ९०(मञ्जिष्ठा) मॅजीठ ८९ ५६ (मण्डूकपर्ण) सरिवन १५२ १०९ (मजीर) पैजनियां ९६ ९१ (मण्डकपणी) मॅजीठ २५५ ५२ (मञ्ज) सुन्दर २२६ ६८ (मएदूर) लोहेका मुर्चा २५५ ५२ (मञ्जल) सुन्दर १८२ ३४ (मतंगज) हाथी ०३७ ३० (मझूपा) प्यटारी,मंदूक ३० २७ (मतल्लिका) अच्छा ७१ ८ (मठ) विद्यार्थी आदि के | ३१ १ (मति) बुद्धि रहनेका स्थान १८३ ३६ (मत्त) मतवालाहाथी, ४३ ८ (मह) बड़ा डमरू हर्पित, मतवाला २२५ ९३ (मणि) पद्मरागादि १२५ ४ (मत्तकाशिनी)उत्तमन्त्री मोतीआदि ३२५१७२ (मत्सर) परसन्ताप,पर- २११ ३१ (मणिक) मेटुका सन्तापी, कृपण, कंजूस ८१ (मणिबन्ध) हाथमें प ५८ १७ (मत्स्य) मछली हुँची बांधने की जगह २१३ ४३ (मत्स्यण्डी) राव, खांड़ २१५ ४९ (मण्ड) माड़, पसावन, ९५ ८६ (मत्स्यपित्ता) कुटकी रेंडी ५८ १७ (मत्स्यवेधन) मछली १४९ १०२ (मण्डन) गहना,शृंगार पकड़नेकी कटिया करनेवाला १०७ १३७ (मन्स्याक्षी) ब्राह्मी ९ (मण्डप) मड़वा ५८ १७ (मत्स्याधानी) मछली ६ (मण्डल) परिवेष, वि. रखने का बरतन म्ब, घेरा, गुंडरा २१६ ५३ (मथित) माठा १३८ ५४ (मण्डलक) कोढ़के च- | २२१ ७३ (मथिन) मथानी का कता डण्डा १९६ ८१ (मण्डलाग्र) तलवार १८३ ३७ (मद) हाथीका मद, अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ रोक श्लोक काम, हर्ष, अभिमान, १०० १०९ (मधुयष्टिका) जेठीमधु बीज, दारू ३३ ९(मधुर)मीठारस, स्वादु, १८३ .३५ (मदकल)मदान्धहाथी प्रिय २५ (मदन) कामदेव, म- १०८ १४२ (मधुरक) जीवक यनफर, धतूर ८३ (मधुरसा) धनुपवनाने २३९ ४१ (मदस्थान) दारूपीने की बौड़ी,चिनार, दाख कास्थान ११० १५२ (मधुरा) सौंफ २३९ ४० (मदिरा) दारू ६६१०५ (मधुरिका) वनसौंफ ८ (मदिरागृह) दारुकाघर ४ २० (मधुरिपु) विष्णु १८३ ३५ (मदोत्कट) मदान्ध- | १२१ ३० (मधुलिइ) भँवरा हाथी २३९ ४१ (मधुवार) दारूपीने का ६० २५ (मद्गु) जलमुर्गी समय १६ (मद्गुर) मँगुरीमछली १२१ ३० (मधुव्रत) भंवरा २३९ ४० (मद्य) दारू ८३ ३१ (मधुशिग्रु) लालफूल १५ (मधु) सहत, ममाखी, का सहिजन महुआ, दारू, फूलोंका ६५ ८४ (मधुश्रेणी) धनुपवना- रस, चैतमास,जीवन्ती नेकी बौंडी, चिनार १०० १०९ (मधुक) जेठीमध ८२ २८ (मधुप्ठील) महुआ ३० (मधुकर) भंवरा १०८ १४२ (मधुस्रवा)दोडीऔषधि २३९ ४१ (मधुक्रम) दारूपीनेका ८२ २७ (मधूक) महुआ समय २२८ १०७ (मधूच्छिष्ट) मोम ८२ २७ (मधुदुम) महुआ का ८२ २८ (मधूलक)पहाड़ीमहुआ वृक्ष ९५ ८५ (मधूलिका)धनुपबनाने १२१ ३० (मधुप) भंवरा की बौंडी, चिनार ८४ ३५ (मधुपर्णिका) नील,खे-| १४४ ७२ (मध्य) कमर, वीचोयी- भारी ९५ ८३ (मधुपर्ण) गुर्च ८ (मध्यदेश) मध्यदेश १२१ २७ (मधुमक्षिका) ममाखी ४१ १(मध्यम) स्वरविशेष, की माछी कमर, कणांकुल की आ २७ च, उचित १६० अमरकोशादर्श। पृष्ठ कि, वात श्लोक पृष्ठ दलोक वाज, मध्यदेश २२९ १०८ (मनोहा) मैनशिल १२७ ९ (मध्यमा)प्रथमहीरजो- १८० २६ (मन्तु) अपराध धर्म जिसको हुआ हो, ३२४ १६६ (मंत्र) मंत्र, एकान्ती, रजस्वला,बीचकोअगुली वेदका भेद ३ (मध्याह्न) दुपहर १७९ १६ (मन्त्रज) राजाकी श. २३९ ४१ (मध्वासव) महुआ की दारू ४ (मंत्रिन्) मंत्री,सलाही २२६ १०८ (मनःशिला) मैनशिल २२१ ७४ (मन्थ) मथानी, खैलर ३१ ३१ (मनस्) मन, दिल २२१ ७४ (मन्थदण्डक) मथानी ६ २६ (मनसिज) कामदेव का डंडा ३१ २ (मनस्कार) मनकासुख २२१ ७४ (मन्थनी) महेंडी ३४८ ८ (मनाक्) थोड़ा १९२ ७२ (मन्थर) धीरे २ चलने २६८ १०८ (मनित) जाना, माना वाला ३१ १ (मनीपा) बुद्धि २२१ ७४ (मन्यान) मथानी १६० ५(मनीपिन्) पण्डित २३४ १९ (मन्द) सुस्त, आलसी, ३६६ ३८ (मनु) स्वायम्भुवादि मूद, थोड़ा, अतीक्ष्ण, राजा अभागी १२५ १ (मनुज) मनुष्य १९२ ७२ (मन्दगामिन् ) धीरे २ १२५ १(मनुष्य) मनुष्य १५ ६६ (मनुप्यधर्मन् ) कुबेर ५०(मन्दाकिनी स्वर्गगंगा २२९ १०८ (मनोगुप्ता) मैनशिल २३ (मन्दाक्ष) लज्जा, शर्म २४५, १३ (मनोजव) पिता के ५१ (मन्दार) मदार, कल्प. सदृश २५५ ५२ (मनोज्ञ) सुन्दर ५ (मन्दिर) घर, नगर ४८ २७ (मनोरथ) इच्छा, ख्वा ७ (मन्दुरा) घोड़शाल २५ ३५ (मन्दोए) थोड़ागरम, २५५ ५२ (मनोरम) सुन्दर गुनगुन २५२ ४१ (मनोहत) निराश, उ. २ (मन्द्र) गम्भीरशब्द दास ५ २५ (मन्मथ) कामदेव, कथा चलनेवाला ४७ हत्त, बकायनि ७० हिश अमरकोशादर्श। , श्लोक श्लोक ६५ (मन्या) गलेकीपिछली ११५ ४ (मर्कट) वानर नस ११७ १४ (मर्कटक) मकरी १७ २५ (मन्यु) शोच, दीनना, ८७ ४८ (मर्कटी)कंजाविशेष, यज्ञ, क्रोध क्यवांच २९ २२ (मन्वन्तर) ७१ चौयुगी १२५ १ (मर्त्य) मनुष्य काल २७६ २२ (मईन) अङ्गमामींजना २२१ ७५ (मय) ऊंट ४३ ८ (मईल) चाजाविशेप १६ ७२ (मयु) किन्नर ३६२ ३० (मर्मन)अगोकीसन्धि २०७ १७ (मयष्टक)मोथी,वनमंग ४० २३ (मर्मर) पत्तों का खर- २३ ३३ (मयूख) किरण,शोभा, खराना ज्वाला, दीप्ति, अज- २६२ ८३ ( मर्मस्पृश् ) मर्मभेदी, मोटा सुकुमारजगहमेंमारना १०१ १११ (मयूर)मोरशिरया, मोर, १८० २६ (मर्यादा)मर्याद अजमोदा १४१ ६५ (मल) कानआदि का ९६ ८८(मयूरक) तूतिया, लह मल, सूट, पाप, विष्टा, चिचिरा कीट २२५ ६२ (मरकत)हरेरंगकीमणि २५५ ५५ (मलपित)मैलीवस्तु २०२ ११६ (मरण) मरना ६१ (मलपू) स्टारि ३६ (मरीच) मिर्च १५७१३२ (मलयज) चन्दन २७ (मरीचि) मुनिविशेप, ०५५ ५५ (मलिन) मैलीवस्तु फिरण २० (मलिनी) रजस्वलास्त्री २४ ३५ (मरीचिका) मृगतृष्णा २३६ २५. (मलिग्नुच) चोर ६ (मरु) निर्जलदेश,पर्वत, २५५ ५५ (मलीमस) मैलीस्तु माड़वार ३५९ २१ (मल्ल) पहलवान १४ ६३ (मरुत)वाय,हवा,देवता ३६५ ३७ (मलक) बेलाका फूल ४२ (मरुत्वत्) इन्द्र १२० २४ (मल्लिक)मैले चोंच पर १०६ १३३ (मरुन्माला) अस्परक वाले हंस ५२ (मस्वक) मयनफर, ९१ ६९ (मल्लिका) वेला मरुआ, दवना ३५५ १० (मसी) स्याही है. २२ । है .

अमरकोशादर्श। १६३ पृष्ठ पृष्ठ ७ तीस, श्लोक श्लोक ३१ (महेश्वर) शिव ३६३ ३१ (माणिक्य) रत्नविशेष ६१ (महोक्ष) पड़ावैल २१३ ४२ (माणिमन्यासन्धवलोन ६३ ३६ (महोत्पल) कमल २३४ २० (मातंग)चाण्डाल,हाथी २४२ ३ (महोत्साह)बड़ाउद्योगी १३४ ३७ (मातरपितरौ ) माता २४२ ३ (महोद्यम) बडाउद्योगी पिता ९८ १०० (महौपध) लहसुन, अ- १४ ६२ (मातरिश्वन)वायु, हवा सोंठि १० ४६ (मातलि) इन्द्रका सा- ६ २८ (मा) रोंकना,लक्ष्मी रथी १४० ६३ (मांस) मास १३४ ३७ (मातापितरौ) माता १३६ ४४ (मांसल) बली, मोटा पिता २३३ १४ (मासिक) चिकवा, १३३ ३३ (मातामह) माता का कसाई पिता, नाना २२८ १०७ (माक्षिक) सहत ९३. ७८ (मातुल) धतूर, माता १६८ ६७ (मागध) वंशपरम्परा का भाई, मामा वखाननेवाले,यश कह- ६३ ७८ (मातुलपुत्रक) धतूरका नेवाले, क्षत्रियाणी स्त्री फल, जिस से टाट वा में वैश्य से उत्पन्न पुत्र भंगरावने वह सन ९२ ७१ (मागधी) जूही, बड़ी १३२ ३० (मातुलानी) मामाकी पीपरि स्त्री,मामी २७ १५ (माघ) माघ महीना ५२ ६ (मातुलाहि) चीत सॉप ९२ ७३ (माध्य) कुन्द १३२ ३० (मातुली)मामाकी स्त्री, २३ ३१ (माठर)सूर्य के चारोओर मामी रहनेवाला प्रहविशेष ६३ ७८ (मातुलगक) विजौरा ३५४ ८ (मादि) डेपुनी, पत्ताकी नीवू नस १३५ ४२ (माणवक) २० लरका हार,बालक ३२७ १७७ (मात्र) सब, सम्पूर्ण, २८० ४१ (माणव्य)लड़कों का निश्चय समूह २५७, ६२ (मात्रा)सूक्ष्म,बारीक, १४ ( मातृ ) लोकमाता, माता, गौ अमरकोशादर्श १ (मानव) मनुष्य, श्लोक सब सामग्री, कालवि- ३ १३ (मारजित्) शिव,बौद्ध शेष २०१ ११४ (मारण) मारना .२७३ १२ (माद) खशी, हर्ष ४५ १४ (मारिप)श्रेष्ठ, आर्य २७३ १२ (माधव) विष्णु, वैशाख १४ ६३ (मास्त) वायु,हवा २३६ ४१ (माधवक ) महुआकी ११० १५१ (मार्कव) भेंगरा १४ (मार्ग)अगहन, रास्ता, ९२ ७२ (माधवीलता) बसन्ती सड़क २३६ ४१ (मावीक ) महुआकी १६५ ८७ (मार्गण) वाण, तीर, भिखमङ्गा, ढूंदना ४६ २२ (मान)चित्तकी बढ़ती, २७ १४ (मार्गशीर्प) अगहन अभिमान, गरूर,तौल, २६७ १०५ (मागित) ढूँढाहुआ नाप ३३ (मार्जन) लोध १२५ १५५ १२२ (मार्जना) झारना, पो- ३१ ३१ (मानस) मन ११९ २४ (मानसौकस् ) हंस ११६ ७ (माज्जार) विलार १२५ ३ (मानिनी) प्रणयकुपि- २१४ ४४ (मार्जिता) सिखरनि, ता,मानकरनेवाली स्त्री चटनी १२५ १ (मानुप) मनुष्य २२ २६ (मार्तण्ड) सूर्य २८१ ४२ (मानुष्यक ) मनुष्यों २३३ ११ ( मार्दनिक) मृदंग य. जानेवाला २३२ ११ (माया) इन्द्रजाल १५५ १२२ (मार्मि) झारना,पोछना २३२ ११ (मायाकार) इन्द्रजाल . ३२ (मालक) नींव करनेवाला ६२ ७२ (मालती) वेली '३ १५ (मायादेवीसत) बौद्ध १५८ १३६ (माला)शिरमें पदिरने १४० ६२ (माय) पित्त १२१ १४ (मायूर) मुरेलोंका झुण्ड २३१ ५(मालाकार) माली २५ (मार) कामदेव १११ १६७ (मालातृणक) पानी २२५ ६२ { मारकत) हरीमणि, का सर जवाहिर २३१ ५(मालिक) माली का समूह -~ की माला ५ अमरकोशादर्श। पृष्ठ ७५ २७ श्तोक श्लोक १२० २५ (मालिकाख्या)हंस,जि ३७ १० (मिथ्याभियोग) सत्य नके चरणादि मैलेहों को झूठकरना ६ (मालुधान) काला साँप ३७ १० (मिथ्याभिशंसन) मि- ८३ ३२ (मालूर) वेल ध्या दोपलगाना १५८ १३६ (माल्य)शिरपरकीमाला ३२ ४ (मिथ्यामति) भ्रम ३ (माल्यवत्) पर्वतविशेष ९९ १०५ (मिश्रेया) सौंफ २२४ ८५(मापक) घंधुची भर ६६ १०५ (मिसि) सौंफ, वनसौंफ १०७ १३८ (मापपर्णी) मूंग १०६ १३४ (मिसी) जटामासी : २०४ ७ (मापीण)उर्दहोनेवाला २० १६ (मिहिका) पाला खेत २२ २६ (मिहिर) सूर्य २०४ ७(माप्य) उर्द होनेवाला २६५ ६६ (मीढ़) मूताहुआ खेत ५८ १७ (मीन) मछली १२ (मास) महीना ५ २५ (मीनकेतन) कामदेव २१५ ४९ (मासर) माड़ (मीमांसक) मीमांसा १६७ ३३ (मासिक) अमावास्या शास्त्र जाननेवाला का श्राद्ध, महीने में १५० १०२ (मुकुट) जो माथे पर र- होनेवाला क्खा जाय २३३ १४ (मासिक) कसाई १०३ १२१ (मुकुन्द) पलाकी ३४६ ११ (मास्म) रोकना १५६ १४० (मकर) सीसा,ऐना २३० ३ (माहिप्य) वैश्यवर्ण स्त्री ८० में क्षत्रियसे उत्पन्न ६ (मुक्तकञ्चुक) केंचुलि २१९ ६६ (माहेयी) गो छोडेहुये सांप २५४ ४८ (मितम्पच) कृपण,कंजूम २२५ ६३ (मुक्ता) मोती २३ ३० (मित्र) सूर्य, मित्र, अ. १५० १०५ (मुक्तावली) मोतियोंका पने डांड़े से भिन्न राजा ३४६ २५५ (मिथम् )परस्पर,एकांत ५९ २३ (मुक्तास्फोट) सीपी.सूती १२३ ३९ (मिथुन) जोड़ा ३५०' १५ (मिथ्या) झूठकहने में १४६ ८९ (मुख)निकलनेका द्वार, ४ (मिथ्याष्टि)नास्तिकता मुंद १६ (मुकुल) कली ६ (मुक्ति) मोक्ष अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ . - श्लोक श्लोक २५० ३६ (मुखर) अप्रिय बोलने के योग्य वाला १०६ १३२ (मुस्तक) मोथा ३३ ११ (मुखवासन) पान ११२ १५९ (मुस्ता) मोथा १७० ४३ (मुख्य) पहिली विधि, ३६ १६ (मुहुर्भापा) वारंवार प्रधान, कहना १३७ १८ (मुण्ड) मुडुआ, मूड ३४७ १(मुहुस्) फिर,वारंवार १७२ ५३ (मुण्डन)वार बनवाना २७ ११ (मुहूर्त)वारहक्षण १३७ ४८ (मुण्डित) मुडुआ २४५ १३ (मूक) गूंगा २३२ १० (मुण्डिन् ) नाऊ २५४ ४८ (मूद)मूर्ख २९ २४ (मुद) हर्प, खुशी २६५ ९५ (मूत) वांधाहुआ ७ (मुदिर) मेघ, वादर १४२ ६७ (मूत्र) मूत १०१ ११३ (मद्पणी) बनमंग १३६ ५६ (मूत्रकृच्छ) करकरोग १९६ । ६१ (मुद्गर) मुगदर मूत्र करतेसमय जिससे पीड़ा होती है ३ १४ (मुनि) मुनि, चौह २६५ ९६ ( मूत्रित )मृताहुआ -३ १४ (मुनीन्द) गेद २५४ ४८ (मूर्ख) मूर्ख (मुरज) मृदंग २०० १०९ (मर्या) मूर्छा, बदह- १०४ १२३ (मुरा) तालीसपत्र,मुरेठी वासी २६३ ८८ (मुपित) चुरायाहुआ ६१ (मूछलि)मुरझाया,गाढ़ १४४ ७६ (मुष्क) अण्डकोप, १४० ६१ (मूर्षित) मोहित, मुर- पेल्हर झायाहुआ ८५ ३९ (मुष्कक) कालीपॉदरि १४० ६१ (मूर्त ) मुर्शाया,कठोर, १४६ ८६ (मुष्टि) मूठी दृढ़, गाढ़ २७३ १४ (मुष्टिबन्ध) मूठीबांधना १४२ ७१ (मूर्ति) शरीर,कठिनता २०९ २५ (मुसल) मूसर २६० ७६ (मूर्तिमत् ) कठिन हद २४ (मुसलिन्) वलराम १४८ ९५ (मूर्द्धन) शिर १०३ ११९ (मुसली) मूसरि,उपकी, | १७५ १ (मूर्दाभिपित) चत्रिय, चुहिया राना २५३ १५ (मुसल्य)मूसरसे मारने | ६५ ८३ (मूर्वा) धनुपबनानेकी ३४७ ४ (मुधा) व्यर्थ , अमरकोशादर्शी १६७ पृष्ठ रोओं से वनाहुआ श्लोक श्लोक घौड़ी, चिनार १५२ १११ (मृगरोमज) हरिण के ७६ १२ (मूल) जड़,जर, पहि- ला, नक्षत्रविशेप २३५ २३ (मृगव्य) शिकार १९१ १५७ (मूलक) मूरी २१ २३ (मृगशिरम्)मृगशिरा २७० ४ (मूलकर्मन् ) उच्चाटन नक्षत्र २२२ ८०(मूलधन) मूर, पूंजी २३ (मृगशीर्प) मृगशिरा २२२ ७९ (मूल्य) मोल, कीमत नक्षत्र २३७ ३३ (मूपा) धातु गलानेकी / १९ १४ (मृगांक) चन्द्रमा घरिया ११५ २ (मृगादन)चीता,तेंदुआ ११७ १३ (मूपिक) मूस, चूहा १ (मृगाशन) सिंह ६६ ८८(मृपिकपर्णी) मुसरि | २६७ १०५ (मृगित) द्वेढाहुआ २६३ ८८(मूपित) चुरायाहुआ १ (मृगेन्द) सिंह ११ (मृग) द्वंदना, हरिन, १५५ १२२ (मृजा)झारना, पोंछना मृगशिरा नक्षत्र २७८ ३०(मृगपा) दूढ़ना २४ ३५. (मृगतृष्णा) दुपहरी| ६४ ४२ (मृणाल)भसींड़,कमल जलजलाना २३५ २१ (मृगदंशक) कुकुर २०२ ११७ (मृत)मराहुआ ११४ १(मृगदृष्टि) सिंह | २४६ १९ (मृतस्नान) मरे के नि- ११५ २ (मृगदि) सिंह ११५ ६ (मृगधर्तक) सियार २०३ ३(मृत) मांगने से मिला १५६ १३० (मृगनाभि) कस्तूरी १०५ १३१ (मृत्तालक)अरदर,अहीं २३४ २१ (मृगवधाजीव) व्याधा, ६६ ५ (मृत्तिका) मही शिकारी २०२ ११६ (मृत्यु) मरना २३६ २६ (मृगवन्धनी) जाल ७ ३५ (मृत्युञ्जय) शिव १५६ १३० (मृगमद) कस्ती ५(मृत्सा) अच्छी मट्टी २३५ २३ (मृगया) शिकार ५ (मृत्स्ना) अच्छी मट्टी, २३४ २१ (मृगय)व्याधा,शिकारी अरदर, अटी १११ ५ (मृह) मही ३२ (मृड) शिव ३८ (मृडानी) पार्वती की जर मित्त नहाया हुआ १ (मृगरिप) सिंद १६८ अमरकोशादर्शी . पृष्ठ पृष्ट प्रलोक ५ (मृदंग) मृदंग २३६ ४ (मेदक) दास्का काढ़ा २६१ ७८ (मृदु) कोमल,अतीक्ष्ण १४१ ६४ (मेदस्) चर्वी ८६ ४६ (मृदुत्वच्) भोजपत्र ६५ ३ (मेदिनी) पृथ्वी,जमीन २६१ ७८ (मृदुल) कोमल २४६ ३० (मेदुर) सघन, चीक्न १०० १०७ (मृदीका) दाख १ (मेधा ) धारण करने १६६ १०४ (मृध) लडाई,युद्ध वाली बुद्धि ३५० १५ (मृपा) मिथ्या.झूठ २०७ १५ (मेधि) मेढ़ी-जिसमें ४० २१ (मृपार्थक) असभावित चैल वांधकर मड़नी २५५ ५६ (मृष्ट) शुद्ध किया हुआ माडी जाती है ६१ ३२ (मेकलकन्यका) नर्मदा २५५ १५ (मेध्य) पवित्र, साफ़ १५.१ १०८ (मेखला)परतला,स्त्रियों ११ ५० (मेर) सुमेरुपर्वत के कमर का भूपण कर- २७८ २९ (मेलक) संग, मिलाप धनी वगैरह २२ २७ (मेप)राशिविशेप, भेंडा ६ (मेघ) मेघ,वादर २२८ १०७ (मेपकम्बल) के ऊन १० (मेघज्योतिस्) चादर का कम्बल की ज्योति १३८ ५६ (मेह) प्रमेहरोग १.१ ३१ ( मेघनादानुलासिन्) १४३ ७६ (मेहन) लिंग मोर २०(मैत्रावरुण) अगस्त्य, ११२ १५९ (मेघनामन)मोथा वाल्मीकि ८ (मेघनिर्घोप) बादर का ३६६ ३९ (मैत्री) मिताई गर्जना ३६६ ३९ (मैन्य) मिताई ५ (मेघपुप्प) जल,पानी १७४ ६०(मैथन ) संगति, रति, ८(मेघमाला) वाटरकी स्त्री पुरुपका व्यवहार पांति २३६ ४२ (मैरेय) गुड़ वा सीरा ४५ (मेघवाहन) इन्द १५ (मेचक) कालारंग,मोर| ३२ ७(मोक्ष) मोन, काली पंसमें ऑसकेसहशचिहा पॉटर २२१ ७६ (मेट) भंडा २६१ २२ (मोघ) व्यर्थ १४३ ७६ (मेद) भेंडा,लिंग ५४ (मोवा)पॉदरि गाय- की दारू. ३४ ८८ अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृथः श्लोक ૨ श्लोक भिरंग. ८३ ३१ (मोचक) सहिजन १४१ ६६ (यकृत)पेटमें जो दहिनी ८७ ४६ (मोचा) सेमर, केला ओर घटिया होता है ३६४ ३३ (मोदक) लड्डू ११ (यक्ष) देवयोनि, कुवेर २२६ ११० ( मोस्ट) ऊबकी जर १५७ १३४ (यक्षकईम) कपूर,अ- ९५ ८३ (मोरया) धनप बनाने गुरु, कस्तूरी, केसर की बौड़ी, चिनार चन्दन इन सबको मि- २३५ २४ (मोपक) चोर लाकर बनाया गया लेप २०० १८९ (मोह) मच्छी १५६ १२८ ( यक्षधूप) राल, धूप २२ ( मौकुलि ) कौआ १५ ७० ( यक्षराज) कुबेर २२५ ९३ (मौक्तिक) मोती १३७ ५१ ( यक्ष्मन्) क्षयीरोग २०५ ८ (मौद्गीन) मूंगका खेत १६१ १० ( यजमान) यजमान ३ (मौन) चुपचाप ३६ ३ (यजुस् ) यजुर्वेद २३३ १३ (मौरजिक) मुरज,मृदं- १६३ १५ ( यज्ञ) यज्ञ ग बजानेवाला (यज्ञसूत्र) जनेऊ ६३० १६२ (मौलि) शिर, चोटी ८१ २२ ( यज्ञान) गूलर १६६ २९ (यज्ञिय) यज्ञकी वस्तु १९५ ८५ (मौर्वी) धनुषकी डोरी १६१ १० (यज्वन ) विधिसे यज्ञ रोदा करनेवाला ३५३. ५ (मोटा) मूठियों की ३४७ ३ ( यत् ) जिससे, जो मारवाला खेल ३४७ ३ (यतस्) जिससे १४ (मौहूर्त ) ज्योतिषी १७१ १७(यति) जितेन्द्रिय १४ (मौहर्तिक) ज्योतिषी १७१. १७ ( यतिन् ) जितेन्द्रिय ४० २१ (म्लिष्ट) सफानहीं ३४८ ९ (यथा) जैसा,जिसतरह २३४ २० ( म्लेच्छ) नीचजाति ३५४ ४८ ( यथाजात) मूर्ख विशेष ३५० १५ (यथातथम् )यथार्थ,सत्य ८ (म्लेच्छदेश) म्लेच्छों , ३५० १४ (यथायथम् ) यथायोग्य ३५० १५ ( यथार्थम् ) सत्य २२६ १७ (म्लेच्चमुख ) ताँबा । १७७ १३ (यथाहवर्ण)जासूप्त,चार मुकुट, बँधेवाल --- का देश २२ अमरकोशादर्श। स्साके अनुसार . अनुसार . वॉछित मिली वस्तु पृष्ठ दसोक श्वोक ३५० १४ (यथास्वम्) अपने हि- मुरेठी १० (यट्ट) यजमान २१७ ५७ (यथेप्सित ) इच्छा के १६३ १५ (याग) यज्ञ २५४ ४९ (याचक) मॉगनेवाला ३४६ १२ (यदि) पक्षान्तर २५४ ४६ ( याचनक ) मॉगने २७० २ (यहक्षा) अपनी इच्छा वाला १८६ ५९ (यन्तृ) सारथी, महावत १६७ ३४ ( याचना) मॉगना १३ ५९ (यम) यमराज, संयम २०३ ३ (याचित) माँगाहुआ १३ ५९ (यमराज) यमराज २०४ ४ (याचितक) मॉगने से ६१ ६२ (यमुना) यमुनानदी १३ ५६ (यमुनाभ्रातृ) यमराज १६७ ३४ (यात्रा) मॉगना, भीख १८५ ४५ (यय) जिसका एक कान माँगना कालाहो और अंग सपे- १६४ १६ (याजक) यज्ञ कराने द हो वह घोड़ा वाला २०७ १५ (यव) यव ३ (यातना) पीड़ा, दण्ड २०४ ७ (यवक्य) यवों का खेत सजा २२९ १०८ (यवक्षार) यवाखार ३९८ १४५ (यातयाम) पुराना, खा. ११२ १६१ ( यवफल) बॉल कर फेंकागया ११४ १६७ (यवस) घास १४ ६१ (यातु) राक्षस ५० (यवागू) लप्सी १३ ६१ (यातुधान) राक्षस २२९ १०८ ( यवाग्रज) यवाखार १३२ ३० (यात्र) देवरानी, जे- १०६ १४५ (यवानिका) वाइन ठानी ६६ ६१ (यवास) यवासर ९५ (यात्रा) कहींको च- १३५ ४३ (यवीयस् ) छोटाभाई लना, निकालना, देव- २०४ ७(यव्य) यवोंका खेत ताका उत्सव ६ (यशःपटह) ढोल, डंका ५४ २ (याद-पति) समुद्र ११ (यशस्) यश, २० (यादम्) जलजीय ३६६ ३८ (यष्टि) लाठी, छड़ी ६२ (यादसांपति) वरुण १० १०६ (यष्टिमधुका) जेठीमधु '१७२ १० (यान) शत्र के ऊपर । ५४ ४२ कीर्ति ५६ अमरकोशादर्श। पृष्ट . १२३ ल, हरका वैल पृष्ठ ग्लोक श्लोक चढ़ाई करना, सवारी, २१८ ६३ (युगपार्श्वग) चैलनि- बाहन कालनेका काठमें नधा ९८८ ५५ (यानमुख) धुरा, धुरी २५५ ५४ (याप्य) अधम ३९ (युगल) दो १८३ ५३ (याम्ययान) पालकी | १२३ ३६ (युग्म) दो २५ ६ (याम) पहर, संयम १८८ ५८ (युग्य)वाहन, सवारी ४ (यामिनी) रात जुआलेजानेवाला - २२७ १०० (यामुन) सुरमा १० (यायजुक) बारम्बार १९९ १०३ (युद्ध)लड़ाई, संग्राम यज्ञकरनेवाला २०० १०६.(युध्) लड़ाई,संग्राम १५५ १२६ (याव) लाह, लाख १२७ ८ (युवति) जवान स्त्री २०८ १८ (यावक) कुरथी १३५ १२ (युवन) जवान पुरुप ३४४ २४५ (यावत्) सम्पूर्णता, ४४ १२ (युवराज) राजकुमार अवधि,प्रमाण,निश्चय १५४ ४२ (यूथ) पत्नियोंकासमूह १५६ १२९ (यावन) लोहवान ३५ (यूथनाथ)हाथियों के १६१ ७० (याष्टीक) लट्टवाज समूहमें बड़ा हाथी ६१ (यास) यवासा १८३ ३५ (यूथप) हाथियोंके स- १८० २४ (युक्त) न्यायसे जो मूहमें वड़ाहाथी वस्तुलीजावे ७१ (यूथिका) जूही १०७ १४० (युक्तरसा) कोलिन्दण ८५ ४१ (यूप) तूतकावृक्ष,पी. १२३ ३९ (युग)गाडीआदिका परके समान वृन वि- जुआ, सत्ययुग, द्वापर शेप, यज्ञकाखम्भ २० (यूपकटक) यज्ञका २०६ १४ (युगकीलक) सइला सम्भ ૨૮૮ ५७ (युगन्धर) ढ्यगुरी वा १६४ २१ (यूपान) यज्ञग्यम्भा घसीटामें जोता बैल, का शिरा, अग्रभाग वकौरा ३६५ ३५ (प) जूस २२ (युगपत्रक) कचनार, २०६ १३(योक्त) जोतने की २२ (युगपद) एकसमयमें रस्मी नाचा १ ९२ आदि युग ३५२ १७२ अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ रस्सी, २ श्लोक २८७ २२ (योग) हथियारवाँ- ५९ २२ (रलपा) जोंक धना, उपाय, ध्यान, १०७ १३६ (रक्तफला) कुन्दुरू संगति, युक्ति ३६ (रक्तसन्ध्यक) लाल २२८ १०५. (योगेष्ट) सीसाधात कमल ११२ (योग्य) ऋद्धिसिद्धि ६४ ४१ (रक्कसरोरुह) लाल क- ३६२ ३० (योजन) चारकोश मल ९१ (योजनवल्ली) मजीठ १०९ १४६ (रक्तांग) कवीला २०६ १३ (योत्र) जोतने की ६४ ४२ (रलोत्पल)लालकमल नाधा ३६२ २७ (रक्षःसम)राक्षसों की ६१ (योबृ) लड़नेवाला सभा ६१ (योध) लड़नेवाला ११ (रक्षम्) राक्षस २०० १०७ (योधसंराव ) वीरोंका | २६८ १०६ (रक्षित) रखाया हुआ ९७६ ६ (रक्षिवर्ग)रक्षक, पह- १४३ ७६ (योनि) भग रेदार, रखवार १२५ २ (योपा) स्त्री २७२ ८ (रक्षण) रक्षण,रखाना १२५ २(योपित ) स्त्री ११ (क) हरिण विशेष २८ (यौतक) दायज,दहेज २२८ १०६ (रङ्ग) राँगाधातु २२४ ८५ (यौतव) तौल, २३१ ७(रङ्गाजीव) तसवीर १२० २२ (यौरत) जवानी स्त्रियों आदिखींचनेवाला १५८ १३८ (रचना) बनाना १३५ ४० (यौवन जवानी २३२ १० (रजक) धोवी (र) २२६ ९६ (रजत) चाँदी, सोना ६५ (रंहस)वेग रूपा, उज्ज्वल ३४ १५ (रत) लालरंग, रक्त २५ ४ (रजनी) रात,चकवत लोहू,कुंकुम, रँगाहुआ| २५ ६ (रजनीमुख) सन्ध्या- ६.२ ७३ (रतक) दुपहरियाफूल काल १५७ १३३ (रक्तचन्दन) लालच २८ (रजस्) रजोगुण, धू- न्दन,देवीचन्दन, रक्त- रि, स्त्रियोंका रज सार २० (रजस्वला) रजस्वला नाप का समूह , अमरकोशादर्श। १७३ . भिरकर लड़ना पृष्ठ श्लोक पृष्ट श्लोक २३६ २७ (रज्जु) रस्सी ૮૨ २६ (स्थट) तिनिस वृक्ष १५७ १३३ (रञ्जन) लालचन्दन १२० २३ (स्थांग) पहिया, चक- ९५ (रजनी) नीलरंग वा, चकई, तांगा १६६ १०४ (रण) शब्द, लड़ाई ७६ (रथिकोरथकामालिक २०० १०६ (रणसंकुल) परस्पर १८६ ६० (रथिन् ) रथपर चढ़कर लड़नेवाला ८८ (रण्डा) मूसरि १९२ ७६ (रथिन) रथकामालिक १७४ ६० (स्त) मैथुन १८६ ४६ (रथ्य)रथकालेचलने ६ २६ (रतिपति) कामदेव वाला घोड़ा २२५ ६३ (रत्न) पद्मरागादि, ७० ३ (रथ्या गॉवकेभीतरकी मोती इत्यादि अपनी रास्ता, रथों का समूह जाति में श्रेष्ठ १४७ ९१ (रद) दाँत ४ (स्नगर्भा) पृथ्वी १४७ ६१ (रदन) दाँत २१ ५० (स्त्रसानु) सुमेरु १४७ ९० (रदनच्छद)ओठ २ (रत्नाकर) समुद्र २(रन्ध्र) छेद, बिल ८६ (रवि) मुट्ठी ३५६ २१ ( रभस) हर्प, खशी ३० (स्थ) वेत, लड़ाई में १२५ ४ (रमणी) सुन्दरी स्त्री चढ़नेका रथ जिसमें चित्तबहुत रमे १८८ ५५ (स्थकट्या) रथोंकास- ६ २८ (स्मा) लक्ष्मी मूह १०१ ११३ (म्मा) केला २३२ ४ (स्थकार) बढ़ई, शुद्रा १४ ६५ (स्य) वेग में वेश्य से उत्पन्न ल- १५३ ११६ (रल्लक) कम्बल ड़की करणी है उसमें २२ (ख) शब्द वनिनि में क्षत्रिय से २५१ ३८ (खण) शब्द करने. उत्पन्न पुत्र माहिप्यसे वाला २३ २१ (रवि) सर्य १८८ ५७ (स्थाप्ति) रथकी झॉप २३ ३३ (रश्मि) किरण, पगहा लोहसे चनाहुआ रथ ३२ ७ (रस) रस, शृंगारादि का बहार रस, पारा, विप, वीर्य - १४६ पैदा हुआ ९७४ अमरकोशादर्श। " पृष्ट जा, नत्रिय १७५ वृक्ष, पॉदरि श्तोक पृष्ठ श्लोक गुण, प्रीति, द्रव, ट-, १४ १३ (राजन्) चन्द्रमा,रा- घिलना २२७ १०२ (रसगर्भ) रसोंत १७५ १ (राजन्य) क्षत्रिय १४७ ९१ (रसज्ञा) जीभ ४ (राजन्यक) क्षत्रियों ६१ (रसना) जीभ, स्त्रियों का समूह की करधनी १४ (राजन्वत्) अच्छेराजा २७ (रसवती) रसोई का वाला देश घर ११० १५३ (राजरला) अमरवा- ६५ २ (रसा) पृथ्वी, साल रिया २ (राजवाजिन्) राजवंश २२७ १०१ (रसाञ्जन) रसोत ६९ (राजराज) कुबेर ५१ १ (रसातल)पाताल २ (राजवंश्य) राजवंश ८४ ३३ (रसाल) ऑव, ऊख ६८ १५ (राजवत्) राजावाला २१४ ४४ (रसाला) सिखरनि देश ८ (रसित)मेघकागरजना ८१ २३ (राजन) अमिलतास १०९ १४८ (रसौनक) लहसुन ७२ १० (राजसदन) राजाका २२ (रहस्) एकान्त घर २३ (रहस्य) एकान्त में ३५५ ९ (राजसभा) राजा की सभा ८ (राका) पूर्णचन्द्रवाली ३६३ ३१ (राजसूय) राजा सोम पूर्णमासी औषधी जिसमें पीवे ६० (राक्षस) राक्षस वह यज्ञ १०५ १२८ (राक्षसी) धनहरी १२० २५. (राजहंम)लालेपैरचा- १५५ १२६ (राक्षा) लाख,लाह च और उजली देह १५२ १११ (राइव) हरिणके रोम वाला हंस से बना हुआ कपड़ा ३५ (राजादन) चिरोंजी १७५ १(राज) राजा वृन, खिन्नी ३ (राजक) राजाओं का १५६ १२७ (राजाह) अगुरु समृह १ (गजि) रेखा,पॉति हुआ अमरकोशादर्श। १७५ पृष्ठ पृष्ठ ५८ श्तोक श्लोर २०८ १९ (राजिका) राई १०१ ११४ (रास्ना) रासनि, को- ५ (राजिल) डेंडहासॉप लिन्दण १९ (राजीव) कमल, मछ २२ २६ (राहु) राहु ली विशेष २५६ ५६ (क्रिक) शून्य,साली १७८ १८ (राज्याग) राजा,मत्री २२५ ६० (रिक्थ) धन मित्र, सजाना, राज्य, ३६ (रिङ्गण) लडकों की कोट, फौज वया चाल २५ ५ (रानि) रात १० (रिपु) शत्रु ६१ (रात्रिचर) राक्षस २६१ ३५ (रिष्ट) क्षेम, अशुभ १३ ६९ (रात्रिचर) राक्षस शुभ ३२ ४ (राद्धान्त) मुख्यसि-। १६६ ८९ (रिष्टि) तलवार द्धान्त २३ (रीढा) अनादर,अप- १६ (राध) वैशाख महीना। मान २२ (राधा)विशाखा नचत्र ५६४ ६२ (रीण) रसिआता,बह- २३ (राम) वलदेव, हरिण ता हुआ विशेष, चौगड़ा, नीला २२६ ६७ (रीति) पीतरि, लोका- सुन्दर, उजला, चार, टपकना, बहना २१३ ४० (रामट) हींग २२७ १०३ (रीतिपुप्प) पीतल गर. १२५ ४ (रामा) सुन्दरीस्त्री जि- माकर उसपर घिसके समें चित्त बहुतरमे जो बनाया जाता है १७१ ४२ (राम्भ) ब्रह्मचारी का बॉसका दण्डा १३७ ५० (रुक्मतिक्रिया) रोग १५६ १२८ (राल) राल,धूप की दवाई करना १२४ ४३ (राशि) अन्न आदिका २२६ ढेर, समूह, मेपादि २३२ ८ (सक्मकारक) सोनार ३२८ १८३ (राष्ट्र) देश,उपद्रर ३३८ २२४ (रुस) रूखा, नारसाई ९४ (राष्ट्रिका) भटकटैया २६४ ६१ (रुग्ण) टेढ़ा, टूटाहुआ ४४ १४ (राष्ट्रिय) राजाकाशाला २४ २२२ ७७ (रामभ) गदहा ५१ (रुचक) रंडी, विजोग PM अञ्जन विशेष ९५ (रुस्म) सोना ३४ (रुच ) कान्ति १७६ अमरकोशादर्श। पृष्ठ , श्लोक श्नांक नींबू, सज्जी, सोंचर १०० १०८ (रेचनी) उवेत त्रि. लोन धारा ३४ (रुचि)शोभा, क्रोधकी १९८ ९८ (रेण) धुरि इच्छा, इच्छा, किरण २०७ १६ (रेणुक) मटर,क्यराव ६५५ ५२ (रुचिर) सुन्दर १०३ १२० (रेणुका) गगनधरि २५५ ५२ (रुच्य) सुन्दर १४० ६२ (रेतस्)वीज, काम १३७ ५१ (रुज्) रोग, शोभा २५५ ५४ (रेफ) अधम, रकार १३७ ५१ (रुजा) रोग २३ (रेवतीरमण) बलदेव ४१ २५ (रुत) पक्षियों का शब्द ३२ (खा) नर्मदानदी ५० ३५ (रुदित) रोना २२५ ९० (रै) धन, सोना, २६४ ६० (रुद्ध) घेराहुआ ५१ २(रोक) छेद १० (स्ट) गणदेवता, शिव १३७ ५१ (रोग) रोग ३८ (दाणी) पार्वती १३६ ५७ (रोगहारिन ) वैद्य १४२ ६४ (रुधिर) रक, लोह ८७ ४७ (रोचन) कालासेमर २० (रुमा) खारी समुद्र १०६ १४६ (रोपनी)निधारा,कधीला ११ (रुरु) हरिण विशेष १४९ १०१ (रोचिष्णु) भपणाटि से ३६ १८ (रुशती) अशुभ वचन शोभायमान ४७ २६ (रुपू) क्रोध २४ ३४ (रोचिस् ) शोभा, चमक ११२ १५८ (रुहा) दूब १४७ ९३ (रोदन) रोना, ऑसू ७(रूप) रूप, सूरत ६६ ९२ (रोदनी) यवासा १२९ १९ (रूपाजीचा) पतुरिया ६६ २०(रोदम्) भूमिआकाश २२५ ६१ (रूप्य) तॉचामिली हुई ६९ २० (रोदसी)भूमिआकाश चॉदी,चॉदी,अच्छारूप ५५ ७ (रोधस्) किनारा १७६ ७ (रूप्याध्यक्ष) रुपये के १२५ ८७ (रोप) चाण, तीर सजाने का मालिक १४९ ९९ (रोमन् ) रॉबॉ २६३ ८९ (रूपित) धरिलगाहुआ ३५८ १६ (रोमन्थ) पशुओं की रेंगा पागुरि १८६ ४८ (रेचित) घोडॉकी दुल ५० ३५ (रोमहर्पण) रोंघा खडे होना " की चाल अमरकोशादर्श। पृष्ठ ४७ पृष्ठ श्लोक श्लोक 1 ५० ३५ (रोमाञ्च) वॉ खड़ेहोना २२ २७ ( लग्न ) राशियों का ४७ २६ (रोप) क्रोध उदय २१६ ६७ (रोहिणी) गौ, नक्षत्र २४० ४४ (लग्नक) जामिन ३४ १५ (रोहित ) रोहूमछली, १४ ६५ (लघु) शीघ्र, अस्परक, सीधाहोनेपर इन्द्रधनुष, बॉछित, थोड़ा लालरंग, लालहरिण ११३ १६५ (लघुलय) गॉडरकी ८७ ४९ (रोहितक) गुलनार, जड़ माणिक |३५४ ७(लंका) रावणकीपुरी १२ ५६ (रोहिताश्व) आगि १०६ १३३ (लंकोपिका) अस्परक ८७ ४९ (रोहिन ) गुलनार २३ (लज्जा) लाज ४६ २० (रौद्र) रौद्ररस, देखनेसे २४८ २८ (लज्जाशील) लाज अति डरानेवाला करनेवाला २१३ ४२ (रोमक) सॉभर निमक २६४ ९१ (लज्जित) लाजयुक्त ५३ १ (रौरव) नरकविशेष ३५५ १० (लद्दा) गौरैया ५ २४ (रौहिण्य) बलदेव,बुध | ७८ ९ (लता) वाडी, वृक्षकी ११३ १६६ (रोहिप) हरिणविशेष, जरमे ऊपरतक फैलने सुगन्धतृण वाली बोंडी, काकुनि, (ल) वासन्ती,अस्परक,मा. ८९ ६०(लकुच) बड़हल लकांगणी १९५ ८६ (लक्ष) निशाना १०६ १४८ (लतार्क) हराप्याज २० १७ (लक्षण)चिह्न, कलंक १४६ ८६ (लपन) मुख २४५ १४ (लक्ष्मण) लक्ष्मीवाला ३५ १(लपित) वचन, कहा १२० २६ (लक्ष्मणा)सारसकीस्त्री हुआ १७ (लक्ष्मन ) चिह्न, प्रधान २६७ १०४ (लब्ध) पाया ६ २७ (लक्ष्मी)लक्ष्मी, ऋद्धि १६० ६ (लब्धवर्ण ) पण्डित सिद्धि, सम्पत्ति १६२ १२ (लब्धानुन) आज्ञापाये २४५ १४ (लक्ष्मीवत्) लक्ष्मीवान् १८० २४ (लभ्य) न्यायसे युक्त ४६ ३३ (लक्ष्य)छल,निशाना १५० १०४ (लम्बन) जो नाभितक ३५८ १८(लगुड) लाठी लम्बी कंटी २० अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ . श्लोक श्लोक ९ ३९ (लम्बोदर) गणेश १९५ ८५ (लस्तक) धनुप का ६ (लय) ताल स्वर मि- मध्यभाग लाना १५५ १२५ (लाक्षा) लाह,लाख . १२५ ४ (ललना दुलारी स्त्री ८५ ४१ (लाक्षाप्रसादन) लाल १५० १०४ (ललन्तिका)जोनाभि लोध तक लटकतीहो लम्बी २०६ १३ (लागल) हर कण्ठी २०७ १४ (लाइलदण्ड) हरश १४७ ९२ (ललाट) माथ २०७ १४ (लागलपद्धति) खेत १५० १०३ ( ललाटिका) वेदी, का कँड टीका १०२ ११८ (लाङ्गलिकी) करि- ३१८ १४३ (ललाम) पूँछ, चिह्न, आरी घोड़ा,भूषण,प्रधानता, १०१ १११ (लाइली) नारियल, वजा जलपीपर १५८ १३६ (ललामक) जो शिखा १८६ ५०(लांगूल) पूँछ में लिलारतक लपेटी २१४ ४७ (लाज) धान के लावा मालाहो २० १७ (लाञ्छन)चिह,कलंक ३१ (ललित)स्त्रियों के हाव २२२ ८० (लाभ) व्याज, नफा २५७ ६२ (लव) अन्न काटना, ११३ १६५ (लामज्जक) गाँडर कालविशेष,मिहीं,सूक्ष्म १५५ १२६ (लवन) लवल ४८ २८ (लालसा) पड़ीचाहना, ३३ ६ (लवण) समुद्र का प्रार्थना लोन ६७ (लाला)लार २० (लवणाकर) निमकका २८५ १७ (लालाटिक) मुँहदेखा, रस, खारी समुद्र मालिक का काम न २ (लवणोद)खारासमुद्र करसकनेवाला ૨૭૬ २४ (लवन) खेत से अन्न १२२ ३६ (लाव)लवा पक्षी का काटना (लासिका)नाचनेवाली १३ (लवित्र) हँसिया १०(लास्य) नाचना १०६ १४८ (लशुन) लहशुन ८९ ६०(लिकुच) बड़हल की जर .

अमरकोशादर्श। १७९ पृष्ठ पृष्ठ श्लोक श्लोक ३५५ १०(लिक्षा) लीख है ४३ (लेखपभ) इन्द्र १६ (लिखित) लिखाहुआ ७७ ४ (लेखा) पॉति, रेखा २८८ २५ (लिङ्ग)चिह्न, लिङ्ग, २१७ ५६ (लेप)आहार, खाना शिश्न २३१ ६ (लेपक) थवई,राज १७३ ५७ (लिगवृत्ति)बहुरूपि- २५७ ६२ (लेश) अंश, सूक्ष्म, या ब्राह्मण वारीक १६ (लिपि) लिखना, लि-२०६ १२ (लेष्टु) ढीला खाहुआ २१७ ५६(लेह) आहार, खाना १७८ १५ (लिपिकर) लेखक ७ (लोक) भुवन, जन, २६४ ९०(लिप्त) लिपाहुआ भारतवर्ष १९६ ८८ (लिप्तक) विषका वु ३ १३ (लोकजित्) वौद्ध झाया वाण, तीर ६ २८ (लोकमातृ) लक्ष्मी ४८ २७ (लिप्सा) मनोरथ ३६३ ३२ (लोकायत) नास्तिकों १७८ १६ (लिवि) लिखना, लि- का शास्त्र खाहुआ २ (लोकालोक) पर्वतवि- २६९ ११० (लीढ) खायागया शेप ४२ ३२ (लीला) खेल, शृंगार ३ १६ (लोकेश) ब्रह्मा आदि से दूसरे की अ- १४७ ६३ (लोचन) ऑखि नुहारि करना १०१ १११ (लोचमस्तक) मोरशि- १८६ ५०(लठित ) लोटना अजमोदा २४७ २२ (लुब्ध) लोभी २३६ २५ (लोपत्र)चोरीकामाल २३५ २१ (लुब्धक) व्याधा,बहे- ८४ ३३ (लोध्र) लोध लिया, बाघ २० (लोपामुद्रा) अगस्त्य ५(ललाय) भैसा की स्त्री ११७ १४ (लता) मकरी १४९ ९९ (लोमन) रोंबा २६७ १०३ (लून) काटाहुआ १०६ १३४ (लोमशा) जटामांसी ५० ( लम) पूंछ ३५ (लोमहर्पण) रोंबॉख- ८(लेख) देवता डेहीना, रोमाञ्च १७८ १५ (लेखक) लिखनेवाला २६० ७४ (लोल) चंचल,तृष्णा- खा, २० . २ अमरकोशादर्श। . पृष्ठ पृष्ठ नदान, चाँस श्लोक श्लोक युक्त २४७ २२ (लोलुप) अतिलोभी २२९ १०९ (वंशरोचना)वंशलोचन २४७ २२ (लोलुभ) अतिलोभी | १० ६४ (वकुल) मोमशिरी २०६ १२ (लोट) ढीला १५६ २७ (वंशिक) गूगुर २०६ १२ (लोप्टभेदन)मुंगरी,स- २६६ १११ (हिप्ठ)बहुतसे बहुत रावन ३२२ १५९ (वक्तव्य) निन्दित, अ. २२६ ९७ (लोह) लोहा, चांदी, धीन, कहने के योग्य. सोना, लोह इत्यादि, २५० ३५ (वकृ) बहुत अच्छा अगुरु बोलनेवाला ७ (लोहकारक) लोहार |२५९ ७१ (वन) टेढ़ा १७ (लोहपृष्ठ) उजली १४६ ८९ (वन) मुख. चील्ह १४४ ७८ (वक्षस्) छाती २५१ ३७ (लोहल) साफ न बो- १४३ ७३ (वझण) टेहुनी लनेवाला, जो साफ २२८ १०६ (वज) राँगा न बोतताहो १ (वचन) बोलना १६७ ९६ (लोहाभिसार) शस्त्र. २४७ २४ (वचनेस्थित) आज्ञा- धारीराजाओं की नी- कारी राजनविधि, हथियार ३५ १(वचम्) योजना पूजनेका दिन ६६ १०२ (वचा) वच ३४ १५ (लोहित) लालरंग, ११ ४८ (वन) हीरा, वज, सें- . का गर्जना है १५५ २५ (लोहितचन्दन)केसर, १३ १० (वनिप) विजुली कुंकुम २१ २५ (लोहितांग) मंगल, ६३ ७६ (वज्रपुष्प)तिलकाफूल (लोहिताश्व) आगि ४३ (पत्रिन्) इन्द्र = (लोकायतिक) वौद्ध |२५४ ४७ (वश्वक) छली, ठग, मतको माननेवाला दगावाज ६ (वंचुक) सियार ११२ १३० (वंश) वंश, गोत्र,खा- २५२ ११ (खचित)चहकाया,ठ- अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ श्लोक खोक गागया अच्छा बोलनेवाला ८२ २७ (वझुल) तिनिस, अ-२५० ३५ (पदावद)बहुतबोलने शोक वाला ८३ ३२ (वट) बरगदवृक्ष ३ (वन) जल,वन,जङ्गल ३५७ १७ (वटक) चरा ६५ ८५ (वनतिक्तिका) पाँदरि, २३६ २७ (वटी) रस्सी पाठा ९८६ ४६ (बड़वा) घोड़ी २० (वनप्रिय) कोयल ५७ (वड़वानल)बड़वानल| १२१ २८ (वनमक्षिका) डाँस, १६ (वडिश)वंशी,कटिआ मच्छर २५७ ६१ (वह) फैलाहुआ,बड़ा २१ (वनमालिन् ) विष्णु २२२ ७८ (वणिज ) धनियाँ २०७ १७ (वनमुद्ग) मोथी, मोठ २२२ ७८ (वाणिज) वनियाँ ९९ (वनशृंगाट) गोखुरू २२२ ७९ (वणिज्या)चनियाँपन, ७७ ४ (वनसमूह)वन का स- बनेई मूह २२५ ८६ (वराटक)तौलनेकेबाट ७८ ६ (वनस्पति) विना फूल २१९ ६९ (वनोका) जिस गौका के फलनेवाला वृक्ष गर्भ गिरजाताहो १४४ ७८ (वत्स) गोकापछड़ा, १८५ ४५ (बनायुज)वनायु देश वर्ष, छाती का घोड़ा ६६ (वत्सक) कुरैआ १२५ २ (वनिता) स्त्री, बड़ी २१८ ६२ (वत्सतर)जवानवछड़ा प्यारी स्त्री ५३ ११ (वत्सनाभ)विपविशेष २५४ ४६ (वनीयक)माँगनेवाला १३ (वत्सर) वर्ष, साल ९२ ७० (वनोद्भवा) वनवेली, २४५ १४ (वत्सल) प्यारकरने पवारी. ४ (वनौकस) बन्दर ६४ ८२ (वत्सादनी) गुर्च ६४ ८२ (वन्दा) बाँदा २५० ३५ (वद)बहुतघोलनेवाला २४८ २८ (वन्दारु)वन्दना करने ८६ (वदन) मुख वाला, स्तुति करने २४३ ६ (वदान्य) दानी, बहुत वाला गूलर वगैरह वाला, स्नेही - १८२ अमरकोशादर्श . पृष्ठ पृष्ठ - १२५ , प्णु, पीला मा स्त्री ३ (वराह) सूअर श्लोक श्लोक ७७ ४ (वन्या) वनका समूह मड़ाकी रस्ती,वरेत १७२ ५३ (वपन)बार वनवाना २४३ ७ (वरद)वर देनेवाला- १५१ २(वपा)छेद, चर्वी ४ (वरवर्णिनी) बहुत उ- १४२ ७० (चपुस्) देह, शरीर चम स्त्री, हरदी ३ (वर) छहरदीवाल, १०६ १३४ (वरांग) योनि शहरपनाह,सीमा १०६ १३४ (वरांगक)तज, दाल- ३२५ १७० (वभु) वड़ा,न्योरा,वि- चीनी ६४ ४३ (वराटक) कमलगट्टा, १३८ ५५ (वमथ) वान्त, उछार, रस्सी, कौडी हाथी के Dड केपानी | १२५ ४ (वरारोहा)बहुत उत्त- का निकरना १३८ ५५ (वमि) वान्न, उछार १५३ ११६ (वराशि) मोटा कपड़ा ३४० २२९ (वयस)पक्षी,अवस्था ११५ १३५ ४२ (वयस्थ) जवान |२६७ १०२ (परिवसित)सेवित ८६ ५८ (वयस्था)हरी, अँवरा- १६८ ३७ (वरिखस्या) सेवा ब्राह्मी, काकोली २६७ १०२ (वरिखस्यितोसेयित १२ (वयस्य) समान अव- २२६ ९७ (वरिष्ठ) अति श्रेष्ठ, स्था वाला बहुत लम्बा चौड़ा, १२८ १२ (वयस्या)सखी तांचा १५५ १२५ (वर) केसर,कुंकुम, वर- ९८ १०० (वरी)शतावरि दान, श्रेष्ठ, दामाद ३४१ २३४ (वरीयस्) श्रेष्ठ, अ- १२० २६ (वरटा)वरैया, हंसकी तिशय,महान् स्त्री ६२ (वरुण) वरुण, पुल्ह ३ (वरण)बॉस कांटाआ- वारुण दिसे घिरा, वारुण २३६ ३६ (वरुपात्मजा) दारू, ३५८ १८ (वरण्डामुखरोग, मुस मदिरा की पीड़ा ૨૮૮ ५७ (वस्थोलोहसे बना हु- १८४ ४२ (वरत्रा) हाथी के कमर आ रथका ओहार में बांधनेकी रस्मी,च. १९३ ७८ (वरुथिनी)फोज,सेना . ७० -- अमरकोशादर्श। १८३ पृष्ठ पृष्ठ थीकी मूल श्लोक श्लोक २५६ ५७ (वरेण्य) श्रेष्ठ २३२ ९ (वर्द्धकि) बढ़ई २३५ २३ (वर्कर) जवान पशु,ब. २४८ २८ (वर्द्धन) बढ़नेवाला, करा काटना १२४ ४१ (वर्ग) एक जातिवाले ८८ ५१ (वर्द्धमान) रेंड, रेंडी प्राणीव अप्राणियोंका २११ ३२ (वर्द्धमानक) मट्टी का "झुण्ड सेरवा, परई ३४० २३० (वर्चस्)तेज,गृह,बीट २४८ २८ (वर्द्धि) बढ़नेवाला १४२ ६८ (वर्चस्क)गृह.विष्टा (वर्द्धिप्णु) बढ़नेवाला १५९ १ (वर्ण) ब्राह्मणादि, अ./२३७ ३२ (वी) वरेत,चमड़ेकी क्षर,उजलादिरंग,हा- रस्सी १६० ६४ (वर्मन्) कवच,खतर १५७ १३४ (वर्णक) चन्दन,घिसी १९० ६५ (वर्मित) कवच आदि हुई लेपन वस्तु पहिरे हुये २६९ ११० (वर्णित) स्तुति किया २५६ ५७ (वर्य) श्रेष्ठ हुआ ७(वा) स्वयंवर में ४६ (वर्णिन)ब्रह्मचारी अपने आप पतिकीइ- १२३ ३६ (वर्तक)वटेर, घोड़ेका च्छा करनेवाली कन्या खर, बतख १२१ २७ (वर्वणा) कालीमक्खी २०३ १(वर्तन) वर्तनेवाला, ९६ ९० (वर) भंगरा जीविका, रोजगार १०७ १३६ (वर्वरा) ववई १५७ १३४ (पति)पिसीहुई लेपन १९ ११(वर्ष) वर्षा,भारतवर्ष, वस्तु घरस १२३ ३६ (वर्तिका)बटेर १७६ ९ (वर्पवर) हिजरा २४९ २९ (वर्तिप्णु) वर्तनेवाला, २८ १६ (वर्ग) बरसात वैपरनेवाला २४ (वभू) मेढ़क २५९ ६६ (वर्तुल) गोल ६० २४ (वभ्वी) मेंडकी ६८ १६ (वर्मन् )मार्ग, रास्ता, १३५ ४३ (वर्षीयस् ) अतिबूढ़ा आंखों की पलकें बरौनी १६ १२ (वर्पोपल) वर्षाके साथ ८० (वर्द्धक)भेंगरा गिरनेवाले पत्थर १७० अमरकोशादर्शी ५ श्लोक श्लोक १४२ ७० (वर्मन) देह, प्रमाण १६६ २९ (वपटकंत)आगिमेंहोम १०३ १२२ (वर्हिष्ठ) नेत्रवाला कियाहुआ,अग्निहुत १३ (वलक्ष) उजलारंग २९९ २९९ ६६ (वसति) रात, घर ७३ १५ (वलभी) छज्जा १५३ ११५ (वसन) कपड़ा १५१. १०७ (वलय) हाथकेकड़ा १८ (वसन्त बसन्त ऋतु ७३ १४ (वलीक)छज्जा,वरौनी १४१ ६४ (वसा) चर्वी ३ (बलीमुख) बन्दर २१३ ११ (वसिर) समुद्र में होने १२ (वल्क) वकला वाला निमक १२ (वल्कल) वकला २ १० (वमु) देवगण, धन, १८६ ४८(वल्गित) घोड़ों की आगि, किरण, रत्न गति,उछाल ८० (वसुक)मदार, साँभ- १५ (वल्मीक) चेमउरि रिनिमक ४२ ३ (वल्लकी) वीणा २२ (वसुदेव कृष्णके पिता २५५ ५३ (वल्लम) प्यारा, मुख्य ६५ ३ (वसुधा)पृथ्वी,ज़मीन मालिक,कुलीन घोड़ा ६५ ३ (वसुन्धरा) पृथ्वी, ज़- १३ (वल्लरि) मञ्जरी,चोर मीन ६ (वल्ली) घोडी ३ (वसुमती)पृथ्वी,ज- ६३ (वल्लूर) सूखा मांस मीन ૨૭૨ ८ (वश) इच्छा,सन्तान, | २२१ ७६ (वस्त) बकरा घाँस १४३ ७३ ( वस्ति) जहां मूत्र २७० ४ (वशक्रिया) वशीकरण रहताहै वह स्थान १८३ ३६ (वशा) हथिनी, वाँझ | १५३ ११५ (वस्त्र ) कपड़ा गोखी १५४ १२० (वस्रवेश्मन् ) कपड़ा २५६ ५६ (वशिक) खाली का घर, कनात ९८ ९७ (वशिर)गजपीपरिस- २२२ ७६ (वस्न) मूल्य,कीमत ६६ (वस्नसा)नस. २४७ २५ (वश्य) वशमेंपड़ाहुआ २१८ ६३ (वह)बेलफा काँधा = (वपद् ) देवताओं के ५४ (वह्नि) आगि २२८ १०६ (वह्निशिख) कुसुम्भ Go मुद्रका निमक अर्थ त्याग अमरकोशादर्श। हुआ पंख कारकयुक्त क्रिया पृष्ठ श्लोन श्लोक ८० (वनिसंज्ञक) चीत औ- २५० ३५ (वाचोयुक्तिपटु) युक्ति पध युक्तवचन बोलनेवाला, ३४५ २४८ (वा)उपमा, विकल्प, नैयायिक निश्चय १९५ ८७ (वाज) चाणमें लगा. २५० ३५ (वाक्पति) बहुत अ- च्छाबोलनेवाला ३६३ ३१ (वाजपेय) यज्ञविशेप, २ (वाक्य) तिडन्त और वाजपैठी मदिरा जि- सुवन्तों का समूह, वा समें पीजावे ६. १०३ (वाजिदनक) रूस ३५ (वागीश)वहुतअच्छा १२२ ३४ (वाजिन्) घोड़ा, वाण, बोलनेवाला पक्षी २६ (वागुरा)जाल ७ (वाजिशाला) घोड़- २३३ १४ (वागरिक) बहेलिया, शाल जाल से जीवोंको पक- ४८ २७ (वाञ्छा) मनोरथ डनेवाला ३६७ ४२ (वाटी) रास्ता, मार्ग २५० ३५ (वाग्मिन् ) युक्रियुक्त १०० १०७ (वाट्यालका)वरिआरा बोलनेवाला,नैयायिक | १३ ५७ (वाब) बड़वानल ३७ ९ (वाड्मुख) आरम्भ घोड़ियोंका समूह, व्रा ३५ १(वाच्) सरस्वती, ह्मण वाणी बोलना ४१ (घाव्य) ब्राह्मणों का १७० १४५ (वाचंयम) मुनि ममूह २ (वाचक)शास्त्रीय शब्द, ९३ ७४ (पापा) नीलीझिपटी २२ २४ (वाचस्पति) वृहस्पति १६० ३ (वानग्रस्य) ब्रह्मचारी ३६ (वाचाट)वहननिन्दित ३६ २८ (वाणि) बीनना वचन बोलनेवाला २२२ ७२ (वाणिज्य) अनियोश ३६ (वाचाल) बहुत नि. कर्म, धनिय दितवचनबोलनवाला ३१० ११ (पाणिनी) नटिनि,ना. १७ (वाचिक) सन्देशाक- गंगाली, दुनी 'हना १ (वाणी) मरम्बनी २५० -- अमरकोशादर्श पृष्ठ पृष्ठ श्लोक श्लोक ६४ (वात) हवा, वायु ३ (वामन) दक्षिणदिशा १०९ १४९ (वातक) पटुआ, सन का दिग्गज, धवना १३२ ५९ (वातकिन्) याईरोग ६८ १५ (वामलूर ) मउरि वाला १२५ ३ (वामलोचना) सुन्दर २९ (वातपोथ)छिउलवृक्ष आँखवाली स्त्री ८ (बातममी)हरिनविशेष १२५ २ (वामा) स्त्री ११६ = (वातमृग)हरिणविशेष १८५. ४६ (वामी) घोड़ी १३९ ५९ (वातरोगिन् )बाईरोग २३६ २८ (वायदण्ड) कपड़ावी- वाला ननेका दण्डा, राछि ९ (वातायन) झरोखा | ११६ २१ (वायस) कौवा ११६ ९ (वातायु) हरिणविशेष ११८ १८ (वायसाराति) उल्लूपक्षी ३३१ १९५ (वातूल) वौंडर, चव- ११० १५१ (वायसी) कोयाहाँडी डल,वायुकासहनेवाला १०८ १४४ (वायसोली) ककोली २९७ ६० (वात्सक) पछड़ों का १४ ६२ (वायु) वायु, हवा समूह ५६ (वायुसख) आगि (पादित्र)वाजाका स- ५५ ३ (वार)जल, पानी राजाम १२४ ३९ (वार) समूह, अवसर, ४२ ५ (वाद्य) वाद्यभेद सूर्यादिका दिन १५ (वान) सूखाफल १८२ ३४ (चारण) हाथी २८ (वानप्रस्थ) महुआ १०१ ११३ (वारण वुसा) केला १२५ ४ (वानर) वन्दर १२९ १९ (वारमुख्या) मुख्य प- ६ (वानस्पत्य) फूलकर तुरिआ फलनेवालावृक्ष १८९ ६३ (चारवाण) वखतर ८३ ३० (पानीर) उत १२६ १९ (वारस्त्री) पतुरिया १३१ (वानेय) मोथा ५१ (बाराही) विलाईकन्द ६१ २८ (वापी) यावली ५५ ३ (वारि) जल ३१८ १४४ (वाम) सुम्दर, टेढ़ा, १८ ७ (वारिद) वादर, मेघ महादेव ३८ (वारिपीजलकुम्भी ३३ (वामदेव) शिव ५ (वारिप्रवाह) भर्ना ११० ७ अमरकोशादर्श। श्य पृष्ठ श्लोक श्लोक ६ (वारिवाह)वादर, मेघ कपड़ा १८५ . ४३ (वारी) हाथीके वॉधने १६९ ३९ (वाल्मीक) वाल्मीकि का स्थान मुनि ५१ (वारुणी)दारू, पश्चिम २५० ३५ (वावदूक) बहुन बोलने दिशा वाला ५७ (वार्त) लघुरोगसे छूटा ९९ १०३ (वाशिका) रूस हुआ, असार वस्तु ४१ २५ (वाशित) पक्षियोंका ७(वार्ता) वृत्तान्त,हाल, शब्द जीवनोपाय, रोजगार ७२ ६ (वास) सभामंदिर, र- १०१ ११४ (वार्ताकी) बैंगन वृक्ष, हनेकास्थान,मभा,वस्त्र भॉटा ९९ १०३ (वासक) रूस २३३ १५ (वार्तावह ) संदेशा ले ७१ ८ (वासगृह) घरका बीच जानेवाला ९२ ७२ (वासन्ती) वसन्ती १३५ ४० (वार्द्धक)बुढ़ापा,बुढ़वों १५७ १३५ (वासयोग) सुगन्ध का समूह द्रव्यका चूर्ण २३२ ९(वार्द्धकि) बढ़ई २४ २ (वासर) दिन २०४ ५ (वार्द्धपि)व्याज से जी ४३ (वासव) इन्द्र विका करनेवाला १५३ ११५ (वासस्) वस्त्र २०४ ५(वार्द्धपिक)व्याजसे ९९ १०३ (वासक) रूस जीविका करनेवाला १५७ १३५ (वासित) छ्योंकी हुई २८१ ४३ (वार्मण) कवचका वस्तु, सुगन्धयुक्त किया समूह हुआ, पक्षियों का शब्द ११० १५० (वार्षिक) चिरायताका १८५ ४६ (वासी) घोड़ी ७५ (वासितास्त्री, हथिनी १५० १०३ (बालपाश्या बोटीमें ५१ ४ (वासुकि) सांपों का लगानेकी सोने की पट्टी राजा १०३ १२१ (वालुक)एलुआ २० (वासुदेव) विष्णु १५२ १११ (बाल्कोअलसी आदि ४५ १४ (वास) कन्या के बकल से बनाहआ ७४ १२ (वास्तु) घरकी भूमि ૨૮ अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृध श्लोक श्लोक ११२ १५८ (वास्तुक) बथुआ का बदलना, अंजाम शाक २४९ ३० (विकासिन ) फूलने- ४४ (वास्तोप्पति) इन्द्र वाला ५४ (वास) वस्त्रले ढका हुआ, १२२ ३४ (विकिर) पक्षी जिसपर कपड़े का व- ९४ ८० (विकीरण) मदार हारहो २४३ ७ (विकुर्वाण) हर्पित,खुश १८५ ४४ (वाह) घोड़ा, १६ ४६ १६ (विकृत) वीभत्सरस, द्रोण का १ वाह रोगी ५ (वाहदिपत्) भैंसा २७४ १५ (विकृति) विरुद्ध करना ५८ (वाहन) सवारी १६६ १०२ (विक्रम)अतिपराक्रम, ५ (वाहस) अजगर सॉप अन्यको दबाना १८४ ३६ (वाहित्य) हाथी के ल- २२३ ८३ (विक्रय)वेचना लाटका नीचेका भाग २२२ ७९ (विक्रयिक)वेचनेवाला १९३ ७८ (वाहिनी) सेना, फौज, १९३ ७७ (विक्रान्त)बहादुर,शूर फौजविशेप, नदी २७४ १५ (विक्रिया)विकार, वि- ६२ (वाहिनीपति)फौजका रुद्धकरना मालिक २२२ ७९ (विकेतृ) नेंचनेवाला १४४ ८० (वाहु)बाह, भुजा,हाथ २२३ ८२ (विक्रय)वचनेकेयोग्य १५५ १२५ (वाहीक ) कुंकुम १४ (विक्रय)विकन्ट,शोक १२२ ३४ (वि) पक्षी से जिसका अंग भर ૨૨૨ ८३ (चिंशति) वीस होगयाहो ३७ (विकंकत) कॅटाय २७९ ३७ (विक्षाव)छींक ७ (विकच) लाहुआ । २६६ १०० (विगत) तेजहीन २९ (विकर्तन) सर्य १३० २१ ( विगतार्तवा) रजोर- १३६ ४६ (विकलाइ) अंगहीन हित स्त्री ९० (विकसा) मजीठ ४६ (विग्रोनकटा ८ (विकसित) फूलाहुआ १४२ ७० (विग्रह) देह, विगार, २४९ ३० (विकस्वर)फुलनेवाला लड़ाईदूसरे राज्यको २७४ १५(विकार)प्रकृति का लूटलेना कदेना ७८ अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ ८० ८७ श्लोक श्लोक विस्तार १४ (विटप) वृक्षकीशाखा, ३०(विघस) देवपित्रादि खरकागुच्छा, वृक्ष के भोजन से बचीहुई ७७ ५(विटपिन) वृक्ष वस्तु ५० (विदखदिर) दुर्गन्धि- २७५ १९ (विघ्न) कार्यनाशक युक्त खयर, रीवां उपद्रवविशेप, खलल २३५ २३ (विदचर) गॉवकासूअर ९ ३९ (विघ्नराज) गणेश २१३ ४२ (विड) खारीनोन १६० ६ (विचक्षण) पण्डित १०० १०६ (विडंग) वायभिरंग २७८ ३० (विचयन) ढूँढ़ना ७ (विडाल) बिलार ५३ (विचर्चिका) खाजु ९ ४२ (विडोजस्) इन्द्र २ (विचारणा) विचार (३५४ ५(वितण्डा) ववाह, २६६ ९९ (विचारित) विचारा मिथ्यावाद हुआ ४० २१ (वितथ) असत्य, झूठी ३ (विचिकित्सा) सन्देह १६७ ३१ (वितरण) दान ११ (विच्छन्दक) राजाओं ७३ १६ (विता) वेदी, चोतरा का घर विशेष १४५ ८४ (वितस्ति) वित्ता ३६१ २६ (विच्छाय) पक्षियोंकी १५४ १२० (वितान)यज्ञ, विस्तार, छाया तुच्छ, चॅदवा, शून्य, २२ (विजन) एकान्त २०१ ११० (विजय)जीति, फतेह १०९ १४९ (पितुन्न)विसम्पपरिआ २१४ ४६ (विजिल) रसा वा क- १०४ २६ (वितुन्नक) भूमीवरा, रायलवाला व्यसन तृतिया, धनियाँ २४२ ४ (विज्ञ) प्रवीण, चतुर २२५. ६० (वित्त) प्रसिद्ध, वि. २४४ है (विज्ञात) प्रसिद्ध चारा हुआ, धन ३२ ६ (विज्ञान) लोकके कार्य २७१ और शास्त्रका जानना ३६३ ३२ (पिदल)घाँसका टर- ३५७ १७ (विट) धूर्त लवा ७३ १५ (विटंक) कबूतरआदि २७१ ५ (विदार) फूटना के रहने का स्थान १०२ ११५(पिदाग्गिन्धा)सरिवन ७२ ५ (विदर) फुटना .

अमरकोशादर्श। पृष्ठ श्लोक पृष्ठ श्लोक १०० १२० (विदारी)कालाकुम्हड़ा विधिक देखनेवाला २६८ १०८ (चिदित) जानाहुआ, ५ २२ (विधु)विष्ण, चन्द्रमा, स्वीकार किया हुआ कपूर, राक्षस १७ ५ (विदिश्) दिशाओं २६८ १०७ (विधुत) त्यागा हुआ का मध्य ૨૨ २६ (विधुन्तुद) राह २४९ ३० (विदुर) जनआ,ज्ञानी २७५ २०(विधुर) अत्यन्त वि. ८३ ३० (विदुल) जलवेत, घेत योग, अलग होजाना २६३ ८७ (विद्ध) छेदाहुआ, प. २७० ४ (विधवन) कॉपना ठायाहुआ २७० ४ (विधूनन ) काँपना ८४ (विद्धकर्णी) पाँढरि २४७ २४ (विधेय) आज्ञाकारी ११ (विद्याधर) देवयोनि २४७ २४ (विनयग्राहिन्) आ- ९ (विद्युत) बिजुली ज्ञाकारी १३६ ५६ (विधि)व्यरथिआरोग ३४७ ३(विना) निषेध २०९ १११ (विद्रव) भागना ३ १४ (विनायक) जैनमती, २६६ १०० (विदुत) पिघलाहुआ धीआदि |२७६ २२ (विनाश) नाश, लोप ૨૨૫ ९३ (विद्रुम) मूंगा २६४ ६१ (विनाशोन्मुख) पका १०५ १२६ (विदुमलता) पारी हुआ, मरने के योग्य १२ (विद्धम् )पण्डित, आ- १८५ ४४ (विनीत ) सीखाहुआ स्मज्ञानी घोड़ा, नम्र, मुलायम २५ (विदेप) र आदमी ૨૨૭ ११ (विधवा)रोड़ २४२ ३० (विन्दु)जानने याला, २३६ ३८ (विधा) विधान, प्र. ज्ञाता, बूंद कार, मजूरी. १८४ ३९ (विन्दुजालक) हाथी १७ (विधातृ) ब्रह्मा के शरीरके लालबुन्दा १७ (विधि) ब्रह्मा, भाग्य, ७५ ३ (विन्ध्य) पर्वतविशेष विधान, नियोगशास्त्र २६६ ९९ (विन) विचाराहुआ, पायाहुआ १८ (विधिदर्शिन्) यसँकी २७७ ११ (विपक्ष) शन गणेश, गरुड़ ४ ४ के नाम अमरकोशादर्श। ५५ श्लोक श्लोक १२ ३ (विपञ्ची) वीणा २५८ ६८ (विप्रकृष्टक) दूरि २२३ ८२ (विपण)वेचना ४७ २५ (विप्रतीसार) पछताना २ (विपणि) जहां बाजार २७७ २८ (विप्रयोग) प्रीति छो- न हो लेकिन वस्तु वि. ड़ना कतीहो उसका नाम, २५२ ४१ (विपलब्ध) बहकाया, दूकानोंकी लैन,बाजार ठगाहुआ, ठगागया के भीतरकी गली ५० ३६ (विप्रलम्भ) किसी व- १६४ ८२ (विपत्ति) विपत्ति, मु- स्तकी आशादेकर फिर सीबत उसे भंगकरना, प्रीति १७ (विपथ) खराबरास्ता छोड़ना ८२ (विपद् ) विपत्ति. मु. ३९ १६ (विप्रलाप) विरुद्धकहना सीवत १३० २० (विप्रभिका) शुभाशुभ २७९ ३३ (विपर्यय) उलटा पु. जानने वाली लटा ६ (वि प्) बूंद २७६ ३३ (विपर्यास) उलटा पु- २७३ १४ (विप्लव) लूटना लटा १३८ ५५ (विवन्ध) कवजरोग ५ (विपश्चित्) पण्डित ७ (विवध) देवता ६२ ३३ (विपाद )विपाशानदी २२५ ९० (विभव) धन १३८ ५२ (विपादिका) व्यवाई २२ २८ (विभाकर) सूर्य ६२ ३३ (विपाशा)विपाशानदी २५ ४ (विभावरी) रात १ (विपिन) वन १३ ५७ (विभावसु) आगि,सूर्य २५७ ६१ (विपुल) फैलाहुआ, ८६ ५८ (विभीतक) वहेड़ा बड़ालम्बा चौड़ा ३७ (विभति) ऐश्वर्य ४ (विपुला) पृथ्वी १४६ १०१ (विभूपण) गहना १५६ २ (विप्र) ब्राह्मण ३१ (विभ्रम) स्त्रियोंकी कि- २७४ १५ (विप्रकार) अपकार, याविशेष, अलंकार, अनभल भ्रांति, शोभा २५२ ११ (विप्रकृत) निकाला १४९ १०१ (विभ्राज) शोभित, च हुआ मकता हुआ ९६० १९२ अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ लोक श्लोक २४३ ८ (विमनम् ) उदाल, ५१ १ (विल) विल, छेद रंजीदः २४८ २६ (विलक्ष)चकरायाहुआ २७३ १३ (विमईन) मीजना २७० २ (विलक्षण)विनाकारण २५५ ५५ (विमल) सफा की स्थिति १०८ १४३ (विमला) हुडाविशेप ४३ ९ (विलम्बित) धीरेधीरे १३१ २५ (विमातूज) सौतेला होनेवाला भाई २७७ २८ (विलम्भ) अतिदान ११ १२-(विमान) विमान ३६ १६ (विलाप) रोना १६ १॥ (वियत्) आकाश ४८ ३१ (विलास)स्त्रियोंकेहाव ११ ५० (वियदगंगा) आकाश- २६६ १०० (विलीन) पिघलाघी गङ्गा आदि २७५ १८ (वियम) संयम १५७ १३४ (विलेपन) घिसाहुआ २५ (वियात) निर्लज्ज,ढीठ सुगन्ध द्रव्य, चन्द- २७५ १८ (वियाम) संयम नादि लगाना १७१ ४८ (विरजस्तमस्) रजो- २१५ ५० (विलेपी) लप्सी, मी- गुण तमोगुणसे रहित लाभात २७९, ३८ (निरति) निवृत्ति ५० ८(विलेशय) सॉप २५ ६६ (विरल) विरल |३०६ ६६ (विवध) सघतरफसे १७५ १ (चिराज्) क्षत्रिय खींचकर इकट्टाकिया २३ (विराव) शब्द ध्यानादि, रास्ता १७ (विरिधि) ब्रह्मा १ (विवर) विल, छेद, ३३ (विरूपाक्ष) शिव २३३ १६ (विवर्ण) नीच ३० (विरोचन) सूर्य, च- २५२ ४४ (विवश) मरणासन्न, न्द्रमा, आगि, प्रह्लाद बुद्धि होनेवाला, सठि- २५ (विरोध) वैर आन २७५ २१ (विरोधन) विगार २९ (विवस्वत्) सूर्य, दे- १६ (विरोधोक्ति) विरुद्ध वता कहना [३७ ९ (विवाद) व्यवहारियों ४० ४ मरने के लगभग दुष्ट- का पुत्र अमरकोशादर्श। १६३ पृष्ठ पृष्ठ तरकी रास्ता २ श्लोक श्लोक की धतकही ८१ २३ (विशालत्वच्) छत- १७४ ६०(विवाह) व्याह, शादी वनि १८० २२ (विविक्त)एकांत,पवित्र १११ १५६ (विशाला) इन्दारुणि २६४ ९३ (विविध) अनेक प्र-१४५ ८६ (विशिख) वाण, तीर कारका ३ (विशिखा) गॉवकेभी- ४१ (विवेक) प्रकृति पुरुष के भेदको जानना , १५५ १२३ (विशेषक) माथेमें क- अन्य विचार स्तूरीआदि से तिलक ४८ ३१ (विबोक) स्त्रियोंफेहाव लगाना २०३ १ (विश्)वैश्य,मनुष्य, १६७ ३१ (विश्राणन) दान विष्ठा २७७ २८ (विश्राव) अतिप्रसि- २५६ ६०(विशंकट)बड़ालम्बा द्धता चौड़ा, फैलाहुआ २४४ ९ (विश्रुत) प्रसिद्ध १२ (विशद) उजला १० (विश्व) गणदेवता, २०२ ११५ (विशर) मारना ६४ ८२ (विशल्या) इन्द्रपुप्पी, २३५ २२ (विश्वकछु) शिकारी गुर्च, दतिया कुत्ता २०१ ११४ (विशसन) मारना ३०९ १०८ (विश्वकर्मन ) सूर्य, ४१ (विशाख) स्वामिका- र्तिक २७ ६ (विश्वकेत) कामदेव २१ २२ (विशाखा) विशाखा २१२ ३८ (विश्वभेपज) सोंठि नक्षत्र ५ २२ (विश्वम्भर) विष्णु २७८ ३२ (विशाय) सोनेवाला | ६५ २ (विश्वम्भरा) पृथ्वी २०१. ११२ (विशारण) मारना ४ ७(विश्वसृज्) ब्रह्मा ३०६ ९५ (विशारद) पण्डित, १२७ ११ (विश्वस्ता) राँड़, वि. ढीठ २५७ ६० (विशाल) वडालम्बा ९८ ९९ (विश्वा) अतीस चोड़ा, फेलाहुआ १६६ ३६ (विश्वामित्र) विश्वा- १५३ ११४ (विशालता) चौड़ाई मित्र सब, सोंठि देवोंका थबई धवा १६४ अमरकोशादर्श। पृष्ठ श्लोक श्लोक २३ (विश्वास) विश्वास, ४ १८ (विष्टरश्रयस) विष्णु परतीति, यकीन ३ (विष्टि) हठसे नरको ९ (विप) जहर, माहुर फेंकना ५२ ७(विपधर) सॉप १५२ ६८ (विष्ठा) गृह, मैला ८१ २३ (विपमच्छद) छतवनि ४ १८ (विष्णु) विष्णु ६ (विपय)रूपरसादि,दे- ९९ १०४ (विष्णुकान्ता) विष्णु- श,प्रयोजन,मतलब, क्रान्ता औषधिविशेष जिसका जो कुछ जा. १६ १॥ (विष्णुपद) आकाश नाहे वह ६१ ३१ (विष्णुपदी) गंगानदी ८ (विपयिन् ) इन्द्रिय ६ ३० (विष्णुस्थ) गरुड़ ५३ ११ (विपवैद्य) विपझारने २५३ ४५ (विष्य) विपसे मारने वाला के योग्य हन EL (विषा) अतीस ३४६ १३ (विप्वच्) सबतरफ ८८ (विषाक्त) ज़हरीलावा १६ (विप्वक्सेन) विष्णु ११० १५१ (विप्वक्सेनप्रिया) वि- २९६ ५५ (विपाण) पशुओं का लाईकन्द सींग, हाथीका दाँत ८९ ५६ (विप्वक्सेना) काकुनि १०३ ११९ (विपाणी) मेढ़ासिंगी |२५० ३४ (विप्वाच्) सब तरफ १४ (विपुव) रात दिन वरा- जानेवाला वर होनेवाला काल | ६४ ४२ (विस) भसीड़ १४ (विपुवत) रातदिन व. १२० २६ (विसकण्ठिका) एफप- राबर होनेवाला काल कार की बकुली १७ (विष्कम्भ) केयाइवन्द ६३ ४१ (विसप्रसून) कमल करनेका काठ, पन्ना ३६ (विसंवाद) आशाभ- १२२ ३४ (विप्किर) पक्षी गकरना,अयोग्य वचन ७ (विष्टप) लोक १२४ ४० (विसर) समूह ३२५ १६९ (विष्टर) वृक्ष, पचीस १६७ ३१ (विसर्जन) दान कुशों की मूठी, पीढ़ा | २७६ २३ (विसर्पण) फैलना आदि काप्ठ आसन । ५८ १७ (विसार) मछली ण,तीर २७ २७ अमरकोशादर्श। १६५ पृष्ठ शाखा, फैलाव पृष्ठ एलोक दलोक २४९ ३१ (विसारिन्) फैलनेवाला २३७ ३० (विहंगिका) पहिंगी ३६ (विसिनी) कमलिनी ५० ३५(विहसित) मध्यम २६२ ८६ (विसृत) फेलाहुआ हँसना २४९ ३१ (विसृत्वर) फैलनेवाला २५२ ४३ (विहस्त)व्याकुल, शो २४६ ३१ (विसमर) फैलनेवाला क से जो कुछ न.कर २२४ ८६ (विस्त)८० घुघुचीभर, सकताहो मोहर १६ १॥ (विहायस् ) आकाश, २७१ २२ (विस्तर) शब्दका वि- पची स्तार १६७ ३१ (विहायित) दान १४ (विस्तार) हनों की २७४ १६ (बिहार) खेलमें पाँवसे चलना २६२ ८६ (विस्तृत) फैलाहुआ २५२ ४४ (विखल) शोकादि से ४१ (विस्रसा) बुढ़ापा अंगभंग निसका दो- २०० १०८ (विस्फार) धनुप का गयाहो, व्याकुल शब्द ३३६ २१४ (चीफाश) एकान्त, १३८ ५३ (विस्फोट) फोड़ा प्रकाश ४६ १६ (विस्मय) अद्भुतरस, ५५ ५(वीचि) लहरि आश्चर्य ३ (वीणा) वीणा २४८ (विस्मयान्वित) चक- २३३ १३ (वीणावाद) वीणाय- रायाहुआ जानेवाला २६३ ८६ (विस्मृत) भूला हुआ १८५ ४३ (बीत) निर्वल हाथी, १२ (विस) कच्चेमांसादि घोड़ा २३६ २६ (वीतंस) मृगा और १८० २३ (विसम्भ) विश्वास, पक्षियों के घुझाने की रतिकाल में स्त्री पुरुष सामग्री जाल वगेरह का झगड़ा १८५ ४३ (चीति) घोड़ा १२२ ३३ (विहग) पक्षी १२ ५४ (वीतिहोत्र) आगि १२२ ३३ (विहंग) पक्षी ४ (वीथी) पाँति, मार्ग १२३ '३३ (विहंगम) पक्षी २५५ ५५ (पीघ्र) सफा का गंध ७७ १६६ अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ मिलाकर बनायाहुआ श्लोक श्लोक २७ (वीनाह) कुँऑआदि ११६ ८ (वृक) भेड़हा, विग की जगति | १५६ १२९ (वृकधूप)कई एक वस्तु ૨૫ १८ (वीर)वीररस, शूरवीर, वहादुर धूप, देवदारुधूप,चूहा ११३. १६४ (वीरण) गॉडर २६७ १०३ (वृक्ष) कटाहुआ ११३ १६४ (वीरतर) गॉडर ७७ ५(वृक्ष) विरवा, पेड़ ४५ (वीरतरु)अर्जुनदृक्ष २३८ ३४ (वृक्षभेदिन) वृक्षका १२९ १६ (वीरपत्नी) वीरकी स्त्री काटनेवालाहथियार, १९९ १०३ (वीरपान) युद्धसे पहि- वॉका ले या पीछे नशाखाना, ६४ ८२(वृक्षरहा) बाँदा १९९ १०३ (वीरपाण) युद्धसे प- ७७ २(वृक्षवाटिका) मन्त्री हिले नशाखाना और पतुरियों के रहने १२९ १६ (वीरभार्या) वीरकीती का बागीचा १२६ १६ (वीरमातृ) वीरकीमाता २३८ ३४ (वृक्षादन) वृक्षका का- ४२ (वीवृक्ष) भिलॉवॉ टनेवाला हथियार १९८ १०० (वीराशंसन) अतिभ- वॉका यानक रणभूमि ९४ १२ (वृक्षादनी) वॉदा १२९ १६ (वीरसू) बीरकी माता २१२ ३५ (वृक्षाम्ल)अमिली,चूक १७३ ५८ (वीरहन ) जिस तपस्वी २९ २३ (जिन) पाप, टेढ़ा, का अग्निवुझगया हो क्लेश ९ (वीरुध्) वहुत फैली २६४ ६२ (घृत) वरणकियाहुआ हुई वाडी २७२ ८(कृति) वरदान २६ (वीर्य) बड़ाभारी उ. २५६ ६९ (वृत्त) गोल, श्लोक, त्साह, काम, वल, प्र. चरित्र, भूतकाल, पो. भाव ढा,वरण कियागया ६६ (वीवध) सवतरफसे ३७ ७(वृत्तान्त) हालखबर, खींचकर इकट्टाकिया- प्रकरण, प्रकार, स. हुआ ध्यानादि,रास्ता म्पूर्णता ८१ (बुक) गूमा २०३ १ (वृत्ति) किसानीआदि ४८ ६१ अमरकोशादर्श। १६७ पृष्ठ न्दर, श्रेष्ठ ड्ढा, पण्डित श्लोक श्लोक जीविका, जीविका, सूत्रका अर्थ, विवरण, २६६ ११२ (वृन्दिप्ठ) अतिशय रोजगार वृन्दारक ३२३ १६३ (वृत्र)अन्धकार, शत्र, ११७ १५ (वृश्चिक) वीछि, ऊन दानव वृत्रासुर आदिका खाने वाला ४३ (वृत्रहन) इन्द्र कीड़ा ३४४ २४६ (वृथा) निरर्थक, अ.| २२ २७ (वृप) धर्म,रूस, घेल, विधि, व्यर्थ काँकड़ासिंगी, अण्ड- १०३ १२२ (वृद्ध) शिलाजीत, बु. कोश, मूस, श्रेष्ठ | १४४ ७६ (वृपण) अण्डकोश १३५ ४०(वृद्धत्व) बुढ़ापा ७ (वृपदंशक) बिलार १०७ १३७ (वृद्धदारक) विधारा ३५ (वृपध्वज) शिव ४२ (वृद्धश्रवस्) इन्द्र ४३ (वृपन ) इन्द्र १३५ १० (वृद्धसंघ) दृद्धोंका स-/२१७ ५६ (वृपभ)घेल २३० १(वृपल) शूद्र १२८ १२ (वृद्धा) बूढ़ी १२७ ६(वृपस्यन्ती)मेथुनकराने २७२ ९ (वृद्धि) पढ़ती, कृपिर की इच्छा किये हुए स्त्री णिज आदि आठवर्ग| ९५ ८७ (वृपा) मूसरि की पढ़ती ३२११५५ (वृपाऊपायी) लक्ष्मी, २०४ ४ (वृद्धिजीविका)व्याज पार्वती २१८ ६१ (वृद्धोस) चूढाल ३१४ १२६ (वृपाकपि) शिव, विष्णु २०४ ५ (वृद्धयाजी) व्याजले १७१ १९ (पी) पियों का जीनेवाला आसन १५ (पन्त) अति छोटीक- १९ ११ (वृष्टि) वर्षा ली और अति छोटे २२१ ७६ (पिए) भेंडा फलोंके गुच्छेके ऊपर २८७ २०(वेग) प्रवाह, जल्द १६२ ७३ (वेगिन) जल्दयाज ९४ ८२ (सन्दा) याँदा १४८ ६८(वैषि)त्रियोंके पालों ९ (वृन्दारक) देवता, सु- की तीन लटॉस बनाई ८० की पंखुरी २०० अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ धामें पड़ा हुआ श्लोक श्लोक ३१ (व्यक्ति) पृथक् प्रका-२५२ ४३ (व्याकुल)शोकादि से शित होना जो कुछ न करसकाहो ३३० १८९ (व्यग्र) आकुल,दुधि- ७८ ७ (व्याकोश) फूलाहुआ २ (व्याघ्र) वाघ,श्रेष्ठ १५६ १४० (व्यजन)वेना, पंखा | १०५, १२९ (व्याघ्रनख) नखनामक ४५ १६ (व्याक)भाववताना गंधद्रव्य, वड़ी नखी ३११ ११५ (व्यञ्जन ) चिह्न, मो- ८५ ३७ (व्याघपाद् ) कॅटाय छदाढ़ी,जेमन,भोजन, ८७ ५० (व्याघ्रपुच्छ)रेंड,रेंडी अंग ११८ १६ ( व्याघाट) भर्दूल ५१ (व्यडम्बक) रेंड,रेडी चिड़िया २७६ ३३ (व्यत्यय) उलटा पु- ९७ ९३ (व्याघ्री) भटकटैया लटा ३०(व्याज) कपट,बहाना २७६ ३३ (व्यत्यास) उलटा पु-२९३ ४२ (व्याड़) सर्प, व्याघ्र लटा इत्यादि मांस के खाने ५४ ३ (व्यथा) पीड़ा वाले जीव २७२ ८(व्यध) वेदना १०५ १२६ (ब्याडायुध) नखनाम १७ (व्यय) खराघरास्ता गंधद्रव्य, बड़ी नखी २७५ १७ (व्यय) खर्च २३४ २०(व्याध) व्याधा, पहे- ૨૮૪ १२ (व्यलीक)अप्रियकार्य, लिया पीड़ा १०४ १२६ (व्याधि) कूट औषध, १२ (व्यवधा) ढाँपना रोग ३७ ६(व्यवहार) विवाद ८२ २४ (व्याधिधात) अमल- १७४ ६० (व्यवाय) मेथुन तास ३१२ १२० (व्यसन)विपत्ति नाश, १३९ ५८ (व्याधित) रोगी पतन, काम और क्रोध १४ ६४ (व्यान) वायुविशेप लोभसे हुआ दोप ૨૨ १(व्यापाद) परद्रोह की २५२ ४३ (ब्यसनात) व्यसनसे चिन्ता पीड़ित, मुसीयतजदः | १०१ १२६ (व्याप्य) कूट ओपथ १२५६ ७२ (व्यस्त) आकुल । १४६ ८७ (व्याम) हाथ फैलाने अमरकोशादर्श २३१ 1. सादि पुण्य पृष्ठ श्लोक श्लोक TR का नाम ७ ('व्योकार) लोहार २६९ ११२ (व्यायत) दीर्घ,लम्बा ३५ (व्योमकेश)शिव '५७(व्याल) साँप, शेठ, १६. १ (व्योमन् ) आकाश हिंसकजन्तु ४९ (व्योमयान) विमान ५३ : ११ (व्यालग्राहिन ) साँप २२९ १११ (व्योप) मिली हुई सों- F-पकड़नेवाला ठि मिर्च पीपरि २६४, ६२ व्यावृत्त) वरण किया १२३ ४० (ज) समूह, गोंट 'जहां पर गौरहें,गली १६६ ४०.(व्यास)विस्तार,व्यास | १६८ ३८ (व्रज्या) घूमना, यात्रा 2. मनि १३८ ५४ (व्रण) घाव :३५१ (व्योहार ) बोलना १६६ ४१ (व्रत) नियम,उपवा- ३१२.३.११८ (व्युत्थान) तिरस्कार, ...: निरोध, विरुद्ध कार्य ७न ९ (व्रतति ) विस्तार, करना बाँड़ी, चवर' ६६२ .३८ (व्युष्टि) फल, सम्पदा, १६१ ६ (तिन ) यजमान विन्यस्त, संहत, पृथुल ७९ १२ (बध्न) वृक्षकी जड़ २६३ : ४४ (ब्यूड)कुछ जगह छोड़ २३७ ', 'कर औरमिलकर खड़ी १२४ १० (जात) समूह हुई सेनाकी स्थिति. १७३ ५७ (ब्रात्य) संस्कारहीन, ६५ (व्यूढ़कंकट) कवचा जिस ब्राह्मणका: १६ -: ... दि पहिरे अथवा म- वर्ष के ऊपर भी यज्ञो- 5। त्रादिरक्षित ..., पीत न हुआहो २३६.. ४.२८ (व्यति) कपड़ाआदि २७३ ५१ (ब्राह्मय)हाथ के अंगूठे का बीनना कीजर अर्थात् ब्रह्मतीर्थ १२३.४० (व्यूह) समूह, फौज १७:२३.(ब्रीडा) लज्जा का किला बांधना : १५(ब्रीहि.) साँठी आदि १९३ ७९(व्यूहपाणि) किला धान्य, धान्य बींधकर खड़ीहुई सेना २०८:२० (ब्रीहिमेद्र)साँवा,चीना का.पिछला भाग: २०४ ६ (हयात्रीहिके योग्य ३३ (वेश्चन ) रेती २०७ २०२१ अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ श्लोक श्लोक क्षेत्र, धानका खेत २५० ३६ (शकन) प्रियवचन (श) बोलनेवाला १८७ ५२ (शकट ) गाड़ी ४३ (शक) इन्द्र, कुरैया २० १६ (शकल)खण्ड, हिस्सा १८ १० (शक्रधनु) इन्द्रका ५८ १७ (शकुलिन्) मछली धनुष १२२ ३३ (शकुन)पक्षी,चिड़िया ८८ ५३ (शक्रपादप) देवदारु १२२ ३३ (शकुनि) पक्षी, चि. १०६ १३६ (शक्रपुप्पी) इन्द्रपुष्पी ड़िया २५० ३६ (शक्ल) मीठावचन १२२ ३३ (शकुन्त)पक्षी, चिड़ि- बोलनेवाला या, भासपक्षीविशेष ३१ (शंकर) शिव ३३ (शकुन्ति) पची,चि- ५९ २० (शंक) ह्ठ,छूरीआदि डिया काफल, मछलीविशेष १९ (शकुल) सौरी मछली १६ ७२ (शङ्क) निधिविशेष, ११२ १५९ (शकुलाक्षक) उजली शंख, ककुंदनि, ल- दूब लाटका हाड़ ८६ (शकुलादनी) कुटकी, ५९ २३ (शङ्खनख) छोटाशंख जलपीपरि १०४ १२६ (शचिनी)शंखकोडी ५८ १७(शकुलार्भक) मछली १० ४६ (शची) इन्द्राणी का बच्चा ४४ (शचीपति) इन्द्र १४२ ६७ (शकृत् ) गृह, मैला १११ १५४ (शटी) कचूर २१८ ६२ (शकृत्कार) बछड़ा २५३ ४६ (शठ) दुर्जन, दुष्ट १९९ १०२ (शक्ति)प्रभाव,उत्साह, १०६ १४९ (शणपर्णी) पटशन उत्तम सलाह,पराक्रम, १०० १०७ (शणपुष्पिका)सनई, वी,सांग सन ४१ (शक्तिधर) स्वामिका- ५८ १६ (शणसूत्र) सुतरी र्तिक २१८ ६२ (शण्ड) साँड़ १६७ ६९ (शक्तिहेतिक) शक्ति- २२३ ८४ (शत) सौ हथियार धारण करने ११ ४८ (शतकोटि) वज वाला ६३ (शतह) शतद्रुनदी है अमरकोशादर्श। २०३ पृष्ठ २७० श्लोक श्लोक ६३ ४० (शतपत्र) कमल ७ (शब्द)ध्वनि,आवाज, ११८ १७ (शतपत्रक) भुजकैल अर्थकावाचक पक्षी, भुजैटा ६४ (शब्दग्रह) कान १४ (शतपदी) खनखजूर २५१ ३८ (शब्दन) शब्दकरने ११२ १६१ (शतपर्वन् ) बॉस वाला EE १०२ (शतपर्विका वच, दूध २७० ३ (शम)शान्ति १५२ (शतपुष्पा) सौंफ ३ (शमथ) शान्ति ६३ ७६ (शतप्रास) कनइल १३ ५६ (शमन) यज्ञपशुका ४३ (शतमन्यु) इन्द्र मारना, यमराज ३६४ ३४ (शतमान) तौलविशेप ६१ ३२ (शमस्वमू) यमुनानदी ९८ १०० (शतमूली) शतावरि १४२ ६७ (शमल) गृह ११२ १५९ (शतवीर्या) उजलीदूव २६६ ६७ (शमित) शान्त, मि- १०८ १४१ (शतवेधिन)अमलवेत टाहुआ ९(शतहदा) बिजुली ८८ ५२ (शमी) शमीक्ष, श- १८७ ५१ (शतांग)लड़ाई में च- यनि, छीमी दनेवाला रथ २०६ २४ (शमीधान्य) छीमी- ९८ १०१ (शतावरी) शतावरि वाला धान्य जिस में १७७ ९(शत्रु) अपनी राज्य छीमी लगतीहो वह के डॉडेपरका राजा, धान्य शत्रु, दुश्मन ८८ ५२ (शमीर) छोटीशमी २२. २६ (शनैश्चर) शनैश्चर १२ ६ (शम्पा) बिजुली ३५० १७ (शनैस् ) धीरेधीरे ८१ २३ (शम्पाक)अमलतास ९ (शपथ) कसम,सोगन्ध ११ ४८ (शम्ब) इन्द्रकावज है (शपन)कसम,सौगन्ध ५५ ४ (शम्बर) पानी,हरिण- १८६ ४९ (शफ) खुर, टाप विशेष १८(शफरी) सहरीमछली ६ २६ (शम्बरारि) कामदेव ३५ १७ (शवल)चितकवलारंग ६५ ८७ (शम्बरी) मूसाकर्णी २१६ ६७ (शवली) चितकब- ३६४ ३४ (शम्मल) सॉवलारंग, ली गो गाली, खच्चर २०४ अमरकोशादर्श। पृष्ठ ५६ ६७ . रलोक श्लोक २०५ ६ (शम्वाकृत) दोबार कामारनेवाला,हत्यार जोताहुआ ३२ (शराब) सेरवा, परई. २३ (शम्बूक) घोंघा ३४ (शरावती) नदीविशेष १६. (शम्भली) कुटनी स्त्री १९४ ८३ (शरासन) धतुप ३१ (शम्भु) शिव, ब्रह्मा ९४२ ७० (शरीर) देह २०६ १४ (शम्या) सइला ३० (शरीरिन् ) प्राणी १४५ ८१ (शय) हाथ २१३ ४३ (शर्करा) मिश्री, पक्की ३६ (शयन) सोना, नींद, खाड़, सिटकी, चालू বিনা। वाली भूमि, पत्थर १५६ १३८ (शयनीय) विछौना १२ (शर्करावत् बालूवाली ३३ (शयालु) सोनेवाला भूमि ३३ (शयित) सोनेवाला १२ (शर्करिल) बालूवाली ५(शय) अजगरसॉप भूमि १५९ १३८ (शय्या)बिछौना २५ (शर्मन् हर्प, आनन्द ११२ १६. (शर)शरपत, वाण, ३१ (शर्व) शिव तीर २५ ३ (शर्वरी) रात ४० (शरजन्मन् ) स्वामि- ३८ (शर्वाणी) पार्वती कार्तिक ८(शल) साहीकाकॉटा २६५ ५२ (शरण)घर,रक्षा करने १२१ २९ (शलम) पतह, फर वाला निगा १९ (शरद) कार, कार्तिक, ११६ ८ (शलल) साहीका कॉदा. ११७ ३२(शरभ) हरिणविशेष, ११६ ८ (शलली) साहीका १९५ ८६ (शरव्य) निशाना कॉदा १९५ ८६ (शराभ्यास)वाणविद्या ८० १५ (शलाइ) कचा, सीखना दाफल २६ (शरारि )आडीपक्षी, २८६ १३ (शल्कोखपड,टुकड़ा, चकजाति वकला २८ (शरासोबहुत प्राणियों ८८ १३ (शल्य) मयनफर, २९ ९ द , । चर्प, साल - .

अमरकोशादर्श। २०५ पृष्ठ ७४ - श्लोक श्लोक 'साही पशुविशेष, छूरी विकाकर आदिका फर, कील ९२ (शस्त्री) छूरी २०२ ११८ (शव) लहास, मुर्दा ८० १५ (शस्य) वृक्षादिकों के २० (शवर) म्लेच्छजाति विशेष,जगलीआदमी २०८ २१ (शस्यमञ्जरी) बाली २० (शवरालय) म्लेच्छ २०८ २१ (शस्यशूक)प्तींकुर,ट्रेंड , जातिवाले भिल्लोंका ८६ ४४ (शस्यसम्बर)सॉग्बू स्थान १०६ १३६ (शाक) साग, तारी ११२ (शश) शशा, चौगड़ा २१८ ६४ (शाकट) गाड़ी लेच- १५ (शशधर) चन्द्रमा लनेवाला वैलआदि २२८ १०७(शशलोमन) चौगड़े २०५ ८(शाकशाकट)शाक, - के रोवॉ, इसीकाबना तकारीका खेत .31 कम्बल २०५ ८ (शाकशाकिन)शाक, १५ (शशादन) वाजपक्षी तारीका खेत R२८ १०७ (शशोर्ण) चौगड़े के २३३. १४ (शाकुनिक)चिड़ीमार रोवा, इसीकावना क- | १९१ ६(शाक्तीक)शक्रि हथि- स्बल यार धारणकरनेवाला ३४३ २४६ (शश्वत्) लगातार, ३ १४ (शाक्यमुनि) जैनमती घारंवार, साथ ३ १५ (शाक्यसिंह) जैनमती १६७ (शप्प) नयाखर ११ (शाखा)डार, शाखा २६ (शस्त) कुशल,स्तुति ७१ २ (शाखानगर) नगरके ( कियागया समीप छोटागॉव ८२ (शस्त्र) हथियार लोहा ११५ ४ (शाखामृग) बन्दर २२६ ' ९८ (शस्त्रक) लोहा ५(शाखिन् ) पेड़, वृक्ष ७ (शस्त्रमार्ज) तलवार २३२ ८(शांखिक) चरिहार पर वाद रखनेवाला, ३६४ ३३ (शाटक) पहिरनेकी शिकिलीगर १६. ६७ (शस्त्राजीव) जो केवल ३६६ ३८(शाटी) पहिरने की हथियार बॉधकर जी- “सारी १९४ सारी " f २०६ अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ श्लोक . श्लोक ३० (शाठ्य) शठकास्व- पाँसासारी भाव, कपट, दगाबाजी १०१ ११२ (शारिखा)कालाशाम्ब २३७ ३२ (शाण)कसौटी, शान, ६७ ११ (शार्कर) बालू या सि- वादि टकीवाली भूमि ९ (शाणी) सनकावस्त्र, ४। १९ (शाहिन्) विष्णु शान, वादि २ (शार्दूल) वाघ, श्रेष्ठ ८३ ३२ (शाण्डिल्य) वेल ३२६ १८७ (शावर) वड़ा अँधेरा, २६ २५ (शात)हर्प,खुशी,तेज, प्राणियोंकामारनेवाला पैन किया ५६ १६ (शाल) सौरी मछली, २२६ ९४ (शातकुम्भ) सोना, वृक्ष- सुवर्ण ६ (शाला) सभा, कच- १७७ ११ (शात्रव) शत्रु, दुश्मन हरी,बड़ीभारी शाखा ९(शाद) बोदा, कीचड़, २८४ १२ (शालाक) बन्दर, नयाखर सियार, कुत्ता "६७ ११ (शादहरित) नये खर २०९ २४ (शालि) सबधान से हरा प्रदेश २४८ २६ (शीलीन)सलज्ज ११ (शादल) नये खरसे ६३ ३८ (शालूक)कमलकीजर हरा प्रदेश ६० २४ (शालूर) मेढ़क : ९७ (शान्त) मिटा, स्व ९९ १०५ (शालेय) सौंफ, धान भावको जीतनेवाला ३ (शान्ति) स्वभाव को ४६ (शाल्मलि) सेमर. जीतना ४७ (शाल्मलीवेष्ट) सेमर २३२ ११ (शाम्बरी) इन्द्रजाल का गोंद ३२४ १६५ (शार)वायु,हवा,चित- १२३ ३९ (शावक) घच्चा ८४ ३३ (शावर) लोध '८१ , २३ (शारद)छतवनि,नया, २५९ ७२ (शाश्वत)नित्य, हमे- व्यरभुत शह रहने वाला १११ (शारदी) जलपीपरि २८० ४० (शाप्कुलिक) पूरियों १६ (शारिफल) चौपड़,। १ ६७ २६६ का खेत ২৩০ ८७ कचरा रंग २४० का समूह अमरकोशादर्श । २०७ पृष्ठ पृष्ठ मेचक, श्याम ३६ की जड़ की जड़ श्लोक इलोक १८० २५ (शासन) हुकुम,आज्ञा शब्द ३ १४ (शास्त) जैनमती ८५ (शिञ्जिनी) धनुप की ३२७ १७९ (शास्त्र)आज्ञाविशेष, रस्ती, रोदा ग्रन्थ २०७ १५ (शितशरक) यव, जव २४३ ६ (शास्त्रविद) शास्त्र का ३०३ ८२ (शिति)काला,उजला, जाननेवाला १२ (शिशपा) सीसमवृक्ष ३३ (शितिकण्ठ) शिव २३७ ३० (शिक्य) शिकहर ८५ ३८ (शितिशारक) तेंदुआ २६३ ८६ (शिक्यित) शिकहरमें २९१ ३४ (शिपिविष्ट) चदुला, धरी हुई चीज दुष्टचर्म, महादेव ४ (शिक्षा) वेदांग-शास्त्र ७९ ११ (शिफा) परोहा पेड़ २४२ ४ (शिक्षित)चतुर,निपुण १२२ ३२ (शिखण्ड) मोरके पंख ६४ ४३ (शिफाकन्द) कमल ९६ (शिखण्डक) जुलुफ ४ (शिखर) पहाड़ का श्रृं. २०९ २०३ (शिम्बा) छीमी ग,वृक्षकीचोटी,टहिनी १८२ ३३ (शिविर) सेनाका नि- ७४ १ (शिखरिन) वृक्ष,पर्वत वास,पड़ाव ५८ (शिखा)आगिकीज्वा-१४८ ९५ (शिरस् ) शिर, वृक्ष ला, चोटी, किरण की चोटी १२ ५६ (शिखावत्) आगि १९० ६४ (शिरस्त्र) टोप ३१ (शिखावल) मोर ६८ (शिरस्य) सफावाल २२७ १०१ (शिखिग्रीव) तूतिया १४१ ६५ (शिरा) नाड़ी १२१ ३१ (शिखिन्) मोर, आगि ७९ १२ (शिरोऽय) टेरा,टहिनी ४१ (शिखिवाहन)स्वामि- ७१ ९ (शिरोगृहः)ॲटारी, कार्तिक कोठा '८३ ३१ (शिJ) सॅहिंजन,साग १० ६३ (शिरीप) सिरसा वृक्ष २२९ ११० (शिग्रज) सहिजन के १४६ ८८ (शिरोधि)गला, गटई बीज | १५० १०२ (शिरोरत्र) चोटी में ४१ २४ (शिन्जित) भूपण का बांधने की मणि ६ २०८ अमरकोशादर्श। २०३ , ड्रा रह जाताहै + चाण, - क पृष्ठ श्लोक श्लोक १४८ ९५ (शिरोरुह) बार,वाल १३५ ४० (शिशल )लड़कपना २ (शिल) सीला, खेन ५९ २०(शिशमार) शिरस काटनेपर जो अन्न प- नामको जलजन्तु १४३ ७६ (शिश्न)लिंग ४ (शिला)चौकठि,पत्थर २५३ ४६ (शिश्विदान) पुण्या- २२८ १०४ (शिलाजतु ) शिला- त्मा जीत, गेरू १८० २६ (शिष्टि)आज्ञा, हुकुम २४ (शिली) छोटी केंचुई १६२ १३ (शिप्य) शिष्य, वि. २८६ १८ (शिलीमुख ) भौरा, द्यार्थी। तीर ११ (शीकर) जलके कणा १(शिलोचय) पर्वत फहारा ०३८ ३५ (शिल्प) कारीगरी ६५ (शीघ्र)जल्दी २३२ ५ (शिल्पिन् ) चढ़ई. २० १९ (शीत) ठण्ड, वेत, कोरी, नाउ, धोवी,च- लसोहर । मार, कारीगर, थवई २३४ १९ (शीतक)सुस्त,आलसी ७ (शिल्पिशाला) कारी- ९१ ७० (शीतभीरु) वेला गरोंका स्थान, कार १६ (शीतल)ठण्ड,पटशन खाना ९९ १०५ (शीतशिव) शिला- ३१ (शिव) महादेव, शुभ जीत, बनसोंफ,सैन्धन ७३ (शिवक) खूटा नमक ९४ ८१ (शिवमल्ली) गृमा ३६४ ३४ (शीथ) दारू, मद्य ३८ (शिवा) पार्वती,शमी-१४८ ६५ (शीर्प)शिर शयनि, हरं, भूमि- १८९ ६३ (शीर्पकोटोप वरी,सियारी २५३ ४५ (शीर्पच्छेद्य)शिर का. १०७ ५३ (शिविका) पालकी टनेके योग्य १९ ( शिशिर ) शिशिर १४८ ६८ (शीर्पण्य) साफबाल, ऋतु, ठण्ड - टोप १२३ ३६ (शिशु) बच्चा २६ (शील)यश,स्वभाव, १८ (शिशुकोसुइसि, छूछ। अच्छाचालचलन । ७ २२० . १७ अमरकोशादर्शी २०६ पृष्ठ पृष्ठ श्लोक श्लोक १०६ १३२ (शुक)कुकुरौंधा,सुआ २५४ ५० (शुभान्वित) शुभयुक्त ५७ (शुकनास) सरिवन ३४ १२ (शुन) उजला, अति- ८२ (शक्त)खट्टा,निष्ठुर चमक वाला, उद्दीप्त • ५६ २३ (शुक्ति) सीपी, ककू- १७ ५ (शुभ्रदन्ती) पुष्पदन्त दनि नामक दिग्गजकी स्त्री १३ ५७ (शुक्र) आगि, काम, १४ (शुभ्रांशु), चन्द्रमा ज्येठमास,शक्राचार्य १८१ २७ (शुल्क)मासूल, स्त्री ३ १२ (शुक्रशिष्य ) असुर, को देने का धन दैत्य ૨૨૬ ९७ (शुल्व) तांबा, रस्सी १२ (शुक्ल)उजलारंग, उ-१६८ ३७ (शुश्रूपा) सेवा जियाला, १५ दिन २ (शुपि) विल, छेद २५ (शुच्) शोक, शोच, ५१ १ (शुपिर) वॉसुड़ी,विल, अफसोस छेद, विलयुक्त १३ ५७ (शुचि)आगि,आपाढ़ | १०५ १२६ (शुपिरा) पवारी मास,मन्त्री,शुद्धचित्त, १४१ ६३ (शुष्कमांस)सूखामांस पवित्र, स्नान आदि| १९८ १०१ (शुप्म) सामर्थ्य करना, उजलारंग, शृं- १२ ५५ (शुष्मन् ) आगि गाररस २०९ २६ (शूक)सींकर,ट्रेट ३८ (शुण्ठी) सोंठि १५ (शककीट)ऊनआदि २३९ ४१ (शुण्डापान)दारू पीने का खानेवाला कीड़ा, कास्थान दाड़ा ६२ ·३३ (शुदि)सतलज नदी २०९ २४ (शूकधान्य) यवादि १२ (शुद्धान्त) रनिवास, धान्य, जिसमें सींकुर राजधानी होताहो २३५ २२ (शुनक) कुत्ता ३ (शृकर) सूअर, गांव २३५ २२ (शुनी) कुतिया का सूअर २५४ ५०(शुभंयु)शुभयुक्त ८७ (शकशिम्बि) क्यवॉच २५ (शुभ) कल्याण, ख. २३० १ (शूद्र)शूद्र १३८ १३ (शूद्रा) शूद्रजातिवा; . ७२ मीवा वकड़ा २१० अमरकाशादश। पृष्ठ पृष्ठ रूपे का गहना नेकीमाला का फूल नाहुआ मांस श्लोक श्लोक ली स्त्री २१९ ६६ (श्रृंगिणी) गौ १२८ १३ (शूद्री) शूद्रकी स्त्री २५ (शृंगी)सींगी मछली ५६ (शून्य) खाली अतीस, काकड़ासिंगी १६१ ७ (शून्यवार्दन) नास्तिक २२६ ६६ (शृंगीकनक) सोने १६३ ७७ (शूर)बहादुर १११ १५७ (शूरण) जिमीकन्द, २६५. ९५ (शृत) पके हुये दूध घी सूरन का नाम २०६ २६ (शूर्प) सूप | १५८ १३७ (शेखर)चोटीमें पहिर- ३३२ १९६ (शूल) शूलरोग,त्रि- शूल १४३ . ७६ (शेफस).लिंग २१४ ४५ (शूलाकृत) लोहे की ९२ ७० (शेफालिका)न्यवारी सराई में छेदकर भु. १ (शेमुपी) वुद्धि ७. ३१ (शूलिन्) शिव ३४ (शेलु) लतोहरा २१४ ४५ (शूल्य) लोहेकी स- १६ ७२ (शेवधि) गाड़ाहुआ राईपर भुनाहुआ मांस खजाना ११५ ६ (शृगाल) सियार ६३ ३८ (शेवालं) सेवार १५१ १०६ (श्रृंखल) पुरुष की कर. ५१ ४ (शेप)शेषनाग,अनन्त वाकी, कहे से अन्य .१८४ ४१ (श्रृंखला) हाथी की १६२ १३ (शैव)नयाविद्यार्थी जंजीर ८८ (शैखरिक) लहचिचरा २२१ ७५ (शृंखलक) लकड़ी में| ७४ १ (शैल) पर्वत पैर से बाँधेहुये छोटे | २३३ १२ (शैलालिन) नट चचे २२ (शैलूप)चेल, नट ४ (शृंग) पहाड़ का शि-१०३ १२३ (शैलेय) शिलाजीत खर,जीवक, प्रभुता ३८ (शैवल) सेवार २१२ ३७ (शृंगवेर) अदरख ३० (शैवलिनी) नदी १८ (शृंगाटक) चौराहा १३५ ४०(शैशव) लड़कपन १७(शृंगार) रस विशेष, २५ (शोक) शोच धनी ૦૨ ४७ अमरकोशादर्श पृष्ठ ए १ पृष्ठ श्लोक श्लोक ५५ (शोचिप्केश) आगि नेवाला २४ ३४ (शोचिस) तेज,झलक (श्च्योत) टपकना : ३४ १५ (शोण) शोणभद्रनद, २०२ ११८ (श्मशीन) मशान लाल कमल की छवि. १४६ ६६ (श्मथ) मोछ, दाड़ी चाला १४ (श्याम) हरा, काला ८९, ५७ (शोणक) सरिवन | ३४ १४ (श्यामल) काला २२५,. ६२ (शोपरत्न) पद्मराग ५५ (श्यामा) काकुनि, मणि कालीत्रिधारा, काला '१४१ , ६४ (शोणित) रक खून शाम्ब, रात, शतावरी १३८ ५२ (शोथ) सूजनि ११३ १६५ (श्यामाक) भदईसा- १०९ १४९ (शोथनी) गदहपुन्ना वॉ,तृणधान्य ७४ १८ (शोधनी)बढ़नी, झाडू १३२ ३२ (श्याल) स्त्रीकाभाई २१४ ४६ (शोधित) साफ,पी- साला ना, धोया, शोधा १६ (श्याव) वन्दरकासा १३८ ५२ (शोफ) सूजन रंग २५५ ५२ (शोभन) सुन्दर ३४ १२ (श्येत) उजलारंग १७ (शोभा) शोभा १८(श्येन)वाजपक्षी १३७ ५१(शोप)क्षयीरोग ३५३ ६ (स्यैनम्पाता) शिकार १२४ ४४ (शौक)सुओंकासमूह विशेष ५३ १० (शौक्लिकेय) विपवि. ३०८ १०२ (श्रद्धा)आदर,वाञ्छा शेप ३१ (श्रद्धालु) श्रद्धावान् २४७ २३ (शौण्ड) मतवाला गर्भरहनेपर जो उत्तम ૨૨૨ १० (शौण्डिक) कलवार वस्तुकी इच्छा करती ९७ (शोण्डी) घड़ीपीपरि है वह स्त्री ३ १५ (शौद्धोदनि)जैनमती २७३ १२(श्रयण)सेवा,खिदमत २१ (शोरि) विष्णु १४८ ९४(श्रवण) कान १९९ १०१ (शोर्य) बल १४८ ९४ (श्रवस्) कान २३२ (शोल्विक) ठठेर २१ २२ (विप्ठा)चनिष्ठानचन २४६ १६ (शोकल)मांसखा-२०५ ५०(श्राणा) लप्सी,गी. - ४ २१२ अमरकोशादर्शी पृष्ठ पृष्ठ । २८ ७ श्लोक श्लोक लाभात ३०१ ७६ (श्रुत)शास्त्र,सुनाहुआ १६७ ३३ (श्राद्ध) शास्त्रले पि- ३५ ३(श्रुति) वेद, कान, तरों के निमित्त जो सुनना कर्मकियाजाय (श्रेणि)एकजातिवाले ६० (श्राद्धदेव) यमराज कारीगरोंका समूह २७३ १२ (श्रायोसेवा, खिदमत ७७ ४(श्रेणी) पॉति २८ १६ (श्रावण) श्रावणमास ३२ ६(श्रेयस्) पुण्य,मोक्ष, १६ (श्रावणिक) श्रावण वहुत सुन्दर मास ८६ ५९ (प्रेयसी) हर्र, पाढ़ा, २७ (थी)लक्ष्मी,सम्पति पादरि, गजपीपरि ३३ (श्रीकण्ठ) शिव २५६ ५८ (श्रेष्ठ) बहुत सुन्दर, ३ १४ (श्रीघन) जनमती प्रधान पुरुष ७० (श्रीद) कुवेर १३७ ४८ (श्रोण) पॅगुला २१ (श्रीपति) विष्णु १४३ ७४ (श्रोणि) स्त्रियों की ६६ (श्रीपर्ण) कमल,अ- कमर रणी नाम औपध वि- १४३ ७४ (श्रोणिफलक) स्त्रियों शेप ४०(श्रीपर्णिका) कायफर १४८ ९४ (श्रोत्र) कान ३६ (श्रीपर्णी)गम्भारीवृक्ष १६० ६ (श्रोत्रिय) सम्पूर्ण वेद ३२ (श्रीफल) वेल पढ़नेवाला ६५ (श्रीफली) नील ३४८ ८ (श्रीपट) देवताओंकी ४०(श्रीमत) तिलकवृक्षा हव्य देनेका उपयोगी लक्ष्मीवान् स्वाहा २४५ १४ (श्रील) लक्ष्मीवान् |२५७ ६१ (श्लषण)पतला,मिहीं २२ (श्रीवत्सलांचन) विष्णु ४० २१ (श्लिष्ट) मिलाहुआ १५६ १३० (श्रीवास) देवदारुधूप १३६ ५६ (श्लीपद) हाड़ारोग, १५६ १३० (श्रीवेष्ट) देवदारुधूप पीलपाया १५५ १२६ (श्रीसंज्ञ) लवंग AIRS (श्लप) मिलाप, जो- इना की कमर अमरकोशादर्श। २१३ पृष्ठ युक्त रात ९२ श्लोक श्लोक १४० ६० (श्लेष्मण) कफवाला मयनफर ६२ (श्लेष्मन्) कफ ८ (श्वाविध ) साही १४० ६० (श्लेष्मल) कफवाला | १३८ ५४ (श्वित्र) उजला कोढ़, ८४ ३४ (श्लेष्मातकोलसोहरा छंजन २८२ २(श्लोक) यश,श्लोक ३४ १२ ( श्वेत) उजला रंग, पद्य चाँदी, रूपा,द्वीप वि- - २६ २५ (श्वःश्रेयस) कल्याण शेप मंगल १२० २४ (श्वेतगहन्) हंस ९८ ९८ (श्वदंष्ट्रा) गोखुरू २२९ ११० (श्वेतमरिच) सहिजन २३५ २२ (श्वन्) कुत्ता के वीज ३६७ ४० ( श्वनिश) कुत्तों से ३४ १५ (श्वेतरत) गुलावीरंग ७१ (श्वेतसुरसा) उजले २३४ २० (श्वपच) चाण्डाल फूलकी न्यवारी २ (श्वभ्र) भूमिकाविल, पाताल गड़हा १६० ४ (पदकर्मन्) यज्ञकरना -१३८ ५२ (श्वयथु) सूजनि कराना आदि छःकर्म २०३ २ (श्ववृत्ति)सेवा,नौकरी करनेवाला ब्राह्मण ३१ ( श्वशुर) पति और १२१ ३० (पट्पद) भवरा स्त्री का चाप ३ १४ (पडभिज) जेनमती १३४ ३७ ( श्वशुरौ) शासु ४०(पडानन)स्वामिका- तिक ३१९ १४५ (श्वशुर्य) देवर,साला ८७ ४८ (पड्यन्य)कंजा विशेष १३२ ३१ (श्वशू) पति और स्त्री ६६ १०२ (पान्या) वच १११ १५४ (पग्रन्थिका) कचर १३४ ३७ (श्वश्वशुरौ) शासु | ४१ १(पइज)स्वर विशेप, मोरकी आवाज २२ (श्वस्) आगामि-१३४ ३९ (पण्ड) कमलों का प्रातःकाल समूह, सॉड, नपुंसक १४ ६२ (श्वसन) वायु, दवा १३४ ३९ (पराह) नपुंसक हि- और शसुर की माता और शसुर ३५१ २१४ अमरकोशादर्श पृष्ठ जड़ा, खोजा से घिराहुआ. प्लोक श्लोक २७८ ३०(संवीक्षण) ट्रॅदना: २०४ ७ (पष्ठिक्य) साँठी का २६४ . ९० (संवीत) नदी आदि खेत . ४१ (पाएमातुर) स्वामि- - ४९ ३४ (संवेग) खुशी आदि कार्तिक से कार्य में जल्दी: २७१ ६ (संवेद) दुःखपरने पर २०० १०६ (संयत्) युद्ध लड़ाई हुआ ज्ञान २५३ ४२ (संयत) वाँधाहुआ ५० ५० ३६ (संवेश)सोना,अनुभव २७५ .. १८ (संयम)संयम इन्द्रिय १५३ ११८ (संव्यान): अंगोछा निग्रह या डुपट्टा २७५ . १८ (संयाम) संयम - १९८ १८ (संशप्तक) प्रतिज्ञा १६९ १०५ (संयुग) युद्ध लड़ाई करके संग्राम से नहीं २६४ . ९२ (संयोजित) मिलाया लौटने वाला हुआ ३ (संशय) संदेह :४० २३ (संराब) शब्द,आवाज़ २४३ ५(संशयापन्न मानस) ३६.१६ (संलाप) परस्पर संदेह युक्त, शकी, जि- घतकही स पदार्थ के देखने से २८ २० (संवत्सर) साल, वर्ष संशयहो. ३५० १६ (संवत् ) साल, वर्ष ५(संश्रव) अंगीकार ४ (संवनन) वशकरना २६८ १०६ (संश्रुत) अंगीकार २९ २२ (संवर्त) प्रलय किया ६४. . ४३ (संवर्तिका) कमल के २७८ ३० (संश्लेप) आलिंगन, लपटाना १६ (संवसथ) गाँव २५८ ६८ (संसक्त) संयुक्त, मिला २७६ २२ (संवाहन) पैरदावना हुआ ३१ १(संवित्) बुद्धि,अंगी- १६३ १७ (संसद्) सभा 'कार, ज्ञान वतलाना १६ (संसरण) राजमार्ग कार्य - कराना युद्ध सड़क,प्राणियोंकी उ- त्पत्ति,अवकाशसहित ३२ '२७० नये पत्ता ।

अमरकोशादर्श। २१५ पृष्ठ पृष्ठ ८ ८८ हुआ पदार्थ यनि वृक्ष श्लोक श्लोक सेनाका चलना वाला ३७ (संसिद्धि)स्वभाव ८५ (संहतल) दुहस्ताचट- १५७ १३५ (संस्कार) मन्त्रादि से कना किया यज्ञोपवीतादि १२४ ४१ (संहति)समूह अथवा चन्दन माला- १४२ ७० (संहनन) देह दिधारण ५३ २ (संहार) नरकविशेष ३०२ ८० (संस्कृत) शास्त्र में कहे ३७ (संहूति) बहुत लोगों हुये लक्षणसे युक्त का पुकारना ३२३ १६१ (संस्तर) कुशकी मुट्ठी, २५८ ६५ (सकल) सब, बिल्कुल प्रस्तर, कुशकी शय्या, ३४३ २४१ (सकत्) साथ,एकवार यज्ञ, अथवा बनाया| ११६ २१ (सकृत्प्रज) कौआ ५२ (सनुफला)शमी,श- २७६ २३ (सस्तव) परिचय, मु- लाकात १४३ ७३ (सक्थि) निरोह २७६ ३४ (संस्ताव) यज्ञ में बा. १७७ १२ (सखि) मित्र ह्मणों की स्तुति का | १२८ १२ (सखी) सखी, सहेली स्थान १७७ १२ (सख्य)मित्रता,मिताई ३२० १५१ (सस्त्याय) समूह, अ-|१३३ ३४ (सगर्म्य) सगा भाई च्छा स्थान, अंगों का १३३ ३४ (सगोत्र) गोतिआ, सन्निवेश २६ (संस्था)मर्यादा,आ-1२१६ ५५ (सग्धि)साथ भोजन धार, स्थिति, मरण करना ३१३ १२४ (संस्थान) चौराहा, अं- २६२ ८५ (सकट) संकठ, चुस्त गोंका स्थितसन्निवेश सकिस्त २०२ ११७ (संस्थित) मराहुआ ७४ १८ (सङ्कर) कूड़ा, करकट १११ १५४ (संस्पर्शा) चकवत ५ २४ (सङ्कर्षण) पलदेव १९९ १०५ (संस्फोट) युद्ध, लड़ाई २६४ ६३ (सकलित )जोड़ेहुये दुहस्ता चटकना २ (सङ्कल्प) मानसकर्म ८५ (संहत) मिलापी,मेल:/२५३ १२ (सकमुक) चश्चल . एक गोत्रवाले १४६ अमरकोशादर्श पृष्ठ किया हुआ. मूह श्लोक श्लोक २३८ ३८ (सङ्काश) सहश,बरा- २६८ १०९ (संगीर्ण ) अंगीकार चर २३० १ (सङ्कीर्ण)अम्बष्ठकरण २६४ ९३ (मंगूढ़)जोड़ेहुये से चाण्डाल पर्यन्त ३६ ६ (संग्रह)इकट्ठा करना वर्ण संकर, अशुद्ध, २०० १०५ (संग्राम) युद्ध, लड़ाई व्याप्त, भराहुआ १९६ ९०(संग्राह) ढाल पकड़ने ३६ १६ (संकुल) असम्भवअ. की कड़ी,मूठी बांधना थवा पूर्वापर विरुद्ध | १२४ ४२ (संघ) जन्तुओंकास- वात, व्याप्त,भरहुआ १५५ १२५ (सङ्कोच) केसर १२४ ४० (संघात) समूह झुण्ड १० ४५ (संक्रदन) इन्द्र ३३४ २०५ (सचिव) मंत्री, सहाय २५ (संक्रम) कोट में प्रवेश ११ (सजम्वाल) कीचड़ करना,याउसकीगली युक्र २७५ २१ (संक्षेपता) संक्षेप १६० ६५ (सज्ज) मंत्रादि रक्षि- १६६ १०४ (संख्य) युद्ध,लड़ाई त युद्धको तयार ३१ २ (संख्या) विचार, गि- १८१ ३३ (सज्जन) फौजरखाने नती ६४ (संरयात) गिनाहुआ साधु, अच्छा मनुष्य ५ (संख्यावत्) पण्डितं १८४ ४२ (सज्जना) सवारी के २२३ ८३ (संख्येयोगिननेकेयोग्य लिये हाथीको तय्यार २९ (संग) मेल, साथ करना ३९ १८ (संगत) योग्य, वचन | १२४ ४० (संचय) समूह, इकट्ठा १३६ ४८ (संगतजानुक) जिस- करना की मिलीहुई फीलीहो १२९ १७ (संचारिका) दूती वह पुरुष ७१ ६ (संजवन)चौक २७८ २९ (संगम) मेल,मुसीवत २०१ ११३ (संज्ञपन) मारना संयोग २९० ३३ (संज्ञा)बुद्धि, नाम हाथ ३२४ १६६ (संगर) अंगीकार,युद्ध आदिसे वस्तु वताना इशारा करना गायत्री के लिये पहरा,गस्त, 4 ज्ञान, आपत्ति अमरकोशादर्श। २१७ पृष्ठ पृष्ठ . १३ स्थ, मोदी ७० श्लोक श्लोक सूर्य की स्त्री ३२७ १८० (सत्र) वस्त्र, यज्ञ, स- १३६ ४७ (संजु) जिसकी मिली दादान, वन हुई फीलीहो वहपुरुष ३४७ ४ (सत्रा) साथ ५८ (संज्वर) सन्ताप १५ (सत्रिन) सदा अन्न १४८ ६७ (सटा) जटा दान करनेवाला गृह- १२३ ३८ (संडीन) अच्छी तरह उड़ना ४० (सत्यवतीसुत)व्यास- १६० ५ (सत्) पण्डित, सत्य, मुनि साधु,विद्यमान,अच्छा, ३० २६ (सत्व)सत्त्वगुण द्रव्य, पूजित प्राण, निश्चय, जन्तु १४ ६६ (सतत)नित्य,लगातार १४ ६६ (सत्वर) शीघ्र १२६ ६ (सती) पतिव्रता ५ (सदन) घर २०७ १६ (सतीनक) मटर १६३ १७ (सदस्) सभा १४ (सतीर्थ्य) एकगुरू के १६३ १८ (सदस्य) यज्ञमें न्यूना- पास पढ़नेवाले धिक न होने पावे इस २५६ ५८ (सत्तम) अतिसुन्दर वातको देखनेवाला १७ (सत्पथ) अच्छा रा- ३५२ २२ (सदा) सदा, हमेशा स्ता ६२ (सदागति) वायु, हवा २२ (सत्य) सच, शपथ, २५२ ७२ (सदातन) नित्य, स. कसम नातन २२३ ८२(सत्यकार)धयाना,साई ६२ ३३ (सदानीरा) नदीविशे- ४६ (सत्यवचस्) ऋपि,स प,जिसमें सदा जलरहे त्य बोलनेवाला २३८ ३७ (सदृक्ष)प्तदृश, वरावर २२३ ८२ (सत्याकृति) बयाना, २३८ ३७ (सदृश्) बराबर २३८ ३७ (सदृश) घरावर २०३ ३ (सत्यानृत) वाणिज्य, २५८ बनियई ४ (समन्) घर २२३ ८२ (सत्यापन) वयाना ३४८ ९ (सद्यस)तत्काल, उ- साई सीतमय -- साई ६७ (सदेश) समीप अमरकोशादर्श। पृष्ठ , हित कहना श्लोक श्लोक २५० ३४ (सध्यच् ) साथ चलने १७८ १६ (सन्देशहर) दूत, हर- वा पूजाकरनेवाला कारा ५२ (सनत्कुमार) सनत्कु-/ ३१ ३ (सन्देह) संशय, शक मार १२३ ४० (सन्दोह) समूह,झुण्ड ३५० १७ (सना) नित्य २०१ १११ (सन्द्राव) भागना २५९ ७२ (सनातन) नित्य ३०८ १०२ (सन्धा) प्रतिज्ञा, म- १३३ ३३ (सनाभि) जातिवाले ादा १६७ ३४ (सनि) विनय, विनती २१० १२ (सन्धान) दारूका व- करना नाना २० (सनिष्ठीव) यूँकस- १७९ १८ (सन्धि) मेल, मिलाप, सुवर्णादि देकर शत्रुसे ૨૫૮ ६६ (सनीड़) समीप मिलाप करना ६६ (सन्तत) नित्य २१९ ६९ (सन्धिनी गर्भिणी,व- १५९ १ (सन्तति) गोत्र, वंश दतीहुई गो २६७ १०२ (सन्तप्त) सन्तापयुक्त, २५ ३ (सन्ध्या) साँझ दुःखी ८४ ३५ (सन्नकटु) चिरौंजी ४ (सन्तमस) सब ओर १९० ६५ (सन्नद्ध) मंत्रादि से अँधेरा रक्षित.युद्धको तय्यार ११ ५१ (सन्तान) कल्पवृक्ष, ३२० १५० (सन्नय) सेना के पीछे गोत्र, वंश रहनेवाली सेना,समूह १३ ५८ (सन्ताप)आगिकाताप २७६ २३ (सन्निकर्पण) परोत, २६७ १०२ (सन्तापित)सन्तापयुक्त समीप २०१ १११ (सन्दव) भागना २५८ ६६ (सनिकृष्ट) समीप २२१ ७३ (सन्दान) रस्सी,गेराँव २७६ २३ (सन्निधि)परोस,समीप २६५ ६५ (सन्दानित)बॉधाहुआ| ७४ १६ (सन्निवेश) प्रवेश क- २६२ ८६ (सन्दित) वाँधा हुआ, रना, घुसना गॅठिआया १७७ ३९ १७ (सन्देशवाच् )सन्देशा ३४७ २ (सपदि)शीघ, तत्काल कहना १६८ ३७ (सपा) पूजा, सेवा - १० (सपत्न) शत्रु, दुश्मन अमरकोशादर्श। २१९ पृष्ठ पृष्ठ १६३ श्लोक श्लोक १३३ ३३ (सपिण्ड) जातिवाले वाला २१६ ५५ (सपीनि) साथपीना | १६० ३ (सभ्य) सज्जन,सभा १०८ (सप्तकी) स्त्रियोंकीक में बैठनेवाले मरके आभूषण करध- २३८ ३७ (सम) तुल्य, वरावर, नी वगैरह सव, बिल्कुल १५ (सप्ततन्तु) यज्ञ २५८ ६५ (समग्र) सव २३ (सप्तपर्ण) छतवनि. ६६ ६० (समंगा) मॅजीट,ल- २२ २७ (समर्पि) मरीचि आदि जालू साताप १२४ ४३ (समज) पशुओं का ७२ (सप्तला)वर्पाकीवेली, समूह सेहडाविशेष ११ (समज्ञा) कीर्ति, यश १३ ५७ (सप्तार्चिस्) आगि १६३ १७ (समज्या) सभा २२ २९ (सप्ताश्व) सूर्य २४ (समञ्जस) न्याय, इ. ४४ (सप्ति) घोड़ा न्साफ, १३ (सब्रह्मचारिन् ) एक २६० ७५ (समधिक) अधिक, साथ वेद और व्रतका ज्यादह, बढ़ा हुआ आचरण करनेवाले १३४९ १३ (समन्ततस् ) सबओर १२८ १२ (सभर्तृका) अहिवाती ९९ १०६ (समन्तदुग्धा) सेंडेंड्रा स्त्री ३ १३ (समन्तभद) जेनमती ६ (सभा)समाज, कच. ३४७ ४ (समम्) साथ हरी, दरवार, सभा में २९ १ (समय) समय, कसम, आचार, काल,सिद्धा- ७ (सभाजन) कुशलादि न्त, अच्छी भापा पूछना ३४५ २५१ (समया) समीप, मध्य १८ (सभासद) सभा में वे. १९६ १०४ (ममर) युडलड़ाई ठने वाले ३०४ ८६ (समय) सामर्थ्याला, १८ (सभास्तार) सभामें पैठनेवाले २५. (ममर्थन)उचित अनु- २४० ४४ (मभिक) जुआग्वेलाने चित पिचाग्ना, नीक ठने वाला १६३ " सम्बन्ध,हित १८० २२० अमरकोशादर्श। पृष्ठ . देने वाला किया हुआ २८ श्लोक गलोक जवून पररखना १६२ १२ (समावृत्त) अनूचान २४३ ७ ( समर्द्धक ) वरदान गुरू से गृहस्थाश्रमा- दि में प्राप्त होने की २५८ ६६ (समर्याद) समीप आज्ञापायेका नाम १३ ५६ ( समवर्तिन् ) यमराज २६४ ६२ (समासाद्य) मिलने के १२४ ४१ (समवाय) समूह योग्य १११ १५७ (समप्ठिला) गॉडरका ३७ ७ (समासार्था) पूराकरना २७४ १६ (समाहार) बटोरना २७५ २१ (समसन) संक्षेप २६८ १०२ (समाहित) अंगीकार २५८ ६४ (समस्त) सब ३७ ७ (समस्या) पूराकरना ३६ ६(समाति) संग्रह, २० (समा) वर्प वटोर २२० ७२ (समांसमीना) प्रति २४१ ४६ (समालय)प्राणियों की वर्प वियानेवाली गौ ११ (समाकर्पिन ) बड़ीदूर २०० १०६ (समित्) युद्ध,लड़ाई तक जानेवाला सुगन्ध १६३ १७ (समिति)युद्ध,लड़ाई, १९६ १०१ (समाघात)युद्ध लड़ाई १२४ ४३ (समाज) पशुओं से ७९ १३ (समिध् ) इन्धन अन्य जीवोंका समूह १६९ १०४ (समीक) युद्ध लड़ाई ५ (समाधि) समर्थन, मो- २५० ६६ (समीप) समीप, पास न, चपरहना, अंगी. ६३ (समीर) वायु, हवा ६३ (समीरप) वायु, हवा, ६५ (समान) शरीरस्थ मरुआ, दवना वायुविशेप, तुल्य, व. २७४ १६ (समुच्चय) घटोरना राबर, पण्डित, एक ३२० १५१ (समुच्छय) विरोध,उं. १३३ ३४ (समानोदर्य ) सगा चाई, बढ़ती भाई २६८ १०७ (समुझित) स्यागा २७ (समालम्भ) चन्दना- हुआ EE (समत्पिा) अति आ- बाजीवाला जुआ सभा, संग कार,नियम २७७ दिलगाना अमरकोशादर्श। २२१ पृष्ठ पृष्ठ ढती, भरापुरा श्लोक श्लोक कुल, घबराया हुआ २४४ ११ (समृद्धि) विधान, ब. २६४ - ६१ (समुदत) कुंआँआदि से निकाला हुआ जल १९४ ८२ (सम्पत्ति) सम्पत्ति १२४ ४१ (समुदय) समूह,झुण्ड १९४ ८१ (सम्पद्सम्पदा, दौ- १२४ ४१ (समुदाय) समूह झुड, लत युद्ध, लड़ाई ३२० १५१ (सम्पराय) लड़ाई,उ. ३५७ १७ (समुद्ग) सम्पुट, डव्या त्तरकाल, आपदा १५६' १४० (समुद्क) सम्युट, ड- १५९ १४० (सम्पुटक) डब्बा व्या,जल पाथको अ- ३५२ २३ (सम्पति) अभी, इसी पर पहुँचाना काल २९६ ५५ (समुगिरण) डाकाहुआ २७१ ७ (सम्प्रदाय) परम्परासे अन्न चलीआती हुई रीति २४७ २३ (समुद्धत) उज, अ- रीति अच्छा उपदेश न्यायी २५ (सम्प्रधारणा) उचित "५४ १ (समुद्र) समुद्र अनुचित विचारना, ६२ (समदान्ता) जवासा, नीफ जवून परखना कपास, रुई, अस्परक १९९ १०५ (सर र)युद्ध, लड़ाई २९ (समुन्दन) गीला वा ७(सम्फुल्ल) फूलाहुआ ओदा करना २६५ ८५ (संवाध) संकट, भ. २६८ १०५ (समुन्न) गीला वा ओ. राहुआ दा कियाहुआ ३५ (सम्भेद) समुद्र और ३०८ १०३ (समुन्नद्ध) मूर्ख, अहं- नदियोंका संगम कारी ३४ (सम्भ्रम) खुशीआदि ३४९ १० (समुपजोपम्) आनन्द से कार्य में अति ज- ११६ : १० (समूह) हरिणविशेष ल्दी, जल्दी १२३ ४० (समूह) झुण्ड, थोक २६ २४ (सम्मद) सुशी २२ (समूह) यज्ञाग्नि १८ (सम्मानी) पढ़नी, २४४ ११ (समृद्ध) अति बढ़ती झाडू वाला २७१ ६ (सम्मुईन) सबओर २७८ ७४ २२२ अमरकोशादर्श। क नाम साँय श्लोक श्लोक व्याप्तहोना २८७ २२ (सर्ग)स्वभाव, त्याग, २२ (सम्यच) सत्य निश्चय,अध्याय,सटि १७५ ३ (सम्राज) राजसूयय- ८६ ४४ (सर्ज) सॉखू ज्ञ करनेवाला, अपनी ८६ ४४ (सर्जक) विजयसार आज्ञा से राजाओं का १५६ १२८ (सर्जरस)यक्षधूप,राल शासन करने वाला, २२६ १०६ (सर्जिकाक्षार) सज्जी सम्पूर्ण मण्डल का ५२ ६ (सर्प) सॉप मालिक ४ (सर्पराज) वासुकी २७० 1४ (संवदन) वशीकरण १४० ४३ (सरक) दारूपीना | २१६ ५२ (सर्पिस्) घी, घृत १२९ २७ (सरघा) ममाखीकी २५८ ६४ (सर्व) सब माछी ३ (सर्वसहा) पृथ्वी, ज- ११७ ७३ (सस्ट)गिरगिट मीन ११० १५२ (सरणा) चाँदवेल ३ १३ (सर्वज्ञ)शिव,जैनमती १६ (सरणि)सड़क,रास्ता | ३४६ १३ (सर्वतस् ) सवतरफ २३५ २२ (सरमा)कुतिया १० (सर्वतोभद्र) दुमहला ६० (सरल) सरलहन, या पॅचमहला घर, देवदारु, सीधामनुष्य नींववृक्ष १५६ १३० (सरलद्रव) देवदारुधूप ८४ ५५ (सर्वतोभदा) गम्भारी १०८ (सरला) श्वेत त्रिधारा वृक्ष २८ (सरस् )छोटातालाव | ५५ ४ (सर्वतोमुख)जल,पानी ६० २८ (सरसी)छोटातालाव ३५२ २२ (सर्वदा) सदा,हमेशा દરૂ ४० (सरसीरह) कमल २१६ ६६ (सर्वधुरावह) सक्यो- १ (सरस्वत्) समुद्र नद झा ले जानेवाला,सब १ (सरस्वती) सरस्वती, भार थॉभनेवाला सरस्वतीनदी २१९ ६६ (सर्वधुरीण) सवयोझा २८ (सरित ) नदी लेजानेवाला,सवभार १ (सरित्पति) समुद्र थॉभनेवाला ७ (सरीसृप) सॉप ३८ (सर्वमंगला) पार्वती CE .

अमरकोशादर्श। २२३ पृष्ठ पृष्ठ वाला, पाखंडी श्लोक श्लोक १५६ १२८ (सर्वरस) यक्षधूप,राल १७७ १२ (सवयस्) समान अ. १६७ ९३ (सर्वला)गुर्ज, गड़ासी वस्थावाला, हमजो- १७१ २८ (सर्वलिगिन्) वौद्ध क्ष- लीवाला पणकशास्त्रको मानने २३ ३१ (सवितृ) सूर्य २५८ ६७ (सविध) समीप १६२ ११ (सर्व वेदस्) सर्वस्व २५८ ६७ (सवेश) समीप दक्षिणावाले विश्व-२६२ ८४ (सव्य) वॉयॉअग जित् नाम यज्ञकाकर्त्ता १९९ ६० (सव्येष्ट्र) सारथी । १६७ ९४ (सर्वसन्नहन) फौजकी ८० १५ (सस्योरक्षादिकाफल तय्यारी २१ (सस्यमञ्जरी) वाली १०० १०८ (सर्वानुभूति) श्वेतत्रि- ८६ ४४ (सस्यसंवर) साखू धारा २०८ २१ (सस्यशूक) सीकुर" २४७ २२ (सर्वानभोजिन् ) सब ३४७ ४ (सह) साथ का अन्नखानेवाले प ८४ ३३ (सहकार) आँचकावृक्ष रमहंस इत्यादि ७५ (सहचरी) सोनहरी २४७ २२ (सर्वानीन) सवका झिएटी अन्नखानेवाले परम- १३३ ३४ (सहज) सगाभाई हंस इत्यादि १२६ ५ (सहधर्मिणी)व्याहीस्त्री १९७ १ १६४ (सर्वाभिसार) सबफौ- | २४६ ३१ (सहन) सहनेवाला जकी तयारी २१६ ५५ (सहभोजन)एकसंग ३ १५ (सर्वार्थसिद्ध)जैनमती भोजनकरना ९४ (सर्वोघ) सव फौज | २७ १४ (सहस्)अगहनमास, की तयारी २०७ १७ (सर्पप) सरसो ३४८ ७ (सहसा) अकस्मात् ५५ ३ (सलिल) जल वा हठसे १०४ , १२४ (सल्लकी) सालवृक्ष १५ (सहस्य) पूसमास १५ (सव) यज्ञ २२३ ८४ (सहस) हज़ार ५० (सवन) यज्ञोपधिको ५८ १८ (सहस्रदंष्ट) पढ़िना कूटना मछरी ६३ - T २७ २२४ अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ नमूंग, मोठ वार, श्लोक श्लोक ४० (सहस्रपत्र) कमल हश ११२ १५८ (सहस्रवीर्य्या) दूब ५४ १ (सागर),समुद्र २१३ ४०(सहस्रवेधि) हींग ४ (सागराम्बरा) पृथ्वी १४१ (सहस्रवेधिन) अम- ३४८ ६ (साचि) तिरछा. लवेत १०८ १४३ (सातला) सेंहुँडावि- २३ ३१ (सहस्रांशु) सूर्य शेष १०. ४५ (सहस्राक्ष) इन्द्र २८० ३९ (साति) दान, अन्त ६२ (सहसिन )हज़ार सि-१४० ५६ (सातिसार) बहुतदस्त पाहीका अफ्सर जिसकोआतेहों,अती- ९२ ७३ (सहा) घीकुवारि, व- सारकी वीमारीवाला ४५ १६ (सात्त्विक) अन्तःक- १६१ ७१ (सहाय) सहायक, रणका भाव मददगार १८९ ६० (सादिन) घोड़ेकास- २८० ४१ (सहायता) सहायकों सारथी का समूह ३१२ ११९ (साधन) पाराआदि २४९ . ३१ (सहिष्णु) सहनेवाला का मारना, मरेहुये ८ (सांख्य) सांख्यशास्त्र का दाहादिसंस्कार, जाननेवाला गमन, द्रव्य, धनादि १२ (सांयात्रिक) नाव, दिलवाना, किसी का- र्यकी सिद्धि, सामग्री, गार करनेवाले पाछेचलना ७७ (सांयुगीन) वहादुर २३८ ३७ (साधारण) सामान्य, १४ (सांवत्सर)ज्योतिषी बराबर, सदृश,मामूली पण्डित २५१ ४० (साधित) धनादिदेकर २४२ ५(सांशयिक) जिस प- साधाहुआ, हैंडवाया दार्थ के देखने से स- २६९ ११२ (साधिष्ट) अधिक से न्देहहो अधिक ૨૪૭ १ (साकम्)साथ ३४१ २३४ (साधीयस)अतिशय ३४३ २४२ (सातात्)प्रत्यक्ष,स- साधु, अतिशय बाढ़ . ५७ 1 वा जहाजका रोज- अमरकोशादर्श। २२५ पृष्ठ ३ न्याययुक्त श्रेष्ठ ला रंग पृष्ठ श्लोक श्लोक १६० ३ (साधु) सुन्दर सज्जन जिबी, अब,इसी काल २ ११ (साध्य) गणदेवता ३५१ १९ (साय) सॉझ १४६ : २१ (साध्वस) भय २८२ २ (सायक) बाण, तीर, १२६ ६ (साध्वी) पतिव्रता तलवार ७५ - ५ (सानु) पर्वत का कि- २५ ३ (सायम् ) साँझ नारा १२ (सार) गूदा, हीर, वल (सान्सपन) व्रतविशेष सीसम आदिका सार, ३२. “१८ (सान्त) अतिमीठा वचन, समझाना, स- ११० १७ (सारंग) चातक, पपी- लूक करना हा, हरिण, चितव- २९ (सान्दृष्टिक) तुरन्त का १८६ ५६ (सारथि) रथवान् २५८ - ६६ (सान्द्र)सघन, गझिन २३५ २१ (सारमेय) गाड़ी हॉक- १६६ २९ (सान्नाप्य) साकल्य १७७ १२ (साप्तपदीन) मित्रता ६२ ३६ (सारख) सरयू में पैदा ३(सामन)सामवेद, स- हुआ मझाना सलूक करना ६३ ४० (सारस) सारस,कमल १६४ १८ (सामाजिक) सभामें १५१ १०६ (सारसन) स्त्रियों की बैठनेवाले करधनी,वस्तर पहिन ३१ ३१ (सामान्य) जाति, सा. कर जिससे कमर घॉ. धारण, मामूली धते हैं कमरपट्टी ३४५ २४८ (सामि ) आधा नि- ३५४ ८(सारिका) पक्षी वि- न्दित शेप मैना २४ (सामिधेनी) अग्निज- १२४ ११ (सार्थ) जन्तुओं का लाने का मन्त्र समूह १५४ १ (समुद्र) समुद्र २२२ ७८ (सार्थवाह) बनियाँ १६६ १०४ ( साम्परापिक) युद्ध २६७ १०५ (साई) वोदा, गीला लड़ाई ४(सार्द्ध) साथ ३४६ ११ (साम्प्रतम्) युक्त, या ४ (सार्वभौम) चक्रवर्ती नेवाला, कुत्ता १७ २२६ अमरकोशादर्श पृष्ठ वाला प्रदेश जगह देश पृष्ठ श्लोक श्लोक उत्तर दिशाका दिग्गज ६७ १२ (सिकतावत) चालू ३ (साल) साँख, बाँस काँटाआदिका घेरवृक्ष १४२ ६७ (सिंघाण) नासिकाका १०२ ११५ (सालपर्णी) सरिवन मल, नकचपरी ६३ (सास्ना) वैल आदिके ६५ १२ (सिकतिल)बालूवाली गले में लटका हुआ चास |२२६ १०७ (सिक्थक) मोम २१ (साहस) दण्ड देना, ३४ १३ (सित) उजला रंग, सज़ादेना बाँधा हुआ, समाप्त, ६२ (साहस्र) हजार सि- खतम पाही का अफसर ११० १५२ (सितच्छन्ना) सौंफ १ (सिंह) सिंह, शेर २१३ ४३ (सिता) शकर,मिश्री २०० १०७ (सिंहनाद) वीरों का १५६ १३१ (सिताम्र) कपूर गर्जना ६४ ४१ (सिताम्भोज) उजला ९३ (सिंहपुच्छी) पिथयन कमल औपधि ११ (सिद्ध) देवजाति वि. २४४ १२ (सिंहसंहनन) सुन्दर शेष, सिद्धहुआ रूप और अंगों से युक) ३२ ४ (सिद्धान्त) यथार्थ का २२६ ६८ (सिंहाण)लोहेकामुर्चा निश्चय ३१ (सिंहासन ) सोने से २०७ १८ (सिद्धाय)उजले सरसों चनाहुआ राजाके - १०१ ११२ (सिद्धि) ऋद्धि सिद्धि ठनेका स्थान वृद्धि औषधि ६६१ १०३ (सिंहास्य) रूस १३८ ५३ (सिध्म) सेह ६६ १०३ (सिंही) रूस, वन-१४० ६१ (सिध्मल) Bहुआं रोग भांटा वाला १२ (सिकता) वालूवाले | ३५५ १० (सिध्मला) सूखामांस बालू २१ ५६ ६ (सिकतामय) चालू ३५४ ८ (सिप्रका) सीधवृन्न वाली भूमि ९ (सिनीवाली) चन्द्रमा २ देश, २२ (सिध्य) पुष्यनक्षत्र अमरकोशादर्श। २२७ पृष्ठ पृष्ठ २६ समुद्र का मिलना ग्लोक श्लोक के देखपरनेवाली अ-२२० ७० (सुकरां) सीधी गौ मावस २४३ ८(मुकल) दाता,भोगी, ६८ (सिन्दुक) म्यादी देने, खानेवाला ९१ ६८ (सिन्दुवार) म्योड़ी २६१ ७८ (सुकुमार)कोमल,नरम २२८ १०५ (सिन्दूर) सेंदुर २४ (सुकृत) धर्म पुण्य २ (सिन्धु) समुद्र, प्रेत २४२ ३ (सुकृतिन) पुण्यवान, नदी, सिन्धु देश, अ- भाग्यवान् टक नदी २९ २५ (सख) सुख ४२ (सिन्धुज) सैन्धवलोन २१२ ३७ (मुखबी) काराजीर ६२ ३५ (सिन्धुसंगम)नदी और २२६ १०६ (मुखवर्चक) सज्जी २२० ७१ (सुखसन्दोहा) दुहने में १५६ १२९ (सिल्ह) लोहवान सीधी गौ २०७ १४ (सीता) खेत का कॅड ३ १३ (सुगत) जैनमती ८ (सीत्य) जोताखेत १०९ ११४ (सुगन्धा) रासनि २३९ ४२ (सीध) गुड़ वा सीरा ३३ ११ (मुगन्धि)अच्छा सुगंध, का दारू एलुआ पक्ष २० (सीमन्) डांड हद ६ (सुचरित्रा) पतित्रता ३५. १६ (सीमन्त) सवॉरेहुये १५३ ११६ (मुचलक) अच्छा वस्त्र, उमदाकपड़ा १२५ २ (सीमन्तिनी) स्त्री १३१ २७ (मृत)पुत्र लड़का,राजा ७४ २० (सीमा) डांड,हद्द ९६ ८८ (मुतश्रेणी) मूसरि २०६ १४ (सार) हर, हल १३२ २६ (मुतात्मजा) लड़के की ५ २४ (सीरपाणि) बलदेव ५ (सीवन) कपड़ों, का ४३ (मुत्रामन ) इन्द्र सीना २२८ १०५ (सीसक) सीसाधातु कूटना •EE १०५ (सीहुण्ड) सेहुँडा १२ (मुत्वन्) अभिपर स्नान ३९७ २ (सु) पूजा अतिशय करनेवाला .१०९ १४७ (मुकन्दक) पाज ६ २६ (सुदर्शन)विष्णुफाचक वाल लड़की, नातिनि ६ ५० (मुत्पा) यज्ञोपधी का ૨૨૮ अमरकोशादर्श। । पृष्ठ २ २ है . पृष्ठ श्लोक श्लोक १८१ २८ (सुदाय) दहेज व भाई २०८ १८ (सुमन) गोहूँ बन्धुको देने की वस्तु ७ (समनस् )देवता, फूल, २५६ ६९ (मुदूर) बहुत दूर वकी चॅवेली ४९ (सुधर्मन्) देवसभा ९७ (सुमनोरजस्) फूलकी ४९ (सुधा) अमृत, सहुँडा, धूरि पौतनेवाला चूना, वि. ११ ५० (सुमेरु) सुमेरुपर्वत जुली ७ (सुर) देवता १४ (सुधांशु) चन्द्रमा ३५४ ८ (सुरंगा)सुनुग, सेंधि १६० ५. (मुधी) पण्डित ३ १६ (सुरज्येष्ठ) ब्रह्मा ४२ (सुनासीर) इन्द्र ५० (सुरदीर्घिका) आकाश- १०६ १४९ (सुनिपणक) विसख- गगा परिया ३ १२ (सुरदिए) देवताओं २५५. . ५२ (सुन्दर) सुन्दर के शत्रु, दैत्य १२५ ४ (सुन्दरी)सुन्दर अङ्ग ६१ ३१ (सुरनिम्नगा) गङ्गा वाली स्त्री ४४ (सुरपति) इन्द्र ९७ (सुपथिन ) अच्छा- | २८ १८ (सुरभि)वसन्तऋतु, रास्ता ६ ३० (सुपर्ण) गरुड़ १०३ १२३ (सुरभी) सालई ७(सुपर्बत) देवता ४६ (सुरर्पि) नारदादि ४३ (सुपार्श्वक) गेंठी ६ (सुरलोक) स्वर्ग ४ (सुप्रतीक) ईशानको- १६ १(सुखमन्) आकाश णका दिग्गज १०१ ११४ (मुरसा) रासनि १६०. ६८ ( सुप्रयोगविशिख) २३९ ६९ (सुरा) दारू, मदिरा अच्छा तीरन्दाज २१ २४ (सुराचार्य) वृहस्पति ३६ १७ (सुप्रलाप) अच्छा क- २४० ४३ (सुरामण्ड) दारूकाफूल हना ५० (मुरालय) सुमेरुपर्वत २४ (सुभगामुत) सुहागिल | १०५ १३१ (सुराष्ट्रज ) अही, अ- रहर १०४ १२४ (मुभिक्षा) धवई,धाय ३६ १७ (सुवचन)अच्छाकहना ९ सुगन्ध, गौ २ १ का पुन अमरकोशादर्श। २२९ पृष्ठ पृष्ठ 4 , श्लोक श्लोक २२४ ८६ (सुवर्ण) ८० घुघुची पूरीआदि भर, या मोहरभर १७७ १२ (सुहृद्) मित्र सोना, सोना २४० ३ (सुहृदय) शुद्धमन २४ (सुवर्णक) अमिलतास वाला, सीधामनुष्य ६५ (सुवल्लि) वकची २५७ ६१ (सूक्ष्म) पतला, मिहीं, ७० (सुवहा) न्यवारी, रा- लिङ्गशरीर, अध्यात्म सनि, हसपदी, साल वृक्ष, कोलिन्दण २५३ ४७ (सूचक) चुगुल ३७ (सुवावृक्ष) कंटाय ३५४ ८ (सूचि) सूजी, सुई १२७ ९(सुवासिनी) कुछ १८९ ५९ (मृत) सारथी, गाड़ी युवावस्था को प्राप्त, हांकनेवाला, पारा, ना व्याहीहोकर पिता के ह्मणीस्त्री में क्षत्रिय से घर में रहनेवाली स्त्री उत्पन्न पुत्र, बढ़ई, पो- २२० ७१ (सुव्रता) दुहने में सी. राणिक, पण्डित धी गौ ८ (सूतिकागृह) लड़का २५५ ३२ (सुपम) सुन्दर होनेवाला घर २० १७ (सुपमा) शोभा १३४ ३६ (सूतिमास) जन्ममास १११ १५५ (सुपवी) करैला, का- २३४ १६ (सूत्थान) चतुर लाजीरा २३६ २८ (सूत्र) सूत,डोरा ४२ ४ (सुपिर) चॉसुरी ३७६ २४ (सूत्रवेष्टन) कोरी का १०५ १२८ (सुपिरा) पवारी पाई पसारना, सूतल- १९ (सुपीम) ठण्ड पेटना ६१ ६७ (सुपेण) करौंदा २८ (सूद) रसोई घरदार १०८ (सुपेणिका) कालात्रि- व्यञ्जन, सालन धारा ३११ ११२ (सूना) घेघरोग, मार- ३४७ २ (मुटु) अतिशय, प्र नेका स्थान, हिंसा शंसा, वड़ाई करना १३१ २७ (सूनु) पुत्र लड़का २१४ ४५ (सुसंस्कृत)दूसरीवस्तु ३९ १६ (सूनृत)प्रिय और सत्य मिलाकर पकायाहुआ वचन १०० २३० अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ श्लोक श्लोक २९० २७ (सूपकार) रसोई वर- रुण वृक्ष दार १९३ ७८(सेना) फौज, चमू २२ २८ (सूर) सूर्य १८२ ३३ (सेनांग) हाथी, घोड़ा १११ १५७ (सूरण) जमीकन्द रथ, पैदल, सिपाही. २४५ १५ (सूरत) दयालु ९ ४० (सेनानी) स्वामिका- २३ ३२ (सूरसूत)अरुण,सूर्यका र्तिक, फौजका अफसर सारथी ८१ (सेनामख) फौज वि- ६ (सरि) पण्डित शेष तीनपत्ति २३८ ३५ (समी)लोहेकीप्रतिमा १६ ६१ (सेनारक्ष) फौज की ૨૨ २८ (मर्य्य) सूर्य खबरदारी करनेवाला, ३२ (सूर्य्यतनया) यमुना गस्त करनेवाला २६ ८ (सूर्येन्दुसंगम) दर्श १७६ ९ (सेवक) सेवक,नौकर नाम अमावास्या २७१ ५ (सेवन) कपड़ा आदि ९१ ( सृकन् ) ओठों का सीना किनारा २०३ २ (सेवा) सेवा, नौकरी १९६ ८१ (सृग) ढेलवांसी, गो- | ११३ १६४ (सेव्य) गॉडरकी जर फना खसखस ४१ (सृणि) अंकुश २२ २६ (सैहिकेय) राहु १४१ ६७ (सृणिका)लार,थूक ५६ ९ (सैकत) घालूवाली १६ (सृति) रास्ता,मार्ग भूमि ३८ (सृपाटी) तौल विशेष ६२ ३३ (सैतवाहिनी)सहस्र १२ (समर) हरिण विशेष वाहु की नदी २९२ ३८ (सृष्ट) निश्चित, बहुत १८९ ६९ (सैनिक) फौजकेलोग, मुक्र पहरा देनेवाला, गस्त १३ (सेकपात्र)सींचनेका वर्तन | १८५ १४ ( सैन्धव) सैन्धव न- १३ (सेचन) सींचने का मक, घोड़ा वर्तन ६१ (सैन्य) फौजके लोग, ६८ १५ (सेतु) बॉध, पुल, वा- फोज घूमने वाला अमरकोशादर्श । २३१ पृष्ठ पृष्ठ गिल का पुत्र ७४ श्लोक श्लोक १६३ ७९ (सैन्यपृष्ठ) फौज का ६२ ३६ (सौगन्धिक) उजला पिछला भाग कमल , रोहिस नाम २१८ ६४ (सैरिक) हरवाह खर, गन्धक १२६. १८ (सैरन्ध्री) लौड़ी २३१ ६ (सोचिक) दर्जी ११५ ५.(सैरिभ) भंसा ६ (सौदामिनी) विजुली १३ ७५ (सैरीयक) कटसरैया ७२ १० (सौध) राजघर ७५ (सैरेयक) कटसरैया १३१ २४ (सौभागिनेय) सोहा. २६५ ६७ (सोढ़) क्षमायुक, वर दास्त कियेहुये २२ २६ (सौम्य) बुध, सुन्दर, १३३ ३४ (सोदर्य ) सगाभाई चन्द्रमाहै देवता जिस २६ १. (सोपप्लव) ग्रहणपरना का वह वस्तु' १८ (सोपान) सीढ़ी २१७ ६० (सौरभेय) वैल ८३ ८३ (सोभाञ्जन) सहिजन २१९ ६६ (सौरभेयी) गौ १६ १४ (सोम) चन्द्रमा ५३ १० (सौराष्ट्रिक)विषविशेष १६२ ११ (सोमपा) सोमरस पी. २२ २६ (सौरि) शनैश्चर 1 ने वाला २१४ ४३ (सौवर्चल) सोंचर न- ११ (सोमपीतिन)सोमर- स पीनेवाला १७६ ८ (सौविद)राजा व राजा ६७-६५ (सोमराजी) बकुची की स्त्रियों के पास चेत ५० (सोमवल्क) उजला लिये हुये रहने वाले वृद्धपुरुप (कद फल) कैफरा १७६ ८ (सौविदल्ल) राजा व १०७ १३७ (सोमवल्लरी) ब्राह्मी राजाकी स्त्रियोंके पास वेतलियेहुये रहनेवाले ९५ (सोमवल्लिका) वकुची वृद्धपुरुप ६७. ८३ (सोमवल्ली) गुर्च ८४ ३७ (सौवीर)बेरी के फल, २२ (सोमोद्भवा) नर्मदा कांजी, सर्मा २१७ ५६ (सौहित्य) तर्पण,तृप्त १६१ ७(सोगत) नास्तिक करना मक, सज्जी या दूधिया खैर या छयोंटा , नदी । ।

२३२ अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ जन भाट श्लोक श्लोक - ०९:४० (स्कन्द)स्वामिकार्तिक जड़ना ७९ १० (स्कन्ध)रक्षका जांघा, ३८ ११ (स्तव) स्तुति .: कांधा, समूह, राजा ८० -१६ (स्तर्वक) गुच्छा :- ७९ ११.(स्कन्धशाखा) बड़ी २६८१०५:( स्तिमितः) ओदा भारी डार गीला ।। २६७ १०४ (स्कन्न) चुआहुआ २६२.११० (स्तुत) स्तुति किया - ५०- ३६ (स्खलन) ऐंटुककर हुआ गिरना , लड़कों की ३८. ११ (स्तुति) स्तुति बैंयाचाल १६८ ६७ (स्तुतिपाठक)बन्दी- २२०१:१०८ (स्खलित) छल धोखा १४४ ७७.(स्तन) कुच, चूंची ३५८ १९ (स्तूप) वरा १३५ : ४१ (स्तनन्धयी) दूध पीने २३५, २४ (स्तेन) चोर वाले बच्चे २३६ २५ (स्तेय) चोरी १३५-४१ (स्तनपा)दूध पीनेवाले २७०० - २६ (स्तेम) गीला करना बच्चे २३६ - २५ (स्तैन्य) चोरी .१८ : १६(स्तनयिन) मेघ,वादर २५७ ६१ (स्तोक) थोड़ा (स्तनित) वादर का ११८ १७(स्तोकक) चातकाप- :: पीहा' ११५:३(स्तब्धरोमन) सूअर ३८ . ११ (स्तोनो स्तुति, तारीफ ७८९.(स्तम्ब),ठवृक्ष,खर १२३ : ४० (स्तोम) समूह, स्तुति आदिका गुच्छा पूरा यज्ञः २०८ २१ (स्तम्बकरि)साधारण १२५ २ (स्त्री) स्त्री, औरत धान्य, मामूली नाज १३० २० (स्त्रीधर्मिणी)रजस्वला २७९ ३५ (स्तम्वधन) खन्त ग- | १२३ ३८(स्त्रीपुंस) स्त्री पुरुष का देला,बेलचा 'जोड़ा. २७९ - ३५ (स्तम्वन) खन्ता, गदे- १६४: । २० (स्थण्डिल) यज्ञ आदि का चौतरा १२-०३५(स्तम्बरम) हाथी १७१ ४७ (स्थण्डिलशायिन्) पृ. ३१६ १३४ (स्तम्म)खम्भा,धूनही, (थ्वी में सोचनेवाला गर्जना : । ला, वेलचा .

अमरकोशादर्श। २३३ पृष्ठ पृष्ठ श्लोक श्लोक १६२:४११ (स्थपति) वृहस्पति, १५.८ (स्थापनी) पाठा, पाँ: १११ (संवनाम यज्ञका.कर्ता, दरि । कारीगर थवई १९९: -१०१ (स्थामन्) सामर्थ्यः ६६६ (स्थल)थल,जगह, प्र- १७६ ७ (स्थायुक) एकंगाँव "देश • .काठेकेदार अधिकारी ६(स्थली) थल,जगह, ३६३ ३२ (स्थाल) थारा । प्रदेश २११ ३१ (स्थाली) बटुई, प- १३५४२ (स्थविर) बूढ़ा पुरुष तीली. २६९ १११ (स्थविष्ठ ) अतिशय | २६० ७३ (स्थांवर) नादिक 1.मोटा । १३५ ४० (स्थाविर) चुढ़ापा १६.३५ (स्थाणु) शिव, दूंठ, १५५ १२३-(स्थासक) चन्दनादि 1 खम्भा पर्वत का अंगमें लेपना १७:४६ (स्थाण्डिल ) व्रतादि २५६ .७३ (स्थास्तु) अतिस्थिर हेतु से पृथ्वी में सोने १८० - २६ (स्थिति) मर्यादा, वाला : आसन : १६१:.: ८ (स्थादादिक) मोच २५९ .७३ (स्थिरतर)अतिस्थिर मार्ग का दिखानेवाला ६५ २ (स्थिरा) पृथ्वी, स- ३११, ११७ (स्थान ) अवकारा, रिवन, स्थिति, नीति जानने ८७ ४६ (स्थिरायु) सेमर वालों का त्रिवर्गविशेष २३८ ३५ (स्थूणा) लोहेकी:प्र. १ (स्थानीय) दुसरे कोट तिमा, घरकाखम्भा, : आदि से घिराहुआ • • यून्दी ..।' बड़ा स्थान अर्थात् २५७ ६१ (स्थूल)जड़, मोटा : राजधानी २३३ ६ (स्थूललक्ष्य) अति. ३४६ ११ (स्थाने) युक्त, उचित दानी ९७६ (स्थापत्य) राजा व १५३ ११६ (स्थूलशाटक) मोटा राजाकी स्त्रियाकपास वेत, लिये हुये रहने ३१६ ११३८ (स्थूलोचय) कम,हा- ":.-धियों की .मन्दयाल वख वाले वृद्ध पुरुष રૂ૪ अमरकोशादर्श। पृष्ट पृष्ठ दलोक श्लोक २५९ ७३ (स्थेयस्) अतिस्थिर २७४ १४ (स्पष्ट) परसन्ताप १०६ १३२ (स्थौणेय) कुकरौंधा ५२ ६ (स्फटा) फणा ४६ (स्थीग्न्)िलदुआघोड़ा २७२ है (स्फाति) बढ़ती २७२ ९(स्नब)यहना,टपकना १४३ ७५ (स्फि)कूल, त्रियों २७१ ४६ (स्नातक) वेदव्रतधा- की कमरका पिछला रण कियेहुये गुरूकी भाग आज्ञासे स्नान करने २५७ ६३ (स्फिर) वहुत वाला ७(स्फुट) साफ, फ्ला १५५ १२३ (स्नान)नहाना,स्नान हुआ १४१ ६६ (स्नायु) नस २७१ ५ (स्फुटन) फूटना १७७ १२ (स्निग्ध)समान अ- २७२-- १० (स्फुरण) फरकना वस्थावाला, चिकना, ७२ १० (स्फुरणा) फरकना प्यारा, स्नेही १३ ५८ (स्फुलिङ्ग) अग्निके ५(स्न) पर्वतकाकिनारा कणा, चिनगारी २६४ ६२ (स्तुत) बहताहुआ ८५ ३८ (स्फूर्जक) तेंदुआ ६ (स्नुपा) पतोहू १० (स्फूर्जथु) बन या ९९ १०५ (स्तुह्) सेहुँडा विजलीका शब्द ९९ १०५ (स्नुही) सेहुँडा २६६ १९२ (स्फेप्ठ) अधिक से ४७ २७ (स्नेह) प्रेम, प्रीति अधिक ३२ ७ (स्पर्श) छूना, वायु । ३४० ५(स्म) पादपूरण में, का गुण, परसन्ताप चीताहुआ काल ६२ (स्पर्शन) दान, वायु, २५ (स्मर) कामदेव ३४ (स्मरहर) शिव १३ (स्पश)जासूम, युद्ध १६ ३४ (स्मित) थोड़ा सिना, २६९ ८१ (स्पष्ट) साफ़ मुस्कुराना १०६ १३३ (स्पृफा) अस्परक ૨૮ २९ (स्मृतिचिन्ता,धर्म ९७ ६३ (स्पृशी) भटकटया शास्त्र, २७२ ९(स्मृष्टि)हना ६५ (स्पद) वेग २७ (स्पृदा) मनोरथ २६ (स्पन्दन)तिनिशच, १४ १८ अमरकोशादर्श। ૨૨ पृष्ठ १८६ श्लोक श्लोक लड़ाई में चढ्नेका रथ २२७ १०० (स्रोतोअन) सुर्मा ६० (स्यन्दनारोह) रथपर १३३ ३४ (स्व) अपने वन्धुवर्ग सवारहोकेलड़नेवाला जाति,आत्मा,आत्मी- १६१ :-६७ (स्यन्दिनी) लार य,धन. १५४ . ६२ (स्यन्न) बहता हुआ |२४५ १५ (स्वच्छन्द) स्वतन्त्र २१० २६ (स्यूत) थैली, वीना १३३ ३४ (स्वजन) अपने वन्धु i हुआ कपड़ा वर्ग २७१ :- ५ (स्यूति) कपड़े आदि २४५ १५ (स्वतन्त्र) अपने आ- सीवना धीन ८९.५७ (स्योनाक) सरिवन ३४८ ८(स्वधा) पितरों के लिये '८२ . २८ (संसिन्) पीलुआवृक्ष त्याग १५८ १३६ (सज्) माला ९२ (स्त्रधिति) कुल्हरी,फ- २७२ ६ (सव) बहना, झर्ना २२१६ • ६६ (स्रवद्गर्भा) जिस गौ २२ (स्वन) शब्द का गर्भ गिरजाताहो २६५ ६४ (स्वनित) बजता हुआ ३०(सवन्ती) नदी ३६ (स्पन) सोना ९५. ८३ (सवा) चिनार बौडी २५० ३३ (स्वमज्) सोनेवाला ४ : १७ (सट्ट) ब्रह्मा ३८ (स्वभाव) स्वभाव. २६७ १०४ (सस्त) चुआ, टपका १८ (स्त्रभू) विष्णु हुआ १२६ ७ (स्वयंवरा) अपने आ- ३४७ २ (साक्) जल्दी पस्वयम्बरमें पतिको -२६४५ ९२ (वृत) वहता हुआ घरण करनेवाली कन्या '२७ (सुव) यज्ञका पात्र वि. ३५० १६ (स्वयम्) अपनासे ३ १६ ('स्त्रयम्भू) ब्रह्मा ८३ (सुवा) चिनार बौड़ी १ ६ (स्वर)स्वर्गलोक,पर. ८४ . ३७(सुवावृक्ष) कँटाय लोक ५६ ११ (स्रोतस्) इन्द्रिय,नदी ३६ ४ (स्वर) उदात्तादिस्वर, निपादादिस्वर ६१. .३० (स्रोतस्वती) नदी ११ ४८(सरु.) इन्द्रका वन शेष , का वेग २३६ अमरकोशादर्श। - पृष्ठ पृष्ठ वेदका पढ़ना ५० . . गंगा, - लिये त्याग . श्लोक श्लोक यज्ञ, वाण, यूपका ख- १०० १०७.(स्वादी) दाख ण्ड १७१, ५० (स्वाध्याय)वेदाभ्यास, .५० ३८ (स्वरूप) स्वभाव,बुध पण्डित,सुन्दर,अपना ४०.. २३-(स्वान) शब्द ३१ : -३१ (स्वान्त) मन ? ६ (स्वर्ग) स्वर्गलोक ३६ (स्वाप) सोना २२६ ९४ (स्वर्ण) सोना, सुवर्ण २२५ ९० (स्वापतेय) धन .२३३. . ८(स्वर्णकार) सोनार |२४४ . .११ (स्वामिनः) मालिक, १०७ १३७ (स्वर्णक्षीरी) मकोइ राज्याङ्ग ५०(स्वर्णदी) आकाश १०, ४४ (स्वाराज्) इन्द्र १६५ २३ (स्वाहा)अग्निदेवता -.२२.. २६ (स्वर्भानु) राहु । की, स्त्री, देवताओं के ५३ (स्वर्वेश्या) उर्वशी, ३४३ २४१,(स्वित्) प्रश्न, वितर्क -१९ ५२ (स्वर्वेद्य) अश्विनीकु. ४९ .,३३: (स्वेद) पसीना या घाम - १३२ . २९ (स्वसृ) वहिन २४४ ५१ (स्वेदज)किरवा,डाँस ३४३ २४० (स्वस्ति) कल्याण,पु. मसा; खटमलआदि " ण्य,मगल, आशीर्वाद २१०, ३० (स्सेदनी) भट्ठी, भार ७२. १० (स्वस्तिक) राजघर ३३० १९१ (स्वैर) स्वेच्छाचारी, जिसमें चारदरवाजेहों सुस्त ३२ (स्वतीय) बहिन का २२७ १९ (स्वैरिणी) छिनारित्री २७. . ३ (स्वेरिता)अपनीइच्छा ३८ (स्वाति)स्वाती नक्षत्र २४५ १५ (स्वैरिन् ) स्वतन्त्र २६६ ११० (स्वादित) खायागया ३०६ ९४ (स्वाइ) प्रिय,मधुर ३४८०. ५ (ह) पादपूरण ..., ८४ ३७ (स्वादकण्टक) कॅटाय, २३. १३१ (हंस),सूर्य, उजले -गोनुरू पंखवाला हंसपक्षी १५८, १४४ (स्वादुरसा) काकोली| १५२ १९० (हंसक) पेरकाकड़ा आदि अप्सरा .. . मार: 1 लड़का, भांजा अमरकोशादी। २३७ पृष्ठ पृष्ठ श्लोक हरिणं, मृग न्द विशेष , . . . श्लोक ९६.८६ (हजिका) भेगिरा कपिलवर्ण के चन्दन ४५ .१५(हजे) नीच लौंडी ३४ १३ (हरिण)कुछ पीलारंग, -के पुकारने में ३५९ १८ (हट्ट) हाट, बाजार २६५ ५० (हरिणी)हरिणकीस्त्री, १०५ - १३० (हट्टविलासिनी) क मृगी, सोने कीप्रतिमा, । कून्दनि हरेरंगवाली, वस्तु, छ- २०० + १०८ (हल) हठ १५.१५ (हण्डे) नीच लोंडी के १६ १ (हरित्)दिशा,हरारंग पुकारने में ३४ १४ (हरित) हरारंग - २५२.४१ (हत)निराश किया २११ ३४ (हरितक) साग । हुआ ३६३ ३२ (हरिताल) हरतार ११५ १३० (हनु) ककूदनि, कन- २२८ १०३ (हरितालक) हरतार पटा २२ २६ (हरिदश्व) सूर्य ३४४॥ २४३. (हन्त) हर्ष, दया, वा- २१३ ११ (हरिद्रा) हरदी १४ (हरिदाभ) पीलारंग । २६५-- ९६ (हन्न) हगाहुआ,विष्टा ९८ १०१ (हरिद्व) दारुहलदी १८५ ४४ (हय) घोड़ा २२५ ९२ (हरिन्माणि) मरकत १७ -५२.(हयन) जनाना रथ मणि १०७ १३८ (हयपुच्ची) मॅग ६ २७ (हरिप्रिया) लक्ष्मी ६३७६ (हयमारक) कॅदैल २०८ १८ (हरिमन्धक) चना ३४ (हर) शिव १०३ १२१ (हरिखालुक) एलुआ १८१.२८ (हरण) दायज, दहेज वृक्ष १ (हरि) सिंह, यमराज, १० ४४ (हरिहय) इन्द्र :- वायु, इन्द्र, चन्द्रमा, ८९ ५९ (हरीतकी) हर्र, हर्रका सूर्य, विष्णु, किरण, घोड़ा,सुआप्रक्षी, सर्प, १०३ १० (हरेणु) गगनधूरि, म- बन्दर, मेढ़क, कपि. टर रंग) ९(हर्म्य)धनिकोंका म- ११ । २१ (हरिचन्दन) देववृक्ष, कान क्यारम्भ, विपाद ७ 1 -- ७२ २३८ अमरकोशादर्श। पृष्ठ पृष्ठ ५ श्लोक श्लोक ११४ १ (हर्यक्ष) सिंह 'हाथ, नक्षत्र विशेष, २९ २४ (हर्प) खुशी, प्रीति हाथी की शृंड २४३ ७ (हर्पमाण) खुश,प्रसन्न २७१ ५ (हस्तवारण)किसी को २०६ १३ (हल) हर कोई मारताहोतो उस ४५ १५ (हला) अपनी सखी का हाथ पकड़लेना, के पुकारने में मारनेको निश्चय किये २३ (हलायुध) बलदेव हुये का रोकना ५३ १० (हलाहल) जहर,विष १८२ ३४ (हस्तिन्) हाथी. २४ (हलिन) बलदेव १७हस्तिनख) दरवाजे ८५ ४२ (हलिप्रिय) कदम्बवृक्ष के आगे बनाई हुई च- ૨૨૬ ३६ (हलिप्रिया) दारू,म. ढ़ा उतार भूमि दिरा ५९ (हस्तिपक) हथिवाल २०५ ८ (हल्य) जोताहुआ खेन महावत ૨૮૦ ४१ (हल्या) हरोंकासमूह १८८' ५९ (हस्त्यारोह) हथवाल, ३६ (हल्लक) लालकमल महावत २७२ ८ (हव) पुकारना,आज्ञा, ३४६ ३५५ (हा) विपाद, शोक, यज्ञ पीड़ा. १६६ २९ (हविस्) होमकरनेकी २२६ ९४ (हाटक) सोना,सुर्वण २८ २० (हायन) चरस, साल २५ (हन्य) देवताओं का । ज्वाला, सॉठी आदि अन्न धान ५६ (हव्यवाहन) अग्नि १५० १०५ (हार) मोतियों की ४६ १८ (हस) हंसी, हेसना, माला हास्यरस १२२ ३५(हारीत) हारिलपक्षी २१० ३० (हसनी) नीआई,यो- १७ २७ (हाई) प्रेम,प्रीति रसी, अॅगठी २३९ ३९ (हाला) दारू,मदिरा -२१० २६ (हसन्ती) नीआई,वो २१८ ६ (हालिक) हरवाह रसी,अॅगेठी ४६ ३२ (हाव) रतिकी इच्छा १८६ ८६ (हस्त)धहुये वाल. से स्त्रियों की क्रिया और ६२ वस्तु, गौकाघी अमरकोशादर्श। २३९ पृष्ठ पृष्ठ -- श्लोक श्लोक चेष्टा विशेष १८ (हिम) पाला,ठण्ड १६ (हास) हँसी,हास्यरस ७५ ३ (हिमवत्) हिमालय १८३ ३६ (हास्तिक) हाथियोंका । पर्वत समूह १५७ १३१ (हिमवालुका) कपूर १९ (हास्य) रस विशेप, २० १८ (हिमसंहति) पालाका हँसी, हँसना समूह ५३ (हाहा) गन्धर्व विशेष १६ १६ १३ (हिमांशु)चन्द्रमा ३४६ २५६ (हि) हेतु,कारण, नि- २० १८ (हिमानी) पाला का श्चय, पादपूरण समूह ३३९ २२८ (हिंसा) चोरी आदि १०७ १३८ (हिमावती) मकोइ कर्म, प्राणियों का २२५ ९१ (हिरण्य ) सोना और नाश चांदी, सोना, सुवर्ण, २७५ १९ (हिंसाकर्मन्) किसी धन ३ १६ (हिरण्यगर्भ) ब्रह्मा २८ (हिंस्र) प्राणियों का ३४ (हिरण्यवाहु) शोण- नाश करनेवाला ह- भदनद ५६ (हिरण्यरेतस्) आगि ३५४ ८(हिका) हिचकी ३ (हिरुक्) वर्जना,स- २१३ ४०(हिंग) हींग मीप ९०४ ६२ (हिगुनि-स) नीषका १११ १५७ (हिलमोचिका) हिल- वृक्ष साका साग ३५६. २० (हिंगुल) ईगुर,शिंग- ३४८ है (ही) विस्मय रिफ २६८ १०७ (हीन)त्यागा, छोड़ा १०१ ११४ (हिगुली) वनभांटा, हुआ, न्यून, कम भांटा १६५ २३ (हुतभुप्रिया) अग्नि ६१ (हिज्जल)समुद्रफल की स्त्री स्वाहा २२८ १०५ (हिण्डीर) समुद्रफेन । १२ ५६ (हुतभुज्ञ) आगि ११४ १६६ (हिन्ताल) छोटा ता. ३४५ २५१ (हुम्) वितर्क, प्रश्न, के मरनेका पुरश्चरण } त्यार इविशेष तर्क अमरकोशादर्श। २४० पृष्ठ पृष्ठ - mmm हिनाना, . मानी वस्तु श्लोक लोक रंगकीजही ३७ ८ (इति) पुकारना १२ ५३ (हूहू) गन्धर्वविशेष ११ ५७ (हेमादि) सुमेरुपर्वत २७८ ३२ ( हणीया) करुणा ६ ३९(हेरम्ब) गणेश वा घिनाना ४६ ३२ (हेला) अपगणना ३१ ३१ (हृद्) मन 'पूर्वक दीनतादिखाने ३१ (हृदय) मन का नाम ३६ १८ (हृदयंगम) युक्रयुक्त, १८६ १७ ((हेपा) घोंडोंका हिन- बहुत मुनासिब, मन- ७(है) सम्बोधन २४२ ३ (हृदयालु) शुद्धमन ८ ३७ (हेमवती)पार्वती, हर्र, वाला, सीधा मनुष्य उजली वच, मकोय २५५ ५३ (हृद्य) प्यारा २१६ ५२ (हैयद्गवीन) एकरात ८(हपीक) इन्द्रिय हीके जमायेहुये 'दही '४ १८ (हपीकश) विष्णु से उत्पन्न घी २६७ १०३ (दृष्ट) आनन्द,खुश १६४ १६ (होत) ऋग्वेद जानने ७ (हृष्टमानस) प्रसन्न वाला" चित्त, खुश ३५५ १० (होरा) एक मेपादि ३४८ ७ (हे) सम्बोधन राशिको आधाभाग, ५८ (हेति) अग्निकीज्वा- या लग्न ला, सूर्यकी किरण, ३५१ २२ (ह्यस्) पूर्ववीताहुआ हथियारविशेष दिन २८ (हेतु) कारण २५ (हृद)गहिरेजलवाला ३ (हेमकूट) पर्वत विशेष कुण्ड ८ २२ (हेमदुग्धक) गूलर ६१ ३०(इदिनी) नदी २२६ ६४ (हेमन्) सोना, सुवर्ण २६९ ११२ (इसिष्ठ) अतिछोटा १६ (हेमन्त) अगहन, पूस | १३६ ४६ (इस्व) छोटा,वामन ६२ (हेमपुष्पक) चम्पा- ववना वृन १०२ ११७ (हस्वगवेधुका) कॅकही ९२ ७१ (हेमपुप्पिका) पीले वृक्ष २४३ द ७५ २८ rom अमरकोशादर्श। २४१ पृष्ठ पृष्ठ १८६ श्लोक श्लोक १०८ १४२ (इस्वांग)जीवक २६४ ६१ (हीत) लज्जित ४८ (हादिनी) इन्द्रका १०३ १२२ (हीवेर) नेत्रवाला वन, विजुली ५७ (हेपा) घोड़ोंकाहिन २३ (ही) लज्जा हिनाना २६४ ६१ (हीण)लज्जित,शर्मिन्दः १०४ १२४ (ह्लादिनो) सालवृक्ष इत्यमरकोशमूलशब्दानुक्रमणिका । अथ वैद्यककोशप्रारम्भः ॥ श्लोक ॥ लम्बोदरंनमस्कृत्य गुरुधन्वन्तरितथा॥ अकारादिक्रमेणैव कोशोयंभण्यतेमया॥१॥ (अ) (अनल) चीता (अन्धक) तुंबुल (अजमोदा) अजमोद (अभया) हड़ (अजमोदिका) अजवाइन (अमृता) हड़, अंबरा, गिलोय (अजाजी) सफेदजीरा (अधिकफ) समुद्र का फेना (अमोघा) वायुविडंग, पाढरि (अव्यथा) हड़, महामुंडी, स्थल (अश्वत्थफल) दूसरी हाऊबेर कमल, मेवड़ी (अवर्ग) जीवक, ऋपभक, मेदा, (अक्ष) बहेड़ा, कालानिमक, कर्ष, महामेदा,काकोली,क्षीर पद्माक्ष, रुद्राक्ष, शकट, इ- काकोली, प्रद्धि, वृद्धि न्द्रिय, पांशा (अशोका) कुटकी (अक्षीव) पांगानोन,महिंजन, महा (अनार्यतिक) चिरायता निव (अर्द्धतिक्त) चिरायता जो नेपाल (अश्वग) मेद में होता है - वैद्यककोश। २४२ रंगका एक तृण . (अम्बष्ठा) मोइया, जूही, अमलो- नियाँ, पादर, मोचिका (असृक्) सुगन्धित शाक विशेष (अम्बा) मोइया (अग्निसंस्पर्शा) उत्तर देशमें पद्मा. (अम्बालिका) मोइया वती नामसे प्रसि. (अम्बिका) मोइया द्ध द्रव्य (अजश्रृंगिका ) काकड़ा सींगी, (अञ्जनकेशी) उत्तर देशमें नलिका मेढ़ासींगी नामसे प्रसिद्ध द्रव्य (अजशृंगी)का ड़ासींगी,मेंढासींगी (अमृतवल्लरी) गिलोय, गुर्च (अंगारवल्ली) भंगरया, भारंगी, मूंज (अलिवल्लभा) पादरि (अतिक्त्रा) सोवा (अग्निमन्थ) अरणी (अश्मन) पापाण भेद (अरलु) सोनापाढ़ा (अरुणा) मंजीठ, अतीस | (अंशमती) सरिवन (अलक्क) लाख (अंधिपणी) पिठवन (अवल्गुज) बकुची (अल्पिका) वनमूंग (अतिविपा) अतीस (अदण्डक) सफेद, अरंड (अरिष्ट) लहसुन, नींव, मद्य (अलर्क) सफेदमदार (अग्निक) भेलावां, करिआरी (अर्क) मदार (अग्निमुखी) भेलावां, करिआरी (अर्कपर्ण) लालमदार (अरुप्क) भेलावां, करिआरी (अग्निशिखा) करिआरी (अरुप्कर) भेलायां, करिआरी (अनन्ता) करिआरी,नीलीदूष, ज- (अन्ध) कालानोन वासा (अहिफेनक) अफीम (अश्वमारक) सफेद कनेर सीसव (अटरूपक) रूसा (अनार्यक) अगर (अपराजिता) विष्णुकान्ता, शालि- (अम्बु) सुगन्धघाला, पानी पर्णी (अमृणाल) खस, लामज्जक, खस (अजरा) केवांच के समान पीलेरंगका (अन्यण्डा) केवांच एक तृण (अतिरुहा) रोहिणी (अंगनाप्रिया) पियंगु, ककुनी (अम्रपुप्प) येत (अवदातक) खसके समान पीले (अम्वुज) समुद्रफल (अगुरु) अगर, वैद्यककोश। २४३ का साखू (अकोट) ढेरा,अंकोल (अगस्त्य) अगस्ति (अकोल) ढेरा,अंकोल (अपेतराक्षसी) तुलसी (अतिवला) ककहिया (अजगन्धिका) ववई (अर्द्धकण्टिका) महासतावर (अर्जक) सफेद पवई (अश्वगन्धा) असगन्ध (अश्वत्थ) पीपर (अम्बष्ठका) पारि (अश्वत्थभेद) बेलिया पीपर (अम्बष्ठकी) पादरि (अश्वकर्णिका) शाल, साखू (अर्द्धचन्द्रा) कालानिशोथ (अजककर्ण) शालभेद, एकतरह, (अतितपस्विनी) महामुण्डी (अपामार्ग) लटजीरा,लहचिचरा (अर्जुननामाख्य ) अर्जुन वृक्ष, (अधःशल्य) लटजीरा,लहचिचरा कोह (अस्थिश्रृंखला) हरसिंगार (असन) विजयसार (अस्थिसंहारक) हरसिंगार (अस्मेिदक) दुर्गन्धितखयर (अस्थिसंहारी) हरसिंगार (अरिष्टक) रीठा (अंगारक) भंगरा (अर्थसाधन) रीठा (अमखल्लरी) अमरवेल (अर्थसाधक) पौजिया (अर्कपुष्पा) अर्कपुप्पी (अङ्गार वृक्ष ) गोंदी इंगुदी (अलम्बुपा) खेतकी लज्जावती (अरविन्द) कमल (अग्निदीपन) वरना (अम्भोरुह) कमल (अम्बुशिरीपिका) जल शिरस (अतिचरा) स्थल कमल (अतिसौग्भ) आम (अतिमञ्जुला) सेवती गुलाब (अतिबृहत्कल) कटहल (अतिकेशर) कूजा (अम्बुसारा) केला (अलिकुलसंकुला) कृजा (अंशुमतीफला) केला (अतिमुक्तक) मोतिया (अशितशारक) तेंदुआ (अशोक) अशोक (अल्पास्थि) फालसा (अम्लाटन) वाणपुष्प गौड़ देश (अमृतफल) नासपाती प्रसिद्ध (अम्लात) वाणपुप्प (अम्ला) इमली (अम्लातक) याणपुष्प (अम्लिका) इमली (अपत्र) करील (अक्षोट) अखरोट २४४ वैद्यककोश। . (अप) पानी (अम्ली) इमली (अङ्गारकर्कटी) वाटी, लीटी (अम्लवेतस) अमलवेत (अलीकमत्स्य) पानकासहिंड़ा (अम्लवृक्ष) विपास्निल (अम्लिकाफलपानक)इमलीकापना (अदिजत) शिलाजीत (अण्मज) शिलाजीन (अमृत) पानी (अन) अभ्रक (अम्भस्) पानी (अञ्जन) सफेद तथा काला सुरमा (अर्णस्) पानी (अश्मगर्भ) पन्ना (असिपत्र) ईख (अतसी) अलसी (अग्निशिख) केशर,कुसुम्भ,कुसुम (अतियव) जो जिसमें नोक नहीं (अग्नि) चीता, भिलावा होती है (अखित) अमलतास (अमृतवल्लरी) पोय (श्रा) (अल्पमारिप) चोराई (आर्दक) अदरक (अम्ललोणिका) अमलोनियों (आदिका) अदरक (अश्मन्तक) अमलोनियॉ, कच- (आरग्वध) अमलतास नार (आम्रगन्धा) कपूरहल्दी (अम्लपत्रक) अमलोनियाँ (आर) विडनोन (अरिमर्द) कसोदी (आफूक) अफीम (अगस्तिकुसुम) अगस्त्यकेफूल (आमण्ड) सफेद अरण्ड (अलाव) लौकी (आस्फोट) लालमदार (अमृताफल) परवल (आटरूप) अरुसा (अर्थान) ज़मीकन्द (आटरूपक) अरूसा (अण्डज) मछली, पक्षी (आस्फोता) विष्णुकान्ता (अज) वकरा (आत्मगता) केवाच (अजा) वकरी (आखकर्णी) बड़ीदत्यून,या,चघर- (अवि) भेंडा ण्डा,मूसाकर्णी (अनह) वैल (आखपणी) बड़ीदत्यून या घघरंडा (अर्थ) घोड़ा मसाकर्णी (अन्धस्) भात (आकाशवल्ली) अमरवेल (अन्न) भात (आनन्दा) बरसातीबेल वैद्यफकोश। २४५ (आर्तगल) नीलीकटसरैया (इन्द्रवारुणी) इन्द्रायन (आभापपदमोदिनी) वधूल (इन्ददारु) देवदार (आपीन) तुनि (इन्द्रयव) इन्द्र जौ (आम्र) आम (इन्द्राक्ष) ऋपभक (आम्रावन) अमावट, अमरस (इन्द) कुरैया (आम्रवीज) आमकी विजली (इज्जल) समुद्र फल (आम्रातक) अम्बार, अमरा (इन्दीवरी) सतावर (आम्रात) राजाम्र (इक्षुरक) तालमखाना (आयस्) लोहा (इक्षवालिका) तालमखाना (आर) पीतल (इन्दीवर) नीलकमल (आरकूट) पीतल (इंददु)अर्जुनकावृत्त,देवदारु,कुरैया (आल) हरताल (इरिमेद) दुर्गन्धित खयर (आढकी) सोरठी मट्टी, अरहर (इंगुद) गोंदी (आसुरी) राई (इंगुल) सिंगरफ (आचारी) हुरहुर (इंद्रनील) नीलम (आरुक) आलू (इक्ष्वाकु) कड़वी लौकी (आलुक) आलू, (इल्लस) हिलसा मछली (आलकी) अरुई (इक्ष) ईव (आमिप) मांस (उ) (आईकवर) अदबरा, मूंगकीडवकी (उपकुल्या) पीपल, पीपरि (आज्य) घी (उग्रगन्धा) अजवाइन, वच, कु. (आस्फीता) विष्णुकान्ता, सारिवा लिंजन (इ) (उपकुची) कलौंजी (इष्ट कापथक) खसके समान पीले (उपकञ्चिका) कालाजीरा रंग का एकतृण (उपकालिका) कालाजीरा (इक्षुगन्धिका) गोखुरू (उद्गारशोधन)कालाजीरा (डक्षरस) कास (उग्रा) बच (इक्ष्वालिका) कास (उत्पल) कूट (इक्षुगन्धा) कास, विदारीकन्द, (उपविपा) अतीस तालमखाना, गोखरू (उग्रगंध) लहसन २४६ वेद्याकोश। (उदधिसम्भव) पांगानोन (ऊर्ध्वपुष्प) गुड़हल (उलूखल) गूगुर (ऊपण) सोंठ, मिर्च, पीपलामूल (उपकुंचिका) छोटी इलायची (ऊपणा) पीपरि, चव्य (उत्कट) तज () (उदीच्य) सुगन्धवाला (अपभ) ऋपभक, चैल (उशीर) खस (अप्य) नीलेरंग का हिरन (उस्बूक) लालअरण्ड | (ऋष्यमोक्का) केवांच, ककहिया, (उत्तानपत्रक) लालअरण्ड महासतावर (उन्मत्त) धतूरा (उद्रेका) बकाइन (एलापर्णी) रासना (उदकीर्य) डहरकंजा (एडगज) पवांड़ (उच्चटा) स्वेत घोंघची (एला) वड़ी इलायची (उरच्छ) गन्धपटेर (पलवालुक) एलुवा (उढुंवरपर्णी) छोटी दत्यून, ज- (एलालू) एलालू माल गोटेका पेंड़ (एरका) मोथीनाम तृण विशेष (उपचित्रा) बड़ी दत्यून, वघरण्डा (एकष्ठीला) पादर (उदुम्बर) गूलर, तांबा (एरण्डफला) छोटीदत्यून, जमाल (उदेग) छोटी सुपारी गोटेका पेंड (उद्दाल) लसोड़ा, वनकोदव | (एकप्टील) बड़ी मौलसिरी (उमा) अलसी (पर्वारु) ककड़ी (उपोदिका) पोय (एए) काला हरिण (उरण) भेंडा (एड़क) भेंडा, ढुवा भेंडा (उरभ्र ) भेंडा (एरगी) अरंगी मछली (उक्षन) बेल (पे) (उदश्वित्) मट्ठा जिस में आधा (ऐन्द्री) इन्द्रायण, बड़ीदंती जल मिलाहो (ऐलेय) एलुआ (उदक) पानी (श्रो) (ऊ) (ओदन) भात (ऊबी) ऊबी (ओल) ज़मीकन्द (ऊर्णायु) भेड़ा (ओष्ठोपमफला) कुंदुरू वैद्यककोश। २४७ (कर्चर) कचूर (औ) (कटुपर्णी) चोक (औदुम्बर) तांवा (कमल) कायफल (औद्भिद) कचनोन, पानी जो (कर्पूरा) कपूर, हल्दी ज़मीनको खोदकर ग- (कटङ्कटेरी) दारुहल्दी हरे स्थानसे बड़ी धारा (कतक) विडनोन के साथ निकलता है (कर्पूर ) कपूर (क) (कस्तूरिका) कस्तूरी (क) पानी (कस्तूरी) कस्तूरी (कर्पफल) बहेड़ा (कपितैल) शिलारस (कलिदुम) बहेड़ा (कपि) शिलारस (कलियुगालय ) बहेड़ा (कटुभद) सोंठि, अदरक (कल्पक) कचूर (कणा) पीपल, पीपरि, सपेदजीरा (कपिला) रेणुकानाम सुगन्धित (कटुत्रिक) त्रिकटु वस्तुविशेप,कच्चीपीतल (कपिवल्ली) गजपीपल (कंकोल) शीतचीनी (कर्कश) कबीला, कसौंदी (कपित्थपत्र) एलुवा (कर्णिकार) अमलतास, धनवहेरा, (कपोतचरणा) नलिकानामसे उत्तर कर्णिकार देशमें प्रसिद्द सुग- (कटुका) कुटकी न्धित वस्तुविशेष (कटुकी) कुटकी (कट्वंग) सोनापाठा (कतिक्त) चिरायता (कटम्भर) सोनापाठा (क टुरोहिणी) कुटकी (कलशी) पिठवन् (कटुम्भरा) कुटकी, सोनापाठा (कण्टकारी) भटकटैया (कलिंग) इन्द्रजी (कंटालिका) भटकटैया (कंगुनी) मालकांगनी (कंटकिनी) भटकटैया (ककुन्दनी) मालकांगनी (कलिहारी) करिहारी (कटभी) मालकांगनी, कटभी (करवीर) कनैर (करहाट) मैनफल, भसीड (कनक) धतूरा (कटाख्या) काकड़ासींगी (कवच) पित्तपापड़ा (कर्कटशृङ्गी) काकड़ासींगी (करज) का २१८ वैद्यककोश। (करन) का (कपिचूत) गजदण्ड सहोरा (करञ्जी) डहरका (कपीतन) गजदण्ड सहोरा, सि- (करभजिका) डहरका रसा, अम्वार, अमरा (कपिकच्छु) केवांच कमण्डल) गजदण्ड सहोरा (कण्डुरा) केवांच (ककुम) अर्जुनकावृक्ष (कमा) रोहिणी (कण्टकी) खयर (कंकतिका) ककहिआ (कदर) पपड़िया खयर (कार)वांस (कन्छक) तुनि (कतृण) रोहिस (कठेरक) तुनि (कच्छुरा) यवासा (करीर) करील (कपाया)जवासा (कटुम्भर) कटभी (कदंव पुप्पिका) महामुण्डी (कएटकिफल)कटहल,वालमखीरा (कपिपिप्पली) लाललटजीरा (कदली) केला (कन्या) घिउकुवार, वांझखक्सा (कदलीकुसुम) केलेकाफूल (कठिल्लक) लाल गदहपूरना (कपिस्थ) कैथा (कटम्भरा) गन्धप्रसारणी (कपिप्रिय) कथा (कलघण्टिका) कालीसांव (कर्कन्धू)चेर (कवरी) हिंगुपत्री (करमर्द) करौंदा (कपोतका) ब्राह्मी (करमर्दिका) छोटा करोंदा (कर्कटी) सोनैया, ककड़ी । (करक) अनार (कमल) कमल (कतक) निर्मली (कर्णिका) कमलके भीतरका झु-(कर्पराल) अखरोट मका, सेवती गुलाव (कर्मरंग) कमरख (कदम्ब) कदम (कराटकादया) कृजा, सेमर (कलधौत) सोना (कलि) अशोक (कंसक) कांसा (कटसारिका) कटसरेया (कठिनी) खड़िया (कठिल्लक) कालीयबई, करेला, (कंकुप्ठ) मुर्दासिंग लाल गदहपुरैना (कलाय) मटर, केराव, (कन्दराल) गजदण्ड सहोरा (कटुकस्नेह) सरसों । (कनक) सोना है .

वैद्यककोश। २४६ .(कदम्बक) सरसों (कालस्थाली) पादरि (कंगु) काकुन (काष्ठपाटला) घण्टापादरि (कर्दमक) शालि, धान (काकपर्णी) वनमूंग (कलम) शालि, धान (काकमद्गा) वनमंग (कचट) जलचौराई (कांवोजी) वनउर्दी (कलम्बी) कलगी (कार्मुक) बकाइन (कलायशाक) मटरकाशाक (काञ्चनार) कचनार (कर्कारु) बहुतछोटा पेठा, कुम्हड़ा (काश्चनक) कचनार (कटुतुम्बी) कड़वीलोकी (कालिंग) कुरेया (कर्कशच्छद) परवल (काकचिची) लालधुंधची (कर्कोटकी) खेखसा (काकानान्ता) लालघुघची (कन्द)जमीकन्द (काकादनी) लालधुंधची (कन्दल) जमीकन्द (काकपीलु) लालघंघची' (कदलीकन्द) केराकन्द (काकवल्लरी) लालपुंघची, स्वर्ण- (कलविक) गौरैया वल्ली (कलध्वनि) पिंडुकी (काकायुः) स्वर्णवल्ली (कपोत) पिंडकी, कबूतर (कार्पास) कपात (कलापी) मोर (काश) कास (कलख) कबूतर (काशेक्षु) कास (कच्छप) कछुआ (कालमेपिका) कालानिसोथ (कमठ) कछुआ (कालदोला) नील (कविका) कवईमछली (कलकेशी) नील (कर्पूरनालिका) कर्पूरनालि, एक (काकेच) तालमखाना प्रकार से बनाई (काण्डेक्ष) तालमखाना "हुई मिठाई (काकमाची) मकोय (कान्ता) प्रियंगु (काकाहा) मकोय (काकपुच्छा) भटोरा (काकनासा) कौवाठोडी (काश्मरी) गंभारी (काकांगी) कौवाटोडी (काश्मीरी) गंभारी (काकतुण्डफला) कौवाटोडी (काश्मर्य) गंभारी (काकजंघा) मसी २५० वैद्यककोश। (कासर) भैंसा (काकतिक्का) मसी (काञ्चनक) शालि (काका) मसी (कासडेर) चौराई (कामुक) मोतिया (कालक) नारी, केरमुऑ (काकोदुम्बरिका) कठिया गूलर, (कालशाक) नारी, केरमुऑ कढूभर (कासमर्द) कसोंदी (कार्य) साल, साखू (कासारि) कसोंदी (कालस्कन्ध) दुर्गन्धित खयर,त- (कासमददल) कसोंदीकेपत्ते माल, तेंदू (कारवेक्ष) करेला (कान्तलक)तुनि (कारवेल्ली) करैली (कामाङ्ग) आम (कासभञ्जन) परवल (कामास) राजाम्र (कालकण्ठक) गौरैग (कालिंग) तरबूज (कालज) मुर्गा (कालिन्द) तरबूज (कालसन्ध) तेंदुआ (कादम्बरी) मद्य, शराब (कालतिन्दुक) कुचले का वृक्ष (कान्तारेव) केताराईख (कालपीलुक) कुचले का वृक्ष (कालानुसार्य) कालीयक, तगर, (काकेन्दु) कुचले का वृक्ष शिलाजीत (काफकर्कटी) सजूर, पिंडखजूर, (काश्मीर) केसर, पुष्करमूल, ग- छोहारा म्भारी (काक)काकमाची, काकोली, घु- (कार्तस्वर) सोना घची, काकजंघा, काक- कालायस) लोहा नासा, काकोदुम्बरिका, (कांस्य) कांसा फाकाक्ष्य (कापोताजन) सुरमा (कारखी) कालाजीरा, सौंफ, अ. (कान्तपापाण) चुम्बकपत्थर जमोद (काशीश) हीराकशीत (कालमेपी) मजीठ, चकुची, का. (काक्षी) सोरठीमट्टी लानिसोत (कालकुप्ठ) मुर्दासिंग (कालक्ट) एक प्रकारका विप, पी-(किंकिराट) यवल पलकेसमान रक्षकागोंद (फिकिरात) वचूल, किंकिरात, गो. . (कावन) सोना A . (कि) वैद्यककोश। २५१ है, धतूरा देशमें प्रसिद्धहै (कुवलय) कोकावेली (किंजल्क) कमलकीकेशर (कुमुद) कोकाबेली (किंशुक) पलाश (कुमुद्धती) जड़, दण्डी तथा पत्ते (किट्टी) कीटी, तपायेहुये लोहे का सहित कोकावेली मैल (कुमुदिनी) जड़, दण्डी तथा पत्ते (किणिही) लटजीरा सहित कोकावेली (कितव ) भटेउर, नेपालमें प्रसिद्ध (कुम्भिका) पुरइन (कुब्जक) कूजा (किलाटक) खिझरी, फटे हुये दूध (कुरण्टक) वाणपुष्प, गौड़देशप्र. को पकाकर जो छ- सिद्ध पीली कटसरैया नाते हैं (कुखक) लाल कटसरेचा (की) (कुन्द) कुन्द (कीटमाता) हंसपदी (कुलपुत्रक) दवना (कीलाल) पानी (कुठेरक) कालीवबई (कु) (कुन्दुरुकी) सलई (कुरुविन्द) मोथा (कुपील) कुचिलेकावृक्ष, परवल (कुकुर) कुकरौंधा (कलक) कुचिलेकावृक्ष, परवल (कटन्नट) केवटीमोथा, या जल (कुवल) बेर मोथा, सोनापाठा (कुहा) धेर (कुण्डली) गिलोय, कचनार (कुमुदवीज) कोकाबेलीकाफल (कुवेराक्षी) पाढरि (कुनटी) मनसिल, धनियां (कुली) बड़ी भटकटैया (कुलत्थ) कुलथी (कुद्दाल) कचनार (कुलस्थिका) कुलथी (कुकुटज) कुरैया (कुधान्य)क्षुद्रधान्य, काकुनआदि (कुश) कुश (कुसुम्भवीज) धेरै, कुसुमकेवीज (कुप्ठगन्धिनी) असगन्ध (कुकुट) शिरियारी, मुर्गा (कुनाशक) यवासा (कुप्ठहा) परवल (कुमारी) घिउकुवार (कुरंग) हरिण जिसका रंग कुछ (कुकुन्दर) कुकरौंधा लालहो (कुशेशय) कमल (कुलिङ्ग) गौरैया २५२ वैद्यककोश। 4 (कुण्डलिनी) जलेबी (कृष्णवृन्ता) गँभारी,पादर,वन उर्दी (कुल्माप) घुधुरी (कृष्णा) सेवतीगुलाव, पीपरि) (क) कालाजीरा, नील (कूटज) कुरैया (कृशरा)खिचरी (कूटशाल्मलि) कालासेमर (कृशोदरी) गोरीसांव (कूर्चशीर्पक) नारियल (कृष्णवर्ण) रीठा (कूप्माण्ड) कुम्हड़ा, पेठा (कृप्पसारा) सीसम, सिरसई (कूष्मांडी) बहुतछोटा पेठा (कूलक) परवल (केकी) मोर . (कूर्म) कछुआ (केतक) केवड़ा (कूर) भात केमुक) केमुआँ (कूष्माण्डवटी) कुम्हड़ौरी केशपर्णी) लाल लटजीरा, लह- चिचरा (कृकयाकु) मुर्गा (केशरजन)भंगरा (कृमिघ्न) वायुविडंग, हल्दी (केशराज)भंगरा (कृमिना) हल्दी (केशहंत्री) शमी (कृमिज) अगर (केशा) वकायन (कृमिजग्ध) अगर (कृमिकृत् ) कालीराई (कैरव) कोकावेली (कृष्णसर्पप) कालीराई (कैरविका) जड़, डण्डी और पत्ते (कृतमाल)अमिलतास सहित कोकावेली (कृतवेधना) तरोई (कैरविणीफल)कोकावेली का फल (कृमिवृक्ष) कोशम्भ, कोशान (केवीमुस्तक) केवटीमोथा, या (कृपण) मिर्च, पापड़ी या चकवत 'जलमोथा (कृष्णकाय) भंसा (कैपिका) कालानिसोध (कृष्णभेदा) कुटकी (को) (कृष्णफला) वकुची, सुवरासेम (कोलक) शीतलचीनी (कृपणवीज) तरबूज (कोशफल) शीतलचीनी (कृपणला ) सफेद घुघुची (कोवि) सुगन्धि (कृष्णपात्रफल) करोंदा (कोविदार) कचनार 7 वैद्यककोश। २५३ वृक्ष, मोक्ष (कोटि) कुरैया (क) (कोला) काला निसोथ (कथिता) कढ़ी (कोकिलाक्ष) तालमखाना (क्ष) (कोकनद) लाल कमल (क्षत्रवृक्ष) मुचुकुन्द (कोशाम्र) कोशम्भ (क्षयतरु) बेलिया पीपर (कोल)बेर (क्षव) काली राई (कोली)बेर (क्षवकृत) नकछिकनी (कोमलवल्कला) हरफारेवड़ी (क्षार) सोहागा, जवाखार, सज्जी (कोदव) कोदव (क्षारपत्र) बथुई (कोरदूप) कोदव (क्षारवृक्ष) पलाशके समान पहाडी- (कोलशिम्बि) सुवरासेम (कोशातकी) दोनों तरोई (क्षारश्रेष्ठ) पलाश, पलाश के स. (को) मान पहाड़ीवन घं. टापाटला (कौन्ती) रेणुका नाम एक सुग- (क्षीर) दूध (क्षीरशाक) खरिसा, बिना पकाये (क) फटाहुआ दूध (क्रकर) करील (क्षीखल्ली) विदारीकंद (क्रकचच्छद) केवड़ा (क्षीरशुक्ला) विदारीकंद (क्रमुक) सुपारी का वृक्ष, सहतूत, (क्षीरा) दूधी ब्रह्मदारु, पठानी लोध (क्षीरिका) खिन्नी,खीर (क्रव्य) मांस (क्षीरिणी) दूधी,क्षीरकाकोली,सफेद (बू) अनन्तमूल (क्रूरकर्मा) अर्कपुप्पी (क्षीरी) बरगद, वेलिया पीपर (कोडकसेरुक) नांगरमोथा (क्षुद्रभण्टाकी) बड़ी भटकटेया कोष्टी) विदारीकन्द (क्षुदा) बड़ी भटकटैया (क्रोटुविन्ना)पिठवन (पुरक) गोखुरू, तालमखाना,ति- लक, एक प्रकार का रांगा, (क्लीतक) नील बंग न्धित वस्तु २५४ वेद्यककोश। (सौ ). (क्षुरपत्र) डाभ (गन्धमूलिका) गन्धपलाशी नाम (शुर) तालमखाना सुगन्धित वस्तु क- (क्षुद्रवर्षाभू) लालगदहपूरना इमीरमें प्रसिद्ध (शुद्राम) कोशम्भ, कोशाम्र (गन्धारिका) गन्धपलाशी नाम (क्षुद्रपएस) बड़हल सुगन्धितवस्तु कश्मीर (क्षमा) अलसी में प्रसिद्ध (वजनिका) राई (गन्धारी) जवासा, गन्धपलाशी (क्षुधाभिजनक) काली राई (गन्धवधु) गन्धपलाशी नाम सुग. (क्षुद्रधान्य) काकुन इत्यादि न्धित वस्तु कश्मीर में (1) प्रसिद्ध (क्षेत्रतिका) सफेद भटकटैया (गन्धपलाशी) एकप्रकारकी सुग- (वेड) जहर न्धितवस्तु कश्मीर में प्रसिद्ध (क्षोद) सहत (गन्धप्रियंगु) प्रियंगुविशेष (गपहासक) भदेउर नेपालमें प्र- (खग) पक्षी, चिड़िया सिद्धहे (खटिका) खड़िया (गन्धकोकिला) सुगन्धित वस्तु- (खण्डक) खेसारी, अक्सा विशेप (खदरिका) लज्जावंती (गन्धमालती ) सुगन्धितवस्तु वि. (खदिर) खयर, कत्था शेष (खरत्वक्) खेतकी लज्जावती (गम्भारी) गंभारी (खर्परी) खपरिया, तूतियाभेद (गणिकारिका) अरणी (खरपर्णिनी) गावजवां (गर्भदा) सफेद भटकटैया (खरपुप्पा) पवई (गन्धर्वहस्तक) सफेद अरण्ड (खज) खरबूजा (गणरूप) सफेद मदार (खरमंजरी)लटजीरा, लहचिचड़ा (गर्भनुत्) करिहारी (खरस्कन्ध)चिरोंजी (गण्डारि) कचनार (खरस्पर्शा) पीली सोनैया (गण्डदूर्वा) गांडर (गण्डाली) गांडर, सरहटी (गन्धकटी) मरोरफली (गन्धान्ना) असगन्ध - वैद्यककोश। २५५ (गवाक्षी) इन्द्रायन (गवादनी) इन्द्रायन (गरनी) गिरई (गर्गर) गर्गरा मछली (गरागरी) सोनैया (गण्डीर) मंजीठ, गांडर (गरनाशिनी) पीली सोनैया (गा) (गन्धाट्या) सेवती गुलाब (गांगेरुकी) गुलसकरी (गणिका) जूही (गान्धारी)जवासा (गन्धफली) चम्पाकीकली, प्रियं- (गायत्री) खयर गु, मालकांगनी (गालोज्य) कमलगट्टा (गन्धपुप्प) अशोक (गाय) सोना (गन्धोत्कट) दवना (गरुत्मत) पन्ना (गजाशन) पीपर (गिरिकी) विष्णुकान्ता (गर्दभाण्ड) गजदण्ड, सहोरा (गिरिज) शिलाजीत, गेरू, सुन- (गजपादप) बेलिया पीपर हरी गेरू (गजभक्ष्या) सलई (गिरिमल्लिका) कुरैया (गर्भपातन) रीठा (गिरिसानुजा) त्रायमान (गर्भकर) पतौजिया (गुच्छक) भटोरा (गन्धक) गन्धक (गुडपुष्प) महुआ, बनमहुआ (गन्धपापाण) गन्धक (गुडफल) पीलू (गन्धिक) गन्धक (गुडमूल) ईख, गन्ना (गगन) अभ्रक (गुडा) सेहुंडा (गंधरस) वोल (गुड्ची) गुर्च, गिलोय (गरल)विप, जहर (गुन्द) गन्धपटेर, सरपत (गवेधु) गरहडुआ, मुनिअन्नविशेष, (गन्दफला) प्रियंगु, काकुन माधी सावां (गन्दमूला) मोथी एकतरहका तृण (गवेधुका) गरहडुआ, मुनिअन्न- (गुन्द्रा) नागरमोथा, प्रियंगु,मोथी विशेप, माघी सावां (गुवाक) सुपारी का पेड़ (गजकर्णा) हस्तिका (गुहा) सरिवन, पिठवन (गवय) घड़े शरीरवाला हिरन (गुह्यबीज) भूस्तृण (गलस्तनी) वकरी (4) (गंधर्व) घोड़ा (गैरिक) गेरू, सुनहरी गेरू ।

वैद्यककोश। ज नियां, चूक (चिर्भिट) ककड़ी, कचरी (छेलिका) बकरी (चीनाका) सावां (चीरितच्छदा)पालक (जतुका) पापड़ी, चकवत (जननी) पापड़ी, चकवत (चुका) इमली (जनी) पापड़ी, चकवत (चक्रिका)इमली, चाहेरा, अमलो- (जतुकृपण) पापड़ी, चकवत (जतुकृत) पापड़ी, चकवत (चुन) अमलवेत, विपाम्बिल, (जय) अरणी (चुम्बक) चुंबक पत्थर, चूक (जया) अरणी (चेतकी) हड़ (जयन्ती) अरणी (चेतिका) चमेली (जलवेत) जलवेत (जवुकप्रिय) भूस्तृण (छच्छिका) छाछ, बहुत जलयुत (जलकामुका) अर्कपुष्पी मक्खन निकाला हुआ (जलकारिका) लज्जावन्ती मट्ठा (जटा) भुइँ ऑवला (छत्रा) धनिया, भूस्तृण (जलपिप्पली) जलपीपरि (छत्रिका) सौंफ, सोवा (जम्बुक) केवड़ा (छर्दन) मैनफल (जपा) गुड़हल (बाग) करा (जन्तुफल) गूलर (कागल) चकरा (जघनेफला)कठियागूलर, कढूभर (छांगी) वकरी (जटी) पाकर (चिकनी) नक छिकनी (जलद) कुचिलेकारक्ष (चिकिका) नक छिकनी (जलजम्बुका) छोटीजामुन (छिन्न पुष्पक) तिलक (जलफल) सिंघाड़ा (चिन्नरहा) गिलोय, गुर्च (जम्बीर) जम्भीरीनींबू (चिन्ना) गिलोय, गुर्च (जम्भ) जम्भीरीनींबू (जिन्नोद्भवा) गिलोय, गुर्च (जम्भल )जम्भीरीनींबू (लिलिहिण्ट) पाताल गरुडी (जम्भीर) जम्भीरीनी (टुरिका) पालक (जलतण्डुलीय)जलचौराई (बलक) बकरा (जल) पानी वैद्यककोश। २५९ (जागली)नारियल (मिही) जिङ्गनी (जातरूप)सुवर्ण (झिहिनी) जितनी (जाति) चमेली () (जाती) चमेली (टङ्कारि) टंकारी (जाम्बूनद) सुवर्ण, सोना (टक) राजान (जालि)जारी, पिसेहुये कच्चेआममें (टकण) सोहागा राई नोन और भुनी हींग (दिण्टिणिका) जलशिरस मिलाके घोलकर बनाते हैं (टुएटुक) सोनापाठा (जालिनी) तरोई (ड) (जिगिनी) जिगनी (डिण्डिश) टिडा (जीमृत) सोनैया (डुहु) घड़हल (जीव) वकायन (डोडिका) करेरुआ (जीवन) पानी (डोदिका) करेरुआ (जीवनगण) अष्टवर्ग, जीवन्ती, (स) मुलेठी, वनमूंग, व. (तंत्रिका) गिलोय नउर्द (तकारी) अरणी (जीवनीयगण) अष्टवर्ग,जीवन्ती, (तरुण) सफेदअरण्ड मुलेठी, वनमूंग, (तपोधना) मुण्डी वनउर्द (तरुणी) सेवतीगुलाव (जीवनी) जीवन्ती, डोंडीनामका (तपोधन) दवना शाक (तपनीय) सोना (जीवन्ती) गिलोय, डोंडीनाम (तन्तुभ) सरसों शाक, बांदा (तण्डुलीवीज) चौराई (जीवनीया) जीवन्ती, डोंडीनाम (तण्डलीय) चौराई शाक (तण्डुलेरक) चौराई (जीवा) जीवन्ती, डॉडीनाम शाक (तक्रमांस) अवनी (तलित) तलाहुआ मांस (झप) मछली (तक्रपिण्ड) दही वा मद्रुमे दूधको (झपा) गुलसकरी फाड़कर कपड़े से चां- (झरिका)धुआंसकी रोटी ध के उसके जलको २६२ वैद्यककोश। गोखुरू, वेल, खंभारी, (दुःस्पर्श) जवासा, किवांच, भट- अरणी, पादरि, सोना कटया पाठा (दुरभिग्रह) जवासा (दशागुल) खरबूजा (दुरालभा) जवासा (दाडिम) अनार (दुरालम्भा) जवासा (दाडिमपुष्पक) लाल कंजा (दुर्गहा) लटजीरा (दान्त) दवना (दुग्धिका) दूधी (दार्विका) गावजयां (दुवा) जलशिरस (दासपुर) जल मोथा या केवटी (दुरारोहा)खजूर, पिएडखजूर,छुहारा मोथा (दुम्बक) दुवा भेंडा (दासी) मसी, नीली कटसरैया (दुग्धपिका) एक प्रकार की मि- (दालि) दाल ठाई जो इसी नाम (दाली) दाल से प्रसिद्ध है (दिविद) भात (दुग्ध) दूध (दिव्या) ब्रह्ममांडूकी (दूरजरन) वैदूर्य (दिव्योपधि) मैनसिल (दूर्वा) दूब (दीप्यक) अजवाइन, अजमोद (दीर्घ कील) ढेरा वा अंकोल (देवजग्ध) रोहिस (दीर्घच्छद) ईख गन्ना (दीर्घदण्ड) सफेद रेंट (देवताण्डी) सोनेया (दीर्घपत्र) डाभ (देवदाली) सोनेया (दीर्घपत्रक) कुचिले का वृक्ष (देवदुन्दुभी) तुलसी (दीर्घपत्रा) सरिवन, चेवुना (देवनिर्मिता) निलोय गुर्च (दीर्घपत्रिका) सफेद गदह पुरैना (देवी) सुगन्धितशाक विशेप,चि- (दीर्घमूल) जवासा शालिपर्णी नार, मरोरफली, वांझ (दीर्घवृत्त) सोना पाठा खेक्सा (दीर्घशूक) शालि (देत्या) मरोरफली (दीर्घाही) सरिवन (दृढपृष्ठक) कछुआ (दुप्प्रधर्पिपी) बड़ी मटकटेया (दृढफल) नारियल (दुःस्पर्शा) भटकटैया, केवांच (दृढरङ्गा)फिटकरी (दुपक) शालि (देवता) धतूरा वैद्यककोश। २६३ (द्राविड) कचूर -- .- (दृढारङ्गा) फिटकरी (धान्याकपानक) धनियां का पना (द्रवन्ती) बड़ी दत्यून वा वघरण्डा (धामार्गव) लाललंहचिचरा,दोनों तरोई (द्राक्षा) दाख, मुनका (धारा) गुर्च, क्षीर काकोली (द्रोणपुष्पी) गूमा | (धावनि) पिठवन (द्रोणा) गूमा (धावनी) भटकटैया '(द्रोणपुष्पीदल) गूमाका पत्ता (धीरा) गिलोय (दारदारु) भुइँसहा (धूमगन्धिक) रोहिस (दिजप्रिया) सोमलता (धूर्त) धतूर (दिजा) रेणुका मिर्च के समान (धूस्तूर) धतूर सुगन्धित वस्तु (धेनुदुग्ध) ककड़ी (ध) (ध्याम) रोहिस (धत्तूर) धतूर (ध्रुव) वरगद (धनहर) भटेउर (ध्वाक्षमाची) मकोय (धनुईक्ष) धामिन (धनुप्पद)चिरोंजी (नकुलेष्टा) नाई,रास्नाभेद (धन्वङ्ग) धामिन (नट) मैनफल, सोनापाठा, अशोक (धन्वयास) जवासा (नन्दिनी) चनसुर (धमन) नरकुल (नत) अगर (धमनी) उत्तर देशमें होनेवाला (नख) नखना नलिका नाम से प्रसिद्ध (नखी) छोटानखना : सुगंधित द्रव्य (नलद) खस, लामज्जकनाम ख- (धर्मपत्तन) मिर्च सके पीलेरंगका एक तृण (धव) धवई (नन्दिनी) रेणुकानाम सुगन्धित (धवल) अर्जुन वृक्ष, पिंडुकी (धातुकाशीश) हीरा कशीस (नलिका) उत्तरदेशमें प्रसिद्ध सु- (धातुद्रावक) सोहागा गन्धवालाके समान सु. (धात्रीपत्र) तालीस गन्धितवस्तु. (धाना) बहुरी, भुनीजी (नटी) नलिकानाम सुगन्धित व (धान्य) धनियां,शालि आदि अन्न वस्तु विशेष स्तु विशेष २६४ वैद्यककोश। (नली) नलिकानामसे उत्तरदेशमें (नागपुष्पी) नागदमन प्रसिद्ध सुगन्धित वस्तु (नागपत्रा) नागदमन विशेप (नास्केिर) नारियल (नलमाल) कला (नागरङ्ग) नारंगी (नम्रक) वेत (नारङ्ग) नारंगी (नल) नरकुल (नाग) सीसा, अभ्रक जो अग्निमें (नदीकान्ता) मसी छोड़ने से सर्प के समान (नमस्कारी) लज्जावन्ती फुकार शब्द करताहे, सर्प, (नकदमनी) वांझखेक्सा हाथी, भेंडा, सीसा, नाग- (नलिन) कमल केसर, नागवल्ली, नागदंती (नवमालिका) वसन्तीनेवारी. (नागगर्भ) सिन्दूर (नदीसर्ज) अर्जुनकावृक्ष (नागजिदिका) मैनसिल (नन्दिवृक्ष) तुनि, बेलियापीपर (नाडिक) नारी, करमुआँ (नन्दक) तुनि (नाडीक) पटुआ का शाक (नन्दितरु) धवई (नाडीशाक) पटुआ का शाक (नन्दी) फरेंदा (नारनवर्णक) गाजर (नवनीत) मक्खन (नादेय) नदी का जल (ना) (नि) (नागरमुस्तक) नागरमोथा (निशाचर) भटेउर (नादेयी) अरणी, छोटी जामुन, (निर्मध्या) नलिकानाम से उत्तर जलनेत देशमें प्रसिद्ध सुगन्धिः (नागिनी) पान, नाग पुप्पी (नागवल्लरी) पान (निदिग्धिका) भटकटेया (नादेय) जलवेत (निम्ब)नींव (नागवला) गुलसकरी (निम्बक) वकाइन (नारायणी) सतावर (निम्बतरु) जलनींव (नागपुप्पी) नागपुष्पी (निर्गण्डी) नीलेफूलका सम्भालू (नाडीकपालक)सरहटी (निकुञ्चक) जलवेत (नागारि) चांझखक्सा (नागदमनी) नागदमन (निकोचक) ढेरा, अंकोल " त वस्तु विशेष (निचुल) समुद्रफल वैद्यककोश। (निशोत्रा) निसोथसफेद (न्यंक) वारहसिंहा (निकुम्भ) छोटी दत्यून, जमाल- (पलाशी) एक प्रकार की सुग- गोटेकाड़ न्धित वस्तु कउमीर (निम्बुक) नींबू देशमें प्रसिद्ध है (निम्बूनींबू (पनाढय) तालीस (निम्बूक) नींबू (परिपेलव) केवटीमोथा,जलमोथा (निप्पाव) भटवांस (पर्पटी) पापड़ी, चकवत (निम्बूफलपानक) नींबूकापना (पत्रोर्ण) सोनापाठा । (नी) (पञ्चमूलवृहत् )वेल,खंभारी,पाढरि, (नीलपुष्प) भटोरा अरणी और सोना (नील) नीलीदूब । पाठा यह पांचो (नीली) नील (पलंकपा) गोखुरू, गुगुल, लास (नीलिनी) नील (पञ्चमूललघु.) सरिवन् , पिठवन् , (नीलिका) नील भटकटेया,बड़ीभट- (नीलपुप्पा) नील कटैया तथा गोसुरू (नीलीवृक्षाकृति) सरफोंका (नीप) कदम (पयस्विनी) जीवन्ती, डोंडी नाम (नीला) कूजा शाक, विदारीकंद (नील) नीलम (पञ्चांगुल) सफेद अरण्ड (नीलपुप्पी) अलसी (पर्पट) पित्तपापड़ा, पापड़ (नीवार) तिन्नी (पर्पटफ) पित्तपापड़ा (नीलाण्डक) नीलेरंगकाहिरन (परिव्याध) जलत, अमलतास (नीलकण्ठ) मोर (पयस्या) अर्कपुप्पी (नौर) पानी (पर्णिका)मुसा करणी (नेत्रोपमफल) बादाम (पद्म) कमल (नेमि)तिनिश (पकेह) कमल (नेपाली) घसन्तीनेवारी, मेनसिल (पद्मिनी)जड़, नाल और पत्ने स- (नेर) झरनेकापानी हित कमल (न्यग्रोध) बरगद. (पदाचारिणी) स्थल कमल (न्यग्रोधी) बरगद (पा) स्थल कसल, भारंगी ग्रह पांचो २६६ वैद्यककोश। (पर्ण) पताश , (पाटला) पाढरि (परिव्याध) कर्णिकार (पलल) मांस, तिलकुट ‘गुड़ (पर्णाश) ववई आदिसे युक्र कुटा हुआ (पलाश) गजदंड सहोरा, पलाश, तिल पत्ता, गन्धपलाशी (पक्षी) चिड़िया (पर्कटी) पाकर (पतत्री) चिड़िया (पर्करी) पाकर (परमान्न) खीर (पयस्) पानी, दूध (पनस)कटहल (पा) (पणस) कटहल (पाण्डुपुत्री) रेणुका नाम मिर्च के (पद्मकर्कटी) कमल गट्टा समानसुगन्धितवस्तु (पद्मवीज) कमल गट्टा विशेष (पद्माक्ष) कमल गट्टा (पाटलि) पाढरि (पद्मवीजाभ) मखाना (परापर) फालसा (पाण्ड) वनउर्द, हरफा रेवड़ी, पि- (परुप) फालसा डुकी (परूपक) फालसा, (पांशु) पित्तपापड़ा (पयम्भसादि) निर्मली (पारिभद्र) नींव, जलनीय, पारि- (पञ्चाम्ल)अमलवेत, चूकशाक,बड़ा जात, देवदारु जंभीरी नियू, विजौरा (पारिजातक) जलनीय ये पांच (पाण्डुरदम) कुरैया (पद्मराग) माणिक्य (पाग) पाढर (पवना) पुनेरा (पायचेलिका) पाढर (पलक्या) पालक (पाठिका) पाढर (पदृशाक) पटुआ का शाक (पालिन्दी) कालानिसोथ (पत्राम्ला)चूक (पारावत पदी)मसी,मालकांगनी (पर्णक) शिरियारी (पातालगरुड) पातालगरुडी (पटोलपत्र) परवल के पत्ते (पाशुपत) बड़ी मौलसिरी (पटोल) परवल (पादपोत्पल) कर्णिकार (पर्यकपट्टिका) सुबरासेन (पारीप) गजदंड सहोरा (पल)मांस (पानीयामलक) पानि आँवला , वैद्यककोश। २६७ (पानीयफल) मखाना जाता है (पारद) पारा (पिप्पल) पीपर (पांशकाशीश) हीराकशीस (पिण्याक) तिलकी खली (पार्वती) अलसी (पिशित) मांस (पाण्डुक) शालि, परवल (पिष्टिका) पिट्टी (पाण्डुफल) परवल (पिसली) अमलोनियां (पांशुल) लवा (पीतरोहिणी) गम्भारी (पातादी) मुर्गा (पीवरी) सरियन् , सतावर (पारावत) कबूतर (पीतपुष्पा) सहदेई, खेखसा (पाठिन) पदिन मछली (पीलुपी) चिनार, कुन्दुरू (पायस) खीर (पीतक) किंकिरात, गौड़देशमें (पानीय) पानी प्रसिद्ध (पाथस) पानी (पीतभदक) किंकिरात (पाक्य) विडनोन, कालानोन,ज- (पीतशालक) विजयसार वाखार (पीतसार) विजयसार (पिकवल्लभ) आम (पीतफेन) रीठा .(पिगला) कच्ची पीतल (पीतफलक) सहोरा (पिहा) वंशपत्री (पीतन) अम्बार, अमरा (पिञ्चट) बंग, लालरांगा (पील) पीलू (पिचुमन्द)नींव (पीतस्त्रक) गोमेद (पिचुमर्द) नींव (पीतपुप्प) कुम्हड़ा, तरोई (पिच्छा) सेमरका गोंद (पीनस्कन्ध) भंसा (पिच्छिल)लसोड़ा (पीतदारु) हल्दी, देवदारु, सरल (पिच्छिला) सीसव, सिरसई,सेमर (पुण्डरीक) सफेदकमल, शालि (पिण्ड) लोहा, घोल (पुत्रजननी)लक्ष्मणा, जिसमें या- (पिण्डपुप्प) अशोक लकों के समान लोटेर (पिण्डार) पिंडार लालचिव होते हैं (पित्तल)पीतल (पिनाक) अभ्रकजो अग्नि में छो- (पुण्डक) मोतिया इने से पर्त २ अलग हो (पुनर्नवा) सफेद गदहपुरेना (पुत्रजीव) पतौजिया २६८ वैद्यक्रकोश। गौका गाढ़ादूध - १ (पुप्पकाशीश) हीराकशीश (पेयूप) पेउस, जल्दकी व्यानी, (पुष्कर) कमल (पुष्पफल) कैथा, कुम्हड़ा (पोटगल) नरकुल, कास (पुप्परसोद्भव) सहत (पोतकी) पोय (पुष्पराग) पुखराज (पोलिका) लुचई, मैदेकी पारीक. (पुष्पांडक) शालि पूड़ी (पुस्तशिम्बी) दूसरीसेम (पी) (पुस्तकशिम्बिका) दूसरीसेम (पौण्डर्य) पुण्डेरी (पूग) सहतूत (पौण्डरीयक) पुण्डेरी (पूगी) सुपारीकावृक्ष (पौर) रोहित (पूगीफल) छोटीसुपारी (पौण्डरीक) लवा, पोंडा (पृतिक) कांटेदार कंजा (प्रकीर्य) कांटेदार कंजा (प्रतिकरज) कांटेदार कंजा (प्रतापनी) गन्धप्रसारिणी (पूरिका) पूड़ी (प्रतापस)सफेट मदार (पूर्णपारद) शिंगरफ (प्रतिविष्णुक) मुचकुन्द (पूरणी) सेमर (प्रतीक) परवल (पृथकपणी) पिथवन (प्रत्यक्पर्णी) वड़ी दत्यून चा बघा). (पृथ) हिंगुपत्री रंडा, लाल लहचि- (पृथुका) हिंगुपत्री चिरा (पृथुक) चिउरा (प्रत्यक्श्रेणी) बड़ी दत्यून वा वघ- (पृथुपलाशिका) गन्धपलाशी, सु- रंडा गन्धितवस्तु क- (प्रदीपन) एक प्रकारका विप जो) इमीरमें होती है रक्रवर्ण और अग्नि के (पृथुरोमा) मछली समानप्रभायुक्र होता है। (पृथशिम्ब) सोनापाठा (प्रपानक)पना (पृथशृङ्ग) दुम्बा डा (प्रपौण्डरीक) पुंडेरी (पृथ्वाका) हिंगुपत्री, कालाजीरा, (प्रवाल) मूंगा बड़ी इलायची (प्रमोदक) सांटी जो गर्भमें ही (भिपणी) पिटवन पक जाय (पृपत)चन्द्रविन्दयुक्र चिनला हिरन (प्रमोदिनी) जिंगनी -1 . -- वैद्यकंकोश। २६९ (फलेपुप्पा) गूमा (प्ररोही)वेलिया पीपर (प्रसारिणी) गन्धप्रसारिणी (फलेन्द्रा) फरेंदा (प्रसाधिका) तिनी (फलेरुहा) पादरि (प्रस्थपुप्प) मरुआ (फाणित) राय (प्रहाखल्ली) रोहिणी (फेनिका) वताशफेनी (प्रचीना) पादर (फेनिल) रीठा, वेर (प्राचीनामलक) पानि आंवला (प्राण) वोल (वधू) गन्धपलाशी नाम सुगन्धित (प्रावृपायिणी) केवाच वस्तु कश्मीर में प्रसिद्ध है, (प्रियक) कदम, विजयसार,माल सुगन्धित शाक विशेप कांगनी (वला) परियारा, गन्धप्रसारणी (प्रियाल)चिरोंजी (वहुमुता) सतावर (प्रियकरी) सफेद भटकटेया (वलदा) असगंध (प्रियंग)प्रियंगु,काकुन,मालकांगनी (वलभदा) त्रायमान (प्रोप्ठी) सहरी, शफरी (बहुपत्रा) भुइँ आंवला (लक्ष)पाकड़ (बहुफला) भुइँ आंवला (प्लव) केवटी मोथा वा जलमोथा (बहुवीर्या) भुइँ आंवला (प्लवग) मेढ़क (वन्ध्याकर्कोटकी) वांझसक्सा (प्लीहशत्रु) सरफोंका (बलामोटा) नागदमन (वन्धुजीवक) दुपहरिया (फंजी) भंगरेया (वन्धक) दुपहरिया (फपिञ्जक) मरुआ (बहुमञ्जरी) तुलसी (फणी) मरुआ (बहुपाद) वरगद (फल्गु) कठियागूलर, कटूंभर (बहुसवा) सलई (फलत्रिक) त्रिफला हड़, बहेरा, (बन्धकपुप्प) विजयसार आंवला (बहुशल्य) सयर (फलपूरक) विजारा (बहुवल्कल) भोजपत्र, चिरोंजी (फला) शमी । (बहुवार) लसोड़ा (फलाध्यक्ष) सिनी ।(बहुवारक) लसोड़ा (फलिनी) नियंग '(बलि) गन्धक २६८ वैद्यककोश। गौका गाढ़ादूध --- -- (पुष्पकाशीश) हीराकशीश (पेयूप) पेउस, जल्दकी व्यानी, (पुष्कर) कमल (पुष्पफल) कैथा, कुम्हड़ा (पोटगल) नरकुल, कास (पुष्परसोद्भव) सहत (पोतकी) पोय (पुष्पराग) पुखराज (पोलिका) लुचई, मैदेकी बारीक (पुष्पांडक) शालि पूड़ी (पुस्तशिम्बी) दूसरीसेम (पी) (पुस्तकशिम्बिका) दूसरीसेम (पोण्डर्य) पुण्डेरी (पूग) सहतूत (पौण्डरीयक) पुण्डेरी (पूगी) सुपारीकावृक्ष (पौर) रोहिस (पूगीफल) छोटीसुपारी (पौण्डरीक) लवा, पौंडा (पूतिक) कोटेदार कंजा प्रकीर्य) कांटेदार कंजा (पूर्तिकरज) कांटेदार कंजा (प्रतापनी) गन्धप्रसारिणी (पूरिका) पूड़ी (प्रतापस)सफेद मदार (पूर्णपारद)शिंगरफ (प्रतिविष्णुक) मुचुकुन्द (पूरणी) सेमर (प्रतीक) परवल (पृथकपी) पिथवन (प्रत्यक्पी) बड़ी दत्यून वा बघ. (पृथ) हिंगुपत्री रंडा, लाल लहचिः (पृथुका) हिंगुपत्री T चिरा (पृथक) चिउरा (मत्यश्रेणी) बड़ी दत्यून वा वघ- (पृथुपलाशिका) गन्धपलाशी,सु- रंडा गन्धितवस्तु क- (प्रदीपन) एक प्रकारका विप जो श्मीरमें होती है रक्तवर्ण और अग्नि के (पृथुरोमा) मछली समानप्रभायुक्त होता है। (पृथशिम्म) सोनापाठा (प्रपानक) पना (पृथशृङ्ग) दुम्बाभेडा (प्रपौण्डरीक) पुंडेरी (पृथ्वांका) हिंगपत्री, कालाजीरा, (प्रवाल) मूंगा बड़ी इलायची (प्रमोदक) सांठी जो गर्भमें हो (पृभिपणी) पिठवन पक जाय *. (प्रपत)चन्द्रविन्दयक चितला हिरन (प्रमोदिनी) जिंगनी ) .

वैद्यककोश। २६९ -- (प्ररोही)बेलिया पीपर (फलेपुप्पा) गूमा (प्रसारिणी) गन्धप्रसारिणी (फलेन्द्रा) फरेंदा (प्रसाधिका)तिन्नी (फलेरुहा) पादरि (प्रस्थपुष्प) मरुआ (फाणित) राव (प्रहारवल्ली) रोहिणी (फेनिका) वताशफेनी (प्रचीना) पादर (फेनिल) रीठा, वेर (प्राचीनामलक) पानि आंवला (व) (प्राण) वोल (वधू) गन्धपलाशी नाम सुगन्धित (प्रावृपायिणी) केवाच वस्तु कश्मीर में प्रसिद्ध है, (प्रियक) कदम, विजयसार, माल सुगन्धित शाक विशेप : कांगनी (वला) बरियारा, गन्धप्रसारणी। (प्रियाल)चिरौंजी (बहुमुता) सतावर (प्रियङ्करी) सफेद भटकटैया , (वलदा) असगंध (प्रियंगु)प्रियंगु,काकुन,मालकांगनी (वलभद्रा) त्रायमान (प्रोष्ठी) सहरी, शफरी (बहुपत्रा) भुइँ आंवला (सक्ष)पाकड़ (बहुफला) भुइँ आंवला (प्लव) केवटी मोथा वा जलमोथा (वहुवीर्या) भुइँ आंवला (प्लवग) मेढ़क (वन्ध्याकर्कोटकी) वांझखक्सा (प्लीहशत्रु) सरफोंका (बलामोटा) नागदमन (फ) (बन्धुजीवक) दुपहरिया (पंजी) भंगरैया (वन्धूक) दुपहरिया (फणिञ्जक) मरुआ (बहुमञ्जरी) तुलसी (फपी) मरुआ (बहुपाद) वरगद (फल्गु) कठियागूलर, कढूभर (बहुलवा) सलई (फलत्रिक) त्रिफला हड़, वहेरा, (वन्धूफपुप्प) विजयसार आंवला (बहुशल्य) खयर (फलपूरक) विजोरा (बहुवल्कल) भोजपत्र, चिरोंजी (फला) शमी (बहुवार) लसोड़ा (फलाध्यक्ष) खिन्नी (बहुवारक) लसोड़ा (फलिनी) प्रियंगु (बलि) गन्धक २७० वैद्यककोश। (भद्रमुअ) सर्पत (वलिरस) गन्धक (ब्रह्मरीति) कच्चीपीतले (वहीं) मोर (ब्रह्मवृक्ष) पलाश (वर्कर) बकरा (ब्रह्मसुवर्चला) एकतरह का हुरहुर (वलीबर्द) पैल (ब्राह्मी)ब्राह्मी (वलभदिका) उर्दकी रोटी (बाह्मणी) सुगन्धित शाक विशेष, (बलवल्लभा) मद्य, शराव भारंगी (वाणा)कटसरैया (भ) (बालजीवन) दूध (भद्रमुस्त) नागरमोथा (वालपत्र) खयर, कत्था, जवासा (मस्मगन्धा) रेणुका नाम सुग- (वालीक) वगेरा न्धित वस्तु विशेष (वालुका) बालू (भद्रपर्णी) गंभारी, गन्धप्रसारणी (वालेय) केवटी मोथा वा जल- (भक्षटक) गोखुरू मोथा (वीजक) विजयसार (भद्रा) गन्ध प्रसारणी (वीजगर्भ) परवल (भद्रतरणि) कूजा (वीजपूरक) विजोरा (भण्डी)सिरसा (वेढमिका) घेढ़ई (भण्डिल) सिरसा (बोधिद) पीपर (भण्डीर) सिरसा, चौराई (बोल) इसी नाम से प्रसिद्ध औ- (भस्मगर्भा) कपिलवर्णका सीसवे, सिरसई (वृहती) बड़ी भटकटैया, भटक- (भयकण्टका) घेर टैया | (भण्टाकी) बैंगन (बृहत्पुप्प) कूजा (भद) बैल (वृहत्फल) कुम्हड़ा (भकुर) भाकुर मछली (वृहल्लोणी) बड़ी लोनियां (भक्त) भात (ध्र) सीसा | (भाण्टिका) बैंगन (ब्रह्मजट) दवना (भार्गवी) नीली दूब (ब्रह्मदारु) सहतूत भिक्षु) मुंडी, तालमखाना (ब्रह्मपुत्र) कपिलवर्ण एक प्रकार (भिन्दी) कटसरैया कारिप, जहर (भिपड्माता) अरूसा, रूसा पधि वैद्यककोश। २७१ (भिस्सा) भात (भृगरज) भंगरा (भिस्साण्ड) भसीड (भृगराज)भंगरा (भीरु) सतावर (भृङ्गार) भंगरा (भुजङ्ग भुक्) मोर (भृगवान्त) सहत (भूकदम्बिका) महामुंडी (भ्रमरोत्सव) मोतिया (भूतजटा) जटामासी (भेक) मेढक (भूतवास) बहेड़ा (भूदरीभवा) मुसाकर्णी (महौपध) लहसन, सोंठि, विप (भूतावास) सहोरा (महोपधि) सोंठि, ब्रह्ममाण्डूकी (भूतवृक्षक) लसोड़ा (मरिच) मिर्च (भूतिक) रोहिस (मयूर) अजमोद, तूतिया, लट- (भूतीक) भूतृण, कतृण, जीरा चिरायता (मधुरा) सेवा (भनिम्ब)चिरायता (मन्या) मेथी (भूपदी) वेला (मत्स्यगन्धा)दूसरीहाऊवेर,मछेली, (भूमिखजूरिका)खजूर, पिंड खजूर, जलपीपरि, छोहारा (मंगल्या) वच, गोरोचन (भूमिच्छन्न)स्वेदजशाक जो पृथ्वी (मधुर,ग) जीवक गोबर काष्ठ औरतक्षा-(मणिच्चिदा) मेदा दिकोंपर उत्पन्न होताहै (महामेदा) महामेदा (भूमिरस) ईख गन्ना (मधुक) मुलहठी (भूमिवल्ली) भुइँ सेक्सा (मधुलिका) मुलहठी जो पानी में (भूमीसह) भुइँसहा पैदा होती है, चिनार (भूम्यामलकी) भुइँ ऑवरा (मत्स्यपित्ता) चिरायता (भूरिफेना) सेहुड (मत्स्यशकला) चिरायता (भूर्जचर्मी) भोजपत्र (मर्दन) मेनफल (भूर्जपत्र)भोजपत्र (मलक) मैनफल (भूस्तृप) भूतृण (मयूर पिदला) मेनफल (मृगुभवा) भारंगी (मजिप्पा) मंजीठ (भृग)तज,भंगरा,दालचीनी,भरा (मपा) मंजीठ ૨૭૨ * वैद्यककोश। । (मण्डूकपर्णी) मंजीठ, ब्रह्ममाण्डूकी (मर्कटी) डहरकंजा, केवांच, लट- (मलयज) सफेद चन्दन जीरा , (मस्तदारु) देवदारु (महावला) सहदेई (मधुप) तगर (मस्कर) वांस (महिपाक्ष) गूगुर (मत्स्याक्षी) गांडर, मछेछी (महिलाह्वया) प्रियंगु (महाशतावरी) सतावर बड़ी (मरुन्माला)सुगन्धितशाक विशेष (महोदरी) महासतावर (मधुपी.) गिलोय, गंभारी, नील, (मसूरविदला) काला निसोथ सुदर्शन (मकूलक) छोटी दत्यून, जमाल- (मंडली) गिलोय गोटेका पेंड़ (मधुरसा) गंभारी, चिनार, दाख (महाफला) बड़ी इन्द्रायन (महाकुसुमिका) गंभारी (महाश्रावणिका) महामुण्डी.. (मधुदती) पाढरि (मयूरक) लटजीरा, तूतिया (मण्डूकपर्ण) सोनापाठा | (मर्कट) लटजीरा (महती) बड़ी भटकटैया (मधुश्रेणी) चिनारं (महोप्ट्री) बड़ी भटकटैया (महामूल.) पातलगरुडी. (मधुरवा) जीवन्ती डोंडी नाम (मत्स्यादनी) मछेली, जलपीपरि शाक (महायोगेश्वरी) नागदमन (मंगल्या) जीवन्ती डोंडी नाम (मयूरशिखा.) मोरशिखा शाक, शमी, मसूर (मधुच्छदा) मोरशिखा (महासहा) चनउर्दी (महोत्पल) कमल (मधुरगण) अष्टवर्ग, मुलहठी,जी. (मकरन्द) कमलकारस वन्ती, वनमूंग और (महाकुमारी) सेवतीगुलाव (मधुगन्ध) मौलसिरी (मन्दार) मदार सफेद, जलनींव (महासहा) पूजा (महामोही) धतूरा (मल्लिका) वेला (मदन) धतूरा, मैनफल, मोम (मदयन्ती) वेला (महानिम्ब) बकाइन (मण्डक) मोतिया: (मधुशिग्रु) लाल सहिजन ' (महासह) वाणपुष्प, गोड्देश प्र- (मल्लिकापुप्प) कुरेया सिद्ध वनउर्द यह सब , वैद्यककोश। मेर ૨૭૩ (मरु) मरुआ (मनोगुप्ता) मैनसिल (मरुत्) मरुमा (मनोहा) मैनसिल (मरुखक) मरुआ, मरसा, मैनफल (मन-शिला) मैनसिल (मलयू) कठियागूलर, कढूभर (मणि) रत्न (मरिचपत्रक) शालभेद एक तरह (पाणिवर) हीरा का साखू (मरकत) पन्ना (महेरुणा) सलई (मंजुमणि ) पुखराज (मरुभूरुह) करील (मधली) छोटागेहूं जो मधदेशमें (मधुरेणु) कटभी होताहै (मधुदत) आम (महागोधूम) बडागेहूं जो पश्चिम (मईटाम्र) अम्बार, अमरा देशमें होताहे (महोन्नत) ताड़ (महामाप) बोंडा, लोविआ (मर्कटतिन्दुक) कुचलेकावृक्ष (मकप्ट) मोठ, मोथी (महाजम्बू) फरेंदा (मकुप्उक) मोठ, मोथी (महाफला) फरेंदा, कड़वीलौकी, (मंगल्यक) मसर, मसुढ़ी धियातरोई (मसूर) मसूर, मसुढ़ी (मधुपुप्प) महुआ, वनमहुआ (मसूरिका) मसूर, मसुदी (मधुष्टील) महुआ, वनमहुआ (महाशालि) शालि (मधुरव) महुअा, बनमहुआ (महिपमस्तक) शालि (मधूक) महुआ, वनमहुआ (महापण्ठिक) सांठी (मधूलक) जलमें होनेवाला महुआ (मन्त्री) हुरहुर (मधुर) सधुककड़ी, विजौराभेद (महाकोशातकी) घियातरोई (मधुकर्कटी) मधुरुकडी, बिजौरा (महाजाली) खेखसा भेद (मरुतम्भव) मूली (महापत्र) मानकेच (मण्डूर) कीटी, तपायेहुये लोहेका (मत्स्य) मछली (मयूर) मोर मण्डकी) मेढ़क (मधुमाक्षिक) सोनामरखी (महिप) भैंसा (महारस) पारा (महाशफर) पपता मछली 4 . , (महारजत) सोना मल (मधुधातु) सोनामखी २७४ वैद्यरकोश। (मंगुरी) मंगुरी मछली (मालती) चमेली (मण्डा) मंडा लोई (माधवी) मोतिया (मट) माठ बालूसाही (माध्य) कुन्द (मस्तु) दही का तोड़ (माध्याहिक) दुपहरिया (मथित) मलाई रहित जलयुक्न मट्ठा (मारुत्तक) मरुआ (मद्य) शराब (मांगल्य) रीठा (गदिग) शरार (माकन्द)आम (मक्षिकावान्त) सहत (माखान) मखाना (मधु) पुप्परस, मद्य (मातुलंग) विजोरा (मदनक) सहत (माक्षिकधात) सोनामक्खी (मधूच्छिष्ट) सहत (माणिक्य) माणिक्य (मधूपित) सहत (मालवा) पोय (मधुशेप) सहत (मारिप) मरसा (मध्वाधार) सहत (मार्प) मरसा (मयन) सहत (मानक)मानकेचू (मधतृण) ईख,गन्ना (मांस)मांस (मत्स्यण्डी) खाड़ (माहेयी) गौ (मधूलिक) मरोरफली, मलेहठी (मांसशृंगाटक) एकप्रकारसे चना- यागया मांस (मार्जारंगंधिका) वनमंग (माक्षिक) सहत (मापपी) बनउर्दी (माध्वीक) सहत (मातल) धतूरा (मिरा) मद्य, शराब (मातुलपुत्रक) धतूरे का फल (मिश्रक) एक प्रकारका रांगा बंग (मांसरोहिणी) रोहिणी (मीन) मछली (मालातृणक) भूस्तृण (मार्कव) भंगरा (मुस्त) मोथा (मांगल्यकसुमा) शङ्खपप्पी (मुस्तक) मोथा (माण्डुकी) ब्रह्ममाण्डुकी (मुरा) मरोरफली (मार्कण्डिका) भुइखेक्सा (मुष्कक) घण्टा पारि (मार्कण्डी) भुइँखेक्सा (मुद्पी) वनमूंग (मालर) वेल वैद्यककोश। २७५ (मुष्टि) यकाइन (मृदुच्छदा)वजूर, पिंड खजूर, छो- (मुञ्ज) मूंज हारा (मुजातक)मुंज (मृदुच्छद) कुकुरोधा (मुशली) मुसली (मृदुपप्प) सिरसा (मुण्डी) मुण्डी, हिरन जिसकेसी- (मृदुरेचनी) भुइँ टेक्सा ग न हों (मृदुला) सुलेमानी पिंड खजूर (मुण्डतिका) मुण्डी (मृद्धीका) मुनका (मुनवन्धना) वरसाती वेल (मुचकुन्द) मुचुकुन्द (मेघनाद) चौराई, मोर (मुनिद्रुम) अगस्त्य (मेघराव) मोर (मुनिपुप्प) अगस्त्य (मेढ) भेंडा (मुनिपुत्र) दवना (मेड) भेंडा (मुखप्रिय) नारंगी (मेप) भेड़ा (मुष्टिप्रमाण) सेव (मेदः पुच्च) दुवा भेड़ा (मुक्ता) मोती (मेदोगला) खेत की लज्जावन्ती (मुक्ताफल) मोती (मेपवल्ली) मेढ़ा सींगी (मकप्टक) मोठ, मोथी (मेपशृंगी) मेढ़ा सींगी (मकन्दक) साठी (भैरेय) शराब (मुनिनिर्मित) टिंडा (मो) (मुद्गमोदक) मूंग के लेडू (मोक्षक) घण्टापाढरि, पलाश के (मूर्वा) चिनार, मरोरफली, कुंदुरू समान पहाड़ी क्ष (मूलकपोतिका) मूली (मोचक) सहिजन (मृक्षण) मक्खन (मोरटा) चिनार (मृगाक्षी) बड़ी इन्द्रायन (मोहिनी) वटपत्री (मृगादनी) बड़ी इन्द्रायन (मोचा) सेमर, केला (मृगैर्वारु) बड़ी इन्द्रायन (मोचनिर्यास ) सेमर का गोंद (मृणाल) कमल की डंडी (मोचरस ) सेमर का गोंद (मृणालमूल) भसींड़ (मोचालाव) सेमर का गोंद (मृतालक) सोरठी मट्टी (मोक्ष)पलाश के समान पहाड़ीवृक्ष • (मृत्स्ना) सोरठी मट्टी (मोचिका) मोचिका मछली २७६ वैद्यककोश। न्दन, (मोस्ट) फटे हुये दूध का पानी (स्नफला) स्वर्णवल्ली, कुंदुरू (मौलिक) मोती (रसा) पाढर, सलाई,रास्ना (म्लेच्छ) सिंगरफ (रजनी) नील (म्लेच्छमुख) तांबा (रक्तपुप्पा) लालगदहपूरना, सि- न्दूरिया, सेमर (यवफल) कुरैया, बांस (रक्तपारी) लज्जावन्ती. (यज्ञभूपण) कुश (रविप्रीता) हुरहुर (यवास) जवाता (रक्त) दुपहरिया (यना) गूलर (रक्तवीजा) सिंदूरिया (यज्ञिय) खयर, पलाश (रतफल) बरगद (यष्टीपुप्प) पतौजिया (रक्तसार) खयर, कत्था, लालच. (यसद) जस्ता पतंग (यव) जौ, जिसकी नोक सफेद (रक्तबीज) रीठा होतीहै (रक्तपुष्पक) पलाश (यवशाक) वथुई (स्थद्) तिनिश (यवानीशाक) अजवाइनका शाक (रसाल) आम (यमवाहन) भंसा (रंजत) रूपा, चांदी (यामुन) सुरमा (रविप्रिय) तांचा (यास) जवासा (रक्तरेणु) सिंदूर (युगपत्रक) कचनार (रसधातु) मांस, द्रवपदार्थ, ईख (यूथिका) जूही का रस, पारा,मधुरा- (योगीश्वरी) बाँझखेक्सा दिक छः, बालरोग, (योगेष्ट) सीसा (र) (रसेन्द्र) मांस, द्रवपदार्थ, ईखका (रजना) पापड़ी, चकवत रस, पारा,मधुरादिक छ, (रसायनी)गिलोय वालरोग, विप, जल (रक्तपुप्प) लालमदार (स) मांस, द्रवपदार्थ, ईखकारस, (रम्यक) यफाइन् पारा, मधुरादिकछः, बाल- (रक्तिका) लालघोंघची (स्थीत) घेत (रणदा)फिटकरी विप, जल , रोग, विप, जल वैद्यककोश। २७७ (रक्तवर्द्धन) क्वूतर की सुगंधित वस्तु (रेतजा) वालू (रक्तधातु) गेरू, सुनहरी गेरू (राजीफल) परवल (रसक) तूतियाभेद, खपरिया (राजेय) परवल (रङ्गदायक) मुर्दासिग (राजकसेरुक) कसेरू (रत्र) रत्न (रीति) पीतल (रक्तशालि) शालि, धान (रुचक)विजौरानींबू,कालानिमक (स्वू ) लालरेड़ (रजस्वल) भैंसा (स्वक) सफेद तथा लालरेंड (रसाला) सिखरन (सहा) नीलीव,मांस रोहिणी (रा) (रूप्य) चांदी (राजपुत्री) रेणुका नाम मिर्च के (रेचनी) निसोथ सफेद, वटपत्री समान सुगन्धित वस्तु (रेणुका) मिर्च के समान एकतरह विशेष (राष्ट्रिका) वड़ी भटस्टैया (राजवला) गन्धप्रसारणी (रोगाह्वय) कूट (रामदूतिका) नागपुष्पी (रोचन) कवीला, कालासेमर गो. (राजीन) कमल रोचन (राजपुत्रिका) चमेली (रोचना) गोरोचन, हल्दी (राजपुत्रक) राजाम्र (रोचनी) चूक (राजाम्र) राजाम्र (रोऊ) हरिन (राजजम्बू ) फरेंदा (रोटिका) रोटी (राजादन)चिरोजी, खिन्नी (रोदिनी) जवासा (राजन्या) खिन्नी (रोमक) सांभरनोन (राजरीति) कच्ची पीतल (रोमशफल) टिडा (राजापत) रेवटी (रोमशुफ) कुकुरौंधा (राजमाप) बोंडा, लोबिआ (रोहिणी) हड, कुटकी (राजशिम्मि) भटवास (रोहित) रोहू मछली जिसके सब (राजिका) राई अग लाल हों और (राजी) राई काली हो (राजकोगातकी) तरोई (रोहितक) लालकजा (गजिमकला) तरोई (रोहिप) रोहित वेद्यककोश। . एक तृण (रोही) लालकंजा (लाक्षा) सेवती गुलाब (रोहीतक) लालकंजा (लांगली) करियारी,केयांच, जल. (ल) पीपरि (लता) प्रियंगु, सुगन्धित शाक (लाजा) खील, धानके लावा विशेष, गोरी सांव, (लामज्जक) खसके समान एकप्र- (लव) खसके समान पीले रंगका कार का पीला तृण (लिकुच) बडहल (लघु) खसके ममान पीले रंगका (लुलाय) भैसा एक तृण, सुगन्धित शाक (लेखनी) ग्वड़िया विशेष (लेखपत्र) ताद (लकोपिका) सुगन्धितशाक वि. (लोचमस्तक) अजमोद शेप (लोणा) छोटी लोनियां (लक्ष्मणा) सफेद भटकटेया (लोणिका) लोनियां, चूकका शाक (लगुड) लालफनेर (लोणी) छोटी लोनिया (लक्ष्मणा) इसी नामसे प्रसिद्ध है (लोध्र) लोध इसमें बालकों के समान (लोधपुप्पक) शालि छोटेलाल चिह्नहोतेहैं (लोमकर्ण) खरगोश (लघुदन्ती) दत्यून, जामालगोटे (लोमशपर्णी) वन उर्दी का पेड़ (लोमशा) वच (लज्जाल) लज्जावन्ती (लोह) अगर, लोहा (लघुपुप्पा)सुवर्णकेतकी एक तरह (लोहकर्पक) चुंबक पत्थर (लोहित) माणिक्य (लक्ष्मी) शमी (लोहितपुष्पक) अनार (लकुच) बड़हल (लोहसिहानिका) कीटी,तपायेहुये (लवली) हरफारेवड़ी (लघुमूलक) मूली, मुरई (क) (लजाशूक) मसीड़ (वयस्था) हड़, गिलोय (लम्बकर्ण) खरगोश (वरा) त्रिफला अथवा हड़,बहेड़ा, (लप्सिका) लप्सी आमला (लक्ष्मी) ऋद्धि, वृद्धि, शमी (वशिर) गजपीपल, पांगानोन का केवडा लोहे का मल चैद्यककोश। २७६ (वर्णपुप्प) वाणपुप्प (वचा) वच (वकुल)मौलसिरी (वहिज्वाला) धवई (वक) बड़ी मौलसिरी (वर्हिवह ) कुकुरौंधा (वसु) बड़ी मौलसिरी (चत्सादनी) गिलोय (वनशृंगाट) गोरघुरू (बद्नसेन) अगस्त्य (वर्धमान) सफेद अरण्ड (वर्वरी) ववई (वसुक) राफेद मदार, खारीनोन (वटपत्र) सफेद बबई (वज्री) सेहुंडा (क्ट) बरगद (वज्रहम) सेहुंडा (वनस्पति) बरगद,वेलिया पीपर (वह्निचक्रा) करिहारी (वल्लकी) सलई (वरतिक्त) पित्तपापड़ा (वव्बूल) वधूल (वत्सक) कुरैया (वरण) वरना (वझुल) वेत, अशोक, तिनिश (वरुण) वरना (वस्तगन्धाकति) लक्ष्मणा इस में (बरदारु) भुसहा वालकोंके समा- (बदरी) वेर न छोटे २ लाल (बदर) वेर, सेव चिह्न होते हैं (वद्ग) लाल रांगा (वंश) वांस (वन) सीसा (बज्र) अभ्रक जो अग्नि में डालने (बदरा) विदारीकन्द,चाराहीकन्द. से वनकी तरहवनारहे वि. गड़े नहीं, हीरा (वरी) सतावर (वराह) मुर्दासिंग (वरदा) असगंध, हुरहुर, गेंठी (वत्सनाभ) मीठा तेलिया, एकप्र. (वरतिक्तिका) पाढर कार का विप (वशिर) लाल लटजीरा, गजपीपल (बल्लक) भटवांस (वांगी) दरसिंगार (वर्चल) मटर, केराव (वस्टा) चरै, कुसुम्भ के बीज (वरष्ट्रिका) यर, कुसुम्भ के बीज (वर्तक) घटेर (वर्हि) कुश हुरहुर, कालानोन . समुद्र का नोन (वनम) मोट, मोथी (वन्दा) यांदा (चटपत्री) वटपत्री (वंशपत्री) वंशपनी २८० वैद्यककोश। (वर्त्तका) एक प्रकार का बटेर गोटे का पेंड़ (वर्तिका) वटेर (वारुणी) इन्द्रायन (वर्ति) वगेरा (वाहिका) मछेछी, केशर, हींग (वस्त) बकरा (वारिपर्णी) पुरइन् (वर्मि) वांव मछली (वासन्ती) मोतिया (वटका) वडाबरा (वातहर) पलाश (वटिका) वरी (वारणा)फेला (वन) पानी (वानप्रस्थ) महुआ,वनमहुआ (वस्टीवान्त) सहत (वातवैरी) बादाम (वारिद) मोथा (वाताद) बादाम (वार्ताकी) बडी भटकटैया (वाचस्पतिवल्लभ) पुग्वराज (वातारि) सफेद अरण्ड, लाल- (वास्तुक) वथुई अरण्ड (वास्तूक) वथुई (वासक) अरूसा (वाप्पक) मरसा (बासिका) अरूसा (वास्तुकाकारा) पालक (वाजी) घोडा (वार्ताक) वैगन (वासा) अरूसा (बाराही) वाराहीकन्द (वाजिदन्ता) अरूसा 1(वातीक) वगेरा (वायसी) डहरकंजा, मकोय (वाह) घोड़ा (वानीर) वेत | (वार) पानी (वाट्यालिका) वरियारा (वारि) सुगन्धवाला (वाट्या) बरियारा (वारुणी) मद्य, शराव (वाट्यालक) बरियारा (वाण) सरपत, मूंज (विपक्सेना) प्रियंग (वाराहीकन्द) गेठी (विदुमलता) नलिका नाम उत्तर (वाराहवदना) वाराहीकन्द, या, गैठी न्धि वस्तु विशेष (वाजिनामा) असगन्ध (विशल्या) गिलोय, छोटी दन्ती, (वाराहकर्णी) असगन्ध करिहारी (वाराहांगी) छोटी दत्यून, जमाल (दिल्ल) वेल (वि) देश में प्रसिद्ध सुग- वैद्यककोश। २८१ (विदारिगन्धा) सरिवन् (विदुम) मंगा (विकीर्णक) लाल मदार (विप) जहर (विमला) सेहुंडभेद (विपन्न) चौराई (विदुला) सेहुंडभेद (विम्बी) कुंदुरू (विशल्या) करिहारी (विम्बिका) कुंदुरू (विपमुष्टिक) बकाइन् (विपमुष्टि) करेरुआ (विष्णुकान्ता) विष्णु कान्ता (वित्र)मूली (विकसा) रोहिणी (विसार) मछली (विदुल) वेत | (विलेशय) खरगोश (विदारी) विदारीकन्द, गेंठी (वि) पक्षी । (विशाला) बड़ी इन्द्रायन (विकिर) पक्षी (विपाणी) मेढ़ासींगी | (विष्किर) पक्षी .(विक्षीरिणी) दूधी (विहग) पक्षी (विपकण्टकिनी) बांझखेक्सा (विहङ्ग) पक्षी (विपनी) पीली सोनैया (विहङ्गम) पक्षी (विपापहा) नागदमन (विश्वा) सोंठ, अतीस (विसप्रसून) कमल (बी) (विस) कमल की डंडी (वीखती) रोहिणी (विमुक्त) मोतिया (वीरतरु) वरवेल, अर्जुन, वीरण, (विनीत) दवना सरपत (विद् खदिर) दुर्गन्धित खयर (वीर) अर्जुनकावृक्ष, वीरण (विशालत्वक) छितवन (वीरवृक्ष) अर्जुनकावृक्ष (विपमच्छद) छितवन (वीरसेन) आलू (विल्ल) वेल (वेणी)सोनैया (विल्वकर्कटी) वेलका कच्चा फल (वेण) वांस (विल्वपेशिका) वेलका कच्चा फल (वेणपनी) वंशपत्री (विपतिन्दुक) कुचले का वृष (वेतस) घेत (विपमा) वेर (वेधमुख्य) कचूर (विककत) कँटाई (वेधमुख्या) कस्तुरी (वितुन्नक) तूतिया, धनियां (वेल्ल) वायविडंग वेद्यककोश। २८२ (वेल्लज) मिर्च (शक्रपुप्पी) करिहारी (वेल्लन्तर) बरवेल, वीरतरु (शतकुम्भ) सफेद कनैर (वेशनवटिका) पकौड़ी (शकशाखी) करेया (वैजयन्तिका) अरणी (शतपर्वा) वांस, कलगी, दूब, वच (वैदल) मुंगआदि शिंवीधान्य (शतफली) वांस (वैदूर्य) वैदूर्य (शर) सरपत (वैश्रवणावास)वरगद (शरी) मोधीतृण विशेष (वैसारिण) मछली (शतपर्विका) नीलीदूब (वृक्षक) कुरैया (शप्प) नीलीव (वृक्षभक्ष्या) बांदा (शतवल्ली) नीलीदूव (वृक्षरुहा) वांदा (शतवीर्या) सफेदव, सतावर (वृक्षादनी) बांदा (शकुलाक्षक) गांडर (वृक्षाम्ल) विपांविल (शतावरी) सतावर (वृत्तकोश) सोनेया (शतपदी) सतावर (वृत्तपुष्प) कदम (शतमूली) महासतावर (वृत्तफल) लाल लटजीरा, लह- (शम्बरी) बड़ी दत्यून, बघरण्डा चिचरा (शरपुड) शरफोंका (वृत्ता) रोहिणी (शणपुप्पी) सनपुप्पी (वृन्ताक) बैंगन (शणपुप्पसमाकृति) सनपुप्पी (वृप) अरूसा, रूसा, वेल (शइपुप्पी) शपुप्पी (वृपकेतु) लाल गदहपुरैना (शद्वाहा) शहपुप्पी (पभ) पैल (शमीपत्रा) लज्जावन्ती (पा) बड़ी दत्यून, बघरण्डा (शकुलादनी) जलपीपरि, कुटकी (वृष्णि) भंडा (शतपत्र) कमल (व्याघ्रपुच्छ) लाल अरण्ड (शतपत्री) सेनतीगुलाब (व्याघी) मटकटैया (शस्यशम्बर) शाल, सासू (शल्लकी)सलाई (शटी) कचूर, गन्धपलाशी, एकप्र- (शत्रुफला) शमी कार की सुगन्धित वस्तु (शमी) शमी कश्मीर देशमें प्रसिद्ध है । (शमीर) छोटी शमी (स) वैद्यककोश। २८३ शातकुम्भ) सोना (शतवेधि) अमलवेत (शारद) छितवन (शस्त्रक) लोहा (शाण्डिल्य) वेल (शर्करा) बालू, चीनी (शमीज) शिम्बीधान्य, मूंगआदिक (शाकराद) बथुई (शणपुप्पिका) अरहर (शाल्मलीपुष्पशाक) सेमरके फूल (शकुनाहत) शालि का शाक (शतपुप्पा) सांठी (शालमर्कटक) मूली, मुरई (शफरी) अमलोनियॉ (शालेय) मूली, मुरई (शतवेधिनी) चूक (शि) (शहधरा) हुरहुर (शिवप्रिय) धतूरा (शकुली) मछली (शिग्रु) सहिजन (शश) खरगोश (शिवि) मोथी नाम तृण विशेप (शल्यक) साही (शिलाटिका) लाल गदहपूरना (शकुनि) पक्षी (शिवा) भुइँ आंवला, शमी (शकुली) सौरीमछली, सोहारी (शिवमल्ली) बड़ी मौलसिरी (शर्करोदक) शर्वत (शिरीप) सिरसा (शिशपा) सीस, सिरसई (शालपर्णिका) मरोरफली (शिरीपिका) जल शिरस (शालपणी) सरिवन् (शिखिग्रीव) तूतिया (शाकश्रेष्ठा) जीवन्ती,डोंडी नाम (शिलाजतु) शिलाजीत शाक (शिवाय)पारा (शातला) सेहुंडभेद (शिववीर्य) पारा (शारिवा) कालीसाव (शिला) मेनसिल,शिलाजीत,गेरू (शारदी) जलपीपरि, सारिवा (शिंवीज) शिंवीधान्य मूंग आदिक (शालूक) कमलकीजड़, भसींड़ (शिवीभव) शिंवीधान्य मूंग आ- (शारदा) स्थलकमल दिक (शाल)शाल, साख, शालभेद (शितिवर) सिरिआरी (शाल्मलि) सेमर (शितिवार) सिरिआरी (शाल्मलीवेष्टक) सेमरकागोंद (शिखी) सिरिआरी (शाखोट) सहोरा (शिग्रपुप्प) सहिजन का फूल - वैद्यककोश। २८४ भूनागया मांस (शिम्बि) सेम (शूकशिम्बी) केवांच (शिम्बी) सेम (शून्यमध्य) नरकुल (शिलीन्धक) स्वेदजशाक जो पृ- (शूलनी) तुलसी थ्वी गोवर काष्ठ और (शूली) खरगोश वृक्षादिकों पर उत्पन्न (शूल्य) लोह शलाकामें लपेट कर होताहै (शिखण्डिक) मुर्गा (शिखण्डी) मोर (शेफाली) नीले फूल का संभालू (शिखावल)मोर (शेलु) लसोड़ा (शिखी) मोर (शैलधातुज) शिलाजीत (शीघ्रा) छोटी दत्यून, जमाल गोटे (शैलनिर्यास) शिलाजीत का वृक्ष (शैलप) वेल (शीत) लसोड़ा (शैवल) सेवार (शीतफल) पीलू (शैवाल) सेवार (शीतभीत) वेला (शोणपुप्पक) कचनार (शीत शिव) सेंधानमक, सौंफ (शोणरत्न) माणिक्य (शीर्ण) कुकुरौंधा (शोधनी) सफेद तथा लाल गदह (शुकच्छद) कुकुरौंधा पुरैना (शुकतरु) सिरसा (शोभाञ्जन) सहिजन (शुकतुण्डक) पीलेरंगका सिंगरफ (शोपण) सोना पाठा (शुकनास) सोना पाठा (शौक्तिक) मोती (शुकप्रिय) सिरसा (शौण्डी) पीपरि (शुकपुप्प) कुकुरोधा (Gट्रवेर) सोंठ, अदरख (शुकवह ) कुकुरौंधा (शृगवेरामूलक) गन्धपटेर (शुक्लफल) लालमदार (शृङ्गाटक) सिंघाड़ा (शुक्लोपाइ) मोर (शृनिक) सींगिया विप, जिस विष (शुना) फिटकरी को गौके सींग में बांधने से दूध लाल होजाता है (शुपिरा) पंवारी उत्तर देश में ना- (शृङ्गी) काकड़ा सांगी, अतीत, लिफा नामसे प्रसिद्ध सींगी मछली (शुल्व) तांचा . वैद्यककोश। २८५ लगोटे का सच कपास, (श्यामक) रोहिस (श्वेतार्क) सफेद मदार (श्यामा) प्रियंगु, काला निसोथ, काली सांव, गोरी सांव, (पग्रन्था)गंधपलाशी, एक सुगं- सीसव, सारिवा धित वस्तु जो कश्मीर (श्येनघण्टा) छोटी दत्यून, जमा- में प्रसिद्ध है, वच,डहर (पट्पदा) वरसाती वेल (श्योनाक) सोनापाठा (पष्ठिक) साठी (श्रवणशीर्पक) मुंडी (स) (श्रवणाहा) मुंडी (समुद्रान्ता)सुगन्धित वस्तु विशेप, (श्राद्धशाक) केरमुऑ, नारी जवासा (श्रावणी) मुंडी (सहा) वनमूंग,ककही, सेवती, गु- (श्रीपदी) बरसाती वेल लाव (श्रीपर्णी) गंभारी,अरणी,कायफल (सदापुप्प) सफेद तथा काला म- (श्रीफल) वेल दार, कुन्द (श्रीफली)नील (समन्तदुग्धा) सेहुंडा (श्रीमान ) तिलक सप्ला) सेहूंडभेद,वसंती नेवारी (श्रीवारक) सिरियारी (सहदेवी) सहदेई (श्रेयसी) हड़, रास्ना, गजपीपल (सहस्रवीर्या) नीलीदूष, महासता- (श्लेष्मान्तक) लसोड़ा वर (श्वदंष्ट्रा) गोखुरू . (सर्वानुभूति) निसोथ सफेद (श्वावित् ) साही (सरला) निसोथ सफेद (श्वेतपुष्प) सफेदमदार कटसरैया (सरणी) गन्धप्रसारणी (श्वेतपुष्पा) बड़ी इन्द्रायन, नाग- (साक्षी) सरहटी पुष्पी (समंगा) लज्जावन्ती, दुई मुई, (श्वेतमरिच) सहिजन के वीज मंजीठ (श्वेतमूला) सफेद गदहपुरैना (सरस्वती)ब्राह्मी (श्वेतराजि) चिचिंडा (सहस्राहि) मोरशिसा (श्वेतशिम्बिक) भटवांस (सहस्रपत्र) कमल (श्वेतसार) पपड़िया खैर (सरसीरह) कमल (श्वेता) फिटकरी (संवर्तिका) कमल के नवीन पत्ते , २८६ वैद्यककोश। , (सहाचर) कटसरैया (सहस्रवेधी) अमलवेत, कस्तूरी, (सहचर)कटसरैया हींग (समीरण) मरुआ (सारख्य) सहत (सर्ज) शाल,साखू (सारणी) गन्धप्रसारणी (सर्जक)शालभेद एक तरह का (सारस) कमल साखू विजयसार (सारा) एक प्रकार का सेहुंड (सपीतक) बबूल (सि) (समिदर) पलाश (सिंहपुच्छी) पिठवन् (सप्तपर्ण) छितवन (सिंही) बड़ी भटकटैया, वासा (सहकार) आम (सिंहतुण्ड) सेहुँडा (सदाफल) नारियल (सिंहिका) अरूसा (सन्नकटु)चिरौंजी (सिंहास्य) अरूसा (सहस्रनुत्) अमलवेत (सिंहपर्ण) अरूसा (सकुक) एक प्रकार का विप जिस (सिन्दुवार) सँभालू की गांठ सत्तूके समान (सिन्दुक) सफेदपुप्पका संभालू चूर्ण से पूर्ण (सिन्दुवारक) सफेदपुष्पका सँभालू (सकलप्रिय) चना (सिहकेशरक) मोलसिरी (सतीनक) मटर, केराव (सिन्दूरी) सिन्दूरिया (सर्पप) सरसों (सिवितिकाफल) सेव (सस्त्रीज) सरवीज (सितमभ) रूपा, चांदी (सप्ति) घोड़ा (सिंहान) कोटी, तपायेहुये लोहे (सपादमत्स्य) टेंगरा मछली का मल (सहदक) सेहुड़क सहयासु (सिन्दूर) सिन्दूर (सम्पाय) पिणाक, गोझिया (सिकता) वालू (स) सत्तू (सिद्धार्थ) सफेदसरसों (सलिल) पानी (सिलन्ध) सिलन्धामछली (सन्तानिका) मलाई (सिक्थक) मोम (सर) दहीकी मलाई,साढ़ी (सिता) चीनी (सरज) मक्सन (सितोपला) मिश्री (सर्पिम्) घी (सीधु) मद्य, शराब वैद्यककोश। २८७ (सुवर्तुल) तरबूज . (सीस) सीसा (सीसज) सिन्दूर (सुधावास) वालमखीरा (सुशीतल) वालमखीरा (सुरभि) मरोरफली, गौ (सुरभिपत्रा) फरेंदा (मुव्रता) गन्धपलाशी नाम सुग- (सुगन्धमूला) हरफारेवड़ी न्धित वस्तु कश्मीरदेश (सुपेण) करोंदा में प्रसिद्ध है (सुवर्ण) सोना (सुगन्ध) भटोरा, भूस्तृण (सुरमृत्तिका) सोरठीमट्टी (मुनाल) खसकेसमान पीलेरंग (सुराष्ट्रजा) सोरठीमट्टी का एक तृण (सुमनस्) गेहूं (सुगन्धि) एलुवा (सुगन्धक) शालि (सुधा) सेहुँडा (सुनिपणक) सिरियारी (सुवहा) नीलेफूलका सँभालू, स- (सुदीर्घ) चिचिंडा लई, रास्ना, नाकुली (सुमुष्टिका) करेरुआ (सुमेखल) मूंज (सुदर्शन) मछली (सुपेणिका) कालानिसोथ (सुरा) मद्य, शराव (सुगन्धा) कालीसांव (सू) (मुलोमसा) मसी (सूर्यपर्णी) वनमूंग, वनउर्दी (सुवर्चला) हुरहुर (सूच्यग्र) कुश (सुदर्शना) सुदर्शन (सूर्यभक्का) हुरहुर (सुमना) चमेली, पीलीचमेली (सूर्यावर्ता) हुरहुर (सुगन्धिनी) सुवर्णकेतकी (सूक्ष्मपत्र) कुकुरीधा (सुकोमला) सिन्दूरिया (सूचिकापुष्प) केवड़ा (सुरसा) तुलसी (सूक्ष्मपत्रा) छोटी जामुन (मुलभा) तुलसी (सूर्य पर्याय) तांबा (सुपार्श्वक) गजदण्ड सहोरा (सूत) पारा (सुरभी) सलई, मरोरफली,एलुआ (सूर्य) शिंची धान्य, मूंग आदिक (सुनिर्यासा) जिंगनी (सूचिपत्र) शिरियारी (मुतेजन) धामिनवृक्ष (सुकौशक) कोशम्भ, कोशान (सूप) पकीहुई और लवण अदरक (सूरण) जमीकन्द २८८ वैद्यककोश। हींग से युक्त दाल विय (सेतु) वरना (सौवीर) धेर,सफेदसुरमा,संधान (सेधा) साही भेद (सेव) सेव (स्कन्धज) वरगद (सेवन मोदक) सेवका लड्डू (स्कन्धफला) खजूर, पिंड खजूर, (सेविका) सेवई छोहारा (सेवीका मोदक) सेवका लड्डू (स्तन्य) दूध (सेव्य) खस, लामज्जक, खस के (स्तुभ) वकरा समान पीले रंग का एक (स्तुभा) वकरी तृण (स्थाली वृक्ष) वेलियापीपर (सेहुण्ड) सहुँडा (स्थि) (सैन्धव) घोड़ा (स्थिरा) सरिवन् (सैरेय) कटसरैया (स्थिरायु) सेमर (सैरेयक) कटसरैया (स्थिर) धवई (सोमक्षीरी) सोमलता (स्थूल) सहतूत (सोमवल्क) कांटेदार कंजा,सफेद (स्थूलदर्भ) मुंज कत्था, कायफल (स्थौणेयक) कुकुरौंधा (सोमवल्कल) पपड़िया खयर (स्नुक्) सेहुँडा (सोमवल्ली) सोमलता, गिलोय, (स्नुही) सेहुँडा ब्राह्मी,सुदर्शन,चकुची (स्तुवा) चिनार (सोमा) गिलोय (स्पृका) एकतरहकासुगन्धितशाक (सौगन्धिक) रोहिस,गंधक,कहार (स्फटिका) फिटकरी कत्तृण (स्फटी) फिटकरी (सौभाग्य) सोहागा (स्फुटस्वन) पिंडुकी (सौभाञ्जनफल) सहिजनका फल (स्फूर्जक) तेंदुआ (सौम्या) सरिवन (स्फोटा) गोरी साँव (सौरभेय) बैल (स्कोता) गोरी साँव (सौरभेयी) गों (स्यन्दन) तिनिश (सौराष्ट्री) सोरठी मही (स्यमन्तक) कचनार (सौराष्ट्रिक) सुराष्ट्र देशमें होनेवाला (संसी) पील वैद्यककोश। २८ (मुबारक्ष) कॅटाई रक्तवर्ण सिंगरफ (स्रोतोऽञ्जन) कालासुरमा (हरिताल) हरताल (स्वरच्छद) सहोरा, भुइँसहा (हरिन्मणि) पन्ना (स्वर्ण) सोना (हरिमन्थक) चना (स्वर्णजातिका) पीली चमेली (हरेणुक) मटर, केराव (स्वर्णमाक्षिक) सोनामक्खी (हस्तिघोपा)घियातरोई (स्वर्णवल्ली) इसी नाम से प्रसिद्ध (हस्तिपर्ण) घियातरोई ओषधि (हरिण) हरिन, जोताम्रवर्ण होताहै (स्वल्पकेसरी) कचनार (हरित) हारिल (स्वस्तिक) सिरियारी (हय) घोड़ा (स्वादुकण्टक)गोखुरू,कॅटारी,शमी (हरि) मेढक (स्वादुकन्दा) गेंठी, विलाईकन्द (हरीसा) आस, एकप्रकार से बना- (स्वादुपर्णी) दूधी या गया मांस (खादुपुष्प) कटभी (हविप) घी (स्वादुफला) मुनक्का, दाख (हाटक) सोना (स्वादमस्तका) खजूर, पिंडखजूर, (हायन) शालि छोहारा (हारहूरा) मुनक्का (स्वादी) खजूर,पिंडखजूर,छोहारा (हारिद्र) विष, जिसके वृक्षकी जड़ हल्दी के समान होती है (हरेणुका) रेणुका नाम सुगन्धित (हारीत) हारिल (हाला) शराव (हालाहल) विप जिसका फल मु- (हयपुच्छिका) वनउर्दी नका के समान और (हलिनी) करिहारी पत्ते ताड़के समान (हस्तिवारुणी) डहरकंजा होते हैं (हयाह्वया) असगन्धा (हिज्जल)समुद्रफल (हंसपदी) हंसपदी (हिंगुनिर्यास) नीय (हंसपादी) हंसपदी (हिंगुपत्री) हींगपत्री (हलिप्रिय) कदम (हिंगुल) सिंगरफ (हंसपाद) गुड़हरके फूलके समान (हिंगुली) बड़ी भटकटया वस्तु विशेष (हरिवालुक) एलुवा २६० वैद्यककोश। (हिंगुशिवाटिका) वंशपत्री प्रसिद्ध है (हिरण्य) सोना . (हेमदुग्धक) गूलर (हिलमोचिका) हुरहुर (हेमयुप्प) चम्पा, अशोक (हीरक) हीरा (हेमपुप्पिका) पीलीजुही (हीरा) गंभारी (हेमवती) हड़,खुरासानी वच, चो- (हुड) भेंडा क, पीले दूध का सेहुंडा (हेतु) महाशतावर (हैयङ्गवीन) मक्खन (हेम) सोना (होलक) होरा (हेमगौर) किकिरात गौड़देश में (हृद्यगन्धा) चमेली अथ मानपरिभाषा॥ नमानेनविनायुक्तिव्याणांजायतेकचित् । अतःप्रयोगकार्यार्थ मानमत्रो च्यतेमया १ चरकस्यमतवेद्यैराद्यैर्यस्मान्मतंततः । विहायसर्वमानानि माग धमानमुच्यते २ त्रसरेणुर्वधैः प्रोक्तस्त्रिंशतापरमाणुभिः । त्रसरेणुस्तुपर्यायैर्ना नावंशीनिगद्यते ३ जालान्तरगतैः सूर्यकरैर्वशीविलोक्यते । पड़वंशीभिर्मरी चिस्यात्ताभिःपइभिश्वराजिका ४ तिसृभीराजिकाभिश्च सर्पप-मोच्यतेबुधैः । यवोऽष्टसर्पपैःभोक्तो गुञ्जास्यात्तचतुष्टयम् ५ पद्भिस्तुरक्तिकाभिःस्यान्मापको हेमधानको । मापेश्चतुर्भिःशाणःस्याद्धरण सनिगद्यते ६ टङ्कःसएवकथितस्त द्वयंकोलउच्यते । शुद्रकोवटकश्चैवद्रक्षण सनिगद्यते ७ कोलदयन्तुकर्पः स्यात्सपोज-पाणिमानिका । अक्षःपिचुःपाणितलं किञ्चित्पाणिश्चतिन्दुक म ८ विडालपदकश्चैवतथा पोडशिकामता । करमध्योहंसपदं सुवर्णकवलन हः उदुम्बरश्चपर्यायः कर्पमेवनिगवते । स्यात्काभ्यामर्द्धपलं शुक्तिराष्टमि कातथा १० शुक्तिभ्याचपलंज्ञेयं मुष्टिराम्रचतुर्थिका । प्रकुञ्च पोडशीविल्चंपल मेवात्रकीय॑ते ११ पलान्यांममृतिज्ञेया प्रसृतश्चनिगद्यते । प्रसृतिभ्यामञ्जलिः स्यात्कुड्योऽर्द्धशरावकः १२ अष्टमानवसज्ञेयः कुडवाभ्याश्चमानिका । शरा योऽटपलन्तबज्ज्ञेयमत्रविचक्षणेः १३ शरावाभ्यांभवेत्तस्थश्चतुःप्रस्यैस्तथाढ कः।भाजनंकांस्यपात्रञ्च चतुःपष्टिपलबसः १४ चतुर्भिराढकेंद्रोण कलशोन वैद्यककोश। २६१ ल्वणोऽर्मणः । उन्मानश्चघटोराशिर्टोणपर्यायसंज्ञितः १५ द्रोणाभ्यांशूर्पकु म्भौच चतुःपष्टिशरावकः । शूर्पाभ्याश्चमवेद्रोणी वाहोगोणीचसास्मृता १६ द्रोणीचतुष्टयंखारीकथितासूक्ष्मबुद्धिभिः । चतुस्सहस्रपलिकापणवत्यधिकाच सा १७ पलानांदिसहस्रञ्चभारएकःप्रकीर्तितः। तुलाफ्लशतंज्ञेयं सर्वत्रैचैपनि श्चयः १८ मापटङ्काक्षविल्वानि कुडवःप्रस्थमाढकम् । राशिर्गोणीखारिकेति. यथोत्तरचतुर्गुणम् १६ मागधपरिभापायां पक्तिकोमापश्चतुर्विंशतिरक्तिकष्ट शापवतिरक्तिकाकर्षः, अयञ्चरकसम्मतः । सुश्रुतमते-पञ्चरक्तिकोमापोविंश तिरक्तिकप्टकोऽशीतिरक्तिकाकर्पः । अयमेवकलिङ्गपरिभापायामपि । यतस्त त्राटरक्तिकोमापोदात्रिंशदतिकप्टक साईटकद्धयमितःकपः॥ भापार्थ ॥ तौलके विना द्रव्योंकी युति कहीं ठीक नहीं होती इस कारण व्यवहार के लिये यहां मान (तौल) का वर्णन करताहूं १ चरक मुनिका मत प्राचीन वैद्याने मानाहै इसलिये सय मानोंको छोड़कर मागध मान कहताहूं २ तीस परमाणु को एक प्रसरेणु प्रथया वंशी कहाहै ३ झरोख्ने में से पाई हुई सूर्य की किरणोंसे जो सूदमपदार्थ दिखाई देते हैं उनको प्रसरेणु घा वंशी पाहते हैं छः घंशीको एक मरीचि और छः मरीचिकी राई ४ तीन राईकी सरसों आठ सरसोंका जव चार जव की एक रत्ती ५ छः रत्तीका मासा, मासाको हेम और धानकभी कहते हैं चार मासे फा शाण इसको धरण ६ और टंकभी कहते हैं दो शाणका कोल इसको जुद्रफ यटक द्रंक्षराभी कहते हैं ७ दो कोलका कर्प इसको पाणिमानिका अक्ष पिचुपाणितल किंचित् पाणि तिंदुक ८ विडालपदक पोडशिका कर मध्य हंसपद सुवर्ण कवल ग्रह ! उदुंबर कहते हैं दो कर्पका भई पल इसको शुक्ति तथा अपमिका पाहते हैं १. दो शुक्तिका एक पल इसको मुष्टि प्रान चतुर्थि का प्रकुंच पोडशी और बिल्य कहते हैं ११ दो पलकी प्रसूति इसको प्रस्तभी कहते हैं दो प्र- सुति को अंजली इसको कुडव अर्द्ध शराब १२ और अपमान दो कुडव को एक मानिका इसको शराव और अष्टपल विद्वान् लोग कहते है १३ दो शराव का प्रस्थ चार प्रस्थ का श्राढक इस को भाजन कांस्यपात्र और चतुःपष्टिपल कहते हैं १४ चार श्राढक काएक द्रोण इसको पालश नरवण अर्मण उन्मान घट और राशि कहते हैं १५ दो द्रोण का शूर्प इसको कुम्भ भी कहते हैं यह चौंसठ शराव का होताहै दोशूर्प की द्रोणी इसको वाह और गोणी कहते हैं १६ चार द्रोणी की एक खारी यह चार हजार छयानवे पलकी होती है १७ दो हज़ार पत्तका एक भार होताहै सौ पलकी एक तुला जाननी चाहिये १८ मासा टंक अक्ष विल्व कुउव प्रस्थ ग्राहक राशि गोणी खारी यह सब क्रमसे उत्तरोत्तर चौगुने हैं जैसे मासा से चौगुना टंक इत्यादि १६ मागध परि. भाषा में छः रत्ती का मासा चौवीस रत्ती का टक छयानवे रत्ती का वर्ष यह चरक का मत है के मत में-पांच रत्ती का माला वीस रत्ती का टंक अस्ती रत्ती का फर्ष और इसी तरह फलिंग परिभाषामें भी पाठ रत्ती का मासा यत्तीस रत्ती का टंक ढाई टंकका कर्प होताहै। गुञ्जादिमानमारभ्य यावत्स्यात्कुडवस्थितिः । द्रवाशुष्कद्रव्याणां ताव - सुश्रुत - २९२ वैद्यककोश। न्मानसमंमतम् २० प्रस्थादिमानमारभ्य द्विगुणंतवादयोः । मानंतथातुला यास्तु दिगुणंनकचित्स्मृतम् २१ म्रवृक्षवेणुलोहादेर्भाण्डंयचतुरंगुलम् । वि स्तीर्णश्चतथोचश्च तंमानंकुडवंवदेत् २२ ॥ इति मागधमानम् ॥ रत्ती आदि लेकर छुडय पर्यन्त द्रव तथा भाई और शुष्क द्रव्यों फामान तुल्य (घरापर) होताहै २० प्रस्थ श्रादि लेकर सम्पूर्ण द्रव तथा थाई पदार्थों का मान दूना ग्रहण करना चा हिये और तुला गा मान दूना कभी नहीं होता २१ मृत्तिका वृक्ष यांस और लोहा आदि के यर्तन जो चार अगुल व चार अगुल चौड़े और चारही अगुल गहरे होते हैं उनमें जितना पदार्थ थाता है उसको कुडव कहते है । २२ इति मागधमानम् ॥ अथ कालिंगमानम् ॥ यतोमन्दाग्नयोहस्वा हीनसत्वानराःकलौ । अतस्तुमात्रातद्योग्या प्रो- च्यतेसुज्ञसम्मता २३ यवोदादशभिरेर सर्पपैनोच्यतेवुधैः । यवदयेनगुंजा स्यात्रिगुंजोवल्लउच्यते २४ मापोगुंजाभिरष्टाभिः सप्तभिर्वाभवेत्वचित् । च- तुभिर्मापकै शाणः सनिष्कटङ्कएवच २५ गद्याणोमापकै.पभिः कपःस्या दशमापिकः । चतुः पलंप्रोक्तं दशशाणमितंबुधैः २६ चतुःपलैश्चकुडवः प्रस्थाद्या पूर्ववन्मताः। स्थिति स्त्येवमात्रायाः कालमग्निवयोवलम् २७ प्रकृतिदोपदेशौच दृष्ट्वामात्राम्प्रकल्पयेत् । नाल्पहन्त्यौपधंव्याधि यथाम्भो ऽल्पमहानलम् २८ अतिमात्रंचदोपाय क्षेत्रसस्येवहूदकम् ॥ इति मानपरिभाषा फलियुगमें मनुष्य मन्दाग्नि इस्य (अदफे छोटे ) सत्वहीन (फमजोर ) होते हैं इसयास्ते उनके योग्य मात्रा कहताह २३ धारह सफेद सरसाका जव दो जवकी एक रत्ती तीनरसी का घम २५ साठ या सात रत्ती का मासा चारमासे का शाण इसको निष्क और टक कहते है २५ छ मासे का गद्याण दशमासे का फर्फ चार कर्ष का या दशशाण का पल २६ चार पल या कु श्व और प्रस्थादिक पूर्व के समान होते है मात्रा का कोई नियम नहीं है काल (समय) अग्नि यल अवस्था (उमर २७ प्रकृति दोष और देश इनको विचार कर माना की करपना करनी चाहिये ते थोटा जल बहुतसी अग्नि को नहीं बुझा सलाहे वेसे थोड़ी ओपधि (दया) यहे रोग को नहीं नाश करसती हे २८ और जेसे वहुत जल पेत में अन्न की हानि करता है वेसे यहुत नौपधि भी दापों को करती है इससे योग्यही मात्रा देना चाहिये ।। रति मान परिभाषा ब्रह्मा अथ शब्दसंग्रह ॥ श्लोक ॥ देवदेवनमस्कृत्य गणराजंविनायकम् ॥ सर्वेषांसुखबोधाय क्रियतेशव्दसंग्रहः ॥१॥ (अंशिन्) वटाऊ,वॉटनेवाला, हि- (अखण्डित) समग्र, पूरा स्सेदार (अगणित ) बेशुमार, असंख्यात, (अंशुजाल) किरणों का समूह अनगिनती (अंशुधर) सूर्य, चन्द्रमा, दीपक, (अगद) नीरोग, रोगसे छूटाहुआ अग्नि, प्रतापी, देवता, (अगस्ति) एक ऋपिका नाम,जि. सने समुद्रका पान कि- (अंशुमत् ) सूर्यवंशी असमंजसरा याथा,अगस्ति वृक्ष,अ- जाका पुत्र, सूर्य, चंद्रमा गस्ति तारा (अंशुमालिन्) चन्द्रमा, सूर्य (अगुण) सत्व, रजस्, तमस् , गुण (अंहि) पाद, पैर, हाहूवेर से रहित, ब्रह्म, बेहुनर (अकल) कलासेहीन, परमात्मा (अगेन्द्र) पर्वतो में श्रेष्ठ, सुमेरु,हि- (अकस्मात्) अचानक, एका एक, इत्तिफाकन (अगोचर) इन्द्रियोंसे जो न दिखा- (अकाण्ड) कुसमय, वेवक्त ईदे,अदृश्य, गायव (अकापट्य) निश्छल, ईमान्दारी (अग्निक्रीडा) आतश बाजी, आ- (अकाल) दुर्भिक्ष, कहत, वे समय गिका खेल (अकिञ्चन) निर्धन, गरीब, मुफ- (अग्निचूर्ण) आगिका चूर्ण, वारूद लिस (अग्निवाण) आगिकातीर (अकुल) नीच, कुलटुट, कमीना (अग्निसंस्कार) मुर्दे को जलाना, (अक्रूर) नम्र, कोमल स्वभाव (अक्षांश)लैटीच्यूड, पृथ्वीके उत्तर (अग्निहोत्री) आहिताग्नि, सदा वा दक्षिण केन्द्रतक नब्बे होम करनेवाला अंशपर रेखा (अग्रगण्य) अगुआ, अग्रसर, मु. खिया (अक्षोभ)घेखौफ, निर्भय माचल दाह क्रिया २६४ शब्दसंग्रह। (अग्रगामिन्)आगे चलनेवाला, स. जिसकी जीत न हुई हो रदार, मुख्य (अजर) जिसको कभी बुढ़ापा न (अग्रिम) अगिला, पेशगी हो सदाजवान रहनेवाला (अघखानि) पापकी खानि, पापी, (अजामिल) एक बड़ापापी ब्राह्मण गुनहगार (अजीर्ण) अपच, बदहज़मी (अघटित) असम्भाव्य, अनहोनी, (अज्ञात) वेजाना हुआ, ये समझा गैर मुमकिन हुआ (अघासुर) राक्षस, जो कंसके यहां (अज्ञान) जिसको ज्ञान नहीं, मूर्ख, रहताथा वेवकूफ (अघोर) जो दारुण नहो, शान्त (अज्ञानता) बेवकूफी, मूर्खता (अंकविद्या) गणितशास्त्र, हिसाव (अज्ञानिन्) नादान, वेसमझ,अज्ञ (अंकित) चिह्न कियाहुआ, चिहित (अञ्चल) ऑचर, कपड़ेका किनारा (अंगजनित) शरीरसे उत्पन्न (अटन)भ्रमण करना, घूमना (अंगण) आँगन (अटल) जो हटाये न हटे, स्थिर (अंगन्यास) मन्त्रोच्चारण पूर्वक अं- पायदार गोंको स्पर्श करना (अटवि) बन, जंगल (अंगपक्ष) सहायक, सहायता कर- (अट्टहास) बहुत जोरसे हसना, (अट्टालिका) अटारी, छत (अंगांगिभाव) गौण, मुख्यभाव,वा (अणुमात्र) बहुत छोटा, जरासा हमीमदद (अण्डकटाह) ब्रह्माण्ड, संसार •(अंगिरस) वृहस्पति, देवताओं का (अतः) इससे, लिहाज़ा (अतएव) इसीलिये, पस (अंगिन्) अङ्गावाला, शरीरी,प्राणी (अतत्वज्ञ) सिद्धान्तको न जानने (अंगुल) आठ जौ का नाप,अंगुली वाला, बेसमझ (अंगुलित्राण) अंगुलियों का रक्षा (अतत्वज्ञता) नासमझी करनेवाला, दस्ताना (अतन) शरीरसे रहित, बड़ा, दीर्घ (अचञ्चल)जो चञ्चल न हो, स्थिर कामदेव (अतंद्रित) आलस्य रहित, तेज़ (अचिर) शीघ्र, जल्द (अतल) अथाह, पृथ्वी के सात (अजय) जिसको कोई न जीतसके लोकों में से पहिला लोक ने वाला कायम शब्दसंग्रह। २९५ (अतिकाय) जिसका शरीर बहुत (अधर्म) पाप, गुनाह, चुराकरम लम्बा चौड़ा हो (अधर्मिन) अपराधी, मुजरिम, दुष्ट (अतिक्रान्त) व्यतीत, लांघाहुआ (अधस्) नीचे, तले (अतिथिभक्त) अतिथि पूजक,म- (अधर्मिक) पापी, दुष्ट, बुरा काम हिमान की खातिर करनेवाला करनेवाला (अधिकरण) आधार,आसरा, सा- (अतिसार) उदर रोग, संग्रहणी,पेट तवां कारक की बीमारी (अधिकारिन्) मालिक,स्वामी,वा- (अतीत) भूत, गुजरा हुआ रिस (अतुल) वेतौल,बेशुमार,अप्रमाण (अधिपति) प्रभु, स्वामी (अत्याचार) अनीति, वेइन्साफी (अधिमास) मलमास, लौंद का (अत्युक्ति) बहुत बढ़कर कहना,एक महीना अलंकार की संज्ञा (अधिरूढ़) आरूढ़, सवार (अत्र) यहां, इस जगह (अधिवासन) रहने की जगह, स- (अत्रि) ब्रह्माका बेटा, एक ऋषि कूनत (अदन) भोजन करना, खाना (अधिवेशन) सभा,इजलास, दर- (अदनीय) खाने की चीज, भोज्य वार (अदार) स्त्री रहित, रंडुआ (अधिष्ठाता) मुखिया, अगुआ, (अदिति) देवतावों की माता, दक्ष अध्यक्ष की बेटी, कश्यप मुनि (अधीत) पढ़ाहुआ, पठित की स्त्री (अधीति) अध्ययन,पढ़ना,ख्वांदगी (अदूरदर्शिन् ) वेवकूफ, स्वल्प दृष्टि (अधीनता) मातहती, तावेदारी (अदृश्य) जो देखने में न आवै, (अधीरता) उतावली, बेसवरी अगोचर (अधीश) महाराज, शाहनशाह, (अदेय)न देनेके योग्य स्वामी (अद्यापि) अवभी (अध्यवसाय) व्यापार, उद्यम, (अद्यावधि) अवतक, अभीतक जगार (अद्वितीय) अकेला,एकही,अनुपम (अध्यापक) पढ़ानेवाला,गुरु,पाठक (अद्वैत)जिसके तुल्य दूसरा नहीं, (अध्यापन) पढ़ाना, पाठन बेमिसाल (अध्याय) सर्ग, पर्व, परिच्छेद, प्र शब्दसंग्रह। खून न हों , करण, वाव किसीप्रकार व- (अध्यासीन) वैठाहुआ र्णनन कियाजाय (अनख) नखहीन, जिसके ना- (अनिष्ट) दुःख, अप्रिय,वेचाहा (अनीह) चेष्टारहित, आलस्ती (अनघ) निष्पाप, पापरहित, चे- (अनुकरण) नकलकरना, अनुहार गुनाह (अनुकूल) कृपालु, मेहरवान, मु. (अनन्य) जिसके दूसरा न हो वाफिक (अनपत्य) जिसके लड़का, लड़की (अनुगामिन्) पीछे चलनेवाला, कोई न हो, लावल्द सहायक (अनभिज्ञ) अज्ञ, नादान, नावा- (अनुगृहीत) उपकृत, अहसानमन्द किफ (अनुचरी) दासी, लोंडी (अनर्थ) हानि, नुक्तान (अनुजा) छोटीवहिन, कनिष्ठभ- (अनवद्य) दोपरहित, बेगुनाह, गिनी निरपराध (अनुज्ञा) आज्ञा, अनुमति, हुक्म (अनवस्थित) गाफिल, अस्वस्थ, (अनुतप्त) दुःखी, गमगीन, बेखवर (अनुदिन) प्रतिदिन, हररोज़ (अनाथ) लावारिस, अशरण, य- (अनुनय) विनय, मनाना तीम (अनुनासिक)जिन अक्षरोंका उ- (अनाथालय) मुहताजखाना, दी- धारण नाकसेहोवे नागार अक्षर जैसे जम, (अनादर) अपमान, बेइज्जती ङ,ण,न (अनायास) सुख, विनापरिश्रम, (अनुपम) उपमारहित, अनूप, वे आसानी नजीर (अनाहार) उपोपण, लंघन,फाका- (अनुपयुक्त) अनुचित, ना मुना- कशी सिव (अनित्य) नश्वर, नाशहोनेवाला, (अनुयत्न) प्रतिक्षण, हरवक्त सदा न रहनेवाला (अनुपात)तुल्यसम्बन्ध अनुमान (अनियत) अनिश्चित, इत्तिफ़ा- (अनुपान ) औषधी के अनुकूल किया पथ्य (अनिर्वचनीय) अकथनीय, जो (अनुमत) अनुज्ञात , जिलको , शब्दसंग्रह। २६७ . सलाह दीगईहो (अनुरोधित) प्रतिवद्ध, कैदी, बंधु. (अनुमान) परामर्श जन्यज्ञान, वा, अनुवर्ती अन्दाज़ा, तखमीना, (अनुरूप) सदृश, तुल्य, समान अटकल (अनुलेप) उबटन लगाना,तेलल- (अनुमित) अनुमान, कियागया, गाना, सुगन्ध द्रव्यका अटकलागया अंगों में लगाना (अनुमेय) अनुमान करनेके योग्य, (अनुलेपन) उबटन लगाना, तेल अन्दाजके लायक लगाना, सुगन्ध द्रव्य (अनुमोदन) अभिनन्दन, प्रशंसा का अंगों में लगाना करना, ताईदकरना (अनुलोम) सीधा, यथाक्रम (अनुयायिन्) पीछे चलनेवाला, (अनुवाद) पुन. पठन, उल्था के- दास,सेवक, नौकर रना, तर्जुमाकरना (अनुयोजन) पराजित, व्यवहार (अनुवृत्ति) सेवा, मार्ग, ज़रिया को पुनः सभामें प्र- (अनुवन्दना)सहानुभूति,हमदर्दी विष्ट,करना, अपील (अनुशासक) शिक्षा देनेवाला, करना आज्ञा देनेवाला,हा- (अनुयोक्तृ) जो व्यवहारको सभा फिम में प्रविष्ट करै वह मुद्द- (अनुशासन) आज्ञा, हुक्म ई अपीलाएट (अनुशीलन) अभ्यास करना (अनुयोजक) जो व्यवहार को स- (अनुष्ठान) आरम्भ, किसी कार्य भा में प्रविष्ट करै वह को करना मुद्दई अपीलाण्ट (अनुसन्धान) सोचना, अन्वेषण, (अनुयोज्य) जिसपर मुकद्दमा दा- तलाश करना, तह- यर किया जाय वह कीकात मुद्दाअलेह, प्रत्यभि (अनुस्वार) अक्षर के ऊपर की योगी बिन्दी (अनुरक्त) स्निग्ध, प्रेमी, आशिक, (अन्तरङ्गमित्र) सहद, दिली दोस्त आसक्त (अनुराग) प्रेम, मुहब्बत हाल कहा जाय (अनुरागिन) मुहब्बती, स्नेही (अन्तरगसमा) छोटीसभा जिसमें जिससे अपना सब २६८ शब्दसंग्रह। गाड़, हानि चुने २ सभ्यहों बुराई (अन्तरित) मध्यम, वीच का (अपनीत) दूरीकृत, दूरकिया गया, (अन्तरितकृपक) जो असामी का- हाटया गया इतकार से खेत (अपरिष्कार) अशुद्धता, मैलापन लेकर जोते शि- (अपवाहन ) एक जगह से दूसरी कमी काश्तकार जगह लेजाना, धोखा (अन्तर्पट) तिरस्करणी परदा देना (अन्तत्ति) मानसिक भाव,दिली (अपशकुन) अशुभ सूचक चिह्न, असगुन (अन्तर्हित ) निलीन, छिपाहुआ, (अपहरण) हरलेना, कुर्की अलख (अपादान) विभाग, व्याकरण का (अन्त्रावली) अंतड़ियों का समूह पांचवां कारक (अन्धकूप) जिसमें पानी न हो (अपाय) अलग होना, नाश, वि- और घास पात जम गये हों वह कुआं (अपूर्ण) सवनहीं, थोड़ा, असम्पूर्ण (अन्धपरम्पराग्रस्त) प्राचीन आचर- (अपेक्षा) निस्बत, आशा, परवाह णमें फंसा हुआ, आकांक्षा, जरूरत क़दीमरस्मों में (अप्रतिहित) घेरोंक टोक, नाशर- मुन्तिला हित (अन्नप्राशन) एक संस्कार जिस्में (अप्रीतिकर) निठुर, बेमुहब्बत पैदायश से छठे महीने (अभिगमन) समीप जाना शुभ मुहूर्त में लड़केको (अभिप्रेत) अभिमत, पसंद, मुराद अन्न खीर खिलाते हैं (अभिमर्पण) परदाराभिगमन,दूसरे (अन्योन्याश्रित) परस्पर सम्बद्ध, की स्त्री के पासजाना, एक दूसरे के साथ सम्बंध रखनेवाला (अभियुक्त) प्रत्यर्थी, मुद्दाअलेह (अन्वय) वाक्य में क्रियाकारकका (अभियोग्य) प्रत्यर्थी, मदाअलेह सम्बन्ध, वंश, कुल (अभियोगिन् ) अर्थी, मुद्दई (अपकप)अनादर, न्यूनता,खींचना (अभियोजक) अर्थी, मुद्दई (अपकीर्नि.) अपयश, बदनामी, (अभिराम ) मनोहर, सुन्दर, प्यारा स्पर्शकरना, छूना शब्दसंग्रह। २६६ (अभिलापा)इच्छा, कामना, चाह विन्दु, (.) गलहस्त, (अभिपिक्त) तिलक किया गर्दनियों हुआ, , गद्दीनशीन (अर्पण) समर्पण, सौंपना (अभिसन्धान) सन्धि, मेल, कपट (अर्हत्) चौद्ध, जैनी, बौद्धमतान- (अभूतपूर्व) जो पहिले कभी न यायी,किसी एक ऋपिका हुआ हो, अद्भुत, अ- नाम जीव (अलौकिक) इस लोकमें न होने (अभ्यस्त) मश्क किया हुआ, वाला, अद्भुत, अजूबा (अभ्यागत) अतिथि, पाहुन, मेह- (अवकाश)अवसर, मौका, फरसत मान (अवगुण) दोप, औगुण, बुराई (अमोच) सफल, जो निष्फल- (अवतार ) प्रादुर्भाव, प्रकटहोना, व्यर्थ, न हो सीढ़ी (अम्बक) नयन, आंख (अवधान) समझना, ध्यानदेना, (अम्बुद) जलद, मेघ, अब मुखातिवहोना (अम्बुधि) समुद्र, अम्भोनिधि (अवधीरित) असत्कृत, अनाहत, (अयक्त) अनुचित, अयोग्य,नाम- अपमान कियागया नासिव (अवनति) न्यूनता, घटती, नन- (अयत) देशसहस्र, १० हजार ज्जुली (अरुचि) अनभिलाप, नफ़रत (अवन्तिका) उज्जेन, मालवादेश (अरुणचूड) मुगा, कुकुट की राजधानी (अरुणशिखा) मुर्गा, कुक्कुट (अवलम्ब)प्तहारा, आधार, भरोसा (अरुणोदय) प्रातःकाल में ललाई (अवलम्बन) सहारा, आधार, भ- का निकलना रोसा (अर्चक) पूजा करनेवाला, पूजक, (अवलेह) चटनी सेवक (अवलोकन) ईक्षण, दर्शन, न- (अर्चित) पूजागया, सेवित, पूजित जर, देखना, मुला- (अर्थकारिन्) धन पैदाकरनेवाला, उपयोगी, मुफीद (अश) अधीन, वेश, ये इरित (अर्थात् ) यानी, अर्थसे (अर्थचन्द) आधा चन्द्रमा, आधा (अवशिष्ट) वचा, बाकी , परिशिष्ट हिजा करना यार शब्दसंग्रह। , (अबसन्न) आन्त, थकाहुआ, उ- (अश्वमेध) यज्ञ विशेष दासीन, रंजीदः (अश्वशाला) अस्तवल,मन्दुरा (अवस्थित) स्थित्त, ठहराहुआ, (अश्वशिक्षक) घोड़ों को सिखाने टिका हुआ वाला, चावुकसवार (अवहित) निश्चित, सावधान, त- (अश्वसेवक) अश्वकी सेवा करने हदिल वाला, साईस (अविकारिन् ) जिसमें, विकार ख- (अष्टधातु) आठ प्रकारकी धातु,सो- राबीन पैदाहो,अ ना, चांदी, तांबा, कांसा, विकृत, वेऐव पीतल,रांगा,लोहा,सीसा (अविवेक) अविचार, मूर्खता, व- (अष्टसिद्धि) आठप्रकारकी सिद्धि, दतमीज़ अणिमा, जिसके बल (अव्यस्थित) अनिश्चित, तरल, से बहुत छोटा वन- चञ्चल जाय, महिमा, जिसके (अशक्त) असमर्थ, दुर्वल,कमज़ोर वलसे बहुत बड़ा वन (अशक्य) जो न होसके, गेरमुम- जाय, गरिमा, जिसके असम्भव चल से वहुत गरू, व. (अशंक) निःशंक, निडर, बेखौफ जनी, होजाय, लघि- (अशिक्षित) अविनीत, जिसने मा, जिसके वलसे ब- शिक्षा, तालीम न हुत लघु, हलका वन पायाहो, अनसीख जाय, प्राप्ति, जिसके (अशुद्ध)अपवित्र, नापाक,अशुचि, पलसे बहुत दूरकी भी ग़लत वस्तु मिलजाय, प्रा. (अशुद्धता) अशुद्धि, नापाकी, अ- काम्य, जिसके वलसे पवित्रता, गलती हरएक मनुष्य के म. (अशोक) शोकरहित, सुखी, खुश, अशोकवृक्ष सकै, ईशित्व,जिसके (अश्वतर) खच्चर, जो घोड़ी और वल से सब ऐश्वर्य गधे से पैदाहुआ हो उपस्थित हैं, वशित्व, (अश्वपति) अश्ववार, सवार, घोड़े जिसके पल से सब का मालिक प्राणी वशीभूतरहै, किन, नोरथ को पूरा कर , शब्दसंग्रह। 29576 ~ (असमशर) पञ्चवाण, कामदेव (आख्यान) वृत्त, इतिहास. कथा, (असत्यवादिन्) असत्य,झूठबोलने दास्तान वाला,अनृत भाषी (आगन्तृ) आनेवाला, विना जान (असह्य ) दारुण, जो न सहाजाय, पहिचान के जो कोई कठोर, वेवरदाश्त मकान पर आजावै (असाध्य) जो किसीप्रकार सिद्ध (आगन्तुक) आनेवाला,विना जान न हो, लाइलाज पहिचान के जो कोई (असूयक) गुण में दोप निकालने मकानपर आजावे वाला, निन्दक, बुराई (आग्रह)अच्छीतरहसे ग्रहणकरना करनेवाला निर्वन्ध,इठकरना,जिद्दकरना (अस्तव्यस्त) उलटा पुलटा, विप- (आघात) मारना, चोट यस्त,इधरका उधर (आघूर्णन) अवगूरण, घूरना (अहल्या) गौतममुनि की स्त्री (आचरण) चालचलन,व्यवहार, व- (अहिसा) जिसकमसे प्राणियों का वि वध न हो, दया (आच्छादित) ढंकाहुआ,आवृत, - (अहिफेन) अफीम दाहुआ (आ) (आच्छन्न) ढाकाहुआ, आवृत, मूं- (आकर्णित) सुनागया, श्रुत दाहुआ, (आकर्पण) ग्वींचना (आजीविका) जीविका,वृत्ति,रोजी (आकांक्षा) इच्छा, चाह, ख्वाहिश (आज्ञापन) इत्तिलादेना, विज्ञापन (आकांक्षिन)अभिलापी,चाहनेवाला जताना, आज्ञादेना (आकाशवृत्ति) अनियत जीविका (आज्ञापत्र)आज्ञाक पत्र, कागज लि- जिस जीविका का खित आज्ञा,हुक्मनामा निश्चय न हो, बेक- (आतङ्क) भय, सन्ताप, रुजा, रोग (आतुर) व्याधिपीड़ित रोगी,व्याकु- (आकाशवाणी) आसमानकी आवा ल,घराया ज, अशरीरिणीवाफ (आत्मघात)सुदमरना,आत्महत्या, (आकुञ्चन ) संकोचन, सिकोड़ना, समेटना (आदर) सन्मान, इज्जत, खातिर (आक्रमण) दवालेना,हमलाकरना (आधान) स्थापन करना याम रोजी अपने आप मरजाना शब्दसंग्रह। वताओं को बुलाना , . (आधिक्य) अधिकता,बहुताई,अ- धिकाई (आविर्भाव) प्रकट होना,प्रादुर्भाव (आधिपत्य)प्रभुत्व, अधिकार,अ- (आविष्कार) आविर्भति,प्रकटहोना ख्तियार (आवेदन ) निवेदन, वनव्य, गु- (आन्दोलन) हिलाना,झूलना,हल जारिश चल (आवेद्यसंग्रह) निवेद्यपत्र, जिसमें (आप्त) हित, यथार्थवका ज़मींदार लोग अ- (आमा) दीप्ति, चमक, रोशनी पनास्वत्व राजसभा कान्ति में दाखिल करते हैं, (आभूपण) गहना, जेवर, अलंकार वाजिबुलअर्ज (आय) लाभ, आमदनी, फायदा (आवेश) मान, घमण्ड, प्रवेश (आयास) परिश्रम, मिहनत (आशुतोप) शीघ्रप्रसन्न होने वाला (आरब्ध) प्रारम्भ किया हुआ, उ- महादेव पक्रान्त (आश्रयस्थान) आलम्ब सहाराकी (आराति) वैरी, दुइमन, शत्रु जगह (आराधन) सेवन, शुश्रूपण, सेवा (आश्रित) आयत्त, शरणप्राप्त, ता. करना, इबादत वेदार (आरोपण) स्थापितकरना, कायम (आश्वासन) तसल्ली देना, भरोसा करना देना, प्रबोधन (आलपनीय) सम्भापणयोग्य (आसीन) स्थित, धैठाहुना (आलिङ्गन) कण्ठाउलेप, गले से (आस्तिक) वेदान्तवाक्य, ईश्वर, लगाना, प्यारसे मि- गुरू परलोक में श्रद्धा लना या विश्वासकरनेवाला (आलेख्य)चित्र, तसवीर पुरुप (आलोडन) मन्धन,मथना,मार्गण (आस्वाद)रस,स्वाद,जायका,मवाद तलाशकरना, डूंढ़ना (आहुति) मन्त्रपढ़कर देवताओं के (आवरण) आच्छादन, ढकना नामसे आगि में हुनना (आवर्जन) अवरोधन, रोकना,म- (आह्निक) दिन में जो कियाजाय, नाकरना सन्ध्या, तर्पण, बलिवे- (आवाहन) मन्त्रोचारण पूर्वक दे. उप इत्यादि शब्दसंग्रह | (आहाद) खुशी, हर्ष, आनन्द आवाज़ बोलना (उच्चारण) आवाज़ (इक्षुरस) ऊखकारस (उच्छिन्न) कटाहुआ, कृत्त, निर्मूल (इस्थम्) इसप्रकार, इसतरह (उच्छिष्ट) भोजन के पीछे जो थाली (इन्दजित्) इन्द्रको जीतनेवाला, में पड़ारहजाताहै, जूटा मेघनाद, रावणकापुत्र (उच्छेद) विनाश, काटना, बरवादी (इन्द्रप्रस्थ) दिल्ली, हस्तिनापुर (उज्ज्वलन)जलना, बरना,चमकना (इन्द्रवधू) इन्द्रकी रानी, इन्द्राणी, (उड्डीयमान) उड़ताहुआ, वीरबहूटी (उडुगण) तारोंका समूह, तरई (इष्टदेव) जिस देवताको स्वयं मा. (उत्कण्ठित) अभिलापी, चाहने नताहो वह देवता वाला ख्वाहिशमन्द (उत्कर्पता)उत्तमता, श्रेष्ठता, बड़ाई (ईक्षक) दिलैया,देखनेवाला,नाज़िर (उत्कृष्ट) श्रेष्ठ, बड़ा, उत्तम, अच्छा (ईक्षित) देखाहुआ,दृष्ट,अवलोकित (उत्खात) उखाड़ागया (ईदृश) ऐसा, इस तरह का इस (उत्तीर्ण) पारङ्गत, कामयाब (उत्तेजक) प्रेरणा करनेवाला, हो- (ईदृक्ष) ऐसा, इस तरह का इस सला, बढ़ानेवाला (उत्तेजना) तेज़करना, तीक्ष्णीक- (ईप्सा) पानेकी इच्छा, लिप्सा रण, भड़काना (ईप्सित) जिस चीजके पानेकीइच्छा (उत्तोलन) तौलना, उन्नय, ऊपर कीगईहो, वह चीज को उठाना (ईहा,) चेष्टा, उपाय, यतन (उत्पाटन) उखाड़ना, उन्मूलन (उ) (उत्प्रेक्षा) भावना, मानना, एक (उग्रस्वभाव) क्रूर, कठोरचित्त, सं अलंकारका नाम गदिल (उत्सर्ग) त्याग, दानदेना, सम- (उग्रसेन) जिसकी सेना वड़ीभया- नकहो, मथुरा का राजा (उदग्र) ऊँचा, उच्च, तीक्ष्ण, तेज कंसका पिता (उदरम्भरि) अपनाही पेटपालने (उचस्वर) जिसका ऊंचास्वर आ वाला, पेटू वाज़ हो, वह पुरुप, ऊंची (उदाहरण) निदर्शन,मिसाल, दृष्टांत भांति का भांति का पण करना ३०४ शब्दसंग्रह। . , (उदीरण) कथन, कहना (उपशम) शान्ति, समता, इन्द्रि- (उद्देश) अभिप्राय, प्रयोजन, अर्थ, योंको अपने वश विषयों मतलव से खींचकर रखना, इ- (उद्यानपाल)वागवान,माल, बा. न्द्रिय निग्रह टिकारक्षक (उपस्थान) हाजिरी, सेवा, स्तव, (उद्योत) प्रकाश, रोशनी स्तुति करना (उन्नति) वृद्धि, बढ़ती, तरक्की (उपस्थित) वर्तमान,मौजूद, हाजिर (उपगम) अंगीकार, कबूल करना, (उपहास) निन्दाकेसाथ हँसी करना स्वीकारकरना,पासजाना (उपार्जन) संग्रह करना, इकट्ठा (उपचार)उपाय, सामग्री, सामान, करना, सञ्चय दवा, चिकित्मा (उपेक्षित) त्याग कियाहुआ, छोड़ा (उपजीविन्)कितीकेसहारेजोजीता हो,आश्रित, आसरागीर (उरगाद) सोका खानेवाला, ग- (उपदंश)जहरीला जानवर, सांप, रुड, मयूर वीछू का काटना, गर्मी (उरगारि) सोका शत्रु, दुश्मन, ग- हुआ, परित्यक्त का आर्जा , (उपदेश) शिक्षा, सिखाना, नसी- (उल्लछन) लांघना, विपरीत करना हत, सीख, व्याख्यान उत्क्रमण, फांदिजाना (उपदेशक) शिक्षक,सिखानेवाला (उल्लास) हर्प, खुशी, अध्याय, परि- व्याख्यान देने वाला, च्छेद ल्यक्चरर (उल्लेख) अच्छालेख,वर्णन, वखान (उपदीप) छोटे २ टापू , द्वीप एक अलंकार का नाम (उपनयन) यज्ञोपवीत, संस्कार, उ- (ऊ) पनीति, जनेऊ (ऊईबाहु) जो तपस्वी सदाहाथ (उपनेत्र) चश्मा, ऐनक को ऊंचारक्खे,ऊर्द्धवाहू (उभयपक्षीय) दोनों तरफका, तर्फन (ऊहा) वितर्क दलील (उपयोग) काममें लाना, इश्तेमाल () (उपयोगिन् ) सहायक, सहयताकर (ऋणपत्र) कर्जदेनेकी तिथि मिती ने वाला, मददगार, जिसमें लिखी जातीदे, उपकारक तमस्सुक शब्दसंग्रह। ३०५ (ऋणमुक्तपत्र) फारिगखती मुस्तैद (ऋणिन् ) कर्जदार, अधमर्ण, देन- (कठिनता) कठोरता, कठिनाई, दार दिक्कत (ऋतुराज) घसन्त, ऋतु, मौसम, (कण्ठस्थ) कण्ठमें स्थित, वरज़- वहार वान, वाचोविधेय (ऋतुस्नान) स्त्रियों का मासिक (कंठ्य) जोवर्ण कण्ठसे निकलताहो स्नान (कण्डन)कांड़ना, मर्दना, मींजना (ऋष्यमूक) एक पर्वत जो किष्कि- (कण्डनी) कॉड़ी, उखली धापुरी के पासहै (कतम) कोन २ (ऋ) देवता, दानव, की माता (कतिपय) कईएक, चन्द, थोड़ा महादेव, भैरव, रानस (कथक) कहनेवाला, कथावांचने वाला, पौराणिक (एकचित्त) सावधान, निश्चिन्त (कदाचित्) कभी, किसी वक्त जिसका मन एक वि- (कदापि) कभी, किसी वक्त पय पर जमाहुआ हो (कनकाचल) सोनेकापहाड़ (एकत्र) एकजगह (कपटिन् ) वश्चक,छली, दगाबाज़ (एकधा) एकप्रकारसे, एकतरहसे (कपर्दिका) काकिणी, कौड़ी (एकरस) जो सर्वकाल एकसारहै । (कपालिन्) महादेव (एकाक्ष) एक आंखवाला, काना (कपिकुञ्जर) वन्दरों में श्रेष्ट (एतादृश) इसतरहका, ऐसा (कपिधज) जिसकी ध्वजा में वा- (एतावत्) इतना, इतनी नरकीसीसूरतवनीहो, (ऐ) अर्जुन (ऐरावती) एक नदीका नाम जो (कमनीय) मनोहर, सुन्दर, सुथरा, लाहौरके पास बहती है, ब्रह्मादेशमें जो नदी (कमलापति) लक्ष्मीकाभा,ना. घहती है उसका नाम रायण (कम्युग्रीव) शंख के सदृश तीनि (औपचालयोदवाखाना, अस्पताल रेखायुक्त, तथा सुस्नि- (क) ग्ध सुन्दर ग्रीवा, गला (कटिवद्ध) कमरवांधे हुये, तय्यार, सुहावन, दिलचस्प जिसका हो, वह पुरुष ३०६ शब्दसंग्रह। कने की जगह हो भयानक, नाक (करताली) हथेली वजाना १ (गान)७ प्रकार के स्वर, (करपाल) हाथकी रक्षा करनेवाला तथा राग, और रागिनियोंको अच्छे खड्ग, तरवार, दस्ताना प्रकार जानना और उनको अच्छी (करशाला) चुंगीघर, महसूल चु- तरहअभ्यस्त याद करना. २ (वाद्य)जै प्रकारके वाजा है (करालाकृति) जिसकी आकृति सू- उनको अच्छी तरह वजाना. रत कराल, डरावनी ३ (नटन) नृत्य, नाचना. खौफ ४ (नाट्य) भूत पूर्व, पहिले के महाराजाओं के चरित को नाटक (करुणायतन) करुणा दया के आय- करके खेलना व दिखलाना, नकल. तन, स्थान, बड़ार- करना. हम दिल, अतिकृ-५ (आलेख्य ) चित्रकारी करना, पालु तसवीर खींचना. (करुणाई) दयाले आई, गीला,क-६ (बहुरूपधारित्व ) विशेपक छेद्य समयानुसार, वक्त मुताविक, हर- (कर्णवेध)संस्कार विशेष, कनछेदन तरह का रूप धारण करना. (कर्ण वेधन) संस्कार विशेष कन ७ (तण्डुलप्रसूनवलि विकार- छेदन क्रिया) समूचे चावल और पुप्पोंसे (कर्णाट) कर्णाटक देश देवताओं के मन्दिर में चौकवगैरः (कर्मेन्द्रिय) काम करनेवाली इन्द्रि बनाना, य,हाथ, पैर, लिंग, गु ८ (पुप्पशव्यानिर्माण ) फूलों दा, वाक्, ये पांच की शय्या, सेज वनाना, और फूलों (कलकण्ठ) जिसका मधुर स्वर,हो के अनेक प्रकार के भूपण गहना कोकिल, कोयल (कलन) गिनना, संख्यान ९ (दन्त, वस्त्रागारागादिनिर्माण) (कला) सोलहवाँ अंश, हिस्सा, दाँतोंको सुगन्धित और स्वच्छसाफ समय का हिस्सा, मिनट, करनेवाले अनेकप्रकार के मजन, चतुःषष्टि ६४ प्रकार की मिस्सी बनाना, समय २ के नेप- विद्या, जो आगे क्रम से ध्यपोशाक को जानना, स्त्रियों के वर्णन की जाती हैं, अङ्गों में अनेक प्रकार के चित्र उरे- रुणानिधान . वनाना.

शब्दसंग्रह। ३०७ नाना. हना और सुगन्धादि, इत्र, फुलेल विधान, गहना पहिनना, या पहि- द्रव्य का लेप करना. १० (मणिभूम्यादिनिर्माण) ऋतु २१ (ऐन्द्रजाल) मायावी,बाजी समय के अनुसार मकान बनाना गरकी तरह क्रीडा करना, जिसमें ऋतु के अनुसार सब सा २२ (रूपनिर्माणकौशलको) मग्री मौजूद रहै. कौचुमार योग बदसूरत को खूब ११ (शय्याविधांन)विस्तर का सूरत बनाना बिछाना. २३ (हस्तलाघव) काम में हाथ १२ (जलवाद्य) पानीका वाजा की सफाई वजानाजलतरङ्ग. २४ (भोज्यविकार) अनेकप्रकार १३ (उदकक्रीडा) जलका खेल, के भोजन रसोई,बनाने में चतुरता जलविहार जानना. होशियारी. १४ (विचित्रविधान) क्लीव, नपुं २५ (पानक रस रागासवयोजन) सक बनाना, युवा, जवानको वृद्ध, हरतरहके पीने के लिये शरबत रस बूढ़ावनाना. अर्क, आसव नशीली चीज़, भांग १५ (मालाग्रन्थन) देवताओं के माजून, अङ्गेरी शराव वगैरः का पूजन के लिये विविध भाँति के वस्त्र बनाना तथामाला बनाना. २६ (सूची वाणकर्म) सुई का १६ ( शेखरापीडयोजन ) पुप्पों काम, सीना यूटे काढ़ना, वाणकर्म, से केशपाशको भूपित करना, वाणका चलाना व वनाना, १७ ( नेपथ्यरचना) देश तथा २७ (सूत्रक्रीडा) तागासे चकई, समय के अनुकूल पोशाक प- व लहू वगैरः का नचाना या रंग हिनना. विरंगा तागा दिखाना, १८ (कर्णपत्रभङ्गानिर्माण) हाथी २८ (प्रहेलिका) जिसके शब्दों दांत या शंख या और वस्तु से कर्ण से और अर्थ हो और वास्तविक अ- भूपण बनाना. सलीमतलब कुछ औरही हो यथा १६ ( सुगन्धयोजन) विविध जरें बरें ऐठे लड़ें याहीमें म्वहिं चैन। भांतिके सुगन्धित, खुशबूदार चीज़ गली गली डोलत फिरै कहै रसीले वैन ? नाच उलटिकै घोड़ाखाय २ बनाना व लगाना. २० (भूपणयोजनम् ) अलङ्कार इत्यादि वार्ता, कहानीको जानना ३०० शब्दसंग्रह २६ (प्रतिमाला) हरएक पशु, स्वागुरूणाम् ॥ आयार्नीच पुंसा पक्षीकी बोली बोलना. या अन्तरा- म्मलिनकुलजुषांशिष्टतेयं यदिस्यात् क्षरी बैतवाजी जैसे शारदा शारदा 'सूच्यग्रेकूपपटकन्तदुपरि नगरी म्भोजवदना बदनाम्बुजे । सर्वदा तत्रगंगाप्रवाहः” इत्यादि. सर्वदा स्माकं सन्निधि सन्निधिं कि- ३४ (पट्टिकावेत्रवाणविकल्पाः) यात १ इस श्लोक के अन्तिमनखी- नेवार, और वेत, रज्जु, रस्ती से री अक्षर त से कोई श्लोक पढ़ना मोढ़ा, कुर्सी, कोच, पलॅग वगैरह यथा ततीरावण नीतायाः सीताया- चीनना. इशत्रुकर्पणः॥ इयेपपदमन्वेट चा ३५ (तर्ककर्माणि) तर्क, युक्ति, रणा चरिते पवि१ इत्यादि जानो। तरकीब से कामकरना, ३० (दुर्वञ्चक योगाः) दुष्ट, व ३६ (तक्षणम् ) बढ़ई का काम श्चक, ठग दगाबाज़लोगोंकी संगति जानना या करना, सोहबत करना. ३७ (वास्तुविद्या) गृह, घर, म- ३१ (पुस्तकवांचनम् ) शुद्ध सही कान, बनाने की विद्या, कारीगरी, शीघ्र लल्दी पुस्तक को वॉचना. जानना,थवई का काम करना. ३२ (नाटकाख्यायिका दर्शनम् ३८ (रौप्य, रत्नपरीक्षा) रौप्य, नाटक) दृश्यकाव्य, थियटर क- सोना, चॉदी, रत्न, जवाहिरात को रिकै प्राचीन, पुरानी, कथा, इति- पहिचानना, परखना. हास, कहानी, को दिखलाना, या ३६ (धातु वादः) सुवर्णकार देखना. सोनारका काम जानना या करना. ३३ ( काव्यसमस्यापूर्तिः) जो ४० (मणिरागाकरज्ञानम् ) म- कोई पुरुष कचित्त अथवा रलोकका णिराग मणियोंके रंगको तथा उन चौथाचरण देवे यथा “ सूच्यग्रेकूप की खानि को जानना और पहि- पटकन्तदुपरिनगरी तत्रगंगाप्रवा- चानना, हः" और कहै कि इसको तथा इसी ४१ (वृक्षायुर्वेदयोगः) वृक्ष पेड़ प्रकारके और श्लोकका चौधाचरण दरस्त का आयुर्वेद, वैद्यक चि- को पूर्णकरो तब उसको पूराफरना कित्सा, दवा, पालन, पोपणकरना, यथा भन्ने सम्यक्प्रयुक्तः सविधि या उसका प्रकार जानना. गिरिभुवामौषधीनाम्प्रयोगेस्सारन्नि ४२(मेप,कुकुट,लया,युद्धविधिः) कास्यरत्नेनिगमजलधित शिशचयि मेप भेंडा, कुकुट मुर्गा, लया तीतर, शब्दसंग्रह। ३०६ सिखाना. कामों में कुशलता. की लड़ाई का प्रकार जानना व | गैरः वनाना तथा उसका प्रकार लड़ाना. जानना. ४३ (शुक सारिकाप्रलापनम् ) ५१ (धारणमात्रिका) विना पढ़ी सुआ सुग्गा, तोता सारिका, मैना विद्याको भी एकहीवार सुनकर अ को पढ़ाना यानी उन को बोलना वधारण याद रखना, स्मरण शक्ति को बढ़ाना, अवधान करना. ४४ (उत्सादनम् ) शत्रु दुश्मनों ५२ (समवाच्यसमपाठयम्) कि- को यत्न पूर्वक तरकीब के साथ उ- सी दूसरे आदमीका पढ़ना या बात त्सादन उजाड़ देना, निकासिदेना. चीत सुनकर चाहै उस भाषा को ४५ (केशमार्जन कौशलम् ) जानता भी न हो तथापि यथाश्रुत वालोंको मलना और कंघी करना, जैसा सुनै वैसा स्मरण रखना, या तथा तेल फुलेल लगाना इत्यादि दूसरीबार उसीतरह पढ़जाना. ५३ ( मानसीकाव्यक्रिया) मन ४६ (म्लेच्छित विकल्पाः)म्लेच्छ से काव्य करना अर्थात् दूसरे के यवनादि की भाषा जवान,को जा- आशय, मतलव को विना जनाये नना तथा उनके काम में आनेवाली भी समझलेना. ५४ (अभिधानकोशाः) सब प- ४७ (देशभापाज्ञानम्) सबदेश | दार्थों, चीजों का नाम जानना, मुल्कोंकी भापा बोल चाल सीखना. ५५ (छन्दोज्ञानम् ) छन्दके शास्त्र १८ (पुष्पशकटिका) लड़कों के से अनेक प्रकार के छन्दों के भेद खेलने के लिये फूलोंकी गाड़ी वगै- को जानना ५६ (क्रियाबिकल्पाः)जिसतरह ४९ ( निमित्तज्ञानम् ) कुण्डली वनै उस तरह से कार्य को सिद्ध तथा प्रश्न तथा वर्तमान समय तथा करना. अनेक अद्भुत वातों को ५७ (चलितयोगाः) छलित, देखकर भूत, भविष्यत् , का शुभा- छल, कपट हरतरह की चालाकी शुभ अच्छा बुरा फल नतीजा जान सीखना अर्थात् ऐयारी करना. लेना व बतलाना. ५८ (वस्त्रगोपनानि) कपड़ों की ५० (यन्त्रमात्रिका) वशीकरण, रक्षा, हिफाज़त करना. युद्धादिक के लिये यन्त्र तावीज़ व ५६ (यूतविशेपाः)शतरंज, चौ- चीजों को बनाना. रःबनाना. प्रकार की शब्दसंग्रह। नना. पड़, ताश वगैरः अनेक प्रकार के मनोरथको पूर्णकरता है जुआका खेल जानना, याखेलना, वह वृक्ष ६०(आकर्पीडनम् ) जुआ के (कल्पित) बनायाहुया, मानागया खेल में भी इसतरह खेलना जिससे कृत्रिम, रचित अपनी ही वाजी चौकसरहै इसवात (कश्यप) एक मुनिकानाम, जिसने में निपुणहोना. अपनीमृटिसे देवता,दैत्य ६१ (वालकक्रीडनकानि) लड़कों राक्षस इत्यादि को उत्पन्न के खेल को जानना या लड़कों के किया कश्य, मदिराकी भी खेलने के लिये खिलौना वनाने जा संज्ञाहै,उसको जो पीवेसो पुरुप, शराबी, मधप ६२ (वैनायिकीज्ञानम् ) राजादि (काकतालीयन्याय) अनायास विना कों को विनय, नम्रतासेप्रसन्न,खुश परिश्रम या अन- करने जानना. वसर वे मौके ६३ (वैजयिकीज्ञानम् ) स्पष्ट यादेवयोगसे इ- विजय करना या विजय, जीत देने त्तिफाकन, जो वाले देवताओं को वश करने की विद्याजानना. ऐसे समय पर ६४ (वैयासकीव्यायामकीविद्या कहाजाता है कि ज्ञानम् ) व्यासादिकनके जो पुराण यह काकतालीय हैं उनको सब को जानना और न्याय से प्राप्त व्यायाम कसरत इत्यादि नटविद्या हुआहै (कांक्षा) इच्छा, अभिलाप, चाहना (कलाधर) कलानिधि,चन्द्रमा, चांद ख्वाहिश (कल्पतरु) इन्द्रके नन्दनवनमें एक (कापुरुप) खराव आदमी, नीचपुरुप ऐसावृक्षहै जो देवताओं (कामकेलि) कामदेवका खेल, स्त्री के सम्पूर्ण मनोरथ को पुरुपका एकान्त मि. पूर्णकरताहे वह वृक्ष लाप, सुरत, मैथुन (कल्पद्रुम) इन्द्र के नन्दन वन में (कामधेनु) एकतरह की गो, जो एक ऐसा वृक्ष है जो सम्पूर्ण मनोरथको पू- देवताओं के सम्पूर्ण राफरती है वस्तु मिलजाय, को जानना.

शब्दसंग्रह। . (कामना) मनोरथ, चाहना, रवा- लगीथी उससमय स- हिश जीवनमूरि लेनेको जा- (कामरूप) इच्छानुसार जैसाचाहै तेहुये हनुमानजी को तैसा रूप सूरत धारण रास्ते में कपटमुनिव- करनेवाला मायावी नकर जिसने छलना' (कामातुर) कामदेवसे व्याकुल, चाहाथा मस्त, बड़ाकामीपुरुष (कालरात्रि) काल, मौतकीरात, न- (कामार्त) कामदेवसे पीड़ित, का. वरात्रकी सप्तमी तिथि मुक, मस्त (किष्किन्धा) वालिवानर की राज- (कामारि) कामदेवकाशत्रु, महा- धानी एक पुरी देव (कीदृश्) कैसा, किसप्रकारका, (कायिक) शरीर सम्बन्धी, देहके किसतरहका मुतअल्लिक, शारीरिक (कीदृक्ष) कैसा, किसप्रकारका कि- (कारागार)जेलखाना, बन्धनालय सतरहका (कार्पण्य) कंजूसी, कृपणता, सू- (कीर्तन) तारीफकरना, सराहना, मपना यशोवर्णन (कार्याधिकारिन ) कारोवारकामा- (कुकर्मन) धुराकाम लिक, का-- (कुचकुइमल) कुचकीकली, चूंची मैनेजर की ढेपुनी, चूचुक, (कार्यकलाप) बहुतसाकाम कुचाग्र (कार्यदक्षता) काममें होशियारी, (कुटम्विन् ) गृहस्थ, घरवारी, खान- कार्यकौशल, कार- दानी गुजारी (कुण्ठित) मुड़ाहुआ, खफाहुआ, (कार्यनिष्ठ) काम में लगाहुआ, लज्जित, आलसी,सुस्त कार्यासन, मशगूल | (कुतर्क) वेजह दलील (कालक्षेप) समयको व्यतीतकरना, (कुदृष्टि) वुरी निगाह, बुरी निगाह दिनकाटना से देखना, वदनज़र (कालनेमि) एक राक्षसका नाम, (कुधर) पहाड़, अद्रि, पर्वत लंकाकी लड़ाई में जव (कुध) पहाड़, अद्रि, पर्वत लक्ष्मणजी के शक्ति (कुपथ) खरावरास्ता, कुमार्ग ध्यक्ष, ३१२ शब्दसंग्रह। . में हों वह पुरुष (कुपात्र) खराव वर्तन, दानदेने के बुरे कर्मों से अपने अयोग्य ब्राह्मण वंश को बदनाम क- (कुपित) गुस्सावर, क्रुद्ध, नाराज़ रनेवाला कुभार्या)धुरीस्त्री, लड़ांका (कुलधर्म) कुल, वंशका धर्म, आ- (कुमति) वुरी समझ, दुर्बुद्धि चरण वर्ताव, व्यवहार (कुमुदवन्धु) चन्द्रमा कुलाचार (कुम्भसम्भव) अगस्त्यमुनि (कुलपूज्य) वंशके सब लोग जिस (कुम्भीपाक) एक नरकका नाम, की पूजा करतेहों कुल जिसमें जलतेहुये तेल गुरु, पुरोहितकुलदेवता की कड़ाही में पापी (कुलक्षण) कुचाल, बुरेचिह्न जिस लोग डालेजाते हैं (कुयोग) वुरी सोहवत, कुसंगति (कुशलक्षेम) खैर सल्लाह कुशल (कुरु) इन्द्रप्रस्थ, दिल्ली का एकपु- मंगल, चैनचान रानाराजा जिसकावंश कौं- (कुशाग्रबुद्धि) कुशके अग्र, फुनगी रव कहलाताहै के तुल्य जिसकी (कुरुक्षेत्र) कुरु राजा का क्षेत्र, ज- पुद्धि तेज़हो वह पु. गह जहांपर कौरव और रुप, बड़ा बुद्धिमान पाण्डवोंका युद्ध हुआथा (कुप्ठनाशिनी) कोढको नाश क (कुरूप) बदसूरत आदमी, खराव रनेवाली औषध सूरत सोमराज वल्ली (कुलघातिन्) खानदानको वरवाद (कुसुमशर) जिसके बाण फुलके हों वह, कामदेव शक (कुसुमित) फूला हुआ, पुष्पित (कुलतारण) कुलको तारने वाला (कहक) कुटिल, कपटी, छली, लायक लड़का, जि. फरेची ससे कुल सुशोभित (कूलदुम) नदी के किनारे पर उगे होता है हुये वृक्ष, तटस्थवृक्ष (कुलदोहिन्) कुलवाले खानदानी (कृतकार्य) जिसने काम को पूरा लोगों का द्रोह, नाश किया हो, कामयाव, चाहने वाला अर्थात् कृतकृत्य करने वाला, कुलना- शब्दसंग्रह। , (कृतम) उपकारको न माननेवाला, (कोमलता ) मुलायमत, नरमाई, अहसान फरामोश मृदुता (कृतघ्नता) उपकार को न मानना, (कोलाहल) कैल कल शब्द, गुल अहसान फरामोशी गपाड़, हल्ला (कृतज्ञ) नेकीको समझनेवाला,उ- (कोशला) कोश खजानः जिसमें पकारज्ञ, अहसानमन्द बहुत हो अयोध्या (कृतवीर्य) एक राजाकानाम, जि- (कोशाध्यक्ष) खजान्ची, भाण्डा- सका सहस्त्रबाहु कार्त- रिक वीर्य, नामपुत्र हुआथा | (कौतुकिन्) क्रीडाशील, खिलाड़ी (कृतार्थ) जिसने अपने कृत्य काम (कौरव) कुरु राजा के वंश के लोग को कियाहो, जिसकी इ- कुरुवंशी च्छा पूरी होगई हो (कौशिकी) एक नदी का नाम प. (कृत्रिमपुत्र) दत्तकपुत्र, जिस को हिले जो विश्वामित्र गोद विठाया हो, वह की बहिनथी, अब नदी लड़का होकर हिमाचल से व- (कृषिकर्म) खेतीकाकाम,काश्तकारी हती है (कृपिकारक) खेती करनेवाला, का- (क्रयविक्रय) खरीद, फरोख्त, ब- किसान नेई, बनिजपन (केन्द्र) पृथ्वीको दक्षिण तथा उत्तर (क्रान्ति) आकाशमें सूर्यका रास्ता रेखा जिससे पृथ्वीकी नाप (क्रान्तिमण्डल) खगोलमें सूर्य का होतीहै मार्गवतलानेवाला (केरल) मालवादेश, नवीनविद्या, वृत्त (क्रियादक्ष) काम में कुशल होशि- नयाशास्त्र (केशिन्) जिसके वाल सुन्दर हो, यार,कार्य कुशल जोब्रजमें श्रीकृष्णजीको (क्रोधना) कोपवती स्त्री, गुस्सायर औरत मारने गयाथा (कैटभ) एक राक्षसकानाम, जिस (क्रोश) पुकारना, रोना, कोस, दो मील (कोपित) क्रोधी, खफ़ा (क्लान्त) थका हुआ, श्रान्त इतकार, एक राक्षस का नाम (क्रोडपत्र) खरी, पर्चा को दुर्गाजीने बध कियाथा शब्दसंग्रह। माराहुआ, हिंसित -- (स्व) मालिक, गरुड़, ) (क्लान्ति) थकावट, परिश्रान्ति उत्पन्न पुत्र, जारपुत्र (क्लेशक) दुःख देनेवाला, दुखदाई (क्षेपक) फेंकनवाला (काथित) पकाया हुआ, पक्क (क्षेपणी) ढीला, छोटा पत्थर, फें- (क्षणिक) थोड़ी देरतक जो रहे, कनेवाली चमड़े वा रस्सी थोड़ी देर का की दिलवासी (क्षत) घाव, व्रण, जखम, अथवा, (क्षोभ) भयानक वस्तुके देखने से चित्त, तवीयत की घबरा- (क्षति) घाटा, नुक्सान, हानि हट, डर, भय (क्षरण) टपकना, चूना, स्त्राव (क्षौर) मुण्डन, हजामत करना, (क्षाम) पतला, दुवला,क्षीण, कृश मुड़ाना (क्षालन) शुद्धकरना, पवित्र करना, धोना, खंहारना (खगपति) पक्षियों, चिड़ियोंका (क्षालक) धोनेवाला, धोवी (क्षालित) शुद्धकिया हुआ, धोया (खगान्तक) पक्षियोंका नाशकरने हुआ,साफ कियाहुआ चाला, वाजपक्षी (क्षितिप) पृथ्वीकामालिक, राजा, (खगेश) गरुड़, पन्नगारि महाराजा (खगोल) आकाशमण्डल (क्षितिपति) पृथ्वीकामालिक, राजा, (खगोलविद्या) आकाशके तारा,ग्र. महाराजा हादिकों की चाल (क्षितिपाल)पृथ्वीकामालिक, राजा, उदय,अस्त जानने महाराजा की विद्या, ज्योतिष (क्षुण्ण) पीसाहुआ, चूर्णित के सिद्धान्त ग्रन्थ (क्षुधातुर) भूखसे व्याकुल, चुभु- (खण्डन) काटना, टुकड़े करना, क्षित, मँखा किसी की वात काटना (क्षुधात) खसे व्याकुल, बुभुक्षित, मातकरना रखा (खनन) खोदना या जिससेखोदा (क्षुब्ध) व्याकुल, घबरायाहुआ जाय, कुदार वगैरः (क्षरभाण्ड) अस्तुरा धरनेका वर्तन, (समणि) आकाश का मणि, सूर्य किस्वत (सरधार) जिसकीधार वहुनतेज़हो, (क्षेत्रज) अपनी स्वी में दूसरे से तीक्ष्णधार शब्दसंग्रह। ३१५ ३ करनेवाला (खल्वाट) चंदुला, जिसके शिर में (गतिपरिपाटी) सेना के चलने की बाल नहों, गंजा रीति, फौजकी क- (खाण्डव) एक बनका नाम वायद (खाद्य) खानेके लायक चीज़,भोज्य (गदहन) रोगको (खानिक) खानि में पैदाहोनेवाली वैद्य, हकीम, डाक्टर चीज़ (गदा) एक तरह का हथियार (खिन्न) उदासीन, रंजीदः (गदाधर) कौमोदकी गदाको धा- (खेचर) आकाश में चलनेवाला, रण करने वाले विष्णु ग्रहगण, देवतादिक भगवान् (खेद) शोक, अफसोस, पछतावा (गदिन्) रोगी, विष्णु (गद्गद) बड़े हर्प, खुशी या भय से (गहादार) जहाँ से गङ्गा निकलती पूरा न वोलसकना है, गंगोत्तरी (गन्तृ) चलनेवाला, जानेवाला (गजगामिनी) जिस स्त्रीकीचाल (गमनागमन) आनाजाना, आम- हाथीकी चालकी दरफ्त नाई मतवालीहो (गमिन् ) जानेवाला (गया) एक तीर्थस्थान जहां हिन्दू (गजपाल) हाथीको पालनेवाला, लोग पितरों के उद्धारार्थ महावत, हाथीवान् पिण्डदान करते हैं (गजवदन) गणेशजी (गर)निगलना, गला, जहर, विष (गणक) ज्योतिषी, गिननेवाला, (गरिमन ) गरुआई, बोझा, गुरुत्व नजूमी (गरीयस्) गुरू, श्रेष्ठ, बड़ा (गणनाथ) शिवजी के गणोंका मा- (गर्ग) एक ऋपिकानाम, जो यदु- लिक, गणेशजी वंश का गुरूथा (गणनायक) गणेशजी (गर्जन) गरजना, सिंहका शब्द, (गणपति) गणेशजी गाजना (गणितज्ञ) हिसाव जाननेवाला (गर्भवती) जिस स्त्री के सन्तान (गण्डकी) एक नदीका नाम होनेवाला हो (गताक्ष) जिसकी आंख जातीरही (गर्भस्राव) गर्भका गिरना गर्भपात, हो, अंधा (गर्वित)अभिमानी,अहंकारी,घमंडी वह स्त्री . , शब्दसंग्रह। (गर्दित) निन्दित को जाननेवाला (गाथा) कथा, श्लोक (गुणग्राहिन्) गुण का गाहक गुण (गाधितनय) विश्वामित्र को जाननेवाला (गाधर्व) गन्धर्व विवाह, जो के- (गुणन) गुनना, जरब देना बल वर कन्या की ही (गुणवत्) पण्डित, प्रवीण, चतुर रजामन्दी से होताहै (गोपित) पालाहुआ, पालित, रक्षा (गायक) गानेवाला, गवैया किया हुआ, रक्षित (गायन)गानेवाला, गवैया (गोह) रक्षा करनेवाला, पालक, (गालव) एक ऋपिका नाम, लोध मुहाफिज औषध (गोप्य) छिपानेकेलायक, अप्रकट-) (गिरिजा) हिमाचल से उत्पन्न पा नीय र्वती जी, गौरी (गुम्फ) गूंथना, पोहना, गुम्फन, (गिरिधर) गोवर्धन नाम पर्वत को ग्रन्थन धारण करनेवाले, श्री (गुरुतर) बहुतभारी,बहुतही भारी कृष्ण भगवान् (गुरुतम) बहुतभारी,बहुतहीभारी (गिरिधारिन) गोवर्धन नाम पर्वत (गुरुजन) बड़े लोग, वृद्धजन, बड़े को धारण करनेवाले श्रीकृष्ण, भगवान् (गुरुवार) वहस्पति का दिन, वीफे (गिरिराज) हिमाचल गोवर्धन, (गृध्रराज) गीधों का राजा, जटायु सुमेरु सम्पाति, नाम के दो (गिरिवर) पर्वतों में श्रेष्ठ बड़ापहाड़ गीध (गिरिमुता) गौरी, पार्वती (गृहिणी) स्त्री,जोरू (गिलन) निगलना,खाना, भोजन (गेय) गाने के योग्य (गोत्रज) गोतियार, एक गोत्र के (गीतिका) एक छन्द का नाम लोग (गअन) गॅजना (गोऽतीत) अप्रत्यक्ष, इन्द्रियों से (गुटिका) गोली, गुलिका बाहर गुणक) जिस अंक से गुना जाय, (गोदान)गोकादान,देना, संस्कार मुण्डन, विशेप, पहिले २ (गणग्राहक) गुण का गाहक गुण दादी बनवाना करना वह अंक शब्दसंग्रह। ३१७ थी वह शहर काश्य (गोदावरी) स्वर्गको देनेवाली एक गुसाईं, अथवा जिस नदी का नाम जो द- के बहुतसी गौएँ हों क्षिण में वहती है (गौड़)ब्राह्मणोंकी एक जाति,जि. (गोधूलि) सायंकाल, शाम, जब समें वंगालकी राजधानी कि गौएँ जंगल से चरके गाँव को आती हैं वह (गौण) अप्रधान समय (गौरीश) महादेव, शिव (गोपन) छिपाना, अप्रकाशन, र- (ग्रन्थकर्तृ) पुस्तक बनानेवाला क्षा करना (ग्रन्थकार) पुस्तक बनानेवाला (गोपनीय) छिपाने के योग्य अप्र- (ग्रहण) लेना, सूर्य अथवा चन्द्रमा को जव राहु ग्रसताहै वह (गोपी) गोप, अहीर की स्त्री, अही. समय रिन, ग्वालिन (ग्राहक) ग्रहण करने वाला, लेने (गोपीनाथ) श्रीकृष्ण, भगवान् वाला, खरीददार (गोमती) एक नदीका नाम (ग्राह्य),ग्रहण करनेके योग्य, लेने (गोमुखी) जिसका गौकैसा मुखहो आदेय या जिसमें मालारखकर (घ) जप किया जाता है वह (घटक) मिलाने वाला, संयोजक थैली, हिमाचलकी एक चेष्टा करनेवाला गुफा जिससे गंगाजी (घटज) घटसे उत्पन्न,अगस्त्यमुनि निकलती हैं जो दक्खिनतरफ़ आकाश (गोवर्धन) व्रज में इन्द्रके कोप से में उदयहोताहै जब धारा सम्पात कर- (घटयोनि) अगस्त्यमुनि के जल वरसताथा उस (घटी) घड़ी, ६० पल, चौवीस मि. नट, छोटा घड़ा सपर्वत को उठाया था (घटिका) घड़ी, ६० पल, चौवीस वह पहाड़ (गोस्वामिन् ) गो, इन्द्रिय और गो (घण्टाली) छोटी २ घंटियोंकास मूह, जो पैलके गलेमें ईश्वर, महन्त, गुरू वांधीजाती हैं लायक, समय श्रीकृष्णजीने जि मिनट, छोटा घड़ा का स्वामी, मालिक ३२० शब्दसंग्रह। नेवाला लोक प्रवाद वाला, कारका कच्चा लोहा जो (जटाधारिन्) जटा, सदा धंधे रहने लोहे को खींच लेताहै वाले वालों को, रख- (चुम्वन) चुम्मा, वोसा, चूमना (चूडाकरण)मुण्डन संस्कार, मूंड़न (जटित ) जड़ाऊ, जड़ाहुआ (चूपक) चूसनेवाला (जटिल) जटा रखनेवाला, जटा. (चूपण) चूसना धारी (चेष्टा) हाथ, पैरका चलाना, काम (जड़मति) उजड्ड, दुवुद्धि करना (जनकतनया)जानकी जी महा- (चैतन्य) परमात्मा, ब्रह्म रानी (च्युति) चूना, टपकना (जनकसुंता) जानकीजी महारानी (जनप्रवाद) लोगों की कहावत, (छन्दोग)काव्यवनानेवाला,कवि, सामवेदका गानेवाला (जनमेजय) दुष्ट लोगों को पाने (छर्दन).छाँट, वमन, कय प्रतापशाली (छर्दि) छाँट,वमन, क्रय राजा परीक्षित का (छलविनय) कपटपूर्वक, विनय पुत्र करना (जनयितृ) पैदा करनेवाला, तात, (छात्रवृत्ति) विद्यार्थियों की वृत्ति, वज़ीफा, स्कालरशिप (जनश्रुति) लोगों में फैला हुआ (चायापथ) पछाई का मार्ग, खाली अफवाह, किंवदन्ती जगह, आकाश (जन्मद) पिता, बाप (छोटिका) कौपीन, लँगोटी (जन्मदिन)पैदायश का रोज (जगदम्बा) जगत्,संसारकी माता, (जन्मभूमि) जिस जगह पैदाहुआ हो वह जगह, वतन (जगदाधार) दुनियां जिसके सहारे (जन्मान्तर) दूसराजन्म, पुनर्जन्म पर रहै, शेपजी (जम्बुदीप) पृथ्वी में सातद्वीप है, (जगदीश) संसार का मालिक, उन में से पहिलाद्वीप, परमात्मा जिसका एक हिस्सा (जगम) दो प्रकार की सृष्टि में से भरतराजा के नामले चलने फिरनेवाले जीव भारतवर्ष कहलाता है जनक, पिता देवी, दुर्गा शब्दसंग्रह। ३२१ नाव (जम्बूद्वीप) पृथ्वी में सातद्वीप हैं, (जलक्रीडा) पानीकाखेल उनमें से पहिलाद्वीप, (जलचर)पानी में रहनेवाले जीव, जिसका एक हिस्सा मछली,ग्राह इत्यादिक भरतराजा के नामसे (जलन) पानीसे बचानेवाला, छ- भारतवर्ष कहलाताहै तुरी, नाव (जयपताका) जीतकाझण्डा,विज- (जलद) मेघ, बादल यकेत (जलधि) समुद्र (जरती) बुढ़िया स्त्री (जलनिर्गम) पानी निकलने की (जरासन्ध) नरानाम राक्षसी ने रास्ता, मोरी, नाला जन्मके समय उसके (जलपति)जलकादेवता,वरुण शरीरके जो दो टुकड़े (जलयान) पानीकीसपारी, जहाज़, थे उनको जोड़ कर यह घरदान दियाथा (जलराशि) समुद्र कि जबतक यह जोड़ (जलरुह) कमल न फटेगा तब तक यह (जलशायिन्) क्षीर समुद्रमें सोने किसीके मारेन मरेगा चाले विष्णु इसीसे उसका नाम (जडु)चन्द्रवंशका एकराजर्पि,जि- जरासन्धथा, यह म- सने गंगाजीको एकबार पी गधदेशका राजाथा, लियाथा तभीसे गदाजीको और अपने जामाता, दामाद,कसकेमरनेपर (जागरण) रातको जागना,रतिजगा श्रीकृष्णजी का वैरी (जात) जाति, कौम, पैदाहुआ, उ. होगया अन्तमें इस भीमसेनके (जातक) जन्म का हाल बतलाने वाले ज्योतिपके अन्य (जलकरक) पानीकासेवार,काई, (जातकर्मन्) संस्कार विशेष जो घोंघा कि पुनके पैदा होने (जलकाक) पानी में रहनेवाला पर तुर्नही किया जा पक्षी,पनडुब्बी, यतख ता,नान्दीमुख दिक (जलकुष्ट) पानी में रहनेवालामुर्गा नहुतनया भी कहते हैं त्पन्न की मृत्यु हायसे हुई श्राद्ध ३२२ शब्दसंग्रह। किया हुआ (जापक) मन्त्रको जपनेवाला (जुट) प्रसन्न, खुश, सेवित, सेवा (जाम्बवत् ) जामवन्त नाम रीछ जिसकीकन्या जाम्ब- (जुम्भा) जॅमुहाई, जृम्भण वती श्रीकृष्णजी को (ज्ञात) जाना हुआ, समझा हुआ व्याहीथी जिसने ल- ( ज्ञानवत् ) जाननेवाला, ज्ञानी, वाकी लड़ाई में श्री पण्डित रामचन्द्रजी को बड़ी (ज्ञानेन्द्रिय) इन्द्रियॉ, जिनसे वि- सहायता दीथी पय सम्बन्धी ज्ञान (जायानुजीविन्) औरतसे रोज़गार होता है, कान, स्वक् करने वाला, नट खाल, नेत्र, जीभ, बेड़िया नाक, ये पांच इन्द्रिय (जाहवी) गंगाजी (ज्ञापक) विदित करनेवाला, ज- (जिगमिषा) जानेकी इच्छा,इरादा, नानेवाला गमनेच्छा (ज्ञापन) विदित करना, बतलाना (जिगीपा) जीतनेका इरादा (ज्ञाप्य) जनाने के योग्य, जामने के (जिघत्सा) भोजन करनेकी इच्छा योग्य (जिघांसा) मारनेका इरादा (ज्ञेय) जनाने के योग्य, जानने के (जिघांसु) मारने की इच्छा किये योग्य हुये (ज्योतिर्विद) ग्रह, नक्षत्रका गति, (जिज्ञासा) जानने की इच्छा कि- उदय,अस्त बतलाने येहुये वाले शास्त्र का जा. (जिज्ञासु)जानने की इच्छा किये ननेवाला पण्डित (ज्वलित)प्रकाशमान, जलता हुआ (जितेन्द्रिय) इन्द्रियों को अपने (ज्वालामुखी) ऐसा पहाड़ जिम वश, इस्तियार में में सदा अन्ति की किये हुये ज्वाला निकलतीरदै (जीर्णोद्धार) पुरानी चीज़की मर- यह पर्वत पंजाब म्मत करना प्रान्त में है, जिस (जीवित) नीताहुआ को कि आस्तिक (जुगुप्सित) निन्दित, बदनाम हिन्दू लोग देवी का 4 हुये, बुभुत्सु शब्दसंग्रह। ३२३ . 2 तर सी स्थान मानते हैं (तटी) कूल, वेला, किनारा, तीर (तडित्समाचार) तार के समाचार, (मँझानिल) हवा, जिस में झंझ- तारवी, सौदा- नाहट की आवाज़ मिनी सन्देश आती हो, गर्मी या (तत्क्षण) उसीवत्र, तुरंत, फौरन वर्षा की हवा, झं- (तत्र) यहाँ, उस जगह झाबात (तत्रभवत्) पूज्य,आदरणीय, आं. (झपकेतु) कामदेव, मदन जनाव (ट) (तत्वतम्) यथार्थ, ठीक २, सत्य २ (टकशाला) टकसाल घर जहाँ (तथाऽपि) तिस पर भी, तौभी, रुपया बनाया जाताहै (टङ्कार) टन् २ ऐसे शब्द करना (तथाऽस्तु) वैसाही हो (टलन) उद्वेग, घबड़ाना (तदनन्तर) तिसके बाद (टिट्टिभ) टिटिहिरी, एक तरहकी (तनया) कन्या, लड़की चिड़िया जिसके कण्ठ (तनुज) पुत्र, लड़का का छिद्र बहुत छोटा (तनूज) पुत्र, लड़का होने से प्रायः तालाव (तन्तुकीट) रेशमवनानेवाला कीड़ा नदी के किनारे प्यासके (तन्मय) बिल्कुल वही, तद्रूप मारे टी२ किया करतीहे (तन्मात्र) उतनाही, तावन्मात्र (टिप्पणी) कठिन शब्दोंका अर्थ (तपस्या) व्रत नियम में शरीर को (८) क्लेशदेना (डाकिनी) डायिन (तपोधन) जिसके केवल तपही (डीन) पक्षी की उड़ान धनहो, तपस्वी (स) (तपोवन) तपस्या करने का वन (तक्ष) काटना, पतला करना (तप्त) तपाया हुआ गर्म, उष्ण (तज्ज्ञ) तत्व, सिद्धान्त को जानने (तमसा) एक नदीका नाम जो । वाला, पण्डित अयोध्या से पूर्व अफघर (तटस्थ) नदी आदिके किनारे पर पूर के पास यदती जि. रहनेवाला उदासीन, स- को टीस अय लोग फ. 'मयत्ति - . - .

३२४ शब्दसंग्रह। (तमोन) तमस्, अँधेरा या अज्ञान (तारतम्य) घटबढ़ को दूर करनेवाला सूर्य, (तार्किक) नैयायिक, न्यायशास्त्र गुरू जाननेवाला (तरण) तैरना, पारहोना, नाव इ. (तालबृन्त) पंखा, वेना त्यादिक, हाथी का झूल (तालव्य) जिन अक्षरोंका उच्चारण (तर्कविद्या)न्याय शास्त्र तारूसे होताहे वे अक्षर (तर्जन) धमकाना, भर्त्सन, धम- यथा, इ, च, छ, ज, झ, की, घुड़की त्र, य, श (तर्पक) तृप्तिकरनेवाला (वितिक्षक) हरएक के अपराधको (तर्प)प्यास, इच्छा, चाह सामर्थ्य होनेपर स- (ताटक) कानका गहना,कर्णभूपण हन करनेवाला, स- (ताड़क) ताड़ना करनेवाला, स- हनशील जादेनेवाला (तितिक्षा) सामर्थ्य होनेपर दूसरे (ताड़न) सज़ा,मारपीठ के अपराधको सहना (ताड़ना) सज़ा, मारपीट (तिरस्कार) अनादर करना, त्या- (ताड़नी) कोड़ा, कशा, चाबुक गिदेना। (तात्कालिक) उसीसमयका (तिरस्क्रिया) अनादर, घेइज्जती, (तात्पर्य) आशय, मतलप त्याग (तादर्थ्य) उस कामकेवास्ते (तिरोधान)अन्तरम्यान,गायवहोना (ताप) शोक, पछितावा, दुःख, (तिरोहित) लुकाहुआ, छिपाहुआ, ज्वर,घुखार (तामस) तमोगुणी मनुष्य, ता- (तिलोत्तमा)स्वर्गकी एक वेश्या मसी, क्रोधी का नाम (ताम्बूल) पान | (तिलोदक) तिलमिला पानी, त- (ताम्बूलिन्) तम्बोली, पानधेचने वाला (तिलौदन)तिलमिला हुआ भात (ताम्बूलिक) तम्योली, पानवेचने अर्थात् खिचड़ी घाला (तीर्थराज) तीर्थों का राजा, प्रयाग (तारण)तारना, पारलगानेवाला, (तुङ्गमदा) एक नदीका नाम जो उद्धार करनेवाला महीसुर, मेसूर राजः - गायव पणका जल शब्दसंग्रह। ३२५ फाल वेत्ता धानी के पास बहती है (त्रासक) भयानक, डरानेवाला (तुम्बुरु)तम्बूरा,तानपूरा,एकतरह (त्रासित) डरायागया, भययुक्त कावाजा (त्रिकालदर्शिन् ) भूत, भविष्यत् (तुरीय) चौथा, चौथाई वर्तमान इनतीनों (तुलाधार) बनिया, वणिक् कालमें होनेवाली (तुष्ट) सन्तुष्ट, तृप्त, प्रसन्न चात को जानने (तूली) चित्रकार, मुसब्बरकी कूची वाला,सर्वज्ञ, त्रि. (तृणवत्) तिनकाके घरावर (तृतीय) तीसरा (त्रिकूट) एक पर्वत का नाम जिस (तृपात) प्याससे व्याकुल, बहुत पर लंका, रावणपुरी घ- प्यासा सीधी (तृपित) प्यासा (त्रिकोण) जिस खेत में तीन कोन (तैलङ्ग) देशविशेष, कर्णाटक हों,त्रिभजक्षेत्र,तिकोना (तोयद) मेघ, बादल (त्रिजटा) एक राक्षसी का नाम (तोयनिधि) समुद्र जो लंका में जानकीजी (तोलक) तौलनेवाला के अनुकूलथी (तोपक)सन्तोप करनेवाला, प्र-(त्रिधा)तीन तरह से (त्रिनयन) तीन नेत्रवाला,शिवजी, (त्यागशील)दानी, फय्याज, दाता महादेव । (त्याजित) छुड़ायागया (त्रिनेत्र) तीन नेत्रवाला, शिवजी, (त्यागिन्) जिसने सर्वस्व त्याग महादेव दिया हो,विरक, वैरागी (त्रिपुण्डू) शाक्त और शेव लोगोंका (त्याज्य) त्यागकरने के योग्य छोड़ तिलक, जिस में तीन ने के लायक रेखाहों (त्रपित) लज्जित,शर्मिन्दा,लजाया (त्रिपुर) एक असुर का नाम जिस हुआ (त्रयोदशी) तेरहवीं तिथि जी के हाथ से हुई थी, त्रिपुरासुर (वस्त) डराहुआ,भीत, खौफ़ज़दा (त्रातृ) पालन करनेवाला, रक्षक, (त्रिपुरदहन) त्रिपुर राक्षसको ज- गोता लानेवाले महादेवजी सन्न करनेवाला मृत्यु संग्राम में शिव ३२६ शब्दसंग्रह। (त्रिपुरारि) शिव, महादेवजी (दण्डकारण्य) शुक्र वा भृगमुनिके (त्रिलोक) स्वर्ग, मृत्युलोक, पाता- 'शापसे दंडक राजा. ल ये तीनों लोक का राज्य नष्ट हो- (त्रिलोकी) स्वर्ग, मृत्युलोक, पा- कर. जंगल होगया ताल ये तीनों लोक था, जिस में श्री (त्रिविध) तीन प्रकार का रामचन्द्रजीने कुछ (त्रिवेणी) गंगा, यमुना, सरस्वती दिन वासकिया है, इन तीन नदियों का वह वन संगम (दण्डनायक) धर्मराज, यम,फौज- (त्रिशिरस् ) तीन शिरवाला एक । दारी का मुलाजिम राक्षस (दण्डपाशिक) फांसी देनेवाला, (त्रिशूल) एक तरह का हथियार जल्लाद (त्रिशूलपाणि) महादेवजी (दण्डादण्डि) लठिआहुज,लाठीकी (त्रैराशिक) तीन राशिका हिसाब लड़ाई (त्रैलोक्य) स्वर्ग, मृत्यु, पाताल, (दण्डिन्) बांसकीछड़ी रखनेवाला लोक संन्यासी (त्रोटक) एक छन्द का नाम (दत्त) दियाहुआ। (द) (दत्तक) गोद वैठायाहुआ लड़का (दंष्ट्रा) दाढ़, दाँत (दत्तात्रेय) दत्तकपुत्र एक बड़े ज्ञा- (दक) जल, पानी, अप् नी अत्रि ऋपिका पुत्र (दक्षकन्या) दक्षनाम प्रजापतिकी जिसके २४ गुरू थे वेटी सती (ददन) दान देना (दक्षमुता) दक्ष नाम प्रजापतिकी (दटू) दाद, एकप्रकार का रोग , बेटी सती (दधि) दही (दक्षिणा) दान, भेंट, विदाई (दधीचि) एक ऋषिका नाम जि- (दक्षिणायन) कर्कराशिसे धनराशि सने अपने शरीरका हाड़ तक जव सूर्य संक्रा वृत्रासुरके मारनेके लिये न्तिकरते हें वह समय इन्द्र को वज-बनाने के (दण्डक) दण्ड सजा देनेवाला एक वास्ते दिया था राजा का नाम (दधिमार) नयनू,मक्खन,नवनीत 1 .

शब्दसंग्रह। ३२७ (दशम) दशवॉ , (दन्तच्छद) होठ, ओष्ट (दलित)मीजागया, मर्दित- (दन्तधावन) दातुन, दतून (दवाग्नि) वनकी आगि, दाव (दन्त्य) जिन अक्षरों का उच्चारण (दशकण्ठ) रावण, दशानन दांत से होता है वे अक्षर (दशकन्धर) रावण यथा ल, त,थ, द, ध, न, (दशग्रीव) रावण ल,स (दमक) इन्द्रियोंका दमन, विषयों (दशमहाविद्या) दशप्रकारकी देवी से रोकनेवाला महामाया, यथा. (दमनीय) दाबने के लायक, शान्त काली. तारा. पो- करने के योग्य उशीच, भैरवी.भु. (दमयन्ती) विदर्भ देशके राजाभी- बनेश्वरी॥ धूमा. मकी बेटी, महाराज वती.छिन्नमस्ता. नलकी पत्नी मातही वगलात- (दम्भिन्) कपटी, छली, दगाबाज़, था १एतादशमहा पाखण्डी विद्याः कमलाऽपि (दयिता) प्यारी स्त्री, वल्लभा प्रकीर्तिताः॥जैसे (दरिद्रता) गरीची, निःस्वता, कंगा- काली १ तारा २ लपना पोडशी ३ भुवने. (दर्प) अहंकार, गर्व, घमंड श्वरी ४ भैरवी ५ (दर्पित) अभिमानी, मारूर,घमंडी छिन्नमस्ता ६ धू. (दर्शनप्रतिभू) दिखलानेकीजिम्मे- मावतीवगलाम दारी, हाजिर करने मातही : कमला की जिम्मेदारी,हा- १० ये दश दुर्गा जिर जामिनी | (दशमुख) रावण (दलन) मर्दन करनेवाला,नाशक, (दशमुखान्तक) रावण के नाश क- फूलना,विकसन, टुकड़े २ रनेवाले श्री राम करना (दलनी) लोहकी मुंगरी जिसप्ते (दाक्षिणात्य) दक्षिण दिशामें होने सड़कवगैर-कूटीजातीहे, वाला नारियल, वा दुर्मट दक्षिणी मनुष्य शब्दसंग्रह। (दाक्षिण्य) दातृत्व, उदारता,कुश- मराज३दक्खिनपश्चिम लता, होशियारी के कोण का नैर्ऋत (दातृ) देनेवाला, दाता,सखी, फे- पश्चिम का वरुण ५प- याज श्चिम उत्तर के कौनका (दानपत्र) हिवानामा, दानकी हुई वायुउत्तरका कुवेर ७ इस मेरी जायदाद उत्तर, पूर्व के कोन का हरलेनेका अधिकारमेरे महादेवजी आकाशका किसी भी दायाद को ब्रह्मा ९ पातालका शेप बाद मेरे न होगा इस भगवान् १० स्वामी है। प्रकार का लेख जिस और किसी के मतसे पत्र में किया जाताहै वह "सूर्य-शुक्रःक्षमापुत्रः पत्र सैहिकेयः शनिःशशी। (दानशील) दानकरनेका जिसका सौम्यस्त्रिदशमन्त्रीच स्वभाव हो, दानी पूर्वादीनामधीश्वराः॥ (दाय) पैतृक धन, बाप दादा की ये दिशाओंके स्वामी है जायदाद दिक्शूल । शनीचन्द्रेत्यजेत्पूर्वी (दारकर्मन्) विवाह, व्याह दिशाशूल : दक्षिणान्तुदिशाङ्गु- (दारिका) कन्या, लड़की रौ॥ सूर्येशुक्रे पश्चिमा (दरुक) श्रीकृष्णजी का सारथी न्तु बुधेभौमे तथोत्त- (दारुगर्भा) कठपुतली, गुड़िया राम् १ शनैश्चर सोम- (दासी) टहलई, लौंडी वारको पूर्व, बृहस्पति (दाह) जलाना, भस्मकरना को दक्षिण, रविवार (दाहन) जलाना, भस्म करना शुक्रवार को पश्चिम, (दाहक) जलानेवाला बुध वा मंगल को दिक्पति । इन्द्रोवह्निः पितृ पतिर्ने उत्तरकीयात्रा वजित दिक्पाल तोवरुणोमरुत्॥कु हैं इस निषेध को ही वेरइशः पतयःपूर्वादी दिक्शूल कहते हैं नादिशांकमात् १ पूर्व (दिगन्त )जहांतककिसूर्यचन्द्रकी काइन्द्र अग्निकोणका गतिहो अग्नि २ दक्खिनकाय- (दिग्गज)आठ दिशा के हाथी, शब्दसंग्रह। ૨૨૯ की स्त्री . यथा ऐरावतः पुण्डरी (दुःखसागर) दुःखकासमुद्र, संसार, को वामनः कुमुदोऽअनः दुनियां पुष्पदन्तः सार्वभौमः (दुःशील) बुरे स्वभाववाला, वद- सुप्रतीकरच दिग्गजाः१ मिज़ाज पूर्वादि क्रमसे ये आठ (दुःखावह) दुःख उठानेवाला, दुः- दिग्गज हैं खित (दिग्विजय) सवदिशाको जीतना (दुःसह) दुःखसे सहने के योग्य, (दिति) दैत्योंकी माता, कश्यप असह्य (दुरन्त) जिसके अन्तमें दुःखहो, (दिदृक्षा) देखनेकी चाह, दर्शना ऐसाकर्म मिलाप (दुरतिक्रम) अति कठिन, दुस्तर, (दिनकर) भानु, सूर्य, सूरज मुश्किल (दिनमणि) सूर्य, दिवाकर (दुराग्रह) अनुचित हठ, वेजहज़िद (दिनमुख) प्रातःकाल, सुबह (दुराचारिन्) वदकार,पापी,अधर्मी, (दिनेश) सूर्य, दिनपति (दुरात्मन्) जिसकादिल वुराहो,दुष्ट (दिव्य) स्वर्गकीवस्तु (दुराधर्ष) अजेय, जिसको हर एक (दिव्यदृष्टि) अलौकिक ज्ञान जि- न जीतसके, ज़बरदस्त ससे संबमालूमहोजाय (दुरालाप) वेजह वात चीत, दुर्वच- (दीक्षक) मन्त्रदेनेवाला, गुरू न, दुरुक्ति (दीक्षा) मन्त्रलेना, मन्त्रोपदेश (दुराशा) वुरी ख्वाहिश (दीपमालिका) दिवाली (दुर्ग) किला, कोट (दीप्तिमान) कान्तिमान् , सुन्दर, (दुर्गम) जिसमें मुश्किल से जास. तेजस्वी के, अप्राप्य, अगम्य (दीर्घजीविन्) बड़ीउमरवाला,चि. (दुर्दशा) पुरी हालत, दुर्गति रजीवी (दुर्भगा) जिस स्त्रीका भाग्य कि. (दीर्घदर्शिन्) बड़ा विचारवान् , स्मत अच्छा नहो, या जिसको पति न चाहता (दीर्घरोमन)जिसके लम्बेर रोहों (दुर्भाग्य) यद किस्मत, अभागा, (दीर्घायुसे बहुतदिनतक जीनेवाला या, बदकिस्मती, इदेव दूरदर्शी हो वह स्त्री वह भालू, रीछ ३३० शब्दसंग्रह। ने वाला (दुर्भिक्ष ) असमय,कहत,काल,झूरा (देशभापा) देशीजवान (दुर्मति) दुवुद्धि, वेसमझ (देशाटन) देशों में घूमना (दुर्लभ) जो चीज़ मुश्किल से मिल (देशान्तर) दूसरा मुल्क सके, दुर्गम, दुष्प्राप्य (देशहितैपिन्) देशकाभला चाह- (दुर्वासस्) शिव के अंशले उत्पन्न अत्रिनाम ऋपिका पुत्र, (देशोन्नति) देशकी भलाई जिसके कपड़े बुरेहों वह (देहत्याग) देशको छोड़ना, मृत्यु, पुरुप मौत (दुर्विपाक) बुरापरिणाम,बदनतीजा (देहिन्) शरीरी,प्राणी आत्मा (दुर्वाध्य) जिसको हरएक न जान (दैन्य) दीनता, लाचारी सके, कठिन, मुश्किल (दैनिक) रोज़ मर्स, प्रति दिनका (दुप्कर)जो काम कठिनता से कि- (दैहिक) देह सम्बन्धी, जिस्मानी याजाय, दुःसाध्य (दोलन) झूलना (दुष्कर्मन्) बुरा काम, पाप (दोप) अपराध, कसूर (दूरदर्शिता) पाण्डित्य, बुद्धिमत्ता (दोपारोपण) दोपलगाना (दूपक) दोप लगानेवाला (दोहनी) दूधदुहनेका वर्तन (दूपित) अंकित, दोषी (द्योतक)प्रकाशक,प्रकटकरनेवाला (दृप्य) दोप लगाने के योग्य (दष्टव्य) दर्शनीय, देखनेकेयोग्य (देय) दान करने के योग्य, दातव्य (द्रष्ट) देखनेवाला, नाज़िर (देवगृह) देवताका मन्दिर,देवालय (द्रावक) बहानेवाला (देववाणी) संस्कृत विया (दुमारि) वृक्षोंका शत्रु, हाथी, प्र- (देवस्थान) मन्दिर, ठाकुर द्वारा (देवतरङ्गिणी) आकाश गङ्गा, देव- (दुमेश्वर) पीपल, पिप्पल, वृक्ष- ताओं की नदी राज, चन्द्रमा (देवधुनी) आकाश गङ्गा, देवत्ताओं (द्रोह) शत्रुता, दुश्मनी की नदी (द्रौपदी) पंजावदेशके राजा द्रुपद (देवोत्थानी) कार्तिकके शुक्लपक्ष की की बेटी, पाण्डवोंकी स्त्री एकादशी तिथि जिसमें (दादश) वारह, वारहवा श्रीकृष्ण भगवान् शेष (द्वादशी) बारहवीं शय्या से उठतेहैं (दारावती) श्रीकृष्णजीकी पसाई , चण्ड बात शब्दसंग्रह। ३३१ ३ ३ (द्वितीय) दूसरा द्वारकापुरी लिये हुये निकला था (दिगुण) दुगुना, दोचन्द और वैद्यकशास्त्रमें - डा विद्वान्था (विधा) दोतरहसे (धरणिधर) पर्वत, पहाड़ (द्विपद) दोपैरवाले जीव, मनुष्या- (धरणीधर) पर्वत, पहाड़ दिक (धरणिसुता) जानकीजी (दिपायिन) हाथी (धरातल) पृथ्वीके नीचेकाभाग (दिविद) एक वानरका नाम जो (धराधर) पर्वत,अद्रि,गिरि, पहाड़ बड़ावलीथा (धर्तृ) धारण , रखना करनेवाला (देप) विरोध, दुश्मनी (धर्मक्षेत्र) पुण्यकी जगह, कुरुक्षेत्र (देपिन् ) दुश्मन, वैरी (धर्मज्ञ) धर्म को जाननेवाला, धर्म (देदृ) शत्रु, द्रोही, दुश्मन विद (द्वैधीभाव) विगाड़, नाइत्तिफ़ाकी (धर्मध्वजिन्) लोक में पुजाने के (घ) लिये धर्म को करने (धनतृष्णा) द्रव्य, दौलत की ला- (धर्मपत्नी) वेद विधि पूर्वक जिस (धनपति) कुवेर, देवताओंका ख स्वीकापाणिग्रहणकिया हो वह स्त्री. (धनवत्)अमीर, दौलतमन्द, धनी (धर्मपुत्र) युधिष्ठिरजी (धनहीन) गरीव, दरिद्री (धर्मशाला) विदेशियों के ठहरने (धनाढ्य) दौलतमन्द, धनी कीजगह जहाँ गरीबों (धनाध्यक्ष) धनकामालिक, ख- को खैरात दीजातीहो ज़ाञ्ची (धर्मशील) पुण्यात्मा (धनार्थिन् ) धनका चाहनेवाला (धर्माध्यक्ष) इन्साफ करनेयाला (धनेश) कुचेर (धनेश्वर) कुवेर (धर्मनिष्ठ) धर्म,अच्छेकाम तत्पर (धन्यवाद) सराहना, तारीफ, शु. (धर्मरत) धर्म,अच्छेकाम में तत्पर क्रगुज़ारी (धर्मावतार) धर्मही के वास्ते पैदा (धन्वन्तरि ) जो समुद्र मथने से हुआ हाथमें अमृतका कलश (धर्प) प्रगल्भता, टिठाई वाला, पाखण्डी जाची मजिस्ट्रेट वगैरः ३३२ शब्दसंग्रह। जी का भाई नकुल (धर्पण) प्रागल्भ्य (धातुविलेपक) कलई साज (नखायुध) जिसके नाखूनही हथि- (धारण) रखना, पहिरना यार हों, वानर, कुत्ता, (धार्मिक) धर्मात्मा, पुण्यवान् विल्ली वगैरः (धार्य) पहिरने या रखनेकेलायक (नगपति) हिमाचल, हिमालिया (धावक) दौड़ने या धोनेवाला पहाड़ (धिकार) लानत, धिरकारना, फट (नगाधिराज) हिमाचल, हिमालि- कारना या पहाड़ (धूम) धुआं (नटमाया)नटका खेल, बाजीगरी (धूमयन्त्र) धुआं का कल, एंजिन (नटी) नटकी स्त्री, नटिन, सूत्रधार (धूर्तता) मकारपना, छल, कैतव की स्त्री (धृतिमत्) धीरज रखनेवाला, धै- (नताही) युवा अवस्थामें जो कुछ र्यवान् झुककरचले,कुलवती स्त्री (धेनुक) बैलका रूप धरके जो कंस (नद) घाघरा, धर्धर, शोणभद्र, सि. का पठाया श्रीकृष्ण जी न्धु इत्यादिक के मारने के लिये ब्रजमे (नन्दलाल) श्रीकृष्णजी आया था वह राक्षस (नन्दिनी) वशिष्ठ मुनि की काम- (धेनुमती) गोमती नदी धेनु (धैर्य) धृति, धीरज (नद्ध) बधाहुआ (धौत) धुलाहुआ,पवित्र,पाक साफ (नम्र) नत झुकाहुआ विनय शाली (ध्यात) विचारित, शोचाहुआ (नयनामृत) एकप्रकारका काजल (ध्यातव्य) स्मरणीय, ध्यान करने रोग जाते रहते हैं (ध्यान) चिन्तन,स्मरण, यादगारी (नरकेशरिन् ) नृसिंह भगवान् (ध्येय)स्मर्त्तव्य,ध्यानकरनेके योग्य (नरकान्तक) नरक नाम एक अ- (ध्वंस) नीचे गिरना, नाश (ध्वंसन) नीचे गिरना, नाश श्रीकृष्ण भगवान् (न) (नरनारायण) ईश्वर के अंश दो (नकुल) नेउरा. नेवला, जिन के ऋपिजो बदरिका- कुल न हो या युधिष्ठिर श्रममें वास करतेथे सुरमा जिससे नेत्र के के लायक सुर के मारने वाले शब्दसंग्रह। ३३३ (नरेश) राजा (नरेश्वर) राजा (नरपति) राजा, महाराज दुर्गाः प्रकीर्तिताः॥अर्थ (नरपुर) मृत्युलोक,यही लोक शैलपुत्री ब्रह्मचारिणी२ (नरमेध) जिसमें मनुष्यकी वलिहो चन्द्रघण्टाइकूष्माण्डा ४ (नरसिंह) नृसिंहावतार स्कन्दमाता ५ कात्याय- (नरहरि) नृसिंहजी श्री गोसॉई नी६ कालरात्रि ७ महा- तुलसीदासजीके गुरू गौरी ८ सिद्धिदात्री है (नराधम) मनुष्यों में नीच,कमीना ये नव दुर्गा है नरापसद (नवदार) जिसमें ९ रास्ते हों अ- (नराधिप) नर मनुष्यका मालिक र्थात् शरीर जिस्म, जैसे राजा, नरदेव रनेत्र, ऑख २ कर्ण, कान (नरेन्द्र) मनुष्यों में श्रेष्ठ, राजा, नृ- वनासिका नाकके छिद्र, पति मुंह १ लिंग १गुदा १ ये इस शरीर में ९ रास्ते हैं (नववाला युवती स्त्री,जवान औरत (नर्त्तनप्रिय) जिसको नाच पसन्दहो (नवम) नववॉ (नर्मद) सुखप्रद,आरामदेनेवाला (नवमी)नवई (नवग्रह) सूर्यादि ९ ग्रह, जैसे, सूर्य, (नवयौवना) युवती, जवान ओरत चन्द्रमा, भौम, बुध, वृ. (नवरत्र) नो प्रकारके जवाहिरात, हस्पति, शुक्र, शनेश्वर, जैसे हीरक, हीरा? पद्मराग, राहु, केतु है ये ग्रहहें पन्नार नीलमणि, नीलम ३ (नपदुर्गा) नव प्रकारकी देवी. वैदूर्य लहसुनियां १ पुष्प यथा “प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयंब्रह्मचारिणी।। तृतीयं चन्द्रघण्टेति कु- प्माण्डेति चतुर्थकम् । है।या महाराज विक्रमा- पञ्चमंस्कन्द माताच प. दित्यके यहाँ जो नापंटित ठं कात्यायनीतिच ॥ रहते थे उनके नाम यह हैं धन्वन्तरि १ जपणक २ सप्तम कालरात्रिश्च म- अमरसिंह ३शक हागौरीतिचाष्टमम् २॥ नाम सिद्धिदात्रीच नय ताल भट्ट ५ घटकपर ६ राग,पुखराज, ५ गोमेद ६ मुता, मोती७ माणिक प्रवाल, मूंगा ६ ये नारद R गया . शब्दसंग्रह। ३३५ (निक्षेप) न्यास, धरोहर (निमि) सूर्य पंश में उत्पन्न राजा (निखर्व) बहुतही छोटा इवायु का पुत्र (निखात) गड़हा, गड्ढा (निमीलन) आंखको बन्द करना, (निगड़ित)जंजीरसे बंधाहुआ,क ऊंघना साहुआ (नियत) मुकर्रर किया गया (निगदित) कहाहुआ, उक्त (नियुक्त) व्यामृत, काममें लगाया (निगूढ़) छिपाहुआ, अप्रकटित (निचय) समूह, गरोह (नियोग) आज्ञा, हुक्म प्रेरण, (निजवृत्ति) अपनी जीविका, अ. (निरहुरा) स्वतन्त्र, स्वैरी खुदमु- पनापेशा ख्तियार (नित्यकर्मन्)प्रतिदिनकरनेकाकाम (निरञ्जन) मायासे रहित, निर्गुण सन्ध्या, तर्पण, पलि (निरत) आसक, मशगूल, किसी वैश्वदेव , अतिथि काममें लगाहुआ,प्रसित सेवा,वेदकापाठ क- (निरति) प्रेमशून्य, रूखा (निरन्तर) सर्वदा,हमेशः,अव्यवहित (निदर्शन) उदाहरण, मिसाल | (निरपराध) निर्दोप, बेगुनाह (निद्रित) सोताहुआ, सुप्त (निरर्गल) बेरोक टोक, खुला हुआ (निधान) खज़ाना, भण्डार (निरवकाश) धाधारहित पूर्ण,भरा (निनीपा) लेनेका इरादा, लिप्सा ' हुआ, वेफुरसत (निनीपु) लेनकी इच्छा कियेहुये (निवघ) निष्पाप, दोष रहित (निन्दक) बुराई करनेवाला (निरस) स्वादहीन, सूखा, फीका (निंद्यकर्मन) चुरेकाम, दुराचार (निरस्त)प्रक्षिप्त, फेंका हुआ, परा- (निपतन) गिरना जित हाराहुआ (निपात) नाश, पतन, गिरना, (निराकार) जिसका स्वरूप न हो, वेजिस्म को भी निपात कहते हैं (निरादर) अपमान, वे खातिरी (निपीड़न) क्लेशदेना,तकलीफ़देना (निरामिप) विना मांस (निबन्ध) संग्रहीत ग्रन्थ नियत (निमज्जन) नहाना, पानी में डूबना (निराश्रय) निरवलम्ब, पेसहारा, (निमन्त्रण) नेवता, निकेतन (निराहार) भोजन रहित, भंसा- रना, होम 1 व्याकरण में प्रादिगण (निरायुध) शस्त्रहीन, वेहथियार ३३६ शब्दसंग्रह। त . (निरीक्षण) देखना, अवलोकन (निर्मल) पाकसाफ, शुद्ध पवित्र (निरीह)निश्चेष्ट जो कुछ काम न करै (निर्माण) रचना, वनाना (निरुक्त) निर्वचन, व्याख्या, वेद का (निर्माल्य) देवताओंका उच्छिष्ट, अंग जिसमें वेद के मन्त्रों जूंठा या निर्मलता, का अर्थ निदर्शन रूप से सफाई तथा मन्त्र गत शब्दों को (निर्मूल) विनाकारण, विनाजड़, साधन क्रम वर्णित है बेसवन (निरुत्तर) लाजवाब ( निर्यास) वृक्षकीलाख, हींग,वगैरः (निरुत्साह) आलसी, सुस्त (निर्लज्ज) वेशर्म, वेहया (निरुप) अपूर्व, अनूठा जिसके स- (निलोंभ) जिसको लालच न हो दृश दूसरा न हो (निर्लोभिन्) जिसको लालच नहो (निरुपाधि) जिसमें किसी प्रकार (निर्वश)जिसके सन्तान, औलाद का झगड़ा न हो नहो, लावल्द (निरूपण) वर्णन, धयान करना (निर्वाण) मोक्ष, संसारसे छूटना (निर्गन्ध) जो न महके, गन्धहीन (निर्वात) जिस स्थान में वायु न (निर्गम) निकलना, जाना, यात्रा (निर्जन) जहाँ मनुष्य न हों वि- (निर्वास) निकालना, निस्तारण, विक्त, विजन (निर्जल) जिसमें पानी न हो, नि- (निर्वासक) निकालनेवाला, नि- स्सारक, मारनेवाला (निर्जित) जीतागया, विजित (निर्वासित)निकालाहुआ,मारागया (निर्जीव) मराहुआ, जड़ (निर्वाह) निवाह, गुज़ारा, वसर (निर्णीत) निश्चित, दरियाफ्त कि- (निर्विकल्प) निस्सन्देह, बेशक याहुआ (निर्विकार) जिसमें किसीतरहकी (निर्दिष्ट) दिखायागया, आज्ञापित बुराई नपैदाहो (निर्दन्द) सुख दुःख से रहित (निर्विन) जिसकाममें किसीतरह (निर्धार) निर्णय, निश्चय, अलग का विघ्न, खलल न पड़े (निवारण) रोकना, मनाकरना (निर्धारण) निर्णय, निश्चय, अलग (निवास) रहना, वासकरना (निवासिन) रहनेवाला जाय मारना करना करना शब्दसंग्रह। चौथे महीने शुभ मु. , (निविड) घन, गझिन, सघन सीधा, साफ, निश्छल (निवृत्ति) रिहाई पाना, छुट्टी पाना (निष्कलङ्क) जिसका किसीतरह का (निवेदन) विनती करना, गुजारि कलंक ऐब न लगाहो, शकरना निर्दोष, बेदाग (निशाकर) विधु, चन्द्रमा (निष्काम) निस्पृह,वेपरवाह, इच्छा (निशाचर) रात्रि में घूमने वाला, रहित राक्षस (निष्कारण) विलावजह, पिना (निशाचरी) राक्षसोंकीस्त्री, राक्षसी किसी हेतुके (निशानन) शाम, सायंकाल, संध्या (निष्क्रमण) वाहर निकालना एक (निशामुख) शाम,सायंकाल, संध्या संस्कार, जिस, दिन (निशानाथ) रातकामालिक, चंद्रमा (निशापति) रातकामालिकचंद्रमा हूर्त में लड़के को घर (निशुम्भ) एक राक्षस, जिसको से बाहर निकालते हैं। देवीजी ने माराथा, यह (निप्पक्षपात) विलातरफदारी कथा मार्कण्डेय पुराण (निष्पत्ति) सिद्धि, पूर्ण होना के सप्तशती स्तोत्रमें है (निष्पन्न) पूराहुआ, सिद्धहुआ (निशेश) रात्रिका स्वामी,चन्द्रमा (निप्पाप) निरपराध, वेगुनाह (निश्चल)जोहिलाये न हिले, अ- (निप्फल) व्यर्थ, वेमतलष (निसर्ग) आज्ञा,हुक्म,स्वभाव, (निश्चला) जो कभी न चलै, पृथ्वी, आदत ज़मीन (निस्तार) उद्धार, बचाव (निश्चित) करार पाया, ठानागया (निस्सन्देह) निश्चय, ज़रूर (निश्चिन्त ) वेफिक, जिसको चिन्ता (निहित) रक्खा हुआ, स्थापित न हो (नीत)लायागया,प्राप्त कियागया (निपण) वैठाहुआ, स्थित (नीति) न्याय, इन्साफ, निआव (निपिद्ध) वर्जित, नाजायज (नीतिज्ञ) न्यायको जाननेवाला (निषेधक) वर्जनेवाला, रोकनेवाला (नीरज) पानी में पैदा होनेवाला (निष्कण्टक) जिस में शत्रु न हो, कमल बेखटके (नीरद) मेघ, मेह, बादल (निष्कपट) जो दगाबाज़ न हो, (नीरधर) पानी को रसनेवाला,मेय चल, स्थिर शब्दसंग्रह। (नीरनिधि) समुद्र (नैमिष्यारण्य) एक वनका नाम, (नीरस) स्वाद रहित, फीका : पूर्व काल में जहाँ (नीलग्रीव) शिवजी, जिसका गला ऋपिलोग तपस्या नीलाहो करतेथे (नीलमणि) कालेरंगका मणि, ज- (नैराश्य) आशासे रहितहोना, ना वाहिर, नीलम उम्मैदी (नीलोपल) नीलम, जमुर्रद. (नैवेद्य) भोजनसामग्री जो देवता (नृग)सूर्यवंशमें उत्पन्न एक राजा को अर्पण कियाजाताहै, का नाम, जो वड़ा दानीथा प्रसाद (नृत्त) नाच, नृत्य (नैसर्गिकोस्वभावसिद्धस्वाभाविक (नृपघातिन) क्षत्रिय राजाओंके वध (नैष्ठिक) भक्त, श्रद्धायुक्त करनेवाले, परशुराम (न्यायकारिन्) इन्साफ करनेवाला, (नृपति) राजा,मनुष्योंका मालिक मुन्सिफ (नृपाल) राजा, मनुष्योंका पालन (न्यायालय) कचहरी, न्यायागार करनेवाला (न्यूनता) कमी, कसर, छोटाई (नृसिंह) नरसिंह, भगवान् (न्यूनाधिक) कमज्यादः,अल्पाधिक (नृहरि ) नरसिंह, भगवान् (नेक्तृ) पालन करनेवाला, पोपक, (पक्ति) पाक फरना, पकाना पवित्र करनेवाला (पक्षपात) अनुचित सहायता, तर- (नेजक) पालक, धोवी फदारी (नेजन) शोधन, साफकरना (पक्षपातिन) तरफदार, किसी प्र- (नेतृ) नायक, लेजानेवाला कार के सम्बन्ध से (नेतव्य) लेजाने के लायक, पहुँ- सहायता करनेवाला चाने के योग्य (पक्षिराज) गरुड़ : (नेच्छद) पलक. (पक्षीय) सहायक, मददगार (नैमित्तिक) जो किसीकारण से (पकज) कमल, सरोरुद कभीर हो (पचन) पाक, पकाना (नमिप)जिस स्थानपर विष्णुभंग- (पचनीय) पाफ करने के योग्य, । वान ने एक राक्षतको लह- (पचमान) पकाताहुआ मेंभरमें माराया, वहस्थान (पंञ्चगव्यः) गौसे उत्पन्न पाँच वस्तु, शब्दसंग्रह। ३३६ ३ गोवर? गोमूत्र २ दूध ३ (पञ्चभूतात्मन्) मनुष्य जो पूर्वोक्न दही घी ५ पांच तत्वों से ब- (पञ्चतत्व) पॉच पदार्थ, पृथिवी १ नताहै जल २ अग्नि ३ वायु,ह- (पञ्चमुख) शिवजी, महादेव वा४आकाश५ (पञ्चवक्त) जिसके पांचमुखहों,म- (पञ्चतन्मात्रा) पाँच तत्वोंका विषय, हादेवजी शब्दस्पर्श २ रूप३ (पञ्चवटी) जिस जगह पाँच तरह रस ४ गन्ध ५ के पीपर १ वरगद २ अॅ- (पञ्चत्व) पाँच तत्वों पृथिवी, जल, वरा ३वेल ४ अशोक ५ अग्नि, वायु, आकाश,में ये वृक्ष अधिकहों, जहाँ मिलजाना,मृत्यु, मरना वनवास समयमें श्रीरा- (पञ्चनद) जिस देश में पाँच नदी मचन्द्रजीनेनिवासकिया वहती हों, वह देश पं- जानकीजी का भी हरण जाव पांच नदीये हैं, च रावणने वहीं से कियाथा न्द्रभागा,चनाव ऐराव- (पञ्चवाण) कामदेव, सम्मोहनादिक ती, रावी २ शतह, सत. पाँच घाण जिसके हैं स- लज ३विपाशा,व्यासष्ट म्मोहन १ उन्मादन २ भेलम ५ शोपण ३ तापन स्त- (पलपात्र) आवखोरा, जो सोना, म्भन ५ये पांच चांदी,तांबा,लोहा,रांगा (पञ्चमूना) जीवों के मरने की जगह, ये पांच धातु मिलाकर यथा कण्डनीचोदकु- बनाया जाता पूजाके म्भश्च चुल्ही पेपण्युप- काममें आता है स्करः ॥ गृहस्थों के यहां (पञ्चपाण) हृदय का वायु प्राण, इन कांडी घड़ा रखने की जगह २ चुल्दा ३ च. भिकावायसमान, कण्ठ की ४ झाद्र ५ पाँचों से अवश्यजीवहत्याहोती भरमें व्याप्त वायु व्यान (पवाह) तिथिपन, जन्त्री जिसमें निधि १ वार २ ननन ३ (पचभूत) पृथ्वी १ जल २ अग्नि३ योग करण ५ होने हैं गुदाकावायु अपान,ना- का वायु उदान, शरीर वायु आकाश ५ ३४० शब्दसंग्रह। . (पश्चानन) महादेवजी, सिंह (पदाम्भोज) कमल सदृश चरण, (पञ्चामृत) दूधपदही २ घी ३शक्कर जिसके पैरमिस्ल क. मधु, सहद ५ इन चीजों मलके मुलायम और से वनाहुआ पदार्थ खूब सूरतहों (पटकार) कोरी, जुलाहा, कपड़ा (पदार्थ) शब्दके माने,मतलव चीज़ वनानेवाला (पद्मगर्म) विष्णु भगवान् के नाभि (पहत्त्व) चतुरता, होशियारी कमलसे उत्पन्न ब्रह्माजी (पटुता) चतुरता, होशियारी पद्माकर) जिस तालाब में बहुत (पठनीय) पढ़ने के योग्य कमल पैदा होता है वह (पाव्य) पढ़ने के योग्य तालात्र (पण्डा) भला, बुरा समझनेवाली (पन्नगारि) सपा के शत्रु, गरुबजी घुद्धि, सन्मति (पपी) सूर्य, जो लोक की रक्षाकरे (पण्डितम्मन्य)अपनेको चड़ापण्डित (पयोनिधि) समुद्र माननेवाला मूर्ख (पयस्विनी) बहुतधदेनवालीगाय (पण्यत्री) गणिका, वेश्या, रंडी (पयोद) मेघ,बादल,पानी देनेवाला (पतञ्जलि) एक ऋपिजिसने व्याक- (परकीय) परकीय दुसरेकी चीज़ रणका महामाप्य रचा है (परन्तप) शत्रुको दुःख देनेवाला (पतित) पापी, धर्मच्युत (परमधाम) उसम स्थान वैकुण्ठ (पतिदेवता)अपने पति,शौहरहीको (परमाणु) बहुत छोटा भाग जरी देवता समझने वाली जालान्तरगतेभानो य. स्त्री, साध्वी, पतिव्रता सूक्ष्मन्दृश्यतेरजः । त- (पत्रदातृ) डाकिया, चिट्ठी बांट- स्यपष्टितमोभागः परमा नेवाला णुःसउच्यते॥ (पत्रालय) डाकघर (परमार्थ) सबसे अच्छाकाम,पुण्य, (पदचर) पैदल सुकृत (पदचारिन)पेरसेचलनेवाला, पैदल (परमायुस्) दीर्घजीवी, बड़ी उम्र पद्ग वाला (पदत्याग) जगह छोड़ना, इस्ती- (परम्परा) पुरानी रीति, मर्यादा (परवरा) दूसरे के अधीन (पदत्राण)खड़ाऊँ, जूता (परशुधर) परशुराम जी, फरसाको . फादेना शब्दसंग्रह। ३४१ , . . धारंण करनेवाला (परिपाटी) रीति, क्रम, दस्तूर (परशुराम) जमदग्निऋपिके पुत्र, (परिभ्रमण) पर्यटन, घूमना जिसने इकईसवार ए. (परिमाण) नाप, परिच्छेद, तौल थ्वीको क्षत्रियों से रहि- (परिमित) परिच्छिन्न, नपाहुआ तकिया (परिवर्तन) बदलना,तब्दील करना (परस्पर) आपसमें, मिथः (परिवाद) दुर्वचन, बदनामी (पराक्रमिन्) समर्थ, वलवान् , जो- (परिवृत्त) चारो ओरसे घिराहुआ रावर (परिवेष्टन) लपेटना, ढकना (पराभव) अनादर, तिरस्कार, हार (परिशिष्ट) वाकी, अवशिष्ट (परामर्श) विचार, तजवीज़ (परिशोधन)अच्छेप्रकार शुद्ध करना (पराशर) एक ऋपिका नाम, जि- (परिश्रम) मिहनत, श्रम, आयास सके पुत्र व्यासजी हैं (परिश्रांत) थकाहुआ, श्रान्त (पराश्रय) दूसरेका सहारा (परिहास) हंसी, निन्दापूर्वक हॅसना (परास्त) पराभूत, हाराहुआ (परीक्षा) परखना, आज़माना इ- (पराह्न) दोपहरकेवाद, मध्याह्नोत्तर म्तिहान (परिच्छद) विस्तर, आस्तरण (परीक्षित) आज़माया हुआ, परखा (परिच्छन्न) चारोतरफसे ढकाहुआ गया (परिच्छेद) परिमाण, नाप, अ- (परीक्षोतीर्ण) इम्तिहानमें पास ध्याय, खण्ड (परेधुस्) दूसरे दिन (परिजन) कुटुम्ब, परिवार, दास- (परोक्ष) वाद, पीछे आदिक परोपकार) दूसरे की भलाई (परिणामदर्शिन् )विचारवान् ,चतुर (परोकारिन्)दूसरेका हितकरनेवाला (परिताप) सन्ताप, पछितावा (पर्णशाला) फूसकामकान,झोपड़ी (परितुष्टि) सन्तोष, इतमीनान (पर्णिन ) पेड़, द्रुम (परितोष) प्रसाद, खुशी (पर्यन्त) सीमा, हद्द, तक (परित्याग) विसर्जन, छोड़ना (पर्याय) वारी, अवसर (परित्राण)रक्षा या रक्षक, रक्षित (पर्यायवाचक) एकार्थक शब्द यथा हिफ़ाज़त कियाहुआ घट,कलश (परिपक) पकाहुआ, पक्का (प-लोचन)अवलोकन, विचारना (पर्वतीय) पहाड़ पर होनेवाला प. (परिपाक) परिणाम, नतीजा ३४२ शब्दसंग्रह। दार्थ, पहाड़ी चीज़ (पाणिनीय) पाणिनिमुनिका व- (पलायन) भागना नायाहुआ, व्याक- (पल्लवित) रोमांचयुक, खुश जिस रणशास्त्र वृक्षमें नये पने लगेहों (पाण्डव) राजापाराडके पुत्र युधि- (पवनकुमार) वायुकापुत्र हनुमान्जी ष्ठिर १ अर्जुन २ भीम ३ (पवनतनय ) हनुमान्जी नकुल ४ सहदेव ५ (पवनायन) झरोखा, गवाक्ष (पाण्डित्य) विद्वत्ता, पण्डिताई (पवनसुत) हनुमानजी (पातकिन् ) अधर्मी, पापी (पशु) जोप्सबको बराबर देखे,प्राणी, (पातञ्जल) पत्तञ्जलिमुनिका धनाया जानवर हुआ, योगशास्त्र (पशुपाल) पशुकापालन करनेवाला, (पातृ) पीनेवाला यारक्षाकरनेवाला अहीर (पात्रता) योग्यता, लियाकत (पशुपालक) पशुका पालन करने (पात्रत्व) योग्यता, लियाकृत वाला, अहीर (पाथेय) रास्तेकाखर्च (पश्यतोहर) देखतेही देखते चुरा- (पाथोज) कमल लेनेवाला सोनार,स्व- (पाथोधि) समुद्र, अब्धि र्णकार (पायोनिधि) समुद्र, वारिधि (पाकशाला) रसोई का मकान (पादचारिन्) पैरों से चलनेवाला, (पाक्षिक) वैकल्पिक जो एक बार पदाति हो एक बार न हो (पादत्राण) जूता, खड़ाऊँ (पाचक) रसोई बनानेवाला (पादधारिणी) घोड़ेकीरिकाव (पाञ्चाल) एक देशका नाम, पंजाब (पादप्रक्षालन) पैरधोना (पाचाली) पाञ्चाल देश के राजा (पादप्रहार) लातमारना द्रुपदकी लड़की द्रौपदी (पादसंवाहन)पैरदायना,चरण सेवा (पाटलिपुत्र) पटना, शहर (पापभाज) दोपी, पापी, गुनहगार (पाटब)पटुता, चतुराई, होशियारी (पापात्मन्) महापापी (पाठशाला) मदर्ता, कालेज (पारण) व्रतके अन्त का भोजन, (पाणिग्रहण) विवाह, शादी,व्याह (पारदारिक) दूसरे की स्त्री के साथ (पाणिनि) व्याकरणशास्त्र के आ- भोग करनेवाला चार्य (पारमार्थिक) परलोकके वास्ते जो .

शब्दसंग्रह। ३४३ कुछ कियाजाय अँधेरा पाख आच्छन्न काम किया जाता है, (पारलौकिक) परलोकके हेतु जो कर्म श्राद्धादिक कियाजाय,धर्म,पुण्य (पितृकार्य) पितरों के वास्ते जो (पाराशर) पराशर ऋपिकापुत्र श्री काम किया जाता है, वेदव्यासजी श्राद्धादिक (पाराशर्य) श्रीवेदव्यासजी जिस (पितृकानन) श्मसान, मसान ने१८ पुराण तथा महा (पितृतिथि) पितरों का श्राद्ध वगैरः भारत इत्यादि के ग्रंथ जिस दिन कियाजाता बनाये हैं है, वह दिन (पारिणाह्य) विशालता, चौड़ाई (पितृपक्ष) आश्विन, कुआर का (पारितोपिक) परितोष प्रसन्नता के लिये जो दियाजाय (पितृप्वसृ) पिताकी वहिन, फूफी इनाम (पिधायक) ढकनेवाला, ढकना (पार्थ) पृथा, कुन्ती का पुत्र अर्जुन (पिहित) ढकाहुआ, छिपाहुआ, (पार्वण) अमावास्य, पूर्णिमा,अष्ट- मी, इत्यादिक तिथियों (पीड़ित) दुःखी जिसको किसीत- में जो कर्म कियाजाय रह की बाधाहो (पार्श्ववर्तिन) पास रहनेवाला स- (पुंल्लिङ्ग) जिसमें पुरुषका चिह्नहो मीपस्थ (पालक) पालनेवाला, रक्षक (पुण्यकृत् ) धर्मको करनेवाला, पु- (पालनीय) पालन, परवरिश, करने के लायक, काविल प-(पुनरागमन)लौटआना, फिरआना रवरिश, रक्षणीय (पुनरुक्ति) एकहीयात को दो बार (पालित) पालागया, परवरिश कि- कहना, पुनरुचारण (पुनर्जन्मन् ) दूसराजन्म, पुनर्भव (पावन) पवित्र करनेवाला (पुनर्वसु) एक नक्षत्र (पिण्डितोइकट्टाकियाहुआ,एकत्रित (पुरजन) पुर, ग्राम के लोग (पिण्डूक) एक प्रकारकी चिड़िया (पुरट) सुवर्ण, सोना जिसको पेंडुकी कहतेहैं (पुरारित्रिपुरासुरके वैरी,महादेवजी (पितृकर्मन्) पितरों के वास्ते जो (पुरवासिन्) शहरकेलोग, पोर (पुट) दोना ण्यात्मा यागया, गोपायित ३४४ शब्दसंग्रह। करना, विभजन , (पुरस्कार) सन्मान, आदर,खातिर (पूर्वोक्त) पहिले कहाहुआ (पुराण)जिसमें पांचवातोंका वर्णन (पूर्वलिखित) पहिलेका लिखाहुआ हो यथा सर्गश्चप्रतिसर्गश्च (पूत) मिलाहुआ, शामिल, सम्मि. वंशोमन्वन्तराणिंच ॥ वंशा लित नुचरितश्चैव पुराणम्पञ्चल (पृच्छक) पूछनेवाला क्षणम् ॥ अर्थ, सृष्टिका व- (पृथक्करण) अलग करना, विभाग र्णन १ संसारका प्रलय २ क्षत्रियराजोंकेवंशकावर्णन३ (पृथा) युधिष्ठिरादिककीमाता कुन्ती मन्वन्तरोंका वृत्तान्त ४ तथा (पृथिवीनाथ) पृधिवी ज़मीन का उनके वंशका आचरण व्य- मालिक, राजा वहार ये ५ वातें जिसमेंहों (पृथिवीपति) राजा, भूप (पुराणपुरुप) विष्णुभगवान् (पृथिवीपाल) राजा, भूप (पुरुपसिंह) पुरुषों में श्रेष्ठ, पुङ्गव (पेय) पीने केलायक, पानीय, पानी (पुरुषार्थ) जो मनुष्यका कामहै, (पेपक) पीसनेवाला अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष (पेपण) पीसना (पुलक) हर्ष, खुशी से रोमाञ्चहोना (पेपणी) चक्की, जांता (पुलस्ति) सातऋपियों में से एक (पोतक) शिशु, बालक ऋपि,रावणकापितामह (पोपक) पालन करनेवाला (पुलस्त्य) सात ऋपियों में से एक (पोपणीय) पालन करने के लायक ऋपि, रावणकापितामह (पोप्पपुत्र) वह लड़का जिसको गोद (पुष्टाङ्ग) जिसका बदन बहुत म- जबूतहो (पौत्र) पोता, लड़के का लड़का (पुप्पकरण्डक) फ्लरखनेका वरतन (पोराणिक) पुराण बांचनेला (पुप्पचाप) मदन, कामदेव (प्रकट) प्रसिद्ध, जाहिर (पुप्पित) फूलाहुआ (प्रकटन)प्रकाशकरना,जाहिरकरना (प्रकम्प) कांपना, वेपथु (प्रकरण) मोका, अवसर (पूजनीय) पूजा करने के योग्य (प्रकर्प) वड़ाई, श्रेष्ठत्व (पूय) पीब, मवाद (प्रकाशक) उजेला करनेवाला (पूर्ति) पूराहोना, पूरण (प्रकाशनीय ) जाहिर करने के . लियाहो, दत्तकपुत्र (पुस्तक) किताब, पोथी (पूजन) पूजा, खातिर शब्दसंग्रह। + लायक, प्रकाश्य (प्रतिपादक) वक्ता, कहनेवाला (प्रकीर्ण) फैलाहुआ, प्रस्मृत (प्रतिपालन) पोपणकरना, पालना (प्रकृत)प्रकरणप्राप्त (प्रतिफल) बदला, एवज़ (प्रकीर्तित) कहा हुआ, कथित,उन (प्रतिवन्धक) रोकनेवाला, बाधक (प्रकृष्ट) उच्च, श्रेष्ठ, बड़ा (प्रतिभा) समझ (प्रक्षालन) धोना, पखारना (प्रतिभूति) जमानत (प्रक्षेप) फेंकना (प्रतिमास) हरमहीने (प्रखर) बहुतही तीक्ष्ण, तेज (प्रतियोगिन प्रतिपक्षी,शत्र,दुश्मन (प्रख्यात) प्रसिद्ध, मशहूर (प्रतिरूप) समान, सदृश, वराबर (प्रगल्भता) ढिठाई, धृष्टता (प्रतिलोम) उलटा, विलोम (प्रचण्ड)बड़ा क्रोधी, बहुत तेज (प्रतिवादिन) प्रतिपक्षी, विरोधी (प्रचार) व्यवहार, चाल (प्रतिवासिन) पड़ोसी, प्रतिवेशी (प्रच्छद) उपरना, डुपट्टा (प्रतिष्ठा) इज्जत, समान (प्रजाधिकारिराज्य)जहां राजान हो (प्रतिष्ठित) इज्ज़तवर, आहत और राज्यका काम प्रजाही (प्रतीकार) उपाय, तदवीर, करती हो वह राज्य (प्रतिसर्ग) संसारका प्रलय,कयामत (प्रजेश) दक्षप्रजापति (प्रतीक्षा) इन्तिज़ारी, प्रत्याशा (प्रजेश्वर) दक्षप्रजापति (प्रतीति)विलम्भ,विश्वास,यतबार (प्रज्ञ) पण्डित, वुद्धिमान (प्रतीप) प्रतिकूल, खिलाफ (प्रणिधान) सोचना, समाधिभेद (प्रत्याशा) प्रतीक्षा, इन्तिज़ारी (प्रतापवत् ) जिसकी बड़ी महिमा (प्रत्युत्तर) जवाय, उत्तर प्रतिवास्य हो, अकबालमन्द (प्रत्येक) हरएक (प्रतापिन) तेजस्वी (प्रदक्षिण) परिक्रमा,चारो तरफ (प्रतारण)छलना, धोखादेना, वचन घूमना (प्रतिक्षण) हरवक्त, अनुपल (प्रदर्शक) दिसलानेवाला (प्रतिग्रह) दानलेना (प्रदर्शनी) उत्तम २ वस्तु जिसस. (प्रतिज्ञा) नियमकरना भा में दिसलाई जावे (प्रतिदिन) रोज़ २ हररोज यह सभा, नुमायश (प्रतिध्वनि)प्रतिशब्द,गंज (प्रदेश) देश, मुल्क (प्रतिपक्ष) शत्र, टुमन, चैरी (अध्वंस)नाश, नय यत शब्दसंग्रह। (प्रपौत्र) परपोता, पुत्र के लड़के का भी कहते हैं लड़का (प्रयाण) गमन, यात्रा (प्रवन्ध) इन्तिजाम, वन्दोवस्त (प्रयास)प्रयत्न, उद्योग (प्रवन्धक) प्रवन्ध करनेवाला, मः (प्रयोजक)प्रेरणा करनेवाला,प्रेरक न्तज़िम. मनेजर (प्रयोजन) काम, मतलब (प्रबल) वली, समर्थ, जोरावर (प्ररोह) अंकुर, आंखुआ - (प्रबुद्ध) जागता हुआ, फूला हुआ (प्रलम्ब) लम्बा, एक राक्षस का (प्रभास) एक तीर्थ का नाम जिस नाम जिसको बलदेवजी को प्रभासक्षेत्र कहते हैं ने माराथा (प्रभुत्व) स्वामित्व, हकूमत (प्रलोभन) लुभाना, लालच दिख- (प्रभुता) स्वामित्व, हकूमत लाना (प्रभृति) पञ्चमी के अर्थ में यह श-(प्रवर्तक) प्रवृत्त करनेवाला, प्रेरक ब्द लाया जाताहै, "यथा (प्रवर्तन) प्रेरणा करना,प्रेरण भवात्प्रभृति,आरभ्य वासे. (प्रवर्पण) एक पहाड़ का नाम जो व्योहरिः" जन्मसे लेकर किष्किन्धापुरी के पास हरिकी सेवा करना चाहि जिसपर श्रीरामचन्द्रजी ये लेकर-यह अर्थ प्रभृति ने वर्षाकाल व्यतीतकि- शब्द का है याथा (प्रमातामह) परनाना (प्रवास) विदेश में रहना- ~~ (प्रमाथ) मारना, मथना (प्रवासिन्) विदेशी, मुसाफिर (प्रमादिन् ) गाफ़िल, असावधान, (प्रवाह) स्रोतस्, चश्मा, सोता बेहोश (प्रविष्ट) घुसाहुआ (प्रमित) नपाहुआ (प्रवीणता) निपुणता, होशियारी (प्रमेह) एक प्रकार का रोग जिस (प्रवेश) पैठना, घुसना से वीर्य बिगड़ जाता है (प्रनज्या) संन्यास (प्रयत्न) उद्योग, उपाय (प्रशंसनीय)तारीफकेलायक,स्तुत्य (प्रयाग) एक तीर्थस्थान,जहां गंगा, (प्रशंसा) स्तुति, तारीफ यमुना, सरस्वती इन तीन (प्रशस्ति) प्रशंसा, तारीफ नदियों का संगम है जिस, (प्रशान्त)जो शान्त होगयाहो को लोग अब इलाहाबाद (प्रष्टव्य) प्रश्न, सवाल, r शब्दसंग्रह। ३४७ व्रतादिक, -- (प्रसङ्ग) विषय (प्रामाण्य) प्रमाण, सबूत (प्रसाधिका) शृङ्गार करनेवाली स्त्री, '(प्रायश्चित्त) पापको शुद्धकरनेवाला, कपड़ा गहना वगैरः यथा-प्रायः पहिरानेवाली लोंडी, पापं विजानीयाञ्चित्त- दासी न्तस्यास्तिशोधनम् (प्रसारण) विस्तारकरना, फैलाना (प्रारब्ध) भाग्य, किस्मत, नियति, (प्रसिद्धि) ख्याति, शोहरत तकदीर, आरब्ध, शुरू (प्रस्तावना) उपोद्घात, भूमिका कियाहुआ (प्रस्फुटित) फूलाहुआ, विकसित '(प्रारम्भ) आरम्भ, शुरू (प्रस्फुरित) चमकताहुंआ (प्रार्थना) याच्या, मांगना (प्रहसन) परिहास, निन्दापूर्वक (प्रार्थनीय)प्रार्थना करने के लायक हॅसना (प्रार्थयितृ) प्रार्थना करनेवाला, मां- (प्रहार) मारना, हथियार गनेवाला (प्रहारिन) मारनेवाला (प्रियतम) बहुतही प्यारा (प्रदृष्ट) बहुत प्रसन्न, खुश (प्रियभाषण)प्यारीयोल,मधुरवचन (प्रह्लाद) हिरण्यकशिपुका पुत्र, जि- (प्रियवक्र) मीठी२ घातें करनेवाला, सकी रक्षाकेलिये भगवान् । प्रियंवद ने नृसिंहावतार लियाथा (प्रियवादिन ) मधुर भापण करने (प्रह) नम्र, विनीत वाला, शीरींकलाम (प्राक्तन) पहिलेका, पुराना (प्रियवादिनी) प्यारी वाने बोलने (प्राग्ज्योतिपपुर) भौमासुरकी प्रा: वाली स्त्री, औरत चीनपुरी (मिया) प्यारी, प्रसन्न करनेवाली (प्राणनाथ)बहुतही प्यारा, प्रियतम औरत (प्राणपति) पहुतही प्यारा, प्रियतम (प्रेक्षक) नाच देग्यनेवाला (पाणेरा) बहुतही प्यारा, प्रियतम (प्रेयमी) बहुतही प्यारी (मातराश) प्रातःकाल का भोजन (प्रोत) कहाहुआ, उन (प्रादुर्भाव) प्रकट, जाहिरहोना (मोपित) विदेश को गयाटुआ,वि- देशस्पिन (प्रोपिनपतिस्त)जिमनीकापनिवि- (पामाणिक)विश्यामपान,मुअनयिर 1 (पान्त) आसपास, समीप (प्रापक) पानेवाला देश में हो रहस्री પુર शब्दसंग्रह। .. वाला, मार्मिक (मनोभूत) मन्मथ, कामदेव जो मानसरोवर में रहता (मनोहर) सुन्दर, रम्य,खूबसूरत है और मोती चुनताहै. (मन्तव्य) माननेके लायक,माननीय (मारीचिमालिन्) सूर्य, रवि (मन्त्रण) सलाह, राय (मरुस्थल)रेगिस्तान,निर्जलप्रदेश, (मन्त्रज्ञ) तान्त्रिक मन्त्रों को जान- मारवाड़ नेवाला (मर्त्यलोक) मृत्युलोक, संसार, (मन्त्रविद) मन्त्र को जाननेवाला, दुनियां तान्त्रिक (मर्मज्ञ.) असली मतलबको जानने (मन्त्रित) शुद्ध कियाहुआ,संस्कृत (मन्थन)मथना,विलोडन,प्रतिघात (मर्पण) सहना, क्षान्ति : (मन्दगति) धीरे चलनेवाला,सुस्त (मलग्राहिन्) भंगी, मेहतर (मन्दबुद्धि) कमअक्ल, स्वल्पवुद्धि | (मलापकर्पिन्) भंगी, मेहतर (मन्दमति) कमअक्ल, स्वल्पवुद्धि (मलय) एक पर्वत का नाम (मन्दभाग्य) वदकिस्मत, अभागा (मलिनचित्त) जिसका दिल बुरा (मन्दर) एक पर्वतका नाम, मन्द- हो वह पुरुष, पापी राचल (मल्लयुद्ध) कुश्ती, दंगल (मन्दादर) स्वल्प सन्मान,कमकदर (मशक) मसा, मच्छड़ (मन्दोदरी) जिस औरतकापेट व- (मसीपात्र) दावात हुत सूक्ष्महो वह स्त्री, (महत्त्व) श्रेष्ठता, चड़ाई शोदरी, रावण की (महर्पि) वड़ा ऋपि 'पटरानी का नाम (महाकाय) जिसका शरीर बहुत (मन्मथारि)कामदेवकेशत्रु शिवजी लम्बा चौड़ाहो वहपुरुप (ममता) मोह, अज्ञान, वास्तव (महाकाली) एकदेवी का नाम जो अपना नहीं है उसको (महापोर) अति भयानक, जिससे अज्ञानवश अपनाहीं स बड़ा भय उत्पन्नहो मझना (महाजन) बड़ा आदमी (मयतनया) मयनाम देत्यकी बेटी, (महात्मन्) श्रेष्टपुरुप,बहुत अच्छा रावणकीस्त्री,मन्दोदरी आदमी: (मरणप्राय) बिल्कुल मेरे की तरह (महिमन्) महत्त्व, यड़ाई. (मराल) हंस, एक तरह का पक्षी (महीधर) अद्रि, पर्वत, पहाड़ .

शब्दसंग्रह। (महीप) राजा, भूमिपाल की सहायता कीथी (महीपति) रोजा, भूमिपाल (मारुतमुत)हनुमानजी,भीमसेन (महेन्द्र) इन्द्र, स्वर्गका मालिक (मारुतात्मज)वायुकापुत्र हनुमानजी (महेश) महादेव (मार्कण्डेय) एक ऋपि का नाम, (महोत्सव) वड़ाजलसा जिसने मार्कण्डेय पु. (मांसाद)मांसका खानेवाला,मां- राण बनाया साशी (मार्गशिर) अगहनका महीना (मांसाहारिन्) मांसभोजी, मांस (मार्जनी) वोहारी, झाडू खानेवाला (मार्जनीय) शोधनीय, शुद्धकरने (मांसभक्षक) मांसखानेवाला, गो. के योग्य । इतवार (मालिका) पांति, श्रेणी, कतार (मांसभक्षिन) मांसखानेवाला, गो- (मालव) मालवादेश श्तरवार (मासान्त) मासकीसमाप्ति (मातृष्वस) माकीवहिन, मोसी (माहेश्वरी) पार्वती (मातृप्यतेय) मौसीका लड़का । (मित) नपाहुआ (माथुर) मथुरापुरीका रहनेवाला (मितप्रद) थोड़ादेनेवाला, कंजुस (मादक) नशेकीचीज़ (मित्रता) मेत्री. दोस्ती (माधुर्य) मधुरता, मिठास (मित्रद्रोहिन) दोस्तकी बुराई चा. (माध्वी) महुआकी मदिरा, दारू । हनेवाला (मानसिक) मनका, दिलका (मिथिला) जनकपुर (मानहानि) अप्रतिष्ठा, घेइज्जनी (मिथिलेशकुमारी)सीरपज, जनक- (मानिन्) घमण्डी, मगरूर, अ.। जीकी पुत्री,श्री. भिमानी रामचन्द्रकी पत्नी (मान्य) मानने के लायक, पूज्य (मिश्रित) मिलाहुआ, सम्पृक्र. (मायापति)मायाकास्वामी, ईश्वर (मिष्ट) मधुर, मीठा (मायाविन ) जालिया. माया जि- (मिटान) मिठाई (मीमांसक) विचार करनेवाला, (मारक) मारनेवाला, घातुक मीमांमागास्त्रको जा. (मारीच) एक राक्षमका नामजि. ननेला राने मीताहरणमें रावण (मीमांमा) विचार, परामर्श समेंदो ३५४ शब्दसंग्रह। (मीमांसित) विचाराहुआ (मुद्रित) मुहर कियाहुआ, छपाहुआ (मीलन) संकोचन, निमीलन, व- (मुनिपुङ्गव) मुनियों में श्रेष्ठ न्दकरना (मुनीन्द्र) मुनिवर्य, मुनिश्रेष्ठ (मीलित) वन्दकियाहुआ (मुनीश) मुनिवर्य, मुनिश्रेष्ठ (मुकुट) एक तरहका आभूपण जो (मुन्यन्न) तीनी, नीवार शिरमें पहिनाजाताहै (मुमुक्ष)जो संसारको हमेशाके लिये (मुकुन्द) मुक्तिको देनेवाले विष्णु छोड़ना चाहता है भगवान् (मुर्प) मरणासन्न, करीवुल्मर्ग, (मुकुम् ) मुक्ति, मोक्ष जो करीव मरनेकेहो (मुकुलित) कलीदार,कलिकासंयुक्त (मुर) एक राक्षस जिसको श्री- (मुक्त) दुनियांके जालसे छूटाहुआ कृष्णजीने मारा था (मुक्तहस्त) उदार, बड़ादाता, सखी (मुरारि) श्रीकृष्ण (मुखभूपण) मॅहको शोभित करने- (मूर्द्धन्य) ऋ, ट, ठ, ड, ढ,ण, र, वाला ताम्बूल, पान प, ये अक्षर (मुखलागल) सूअर, शूकर (मूलभूत)जड़, बुनियाद (मुग्ध) सुन्दर, खूबसूरत, मूढ़, (मृगनयनी) जिस औरतकी आँखें अनारी हरिणकैसीहों वहस्त्री (मुग्धा) एक प्रकारकी स्त्री जो (मृगपति) सिंह, शेर खूबसूरत और कमउम्रहो (मृगी) हरिणी, हन्नी (मुचकुन्द) सूर्यवंशी एक राजा (मृग्य) ढूंढने के लायक, अन्वेष्य (मृतक)मराहुआ (मुझ) मुंज (मृतसञ्जीविनी) एक औषधी जि. (मुण्डक)मुंडनेवाला नाई, हज्जाम ससे मराआदमी (मुण्डमाला) खोपरीकीमाला जी जाता है (मुदित) प्रसन्न, खुश (मृदुता) मुलायमियत, कोमलत्व (मुह) एक प्रकारका अन्न, मूंग (मेकलमुता) नर्मदानदी, यह मे- (मुद्रा) सुशफरनेवाली चीज़ रु- कलनाम पर्वतसे नि. कलती हे (मुदिका) एक तरहकी अंगूठी जि. (मेघवनि) मेहकीगर्ज सपर नाम मुढाहो (मेघ) यज्ञ, इच्या का नाम पया, मोहर शब्दसंग्रह। (मेधाविन्) बड़ा ज़हीन, अतिवु. (यदुनाथ) श्रीकृष्णजी द्धिमान (यदुपति) श्रीकृष्णजी (मेलिन) संगी, साथी (यन्त्र) कल (मैत्री) मित्रता, स्नेह, दोस्ती (यन्त्रणा) पीड़ा, क्लेश (मैथिली) जानकीजी,जनकात्मजा (यमक) जमाव, एक प्रकारका अ. (मैनाक) एक पर्वतका नाम लंकार (मोचन) छुड़ाना (यमज) साथ पैदाहुआ, जोड़िया (मोहन) मोहनेवाला, मनको हर (ययाति) एक चन्द्रवंश का राजा लेनेवाला (यवन) म्लेच्छजाति (मोहनी) मनको हरलेनेवाली स्त्री (यशस्विन) नामी पुरुप (मोहमय) अज्ञानमय, झूठा (याजन) यज्ञ करना (मौजी) मजकी बनीहुई वस्तु मे- (यात) प्राप्त, पाया हुआ खला (यादव) यदुवंशी (मौनिन् ) चुपचाप रहनेवाला (यादृश) जैसा (म्लान) मुरझायाहुआ (यक्ति) तरकीब (य) (युत) संयुक, मिलाहुआ (यजन)पूजा, याग (यद्धनिदेश) लड़ाई का पैगाम (युधिष्ठिर) पाण्डुराजा का पुत्र, (यज्ञोपवीत) जनेऊ संग्राम में ठहरनेवाला (यत्न) उपाय, तदवीर (युवक) नौजवान, तरुण (यन्त्रित) बंधाहुआ, कैद, वद्ध (योगनिदा) विष्णुभगवानकीनींद (यथाकाम) यथेच्छ, भरपूर (योगदि) शब्दकी एक शकिजो (यथायोग्य) यथोचित, जैसा चा- अर्थविशेपमें शब्दको हिये वैसा प्रवृत्ति करती है (यथाशक्ति)जहांतक होसके, यथा (योगिनी) एकटेगी जिसके चौसटि सामर्थ्य भेद हैं (यदा)जब, जिस समय (योगिन्) चित्तकी वृत्तिको रोकने- (यद) चन्द्रवंश के एक राजा का वाला नाम जिससे यदुवंश कद- (पोग्यता) हैसियत लाताह (योजक) मिलानेवाला (यज्ञसूत्र) जनेऊ शब्दसंग्रह। } , . शाकी जगह (योजना) जोड़ना सारथी (योधन) शस्त्र, हथियार (रदच्छद) ओष्ठ, होट (यौगिक) योगसे बनाहुआ (रन्तिदेव) एक चन्द्रवंशी राजा (रमक) क्रीडाकरनेवाला, कामी । (रक्षकन्द) पलाण्डु, प्याज (रमण) क्रीड़ा, भोग, पति (रक्तचूर्ण) सिन्दुर, वन्दन (रमणीय) रम्प, सुन्दर (रक्तप)खूनपीनेवाला जोक,खटमल (रमापति) विष्णु, भगवान् (रक्तपात) खून गिरना (रविर्तनया) यमुनानदी (रकवीज) एक राक्षस का नाम जि- (रविनन्दिनी) यमुनानदी सको दुर्गाजीने माराथा (रविपुत्र) सुग्रीवनाम वानरं राजा (रक्षक) पालक, रक्षा करनेवाला कर्ण (रक्षण) पालना, रक्षा ) (संज्ञा) स्वादको जानने वाली (रङ्गभूमि) नाट्यभवन, नाच, तमा जिह्वा, जीभ (रसायनविद्या) कमिस्ट्री जिससे (रचयितृ) वनानेवाला पदार्थ का विवेक (रुजकी) धोचिन होता (रजनीकर) चन्द्रमा,रातकरनेवाला (रसिक) रसज्ञ, रसीला (रजनीचर) निशाचर, राक्षस (रहित) त्यक, छुटाहुआ (रञ्जक) प्रीति करनेवाला, प्रसन्न (राकापति) पूर्णिमाका चन्द्रमा करनेवाला, रॅगनेवाला (राकेश) पूर्णिमाका चन्द्रमा (रजित) रँगाहुआ (राग)प्रीति, मोहब्बत (स्टन) घोपना, रटना (राजकन्या) राजाकी लड़की (रटित) पोपाहुआ, घुट (राजकर) महसूल, लगान (रणभूमि) लड़ाई की जगह (राजकीय) राजाका, राजसम्बन्धी (स्तहिण्डक) रंडीवाज़ सरकारी (स्नगर्भ) समुद्र (राजकीयमहासभा) राजाकी बड़ी (स्वजटितं) जिस में जवाहिरात कचहरी जड़ेही (राजकुमार) राजाका लड़का, रा. (रनसोरलोंको पैदाकरनेवाली पृथ्वी जसून (स्थवाहक) रथको हांकनेवाला, (ग़जकृत्य) राजकार्य N । ।

शब्दसंग्रह। ३५७ (राजकोश) सरकारी खज़ाना (रोटिका) रोटी (राजद्रोहिन) राजाका शत्रु, वागी (रोद्ध) घेरनेवाला, रोकनेवाला, (राजदार) राजाकी ड्योढ़ी रोधक (राजधानी) जहाँ राजा रहताहो (रोमाञ्चित) भय या हर्ष से जिसके वह स्थान, दारल्स. रोम खड़े हों वह पुरुप ल्तनत (रोमावली) रोमराजि नाभिके नीचे (राजभवन) राजाका महल, राज की रोएंकी पांति सदन (ल) (राजमार्ग) सड़क (लक्षित) चिह्नित, निशान किया (राजशासन) राजाकाहुक्म हुआ, देखाहुआ (राजस) रजोगुणी (लक्षणा) आरोप (राजेसभा) राजाका दरवार (लक्ष्मीकान्त) विष्णु, नारायण (राजित) शोभित (लक्ष्मीनाथ) विष्णु, नारायण (रामगिरि) चित्रकूट (लक्ष्मीपति) विष्णु, नारायण (रिपुसूदन) शत्रुका नाशकरनेनाला (लघिमन्) लघुता, छोटाई (रुदाक्रीड) महादेवजी के क्रीड़ा (लधुहस्त) कार्यकुशल, काममें हो- करनेकीजगह,श्मशान शियार (रुट) नाराज, कुपित (रूढ) उत्पन्न, प्रकट (लकापति) रावण (रूदि) प्रसिद्धि, उत्पत्ति,पैदाहोना (लकेश) रावण .(रूपनिधान) अतिसुन्दर (लकेश्वर) रावण (रूपवती) खूबसूरत पोरत (लवन) लांघना (रेसा) लकीर (लज्जारहित) वेशर्म, बेहया (रेवती) सत्ताईसवां नक्षत्र, चल- (लतायनस) तरयूज़ देवजी की माता (लन्धि)लाभ (रैत) एक पर्वत का नाम जो (लम्ब) लम्बा काठियावाड़ में जूनागढ़के (लम्बोप्प) उंट,जिसके होटलम्येदों पास (लाक्षणिक) बद्द अर्थ,जिसकायोध (रोगिन्) रुजार्दित, यीमार लक्षणागति से हो (रोचक) रुचि बढ़ानेवाला (लावर) छोटाई, लघुना (लवी) छोटी --- , ३५८ शब्दसंग्रह। (लठन) लोटना (लाच्छित) कलङ्कित, बदनाम (लौकिक) सांसारिक दुनियावी (लालन) लाड़, प्यार (लालित) दुलारा (वंश्य) वंश में उत्पन्न (लालित्य) मनोहरता, खूबसूरती (वक) घगुलापक्षी (लावण्य) सुन्दरता, खूबसूरती (बकवृत्ति) दम्भी, पाखण्डी (लासक) नाचनेवाला (वक्तव्य) कहने के योग्य (लिहित) चिह्नित (वक्तृता)कथन,व्याख्यान,वस्तृत (लिप्मु) पाने की इच्छा किये हुए (वक्राग) कुब्ज, कुबड़ा जिसका (लीन) शिलष्ट, मिलाहुआ अंग टेढ़ा हो (लुचन) उखाड़ना, उन्मूलन (वक्रोक्ति) सीधे को उलटा कहना, एक अलंकार का नाम (लुप्त) नट, गायव (वक्षःस्थल) उरस, सीना, छाती (लेखनी) कलम (वक्षोज) स्तन, चूची (लेखनीय) लिखनेके योग्य, लेन्य (वज्रदन्त) जिसके दांत बहुत मज- (लेख्यगृह) जहां लिखने पढ़ने का काम होता हो दफ्तर (वज्राघात) वज एक तरह के ह- (लेशमात्र) स्वल्प, थोड़ा भी थियार की चोट (लेह्य) आस्वाय, चाटनेके लायक (वञ्चक) ठग, धूर्त (लोकप) लोक भुवन के मालिक (बटु) लड़का, वालक लोकपाल (बटुक) बाल,लड़का (लोकलोचन) सूर्य, रवि (वनज) जल से पैदा होनेवाला (लोकयात्रा) ससार का व्यवहार कमल (लोकापवाद) पदनामी, अपयश, (वनमाला) तुलसीदल, कुन्द, म- अपकीर्ति न्दार, पारिजातक, क- (लोप) न दिखाई देना, अदर्शन मल, इनकीमाला यथा (लोम) लालच तुलसी कुन्दमन्दार (लोमिन) लालची पारिजाताजपुष्पकेः॥ (लोमश) जिस मनुष्य के शरीरमें निर्मिता दीर्घमालाया वनमालाप्रकीर्तिता॥ (लोहितान) जिसकीआंग्वलालहों। (चन्दन)प्रणाम, स्तुति, तारीफ वत हों , बहुत रोएं हों शब्दसंग्रह। - . (वन्दनीय) स्तुत्य, तारीफ करनेके मतलब योग्य,अभिवाद्य,प्रणा- (वात्सल्य) प्रेम, प्यार म करने के योग्य (वाद) वातचीत, झगड़ा (वन्य) वनमें होनेवाला जंगली (वादिन् ) शत्रु, मुद्दई (वपन) घोना (वानरेन्द्र) सुग्रीव, हनुमानजी (वमन) उद्गार, कय,डाकना,उलटी (वायव्य) वायु का, पश्चिम उत्तर (वरदान) अभीष्ट वस्तु को देना का कोन (वरदायक) वर देनेवाला, वरद (वायुपुत्र) हनुमान जी (वराटिका) कौड़ी (वाराणसी) काशी, बनारस (वरासन) उत्तम आसन (वारिचर)जलजन्तु,मछलीइत्यादिक (वजन) मना करना, निवारण (वारिज) कमल (वर्जनीय) त्याज्य, मना करने के (वार्पिक) बरसातका, वर्षाकालका, योग्य सालाना, आब्दिक (वर्णन) बयान, स्तुति (वासना) इच्छा, अभिलाप (वर्णमाला) अक्षर पंक्ति ककहरा (वास्तव) वस्तुतः,ठीक २ संत्य २ (वर्णसङ्कर) दोगला (वास्तव्य) रहनेवाला (वर्तमान) उपस्थित, मौजूद (विकल) व्यग्र, घयरायाहुआ (वर्द्धन) वृद्धि, बढ़ती (विकल्प) पसोपेश (वर्द्धित) बढ़ायाहुआ (विक्रमिन) पराक्रमी, बलवान् (वर्पण) वृष्टि, वारिश (विक्लान्त) खिन्न, उदास, (वल्गु) मनोहर, सुन्दर (विक्लेद) आदीभाव, गीलापन । (वल्लभा) प्रिया, प्यारी (वशिष्ठ) जो इन्द्रियों को अपने (विख्यात) प्रसिद्ध, मशहूर वशमें रक्खे (विख्याति) प्रसिद्धि, शोहरत (वशिन्) जितेन्द्रिय (विगतश्रम)जिसकी थकावट जा- (वहिन) जलयान, जहाज़ तीरहीहो (वागीश्वरी) सरस्वती (विगर्हण)बुराई करना,निन्दाकरना (वाग्दण्ड) फटकार, डाट (विघात) नाश (वाइमय)शास्त्र (विचित्र) अद्भुत, अजीय (वाच्य)कहने के योग्य, वक्तव्य, अर्थ, (विन्विन) टूटाटुआ M (विक्षेप) फेंकना , शब्दसंग्रह। , A (लठन) लोटना (लाच्छित) कलङ्कित, बदनाम (लौकिक) सांसारिक दुनियावी (लालन) लाड़, प्यार (4) (लालित) दुलारा (वंश्य) वंश में उत्पन्न (लालित्य) मनोहरता, खूबसूरती (वक) बगुलापंक्षी (लावण्य) सुन्दरता, खूबसूरती (वकवृत्ति) दम्भी, पाखण्डी (लासक) नाचनेवाला (वक्तव्य) कहने के योग्य (लिहित) चिह्नित (वक्तृता)कथन,व्याख्यान,वस्तृत (लिप्मु) पाने की इच्छा कियेहुए (वकार) कुन्ज, कुबड़ा जिसका (लीन) श्लिष्ट, मिलाहुआ अंग टेढ़ा हो (लुजन) उखाड़ना, उन्मूलन (वक्रोक्ति) सीधे को उलटा कहना, एक अलंकार का नाम (लुप्त) नट, गायब (वक्षःस्थल) उरस्, सीना, छाती (लेखनी) कलम (वनोज) स्तन, चूंची (लेखनीय) लिखनेके योग्य, लेख्य (वज्रदन्त) जिसके दांत बहुत मज- (लेख्यगृह) जहां लिखने पढ़ने का काम होता हो दप्तर (वज्राघात) बज एक तरह के ह- (लेशमात्र) स्वल्प, थोड़ा भी थियार की चोट (लेह्य) आस्वाय, चाटने के लायक (वश्वक) ठग, धूर्त (लोकप) लोक भुवन के मालिक (बटु) लड़का, बालक लोकपाल (बटुक) वाल, लड़का (लोकलोचन) सूर्य, रवि (वनज) जल से पैदा होनेवाला (लोकयात्रा) सतार का व्यवहार कमल (लोकापवाद) बदनामी, अपयश, (वनमाला) तुलसीदल, कुन्द, म- अपकीर्ति न्दार, पारिजातक, क- (लोप) न दिखाई देना, अदर्शन मल, इनकीमाला यथा (लोम) लालच " तुलसी कुन्दमन्दार (लोभिन्) लालची पारिजाताजपुष्पकैः॥ (लोमश) जिस मनुष्य के शरीरमें निर्मिता दीर्घमालाया वनमालाप्रकीर्तिता॥ (लोहिताम) जिसकीआंग्वलालदों (वन्दन)प्रणाम, स्तुति, तारीफ बूत हो . बहुत रोएं हों शब्दसंग्रह। ३५६ का कोन (वन्दनीय) स्तुत्य, तारीफ करनेके मतलब योग्य,अभिवाद्य,प्रणा- (वात्सल्य) प्रेम, प्यार म करने के योग्य (वाद) वातचीत, झगड़ा (वन्य) वनमें होनेवाला जंगली (वादिन् ) शत्रु, मुद्दई (वपन) वोना (वानरेन्द्र) सुग्रीव, हनुमानजी (वमन) उद्गार, कय,डाकना,उलटी (वायव्य) वायु का, पश्चिम उत्तर (वरदान) अभीष्ट वस्तु को देना (वरदायक) वर देनेवाला, वरद (वायुपुत्र) हनुमानजी (वराटिका) कौड़ी (वाराणसी) काशी, वनारस (वरासन) उत्तम आसन (वारिचर)जलजन्तु,मछलीइत्यादिक (वजन) मना करना, निवारण (वारिज) कमल (वजनीय) त्याज्य, मना करने के (वार्षिक) बरसातका, वर्षाकालका, योग्य सालाना, आब्दिक (वर्णन) वयान, स्तुति (वासना)इच्छा, अभिलाप (वर्णमाला) अक्षर पंक्ति ककहरा (वास्तव),वस्तुतः, ठीक २ संत्य २ (वर्णसङ्कर) दोगला (वास्तव्य) रहनेवाला (वर्तमान) उपस्थित, मौजूद (विकल) व्यग्र, घयरायाहुआ (वर्द्धन) वृद्धि, बढ़ती (विकल्प) पसोपेश (वर्द्धित) बढ़ायाहुआ (विक्रमिन) पराक्रमी, बलवान (वर्पण) वृष्टि, वारिश (विक्लान्त) खिन्न, उदास (वल्गु) मनोहर, सुन्दर (विक्लेद) आर्दीभाय, गीलापन (वल्लभा) प्रिया, प्यारी (वशिष्ठ) जो इन्द्रियों को अपने (विख्यात) प्रसिद्ध, मशहूर वशमें रक्खै (विख्याति) प्रसिद्धि, शोहरत (वशिन) जितेन्द्रिय (विगतश्रम)जिसकी थकावट जा. (वहित्र) जलयान, जहाज तीरहीहो (वागीश्वरी) सरस्वती (विगर्हण)चराई करना,निन्दाकरना (विघात) नाश (वाग्दण्ड) फटकार, डाट (वाङ्मय) शास्त्र (विचित्र) अद्भुत, अजीय (वाच्य) कहनेके योग्य, चक्रव्य, अर्थ, (विन्दिन) बाहुआ -- (विक्षेप) फेंकना ३६० शब्दसंग्रह। समर्थ (विच्छेद) विरहवियोग (विभक्त.) वांटाहुआ (विजयिन्) जीतनेवाला (विभक्ति) विभाग, अलगकरना (विजिगीपा) जीतनेकी इच्छा | (विभाजक) बांटनेवाला (विज्ञापन नोटिस, जताना,निवेदन (विभावना) एक प्रकारका अलंकार, (वितक) विचार, अनुमान जिसमें विना कारणके (वितत) विस्तृत, फैलाहुआ कार्यकी उत्पत्ति होतीहै (वितरण) दान, खरात (विभीषण) अति भयङ्कर, वड़ाखौ- (विदर्भ) एक देशकानाम फनाक, रावणके.छोटे (विदारण) फाड़ना भाईका नाम (विदीर्ण) फाड़ाहुआ (विभीपिका) डराना, भयदर्शन (विदूपक) नाटकका एक पात्र जो (विभु)व्यापक, नकलकरताहै (विभूपित) अलंकृत, शृङ्गारकियेहुये (विदुपी) जाननेवाली, पण्डिता (विमर्श) विचार (विद्यार्थिन ) छात्र, तालिवइल्म (विमाट) सौतेली,मा (विद्यालय.) पाठशाला, कालेज (विमुख) मुँहफेरेहुये, नाराज,विरुद्ध (विदेष्ट) शत्रु, दुश्मन, वैरी (विमोचन) छुड़ानेवाला, छुड़ाना (विधायक) करनेवाला (वियोग) विरह, जुदाई (विध्वंस) नाश, वरवादी (वियोगिन्) विछुड़ाहुआ, वियुक्त (विनता) गरुड़की माता | (विरक) संन्यासी (विनति) विनय, नन्नता (विरचित) पनायाहुआ, निम्मित (विनश्वर)विनाशी, नष्टहोनेवाला (विरह) वियोग, विजुड़ना (विनिमय) परिवर्तन, बदलना | (विराध) एक राक्षस जिसको श्री (विनोद) आनन्द, खुशी रामचन्द्रजी ने माराथा (विन्ध्यवासिनी)विन्ध्याचलपर रह- (विराम) अवसान, अन्त, समाप्त नेवाली देवी (विरूप) बदसूरत (विन्यास) स्थापनकरना (विरोधिन् ) दुश्मन, द्वेषण (विपरीत) उलटा (विलम्ब) देर, अरसा (चिपाक) कर्मफल, परिणाम (विलासिन्) रसिक, भोगी (विप्रलब्ध) धोखा दियागया, प्र. (विलासिनी) हावभाव के करने तारित वाली भारत , शब्दसंग्रह। , मुख्य न हो (विलुप्त) नष्ट, गायत्र (विस्मरण) भूलजाना, विस्मृति (विलोकन) दर्शन, देखना (विस्मित) आश्चर्ययुक्त (विलोचन) ईक्षण, नेत्र, आंखि (विहरण) विहारकरना, चैनकरना (विवरण) विवृत्ति, व्याख्या, टीका (विहित) कियाहुआ, कृत (विवाहित) व्याहा हुआ (विहीन) रहित, शून्य, खाली (विवाहिता) व्याही गोरत (वीक्षण) देखना, दर्शन (विवकिन ) विचारवान्, समझदार (वीरप्रसू) बहादुर पुत्रको पैदा करने (विशिखासन) धनुष वाली,वीरकीमाता,वीरसू (विशुद्ध) बहुत साफ़, अतिपवित्र (वीरता) वहादुरी -(विशेप) आधिक्य (वीरभद्र) शिवजी के पुत्र (विशेषण) अप्रधान, गौण, जो (वृकोदर) भीमसेन (वृपली) शूद्रकी स्त्री, सूदिनि (विशेष्य) प्रधान, मुख्य (वृपोत्सर्ग) मृतक के वास्ते सांड़ (विशोक)प्रसन्न,जिसको शोचन हो छोड़ना (विश्राम) आराम, सुस्ताना (वेत्र)त, वेतस (विश्लेप) विभाग, अलगहोना बेदपारग) चारोंवेदको जाननेवाला (विश्वनाथ) संसारका मालिक । (वेदमा) गायत्रीमन्त्र (विश्वस्त)विश्वासपात्र, मुअतमिद (वेदाह्न) वेदोंके अङ्ग, शिक्षा कल्प, (विश्वासघातक) धोखादेनेवाला, व्याकरण ज्योतिप् छन्दस् दगावाज निरुक ६ इनको विनापढ़े (विश्वेश) दुनियांका मालिक मनुप्य वेदका अधिकारी (विश्वेश्वर) दुनियांका मालिक नहीं होसत्ता (विपमता वैषम्य, असाम्य, घटबढ़ (वेद्य) जाननेके योग्य, ज्ञेय (विपुवतरेसा) भूमध्यरेसा, खत (वेधक) छेदनेका औज़ार उस्तवा (बेखानस) वानप्रस्थका आश्रम (विष्टब्ध) स्तब्ध, निश्चेष्ट (वैदिक) वेदपाठी ब्राह्मण, वेद (विसर्ग) अक्षरके आगेकी दोविंदी (विसर्जन) विदा, हट्टी, रुखसत (वैद्यक) टास्टरी, धैद्यकशास्त्र (विसूचिका) हेज़ाकीवीमारी (वभर) ऐश्वर्य, सम्पत् (विस्फोटक) फोड़ा, चेचक (वमनस्य) विगाड़, रंज में कहाहुआ शब्दसंग्रह। 'विच्छेद) विरहवियोग (विभक्त) वांटाहुआ (विजयिन) जीतनेवाला (विभक्ति) विभाग, अलगकरना (विजिगीपा) जीतनेकी इच्छा (विभाजक) बांटनेवाला (विज्ञापन) नोटिस, जताना,निवेदन (विभावना) एक प्रकारका अलंकार, (वितर्क) विचार, अनुमान जिसमें विना कारण के (वितत) विस्तृत, फैलाहुआ, ..कार्यकी उत्पत्ति होती है (वितरण) दान, खेरात (विभीषण)अति भयङ्कर, बड़ाखौ- (विदर्भ) एक देशकानाम फनाक, रावणके छोटे (विदारण) फाड़ना भाईका नाम (विदीर्ण) फाड़ाहुआ (विभीपिका) डराना, भयदर्शन (विद्वपक) नाटकका एक पात्र जो (विभु) व्यापक, समर्थ नकलकरताहै (विभूपित) अलंकृत, शृङ्गारकियेहुये (विदुपी) जाननेवाली, पण्डिता (विमर्श) विचार (विद्यार्थिन ) छात्र, तालिवइल्म (विमात) सौतेली.मा (विद्यालय.) पाठशाला, कालेज (विमुख) मुंहफेरेहुये, नाराज,विरुद्ध (विदेष्ट) शत्रु, दुश्मन, वैरी (विमोचन) छुड़ानेवाला, छुड़ाना (विधायक) करनेवाला (वियोग) विरह, जुदाई (विध्वंस) नाश, वरवादी (वियोगिन्) बिछुड़ाहुआ, वियुक्त (बिनता) गरुड़की माता (विरक) संन्यासी (विनति) विनय, नम्रता (विरचित) बनायाहुआ, निम्मित (विनश्वर) विनाशी, नष्टहोनेवाला (विरह) वियोग, पिछड़ना (विनिमय) परिवर्तन, बदलना (विराध) एक राक्षस जिसको श्री (विनोद) आनन्द, खुशी रामचन्द्रजी ने माराथा (विन्ध्यवासिनी)विन्ध्याचलपर रह- (विराम) अवसान, अन्त, समाप्त नेवाली देवी (विरूप) बदसूरत (विन्यास) स्थापन करना (विरोधिन् ) दुश्मन, द्वेषण (विपरीत) उलटा (विलम्ब) देर, अरसा (चिपाक) कर्मफल, परिणाम (विलासिन्) रसिक, भोगी (विपलब्ध) धोखा दियागया, प्र- (विलासिनी) हावभाव के करने तारित वाली मारन शब्दसंग्रह। ३६१ मुख्य न हो (विलुप्त) नष्ट, ग़ायब (विस्मरण) भुलजाना, विस्मृति (विलोकन) दर्शन, देखना (विस्मित) आश्चर्ययुक्त (विलोचन) ईक्षण, नेत्र, आंखि (विहरण) विहारकरना, चैनकरना (विवरण) विवृत्ति, व्याख्या, टीका (विहित) कियाहुआ, कृत (विवाहित) व्याहा हुआ (विहीन) रहित, शून्य,खाली (विवाहिता) व्याही औरत (वीक्षण) देखना, दर्शन (विवेकिन ) विचारवान्, समझदार (वीरप्रसू) बहादुर पुत्रको पैदा करने (विशिखासन) धनुष वाली,वीरकीमाता,वीरसू (विशुद्ध) बहुत साफ, अतिपवित्र (वीरता) वहादुरी -(विशेप) आधिक्य (वीरभद्र) शिवजी के पुत्र (विशेषण) अप्रधान, गौण, जो (वृकोदर) भीमसेन (वृपली) शूद्रकी स्त्री, सृदिनि (विशेष्य) प्रधान, मुख्य (वृपोत्सर्ग) मृतक के वास्ते सांड (विशोक)प्रसन्न,जिसको शोचन हो छोड़ना (विश्राम) आराम, सुस्ताना (वेत्र) घेत, वेतस (विश्लेप) विभाग, अलगहोना (वेदपारग) चारोंवेदको जाननेवाला (विश्वनाथ) संसारका मालिक (विश्वस्त)विश्वासपात्र, मुलतमिद (वेदाङ्ग) वेदोंके अन, शिक्षा कल्प, (विश्वासघातक) धोखादेनेवाला, व्याकरण ज्योतिप् छन्दसू दगाबाज निरुक्त ६ इनको विनापढ़े (विश्वेश) दुनियांका मालिक (विश्वेश्वर.) दुनियाँका मालिक (विषमता) वेपम्य, असाम्य, घटबढ़ (वेद्य) जाननेके योग्य, ज्ञेय (विषुवतरेसा) भूमध्यरेखा, खत (वेधक) छेदनेका औज़ार उस्तवा (वसानस) वानप्रस्थका आश्रम (विष्टब्ध) स्तब्ध, निश्चेष्ट (वैदिक) वेदपाठी ब्राहाण, वेद (विसर्ग) अक्षरके आगेकी दोबिंदी में कहाहा (विसर्जन) विदा, छुट्टी, रुवसत (वेद्यक) डाक्टरी, वेद्यकशास्त्र (विसूचिका) हेज़ाकीवीमारी (वेभा) ऐश्वर्य, सम्पत् (विस्फोटक) फोड़ा, चेचक (वेदमात) गायत्रीमन्त्र मनुष्य वेदका अधिकारी नहीं होसमा (वैमनस्य) विगाड़, रंज ३६० शब्दसंग्रह। (विच्छेद) विरहवियोग (विभक्त) बाटाहुआ (विजयिन्) जीतनेवाला (विभक्ति) विभाग, अलगकरना (विजिगीपा) जीतनेकी इच्छा (विभाजक) बांटनेवाला (विज्ञापन) नोटिस, जताना,निवेदन (विभावना) एक प्रकारका अलंकार, (वितर्क) विचार, अनुमान जिसमें विना कारणके (वितत) विस्तृत, फैलाहुआ .१. कार्यकी उत्पत्ति होती (वितरण) दान, खरात (विभीषण) अति भयङ्कर,वड़ाखौ- (विदर्भ) एक देशकानाम फनाक, रावणके छोटे (विदारण) फाड़ना भाईका नाम (विदीर्ण) फाड़ाहुआ (विभीपिका) डराना, भयदर्शन (विद्वपक) नाटकका एक पात्र जो (विभु)व्यापक, समर्थ नकल करताहै (विभूपित) अलंकृत, शृङ्गारकियेहुये (विदुपी) जाननेवाली, पण्डिता (विमर्श) विचार (विद्यार्थिन् ) छात्र, तालिवइल्म (विमा) सौतेली मा (विद्यालय) पाठशाला, कालेज (विमुख) मुँहफेरेहुये, नाराज,विरुद्ध (विदेष्टु) शत्रु, दुश्मन, वैरी (विमोचन) छुड़ानेवाला, छुड़ाना (विधायक) करनेवाला (वियोग) विरह, जुदाई (विध्वंस) नाश, वरवादी (वियोगिन् ) बिछुड़ाहुआ, वियुक (विनता) गरुड़की माता (विरक) संन्यासी (विनति) विनय, नम्रता (विरचित) बनायाहुआ, निम्मित (विनश्वर) विनाशी, नष्टहोनेवाला (विरह) वियोग, विजुड़ना (विनिमय) परिवर्तन, बदलना (विराध) एक राक्षस जिसको श्री (विनोद) आनन्द, सुशी रामचन्द्रजी ने माराथा (विन्ध्यवासिनी)विन्ध्याचलपर रह- (विराम) अवसान, अन्त, समाप्त नेवाली देवी (विरूप) बदसूरत (विन्यास) स्थापनझरना (विरोधिन् ) दुश्मन, हेपण (विपरीत) उलटा (विलम्ब) देर, अरसा (वियाफ) कर्मफल, परिणाम (विलासिन्) रसिक, भोगी (विप्रलब्ध) घोखा दियागया, प्र- (पिलासिनी) हारभाव के करने तारित वाली भारत ७ शब्दसंग्रह। ३६१ . मुख्य न हो (विलुप्त) नष्ट, गायन (विस्मरण) भुलजाना, विस्मृति (विलोकन) दर्शन, देखना (विस्मित) आश्चर्ययुक्न (विलोचन) ईक्षण, नेत्र, आंखि (विहरण) विहारकरना, चैनकरना (विवरण) विवृत्ति, व्याख्या, टीका (विहित) कियाहुआ, कृत (विवाहित ) व्याहा हुआ (विहीन) रहित, शून्य, खाली (विवाहिता) व्याही औरत (वीक्षण) देखना, दर्शन (विवेकिन ) विचारवान्, समझदार (वीरप्रसू) बहादुर पुत्रको पैदा करने (विशिखासन) धनुप वाली,वीरकीमाता,वीरसू (विशुद्ध) बहुत साफ़, अतिपवित्र (वीरता) वहादुरी '(विशेप) आधिक्य (वीरभद्र) शिवजी के पुत्र (विशेपण) अप्रधान, गौण, जो (वृकोदर) भीमसेन (वृपली) शूद्रकी स्त्री, सूदिनि (विशेष्य) प्रधान, मुख्य (वृपोत्सर्ग)मृतक के वास्ते सांड (विशोक)प्रसन्न,जिसको शोच नहो छोड़ना (विश्राम) आराम, सुस्ताना (वेत्र) घेत, वेतस (विश्लेप) विभाग, अलगहोना (वेदपारग) चारों वेदको जाननेवाला (विश्वनाथ) संसारका मालिक (वेदमा) गायत्रीमन्त्र (विश्वस्त)विश्वासपात्र, मुमतमिद (वेदाह) वेदोंके अङ्ग, शिक्षा कल्प, (विश्वासघातक) धोखादेनेवाला, व्याकरण ज्योतिप् छन्दस् दगावाज निरुक्त ६ इनको विनापढ़े (विश्वेश) दुनियांका मालिक (विश्वेश्वर) दुनियांका मालिक नहीं होसका (विषमता) वेपम्य, असाम्य, घटबढ़ (वेद्य) जाननेके योग्य, ज्ञेय (विपुवतरेखा) भूमध्यरेखा, खत (वेधक) छेदनेका ओज़ार (वैखानस) वानप्रस्थका आश्रम (विष्टब्ध) स्तब्ध, निश्चेष्ट (वैदिक) वेदपाठी ब्राहाण, वेद (विसर्ग) अक्षरके आगेकी दो बिंदी में कहाहुआ (विसर्जन) विदा, छुट्टी, रुवसत (वैद्यक) डाक्टरी, वैद्यकशान (वभर) ऐश्वर्य, सम्पत् (विसूचिका) हेज़ाकीवीमारी (विस्फोटक) फोड़ा, चेचक (वैमनस्य) पिगाड़, रंज मनुष्य वेदका अधिकारी उस्तवा ३६२ शब्दसंग्रह। (वैयाकरण)व्याकरणशास्त्रको जा- में उत्पन्न विश्वामित्र ननेवाला की कन्या जिल को (वैष्णव) विष्णुभगवान् के भक्त कण्वऋपिनेपालाथा (व्यञ्जना) एकप्रकार की शब्द की (शक्त) समर्थ शनि, जो अभिधा तथा (शजित्) इन्द्र को जीतनेवाला लक्षणाशक्ति के विरत रावणकावेटा,मेघनाद होनेपर अर्थान्तरका घो- (शंखध्म) शंख बजानेवाला ध करती है (शउता) दुर्जनता, वदमाशी (व्यतिक्रम) व्यत्यय, उत्क्रम,उल-(शण) सन, पेटुआ ट पलट (शतक्रत) जिसने सोयज्ञ कियाहो, (व्यतिरिक्त) अतिरिक्त, सिवाय, अ. इन्द्र (शतघ्नी) तोप (व्यतीत) गुज़राहुआ, अतिक्रान्त (शताब्दी) सदी (व्यथित) दुःखित, दुःखी (शरण्य) रक्षक, बचानेवाला (व्यपदेश) व्यवहार (शवाधार) टिकठी (व्यभिचार) परदारोपसेवन, जिना (शशाक) चन्द्रमा (व्यभिचारिन्) कुकर्मी, बदचलन (शशिन् ) चन्द्रमा, विधु (व्यवकलन)याकीनिकालना,घटाना (शस्त्रधारिन् ) हथियारवंद (व्यवधान) आड़, परदा (शस्त्रमार्जन) हथियार को साफ़ (व्यवसाय) उद्यम, उद्योग (व्यवस्था) निर्णय, फैसला (शस्त्राधार) हथियारघर, शस्त्रगृह (व्यारयान) उपदेश, ल्यक्चर (शाकिनी) दुर्गा की अनुचरी (व्यापक) सब जगहभराहुआ,स- (शाक्त) देवी की पूजा करनेवाला व्यापी (शापित) हथियार जिसपरतान (व्यापादन) मारना, हिंसन, कत्ल (व्यायाम) कसरत, परिश्रम (शाप) बददुआ, सराप (व्युत्पत्ति) बोध, समझ (शाब्दिक) वैयाकरण (वीडित) लज्जित, शर्मिन्दः (शायिन) सोनेवाला (श) (शासनपत्र) आज्ञापत्र, परवानः (शकुन्तला) मेनका नाम अप्सरा (शालिन) शास्त्र का जाननेवाला, करना चढ़ा हो शब्दसंग्रह। ३६३ , पण्डित (शोकात) रंजीदः (शिक्षक) सिखानेवाला (शोचनीय) शोक करनेके योग्य, (शिक्षाप्रकरण) विद्याविभाग, स- शोच्य रिश्तातालीम (शोधक) शुद्ध, सही करनेवाला (शिथिल) ढीला (शोधन) शुद्धकरना, सेहत (शिरोमणि) श्रेष्ठ, उत्तम (शोपक) सोखनेवाला (शिवि) एक राजा का नाम (शौच) पवित्रता, सफाई (शिविर) छावनी, सेनानिवेश (शौल्किक) चुंगी का दारोगा (शिष्ट) सज्जन, सभ्य (श्रद्दधान ) श्रद्धालु, मुअतक्रिद, (शिष्टाचार) सज्जनों का आचरण श्रद्धावान् (शीघ्रगामिन्) जल्दी चलनेवाला (श्रम) मेहनत, परिश्रम (शीतकर) चन्द्रमा (श्रान्त) थका हुआ (शीतकाल)जाड़ेके दिन (श्रान्ति) थकावट (शीतज्वर) जूड़ी (श्रोह) सुननेवाला (शीतलता) शैत्य, ठंढापन (श्लाघा)प्रशंसा, तारीफ़ (शीर्ण) मराहुआ (श्लाघ्य)प्रशंसनीय, तारीफ के (शुद्ध) पवित्र, साफ़, सही लायक (शुद्धता) सफाई, स्वच्छता (श्वान) कुत्ता, कुकुर (शुद्धि) सफाई, निर्मलता (श्वास) सांस (शुभग) सुन्दर (श्वेतदीप ) एकद्वीप का नाम (शुभचिन्तक) वैरख्वाह, शुभा- (प) भिलापी (पवर्ग) काम १ क्रोध २ लोभ ३ (शुभलग्न) अच्छासमय मोह ४ मद ५अहंकार ६ (शुभाकांक्षिन) भला चाहनेवाला (पट्शास्त्र) न्याय १ वैशेषिक २ (शुश्रुपक) सेवाकरनेवाला, दास मीमांसा ३ वेदान्त ४ सांख्य ५योग पातजलद (शुष्क) सूखा, खुश्क (शूरता) बहादुरी, वीरता (पति) भौरा, भ्रमर (शेपशायिन) विष्णुभगवान् (पोडशदान) सोलह प्रकारके दान (शैव) शिवभक्त यथा। पृथ्वी १ आसन (शोकाकुल) रंजीदः २ जल३ वस्त्र ४ दीप५ ३६४ शब्दसंग्रह। अन्न ६यान ७ छन (सङ्घर्प) दूसरे का अभिभव चाहना, सुगन्धितवस्तु पुष्प स्पर्दा साला१०फल११शय्या (सजल)जलयुक्त १२ खड़ाऊं१३गो १४ (सजातीय) एक जातिका सुवर्ण १५ रजत १६ (सचित) इकट्ठा किया हुआ इन सबका दान (सत्कार) संमान, खातिर (स) (सकिया) सत्कार (संन्यासिन्) यति. परिव्राजक (सत्यवादिन ) सच बोलनेवाला (संयुक्त) मिलाहुआ (सत्यसन्ध)सत्यप्रतिज्ञ,कोलकापका (संयुत) संमिलित | (सत्सङ्ग) सज्जनों की सोहवत (संयोग) मिलाप, संगम (सदसत्) अच्छाबुरा (संलग्न)लगाहुआ. (सदाचार) अच्छा चालंचलन १ (संवाद) वार्तालाप, बातचीत में प्राचीनधर्म २ (संशयात्मन्) शकी, सन्दिग्ध (सधवा) सौभाग्यवती स्त्री, जिस (संसर्ग) सम्बन्ध, सोहवत का पति मौजूदहो। (संहिता) सन्धि ... (सधीची) साथ चलनेवाली (सकाम) सामिलाप (सन्तुष्ट) प्रसन्न (सघन) सान्द्र, घना (सन्तोप) सत्र, सन्तुष्टि (सकलन) जोड़ना, मिलाना (सन्तोपिन्) सन्तोप करनेवाला (सङ्कीर्णता) तंगी, कोताही (सन्दर्भ) रचना, प्रवन्ध (सङ्कीर्तन) वर्णन, कथन (सन्नाह) कवच, वर्म, वख्तर (सकेत) इशारा (सन्निधान) समीप, सन्निधि (सकोचन) सिकोड़ना (सन्निपात) सरसाम (सङ्कमण)संक्रान्ति,सूर्यका एकराशि (संन्यास) त्याग,छोड़ना,चतुर्थाश्रम से दूसरी राशि पर जाना (सप्तसागर) सारासमुद्र १ इक्षुरसर (संगम) मिलान, संयोग दधि.३ क्षीर ४ मधु ५ (सङ्गीत) गानविद्या १: मद्य ६ घृत ७ इन सात (सहीत) सङ्ग्रह,इकहा कियाहुआ (सङ्हणी) एक प्रकार का रोग (सप्ताह) सात दिन, हफ्तः (सभापति) सभा का मालिक ने चीजों का समुद्रा प्रवाहिका..

शब्दसंग्रह। सीडेण्ट (सर्वभूत) सव जीव (समक्ष) सामने, संमुख | (सवर्ण)समान जातिका, हमजिन्स (समता) वरावरी, तुल्यता (सव्यसाचिन् ) अर्जुन, पाण्डुपुत्र (समदर्शिन) वरावर देखनेवाला (सशङ्क) भीत, उराहुआ (समन्वित) युक्त, सहित, साथ (सहचर) साथ चलनेवाला, साथी (समवल) वरावर वाला, तुल्यवल (सहदेव) पाण्डु का छोटा पुत्र (समाधान) शंकाकाउत्तरसमझाना (सहयोगिन् ) साथी (समाप्त) पूर्ण, तमाम (सहवास) साथ रहना (समाप्ति) पूर्ति, खातमा (सहवासिन्) साथ रहनेवाला (समारोह) जमाव, धूमधाम (सहस्रनयन) इन्द्र,हजार नेत्रवाला (समाहित)सावधान (सहस्रनेत्र) इन्द्र, हजार नेत्रवाला (समाह्वान) पुकारना, आह्वान (सहस्रपाद) सूर्य, सहस्रांशु (समीकरण) वरावर करना (सहानुभूति) सुखदुःखमें साथीहोना (समीचीन) उत्तम, उम्दः (सहायक) मददगार, सहारा करने (सम्पन्न) अमीर, धनवान् चाला (सम्पर्क) संसर्ग, सम्बन्ध (सहोदर) सगाभाई (सम्पादक) करनेवाला (सह्य) सहने के लायक (सम्बन्ध) ताल्लुक, रिश्ता (सांसारिक) संसार का, दुनियवी (सम्बन्धिन) रिश्तेदार (साकार) मूर्तिमान, युनियुक्त (सम्भवना) उम्मेद, आशा (साक्षिन) साखी, गवाह (सम्भापण) वोलचाल (सांस्य) कपिलमुनिकावनायाशास्त्र (सम्भोग) मैथन, रत (सादृश्य) तुल्यता, वराबरी (सम्मत) अङ्गीकृत, मंजर (साधक) काम करनेवाला (सम्मति) सलाह, राय (साधनीय) सिद्ध करने के योग्य (सरयू) एक नदीका नाम जो अ. (साधारणधर्म) जीवको न मारना, योध्यापुरी के पास वहती अहिंसा १ सच घो- (सरस) स्वादुयुक्त, रसीला लना, सत्य २ चोरी (सरसिज) कमल । न करना, अस्तेय (सरोज) कमल (सरोप) क्रुद्ध, गुस्सावर, कुपित शोच ४ इन्द्रियोंको M . . पाक साफ रहना, ३६६ शब्दसंग्रह। अपने वश में रखना (सीमाविवाद)सरहद्दी झगड़ा इन्द्रिय निग्रह ५, (सुकण्ठ) सुग्रीवनाम वानर,जिस दम ६ सामर्थहोने का गला अध्छाहो पर दूसरेके अपराध (सुखद) आराम देनेवाला को क्षमा करना, (सुखदायक) आराम देनेवाला चमा ७ स्वभावको (सुखधामन्) आरामकरनेका मकान कोमल रखना,आ- (मुखमा) खूबसूरती, शोभा जवखैरात करना, (सुखावह) सुख देनेवाला, सुखद दानह यथाअहिंसा (सुखी) खुश, प्रसन्न सत्यमस्तेयंशोचमि (सुगन्ध) खुशबू,अच्छीवास न्द्रियनिग्रहः॥दमः (सुगन्धित) खुशबूदार, सुगन्धी क्षमाऽऽर्जवंदानंध- (सुगम) सरल, सहज, आसान मसाधारणविदुः १ (सुगमता) सरलता, आसानी (सामग्री) सामा, सामान (सुधाकर) चन्द्रमा (सामयिक) समयपर का (सुपात्र) दानदेनेके योग्य, सुयोग्य (सामर्थ्य) वल, ताकत, शक्ति (सुप्त) सोया हुआ, निद्रित (सामीप्य) समीपता, नजदीकी (सुप्ति ) नींद, सोना (सामुदिक) एक प्रकार की विद्या, (सुभग) सुन्दर, खुशकिस्मत जिससे मनुष्य के ल- (सुभगा) सौभाग्यवती, स्त्री क्षण मालूम होतेहें (सुमति) अच्छीवुद्धि (सार्थक) अर्थमहित,साथमतलबके (मुमुखी) सुन्दरमुखवाली, स्त्री (सावधान)सचेतहोना, चौकसहोना (सुयोग) अच्छी सोहवत, सुसंगति (साहसी) हिम्मतदार, पराक्रमी (सुरगुरु) वृहस्पति, (साहित्य) मिलान १ एक शास्त्र (सुरत) मैथुन, भोग जिससे काव्य के गुण (सुरतरु) कल्पवृक्ष दोषादिक मालूमहोतेहें (सुरधेनु) कामधेनु (सिंहिका) एक राक्षसी का नाम, (सुरनदी) आकाशगङ्गा,मन्दाकिनी जिसका पुत्र राहुहे (सुराङ्गना) देवताकी स्त्री (सिक्त) सींचा हुआ (सुलभ)जोआसानीसे मिलसलाहो (सीकर) जलकण,पानीकेछोटे रवूद (सुलोचना) अच्छी आंखवाली, , शब्दसंग्रह। ३६७ . सुनेत्रा, मेघनादकी स्त्री के साथ व्याहकियाथा (मुवेल) एक पर्वतका नाम जो द- (सौभद्र) श्रीकृष्णजी की भगिनी, क्षिण समुद्रके किनारे है वहिन, सुभद्राकाबेटा (सुशील) अच्छे स्वभावका आदमी (सौभाग्य) अच्छाभाग्य (सुपप्ति) गहिरीनींद, गाढ़निद्रा (सौमित्रि)सुमित्राजीके लक्ष्मणजी (मुस्थ) सावधान, निश्चिन्त (सौर) सूर्यका, सूर्य सम्बन्धी (सूक्त) अच्छाकथन (सौरभ) सौगन्ध्य, खुशबू (सूक्ष्मता) पतलापन, वारीकी (सौहार्द) रोत्री,दोस्ती (सूचना) निवेदन, इत्तिला (स्खलित) च्युत, गिराहुआ,छद्म, (सूचित) जानागया धोखा (सूचीपत्र) फेहरिस्त (स्तम्भन) रोकना (सूतक) आशौच, अपवित्रता, जो (स्तवन) स्तुति, तारीफ जनन,मरण प्रयुकहोताहै | (स्तुत्य)स्तोतव्य, तारीफ़के लायक (सूत्रधार) नाटक करनेवाला, पा- (स्तोत्र) स्तुतिकरनेवाले (स्त्रीधन) यौतुक, दायज, जहेज़ (सूदन) मारना, मारनेवाला (स्थापन) बैठाना,ठहराना (सृष्टि) संसारकी उत्पत्ति (स्थापित) बैठायाहुआ (सेचक) सींचनेवाला (स्थायिन) रहनेवाला,ठहरनेवाला (सेतुबन्ध)पुलबांधना (स्नायिन) स्नानकरनेवाला (सेनापति) फौजका अफ्सर,कर्नेल (स्पर्धा) ईया, डाह, जलन (सेवित) सेवाकियागया, उपासित (स्फटिक)सफेदपत्थर,विल्लोरीपत्थर (सेव्य) सेवाकरने के योग्य, स्वामी (स्फोटक) फोड़ा, चेचक (सन्यप्रदर्शनी) फौजीनमायश (स्फूर्ति) फरकना (सोह) सहनेवाला, सहिष्णु (स्मरण) याद, स्मृति (सोमज) वुध, चन्द्रमाका पुत्र (स्मारक) याददिलानेवाला, (सोजन्य) सुजनता, शराफ़त (स्वकीय) अपना,निज (सोनिक) वधिक, बहेलियां (स्वच्छ) साफ, निर्मल (सौन्दर्य) सुन्दरता, सूबसूरती (स्वच्छता) सफाई, नेमल्य (सौभरि) एक पि, जिसने मा. (स्वच्छन्दता) सुदमुरिस्तयारी,स्था- न्धाताकी पचास कन्या धीनता न, नट शब्दसंग्रह। को पढ़ना (स्वत्वापहरण) वेदखली (हारक) हरणकरनेवाला (स्वधर्म) अपनाधर्म (हारिन् ) हरण करनेवाला (स्वरित) उदात्त, अनुदात्तसे मि. (हार्य) हरणकरने के लायक लाहुआ स्वर (हाहाकार) कोलाहल, हला (स्वर्ग्य) स्वर्गकेलिये हितकारी (हिंसक) मारनेवाला (स्वल्प) बहुतथोड़ा (हिंसन) मारना (स्वस्तिवाचन) महालके वास्ते मंत्रों (हित) भलाई,उपकार (हितकारिन्) भलाई करनेवाला (स्वागत) आदर, संमान (हितैपिन् )खरैरबाह, हित,भलाई, (स्वाधीन) स्वतन्त्र, खुदमुख्तियार चाहनेवाला (स्वाभाविक) स्वभाव सिद्ध, खु-(हिमकर) चन्द्रमा दादाद (हिमालय)हिमाचल (स्वार्थ) अपना मतलब (हिरण्यकशिप)कश्यपमुनिका पुत्र, (स्वार्थिन ) मतलवी महादकापिता (स्वास्थ्य) तन्दुरुस्ती, अनामय (हिरण्याक्ष) हिरण्यकशिपुका छो- (स्वीकार) अङ्गीकार, कबूल करना टाभाई (ह) (हीनजाति) नीचजातिका (हति) हनन, मारना (हुड्डार) हुँकरना (हत्या) वध, मारना (हुत) हुनाहुआ (हन्ट) मारनेवाला (हुताश) अग्नि, आग (हरणीय) हरनेके योग्य (हुताशन) अग्नि, आग (हखिाहन) विष्णुकी सवारी, गरुड़ (हत) हरायगा, जन्तकियागया (हर्त्तव्य) हरणीय, हरने के योग्य (हेय) छोड़ने के काबिल, त्याज्य (हर्ट) हरनेवाला (होम) हवन (हलधर) वलदेवजी (होमकुण्ड) हवनकाकुण्ड, गड़हा (हवन) होम (हास) घाटा, कमी (हविर्भुज) अग्नि, आग (हाद) सुख, आनन्द (हस्तगत) हाथमें आया, अरिस्त- (ह्लादित) प्रसन्न, खुशी यारमें (ह्वलन) चलना (हानि) नुक्सान इति शब्दसंग्रह समाप्तः॥

हम लोगों को यह भी दृढ़ विश्वाम है कि यदि इस भाषा का प्रवन्ध भी न बिगड़ने पाये इसमें जहाँ २ नीतिके श्लोक आगये हैं वह भी अनुवादसहित कोप्टक में लिख दिये गये हैं। लेकर संस्कृतके कवियों ने नागानन्द कादंबरी हितोपदेश मदारानम तथा वैवालपंचविंशतिका आदि अनेक ग्रन्थ बनाये हैं इसीप्रकार इस अनुवाद को देखकर हिन्दीभापा के सुलेखकगण भी इसकी कथाओं के आशयों को लेकर अनेक नवीन अन्ध बनाके अपनी मातृभाषा के गौरव को बढावेंगे श्रीमद्भागवत भापाटीकासंयुक्त ७) रु. पु. इस ग्रन्थके उत्तम होने में कदापि सन्देह नहीं है-इसका भाषा तिलक बजबोली में बहुतही प्याराहै आशय प्रत्येक श्लोकों का है क्यों न हो इस के तिलककार महात्मा ब्रजवासी अगदजीशास्त्री है-यह तिलक ऐसा स- स्लहै कि इसके द्वारा अल्प संस्कृतज्ञ पुरुषों का पूरा कार्य निकल सक्काहे- संस्कृत पाठकभी इससे श्लोकोंका पूरा आशय समझ सक्ने हैं इसबार यह अन्य टैपके अक्षरों में उम्दा कागज सफेद चिकना में छापागया है और विशेष विद्वान् शास्त्रियों के द्वारा शुद्ध कराया गयाहै जिससे वम्बईकी छ- पीहुई पुस्तकसे किसी काम में न्यून नहीं है उम्दातसवीर भी प्रत्येक स्क- न्धमें युक्त हैं-आशा है कि इस अमूल्य रनके लेने में महाशयलोग निलम्म न करेंगे। इश्तिहार सरित्सागर भाषा ३) रु. पु० हिन्दी भाषा के परमहितेपी भार्गववंशावतंस मुंशीनवलकिशोर (सी, आई, ई) ने विदानों के मुखसे इस कथा सरित्सागर नाम ग्रन्थरत्रकी प्र- शंसा तथा सदुपदेश भरी अत्यन्त मनोहर कथाओं को सुनकर अपनी मा- दृभाषा हिन्दी का गौख बढाने के लिये हमलोगों को यथोचित धन देकर इसका अनुवाद करवाया इस अनुवादमें हमलोगों ने यथाशक्रि यह उद्योग किया है कि श्लोक के किसी शब्दका अर्थ न रहने पावे और यथासंभव हमलोग आशा करते हैं कि जैसे इस ग्रन्थकी कथाओं के आशयों को .

. आज्ञानमार इस ग्रन्थकी छोटी छोटी कथाओं को लेकर दो चार छोटे छोटे अन्थ वनवाकर पाठशालाओं के दशम नवम अष्टम तथा सप्तम आदि वर्गों के विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिये नियत किये जायें तो उनको विना प्र- यासकेही सदुपदेशका लाभ होगा और इस समय यह अन्य विशेष शुद्धता के साथ उम्दा हरूफ मे छपाहुआ तैयार है ॥ मैनेजर अवध अखबार प्रेस लखनऊ हजरतगंज इश्तिहार शिवताण्डवस्तोत्रम् यह स्तोत्र रावणकृत जिसको कि सभी विद्वान पुरुप जानते हैं। और अतीव सत्कार करते हैं इसकी छन्द संस्कृत में बहुतही रोचकहैं परन्तु वि. शेप कठिन होने के कारण सामान्य पुरुप केवल श्लोकों को पढ़ाकरते हैं उसके अर्थको नहीं समझते कि क्या इसमें अभिप्रायहे अतएव दो तिलक किये गये हे एक (सवैया) दूसरा (वार्तिक भापा) इन दोनों तिलकों में एक २ पदका अर्थ किया गया है केवल २० सझेकी कितावहे मूल्य बहुत थोड़ाहै और इसी यंत्रालयमें मुद्रित हुई है अन्यत्र कहीं नहीं ऐसी प्रकाशित हुई कागज व अक्षर बहुतही उम्दा है ।। इश्तिहार अर्जुनगीता इस पुस्तक में अर्जुन और श्रीकृष्णचन्द्र आनन्दकन्द का प्रश्नोत्तर शंका समाधान करके युक्त सम्पूर्ण वर्ष और धर्मों के लिये निरूपण किया गया है इससे अतिरिक्त श्रीवेदव्यासजी की उत्पत्ति व गरुड़ और अरुणा उत्पत्ति व उनके दुष्कर कर्म व गजेन्द्रमोक्ष व द्रौपदी चीरहरण सविस्तर रुचिर दोहा चोपाई आदि छन्दों में वर्णन कियागया है जिसके देखनेहीसे भक्त पुरुषों को आनन्द लाभ होगा और इसके गुण को जानेंगे बहुत उ- । कागज व शुद्ध होरर बम्बई अक्षरों में छापी गई है मूल्य बहुत स्वरूप गया।

Sabdart Sangrha

Author
Naval Kishor
Title
Sabdart Sangrha
File name
Sabdart Sangrha
Text
OCR done
Citation
1911
Published
2012/08
Publisher
Lakhanu,.munsi Naval Kishor Chapa Khane
Language
Sanskrit
Pages
359
Library
Bharatiya Vidya Bhavan Library, Mumbai
DLI number
312296
Barcode
99999990321097.00
Scanning centre
Banasthali University
Digital publisher
Digital Library Of India
VMLT id
0w6n9xiSjp5
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