Bhartiya Vidya Mandir Shoudh Pratisthan,bikaner

Rediyo Varta Shilap

Kumar,sidh Nath · 2010/12

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iliपोनीरस प्रमाता-हिम्मी पापा-५
रेडियो-वार्ता-शिल्प
सिद्धनाथ कुमार
भा र ती य ज्ञान पीठ • काशी

शालपोठ-मोफोरम-पम्पमा
सम्पादक और नियामक
भी समाधान
प्रथम संस्करण
१९६१
मूल्य दो रुपये
भाषी भारतीय ज्ञानपीठ
दुर्गाकुम पे वाराणसी
मा
बाजार न कामुक
सग्मवि मामास्य वाराणसी

हिम्पीके मुप्रसिस नारककार
तपा
प्राकामवाखोके महानिदेशक
श्री जगदीशचन्द्र मापुर
प्रारसहित

निवेदन १९५९ में जब मेरी निमुक्ति पाकापपानी पटनाफे माता-विभावमें हुई, तब मुझे पायो-वात्ताको निकटसे रेखने मीर उसका सम्पयन करनेका मवसर मिा यो बाताएं मै पर पहले से सुनवा मा पापा और उनके प्रति प्रोताओं को तिरस्कारपून प्रतिक्रियाएँ भी रेल्वामा रहा था। रेडियो निष्ट पर मैंने बनुयर किया कि रेरियोमाताकी सम्भावनाएँ कितनी सो मार रमका उपयोग कर कोई बातभर किस प्रकार अपनेसे दूर रहनेवाले हसा म्यक्तियोंसे निष्ट सम्पर्क स्थापित कर सकता है।तीयो माताका मेरो सम्बोसे प्रसारित विभिम प्रभरकी रचनामोंकी पेक्षा गत म्यापक है कविता हानी नाटक मारिकी रमा यस साहित्यकार हैकर है पर गीयो-माता साहित्मसे परे पकाने मालिक एग मीधिक प्राध्यापक मार मी बाँम्पमितोमे मधारित करती पानी पर यह आश्चर्य की बात है कि प्रसारको इपने बाद भी हमारे यहाँ रेमियोपातिक समावमें नमी पड़ मम्मीरवापूषक विचार नहीं किया पमा पहला को यह पाहिए किमी तक किया कमर ही पाठी रहो।किसी बाधाको भानपनापीकी और माता प्रसा- रपके लिए बामयित किया गया और उसने दो-तीन टिम मा बिसार प्रसारित कर। ऐमी स्विति माताएं परि मनाकर्षक होती है और मोडामोंगरा पनका स्वागत नही होता तो इस कोर मापपर्यकी बात मा दीपती । किन यो मानिकी तम्पावनाओं को देखते हुए इत विषयपर पम्भीरता से विचार होना पाहिए. ऐसा मुझे मा। प्रस्तुत पुस्तकमें ममे यी रमेका प्रपान पिया है। ।

निवेदन मोपोसे मेण समव मिष्ट मा पूरका पिछले बाहसि यहाई पर प्रसारपसे पम्मीर विषयपर विचार करने के लिए इतना भेटा-सा यमुभव पर्याप्त नहीं होगा । फमत मे पाश्चात्य देोक हिस्ग पपिसन मिोनेस मनि बेनेट रनवर, रोगर मैनरोग, एलन ऐप गेरोपियन एबम एप.बार• मिशियमपम जॉन एस. कालिसे प्रसिद्ध प्रसारमार्मिक ममुमबास सहायता भी है। सपा मोर ममे कि तपो-पाकिसम्माप प्रफी रिपारा।यही यह कह दिया पाय जिप्रसारगके नियम सभी देसाम समान है हर देशको प्रसारण सम्बन्धी मपनी-अपनी कोई प्राचीन परम्परा नही है। अपनी रियो टॉई' पुस्तक में पेनेट रनबरने कहा है-'मेरी इन विभिन्न पेति प्रोम्यू परों और प्रशारण कि साप विवारपूर्ण और प्रेरक बातचीत हुई है। बमेरिका कसारा रमिक मफीन बास्ट्रेलिया म्यूमोमर बारित टर्जी मस पारत देवियम स्पेन मारें रेममाफ मोर बोसोषिया । मर्मेस इसके साथ हुए विधारनपमकि बाद वपने मोदसके बप्पयनसे मुझे पता पीर गत सह शिवायी पम्ती है मन्ती परीयोपाकि सिदान्त प्रत्येक देश और प्रत्येक मापाके लिए समान है। गिन देशों रसियानाकर समापर विप ध्यान रिया पया, रनक मनुमरी प्रसा रगामिक विचारों मापारपर मैने इस पुस्तक मच्छो रेडियो बातकि सिमान्तों को ही प्रस्तुत करमा कोषिस की है। उधाहरण-सम माये रसरणारे अतिरिक्त शिपने मंध पुस्तकमें गरपृत किये ममे । उनी मेपेरीसे मनुवादित रहे इसलिए कि केक हिन्दी गानमराठे पाटोको भी पुस्तक समझनेमें कहीं कोई कठिनाईका मम भवन हो । मपरीके मुग उसरप गम-सहर छो, रिम पमे है। मा सोचकर कि रियो पातामा सम्पन्न उन होगामे भी बो साहित्यकार नहीं है सेबनकाय मिमका नियमित पैसा नहीं है, पुस्तकम

६
प्पिोमाता-मित्त
सेसनमा-समयी विपर्योको पर्याप्त बाहरपों सारा सटरमेका प्रपल
किया गया है जिससे से पाकर भी ममाम्बित हो सके।
पुस्तको बपित उदाहरण भारत सरकार परिम्स रिपोरम
पारा प्रकामिव रहियो संग्रह प्रक्षारिका' और 'बाबावापी प्रसारिका
में पी रेरियो-मामिस लिये गये है। सेना इनके सौम्यको सामार
स्मोकार करता मिनसम्म स्वधि भी बाहरण रिप गये। उनके
प्रति भी मपनी या प्रष्ट करता है।
रपहरो सम्बन्ध यह निवेदित करना उपित गवापिस
रम देते समय किसी रचनाकारकी मिना या प्रसाकरला सेवाका
ऐप नहीं कहा। उसने रचनाकारोंडो मपरे सामने रखा ही मही',
यस सनकी तिमाहोरेना और सैदान्तिकसोटीपर मोरहा रचित
भाdatt उनको कहा जरिया 11 सन समबकि प्रति केजर
निममै रमामा सरर इस पुस्तकमें भाये ।।
-सिखनाथ कुमार

विषय-सूची
१८
२४
रेगियो-वार्ता साहित्यका एक नया म
रेडियो वार्ताको घोमाएँ
रेडियो पारी और माचित सम
रेरियो-मार्ता मौर मोवाकी मानसिक दृष्टि
रेरियोमा और प्रोतामे पान एवं स्मरम-क्ति
रेडियो वार्तामार व्यक्तित्वका प्रश्न
रेडियो-वात्तसि सम्बन्धित तीन प्रश्न
रेशिमोपात्तापानकी तैयारी
रेरियापारी प्रारम्म मभ्य बौर मन्ठ
रेडियो-बात की भाषा मी
रेरियोमाता प्रसारण
रेषियोवार्ता और प्रो. वनरके निकप
प्प पार्थोकी मुषी
८०
११८
१२९
0

God forbed that I should set up for .
beacher II porpore merely to confido to my
reeder what little l bare harnel
......
reminding them manwhile that even in the
laust important books one sometimes findi mall
matters deserving attention,
Carlo Goldoni
(Italun Drumatht)

रेडियो वार्ता साहित्यका एक नया रूप 'म मापसे रेरियो मानके सम्बम्ब पुष बातचीत कर्मया। हमारी मह बादलीत बसी ही होगी जैसी किसो पामें होटहमें या माग-कममें ठे दो पार मित्रों की होती है। लेकिन अपर मुमसे ममी दुछ मसारपानी हो पाप मोर पापको फापरको साइट मुनायौ पा गाय तो माप सोचने समे सापर मेरे हाप, कापर मुछ पमे है पायव में वापस बातचीत म करके सपनोंको हो पा रहा है। भापका मनुमान सही पा । मापसे या रोगावचीत कर रहा है, वह मौखिक नहीं सिक्षित है। मेरी यह बात सितिति बना है। माप रेरियो मुनते है तो बापने यह बात पर बार-बार मुमा होगा। लेकिन 'साहित्म-दर्पण' या 'रसर्मपार या साहित्य-गायक किसी भी प्राचीन ग्यम इसकी पर्चा मही मिलेगी। बात यह है कि सभी ३-३५ वप पाडे तक माता नाम की रचनामा मस्तिम्ब नहीं था। या मारिपारके बाद इसका मम्म हमा है, वह सीन नहीं, रीयोके लिए लिखित साहित्यके कई मौर मोका मी बम्म हमा है। -इन पक्तियाँसे इस मेवान दो परिप प्स साहित्यके नये पाकिम प्रमारित मपमा रियासन' पीपक माता प्रारम्भ की पौ। सपमुष पियो पारिकारले रेरियो नाटक रेशियोनपक मारि मिन मये साहिस्स-कमोंको परम प्यिा नमें रिपो- मातांता भी महत्वपूर्ण स्थान है । पेयी या विरेणी, कोई भी मियोपेपन १

रियो-माता-पि
नहीं है, बसि रेरियो पाएं नहीं प्रसाति की बातों ! या मालस
एप्प है प्रमठा पा सताकि १९५६ पाकायामा विभिम
मोसे प्रसारित भागों एवं परिवाओंकी संसा गी। यह संस्था
और मपमे देश लिए प्रसारित कायमोकी, विकिमिए प्रसारित
कार्यक्रमोमें हुई मानिकी क्या मठप है। पामीण क्षेत्रों बाहों का
स्त्रिया ममि प्रसारित पाच ही संस्ता भी इसमें नहीं बो गयी
है। १९५१ के बाप तो भाकामाची नोंकी संस्था मार भी हो
जनके पार ही प्रसारिन कापक्रमांकी संस्म भी भूमि १९५८ के
पापिक विषपसे होता है कि विभिम केगोसि प्रति वर्ष अग्रेजी तपा
प्रारपिक मापामि एस इमारसे पिटवारि प्रणारित की जाती है।
ीियो पाविका यह यात्रा संस्थाको दृस्सेि है गुमकी मिसे
नाही। रेसियो कार्यमा सम्भवत' सबसे बनाइपकी नीरस रेग्यो-
बामाको ही सममा पाता है। रेरियो पुनते समय कोई बात मुबई
मही कि मिल का -ब, पह तो माता पुहर्ष भी दूसरी
जगह बनायो, ही मौत-बाप को। पन्नीर परि मटित प्रसारम
बार भी हमारे पाहारी बाबिमि मी शक्ति महीमा पामी है कि
मोबायोम प्यान पनी मोर बाट कर समाप प्रसारण प्टिस
विचार किया जाय तो विमी प्रसारमानों को भी पूषव सन्चोदनाक
महाशाका सा है। पौनेह पेपलिन मनी पुस्तक मार बान
दिएपर प्रकाशम-माल १९४.] में मो.द.सी.कोको
माया प्रशारकी महायपर परमने -'यह स्वीपर कामा
पोगा दिपक मप चतुपापक प्रचारक पार पी
बर्म
मोदी संस्था सफल कार्यक्रमोंती पेधा परिकहै।
अपने महा रेमियोपामिको रोगमा एवं बाकस मित
पाना चाहिए ना मदमहीं मिल बा लाल मुम्पारण पाकि

रेशियो-पान ताहियका एक नया स हमारे यहाँके बमिका होमोने यह स्वीकार मा किया है कि रेडियोनार्ता साहित्यका एक विलय नया कप है-ऐमा म्प, मो रेरियों के मारिफार के पूर्व नहीं था। लोग पहले रेरियो-माटकको पैसे रंगमंच-नाटकसे भिन्न नहीं समझते बसे झै ऐशियो-पातको निवग्म या भेडसे भिन्न नहीं मानते । मा प्रसमताकी बात है कि यह रेडियो-माटक रंगमंच-नारसे मिल सममा पाने लगा है। लेकिन रेडियो बातकि सम्पत्यम वी ऐसी बात नहीं है। ममो मी पावापापी मेट्रॉम पापटिप्पणियाँ भरी एसी बनाएँ महावित ही प्रसारणाप माती रहती है मि सेप या प्रबम्पके मतिरित बोरख नहीं पाया सकला बोर स्निका पाठ किया जाय तो कम से कम ४-५. मिना सवय वर्गे । ममी मी ऐसे म्पति मिलते है मी मातीतके प्रसपमें करते है-में भी रेरियोमे एक निवग्य प्रसारित करना भाहता है। यह बात महीं कि एसे निबन्य माकायामीमें प्रसारित नहीं होते होते है, और पाकि नामपर अधिकवर निबन्म ही प्रसारित होते है। इस सापारम-सी बातपर भी प्यान नहीं दिया मावा किमासे प्रसारित रचनाएँ मात्र भम्प होती है, मोर सनको सपता अपने ग्राम अपमें ही पोजगम्य होनमें है। शाहरपके पि छ प्रसारित मालिक बंध प्रस्तुत है। 'महाके कममें सपाष पौर कम्पना' पीक वार्ताका एक मेरा इस प्रकार है- इस प्रकार कला-सारिका प्रमर प यो बनवा है- मा सहि मृप्त प्रस्तरका प्राइप प्राबेगमा भार परीर पवासाम रस भारका समाप मौर सन्माण

रिमो-पार्ता मिस
सौन्दर्य प्रान्तर एवं बाए
मारमा
पानम्म।'
[मानसपात्री प्रसारिका मप्रेसयून १९५१ ]
एक दूसरीमार्ता मम्स्वनमें ममोरबनके सापमा एकस सपूत है-
'इस प्रकार समागका मनोरंजन करवाती परमेखनीय बातियां
निम्न है-
१ पुचामन परबतसर कस्मतमी मबानेबात नट ।
२ बाना तवा परबतसर प्रात-पास पहनेवाले तेहबासवाले।
। मनमोरगारमेर मारित कधी पोड़ी मचानेवासे तरपरे
कुम्हार वामी।
४ बीकानेर र पोखरन तथा बुटेनो भोपे हामीले माने,
मेरमी मोप और मोपामोडे मोपे।
2.सतमेर पारमेरसंघ तमा मिराती।
महोररे सरगर तवा होगी।
गत सब मातियाँका प्रमुख कार्य पायन बारम नृत्य और नाम्प
राप्रपने परमानोका मनोरंजन करना है।'
[माकामामी प्रसारिप बमपरी-मार्च १९५१]
पहताग्रप मपने पम्मम्ममें से बोम्ययम सकता है इसकी
पस्सना नहीं पा सकती। दूसरे सरमम मो इसने नाम एक सार
पिनामे से है गहें मम एक बार सुनकर पोता पपा पन्हें स्मरण रण
समता है? १ २ बारिमणिक पाठसे भोता क्या पर नहीं समझेपा
हिमाचर ससे बातचीत कर उसे अपना नियब मुना है? इस

रिपी-वार्ता:पाहियका एक मया प अपमें मापे निम्न मोर 'उपयुक्त' राम क्या इस ठप्पको प्रमाणित मही को किरपना यम्प नहीं पाठप है ? श्रम्य रचनामें तो मर या नीचे नामकी कोई भी नहीं होती। तात्पप यह कि हमारे यहास मषिकापत निमम ही प्रसारित किये जाते है । माकागवाणीके भूतपूर्ण गपरेफ्टर माफ प्रोपास भी सोमनाम चित्र विस्पोनपा'पीपक अपने निवथ बाकाच बामीसे प्रसारित मनिसी बार्मिक सम्बत्यम कहते है कि इसके अधिकतर बाण [Sampts] निबम्प-से सपते है। हिन्दी बाकि सम्बन्धम भी यह मसरत सरप है। ऐसी स्थिति में परिवाएं मौरस होती है और उन्हें कोप नहीं सुनना चाहते तो इसमें मायकी कोई बात रेगियो-वार्तामोंकी पतमान स्थिति सन्तोपजनक मही। पर इसे परि पवित किया जा सकता है। वार्तामाँका स्वभाव मीरस मौर बनाकपक रहना मा। सब कहा बाप तो बातामाता स्वमाष सरस चोर मनोरमक होना ही है । चार मित्र एक साप ठसे है और मापसमें बातें करते है। क्या ये बातें नीरस होती है? बात करलको कमा बामनेवाला कोई मित्र अपने अनुभव सुनाने ममता कमी-कमी गम्भीर विपयोंकी मी वर्षा रेताtो पया इससे बालापमें नीरस्ता मा बाठी है? कदापि नहीं। रेग्मिोने तो हमें सामूहिक प्रेपनीयतान ऐसा मत पापम उपसम्म करा पिया है कि हम एक स्थानपर बैठे एक ही साथ हमारा मार्यो म्पपियाँको अपने मनुमन मुना मैं उन्हें मफ्ने विचारधि अवयत करा सकें। किन यामी सम्भव है पर हम रेडियोके माप्यमको मपेमावॉको उसकी सौमामों और सम्भावनाको समर्ने । मासिक पृश्य माम्ममके लिए शिपित रखनाथको रेमिोके प्रम्प माम्पमसे प्रस्तुत करलेसे ऐसा नहीं होगा। पंगीतका मानद हम बासि भनेका प्रयास नहीं करते, पर मसिकि थिए हिचित रचनामोन भान हम कानोका ला पाहते है। हमारे यहाँकी रेसिमो वातामोंकी वसफसताना यही हम है। बी.बी.सी. के भनुभवी - रेशियो वाता-शिस पाबिन रेडिमोके मम्प माप्पम अपेवा: समझा है मौर चमके मनुस्म कार्य किया है। इसीपिए रेसमम मेत्री पाडफोरेविस ए. के. एन.बी.प्रोस्टबीमारि प्रसिद्ध पात्तरीको होम पत्सुम्याके साब सुनते थे। रेग्मिोवाचारको सर्वप्रथम यह स्वीकार करना पोमा रेग्मिो- पार्वा मपे प्रकारकी रचना है, नियत्व यह विटामिल है। हरित होनेपर भी यह मात्र पम्प है। किस प्रकार कोई भी नाटक रेडियो नाटक हकर प्रसारित नहीं किया था सस्ता उसी प्रपर कोई भी नियन्य बातों पार नहीं प्रसारित किया जा सकता। मुद्रित नियम और प्रसारित पातमि मन्तर है। वैसे प्रसारमके पिए रसमषनाटकको रेटियो-माटमके पौ पातरित करना पड़ता है उसी प्रकार निवारको भी परिहम प्रसारित करमा बाहें तो उसे मातकिपम पान्तरित करना पगमा । इसे उगहरपसे पर किया पा सकता है। एक सम्मनको पंचवपीय योजनाओम संचार एवं परिवहन विपस पर माता प्रसारित करने थिए मामम्मित पिया मया । रनकी वार्ता को वास्तवमै एक निवाब ही पी का प्रारम्भिक मंध इस प्रकार पा- "घरीरबमा बोस्मान शिगों एवं धमनियोंपी यो स्थान पष्ट्रक पीबन संचार एवं परिगला है। माफिक मुख-सम्बन्धी प्रणास कोप सोमाविक एवं सामामि सभी हिसि संचार एवं परिवहन राष्ट्र समुत्थानके लिए मनिषाय तत्व है। कमापिप इसी दृष्टिकोपसे सिटिस पासकोने सनीस पतामीम ही मारतवपमें संचार एवं परिवहनरा सर्व भारम्भ कर दिया था। तबसे इम साबोका निरन्तर विकास होता रहा है मोर मचाविस क्षेत्र मातीत मिस हवाई। स्वाधीनता-प्राप्टिकेपार संचार एवं परिवहन सापमान निघत सपनीय पतिहमा है। प्रथम पंचवर्षीय योजनाम पि सिंचाई बार परिशदे सापति साप परिवहन मोर संचारम स्पान भी विकास म १५ रिमो-बार्ता : साहिम्मका एक नपास प्रमुख मि रखा गया। इस योतामें संचार एवं परिवहन के साधनोंक उसके लिए अनुमानतः ५१ करोग पोका म्पय हुमा । देसमें सवार मोर परिपानके प्रसारके लिए मरनरमे सवार मोति मापी है। प्रपम मोबनापभिमें गातार विमायके लिए प्राय ३९५ पर सये सच ध्येि गये है। सरकारकी यही मोबना दी शिरो हार मिस्मानामे से मील वन्तरपर बसे हुए प्रत्येक गांवमें गकपर सोते एँ। इस योजना के मनुसार कमरोंकी संख्या १५हगारसे मकर ५५ र हो पपी। रितीय पंचवर्षीय योरता मन्तर्मत मगमग २. हमार र गापर बोलने का समय है। निकायका पह बातदिममें परिवर्तित होनेपर इस प्रकार 'बापमै कमी घोचा है हमारा भीर किस प्रकार सुबाए सपसे काम रता है? यह हमारी गिरामो, धमनियों भौर स्नायुमोका प्रमाण है। मांकि परिये एक महका बन दूसरी जगह पहुंचता है एक मानकी देवना दूसरे स्थानपर पहुंचती है। इन्हींकी प्रेरपासे हम बीवित है, और सुभाष मसे काम पर रहे है। कोई राष्ट्र भी सुचारमस काम करे, इसके लिए पारी किसके शरीरम मी सिराएँ हों पमनियों हो मामु हो । मापका समाचार मापसे वीन सौ मीट दूर इमेवाके मामले मिौके पास पहुंच सके मापके जाने के लिए पंचाक्का ये बापके पास मा सके शासन पचाने के लिए रिस्ठीका मारेन पटमा पटनाका बारेण मारा गया परभगा मावि पहरों में पहुँच सके खतरेकी पड़ीदेशकी सेना एक कोरसे दूसरे औरपर पा सके मापके मनोरंजन लिए बननेवाठी फिल्में सम्बसि भापके नमरममा सलस सबके बिए सामन पाहिए, संचार मार परिमहलके मापन-रेक तार गक सहक हवाई बझार पाह। में राष्ट्रके सरीरको शिराएं, प्रमनियां मोर स्नायु है। राष्ट्रमा भीवन और सास्प्प इन्हींपर निर्मर खा है। माषादी मिलने के बाद हमारी जियोवा मिस राष्ट्रीय सरकारमे बनले महत्वको सममा है और इसके विकास एि मातार कोशिश करती ही। पासी पपाय योजना नितीन प्रमुख प्रति विकासपर लिप बोर लिया गया सनमें पि सिंचाई और अमित साफ-साथ सवार और परिवहनका भी स्पान पा। इसके नि पर गमग पांच सौ एतास धमाल पार, छह रुपये पर्ष किये गये। इसे हम दो मी मसकते है कि हर मारमौके मिय ममन पना समे किये गये। इसीसे पता चल सकता है संचार और परिवहन दिखना महत्वपूर्ण समता यदा । बब इस इसके विकासपर बसन-पानसबसे पहले राम- पर विकासको २२। मारत पांगता tut, मां-पाव पिचा पार भानका प्रकार पहुंच सके इसके पिए पापाय गप विषयको पारी समता पया। मामेबोके लिए काफी परमीति मपनायी पयी। परकी पपप योजना महाय रमा नया कर ऐ बाल विकी बाबादी रोमार या पासे पावित हो एक गापर ने मोर ऐसा मा मी। दूसरी पंचपाप पोजमाप पार्को मोर मुनिया के थिए, पा आप किया गया कि दो मीसमें पनेवाले ऐसे सीन पाका मिता करी मित्र प्रापारो गर या उससे अधिक एक गमवामा नके ही निकटके दूसर गलानेसे उसकी दुरी कम-से-कम तीन मौक बारहो। इस योजनानुसार काम हो पाई। पहली पोगमा पुम गपरोपी संम्मा बम पत्तीस हजार पी मोरना परम होते-होने पर परमहरार हो गयी यानी पार पर्पो उनीस हार गकपर तुले पानी पप र रोगबाइसे मौ बारिक प्रकार होते ममे । सार एक ही सापडी पी मातुत की गयी है और पबनेसे सट बात हो सकता कि नाम किसना मन्पर है। एक मुगएम माप्पमो सिरियाले पम्प माप्पम लिए । एक निसार इसरा, पा लियो माया हो प्रसारित होनी चाहिए, निरापमहीं।

रियो वार्ता साहित्यका एक नया एप बातो हम बातचीत' भी कहते है। अप्रेशीमें इसका पर्याय खो- (Radio Talkti मिशन मौर रेरियो-मातका मन्तर साए करनेके गार यह पुरानेकी पावसाता नही एमाठी कि रेडियो-माता साहित्यका एक विमरु मयर म। यपि मा म किषित होता है पर यह पप और पाठप नहीं कर सम्म है। मम्म मेसकोंकी महिरियो वार्ताकार भी सिखता है, लेकिन मायाममें रखकर खिता है कि उसको रपना पाटो और कोक पास नहीं, पोसामाके पास पहुँचमेवानीमा से अपने मम्म में प्रभारसामी होना चाहिए। रशियों पम्प भाम्पमकी सीमार्यो मार शक्तियोंसे परिचित होकर ही काम्पित्ति रहियो-माता सेखन एवं प्रसारण में सफर हो सकता है। 6

रियोबाधित
।
राष्ट्रीय सरकारने इनके महलको समधाबर मरिसके लिए
मपातार कोषिण करती दी है। पाठी पपपीय योगमा निवीन
प्रपुर मेकि विपापपर सिप र रिया मया समम पि सिचाई और
शक्ति पा-सार सवार और परिणामका भी स्थान पा । लोशिस
पर समय पार सौ इकतीस मस पार, मममे च मे
करे। इसे हम यों भी न स है कि देपर हर भावमा किए समप
पाह मयेर किये गये। दसोसे क्या का समा संसर और
परिबहमको विना मात्यपूर्ण धमधा भया ।
भय हम न विकासपर बाप-बम प्यान। सबसे पहले राम
परो विकासको भारत यात्रा रे गामाबमें शिक्षा और
पालका प्रथम पहुँच सके इसके लिए परिमि सकरों सिकोस्ट
समाहा गया। समाने जो लिए माटी धार नीति अपनापी गयी।
पहमी पप योजना समय रखा गया कि ऐसे पार गिसकी
माबादी रोहमार या उससे बारित हो एक पर जुरे और ऐसा हा
की। इमरी पापीय पोवना पांगहो और मुविधा के लिए यह
दव किया गया कि मौका परेमें पाया ऐसे तीन गांडो मिमा
कर भी सिकी बादारी बोहबार या रहसे अधिक हो, एकतामा
नरे हो निकटके पूसरे गानये सिकी दूरी कम-से-कम तीन मोक
पर हो। इस पोरनानुसार काम हो पा । पाम योजना सम्म
गावराती सम्या व पतीस हमारबी, योगनाई बारम होते-पते यह
पवन रगर हो पपी मानी पाच पाम सनीष हगार गारमे
पानी में हर रोजवाइसे भी पर बीते गये।
आर एकही पामदी दो पमें प्रस्तुत की गयी और सबसे
स्ट मस्त हो जाता है कि मि पिना मन्तर समुपले एप
माध्यम सिपसरा रेशियो पम्म माम्मको लिए 1 एक निवा
सय all परिपाले पाए प्रसारित होनी चाहिए, निबदही।

योगा सामिका एक माप १०
को इस नदी महो। प्रमोमें रसा पर्याय 'पा-
* (Radio Tal ) 1
निमय और रेमिोबाका नम्बर स्पष्ट करने के बाद यह इनकी
मासम्ता मी यो जिग्रीयो-माता साहित्यका एक गिमा
म पनि समम सिक्षित देता है पर यह इस्य और पारम
को मम ममताको मति दीमापारियोसिस
हैन प्यान मार सिता है कि उसकी पापा और
या पानी योगा पास पहुँनमेगती है, पर उसे अपम पम्म
ममें प्रमाणपाती होना चाहिए। मोके प्रम पापमपी डीमामा और
धनियममि परिक्ति होकर कम्पति रेम्पिो-पात वार एवं प्रसारण
मेमस हो पाया है।
.

रेडियो-वार्ताकी सीमाएँ शरयो-निस्पके मनुमयी विद्वान् का है कि trयोनामकोका मोवा मापा होता है मपनी मांगोसे काम नहीं ले सकता । लेकिन प्रसारण कसम्मत्व गम्मीरवासे विचार किया जाय तो मात होगा कि रियो कायक्रमौका प्रसारमा मी बाबा होता है, यह मी अपनी मांसि काम नहीं में समता । पहबपनी बामोसे अपना गाना पड़ मर सकता है उससे मषिक कुछ नही कर सकता । प्रसि चिन्ता एमर्सनने कहा कि 'मा पमी भापाएँ बोलती है। अमरीकी माटारमन करते 'बार ऐसी पात्ल-सक्सि मोर सन्चाविसाप बोलती है कि पापोंको भी मात कर देती। इन रस्सियोंकी सस्पताको यस्वीकार नहीं किया जा समता । माया ममुठ मभिम्बना-भक्ति होती है। माणसे मानस काम की वर्षा बम फिमी बातचीत नहीं। यह हमारे पावहारिक पीवनका सत्य है । अपने निक प्रहारमें इम बम से ही नही हिसे भी बोलते है। मिस्तु रेडियो बाताबर मपनील मोका उपयोग नहीं कर समता परियारे भी तो उसके पोवाकि एि सनरा कोई धर्म नहीं है। रसम पोता उसकी मांगोंकी मापा नही पा सम्ता बह उसमे दर हवा है रसस विनुरूपदस्य । माग सम्बाप रही कयौ बार मुशाति पर भी लागू है। मुमाइतिसे भी रिपारों दौर भावनाओं को अभियक्ति होती है। ऐप्सपिमर रेरियो-बातांदी सीमाएँ १६ में विचार तुम्हारा मुस एक पुस्तक है, जिसमें सोम विविध बात पर सम् । मादी और मुवाइविसे बता सोको अमिम्बना-शामित गती है। यही बात मन्य भाव मंपिमामों एवं कितोड़े सम्बन्धमें कही पा सकती है। झप मोर उपमिया इयारसि भी हम भाषामिम्पत्ति करते कमी-कभी तो मह भावाभिव्यक्ति सनी सधस होती कि छन्द उनके समध मत्यन्त दुर्दम मात होते है। हट स्पेम्मर बारा रिये मये रसहरोका सहारा लेकर महा पा सकता है-'पारेकी तरफ मारा फरमेकी मपेक्षा यह कहना कि 'कमरा दो, कम बमियरक है। मत बोसो पहनेको तुसमा होटॉपर रग रखना मक्षिक पषित पाती है। 'यहाँ बानो की बपक्षा झपका ति मरिक मना है। मापवर्मक भावको कोई भी एमाबरी इतनी स्पएका पाप मिम्यास्त नही कर सकती मिनी स्पष्ठसे बिॉडा बोसना और याँहोंका रठाना कर सकता है। रियो मातकार अमिप्यक्ति के पथर मापनाका रस योग नहीं कर सकता। यह नसकी बहुत बड़ी सीमा है। उसे केवल भपने पा मोर ससे प्रम मेना है और एहकि वारा उस प्रमावोत्पादकता बमापकी पूर्ति करनी है मो वताको बोगी सम्मु उपस्थित होकर भाषण देने समय आपसम्म रहती है। प्रत्पल कापनकी तुबमा ररियो-वार्ताकी एक और सीमा पर ही रिसायो पाती है। पाश्निर पीयाके स्ट्रशियोमें मारोफोनके सामने मछा ठा हुआ अपना नामेट पाता है, उसके मोवा उससे दूर अपने अपने परोंमें रसकी वार्ता मुमठे है। पाकिार बपने मोवाजाकी प्रतिश्मिा से बंचित रह पाता है, यह समय नहीं पाया कि उसकी पाक्षिा प्रभाष योतामोपर कसा पा पा है। 'गुरु मिस्निप' पुस्तक सेवक एस्टर एपगरोपियन एकमका कवन दि ' माझोनपर बोसन मार भग्यत्र बोलने में प्यारभरिक अन्तर सन टोमाका है, मिनको सम्मोमिनु पिया पावा है। सचमुच योतामों की प्रतियादा प्रभाष पाया और उसकी भापम तीयोपात सिरप कसापर मयस्स हो पाता।पीचड़ी सभामाम मापन रेनेपाल यातायों को इसका मनुमा सरा होता रहता है, और ये अपने सम्मुस डे योगायों की प्रतिकिसानो भनुम मपनी तामें परिवर्तन करमेका प्रगल करते असते है । माठोपकर मप्यूमने नाटक सम्मम, मो का है कि "रसर्मच समूह काम तपा नाटककारको कृति रन बकति भी प्रमा रित होवी पती मिन सिए नाटक प्रस्तुत किया पावा है या प्रत्पत मापद गिए भी मारप' सत्य है । रिमोपर मोसनेमाला पवित्र मातृत्वबाकी इस पिपताका उपपोप महीं कर एकता। बह मम्बारमें अपने पादकितीर घमाता माता और समझ नहीं पाता किरही कागवे भी है या नहीं। ग्यिो-बाततिारको इस सीमाका भी बपन करता होanti नहीं एक बात यह मी बाय कि रम्मिोपात्तो प्रत्यक्ष मापसे विलकुम भिम है । यह समूहका कार्य नीतियों का कार्य :- मपिफसे-अधिक दोनो बार-बार पक्तियों बनी मोष्ठियोग कार्य है। इन दोनों को बन्ध मन्दर है, पनकी पइम यथास्थान बार करेंगे किन मी बी मा पयाई उसके मावारपर यह निसको स्वीकार किया जा सकता है कि रेग्मिो-बाती शिपो-माप' कामा पपित नही। बव होप रेडियोपर भाषण देनेकी बात या करवे सियो- पिपर लिखी एक हिन्दी पुस्तक में भी इसे रहियो-माप' मा बा है। इस प्रकारका प्रमोत्पारक मामकरपतीयोपाचति सरपको समझने में बाबा होगा। सा पहले पहाबा चुका है, प्रेमी में भी से यो eta' [Redbo Talk] ! Hari [Radio Speech) मा पग्म गुछ नहीं। मब फिर हम मपने मूत विपयपर बा । एमन्त मापनमा प्रोता की प्रतिक्रिया ममाप यह मापका ही कियाताकार का यंत्रण नहीवाम -बार मित्रकी मौसम पाते करते समय उसमें जो मानवी- म्यो-माताकी सीमाएं यता बार सप्राप्ता पती, या कहीं त म हो पाय। बट्ठारही पनामी प्रसिस मनिय मक्ता पेस्टरपीसने कहा है-'तुम मिस म्पक्सिसे गाहर ऐसे उसकी सन्नी भावनाओं को जानना चाहते हो तो उसके हरको रेखो पहनपने धम्हों को सरक्तासे निर्यत्रित कर सकता है, मुबपर अंकित मारनामों को नहीं। छोटी मोष्ठीम बातें करने समय किसी पनाकी बागीमें दो सगीरता रहती है उसका यही कारण यह प्रतिक्षम अपने मियोती मुखाकृतिसे प्रमाक्ति होता रहता है। रेशियो वार्ताकार इस सगीषवाको किस प्रकार बनाये रख सके यह उसके लिए एक समस्या है। बार हम मुदित निबन्धको तुमनाम रेडियो बातो कुछ सीमाओंपर विचार करेंगे। कपि नायरनने पहावा-कोई भी हाथ मेरे लिए बब पहासे यह समय नहीं बना सकता को मुरार गया। रेरियो पात्र पोता मो कोई बात सुनकर यही कह सकता है। रेमियोपासा मी बम्प रेडियोमामहर्मोकी तरह ही गुगरे हुए समयकी मावि वापस नहीं पाठी बह पीके एक-एक सेके साथ भागे पड़ती माती है, पीछे नहीं मोटठी। फलत यषि पंक्तियाँ मोठाकी समसमें नहीं बाठी तो यह पहें गुजारा नहीं मुन सका। इसके विपरीत यदि उसे मुद्रित निवपके पुल बायोचे समझनेमें कठिनाई हो सकती है जो बह पन्हें एक ही बार नहीं सौ पार पानेको स्वतंत्र है। वह चाहे, तो पहले परे हए पृष्ठोंको फिरसे उम्टार रेख सकता है। रेडियो पातका मोवा इस एपिसे रिप है। सधारमके लिए, परि यह रेडियोपर ये पंक्तियां सुनता है- मानव-चीवनमें एस्तोवना मोर एका प्रश्न उससे पायन उसके मोम मा उसमें सापकता बोबनेका प्रयास म्पपिसके भारम-माफम्स बार मसन सामाजिक उपयोगिताका प्रश्न मैतिक मम्मोके एक नये परिमाण बोगनेकी भापम्पमता बीवन-प्रक्रिया में मारम-निपेष मा मात्मोपसम्पिक पीच भयाकी एक स्थायी भूमि जोग पामेका प्रयास मोमोती भस्पम्त मप्रिय भदायका प्रयोग कर दो टेगीसे घूमते हुए पहली एक स्थिर पुरी -

सम्मोवामित्व
एखये।
बोक्नेको प्यास-ये सपा प्रम को ही सदितिको मेनने 'सुनीया में
[सारग, २२ मनपर ]
बीर, इनकी समावठीको पृषत समझ नहीं पाया अपमानास्की
समाप्पिा मार हिरसे यह मानना चाहा कि 'मुनीता' में कौन-कौमी
मान राय ममें है तो उसकी इम पूर्ण नहीं हो सकी। ये परिश्मा
उसे फिरसे मह सुनायी पोगी। मोताको या पिता मी रिपो-बारी
कारकी पक पर बड़ी सीमा है।
पोता किती पालो मारा महीं मन सता, यह पप्प रेशियो-माता
तमा मुरित निरापरे एक और मम्तरको मोर पित करता है। मुदित
निवल एक पूष रचना होता है यह माने समाप पाठको पल्स
एवा । पर यिो पोताको कोई वि पूर्णतः पठित एवं सम्पून
म्प स्मत महीं बस होती पर इसके लिए सम परिपम करणा पत्ता
। पसे मुने इए एएक गत्यको बोरकर पूर्व मटित ति निर्मित
करली पापी यह एक-एक बालप मुन्ता हुमा कमा भारी माता माता
है। यह पार्ताको मुरित मिकी मधि एक बार ही समय ममें नहीं
रिक समता रिसो कठिन भणी दिरसे पर हमम सके। रियो
मासिपुर्वमताको मारिसे दूर करे बह या रेल बातम
सामूहिक प्रभार पोवार मुरिक सामग्री किसी प्रकार कम म पो या
एसए एक फदिम प्रश्न
घमा प्रभारी बोबाव मनीही गो मम मम्माय प्रोताकी
स्मरणविसे मोहै। मोवा किसी बातर्मि मापे घमी पाराडो स्मरण
मही रस सकता। साहित्यका मिति प हमारी स्मरम-विनयापन
होवा पर रमेशप ममें इस विशेषताका नमार यच है। यो-
बातदिसम्बार मातोपर ग्रेगर मेनरमा शिरकारिता
ममें पोता विधार-पवाने हजयाबाब परखे यती है, और
इस बार दिसत होती ई स्मृतिको की मेड़ी राहमि प्रवेश करती है।

रेरियो वार्ताही सीमा २५ फत माताकी समाप्तिपर सामान्य मोठा थिए पातकि प्रारम्भ पर्व पिकासके विपयम निश्चित म पु का सम्मा कठिन होता है। रोटिया- मोनाकी यह ऐसी मनाशनिक अक्षमता है, जिसपर चार करता रेग्मिो गार्गकारका पम्प हो जाता है। यो माहम शिम दातामरणम मुन बाते है यह भी माताकारक मिए विधारभीय विषम है। हम अपने म्याबारिक जीवनमें देखते है कि रेसियो-पबमको वातावरण सापर ही कमी मौर किमोके महाँ पिमफुल पाम्त पहा है। ऐसे कम से पोम मिये बो कमरे परबारे बम्ब कर पास्तिक साथ कार्यक्रम सुनते है । हन्ता मधिकार सागि कार्यक्रम मी सुनवे रहते है, मापसमें कमी-कमी पावे मौकरते बाते है दूसरी तण पोका पोरगुठ भी घेता यावा वीच-बीच टेठानकी पटी भी परती रहती है कमरेमें पर-परकी दूसरी बाबा भी माती रहती है। इसके विपरीत मरि हमें पुरित साहित्य पदमा होता है, तो एफास्तुम पास्ति- पूबफ पानेका मयल करते है। पानेका काम ोगोंकी मीर मौर तरह तपको हम नहीं होता। यो-यातकार रेडियो प्रामक इस मायक बाताबरणमा पिस प्रवर सामना करे, यह भी एक समस्या है। रेमियो-बातोकार सम्पुस इतनी पारी कठिनाइयो उसके पास केगम पानी भमिम्पत्तिके दूसरे एप साधन नहीं है, मोवाके पास केर मरण दधि नहीं है मौर मे यबम भी प्रभारित रचनामोंको मा एक ही पार सुन सकते है, भोताकी स्मरण-अमित्र भी बाताको सम्पूर्णत स्मरण रखने मसम , मार पोज जिस पावापरममें काम मुनता है बामौ प्रपंसनीय नहीं माना सम्ता । बाकारसोल टीमामाको गित करता है। उसकी सहायता करनेवाले सापन बो सीमित मापा शक्ति मनोविमानसे उपयशान मेमन-मोह पनि और प्रसारप- हसरह किम प्रकार मधिशापिक सफलता साप उपयोग कर सकता है इसका विषेषन हम अपसे मप्पार्योम हरेंगे ।

रेडियोवार्ता गाय ही बाते है मझोग भी पापासष्ठानुसार इन तिमि प्रम ठे। किमी बस्य भापा-मापीछे मिनपर प्राय अपूर्ण गवारण मला बम शम्द-मापारकी पूर्ति करनेके लिए हमें उरतोंका प्रयोग करला पाता है। बदरे मोर गूंपासे संकाप करनेमें धमकी कितमय भाषा मान मापक हो पाता है। इसी प्रवर मुक-विकृति मी भाषाका सराप मामी मा सकती है। गा कोष मा बारिक मापोंके प्रकाशन, मुक-शिति- कार सहयोग यहवा एकरेषपूर्ण मायके साथ ही माताकी बांचों- में भी कोष रेस पहना साबारप बात है। बातचीतसे मुखकी मिति बरमा पाक्-मनी का पना पनिष्ठ सम्बन्ध होता है कि बयाकारमें भी हम किसीके पन्नों को सुनकर उसके मुबकी मार-मकी प्रपना कर ।। ऐपी बसस्वामि प्राय पहनेकाम बर्वाद मागास [ tone of voce] हमारी समयका करती है। बिना रे मो हम दूसरे भी भागार' 'मरी गावर या भरपि और 'टूटे सरसे पतके पायोका मिम्म भिन्न पर्प पावा करते है। इसी मा बाधार [ toos ] पपया सर-विकार भी मापाका एक बंग माना जाता है। इसे बाप-सर भी कर सम। इसी प्रकार सर[गति पीठात्मक सरावात -प्रयोग और उच्चारणा [पति प्रपा] मो मापा विषम होते है।यहोकी भावश्यकता नलं कि मेहन-सा और मुणगावो मारिकारने मापाको रसके इन समायोसि विविधन कर रिना है, किसके फाराम माषा मपमेको अपर बनुनय करने सबीको मापा जितनी ही पुरानी है और परम्परामत प्रयोगकि कारण स्तिको बम-पति मिनी ही पिस गपी,पसे पतनामपिक अपनी पति-भीमणम बनुमा होश,बोरहरपरले कि मी ठीका संस्मर करती शिवामी पाशीची समाप वि पर मारणार दुई मनोस भारिपारको चिता साहित्य ना पुना है, और जिसकी समसामयिक सी प्रयोगसि सनी ममल हो ममी को मार मारमा

हिमो-बातों और भापित चम
२७
बारे लिए उपचार-वा-सीधे-भारे बमसम्यों बार पिसे-पिटे पिको
थेरंग पहनको लीपर निर्भर करना पड़ रहा है। उगम भनुसार
मणि पृष्ठार ऐसा करने के लिए सस्त कौसा-प्राणाकी सपेक्षा है पर
गति पाए नि महब ही ध्यिा पा सका है।
इसी प्रसंग; महेय' की ये पंक्तियां भी उत्पत की बा सकती है-
'भाषाको पात पापरविराम-सिसि मंकी पौर सीपी-ठिगी कीरों
से मेरेबाशि सीधे या उटे मासे फोर्पो भोर स्थानों के मार्मों
से, बहरे मायसि-समी प्रकारणे इतर साधनास कपि वपोस करने का
किमपनी सधी हुई सरनाकी सृष्टिको पाठकों तक मनुष्य पाए।
इसके उदाहरणसम्म रेसी-विरोधी इत्याधुनिक करिया के बनेकानेक अध
छपत किये गा sd tहिन्दीकी एक कमिवाका प्रस्तुत
--
[प्रमोद हमने
रहें पपने परिपके पर्म मारन पिया
माने पाबहुत पोषि मनवाने ही
सका संपारण
ममता
कर्मचा
सम्मानित मा।
पोर
हिसरती त
प्रमितिमों,

रशियो-पातानास
.
ईगिता,
प्रापरयों,
कर्मों,
माध्यम
इनके पूसको
नाम प्रवतरित किया।
[परस्तके वानिका प्रपोग
मेरा--[+]
मर्थात
हमारा-[+n]
मम नहीं पा
[ सारकी सांभ संपहसे ]
पपके भी ऐसे बने परम पिये वा सकते। बिनमें बान-श्री-
की नवीनताके द्वारा बमकार पत्तकरणका प्रयल किया पात्रा।
अपरम्परा [मासिक साहित्य संमान ] में प्रकाशित 'तीसरी कसम
बर्वाद मारे पसे
गुरुपयम
। चौपक कहानीसे कुछ पवित्रा
'पारोमा साहबको रोपप सम्बी चोरबत्तीकी रोशमी तिनी तेर
होती हिएमम बामता । एकसष्टावक बादमी मन्बा हो जाता है,
एकक मी पर पाय बांतर, तो! रोपनी के साथ ताम्ती हुई
बाबार-ऐ-य! याही रोको । सामे मोती मार !-
बीसौ पाही एक साथ कार ममी। हिरामनने पहले ही
पहा पाया बीस पिपापा । परोमा साहब उसकी गाराम पुराए
मुनीमनीपर रोपनी गमार पिसानी सी हंस-हा-बाना । मुहीमयी
दही-ही-ही। ऐ-य साला नाहीवाम मुंह क्या देखा है। रए
ए? कममयमो इस बोरे महारसै| हापको गेटी म्पठीसे मुनीमनीने
पेटमें पौवा मारते एका पनसोरेको । स-स्साला !!

रेग्मिो-बात प्रौरमाणिव हार इन उरहरमासे स्पष्ट झात होता है किसेवक किस प्रकार अपनी डी पक्तिसे लिखित मापापी मसमया मिटाने के लिए प्रयत्नशील है। यह माप-पत्व मौर मेसन-महाका प्रमाण है। एम्हाने छेसको मोर पाठों- को दूसरे प्रकार से भी प्रभाषित यिा है। मही हम कुछ और प्रमाोपर विचार करें। माम चित्र-निर्मामकी सक्ति होती है। बकाई म सन्चारित पिया भावाम मौलाके मनमें उम्परित पनिमाकी प्रतिक्रिया होगी है और मानस-लि उमर माते है । शौक सिक्षित स्पमें यह प्रति माह होती। फात माग-पवने देवकों और पाठोका ध्यान भापित मार्योको अतिषियासे हटा दिया है। सोमनाथ घिरके पदमि सिपित पनि मेसको भाषाको पाप मौर मनुदो पमें सोचनेकी भावको मम्म सिसने सपरित पदों की प्रतिध्यिानों चित्रों मोर बोपरसे देखा और पाठनका प्यान हा दिया। दूसरी बात यह भी प्याग देनको कि सबमें परसम ही नहीं होण भमि भी होती है। मनियों मानमें भी माल होता है। कवितामें तो इस नार-सौन्दर्यका बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है, लेकिन उसके सिक्षित आपके मौन पाठ दाग इस बामदको सप- समिमी हो कती। सच प्रमाण प्रोगोंधीयाना-पहणकी भक्ति पर पाता है। सा कि प्रा. परने हा है 'माण-कसाने हमारी सादि पिक दृष्टि मन्द कर दी है। दुई मैनीमने मो सत्य ही कहा है कि हम एसे मुगम है, जिसमें हमारे कवि भी इस प्रपर लिखते है जैसे में गरे और मे है। माद-सौन्दर्पको यह बात परत काम्पके लिए हो सत्य मही मचको पारमकताम भी सौन्दय देता रिसे सुनकर पान प्राप्त किया जा सकता। पोकरी मावस्यकता नही किमान्यवहारा मपहत पर्दो की मौलिक परिपाको यो फिरसे वापसरे समाए। यिोने पापा सर मिर, स्वपद और प्रबाद ल समौ योस पुन सम्मप्र कर दिया रेरियोमाता-हिस्स है। इसमे हम प्रक्ति दी है कि हम भाषित शम्बासे मोठाबकि मनमें ब- क्षित मानस-कियोका निर्माण कर अमित प्रतिक्रियाएं समा सरे सदोंके सूबे हुए फूलमें फिर रंय मौर मन्त्र का सके मांगीक्ति पोको पूर्णतः प्रामवन्त बना सके। भापित गम्यो पममें कहे गये तथ्योस बहन सममा पाय कि शिक्षित मौर मुषित शवोंका कोई मुस्प ही नहीं है। इन दोनोन हमारी सम्पदाके विकासम बहुत बड़ा काम किया है मेहन-कहा माषिकारने मालर मानबके बीचकी दूरी मिटायी की एक स्थानका म्पत्ति मपनेसे कोसों पर रहनेवासे पक्तियों विचार-विमर्म करनेमें समर्प हो सका। इस प्रकार मुग-यम्बके बाविकारले रेस-कामकी दूरी मिटाकर मामका प्रसार किया मामिास और सेक्सपियर-वैसे साहित्यकारोंकी दिया सबके लिए सुकम हो पयीं। मेकिन इन सुविधाबाके बावजूर खान और मापने भापित पमोकी पति जीनी इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता । रेडियो विरोपता यह है कि इसने मेहन मोर माप-करायोको ठप स्पार्मोकी पूरी भी मिटायी साप ही पतीसोयी हुई सक्ति भी वापसममि पनिका इतना विपित माम्पम मनुष्यको पहली बार मिला, सिमें प्रत्यरा भापकी सामूहिष्का भी है और स्थानोकी रीमिटानेकी रेखम कसाबसी ममता भी है। भारका विचारक और साहित्यकार एक स्थान हमा रखर इनबारे असंख्य लोगोंस एक ही साप बात कर सकता है। सामूहिक प्रेपपीयवान इतना सथात सावन दूसरा नहीं है जिसके माम्पमये एक बातकार रब पक्तिमासे प्रत्यरा पर अपनी बाते कह सके। बार्तापरकी यह समता मापित राम्रो सपनालपर निर्भर है। इस पलिप किस प्रकार पयोम पिया पाय यह हमारे बदले अम्पायोंका रिमेय विपप होगा।

रेडियो वार्ता और श्रोताकी मानसिक दृष्टि रियो मुमता। परके वापसे स्वर और समक करि त नवा है। सचमुच रेडियो सुनते समय मोठा स स मौर पकि रंगीरपे पूल पुगनेश मनुमब करने हताहै भी रियो नामम्मोंकी साम्वा सिम होती है मम्पपासून्पम विजयी गयी मिरपफ पनियोंकी तए सबके म पोशाकी मानसिक बीजों काही रे पा सकते है, मार महोबारा ने भी पा सकते है। फम्त रेरियो कार्यको प्रस्तु:- Sun प्यान प्रोतली मानसिक परिपर भबम ही रहना चाहिए। स्मिोन्ही साहेबह माटाकार हो पानीकार हो, मातभर हो सरा मह सरप रखमा किबह मोंक एि सिय पापसे प्रत्येक वम मपने बोकी पिप-मर्माप-शक्तिका उपयोग करना है। रेम्मिी- पातरिम हो यह विरोपता निश्चित पसे होनी चाहिए। हिमो-यात. हैलो समयमें प्रसिर मनोरमानिक प्रोफेसर सीरिपबर्ट का 1- 'पनामा बिते समय प्रसारप- कबवे मोठामों की मानसिक पहिलो प्यान रखना चाहिए, वो सभी मार मात्र हो मधेर रेमा पाहिए और प्रत्येक पात्यको एक पि निमित करना चाहिए।' - रेडियोभाता-पिस्प बी. बी. सी. के पहले पीप इम्पीनियर पी. पी. एकरस्मे मम्मी पुस्तक परिपाबर बिहारण माघेळोन में दो साफ पोम कहो । कि 'ममको उबानबाठे ऐसे पप-पाठ बहुत कम होने चाहिए [रियोपर] पो परपर साबास बिरे-वैसे मालम हो बार ऐसे एमड वार्ताकारोंको पषिक सम्पा बाना चाहिए, बो पटनाओं मौर विषारोह सा समषित निर्मित करना बानो हो। यो प्रसिव प्रसारपत्ता म्पिोनेल माहित रेटियोपर प्रभावपामा प्रमि-चित्र [ Sound Ficture ] पाहत और बताते है कि रेडियोरा प्रस्तुत पनि-विष पिषसामा चिनको तय गविहीन नहीं ोते बलियो पतिष्ठीह हो। भोपके सामने एक बक- केहिए माते । और फिर विवा हो जाते। पोवा नपारा नहीं देखा सम्ता फमत गन्हें विटहुक पर होना चाहिए। रेरियो पातकिए निमारमच्या मनिवार्य है इसमें सम्ये नहीं म्यिा वा सकता। प्रल यह कि पोंडारा किस प्रकार चित्र-भिषि यिा बाय? पौनकी एक महापवमें कहा पया कि एकत्रि स हसार समषि बराबर होय है। यह उक्ति विमा सरप है लेकिन रस हजार नहीं बलि एप इने-पिने पपासे ही किसे में यह एक कठिन कार्य । इसके लिए कल्पना-पक्तिकी अपेमा है। बिना शासनास सहप लिये पोली शक्तिका पेचित उपयौन नही हो सकता पोमेत गरिन पो कहते है कि बिना र इए कोई भी इस मस्समाका उपयोग नहीं कर एकवा । कहनेको बाबापता नहीं कि रिपोवापिलरको भी साकार बनमा पोथा बममा क्या पड़ेगा, सागर वो पर हो । हो या कपियों हानीकारों बार नाटककारीकी पए मानी वार्ता लियोने लिए प्रम दाम घटाता है, और उस बार अभिनेवायोंी तय माको प्रेम के सामने सबसना बभिनय करनेके लिए [सरों मही ] माता पक्राकार परपर प्रतिष्ठित हो पाता है। यह सही हिवाशनिक गरात मनोतिकमा साहिस्पिक रिचारपात्रो रेरियो-वार्ता मोर प्रोतारी मानसिक भवान्सिी दूसरे विषयका रिशेपज है, परमाता पहन मौर प्रसारमा प्रश्न पाठा साकार है इसे मस्तीपर नहीं किया जा सकता । रस सामने समस्या तो यह है कि वह यपन मारके मारप की रक्षा किस प्रकार करे, पिस प्रकार करसमा पौर प्रमोंकी प्रतिसे काम के मौर किस प्रकार मपने मोठामाती मानसिक टिक साममे पपो- पित सामग्री उपस्थित कर सके? पदोंकी पक्ति मपरिमित है मह पहले कहा था का है। समाये लिए भी मिपित हो सकता है, स्प-रतकी झांकी भी प्रस्तुत भोगा सकती है पतिको मना भी हो सकती है। इसके पहले कि हम प्रसाखि वातमिसि सके बाहरण या रषित मगता है कि प्राचीन काम्पले उखाहरणों से पानी पिधारमपिता परिचय दिया बाय। प्राचीन काम्पमें यह इस्म तत्व बहन मषित पा माप-पान माविकार तपा बौद्धिकताके रिसके साम-माप इसका हार हो गया है। त्रिपयता तपाइप शाहिरासको दियाँस उनके कुछ मंगकि मनुवादारा रिसे या मासिानिमित्र को मातपिका पद स्पषित-बड़ी-बड़ी मौर्य काम्तिमाम् परदो मा पा मुख कॉपर पोपी मुकी हुई मुगाएँ, पागत स्तन मुट्टी भरकी कटि पृपुर गाय और पोड़ी-थोड़ी मुकी इई परोपी पलिया। कुमारसम्मम' की पार्वती के इस चित्र रंगोंको सारला जा सकता -रमा समान निकी माल है सिरसके फलसे भी कोम गिनकी मुगाऐं है जिनके मम्माम मपपर मुसकानकी उरममता ऐसी कमठी है, से काम कोपटम कोई बसा फूट रपा हो या सा भूमके बीच मोती भड़ा हुमा हो। महर्षि प्रबके बाभयका यह बिल देखिए-ही प्रोन मीरे दो बॉससे पिरे ए हिम्मीकाने विचारे पो ही इमर-बार

रेडियो-माता-सि
पोइए किने पत्पर बना पेक इनपर हिपोट सटे गये।
कमी
निहरिम इस विस्वासके साप रपमा पम मुन है कि
मापमम रनको ऐना नहीं कहाँ भगवासापर माने-मानकी प्राम
मनिकि पाठसि टपके हुए पलकी रेखाएं बनी हुई है।
पातिक पम-पित्रके एि बेगमे पाते हुए एपका यह पिच पसनीय
-'सपमुषल मानि तो मूर्य मौर परके भागोंको भी पोरम पमा
रिलायोकियो बस्तु एरसे पतली रिसाया रेती पी पणतीही
मोटी हो पाती। बो दीपसे कटी पाम पाटी पी एमट ऐसो पान
परम हाती है मानो ग्मे सिामे बोर पिया हो मोर बोसमाव टेमें
बस्तुएँ । मौसको सीधी-सो रिखापी ने लगती है। एप वने रेसले
और रहा है कि कोई पस्नुन र पाती है मसमीप ही-[माका
ताप येम गाते पित्र] पा रप हमे पसे पोर हा कि
की रफा पो बार पिस-पिसकर पूछन म है। इसके पहिये भी
इतने पसे घूम रहे हैं कि मयता मानो पहियाकबकि पीपमें और
भी बहुक्मी बरे पते पर पाये। नकि सिरपर रियासह
ही हो गयी है कि गता है ये बिग विपी हुई और पसे
पहनके परमयी परत रखता उसो झमे पाका रूपमा बपने
बाइपोरके मोर पगारे के बीच सौषा पर गया। सनिक मी
fimageता को।
व प्रकारले पनि का अपहार रेडियो बाताको भार और
प्रभावोत्पारक बना सवा सौ सन्देह नहीं। माविष्ट दृस्यों स्थानों
रेगा प्यपियों यात्रा-विबरपों मारि सम्बग्पित बाम विला
ध्यपहार यिाचा सकता है। पराहरण के लिए, 'पापस्मान
पारा यह प्रमुख
'यह रामपान भूरमा दे। नाम से ही विझत मानोपरा
पाता । बीकाहे निस्तान समयमा विस्तार, तिनी होगीहा भूमि
पर्षक

रेशिपोवार्ता प्रौर भोताको मानसिक
मने ही पीहा माश्मी। मारमा कि फौठाप पिषता तो पानी पमा
तोपत्र।
x
x
प्रहरा गैसस मुकीको मा मापा शिस्मसे रिपको कन्या-
मुमा पोतो, स्टो भिरबा की पपड़ी। कमरसे छटो तसार, मट्टीमें
कसा माला। दोनों मोरममावड़ी बड़ी मुहं सायका रंग का
रामपूर कि वो हराएमा किचके तो गयराम यह छोड़।
पपरी काया सुबरा रेप सचिम से मंग। छातीपर नसी बोली
समरसे फेला पारा । माथेपर समापपुर गोरता सिरपर मापस मुको
पो गोपापीम आये हो तो सिंहनी गरम उठे। उमा-मी पावन पेस
रिपा पमपूक्की मानकी इस्म-राजपूतमी ।
[पाकामपाणी प्रसारिका प्रसार १९५५]
ये मान्य ही मारे बायेंगे। पर इसके विपरीत मार्गों
में रिमा लिए मवानप पनेपर भी साधारपर ये बातारा नहीं
प्रस्तुत रिसे बाते । सहरमाच बारीमाप सोपा वातमि बापार
-
'यपि पत्तमान मन्दिर तीर्षकी प्रसिदिक मनुम नहीं है मौरन
मारने मम्प मम्विरों मांति इसमें भारतीय स्पापस्य मौर मूर्तिमकाका
वास्तविक म प्रकट हुमा है, तो भी इसका प्रदेशवार बहुत पप है।
[भियो-संग्रह प्रश्परतीसमर १९४५]
म 'मम्प पम्पहरेने माषमे मौलाके मनमें प्रवेष-वारा सा
शिव मायेगा? ऐसा ही एक दूसरा रपाहरण में । मह मेश सीहोकादेश
मनाग नापित है-
दररोका मगायबपर हमारे माइके रेवे हुए बड़े भगायपरमि एक
पा पर उसके संग्रह तो ऐसे ये से हमने मसामकि भाप
परमें न । दुरटोका यह एप बोटारिया म्यूरियम मूनिवसिरी
-

ख्यिो वात-शिस एमेम्पूपर बना हुआ है। इस एक मनायबपा, वास्तबमें चार गायपर है। सम्पनको होड़ मह मनायबार बिटिप्प राष्ट्रमपमें सबसे गाt और मपमे ग्राम मिए मस्यन्त पिपात है। बायपरले चार माम इस प्रकार है- पुरातत्व सनिय शास्त्र मूगर्भ धारण बोर प्राणिशास्त्र । इस भगापगारसे जीवनकी महत्ताका प्रामाम मिया है। [प्रसारिका पुताई दिसम्बर १९५५] चपत पसे मोताके पनमें बगावपरके सम्बपमें क्या पारमा बनेपा । इससे क्या यह समझ पाता है कि बगायबर पिनाका पसमें कौन-कौन-सी ऐसी महत्त्वपूर्ण पस्तुएँ । बोबार भी ना पार्ताकार समी बड़ी ऐपती बावे ही है पसने पदोंकी बिमात्मा अश्विका उपयोग नहीं किया है। सीरिम बर्टका मो बिचार पहने दिया था पुका भाव मात्र हो उसे छोड़ना चाहिए और प्रत्येक पापी एक चित्र निर्मित करना चाहिए, वह ऐसे ही प्रसंपोके लिए। मातांनोम प भी पता नहीं होना चाहिए । 'मोटरसा एग गारेगम माफ रेडियो प्रोपाम्स' के मेरा मान एल० कालांइस कहते है-'तपको निश्चित और प्रस्व स्पर्म पस्मित कोविए। प्रसिटमा एवं बता गेम कार्नेगी भी यही बात कहते है कि सृष्टि के लिए प्रस्तुत सामग्रीको वि+ पुरस्पष्ट मौर निश्चित रदिए। सामों द्वारा निर्मित चित्रकि सम्माप या भवाय मार रखना है कि रामकिती मी बस्तु या दृश्यान हा पित नहीं किस पर सस्ते में का पित्रोंको ग्यबना कर सकते । पानी मा छ वायो बाप एते रिप मर रिपे पा सस्ते मिनसे योगा सपने मानसमें सनी विष निर्मित करके। पार-मस्या विरोपमा पल इसी बातम हि मोनाबाम पासनापपिसको सरकार जिससे वह मानवोिंडा निर्मान कर फो। योको मरोंकी कसा पहा पाता है। इसकी रिपता इसकी म्यनाम हो। मभिषा नहीं। जाहिरपती सबसे बड़ी पति बनादी रेरियोमा और मोताकी मानसिक मानी जाती है। इस दृष्टिसे रेग्मिो विचारों और भाषक प्रेपणन सबसे मषित माम्पम है। इसीलिए टेसिरियनको तुलनाम ररियोको वनुभवी प्रसारणकर्ताओं हारा भपिक महत्त्वपूर्ण माना गया है । टेलिविजनके पटपर साहित्यमें मंत्रित दृश्योक हूबहू चित्रका प्रयत्न यता है। 'वियाम्स पत्रके रेडियो समानाने एक बार सिखा पा--- फिल्मी चित्रपटॉकी यपा उम्पतामे स्पेम्सरके काम्पकी चित्रमयताको हास्यास्पर बना दिया। पष्टीका उसोस है, इसलिए हमणेोको पम्टी बगानेवामाको रेखमा ही चाहिए, ऐपनीका उत्त है इसलिए रोषनीवार्मोको सबना ही चाहिए। पा काका निषेष है। कृषि मई मैक्नोस को-कवि मन कोमबके विषयमें कहता है कि नही एक मात्र ऐसा पनी है जिसके स्वरमें बनी सबनता है कि उसकी भी प्रतिया होती है, जब हम किसी कोपको मही रेखना चाहते। मैं समझता हूँ हमलोग कुछ भी नहीं रेखमा चाहते काम्पात्मक चित्रको अपना रैमर्मच स्पर्य मपने पास होना चाहिए । म समी पार्कोसे मह निष्कप सरबतासे निकायबा सकता है कि सोंक लिए पियोंकी पना कर देता ही पर्याप्त है। मोतामों की मानसिक दृष्टिकी तृप्तिक लिए चित्रारमकवाके मतिरिक्त मी मनेक सामन है। उनमें एक यह है कि मपमे पिचारको उपाहरपंकि पम्पक्त किया धाय । गम्भीरसे-गम्भीर विचार मी सपहरक्षिाप माकर्पक एवं सरम ८पमें उपस्पित किया जा सकता है। बगर मातार कुछ रेर तक विचार-ही-विचार उपस्पित किये बाय पो पोवाबों को समझने भी कठिनाई होपी बोर सनका मन भी कर पायेगा। रेशिमोके मदृश्य मोताकि सिए पो यह बात विणेप पसे ही है। इसीलिए बाम एस. काहस रेडियो मासि ले कि नपाहरणकि व्यवहारमें सावधान दिए । बन-सामान्पसे सम्पर्क रकमेपासे विचारफ एवं बाला सबाहरमाके महत्वको बाकी तप मानते है। बाचाय पिनोबाई 'गीता-प्रयान में रेशा पा सकता है कि पृष्टानों पारा किस प्रश्नर पोता मम्मीर वर्मनको भी 10 रेडियोबाता शिस सहन बोपपम्म बना दिया गया है। उसीसे एक ोटा-सा पंप पर है। सहर कमको टेमकर्म कहते है। कर्मको सहमताको समझने लिए हम अपने परिषया एक उदाहरण है। छोटा रबा पहले चमन सौखता है। उस समय उसे किवना का होता है। किन्तु हमें रसको । महासे मानन्द होता है। हम कहते है हो ससा बहने लगा। पर, पीछे नही पाना सहर हो बाता है। बाम्ता भी रहा है और बार- पीत भी करता रहता है। पानेकी वोर मान भी नहीं एता । यही बात सामे सम्भव है। हम पोटेपनप ममप्रायन कराते है, मानो साना कोई काम हो। परन्तु पीछे बी वाला एक सहर कर्म हो जाता है। मनुष्य पर हरना सौबतातो कितना कह होता है। पहले म मर माता है पर पामें तो पल्टे बा दूसरी मेहनतसे न पाता है तो कहवा दिपोरा र मायें दो पकान मिझम बाब यह टरमा काकर नहीं मागम होता। पर यों ही सहर भाषसे पानीपर देखाई। अमित होना मनन धर्म है। मन पर कमि म्यस्त पणा तो मम मायूम होता है परन्तु कर्म बब सदय होने सपते है तो फिर उनका योग नहीं मानम होता। कर्म मानो गर्म हो जाता है। कर्म बामतमय हो माता एक सबम्हरप एक प्रसारिख पातसि रहिए किराहरमौके पबहारसे बाता पिस प्रकार रोषा हो पाती है। पाकिा नाम है ऐन मौके पर 'मुदिप, पाप मह, प्रतिमा पर वो ऐन मा पर बताये, पब मुशाये, काम पपाये। यो तो पुदि उस बात मानबरमें भी होती, बो पीठपर माप बोस म्पेि मारे मुपये कान भटकाये और पको बोली पाटवक वैसे-वैसे पोष हो पाता है। मैं मानता हूँ सी मुटि ही चातुरी सौ प्रतिभा सको नहीं मिलती। हनो मानवा! एक मम्मी साबनाके बार मुनि सा बमलाप, चातुम सा पैनापन और प्रतिमा बसे पबन पाते रियोमाता मोरमोताकी मानसिकट १, पब मादमी एक मानमें पाको पार कर मेला है एक मोगमें समुद्र हाव वा एक सरपटमें माभूमिको पीछे छोड़ पाता है, पाकि इमरे होम सांस रोककर यह रेखमेडो उत्सुक होते है कि भगए पराममा या पाना एक ताग आहरण होमिए । पिसी भाई पुर। हिटलरने पूरोप पुराराम मचा दिया। यह रेपरस्टेप बिमय करता गया ऐसा पा मारा संसार तानाशाही र पये मादर पेया। भारतम मनीष हालत पी मागोवारके समी दुश्मन पे किन्तु उसके खिलाफ अनिलो मदर भी विस नए बोबा सकती पो बो हमें पुथम बनाकर रखे हुए है। हमारे मामाकी दिमागी परेशानी देखने लायक भी वासकर उम मेवामारी दिनका दिमाए भान-विज्ञानसे सपासप मराहमा पार गई एक गरीबी पी दूसरी तरफ मणिकुण पाठा नगर मावा मा। किसीको कुछ नहीं भूमवा पा शिस्तु सेनापति तो बह, मो मन्मकारमें मी प्रथम निकाले । ऐन मोहपर उसके महसे निमन हमा-'भारत छोड़ो। मोर, क्या यह सब माही रिपरि उसके मुंहले यह पाणी म फूटती पो हम माय मी गुहाप होते? रविदासपी एबमर पटना कि यार नहीं है? मेपोछिपाकी सेना विममाभियानको निकली है, सामने माम्सा है। सेनाकी सेनानाप- पी मुधि पाकर मर क्या हो? 'मड़ो मारप्स पार करो। यह वो असम्मम है। 'मसम्भव सह पुरादिक कोपमें होता है। और, यह देहिए, यह पोय-सा पासपार बने बोरेको मापे आता है और मैथिए, मात्मपार। हमें यह वरना तो पार ६ पाती, पितु हम भूम पाकि सरको दिगो बास बाम है। हम एस मासको रेलवे १, सहमते १ है हिम्मत झरकर पाते हैं या रस पार करने का निस्तव रेडियोबा-मिस मोमनायोमें एप बाते है । प्राय होता है योजनाएं बनती ही पाती है बास्स मुसकरावा ही रह जाता है।' [रेसियो पेण, प्रमुगर रिसम्बर १९५] इप्टाकि बतिरिक्त पिण-निर्मानका एक सपाम यह मौसपने मध्यको सामान्यके परमे विपके पारा म्यक्त किया जाय । पुम सामान्य पर माम या मीम कहना विशेष है। सामाम्पमें विस-निनिय पति नहीं होती विरोपमें होती है। सेन्सर को है-'हम योग सामाम्य- माम्पमसे नहीं सोचते बकि विपके माध्यमसे सोचते हैं। बात पही है। इस सम्पनी सस्पतासे वार्ताकार सहायता से सकता है। सामायके माध्यमका एक बाहरण 'भावपर्म माम्यात्मिक प्रश्मॉपर मनापिकासे विचार होता हा है। प्रत्येक युप वपा प्रत्येक विणा बनेकपा माबोक पानाती उत्पत्ति है। [प्रसारिका पुताई दिसम्बर १२५] इसे विक्षपोके माप्यमसे मौकहा पा सम्मा-'भरीरको तोहम मपनी माहीसे रेखमात्मा कही रिलायी नहीं पाती। कहीं बास्माई मौ क्या है भी तो क्या है ? कहांसे बाती है। मृत्यु बार परीरला नाश होनेपर कहो पाती है? क्या पतीपर गैरकर भी गाती है। परमारमासे उसका क्या सम्मान है। मायासै उसका सा माता? यह संसार क्या है और मास्मा इससे किस तय गुप्ता-विपाती है, ऐसे सारे बाप्मास्मिक प्रस्नोपर हमारे मारतवपमें प्रापीम कासे हो विचार ऐवा पा है। विचारनि बपने-अपने से सोपा है, अपने चरम पार पसाये Part विसिष्यापार शिानदार, समिताबार ऐसे ही बनेकपार है ।

रियो वार्ता मौर श्रोताकी मानसिक राशि सामाम्प स्पसे कहा जा सकता है कि 'पानाने सायदो होगा पाहिए मारमनपर ही उनका सुप निर्भर है। इसोको विनोबा भावे रिपोक सरा इस प्रकार कहते है मारवाको वपने परोपरगा होना चाहिए । यही सच्चा स्पराग्य हैमाबमें ग्रामक्ति है। उसासे यहाँ पसेका निर्माण होता है। मापकी पारतकी सारी बीरें गांवमें पंच हो सकती है। गांवमें कपड़ा बन सकता है महान बन सकते है। बो घोड़ी-सी मबर बाहरसे चाहिए. यह भी मिस सकती है। इस तरह बहुत सारा काम पांमकी मपनी पक्तिसे होना चाहिए । हम बाते है, तो खुद अपने हासि भाते है दूसरोके सरसे नहींगा सकते । वाया हमा अपनी ही पचनेन्द्रियोंसे पचाते है, हमारा मोबन दूसरा कोई नहीं पा सकता । पाबको खुदकी ताकत बब मोमी मी गांवमें सराम्य बापेमा-चो मरेगा बी स्पर्म रेखेमा । साग बना पाहते हो तो मरमेकी बारी कये। गांव सुखी हो गांव मापार हो-यह पाहते हो तो अपनी पारतसे नम करो।' [पिबेरपी प्रवचन-महसे ] इस प्रकारका एक पराहरम मौर। पंचवर्षीय मोम्मा गौर नारी गोर्पक पातमि हा भया है 'पंचवर्षीय योजनाओं से मुख्य उद्देश्य है- [4] कोकि किए उच्च पीवा-स्तर और [.] सामाविक न्याय [रियोसमा प्रसपर रितम्बर १७] सामाग्म योगा इससे क्या समपा ? ससो मनमें बीवन-स्तर और सामाजिक न्याय स्मी पारमाएँ बर्मेपी मोवाके मनके सामने कोई चित्र सस्थित हो सके इसके लिए विशेोका उपयोग करता होमा--'पचपर्पोप पोरनाका पहला गेम कोपोटो मुली बनाना, रेपमें इमान पैरा करना है कि सबको मना बामा मिडे बम पम मिगे, पोको मन्छा -

म्पिो-बातनिशिप
हवापार ममान मिसे। समूब रेसका हिसाब सपाकर देखा गया है कि
देपका हर बारमो हर रोर सिफनये पसका पूरी जाता है। यह
चौसत हिसाव है, इसमें उन दोयोका भी हिसाव है, दो ऐम समे-बाठ
शमे दूधयो पाठे है। इसका मतम पह कि रेशम ऐसे गाव लोप है
बिप-पीके दर्शन भी मही होठे। पंपवर्षीय पौरमाके आप हमें ऐसा
उपाय करमानिसको मालाना मर पेट मिल सके। मतमा
कि हमें मोगा इन-सहनका स्तर ऊँचा रखना है। 'सामाजिक न्याय'
को भी विपके माम्पमसे प्रस्तुत करना होगा।
पाहिस्पिक वातावा भी विशेोकी भक्तिमा पयोप रिमा पाहता
है। मह कानी अपेक्षा सिमा ही प्रयोडॉका निर्माण कराठी .
यहा कि 'यह सपना है बो इंधने बास्मा पूषटको माश बोर
परीरको बारकप पपस्थित करती मपिक विषमय व
मार्पक होगा।
विमात्माका एक सापन तुलना भी है। बस्तुदोषी तुम्ना 0
भी निमारमाता मा सकती है। इसके लिए अपनी कथ्य बाकी उपमा
हम दूसरी बस्तुसे है। काम्ममि तो इसका म्यबहार मत बनित ोपा
।ससे कायन सौम्दम भी गवा है। उदाहरणार्थ, रामसाप दरी
मानेपर उर्वो पूषित हो पपी पी रसन सोदर्य मशिन पा गप्प पा
देफिन मुसिके बार उसका सौन्दर्य शिर नियरबाया। महाकवि कामियम
प-मगा से एपममा निल मानेपर मोरसे यूटी पण
हो पा रात के समय बिना ऐषाठी निधी रुपर दो या पाश्री
पाप हो बोकमारके मिरगी न होकर फिर सपो ममी हो।
इसी प्रकार कासिवान काल बारटोमें माती मिलीको बसोटीपर
विवी सरसामने विधित करते हैं। चारधन अपनी रिमिमी
भारमाको पिडा पति पर मिए पहते है--मन मोर रहा
प्रस गोसे । इस यो मनपिमत उगारम उपस्थित विमा सकते है।

रेडियोवार्ता पौर भोताकी मानसिक दुरि बनुमनी पक्ता इस प्रकारको तुलनार्मोका म्पपहार अपने मापोम सरा में किया करते है। कुछ उदाहरण मात्राय मासे ही सीविए- '१-मारी दुनियाम विकारका प्रवाह इपरसे-चपर मौर बरसेनपर बता पाता है। मानसूनकी तरह कान्तिकारक विचार भी बाहरसे यहाँ मायेंगे और महसि बाहर बायेंगे। हबाकी तरह विमारको भी किसी पास पोटकी पहरण नहीं होती। विचारको कोई भी दीवास नहीं रोक सकती। २–मुक्तिका पर्व मह है कि मानब मफ्ने निकोबीवनको एम्प बनाये मौर निस-माबके जीवनमें विलीन हो गाय । विस दए मरी समामे कीन हो पाती, सप्पी तरह मानव अपनी पारी शक्ति परमेस्सरमें कीन करे । हजार मस्तको हसार हार्यों पर हमार नेति इम मिसरप भवान्की सेगमें मग बाम भो हमारे सामने बम। -हिन्दुस्तानमें बो तीम-बार यो समाद हो पपे है, उनमें हर्पका माम बाता है। कि कपरेका वर्मन वाया है। वह मेरे समान एक नाचे भार एक पर घोपी पहनता था, किसानकी ठप सादमीसे पता था। रामाकी यही पूरी दी कि सम्पत्तिका सबस्स दान देते पाना । फिरसे माना गौर फिरसे पन देना- यह क्रिमा पन्ती बी । सूर्यमाएपप समासे पानीच हे पाते है और जिना पाते है सतना बाबमें सौटा बेते है। पारा पानी के पाते है और मीय पानी ये बाते है । इसी प्रवर रागाको होना चाहिए। [निमेसी' प्रवचन-सम्हसे ] एन समी ग्यारोमि यह रेवा वा सकता है कि किस प्रकार गम्भीर पते भी पार होकर मायोके सामने मा जाती है। हाँ तुमना करते समय को सबसे बड़ी विधेपता होनी चाहिए, यह इन समी उदाहरणोम है: मप- रिषित बस्तु या विचारको सप्ठ अमिम्पक्तिके मिए सनी उपमा परिचित पस्तुमस पी यानी चाहिए। पर हम करते है कि विचार हमाकी तप पीसे-कहीं मावा सकता है तो मफ्ला कप्प सा होता है, पेकिन अगर +

रेशियोपात्ता-मास
इस एस्पामकी परतीका विस्तार म्पषित करने के लिए को-सरकार
रेगिस्तान समागका विस्तार तो भारत के दिन सोनि सहाराको नही रेखा
है, उनके मममें पमपानके विस्तारका कोई सा पिप सामने नहीं
मायेपा । उपमा परा परिश्वि बस्तुमसे ही रो बानी चाहिए । हो प्रम
हो सकता है-न कोनों की परिचित प्रस्तुति ! बालिगरफी नही,
मौलानोकी । मोर इसलिए यह मानमा अमिषार हो पाया है कि
बिसके थिए, मिस पो प्रोताक सिप वार्ता प्रसारित कर है।
बार्ताकारको इस बावत्र पान रखना पोया कि सभी पाती
मिप है महिलाकि सिए हामीमकि लिए या शिक्षितों एवं
साहित्यिक लिए है। पोता-गोया प्रभाग मित भर पातारी समा-
पर पाता है इसका विपन हम बामे यथास्थान करेंगे। यह वमा हो
कहना पर्याप्त है कि माता बिस बके दिए सबकी परिमित बस्तुझे
राही व चित्रमयता माली पाहिए।
विधात्मता सबरी मषिक वाफ होठी संसाएँ । बीबी
पस्याका सुमना मातामोंको बहुत ही बरुविकर होता है। सभी अनुपपी
महारफायने इसपर और मिमि बोकोर कमसे कम
म्पहार होना चाहिए । धान एस. कास पा सम्म से है कि
'नीरसमांकनको दर रथिए । मेकिन मोटिविमा काम तो पहनेवम्तम
नहीं इसलिए इन्हें भी बाक्पा और प्रभावोत्पारक म प्रस्तुत करता
पाताभारका कम है। इस पोम पड़ी-बड़ो समायोंगे
चिमि परिवर्तित कर बौरिए। पहरण के लिए सा कि पेट गवर
कहा है कि पापिर नगर पौरमापर बोलते समय मौजामाको
बासीको सपनवाडी मरेना चाहता है। आमता है कि सामान्य
मोठा लिएसे मगरमको वर्ष नहीं ये ही पवारसार
भी। मैपिन बार यह इस नये मगर र म्परितो एक
भरना पर होगा और हर मविपाहिन सम्पति मुनिलामो सप्पण

रेसिपी-बाता और माताकी मानसिक पहि एक फर', तो यह ऐसा कापा है, मिस प्रोता सरसमासे ग्रहण इस तरहका एक सहरम हमसोय प्रसारित पामिसि है। बाकाय पापीसे प्रसारित मामिमि पपिर मोरस मांगोही प्रस्तुत किये बाते है।'नवीन मारतके टीप-स्पान' पात्तसि यह एक मंच है- 'मयूरामौका पानी पर प्रतिवप पोरमूम बपमान मौर मुधियार, इन तीन रिकी कार एका मूमिका ममिकबर या मोर रस सिवनमे ३६ हाच मन मतिरिक्त पान मौर बाबर बंगाको प्रविषप [ भाकामबासी प्रसारिका प्रतिमन १९५५] परमुष सामाग्य पोसाके लिए कासमोर माठ साव को मन्तर नही पाता। इसी प्रकार, पसा हाच मन सा ही ४. सास मन । इन बोकोसे कोई निश्चित धारणा इनके सम्बन्ममें नहीं बनती। लेकिन पार्ताकार पाहे ती निषित पारणा बनायी गा सच्ची ईमयूरापीके पामीस मन प्रतिवर्ष बंगालकी परतीमा एगभग पांच रिम्मा सींचा गाया है- बीरभूम मंगेपण गरमान मोर मुगिराबारकी छ घास एका बरती। उसमे उपर मोदी है। बंगालको बम निमप २५हास मम मषिक बाम और चावल मिम पाहै। इस अधिक उपसा मतलब यह है किया र मादमीको बाहर साह २८ पैर मनाय मपिक मिह पास मनारसे कामपाका हर माश्मी-कदा ना मोर बबाम स्त्री-पुष्प- अगममग महीन तक राज भोर पा सपथा। इस प्रकार मौकी पतिका उपयोग कर यो-पोवामौको मानसिक एसिपिए पर्याप्त रोष: सामग्री उपस्थित की पा ही है। ८ रेडियो-मार्ता और श्रोताको ग्रहण एवं स्मरण-शक्ति श्टया मैदानमें जब निश्चित समयपर करत माईपस्थित होता इस रस एका पोह करके अपनेडो विषयी एमाहा। रियो पाता-प्रसारमो समय मोता हमेशा ही माताकारके सामने बनुप- स्थित पता है ममतः यह मय बना रहता है किम्ही या मी एकापस मोह तो नहीं कर पा है। रेडियो कार्यक्रमो सार्थकता के प्रसारण ही पनकी प्रेपनीयताम है। पाताधर अपनी वार्ता प्रसारित कर देता है, यही उसका काय समाप्त नहीं हो पाता कि ने यह भी सना है कि दूसरे परपर उसकी बात प्राण मुनी ही नहीं गाती बलि प्रहन मी की जाती है। एक अनुभवी रिमो-मेरक पता है किवात्तोकारकी तुम. पर यदि कोई ऐण पत माया गाय विसकी जाती-धुमती बत्तियां माता- फारको सूचित करती हैं कि तिने लोग पसकी मार्ता सुन पे और उनपर उसकी याममा प्रतिक्रियाएं हो हो है हो र मफ्ने प्रसारप पार्यकी एफसतारा पुछवान हो। ऐसा कोई पत्र सभी पता नहीं है सलिए वापिसो प्रसारगरे पहावेसे दो नाबाई पना। कि उसी मार्ग उसके मोटामोके पास पहुंचे है। इस पपा मग पाह है कि माताकार मोहे प्रोडा पसे सरसासे उमझे उसे बदन रम्यिो-वार्ता और भौताकी करे, उससे प्रभावित हो, उससे पाना प्राप्त करे मोर बापस्सना समझे वो उसे स्मृम्मिोक कोपमें रक्षित रख सके। मंसा पहले का वा दुका है, रेशियोका पोता निबम्ब-पाटसि मिन 1, उसे प्रसारित रेडियो कायक्रमके किसी को दुबारा सुननेकी मुरिषा मही । रेरियोसे काम्प-प्रसारण सम्बन्धमें बोनामी गडी मार है- 'मुग्ति परिता पानसे भिन्न परिमाप उसे प्रसारित रूपमें मुमते है ता सका मपिनाभिक मेरा एक ही बार प्रहण करनमें मापको समर्म होना चाहिए। रेशियो-बाकि लिए भी यह बात बिहान सही है। माता मिमी पार्ताको एक ही बार सुनकर उसका मभिकापिक म प्रहल करने- में समर हो सके इमन अधिक उत्तरायित वार्ताकारपर है। इसके लिए सबसे पहली वावस्यकता यह है कि पाकिपरकी भभिम्पति साक पौर मुख्मी हुई हो। योंके सभी अनुमको प्रसारणकर्ता पम सरम एवं सप्ट पमिम्पपियको प्रसारणकी पहली पत मानत है। देखने और होम यानी सीपी और छोटी-सी बात है, पर मनमरमें स्मए ममि. पपिच बहुत ही कठिन है। प्रसिद्ध माला रस कानेंगी कहते है-सस्ता के माल मौर इसकी कठिनाईको कम मा समाहिए । बमी हाम हो मैंने एक मारिप करिको अपनी कविताएँ मुनाते हुए वा। पाये समय तक वर्यकोंका रस प्रतिसत भी यह नहीं समठ हा पा किंबह फिस विषय- पर बातें कर रहा है। बनताके बीच बार म्पविक्षणात पोषनमें भी ऐसे पातपिर बहुत है। अपने यहां प्रसारित पाबिॉमसे ऐसे मनेक बंध पाव किये पा सकते है, जिन्हें बस एक बार मुमकर समझ छेमा पनि होनही मसम्भव है। 'भाकावामी प्रसारिका [मानबर-दिसम्बर १९५७ ] में प्रप्रपित दो मानिस एक-एक मप मत है । पहला प 'माधाय मताभका ररवार पीपक याति है मनुष्य हरप मार मस्तिष्कमा पौरख पप-वन साहित्य में मपिम्पक्समा तालाब उम साहित्य को बा हम नामोचना रेशियोमाता-भिस Yg करते है तब हमें बीस सत्य दृष्टिगोचर होता है कि अपने युगरीबनके म्पके मौतर पर ही रही परिस्थितियॉर्म मनुष्यने अपनी मानवता सीमित स्पको मनन्त बनानेम प्रयास गिया है। अपने पुमा पूगा-सामग्री से मसीमको लासना करके सीमित मानव अपने साहिपके सत्प्रपाससे नसीम बन पानके सटायल करवा परम बा पा है। कि युग मारम्न करके बाहन उपनिषद् तपा पुरावोंके युगोको साहित्यिक सापनाका पर्शन करते हुए वर्तमाल युम तक पहुँचकर हम इसी सस्पका साबात्कार करते है कि प्रत्येक साहित्यमें मनुष्यने मपने सुपरी सामग्रीके भीतर ही अपने युपी परिस्थितियों के भीतर ही बपन बनम्त सापकी साधना करनेका प्रयास किया है। मह एसप वम 'रोमांस पीपक पाका है पूरोपके इतिहास के पृष्ठोंको उष्टमेसे पहात होता है जिसम्पूर्ण मम्प युगके पर्व पीसो रोमन रीति-रिवार तथा एकीन तबके सूरेनिक रीति-रिवामि एक विचित्र विभावत है। दोनों प्रकारके रीति-रिवार सम्पदा निर्मानी मोर बसर दो पेपे परन्तु रोकि माग भित्र मिल थे। पुमीमतन वर्पने सभ्यता के लिए सामाग्य मिमि धर्म निरपेश सरसार, पीखा कविता और रोमांस प्ररान किया। इस मौकमि रोमाघ एक महत्वपूर्ण म पी। हम दोनों पयरोगी दोषपम्यवाद सम्बन्ध, अपनी बोरसे पुण कामेकी मपेवा पही सरित मात होता है कि इसके साथ ही सरल एस- बभिम्यक्तिक बाहरम-सम्म भी एक रपट कर रिपा पाप । मा पंप 'सरिय' पीपक वाहिया वार्ता भी मामपवानी प्रसारि हुई थी। ग्प मेपमें यह रेखा पा समता है कि सत्यकी पोर-4 पम्भीर विषयकी प्यास्मा किस प्रकार की गयी है 'यह सोश्य रिचार है क्या? पहली बात यह समझ मेनी चाहिए या कोई बार नहीं है कि प्रचारक बार मात्र प्रचलित है।

रिपोवार्ता पार पोसाकी
एक मुक्त विचार है। महात्मागीन सर्व गोर रेकरमापा हि उमाने
किसी भी प्रकार वारकी स्थापना नहीं की है। वह तो वह अपनी
पोमें मे रहे। इसी पानमें महिमा मपमा मर्कोपका विचार
मिता पा।
सस्पती शाम महरमागी साप समाजापुरी या गाण् म्होम
निकाठा सतनाही सरप-सो बात भी नहीं है, और मको
सोदय विचारपाठा एसा रहेगा। सत्पको पाप मानव-नीवनके प्रारम्भिक
पारसे पी मापी और पब क मानव गाति छायम है, परपोष
परती पेपी । मानबही यह सबसे बड़ी पिपठाईकिबह बराबर मायकी
बोगम मा पा है। यह उसका सहन समाव है। समापका छोटा
बन्ना बारस पुण्या-बागो मह वपा है। तब बह सम्पपी पाप
होकर रहा है। मसरप तोपर टेठे गा मिया गा सहवासा कि
दुनिया में हर दिन होता है।
महभप प्रमिट सर्वोरम मा पत्रकाप माण्यम बात।
पानेकी मावस्यकता महीं कि बनवा समर्शमें हार मे मनी बातें
प्रायत पर सम्मामेवाहापक्कि अमिम्पमिमें सरमा मौर स्पष्टताक
महतको मठीमाति मानता है, पर होगा सामने मस्सए ऐसी नहीं
सन्टा । प्रस्मस भापपाम बसट होना सतरा कम रहता है। पत्री
गौर रहमी हुई माताको मुनकर बर पसको मुंहपर हमाइयां वाम
माती है, तब सममशर बमका मफ्नी दुपा सत सातो गाठी है।
मोगमोंकी प्रत्पम अनुरस्थितिक कारप रीपोमातमि मस्पष्ट होना
बराबर होगामी बर्षा हम पहले ही कामापे है। पातमि
मस्परता नहे, इसके लिए पापस्य है कि मातापी पसरली सीपी-
सारी बार सरत हो बापाको मुमा-फिराकर ने कहार वित मीचे
रंपसे कहा बाय । रेडियोले समय समी अनुमती म्पति इन मार पोर

रेग्यिो वार्ता शिप
ऐ है ।बान एमाह कहते है-सरमौर प्रत्पर होइए।
को विधारों की माने रीगिए, पर उनके समय साहिए ।
पाताही मोमगम्यता मानेके लिए गुण मौर गावापर भी ध्यान देना
भाषस्यक होता है। विषमया दृष्टान्त उपयोप सामान्यके समर्थन
विपके म्ममहार माविकी पर्वा इसके पसेनाले मम्मापदं हो पुगे।
यहाँ हुए पोर बााकी बौर समेत किया बाया है। अपने पप्पोको स्मर
करने के लिए कभी-कभी उनकी मानुत्ति भावस्पक होती है बोलो इप
बने से सट हो जाती है। हो मा विभिन्न समातिम गायी
बाय यापरी अम्मा प्रपल हास्यास्पर समेमा । सास मा एवं
पता इस बावक महत्वको बन्ने रह समभने । उगहरपके लिए,
'सर्गेश्य पातकही पुष वाक्य है
मानब एक सामायिक प्राणी है, पर यहां मी बह पापा बाय
छोटे-बो हप्नाकर पता है। माना-धोबन समूह या समारसे सम्प
बादी नहीं सकता। मनुष्य मना नहीं प सम्वा ।
यही मन्तिम दो पामि पाले मायकी बातको ही दूसरे दूसरे पाहा-
पुरामा मया है। गम्भीर विपर्योकी स्याम्पा गे मावृत्तिको अपेमा
और मषिक होती है।
पातामोंकी मोपमम्पत्रा बहुत अधिक वापा टेशिनमा परेमा
बरसे होती है। पार्दा सामाम्पत अपने-अपने विपयो विशेषम होते
है और विपकको प्रस्तुत कर समप उममें अपने पिपपरे पापीय
पीक पहारको सामाविक प्रगति होती है। शानिक अपराधी
पाएर, पोपचारतो कहा-पिरोपा-ममा भपने पिपपपरपोतने समय
पापा ऐसे धास्त्रीय गाँजा पाहार कखे। जो मामाम्य मोगा
समझ पादर है। मातापरको पइमे हो यह मौर सेना पकापा
मग भेषो मरे विशेषमति ही पा कर पा है पासमार शामान्य
पत्तियाँस परिबह सामान्य पवितपाठक अपने विचाको पहुँचाना

रियो-पाई और मोत्ताको हए कपाळ पाइताबो से माने विपयरे टेक्निका पदा म्यबहारम अपना होपा पदि कोई ऐसा सपमा हो जाय तो उम उमकी पासा करनी होगी। प्रसिरहानिक पदीयम् बामका परिचय देने कारवाई बोसने १५ सपनी मासुसे ही रित-पाकीय तरपनि प्रभात अध्ययन करना प्रारम्म किया। रे तरंगें है जिनमे स्पिो डाग पनि प्रसारित की जाती है। उप ममम म परमाला उरण मान या नहर करनको बम रोनिशात न पी। वासने इन नगरको रत्पन्न करने के लिए भरयन्त मुरिधामन मोर प्रो स्थानम वा मन पोप्प एक यात्र नामा गिममें पाटिनमा दो पालोरीच पिनमारियाँटना पर पौर इस प्रकार विपुल गत्वप होठो भी । [प्राकामवामी प्रसारिका प्रस-बन १९] पस मेपमे "वित-एमकीम रंग एक निकम न माया है। सामान्य पोता इस समझ नहीं पाया। यह मही है कि महा माकाग्मे उमडी माराका प्रमल किया है पर यह एक पंक्तिी म्पापा [ तिम रेरियो द्वारा पनि प्रमारित की बाती है अपर्याप्त । इममे धोना यह समम नहीं पाया कि यह पनि कहाँ ोती हैारतीपर पा पाममानमें' इनको विपता क्या है मादि । विपुलरंगांकी पानयापर ही बोमकी इसे सम्बन्धित पोरका महाल निभर है। वार्ताकार उत्त म्यार बरने मोठाबाको सामान्य सम्दारहीम उठा मना था कि माप मेरी गो माबार सुन रहे ह साधारण मनि-रंग महार नहीं रिमो. तरपीक महार मा की है । मापसे सो गय पर हुए माश्मीको मावार जित्नी रमै मापक पाम पहुंचेगी उसके बहुत पहले ही मेरी माघार कोर्मोनरी तय कर मापके पास पहर पी है। सापारण पनि-सरप पपीका कर तगाभेमे कम-स-कम ४. पटे रेपी गा ितमो वरप एक शाम पीने सारे सव बहराती है। समातेर १२ म्मिो-बात-मिस है इसकी मति । इचाको विपुद-तरेप मा मह है। दोसने इसके पुषोंकि सम्पबमें पो होर की बहन हो मतपूर्व। मारिवानि । समी भेष विपनाको सामाम्प मोवाकि बिए पाता प्रमाप्ति करते समय इस मापर म्यान रखना चाहिए । मोवायमि अधिक मामा मनुमान कर मेना बाकी बोपगम्यतामें बहुत हो पापक होता है। मोता एकही मानसिक स्तरपर नहीं होते। उनकी पिमा संसार, मान हमी रिमित स्तरोंपर होते है। पाभिरको बिमित्रताोपर प्यान रखना है। उसे मपनी माताको उस स्तरपर रखना यहाँ राजपिपवित्र मोवाक सिए बोयम्म हो सके। ऐसा न करता माताको मतकात बनाना है। प्रो. बर्मनने रेडियो वार्तामोंपी गोषपम्पा सम्मम्ममें बोग की है, और में इस निष्कर्पपर पर सबसे कम समझमें मायाको पात्ताएँ नही हो. निमें पार्ताकानि अपने प्रोतामें भानका अनुमान र सिम्मा मा। नेट रनबर भी यही बात यह है पुण्टोन मपन प्रोतार्थोकी मौसि मुवनाओं को पाव मभिक मान मेरे मौर पनकी बातें प्रोवा के सिर परसे ही निकल जाती है। सचमुच बाकारको सपना है कि उसकी बाते मोतार सिरके उपरए ही न निकल वार्य गति सिरके भीतर पहुंचे। भोताममि मि प्रकार मषिक मानका अनुमान कर मिमा भावासरा परिषप बररी मा' पीपक बातकि इस मंससे मिल मा सम्वा है। पाकिार मरि- की वर्षा करता है: 'इम मन्दिरका पितर उत्तर भारत पिलरमन्दिरोधी मापती॥ है जिसे पहनाया रिवर मीम है। इसके उपरी छोरपर एक मामल सरीता काई। मसकनवाकी पाटीमें इसी प्रकार मन्दिर है और पमा समाप लिनुको मापनाते है। परन्तु पास हीदी मन्यक्तिी पाटीमें पिक-मदिरों सामाग्प है। समपर स्पष्टपणे तिष स्थापत्य रेरियो-वार्ता और प्रोताकी मलाका प्रभाव है, यपि स्वयं केदारनापका मन्दिर पूनानी पैडीकी मार रिखता है, विशेषकर उसके बमभापमें बने हुए एपरका निकोग। [रेरियो सम्ह, मम्बर दिसम्बर १९५] इस परपसे सह है कि पाकिारने यह मान लिया है कि मोता स्थापरप फलाको विभिन्न पेटियोंसे परिचित है। स्म-सपर बह विभिन्न सियो परिषयके सिए क्ति देता है पर ये कित बहुत मक्षिप्त मौर अपर्याप्त है। बाशिर यदि इनके बर मम्पिक पम्प-विक उपस्पित कणा तोरे मोताकि लिए विरोप बोपमम्य होते। बी.बी.सी.पी पामोंकी बोबमम्मताके सम्बाबमें प्रो. बनन गाय की पदी जिस बोगका उम्मेह पहले किया पपा है उस इस मालपूर्ण बात का भी पता चलता है कि पायोको बोषगम्यता केवल अपिम्पक्तिकी सरता और सम्वापर ही नहीं बक्ति विपयकी रोषमता पर मी निर्भर है। उक्त बोसके मापारपर कहा गया है-रोचक पार्ता उस बाली अपेक्षा सरता समक्षी पाती है, जिसे समचना बास्तबमें बासान होनेपर भी विसका विषय नीरस होता है। बात सही है। जिस विपयमें मनुष्यकी रवि होती उसकी बोषणम्पदाम को पार कठिन घम भी पापक महीं हो सकते। इसीलिप सभी रेरियो कमाविरोपा मार्गकी रोषवापर पोर देते है। बान एस. काश्मिा कपन है-'इसका निश्चय कर हो कि विषय सामाम्प रुपित है। नेट रनबर यह है विविविजनके इस्पत्व के साथ मरि सफलतापूर्वक प्रतिद्रिता करनी है, वो रेमियोपार्ताको प्रोतार्मोका म्यान अपनी रिपक्वस्तु मोर बमिम्मति कसारा माठ करना पड़ेगा। वार्ताकारके सिए रेसियो-पाचमि ऐपता के महत्वको स्वीकार करना मावस्यक है। विपकी ऐपमा प्रमाण या माश्य कस मा सकता है कि चि म्पत्ति-म्यक्तिक मनुसार परमती एनी एक म्पतिकी - रेरिपोवा-मिस गणितम हो सकती है दूसरेकी पर्सनम तीसरेपी साहित्यमें इसी प्रकार विभिन्न व्यक्तियोंकी रषिया बिमित पियाम। यह धियोंक मिन- मित भरातों और प्रशारकी बात है, यह अपनी जगहपर सही से मस्वीकार नहीं किया जा सश्वा। गेकिन हचियाका एक सामाग्य परावत भी होता कुछ ऐसे स्वर मी है यहाँ पक्ति-म्पतिकी रविका अन्तर मिट जाता है। लस्वरोंपर बात करके वार्ताकार अपनी पार्म- अपिकाप मोवार्मोक सिए पर बना सकता है। यहाँ कुछ ऐसे स्तरोनी बात की वा रही है। ममोजानिक मानव-मन मप्यमनकेशारा इस निर्पपर पहुंचे है कि मनुष्यकी सबसे अधिक रपि स्वयं अपने में होती है। प्रोफेसर पेम्स हा पबिम्सन कहते है कि मायनेकी परिमि हम लोग हमेण ही अपने विपममें सोचते हुए मातम पहवे है और इमोर्मिसे पिक तोप बारते है कि सोते रामेपर भी हमप इसी प्रकार सोरते पाते है"हमहोपों कपिए स्वयं अपनेसे वापर दूसरी कोई मी पेपर वस्तु नहीं है। माता- कार मनोविज्ञानके इस बप्पपनसे ठाम रटा सकता है। मात्तति विपरका सम्बन्प मोगमा बीपतसे होना चाहिए। मोताको दपि चापीय मोरनामें बम-उसालमें स्वनी नहीं गिनी स बात है कि बन्न-सत्पादना प्रभाव स्वयं रसके बीर पटक हसरे म्पक्षियो बीयन पर क्या पोगा माप-तौमकी नयी मेट्रिक प्रमानामें उसनी चिमही जितनी त बातमें कि यह नयी प्रमामी उसक बीवनको लिम प्रकार कामानित की। इस प्रकार किसी भी पाश समय पोशारी पीपनसे पौडर से रोचक बनाया वा समसा है। इस सम्मम्ममें बान एस. पारित एक सदाहरण देव है- जोगी रोटीमा बीच मभी हाल ही प्रसारित एक पार-विवार इसका बड़ा सुपर पूरान्त प्रस्तुत बरेपा । रिवार एमाष्ट्रीय विपपपर पा, जिसके लिए समतामविक इतिहास पानीति मारिक विस्तृत मानही अपेभा भी। विना मन्स रेशियोबा पौर मोताकी होता मगर मोकि स-सासमके गुण-दोर्पोपर माद विचार प्रस्तुत किया गया हवा । सचमुष या विषय एसके कि लिए वपिक रविकर होता। यही बाकावामोसे प्रसारित मातामोके सम्बन्धमे यह करना उचित मात होता है कि मुमके विषय पात्तीकार नही मिश्चित करते रेरिमो कार्यक्रर्मोकी फ्रेचा बनामेवामे यहाँक अधिकारी ही निश्चित करते है। वेही बाताबोके विपर निश्चित करते है और उनपर बोम्मे के लिए बात्ताकारों को मामलित करते है। पात िदेनेके इम्त पक्ति मो कभी- कभी अपनी रचनाएं विचारार्प मेलते है, पर कि उनमेस ममिको रफ- माएँ पाता नही होती, सीहत नहीं हो पाती। मयाचित रचनाएँ मी माताको दृष्टिसे सफल होने तपा बाकावानीकी नीति बम होनेपर स्पीकत होती , और हो सकती है, इसमें सनेह नहीं । विपय का निरषय बाहे रेडियो अधिकारी करें, बाई वार्ता ने बाकाची पक्ति समका प्यान मात्तकि पेचक पक्षपर होना चाहिए। यह बहुत ही मारक पूर्ण मान है। मैं समझता हूँ कि यो वार्ताको रोचकवाकी मितनी कठिन प्रतियोपिवासे मुरारना पड़ता पतनी बार किसी भी साहित्य-सको नही। सूईकी नोंक मिनी पूरीपर गीत पा रहा है, माटफ होणे, बिनकी रोचकतामें सम्मोह नहीं किमा बा सकता। इन सबके साप रेडियो बात्तको प्रतियोगिता है। भोता रेरियो-मार्ता मुने और मुनता प्हे, सूर्य को गीतमा स्टेसनपर म हमारे पाकारको इस बातपर ध्यान देना है। इसीपर उसकी सफमता निर्भर है। मौर मह पिपय मोर मभिम्पतिको रोपवाद वाराही हो सकता है। रोचकताके सम्बन्पमें दूसरी बात प्यान देनेकी यह है कि मनुष्य विचारों मार मासे मधिक दूसरे बोकि बीवनमें ममिचि रखता है। दूसरे कोगोंके जीवनकी कहानियोंमें मी माऊपण होता है। कहानियों और उपम्पासोम को इतनी रोचता होती है, उसका यही इस्प है। वित मामिोके विषय मानवीय वत्लास सम्बल में रोषक होंगे इसमें रेरियो बाता-मिस सम्मेह नही। पापाविपरमों मपने भानुभयों बारिसे सम्बन्धित पातमिमि इस मनोहानिक सस्पका उपयोग किया जा सकता है। बमीन मोतामोंकी बोप-सक्ति और पातकी मोमगम्यता सम्बन्धमें विचार हमा। यब हम मोतामोंकी स्मरक-राक्सिसे सम्बन्धित प्रश्नोपर विचार करेंगे राकारको अपने मोवामांनी मानसिक पक्सिममी पान रखना परता। कोई भी माय स्मृतिमें टिक सके इसके लिए ये सभी बातें ममिव जिनकी पर्वा हम पर करणे ऐ मा घरस और स्पष्ट हो सहन पोषपम्प हो उसमें विजारमा हो पाप ही मनपा पहा प्रभाष गनेकी पति हो। इसके अतिरिक्त भी कुछ और है जिनपर प्यान ना पावस्यक है। एक ही बार बहुत-सी बातों को सुनकर उन्हें स्मरण रखना सम्भव नाई है। सामान्य मोताको मानसिक पति सीमित होती है, यह एक ही पाप बनेकतप्पोको प्राण नहीं कर सकता। इसलिए यह मावस्यक है कि पोटी- सी परपिकी मातर्मि प-सी बातें मनही गाय । बाबासवानी प्रसारित पार्तामोडी बपि पांच मिनटसे कर बीस मिनट तकली होती. बोस मिनरमानी वार्ता यो विप कापामोम ही होती है, यमाय वाचा अबपि रस फिट रहती है। समिनकी बातमि बननद पोंकी रखने का प्रपल उचित नहीं लेकिन होता मरिकतर यही पूरीमाताकी बात को बार एक-एक मनुम मे तपोको रक्षा गावाजकि पोताको स्मृतिक परमही पा पाता । एक सपहरण हीलिए कम्मोकर मात्र मोरेम्स द्वारा समर, १९५४ को प्रमाणित मानोरनुसार दिएपीपीमा-कम्पनियोक पास भारत को २ सय गर पारिसिया बाती को १ परब ३५ करोड ९१ सास पी वीनार र ताव सपा प्रमकी प्रोमिममम्परा किया पाया है। हिन्दुस्तानी पीरन-बीमा कम्पनियों की पु पारा रियर, रियो-बार्ता और प्रोताही १९५लोकममग ३ मरब १ करोग ३३ सास रुफ्पेकी पी पौर मिदेसी कम्पनियोकी रूपमम ५. करोड ९१ भार कायेदी। ममसे भारतीय मोमा-कम्पनियोमे १ वरब ६४ करो। ९. छान रुपमा मानो ५४६ प्रति- मत रूपमा सरकारी सिम्यूरिटियाम ४८ करोड ५७ भार रूपया यानी १५ प्रतिपत सया प्राइवेट कम्पनियोंके हिस्सोम और .करोड ९७ हार सया यानी १० प्रतिसत रुपया पहन भूमि मौर मकानों माविम गाया या। इसी प्रकार विदेशी कम्पनियोका ३० करोड ६४ काज सया मारतीय कम्पनियोंमें और माक्री विरेपी सरकाकी सिफ्यूरिटियम सगा भीषम-बीमाका राष्ट्रीयकरण क्यों किया गया है, इसपर प्राप्त गमते हुए भूतपूर्ण वित्तमन्त्री भी देशमुखने निम्न तीन बात बतायी भी- १-दूसरी पावसामा योगमाके लिए सरकारको गोको सम्पत है। २-पहली पाचसाका योजना मह नीति बनायी गयी थी कि मानता की बमका मितमा पया हैपह सब सरकारके मभिकारमें होना चाहिए ताकि यह महफूल रहे मौर राष्ट्रो कार्मोम पाया जा सके। लेपमें समाजवादी भाषिकांचा कायम करनेके लिए भी उक्त कार्रवाई परी है। [प्रामबापी प्रचारिणा प्रोल-न १५५५] भनेकी भारस्यकता नहीं कि एक साप ने मांगों पर ठोका माना बार्ताको निश्चित भमसे मसफर बना देमा । मेकिन पाकिमि ऐमा परमेकी प्रवृत्ति समारत होती है। ये सोचते है रस ही मिनरका जो समम है इसमें मविकस-क्षिक सामग्री पोतामोनो रेमी पाहिए, पर ऐपा सोचमा रषित नहीं। इस बातको भो पार रखना है कि मेतारो पारके पूसरे कोरपर बैठा हुमा मोदा अपना यो-सेट गरम कर या पो कुछ सुने मी पसका पुछप भी उसे यार है। सभी मनुममी प्रसारणकर्ता प्रसारम-सम्मानी इस महत्वपूर्ण पाको समानते है और इस रेरिपो-वाता-पिम्स पर बोर देते है। नेट इनारका कपम है-'पापी प्रवृत्ति पात मषिक तोको भर की होती है पातमि इतनी मूषनाएं मरलेको कि उसका पम मुटने युटो हो पाय । महकी शिा ने अपने शान को इसी साप पोट सेनेकी यह परेपास्मक प्रवृत्ति है । अपनेमें पहनही मठी प्रतिदिन इसे जिम ममुशासन पाहिए, नहीं तो इस प्रेरमासे ऐसा प्रसारण होता है, बो पोतासे सिप फ्रि करा देता है। बान पसापक कहते है-एकही मापपर्मे बहुत-से विचारों का माना रमान पैदा करनेवाला होता है। पोसे समपमें माप बार-सी गायों- के बारेमें बच्ची तरह पानात नहीं कर सकते । अपने मिनटों और सेकेणी में मोर मत तपाइए। और, पैमहिनामि पी.बी.पी.को पोता-चनुसन्धान-समितिको नियमित परे अपनी रिपोर्ट भेजनेबारे हम- मप हमेघा ही यह विचार प्रष्ट करते। अमुक पारने प्रसारको लिए निश्चित समपमे बार मषिक वा मालेका प्रयल पिम्पा । पार्ण कारको इन समी अनुमती हो! निधारको वार्ता लिखते समय बाप ही स्मरण रहना चाहिए। पहा मनुषी शिनान यह कहा कि रेडियो-पातमि बातोंकी मी मरूपायी जाय छ ही सभ्य सा एवं प्रभावोत्पारक मसे रखे बारे पहा मह भी किवात्तमि मापी मुस्प बााको भुप बन्चरपर पर मिया बायाहर ठप्प भाप की पर्याप्त स्याम्पा होगी पाहिए। ममेड पम्पोको एकही साप गिना रेरित नहीं है। इससे वार्ताको प्रम मम भी मौवाको पटिमाई होगी और उस्मरण रखना वो बसम्मर होगा हो। यहीं एक बात यह मौसही पाय कि पाठमि कोई ऐसा स्पसमा ऐसा ठप्प नहीं माना चाहिए, जिसको समप्ता लिए मापे या पीछे संस्वा फिरसे रेहनेको पारख हो। मुद्रित सामग्रार पटक मागे या पाणेरो बास्मतानुस्बर फिरसे स तम्यगियोहा मोता ऐसा नहीं कर साठा, इमलीपापो होगी। रेरियो-पोतानी इस रेरियो-वार्ता और मोटाको सीमाको मानमें रखना नाबश्यक है। उदाहरणाव परि वार्ताकार कहे कि 'मरोन बीन भारत गौर यूनानमे मा कागज मौर प्रेस बिसिरसा भौर साहित्य तथा दर्षन मौर विज्ञान प्राप्त किये तो मोतारे लिए यह समयमा कमि होगा कि फिन विषयोंका सम्मपनि ठोसे है। पाठक इसे सरमतासे समप्त मा। बात्तकारको देशों और विपर्योको मसम- वसम करके समताना होगा। स्मरप-क्तिसे सबसे मषिक गत्ता तो बीबड़ी सस्मामासे होती है। पम्हें स्मरण रखना बहुत ही कठिन होता है। प्रसिद्ध सम माफ ीन कहते है कि संस्थाएं बहुत ही एकरस और बनारुपक होती है मौर में टिकती नहीं। पहें बाकर्षक मौर स्मृति में टिकने योग्य बनाने के मनेक उपाय है जिनके उलेख पहले माप है मौर कई उदाहरण मी दिये गये ६। सके सम्मपमें सनबरका यह विचार प्यान रखना चाहिए—'मगर भाप मोवाको बामे है तो उन्हें मापक लिए मापरण भी वीगिए । पहले पैसा कमा पपा है, मौताके लिए सत्तर और मम्मे सासमें कोई अन्तर महीं पाता । मपर नन्हें प्रति म्पक्ति प्रति भष्ट्य प्रति रिन वारि की डोटी इकाइयोंमें परिवर्तित कर दिया जाय तो उनका महत्व भी जात होगा और ये संस्थाएँ पार मी पसरूंगी। पातला स्प-संपठन मी स्मरम-सचिन सम्बब रखता है। मोता पातको मुमता भी बाता मोर रसे मूमता भी बाता है या हम चुके है। पालिो समाप्तिपर सामाम्प पोताके लिए उसके प्रारम्म बौर विसक सम्बत्यमें निरिक्त म्पसे गुण कह सकना सम्भव नहीं होता । पारिपना मोताकी इस सीमाको देखते हुए किस प्रचारकी हो मह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है। प्रोफेसर बेम्समे कहा -'हमारा मस्तिष्क मुस्पतः एक सम्पद करनेवाला सब। मेकिन इस समय करनेवाले यन्त्र को उनी स्तुसि मधिक सहायता मिल सकती है, वो सब परस्पर सम्बर हा मिनकी कलियां एमस से मन्त्री तह ही हुई हो। भमर हम कोई रेरियोमाता मिस मुसंगटित कहानी सुनते है तो उसे स्मरण रख पावे है। क्या ? जबर इसका तर ते 1-माप पहानी के साप पर है-बापरे एक पम पहले यो सुमा, उसको इस सप माप गो सुन है इसके साथ मोरते हुए। बहतिक बापका सम्बन्ध, यह सम्मायक्यापन ही मी करना है। इसके विपरीत हम कोई मनोवैज्ञानिक मानी है सावे । जिसमें सब कुछ भाव-नी-मार वह तना प्रभाा, एक वस्तुका एसरी पस्तुमे कोई साल महो। सी कहानी मस्तिक टिकली नहीं उसन प्रभाष मात्र प प पाता है। इसी प्रकार का मस्त-म्पस्ववापर निर्मित पार्ता स्मृति के लिए अनुपयुक्त होती है। पातमि बिधाका भवताप्रपना मायक-सम्मत कारप-कार्य-सम्बोपर मापा- रिख पात ही मफत वार्ता नही पा सकती है। मदररेदी पर्मि- 'मगर भाप मपने विचारोंको प्रेपनीय बनाना चाहते है, तो मी धावपाली- से उन्हें मुनिश्चित कमर्म रपिए, जिससे उने पानी बार मुमनेपर हो सनम कब सममना ही पासान न हो बस्ति यार रखमा भी सम्म हो। भन्तम महकमा मा सम्वा है कि कौर बाबपने पेधित मोवाई- के पास पहुंच सके इसके लिए मावस्यक है कि यह सर एवं साहो उसमें बातोंको पुमा-फिराकर नमार ही प्रापत पसे कहा बाप, कदिन समोरो विभिन्न समास्मिमि म्यक्त मिया पाय टेकनिका या पास्त्रीय पण विमानों को भी तो पनकी पर्याप्त मामा पाप मिस पपा बाप मार, उमरे बिना काम म पवाग हो यो हन छोटी शामि बार्पाम्प उपस्थित म्मिा पाप उपोदी परमार न की माप और रोषमता एवं मुसम्ममतापर रिप प्यान लिया जाय । पोसाकीमतिको सहायता देनेका एक गाय यह भी हिप्परमान बातम मन्तम पारी मुस्प बातका सारांपरि पाम सामग्री रिपा पपा1 रेडियो-वार्ता और व्यक्तित्वका प्रश्न पी.पी.सी. प्रसिद्ध सफल रेडियो वार्ताकारकि नाम है के.बी. प्रीस्टती ए. एकम सी. एच. मिटा एमिस्टेयर कूक और बान हिस्टन। इनके सम्मत्वमें एस्कन एग गेरोपियन एसनकापिचार है कि इनकी सबसे बड़ी विपता मो इम्हे दूसरे सामान्य वार्ताकाऐसे पृषक करती है, बपने श्रोतामों मऔर सपने बीचको दूरीको मिटाने की है। इनकी बातएं सुमते समय भोता यह महीं मनुमय करते कि पार्ताकार सनसे त्री दूर है। इसका कारण यही कहा जा सकता है किन वातकिमि रेडियोक माम्पमकी सूक्ष्म मपेक्षा को भी पड़ी गह रासि समसा है और समके अमुम्म कार्य किया है। तीयो-माप्यमकी सबसे बड़ी विशेषता मारमीयता है। सचमुच रेग्यिो-सा मात्मीय माप्यम हमारे युवमें दूसरा नहीं । यहाँ बारमीयताका पगार किसी विशेप मर्षमें महीं हो पाई मारमीयताका सीधा-सा मर्ष मैत्री मौर स्नेह-सम्बम्ब काही दिया पा पा है। अब हम अपने पास बैठे दो-तीन मिमोसे बातें परने करते है हमारे बीच की दूरी मिट जाती है, हम सभी मास्मीयताका भनुमय करने लगते है। सहक रेग्यिो-प्रसारप भी इस प्रकारका बनुभम करा सकता है। इस सम्बन्धमें म्पिोनेछ ममनिका कमन है कि वास्तव प्रत्येक प्रसारण एक मारमीय विसमें प्रसारमा [पाक्ति होगा सी हो] और एकाकी मोता [ममा-माम हुए कारों १२ म्पिमाता मिस्प म्पतिमोम से एक ] सहमोक्ता होते है। मैं समझता है यह बात भबसे मषिक रेडियो बाकि लिए ही सही है। दूसरे माध्यमों साथ रेडियोको तुम्ना कमेपर इसकी सत्यवा स साहो बाययौ । मुद्रण पात्रके माप्पमसे हम रेरियोकी तुलना कई इस्पिांसे कर बामे है एक मौर हिसे फिर । सानो यो कुछ कहना होगा। मिस देवा रसका कम्य मुद्रित होकर पाठो पास पहुंचा है। इसम मग मह हुमा कि समपने पाठकों के सामने प्रत्यक्ष म्पसे मही माता, पाटकमा म्पपिपरे प्रत्यन सम्पर्ष में नहीं माता । रेरियो पातमि ऐसी बात मी होवो यहाँ दाताकार प्रत्यय से अपने पोटाकि सामने अपने विचार प्रकट करता है उसका मस्तित्व मोताकि प्रत्यय सम्पमि एता है। रेग्मिोपात्तक सम्पपर इसका क्या प्रभाव पाता है, या पाना चाहिए, इसपर विचार करमेके पर सीयोकी तुलना सामूविक प्रेपनीमता सरे रपसाप माप्यसि कर मना रचित होमा । एक मायम प्रधर्म मामी प्रत्यक्ष भापम । मत्पम पापपर्म गदा बरस्म हो अपने रमको मोवाकि सम्मुत परिपत पता है, पर यहाँ यह मस्तिोस पाते नहीं कर समूहसे बातें करता है। मेटफासे भग-अलप पत्तियां- से बातेकणा सम्मब है ही नह। यही एकम्परित एका समूह सम्प, मोदा फास पक्ति-व्यक्ति पीप बो मारमीय सम्र होना पाहिए, नहीं होता । रियो पातमि एक म्यक्ति दूसरे व्यक्तिले हो बार्ने का यह दूसरी बात है कि यह इसरा म्पति बलग-अमठेहए गारों पक्तिोत्र मेगा है। पड़ो पश्विभ्यक्ति पीप होनेवाडी मास्मी- पता सम्भव है। सामूहिक प्रेपणापता व माम्पम (सिविन । टेसिपिरान मी ममता अपने ए-पोसाक सामने प्रत्यय पर पता है। यहाँ तक मनाको मपनी बात सामने पित्रमें रेसले पते ।। पहनेकी बावरपाठा नहीं कि रिममें एमाही परी मंगला परता पता है। फिम रेखो समम हम प्रापा ही मनुनय करते पते है कि रिपोभाल और पत्तिाका प्रश्न विधर्म मानेगा भक्ति इमर। फसत उनसे मात्मीयताका मनुभव नहीं किया पा सकता। रेख्यो पातमि मासाकी यह बाबाराही मोताओं- के पास पहुँचती है, और यदि वार्ताकार प्रतिमा सम्पन्न एवं अपनी कहा पुनको बह मपनी पापीसे प्रोताओंको उनके निकट होमनी उप स्थितिमा मनुमन करा सकता है। कभी-कभी हम भफ्नो पार किये मारामसे पैठार अपने सम्मुख उपस्पिा मित्रोंकी बातें सुना करते है। पाकिारणी समता प्रोपामोंटो ऐसा मनुमा करा रेनेमें ही है।मो.बी. मी के एक प्रसिधा प्रसारमा नाम है मैनिकमार । पुर कासमें बह मप्प राषिका समाचार एनिवर्गकी कुछ नाक लिए प्रसारित किया करता पासप्रसारण समय उसकी भाषार साधारण मापारको अपेक्षा प्रटी धीमी होती पी क्योंकि यह मरीसि भरे मस्साकर्मे समाचार वा पा सके इस प्रसारणकी काफी प्रपंसा पी।पातकार-पौवाके पीप सि मारमीपताकी अपेया ोती है, उसे स्मापित परमेमें यह सफस भब तक यह साहो मा होपा कि पोका माध्यम प्रेपभीयवाय समी माध्यमामें अपना पुरक बस्तित्व रखता है। इसकी मपनी विशेषताएँ है। इसमें पति-पक्तिक पोषका पमीय सम्मय पता है। बेवारसा तार सबमुन सनीव तारोको मिडामेनासा होता है। इसमें एक पवित गोमता है ऐसा मनुष्य को मशीन नहीं है, पामोफोनम रिकार नहीं है, नियन या किस्मोंका चिपमहीपति एक समाव प्रामी है। यहीं पातकारक परिवारका प्रम माताहै। रग्यो-पातमि म्यक्ति विशेष योगता है, इसटिए मनितालका प्रश्न सामाविक ही अनुभको प्रसारमामिनि प्रसारणमें व्यक्तित्वको सबसे मपिक महत्व दिया है। फियोनेल पमसिनो पदाम-पस सबसे पपी मामी सबर को विशेषता है-पश्चित । माफोनके माध्यमसे पतितके कमारमा प्रोपगार हौ किमी प्रसारमकी प्रमागोरावस्याका १४ हिमो-पात-शिप बनमा-वियना निर है। मपनी पुस्तक 'मारकास्टिग' में बिग मैषिधन- का मन (-प्रसारममें सिम महत्ताबीपन-रि-यह प्रसा रम पाहे मनोरंकनका हो, पिलाम हो संगोवा हो, या मोर मिली दूसरे प्रकार कार्यमान हो । साउन मामलोम प्राधिकार मारमीय सम्मान प्रदान करती को परस्पर प्रत्पन सम्पमि कमी नही मी मा सस्ते में साम्पस्तित्व वत्तकामा देती है। इसमें सन्देह नहीं कि रिमो-पातमि मातिारका पपिसव बात है मालपूर्ण है। पर यह पक्तित्व र क्या ? सा किस कानगीने साहै ' पगली बार पान मानेवाली पीर को पानी तह हो या विस्मेपन से परे हो पाती है। परम्पति पारीरिक मारिमक मान सिक समी लिपेपतामही समष्ठिहै रसको पारिरक पिताएँ, उसकी पण, असकी प्रवृत्तिपा उसका समान सनकी मानसिक इसमें पति उसका अनुभव रहा ख्मिण उसका बीवन, सबछ। मिकाकर पवित्र विपका पक्किम बनता है। प्रत्येक व्यक्तिका बना पक्तित्व होता है इसकी अपनी विपनाएं होती है। हर मारमीका हप मपनी पा होग है, से ही हर म्पतिका अपना म्पतिल होता है। प्रतिय पिता एमसमने सत्म हो रहा है 'मरमेड पनि समारी अपनी सुरता होती है। मान रैनिक भवनम इसका अनुभव हम करते रहते सामपना सोपनका महबोलने और गतें करने म है पाला मारके पुपमै एसे अनेक सहरम बाबपे है, गौम्पत्रिपाकी मपनी-अपनी पितामो मिटाकर सई एक सामान्य सरिम सनका प्रमल करते है। उन गारपोंमें विस्तृत वर्षा करता यही जप्रासंगिक होपा । यहाँ इवना हो पाया सम्य मानिक पुनमें, यहाँ पक्तियोंी पिगिताएँ पोरे पोरे बिरही। यहाँ पर हम किसी जीवन में कोई रिपिता रेतो महसे प्रभावित होने हैन मिपिसानों का पता ही हम मनुप्पी पिता पहले है।

रेरियो वार्ता प्रौर म्पत्तिबारा प्रान यो पातमि व्यक्ति ही बोमतासा कि हम रेड एक है, उसमें पविमलाकी अमिपति निषित पसे होनी चाहिए। मैनट रनार कहते 'प्रसारण सम्भवत सबसे बड़ी पोर मेयक्तिकता ही है। रियो पातमि पिठणाकी मिष्यक्ति प्रमाण हो कि पोता कोल्ये किया वार्ताकार कोई भी उमप या महेध नहीं हो सकता, यह विप कि वो अपने मनुमरों मार रिचाराको रसके पास पहुंचा हा है। इसमें सोचने मपना प, मनिम्मक्तिकी भपनी फैली है, बीपनके अपने अनुभव है। इस दृष्टिसे देखनपर मार होगा कि रेटियो मार्ग कहा और पाहिपसे मिन नही है या भी एक विशेष प्रकारका साहित्य है । साहित्य हावा क्या है? प्रसिस केंच बार मर्नेस्ट मिनट पतरने-कहता हूमाहिय बारमाभिम्पति बारमात्मामिम्पति परिवाना। मपनी विधिताको बोर निकाममा अपनी विधप दृष्टिले किमी बस्तुको रेसना मोर रसे अपने विशेष प्रकारसे ममियत करना तो साहित्य है। रियो वार्ता मो साहित्य ही है, मौर इसकी विशेषता भीमविश्वाको बमिम्परितम है। इससे निष्कर्ष निकाला पा सा कि मुटित पाहिल्यावर मही पूर्णत बम्नुनिष्ट हो सकता है, यहाँ रहयो बाधिरको मारमनिष्ट रहना परेमा । मामाग्मपरकवा ही रमनी विशेषता है । रेडियाला पोवा पम्नमें पटनी चि नहीं रखता सिवनी वार्ताकार । यस्तु पो उसे कहीं मी सिमा सती प्रति माहारी बीवन-दृष्टि रिसरी भोर हिमा मपिनमम त रिमाको पातभिरसे ही मित सच्ची है। रायोका थोमा रेडियोपर यस सी वस्तु प्राप्त करना चाहेगा वो उसे माया नही मि समतो। वार्ताधर यदि 'मोमंदिरेस मा पर बात एक 1ो मागका मौगोहिल, ऐखिशामिक सांसाविक मौर रामीतिक परिचय तो माता पुस्तका पने उमटनेपर सहर हो मिला सका है। प्पिोपर नो परिषयो प्रसारण एवं अषणको सावस्या योगात-मिस क्या है ? भोता पो पाकिारसे या बानना चाहेगा सिने नाम पमा रेखा क्या अनुभव पिया। दूसरे धर्म प्रोता मातालारी माता नागको रखना चाहेमा । पह पस्तु समे वार्ताकारको मेरमौर सिी से महीं मिल सकती। इसी प्रकार मविपातकार पंचमीय पोमनामें प्रयोगों की प्रपतिपर मात पाहै तो प्रगतिका परिषम हो सरकार आप प्रकाधिव एवं प्रचारित विज्ञप्तिमि पोता सरस्वास पलम्प कर सकता है, हो सपोकि विकासका परिचय पाकिारी पिसे प्राप्त करता पाहेगा यह दूसरी बात है कि पातकारहो पा परिषय माकाबामाकी नीतिकी सीमामो भीवरसे ही देना होगा। यही मेट सनबरसो हम फिर मात करना चाईमे-बन्ने पातक सम्बन्ध मान रेनेी बात यह है कि यह पटल मार सापा-सावा विपरप प्रस्तुत करना नहीं है, बाहिर की वैयक्तिकता मबाप मभिम्पत होनी चाहिए। सचमुच रीयोपर वार्ता प्रसारित करनेकी सार्थकता इसी बात है । समावप्प पटनाोपर बाबा रित माप-कपकोंची पर्वा कर (ए एक स्थानपर नई मैग्नीसन हा किरियो-मकदार बहमरामन मा रिपोर्टर मबह इनसे ० मषित है, कहाकार है। यही पाव रेग्योचात्तधि सम्पबमें भी कही पा सकती है। रिपो वार्ताकार पुस्तकास एण्फने निकालकर मेबार भर नही येता परस्परसे संकलित सामग्री रेरियोपर प्रक मसारित मर नहीं कर देता बहमारमाभिम्पति करतापनी जीवन दृष्टिसे प्रोवाना हो परिचित कराता है माहिरपनका काम रखा है। यह सापारण काम नहीं है । साहित्य-मन के लिए साहित्यकारको गित सामना और पापनाकी अपेमा होती है पससे कम मपेसा तयी-माता परोपही है। सामिहिन मह 'मोशमा साप मामि भात्मीयता बनाये रखने लिए प्रपना मोर रामस्वामयाहै।' मोबातमि बसिपवाग समिप्यक्षिके लिए अपेक्षित सापना मोर मममी मोर पाशित प्यान बाना चाहिए।

रेरियोवार्ता प्रारम्पतिका प्रश्न यहाँ यो कुछ कहा गया उससे यह न सममा माय कि रेडियो वार्ता केवल माम्मनिष्ठ ही हो सकती है, वस्तुपरक एवं तप्य प्रवान नहीं । इस सम्बन्धम मागे दूसरे मप्यापम विचार ठ्यिा भायमा यहाँ इतमा ही कहना पर्याप्त होगा कि वार्ताएं तप्म-प्रधान मी होती है मौर हो सकता है, पर ग्नमें भी पाकिार पक्तित्वकी साधी दो मिनी झे पाहिए, भौर सिी कपमं न हो सके तो ताक प्रस्तुतीकरणम हो। मोचमासे मारमीयता स्थापित करके थिए पातकार म्पपिसवमें किन गुगॉफी पपेक्षा होती है इसपर भी विचार कर लेना चाहिए । एस्सन एग गेरोपियन एडमके भमुसार, सफा प्रसारणकी मौधिक मपेमा है समाई। सफा भप यही है कि वार्ताकार वपनेको वितपुछ सच्चे पपमें प्रष्ट करे यह अपने प्रोवामा एराब न रथेसा पमी पहमे हा मया है, रेडियोमा कार भी साहित्यकार और साहित्यकारकी सबसे बड़ी विद्येपता के बारेमें नाचाय बिनावा माब कहते है-'साहित्यिकर्मे एक मूम- भूत गुण होना चाहिए । उसके बिना कोई साहित्यिक महीं सकता।बह है सेन्सेरिटी मानी सचाई। पौर सुन हो या म हो साहिस्पिकको सन्चा होना ही चाहिए-ह सभा सत्पुस्प हो मा सन्चा पुन । सच्चा सत्गुरुप हो तो सोनेम सुपरब मा भामेनी। किम दुर्बम हो हो ।एटमोजिमक्सर मबरसे एक पणे पार बाहरसे दूसरे विसाईते । पाहे दुनियाको ख्म है परन्तु अपने-माफको ठम मही सको। इसी लिए अपनेको प्रष्ट भी मही कर सकते। वार्ताकारको मफ्नेको प्रकट करता है-अपनेको बानी मपन पूम भ्यक्तित्वको पो कुछ यह है वो कुछ वह मोबठा बनुम्ब करता है। इसीको मार कहते है "मुझे लगता है, मनियत्वका मूल तत्व है समग्रता मपने पून अपमें बो हमम पास्तवम है, उमे सोजना मौर उसका सबसे अच्छे रूममें उपयोग करना। पास्मीयता के लिए इसरा पुष यह अपेमिठ है कि पाकिारके मनमें मपने प्रोतामेति प्रति समाव हो स्मह हो । धान एस• काला परा तपोमानिसम्प - मय है 'अपने मोवामा पारेमें सोपनकी माय राहिए। मो मातापर मोठामंकि सम्बन्ध में मात्मीयताके साप सोरेवा मोर रसे मोपदों एवं पापी द्वारा प्रकट करपा उसके प्रति मोखार्मोका भी बायम ऐपा इममें सम्देव नहीं। रीपोपसे बनता है प्रेम प्रेमपर निर्मर'-पक्लिी इन पलियाम पर्याप्त सत्य है। इसके अतिरिक्त वापरके मनमें मपने भोगायक प्रतिबारर एवं सम्मानका बाप मी पना बाबायक। यह इस प्रबर बातें करेंकि पोखायो अपनी हीनताका मनुमय न हो। हम मानते है कि कोई भी मनुप्प समाय मपोको हीन नहीं समानता बाबा मी अपनेमबाबा पहा मानेपर बुरा मानता है। इसीलिए पारस्परिक व्यवहार में परेशा रमकी प्रवृत्ति बहुत भातक सममी पापी है। मानसनने ही पहा है-'परामका स्वागत शायद ही कभी होश है। जिन्हें सबसे अधिक इसकी बावश्यकता होती है इसे सबसे कम चाहते है। सपमुष में दो मानता हूँ माप नहीं पामत की प्रवृत्ति रेटियो-मोजाये मनम गाधिरके प्रति मारमीयता भार नहीं माम रेपी। यिोनसिपके सभी बनुभवी मक्ति इस तथ्यको म्पीयर करते है। मैमबिन पहले किया गनुमच दिपार हमें होन समझकर पा र रहा है योता मनमें पीप ही ऐमी पताको रन्म देती है जिसका कोई उत्तर नहीं है। समाहरण मिए एक पातका पर पहमा बास्य देहिए- बन्नकि पक्तित्व के बारेमें गुछ कहने पहसे में रन बनाके सम्देह होय देना चाहती हू बी पा सोबती हो कि पापा भी क्या कोई पक्किल होता है। इसका प्रभाव मुननेवाती पानोपर पग पांमा? ईरहेपी-ये मपनको बहुप समाती है। इमसे वार्ताकार और मोवार दोप मामीप गम्बत्य माही स्थापित हो सकता। एक दूसरी पत्तागी पुरा पंक्तिमागिए- रियो वार्ता और पतिरबका प्रश्न में इस तरहो भनेर सवारण दे सकता है। इसके द्वारा मै पही घमनाना चाहता है कि शरीरमें पम्बियों या मोर मांसपेशियोंकी किया प्रतिक्रिया मानसे ही एक प्रकारकी स्पिरखा पैदा होती है। पातकार कुछ ही देर बार फिर कहते है- मैं अधिक-से-अधिक मापको यह समझा सका कि बिना बाप समासे है बीयन सससे कभी पेचीदा या माश्चर्यपूर्ण है। इसके साबमें कुछ कहनेकी यायस्यकता नहीं। हाँ पातभिरको इस प्रवृत्तिसे बचना मनस्य है । उसे यह नहीं समतना है कि यह मोतार्मो- से सर, किसी उम्प मासनपर प्रतिप्टिव है। रसे मपमेको योतामोंक सामान्य पपवरूपर ही रखना है। पहले कहा बा का है कि पाकिार को अपने मोठाममि अधिक मानका पनुमान नहीं कर हेमा चाहिए, इसका पदमप नहीं कि मोतामाको भानहीन ही समझना चाहिए । पोवाकि मनमें वार्ताकारकी मानीसे ऐसी भावना कभी नहीं मानी चाहिए कि मोता मपनेको भेष्ठ समाठा है।.बी. प्रीस्टफीके सफल रशियोमाता-प्रमा रमो सम्बन्ध में एक रेरियो मिठेपल यही का है कि 'मागम होता घनमें अपने मोठा प्रति बादर-मायनो गन्हें हीन समझकर ही पास करखे। न उनमें मत भाविक ज्ञानका अनुमान ही परके।

रेडियो वार्तासे सम्बन्धित तीन प्रश्न प्रश्न माराम करमने पहले अपने माताएबानीने बीवन एक जन- भर प्रस्तुत करनेडी हल्हा हन्टी त मनुमबार सम्बन्धमानी एक ऐसी दसती बिहे में बाकापमानाम पदा, जो पापरही कया। रावने ॥ बजे एक पाता होनबाली बी पिय पा 'ममन् मन्तिमारी चिम्क पारसयान । मनमा । बर मये, पर माताभारले सपना मामेल मेरे पाठ नहीं बा। मैंने आत्तापरको श्रेन किया तो पूसरे मेरसे मापारमाया-बार रिसर में गाय मस्त प्य पात पिसनेभी मत ही मही पिली बसौ मी भार्ग स्टेनोको दिया पाईपालि समय भाषा पथ्य पारिएतो वही हम होपी पाटबडेवाबार्ता साप होरपार हो पायेनौ। मागिरको भाषामाचारी पहली पार भार्या प्रमाणिकरती थी इसीलिए ऐसा हमें। मैंने गए-भापती पावे। महान समय लाल मिरिपत रहता है एक मिनर भी र पपरमही वा। मौर, यह बात दो किमी सए बोली ही 1ोपानि बामणामोमीरा रत्तरमाया-बन्धी बाव है, मोदिप करता हूँ। मम रखार में अपनी स्वीपर - हाने भगा कि मैंने मातांस बात कुछ दिन पहले ही क्यो नही किया। बागही समय मेगामा मेरा पाम पा दो मा मारिव के लिए का मामयम-पत्र मिस मगाय-या मागावा tah ७१ म्मिो-वात्तसि सम्बन्धित तीन प्रश्न कारोके पास भेगा माता है, उसमें यह प्रार्षमा हती है कि मामेश निश्चित प्रसारप-विपिसे इस दिन पहले माकापवानी केन्द्र बाबाना चाहिए, पर ऐसी पा कम पाकिार करते है। मैने सस निम्पमे स्टेशमके मषि कारियों से भी यह नहीं पाया कि बाकी पातका बाख बमी तक मेरे पास महीं पाया है, फसत' कायक्रमके प्रसारणका पूरा उत्तर वामित्व मेरा पा । सात बार दस मिनट हो ममे मुझे कोई सूचना नहीं मिसी । मने फिर फोन किया तो उत्तर मिळा-'मैने रिक्टेशनतोरिया है पर वार्ता यमी याप नही है बरपुर ही हो पो है। मैंने हा-बसनेमें गत पर नहीं है, किसी तरह मापको महा जाब पहलेमा जाना है। तो मिठमा टाप हुवा है पतमा पर मै बावा है।-पाकिारने टेलीफोन रख दिया। पड़ोकी मुकि साप मेरे हायकी पालन पानी पापीपी। मैंने पानि एमाउंसमेष्ट सिसकर एमासर कोरिया पर रवायेपर पाकर बाकारको प्रतीक्षा करने सपा। . वसर २० मिनट बाकिारका पता नहीं २८ मिनटपर ये उपस्मिता हुए। मैने कहा-'हाइए निवनी स्क्रिप्ट है, उभी रेस। सिमट हो विमुक नहीं, मी याप ही नहीं हो सकी। मैने भबमकर पूण- 'तब से होगा? 'भाप बबिए, म बोस या रस मिनटका बोमना क्या है! मरे मुंहसे निकला-मिश्मि महसि बिना सिमटके कोई मार्ग नहीं प्रसारित होती भी कुए ममोपाय ! माप मुझपर निवास रथिए, मैने १४ बर्षों तक कासेगमें पड़ा है,बोसने हीका तो पेसा है।- पाकिारने पहा । मरी मांकि सामने अभी एक महीने पहले मार्ग प्रसारित करनेवाले एक सम्बनकी तस्वीर मात्र पपी। रेपी कायम प्राध्यापक दस-बार बसि पाहे है, अपनी सिमित वार्ता प्रसा खिकरने मे तो भरसे उनकी मापार सहा रही थी अपनी बड़ी सी बात भी सनहीन समपसे दो मिनट पहले ही परम कर री बी। नागिन यहाँ मुझे चोरमेश धमय नहीं पा में स्टूग्यिोकी तरफ ।

रेडियोवा-मिस
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है बहा। रास्तेमें क्या पया-'यार रखिएमा कि भापकी रात्रि
प्रभाव मुमपर भी पा सकता है। मैने उन्हें स्टूडियोमै माइग्रेनके
सामनेठा दिया मौर बागरिया कि सामनेकी साहयती बस्नेपरये
पात्ता प्रारम्भ करेंगे । ॥ बने दूसरे स्टूडिपोसे एनाउंसरने पाव
भाकामयामी पटना है। महान् कान्तिभरी चिन्तनस पाकिम बार
'बाइम्सटाइनके सम्बग्बमैं एक पाता प्रसारित कर है।।
""। मेरा हरप पार पहा पापही पापड़ी महो
पाप । कहीं यह पोते-बोलते एपएक बीपमें ही मकवाय। पी
माकासवामीकी मीतिक विष्णकाई विकारासर बात न हो। मुझे इसे
मोसने नही बेमा पाहिए पा। पर वार्ताकारको सारवती मिल चुकी
बी पन्होंने बोपना मुरू कर दिया था सामारिक पाता
सीमी सारी मापा नप-सुने पाप सन्तुति विचार। में तो प रह
पा । पूसरे दिम होबाने कहा- दिनकि बार पछी माता सुननेको
मिली। मैं सोचता है क्या बापार्ता इसीलिए सफल हो सकी माता-
कारके पास बाका बारेख नहीं पा ? रिपो-त-सम्माची पही पहना
प्रहम-पा मह बारस्पक कि बात सिखी पाय पसका सिक्षित
माप हो।
बात तो पातचीतवाभिरको मौविसभिव्यक्ति वाशि
पाता प्रसारित करते समय बाद सामने रखकर भी मोजमानमा
मामास रेला पाइा है कि सिवित रखना पढ़ नहीं पा
बक्ति अपने पौगाबोसे बात कर पाt। ऐसी सिक्रिम वार्ता बियर
क्या मारापरता है। लिखित पातारा परिणाम भी तो मना नहीं हो
उसमें मौरिक वाताती स्वाभारिता नहीं मा पातीबाती त्रिम
बाती है। इसीलिए पी. पी. एकरसोगह है-मसामान्य नियम
करपामिपिसे वाता-पाटका निवर इंगा। या नियम पिति
सामारिफ हमामंडि परिसंवामि बहता है और इममे होप कामा

तीयो-मातास सम्बन्धित तीन प्रश्न देते है । मोट्सकी सहायता सब कमेने योगाएपी बब करे विचारों- मे क्रममा रखनेमें सहपक हाँ मोर प्रेरमा बौर सहमताको हत्या म करें। एतका एक प्रेषिया एनका कपात -हाउस बॉफ कामम्स का यह निमम कि सिक्षित मापन रिय मापे केस मोट्ससे सहायता मी वाय कुछ शिक्षित संस्थानों पाय माना जातामौर बी.पी. पोदारा भी इसका बमुहरण समतासे किया जा सकता है। मपि मात िहममा निश्चित समय-मोबनाम मन्धी तरह ही 48 समी और भूध पिकारियों को भी पाते हुए हमसे नई सुनवा यना पोगा कि मातार बी.बी.सी. को नीतिक विश्वन कुछ करने पर इससे भारत अधिक मेगा । रेडियोको उसका एक मका उपहार वापस मिल नाएगा पोतामों को कार्यरत मस्तिनकी बमिम्मक्ति सुमेध मबसर मिनेमा और प्रशारण मपनी पये से पापा मालेबसे मुक्ति पा जाएगा। बिना भाषिक समाहात प्रसारित करा पस्तियों में प्रेसीट पोस्टम पत्नी एविनर वेस्टका नाम पाता है बिनके सम्पबम बेनेट रमर पवे 1-मत्रीपूर्ण मनोपचारिक भनि शामसे भरी सनकी पाती पर पनी रिप-मस्तुझे इस्सेि ही नहीं प्रसारण समीकी इटिसे भी प्रसनीय भीम एक निश्चित होता पा जिमव पथसि प्रारम्भ की अपना प पुकारती पर विपस करती एक मिचि विचार देकर से समेटा और सामाविक समाप्ति परमा माहीतीप्रसप रे बाप है-'पनी बातका एक स्थापत्य होता एक निरित संपरा प्रत्येक विचार अपने पूर्णपती विचारसे तक संपदम्पमें निकलता । रम पम रिसे-पिणे होनेपर मी एएस होते। यह सही है कि बिना बारेमा प्रसारित वातमि स्वाभाविकता और ममिता हेमी पर प्रल है कि ऐसे पास पाकिार सिने मिसँग ? मिति पातमि ही कोई सापत्य नहीं होता उसकी पौहिराती ररिपो-वाता-शिस ७४ की क्या पणा होगी? एमकी पातमि सबकुछ शिवरा-बिसरा-सा रहेगा, उसमें कोई निश्चित प्रमाव गमनकी शक्ति महापमा । एसिमर मरेर पैसे मामाको अपबाद ही गिनना चाहिए। जिस पार्शकारी पर्वा गुस्में की पपी है, भी मैं समझता। इसीलिए सफर हो सके किये सपनो गार्ता मपने स्टेनोको सिखाकर माये पे फमत में मपनी विपय यस्तुके हमिक विकासन्य ज्ञान पा। दूसरी बात यह भी है कि मौलिमसे माता रेमें वार्ताकार पर्याप्त मुनियोरित सामग्री भी नहीं दे सकेमा। यो-यो मापोडी सुनते समय हम यह मनुभव करते है कि इसमें मावृत्तियां भकिन बाकि वे बहत है । सामान्य वार्ताकारों की ममिचित मातमि भी यही बातें मिलेंगी। तीसरी पठिनाई मबधि-सम्बनी है। रियो कार्यहम निश्चित समय बोम व पते है। वार्ताकारके लिए सपमुष यह कठिन समस्या है कि निश्चित अवधिमै मपनी बार्ता यि प्रकार समाप्त करे। यामी सम्भव हो सकता है, पर बानिसमौ बातें निश्चित बनुपाल्में रहें। इसके लिए रित मानसिक बनुपासन एवं सन्तुलनही बोभा। उसे अविबरना सरह परम नहीं सभी एसा नही कर सकते। - चाचा प्रश्न प्रमारष-मस्पाको नीतिमा है। प्रत्येक प्रसारम-रचाकी बानी नोति होती है अपनी सीमाएँ होती है। मालपानीके ताप भी ही बात है। मौखिक वामि यह सारा हमेणा बना ऐना किवार म्ही ऐसी बाते नहरे चिने हम नहीं चाहते। और सबसे बम पतरातो वातावरको परापर पौर भएका गल एसे म्पत्ति नि मागोफोतो सामन पसारका अनुमा होने ममता है। मैंने स्वयं एमबापाको लागि स्टूरियोमें बोलते-बोलते पसीना हो माया है। ऐसे म्पत्तियोंसे मौयिक पारिएका पर्षीपनले सम्मान और मरने पापम्मको सारमें गहमा । इन समौ बाठाको गाते हुए पातलिहिए बामेरामायणम्वाको रेटियो-वातास सम्बन्धित तीन प्रश्न महब ही सममा पा सकता है। ग्नबर से प्रसारमा एक बिशेपम बाहेकको मागस्यक मानते हैं। भब हम दूसरे प्रश्नपर मार्ये । भाकामामी केन्द्रसि बहुपा यह सुना माता-'ममी' "को पिसी हुई वार्ता पाकर सुनायी गयो। वात्पर्य यह किपाड़िा मेखक एक म्पति और उसे परमबाण छप पक्ति बो या तो कोई एनाटन्सर होता है या ररियो स्टेसनका कोई मामर । विचारमीय मह है कि क्या एक म्पसिकी वार्ताको दूसरे किसीसे परवा देना सचित है? पाहसे हम यह है कि ऐसा होता क्यों है? पहा कारण तो यह है वार्ताकार किसी माकस्मिक मटना या बसस्पताके कारण समयपर उपस्थित नहीं हो पाता । दूसरा कारण यह होता है कि वाहावापाने अधिकारी किसी बात को मातपूप समझते है मौर उसे विभिन्न केन्द्रसि स्थानीय एनाउम्मरों द्वारा पुन प्रसारित कराते है । भग्रेजी पाकि बाद भी पापा उसी प्रकार प्रसारित करामे बाते है। तीसरा कारण हो सम्वा-वार्ताकारकी पारीरिक मामता । हो सकता है कोई विशेषज्ञ बोसनेमें बसमर्ष हो सपना उसकी मोठी हानाह मारिके रोप हों। बा मूम प्रस्लपर विचार किया बाय । जैसा मबतक बार-बार मा गया है, मार्ता सिमित होती हुई भी मौसिक समझी गाती है। वातकिार की सफलता इसी बात है किबह पोशामाको मपनी सिचित रचनामा बामास भो न मिझमे है। बत' पर हम सुमते है-'ममी यह मार्ता पर कर सुनामी गमो वो हमें लगता है जैसे हाता-प्रसारपही साके मूसपर ही बामात पिया जा रहा है। एनाउम्मरकी यह मूषना कि 'बार्ता पदो बा रही है हमें स्पष्ट मूपित कर देती है कि पानि मास भी है और इससे पाधि पाक- पर कम हो पाता है। किसी समा बमाको मपना चिचित मापण पड़ते सकर मा मोट्सने सूझरे यो देखकर हमारे मनमें क्या प्रतिक्रिया शेती रेरिपो-माता- मिस है? रेप कामी इसे प्रश्नर्मि बमिम्पपर करते है-'नया नोट्स भापममें बापा मापन पाच प्रतिमा कम नहीं करते? पता बीर भोतके बोच बो धारमीय मौर मूम्पबाट सम्मान पना बाहिए, साये से और महीने मपया उसका बना पहना कठिन नहीं कर देते ? क्या ये कृषिमता का मातरम मही रसन करते ? या पोको पा मनुमर होनेसे नहीं रोते कि वस्या के पास दो विश्वास मोर पा चाहिए, वह उसके पास है? ठीक यही बात सिवित बाकि पाठक सम्बन्धमें कही मा सकती है। पर मामकर पाता शिक्षित, मनमें यह भान भी मावा है कि बार्ग मी होमो, तो वारंग' 'प्रसारिका या रिसी पर्म ही पेगी, मोर पसे नहीं पा लिया बापमा । यह मान भी बावकिपाकपषको कम इस सम्बाबमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह नही गापमी किसयो वार्ता जैसा कि हम पहठे देश के कोई तरल मस्तुनिष्ठ सति नहीं है कि उसका पाठ कोई मौकर। रसका सम्बब बातोपरी पवित्व होता है। एक पत्रिकी वार्ता पर पूसरा म्परित पाना है तो हम बातभिरके म्पतिववके प्रयास सम्म बामेसेषित बाठे है। इस सम्मत्वमे एक रेसियो-विरोपाने प्रसिनिय भिम गारेर धर्म डेपरको एक वार्ताण बम मनोरना पवारण प्रस्तुत यिा है। पर्म पर अपने प्यार सम्बाय दी.बी.सी.लिए एक मार्ग विसी। एक एनासम्मरमे उस पार नुमामा पुर यिा, पो बोम-बार बापर हा। मन्तिम गुण मिनटो मिए देपरले अपनी माता दुर पनी । एनाउन्सर और गम पड़ने में मारपर्मम मम्तर पहा । बाता समीर हो उठी बगा कि उसके पीछे एकम्पनिलमा मा यो अपने रिपाको सोपा और गम मिम्मान करता है। परपी रियो पातति सम्बन्धित तीन प्रश्न परिबी टूटी-फूटी भी कहीं-कहीं उसका समाना भी कठिन पा फिर मौ पावनि समुव मार्पम मा गया। इस उपाहारमसे स्पर हो गाता है कि रेशियो पातमि महम लय पातका नहीं उसके पार्ताकारके व्यक्तित्वका होता है। यहाँ एक बात और दो भाय । कुण् कोग कहते है कि हमारे या निवाएँ इसलिए नीरस होती है कि पाकिर उन्हें पाइप पाते ही, इसलिए उन्हें एनाउन्स पहाकारकि मुसार स्वरोंसे पापाना पाहिए । पाहमा उपित मही। पर उदाहरपसे ही यह शप्ट है कि पातमि सर और भापाका उखना महत्व नहीं मिमा पक्तित्वका है। हमारे यहाँको वार्ताकी मीरमताका कारण यह है कि यही म्पतिस्पके पक्ष पर मान रिया ही नहीं पाता । बाकी नीरसवाके मरे कारावीप इम पहले सप्यायमें कर माये। बब तीसरा प्रम महा आता है एकम्पपित मोपाती बम प्रसा प्ति करताt बहनोरस होती है, इसलिए कई स्थपियाँक सहयोगस माताको माकपा ममें प्रस्तुत करना चाहिए। एक पक्तिको पातको हम प्रम्पस बात का है।बगामें इसे 'स्ट्रेट टॉक [ Strught Tult करते है। मनेक व्यक्तिमाके सहयोपसे प्रसारित मातादी मेंट शार्ता [ Internew] परिसंचार [ Sympowum ] मारि कहते है। मैंट-मातमि प्रनकर्ता मातांकारसे प्रश्न पूछना पाता है और बार्ताक्षर प्रस्मक उत्तर देता है। परिसंवादम यक्ति एकही विषयपर अपने विचार प्रकट करते हैं। प्रश्न या है कि रियो-माप्पम मिए उपयुक्त पमा प्रत्यक्ष वार्ता या मॅटवार्ता मपमा परिमबार। म सम्बयम स्मरण लनेकी बात यह है कि रियो सामूहिक प्रेप मोमवार मापन है-प्रत्पत सपन विसका परिषम हम पाते के है। इसके माप्यममै एक पति मपनेमे ए पतेमाके हग पौठामॉम प्रायस मम्मर स्पापित कर सता है। मो माप्यमी सबमीन पही। इसमें पता-पोवास प्ररपन सम्बप्प पता है। किन मक

७८
रिपो-बार्ता-पि
विपरीत मप्रत्यम मार्तामों [ मेंट-मार्ग बादि] पाचार एवं प्रोवार्यो-
का प्रत्यस सम्पम्प बगित हो पता नमें बाघिर पर मौताकि
बीच कई मन्य पक्तिमा मातेलम बातार अपने पोवापि पीचे
दुछ नहीं कहता कि प्रश्नकनिक माध्यमसे कहा है। इस दृष्टिले
मगता है कि रेसियो माम्पमके सिए यदि सबसे उपयुमा साहित्य-स कोई
है वो बह प्रत्यक्ष रेडियो-पान हो ।
.

रेडियो-वार्ता-लेखनकी तैयारी प्रसिरमा शो पिसन पिसीने पूछ-आप अपने १० मिनट के मापनको तयारी कितने समयमें कसे ? विस्सनने का-'दो सप्ताह । प्रश्नपत्र प्रस्त एमा-'मार, एक पटेो मापनको तयारीम कितना समप समावे? उत्तर मिन-एक सप्ताह । प्रश्नकापी बिमासा पाप्त नहीं हुई रननि फिर पूछ- पाटे माषमके लिए माफको कितना समय चाहिए ? 'उसके लिए तो मै हर सम्म तैयार रहना 11- विम्सनका उत्तर पा। में उत्तर मजाक से हम सका है, पर नही। पम्मीरखासे सोचनेपर साल होगा कि कम मबपिम अपने कम्पको भमि म्मान कर देना सचमुच ही बहुत परिणाम है। बरे माप!म बनायस्पक विस्तार एवं भावृत्तियों रिए भकास हो सकता है, छोटे भापमि नहीं । इसीलिए कम बधिक मापति एि पर्याप्त तयारीको बागम्यकता होती है। शिमोगामिौकी गति भी सौमित ही होती है-पांच मिनट से लेकर बीस मिनटवा पिकपातीमपि दस मिनट होती है। एक दस मिनट की वार्ता लिखना पुम् करने पाले माकारको काफी तैयारीफी मपेशा होती है। इस तैयारी क्या वारपर्य है, इसकी म्याम्या हम बादमें रेमपहले विषयके सम्बन्ध में विचार पर थिमा जाप । बिन म्पनियोको विषय रिसेप- पर पाता देनेरे लिए मानक्षपाणी बारा मामलित किया जाता। उनकी हमारी तो उसके बाद ही पुट होती रहें विपपके लिए चिन्ता करने रियोवार्ता प्रिय t की गम्ख नहीं पाती। मेपिन यो म्पति बामवित नहीं ये बाते फिर भी यह मनुभव कसे है कि उनमें योभातकिमान एवं प्रसारक की समता है, लकी पारी विपके मापसे ही पुरू होती है। प्रश्न यह है कि रियो पातकिए से विषम अधिक उपयुक्त होने माकासबागीते समय-समयपर प्रसारित कुछ बातामोक रिपय देने पार्य-भारती इरानी राजनीति' 'मामें मविश्वाचनतिष्ठामा पास से पीनी पानी 'महायानमें विशामराय, 'कामीरता सौन्दर्य महास्मानी के संस्मरण पुस्तरे जिनसे मैंने सीसा 'वारको उपयोगिता बापानी मेठीकोन तरीके 'विरेस-या मैरे अनुभव । रेतकर या मनु- मान ममागा पा सकता है कि दुनिया कोई भी एसा विपम नहीं है जिसपर बात म प्रसारित की रा प पर ऐसा अनुमान को समय मानाबापाके मूत्पूर्व गयरेक्टर माप प्रोग्राम्त सोमनाप निकाह कपन स्मरण रखना चाहिए कि रिपोपर [माकापवानी बावकर स्पिना सरस समझते है माफिी मपेपा निवपणन अधिक म. मुच प्रकारले हात है। सचमुच यो विषय मार दिये परे। ये सभी पोबार मुठ महीरे यहा। याताका पिन हो गुमाई ससे साहिसि पिताकी भभिम्पक्सिका समसे सुबर माम्पम मात्र ति रिपोरगतिवानी भिम्पमित्र अधिक से मरिकहो सके कि मारिमक अनुमों एवं वात्मपरमताको मन करने के लिए मपिक काप मम्माम्म बिपोंकी मपेमा निकषय ही राग्यो अपिक एपमुक्त महे पार्मने । पाकिारके पास परिपु म अनुमय है सबके लिए पिार हो सयो है मामा ऐने स्मरण हाँ जिनमें उसमें स्पान- विपके सौनसको अपनी माधम रेला हा पहा मोपोंने यन-मामा मामी से मप्पयन म्यिासे ऐसे विपर लिपर ससने अपनी से विचार छिया हो पो रहे पमपनी पारा रिपप बना ता है। पक्तिगत हितो बात बपित होमाको पानी

रेरियोपा-देशमकी पारी
मोर मार कर मपी सम सम्मेहमहो। बनेट मारने काही मह
है-सुन्नी म्पमितगत पात अधिक प्रोतामाको रुविकर होती है क्यापि
पामारमनिष्ठ होकर दी जाती है और उसमें पक्तिक रेस मधिक रहता
है। वस्तुनिष्ठ मोर मारमनिष्ठ इन दोनों प्रभारकी पाोिंमे किसमें
मर्षिक रोमाता होती है इसकी मरो बार्मिक प्रारम्भिक
पास्पोम मिल पा सकती है। पहली बाहा पीपर कवि-सम्मेलन मोर
मुपायरे' मिसमै पाकिार स्टस्म भावसे प्रारम्भ करता है-
डापेसानेने करोड़ों भारमियोंके लिए यह मुमति बना लिया है कि
मम भार नरम बनहामि चुपचाप पर रहें महिम पदकका एक पास
मसर उस बस भी पता जब कई कोप मिनको साधार योसेकर
हजारों तक पहुँच बादी एक पपा भाकर मिम में मार अपका पाय
सुपचाप मरे से पलके मरीयके मेंइसे रपे सुनें। इस तण पूरे भवमेमें एक
फिया राहो पाती है और एक सा र पाता है। इसीलिए हमारी
समागी सिन्धमा मरगी कपरको फन्मने मार गारमेम मुशायरों मोर
कवि-सम्मेमनोका बहुत बार हिस्सा हा है।
[डियो-संह, मपट्रगर सिम्बर १९७]
पूसरी पात्र पीपक कवि-सम्मेटकि कर.ए मीठे अनुमर'
निम्म एक प्रतिष्ट करि प्रारम्भ करता है-
"मने प्राय १९१२-११ से कवि-सम्मेमनमि भाग मना पुर किया।
इन पच्चीस पोम मेबो मिटाकर कोई.. कवि-सम्मेशनेमि वो माग
के युग मा । और इसमें मुझे पण-तह मनुमब ए-मुहा
मनोरबर और विचित्र भी पुण् बापके सामन पर पाई। इसके पास
मनुमन प्रारम्भ होते है
[पाकाराबासो प्रसारिका पानीमा १५.]
पहनकी भावस्यकता नहीं कि ऐसी पनुमानाची पायाम वार्ताहर
का पति भी महत्वपूर्ण होना चाहिए, जिसमें मोताोपी पर हो ।
P

५२ रिपोबानगर इन गावोस पहन समता पाय कि तप्यमान सूचनारमा सं मिला रमाबार्तामोका कोमात ही नहीं। अपने स्थानपर उनका भी महाप है। बार-से ऐसे विषय है जिनकी यह मूत्रनामा भी मौजादी पि हेस्तो है । ऐसा नहीं होता तो रेसियोसे कोई धमाधार पो हुनाने बामपरिक्ष अपना राष्ट मेग तो कोयाम रसके प्रति काफी अमि गरिवी चोप बामना चाहते थे कि पीकी माकपन-किसकी सीमारे बाहर सी गफेर से पा सत्र पूसरे पोपर पहुंचने की क्या सम्माषनाएँ है ? ऐसे मना वप्पप्रधान विपर है जिनमें प्रोतामांगीतिचस्पी हो सन्नी ६. प्रामीण प्रोता यह बानमा पाह समाये है की उपज पिस प्रसर बन सच्ची है जापानो तयका क्या । उसरे क्या काम हो सकते है। ऐसे उप्पप्रधान सूचनात्मक विषय भी पीयो-पातकि पिने वा सगते है। पाकि विपका चुनाव करते समय पाश्मिरको एक और महत्वपूर्ण बापर प्यान रखमा पाश-पाकिसलिए माता प्रसारित करनी सोच पा?ौन-सा बन सकी माता मुनेमा ! पाकी माता सामाम्प पितित म्पपितो हिप होगी बममा पपितित प्रामीन भौति लिए? महिना पोवारि मिर या बन्नति मिए । सो प्रॉ लिए पा परोको युग सिए ? ल एमी बोकी अपनी-अपनी विपेपताएं होती हैली मपनी-अपनी बमिरवि होती है। एकही वार्ता समी बकि लिए नही ही सनी । 'कमा मनिवा-बनिया प्रश्न परमात पामीप प्रोताक सिए नही प्रसाति कोमा समठी। इसी प्रकार मिशानमार पर कोई वार्ता म पन्नों काम पाहती हैसक दो मिपयन एनाय प्रोता-बर्मक मनोविज्ञान अमिपि मारिभापारपर ही हो सकता है। पाशिरो सामना पोगा कि रिम पर पिए पाना चाहता है, समकी सब मि विपपामें दो सरीरहण हिए. महिला-पोगमारी रवि पिरोपन भग्नी पर गृहसी परिवार रेरिपोबानिनेपाली तयारी निक रफ्योपके कामों मादिम हाती है। इसी प्रकार मोंकी कवि भी इसी मा सम्वी है। समी रवि किन विपर्याय होती है? मदर पहने १- धमतता है उनकी रुपि कोमों और पशुमा विपयम हावी है। ये बस्तुमर्माहा वर्षमय तक नहीं मुनमा पाहते मग तक उनका पनिष्ठ समापनों मार पमुखोसेम हो। इसके साथ ही ये स्पलित साहसिक पदों अपनी पसकी बस्तुमों और मावारिक उपयोगबारे विमान मम्माची ममी पपोंगो पाहत है। पातभिरफोन सनी बातोंका प्यान एलमा परता है। बाबारावामी फिमो की लिए वार्ता लिसवे समप माताकारको मामामामाकी सीमायोंसे भी परिचित पना भाषायक है। सभी प्रसारण केकी अपनी नीतिमन मौमाए होती है मामपामीको भी है । माकारा रापी में राजनीतिक पार्मिक मावि विधायपर पिपकि लिए स्पान नहीं है। इससे प्रसारित होनेवाली पातति सिी भी एस मेधसे पता होता है, बिममें किसी व्यक्ति, समाराम धर्म, संस्था मत मारिपरमिमी मो प्रमर सेमाक्षेप श्मिा पया हो। पिप निषित हो बानबारहो मा समकी तैयारी सुरु होती सिरिया पहन बाम सामग्री-माना पापिणे पार पनी वात्तफि सिए पर्याप्त सामग्रीका पहना अत्यावश्यक है। उसके बभाषम सातादी पल्पना भी नही की मामबती । यह सही है कि रिपो मातापी दौमित परपिम पर मषिक सामग्री प्रस्तुत मही पीना सी पीवी-बारिसे चसकी अपेक्षा भी महों को मा सरती पर समसे पो मपेवा की जाती है, सामपाकी सम्पन्नवापर ही निर्भर है। यशपमें पर्याप्त सामग्री रहे, समी उममें सपने उपयोगक ठप्प ने गा सकते है भौर चमके मापारपर बपना हिमोग निश्चित मिया मीरिए सभी ररियो-गिपरोपा पिक सामसी पुयार पार है। पिन म्पनियोंगे रिमोभान रेनो लिए प्राषित किया जाता है सम्वा

रियापारि
सामाम्पत अपमे विपके विपेपर होते है, समके पास सामग्रीषी कमी नहीं
गती । पिनो विपम नही है उ- पुस्मारिकी परण मनी
पायी है।
तप्पामान मातमि मिमित रष्टिकोपरि धामग्रीका सेलम मपेक्षित
है। विभिन्न विधान विपम-विपके सम्बाबमें सपा विरार रखी या
सामना भी गति है। तय सिमामाविक हो निमसे पोवाओं को
उनमें किसी प्रकारले सन्देहए पान। पापि परि सरन
दिर्य पाय तो ये भी पृषय पुन मोर प्रामाणिक हो । रेशियो मामिोम
सामान पणशेवर है।
सम्य-संग्रह बात-पानी रिणाम मेरा एक दम है वास्तविक
शरी को इसके साथ गुरु होती है। यह पहले पहा पा पुगा है कि
रियो-
पोह तप्प और बांग नहीं माला मने पाताभासे
इनसे एमपिक वाहवाह कुछ ऐनी बस्तु पाहता है को सरेपी
पोलिवित सपमैं प न हो सके। मुष्टिकोण पाएता है,
बाराबारा मस्तित्व बाहता है और इस बार का प्रपन्न
रना ही मास्तविक पाप है। इसके लिए विजन पर भाषामना
होती है। सपा म्यिो बातापराते पप्पा मापात्पर मोट कर
पहते है कि वोगा पाप हो सर में रिलायो पाती है। इनमें
एबम्पारोप पक्तिक पुम प्रार
पात्रा
रहा जिसे इम पति
पहले । रिन सममें इसके दुख पिक भी होता है। परिभात वनारे
पाताको माहोपाको नए मुमता पायेंगे कि हम मान
मामेवरीमरेवा पारमें मोचन भारी हारपानी बनी है। पी
सोपना पास्वपित गहै। रे पापा भापती वैपायो समाप
निव-यारीरामर्प मोचना निकला भी विचार मापा
सम्म मनिकापर है जमानाय मा, सम्हें धमकाता में एक
निश्चित पोरना ना। इमरे पिना मोईली वार्ता गरेर दिनी पी

रेग्मिो-माता सनकी तैयारी प्रभारी मो मो सफल नहीं हो सकती। प्रसिद्ध सामोंक अनुभव साकी रफ्ताको सिटकर है। प्रत्यक्ष भाषाक लिए भी इस प्रकारकी तयारीकी मापसम्ता होती है, रेरियामाजिक छिए भी। प्रसिर माता सो पिस्सनका ही उपाहरण मिया गाम । मापण तैयार करने बपनी प्रक्रिया सम्बव रे कहते है.--'मैं कुछ ऐसी बातोंकी भूसे सुरु करता है जिन्हें में मफ्ने मापवर्म रखना चाहता हूँ उन्हें उनके पारस्परिक स्मामाणिक समयोंको देखते हुए अपने मन समाता हूँ पानी में बस्नुपी परिपयों को एक साप मगठित कता है। एक दूसर यस्ता मोगर मिस्टमका बनुभव भी रेबाबा सकता है ये कहते है- होम मुषे प्रतिभावान होनेका श्रेय देठे है, लेकिन मुममें दो प्रतिमा है, वह इस बात है जब मेरे पास कोई विषय ऐसा है तो में उसका पूरा पम्पयन करता हूँ। रिम-त पर मेरे सामने रहता है। मैं उसके सभी पहनुमोको बोरता है। मेरा मस्तिष्क उससे हा भाता है। इस प्रकारके चिन्ताको अपेषा सकिए होती है कि मोतामाक मनपर अपेक्षित प्रभार पा सके मार मात्तबार अपने प्रयोजनको सिर कर सके। बमा किरत कार्नेमीने मह 'प्रत्येक भापम एक यात्रा बिसा एक मेश्य होता, मौर विसका रास्ता पहमेसे ही निश्चित कर मेना पाहिए। रियो सातनि समाव मी यामळ विमा सही है। प्रत्येक हमो-सातारा एक प्रयोमन होता है, मोर उभी सिसिके लिए उसकी एक निश्चित म-रेवा होनी चाहिए । पहले इस प्रयोगनकी ही बात में। कुमाएं बपने पोधामा माय मनोरंजन करना चाहती है, अपने प्रोबायोलो अपने पोस ममापित करना चाहती एशियी कटिन विपयकी म्याम्यासे भपने योगामको परिचित रुपमा माती, कुछ प्रोतामोंको सिी कार्यके थिए मस्मि करना चाही। रणको थिए, यदि वायर 'गप पाना मी एकमा विपप्पर माता प्झ है, प्रो एसका एक मात्र पक रेरिपोमाता-शिम नहीं है। भूमिकामा प्रारम्भ किसी मात्रिी सिरित पसे बसमस मना देता है । निबन्ध प्रारम्भमें जिस प्रकार भूमिकाएं मिसी पाठी, रत प्रकार मातमि नहीं लिखी बा सकती । पर हमारे यहाँ रेसियो-पाचार निबायको सीसे प्रभावित होनेके परप मषिकवर भूमिग्रमास ही प्रारम्भ होती है ।वहीनही वो ये भूमिकाएं बहुत बड़ी और मम्मी होती है और पातकि मु निपयसै उमका गिणेष सम्माय मी नहीं होता। गरमके लिए कुए मार्मिक मान देते ना सको।। 'पुपमा प्रतीक सोपा पारा प्रारम्भ इस प्रकार 'मावर्षका पुराप साहित्य एक अत्यन्त बभुव मार रहस्यमय साहिप है। इसके समयमें विवानोंकी बनेक विस भारपाएँ । सनो पारणामोडी पनि भि पुरायो प्रमाण मित मावे है। एक बार तो सामी रमानम सरस्पती-4से पगिका यह मत है कि पुराम कपोल- कस्पित मापान्त मनतिहासिक, समीर बापा मीस हानिक संह है। पारपरप धिानों मव भी पुरापनि रस बसभ्य और मानसमापिकासके समय में प्रचलित पार्मिक कापनिक कहानिया है। प्राय सभी यो प्रकारको कहानियां प्रगति और प्राचीन सातसे पछी माती है। इन मानियों का मापार बारिम मनुप्पोकी दिमिर और परलोक मारि समापी सर विचार[५ मिनटती गात मगमग चार मिनट का पुरामाती पी वापर - नापा रिपोबार्ता प्रारम्भ मम्य पार पन्त 'भारत में स्वामीना-माम्दोलनके कारण स्त्रियमि भारी बाति मायो । अनि ममी तक उनकी सामान्य स्पिति पिणी हुई है। सरोजिनी नियमकामी परित पगमारी अमृतकौर बारि अपवाद है। हमारे देशम पियाँको कानूनी हक मिले है लेखिन सनकी शिक्षा माविका स्तर बमी पर बसम्तोपबमक है। प्रपति बगस्य शीसे हो यो है, और हमें माया हैपौधो मारखमें भी स्त्रिया उन्नति बेमसे होने मेगी। स्त्रियों के लिए सिषा निरिसा बारिक क्षेत्र निरोप भ्यमे उपयुक्त है। परन्तु पत्रकारिता एक ऐसा क्षेत्र है,बो मासामीसे भपमामा बा समता पाकिसमें पौम्पकी भाषमता कम है। मैतिक पाहसमें तो स्त्रिया किमी प्रकार मी पुस्योस पोछे नहीं है । परपरिणाम स्त्रियाँको साता भी का मिठी। [प्रसारिका पुताई-सिम्बर १६५५] इस तरह संमा सहरम रिये वा सकते है। ऐरियो-पातमि इस प्रकारके भूमिधारमा प्रारम्भको अनुपपुषवाका एक कारण यह भी है कि गीयो-माफिी मबपि सीमित होती है। अपर कोई मार्ग १.मिनटकी tो से प्रसारण समय कमी मी ११ मिनटका समय नहीं दिया था सकता। से १. मिनट के भीतर ही ममाप्त होना है। पत्र-पत्रिकाोम मति नियन्याक लिए इतना कठिन बन नही हवा मच रेमियो-मातमि भूमि देनेका बर है समपध दुरपयोम । पारिको अपनी सीमित अपपिका अधिकाधिक उपयोग करता है, और इसके लिए उसे भूमिका अपना बहुमूस्म समय मष्ट नहीं करना चाहिए । समपम यह प्रश्न मोवाबों- की हिने मी महत्व रखता है। बार हम सभी गतिक पुपमें है। प्रारम्भिक पुर्पोम कोकि बीवन में बो मारा था बाबामुनिक युबके बाषनमें नहीं एमपा है । समयकी पिता सबसे गी पनी है। ऐसी स्थिति मोवा भी पाया है कि पाकिर कमी-बाड़ी भूमिका न बाँचे बल्कि उसे यो पुण् पाना है, उसे बह पानी और विस्मुस सोये बसे पहे। पति

रिपो-त-मिस
सीलिंग पर विजिनेस मेम पुस्तकमा सिग्नी एक पिसने गल्व बैंक
पदा है कि 'भापत लिखने में कोई बना जिसमेकी तप हो, हमकोप
पा मुगकर मापारमा पाइने पैसा निकाल रेसको।।माप यही
अपनी भूमिका यात समाते है से प्रारम्न कोमिए । सबमुष अपने
विषयममा प्रदेए कर माना बिना मायक होता है मह सर्योदय
धीपक मार्गकी पहले पापको पपी पक्विोंमें फिरसे देखा वा सम्म
'पह सोवर शिवारच्या पालो पात मा समन्चमी पाहिए कि
मह कोई बार नहीसे कि प्रधाक बार मात्र प्रचलित है। मा
एक मुस्तरि है। महारमानीने सर्व पोर कर पा बिरहनि
किसी भी प्रभारो मारकी स्थापना नहीं की है। वह तो बस सत्यकी
योरमें सपे हे में । इसी पोपमें न बहिसा भवना सरपका रिकार
मिलामा
भूमिहात्मा प्रारम्पको निकास रेसे वाताएँ किस प्रकार पाक
कहोबा सती बनेकाहरण रिस पा सकते है। एक
दरमहा 'प्रेम' पीपक वातारी
'बसन्तानी मेमरी एम । समुषमान्तानी में। बिना
पास हर भी पिही पये और इस रिम्परान कहीं भी मत मारिज
पत्रणा या साइट महीं | माई यह है कि प्रेमपनपने उमप पर
बोकार पे पर सतसे भीगो पनुप्प । समामी रा पेमा की
रि पाना भौर अपनेको जाहे सपा कमा सिौ भापारप
मनुष्य के लिए पानीमा।
की बार गुणयों सपन एराट रोगार बारपार मनुप्पमें
मिलान करनी मारी। एक मि मैंने उनसे पुश-परेको
पोबार मते मेरावर विपास ही है में माविकोपर
अपने साहित्यमें बार-बार मामा प्रयल है मनुषय रेसलर सन, प्रपार
मार मार सह या tr

रेरियो-बार्ता प्रारम्भ, मध्य और प्रस्त अपने खास मानेमें व बोले-बला | स्विरमें विस्वास करनेकी परत ही उन्हें पाती हैमो मारमीमें देवत्वका यान नहीं कर सकते । यह गे वनुमयकी बात है, किसी चमत्कारकी नहीं कि मुरा बावमी मी विखनुस पुरा नहीं होता । उसमें कभी-नयाँ देवत्व मवस्म छिपा रहता है। मैन मपनी समसे इस सत्यको घडीमही नमार दिया है, और कहीं- मा प्रकाशित कर दिया है। प्रमचन्दनी भपने इसी मूण् दृष्टिकोषके कारण पुरे भारमियोती मी दुई मही करते पे मा मूं कहूँ कि पूरे भापमिर्योको पुराईको सह पावे पे पी नावे दे पपा बाद को [प्रसारिका पुताई रिसम्बर १५५] मगर यह बात यहसि प्रारम्म होती कि एक दिन मैंने प्रेमबम्पनीसे पूम- पौर घुम्ने म्ही गयी बातें कहीं बाप मा पाती तो प्रारम्भ पायब कुछ और मापक हो बाता । ममन् मस्तिति संस्मरनाम को बाम्पन होता है वह इनकी बीवन- मर्म नहीं उनके गुर सम्बम्प में हिसे नये निवामि भी नहीं । बा फिसी पेषा संस्मरणसे वार्ताका प्रारम्भकर उसमें भोतामोती संघ उत्पन को पा सकती है। बात्तकि प्रारम्मका हरेश्य यही होता कि सससे मोवाकि मनमें पातकि बपसे मोके प्रति चि एवं विज्ञासा बये। बाकापपानी प्रसारिका [ मप्रैल-जून १९५1 ] में एक पाता है-'बापूका पा-सामिप'। इसमें बापूके बड़े मुम्बर पर ग्पत किये मये । जिनमें किसीकी भो मचि हो सकती है, किन पाकिार प्रारम्भ करते है इस प्रपर- पर मेडन एक मा। मापीगी इस कसमें बहुत निपुन । भनके पिप पोंकी संस्पा हमारों तक पहुंचती है। मनी मौरा बहन, पनकी एक प्रपान मूरोपियन शिष्या के पास ६०. से भाविक उनके पत्र है। ऐसे संका म्यक्ति भारतमें तमा बीसियों विदेपोम होसे मिन्हें में ध्यप-समपपर यो बाबसे पर जिला कसे पे। गम्हनि बामसराम मौर रेसियोमाता-मिस दूसरे दिराममयो तपा मम्य च परस्म परनायकल मार भारतके एक साधारण कायकर्ता को पत्र लिसे है। बारिमारि। ऐसी पर्वा कुछ देर तक पती है, पसगार पत्र व लिये पाने है। इस पसि पोता यही समहेपा कि पाकिर बापूके पर-साहित्यका इसी प्रकार परिषय पातका पाक भी इसी बात भोरमवित करता है। परिपत्तांग पीपक 'बापू पर' मा 'बापू पुए महत्वपूर्ण पत्र' होता ठगे पोता यह माला बनाये रख सकता कि प्रारम्भिक पाकि पार बापूके पत्र नुपूत किये बाये । ऐसी स्पितिम मोवामोको विमा बनाये रखनो पिए बाल बापूरे किसी पत्रसे ही प्राराम की ग सकती पी मयमा पाकार प्रारम्भमें ही कह रे सपने दे-सोपहर में बापूध मालपूर्ण परमिंध बाप सामने रक्त में बापते यह कह कि बापू पम-रहन-कलामें बहुत निपुण पे। प्रेमरको साप हए पालाप या पूरे लिये किसी पारे पसे बार्ता प्रारम्भ करने यह किस भाटीयपसे प्रारम्भ किया पाम । नाटकीयताम समाषा मार्पम होगा। मोर रेग्यो- बापर चाहे तो इस नाटकीय नोट उपयोग सार ही कर सावा।। यह प्यानमें रपना मावस्यक किनाटकीयता नहीं अविनाटकीयताम बरस माय । सो-कभी यह महिनाटकीयता बहुत प्रभावोत्पारक होती कमी-कभी झम्पापर मो हो वाठी है। मतिनाटकीयाका एक उदाहरण बमरीकी पाताभर वर्मपसे रिमा पा सकता है। अमरीकी सिनेटके सरस्प कोपने एनीतिक जीवन र स्थान प्राप्त करने में रियों के माम्ममा का सहारा लिया पा। वह बोही भारमीम रितु मारम पसे अपने प्रोतामेसि बात परखा पा। रमी एक वाम पाएन 8 प्रतापा 'मित्रो पह है पी. काप बोल हा है। मुझे पुण्यात ही महत्व पूर्ण रहम्प मापके सामने बोले है हेलि में ऐसा कन, इसके पाले में रेशिमोगा। प्रारम्न मम्म प्रौर पन्त पाया कि बाप टेलीफोनके पास मार्य मौर अपने पार मित्रों को पह किये भी सुनें। मैं बार-पांच मिनट तक यों ही बात करता एमा बिना कोई विरोप बात अहो, इसलिए माप टेलीफोनके पास माइए, मौर मपने मित्रोंसे कह रीचिए किसाग रेडियोपर बोच रहा है। इसमें सन्देह नहीं कि यह एक माकर्पक प्रारम्प है, पर नाकारामामीम ऐसी नाटलीयवाके लिए सम्भवत' बहुत कम स्थान है। फिर भी भपनी सीमाम ही नाटकीयताका सपमोम किया जा सकता है। उपहायके खिए, किसी व्यक्तिका परिचय देते समय पानावश्यक नही कि उसके मम्मकी माउसे वार्ता प्रारम्भ की चाय पैसा कि हम पातमि किया गया है 'स्वामी रामाम्म परमहंसका यन्म गास प्रान्तके हमसी विममें १. फरवरी सम् १८३६. बुधवारको कामारपुकर नामक पाबमें मापा। पह गांव काकत्तासे रुममम पचास मीमती रीपर पश्चिमको विक्षामे है। मकाममाम गदाधरा। [प्रसारिका पुताई-सिमर १९५५ ] 'अपि दयानन्दका सम्म काठियावाइमें मोरणी राम्प एक कस्बेमें मपभप संवत् १८८१ बर्वात सन् १८२४. में हमा मा। उनका जन्म नाम मूमर्पकर पा । पस समय भारतकी सामारिक बबस्था गरी सोपनीय बी। मादि [प्रसारिका, पुताई-दिसम्बर १९५४] इन महान् पविठयाक बीवनमें हु०-सी महत्वपूर्ण एवं मावर्पक पर माएँ पटी गिनती बसि वार्ताएं प्रारम्भ की जा सकती। ऐसी घटनामोंकी पर्चा पातमि मागे पार हुई भी है। प्रारम्मको भाकपा ममानके पौर मी का पाप है। वार्ता किसी

रेग्मिो-जाताशित
हास्य-प्रपान मसंग या पिसे मुकी गाठली है। कोने हमेम
चौक सवारा प्रारम्भ देखिए
"एक साहब पियले भी गाएं और इसते मी या ऐ बार सिम
वापा पिट पे रस ही र पेशामा हस्ते थे। रात हात
करनेपर हा मोगरने बताया कि पोरवाम्म प मारपीडो पीर फा
पा। इसलिए रखी हिमाउसे बुक मम्मीर की
ऐमरा या
ठी पा पिटने कही।
अब हा वीनेका सीता सती की मुन कीजिए । पे
भारनी एकही कोठरी कर पपड़ी तारीक और मपानक पीबार
तूधन पिएपरा। मन पमा तो दोनों को मार बाये
मार सानिमाकनं सगे। एक पारामामापस गपा- किस
बसायी ताकी है। दूसरा बाबा रहा पार सपने मासे गोठा-
रिलमा एक तारा पौधापा। नामा तो समझे क्या,
जानेवाचे पाते है कि परम नही हो, मलिन बामपएक सनाका
एपाहमा है। मम स मताको माप पानसरे या रसायन हाँ
को मारिए गोहीम हाकिस्से।
किमी कामको पूरी मार मरमुरतीसे करना सहीका
परकीरिएको कोई मुगापार महोती मातको सहरहमा पा
कामादि उपहापापे सतीका! इस विनापर पुल
ऐसा ममता फिपम पहा बार उतम सा परमपर
मुली मोरारनामार भारती इस विस्तार एक मपहर तादानी
Newी मार गिम पर साहले वो पाकिस्म
भाहर मापके इलायसे भी सोप मरहे है और मामाईबसे
श्री मलेरिमाप रोनोमें फक मया पहलीम साहने प्ररमापा-
कोई नहीं। माघि हलो हात पार

रेडिमा-वार्ता:प्रारम, पम्य प्रौर प्राप्त
देता है, में कापरेसे पान मेठा हूँ। यह कायदा मी सीके हो का दूसरा
माम है?
[म्पिो संह परमार रितम्बर ११]
किसी रखएपसे भी पाकिा प्रारम्म मापन बनाया जा सकता है।
पियो कविताको पुमती पाई पक्तियो सप्त कर प्रारम्भमें चमलार
उत्पन दिया था समा। फरियों और सानियकारोंपर वार्ताएं देते
समय हो इसके लिए यही बकाध पता है, पर उसका पर्याप्त रुप
योग नहीं म्यिा भावा। सरणबामे प्रारम्भ हो राहाम यहाँ रहेका
सप्त। हिदीमें प्रेम' शीर्षक पाका प्रारम्भ है
महिं पग माहि मधुर म
महि विकास एहि कात।
महो पाती ही सोप्पो
बाह।
महारीकी इन पंक्तिमि मिस पप्यमे कर्तम्म-विमुख पगाको बिना
मापात पहुँचाये समोर कर बना दिया था। मम्म उस चाबुकी तरह
हमो मगर बोट पहुंचाता है पो इसीएि कि हमें सचेत करना चाहता
है। प्य सचेतकरे, बगापे नहीं सिफ़ पोट ही पहुंचाये मापातही
करे तो यह पप्प नौ पम्प-सी समनेवाली यह पीर गाडी है।'
[डियो-संह पारसम्बर १६५५]
दूसरा पहरण जननी बामभूमिब स्वपरिपि परीपती
पाताई
'महामपि त्राहका एक पीठ भागात प्रचलित
सारे बहासे प्रया हिन्दोस्तां हमारा।
हम कुमुते है उसको पपुलिस्ता हमारा
कि मामले पर पहले या भाष पाम पामा पा रही

रेग्विोबाता-भित्स
महाकविकिमचम्बने भारत माताको पम्सना, सचमुष ही मावा बता
म्यारेजीके म को मार देपो बन्दे मातरमहा बापरव-पन से हर
समॉन गो पराससे एक नयी स्तुतिका दान किया-तुमसा कमा
मायबापीतमा बाक्पिादि।
[प्रसारिक, मारी-मार्च १६५९]
कपिपात मतिरिका किसी माझएम्प मा विशनके सरनसे मी
मावि प्रारम्भ की पा सकती है। किसी महापुष्पी पितात
सौम्पर्य पौरमा उसमें पक्ति भी माती,म्मका मरकर्पन भी पाय
है। 'बाबा' पीपक व पातका प्रारम्भ देखिए
'महरमारीने एक बार मुमसे बरपा बिग्रेको मोपियों की
सम्वान मालूम होते है। परी प्रयत्न यता नियमित और प्पपस्थित
बीपल पर्व-पता किसी बोलीले कम नहीं। बस एकसर उनका
पारा प्रयान इसका पोपक रनेके लिए होता है। दूसरे मायनोम में
पनको कमीनो एवमको सम्म हाकारा होगा वित्
और तपस्वी पा मन्छा पाक और मटार्ता मा परन्तुमा गरम
सिपिए पापा कि दूसरों सताता पिर मी अगों पुनम
और मुकाविये पार पन्दुस्तानियों को परिया पाता है।
सीप पा परमेशका याम बाले ही पहारमागी पूोलर पल
मार बा पाते हैं। नामिमि इमरान पोपण परकी
पोति पायी जाती है उससे पी महारत विरगुतपरी। सिान तो
वही सिमि की पुष्टिम पिता पोरन-गुठि मोर पोषन
मिटि मुभावितम म पा। समोस बिपतामे गम्हें कोपिल
नाहने कर पियोगी पंसी मीणा प्रतापी संपाश मषिप्यासा
बमा दिया।
[क्षिपी-यह प्रपरनीतम्बर १५१५]
बाती रोपाहानियोंसे भी प्रारम्म मिा का सपना है। न
.

रेडियो-मार्ता प्रारम्भ मम्म प्रौर प्रान्त सम्बन्धमें भी यही ध्यान रखना होता है कि हामी प्रासंगिक हो मौर पात्तकि मूड विपपसे उसका पनिष्ठ सम्बन्ध हो । 'समताका सिद्धान्त'- से पम्मीर विपयका मा माफर्पक प्रारम्भ रमनीय है "विपावाने पर सबनम काम शुरु फिमा र समताका सिद्धान्त ही उसका मापनप पा। एक मारिबासी बोक-माके बनुसार सबसे पहले यस बार योनिम प्रामी-बमत्की रचना हुई–मादमी सत्ता और पुम्। भारमीके सुपुर्द काम हुमा प्रकारको सक्तियोंका माहाम मौर ईश्वर का गुममान। वैसी सूपुर हुमा प्रापी-नरका सेवा-मार । कुत्ते के सुपर हुमा प्रागी-बपकी रसवाठी। भौर बम्पकारको पक्तियोंपर निगाह रखनेका काम पुग्यूको सौंपा गया। परमारमा परबारमें उस पाक सिर्फ एक ठरायू पी मौर पर पी समताकी। चारोंकी तापी हुई मौर ईमरीय बाबेध मुना दिया गया तुम नारीको पानीस पाठीस बरसकी जीवन-भवपि पे बाती है। मादेश सुमार बाराका मन उदास हो गया। भावमीने सोचा बामीस परसमें तो उसके बवानाके हौसके मो पूर न हो सकेंगे। मपर सबसे समझ रार प्रापी होमेके माते यह वीरमका पुट पीकर खामोस रहा । परन्तु से न रहा गया । उसकी दोनों बौरासे टप-टप मामू गिरने ममे । मारव-भरे स्वरमें बोमा ने पाके मोत | चालीस बरमक निर म्तर पिसते यानेकी मरे बदर भक्ति महीं। मुझे किया वीस वर्षको माय चाहिए । मपर परमात्माकी मापीपको मापसीका तो कोई प्रश्न ही नहीं बा। ऐसे पारे पासपर मायमी सकेसम माया । उसने गिनतीकी-- की बायुके बाकी बीस वर्ष में सहप सेनेको तयार हूँ। इस तरह मनुष्यको बायु पातोससे साठ वर्ष हो पयो।

। १८ रिपोमाता-मित्त इस पारी मामी यो सहने पर अपनी मायुके बारह वर्ष पारे मारपीने कुत्तके महास पर भी मपनी बापू पुसा लिये। मन्त पुसूप पृण पया। सभी बड़ी महिमासि पाक बीस लेको रारी हमारपीमनी मतृप्त माला पिये मनुम्पने पुरे विमा बीमपभी माप लिये। अन्तिम सम भारमौली बीरमधपधि १०८होगमी, पी रुप में पाए और माफीबाम गर्ने । पार्य प्रानी परको वन्य बार ये हुए पापमोहको मोट बाये। ममीन यो मायामक निकट बेटी हुई मी पाएँ प्राविपिरा होम भार भान्से बहानामपन्, मारमाने तो अपने पापसी में समवा- कोणीय मुका मब कर गली । मगर यहा बह गये। पिता बोले-मामी art माश्या इमी पतताहीने पीना मागियोंकी जीवन-दिपमामारपी वोवारत पातीस पर तकदीमा । पाचपो पार उसका बावन बैठी समान होना। परिवारले भरपपोपपणे लिए पिसना हो राम ध्येय होगा साठी बरगतकी परकी रलगाडी रेप और माती परिवारमा पुम्पूकी वह मापार पमा यमकी मोर लावा रहेपा । हामी गमा सचमुच मामी मप्रेम पा! बारिम पुनो रेकर बरा पाया ममुप्पका पादने से समामा र माप मेके लिए प्रेरित किया हार मानवजातिको ठोर पाकर मनाहान होला पर। [प्रसारिका बारी-मार्च १५५] भारम्भ परमार्णकम सम्देह नही से यह विमान को या सरी पिने मृत विषयार पाने गुरमीयी। पतित पनि भी सारा प्रारम्भ होनपा पापि बाप्पंप बाला हम पहले या रेप रे मोचार्ग परिमा - - ररिपोवार्ता प्रारम्भ मध्य और प्रत है, बार्ताकार बीवनकी अभिव्यक्तिसे इसकी मिशेषता पाती है। 'प्रसा रिका [बुणा-दिसम्बर १९५५ ] में प्रकाशित दो मार्मिक प्रारम्म इस इटिसे रे गा सकते है १-एक समय था बब में सरकारी नौकरी और साहित्य-सृमनको परस्पर विरोधी काय मानता था। सरकारी नौकरी करनसे पारे में स्वतन्त्र पत्रकार पार साहमरमें ही हिबमेन रोग मुझे जम गया था। [ मेरा प्यबसाय और साहित्य-मृबन] २-'मैं रिस्की पहली मखमा सन् १९१५ में मापा । मेरे सूपका सेप्ट स्टीफस पई फूलसे हारीका मैच था। मेरे चार भाई ममें । मैं एक्स्ट्रागमें पामिल कर लिया गया ताकि में भी रिम्सी देख सई। गफ्टर बन्सारी महमके एक मरीज भी टीममें सामिछपे। इनके परिये गवटर अन्सारी याई रहनका इन्तयाम हो गया । मुझे ठीक याद नहीं कि मैन रिस्मीमें या-क्या रेषा पर भासारीका मकान मोरी गेटके पास पा। हॉकी- टीवहाँ हम सेमे मौर। गये पारगुतुब बोर तुरामदाबाद तो समझ पाते है। [रिती-पी पौर पुरानी] इस प्रकार वार्ताका प्रारम्भ बनेभनेक प्रकारसे किया पा सकता है। बो उराहरप प्रस्तुत किये गये उनसे परे भी बमी भनक प्रकार है-वार्ता का प्रारम्भ किसी प्रश्नसे हो सकता है, किसी चमत्कारपूर्ण परितसे हो सकता है पोतामाको पौनेबारी सिी वाक्से हो सकता है । इस प्रकारों की कोई सीमा नहीं है, मौर म इन्हें फिम्ही निश्चित नियमोमें बाधा ही बा सकता है। पाकिारकी प्रतिभा एवं पक्तिपर निर्भर है। वार्ता- कारपो मार सदा स्मरण रखना है कि यह घिसी भी प्रकारसे पार्ता प्रारम्भ करे पर उसमें बाकपन वीर रोचकतान गुण अवश्य ही ड्मा चाहिए । कुछ माताएं सीमित मषिकी योर डिव करते हुए प्रारम्भ होती है रेडियो-माता-मिस्स पत्तमान बर्मापी प्रमतिकी रेप्राएँ एवनी सीबी नहीं हिरनी पर्चा पोड़े समय से सके। [रियो सम्ह प्रस्पर रिसम्बर १६५] सीमित ममिका परत प्रारम्मम या मम्समें मा कभी भी प्रसनीय नहीं समझा मा समतापाकिार पामता से एक सीमिव मधि में ही अपनी बात कहली से समय मापनको स्वीकार करके ही पसमा भोवा मी इस बापनसे परिचित है उसे इसरी मार रितानकी कोई मावस्यकता नहीं होती। इसका प्रभाव मोवापर मप्र नहीं पाता । प्रारम्म बार बाकि मम्प मागका प्रस्न पाता है। मातापी एफ- मता मत उसके प्रारम्मपर निर्भर नही है प्रारराम तो मोवाकि मनको मपनी मोर पस भार भर करता, रिपको प्रति पोताममि बम पनि उत्पन्न करता है। उसके पापा र काम बाकि मप्प मान- पर निर्भर है। पौवा मन्त तक वार्ताको मुमता एमके इस मिण इस मम्म भाग भी पर्याप्त माविका पना मनिपाप है। मैसा बनेट ग्नपर कह रोषमताका सन्त नवीन हो रहना ही मोतामा प्यानको पाये रखता है। प्रान यह है कि मातमि भारम्भय मैकर बम्त कम प्रभार रोताको माये रखा पाप। इस लिए भी पेहए निपम महा है बाताहरपी प्रतिमापर ही यह भी निर्भर है। फिर भी यहाँ १७ एसे उपायॉरी वर्षा कीपापी है, मिनसे बातरि पप्प मापमें पेषच्या बनाये रखने में सहायता मिलती है। माताकारको सबस पाने वो पह प्यान रखना होता है कि समुपी पार्ता एक ही प्रकारकरी या एकरस महो। एकरमा रोपवाफ मार्ग सबसे मपिक बाबा गती है। प्रभूधी पामि तारानेपामा बार्ने ही , मर मारकीय ही हे पा सरगुण विसास सापारमनमे ही को पात मि एकरसता बनायास ही मा जायेगी ।म एपरसता हो भपकानेक प्रयत्न मार-पीपम रोपाप्रपा प्रमों रेरियोनवार्ता प्रारम्म, मध्य प्रौर भन्स पसरपा मारिकारा ऐसा पिमा पा सकता है। नेट इनारके ममुसार, "मिनिषता मानपक मन-स्पितिमें परिपत्तन, दृष्टिकोपमें परिवर्तन और सहीदरममें परिवर्तन। वापर्व स्पष्ट है कि पाश्भिर अपने पिपम मोमिन हिमांस देखें इसके विभिध पोको पाटित करे, स्पान स्पलपर विषयान्तर भी करें । विमान्तरसे एकरसता ममम ही भय होता है पर मोवाको समानेमें कोई कठिनाई नहीं हो इसलिए विषयावर पर समय पाकिार के लिए यह कह देना बासस्मक होता है कि मुम्म रिपसे इटकर दूसरी मोर यमाई मोर ऐसा क्यों कर पाई। मुस विषयपर माते समय विपनावरके पहले छोड़ी हुई मुम्प माता इसरे पनाम पोखरेबापे बडनेस विचारों की सेवा बनी रहती है। माताको कमी मुम पाताडो एक ही स्वापर कहकर पुजा अन्वरपर हो रहनेसे विषिमता बनी पती है। इसके विपरीत सभी मुस बात को एक ही स्थानपर रखनसे एकरसवाली सूटि होती है। शा. की मुस्प बातोको विस प्रकार और कहां-कहां रखा माम यह एकाही महत्वपूर्ण विषय मौर इसपर बातभिरको बबरम हो प्यान ना पारमिट का समयमें यह पहले ही कहा बाबु विभावकी शिपम-बस्तुमा विकास तरसेमत रूपमै कारण-चार्य-सम्मपणे मापारपर होना चाहिए। माती सभी पाहियोको सुसम्बन होना चाहिए। इस पनि मोखामोगी विवालो बाये रखनेत्री धपित रहती है। मात िविमाकोपरि मापाप पिलोग मारे इस प्रयाण पर दिया था सच 'ने बागरी महिना तरी हासित दी। भर एकसम मारी वाम इमारे सामने यह है कि बार्षिक पा प्रामाणिक पणा करणे पौन-से बस्तेमाल मि बा । पापानी समानेमे बहिसारमा तरीका इस्तेमाल किया गया। इसमें कोई दिपेपता नही। पाकि रेडियो-वाता-पित से कहा हूँ।मो नम बनता है, पर पता है। मनु मह्मपर मपिम्प सिहावा पतरोगामस्म स्वपरित निमरणाषिप्या सर्वमानमा । 'इस रेप बो महान् विचारक पर हुए या ने उनके बारा निम केोग अपने-अपने परिणी शिक्षा मंगे। भाइमो ऐसा नेता रमें मिा पापब हमारा देश मीसा परिमे स्वप्रम्प हाधित कर पा पाबा भी हमारे रेपमें ऐसे फोन.. जिनके हायमें सदभाव है। पोड़ी हिम्म बौर कल्पमा-समित रहो तो बाप हामि दुनियाको मारनेकी सपि मा पायेगी । यह को मारमन नही है यह तो दुनियाको बचाना है। या एक एसी महत्त्वामा है, बो रसने सपा । इसलिए परि हम भूमिक मसहा महिसक वरोडेसे हर कर सगै पो पुनियाको रास्ता रिष सकेंगे। ['विवेची से इस प्रबबनका मूब विषय है-मारके पुरमें महिसार या महत्त। और भूमिकी समस्या सुममानेमें इसका पया योग हो सका है। इसकी प्रतिपादन-हीमें रेखा मा समता कि किस प्रकार एमरसवाकोग करनेका प्रपल किया पमा है-विमिष दहिसि अपने प्रश्नपर रिपार मिया गया है, सभी पाते तसंगत है बीच-बीपम रिचायक बातें। ['पापीयाले बमानमें बहिसारमक तरी स्वेमाम पिया पया। इसमें कोई बिशेपता नहीं है 1-'हम तुरे पौरपर बिना सिवाब चुनाव परप इसीलिए भमषाम् पापो से पपा। -समर बाप हिंसाको मानते है वो गापूका पन करनेवाग पृथ्यवान् पा–ऐसा पहना होगा। मारि] सचित्र स्पतिर धतका सहारा लिया गया है। प्रस्तुत प्रबकन सायो-पार्ता नहीं है. परीयो पालिी दृष्टि से भी सरस सममा पापा इसमें सन्देद नहीं।

रेडियोवार्ता:प्रारम्भ मम्म प्रौर मम्त जब बाकि भम्तो सम्मम्ममें विचार किया जाय। इसका महत्व म्म दौर मप्पस किसी प्रकार कम नहीं है। यह मार्ताका यन्त ही है ककी पत्तिमा प्रोताके मनमें पार्ता सुननेके कुछ देर बार तक मूंगती ती है । सचमुच मन्त किसी वार्ताका बहुत ही महत्त्वपूर्ण वग है। लेकिन मितना महत्व मिझना चाहिए, उतना साधारणत नही मिन्ता । इस सम्बन्धमें सबसे पहण बात तो प्यान देनेकी यह किमार्ताषी स्तम परिमारी पाकिी समाप्तिका बाम होना चाहिए, पहें सुनकर का म हो कि वार्ता एपएक समाप्त हो गयी मह मागे मी पा सकती ।। श्रीसोका रेप-फमाग पीपक पाताला यह मन्तरेचिए रिमा बोरिमा हमने देखा यहा विचित्र वा। सिमेकी लम्बाई कोई ८. न। बौर इतने से रिमोमें २४ मुसाफिरोम-रो हरेक लिए सम-मकन कमरे पे । कमर्राटी सवारी मौर बीच दो फुट चौड़ा स्वा। कमरेमें उपलबबनेक मुपिया की पकि बार कमरेकी इन चम बस्तुमोके सिना पानी पीने सेस्यूलाइसके निमस कमोडका काम पिसी सिम्मी बार दौडिये मोर साबुन ये वहाँकी पत सम्पत्ति की। निपाके नवीनतम रेमे इस रिमेका नाम है रिफपस म्एट । [प्रसारिका माई-दिसम्बर १५५] पह वार्ता एकाएक समाप्त ऐ गई-बसी सकती है। उपयुक्त लिस वास्तबमें पातीका अन्त नहीं होता । स्मान परिषय-सम्मन्त्री सदूसरी माताको मन्तिम पीपार्योन एक ऐसा उपहप लिया बाप इससे पाताकी समाप्तिका परिचय मिले। 'मह रामस्पान वार्ताका महमतिम स है भाग भी पार है चित्तोडका पह मा, रिपाडाका वह मन्दिर सम्बरफा यह दुर्य मौर मेवाड़ी मारीतकी किरण-सी बह पनी । [पाकामवानी प्रसारिका, प्रत-वन १९५५ ]

थ्यिो वाता-पिम्म
उप्पप्रपान मार्मिक सम्बन्पमें यह पहसे मागा पुत्र किसी
मुम्म बावाको मातमें दुहरा देना भौताकी स्मरण-शक्तिको प्टिसे रफ्पोमी
होता है।
बित मानिस गोम्म पोवामा सक्रिय सहयोग प्राप्त करना होता
मोवाको एक निश्चित दिसाम हिमापी बनाना होता है तो
बम्पमें उस हिमाधीमताका संमत अपेक्षित है। भाचार्य विनोगामा यो
प्रपन पहले त ठिया पया, रस बन्तिम में इसे वाया
सकता है।
बम्प प्रकारकी बाकिबन्तिम बंगालो मी मापक एवं प्रमाची
पारस होना चाहिए । मह प्रभाव मोर मापन मिती मुमती
किसी विद्याकी पक्ति किसी महापुरप परम किसी प्रश्न मारिते
सत्पप पिया जा सकता है। उद्याहरण-साप दुध मानिक भाकपा
भात सेवा सन्
पना पगहरप गरि सम्मेसोक प.प मोठे मनुमन' पीपक
पाकि
'सम बात गुरुपी पीती सोचा पाए मीठे अनुभव
मुनामा मौर एम.ए. पर बाबा परम करनेत्र बनाया है,
तर देशवा ( किया.ए मनुमय ही रपाया बता पाया है। मीठे अनुमती
बात तो इसमेसे ही समाप्त हो पाती है कि कवि-सम्मेसनम गुहाया नया
पविताको पूर वाह-वाही हुई समुषित परिममिकरिया मया बारबर
सौर मापा । इसमें पहली क्या बात !
मातीसी पानी मैरा: मोपाससि एक बार फितीने या शिबाप
गिनी पानिया मियते न सबमें पुरी बीसीकी पर्चा पती है भार
पठी बोतक रिपपहानियां नीमही शिश?
मोरासनि पहा ममो मोरवार पारेको पानी ही होगी।
[मागासमतो प्रतारिका, पामगर सिर ११)

सपो-बात प्राम, माप पार पन्त सियारा श्रीपर बातका बन्त इस प्रकार है कीर यो विदेणेसे भारत बाठा भौर इन मरिक मार पमतमहा झेमावा? पहमा पर इस समाधम छ धाका मिळवा | पहा बाकर और मन्दिर विपरको रेसपर उसने अपनी पुस्तकमें सिपा-का माता पारसे पास वोपहर मपा पारसी समय माको पोटी प्रस्ममान हुई और मेराय बालदसे भर मपा मोर रस पिकी वरद मै बहामासह रख #पा गया, मैं पा मया। [रम्किी तह, प्रक्टूबर रिसम्बर १९५३] 'पुरामि प्रतीक मार्गका यह मत विप्रेमपार भी प्रतीकारक है। उसके ताप पुराण कोने मरिन पुगेको पम्पता और समातिक विकासके कमका पथन किया है। मत्स्म-नामें रहनेवाले धर्मा और पा रोमॉपर हवाम सिंह- पापा पम् पीर मामा मनुष्य परपुराम-नसी मनुप्य राम मारा पुष्य नरपोत्तम पुर-शाली और करिहमियुगका मात करपाका महापुरुष । साय पुपाके विकसके प्रतीक नहीं है? [ररिसो-सपा अक्टुबर रिसम्बर १६५] करिताकी पवितसि माता-वमाप्तिका एक दम बिरसाताका फोपहरोत 'माप हवाइए, या माप ऐस दोस्तोसे परराकर ऐमी बमह बाला पीहर कोई हो। मनी पौरपर धापर भापका रिस भवराये हेकिन हिरमापो मोमिनके वाब सहना हो परेया- सानो पीरिममें प्रबर मिनये कितीते हम । किरपा पर विहो गये प्राकार मोठे हम ।' [प्रसारिका, नाईनीमार १६५४]

१.८
रियो पाता-पिस
इन ससरोंसे स्पष्ट हो गया झेगा किपाका मन किस प्रघर
माका बनाया पा सकता है। प्रारम्म मौर मम्पके सम्मन्पमैं मोबात
परने पही गयो । यहाँ यहाँ मौ हरायी बामणी विवाहित लिए
भी कोई निमम नहीं है। यह भी पार्ताकारकी पति एवं प्रतिमारे
भापारपर बनेक गमि प्रस्तुत किया जा सकता है। किसी भी प्रकारसे
हो तोयानाधि मन्त पुस्त मौर मनपर पहरी पप ग्रेगनेवास्ता होना
पाहिए, यही स्मरप बना है। यह कहामत टीक हो रही बावी-
बन्ठ महातोसरममा ।
.

रेडियो वार्ताकी भाषा-शैली - मामपामीके प्रठीम-विषम मंकित -बनहिताय बहुमत मुखाम । प्रसारमकी दृष्टि विचार किया बाब वो माकपा माका पानीका रेस्प नहीं प्रसारण मात्र महेश्य है। ीपो सबकी का है, ए सामूर्षिक प्रपनीयताका माध्यम है। इसकी समन्ता इसी गावमें है किसी मनिकाधिक लोगों का मनोरंजन मौर कापान हो सके। रेडियो- पातीि सामना मी सी बात है कि वह अधिकाधिक होगवक पहुंच सो कार यह कार्य पातमि प्रमुफ्त मापापर ही निर्भर है। यो पात- के बनने-विगहनेका सारा एतररामिस्व मापापर ही है। इस दृष्टिसे भाषा प्रश्नपर पम्पोरखसे विचार करला प्रमेक बातकारका कत्तम हो पाता है। शियोबा भविताविक सोमीकी समभम पा सके इसके लिए भागाककिपातली माषा उम छोमोंकी मापा हो जिनके लिए माता प्रसारित की पा रही है। वह मात कसरोपर ध्यान देलेकी है। सबस पइसा स्तर बहुत ही पर है हिन्दी-पापियो fए प्रसारित पाकी मारा हिन्दी ही ऐमी पाहिए, से हिन्दीमेसी हिन्दी-संसात या हिन्दी धरतीका मिश्रण नहीं होमा पाहिए। मह बड़ी सीधी-सी बात पर इसपर हमारे यहाँ प्यान नही रिवा बाता। यह सर्वविदित है किमि महिनी-पापी श्रोती संसात या मरणी-पारसी जानते है मौर दिसौ रेडियो-माता-सिप यह निश्चित म स्मारय । यिोनेह ममष्टिम अपने यहाँको मो. पार्मिक सम्बाबमें गए है-प्रसारपाको पिपी मरमातम होनी पाहिए, एसे भविमपिक मोवायोक लिए गोषसम्म होना चाहिए। इसम तात्पर्य यह कि उसे बिलकुछ स्थानीय नहीं होना चाहिए। यह कवन भव एम सत्य है । यो वार्ताका परात बहुत ही विस्तृत और पापक होना पाहिए, उसे अधिक से अमिक मोगफि पास पाना चाहिए. इसके लिए बोलिकि व्यवहारसे बचना मावसह बातभर एक- विपके पिए ही वार्ता प्रसारित कर पप गाफी बात पूरी। ममी पामे कहा गया है वार्ताको मापा बन मोगोंकी मापा होनी पाहिए, जिनके लिए यह प्रसारित की पापी हो। इसका बस पर भी है किसी भाषा भोता के अनुरूप होली काहिए । वार्ताएँ विनिम बने लिए प्रसारित बाठी ई-सामाग्य शिक्षित म्पतियोंके लिए, पामीण बनताने लिए, बच्चोंके लिए, स्फूति के लिए, कामोंकि पुषहरिलिए। इन सभी बाकी अपनी भाषाएँ होती है तो सम समेकी गरमी पीमाएं होती है। इनपर ध्यान देना दातारसा फत्तम्म है। जिस मापा सामाग्य मिसित म्पतिया सिए पाता प्रसारित की पायेगी सौम बच्चोंकी पाताएँ नहीं प्रसारित की जा सकती। 30 मातिर इस बात पर प्यान नहीं हैं। मान नही रेनेशातमिसे एका सारण दिए, 'माम अमर के लिए प्रसारित बमवाफी मुरमा पौरपाकी म पवित्रा है। 'मनुष्य बिन पिकाका उपयोग करता है, सममेमे मविस्तर माग की देन है। मप्पापर मिक मामिक शिक्षा प्रणा और पेपरको मम' पर, मयूर पुत्र प्रथा और बम्लीपर मपिकार होते है। परन्तु महो मषिकारोंमस्तित्व पिरस्पायी है पण । समापारी म्पपरपा मिन-मामिल ही नहीं होता मिसम्मान मनुष्य के लिए पिया रामसम्म दार मही हो ममता, प्रगावपमें न एना होता है न पारितार रिपोबावाडी मापाती होसते है।मम्स मिथर मन प प्राप्त होते है पर कसून र डीन पाया। ['तारप, १ से १५तिमार ११४] अपने मोबागोको सामानांपर ध्यान रखमेवात वार्ताकारामसे भी एक- का सहरण देखा वा सकता है, 'साम बगद सिए प्रसारित का बोहमार सपनिमारपीपक वातापी में किया। माम किसन पाक मही पादीकी इमपाय माम्म होती है। वे मापपुरस पाने पाया है कीमती कपो मोर भर वन भी। और महत पुमधाम मनामी पापेपो पादी। बहास माया बना पैसा' वारा यह छोटा-सा कामपा रोख पना परिमम करता है पिन कमी मासोमाय नही रीखवा । पर पानी के लिए को बहुत सीकर हा मी मिशीtgal के लिए, और मुना है कि करीमी मह मापस कर भी लिया है। पायर इसी राम्मी पा सारी धनी [ साग' १ से १५ जनवरी १९५५ ] सामान्म मिशिव पक्सियहिए प्रसारित भातमि मी यह प्यान रखना बागायत है किसमें ऐसे कठिन पर बाय नि पोतान समा सरें। रियो-मार्गको मापाप ऐसे परावलपर पना अपेक्षित हिपहरिकसे अधिक माँक लिए पाए हो सके। इस एटिम रेरियो मातमि मुन्दर बनबारे गोन्बो पोका कोई मुम्ब पी है। मनाते पासनेमस पा-परिमाप समान नहीं पाते वो संसार मुम्बखम पम्प मी निरर्षक पनिया है। इसी सरपोट समपर गावि है-बातों में साहित्यिक सम्पावतिया महान होती है। रिपोमावारको एमी पवाटिभि ना पाहिए, से सभी रोस्यो पिरोपम सीकार करते है। वी.की. सौ. मतिर पार न हिस्टनो ममरने एस्त ११२ रेरिमाबार्ता शिस्त या निषित भमसे स्याम्प है। छियोमेड पैमदिन अपने बहकी पीयो पातमिषि सम्बन्धम करते है-प्रसारमाफिी बनी सरमतम होना पाहिए, पसे अधिकाधिक भोता लिए बोषपम्प होना चाहिए । था पात्पर्य यह किसे विमुझ स्थानीय नहीं होना चाहिए। यह कवन मन एप सस्प है। रेरियो-बात पर बहुत ही विस्तृत मौर गाएक होना पाहिए, उसे परिण-अषिक को पास पोषना पाहिए, इसके लिए- बोलिकिम्मबहारसे बचना बावपया 1 पहा याताकार एक सपा विपके लिए ही वार्ता प्रसारित कर रहा हो पहाँकी बात सर्प है। ममी पास गया है वाचकी मापा सामोपोपी भाषा होनी पारिए, जिनके लिए यह प्रसारित की बा हो हो। इसका मब यानी किवाताकी भाषा प्रोता पक बमुम्म होनी चाहिए। रातार मिनिम पोलिए प्रसारित की जाती है सामान्य सिमित म्पनिक मिए, पामीन जना बिए, बाकि भिए, पूति के लिए, फालेमोके मुवकिए। इन सभी बाँकी मानी पापा होती है वार्ताको सम भनेको मनी धीमाएँ होण। इसपर पान मा वार्तापरका कम्प है। जिस भाषामें सामान्य सिमित म्पतियों लिए माता प्रचारित की जायेगी पसौमे लोंकी पाएं नहीं प्रसारित की जा सकती। इस पाकिर इस बाळपर प्यान देते है पुण्मही है। प्यान मारेलगातमिसे पर पपहरम रेपिए, 'पाम समा के लिए प्रसारित 'जनताको मुत्ता पीकपातकी ये परिना है। 'ममुप्प गिन परिकारों पयोम करता है उनमेमे मापार समार कोरेगी। बप्पाप मिक मामि पिता या मोरक्को मन पार मार पुत्र प्रग और पम्मीर पिचर हो । परस्तुम तो इस मपिता मस्तिस्स पिरस्पायी है मसम्म । समामाली म्पबरपामें पिक-माहिर हो हो हो निसन्तान मनुष्य लिए पिता पम पर दार नहीं हो हमठा, प्रगावम न पा होता नामंदिवपिपार रियो पातकी भापा-अंसी हो सकते है । बहुपये वापिकार कानुन ारा प्राप्त होते है और कानूम उन्हें सीम भी सकता है। [ 'सारम, १ से १५ दिसम्बर १९४] अपने मोखाबाको सीमामापर प्यान रखनेबाहेमाममिसे मी एक- का उपाहरम रेबाबा सकता है, 'ग्राम बग सिए प्रसारित 'कर्षका बोध बार उसका निवारण' पीपक बातफिी में पक्तिमा है भाव किसन पाराके यहाँ पापीकी पूमधाम मासूम होती है। प्रते मामपुरसे गहने हाया है श्रीमती कप मौर र मरबर्तन भी। और बहुत धूमपामसे ममापी बायेगी भारी। हासे माया स्वमा पैसा ? बेचारा यह छोटा-सा कास्तकारबोसोम समा परिमम करता है किन कभी माहोमाठ मही पीचता। पर पानी के लिए वो बहुत कर पा है। काली मिमी tat वनेके लिए, मोर मुनते दिकरोड़ी म साहूकारसे कर्म भी लिया है। शायद इसी रामसे या मारी रोमनी [सारंम' १ से १५ जनवरी १९५३ ] मामाम्म सिमित पक्तियोंके लिए प्रसारित वार्तामोम भी पह पान रखना मावस्यक है कि उनमें ऐसे कठिम शमन मा गिरें पातान समास सरें। ररिपो-पार्ताको भापाका ऐस परातसपर रहना अपेक्षित है किमहभिमसे-अधिक सोगारे लिए पाए हो सक। इस दृष्टिम रहियो पातमि मुम्बर खममासे बोबो धोका कोई पुस्य महीं है। बातों पासने पहा पा-'यदि माप समान नहीं पाते तो संसारक सुन्दरतम मर भी निरर्प पनियां है। इसी सत्यको मेमेट मार दुहराते है-वार्ता- में साहित्यिक पमिया वर्षहीन होती है। रेडियो वार्ताकारको ऐनी पम्मासिमि बचना चाहिए, इमे सभी रेडियो-बिग्रेपम सीधारक है। बी. बी. मो. प्रसिद्ध वार्ताकार अनि हिस्टमके मम्मपमें एसन

रेरियोमाता-पिस्प
एप गेरोपियन एबना कपन है-'पास्त्र में मपनी बात नियम
मा परिभम करते जिस साहिस्पिक परम्पराम ये पके थे उससे बाते
हए, मोकप्रिय मायाको खोर करने हुए, और 'ममी सेरीको पीछे गोले
हुए । बान हिमाम बाहरम प्रपेकसीयोबाधिरसा मारण हला
चाहिए । करिन साहित्यिक सरोका मोह रही को पार सफल
बाकी रचमा कर सकता है। कहनेको मावस्यता नहीं किस रिम
मपावपि विकास हो पा है सानपर 'ममी तक विकास हो रहा है
भषिक रचित समता पाया ।
एमांकी वर्षा पर पो तो यही पह भी कह दिया जाय कि
बातकिारको ऐसे एम्मा म्परहारसे बचमा भाषायक होता है यो समान
पचारगो कारण माप बापक होते है। पानी की अपेमा
चीन रेसके बच्चे ना मषिक अन्य होगा। इसी प्रकार मुरषिमें
पापक धमॉम मोबना रचित है। पवन सास पर 'लने
बो' बाहना प्रसंसनीय पहा पायेगा।
यो-
माती भापा की सम्पमें समरे महासपूर्ण बात यह
स्मरपीप कि उसका मापार भापास हिडिम्प नहीं पम्प
होना चाहिए। इस दृष्टिमे श्री मुरित निबन्पा मोर प्रसारित पालिने
अपर होता है। यह गान सहरमसे सट हो पाएगी। बता पहले
कहा मा पुरुष हमारे महमि मनियर मिन ही प्रसारित है,
फत प्रसारित हामिाम ही हमें मुरित मापा भनेक माहरम मित
पायेंगे। प्रस्तुत उदाहरण मारता पुरानी राजनीति पीक ग्रा.
-
'यपि मानुषिक पाचन पवार्म भी मिलता है, परनु
राशरा उचापितारी दिनय निपमा जोपमेरा रिचमाप्ति
मुमति सम्पपारिता पमप्रियता पारि पुमाम रिमूपित होनेपर ही एग
बन ममता पा और मिी एमर पर मभिषित हाने लिए परिपात

रेशियो-माताती भाषा-शैती में सभा तमा समितिकी बोर रामायपकाए सपा महाभारतकालमें पौरबाम- पार संस्थानों की स्पीति मनिवास होती थी। [ रेडियो सम्ह, प्रपदबर विसमर १९५१] इस मसक के कठिन पम ही नहीं, बल्कि इसका माप-संपठन भी इस बातकी मोर संरत करता है कि मह मापाका भापित स महें लिखित म है मह म मोपन बार सुनने के लिए नहीं सिखने मौर पानो मिरा है। हम बोमो समय सम्वे-सम्बे वाफ्याँका व्यवहार नहीं करते मिम और संयुक्त वाक्यास बहुत कम काम मेते है, हमारे धन और पाप ऐसे होते है जिनके पोषनेमें किसी प्रचारकी कठिनाई नहीं होती मौर जिनको समझनेमें भी सुनमेवाठोंको मानसिक व्यायाम नहीं करना पाता । निवामि मापान सिचितम महेही चा पाय रेशियो वातषिों में नहीं पड सकता। इसलिए वार्ताकारको इस मोर भगाय ही म्याम देना है मे मापा उच्चरित स्वस्पन्न मापार पहण करना है। रेडिया बाकीच्य भभिबना-हो पाक्य पय्य, सबका हमारी बोसपासकी मापाके निकट पहमा अपेक्षित है। नेट रनबर के अनुसार 'बात्ताका मामेल सिखने में सामान्य मातिापकी मसगी मनही पम्-निधिका है। इस सम्मायमें एक बात ध्यान रखनेकी माय मि हियो- बाकी मापाको दमारी बोहवामी भापाके निकट रहमा है उसे गोपचासकी मापा नही हो जाना है। पीयोमार्ता मौर सामान्य वार्ताणपमें मन्तर है। रपियो-माता साहिस्मिट कति है उसमें पति चाहिए प्रमामोत्ता रकता चाहिए, इस्ती पाहिए । बोमपानमें विसराहा होती है स्मान-स्पान पर पूरे पार पेठ है बातों और पदॉपी निरपर बाबत्तियाँ होती है 'वब तो पस 'मच्या मममे ? जैसे मनेक पोका मालताके माप म्यवहार होता है। रेशियोपातमि इन सारे पबहारसे उसकी पित में सीणता भावी है। इसीलिए मनुमची प्रसारपस्ता रेग्पिोनाको बोस रेरिपोवार्ता शिम्प पाम निष्ट रखते हुए मी उससे दूर रसमेन परामर्थ ।। मेट रामवरका ही विचार लिया पाय-यो-माससकी इलिमे स्वाभाविक पाता निक म्पबहारकी मापाकी मुहावरेबार बार प्रामानिक मभिम्पत्ति है उसम्म मरण प्रस्तुतीकरण नहीं है। एस्कन ऐप मेरोपियन एसनो भमुसार, 'अतिरिनकी भाषाको निश्चित हम्बावतियों और भावना सपमें तीन बना देना महान् प्रसारपती महत्त्वपूर्ण विशेषता है। हम विपताकी उपाबिके लिए भारस्यक है किपातकिएम मोर वाक्य सुबोध होते हुए भी निक महारते कारण विमुक्त विसीले म हो ऐसे पिसे-पिरे पनि अपेक्षित प्रयार रसन्न करनेकी ममता नहीं होती अपनीने माही -वासन अधिक पिसनेसे मुतामा फू जाता है। विताम बोलचालको भापाके पबहारसे रेशियो वार्ता यो दुर्वक ताएँ माती। इसके सम्पवर्म भी प्रसारमकतने विचार पिया है। उनके मनुसार 'मच्या माप समझते है मे शब्दोका अधिक म्पबहार वार्ताकी बोमपम्यता वापर होता है। मन बावरको रमपर मी मान देना चाहिए। बोमबारके निकट रहकर भी मापा बासवानको दुबमासि मुक्त ऐ ससमें धक्ति ये सरलता ऐ गोपगम्मता हे, वह बोसमय सहर मौर मुनिपारन हो, इन सभी दृष्टिपासे इस पुस्तमें पास पर विनोबा भाव प्रपोक मगोंडा मध्ययन यिा जा सका है।ही उन प्रपना पता बोरामोअपनी सप है जो सभी स्थान पर परि कभित होगी। यह भी पश्विन एकमेन है। प्रस्पर सामनी जय होती है समारम्यान देना उमरे सहारे अपनी अभिपसिरमा बान म्पस्तितको अभिम्पस भरना। जो शीयानातरि लिए अनि पर सारे विनसे यह साबितीया मातादीमापा पुस्ता रेडियोमाताको भाषा-भती की निर्जीव मापा नहीं है, प्रत्यक्ष सम्माषगकी सभीष भाषा है। इसके लिए बड़ी ही प्रामबम्त पैटीवी अपेक्षा है, ऐसी ही बिसके सम्म बोते हा चित्र-निर्माण करते हो बो भोतामाको मपने सौन्दर्य प्रति माre मकर अपने पीछे उफनते मायो-विचारकि प्रति माह करते हो मिसके मायाम पनि हो प्रबाह हो ध्यात्मकता हा समागता हो । माषित पा- की पाक्तिपर मापारित ऐसी ही बीवनमपी मापा यही रेशियोनार्ताको सफल बना सकती है।

रेडियो-वार्ता-प्रसारण
रमियोपामिर रेस बार ही नहीं बपिनेता भी । ना
मेपन समाप्ति सापही या हाका पमित्त पूरा कर मेता है, और
उसके सर अभिनेवाला स्तररापिरष या नाता है। पर की वार्ता
नाटक बीमार बह रसमा मुल्य अभिनेता हो जाता है। यो
बा एपात्री नाटक मिसा मुम्प पर माहिर होता है। इन
माटम्म हम्सिी पूसरे म्मानिस ममिमय नहीं कमा सम पनामि-
नम ने परिवार निदिन पिगमॉको पारित कथा
अभिमय समयपर ही बातम्पसारगरी सफा नरहै।
बन्डीसे-बन्नी नी हुई पाता भी प्रचारप-कभी पुरावापरण
तित प्रभारहीन बोरवप हो जाती है।लोमिए प्रसारमार
भी प्यान ना करके लिए माराया है। वैसे माटाको पाता
समसार निव होगी। उसी प्रकार शीयो-मातारी समता स्टीयोम
मारनपुर। बार किस प्रकार मारोगपरमपना सामाषिक
पिसनीय और प्रभागोपारा अभिनय प्रस्तुतकर इस रिपफमे बात
पारको परिचित होना चाहिए।
यह विपिएसबाट होकिदा रमपीय या पीपोनाटको
अविमना के लिए परमम्माष मोर प्रमियमरो मायरसमा एमाही मानी
है यह गानाम्प रागिर पालिका होनी एकपा मम्पास मी

रेडियो-बात-प्रसारण गमावस्यक मानता है। प्रोड्यूसर पोपहरम अपने वार्ताकारसे टेलीफोनपर कक्षा-रूपया पामको एक-मे पटे पहले वा बाइए, तो रिइसम हो पायया। उसे उत्तर मिता है-'रिहर्ससकी पपा पम्त है? मैने पर कर सिया है, सब ठीक है। मैं १५ मिनट पहछे मा बाऊँगा।' यह जो नये पाकिारोंकी बात है, पुराने बाकिर कहेंगे, मुझे रिहसकी पा परत में तो पांच वर्षसि पात प्रसारित करता वा रहा हूँ [कास चन्हें पता होता कि पांच वर्षांस उमकी माएं कोई सुनता भी मा रहा है या नहीं। ] बौर प्रसारमके निश्चित समयसे दो-बार मिमट पहले स्टूरिमोमें भा पायेंगे । ऐसी स्थितिमें बाकाण्वामीसे प्रसारित पार्ताएँ बनाकपक बौर प्रभावहोम होती है तो इसमें कोई पापकी बात नहीं है। वार्ता-प्रसारमके पहले पिससको वनिवार्यता सम्बन्प, बॉन एस. काश्मिका यह विचार नमृत कर देना पर्याप्त होगा-रेग्मिोमाता- प्रसारमके कुछ ही मिनट पहले माइक्रोफोनके सामने पहली बार किसी भी प्मक्तिको नहीं जाना चाहिए, पातहिारको रेरियोहा मनुमब पहमेसे कितना भी अधिक क्यों न हो। प्रसारण घस्पाएँ वार्ता-प्रसारपके पहले हमेपा ही माइक्रोफोन रिर्सबके लिए एक समय निश्चित करती है। उसमें बिताये गये समयका पुरस्कार वार्ताकार पौर षोता रोको ही मिनता है। हिसक्से फितनी परेशानियोंकी बरत हो बाटी है यह रेडियोये सम्पस पक्ति ही मानते है। इस सम्बन्धमें मामे कुछ पर्श करनके पहले अपना एक मनोरंक बनुमय प्रस्तुत करनकी हम होती है। कॉमबके एफ प्राम्पापक पहली बार एक वार्ता प्रसारित करने माये-निश्चित समयसे तीन-चार मिनट पहले । मौर कुए ग्रहनेका समय मा नहीं स्टूडियो में पहुंचकर मैने इना कर दिया कि ठीक समयपर दूसरे स्टूडियोसे एना उम्सर बापका नाम मनाउम्स करेंगे और एसके बाद बापके सामने दीवार पर पड़ा नीचेवाती बत्ती बोपी तब माप अपनी मार्ग पर करेंगे। बारह पाता समपसे बरम कर बौगिएना। समय हो पमा पा मौर में तीयो-माता-मिस - H सुनिए । पी म[स्टूडियो की बरामय भेटा-सा कमरा, गिसमें एकाउम्स, प्रोड्यूसर मापिठी] में बसा पया लेकिन मुझे मग हाल पारि मेरी बाते सुनी नहीं है क्योंकि मानसिक भाटकी स्थिति में सरे स्टूरिमोसे एनागमरने भोपमा की-भर शीवार्ता । मपना नाम मुनाबी पहा नही कि पाधिरने वार्ता मुस्करो। मैंने देखा उनका मुंह पर हामिपि सनोमावार मुझे नहीं मिड होवी क्योंकि मुझे यूपमें कस्ट्रोड कम [यहाँ चीनियर बैठते है, बीर बहसि ये स्टूडियो मारिका संबान करने से पिता [ रोसनीका यह संकेत विससे यह मावहताकिब यह स्टूडियो काम कर पा है और यहसि कायाम प्रसारित किया थाय ] नहीं मिला था। मुझे जब पिडा मिला तो मैंने रामक स्टूडियो क्लिा रिया बीमारी काठ बती या सटी। उस समय वार्ताकार मपने किसी पारपके पाच पे पोतान भी उन्हें पहले मुना होपा। पार्ता सुनते पए में सौर पहा था कि सम्म वार निश्चित समयभाये बनेकी कोधिध करें उस समय उनी वार्ताको पिती बीबपहपरसे पार के लिए तैयार पना चाहिए। माताकार वार्ता पारेमापे की भावार बम हो बी कि रामके भीतर पगाहट बहुत अधिक है मैंने पहली बमोवीन मिनट बाकी पारिको भी पायर सय को पार बायो रानि भी सिर रखकर सामने नहीपी बइमा पुपोग-बातकि मम्ममें हो। मेवॉक पया कि पहल्या होम्यो। सामने देखा तो पाांतर पाच भावसे पूर्वीपर सापार होकर मैने स्टूडियोम me k लिया। सूरियो मार पूण-मली तो तीन मिनट से बार बीवी क्यों हो एन्होंने महा-मापने सामने पदमारती रियादो मेम प में समा गया सात पती सब पाहणेश सोपा उथे पहा भी यही समझा। ।

रेरिपो-माता प्रसारण १२१ पिसबसे फेस इस तरहकी सामान्य बातोंकी ही बानकारी नहीं हो माती पति और भी बनेक सुविधाएं होती है। नये पाकिारको यह मात नहीं होता कि उसे किस पतिसे वार्ता प्रसारित करमी, मपने परपर मिसे मह रस मिनटको वार्ता समझता है, यह स्टूडियोकी दृप्टिसे पन्द्रह मिनटकी पात झेपाती है पसे पट-छांटकर इस मिनटकी मीमामें बाँधनेका काम रिहर्सबमें ही हो पाता है। इसके अतिरिक्त उसे इस बातकी भो बानकारी मिन्टी है कि यह मामेबके पोंको किस प्रकार प्रये पौर रखे कि समसे पापाहट न हो प माइक्रोफोनसे कितनी दूरपर बैठे उसकी बाबार कितनी ऊँचाईसर ऐ, बहबार्ता किस प्रकार प्रसारित करे दिन धम्मॉपर शोर रे मादि । हिसकी उपयोमिता नि सनिम्न है उसके लिए रेडियो अधिपरियाँका मामयम स्वीकार करना सौर मामन्मन मिनेपर उसके लिए स्वयं माप करना प्रत्येक वार्ताकारण कर्तम्प है। बब प्रसारपकी कुछ मपेक्षित विशेषताओंपर विचार किया जाय । पार्ता प्रसारित करते समय साधारणतः दो कठिनाइयो पाकिारले सम्मुख पाती है। यही कठिनाई यह है कि बनेकपाकारोंको माइक्रोफोनका भय होता है। मारपके सामने बाते है उनमें पराइट मा पाती है। सम्भवत इसम्य कारण यह है कि ये सोचते । ममुक-अमुकम्पति मेरे ममुक प्रतिवन्तो मेरी वार्ता सुनते होंगे, यषि वार्ता मच्छी नहीं हुई तो कोर पा रहेंगे मेरे प्रति क्या-क्या पारमाएं बनायेंगे। दूसरो कठिनाई पह है कि पाभिरका प्रसारण निर्माण और प्राबहीन हो जाता है। इसका प्ररण सम्मकत. मकिपातकारके सामने स्टूटिग्योम दूसरा कोई नहीं पता बिससे बहमा निग्रेरित करे मोर विसकी प्रतिक्रियासे उसकी बागी में सनीषठा भाये। एसी स्थिति वार्तापरके सत्वगत् हो मानका भय रहता है, इसका संकेत हम पहले ही कर माये है। इस ममको वातावरकी पानीम पाक्न माना प्रसारण फसाकी सबसे बड़ी पेमा है। नेट रनबर कहते है-मास्तबमें मिस वस्तुका मल्प है, वह यह है मला ८

१२२
रिया-बिल्स
किमारकी गाय बीवन हो। यह एक ऐसा नाम है से कोई भी
ओयूमर बार लिए नहीं हर सटायाबापसे पा साता है कि
छावा सोबरपर माविम सपाट अश निषि पाते है और
आपको बागीय १७ बोगन गर्नका प्रवल कर सकता है। मेरिट पह
टेमिमामात नाही वा विट मनोशानिक धीर। सातमा
पासमार स्वयं अपने ही र सोहै।
चिनोठिनाइयों और किसानमा दोनों ही मनोशानिय
है मौर इनाम समाशल मी मनोरमानिक ही हो सकता है। सभी अनुमची
प्रसारमती इनका समाधान रिपाई मिाकार वार्ता
ममारित करते समय अपनी मानसिक सनुप पर ीि प्रिय
पमित परिरित मय हमपीका निचरा यह मामाकरे किए
निर्णय मारमें बोमर सपने प्रिय म्परितसे ही बात कर रहा है।
4ट नबर ही रपमा देते है। सारा पामिरी मोमें
सजीवता बासमतीमार एवमरिहते है-परा
सीपर रामन ने निी परिचित परिचित करा पर लिए
उपयोसी उमप सतपास पेषिमा एमसी विधारणा
समर्पत करते-अपने सन्देषको मानवीय कमाने के लिए बने प्रशारप
बावरी माडोलके दूसरे छोरो मामनिक मित्रमे मारपण
होती बस मामेव ही मही शेष समते, म परेको भी
सोपा
प्रमिवाधिक मनुमा बनोसाविक मामाला सरममा
विवर। मुरलिपिसमें सि मोनुभव इस प्रकार
10. सनीने पोनामोनोपार-बार या पानांची मोपियों
मशिने चिमनी धामममाना भयो
है। रेतपय मानव शो म प्रमादिता ने
माम्ने हुए पति मपनी पर मना रहे हो मनले

रेडियोमाता प्रसारण १२३ किसी एक मित्रकी कल्पना करते थे। ए.के. एम अनुभव करते थे कि मपन परम मसाबर सामने बैठे अपने किसी मारमीयसे अपनी साहसिक कहानियां रह रहे हो। लप्रसारणकर्ताबोंके भनुमोका उपयोग कोई भी वार्ताकार कर सकता है, मो यह उस काम महीं है। एनके ही ममि मुद्रित मायाको सामाविक मनेबाही गेमें पानका प्रयत्न करते समय ऐमा मानसिक चित्र अपने सम्मुख सरत रसना कोई मासान काम मही है मौर मन प्रसारणकर्ता मनुमब करते है कि ऐसा मही कर सकते फस यह होता है कि ये इस बाता मामासरे देते है कि ये जमा मिशिव पोय ही रक्षा कर ऐ है। फिर भी पार्ताकार मानसिक भप बोर निर्मातासे बचनके लिए इस रिणाम प्रयन कर सकता है। प्यक्तित्वक प्रसकी पर्चा पहले बातावान प्रसपमें की जा चुकी मार्ग-प्रसारपके प्रमममें उसका बोर बमिक महत्व है। सबकी बोलने भी बनी सी होती है, सबकी मपनी बाबार होती है और इन अपनी मियोपताना इसरे पदार्म मपनी वस्तिमा मभिम्पमित रेडियो प्रसारणमें होनी चाहिए । हो मह प्यान रखनकी बात अबस्य है कि समान सन्चारण गुर हाँ। माइक्रोफोनको यह विशेषता की गाती है कि वह गड़ाही मूमपाही होता है और उन्चारकको साधारण भुटियोती मी बात बड़ा बनाकर पोसायकि सामने उपस्पित करता है। इसलिए माता- पारको अपने सच्चारपपर मवम्म ही प्यान रखना है। हिन्दी में ती उन्चारणकी परिमाई नहीं है, फिर भी बहुत गोम गुरु उच्चारण नहीं करते। मरिहर मौर रो मात्रामा उच्चारमपर ध्यान दिया पाप घमौर ९ रमौर गया । और 4-4 कुक बकि भान्तरको सम्प्रा बाप सन्चारममें मुटिया नहीं ये समतों। दूसरी बात प्यान रेनेकी यह है कि पाकिारके पगारप सए और याबार बिसन्त साफ हो बिससे योगको वार्ताकारी बातें समसमें किसी प्रकारकी

रिपोवाता-शिस
कविता महो। सा परोसा गा माई, बोगसम्स्या समायो-
माती पहली पत।
लदोनों पार्वोपर म्यान ते हर मपनी मतिमाया और
इसकी सधस्त मिरमित रेमियोपात्तर्षि गत माणस्या है। पी. पी.
एकराम पो है 'पक्तित्व साभाविक भाग एक है। मदि
निधी परिपके स्वरको मत-पस्त पर भी बोसमें रिया बाप, बप कि
बहसमामे बाले सापक हो पानापनके मम पटोटमा समारलसे
अपिल मनोरंजक होगा यो भोरमलाको और मषिक परवाहै।
सीलिए सभी यो-
पिपा पितासी रमापर बोर है। यो
अनुसार बात करको बोलने की होम किसी पूसरेक मनुकरणी भाप
पता नहसा प्रतिर बाकिर परिस्टेवर को कहा है
को प्रसारणम मानेको स्वीकार करना ही सबसे पसीना। अब
कुराकारका प्रमरम नही देना चाहिए कि मोहोई, प्रदरे
कम्पपिकचरे मरने सर बारोपिकमरे। फिरभी से प्रमारणको
भमेशामा मिमोर्गमाने की मा की है, और मम्मी मान
ना पाहिए।
वार्ता प्रसारित करते समय पारी सबसे बड़ी सम्पत्ति है की
बाबार । यह मापार से स्पर, स्वस्थ प्रभावशाली और पुतिषिय हो
यह एकएक महत्वपूर्ण Aपर । लियोनेह नमानस लिए तीन
मुस बातें बतला 1-मही पो सांस सेना साप-माइ बोला और
ममारमता। पानी दोनों लिए पहप म म्यायाम और
महको पुप सोने का मुरो सरेसमा नाम RASHIम्पाम
की बाम एकवा होती है। मतिमा दीपा रहा और पामे
पूरा नाम मनके सार ही बोलने पति वितरणमे एसी RL मि
परि दो सम्बोदिमी भी मोता हे निकबीरप हा
मा सवारनमें से सरकार मानी है।
-

रेग्मिाता प्रसारण १२५ भाषण स्पारमा अनिवार्य है। इसके अभायमें मापदम बीबन नहीं होता ह यत्नपद पाता है। भाषा भाषों मार विचारोगा बड़ा मनीला माम्पम है। जैसे मार मार विचार होते है वैसा ही भाषाका प्रका होता है, वैसा ही उसकी गति होती है। भावना यौर मनुमति ही मापाको बीवन देती है यह बीवन पर ये पागौम परिमित होता है, तभी हम कहते है कि उसमें समारमकता है उसमें एबीवता है। भावनाओं पौर विचार मनुरुप बोलने की सलामें परिपतन होते पने को ही हम म्पारमन्ठा कहते है। यमकिन पहते है सम से बनाके विचारों को कारके लिए पेट्रोए से ही यात्मकता कहते है गो उस गाडीको रिफ्ना रखता है। मदि प्रसारण प्रेषगीयता ई-पानन्दके लिए-तो प्रसारणकत्तकि पिए यही पर्याप्त नहीं किया अपनी बात पह, मरिक यह भी किया पोताको मान्दोलित करे। यह सत्यात्मकता होबो से यह काम प्रभावपून बसे करने में समर्थ बनाती है। बहा भायममें सपारमकता नहीं होती पहा एकरसता मा पाती है, मला एकही काम प्रारम्मसे पर बम्त तक बोता है। पौर प्रसा- रासारतासे कर दुसरी खतरनाक बस्तु नहीं होती । इस दृष्टिसे प्रसारपकी पहली मिसमें एक निश्चित क्रमसे उतार पाब रहे, त्याम्प । भापमम समारममता विधिपताको धननीइससे पातका भारुपम पाता। भाषनमें पारमकता मे बाने के लिए प्रसिद्ध पा रेत कानेपो मे पार पाय बताये है [1] मुस्प सोपर पर ना मोर पीण पादोंको वा ना [२] भाषायी चामि परिवर्तन [1] रोकनेकी गतिम परिपत्तन पार [४] मुम्म विचारोंके पहरे पौर बादमें मना। मरे ज्या मतिरिक्त समी नपाय गयो पातकिसिए भी सही ही है। रम्यिोपात्तमि बागारमें अपित परिवर्तन सम्भव है, म अपेक्षित हो । माइक्रोग्रेनको सीमा होती है यह सूरमपाही होने कारण पोरकी

रेसियो-बाता मास
बापानको विहत कर सकता है। इसके लिए दोषपाली माय
मसार पवित है । वातार मुहैया प्रसारित करने पर
कितने पोरस बो। इन सब पहें स्मरण रहमा मत मार
स्ट्रीया प्रत्यक्ष मापम मार रेरियो पातमि बन्दर हा प्रया
मापनमें माता एक समूहको सम्बोषित करवा दियोमा-
में बह एक या पिक-अधिक परपर ममियोको। यी कारण
रिमोपातमि भास्मीयतामी मात्पीमा सरकारमा
होती है। कान एस.काह है की समामि भापप से
समर शेतनकी पारमीयमी बनारसमाको प्रेम सामने भार
की लापमयामी चापा को मानना इसी प्रकार बार
पक्तिया सामन प्रपात पसे बोलने मार रियो बहन भी मान्ठर
है । एस्लम ऐग गरोपियन एसान रिचार-पकी मरमें भापके
शाब कर फूल और प्रीटी प्रकार पाही बने
भिम प्रमायोपर से है। मा प्रतिमिमा
मतिमारपीक मा, सुम्पस र कम भारव मोर भापिकारिक
होगा । इन धार मुला एकहो ामिन उनकी प्रता
पर होगी। वालम महाभारको मापार समसामान्य बाता-
बाकी बाबाले दुष्ठ मित्रहती है:ोत सिम से इस
पनमी मपम प्रेमामधारणा बोरी मावा बोलते है जो
सामान्य मामा भारी होती है।
नाममा पनप उपााँच पोर रिपोवा
मापोना चाहिए। मुस समोर और सबसली कारें
ही पिता मारे मा पतिक विपकी मधिपति भी बत
ली है। दोनेको गतिक समापने पार रणना बिल तशी
मोर पातानीको माता सम्मान में हिना ही है। मोतिरोध
पति पर पामी एनेस का निधन होत राहिए

रेडियो-बा-प्रसारण माता-प्रसारममें मत्रिका मप्पम मार्ग उचित हो सकता है, हो मह मम्पम माग भी सवा एकरसन, उममें सय परिपतन होता रहे, यह बावश्यक है। इसी प्रकार उचित स्पर्गेपर कमा कहीं-कहीं ममिक शान्ति मारि भी पिविषता सिए मावश्यक है। पा-िप्रसारममें माविको मपमी समावगत पुस्ताभासे भी बपना गरी है। मेरे एक मित्र है, वो हर बारमके बाद कहते है- 'सममे न? पर ये कहने छपते है-'म उनके यहाँ बाना माने गया पा समोना मन्सबाना सिसाया समाप्त न? तो कहनका मन होता है-'महीं समझे। मोनकी सीमें मी होोकी एसी मारों होती है कुछ पोम बायः पहत एम्पर बात चोर ते है कुछ लोग मन्तिम सम्पर । गुण्डोग है जो बायको मन्तिम घ्यिामोंका दूर तक साब से पाते है-जानता हूँ-1-31 ब होग भाये --ए-ए। एसी बार माइक्रोफोनपर बड़ी स्पष्टत परिसक्षित हो जाती है और इनसे बचना सम्पाकारका उत्तम्प है। सा इस बम्मायक प्रारम्ममें कहा गया है रेडियो वार्ताकार था मी है, और अभिनेता भी । वार्ता प्रसारित करते समय उसमें नाटकीयता यवत्य ही अपेक्षित है, पर यह रेहले पना है कि वह महिनाटकीयामें म बदम बाप । माटबके पभिनयकी गिोफ्ता उसकी स्वामारिकता समझी माती नाटकमा अभिनय इतना स्वामाविको किया यह न समझें कि नाटक हो रहा है। पड़ी गात ग्यो-पातक सम्बन्धमें भी कही जायेगी। बार्ताका प्रसारण इसने स्वाभाविक बसे हो कि मोवाका उसमें कहीं भी माटमीयताका मामाम म मिल या समझे कि उससे सामाविक ग्पमें बिना किसी मायासके बातचीत कर रहा है। यही माफिी सफलता पही गायेमी। बात्ता प्रमारमा सामाम्प नियम मही है किन्तु सभी नियमाके मप बार होते है। रडियोपर योजनेपासे ऐसे मनेक व्यक्ति हुए है बो सभी

१२५
रिमोबा-प्रिय
नियोको गणित परम बार भी एक सपमे गये है। ऐसे तीन
पक्तियों की वर्षा सोमनाब पिबने की है।पामा हिटलर रिसे यो
का मौलिकमार' कहा जाता है। यह भावग्रमें इतने पोरसे बिपाशा
मा कि लगता पा रिपो-रोट समाज पामेपा फिर भी तुमाया
मुननको सदा उत्सुक रहते थे। इसरा माम पनिका । यो पानी
मातमि बम्पयनपूर्व साहित्यिक पपाधिोका म्यबहार करते है। तीसरे
+ गोपीवी, मि सबों और पलायो मलादीनता ही गिनती कशादी।
से पाकर प्रसारणके नियमकिपमा बसम्म हेकिन मुझे हप्ता
है कि उनकी सामता प्रसारण त सबस यो नियमकी सस्पताको मिर
करती tA रेशियो-पातमि म्पत्तिल सबसे मुस्प तत्व है। यहा म्पतिल
महान बही निपोच पाम किये बिना ही बातमि बार्पण मा पाता
। सामान्य परिवलकि सिए निपोगा पासन मायया है इसमें
सन्देह नहीं।
.

रेडियो-वार्ता भौर प्रो० वर्ननके निष्कर्ष माको निधनसे यह स्पष्ट है कि रेरियोगापरा सबसे मुख्य काय अपने टेसन एवं प्रसारमा वारा अपनी बाताको मौनबारे लिए सामना बनाना है। मनम विस्थाविवाच्या प्रो. पी. ई.बलनने १९५. में रेसियो वार्ताको दोपमम्मताके सम्बन्धी अनुसन्धान कार्य घियापा । म निवर्प को ही महापपुष है। हममे मा को मित्र पर किया है, उसमें इन नियोका सहारा सामान सिमा पमा है। यिौ-मार्ता-सम्माची मुस्प बातों को वापिस ले नपसे हम मन्न में प्रो.बलन निकोको नव कर रहे है [१पातकी पोषणम्पाने लिए उसके विपरम रोष होना नारी पिरीमा दियो बाएं प्रसारित की पौवी सनमें कई चम समयकी सामयिक घटनाओं और विमान से सम्बन्धित नौ और एम एसे बावरे सर और विरार थे, बिग पानसे मुममेकी भाषामता मो फिर भी पोवानि गम्हें ममामा । [२] गिन पामि मापे से कम मुल्य गाउँ होती है सम- मन मासान होती है। एक मुस्स बायो माया मौर विस्तारमें रात कार एसे दो मिनरा समय हपान है। बोपणम्पवासिय पुस्तकीपाप-पकी अपेमा सहर एवं मनीष ही अनिवार्य होती है।

योगातगाल
[४] गो विचार मार मात्र [.bstract] न्हें सन्तास सम
माना पारी हाँ यह प्यान रखए कि मोवा मुम विषारी साप
इयतका सम्मान सममता रहे, और मूम विपपको वपेसा इशारी
अधिक मानसरे
[५] मिन मानिमि रिचार्गे विकास का-संमत ऐतिमे नही पोस
बसहर बोषपम्म नहीं होती।
[१] कम बोममम्प माताएं मोवाममि भधिक जानका अनुमान पर
[७] बात्तातो बोडगम्प बनाने के लिए मुस्म-मुम वापर विप रोर
रेना री।
[८] साहिरिया पारास्मिति वार्तापी मोषसम्मवा गामा पानी।
[+] फठिन पर बात पिक होनसे भी बोपनम्पाना बामा
[..J पुस मौर भिप बाप्पास पूष समर्म बायर मी समाने
में कठिन होते है।
[११] बहुत मधिक वार्तामापारमा सीसे मी पौषममा पारा
पानी है।
[१२] माता प्रसारण ममम बोलनेमी गति रोग होने मी पापपम्पता
कम होती है।
इमरे मामारपर यह वाही कहा जा सकता totrयो-माती
विसपनाएँ : सरसना सामारिता एवं मुममउन । माना नाम
बनारस मी रेसीयो-पाता सफल होमी इनमें सन्द नहीं।

उधृत रचनांशोंकी सूची रेसिपी मन मला काममें पाप और कसना मास्थममें मनोरक्त साधन संचार एवं परिवहनका विकास मुनीठा पचारकी सांस तीसरी कमम मति मार यये पुस्तफाम पह पम्पान है बदरीनाथ मीशाय माग गीता-प्रवचन सिसनायकुमार रामनाथ मुमन देवीमा सामर कममेश्वरी धरण ग.पमधीर भारती गमनरेश पाठक फलीस्तरमा रम मयमापरणपाध्याय विष्म प्रभार गोबिनरास विनोबा भाये प्रमबम पनीपुणे पुगीर दिनोबा माप मोशिमा पुषी धार. आर. सारिकर ग. रामगिरबा पामय एव माध्पर महापानमें रिजानकार प्रवचन पचय पौरना और मारी मबीर भारदा वीर्षस्थान भाषाय मस्समापार रोमांस सरप धम्मूरन पिपाठी रेसियो-माता-गिस्प पौरस प्रसार मतमा ऐप ममीपषम बोस बीवन-भीमान राष्ट्रीपकरण बका विल कपि-सम्मेलन मौर मुशायरे कवि-सम्मेहमोर मोठे मनुभव पुराभीम प्रवी त्रिति कार्यक्षेत्र पत्रकारिता प्रेमपनकी कम मापूका पप-माहिम पमण परमहंस अपि ग्यालय बोमेकातहीका दिग्दो सम्म पननी सम्मभूमिाण- मागेल समताका सिद्धान्त मेरा पसार मार साहित्य-नगन मिही- मोर पुरानी पासका बर्मा पतिसहाय किफ महरिप्रय बन भीखममा बाम सरा गुप्ता कईयासाब मिम प्रसार हरिभाऊ सायाम मातारपासीमा रामद रवीर महमर सिहीती मासिनवितोवन सर्मा एमबारीसिंह दिनकर हरिमाउपायाम विम्बम्मरमाबपाय रागतास हा एम. मुगीच बनमनभावन मेमरमार मित्रा महमूरब पुस्तके मिनसे मैने सीता बनतापी मुरणा पमबहादुर ग.निमा एम. एम. पाई मायमर हसति सकायोमबार रस निवारण भारतकी पुरानी राजनीति

Rediyo Varta Shilap

Author
Kumar,sidh Nath
Title
Rediyo Varta Shilap
File name
Rediyo Varta Shilap
Text
OCR done
Citation
1961
Published
2010/12
Publisher
Kashi,bharatiy Gyanpith
Language
Sanskrit
Pages
129
Library
Bhartiya Vidya Mandir Shoudh Pratisthan,bikaner
Classification
History
DLI number
514843
Barcode
4990010022520.00
Scanning centre
C-DAK, Kolkata
Digital publisher
Digital Library Of India
VMLT id
1KdJCXlfO2Z
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