Shri Abhaya Jain Granthalaya, Bikaner
Sidhant Swadhyaayamala
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नाहना कीगुराड
For lifeीकामा
Eid MHANUJ TIMIL
-
If णमो समणम्म भगवा मगीरस्म ।।
भगवत् मुधर्मस्वामोप्रणीता
श्रीमदुत्तराध्ययनसूत्रम् श्रीदशवकालिकसूत्रम, नदीसूत्रम्
सुग्वविपाकसूत्रम्, उपासूत्रम् (गाथा २२)
सूत्रकृनागसूत्रे पष्ठा ययनम एकादशाध्ययनम् च ।।
अतर्मूलसूत्रेस्सयुक्ता
॥ सिद्धान्त-स्वाध्यायमाला ॥
TITLERHITFHOTHAIR
卐
- प्रकाशक:-
IMUNAFIKIA RANNIE
जामनगर वास्तव्य पडित हीरालाल हसराज
श्री जैनभास्करोदय मुद्रणालय-जामनगर
सने १९९८
मूल्य 1-1-.
सम्बत् १९९५
Dil film
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farmsxxxurces.ruxures.ruar- ॥ स्वाध्यायमाला-विषयानुक्रम ॥ पाना उपराध्ययनमत्रम् दाकालिकसत्रम् दीपत्रम् उपवाहमूरगाधा-२२ मुराविपाकसूत्रम् सायाग ६-११ अध्ययन प्रास्ताविक गाथाओ शुद्धिपत्रक १ थी ७४ ७५ यी १०० १०१ थी ११९ १२० थी १२० १०१ थी १२५ १२५ थी १२८ १२९ थी १३२ Parmatma TITANI 1) णमोन्यु णं तस्स समणस्म भगाओ महागीरस्स ॥ श्री जैन ॥ सिद्धान्त-स्वाध्यायमाला ॥ । सिरि-उत्तरज्झयण-सुत्त ।। विणयसुय पढम अज्झर्यण सजोगा विप्पमुधस्म, अणगारस्स मिक्सुणो। विणय पाउकरिम्मामि, आणुपुचि मुणेह मे ॥१॥ आणानिद्देमकरे, गुरूणमुक्वायकारए। इगियागारसपत्रे, से विणीए चि बुचई ॥ २ ॥ आणाऽनिदेमकरे, गुरूणमणुवयायकारए | पडिणीए असयुद्धे, अविणीए ति बुचई ॥ ३ ॥ जहा सुणी पूइकण्णी, निकसि ई सयमो । एव दुरस्सीलपडिणीए, मुहरी निकसिन्नई ॥ ४ ॥ क्णकुण्डग चडताण, विट्ठ भुजड स्यगे। य सील चडताण, दुस्सीले रमई मिए ॥५॥ सुणिया भार माणस्स, स्यास्स नरम य। विणा मेन अपाणमिच्छन्तो हियमप्पणो ॥६॥ तम्हा विणयमेसिज्जा, सील पडिलमेनए । बुद्धपुत्त नियागट्ठी, न निकसिन्जइ कण्हुई ।। ७ ।। निसन्ते सियाऽमुहरी, युद्धाण अन्तिए सया। अट्ठजुत्ताणि सिक्सिजा, निरहाणि उ बजए ॥ ८॥ अणुसासिओ न कुप्पिज्जा, गति सेविज पण्टिए। सुडेहि सह ससग्गि, हास कीड च नजए॥९॥ मा यस्चण्डालियाकासी, बहुय मा य आलवे। कालेण य अहिलिचा, तओ झाइज एगगो ॥१०॥ आदच वण्डालिय कटु, न निण्हविज्ज कयाइ वि। कड कडे ति भासेना, अरुड नो कडे ति य ॥११॥ मा गलियस्सेर कस, वयणमिच्छे पुणो पुणो । स च दठ्ठमाडण्णे, पारग परिवजए ॥१२॥ अणासवा धूलनया कुसीला, मिउपि चण्ड परिन्ति सीसा । चित्ताणुया लहु दक्सोग्नेया, पमायए ते हु दुरासयपि ॥ ॥१३॥ नापुट्ठो वागरे किंचि, पुट्ठो पानालिय गए । कोह अमच कुजा, धारजा पियमप्पिय ॥ १४ ॥ अप्पा चेन दमेय पो, अप्पा हु सलु दुद्दमो । अप्पा दन्तो सुही होड, अस्मि लोए परत्य य ॥ १५ ॥ घर मे अप्पा दन्तो, सजमेण तण य । माह परेहि टम्मतो, यधणेहिं बहेहि य ॥१६॥ पटिणीय च युद्धाण, वाया अदुव रम्मुणा । पानी का जड पा रहस्से, नेर कुना कयाद दि ॥ १७ ॥ न पक्समो न पुरओ, नेव किच्चाण पिट्ठओ। न जुजे उरुणा उरु, सयणे नो पडिस्सुणे ॥ १८ ॥ नेव पल्हस्थिय कुज्जा, परखपिण्ड च सजए । पाए पसारिए वापि, न चिट्ठ एरुणन्तिए ॥ १९ ॥ आयरिएहि वाहित्तो, तुसिणीओ न कयाइवि। पमायपेही नियागट्ठी, उपचिट्टे गुरु सया ॥ २० ॥ ,
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श्रीनैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला
आलपन्ते लबन्ते वा, न निसीएन कयाइ वि । चइऊणमामण धीरो, जओ जत्त पडिस्मुणे ॥ २१ ॥
आमणगओ नपुच्छेजा,नेर से जागओकया।आगम्मुक्कुडओ सन्तो, पुन्छिज्जा पजलीउडो ।। २२ ।।
एव विणयजुत्तस्म, मृत्त अथ च तदुभय । पुच्छमाणस्म सीसस्म, वागरिज जहासुय ॥ २३ ॥
मुस परिहरे मिक्खू न य ओहारिणि वए । भासादोस परिहरे, माय च बज्जए सया ॥ २४ ॥
न लवेन पुट्ठो सारज, न निर? न मम्मय । अप्पणट्ठा परहा था, उभयस्स तरेण वा ॥ २५॥
ममरेमु अगारेसु सन्धीसु य महापहे । एगो एगस्थिए सद्धिं, ने चिट्टे 7 सलवे ॥ २६ ॥
ज मे युद्धाऽणुसासन्ति, सीपण फरुसेण या । मम लाहो त्ति पेहाए, पयो त पडिस्सुणे ॥ २७ ॥
अणुमामणमोगाय, दुफडम्म य चोयण । हिय त मण्णई पण्णो, वेस होड अमाहुणो ॥ २८ ॥
हिय विगयभया सुद्धा, फरमपि अणुमासण | वेस त होड मृढाण, सतिमोहिकर पय ॥ २९ ॥
आमणे उचिद्वेन्ना, अणुचे जाए थिरे । अप्पुट्ठाई निरुट्ठाई, निसीलप्पाए ॥ ३० ॥
मालेण निरसमे निम्म्यू, कालेण य पडिक्मे। अकाल च विजित्ता, काले काल ममायरे ॥ ३१ ॥
परिमाडीए न चिटेन्ला, मिक्सू दत्तेमण चरे । पडिख्येण सिचा, मिय कालेण मस्सए ॥ ३२ ॥
नाइदूमणामने, नाऽनेमि चक्षुफामओ। एगो चिटुंज भत्तहा, लघित्ता त नाऽटयामे ।। ३३ ॥
नाइउच्चे न नीए वा, नामन्ने नाइदूरओ। फामय परकड पिण्ड, पडिगाहज सजए ॥ ३४ ॥
अप्पपाणेऽप्पपीयम्मि, पडिछन्नम्मि सउडे । समय सजए भुजे, जय अपरिमाडिय ॥ ३५ ॥
सुरडित्ति सुपफिति, सुच्छिन्न सुहडे मडे । सुगिट्टिए सुलद्धित्ति, सावज वजए मुणी ॥ ३६ ।।
रमए पण्डिए सास, हय भद्द व चाहए। पाल सम्मइ सासतो, गलियस्स व वाहए ॥ ३७ ।।
राष्ड्डया में चरडा मे, अकोमा य रहा य मे । कलाणमणुसाम तो, पावदिहित्ति मन्नई ॥ ३८ ॥
पुत्तो मे भाय नाइ चि, माहू कल्लाण मन्नई। पारदिट्टि उ अप्पाण, साम दासु ति मन्नई ।। ३९ ।।
नसोपण नायरिय, अप्पाणपि न कोरए । युद्धोघाई न सिया, न सिया तोचगवेमए ॥ ४० ॥
जायरिय पिय नचा, पतिपण पमायए। विझपेज पजलीउटो, पएज्ज न पुणोति य ॥४१॥
धम्मजिय च महार, उद्धहायरिय सया। तमायान्तो ववहार, गरह नाभिगच्छई ॥ ४०॥
मणोगय वयगय, जाणित्तायरियस्म उ । त परिगिझ वायाए, कम्मुणा उपनायए ॥ ४३ ॥
पित्ते चोटए निच, सिप्प हबह सुचोडए। जहोइट्ट सुस्य, विचाड बुचई सया ॥ ४४ ॥
नया नमइ मेहापी, लोए पित्ती से जायए । हवई फिचाण मग्ण, भूयाण जगई जहा ॥ ४० ॥
पुना नम्म पमीयन्ति, मउद्धा पुच्चमधुया। पमन्ना लाभइम्सति, विउल अट्ठिय मुय ॥ ४६॥
म पुनमये मुविणीयससण, मणोरुई चिदृह कम्मसपया ।
तगोममायारिममाहिसवुडे, महर्जुई पच वयाइ पालिया ।।
म देवगध मणुस्माइए, चइत्तु देह मलपरपुष्य ।
मिद्धे का हर मामा देने वा अप्परए महिड्डीए ।
त्ति बेमि ॥ अविणयसुय नाम पढम अज्मयण ममत्त ।।
॥४७॥
॥४८॥
श्रीउत्तरा ययनरत-प्रथमाध्ययनम्
ArA
॥ अह दुइअ परिसहज्मयण ॥
आउम-
मे मगरया एपमावाय । इह मल बापीस परीमहा ममणेण भगया महा
चौग्ण कामचेण पोडया । जे मिक्म्यू सोचा नचा जिचा अभिभ्य भिक्पायग्यिाए परिव्ययन्तो
पट्टो नो निहोना । जयरे ते खलु पापीम परीमहा ममणेण भगाया महागीरेण कासवेण पवे.
इया, जे भिक्य मोचा नवा निच्चा अभिभृय भिक्सायरियाए परि वयतो पुट्टो नो निहोना?"
इमे ते गल पात्रीम परीसहा ममणेण भगवया महावीरण कामरेण परेडया, जे भिक्यू मोचा नगा
जिचा अभिभूय मिरमायग्यिाए परिचयतो पुट्टो नो निण्हज्जा, तनहा-दिगिंडापरीमहे १ पिया
मापरीमद २ सीयपरीसह उसिणपरीमह ४ दमममयपरीमह ५ अचेलपरीमहे ६ अरइपरीमहे ७
इत्यीपरीम ८चरियापरीमहे ९ निमीहियापरीमह १० सेनापरीमहे ११ अकोसपरीमहे १० वह-
परीसहे १३ जायणापरीमहे १८ अलाभपरीमहे २५ रोगपरीमह १६ नणफामपरीमहे २७ जल्लप-
रीसहे १८ मझारपुरकारपरीमहे २१ पनापरीमहे २० अन्नाणपरीमह २१ दमणपरीसह २२ ॥
परीसहाण पविभत्ती, कासवेण परेडया । तु मे उदाहरिम्मामि, आणपुत्रि मुणेह मे ॥१॥
ठिगिंडापरिगए देह, तरस्मी भिक्म्य यामय । न दिन जिंदारए, न पए न पयागरा ||२॥
कालीपच्चगमकासे, रिसे धमणिसतए । मायन्ने अमणपाणरूम, अणिमणसी चरे ॥३॥
तओ पुट्टो पिपामाए, दोगुठी लजमना । सीओदग न सैनिन्ना, वियडम्मेमण चर ॥ ४ ॥
छिनागाएमु पयेसु, आउरे मुपियामिए । परिमुक्पमुहाऽदीणे, त तितिम्स परीसह ॥ ५ ॥
चरत विग्य लूट, सीय फुगड एगया। नाइवेल मृणी गई, मोचाण जिणसामण ॥ ६ ॥
न मे निवारण अत्यि, उपित्ताण न विजई। अह तु अग्गि सेनामि, इ. मिन्यू न चितए ॥ ७ ॥
उसिण परियारेण, परिदारण तजिए। पिसु श परियायेण, माय नो परिटनए ॥ ८ ॥
उण्हाहितत्ते मेहानी, सिणाण नो विपथा। गाय नो परिमिचेजा, न वीएज्जा य अप्पय ॥२॥
पुट्टो य दमममपहि, ममरे व महामुणी । नागो सगाममीसे बा, सूरो अभिहणे पर ॥ १० ॥
न मतसे न पारज्जा, मण पि न पोमण । उबेहे न हणे पाणे, भुजते मससोणिय ॥११॥
परिजुष्णेहि नत्येहि, होरसामिति अचेलए । अदुना मचेले होरपामि इ भिक्यून चिंता ॥ १२ ॥
एगयाञ्चलए होड, सचेले आवि एगया। एय धम्म हिय नन्चा, नाणी नो परिदेवए ॥ १३ ॥
गामाणुगाम रीयंत, अणगार अकिंचण । अरई जणुप्पनेसेज्जा, त तितिक्पे परीसह ॥ १४ ॥
अआइ पिट्टओ रिचा, रिए आयरक्सिए । धम्मारामे निरारम्मे, उनसन्ते मुणी चरे ॥ १५ ॥
मनो एम मणूमाण, जाओलोगम्मिइथिओ। जस्म ण्या परिन्नाया, मुरुड तस्स सामण्या ॥ १६ ॥
श्यमादाय मेहावी, पङ्कभ्या उ इत्यिओ। नो ताहि विणिहम्मेखा, चरेनत्तगमए ॥१७॥
एग र चरे लाढे, अभिभूय परीमहे । गामे वा नगरे वावि, निगमे या रायहाणिए ॥१८॥
अममाणे चरें मिषम्बू , नेव पुजा परिग्गह । असमत्ते गिहत्थेहि, अणिपओ परिबए ॥ १९ ॥
मुमाणे सुन्नगारे वा, रुक्समूले य एगो । अकुक्कुओ निसीएज्जा, न य विचासए पर ॥ २० ॥
श्रीजैनसिद्धान्त -नवा पायमाला तत्थ से चिट्ठमाणस्स, उनसग्गाभिधारए । सकाभीओ न गच्छेना, पट्टित्ता अन्नमासण || २१ ॥ उचावयाहिं सेनाहि, तपस्सी भिकम्य् थामन । नाइवेल विहम्मेजा, पारदिट्ठी विहम्मई ॥ २२ ॥ प्रइरिस्कुवस्सय लधु, कल्लाणमदुवा पावय । किमेगराइ करिस्सइ, एव तत्थडहियासए ।। २३ ॥ अशोसेन्जा परे मिक्खु, न तेसि पडिसजले। सरिसो होइ चालाण, तम्हा मिक्यू न सजले ॥ २४ ॥ सोचाणं फरुसा भासा, दारुणा गामझण्टगा। तुसिणीओ उमेहेना, न ताओ मणसीकरे ॥ २५ ॥ हो न सजले भिक्ख्. मणपि न पओसए। तितिक्स पग्म नचा, मिक्म्य धम्म समायरे ॥ २६ ॥ समण सजय दत, हणिना कोइ कथई । नत्थि जीवम्स नासचि, एव पेहेज सजए ॥ २७ ॥ दुकर सलु भो निच, अणगारस्स मिक्सुणो। सव्व से जाइय होइ, नस्थि किचि अजाइय ॥ २८॥ गोयरग्गपनिहस्स, पाणी नो मुप्पसारए । मुओ अगारवासुत्ति, इइ भिक्खू न चिंतए ॥ २९ ॥ परेसु धासमेसेंजा, भोयणे परिणिहिए। लद्धे पिण्डे अलद्धे या, नाणुतप्पेन पडिए ॥ ३० ॥ अजेवाह न लम्भामि, अनि लाभो सुए सिया। जो एव पडिसचिखे, अलाभो त न तजए ॥ ३१ ॥ नचा उप्पइय दुक्स, वेयणाए दुहिए। अदीणो थानए पन्न, पुट्ठो तत्थ हियासए ॥ ३२ ॥ तेइन्छ नामिनदेना सचिक्सत्तगवेसए । एव सु तस्स सामण्ण, ज न बुन्ना न कारवे ॥ ३३ ॥ अवेलगस्म लूहस्स, सजयस्म तपस्सिणो। तणेसु सयमाणस्स, हुजा गायनिराहणा ॥ ३४ ॥ आपरस्म निनाएण, अउला हाइ वेयणा । एव नच्चा न सेवति, ततुज तणनलिया ।। ३५॥ फिलिनगाए मेहावी, पकेण रएण वा । प्रिंसु वा परियावेण, साय नो परिदेवए । ३६ ॥ वेएन निजरापही, आरिय धम्मणुत्तर । जार सरीरमेउत्ति, जल्ल कारण धारए ।। ३७ ।। अभिनायणमब्भुट्ठाण, सामी कुन्जा निमतण । जे ताइ पडिसेवन्ति, न तेसिं पीहर मुणी ॥ ३८ ॥ अणुकसाई अप्पिन्छे, अनाएसी अलोलुप । रसेसु नाणुगिज्झेजा, नाणुतप्पेज पन्नव ।। ३९॥ से नूण मए पुन्य, कम्माऽणाणफला कडा । जेणाह नाभिजाणामि, पुट्ठो केणड कण्हुई ॥ ४० ॥ अह पन्छा उइज्जन्ति, कम्माऽणाणफला कडा। एनमस्मासि अप्पाण, नचा कम्मविवागय ॥४१॥ निरङ्कगम्मि निरओ, मेहुणाओ मुमयुटो। जो सक्स नाभिनाणामि, धम्म कहाणपावग ॥ ४२ ॥ स्पोपहाणमादाय, पडिम पडियनओ। ण्व पि विहरओ मे, छउम न नियहई ॥ ४३ ।। नत्थि नूण परे लोए, इड्ढी वापि वस्सियो। अदुवा वचिओमित्ति, "इ भिकाबू न चिनए ॥ ४४ ॥ अभ् जिणा अस्थि जिणा, अदुवावि भविसई । मुस ते एपमाहसु, डइ भिक्ग्यू न चिंतए ॥ ४५ ॥ एग परीसहा सव्वे, कासवेण निवेडया । जे मिक्सू न विहम्मेज्जा, पुट्ठो केणड कण्हुई ॥४६॥ त्ति वेमि ॥ इअ दुइअ परिसहज्झयण समत्त ॥ २ ॥ - - श्रीउत्तराध्ययनम्न-तृतीयाध्ययनम् ॥ अह तइअ चाउरगिज्ज अज्झयण ॥ चत्वारि परमगाणि दुल्लहाणीह ज तुणो। माणुमत्त मुई पदा, मजमम्मि य पीरिय ॥ १ ॥ समावन्ना ण ससारे, नाणागोतामु जाइमु । फम्मा नाणानिहा कटु, पुढो निम्ममिया पया ।। २ ॥ एगया देवलोएम, नरएमु नि एगया। एगया आमुर काय, अहाफम्मेहिं गन्ठई ।। ३ ।। गया पत्तिओ होट, तओ चण्टालनोकमा । नओफीटपयगो य, तओ कुन्युपिनालिया ॥ ४ ॥ एमापट्टनोणीस, पाणिणो कम्मविधिसा। न निरिजन्ति समारे, सबढेन च सत्तिया ।। ५ ।। कम्मसगेहि मम्मूढा, दुक्सिया नरयणा! अमाणुमा जोणीय, पिणिहम्मन्ति पाणिगो ॥ ६ ॥ कम्माण त पहाणाप, आणुपूनी क्याइ उ ! जीया मोहिमणुप्पत्ता, आययति मणुस्मय ।। ७ ।। माणुस्म निग्गह लद्यु, मुई धम्मस्म दुष्टहा। ज मोचा पडिजन्ति, तर सतिमहिमय ॥ ८ ॥ आय सपण ला, सद्धा परमदुल्लहा । मोगा नेआउय मग, यह परिभराई ॥ ९ ॥ मुह च लद्यु मद्ध च, चीरिय पुण दुछह । बहरे गेयमाणानि, नो य ण पटियजप ॥ १०॥ माणुमत्तमि आयाओ, जो यम्म मुच्च मदहे। तयस्मी वीग्यि लघ, सबुढे नि धुणे रय ॥११॥ सोही उज्जूय भूयम्म, धम्मो मृद्धस्म चिटई। निजाण परम जाइ, घयसित्तिव्य पाए ॥ १२ ॥ विगिच कम्मुणो हेउ, जस सचिणु सतिए । मरीर पाढर दिया, उट्ट पश्मण दिस ।। १३ ।। विसालसेहि सीलेहि, जस्सा उत्तरउत्तग। महामुका व दिप्पता, मन्नता अपुणचय ।। १४ ॥ अप्पिया देवकामाण, कामरूपविउब्धिणो। उट्ट कप्पैम चिट्ठति, पुयावाममया यह ॥१५॥ तय ठिचा जहाठाण, जस्पा आग्क्सय चुया। ति माणुस जोणि, मे टसगेभिजायए ॥१६॥ खित्त पन्थ हिरण च, पमनो दासपोरुस । चत्तारि कामसपाणि । तत्य से उनवजह ॥ १७ ॥ मित्तर नाडर होट, उच्चागोए य गर । अप्पायके महापन्ने, अभिजाए जमो चले ॥ १८ ॥ भुया माणुस्मए भोण, अप्पडिम्वे अहाउय । पुत्र निमुद्वमद्धम्मै, काल बोहजिमया ॥ १९ ॥ चरग दुलह नद्या, सनम पडिजिया । तरमा यस्म्म से सिद्ध नाड सासए ॥ २० ॥ त्ति चेमि । अतृतीय परिझया ममत्त ।। ॥ अह चतुर्थ अगसय अज्झयण ।। असमय जीविय मा पमायाए, जरोरणीयम्म हुनयि ताण । एव वियाणाहि जणे पमत्ते क नु पिहिमा अनिया गिहिति ॥ ॥ जे पारकम्महिं धण मणूसा, ममाययती अमट गहाय । पहाय ते पामपयट्टिए नगे, वेराणुपद्धा नरय उपिति ॥ २ ॥ तेणे जहा सधिमुह गहीए, माम्मुणा मिचड पानसारी। एर पया पञ्च वह च लोए, कडाण कम्माण न मुक्न अस्थि ॥ ३ ॥ .
-५ Ans- श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला ससारमापन्न परस्स अहा, साहारण ज च करेड कम्म । कम्मस्स ते तस्स उवेयकाले, न बधना यधक्य उदिति ॥४॥ वित्तेण ताण न लमे पमत्ते, इममि लीए अदुवा परस्य । दीयप्पणटेर अणतमोहे, नेयाउय दडुमदहमेव ॥५॥ सुत्तेसुआवी पडियुद्धजीवो, न वीससे पडिय आसुपण्णे । घोरा महुत्ता अपल सरीर, भारटपक्सीन चरप्पमत्तो ॥ ६ ॥ थरे पयाइ परिसकमाणो, ज किंचि पास इह मन्नमाणो । लाभतरे जीवियमूहइत्ता, पन्छा परिन्नाय मलावधसी ॥७॥ छदनिरोहेण उवेइ मोक्स, आसे जहा सिक्सियसम्मधारी । पुनाद वासाइ चरप्पमत्तो, तम्हा मुणी सिप्पमुइ मुस्स ॥ ८॥ स पुयमेन न लभेज पच्छा, एसोपमा मामयवाइयाण । विमीदइ सिढिले आउयम्मि, कालोणीए सरीरस्म मेए ॥१॥ सिप्प न मर्केड विवेगमेड, तम्हा समुट्ठाय पहाय कामे । समिच लोय समया महमी, आयाणुरक्सी चरमप्पमत्ते ॥ १० ॥ मुट्ठ मुह मोहगुणे जयात, अणेगरूमा समण चरन्तं । फामा पुमन्ती अममजस च, न तेसि मिक्सूमणमा पउस्से ॥११॥ मन्दा य फामारहुलोहणिज्जा, तहप्पगारेसु मण न चुना। रकिग्वज कोह विणएज्ज माण, माय न सेवेज पयहेज लोह ॥ १२॥ जेऽससया तुच्छपरप्पपाई, ते पिजदोमाणुगया परभा । एए अहम्मे ति दुगुछमाणो, कखे गुणे जार सरीरभेउ ।। १३ ॥ त्ति वेमि ॥ दअ असमय चउत्य अज्झयण समत्त । । अह अफाममरणिज्ज पञ्चम अज्झयण ॥ अण्णासि महोहमि, एगे तिण्णे दुरुत्तर । तत्थ एगे महापन्ने, इम पण्हमुदाहरे ।। १ ।। सन्तिमे य दुवे ठाणा, अक्साया मरणन्तिया । अकाममरण चेन, सफाममरण तहा ॥ २ ॥ यालाण तु जगाम तु, मरण असइ भवे । पण्डियाण सकाम तु, उकोसेण मइ भवे ॥ ३ ॥ तथिम पढम ठाण, महारीस्ण दसिय । कामगिद्धे जहा वाले, मिस कूराइ कुव्वई ॥ ४॥ जे गिद्धे कामभोगेमु, एगे कडाय गछई। न मे दिट्टे परे लोए, चक्युदिट्ठा इमा रई ॥ ५ ॥ हत्यागया इमे कामा, कालियाने अणागया। को जाणड परेलोग, अस्थि वा नत्यि यापुणो ॥ जण मद्धि होक्सामि इइ पाले पगम्भट । काममोगाणुगएण, केस सपडिवन्नई ॥७॥ तओ से दण्ड समारभई, तसेसु थापरेसु य । अट्ठाण य अणट्टाए, भूयगाम विहिंसई ॥ ८॥ हिंसे पाले मुसाबाद, माइले पिसुणे सढे। भुजमाणे मुर मस, सेयमेय ति मनई ॥९॥ ॥
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श्रीउत्तरा ययनमून-पचमाध्ययनम्
कायसा वयमा मते, वित्ते गिद्धे य इत्थिमु। दुइओ मल सचिणड, सिमुणागु व्य मट्टिय ॥१०॥
तो पुट्ठो आय केण, गिलाणो परितप्पई । पमीओ पररोगम्म, कम्माणुप्पेहि अप्पणो ।। ११ ।।
मुया मे नरए ठाणा, अमीलाण च जा गई । नालाण कुरफम्माण, पगाढा जन्य पेयणा ।। १२
तत्थोपाहय ठाण, जहा मेयमणुस्मुय । आहाफम्मेहिं गडन्तो, सो पन्छा परितप्पई ॥ १३ ॥
जहा मागडिओ जाण, सम हिचा महापह । विमम मम्गओहण्णो अस्खे भग्गम्मि मोयई ॥ १४ ॥
एव धम्म विउकम्म, अहम्म पडिगनिया । पाले मन्चुमुह पत्ते, अक्से भग्गे र मोयई ॥ १८ ॥
तओ म मरण तम्मि, पाले सताई भया । अकाममरण माई, जुत्ते र कलिणा जिप ॥ १६ ॥
एय अकाममरण, पालाण तु पवेटय । एतो माममरण, पण्डियाण सुणेह मे ॥ १७ ॥
मरण पि मपुषणाण, जहा मेयमणुस्सुय । विष्पमण्णमणाघाय, सजयाण युसीमको ।। १८॥
नइम मचे मिस्सु,न इम सब्वेसुगानिसु। नाणासीला अगारत्या,विममसीला य मिरवृणो।॥ १९॥
सन्ति एगेहि भिक्यूहि, गारत्या सजमुत्तरा । गाग्त्येहि य मध्येहि, माहगो सजमुत्तरा ॥ २० ॥
चीराजिण नगिणिण, जटी सपाटिमुण्डिण। एयाणि वि न तायन्ति, दुम्सील परियागय ।। २१ ।।
पिडोल एव्य दुस्सीले, नरगाजो न मुञ्चई। मिस्साए नागिहन्त्य गा, सुब्बए कम्मई दिन ॥ २२ ॥
अगारिसामाइयगाणि, मड्डी कारण फासम् । पोगह दुहओ पाम, एगगय न हामए ॥ २३ ॥
एर सिक्खाममानने, गिहिनासे पि सुन्पण । मुञ्चई उविपचाओ, गच्छे अस्समलोगय ॥ २४ ॥
अह जै मजुडे भिरपू, दोण्ह अनयरे सिया। म र दुक्सपहीणे , ढेरे बावि महिड्टीप ॥ २५ ॥
उत्तराड विमोहाइ, जुईमन्तापुब्यसो। ममाइण्णाइ अक्मेहिं, आगामाह अमसिणो ॥ ६ ॥
दीहाउया हुड्ढीमन्ता, समिद्धा काम पिणो। अहणोमन्नमामा, भुजो अधिमलिपभा ॥२७॥
ताणि ठाणाणि गन्छन्ति, सिक्सित्ता सजम ता ।
भिसागे ना गिहित्ये या, जे सन्ति पडिनिचुटा ।
॥२८॥
तेसि मोचा सपुजाण, सजयाण युमीमओ। न मतमति मग्णते, सीतनन्ता बहुस्मुया ।। २९।।
तुलिया विसेममादाय, दयावम्मम्म सन्तिए । विप्पमीएन मेहाची, तहाभूषण अप्पणा ।। ३० ।।
तओ काले अभिपए, सडढी तालिममन्तिए। विणएन लोमहरिम, मेय देहम्म कग्वए ॥ ३१ ।।
अह कालम्मि सपत्र, आघायाय समुस्मय । सफाममरण माई, तिण्हमन्नयर मुणी ॥ ३२ ॥
त्ति चेमि॥ इअ अकाममरणिन्न पचम अज्झयण ममत्त ।।५।।
॥ अह खुड्डागनियहिज छह अन्झयण ॥
जायन्तविजापुरिमा, मवे ते दुक्यममवा । लुप्पन्ति बहुसो म्टा, समारम्मि अणन्तए ॥१॥
समिम्प पण्डए तम्हा, पामजाई पहे बहू । अप्पणा मच्चमेसेन्ना, मेत्तिं भूएम कप्पए ॥ २ ॥
माया पियान्हमा माया, भना पुत्ता य ओरमा। नाल ते मम ताणाण, लप्पतस्स सम्मुणा ॥३॥
एयमट्ट महाए, पासे ममियटमणे । छिन्द गेद्धि सिणेह च, न कसे पुष्यमयुय ॥ ४॥
गनाम मणिपण्डल, पमो दासपोरुस । सम्पमेय चदत्ताण कामम्धी भविम्मसि ॥ ५॥
श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला
अज्झत्य समओ सन्म, दिम पाणे पियाय । न हणे पाणिणो पाणे, भयवेराओ उपरए ॥ ६ ॥
आदाण नरय टिस्म, नायएन तणामवि । दोगुञ्छी अप्पणो पाए, दिन्न भुजन भोयण ॥७॥
इहमेगे उ मन्नन्ति, अपचरसाय पानग । आयरिय विदित्ताण, मजदुरसाण मुचए ॥ ८॥
भणता जफरन्ता य, बन्धमोक्सपडग्गिणो । चायापिरियमेण, समामासन्ति अप्पय ॥९॥
न चिचातायए भामा, ओ विजाणुसामण । विसना पारसम्मेहि, बाला पडियमाणिणो ॥ १० ॥
जे केड मरीर सत्ता, चपणे रुवे य स रमो। मणमा सायारेण, सम्मे ने दुस्पमम्भा ॥ ११ ॥
आरना दीहमद्वाण, ससारम्मि अणन्तए । तम्हा सव्यादिम पस्स, अप्पमत्तो परिचर ॥ १० ॥
पहिया उढमादाय, नापक क्याइ वि। पुचम्मक्पयटाए, इम देह समुद्धरे ॥ १३ ॥
विश्चि मम्भुणो हउ, कालकमी परिया। माय पिंडम्स पाणम्म, कड द्धग भक्सए ॥ १४ ॥
सन्निहि च न जा, यमाय सजाए । पक्पीपत्त समादाय, निरपेक्यो परिपए ॥ १५ ॥
एमणासमिओ लज्ज, गामे अणिपओ चरे। अप्पमत्तो पमत्तेहिं, पिण्टवाय गवेसए ॥१६॥
एव से उदाहु जणुत्तग्नाणी अणुत्तरदसी अणुत्तरनाणदमणधर अग्दा नायपुत्ते भगर मालिए विपालिए
इअ सुहागनियठिल 8 अज्झयण समत्त ॥ ६॥
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॥ अह एलय सत्तम अज्झयण ॥
जहाएस समुद्दिस्स, कोइ पोसेन एलय । जोयण जस देना, पोमेनावि मयङ्गणे ॥१॥
तनो से पुढे परिसूढे, जायमेश महोदरे । पीणिए विउले देहे, आगम परिक्सा ॥२॥
जान न एइ जाएसे, तार जीपइ सो दुही। अह पतम्मि आएसे, मीम छेत्तृण मुन्नई ॥ ३ ॥
जहा से सलु उरन्भे, भाएसाए समीहिए । एप वाले अहम्मिटे, ईहई नरयाउय ॥ ४ ॥
हिंसे बाले मुसापाई, अाणसि विलोकए । अन्नदत्तहरे राणे, माई क नु हर सढे ॥०॥
इत्यीनिसयगिद्धे य, महारभपरिग्गहे । भुजमाणे सुर मस, परिपूढे परदमे ॥६॥
अयफचरभोई य, तुडिल्ले चियलोहिए। आग्य नरए कसे, जहाए व एल ॥७॥
आसण सपण जाण, वित्त कामे य मुजिया । दम्माहइ पण हिया, बहु सचिणिया रय ॥ ८ ॥
तओ कम्मगुरू जतू, पच्चुप्पमपरायणे । अए व्य आगयाएसे, मरणतम्मि सोयई ॥ ९ ॥
तमो आउपरिक्सीणे, चुया टेहा विहिंसगा। आसुरीय दिस बाला, गन्छन्ति अपमा तम ॥१०॥
जहा कागिणिए हउ, सहस्म हारण नरो। अपच्छ अम्बग भोचा, राया रज तु हारए ।। ११ ।।
एर माणुस्सगा कामा, दरकामाण अन्तिए। सहस्मगुणिया मुजो, आउ कामाय दिजिया ॥ १२ ॥
अणेगमासानउया, जा सा पन्नाजो ठिई। जाणि जीयन्ति दुम्मेहा, ऊणवासमयाउए ॥ १३ ।।
जहा य तिनि माणिपा, मूल घेत्तूण निग्गया। एगोऽस्थ लहई लाभ एगो मूलेण आगओ ॥ १४ ॥
एगो मूल पि हारित्ता, आगओतत्य वाणियो। क्वारे उममा एमा, एच धम्मे चिपाणह ॥ १५ ॥
माणुसत्त भवे मूल, लाभो देवगई भो। मूलच्छेएण जीवाण नरगतिरिक्सत्तण धुव ॥ १६ ॥
दुहओ गई वालम्म, आई वहमूलिया। देवच माणुमत्त च, जनिए लोलयासढे ॥ १७ ॥
श्रीउत्तराध्ययनमूत्र-सप्तमाध्ययनम्
तो निए सइ होइ, दुविद दोग्गह गए। दुलहा तम्म उम्मग्गा, अदाप इरादवि ॥ १८॥
एर निय सपेढाए, वृद्धिया बाल च पण्डिय। मूलिय ते पवेसन्ति, माणुमि जोणिमेन्ति जे ॥ १९ ॥
वेमायाहिं सिक्साहि, जे नरा गिहिमुन्वया।उन्ति माणुम जोणिं, कम्ममचा हु पाणिणो ॥ २० ॥
जेमिं तु निउला सिरसा, मूलिय ते अडच्छिया। सीलपन्ता मगीसेमा, अदीणा जन्ति देवय ॥ २१ ॥
एवमद्दीणर मिक्सु, आगारिंच रियाणिया। इणु निचमेलिक्व, जिचमाणे न मनिटे ॥२२॥
जहा सग्गे उदग, समुदेण मम मिणे । एर माणुम्मगा कामा, देवकामाण अतिए ॥ २३ ॥
इसम्गमेत्ता इमे कामा, मनिरुद्धम्मि आउए । क्म्म देउ पुगफाड, जोगलम न सपिदे ।। २४ ।।
ह. कामाणियहस्म, अत्त? अपराई। मोचा नेयाउय मग्ग, ज भुजो परिमस्सई ॥ २५ ॥
इह कामणियट्टम्म, अनट्टे नागझर्ड । पूइर्दहनिरोहण, भरे टेनि ति मे सुय ॥ २६ ॥
इड्ढी जुई जस्मो वणो, आउ सुहमणुचर । भुनो जथ मणुस्सेसु, तन्य से उपवनई ॥ २७ ॥
पालस्म पस्म बालत्त, अहम्म पडियन्निया। चिच्चा धम्म अहम्मिटे, नगए उपवनई ॥ २८॥
धीरस्म पस्म धीरत मचधमाणुपत्तिणो । चिचा अधम्म धम्मिटे, देवेमु उववजई ॥ २९ ॥
बलियाण पालमाप, अमाल चेर पडिए । चहण बालमान, अगल सेवई मुणि ॥ ३० ॥
त्ति वेमि || इअ पलय-जायण ममत्त ॥ ७॥
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॥ अह काविलिय अहम अज्झयण ॥
अधुवे अमामयम्मि, ससारम्मि
दुक्यपउराण।
कि नाम होन्नत कम्मय, जेणाह दोग्गड न गन्जा ॥१॥
विजहित्तु पुन्यमजोय, न सिणेह रहिंचि कुब्वेजा।
असिणेहसिणेहकरहिं, दोमपओमेहि मुच्चए भिम ॥२॥
तो नाणदमणममग्गो, हियनिस्सेसाय मयजीवाण ।
तेसि रिमोसणटाए, भामई मुणिवरो विगयमोहो ॥३॥
सा गथ कलह च, विप्पजहे तहाविह मिाम् ।
मच्चेसु कामजाएमु, पाममाणो न लिप्पई ताई ॥४॥
मोगामिसदोमनिमने, हियनिस्सेयमद्वियोचत्थे।
वाले य मन्दिए मूटे, पज्झई मच्छिया व सेलम्मि ॥ ५ ॥
दुप्परिचया इमे कामा, नो सुजहा अधीरपुरीमेहिं ।
अह मन्ति मुच्चया माहू, जे तरन्ति अतर पणिया वा ॥६॥
समणामु एगे ययमाणा, पाणवह मिया अयाणन्ता ।
मन्दा निरय गच्छन्ति, पाला पारियाहिं दिट्ठीहिं ॥७॥
नहु पाणनह अणुजाणे, मुच्चेज क्याह सयदुक्साण ।
एवारिपहिं अक्साय, जेहिं इमो माधुधम्मो पन्नत्तो ॥ ८ ॥
(१०) . - श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला पाणे य नाइवाएज्जा, से समीइ ति बुच्चई ताई। तओ से पावय कम्म, निजाइ उदग व थलाओ ॥९॥ जगनिस्सिएहि भूपहि, तसनामेहिं थाररेहिं च। नो तेसिमारमे दड, मणमा वायसा कायसा चे॥ १० ॥ मुद्धसणाओ नचाण, तत्थ ठवेज मिकम्बू अप्पाण । जायाए घासमेसेना, रसगिद्धे न सिया भिस्साए ॥११ ।। पताणि चेव सेवेज्जा, सीयपिंड पुराणकुम्मास । अदु यस पुलाग ना, जपणट्ठाए निषेसए मधु ॥ १२ ॥ जे लक्सण च मुविण, अङ्गविन च जे पउजन्ति । न हु ते समणा वृञ्चन्ति, एय आयरिएहिं अक्साय ॥ १३ ॥ इहजीविय अणियमेत्ता, पभट्ठा समाहिजोएहिं । ते कामभोगरसगिद्वा, उववजन्ति आसुर काए॥ १४॥ तत्तो वि य उघट्टित्ता, ससार वह अणुपरियडन्ति । वहुकम्मलेपलित्ताण, बोही होइ सुदुल्लहा तेसिं ॥ १५ ॥ कसिणपि जो इम लोय, पडिपुण्ण दलेन इकस्म । तेणावि से न सतुस्से, इइ दुप्पूरए इमे आया ॥ १६ ॥ जहा लाहो तहा लोहो, लाहा लोहो पवढई । दोमासकय कन्न, कोडीए वि न निहिय ॥ १७ ॥ नो रकमसीसु गिन्झेजा, गडवच्छामु उणेगचित्ताम् । जाओ पुरिस पलोभित्ता, सेल्लन्ति जहा व दासेहिं ॥ १९ ॥ नारीसु नोरगिज्झेजा, इत्थी विप्पजहे अणागारे । धम्म च पेमल नचा, तत्य ठोज मिक्खू अप्पाण ॥ १९ ॥ इअ एम धम्मे अक्साए कपिलेण च विमृद्धपनेण । तरिहिन्ति जे उ काहिन्ति, तेहिं आराहिया दुवे लोग ॥ २० ॥ त्ति पमि || अ काविलीय अट्ठम अज्झयण समत्त ॥ ८ ॥ ॥ अह नवम नमिपव्यज्जा अज्झयण ॥ चहण देवलोगाओ,मानो माणुमम्मिलोगम्मि। उसमन्तमोहणिज्जो, सई पोराणिय जाड ॥१॥ जाइ मरितु भयव, महस युद्धो अणुत्तरे धम्मे। पुत्त ठवेत्तु रने, अभिणिक्समई नमी राया ॥२॥ से देवलोगमरिसे, अन्तेउग्यरगओ बरे भोए । भुजितु नमी राया, युद्धो भोगे परिचयई ॥३॥ मिहिल सपुरजणश्य,नलमारोह च परियण मन्या चिचाअभिनिसन्तो,एग तमहिढीओ भयव ॥ ४ ॥ कोलाहलगसभ्य,आमी मिहिलाए पव्यपन्तम्मिा तइयारापरिसिम्मि,नमिम्मि अमिणिक्समतम्मिा।
. श्रीउत्तरा ययनसूत्र-नवमाध्ययनम् अन्मुट्ठिय रायरिमि, पयजाठाणमुत्तम । सको माहणम्वेग, इम वयणमेचवी ॥ ६॥ फिष्णु भो अन्न मिहिला, कोलाहलगसकुला। सुचन्ति दारुणा महा, पासामु गिहेमु य ॥ ७॥ एयम निसामित्ता, हेजकारणचोइओ। तओ नमी रायरिसी, देविन्दो इणमध्यवी॥८॥ मिहिलाए चेहए बच्छे, सीपच्छाए मणोरमे । पत्तपुष्फफलोवेर, यह बहुगुणे मया ॥९॥ पाएण हीग्माणम्मि, चेहयम्मि मणोरमे। दुहिया असरणा अत्ता, एए कन्दन्ति मो सगा ॥ १० ॥ एयमह निमामित्ता, हारणचोइओ । नमो नम रायरिसिं, देविन्दो इणम चवी ॥११॥ एम अग्गी य वाऊ य, एक डझइ मन्दिर। भयव अन्तेउर तेण, कीम ण नारपैक्मह ॥ १२ ॥ एयम निमामिता हेऊकारणचोहओ। तओ नमी रायरिमी, देविन्दो इणमन्यनी ॥ १३ ॥ सुह यसामो जीपामो, जेसि मोनत्यि किचण । मिहिलाए डज्झहमाणीण, न मे डझड किचण ॥ १४ ॥ चत्तपुत्तकलत्तम्म, नि पारस्म मिक्पूणो। पिय न पिचई किचि, अप्पिय पि न विजई ॥ १५॥ बहु सु मुणिणो भद्द, अणगारम्स भिरसूणो । मव्वओ विप्पमुस्म, गन्तमणुपमयो ।। १६ ॥ एयमह निमामित्ता, हेसारणचोडओ। तओ नमी रायग्सिी, देविन्दो इणमममी ॥ १७॥ पागार काग्डताण, गोपुरट्टालगाणि च । उस्मूलगमयग्धीओ तओ गन्छसि यत्तिया ॥१८॥ एपमह निगामित्ता, हऊकारणचोइओ। तो नमी रायरिमी, देविन्दो इणम की ।। १२ । सद्ध नगर किया, तबसवरमग्गल । खन्ति निउणपागार, वीगृत दुप्पधमय ॥ २० ॥ धणु परयम किया, जीन च इरिय सया। धिइ च केयण फिचा, सचेण पलिम थए ॥ २१ ॥ तरनारायजुत्तेण, मित्तृण कम्मकचुय । मुणी विजयसगामो, भावाओ परिमुच्चए ॥ २२ ॥ एयमह निमामिला, हे कारणचोइओ। तओ नमि रायरिमि, देविन्दो इणमाननी ॥ २३ ॥ पामाए कारहत्ताण, भद्धमाणगिहाणि य । बालग्गपोइयाओ य, तओ गच्छसि सत्तिया ॥ २४ एयम निमामित्ता, हेऊझारणचोइओ। तओ नमी रायरिसी, दविन्दो इणमन्बी ॥ २८॥ समय रालु मो कुणई, जो मग्गे कुणई घर। जत्थेर गन्तुमिच्छेना, तत्थ कुव्वेज सासय ॥ २६ ॥ एयम निसामित्ता, ऊकारणचोडओ। तओ नमि रायरिसिं, देविन्दो हणम वी ॥ २७ ॥ आमोसे लोमहारे य, गटिमेए य तकरे । नगरम्स सेम काऊण, तओ गन्छसि पत्तिया ॥२८॥ पयम? निमामित्ता, हेऊभारणचोडओ। तओ नमी रायरिसी, देविन्दो इणमन्नवी ॥ २९ ॥ अमड तु मणुम्सेहिं, मिन्छा दडो पजुञ्जई। अकारिणोऽत्य चन्झन्ति, मुचई कारओ जणो ॥ ३० ॥ एयमह निमामिना, देऊकारणचोडओ। तओ नमि रायरिमि, देविन्दो इणमन्नवी ॥ ३१ ॥ जे केइ पत्थिया तुज्झ, नानमन्ति नराहिना । वसे ते ठावद्वत्ताण, तओ गच्छसि सनिया ॥३२॥ एयभट्ट निमामित्ता, हेऊकारणचोइओ । तओ नमी रायरिसी, देविंदो इणमयी ॥ ३३ ॥ जो महस महस्माण, सगामे दुजए जिणे । एग जिणेज अप्पाण, एस से परमो जओ ॥ ३४॥ अप्पणामेय जुज्झाहि, फिते जुझेण यज्झओ। अप्पणामेवमप्पाण, जइत्ता मुहमेहए ॥ ३० ॥ पचिन्दियाणि कोह, माण माप तहेव लोह च।दुजय चैव अप्पाण,सब अप्पे जिए जिय ॥ ३६ ॥ एयम निसामित्ता, हेउफागणचोइओ । तओ नमि रायरिमि, देविन्दो इणमञ्चरी ॥३७॥ जइत्ता विज्ले जन्ने भोइत्ता समणमाइणे। दत्ता भोचाय जिहा य, नओ गच्छसि खत्तिया ॥ ३८ ॥ , श्रीजैनसिद्धान्त-म्याध्यायमाला एयम निसामित्ता, हजकारणचोइओ । तओ नमी रापरिसी, टेपि दो इणमन्त्री ॥ ३९ ॥ जो सहस्स सहस्साण, मासे मासे गा दए । तस्स वि सजमो सेओ, अदिन्तस्य वि किंचण ॥१०॥ एयम निसामिका, हजकारणचीडओ। तो नाम रायरिगि, देविन्दो णमची ॥४१॥ घोरासम चहत्ताण, अन्न पत्थेसि आमम । हेय पोसहरओ, भगाहिया मणुयादिना ॥ ४२ ॥ एयम निसामित्ता. हेऊगरणचोइओ। तओ नमी रायरिगि, देविन्दो इणमयी ॥ ४३ ॥ मासे मासे तु जो बालो, उमग्गेण तु भुनएन सो मायायधम्मस्म, कल अग्पा मोनमि ॥ ४४ ॥ एयमह निमामिना, हेजकारणचोडमो, तमो नमि गरिमि, देवि टो इणमन्मी ॥ ४५ ॥ हिरण्ण गुनण्ण मणिमुत, करा दूस च वाहण। योस बटवारइचाण, तओ गच्छसि यत्तिया ॥ १६ ॥ एयम निमामिला, हेऊकारणचोइओ। तभो नमी गपरिगि, देस्तिो इणम पनी ॥ ४७ ॥ मुनण्णरुपस्म उ पच्चया भये, सिया केलामममा अरासया । नरस्म लुद्धम्म न तहि किचि, इन्छाउ आगामममा अणन्तिया ।। ॥४८॥ पुढवी साली जवा चेप, हिरण्ण पगुमिस्सह । पडिपुण्ण नालमेगस्म, इरिना तर चर ॥ ४९ ॥ एयमह निमामिचा, हेऊझारणचोडओ। तो नमि रापरिसिं, देविन्दो इणमन्नवी ॥ ५० ॥ अच्छेरयम भुए, भोए चयसि पत्थिना। अमन्ते कामे पत्येसि, मकप्पेण निहम्मगि ॥१॥ एयमट्ठ निसामित्ता, उकारणचोडनो । तओ नमी रायरिसी, देविदो इणमन्ची ।। ६२ ।। साल कामा विस कामा, कामा आमोविसोरमा । कामे पन्धेमाणा, अकामा जन्ति दोग्गइ ।। ५३ ।। अहे वयन्ति कोहेण, माणेण अहमा गई । माया गई पडिग्धाओ, लोमाओ दुइओ भय ॥ ५४ ॥ अझिजण माहणरूप, विविऊण इन्दत्ता चन्दा अभिन्युण तो, इमाहि महुराहिं वग्गूहि ॥ ५५ ॥ अहो ते निजिओ कोहो, अहो माणो परानिओ। अहो निरफिया मापा, अहो लोमो वसीओ ॥५६॥ अहो ते अन्नव साहु, अहो ते साहु महव । अहो ते उत्तमा यन्ती, अहो ते मुति उत्तमा ॥ ५७ ।। इह सि उत्तमो भन्ते, पच्छा होहिसि उत्तमोलीगुत्तमुत्तम ठाण, सिद्धिं ग सि नीरगी ।। ५८ ॥ एष अमित्युण तो, रापरिमि उत्तमाए सद्धा। पयादिण करेन्तो, पुणो पुणो चन्दई मको ॥ ५९ ।। तो घन्दिऊण पाए, चपारसलपसणे मुणियरम्स। आगासेणुप्पइओ, रलियबलकुडलतिरीडी ॥ ६ ॥ नमी नमेइ अप्पाण, सक्ससमेण चोइओ। चइऊण गेह च घेदही, मामण्णे पज्जुडिओ॥ ६१ ॥ एष फरेन्ति सयुद्धा, पडिया परिपक्सणा। रिणियन्ति भोगेगु, जहा से नमी रापरिसि ॥ ६२ ॥ त्ति बेमि ॥ इअ नमिपन्यता ममत्ता ॥ .
श्रीउत्तराध्ययनएस-दसमाध्ययनम् ॥ अह दुमपत्तय दसम अज्झयण ।। उ काल मा दुमपत्तए पहुपए जहा, निपडइ राहगणाण अथए। एव मणुयाण जीविय, ममय गोयम मा पमाया ।।१।। कुसग्गे जह ओमचिन्दुए, थोर चिट्ठइ लम्बमाण । एर मणुयाण जीविय, समय गोयम मा पमायण ॥२॥ इइ इत्तरियम्मि आउए, जीवियए बहुपञ्चवायए । पिडणादि रय पुरे कड, ममय गोयम मा पमायए ॥ ३ ॥ दुलहे सलु माणुसे मरे, चिरकाले नि सबपाणिण । गाढा य विवाग कम्मुणो, समय गोयम मा पमायए ॥ ४॥ पुढविधायमहगो, उफोस उकोस जीनो सरसे। काल ससाईय, ममय गोयम मा पमायण ॥ ५॥ आउकायमहगओ, उकोस जीयो सबसे। ससाईय, समय गोयम पमायए ।। ६॥ तेउकायमडगओ, नकोस जीयो य मामे। काल सम्बाईय समय गोयम मा पमायए ॥७॥ पाउकाइपमइगओ, उकोम जीनो सरसे। काल ससाईय, समय गोयम मा पमायण ॥८॥ वणस्सहकायमइगओ उकोम जीमे उ सबसे । कालमणन्तदुरन्तय समय गोयम मा पमायए॥९॥ वडन्टियवायमहगो, उकोस जीनो उ मासे । काल सपिन्नमत्रिय, समय गोयम मा पमाप ॥१०॥ तेइन्दिकायमडगओ, उकोस जीवो मवसे । काल मसिनसन्निय, समय गोयम मा पमायण ॥११॥ चउरिनियरायमहगओ, उद्योस जीयो उ मरमे । काल' समिल्लसन्निय, समय गोयम मा “पमायए ॥ १२ ॥ पंचिन्दिय झायमडगओ, उक्कोम जीयो उ मासे । सत्तट्ठभागहणे, समय गोयम पा पमायए ॥१३॥ देरे नेहए यमगओ उकोस जीयो उ मासे । इममनगहणे ममय गोयम पमायण ॥ १४॥ एर भरसमारे, संमरद मुहामुहेहि कम्मेटिं। जीयो पमायबहुलो, समय गोयम मा पसारए ।। १५ ।। मा है -- (१४) -- श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला लण वि माणुमत्तण, आरिअत्त पुणरावि दुलह । विगलिन्दियया हु दीसई, समय गोयम मा पमायए ॥ १६ ॥ लघृण पि आयरित्तण, अहीणपचेन्दियया हु दुल्लहा । विगलिन्दियया हु दीसई, समय गोयम मा ण्मायए ॥ १७ ॥ अहीणपचेन्दियत्त पि से लहे, उत्तमधम्मसुई छ दुलहा । पुतित्थिनिवेसए जणे, समय गोयम मा पमायए ॥ १८ ॥ लघृण वि उत्तम मुइ, सम्हणा पुणरावि दुल्छहा। मिच्छत्तनिवेसए जणे, समय गोयम मा पमायए ।॥ १९ ॥ धम्म पि हु सहन्तया, दुल्लहया काएण फासया । इह कामगुणेहि मुच्छिया, समय गोयम मा पमायए ॥ २० ॥ परिजूरह ते सरीरय, केमा पण्डरया हवन्ति ते । मे सोयवले य हार्ड, ममय गोयम मा पमायए ॥ २१ ॥ परिजूरह ते सरीरय, केसा पण्डरया हवन्ति ते । से चवसुनले य हायई, ममप गोपम मा पमापए ॥ २२ ॥ परिजूरइ ते सरीरय, केसा पण्डुरया हान्ति ते । से घाणवले य हायई, ममय गोयम मा पमायए ॥ २३ ॥ परिज़रइ ते सरीरय, केमा पण्डुरयाँ हयन्ति ते । से जिब्मवले य हायई, समय गोयम मा पमायए ॥ २४ ॥ परिजूरड ते सरीरय, केमा पण्डरया हवन्ति ते । से फासबले य हायई, समय गोयम मा पमायण ॥ २५ ॥ परिजूरह से सरीरय, केमा पण्डरया हान्ति ते । से साठे य हायई, समय गोयम मा पमायए ॥ २६ ॥ अरई गण्ड विसूइया आयका विविहा मन्ति ते । विहइड विद्धमइ ते सरीरय, मम५ गोयम मा पमायए ।। २७ ।। चोनि छन्द सिणेहमपणो, कुमुय सारडय व पाणिय । से मवसिणेहान्निए, समय गोयम मा पमायए ।। २८ ।। चिचाण धण च भारिय, पचहओ हि सि अणगारिय । मा वन्त पुणो वि आइए, समा गोयम मा पमायए ॥ २९ ॥ अवउझिय मित्तयन्धर, विन्ल चेत्र घणोहसचय । मा त पिउय गवेसए, समय गोयम मा पमायए ॥३०॥ न हु जिणे अन दिस्सई बहुमए दिस्सह मग्गदेसिए । सपइ नेयाउए पह, समय गोपम मा पमायण ॥ १॥ अपमोहिय क्ण्टगा पह, ओइण्पो सि पह महालय । - 4 है
श्रीउत्तरा ययनसून-दसमाध्ययनम्
anvuman-
गच्छसि मग्ग निमोहिया, समय गोयम मा पमायए ।। ३२ ॥
अपले जह भारसाहए, मा मगे विममे वगाहिया।
पन्छा पच्छाणुतावर, ममय गोयम मा पमायए ॥ ३३ ॥
तिण्णो हु सि अण्णा मह, किं पुण चिट्ठसि तीरमागओ।
अमितुर पार गमित्तए, समय गोयम मा पमायए ॥ ३४ ॥
अफलेवरसेणि उस्मिया, सिद्धि गोयम लोय गन्छसि ।
खेम च सिर अणुत्तर, ममयं गोयम मा पमायए ॥ ३५ ॥
युद्धे परिनि थुढे चरे, गामगए नगरे व सजए ।
सन्तीमग्ग च चूहए, ममय गोयम मा पमायए । ३६ ॥
युद्धस्म निमम्म मासिय, सुकहियमपजोपमोहिय ।
राग दोस च छिन्दिया, सिद्धिगह गए गोयमे ।। ३७ ॥
त्ति वेमि || इअ दुमपत्तय समत्त ॥१०॥
.
॥ अह वहुस्सुयपुज्ज एगारस अज्झयण ॥
सजोगा विप्पमुकरम, अणगारम्स मिक्सुणो। आयार पाउकरिस्सामि, आणुपुचि मुह मे ॥१॥
जे यावि होड निविजे, यद्ध लुद्ध अणिग्गहे अमिकरण उल्लयई, अपिणीए अपहुस्मए ॥२॥
अह पचहि ठाणेहि, जेहिं सिक्सा न लन्मई । थम्मा कोहा पमाएण, रोगेणालम्मपण य ।।३।।
अह अहिं ठाणेहि, सिक्खासीलि त्ति पुचई । अहस्सिरै सया दन्ते, न य मम्ममुदाहरे ॥ ४ ॥
नासीले न विसीले, न सिया अडलोटुए । अकोहणे सचरए, सिक्सासीलि ति दुबई ॥ ७ ॥
अह चोहसहि ठाणेहि, वट्टमाणे उ सजए। अविणी चुबई सो उ, निवाण च न गन्छड ॥ ६॥
अमिरवण कोही हा पर घ च पन्बई । मेचित्रमाणो बमड, सुयं लभृणमबई ॥७॥
अवि पात्रपरिक्खेगी, अवि मिनेसु कुप्पई । सुप्पियस्सावि मित्तस्म, रहे भामा पाय ॥ ८ ॥
पइण्णवाई दुहिले, थद्धे लुद्ध अणिग्गहे । असविंभागी अवियत्ते, अविणीए ति पुचई ॥ ९ ॥
अह पन्नरमहि ठाणेहि, मुविणीए ति घुच्चट । नीयापत्ती अचरले, अमाई अकुहठे ॥१०॥
अप्प च अहिक्सिबई, पर घ च न इन्बई । मेत्तिन्त्रमाणो भयई, सुय लधु न मलई ॥ ११ ॥
न य पायपरिक्मेवी, न य मित्सु कुप्पई । अप्पियस्सावि मित्तस्म, रहें कलाण मासई ॥ १२॥
कलहडमरमजिए युद्ध अभिजाइए । हिरिम पटिसलीणे, मुविणीए ति बुचई ॥ १३ ॥
बसे गुरुकूले निच, जोगर उपहाणर । पियकर पियंचाई, से सिरसं लधुमरिहई ॥ १४ ॥
जद्दा ससम्मि पय, निहिय दुहनो वि विरायड । एक बहुम्मुए भिक्य, धम्मो कित्ती तहा मुय ॥ १० ॥
जहा से कम्बोयाण, आइण्या कन्थए सिया । आसे जवण' पवर, एर हाड बहुम्मुए ॥ १६ ॥
जहाइण्णममारूढे, मूर दृढपरकमे । उभो नन्दिघोसण, एपं हवः बहुम्सुए ॥ १७ ॥
जहा करेणुपरिकिण्णे, बुजरे मट्टिहायणे । बनमन्ते अप्पडिहए, एप हार नहुम्मए ।॥ १८ ॥
- (१६) श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला जहा से तिक्ससिंगे, जायसन्धे विरायई । बमहे जूहाहिबर्ड, एघ हवड पहुस्सए ।॥ १९ ॥ जहा से तिस्सदाढे, उदग्गे दुप्पहस | सीहे मियाण पररे, एर हवइ पहुस्सुए ॥२०॥ जहा से वासुदवे, ससचकगयाधर । अप्पडिहययले जोह, एव हाइ बहुस्मए ॥ २१ ॥ जहा से चाउरन्ते, चपट्टीमहिटिए । चोद्दमरयणाहिनई, एक हवह बहुस्सुए ॥ २२ ।। जहा से सहारसक्खे, वन्नपाणी पुरन्दरे । सके दयाहिबई, एर हाइ बहुस्सए ।। २३ ॥ जहा से तिमिरविद्धसे, उचिट्ठन्ने दिपायरे । जलन्त इस तेण्ण, एव हह बहुस्सुए ॥२४॥ जहा से उड्डाई चन्द, नक्खत्तपरिवारिग । पडिपुण्णे पुण्णमासीए, एव हाइ बहुस्सए ।॥ २० ॥ जहा से समाइयाण, कोडागार सुरक्सिए । नाणाधनपडिपुण्णे पर हा बहुस्सए ॥ २६ ।। जहा सा दुमाण पारा, जम्नू नाम सुदमणा । अणाढियस्म देवस्स, एर हवइ बहुम्सुए ॥ २७ ॥ जहा सा नईण पररा, मलिला सागरगमा । मीया नीलसन्तपरहा, एवं हाइ बहुस्सुए ॥ २८॥ जहा से नगाण पपरे, सुमह मन्दर गिरी । नाणोमहिपञलिए, एव हवा बहुस्सुप ।। २९ ॥ जहा से सयभुग्मणे, उदही असनोदए । नाणारयणपडिपृष्णे, एव हाड पहुस्सए ॥ ३० ॥ समुद्दगम्भीरसमा दुरासया, अचकिया केणइ दुप्पहमया । सुयस्स पुण्णा विउलस्मताइणो, सवित्त कम्म गहमुत्तम गया ॥३१॥ तम्हा सुयमहिटिजा, उत्तमहगवेसए। जेणापाण पर चेव, सिद्धिं सपाउणेनासि ॥ ३२ ।। त्ति येमि ॥ इअ यहुस्सुयपुग्न समत्त ॥ ११ ॥ - . N ॥ अह हरिएसिज बारह अज्झयण ॥ सोनागकुलसभूओ, गुणुचरधरो मुणी, हरिएसवलो नाम, आसि भिनम्बू जिइन्दिओ ॥१॥ इरिएमणमासाए, उचारसमिईसु य । जओ आयाणनिसेवे, सजओ मुममाहिओ ॥२॥ मणगुत्तो चयगुत्तो, कायगुत्तो जिइन्दिओ। भिक्खट्टा यम्भइनम्मि, जन्नवाडे उपहिओ ॥ ३ ॥ त पासिऊण एजन्त, तवेण परिसोसियं । पतोरहिउमगरण, उपहसन्ति अणारिया ॥४॥ जाईमयपडियद्धा, हिंसगा अजिइन्दिया । अगम्भचारिणो बाला, इम चयणमन्यवी ॥ ५ ॥ कयरे जागछड दिवरूने, काले विगराले फोकनासे । ओमचेलए पसुपिमायभूए, सकरदूम परिवरिय कण्ठे ॥ ६॥ को रे तुम इय अदसणिजे, काण घ आमाइहमागओमि । ओमचेलया पसुपिसायभृया, गच्छक्सलाहि सिमिाहे ठिओ सि ॥ ७ ॥ जक्खेतहिं तिन्दुयरस्पवासी, अणुकम्पओखस्स महामुणिम । पच्छायइत्ता नियग सरीर, इमाइ वयणाहमुदाहरित्था ॥ ८ ॥ समणो अह सजओ, यम्भयारी, निरओ धणपरणपरिग्गहाओ । परप्पवित्तस्म उ मिक्सकाले, अनस्स अट्टा इहमागओमि ॥९॥ नियरिनइ खजड मुजई, अन्न पभूय भश्याणमेय ।
(१७) श्रीउत्तराध्ययनम्ब-द्वादशमाध्ययनम् जाणेह मे जायणजीविशु नि, सेमारसस लमऊ एवासी ॥१०॥ उपक्सड भोयण माहणाण, अत्तट्टिय सिद्धमिहेगपक्स । न ऊ बय एरिममन्नपाण, दाहामु तुज्झ किमिह ठिओ सि ॥ ११ ॥ थलेसु बीया वतिसमगा, तहे निन्ने मु य आममाए । एपाए सद्धाए दलाह मज्झ, आराह पुष्णमिण तु पित्त ॥ १२॥ खेत्ताणि अम्ह विडयाणि लोप,जहिं परिण्णा विरहन्ति पुण्णा । ने माहणा नाइविनोपवया, ताइ तु खेचाड सुपेसलाइ ॥ १ ॥ कोहो यमाणोय होय जेसि,मोस अदत्त च परिगहच । ते माहणा जाहविनानिणा, ताड तु खेताड मुपाग्याइ ॥ १४ ॥ तुम्मेत्य मो माग्धत गिराण, अट्ट न जाह अहिन्न ए । उच्चारयाह मुणिणो चरति, साइ तु खेत्ताह सुपेमलाइ ।। १० ।। अन्मारयाण पडिकलमासी, पभाससे किंतु मगासि अम्ह । अवि एय निणम्सट अन्नपाण, न यण दाहामु तुम नियण्ठा ॥ १६ ॥ समिइहि मझामुममाहियस्म, गुतीहि गुत्तम्स जिडन्दियस्म । जह मेन दाहित्य अहेमणिन, किमन जन्माण लहिन्ध लाह ।। ७ ।। के एत्य सत्ता उपजोडया गा, अम्झापया ना मह सण्डिहिं । एय रण्डेण फलपण हन्ता, कण्ठम्मि घेत्तण ग्वलेज जोण ॥ १८ ॥ अज्झारयाण क्यण मुणेना, उदाहया तत्थ बहक्मारा । दण्डेहि विनेहि सहि चैत्र, ममागया व इसि तालयन्ति ।। १९ ।। रनो वहिं कोयलियस्स धूया, मद्दति नामेण अणिन्दियगी । तं पासिया सजय हम्ममाण, बुद्ध कुमार परिनियवेइ ।। २०॥ देवामिओगेण निओडण्ण, दिन्ना मु रन्ना मामा न भाया । नरिन्ददेवि दमिन्दिण्ण, लेगम्हि वता इसिणा स एमो ॥ २१ ॥ एसो हुसो उग्गतको महप्पा, जितिन्दिओ सजओ यम्मयारी । जो मे तयानेन्डा दिलमाणि, पिउणा मय कोसलिएण स्ना ॥ २० ॥ महाजसो एम महाणुमागो, घोग्यो योग्परामो य । मा ण्य हीलेइ अहीलणिन, मा मधे नेएण मे निदहेजा ॥ २३ ॥ एयाइ तीसे वयणाड मोचा, पत्तीइ भाइ मुहासियाह । इसिस्म वेयावडियट्टयाए, जक्पा कुमारे विणिनाग्यन्ति ॥ २४ ॥ ते घोररुता ठिय अतलिक्सेसुरा तहि त जण तालयन्ति । ते मिन्नदहे रुहिर यमन्त, पासित्तु मा इणमाङ भुजो ॥ २५ ॥ मन्तेहि जायतेय पाएहि दणका जे भिक्खु अचमन्नह ॥ २६ ॥ गिरि नहेहि सणह, खायह।
श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला आसीविसो उग्गतो मद्देसी, घोरपओ परमो य । अगणिं व पक्म द पयगसेणा, जे भिक्सुय भत्तकाले वदेह ॥ २७॥ सीसेण एय सरण उबेह, समागया सबजणेण तुम्मे । जइ इच्छह जीविय पाधणा, लोगपि एसो कुविओ डहेजा ॥ २८ ॥ अवहेडिय पिटिस उत्तमगे, पमारिया बाह अकमहे । निज्झेरियन्छे रुहिर वमन्ते, उद्धमुह निग्गयजीहनेत्ते ॥ २९॥ ते पासियासण्डियकहभूए, विमणो विसण्णो अह माहणो सो। इसि पमाएइ सभारियाओ, हील च निन्द च समाह भन्ते ॥ ३०॥ भालेहि मूढेहि अयाणएहि, ज हीलिया तस्म खमाह भन्ते । महप्पमाया इसिणो हरन्ति, न हु मुणी कोरपरा हनन्ति ॥ ३१ ।। पुचिचडहि च अणागय च, मणप्पदोसोनमे अस्थि कोइ । जम्मा हु यापडिय करेन्ति, तम्हा हु एए निहया कुमारा ॥ ३२ ॥ अत्थ च धम्म च वियाणमाणा, तुम्मन वि कुप्पह भूइपन्ना। तुभ तु पाए मरण उवेमो, ममागया भरजणेण अम्हे ॥ ३३ ॥ अञ्चेमु ते महाभाग, न ते किंचि न अधिमो। भुजाहि मालिम नाणावजणसजुय ॥ ३४ ॥ इम च मे अस्थि पभूयमन्न, त भुजम् अम्ह अणुग्गहट्ठा । बाढ ति पडिच्छइ भत्तपाण, मामस्म ऊ पारण महप्पा ॥ ३५॥ वहिय गन्धोदयपुष्फवास, दिव्या तर्हि वसुहारा य बुट्टा । पहयाओ दुन्दुहीओ सुरेंहिं, आगासे जहो दाण च घुट्ठ ।। ३६ ।। सक्स सु दीसह तगोविसेसो न दीमइ जाइविसेस कोई। सोवागपुत्त, हरिएमसाहु, जस्सेरिमा इष्टि महाणुभागा ।। ३७ ।। कि माहणा जोइसमारभन्ना, उदएण सोहि बहिया विमग्गह । ज मग्गहा पाहिरिय विमोहिं न त सुइट्ठ कुसला वयन्ति ॥ ३८ ॥ बुस च जव तणपट्टमींग, माय च पाय उदग फुमन्ता । पाणाइ भूयाइ विहडयन्ता, मुजो वि मन्दा पगरेह पाव ॥ ३९ ॥ कह च र भिक्सु मय जयामी, पावाइ कम्माड पुणोलयामो । अक्याहि सजय जक्सपृडया, यह मुजह सला यन्ति ॥ ४० ॥ छजीपाए अममारभन्ता, मोस अात्त च असरमाणा। परिग्गह इरियो माणमाय, म्य परिन्नाय चरन्ति दन्ता ०४१ ॥ सुसडा पचहि सहि, डह जीविय अणवमाणा। बोसहवाइ सुचत्तदेहा, महाजय जयड जन्मसिट्ट ।। ४०॥ के ते नोइ केव ने जोइटाणे, यावे मुया किं च ते गरिसग ! वर, श्रीउत्तगययनमून-द्वादशमाध्ययनम् vu एहा य ते कयग मन्ति मिस्म्य, कपरण होमेण दुणासि जोड ।। ४३ ॥ तो जोई जीनो जोइठाण, जोगा मुया सरीर कारिसग । कम्मेहा सजमजोगमन्ती होम गुणामि इमिण पसत्य ॥ ४४ ।। के ते हरए के य त सन्तितित्य, रहि सिणाओ व रय जहासि । आइक्स णे सजय जयपडा, इन्छामो नाउ भरओ मगासे ॥ १५ ॥ धम्मे हरए पम्मे सन्तित्त्येि, अणाविले अत्तपमनसे । जहिं सिणाओ विमलो विसुद्धो, मुसीइभृो पनहामि टोस ॥ ४६॥ एय सिणाण उमटेहि दिट्ठ, महासिणाण इसिण पमन्य । जहि सिणाया विमला विसुद्धा, महारिसी उत्तम ठाण पत्त ।। १७ ।। त्ति धेमि ॥ इअ हरिसिज ममत्त ॥१०॥ " ॥ अह चित्तसम्भूइज तेरहम अज्झयणं ॥ जाईपराजइओगलु, गामि नियाण तु हरियणपुरम्मिा घुलणी सम्भदत्तो, उन्नो पउग्गुमाओ ॥१॥ कम्पिले सम्भूओ, चित्ती पुणजाओ पुरमतालम्मिा सेहिकुलम्मि विसाले, धम्म मोऊण पच्चइओ ॥२॥ कम्पिल्लम्मिय नयरे, ममागया दो विचित्तमम्भूया। मुहदुक्मफलविवाग,कहेन्ति ते एकमेक्स्स ॥३॥ चक्वट्टी महिद्दढीओ, नम्मदत्तो महायमो। मायर बहुमागेण. हम उयणमम वी ॥ ४ ॥ आसीमु मायगे दोषि, अन्नमनवमाणुगा। जनमनमणरत्ता, अन्नमन्नहिसिणो ॥५॥ दासा दसणे आसीम, मिया कालिजर नगे। हमा मयगतीरे, मोगगा कासिभूमिए ॥६॥ देवा य देवलोगम्मि, आमि अम्हे महिन्द्वीया। इमा नो छट्टिया जाई, अन्नमनेण जा विणा ॥ ७॥ फम्मा नियाणपयडा, तुमे राय विचिन्निया । तेसिं फलनिगगेण, विप्पओगमुनागया ॥८॥ सघमोयप्पगडा, रम्मा मए पुरा कडा । ते अअ परिसुजामो, किंतु चित्तेवि से तहा ॥९॥ मय मुचिण्ण सफल नराण, कडाण रम्माण न मोक्प अस्थि । अत्यहि कामेहि य उत्तमेहि, आया मम पुण्णफलोरवेण ॥१०॥ जाणाहि मभूय महाणुभाग, महिडढीय पुण्णफलोरवेय। चित्त पि जाणाहि तहे। राय, इड्ढी जुई तम्म नियाभूया ॥ ११ ।। वयणप्पभूया, गाहाणुगीया नरमधमज्झे । ज मिक्सुणो सीलगुणोपवेया, इह जयन्ते सुमणो मि जाओ !॥ १० ॥ उच्चोयए मह को य सम्मे, पोडया आपमहा य रम्मा । म गिह चित रणभूय, पमाहि पचारगुणोपवेय ॥ १३॥ न हि “गीहि य वाटपहि, नारीनणाहि परियारयन्तो। मुजाहि भोगाइ इमाइ भिकम्बू, मम रोयई पचन द ग ॥ १४॥ महत्थरूया wwwer भारा, सच्चे , . श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला, त पुन्चनेहेण क्याणुराग, नगहिन कामगुणेसु गिद्ध । धम्मस्मिओ तस्म हियापही, चित्तो हम क्यणामुदाहरित्या ॥ १५ ॥ विलविय गीय, नट्ट विडम्बिय। सच्चे आभरणा कामा दुहारहा ॥ १६॥ बालामिरामेनु दुहारहेमु, न त सुह कामगुणेषु राय । विरत्तकामाण तोहणाण, ज मिक्सुण सीलगुणे रयाण ॥ १७ ।। नरिंद जाई अहमा नराण, सोवागजाई दुहओ गयाण । जहिं वय समनपस्स, वेस्मा, वसी य सोगागनिवेसणेसु ॥ १८ ॥ तीसे य जाई उ पावियाए, युन्छानु सोनागनिवेमणेसु । मन्यस्म लोगस्म दुगडणिज्जा, इह तु कम्माइ पुरे कडाइ ॥ १९ ॥ स्रो दापि सिं राय महाशुभागो, महिड्ढी पुष्णफलोपवेओ। चात्तु भोगाइ असासयाइ, आदाणदेउ अभिणिक्खमाहि ॥ २० ॥ इह जीपिए राय अमासयम्भि, धणिय तु पुण्णाइ अधुनमाणो । से सोयह मच्चुगुहोवणीए, धम्म अकाऊण परसि लोए ॥ २१ ॥ जहेह सीहो व मिप गहाप, मन्यू नर नेइ हु अन्तकाले । न तस्म माया च पियाव भाया, कालम्मि तम्ममहरा भान्ति ॥२२॥ नतस्स दुक्स विभयन्ति, नाइओ, न मित्तागान सुपान वधया। एको सय पचणुहोइ दुक्स, कत्तारमेन अणुजाइ कम्म ।। २३ ।। येचा दुपय च चप्पय च, सेत्त गिह भणधन च सच्चं । सकम्मबीओ असो पयाड, पर भर मुदर पावग वा ॥ २४ ॥ त एक तुच्छमरीरंग से, चिईगय दहिय उ पावगेण । मजा य पुत्तावि य नायओ य, दायरमन्न अणुसकमन्ति ॥ २५ ॥ पाणिनई जीवियमप्पमाय. वण्ण जरा हरइ नरस्म राय ! पंचालराया क्यण सुणाहि, मा कासि कम्माड महालयाइ ॥ २६ ॥ अह पि जाणामि जहह साहू ज मे तुम साहसि वक्कमेय । भोगा इमे सगरा हवन्ति, जे दुजया अन्नो अम्हारिसेंहिं ॥ २७ ॥ हत्पिणपुरम्मि चित्ता दहण नरबह महिड्ढीय । काममोगेसु गिद्धेण, नियाणमसुह कड ॥२८॥ उस मे अपडिकन्तस्म, इम एयारिस जाणमाणो वि ज धम्म, काममोगेस मुच्छिओ ॥ २९ ॥ नागो जहा पाजलारसन्नो, दछ थल नाभिसमेइ तीर । एवं वय कामगुणेसु गिद्धा, न मिक्सुणो मग्गमणुषयामो ॥ ३०॥ अधेर कालो तरन्ति राइओ, न यावि भोगा पुरिसाण निधा। - - (२१) श्रीउत्तराध्ययनसम-निंदरामध्ययनम् उपिच भोगापुरिम चयन्ति, दुम जहा सीणफल व पक्सी ॥ ३१ ॥ जात मि भोगे चटउ अमत्तो, अजाइ माइ करहि राय । धम्मे ठिओ मवपयाणुकम्पी, तो होहिसि देवो इओ निउधी ।। ३२॥ न तुझ भोगे चदऊण युद्धी, गिद्धो सि आरम्भपरिग्गहेसु । मोह को एत्तिउ विप्पला, गन्छामि गय आनन्तिम मि ॥ ३३ ॥ पचालराया ति य सम्भहत्तो, साहुम्म तस्म जयण अफाउं । अणुत्तरे भुजिय कामभोम, जणुत्तर सो नरए पनिहो ॥ ३४ ॥ चित्तो वि कामेहि चिरतकामो, जदग्गचारित्ततमो महेसी । अणुचर मजम पारडत्ता, अणुत्तर मिद्विगह गओ ॥ ३५ ॥ त्ति बेमि ॥ इअ चित्तसम्भूहज समत्तं ॥ ॥ अह उसुयारिज चोदहम अज्झयण ॥ देगा भवित्ताण पुरे भनम्मी, केई घुया एगविमाणासी । पुरे पुराणे उमुयारनामे, खाए समिद्धे सुग्लोगरम्मे ॥ १॥ माम्मसेसेण पुराकरण, बुलेमुनग्गेसु य ते पस्या । निविण्णाससारभया जहाय, जिणिदमग मरण पनन्ना ॥२॥ पुमत्तमागम्म कुमार दो वी, पुरोहिओ उस्म जमा य पत्ती । विसालकित्ती य तहोसुयारो, रायस्थ देवी कमलाई य ॥३॥ आईजरामच्चुभयाभिभूया, पहिविहागभिनिविचित्ता। समारचकस विमोक्सणहा, दहण ते कामगुणे विरत्ता ॥४॥ पियपुत्तगा दोनि विमाहणम्म, मझम्मसीलस्म पुरोहियस्म । सरित्तु पोराणिय तत्थ जाइ, तदा भूचिण्ण तासजम च ॥५॥ ते काममोगेसु असज्ज माणा, जाणुस्सएम जे यावि दिया। मोस्वाभिकसी अभिजायसड्ढा, ताय उवागम्म इमं उदाहु ॥ ६ ॥ भमामयं दछ इस मिहार, बहुअन्तराय न य हीयमाउ । तम्हा गिहिसि नरई लहामो, आमन्तयामो चरिम्मामु मोण ॥ ७॥ अह तायगो तय मुणीण तेसि, तवस्म पापायकर वयासी । इम वय वेयरियो पयन्ति, जहा न होई जमुयाण लोगो ॥ ८ ॥ अहिन्न वैए परिविस्म विष्प, पुत्ते परिदृप्प गिहसि जाया। भोवाण मोए मह इस्थियाहि, आग्ण्णगा होह मृणो पसत्या ॥९॥ सोयरिंगणा आयगुणिन्धणेण, मोहाणिला पललणाहिएण ! सतरमात्र परितप्पमाण. सालाना ।
२२) - - श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला पुरोहिय त कमसोऽणुणिन्त, निमतयन्त च सुण धणेण । जहकम कामगुणेहि चेन, कुमारगा ते पसमिक्स क ॥ ११ ॥ वेया अहीयान भान्ति ताण, भुत्ता दिया निन्ति तमं तमेण | जाया य पुत्ता न हन्ति ताण, को णाम ते अणुमनेज एय ॥ १२ ॥ खणमेत्तसोक्सा यह कालदुक्या पगामदुक्या अणिगामसोक्वा । ससारमोकवस्स विपक्सभूया,साणी अणत्याण उ कामभोगा ॥ १३ ॥ परिचयन्ते अणियत्तमामे, अहो य राओ परितप्पमाणे । अन्नप्पमत्ते धणमेसमाणे, पप्पोति मन्चु पुरिसे जर च ॥ १४ ॥ इम च मे अस्थि इमच नत्थि, इम च मे रिच इम अकिच । त एवमेय लालप्पमाण, हरा हरति ति कह पमाए ॥ १५ ॥ धण पभूयं सह इस्थियाहिं, सयणा तहा कायगुणा पगामा । तव कए तप्पड जस्म लोगो, त सब माहीणमिमे तुम्भ ।। १६ ॥ धणेण कि धम्मघुराहिगारे, सपणेण वा कामगुणेहि चैत्र । समणा भविस्सामुगुणोहधारी,कहिंपिहारा अभिगम्म भिस्य ।। १७ ।। जहा य अग्गी अरणी अमन्तो, सीरे घय तेल्लमहा तिलेसु । एमेव वाया मरीरमि सत्ता, समुन्उड नासइ नापचिट्टे ॥ १८ ॥ नो इन्दियग्गेज्झत्तमुत्तभाना, अमुत्तभाना वि य होइ निचो। अज्झत्थहेउ निययम्स पन्धो, समारहेउ च वयन्ति बन्ध ॥ १९ ॥ जहा वय धम्म अजाणमाणा, पार पुरा कम्ममकासि मोहा । ओलभमाणा परिरक्षयन्ता, त नेन भुलो वि समायरामो ॥ २० ॥ अम्माहपम्मि सन्चओ परिवारिए । अमोहाहिं पडन्तीहिं, गिहसि न रह लभे ॥ २१॥ केण अभाहओ लोगो केण वा परिवारिओ। का या अमोहा बुत्ता, जाया चितारो हुमे ॥ २२ ॥ मन्चुणा-भाहओ लोगो, परिवारिओ। अमोहा रयणी चुत्ता, ताय विजाण ॥ २३ ॥ जा वचइ रयणी, न मा पडिनियत्तई। अहम्म कुणमाणस्म, अफला जन्ति राइओ।।०४॥ जा बचइ रयणी, न सा पडिनियतई। च कुणमाणस्म जन्ति राडओ।२० ॥ एगओ दुहमो मम्मत्तसजुया। पच्छा जाया गमिम्मामो, भिस्यमाणा कुले कुले ॥ २६ ॥ जस्मत्यि मन्चुगा मक्स, जस्म चत्यि पलायण । , जोगम्मि, जराप जा जा धम्म मामित्ताग, श्रीउत्तरा ययनरत-चोद्दमाध्ययनम् (२३) जो जाणे न मरिस्पामि, सो हु करो मुए सिया ॥२७॥ अजेय धम्म पडियनयामो, जहिं परना न पुणब्भनामो। अणागय नेव य अस्थि किची, मदासमणे विणइत्तु राग ।। २८ ॥ पहीणपुनम्म हुनत्य पामो वासिट्टि मिस्पायरियाड कालो। माहाहि रस्मोलहई ममाहि, छिन्नाहि माहाहि तमेव ठाणु ॥ २९ ॥ पसाविहणोचजहा परसी, मिचविणो व रणे नरिन्दो। विचन्नमारो पणिनो व पोए, पहीणपुत्तोमि नहीं अपि ॥ ३० ॥ मुसमिया कामाणे इमे ते, सपिण्डिया अग्गरसप्पभूया। भुजामु ता कामगुणे पगाम, पच्छा गमिस्मामु पहाणमग्ग ॥ ३१ ॥ भुत्ता रसा मोड जहाडणे ओ न जीवियहा पजहामि भोए । लाभ अलाभ चसुह च दुक्स,मचिक्समाणो चरिम्मामि मोण ॥३२॥ माह तम मौयरियाण मम्मरे, जुणोच हमो पडिसोत्तगामी । मुजाहि भोगाह मए ममाण, दुक्स खुमिकमायरियाविहारो ॥ ३३ ॥ जहा य भोई तणुय भुयगो, निम्मोयणि हिय पलेइ मुत्तो। एमए जाया पपहन्ति भोए, ते ह कह नाणुगमिम्ममेको ।। ३४ ।। छिन्दिनु जाल अनल व रोहिया, मच्छा जहा कामगुणे पहाय । धोरेयसीला तरमा उदारा, वीग हु मिक्याचरिय चरन्ति ।। ३५ ।। नहेव कुचा सयइकमन्ता, तयाणि जालाणि दलित्त हसा । पलेन्ति पुत्ता य प य मज्झ, ते ह कह नाणुगमिस्ममेका ।। ३६ ॥ पुरोहिय व समयं सदार, सोचाऽमिनियम्म पहाय मोए । कुडम्बसार विउठत्तम च, रायं, अभिनय समुदाय देगी ।। ३७ ॥ चन्तासी पुरिमो राय, न सो होट पमसिनो। माहणेण परिचत्त, आठाउमिच्छमि ॥ ३८॥ सब जग जइ तुह, सच वावि घण भवे। मध पिते अपलत्त नेर ताणाय व तर ॥ ३० ।। मरिहिसि राय जया तया वा, मणोग्मे कामगुणे विहाय । पक्को दु धम्मो नरदेव ताण, न विन्नई अन्नमिदेह किंचि ॥ ४० ॥ नाह ग्मे परिमणि पनवा, सताणडिन्ना चरिस्मामि मोण । अकिपणा उज्नुकटा निरामिमा, परिग्गहारम्भनियतदोमा ॥ १ ॥ दाग्गिणा जहा रणे, टज्ममाणेसु जन्तुम् । अन्ने मत्ता पमोयन्ति, गगहोमवस गया ।। ४२ एवमेन वय मूढा, काममोगेमु मुन्छिया । उज्झमाण न उज्झामो, रागद्दोमग्गिणा जग ॥ ४: भोगे मोचा मित्ता य, स्तुभ्यविहारिणो आमोयमाणा गच्छन्ति, दिया काममा इन ॥४४॥ इमे ५ बदा फन्दन्ति, मम इत्यत्रमागया । मचा कामेसु, भविष्मामो जहा इमे ॥ ४५. धण - मच (२४) श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला. सामिस कुलल दिस्म, बज्झमाण निरामिस । आमिस मध्यमुज्झिना, विहरिम्मामि निरामिमा ॥ ४६ ॥ गिद्धोपमा उ नचाण, कामे समासट्टयो । उरगो सुपण्णपास ब्य, मझमाणो तणु घर ॥ १७ ॥ नागो व्य पधण छित्ता, अप्पणो महिं गए । एय पन्छ महागयं, उम्यारि त्ति में सुय ॥ ४८ ॥ चहत्ता विउल रज, कामभोगे य दुच। निधिमय निरामिमा, निन्नेहा निप्परिग्गहा ।। ४९ ॥ धम्म धम्म वियाणिचा, या कामगुणे बरे । तर पगिज्झहक्साय, घोर घोरपरपमा ॥५०॥ एव न कमसो युद्धा, मचे धम्मपरायणा । जम्ममच्युमउजिग्गा, दुक्सम्म तगवेरिणो ॥ ५१ ।। सासणे विगयमोहाण, पुचि भाषणभारिया। अचिरेणेव कालेण, दुक्यस्मन्तममागया ।। ५२ ॥ राया सह दवीए, माहणो य पुरोहिओ। माहणी दारगा पैर, मध्ये ते परिनिचुट ।। ५३ ।। त्ति वैमि ॥ इअ उसुयारिज समत्त ॥ १४ ॥ , - ॥ अह सभिक्खू पचदह अज्झयण ॥ गोण चरिस्सामि समिच धम्म, सहिए उज्जुकडे नियाणलिने । सथर अहिज कामकामे, अन्नायएसी परिचए म भिकम्यू ॥१॥ राओवरय चरेज लाद, विरए वेयरियायरस्सिए । पन्ने अभिभूय सबदसी जे, कम्हिचि न मुन्छिए स भिक्यू ।। २ ।। अधोसरह दिइनु धीरे, मुणी चरे लाढे निघमायभुत्ते । अबग्गमणे असपहि?, जे कसिण अहियामा स भिक्स ॥ ३ ॥ पन्त सयगाण भइत्ता, सीउण्ह निविह च दमममग । अबग्गमणे जसपहिडे, जे कसिणं जहियामए स मिक्सू ॥ ४॥ नो सबइमिच्छई न पूय, नो वि य पदणग कुनो पमस । से सजए सुपए तबस्सी, सहिए आयगवेसए स भिरम् ॥ ५ ॥ जेण पुण जहाड जीविय, मोह या फसिण नियच्छई। नरनारि पजहे सया वरस्मी, न य कोहल उवेइ स मिक्खू ।। ६ ।। छिन्न सर भोमन्तलियस, मुमिण लक्पणदण्डवत्युपिन्न । अगवियार सरस्स विजय, जे विजाहिं न जीनइ स भिक्ख ।। ७ ॥ मन्त मूल पिचिह बेअचिन्त, वमणविरेयणधूमणेशसिणाण । आउरे सरण तिगिच्छिय च, त परिनाय परिषए स भिषम्यू ॥८॥ सनियगणउग्गरायपुत्ता, माहणमोइय विविहा य मिप्पिणो । नो तेसिं चयइ सिलोगपूय, त परिनाय परि वए स भिक्खू ॥ ९॥ गिहिणो जे पाइएण दिट्ठा, अप्पयइएण व सयुया हविजा । तेसिं इयलोइयफलट्ठा, जो सथव न फ्रेइ स मिस्सू ॥ १० ॥ सपणासणपाणमोयण, विविह् साइमसाइम परेसि । " (२५) - श्रीउत्तराध्ययनसूत्र-पचदशमध्ययनम् अदए पडिसेहिए नियण्ठे, जे तत्य न पउम्सई स मिक्स् ॥ ११ ॥ जकिंचि आहारपाणजाप, विविह साइममाइम परेमि लाधु । जो त तिविहेण नाणुकम्पे, मणवयकायसुमधुढे स मिक्खु ॥ १२ ॥ आपामग चैत्र जमोदण च, सीय सोनीरजवोरग च। न हीरए पिण्ड नीरस तु, पन्तलाइ परिव्यए स मिस्स् ॥ १३ ॥ मद्दा विविहा भवन्ति लोए, दिवा माणुस्मगा तिरिच्छा। भीमा भय मेखा उराला, सोचा न विहिबई स मिक्वू ॥ १४॥ वाद विविहं ममिचलोए, सहिए खेयाणुपए य कोवियप्पा । पन्ने अभिभूय महदसी, उनसन्ते अविहेडिए स मिक्स् ॥ १५ ॥ अविसप्पजीवी अगिहे अमिचे, जिहन्दिए मवओ विप्पमुके। अणुफसाई लहुअप्पमक्सी, चेचा गिह एगचरे स मिक्स् ॥ १६ ।। त्ति बेमि । इअ ममिखुप समत्त ॥ १५ ॥ ॥ अह बम्भचेरसमाहिठाणाणाम सोलसम अज्झयण ॥ सय मे आउस-तेण भगवया एवमक्साय । इह सलु थेरेहिं भगवन्तेहिं दम पम्मचेरसमाहिठामा पनत्ता, जे मिक्स् सोचा निमम्म मजमबहुले सवरपहले ममाहिबहुले गुत्ते गुत्तिन्दिए गुत्तमम्म- यारी मया अप्पमत्त विहरेजा। कयरे राल ते धेरैहि मगर तेहिं दस पम्मरममाहिठाणा पत्रचा, जे मिक्यू सोचा निसम्म मजमबहूले ममाहिवाले गुचे गुत्तिन्दिए गुत्तबम्भयारी मया अप्पमचे विहरेला । इमे खलु ते थेगेहिं मगर तेहिं दम यम्भचेरठाणा पन्नचा, जे मिक्खू सोचा निसम्म सजमबहले सवरबहुले समाहिबहुले गुत्त गुत्तिन्दिए गुत्तपम्भयारी सया अप्पमत्ते विहरेला तजहा विवित्ताइ सयणासणाइ सेचित्ता इवह से निग्गन्थे। नी इत्थीपसुपण्डगससत्ताइ सयणासणाड सेविता इबह से निग्गन्थे । त प्रहमिति थे। आयरियाह । निग्गन्थस्म खलु इस्थिपसुपण्डगसमत्ताइ सय- गासणाइ सेवमाणस्स पम्भयारिस्स उम्मचेरे मका वा कसा मा विगिच्छा गा समुप्पजिजा, मेद बा लमेसा, उम्माय वा पाउणिमा, दीलकालिय वा रोगायक हवेसा, केलिपन्नताओ धम्माओ मसेज । तम्हा नो इस्थिपसुपण्डगममत्ताइ सपणापणाइ सेपित्ता रह से निग्गन्ये ॥१॥नो इथिण यह कहित्वा हमह से निग्गन्थे। त कहमिति चे आयरियाह । निग्गन्यस्म खल इत्यीण कह कहेमाणस्म कम्भयारिस्म पम्मरे सफा ना कसा वा विहगन्छा ना समुप्पजिजा, मेद वा लमेला, उम्माय वा पाउणिजा, दीहकालिय वा रोगायक हवेना, केवलिपभत्ताओ धम्माओम- पेना। तम्हा नो इत्थीण कह कहेना ॥२॥ नो इत्यीण सर्द्धि मनिसेझागए विहरित्ता हबह से निग्गन्थे । त कहमिति चे । आयरिया। निग्ग थस्म खलु इत्थीहि मद्धिं सन्निसेनागयम्स पम्मपारिस सम्मवेरे सका वा कखा वा पिइगिन्छा वा समुप्पजिना, मेद ना लमेजा उम्माय वा पाउणिना, दीदकालिय या रोगायक हवेजा, केलिपन्नत्ताओ धम्माओ मसेजा । तम्हा सर . - श्रीजेनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला नो निग्गंधे इत्थीहिं सद्धिं सभिसेजागए विहरेजा ॥३॥ नो इस्थीण इन्दियाइ मणोहराइ मणो- रमाइ आलोइत्ता निझाइत्ता हवइ से निग्गन्थे । त कहमिति चे आयरियाह । निग्गन्थस्स सलु इत्थीण इन्दियाइ मणोहराइ मणोरमाइ आलोएमाणस्स निज्झायमाणस्स यम्भपारिस्स पम्भचरे सका वा कखा वा विइगिच्छा या समुप्पजिजा, भेद ना लभेजा, उम्माय वा पाउणिजा, दीह- कालिय वा रोगायक हवेआ, केवलिपन्नत्ताओ धम्माओ भसेजा । तम्हा सलु नो निग्गन्थे इत्थीणे इन्दियाइ मणोहराइ मणोरमाइ आलोएज निज्झाएजा ॥ ४ ॥ नो इत्थीण कुहुन्तरमि वा दम- न्तरसि वा मित्तन्तरसि या कइयमद्द या रुझ्यसद्द या गीयमह वा इसियसद वा यणियमद्द या फन्दियसह पा लिवियसद्द वा सुणेत्ता हवड से निग्गन्थे । त कहमिति थे । आयरियाह । निग्ग- न्यस्म सल इत्थीण बुद्धन्तरसि व दूसन्तरसि या मित्चन्तरसि या कूड़यसह वा रुझ्यसद्द वा गीयसह वा हसियसद्द वा थणियमद्द वा कन्दिय सद वा विलपियसद वा पुणेमाणस्स बम्भयारिस्स नम्भचेरे संका वा करवा वा विगिन्छा पा समुप्पअिज्ञा, भेद वा लभेजा, उम्माय वा पाउणिजा, दीहका- लिय वा रोगायक हवेजा केलिपन्नत्ताओ धम्माओ भसेजा । तम्हा,राल नो निग्गन्धे इत्थीण कुहु तरसि वा दूसन्तरसि वा भित्तन्तरसि ना कइयसद्द या रुझ्यमह वा गीयसद्द वा हसियसह वा थणियमद्द वा कन्दियसद्द वा विलवियसद्द वा मुलेमाणे विहरेजा ॥ ५॥ नो निग्गन्थे पुवरय पुतीलिय अणुमरित्ता हबई से निग्गन्धे त कहमिति चे । आरियाह । निग्गन्थस्स सल पुवरय पुलकीलिय अणुमरमाणस्म बम्भयारिस्स चम्मचरे सका वा कसा वा विडगिच्छा वा समुप्पजिला, मेद वा लभेजा, उम्माय वा पाउणिजा, दीहकालियं वा रोगायक हवेआ, केलिपन्नत्ताओ यम्मा ओ भसेजा । तम्हा सलु नो निग्गण्य पुवरय पुनरीलिय अणुसरेजा ॥ ६॥ नो पणीय आहार जाहरित्ता हवड से निग्गन्थे । त कहमिति चे । आयरियाह । निग्गन्यम सलु पणीय आहार आहारेमाणस्स बम्भयारिस्म बम्मो सका वा कसा वा विडगिच्छा पा समुप्पग्जिा, भेद या लमेना, उम्माय वा पाउणिजा, दीहकालिय या रोगायक हवेजा, केवलिपन्नताओ धम्माओ भसेज्जा । नम्हा सलु नो निग्गन्थे पणीय आहार आहारेजा ॥ ७ ॥ नो अइमायाए पाणभोयणं आहारत्ता हाइ से निग्गन्थे । त कहमिति चे । आयरियाह । निग्गन्थस्स सलु अमायाए पाण भोयण आहारेमाणस्स बम्भयारिस्म बम्भवरे सका वा कम्वा या विडगिच्छा वा समुप्पजिला, भेद वा लमज्जा, उम्माय वा पाउणिज्जा, दीलकालिय या रोगायक हवेजा, केवलिपन्नत्ताओ धम्माओ मैसेजा। तम्हा सलु नो निग्गन्थे अइमायाए पाणभोयण आहारेजा ॥ ८ ॥ नो विभू- साणुवादी हवड से निगन्ये । त महमिति चे आयरियाह । विभूमापत्तिए विभूसियसरीरे इत्थि- जणस्स अभिलसणिजे हवइ नओ ण इत्थिजणेण अमिलसिनमाणस्स यम्मचेरे सका वा कसा वा विइगिच्छा या ममुपजिन्ना, भेद मा लभेजा, उम्माय वा पाउणिजा, दीहकालिय या रोगायक हवेजा, कालिपन्नत्ताओ धम्माओ भसेजा। तम्हा खलु नो निग्गथे विभूसाणुवादी हविज्जा ॥ ६॥ नो सहयरमगन्धफामाणुवादी हाइ से निग्गन्ये । त कहमिति थे। आयरियाह । निग- न्यास वलु सहस्वगन्धफामाणुगादिस्स नम्भयारिस्स पम्भचेर समाचा पंखा या विहगिच्छा वा समुप्पनिना, मेद वा लभेजा, उम्माय वा पाउणिन्ना, दीहकालिय वा रोगायक हवेना, केव 4 , - - - श्रीउत्तराययनपत्र-सोलमाध्ययनम् (२७) लिपन्नताओ धम्माओ भमेन्ना। तम्हा मलु नो मदरूपरसगन्धामाणुवादी भोला मे निग्गन्थे । दसमे पम्मचेग्ममाहिठाणे हाह ।।10, भनन्ति इ.4 सिलोगा नहा- ज विवित्तमणाइण, रहिय इस्थि जणेण य यम्भचेरम रस्सट्ठा, आलय तु निसए ॥ १॥ मणपल्हायजणणी, कामरागविडणी। सम्मोरिओ भिक्यू, पीरह त सिन्नए ॥ २॥ सम च सथवं थीहि, सकह च अभिक्सण । यम्मचररओ भिक्खू, नियमो परिवन्नए ॥ ३ ॥ अगपञ्चगमठाण, चारवियपहिय । चम्मचेररओ थीण, चक्मुगिज्य विननए ॥ ४ ॥ फूड्य रुइय गीय, हमिय थणियफन्दिय ! चम्मचेररओ थीण, सोयगेझ निबए ॥५॥ हास किड रह टप्प, सहमाचित्तासियाणि य । पम्भचेररओ थीण, नाणुचिन्ते कया: वि ॥ ६ ॥ पणीय भत्तपाण, सिप्प मयविमटण मम्मचेरओ मिरम्, निचमो परिसन्नए ॥ ७॥ धम्मलद्ध मिय काले, जनत्य पणिहाणव । नाइमच तु मुजेआ, यम्मचेररी मया ॥ ८ ॥ विभूम परिसजेसा, मरीरपरिमण्डण । गम्भचेररओ मिक्स्, सिंगारस्य न धारए ॥९॥ सद रूपे य गन्धे य, रसे फासे तहवय । पचविहे कामगुणे, निचमी परिपजए ॥१०॥ आलओ थीजणाउण्णी, थीकहा य मणोरमा । सथो चेन नारीण, तामि इन्दियदरिमण ।। ११ ।। कइय स्टय गीय, हासभुचागियाणि य । पणीय भत्तपाण च, अइमाय पाणभोयण ॥ १२ ॥ गचभूमणमिट्ट च, कामभोगा य दुज्जया। नरस्मत्तगवेसिस्स, रिस तालउड जहा ॥ १३ ।। दुआए कामभोगे य, निचमी परिवजए । संकाथाणाणि समाणि, पन्नेना पणिहाणः ॥ १४ ॥ धम्मारामरते चरे मिक्सू, घिइम धम्मसारही । धम्मारामरते दवे, पम्मचेरसमाहिए ॥ १५॥ देवदाणवगन्धवा, जक्परक्समविधा। पम्मयारि नममन्ति, दुक्र जे करन्ति त ॥ १६ ॥ मम धम्मे एवं निचे, मामए निणदेमिए। मिद्धा सिज्यन्ति चाणेण, सिज्झिस्सन्ति नहावरे ॥ १७ ॥ त्ति बेमि || असम्भचेरममाहिटाणा ममत्ता ॥ १६ ॥ - ॥ अह पावसमणिज्ज सत्तदह अज्झयण ॥ ज के उ पाइए नियण्टे, धम्म मुणिना विणोरपन्ने । सुदुलह लहिउ गोहिलाम, विहन पन्छा य जहामुह तु ॥ १॥ मेा दढा पाउग्णम्मि अग्यि, उपजई मोतु तहेव पाउ । जाणामि ज पटई आउमुत्ति, किं नाम पदामि मुएण भन्ने ॥ २ ॥ जे केई पहाए, निहामीले पगाममो । भोचा पेचा मुह सुबह, पारसमणि ति पुचई ॥३॥ मायरिय उपज्झएदि, सुय विणय,च माहिए । ते चेत्र सिमई याले, पारसमणि चि पुचई ॥४॥ आपरिपउवज्झायाण, सम्म न पडितप्पड । अप्पडिपूग यद्धे पापममणि चि चुचई ॥५॥ सम्महमाणो पाणाणि, धीयाणि हरियाणि य । अमजए मजयमनमाणी, पारसमणि त्ति पुचई ॥ ६ ॥ सथार: फलग पीढं, निसन्न पायकम्बल । अप्पमझियमारहा, पारसमणि चुचई ॥७॥ दवदवस्म चरई, पमते य अभिवण | उल्लपणे य चण्डे य, पारसमणि त्ति बुचई ॥ ८॥ -
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भीजैनसिद्धान्त-खाध्यापमाला.
पडिलहइ पमचे, पउज्झइ पायकम्पल । पडिलेहा अणाउत्ते, पावममणि ति वुचई ॥ ९ ॥
पडिलेहेइ पमत्ते, से किंचि हु निसामिया । गुरुपारिभावए निच, पावममणि ति पुचई ।।..॥
बहुमाई पमुहरे, थद्धे लुद्धे अणिग्गहे। असविभागी अविषचे, पावममणि ति घुचई ॥ ११ ॥
विवाद च डदीरेइ, अहम्मे अचपन्नहा । बुग्गहे कलहे रत्ते, पारसमणि ति पुचई ॥ १२ ॥
अधिरासणे कुइए, जत्थ तथ निसीयई । आसणम्मि अगाउत्ते, पारसमणि त्ति वुचई ॥ १३ ॥
ससक्सपाए मुबई, सेज न पडिलेहइ । सथारए अणाउत्ते, पापममणि ति पुचई ॥ १४ ॥
दुद्धदहीविगईओ, आहारेइ अमिक्सण । अरए य तयोफम्मे, पारसमणि चि पुच्चई ।। १५ ॥
अत्यन्तम्मि य सुरम्मि आहारेइ अभिक्राण। चोइओ मडिचोएइ, पारसमणि त्ति वुच्चई ॥ १६ ॥
व्यायरियपरिचाई, परपासण्डसेवए । गाणगणिए दुम्भूए, पारसमणि ति पुचई ॥ १७ ॥
सय गेह परिचन, परंगेहसि वावरे । निमित्तेण य चवहरइ, पावममणि ति घुचई ॥ १८ ॥
समाइ पिण्ड जेमेइ, नेच्छई सामुदाणिय । गिहिनिसेन च वाहेइ, पारसमणि ति घुचई ॥ १९ ॥
एयारिसे पचकुसीलसुवुडे, रूपधरे मुणिपवराण हेडिमे ।
अयसि लोए विसमेन गरहिए, न से इह नेव परस्थ लोए ॥ २० ॥
जे वजए एए सया उ दोसे,से सुपए होइ मुणीण मज्झे ।
अयसि लोए अमय व पूइए, आराहए लोभिणं तहा पर ॥ २१ ॥
॥ ति येमि ॥ इअ पावसमणिज समत्त ॥ १७ ॥
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। अह सजइज्ज अढारहम अज्झयण ॥
कम्पिल्ले नयरे राया, उदिण्णवलगाहणे। नामेण सजए नाम, मिगब उवणिग्गए ॥१॥
हयागीए गयाणीए, स्याणीए तहेच या पायताणीए महया, सबओ परिवारिए ॥२॥
मिए छुहित्ता इयगओ, कम्पिल्लुआण केसरे। मीए सन्ते मिए तत्थ, वहेइ रसमुच्छिए ॥३॥
यह केसरम्मि उजाणे, अणगारे वयोधणे । सज्झायज्झाणसजुत्ते, धम्मज्झाण झियायह ॥ ४ ॥
मप्फोवमण्डवम्मि, मायइ क्सवियामवे। तस्सागए मिग पास, बहेइ से नराहिवे ॥ ५ ॥
मह आसगओ राया, खिप्पमागम्म सो तहि।हए मिए उ पासिता, अणगार तत्थ पासई ॥ ६ ॥
अह राया तत्थ सम्भन्ती, अणगारो मणा हो । मए उ पन्दपुण्णेण, रसगिद्धण धन्नुणा ।। ७ ॥
आस विसजइत्ताण, अणगारस्म सो निवो। विणएण बन्दए पाए भगर एत्थ मे समे ।। ८॥
अह मोणेण सो भग्गा, अणगारे झाणमस्सिए । रायाण न पडिमन्तेइ, तओ राया भवदुओ॥९॥
संनओ आहमम्मीति, भगव वाहराहि मे । बुद्ध तेएण अणगारे, डहेब नरकोडिओ ॥ १० ॥
अन्मो पत्थिया तुम्म, अमपदाया मवाहिया अणिचे जीवलोगम्मि, कि हिमाए पसज्जसी ॥ ११ ॥
मया सह परिचन, गन्तवमासस्म ते । अणिचेजीवलोगम्मि, किं रजम्मि पसनसी ॥ १२॥
मीविय चेव रूव च, विज्जुसपाय चचल । जत्य त मुझसी राय पेचत्य नाघुपुज्झसे ॥ १३ ॥
पाणि य सुया चेत्र, मित्ता य तह पन्धवा । जीवन्तमजीवन्ति, मय नाणवयन्ति य ॥१४॥
. श्रीउत्तराध्ययनसूत्र-अहदशमाध्ययनम् (२९) नीहरन्ति मय पुना, पितर परमदुक्खिया । पितरो वि तहा पुचे, वन्धू रायं तव चरे ।। १५॥ वो तेणन्जिए दहे, दारे य परिरक्विए । कीलन्तिऽने नरा राय, हतुहमलकिया ॥ १६ ॥ तेगावि ज कय कम्म, सुह वा जइ वा दृह । कम्मुणा तेण सजुत्तो, गच्छई उ पर भर ॥ ७॥ सोजण तस्म मो धम्म, अणगारस्म अन्तिए । महया सवेगनिवेद, समावन्नो नराहिमो ॥ १८॥ सजओ चइउ रज, निग्विन्तो जिणसासणे । गद्दभालिस्म भगवओ, अणगारस्म अन्तिए ॥ १९ ॥ विधा रट्ट पवडण, सचिए परिभासद | जहा ते दीसई रूप, पसन ते महा मणो । २०॥ किं नामे किं गोत्त, कस्मट्ठाए य माहणे। कह पडियरसी बुद्ध, कह विणीप ति बुचसी ॥ २१ ॥ सजओ नाम नामेण, तहा गोत्तेण गोयमो । गद्दमाली ममायरिया. विआचरणपारगा ॥ २२ ॥ फिरिय अफिरिय विणय, णनाण च महामुणी। एएहिं चउहि गणेहि, मेयन्ने कि पभामई ॥ २३ ॥ इइ पाउकरे उद्धे, नायए परिणिधुप । विजाचरणसपने, सच्चे मचपरब मे ॥ २४ ॥ पडन्ति नरए घोरे, जे नरा पावकारिणो | दिन च गइ गाउन्ति, चरित्ता धम्ममारिय ॥ २५॥ मायाइयमेय तु. मुमाभासा निरस्थिया। सजममाणो वि अह, यमामि इरियामि य ॥ २६ ॥ सोए विद्वय मज्झ, मिच्छादिट्ठी अणारिया। विजमाणे परे लोप, मम्म जाणामि अप्पग ॥ २७ ॥ अहसासि महापाणे, जुइम गरिससओगमे । जा मा पालिमहापाली, दिवा परिमसओरमा ।। २८ ।। से धुए बम्मलोगाओ, माणुस्स भरमागए। अप्पणो य परेमि च, आउ जाणे जहा तहा ॥ २९॥ नाणारह च छन्द च, परिवने मजए। अणट्ठा जे य सवत्था, इयविझामणुसचरे ।। ३० ॥ पडिकमामि पसिणाण, परमंतेहिं वा पुणो । अहो यहिए अहोराय, इइ विना तव चरे ॥ ३१ ॥ ज च मे पुच्छसी काले, मम मुद्रण चेयसा । ताइ पाउकरे बुद्धे त नाण जिणसासणे ॥ ३२ ॥ फिरियं च रोपई धीरे, अकिरिय परिपज्जए। दिट्ठीए टिट्ठीसम्पन्ने, धम्म चरसु दृच्चर ।। ३३ ।। ज्य पुण्णपय सोचा, अत्थधम्मोवमोहिय । भरहो चि भारह वास, चेचा कामाइ पहए ॥ ३४ ॥ सगरो वि सागग्न्त, भरहनास नराहियो । इस्मरिय काल हिचा, दयाह परिनिपुढे ॥ ३५ ॥ चाचा भारह वाम, चकाट्टी महिड्डिओ। पवनमन्भुनगओ, मघर नाम महाजसो ॥ ३६ ॥ मणमारो मणुस्सिन्दो, चकाट्टी महिड्डिओ। पुत्त रजे उवेऊण, सो वि राया तव चरे ॥ ३७ ।। चइना भारह वाम, चकवटी महिडिओ। मन्ती सन्तिकर लोए, पत्तो गडमणुत्तर ।। ३८ ॥ इक्सागरायत्रसभो, न्यू नाम नरिसरो। विक्खायफित्ती भगर पत्तो गइमणुत्तर ॥ ३९ ॥ मागरन्त चइताणं, भरह नरपरामरो। अरो य अरय पत्तो, पत्तो गइमणुत्तर ॥ ४० ॥ चरत्ता भारद वाम, चइत्ता बलवाहण । चहत्ता उत्तमे भोप महापरमे तन चरे ॥४१॥ एगच्छत्त पमाहिता, महिं माणनिश्रणो । हरिसेणो मसुस्मिन्दो, पत्तो गहमणुतर ॥ ४२ ॥ अनिओ रायमहस्सेहिं सुपरिचाई दम चरे। जयनामो जिणक्खाय, पत्तो गइमणुत्तर ॥ ४३ ।। दमण्पारन मुदिय, चइत्ताण मुणी चरे। दमण्णमद्दो नियन्तो, मरस सकेण चोडओ ॥४४॥ नमी नमेड अप्याण, मक्स मक्केण चोडओ। चइरुण गेह पडदेही, मामण्ण पज्जुपट्टिओ॥ ४५ ॥ करकण्टू कलिंगेसु, पचालेस य दुम्मुहो। नमी राया वीदेहेसु, गन्धारेसु य नगई ।। ४६ ।। एए नरिन्दवसभा, निक्यन्ता निणसासणे । पुत्ते रज्जे ठमेऊण, सामण्णे पज्जुट्टिया ।। ४७ ॥ .
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(३०)
श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला
। सोचीग्गयवमभो, चइताण मुणी चर । उदायणो पाइयो, पत्तो गहमणुत्तर ।। ४८॥
तहेव कासीराया, सेओसद्यपरकमे। कामभोगे परिधन, पदणे कम्ममहारण ॥४९॥
तहेव विजओ राया, अणहाकित्ति पथए । रज तु गुणममिद, पयहित्तु महाजसी ।। ५० ।।
तयुग्म तब किया, अवविखतेण चेयसा । महबलो रापरिसी, आदाय सिरसा सिरिं ॥ ५१ ॥
कह धीरो अहेअहिं, उम्मनो व महिं चरे । एए विसेममादाय, सरा दढपरपमा ॥५॥
अचन्तनियाणसमा, सया में भासिया ई । अतरिंसु तरन्तैगे, तरिस्मन्ति अगागया ।। ५३ ।।
कहिं धीर अहेऊहिं अत्त ण परियारसे। मवमगविनिम्मुके, सिद्ध भार नीरए ॥ ५४॥
त्ति बेमि ॥ इअ मजहन ममत्त ।। १८॥
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" मियापुतीय एगूणवीसइम अज्झयणं ।
मुग्गीवे नयरे रम्मे, राणणुज्जाणसोहिए | राया पलभहि ति, मिया तस्मग्गमाहिसी ॥ १ ॥
तेमि पुत्ने चलमिरी, मियापुत्ते ति विस्मए । अम्मापिऊण दहए, जुराया दमीमर ॥२।"
नन्दणे मो उ पासाप, कीलए सह इस्थिहिं । देवोदोगुन्दगे चैव, निच मुइयमाणमो ॥३॥
मणिरयणकोहिमतले, पायायालोयणहिओ । आलोण्ड नगरस्म, चउ तियचचरे ॥ ४॥
जह तत्थ अइच्छन्त, पासई ममणसजय । नवनियमसजमघर, सील? गुणआगर ॥५॥
त हहद मियापुत्ते, दिट्ठीण अणिमिमाए 3 । कहिं मन्ने सि रूप, विद्वपुत्र मए पुरा ।। ६ ॥
माहुम्म दरिसणे तम्म, अज्झरमाणम्मि मोहणे। मोर गयस्म स तम्स, जाईमग्ण मम्प्पन्न ॥ ७ ॥
जाईसरणे ममुप्पन्ने, मियापुत्त महिड्डिए । सई पोराणिय जाई, सामण्ण च पुरा कय ॥८॥
विमएहि अरज्जन्ती, रज्जन्तो सनमम्मि ५ । अम्मापियरमुवागम्म, इम उयणमन्ययी ॥९॥
मुयाणि मे पच महन्वयाणि, नरएम दुवय च तिरिक्सजोणिम् ।
निविष्णकामो मि महण्णवाउ, अणुजाण पदहस्सामि अम्मो ॥ १० ॥
अम्म ताय गए भोगा, मुत्ता विसफलोरमा । पच्छा कट्टयविवागा, अणुपन्धदुहावहा ॥ ११ ॥
म मरीर अणिञ्च, असुइ असुइसमय । अमासयारासमिण, दुक्सक्माण भायण ॥ १० ॥
असासए मरीरम्मि, रह नोपलभामह । पच्छा पुरा ३ चइयत्वे, फेण-अयमनिमे ॥ १३ ॥
माणुमत्ते अमारम्मि, पाहीरोगाण आर| जरामरणपत्थम्मि, सणपि न रमामह ॥ १४ ॥
जम्म टुक्रा जरा दुक्स, रोगाणि मरणाणि य। अहो दुक्सो हुसमारो, जत्थ कीसन्ति जन्तवो ॥ १५ ॥
खेत्त व हिरण्ण च पुतदार च बन्धया । चडताण हम देह, गन्तवमयसम्स मे ॥ १६ ॥
जह किम्पागफलाण, परिणामो न सुन्दरो। एव भुत्ताण भोगाण, परिणामो न सुन्दरो ।। १७॥
अद्धाण जो महत तु, अप्पाहेओ पवमई । गान्तो मो दुही होइ, छुहातण्डाय पीडिओ ॥ १८ ॥
एव धम्म अशऊण, जो गच्छइ पर भव ! गच्छ वो मो सुही होइ, वाहीरोगेहिं पीडिओ ॥ १९ ॥
अद्धाण जो महत तु, सपाहेओ पवई । गन्छन्तो मो मुही होइ, हातहाविचलिओ ॥ २० ॥
- - श्रीउत्तरा'ययनसूत्र-सोलमाध्ययनम् (३१) एव धम्म पि काऊण, जो ग छड पर भर । गछन्तो सो मुही होड, अप्पकम्मे अयणे ॥ २१॥ जहा गेहे पलितम्मि, तस्म गेहस्म जो पढ़ | सारभण्डाणि नीणेड, असार अबउम्झड ॥ २२ ॥ एव लोए पलित्तम्मि, जराए मरणेण य । अप्पाण तारहस्सामि, तु भेहिं अणुमनिओ ॥ २३ ॥ त विन्तम्मापियरी, मामण्ण पुत्त दुचर । गुणाण तु सहस्माइ, धारेयवाइ भिस्युणा ।। ०४॥ । समया मंबभूएसु, सत्तुमित्तेसु वा जगे । पाणाइयायविरई, जायजीवाए दुकर २५ ॥ निचकालप्पमत्तेण, मुमानायविवजण । भासियय हिय मद्य, निचाउत्तेण दुघर ।। २६ ।। दन्तसोहणमाइम्स, अदत्तस्म विवजण । अणयनेमणिजस्म, गिहण्णा अपि दुघर ॥ २७ ॥ विरई असम्भचरस्म, कामभोगरन्नुणा । उग्ग महत्वय अम्म, धारेयव सुदुकर ॥ २८ ॥ धणधनपेसबग्गेसु परिग्गहविरजण । मबारम्भपरिचाओ, निम्ममच मुदुधर ॥ २९ ॥ वि आहारे, राईभोयणपक्षणा । सन्निहोमचओ चेक, वज्नेयबो सुदुकर ॥ ३० ॥ छुहा तहा य सीउण्ह दसमसगवेयणा । अकोमा टुक्ससेना य, तणफासा जलमेर य ॥ ३१ ॥ तालणा तज्जणा चैव, वह धपरीसहा । दुक्स मिसायरिया, जायणा य अलाभया ।। ३२ ॥ काोया जा मा वित्ती, केसलोओ य दारुणो। दुक्स थम्भवयं घोर, धारउ य महप्पणो ॥ ३३ ॥ सुहोडओ तुम पुना, मुकुमालो मुमजिओ। नहु सी पभू तुम पुत्ता, मामण्णमणुपालिया ॥ ३४॥ आवजीनमविस्मामो गुणाण तु महम्मरो। गुरु उ लोहमारुव, जो पुत्ता होइ दुराहो ॥ ३५ ॥ आगासे गगमोउ छ, पडिपोउ व दुत्तरो। पाहाहिं सागरो चेर, तरियछ। गुणोदही ॥ ३६॥ गठया करलो चव, निरस्माए उ मजमे । असिधारागमण चेव, दुकर चरिउ तबो ।। ३७ ।। अही वेगन्तदिट्ठीए, चरित्तै पुत्त दुकर । जया लोहमया चैत्र, चावेयचा मुदुकर ॥ ३८ ॥ जहा अग्गिसिहा दित्ता, पाउ होइ सुदुधरा । एहा दुकर करेउ जे, तारपणे समणत्तण ।। ३९ ॥ जहा दुक्स भरेउ जे, होइ सायस्म कोत्थलो। तहा दुवस करेउ जे, कीवेण समणतण ॥ ४० ॥ जहा तुलाए तोलेड, दकरो मन्दरी गिरी। तहा नियनीसक, दुकर ममणत्तण ॥ ४१ ।। जदा भुयाहि तरिउ, दुधर ग्यणायगे। तहा अणुवमन्तेण, दुधर दमसागरी ॥ ४२ ॥ भुज माणुस्सए मोगे, पचलक्सणए तुम। भुनमोगी नओजाया, पच्छा धम्म चरिस्समि ॥ ४३ ॥ सो रद अम्मापियरो, एपमेय जहा फुड । इह लोए निप्पियामस्म, नस्थि किचिवि दुकर ॥ १४ ॥ मारीरमाणमा चेत्र, वेयणाओ द्वनन्तसो। मए मोढाओ भीमाओ, असइ दुक्सभयाणी य ॥ ४५ ॥ जरामरणस्न्तार, चाउरन्ते भयागरे । भए सोढाणि भीमाणि, जम्माणि मरणाणि य ॥४६॥ जहा इह अगणीउण्हो, एत्तोऽणन्तगुणे तहिं । नरएभु वेयणा उण्हा, अस्माया वेइया मए ॥४७॥ इम इह सीय, एतोऽणन्तगुणे तहिं । नरगसु वैयणा सीया, अस्मया वेडगा मए ॥४८॥ चन्दन्तो रदुकुम्मीसु, उड्डपाओ अहोसिरे । हुयासणे जग्न्तम्मि, पायुचो अण तसो ॥ ४९ ॥ महादयग्गिसकासे, मरुम्मि हरपालु । कदम्बवालयाए य, दड्डपुब्बो अणन्तमो । ५० ॥ रसन्तो कन्दुकुम्मीसु, उड बद्धो अमन्यो । करवत्तकरकाईहिं छिन्नपुष्यो अणन्तसो ॥५१॥ अतिक्पकण्टगाइण्णे, तुगे सिम्बलिपायवे । सेविय पासपद्धेण, कडोकदाहिं दुघर ।। ५२ ॥ 1 महाजन्तेसु उच्छू बा, आरसन्तो सुमेरर । पीडिओ मि माम्मेहि, पारकम्मोआणण्वसो ॥५३ ।। 1 - . , (३२) श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला पन्तो कोलमृणहिं, सामेहि सरलेहि य । फाडिओफालिओ छिनो, विफरन्तो अणेगसो ॥ ५४॥ असीहि अवसिवण्णाहि, मलेहि पट्टिसेहि या छिनोमिनो विमिन्नो य, ओइण्णो पावकम्मुणा ॥ ५० ॥ अनसे लोहरहे जुलो, जलन्ते समिलाजुए। चोइओ तोचजुत्तहिं, रोज्झो चा जह पाडिओ ॥ ५६ ॥ हुयासणे जल तम्मि, चियासु महिमो विच । दड्डो पयो य अबसो, पारकम्मेहि पाविओ ।। ५७ ॥ वला सडामतुण्डेहि, लोहतुण्डेहिं पक्खिहि । विलुत्तो रिलान्तो ह, ढागिद्धेहिऽणन्तसो ॥५॥ तण्हाकियन्तोधापन्तो, पत्तोवेयराणिं नदि। जल पाहिं ति चिन्त तो, सुरधाराहिं विधाइओ ।। ५९ ।।। उपहामितत्तो सपत्तो, असिपत्त महारण । असिपत्ताह पहन्तेहि, छिन्नपुग्यो अणेगसो ॥ ६०॥ मुग्गरेहिं मुसढीहि, सुलेहिं मुमलेहि य । गया मभग्गगत्तेहिं, पत्त दुक्य अणन्तसो ॥ ६१ ॥ सुरेहिं तिक्सधारहि, छुरियाहिं कप्पणीहि या यपिओफारिओछिन्नो, उपिचोय अणेगमो ॥ ६२ ॥ पासहि कूडजालेहिं मिओ वा असो अह । वाहिओ बद्धरद्धो वा, यह चेर विनाइओ ॥ ६३ ॥ गलेहि मगरजालेहि,मच्छो वा अवसो अह । उलिओफालिओ गहिओ, मारिणोय अणन्तसो ॥ ६४ ॥ पीदमाहि जालेहिं लेप्पाहि सउणो निगहिओ लग्गो पद्धो य, मारिओ य अणन्तसो ।। ६ ।। कुहाडफरसुमाईहिं, वहुईहिं दुमो विव । कुडिओ फालिओ छिन्नो, तच्छिओ य अगन्तमो ॥ ६६ ॥ चवेड मुढिमाईहिं, कुमारहिं जय पिप । ताडिओ कुहिओ मिनो, चुण्णिओ य अणन्तसो ।। ६७ ॥ तत्ताइ तम्बलोहाइ, तउयाइ सीसयाणि य । पाइओ कलकलन्ताइ, आरमन्तो सुमेरस ॥ ६८॥ तुह पियाइ ममाइ, सएडाइ सोलगाणि य । साविओ मिममसाइ, अग्गिरपणाइऽणेगसो ॥ ६ ॥ तुह पिया सुग सीह, मेरओ य महूणि य। पाहओ मि जलन्तीमो, साओ रहिराणि य ॥ ७० ॥ निच भीएण तत्थेण, दुहिएण यहिएण य । परमा दुहमरद्धा, वेषणा वेदिता मए ।। ७१ ।। तिवचण्डप्पगाढाओ, घोराओ अइदुस्सहा । महन्मयाओ भीमाओ, नरएम वेदिता भए ।। ७२ ॥ जारिसा माणुसे लोए, ताया दीसन्ति वेयणा । एत्तो अणन्तगुणिया, नरएसु दुक्सवेयणा ॥ ७३ ।। सबभवेसु अस्साया, वेयणा चेदिता मए । निमेमन्तरमिच पि, ज साता नत्थि यणा ।। ७४ ।। त विन्तम्मापियरो, छन्देण पुत्त पछया। नवर पुण सामण्णे, दुक्स निप्पडिकम्मया ॥ ७५ ॥ सो वेइ अम्मापियरो, एवमेय जहा फुड । पडिकम्म को पुणई, अरण्णे मियपक्सिण ॥ ७६ ॥ एगभूए अरण्णे य, जहा उ चरई मिगे । ए धम्म चरिस्मामि, सजमेण तयेण य ॥ ७ ॥ जया मिगस्म आपको, महारग्णम्मिजायई। भचत समूलम्मि, को ण ताहे तिगिन्छई ॥ ७८ ।। को वा से ओमह देइ, को वा से पुच्छई सुह। कोसे मत् च पाण वा, आहरितु पणामए ॥ ७९ ॥ जया से मुही होइ, तया गच्छह गोयर । भत्तपाणस्म अट्ठाए, वल्लरापि मराणि य ॥ ८ ॥ साइचा दाणिय पाउ, वल्लरेहि मरेहि य । मिगचारिय चरिताण गच्छई मिगचारिय ॥ ८१ ॥ एव समुट्टिओ मिक्स्, एवमेव अणेगए । मिगचारिय चरित्ताण, उड्ड पफमई दिस ॥ ८ ॥ जहा मिगे एगे अणेगचारी, अणेगवासे धुनगोयरे य । एव मुणी गोयरिय पविट्ठ, नोहीलए नोवि य सिंमएआ ॥ मिगचारिय चरिस्मामि, एर पुत्ता जहासुह । अम्मापिईहिऽणुनाओ, जहाइ उपहिं तहा ।। ८४ ॥ मियचारिय चरिस्सामि, सबक्सनिमोक्सणि । तुम्भेहिं अब्भणुन्नाओ, गच्छ पुत्त जहासह ॥ ८५॥ " " श्रीउचराध्ययनसूत्र-एगूननिशमाध्ययनम् एवं सो जम्मापियरो, अणुमाणित्ताण बहुविद । ममत्त छिन्दई ताई, महानागो छ कचुप ।। ८६ ॥ इट्टी वि च मिने य, पुत्तटार च नायो । रेणुय व पडे लग्ग, निन्धुत्वाण निग्गओ ।। ८७ ॥ पचमहायजुत्तो, पचहि समिओ तित्तिगुतो या सन्मिन्तग्याहिरओ, तवाफम्ममि उज्जुओ ॥ ८८ ॥ निम्ममा निरहकारो, निम्सगो चचगारयो । समी य सबभूएम, तसेसु थावरेमु य ।। ८९ ।। लाभालामे सुहे दुक्से, जीविण मरणे तहा । समो निन्दापमसासु. तहा माणाप्रमाणओ ॥९० ॥ गारवेसु कमाएसु, दण्डसल्लमएसु य । नियत्तो हामसोगाओ, अनियाणो अवन्धणो ॥ ९१ ।। अणिमिओ इह लोए, परलोए अणिस्सिओ। वामीचन्दणकप्पो य, असणे अणमणे तहा ॥ ९ ॥ अप्पमत्येहि दारहि, सबओ पिहियासर्व । अन्झप्पज्झाणजोगेहि, पसत्थदममासणे ॥ ९३ ॥ एव नाणेण चरणेण. दसणेण तवेण य । भाषणाहि य मुद्वाहि, सम्म मावेत्तु अप्पय ॥ ९४ ॥ बड्याणि उ चासाणि, सामण्णमणुपालिया । मासिएण उ भत्तेण, सिद्धिं पचो अणुनर ॥ ९ ॥ एवं करन्ति मद्धा, पण्डिया परियकराणा । रिणिन्ति भोगेसु, मियापुचे जहारिसी ॥ ९६ ।। महापभावस्म महाजमस्म, मियापुत्तस्स निसम्म भासिय । तपप्पहाण चरिय च उत्तम, गहप्पहाण व तिलोगरिस्सुत ।। ॥९७॥ वियाणिया दुक्खविवद्धण धण, ममत्तपन्ध च मयामयावह । मुहावह धम्मधुर अणुचर, धारेज निधाणगुणावह मह ।। ॥९८॥ त्ति वेमि ॥ इअ मियापुत्तीय ममत्त ॥ १९ ।। " G ॥ अह महानियण्ठिज्ज वीसइमं अज्झयणं ॥ सिद्धाण नमो फिचा, सजयाण च भाषओ। अधधम्मगइ तच अणुमहिं मुह मे ॥ १ ॥ पभूपरायणो राया, सेणिओ मगहायिो। विहारजत्त निआओ, मण्डिकुछिसि चेहए ॥२॥ नाणादुमलयाइण्ण, नाणापक्सिनिसेविय । नाणाकुसुमसछन्न, उमाण नन्दगोरम ॥ ३ ॥ तस्य सो पासई मागु, सजयं सुसमाहिय । निसन्न रुस्यमूलम्मि, सुकुमाल सुहोदय ॥ ४ ॥ तस्म रूप तु पासिचा, राइणो तम्मि सजए । अचन्तदरमो आमी, अउलो रूपनिम्हो ॥५॥ अहो वण्णो अहो रून, अहो अचम्म सोमया। अहो सन्ती अहो मुत्ती, अहो भोगे असजया ॥ ६ ॥ तम्म पाए उ बन्दिचा, काऊण य पयाहिण | नाइदूमणामन्ने, पजली पडिपुच्छई ।। ७ ।। तरुणो सि अओ पाइओ, भोगकालम्मि सजया। उपढिओसि सामण्यो, एयमट्ट सुणेमि वा ॥८॥ अणाहोमि महाराय, नाहो मज्न न विजई । अणुकम्पग यदि वापि, कचि नामिममेमह ॥९॥ सओ मो पहसिओ राया, सणि ओ मगहाहियो। एव ते इष्टिमन्तस्स, कह नाहो न पिबई ॥१०॥ होमि नाहो भयताण, मोगे भुजाहि सजया । मिचनाईपरियुडो माणुस्स र सुदुलहं ॥ ११ ॥ अप्पणा विगाहो सि, सेणिया मगहाहिया अप्पणा अणाही सन्तो, करस नाहो भरिभ्यसि । ॥२॥ एव पुचो नरिन्दो सो, सुमभन्तो सुपिम्हिओ। व्यण अस्सुयपुच्च, साहुणा रिम्हपन्निओ.१३ । अस्सा इत्थीमशुस्मा मे,पुर माशी भोगे, आणा इस्सरिय चम (३४) श्रीजनसिद्धान्त-साध्यायमाला एरिसे मम्पयग्गम्मि, सहकामसमप्पिए । कह अणाहो भाइ, मा हु भन्ते मुस वए ॥ १५ ॥ न तुम जाणे अणाहम्म, अत्य पोत्थ च पत्थिमा जहाअणाहोमवर्ड, गणाहो वा नराहिया ॥१६॥ सुणेह मे महाराय, अववियत्तेण चेयसा। जहा अणाहो भवई, जहा मेय पयत्तिय ॥ १७ ॥ कोसम्मी नाम नयरी, पुराण पुरभेयणी । नत्थ आसी पिपा मज्झ, पभूयधणमचओ ॥ १८ ॥ पढमे यए महाराय, अउलाम अच्छिवेयणा । अहो था विउलो टाहो, सधगतेसु परियया ॥ १९ ॥ सत्थ जहा परमतिक्स, सरीरविनग्न्तरे। आपीलिज अरी कुद्धो, एव मे अच्छिवेपणा ॥ २० ॥ तिय मे अन्तरिच्छ च, उत्तमग च पीडइ । इन्दामणिममा घोरा, रेयणा परमदारुणा ॥ २ ॥ उद्विया मे आयरिया, विजामन्ततिगि ज्या । अघीया मत्यवमला, मन्तमूलविमारया ॥२०॥ ते मे तिगिच्छ कुन्ति, चाउप्पाय जहाहिय । न य दुक्सा निमोयन्ति, एमा मज्झ अणाया ॥ २३ ॥ पिया मे सधमारपि, दिनाहि मम कारणा । न य दुक्सा विमोण्ड, एसा मग्झ अणाहया ॥ २१ ॥ माया य मे महाराय, पुत्तमोगदुहटिया । न य दुक्या विमोएइ, एमा मज्झ अणाहया ॥ २५ ॥ भायरो मे महाराय, सगा जेहरुणिट्ठगा। न य दुक्सा विमोयन्ति, एमा मज्दा अणाहया ॥ २६ ॥ भइणीओ मे महाराय, सगा जेट्टकणिढगा। न य दुक्सा विमोयन्ति, एमा मज्झ अणाहया । २७ ॥ भारिया मे महाराय, अणुरचा अणुवया । असुपुण्णेहिं नयणेहि, उर मे परिसिंचई ॥ २८ ॥ अन्न च पाण ण्हाण च, गन्धमल्लविलेपण | मए नायमणाय पा, सा पाला नेव भुजई ॥२९॥ सण पि मे महाराय, पासाओ में न फिट्टई । न य दुक्सा विमोएइ, एसा मज्ज्ञ अणाहया ॥ ३० ॥ तओ ह एवमाहसु, दुक्पमा हु पुणो पुणो । वेयणा अणुभविउ जे, ससारम्मि अणन्तए ॥ ३१ ॥ सइ च जइ मुच्चेजा, वेयणा दिउला इओ। सन्तो दन्तो निरारम्मो, पाए अणगारिय ।। ३२ ।। एव च चिन्त,त्ताण, पसुत्तो मि नराहिवा । परियत्तन्तीए राईए, वेयणा मे राय गया ।। ३३ ।। तओ कल्ले पमापम्मि, आपुच्छिताण बन्धये । स तो दन्तो निरारम्भो, पवइओऽणगारिय ॥ ३४ ॥ तो इ नाहो जाओ, अप्पणो य परस्म य । मधे सिं चेव भूयाण, तमाण यावराण य ॥ ३५ ॥ अप्पा नई वयरणी, अप्पा मे कृडमामली । अप्पा कामदुहा रेणू, अप्पा मे न दण वण ॥ ३६ ॥ अप्पा कत्ता विकत्ता य, दुक्याण य सुहाण य। अप्पा मित्तममित्त च, दुप्पट्टियसुपहिओ ॥ ३७॥ इमा हु अना नि अणाहया निसा, तमेगचित्तो निहुओ सुणेहि । नियण्ठधम्म लहीयाण वी जहा, सीयन्ति एगे पटुकायरा नरा ॥ ३८ ॥ जो पवइत्ताण महत्वयाइ, मम्म च नो फासयई पमाया । अनिग्गहप्पा य रसेसु गिद्धे, न मूलओ छिन्नइ बन्धण से ॥ ३९ ॥ आउत्तया जस्स न अस्थि काइ, इरियाए भासाए तहेसणाए। आयाणनिक्सेपदुगछणाए, न धीरजाय अणुजाइ मग्ग ॥ ४० ॥ चिर पि से मुण्डरइ भविचा, अथिरखए तवनियमेहि महे । चिर पि अप्पाण किठेसहत्ता, न पारए होइ हु सपराए ॥ ४१॥ पोले व मुट्ठी जह से जसारे, अयन्तिए कूडकहावणे या । गढामणी वरुलियप्पगासे, अमहग्धए होइ इ जाणएसु ॥ ४२ ।। " " श्रीउत्तरा ययनपुर-विममाध्ययनम् कुसीललिंग इह धारहना, इसिज्झय जीविय महत्ता । असजए सजयलप्पमाणे, निणिग्यायमागाउड से चिरपि ॥ ४३ ॥ विस तु पीय जह कालकूड, हणाड सत्य जह बग्गहीयं । यो नि धम्मो विमोचनो, हणाड पाल याविपनो ॥ ५ ॥ जे लस्मण सुविण परंजमाणे, निमिनकोउहलसपगाढे । कुहडविलामवदारजीपी, न गच्छड सग्ण तम्मि काले ॥४५॥ तम तमेणे उसे असीले, सया दुही विपरियामुबह । सधावई नरगतिरिक्सजोणि, मोण विगहेतु असाहुरूव ॥ ४६ ॥ उद्देसिय कीयगट नियाग, न मुच्चइ कि च अणेमणिन। अग्गी पिया मह मक्सी भपिना, इत्ताचुछ गाछ कह पार ॥ ४७ न त अरी कठडेचा करह, जसे फर अप्पणिया दरप्पया। से नाहह मच्चमुह त पत्न, पच्छामिनावेण ट्यापिणो ॥ १८ ॥ निरट्रिया नग्गरद उ तम्म, जे उत्तम विपनाममेह । इमे रिसेनस्थि पर विलोए, दुइओ विसं भिन्न तत्य लोग ॥ ४ ॥ एमेव हा छन्दकुसीलम्चे, मग गिराहेत्तु जिणुत्तमाण । पूरी विमा मोगरमाणुगिद्धा, निरमोया परियाममेह ५० ॥ सोचाण मेहानि सुभासिय इम, अणुमासण नाणगणोपय । मग कुसीलाण अहाय मञ्च, महानियण्ठाण पए परेण ॥५१॥ चरितमायारगुणनिष तो, अणुनर मजम पारियाण। निरामवे मसरियाण पम्म, उयेह ठाण पिउन्टनम धुर ॥५॥ एग्गदन्ते । महातबोधणे, महामुणी महापडाने महायसे । महानिष्ठिनमिण महासुय, से कहर महया पिन्यग्ण ॥ ५३ ।। तहो य सेणिो राया, हणमुद्राः स्यजली । अणाहत जहाभूग, में उपदसिय ॥५॥ तुझसुरद्ध यु मणुस्म जम्म, लामा मुलद्धा य तुम महमी । तुम्मे सणाहा य गवन्धवा य, ज मैटिगा मग्गे जिणुत्तमाण ।। ०५ ॥ सि नाही अणादाण, मभूयाण मजया। मामेमि त महामाग, इन्ठामि जणुमासिङ ॥ ५ ॥ पुच्छिऊण भए तुम्म, आणविग्घाओ जो जो। निमन्तिया य भोगेहि, त मध मरिसहि मे।७॥ एर धुणिताण म रायसीहो, अणगारमीह परमाइ भत्ती । सओरोहोमपरियणो मनन्ययोधम्माणरत्तो विमलेण चेयसा ।।५८ ॥ ऊससियरोमायो- काऊण पयाहिण । त - य wv vvvA RAMw श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला. अमिवन्दिऊण सिरसा, जयाओ नराहियो ।। ५९ ॥ इयगे वि गुणसमिद्धो, तिगुत्तिगुत्तो तिदण्डपिरओ य । विहग इस विप्पमुक्को, विरह वह विगयमोहो ॥ ६०॥ त्ति चेमि ।। इअ महानियण्ठिन समत्त ।। ॥ अह समुद्दपालीय एगवीसइमें अज्झयण ॥ चम्पाए पालिप नाम, सावा आसि वाणिए । महापीरस्म भगनी, सीसे सो उ महप्पणो । १॥ निग्गन्ध पारयणे, मावण से मि कोविए । पोषण ववहरन्ते, पिहुण्ड नगरमानए ॥ २ ॥ पिहुण्डे यरहन्तस्स, बाणिओ देइ धूपर । त समत्त पइगिज्झ, सदेसमह पत्थिओ॥३॥ अह पालियस्स परिणी, समुद्दम्मि पसवई । अह वालए तहि जाए, समुद्दपालि त्ति नामए ॥ ४ ॥ खेमेण आगए चम्प, सारए वाणिए घर । संवडई तस्स घरे, दारए से मुहोइए ॥५॥ पावत्तरी कलाओ य, मिक्खई नीइकोथिए । जोवणेण य सपन्ने, मुरुवे पियदसणे ॥६॥ तस्स रुबह भन्ज, पिया जापोइ रविणिं । पामाए कीलए रम्मे, देवो दोगुन्दओ जहा ॥७॥ अह अन्नया कयाई, पासायालोयणे ठिओ। यज्झमण्डणसोभाग, पज्झ पासह बज्झग ॥ ८॥ त पासिऊण सवेग, ममुद्दपालो इणम वी । अहोऽसुमाण कम्माण, निजाण पावग इम ॥९॥ सद्धो सो तहिं भगर, परमसवेमागओ। आपुच्छमापियरो, पबए अणगारियं ॥१०॥ जहितु ऽमग्गन्यमहाफिलेस, महन्तमोह कसिण भयावह । परियायधम्म चमिरोयएज्जा, क्याणि सीलाणि परीसहे य ॥११॥ अहिंससच च अतेणग च, तत्तो य उम्भ जपरिग्गह च । पटिवजिया पच महत्वयाणि, चरिज धम्म जिणदेसिय विदुः ॥ १२॥ सवेहिं भूएहि दयानुकम्पी, सन्तिक्समे सजमयम्भयारी । सायजजोग परिसअयन्तो, परिज भिक्खू सममाहिइन्दिए ॥ १३ ॥ कालेण काल विहरेज रहे, पलायल जाणिय अप्पणो य । सीहो व मदेण न सन्तमेजा, वयनोग सुच्चा न अमञ्चमाह ॥ १४ ॥ उवेहमाणो उ परिवएजा, पियमप्पियं सब तितिखएना। न सब सहत्य ऽमिरोयएजा, न यावि पूय गरह च सजए ॥ १५॥ अणेगच्छन्दामिह माणवेहि, जे भापओ सपगरेइ मिक्स् । भयमेरया त थ उहन्ति भीमा, दिधामणुस्साअदुवा तिरिच्छा ॥ १६ ॥ परीमहा दुन्चिसहा अणेगे, सीयन्ति जत्था बहुकायरानरा । से सत्य पत्ते न पहिज मिम्बू, सगामसीसे इव नागराया ॥ १७ ॥ सीओसिणादसममा य फासा, आयका विविद्दा फुसन्ति देह । अकुक्कुओ तत्याहियासहेजा, रयाइ सेवेज पुरे कयाइ ।। १८ ।।
mvam । श्रीउत्तराध्ययनम्न-एगरिसमाध्ययनम् पहाय राग च तहेन दोस, मोह च मिक्ख सतत वियरसणो। मेरु व्य वारण अकम्पमाणो, परीसहे आयगुत्ते सहेजा ॥ १९ ॥ अणुन्नए नावणए महेसी, न यावि पुप गरह च सजए । स उजभाव पडिवान, सजए, निधाणमगा विरण उवेइ ॥२०॥ अरइरइसहे पहीणसथवे, रिए आयहिए पहाणत्रा परमट्ठपपहिं चिट्टई, छिन्नमोए अममे अकिंचणे ॥२१॥ विविचलयणाइ भएन ताई, निरोपलेवाइ असथडाइ । इसीहि चिण्णाइ महायसेहि, कारण फासेज परीसहाह ॥ २२ ॥ सत्राणनाणोजगए महेसी, अणुत्तर चरिउ धम्मसचय । अशुत्तरे नाणधरे जससी, ओमासई सरिए वन्तलिक्खे ॥ २३ ॥ दुविह खवेऊण य पुण्णपाय, निरगणे सपओ विष्पमुफे । तरिता समुद्द व महामोध, समुद्दपाले अपुणागम गए ॥ २४ ॥ त्ति वेमि ।। इअ समुद्दपालीय समत्त ॥ ॥ अह रइनेमिज चावीसइम अज्झयण ॥ सोरियपुरम्मि नपरे, आसि राया महिड्डिए । वसुदेवु ति नामेण, रापलासणसजुए ॥ १॥ तस्स भजा दुवे आसी, रोहिणी देवई तहा । तासिं दोण्ह दुवे पुत्ता, इट्टा रामकमा ॥२॥ सोरियपुरम्मि नयरे, आसि राया महिटिए । समुद्दविजए नाम, रायलक्सणसजुए ॥ ३ ॥ वस्त मज्जा सिवा नाम, तीसे पुत्ती महायसो। भगर अरिहनेमि ति, लोगनाहे दमीसरे ॥४॥ सो ऽरिद्वनेमिनामो उ, लक्सणस्मरसजुओ । अहमहस्सलपसणधरो, गोयमो कालगच्छवी ॥५॥ बजरिसहसघयणो, समचउरमो असोयरो। तस्म रायमईकन, भज जायड केसको ॥६॥ जह सा रायररफना, मुसीला चारुपेहणी । सबलक्सणसपन्ना, विज्जुमोयामणिप्पभा ॥७॥ अहाह जणओ तीसे, नासुदेव महिड्डिय । इहागच्छउकुमारो, जा से फन्न ददामि ह ॥८॥ सबोसहीहिं हविओ, कयकोउयमगलो। दिवजुयलपरिहिओ, आभरणेहिं विभूसिओ ॥९॥ मत्त च गधहरिथ, वासुदेवस्म जेट्टग। आरूटो सोहए अहिय, सिरे चूडामणि जहा ॥१०॥ अह ऊसिएण छत्तेण, चामराहि य सोहिए | दमारचक्षेण य सो, मबओ परिवारिओ ॥ ११॥ चउरगिणीए सेणाए, रइयाए जहकम । तुरियाण समिनाएण, दिव्वेण गगण फुमे ॥१२॥ एयारिसाए इड्डीए, जुत्तीए उत्तमाइ य । नियगाओ भवणाओ, निआओ यहिपुगवो ॥ १३ ॥ अह सो तत्थ निजन्तो, दिग्स पाणे भयदुए। बाडेहिं पजरहिं च, सन्निरुद्धे सुदुक्सिए ॥ १४ ॥ जीवियन्त तु सम्पत्ते, मसट्ठा भक्खियवए । पासेत्ता से महापन्ने, सारहिं इणमव्यवी ॥ १५॥ कस्स अट्ठा इमे पाणा, एए मधे सुहेसिणो । वाडेहिं पजरेहि च, सन्निरुद्धा य अच्छहि ॥ १६ ॥ अह सारही तओ भणइ, एए भद्दा र तुज्झ विवाह अम्मि, मोयावेठ . ।
(३८) श्रीजनसिद्धान्त-खाध्यायमाला सोऊण तस्स वयण, बहुपाणिविणासण । चिन्तेइ से महापन्नो, साणुकोसे जिए हिऊ ॥ १८ ॥ जह मज्न कारणा एए, हम्मन्ति सुबह जिया ! न मे एय तु निस्सेस, परलोगे भविस्सई ॥ १९ ॥ सो कुण्डलाण जुयल, मुत्तग च महायसो। आभरणाणि य सवाणि, सारहिस्स पणामए ।। २० ॥ मणपरिणामे य कए, देवा य जहोडय ममोइण्णा । सबड्डीइ सपरिमा. निक्समण तस्स काउ जे ॥ २१ ॥ देवमणुस्मपरिवुडो सीयारयण तओसमारूढो, निक्तिमय वारगाओ, रेवयम्मि हिओ भगर ।। २२ ।। उन्नाण सपत्तो, ओइण्णो उत्तमाउ सीयाओ। माहस्सीपरिखुडो, मह निम्समई उशित्ताहि ॥ २३ ॥ अह से सुगन्धग-धीए, तुरिय मउचिए । सयमेव मुचई केसे, पचमुट्ठीहिं समाहिओ ॥ २४ ॥ वासुदेवो य ण भणइ लुत्तम जिडन्दिय । इन्छिरियमणोरह तुरिय, पारस त दभीमरा ॥ २५ ॥ नाणेण टसणेण च, चरित्तेण तहेब य। खत्तीए मुत्तीए, बढमाणो भवाहि य ॥ २६ ॥ ण्व ते रामकेमा, दमारा य यह जणा। अरिहणेमि वन्दित्ता, अमिगया दारगापुरि ।। २७ ।। मोऊण रायफन्ना, पचन सा जिणस्म उनीहासा य निगणन्दा, सोगेण उ समुत्थिया ॥ २८ ॥ राईमई विनिन्तेइ, धिरत्यु मम जीविय । जा ह तेण परिचत्ता, सेय पव्यइउ मम ॥ २९ ॥ अह मा भमरसन्निभे, कुचफणगमाहिए । सयमेन लुचई केसें, धिडम ता ववस्मिया ।। ३० ।। गासुदवो य ण भणड, लुत्तकेम जिइन्दिय | समारमागर घोर, तर कन्न ला लहु ॥ ३१ ॥ सा पपइया सन्ती, पयावेसी तहिं बहु मयण परियण चेन, मीलनन्ता पहुस्सुया ॥ ३२ ॥ गिरि रेवतय जन्ती, नासेणुला उ अतरा। पास-ते अन्धयारम्मि, अन्तो लयणस्स सा ठिया ॥ ३३ ॥ चीवराह विसारती, जहा जाय त्ति पासिया। रहनेभी भग्गचित्तो, पच्छा दिट्ठो य तीड वि ॥ ३४ ॥ मीया य सा तहिं दद्छु, एगन्ते सजय तय । पाहाहिं काउ सगोष्फ, वेवमाणी निमीयई ॥ ३५ ॥ अह मो पि रायपुत्तो, समुद्दविजयगओ। भीय पवेविय दव, इम वक उदाहरे ॥ ३६॥ रहनेमी अह भहे, सुरूवे चारुभासिणी । मम भयाहि मुयणु, न ते पीला भविस्मई ॥ ३७॥ एहि ता भुजिमो भोग, माणुस्स सुसुदुल्लह । भुत्तभोगी पुणो पच्छा, जिणमग्ग चरिस्ममो ॥ ३८ ॥ दगुण म्हनेमिं त, भग्गुजोयपराजिप ! राईमई असम्भन्ता, अप्पाण सवरे तहि ॥ ३९ ॥ अह मा रायवरकन्ना, सुहिया नियमदए । जाई कुल च सील च, रक्समाणी तय वए ॥ ४०॥ जड सि रूपेण वेसमणो, ललिएण नलकुदरो। तहा वि ते न इन्छामि, जइ सि सक्स पुरदरो ॥११॥ धिरत्यु तेऽजसोकामी, जो त जीवियकारणा । बन्न इच्छसि आयाउ, सेय ते मरण भवे ॥ ४२ ॥ अह च भोगरायस्स, त च सि अन्धगहिणो। मा कुठे गन्धणा होमो, सजम निहुओ चर ।। ४३ ॥ जइ त काहिसि भार, जा जा टन्छसि नारिओ। बाया'द्धो व हढो, अद्विअप्पा भविस्ससि ॥ ४४ ॥ गोगालो भण्डवालो वा, जहा तत्वणिम्मरो। म जणिस्मरो त पि, सामणस्स भविस्ससि ॥ ४५ ॥ तीस सो रयण सोचा, सययाण मुभासिय । अकुसेण जहा नागो, पम्मे सपडिवाइओ ।। ४६ ।। मणगुत्तो वायगुत्तो, कायगुत्तो जिहन्दिए । सामण्ण निश्चल फासे, जापजीव दढवओ ॥ ४७ ॥ उग्ग तर चरित्ताण, जाया दोणि वि केवली। सब कम्म सवित्ताण, सिद्धि पत्ता अणुत्तर ॥ ४८ ॥ एप करन्ति मयुद्धा, पण्डिया पवियक्सणा। विणियन्ति भोगेसु, जहा मो पुरिमोत्तमो ॥ ४९ ।। त्ति यमि ॥ रहनेमिन्न समत्त ॥
श्रीउत्तरा ययनमत्र-तेनिसमाध्ययनम् ॥ अह केसिगोयमिज तेवीसहम अज्झयण ॥ , - जिणे पासि ति नामेण, अरहा रोगपटओ । सयुद्धप्पा य सम्पन्न्, चम्मतित्थयर निणे ॥१॥ तस्म लोगपदीवम्य, आमि सीसे महायसे । केसी कुमारममणे, विजाचरणपारगे ॥२॥ ओहिनाणसुप बुद्धे, सीससघममाउछे । गामाणुगाम रीयन्ते, माथि पुरमाग ॥ ३ ॥ ति दुय नाम उज्जाण, तमि नगरमण्डले । पामुए सिज्नसधारे, तत्थ बासमुनागा ॥ ४ ॥ अह तेणेन कालेण यम्मतिथपरे लिणे | भगर पद्धमाणि चि, सचलीगम्मि पिम्मुए ॥५॥ तस्म लोगपदीवस्म आसि सीसे महायसे । भगर गोयमे नाम, मिनाचरणपारए ।।६।। पारसगविऊ युद्ध, सीमसथममाउले । गामाणुगाम रीयन्ने, से वि सारथिमागए ॥ ७॥ कोट्टग नाम उजाण, तम्मी नगरमण्डले । फासुए सिजसथारे, तत्थ पातमुवागए ॥ ८॥ कमी कुमारसमण, गोयमे य महायसे । उभओ पि तस्य विहरिसु, अल्लीणा मुममाहिया ॥९॥ उमओ सीससघापा, सजयाण तास्मिण, । तत्थ चिन्ता समुप्पन्ना, गुणवन्वाण वाइण ।। १० ।। कैरिसो वा इमो धम्मो, इमो धम्मोय के रिमो। आयारधम्म पणिही, टमा वा सा र केरिमी ॥ ११ ॥ चाउजामो य जो यम्मो, जोडमोपचसिकिओ। टेसिओबदमाणेण, पामेण य ममामुणी ॥ १२ ॥ अचेलभो य जो धम्मो, जो ग्यो सतरुत्तरो। एगाजपपन्नाण, विसेमे कि नु कारण ॥ १३ ॥ अह ते तत्थ सीसाण, विन्नाय पवितकिय । ममागमे कयमई, उमओ केसिगोयमा || १४ ॥ गोयमे पडिरून नू, मीससघसमाउले । जेट्ट कुलमवेपन्तो, तिन्दुय अणमागओ ॥ १५ ॥ केसी कुमारसमणे, गोयम दिस्समागय । पडिरू पडित्ति सम्म सपडिरआई ॥ १६ ॥ पलाल फासुय तत्थ, पचम युसतणाणि य । गोयमस्स निसेनाए, सिप्प समणामए ॥ १७ ॥ कमी कुमारसमणे, गोयमे य महापसे । उभओ निमण्णा सोडन्ति, चन्दसम्ममप्पमा ॥ १८॥ ममागया यह सत्य, पासण्डाफोउगामिया। गिहत्याण चणेगाओ, माहस्मीओ ममागया ॥१९॥ देवदाणगन्धया, जक्सरमसकिन्नरा । अदिस्साण च भूयाण, आमी तत्य ममागमो ।। २० ।। पुच्छामि ते महाभाग, केमी गोयममधवी । तओ केसि उवण्त तु, गोयमो इणमव्यवी ॥ २१ ॥ पुच्छ भन्ते अहिच्छ ते, फेरि गोयममन्वयी। तओ फेमी अणुनाए, गोयम हणमन्त्री ॥२०॥ चाउलामोय जो घम्मो, जो इमो पंचसिक्सिओ। दसिओ बद्धमापोण, पासेण य महामुणी ॥ २३ ॥ एगाजपनन्नाण, सिमे किं नु कारण । धम्मे दुविहे मेहारी, कह विपचओ न ते ॥ २४ ॥ तमो केसि उन त तु, गोयमोहा मनवी। पन्ना ममिस्सए धम्मतच तनरिणिन्छि ॥ २० ॥ पुरिमा उज्जुजडा उ, यानडाय पच्छिमा। पज्झिमा उजुपना उ, तेण धम्मे दुहा कए ॥२६॥ पुरिमाण दुविसोझोउ, चरिमाण दुरणुपालओ। पप्पो मजिसमगाण तु, सचिवमोझो सुपालओ ॥२७॥ साहु गोयम पना ते, छिन्नो मेससमो इमो। जन्नो विमो मझ, त में कहा गोयमा ॥२८॥ अचेलगो य जो धम्मो, जो इमो मन्तरुत्तरो। देमियो बढमाणेण, पासेण य महाजमा ॥ २९ ॥ एगाजपपन्नाण, विससे कि नु कारण । लिंगे दुविहे मेहावी, यह विप्पो न वे || Fort । . योजनासद्धान्त-स्वाध्यायमाला. केसिमेव युवाण तु, गोयमो इणमञ्चवी । विनाणेण समागम्म, घम्मसाइणमिच्छिय ॥ ३१॥ पञ्चयत्य च लोगस्स, नाणाविहविगप्पण | जत्तत्य गणहत्थं च, लोगे लिंगपओयण ॥ ३२॥ अह भवे पडन्ना उ, मोक्खसम्भूयसाहणा | नाण च दसण चेर, चरित्त चेत्र निच्छए ॥ ३३ ॥ साहु गोयम पन्ना ते, छिन्नो मे समओ इमो। अन्नो वि ममओ मज्झ, त मे कहसु गोयमा ॥ ३४ ॥ अणेगाण सहस्माण, मज्झे चिट्ठसि गोयमा। ते य ते अहिग छन्ति, यह ते निन्जिया तुमे ॥ ३५॥ एगे जिए जिया पच, पच जिए जिया दम । इसहा उ जिणिताण, सधमत्त जिणामह ॥ ३६ ।। सत्तू य इइ के बुत्ते, केसी गोयम मन्धवी । तओ केसि धुवत तु गोयमो इणमब्यवी ॥ ३७ ।। एगप्पा अजिए सतु, कमाया इन्दियाणि य । ते जिणितु जहानाय, विहरामि अह मुणी ॥ ३८ ॥ साह गोयम पन्ना ते, छिन्नो मे मसओइमो, अन्नो वि मसओ मज्झ, त मे पहसु गोयमा ॥ ३९ ॥ दीसन्ति यहवे लोए, पासपद्धा सरीरिणो । मुक्पामो लहुभुओ, कह विहरिसी मुणी ॥ ४० ॥ ते पासे सबसो चित्ता, निदन्तूण उवायओ । मुकपासो लहु भुओ, कहं विहगमि अह मणी ॥ ४१ ॥ पामा य इह के चुत्ता, केसी गोयममब्बी। केसिमेव उरत तु, गोयमो इणमव्यवी ॥ ४२ ॥ रागद्दोमादओ तिवा, नेहपामा भयकरा । ते छिन्दित्ता जहानाय, विहगमि जहयम ।। ४३ ॥ साहु गोयम पन्ना ते छिन्नो मे ससओ डमो। अन्नो मि समओ मज्झ, त मे कहमु गोयमा ॥ ४४ ॥ अतोहिययसभूया, लया चिट्ठ गोयमा । फलेड विमभक्सीणि, सा उ उद्धरिया कह ॥ ४५ ॥ त लय सबमो छित्ता, उद्धरित्ता समूलिय । विहरामि जहानाय, मुको मि विसभक्षण ॥ ४६॥ लया य इइ का बुत्ता, केसी गोयममव्यवी। केसिमेन युक्त तु, गोयमो इणमब्बी ॥ ४७ ॥ भवतण्डा लया बुत्ता, भीमा भीमफलोदया। तमुद्धिचा जहानाय, पिहरामि जहामुह ।। ४८॥ साहु गोयम पन्नाते, छिन्नो, मे समओ इमो। अन्नो वि ससओमज्झ, त मे कहसु गोयमा ॥ ४९ ॥ सपनलिया घोरा, अग्गी चिट्ठइ गोयमा । जे डहन्ति सरीरत्थे, कह विज्झाविया तुमे ॥ ५० ॥ महामेहपस्याओ, गिज्झ वारि जलुत्तम । सिंचामि समय देह सित्ता नो व डहन्ति मे ॥५१॥ अग्गी य इइ के युत्ता, केसी गोयममन्यवी । केसिमेर युवत तु गोयमो इणमबी ॥ ५२ ।। कसाया अग्गिणो वुत्ता, सुयसीलतमा जल। सुयधारामिहया सन्ता, मिन्नाहुन डहन्ति मे ॥ ५३॥ साहु गोयम पन्ना ते, छिन्नो मे सपनो। अन्नो वि ससओ मज्झ, तं मे कहसु गोयमा ॥ ५४॥ अय साहसिओ भीमो. दुहस्सो परिघावई । जसि गोयममारूढो, यह तेण न हीरसि ॥ ५५ ॥ पधारन्त निगिण्हामि सुपरस्सीसमाहिय । न मे गच्छइ उम्मग्ग, मग्ग च पडिवज्जई ।। ५६ ॥ आसे य इह के बुत्ते, केसी गोयममचवी । केसिमेव उरत तु, गोयमो इणमन्बयी ॥ ५७ ॥ मणो साहसिओ भीमो, दुहस्सोपरिधाचई। त सम्म तु निगिण्हामि, धम्मसिक्ख इ कन्थग ।। ५८॥ साहु गोयम पन्ना ते छिनो मे समओ इमो। अन्नो वि ससओ मझ, त मे कहसु गोयमा ॥ ५९॥ दुप्पहा यहवो लोए, जेहिं नासन्ति जतुणो। अद्धाणे कह बट्टन्ते, त न नाससि गोयमा ।। ६० ॥ जे य मग्गेण गच्छन्ति, जे य उम्मग्गपट्ठिया ते सवे वेइयामन्न, तो न नस्मामह मुणी ॥ ११ ॥ भग्गे य इइ के युत्ते, केसी गोयममन्बनी। कैसिमव युवत तु, गोयमो इणमव्यवी ॥ १२ ॥ कुप्परयणपामण्डी, सवे उम्मग्गपट्टिया । सम्मग्ग तु जिणक्साय, एस मग्गे हि उत्तमे ।। ६३ ॥ - .
. श्रीउत्तराध्ययनस्त्र-तेपिसमाध्ययनम् साह गोयम पन्ना ने, छिन्नो मे ससओइमो। अन्नो वि ससओ मन्झ, त मे बहमु गोयमा ॥ ६४ ॥ महाउदगवेगेण, गुज्झमाणाण पाणिण 1 मरण गई पइट्टा य, दीपक मनसी मुणी ॥६५॥ अस्थि एगो महादी, वारिमझे महालओ। महाउदगवेगस्म, गई वत्य न विजई ॥६६॥ दीव य इह के उत्ते, केसी गोयममधी। केसिमेर युनंत तु, गोयमो इणमबी ॥ ६७ ॥ जरामरणवंगेण, उज्झमाणाण पाणिण । धम्मो दीनो पइट्टा य, गई मरणमुत्तम ॥ ६८ ॥ साहु गोयम पन्ना ते, छिनो मे ससओ इमो। अन्नो वि समओ मज्म, त में कहमु गोयमा ॥ ६९ ।। अण्णपति महोहसि, नागरा विपरिघापट । जसि गोयममारूढो, कह पार गमिस्मसि ।। ७० ।। जा उसस्मारिणी नावानमा पाररस गामिणीजा निरस्माविणी नावा,माउ पारस्म गामिणी ।। ७१ ।। नागा य ह का चुत्ता, केसी गोपममी। फेसिमेन युक्त तु, गोयमो इणम पनी ॥ ७ ॥ मरीरमाहु नान त्ति, जीरे उघड नाविओ। ममारो अण्णो जुत्तो, ज तरति महसिणो ।। ७३ ॥ साहु गोयम पन्ना ते, छिनो मे माओ इमो। अन्नो वि ममओ मज्झ, त में रहमु गोयमा ।। ७४ ॥ अन्धयारे तमे पोर, चिट्ठन्ति पाणिणो यह । को परिस्मद उनोय, सघलोयम्मि पाणिण [[ ७५ ।। उग्गओ विमलो माणू, सालोयपमकगे। सो परिम्मड उन्नोप, मवगेम्मि पाणिण ॥ ७६ ॥ भाणू य इट के उत्ते, केसी गोयममयी। सिमेव उपत तु, गोयमो इणमन्त्री ॥ ७ ॥ उग्गो खीणसमारो, सधन्न जिणमक्यरो । सो करिस्मा उज्जोय, मलोयम्मि पाणिण ।। ७८ ॥ सादु गोयम पन्ना ते, छिन्नो मे समओ इमो। अन्नो विममओ मज्झ, त में कहसु गोयमा ॥ ७९ ॥ सारीरमाणसे दुक्ये, पज्झमाणाण पाणिण । सेम सिरमणापाह, ठाण किं मन्नमी मुणी ।। ८० ॥ अस्थि पग घुव ठाण, लोगग्गम्मि दुगरुद। जत्य नस्थि जरा मन्च, पाहिणो वेयणा तहा 11 ८१ ।। ठाणे य इइ के बुत्ते, पसी गोयममयी। केसिमेव उपस तु, गोयमो इणमव्ययी ॥ ८२ ॥ निवाण ति अमाह ति, मिद्धी लोगग्गमेन य । म सिन अणापाह, ज चरति महेमिणो ।। ८३ ।। ताण सामय नास, लोयग्गम्मि दुराम्ह । ज सपत्ता न मोयन्ति, मयोहन्तारा मणी ।। ८४ ॥ माहु गोयम पन्ना ते, छिन्नो मे ससओ इमो नमो ते समगतीन, सचमुममहोयही ॥ ८५ ॥ एव तु ससए छिन्ने, केसी घोरपरक्मे । अमिान्दित्ता सिरमा, गोमय तु महायस ।। ८६॥ पचमहत्वयाम्म, पडिवजड मारओ । पुरिमस्म परिछमम्मि, मगगे वत्थ मुहावहे ॥ ८७ ।। केसीगोयमओ निच, तम्मि आमि समागमे । मुपमीलममुबमो, महत्त्व थविणिन्छओ) ८८॥ नोमिया परिसा मवा, सम्मग्ग समुट्ठिया । सधुपा ते पसीयन्तु भयय कमिगोयमे ।। ८९ ॥ त्ति बेमि ॥ केसिगोयमित ममत्त 031 .
. (१२) श्रीजेनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला ॥ अह समिओ चउबीसइम अज्झयण ॥ अट्ट परयणमायाओ, समिई गुची तहर य । पचेर य समिडओ, तओ गुत्तीड आहीया ॥ १ ॥ इरियामासेमणादाणे, उचार मगिर्द व्य । मणगुती वयगुत्ती, कायगुत्ती य अट्ठमा ॥२॥ एयाओ अट्ठ सगिईओ, समासेण वियाहिया। दुपारसग जिणग्याय, माय जत्थ उ पथयण ॥ ३ ॥ आलम्बणेण पालेण, मग्गण जयणाय य। चउकारणपरिसुद्ध, सजए इरिय रिए ॥४॥ तत्य आलम्बण नण दसण चरण तहा | काले य दिवसे युत्ते, मग्गे उप्पहयजिए ॥ ५ ॥ दवओ सेत्तओ चेन, कालो भाभो तहा । जायणा चउदिहा वुत्ता, त मे किचयओ सुण ॥ ६ ॥ दरओ चक्सुमा पेहे, जुगमित्त च सेत्तभो । कालओ जार रीडजा, उवउत्ते य भामओ ॥ ७ ॥ इन्दियत्ये विवजित्ता, मज्झायं घेव पञ्चहा । तम्मुत्ती तप्पुरधारे, उचउत्ते रिय रिए ॥ ८॥ कोई माणे य मायाग, लोभे य उपउत्तया। हासे भए मोहरिए, विकहासु वहेच य ॥९॥ एयाइ अस ठाणाइ, परिधज्जितु सनए । असावज मिय काले, भास भामिज पन्नन ॥१०॥ गोमणाए गहणे य, परिभोगेमणाय य । आहारोनहिसेआए, एए तिन्नि विसोहए ॥११॥ गग्गमुप्पायण पढमे, नीए सोहज एसण। परिभोयम्मि चउक, विसोहज जय जई ॥ १२ ॥ ओहोरहोगग्गहिय, भण्डग दुविह मुणी । गिण्हन्तो निक्सिन्तो वा, पउजेज डम विहि ॥ १३ ॥ चक्युमा पडिठेहित, पमंजेन जय जइ ! अहए निक्सिवेला गा, दुहओ वि समिए सया ॥ १४ ॥ उच्चार पामरण, सेल सिघाणजल्लिय । आहार उहि देह , अन वावि तहाविह ॥ १० ॥ अणावायमसलोए, अगोवाण चैव होड सलोग । आगयमसलोग, आवाए चेर सलोए ॥ १६ ॥ जणापायममलोए, परस्मणुनधाइरा । ममे अज्युसिरे यावि, अचिरकालस्यम्मि य ॥ १७ ॥ पिस्थिण्णे दूमोगाढे, नासन्ने दिलवजिए । तसपाणयीयरहिण, उच्चागर्दणि वोसिरे ॥ १८ ॥ एयानो पञ्च समिदओ, ममासेण वियाहिया। एत्तोय तओ गुत्तीओ, वोच्छामि अणुश्चमो॥ १९ ॥ मरम्भममारम्भे, आरम्मे य तह य । चउत्थी असचमोमा य, मणगुत्तीओ चउबिहा ॥ २० ॥ सरम्भममारम्भे, आरम्मे य तहन य । मण पात्तमाण तु, नियत्तेल जय जई ॥२१॥ मच्चा तहा मोमा य, सचमोमा तहेर य | चउत्थी अमचमोमा य, वइगुत्ती चविहा ॥ २२ ॥ सरम्भममारम्भे, आग्म्मे य तह य । य पत्नमाण तु, नियतेन जय जई ।। २३ ॥ ठाणे निसीपणे घेर, तहेव य तुयट्टणे । उयणपट्टयणे, इन्द्रियाण य जुजणे ॥ २४ ।। सरम्भसमारम्मे, आरम्मम्मि तहेर य । काय पचत्तमाण तु, नियत्तेन जय जई ॥ २५ ॥ एमाओ पञ्च समिईओ, चरणम्स य पात्तणे । गुत्ती नियत्त गे गुत्ता, असुभत्येसु महमा ।। २६ ।। एमा पश्यणमाया, जे मम्म आयरे मुणी । सिप्प मवममारा, विप्पमुच्चड पण्डिए ॥ २७ त्ति बेमि ॥ इअ ममिईओ समत्ताओ 4 Centre श्रीउत्तरा ययनपत्र-पञ्चविममाध्ययनम् (४३) vahini "अह जन्नरज पञ्चवोमडम अन्झयण ॥ . माहणकुलमभूओ, आसि विप्पो महायमो । जापाई जमजनम्मि, जयगोसि ति नामओ ॥१॥ इन्दियग्गामनिग्गाही, मग्गगामी महामुणी। गामाणुग्गाम रीयते, पत्ते पाणारमि पुरि ॥२॥ चाणारसीए पहिया, उन्माणम्मि मणोग्मे । फामुए सेजसथारे, तत्य वाममुपागए ॥३॥ अह तेणेर कालेण, पुरीए तत्य माहणे । विजयघोसि ति नामेण, जन्न जयह पेयपी ॥४॥ अह से तस्थ अणगारे, माससमणपारणे । विजययोसस्म जन्नम्मि, मिक्समट्ठा उचट्ठिए ॥॥ समुपट्टिय तहिं स त, जायगो पडिशेहिए।नहु दाहामि ने मिक्स, मिस्प जायाहि अन्नओ ॥ ६ ॥ जे य वेयविऊ विप्पा, जन्नट्ठा य जे दिया। जोग्मगविऊ जे य, जे य यम्माण पारगा।' ७॥ जै समस्या समुद्धन, परमप्पाणमेन य । तेसि अन्नमणिदेय, भो भिक्खू सहकामिय ॥ ८॥ सो त थ एव पडिसिद्वो, जायगेण महामुणी । न नि रुट्ठो न वि तुट्ठो, उत्तिमगरेसओ ॥ ९ ॥ नन्नह पाणदेउ चा, नवि निवाहणाय वा । तेमि विमोक्पणट्ठाए, इण रयणमन्त्री ।। १० ॥ ननि जाणसि वेयमुह, ननि जन्माण ज मुह। नक्पत्ताण मुह ज च, जच धम्माण या मुह ।।११।। जै समस्या समुद्धत, परमप्पाणमेप य । न ते तुम बियाणासि, अह आणासि तो भण ॥ १२ ॥ तस्सक्वेवपमोरस तु, अभयन्तो तर्हि दिओ। मपरिसो पजली होउ, पुछई त महामुणिं ॥ १३ ॥ याण च मुह हि, चूहि जन्नाण ज मुह । नक्सत्ताण मुह गृहि, वृहि धम्माण का मुह ।। १४ ।। जे समस्या समुदत्त, परमप्पाणमेव य । एय मे ससय मध, साह कहसु अच्छिओ ॥ १५ ॥ अग्गिहृत्तमुहा वैया, अन्नट्ठी यमा मुह । नग्वत्ताण मुह चन्दो, धम्माण कामयो मुह ॥ १६ ॥ जहा चन्द गहाईया, चिट्ट ती पजलीउडा । चन्दमाणा नममन्ता, उत्तम मतहारिणो ॥ १७ ॥ अजाणगा जन्नबाई, विजामाहणमपया । गृढा सज्झायतमा, भामच्छन्ना इयग्गिणो ॥ १८ ॥ नो लोए गम्भणो वृत्तो, अग्गीय महिओ जहा । सया कुमलमदिट्ट, न य म माहण ॥ १९ ॥ जो न सजड आगन्तु, पचपन्तो न मोयड । मिड अन्नवयणम्मि, त वयं उम माहण ॥ २० ॥ जायरून जहामह, निद्धन्तमलपापग। रागदोसभयाईय, त ग्य यम माहण ॥ २१॥ ताम्मिय किस दन्त अपचियमससोणिय । सुवय पत्तनिवाण, त वय म माहण ॥ २२॥ तमपाणे बियाणेत्ता, मगहण य थावर । जो न मिइ तिविहेण, त य म माइण ॥ २३ ॥ योहा ना जड वा हासा, लोहा या जइ वा भया। मुम न वह जो उ, त य म माण ।। २४ ॥ चित्तमन्तमचित्त ना, अप्प वा जइ मा बहु । न गिण्हाड अदत्त जे, त क्य राम मादण ॥ २५ ॥ विधमाणुमतेरिन्छ, जो न सेवड मेहुण | मगमा कायस्केण, त य म माहण ॥ २६ ॥ जहा पोम जले जाय, नोरलिप्पड बारिणा । एर अलित्त कामेहि त य म माहण ॥ २७ ॥ अलोलुप मुहाजीवि, अणगार अकिंचण । असमत्त गिह येसु न य म माहण ॥ २८ ॥ जहिता पुवसजोगं नाहमगे य गन्धर्व । जो न मन्नड भोगेगु, त य उम माइण !! २९ ॥ पसुर या मध्वेया य, जहच न त तायन्ति दुम्मील, कम्माणि - S
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(४१)
श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला
न वि मुण्डिएण समणो, न ओकारेण यम्भणो । 7 मुणी रणरामेण, कुमचीरेण तापमो ।। ३१ ।।
समगए समणो होइ बम्भचेरेण यम्भणो । नाणेण उ मुणी होड, तवेण होइ तावसो ॥ ३२ ॥
कम्मुणा बम्मणो होड, कम्मुणा होइ सत्तिओ । बइमो कम्मुणा होड, मुद्दो कह कम्मणा ॥ ३३ ॥
एए पाउकरे बुद्धे, जेहिं होड सिणायो । सबकम्मविणिम्मुक, त वय घूम माहण ॥ ३४॥
एव गुणममाउत्ता जे भान्ति दिउत्तमा । ते समत्था उ उद्धत्तु, परमप्पाणमेव य ॥ ३५ ॥
एव तु ससए दिन, विजयघोसे य माहणे । समुगय तत तु, जयघोम महामुणिं ॥ ३६ ॥
तुढे य विजययोसे, इणमुदाहु कयजली । माहणत्त जहाभूय, मुठ्ठ मे उपदसिय । ३७ ॥
तुम्भे जइया जन्नाण, तुम्भे वैयरिऊ विऊ । जोहसगपिऊ तुम्भे, तु भे धम्माण पारगा ।। ३८॥
तुम्भे समत्था उत्तु, परमप्पाणमेव य । तमणुग्गह करेहम्द मिक्खेण मिस्सु उत्तमा ॥ ३९॥
न कन्ज मज्झ मिस्खेण, सिप्प निक्समम दिया। माभमिहिसि भयानडे घोरे ससारसागरे ॥ ४० ॥
उवलेयो होइ भोगेसु अभोगी नोरलिप्पई । भोगी भमड समारे, अभोगी निप्पमुच्चई ॥ ११ ॥
उल्लो सुरसोय दो छुढा, गोलया मट्टियामया।दोपिआरडिया बुड्डे, जो उल्लो सोऽथ लग्गई ॥४२॥
एप लग्गन्ति दुम्मेहा, जे नरा यामलालसा । पिरत्ता उ न लग्गन्ति, जहा से मुक्सगोलए ॥ १३ ॥
एव से मिजयघोसे, जयघोसस्स अन्नि । अणगारस्स निक्सन्तो, धम्म सोचा अणुत्तर ॥ ४४ ॥
सवित्ता पुष्यफम्माइ, सजमेण तषेण य | जयघोसपिजयघोपा, सिद्ध पत्ता अणुत्तर ॥ ४ ॥
त्ति बेमि ।। इअ जन्नइन ममत्त ॥ २५॥
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॥ अह सामायारी छवीसइम अज्झयण ॥
सामायारिं परक्यामि, सबदुवखविमोक्खणि । ज चरित्ताण निग्गन्था, तिण्णा ससारसागर ।। १ ।।
पढमा आनस्सिया नाम, पिहया य निमीहिया । आपुच्छणा य तइया, चउत्थी पडिपुच्छणा ॥२
पचमी छ दणा नाम, इच्छाकारो य छट्ठो। सत्तमो मिन्छकारो य, तहकारो य अट्ठमो ॥३॥
अन्मुट्ठाण च नरम, दसमी उपसपदा। एसा दसगा साहूण, सामायारी पवेइया ।। ४
गमणे आवस्मिय कुना, ठाणे कुछ निमीहिय । आपुच्छप सपकरणे, परकरणे पडिपुच्छण ॥५॥
छन्दणा दबजाएण, इच्छाकारो य सारणे 1 मिच्छाकारो य निन्दाए, तहकारो पडिस्सुए ॥ ६ ॥
अन्मुट्ठाण गुरूपूया, अच्छणे उपसपदा। एव दुपचमजुत्ता, सामायारी पवेडया ॥७॥
पुघिल्लम्मि चउभाए, आश्चम्मि समुट्ठिए । भण्डय पडिलेहिता, वन्दित्ता य तओ गुरु ॥ ८॥
पुच्छिा पजलीउडो, कि काय मए इह । इच्छ निओडउ भन्ते, वेयावच्चे व सज्झाए ॥९॥
वैयारो निउत्तेग, कायव अगिलायओ। सज्झाए वा निउत्तेण, सबदुक्सविमोक्सणे ॥ १० ॥
दिवमस्म चउरो भागे, मिक्खू पुजा विपक्षणो। तओउत्तरगुणे कुजा, दिणमागेषु चउसु वि ॥ ११ ॥
पदमपोरिसि सज्झाय, नीय झाण झियायई । तइयाए मिक्पायरिय, पुणो चउत्थीइ समाय ॥१२॥
आमाहे मासे दुपया, पोसे मासे चउप्पया । चिचासोएसु मासेस, तिप्पया हवइ पोरिमी ॥ १३ ॥
अगुल सत्चरत्तेण, परखेण च दुरगल । वड्डए हायए वावि, मासेण चउरगुल ॥ १४ ॥
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श्रीउत्तरा ययनरत्र-छविसमाध्ययनम्
(४५)
आमादबहुलपक्खै, भद्दवए कत्तिए य पोसे या फग्गुणवाइसाहेसु य, पोवा ओमरचाओ ॥ १५ ॥
जेट्ठामूले आमाढसावणे, छहि अशुलेहिं पडिलेहा अट्टहिं वीयतम्मि, तहए दस अट्ठहिं चउत्थे ॥ १६ ॥
रति पि चउरी भागे, मिक्खू कुआवियासणो। तओउत्तरगुणे कुआ, राइमाएतु चउसु वि ॥ १७ ॥
पदमपोरिसि सज्झाय, षीय झाण शियायई। तत्याए निद्दमोक्स तु चउत्थी सुजो वि मज्झाय ॥१८॥
ज नेइ जयारति, नवरात्त वम्मि नहचउन्माए । सपत्ते विरमेजा, सज्झायपओमकालम्मि ॥१९॥
वम्मेव य नसते, गयणचउभागमावसेमम्मि । वरचियपि काल, पहिरोहिता मुणी कुआ ॥ २० ॥
पुवितम्मि चउन्माण, पहिलेहिताण भण्डय। गुरु मन्दिनु सज्झा, या दुक्सविमोकवण ॥ २१ ॥
पोरिसीए चउन्माए, यन्दिताण तओ गुरु । अपडिकमित्ता फालस्म, भायण पडिलेहए ॥ २२ ॥
मुहपोनि पडिलेहिता, पडिलेअ गोच्छग। गोच्छगलइयगलिओ, वत्थाइ पडिछेहए ।। २३ ।।
हथिर अतुरिय, पुव ता पत्थमेव पडिलेहे । तो विइय पफोडे, तइय च पुणो पपजिन्न ।। २४ ।।
अणचाविय अपलिय, अणाणुबन्धिममोसलिं चैनछप्पुरिमानव सोडा, पाणीपाणिविसोहण ॥ २५॥
आरभडा मम्म हा, वजेयवा यमोसलो तडया। पप्पोडणा चउत्थी, विक्खिप्ता वेइया छट्टी ॥ २६ ॥
पसिढिलपलम्पलोला,एगा मोमाअणेगरवधुणा। कुणइपमाणिपमाय,सकियगणणोरंग कुजा ॥ २७ ॥
अणूणाहरितपडि उहा, अविवञ्चासा तहव या पढम पय पसरथ, सेसाणि य अप्पमस्थाइ ॥ २८॥
पडिलेहण कुणन्तो, मिहो कह कुणह जणवयम्हचा देह व पच क्साण, वाएइ सय पडिन्छइ वा ॥ २९॥
पुढवी आउकाए, तेज व वणस्सह-तमाण । पडिलेहणापमचो, छह पि विराहओ होइ ।। ३० ।।
पुढनी आउदाए, तेऊ वाऊ वणस्मइ तमाण । पडिलेहणाआउत्तो, छह सग्क्सओ होइ ॥ ३१ ॥
तयाए पोरिसीए, भत्त पण गवे सप । छह अन्नपराए, कारणम्मि समुट्ठिए ॥३२॥
वेयण वेयायचे, इरियट्ठाप य सजमट्ठाए । तह पाणवत्तियाए, छट्ठ पुण धम्मचिन्ताए ॥ ३३ ॥
निग्गन्थो धिडमन्तो, निग्गन्धीचि न करेज छहिं चेवा थाणेहि उ इमेहि, अणदछमणाइसे होड ॥ ३४॥
आयके उवमग्गे, तितिक्खया यम्भचेरगुतीसु । पाणिदया तवहउ, मरीनोच्रे यणट्टाए ॥ ३५ ॥
असेस भएडग गिज्झ, चक्खुसा पडिलेहए । परमद्धजोयणाओ, विहार विहरण मुणो ॥ ३६ ॥
चउत्थीए पोरिसीए, निक्खिवित्ताण भायण । सज्झाय तो पूजा, मद्यभानविभाषण ॥ ३७॥
पोरिसीए चउन्माए, वन्दित्ताण तओ गुरु । पडिकमित्ता कालस्म, सेझ तु पडिलेहए ॥ ३८ ॥
पासवणुचारभूमि च, पडिलेहिन्ज जय जई । काउस्सग तओ कुन्ना, समदुक्सविमोक्सण ॥ ३९ ॥
देवसिय च अईयार, चिन्तिना अणुपुषसो । नाणे य दसणे चेत्र, चरितम्मि तहर य ॥४०॥
पारियकाउस्सग्गो, वन्दित्ताण तओ गुरु । टेमिय तु अइयार, आलोपज सहकाम्म ॥ ११ ॥
पडिफमिनु निस्मटो, पन्दित्ताण तओ गुरु । काउस्मग्ग तो कुजा, मधदुक्सविमोक्सण ॥ २ ॥
पारियकाउस्मग्गो, चन्दिचाण तओ गुरु । युइमगल च काऊण, काल सपडिलेहए ॥ ४३ ।।
पढम पोरिसि सज्झाय, वितिय झाण झियायई । तइयाए निमोरस तु, मज्झाय तु चउस्थिए । ४४ ॥
पोरिसीए चारथीए, काल तु पडिलेहिया । मज्झाय तु तओ कुना, अमोहेन्तो असजए ॥ ४५ ॥
पोरिसीए चउन्माए, वन्दिऊण तओ गुरु | पडिकमित्तु पालम्म, काल तु पडिलेहए ॥ ४६॥
आगए काययोस्मग्गे, सघदुक्मविमोक्सणे । काउस्सग्ग तओ चुन्ना सबदुक्मविमोसण ॥ ४७ ॥
-- श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला राइय च अईयर, चिन्तिज अणुपुइमो । नाणमि दमणमि य, चरित्तमि तामि य ॥४८॥ पारियकाउस्सग्गो, पन्दित्ताण तओ गुरु । राज्य तु अईयार, आलोपन जहपम्म ।। ८० ॥ पडिकमित्तु निस्मल्लो, वन्दित्ताण तओ गुरु । काउस्मग तो पुजा, सपरसण ॥ ५० ॥ किं तर पडिवजामि, एव तत्य विचिन्न | उस्मन्गं तु पारित्ता, पन्दई य तओ गुरुं ॥ ५ ॥ पारियकाउस्सग्गो, वन्दित्ताण तओ गुरु । तव तु पडिवोझा, कुना सिद्धाण सथय ।। ५२ ॥ एमा सामायारी, ममासेण वियाहिया । ज चरिता यह जीना, तिण्णा समारमागरं ।। ५३ ॥ ति पेमि ॥ इअ सामायारी ममत्ता ॥ २० ।।। - - ॥ अह सलुकिज सत्तवोसइम अध्झयण ॥ थेरे गणहरे गग्गे, गुणी आमि विसारए । आइण्णे गणिभापम्मि, समादि पडिसधा ॥ १ ॥ वहणे महमाणम्म कन्तर अहात्तई । जोगे यहमाणस्म, समारो अहवाई ॥२॥ सलके जो उ जोएर, विहम्माणी फिलिम्मर्ट । अममाहि ज वेण्इ, तोत्तओ से य भन्नई ।। : एग डसइ पुन्छम्मि, एग विभइ ऽभिक्सण । एगो भजड ममिल, गो उप्पहडिओ ॥ ४॥ ग्गो परह पासेण, निवेसड निवजइ । उपाहइ उपिडड, मटे पालगवी वए ॥ ५॥ माई मुद्धण पडड, कुद्ध गछे पडिप्पह । मयलक्खेण चिट्ठई, वेगेण य पदाई ।। ६ ॥ छिन्नाले छिदई सेलि, दुद्द तो भजए जुग । सेरि य सुस्मुयाहना, उज्जहिना पलायए ॥ ७ ॥ खलुमा जारिसा जोना, दुम्सीसा विहु ताग्मिा।जोइया धम्ममाणम्मि, भजन्ती घिइदुन्धला ॥८॥ इडीगारविए एगे, पगेन्स्य रमगाग्य । सायागारविष गगे, एगे मुचिरकोहणे ॥ ९॥ मिस्सालसिए एगे, गगे ओमाणमीरए । थद्ध पगे आणुमागम्मी, हेअहिं कारणेहि य ॥१०॥ मो वि जन्तरभासिलो, दोसमेर पपुबई । आयरियण तु वयण, पडिलेइऽभिकरण ॥ ११ ॥ न मा मम नियाणाइ, न य सा मज्म दाहिई । निग्गया होहिई मन्ने, मह अनोत्य व ॥ १२ ॥ पसिया पलिउचन्ति, त परियन्ति, ममन्तओ । रायवेटिं च मन ना करेन्ति मिसर्डि मुहे ॥ १३ ॥ वाइया सगहिया चेन, भत्तपाणेण पोसिया । जायपक्सा जहा हमा, पय मन्ति दियो दिमि ॥ १४ ॥ अह सारही विचिन्तेइ, पलकेहि ममागो। किं मन्दा दुट्ठसीमहि, अप्पा मे अयसीयई ॥ १५ ॥ जारिमा मम सीमाओ, तारिमा गलिग हा । गलिगद्दह जहिताण, दढ पगिहई तर ॥ १६ ॥ मिउमदरसपनो, गम्मीगे सुममादिओ। विहरह महिं महप्पा, सीलभूषण अप्पण ॥ १७ ।। त्ति पेमि ।। गलुफिन ममत्त ॥२७॥ - A , न (४७) श्रीउत्तराध्ययनसूत्र-जहारिममाध्ययनम् ॥ अह मोरखग्गगई अहावीसडम अज्झयण ॥ मोक्खमग्गगइ तथ, सुपोह जिणभासिय । चउकारणसजुत्त, नाणदसणलावण ॥ १ ॥ नाण च दसण येव, चरित्त च तो तहा ! राम मग्गु नि पन्नत्तो, जिणेहिं वरदसिहि ॥ २॥ नापा च दमण चैव, चरित च तो नहा। एयमगमणुप्पत्ता, जीना गच्छन्ति मोग्गड ॥३॥ तत्य पचविह नाण, मृय आभिनियोहिय । ओहिनाण तु तइय, मणनाण च केरल ॥ ४ ॥ एय पचविह नाण, दवाण य गुणाण य । पन्नवाण य समि, नाण नाणीहि दसिय ॥ ५॥ गुणाणमामओ दव, पगदवस्मिया गुणा । लक्पण पजाण तु अमओ अस्मिया भवे ॥ ६ ॥ धम्मो अहम्मो आगास, कालो पुग्गल ज तो । एम लोगो त्ति पन्नत्तो, जिणेहिं वरदसिहि ॥ ७ ॥ धम्मो अहम्मो आगाम, दव इविकमाहिय । अणन्ताणि य दव्याणि, कालो, पुग्गलजन्तोगो ।। ८ ।। गइलक्सणो उ धम्मो, अहम्मो ठाणरम्सणो । भायण मवढयाण, नह ओगाहलक्पण ॥९॥ वत्तणालपणो कालो, जीनो उपओगलक्पणो । नाणेण दमणेण च, मुहेण य दुहेण य ॥ १० ॥ नाण च दमण चैत्र, चरित्त च तयो तहा। वीरिय अपओगो य, मय जीवस्म स्क्सण ॥ ११ ॥ महन्धयार उओओ, पहा छाया तवे : वा। पण्णरमगन्धफामा, पुग्गलाण तु लक्मण ॥ १२॥ एगत्त च पुहरा च, मसा सटाणमेव य । सजोगा य विभागा य, पनवाण तु लम्मण ॥ १३ ॥ जीवाजीना य य ची य, पुण्ण पायाममा तहा। मारो निन्जरा मोम्यो, मन्तए तहिया नव ॥ १४ ॥ तहियाण तु मावाण, स भावे उवागमण । भावेण महन्तस्म, मम्मत्त त वियाहिय ॥ १५ ॥ निमग्गुषण्माई, आणइ मृत्त वीयरइमेय । अभिगम वित्याररुई, फिरिया संगन यम्मम् ॥ १६ ॥ भूयस्थणाहिगया, जोगनीपा य पुण्णपार च । महमम्मुडयामामारो य रोएड उ निम्मग्गो ॥ १७ ॥ जो जिणटिट्टे भावे, चउघिद सदहा मयमेव । एमेन नन्नह त्तिय, म निमग्गरुह ति नायद्यो॥१८॥ एए चे। उ भावे, उपइट जो परेण मद्दद्दई । उउमत्येण जिणेण य, उपसरुद्ध ति नायवो ॥ १९ ॥ गगो दोमो मोहो, अन्नाण जम्म अवगय होइ । आणाए रोगतो, मो बलु आणामट नाम ।। २० ॥ जो सुत्तमहिअन्तो, मुण्ण ओगाहई उ मम्मत्त । अगेण बहिण 1, सो सुत्तरुह नि नायहो ॥ २१॥ एगेण अणेगाट, पयाद जो पमरई उ सम्मत्त । उदए च नेलविद्, सो गीयरुढ ति नाम्चो ॥ २२ ॥ सो होड अभिगमरुद, मुयनाण जण अयो। एमास जगह, पडण्णग टिहिसाओ य 1०३ ॥ दवाण सबमावा, मवपमाणेहि जस्म उपलद्धा । मचाहि नयविहीहिं, विरधारस्ह ति नायहो ।। २४ ॥ दमणनाणचरित्ते, नानिणा मधममिहगुत्तीसु । जोकिरियामान, मोगलु किरियाई नाम ॥ २ ॥ अणभिग्गहियदिट्टी ससेनहत्ति होइ नायबोलिनिसारओ परयणे,अणभिंगहिओ य मगेमु ॥ २६ ॥ जोअस्थिकायधम्म,सुधम्म सलु चरित्तपम्म च। महत निणामिहिय,मो पम्मरुट तिनायो ।॥ २७॥ पग्मत्यमथनो चा, मुरिट्टपरमा यसरण पा वि । वामनकुटमणवत्रणा, य मम्मत्तमहणा ॥ २८॥ नन्धि चरित्त सम्मत्तविण, दमणे उ भया । गम्मत्तचरिनार, जुगर पुव य समत्त ॥ २० ॥ नादमणिस्म नाण, नाणंण विणा न दुन्नि चरणगुणा । जगणिम्म नन्थि मोक्सो, नयि अमोरावस्म निहाण (४८) श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला. निस्सकिय निकसिय निधितिच्छा अमूढदिट्ठीय । उवाह थिरीकरणे, वच्छल पभाषणे अट्ठ ॥ ३१ ॥ सामाइत्थ पढम, ओवट्ठारण भये वीर्य । परिहारविसुद्धीय, सहुम तह संपराय च ॥ ३ ॥ अफसायमहक्साय, छउमथस्म जिणस्म वा । एव चयरित्तकर, चारित्त होह आहिय ॥ ३३॥ तयो य दुविहो चुचो, वाहिरभन्तरो तहा। बाहिरो छन्त्रिहो कुत्तो, एमेकमतरो तवो ॥ ४॥ नाणेण जाणई भावे, दसणेण य सरहे । चरितण निगिण्डाइ, तवेण परिसुज्झई ॥ ३५ ॥ खवेत्ता युवकमाइ, सजमेण तवेण य । सबदुक्सपहीणट्ठा, पकन्ति महेसिणो ॥ ३६ ॥ त्ति बेमि ॥ इअ मोक्ग्वमग्गगई समत्ता ॥ २८ ॥ । अह सम्मत्तपरकम एगूणतीसइम अज्झयण ॥ मुप मे आउस, तेण भगाया एवमवाय । इह खलु मम्मत्तपरकमे नाम अज्झयणे समणेण भगाया महावीरेण कासवेण पवेइए, ज सम्म सइहित्ता पतियाइत्ता रोयहत्त फासित्ता पालइत्ता ती- रित्ता कित्तइत्ता सोहइत्ता आराहिता आणाए अणुपालइत्त यहवे जीना सिग्झन्ति उज्झन्ति सुचन्ति परिनिवायन्ति सम्बदुक्साणमन्त करेन्ति । तस्स ण अयमढे पवमाहिअइ, तजहा-सवेगे १ निए २ धम्मसद्धा ३ गुरुमाहम्मियसुरसुसणया ४ आलोयणया ५ नि दणया ६ गरिहणया ७ सामाइए ८ चउग्रीसत्थवे,९ बन्दणे १० पडिमणे ११ काउस्मग्गे १२ पचखाणे १३ थवथुईमगले १४ कालपडिलेडणया १५ पायच्छित्तकरणे १६ समावयपया १७ सझाए १८ वायणया १९ पडिपु- छणया २० पडियट्टणया २१ अणुप्पेहा २२ घच्मकहा २३ मयस्स आराहणया २४ एगग्गमण सनिवेमणया २५ सजमे २६ तवे २७ वोदाणे २८ सुहसाए २९ अपडिबद्धया ३. विवित्तमयणा सणसेवणया ३१ विणियणया १२ सभोगपञ्चक्साणे ३३ अहिपचक्याणे ३४ आहारपञ्चपाणे ३५ कसायपचक्याणे ३६ जोगपञ्चक्साणे ३७ सरीरपञ्चसाणे ३८ सहायपञ्चस्साणे ३९ भत्तप धक्साणे ४० सम्मानपञ्चक्साणे ४१ पडिरूवणया ४२ वैयापचे ४३ सदगुणसपुण्णया ४४ वीय- रागया ४५ मन्ती ४६ मुत्ती ४७ महवे ४८ अजवे ४९ भावसचे ५० करणसच्चे ५१ जोगमच्चे मणगुत्तया ५३ ययगुत्तया ५४ कायगुत्तया ५५ मणसमाधारणया ५६ वयसमाधारणया ५७ का. यसमाधारणया ५८ नाणसपनया ५९ दसणसपन्नया ६० चरित्तसपन्नया ६१ सोइन्दियनिग्गह ६२ चक्पिन्दियनिग्गहे.६३ पाणिन्दियनिग्गहे ६४ जिभिन्दियनिग्गहे ६५ फासिन्दियनिग्गहे ६६ कोहविजए ६७ माणविजए ६८ मायाविजए ६९ लोहविजए ७० पेजदोसमिच्छादसणविजए ७१ सेलेसी ७२ अकम्मया ॥७३॥ सवेगेण भते जीवे कि जणयह। सवेगण अणुचर धम्मसद्ध जणयह । अणुत्तराए धम्मसद्धाए सवेग हदमागच्छड् अणन्ताणुवन्धिकोहमाणमायालोमे सवेइ । कम्म न बन्धइ । तप्पचय पण मिच्छत्तविसोहि काऊण दसणाराहए मवइ । दमणविसोहीए य ण विमुद्धाए अजेगइए तेणेत भरगहणेण सिज्झई । सोहीए य ण विसुद्धाए तच पुणो भवग्गहण नाइकमइ ॥ १॥ निव्वेदेण श्रीउत्तरा ययनसूत्र-एगणतीसमाध्ययनम् (४९) भन्ते जीव कि जणयइ। निवदेण टिबमाणुमतेरिच्छएसु कामभोगेसु निवेय हदमागच्छेह मधविसपसु मिरजह । मवविमएसु विरजमाणे आरम्भपरिचाय करेइ। आरम्मपरिचाय करेमाणे ससारमग्ग वोच्छि दड, सिद्धिमग्ग पडिबन्ने य भइ धम्मसद्धाप ण मन्ते जीवे कि जणयड | धम्ममद्धाए ण मायासोमसेसु रजमाणे विरन्जडा नागारधम्म च ण चयड। अणगारिए ण जीवे मारीरमाणमाण दुक्याण छयणभेयणमजोगाईण रोन्द्रय रेड अव्यानाह च सुह निव्वत्तेड ॥ ३ ॥ गरुमाहम्मिय- सुस्मुमणाए ण विणयपडियत्तिं जणयह । विणयपडियन य ण जीवे अणाचामायणमीले नेरहयतिरि- क्सजोणियमणुम्मदेवदुग्गईओ निरुम्मड । वण्णमजल्णमत्तिबमाणयाए मणुस्सदेवगईओ निनन्धर, सिद्धिं सोग्गइ च विमोहेइ । पमरयाट च ण विणयामूलाइ सबरवाड साहे. अने य बहवे जीवे विणिइत्ता भय । आलोयणाए णभन्ते जीवे कि जणयड। आलोयणाए ण मायानियाणमिच्छा दमणमल्लाण मोस्समग्गनिग्माण अणतममाग्यन्धणाण उद्धरण रेइ। उज्जुमार च जणपड । उज्जु भावपटिान्ने य ण जीवे अमाई इत्यीयनपुमगवेय च न वन्धइ । पुवबद्ध च णं निबरेइ ।।।। निन्दणयाए ण भन्ने जीवे कि जणयड । निन्दणया ण पच्छाणुताव जणयह । पच्छाणुतावेण विर जमाणे करणगुणसेढिं पटियजः। रणगुणसेढीपडियन्ने य ण अणगार मोहणिन्न कम्म उग्धाएड॥६॥ गरहणयाण ण मत जीवे कि जणयइ । गरहणयाप अपुरेकार जणयह । अपुरेधारगए ण जीधे अप्प- मत्येहितो जोगेहिंतोनियत्तेड,पमत्ये य पडिवनड पसत्थजोगपडियने यण अणगार अणन्तपाइपजये संबंड |मामाहएण भन्ते जीवे किं जणगड । मामाइपण सारजजोगविग्ड जणयह॥८॥चउव्वीम- स्थएण भन्ते जीवे कि जणयह । १० दमणविमोहिं जणयड।।९। चन्टणएण मन्ते जीने किं जणयह । ०नीयागोय कम्मरावेड। उच्चागोय कम्म निरन्धह मोहग्ग च ण अपडिहिय आणाफल निवत्तेह । दाहिणभान च ण जणयट ॥१०॥ पडिकमणेण भन्ते जीवे कि जणयह । ५० पयछिदाणि पिहेड । पिहियनयरिद पुण जीवे निरुद्धामरे अमबलचरिते अहम पवयणमायाम उपउत्ते अपुहत्त मुप्पणि- हिइदिए विहरड ॥ ११ ॥ काउसग्गेण भन्ते जीने कि जणयह । का. तीयपडप्पन्न पायच्छित्त निसोदेह । निसुद्धपायन्छिते य जीये नि उहियए ओहरिमरुप भारवह यज्झाणोरगए मुह सुइण निदरड ।। १२ ।। पचरसाणेण मन्ते जीवे किं जणयड । ५० आमदाराइ निरुम्भः । पञ्च- क्खाणण इन्डानिरोह जणयह । इनिरोह गए य ण जीवे मन्बटव्वेमु पिणीयतण्हे सीडभूए वि हग्ड ॥ १३ ॥ थपधुहमगरेण मन्ते जीवे कि जणयइ । य० नाणदमणचरित्तमोहिलाभ जणयड । नाणदमणचरित्तयोहिलामसपन्ने य ण जीवे अन्तफिरिय कप्परिमाणोवपत्तिग आराहण आराहेड ॥ १४ ॥ कालपडिहणयाए ण मन्ते जीवे कि जणयह । का० नाणावरणिन्न सम्म सवेह ॥ १५ ॥ पायच्छित्तकरणेण मन्ते जीरे कि जणयड । पा० पापिसोहिं जणयइ, निरइयारे वावि मरह ! मम्म च ण पायच्छित्त पटियनमाणे मम्ग च मग्गफल च विमोहह, आयार च आयारफल च आराहेड ॥ १६ ॥ समापणयाए ण भन्ते जीने किं जणयह । १० पल्हायणभाव जणयइ । पल्हायणमानमु- वगए य मन्चपाणभूयजीवमत्तेसु-मेत्तीमानमुप्पाएछ । मेत्तीभावमुगए यावि जीरे भारचिमोहि पाऊण निभए भाइ ॥१७॥ सज्झाएण मन्ते जीरे कि जणयइ । स. नाणापरणिज्न कम्म गोड ॥ १८ ॥ बायणाए ण भन्ते जीने किं जणयइ । पा० निजर जणयइ मुयस्स य अणामायणाए
(५०)
श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला
वट्टए । मुयमअणासायणाए बट्टमाणे तित्यधम्म आलम्बइ । तित्यधम्म अलम्बमाणे महानिअरे
महापजवसाणे भनइ ॥ १९॥ पडिपुच्छणयाए ण भन्ते जीवे किं जणयह । प० मुत्त्यतदुभयाड
विमोदेड । कसामोहणिज्ज कम्म वोच्छिन्दह ॥२०॥ परियणाप ण मन्ते जीवे किं जणयह । १०
वजणाइ जणयह, वजणलद्धिं च उप्पाएड ॥२१॥ अणुप्पेहाए ण भन्ते जीरे कि जणयह । अ०भाउ.
यवनाओ मत्तकम्मपगडीओ घणियवन्धणबद्वानो सिढिलन-धणलद्धाओ परइ । दीहालट्ठियाओ
हस्सकाठिई आसी परेड । तिवाणुभाषाओ म दाणुभाषाओ परेइ । (बहुपएमग्गाओ अप्पपएम
ग्गाओ पकरइ) आउय च ण सम्म सिया वन्यड, सिया नो पन्धइ । असायणि च ण फम्म नो
भुजो भुनो उपचिणाइ। अणाइय च ण अणदग्ग दीहमद चाउर त ममारकन्तार पिप्पामेव पीट-
चमड ||२२|| चम्मकहाए ण भते जीवे कि जणयह । घनिअर जणयह । धम्मरहार ण परयण
पभावेड । पश्यणपभाषेण जीचे आगमेसस्म भद्दत्ताए यम्म निवन्धड । २३॥ मुयस्स आराहणयोग
ण भन्ते जीवे कि जणयइ । सु० अन्नाण गइ न य मरिलिस्मइ ।। २४ ॥ एगग्गमणसनियमण
याए ण भ ते जीये कि जणयट । प० चित्तनिरोह करड ॥ २५ ।। सजमएण भन्ते जीवे कि जण•
यइ । म० अणण्यत्त जणयइ ।। २६ ॥ तण भन्ते जीय किं जणयह ।। तवेण चोदाण जणयइ
॥ २७ । गोताणेण भन्ते जीरे किं जणयइ । मो० अपिरिय अणयह । अपिरियाए भवित्ता तओ
पन्द्रा सिज्झइ, युज्झइ मुच्च परिनिवायइ सबक्साणमन्त कग्ड ॥ २८ ॥ मुहमारण भन्त जीवे
किं जणयह । सु० जणुस्सुयत्त जणयइ । अणुस्सुयाए ण जीव अणुस्म्पए अणुब्मटे विगयमोगे
चरितमोहणिन्न कम्म सवेइ ॥ २९ ॥ अप्पटिवद्धयाए ण भन्त जीरे कि जणयह । अ० निस्मगत
जणयइ । निस्मगत्तेण जी एगे गग्गचित्ते दिया य राओ य अमान्नमाणे अप्पडिसद्ध यानि
विहरइ ।। ३० ।। विवित्तमयणामणयाए ण भन्ते जीवे कि जणयः । वि० चरित्तगुत्ति जणगड ।
चरित्तगुत्ते य ण जीरे विवित्ताहार दढचरित एगन्तरण मोक्पभापडियन्ने अढविहकम्मगठि नि
जग्इ ॥३१॥ वेनियट्याए ण भन्ते जीवे किं जणयड । वि० पायकम्माण करणयाए अन्भुट्टेड ।
पुषबद्धाण य निजग्णयाए त नियत्तेह । तओ प छा चाउरन्त गमारकन्तार वीइवयइ ॥ ३२ ॥ म
भोगपञ्चरसाणेण भते जीव किं जणयह । म० जालम्पणाइ सवेइ । निरालम्बणस्स य आपडिया
योगा भान्ति । मण्ण लाभेण समुस्सट, परलाभ नो आमादइ, परलाभ नो तवेड, नो पीहा, नो
पत्यैइ, नो अभिलमइ । परलाभ अणस्मायमाणे अतधेमाणे अपीहमाणे अपत्यमाणे अणभिलममाणे
दुच सुहसेन उपसमपन्नित्ता ण निहरड ॥ ३० ॥ अहिपञ्चक्साणेण भते जीरे कि जणया । उ०
अपलिमन्थ जणयइ । निस्वहिए ण जीरे निघसी वहिमन्तरेण य न सफिलिस्सई ॥३४॥ आहा-
रपञ्चक्रवाणेण भन्ते जीने किं जणयइ । आ० जीवियाममप्पभोग योन्छि दइ । जीवियाससप्पओग
योच्छिन्दित्ता जीवे आहारमन्तरण न सकिलिस्मा ॥ ३५॥ कसायपञ्चसाणेण भन्ते जी किं
जणयइ । क० वीयरागभान जणय' । बीयरागभावपडियन्ने वि य ण जीये सममुहदुक्से भड
॥ ३६ ॥ जोगपचाखाणेण भन्न जीरे नि जणयड । जो० अजोगत्त जणयह अजोगे ण जीये नव
कम्म न यन्या, पुटबद्ध निझरेड || 30 सरीग्पचक्साणेण भते जीरे पिंजणग्रह । म० सिद्धा-
इमयगुगक्त्तिण निवचेड सिदाइमयगुणमपन्ने य ण जीरे लोगग्गमुनगा पम्ममुही भरड ॥ ३८ ॥
श्रीउत्तराध्ययनसूत्र-एगणतीममाध्ययनम् सहायपचक्साणेण भन्ते जी किं जणयड । स० एगीमार जणयह । एगीमानभुए वि य ण जीने एगत्त मारेमाणे अप्पझझे अप्परलह अप्परमाए अप्पतुमतुमे सनमबहुले मारबहुठे ममाहिए याविं भरड ।। ३९ । मत्तपञ्चरसाणेण मन्ते जीरे जिणयह भ० अणेगाड मरमया निरुम्मड 1140॥ सम्भावपञ्चक्साणण भन्ते जीवे किं जणयह म० अनियहि जणयइ। अनियहिपडिपने य अणगारें चत्तारि केलिकम्मसे सह तजहा-चेयणिन्न आउय नाम गोय। तओ पन्छा सिज्मड उज्झड मुथई सबदुक्याणम त करेइ ।। ४१ ॥ पडिरूपणयाए ण भन्ते जी कि जणयड । प० लायपिय जण- यह । लघुभूए ण जीने चप्पमते पागडलिंग पमत्यलिंगे विसुद्धमम्मत्ते सत्तममिटममत्त मद्यपाणभू यनीरसत्तम वीममणिज्जले अप्पडिलेहे जिडन्दिए विउलतसममिडममनागए यानि मनड ॥४२॥ वैयानचेण भन्ते जीरे किं जणयह । वे० तित्थयरनामगोत्त कम्म निरपड ॥ १३ ॥ सवगुणसंप- नयाए ण भन्ते जीरे कि जणयह । स० अपुणरापनि पत्तए य ण जीरे मारीरमाणमाण दुकमाण नो भागी भवइ ।। ४४ ॥ पीयगगयाप ण भन्ते जीरे कि जणयड | धी. नेहाणुगन्यणाणि तण्हा- णुपन्यणाणि य गोन्छिन्दह, मन्नामणुनेमु मद्दफरिमन्नग्मगन्धमुचेय विग्जह ॥ ४५ ॥ स तीए ण भन्ते जीरे कि जणयह ० स० परीमहे जिणइ ॥ ४६॥ मुनीए ण भते जीरे कि जणयह । मु० अकिचण जणयह । जकिचणे य जीरे जत्थलोलाण अपत्थणिन्नो भरड ॥ ४७ अन्जनया ण भन्ते जीवे कि जणयड । अ० काउन्नुयय भावजयय भासुज्जुयय अनिसमायण जणयह । अ विसमायणमपन्नयाए ण जीवे म्मम्म आराहए मरह ॥४८॥ मग्याए ण भन्ते जी किंजणयह। म० अणुम्मियत्त जणयह । अणुम्मियत्तेण जीरे मिउमद्दसमपन्ने अह मयटाणाइ निहांड ।। ४९ ।। मावसञ्चण भन्ते जीरे कि जणयड । भा० माननिमोहिं जणयह । भारनिमोहिरा वट्टमाणे जीरे अ रहन्तपन्नतस्म यम्मस्म आराइणयाए अप्मुढे । अरहन्तपन्नत्तस्म सम्मम्म आगहणयाए अन्भुद्वित्ता परलोगधम्मस्म आगहा मह ॥ ५० ॥ उग्णमच्चेण मन्ते जीरे कि जणयट । क० करणमत्ति जणयह । करणमचे पट्टमाणे जीरे जहा पाई तहा कारी यावि भड ।। .१॥ जोग मचेण मन्ते नीरे कि जणयह । जो जोग विमोहेड ।। ५२ ॥ मणगत्तयाए णभन्ते जीने कि जणयह म० नीचे एगग्ग जणयड । एगग्गचित्ते ण जीरे मणगुते सजमागहए भरड ॥ ०३ ॥ ययगुत्तयाए ण मन्ते जीने कि जणयह। ३० नितियार जणयह। निधियारे ण जीरे बडगुत्ते अज्झप्पजोगमाहणजुत्ते यानि पितरह ॥ ५४ ॥ कायालयाए ण मन्ते जी कि जणयह । का० मार जणयह । मवरण कायगुत्त पुणो पानासननिगेहं करेह ॥५॥ मणसमाहारणयाए ण भन्ते जी कि नणयइ । म० एगग्ग जणयड । गग्ग जणहत्ता नाणपजरे जणयड | नाणपञ्जरे जणहत्ता मम्मत्त विमोहेह मिच्छत च निजरेइ ॥ ५॥ यममाहारणया मते जीवे कि जणयह । १० यममाहारणटमणपन्न निमो हेह । वयसाहारणदमणपनवे पिमोहिता मुलायोहियत्त निवत्तेइ, दुलहरोहियत्त निजरेड ।। ५७।। कायसमाहारणयाए णभन्ते जीव किं जणयह का० चरित्तपजरे विमोहा। चरितारे रियोहिता अहरपायचरित्त विसोहेइ । अहसायचरित्त निमोहत्ता चत्तारि केवलिकम्ममे सोइ ! ती पच्छा सिझड युझड मुच्चड परिनिवार सबक्याणमन्त करेड (१५८ नाणमपन्नयाए ण भन्ते जीरे कि जणयह । ना० जीरे मदभाराहिगम जणयड ! नाणमपने जी चार ते ममारकन्तारे न विणसह ।
, (५२) श्रीजैनसिद्वान्त-स्वाध्यायमाला जहा सूई ससुत्ता न विणस्मड तहा जीये मसुते समार न पिणस्मड, नाणनिणयतरचरितजोगे सपा उणइ, ससमयपरसमयविमारए य असघायणिजे भवइ ।। ५९ ॥ दसणमपन्नयाए ण भते जीरे कि जणयह । ६० भनमिच्छत्तयण करेड न विज्झायड । पर अविज्झाएमाण अणुत्तरण नाणदसणेणं अप्पाण सजोएमाण मम्म भारेमाणे विहरह ॥ ६०॥ चरित्तमंपन्नयाए ण भते जीरे कि जणयइ। च० सेलेसीभार जणयह । सेलेसि पडिबन्ने य अणगारे चत्तारि कालिकम्मसे सवेइ । तओ पन्छा सिझड युज्झड मुघड परिनिवायइ सबदुक्साणम त करड ॥ ६ ॥ सोइन्दियनिग्गहेण भते जीवे किजणयइ । सो० मणुनमणुन्नेसु सद्देसु गगदोसनिग्गह जणयइ, तप्पञ्चडय फम्म न गन्धर, पुष- पद्ध च निजरइ ॥ ६२ ।। चक्सिन्दियनिग्गहेण भ ते जीरे कि जणयइ । च० मणुनामणुनेसु स्म रागदोमनिग्गह जणयह, तप्पच्चइय कम्म न पन्धड, पुष्धनद्ध च निन्जरेइ ।। ६३ ।। पाणि न्दियनिग्गहण भन्ते जीवे किं जणयइ । घा० मणुनामणुनसु गन्धेसु रागदोसनिग्गह जणयइ, तप्मचडय कम्म न बन्धइ, पुनद्ध च निज रेड ॥ ६४ ॥ जिब्लिन्दियनिग्गहेणं भन्ते जीने किं जणयड । जि० मणुनामणुन्नम रसेसु रागदोपनिग्गह जणुयह, तप्पचइय कम्म न ब-धइ, पुवबद्ध च निञ्जरेइ ।। ६५ ।। फासिन्दियनिग्गहेण भन्ते जीवे किं जणयइ । फा० यणुनामणुन्नेसु फासेसु रागदोपनिग्गह जणय, तप्पचइय कम्म न पथइ, पुवनद्ध च निअरेइ ॥६६॥ कोहविजएण भन्ते जीव किं जणय | को सन्ति जणयद कोहवेयणिन्न कम्म न पन्धह, पुवबद्ध च निजरेड ॥६॥ माणविजएण भन्त जीने किं जणयड | मा० मद्दव जणयइ, मायावयणिज्ज कम्म न चन्धर, पुवबद्ध च निनरेड ॥ ६८ ॥ मायाविनएण भन्ते जी किं जणयइ । मा० अजन जणयइ, मायावेयणिज पम्म न व घइ, पुवबद्ध च निजरेइ ॥ ६९ ॥ लोभरिजएण मन्ते जीत्रे कि जणयइ । लो० सतोस जणयड, लोभयणिज कम्म न यन्धर, पुवलद च निजरेइ ॥७० ॥ पिज्जदोसमिच्छादसणविजएणं भन्ते जी कि जगयइ । पि० नाणदसणचरिताराहणयाए अन्मुटे । अढविहस्स कम्मस्म कम्म गण्ठिविमोयणयाए तप्पढमयाए जहाणुपुवीए अट्ठवीसदविह मोहणिन्न कम्म उग्याएइ, पश्चविह नाणावरणिज, नाविह दसणावरणिन, पचविह अन्तराइय, एण् तिन्नि नि कम्मसे सवेइ । तओ पच्छा अणुत्तर कसिण पडिपुत्ण निराबरण दितिमर निमुद लोगालोगप्पभान केवलबरनाणदमण समुप्पाडेड । जाव सजोगी भरड, ताप ईरियावहियं कम्म निबन्धइ मुहफरिस दुममयठिय व पढमसमए बद्ध, विइयसमए वेश्य, तश्यसमए निजिण्ण, त बद्ध पुट्ठ उदीरिय वेश्य निजिण्ण सेयाले य अम्भयाच भवइ ॥७१॥अह आउयपालइत्ता अन्तोमुहुत्तद्धारसेसाए जोगनिरोह करेमाणे मुहमकिरिय अप्पटियाइ सुक्झाण झायमाणे तप्पढमयाए मणजोग निरुमा यजोग निरुभइ,कायजोग निरुभइ, आणपाणुनिरोई करेइ, ईसि पचरहस्मक्खस्चारणट्ठाए य ण अणगारे समुच्छिन्नकिरिय अ नियट्टिसुक्झाण झियायमाणे वेयणिज आउय नाम गोत्त च एए चत्तारि कम्मसे जुगव खवे॥७॥ तो ओरालियतेयकम्माह सवाहि विप्पजणाहिं विप्पजहिता उज्जुसेढिपचे अफसमाणगई उड्ड एग समएण अविग्गहेण तत्य गन्ता सागारोवउत्ते सिज्झइ युज्झइ जाव अत करेड ॥ ७३ ॥ एस सल सम्मत्तपरकम्मरस अज्झयणस्स अट्टे समणेण भगवया वहावीरेण आघलिए पन्नविए परूविए दसिए उपदमिए । ७४ ॥ त्ति वेमि । इअ सम्मत्तपरकमे समत्ते ।। २९ ।।
श्रीउत्तराध्ययनसूत्र-तीसमाध्ययनम्
॥ अह तवमग्ग तीसइम अज्झयण ॥
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जहा उ पाग कम्म, रागदोमसमन्जिय । सवेद तवसा भिवम्, तमेगागमणो सुण ॥१॥
पाणिमहमुगापायामदत्तमहुगपरिगहा विरो। राईभोयणदिरओ, जीवो भवद अगासवो ॥ २ ॥
पचममित्रो तिगतो, अम्मामी जिन्टिओ। अगारो य निम्महो, जीयो हो अणासमो ॥३॥
एएमिं तु विषयामे, रागदोमममन्जिय । सचेड उ जहा मिरप, तमेगग्गमणो सुण ॥ ४ ॥
जहा महातलायस्म, सनिरहे जलागमे । उस्सिचणाए तपणाए, कमेण सोसणा भने ॥ ५ ॥
एव तु सनयस्मापि, पावकम्मनिरामये । भरकोटीसचिय कम्म, तनसा निजरिजड ॥ ६ ॥
सो सवो दुविहो जुत्तो, बाहिरम्भतरो तहा । नाहिगे उविहो वुत्तो, एवममन्तरी तो ॥७॥
अणमणमृणोयरिया,मिक्सायरिया यरसपरिचाओ। कायक्लेिसोसलीणयाय पज्झो तमो होइ ।। ८
उत्तरिय मरणकाला य, अणमणा दुविहा भो । इत्तरिय मानकसा, निरवकंसा उ विजिया ॥ ९॥
जो सो इतरियतनो, सो समासेण उबिहो। सेढितयो पयरतमो, घणो य तह होइ वग्गो य ॥ १० ॥
उत्तो य जग्गग्गो, पचमो छट्टओ पप्णतयो। मणडस्टियचित्तस्यो, नायघो होइइतरिओ ॥११॥
जा सा अणमणा मग्णे, दुविहा मा वि रियाहिया। सवियारमविपारा, कायचिट्ठ पइ भवे ।। १२ ।।
अगा सपरिकम्मा, अपरिकम्मा य आहिया। नीहारिमनीहारी, आहार रेओ दोस नि ॥ १३ ।।
ओमोयरण".पचहा, ममासेण पियाहिय । दचओ सेत्तकालेण, भारेण पञ्चचेहि य ॥ १४ ॥
जो जस्स उ जाह रो, तत्तो ओम तु जो करे। जहन्नेणेगसियाई, एव दवेण उ भवे ॥ १० ॥
गाम नगरे तह रायहाणिनिगमे य आगरे पल्ली । खेडे वन्यडदोणमुपट्टणमडम्बसपाहे ॥ १६ ॥
आममपए बिहारे, सनिवेसे समायघोसे य । थलिसणाए-धारे, सत्थे संघट्टकोट्टे य ॥ १७ ।।
चाहेमु य रच्छास व, घरेसु वा एनमित्तिय सेत्त । कप्पई उ एवमाई, एव सेत्तेण ऊ भवे ॥ १८ ॥
पड़ा य अद्धपेडा, गोमुत्तिपयगवीहिया चे। सम्मुकापट्टाययगन्तुपचागया छट्ठा ॥१९॥
दिवसम्म पोरुसीण, चउण्हपिउ जतिओ भये कालो। एव चरमाणोरालु कालोमाण मुणेयच ।। २० ॥
अहबा तम्याए पोरिसीए उणाइ घाममेसन्तो। घउभागूणाए चा, एव कालेण ऊ भवे ॥ २१ ॥
इत्यी वा रिसो वा, अलकिओ वानलधिओवादि। अन्नयरवयस्थो वा, अन्नयरण व वत्येण ॥ २२ ॥
अमेण विसेसैण, घण्णेणं भावमणुमुयन्ते उ । एव चरमाणो सल्ल, भागोमाण मुणेयध ॥ २३ ॥
दये खेचे काले, भारम्मिय आहियाउने मागा। एएहि ओमचरओ, पञ्चवचरो भने मिक्बू ।। २४ ।।
अहविहगोयरग तु, तहा सत्तेच एमणा। अभिग्गहा य जे अने, मिक्सायरियमाहिया ॥२५॥
खीरदहिसप्पिपाई, पणीय पाणमोयण। परिवजण रसाण तु, भणियं रसविवाण ॥ २६ ॥
ठाणा वीरासणाईया, जीवरस उ महावहा। उग्गा जहा धरिजन्ति, कायक्लेिस तमाहियं ॥ ७ ॥
एगन्तमणापाए, इस्वीपमुविचलिए । सयणामणसेवणया, विवित्तमयणासण ॥ २८ ॥
एसो पाहिरगतयो, समासेण वियाहिओ। अन्भिन्तर तव एत्तो, चुच्छामि अशुपुचसो ॥ २९ ॥
पापच्छिव विणो, पायचं तहेव सज्शाओ। झाण च पिउसग्गो, एमो अन्भिन्तरो तनो ॥ ३० ॥
(५५) श्रीजनसिद्धान्त-म्बाध्यायमाला आलोयणारिहाइय, पायर्यान्उत्त तु टसविह । ज भिक्खू वहई मम्म, पायच्छित्त तमाहिय ॥ ३१ ।। अभुट्ठाण अनलिकरण, तहेवासणतायण | गुरुभत्तिभावसुस्ममा, विणओ एम वियाहिओ ॥ ३२ ॥ आयरियमाईए, यावचम्मि दसविह। आसेवण जहागाम, वैयापच तमाहिय ॥ ३३ ॥ वायणा पुन्छणा चेन, तहेर परियणा । अणुप्पहा यम्मकहा, अज्झाओ पञ्चहा भवे ॥ ४ ॥ अहरुमाणि वजित्ता, झाएजा सुसमाहिए । धम्मसुकाइ झाणाह, झाण त तु बुहागर ।। ३५ ॥ सयणामणठाणे या, जै उ भिक्य न पापरे । कायस्म विउस्मगो, उट्ठो मो परिफित्तिओ ॥३०॥ पप तर तु दुविह, जे मम्म आयर मुणी । मो सिप्प समसाग, चिप्पमुचड पण्डिओ ॥ ३७॥ त्ति बेमि ॥ अ तपमग्ग ममत्त ॥३०॥ ॥अह चरणविही एगतीसइम अज्झयण ॥ चरणविहि परक्यामि, जीवस्म उ सुहारह । ज चरिचा चहू जीवा, तिष्णा ससारसागर ॥ १ ॥ एगओ विरह कुञ्जा, एगओ य परतण । असनमे नियत्तिं च, सजमे य पपत्तण ॥ २ ॥ रागदोसे य दो पावे, पारकम्मपयत्तणे । जे मिक्खू रुभई निच, से न अच्छद्र मण्डले ॥ ३ ॥ दण्डण गाग्वाण च, मल्लाण च तिय तिय । जे भिक्खू चई निच, से न अउह मण्डले ॥२॥ दिव य जे उवमग्गे, तहा तेरिच्छमाणुसे । जे मिक्स् महई जयई, मे न अच्छा मण्डले ॥ ५॥ विगहाफमायसन्नाण, आणाण च दुय तहा। जे जई निन, से न अन्छड मण्डठे ॥६॥ वासु इन्दियत्धेमु ममिर्दसु किरियासु य । जे मिक्खू जयई निच, से न अच्छड मण्डले ॥ ७ ॥ लेमामु छसु काएम, छक्के आहारकारणे । जे भिक्यू जयई निच, से न अन्छड मण्डले ॥ ८ ॥ पिण्डोग्गहपडिमासु, भयहाणेमु मत्तम् । जे मिक्यू जयई निच, से न अच्छड मण्डले ॥ मदसु पम्भगुत्तीसु, भिक्सुधम्मम्मि दमविह। जे भिक्यू जयड निच, से न अच्छइ मण्डले ॥ १० ॥ उपासगाण पडिमासु, भिक्खूण पडिमासु याजे भिवृ जयड निच, मे न अच्छइ मण्डले ॥ ११ ॥ किरियासु भूयगामेसु परमाहम्मिए य । जे भिक्ग्यू जयई निच, स न अच्छइ मण्डले ॥ १० ॥ गाहासोलमपहि, तहा असजम्मि य । जे भिक्ग्य जयई निय, से न अच्छइ मण्डले ॥ १३ ॥ चम्मम्मि नायज्मणेम, ठाणेसु य समाहिए।जे भिक्यू जयइ निच, मे न अच्छद्र मण्डले ॥ १४ ॥ एगीमाऐ सयले, पावीम.ए परीमहे । जे भिक्य जयई निच, मे न अन्छइ मण्डले ॥ १ ॥ तेनीसाइ सयगडे, रूमाहि"सु सुरसुज। ज भिक्म्य जयई निच, से न अच्छइ मण्डले ॥ १६ ॥ पणुवीमभाषणासु, उद्देससु दमाइण । जे भिक्खू जई निच, मे न अन्छ। मण्डले ॥ १७ ॥ मणगारगुणेहिं च, पगप्पम्मि तहेव य । जे भिक्ख् जयई निच, से'न अन्छइ मण्डले ॥ १८ ॥ पायमुयपसगेसु, मोहठाणेसु चेव य । जे मिक्यू जयइ निच, से न अच्छइ मण्डले ॥ १९॥ सिद्धा गुणजोगेसु, तेत्तीसासारणासु य । जे मिक्खु जयई निच, से न अच्छइ मण्डले ।। २० ।। इय शासु ठाणेसु, जे भिक्खू जयई मया । सिप्प मो सबससारा, विप्पमुचड पण्डियो ॥२१॥ त्ति वेमि ।। अचरणविही ममत्ता ।। ३१ ॥ , श्रीउत्तम ययनमूत्र-पतीसमाध्ययनम ॥ अह पमायष्ठाण बत्तीसडम अझयण ॥ , अञ्चन्तकालम्म ममूलगस्म मच्चम्म दुक्वम्म उजो पमोम्यो। त भामओ मे पडिपुण्णचित्ता, मुणेह एग तहिय हियत्य ॥ १ ॥ नाणम्म मवस्म पगामगाग, जनाणमोहम्म सिन्नणाए । रागम्म दोसम्म य ससाण, एगन्नमोक्स ममवेड मोक्रा ॥२॥ तस्सेम मग्गी गुगनिद्धसेना, विरजणा बालजणस्म दुर्ग। मझायएगन्तनिसेरणा य, सुनत्थसचि तणया पिई य ॥३॥ आहारमिन्छे मियममणिन्न महायमिन्छ निउणत्यबुद्धि । नियमिन् विवेगमोग्ग, ममाहिकामे ममणे ताम्मी ॥ ४ ॥ न य लमेजा निरण महय, गुणाग्यि या गुणओ मम ना । एको वि पाह निमजयन्ततो, निहरन समेमू असनमाणो ॥५॥ जहा य आडप्पभना लागा, अण्ड गालागापमर जहा य । पमेव मोहाययण गु तण्डा, पोह च तण्हाययण रयन्ति ।। ६ ।। रागो य दोमो विय कम्मरीय, कम्म च मोहप्पमा यन्ति । कम्म च जाटमरणम्म मल दुक्य च जाईमरण नयन्ति ॥ ७ ॥ दुक्स हय जस्सन होड मोहो, मोहो होसम्म न होइ ताहा । तण्हाहयाजम्मन होड लोहो, लोहो ओ जम्म न किचणाड ॥८॥ राग च दोम च नहेर मोह, उद्धत्तु कामेण ममूलजाल । जे जे आया पडियजियावा, ते कित्तहम्मामि अहाणुपुचि ॥ ९ रमा पगाम न निसेवियचा, पाय ग्मा दितिकग नराण । दिन च कामा सममिध्वन्ति, दुम जहा माउफलें र परम्रो ॥ १० ॥ जहा टनग्गी पारिन्धणे वणे, ममारुओ नोवसम उवेड । पविन्दियग्गी निपगामभोडणो,न यम्मयारिस्म हियायि कम्मई ॥११॥ विवित्तसेनामणअन्तियाण, ओमामणाण दमिटन्दियाण । न गगमत्तू धरिसेइ चित्त, पराओ वाहिरियोमहेहिं ॥ १० ॥ जहा विरालापमहस्म मृले, न ममगाण यमही पमथा । एमेव इन्धी निलयस्म मज्दो, न मम्मयारिस्म बमो निवामो ॥ १३ ॥ न बलापण्णविलासवास, न जपियइगियपेहिय वा। इत्थीण चित्तसि निवेसहता, ददु वयम्से ममणे तपम्सी ॥ १४ ॥ अदमा चैच अपत्थण च, अचिन्तण र अफित्तण च । इत्थीजणस्मारियज्माणजुग्ग, हिय मया नम्मरण रयाण ॥ १५ ॥ ॥ .
है Inmar श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला. काम तु दीहि विभृमियाहि, न चाइया सोभइउं तिगुत्ता। तहा वि एगन्तहिय ति नचा, विपित्तचासो मुणिण पमल्यो ॥ १६ ॥ मोक्खाभिमखिस्स उमाणपस्स,ससारमीनरस ठियरस धम्मे । नेयारिस दुत्तरमत्यि लोग, जहित्यिो बालमणोहगओ ॥ १७ ॥ एए य सगे समडकमित्ता, सुदत्तरा चे भान्ति सेसा । जहा महासागरमुत्तरित्ता, नई भवे अपि गङ्गाममाणा ॥ १८ ॥ कामाणुगिद्विप्पभर ख दुक्य, मवस्म लोगस्य मदेवगस्म । जे काय माणसिय च किचि, तस्सन्तग गच्छड वीयरागो ॥ १९ ॥ जहा य किम्पागफला मणोरमा, रसेण वण्णेण य भुजमाणा। ते सुड्डए जीविय पञ्चमाणा, एओरमा कामगुणा विधागे ॥ २० ॥ जे इन्दियाण विसया मणुना, न तेसु भार निसिरे कयाइ । न यामणुन्नेसु मण पि कुजा, ममाहिकामे समणे तपस्सी ॥२१॥ चक्नुस्म चक्खु गहण वयन्ति, त रागहेउ तु मणुम्नमाहु । त दोमहेउ अमणुन्नमाहु, समो य जो तेसु स वीयरागो ॥ २२ ।। रूपस्स चक्र गद्दण वयन्ति, चक्सुरस र गहण वयन्ति । रागस्म हेउ समणुनमाहु, दोसस्म हेउ अमणुन्नमाहु ॥ २३ ॥ रूवेसु जो गेहिमुवेड तिव, अकालिय पान से विणाम । रागाउरे से जह या पयगे, आलोयलोले समुवेइ मच्चु ॥ २४ ॥ जे यावि दोस समुवेइ तिचं, तसिक्खणे से उ उवेइ दुक्स । दुतदोसेण सएण जन्तू, न किश्चि स्व अवरज्झई से ॥५॥ एगन्तरते रहरसि रुवे, अतालिसे से कुर्णई पओस । दुक्खस्म सम्पीलमुखेड माले, न लिप्पड तेण मुणी विरागा ॥ २६ ॥ रुषाणुगासाणुगए य जीवे, चराचरे हिंसइ तेणरूवे । चित्तेहि ते परितावेइ पाले, पीलेइ अत्तद्वगुरू किलिट्टे ॥ २७ ॥ रूवाणुवाएण परिग्गहेण, उपायणे रक्सणसन्निओगे। चए विओगे य कह सुह से, चए सम्भोगकाले य अतित्तलामे ॥ २८ ॥ रूचे अतिचे य परिगहम्मि, सत्तीनसत्तो न उवेइ तुहिं । अहिदोसेण दुही परस्स, लोमाविले आयपई अदत्त ।। २९ ॥ वण्हाभिभूयस्स अदत्तहारिणी, रूवे अतितस्स परिग्गहे य । मायामुम बड्ड लोभदोसा, तथापि दुक्या विमुचई से ॥३०॥ मोसस्म पच्छा य पुरस्थो य, पयोगकाले य दुही दुरन्ते । एप अदचाणि समाययन्तो, रूपे अतिचो दुहिओ अणिस्सो॥३१॥ रूवाणुरत्तस्स नरम्स एवं, कचो सुह होज कयाइ किश्चि ।
(५७) श्रीउत्तरा ययनसूत्र-पतीममाध्ययनम् तत्योपभोगे कि किलेसदुक्स, निवत्तई जस्म करण दुक्स ।। ३२॥ एमेव मम्मि गओ पओस, उवेद दुक्सोहपरपराओ। पदुद्दचिनो य चिणाह कम्म, ज से पुणो होड दुह विधागे ॥ ३३ ॥ रूवे विग्चो मणुओ रिसोगो, एएण दुरसोइपरपरेण न लिप्पए भवमझे विसतो, जलेण वा पोक्सारिणीपलास ॥ ३४॥ सोयरस मद गहण वयन्ति, त रागडेउ तु मणुन्नमाहु । त दोसहेउ अमणुन्नमाहु, समो य जो तेसु स जीयरागो ॥ ३५ ॥ सदस्य मोय गहण वयन्ति, सोयरस मद्द गहण वयन्ति । रागस्स हेउ समणु नमाह, दोसस्म हउ अमणुन्नमाहु ॥ ३६ ॥ सद्देसु जो गेहिमुड तिव, अकालिय पापड से विणास । रागाउरे हरिणमिगे व मुद्धे सदे अतिचे समुवेड मच्चु ।। ३७ ।। जे यानि दोस ममुपेड़ तिघ, नसि क्सणे से उ उपेट दुक्स। दुइन्तदोसेण सएण जतू, न किचि सद्द अवरुज्झई से ॥ ३८ ॥ पगन्तरते रुइरसि संदे, अतालिसे से कुणई पओम । दुक्सस्म सम्पी मुवड पाले, न लिप्पई तेण मुणी विरागो ॥ ३९ ।। सदाणुगासाणुगए य जीवे, चराचरे हिंसइश्णेगरूवे । चित्तेहि ते पग्तिावेट पाछे, पीलेइ अतहगुरू फिलिट्ठ ॥ ४० ॥ माणुवापण परिग्गहेण, उपायणे ग्क्सगसनिओगे। वए विओगे य यह मुह से, सभोगकाले य अतित्तलामे ॥४१॥ सद्दे अतिते य परिग्गहम्मि, सलोरमत्तो न उवह तुहि । अतुट्टिदोसेण दुही परस्स, लोभाविले आययई अदत्त ।। ४२ ।। तण्हामिभूपस्म अदत्तहारिणो, सद्दे अतित्तम्म परिग्गहे य । मायामुस वडा लोभदोसा, तत्याचि दुस्मा न विमुचई से ॥ ४३ ॥ मोमस्स पच्छा य पुग्त्यओय, पओगकाले य दुही दुरन्ते । एर अदत्ताणि समाययन्ती, सद्दे अतितो दुहिओ अणिस्सो ॥ ४४ ।। मदाणुरत्तस्स नरस्म एष, कचो सुह होन फयाइ किचि । तत्थोपभोगे वि फिलेसटुक्स, निवत्तई जस्म फएण दुक्स }} ४५ ॥ एमेन सद्दम्मि गओ पोस, उवेइ दुक्सोहपरपराओ। पट्टचित्तो य चिणा कमा, ब से पुणो होइ दुह वियागे ।। ४६ ।। सई विरतो मणुओ चिसोगो, पएण दुक्योहपरपरेण । न लिप्पए भवमज्झे विस तो, जलेण वा पोक्सरिणीपलाम ॥४७॥ घाणस्स गन्ध गहण वयन्ति, त राअहेउ तु मणुनमाहु । व दोसदेउ अमानमाहू, समो-य जो तेमु स वीयरागो ।। ४८ ॥ - E . , श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला गन्धस्स घाण गहण रयन्ति, पाणम्म गन्ध गहण वयन्ति । रागस्म हेउ समणुन्नमाहु, दोमस्म हेउ अमणुन्नमाहु ॥४९॥ गन्धेसु जो गेहिमुवे तिव, अकालिय पारड से विणाम । रागाउरे ओमहगन्धगिद्धे, सप्प विलाओ गिर निक्पमते ॥५०॥ जे यावि टोस ममय तिघ, तसिस्सणे से उ उवेइ दुक्स । दुद्दन्तदोसेण सपण जन्तू , न किचि गन्ध अवरुज्नई से ॥ ५१ ॥ एगन्तरत्ते रुहरसि गन्ये, अतालिसे से कुगई पओस । दुक्सस्म मंपीलमुवेड बाले, न लिप्पई तेण मुणी विरागो ॥ ५० ॥ गन्धाणुगासाशुगए य जीये, चराचरे हिंमऽऽणेगवे । चित्तेहि ते परितावेइ पाले, पीलेइ अत्तगुरु किलिहे ॥ ५३ ।। गन्धाणुवाएण परिग्गहेण, उपायणे ग्क्रयणसन्निओगे। वए विओगे य कह सुह मे, सभोगकाले य अतित्तलामे ॥ ५४ ॥ गधे अतिते य परिग्गहम्मि, मत्तोरसत्तो न उवे तुहि । अतविदोसेण दुही परस्स, लोभाविले आययई अदत्त ।। ५५ ॥ तहामिभूयस्स अदनहारिणो, गन्धे अतितस्स परिग्गह य । मायामुस वडा लोभदोसा, तथावि दुक्मा न विमुबई मे ॥ ५६ ॥ मोसस्म पछाय पुरत्यको य, पओगकाले य दुही दुरन्ते । एष अदत्ताणि समायय तो, गये अतितो दुहिओ अणिस्मो ।। ५७ ॥ गधाणुरत्तस्म नरस्स एव, कत्तो सुह होन कयाइ किचि । वत्योवभोगे वि किलेसदुक्स, निवतई जस्स करण दुक्म ॥ ५ ॥ एमेव गन्धम्मि गओ पओस, उवेइ दुक्सोहपरपराओ । पट्टचित्तो य चिणाइ कम्म, ज से पुणो होइ दुह विवागे ॥ ५० ॥ गन्ने विरत्तो मणुगो विसोगो, एएण दुक्सोहपरपरेण । न लिप्पई भनमझे वि सन्तो जलेण वा पोस्सरिणीपलास ॥६०॥ जिभाए रस गहण धयन्ति, त रागहेउ नु मणुग्नमाह। त दोमहेउ अमणुन्नमाहु, समो य जो तेरा स वीयरागो ।। ६१ ॥ ग्सम्म निन्म गहण यति, जिभाए रस गहण वयन्ति । रागस्म इउ ममणुनमाड, दोमस्स हेउ अमणुनमाहु ॥ ६२ ।। रसेमु जो गेहिमुवेइ तिव, अकालिय पावइ से विणाम । रागाउरे वडिसविमिनकाए, मच्छे जहा आमिमभोगसिद्वे ।। ६३ ।। जे यानि दोस समुचेड तिव, सिक्षणे से उ उवेह दुक्य । दुद्द-तदोसेण सएण जन्तू, न किंचि रस अमरुज्झई से ॥ ६४ ॥ एगावरचे रुहरसि रसे अतालिसे से कुणई पोस - (५९) श्रीउत्तराध्ययनन-तीसमाभ्ययनम् दुक्मम्म मपीलमुवैड माले, न लिप्पई लेण मुणी निरागो ।। ६५॥ रमाणुगामाणुगए य जीने, चगचरहिंसऽणेगरूले। चित्तेहि ते परितानेह पाले, पीलेड अन्नहगुरु फिलढे ॥ ६६ ॥ रसाणुगाण्ण परिग्गहेण, उपायणे रक्षणसन्निओगे। वरिओगे य कह रह से, ममोगकाल य अतित्तलामे ॥ ६७ ॥ रसे अतिचे य परिग्गहम्मि, मत्तोत्रमत्तो न उबेड तुष्टिं । अतुहिदोमेण दुही परम्म, लोभाविले आपयई अदत्त ॥ ६८॥ तण्हाभिभूपम्म अदत्तहारिणो, रसे अदत्तस्म परिग्गहे य । मायामुस बटर लोमदोमा, तत्थायि दुक्सा न निमुचई से ।। ६९ ॥ मोमस्म पच्छा य पुरस्थीय, पओगकाले य दुही दुरन्ते । अदनाणि ममाययन्तो, रसे अतितो दुहिओ अणिस्सो ॥ ७० ॥ रमाणुरत्तस्म नरम्स एप, कत्तो सुह होन कयाइ किंचि । तत्योतमोगे वि किलेमदुक्य, निवर्तई नस्म कएण दुक्प ॥ ७१ ॥ एमेन रसम्मि गो पओम, उवेइ दुक्योहपरपराओ । पदुद्दचित्तोय चिणाड कम्म, जमे पुणो होइ दुह विधागे ॥ ७२ ।। रस चिरत्तो मणुओ निमोगो, एएण दुक्सोहपरपरेण । न लिप्पई भवमन्ये वि मन्तो, जलेण वा पोक्परिणीपलास ॥७३॥ पायस्म फास गहण वयन्ति, व रागहेउ तु मणुन्नमाहु । त दोमहेउ अमणुन्नमाहु, ममो य जो तेस स वीयरागो ॥ ७४ ॥ फासस्स काय गहण वयन्ति, कायस्म फास गहण वयति । गगस्म हेउ समणुन्नमाहु दोसस्म हेउ अमणुन्नमाहु ।। ७५ ।। फासेस जो गेहिमुवेइ तिघ, अकालिय पाप से विणास । रागारे सीयजलायसन्ने, गागहीए महिसे रिवन्ने । ७६ ॥ जे यानि दोस समुवेइ तिव, तसि क्सणे से उ उवेइ दुक्रा । दुद्दन्तदोसेण मपण जतू, न किंचि फास अरुज्झई से ॥ ७ ॥ एगन्तरत रुइरसि फासे, आतालिसे से कुणई पओस । दुक्खम्म मपीलमुवेड याले, न लिप्पई तेण मुणी विरागो ॥ ७८॥ फामाणुगासाणुगए य जीव, चराचर हिंसहऽपोगरूवे । चिचेहि ते परितावेड पाले, पीलेइ अचगुरूकिलिट्ठ ॥ ७९ ॥ फासाणुवाएण परिग्गहेण, उप्पायणे रस्वणसन्निओगे। व विओगे य यह सुह से, मंभोगकाले य अवित्तलामे !! ८० ॥ परिग्गदम्मि, सत्तोपमचो न उवे तुहि। अतुविदोसैण, दुद्दी परस्म. आपयर्ड अदत्त ।। ८१ ।। - फासे अतित्ते या , क श्रीजेनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला. वहामिभूयस्म अदचहारिणो,फासे अतित्तस्म परिग्गहे य । मायामुस बहुइ लोभदोमा, नत्यावि दुक्सान विमुचई मे ॥ ८ ॥ मोसस्स पच्छाय पुरत्यओ य, पोगराले य दुही दुरत्ते । एच अदचाणि ममाययन्तो,फास अतिचो दुहिओ अणिस्मो ॥ ८३॥ फासाणुरचस्म नरस्स एच, कत्तो ग्रह होन कयाह किंचि । तत्योपभोगे वि फिलेसदुपप, निवतई जस्म करण दुक्यं ।। ८४ १ एमेव फासम्मि गओ पोस, उबेड दुक्योहपरपराओ। पदुदृचिचो य चिणाइ कम्म,जसे पुणो होड दुई विवागे ।। ८ ॥ फासे विरतो मणुओ विसोगो, एएण दुस्मोहपरपरण । न लिप्पई भवमा वि सन्तो, जलेण या पोरसरिणीपलास ॥८६॥ मणस भावं गहण पन्ति, त रागहेड तु मणुममाए । त दोसहेउ अमणुनमाहु, समो य जो तेसु स वीपरागो ॥ ८७॥ भावस्स मण गहण धयन्ति, मणस्स भार गहण पन्ति । रागस्स हेउ समणुनमाहु, दोसम्म हेउ अमणुनमाहु ॥ ८८ ॥ भावेसु जो गेहिमुवेइ तिघ, जकालिय पारइ से विणा । रागाउरे कामगुणेन गिद्धे, करेण्मगावहिए गने या ॥ ८९ ॥ जे यावि दोस समुह तिघ, तसिरपणे से उ उवेइ दुक्म । दुद्दन्तदोसेण सएण जतू, न किचि भाव अवरुज्झई से ॥ ९० ॥ एगन्तरते रुहरसि भावे, अतालिसे से पुणई पओम । दुक्खस्स सपीलमुवेड पाले, न लिप्पई तेण मुणी चिरागी ॥ ९१ ॥ भावाणुगासाणुगए य जीरे, चराचर हिसणेगरूपे । चिहि ते परितापेइ पाले, पीलेइ अत्तदृयुरू फिलिट्टे ॥ १२ ॥ भावाणुवाएण परिग्गहेण, उपायणे रक्पणमनिओगे। पए विओगे य कह सुह से, सभोगकाले य अतितलामे ॥ ९३ ॥ भावे अतिचे य परिग्गहम्मि, सत्तोषसत्तो न उवेइ तुहि । अहिदोसेण दुही परस्स, लोमापिले आययई अदत ।। ९४ ।। तहामिभूयस्स अदत्तहारिणो, भारे अनित्तस्स परिगहे य । मायामुस बहुइ लोभदोसा, तत्थापि दुक्या न विमुच्चाई से ॥ ९५ ॥ मोसस्स पच्छाय पुरत्थओय, पोगकाले य दुही दुरन्ते । एव अदत्साणि समाययन्तो, मावे अतितो दुहिओ अणिस्सो ॥ १६ ॥ मावाशुरनस्स नरस्स एव, कस्तो मुह होज कयाइ किंचि । वस्थोपभोगे वि किलेसवर, निधतई जम्स करण दुक्स ॥ ९७ ॥ एमेव भावम्मि गओ पओस, ज्येह दुक्खोहपरपराओ।
www wware श्रीउत्तराध्ययनपत्र-पतीसमाध्ययनम् पट्टचित्तोय चिणाइ कम्म, ज से पुणो होड दुह विवागे ।। ९८ ॥ भावे विरतो मणुओ विसोगो, एएण दुक्सोहपरपरेण । नलिप्पई भवमझे विसतो, जलेण वा पोक्सरिणी पलास ॥ ९९ ॥ एविन्दियत्था य मणस्म अत्था दुक्सस्म हेउ मणुयस्म रागिणो । ते पेरथोर पिकयाइ दुक्स, न वीयरागस्म करेन्ति किंचि ॥ १० ॥ न कामभोगा ससय उवेन्ति, न यावि मोगा रिगइ उवेन्ति । जे तप्पओसी य परिग्गही य, सो तेसु मोहा विगह उयेइ ॥ १०१ ॥ कोह च माण च तहेव माय, लोह दुगुच्छ अग्इ रह च । हास भय सोगमित्यियेय, नपुसचेय विविहे य भावे ॥ १०२ ।। आवाई एवमणेगरूने, एवविहे फामगुणेसु मचो। अन्ने य एयप्पभये विसेसे, कारुण्णदीणे हिरिमे वहस्से ॥ १०३ ॥ कण न इच्छिन्न सहायलिन्छ, पच्छाणुतावे न तयप्पभाव । एव वियारे अमियप्पयारे, आचन्नई इन्दियचोरयस्से ॥ १०४ ॥ तभी से जायन्ति पओयणाइ, निमिजिउ मोहमहण्णाम्मि । सुहेसिणो दुक्राविणोयणट्ठा, तप्पचय उअमए य रागी ॥ १०५ ॥ विरजमाणस्म य इन्दियत्था, सद्दाइया तापइयप्पगारा । न तस्स सधे वि मणुन्नय या, निवत्तयन्ती अमणुनय वा ॥ १०६ ॥ एष ससकप्परिकप्पणासु, संजापई समयानुनहियस्त । अत्थे असकप्पयओ नओ से, पहीयए कामगुणेसु तण्हा ॥ १०७ ।। स वीयरागो कयसबकियो, खवेड नाणावरण राणेण । तदेव ज दसणमापरेइ, न च तराय परेड कमा ॥ १०८॥ सध तओ जाणइ पासए य, अमोहणे होइ निरन्तरा । अणामधे झाणसमाहिजुत्ते, आउक्सए मोक्समुवेइ सुद्धे ॥ १०९।। सो नस्स सबस्म दुइस्स मुफो, ज पाहई सययं जन्तुमेय । दीहामयं विप्पमुको पसत्थी, तो होइ अञ्चन्तसुही कयत्थो ।। ११० ॥ अणाइकालप्पभवस्स एसो, सबस्स दुक्सस्म पमोक्खमग्गो । विपाहिओ ज समुविच ससा, कमेण अचन्तसुही भान्ति ॥ १११॥ त्ति बेमि ।। इअ पमायहाण समत्त ॥ ३२ ॥ .
(६२)
श्रीजैन सिद्धान्त-खाध्यायमाला.
॥ अह कम्मप्पयडी तेत्तीसडम अज्झयण ।।
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अट्ट कम्माइ योन्छामि. आणुपुछि जहाफम । जेहि पद्धो अय जीरो, ससारे परिवट्टई ॥१॥
नाणस्साररणिज, दसणाचरण तहा। यणिझ त मोह, आझम्म तहेव य ॥ २ ॥
नामसम्म च गोय च, अन्तराय तहेव य। एवमेयाइ कम्माइ, अट्ठव उ समामो ॥ ३ ॥
नाणावरण पञ्चविह, सुय आभिणियोहिय । ओहिनाण च तइय, मणनाण च केल ॥ ४ ॥
निद्दा तहेव पयला, निनानिदा पयलपयला य । नतो यवीणगिद्धी उ, पचमा होड नायबा ॥५॥
चम्सुमचक्खूओहिस्स, दसणे फेरले य आपरणे ) [ तु नव विगप्प, नायव दसणाचरण ॥६॥
वेयणीयपि य दुपिह, सायममाहिय च अहिय । सायस्म उ म मेया, एमे। अमायस्म वि ॥ ७ ॥
मोहणिजपि च दुविह, दसणे चरणे तथा । दमणे तिविह वृत्त, चरणे दुविह भो ॥ ८॥
सम्मत्त चेर मिच्छत्त, सम्मामिच्छत्तमेन या एयाओ तिन्नि पयडीओ, मोहणिन्नस्स दसणे ॥ ९ ॥
चरितमोहण कम्म, दुनिह त नियाहिय कमायमोहणिज्न तु, नोकसाग तहेव य ॥ १० ॥
सोलमविहभेएण, कम्भ तु सायज । सत्तविह नवविह वा, कम्म च नोकसायज ॥ ११ ॥
नेरहयतिरिक्साउ, मणुस्माउ तहेन य । ढगाउय चउत्थ तु, आउ पम्म चउचिह ।।१२।।
नाम कम्म तु दुनिह, सुहमसह च आहिय । सुमस्स उ पह भेया, एमेव असुहस्स वि ॥ १३ ॥
गोय कम्म दुविह, उच्च नीय च नाहिय । उच्च अहरिह होइ, एव नीव पि आहिय ॥ १४ ॥
दाणे लामे य भोगे य, उपभोगे वीरिए तहा । पञ्चविहमन्तराय, समासेण वियाहिय ।। १५॥
एयाओ मूलपयडीओ, उत्तराओ य आहिया । पएसग्ग सेत्तकाले य, भार व उत्तर सुण ॥१६॥
मवेसिं चैव कम्माण, पएसग्गमण तगं । गणिठयसत्ताईय, अन्तो सिद्धाण आहिय ॥ १७ ॥
सबजीमाण कम्म तु, मगह छदिमागय । मधेस वि पण्सेस, सह सम्वेण पद्धग ॥ १८ ॥
उदहीमरिसनामाण, तीसई फोडिकोडिओ । उक्कोसिय टिई होइ, अन्तोमुहुत्त जहनिया ॥ १९ ॥
आवरणिजाण दुहंपि, वेयाणिने तहर य । अन्तराए य कम्मम्मि, ठिई एमा वियाहिया ॥ २० ॥
उदहोमरिसनामाण, सत्तरि कोडिकोडीओ। मोहणिजस्स उकोसा, अ तोमुहूत्त जहनिया ॥ २१ ॥
त तीम सागरोपमा, उद्योसेण वियाहिया । टिई उ आउफम्मस्म, अन्तोमुहूत्त जहनिया ।। २० ॥
उदहीमरिमनामाग, वीसई कोडिकोडीओ । नामगोचाण उकोसा, अह मुहत्ता जहनिया ।। २३ ।।
सिद्धान्त पागो य, अणुभागा हान्ति उ । मध्येसु चि पएमग, साजीवे अइन्छिय ॥ २४ ॥
तम्हा एसि कम्माण, अशुभागा पियाणिया । एएमि सवरे चेर, सपणे य जर हो ॥ २५ ॥
त्ति चेमि ॥ इअ कम्मप्पयडी समत्ता ॥ ३३ ॥
run श्रीउत्तगययनसूत्र-चोचीममाध्ययनम् (१३) ॥ अह लेसज्झयण चोत्तीसहम अज्झयण ॥ लेसज्झयणं पाक्सामि, आणुपुदि जहक्म । छण्हपि कम्म लेमाण, अणुमावे सुहेण मे ॥ १॥ नामाइ वण्णरसग धफासपरिणामर क्सण | ठाण टिइ गह चाउ, लेमरण तु सुणेह मे ॥ २॥ किहा नीला य काऊ य, तेऊ पम्हा तहेर य । मृफ्लेमा य उद्या य, नामाड तु जहम ॥ ३ ॥ जीपनिटमासा, गलरिद्वगमन्निमा। सजणनयणनिमा, हिलेमा उ पणओ ॥४॥ नीलामोगमममा, चामपिच्छममप्पमा । वेरुलियनिद्वमकामा, नीललेमा उ पण्णओ ॥ ५॥ जयमोपुप्फममामा, कोहलच्छदमन्निमा । सुपतुण्डपर्दानिमा, काउठेमा उ पण्णओ ॥६॥ हिंगुलपाउसरामा, तम्णाइञ्चमनिमा। सुयतुण्डपईचनिमा, तेऊलेमा उ पण्णो ॥ ७ ॥ हरियालमेयसकामा, हलिदामेयममप्पमा मणासणसुमनिभा पम्हलेमा उ पण्णी ।। ८ ।। संबवन्दमकामा, गीरपूरममप्पमा। स्यणहारमकासा, मुबलेमा उष्णओ ॥१॥ जह क्डयतुम्बगरमो, निम्बरमो कायरोहिणिरसो वा । एत्तो रि अणन्तगुणो, रसो य किण्हाए नायवो ॥१०॥ जह तिगडयम्स य रसो, विक्सो जह स्थिपिपलीए वा । एत्तो हि अणन्तगुणो, रसो उ नीलाए नायव्यो ।॥ ११ ॥ जद्द परिणअम्यगरमो, तुमरकपिट्ठम्म वारि जारिमओ । पचो नि अणन्तगुणो, रसो उ काऊण नायव्यो ।॥ १२ ॥ जह परिणयम्बगरमो, पकाविट्ठस्स गरि जाग्मिनो। एतो वि अणन्तगुणो, रसो उ तेऊण नाय गो ॥ १३ ॥ वरवारुणीप वारसो, विविहाण व आमवाण जारिमओ। महुमेरयस्म व रसो, पत्तो पम्हाए परएण ॥ १४ । सज्जृमुद्दियम्सो, सीररमो गडमकामो वा । एत्तो नि अणतगुणो,ग्मो उ मुमा नायवो ॥ १५ ॥ जह गोमडस्म गधो सुणगमडम्म व जहा अहिमडस्माएतोपिअणतगुणो,लेमाण जपपस्थाण ॥ १६ ॥ नह मरहिकुसुमगधो,गधनामाण पिस्ममाणाण। पत्तो वि अणतगुणो, पमत्यलेमाण तिण्ह पि ॥ १७ ॥ जा रगयस्म फासो, गोजिमाए य मागपत्ताण। एनो वि अणवगुणो, लेमाण अप्पहन्याण ॥ १८ ॥ जह पुरस्म व फासो,नपणीयस्म व मिरीमासुमाणा एत्तो वि अणतगुणो,पसन्थलेमाण तिण्इपि॥ १९ ॥ तिविहोनापिहोवा, सचावीसइविदेक्सीओ वा। दुसओ तेयारोवा, लेमाण होड परिणामो ॥ २० ॥ पचामयप्पवत्तो, तीहिं अगुत्तो छसु अपिरओ या तिघारमारिणओ, खुड्डो साहसिओनरो ॥२॥ ॥ निद्धन्धमपरिणामो, निस्समो अनिइन्दिओ। एयजोगममाउत्तो, किण्हलेम तु परिणमे ॥ २२ ॥ इस्मा अमरिम चतमो, अपिजमाया अहीरिय । गेही पओमे य सडे, पमत्त रसलोलए ॥ ३ ॥ सायगवेमए य आरम्भाओअविरओ,सुडोसाहस्मिोनरो। एयजोगममाउत्तो,नीललेमतु परिणमे २४ वके वकममायारे, नियहिले अणुज्जु । पलिउचगोपहिए, मिच्छदिट्टी अणारिए ॥ २ ॥ उम्फासगदुट्टवाई य, तेणे यानि य मच्छरी। एयजोगममाउत्तो, काऊठेम तु परिणमे ॥ २६ ॥ .
+ - श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला नीपानची अचवले, अमाई अकुऊहले । विणीरविणए दन्ते, जोगव उपहाणर ॥ २७ ॥ पेयधम्मे दढधम्मेअजमीरू हिएमए। एयजोगसमाउचो, तेउलेस तु परिणमे ॥ २८ ॥ यणुकोहमाणे य, मायालोमे य पयणुए । पमन्तचित्ते द तप्पा, जोगव उमाणव ॥ २९॥ हा पयणुवाई य, उपसन्ते जिइन्दिए। एयजोगसमाउत्ती, पम्हलेस तु परिणमे ॥ ३० ॥ महरुद्दाणि वजित्ता, धम्मसुकाणि झायए। पसन्तचित्ते दत्तप्पा, समिए गुत्ते य गुत्तिसु ॥ ३१ ॥ रागे वीयरागे वा, उपसन्ते जिडन्दिए । एयजोगममाउत्तो, सुबलेस तु परिणमे ॥ ३२ ॥ सरिमाणोमप्पिणीण, उस्मप्पिणीण जे समया। ससाईया लोगा, लेसाण हान्ति ठाणाइ ।। ३३ ।। बहुत्द्ध तु जहन्ना, तेत्तीसा सागरा मुहुत्तहिया। उक्कोसा होड ठिई, नायवा किण्हलेसाए ॥ ३४ ॥ हुत्तद्ध तु जहन्ना,दस उदही पलियमसग्यभागम्भहिया। उक्कोमा होड ठिई नायचा नीललेमाए ॥ ३५ ॥ (हुत्तद्ध तु जहन्ना,तिण्णुदही पलियमससभागमभहिया।उकोसा होड ठिई,नायवा काउलेसाए ॥३६ ॥ हुत्तद्ध तु जहन्ना,दोण्णुदही पलियमसंसभागमभहिया।उकोसा होइ ठिई,नायवा वेउलेसाए ॥ ३७ ।। हुत्तद्ध तु जहन्ना, दस होति य सागरा मुहुत्तहिय । उकोसा होइ ठिर्ड, नायचा पम्हलेसाए ।॥ ३८ ॥ इत्तद्ध तु जहन्ना, तेत्तीस सागरा मुहुचहिया । उकोसा होइ टिई, नायवा सुकलेसाए ॥ ३९ ॥ रसा सल लेसाण, ओहेण ठिई पष्णिया होइ । चउसु वि गईसु एत्तो, लेसाण ठिई तु योन्छामि ॥ ४० ॥ सवाससहस्साइ, काऊए ठिई जहन्निया होइ। तिष्णुदही पलिभोवम, अससभागच उकोसा ॥४१॥ तेण्णुदही पलिओवमससभागोजहन्नेण नीलठिई।दस उदही पलिओयमअसखभागच उफोसा ॥ ४२ ॥ इसउदही पलिओवमअससभग जहनिया होइ । तेत्तीससागराइ उक्कोसा, होइ किण्हाए लेसए ॥ ४३ ॥ रसा नेरहयाण, लेसाण ठिई उ पण्णिा होइ । तेण पर वोच्छामि, तिरियमणुस्माण देवाण ॥ ४४ ॥ अन्तोमुत्तम, लेलाण जहिं जहि जाउ । तिरियाण नराण वा, वजित्ता केवल लेस ॥ ४५ ॥ बहुत्तद्ध तु जहन्ना उकोमा होइ पृषकोडीलो । नवहि परिसेहि ऊणा, नायघा वसुलेसाए ॥ ४६ ॥ एसा तिरियनराण, लेसाण ठिई उ वणिया होइ । तेण पर वोच्छामि, लेसाण ठिईड देवाण । ४७॥ दस यामसहस्सइ, रिहाए ठिई जहनिया होइ । पलियमससिज्ज इमो, उक्कोसो होइ किण्हाए ॥४८॥ जा किण्हाए ठिई सलु, उबोसा सा उ समयमभहिया । जहन्नण नीलाए, पलियमसर च उघोसो ॥ ४९ ॥ जा नीसा ठिई सल, उफोसा सा उ समयमा भहिया। जह नेण काऊए, पलियमसस च उक्कोसा ॥ ५० ॥ सेण पर योन्छामि, तेउलेसा जहा सुरगाण । भरणरायाणमन्तरजोइसनेमाणियाण च ॥ ५१ ॥ पलिओरम जहन्न, उघोसा सागरा उ दुन्नहिआ । पलियमसरोज्नेण, होइ भागेण तेऊए ॥ ५२ ।। दस बाससहस्साइ, तेरएटिई जहनिया होइ । दुन्नुदही परिओवमअसखभाग घउकोसा ॥ ५३ ।। जा तेजण ठिई राल, उधोसा सा उ समयममहिया । जान्नेण पम्हाए, दस उ मुहचाहियाइ उकोमा ॥ ५४ ।।
श्रीउत्तरा ययनस्त्र-चोचीममाध्ययनम् जा पम्हाएटिई सलु,उकोमा सा उममयमम्महिया।जहन्नेण सुकाए, तेचीम मृहुत्तमम्भहिया ।। ५५ ॥ रिहा नीला काऊ, तिनि वि एयाओ अहमलेमाओ। ण्याहि तिहिवि जीरो, दुग्गड उपपई ॥ ५६ ॥ तेऊ पम्हा मुक्का, तिन्निवि एयाओ धम्मलेमाओ। ण्याहि तिहिवि नीनो, मुगाइ उनपजई ।। ५७ ॥ लेसाहिं समाहि, पढमे समर्याम परिणया हिंतु निहुरम्मइ उपमानो, परेभव अस्थि जीपस्म ।। ५८ ॥ लेमाहि मचाहिं, चरिमे समयमि परिणयाहिं तु निहु कस्सइ उपचाओ पर मवे होड जीवस्म ।। ५९ ।। अन्तमहत्तम्मि गए अनमुत्तम्मि मेमए येव । लेमादि परिणयाहिं, जीना गच्छन्ति परलोय ॥६०॥ तम्हा ण्यामिलेमाण,आशुभा पियाणिया अप्पसत्याओ मित्ता, पमत्थानोऽहिटिएमणि ।। ६१ ॥ ति बेमि ॥ अ लेमज्झयण समत्त ॥ ४ ॥ ॥ अह अणगारज्झयण णाम पचतीसइम अज्झयण ॥ महेण मे गग्गमणा, मग उदेहि दसिय । जमायरन्तो भिम् , दुक्याणन्त करे भवे ॥१॥ गिहनास परिश्चन्न, परनामम्सिा मुणी। इम मगे वियाणिज, जेहिं सन्नन्ति माणा ॥ ॥ तहेच हिंस अलिय, चोन्न असम्मसेवण | इच्छाकाम च रोम च, मझओ परिसलए ।। २ ।। मणोहर चित्तधर, मल्ल प्रवेण पासिय । सकवाड परलोच, मणमावि न पथए ॥ ४ ॥ इन्द्रियाणि उ मिक्युम्स, तारिमम्मि उम्मा | दुकराह निगारेउ, भामरागविचढणे ॥ ५ ॥ सुमाणे सुनगारे वा, रुक्समूले इकओ। पडरिक परफटे वा, पास तत्याभिगेयए ॥६ फासुपम्मि अगाबाद, इत्यीहिं अणमिदुए । वथ सरप्पा पाम मिक्यू परममजए ।। ७ ।। न मय गिहाड कुधिना, र अन्नेहि कारए । गिहम्म्मममारम्मे भयाण दिस्मा यहो । तमाण धाराण च, सुदृमाण यादगण य । तम्हा गिहममारम्भ, मजओ परिवला ॥९ तहेव भत्तपाणेगु, पणे पयारणेमु य । पाणभूयदयट्ठाए, न प न पयारए ॥ १०॥ जलपन्ननिस्मिया जीना, पुटवीट्ठनिस्मिया। हमन्ति भत्तपाणेसु तम्हा मिक्स न पयात्रा ।। २१ ॥ विमप्पे मवो धार, यहपाणिरिणामणे । नत्यि जोडसम मत्ये, तम्हा जोड न दीवए ॥ १० ॥ हिरण जायन्त्र च, मणमा वि न पत्यार । ममठेट्टरचणे मिक्यू , विगा क्यविधा ॥ १३ ॥ गिणन्तो कडओ घोड,विरिणतोय आणिणो अपविक्रयम्मि वहन्तो, मिक्यु न भनइ नागिसो । ४॥ मिक्सियह न केयव, भिक्सुणा भिक्खपत्तिणाक्यविक्की महादोसो भिस्यपत्ती सुहारहा ॥ १५ ॥ समुयाण उउमेसिन्ना, जहामुत्तमणिन्दिय ! लामालामम्मि सतु पिपटगाय चर मुणी ॥ १६ ॥ अन्गेले न रसे गिद्धे, नि मादन्ने अमुन्छिन रमाए भुजिना, जपणट्टाछ महामुणी ॥ १७ ॥ प्रचण रयण चेन, र दण पूयण तहा। ग्वीपधारसम्माण, मणमा वि न पन्थए ।॥ १८ ॥ मुबमाण मियाजा, अणियाणे अकिंचणे। सोमटका विहरजा, आर कालम्प पञ्जओ ॥ १९ ॥ निहिऊण जाहार, मालधम्म उपढिए । जहिऊण माणुम योन्दि, पटू दुस्मे विमुच्चई ॥ २० ॥ निम्मम निरहकारे, गीयरागो अणामयो । मपत्तो केवल नाण, सामय परिणिगए ॥ १॥ त्ति बेमि ॥ इअ अणगारज्झपण समत्त ॥ ३५ ॥ . -
(६६)
श्रीजेनसिद्धान्त-म्वाध्यायमाला.
॥ अह जीवाजीवविभत्ती णाम छत्तीसहम अम्झयण ॥
जीवाजीयविभत्ति, सुणेर मे एगमणा इओ । ज जाणिण मिक्स्स् , मम्म जयह सजमे ॥१॥
जीया चेव अजीना य, एस लोए नियाहिए ! अजीवटममागारो, अलोगे से रियाहिए ॥ २॥
दघओ सेचओ पेर, पालओ भारओ तहा । परूषणा तेमि भवे, जीवाणमजीराण य ।। ॥
रुणिो चेयरूपी य. अजीना दृविहा भये । अरूपी दसहा जुना, रविणो य उपिहा ॥ ४ ॥
धम्मत्थिाए तसे, तपासे य आदिए । अहम्मे तस्म से य तप्परसे य ाहिए ॥ ५॥
आगासे तस्म देसे य, तप्पएसे य आहिए । अद्धाममा घेर, अली दमहा भवे ॥३॥
धम्माधम्म य दो चेन, लोगमिता नियाहिया। लोगालोगे य आगामे, ममए समयमेतिए ॥ ७॥
धमाधम्मागासा, तिनिरि पए अणाइया । अपनपमिया चेव, मबद्व तु वियाहिया ॥८॥
ममरवि मतइ पप्प, एवमेव वियाहिए । आपस पप्प माईग, मपनयमिगधि य ॥२॥
सन्धा य सन्धदेसा य, तप्पएसा तब य । परमाणुणो य योधना. सविणो य चउपिहा ॥ १०॥
एगत्तेण पुरतेण, सधा य परमाणुणो । लोएगटेसे लोए य, मइया ते उ मेरो ॥११॥
इत्तो यालविभाग तु, तेमि बुच्छ चउदिह ॥ १२॥
सतइ पप्प नेऽणाई, जपानवमियावि य । ठिइ परच माइया, मपन्नसिया नि य ॥ १३ ॥
अससकालमुफोस,एको ममओ जहन्नय । अजीपाण य रूपीण, टिई मा वियाहिया ॥ १८ ॥
अणतकालमुकोसमेको, ममओ जहन्नय । अनीपाण य रूवीण, अन्नग्य वियाहिय ॥ १५ ॥
पण्णओ गन्धओ चेव,रसओ कामओ तहा। सठाणओ य विन्नओ, परिणामो नमि पचहा ।। १६ ।।
अण्णो परिणया जे उ,पश्चता ते पकिचियाण्हिा नीलाय लोहिया,लिदा मुफ्लिा तहा ॥ १७ ॥
गन्धो परिणया जे उ,दुनिहा ते पियाहिया। सुम्भिग धपरिणामा,दुन्भिगन्धा नहर य ॥ १८ ॥
रमओ परिणया जे उ, पञ्चहा ते परित्तिया । तितकट्ठपकमाया, अम्पिरा महुरा नहा ।। १९ ।।
फामलो परिणया जे उ, अट्टहा ने पकित्तिया। कपडा मउआ चेन, गरुया लहुन तहा ॥ २० ॥
सोया उण्हा य निद्धा य,तहा लुम्सा य आहिया। इय फामपरिणया परा,पुग्गला ममुदाहिया ॥२१॥
सठाणओ परिणयाजे उ, पञ्चहा ते परित्तिया। परिमएडला य वट्टाय, तमा चदरममायया ॥२०॥
वष्णओ जे भवे किण्हे, भइए से उ गन्धयो । रसओ फासओ चेन, भइए सठाणोपि य ॥ २३ ॥
नण्णओ जे भरे नीले भडा से उगन्धओ । रमओ फासमो चेन, माए सटाणोषि य॥२४॥
वण्णमो लोहिए जे उ, भहा से उगन्धओ। रमओ फासओ चेन भहर सठाणओरिय ॥२५॥
चण्गयो पीपए जे उ, भहए से उ गन्धमओ । रमओ फासओ चैन, भए सठाणओपि य ॥२६॥
वण्याओ मुहिले जे उ, भडए से उ अन्धो । रसओ फासओ चेर, भहए सठाणओपि य ।। २७ ।।
गन्धमओ जे मवे मुख्मी, भहए से 3 घण्णओ। रसओ फामओ चेत्र, भइए सठाणओपि य ॥ २८ ॥
गन्धयो जे मन दुन्मी, भहा से उ नण्णओ। रसओ फासओ चेत्र, भहार मठाणओवि य ।। २९ ।।
रसओ तितए जे उ, भगए से उ यण्णयो। गधओ रमओ चेर, भडए मठाणओवि य ॥३०॥
श्रीउत्तराध्ययनसूत्र-छतीसमाध्ययनम् (३७) रसओ कइए जे उ, भइए से उ वण्णओ । गन्धो फासओ चेर, भडए मठाणमोवि य ॥ ३१ ॥ रसओ कसा जे उ, भहए से उ वष्णओ। गधओ फामओ घेर, भडए मठाणोषि य ॥ ३२॥ रसो अम्पिले जे उ भगए से उ चण्णाओ।गन्धशो फासओ र, भइए माणओवि य ।। ३३ ।। रमओ महुरए जे उ, भइए से उ अण्णओ । गन्धो फासओ चेन, भए सठाणोवि य ॥ ३४॥ फामओ कक्सडे जे उ, भइए से उ अण्णओ। गन्धओ रमओ चेर. भडग मठाणओपिय ॥ ३५ ॥ फाममो भइए जे उ, भइए से उ पण्णओ । गन्धओ रसओ चेर, भडए मठाणओपि य ।। ३६ ॥ फासण गुरूए ज उ, भडए से उ घण्णओ। गन्धओ रमो चैव, भडए सठाणोवि य ॥ ३७॥ फामओ लहुए जे उ, भइए से उ वण्णओ । गन्धओ रसओ चेर, भहए सठाणमोवि य ॥ ३८॥ फासए सीयए जे उ, भइए से उ पण्णओ । गन्धओ ग्सओ चेव, भइए मठाणओवि य ।। ३९ ।। फामओ उहए जे उ, भडए से उ यण्णओ। गन्धो रसो चेक, भहण सठाणोनि य॥४०॥ फामओ निद्रए जे उ, भटए से उ पणो । गन्धओ रमओ चेर, मइए सटाणोनि य ॥४१॥ फामओ लुक्सए जे उ, भडए से उ वण्णओ। गन्धओरमओ चेक, भइए मठाण ओपि य ॥ ४२ ॥ परिमण्डलमठाणे, भडए से उ पण्णओ । गन्धभो रसओ चेर, भह से फामओवि य ४३ ॥ सठाणओ भवे नहे, भइए से उ घण्णओ । ग वओ रसओ चेन, भटए मे फासजोवि य ॥ ४४ ।। सटाणओ भवे तसे, भइए से उ वण्णओ । गन्धओ रमओ चेन, भइए से फामओवि य ॥ ४०॥ सटाणओ जे चउरसे, महा मे उ वण्णाओ । गन्धो रमओ चेर, भडए से फासओवि य ॥ ४६॥ जे आययसठाणे, भदए से यण्णओ। गन्धो रसओ चेर, भइए से फासओपि य ॥ ४७ ॥ एसा अजीपविभत्ती, समासेण वियाहिया । इत्तो जीविभत्ति, वृच्छामि अणुपुधमो। ४८ ॥ मसारत्था य सिद्धा य, दुविहा जीवा वियाहिया। सिद्धाणेगविहा पत्ता, त मे फियतको मुण ॥४९॥ इत्थो पुरिससद्धा य, तहेव य नपुसगा। सलिंगे जनलिंग य, गिहिलिंगे तहेव य ॥ ५० ॥ उफोसोगाहणाए य, जहन्नमज्झिमाड य । उड्ढ अह तिरिय च, समुम्मि जलम्मि य ॥१॥ दस य नपुमएसु पीस इत्थियासु य । पुरिसेमु य अट्ठसय, ममएणेगेण सिज्झई ॥ ५२ ॥ चत्तारि य गिहलिंगे, अन्नलिंगे दसेव य । सालिंगण अट्टमय. समएगेण सिन्झई ॥ ५३ ॥ उकोमोगाहणाए य, सिझन्ते जुगव दुवे। चत्तारि जहन्नाए, मज्झे अटुत्तर मय ।। ५४ ।। चउरुङ्कलोए य दुवे समुद्दे, तओ जठे वीसमह तहेर य । मय च अठुत्तर तिरियलोए, समयोगेण सिज्झई धुर ।। कहि पडिहया सिद्धा, कहिं सिद्धा पट्टिया। कहिं गोन्दि, चइत्ताण, कत्थ गन्तूण सिन्झई ॥५०॥ आलोए पडिहया सिद्धा, लोयग्गे य पइट्टिया । इह घोन्दि चहत्ताण, तन्य ग तूण सिन्झई ।। ५७ ॥ धारसहि जोयणेहिं, मवहस्मृपरि भने। ईसिपमारनामा, पुढरी छत्तसठिया 11 ०८॥ पणयालसयसहस्सा, जोयणाण तु आयया। तामइयचेच वित्थिण्णा,तिग्गुणोतस्से परिमणो ॥ ५९॥ अट्ठजोयणपाला, मा मज्झम्मि वियाहिया। परिहायन्ती चरिम ते, मन्छिपत्ताउ तणुयरी ।। ६० ।। अज्जुणसवण्णगमई, सा पुढी निम्मरा सहारेण । उत्ताणगछत्तगसठिया य, मणिया निणरहि ॥ ६१ ॥ .
. (६८) श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला ससफदमकामा, पण्टुरा निम्मला सुहा। सीयाणे जोयणे तत्तो, लोयन्तो उ वियाहिओ ॥ ६२ ।। जोयणस्म उ जोतत्थ, मोमो ग्वरिमो भवे। तस्स कोसस्म सभाए, सिद्धाणोगाहणा भवे ॥ ६३ ॥ तय सिद्धा महाभागा, लोगग्गम्मि पडडिया | भरपपचओ मुक्का, सिद्धि वरगड गया ॥ ६४ ॥ उम्सेहो जेसिं जो होइ,भाम्मि चरिमम्मि उ । तिभागहीणो तत्तो य, मिद्धाणोगाहणाभवे ॥ ६५ ॥ एगण साईया, अपन्नमसियात्रि य । पुहत्तेण अणाइया, अपजसियावि य ॥ ६ ॥ अरूविणो जीपघणा, नाणदसणमन्निया । अउल सुह सपना, उपमा जस्स नस्थि उ ॥ ६७ ॥ लोगेगरसे त मवे, नाणदसणमन्निया । ममारपारनिस्थिण्णा, सिद्धिं वग्गड गया ॥ ६८ ॥ ममार था: जे जीना, दुविहा ते पियाहिया। तमा य यांचरा घेर, थारा तिरिहा तहिं ॥ ६९ ॥ पुडनी आउजीना य, तहन य वणस्मई । इच। थारा तिनिहा, तेसिं भेष मुह मे ॥ ७० ॥ दविह पुढबीजीया य, सुहमा आयरा तहा। पजत्तमपजत्ता, एवमेए दुहा पुणो ॥ ७१ ॥ घायरा जे उ पनचा, दुरिहा ते नियाहिया। सहा सग य बोधवा सहा सत्तविहा तहिं ॥ ४०॥ विणका नीला य रुहिग य, हलिद्दा मुक्लिा तहा । पण्णुपणगमहिया. सरा छत्तीसइनिहा ।। ७३ ॥ पुटपी य सकरा नालुया य, उपले सिला य लोणूसे । अय-तम्ब तउय-सीमग-रप-सुपण्णे य नहरे य ।। ॥ ७४॥ हरियाले हिंगुलए, मणोसिला मामगजण-पगाले । अभपडर भनालय, वापरकाए मणिनिहाले ॥ गोमजप य रुपगे, अके फलिहे य लोहियक्से या मरगय मसारगळे,भुयमोयग इन्दनीले य ॥ ७६ ।। चन्दण गेल्य हमगन्मे, पुलए सोगन्धिए य गोधये । चन्दप्पटवेरुलिए, जलान्ते सरमन्ते य ।। ७७ ।। एग सरपुटीए, भेया छत्तीममाहीया । एगविहमणाणत्ता, सुहमा तत्थ वियाहिया ।। ७८ ॥ मुहमा सबलोगम्मि, लोगदेसे य वायरा । इत्तो कालविभाग तु, पुन्छ तेमि चउबिह ॥ ७९ ॥ सतइ पप्णादया, जपजवसियानि य । टिई पहुच साईया, मपन्जासियापि य ॥ ८०॥ पानीसमहस्साह, नामाणुशोसिया भवे । आउठिई पुढवीण, अन्तोमुहुत जहन्नय ॥ ८१॥ अमसरामुमोम, अन्तोमुटुत्त जहन्नय । कायठिई पुढवीण, त काय त अमुचओ ॥ ८ ॥ अणन्तकालयोग, अन्तोमहुत्त जहन्नय । विजढम्मि मए काए पुढपिजीपाण अन्तर ।। ८३ ।। एमि वण्णओ चेर, गन्धो रमफमनो। सठाणदेसओ गागि, विहाणाह महम्मसो ॥ ८४ ॥ दुनिहा आऊजीना 3, सुहमा नायरा तग। पजत्तमपजत्ता, एपमेए दुहा पुणो ॥ ८५ ॥ थायरा जे उ पचना, पचहा ते पफित्तिया । सुद्धोदरा य उम्से, हरतणू महिया हिमे ॥ ८६ ॥ पगविहभणाणता, सुगुमा तथ विवाहिया। मुहुमा मालोगम्मि, लोगदेसे य घायरा ॥ ८७ ॥ मतद पप्पणाइया, अपज्जवमिपापि। ठिठ पदच माईया, सपजामियावि य ।। ८८ ॥ मसेर सहम्माड, यासाणुशोमिया भो। आइठि आऊग, अ तोमूहत्त जहनिया ॥ ८९ ।। समयमारमुपोस, अन्तोमुत्त जहनय । कायठिई जाऊण, तु काय तु अमुचओ ।। ९० ।। आन्तरारम्पोस, अतोमुहत्त जहन्नय । विजम्मि सए काए, आऊजीवाण णन्तर ॥ ९१ ॥ पनि यगो चेर, गन्धओ ग्सफासओ। सठाणदसओ यावि, विहाणाइ सहस्समो ॥ ९ ॥ - . श्रीउत्तराध्ययनपत्र-छतीसमाध्ययनम् (६९) दुरिहा वणस्मईजीवा, सुहमा बायरा तहा। पन्नत्तमपनचा, एवमेव दुहा पुणो ॥ ९३ ।। बायरा जे उ पळचा, दुविहा ते वियाहिया। साहारणसरीरा य, पत्तेगा य तहब य ॥ ९४ ॥ पत्तेगसरीराओऽयोगहा ते पकित्तिया। रुस्सा गुच्छा य गुम्मा य, लया वही तणा वहा ।। ९० ॥ चलया पक्षगा बुहुणा, जलम्हा ओमही वहा । हरियकाया बोषधा, पत्तेगाड वियादिया ॥ ९६ ॥ साहारणमरीराओऽणेगहा ते पकितिया । आलुए मूलए वैव, मिंगबेरै तहेर य ॥ ९७ ।। हरिलीसिरिली सस्मिरिली, जावई केयान्दली । पलण्डुलमणकन्दे य, कन्दली य कुटुपए ॥ ९८ ।। लोहिणीहू य थीह य, इहगा य तहेर य । कन्द य पन्चकन्दे य, कन्दे मूरणए तहा ॥ ९९ ॥ सस्मकणी य योधवा, सीहकण्णी तहेव य । मुमुण्ढी य हलिहा, य गहा एवमायओ ॥ १०० ।। एगरिहमणाणत्ता, मुहमा तत्थ वियाहिया सुहमा सबलोगम्मि, लोगदेसे य पायरा ॥ १०१ ।। सतइ पप्पणाईया, अपजवसियावि य । ठिड पहुंच साईया, मपलनमियात्रि य ॥ १० ॥ दस चैव सहस्मात, यासाणुकोसिया पणगाण ! पणफईण आउ, अन्तीमुद्दुत्त जहनिया ॥ १०३ ।। अगन्तकालमुक्कोस, अन्तीमहुत जहन्नय । कायटिर्ड पणगाण, त काय तु अमुचओ ।। १०४ ॥ असखकालमुहोस, अन्तोमुहुच जहन्नय । विजदम्मि सए काए, पणगनीवाण अन्तर ।। १०५ ॥ एएसि वण्णो चेन, गन्धओ रमफामओ । सठाणदसओ वानि, विहाणाइ महस्ससो ।। १०६ ।। इचेए थायरा तिनिहा, समामेण वियाहिया। इत्तो उ तसे तिपिहे, बुच्छामि अणुपुवमो ॥ १०७ ॥ तेज बाऊ य योधद्या, उराला य तमा तहा । इचए तसा तिरिहा, तेमि मेए मुह मे ॥ १०८॥ दुपिहा तेऊजीना 3, मुहुमा चायरा तहा। पन्नाचमपज्जत्ता, एपमेए दुहा पुणो । २०९ ॥ घायरा जे उ पजत्ताणेगहा ते वियाहिया। इगाले मुम्मुरे अगणी. अचिजाला तहेब य ॥ ११०॥ उका पिज्जू य पोधा गहा एवमायओ। एगविहमणाणत्ता, मुहमा ते बिपाहिया ॥ ११ ॥ मुहमा सबलोगम्मि, लोगटेसे य यायरा । इत्तो कालविभाग तु तेमि गुच्छ चढविह ॥ ११२ ॥ सतह पप्पणाईया, अपन्नवामिगरि य । दिई पडच साइया, मपञ्जवसियापि य ॥ ११३ ॥ निष्णेर नहोरत्ता, उकोसेण वियाहिया । आउठिई तेऊण, अन्तोमुहत्त जहन्निया ॥ ११४ ॥ अससकार मुक्कोस, अन्तोमुहुत्त जहन्नय । कायटिई तेऊण, त सय तु अमुचओ ॥ ११५ ॥ अणन्तकालमुकोस, अन्तोमुहुत्त जहन्नय ! निजढम्मि सए काए, तैऊजीमाण अन्तर ॥ ११६ ।। एपसिं वण्णओ चेन, गन्धओ रसफासओ। सठाणदेसओ गावि, विहाणाड महस्ससो ॥ १७ ॥ दुविहा भाउजीना च, सुहमा पापरा तहा । पञचमपअत्ता, एवमेए दुहा पुणो ॥ ११८ ॥ पायग जे उ पन्जत्ता, पञ्चहा ते पफित्तिया। उपलिया मण्डलिया, धणगुआसुद्धगाया य ।। ११९ ।। सबदगमाया योगहा एवमायओ। एगविहमणाणत्ता, मुहमा तत्थ वियाहिया ॥ १२० ।। मुहमा सबलोगम्मि, एगदेसे य यायरा । इचो कालविभाग तु, तेमि पुच्छ चउदिह ॥ १२१ ॥ सन्तइ पप्पणाईया, अपनासिपानि य । ठिइ पडुच्च साईया, मपजासियापि य ॥ १२ ॥ तिण्णेव मदस्माइ, वासाणुकोमिया भवे । आउठिई काऊण, अन्तोमुहुत्त जहनिया ॥ १०३ ।। अससकालमुफोस, अन्तोमुत्त जहन्नय । कायटिई वाऊण, त काय तु अतुंचओ ॥ १२४ ।। अणन्तकालमुक्कोम, अन्तोमुत्त जहन्नय । पिजदम्मि सए काए, काऊजीवाण अन्तर ।। १२५ ।।
उराला वसा (७०) श्रीजनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला एएसिं पण्णओ चेन, गन्धओ रसफासओ । सठाणदेसओ यावि, विहाणाइ महस्ससो ॥ १२६ ॥ उ, चउहा ते पकिरिया । बेइन्दिय-तेइन्दिय चरो पचिन्दिया घेर ॥ १२७ ।। बेइन्दिया उजे जीना, दुविहा ते पकित्तिया । पजत्तमपज्जत्ता, तेमि मेए सुणेह मे ॥ १८ ॥ किमिणो सोमगला चेव, अलसा माइवाहया। वासीमहा य सिप्पिया, सस ससणगा तहा ।। १२९ ।। घलोयाणुल्लया चेय, तहेव य वगडगा । जलगा जालगा चेत्र, चन्दणा य तहेन य ॥ १३० ।। बेइन्दिया एएऽणेगहा एयमायओ। लोगेगदेसे ते मो, न सवत्थ वियाहिया ॥ १३१॥ सत्तइ पप्पणाईया, अपजवसियावि या ठिइ पहुच साईया, मपञ्जवसियावि य ॥ १३२ ॥ वासाइ पारसा चेव, उद्योसण वियाहिया । येइन्दियआउठिई अन्तोमुहुत्त जहनिया ॥ १३३ ।। ससिनकालमुक्कोस, अन्तोमुहुत्त जहभय । बेइन्दियकायटिई, त काय तु अमुचओ ॥ १३४ ।। अणन्तकालमुकोस. अन्तोमूहुत्त जहन्नय । बेइन्दियजीवाण, अन्तर च वियाहिय ।। १३५ ॥ एएसिं पण्णी चेष, गन्धओ रसफासो । सठाणदेसओ यावि, विहाणाइ सहस्मसो ॥ १३६ ।। तेइन्दिया उजे जीवा, दुविहा त पकिचिया । पञ्जत्तमपन्जत्ता, तेर्सि मेए सुणेह मे ॥ १३७ ।। युपिपीलिउड्डसा, उक्लेदेहिया तहा । तणहारपट्टहारा य, मालुरा पतहारगा ।। १३८ । कप्पामहिम्मि जायन्ति, दुगा तवममिजगा सदापरी य गुम्भी य, वोपचा इन्दगाइया । १३९ ।। इन्दगोगमाईयाणेगहा एवमायओ। लोगेगदसे ते सवे, न सवत्थ वियाहिया ॥ १० ॥ सत्तइ पप्पणाईया, अपनचसियावि य । ठिइ पडुच्च साईया, सपञ्जवसियावि य ॥ १४१ ॥ एगूणपणहोरत्ता, उकोसेण वियाहिया । तेइन्दियआउटिई, अतोमुहुच जहनिया ॥ १४२ ॥ ससिज्जकालमुकोस, अन्तोमुहुत्त जहन्नय । तेइन्दियफायठिई, त काय तु अमुचओ ॥ १४३ ।। अण तालमुकोस, अन्तोमुहत्त जहन्नय । तेइन्दियजीवाण, अन्तोमुहुत्त जहनिया ॥ १४४ ।। एएसि वण्णओ चेव, गन्धो रसफासओ । सठाणदेसओ वावि, विहाणाइ सहस्सजो ॥ १४५ ॥ चरिन्दिया उ जे जीवा, दुविहा ते पफित्तिया। पजत्तमपजत्ता, तेसिं भेए सुणेह मे ॥ १४६ ।। अन्धिया पोत्तिया चेव, मच्छिया मसगा तहा। भमरे कीडपयगे य, टिंकणे करणे तहा ।। ६४७ ॥ बुडे मिरीडी य, नन्दापचे य विच्छुए । टोले भिंगारी य, वियडी अच्छिवेयए । १४८ ॥ अच्छिले माहए अच्छिरोडए, विचित्र चित्तपत्तए । उहिजलिया जलकारी य, नीया तन्तश्याइया ।। ॥ १४९ ॥ इय चउरिन्दिया, एएऽणेगहा एवमायो । लोगेगदेमे ते सवे, न सबत्य नियाहिया ॥ १५० ॥ सतह पप्पणाईया, अपज्जवसिया विय। ठिड पर साईया, मपजरसिया वि य ।। १५१ ॥ छच्चेर मामाऊ, उकोसेण नियाहिया । चउरिन्दिदयआउठिई, अतोमुहुत्त जहनिया ॥ १५२ ।।' सरिजकारमुयोम, अन्तीमुहत्त जहन्नय । चउरिन्दियफायटिई, त काय तु अमुचओ ॥ १५३ ।। जणन्तकालमुधोस, अन्तीमुहुत्त जहन्नय । चउरिन्दियजीवाण, अन्तर च वियाहिय ॥ १५ ॥ एएमि यण्णशो चेर, गन्धो रमफामओ । सठाणदेसो पानि, विहाणाइ सहम्ममो ॥ १५ ॥ पचिन्दिया उजे जीवा,चउबिहा ते पियाहिया निरइयतिरिक्खा य, मणुयादवाय आहिया ।। १५६ ।। नेण्डया सत्तनिहा, पुढवीमु सतमू भने । ग्यणाभयवराभा, पालुयामा य आहिया ॥ १५७ ॥ .
. श्रीउत्तगययन-छत्तीममाध्ययनम् पंकामा धूमामा, वमा तमतमा तहा। इह नेरइया एए, सत्तहा परिकित्तिया ॥ १५८ ।। लोगस्स एगदेसम्मि, ते मचे उ वियाहिया पत्तो कालविभाग तु, गोन्ठं तेमि चउबिह ॥ १५९ ।। सतइ पप्पणाईया, अपनवसियादि य । टिइ पडुच साड्या, सपनरसियानि य ।। १६० ।। सागगेवममेग तु, उकोसैण वियाहिया । पढमाए जहन्नेण, दसवासमहम्सिया ॥ १६१ ।। तिण्णेर सागरा ऊ, उकोसेण रियाहिया। दोचाण जहन्नेण, ग तु मागरोनम ॥ १६ ॥ सत्तेन सागरा अ, उपोसेण विगाहिया । चउत्थीए जहन्नेण, तिण्णेन मागरोरमा ॥ १६३ ।। दस सागरोपमा अ, कोसेण वियाहिया। चउथीए जहन्नेण, सत्तेव मागरोपमा ॥ १६४ ॥ मनरम सागरा ऊ, उद्योमेण वियाहिया। चउत्थीए जहनेण, सत्तेन नागरोनमा ॥ १६ ॥ चानीम सागरा 3, उफोसेण रियाहिया । उट्ठीए जहन्नेण, मत्तरम मागरोपमा ॥ १६६ ॥ तेतीम मागरा , उकोसेण सिपाहिया। सत्तमाए जहन्नेण, मार्पास मागरोनमा ॥ १६७ ।। जा चेन य आयठिई, नेरडयाण नियाहिया । सा तेसिं कायठिई, जहन्नुधोसिया भवे ॥ १८ ॥ अणन्तकालमुफोम, अतोमुहुत जहन्नय । विजढम्मि सए काए, नेरइयाण अन्तर ।। १६९ ॥ एएसिं वण्णओ चेक, गन्धो रसफासओ। सठाणदेमओ वावि, विहाणाइ सहम्मसो ॥ १७० ॥ पचिन्दियतिरिक्साओ, दुविहा ते पियाहिया । ममुच्छिमतिरिक्खाओ, गम्भवन्तिया तहा ।। ॥ १७१।। दुनिहा ते भवै तिविहा, जलयरा धलयरातदा। नायरा य बोधवा, तेसिं भेए सुणेह मे ॥ १७२ ॥ मच्छा य कच्छमा य, गाहा य मगरा तहा । मुसुमाराय बोधवा, पचहा जलहराहिया ।। १७३ ।। लोएगदेसे ते सधे, न मण्य वियाहिया। एत्तो कालविभाग तु, वोच्छ तेसिं चउदित ॥ १७४ ॥ सतइ पप्पणाईया, अपजयसिया वि य । टिइ पच साईया, सपनवसिया वि य ॥ १७५ ॥ एगा य पृषकोडी, उफोसेण वियाहिया । आउठिई जलयराण, अन्तोमुहुत्त जहन्निया ।। १७६ ।। पुषकोडिपुहत्त तु, उकोसेण वियाहिया। फायट्टिई जलयराण, अवोमुहृत्त जहन्नय ।। १०७ ।। अणन्तकालमुक्कोस, अन्तोमुहुत्त जहन्नय । विजम्मि सए काए, जमयराण अन्तर ।। १७८ ॥ चउप्पया य परिमापा, दुविहा यलयरा भवे। चउप्पया चउविहा, ते मे कियनओ सुण ॥ १७९ ॥ प्रगखुग दुखुरा चेव, गण्टीपयसणहप्पया। हयमाहगोणमाडगयमाइसीहमादणी ॥ १८० ।। सुओरगपरिसप्पा य, परिसप्पा दुरिहा भये । गोहाई गहिमाई य, एवेधाणेगहा भवे ॥ १८१ ॥ लोएगदेसे ते मवे, न सवत्थ चियाहिया। एत्तो कालविभाग , वोम्छ तेमि चविह ॥ १८२ ।। सतइ पप्पणाईया, अपजयसियापि य । टिई पहुच माईया, सपञ्जयसियारि य॥ १८३ ।। पलिओनमाइ तिण्णि उ, उकोसेण पियाहिया। आउटिड थलपगण, अनोमुहत्त जहनिया ॥१८॥ शुवरोडिपुढनेण, अन्तोमुटुत जहनिया । सायटिई थलयराण, अन्दर तेसिम भवे ।। १८५ ॥ कालमणन्तमुकोम, अन्तोमुद्त्त जहनय । निजदम्मि गा काप, यलयराण तु अतर ।। १८६ ॥ चम्मे उ लोमपक्वी य, तइया ममुग्गपक्सिया। दिययपसी य पोषधा, पक्पिणो य चउबिहा !! ॥ १८७॥ लोगेगदेसे ते सके, न मबन्ध नियाहिया । • विभाग तु, योन्छ तेमि चउयिह ॥ १८ ॥ -
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(७२)
श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला.
सतह पप्पणाईया, अपज्जयसियावि या ठिई पहुच साईया, सपनवासियानि य ॥ १८९ ।।
पलिओयमस्स भागो, असखेजइमो भवे । आउठिई सहयराण, अन्तोमुहुत्त जहनिया ।। १९० ॥
अससभाग पलियस्स, उक्कोसेण उ साहिया । पुषकोडीपुहत्तेण, अन्तोमुहत्व जहनिया ॥१०॥
ठिई सहयराण, अन्तरे तेसिमे भवे । काल अणन्तकोस, मुहोस, अन्तोमुहुन, जहन्नय ॥ १९२ ।।
एएसि वण्णओ चेव, गन्धओ रसफासओ। सठाणदेसओ वावि, निहाणाइ महरममो ॥ १९३ ॥
मणुया दुविहमेया उ, ते मे कित्तयओ मुण । समुच्छिमा य मणुया, गम्भवन्तिया तदा ॥ १९४ ॥
गन्भवशान्तिया जे उ, तिपिहा ते वियाहिया ! कम्मअझम्मभूमा य, अन्तरद्दीवया तहा ॥ १९५ ॥
पभरम तीमविहा, मेया अहवीमह । मसा उ कम्मसो तेर्सि, इह एसा वियहिया ॥ १९६ ।।
समुन्छिमाण एसेव, मेओ होइ वियाहिओ। लोगस्म पगदेसम्मि, ते सधे वि वियाहिया । १९७ ॥
सतइ पप्पणाईया, अपज्जवमियावि य । टिई पडुच्च साईया, सपज्जरसियावि य ।। १९८॥
पलिओषमाउ तिण्णवि, अमसेजइमो भवे । आउढिई मणुयण, अन्तोमुहुच जहन्निया ॥ १९९ ।।
पलिओमाइ तिणि उ, उकोसेण उ साहिया । पुवकोटिपुइचेण, अन्तोमुहुत्त जहन्निया ॥ २०० ॥
कायटिई मणुयाण, अन्तर तसिम भवे । अगन्तकालमुषोम, अन्तोमुहूत्त जहन्नय ॥ २०१॥
एएसि, वणओ चेव, ग घओ रसफामओ । सठाणदेमओ वानि, विहाणाइ सहम्ससो। २०२ ।।
देवा चचिहा बुत्ता, ते मे कित्तयो मुण । भोमिन्नवाणमन्तरजोडसवेमाणिया वहा ।। २०३ ॥
दसहा उ भवणमासी, अट्टहा वणचारिणो । पचविहा जोइसिया, दुविहा वैमाणिया तहा ।। २०४।।
असुरा नागमुवण्णा, विज्जू अग्गी रियाहिया ।
दीवोदहिदिसा वाया,
धणिया भरणवासिणो ॥ ॥२०५॥
पिसायभूया जक्सा य, रखरूसा किन्नरा किंपुरिसा ।
महोरगा य गन्धवा, अढविहा पाणमन्तरा ।। ॥ २०६॥
चन्दा सरा य नक्खता, गहा तारागणा वहा ।
ठिया विचारिणो चेव, पचहा जोइसालया ॥ ॥ २०७॥
वेमाणिया उजे देवा, दुविहा ते रियाहिया। कप्पोरगा य बोध ना, कप्पाईया तहेर य ॥ २०८ ॥
कप्पोषग्गा पारसहा, सोहम्मीसाणगा तहा। सणकुमारमाहिन्दवम्भलोगा य सन्तगा ।। २०९ ।।
महासका सहस्सारा, आगया पाणया तहा। आरणा अध्चुया पेव, इह कप्पोवगा सुरा ।। २१० ।।
कप्पाईया उजे देवा, दुविहा ते वियाहिया गेविनाणुत्तरा चेव, गेविजा नवविहा तहिं ।। २११ ।।
हेट्ठिमा हेहिमा चेक, हेहिमा मज्झिमातहा। हेडिमा उरिमा चेर, मज्झिमा हेट्ठिमा तहा ॥ २१२ ।।
मज्झिमा मज्झिमा चेव, मज्झिमा उवरिमा तहा।
उपरिमा हेद्विमा चेव, अरिमा मज्झिमा वहा ।
उपरिमा उवरिमा चेय, इय गेविसगा मुरा। विजया वेजयन्ता य, जयन्ता अपराजिया ॥ २१४ ॥
सबस्थसिद्धगा चेर, पचहाणुचरा सुरा । इय वैमाणिया एएऽणेगहा एवमायओ ।। २१५ ॥
लोगस्स एगदेसम्मि, ते सवेवि वियाहिया। इचो कालविभाग तु, बुच्छ तेसिं चउविहं ॥ २१६ ।।
सतह पप्पणाईया, अपज्जवसियाति या ठिइ पडुच्च साइया, सपञ्जवसियावि य ॥ २१७ ॥
.www , , श्रीउत्तराध्ययनमत्र-छतीसमाध्ययनम् साहीय सागर एक, उफोसेण ठिई भवे । भोमेनाणं जहन्नेण, दमवाससहस्मिया ॥ २१८ ।। पलिओरममेग तु, उकोसेण टिर्ड भवे। पन्तराण जहन्नेण, दमाससहस्मिया ॥ २९॥ पलिओवममेग तु. पासलक्सेण साहिय । परिओगमट्ठमागो, जोहसेसु जहन्निया ॥ २२० ।। दो चेन सागराइ, उकोसेण रियाहिया । सोहम्मम्मि जहन्नेण, एग च पलिओनम ॥ २२१ ।। लागग साहिया दुन्नि, उकोसेण नियाहिया । ईसाणम्मि जहन्नण, साहिय पलिओनम ।। २२ ॥ सागराणि य सत्तर, उकोसैण ठिई मरे । सणवुमार जहनेण, दुन्नि उ मागरोनमा ॥ २२३ ।। साहिया सागरा यत्त, उकोसेण ठिई भवे । माहिन्दम्मिजहन्नेण, साहिया दुन्नि सागरा || २२४ ॥ इस चेव मागराइ, उक्कोमेण ठिई भवे । गम्भलो जहन्नेण, मत्त ऊ सागरोवमा । २०५ चउदस सागराइ, उकोसेण ठिई भवे । लन्तगम्मि जहन्नेण, दम उ सागरोवमा ॥ २२६ ।। सत्तरस सागराइ, उकोसेण ठिई भवे । महामुके जहन्नेण, चोदस सागरोनमा ।। २२७ ॥ अट्ठारस सागराइ, उक्कोसेण ठिई भवे । सहस्मारम्मि जह नैण, सत्तरम सागरोपमा ॥ २२८ ॥ सागा अउणीस तु, उफोमेण ठिई भवे । आणयम्मि जहन्नेण, अट्ठारम सागरोपमा ।। २२९॥ चीम तु सागराइ, उकोसेण लिई भवे । पाणयम्मि जहन्नेण, सागरा अणवीमई ।। २३० सागरा इकवीस तु, उफोसेण ठिई भवे । आरणम्मि जह नेण, वीसई सागरोपमा ॥ २३१ ॥ भावीम सागराइ, उक्कोसेण ठिई भवे । अन्चुयम्मि जहन्नेण, मागरा इझनीमई ॥ २३२ तेवीम सागराइ, उक्कोसेण लिई भवे । पढमम्मि जहन्नेण, यापीसं सागरोनमा ।। २३३ ।। घउपीस सागराइ, उपोसेप टिई भवे । विइयम्मि जहन्नेण, तेवीस सागरोनमा ॥ २३४ ।। पणवीम सागराइ, उकोसेण ठिई भरे । तहय जहन्नेण, चउचीस सागरोपमा ॥ २३५ छवीस सागराइ, उकोसेण ठिई भये । चउत्थम्मि जहन्नेण, मागरा पणुवीसई ॥ २३६ ॥ सागरा मत्तीस तु, उक्कोसेण ठिई मवे। पञ्चमम्मि जहन्नेण, सागरा उ उवीसई ।। २३७ ।। सागरा अट्ठचीस तु, उकोसेण लिई, भवे । छहम्मि जहन्नेण, सागरा सत्तवीसई ।। २३८ ।। सागरा अरणतीस तु, उक्कोसेण ठिई मवे । सचमम्मि जहनेण, सागरा अहनीमई ॥ २३९ ॥ तीम तु सागराइ, उक्कोसेण ठिई भवे । अट्टमम्मि जहन्नेण, सागग अउणतीमई ॥ २४॥ सागरा इफ्तीम तु, उकोसेण ठिई भवे । नामम्मि जहन्नेण, तीसई सागरोधमा ।। २४१ तेत्तीसा सागराइ, उक्कोसेण टिई भवे । चउसुपि विजयाईसु, बहनेणेकतीमई ॥ २४० अजहन्नमणुकोमा, तेत्तीस सागरोवमा। महाविमाणे सबढे, ठिई एसा रियाहिया ।। २४३ ॥ जा चेर उ आउठिई, देवाण तु वियाहिया । सा तेसि कापठिई, जहन्नमुफोसिया भवे ॥ २४४ ॥ अणन्तकालमुकोस, अन्तोमुहत्त जहन्नय । निजदम्मि सए काए, देवाण हुअ अन्तर ।। २४५॥ एएमि यण्णओ चेव, गन्धओ रमफामओ। सठाणदेसओ वावि, विहाणाइ सहम्मसी ।। २१६ ॥ समारत्याय सिद्धा य, इस जीवा नियाहिया। रुविणो पन्त्री य, अजीया दुदिहानि य ॥ २७ ॥ इस जीपमजीरे य, मोचा सदहिजण य । सघनयाणमशुमए, रमेज सजमे मुणी ।। २४८।। तओ यह णि वासाणि, सामण्णमणुपालिप । इमेण कम्मजोगेण, अप्पाण मलिहे मुणी ॥ २४९ ॥ मारसेन उ यासाइ, सलेहुकोसिया भवे । छम्मासा य जहनिया ।। २५० || . . Ram (७४) श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला. पढम पामचउप म्मि, निगई-निजहण करे । विईए नामचउम्मि, निवित्त तु तव चरे ।। २५१ ।। एगन्तरमायाम, कटु सवच्छरे दुवे। तो सबन्छरद्ध तु, नाइविगढ तर चरे । २०२॥ तओ मान्छग्द्ध तु, सिगिट्ट तु तर चरे। परिमिय चेन आयाम, तम्मि मवन्छरे करे ।। २०३ ।। फोडी सहियमायाम, कटु, समच्छरे मुणी । मासद्धमासिष्ण तु, आहारेण तर चरे ।। २५४ ।। कन्दप्पमामिओग च, फिविसिय मोहमासुरुत्त च । ग्याउ दुग्गईओ, मरगम्मि विराहिया होन्ति ॥ ॥ २५५॥ मि उादमणरत्ता. सनियाणा उ हिंमगा । इय जे मरन्ति जीना, नेमि पुण दुलहा वोही ॥ २५ ॥ मम्मदसणरत्ता, अनियाणा सुक्लेसमोगाढा । इयजे मरन्ति जीरा, तेसिं सुलहा भवरोही ।। २५७ ॥ मिच्छादसणरत्ता, मनियाणाकण्ह रेसमोगाढा । इय ज मरन्ति जीवा, तेसि पुण दुःसहा गोही । १२५८॥ जिणायणे अणुरत्ता,जिणायण करेन्ति भावेण। अमलाअमङ्किलिहा,तेहोन्ति परिचसमारी ॥ २५९ ।। बालमरणाणि बहुसो, अकाममरणाणि चेन य यहणि । मरिहन्ति ते पराया जिणवयण जे न जाणन्ति ।। ॥ २६०॥ पर आगमविनाणा, समाहिउप्पायगा य गुणगाही। एएणकारणेण, अरिहा भालोयण सोउ ।। २६१ ।। कन्दप्पवृकयाइ, तह सीलमहामहमणविगहाइ । विम्हावेन्तोचि पर, इन्दप्प भावण कुणइ ।। २६२ ॥ मन्तानोग काउ, भूईकम्म च जे पउजन्ति । माय-रम-इड्डिहउ अभिओग भाषण कुणइ ॥ २६३ ।। नाणस्म कालीण, धम्मायरियस्स सङ्घसाहण । माइ अण्णवाई, किसिमिय भाषण कुणह ॥ २६४ ।। अणुपद्धगेमपसरी, तह य निमित्तम्मि होड पडिसवी एहि कारणेहि, आसुरिय भावण कुणः ।। २६५ ।। सस्थगहण विसभक्षण च जलण च जलपरसोय । अणायारभण्डसेना, जम्मणमरणाणि यधन्ति । इय पारकर युद्ध, नायए परिनि उए । छत्तीस उत्तरज्झाए, भवसिद्धीयसबुडे ॥ २६७ ॥ त्ति वेमि ॥ जीवाजीपविभती ममत्ता ॥ ३६ ।। । दअ उत्तरज्झयण सुत्त समत्त ॥
॥ णमो समणस्स मगाओ महागीरम्म ।। ॥ सिरि-दसवेआलियं-सुत्तं ॥ ॥ दुमपुफ्फिया पढम अज्झयण ॥ पम्मो मगलमुफ्टि, अहिंमा सजमो तो। देवा वि त नममति, जस्म धम्मे मया मणो ॥ १ ॥ जहा दुमम्म पुप्पमु, भमरो आवियह रस । ण य पुष्फ फिलामेह, मो अ पीणेड अप्पप ॥ २ ॥ एमेए समणा मुत्ता, जे लोण सति साहणो । रिहगमा पुप्फे, दाणमचेसणे ग्या।। ३ ।। वय च वित्तिं लभामो, ण य कोड उपहम्मड । जहागडेम रीयते, पुप्फेम ममरा जहा ॥ ४ ॥ महगा (का)ग्समा उद्धा, जे भरति अणिस्मिया । नाणपिंटरया दता, नेण पुञ्चति मागुणो ॥ ५ ॥ त्ति बेमि ॥ दुमपुफिया पढममज्झयण ममत्त । ॥ अह मामण्णपुव्वय दुइअ अन्झयण ॥ कह नु कुआ सामण्ण, जो कामे न निवागए । पए पर निसीअतो, सरपस्स वस गओ ॥१॥ पत्यगधमलकार, हत्यीओ मयणाणि य । अछठा जे न भुजति, न से चाट ति उच्चड ॥ २ ॥ जै य क्ते पिए मोए, लद्धे वि पिट्टि बुदद । माहीणे चयह भोग, मे छ चाड चि पुचड ॥३॥ ममाइ पहाड परिवयतो, सिया मणो निम्मर पहिद्धा । न मा मई नोवि अह वि तीसे, इथेन वायो विणइन्न राग ।। ॥४॥ आयारयाही चय मोगमल्ल, कामे कमाहि कमिय सु दृक्प। डिंदाहिं दोस विणएज्ज राग, ए सही होहिसि सपराण ॥ पक्पट जलिय जोड, धूमकंउ दुरासय । नेउति तय मोन, ले जाया अधगणे ॥ ६ ॥ घिरत्यु तेऽजमोसामी, जो त जीवियकारणा। यत इच्छसि आवेउ, संय ते मरण भवे ॥ ७॥ अह च भोगरायस्स त चऽसि अधगविहिणो । मा कुले गधणा होमो, सजम निहुमो चर ।। ८ ॥ जइ त काहिसि भार, जा जा दिन्छसि नारिओ। वायाविद्धो व हडो,अहिअप्पा भरिम्ससि ॥ ९ ॥ तीमे मो वयण सोचा, सजयाइ सुभासिय । असेण जहा नागो, धम्मे सपटिवाडओ ॥ १० ॥ एव करति सयुद्धा, पटिया पविययणा । विणियति भोगेस, जहा से परिमृत्तमो ॥ ११ ॥ त्ति बेमि। इअ मामण्णपुग्य नाम अज्मयण ममत्त ।। - (७६) श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला ww . ॥ अह खुड्यायारकहा तइम अज्झयण ॥ संजमे सहिअप्पाण, विप्पमुकाण ताइण । तेसिमेयमणाइण्ण, निरगयाण महेसिण ॥ १ ॥ उद्देसिय कीयगट, नियागममिहडाणि य । राइभत्ते सिणाणे य, गधमछे य वोयणे ॥२॥ सनिही गिहिमचे य, रायपिंडे किमिच्छए। समाहणा दतपहोयणाय, सपुन्छणा देहपलोयणाय ॥३ अट्ठारए य नालीए, छत्तस्म य वारणट्टाए । तेगिच्छ पारणापाए, समारभ च जोहणो॥र सिजायरपिंड च, आसदीपलियकए । गिहतरनिसिन्ना य, गायसुबट्टणाणि य ॥ ५ ॥ गिहिणो वेआरडिय, जा य आजीनपत्तिया। तचानिबुडभोइत, आउरम्सरणाणि य ॥६॥ मूलए सिंगबेरे य, उच्छुखडे अनिव्वुडे । कदे मूले य सचित्त, फले पीए य आमए ॥७॥ सोपचले सिंघवे लोणे, रोमालोणे य आमए । समुद्दे पमुसारे य, कालालोणे य आम ॥८॥ धुवणे ति रमणे य, वत्पीकम्भविरेयणे । अजणे दतपणे य, गाय-भगविभूसणे ॥ ९॥ सबमेयमणाइन्न, निग्गथाण महेसिणं । सजमम्मि अ जुत्ताण, लहुभूयविहारिण ॥ १० ॥ पचासनपरिणाया, तिगुत्ता छसु सजया | पचनिग्गहणा धीरा, निग्गथा उज्जुदसिणो ॥ ११ ॥ आयावयति गिम्हेसु, हेमतेसु अवाउडा । वासासु पडिसलीणा, सञ्जया सुममाहिया ॥ १२ ।। परीमहरिऊदता, धूअमोहा जिइदिया। सधदुक्सपहीणट्ठा, पफमन्ति महेसिणो ॥ १३ ॥ दुकराइ करित्ताण, दुस्महाइ सहित्तु य । केइत्थ देवलोएस, केइ सिज्झन्ति नीरया ॥१४॥ सवित्ता पुवकम्माइ, सजमेण तवेण य | सिद्धिमग्गमणुप्पत्ता, ताइणो परिणि बुडे ॥ ॥१५॥ त्ति बेमि ॥ इअ खुड्डायारकहा नाम तदयमज्गयण ॥ ॥ अह छनीवणियानाम चउत्थ अज्झयण ॥ मुअ मे आउसतेणं भगवया एवमक्खाय, इह सल छन्नीरणिया नामज्झयण समणेण भग वया महावीरेण कासवेण पवेइया सुअक्खाया सुपनत्ता सेज मे अहिजिउ अझयण धम्मपण्णत्ती ॥१॥ कयरा सलु सान्जीवणिया नामज्झयण सपणेण भगया महावीरेण कासवेण पदेइया मुअक्साया अपनत्ता सेज मे अहिनिउ अज्झयण धम्मपण्णती ॥ २॥ इमा सल सा छजीवणिया नामज्झयण समणेण भगवया महावीरेण कामवेण पवेइया सुअक्साया सुपन्नता सेअ मे अहिलिउ अन्झयण धम्मपन्नती ॥ तजहा-पुढविकाइया १, आउकाइया २, तेउकाइया ३, वाउकाइया ४, वणस्सइकाइया , तसफाइया ६ । पुढवी चिचमतमक्साया अगजीया पुढोसत्ता अन्नत्य सस्थप- रिणएण | आज चित्तमतमक्खाया अणेगजीवा पुढोसत्ता अन्नस्थ सत्थपरिणएण । वाम चिचमत मक्खाया अणेगजीना पुढोसत्ता अन्नत्थ सथपरिणएण । बाऊ चित्तमतमक्खाया अणेगजीया पुढो. सत्ता अमत्यपरिणएण । वस्सई चित्तमतमक्खाया अणेगनीया पुढोसचा अमत्थ सत्यपरिणएण तनहा-अग्गीया, मूलनीया, पोरवीया, सधवीया, चीयरुहा, समुच्छिमा, तणलया, वणस्सइका इया, सदीया विचमतमक्खाया अणेगजीवा पुढोसत्ता अन्नत्य सत्यपरिणएण । से जे पुण इमे - -~-- . श्रीदसवैकालिकरत्र-चतुर्थाध्ययनम् (७७) अणेगे बहवे तसा पाणा, तजहा-अडया, पोयया, जराउया, रसया, ससेइमा, समुच्छिमा उभिया उपाइया, जेमि कैसिंचि पाणाण, अमिकत, पडिक्त, सकृचिय, पसारिय, रुप, भव, तसिय, पलाइय आगइगइविनाया, जे अ कीडपयद्गा, जा य कुथुपिपीलिया, सबै वहदिया, सचे तेडदिया, सधे चउरिदिया. सद्धे पचिंदिया, मवे तिरिक्सजोणिया, सधे नेरइया, मधे मणुआ, सबै देना, मझे पाणा, परमाहम्मिआ, एमो सल उट्ठो जीवनियो तमकाओ त्ति पगुच्चा । इच्चेमि छह जीपनि कायाण चेर सय दड समारभिन्ना, नेवन्नेहिं दड समारभाविना, दट ममारमन्त वि अग्ने न समणुजाणामि, जामजीपाए तिविह तिविहेण मणेण वायाए कारण न करमि न कारमि परतपि अन न समणुजाणामि । तस्स मते पडिकमामि निन्दामि गरिहामि अप्पाण योमरामि ।। पढमे भते ! महत्वए पाणाइयाओ वेरमण । सवं भन्ते ! पाणाहनाय पञ्चक्सामि । से मुहम चा, पापर ना, तस था, थारर वा, नेर सय पाणे अहवाइजा, नेऽनेहिं पाणे अहसायाविना, पाणे अइवायन्तेऽपि अने न ममणुजाणामि, जावजीगए तिविह तिविहेण मणेण गयाए काण न फरेमि न कारवेमि करतंपि अन्न न समणुजाणामि, तस्स भते ! पडिकमामि निन्दामि गरिहामि अपाण नोमरामि । पढमे भन्ने ! महथए उपढिओ मि सबाओ पाणाडयायाआ वेरमण ॥१॥ अहानरे दुच्चे भन्ते ! महत्वए मसापायाओ रमण | सब भन्ते ! मुसावाय पञ्चक्सामि । से कोहा वा, लोहा वा, मया चा, हासा वा, नेच सय मुस यइज्जा, नेग्नेहिं मुम गायाविना, मुस वपन्ने वि अन्ने न समणुजाणामि जावजीपाए तिविह तिविहेण मणेण वायाए कारण न करेमि न कारवेमि करतपि अन्न न समणुजाणामि तस्म भन्ते ! पडिकमामि निन्दामि गरिहामि अप्पाण योमरामि । दुचे भते ! महबए उनहिओ मि सदाओ मुमावायाओ चेरमण || २R अहापरे तच्चे भन्ते ! महबए अदिनादाणाओ वरमण । मन्छ भन्ते ! अदिन्नादाण पचक्यामि। से गामे या, नगरे या, रम्णे या, अप्प वा, यह वा, अणु वा, धूल या, चित्तमत बा, अचित्तमत था, नेर सय अदिन्न गिहिना, नेवन्नेहिं अदिन गिहाविजा, अदिन गिण्हन्ते वि अग्ने न सम- गुनाणामि जान्नीगाए तिनिह तिविहण मणेण पायाए कारण न करेमि न कारवेमि करवपि अन्न न समणुजाणामि । तस्स भन्ते ! पडिपमामि निन्दामि गरिहामि अप्पाण योमरामि । तच्चे भन्ते ! महबए उनहिओ मि सबाओ अदिनादाणाओ वेरमण ॥ ३ ॥ अहावरे चउत्थे भन्ते ! महयए मेहुणाओ वैरमण | मद भते । पचक्सामि । मे टिव वा, माणुस वा. तिरिक्सजोणिय वा, नेर सय मेहुण सेविजा, नेवन्नेहि मेहुण सेनाविआ, मेहुणं सेवन्ते वि अन्ने न समणुजाणामि जावन्नीवरए तिविह तिविहेण मणेण वायाए गएण न करेमि न कार चेमि करतपि अन्न न समणुजाणामि । तस्स भन्ते! पडिकमामि निन्दामि गरिहामि अप्पाण योमरामि । चउत्थे भन्ते ! महपए पट्टिओ मिामवाओ मेहुणाओ घेरमण ॥ ४ ॥ अहावरे पश्मे भन्ते ! महबए परिग्गहाओ चरमण । सब भते ! परिगगह पचक्सामि । से अप्प या, बहु चा, अणु वा, धूलं वा, चित्तमत या, अचित्तमत या। नेन सयपरिग्गह परिगिहिना, - (७८) श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला नेवन्नेहिं परिग्गह परिगिहन्ते वि अन्ले न समजाणिजा जायजीपाए तिविह तिपिहेण मणेण पायाए काण्ण न करेमि न कारवेमि करतपि अन्न समणुजाणामि, तस्स भन्ते । पडिकमामि निदामि गरिहामि अप्पाण रोसरामि। पश्चमे मन्ते । महन्थए उनहिओ मि समाओ परिग्गहाओ वेरमण ||७॥ अहापरे छट्टे भन्ते ! वए गइमोअणाओ वेग्मण । गच्च भते ! राइभोयण पञ्चक्यामि । से अमण वा, पाण वा, खाइम वा, साइमं वा । नेन सय राइ भुजिना, नेव राइ भुजिल्ला, नेयन्नेहि राइ मुनाविना, तइ भुजतेवि अन्ने नसमणुजाणामि जायजीपाए तियिह तिविहेण मणेण वायाए कारण न करेमि न कारवेमि करतपि अन्न न ममणुजाणानि । तस्स भन्ते । पडिकमामि निंदामि गरिहामि जप्पाण वोसिरामि । छटे भते ! वए उवडिओ मि सबाओ राइभोअणाओ वेरमण ॥६॥ उचेयाइ पचमहावयाइ राइमोअणवेरमणछट्ठाड अत्तिहियट्ठियाए उपसपबित्ता ण विहरामि ॥ से मिक्सू पा, भिक्खुणी वा, सजयविरयपडिहयपञ्चसायपानकम्मे, दिआ वा, राओ वा, एगओ बा, परिमागओ वा, सुते वा, जागरमाणे वा, से पुढनि चा, मिर्ति वा, सिल था, लेट वा, समरक्स ना काय, ससररर वा पत्थ, हत्थेण या, पाएण वा, क्वेण किलिंचेण वा, अगुलियाए पा, सिलागाए चा, सिलागहत्येण वा न आलिहिज्जा, न विलिहिआ, न घटिजा, न भिंदिजा, जन न आलिहाविआ, न विलिहाविजा, न घटाविजा, न मिंदाविना, अन्न आलिहत वा, विलि- हत वा, घटत या, भिदत वा नसमणुजाणिजाजायजीपाए तिविह तिविहेण मणेण वायाए कारण न करेमि न कारवेमि करत पि अन्न न ममणुजाणामि तस्म । भते । पडिवमामि उिंदामि गरिहामि अप्पाण होमरामि ॥१॥ से भिक्यू वा, भिक्खुणी वा सजयनिरयपडिहयपचक्यायपारगम्मे, दिआ था, राओ वा, एगओ चा, परिसागओ वा, मुत्ते वा, जागरमाणे चा, से उदग या, ओम था, हिम वा, महिय वा, फरग का, हरिंगणुग वा, सुद्धोदग वा, उदउल्ल वा वस्थ, ससिणिद्ध ना काय, ससिणिद्ध वा वत्थ न आइसिआ, न सफुसिजा, न आवीलिज्जा, न पपीलिजा, न अक्सोडिना, न पक्सोडिआ, न आयामिजा, न पयाविना, अन्ने न आमुसाविजा, न सफुसाविजा, न आवीलाविजा, न पीला विजा, न अक्सोविजा, न पसोडारिजा, न आयाविजा, न पयापिज्जा, अन्न आमुसत वा, सफुमत ना, आगीलत वा, पपीलत ना, अक्खोडत वा, पक्खोडत वा, आयावन्त वा, पयावन्त ना न समणुजाणिन्ना, जावजीनाए, तिविह तिनिहेण मणेण वायाए कारण न करमि न कारयेमि करत पि जन न समणुनाणामि । तस्म भन्ते ! पडिकमामि निन्दामि गरिहामि जप्पाण वोसरामि ॥२॥ भिखू पा, भिक्सुणी वा, सजयविरयपडिहयपञ्चसायपावकम्मे, दिआ वा, राओ या, पगओ पा, पस्सिागो या, सुत्ने वा, जागरमाणे वा, से अगणि वा, इगाल था, मुम्मुर चा, अचिं था, जाल बा, अछाय वा, सुद्धागणि चा, उकया, न उजिजा, न घट्टिजा, न भिंदिज्जा, न उजा- लिन्ना, न पजालिजा, न निधाविजा, अन्न न उन्नाविना, न घटाविना, न भिदाविना, न " - श्रीदसवैकालिपसूत्र-चतुर्याध्ययनम (७९) उजालाविना, न पजालाविजा, न निवाविजा, अन्न उजन्त या, घटत वा, भिदत वा, उज्जालत वा, पज्जालत ना, नि वावत वा, न समणुजाणिज्ना जावन्नीगए तिविह तिपिहेण मणेण वायाए कारण न करेमि न कारवमि करत पि अन्न न समणुजाणामि । तस्स मन्त ! पडिकमामि निन्दामि गरिहामि अप्पाण वोसरामि ॥३॥ से भिक्खू वा, भिक्सुणी ना, मजयविरयपडिहयपच्चस्सायपारकम्मे, दिआ था, राओ वा, एगओ वा, परिसागओ ना, सुत्त चा, जागरमाणे ना, ने सिएण वा, विदुयणेण पा, तालियदेण वा, पत्तेण वा, पत्तभगेण ना, साहाए चा, साहामगेण पा, पिहुणेण वा, पिहुणलत्येण ना, चेलेग वा, चेलकनेण वा, हत्थेण पा, मुहेण या, अप्पणो पा काप, बाहिर वा नि पुग्गल न मिज्जा, न बीएज्जा, अन्न न फूमापिज्जा, वीनानिज्जा, अन्न फूमत या, चीअत वा न समणुजाणिज्जा जा- ‘पन्नीपाए तिविह तिनिहण मणेण वायाए काणं न करेमि न कारवेमि करतपि अन्न न समणुजा णामि । तम्स भते । पडिक्मामि निन्दामि गरिहामि अप्पाण वोमरामि ॥४॥ - मे मिक्म्यू वा, भिक्गुणी वा, सजयविरयपडिहयपञ्चसायपानकम्मे, दिआ वा, राओ वा, एगओवा, परिसागओ ना, सुत्ते वा, जागरमाणे ना, से वीएसु या, वीयपइट्ठेमु वा, रूढेसु वा, भ्ढपडद्वेसु वा, जाएसु वा, जायपइद्वेसु पा, हरिएसु हरियपइढेसु वा, छिन्नेसु था, छिन्नसु या, छिन्नपइटेसु वा, मचित्तेसु घा, सचित्तकोलपडिनिस्सिएसु चा न गठज्जा, न चिटुंज्जा, न निसी इज्जा, न तुअहिज्जा, अन्न न गन्छाविज्जा, नचिट्ठापिज्जा, न निसीआविजना, न तुअट्टानिज्जा, अन्न गच्छत चा, चिट्ठत वा, निसीअत वा, तुयट्टत वा न समणुजामि जानज्जीनाए तिविह निवि- हैण मणेण वायाए कारण न करेमि न कारवमि करत पि अन्न न ममणुजाणामि । तस्स भन्ते ! पडिकमामि निन्दामि गरिहामि अप्पाण वोमरामि ।।4।। से भिक्खू वा, भिवखुणी चा, मजयविरयपडिहयपञ्चसायपारकम्मे, दिआ ना, राओ वा, एगओ या, परिसागओ या, सुत्ते वा, जागरमाणे वा, से कीड वा, पयग ना, कुशु वा, पिपीलिय चा, हत्थसि वा, पायसि वा, बाहुसि वा, उरुसि था, उदरसि वा, सीससि ना, यत्यसि वा, पडि- ग्गहसि था, स्वलसि वा, पायपुच्छणसि ना, रयहरणसि वा, गुन्छगसि वा, उडगसि वा दडगसि वा, पीढगसि वा, फलगसि बा, सथारगसिपा, अन्नयरसि वा तहप्पगारे उवगरणजाए तओ सजया- मेव पडिटेहिय पडिलेहिय पमन्जिअ एगतमाणिज्जा, नो ण मघायमावजिज्जा ॥६॥ अजय चरमाणो अ, पाणभूयाड हिंमद । बन्धह पारय कम्म, तसे होट कडुअ फल ॥ १ ॥ अजय चिट्ठमाणो अ, पाणभूयाइ हिंसइ । चघड पापय कम्म, त से होइ कडुअ फल ।।२॥ अजय आसमाणो अ, पाणभ्याड हिंलड । पन्धड पारय कम्म, त से होइ कडुअ फल ॥ ३ ॥ अनय सयमाणो अ, पाणभूयाइ हिंसइ । नधइ पारय कम्म, त से होड़ क्डुअ फल ॥ ४ ॥ अजय भुजमायो अ, पागभूयाह हिंमइ । बघा पाश्य कम्म, त से होड कडअ फल ॥ ५ ॥ अजय भाममाणो अ, पाणभूयाड हिमा पाग्य कम्म, त से हो रहुअ फल ॥६॥ - + - श्रीजेनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला कह चरे कह चिढ़े, कहमाग कह सा। कह भुजन्तो भामतो, पापफम्म न उघड ॥७॥ जय चर जय चिट्टे, जयमास जय सण | जय भुजन्तो भासतो, पारकम्म न उघद ॥ ८॥ सवभूयप्पभूयस्स, सम्म भ्याइ पासओ । पिहिआसवस्स दवस्म, पावकम्म न पधह ॥ १॥ पढम नाण तओ दया, एव चिट्ठसघमजए । अन्नाणी कि काही, किंवा नाही सेयपारग ।। १०॥ सोचा जाणा कल्लाण, सोचा जाणइ पावग। उभय पि जाणइ सोचा, ज सेय त समायरे ॥ ११ ॥ जो जीवे वि न याणइ, अजीचे वि न याणड । जीवाजी अयाणतो, कह मो नाही सजम ।। १२ ।। जो जीने वियाणेइ, अजीरे वि पियाणइ । जीगानीवे वियाणतो, तो हु नाहीड सजम ॥ १३ ॥ जय जीयमजीवे य, दोनि एप पियाणइ । तया गइ बहुविह, सच जीवाण जाणा ॥ १४ ॥ जया गइ बहुविह सबजीपाण जाणइ । तथा पुण्ण च पार च, वंध मुक्म च जाणइ । १५ ॥ जया पुण्ण च पार च, नध मुक्सच जाणइ । तया निबिदए भोए, जे दिवे जे य माणुसे ॥ १६ ॥ जया निविदा भोए, जे दिवे जे य माणुसे । तया चयइ सजोग, मम्मिन्तर बाहिर ॥ १७ ॥ जया चयइ सजोग, सभितर चाहिर । तया मुड भवित्ताण, पाइए अणगारिय ।। १८॥ जया मुडे भविचा, पवइए अणगारिय । तया मारमुषिद्ध, धम्म फासे अणुत्तर ॥१९॥ नया सवरमुफिट्ट, यम्म फासे अणुत्तर । तया धुगइ यम्मग्य, अयोहिल्लुम कड ॥२०॥ जया धुणइ कम्मरय, अयोहिफलस क्ड । तया मतग नाण, दमण चाभिगच्छड ॥ २१ ॥ जया सव्वत्तग नाण, दसण चाभिगच्छह । तया लोगमलोग च, जिणो जाणइ केवली ॥ २२॥ जया लोगमलोग च, जिणो जाणइ केवली । तया जोगे निरुभित्ता, सेलेसि पडिअइ ॥ २३ ॥ जया जोगे निरुभिचा, सेलेमि पडिपाइ । तया पम्म सविचाण, सिद्धिं गन्छइ नीरओ ॥ २० ॥ जया कम्म सवित्ताण, सिद्धिं गच्छड नीरओ। तया लोगमत्थथरथो, सिद्धो हवड सासओ ॥ २५ ॥ छह सायगरस समणस्म, मायाउलगस्स निगामसाइस्स । उच्छोलणापहोअस्म, दुलहा मुगई तारिसगस्म ॥ २६ ॥ तमोगुणपहाणस्स, उज्जुमइ पन्तिमजमरयम्स । परीमहे जिणतस्स, मुलहा मुगई “वारिसगस्म ॥७॥ पन्छा वि ते पयाया, सिप्प गच्छति अमरभवणाइ । जेसि पिओ नगे सजमो अ, सती अ वभचर च ॥ २८ ॥ इच्चेय उन्नीपणिअ, मम्मदिही सया जए। दुल्लह लहितु सामण्ण, कम्मुणा न विराहिजासि ॥ २९ ॥ त्ति बेमि । अछज्जीवणिआ णाम चउत्थ अप्रयण समत्त ॥ ४ ॥ .
(८१) श्रीदमकालिकसूत्र-पञ्चमाध्ययनम् ॥ अह पिंडेसणा णाम पचमज्झयण ॥ सपचे भिक्सकारम्मि, असंभतो अमुच्छिओ। इमेण कमजोगेण, मत्तपाण गरेमए ॥ १ ॥ से गामे या नगरे वा, गोअरग्गगो मुणी । चरे मदमणुविग्गो, अवक्सित्तेण असा ॥ २॥ पुरओ जुगमायाए, पेठमाणो महि चरे। वनतो पीअहरियाइ, पाणे अगमहि ॥३॥ ओपाय विसम साण, विजल परिसञ्जए । सम्मेण न गन्छिा, विजमाणे पग्कमे ॥ ४ ॥ पपईते च से तत्थ, पासलते न मजए । हिरोज पाणभूयाइ, तसे अदुर थावर ॥ ५ ॥ तम्हा तेण न गच्छिन्ना, मजए सुसमाहिए। सइ अण्णेण मग्गेण, जयमेव परचमे ॥६॥ इगाले छारिय रामि, तुमरासिं च गोमय । समरक्सहिं पाएहि, संजओ त नइधमे ॥ ७ ॥ न चरेज बासे यामते, महियाए पटनिए | महापाए व वायते, तिरीन्छमपाइमेसु ना ॥ ८ ॥ न घरज वैससामते, घमरवमाणुए । घमयारिस्म दतस्म, होजा तस्य पिमोहिआ ॥ ॥ अगाययणे चरनस्स, समगीए अमिक्सए । होज ययाणं पीला, सामणम्मि अ समओ ।। १० ।। वम्हा अ विआणित्ता, दोस दुग्गडपडण । वजा वैमसामन्त, मुणी एगतमम्मिए ॥ ११ ॥ माण सहा गापि, दित्त गोण हय गय । मडि भ स्नेह जुद्ध, दूरओ परिवबए ।॥ १२ ॥ अणुनए नारणए, अप्पहिवे अणाउले। इटिआई जहाभाग, दमहत्ता मुणी चरे ॥ १३ ॥ दादवस्म न गच्छेन्ना, भाममाणो अगोचर। हमन्तो नाभिगच्छन्ना, उल उद्यानय मया ॥ १४ ॥ आलोग विग्गल दार, सपि ढगभत्रणाणि । चरन्तो न विणिज्झाण, सटाण विजए ॥ १५ ॥ रनो गिहाईण च, रहम्मारविक्सयाण य । समिरर ठाण, दूरओ परिमन्नए ॥ १६ ॥ पडिउट्ट कुर न परिसे, मामग परिपजए। अचियच कुल न परिसे, चियत्त परिसे बुल । १७ ॥ साणीपावारपिहिअ, अप्पणा नारपगुर । कनाड नो पणुहिना, उग्गहसि अणाइआ ॥ १८ ॥ गोपरग्गपविठ्ठो अ, पचमुत्त न धाए । गोगाम फामुअ नया, अणुनविय वोसिरे ॥ १९ ॥ णीय दुनार तमस, वृट्ठग परिवजए। अचसुपिमओ जत्य, पाणा दुप्पडिरेहगा ॥ २० ॥ जत्थ पुष्फाड बीआइ, पिप्पडनाइ नोट्टए । अहुणोपलित्त उछ, दण परिवजण ॥ २१ ॥ एलग दारंग साण, वन्छग वा वि कुट्ठा । उल्लधिया न परिमे, पिउहिताण व सजए ॥ २२ ॥ अससत्त पलोहा, नाइद्गरलोभए । उप्फुल्ल न पिणिज्झाग, नियट्टिन अयपिगे ॥ २३ ॥ अइभूमि न गन्डेआ, गोअरग्गगो मुणी । कुलम्म भूमि जाणिना, मिअ भूमि परकमे ।। २४ ।। तथा पडिले हिज्जा, भूमिभागविसमपणो । सिणाणस्म य वचस्म, सलोग परिवजए ॥ २५ ॥ दगमटिअआयाणे, वीआणि हरिआणि अ । परिसज्जतो चिहिला, सहिदिनसमाहिए ॥26॥ तत्य मे चिट्ठमाणस्स, आहारे पाणमोअण! प्रकापिअन इच्छिन्ना, पटिगाहिज पि !! २७ ॥ आहान्ती सिआ तस्थ, परिसाडिज भोगण । दितिम पडिआ'क्ये, न मे पप्पड तारिस ॥ २८ ॥ समद्दमाणी पाणाणि, वीआणि हरिआणि अ । अमजमसरि नन्चा, तारिसिं परिवजए ॥ २९ ॥ साइड निक्सिवित्ता ण, मचित्त घटियाणि या तहेव ममणुट्टाए, उदग सपशुल्लिया ॥ ३, + श्रीजेनसिद्धान्त-खाध्यायमाला. ओगाहइचा चलत्ता, आहारे पाणभोगण । दितिम पडियाइफ्ले, न मे कप्पइ वारिस ॥ ३१ ॥ पुरफम्मेण हत्थेण, दवीए भायणेण वा । दितिअ पडिआइक्रो, न मे कप्पा वारिस ॥ ३२ ॥ एव ग्दउल्ले मसिणिद्धे, ससरक्खे मट्टिआओसे। हरिआले हिंगुलए, मणोसिला अंजणे लोणे ॥ ३३ ॥ गेरुअवनिअसेढिअ, सोरद्विअपिटकुक्कुसकए अ । उकिट्ठमससहे, ससढे चेव बोद्धन्वे ॥ ३४ ॥ अससट्टेण हत्थेण, दबीए मायणेण वा । दिज्जमाण न इन्छिला, पच्छाकम्म जहिं भवे ॥३०॥ समद्वेण य हत्येण, द नीए भायणेण वा । दिउमाण पडिच्छिा, ज तत्धेसणिय भवे ॥ ३६॥ दुण्ह तु भुजमाणाण, एगो तत्थ निमत्रए । दिनमाण न इन्छिन्जा, छद से पडिलेहए ॥ ३७॥ दुण्ह भुजमाणाण, दो वि तत्य निमतए । दिज्जमाण पडिच्छिन्ना, ज वत्येसणिय भवे ॥ ३८ ॥ गुत्रिणीए उपण्णस्थ, विविह् पाणभोअण । भुजमाण विवज्जिज्जा, भुवसेस पडिच्छए ॥ ३९ ।। सिआ य समणट्ठाए, गुत्रिणी कालमासिणी । उद्विआ वा निसीइजा, निसन्ना या पुणुहुए ॥ ४० ॥ त भवे मत्तपाण त, सजयाण अप्पिा । दितिन पडिआइक्खे, न मे कापइ तारिस ॥ ४१ थणग पिज्जमाणी, दारग वा कुमारिअ । त निक्सिवितु रोअत, आहारे पाणभोयण ।। ४२ ।। त भवे भत्तपाण तु, सजयाण अकप्पिय । दितिअ पडिआइक्ये, न मे कप्पइ तारिस ॥ १३ ॥ ज भवे भत्तपाण तु, कप्पकप्पम्मि मकिय । दितिअ पडिआइक्खे, न मे कप्पइ तारिम ।। ४४ ॥ दगवारण पिहिअ, नीमाए पीढएण वा । लोढेण पा विलेवेण, सिलेसेण या केणइ ॥ ४ ॥ न च उभिदिआ दिज्जा, ममणट्ठा एव दावए । दितिम पडिआइक्खे, न मे कप्पइ तारिस ।। ४६ ।। अमण पाणग वावि, साइम माइम तहा। ज जाणिज्जा सुणिज्ज वा, दाणट्ठा पगड इम ।। ४७॥ त भये भत्तपाण तु, मजयाण अप्पिअ । दितिअ पडिआइक्खे, न मे कप्पइ तारिम ॥ ४८ ॥ अमण पाणग यावि, साइम साइम तहा । ज जाणिजा सुणिजा वा, पुण्णहा पगड उम ।। ४९ ।। त भवे भत्तपाण तु, मजयाण अप्पिा । दितिअ पडिआइक्से, न मे कप्पइ तारिम ॥ ५० ॥ अमण पाणग वावि, ग्वाडम साइम तहा ! ज जाणिज्जा मुणिआ वा, वणिमट्ठा पगड इम ।। ५१ ।। त भवे भत्तपाण तु ममयाण अपि । दितिअ पडिआइक्वे, न मे कप्पड तारिस ।। ५२ ।। असण पाणग वापि, बाडम माइम तहा | ज जाणिन सुणिज्जा या, समणट्ठा पगड इम ।। ५३ ॥ त भवे भत्तपाण तु, मजयाण अप्पिा । दितिय पडिआइक्वे, न मे कप्पइ तारिम ॥ ४ ॥ उदेसिय कीयगड, पूइफम्म च आहड । अझोअरपामिच, मीमजाय विवज्जा ॥ ५५ ॥ उगम से अ पुन्छिन्ना, स्महाकण गण्ड। सुचा निस्मक्रिय सुद्ध, पडिगाहिज सजए ॥ ५६ ॥ असण पाणग आपि, याडम माइम तहा। पुप्फेस हुज उम्मीम, वीएस हरिणसु वा ।। ५७ ॥ त म भत्तपाण तु, सजयाण अकप्पिा । दितिय पडिआइक्ये, न मे कप्पड़ तारिम ॥ ५८ ॥ अमण पाणग वावि, साइम साइम तहा । उदगम्मि हुन निक्सिच, उत्तिंगपणगेम वा ॥ ५९॥ न भवे भत्तपाण तु, मजयाण अप्पि। दितिम पडिआइक्ये, नमे कप्पइ तारिस ।। ६० ॥ साइम तहा। उम्मि (अगणिग्मि) होज निक्सिच, त च सरट्टिा दा ।। अमण पाणग यावि श्रीदनमालिकसूत्र-पश्चमाध्ययनम् त भवे भत्तपाण त, मजयाण अकप्पिा । दितिअ पडिआउक्से, न मे सप्पड़ तारिम ॥ ६२॥ एव उम्मिफिया ओमकिया. उन्नालिा पन्जालिआ निवाविया । उस्सिचिया निस्मिचिया, उपपत्तिया (उच्चचिया)ओगारिया दए । त भवे भत्तपाण तु, सजयाण अपिना दितिम पडिआइक्मे, न मे कम्पह तारिम ॥ ६४ ॥ हुन्न ? सिल वावि, इट्टाल याचि एगया। ठविअ मामट्ठाए, त च हुन चलाचल ।। ६५ ।। न तेण भिक्खू गच्छिन्ना, दिडो तत्य अमजमो । गमीर मुसिर चेत्र, मचिदिअ ममाहिय ।। ६६ ।। निस्सेणि फलग पीढ, उम्मवित्ता ण मारहे। मच कील च पामाय, समणट्ठा एव दावए ॥ ३७॥ दुरूहमाणी पाडना, (पडियन्ना) हत्य पाय व लूमा । पुढवीजीवे हि हिंसेना, जे अ तन्निम्मिा जगे। 'आरिसे महादोसे, जाणिऊण महेसिणो। तम्हा मालोहड भिस्स न पडिगिण्दसिसजया ।। ६९॥ कट मूल पलप चा, आम छिन च मभिर । तुवागं मिंगवेर च, आमग परिसजए ॥ ७० ॥ वहेच मत्तुचुनाड, कोलतुनाह आवणे । मक्कलि फालिअ पूअ, अन्न वा वि तहानिह ॥ ७१ ॥ विकायमाण पमढ, रएण परिफासिम । दितिम पडिआइक्खे, न मे कापड वारिस ॥ ७ ॥ बहुअहिअ पुप्गल, अणिमिम वा बहकटय । अत्यिय निदुय विष्ट, उन्राड मियलिं ॥ ७ ॥ अप्पे सिआ भोअणजाए, बहुझिय धम्मिए (य)। दितिम पडियाइक्वे, न में कप्पर नारिम || ।। ७४ ॥ तहेपुच्चावर पाण, अदुवा नारघोअण ! मसेग्म चाउलोटग, अहुणामोश निझए ।। ७५ ॥ जाजाणेआ चिरावाआ, मडए दमणण वा, पडिपुन्उिउण मुचा वा, ज च निम्सकिय भरे ।। ७६ ।। अजीव पडिणय नचा, पडिगाहिज मजए । अह मफिय मनिला, आमाहत्ताण रोअए ।। ८७ ॥ घोबमासायणढाए, हत्थगम्मि दलाहि मे । मामे अचविल पूअ, नाण तिण्ह विणित्तए । ७८ ॥ त च अचविल पूज, नाण तिण्डविणित्तए । दितिय पडिआडवे, न मे कप्पइ तारिम ।। ७९ ॥ व च हुला अकामेण, विमणेण पडिच्छिा त अप्पणा न पिदै ! नो नि अन्नम्म दावए ।। ८०॥ एगतमवक्कमित्ता, अचित्त पडिलेहिआ। जय पडिपिआ, परिठ्ठप्प पडिक्मे ।। ८१ ।। सिया अ गोअरग्गओ इन्छिना परिसूनु । छुट्टग मितिमूल बा, पडिहिनाण पासुअ ॥ ८२ ॥ अणुभवितु मेहावी, पडिच्छिन्नम्मि सयुढे । हत्यगं मपमअित्ता, तत्थ भुजिझ मजए || ८३ ।। तत्य से भुजमाणस्म, अहिअ कटओ सिया। तणावगर पावि, अन्न वानि नहानिह ।। ८४ it त अक्सिवितु न निक्मिवे, आसण्ण न छट्टए। हत्येण त गहेऊण, प्रगतमकमे ॥ ८॥ एगतमवकमित्ता अचित्त पहिलेद्दिआ । जय परिहरिना, परिदृप्प पडिक्मे ! ८६ ।। सिआ आमिकम्यूइन्छिना, सिझमागम्म अतुम ! मपिंडपायमागम्म, उछ पडिलेहिमा || ८७ ॥ विणएण पनिमिचा, सगासे गुरूणो मुणी। हरियापहियमाययाय, आगओ अ पडियमे ॥ ८८॥ आमोइत्ताण नीसेस, अडआर च जहफम । गमणागमणे चेन, मत्ते पाणे च सजा ।। ८९ ॥ रज्जुप्पनो अणुविग्गो, अक्सित्तेण चेअमा । आलोप गुरुमगासे, ज जहा गहिय मवे ।। १०॥ न मम्ममालोहा हुन्ना, पुद्धि पन्छा र ज कटा पुणो पडिक्म तस्म, पोमट्टो चिंता इमं ॥ ११ ॥ ,
(८४)
श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला
अहो जिणेहिं असायजा, वित्ती साहूण देसिआ । मुस्ससाहणहेउस्स, साहुदहस्स धारणा ॥ ९ ॥
णमुकारेण पारिता, करित्ता जिणसथव | सज्झाय पट्टवित्ताण, वीसमेज सण मुणी ॥ ९३ ॥
वीससतो इम चिंते हियमट्ठ लाभमहिओ। मे अणुगह कुञ्जा, साहू हुजामि तारिओ ॥ ९४ ॥
साहनो तो चिअत्तेण, निमतिज जहकम जड तत्थ के इज्छिज्जा, तेहिं सद्धि तु भुजए । ९० ॥
अह कोइ न इच्छिना, तओ भुजिज एको।आलोए भायणे साहू जय अपरिसाडिअ ।। ९६ ।।
तित्तग च रुडुअच, कमायं अविल च महुर लरण वा।
एयलद्धमन्नत्यपउत्त महु घय व भुजिज मजए॥ ॥१७॥
अरस विरस वावि, सूइअ या अमइ । उल्ल या जइ वा सुक, मधुकुम्मासमोअण ॥ ९८ ॥
उप्पण्ण नाइहीलिजा, अप्प वा बहु फासु । मुहालद्ध मुहाजीनी, भुजिजा दोसवजिअ ।। ९९ ।।
दुल्लहाओ मुहादाई, मुहाजीगी, वि दुल्लहा । मुहादाई मुहाजीवी, दो वि गछति सुग्गह ॥ १० ॥
॥ अ पिंटेमणा पढमो उद्देमो समत्तो ॥
पटिग्गह सलिहिचाण, लेगमायाइ सजा। दुगध वा, सच भुजे न छहए ॥१॥
सेना निसीहियाए, अमापनी अगोचरे । अयानयट्ठा भुचाण, जइ तेण न सथरे ॥२॥
तओ कारणमुप्पण्णे, भत्तपाण गवेसए । विहिणा पुवउत्तेग, इमेण उत्तरेण य ॥ ३ ॥
कालेण निक्समे मिक्खू , कालेण य पडिक मे ।
अकाल च विनजिता (जा), काले कालं ममायरे॥
॥४॥
अगाले चरिसि मिरवू, काल न पडिलेहिसि ।
अप्पाण च फिलामेसि, सन्निवेस च गरिहासि ॥
सह साले चरे मिक्सू कुल्ला पुरिसकारिय। अलामोत्ति न सोइजा, वो ति अहियासए ॥ ६ ॥
तहवचारया पाणा, भत्तट्ठाए गमागया। त उजुअ न गच्छिना, जयमेर परकमे ॥ ७ ॥
गोअरग्गविट्ठो अ, न निसीइन पत्थई । कह च न पयधिजा, चिहित्ताण व सजए ॥ ८॥
अग्गल फलिह दार, कवाड वा वि मजए । अमलविश्रा न चिट्ठिजा, गोअरग्गओ मुणो ॥ ९ ॥
समण मादण वावि, किविण या वणीमग । उसम्मत भत्तट्टा, पाणहाण व सजए ॥१०॥
तमइकमित्तु न पविसे, न चिट्टे चक्खुगोअरे । एगतमनफमित्ता, तत्थ चिहिज सजए ॥ ११ ॥
वणीमगस्म वा तस्स, दायगस्सुभयस्म वा । अप्पत्तिम सिमा हुना, लहुल परयणम्म वा ।। १२ ।।
पडिसेहिए व दिने चा, तओतम्मि नियत्तिए। उपसकमिन्न भचट्ठा, पाणट्ठाए व सजए ॥ १३ ॥
उप्पल पउम वावि, कुमुअ ना मगदति । अन्न वा पुष्कमचित, त उसलचिा दए ॥ १४॥
व भये भत्तपाण तु मजयाण अफप्पिय । दितिम पडि आइक्से, न मे कप्पइ तारिस ॥१५॥
उप्पल पउम चावि, कुमुना मगदति । अन्न वा पुप्फपचिच, त च सम्मदिआ दए ॥ १६ ॥
त भवे भचपाण तु, मजयाण अकप्पिा । दितिअ पडिआइक्स, न में कप्पर तारिस ।। १७ ॥
सालअ या विरालिम, कुमुअ उप्पलनालिय। मुणालि सामानाठिअ, उन्छुसड अनियुड ॥१८॥
तरणग वा पाल, रक्सस्म तणगस्म वा। अभस्म वा वि हरिभस्म, आमग परिवजए ॥१९॥
AN Antv - श्रीदसर्वकालिकसूत्र-पञ्चमाध्ययनम् तरुणिचा छियार्डि, आमिज भन्जिय मय । दितिक पडिआइक्से, न मे कप्पड तारिम २०॥ तहा कोलमणुस्मिन्न लुअ रासरनालिअ । तिलपप्पडग नीम, आमग परिसन्नए ॥२१॥ तर चाउल पिट्ठ, विअड तत्तनियुड । तिलपिट्टपूपिन्नाग, आमग पग्विजए ।। २२ ।। कविट्ठ माउलिंग च, मूलग मूलगतिभ, आम अमत्थपरिणय मणमा वि न पत्थए ॥ २३ ॥ तहेर फलमणि, पीचमणि जाणिआ 1 मिहरग पियाल च, आमग परिवाए ॥ २४ ॥ समुआण चरे मिक्यू कुलमुच्चावय मया । नीय कुलमहकम्म, ऊसढ नाभिधारए ।॥ २५ ॥ अीणो रित्तिमेसिझा, न पिसीएज पडिए । अमुणम्मि भोअणम्मि, मायण्णे एपणारए ॥ २६ ॥ बहु परधर अत्यि निविह सामसाहम । न तत्थ पडिओ बुप्पे इच्छा दिल परो नना ॥ २७ ॥ मयणामणवत्थ ना, मत्त पाण च मजए। अदितस्म न पिज्जा, पञ्चरसे वि अ टीमओ ॥ २८॥ इत्थिा पुरिस नावि, डहरं वा महल्ला । वदमाण न जाइजा, नो अण फरस व ॥ २९॥ न बदन से कुप्पे, बदिओ न समुफ्से। एवमन्नेसमाणम्म, मामण्णमशुचिट्ठइ ॥ ३०॥ सिमा एगहमी लधु लोमेण विणिगृहइ । मामेय दाइय सत, दट्टण मयमायर ॥ ३१ ॥ अचट्ठा गुरुओ लुद्धो, बहु पार पकुवड । दुत्तोमओ अ से (सो) होड,निवाण च न गच्छद ॥ २ ॥ सिआ एगइओ लधु, विविह पाणमोअणं । भग भग भुच्चा, विपन्न विरममाहर ।। ३३ ।। जाणतु ता इमे समणा, आययट्ठी अय मुणी। सत्हो मेनए पत, टूहवित्ती सुतोमओ॥३४॥ पूयणट्ठा जमोसमी, माणसमाणकामए । बहु पसाई पान, मायासल च दुवड । ३५ ॥ सुर ना मेरग वापि, अन्न वा मजग रम । ममक्स न पित्र मिक्यू जम मारक्समप्पणो ॥ ३६ ।। पिया एगओ तेणो, न मे कोई विआणड । वस्म पस्मह दोमाह, नियडिं च मुणेह मे ॥ ३७॥ बहद मुडिआ तम्म, मायामोस च मिम्यूणो। अयमो अनिवाण, मयय च जमाहुआ ॥ ३८ ॥ निचुधिग्गो जहा तेणो, अत्तमम्मेहिं तुम्मट । वारिमो मरणने वि न आराहेड मार ॥ ३९ ॥ आयरिए नाराहेइ, समणे आरी ठारिसो। निहत्था मिण गरिहति, जेण जाणति तारिम ॥ ४० ॥ एस तु अभुप्पेही, गुणाण च विवजए। तारिमो मरणते वि, ण आराहेड सर ॥ ११॥ तव कुछइ मेहावी, पणीभ वन्नए रम । मन्नप्पमायविरओ, तपस्सी अउक्कमो ॥ ४२ ॥ तस्म परमह कठाण, अणेगमाहुपडअ । विवल अत्यस जुत्त, फित्ताम्म मुह मे ॥ ४३ ॥ एर तु गुणप्पेही, अगुणाण च विजए (ओ)1 तारिमो मरणते वि, आराहेइ सरर ।। ४४ ॥ आयरिए आराहेइ, मपणे आनि तारिसो। गिहत्था वि ण पूयति, जैम जाणनि तारिम ॥ ४५ ॥ तपणे पयतेणे, रुपतेणे अ जे नरे। आयारमारतेणे अ, चुघड देवकिविम ॥ ४६ ॥ लक्ष्म नि देवत्त, उपनन्नो देवकिविम। नत्थापि से न याणाह किं किया इम फल ॥ १७ ॥ ततो नि से चहत्ताण, ल मह एलम अग । नरग तिग्विसनोणि वा, वोही जस्थ सुदुल्लहा 1. १८ ॥ एअ च दोस दट्टण, नायपुत्तेण मासिभ । अणुमाय पि मेहावी, मायामोम मिरजए ॥ ४० ॥ सिक्सिऊण मिक्वेमणसोहि, मजयाण युद्धाण सगासे । तत्थ मिस्स् सुप्पणिहिदिए, विवलनगुणर विहरिजासि ॥५०॥ तिमि अपिडेमणा धीओ उद्देमो॥ पचममयण ममत्त ।। ,
श्रीजेनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला
॥ अह छठं धम्मत्थकामज्झयण ॥
नाणदसणसपन्न, सजमे अ तवे स्य। गणिमागमसपन्न, उआणम्मि समोसढ ॥१॥
रायाओ रायमचा य, माहणा अदुव सत्तिा। पुच्छति निहुअप्पाणो, कह मे आयारगोयरो ॥२॥
तेसि मो निहुओ दतो, सबभूअसुहारहो, सिक्साएमु समाउत्तो, आयस्प पिअक्रवणो ॥ ३ ॥
हदि धम्मस्थकामाण, निग्गथाण सुणेह मे। आयारगोअर मीम, सपल दुरहिडिअ ॥ ४ ॥
नन्नत्य एरिम धुत्त, ज लोए परमदुघर । पिग्लट्टाणमाइस्म, न भूअ न भविस्सइ ॥ ५ ॥
मसुड्डगविअचाण, बाहिआण च जे गुणा । अअसडफुडिआ कायद्या, त सुणेह जहा तहा ॥ ६ ॥
दस अट्ट य ठाणाइ, जाइ पालोअपरज्झड । तत्य अन्नयरे ठाणे, निग्गताओ भस्मः ॥७॥
वयछक कायछक, अफप्पो गिहिमायण । पलियफनिम [सि] ज्जा य, सिणाण मोहरज्जण ॥ ८॥
तस्थिम पढम ठाण, महावीरेण देसिअ । अहिंसा निउणा दिहा, सधभूएसु सजमो ॥ ९ ॥
जावति लोए पाणा, तसा अदुव थापरा । ते जाणमजाण वा, न हणे णो विधायए ।। १० ।।
मझे जीता वि इच्छति, जीविउ न मरिज्जिउ । तम्हा पाणिनह घोर, निग्गथा वज्जयति ण ॥ ११ ॥
अप्पणट्ठा पण्डा पाकोहा या जड वा भया। हिंसग न मुमं वूआ, नोनि अन्न वयापए ॥ १२॥
मुमानाओ यलोगम्मि, सबमाहूहि गरिहिओ। भविस्माओ य भूआण, तम्हा मोम रिवज्जए ॥ १३॥
चित्तमतमचित्त या, अप्प वा जद या बहु । दतसोहणमित्त पि, उग्गहसि अजाडया ॥ १४ ॥
त अप्पणा न गिण्हति, नो वि गिण्हापए पर। अन्न वा गिण्हमाण पि, नाणुजाणनि सजया ॥ १५ ॥
असमचरिअ घोर, पमाय दुरहिहिअ । नायरति मुणी लोए भेआयणरमिणो ॥ १६ ॥
मूलमेयमहम्मस्म, महादोमसमुस्मय । तम्हा मेहुणसगग्ग, निग्गथा वजयति ॥ ॥ १७ ॥
विडमुम्भेइम लोण, तिल्ड सपि फाणि । न ते सन्निहिमिन्छति, नायपुत्तवओरया ॥१८॥
लोहस्सेसणुफासे, मन्ने अन्नयरामवि । जे सिया सन्निहिं सामे, गिही पवइए न से ॥ १९ ॥
ज पि वत्थ च पाय ना, कवल पायपुछण | त पि सजमलगट्टा, धारति परिहरति अ॥ २० ।।
न सो परिग्गहो चुचो, नायपुत्तण नाणा । मुच्छा परिग्गहो वुत्तो. इह वुत्त महेसिणा ॥ २१ ।।
सरयुवहिणा उद्धा, सरक्सणपरिग्गहे अवि अप्पणोऽवि देहम्मि, नायरति ममाइय ॥ २२ ॥
अहो निच तो यम्म, सब युद्धेहि वन्नि । जा य लआसमा वित्ती, एगभच च भोअण ॥ २३ ॥
सति मे मुहमा पाणा, तसा अदुव थारा । जाइ राओ उपासतो, कहमेसणि चरे ॥ २४ ॥
उदउल्ल वीअससत्त, पाणा नियडिया महि। दिआ ताइ विजिजा, राओ एत्थ कह चरे । २५ ॥
एअ च दोस दटुण, नायपुत्तण भासिय । सधाहार न भुजवि, निग्गथा राइमोअण ॥ २६ ॥
पुढविकाय न हिंसति, मणसा वयसा कायसा। तिविहेण करणजोएण, सजया सुसमाहिआ ॥ २७ ॥
पुदविकाय विहिसतो, हिंसई उ तयस्मिए । उसे अ विविहे पाणे, चक्खुसे अ अचाखूसे ॥ २८ ।।
तम्हा एम विआणिचा, दोस दुग्गइवट्ठण । पुदनिकायसमारभ, जावजीवाए वअए । २९ ।।
आउकाय न हिंसति, मणमा क्यमा कायमा। तिविहेण करणजोएण, सजया सुसमाहिआ ॥ ३० ॥
श्रीदमवैकालिममत्र-पष्ठमाध्यपनम् आउसाय विहिंमतो, हिंमई तयस्सिए । तसे अविविहे पाणे, चक्खुसे अ अचक्सुसे ॥ ३१ ॥ सम्हा एअ विआणित्ता, दोस दुग्गहरडण । आउकायममारभ, जापजीवाए बजए ।। ३२ ॥ जायतेअन इच्छति पाग जलइत्तप । तिनयमनपर मत्थ, मबओ वि दुरासय ।। ३३ ।। पाईण पडिण वापि, उट्ट अणुदिमामगि । अहे दाहिणिओ गा वि दहे उत्तरओ वि अ॥ ३४ ॥ भूआणमेममाघाओ हवाहो न ससओ। त पईवपयापट्टा, मजया किंचि नारमे ।। ३५ ।। सम्हा एयरियाणित्ता, दोम दुग्गडयद्गुण । तेउपायसमारभ, जापजीना वजए ॥ ३६ ।। अणिलरम ममारम, युद्धा मनन्ति तारिस । मारजगहुल चेअ, नेत्र ताईहिं सेविअ ॥ ३७॥ तालिअटेण पत्तेण, साहाविहु अणेण था। न ते पीडउमिछति, बीआवेऊण वा पर ॥ ३८ ॥ जपि वय व (च) पाय ना, कपल पायपुषण न न वापमुईरति, जय परिहरति ॥ ३९ ॥ तम्हा एअ विआणित्ता, दोम दुग्गड्डण । गाउकायसमारम, जावज्जीपाए बजए ।। ४०॥ वणस्मइ न हिंसति, मणमा क्यमा कायसा । तिविहेण करणजोएण, मजया सुममाहिया ।। ४१ ।। चणस्सइ निहिनतो, हिंसइ उ तयस्मिए । तसे अपिपिहे पाणे, चक्सुसे अ अचाखुसे ॥ ४२ ॥ तन्हा एय वियाणित्ता, दोस दुग्गइवगुण । पणम्यह समारंभ, जापज्जीपाए वज्जए ।। ४३ ।। तमाय न हिंसति, मणसा ग्यसा कायमा । तिनिहेण करणजोएण, मजया सुसमाहिआ ॥ २४ ॥ तसकाय विहिंसतो, हिंमई उ तयस्थिए । तसे अ निरिह पाणे, चपखुसे अ अचक्नुसे ॥ ४५ ॥ तम्हा एअ विआणिचा, दोम दुग्गहवडण । तमझायममारम, जानीना [] नज्जए ॥ ४६ ॥ जाड चत्तारि भुज्जाइ, इसिणा हारमाइणि । ताह तु विज्नतो, मजम अणुपालए ॥४७॥ पिंड सिज्ज च पत्थ च, चउत्थ पायमेव य । प्राप्पियन इन्छिन्ना, पडिगाहिज्ज कप्पिा ॥४८॥ जे नियाग ममायति, कीअमुद्दोसिआहड । वह ते ममणुजाणति, इ उ ()त्त महेसिणा ॥ ४९ ॥ तम्हा अमणपाणाड, कीयमुद्देसियाहड । गज्जयति ठिअप्पाणो, निग्गया बम्मजीविणो ॥५०॥ कसे कमपाण्मु कुडभोपसु वा पुणो । भुजतो असणपाणाड, आयरा परिभम्सह ।। ५१ ।। सीओदग ममारमे, मत्तघोषणछडणे जाइ उनति भूआह, दिट्ठो तथ असजमो ।। ०२ ॥ पच्छायम्म पुरेफम्म, मिआ त थ न कप्पड । एअमट्ठ न भुजति, निग्गथा गिहिभायणे ।। ५३ ॥ आसदीपलिअक्सु, मचमामालएमु वा । अणायरिअमआण. भासदत्तु सइत्तु या ॥ ५० ॥ नासदीपलिअक्मु, न निसिजा न पीढए । निग्गया पडिलेहाए, वृद्धत्तमहिढगा ।। ५५ ।। गमीरविजया एए, पाणा दुप्पडिलेहगा। आसदी पलिअो अ, एयम विनिआ ॥ ५६ ॥ गोअरगपविट्ठस्स, निसिआ जस्म कप्पड़ । इमेणिसमणायार, आगजड अमोहिअ ॥ ५७ ॥ विरत्ती समरस्म, पाणाण च वहे वहो । वणीमगपडिग्याओ, पडिकोहो अणगारिण ।। ५८ ।। अगुची अमरस्स, इत्थीओ वा वि सक्ण । कुमीलपट्टण, ठाण, द्रो परिपजए ॥ ५० ॥ तिहमन्नयरागस्स, निसिना जस्म कप्पड ! नराए अमिभूअस्म, वाहिअम्म तवस्मिणो ॥ ६ ॥ वाहिओ वा अरोगी था, सिणाण जो उ पन्थए । चुक्तो होइ आयारो, जढो हबह मजमो ॥ ६१ ॥ सतिमे सुहमा पाणा, घमास मिलगामु आजे अमिक्खू सिणायतो, विअडेणुप्पिलावए ॥ ३२॥ तम्हा ते न सिणायति, सीपण उसिणेण या । जापनीव वयं घोर, असिणाणमहिगा ॥ ६३ ।।
(८८)
श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला.
सिणाण अदुवा पक, शुद्ध पउमगाणि । गायस्मृधणट्ठाए, नायरति कयाइ वि ॥ ६४ ॥
नर्गिणस्स बावि मुडम्म, दीहरोमनहसिणो। मेहुणागो यसतस्म, कि विभूसाय कारिम ॥६५॥
निभूसापत्ति भिमन्यू, कम्म बधइ चिाण | ससारमायरे घोरे, जेण पडइ दुरुत्तरे ।। ६६ ॥
निभूसापतिअ चेअ, उद्धा मन्नति तारिस | सानन बहुल चेअ, नेय ताईहि सेवित्र ।। ६७ ।।
ग्वाति अप्पाणममोहदसिणो, तवे रया सजम अअवे गुणे।
धुणति पावाइ पुरेकडाइ नाइ पापाइ न ते करति ॥ ॥६८॥
सओवसता अममा अकिवणा, मविनाविजाणुगया जससिणो।
उउप्पसन्ने विमले व चदिमा । सिद्धि विमाणाइ उति (वयति) ताइणो ॥ ६९ ॥
त्ति वेमि ॥ इअ उह धम्मत्यकामजप्रयण समत्त ॥६॥
॥ अह सुबकसुनी णाम सत्तम अज्झयण ॥
चउण्ह सलु भासाण, परिसपाय पनर । दुण्ह तु विणय सिरसे, दान भासिज्न सबमो॥१॥
जा अ सचा अपत्तधा, मघामोमा अजा मुसा । जा अ बुद्धेहिं नाइन्ना, न त भामिज पन्नर ॥ २ ॥
असचमोस सच च, अणवज्जमरकस । समुप्पेहमरादिद् गिर भासिन पन्ना ॥ ३ ॥
एय च अद्वमन्न घा, जतु नामेइ सासय । स भास सच्चमोम च पि त (पि) धीरो विवज्जए ॥ ॥
गितह पि तहामुत्ति, ज गिर भासो नरो । बम्हा सो पुट्ठो पावेण, कि पुण जो मुस व ॥ ५ ॥
तम्हा गच्छामो नक्सामो, अमुग गाणे मविस्सह ।
अह वा ण करिम्सामि, एसो वा ण करिस्सह ॥
एवमाइ उ जा भासा, एसकालम्मि सफिआ। सपपाइअमढे वा, व पि धीरो विनज्नए ॥७॥
अईअम्मि अ कालम्मि, पन्चुप्पण्णमणागए। जमट्ट तु न जाणिज्जा, एपमे ति नो वए ।॥ ८॥
अहअम्मि अ फालम्भि, पच्चुप्पण्णमणागए । जत्य सका भवे त तु, एवमेअ तु नो वए ॥९॥
अईअम्मि य कालम्मि, पच्चुप्पणमणागए । निस्मकिअ भवे ज तु, एवमेअ तु निहिसे ॥ १० ॥
तहेब फरुमा मासा, गुरुभूओवघाइणी | सचा वि सा न वचक्षा, जओ पारस्स आगमो ॥ ११ ॥
वहेव काण काणति, पडग पड़गति था। वाहिजपा वि रोगि ति, तेण चोरे ति नो वए ।॥ १२॥
एएणनेण अद्वेण, परो जेणुमहम्मह। आयारमावदोसन्न्, न त मासिज्ज पण्णव || १३ ॥
वहल होले गोलि त्ति, साणे वा वसुलि त्ति । दमग दुहए वा वि, नेव भामिज्ज पण्णव ॥ १४ ॥
अजिनए पज्जिए या वि, अम्मो माउस्सिा ति अ।
पिउस्सिए भायणिज्ज चि, धूए णतुणिअ ति अ ।।
हले हलिचि अनि ति, भट्टे मामिणि गोमिणि ।,
होले गोले यसुलि ति, इत्थिा नेवमालवे, ।।
गामधिज्नेण ण चूला, इत्थीपुत्तेण या पुणोजिहारिहमभिगिज्दा, आलविज्ज लविज्ज वा ॥ १७ ॥
- श्रीदमवैकालिकसूत्र-सप्तमाध्ययनम् (८९) अन्जए पन्जए या वि, वप्पो चुल्लपिउत्ति आमाउलो भाइणिज्ज ति, पुत्ते णनुणि ति अ॥ १८ ॥ हे भो! हलिति अन्नित्ति, मट्टा सामि अगोमिअ । होला गोल बमुलिचि, पुरिम नेवमालवे ॥ १९ ॥ नामधिज्जेण ण चूआ, परिगुत्तेण वा पुणो। जहारिहमभिगिज्झ, आलविज लविज वा ॥ २० ॥ पचिंदिआण पाणाण, एम इत्थी अय पुम जान ण नो विजाणिजा, तार जाइ ति आलवे ॥२१॥ तहेव मणुस एसु, पक्सि मा वि सरीसिर । धूले पमेइले बज्झे, पाइमि त्ति अ नो वा ॥ २२ ॥ परिवुढे त्ति ण धूआ, सूआ उपविण् ति । सजाए पीणिए चापि महाकाय ति आलवे ॥ २३ ॥ तहेव गाओ दुज्झाओ, दम्मा गोरहग त्ति । वाहिमा रहजोगि ति, नेर भासिन पण्णव ॥ २४ ॥ जुन गवि ति ण दुआ, घेणु रसदय त्ति अा रहस्से महल्लए वा वि. वए सरहाणि ति अ ॥ २० ॥ तहेन गतमुजाण, पछयाणि वणाणि अ । रक्सा महल पेहाए, नेर भामिझ पण्णव ॥ २६ ॥ अल पामायसमाण, तोरणाणि गिहाणि अ। फलिहग्गलनागाण, अल उदगदोणिण ॥ २७ ।। पीढए चगवेरे अ, नगले महय मिआ। जतलठ्ठी व नाभी वा, गडि आ व अल सिआ ॥ २८ ॥ आमण सयण जाण, हुजा ना किंचुवस्मण । भूओवधारणिं भाम, नेव भासिज पण्णय ।। २९ ।। तहेर गतुमुजाण, पद्ययाणि रणाणि अ । रक्सा महल्ल पैहाए, एव भासिज पण्णन ॥ ३० ॥ जाइमता इमे रुस्सा, दीहरट्टा महालया। पयायसाला विडिमा, पए दरिमणि त्ति अ॥ ३१ ॥ सहा फलाइ पकाइ, पायपाइ नो वए। वेलोड्याई टालाइ, वेहिमाइ ति नो वए ॥ ३०॥ अमथडा इमे अपा, बहुनिघडिमा फला। पइज बहुमभूआ, भूअरून शिया पुणो ॥ ३३ ॥ तहेनोसहीओ पकाओ, नीलिआओ छवीइ । लाइमा भञ्जिमाउत्ति, पिहुगज ति नो पए ॥ ३४॥ रूढा बहुसभूआ, थिरा ओमढा वि अ । गम्भिआओ पसआओ, समाराउ ति आलरे ॥ ३५ ॥ तहेव ससडि नचा, किच का ति नो गए। सेणग वापि वझि ति, मुतिथि ति अ आनगा ॥ ॥३६॥ ससडि ससडिं चूआ, पणिअट्ट ति तेणग । बहुसमानि तित्याणि, आवगाण विआगरे॥ तहा नईओ पुण्णाओ, पायतिज सि नो वए । नावहिं तारिमाउ ति, पाणिपिज ति नो वए । ॥ ३८॥ बहुवाहडा अगाहा, पहुसलिलुप्पिलोदगा । बहुवित्थडोदगा आवि, एव भासिन्न पण्णव ।। ३९ ।। तहेव सापन्न जोग, परम्सट्ठा अनिटिअ। कीरमाण ति वा नचा, सापन्न न लवे मुणी ॥४०॥ सुरडि नि मुपकि त्ति, सुच्छिन्ने सुहडे मडे । मुनिट्टिए सुट्टित्ति, मानज्न बजए मुणी । ४१ ॥ पयत्तपकि ति व पकमालवे, पयत्तछिन्न त्ति न छिन्नमालवे । पपत्तलहित्ति व कम्महे उअ, पहारगाढि त्ति व गाढमालवे ।। ॥ ४२ ॥ सकस परग्ध था, अउल नत्थि एरिम | अपिशिअमरतव, अचित्त चेत्र नो वए ॥४॥ मधमेश वइस्मामि, मधमेति नो वए। अणुनीड सब सवत्य, एवं भासिज पण्णः ॥ ४४ ॥ मुकीय वा सुविकीअ, अफिज्न मिजमेन या। इम गिण्ह इम मुच, पणिण नो विभागरे ॥ १५ ॥ , -
श्रीजैनसिदान्त-स्वाध्यायमाला
अपग्धे वा गहग्य घा, कस चा विकए वि या ! पडिअट्ट समुप्पन्ने, अणवन विआगरे ॥ ४६ ॥
तहेवासजय धीरो, आस एहि करहिया। मपचिट्ट पयादित्ति, नेव मासिज पण्णर ४७॥
बहवे इमे असाहू, लोग बुधति साहुणो । न लो अमाहु साहुत्ति. माहु माहुचि आलवे ।। ४८ ॥
नाणदसणसपन्न, सजम अ तव रयं । एव गुणसमाउत्त, सजय माहुमालवे ॥ १९ ॥
देवाण मणुआण च, तिरिमाण च बुग्गह । अमुगाण जओ होउ, मा वा होउति नो व ॥ ५० ॥
नाओ पुट्ट व सीउण्ह, मेम धाय मिर ति वा ।
कया णु हुम एयाणि, मा वा होउ ति नो वए । ५१ ।।
तहेव मेह य नह मणम, न देवदेव ति गिर पहना।
समुन्छिा उन्नए या पओए, बहन वा युट्ट पलाहय ति ॥ ५२ ॥
अवलिक्स चि ण मा, गुज्माणुचरिक्ष ति ।
रिद्धिमत दिस्म, रिद्धिमत ति आलवे ॥ ५३ ।।
तहे मारसणुमोअणी गिरा, जा य परोपघायणी।
मे कोह लोह भय हाम माणबो, न हाममाणो विगिर पडला ॥४॥
मुरकसुद्धिं ममुपहिआ मुणी, गिर च दुट्ठ परिवनए मया ।
मिअ अदुढे अणुवीड भासप, सयाण मझे लहई पसमण ।। ५५ ।।
मामाइ दोसे अगुणे अजाणिमा,तीसेअ दुटे परिपत्रए सपा ।
उमु सनए मामणिए मया जए, पहज्ज युद्धे हिअमाणुलोष ॥५६॥
परिक्समासी मुममाहिइदिए, चउममायावगए अणिस्सिए ।
म निधुणे धुत्तमल पुरपड, आराहए लोगमणि तहा पर ॥ ५७ ॥
त्ति वेमि ॥ अ मुरमसुद्दीनाम मत्तम अन्नपण ममत्त ॥ ७ ॥
श्रीदमकालिम्पन-अट्ठमाध्ययनम् ॥ अह आयारयणिही अहमम झयण ॥ . . आयाग्पणिहि लद्, नहा सायच मिरसुणा । त मे उदाहरिम्सामि, आणुविं सुणेह मे ॥१॥ पुढविदगअगणिमात्र, तणामस्म वीयगा । तमा अपाणा जीप ति, इइ वृत्त महेसिणा ॥ २ ॥ तेमि अच्छणनोएण, निच होअनय मि। मणमा काययकेण, एष हवड सजए ॥ ३ ॥ पुनि मिति सिल ले, नेर मिटे न मलिहे। तिविण करणजोएण, मनए सुममाहिए ॥४॥ मुद्धपुढवी न निमीए, समरकवम्मि अ आमणे। पमनित निसीडा, जाइत्ता जम्म उग्गह ॥ ५॥ सीओदगं न सेविजा, सिलाट्ट हिमाणि अ। उसिणोदध तत्तफामुअ, पटिगाहिब मजए ॥ ६ ॥ उदउछ अप्पणो काय, नेर पुरे म मलिहे । समुप्पेठ तहाभूत्र, नो ण मघटए मुणी ।। ७ ॥ इगाल अगणि अचिं, अलाय वा सजोडमान उजिज्जा न घहिना, नो ण निधारए वालिअटेण पत्तेण, साहाए विट्ठयणेण या! न वीइज्ज अपणो काप, बाहिर गा वि पुग्गल ॥ ९ ॥ तणरुक्प न डिदिज्जा, फल मूल च कस्सह । आमग विविह पीअ, मणमा वि ण पत्थए ॥ १० ॥ गहणेसु न चिहिज्जा, वीण्मु हरिएसुना। उदगम्मि तहा निच, उत्र्तिगपणगेम वा ॥ ११ ॥ तसे पाणे न हिसिज्जा, वाया अदुव सम्मुणा । उपरओ सबभूएसु, पारन रिविह जग ।। १२ ।। अह मुहमाह पहाए जाइ जाणितु मजए । दयाहिगारी भूएम, आस चिट्ठ सएहि या ॥ १३ ॥ क्यगइ अट्ट सुगुमाइ. जाइ पुच्छिज्ज मजए। इमाइ नाइ मेहावी, आइक्सिजन रिअखणो ॥ १४ ॥ सिणेह पुष्फमुहुम च, पाणुत्तिंग एहेन य । पणग बीअ इग्नि च, अटमुगुम च अट्टम ॥ १० ॥ एयमेआणि जाणित्ता, समावेण सजए। अप्पमत्तो जए निच, मधिदिअममाहिए ॥ १६ ॥ धुप च पडिले हिज्जा, जोगवा पायक्वल । सिजमुच्चारभूमि च, मधार अदुवामण ॥ १७ ॥ उच्चार पामरण, मेल मिघाणजल्लिभ । फासुअ पडिलेहिता, परिहाविज्ज मजए ॥ १८ ॥ परिमित परागार, पाणट्ठा भोअणस्स या । जय चिट्टे मिअ मासे, न य रुवेमु मण करे ॥ १९ ॥ बहु मुणेड कपणेहि, पहु अन्छीहि पिन्छ । न य दिव मुन मन्य भिक्म् अक्पाउमरिहड ॥ २० ॥ सुअवा जड वा दिइ, न लरिजोरपा । न य ण उपाण्ण, गिहिजोग ममायरे ॥ २०॥ निट्ठाण सनीजह, भटग पारग ति वा । पुट्ठो यानि अपुट्ठो वा, लामालाम न निदिसे ॥ २२ ॥ न य भो अणम्मि गिदो, चर उछ अयपिरो। अफासुन मुजीना, शीअमुझे पिआइड ॥ २३ ॥ मनिहीं च न कृधिज्जा, अणुमाय पि मजप । मुद्दाजीची अमरद्धे, हपिज्ज जगनिस्मिए ।। २४ ।। लहपित्ति मुमतुडे, अपिन्छे सुहर मिआ । आमरत न गन्छिन्ना, सुचा ण निणमामण || २५॥ रणमुक्खेहि सद्देहि, प्रेम नामिनि वैमए । दारुण रकम फाम, कारण अहिआयए ॥ २६ सुह पिचास दुस्सिज्ज, मीउण्ह अरह भय । आहिआसे अव्वाहिओ दह ग महाफा 1000 अत्य गयम्मि आइन्चे, पुरत्या अ अणुग्गए । आहारभाइअ मव्य, मणमा रिण पथए ॥ २८ अनितिणे अचाले, अप्पमामी, मिश्रामणे । हविज उअरे दत्ते, योर लधु न पिमण । २० न पाहिर पग्मि अत्ताण न ममुबसे । मुअलामे न मन्निना, नया तपम्मि युद्धिप ॥ ३० ।
" - श्रीजेनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला से जाणमजाण वा, कटु आहम्मिभ पय । सबरे सिप्पमप्पाण, पीअ त न समायरे ॥ ३१ ॥ अणायार परकम्म, नेव गृहे न निण्हवे । सुई सया रियडभावे, असमत्ते जिइदिए ॥ ३०॥ अमोह चयण कुज्जा, आयरीअस्स महप्पणो। त परिगिज्झ वायाए, कम्मुणा उपनायए ॥ ३३ ॥ अधुव जीविअनचा, सिद्धिमग्ग विआणिआ। पिणिअहिज्ज मोगेम, आउ परिमिअमप्पणो॥ ३४ ॥ चल थाम च पेहाए, मद्धामारुग्ममप्पणो । खित्त काल च विनाय, तहप्पाण निजुजए ॥ ३५ ॥ जरा जाव न पीडेड, चाही जाव न वइ । जाविंदिआ न हायति, ताव धम्म समायरे ॥ ३६ ॥ कोह माण च माय च, लोभ च पारनडण । मे चत्तारि दोसे उ, इच्छतो हिअमप्पणो ॥ ३७ ।। कोहो पीइ पणासेड, माणो विणयनासणो । माया मित्ताणि नासेइ, लोभो सबविणामणो ॥ ३८ ॥ उवसमेण हणे कोह, माण मद्दवया जिणे । मायमन्जनभावण, लोभ सतोसओ जिणे ॥३९॥ कोहो अमाणो अ अणिग्गहीआ, माया अ लोभो अ पवड्डमाणा । चत्तारि एए कसिणा कसाया, सिंचति मूलाइ पुण भस्म ॥ ॥४०॥ रायणिएसु विणय पउजे, धुरसीलय गयय न हारइजा । कुम्मुन अल्लीणपलीणगुत्तो, परकमिना तपसनम्मि । ॥४१॥ निद्द च न बहु मनिज्जा, मप्पहास विवज्जए। मिहो कहाहिं न रमे, मज्झायम्मि रओसया ॥४॥ जोग च समणधम्मम्मि, जुजे अनलसोधुन । जुचो अ समणधम्मम्मि, अट्ठ लहइ णणुत्तर ।। ४३ इहलोगपारत्तहिअ, जेण गच्छइ सुग्गइ । बहुस्सुअ पज्जुनासिज्जा, पुचिउज्जत्थविणिच्छा ।। ४४ ॥ हत्य पाय च काय च, पणिहाय जिइदिए । अल्लीणगुत्तो निसिए, मगासे गुरुणो मुणी ॥ ४५ ॥ न पासओ न पुरो, नेर फिच्चाण पिट्टओ। न य ऊरु समासिज्ज, चिट्ठिज्जा गुरुणतिए ॥ ४६ ।। अपुच्छिओ न भासिज्जा, भासमाणम्स अवरा। पिट्टिमस न साइज्जा, मायामोस विवज्जए । ४७ ॥ अप्पति जेण सिआ, आसु कुप्पिज्ज वा परो । सब्यसो त न भासिज्जा, भास अहिअगामिणि ॥ दिट्ट मिअ अमंदिद्ध, पडिपुन विज जिअ । अयपिरमणुधिग्ग, भास निसिर अत्तर ॥ ४२ ॥ आयारपन्नतिघर, दिट्ठिवायमहिज्जग। वापविक्सलिअ नचा, न त उवहसे मुणी ॥ ५० ॥ नक्सत्त सुमिण जोग, निमित्त मतमेसज । गिहिणो त न आइक्खे, भूआहिगरण पय ॥ १॥ अनह पगड लयण, भइज्जा सयणामण । उच्चारभूमिमपन्न, इत्यीपसुविवन्निा ॥ ५२.५॥ विवित्ता अ भवे सिन्ना, नारीण न लवे कह । गिहिमथव न पुज्जा, कुज्जा माहूहि सथव ।। ३ ॥ जहा पुक्सुडपोअम्स, निच कुललओ भय । पव सू नभयारिस्म, इत्यीविग्गही नय ।। ५४ ।। चित्तमित्तिं न निज्झाए, नारिं वा सअलकिन। भक्खर पिव दट्टण, दिहि पडिमसमाहरे ॥ ५५ ॥ हत्यपायपडिन्छिन्न, कमनासविगप्पिा । अवि वासमय नारिं, यमयारि विवज्जाए ।। ५६ ।। विभूमा इथिममग्गी, पणी रसभोअण। नरम्पत्तगवेमिम्स, पिम तालउड जहा ॥ ५७ ॥ अगपचगमठाण, चारलविअप्पहिल। इत्थीण त न गिज्झाए, कामरागविरड्डण ।। ५८ ॥ पिमएमु मणुष्णेसु, पेम नामिनिमए । अणिच तेसि विण्णाय, परिणाम पुग्गलाण उ ॥ ५९॥ - ॥ ४८ " श्रीदमबैकालिकात्र-अट्टमाध्ययनम् पोग्गलाण परिणाम, तेसिं नया जहा तहा। विणीअतिण्हो विहरे, सीईभूएण अप्पणा ॥ ६ ॥ जाइ सद्धाइ निक्खतो, परिआयट्ठाणमुत्तम । तमेर अणुपालिज्जा, गुणे आयरियसमए ॥ ६१॥ तव चिम सजमजोगय च, सज्झायजोग च सया अहिट्ट ए । सूरे व सेणाइ सम्मत्तमाउहे, अलमप्पणो होड अल परमि ॥ ६ ॥ सज्झायसुज्याणरयस्म ताइणो, अपानभावस्म तवे ग्यस्स । विसुज्झई ज सि मल पुरेकड, समीरिअ स्प्पमल न जोइणा ।। ६३ ।। से तारिसे दुषसमहे जिदिए, सुएण जुत्ते अममे अकिंचणे । विरायई कम्मघणम्मि अगए, कसिण भपुडारगमे व चदिम ॥ ६४ ॥ ति वेमि || अ आयारपणिही णाम अहममायण ममत्त ॥८॥ ~ ॥ अह पिणयसमाही णाम नरममज्झयण ॥ थमा र कोहा व मयप्पमाया, गुरुरमगासे विणय न सिम्से। सो चेव उ तम्स अभूहमानो, फल व कीअस्स बहाय होड ॥१॥ जे आवि मदि ति गुरु विडत्ता, डहरे इमे अप्पसुपति नचा। हीलति मिन्छ पडियजमाणा, करति आसायण ते गुरुण ॥ २॥ पगर्दए मदा विभाति पगे, डहरा नि अजे सुअशुद्धोववेत्रा। आयारमना गुणमुट्टिअप्पा, जे हीलिआ सिहिरिव भास कुञा ॥ ३ ॥ जे आवि नाग दहर ति नचा, आमायए से अहिआय हो । पवारियन पि हीलयतो, निअच्छई आइपह सु मदो (दे) ॥ ४ ॥ आसीरिसो गावि पर मुरहो, कि जीरनामाउ पर न कुआ। आयरिआया पुण अप्पसन्ना, बोहिमायण नस्थि मुक्यो॥५॥ जो पारगजलि अमरकमिझा,आसीविम वा मिदु कोडना। जो वा विस सायह जीविअट्ठी, एमोसमामायणगा गुरूण ॥६॥ सिमा हुसे पापय नो डहिला,आमीचिसो पानिओन भरने। सिआ निम हालहल न माग, न आदि मुस्यो गुरुहीलणाए ॥ ७॥ जो पदय सिरसा मिनुमिच्ने, मुत्त च सीह पडिगोहहना । जो पाटा सचिअग्गे पहार, एमोरमामायणया गुरुण ॥ ८ ॥ सिआइ सीसेण गिरि पिमिद,सिाह सीहो कुविओन भस्म । सिआ नमिंदिर सत्तिअग्ग, न आनि मुसो गुम्हीलमाए ॥९॥ आयरिअपाया पुण अपमन्ना,अमोहिआमायण नत्थि मुक्यो । तम्हा अणानासुहाभिकसी, गुरुप्पमायाभिमुहो रमिजा ॥ १० ॥ जहाहिअग्गी जलण नमसे, नाणाहुईमतपयामिसित्त । -
(९४)
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श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला.
एवायरिअ उवचिट्ठइज्जा, अणतनाणोजगओ वि सतो ॥११॥
जस्सतिए धम्मपयाइ सिक्खे, तस्सतिए वेणइय पउजे ।
सकारए सिरसा पजलीओ, कायरिगरा भो मणसा अनिच्च ॥ १२ ॥
लज्जा दया सजमवभरं, कलाणभागिस्स विसोहिठाण ।
जे मे गुरू सययमणुसासयति, तेहिं गुरू सयय पूजयामि ।। १३ ॥
जहा निसते तवणचिमाली, पभासई केलभारह तु।
एवायरिओ सुअसीलवृद्धिए, विरायई सुरमझे व इदो ॥ १४ ॥
जहा ससी कोमुइजोगजुत्तो, नक्सचतारागणपरिवुडप्पा ।
खे सोहई निमले अन्भमुके, एव गणी सोहइ भिक्सुमुज्झे ।। १५ ।।
महागरा आयरिआ महेसी, ममाहिजोगे सुअसीलबुद्धिए ।
सपाविउकामे अणुत्तराड, आराहए तोसइ धम्मकामी ॥१६॥
मुचा ण मेहाची सुभासिआइ, मुस्मए आयरिअप्पमत्तो।
आराहइत्ताण गुणे अणेगे, से पावई सिद्धिमणुत्तर त्ति बेमि ॥ १७ ॥
॥ इअ विणयसमाहिज्ायणे पढमो उद्दसो ममत्तो ।।
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मूलाउ सघप्पभगो दुमस्म, सघाउ पच्छा समुर्विति साहा ।
साहप्पसाहा विग्हति पचा, तओसि (से)पुप्फ च फल रसोअ ॥ ॥१॥
एव धम्मस्स पिणओ, मूल परमो अ से मुक्यो, जेण कित्तिं सुअ सिद्ध, नीसेस चाभिगच्छड ॥२॥
जे अ चडे मिए थद्धे, दुचाई नियडी सढे। उज्झड से अविणीअप्पा, क्ह सोअगय जहा ॥ ३ ॥
विणयम्मि जो उवाएण, चोडओ कुप्पइ नरो । दिव्य मो सिरिमिन्नति, दडेण पडिसेहिए ॥४॥
तहेव अपिणीजप्पा, उनमज्झा हया गया। दीसति दुहमेहता, आभिओगमुवद्विआ॥५॥
वहेव मुविणीअप्पा, उपवज्झा हया गया। दीसति सुहमेहता, इष्टि पत्ता महायसा ॥ ६ ॥
तहेव अविणीअप्पा, लोगम्मि नरनारिओ । दीसति दुहमेहता, छाया ते विगलिंदिआ ॥७॥
दडसस्थपरिज्जुना, अमन्भपयणेहि अ । ग्लुणा विवन्नछदा, सुप्पियामपरिग्गया ॥८॥
तहेव रविणीअप्पा, लोगसि नरनारिलो । दामति सुहमेहता, इदि पता महायसा ॥ ९ ॥
तहेव अविणीअप्पा, देना जक्या अ गुज्झगा । दीमति दुहमेहता, आमिओगमुपहिआ। १० ॥
तहेय सुविणीअप्पा, दया जक्सा अ गुज्झगा । दीसति मुहमेहता, इड्डेि पत्ता महायसा ॥ ११ ॥
जे आयरिअमझायाण, मुस्समायण करे।तेसिं सिक्पा पचड्ढति, जलसित्ता इव पाया ।। १०॥
अप्पणट्ठा परट्ठा वा, सिप्पा णेउणिआणि अ । गिहिणो उमभोगट्ठा, इहरोगस्म कारणा ॥ १३ ॥
जेण यध वह घोर, परिआर च दारण । सिक्यमाणा निअन्छति, जुचा ते ललिददिआ ॥ १४ ॥
वे वि त गुरु पूअति, तस्स सिप्पस्म कारणा । मकारति नममति, तुट्ठा निर्देसनचिणो ।। १५ ।।
किं पुण जे सुअग्गाही, अणतहिअकामए । आयरिआज न मिक्खू तम्हा त नाइवसए ॥ १६ ॥
Namah
श्रीदसवैकालिकसूत्र-नरमाध्ययनम्
नीअ सिज्ज गह ठाण, नीच आमणाणि आनीमच पाए वदिजा, नीमज्जा अ अजलि ।। १७ ।।
सघहत्ता कारण, तहा उपहिणामवि । रामेह अवराह मे, पडलन पुणु ति अ॥१८॥
दुग्गओ वा पओएण, चोडओ बहइ रह । एव दुबुद्धि फियाण, वृत्तो वृत्तो पपइ ।। १९ ।।
आलवते लपते वा, न निसिनाए पडिस्सुणे । मुत्तूण आसण धीरो, सुस्ममाए पडिस्मणे ॥ २० ॥
काल छंदोवपार थ, पडिलेहिताण हेउहि । तेण तेण उनाएण, त त सपडियायए ॥२१॥
विरति अविणीअम्म, सपत्नी चिणिभस्म य । जस्सेय दुइओ नाप, सिक्स से अमिगच्छइ ।। २२ ॥
जे आवि चडे महइष्टिगारये, पिणे नरे साहसडीणपेसणे ।
अदिट्टधम्मे विणए अकोगिए,अमरिभागी न हु तस्स मुक्सो ॥
निदेसविची पुण जे गुरुणं, सुअत्यधम्मा रिणयम्मि कोचिआ।
तरितु ते ओधमिण दुरुत्तरं, सचित्तु क्म्म गइमृत्तम गया । ॥२४॥
त्ति बेमि इअ विणयसमाहिणामारणे पीओ उदेमो समत्तो॥
आपरिअ(अ) अग्गिमिवाहिअग्गी, मुस्सममाणोपडिजागरित्रा।
आलोअ इगिअमेय नना, जो छदमाराहयई म पुज्जो ॥१॥
आयारमट्ठा विणय पउने, सुस्म्ममाणो परिगिझ वक।
जहोयइद अमिक्रामाणो, गुरु च नासायइ जे म पुज्जो ॥ २ ॥
रायणिएमु विणय पउजे ठहरा वि अजै परिआयजिहा।
नीअतणे पट्टइ सचबई, ओगाया चकमरे म पुजो ।। ३ ।।
अन्नायउछ चरई विसुद्ध, जवणया ममुआण च निच ।
अलपुआ नो परिदेव इन्ना, लधु न विकत्थई स पुज्जो ॥४॥
सयारसिझामणभत्तपाणे, अपिच्छया अइलामे पि मने ।
जो एवमप्पाणमितीसइजा, सतोसपाहन्नरए स पुजो ॥५॥
मका सहउ आमाइ कटया, अबओमया उच्छहया नरेण ।
अणासए जो उ सहिल कटप, ईमए कन्नसर स पुलो। ॥
मुदत्तवा उ हरति कठया, अओमया ते नि तओ मृउद्धरा ।
वायादुरुत्ताणि दुरद्धराणि, वेराणुवीणि मयुन्भयाणि ॥ ७ ॥
समाययता रयणाभिधाया, कनगया दुम्मणिअ जाणति ।
धम्मु ति चिा परमगरे, निहदिए जो महई स पृओ ॥ ८॥
अवण्णवाय च परम्मुहस्म, पञ्चसओ पडिणीअ च भाम।
जोहारणिं अप्पिसारणिं च, माम न भासिन्न मया स पुज्जो ॥ ९ ॥
अलोलए अहए अमाई, अपिमुणे आघि अदीणचित्ती ।
नो भारएनो बिमारिअप्पा, अमोउहाटे असया म प्रजो ॥१०॥
श्रीननसिदान्त-स्वाध्यायमाला गुणेदि साह अगुणेदिऽसाहू, गिहाहि माह गुण अचऽमाह । विआणिा अप्पगमप्पण्ण, जो रागदोसहि ममो स पन्नो ॥१॥ तर डहर च महालग घा, त्यो शुम पास गिहिया। नो हील नो पि असिंमाना म प पोहं प नए पुलो ॥ १२ ॥ जे माणिआ मपयय माणयति जत्तेण पन र निमयति । ते माणण माणरिहे तपस्सी, निदिए गवरण म पुजो ॥ १३ ॥ तेमि गुम्ण गुणगायगण, मुराण मेहामि गुमासिबार। चरे मुणी पचर निगुनो, गामायारगए स पुज्नो ॥ १४ ॥ गुरुमिद मयय पटिगरिश मुणी,निणमयनिरणे अभिगमगले । धुणि रयमल फड, मागुम्मउल गह यह ( गय) ॥१५॥ त्ति बेमि ।। इअ रिणाममा ताओ उद्देमो ममत्तो॥ मुझ मे आउन-तेण भगवथा एवमपाय । र गल थेगेहिं भगतहि चत्तारि विणयसमा हिठाणा पन्नत्ता । क्यरे गल ने पेरेहिं भगवहिं चनारि पिणयममाहिट्टाणा परता। इमे गल ते परेहिं भगरनहि चत्तारि विणयसमाहिट्टाणा पमता। महा-विणयसमाही, मुअसमादी, तवम- माही, आयारममाही । "विणणे सुए अतवे, प्राचार निघ पडिआ। अमिगमयति अप्पाण, जे भवति जिइदिआ" चउबिहा स विणयममाही भाः। तनहा-अणुमासिनतो, सस्यमइ । मम्म पडियनइ । पयमाराहइ । न य भरड अरासपग्गदिए। चउत्य पय भवः । मगर अभय सिलोगो।। "पहेड हिसाणुमामण, मुम्मूमह त च पुणो अहिटिए । न य माणमण्ण मजा, विणयममाहिला. ययहिए" ॥ २॥ चउधिहा मल सुअमगाही मनः। ननहा-गुअ मे मरिम्मा नि अन्माइअब भनइ । एगग्गचित्तो भरिम्सामि ति अन्माइअक्षय भह । अप्पाण ठाइस्मामि चि असाइअक्षय भवइ। ठिओ पर ठापटस्मामि ति अज्झाइयं भगइ। उत्य पप भामा अन्य सिरोगी। "नाणमेगग्गचित्तो अ, ठिओ अ अवह पर । मुआणि अ अहिनिता, ओ मुअमाहि" ॥ ३॥ घरविहा सलु तपसमाही भनइ । जहा-नो इहलोगट्टयाए तरमदिहिना, नो पग्लोगट्ठयाए तब- महिहिन्या, नो कित्तिनमहसिलोगहभाए तरमहिडिल्ला, ननस्थ निबाहयाए तरमहिहिना । चउत्थ पय भवइ । भाइ अ इत्थ सिलोगो । "पिरिहगुणतोरए, निध मवड विगसए निसर- हिए । तयसा धुगइ पुराणपाग, जुत्तो गया तबसमाहिए"।। ४ ॥ चउबिहा गल आपारसमाही भवा । तजहा-नो इहलोगट्टयाए आयारमहिहिजना, नो नो परलोगट्टपाए आयारमहिहिन्न, नो कितिनन्नमसिलोगट्टयाए आयारमहिहिना, नामस्थ आरहतेहिं हेउहिं आयारमहिहिना । चउत्थ पय भाइ । भवड अ इत्थ सिलोगो । “जिणश्यणरण अतितणे, पडिपुनाययमागपट्टिए । आया. समाहिसयुडे, भह अ दते भारसपए ॥ ४ ॥ अभिगम चउरो समाहिओ, मुविमुद्धो सुममाहिम प्पणो । विउलहिय सुदारह पुणो, बुबइ अ सो पपखेममप्पणो ॥ ६॥ जाइमरणाओ मुखइ इत्यस्य न --
श्रीदसवैकालिकसूत्र-दममाम्ययनम्
च चएइ सहसो । सिद्ध वा हाइ सासए, देवे वा अप्परए महिट्टिए ॥७॥
त्ति वेमि ।। इअ विणयममाही नाम चउत्थो उद्देमो नरममायण समत्त ॥ ९॥
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॥ अह भिखू नाम दसममल्झयण ॥
तिक्सम्ममाणाइ अबुद्धक्यणे, निच चित्तसमाहिओ हरिज्मा ।
इत्थीण यस न आरि गई, वत नो पडिआरइ जे म मिक्खू ।। १ ।।
पुढवि न सणे न सणापए, सीमोदग न पिए न पिआरए ।
अगणि सत्य जहा मुनिसिअ, त न जले न जलाए जे म भिक्खू ॥२॥
अनिलेण न वीए न वीयारण, हरियाणि न छिंदे न ढिारए ।
पीआणि मया विमज्जपत्तो, सचित्त नाहारए जे स मिक्बू ॥३॥
वहण
तसथागण होइ, पुढरितणाहनिस्मिआण ।
तम्हा उसिभ न भुजे नो नि, पए न पयावप जे स भिरस् ॥ ४ ॥
रोइअ नायपुत्तपयणे, अत्तममे मनिन्न उप्पि का ।
पच य फासे मइयाइ, पचामवसारे जे स भिक्यू ॥५॥
चत्तारि बमे मया कमाए, धुनजोगी हरिज युद्धवयणे ।
अहणे निझायरूपरयए, गिहिजोग परिवाए जे स मिक्स् ॥ ६॥
सम्मदिट्ठी सया अमूढे, अस्थि हु नाणे तवे सजमे ।
तसा धुणइ पुराणपाग, मणरयकायमुसमुढे जे म मिक्स् ॥ ७ ॥
तहेर असण पाणग वा, विविह साइममाम लभित्ता ।
होही अट्टो सुए परेवा, त न निहे न निहारए जे म भिक्यू ॥ ८॥
तहेव अमण पाणग ना, विविह माइममा म लमित्ता।
छदिश साहम्मिआण भुने, भुचा मज्मायरए जे म भिक्यू ॥९॥
न य युग्गहिअ कह कहिसा, न य कुप्पे निहुइदिए पसते ।
सजमधुनजोगजुत्ते, उपसते उपहेदए ने स भिक्खू ॥ १० ॥
जो गहह हु गामक्टए, अहोमपहारतजणाओ ।
भयमेरवसहसप्पहासे, समसुहदुक्पसहे अ जे स भिक्ख ॥ ११ ॥
पडिम पडिवजिआ समाणे, नो भायए मय मेरवाह दिम्म ।
विविहगुणतवोरए अनिच, न सरीर चाभिस्सए जे समिक्स् ॥ १२ ॥
अमई वोसिद्वचत्तदेहे, अबुट्टे व हए लूसिए था।
पुढविममे मुणी इविक्षा अनिआणे अकोउहल्ले जे म मिक्म्य ॥ १३ ॥
अमिभूअ कारण परीमहाइ, समृद्धरे जाइपहाउ अणय ।
विउत्तु जाईमरण महम्भय, तवे रए सामणिए जे स भिक्स् ॥ १४ ॥
. . (९८) श्रीजनसिद्धान्त-खाध्यायमाला. हत्थसजए पायसजए, वायसजए सजइदिए। अज्झप्परए सुसमाहिअप्पा, सुत्तत्थ च विआणड जे स भिक्खू ॥ १५ ॥ उपहिम्मि अमुच्छिए अगिद्धे, अन्नायउछ पुलनिप्पुलाए । कविष्यसन्निहिओ विरए, सबसगानगए अ जे स मिक्ख ॥ १६ ॥ अलोल(लु)भिक्खून रसेम गिज्झे,उछ चरे जीविअनाभिकखी इड्डिं च सकारण पूअण च, चए ठिअप्पा अणिहे जे स भिक्खू ॥ १७ ॥ न पर बइजासि अय कुसीले, जेण च कुप्पिज न त यहजा । जाणिअ पत्ते पुनपाव' अत्ताण न समुफसे जे स भिक्खू ॥ १८ ॥ न जाइमत्ते न य रूपमत्ते, न लाभमत्ते न सुण्ण मते । मयाणि सवाणि विवजइत्ता, धम्मज्झाणरए जे स भिक्खू ।। १९ ।। पवेअए अञ्जपय महामुणी, धम्मे ठिओ ठावयइ पर पि । निक्सम्म पलिज कुसीललिंग,न आविहास कुहए जेस भिक्खू ॥ २० ॥ त देहास असइ असासय, सया चए नियहिअद्विअप्पा । छिदित्तु जाइमरणस्स यधण, उवेइ भिक्खू अपुणागम गइ ।। २१ ॥ त्ति बेमि ॥ इअ भिरखु नाम दममज्झयण ममत्त ।। ॥ अह रहवका पढमा चूलिआ ॥ इह सलु भो पाइएण उप्पण्णदुक्खेण सजमे अरइममारनचित्तेण जोहाणुप्पेहिणा अणोहाइएण चेव हपरस्सिगयकुसपोयपडागाभूआइ इमाड अट्ठारस ठाणाइ सम्म सपडिलेहिअवाइ भवति । तजहा ह भो! दुस्समाइ दुप्पजीवी ॥१॥ लहुसगा इत्तरिआ गिहीण कामभोगा ॥२॥ भुजो असाय बहुला मणुम्सा ॥ ३॥ इमे अ मे दुषसे न चिरकालोरट्ठाइ भविस्सइ ॥ ४॥ ओमजणपुरकारे ॥५॥ यवस्स य पडिआपण ॥ ६ ॥ अहरगहवासोवसपया ॥ ७ ॥ दुल्लहे सलु भो ! गिहीण धम्मे गिहिरासमझे वसताण ||८|| आयक से वहाय होई ॥९॥ सकप्पे से वहाय होई ॥१०॥ सोनकेसे गिहवासे, निरुनकेसे परिआए ॥ ११ ॥ मधे गिहवासे, मुक्खे परिआए ॥१२॥ सावजे गिहवासे, अणजे परिआए ॥ १३ ॥ यांसाहारणा गिहोण कामभोगा ।। १४ । पत्तेअ पुन्नमाव ॥ १५ ॥ अणिचे सलु भो! मणुआण जीविए कुसग्गजलविंदुचरले ॥१६॥न च सलु भो! पार कम्म पगड ॥ १७ ॥ पााण च सलु भो ! कडाण रम्माण पुविं दुचित्राण टुप्पडिकनाण वेइत्ता मुक्सो नत्थि अवेइत्ता तरमा वा झोसइत्ता ॥ १८ ॥ अहारमम पय भवइ, भाइ ज इत्य सिलोगो- जया य चयई धम्म, अगजो भोगकारणा। से तत्थ मुच्छिए बाले, आयड नावयुज्झई ॥१॥ जया ओहाविओ होइ, इदो चा पडिओ छम । सबधम्मपरिमट्ठो, स पच्छा परितप्पइ ॥ २ ॥ जया अ पदिमो होइ, पच्छा होइ अादिमो। देवया व चुआ ठाणा, सपा परितप्पइ ॥ ३ ॥ जया पृइमो होड, पन्छा हो अपूरमो, राया न रनपभट्ठो, स पन्छा परिवप्पइ ॥ ४ ॥ - . श्रीदमौकालिकसूत्र-दममाध्यपनम् जया अ माणिमो होड, पच्छाहोइ अमाणिमो । सिटिव कबडे छुढो, स पन्छा परितप्पइ ॥५॥ जया अ थेरओ होड, सम.कवनवणो । मच्छुछ गलि गलिचा, स पन्छा परितप्पड ॥ ६॥ जया अकुकुहवस्म, वृतत्तीहि विहम्मद । हत्यी र यधणे बद्धो, म पन्छा परितप्पइ ॥७॥ पुतदारपरिफिनो, मोहमताणमतओ। पोमन्नो जहा नागो, स पच्छा परितप्पड़ ॥ ८॥ अन आह गणी हुतो, भाविअप्पा बहुस्सुओ । जइ हरमतो परिआए, सामन्ने जिणदेसिए ॥९॥ देवलोगसमाणो अ, परिआओ महसिण । ग्याण, अरयाण च, महानरयसारिमो ॥१०॥ अमरोवम जाणिय सुक्समुचम, रयाण परिआए तहारयाण । निरओनम जाणिय दुक्समुत्तम, रमिन तम्हा परिआयपडिए ॥ ११ ॥ धम्माउ भट्ट सिरिओववेय, जन्नगि विज्झायमिनप्पते । हीलति ण दुन्यिहि कुसीला, दाढदिअ घोरविस व नाग ॥ १२ ॥ इहेर धम्मो अयसो अफिची, दुनामविज्ज च पिटुज्जगम्मि । चुअस्म वम्माउ अहम्मसेविणो, मभिन्नपित्तस्म य हिट्टो गई ।। १३ ॥ सुजित्तु भोगाइ पमझ चेअसा, तहाविह कटु अमजम बहु । गइच गरे अणहिझिअदुह, योही असे नो सुलहा पुणो पुणो ॥ १४ ॥ इमस्म ता नेरहअस्म जतुणो, दुद्दोवणीअस्म फिलेसपत्तिणो । पलिओवम झिज्जड सागरोनम, किमग पुण मज्म इम मणोदुह ॥ १५ ॥ न मे चिर दुक्खमिण मविस्मर, अमायया भोगपिनाम जतुणो । न चे सरीग्ण इमेण विस्मा, अविम्म जीविभपञ्जवेण मे ॥ १६ ॥ जस्मेवमप्पा उ हविज निन्टिओ, चहल देह नदु धम्ममामण । त तारिम नो पडलिंति इदिआ, उर्विति वाया व मृदमण गिरिं ॥ १७ ॥ इचेर मपस्सिअ घुद्धिम नरो, आय उपाय विविह विआणिा । कारण वाया अदु माणसेण तिगृत्तिगुत्तो जिणश्यणमहिहिलासि १८ ॥ त्ति चेमि ॥ इभ रहरका पढमा चूला ममत्ता ॥१॥ , ॥ अह विवित्तचरिया वीआ चुलिआ ॥ चलिअ तु परक्यामि, सुभ विलिमासिक । ज मुणितु मुपुण्णाण, धम्मे उप्पन्नए मई ॥१॥ अणुसोअपहिए बहुजणम्मि परिसोअलद्धलक्वेण । पडिमोअमेर अप्पा, दायहो होउकामेण ॥ २॥ अशुसोअसुहोरोओ,पडिसोओ आसवो सुविहिआणाअणुमोओससारो,पडिसोओ तस्म उत्तारो ॥ ३॥ तम्हा आपारपरकमेण सरसमाहिबहुलेण । चरिआ गुणा अ नियमा अ, हुति माण दट्टवा ।। ४ ।। अणिपअनासो ममुआणचरिआ, अन्नायउछ पयरिक्या अ। अप्पोवही क्लहविवानणा अ, विहारचरिया उसिण पमत्था ॥ ५ ॥ आइन्नओ माणविनानणा अ, नोमन्नदिवाइटभत्तपाणे ।
श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला ससहकप्पेण चरिज मिक्खू तआयससट्ट जई जहा ॥ ६ ॥ अमजमसासि अमच्छरीआ, अभिक्रसण निविगइ गया । अभिक्सण काउस्सग्गकारी, सज्झायजोगे पयओ हविना ॥ ७ ॥ न पडिन्नविजा सयणासणाइ, सिअ निसिन्न तह भत्तपाण । गामे कुले गा नगर व देसे, ममत्तभाव न कहिं पि पुन्हा ॥ ८ ॥ गिहिणो आवडिअ न कुन्ना, अमिनायण वदणपूअणं वा। असकिलिटेहि सम पसिना, मुणी चरित्तस्स जओ न हाणी ॥ ९ ॥ न या लभेजा निउण महाय, गुणाहिअ वा गुणओ सम चा । डफो वि पावाइ विजयतो, विहरिज कामेसु अमन्नमाणो ॥१०॥ सबन्छर वा वि पर पमाण, पीअ च चास न तर्हि पसिना। मुत्तस्स मग्गेण चरिज्जमिास, सुतस्म अत्यो जह आणवेड ॥ ११ ॥ जो पुखरतारररत्तकाले, सपिक्सए अप्पगमप्पएण। कि मे कड किं च मे किचसेम, किं समणि न समायरामि ॥ १२ ॥ किम परा पामइ किच अप्पा, कि वाह सलिअन विवजयामि । इचत्र सम्म अणुपाममाणो, अणागय नो पडियध पुज्जा ॥१३॥ जत्येन पासे कड दुप्पउत्त, कारण पाया अदु माणसेण । तत्येव धीरो पडिसाहरिज्जा, आहन्नओ सिप्पमिव क्सलीण ॥ १४ ॥ जस्सेरिसा जोग जिइदिअस्म, धिइमओ सप्पुरिमस्म निच । तमाहु लोए पडिबुद्धजीवी, सो जीअइ सजमजीविण ॥ १८ ॥ अप्पा सल सयय रविवअयो, सबिदिहिं सुसमाहिएहिं । अरक्सिओ जाइपह उवेइ, सुरक्पिो सचदूहाण मुचः ॥ १६ ॥ त्ति बेमि ।। इअ विवित्तचरिआ पीआ चूला समत्ता ॥ ॥ इअ दसवेआलिअ सुत्त समत्त ॥
(as । श्रीमद्देनऋद्धिगणितमाश्रमणप्रणीत । श्री नन्दीसूत्र मूलपाठः । जयह जग जीव जोणी रियाणओ । जगगुरू जगाणदो ।। जगणाहो अगर, जय जगणि- यामहोभयर ॥ १ ॥ जयह सुआण पभयो । तित्थयराण अपच्छिमो जयड ॥ जयइ गुरूलोगाण। जयइ महप्पा महावीरो ॥ ॥ भद्द सघ जगुजोयगस्म । भ६ जिणम्म चीरस्स ॥ भद मुरासुरनम- सियरस । भद्द धुयरयस्म ॥ ३ ॥ गुणमरणगहण । सुयरयण भरियदसणरिसुद्धरत्यागा सघ नगर भ६ ते । असड चारित्तपागारा ॥ ४ ॥ सजम तर तुवाग्यस्म । नमो मम्मत्त पारियाहस्म ॥ अप्पडिचकारस जओ होउ सया मघचवस्म ॥ ५ ॥ भ६ सील पडागूसियस्म । तर नियम तुरय जुत्तम्म । सघरहस्म मगरओ । मझाय सुनदियोसस्म ॥ ६ ॥ कम्मरय जलोह विणिग्गयस्म । मुयरयण दहनालस्म । पच महत्तय पिग्मनियस्स । गुणकेमरालम्म ॥ ७ ॥ मारग जण महुअरि परिएडम्म । जिण सूर तेय युद्धस्म ॥ सघाउमस्स भद्द । समण गण सहस्म पत्तस्म ॥ ८ ॥ तर सजम मयलण । अफिरिय राममुह दुरिसनिच । जय सघ च । निम्मल मम्मत्त निमुद्ध जो- पहागा ॥०॥ पर तिस्थिय गह पह नामगस्म । तपतेय दिच लेमस्म || नाणु जोयम्म जए भद दम सत्र सूरस्स ॥ १०॥ भद घिड वेला परिगयस्स । मज्झाय जोग मगरस्म ॥ अक्खोहस्म भग- वओ। गघ समुदस्म रद्दम्य ॥ १६ ॥ सम्म दमण पर हर दढ रूढ गावागाट पेढस्म ॥ धम्म वररयण मडिय चामीयर मेहलागस्म ॥ १२ ॥ निय मूसिय क्णय सिलायलुअल जलत चित्ता. डस्म ॥ नदण वण मणहर सुरमि सील गधुझुमायम्म ॥ १३ ॥ जीवदया सुदर कद रुदरिय मुणियर मइद हम्नस्स ।। हेउ सय धाउ पगलत रयणदित्तीसहि गुहस्स ।। १४ ॥ सनर पर जल पग लिय उज्झर पविराय माणहारस्म !! माग जण पर सत मोर नमत चुहरस्स ॥१५॥ निणय नय परर मुणिवर फुरत विज्जुअलत मिहरस्म । पिविह गुण कप रुक्सग फलमर कुसुमाउल गणरस ॥ १६ ॥ नाण कर रयण दिप्पत्त क्त नेरुलिय विमल चुलस्म ॥ वदामि विणय पणजो सघ महामदर गिरिम्म ॥ १७ ॥ गुण रयणुञ्जम कडय सील सुगधि तर मडिउद्देस ।। मुयनारम- गसिहर सघ महामदर वदे ।। १८ । नगर रह चक पउमे चदे सूरे समुद्द मेरुम्मि ॥ जो उसमि- अह सयय त मघगुणायरं वदे ॥१९॥ दे उमभ अजिय समय ममिनदण सुमड सुप्पभ सुपाम || st +
श्रीजेनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला.
ससि पुप्फदत सीयल सिअस वासुपूज च ॥२०॥ विमल मणत य धम्म मन्ति कुयु अर च मल्लिं
च ।। मुनिमुखय नमिनेमि पास वह बद्धमाण च ॥ २१ ॥ पढमत्थि इदभूह वीए पुणहोइ अग्गिभ्।
इति ।। तईए य वाउभूई तो विपत्ते मुहम्मेय ॥ २२ ॥ मडिअ मोरिय पुत्ते अकपिऐ चे अपल
भायाय॥ मे यज्जेय पहासेय गणहरा हुति वीरस्म ॥ २३ ॥ नियुह पह मामणय जपइ सया सब
भाव देसणय॥ कु समय मय नासणय जिणिदयर वीर सासणय ॥२८॥ मुहम्म अग्गिवेमाण जयू
नाम च कासर पमव । पञ्चायण पदे वच्छ सिन्नभव वहा ॥ २० ॥ जसनद तुगिय वदे सभूप
चैव माढर ।। भद्दबाहु च पाइन्न थूलभद्द च गोयम ॥ २६ ॥ ऐलायचसगोत्त वदामि महागिरि
मुहत्यि च ॥ तत्तो कोसियगोत्त बहुलस्म सरिश्चय चन्दे ॥ २७ ॥ हारिय गुन माइ च यदिमो
हारिय च सामज । वन्दे कोसिय गोत सडिल्ल अन्न जीयधर ॥ ८॥ तिसमुहयायकित्ति दीप
समुद्देमु गहिय पेयाल ।। चढे अन्न मम्मुद्द अपसुमिय समुद्दगमीर ।। २९६ मणग करग झरग
पभावग पाणदमण गुणाण ॥ उदामि अज मगु सुय सागर पारग धीर ॥३०॥ वदामि अन्न धम्म
वचो वदे य मद्द गुत्त च ॥ तत्तोय अस वइर तर नियम गुणेहिं बइर मम ।। ३१॥ वदामि अज
रक्सिय समणे रक्सिय चारित्त मवस्से ॥ रयण रडग भूओ अणुओगो जेहिं ॥ ३२ ॥ नाणम्मि
दमण म्मिय तर विणए णिय काल मुज्जुत्त ॥ अन्न नदिलसमण सिग्मा यदै पमन्नमण ।। ३३ ।।
चट्ठउ पायगरमो नलवमो अन्न नागहत्यीण ॥ नागरण रण भगिय कम्मपयडी पहाणाण ॥३ ॥
जचजण धाउ समप्पहाण मुद्दिय कुवलय निहाण ॥ पड्ढउ वायगरमो रसदनक्सत्त नामाण ॥३०॥
अयलपुरा णिक्सते कालियसुय आणुओगिए धीरे ॥ वभहीरगमीहे नायगपय मुत्तम पत्ते । ३६॥
जेमि इमो अणु ओगो पयरइ अन्नाविअढभरहम्मि ॥ बहु नयर निग्गय असे ते वद सदिलाय
रिए ।। ३७ ॥ तत्तो हिमपन्त महत विक्कमे धिड परकम मणते ।। सम्झाय मणतधरे हिमवत यदि
मो सिरसा ॥ ३८ ॥ कालिप सुय अणु ओगम्म धारण धारए य पुष्याण ॥ हिमवत समा ममणे
चदे णागज्जुणायरिये ॥ ३९ ॥ मिउमर सपन्ने आणुपुन्धि वायगतण पत्ते ॥ ओहमप समायारे
नाजुण पायण चदे ॥ ४० ॥ गोविंदाण पि नमो अणुओगे विउल धारिणिं दाण ॥ णिच सति
दयाण परवणे दुल्लमिं दाण ॥ ४ ॥ तत्तो य भूयदिन्न निच तर सजमे अनिविण ॥ पडिप
जण मामण्ण बदामो सजम विहिष्णु ॥४२॥ करकणगतविय चपग विमउलवर कमल गन्म
सरिवने । भविय जणहिययदइए दयागुण विमाए धीरे॥४३॥ अट्ट भरहप्पहाणे महविह सज्झाय
सुमृणिय पहाणे । अणुओगिय पर वम नाइल कुल यमनदिकरे ॥४४॥ भूगहिय अपगम्भे वदाह
भूयदिन मायरिए । भनमय यु-डेय करे सीस नागज्जुण रिमीण ॥ ४५ ॥ सुमुणिय निचा निच
सुमुणिय सुत्तस्य धारय वदे म भागुब्भावणया तत्थ लोहिचणामाण ॥ ४६ ।। अत्थ महत्थ
क्साणिं मुसमण वरसाण कहण निवाणि॥ पयईए मारवाणि पयत्रो पणमामि दूसगणिं ॥ ४७ ।।
तर नियम मच मनम विजयजय सति मद्दयरयाण !! मील गुणगद्दियाण अणुओग जुगप्पहाणाण
॥४८॥ मुकृमाल कोमल तले तेमि पणमामि लक्मण पमत्ये पाप पावयणीण पडिच्छ सय एहि
पणि वडए ॥४९॥ जे अभ भगवते गलिय सुय आणु ओगिए धीरे ॥ ते पणमिण सिरसा
नाणस्स परूवण वोच्छा॥५०॥
1 ५ . ११ ३ - 4 ॥ श्री नन्दीमूत्र मूलपाठः॥ इति। सेल-धग, डग, चालणि, परिपूणग, हम. महिम, मेसे य, ममग, जन्म, विराली जाहग, गो, मेरी आमगि ।।।। "मा ममामोतिविहा पनना तजहा जाणिया, अनाणिया, दुधियड्वा" जाणिया नहा सीर- मिर, जहा हमा जे पुन्ति रह गुमगुण समिदा दोसे य विरजति त जाणमु जाणिय परिस ॥५२॥ अजाणिया जहा-जा होइ पगहमरा मिपछावय मीह पुरागडप भूआ । स्यणमिव असठविया । अनाणिया मामय परिसा ।। ५३ ॥ दृषियड्डा जह-नय र यह निम्माओ न य पुखद परिमवस्म दोगेण । पत्विाधापपुण्णो द गामिष्ठयरियडो दुधियट्टी ॥ ५४ ! (सूत्र) नाण पत्रविदं पन्नत, वनदा-आमिणि वोहियनाण मुयनाण, ओहिनाण, मणपशमनाण, लिनाण ॥ १॥ त ममामओ दुपिड पण्णत, तनहा-पचासु च परोक्म च ।। मू० २ ॥ से कि त पचास पचर दुविहप- स, बहा दियपचय | नोइटियपचक्य च ॥ ० ३ ॥ से कि त इदिय पचय इदिय- परस्म परिह पागच, तनहा-सो इदियपचास । चमिदिय पञ्चक्र । पाणिदिय पगम। जिटिमरिय पचम । फामिदिय पचास । सेत इदियपचाए । ०४ ।। से किं न नोइदियप पक्च' नोइदियपरम विविद पणत्त तनहा-ओहिनाण पक्ष । मणपजवनाण पचक्य। गलनाण पधप ॥ ५॥ से कि त भोहिनाण पचक्य ! ओहिनाण परक्य दुरिह पण्णच, तजहा-भरपचायच या ओरममिय च ॥ ६ ॥ से किं व भवपञ्चव्य ? भरपघडय दुष्ठ, तजहा- देगागय नरहयागय ॥७॥ मे कि त सा ओवममिप ? म्या ओरममय देण्ह, तनहा--मणूमाण प पदिय तिरिक्स जोणियाण य । को हर साओवममिय? साओरममिय तपावरणि जाण सम्माण उदिष्णाण सपण अशुदिष्णाण उपसमेण ओहिनाण ममुप्पसह ।। सू०८॥ अहना गुण- परिवमस्म अणगारम्म ओहिनाण समुप्पसह त समासओ छविह पण्णत्त, वनहा-आशुगामिय, अणाणुगामिय, पट्ठमाणय, हीयमाणय, पटिवाइंग, अपडिवाइस ॥ ६ ॥ से कि त आणुगामिगं आशुगामिय ओहिनाण दूषित पाणच, दहा-अतगय च मझगा च । मे किं न अंतगा? अनगप निविद पण तनहा पुग्यो अनुगप? मगगओ अतगया पानयो अतगयं मे कि त पुग्ओ अतगय? पुरओ अतगय-से जहा नाम का पूरिस उपना चलिय वा अलाय रा मनिया पर ना जोइ या पुग्ओ गाउ पशुखमाणे २ गोन्ना, मे त पुरओ अवगय । मे नित मगमो अनगप' मग्गो अतगप से जानामए पर पुरिस उहा चट्टलिप रा अलाय रा मणि या पदर या नोइ या मागओ 13 अशुरुढमाणे • गनिधा, मे त अनगम । मे कित पामो अनगय ? पामो अतगय मेजबानामए का पूरिम उध का चद्दलिय मा अगय वा मणि वा पर चा जोर या पामओ राउ परिकहे मागे २ गन्धिना, में त पामओ अतगप मे न अन- गप से किंत मझगप ! ममगय "रेड पुग्मे उस वा चढलिय या अनायं का . ५ १ 1 (१०४) श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला मणि वा पईन जोइ वा मत्थए काउ समुह माणे २ गच्छिज्जा सेत मझगय । अतगयस्स मज्झगयस्म य को पइविसेसो । पुरओ अतगएण ओहि नाणेण पुरओ चे सखिजाणि ना असखे. आणि वा जोयणाइ जाणइ पासइ मग्गओ अवगएण ओहिनाणेण मग्गओ चेव सखिजाणि वा अस- सिजाणि वा जोयणाइ जाणड पामह । पामओ अतगएण ओहिनाणेण पासओ व ससिजाणि या अससिखाणि वा जोयणाइ जाणइ पामइ । मज्झगएण ओहिनाणेण सबओ समता ससिआणि वा अससिज्जाणि वा जोयणाइ जाणइ पामइ । से त आणुगामिय ओहिनाण ॥ १० ॥ से कि त अणा- णुगामिय ओहिनाण अणाणु गामियं ओहिनाण से जहानामए के पुरिसे एग महत जोइट्ठाण काउं तस्सेन जोडट्ठाणस्म परिपेर तेहिं परिपेरतेहिं, परिघोले माणे परिपोलेमाणे तमेव जोडहाण पासइ, अन्नत्यगए न जाणइ न पासड एवामेर अणाणुगामिय ओहिनाण जत्थेन समुप्पजड तत्थेन सखे जाणि वा असखेजाणि वा सपद्धाणि वा असपद्धाणि वा जोयणाइ जाणइ पामड, अन्नत्थगएण पामइ, से स अणाणुगामिय ओहिनाण ॥११॥ से किं त उड्डमाणय ओहिनाण? पड्डमाणय ओहिनाण पमत्येसु अज्झरसायट्ठाणेसु नड्डमाणस्स बड्डमाण चरित्तस्म । विसुज्झमाणस्म विमुज्झ- माण चरित्तस्स । सबओ समता ओहि वड्डइ- जावाना तिसमयाहारगम्म मुहुमस्म पणगजीवस्स || ओगाहणा जहन्ना ओहीसित जहन्न तु ।। ५५ ।। सब बहु अगणि जीवा निरतर अत्तिय भरिजसु॥ सित्त सबदिमाग परमोही सेवनि- दिहो । ५६ ॥ अगुलमावलियाण भाग मसपिन दोसु ससिज्जा । अगुलमापलियतो आवलिया अगुल पुहुत्त ॥ ५७ ॥ हत्यम्मि मुहुत्ततो, दिवसतो गाउयम्मि योद्धयो । जोयण दिनसपुहुत्त, परसतो पन्नवीमाओ ॥ ५८ ॥ भरहम्मि अद्धमासो, जम्बुद्दीम्मि साहिआ मामा || पास च मणुय लोए, चामपुटुत्त च रुयगम्मि ॥ ५९॥ ससिज्जम्मि उ काले, दीरममुद्दावि हुति सस्विजा।। कालम्मि अससिज्ने, दीनसमुद्दा उ भडयया ।। ६० ॥ काले चउण्हरुड्ढी, कालो भइयचु सित्त बुड्डीए । युट्टीए परपजर, भडयवा सित्तकाला उ ॥ ६१ ॥ सुहमो य होइ कालो, तत्तो मुहुम- यर हाइ सित्त अगुल सेढी मित्ते, ओमप्पिणिओ अससिज्जा ॥ ६ ॥ से स पड्डमाणय ओहिनाण सू॥ १२॥ से कि त हीयमाणय ओहिनाण ? हीयमाणय ओहिनाण अप्पमत्येहि अज्झरसायट्ठा णहिं वडमाणस्स बढमाणचरित्तस्म सफिलिस्स माणस्स सकिलिस्ममाणचरितम्स मवओ समन्ता ओही परिहायह से त्त हीयमाणय ओहिनाण ॥ १३ ॥ से कि त पडिवाइ ओहिनाण ? पडिमाइ ओहिनाण जहण्णण अगुलम्म अससिज्मय भाग वा सरिजय भाग वा वालग्ग वा बालग्ग पुहत्त या लिक्स या लिक्सपुहुत्त था, जूय ना जयपुटुत्त बा, जर ग जब पुद्दुत्त वा । अमुल या अगुल पुहुत्त बा । पाय वा पायपुहुत्त वा । विहत्थि वा विहत्थि पुहुत्त वा । रयणि वा रयणि पहुत्त वा। कुच्छि कुच्छि हुत्त वा, धणु ना धणुपहुत वा । गाउअ ा गाउयपुहुच वा । जोयण या जोयण पुत्त था । जोअणमय या जोयणमय पुहुत्त या जोयण महस्स वा जो यणसहम्म पुहुत्त वा । जो यणलक्स वा जोयणलक्स पुहुत्त वा । जोयणकोडिं वा जोयणकोडाकोटि हुत्त वा। जोयणकोडा- योर्डि वा जोयणकोडाफोडि पुदुत्त या । [जो अणमसिन वा जो अणससिज पहुत्त वा जो अण ॥ श्री नन्दीसूत्र मूलपाठ ॥ अमग्वेजना जो अणअसवेजपुद्दुत्तया । ] उक्कोसेण लोग वा पासि ताण पडिवइया । म त पडिपाड ओहिनाण ॥ १४ ॥ से कि त अपडियाइ ओहिनाण । अपडिनाइ ओहिनाणजेण अलोगस्म पग- मवि आगामपएम जाणड पाम तेण पर अपडिमाइ ओहिनाण । से च अपडिनाइ ओहिनाण ॥१५॥ त समामो चउदिह पण्णत्त, तजहा ढवओ, सित्तओ, कालो, मापओ। तन्थ दर ओण ओहि- नाणी जहन्नेण अणताह रूविदबाइ जाणड पामह उक्कोसेण सदाइ विदव्याह जाणइ पामह सित्त ओण ओहिनाणी जहन्नण अगुलम्स अमसिन्नय भाग जाणः पामह, उक्कोसेण अममिलाइ अलोगे लोगप्पमाण मित्ताइ पटाह जाणह पामर, सलओ ण ओहिनाणी जहन्नेण आरलियाए अमसिञ्जय भाग जाणइ पासह, उकोमेण असपिज्जाओ उस्मप्पिणीओ अवमप्पिणीयो अईय मणागय च माल जाणड, पामह भारओ ण ओहिनाणी जहन्नण अणत भावे जाणड पामह, उफसेणवि अणत भारे जाणड पामह । मन मायाण मणत भाग मावे जाणड पामह ॥ १६ ॥ ओही भरपचडओ गणपञ्च- इओ य पणिओ दुविदो । तस्म य यह विगप्पा दरे मित्त य शालेय । नग्डयदानित्यारा य ओहिम्मऽनाहिंग हुति । पामनि म ओ गल सेमा देसेण पामति । से त ओहिनाणपञ्चकप से कि त मणपज्जननाण ? मणपन्नानाणे पण भते ! कि मणुस्माण उप्पज्जड अमणुम्माण ? गोयमा ! मणुम्माण नो अमशुस्माण ? जहमशुम्माण किं समुच्छिममणुस्माण गमनकतिय मणुम्माण ? गोयमा? नोसमुन्टिममणुम्माण उजट गभरतियमणुम्माण । जगन्मयकतियमणुस्माण कि यम्मभूमिय गन्मनकतिय मणम्माण, अकम्मभूमिय गन्मनकतिय मणुस्साण, अन्तग्दीगगन्भव- कतिय मणुम्माण, गोयमा ? कम्मभूमिय गमवतियमणुस्माण नो अम्मभूमिय गमनकतिय- मणुम्माण, नो अन्तरदीपग ग म कठियमणुस्माण जड कम्मभूमियगमनकतिपमणुस्माण, कि ससिमामाउयाम्मभूमिय गम्भवतियमणुस्साण अमपिजवामाउयसम्मभूमिय गन्भरकतिय मणु- स्माण ? गोयमा ? ससज्जनामाउय कम्मभूमिय गन्मातिय मणुस्माण, नो जमरोज्न नामाउय कम्मभूमिय मणस्माणा जड मसेज पामाउय कम्मभूमिय गम्भवतिय मणुस्माण, कि पजतग समे अपरामाउयस्म्मभूमिय गम्भवतिय मणुम्माण,अपजनगमसेन गामाउय कम्मभूमिय गन्मवरतिय मणुस्माण ? गोयमा! पजत्तग समेज नामाउय कम्मभूमियगामाकतिय मणुम्माण,नो अपञ्चचग सग्वेज वामाउय क्म्मभूमिय गभरतिय मणुम्साण । जह पनत्तग मपेज माउय उम्मभू मिय गम्भकतिय मणुम्माण कि मम्मदिट्टि पज्नत्तग मसंज्न नामाउय कम्मभूमिय गमरक तिय मशुस्माण, मिउदिट्टि पज्नत्तग मसं जगासाउथ कम्मभूमिय गन्मनकतिय मणुम्माण, स. म्मामिछदिट्टि पज्नत्तग ममेज्न पामाग्य कम्मभूमिय गम्भवतिय मणुम्माण? गोयमा। मम्म द्दिहि पन्नचा मज्जानामाउय कम्मभूमिय गभरतिय मणुस्माण नो मिच्छनिहि पन्नत्ता मसेन नामाउय कम्मभूमिय गम्भातिय मणुम्माण, नो मम्मामि उद्दिट्टि पञ्चत्तम मपेज्न वामाउय सम्मभूमिय गभरतिय मणुम्माण, जड मम्मदिहिपन्नत्तग मरोज्न नामाउय कम्मभू मिय गन्मयकतिय मणुस्माण किं मजय सम्मदिट्टि पज्नत्तग मग्गेज्न चामात्य सम्मभूमिय गन्म- कतिय मणुम्माण, असजय मम्मतिहि पज्जत्नग समैज्न गामाउय कम्मभूमिय गन्मयकातिय मणुम्माण । सजया सजय मम्मदिट्टि पत्तग मज्ज वामाउय सम्ममिय गभवतिय मणु HTRAN श्रीजेनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला म्साण ? गोयमा ' सजय सम्मदिट्टि पज्जचग मसेउन वामाउय कम्मभूमिय गम्भवफातिय मणु- स्साण, नो अमजय सम्मदिट्टि पज्जत्तग सखेज्न नामाउय कम्मभूमिय गन्मनफतिय मणुस्माण । नो सजयास नय मम्मदिहि पज्नत्तग सखेज्जवासास्य कम्मभूमिय गम्भवतिय मणुस्माण । जह सजय सम्मदिहि पनत्तग सखेज्ज पामाउय कम्मभूमिय गम्भवतिय मणुस्माण किं पमत्त सजय सम्मदिहि पज्जत्तग सखेल रासाउय कम्मभूमिय गम्भयकतिय मणुस्साण, अपमत्त सनय मम्मदिहि पउनत्तग ससेज्ज पामाउय कम्मभूमिय ग भवधतिय मणुस्माण ? गोयमा! अपमत्तमजय सम्महिदि पन्नत्तग ससेज्ज वामाउय कम्मभूमिय ग भवतिय मणुस्माण, नो पमत्त सञ्जय मम्मदिहि पन्नत्तग मखेज्न वामाउय कम्मभूमिय गम्मरपतिय मणुस्माण । जड अपमत्त सजय मम्मदिहि पज्जत्तग मसेल वामाउय कम्मभूमिय गमवकवियम्णुस्माण,कि इड्डीपत्त अपमत्त सजय मम्मदिद्धि पज्नत्तग सखेज वामाउय कम्मभूमिय गभरतिय मणुम्माण अणिड्डीपच अपमत्र समय सम्म- द्दिहि पज्जत्तम ससेज्ज वासाउय कम्मभूमिय गमय तिय मणुस्माण ? गोयमा ! इड्डीपत्तअपमत्त सजप मम्मदिहि पज्जचग सखेज वासाउय कम्मभूमिय गन्मवतिय मणुस्साण, नो अणिड्डीपत्त अपमत्तमजयसम्मदिहि पज्जत्तग ससेज्न पासाउय कम्मभूमिय मणुस्साण । मणपज्जनाण समु प्पज्नइ ॥ सू० ॥ १७ ॥ त च दुविह उप्पज्जा तजहा उज्जुमई य विउलमई य त समासओ चचिह पन्नत्त तजहा-दवओ, सिनओ, कालओ, भारओ। तत्थ दहीण उज्नुमई अणते अणत पएसिए मधे जाण' पामइ, त । विउलमई अमहियतराए विउलतरा विसुद्धतराए रितिमिर- बराए जाणड पासई । सित्तओण उज्जुमई यजहनेण अंगुलस्स अमज्जय भाग उकोमेण अहे जान इमीसे रयणप्पभाष पुढीए उपरिमहडिल्ले खुड्डम पयरे उड जार जोइमस्म उरिमतले, तिरिय जाव अन्तोमणुस्णुम्मसिने अड्डाइज्जेसु दीपममुद्देस पन्नरस्ससु कम्मभूमिमु तीसाए अपम्म- भूमिसु छपन्नाए अन्तरदीपगेसु सन्निपचेदियाण पअत्तयाण मणोगए भाये जाणड पाम त चेव विउलमइ अड्डाईज्जेहिमगुलेहिं अभहियत्तर विउलतर विसुद्धतर वितिमिरतराग सेत्त जाणइ पामइ । कालओ ण उज्जुमई जहन्नेण पलिओवमस्म अससिज्जयभाग उफोसेणवि पलिओनमस्म अससि- जनयभाग अत्तीयमणाग या काल आणड पामर । हचेर विउरमई अन्महियतराग विउलतराग विशुद्धतराग वितिमिरतगग जाणइ पामइ । भारओ ण उज्जुमई अणते भावे जाणइ पासह, सब- भागाण अणतभाग जाणइ पामह । त चे विउलमई अमहियतगग विउलतराम विसुद्धतगग वि तिमिरतराग जाणइ पामह । मणपज्जननाण पुण जणमणपरिचितियस्थपागडण। माशुमखित्तनिपद्ध गुणपञ्चाय चरिचरओ ॥ ६॥ से त मणपज्जनाण सू० ॥ १८ ॥ से कि त कालनाण ? केलनाण दुविह पन्नत्त, तजहा-भवत्यकेवलनाण च सिद्धकेलनाण च । से कि त भात्यकेवर- नाण १ भवत्यकवलनाण दुविह पण्णत, तजहा-सजोगिभरत्यकेलनाण च अजोगिनवत्थकालनाण च । से किं व सजोगिमात्थकालनाण' सजोगिभवत्थकेवलनाण दुविह पण्णत्त, वजहा-पढम• समयसजोगिमवस्थ, केलनाणच अपढम समय मजोगिभवत्थकेरलनाण च, अहवा, चरमसमयस- जोगिमवस्योलनाण च अचरमसमयसजोगिमवत्यकेवलनाण च, से तसजोगिमवत्थकेरलनाण । से कि त अजोगिभरत्यकेवलनाणी अजोगिमात्यचलनाण विह पन्नत, वजहा-पढमसयअजोगि- . . , । यो नन्दामा मूलपाठः ॥ भवत्थकेरलनाण च अपढमसमयअजोगिभवस्थफेवलनाण च अहना चरमममयअजोगिमात्यकेरल नाण च अचरमममय अजोगिमात्यफेलनाण च, सेत्त अजोगिमवत्थकेयसनाण, से च भवत्यके चलनाण ।। सू० ॥ १९ ॥ से किं त सिद्धकेलनाण? सिद्धकेलनाण दुविह पण्णत्त, तनहा-अण- तरसिद्धकेलनाण च परपरसिद्धकेलनाण च ॥ सू० ॥ २० ॥ से कित अणतरसिद्धफेलनाण ? अणतरसिद्धकेवलनाण पन्नरसविह पण्णत, तजहा-तित्यसिद्धा १, अतित्यसिद्धा २, तित्थयरसिदा ३, अतित्थयरसिद्धा४ , मयबुद्धसिद्धा ५, पोययुद्धसिद्धा ६, युद्धचोहियसिद्धा, ७ इस्थिलिंगसिद्धा ८, पुरिमलिंगसिद्धा २, नपुसगलिंगमिद्धा १०, सलिंगसिद्धा ११, अन्नलिंगसिद्धा १२, गिहिलिंग सिद्धा १३, एगसिद्धा १४, अणेगसिद्धा १५, से पा अणतरसिद्धकेलनाण | J० ॥ २१ ॥ म किं त परपरसिद्धकेलनाण' परपरसिद्धफेवलनाण अणेगविह पण्णा, तजहा-अपढमममयमिद्धा, दुस- मयसिद्धा, तिममयसिद्धा, चउममयसिद्धा, जाव दसममयसिद्धा, सरिजममयसिद्धा, अससिन्नर मयसिद्धा, अणतसमयसिद्धा, से 7 परपरसिद्धकेलनाण, मे श सिद्धकेलनाण ॥ त ममामओ चउविह पपणच, तजहा-दवओ, सित्तओ, कालो, भारओ तय दडओ ण केवलनाणी मइद- बाइ जाणइ पामइ । सित्तओ ण केलनाणी सह सिच जाणड पासह। कालओण केलनाणी साह काल जाणड पासइ । भावओ ण केरलनाणी सच्चे माने जाणड पासइ । अह मवदयपरिणाम, भावपिण्णत्तिकारणमणत । सासय मप्पडियाइ, प्रगविह केवल नाण ॥६६॥ १० ॥ २२ ॥ केव- लनाणेणऽस्थे. नाउ ज तत्थ पण्णरणजोगे । ते भापड ति ययरो, डजोगसुय हवद मेम ।। ६७ ।। से न केवलनाण, से नोडदियपचास से च पचपनाण ।। स० ॥ २३ ॥ से कि त परोक्य. नाण' परोक्यनाण दुविह पन्ना, तनहा-~-आमिणियोहियनाणपरोक्स च, सुयनाण परोक्स च, जत्य आमिणियोहियनाण तत्थ सुयनाण, जत्थ मुयनाण तत्यामिणियोहियनाण, दोऽपि पयाइ अण्णमण्णमणगयाइ, तहवि पुण इत्य आयरिया नाणा पण्णापति-अमिनिउज्झइति आभिणियोहि- यनाण, सुणेडत्ति सुय,महपुन जेण सुय, न मई सुयपुब्विया । सू० ॥ २४ ॥ अविगेसिया मई, मइनाण च महअन्नाण च । विसेसिया मम्महिहिस्स मई महनाण मिउद्दिहिस्स मई महणन्नाण । अविसेसिय सुप मुयनाण च मुयअनाण च! विसैसिय सुय मम्मदिहिस्स सुय सुयनाण, मिच्छ- दिद्विस्म सुप सुयअन्नाण ।। सू० २५ ॥ से कि त आभणियोहियनाण? आभिणियोहियनाण दुविह पण्णत्त, तजहा-सुयनिस्मिय च, अम्मयनिस्सिय च। से ति अस्सुयनिस्सिय १ अस्मुयनि- स्सिय चउनिह पाणच, तजहा- उत्पचिया १ वेणइया २, कम्मया ३, परिणामिया ४ । बुद्धि चउबिहा पुत्ता, पचमा नोवलन्मड ।। ६८ ।। सू० ॥ २६ ॥ पुच्चमदिट्ठमस्मुयमइय, तक्मणवि- सुद्धगहियत्था । अनायफलजोगा, बुद्धि उत्पत्तिया नाम ।। ६९ । भरहसिल १ पणिय २ रुक्से ३ सुहग ४ पड ५ सरह ६ काय ७ उच्चारे ८ गय ९ धयण १० गोल ११ समे १२, सुडग १३ मगि १४ स्थि १५ पद १६ पुत्ते १७ ॥ ७० ॥ मरह १ सिल • मिंद ३ बुक्ड ४, तिल ५ वालय ६ हथि ७ अगह ८ वणसहे ९। पायम १० अइया ११ पत्चे १२, साडहिला १३ पच पिअरो य १४ ॥ ७१ ॥ महुमित्थ १८ मुदि १९ अफे २०, य नाणए २१ मिक्स्तु २२ चेडगनिराणे २३ सिक्खा २४ य अस्थमस्ये २५, इत्थी य मह २६ मयसहम्मे २७ ॥ ७२ ।। .
. -- श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला. भरनित्थरणसमत्था, विवग्गसुत्तत्थगहियपेयाला। उमओलोगफलवई, विणयममुत्या हवह युद्धी ।।७३ ॥ निमित्त १ अत्थसत्ये य २ लेहे ३ गणिए य कून ५ अस्मे ६ य । गहम ७ लक्राण ८ गठी ९, अगए १० रहिए ११ य गणिया १२ य ॥ ७४ ॥ सीया सादी दीह, च तण अवम- चय च कुचस्म १३ निव्बोदए १४ य गोणे, घोडगपडण च रुस्साओ १५॥ ७५ ॥ उसओग- दिहमारा, कम्मपसगपरिघोलणपिसाला । साहुकारफलाई, कम्मममुत्था हाइ युद्धी ॥ ७६ ।। हेर णिए १ करिमए २, कोलिय : डोवे ४ य मुत्ति ५ घय ६ प ५ तुनाए ८ वडय ९ पूयह १० ११ ११ चित्तकार १२ य ॥ ७७ ॥ अणुमाणहेउदिट्ठतमाहिया वयविनागपरिणामा। हिय- निस्सेयमफलई, युद्धी परिणानिया नाम ॥ ७८ ॥ अभए १ मिट्टि इमार ३, देवी ४ उदिओदए हवद राया ८ मा य नदिसेणे ६, धणदत्ते ७ साग ( अमचे ९ ।। ७९ ॥ गमए १० अमच- पुस ११, चाणधे १० चेर थूलभद्दे १३ य। नासिकसुदरिनद १४ वहर परिणामिया युद्धी 1८०॥ चरणाहण १६ आभडे १७, मणी १८ य सप्प १९ य सरिग २० यूभिंद २१ । परिणामिययु द्धीए, एवमाई उदाहरणा ।। ८१ ॥ सेत्त अम्मुयनिस्मिय । से कि त सुपनिस्मिय ? सुयनिस्मिय चाहि पण्णत्त, तनहा-उम्गहे १ ईहा • माओ ३ धारणा ४ ॥ १० ॥ २६ ॥ से मित उग्गह ? दुपिहे पण, तजहा-अत्युग्गड य जणुग्गह य, ॥ सू० ।। २७ ।। मे कित वजणुग्गह ? जणुग्गह चरबिहे पण्णत्त तजहा-मोडदियवजणुग्गह, पाणिदियवाणुग्गहे जिभितिगाजणग्गई फासिंदिरवंजणुग्गह, से यजणग्गह ॥ २० ॥ ॥ २८ ॥ से किं त अस्थुग्गह ? अत्थुग्गहे छबिहे पण्णते, तजहा-मोइदियअत्युग्गहे, चक्सिदियअत्युग्गह, पाणिदियअयुग्गहे, जिभिदियअत्युग्गहे, फामिदियअत्युग्गहे, नोइदियअत्युग्गह ॥ २० ॥ ॥ २९ ॥ तस्म ण इमे एगट्टिया नाणाघोसा नाणारजणा पच नामधिजा भपति, तजहा- ओगेण्डया, उवधारणया, मरणया, अवलवणया, मेहा, से त उग्गहे ॥ सू० ॥ ३० ॥ से कित ईहा ? छविहा पण्णता, तजहा-सोडदियइहा, चम्पिदियईहा, पाणिदियईहा, जिभिदियईहा, फा- मिंदियईहा, नोहदियईहा, तीसेण इमे एगढिया नाणाघोमा नाणा चजणा पच नामधिमा भवति, तजहा-आभोगणया, मग्गणया, गवेसणया, चिंता, वीममा, से त ईहा ।। सू० ॥ ३१ ॥ से कि त अवाए ? अाए छविहे पण्णते, तजहा-सोडदियाए, चक्सिदियभवाए, पाणिदियमनाए जिभिदियअमाए, फासिदियअवाए, नोडदियाए, वस्म ण इमे एगढिया नाणायोसा नागारजणा पच नामधिना भवन्ति, तजहा~-आउट्टणया, पचाउट्टणया, अपाए, युद्धी, विण्णाणे, से त अगए ।। सू० ३२ ।। से कि त धारणा ? धारणा छब्धिहा पण्णता, तजहा-मोइदियधारणा, च. विसदियधारणा, पाणिदियधारणा, जिभिदियधारणा, फासिदियधारणा, नोइदियधारणा, तीसे ण इमे एगहिया नाणाघोमा नाणानजणा पच नामधिजा भरति, तजहा धरणा, धारणा, ठरणा, पइट्ठा, कोहे, से त्त धारणा ।। सू० ॥ ३३ ॥ उग्गहे इसमइए, अतोमुहुत्तिया ईहा, अतोमुडचिए अग ए, धारणा सग्वेज वा काठ अससेज वा काल || सू० ॥ ३४ ॥ ण्य अट्ठावीमइविहस्स आमि णिरोहियनाणस्म वनणुग्गहस्म परूषण करिस्सामि पडिबोहगदिहतेण मलगदिहतेण । मे किं त पडिवोहगदिट्टण? पडियोहगदिट्टतेणसे जहानामए केइ पुरिसे कचि पुरिस सुत्त पडियोहिला, णत . ॥ श्री मन्दीसूत्र मूलपाठ ॥ (१०९) अमुगा अनुगत्ति वत्य चोयगे पन्नवय एव वयासी-किं एगसमयपविठ्ठा पुगला गहणमागच्छति ? दुसमयपविट्ठा पुग्गला गहणमागन्छति? जाव दससमयपविट्ठा पुग्गला गहणमागच्छति ? संविज्ज- समयपविट्ठा पुग्गला गहणमागच्छति', असपिऊ समयपविट्ठा पुग्गला गहणमागच्छति ?, एव वयत चोयग पण्णवए एव क्यासी-नो एगसमयपविठ्ठा पुग्गला गहणमागच्छति, नो दुसमयपविट्ठा पुग्गला गहणमागच्छति, जार नो दसममयपविठ्ठा पुग्गला गहणमागच्छति, नो ससिज्जसमयप- विट्ठा पुग्गला गहणमागच्छति, असखिज्जसमयपविठ्ठा पुग्गला गहणमागच्छति, से च पडिबोहग- दिहतेण । से कि त मल्लगदिठ्ठतेण १ मल्लगदिट्ठतेण से जहानामए केइ पुरिसे आवागसीसाओ मल्लग गहाय तन्धेग उदगनिंदु पक्रोविज्जा, मे नटे, अण्णेऽचि पक्सिचे सेऽनि नहे, एव पक्खि- पमाणेसु पक्विप्पमाणेसु होही से उदगविंद जे ण त मला रावेहिइति, होही से उदगविद्, जे ण तसि मल्लगसि ठाहिति, होही से उदगविंद जे ण त मछग भरिहित, होही से उद्गपिंदु, मलंग पगाहेहिति, एवामेव पक्खिपमाणेहिं पक्सिप्पमाणेहिं अणतेहिं पुग्गडेहिं जाई व वजण पूरिय होइ ताहेहुति करेड नो चेव ण जाणइ के वैम सद्दाइ ? तमो ईह पविसई, तओजाणई अ. मुगे एस सइ, तओ अवाय परिसइ तओ से उपगय हवइ, तओ धारण पविसड, तओण धारह ससिज्ज वा काल, अससिज्ज वा काल, से जहानामए केड पुरसे अवर सद्द मुणिन्ना, तेण सदोति उग्गहिए, नो चेव ण जाणड के वेम महाइ, तओ ईह पविसह तओ जाणड अमुगे एस मई, तओ अगाय परिसइ, तओ से उवगय हवइ, तो धारण पविसइ, तओ ण धारेइ सखेज चा माल अ सरोज चा काल । से जहानामए केड पुरिसे अवल रूप पासिज्जा तेण रूपति उग्गहिए, नो चेव ण जाणइ के चेस रूपति तओ ईहपविसइ, तओ जाणड अमुगे एस रूवे, तओ आय पविमड, तओ से उचगय हवइ, तओ धारण परिसड, तओ ण धारेइ सरोज वा काल, असखेज वा काल । से जहानामए केइपुरिसे अन्यत्त गध अग्घाइआ तेण गधत्ति उग्गहिए, नो घेर ण जाणइ के वेम गत्ति तओ ईह पविमड, तो जाणा अमुगे एम गधे, तओ आय परिसइ, तओ से उगय हवड; तओ धारण परिसइ, तओ ण धारेइ सखेनं वा काल अमसेज वा काल | से जहानामए- केह पुरिसे अन्यत्त स्म आसाइला तेण रमोति उग्गहिए, नो चेय ण जाणइ के पेम रमेति, तओ ईह पविसइ, वओ जाणड अमुगे एस रसे, तओ आय परिसड, वओ से उवगय हवइ, तओ धारण परिसइ, तओ ण धारेइ ससिज वा काल अमसिन ना काल ! से जहानामए केइ पुरिसे अन्यत्त फास पडिरावेइज्जा तेण फासेत्ति उग्गहिए, नो चेव ण जाणड के वेस फासओत्ति, तो ईह पविमइ, तो जाणड अमुगे एम फासे, तओ अपाय पपिमइ, तओ से उहगय हवइ, तओ धारण पविसह, तओ ण धारेह सखेज ना काल अमखेज्ज वा काल । से जहानामए के पुरिसे अन्वत्त समिण पामिला तेण सुमिणेति उग्गहिए नो चेव ण जाणइ के वेस सुमिणेत्ति, तओ ईह पविसइ, तो जाणड अमृगे एस समिणे; तओ अवाय पनिमइ, तओ मे उबगय हाइ, तओ धारण परिसइ, तो ण धारेइ मखेज्न या काल, अमरोज्ज वा काल, से त मलगदिट्टमेण ।। २०३५॥ त ममामओ चउनिह पण्णच, तजहा दबओ, सित्तओ, कालओ, भारओ, तस्य दयओ ण आ- भिणियोहियनाणी आएसेण सन्बाइ दयाइह न पामइ । खेत्तओण आभिणियोहियनाणी-- .
श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला HAMArwwronm - ? आण्सेण सन्न खेत जाणइ न पामह । कालोण आभिणियोहियनाणी आपसेण सब काल जाणइ न पामह । भावओ ण आभिणिनोहियनाणी आएसेण सन्चे भावे जाणड, न पासइ । उगगह ईहाजाओ, य धारणा एव हुति चत्तारि। आभिणियोहियनाणस्म भेयवत्य समासेण ॥८॥* अस्थाण उग्गहणम्मि उग्गहो तह रियालणे ईहा। ववमायम्मि आओ, धरण पुण धारण निति ॥ ८३ ॥ जग्गह इक्क समय, ईहाचाया मुहुत्तमद्ध तु । कालमसस सस; च धारणा होई नायया ।। ८४ ॥ पुट्ट सुणेड सद्द, रूव पुण पासइ अपुट्ट तु । गध रस च फास च, बद्धपुट विया गर ॥ ८५ ।। भासासमसेढीओ, सद्द ज सुणड मीसिय सुणइ । वीसेढी पुण मद्द, मुंणेड नियमा परापाए ।। ८६ ॥ ईहा अपोह वीमसा, मग्गणा य गवेसणा । मन्ना सई मई पन्ना, मन्त्र आमि पिचोहिय ।। ८७ ॥ सेत आभिणियोहियनाणपरोक्स, से त सइनाण ।। सू० ॥ ३६ ॥ से कि त सुयनाणपरो- क्स ? सुयनाणपरोक्स चोद्दसविह पण्णत्त तजहा-अक्सरसुय १ अणक्सरमय २ सण्णिसुय ३ असण्णिसुय ४ मम्मसुय ५ मिच्छसुय ६ साइय ७ अणाइय ८ मपज्जवसिय ९ अपज्जवसिय १० गमिय ११ अगमिय १२ जगपविट्ठ १३ अणगपविट्ठ १४॥मू०३७॥ मे कि त अक्सरमुय' अक्स- रसुथ तिविह पण्णत तजहा-सन्नरसर वजणक्सर, लद्धिअक्खर । से किं त सन्नन्सर ? सन्नक्सर अपरस्स मठाणागिई, से सन्नक्सर । से कि त बजणलक्खर १ यजणक्सरअक्सरस वजणा भिलायो, से त्त वजणक्सर । से कि त लद्धिअक्सर ' लद्धिअक्सर अक्सरलद्धियस्स लद्धिअक्सर समुप्पजइ, तजहा-सोडदिय सद्विअक्सर, चरिंसदिय लद्धिअक्सर, पाणिदिय लद्धिअपर, रस जिंदिय लद्धिअक्खर, फासिदिय लद्धिअक्सर, नोइदिय लद्धिअक्सर, से त्त लद्धिअक्खर, से त अक्सरसुय ॥ से कि त अणसरसुय? अणक्ससुय अणेगविह पण्णत्त, तजहा-ऊससिय नीमसिय, निच्छढ ग्यासिय च छीय च । निस्सिघियमणुमार, अणक्सर छेलियाईय ॥ ८८ ।। से त्त अणक्परस्य ।। सू० ३८ ॥ से कि त सण्णिासुय' सण्णिसुय तिविह पण्णत, तजहा- पालिओपएसेण, हेचएसेण, दिद्विनाओएसेण । से कि त कालिओवएसेण? कालिओवासेण ण अत्थि ईहा, अबोहो, मग्गणा गरेसणा, चिंता, वीमसा, से ण सण्णीति लब्भड । जस्मण नईहा, अमोहो, मग्गणा, गोमणा, चिंता, वीमप्ता, से ण अमण्णीति लभइ, से श कालिओ वएसेण । से किं त हेऊनएसेण ? हेऊनण्सेण जस्सण अस्थि अमिसधारणपुचिया करणमत्ती से ण सण्णीति लब्भइ । जस्स ण नत्थि अमिसधारणपुलिया करणसत्ती से ण असण्णीति लभइ, से ग हऊचएरोण । से कि त दिहिनाओवएसेण ? दिविवाओवएसेण सण्णिमुयस्म सोपसमेण सग्णी एमड, असण्णिमुयस्म सोरसमेण अमण्णी लम्भइ, से च दिविनाओवएसेण, से च सण्णिमय, से । असण्णिसुय ।। मृ० ॥ ३९ ॥ मे कि त सम्ममुय' सम्मसुय ज इम अरहतेहिं भगरतेहिं उप्पण्णनाणदमणधरेहि तेलुकानिरिक्सयमहियपरएहिं तीयपटुप्पण्णमणागयजाणएहि सन्वणूहिं सबदरिसीहिं पणीय दुवालमग गणिपिडग, तजहा-आयारो १ सूयगडो २ ठाण ३ समवाओ * भयाण उपाहण, व उगह तह थियारग इंह । यवसाय च भवाय भाग पुण धारण बिति ॥ १ ॥ इति पारगाथा ।
- . . ॥ श्री नन्दीमून मूलपाठ ॥ (१११) ४ विवाहपण्णत्ती ५ नायाधम्मकहाओ ६ उगासगदसाओ ७ अतगडदसाओ अवगढमालो ८ अ गुत्तरोवाइयदमाओ ९ पण्हापागरणाइ १० विभागमय ११ दिहिराओ १२, इश्वेय दुगालमग गणिपिडग चोइसचिम्म सम्ममुय, अभिण्णदमपुलिस्म मम्ममुय, तेण पर भिण्योसु भयणा, से पा मम्मसुय ।। मू०॥ ४० ॥ मे कि त मिच्छासुग? मिन्छासुग ज हम अण्णाणिहिँ मिच्छादि- ट्टिएहि म छयुद्धिमहविगप्पिय, तजहा~भारह, रामायण, मीमासुरुक्य, कोडिल्लग, सगड- भदियाओ, गोड (घोडग) मुह, कपासिय, नागमुहम, रणगमत्तरी, वइमेसिंग, युद्धवयण, तेरासिय, कारिलिय, लोगायय, मद्वितत, मादर, पुराण, वागरण, भागनग, पागजली पुस्सदे- यय, लेह, गणिग, गणरुय नाडयाइ, अना बापत्तरिसलाओ, चनारि य या सगोगा, एयाइ मिन्उदिहिस्म मिन्उत्तपरिग्गहियाइ मिच्छासुय एयाह र मम्मदिटिम्म सम्मन- परि सम्मसुय, अहमा मिन्छदिहिस्सवि ण्याइ चेव सम्मसुप, कम्हा ? सम्मत्तहे उत्तणओ जम्हा ते मिच्छदिहिया तेहिं र समाहिं चोइया समाणा केड सपकावदिट्टीओ चपति,से न मिच्छा मुय । सू० ॥ ४१ ॥ से कि त माइय मपजासिय, अणाइय अपनवमिय च १ इचेम्य दुवालसग गणि पिडग वुच्छितिन पट्टयाए साइप सपनगासिय अचुच्छित्तिनयट्टयाए अगाइय अपनासिय, त समामओ चउछिह पण्णच, तजहा--दछओ, खित्तओ, कालो, भारओ, तस्य दद्योग सम्मसुप एग पुरिस पड्च माइय सपनवसिय, बहवे पुरिमे य पद्धच्च अणाइय अपज्जासिय, खेत्तओ ण पच भरहाइ पचेरवयाइ पहुंच साइय सपज्जासिय, पच महानिदेहाइ पडु अणाइय अपज्जनसिय, फालओ उस्मप्पिाणे ओमप्पिणिं च पडच्च माइय सपज्जासिय, नो उस्मप्पिणि नो ओसप्पिणि च पहुच अगाइय अपज्जासिय, भाषओ ण जे जया निणपन्नता भाषा आपतिजति, पण्णविज्नति, परविज्जति, दसिग्नति, निदसिज्जति, उवदसिज्जति, ते तया मारे पडच साइय यपज्नरसिय मा ओवसमिय पुण भाव पवच अणाइय अपज्जासिय, अहना भामिद्धियस्स सुप साइप मपज्जामिय च, अभयसिद्धियरस सुर्य अणाइय अपासिय च, महागामपएमग्ग सदागासपएमेहिं अणतरणिय पज्जयक्रार निष्फानइ, सधजीवाणपि य ण अक्सरस्म अणतभागो,निन्चुग्धाडियो जइ पुण सोऽपि आनरिजा तेण जीमो अजीपर पाविजा,-"मुवि मेहसमृदए, होइ पमा चदरगण" मेश साइय मपज्जवसिय, से त अणाइय अपञ्जामिय ॥ सू० ॥ ४२ ॥ से कित गमिय गमिग दिद्विनाओ, से कि त अगमिय अगमिय कालिय सुप, से त गमिय, से त्त अगमिग । अहा त समासओ दुषिह पण्णत्त, तजहा-अगपचिट्ठ, अग बाहिर च । से कि त अगमाहिर ? अगवाहिर दुविद पण्णत्त, तजहा-आमस्सय च, आनस्मयारिन च। सेपित आरस्सय आरम्मय छब्धिह पण्णा, तजहा-सामाइय, चउचीस यओ, पदणय, पटिकमण, काउस्मागो, पञ्चक्याण, से आरम्सय 1 से फित आपस्मयचडरित ? आवस्मयडरित्त दविह पयाग, तनहा-कालिग च, उकालिप चासे कि त उकालिय २ अरोगविह पण्णा, तजमा-ढमवेयालिग, कप्पियाकप्पिा, चुलकप्पसुग, महाकप्पसुया, उववाहय, रायपसेणिग, जीपामिगमो, पणरणा, महापण्णवणा, पमापप्पमाय, नदी, अणुओगदाराइ, देदित्यओ, नदुलपयालिप, चदानिरझय, सुरपणनी, पोरि- सिमण्डल, मण्ड-पवेमो, पिआवरणपिणिच्छओ, गणिविज्ञा, शाणपिमती, मरणनिमत्ती, आपनि . " - (११२) श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला सोही, वीयरागमय, सछेहणामुप, विहारकापो, चरणविही, आउरपचक्साण, महापचक्याण, एवमाइ, से उकालिया से कि त कालिग ? कालिग अणेगविह पण्णत, तजहा-उत्तुरज्झयणाह, दसाओ, कप्पो, वनहारो, निसीह, महानिसीह, इसिभासियाइ, जम्बूदीपन्नत्ती, दीनसा गरपन्नत्ती, चदप- पन्नती, सुटिया विमाणपविमचोमहछिया विमाणपविभत्तो, अगचूलिया, वग्गचूलिया, विवाहच लिया, अरणोपराए, नरुणोनवाए, गम्लोववाएं, धरणोपवाए, वेममणोनाए वेलधरोपवाए, देविं, दोववाण, गट्ठाणसुए, ममुट्ठाणसुए, नागपरियानलियाओ, निरयापलियाओ कप्पियाओ, कप्पवाड सियाओ, पुफियाओ, पुष्फचूलियाओ, घण्हीदसाओ, आसीविसभापणाण. दिविविसमारणाणं, सुमिण भावणण महासुमिणभानणाण, तेयग्गिनिसग्गाण, एवमाइयाइ चउरासीइ पडलगमहस्साइ भगनगो अरहओ उसहमामिस्स आइतित्थपरस्स, तहा ससिज्जाइ पइन्नगसहस्माइ मज्झिमगाण जिणवराण, चोदस पइन्नगमहस्साई भगाओ पद्धमाणसामिस्स. अयहा जस्स जत्तिया सीसा उप्पत्तियाए, वेणइयाए कम्मयाए, पारिणामियाए, चरबिहाए युद्धीए उपवेया तस्म तरियाई पद्दण्णगसहस्साइ, परोयबुद्धावि तरिया चेव, मेरा कालिय, से आनम्मयाहरित, से अण- गपविट्ठ ॥ सू० ॥ ४३ ।। से कि त अगपविट्ठ ? अगपविट्ठ दुवालसर्वि पण्णत, तजहा-आयारो १ सूयगडो २ ठाण ३ समवाओ ४ विगाहपन्नती : नायाधम्मकहाओ ६ उवासदसाओ ७ अवग उदसाओ ८ अणुसरोत्रयाइयदमाओ ९ पण्हानागरणाइ १० विवागसुय ११ दिद्विवाओ १२ ॥ सू० ४४ ॥ से कि त आयारे' आपारे ण समणाण निग्गयाण आयारगोयरविणयवेणइयसिक्सामासा. अभासाचरणकरणजायामायावित्तीओ आघविज्जति, से समा सओ पचविहे पण, तजहा-नाणा यारे दसणायारे, चरित्तायारे, तपायारे, पीरियायारे, आयारेण परित्ता यायणा, ससेजा, अणुओग- दारा, ससिज्जा वेढा, सखेजा सिलोगा, ससिजाओ निज्जतीओ,ससिजाओ सगहणीओ, संखिजाओ पडिवत्तीओ, से ण अगट्ठयाए पढमे अगे, दो मुयक्सधा, पणवीम अज्झयणा, पचासीइ उद्देगण- काला, पचासीह ममुद्देसणकाला, अट्ठारस पयसहस्माइ पयग्गेण, ससिजा अक्सरा, अणता गमा, पक्षपा, परित्ता तमा, अणता थावरा, सामयकडनिननिकाइया जिणपण्णत्ता भावा आर 4wति पन्नपिज्जति, परुविज्जति, दसिज्जति, निदसिज्जति. उपदसिज्जति से एव आया, एव नाया, एव पिण्णाया, एव चरणकरणपत्रणा आपविआइ, से श आयारे १ ॥ सू० ॥ ४५ ॥ से कि त सूपगडे ' सूयगडे ण लोए सूइज्जइ, अलोए सूहाइ, लोयालोए सूइजइ, जीवा इनति, अजीना मुहमति, नीपाजीरा सूइज्जति, ससमए सूइजद, परसमए सूइजइ, ससमयपरममए सूइज्जइ, सूयगडे [ असीयस्म फिरियावाइमयस्स, चउरासीहए अकिरियापाईण, सत्तट्ठीए अण्णाणीयवा• ईण, बत्तीसाए घेणइयाईण, तिण्ह तेसट्ठाण पासडियसयाण वृह फिचा सममए ठापिजइ, सूय गडे ण परित्ता चायणा, ससिजा, अशुओगदारा, सखेजा वेढा, सखेजा सिलोगा, सखिजाओ निज्जुत्तीओ, ससिजाओ सगहणीओ, ससिजाओ पडिवत्तीओ, से णं अगट्ठयाए विडए अगे, दो मुपक्सधा, तेवीस अन्झयणा, तित्तीस उद्देमणकाला, तित्तीस समुद्देमणकाला, छत्तीस पयसहस्साइ पयग्गेण, सपिज्जा, अक्सरा, अणता गमा, अणता पळवा, परित्ता तमा, अगता थावरा, सासय- पडनिननिकाइया जिणपण्णता मावा आपविज्जति, पणविज्ञति, परुविज्जति, दसिज्जति, निद- 4 - - . ॥ श्री नन्दीमत्र मूलपाठ ॥ सिन्नति, उपदसिन्नति, से एस आया, एव नाया, एस विण्णाया, एव चरणकरणपरूनणा आर- विजइ, से त मूयगडे - ॥ सू० ॥५६॥ से कि त ठाणे' ठाणे ण जीना ठाविन्नति, अजीना ठाविनति, जीवाजीगा ठाविसति, मममए ठाविज्ञइ, परसमए ठाविजड, ससमयपरसमएठाविनड, लोएठाविजड, अलोए ठोविजड, लोयालोए ठाविनइ । ठाणे ण टका, डा, मेला, सिहरिणो, पभाग, कुडाइ, गहाओ, आगरा, दहा, नईओ, आधविन्जति । ठाणे ण एगा'याए एगुत्तरियाए बुड्डीए दमट्ठाणगनियड्डियाण भाषाण परत्रणा आपपिजडा ठाणे ण परित्ता वायणा, सखेज्जा अणु ओगदारा, मग्वेचा वेढा, सखेसा सिलोगा, ससेसाओ निज्जुत्तीओ, सखेजाओ सगहणीओ, सम्वेजाओ पडिपत्तीओ से ण अगट्टयाए तइए अगे, एगे मुयस्पो, दमअझयणा एगीस उद्देम णकाला, एकवीस ममुद्देमणकाला, भारतरि पयमहस्मा पयग्गेण, ससेजा अपग, अणता गमा अणता पजवा, परित्ता तमा, अणता थारग, मासयक काडया जिणपन्नत्ता मामा आध. रिजति, पननिजति, परिअति दसिन्नति, निदसिजति उपदसिन्नति । मे एस आया, एर नाया, एर विष्णाया एव चरणरणपरूपणा आपविजड, सेत्त ठाणे ३ ॥ मू० ॥ ४५ ॥ मे मि त मम घार ? समाप ण जीना गमासिझति, अनीया ममासिअति, जीवाजीना ममासिजति, सममए समासिञ्जर, परममए ममासिझड, मसमयपरममा समामिजह लोग समामिअड, अलोए ममासिज्जा लोपालोए ममामिबइ। ममनाए ण एगाइयाण पगुत्तरियाण ठाणमनिमडियाण मागाण परूषण आपपिञ्जड दुबालमविहस्म य गणिपिढगम्म पल्लवगे ममामिलइ, समवायम्स ण परित्ता नायणा सगिजा अणुओगढारा, समिन्ना वेढा, मसिमा मिलोगा, ससिनाओ, निजुत्तीओ, मरिजा सगहणीओ, ममिजाओ पडिबत्तीओ, से ण अगट्ठयाण्उय अगे, गगे मुयस्पधे, एगे अज्झ यणे, एगे उद्देमणकाटे, एगे समुद्देमणकाले, एगे चोयारे मयगहम्से पयग्गेण, ममेजा जमरा अणता गमा, अणता पजवा, परित्ता तसा, अणता थायरा, मामयफडनिगद्धनिकाडया जिणपण्णत्त मापा आपपिन्जति, पण्णविज्नति, परुपिज्नति, दमिज्नति, नि-सिज्जति, उपद सिन्नति से एक आग, नाया, एर पिण्णाया, एव चरणकरणपरूपणा आपपिञ्जड । सेत्त ममनाए ४०1४८॥ से कि त मिाहे? विवाहे ण जीना रिआहिन्नति, अजीमा पिाहिज्जति, जीरानीया पिाहिजति ससमए निमाहिनति, पग्ममर निवाहिनति, सममएपरममए निहिनति, लोग विहिन्नति अओ पिाहिजति, लोयालोए पिआहिनति, निगाहस्मग परित्ता सायणा, ससिजा अणुओग दारा सपिज्जा वेढा, मसिना सिलरोगा, ससिआओ निज्जुत्तीओ, मसिनाओ मगहणीयो, सरि आओ पडिपत्तीओ, से | अगट्टयाए पचमे अगे, एगे मुयस्यो, एगे साइरंगे अल्झयणसए, दर उद्देमगसहम्माइ समुद्देमगसहम्माइ, छत्तीम पागरणमहस्माइ, दो लक्या अट्टासीइ पयमहस्मा पयग्गेण, ससिआ अपग, अणता गमा, अणता पज्जवा, परित्ता तमा, अणता धारा सामय फडनिरनिराइया जिणपण्णत्ता मागा आरपिन्नति, पणनिज्जति, परूपिज्नति, दमिज्जति निटसिज्जति, उपदसिज्जति, से एय आया, एक नाया, एप पिण्णाया, एर चरणरणपरूपण आपपिज्जद, से त्त निगाह ५॥ सू० कि त नायाधम्मम्हाओ? नायाण नगराइ, उज्नाणाह, चेइयाइ, रापाणो, अम्मापियो - श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला. धम्ममहाओ, इहलोइयपरलोइया इडिविसेसा, मोगपरिचाया, पहज्जाओ, परिआया, सुयपरिग्गहा, बोरहाणाइ, सलेहणाओ, भत्तपञ्चक्साणाइ. पाओगमणाइ, देवलोगगमणाइ, सुकुलपञ्चायाईओ, पुणगोहिलामा, अतकिरियाओ य आपविज्जति, दस धम्मकहाण वग्गा, तत्थ ण एगमेगाए धम्म. कहाए पच पच अक्साइयासयाइ, एगमेगाए अक्खाइयाए पच पच उवाक्खाइया सयाइ एगमेगाए उपक्खाइयाए पच पच अक्खाइयउवक्साइयासयाइ एवामेव सपुवापरेण अछुट्ठाओ कहाणगको- डीओ हवतित्ति समवसाय । नायाधम्मकहाण परित्ता वायणा, मसिज्जा अणुओगदारा, समिज्जा वेढा, सखिज्जा तिलोगा, ससिजाओ निज्जत्तीओ सगहणीओ, ससिज्जाओ पडिवत्तीओ। से ण अगट्ठयाए छटे अगे, दो सुयक्सधा, एगूणवीस अज्झयणा, एगूणवीस समुद्देसणाला, सखेज्जा पयसहस्सा पयग्गेण, सखेज्जा अक्वरा अणता गमा, अणता पज्जवा, परित्ता तमा, अणता थावरा, सासयकडनिवद्धनिकाइया जिणपण्णता भाषा आषविज्जति पण्णविज्जति परूविज्जति दसिज्जति निदसिज्जति उपदसिज्जति, से एच आया, एव नाया, एर विण्णाया, एव चरणकरणपरूपणा आ- घविज्जइ, से त्त नायाधम्मकहाओ ६ ॥ सू० ॥ ५० ॥ से किं त उपालगदसाओ? उनासगदसा मुण समणोवामयाण नगगइ उजाणाइ, चेइयाइ वणसडाइ, समोसरणाइ, रायाणो, अम्मापिवरो, धम्मायरिया, धम्मकहाओ इहलोडयपरलोडया इडिविसेमा, भोगपरिचाया, पचज्जाओ, परि- आगा, सुयपरिग्गहा, तयोवहागाइ सीलवयगुणवेरमणपञ्चक्साणपोसहोयवासपडिपज्जणया, पडि- माओ, उपसग्गा, सलेहणाओ, भचपञ्चक्साणाइ. पाओवगमणाइ, देवलोगगमणाइ, सुकूलपचाईओ, पुणवोहिलामा, अतकिरियाओ आघविज्जति, उवासगदमाण परिचा वायणा, सखेज्जा अणुओग- दारा, सखेज्जा वेढा, सखेज्जा सिलोगा, सम्वेज्जाओ निज्जुत्तीओ सखेजाओ सगहणीओ, सखे- जाओ पडिवत्तीओ । से | अगट्टयाए सत्तमे अगे, पगे, एगे मुयक्सरे, दस अज्झनणा, दस उद्देसणकाला, दस समुद्देसणकाला सखेजा पयसहस्सा पयग्गेण सखेजा अक्सरा, अणता गमा, अणता पजना. परिचा तसा अणता थावरा, सासयकडनिपद्धनिकाइया जिणपण्णता भावा आघ- पत्रविअति परूविअति दसिजति, निदसिजति, उपदसिज्जति, से एच आया, एव नाया, विनाया, एव चरणकरणपख्यणा आपविजड, से श उवासगदमाओ ७ ॥ सू० ॥ ५१ ॥ स त अवगडदसाओ? अतगडदसासु ण अतगहाण नगराइ उजाणाइ, चेइयाइ, वणसडाइ, समो. सरणाइ, रायाणो, अम्मापियरो, घम्मायरिया, धम्मकहाओ, इहलोइयपरलोइया इडिपिसेमा, मोग- परिचागा, पवनाओ परिआगा, सुयपरिग्गहा तपोवहाणाइ, सठेहणाओ, भत्तपञ्चक्खाणाडू, पाओ- वगमणाइ, अतपिरियाओ, आपविञ्जति, अवगडदसासु ण परिचा बायणा, सखिजा अणुओगदारा, ससेना वेढा, सखेजा सिलोगा, सखेजाओ निज्जुत्तीओ, सखेजाओ सगहणी, सखेजाओ पडिव. पीओ से ण अगट्टयाए अहमे अगे, एगे मुयक्सचे, अट्ठवग्गा अट्ठ उद्देसणागला, अट्ठ समुद्देसण- काला सखेसा पयसहस्मा पयग्गेण, सखेजाअक्सरा, अणवा गमा, अणता पजवा, परिचा तसा, अणता थायरा, सासयक्डनिपद्धनिकाइया जिणपण्णता भाषा आपविन्नति, पन्नपिनति परुविनति, डसिनति, निदसिज्जति, उपदसिज्जति, से ण्य आया, एव नाया, एव विनाया, एव चरणकरण- परूरणा आपविझइ से त अवगडदसाओ ८ ॥ सू० ॥ ५२ ॥ से कि त अणुचरोववाइयदमाओ?
॥ श्री नन्दीसत्र मूलपाठ अणुत्तरोवाइयदमान णं अत्तरोवाइयाण नगराइ, उजाणाइ, पेडयाड, उणसडाइ, ममोसरणाइ, रायाणो, अम्मापियरो, धम्मायरिया, धम्मकदाओ, इहलोहयपरलोइया इविविसेमा, भोगपरिचागा, पावसामओ, परिआगा, सुयपरिग्गहा, तोवहाणाइ, पडिमाओ, उपसग्गा, सलेहणाओ, भत्तपचनसा- गाइ पाओगमणाइ, अणुत्तरोक्वाइप ति उघवत्ती, सुकुलपचायाईओ, पुणगोहिलामा, अतकिरि- याओ, आपविनति, अणुत्तरोषनाइयदसासु ण परित्ता वायणा, संसेन्ना अणुओगदारा, ससेज्जा बेढा, मम्मेना सिलोगा, मखेलायो विज्जुत्तीओ, ससेवाओ सगहणीओ, ससेजाओ पडिवत्तीओ, से ण अगट्टयाए नामे अगे, एंगे सुयक्व , तिनि बग्गा, तिनि उद्देसणकाला, तिन्नि समुद्देसण काला, मसेज्नाइ पयसहस्साड पयग्गेण सरोजा अक्खग, अणता गमा, अणवा पज्नवा, परित्ता तसा, अणवा यावरा, मामयकडानिवद्धनिराइया जिणपण्णत्ता भावा आपविज्जति, पण्णविज्नति, परूविज्जति, दसिज्जति, निदसिज्जति, उपदसिज्जति, से एव आया, एन नाया, एर विण्णाया, एच चरणकरणपरूपणा आपपिज्जा से 7 अणुचरोनाहयदमाओ ९ ॥ सू० ॥ ५३॥ से कित पाहायागरणाइ १ पापागरणेसु ण अठ्ठत्तर पसिणय, अछुत्तर अपमिणमय अटुत्तर पसिणापसि णसय, तनहा-अगुट्टपसिणाइ वाहुपसिणाइ, अद्दागपसिणाड, अन्ननिविचित्ता विज्जाइमया, नाग- मुरण्णेहिं सद्धि दिवा समाया आपविज्जति, पण्डामागरणाण परित्ता गायणा, सरखेजा अणुओगदारा, ससेज्जा वेढा, ससेज्जा सिलोगा, मपेज्जाओ निज्जुत्तीओ, सरोज्जाओ सगहणीओ, मसेज्जाओ पडियत्तीओ, से ण अगट्टयाए दसमे अगे एगे सुयक्सधे, पणयालीस अज्झयणा, पणयालीस उद्दे- सणकाला, पणयालीम समुदेसणकाला, सरोजाइ पयसहस्माइ पयग्गेणेण, सपज्जा आसरा, अ गतागमा, अणता पज्जवा, परित्ता तसा, अणता थारा, सासयकडनिबद्धनिकाइया जिणपण्णता मावा आपविज्जति, पण्णविनति, परूविज्जति, दसिज्जति, निदसिज्जति, उपदमिज्जति, से एवं आया, एव नाया, एव विरणाया, एव चरणकरणरूपणा आघविज्जइ, से च पाहावागरणाइ १० ।। सू० ।। ५४ ॥ से कि त विवागसुय? पिवागसुए ण सुकडदुकडाण कम्माण फलविवागे आघ- पिज्जा, तत्थ ण दम दुहवियागा दस सहविचागा । से कि त दुहवियागा ? दुहवियागेसु ण दुह- विनागाण नगराइ, उन्नाणाइ, वणसडाइ, चेहयाई, समोसरणाइ, रायाणो, अम्मापियरो, धम्माय- रिपा, धम्ममहामओ, इहलोइयपरलोइया इडिपिसोसा, निरयमणाइ, ससारभवपाचा दृहपरपराओ, दुकूलपञ्चायाइओ, दुस्सहयोहियत्त, आधविज्जड, से दुहवियागा। से कि त सुहविधागा ? सुह- वियागेसु ण मुहविभागाण नगराइ, उनणाइ, वणमडाइ चेइयाइ, ममोसरणाइ, रायाणो, अम्मा- पियरो, धम्मायरिया, धम्मकहाओ, इहलोइयपरलोइया इड्डिविसेमा, भोगपरिचागा, पचनाओ, परियागा, सुपपरिग्गहा, तबोरहाणाइ, सलेहणाओ, मत्तपञ्चक्साणाइ, पाओवगमणाइ, देवलोग- गमणाद, सुहपरपराओ, सुबलपचायाईओ, पुणवोहिलामा, अतकिरियाओ, आघविज्जति । विना- गमुपस ग परिता वायणा, सखेज्जा अणुओगदारा, ससेज्जा बेढा सरोज्जा सिलोगा, मरोजाओ निम्नतीओ, सखिज्जाओ सगहणीओ, ससिजाओ पडिवत्तीओ । से ण अगदयाए इकारममे अगे, दो सुयक्यधा, वीस अन्झयणा, वीस उद्देमणकाला, वीम ममुद्देमणकाला, ससिवाह पयमहस्साइ पपग्गेग, सखेना अक्वरा, अणता १ पन्नवा, परिता तसा, अणता पाररा, सासपा- - . .
wwwana . . रा श्रीजैनसिद्धान्त -स्वाध्यायमाला डनिबद्धनिकाइया जिणपप्पाचा भाना आघविज्जति, पन्नविचति, परूपिचति, दसिमति, निदसि- ज्जति, से एव आया, एव नाया, एच विनाया, एर चरणरणपरूनणा आपविजड, से श विवा- मसुय ११ ॥ सू० ॥ ५५ ॥ से कि तं दिहिपाए ? दिहिनाएण सधभारपवणा आपपिना, से समासओ पचविहे पण्णत्ते, तजहा-परिकम्मे १ सुताइ २ पुवगए ३ अणुओगे ४ लिया ५ । से कि त परिसम्म ? परिकम्मे सत्तविहे पण्णचे, तजहा-सिद्धसेणिया परिकम्मे । मणुस्ससेणियापरि कम्मे २ पुट्टसेणिया-परिकम्मे ३ ओगाढसेणियापरिकम्मे ४ स्वसपनसेणियापरिकम्मे ५ विप्प- जहणसेणियापरिकम्मे ६ चुयाचुयसेणियापरिकम्मे ७। से कि त सि सेणियापरिकम्मे सिद्धसेणि- यापरिकम्मे चउमविह पण्णत्ते, तजहा-मउगापयाड १ एगट्ठियपपाइ २ अट्ठपयाड ३ पाढोआगा- सपयाइ ४ केउभूय ५ रासिबद्ध ६ एगगुण ७ दुगुण ८ तिगुण ९ केहभूय १. पडिग्गहो ११ समारपडिग्गहो १० नदारत १३ सिद्धायत्त १४, से च सिद्धसेणियापरिकम्मे १ । से कि त मणु- स्मसेणियापरिकम्मे? मणुम्मसेणियापरिकम्मे चउद्दमविह पण्णते, तजहा-माउयापयाइ १ एगट्टिय- पवाइ २ अट्ठपयाइ ३ पाढोआगामपयाइ ४ केउभ्य ' रासिबद्ध ६ एगगुण ७ दुगुण ८ तिगुण ९ केभूय १० पडिग्गहो ११ समारपडिग्गहो १२ वटापन १३ मणुस्सारा १४ से 7 मणुस्स- सेणियापरिकम्मे २ । से कि त पुट्टमेणियापरिकम्मे पुट्ठमेणियापरिकम्मे इकारसविहे पण्णचे, जहा पाढोआगामपयाइ १ केभ्य २ रासबद्ध ३ एगगुण ४ दुगुण तिगुण व केउभूय ७ पडिग्गहो समारपडिग्गहो ९ नदापत १० पुट्ठापच ११, मे च पुट्ठसेणियापरिकम्मे ३ । म कि त ओगाद- सेणियापरिकम्मे ? ओगाढमेणियापरिकम्मे डकारसविहे पण्णचे तजहा-पाढोआगासपयाइ १ केउ भूय रामनद्ध ३ एगगुण ४ दुगुण ५ तिगुण ६ केउभ्य ७ पडिग्गहो ८ समारपडिग्गहो ९ नदा वर १० जोगाढापन ११, से श ओगाढसैणियापरिकम्मे ४ । से कि त उनसपक्षणसेणियापरिक- म्मे ? उवसपक्षणसेणिया परिकम्मे इकारमविहे पण्णते, तजहा-पाढोआगामपयाइ ? केउभूय २ रासिद्ध ३ एगगुण ४ दुगुण' तिगुण ६ केइभूय ७ पडिग्गहो ८ ससारपडिग्गहो ९ नदापन १० उपसपन्नणवत्त १०, से त उवसपजणसेणियापरिकम्मे ५। से कि त विप्पजहणसेणियापरि- कम्मे ? विप्पजहणसेणियापरिकम्मे इमारमविह पण्णते, तजहा-पाढोआगासपयाइ १ केउभूय २ रासिनद्ध ३ एगगुण ४ दुगुण ५ तिगुण ५ कइभूय ७ पडिग्गहो ८ ससारपडिग्गहो ९ नदारत्त १० विप्पजहणापत्त २१, से त विप्पजहणसेणियापरिकम्मे ६ । से कि त चुयाचुयसेणियापरिक म्मे ? चुयाचुयसेणियापरिकम्मे इबारसविहे पनचे, तजहा-पाढोआगामपयाइ १ केइभ्य २ रासिनद्ध ३ एगगुण ४ दृगुण ५ तिगुण ६ केइभूय ७ पडिग्गहो ८ सप्तारपडिग्गहो ९ नदायत्त १० चुयाच्यवत्त ११. से त चुयाचुयसेणियापरिकम्मे ८ । छ चउक्कनइयाड मन तेरासियाइ, मे च परिकम्मे १ से मि त सुत्ताइ पाचीस पन्नचाड, तजहा-उज्जुसुर्य १ परिणयापरिणय २ बहुभगिय ३ विजयचरिय ४ अणतर ५ परपर ६ मामाण ७ सजूह ८ सभिण्ण ९ आहचाय १० सोपस्थियारच ११ नदायत १२ बहुल १३ पुढापुट्ठ १४ बियारच १५ एवभूय १६ दुपारत्त १७ वत्तमाण पय १८ मममिरूढ १९ मवओभद्द २० पस्मास २१ दुप्पडिग्गह २२, इचेडयाह नापीस गुत्ताइ छिन्नन्ठेयनइयाणि ससमयमुत्तपरिवाडी ; इच्चेइयाइ बानीस सुचाइ अच्छिनच्छेयनइयाणि ?
|| श्री नन्दीन मूलपाठ ॥ - आजीवियसुत्तपरिवाडीए, उच्चइयाइ बाधीस सुत्ताड तिगणइयाणि तेरासिय सुत्तपरिवाडीए, उबेड- याइ बानीस मुत्ताइ चउक्नइयाणि मममयसुत्तपरिवाडीए, एवामेव सपुच्चारग्ण अट्टासीई मुत्ताइ भवतित्ति मक्वाय, से च मुचा 1 से कि त पुनगए। पुगए चरद्दसविहे पणचे, तजहा- उपायपुल्च १ अग्गाणीय २ वीरिय ३ अत्थिनत्यिप्पपाय : नाणप्पयाय ५ मञ्चप्पावाय ६ आय- प्पवाय ७ कम्मप्पनाय ८ पञ्चस्वाणप्पवाय (पञ्चक्वाण) ९विनणुप्पनाय १० अर्वझ ११ पाणाज १२ सिरियापिसाल १७ लोकनिंदुमार १४ । उप्पायपुसम्म ण दम चत्य, चत्वारि चूलि पावत्यू पण्णत्ता । अग्गागीयपुहम्म ण चोदम व यू, दुवालम चूलियापत्य पण्णता । वीरियपुत्रस्म म अह वधू अह चूलियारत्यू पण्णता । अत्थिनस्थिप्पायपुवस्म ण अट्टारम पत्यू, दस चूलिया- वत्थू पण्णता । नाणप्पवायपुधम्म ण बारम वत्थू पणत्ता । सचप्पपायपुसम्म ण दोषिणान्यूपण्ण- चा । आयप्पनायपुवम्म ण मोलम रत्यू पण्णचा । कम्मप्पवायपुवम ण वीस क्त्यू पण्णता । पच- क्साणपुधम्म ण वीस यत्य पण्णता । विजाणुप्पपायपुवस्म ण पन्नरम वर पण्णता अवझवस्म ग बारम वत्य पण्णता । पाणाउपवस्म ण नेरस पत्यू पण्णत्ता । फिरियाविसार पुढम्म ण तीस वत्यू पण्णत्ता । लोकपिंदुमारपुधम्म ण पणुपीस वस्य पण्णता, गाहा- दम । चोदम २ अट्ट ३ ऽहारसेर ४ बारम ५ दुवे ६ य रत्णि । सोलम ७ तीम ८ वीमा ९, पन्नरम °० अणुप्पवायम्मि ॥ ८९ ॥ बारम इकारसमे, पारममे तेरसेव व धूणि। तीसा पुण तेरसमे, चोद्दसमे पण्णवीसाओ ॥१०॥ चत्तारि १ दुवालम २ अट्ट ३ चेकदम ४ चे चुल्लारणि । आटण चपह, चूलिया नस्थि ॥११॥ से त्त पुत्वगए ! से मि त अणुओगे ? अणुओगे दुविह पण्णते, नजहा- मूलपढमाणुप्रोगे, गडिया- णुओगे य । मे किं व मूलपढमाणुओगे? मूलपढमाणुओगे ण अरहताण भगताण पुवमना, दर गमणाद, आउ, चणाड, जम्मणाणि अमिमेया रायमरसिरीओ, पवनाओ, तना य उग्गा, केलना णुप्पयाओ, तित्यपवत्तणाणि य, सीमा, गणहरा, अजपत्तिणीओ सधम्म चगविहम्म जच परिमाण, जिणमणपन्लवमोहिनाणी, मम्मत्तसुयनाणिणो य पाई अणुत्तरगईय, उत्तरवैउ, चिणो य मुणिणो, जनिया सिद्धा, सिद्धिपहो जर देसिओ, जचिर चमाल, पोआवगया जे जहिं जत्तियाह भत्ताइ अणस गाए मेहता अनुगडे मृणिवरुत्तमे, तिमिग्ओघ पिप्पमुक मुक्समृदमणुत्तर च पचे, एवमनेय एवमाह माना मूलपढमाणुओगे कहिया, से च मूलपढमाणुओगे से कि न गडियाणुओगे? गटियाणुओगे कुलगरगडियाओ, तित्थयरगडियाओ चकाटिगडियाओ, दमारगडियाओ, बलदेवगडियाओ, पासवगडियाओ, गणग्गडियाओ, मद्दपाहुगडियाओ, तमोफम्मगडियाओ, हरिवसगडियाओ उस्मप्पिणीगडियाओ, ओमप्पिणीगडियाओ, चिचतरगडियागो अमरनरतिरियनिरयगइगमणवि- विहपरियट्टणेसु एचमाइयाओ गडियाओ आधविन्नति, पण्णविन्नति मे च गडियाणुनोगे, सेच अणुओगे ४ । से फि त चूलियाओ? आइलाण चउण्ह पुवरण, चूलिया सेमाइ पुवाइ अलियाइ, से त चूलियाओ। दिविनायस्स ण परित्ता वायणा, सखेन्ना अणुओगदारा, ससेन्ना पेढा, सखेना , . (११८) श्रीजेनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला सिलोगा सखेजाओ पडिवत्तीभो ससिआओ निज्जुत्तीओ, सखेखाओ सगहणीओ से ण अगट्ठयाए धारसमे अगे, एगे सुयक्सरे, चोद्दस पुवाइ, सखेना वत्यू, सखेजा चूलवत्यू, सखेजा पाहुडा,' ससेनापहुडपाहुडा, सखेजाओ पाहुडियाओ, सखेजाओ पाहुडपाहुडियाओ, सखेजाइ पयसद स्साइ पयम्गण, सखेजा अक्सग, अणता गमा, अणवा पञ्जया परित्ता तसा अगता थापरा, सा सयकडनिबद्धनिकाइया जिणपन्नता भामा आपविजति, पण्णविन्नति, परुविनति, दसिन्नति, निदसिजति, उवदसिजति । मे एव आया, एव नाया एव विण्णाया, एव चरणकरणपरूनणा' आधविनति, से च दिट्ठिवाए १२ ॥ सू० ५६ ।। इचेइयमि दुवालसगे गणिपिडगे अणता मावा अणवा अभाना, अणता हेऊ, अणता अहेऊ, अणता कारणा, अणता अकारणा, अणता जीवा अणतता अजीवा अणता भवसिद्धिया अणता अभयसिद्धिया अणता सिद्धा, अणता असिद्धा पण्णता- भागमभागा हेऊमहेउ, कारणमकारणे चेव । जीवाजीया भवियमभविया सिद्धा असिद्धा य॥ १२ ॥ इचेहय दुवालमग कणिपिडग तीए काले अणता जीया आणाए निराहिता चाउरत ससारक- तार अणुपरियटिभु इचेइय दुवारसग गणिपिडग पडुप्पण्णकाले परित्ता जीवा आणा विराहिता चाउरत ससारकतार अणुपरियति । इन्चेडय दुबालसग गणिपिडग अणागए काले अणता जीवा आणाए विराहित्ता चाउरत ससारकतार अणुपरियहिस्मति । इन्चेइय दुवालसग गणिपिडग तीए काठे अणता जीया आणाए आराहिता चाउरत ससारकतार वीईवइस । इच्चेदय दुवालसग गणि- पिडग पडण्णाले परिता जीना आणाए आराहिता चउरत समारकतार वीईवयति । इच्चेइय दुनालसग गणिपिडग अणागए काले अणता जी आणाए आराहिता चाउरत ससारकतार वीईव इस्मति । इच्चेडय दुवालसग गणिपिडिग न कयाइ नासी, न कयाइ न भवइ, न कयाइ न भवि- भूनि च, भाई य, भविस्मइ य, धुवे, नियए, सासए, अस्सए अबए, अवहिए निचे । से पचस्थिकाए न कयाइनासी न कयाइ नस्थि, न कयाइ न भविस्सइ, मूर्ति च, भवाइ य, भविस्मइ, य, युवे, नियए, सामए, अक्सए, अब्बए, अमहिए, निन्चे, एवामेव दुवालसग गणिपिडग न कयाइ नासी, न कयाइ नत्थि, न कयाइ न भविस्सइ, भुपि च, भवइ य, भविस्सइ य, धुने, नियए, सासए. अक्सए, अव्यए, अवहिए, निच्चे । से समासओ चउबिहे पण्णते, तनहा-दचओ, सिचओ, कालओ, भाषओ । तत्थ दबओ ण सुयनाणी उपउरो सबदन्याइ जाणइ पासइ, सित्तओ ण सुयनाणी उनउ सय खेत जाणइ पासइ, कालओ ण सुयनाणी उवउत्ते सब सेच जाणइ पामइ, भारओ ण मुयनाणी उवउचे सव्वे भावे जाणड पासइ ।। सू० ५७ ॥ अपर सन्नी सम्म, साइय खलु सपजासिय च । गमिय अगपविट्ट, सत्तवि एए सपडिक- क्ला ।। ९२ ॥ आगममत्थरगहण, ज पुद्धिगुणेहिं अट्ठहिं दिट्ट । विति सुयनाणलभ, त पुचविसा रया धीरा ॥९४॥ मुस्ममइ १ पडिपुन्छ। २ मुणेइ ३ गिण्हइ ४ य ईहएयावि . ) तत्तो अपोहए ६ वा, धारेइ ७ करोड पा मम्म ८॥९५ ।। - , ॥ श्री नन्दीसूत्र मूलपाठ ॥ भूअ हुकार था, वाढक्कार पडिपुच्छ वीमसा । वचो पसगपारायण च परिणि सत्तमए ॥९६॥ सुत्चत्यो सल पदमो, पीओ निज्जुतिमीसिओ भणिओ। तइओ य निरवसेसो, एस विही होह अशुओगे || ९७ ॥ से च अगपविठ्ठ, से प मुयनाण से श परोक्सनाण, से पं नदी ।। नदी समचा ।। 1. इअ नंदीसुत्तं समत्तम् BEEGREE श्रीजैन सिद्धान्त-खाम्यापमाला. RAM WIN उववाई सूतं , ? (बावीस गाथा) कहि पडिहया सिद्धा? कहिं सिद्धा पइडिया? । कहिं वोदि चहत्ता ण, कत्थ गतूण सिज्झई ॥१॥ अलोगे पडिहया सिद्धा, लोयग्गे य पडिट्ठिया । इहयोदि चइत्ता ण, तत्थ गतूण सिन्झई ? ॥२॥ ज सठाण तु इह भव चय तस्स चरिमममयमि । आसी य पएमपण त सठाण तहिं तस्स ॥३॥ दीह हस्स वा ज चरिमभवे हवेज सठाण । तत्तो तिभागहीण सिद्धाणोगाहणा मणिया ॥ ४॥ तिण्णि सया तेत्तीसा धणुत्तिभागो य होड बोधवा। एसा सलु सिद्धाण उकोमोगाहणा भणिया ॥५॥ चत्तारि य रयणीओ रयणिति भागणियाय बोधष्ठा। एसा गल सिद्वाण मज्झिमओगाहणा भणिया ॥६॥ एका य होइ रयणी साहीरा अगुलाइ क्ह भवे । एमा सलु सिद्धाण जहण्णओगाहणा भणिया ॥७॥ ओगाहणाए सिद्धा भरतिभागेण होइ परिहीणा। सठाणमणित्थथ जरामरणविष्पमुकाण ॥ ८ ॥ जत्थ य एगोसिद्धो तत्थ अणता भवक्सयविमुका। अण्णोण्णसमोगाढा पुट्टा स य लोगते ॥ ९ ॥ फुसइ अणते सिद्धे सव्यपएसेहि णियमसा सिद्धो । ते वि असखे जागुणा देसपएसेहिं जे पुट्टा ॥१०॥ असरीरा जीनघणा उपउत्ता दसणे य णाणे य । सागारमणागार लक्सणमेय तु सिद्धाण ॥ ११ ॥ केवलणाणुवउत्ता जाणहि सयभानगुणभारे । पासति सध्यओ सलु केनलदिट्टीअणताहि ॥ १२ ।। गावि अत्यि माणुसाण त सोक्स णविय सचदेवाण । ज मिद्धाण मोक्स अध्यायाह उपगयाण॥१॥ ज देवाण सोक्म सघद्धापिडिय अणतगुण | ण य पापड मुतिमुह णताहिं घग्गरम्गूहि ॥ १४ ॥ सिद्धस्स महो रासो सम्बद्धापिंडिओ जड हवेज्जा । सोणतरग्गभडओ मयागासे ण माएजा ॥१५॥ जह णाम कोइ मिच्छो णगरगुणे बहुविहे वियाणतो। ण चएड परिकहेउ उत्रमाण तर्हि असतीए॥१६॥ इय सिद्धाण सोक्ख अणोवम णस्थि तस्स ओवम्म। किंचि विसेसेणेतो ओरम्ममिग सुणह वोच्छ।॥१७॥ जह सबकामगुणिय पुरिसो भोत्तूण भोयण कोई । तण्हाउहाविमुको अच्छेन जहाअमियतितो॥१८॥ इय सव्यकालतिता अतुल निजाणमुनगया सिद्धा । सासयमव्याबाह चिट्ठति मुही सुह पत्ता॥१९॥ सिद्धत्ति य कुद्धति य पारगयत्ति य परपरगयत्ति । उम्मुख कम्मकरया अजरा अमरा असगा या॥२०॥ णिच्छिण्णमयदुक्सा जाइजरामरणमवणविमुक्का । अव्यावाह सुक्स अणुहीती सामय सिद्धा॥२१॥ अतुलसुहमागरगया अब्बासह अणोरम पत्ता । सयमणागयमद्ध चिट्ठति सुह पत्ता ॥ २२ ॥ ॥ उववाइ उवग समत्त ॥ भ भवतु।
श्रीसपिाप-मत्रम् १२१ ॥ श्री सुखविपाक-सूत्रम् ॥ तेण कालेण तेण समएण रायगिद्दे णयर गुणसिलप चेइए सोहम्मे समोसढे जयू जाव पन्जु वासमाणे एव बयासी-जहण मते ! समपेण भगवया महावीरेण जाय सपत्तेण दुहविवागाण अयम? पण्णचे सुनिनागाण मते ! समणेण भगवया महावीरेण जाव सपत्तेण के अट्ठ पण तते ण से सुहम्मे अणगारे जवू अणगार एव पयासी-एच सलु जा समगेण भगवया महावीरेण जाव सपशेण सुहविवागाण दस अज्झयणा पण्णचा । तजहा-सुपाहू १ भद्दनदी य २, मुजाए य ३, सुवासवे ।। तहेच जिणदासे ५, धणपती य ६ महबले ७॥ १ ॥ गहनदी ८ महचदे ९ वरदत्ते १० ॥ जइण मते ! समणेण जान सपत्तेण सुहरियागाण दम अज्झयणा पण्णता पढमस्म ण भते ! अज्झयणस्स सुहरियागाण जाव के अट्ठ पण्णते ? तते ण से सुहम्मे अणगार जयू अणगार एन वयासी-एव खलु जरू' तेण कालेण तणं समएण हस्थिसीसे णाम णयरे हो या रिद्धिस्थिमियसमिद्धे तस्स ण हथिसीसस्स णगरस्स पहिया उत्तरपुरस्थिमे दिसीमाए पन्य ण पुष्फकरडए णाम उजाणे होत्था सन्चोउय त थण कयवणमालपियस्म जक्सम्म जम्माययणे होत्या दिन्ने, तत्थ ण स्थिसीसे पयरे अदीणसत्तू णाम राया होत्था महया. वण्णओ, तस्स ण अदीणसत्तुस्स रण्णो धा- रिणीपामुस देवीसहस्म ओरोहे यावि होत्या । तते ण मा धारिणी देवी अण्णया कयाइ तसि तारिसगमि वामघरसि जान सीह सुमिण पामइ जहा मेहस्म जम्मण तहा भाणियच्च । सुनाहुकुमारे जार अल मोगस्समत्ये यापि जाणति, जाणित्ता अम्मापियरो पच पामायवडिंसगसयाइ करानेति, अभुग्गय० भवण एव जहा महापलस्म रणो, णपर पुप्फचूलापामोरसाण पचण्ह रायपरकण्णय मपाण गदिवसेण पाणिं गिण्हापति तहेव पचमहलो दाभो जाव उपि पासायपरगए फुट्टमाोहिं मुइगमस्यएहिं जाब विहरह। तेण कालेण तेण समएण ममणे भगर महातीरे समोसढे, परिसा निगया, अदीणमत्तू जहा कूणिओ तहन निग्गओ सुपाहू चिजहा जमाली सहा रहेण निग्गए जाप धम्मो कहिओ गया परिमा पडिगया। तण्ण से सुबाहुकुमार समणम्म भगवओ महापीरस्म अतिए धम्म सोचा णिसम्म हट तुट्ट० उहाए उष्टेति जार एव वयासी-सदहामि ण भते ! णिग्गथ पावयण० जहा ण दवाणुपियाण अतिए यहार गईसर जाय सत्थवाहप्पमिइओ मुडे भविता अगा राओ अणगारिय पवइया नो सलु अगहण तहा सचाएमि मुडे भविता अगाराओ अणगारिय पञ्च- उए अहण्ण देवाणुप्पियाण अतिए पचाणुवडय मत्तसिसावडय दुवालसविह गिहिधम्म पडिवजि- सामि, अहासुद्द देवाणुप्पिया! मा पडियध करेह । ततेण स मुबाहुकुमारे समणस्म भगवओ महा वीरस्म अतिए पचाणु पय मासिक्सावाय दुपालमविह गिहिधग पडिवजति पडिवजिता तमेच चाउग्घट आसरह दुरुहवि जामेव दिम पाउम्भू तामादिस पडिगए । तेण कालेण तण ममएण समास भगवओ महावीरस्स जेटे अतेवासी इदभूइ नाम अणगारे जाव एव वयासी-अहोण मते । सुपाहुकुमारे इवे इहरूवै कते २ पिए २ मणुणे २ मणामे २ सोमे सुभगे पियदसणे मुरूप १२२ श्रीजेनसिद्धान्त-खाध्यायमाला . बहुजणस्सवि य ण भते ! सुपाहुकुमारे इढे ५ मोमे ४ साहुजणस्मवि य णं भते ! सुबाहुकुमारे इडे जाव सुरूवे । सुबाहुणा भते ! कुमारेण इमा एयारूना उराला माणुस्सरिद्धी किण्णा लद्धा किण्णा पत्ता? किण्णा अभिसमन्नागया ? के वा प्रम आसी पुनभये? एव ग्यलु गोयमा ! तण कालेण तेण समएण इहेव जद्दीवे दीवे भारह वासे हरियणाउर णाम णगरे होत्था रिद्ध० तत्व ण हत्थिणारे णगरे मुमुहे नाम गाहावई परिवसइ अड्डे० तेण कालेण तेण समएण धम्मघोमा णाम येरा जातिसपना जाव पचहि ममणसएहिं सादि सपरिघुडा पुयाणुपुश्विं चरमाणा गामाणुगाम दुइ जमाणा जेणेव हथिणाउरे णगरे जेणेप महसवणे उजाणे तेणेव उवागन्छइ उवागन्छित्ता अहा पडिरूव उग्गह उग्गिण्हित्ता सजमेण तपमा अप्पाण भाषमाणा विहरति । तेण कालेण तेण ममएण धम्मघोसाण थेराण अतेवासी सुदत्ते णाम अणगारे उराले जान लेस्से मास मासेण सममाणे विह रति तए ण से सुदत्ते अणगारे मासक्समणपारणगसि पढमाए पोरिसीए मज्झाय करेति जहा गोयमसामी तहेव धम्मघोसे ('सुधम्म) धेर आपुति जार अडमाणे सुमुहरस गाहावतिरस गेहे अणुपविढे तए ण से सुमुहे गाहावती सुदत्त अणगार एसमाण पासति २ त्ता हहतढे आमणातो अन्मुट्ठति २ ता पायपीढाओ पचोरुहति त्ता पाउयाओ ओमुयति २ चा एगासाडिय उत्तरासग करति २ ता सुदत्त अणगार सत्तट्ठ पयाइ अणुगच्छति २ ता तिवसुत्तो आयाहिणपयाहिण करेड २ चा वदति णमसति २ चा जेणेव भत्तघर तेणेन उपागच्छति २ ता मयहत्येण पिउण अमण पाणरवाइमसाइमेण पडिलामेस्मामीति तुट्टे पडिलामेमाणनि तुट्ट पडिलाभिएवि तुढे । तते ण तस्स सुमुहस्म गाहावइस्स तेण दजसुद्धण दायगसुद्वेण पडिगाहगसुद्धेण तिरिहण तिकरणसुद्धेण सुदत्ते अणगारे पडिलाभिए समाणे ससार परित्तीकए मणुस्साउए निवद्धे गेहसि य से इमाइ पच दिवाइ पाउन्भूयाइ तजहा- महारा बुट्ठा १ दसद्धवन्ने कुसुमे नियातिते २ चेक्खे कए · आहयाओ देवदुदुहीओ ४ अतरानि य णे आगाससि अहो दाणमहो दाण घुट्ठ य ५ । हत्यिणाउरे नयरे सिंघाडग जान पहसु बहुजणो अन्नमनस्म एवमाइक्खड ४-धण्णे ण दवाणुप्पिया! सुमुहे गाहावई सुकयपुन्ने कयलक्सणे सुलद्धे मणुस्सजम्मे सुम्यरिद्धी य जाब न धन्ने ण देवाणुप्पिया! सुमुहे गाहावर्ड । तते ण से सुमुहे गाहावई पहूइ वाससयाइ आउय पालत्ता कालमासे काल फिच्चा दहब इत्थिमीसे एगर अदीणमत्तस्म रनो धारिणीए देवीए बुञ्छिसि पुत्तत्ताए उनमन्ने । तते ण मा धारिणी देवी सय णिजसि सुत्तजागरा ओहीरमाणी २ सीह पामति सेस न चैत्र जाम उप्पि पामार विहरति त एय खलु गोयमा! सुबाहुणा इमा एयारूपा माणुस्मरिद्धी रद्धा पत्ता जभिसमन्नागया पभू ण भते ! मुबारमार देवाणुप्पियाण अति मुडे भवित्ता अगाराओ अणगारिय पचहत्तए ? हता पभू। तते ण से भगय गोयमे समण भगव महावीर पदति नममति • त्ता सजमेण तपसा अप्याण भावेमाणे विहरति । तते ण से समणे भगव महावीरे अन्नया कयाइ हत्यिसीमाओ जगराओ पुप्फकरडाओ उसाणाओ कयषणमालपियरस जक्सस्म जक्साययणाओ पडिणिक्खमति र त्ता पहिया जणग्य श्रीसुखविपाक-मूत्रम् १२३ बिहार विहरति । तते ण से सुबाहुकुमारे समणोवामए जाते अभिगयजीवाजी जार पडिलामेमाणे विहरेति । तन ण से सुपादुकुमारे अन्नया क्याइ चाउद्दसहमुदिषुण्णमासिणीसु जेणेन पोमहसाला तेणेप मागन्छति २ चा पोमहमाल पमञ्जति - चा उच्चारपासवणभूमि पडिलेहति २ ता दम्भ सथार मथरेइ २ ता दम्ममयार दुरूहइ २ चा अट्ठममत्त पगिण्हहा पोमहमालाप पोमहिए अट्ठमभत्तिए पोसह पडिजागरमाणे विहरति । तए ण तस्स सुगाहुरम कुमारस्स पुन्वर तावतकाल. ममयसि यम्मजागरिय जागरमाणरस मे एयारवे अज्झस्थिए . समुप्पन्ने घण्णा ण ने गामागरणगर जार सन्निवसा जन्मण समणे भगन महावीरे जार विहरवि, घना ण तेराईमरतलपर० जे ण समणस्म भगवओ महावीरस्म अतिए मुडा जान पध्ययति, घना ण ते राईसरतलघर० जण ममणम्स भगवओ महावीरस्म अतिए पचाणु हय जार गिहिधम्म पडिज्नति, धन्ना ण ते राइसर जार जे ण ममणस्म भगनओ महावीरस्स अतिष धम्म सुणेति, त जति ण समणे भगव महावीरे पुत्राणुपुब्धि चरमाण गामाणुगाम हलमाणे इहमागनि उना जाव विहग्ना तते ण अह समणस्स भगाओ महावीरम्म अतिए मुडे भरिचा जाब पयजा । तते ण समणे भगव महावीरे मुबाहुस्म कुमारस्म इम इयारूप अज्झस्थिय जाब वियाणित्ता पुन्याशुपुब्धि जाव इन्जमाणे जेणे हथि सीसे णगरे जण पुप्फारडे उन्नाणे जेणेर स्यणमालपियस्म जमस्म जक्खाययणे नेणेव उवाग छह २ सा अहापडिरून उगह उगिगिदत्ता मजमेण तपमा अप्पाण मावेमाणे विहरति परिमा राया निग्गया । तत ण तस्म मुपास्म कुमारस्म त महया जहा पढम तहा निग्गओ धम्मो पहिलो परिमा राया पडिगया । तत्त ण से सुबाहुकुमार ममणरस भगवओ महावीरस्स अतिए धम्म योचा निसम्म हट्ट तुट्ट जहा मरे तहा अम्मापियगे आपुन्छति, मिक्खमणाभिसेओ तहत जाव अणगार जाते इरियाममिण जाव वमयारी, ततेण में सुपाहु अणगारे समणस्म भगवओ महावीरस्म तहारलाण थेराण अतिए सामाइयमाडयाइ एकारस अगाइ अहिसति २ चा पहिं चउत्थरहम० तयोविहाणेहिं अप्पाण भाविता बहा यामाइ सामनपरियाग पाउणित्ता मासियाए मठेहगाए अप्पाण झूसित्ता महि भत्ताइ अपमणाए उदित्ता आलोइयपडिफते समाहिपत्ते कालमासे गाल फिचा सोहम्मे कप्पे देवनाए उसपन्ने, से ण ततो देवलोगाओ याउक्सएण मक्सएण टिड कपण अणवर चय चहना माणुस्म विगह लभिहिति. चा केवल बोहिं बुझिहिति २ त्ता तहारूवाण थेराण अतिए मुडे जार पाउस्मति, से ण तत्थ बहूइ वामाइ सामण्ण परियाग्ग पाउ- णिहिति आलोइयपडिकते समाहिपत्ते गाल करिहिति सणकूमारे पप्पे देवत्ताए उववजिहिति, मे ण तओ दफ्लोगाओ माणुम्म पप्पा यमलोए ततो माणुस्स महासुके ततो माणुस्म आणते दो ततो माणुस्म ततो आरण दवे ततो माणुस्म मपट्टसिद्ध, से ण ततो अणतर उपद्वित्ता महाविदेह मासे जाव अड्डाइ जहा दटपडन्ने सिज्झिहिति • जान एव खलु जरू। समणेण नाव मपत्तेण मुहविधागाण पढमस्म अज्झयणस्स अयमह पाते असमयण समत्त ॥१॥ पितियम्स ण उपसेयो (-पच ग्नल जम्बू । तेण कालेज वेण समएण उसमपुरे णगर थमफरंड- १२४ श्रीजैनसिद्धान्त-खाध्यायमाला । । उजाणे धन्नो जक्सो धणामहो राया सरस्सई देवी सुमिणदसण कहण जम्मण पालत्तण कालाओ य जुचणे पाणिग्गहण दाओ पासाद० भोगा य जहा सुपाहुस्म, नवर भद्दनदी कूमारे सिरिदेवीपा मोक्माण पचसया सामी समोसरण सारंगधम्म पुनभवपुच्छा महाविदेहे वासे पुडरीकिणी गगरी विजयते वुमार जुगवाहू तित्थयरे पडिलाभिए माणुस्साउए निद्धे इह उप्पन्ने, सेस जहा सुबाहुस्स जान महाविदह से सिज्झिहिति युज्झिहिति मुचिहिति परिनियाहिति सयदुक्साणमत करेहिति । वितिय अज्झयण समत्त ॥२॥ तञ्चस्म उक्खेनो-वीरपुर णगर मणोरम उजाण वीरकण्हे जक्से मिचे राया सिरि देवी : सुजाए कुमारे चलमिरिपामोक्सा पचसयकमा मामी समोसरण पुनभवपुच्छा उसयार नयरे उसमदत्ते गाहावई पुप्फदचे अणगारे पडिलाभिए मगुस्साउए नियद्धे इह उत्पन्ने जाव महानिदहे । वासे सिज्झिहिति ५ ॥ तड्य अज्झयण समत्त ॥ ३ ॥ चोत्यस्स उक्सेवी--विजयपुर णगर णदणवण [मणोरम] उजाण असोगो जक्खो वासवदने राया कण्हा दवी सुवासवे कुमारे भद्दापामोक्सा ण पचमया जाव पुष्यभवे कोसवी णगरी धणपाले राया वेसणभद्दे अणगारे पडिलाभिए इह जाप सिद्ध । चोत्थ अज्झयण समत्त ॥ ४॥ पचमस्म उक्खेरओ-सोगधिया णगरी नीलासोए उजाणे सुकालो जक्सो अप्पडिहओ गया मुकना देवी महचदे कुमारे तस्म अरहदत्ता भारिया जिणदासो पुत्तो तित्थयरागमण जिण दामपुत्रभवो मज्झमिया गगरी मेहरहो राया सुधम्मे अणगारे पडिलाभिए जाब सिद्धे ।। ॥ पचम अज्झयण समत्त ।।५।। छट्टस्म उक्खेवओ-यणगपुर णगर सेयामोय उन्नाण वीरभद्दो जक्सो पियचदो राया सुभदा देवी वममणे कुमारे जुबराया सिरिदेवी पामोक्सा पचमया कना पाणिग्गहण वित्थयरागमण . धनपती याराय पुत्ते जार पुन्वभवो मणिपया नगरी मिचो राया सभूतिविजए अणगारे पडिलाभिते जार सिद्ध । छट्ट अज्झयण समत्त ॥ ६ ॥ सत्तमस्म उक्सेवो-महापुर णगर रत्तासोग उजाण रत्तपाओ जक्सो पले राया मुभद्दा देवी महन्मले चमार रत्तवईपामोकवाओ पचमयाना पाणिग्गहण तित्थयरागमण जार पुषभयो मणिपुर मगर णागदत्ते गाहावती इन्ददत्ते अणगार पडिलाभिते जाव सिद्धे ॥ मत्तम अज्झयण समत्त ॥ ७॥ अट्टमस उपखेवो-सुघोस नगर देवरमण उजाण वीरसेणो जक्सो अज्जुण्णो राया तत्तपती देवी भद्दनदी बुमारे सिरिदवीपामोक्सा पचसया जाव पुच्चभरे महाघोसे णगर धम्मघोसे गाहारती धम्मसीहे अणगार पडिलामिए जार सिद्ध ॥ अट्ठम अज्झयण ममत्त ।। ८ ॥ णवमस्म उक्सेवो-चपा णगरी पुन्नभद्दे उनाणे पुन्नमदो जक्सो दत्ते राया रत्तवई दवी महचदे कुमारे जुबराया सिरिकतापामोक्खा ण पच सया कना जाम पुत्रभो तिगिन्छी गगरी -
श्रीसुग्धविपाक-सूत्रम्
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घमन्त राया धम्मारिए अणगारे पडिमिए जाप सिद्धे ।। नवम अज्झयण समच ॥ ९ ॥
अति श दसमस्म उसेयो- एम सर जयू! तेण कालेण तेण समएण साएप नाम नपर होत्था
अनाउन्जाणे पाममियो जक्सो मिसनदी या सिरिकता देवी वरदत्ते कुमारे बरसेणापामोक्सा
एपदैवीयया तिन्थपरागमणं सावग्गधम पुपमयो पुच्छा सत्तदुपार नगर विमल पाहणे राया
कमाई अणगारे पडिलाभि ससार परित्तीकर मणुस्माउ निपद्धे इई उप्पन्ने रोस जहा सुबाहुम्म
जास्स चिंता जाब पच्या कप्पतरिओ जान सन्मसिद्ध ततो महाविदेहे जहा दढपइनो जाप
बिनदिति युज्झिहिति मुचिहिति परि नियाहिति सम्बदुसाणमत करेहिति ॥ एर सलु जबू!
पुरण भगवया महागीरण जार नपत्तेण मुहविभागाण दममस्म अन्झयणस्म अपमढे परते,
अव मते ! सर भन ! मुहविधागा ।। दसम अज्झयण ममत्त ॥ १० ॥
नमो सुयदेवाण-विरागसुयस्म दो मुसक्सधा दुइवियागो य शहविधागो य, तत्थ दुइरियागे
रम्हपणा दम एकसरंगा दसमुचा दिवसेमु उहिसिञ्चति, व सुइविधागो वि सेसं जहा आपारस ।।
ठि एकारसम अगसमत्त ।।
11 इअ सुपविपाकसुत्त समत्तम् ।।
॥ सूत्रलांगसूत्रे वीरस्तुत्यारय पष्टमध्ययन ॥
पुच्छिम्सु पण समणा माइणा य, अगारिणो या परनित्थिा य ।
से कइ णेगतहिय धम्माहु, अणेलिस साहु ममिक्सयाए ॥ १ ॥
१६ च गाण कह दमण से, सील कह नायसुतस्म आसी!।
जाणासि ण मिक्सु जहातहण, अहासुत हि जहा णिसत ॥ २॥
खेयना से कुमलापन्ने (ल महसी) अणतनागीय अण तदसी ।
जसमिणो चक्सुपहे ठिपस्स, जाणाहि धम्म च घिइ च पेहि ।। ३ ॥
उह अहेय तिरिय दिसामु, तमा य जे थार जे य पाणा ।
से णिञ्चणिचेहि समिख्य पन्न, दीरे व धम्म समिय उदाहु ॥ ४ ॥
से सदसी अभिभूयनाणी, निगमगधै धिडम ठितप्पा ।
अणुत्तर मन्बजगसि विज, गथा अतीते अभए अणाऊ ॥ ५ ॥
से भूडपण्णे अणिण्अचारी, ओहतर धीरे अणतचक्य ।
अशुत्तर तप्पति मरिए गा, बहरोयणिंदे व तम पगासे ॥ ६॥
अशुत्तर धम्ममिण जिणाण, णेया मुणी कामय आसुपने ।
इदर दवाण महाणुभाव, महस्मता दिविश विसि ।। ७ ॥
से पन्नश अक्सयमागरे वा, महोटही चावि अणतपारे ।
अणाहले गा अकसाइ मुके, सोच देवाहिवई जुईम ॥ ८ ॥
१२६ श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला . । E से वीरिण्ण पडिपुन्नवीरिए, सुदसणे वा णगसबसेढे । सुगलए बासिमुदागर से, विरायए णेगगुणोरवेए । सय सहस्माण उ जोयणाण, तिकडगे पडगवेजयते । में जोयणे णवणरते सहस्से उध्धुस्मितो हेट्ठ महस्ममेग ।। १०॥ पुढे णमे चिट्ठह भूमिवहिए, ज सरिया अणुपरिवठयति । से हेमपन्ने यहुनदणे य, जसी रतिं वेदयती महिंदा ॥ ११ ॥ स पच्चए सहमहप्पगासे, विरायती कचणमट्ठान्ने । अणुत्तरे गिरिसु य पव्वदुग्गे, गिरीवर से जलिएर भोमे ॥ १० ॥ महीड मज्झमि ठिते णगिंदे, पन्नायते सूरिय सुद्धलेसे । एव सिरीए उ स भूरियन्ने, मणोरमे जोयड अचिमाली ॥ १३ ॥ मुदसणस्मेव जसो गिरिस्म, पवुचई महतो पायस्म । एतोवमे समणे नायपुत्ते, जातीजसोदमणनाणसीले ॥ १४ ॥ गिरीवरे वा निसहाऽऽययाण, रुपए व मेढे वलयायताण । तओनमे से जगभृइपन्चे, मुणीण मज्झे तमुदाह पन्ने ॥ १५ ॥ अणुत्तर धम्ममुईग्इत्ता, अणुत्तर झाणवर मियाइ । मुसुकसुक अपगडसुक, ससिदुएगतरदातसुक्क ॥ १६॥ अणुत्तरग्ग परम महेसी, अमेमकम्म स विसोहहत्ता । सिद्धि गते साइमणतपत्ते, नाणेण सीलेण य दमणेण ॥ १७ ॥ रुक्खेसु पाते जह मामली वा, जसिं रतिं वेययती सुयना । यणसु वा ण णमाहु सेट्ट, जाणेण सीले य भृतिपन्ने ।। १८ ॥ थणिय व मदाण अणुत्तर उ, चदो व ताराण महाणुभारे । गवसु वा चदणमाह सेट्ट, एव मुणीण अपडिनमाहु ।। १९ ॥ जहा मयभू उदहीण सेटे, नागेसु रा धरणिंदमाह सेटे । सोओदप वा रस वेजयते, तोवहाणे मुणिवेजयते ॥ २० ॥ हत्थीसु एरापणमाहु णाए सीहो मिगाण सलिलाण गगा। परसीसु वा गरुले येणुदवो, नि वाणवादीणिह णायपुत्ते ॥ २१ ॥ जोहेसु णाए जह चीससेणे, पुप्फेसु वा जह अरविंदमाह । यतीण सेढे जह दतके, इसीण मढे तह पमाणे ॥ २२ ॥ दाणाण सेट अभयप्पयाण, सच्चेसु वा अणवल यति । तमु वा उत्तम पमचेर, लोगुत्तमे समणे नायच ॥ २३ ॥ ठिईण सेंटा लपमत्तमा वा, समा मुहम्मा या समाण सेट्ठा ।
श्रीमुखापार-सूत्रम् mannmanawm ANA , नित्राणसेट्ठा जह सबधम्मा, ण णायपुत्ता परमत्यि नाणी ॥ २४ ॥ पुढोपमे धुणड विगयगेहि, न सणिहिं युवति आसुपन्ने । तरिउ समुद्द व महामवोध, भयको वीर अणतचक्यू ॥ २५ ॥ फोह च माण च तहेर माय, लोभ चउत्य अज्झत्थदोसा । एआणि बता रहा महसी, ण कुचई पावण पारवेड |॥ २६ ॥ किरियाकिरिय वेणयाणु वाय, अण्णाणियाण पडियच ठाण । से सम्बवाय इति वेयहत्ता, उचट्टिए सजमदीहराय ॥ २७ ॥ से बारिया इत्थी सराइभत्त, उपहाणार दुक्ससयट्टयाए। लोग विदित्ता आर पर च, सब पभू पारिय सध्यवार |॥ २८ ॥ सोचा य धम्म अरहतमासिय, समाहित अहपदोवसद्ध । त सदहाणा य जणा अणाऊ, इटा व देवाहिर आगमिस्सति ॥ २९ ॥ ॥ इति श्रीवीरस्तुत्यारय पष्टमययनम् ।। । मोक्षमार्गनामक एकादशाध्ययनम् ॥ व मग गुत्तर मुद्ध, सम्बदुक्सविमोक्सण । जाणासि ण जहा मिक्खु, त णो वृहि महामुणी ॥२॥ कयरे मग्गे अक्साए, माहणेण मइमता ! ज मांग उज्जु पाविना ओह वरति दुचर ॥१॥ नइ णो वह पुच्छिा, देवा अदुन माणुमा । तेसिं तु कयर माग, आइखेनौ महाहि गो ।।३।। जह यो केइ पुच्छिज्जा, देवा मदुच माणुसा । नेसिम पडिसाहिन्ना, मग्गसार सुणेह मे ॥ ४ ॥ अणुपुष्पेण महाघोर कामरेण पञ्चैहय, । जमादाय इओ पुष, ममुद वहारिणी ॥५॥ अतरिमु तरतेगे, तरिस्सति अणागया। त सोचा पडियक्यामि, जतवो त सुणेह मे ॥६॥ पुढवीजीस पुढो सना, आउजीया तहाऽगणी । वाउजीवा पुढो सत्ता, तणरुक्खा सीयगा 10M अहावरा तमा पणा, एक छक्काय आहिया । एतापण जीयगण, णावर कोइ विनई Mem सवाहिं अणुजुचीहि, मतिम पडिलेहिया ! मध्ये अक्तदुक्खा य, अती सव्वे न हिमया ॥६॥ एय सु णाणिओ सार, ज न हिंसति कचण । अहिंसा समय चेद, एतावत विजाणिया ॥१०॥ उस अ य तिरिय, जे केड तसथावरा । सवस्य चिरति विज्ञा, सति निब्याणमाहिय ॥ ११ ॥ पभू दोमे निराकिच्चा, ण विरुज्झेश केणई । मणमा वयसा चा, कापमा चव अतसो ॥ १२ ॥ सघुडे मे महापन्न, धीरे दत्तेमण चरे। एसणाममिण णिच, रजयते अणेसण ॥ १३ ॥ भूयाइ च समारभ, तमुदिमा य ज क्ड । वारिस तु ण गिदेवा, अन्नपाण सुमजए ॥ १७ ॥ पूईकम्म न सेविजा एस धम्मे गुमीमओ। ज किंचि अभिरुवझा, सन्धमो तन कपए हणत जाणुनाणेना, आयगुत्ते जीइदिए । ठाणाड सति सहाण, गाम नगरेम तहा गिर समारम, अस्थि पुग्णात एगे वए । अहवा गधि जति, एव मेय - पा"t.
१२८ श्रीजैनसिद्धान्त-स्वाध्यायमाला - दाणट्टया य जे पाणा, हम्मति नसथावरा । तमि सारक्सणवाए, तम्हा अस्थित्ति णो वए ॥ १८ ॥ जेमि त उनकप्पति, अन्नपाण, तहानिह । तेसिं लामतरायति, तम्हा णस्थिति णो वए ॥ १९ ॥ जो य दाण पससति, वहमिच्छति पाणिण । जे य ण पडिसहति, वित्तिय करति ते ॥ २० ॥ दुहओवि ते ण भासति, अस्थि वा नयि ना पुणो। आय रयस्स हेचा ण निब्याण पाउणति ते॥२॥ निमाण परम बुद्धा, णक्सत्ताण व चदिमा । तम्हा मदा जाग दते, नियाण सधए मुणी ॥ २२ ॥ युज्झमाणण पाणाण, किचताण सकम्मुणा । आघाति माहु त दीव पतिवसा पवुच्चई ॥ २३ ॥ आयगुत्ते सया दते, छिन्नमोण अणामरे । जे धम्म मुद्धमक्साति, पडि पुग्नमणेलिम ॥ २४ ॥ उमेर भविजाणता, अबुद्धा युद्धमाणिणो । बुद्धा मोति य मन्नता, अत एने समाहिए ॥ २५ ॥ ते य बीओदग चेन तमुद्दिस्सा य ज कड। भोचा झाण झियायति, असेयन्ना(अ)समाहिया । २६ ॥ जहा ढका य कका य, कुलला मग्गुका सिही । मन्छेमण झियायति झाण ने कलुनाधम ॥ ७ ॥ एव तु समणा एगे, मिन्छविट्ठी अणारिया । विसएमण झियायति, ककावा कलुताहमा ॥ २८ ॥ सद्ध मग्ग विराहिता, इहमेगे उ दुम्मती । उम्मग्गगता दुक्स, धाय मेसति त तहा ॥ २९ ॥ जहा आसाविणि नाम जाइअधो दुरूहिया । इच्छई पारमागत, अतरा य विसीयति ॥ ३० ॥ एन तु समणा एगे, मिच्छदिट्टी जणारिया । सोय सिणमापना, आगतरो महन्मय ॥ ३१ ॥ इम च धम्ममादाय, कामयेण पोदित । तर मोय महाघोर, अत्तनाए परिवए ॥ ३२ ॥ पिरए गामधम्मेहि, जे केई जगई जगा । तेसिं अत्तुनमायार, थाम कुछ परिबए ॥ ३३ ॥ अमाण च माय च, त परिन्नाय पडिए । मन्त्रमेय णिराकिचा, णियाण सघए मुणी ॥ ३ ॥ मधए साइधम्म च, पारधम्म णिराकरे । उपहाणपीरिय भिक्य, कोह माण ण पत्थए ।॥ २०॥ जे य युद्धा अतिकरता, जे य युद्धा अणागया। सति तेसिं पइट्ठाण, भूयाणा जगती जहा ॥ ३६ ॥ अह ण नयमावन, फासा उच्चावयाफुसे । ण तेसु विणिण्णेन्जा, वारण च महागिरि ॥ १७ ॥ डे से महापन्ने, धीरे दत्तेसण चरे । निव्वुड कालमाकसी, ण्व (य) पचलिणोमय ॥ २८ ॥ ॥ इति मोक्षमार्गनामक एकादशमध्ययनम् ॥ सुभाषित केटलीक गाथानो सग्रह पचमहलयमुनमुल,समणामणाइलसा दुसुच्चीन्न । वेरनिरामणपनमाण,सव्यममुद्दमोन्दधी तित्थाश विस्थकर हिंसु देसियमग्ग, नरगतिरि छवियन्झियमग्ग । मध्यपरित्त सुनिम्मियमार मिद्धिविमाण अवगुयदार ॥ २ ॥ देवनारिंदनमसियपूय, सव्वजगुत्तममगलमग्ग। उधरिमगुणनायगमेग, मोक्सपहस्सवाडिमगभूय।।३।। (प्रश्नयाकरणसूत्रे सवरद्वारे) धम्मारामेचरेमिव । पिइम धम्मसारही। धम्मा रामेश्यादते । भरसमाहिए । ४ ॥
प्रास्ताविक-गाथाओ १२९ , . देवदाणगधव, जक्सरस्सस्सकिन्नरा । भयारि नममति दुहार , परतिद ॥ ५ ॥ एस धम्मे घुरे निचे, सामए जिगदेसिए । सिद्धा सिज्झति चाणेण, सिन्झिस्सति नहावर ॥६॥ (उत्तराध्ययन सू) पोडशशध्ययन अरहत सिद्ध परयणगुरु और बहुस्मुरए तपस्सी । बच्उल्लया य मि अमिक्खणाणणोरओगे य ॥७॥ दमण विणए आवस्सए य, सीलबए निरइयार ! खणलव तत्र चियाए, वेयाचे समाही य ॥८॥ अपूषणाणगहणे सुयभत्ती, पचयणे पमारणया । पयहि कारणेहि तित्ययरत्त लहह जीओ ॥ ९ ॥ (साताधर्मस्थासूत्र) जिणश्यपणेअणुरत्ता जिणायणजे करति भावेण । अमलाअसकिलिहा, तेजतियपरित्तसमारि ॥१०॥ एयखुनाणीणोमार, ज नहिं सई किचण । अहिंसमय चैत्र, एतारत्त वियाणि य ।। ११ ॥ जाति च बुष्टिं च इह दूपास, भूतेहिं जाणेहिं पडिलेहसाय । तम्हातिविझोपरमतिणचा, मम्मचदसी न करेई पाप ।। १२ ।। उम्मुधपास इद्द मचिएहि, आरमजीवीऊज्झपयाणुपरसी । कामेसु गिमाणिचयफरति, सर्मिचमाणापुणरेनिगम । १३ ॥ सावणेनाणेविनाणे, पञ्चमेक्वाणेयसनमो । अणएहएतवेचेव, चोदाणे अफिरिपासिद्धि ॥ १४ ॥ एगोह गस्थि मे कोड, नाह मन्नस्म कम्मइ । एक अदीणमणस्मा, अप्पाणमणु सामइ ॥१५॥ एगोमे सामओ अप्पा, नाणदसणसजओ। सेसामे याहिरा भावा, मन सजोग लग्यणा ॥ १६ ॥ जीविभो नाभिगच्डेआ मरण नो विपत्थए । दुहउ विनइनेखा, जीविओ मरण तहा ॥ १७ ॥ सार दमण नाण, सार तप नियम सजमसीला सार निण वर धम्म सारसलेहणापडियमरण ॥ १८ ॥ कलाणकोडिकारिणी, दुगइदुर निठवणी, ससारजस्तारणी, एगतहोउनीवदया ॥ १९ ॥ आरमे नस्थि दया, महिलएसगनामाइयभ । सकाएनामइसम्मत्त, एवज्झाअस्थग्गहण च ॥ २० ॥ मअविमयकसाय, निहाविकहायमचमामणिया । ए ए पचप्पमाया, जीगपतिसमार ॥२१॥ रसति विमलामोए, लझति मुरसपया । लक्षति पुत्चमिच च । एगोधम्मो न लज्झई १ २२ ॥ नबिसुद्दीदेवतादेवलोए,ननिसुदीपठनीपहराया। ननिसहीसेठिसेगावाय,एगतमहीसुणीवीपगगी॥२६॥ नगरी सोहति जलमूलबाग, नारीयोहतिपरपुरुपत्यागे । राजसोहत सभा पुराणी, सामोहता अमृतवाणी ॥ १४ ॥ चलंतिमेरुचलतिमदिर, चलतितारारविचमडल । कदापि काले पृथ्वी चलति, सत्पुरुषवाक्यो न चलति धर्म ॥२५॥ अशोकक्षा सुरपुष्पवृष्टि-दिव्यध्वनियामरमामन च । मामहल दुमिरातपत्र, मत्नातिहार्याणिजिनधराणा ॥ २६ ॥ कप अनोपम तुस्य न कोई, वाणीसुणताश्रवणसुसहोई । देहसगधी हरे पुष्पवान, चउमठझ्द्ररह प्रभु पाम ॥ २७ ॥ चउदपुरनधारकहिय,ज्ञानाचारवाणीय। जिननहिं पप जिनसरिसा, श्रीमृधर्मस्वामी जाणी॥ २८॥ रुप अनोपम पसाणीए,देवनाने यल्लम लागे। एक मी ॥ शुद्धिपत्रकम् ॥ उत्तगयनमून अ य र गापाक अगुद्र गुद्ध अध्य पृष गाथाक भशुद्र . ४ १४ भिवाचरिय मिकवायरिय १ २ २४ धम्म २ ३ १५ ४ सयगामाण सजमबदले ५ 14 २५ ४ ४ ३ ५ २७ ३ निहाभाल ४ सयणासण सजमबहसे परपहरे निहाशीरे उदारेर होगभिण सोठण जहाहम ६ ५ २८ . 3 ६ दुरसार निदाइ घर मुआ अभिमायण प युपीगरीया वासस पर महावीर समारभ पमीमा गाविसु असामगो भचिन मिस्सगे - २८ ५ २९ १८ होमिण सोजण इम ८ ५ ७ दन नसो अन तसो ५ ७ १९ ३१ १५ ३२ १९ ३२ ५६ ५ ७ ८५ . ६ ५ अनसे सम्यक्ख अमजया शित्ताहि मसीए ममुामुणी ७ ૨૮ पिया २२ २२ ७ भवसे सम्वदुक्त भमाया चित्ताहि खतिए महामुगी ससयो इमो गोयम सम्बदुरव विमोबाण ९ १२ २८ दुमार निस्टाइन घरे सभा भभिवाय ५थुपिपारिया वीमसे दुरत्तरे महावारण समारंभह पम्पीभो गरिनु ससिणा भञ्चिमा भिकाया पियाण्णुपा दयत्ति नरसु राहो मिहिलामो भित्तण कामभाग अहो ते सहा निया. घोदरसहि द नहि पद महिलामो कामा अकाउ सुविण दीयमाड सफा सुमभिया दर मरण गहा मिदि ५४ ससचो ८ १. गोमय सम्वदुक्पण fn १ १२ काम ५० रडामो . ६ बदामो जभि भाणुपाणा . - १ ६ रदा निरन चोइदि म तदि 7 आणपाणु ए धारे पधारे ३१ ३० ३२ जभिण्ड पावाद १३ ५५ ६ १ ૧૨ ३२ ५६ पचाइ दमिह धक्यु वग सायममादिन काऊग स्वत खसरसो म्भाद धमार गुणि हीपमार्ट माग सुममिया रक्ग्वण सायमसाय ६ २७ E: ७ काण्ण १४ ५३ १२ - सससारको मध्य पृष्ट गायक मध्य पृष्ट गापाक जपस्याण प एकाग ८ ९1 ८ भष्पमस्याण लसाण ব্যথা परिमदा महा सचत्रमा विशश्यशजे १७ ३० ९१ मायावा परिमएका भहप सत्तेवना जिसवर्ण 4 ૬૨ भभायण ममायमण सह तहे। १५ महेष तहे। महाकार महापस भमप्पणी गमपणो ४१ सम्मि मजमि भायभाया সাহিত্য ९ गुरहालसा गुरडीगा २ला मुभमाहिए मुहममा सुहावह सुहारह ८ ८ . ९२ ९३ . ९ ९ २१ दर्शकालिक शुद्धिपत्रकम् ४ " ७ ४ ७९ . मिक्ये सिंधव परीटी गाऊ तऊ परिगाह परिगिण्डाविस्ता वा उदछवाकाथ समणुपामि ममणुजाणिमा वा, सजसिवा हिंसह कोरतुधाइ कोलचुनाई भपुग्मि अमुग्छिगो २ रायभो रायाणी - ४ १९ नन्दीपूर शुद्धिपत्रम् गुण उत्तमगुण १०२ दि रविमोनहि १०० माग्नुण नाग जुग ११1 १ सरी अगदमाओर भतगदसामो 110 भगु भोगदारा अणु भगदारा ११४ सग ससिमाओसग से उममिजससे ५७ गाया खेतमाल ४ " ५ ५ ६५ ६ क्या
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