Agarchand Bhairondan Sethiya Jain Parmarthik Sanstha, Bikaner
Shree Pakaran Sanghra Bhag-2
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मेदिया अन प्रामालय-पुस्तक न. ३५.
३७२ श्री प्रकरण संग्रह-भाग २ जो.
... वर्गस्य १. मुनिराम श्री उत्तमजी स्थामीए मंशाधीने तयार करेगा २७ पोकरानी पड.]
धमंचंद्रजी तत्पुत्र भैरोदानजी नपुन जेठमल मेठिया
बीकानेर-निवासी.
.
प्रथम आवृत्ति
प्रत २०००. संपत १९८०. म. १९२४.
पौर भगत २५५...
भी "घोर-शासन मिटींग प्रेम" मो शा. पेशवपाल दलमुत्रमाप साय है, कापर टंकशाय-अमदावाद
मूल्य का ?
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। प्रकारे मन मेळाराने गौ कोनि एमगर गुलभ होत नपी. भावा निमायभाने मोटे नैनागपोमांपी प्रकरणो एटा पारीने आपनामा पार ले नो नो मायगारा प्रमाण ले रामा भारे प्राप्रकरणी पोहा यमामां देण-गुणपर्यवर्नु वान प्राप्त करा पाटे पणा उपांगो पुरसार पा ले आने यो नदा जूदा प्रकाशको नरमपी ना नहा नदा ग्रो ममिद गया. एगी न रीने पापक स्थ मंगर पग गिद रामा भा. प. पनि महारानश्री उपपदमी यामीए नगार करेग्मी भने स. पूज्य महाराम श्री लापानी स्वामोर सुधारणा सारण मंग्रानी पदंलो भाग या व अगाउ परिन्द भयो तो अने, त्यापछो सुधाराधारा गाये नी पर भारनिमा प्रमिद गई. पापा मंग्रहीनी लोकप्रियता ए पी मालूम पड़ी भारले. भा मंग्रह पगमारानश्रीप मायापी मुनीने नगार करो राखली. हतो, पान्नु नपना सामी ने अप्रकट दशामा,न गयो पो. १९७७. ना नानु िरयां पति मारानी गुंलाइनानी सामो, मुनि श्री वारनी यामी, परिम श्री एनपनी सामी स्पादि माधुरीना दर्शनार्थ अमदावाद मुकामे जना भने आ गं. मुनि यो खुशालचंदनी पागे जीवामा पानी पगिद्ध करीने मुमशुभोने नेनी लाभ भावानी उत्कंठा मने गई भावी; परन्तु ए प्रपनो लेखापरखानामा मोकाली माटोशुद्ध अने गगवामयों नहोतो, एटले तेनी नवी नकल परागो ने गुपारी भाषा में महाराज श्री गुलारचंद मी स्यामो ने पिननि करी. महारानीए पोतानी नादुरस्त पीपा तांत गुपारी भापानी अने छोटमा को नपानी मामानी का मारो , ते तेओश्रीनो मारा पर परम उपकार गयो तमनो एटलो काने परिणामे भाजे आय पाटला मारा सरूपमा नै पार भई यो छ. प्रकरण मंग्राना मगम भाग करना आ भागमा लेपनगेली वधारे मुगम्य गावी के. जे वखते ने माम-गिद्ध
माअोने वा भाषा भाषा-गारणपो गुमराती भाषा भारत से भी तो सलामो
मानिक पाने काप पण लगे. भाimi पण जर परिसरातो सारी, पातु
matha भादियां बने अमानी सरसरी बार पतारी अनंर कार्यमा थप . मनिरान श्री
HINKी समीएरोपो.
पुरनाने कागदो भने पोटा अक्षरमा परानोतु तैना रावन मरलला थाय ए कारनो के.
भान उरणो को ये पने म रिनामले बोनाप नेमा जम्माम हेलो डे, परनु विनापूरी तानाती
(भो टीमबार भनाधिकारीना हाधमां पण जाय उ भने तपो जाननी प्राशना पाय रे. पा कारणपी भा
पुतान मुस्प रारूपं रख परन्तु ते पर कसा पण भोई रास्यु उ भने ने दव्य ज्ञानपवारंपां न वापरता
भावनिमुभो ननो पयोचित लाभ ले नो मारा भाप्रपामने हुँ समाळ यएलो मानीन.
परिमारान भी उनमचंदनी स्वामीना शग्दोमा त्र गुरनुति करीने पापनाउना पूरी कर दु.
साईन ॥ की मद्गुरुवर्यमेनमधुना लाभाजिसंज मुदा।
मबियाणवमार्गशीलमरमं मौजन्यरत्नाकरम् ।।
पत्पादाननीजहांप्पलमही जानोऽस्मि वियां बुधौ ।
मन शक्तिपरोहमनमपुरभंद्राभिधानो मुनिः।
शा
भैगदान जेठमल.
॥२॥
म्व. मुनि महाराज श्री उत्तमचंद्रजी स्वामीना जीवनपरिचय. ॥ गादल ॥ . उन्कएं विमल पिकालविषयं ज्ञानं यदीपं फट । तथव्याप्तवयो विधापरहिला ख्यानो पदीयागमः ।। मन्याऽगम्पगविगंरिष्ठमहिमा व्यामोहि लोकयो। चन्द्रोम्बन्पवरिष्ठवासनपतिर्नस्म्यात्म भनेर । म्व. मुनि महाराज श्री उत्तमनंदनी म्यामोए प्रकरण मंग्रह' ना प्रथम भागमा जे स्तुतिनो लोक रनीने. अनापिकामां पोताना नामनौ रनना फरी ती, तेज लोकपडे प्रस्तुति करीने तैमनो मेक्षित जीवन- परिपप अप आले ई. कुटुंपपरिचप. श्री उत्तमचंदनीना पिता श्री जगजीवन रुपनाय न्याते भावमार मुरतमा मगरामपुरमा मुगैया का पासना पोगानमा रहना. श्री उत्तमचंद्रनीनो जन्म विक्रम संवत् १९१० मां थयो हतो, तेमनी माता नाम दिवाळीलाई इवें. चारपावस्थामा गुजरातो सात,धोरण अने अंग्रेजीपांच धोरणनो मभ्यास तेमणे फर्यो हनो. नेमना पिना रंगारांनो भो जोगन परिचय. योगा जामीनी An, पान श्री तमन:भी मोनिका पाममायो निहन पनि मानागोगनी नोकरीमा जोड़ा गया ना में- पनो कपभाप बने हृदयनी सरलता नेमने गधुगमागममा प्रेती भने नेथी माधुभानो परिचय नेमने मेगां पधारपान न गमा. नेमने पे पहनीती मनां नाम माणेकराई नया नंदकारवाई हता. वेज व्हेन नेपनां लग्न यया पार गरी गोला. नेगना एक पोटा भाई काटीदाममा केरळ नानी वयमा गुजरी गया हता. नेपना पितानी गन् १९२३ मां गुमरो गया. वे वरखने भी उनमपंटमीनी वय पार १३ वर्षनी नो. माधुन्द. पा ममागमनी विशेषतायी थी उत्तमचरमोना ऋजम्वभावमां वैराग्पनां वीन नवाता हता, ने वीजना अंकुरो अपन १९.८ पां पृटपा ने वरखने तेमनां पानश्री वृद्धानां नथापि धर्मपरायण भने पुरना कल्याणनी इन्छावा होपायो विन न पारनां दीक्षा सेवाने आज्ञा आपी नेथी पृश्य श्री लापानी वामी पासे ए वर्पना चैत्र मामनी भष्टमी ने मंगळवार थी उनपचनीए मुरनमां पाताना फाईना दिफग दलीचंद माणेकचंदने पेरथी दीक्षा ग्रहण करी. ए दीक्षामहोन्मय वायने मुग्नमां मारो उत्साह व्याप्या हो भने मुंबई, कठोर वगैरे गामना मंघो मुरतमां भाप्पा मा. उसाभेर सारा जमणारी पण ५या हता या. उत्तमचंद्रजीनो दीक्षा तिथि-चैत्र मुद ८-नी पाखी पाळयाना टराव ते वसते न भावसारमानियां थयो हना जे अन्यारमुयी पळाय छे एवं जाणवामां भाव्यु छे. दीक्षा पणन पटेल न चातुर्माग श्री उनमचंदनी स्वामीए पानान गुम्महाराज श्री लापानी स्वामीनी माथे सुरत पासेना कठोर गायमा कर्प. ॥शा दीक्षा ग्राम ही पी थी अपनी ग्यापीए गरमान, नेमन गएन भाषाना भभ्यागनो प्रारम् को, ध्यारण, काम्य, मोकार न्याय पाटिनो नेपनो अगाम गारी तो भने नेपी नेमां शारंगन गया पाठी संस्कृत भागासोको गणिो लापा ने वह उस्मार दावता. मा प्रकार्नु मर्नु लेखन केवळ प्रकीर्ण . गाभग्रेनी पावाद भाषान शाम पण नेमणे प्राप्त कर इन कंटक यो तेपणे मुखपाट फयाँ हतां तेमनी अगर भागा नदीस गावो गुमान नेमनी गायी, पण ग्रहण करता. जेनेतर मतमनांतरोनी भयाण नेमणे गारी की तो गम नयना रेटयार प्रमीण लेग्यो उपरयी भाजे पालूम पडे छे. पूज्य श्री श्रीमती मारने सारे काठमादमा पानी न बार विहार फों हलो, त्यारे श्री. उनमचंद्रजी महाराज मना परिणर्मा भागामा.पना प्रधानना मेरमा एपश्री श्रीलालजी महारान भणावता के पर्नु मूत्रमान गिय प्रमाग्नु हो भने रेमीफ बानोना मूत्र मांधी गुलागा नेमने श्री उत्तमदजी महाराज पासेपी मेळवीने पोतो. नेमना ए माननी पूग्यश्री श्रीलालनी महारान अनेक प्रसंग पसा पण फरता. लेनिनवृत्ति मेखनमानि मने Hrin fगकर जपानो लो. मगर मारे गमय मळे त्यारे न्यारे ते काईफ ने कारक मारा नाम कमा. मना समिद साप मारण ग्राना ये रिपांगो मिचाय पोडे कोई नयी पान्तु रोमन राणोनो भममिद मंग्रा पोटो से वेदनाक नाना मोटा प्रयो वा के ज्योतिष फरफ पान्ना एनराती . श्रीउत्तम चंद्रजी स्वामीनो ॥४॥ जीवन- परिचय XTRUI भाषांतर, तेरापंथी चर्चा (मंस्कृत श्लोकोमां), चार छेदसूबोनां गुजराती भाषांतर, इत्यादि तेमणे पूरा लसेला ते उपरांत सूत्रोमांधी करवामां आवेलां केंटलांक दोहन, शंकासमाधानो, प्रफोर्ण उतारा, नका रचेला केटलाफ मकीर्ण संस्कृत श्लोको इत्यादि संग्रह अव्यवस्थित स्थितिमां पडेलो छे. आ संग्रहने तपासोने, अने विषयवार वर्गगा' फरीने जो व्यवस्थित करवामां आये तो तेमांयी केटलाफ मोटा 'यो पने नेवो मंभव हे लेखनमनिना नीव उत्साहने लीधे नेमणे जे काई लत्युं छे मार्नु पणुंखरु कागळना नाना- मोटा गमे तेवा टुकडाभो उपर खेल के. ग्लखवानो उत्साह स्फुरे ने रखते पोतानी निकटमा नानो कागळनो टुकडो होय, किंवा एक बाजुए छापे अने बीजी पाजुए कोरं कोई हेन्दधील होय अपवानो पाना आकारना फोर्ड सारो जातना कागळीना कडा पडेला होय नो जेगी पथ्यो तेो कागळ लईने लखया पैसी नवें एवो नेमनी नियम हनी. आज फारणयी तेमना प्रकीर्ण लेखोनो संग्रह कोई विचित्र प्रकारनो पत्रसमुदाय होय एवं जणाय छे. आ संग्रहमानो सौथी वधारे उपयोगी भाग चुंटी काठीने प्रसिद्ध करवामां आये तो घणा सुमुधुओने लाम थवा पामे एवो संभव छे. चातुर्मासो. महाराज श्री उमचंद्रजी स्वामीए सं. १९२८ मां दीक्षा ग्रहण करीने ने वर्षे फोरमां पूज्य श्री लापानी स्वामीनी साये न चातुर्मास कयु. वीजु सं. १९२९ नु चातुर्मास तेपणे पोताना गुरुवर्यनी साय लीपदीमा फर्य त्यारः पछी १०० मा मोरची, १९३१ मां धोराजी, १९३२ मां अमदावाद, १९३३ मां भुन (कच्छ), २९३४ मा सदा लोयो मंदावना मी माथ-पायी मनाने पोटा होय नाना नापि पूर्ण मानगियी गैपने भोता. पना गमागमा रही अभ्याग करणानु पणा साधीने गम कारण रोपनी मिणानियां पारागार भरली में मारम.मो. अन्य गंपदायना माधुभी पण पनी गाये रहीने शानमाप्ति परवाने हमेशा उत्गुरु संतामने पदरे । शिष्या मागेमांना रोगसी नगा नारादिनी गंपदापनी मर्यादापा सीने कमा निगिल माम परया मा. महाराजश्रीप नेमने पेटलीस पार शिवामणी भापी या मा, परन्तु ए मरण दिलना गम पर्यनी परमा नहि करनार नियोने छेटे गुरु गोने जगाधुरंग उतराने रना भापी बीपी तो. बीना निय गुगामी हाय विधमान है. गोपा शिष्य माननीय पननिराम स्वीकार्यो . भोली एकाको पनोनी कंदराभोमा गगे छ भने शांनियुक पानी या पर्यटन करी फालनिर्गमन करे है. माग्नीपान. पटिन श्री उनमदनी महाराननं गानीय शान मत्युगमन नैन भागमोनो भा ना मना मगनमां गंगा- पद गोटवाई एपो हलो, नेनुं फारण एके एफ एफ मागम मेटलीए पार मनावमा पारली. उपमी पटना पधारता के नवराग नोपने गमतुं नहाने कोई पांगनार होगतो नने गाना भने ने नहोय मी पोवांग्या करता. रोमाभो पांचरानो तमने पायोग्य हतो. ने वांसा विचारता भने उपयोगी भाग लपी लेना. निपटी मदापमा नमना समपपां मनी प्याल्यानशैली शायरीय ज्ञानशी भूषित पएल वाने मीरे यह मारणातीली. पर्णा मापाचोमो पण वेमनुं व्याख्यान मांभळ्याने उरमुफ रहेता ता. बारीक मांगा गधी गणितमान पण नेमनामा उन 3212 भीम जीवन- रिचय. सामानो भमहाशा पोमा उगाप्पं बीसीथी विरार फरी अमदावाद भारतां रसामा फगै ददनी हमलो भयो भने गायराना गारपरकन भारश माही नोपण मनोरन्ने परिणामे चोरवडोदरामुधी पहाया. त्या पोटी पवन रोशपूरक उपचार करता कई दोरुपये एटले अमदावार पहोंच्या. लावानी भसर मगन उपर उतरी, रोकदर भीवरामभाई मया देशालालाई परे गरी लागणीगे उपचार करता ता पण एकंदर गीते दर्न पाषा परपु. लेमना एक सिप्प भाईचंद्जो मुनि भने बोजा पण साधुभो नेपनी सारवार फरवामां सारी परनत सेना मा. तमना एक शिष्य सुशालचंद्रनी मुनि फोर चोमा इना. तेमने मांदगो वध गाना ग्यपर मळनां माराज यो शिवजी स्वापीनी साधे लांबा लारा विहार करी थोडा दिवसमा कोरपो अमदावाद भावी पहोंच्या भने पोरा दिवस गुरुसेवानां लाभ पोधो केटलाएक चिहो उपरथी पं. श्री उत्तमचंदनी महारामने जणायु के से आ मांदगी मवाना नथी पटले पोते आहार पाणी मजी थारानी विचार जणाव्यो. तेवा खबर लीवडी घोरे स्थळे पोचता कटलाफ भाविक थापको कठोर गुरत लोंबडी वगैरे स्थळेथी आची पहोंच्या हना अने पंटलाक नेमनी मारवार माटे खास रोकाया हला. छेवर आलोवी परिकमी मंत्यारो करी तेश्रोथी भासो पद ११ ने रविवार परोहा ये वागते १८ वर्ष संयम पालो एकंदर ६६ वर्षतुं आयुप्प भोगवी काळधर्मने पाम्या. गुणमीमांमा. माराम थी उत्तमचंदनी अत्यंत दयाल, सरल दिलना अने ज्ञानभारथी नम्र पनी गएला हृदयना पापभीरू माधुर्य हला. नेमाजीरनना परिचयीने कोई ने कोई प्रमंगे मना ए गुणोनो भापोभाप अनुसरथयाविना रहतीनहि. ||4|| - ८ शुद्धिपत्र TIOनहि अरब पर गि भार ३ १ { in ८ . (अ) मारली देनी ८ . २ गोनीया गाय, जोग, १.अनत मिश्यास २ ८.जोगसमाप महा पोमानी शीर एम ५३ पा. (द) मारकमी लागोमोगा नाती मागणी वि.कापामार २३ फाग, १५ जोग, १२ अप्रतमध्याय ११ गान पगादी पामेल मा. देशतानी ५ या योनीमा २४ काप, ११ जोग, १२ अनत,मियारप, १५२ हेतु लाभ. २९-१० माली समुदाय गीताना अमीन २ रवारि डी गाम रमादि रह मानवाणवाकी २ ११ आठ-माद १.दि बिग १. २ १२ आदमी गलीयोनीमा मद्रियमी थी. १ पार गमती गात आमदनी २.१.५ मे भीमान ३.३ १२ ११०-११शेर. २ ग्राम केटमारी फरमाने मनुष्पनी यादर ऐटदा? ती पदाला? . अवयातगुणा अतगुणा ६ १ ५८ २ ३मयदेवा मातानी अपेक्षाए ए १५२ ने ७ ७ २० २ 750 . n 4 PM-५.५ २
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JABRRE ८ शुद्धिपत्र. पत्रांक शक पति अशुद्ध पत्रांक शंक येहि भशुम २ १२ उम्मद उत्प्ता २ ५ (अ) नारकी देपनी ८ लान २ ११ १९५३ योनीमा २५ काय, ११ जोग, १२ अनत, मिथ्याय, २ ८-९ जीप समुदाय म- पोतानो जीय एम ५३ हेतु सा. (शुद्ध) नारकीनी ४ लाख योनीमा पापी लागती फिरुपयातुना थ. २३ काय, ११ जोग, १२ अप्रतामियारप, ए ११ गाण यथायी इंग पामे ते देतु लाभ देयतानी टाप योनीमा २५ फपाय, ११ जोग, १२ अवत,५ मिथ्यात्य, १५२ हेतु टा. २ ९-१० अजीय समुदाय पोताना अजीय २ रचादि मेययापी समुदाय रथादि- २ मोल मांवराण पायी २ ११ आठ-आट ६ २ १८लाख पंचेंद्रि. ४ लाग्ध तिर्थय २ १२ ये आगलनी ये पलनी यमीयोनीमा दर्शन पंचेंद्रियमी यो. १ चार आंगालनी मात आंगलनी २-३-३ हा नोमां दर्शग २-३ ११०-११ शेर. शर८ अने १५ दाख ૨ ३ मूभम केटलामी केटयार ने मनुष्यनी यादर केटला? असंही फेटला? ૨૨ १ असंख्यातगुणा अनंतगुणा १८ स ८ १८ २ ३ मरुदेया मातानी अपेक्षाप २ १४ २० २ १ भाष ५ भाष ३-५.५ ३ घायु तेउ ७ ७ ७० . ८ २ २ ८ २
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वाख
चार-
गिमिगादेगणमिणा ॥११॥ यमुना देगी।
जीपना हाथी पामा प्रगप्पा दम्पयागी
सापानीकर्म सांगते
Httitunity intellit, whilit
..
Aur inton site am मागिनी
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... ....निमा यि ५साने. ॥२॥
।। II II.1. नमां 0 साग्य योनिमां
. . {... Til जिनमा वीजें गुणवाणुं साने.२६
15 नायव गुणगाणां तान. १० साख योनि
a Matm वान. १४ लाग्य योनि ते ४ लाख
14.4.1 जता • मुगुमणाी १४ मा गुणगणा सुधी ए गुणवाणां
॥५॥
पति अगुद ३ २ २ ३ २ ८-१और पमुदाय मरपोतानी और पाशी हागती जि.प यानुगाय. गाण पापी एवं पामे है ३ २१-१० अजीप समुदाय पीताना अजीर रथापि मेग्रवपाची समुदाय रथादि- मविप्राणवायी ६ २ १८मा पद्रि. मात्र निधन यातीयोनीमार्शम मेद्रियको यो. २.३-४ दाभे पत्रांक म ८ २ (अर) मारकी देनी ८ मा योनीमा २५. काप, जोग, १२ मत,frurn एम ५३ देनु पा. (PR) नारतीमी लार योनीमा २१ काय, ११ जोग, १२ अवत,fमदार.. दया. देशातली साय योमीमा २५ कपाण, जोग, १२ असमियारप, ५२ हेतु या. ८ २ मोल आद-ऑट २ १२ ये आंगादमी घे पलनी . मात आंगनी शरद २ ३ यूक्ष्म केटला. संशोकराने यादर पदया? असा टला? १ १ प्रसंगयातगुणा अनंतगुणा मीमा दर्शन २-३ मनुष्यमी ७ २२ ७ ८ ५८ २ महदेगा मातानी अपेक्षाप , १८ २० ८ २ EVEXERCE ८ २ । भाय ५ शुद्धिपत्र ॥८॥ पत्रांक शव पंसि अमुद्ध १०७ २ ८ द्वीपचंदशी ४ जीजन . विपुलमतिथी २ ९ तण गार द्विपदेशी विपुलमति पयो जण १० . ८ ८ २ क पृष्टांक पनि अपर २४ . ६ (अमुद्र) २११-यफ्रेय मिथ्योगी माफक आणई. (शुद्ध) १९५-नरक, वादर पायरी, ५. जोतिर्यच, १५ मभूमि, येयक अनुप्सर विमान पनीर देवता, ५ मयना पर्याप्तामा लाभ. २ २ १२ तेरावी जाय पर्य विषय १ स्पर्श मोग सप विषय सपभोग आदविषय गुदभाग २ नजरमेछानो मोग मानसिक भोग ८ मंख्यातार्नु अमंग्य्याता २ बीप १२ होम रोम १' सचिटणा मंचिटणा १२ आई ओई मटी १०२ पम मली ५२ एम.दंडक धया, दहक यया मय दंडक जापथा १ " २ M . " . २ २ ४ २२-११ १२ ३४ १ २५८४ ८६द्रिय . २.पद्रिय ने २ ७४ ८८ १३० ४ २ २ २ राप ८ याल ६ व्यत्तयता नेस चोट एम.व्यना २ ૨ १ ६ ताम् ४ पयु २ EXBURGanti १०२ ॥८॥ २ कानी माटेरी ते का माटरीनो ११० .. २ यधनी धनीज.
.
RIYAITRIENTS
विशेष दि.
प. Trirगि
Timir in
१० (प्रा) १८ मा सोनिमा र ११ (:)) Tri
तथा ८ पाप मा. (द) ८ गोनि smrth imm
काय या, ८ या योनिमा मा ११ समंडी जिनि पाती. १९ry
दा, पाग पानिमा ११-१२-८ मा मा गर मामी गिरि Man
, (अमर) १८ माग गयिनी अने अनुयायी तो faif."
पोनिमा २-1-५-५ सान पाने. (गः) ४ ग्याग ० मी) मा मेगा .
पानिमा २-३ तामगाभे, माग पनिमा -1-४-* मनुग पाटी" भो माग
. (:) Tri.
११ (गुदपाल विपित्री
"murtfrापानी पप्या. (सर) •
गरमा मारी प.in.
10 गाना
२
३
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२
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प्रारंन. some भाग पीजो. श्री प्रकरण संग्रह. -" TRA -- Lendision htanlman Atul-IN- Halala Tulsina writer of ७ HATHEIR वालाई कवि म्यान २१..न २७.. योजन शि १ १ शुद्धि एक मि मुधिमा १.३ थो १.८ मास जाय ती १ ममय मुभिमा .. २ ८ गुण! मग्ने गुणा यादर पता २ ४ पायुधाय एकत्रिय १ नोएकेत्रिय नीवाउकाय २ १ मोपद्रिय नंगवासाय एकद्रिय पाउकाप पद्रिय वमज . अतनु सानमा आटमा देवीमा २४.. योगमन ११ प्राकार रिशेण मियादा MEWAXXIIIMALAXMAXCY ८७ २ १४५० १२५ ५/२५० १२४ ६ २ २ २ १ (अशुम) पटेलेममये १.८ मोक्ष जाक.(पुत्र) १ पर्यंत मान जाय तो समय मुसि ॥ थी।८ मा जापती ७ समय सधिमा २.९पो . मल जाय तो समय UिRL ५ धी १ मा जाय तो समय मुषि...थी जाय तो समय मुभिमा ५॥१५ थी ९मोक्ष प्रापना समय पधिया ॥ १७ थी १०२ मा जाय तो २ समय ५ नोअयत नोअमेयन नाम- ॥१॥ २ अपरमपणुं घरमाचरमपणु आरिफ्षत् अनाधारक
श्री प्रकरण संग्रह.
भाग वीजो.
प्रारंज.
BYADRI
SENTERNET
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॥धी वीतरागाय नमः। पचीस क्रिया॥ ॥ अथ श्री ठाणांगसूत्रादिधी पचीस क्रियाना बोल करीप ते क्रिया. तेना पचीस जेद. तेमा कायाना व्यापारे करी निपनी ते कायकी क्रिया ॥१॥ तेना ये जेद-१ पापथी निवां नयी एया थविरत मिथ्याष्टि तथा समष्टि जीवन दालवा चालवायी जे क्रिया सागं ते यनुपरतकाय किया. २ • पुष्ट रोते मन, वचन थने कायाना योग प्रवर्ताववाथी सागे ते उम्प्रयुक्तकाय क्रिया ॥२॥ श्यधिकरण (खम्गादि) शने करी जे किया सागे ते यधिकरणिका. तेना ये नेद-१ पूर्व नोपजावेत खड्गादिने विपे मुष्टि यादिनुं जोमवू ते संयोजनाधिकरणिका, २ प्रथमयोज
क्रिया
२॥
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खम्ग, मुष्टया दिनु नीपजाय, ते निवर्तनाधिकरणिका ॥३॥ प्रपे (मत्सरे) करी नीपजी
ते पानसिया-प्रापिकी. तेना वे नेद-१ जीवने विषे केप करवाथा निग्नी ते जीवप्रा.
पिकी, २ यजीव (स्तंनादि) ने विप कैप करवायी निपनी ते यजीवप्रापिकी ॥४॥
परितापना (तामनादि) दुःख विशेपे करी निपनी ते पारितावणिया-पारितापनिका. तेना
घे चेद- पोताने हाथे करी परितापना उपजाये ते स्वहस्तपारितापनिका, २ वीजाने हाथे
परितापना उपजाववे करी निपनी ते परहस्तपारितापनिका ॥५॥ प्राण (थायुष्यादि
१०) नो यतिपात-नाश करवे करी निपनी ते प्राणातिपात क्रिया. तेना ये नेद-२ पोताने
हाये करी कोइ प्राणोने प्राणथो वेगळो करे ते स्वहस्तप्राणातिपात क्रिया,वीजाने हाये
कोश्ने प्राणथी वेगळो करावतां लागे ते परहस्तप्राणातिपात क्रिया ॥ ६ ॥ यारंज
(उपव ) करवाथी निपनी ते यारंनिका. तेना वेद-१ जीवने उपव करवायी
खागे ते जीवयारंजिका, २ यजीव ( जीवना कलेवर अथवा यस्खादि) नो थारंज--
यग्निसंस्कार वगेरे करतां जे क्रिया लागे ते यजोश्यारंजिका ॥७॥ परिग्रह नव
॥२॥
प्रकारनी. ने उपर मुर्ग राबवावी लागे ते परिग्गदिया क्रिया. तेना ये नेद-जीर (मनु- प्यादि) ने प्रिपे मृा गवयाची लागे ते जीवपरिग्गदिया, २ अजी (मुगणादि) ने विपे मृा गवयाथी लागे ते यजीव परिग्गदिया ॥ ॥ माया-कपट निमिनपी ने किया लागे ते मायावतिया. तना ये नेद-१ उदयना दृष्टयाशयने रस्ताप गोजी रोते बतायवानी कोमोश करवी ने याय नायकाणया, २ गोटा सेवादिकं करी परने न. बानो व्यापार ते परनायकशया ॥ ए॥विति निमिनयी निपनी ने किया प्रा. उचखाण क्रिया. तेना व नंद-१ जीवने विप प्रत्याग्यान कयां गिना जे यंपादिव्यापार ते जीव यपरचखाण क्रिया, २ मयादियजीवन विप पवाण न करवायी कर्मशागत यजीव यपच्चखाण किया ॥ १० ॥ मिध्यात्य निमिन कर्मबंध व्यापार गाय ते मिला. दसणवत्तिया. तेना ये जेद-दीन-थधिक यात्मादि यम्नु विषय मिप्यावदर्शन नि- मित्त व्यापार ते उग्णातिरिक्रमिच्चादसायत्तिया, २ पूर्वात उणानिरिक्त मिण्यादर्शनयी जिन्न मिथ्यादर्शन जेमके थारमा नथी, इत्यादिग्प मियादर्शन व्यापार ते तव्यक्ति-
क्रिया
प. स. रिक्तमिछादसषयत्तिया ॥११॥ वस्तुना देखवाथी निपनी ते दिहिया. तेना वे जेद-२
जीवता हाथी घोमा प्रमुखने देखयाथी जे कर्म लागे ते जीवदिठिया, २ चित्रामण प्रमुख
जोबाथी जे कर्म लागे ते यजीवदिहिया ॥ १२ ॥ वस्तुने स्पर्शवाथी निपनी ते पुठिया.
तेना वे नेद-१ जीवने रागपं स्पर्शवाथी जे कर्म लागे ते जीवपुठिया, २ अजीवने राग-
उपे स्पर्शवायी जे कर्म लागे ते यजीवपुट्ठिया ॥ १३ ॥ वाह्य वस्तुनुं मा चितववाथी
निपनी ते पामुच्चिया. तेना वे जेद-१ जीवने याश्रिने राग-पथी निपनी ते जीवपाहु-
च्चिया, २ थजीवने याश्रिने राग-हेपथी निपनी ते यजीवपासुच्चिया ॥ १४ ॥ सर्व
प्रकारे जनसमूहना मळवाथी निपनी ते सामंतावणिवाश्या. तेना ये जेद-२ जीव समु-
दाय मळयाथी लागती क्रिया ते जीवसामंतोवणियाश्या, २ यजीव समुदाय रथादि
मेळववाथी हर्प पामे ते यजीवसामंतोवणिवाश्या ॥ १५ ॥ हाथे करी निपनी ते साह-
स्थिया. तेना के नेद-१ पोताने हाये जीवने पकमी हणे ते जीवसाहस्थिया, २ पोताने
हाथे (यजीव) खम्गादिक पकको जीवने हणे ते अजोक्सादस्यिया ॥ १६ ॥
॥३॥
निसर्जन-फफयाथी निपनी ते नेसस्थिया. तेना पद-१ पायर यादि रागीय
वस्तुनुं यंत्रादियमे फेक ते जीयनेस स्थिया, २ पाणादिनु भनुगादियगे फेक
ते यजीवनेसस्थिया ॥१॥ स्वामीना यादेशथी निपनी ते याणपणिया-याशाप.
निका. तेना ये नेद-१ जीपने प्राणयानो ध्यादेश करवायी निपनी ने जीरयाणानिया,
र अजीयने याणयाना यादेश करयाथी निपनी ते यजीवयागणिया ॥ १० ॥ पिदा.
खायी निपनी ते विदारणिका. तेना ये नेद-जीवने विदारयायो निपनी ते जीवपिदा-
रणिका, २ थजीप (स्तं नकाष्टादि)ने पिदारयाथी निपनी ते श्रजी विदारणिका ॥२॥
यशान निमिजयो निपनी ते ऋणानोगयनिया. तेना ये नेद-१ उपयोग विना वनादि
वा ने यनायुक्त यादानता, २ उपयोग पिना पात्रादिनुं प्रमार्जन करवं ते श्रनायुतप्र.)
मार्जनता ॥ २० ॥ स्वारीरादिनी थपेक्षा न राग्यवायी क्रिया खाग ते थाणायकंपनिया.
तेना ये नेद- पोताना शरीरनी दाति कन्याथी लागे ते थारमारीग्याणकंग्यनिया,
२ परना शरीग्नी दान करवायी सागे परदारीरयाणवकायलिया ॥ २१ ॥
क्रिया
॥४॥
प्रेम (स्नेह) ना निमिनथी निपनी ते पेङावत्तिया-प्रेमवृत्तिका. तेना बे जेद-१
मायाना निमित्तथी निपनी ते मायावृत्तिका, २ लोजना निमित्तथी निपनी ते लोज-
तिका ॥ २२ ॥ ऐप (क्रोध मान) ना निमित्तथी निपनी ते दोसवत्तिया-पवृत्तिका. तेना
वेद-१ क्रोधना निमित्तथी निपनी ते क्रोधवृत्तिका, २ मानना निमित्तथी निपनी ते
मानवृत्तिका ॥ २३॥ प्रयोगे करी निपनी ते प्रयोगक्रिया. तेना त्रण नेद-१ मनना प्र-
योगे करी निपनी ते मनप्रयोगक्रिया, २ वचनना प्रयोग करी निपनी ते वचनप्रयोग-
क्रिया, ३ कायाना प्रयोगे करी निपनी ने कायप्रयोगक्रिया ॥२७॥ मन यादि प्रयोगे
करी ग्रहण करेल कर्मवर्गणानुं सम्यक् प्रकारे प्रकृचिवंधादि जेदे करी यंगीकार करवू
ते समुदान क्रिया. तेना त्रण नेद-१ यांतरारहित (प्रथम समयवर्तिनी) ते यनंतरसमु.
दान क्रिया-२ द्वितीयादि समयवर्तिनी ते परंपरसमुदान क्रिया, ३ प्रथम अप्रथम
समयनी अपेक्षाए ते तजयसमुदान क्रिया ॥ २५ ॥ पंथे चालवायी जे क्रिया लागे ते
र्यापथिका. तेना चे लेद-१११ मे तथा १२ मे गुणगणे ययाख्यात चारित्रवाळाने लागे
॥४॥
ते वनस्थशरियाव दिया क्रिया, २ केवतीने लागे ते केवली रियादिया क्रिया ॥ एवं मूस
क्रिया २५ थने उत्तर क्रिया ५२ य॥
॥ इति पचीस क्रियाना बोल संपूर्ण ॥
योनिना वोल।।
गाथा ॥ जीव १ इंदिय २ गुणवाण ३, जोग४ वेय ५. कसाय ६ लेस्सा ।।
नाण यन्नास ए दंसण १०, सशिण ११ वेयणीय १२ पङति १३ ॥१॥
पाण १४ काण १५ उपयोग १६, दिट्ठी १७ यप्पा १७ मरण १ए समुग्धार २० ।।
सरीर २१ संवगण २२ संघयण २३, वणा२४सएषा २५ समोसरण चैत्र २६ ॥२॥
नाव २७ देज २७ कूष कोमी रए, पयत्री ३० श्माई तिसदारा॥
चउरासी लख जीयाजोणो, उत्तारेयव्यं तस्सोवरी ॥३॥
२२ मा गोनिमा ३.४.६ सेक्ष्या माने थाटमुं दानहार-7 साल योनि मां ५२ साप गोनिमा हान साजे नदि. ६ साब विगछियनो योनिमा २ शान साते. सायनासो देवनी योनिमां ३ ान साजे. १७ साव पंचप्रियनी योनिमा २.३ ४-५ हार साले ॥॥ न घशानहार-GY सार योनिमा यज्ञान ३ खाने. तमा ५० सार योनिमा अशान २ साने. २६ साय योनिमा २ तथा ३ यज्ञान साने गए दसमुं दर्शनहार-५६ सार योनिमा १ यवशुदर्शन साजे. २ साख चनरिन्द्रियमां के दर्शन पश, ना साजे. साव देवनारकीनी योनिमा ३ दर्शन लाने. १८ साम्य पंचेन्डियनी पोनिमा दर्शन २.३.४ साजे ।।१०॥ यगीधारभु संज्ञी असंज्ञाहार-एज लाग्य योनिमा थसंज्ञो साने. २६ लाख योनिमा संझो यसंझी २ वाजे ॥११॥ वारमुं वेदना छार- Tv बारर योनिमा निश्चयनये २ वेदना साने प्रत्येक प्रत्येकमां. व्यवहारनये ४ सारख नार. कोनो योनिमा १ थशाता वेदनीय साने. ४ साख देवतानी योनिमा १ शाता वेदनीय सा.शेप ७६ खाय योनिमा २ वेदना खाने ॥ १२॥ तेरमुं पांतिधार-८४ साष जीवा योनिमा पालिसाने. तेगा ५२ पाप एफेन्द्रिगती योनिमार्गाशिवाने माग गिनिजगनी योनिमा पनि ५ साने. २३ माग पंगिनी गोनिमा पnि खाने ॥१३॥ पदमुं प्राणकार- लाग गोनिमा प्राण दरा माने. रोगां २२ माग प. यिनी योनिमा प्राण ५ साने. २ लाख पेधिगनी गोनिया माणसाने.२ सानो इजिपनी योनिमां प्राणा माने. २ लाख परिजिगनी योनिमा प्राण माने. २९ साम्प पंजियनी योनिमां प्राण ५-१० खाने ॥१५॥ पंदर{ ध्यानमार... वाय गो- निगा २ थान लाने से या ध्यान १, रोषध्यान २. १२ वाण योनिमा २ ३ ध्यान साने ते धर्मप्यान मध्यु. १५ लाग्य योनिमा २.३-४ ध्यान साने ॥ १५ ॥ सोला. गांगकार-1 माग्य योनि नेमा ५२ लाग्य योनिमा ३ उपयोग, २ यशान १ पाग ३ लाने. ४ लाय येईप्रिय नेजियनी योनिमा ५ उपयोग लाने. २ साम्य परिप्रियनी योनिमा ६ उपयोग साने, १२ लाग्य देव नारकी निर्यचनी योनिमा ७ उपयोग मान. १५ साय मनुप्यनी योनिमा उपयोग ६ नया २२ सान ॥ १६ ॥ मत्तग्मुं दृष्टिबार-१२ साम्य
बोल
योनिना
जीवायोनिमां दृष्टि १ साने.६ लाख योनिमा २ दृष्टि लाने.२६ लाख पंचेन्जियनी योनिमां
१-२ तथा ३ दृष्टि खाने ॥ १७ ॥ यढारमुं यात्माचार-५२ लाख एकेन्शियनी योनिमां
६ यारमा खाने ज्ञान चारित्र वर्जिने. १४ लाख योनिमा यात्मा लाले ते १ ज्ञान
वध्यु. १७ लाख तिर्यच मनुष्यनी योनिमा ७ यात्मा लाने ते चारित्र वध्यु. ॥रजा ओग-
णीसमुं मरणहार-G४ लाख जीवायोनिमां २ मरण समोहिया, १, असमोहिया २,
प्रत्येक प्रत्येकमां लाने ॥१५॥ वीसमुं समुद्घातधार-५१ लाख योनिमा ३ समुद्घात
खाने. ११ लाख योनिमा ४ समुद्घात साने, वैकेय वधी. ७ लाख योनिमा ५ समुद्घात
लाने. १४ लाख योनिमा ३-४-५-६-७ समुद्घात लाने ॥२०॥ एकवीसमुंशरीरधार-४ लाख
जीवायोनि तेमा ५१ लाख योनिमां ३ शरीर-उदारीक, तेजस यने कार्मण ए त्रण लाने.
११ लाख योनिमा ४ शरीर लाने ते १ वैकेय वध्यु. ७ लाख योनिमां ३ शरीर ते वैकेय,
तेजस यने कार्मण ए ३ लाने.१४ लाख योनिमा ३-४-५ शरीर लाने ॥२२॥ यावीसमुं संगण-
हार-४ लाख योनिमा ६ संगण साने. तेमां ६२ लाख योनिमा १ ढुंम संगण. ४ लाख
॥७॥
योनिमा समचरंस संगण. १७ साग्य योनिमा १ संगाण तथा ६ संगण साने ॥२२॥ तेवीसमुं संबयाणद्वार- साग्य योनिमा ६ संघयाण साने. तेमां ५० लाग्य योनिमां ? ठेवटु संघयण, ७ लाख योनि यसंघयणी. १७ लाग्य योनिमा १ संघण तथा ६ संवयाण खाने ॥ २३ ॥ चोवीसमुं वर्णादिद्वार-1४ लाख जीपायोनिमा ५ वर्ण, २ गंध, ५ रस, स्पर्श सर्व मळी २० लाने. तेमां ५ साग्य नारकीनी योनिमां यशुन वर्ण, गंध, रस, स्पर्श साने ने ५ लाख देवनी योनिमा शुन वर्ग, गंध, रस, स्पर्श लाने. शेप १६ लाग्य योनिमा शुनागुन वर्णादि २० बाल साने ए व्यवहारनयन) थपेक्षाये जाणवू ॥ २४ ॥ पचीसमुं संशाधार-18 लाग्य योनिमा ४ संझा साने प्रत्येक प्रत्येकमां ॥ २५ ॥ व्यासमुं समवसरणछार-10 साख जीबायोनिमा ४ समवसरण साने. तेमा ५२ साख योनिमा २ समवसरण यक्रियावादी यज्ञान २ लाने. ६ लाख विगले न्जियनी योनिमा २ तथा ३ ते क्रियावादी यध्या. २६ लाख पंचेन्नियनो योनिमा २-३.४ समय साजे ॥ २६ ॥ सत्तावीसमुं नावहार-30 लाख योनिमां नाय ३ जीपणारिमा 1-201!. ." httram +11 'पान सा। मगर पान EEP 13101 । सा ... गयानि नमा जमान कामालाल. " पाप यानिमा ४ वा. । मय लाग्न यानिमा ३ शागर न वक्रय, नजमशन फार्मण ॥ ३ मा लाग्न यानिमा २-४-५ दार लान ॥२॥ वाममुं मेवाण- हार-४ लाय योनिमा ६ सगाण साने. तमा ६२ साख योनिमा ? टुंम संगण. ४ लाख योनिमा समगारंस मंगाण. १० साम्य योनिमा १ संत्राण तथा ६ संगण साने ॥ २ ॥ तेवीसमुं संघयणमार- क्षाय योनिमा ६ संघयण साने. तमा ५० लाग्य योनिमा १ यदु संघयाण. साख योनि यासंघयणी. १० लाग्य योनिमा १ संघयाण तथा ६ संघयाण सानं ॥ २३ ॥ चोयीसमुं वर्णादिद्वार-10 साख जीयायोनिमा ५ वर्ण, २ गंध, ५ रस, । स्पर्श सर्व मळी २० लान. तेमां । साम्य नारकीनी योनिमां यशुन वार्ण, गंध, रस, स्पर्श खाने ने ४ लाग्य देवनी योनिमा शुन वर्ग, गंध, रस, स्पर्श लाने. शेष १६ साय योनिमा शुनागुन वर्णादि २० बाल साने ए व्यवहारनयनो पहाये जाण ॥ २५ ॥ पनीस, संशाहार-०४ साग्य योनिमा ४ संझा ताने प्रत्येक प्रत्येकमां ॥ २५ ॥ व्यासमुं समवसरणकार-४ साख जोबायोनिमा ४ समवसरण साने. तेमा ५२ साग्य योनिमा २ समयसरण थक्रियावादी यज्ञान २ साने. ६ लाग विगन्डियनी योनिमा २ तथा ३ ते क्रियावादी यध्या. २६ लाख पंचेन्डियनी योनिमा २-३.५ सम साने ॥ २६ ॥ सजायोसमुं नावहार-30 लाख योनिमा नार ३
पोल
पॉमिना
साने, उदग, क्योपाम, परिणामिफ. १४ साख योनिमां नाव ५ साने ने उपदाम, कायक
ए ये पाया ॥ २७ ॥श्यद्वावासमुंदेतुधार-४५ साय एकेन्धियमा ४१ हेतु साने. २५ कपाय,
३ जोग, १२ थात, पथनानांगमिथ्यात्व एम ४१. वाउफायनी साख योनिमां २ के.
पना पता ५३ हेतु सा. प्रण विगन्धियनी छ साख योनिमा २५ कपाय, ४ जोग, १२
शत, १ अनाजोगमिध्यात्व एम ४२ देतु खाजे. नारकीदेवनी साख योनिमा २५ फपाय,
११ जोग, १२ थरत, ५ मिध्यात्व ए ५३ देतु साते. तिर्यचपंचेन्जियनी साग्य योनिमां
५५ देतु साने, ते ५७ मांधी थाहारकना २ वा. १४ साख मनुप्यनी योनिमा ५७ हेतु
सात ॥ २०॥ योगणवीसमुं कुस कोटिहार-५५ साख एकेन्पियनी योनिमा ५७ लाख
फुसकोटि. विगछियनी ६ साख योनिमा २४ साख कुखकोटि. देवनारकीनो साख
योनिमा ५१ साप कुस कोटि. तिर्यच पंचेंजियनी ४ लाख योनिमा ५३ लाख कुसकोटी.
१४ साब मनुप्पनो योनिमां १२ साप कुखकोटि. ए १७५०००७ साग्य थाय. कुसकोटि
कहेता कटना समुदाय जाण ॥२९॥त्रीस, पदवीधार-साख पृथ्वीकायनो योनिमां
॥4॥
७ एकन्जियनी पदवी साने. शेप ४५ लाख गकेन्जियनी योनिमा पदवी एक न खाने.६ साख गिलेन्डियनी योनिमा पदवी गक समकीतनी लाने. लाग्य नारको तया देवनी योनिमा १ समदृष्टिनी पदवी साने. ४ लाग्य तिर्यच पंचेन्सियनी योनिमा ४ पदयो- अव ने गज तथा श्रावक ने समदृष्टिनी साने. मनुप्यनी १४ लाख योनिमा ५ पंचे. निजय रत्ननी ने ए मोटी पदवी एम १५ पदवी साने ।। ३०॥ ॥ इति योनिना बोल संपूर्णम् ॥ गर्भावासना वोल॥ थथ श्री तंमुसवेयालिया प्रकीरणकथी संदिपे ग वासना योस खिस्यते ॥ स्वीनी नानी नीचे ये नामी , ते फुसनी नालीने याकार ते. तेनी नीचे योनि वे. ते जीवने उपजवार्नु वेका. ते अधोमुख कमळने याकारे ते. त्यां यांवानी मंजरी JABA
गोल
।
..
यार मान या त्यार मजा कर.
जम सतयु गमई कर
.. 10 मित्र पाय व्यार बार मुहानमा जीव यात्री
11., 11, 1 न। यानि पचाउन पर्ष नपरात मटा जाय-अवाज
। नियम मा उपना याप्यना प्रमाणना
प्राय दय ताम्राना य. यायाय सुधा मयाज
. .. !! पनी ममा जग पद न्यार अनाज द्वाय. कळं। एक
ननर -१ पना ॥३. पत्र. न गन नुनमा वार वर्ष सुधी मानाना
•मा - पान ना ।। जाव पापना नदय। फ। पावा वीजा बार वर्ष
. तट: चाय ५ शाय, त्यामुधा रह. जमाण पास पुत्र रह. माव पास पुत्री रह.
रय नपुसक रह. नियचर्णीने पाठ वर्ष सुधी गम रहे. मातानुं रुधिर, पिताना
शुक्रना प्रथम थाहार ले. सात दिवस सुधी चोखाना धावण सरखो होय. वीजा सात
पाणीना परपोटा सरखो याय. त्रीजा साते नाकना श्लेपम सरखो थाय. चोथा सात
॥९॥
याय-ययया गरनी पेशी सरग्यो थाय. ते जीय पसे मासे यमनातील मासानार याय, पीजे मासे पेशीथी करण थाय. प्रोजे मासे माताने दोहद (मा) याग. सारी इशा पुण्ययंतनी माताने याग यने पराय शा पापी जीवनी मा. ताने थाय. चोथे मासे मातार्नु यंग पुष्ट करे. पांचमे मासे पेशी यकी पांच अंकुरानोकळे, पहाय, ये पग, एफ गायुं गम पांच. हे मासे पास थने सोही उपजे. सातमे मासे सानसी शीग-नामी उपजे. पांच पेसी ते मांसस्थानक विशेष, नय मोटी नामी याय, गग सात गेम गळा देने, ये क्रोम एकायन लाग्य रोम गळा उपर, सर्व मळी सामो- प्रमोम गेम चाय. यामे मासे संपूर्ण अंगनी प्राप्ति होय. गर्नमाहि जीव उधार पास- पण रोस संघाण पीन शुक शोणित पटसा पानां न करे. ते केम जे पुषस रसदरणी नामोये याहारे, ते शरीरनां अंगोपांगपणे, पांच प्रियपणे,दाम, मीजा, पाळ,मुग, दाढी, गंम, नम्रपणे परगमाये. मस्तक ययययादि पण निपजाये. गर्नमांदि जीवने कयल ग्रा. बार नहि. माता रानी तो गर्न राजी. माता मुखी तो गर्न दुःखी. मातानी ने गर्नना गर्भावा- सना ९॥ बोल सरखं मांस ठे. ज्यारे स्त्रीने ऋतुकाळ यावे त्यारे मंजरी फरे. जेम रसयु गुमडं फरे तेम ते ऋतुनां यिं करे. त्यां वीर्यनो संजोग मिश्र थाय त्यारे यार मुहूर्त्तमां जीव यात्री उपजे, उत्कृष्टा नव लाखजीव उपजे. स्त्रीनी योनि पंचावन वर्ष उपरांत मळी जाय-यवीज थाय. पुरुप पंचोतेर वर्ष पठी यवीज याय. ए नियम सो वर्पना यायुप्यना प्रमाणनो समजवो. उपरांत पूर्व कोम सुधी यायुप्य होय तो स्त्रीना यई यायुष्य सुधी सोज योनि होय. पुरुपना सर्व यायुष्यनो वीसमो जाग शेप रहे त्यारे यवीज होय. वळी एक पुत्रने नवसें पिता होय. नवसं पुरुपनो एक पुत्र. ते गर्न उत्कृष्टो घार वर्प सुधी माताना उदरमा गेमपणे रहे. पाठो एनो ए जीव पापना उदययी फरी पाठा वीजा चार वर्ष रहे, एटसे चोवीस वर्ष शाय, त्यांसुधो रहे. जमणे पासे पुत्र रहे. मावे पासे पुत्री रहे. नने नपंसक रहे. तियेचणीने थाठ वर्ष सुधी ठोक रहे. मातानुं रुधिर, पिताना वे. वार यांगळनी जीन टे. सामात्रण पसनुं हेयु . पचीस पसनु काळजु ठे. पे यांत (कोठा) नानी है, वे यांत मोटो ते. मोटो यांतमा वमीनीत प्रणमे . नानी यां- तमा लघुनीत प्रणमे वे. चे पास है. मायुं ने जमाणु पासुं. मावे पासे सुखनो परिणाम २. जमणे पासे पुग्यनो परिणाम ते. या शरीरने विपे एकसो साठ सांधा . एकसो सी. तेर मर्मनां स्थान . त्यां घा लागे तो तत्काळ मरण पामे. वणसो हाम्नी मीजा ठे. नवसो नारुणी . सातसो शीरा दे. पांचसो पेसी मांसस्थानक वे. नव नामी मोटी छे. सातसो नामीन विवरण-एकसो साठ नामी नानीथी निकली ते उंची चाली मस्तके पहोंची. ते रसहरणी नामथी योलखाय . एनी निरुपघाते यांख, कान, नाक, जीजनुं वळ यधे. एनी उपधाते आंख, कान, नाक, जीननु चळ घटे. एकसो साउ नामी नानिथी उपनी योगामिनी पगतळे जर पहोंची. तेनी निरुपयाते नेत्रनुं अने जंघार्नु वळ वधे. तेनी उपघाते मस्तके वेदना, शूलादिक उपजे. यांखे यांधळो याय, नेत्रनुं बळ अोढुं थाय. एकसो साव नामि नानियी उपनी त्रीज हाये जश् पहोंची.
पोल
गर्भात
ना
तेनी निरुपपाते पाहुनु पळ घघे. तेनी उपधाते पठवाने वेदना, पुंठवेदना, कुखवेदना,
कमे शृलादिक उपजे. एफसो साउ नामि नाजिथी उपनीयधोगामिनी गुह्ये पहोंची. एनी
निम्पपाते यमानीत सघुनोत, कूर्मवायु यादि रोष मुख उपजे. पचीस नामि ससेखमनी
धरणदारी . पचोस नामि पिजनी धरणहारी ठे. दश नामि शुक्रनी धरणहारी के. एम
पुरुपने सातसे नामी शिराने नामे के. एमां उसें सीत्तेर नामि स्त्रीने के. नपुंसकने उसे ऐसी
नामी . मोटो ना नामी तेनाथी दी जाणवी. पुरुषना शरीरमांहे पांच कोठा ठे. स्त्रोने
उकोगा . गर्न धरे ते कोगे यधिको ते. नव हार पुरुपने ते. वार छार स्त्रीने वे. पुरुपने
पांचसे पंशी . स्त्रीने त्रीस योगी . जेम सोनी जंतरमाथो तार खेची बहार काढे तेम
गर्मायासमांथो गर्न चार कोटो कष्टे वहार यावे. वाट्यावस्थामा मल मूत्र यशुचीमा
रसयस रह्यो यनेक व्याधी जोगवी म्होटो थयो, वळी शरीर रस १, रुधिर २, मांस ३, मेद ४,
दाम ५, महा ६, शुक्र ए सात धातुए करीने नयों द. महा यशूची, मलमूत्रनो नंमार
. ए हार तथा १२ द्वार हमेशां बहे . समण पमण विध्वंसण खनाव के. यनेक मल
मूत्र श्लेप्मादिक सहित दे. ते शरीर स्नानादिके करी शुचि केम थाय ? ए शरीरने
|॥१॥
अमीषणे करो माने , ते जीपर्नु मूर्यप ने. गुचि-पपिनता तो शान १, दर्शन २, गाग्नि ३, नप प. चारयी याय, यने ताणे करी मोक्ष पामीए, गर्नु जाणी गंगा टाळ- जी. एक बोने एक नवमां नव साख संतान उपजे नोपजे, प नगवतीसूत्रमा है. जोगे नोगे शायराना जीप समुधिम मरण पामे ठे, ते केम तो के, बांसनी मुंगळीमाहेक पी. जीने नर्ग होय, ते नूंगळीमा सोढानो योसो यनिमा तपाची रातोचोळ करी ते बांसनी नलीमा दायेन जेम र विघंस पामे-पळी जाय, तेम ग्रीने संगे यसंख्यात जीव समु- fiyम मरण पामे ने. यात योस उदारीक शरीरना कहे ठे-त्रणसें साठ सांधा ते १, पांचस मी २, सातसो शीरा ले ३, नयसो नारणी ठे ४, बहोतेर कोग . ५, एकसो याठ नानी नमि, नर मोटोधमा नामि ते साडीत्रण फ्रोम रोम G, ए याउ बोस भारीक शरीरना जागवा. पाल टांक ६४ ॥ १॥ वीर्य टांक ३२ ॥२॥ मधिर शेर १० ॥३॥ मूग शेर १० 1150 परयो शेर ५॥६॥ विष्टा शेर ५ ॥६॥पमान निरोगी शरीरनुं जाणवू. ॥ इति गर्मवासना बोल संपूर्ण ।
श्वासोश्वासना वोल॥
पोल
अथ श्री श्वासोश्वासना योख लिख्यते ॥
TREATISGEETREE.XX
सो पर्पनी युग बीस ॥१॥ सो वर्पना संवत्सर सो ॥२॥ सो वर्पनां ययन यसो॥३॥
सो पर्पनी ऋतु उसो ॥४॥ सो वर्पना मास वारसो ॥५॥ सो वर्पनां पखवा मियां चोवीस
सो ॥६॥ सो वर्षनां थग्वामियां थमतासीस सो ॥३॥ सो वर्पना दिवस त्रीस हजार
॥॥॥ सो वर्पना पहोर ये साख ने यहाशी हजार ॥ए॥ सो वर्षनां मुहूर्त दस लाख ने
पंसी हजार ॥१०॥ सो वर्पनी धमी एकवीस लाख ने साठ हजार ॥११॥ सो वर्पनां
सास उश्वास चारसो सात क्रोम थमतासीस साख ने चालीस हजार. ते संख्याना
धंक दस थाय. ४०३,10,80,000 ॥१२॥ एक घमीना श्वास उश्वास यढारसो ने सामी
व्याशो ॥१३॥ एक मुहूर्त्तना श्वास उश्वास सामनीस सो ने तोतेर ॥१४॥ एक पहोरना
SEXSSS
॥१२॥
श्वास नश्वास चोद दजार एकसो ने पोणी योगणपचास ॥१५॥ एक यहोरा विना श्वास जम्वास गक साख तेर हजार एकसो ने नेवू॥१६॥ पंदर दिवसना श्वासोश्वास सोख लाख सत्ताएं हजार थाउसो ने पचास ॥ १७॥ एक मासना श्वासोश्वास तेत्रीस लाग्य पंचागु ह. जार सातसो ॥१॥ सवानव मासना श्वासोश्वास त्रण कोम चउद साख दस हजार बसो ने परोस एा एक वर्पना शासोश्वास चार कोम सात लाख यमतालीस हजार ने चा. रसो ॥२०॥ वामदत्त नामे चारमो चक्री मरीने सातमी नरके उपन्यो. त्या तेत्रोस साग- रखें थायुप्प . ते शहां मनुष्यपणे एकेक श्वासोश्वासने मुखे त्यां नरकमां केदलो काल पुःख जोगवशे ते कहे ते. यग्यार लाख पढ्योपम उप्पन हजार पढ्योपम नवसो ने पचीस पढ्योपम ने एक पक्ष्योपमनो त्रीजी जाग काफेलं दुःख जोगवशे ॥१॥ काकंदी नगरोना धन्ना अणगारे नव मासतुं चारित्र पाब्युं,ते नव मासना श्वासोश्वास त्रण काम पांच लाख एकसम दजार ने घणसो. ते धन्नो अणगार चवी सर्वार्थसिक विमाने उपन्या. त्यां ३३ सागरनुं वायुप्य ते. तेथे श्दी मनुष्यपणासां नव मासतुं चारित्र पाळयुं, कष्ट वेठ, ते बोल चासो- सिना एकेक श्वास उश्वासने कप्टे देवतानी गतिमा एकसो सात क्रोम सत्ताणुं लाग्य उन्नु हजार नवसो यहाणुं पक्ष्योपम ने एक पत्योपमनो ठहो नाग माउ एटलुं देवतान मुम्ब नांग- वशे. हवे संवर तथा तपना फळनुं प्रमाण कई ठे. सम्यकदृष्टि जीव गगपरहित, क्षमा दयासहित, पौषध पविजें ते सत्यावीससो ने सोत्तोतेर काम सोनातर लाग्य मी. तोतेर हजार सातसो ने सीत्तोतेर पख्य ने एक पल्यना नव नाग करी ने मांदिवा यात नाग काफेलं देवतार्नु यायुष्य वांधे ॥१॥ एक पहारवेळा सुध। संवर यादरे ने वाणमा वेंतालीस क्रोम बावीस लाख वावीस हजार वसो वावीस पट्य ने एक पदयना या जाग करीए ते माहिला सात जाग जाऊ देवता- यायुष्य बांध ॥ २ ॥ एफ मुहान सुधं!ना संवर यादरे ते वाणुं क्रोम योगणसात लाख पचीस हजार नयना ने पचाम पठ्य न एक पश्यना सात नाग करीए तेवा ठ नाग काऊरं देवनानं यायुप्य बाधं ॥ ३॥ एक. घमाना संबर यादरे ते तातोस क्रोम, योगणत्रीस लाग्य बासठ हजार नवमा न मममम पटा न - 1 : चारा को ते माहिला चार नाग काऊरानुं दयतानु यायुप्प वाध ॥४॥ mशा ANJEE एक श्वासोश्वास सुधीनो संवर यादरे ते घे लाख चोपन हजार चारसो या पक्ष्य ने एक पट्यनो चोथो नाग देवतार्नु यायुप्य वांधे ॥५॥ एक नमोकारसी तप करे ते योग- पीस लाख प्रेस हजार वसो समसठ पदय ने एक पथ्यना चोया जागर्नु देवतार्नु यायु- प्य वांधे ॥६॥ एक यनुपूर्वि गणे तेनां जघन्य बासठ सागरना. नारकोनां पाप नाश पामे, उत्कृष्ट पांचसो सागरनां नारकीनां पाप नाश पामे ॥७॥गक उपोदरी तप करे ते, सो व नारकी कर्म खपावे, तेथी थधिक खपावे ॥८॥ एक उपवास करे ते एक हजार च नारकी कर्म खपाये तेथीयधिक खपावे ॥ए। एक ठछ तप करे ते एक लाख व नारकी कर्म खपाव तेथी यधिक खपावे ॥१०॥ एक अहम तप करे ते कोम पै नारकी कर्म खपावे तेथी यधिक खपाये ॥११ चार उपवास करे ते एक कोमाकोमी वर्षे नारकी कर्म खपाये तेथी यधिक खपाये ॥ १४ ॥ ॥ इति श्वासोश्वासना बोस संपूर्ण ॥ RECE
जीवना
। ॥१४॥
जीवना चौद भेद ॥
मैद
थथ जीवना चौद भेदनी चर्चा लिख्यते ॥
जीवना १४ नेद-तेमां सूक्ष्म केटसा ? ने वादर केटला ? उत्तर-असंशोना चार
पहेला. संज्ञी पे ते तेरमो ने चौदमो ए चे॥१॥ जीवना १४ लेद तेमां उस केटसा ? ने
स्थावर केटसा ? उत्तर-स्थावर चार पहेखा, यने त्रसना उपला दस ॥२॥ जीवना १४
नेद तेमा पर्याप्ता केटखा ? यने यपर्याप्ता केटसा ? उत्तर--सात अपर्याप्ता ते १-३.५-9.ए.
११.२३, थने सात पर्याप्ता ते २-४-६-७.१५.१२.१४ ॥३॥ जीवना १४ जेद तेमा नजरे.
केटला थाये ? यने नजरे केटसा न यावे? उत्तर-सात यपर्याप्ता यने एक सूक्ष्म पर्याप्तानो
ए था नजर न यावे, यने वाकी उन्नेद नजरे यावे ॥४॥जीवना १४ जेद तेमां उस
नामामा केटमा ? थने स्थावर नामीमां फेटसा? उत्तर-वस नामीमा १४ जेद खाने, यन
॥१४॥
स्थावर नामीमां चार स्थावरना नेदनी नियमा. पांच अपर्याप्ता यने संझीनो पर्याप्तो एम ६ जेदनी नजना वग्यते होय अने वखते न पण होय ॥ ५ ॥ जीवना १४ जेद तेमां या- हारक केटला ? यने यमाहारक केटला ? उत्तर-सात अपर्याप्ता ने एक संझीनो पर्याप्तो एम व्यणाहारकमा खाने, यने याहारकमा १४ नेद खाने ॥६॥जीयना १५ जेद तेमां मनसहित केटला? यने मनरहित केटला ? उत्तर-मन सहित तो एक १५ मो यने मनरहित माहे १४ नेद खाने॥॥जीवना १४ नेद तेमां गर्नज केटला? यने यणगर्नज केटला? उत्तर- गर्जज वे तेरमो ने चौदमो, यने यणगर्नजमां तो चौद लाने॥॥जीवना १४ नेद तेमांसाश्वता केटसा ? यने असाश्वता केटला ? उत्तर-साश्वता तेर नेद खाने, ते एक १३ मो नेद वर्जिने, थने असाश्वतो एक १३ मोज द लाने ॥ए ॥ जीवना १४ नेद तेमां प्रत्येक केटला? ने साधारण केटला ? उत्तर-साधारणमां चार नेद पहेला लाने, यने प्रत्येकमा १४ जेद माने. ॥ १०॥ ए दस प्रश्न ॥ वाटे वेहेता जीवने शरीर केटलां लाने ? उत्तर-तेजसर, कामण २, ए वे शरीर लाने ॥१॥ वाटे वेहेता जीवने जोग केदला साने ? उत्तर-एक कार्मण काय- जोग. ॥२॥ वाटे पदेता जीपने उपयोग केटला लाजे ? उनर-मनः पर्यवहान १, चतुदर्शन १, ए थे यक्षिने याकी १० उपयोग क्षाने ॥३॥ वाटे वेदेता जीवने गुणगाणां केटप्सां खाने ? उत्तर-पदे, पीज थने चोपुंग प्रण साजे ॥४॥ वाटे वेहेता जीवने प्राण केटसा ? उत्तर- एकशाप्याण ॥५॥ एक थांगळीना टेरवामां जीवना जेद केटसा? उत्तर-त्रण. मूक्ष्म एकन्नियना धजेद, एक संझीनो पर्याप्तो एम ३ नी नियमा. वीजा थपर्याप्तानी नजना जाएको ॥६॥ दापनी मुट्टीमा जीवना जेद केटसा ? उत्तर-पांच जेद. चार स्थावरना द, एक संकीनी पर्याप्तो एम ५ भेद साजे.ए ५नी नियमायने शेप यपर्यासानीनजना Cusu पार जापामां सत्य १, थसत्य २, ए ये पर्याप्ति. (पूरी लापा ). मिश्र १, व्यवहार (२, एघे थपर्याप्ति (थपूरी जापा)॥ ७॥ सौधर्म देवखोके जीवना १४ जेद तेमां केटसा रसद साजे ? उत्तर-उ जेद. चार पद्देखा थने संझोनां २, ए त खाने. ॥ ए॥ एमज रयण नाम उदयाने ॥ १०॥ ए प्रश्न १०॥ एक यांगळीनां टेरवामा प्रदेश केटला हाने? गर-एक पोताना जीरना यसंख्याता प्रदेश साजे. एम यनंता जीवना अंदश खाने ते ( जीवथी प्रदेश संख्यातगुणा यधिक साने ॥१॥ एक याकाशप्रदेश उपर जीवना केटमा नेद साने? उत्तर-नव नेद. धर्मास्तिकायनो देश १, प्रदेश २ अधर्मास्तिकायना २; पुगतना ४ श्यने एक यधासमयनो एम ए नेद खाने ॥२॥ असोकमां यजीवना नेद केटला खाने ? उत्तर-थाकाशास्तिकायनो देश १, प्रदेश २ए वे लाने.॥३॥णक जोयने माता केटली? यने पिता केटसा? उत्तर-मातापक यने पिता घणा॥४॥ पांचमेच्यारेटनियं- ठामांदियो केटखा खाने ? उत्तर-बीजो, त्रीजो यने चोयो पत्रण साने ॥५॥ नियंगमा- हिथी एक पुसाकर्नु साहरण न थाय,वाकी पांचनुसाहरण थाय ||६|| ठेवटु संघयणनो धणी मरीने देवतामां जाय तो पहेला चार देवलोक सुधी जाय. पांचमे, व्हे पदेखा ५ संघयानो धणी जाय. सातमे थाम्मे पदेखा ४ संघयणनो धणी जाय. नवमे, दसमे, यग्यारमे यने वारमे देवलोके पदेखा ३ संघयणनो धणी जाय. नव ग्रेयेयके पहेसा वे संघयणनो धणी जाय. पांच अनुत्तर विमाने तथा मोदामां एक पहेला संघयणनो धणो जाय ॥ ७ ॥ वधे वधे ते शुं ? तृष्णा ॥ १ ॥ घटे पण वधे नहि ते शुं ? यायुष्य ॥२॥ घटे पण खरं ने वधे जीवना चाद ॥१६॥ पण खरं ते शृं? मनना परिणाम ॥ ३॥ न वधे न घंटे ते [? नीर्थकर नाव दीवा ने 11४।। वळी वीजा चार नांगा-बधे पाण घट नदि ते ? मिरू नगवंत ॥ ॥ घटे पण वध नदि ते शु? नव्यजीव ॥ २ ॥ घट ने वध ने 3 ? परिवाद समष्टि ॥ ३॥ न बचे न पटे ते शुं? यानव्य जीव ॥ ४ ॥ पाच गिना गाण ॥ श्री प्रियन माण 4.1 जन ॥१॥ चकु इंडियन संगण मनुग्नी दाटन ॥२॥ गायन RJI 4. ॥ . ।। माणेजियनुं संताण नाविनी काबळी ॥ | प... AJ[l ail.!! १५० पांच इंजियना विषय कह ले । श्रायिना {१. " । बिना विपय साख जोजनना ॥२॥ना || . ।। ।। ।। ।। ५.८ ॥ (उपय नव जोजननो ॥ ५ ॥ जीवन -11: ... El- ना.। । । यातनाम य. सोक मांहि लाने ॥ १ ॥ ५) १५. || II मायामा लान पुण्यतत्व देशे जाण! चार ... नाना नागटस वायम नि पचनान ॥ ६ ॥ संबर ३, नीर्जग , " बिठा लाकमा लान ।। 5 ॥ मादातत्त्व यद। छपमादि लाने जन.ना.
॥ ॥ समकितनुं नाजन जीय ॥१॥ जीवनुं नाजन यजीव ॥२॥ यजीवन नाजन लोक ॥ ३॥ सोकर्नु नाजन यलोके ॥४॥ यसोकर्नु नाजन केवलज्ञान, केवलदर्शन ॥५॥ उगी उगीने जग्या ते नरत महाराजा ॥१॥ उगीने याथम्या ते बह्मदन चक्रवर्ति ॥२॥ पाथमीने नुग्या ते दरकेशी यणगार ॥ ३॥ याथमीने याथम्या ते कालसूरीयो कसाइ ॥४॥ ए. चोनंगी गणांगे ते ॥ पापर्नु कुटुंब कहे ठे ॥ पापनी माता हिंसा ॥१॥ पापनो वाप सोन ॥२॥ पापनो नाइ जूठो ॥ ३ ॥ पापनी वेन तृष्णा ॥ ४॥ पापनी स्त्री माया ॥ ५ ॥ पापनो दोकरी लालच ॥ ६ ॥ पापनी दोकरी कुबुझि ॥ ७ ॥ पापनु मूळ क्रोध ॥गा ये जुदां जुदां व्योनां संगण कद्दे ठे.तमकानुं संठाण गामानी उधनुं ॥१॥ वायार्नु संगण पेटीनुं ॥२॥ थलोकनुं संगण पोला गोळानुं ॥३॥ यधोसोफY संगण नापार्नु ॥४॥ त्रिठा लोकनुं संगण झालरनुं ॥५॥ नर्सलोकनुं संगण मृदंगनुं ॥ ६॥ दिवसर्नु संवाण मोतोनो खटनुं ॥ ७॥ दिशा, संगण गामानी उधनुं ॥ ॥ पृथ्वीनुं संगण मसुरनी दाळर्नु ।ए॥ पाणी- संगण पाणीना विंउनुं ॥ १० ॥ थग्निर्नु संगण सुश्ना REATRE
गोपना
m७॥
पौद
भेद
तारानुं ॥ १९ ॥ दायुन संताण प्रजापताकार्नु ॥ १२ ॥ वनस्पतिर्नु संगण नाना प्रका-
रनु ॥ १३ ॥ प्रसकायर्नु संगण नाना प्रकारचें ॥ १४ ॥ यदिछोप माहिसा चंधमा,
मूगर्नु संवगण थई सामयानुं ॥ १५ ॥ थढि कीप वाहिरवा चंडमा सूर्यनुं संगण पाकी
इंटर्नु ॥ १६ ॥ थाउ फरस काया उपर कहे ठे ॥ खरखरो फरस ते पगनां तळा ॥१॥
सुंदाळू ते ताळg ॥ २ ॥ नारे ते हामकां ॥ ३॥ हळवो ते केश ॥ ४ ॥ टाढी ते काननी
घुट ॥ ५ ॥ उनी ते गती ॥६॥ चोगटी ते नाकनी मांमी ॥ ॥ लूखो ते जीननो
फरस ॥ ॥ नारकीनो जीव काळ करीने जघन्य उत्कृष्टो केटले यांतरे जश् उपजे? उत्तर-
| जपन्य दजार जोजन झाझेराने थांतरे उपजे. ते केम? पहेली नरकनो जीव काल करीने-महा.
पातास कसा सास जोजनना सांगा पहोळा ठे, ने हजार जोजननी ठीकरी जामी वेतेने
दीने पातास कलशामां जळचरपणे उपजे, उत्कृष्टो मिठो स्वयंनूरमणसमुपमा यने उँचो
मेरूनी यापमानां उपजे ॥ ७॥ नवनपतिथी वीजा देवखोकना देवता काल करीने जघन्य
उल्टे फेटसे यांतरे उपजे? उत्तर-जघन्य तो थांगुखना यसंख्यातमा लागे पोताना
॥१७॥
दाय्याना यानूपाणमांदियोकायपणे उपजे, उत्कृष्टो नीयो सातमी नरकना देवता घरिम प्रवामां प्रिनो स्वयं नूरमाणसमुनी वेदोकामां यने उचो इतीपनारामा उपजे ॥२॥ श्रीजा देवलोकधी याचमा देवखोकनां देवता कास करीने जघन्य उत्कष्टा केटले यांतरे उपजे ? उत्तर, जघन्य थांगुलना यसंग्ल्यातमे नागे उपजे. ज्यारे पंगवननी वावमीमां थानमा देवसोक मुधीनां देवता जल अवगाहीने कीमा करतां याना त्रुट तेबारे समय पुरो घये मानसीना गर्नपणे उपजे, अथवा पूर्वनरनी मनुष्यमाणानो स्त्रीयो घणो स्नेह फरी, यतिरागे करीने ते खोनो स्पर्श करे, त्यारे प्रदेश प्रवेशतो काल करे ते गर्नमांदि पुरुपर्नु वीर्य दतुं ते त्यां उपजे. नीचो तो महापातास कलशा लाख जोजननां ठे, सेना प्राण नाग करीए तेना सहुथी नीचेना भागमा मच्चपणे उपजे त्रिगे स्वयंनूरमण समु. जमा उपजे ॥३॥ नवमा देवलोकयो सर्वार्थसिकना देवता कळ करीने जघन्य उरष्टा केटसे यांतरे उपजे ? उत्तर-जघन्य तो विद्याधरनी श्रेणीमां. नीचो हजार जोजननी विजय जुमी ठे तेमां थने त्रीमो मनुष्यदेवने यंते उपजे ॥ ४ ॥ श्री 1723
चांद
जीवना
॥१८॥
साधुजीनी अवगाहना उत्कृषी ५०० धनुप्यनी, यायुप्य देशे नाणं पूर्व कोमन. देशवती
श्रावकनी यवगाहना १००० जाजननं। माठलानी अपनाए, आयुष्य देशे ना पूर्व
कामनुं मम्दया मानानी अपक्षाए ॥ ५ ॥ केवलीनी अवगाहना प्राण लोक प्रमा। केवल
समुदघाननी अपेक्षाण. याप्य दा नाणु पूर्व कोमनुं ॥ ६ ॥ याग्वा लोकमांहि अजी-
वना नंद कंटाला? नजर-अग्यार नंद लानं. धर्मास्तिकायना देश १, प्रदेश २, यधर्मा.
स्तिकायना दश । प्रदेश २, याकामास्तिकायना दश १, प्रदेश २. कालना १, पुदगलना
४, एम ११ नंद लाने ।। ॥ यलोकमां यजीवना व नंद लाने. देश १ प्रदेश २, पवे
साने ॥ ७॥ यढिीप वाहिर काल वर्जिन यजीवना १० नेद खाने ॥ए ॥ अव्य १,
क्षेत्र २, कास ३, नाव ४. ए चारमा सूक्ष्म घणी कोण ? ने थोमो कोण ? उत्तर-सर्वथा
थोमो सूक्ष्म कास १, तेथी क्षेत्र सूक्ष्म २, तेथी प्रव्य सूक्ष्म ३, तेथी नाव सूक्ष्म ठे
॥ १० ॥ परमाणुगें परमाणुपणे जो पुद्गल रहे तो केटलो काळ रद ? उत्तर-यसंख्यातो
काळ रहे ॥ ११ ॥ जे याकाश प्रदेशे परमाणुयो हता ते फरीने तेज याकाश प्रदेशे पाठा
2738
॥१८॥
प्रारं नो केटो काले यांच? उत्तर-यसंगयात काले ॥ १२ ॥ यनांगी घणा ? के यणा झारक पणा? उजर-याणादारक घाणा ते पाटे यदेता यगादारफ ले माटे ॥ १३ ॥ वाटे पेहता जीय घणा ? फेसिक घणा ? सर-चाटे येहेता जीव घणा निगोद ले माटे ॥१४॥ ॥ इति जीपना चौद नेदनो चर्चा संपूर्णा ।। जीवना ५६३ भेद ॥ ॥ यथ श्री ५६३ जेद जीयना ते तेनी चर्चा ॥ गाथा-पेय दिग्यि २ पळाने ३, सासर ४ सन्नि ५ चयणे ६ खेस्सा 31. जागे सरीरे एमाणसदीए.१०, दिदिगोयर ११ गजका १२ नालिग चे १३ ॥१॥ यागा १५ मरणे १५ समुग्धाग १६, पञ्जा १७ विनंग अणाणे १० उदि नाणेय या
।
दिदसण.
प
५.मा
.
73... ना काना नद
३ म..२
दन ।। ३ ।। त्रण
• कम मि मनु यना यप्रजाप्ता ने
प्रार! :: २३ म210032313 ॥ ४ ॥ ममकिन एकलामा पाच, यनुनर विमानना
प्रजाप्ता ने प्रज्ञाप्ता ए १० जद साजे ॥ ५ ॥ समुच्चय समकितीमां तो २०३ जेद साने
ते १४ नेद नारकीनामांयी सातमी नरकनो यप्रजाप्तो पर्यो, शेप १३ जेद नारकीना, ५ संझी तिथंच पंचेजियना'यप्रजाप्ता ने प्रजाप्ता प. १० नेद, ५ असंही तिर्यचना अग्र. जाप्ता, ३ विगले न्नियना थप्रजासा प. १७ नेद तिर्यचना, १५ कर्मचूमिना अप्रजाप्ता ने प्रजाप्ता ३० ने त्रीस यकीनूमिना यप्रजाता ने प्रजाप्ता प. एक मनुप्यना ने देवतामांदि १५ परमाधामी ने त्रण सपिंपी ग १७ वर्जिने शेप १ जाति देवताना यप्रजासा ने प्र. जाप्ता ॥ १६२ नेद दंपताना. सर्व मळी २३ नेद खाने ॥६॥ मिथ्याष्टिमा २०० नेद खाने ते मी नरकनो थमा साप्ता ने तिर्यचना ३० नेद ते २२ एकेनिझयना यने ५ यसंझी तिर्यंच पंचेन्टियना, ३ विगसेजियना ए ७ ना प्रजाप्ता ने मनुष्यना २१३ नेद ते १०१ समुर्विम मनुष्यनाथप्रजाप्ता ने ५६ थंतरछीपाना यप्रजाप्ता ने प्रजाप्ता ११२, ए सर्व मळी २१३ लेद मनुयना; ने देवताना ३६ नेद ते १५ परमाधामी, ३ किलविषी प १० ना थप्रजाप्ता ने प्रजाप्ता ए ३६. प. म सर्व मळी २७० जेद लाने ॥ ॥ समामिथ्यात्यष्टि- मां ए नेद ते ७ नरफना प्रजाता, ५ संज्ञो तिर्यंच, १५ कर्मनूमिना मनुष्य, देवतामांदि
जीवना
॥२०॥
१५ परमाधामी, ३ फिसविषी, ए ग्रेवेयक, ५ यनुत्तर विमानना ए ३५ वर्जिने शेष ६७ जा-
तिना देवता ए सर्व मळी ए४ जेद प्रजाप्ताना साने ॥ ७॥ वे दृष्टि ते समकित दृष्टि ने
मिथ्यात्वदृष्टि, ए २ दृष्टिमा १७ए नेद साने. ते पहेली ६ नरकना अप्रजाप्ता ने ५
संझी तिर्यंच, ५ थसही तिर्यच, ३ विगतेन्द्रिय ए १३ ना यप्रजाप्ता, १५ कर्मभूमि
मनुष्यना यप्रजाता ३० व्यकर्मनूमिना प्रजाप्ता यप्रजाप्ता मळी ६० यकर्मजूमि ए १५ जेद
मनुप्यना, देवतामा १० जवनपति, १६ वाणव्यंतर, १० जनका, १० ज्योतिपि, १२ देवलोक,
ए लोकांतिक ए ६७ जेदना यप्रजाप्ता ने ए ग्रेवेय.कना प्रजाप्ता यप्रजाप्ता ए ७५ नेद
देवताना. सर्व मळी १७५ जेद लाने ॥ ५ ॥णे दृष्टिमा ए। नेद लाने. ते समामिथ्या-
स्वीनी माफक जाणवु ॥ १० ॥ प्रजाप्तामा २३१ जेद साने ते नरकना, २४ तिर्यंचना,
१०१ संज्ञी मनुप्यना ए एए नेद देवताना. सर्व मळी २३१ भेद प्रजाताना खाने ॥११॥
थप्रजाप्तामा ३३५ नेद साने ते २३१ तो एना यमजाता ने १०१ समुर्विम मनुष्यना यप्र.
जाप्ता ए ३३२ साने ॥१॥ सावतामा २५० जेद साने ते ग नारकीना प्रजाप्ता, तिर्य-
॥२०॥
चना ४ लेदमांथो ५ संझो तिर्यचना यप्रजाता वर्जिने शेप ५३ नेद तिर्यचना ने मनुष्य
संझी तेना १७१ जेदना प्रजाप्ता, एए जातिना देवताना प्रजाप्ता ए सर्व मळी २५० लेद
साले ॥ १३ ॥ यशाश्वतामांदि ३१३ नेद खाने. ते ७ नरफना यप्रजाप्ता, ५ संझी तिर्य-
चना यप्रजाप्ता, १०१ समुश्मि मनुष्यना यप्रजाप्ता, २०१ संझी मनुग्यना थप्रजाप्ता ए
२०२ मनुप्यना, एए जातिना देवताना यप्रजाता, सर्व मळी ३१३ नेद साने ॥ १५ ॥
संझीमा ४२७ नेद खाने ते १५ नेद नारकीना, ५ संझी तिर्यचना यप्रजाप्ता ने प्रजाप्ता
ए. १० तिर्यचना. संझी. मनुष्य १०१ ना थप्रजाप्ता ने प्रजाता ए २०२ मनुष्यना ने १ए नेद
देवताना सर्व मळी ४२४ नेद खाने ॥ १५ ॥ यसंझोमांदि १३ए चेद लाने ते १०१
समुर्छिम मनुप्यना अप्रजाप्ता, ३० जेद तिर्यंचना, ते 40 माथी १० नेद संझीना वा,
शेप ३७ जेद तिर्यंचना, सर्व मळी १३ए जेद खाजे॥१६॥ पांचसे प्रेसठमांहि चवे तो ३७१
द चवे. नरकना प्रजाप्ता, एए देवताना प्रजाप्ता, ४ जेद तिर्यंचना, ६. जातिना
जुगलियाना यप्रजाप्ता वर्जिने शेप २१७ नेद मनुप्यना, सर्व मळी ३७१ जेद लाने ॥१७॥
जोपना ॥२२॥ न च तेमा १२ जेद खाने. ते ७ नरकना अप्रजाता, एए देवताना अप्रजाप्ता, ७६ जुगलियाना यप्रजाप्ता, सर्व १७२ जेद न चवे तेमा साने ॥ १०॥ बागसी३ खेश्या तेमां प्रत्येक २ मा ४५ए नेदलाने. ते नारकीना ६ नेद, ते एकेकी लेश्या त्रण त्रण नरके लाने तेथी, ४० नेद तिर्यचना, ३०३ जेद मनुष्यना, ५१ जाति देवताना थप्रजाप्ता प्रजाप्ता १०२, सर्व मळी ४५ए नेद खाने ॥ १५ ॥ तेजुलेश्यामां ३४३ जेद लाले. ते वादर, पृथ्वी, पाणी, वनस्पति ए ३ ना यप्रजाप्ता, संज्ञी तियेचना जेद,संझी मनुप्यनाश्०२ नेद, ६५ जातिना देवताना यप्रजाप्ता प्रजाप्ता १२७,सर्व मळी ३४३ नेद खाने ॥२०॥ पद्मखेश्यामांदि६६ जेद साजे. ते संझी तिर्यचना १० जेद, १५ कर्मभूमिना थप्रजाप्ता प्रजाप्ता ३०, देवतामा वीजो किलविषी, जोजो, चोथो, पांचमो देवलोक ने ए सोकांतिक ए १३ना यप्रजाप्ता प्रजाप्ता २६. सर्व मळी ६६ जेद खाने ॥ २१ ॥ शुकल लेश्यामां नेदं लाले. ते संज्ञी तिर्यचना १० जेद, १५ कर्मनृमिना अप्रजाप्ता प्रजाप्ता ३०, ने देवतामांहि त्रीजो किसविषी १, बठेयो ते बारमा देवलोक सुधी ७ देवलोक, ए अवेयक, ५ धनुत्तर विमान ए २५ ना अप्रजाप्ता प्रजाप्ता ४४, सर्य मळी जेद साने ॥ २२ ॥ वा सैश्यामां नेद ते १० नेद संझी तिर्यचना ने ३० नेद मनुष्यना ते १५ कर्ममिना यप्रजाता ने प्रजाप्ता ३०, सर्व मळी ५० नेद खाने ॥ २३ ॥ यागली वेश्यामा २० नेद साने. ते प्रथम ५१ जातिना देवताना यम- जाशा ने प्रगाहा १०२, ने जुगतीयाना ६ जेदना यप्रजाप्ता ने प्रजाप्ता १०२ ने यादर, यी, पाणी, वनस्पति १३ ना यमजाप्ता र सर्व मळी २७ जेद खाने ॥ २४ ॥ उदा. रिक फाययोगमा ३५१ नेद खाने. ते ३०३ नंद मनुष्यना, ४ जेद तिर्यचना ए ३५१ नेद साने ॥ २५ ॥: उदारिक मिश्रयोगमा २४ नेद खाने ते १०१ समुमि मनुष्य, १०१ संज्ञी मनुष्यना श्रमजाप्ता, १५ कर्ममिना प्रजाप्ता, तिर्यंचना २४ जेद यप्रजासा वादर यायुः फायनो प्रजातो ५ संझी तिचना प्रजाता सर्वे मळी २४ जेद साले ॥ २६ ॥ चक्रेय योगमा २३३ नेद खाने ते एक देवताना, १४ नेद नारकीना, ५ संझी तिर्यचना प्रजाता, पादर पायुफायनो प्रजातो, २५ कर्मनूमिना प्रजाप्ता, सर्व मळी २३३ नेद खाने ॥ २७ ॥ धोपना मिश्रमा २१ जेद साने. ते पूर्व २३३ नेद कया तेमांथो ए मेवेयक, ५ अनुत्तर
IS
(ना
२॥
विमान. १४ ना प्रजामा जनप नंद लाते ।। २० । याहारक ने व्याहारकन
मिश्रमा ५ कमनमिना प्रोn ) .. ताज | 20 || फामाण फाययोगमादि 33
जंद प्लान त::२ अासान कम मिना पजामा साम। ३४ नंद लाने ॥३०॥
सन्य मनादि ने सत्य ना{2 : 1 जगमा दलान. न !uru जातिना दवता ने
3 नारय। 10 मई। यम:। नियत सवना पर्याधाना २१५ नंद पूर्वक्ति सात
यागमा सान | :' ॥ या वचनमा २२0 नंद लाज. नं पूर्व सत्यमनादिमा २१२ नंद
काया नेज न ॥ यमका तयच न : विगलयिना एG ना प्रजाप्ता सर्व मळी २२० नेद
जान ।। : । दारिफ शरीरमा ३५० नंद लानं. ते ५६३ माथ। १४ नंद नारकीना ने
१ तर दाताना वजिन शेप ३५१ नेद खाने ॥३३॥ वक्रेय शरीरमांहि २३३ नेद लाने.
ते'
एत जेद देवनाना, २४ जेद नारकीना, १५ कर्मनूमिना प्रजाप्ता, ५ संझी तिर्यंचना
प्रजाप्ता, बादर वाठकायनो प्रजाती ए २३३ लेद साने ॥ ३४ ॥ थाहारक शरीरमा १५ कर्म-
1 मिना प्रजासाना साने ॥३५॥ तेजस, कार्मण शरीरमा ५६३ नेद खाने ॥३६॥ यणादारकमा
॥२२॥
३४ नेद साने ते कामण काययोगनी माफक जाणवू ॥३॥ यादारकमा ५६३ नेद साने. ॥३॥ मनसहितमा २१२ नेद खाने ते सत्य मननी माफक जागर्नु ॥३॥ मनरहितमा ३५१ नेद खाने ते ७ नरकना अग्रजाप्ता, ४३ नेद तिर्यचना ते ५ संज्ञी तिर्यचना प्रजाता पजिन शेप ४३ लेद तिर्यचना, १०१ समुर्तिम मनुष्यना याप्रजाप्ता, १०१ संज्ञी मनुष्यना यप्रजाप्ता प. २०२, एए जातिना देवताना यप्रजाप्ता ए सर्व मळी ३५१ नेद लाने ॥४॥ नजरे यावे तेमा २२५ नेद लाने. ते ७ नरक, प जातिना देवता, १०१ गर्नज मनुष्य, ५ संझी तिर्यंच, ५ असंही तिर्यच, ३ विगलेजिय, ५ वादर गकेन्ध्यि ए सर्वना प्रजाप्ता एम २२५ नेद लाने ॥४१॥ नजरे न यावे तेमा ३३० लेद साने. ते ३३२ तो अप्रजाप्ता, ५ सूक्ष्म एकेन्जिय ने साधारण वनस्पति प.६ ना प्रजाप्ता ए सर्व मळी ३३० नेद साने ॥ ४२ ॥ गर्जजमा २१२ नेद लाने. ते २०२ संझी मनुष्यना ने १० जेद संझी तिर्यचना, प. सर्व मळी २१२ जेद लाने ॥४३॥ यणगर्नजमां ३५१ लेद लाने. ते १४ नारकोना, रएG नेद देवताना, ३० नेद तिर्यचना ते ४७ माथी १० नेद संझीना वा १०१ समु. ..
. जीवना ॥२४॥ जाप्ता ने प्रजाप्ता २०, यसझी तिर्यंचना ५ नेद ने ३ विगले नियना एनां प्रजाप्ता ने संझीमनुप्यना २०२ नेद ने एए जातिना देवताना प्रजाप्ता एम ३२६ नेद लाने ॥३॥ मनः पर्यायमा २१२ जेद लाने. ते ७ नारकीना, ५ संझी तिर्यंच ने १०१ संझी मनुष्य, एए जा. तिना देवता, ए सर्वना प्रजाप्ता २१२ मां मनःपर्याय लाने॥ ६४ ॥ विनंग ज्ञानमा २२२ जेद लाने ते ५ यनुत्तर विमानना यप्रजाप्ता ने प्रजाप्ता ए १० नेट वा, वाकी १७७ द देवताना ने १५ जेद नारकीना, १५ कर्मचूमिना मन्प्यना प्रजाप्ता ने ५ संज्ञो तिर्य- चना प्रजाप्ता ए २२५ जेद खाने ॥६५॥ यवधिज्ञानमा २१० जेद लाने. ते १५ परमा- धामी, ३ किस विपी ए १७ वर्जिने शेप जर जातिना देवताना अप्रजाप्ता ने प्रजाप्ता २६५ । ने १३ नारकीना ते १५ माथी सातमी नरकनो अप्रजातो वर्जिने १३ जेद ने १५ कर्मजू- मिना यमजाप्ता ने प्रजाप्ता ए ३० ने ५ संझी तिर्यंचना प्रजाप्ता ए १० नेद लाने ॥६६॥ अवधिदर्शनमांहि २४७ नेद खाने. तेमा रए नेद देवताना, १४ नेद नारकीना, १५ :. कर्मचूमिना यप्रजाप्ता ने प्रजाप्ता ३० ने ५ संझो तिर्यचना प्रजाप्ता स सर्वे मळी २४७ IRયા नेद खाने ।। ६०॥ परितमांहि ५६३ नेद जीयना खाने॥६० ॥ अपरितमा५५३ नेदजीवना साने. ते ५६३ माथी ५ यनुत्तर विमानना यप्रजासा ने प्रजासा १० नेद बा, शेप ५५३ नेद खाने ॥६५॥ संजतिमा १५ कर्मनूमिना प्रजाप्ता लाजे, 10 ॥ संजतासंजतिमा १५ कर्मनूमिना प्रजाता नं ५ संज्ञी तिर्यचना प्रजाताप २० नेद लाने ॥ १ ॥ यसंजतिमां ५६३ निद लाने. ॥ २२ ॥ पहेला गुणवाणामां ५५३ नेद लाने. ते ५ अनुत्तर विमानना यग्रजाताने प्रजासा १० दया, शेष५५३ नेद खाने॥ १३ ॥सास्वादान गुणगामा २१३ नंद लाने. ते १३ नेद नारकीना, ते १५ माथी मी नरकनो अप्रजातो वज्यों ने रनेद तिर्यचना, ३ विगसेन्श्यि ने ५ थसंज्ञो तिर्यच पंचेन्जिय ए ना अप्रजाता ने ५ संझी तिच पंचेन्धियना थप्रजाप्ता ने प्रजाप्ता ग. १० ने पूर्व काया ते प. १० ने १५ कर्मजू. मिना यप्रजाप्ता ने प्रजासा ए ३० ने देवता एए जातिमांदिया १५ पर माधामी, ३ किल- विपी, ५ अनुत्तर विमान ए २३ वर्जिने शेप १६ जातिना यप्रजाप्ता ने प्रजाप्ता ए १५२ नेद देवताना, प. सर्व मळीने २१३ लेद साने ॥ १४ ।। मिश्र गुणगणामां एवं नेद खाने, ते
भेद
नारकोना प्रजाता, ५ संज्ञा तिर्यचना प्रजासा, १५ कर्मऋमिना प्रजाप्ता ए २७ ने६७
नेद देवताना ते दमांची १५ परमाधामी, ३ किस विषी, ए ग्रेवयक, ५ यनुत्तर
वि.
मान ए ३२ द वर्जिने शेष ६७ जेदना प्रजाप्ता ए सर्व मळी ए नंद साने ॥ ५ ॥
पोषे गुणगणे २४५ लेद साने. ते पूर्व समकितमा २५३ नेद कह्या , नेमाथी ५ यसंझी
तिर्यंच पंचेन्द्रिय ने ३ विगप्लेन्द्रिय ए जेद वर्जिन शेष २४५ नंद लाने ॥४६॥ पांचमे
गुणगणे २० जेद साजे. ते १५ कर्मऋमिना, ५ संझ) तिर्यच पंचेन्जिय ए २० ना प्रजाता
साजे ॥ ॥ हे गुणगाणेधी चौदमा गुणवाणा सुधी १५ कर्मलमिना मनुप्यना प्रजाता
सा ॥ २० ॥ थजीवना ५६० जेद तेमा सोकमा ५५७ लाने. ते धर्मास्तिकाय यधर्मास्ति-
फाप ए येना देश अने घासाशास्तिकायनो स्कंध ए ३ नेद वा, शेप ५५७ जेद लाने
॥ १५ ॥ थसाकमां यजीवना ५६० नंद मांदिला ६ नेद खाने, ते याकाशास्तिकायना
देश १, प्रदेश २, यने ऽव्यादि ४ नेद, ए ६ जेद खाने ॥ ॥ धर्मास्तिकायना स्कंधमा
थनीयना ११ नेद खाने. ते धर्मास्तिकायनो स्कंध, प्रदेश २, यधर्मास्तिकायनो स्कंध
॥२५॥
३, प्रदेश , शाकाग्निकायनो देश ५, प्रदेश ३ का समयमा पुगालागि. मायनो देश, प्रदेश १०, परमाणु पनगद ११, ११ नंदवाने ॥१॥ य. सीकोप यहार यजीपना १७ वेद खाने से पूर्व ११ द माया गंगाशी काय काय ॥२|| धर्मारिनकायना देशमा ११ नेद, ने धर्मास्तिकायनी देश, प्रदेश २, अधर्माग्निकापनो देश ३, प्रदया है, यानाशालिफायनी देश ५, प्रदेश ६, फा, गुदगना नेद १. ११ नंद लाने. ॥ ३ ॥ धर्मास्निफायना प्रदेशमा द खाने ते भांतिकागनो प्रदेश १, अपमास्तिकायनो प्रदेश २, याफामाग्निकायनो प्रदेश ३, काल ४, पुदगलना । नेद प. यात द लाने || TU | यधर्मास्तिकायना स्कंधमा ११ जद खाने ने धर्मास्तिकागनी मालक जाण ॥ ५ ॥ श्याकाशास्तिफायना स्कंधमा ११ नेद लाने, ते निकायनों की १, प्रदेश २, अधर्मास्तिकायनो स्कंध ३, प्रदेश ४, थाकासानिकायनो संघ ५, प्रददा ६, पामा , पुगतना ४ मेद, सर्व मळी ११ दबानं ॥ याकामानिकायना २ 'जेद, सोकाकाश १, अलकाकाश २. ते लोकाफादाना २ लेद, संपूर्ण , अधुगे २. संपू.
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ते जंबूझीप मध्ये हेमवत पर्वत थने शिपरी पर्यंत थकी पूर्व थने पश्चिमनी दिशिप स- मुज मध्ये रे ये दादा नौळी , ते एकेकी दाढाए सात सात छीपा तेनुं मा.न. प्रथम ३०० जोजन गया. पी पदेलो हरीपाठे. तिहाथको ४०० जोजन गया पली बाजी होपो ने.तिहाथको ५०० जोजन गया पी बीजो छीपो . तिहाथकी ६०० जोजन गया पनी चौथोपो . तिहायकी १०० जोजन गया पठी पांचमो प्रोपो . तिहां यकी 100 जो न गया पनी हो कीयो के. तिहाथी ए जोजन गया पठी सातमो छीपो दे. प रोते दाढाए ५६ यंतर छीपा दे. सर्वे अढोहीप मध्ये जाणवा ॥३॥ १. समुर्दिम मनुष्य उपजयानां गम क दे ॥ उच्चारेसुवा १, पासवणेसुया २, खेसेसुवा ३, संघा गया ४, यंतेमुया ५, पितेसुया ६, सोणिपसुवा ७, पुपसुवा , सुफेरसुवाए, मुक्क पोग्गा परिसामोयेसुवा १०, विगयजीव कलेवरेसुवा ११, इत्योपुरिससंजोगेसुरा २२, नगर निधम्मणेमुया १३, सव्येसु चेव असुश्ाणेसुवा १४ ॥४॥२१॥२२ मो वाणव्यंतरनो दंभक तेनां नाम-पिशाच ?, नूत २, यद ३, रादास ४, किंनर ५, किंपुरुप६, मदोरग , गांधर्व ७, थाणपनी ए,पापपन्नी १०, इसीवाइ ११, जयवाइ १२, कंदीय १३,महाकंदीय १५, कोहंग
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दंडक परिणाग द्वार प.हे ते. सेझ्या प्राण प्रकारे परिणमे-जपन्य, मध्यम यने उत्कृष्ट; तथा ना प्रकार परिणमे ते उपर त्रण कही तेना थरेना प्रण प्रण लेद थाय; जेमके, जघ. न्यनो जपन्य, जपन्यनो मध्यम, जपन्यनो उत्कृष्ट ए रोने दरेकना त्रण त्रण नेद करतां नरमोद पाय. एम नरना सत्तावीस जेद घाय. एम सत्तावीसना एकाशी नेद धाय. गम एकातीना पसे ने तेंतासीस जेद घाय. एटले जेद वेश्या परिणमे ॥६॥ सातमुं संश्यानां सदाणनुं द्वार कहे ते. तेमा प्रथम कृपाश्यानां सक्षण कहे ते-पांच या- सपनो सेवनार, प्रण थयुप्तिवंत, ढकाय जोवनी हिंसक, थारंजनो तित्र परिणामी नपा द्वेषी, पाप करवामां साहसीक, निगेर परिणामी, जीवहिंसा शुग रहित करना यजितेन्द्रिय परा जोगे कररी सहित होय तेने कृष्ण खेश्यानुं सक्षण जाण ...॥ गौष श्याना खाण कदे रे. इावंत, थमर्पयंत, तपरहित, मायावी पापरता साजे नहीं, गधी, धनारो, प्रमादी, रसनो खोयुषी, मायानो गवेपी, थारंगनो यस्यागी, पा.पने षि साहसीक ए नीम वेशानां प्राण जाणगं ॥२॥ कापोत खेश्यानां सक्षण हे ले- वांका घोलो, वांका काम करनार, माया करोने हरखाय, सरळपणाथी रहित, मोढे जूदो थने पुंठे जुदो, मिथ्या-खोटा वचननो योखनार, चोरी मत्सरनो करनार, ए कापोत से- श्यानां सक्षण जाणयां ॥३॥ तेजु वेश्यानां सक्षण कदे ठे-मर्यादावंत, मायारहित, चपळ- पणायी रहित, कुतूहल रहित, विनयपंत, दमितेंघिय, शुन जोगवंत, उपध्यान तप सहित, दृढ़धर्मि, प्रियधर्मि, पाप थकी थीदे, ए तेजुओझ्यानां लक्षण जाणवां ॥४॥ पद्म खेश्यानां सक्षण कहे ठे-क्रोध, मान, माया, खोल पातळा कर्या ठे, प्रशान्त चित्त, यात्मानो दमण- हार, योगउपध्यान सहित होय, योमा बोसो, उपशान्त, जितेंजिय, ए पद्मलेश्यानां सक्षण जाणयां ॥५॥शुक्ल वेश्यानां सक्षण कहे डे-थार्तध्यान रोप्रध्यानयी सर्वथा रहित, धर्मध्यान शुक्सध्यानयो सहित,दश प्रकारनी चित्त समाधीए करो सहित, थारमानो दम- पहार, इत्यादिक शुक्स सेश्यानां लक्षण जाणवां ॥ ७ ॥ हवे थाउमुं स्थानद्वार कहे ठे- स्थान एटखे उत्कर्षे के यपक करी सेश्यानुं परस्पर तारतम्य. यसंख्यात उत्सर्पिणी यव. सर्पिणीना समय जेदलां के यसंख्यात लोकना याकाश प्रदेश जेटसां याय तेदलां क्षेश्यानां BEEXCAREE
पाया। ५.in [
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का सामना
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11 पत्र
यति. हार
पद
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घागर
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यतमहन
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नाम सध्याना स्थिति
जव
बनमहजनी नन० 15॥
12xTAS सागर पट्यने थसंन्यातमे नागे यधिकनी ॥२॥ कापोत खेयानो स्थिति जा अंतर्मुहर्तनी, उत्प३ सागर पल्यने असंख्यातमे नागे यधिकनी ॥ ३॥ तेजुलेश्यानी स्थिति जण यंत मुहर्तनी, उत्॥ २ सागर पट्यने यसंग्ख्यातमे जागे अधिकनी 110 पद्म श्यानी स्थिति जण थंतर्मुहूर्तनी, उ० १० सागर यंतर्मुहर्ज यधिकनी ॥५॥शुरू सेश्यानी स्थिति ज० अंतर्मु. हर्तनी, उ०३३ सागर यंतर्मुहर्त यधिकनी॥६॥रस्थिति सेझ्यानो समुच्चय कही ये ४ ग. तिनी स्थिति कहे वे-नरकगतिनो कापोत खेश्यानी स्थिति ज० दश हजार वर्षनो, उत्॥ ३ सागर पाट्यने असंख्यातमे नागेश्यधिकनी॥१॥नीस सेझ्यानी स्थिति ज०३ सागर कारो ने पत्यनाथसंग्न्यातमा नाग यधिकनी, उ०१० सागर पल्पना यासंख्यानमा नाग यधिक नो ॥ २ ॥ कृष्ण लेश्यानी स्थिति ज० १० सागरनी, उत्० ३३ सागर ने अंतर्मुहाधिकनी ॥३॥ ए नारकोनी लेश्यानी स्थिति कही. हये तिर्यच मनुष्यनो खेश्यानी स्थिति कहे - तिर्यच थने मनुप्य ज्या ज्यां जाय त्यां त्यां ज० उ० प्रथम पाच लेश्यानी येनमुहलन) स्थिति जाणवी. केवलज्ञान याश्रि शुक्ल खेश्यानी स्थिति जघन्य यंतर्मुहर्तनी, उत्० नय SEENEUAGE देडक स्पानफ के. नारोश्यामा संविसष्ट परिणाम के विशुभ परिणामना तारतम्यरूप यसं रूपात पानफ . थने प्रप्यसेश्यामां तेवा अव्यस्कंधो थसंख्यात यसंख्यात ठे. एक परिणामे एफ पपते जेटलां व्योनुं ग्रहण कर्यु ते एक स्थानक व्यसेश्या परत्वे कही शाकाय. ते स्थानकना ये प्रकार. जपन्य स्थानक यने उत्कृष्ट स्थानक. जघन्यनी पासेना स्थानकोनो जपन्यमा थने उत्कृष्टनी पासेनां स्थानकोनो उत्कृष्टमां थंत च करवाथी मध्यम स्थानकानों पीजो भेद थांदि गएयो नथी. हवे तसेश्यानां स्थानकनुं यदपबहुत सबंधी योमा कापोत खेश्यानां स्थानक १ तेथो नील सेश्यानां स्थानक यसंख्यातगुणा २ तेपी कृष्ण सेझ्यानां स्थानक यसंग्ग्यातगुणा ३ तेथी तेजु खेदयानां स्थानक थसंग्न्यानगुणा ४ तथ) पद्म खेश्यानां स्थानक यसंख्यातगुणा ५ तेथी शुक्ल सेश्यानां स्थानक यमस्यात गुणा ६ ॥ ८ ॥ नवमुं खेश्यानी स्थितिनुं हार फदं -टप्ण पदयानी स्थिति जघन्य यंतर्मुहूर्त्तनी, उत्कृष्टी ३३ सागर ने ? शंतमुहर्ग थधिकनी ॥१॥ नीस सेश्यानी स्थिति ज० थंतर्मुहर्जनी, उत्० १० तेणे करी जीव जुर्गति पामे. तेजु, पद्म, शुक्ल ए त्रण धर्म वेश्या, तेणे करीने जोय सुग- तिम जाय ॥ १५ ॥ यगीयारमुं लेश्याना चयननुं हार कहे ठे. सधळी वेश्या प्रथम परिणमती वखते कोइ जीवने उपजवू के चबवु नयी तथा खेश्याना ठेवा समये को जीवने उपज के चबवू नयी. परजयने विपे कम चचे ते कहे वे-लेश्या परजवनी यावी यकी व्यंतर्मुहर्त गया पठी शेष अंतर्मुहूर्त याउखा थामा रहे यके जीव परखोकने विपेजाय. ॥ ११ ॥ समुच्चय सखेशीमा उ लेश्या लाने १-२ नरके कापोत लेश्या २,त्रीजी नरके कापोत घणी नीस योमी ३, चोथी नरके नीत वेश्या ४, पांचमी नरके नीस घणी कृष्ण योमी ५, उही नरके कृष्ण सेश्या ६, सातमी नरके महाकृष्ण वेश्या ॥१॥ १० जयनपतिमां सेश्या ५ साने ॥ ११ ॥ पृथ्वी, पाणी, वनस्पति एवणना यपर्याप्तावस्थामा खेदया , पर्याप्तावस्थामां ३ लेश्या ॥ १४ ॥ तेउ पाउ त्रण विगप्रिय ए पांचमा पहेली ३ लेश्या ॥ १५ ॥ तिर्यंच पंचेन्जिय समुर्तिममा प्रथम ३ वेश्या, गर्जजमा ६वेश्या ॥ २०॥ मनुष्यमां पण तेज रोते जाणवी ॥२१॥ वाणव्यंतरमा प्रथम ४ लेश्या ॥२२॥ ज्योतिषीमा ?
नेज क्षेश्या ॥ २३ ॥ वैमानिकमा १-२ देवलोके तेजु सेश्या, ३-४-५ देवठोके पद्म सेश्या, उहाची सर्गसिद्ध सगी शुक पेश्या ॥२४॥ सिझ यक्षेशी जाणवा. हवे उ लेश्याना जोर्नु थपपहुच कदे -सर्वधी थोमा शुकलेशी १ तेथी पद्मखेशी संख्यातगुणा २ तेषी तेजुसशी सं० ३ तेघी थसेशी अनंतगुणा ४ तेघी कापोतसेशी यनं ५ तेथी नील सेशी पिसेसा दिया ६ तेथी कृप्यलेशी वि० तेची सवेशी विसेसादिया ७ ॥ ए सेश्यानो थपिकार उनराम्ययन सूत्रना थध्ययन ३४ मां तथा पनवणा पद १७ मां तथा जीवा- निगम सूत्रमा ने, त्यांची विस्तारे जाणवो. ॥ इति वीजें खेश्याधार संपूर्ण ॥ Suuut यथ त्रीर्छ स्थितिद्वार कहे ठे। समुरचय स्थिति वाभि जघन्य थंतर्मुहर्तनी, उत्कृष्टी ३३ सागरनी. हवे तेनो जुदो जुदो विवरो कहे . पहेली नरके ज० दश हजार वर्ष, उप १ सागर ॥ पीजी नरके ज० १ सागर, ज० ३ सागर ॥ त्रीजी नरके ज० ३ सागर, 10 9 सागर ॥ चोथी नरके ज०७ सागर, उप १० सागर ॥ पांचमी नरके ज० १० सागर, उ० १७ सागर " नही नरके ज० १७ सागर, ज० २२ सागर ॥ सातमी नरके ज०२२ सागर, उ० ३३. सागर ॥ ए प्रत्येक प्रत्येक नरकनां नाम याश्रियायुष्य कयां. हवे प्रतर नेदे "युष्य कहे ठे-पहेली नरके प्रतर १३ ठे. तेमां पहेले प्रतरे जण १० हजार वर्ष,उ० एव हजार वर्प ॥ वीजे जा एक हजार वर्ष, उप ए० लाख वर्प ॥ त्रीजे जाए लाख वर्ष, उ पूर्व कोमी १ ॥ चोथे ज० पूर्व कोमो र, उ सागर १ तेना जाग १० करीए तेमांनो , नाग ॥ पांचमे जा नाग १, जन जाग २ ॥ठहे जा नाग २, उ० नाग ३॥ सातमे ज० नाग ३, उ० नाग ४॥ च्याम्मे जा नाग ४, जन जाग ५॥ नवमे जग जाग ५, उस नाग ६॥ दशमे जण नाग ६, उस जाग ७ ॥ यग्यारमे जा नाग , जा जाग ॥ वारमे ज० नाग , उ नाग ए॥ तेरमे जा नाग ए, उ० सागर १ ॥१॥ वीजी नरके पाथमा ११
देडक
२४॥
वे. त्यां यकेका सागरना ११ जाग करीए, तेमांना वये नाग वधारीए ॥ प्रथम पाथम
ज० सागर १, न सागर १ नाग २॥ वीजे पाथमे ज० सागर १ नाग २, न सागर १
जाग ४ ॥ त्रोजे ज० सागर र नाग ४, उ० सागर १ नाग ६ ॥ चोथे पाथमे ज० १ सागर ।।
ने ६ जाग, उ०१ सागर ने उजाग ॥ पांचमे ज० सागर १ नाग ७, ज० १ सागर नाग
१०॥ ज० १ सागर नाग १०, ज०२ सागर र नाग ॥ सातम ज०२ सागर १ नाग,
ज०२ सागर ३ नाग ॥ याठमे ज०२ सागर ३ नाग, न० २ सागर ५ जाग ॥ नवमे जण
२ सागर ५ जाग, उ०२ सागर नाग ॥ दशमे जग २ सागर नाग, उ०२ सागर ए
नाग ॥ यग्यारमे ज० २ सागर ए नाग, उ०३ सागर ॥२॥त्रीजी नरके पाथमा ए त्यां
एकेका सागरना ए नाग करीप ते प्रतर प्रतरे ४ नाग वधारीए ॥ प्रथम पाम ज ३
सागर, उ० ३ सागर ४ नाग ॥ वीजे जग ३ सागर लाग, उ० ३ सागर नाग ॥ त्रीजे
जप ३ सागर नाग, उ ४ सागर ३ नाग ॥ चोथे ज० ४ सागर ३ नाग, उ०४ सागर
नाग ॥ पांचमे ज० ४ सागर नाग, उ० ५ सागर २ जाग ॥ उठे ज० ५ सागर २
॥३४॥
Inाग ॥ ज ० " सागर ' नाग , 30 ए सागर ४ नाग सातमजा ! ग . आग , in १० सागर ॥४ ॥ पांचमी नरक पाथमा ५ ॥ त्या एकेका सागरना || IMAL सागरम २ नाग प्रतरे प्रतर वधारीग ॥ प्रथम पाथ जा २० | int , num | सोज ११ सागर न २ नाग , उ ०१२ सागर ४ नाग । १५. गरमाग॥चौथ ज ० 1mHI11 साग ज ॥ १७ सागर ॥५ ॥ ही नरके । नाग, उ०५ सागर ६ नाग ॥ सातमे ज० ५ सागर ६ नाग, ३०६ सागर १ ना यामे ज०६ सागर । नाग, नु०६ सागर ५ जाग ।। नयमे ज०६ सागर ५ नाग, 30 गागर ॥ ३॥ गायी नरकं पायमा ॥ त्यां पकेका सागरना 3 जाग करीप तेमांत्रण प्रण नाग धागेण ॥ प्रथम पाय ज० सागर, 30 सागर ३ नाग ॥घोजे ज०० सागर ३ नाग, 30 मागर ६ नाग॥ त्रीने जग सागर ६ नाग, उ00 सागरं नाग। गाणे गा सागर २ नाग, उ07 मागर ५ नाग ॥ पांचम ज07 सागर ५ नाग, 30 ! १४ सागर नाग, ३०
दंडक
पाथमा ३ त्यां एकेका सागरना ३ नाग करीए तेमांर नागर सागर प्रतरे प्रतरे वधारीए॥
पहेले प्रतरे ज० १७ सागर, उ० १७ सागर २ नाग ॥ वीजे जण १७ सागर २ नाग, उ०
२० सागर १ नाग ॥त्रीजे ज० २० सागर र नाग, उ० २२ सागर ॥६॥ सातमी नरके
१ पाथमो . त्यां ५ नरकावासा वे. तेनां नाम-कास ॥१॥ महाकाल ॥ २ ॥ रौष
॥३॥ महारोज ॥ ४ ॥ ए चार नरकावासाए ज० २२ सागर, उ३३ सागर ॥ यपश्.
गण पांचमा नरकावालाए ३३ सागर जयन्योत्कृष्ट ॥ हवे नवनपतिनो स्थिति कहे ठे-
तेमा दक्षिण दिशाना जवनपतिनी ज० १० हजार वर्पनी, उ० १ सागरन ॥ तेनी देवीनी
ज० १० हजार वर्षनी, उ० सामा त्रण पदयनी. तेना नवनीकायना देवतानी स्थिति जण
१० हजार वर्पनी, उ० दोढ पट्यनी. तेनी देवीनी ज० १० हजार वर्पनी, उ० पोणा पट्यनी.
उत्तर दिशाना नवनातिनी ज० १० हजार वर्षनी, जग १ सागर झाझरो. तेनी देवीनो
ज० १० हजार वर्षनी, उ० सामाचार पटयनी ॥ नवनीकायनी ज० २० हजार वर्षनी, उ०
वे पट्य देशे उणी. तेनी देवीनी जण १० हजार वर्षनी, उ०१ पट्य देशे जणी ॥यथ चादर
॥३५॥
पृथ्वीनी स्थिति सघळीनी जा यंतर्मुहूर्त्तनी॥ हवे उत्कृष्टीनो विवरो कहे -सन्दानी वर्पनी न हजार ॥ सुझानी उप १२ हजार वर्षनी ॥ वायुयानी उप १५ हजार अपनी मणोशिलानी न० १६ हजार वर्पनी ॥ शर्करानी उ० १७ हजार वर्पनी ॥ सरपृचीनी उ० २२ हजार वर्पनी ॥यपनी ज० १ यंतर्मुहूर्त्तनी, उहजार वर्षनी ॥ तंउनीजण यंत- मुहर्तनी, उप ३ यहोराचिनी ॥ वायुनी ज० १ यंतर्मुहूर्तनी, उ० ३ हजार वर्पनो ॥ वन- स्पतिनी ज०१ अंतर्मुहर्तनी, उप १० हजार वर्पनी ॥ सूक्ष्म ५स्यावरनी ज० १ यंतर्मुहर्तनी, जातेटलोजियनी ज०१ अंतर्मुहूर्त्तनी,उ० १२ वर्पनी ॥ तेपियनी ज०१ यंतर्मुहूर्तनी, जय भए दिवसनी ॥ चरिंजियनी १ यंतर्मुहुर्तनी, उ० ६ मासनी ॥ हवे तिर्यच पंचें- प्रियनी स्थिति कहे ठे-जलचर गर्नजसमुर्विमनी जर यंतर्मुहुर्तनी, उ० १ पूर्वक्रोमन।। स्थसचर गर्नजनी ज० १ अंतर्मुहूर्त्तनी, ज ३ पल्योपमनी ॥ समुर्तिमनी ज० १ यंतर्मु- हूर्त्तनी, ना व हजार वपनी ॥ खेचर गर्नजनी ज० यंतर्मुहूर्त्तनी, उ० पट्योपमना व्यसं- ख्यातमा नागनी ॥ समाधमनी जण १ यंतर्मुहूर्त्तनी, उ०७२ हजार वर्पनी ॥ उरपर गर्नजनो दंडक ज०१ यंतमुहर्जनी, उ० १ पूर्वकोमनी. समुाठमनी ज० १ यंतमुहर्तनी, उग'५३ हजार पर्षनी ॥ तुजपर गजनी ज० १ यंतर्मुहूर्तनी, उ० १ पूर्वक्रोमोनी. समुठिमनी जप १ अंतर्मुहूर्ननो, उ० ४२ हजार वर्पनी ॥ ए तिर्यच पंचेंपियनी स्थिति कहो।। हरे मनुष्यनी स्थिति कहे ठे-जे थसंख्याता थायुप्पना मनुष्य ठे तेनी ज० पक्ष्योपमना थसंग्ख्यातमा लागनी ॥ जे मनुष्य संख्याता वर्षना यायुप्यना ये तेनी ज०१ यंतर्मुहूर्त्तनी ॥ ए समस्तनी जघन्य स्थिति कही ॥ हवे उत्कृष्टीनो विवरो कदे ठे-देवकुरु उत्तरकुरुना मनुप्यनी स्थिति ३ पट्योपरानी ॥ हरिवास है। रम्यवासे २ पट्यनी ॥ हेमवंत एरणवते १ पक्ष्यनी ॥ उप्पन यंतरही पट्योपमना य- संग्यातमा नागनी ॥ महाविदेदे । पूर्वकोगनो ॥ जरत थैरवते थाराने, मेळे यायुप्य तथा : थारानुं मानादि जाणवू ।। प्रथम सुसमसुसम यारो कोमाक्रोमी सागरोपमनो ॥ तेना मनुप्पनुं ३ पक्ष्य, थायुप्प. थपत्यतिपासणा ए दिवस वोजो सुसम थारो ३ कोमा. बग्रेको सागरोपमनो. तेना मनुप्यतुं धायुप्य २ पस्योपमनु, यपत्यप्रतिपासणा ६४ दिवस।
पीजो सुसम सुसम थारो २ कोमारोमी सागरनो. तेना मनुप्यतुं थायुप्य १ पट्यनु, थ. पत्यप्रतिपासणा 3 दिवस ।। उत्तरते थारे पूर्व क्रोमीनू ॥ ते थारामांहि G साख पूर्व ३ वर्ग मास शेप बाकी होय, त्यारे प्रथम तीर्थकर उपजे ॥ प्रण वर्ष सामा यात मास शेप बाकी दोय, त्यारे व साख पूर्वनुं थायुप्य पाळीने मोक्षजाय ॥ पांच कल्याणीकं होय। सुसम सुसम चोयो प्यारो ? कोमामोमी सागरमादि ४२ दजार वर्ष थोतां, तेने धुरे थायुप्य पूर्व क्रोमीनें ॥ उतरते २०० वर्ष काजेरार्नु ॥ ते आरामा २३ तीर्थकर होय, तेनुं थायुप्य कहे । ॥ वीजा तीर्थकरनुं १२ लाख पूर्वनुं थायुष्य ॥त्रीजानु ६० लाख पूर्वनुं ॥ पोथान ५० साख पूर्वनें ॥ पांचमार्नु ४० साख पूर्वनें ॥ महानुं ३० लाख पूर्व- ॥ सातमार्नु २० साल पूर्वनें ॥ थाउमार्नु १७ साख पूर्व- ।। नवमान २ लाख पूर्वनें ॥ दशमानु १ लाग्य पूर्वतुं ॥ ग्यारमानुं व साख वर्षतुं । बारमार्नु ७२ लाख वर्पनुं ॥ तेरमार्नु ६० लाग्य पर्पनुं ॥ चौदमा ५० लाख वर्षतुं ॥ ॥ पंदरमानुं १० लाख वर्षतुं ॥ सोलमार्नु १ लाख वपर्नु ॥ सत्तरमार्नु ए५ हजार वर्षनुं ॥ श्रढारमा ७४ हजार वर्षy ॥ थोगणीसमानुं ५५ हजार वर्ष ॥ पीसगान ३० हजार वर्षर्नु ॥ करीसमान १० हजार पर्नु ॥ पानीसमानुं एक भार वर्ष ॥ प्रेषीतमार्नु १०० वर्ष॥ चोवीसमान १२ वर्षनुं थायुष्य जाणवू । ए भोपा राना १५ वर्ष ना मास शेप पाकता दोय सारे चरम तीर्थकर उपजे ।। ३ वर्ष mu मास शेप पाकता होय त्यारे मोक्ष जाय ॥ पांच कश्याषीक होय ॥ पांचमो सम शाले ११ हजार वर्षनो ॥ पूरे थायुष्य १०० वर्ष कारानु. नतरतां २० वर्पनुं ॥ ठहो पुसम इस्मशागे ११ हजार कर्पनो ॥ धुरै शायुष्य २० वर्षमुं, उतरतां १६ वर्षतुं ॥ समुर्दिम मनुष्प वायुप्प अपन्योत्कृष्ट अंतर्मुहर्त्तनुं जाएq ॥ व्यंतरनी स्थिति जघन्य १० हजार पनी, ०१ पटरनो. तेनी देवीनी ज० १० हजार वर्षनी, उ० थर्ड पक्ष्यनी । ज्योति. पानी जा पापना धावमा जागनी, 30 १ पश्य झाझेरी ॥ ए समुच्चय थायुप्य कयु। से उदो उदो शिवगे कद वे-चंउमा घायुप जा पा पक्ष्यनु, उ० १ पक्ष्य ने साख वर्ष ॥ सूर्पनु बायुष्य जपा पायर्नु, ०१पक्ष्य ने १ हजार वर्षमुं। ग्रहलूंज० पापश्यनु, उप १ पत्याउँग रात्रनुं जा पायर्नु, उधई पवनेंतारानं जा पनयनो बाठमो बाग, उ० पट्यनो छ मो नाग काऊलं ॥ दवे देवोनु थायुप्य कदे वे-चंप्रमानी देवीनुं यायुष्य ज० पा पक्ष्यनु, उ० थपढ्य ने ५० हजार वर्षनुं ॥ सूर्यनी देवीचें जा पा पदयतुं, उस थर्ड पदय ने ५० वर्षतुं ॥ ग्रहनी देवीनुं जा पा पक्ष्यनु, नु यई पट्यनुं । नक्षत्रनी देवीनुं ज० पट्यनो यातमा नाग, उ० पा पल्यनुं । तारानी देवीनुं ज० पदयनो याम्मो जाग, उ० पट्यनो याठमो नाग काजेलं ।। इवे वैमानिकनी स्थिति कहे ते-जघन्य । पल्योपम, उत्० ३३ सागरनी, ए समुचय स्थिति जाणवी ॥ हये तेनो जुदा विवरो कहे ठे-प्रथम देवलोके ज० १ पट्यनु, उत्० २ सागरनुं ॥ तेनी देवीनुं ज० १ पढ्योपमर्नु उ० उपत्य ते परिग्रहीतर्नु तथा यपरिग्रहीत- ज० १ पढ्यनु, उत्० ५० पत्यनुं ॥ योजे देवलोके जण १ पत्य जाकेरुं, उत्० २ सागर काजेलं ।। तेनी देवीनुं ज० १ पल्य काके उत् ए पट्य ते परिग्रहीत्तनुं यने अपरिग्रहीत- ज०१ पट्य जालं, उत्॥ ५५ पदयर्नु । तीजे देवलोके जा २ सागरनु, उत्0 9 सागरनुं ॥ चौथे देवलोके ज० २ सागर काकेलं, उत्०७ सागर कारं ॥ पांचमे देवलोके ज०७ सागरनु, उत्०१० सागरनुं । उहे देवलोके TEESGE
दंडक
ज० १० सागरनु, उत्० १४ सागरनुं ॥ सातमे देवलोके ज० १४ सागरनु, उत्०१७ साग-
रनुं ॥ यावमे देवसोके ज० १७ सागर, उत्० १० सागरनुं ॥ नवमे देवलोके ज० १०
सागरनु, उत्० १ए सागरनुं ॥दशमे देवलोके ज० एसागरनु, उत्० २० सागरनुं ॥ अग्या-
रमे देवलोके ज० सागरनु, उत्० २१ सागरनुं ॥ वारमे देवलोके ज०२१ सागरनु, उत्
२२ सागरनुं ॥ नव ग्रेवेयके पहेली त्रिके ज० २२ सागर, उत् २३ सागरनु, ॥ एमज एकेक
सागर एकेक गैवेयके वधारता जq ॥ जावत् नवमी ग्रेवेयकं ज० ३० सागरनु, उत्० ३१
सागरनु । चार यनुत्तर विमाने ज० ३१ सागरनु, उत्०३३ सागरनुं॥ सर्वार्थ सिके ३३ सागर
जघन्योत्कृष्ट ॥ एवं प्रतरनी स्थिति कहे ठे-पहेला वीजा देवलोके प्रतर १३ ठे, त्यां
एकेका सागरना १३ नाग करीए तेमांना वचे नाग वधारता जइए ॥ पहेले प्रतरे ज.
१ पक्ष्य, उत्० १ पल्य ने २ लाग बीजे ज० १ पक्ष्य, उत्० १ पत्य ने नाग ॥ बीजे
ज० १ पल्य, उत्० १ पट्य ने ६ नाग॥ चोथे ज० १ पथ्य, उत्०१ पक्ष्यने नाग ॥ पां.
चमे ज० १ पल्य, उत्० १ पट्य ने १० जाग उठे ज० १ पल्य, उत्॥ १ पल्य ने १५ नाग ॥
॥३८॥
सातमे जा १ पटर, उत्० १ सागर १ नाग॥ याठमे ज०१ पदय, उत्०१ सागर ३ नाग। नयमे ज० १ पार, उत् १ सागर । नाग ॥ दाम ज० १ पात्य, नत् १ सागर जाम ।। अग्यारम ज० १ पल्प, उत्० १ सागर । नाग ॥ पारमे ज० १ पल्य, उत्०१ सागर ११ नाग तेरमे ज० १ पटर, उत्० २ सागर ।। त्रीने चोये देवलोकं प्रतर १२ हे. त्यां एकेका सागरना १२ नाग करीष, तेमांना नाग वधारता जशा । पहेसे प्रतरे ज० २ सागर, उत्त० २ सागर ने ५ जाग । चीजे ज० २ सागर, उत्०२ सागर १० नाग ॥त्रीजे ज० २ सागर, उत्. ३ सागर ३ नाग। चोथे ज०२ सागर, उत्० ३ सागर नागपांचमे जय सागर, ० ५ सागर १ जाग रहे ज० २ सागर, उत्० ४ सागर नाग सात ज० २ सागर, उत्० ४ सागर ११ जाग ॥ थाउमे जा २ सागर, उत्० ५ सागर ४ नाग ॥ नवम ज०२ सागर, उत्॥ ५ सागर ए नाग ॥ दशमे ज० २ सागर, उत्६ सागर २ नाग॥ यग्यारमे ज० २ सागर, उत्॥ ६ सागर ७ नाग ॥ यारमे ज०२ सागर, उत्०३ सागर | प्रोक देवलोके प्रतर ६ ले. त्या एकेका सागरना ६ नाग करीप, तेमांना
।
ज० १० सागरन, उन्० १४ सागरनुं ॥ तमे देवलोके ज०१४ सागर, उत्०१७ साग-
D॥शारो देवलोके ज०१७ सागरनु, उत्० १७ सागरनुं ॥ नवमे देवलोके ज०१७
सागर, उत० १ए सागरनुं ॥दशमे देवलोके ज० १ए सागरनु, उत्०२० सागरनुं ॥ यग्या.
रंगे देषसोफे ३० २० सागरनु, उत्० २१ सागरनुं ॥ वारम देवसोके ज० २१ सागरनु, उत.
२२ सागरनु ॥ नव वयक पदेसी बिके ज० २२ सागरनुं उत् २३ सागग्नु, ॥पमज एकेक
सागर एकेर प्रवयके वधारता जनुं ॥ जावत नवमी ग्रेवयक ज० ३० सागर, उत्० ३१
सागर ॥ चार थनुतर विमाने ३० ३१ सागरनु, उत्०३३ सागरनुं । सर्वार्थसिद्ध ३३ सागर
जपन्योनकृष्ट ॥ दवे शतानी स्थिति कहे -पहेवा वीजा देवताके प्रतर १३ ठे, त्यां
एवं.का सागग्ना १३ जाग कीए तमाना यवे जाग वधारता जाए ॥ पहेले प्रतरे ज०
१ पल्प, उत्० १ पस्य ने २ जाग ॥ वीज ज. १ पट्य, जन्० १ पत्य ने नाग ॥ त्रीजे
ज० । पक्ष्य, उत्० १ पस्य ने ६ जाग। चार्थ ज० १ पख्य, उत्० १ पट्यने नाग ॥ पां.
पो ज० । पक्ष्य, उत्० १ पथ्य ने १० नाग॥ हे ज०१ पक्ष्य, उत्० १ पट्य ने १२ जाग ॥
॥२८॥
सात ज० १ पट्य, उत्॥ १ सागर १ जाग॥ याठमे ज० १ पट्य, उत्। १ सागर ३ नाग। नवमे जा १ पव्य, उत् १ सागर ५ जाग ॥ दशमे ज० १ पट्य, उत्॥ १ सागर नाग ।। अग्यारमे ज० १ पल्य, उत्० १ सागर ए नाग ॥ बारमे ज० १ पल्य, उत् १ सागर ११ लाग ॥ तेरमे ज० १ पट्य, उत्० २ सागर ॥ त्रीने चोये देवलोके प्रतर १२ ते. त्यां एकेका सागरना १२ नाग करीए, तेमांना ५ नाग वधारता जश्ए । पहेले प्रतरे ज० २ सागर, उत्० २ सागर ने ५ लाग ॥ बोजे ज० २ सागर, उत्० २ सागर १० भाग ॥ बीजे ज० २ सागर, उत्० ३ सागर ३ नाग ॥ चोथे ज०२ सागर, उत्०३ सागर नागपांचमे ज०२ सागर, उत्० ४ सागर १ नाग ॥ उट्टे ज० २ सागर, उत्० ४ सागर ६ नाग ।। सातमे ज०२ सागर, उत्॥ ४ सागर ११ नाग ॥ याम्मे ज० र सागर, उत्०५ सागर ४ नाग ॥ नवमे जए २ सागर, उत्० ५ सागर ए नाग ।। दशमे ज० २ सागर, उत्० ६ सागर २ नाग ॥ अग्यारमे ज० २ सागर, उत्॥ ६ सागर नाग ।। वारमे ज० २ सागर, उत्त सागर ॥ ब्रह्मलोक देवलोके प्रतर ६ ठे. त्या एकेका सागरना ६ नाग करीए, तेमांना aart दंडक जाग पधारीए ॥ पहेले प्रतरे ज०७ सागर, उत्० ७ सागर ३ नाग ॥ चीजे जय ७ सागर, उत् ७ सागर ॥धीजे ज०७ सागर, उत्०७ सागर ३ नाग ॥ चोथे ज०७ सागर, उत्त एए सागर ॥ पांचमे ज०७ सागर, उत्० ए सागर ३ जाग ॥ ज०७ सागर, उत् १० सागर ।। सांतक देवलोके प्रतर ५ . त्यां एकेका. सागरना ५ नाग करोग, तेमांना नाग वधारीए ॥ पहेसे प्रतरे ज० १० सागर, उत्०१० सागर नाग ॥ पीजे ज० १० सागर, उत्० ११ सागर ३ नाग ॥श्रीजे ज०१० सागर, उत्० १२ सागर २ नाग॥ चोथे ज० १० सागर, उत्० १३ सागर १ नाग ॥ पांचमे ज०१० सागर, उत्० १५ सागर ॥ महाशुक्र देवलोके प्रतर ४ ॥ त्यां एकेका सागरना नाग फरीप, तेमांना ३ नाग पधारीए ॥ पहेसे प्रतरे ज० १४ सागर, उत्॥ १४ सागर ३ नाग॥पीजे ज०१४ सागर, उत् १५ सागर २ नाग ॥ प्रोजे ज० १४ सागर, उत्० १६ सागर १ नाग ॥ चोथे ज०१५ सागर, उत्०१७ सागर ॥ सहसार देवलोके प्रतर ४ ॥ त्यां एकेका सागरना नाग करीप, तेमांनो १ नाग वधारीए॥ पहेले प्रतरे ज०१७ सागर, उत्। १७ सागर नाग॥धीजे ज०१७ सागर, उता १७ सागर २ नाग ॥ प्रोजे ज०१७ सागर, उत्० १७ सागर ३ नाग ॥ चोथे ज० १० सागर, उत्० १० सागर ॥ म्यागत देवलोके प्रतर, त्यो गफेगा सागरना। नाग फरीग, तमांनी १ नाग पधारीए । पदेले प्रतरे ज० १० सागर, उत्० १० सागर । नाग ॥ पीजे ज० १० सागर, उत्० १० सागर २ भाग ॥ प्रोजे ज०१॥ सागर, उत्० १० सागर ३ नाग ॥ चोथे ज० १० सागर, उत्० १५ सागर ॥ प्राणत देपसोफे प्रतर रगां एक सा- गरना नाग फरीप तमांगा गयफो नाग पधारी ॥ पदेखे प्रतरे ज० १ए सागर, उत्त १७ सागर १ जाग ॥ पीजे ज० १॥ सागर, उ० १६५ सागर २ नाग॥ श्रीगे ज० १m सा. गर, उता १७ सागर ३ नाग ॥ घोथे ज० १५ सागर, उत्० २० सागर ॥ शारण देवलोके तर. त्यां एक सागग्ना नाग फरीए, तेमांनो एकेको नाम पधारीप ॥ पदेशे प्रतरे ज० २० सागर, उत्०२० सागर १ नाग ॥ पीजे ज०२० सागर, उत्०२० सागर २ जाग॥ प्रोजे ज०२० सागर, उत०२० सागर ३ नाग ॥ चोये ज०२० सागर, उत्०२१ सागर ॥ यच्युत देयतो प्रतर ४ . त्या एकेका सागरना । नाग फरीए, तेमांनो एकेको नाग
10
दंडक
वधारीए । पहेसे प्रतरे ज० २१ सागर,नत०२१ सागर जाग॥ वीजे ज० २१ सागर, उत्०
२१ सागर २ नाग ॥ धीजे ज०२१ सागर, उत्० २१ सागर ३ नाग ॥ चोथे ज०२१ सा.
गर, उत्० २२ सागर ॥ ते उपर नव नव ग्रैवेयके एकेक सागर वधारीए । त्यां प्रतर
नधी ॥ हवे देवीनो विचार कहे ठे-सौधर्म देवलोके अपरिग्रहित देवीनां ६ लाख विमान
॥ तेमां जेनुं १० पल्यनुं यायुप्य ठे ते सनत्कुमार इंजने लोग यावे ॥ २० पदयनी
ब्रह्मलोक देवलोकना देवताने लोग थावे ॥ ३० पल्यनी महाशुकना देवताने लोग आये ।।
४० पल्यनी याणतना देवताने लोग यावे ॥ ५० पट्यनी यारणना देवताने जोग यावे ॥
ईशान देवलोके ५ लाख विमान ठे ॥ तेनुं एक पख्य जाफेरार्नु यायुष्य ते. ते ईशानना
देवताने जोग यावे ॥ १५ पध्यनी देवी माहेंजना देवताने लोग थावे ॥२५ पल्यनी देवी
लांतकना देवताने लोग याचे ॥ ३५ पदयनी देवी सहसारना देवताने जोग यावे ॥ ४५
पल्यनी देवी प्राणतना देवताने मोग यावे ।। ५५ पट्यनी देयो अच्युतना देवताने नोग
यावे ॥ पहेखे वीजे देवलोके लोग मनुष्यनी रोते ॥ त्रीजे चोथे तेमावी जाय ॥ पांचमे
॥४०॥
व पर्शनोग | सातमे यारमे रुपनोग ॥ नयमे दशमे सदनोग ॥ यग्यारमे बारमे नगर मेळानो नोग ॥ ते उपरांत याटप विकार, थासंग्ख्य मुग्प ॥ इति श्रीजु स्थितिहार संपूर्ण ॥ ३॥ हये चो\ यवगाहना द्वार कहे ते ॥ सर्व जीवनी यवगाहना जघन्य थांशुमना यसंन्यातमा नागनी जाणया ।। उत्कीनो विवशे कदे ते-पहेली नरके पाणा यात धनुष्य ने ६ श्रांगुप्त ॥ वीजीप, १५॥ धनुष्य १२ थांस ॥ त्रीजील ३१॥ धनुष्य || चोथीए अवगाहना ६२। धनुष्य ।। पांचमीग १२५ मनुष्य ॥ नहीए २५० धनुष्य ॥ सातमीप ५०० धनुष्यनी काया जाणयो । ये प्रतर प्रतरनी जुदी यागादना कहे -देना नरके १३ प्रतर के. तेमा प्रथम पाथमे ३ दायनी काया. ते उपर २ दाय ॥ यांगुन वधारोगे। बीजे पायमे १ धनुष्य र हाथ ॥ थांगुत ॥ त्रीने १ धनुष्य. ३ दाय १०॥ यांगुप्त ॥ चोथ २ धनुष्य
दंदक
र हाथ ॥ यांगुप्त ॥ पांचमे ३ धनुष्य १० यांगुल ॥ रहे ३ धनुष्य २ हाथ रण॥ गुप्त ॥
सातमे ४ धनुष्य १ हाथ ३ यांगुल ॥ याम्म ४ धनुष्य ३ हाथ १९॥ आंगुल ॥ नवमे
५ धनुष्य १ हाथ २० यांगुल ॥ दशमे ६ धनुष्य ॥ यांगुल ॥ अग्यारमे ६ धनुष्य
२ हाय १३ यांगुस ॥ चारमे ७ धनुप्य २१॥ यांगुल ॥ तेरमे ७ धनुष्य ३ हाथ ६ यांगुल॥
पीजी नरके पाथमा ११ ठे ॥ त्यां ३ हाथ ३ यांगुल पायमे पाथमे वधारीए ॥ प्रथम
पाथमे । धनुष्य ३ हाय ६ यांगुस ॥ वीजे " धनुप्य हाथ ए यांगुल ॥ त्रीजे ए धनु-
प्य १ हाय १२ थांगुप्त ॥ चोथे १० धनुप्य १५ यांगुख ॥ पांचमे १० धनुष्य ३ हाथ १७
यांगुल ॥ उढे ११ धनुष्य २ हाथ १ यांगुल ॥ सातमे १२ धनुष्य २ हाथ ॥ थाम्मे १३
धनुष्य १ हाथ ३ यांगुस ॥ नवमे १४ धनुष्य ६ यांगुप्त ॥ दशमे १४ धनुष्य ३ हाथ ए
थांगुस । यग्यारमे १५ धनुप्य २ हाथ १२ यांगुल ॥त्रीजी नरके पाथमा ए ठे॥त्यां
दाथ, १॥ थांगुल पाथमे पायमे वधारीए ॥ प्रथम पाथमे १५ धनप्य २ हाथ १२ यां.
गुप्त ॥ वीजे १७ धनुष्य २ हाथ ॥ यांगुस ॥ त्रीने १५ धनुप्य र हाथ ३ शांगुल ॥ चोथे
॥४॥
हाय ७ यागुम । उहे २५ धनुष्य यामुक्ष । सातमे २० धनुष्य १ हाथ एयांगुख ॥ याम्मे २ए धनुष्य १ हाथ UM योगुप्त ॥ नरमे ३१ धनुष्य १ हाथ ।। चोथी नरके पाथमा ॥ त्या ५ धनुष्य २० यांगुप्त, पफेके पायमे यधारीए | पहेले पाथमे ३१ धनुष्य १दाय ॥ चीजे ३६ धनुष्य १ दाय २० यांगुन । प्रोजे ४१ धनुष्य २ दाय २६ यागुप्त ॥ चोथे ४६ धनुष्य ३ दाय १२ यांगुम ॥ पांचमे ५२ धनुष्य यांगुप्त ॥ उढे ५० धनुष्य १ दाय ४ यांगुल ॥ सातमे ६२ धनुष्य २ दाय ॥ पांचमी नरके पाथमा ५ . त्या २५ धनुष्य २ हाय १२ यांगुल के पाथमे वधारीप. प्रथम पाथमे ६२ धनुप्य २ दाय ॥ घोजे ३० धनुष्य १२ यांगत ॥ प्रोजे ४३ धनुष्य ३ दाय॥ पोथे १०५ धनुष्य १ हाथ १२ यांगुप्त ।। पांचमे १२५ धनुष्य ।। नही नरके पाथमा ३ ॥ त्यां एकेके पायमे ६२ धनुष्य २ हाथ वधारीग ॥ प्रथम पाथमे १२५ धनुष्य ॥ योजे १०० धनुष्य २ दाथ ॥ प्रोजे २५० धनुन्य ।। सातमो नरके ५०० धनु- प्यनी काया । ते नवधारणीकाया जाणवी चक्रेय करे तो जघन्य यांगुसनो संख्यातमो
देडक
जाग, उत्कृष्टी वैकेय करे तो वमणी काया करे ॥ ए नारकीनी अवगाहना करी ॥ हवे
जवनपति वाणव्यंतर ज्योतिषी वैमानिक देवलोक वे सुधा नवधारण ७ हायनी काया ।
त्रीजे चौथे ६ हाथ ॥ पांचमे उट्टे ५ हाथ ॥ सातमे याउमे ४ हाथ ॥ उपरना ४ देवलोके
३ हाथनी काया॥ ए देवता उत्तर वैक्रेय करे तो ज० अंगुप्तनो संख्यातमोजाग, उत्० लाख
जोजन करे. एथी उपरना देवता उत्तर वैकेय न करे. नव ग्रेवेयके २ हाथनो काया ॥ चार
यनुत्तर विमाने १ हायनी काया ॥ सर्वार्थ सिद्ध विमाने १ हाथ मावेरी काया ॥ ए यव.
गाहना उच्छेद यांगुखे करी सर्वनी जाणवी
॥ हवे सिझनी यवगादना ज० १
हाय " यांगुल, मध्यम ४ हाय १६ च्यांगुस, उत्० ३३३ धनुष्य ३२ यांगुख ॥ वादर,
पृथ्वी, पाणी, तेज, वाउ यने सूक्ष्म एकेंजिय ए सर्वेनी ज० उ० यांगुलना यसंख्या.
तमा नागनी यवगाहना जाणवी । प्रत्येक वनस्पतिनी ज० यंगुलनो यसंख्यातमो नाग,
ज० हजार जोजन काफेरी कमलाना मोमाने न्याये ॥ सूक्ष्म वनस्पतिना यसंख्यात शरोरे
एक सूक्ष्म वायुनुं शरीर थाय॥सूक्ष्म वायुनायसंख्य शरीरे एक सूक्ष्म तेउनुं शरीर थाय ॥
॥४२॥
सूक्ष्म तेलना असंख्य शरीरे एक सूक्ष्म थपर्नु शरीर थाय ।। सूक्ष्म थपना यसंख्य शरीरे एक सूक्ष्म पृथ्वीन शरीर थाय ॥ सूक्ष्म पृथ्वीने थसंख्य शरीरे एक पादर वायुनुं शरीर याय ॥ बादर वायुने यसंख्य शरीरे एक चादर तेननुं शरीर थाय॥ चादर तेजने यसंख्य शरीरे एक चादर थपर्नु शरीर याय ॥ वादर थपने यसंख्य शरीरे एक वादर पृथ्वीनुं शरीर याय ॥ एटले केवमो थयो ते उपर चूर्णपीसिका दासीनुं दृष्टांत कहे ठे-त्रीस वर्पनो जुवान जोध पळवंत पुरुप रत्नने एरण उपर मुकीने गाढा घणनो प्रहार करे तो ते रत्न एरणमा झुंचे पण नांगे नहि ॥ एवं रत्न ते चूर्णपोसिका दासी यांगळी ने यंगुन वचे चांपीने तेनो साथीयो काढे एवी बळवंत ते रत्नने यजमय खरत उपर मुके, वजमय सोढायती २१ बार पीसे, वाटे तो ते जीव केटलाएक विलय जाय, केटलापक किसामना पामे, केटलाएके जाएयु पण नथी ॥ वळी नगरने दृष्टांते-जेम कोइ नगर मोडें दोय, ते नगरने क्यांक पासे जुझ होय, ते जुळ करतां केटलाएक बोलय जाय, केटसाएफ कोसामना पामे, केटसाके जाण्युं पण नयी, एबुं सूक्ष्म शरीर ठे। वे इंजि. SUBSE देखक प रोष प्रमुखनुं शरीर १२ जोजननुं ॥ तेइंजिय खजुरा प्रमुख गाउ ३ नुं । चरिंजिय जमरा प्रमुखनुं गाउ ४ नुं ॥ जसचरनुं खामोमांहि ए जोजनना मज ॥ सपण समुषमाहि ५०० जोजनना मछ। कासोदधीमा १०० जोजननां मह ॥ स्वयंभूरमण समुजमा १००० जोजननां मध ठे।। ए जसचर समुर्विम थने गर्नज बन्ने जाणवा ॥ स्थलचर समुर्विमनुं दारीर एपक् गाउनु॥गर्नजनुं ६ गाउनुं ॥ उरपर समुर्विमनुं पृथक् जोजन- ॥ गर्नजनुं १ हजार जोजन ॥ जुजपर समुर्विमनुं पृथक् धनुप्यनुं ॥ गर्नजनुं पृथक् गाउनु । ग्वेचर समुर्विम ने गर्नजनुं पृथक् धनुप्यनुं । वैकेय ज० थंगुतनो संख्यातमो नाग करे, उत्० नवसें जोजननी काया फरे॥ मनुप्यनी काया देवकुरु उत्तरकुरुना युगलियानो ३ गाउनी हरिवास रम्यवासे २ गाउनी ॥देमवय एरणवये १ गाउनी । उपन्न यंतरछीपे ००० धनुष्यनी ॥ पांच महाविदेहे ५०० धनुप्यनी ॥ नरत थैरवते याराना प्रमाणे थवगाहनानुं मान जाणवू ॥ पहेखे धारे ३ गाउ ॥ बीजे बारे २ गाउ॥त्रीजे चारे १ गाउ ॥ उतरते थारे ५०० घ. नुष्यत्वांतीकरनी काया५००धनुष्यनी॥चोथे चारे ५०० धनुप्यनी॥उतरते थारेण्डाय॥ -- ते वारे बीजातीर्थकर- ४५० धनुष्य- शरीर॥त्रीजानु४०० धनुष्यनु।। चोथार्नु ३५०धनुष्यनु। पांचमार्नु ३०० धनुप्यतुं । हार्नु २५० धनुष्यर्नु । सातमान २०० धनुष्यर्नु ॥ याउमार्नु १५० धनुष्यन ॥ नवमार्नु १०० धनुप्यनुं ॥ दशमानुए धनुष्यने ।। यग्यारमार्नु ० धनुष्यर्नु । बार- मार्नु ३० धनुप्यनुं । तेरमा ६० धनुष्यर्नु ॥ चोदमान ५० धनुष्यनुं ॥ पनरमानुं धरधनुष्यनु सोलमार्नु ४० धनुष्य- ॥ सत्तरमार्नु ३५ धनुप्यतुं ॥ थदारमार्नु ३० धनुप्यनुं । योगणीसमानुं २५ धनुप्यनु॥योसमानुं २० धनुप्यनुं । एकवीसमा १५ धनुष्य ॥ बावीसमानुं १० धनुष्यनुं ।। तेवीसमानुं २ धनुष्य १ दायर्नु ॥ चोवीसमानुं १ धनुष्य ३ हाथर्नु। पांचमे यारे ७ दायर्नु, उतरते यारे १ हायर्नु । उठे यारे १ हाय, उतरते थारे मृदा डायनो ॥ सर्व जीय उप. जताने यांगुलना असंख्यातमा लागनी यवगाहना जाणयो, यने उत्तर वैकेय करे तो साख जोजननी काऊरी जाणवी ॥ ति चोथु ययगाहनाकार संपूर्ण ॥ ४ ॥ RSEXX ---
देडक
हवे पांच विरहछार कहे ठे ॥
समुच्चय ४ गतिनो विरहकास जा १ समयनो, ज० १२ मुहूर्त्तनो. सर्व जीवनो
विरह ज० एक समयनो सर्वत्र जाणवो ॥ हवे उत्कृप्टो प्रत्येक् प्रत्येक्नो जुदो
जुदो विरहकाल कहे वे-प्रथम नरके २४ मुहूर्त ॥ वीजीए ७ दिवस ॥ त्रीजीए
१५ दिवस ॥ चोथीए १ मास ॥ पांचमीए २ मास ॥ उट्टीए ४ मास ॥
सातमीए ६ मास ॥ नवनपतिनो २४ मुहर्च ॥ पांच एप्रिय यविरहिया समय समय
उपजे यने समय समय च ॥ संख्याताने गमे संख्याता, असंख्याताने नगमे यसंख्याता
यने अनंताने गमे यनंता उपजे यने चवे ॥ विगजियनो यंतमुहूर्त्तनो विरह ॥
तिर्यच पंचेंजियसमुर्तिमनो विरह यंतर्मुहूर्त्तनो ॥ गर्नजनो १२ मुहूर्त ॥ मनुष्य समुर्विमनो
२४ मुहूर्त ॥ गर्नज मनुष्यनो १२ मुहर्त ॥ व्यंतर ज्योतिषी यने पहेखे वीजे देवलोके
२४ मुहूर्त ॥ त्रीजे देवलोक ए दिवस २० मुहूर्त ॥ चोथे देवलोके १२ दिवस १० मुहूर्त ॥
पांचमे देवलोके २५ दिवस २५ मुहूर्त ॥ उहे देवलोके ४५ दिवस ॥ सातमे देवलोके ८०
॥४४॥
दिवस ॥ श्रामे देवलोके १०० दिवस ॥ नवमे दशमे संग्यातामास ॥ यग्यारमे यारमे संग्याता वर्ष ॥ पदेखी पिके संग्याता वर्पना सेंकमा ॥ बीजी त्रिफ संग्याता वर्षनां सहन ॥ त्रीजी निके संग्याता वर्पना सायनो विरद ॥ चार यनुत्तर विमाने पट्यनो यसंगयातमो नाग ॥ सर्वार्थसिके पल्यनो संगयातमो नाग विरह || मोक्ष जावानो घिरद | ज० १ समय, उत्०६ मास ॥ इति पाय, विरहकार संपूर्ण ॥ ५॥ हवे उहुं जयनद्वार कहे ॥ प्रथम सात नरकनी विगत ॥ रत्नपना पृथ्वी केम कही ? तेमा १६ जातिना रत्नना १६ काम ते. एकेको हजार जोजननो . पटसे १६ हजार जोजननो पर काम ते ॥ याउघल काम 50 हजार जोजननो ठे ॥ चोराशी हजार जोजननो पंकयस काम ते ॥ १ ॥ शर्करप्रजा केम कही ? तेमां कांकरा वे ॥२॥ वायु-
दंडक
प्रजा फेम कही ? तेमां वेयु ॥३॥ एकप्रना केम कही ? तेमां कादव वे ॥५॥ धूम-
पना फेम कहो ? तेमा धुमामोठे ॥ ५ ॥ तमप्रना केम कही ? तेमां अंधकार वे ॥६॥
तमतमाग्रजा केम कहो ? तेमां थंधकारमा थंधकार ते ॥७॥ साते पृथ्वी जामी केटली
ते कहे ते ॥ प्रथम पृथ्वी १ लाख ७० हजार जोजन जामी ॥ घोजी पृथ्वी १ लाख
३२ हजार जोजन जामी ॥ त्रीजी पृथ्वी १ लाख २७ हजार जोजन जामी वे॥ चोथी
पृथ्वी १ लाख २० हजार जोजन जामी ते ॥ पांचमी पृथ्वी १ लाख १७ हजार जोजन
जामी ठे। उही १ लाख १६ हजार जोजन जामी ते ॥ सातमी नरकनो पिंम १ लाख
छ हजार जोजन जामीनी ठे, ते शेने थाधारे रहो ? पहेलोए २० हजार जोजन घनो.
दधि , थसंख्याता जोजननां सहस्रनो घनवात ठे, असंख्याता जोजन सहस्रनो तनुवात
ठे ॥ यसंख्याता जोजनना सहस्रनो थाफाश ॥ एमज साते नरके जाणवु ॥ सातमी
नरके एटलो विशेष जे देते थलोक ठे ॥ हवे त्रीठो थलोक केटले दूर ठे ते कद्दे रे ॥
पदेखी नरकथी बार जोजने त्रीठो असोक ॥धीजीए एक जोज़नना त्रण जाग करीए.
॥४५॥
सेमांना २ नाग यधारोग वेल्सा सुधी पीजीए जोजन १२ प्रश्या नाग२॥ त्रीनीष जोजन १३ जाग १ प्रश्यो । चोयोर १४ जोगन ॥ पांचमीप १५ जोजन प्रश्या जाग२॥ोष १५ जोजन प्रश्पो नाम १ ॥ सातमीए १६ जोजन ॥ पटले यलोक ॥ एकेकी नरके अक्षयाने याकारे प्राण घलय ले । पेक्षी नरके ६ जोजननो धनोदधि ॥ सामाचार जोज- गनो धनवात के. जोजननी तनयात ठे. एकएक नरके एकएक श्यो नाग वधारतां जाय सातमी नरके याच जोजननो घनोदधि . पळी एकेकी नरके पापा जोजन धन- पातमा वधारता वधारता जाय सातमी नरके उ जोजननो घनात ठेवळी एकेकी नरके एफ जीजनना १२ नाग करीर एयो एकेको नाग यधारतां जाय सातमी नरके वे जोजननो बनवान ने । सात पृथ्वी कासरने संस्थाने . साते नरके ४ए पाथमा . तेनी विगत- पहली नरके १३ पाथमा वे ॥ योजीए ११॥ त्रीजीए ए | चोयीए ॥ पांचमीए ५ ॥ an.३॥ सातमो. ११ ए सर्व भए पाथमा वे॥ एकेको पाथमो ३ हजार जोजननो जामो ॥ते मध्ये १ हजार जोजननो हे जामो टे॥ एक हजार जोजननो उपर जामो ॥ व १ हजार जोजननो पोसार ठे, तेमां नारकीनो यास ठे ॥ एकेको पाथमो असं- प्याता जोजनना सहस्रनो सांगे पदोळो वे॥ हवे पाथमार्नु थांतरो कहे ठे-प्रथम नरके १२ यांतरावे ॥ एकेके पाथमे यांतरो ११५७३ जोजन १ गाउ ६६६ धनुष्य २ हाथ १६ थांगळ एटसो ॥ योजी नरके १० शांतरावे, त्या एकेक पाथमे यांतरो एJ जोज- ननो ॥त्रीजी नरके यांतराठे, त्यां एफेक पाथमे १५३७५ जोजननो यातरो छे ॥ चौथी नरके थांतरा ६ , त्यां एकेक पाथमे थांतरो १६१६६ जोजन २ गाउ १३३३ धनुष्य ३२ यांगळनो वे ॥ पांचमी नरके यांतरा ४ वे, त्यां एकेक पाथमे यांतरो २५२५० जोजननो ते ॥ ठही नरके यांतरा ये ठे, त्यां एकेक पाथमे यांतरो ५२५०० जोजननो ठे॥ ए समस्त पाथमाना थांतरा कह्या ॥ हवे पृथ्वीना पिंडनु मान कहे ठे। प्रथम नरके १ साख ७० हजार जोजननो पिंम ठे, ते माहिलो १ हजार जोजन उपर मुकाए, एक हजार जोजन हेरे मुकीए, बच्चे १ सास हजार जोजननी पोलार ठे तमा १३ पाथमा ने १२ थांतरा है. ए. रीते तारतमपणे उ पृथ्वी सुधी एमज जाणवु ॥
सातमी नरके सामी बावन हजार जोजन उपर मुकीए, सामी बावन हजार जोजन देवे मुकाए, बच्चे ३ हजार जोजननी पोलार ले. त्यां पायमो ॥ साते नरके थइन् लाख नरकावासा ने तेनी विगत-पदेखी नरके ३० लाख नरकावासा , वीजीप २५ लाग्य, त्रीजीए १५ लाग्य, चोथीप १० लाख, पांचमीए ३ लाख, नहीए १ लाख पांच जणा ॥ सातमीप पांच नरकावासा ठे ॥ ते मध्ये एक नरकावासो संग्ग्याता जोजननो ठ॥ ४ नरकावासा व्यसंख्याता जोजनना ठे जे संख्याता जोजनना नरकावासा ते त्यां संग्याता नारकीनो वास ठे॥ जे असंख्याता जोजननावे त्यां यसंख्याता नारकीनो वास ॥ दये संख्यातानुं मान कहे ते ॥ कोई एक देवता G॥ लाख जोजननुं एक मगढुं नरतां ६ मास सुधी चाले॥वढे मासे पार पामे, कोइ न पामे ते यसंख्याता जोजनना जाणवा ॥ जे यसंख्याता जोजनना ठे तेनो पार न पामे ॥ संग्ग्याता जोजनना ठे तेनो पार पामे। एटले नानो ते साख जोजननो . मोटो ते व्यसंख्याता जोजननो वे ॥ ये ४ए पाथमे मध्य नागे ४ए इंधक नरकावासा , तेनां नाम कहे ते-सीमंत १, रोरुक २, रंज ३, उहांत ४, AAASE
LEX
दंडक
संत्रात ५, थसंत्रात ६, विक्रांत , नक्त , शीत ए, वक्रांत १०, यवक्रांत ११, विकल
१२, रौरव १३ ॥ ए १३ प्रथम नरकना क्रमे प्रतरना इंजक जाणवा ।। १ ।। स्तनिक १,
स्तनक २, मणक ३, चणक ४, घट्ट ५, संघट्ट ६, जिन्न , यव जिन्न ७, लोस ए, लो-
सावत्त १०, घणलोलुक ११, ए वीजी नरके प्रतरना क्रमे ११ इंजक जाणवा ॥२॥ तप्त १,
तपिक २, तपन ३, तापन ४, विदाय ५, प्रज्वलित ६, उज्वलित , संज्वलित , संप्र.
ज्वसित ए, ए त्रीजी नरके प्रतरना कमे ए इंक जाणवा ।। ३ ।। यार , तार २, मार
वय, तम ५, खामखम ६, खंमखत , ए चोथी नरके प्रतरना क्रमे इंक जाणवा
॥४॥ खात १, तमस, उस ३, थंध ४, तिमिस ५. ए ५मी नरके प्रतरनाक्रमे ५ छक
जाणया ॥ ५॥ वादी १, पादस २, सहक ३ ए वी नरके प्रतरना क्रमे ३२क जाणवा
॥ ६॥ थपश्वाण १, ए सातमी नरके प्रतर १ नो इंशक (महोटो) नरकावासो जाणवो
॥ ७॥ हवे साते नरके यश् यावतीका बद्ध ए६५३ नरकावासा ले तेमां केटसाएक त्र्यंश
है, केटलाएक चरंश , केटसाएक वाटता के, याकोना पुप्पाविकिर्ण जाणा ॥ रत्नप्रना
॥४७॥
पृथ्वीना उपसा मिथकी ४२ हजार जोजन नीने गया पठी चमरेंनी राजधानी ठे त्या क्रोम, ३२ साख जवनपतिनां जयन ठे, तेनी विगत-४ कोम ६ लाख जवन दक्षिण दिशे , ३ मोम ६६ लाख जयन उत्तर दिशे ॥ दक्षिण दिशामां प्रथम यसुर कुमारनां सपन ३७ सास्य दे, नागकुमारना ४४ साख ठे, श्रीजाने ३० लाख, चोथाने ४० लाख, पांचमाने ४० लास, माने ४० साख, सातमाने ४ लाख, याउमाने ४० लाख, नवमाने ५० बारा, दशमाने 10 साख जपन ॥ उत्तर दिशामां यसुर कुमारनां ३० लाख नवन वीगाने ४० सारर, श्रीजाने ३५ लाख, चोथाने ३६ लाख, पांचमाने ३६ लाख, ठगने २६ धारा, सातमाने ३६ लाख, घाउमाने ३६ लाख, नवमाने ४६ लाख, दशमाने ३६ पा, बसा पनपतिनो रन ले ॥ हये १० जवनपतिना मुगटनां चिह्न कहे ठे-यसुर हमारने मुगामपाने, पोजाने नागनी फेणगें, जोजाने गरुमपंखीनु, चोथाने वजनु, पांच- माने करले बजाने सिंदर्नु, सातमाने घोगार्नु, याउमाने गजर्नु, नवमाने मगरमचर्नु, समाने साता संखप्नं, ए चिहे करी बार आपणी जाति जाणवी ॥ हवे एनो वर्ण दंडक ४८॥ फहे -यपुर काळा, नागने उदहि पंमुरा, सुवन, दिशा ने स्तनित एत्रण सोचनवणे, विजु, यनि ने दीप ए प्रण रक्तवणे. पवननो लीलो वर्ण । ए दर्श नवनपतिना वर्ण जाणवा ॥ हवे तेनां वस्त्र कहे ठे-यमुर कुमारनां रक्त वस्त्र ॥ नाग १, उदाह २, विज्जु ३, दीव, ३, थग्नि ५ ए ५ नां सीता वस्त्र ॥ दिशा स्तनित ने सुवा ए प्रपना श्वेत वस्त्र ॥ वायुकुमार ने संध्याना राग सरखां वस्त्र जाण ॥ ए १० पवनपतिनां यस्त्र कयां ॥ दवे रत्नप्रजा पृथ्वीनो उपलो पिंम हजार जोजननो ठे. ते मध्ये १० जोजन उपर मुम्हीए, २०० हेवे मुकीप, तेनी बच्चे १६ ध्यंतरनां थसंख्याता नगर ते. उत्० जंबूधीप जेवमा ॥ मफिम महाविदह जेवमा ॥ जघन्य जरतक्षेत्र जेवमा॥ एनी जाति घजाने चिह्न करी जाणवी ते कदे ॥ पहेलाने कसंयु वृक्षा, चीजाने शासी दनु, श्रीजाने वरु प्रदर्नु, चोथाने पामली वृदनु, पांचमाने यशोक वृक्षानु, गाने , चंपक गृक्षनु, सातमाने नागरक्ष, याउमाने टीयरु वृक्ष, ए याप यापणां चिह्न कहां ॥ दवे तेनो वर्ण कहे ठे-पिशाच, यक्ष, महोरंग ने गंधर्व ए ५ श्यामवणे । किनर नीar ॥ रादास, किं पुरिस श्वेतवणे ॥ भूत कृष्ण वर्ण ॥ 20 नो वर्ण जाणवो ॥ हवे खोकनुं मान कद वे ॥ त्रिवी दिशे असंख्याती जोजननी कोमाकोसीन ॥ तेमज उंची दिशे तथा नीची दिशे यसंख्याता जोजननी कोमाकोमा ॥ हो यसंग्यात जोजननी कोमाकोमीनु मान कदे वे ॥ जंयुद्धीपनी पोसे ४ देवांगना ४ वलिपीम समकाले उठा- के, थने शीघ गतिना धणी ६ देवता जंबूझीप पाखती एक चपटीमादि २१ फेरा देश ते ४ पलिपिम समकाळे थरथी कोसी से जोये पमया न दे, गयो शीघ्र गतिना धणी ६ देवता ६ दिशे चाल्या ॥ तेवारे कोई एक व्यवहारीयाने घेर गक दीकरानो जन्म घयो, तेनुं थायुप्य १ हजार पर्पन, तेना परिया एये याउखे थया तोए लोकनो पार पाम्या ? नोक्षणहे समहे ॥ तेनां नाम गोत्र क्षय गया तोपण लोकनो पार पाम्या ? नोण? समहे ॥ तो स्वामी फेटखा लगी गया ? घणुं गया यने योj वाकी रया ॥ मेरु पर्वतनो कंद त्यां रुचक प्रदेश यकी लोकनुं मान मपाय ॥ ते साफने विपे असंख्याता कोपसमुज ॥ ते थसंख्यातानुं मान यढी उकार सागर जेटला रोमखम दोश अथवा २५ कोमाकोमी पटयोपमे जेटसा रोमखम होय तेटला कीप समुते ॥ यथदा वारुणी दंडक छीप पठो संसारमादि जेटली शुन वस्तुनां नाम ठे तेने वर यो वरावनास शब्द जोमतां एकेक वस्तुने नामे त्रण त्रण छीप समुज्नां नाम थाय तेवो रीते पण एकेके नामे असंख्याता छीपसमुफ ठे, यावत् विनास समुजसुधी ते पण यसंख्यात ज गणवा ॥ पठी त्यांथी एकेके नामे देव १, नाग २, जक्ष ३, नूत , यने स्वयंरमण एम पांच छीप तथा समुऽ छे ५॥ हवे समस्त छीप यने समुजनो मध्यतो जवृष्टीप ज ते ते जंबूझोप पूर्ण चंद्रमाने अथवा पूर्ण पुमलाने याकारे वे ॥ वाकी सर्व छीपसमुन वलयाने याकार दे । जंबूछीप १ लाख जोजननो ठे तेनी विगत-प्रथम दक्षिण उत्तरे पहोळानुं मान कहे ठे-५२६ जोजन ६ कलानो लरतक्षेत्र पहाळो लं, तेने ठम १०५५ जोजन १२ कलानो चूलहीमवंत पर्वत ले, तेने मे २१०५ जोजन ५ कला, हेमवय क्षेत्र ठे, तने ठेमे ४२१० जोजन १० कला महाहेमवंत पर्वत ठे, तेन ठंड ३२१ जोजन १ कलानुं हरिवास देव ठे, तेने मे १६७४२ जोजन २ कलानो निषध पर्वत ठे, तेने ठेमे ३३६न्ध जोजन ४ कसानो महावि -४९॥
देदनो विनाग दे, तेने मे १६०२ जोजन २ कलानो नीलयंत पर्वत ठे, तेने ठेके 1४२१ जोजन १ कलानुं रम्यग्वास क्षेत्र ठे, तेने मे ४२१० जोजन १० कलानो रूपी पर्वत ठे, तेने मे २१०५ जोजन. ५ कलानु एरणवय क्षेत्र ठे, तेने ठेके १०५२ जोजन १२ कक्षानो शिखरी पर्वत ठे, तेने मे ५२६ जोजन ६ कक्षानुं ऐरवतक्षेत्र के, ए सर्व दणि उत्तर पोहोळा काया ॥ ये पूर्व पश्चिम लांबा कहे ॥ १४५२८ जोजन ११ कसानो नरतक्षेत्र साधु , ३१६७४ जोजन १६ कक्षा देशे उणो हेमश्य क्षेत्र लांबू ठे, ३०१ जोजन १०॥ कला हरिवास देव सायं , एक लाख जोजन महाविदेह क्षेत्र खावू ठे, ३५०१ जोजन २०॥ कला रम्यक्वास क्षेत्र साधु ठे, ३७६७४ जोजन १६ कक्षा देशे जणू एरणवय क्षेत्र लावू ठे, १४५२७ जोजन ११ कक्षा एरवत देव लांबु छे, ए क्षेत्र सांवां कहां ॥ दवे यासधर पर्वतनुं लावापणुं कहे ठे ॥ २४ए३२ जोजन हेमवंत पर्वत सांपो , ५३९३१ जोजन महादेमवंत पर्वत सांवो , ए४१५६ जोजन २ कक्षानो निषधने नीलवंतपर्वत सांघो के, ५३ए३१ जोजन कारो रूपी पर्यत लायो , २४ए३२ जोजन शिखरी
।
पर्यंत खायो २, ५ वासधर पर्वतर्नु सावापणुं का ॥ हवे उंचाप; कहे ते ॥ चूल हिमवंत
पर्वत थने शिखरी पर्वत १०० जोजनना उंचा ठे, १०० गाउ नीचे धरतीमा ठे. महाहे.
मवंत पर्वत यने रूपीपर्वत २०० जोजन ऊंचा ठे, २०० गाउ नीचे धरतीमा ने. निषध
नीलवंत पर्वत ४०० जोजन ऊंचा ठे, 100 गाउ नीचे धरतीमा ठे. मानुष्योतर पर्वत १७२१
'जोजन उंचा ठे, १७२१ गाउ नीचे धरतीमा ठे॥ जंबूझोप पूर्व पश्चिम लाख जोजननोठे
तेनुं पहोलपणुं कहे ते ॥ ५४२ चे वनमुख ठे, ७५० जोजन ६ यंतर नदी ठे, ४०००
जोजनना ७० वखारा पर्वत ठे, ४००० जोजनना चे नसाल वन ठे. १०००० जोजन मेरु
पर्वत जामो ठे, ३५० जोजन विजयनुं पहोलपणुं छे, ए जंचूछीपनुं पहोलपणुं कj. ।
तेनी परिधि ३१६२२७ जोजन ३ गाउ १२० धनुष्य १३॥ यांगुलनी जाणवी. ए जंवूछीपने
चारे दिशे ४ दरवाजा ठे. तेनुं थंतर ए०५२ जोजन देशे उणुं ठे. जंवूछोपर्नु क्षेत्रफल
सातसें नेवु कोमी, ५६ लाख, ए४ हजार, १५० जोजन यने पोणा घे गाउ तथा सामी-
बासठ हाथ थाय अर्थात् जोजन जोजनना ककमा करीए तो उपर कह्या तेटसा थाय ॥
॥५॥
जंधीप पहोलो १ साग जागननो ले तेने फरतो २ साख जोजननो सवण समुन के, तगे परनो साख जोजननो धातकी खंम , तेने फरतो साख जोजननो कासोदधि समुद्र ने, रोने फरसो १६ साय जोजननो पुष्करकोप वे ॥ मेरुपर्वत एVOOD जोजन उंचो के. गफ हजार जोजन धरतीमा मो . तेना मध्य नागथी दक्षिण उत्तरे पुकरा सुधी गाणीए, एम करता ४५ जाग्य जोजन थाय ते मनुप्यक्षेत्र जाणवू. तेनी परिधि । फामी ५२ लाग्न ३० हजार २५ जोजन थाप. उपरांत छीपसमुप गम घमणां गाणा ॥ पे जंयुद्धीपनी नदीयोनो विचार कहे ते ॥ जंबूझीप मध्ये मेरु पर्वतनी दक्षिण दिशे नदी शाश्वती ले तेनी विगत ॥ प्रथग गंगा थने सिंधु चूतहिमवंत पायी निकासी के ॥ मूसे जामपणे ६। जोजन-पूर्व पश्चिम जरत मध्ये चाप्ती, समु- धमा नळी. रयां पहोळपणुं ६॥ जोजननु के. गंगा नदीनो परिवार १४००० नदीनो के. सिंगु नदीनो परिवार १४००० नदीनो ठे ॥त्रीजी रोहितसा नदी ते पण चूलहेम. पंतना पद्मएपी उत्तरी, पेसे पासे देमवय क्षेत्र मध्ये चासी. मूसे पदोसपागुं
दंडक
१२॥ जोजननो , थंत समुषमा नली, त्यां १२५ जोजन पहोखपणो
वे ॥ चौथी रोहिता नदी ते महाहेमयंतना प्रदथी उतरी, ते या बाजु हेमवंत
क्षेत्र मध्ये चाली. मूखे पड़ोळपणुं १२॥ जोजन, २. यंते समुह मध्ये जळी, त्यां पहो-
ळपणुं १२५ जोजन- ले. ए वन्ने नदीनो परिवार २००० नदीनो ॥ पांनमी हरिकांता
नदी ॥ी हा सलीला नदो. ते महाहेमवंतनां अह थकी उतरी ते पहेले पासे
हरिवास क्षेत्र मध्ये चाली. मूखे पदोखपएं २५ जोजननुं , यंते समुज मध्ये मळी.
पूर्व पश्चिमने पासे, त्या २५० जोजन पहोलपणुं . ए वेडनो परिवार ५६००० नदीनो ठे॥
सातमी सीता नदी ते निषध पर्वतना अह यकी उतरी, ते पहेले पासे देवकुरुक्षेत्र
मध्ये चाली. मूसे पहोलपाणु ५० जोजननुं . यंते समुप मध्ये नळी, त्यां ५०० जोजन
पहोळी वे. तेनो परिवार ५३२००० नदीनो ते ॥ ये मेरुनी उत्तरनी दिशाए । शाश्वती
नदो टे. प्रथम सीतादा नदी ते नीखवंत पर्वतमा प्रहयो उतरी, उत्तर कुरुक्षेत्र मध्ये
चाली. मूले पहोळपाणु ५० जोजन- चे, यंते समुश्मा जळी त्या ५०० जोजन पहोळी ठे,
॥५१॥
गेनो परिवार ५३२००० नदीनो ने । यीजी नारीना, पीजी नरकंता,पये रूपी पतना प्रहमी गर्ग, से या नरफ रम्पशास मंत्र मध्ये चाती. मूळे पदोळपाणु २५ जोजन, यन समुद्रमा नळी, त्या २५० जोजन पहाटी , प येना परिवार ५६००० नदोनो ते ॥ मी पता, पांचमी सोयनामा ॥ ने मध्ये रूपाखा नदी रूपी पर्वनना उदयको उतरी, गरणय देत्र मध्ये पाणी, मुझे १२॥ जोजन पदोळपाणु ,यंते समुप मध्ये नळी, पौ १२५ जोजन पोहोळी ने, थने सोयनमा नदी शिग्री पर्वतना इद यकी उतरी, रोया, गाय मौन मध्ये नाती, मृसं १२॥ जोजन- पड़ोळपा ने, यंते समुफ मानकी, या १२॥ जोजन पदांजी के गयेनी पग्यिार 500 नदीनो । उगीरता, सालमी गाय ॥ से शिमरी पतना उदयकी उत्तरी, ते गरयन इंचे पैसे पासे पूर्व पधिम बिशपाती, मूल ६। जोजन पहोवाj , ते समुप मा नळी, त्यां ६२॥ जागा महोती . एपे नदीनो पग्विार १४००० नदीनो ॥ स मळी १४५६००० नदीनी परिवार ने ॥ यं पनि यात्री कदे । ॥ सर्व मनी यदी जीप मप्ये १३वार शाश्वता A
दंडक
मा
॥५२॥
पर्वत ॥ हये ४ समुफ प्रत्येक प्रत्येक रतना ठे ते कहे ते ॥ लवण समुन खारो १ ॥
मय सरिखो वारुणी २ ॥ खीर समुज दूध सरिग्यो ३ ॥ घय समुफ घृत सरिखो ४ ॥
कालोदधि, पुष्कर यने स्वयंनूरमण ए त्रण समुफ स्वच्छ पाणीना ठे, वाकी सर्व समुप्र ३०
रसना ते सर्व समुप १००० जोजन उमा ठे ॥ हवे ज्योतिषीनी विचार कहे ते ॥ छोप
समुज मध्ये चंद्रमा, सूर्य, गृह, नक्षत्र, तारा सपळे ठे, तना विवगं ॥ जंबुढ़ीप मध्ये ५
चंडमा २ सूर्य ठे ॥ लवण समुफ मध्ये ४ चंद्रमा ४ सूर्य ॥ धानको खंझ मध्ये १२
चंजमा १५ सूर्य ते ॥ कासोदधि समुन मध्ये ४२ चंद्रमा ४२ मर्य न ॥ पुष्कराई मध्ये १२
चंघमा १२ सूर्य ते ॥ पुष्करहीप मध्ये ४४ चंद्रमा ४४ सूर्य ठे ॥ पुष्कर समुद्र मध्य
४एर चंघमा ४ए सूर्य ठे ॥ वारुणी हीप मध्ये १६७० चद्रमा १६७० सूर्य ॥ वारुणी
समुज मध्ये ५७३६ चंजमा ५७३६ सूर्य 5 ॥ कीर हीप मध्ये ४ चंद्रमा १५५०४
सूर्य ते ॥ दौर समुज मध्ये ६६७६४ चंडमा ६६६६४ मृर्य ॥ वृत होप मध्य २२२७०
चंडमा २२०२७० सूर्य ठे ॥ घृत समु मध्य ए४२४ चंमा ए२४ सूर्य के ॥ ३
॥५२॥
जीप मध्ये २६६११२० चंमा २६६१९२० सूर्य ठे। इस समु मध्ये ए०५६३२ घंमा Cav५६३५ सूर्य ठे। नंदीश्वर छीप मध्ये ३१०२०२७० चंमा ३१०२०२७० सूर्य ॥ नंदीश्वर समुज मध्ये १०५एएचंद्रमा १०५एएGo सूर्य ठे व्यरुणछीप मध्ये ३६९एएए६ चंक्षमा ३६१५एमए7६ सूर्य ठे॥थरुण समुज मध्ये २५१२३७६२१० चंद्रमा, २५२३०६२१७ सूर्य ठे। ते उपरांत झोपसमुह, जे संख्याता जोजनना , त्यां संख्याता चंजमा थने संख्याता सूर्य ते ॥ जे छीप समु यसंख्याता जोजननां ते त्यां यसंख्याता पंजमा थने थसंख्याता सूर्य है. ॥ ज्योतिप चक्र यदि छोप मध्ये चर ठे॥ यदि छोप पहार ज्योतिष चक्र स्थिर तेनुं परिमाण यढी हिपना ज्योतिपी विमान करतां यमधु यो गोति मधी कोगने संस्थाने ठे ते स्फाटिक रस्नमय ॥ अगली राणा को जोजन मध्ये ज्योतिप चक्र नथी, ते उपर ११० जोजन मध्ये ज्योतिष विमान Goo जोजने सूर्य, विमान ने | 10 गोगो मेन्द्रमा गिजोजो नपानां विमान ॥ ७ जोजने देडक युन्नुं विमान वे ॥एर जोजने शुक्रनो विमान ठे ॥ ए४ जोजने वृहस्पतिनुं विमान ॥ए जोजने मंगलनुं विमान ठे ॥ एक जोजने शनिश्चरर्नु विमान वे ॥ एक चंड- मानो परिवार GU गृह २७ नक्षत्र, ६६ हजार ए से ७५ एटखी कोमाकोमी तारानां विमान वे ॥ तेटलो परिवार सूर्यनो पण जाणवो ॥ चंडमानुं विमान एक जोजनना ६१ नाग क- रोए तेमांना ५६ जाग जायुं पहोलु ने २७ जागर्नु उंचुं ने जासु उ ॥ त्रिगुणी काओरी परिधि ठे ॥ सूर्यनुं विमान ६१ या व नागर्नु साधु पहाटुं ने २४ जागर्नु चंचु ने जाउँ ॥ त्रिगुणी फाऊरी परिधि ।। गृहनां विमान २ गाउ सांयां पहोळां ठे ।। एक गाउना जंचा ने जामा ठे, त्रिगुणी काफेरी परिधि वे ॥ नानां विमान १ गाउ सांयां पहोळा ठे यह गाउना जंचा ने जामां ते ॥ त्रिगुणी काफेरी परिधि ठे ॥ तारानां विमान यर्ड गाउ सांयां पहोळां ॥पा गाउ उचा ने जामां , त्रिगुणी कामेरी परिधि वे ॥ चंप्रमार्नु विमान १६ हजार देवता उपाम ते ॥ ते ४ हजार हाथीने रूपे दक्षिण दिशे ॥ ४ हजार सिंहने रूपे पूर्व दिशे॥ ४ हजार घोमाने रूपे उत्तर दिशे॥५ हजार गृपनने रूपे पश्चिम दिशे उपामे ॥ तेम सूर्यने पण जाणधु ॥ परीते ५ दिशेश दजार देवता ग्रहनां विमानने पामे , तेगज ५ हजार देवता नक्षत्रनां विमानने उपामे , तेमन र हजार देवता तारानां विमानने उपा॥ चार दिवो चार रूपे चंजसानी माफक जाणवू ॥ चालवानी गति चंद्र- मानी मंद गति ठे,तेयी सूर्यनी गति उगवळी, तेथी ग्रहनी गति उतावळी, तेयो नक्षवनी गति उतावळी, तेथी तारानी गति उतावळी ॥धमाना एक विमानयी वीजा चंडमाना विमानने १ लाख जोजन कारार्नु थांतलं ते ।। एक सूर्ययो वीजा सुर्यने ? साख जोजन का शांतम ॥ सूर्य माने ५० हजार जोजननुं यांतर ॥ नंघमा ने सूर्यनां विमा- नने ५० हजार जोजननुं यांतकं ॥ हवे ज्योतिपीना उत्कृष्ट व्याघात भ्याश्रिव्यांतरां कहे 3॥१२२४२ जोजन यांत ते ते केम ? १० हजार जोजन मेनो कंद ठे यने ११२१ जोजन ज्योतिषी चक मे घी यळगुं फरे ॥ ते वेन पासानां यांतरां अने मेरुनो कंद सर्व मळी ० १२२५२ जोजन यांतम याय ॥ ज० २६६ जोजन यांतलं ते किम? निपध नीमत पर्यतना कुट २५० जोजन पदोळा ले ते यकी जोजन ज्योतिपत्रक यळगुं
दंडक
॥५४॥
फरे ठे ते घेउ पासानुं यांतरं यने कुटनो कंद सर्व मळी २६६ जोजन थाय ॥ हवे
निर्व्याघाते यांतलं ॥ नियाघात ते शुं ? ज्यां पर्वत कुट यामु नयी ते ॥ त्यां ज०
गाउ २ नुं यांतरं ॥ जण ५०० धनुष्यनुं यांतलं जाणवू ॥ ए यांतलं कर्तुं ॥ हवे सूर्यनुं
तेज उचुं २०० जोजन यने नीचे १७०० जोजन तपे।। ते केम ? रत्नप्रजा पृथ्वी थकी पश्चि.
मना पासांनी पांचमी विजय १७०० जोजन उंमी ठे यने रत्नप्रजा पृथ्वी थकी 100 जोजन
सूर्य उंचोठे ॥ सर्व मळी एटर्बु थाय ॥ ४७२६३ जोजनने एक जोजनना, ६० नाग करीए
तेमांना १ लाग एटबुं त्रीतुं तेज करे ॥ एनां विमान समस्त वाटला संस्थाने ले ॥ हवे
ज्योतिपचक्रया असंख्यात जोजननी कोमाकोमी उंचा जश्ए त्यारे त्यां चार देवलोक
नव अवयक अने पांच अनुत्तर विमान यावे ते ॥ ते शेने याधारे ठे ? पहेडं, वीजें
देवलोक घनोदधिने याधारे , तेनी उपरना ३ देवलोक धनवाने याधारे ठे, ते उपरना
३ देवलोक घनोदधि यने घनवातने याधारे , ते उपर ४ देवलोक, ए ग्रेवेयक
अने ५ अनुत्तर विमान ए सर्व याकाश प्रतिप्ठित ठे ॥ पहेवा वीजा देवसोकनां तसा
॥५४॥
२६०० जोजनना जामां ने ॥ ते उपरना २ देवसोना तनां २५०० जोजननां जाना ॥ ते उपरना २ देवलोकना तळो २४०० जोजननां जामां ॥ ते उपरना ४ देवलोकनां तळो २३०० जोजननां जामां ते ॥ नव ग्रेयेयकनां तळो २२ से जोजननां जाम ते ॥ पांच यनुत्तर विमाननां तळा २१ से जोजननां जामां वे ॥ पहला वीजा देवलोकनां विमान ५०० जोजन उंचां वे ॥ते उपरना २ देवलोकनां विमान ६०० जोजन उंचां ॥ते उपरना २ देवलोकनां विमान १०० जोजन उंचां ते ॥ ते उपरना २ देवलोकनां विमान ८० जोजन उंचां ॥ ते उपरना ४ देवलोकनां विमान ९०० जोजन उचां ॥ ते उपर ए प्रेयेयफनां विमान १००० जोजन उंचां वे ॥ पांच अनुत्तर विमान ११०० जोजन उचाले । पहेला ४ देवलोक यर्डचंडाकार वे ॥ ते उपरना ४ देवलोक पूर्णचंडाकारे ठे। ते उपरना ४ देवलोक यर्डचंडाकारे ठे॥ नव वेयक वेडाने याकारे ठे ॥चार अनुत्तर विमान थर्डचंझाकारे ठे ॥ पांचमु पूर्णचंडाकारे ठे ॥ पहेला बोजा देवलोके ५ वर्ण ॥ ते उपरना २ देवलोके ५ वर्ष ठे, काळो नथी । ते उपरना २ देवलोफे ३ वर्ष
देशक
के, काळी नोसो नथी । ते उपरना २ देवलोके घे वर्ण ठे, पीली ने धोळो ॥ ते उपरना
४ देवलोफ, मेयेयके धोळो वर्ष ठे पांच थनुत्तर विमाने उत्कृष्टो श्वेत वर्ण रे ॥
पार देषसोक ए प्रेयक यने ५ थनुत्तर विमाने १० प्रकारना मनोज्ञ जोग ठे। मनोज्ञ शब्द
१॥ मनोश रुप २ ॥ मनोज्ञ गंध ३ ॥ मनोज्ञ रस ४ ॥ मनोज्ञ स्पर्श ५ ॥ मनोज्ञ
कान्ति ६ ॥ मनोज्ञ सावएय योसवान ॥ मनोज्ञ गति चासवानी ॥ मनोज्ञ याज-
रणनी ज्योति ए॥ मनोज्ञ थायुप्पनी स्थिति १० ॥ हवे देवलोकमां प्रतर ६२ ठे तेनी
विगत ॥ पदेखे वीजे थइ १३ प्रतर ते ॥त्रीजे चोथे १२ प्रतर ते ॥ पांचमे उ प्रतर
॥ ५ प्रतर ॥ उपसा ६ देवताके चार चार प्रतर ठे ॥ ए प्रैवेयकनां ए प्रतर
॥ पांच थानुनर विमाननुं १ प्रतर ठे ॥ हवे विमाननी संख्या कहे ते ॥ पहेला सौ.
धर्म ३२ साख विमान ॥चीजे २७ साख विमान ठे ॥त्रीजे १२ खाख विमान ठे।
नो साख विमान ठे ॥ पांचमे ४ सास विमान ठे ॥ उठे ५० हजार विमान ठे॥
सातमे ४० हजार विमान है ॥ श्याठमे ६ हजार विमान ठे ।। नवमे दशमे ४०० विमान
॥५५॥
॥ यग्यारमे वारमे ३०० विमान ठे॥ पहेसी त्रीके १११ विमान ठे॥ वीजी त्रीके १०७ विमान ॥ विजी त्रीके १०० विमान ते ॥ पांच अनुत्तरनां ५ विमान ॥ सर्व मळी Hए०२३ विमान ठे ॥ तेमा केटसांएक संख्याताने केटसापक यसंख्याता जोजननां ॥ तेमां सर्व देवलोके थई २५७६ वाटला विमान ठे॥ २६७० व्यंश विमान ते ॥ २६०४ चतरंस विमान ठे ॥ सर्व मळी यावतीकायंध विमान IGIU ठे ॥ वाकी एUए पुष्पाविकी. र्णक ॥ हवे सर्वार्थसिद्ध विमानथी १२ जोजन उंची सिविशिक्षा ठे, ते ४५ लाख जोजन खांबी पहोळी ठे, याउ जोजन मध्ये जामी , ठेमे मांखीनी पांखथी पातळी ॥ तेनी परिधि १४२३०२वए जोजन १ गाउ १० धनुष्य ६ दाय १३ यांगळ काफेरी ॥ उज्वल जेवो शंख, यकरत्न, जेवो मचकुंद, जेवू ऽधनुं फोण,जेवो रूपानो पट, जेयां चंडमानां किरण, जेवू दहीनू खोट, तेथी ते अधिक उजळी ठे ॥ ते उपर एक जोजनने २४ मे यम विनागे सिम रह्या ठे ॥ लोकने मस्तके रह्या वे ॥ यसोकथी। यांगळ नीचे रहा ठे ॥ ३१ गुणे करी विराजमान ठे ॥ ते ३१ गुण कहे ते ॥ पांच ज्ञानावर्षीय
॥५६॥
क्षय कर्या, ए दर्शनावणीय दय को, ये वेदनीय क्षय कर्या, समकित मोहनीय, चारित्र
मोहनीय क्ष्य को, ४ गतिनां याउखां क्षय कर्या, शुज नाम अशुल नाम क्षय कर्या,
जंच गोत्र नीच गोत्र क्षय की, दानांतराय, खानांतराय, जोगांतराय, उपजोगांतराय,
वीर्यातराय क्षय कर्या ॥ ए ३१ गुणे करी सहित सिमठे ॥ हवे १४ राज कहे ले ॥
सात पृथ्वी नीचे ७ राज ते ॥ रत्नप्रनाथी उंचं सौधर्म देवलोक सुधी १ राज ॥ सोध-
मथी माहेश देवलोक सुधी र राज ॥ माहेश्यी सांतक सुधी ३ राज ॥ सांतकथी सह-
सार सुधी ४ राज ॥ सहसारथी यच्युत सुधी ५ राज ॥ यच्युतथी ए ग्रेवयक सुधी
६ राज । ए ग्रेयेयकयी लोकना यंत सुधी राज ॥ एटले १ राज काफेरा नीचा ने
राज मावरा उंचा जाणवा ।।
इति जवनहार संपूण ॥६॥
हो सातमुं गतागतिधार कहे ते॥
दवे कया दमकमांयी कया दमकमां जाय, क्यांची यावे ते कदे ठे ॥ नरकमां
At-1
॥५६॥
तिर पन्डिय समुचिम यन गर्नज यने मनुष्य गर्नज ए मायी यावे ॥ नरकना नीतिन पंधिय गर्नज ने गर्नज मनुष्यमा जाय ॥ प. समुच्चय कहो ॥ इये पिस्तारयी पाई ने ॥ नरकमा फ्यांनो थारे कर नरके जाय ? पदेखी नरके तिर्यच पंनिय समुनिम ने गर्नज जाय ॥ योजी नरके 'नुजपर जाय ॥ श्रीजी सुधी खेचर जाग ॥ पोथी मुधी चउपद सिंहादिक जाय पांचमी मुधी उरपर सर्प जाय ॥ उट्ठी गुधी नी जाय ॥ सातमी सुधी नर नपुंसक मन्त्रादिक जाय ॥ इये नरकना नोकळ्या पा यांचे ते फहे ने ॥ सातमी नरफनो नीकापो मनुष्य न थाय पण तिर्यच पंजिय गर्नगा जाय ॥ पाम तो समफित पामे, पण पिरती कशी न पामे ॥ उठी नरफनो नी. पन्यो तिर्यन पनजिर गर्नज यने मनुष्य गर्नजमां याये, पामे तो देश पिरती, पण सर्व- पिरती न पामे ॥ पांघमी नरफनी नीकन्यो तिर्यच गर्नज ने मनुष्य गर्नजमा यावे, पामे तो सर्वपिरती, पण फेवल ज्ञान न पामे ॥ घोयी नरकनो नोकळ्यो तिर्यच गर्नज ने मनुष्य गर्नगा याये, पामे तो केयस शान पामे, पण तीर्थकरपद न पामे ॥त्रीजी
म
॥५॥
Status
गरफनो नीकच्यो तीर्धकरपद पामे, पण वासुदेव वसंदवनी पदवी न पामे ॥ वीजी
नरकनो नीरच्यो वासुदेवनी पदवी पामे, पण चक्रवर्तीनी पदयो न पामे ॥ पहेली नर•
फनो नोकळ्यो चक्रवर्ती विगरे सपळी पदवी पामे ॥ हवे नवनपतिमा तियेच पंचेंजिय.
समुचिम थने गर्नज, मनुप्य गर्नज ए माथी थारे ॥ त्यांनी नोकळ्यो चादर पृथ्वी
थप ने प्रत्येक वनस्पति, तिर्यच पंचेंजिय गर्नज, मनुष्य गर्नज एटसामां यावे॥ पृथ्वी-
मां नारकी वर्जी वाकी २३ दंगक थकी यावे, त्यांनी नोकळ्यो नारकी देवता वर्जी
पाकी १० दंगकमां जाय ॥ थपमा नारकी वर्जी २३ दमकनो यावे, त्यांनो नोकळ्यो
नारको देवता वर्जी १० दमकमां जाय ॥ वनस्पतिमा नारकी वर्जि याकी २३ दमकमाथी
थाचे, त्यांनो नोकळ्यो नारको देवता वर्जी १० दमकमां जाय ॥ तेन वायुमां नारकी
देवता पर्जी चाकी १० दंगकमांथी याये, त्यांनी नीकळ्यो नारकी देवता मनुष्य वर्जी
नप दंगफमां जाय ॥ विगजिय त्रणे १७ दमकमां जाय ॥ एमां नारकी देवता वर्जी
याकी १० दंगफमांची यावे ॥ तिर्यच समुचिम पंचेंजियमां नारकी दवता वर्जी वाकी
॥५॥
१० दंगकमांथी याये, एमाथी नोकळ्या ज्योतिषी मानिक वर्जी वाकी २२ दंगकर्मा जाय ॥ हवे गर्नज तिर्थचमा २५ दंगकथी याये, चोवीसे दंगकमा जाय ॥ उपर थाउमा देवलोक उपरांत न जाय ॥ हवे मनुष्य गजमा तेउवाउ बर्जी २२ दमकमांयी याये, त्यांना नोकळ्या २५ दमके जाय ॥ हवे मनुष्य समुचिममा तेउयायु नारकी देवता वर्जी वाको छ दमकमांथी यावे, त्यांना नोकळ्या देवता नारकी पर्जी बाकी १० दंगकमां जाय ॥ वाणव्यंतरमा तिर्यंच पंचप्रिय समुहिम ने गर्नज थने गर्नज मनुष्यमाथी यावे, त्यांना नोकळ्या वादर पच्ची अपने प्रत्येक वनस्पति, तिर्यंच पंचंधिय गर्नज, मनुप्य गर्नज एमां जाय ॥ ज्योतिपीमा तिर्थच पंचनिय गर्नज यने मनुष्य गर्नजमांथी यावे, त्यांना नोकळ्या चादर पृथ्वी व्यप ने प्रत्येक वनस्पति तियेच पंचजिय गर्नज, मनुष्य गजमा जाय ॥ वैमानिक पेहला चीजा देवप्लोकमा तिर्यंच पंचेंजिय गर्नज, मनुष्य गर्नजमांथी पावे, त्यांना नोकळ्या चादर पृथ्वी यप ने प्रत्येक वनस्पति, तिर्यच पंचेंछिय गर्नज, म नुप्य गर्नज ए पांचमां जाय ॥ जीजा देवलोकयो मांगी थाउमा सुधी ॥५८॥ दंडक तिर्यच पंचेंजिय गर्नज यन मनुष्य गर्न एमाथी यावे, त्यांना नोकळ्या निर्यच गर्नज पंचंडिय अने मनुष्य गर्नजमां जाय ॥ नवमा देवलोकथी सर्वार्थ सिह मुधी मनुष्य गर्नजमाथी यावे, त्यांना नोकळ्या गर्नज मनुष्यमा जाय ॥ मनुष्य गर्नज मोह पाण जाय, पण त्यांची याव नहि ॥ हर ! ममय मोक्ष जाय तनी संख्या यन क्याथी केटला आय ते कहे ते ॥ पहल। ३ नरकना नाकीना जीव मनुष्य गर्नजमां यावे ॥ एक समय १० मोक्ष जाय ॥ ए संझा सघले जाण्यं ॥ चोथीना ४ जाय ॥ पाचमी वी सातमीना नोकाच्या न जाय ।। नवनपतिना देवताना 10 जाय ॥ तनी देवानां ५ जाय ।। पृथ्वी अपना ४ जाय ॥ तेउ वायुना न जाय ॥ वनस्पनिना ६ जाय ॥ विगत प्रियना ४ ज्ञान पामे, पण मोक्ष न जाय॥निर्यच पंचंजियना १० जाय ।। निर्यचणीना १० जाय॥ मनुष्य गनिना १० जाय॥ पुरुष लिंगे १० जाय ॥स्त्रीलिंगना २० जाय ॥ नपुंसकलिगना १० जाय व्यंतरना १० जाय ॥ नेनी देवीना ५जाय ॥ज्योतिपीना १० जाय॥ तेनी देवीना २० जाय ॥ वैमानिकना १०७ जाय ॥तेनी देवीना २० जाय ॥उंचा लोकमांथी४ जाय ॥नीचासोकमांथी २० जाय ॥ ॥५८ त्रीगलोकमांथी १०७ जाय । समुअमाथी रजाय॥शेप जळमाथी ३ जाय ॥ उत्कृष्टी यवगा- हनानां जाय ॥ मध्यम अवगाहनानां १०७ जाय ॥ जघन्य अवगाहनाना ४ जाय ॥ स्वलिंगना १०७ जाय ।। अन्यलिंगे १० जाय ॥ गृहलिंगे ४ जाय ॥ नंदनवनमांची रजाय ॥ पुरुपयी पुरुप यश्ने १०७ जाय ॥ चाकी नांगे १५ जाय ॥ पुरुपयो स्त्रीलिंगे यश् १० जाय ॥ पुरुपथी नपुंसकलिंगे यज्ञ १० जाय ॥ स्त्रीथी पुरुपलिंगे थर १० जाय ॥ स्त्रीथी स्त्री यश्ने १० जाय ॥ स्त्रीथी नपुंसक थइ १० जाय ॥ नपुंसकथी पुरुप यश् १० जाय । नपुंसकथी स्त्री यज्ञ १७ जाय ॥ नपुंसकथी नपुंसक थइ १० जाय ॥ एक समये जे जे गतिना मनुप्यमां यावी उत्कृष्टा मोक्ष एक समये जाय ते कहा ॥ हवे १५ जेदे सिक थाय ते कहे ते ॥ तोर्य सिझा १॥ अतीर्थ सिझा २ ॥ तीर्थंकर सिक्षा ३ ॥ यतीर्थकर सिद्धा ४ ॥ स्वयंयुह सिझा ५ ॥ प्रत्येक बुरू सिझा ६॥ बोधयो दि सिका ७॥ स्वलिंग सिजा ॥ यन्यविंग सिमा ए॥ गृहलिंग सिझा १० ॥ पुरुपलिंग सिमा ११ ॥ स्त्रीलिंग सिद्धा १२ ॥ नपुंसक लिंग सिखा १३ ॥ एक सिक्षा १४ ॥ अनेक सिका १५ ॥ हवे
हर नव, संतापहार कहे ॥
समाजस सम्मान । ॥ निगाद परिममल संस्थान ५
सादि मंत्राण ॥ मन
संगण ४ ॥ कुज माण ५ ॥ हुम संगाण) दव नमरम मंगाण ने कने दिय"
जे चार घाज मरा होय ॥ पद्मासन यना जरय बन जा.) प्रातः ॥ नेट राग-
नने ससाटनं श्रांतम् ॥ बळी नटराज यान. माया जाना जाता पंधी. याने
जमणा जानुधी माया संघ मधी, पटले चार रान सरप याना हाय ते समानरम सताण
जाण ॥ ॥ निगाद पग्गिंगस सटाण ने कटने कहिये ? जे महानी मापक पर पूर्ण
थने नानीथी नीच हीनाग बीजं संत्राण जाण ॥२॥सादि संताण ने कहने फदियं ?
जे नानी नीच युक्तमान प्रमाण, पग कटी जानु प्रमुख सर्व समु दोय, यने नाजाय।
उपाटयो म पामयो होय, दयुं हाथ माथु मुख प्रवृति सर्य यति पुराकृति होय ते शीर्नु
संगण जाणवू ॥३॥ कुन्ज संगण ते केने कहिये? जे संस्थाने दाय पग मस्तक माया
गटलां प्रमाणोपेतवालो दाय, थने उदर पुंठ मुग्य प्रमुग्प पांकुं दोय ते गो संगण
॥१०॥
जाणवू ॥ ४ ॥ वामन संवगण ते केने कहिये ? जे पूर्वना चोयाथी उपरांठे होय ते
पांचमुं संताण जाणg ॥५॥हुंम ते केदने कहिये ? रुंद मूंड मृगापुत्र लोढीयानी माफक
थंगे यवयवे करी अलक्षण होय, सर्वांगे पायो ते व्यु हुँझ संगण जाण ॥६॥
नारको जयधारणीय प्यने वैकेय शरीर करे तोये हुंम संवगण ॥ देवताने नवधारणीय सम
चरंस संटाण, चेक्रेय शरीर करे तो नाना संवाण संठिया, घार देवलोक सुधी वेकेय करे,
ते उपरांत न करे॥ पृथ्वीने टुंम संत्राण पण चंडाकारे तथा मसुरनी दाळने याकारे ठे।
थपने हुंग संवाण पण जळना परपोटानो याकार ते ॥ तेउने हुंम संगण पण सोयना
नारानो थणीनो याकार ठे ।। वायुने हुँन संताण पण ध्वजा पताकानो याकार ॥ वन.
स्पतिने हुंम संवाण पण नाना प्रकारनो याकार वे॥ पिगसेंजिय,समुर्छिम तिर्यंच पंचंडिय,मनु.
प्य समुर्णिमने हुंम संगण । तिर्यच पंचप्रिय गर्नज, ने मनुष्य गर्नजने वए संगण होय ॥
इति संगणकार संपूर्ण ॥ ॥
दंडक ॥ दवे दममुं वद हार कहे ॥ वेद ३, ते वीवद १ ॥ पुरुषवेद २॥ नपुंसक बंद ३ ।। नारकी. एप्रिय, विगले प्रिय, तिर्यच पंचेंप्रिय समुर्जिम, समुहिम मनुष्य ए सर्वन । नपुंसक वेद जाण ॥ निर्यच पंचनिय गर्नज ने मनुष्य गर्न जमां बंद ३ लाने ॥ देवनामां वेद २ ॥ स्त्रीचंद ? पुम्पवंद २ ॥ ते जवनपति यादि देश २ देवलोक मुधी वेद २ लानं ॥ उपर सघळा पुरुषवंद। जाणवा । यस्प बहुत्व कह ॥ सर्वथ थामा गनव कनिय माणुमा । ।। मनुमणी संग्वेज गुणी २ ॥ यादर तेउकाश्या पवनगा यसंग्वगुणा ३॥ याणुनगंवाझ्या दंवा यमंग्वेका गुणा ४ ॥ उवरीमगेविङगादेवा यसंवगुणा ५॥ मझिमगविङगादेवा संग्वझगुणा ६॥ हनीमगविङगादया संखंडागुणा ॥ अचूएकप्प देवा संखेडागुणा ७ ॥ यारणे कप्प देवा संखेडागुणा ए॥ पाणए कप्प देवा संखेडागुणा १० ॥ याणए कप्पे देवा संखङगुणा ११ ॥ थहंसतमाए पुढवीए नेरश्या यसंखेडागुणा १२ ॥ गीतमाए पुढवीए नेरश्या य. संखेडागुणा १३ ॥ सहसारे कप्पे देवा थसंखेडागुणा १४ ॥ महा कप्पे देवा थसंखेडागुणा १५ ॥ पंचमागम्मप्य नाप पुन्योर नेरश्या यसंखडागुणा १६ ।। सात फा५ ५५॥ यता गुणा १०॥ पस्योग पंकप्प नाग पुरवीर नेरश्या यसंखेझगुणा १० ॥ बंजतोष कणे देवा यसंगझागुणा १५ || तगाए. यानुगणनाग पुढवीप नेरश्या असंखेडागुणा २० ॥ माहिरकपदेवा थसंपझागुणा २१ ॥ ॥ सणंकुमार कप्पेदेया यसंग्ग्रेडागुणा २२॥ दोध्याग सारण नाग. पुरुषी नेरझ्या असंखेडागुणा २३ ॥ समुचिम मणुसा यसपमागुणा २५ ॥ इसाणे कप्पे देवा थसंखेडागुणा २५ ॥ इसाणे कप्पे देवीयो संगकारणी २६ ॥ मुहम्मे कप्पे दया संखेडागुणा २७ ॥ मुहम्मे कप्पे देवीयो संखेझागुण ॥शा ॥ नयाणयासी देवा यसंखेडागुणा २ए ॥ जयणवासिणी देवोयो संखेडागुणी ३०॥ इमोस रयाणपनाए पुन्योए नेरश्या थसंपेशागुणा ३१ ॥ खड्यर पंचिंदिय तिरिख जोगिया पुरिसा यसंग्पडागुणा ३२ ॥ ग्रहयर पचिदिय तिरिय जोणिणायो संखेडागुणी ३३ ॥ यसपर पंनिदिय तिरिय जोगिया पुरिसा संबेझागुणा ३४ ॥ यलयर पाच- दिय तिरिम जोगिणोथो संखेझायणी ३५ ॥ जसयर पंबिंदिय तिरिख जोषिया पुरिसा IAMI
देडक
(
॥६२।।
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.
सम्बझागृणा ३६ ॥ जलयर पांच दिय नि: जाणिनीया मंग्वगग :7॥ वाण चतर
दवा स्वागण। ।
पाया | ॥मिया देवा
सातारा :05-14।
।। - घर - गिना.
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(२ र पम्पमा
नि: । ना असम्बनी II ud | चादर
। - । ।। पाटयाना या पीना यसवकप ५६।।
• या यमाय 4'] । घाटा नकाश्या यपत्ता यसबझागुणा
।
पादर
६३.। मुहम ५७ ।। पत्तेय सरीर बादर वणस्सश्काश्या अपाङ्गता यसंखेडागुणा एए ॥ वादर निगादा थपजत्ता यसंखेडागुणा ६० ॥ वादर पुढवीकाश्या यपहात्ता असंखेडागुणा ६१ ॥ वादर याउकाश्या यपङगा असंखेडागुणा ६२ ॥ वा दर वाउकाश्या यपऊत्ता असंखेडागुणा तेउकाश्या अपहाता असंखेजारणा ६४ ॥ मुहुम पुढवी काझ्या अपङत्ता विसेसादिया ६५ ॥ सुहुम याउकाश्या अपाता विसेसाहिया ६६ ॥ सुहुम वाउकाश्या यपङत्ता विसेसाहिया ६७ ॥ मुहुम तेजकाप.या पङता संखेडागुणा ६७ ॥ सुहुम पुढवी काश्या पऊत्ता विसेसाहिया ६ए ॥ मुहुम गाउकाझ्या पत्ता विसेसादिया ७० ॥ सुहुम वाउकाश्या पऊत्ता विसेसाहिया ॥ ३१ ॥ सु हुम निगोदा यपहाता असंखेऊगुणा १२ ॥ सहुमनिगोदा पहाचा संखेडागुणा १३ ॥ यन वसिद्धिया यणंतगुणा ४ ॥ पमिवाइ सम्म दिहि अणंतगुणा ३५ ॥ सिह थपंतगुणा १६ ॥ वादर वणस्तर काश्या पहाता यणत. गुणा ॥ एकाचा विसेसाहिया.७७ ॥ वादर वणस्सइ काश्या अपजाता असंखेडागुणा शए ॥ वादर यपजत्ता विससादिया ७० ॥ समुच्चय वादर विसेसा दिया ७१ ॥ सुहुम HSSESS ASKUL पास काश्पा थपजाना थसंखेजगुणा २ ॥ मुहुम थपङ्गाना विसेसाहिया ३ ॥ गुहुम पणस्सइ फाश्या पजाना संबजगए ।। - ॥ सुहुम पडता विसेसादिया ५ ॥ समुपप सुहमा पिसेसादिया ७६ ॥ जयसिडिया विससादिया G ॥ निगोद जीवा विसे. सादिया ७ ॥ यणरस काझ्या जीवा विसे लाहिया भए ॥ एगिदिया जीवा विसेसादिया " ॥ निशिगजोणिया विसंसारिया ए१॥ मिदिट्टी विसेसाहिया ए२ ॥यविरया जीवा पिसादिया ॥३॥ सरसाश्या विसेसादिया ए४ ॥ उउमत्यजीवा विसंसादिया ए५ ॥ सजोगी जोश विस्ताहिया ए६॥ संसारस्थाजीवा विसेसाहिया ए॥सबजीचा विसेसा दिया ए॥ए थठाणु बोसनो यप वहुत्व जाणवो ॥ सर्वथी थोमा पुरुपवेद ॥ १ ॥ तेथी घीयेद संग्यातगुणी ॥२॥ तेथी नपुंसकवेद अनंतगुणा ॥३॥ मनुष्य पुरुपयी मनुष्यणी गौ २३ गुणी थधिक ॥ देवताची देवी ३२ गुणो यधिक ॥ तिर्यचथी तिर्यचणी ३ गुणी यधिक ॥ पुरुपनो विषय समना पुळा सरिखो ॥ स्त्रीनो विषय चकरानी सिमीना ताप सरित॥ नपुंसकनो विषय नगरना दाद सरिखो।जवनपति व्यंतर ज्योतिषी वैमानिक .
पदसा पीना देवशोक मुधीमा मनुष्यनी माफक नांग ने ॥ ते उपरना ये देवसोके स्पर्शनी जोग ।। ते उपरना ये देवताक रुपना नोगले ॥ ते उपरना ये देवसोके शब्दनो लोग ते उपरना ४ देवलोके मननो जोग ते ॥ ते उपरांत देवताने जोग नयी. ॥ इति वेदधार संपूर्ण ॥१०॥ ये जोगहार कदे ॥ जोग १५, तेमा मनना ४ ते सानुं मन १ ॥ जू मन २॥ मिश्र मन ३॥ व्यवहार मन पचनना जाग ४ ते सानुं पचन १॥ जुई बचन २॥ मिश्र वचन ३ ॥ व्यवहार गगन ४ || कागाना जोग ते उदारिक १॥ उदारिकनो मिश्र २ ॥ फ्रेय ३॥ वैकेयनो मिश्र ४ ॥ याहारफ ५ ॥ यादारफनो मिश्र ६ ॥ कार्मण कायजोग ॥ नारकी देवताने जोग ११ ते मनना ४ ॥ वचनना ५ ॥ कायाना ३ ते वय १ चयनो मिश्र २ फार्मणकाय जोग ॥ ॥ पृषी १ थप २ तेव ३ वनस्पति । ए ४ ने जोग ३॥
मा ॥१४॥ नदारिक उदारिकना । नदारिमाथि कामण यजोग , सामने जा दारिकता :.. पियन म . 1, - । गरन 1. है , + म.। ..। It' ' . 1. " ".12 .."
केवलज्ञान ५ ॥ मतियज्ञान ६॥श्रुतयज्ञान ॥ विनंगदान ॥ चदर्शन ॥ यचा. दर्शन १० ॥ ययधिदर्शन ११ ।। केवदर्शन १२ । १२ उपयोग २५ दमक उपर उतारे ॥ नारकीने उपयोग , ते केयसहान, केयसदर्शन, मनःपर्यवज्ञान | ३ वर्जीने वाकीना " जाणया । तेमां समदृष्टिने ६ उपयोग, ३ यज्ञान नदि । मिथ्यात्वीने ६ उपयोग, ३ ज्ञान नहि ॥ देवताने " उपयोग समुच्चये नारकीनी परे । तेमा समदृष्टिने ६ उपयोग, ३ यज्ञान नदि ॥ मिथ्यात्वीने ६ उपयोग, ३ शान नदि ।। नवरं अनुत्तर विमाने ६ उपयोग, त्यां ३ यज्ञान नदि ॥ पांच गप्रियने ३ उपयोग, ते मति यशान १॥ श्रुत थझान २॥ ययादर्शन ३॥ वेजिय तेइंघियने उपयोग ५ ते मतिज्ञान १ ॥ श्रुतझान २॥ मतियज्ञान ३ ॥ श्रुन यशान ४॥ यच दर्शन ५ ॥ चरिजियने ६ उपयोग तेमां चादर्शन यध्यो । निर्वर पंजिय समुर्तिमने चउशियनी माफक निर्यच पंचप्रिय गर्नजने नेरश्यानी माफक ॥ मनुष्य समुर्तिमनं उपयोग ५ ते मनि अज्ञान १ ॥ श्रुत. यज्ञान २ ॥ चतुदर्शन ३ ॥ श्रदर्शन ४ ॥ मनुष्य गर्नज ने उपयोग १२ ATT
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पपा ६, न भ्यादा पया । ॥ शरीर पया ? । यि पया ३ ॥ श्वासोश्याम पया
४॥ नापा पर्या ५ ॥ मनः पर्या ६ ॥ नारकी दवताने ५ पर्या ॥ नापा मन साथे बांध ।।
एजिय ५ मनुप्प समुर्विमने पर्या ४ पदेसी जापवो ॥ ३ विगजियने तियच पंचें
- प्रिय समुर्तिमने पर्या ५ पदेली । तिर्यच पंचेंशिय गर्नजने मनुष्य गर्नजने पर्या ६ जाणवी । सिने पर्या नथी॥ इति पर्याधार संपूर्ण ॥ १६ ॥ इथे प्रापकार कहे ॥ प्राण १०, ते इञ्जिय ५, ३ जोग , श्वासोच्दास ए, याचग्यु १० ॥ नारको देवताने प्रागद १०॥ एकेजियने प्राण ५ ॥ स्पर्शजिय १ ॥ काययस २॥ श्वासोच्दास ३ ॥ था. उखु ४॥ येईजियने प्राण ६ तेमा मुख थने वचन ए ये वया ॥ तेइंडियने प्राण 3 ते नासिका यधी॥ परिजियने प्राण 0 ते चा पधी ॥ तिर्यच पंजिय-समुर्तिमने प्राणास ते कान वयो। मनुष्य समुर्विमने प्राण ते मनवल वचनवाल एवेनहि ॥ तिर्यर पंजिय गर्नजने, मनुष्य गर्नजने प्राण १०॥ सिखने अन्य प्राण नथी पण नाव प्राण ॥ इति प्राणधार संपूर्ण ॥ १७ ॥ .
.....
कापमान . :
नमा 1 नन।
शनुमा । .
मानयान ।।
३.... न मनन" तना॥ ॥ मनि.
: मनाईन न। नजना॥
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भनय गजन इन 4, थझान ३ नी
जना। पर, Rit
व. जघन्य ॥ गाउ दये। बीजी
नरक नाम। 10॥ गादय, जम् गान: दम्ब ॥त्री नरक
उन्० गाउ ३ देखे,
जय ॥ गार दस ॥ पापी नरके उत्० ॥ गाउ, ज०२ गाउ देखे ॥ पांचमी नरके
॥१७॥
७२ गाण, ज० ११ गान देये ॥ चीप उ० १॥ यने ज० १ गाउ देखे ॥ सातमीए 702 गार देग, ज० यऊंगार देखे ॥ युं चार दिशे देखे ॥ हये यसुर कुमार ज० २५ जोजन दंगे, 3 यसंग्याना वीपसमुफ देखे ॥ तेना नयनिकाय ज० २५ जोजन, उ० संग्याता दीपसमुपदेगे॥ तिर्यप पंधिय गर्नज ज० थांगुसनो श्यसंख्यातमो नाग, उप संग्याता प्रीपसमुत देरो ॥ मनुष्य गर्नज जयंगुतनो यसंख्यातमो नाग, 30 यसंग्याता जीप समुऽ देणे ॥ यती जेवमो साफ तेवमा यसंख्याता खांड्यां यतोक- मांहि देगे ॥ व्यंतर ज० २५ जोजन देगे, उ० संख्याता छीपसमुष देखे । ज्योतिषी जव उस संग्याता कीपसमुप देखे ॥ येमानिक पदेखा घीजा देवलोकना देवता ज० २५ जांजन देगे, उ० नोने पदेखी नरक सुधी देवे, विद् थसंख्याताद्वीप समु देखे,. उप पोताना रिमाननी पजा मुधी देखे ॥श्रीजा चोथानां पीजी नरक सुधी देखे ॥ गुप्रि पहेसा २ देवसोफनी माफक जाण ॥ पांचमा ठगना बीजो नरक सुधी देखे ॥ उनुनि तेमन जाण ॥ सातमा थाउमाना चोथो नरक सुधी देखे ॥ उ वितु जिम
दंडक
परमे ॥ नवमा, दशमा, थग्यारमा, पारमाना पांचमी नरक मुधी देखे ॥ उंचु नि जिम
पतये ॥ नवयफना उनी नरक सुधी देखे ॥ चंचु नि जिम पदमे ॥ चार यनुत्तर
विमानना सातमी नरक सुधा देखे ॥ उचु नितुं जिम पढमे ॥ सर्वार्थसिझना थाखी
सोनाली कांश उणी देखे ॥ सिङ सोकासोक समस्त देखे ॥
इतिनाण थनाणहार संपूर्ण ॥ १७ ।।
हवे १ए मुं संजतिधार कहे ॥
संजति थादि था वो चोरीस जेद कहे ते ॥ संजति १ ॥यसंजति २॥
संजताजति ३ ॥ वति ॥ यति ॥प्रतावति ३ ॥ पच्चखाणी १॥ थपच्चखाणी
२॥ पयाराणापच्चपाणी ३ ॥ पंमिया १ ॥ थपंमिया २ ॥ पंमियापंमिया ३ ॥
मुना १ ॥ जागरिया २॥ मुत्ताजागरिया ३॥ संतुमा १ ॥ यसंवुमा २ ॥ संवुमासं.
पुमा ३॥ पम्मिपा १ ॥ थपम्मिया २॥ धम्माधम्मिया ३ ॥ धम्मववसाश्या १॥ थप
॥१८॥
म्मवप्रसाश्या. ३॥ धम्माधम्मयवसाश्या ३ ॥प याचे चोखना पर प्रकार जाणवा ॥ नारकी देवता गज्यि विगप्रिय तिर्यच पंजिय समुळिम, मनुष्य समुर्मिम ए सर्व व्यसंजति, याति, अपञ्चावाणी, थपंमिया, अजागरा, असंवुडा, यधम्मिया, अध. म्मययसाश्या एटला बोल जाणया ॥ तिर्यंच पंचेंजिय गर्नज संजतासंजति यादि देश यावत् धम्माधम्मयवसाश्या । १६ घोस जाणवा ॥ मनुष्य गर्नजमा एकेका बोलना प्रण प्रण प्रकार गणतां २४ योस लाने । सिस्ने एमानो एके बोल न खाने ॥ इति संजतिधार संपूर्ण ॥ १५ ॥ रोम थाहार दये २७ मुंथाहारधार कहे ठे। श्याहारना प्रण प्रकार॥ योज याहार जे समस्त जीव उपजतां करे ते कहीए। ॥ जे बचाए करी ग्रहण करे ते कहीए २॥ कवल याहार ते फल जरी पुद्गत प्रदा. करे ते कहीए ३ ॥ नारकाने याहार २ ते योज अने रोम चिंतव्या पनी येशुन ने अमनोज्ञपणे परिणम ॥ देवताने थाहार र योज अने होम ॥ वितव्या पटी
मा
देशक
गुल मनाशकारिया परिणम | रिय पाचने 'तर : त योज यन गम, ने शुना-
शुनपण परिणम ॥ ३ गियि चियि यम थन "न.. मनप्य गनज
एटलान थाहार ३ जाणव! । म.प्य समाजमन यादार ने यान अने गम ।। मि.
यणादारी जाणवा ॥
पनि यार , ग्माण || - ||
व वीज प्रकार १५ मयादा कह ॥
थाहार ३, ते सचित्त । ।। थचिन ॥ (श्र : ॥ नारकी देवता यचिन याहार
लिये, पाकी सपळा त्रण थाहार लिय, [RE एक यादार न लिये ।।
पनि २१ में थाहारहार संपूर्ण ॥ २१ ॥
हवे २२ मुंशमा थाहारहार कदे ।
संसारी जीरन थाहार सेवानीशा उपजे ते कद्दे ठे।नारकीने यंतमुत्तें यादारनाश्ता
॥६९॥
उपगे । यसुर कमारने जघन्य परय जके, उत्कृष्ट सागर १ काफे याउयु के, तेने ? इजार कारा वर्षे थाहारनी शमा उपजे ।। तेना नयनिकायने ज० चत्य नके, उ० पृयक् दिवसे ॥ध्यंतरने जापत्य न, उत्पृथक् दियसे ।। ज्योतिषीने जपनोत्कृष्ट पृथक् दिवसे। वैमानिकने जा पृथक् दिवसे, उ० ज्यां जेटला सागर थायु त्यां तेटमा हजार वर्षे थाहार खेयानी शशा उपजे ॥ ज्यां काफेरा सागर त्यां कामेरा हमार वर्षे यादारनी शशा उपजे । एप्रिय पांचने समये समये थादारनी शशा उपजे ॥ विगोज्यिने शंतर्मुहर्ने हा उपजे ॥ तिर्यंच पंचेंजियने उनके थाहारनी शा उपजे ॥ मनुप्यने थम जत या उपजे ॥ देवकुरु उत्तरकुरुए थम नक्त ॥ दरियास रम्यकथासे उपजक्ते ॥ हेमवय एरणपए घउत्थ जो थाहारनी शशा उपजे । सिख यणादारी ॥ इति २२ मुंश्वा थाहारहार संपूर्ण ॥ २२ ॥ दये २३ मुं काय स्थितिधार कहे ।। नारकी देवताने जेने जेटली यायुस्थिति दे तेने तेटली काय स्थिति जाणवी ॥
पुती श्यप ने घागमा गया था । रारा असा जम्मा पाए। अयमाण। का रद ॥ प्रथ। श्यमा काना '.२ ॥ ना. मान- मात्र मादि । मन यं। पत्याने त्यागपत्र नाम ना ले । यात्रत्रमादि हटला याकामा प्रदश ।। स शापामा प्रदा समय समय कसद ना त' यागृत क्षत्र यवम्यान नाम- पिणी शवसांगणंत यवरगय करता ठसवाय ॥ एक हाथ नथा । धनुष्य नथा । गात्र साना केटमा कास थाय ? ने यमम्यान। नत्मापिण। यवमपिणी काल उसाता पाय ॥ एम यावा साक सवानां पण एटखा काल थाय, एटले १ सांके, एम शरम्याना सांक साता जंटा कास थाए तटसं यासंख्याती उत्सर्पिणी यासपिणी जाणषी ॥ ए. उत्कृष्टो कास कयो । जघन्य यंतर्मुहर्तनी स्थिति जाणवी ॥ वादर काय पृथिव्यादि एकको मांहि गयो धको ७० कोमाकोमी सागर रहे ॥ ए उत्कृष्टो काळ जापशे, जर यतर्मुहर्त रहे ॥ वनस्पति कायमा गयो थको काले थनंती उत्सर्पिणी थपसर्पिणी कास रहे ॥ क्षेने थनंता खोक पुरे॥ यसंख्याता पुद्गल परावर्तन करे । ते EN ||७०॥
थसंग्यातानुं मान कदे ॥ यावती १ ने थसंख्यातमे नागे जेटला समय थाय, तेटला पुद्गत परावर्तन करे, ज० अंतर्मुहर्म ॥१॥ एकली सूरम निगोदर्मा गपो पो समाती उरसार्पियो अवसर्पिणी कान रहेको ना दो 1.11 MIRCirmi, . 1.in. ॥ ॥ इव वागु गुपकार ९ वे तेने नघिय अव्य देव कहिये ॥१॥ ने नय निधान कदिये ॥ २ ॥ साधुना सत्या विश गुणे । सहित थने समयेतिया १ ॥ माहणतिया २ ॥ खंतीतिबा ३ ॥ दंतीतिया ४ ॥ ५॥ मुत्तीतिया ६॥ इसोतिया ॥ मुणोतिया ॥ पिरतीतिया ॥ ॥ विड तिबा ११ ॥ निक्खुतिया १२ ॥ तीरत्योतिबा १३ ॥ ए. १३ नामेयुक्त हाय न धमदेव कहिये ३ ॥ बढार दोप रहित ने. पारगुणे करी सहित होय तेने - देवाधिदेय कहिये । यदार दोप ते कदे वे ॥ यज्ञान १ ॥ क्रोध २ ॥ मद ३ ॥ मान ४ ॥
मा
॥७२॥
देवक
वारम वीस पण विम, टुंनि कुलकोमी लम्बाई ॥ २ ॥
झगको मिसन नव, लकवा सफा कुलाण कोमीणं ॥
इइ संगहाणी गंथे, कहिता पूयमूर्गिद ॥ ३ ॥
सिझन कुलकांनी एक नदि ॥ नि कुल कामीहार संपूर्ण ॥ २५ ।।
पचन्ने
हवे २६ मु मोपकमी नापकी यायुप्यनें हार कर लें।
धे प्रकार यायुष्य लें ॥ एक नापकम्मी, वीजें मापकम्मी । नारकी देवता नीथकर
चक्रवती वलदेव वासुदेव असंख्याता वर्पना यायुप्यनां निर्यच मनुष्य जुगलीया ए
सर्वेनुं नोपकी यायुप्य जारण. बाकी सर्वमा नोपकी सांपकी
यायुष्य
होय ॥ सिझमां यायुष्य वेमार्नु एके नदि
इति नोपकी सोपकी यायुष्यद्वार संपूर्ण ॥ २६ ॥
॥७२॥
SAXSECREDERSEE दवे २७ मुं देवकार कहे ॥ गाथा--नाम १ गुण २ उपवाय ३, वि.४ दिन ५ चषण ६ संचिग्णा ॥ अंतर थप्पाहुयं ए, नवदारा पण देवाणं ऐया ॥१॥ पए द्वार तेमा प्रथम नामबार कहे ते ॥ नपिय अव्य देव ॥१॥ नरदेव २ ॥ धर्मदेव ३ ॥ देवाधिदेव ४ ॥ नावदेव ५ ॥ १ ॥ इवे घौजु गुणधार कदे रे ॥ मनुष्य तया तियेच पंचेंज्यि जेने देवतामां उपजवू ठे तेने जविय ऽव्य देव कहिये ॥१॥ चौदररन नप निधान जेने होय तेने नरदेव कहिये ॥ २ ॥ साधुना सत्या विश गुणे करी सहित थने समणेतिया १ ॥ मादणेतिया २ ॥ खेतीतिवा ३ ॥ दंतीतिया ४ ॥ गुत्तोतिया ५ ॥ मुत्तीतिया ६ ॥ सोतिबा ७ ॥ मुणोतिबा ७॥ विरतीतिबा ए ॥ विड तिया १० ॥ सुहेतिया ११॥ जिखुतिया १२ ॥ तीरस्थोतिया १३ ॥ ए १३ नामेयुक्त होय तेने धर्मदेव कहिये ३ ॥ श्रद्वार दोप रहित ने चारगुण करी सहित होय तेने देवाधिदेय कहिये ॥ थदार दोप ते कहेठे ॥ यझान १ ॥ क्रोध २॥ मद ३ ॥ मान ॥
दंडक
1॥७॥
माया ५॥ सोन ६ ॥रति ७ ॥यरति ॥ निजा ए ॥ शोक १० ॥ असत्य ११
चोरी १२॥ मच्छर १३ ॥ जय २४
प्राणिवध १५ ॥प्रेम २६ ॥ क्रिमाप्रसंग १७ ॥
हाइय १७ ॥ ए १७ दोप रहित ने १२ गुणे करी सहित ।। ते १५ गुण कहे ॥ ज्यां
ज्यां जगवंत उजा रहे वेसे समवसरे त्या त्यां दश योत सहित ते जगवतथी वारगुणो
उंचो तत्काल अशोकवृक्ष यश् यावे. स्वामिने ठांयमो करे ॥१॥ लगवंत ज्या ज्यां
समवसरे त्या त्यां पांचवर्णा यचेत फुसनी वृष्टि याय, ढिंचण प्रमाणे ढगला थाय ॥२॥
जगवंतनी जोजन प्रमाणे वाणी विस्तरे, सहुना मननो संशय हरे ॥३॥ नगवंतने
चोविस जोम चामर विकाय ॥ ४ ॥ स्फटिक रत्नमय पादपीठ सहित सिंहासन स्वा.
मिने वागळे थाय ॥५॥ नाममसायंघोमाने ठेकाणे तेज मंगल विराजे, दिशो दिशनां अंधकार
सोळे ॥६॥थाकाशेसामीवार क्रोम गेवी वाजांमागे ॥७॥ जगवंतनी उपर त्रण पत्र उपराउपरी
विराजे पाथनंतझानातिशय ॥ए। अनंत य_तिशय परमपूज्यपणुं ॥१॥ अनंत वचनाति-
शय॥१९॥ अनंत अपायापगमातिशय ते सर्व दोप रहितपणुं॥१२॥ए १२ गुणे करी सहित तथा
RECENSESKSEEXES
॥७॥
पौत्रीस यनियनिस बननातिशय थादेदश्न यनंतगुणे करी सहित दोय तेने देवाधिदेव फहिंग ॥ ४ ॥ नारदंप ते केने कहिये । नयनपति १ ॥ याव्यंतर २ ॥ ज्योतिपो ३॥ मानिस ४ ॥ ए. नार जातिना देवताने नारे प्राते हैं तेने नायदेव कहिये ।। ५ ॥२॥ हानि पराय द्वार कई ने ॥ नविय उच्य देशमा मनुष्य तिर्यच १ ॥ जुगलोया २॥ सिप प्रण नाम वर्जिने याकी सर्व वामना थायो उपजे ॥१॥ नरदेवमां ५ जागिना देवताने पहेसो नरक, ए ५ वामना यावी उपजे ॥ २ ॥ धर्म देवमां वी मातमी नरक | नेउ पाउ मनुष्य तिर जुगतोया, प६ नाम वर्जिने शेप सर्व वामना थानी उपजे ॥३॥ देगाषिदेवर्मा पहेलो पीजो प्रिजो नरक ने किविपी वर्जिने, पेमा- निक देवना यामी गजे ॥ ५ ॥ नावदेवमा संज्ञा तिर्यक पंजिय १ संज्ञो मनुष्य र १२ गागनाथायी उपजे ॥५॥३॥ दो गोधु स्थिति द्वार कई ते ॥ नविय व्य देवनी जप० अंगा, उन्० ३ पानी १ ॥ नरदेवनी जय० सानसे वर्षनी, उत् चोराशीक्षाख पूर्वनी २॥ देवनी जपय यंत०, उत्० देश उगो पूर्व कोमिनो ३ ॥ देशविदेशनो जघा यहुतेर
दंडक
--
१७४॥
पर्पनी, उत्० ७४ लाख पूर्वनो ४॥ नावदेवनी जघरा दशहजार वर्षना, उत्० २९
गरनी
५॥६॥ हचे पांचमु मद्धि तथा विक्रुवणा धार कहे ठे॥ नविय अन्य देवमा जेने वैकेय
सन्धि उपजी होय तेनेज होय ॥ नरदेवने तो होयज ॥ धर्मदेवमा जेने सब्धि उपजी
होय तेने होय ॥ नाव देयने तो होयज । ए ४ वैक्रय रूप करे तो ज० १ ॥२॥३॥
उता संख्याता करे । शक्ति तो असंख्याता रूप करवानी ठे पण करे नहि ॥ देवाधिदेवनी
शक्ति घणी ते पण करे नहि ॥ ५॥ हवे ग्युं चवण घार कहे ठे ॥ नविय द्रव्य देव
चवी देवता याय १॥ नरदेव चवी नरके जाय २॥ धर्म देव चवी वैमानिक तथा मोक्षमा
जाय ३॥ देवाधिदेव तो मुक्ति जाय ४.॥ नाव देव चवीने वादर पृथवा पाणी वनस्पतिमा
ने गर्नज मनुप्य तिर्यंचा जाय ॥ ५॥६॥ हवे सातमु सचिवणा कार कहे ते ।।
- संचित्रणा ते देवनो देवपणे रहे तो केटसा काळ रहे ते ॥नविय अव्य देग्नी संचिवणा
जघा यंत०, जत् ३ पट्योपमनी १ ॥ नरदेवनी जघा सातसें वर्पनी, उतए ७४ लाख
देवनी जघर १ समपनी, उत्प देशे जणी पूर्व क्रोमिनी ३ ॥ देवाधि-
॥४॥
देवनी जघ० बर्डनेर वर्पनी, उत्॥ ४ लाख पूर्वनी ४ | जावदेपनी जघ० दश हजार यपनी, उत्० ३३ सागरनी ५ ॥ ७ ॥ हवे थाउमुं अंतरकार कहे वे ॥ नवियऽव्य देवन थांतरं पमे तो जघा दश हजार वर्ष ने यंतर्मुहत यधिकनु, जत्यनंता काळy यांतलं पके १ । नरदेवनुं जय० १ सागर काळे, उता थर्ड पुद्गला परावर्तन देशे जाएं २ ॥ धर्मदेचर्नु जघ २ पटय कामे, उता बाई पुद्गल परावर्तन देशे उणुं ३ ॥ देवाधिदेवतुं यांतर नथी । ॥ भावदेवतुं जघ० यंत०, उत्० अंनंता काळजें ॥ ५॥ ॥ हवे नवमुं यल्पबहुत्वधार कदे ते ॥ सर्वथो थामा नरदेय १ ॥ तेथी देवाधिदेव संख्यातगुणा २ ।। तेथी धर्मदेव संख्यातगुणा ३ ॥ तेथी नविय अव्यदेव असंख्यात गुणा ४ ॥ तेयो नाव. देव थसंख्यातगुणा ५॥ ॥ ए यधिकार १० श० १२ में उ० ए में है। इति २७ मुं देवहा संपूर्ण ॥ २७ ॥ देवे २७ मुं जरा सी गहार कहे ॥ जे शरीरे करी वेदे ते जरा वेदनीय॥ मन करी वेदे ते शोक वेदनीय ॥ नारकी देवता
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हवे ३० मुं सांतर निरंतरहार कहे ठे॥ पांचसे प्रेसठ नेद जीवनां ते १४ नेद नारकीनां ॥१॥४० द तिर्यचनां ॥२॥ ३०३ नेद मनुप्यनां ॥ ३ ॥रए नेद देवतानां ॥४॥ एवं सर्व मळी ५६३ नंद जीवना ठे ॥ ते जीव सांतर निरंतर उपजे के चचे ? उत्तर पहेली नरके नारकी सांतर निरंतर उपजे थने निरंतर उपजे तो यावप्लीकानें १ थसंख्यातमे जागे । जेटला समय थाय तेटला समय लगे उपजे अने चचे ॥ यांतलं पमे तो २४ मुहूर्त्तनुं १॥ बोजी नरके सांतर निरंतर एमज जाणवो ॥ यांतलं पमे तो ७ दिवसतुं ॥२॥ त्रीजी नरके सांतर निरंतर एमज, आतरू पमे तो १५ दिवसतुं ३ ॥ चोथो नरके सांतर निरंतर एमज ॥ यांतरं पके तो मास १ नुं ४॥ पांचमी नरके सांतर निरंतर एमज ॥ यांतलं .पमे तो मास :१ नुं ५॥ठी नरके सांतर निरंतर एमज ॥ यांतरं पमे तो मास ४ नुं ६ ॥ सातमी नारके सांतर निरंतर एमज ॥ यांतरं पमे तो मास ६ नुं । ॥ जवनपतिने सांतर निरंतर एमज ॥ यांत पमे तो २५ मुहूर्त्तनुं ॥ पांच एकेंघिय निरंतरज उपजे यहा ७६॥ ॥यने चचे पण निरंतरज, उपजवा चववामा यांतलं नयी ॥त्रण विगलेंजियने सांतरं निरंतर एमज ॥ यांतरः पमे तो थंतर्मुहूर्त्तनुं ॥ तिर्यंच समुचिमने सांतर निरंतर एमज ।। थांतरूं पमे तो अंतर्मुहर्त्तनुं ॥ तिर्यच गर्नजने सांतर निरंतर एमज ॥ आंतरुं पमे तो मुहूर्त १२ नुं ॥ मनुष्य समुचिमने सांतर निरंतर एमज ॥यांतलं पमे तो २४ मुहूर्त्तनुं ॥ मनुष्य गर्नजने सांतर निरंतर एमज,॥ यांतरं ज० यंत०, उत्० १२ मुहूर्त्तनुं ॥ वाणव्यंतर ज्योतिरी पहेला वीजा देवखोके सांतर निरं० एमज,यांत २५ मुहूर्त्तनुं॥ त्रीजे देवलोके सांतर निरंतर एमजायातरु पमे तो दिवस थने २० मुहूर्तनुं ॥ चोथे देवलोके सांतर निरंतर एमज, ॥ यांतलं पमे तो १२ दिवसने १० मुहूर्त्तनुं ॥ पांचमे देवलोके सांतर निरंतर एमज ॥ यांतरं पमे तो २॥ दिवसतुं ॥ठ देवलोके सांतर निरं० एमज, यां० ४५ दिवस ॥ सातमे देवलोके सांतर निरं एमज,यां०७० दिवस- याउमे देवलोके सांतर निरंपएमज,यांक १०० दिवस, ॥ नवमे दशमे देवसोके सांतर निरं० एमज, यां संख्याता मासर्नु । अग्यारमा वारमा देवसोके सांतर निरं एमज,यां संख्याता वर्षमुं। नवमेवेयके पदेखी त्रिके सांतर नि- रंगमज यां० संख्याता वर्षना सेंकमार्नु ।वीजी त्रिके सांतर निरंपएमज,यां संख्याता वर्षनां हजारच् ॥ निजी त्रिके सांतर निरं० एमज, यातलं संन्याता वर्पना साखनुं ॥ चार यनुत्तर विमाने सांतर निरं० एमज, यांग पख्यनाथसंख्यातमा नागर्नु॥ सर्वार्थसिह विमाने सांतर निरंतर एमज ॥ उपजे तो यायतीकाने यसंख्यातमे नागे जेटला समय थाय तेटसा समय लगे उपजे थने चये ॥ यांतलं पक्ष्यना संख्यातमा जागर्नु पमे ॥ तिनुं जघन्य थांतरं १ समयनु, थने उत्कृष्टुं थांतरं ६ मासवें ॥ चार गतिमा समुच्चय पंचंडिय यानि यांतलं जा १ समयनु, उब १२ मुहूर्त्तनुं ॥ इंस्थान- ज० १ समयनु, उ० ६ मासनु यांतलं पमे॥ इति सांतर निरंतरकार संपूर्ण ॥ ३० ॥ ॥ इति श्री महादभक संपूर्ण ।।
पोल.
चार ध्यानना वोल॥
१७७॥
थप थी उयपार प्रमुख सिद्धांतथी ४ ध्यानना बोल लिख्यते ॥ सारं मा चिंत-
पर्नु ते ध्यान ॥ ते ध्यान ४ ॥ थाध्यान १॥ रोऽध्यान २॥ धमध्यान ३ ॥ शुक्नध्यान
४ ॥ तेमा प्रथम यातध्यानना ४ नेद ॥ थमनोज्ञ शब्द रूप गंध रस स्पर्शनी जोगवा
यावो मळी ठे, ते कोण जाणे माराथी क्यारे र थशे, ए दूर थाय तो सारं एवी मनने
विपे चिंता उपजे ते थार्तध्यानी जीव कहिये, ए पहेलो जेद ॥ १॥ दवे बीजो जेद कहे
॥ मनोज्ञ शब्द रूप गंध रस स्पर्श शुज जोगवाए यावी मळ्यां ठे ते घणा दिवस रहे
तो सारं थाय, घर न थाय तो नीक एवो मनने विपे चिंता करे ते यातध्यानी जीव
कहिये, ए योजो नेद ॥२॥ शरीरने विपे थातंकादिक रोग यावी उपज्या ते श्वास ॥
खास २॥ ज्वर ३ ॥ दाद ४॥ कुक्षि शुस ५ ॥ जगंदर ६ ॥ हरस ॥ थजिरण ७ ॥
दृष्टिशूल ए॥ यरुचि १० थदिवेदना ११ ॥ कर्णवेदना १२ ।। कंमु १३॥ उदररोग १४ ॥
॥७७॥
कृष्टी रोग १५॥ पृष्टिशूस १६ ॥ ए १६ प्रकारना रोगनी पीमा घणी थायी उपनी तियारे ते जाणे के ए पयारे घर यशे, गम घणो घणो विसाप करे, ए जाय तो सारथाय पम तिये तेने थातध्यानी जीप कहिये, प विजो नेद ॥३॥ ५ इंजियना कामनोग विषय मुख खाया पाया पढेरवा योढवा ए थादि घणा थायो मळ्या ठे तेने गम जाणे के ते घर न थाय तो साम एम घणी घणी लासप मनमा याणे तेन यातयानी जीव कहिये, प चोथो भेद ॥ ४॥ए याभ्यानना ४ नेद कां ॥ इवे थार्तध्यानना लक्षण कहे ते ॥ कंदनता कहेता गाढे गाढे शब्दे करी रोवे याकंद शब्द करे ए, थार्तध्याननुं पहेलु पक्षण ॥ १ ॥ शोचनता कहेता शोध करे घेतो घेठो गासे हाय दश्ने घणो शोच करे, ए बीजु संक्षण ॥२॥ तिप्पणिया कहेता विजोग पमे कोइ वासी वस्तुनो थश्रुपाद फरे, दा हा!! मारी वस्तु गइ पम कहीने यश्रु पामे, पत्रीजु लक्षण ॥३॥ विलपनता फदेता विलाप करे, दीनपणुं धरे, अनेरा यागळ दीनपणुं नखि, ए चोयुं सक्षण ॥३॥ए ए घोल यातभ्याननां कह्यां ।। इति प्रथम याभ्यानाधिकारः ॥१॥ हवे घीजें रोष ध्या-
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पाया पदवीमा रोप्रापानमा यया ॥ प्रति मिी गद्रागिकारा॥2॥4. पानानंद | याला पिणा पाहा गाकिम सहित १२ ११ श्रापकना, १ श्राप फनी पमिगा, " महामग माणुना, १२ पनिमा निनी, शान दर्शन पारित्रमा सानी रदा, पपीतगमगी यादा यागपती, पतुधि नार्थना गुण कीर्णन कगा, पप्रथम नंद। १॥ मागविषय फाईनो संसारमादि जी मिध्यास १॥ ययन २॥ प्रमाद ३॥m || अगुज गोग५॥तया? पाप म्यानफ, कापनी हिंगा पा कारण गाणी, गाभागार्ग वामी संपर मार्ग यादग्यो, गेम जीवापान पामे,ग. पोगो नेद ॥२॥ पिणनिगम महंगा जीव ग रग करी शुनाशन गर्म उपगया लेने गुनागुन फांना उदपयो गुग कुरा गोगने नोगया गग रेप करयो नहि, ममनाप गली गयी परम सुगाilmy श्रीगो नंद ॥ ३॥ स्याविषय को खोकना थाकानी गया परिममतादि गंगगणना गया पत्रियना याकारनो पितो, जोया नेद ॥४॥ भगवान सदा फर ॥ यासारपि ॥ निसर्गनि २॥ गणानि ३ ॥ उपदेशगि ५ ॥ रोगा
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कामिक्या दिशेखेशी थवस्थाने विपे योगना झंधवाथी जेणे ते तथा थपाठा पळवानो सनाव के जेने विपे ते ५ ॥ हवे शुक्सध्यानना ५ लक्षण कहे ठे॥ विवेक १ ॥ व्युत्सर्ग २॥ श्रमदे ३॥ थसमाहिता ४ ॥ तेमां वियेफ कदेतां जीप पिकपणे चिंतये-थरे जीय। जीप काया जूदां वे एम जाणीने काया उपर ममता न थाणवी, ए फाया तो पुद्गल , विणशयानो सनाव ठे, ए प्रथम पक्षण कार्यु १ ॥ व्युत्सर्ग कहेता कायाने चोसरावाने फासग्ग करे, कायोत्सर्ग फरीने निकाचित कर्मने प्रोमे यथवा देवता, मनुष्य, तिर्यच संपंधि यनेक परिसद उपजे ते खमे यने धर्मथी मगाव्या मगे नहि, चळाव्या चळे नहि, सम्पक् प्रकारे ते खमे शुन परिणामे, ए वीजु पक्षण क{ २ ॥ यवदे कहेता थदो ! जीव रोगादिक थायीने उपन्या यका फायरपणं वेदे नहि, मोढं वगामे नहि, जीय तारा संच्या कर्म ते तारां उपराजेस , ते तो समजावे करीने खमे, ए त्रीजुं सक्षण कयु ३॥ संमोहिया कहेतां को वीजानी चक्रवर्ति, पळदेव, वासुदेव तथा देवतानी प्रति देखीने तथा परनी सुख साधवी देखीने मूळ थाणे नहि ॥ अरे जीव! जे नाव सबारे
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ध्याननी ४ थाणुपेहा कहे ते ॥ ययायागुपदा १ । यसुजाणुपेदा २॥ यातयनियागुपदा ३॥ रिपरिणामाणुपेदा ४ ॥ नेमां अयायाणुपहा कहता रे जीव! तुं पांच याश्रये करी समय समये चार थाय ते गवं विचारो थाश्रवथी निवर्तवु तथा यही जीवरागळेपयी जीवने पुग्य उपजे ते यथया रागळेपयी जुटीने ए जीव क्यारे मुक्ति जाशे, गर्बु चिंतये १॥ यसुनागुपदा कहेतां रे जीव ! काया तो यशुचिना नंमार वे तथा यशुचिए करीने उपनी ठे एम जाणीने यशुचि परिहरे, ए संसारनुं स्वरूप ए जाणीने जे गुज कर्मना अशुल थाय ठे व्यने यशुन कर्मना शुन्न थाय । तेणे करीने जीव नारे थाय ते ते क्यारे एवा शुन्नांशुल कर्मयो नूटोशुं प, ध्यान चिंतविए तो परम यानंद सुख पामोर २ ॥ ययंतबत्तियागुपदा कहतां ए. जीव तो थमर ठे, यजर ने, यसक्ष वे,यलपि , मरे नदि पण यायुष्य याश्री अनित्य ठे, नित्य नहि, रम जाणीने रे जीव! धर्मने विपे प्रमाद न करयो तथा नव करे ले तेनुं यनित्यपणो चिंतये ॥ नरक, तिर्यच, मनुष्य, देवता प ४ गतिर्नु अनित्यपणुं.चिंतवे एवं यनित्यपणुं जरत चक्ररर्चिए चिंतव्युं ॥ रे जोर ! एवी --
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देशबंध सर्वबंधना वोल॥ EPAEXPRGE प्रथम १२ वेकाणे उदारिक शरीर साजे । समुशय उदारिक शरीर १ ॥ समुगय एजिय २ ॥ ५ स्थावर ॥ ३ विगप्रिय १०॥ तिर्यच ११ ॥ मनुष्य १२ ॥ समुश्य उदारिक उदारिफना सर्वयंधपणे रहे तो जघा उत्०१ समय, यने उदारिकना देशधपणे रदेतो ज० १ समय, ते केम ? वायु तियेच मनुष्य उदारिकना पणीए वैकेय कर्यु होय थने उदारिक प्रवेश का प्रथम समय सर्वबंध करीने बळी उदारिफना देशबंधमां था. वीने एक समय रहीने मरे ते माटे ज० १ समय, उत्प ३ पव्यमा १ समय लगानी स्थिति १॥समुच्चय एकजियना सर्व बंधनी स्थिति ज० जण र समयनी, देशबंधनीज०१ समय, उत्। २२ हजार वर्षमा १ समय उणामी २॥ पृथ्वी पाणी ते वनस्पति, ३ विगोपियर ना सर्ववंधनी स्थिति जपज १ समयनी, देशबंधनी ज० १ खुखक नवमा३ समय उणानी, उत्० पोतपोताना थायुध्यमांथो १ समय लपानी ए॥ पाउकायना सर्वधनी स्थिति
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नत्र ३
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''initid माना एमाग
समय 01.न.म समय वाटना न समय मवरचना व ३ समय, नत०
२२ हजार ३५ने ? समय यधिकनु, देशवधनु याना जा १ ममयनु, त सर्वचधर्नु
उत्प थेतर्मुहूर्त्तनुं ते फेम ? उदारिक वाउकाय वक्रय करीने यंतर्मुहून
1८३॥
-- रहीने पळी उदारिकनो 'सर्वयंध करीने देशबंध थाय ते कारणे २ ॥ पृथ्वी पाणी तेउ यनस्पति, ३ विगळं प्रिय ए ना सर्वयंधर्नु थांतरं ज० खुमाग नव ३ समय उपार्नु, उत० पोतपोताना थायुष्य उपर १ समय यधिकनुं ॥ देशबंधनुं ज० १ समयनु, उत्०३ समयनुं ते २ समय बाटनाने १ समय सर्वबंधनो एवं ३ समयनु ए ॥ वायराना सर्व पंधर्नु थांतरं जा घुमागनय ३ समय उणा, उत्० ३ हजार वर्पने १ समय यधिकचें ॥ देशपंधर्नु ज० १ समयनु, उत्० यंतर्मुहूर्त्तनुं १०॥ तिर्यंच मनुष्यना सर्वबंधनू थांतरं ज० ग्गुमागनय ३ समय उणानुं, उत्० पूर्व कोमिने १ समय यधिकनुं ॥ देशबंधन यांतरु 70 १ समयनु, उत यंतर्मुहर्त्तनुं १२ ॥ ए पोतपोतानी जाति मांहि यांतलं पमेठे ॥ हवे विशेषांतर हार कद्दे ठे॥ एशिय मरीने नोएघिय याय वळी नोएजिय मरीने एक- जिप चाय तेना सर्वपंधनुं यांतरंज २ खुमागजव ३ समय उणानु, उत् वे हजार सागर कारानुं ॥ देशबंधनुं यात; जा खुमागनय १ समय यधिक, उत्प वे हजार सागर काळरानुं ॥ पृष्यी पाणी तेउ वाउ, ३ विगलें जिय तियच मनुष्य ए ए मरीने यनेरे मवचन ) । पमागना ना 11211 नाम जाय, जान पाता था नाम - 1 !' समय प्रणा110 प. पन 1 गत ' .२मय न. 140 बनस्पति पासान ॥ वन- मरा पनि कार 17। नाव नपान मन नम्पनि पाय तना सवयन ग. समय नाण'ने १० या कालापन यात ज० ग्वमाग तव । समय न तुम. टवकासन ॥ दव यदप पहत्वकार कह ॥ ) सबंधी थामा सारिकाना सवधक, न पहला ममयना न माट। ॥ तथ। उदारिकना यवं. धक. [शमसाहिया २ ॥ तथ। उदारिकना दंशवधक यमर-यानगुणा ३ ॥इति उदारिकना सम्बध देशबंधनु म्वरूप मपूर्ण ॥ थथ वक्रेयना सर्ववध देशवधनु स्वरूप कह ॥ समुच्चय वयना मयिधनी स्थिति ज० ! समयनी, उ० २ समयनी त केम ? कोई मनुष्य तथा निर्वच वैकेय मांमयुं । वैकेयनो पहेलो समय सर्वबंधनो करीने तेज समये मरे, मरीने देवता तया नारकीमां विप्रहगति विना उपजे तेवारे वीजे समये सर्वबंध करे ए रोते २ समय जापया ॥ देशपंधनी जप १ समयनी, उत्०३३ सागरमा १ समय उणानी॥ एप्रिय 1८४॥
'याउकाय १ तिर्यंच २ मनुष्य ३ ए ३ ना सर्वबंधनी जम् उ १ समयनी ॥ देशबंधनी जप १ समयनी, 3 अंतर्मुहर्तनी ॥ नारकी देवताना सर्वबंधनो जप न १ समयनी ॥ देशबंधनी ज० दश हजार वर्षमा ३ समय जणानी, उप ३३ सागरमा १ समय उणानी ॥ हवे यंतरद्वार कहे ॥ समुच्चय येक्रेयना सर्वबंधनुं यांतरं ज० १ समपर्नु, उत्० वन- स्पति कासवें ॥ देशबंधन यांतलं जण १ समय, उत्त वनस्पति कालवें ॥ बाउकाय ति. र्यच मनुप्यना चक्रेय शरीरना सर्ववंधन यांतरं जा धंतर्मुहूर्त्तनु, वानकायर्नु उ0 पन्योपमना यसंख्यातमा जागर्नु थांतलं, तिर्यच मनुष्य उ० प्रत्येक पूर्व कोमिनु ॥ पम देशपंधर्नु पण थंतर जाणवू ॥ए पोतपोतानी जातिमा यांतर पमे ॥ हवे विशेषांतरकार का ठे। एकजिय गरोने नोएजिय थाय वळी नोएप्रिय मरीने एप्रिय याय तेना स्वबंध यांत; जप थेतर्मुहूर्त, उत्प अनंतकासनुं । देशवधनुं यांतलं पण एमाज जाग:॥ बाउकाय र तिर्थच २ मनुष्य ३ ए ३ ना सर्वबंध देशबंधनू यांतरु ज० यंतर्मुह, २० वनस्पतिका अनूं ॥ गारकी देवताना सर्वबंधन यांतलं ज०१० हजार वर्ष ने यंतर्मुहूर्त या धकनु, ज० वन- स्पति कासवें ॥ देशपंधर्नु यांतलं पण एमज ॥ नारकी, १० जवनपति, १६ वायव्यंतर, XVEVEALEJ
)
देसवंध
सर्व
० यनमान :
माना जान.-'ना
)
धना
॥८५||
ज०
"मना
ज्योनिपी, वैमानिक देवलोक मुधी वयना मय नर पासवान
यनर्मुहर्न धिमनु. 30 अननका लन् । दटाव धन याना
चनःनि
कालनुं । नवमा देवताकर्थ। नव ग्रेवयक र घाना मक्य वन
जम्वा उपर पृथक वर्ष यधिकन न० ग्रनतकालन ॥ दटा घन यान:
ज० यनंनकालनें ॥ चार अन्नर विमानना मवचन *
वर्ष यधिक, ज० संग्यात मागग्न ॥ दरावयन यान पर प्रपन
गग्न ॥ सर्वार्थ सिझना सर्ववध दशवधन यान नय। ॥ दर अ५० का संद
॥ सर्वथी थामा वैक्रय शरीग्ना सवयधक । ॥ तथा दाम असम्यान ,गा २ ॥
तथी शबंधक यनंतगुणा ३ ॥२॥ इनि वक्रेयना दशवध सवरधनुं स्वरूप मपूण ॥ दव।
याहारकना देशवध सर्वबंधनुं स्वरूप कई ठे ॥ याहारकना सर्व बंधन। स्थिति जय न० १
समयनी, देशबंधकन स्थिति जा जा यंतर्मुहूर्तनी ॥ थाहारकना सर्वबंधन यांतलं ज० यंत.
मुहर्त्तनुं, उ० अर्ब पुद्गल परावर्तन देशे जणानुं ॥ हवे यक्ष्पबहुलधार कहे ते ॥ सर्वयो
गो गाना सर्वबंधक १ ॥ तेथी देशबंधक संख्यातगुणा ॥ तेथी यंधक थनंन.
,
,
॥८५॥
गुणा ३ ॥ ३ ॥ हवे तेजस् कार्मण- स्वरूप कहे वे ॥ तेजस् कामणना सर्वबंध नहि ॥ देशबंधना २ जेद ॥ यादि नहि यंत नहि ते थनव्य १ ॥ यादि नदियंत ते ते जव्य ॥. हवे पर्नु थपबहुत्व कहे ठे ॥ सर्वथी योमा यजव्य १ ॥ तेथो जव्य अनंत- गुणा २ ॥ सर्वथी योमा तेजस् कार्मणना यबंधक १ ॥ तेथी देशबंधक यनंतगुणा २ ॥ ५॥ दवे ११ बोसनुं यत्पबहुत्व कदे रे ॥ सर्वथी योमा थाहारकना सर्वबंधक १॥ तेथी थाहारकना देशबंधक संख्यातगुणा २ ॥ तेथी वेकेय शरीरना सर्वबंधक यसंख्यात- गुणा ३ ॥ तेथी वेकेयना देशबंधक यसंख्यातगुणा ४ ॥ तेथी तेजस् कार्मणना यबंधक यनंतगुणा ५ ॥ तेथी उदारिकना सर्वबंधक यनंतगुणा ६ ॥ तेयो उदारिकना यबंधक पिसेसाहिया ॥ तेथी उदारिकना देशबंधक असंख्यातगुणा ॥ तेथी तेजस् कार्म- पना देशबंधक विसेसाहिया ए ॥ तेयो वैकेयना अबंधक विसेसाहिया १० ॥ तेथो याहा. रकना यबंधक विसेसाहिया ११ ॥ इति देशबंध सर्वबंधना चोख संपूर्ण ॥ MONDA REGETAILSS 1 HTML
बोल.
मंख्याना अमंग्याताना वाल॥
संपा
तनो वि.
ख्याता
॥८६॥
थनयोगहार मृत्र म यमग्याना या याना अननाना २० नंद कद्या
म्तार कि.चित मात्र लग्यत । सग्यानाना नंद ।। जघन्य मंग्याता ॥ मयम संग्यानो
२॥ उनकृष्ट ग्याना || जद ॥ अम"याताना नव जद । जघन्य पग्ति अमग्यानी
१॥ मध्यम परिन यमायाता ॥ नघट परित अमर याना ३ ॥जघन्य जन अमन्याता ४ ॥
मध्यम जुन यमग्याना ॥ नष्ट जन यमर याता ६ ॥ जघन्य यमर याला असंग्याता
॥ मध्यम यमग्याना यमग्याना ॥ ननकट यमग्याना यमग्याना 0
ए नेद ॥ यनताना नंद ॥ जघन्य परित अनता १ ॥मयम परित यनंतो २ ॥
उत्कृष्ट परित यनंनो ३ ॥ जघन्य जुत्त यनना ४ ॥ मध्यम जुन यनंनो ५ ॥ उत्कृष्ट
जुत्त थनंतो ६ ॥ जघन्य यनंतो थनंतो 9 ॥ मध्यम यनंतो यनंतो ७ ॥ए जनेद ॥
संख्याताना ३ लेद, थसंख्याताना ए लेद, यनंताना नेद ॥ ए सर्व मळी २०
॥८६॥
नेद नामयो कथा । हवे विस्तारे वीस जेदनो थर्थ समजणपूर्वक कहे ते ॥ जघन्य संख्यातो ते वै १ ॥ मध्यम संन्यातो ते प्रण्थी मामीने उता संग्न्याता मांदेयी १ यौठो तेरसा मुधो मध्यम संख्यातो कदीम, एनां संख्यातां रूप धाय २ ॥ उरकष्टो संख्यातो कहे ते ॥ जंछीप प्रमाणे पालो कन्यो सर सबने दाणे सग मुभी गरीने पनी १ दाणो छोपे अने एक दाणो समुझे मुकतां मुकता सर्व पालाना कण खुटी जाय, पत्री जे होपसमुषे ब्लो दाणो आत्र्यो तेवमो मोटो चीजो पालो कल्पयो ते सरसक्ने दाणे जरीने वळी एक दाणा कीपसमुझे मुकता जे छीपसमुह सुधी वेदशा दाणो पहोंचे तेवको मोटो त्रीजी पालो कल्पयो । एका पाठा केटला कल्पया ? उत्तर-थसंक्षप्पा कहतां गएया न जाय पटला पाला १ए। व्यंकयो थधिक शिखा सहित सरसंबंकरी भरया ॥ पूरेपूरा शिखा सुधा जेटला पालाना कण तेटसो उत्कृष्ट । संख्यातो जाणयो । ३ नेद सं. ग्ल्याताना काया हवे यसरन्यातानाए नेद कहे जे उत्तयो संख्यातो ते उपर एक दाणो यधिक मुकीप त्यारे जघन्य परित थसंख्यातो थाय,ते उपरांत ज्यामुधी उरष्टापरित थस- -- EXEADSA
वोल.
रौप्पा
ना भर
ना
11८७॥
ग्यानामांर्थ। । थाती नन म यम पग्नि मग्याना यह ॥ २॥दव नत्कृष्टा परित थसंग्ख्या.
ना न बम थाय ? उनर जन्य पग्नि यमग्यानाना रूप जेटलां थयां ने नेटली जघन्य
परित यमर यातनं। गः।। मान 11 मामान पत्री महामांद गली मघात अन्यास
क.। ।। m या न म ' असा नाय ५ नं। गर्मी मामी. नेने चाग्वार गणनां
: पान १00 पना 100 पचा ६२५ ॥ ६२५ पंचा ३१२५ याय
५ ५५' तम जान्य परिन अमर यानन अघन्य परित
असम्यानगुणा करीए नेटलां
रप बाग तमाच॥ १५ ॥ टन तकृष्टो परित यसख्याता थाय
५:५५ ॥दव नष्टा परिन असम्याना कह्यो नमा । दाणा नांग्बीए, पटलं जघन्य
जुन अमर याना थाय एक श्रावलिकाना समय नटला जाणवा ४ ॥ ने उपरांत ज्या-
मुधी उतकृष्टा जन यमग्याताना तो नंदन नमा १ रूप योढुं त्यांसुधा सर्व मध्यम
जुत्त यमग्न्याना पाचमा नेद कही॥ ५ ॥ हव उत्कृष्टो जुत्त असंख्यातो कम
थाय ? उत्तर--जघन्य जुत्त असंन्याता चाथ नदे यावखिकाना समय कह्या, ।
तेने माहोमांहि गुणां करता जेटसा रूप थाय तेमा १ रूप थोतुं करीए
11८७
स्यारे उत्कृष्टो जुन यसंग्यातो कदीए ॥ एहो नेद ६ ॥ इये उत्कृष्टो जुत्त थसं- ग्यातो कहो तेमां १ रूप प्रक्षेपीए एटले सातमो नेद जघन्य थसंख्यातो थसंख्यातो चाय ॥ ते उपरांत ज्यांसुधी उत्कृष्टो यसंख्यातो थसंख्यातामा १ रूप यो तेने मध्यम यसंग्यातो थसंग्यातो कदीर॥पथाठमो नेद ॥ हवे उत्कृष्टो थसंख्यातो थसंख्यातो फेम थाय ? उत्तर-जघन्य थसंख्यातो थसंग्ग्यातो सातमो नेद ठे तेने मांदोमांहि गुणा फरतां जेटलां रूप थाय तेमा १ रूप यो करीए, त्यारे उत्क्रप्टो यसंख्यातो थसंग्ख्यातो थाय ॥ ए ए नेद श्रसंग्याताना काथा ॥ हवे यनंताना ७ नेद कदे ठे॥ जे उत्- कृष्टो असंख्यातो यसंग्यातो कायो, ते उपर १ रूप यधिक करीप, त्यारे जघन्य परित यनंतो थाय १॥ ते उपरांत ज्यासुधी उत्कृष्ट परित थनंतामांहि १ थोगे तेने मायम परित थनंतो कदीए २॥ दये उत्कृप्टो परित यनंतो केम थाय ? उत्तर-जघन्य परित अनंतो पहेलो भेद कायो, नेने मांदोमांदि गुणा करता जेटलां रूप थाय ते मध्ये १ रूप यो करीए, त्यारे उत्कृप्टी परित यनंतो थाय ३॥ हवे जघन्य परित थनंतो
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11८८॥
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११ PR HI7 नन जयन्य जन नंता चाया
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. 1 47 1 311 का तन माहामांदिणा
- 1 : +} }ा अनता थाय ६॥
द (4) चार घन्य अननानना थाय
'' . १२.३ १३१ अनना पर उस ५ मा त म पातमा अनना मध्ये जाणवां ।।
म. अनसनता" ।। || नवमा अनना नया ॥ प्रहरण मध्य न यता
4 व मन नया ॥
पनि सयाना यसंख्याता अनंताना बोस संपूर्ण ।
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पांच शरीरना बोल॥ थथ पन्नवणा सूचना पद १ थी १६ हारे ५ शरीरना बोस सिग्यते ॥ गादा-नाम १ ऽत्य २ संगण ३ सामी, उग्गाहणा ५ पुग्गस नयण ६ संजोयणा ॥ दव्य त पाएसए दव्यपगसम्याए १०, मुहम बायर ११ जग्गाहणा यप्पाबहु १२ ॥१॥ पयोयण १३ विसय १४ गिय १५, यंतर १६ सोमस दारा श्मे ॥ पण सरीरोवरि एए, उत्तारेयव्या निनण युझिदि ॥२॥ ए १६ हार । तेमां प्रथम नामधार कदे ॥ उदारिक शरीर १ ॥ चक्रेय शरीर २॥
पौर - ॥८॥ . .: : । ३ गयकार धार। नया सकतन (12 : .. • पनन । पान। शानि. नया विजयाग नवा कप । २ . वाचक । ॥ लपवायकः ॥ .याय नारा बनानदाय inाय मनपर नियचन हाय २ ॥ २ ॥ या- दाकारत फन का नोट प्रवधार) मा नायकर महाराजन। ऋदि दग्यवा जए। नया साय टाळवा निमिन उनम पुदगला ग्रहान ज० मुढा हाथनु, ३० १ हाथर्नु शरीर में करे तेने थाहारक शरीर कहोए ते स्फटिकनी पर यति निर्मळ, कोइ न देखे एवु २ दोष ३ ॥ तेजस् शरीर ते तेजना पुद्गले निष्पन्न तेने तेजस् शरीर कहीए ॥ यदृश्य जुत थाहारने पचाये तथा सब्धिवंत सेजुलेश्या मुके तेने तेजस् शरीर कहीए ३ ॥
कार्मण शरीर ते केने कहीए ? कर्म पुद्गलथी निपज्युं तेने कार्मण शरीर कहीए॥ जना उदयथी जीव पुद्गल ग्रहीने ते कर्मादिरूपपणे परिणमावे तथा याहारने खेंचे तेने कार्मण शरीर कहीए ५॥२॥ हवे त्रीजु संगणधार कहे ठे॥ उदारिक शरीरमा संगण ६॥१॥ येक्रेय शरीरमा देवताने संगण एक समचठरंस ॥ नारकीमा संगण एक हुँ । मनुष्य तिर्यचमा वैकेय करतां समचउरंस तथा नाना प्रकारचें ॥ वायुकायनां वैकेयमा एक हुंम ॥२॥ याहारक शरीरमा संगण १ समचउरंस ॥ ३ ॥ तेजस् कामणमा ६ संवाण साने ॥४५॥३॥ चोधु स्वामीद्वार कदे । उदारिक शरीरना स्वामी मनुष्य तिर्यच॥ क्रेय शरीरना स्वामी देवता नारकी तथा सब्धिप्रत्ययिक मनुष्य तिर्यच २॥ याहारक शरी. रना स्वामी चउद पूर्वी साधु ३ ॥ तजस् कार्मण शरीरना स्वामी सर्व संसारी जीव ४ ॥५ ॥ ४ ॥ हवे पांचमुं अवगाहनाधार कहे ते ॥ उदारिक शरीरनी यवगादना जघन्य यंगुसनो थसंख्यातमो जाग, उत्कृष्टि हजार जोजन कारो१॥ वैकेय शरीरनी यवगा- हना जयप्रत्ययिक जघन्य यंगुसनो असंख्यातमो नाग, उधनुप्यनी ॥ लब्धि-
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तिथी तेजस् कार्मष दव्यपाए दोवितुला ने उदारिकयो थनंतपाथधिक जाहवेन. वर्मु पएसंग्याए हार कहे ।। सर्वधी योमा थाहारकना प्रदेश १॥ तेथी येक्रेयना प्रदेश यसं. स्यातगुणा २॥ तेथी उदारिकना प्रदेश यसंख्यातगुणा ३॥ तेथी तेजस्ना प्रदेश यनंत- गुणा ४ ॥ तेथी कार्मणना प्रदेश थनंतगुणा ५ ए ॥ दशमुं दवपरसम्याए छार कहे ॥ सर्वयो थोमा थाहारकना दवया १॥ तेयो चक्रपना दवण्या असंन्यातगुणा २॥ तेथी उदारिफना दवग्या थसंख्यातगुणा ३ ॥ तेथी याहारकना परसठया यसंख्यात. गुणा ४॥ तेथी केयना पएसठयाँ श्यसंग्ड्यातगुणा ५ ॥ तेयो उदारिकना पाएसटया असल्पातगुणा ६ ॥ तेथी तेजस् कार्मण दोधितुमाने दाम्या यनंतगुणा 9-10 तेथी तेस्ना पएसया यनंतगुणा ए ॥ तेथी कामना पासव्या अनंत गुणा १० ॥१०॥ थग्यार, सूक्ष्म याद हार कद्दे वे॥सर्वयो थोमायादर पुगज नदारिका १॥ तेयी वेकेय- नां पुद्गल सूक्ष्म २ ॥ तेथी थाहारकना पुद्गल सूदम ३ ॥ तेथी तेजस्ना पुदगल सूक्ष्म ४॥ तेथो कार्मणना पुद्गल सूक्ष्म ५ ॥ ११ ॥ इये बार अवगाहनानो यक्ष्पाबहुत
10
रोल.
कार पाहे ॥ सर्दयो धोमी उदारिकनी जपन्य यवगाहना १॥ तेथो तेजस् कार्मणनो
गांदोमादि तुटर ने जपन्य थवगाहनां विसेसाहिया ३ ॥ तेथी वैकेयनो जघन्य थवगा.
हना थसंग्यातगुणी ४॥ तेषी थाहारकनी जघन्य अवगाहना यसंख्यातगुणी ५॥
तेषी शादाकनी उत्प्टी थवगाहना विसेसाहिया ६ ॥ तेथी उदारिकनी उत्कृष्टी
थपगादना संग्यातगुणी ॥ तेथी केयनी उत्कृष्टी थवगाहना संग्ग्यातगुणी ॥
तेषी तेजस फार्मणनी मांदोमांहि तुष्य ने उत्० यवगाहना थसंख्यातगुणी १० ॥ १२॥
हवं तेरमुं प्रयोजनधार कहे ते ॥ उदारिकनुं प्रयोजन मुक्ति जावानुं १॥ वैकेयर्नु प्रयो.
जन धेनेक रूप करवानुं २ ॥ याहारकनुं प्रयोजन संशय टाळवा, ३ ॥ तेजस्नु
प्रयोजन थाहार पचावयानुं ४ ॥ कार्मणतुं प्रयोजन याहार खेंचवानू थने थाम कर्म
प्रहण करीने संसार परिवमण करवानुं ५ ॥१३॥ चउदमुं विषयहार कहे वे ॥ उदा.
रिकनो विषय पररमा रुचक छीपताई १॥ वैक्रेयनो विषय यसंख्याता छोप समुजताई
२॥ थाहारकनो विषय थढी छीपताई ३॥ तेजस् कार्मणनो विषय सर्व लोकमां जवानो
॥९॥
४-५ ॥ १४ ॥ पंदर# स्थितिहार कहे ठे ॥ उदारिकनी स्थिति जघन्य थंतर्मुहूर्तनी, उतष्यष्टि ३ पट्योपमनी १ ॥ येक्रेयनी जघन्य यंतर्मुहूर्तनी, उत्कृष्टि ३३ सागरनी २॥ थाहारकनी ज० उ० अंतर्मुहूर्तनी ३॥ तेजम् कामगनी स्थिति पे प्रकारनी ॥थणाश्या श्यपजवसीया ते थनव्य थाधि थादि नयी ने यंत पणा नथी थने यणाश्या सपजर. सोया ते जव्य थाधि थादि नयो ने थंत ठे ॥ १५ ॥ ये सोसमुं यंतरद्वार कहे ॥ उदारिकर्नु थांत पसे तो जघन्य थंतर्मुहूर्त्तनु, उत्प तेत्रीस सागरोपमनुं १॥ वैकेप शारीरर्नु थांतम पम तो जा यंतर्मुहूर्त, उत्। श्रनंतो काय यावत् वणस्सईकासो २ ॥ थाहारकनुं थांतरं पमे तो जण यंतर्मुहर्तन, उत्त या पुद्गल परावर्तन देशे उणानुं ३ ।। तेजस् कार्मणर्नु थांतरं नयी ४-५॥ तथा यंतर वीजा प्रकारे ॥ थाहारिक शरीर वर्जि ४ शरीर खोकमा सदा खाने पण तेनुं अंतर पमतुं नयो, यने थाहारिक शरोरनु यंतर पमे तो उत्कृष्ट ६ मासनु थंतर पमे ॥ १६ ॥ इति पांच शरीना बोल संपूर्ण ॥
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पाच इंद्रिय ॥
अपघी परषणा सूचना पदरमा पदना पदे या उद्देशाथी पांच इंडियना यांस सिम्यते ॥
गापा ॥ नाम १ संवगण २ पादयं ३, पुदत्तं ४ कश्पएस ५ उगाढे ६॥
थप्पायहु ७ पुट पवि ए, विरुय १० यणागार ११ थाहारे १२ ॥१॥
इवे पम नाम हार कई वे ॥ १ श्रावेजिय, २ चतुइंडिय, ३ प्राणेजिय, ४ रसें.
प्रिय, ५ स्पोधिय ॥१॥
दो योजु संस्थान द्वार कहे ते॥१थोत्रप्रियर्नु संस्थान कदंव गृहनां छल सरा,
२ पनियर्नु संस्थान मसूरनो दाळ यया यर्थ चंप्रमा सरग्यु, ३ घाणेजियनुं संस्थान.
तिमुक पुष्प थषमा धमए सरग्यु, ४ रसेंजियनुं संस्थान ठरपतानी धार सरखं, ५
पोनिपतुं संस्थान नाना प्रकारचें ॥२॥
हो श्रोई बाप्यार कहे डे । पाचे जियर्नु जागरणुं जघन्य उत्कृष्ट यांगुमना)
॥९२॥
यसंख्यातमा नागनुं ॥३॥ हवे चोडुं पृथक्त्वधार कहे वे ॥ श्रोत्र, २ चटु ने ३ माण पत्रण जियतुं सांवपणुं जघन्य उत्कृष्ट यांगुसना असंख्यातमा नागर्नु, ३ रसेजियतुं सांयपणुं जघन्य यांरखना यसंख्यातमा नाग, उत्कृष्ट पृथक् ते २ थी ए यागुतनुं । ॥ स्पर्शघियतुं सांवपणुं जघन्य थांगुसना यसंख्यातमा नागर्नु, उत्कृष्ट हजार योजन कारुं ५॥४॥ हवे पांच, प्रदेश द्वार कहे ते ॥ पांच इंजियना अनंत अनंत प्रदेश ॥ ५ ॥ हवे छं यवगाह झार कहे . पांच इंजिय ठे तेमां दरेफ इंघिय याकाशना प्रदेश असंख्यात असंख्यातने थवगाही रहेस ते ॥ दरेक इंजियना यनंत थनंत कर्कश यने नारे स्पर्श ठे, तेम अनंत अनंत हसका यने मृड स्पर्श ठे, ए स्थूल दृष्टिनी यपेक्षाए जाणवू ॥६॥ हवे सातमुं यत्पबहुत्व धार कहे , तेमा प्रथम प्रदेशनो यल्पबहुल ॥ सर्वथा थोमा चा इंडियना प्रदेश १ ॥ तेथो श्रोभियना प्रदेश संख्घातगुणा २॥ तेथी घाणे- पांच प्रियना प्रदेश संख्यातगुणा ३॥ तेथी सेंडियना प्रदेश असंख्यातगुणा ४॥ तेथी स्पर्शे- जियना प्रदेश संख्यातगुणा ५॥ पीजो इंजियोनो याकाश प्रदेश यवगाही रह्यानो यक्ष्पबहुत्व ॥ सर्वथो योमा चतु इंजियना थवगाया याकाश प्रदेश १ ॥ तेथी श्रोभियना यवगाह्या याकाश प्रदेश संख्यातगुणा २ ॥ तथा प्राणेजियना अवगाह्या याकाश प्रदेश संख्यातगुणा ३ ॥ तेथी रसेंजियना यवगाह्या याकाश प्रदेश यसंख्यातगुणा ४॥ तेथी स्पर्शजियना यवगाह्या याकाश प्रदेश संख्यातगुणा ५ ॥ हो विजो इंजियोना प्रदेश यने थाकाश प्रदेशने थवगाही रहेख इंघियो ए वेनो साये यक्ष्पबहुत्व ॥सर्वथी थोमा चाइजियना व्यवगाह्य याकाश प्रदेश १ ॥ तेथो श्रोजियना थवगाह्य संख्यातगुणा २॥ तेथी घाणेजियना यवगाह्य संख्यातगुणा ३॥ तेथी रसेंजियना थवगाय यसंख्यांतगुणा ४ ॥ तेथी स्पोधियना यवगाह्य संख्यातगुणा इंजियना प्रदेश अनंतगुणा ६ ॥ तेथी श्रोत्रेजियना प्रदेश संख्यातगुणा ॥ तेथी घा- ॥ तेथी चट गंजियना प्रदेश संख्यातगुणा ॥ तेथी सेंजियना प्रदेश यसंख्यातगुणा ए ॥ तेथी प शभियना प्रदेश संग्यातगुणा १० ॥ हये चोयो इंजियोमा कर्कश नारे स्पर्शनो याप बहुल ॥ सर्वथी योमा चा इंडित यना कर्कश नारे स्पर्श १ ॥ तेथो श्रोत्रंभियना यनंतगुणा २ ॥ तेथी प्रापंजियना थनंतगुणा ३ ॥ तेथी रसेंजियना थनंतगुणा ॥ तेथो स्पर्शजियनाथनंतगुणा ५॥ सर्व- थी थोमा स्पशेजियना सघुमृदु स्पर्श १॥ तेथी रसेंद्रियना थनंत गुन्या २ तेथी घाणेजियना यनंतगुणा ३ ॥ तेथी श्रोत्रंभियना यनंतगुणा ४ ॥ तेथी चा इंजियना यनंतगुणा५ ॥ हवे ठगो इंजियोमा कर्कश १ नारे २ सघु ३ मृ५ए चारे स्पर्शनो साये यदपबहुत्व सर्ययी योमा च इंजियना कर्कश नारे स्पर्श १ ॥ तेथी श्रोत्रजियना कर्कश नारे स्पर्श यनंत गुणा २ ॥ तेथी घाणेजियना यनंतगुणा ३॥ तेथी रसेंपियना अनंतगुणा U॥ तेथी स्पर्शधियना यनंतगुणा ५॥ तेथी स्पर्शेजियना लघु मृदु स्पर्श यनंतगुणा ६॥ तेथी रसेंजियना लघु मृ स्पर्श चनंतगुणा ॥ तेथी घाणेजियना लघु मृड EX पाप इंदिय. ॥१४॥ स्पर्श यनंतगुणा ॥ तेथी श्रोभियना लघु मृा स्पर्श यनंतगुणा॥ ए॥ तेथी चक्षु. इंजियना लघु मृतु स्पर्श थनंतगुणा १० ॥७॥ हये थाउमुं पृष्ट द्वार कहे ठे ॥ जियोने जे पुद्गलो यावी स्पशे ते पुद्गलोने इजियो ग्रहे ते पृष्ट कहीए. पांच इंजियोमा चढ इंडिय विना चार इंजियोने पुद्गलो थावी स्पर्श ठे पण चतु इंडियने यात्री स्पर्शता नयो ।॥ ७॥ हवे नवमुं प्रविष्ट कार कहे ठे. जे इंजियोने विपे थनिमुख (सामां) पुद्गलो थाने प्रवेश करे तेने प्रविष्ट कहीए ॥ पांच प्रियमा चक्छु इंजिय विना चार इंडिय प्रविष्ट वे ने चतु इंघिय यप्रविष्ट ठे॥ ए॥ हवे दशमुं विपयहार कहे ठे॥ पांचे इंजियोनो जघन्य विषय यांगुलना थसं. ख्यातमा जागनो, उत्कृष्ट जुदो जुदो कहे ठे । एकन्जियनो स्पर्शजियनो विपय ४०० धनुष्य, येनियनो रसेंशियनो ६४ धनुप्य बने स्पर्श शियनो ०७० धनुप्यनो, तेइंडियनो माणेजियनो १०० धनुप्य, रसेंजियनो १२० धनुष्य अने स्पर्शजियनो १६०० धनुष्यनो, परिनिपनी नईयिनी २०५४ धनुष्यनो, प्राणेजियनो २०० धनुन्यनो, रसंडियनो २५६ धनुन्यनो श्रने स्पोजियनो ३२०० धनुष्यनो, असंही पंडियनी श्रीशियनो। गांजननी, पहाईडियनो धनुष्यनी, मागछियनो४०० धनुप्पनो,रसेंजियनो ५१२धनु- गनीयन स्पर्शजियन। ६५०० धनुष्यनो, संदीपननियनां श्रोत्रंडियनो १२ योजननी, चक्षुः इंजियनो १साय योजन कारानी, प्राणजियनो ए योजननो, रसेंजियनो ए योजननो, पजियनीय योजना ॥ १० ॥ ६ अगसामु अनाकार (उपयोग) हार कंद ठे, तमा प्रथम जघन्य उपयोगकाळनो यरूपयगुररामर्षयी चोमो चइंडियनो जघन्य उपयोगकाळ १॥ तेथोश्रोत्रंडियनो जघन्य उपयोगफाल विशेषाधिक २॥ यो प्राणजियनी जघन्य उपयोगकाळ विशेषाधिक ३ ॥ तेशी सप्रिनो जघन्य उपयोगकाळ विशेषाधिक ४ ॥ तेथी स्पशेजियनी जघन्य उप- पोगकाळ विशेषाधिक ५॥ हो पानो उरहन्ट उपयोगकाळनाथम्पयदुत्व ।। सर्ययो योमो चक्षुइंजियनो उत्कृष्ट ZE7
उपागा।।
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दिय.
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... (वाधिक २ ॥ तथक
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14
-.- [यना नट नपयोग.
पान
'' या विडायविक ५ ॥
4पवयन कद न.
सरथा धा ::रयन उपन्ययावाद
॥ तथ। भाजयिनो जघन्य
उपयाग12 ३:11. ५ ॥ नथा प्राण ऽयना जघन्य नपयोगकाळ विशेषाधिक ३ ।।
१। यिनो जघन्य उपयोगकाल. विशेषाधिक ४ ॥ तथा स्पर्शपियना जघन्य नप.
योगकाळ विशेषाधिक ५ ॥ तथं। चक्षुईडियनो उत्कृष्ट उपयोगकाळ विशेषाधिक ६ ।।
ने। प्रायिनी जप्ट उपयोगका विशेषाधिक ॥ तेथी प्राणेभियनो उत्कृष्ट उप-
योगार विशेषाधिक ७॥ तेथी रसेजियनी उत्कृष्ट उपयोगकाळ विशेषाधिक ए॥ तेया
स्पायना उत्तप्प उपयोगकाळ विशेषाधिक १० ॥ १९॥
हर पार{ थाहारहार कद्दे ठे श्रोत्रं प्रिय थादि पांच इंजियो ऽव्ययी यनंत
BHAR
॥९॥
प्रदेशों स्कंधनो थाहार करे यर्थात् ग्रहण करे १॥ देवथी असंख्यात थाकाशप्रदेशने थवगाही रदेख पुद्गलने ग्रहण करे २ ॥ कालथी एक समययी मामो संन्यात सम- यनी स्थितियाळा पुदगलने पहण करे ३ ॥ जावथको वर्ण गंध रस यने स्पर्शवाळा पुद्गलोने थादारपणे ग्रहण करे । ॥ १२ ॥ इति पांच इंघियना बोल संपूर्ण ॥ पुदगल परावर्तन । यथ श्री जगवती शतक १२ माना उद्देशा चोथाथी पुद्गलपरावर्तनना बोल लिख्यते।। गाया-नाम १ गुण र संखा ३ कालं ४, कालोवमं ५ च कालयप्पाबहु ६ ॥ पुग्गस मत पुग्गल , पुग्गल कारणे अप्पायहु ॥ १ ॥ प्रथम नामहार कहे ठे ॥ पुद्गल परावर्तननां नाम ॥ उदारिक पुद्गल पराव.
रावनेन म मन ॥ पोय पु० २ ॥ तंजम पु० ३ ॥ कार्मण पु० ४ ॥ मन पु० ५ ॥ वचन पु० ६ ॥ वालोभाल १० ॥१॥६वे या गुणहार कहे ते ॥ सोकमां जेटया पुदगल ने मई सरपणे पनि मुक त्यार र उदारिकन पुगत परावर्नन थाय ॥ पम जग परावसन जाणवा ॥ ॥ दव (वन सख्याहार कद ठे ॥ ते संन्याना चार पोप. प्रथम बोस एक जीव थाधि. याज्ञो योस घणा जीव याश्रि. जीजी बोस एक जोर मादामाद थाधि. चाधी वांप घणा जीव मांदोमाद यानि ॥ हवं तेमां संख्यानो प्रथम बोर कदे । जे एक वचने एक नारकीने जीव पूर्व उदारिक पुद्गल परावर्तन शनी २ वा कोपा थने थागळ कोइ करो, कोइ नहि करशे ॥ जे करशे ते ज० १-१-१. जयनना करा॥ एम साने कड़वां ॥ एम यावत् वैमानिक देवने जीवे पूर्व उमारिष पुगा पगवर्नन थनती यनंती वार कीयां यने यागळ कोश करशे, कोहनदि का॥ करो ते ज० १-२-३, उत्० यनतां करो ॥ एम साने कद्देवां। एम एक वचन १६० प्रश्न पाय ॥ २ ॥ हवे संख्याना बोजो वोक्ष कदे ॥ पहुवचने ९६॥
सर्व नारकोने जीवे पूर्व उदारिक पुदगल परावर्तन यनंतां कोर्धा यने घणा नारको यागळ थनंता करशे एम यावत् सात पुद्गल परावर्तन कहेवां । गम यावत् सर्व वैमा- निक देवने जो कोधां ॥ एम १६७ प्रश्न थाय ॥ एवं २ संख्याना यश्ने ३३६ प्रश्न याय ॥ ए संख्याना २ घोल कहा ॥ ३॥ हवे संख्यानो त्रीजो बोल कहे ॥ एक नारकीने जीये नारकोपणे पूर्व उदारिक पुद्गल परावर्तन नथी कीधां, यागळ पण नदि करे १ ॥ थने एक नारकीने जीवे नारकीपणे पूर्व केय पुद्गल परावर्तन अनंतां कोधां, थागळे कोई करदो ने कोई नदि करशे अने जे करशे ते ज०१-५-३, उत्त यनंता करशे ॥ एम यावत् श्वासोश्वास पुद्गल परावर्तन सुधी फहे ॥ एम यावत् एक नारकोये मानिक देवपणे ॥ पी जे जे दमके जे जे पुद्गल परावर्तन होय तेनो हा कहीए यने न दोय तेनो ना कहीए, एम एक नारकीनो दमक २४ दंमके उतारतां १६० प्रश्न याय, तेम २४ दमक २५ दमके उतारया ॥ एक वचने ४०३५ प्रश्न थाय ॥ ए संख्यानो त्रीजो बोल कायो ४ ॥ हवे संख्यानो चोयो योस कहे ठे ॥ बहु वचने सर्व नारकीये नारकीपणे पूर्वे
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3581 सर्व नारफोने जीये पूर्य उदारिक पुतुगल परावर्तन यनंता कोधी यने घणा नारकी यागळ अनंता फरशे एम यावत् सात पुद्गल परावर्तन फदेयां ॥ गम गायत् सर्व वैमा- निक देवने जीये कीधा ॥ एम १६० प्रश्न थाय ॥ एवं २ संशयाना यश्ने ३३३ प्रश्न थाय ॥ ए. संगयाना २ पोत काया ॥ ३॥ ये संग्यानो श्रीजो वोल फहे ॥ एफ नारकीने जीये नारकोपणे पूर्य उदारिफ पुद्गल परापर्जन नयी कीधा, यागळ पण नहि करे । ॥ थने पफ नारफीने जीये नारकीपणे पूर्व येक्रेय पुद्गल परावर्तन थनंता फोधा, यागळे कोई करशे ने फोई नदि करो यने जे करशे ते ज०१-२-३, उत्० यानंता फरो ॥ एम यावत् श्वासोश्वास पुद्गल परावर्तन सुधी कहे ॥ एम यापत् एक नारकीये वैमानिक देवपणे ॥ पी जे जे दंमके जे जे पुद्गल परावर्तन होय तेनो हा कदीप थने न होय तेनी ना कहोग, एम एक नारकोनो दमक २५ दंमके उतारता १६७ प्रश्न याय, तेम २५ दंझक २४ दमके उतारया ॥ एक वचने ४०३२ प्रश्न याय || ए संख्यानो तीजो घोल फहयो । ॥ इपे संख्यानो चोथो घोल कहे ठे ॥ पहु वचने सर्व नारकीये नारकीपणे पूर्वे 358836938 पांच ॥१७॥ उदारिक पुद्गल परावर्तन नथी कीधा यने यागले पण नहि करे १॥ यने सर्व नारकीये नारकीपणे पूर्व वैकेय पुद्गल परावर्तन यनंता कोधां अने थागळ पण घणा नारकी अ. नंता करदो २ ॥ एम यावत् श्वासोश्वास मुधी कहेवू । एम यावत् सर्व नारकीये वैमानिक देवपणे १६० प्रश्न थाय॥ एम २५ दमके २४ दंगक बहु वचने उतारता ४०३२ प्रश्न याय॥ एम एक वचन ने यहु वचनना जेगा करतां ६४ प्रश्न थाय ॥ ए संख्याहारनो चौथो पोस करो।चारे योजना मळीने कुल संख्या ७० नांगा थया ॥ हवे एनो विशेप खु. सासो कदे ठे॥ सर्व जीवे उदारिक पुद्गल परावर्तन १० दमके यनंती श्वार कीधा ते १० दमक कदे ॥ ५ एजिय ॥ ३ विगलेंजिय ॥ तिर्यच पंजिय ॥ मनुष्य ॥ ए १० दंग. कने विष कीधां ।। वैक्रेय पुद्गल परावर्तन १७ दंगके यनंती २ वार कीधा ते १७ दंगक कहे ॥ नारकी १॥ दश नवनपति १० ॥ वायुनो १॥ संझी तिर्यच पंचेंजिय प्रजातानो १॥ संझो मनुष्य प्रजातानो १॥ वाणव्यंतर.१ ॥ ज्योतिषी १॥ वैमानिक १॥ ए १७ दमकने विषे कोषां ।। सेजस्-१ ॥ कार्मल २॥ श्वासोश्वास ३ ॥ पुद्गल परावर्तन २४ दमके " -- यनंती.अनंती.बार कोर्धा ॥ मन पुदगल परावर्तन संज्ञा पंचेंद्रिय प्रजासाना १६.दमकने विपश्यनंती थनंतीवार कीयां ॥ वचन पुद्गल पगवर्तन ५ एप्रिय पर्जिने शेप, १५ दमके थनंती.धनंतीवार कीधां ॥ग संख्यान झार चार,योसे संपूर्ण ॥ ३॥. इये चोयुं कावधार कहे ॥ यनंतां कासचक मंस वदी जाय, त्यार, एक उदारिक पुद्गल परावर्तन.याय ।। एम. पुद्गल परावर्तन जाणयां ॥ ४ ॥ दरे.पांच, कालनी उपमान. द्वार कहे ते ॥ अनंत सूक्ष्म परमाणुए एक व्यवहार परमाणु नापजे १ ॥ अनंत व्यवहार परमाणुए एक उत्सनसनियो नीपजे २ ॥ थाउ उसनसनिये एक, सन्दसनीयो नीपजे ३ ॥ थान सन्ह. निगे गफ उरणु नीपजे ४॥ याव रेगुप एक सरेणु नीपजे ५ ॥ यात त्रसरेणुए पारपरीण नीपजे ६ ॥ याउ स्यरेणुए एक देवकुरु उत्तरकुरु क्षेत्रना मनुष्यनी वातान mily ॥ पान तासाने एक दरियास रम्यक्वास क्षेत्रना मनुष्यनो बाक्षाय नीपजे ॥ माय मागे रणवय देवना मनुप्यनो वासाय नोपजे ए ॥ याव वाला पूर्व धिम गतिलो पालाम नोपजे १० ॥ ७ वाला १ खिख नोपजे ॥ तेथी
इंद्रिय.
तीये । जु नीपजे ॥ ७ जुरा । जब मध्य नाग नीपले ।। जय मध्य नागे । उचित
थंगुप्त निपजे ॥ ६ न्निन यगृत 'गन पर निपजे ॥ व पंग विद्वत्थ
निपजे ॥ च विथ एक दाय (नप ॥ व दाथ कक्ष निपज ॥ व कदिा
धनुष निपने ॥ दजार धनुष मा निपंज । चार गाना । जोजन निपजे ॥ तमा
१जोजन प्रमाण ला पद 17।
नाना । चाप्ताग्रना यमग्याना बम
कल्पीन कार बाजाग्र कृ. 1 जान ॥ पनी ने उपर चक्रवत्यादिकन
कटक चाल्य जाय. नापण न घालाय नम नहर नया गगा नदीना प्रवाह उपरथी चाल
तो एक रज पाण नाणाय नदि तयाग्निन दर पm न कळे ॥रावा कुवो नामीन नए
पछी त कुवामाथ। मा मा वष एम. पालाय काढ॥ ॥ न वपन लक्षण तथा मान कह
॥जे थम्ग्याना समय र । यावलका थाय ॥ सन्यानि यावलिकाये
१ नश्वास थाय ॥ तम सम्यानि यातिकार । निःश्वास थाय ॥ १ नश्वास र निःश्वास
नेगा यश्ने एक प्राण थाय || सात प्राण १ स्तोक थाय ॥ सात स्तोके १ सय थाय ॥
यत्यार
॥९८॥
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पोप परापरीन धाय ॥ ५॥ एषा थनंतां मन पुगत परावर्तन वही जाय, त्यारे १ वचन पुद् गत परावर्तन थाय ६॥ एषां यनंतां पचन पुद्गल परावर्तन वही जाय, त्यारे १ वैकेय पुद्गल परावर्तन थाय ॥ ६॥ इवे सातमु पुद्गल मध्ये पुगतनुं हार कहे रे ॥ एक फार्म पुगस परावर्तनमादि थनंतां कालचक वही जाय १ ॥ एक तैजस पुद्गल परावर्तनमांदि थनंतां कार्मण पुद्गल परावर्तन बहो जाय २॥ एक उदारिक पुद्गल पराव- नमादि अनंतां तजस् पुद्गल परावर्जन वही जाय ३ ॥ एक श्वासोश्वास पुद्गल परा- पर्तनमादि थनंता उदारिक पुद्गल परावर्तन वदी जाय ४ ॥ एक मन पुद्गल पराव ननमादि अनंतां श्वासोश्वास पुद्गल परावर्तन बद्दी जाय ५ ॥ एक वचन पुद्गल परा पर्ननमांदि थनंता मन पुद्गत परावर्तन वदी जाय ६॥ एक वैक्रेय पुद्गल परावर्तनमादि यनतां वचन पुद्गल परावर्चन वही जाय ॥ ॥ हवे यायल्पबदुखधार कहें।। सर्वयो योगा जीवे वैकेय पुद्गल परावर्जन' कीयां १ ॥ तेथी यनंतगुणा यधिक जीवे पनि पुद्गल परावर्चन कीयां २ ॥ तेथी.यनंतगुणा थधिकं जीवे मन पुद्गल परावर्तन TIVENEW ॥९॥ ....
णामिकी युझिते जेम जेम यय परिणमे तेम तेम बहुश्रुत थाय ४ ॥ श्रुतनिश्रितना ४ नेद ॥ ययपद १ ॥ श्हा २ ॥ ययाय ३ ॥ यने धारणा ४ ॥ तेमां याद ते निर्देशन यशके तेयो रोते पदार्थना सामान्य यंशनुं ग्रहण करवू ते १ ॥ गृहीत थर्थनी. पोतो. चना करयो ते श्दा २ ॥ अयरहित यने इहित यर्थनो निश्चय करवो ते श्रयाय ॥ जेमके या पाळक ॥ या गाय दे श्यादि ३ ॥ निश्चित थर्थने धारी राखयो ते धारणा ४॥ ये भेद ॥ व्यंजनायग्रह १ ॥ थने अर्थावमह २॥ पदार्थनो प्रथम समये थ- ययमहना व्य संबंधरुप घोध थाय ते व्यंजनावग्रह १॥ अने व्यक्त संबंधरूप बोध याय ते थर्थाव. पर ५॥ गनापमद थाख थने मन सिवाय वोजी चार इंजियोथी याय , त्यारे थ. पारगर उप प्रिययों थाय छे ।। व्यंजनायपद ते शब्दादि रूपे परिणत ऽव्यनो उपकर- प्रियपी थप परिमोद अर्थात् श्रव्य बोध थाय ते यथया दीये करी पदार्य प्रगट पारी तेग उपकरण हिय करी पोताने संबंधे या पदार्थ शब्दादिनुं ग्रहयु अव्यक्तरूपे भाजद ने व्यंजनामद, च इंजिय ने मन विना शेष चार इंजियनो थाय ठे। चायने + ग्र ५ प्रार ॥१०॥ | मनने थप्राप्तकारिपाणु न. नया व्यथा पहा थवाय शनर्मुहर्न ॥ धारणा पर यान! ते कई ॥श्रोत्रप्रिय व्यजनाय ने जाना ए यावत् पापिय व्य नाम न . . . . . . . . .:. ६. समुनय ग्रहवा ४॥दय पाया प्रकार - - 3जाना पापग्रह नाम । ) प्रिये कर। शब्दना समुन्नय याना परमा १५ रन ना.. ना [) रणादिकना समुच्चय यथना परम। 4 - 1 !! , फदे ॥ जगाम्ना पुरपन दाल : में 11 : I J ने '. I श्रम योलाये, थसंग्यान समय गन । ग वन त बाल, प्रतिपादन दयान , १ ॥ चीजें सालानु के मगवना का ॥ वह नाय गमावद ना ना ना ना टन सुधी जरे ने पाणी उसी जाय, नम कानमा दुगा नगय त्यार न मुना पहुकार। फरे पण नदि के कनो शब्द २ ॥ एवं दृष्टात कहा ॥ एकंदर मतिझानना २० नेद थया : नापत्र मनपान दधान r ने नेद व्यंजनारपदना, नेदारपदना, ६ नंद इदाना,६ नेद श्रयायना थने ६ नेदधा- रणाना, ni20ो मनितान संक्षिा ५ प्रकारे । तेमां अन्यथी मतिज्ञानी सामान्य प्रसारमा प्रत्या जाग ने देगे एवं क्षेत्र कामनारधी पण जाणवू ॥ शब्द स्पश्यों सांन. । नापानागलो समणीए ट्राय॥ पोतानो पासेनी श्रेणिमा रदेख बीजां पुद्गलोने ना. पा परिणमारला जाय॥ ने यन्ने मिश्रित पुदगतीने सांनळे पण एकलां मुलगां पुद्गसोने मांजळे ॥" मनिशान पंगद २० नंद की कj १ ॥ ये श्रुतझान परोक्ष कहे ठे॥ पुगताना १४ नंद ।। यामाधुन १ ॥ थनझारश्रुत २॥ संझीश्रुत ३॥ यसंझीश्रुत ४॥ सम्पभुग ५ ॥ गिध्याधुग ६ ॥ सादिश्रुत ७ ॥ यनादिश्रुत ॥ सपर्यवसितश्रुत ॥ ॥ यापर्यजमिनमुन १० ॥ गमिथुन ११ ॥ यगमिकश्रुत १२ ॥ यंगप्रविष्टद्युत १३ ॥ यंगपादिग्धुन १७ ॥ हा श्राग्भुतना ३ नंद ॥ संज्ञाहार १ ॥ व्यंजनाक्षर २ ॥ सध्यातर ३ ॥ नगा श्रकारादि वर्णात्मक यक्षरना संगणना याकार ते संझाक्षर ते दि विपिना दधी अनेक प्रकार- १ ॥ व्यंजनाहर ते व्यंजन (यक्षर ) यका. CM मा नाच है 1 भूतना धन 7. नदिहरपदाप मबार का मन जागा सानी शान नपजन मानमा प्रार नारनन ... Kान पिनार का मा माम नि याम फामा १३ पवारा पं.' विकारा॥ एनपदः ॥ ५:: यावन विममा हाय, ते गाली । +11 पट ! पालन। मज्ञान कालिका नना ते उपर.. टाकावा म्यूट यवन जाण नम पण मनात- विषय मपर मनाऽव्यना यवष्ट ननया नपन्या विचार पुर्वापर यनुमधान का। यथाव. रिपत स्फुट अपन जायं १॥ दतूपदेश संझा ते युक्तायुक्त विचारपूर्वक इष्ट प्रति यनिष्ट या 11..२॥
निचि करवी ते॥ तेयो संझावाला जीव देतूपदेश संझाए करी संझी कद्देवाय २॥ दृष्टि- वादोपदेश संझी ते शान सहित समफितदृष्टि जोर सूचना दायोपशमे करी युनायुक्त जाणे ते ३ ॥ यसको श्रुत ते जावार्थरहित विचारशून्य उपयोगशून्य पूर्वापर यासोचन- रहित नणं 'नणावे इत्यादिक । सम्यक् श्रुन ते थरिहंत देव केवल हानी केवलदर्शनी देवाधिदेव १२ गुणे करी युक्त, १७ दोपरहित, यनंत गुणे करी सहित, देवाधिदेवना प्ररू. प्या यर्थ तथा गणधरे पाठ गुंथ्या जोख्या १४-१३-१२-११-१० पूर्वधारिनु रच्यु ते सम- श्रुत कहीये ने तेथी नपा पूर्वसुधीना रख्या ते समभुत होय ने मिथ्याभुत पण होय ५ ॥ मिध्याभुत ते जे अज्ञानी मिथ्याटिए स्वछंदयुधिए करी रच्या जास्त रामायाण यावत् ४ वेद यंगोपांग सहित ते मिथ्याष्टिने मिथ्यात्वपणे प्रत्या मिथ्यात्व श्रुत ॥स. म्यक् दृष्टिने सम्यक्त्वपणे प्रया समभुत थथया मिथ्यापिने ए सम्यक्त्व श्रुत होय शामाटे के सम्परतना हेतुपणाथी मिथ्या दृष्टि पोतानां शास्त्र विचारता केटसाफ स पक्षदृष्टिने त्यजे ते ६॥ सादि १॥ सार्वतित २॥ यने यनादि ३॥ अपर्यवसित ४ ॥
ते पा १२ यंग पर्यायास्तिक नयनी थपंदाय सादि। सपर्यवसित २ ले । ने ऽच्या- रितफ नयनी थपकार्य यनादि । थपर्यवसित २ ते संक्षेपथी ४ नंद ॥ व्यथा १॥ यी २॥ कालथी ३॥ लावधी ४ ॥ व्यथी सम्यक् श्रुन एक जीव याश्रि रादि, सपर्ययसित यने घणा जीव थाधी थनादि, थपर्यवसित ॥ त्रयी पांच नरत यने पांच इयत्त थाथि सादि सपर्यवसित, पंच महाविदह थाधिने थनादि थपर्य- पसित ॥कासधी यवसर्पिणी उत्सर्पिणीने याश्रिने सादि १ सपर्यवसित २ ॥ नो. थासर्पिणी नोउत्सापिणीने थाधिने थनादि १ थपर्यवसित २ ॥ जावथी जे जेवारे जिन प्ररूप्या नाव कह्या प्ररुप्या तेबारे ते जावने याथ्रिने सादि र सपर्यवसित २ ॥ क्षयोपसम नायने याश्रिने थनादि १ थपर्यवसित २॥ यथवा नव्य सिडिकनुं श्रुत सादि १ सपर्यवसित २॥ थनव्य सिडिकनुं श्रुत यनादि १ थपर्यवसित २ ॥ त्रीजे चौधे मांगे ध्रुतनो थनादि नाव कहो, ते जघन्य ने मध्यमयी जाणवो ॥ तेनुं मान सर्वा. फाश सोफाकारा तेना प्रदेश तेने यनंतवार गुणोये ॥ एक थाकाश प्रदेशे थनंता यगुरु सघु पर्यायना नावथी पर्याय यक्षर निपजे ते केवस ज्ञान तेनो यनंतमो नाग सदा जीवने उघामो ठे ॥ जो ते यावर तो जीव यजीवपणाने पामे ॥ जेम गाढ मेघनो समु. दाय उते पण चंश मूर्यनी तमाम प्रनानो नाश न होय, तेम ए न्याये जीवनो पण ज्ञा-2 ननाव जाणवो ॥ रीते मतिश्रुतनो यनादिनाव यंगीकार करवो --ए-१०॥ हवे गमिकश्रुत ते जेमां सरखा गमा ठे ते दृष्टिबाद श्रुत ११ ॥ यगमिक श्रुत ते जेमां सर- खा गमा यसावा नही तेवा याचारांगादि श्रुत १२ ॥ यंगप्रविष्ट श्रुत ते १२ यंग गण- धरकृत मूस नूत १३ ॥ शेप जे श्रुत ते थनियमयो यनंग प्रविष्ट कदेवाय ठे ॥ यनंग प्रविष्ट (थंग वाय) तेना घे नेद ॥ यावश्यक १ ॥ यावश्यक व्यनिरिक्त २॥ यावश्यक ते सामायकादि उ यध्ययन ॥ यावश्यक व्यतिरिक्तना जेद ॥ कालिक १॥उत्कालिक २॥ कालिक उत्कालिकनो विस्तार सिहांत प्रमाणना बोलयी जाणी खेयो १४ ॥ यावत् १२ यंग गणिपिटक यनंता जीयो याज्ञाए विराधीने यनंते का पूर्वे ४ गति संसारमा नम्या । वर्तमानकाले संख्याता जीव विराधोने नमे ॥ जविष्य काले यनंता जोव
पोल.
4
पाप
मानना
१०४॥
पिराधीने जमशे ॥ एमज ए १२ थंग याज्ञाये थाराधीने पूर्व काले यनंता जीवो तर्या ॥
पर्तमान कासे थाराधीने तरे ठे ॥ नविष्य का यागधीने तरशे ॥ ने श्रुत शाननी
स्थिति ४ नेदे ॥ अव्यथी १॥ दंत्री २॥ कालथी ३॥ नावथी ४॥ व्यथ। श्रुतज्ञानी
उपयुक्त थको सर्व ऽव्यने जाणे देखे, एवं दंत्रथी १ ॥ कालथी २॥नावय ३॥ पण
जाणी खेबु ॥ सूत्र ज्ञानी थनंतां अव्यने जाणं देखे, ते मेरु यादि यदृष्ट पदार्थने पण
शिष्यने यर्थे थालेखीने (चितरीने) देखा तेनाथी, ते श्रोताने ए बुद्धि थाय के ए
जगवान् याचार्य साक्षात् देखपानी परे कहे ते ॥ एम क्षेत्रादिने विपे पण जाणवू ॥ इति
परोक्ष श्रुत शान समाप्त २॥ प्रत्यक्ष ज्ञानना २ नेद ॥ इंघिय प्रत्यक्ष ते श्रोजिय
यावत् स्पर्शजिय प्रत्यक्ष १॥ नोजिय प्रत्यक्षाना ३ नेद ॥ ययधिज्ञान प्रत्यक्ष १ ॥
मनःपर्यवज्ञान प्रत्यक्ष २॥ केवलज्ञान प्रत्यक्ष ३ ॥ अवधिज्ञान प्रत्यक्षना २ द॥ नव.
प्रत्ययिक १॥ कायोपशमिक २॥जवप्रत्ययिक देवता नारकी बने होय ॥झायोपशमिक
मी नि पिय मनप्यने होय, तेना देतु ए वे के तदावरणीय कर्म उदय या-
॥१०४॥
व्यांना दये करीने, यनुदय याव्यांना उपशमे करी, यवधिज्ञान उत्पन्न याय यथवा यंप्रमादी गुणवंत साधुनें यवधिज्ञान उत्पन्न याय ते संक्षेपयो उ प्रकारे काजु ते ॥ या. नुगामिक १॥ अनानुगामिक २ ॥ वर्षमान ३ ॥ हायमान ४ ॥ पहिवाइ ५॥ यपमि- वाइ ६ ॥ तेमां थानुगामिक ते ज्यां जाय त्या साथे याये तेना र नेद ॥ यंतःगत १॥ मध्यगत २ ॥ तेमां अंतःगत ते यात्माना पर्यंत वर्ति प्रदेशे रयुं तथा उदारिक शरीरने यंते रह्यं ॥ यंतःगतना ३ नेद ॥ पुरतो यंतागत १ ॥ मार्गतो यंतःगत २ ॥ पार्थतो यंतागत ३ ॥ तेमां पुरतो यंतःगत ते जेम कोई पुरुप घळतो पुळो, वळती दोषी, पळतुं उंचामायुं, पळतुं ज्योतिर्नु नाजन,मणोरत्न प्रमुख एटलांवानां लश्ने थागळ करीने चाले तेनी यागळ प्रकाश थाय अने पावळ येउ पासेयंधारयाय तेम पुरतो यंतःगत यवधिज्ञानर्नु एबुं यावरण क्षयोपशम थयुं के जेणे करी यागर्बु क्षेत्र देखे, पण पुंठे वेन पाते न देखे ए पुरतो अंतःगत १॥ मग्गयो (मार्गतो) यंतागत तेए पूर्वोक्त व योजने लश् पाउले करी चाले तेने याग वेन पासे थंधार॥पाठसे यजवाळु थाय, तेम मग्गयो यंतःगत यवधिज्ञाननु
मानना
बोल.
यन.गन
%3D
mai पान्य दंत्र देव. ने यागळ व पमग्वे न देग्वे ।
रानवाललान मावजमा पामलेश्न
..ान गण पझप पाना हाय ताजमण
नेम पारा यन.गत यविज्ञानना याव.
। । । पास दोन दग्य. यागळ पावत, दात्र नदेखे, ए पामया
५.न अघिझान कद ।।। पात न वानां लेइ माथ
भयान चाल न न द जवाट करे, न मध्यगत अवधिझानना यावरानो क्षयोपशम
थाय के. जाण का। दिगिन कंत्र देव " मध्यगत २ ॥ शिष्य गुम्न पूठयु के, स्वामी
यंतागत मध्यगतमा फेर शुं? गुरु कहे ॥ यंतागत यवधिज्ञान ते यागल तथा पावळ
तथा पासे एक कोरे संख्यातायसंख्यातांजोजन सुधा देव देखे यने मध्यगत यवधिज्ञान तो
पए दिशे देखे ॥ संख्यातां थसंख्यातां जोजन प्रमाण यवगाढ अव्यने जाणे ॥थानुगामिक
प्यवधिहानना जीवना प्रदेशनो विचित्र क्षयोपशम दोयाथी यंतःगतादि जुदा २ दो
जाणया १ ॥ थाणाणुगामिक ते जेम कोइक पुरुपे तापणी करी होय, दीयो करी मूक्यो होय, तेनी समीपे यासपास क्षेत्र देखे, पण थाघो जाय त्यारे देग्ये नदि, तेम ज्यां ययधि उपजे ते ज क्षेत्रे रग्यो थको जाणे देग्वे, पण याघो जाय त्यारे देखे नहि ॥२॥ दवे वार्ड- मान ते प्रशस्त यध्ययसायना स्थानके करी वध्यु ठे चारित्र जेने तथा विशुध्यमान वे चारित्र जेने गया थणगारने सर्वयो सर्व दिशे ययधिज्ञान वधे ॥ जेटसा वि समयाहारक सूक्ष्म निगोदना शरीरनी थवगाहना तेटझुं जघन्य देव जाणे देवे, उत्प याग्निकायना जीव यजितनाथने यारे घणा होय, ते यनिकायना जीव एकेक था. काश प्रदेशे एकेको मुफीये एम यांतरा रहित मुकता मुकतां यसंपात सोक नराय थलोकमां लोक जेवमा यसंग्याता यांमुया प्रमाणे क्षेत्र देखवानी शक्ति प्रगटे, पटती थवधिदाननी समर्थाश दोच, एटहुँ क्षेत्र जाणे देखे ॥ हवे क्षेत्र ने कालथी देखg कद्दे ॥ जे क्षेत्रयी यंगुलना यसंग्यातमा जाग जाणे देखे, ते कानयो यायलिकाना यसं. ग्यातमा नागना कालनीयागती पानसी यात जाणे देखें। जेयवधिशानी क्षेत्रयी यंगुसनो
घोण,
पुरोगी
संयासमो माग जाणे देखे, ते कासपी शापिकाना सध्यानमा नागनी बात जाणे
देगापिकानी गधी थंग 'जाणे देवे, ते काची थारविकानो मारी
पान जागे दो।
क्षेत्र जाऐ देखे, ते कासयी यावसिका
॥ जे यवधिझानी क्षेत्रयी हाय प्रमाण
तर्मुहुर्न प्रमाणे कासनी यागती पाउन वान
क्षेत्रयो गानत्रने जाणे देखें, ते कालथी
' अवधिज्ञानी कंत्रयी जोजन प्रमाणे
जे यवधिज्ञानी क्षेत्री
- वधिदानी
चधिज्ञानी
यधि.
धंज्ञानी
.
॥१०॥
क्षेषयी १५ मा रुचकहीपने जाणे देवे, ते काल यी प्रत्येक वर्षनी वात जाणे देखे ॥ जे अवधिज्ञानी क्षेत्रथी नाना संग्याता जोजनना छीपने जाणे देवे, ते कालयी संग्याता का. सनी यात जाणे देखे ॥ जे थवधिज्ञानी क्षेत्रयी यसंख्याता छीपने जाणे देये,ते कासयी थसंग्याता कालनी यात जाणे देखे ॥ एम उम्सोक यधोलोक निको लोक पत्रण सोके घधता पता थसंख्यातासोक प्रमाणे जाणे दखे। पटली समर्याइ प्रगटे ते वर्षमान थ. वधिज्ञान ४ प्रकारे ते प्रत्ययी १ ॥ क्षेत्रयी २ ॥ कालथी ३ ॥ जावया ॥दिनी रीत कद्दे ठे ॥ ज्यारे कालथी जाणवानी फि होय, त्यारे ऽव्यथी, देवयी, जावथी, जाणवानी पृद्धि होय २॥ ज्यारे क्षेत्रयी जाणवानी कि होय, त्यारे का. सयी जाणवानी नजना होय, ने ऽव्य नावथी जाणवानी नियमा पृद्धि होय, २ ॥ ज्यारे ऽव्ययी जाणवानी वृद्धि दोय, त्यारे देवथी कासयोजाणवानीनजना होय, यने नावनी कि होय ३ ॥ ज्यारे नावथी जाणवानी गृहि होय, त्यारे अन्य क्षेत्र कालथी जाणवानी नजना होय ४ ॥ सर्वयो काल सूक्ष्म ते ॥ योग्य मिची उघामोये तमां स.
--
गया
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4:12
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11 नापण
.
3
*म कम
मा. ना.
नमा थमायाना याकार प्रदा
पामा ८.२॥यननहारपदा का व्य यनता
AR५ ५ " . 5य दाता थनेता कार चकना समय वह। जाय, तोपण म्वृट नहि,
पटना एक प्रदा उर अव्य ठे, एन सर्व प्रदेश उपर ठे, ए, त्रयी अव्य सूक्ष्म न
३॥ ऽव्ययी नार यनंनषो मूक्ष्म , केमो एक यक्ष प्रमाणे क्षेत्र सइए, तेमा यसं-
स्पाती घेयोपो , तेमायो एक श्रेयो पश्ये, ते श्रेयो एक यंत्र प्रमाणे सांपोने एक
११०७॥
प्रदेशनी पहोळी, तेमा यसंग्याता प्रदेश ठे ॥ एकेक प्रदेशमा थनंता परमाणु प्रमुख अन्य ते ॥ एकेक अव्यमा थनंता पर्यय ले ॥ जेमके एक परमाणुमा, १ वर्ण ॥ १ गंध ॥ १२स॥२ स्पर्श ॥गक वर्णमांगक गुण कालो, यावत् अनंत गुण कालो, ग.५ बोलनाथनंता नेद कहेपा, गम हिप्रदेशी स्कंधमां, ये वर्ण, घे गंध, ये रस, पार स्पर्श,५ दश जातिना अनंता नेद ॥ एक त्रिप्रदेशी स्कंधमां, प्राण वर्ण, घे गंध, प्रण रस, चार स्पर्श, ए वार जातिना थनंता लेद ॥ एम सर्व व्यना पर्यव कदेवा, ते पर्याय समय समय एकेको थपदरतां श्यनंता कासचकना समय वही जाय, त्यारे एक परमाणुना पर्यव थाय ॥ पम छियदेशी स्कंधना यनंता पर्यय रे ॥ एम थनंतानंत प्रदेशी स्कंधना यनंत पर्यव ने ॥ एम एक प्रदेश संबंधी यनंतां अव्यना यनंतानंत नेद पर्यय ठे ॥ एम संपूर्ण लोकना थनंता पर्यव ठे मादे ऽव्ययी पर्याय (नाव) यनंतगुणो सूक्ष्म ले ५ ॥ दवे ४ ने उपमा द बताये वे ॥ कामने चणानी ? ॥ क्षेत्रने जुवारनी २॥ व्यने तसनी ३ ॥नावने खसखसनी उपमा ३ ॥ प४ उपमाए करी समजवु
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१५, १६, त अपामार गए ज्ञान तीर्थकरने जन्मधी होय ६ ॥ दो अवधिज्ञानी फटस जाणे ते फटे है ॥ पदेखी नरकना नारको ज० सामावण गाउ, 30 ४ गाउ देखें। पोनीना ग० ३ गाउ, ३० सामानण गार देगे ॥ गम एकेक नरके ज0 70 मांयी अधी- शर्ष गांगन पटामता सातमी नरकना नारकी जा यह गान, उ० १ गाउ देये। श्रसुर हमार जण २५ जोजन देगे, उ० संग्याता दीपसमुष देखे ॥ नवनिकायना देव तथा गंतर ज० २५ गोजन देणे, ३० संग्याता द्वीपसमुड देखे ॥ ज्योतिषी ज० उ० संन्याता कोपामुन देगे । पहेसा वीजा देवसोफना देवता उY पोताना विमाननी घजा सगी देगेनी ररनप्रजानो देवसो परिमांत जाणे देखे ॥ प्रि ज० यंगुलनो थसंख्यातमो नाग जाणे देणे, उ० असंगपाता छीपसमुष जाणे देग्ये ॥ त्रीजाथी मामी यनुत्तर विमा. नना देव सुधी, मुं पांतपोताना विमाननी घजा सुधी देखे ॥ श्री ज० यंगुलनो थसं. गणातगो नाग, उ संग्यात जीपसमुड जाणे देखे नोनुं देवे तो त्रीजा चोथा दे. पक्षोकना देवता पीजी नरफना देउसा परिमांत सुधी जाणो दो
पोल.
--
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।।
या पाना या ": ।। २.नन "
नारा त्रापान यावर सावनत पाठान याक| .यन पमनन याकार ।
ज्यातिषी कासरने यासारं ) बार दवसाय ना दव नमुग्व मृदगन याकार ॥ नव ग्रेवयक-
ना देव सगंगरीने थाकार ।। पाच यनुत्तर विमानना देव जवनासिका नथा कुंवारिकाना
कंनुपाने थाकार ॥ संज्ञा तिर्यच पंप्रिय तथा संझी मनुष्य नाना प्रकारने याकारे
॥१०॥
देखे । नारकी देवता तीर्थकरने थत्यंतर त्यधिदान ॥ तियेचने घाहिर अवधिज्ञान॥ मनुष्यने थन्यंतर ने पादिर थय विज्ञान होय ॥ नारकी देवताने थाणुगामी १॥ अप- मिवाइ २ ॥ यस्थित ३ ॥ " प्रकारचें थवधिज्ञान होय ॥ तिर्यच ने मनुष्यने यनु. गामी १॥ थनानुगामी २0 वर्द्धमान ३ ॥ दायमान ४ । पमियाइ ५ ॥ अपमिया३६॥ थपस्थित ॥ यनवस्थित ॥प प्रकारचें अवधिज्ञान होय ॥ हये ययधिज्ञान संक- पथी ४ प्रकारे कदे ठे ॥ अव्ययी अवधिज्ञानी जा अनंता रूपी अव्यने जाणे देखे, उप अनंता रूपी अव्यने जाणे देग्वे १ ॥ क्षेत्रथी यवधिहानी ज० यंगुसनो यसंग्ख्यातमो जाग जाणे देखे, उ थलोकमां लोक जेवमा थसंग्ख्याता खांया जाणे देखे ॥ कालथी अवधिज्ञानी जण यावलिकानो यसंख्यातमो लाग जाणे देखे, उ यसंख्याता उत्स. पिणी अवसर्पिणी कास गयानी यने यावतांनी वात जाणे देखे ३॥ नावथी यवधिज्ञानी जा अनंता नायने जाणे देखे, उ० व्यनंता जाबने ते सर्व लावना अनंतमा नागने जाये देखे ॥ ॥ इति प्रत्यक्षा अवधिज्ञान समाप्त ३ ॥ हवे प्रत्यक्ष मनःपर्यव ज्ञान-स्वरूप कहे ॥मनः
बोल.
पौष
गनना
ग
पन म.नयमः। 4. {hati , बाला पयासम-टिमयति,यप्र.
दयान 11
३२.२ ५.२५३ : ... जद म मति विपुलमति
2014 {३
.........५: 12417.''' , माट १ सापामया ने ॥ हवे
मन पय:41.। . 1. नन यन। प्रदेश पधने जाण
देय ॥ *मत [३मनथ। ।३.१५ - ३ देवथा यातना यमन्यातमा
नाग, ७० दंतु रानप्रनाना प३। न । ' प्रतर मुथा ॥ ननु व्यानिपीना उप-
सा नळा सुध। ।। त्रिनु थढि ५ मा ॥ मम(न यदि यगुप्त यो ने विपुलमति
पू जाणे देखे ॥ कासर्थी पस्योपमनो यसंन्यानमा नाग, ज० पट्यापमना यसंख्यातमा
नाग थतीत थनागत कासने जाणे देखे ॥ ए अनुमति विपुलमति एथी विशेष जाणे
देसे ३ ॥ जायधी थनंता जाव ते सव नावने थनंतमे नागे जाणे देखे ॥ विपुलमति एथी
कांश विशेष जाणे देखे ॥ इति प्रत्यक्ष मनःपर्यव ज्ञान समाप्त ४॥ दवे प्रत्यक्ष केवलज्ञान
फदे ने ॥ सर्व प्रत्यक्ष निराकरण संपूर्ण ज्ञान ते केवसझान ॥ तेना २ जेद ॥ नवस्थ केवल
॥११॥
ज्ञान | सिकम्य समान २ ॥ नमस्य केरल झानना पे नेद ॥ सजोगी भयस्य केव. समान अजोगी नाण केरल हान २ ॥ सिकस्य फेवात झानना२ नेद ॥ थनंतर गि पय मान! परंपर सिहस्य केवल झान २॥ यं केवलज्ञान संक्षेपयी । प्रकारे गा। अन्यथी सो अत्यने १॥ देवथी सर्व क्षेत्रने २ ॥ कालयी सर्व कालने ३॥ बाजी मानानं नाणे देख ४ ॥ केवल दाने करी तीर्थकर यर्यने जाणी प्ररूपया गोगने कई ने गगनजांगे करी गणरादि सूत्र गुंथे ॥ इति प्रत्याहा केवल ज्ञान समास ॥ इति पांच झानना चोख संपूर्ण ॥ मप्रदेशी अप्रदेशीना बोल॥ गगन नगरवी शाक ६ उद्देशा ४ चाची कास यात्री सप्रदेशी यप्रदेशीना बोल लिख्यते॥ गापा-रणमा १ याहारग २ नविण ३, सनि ४ सेस्सा ५ दिनी संजय कप्साए ॥ CENESE
win
जीरशाधी.
विधाय
)
+
पाय ।तमा प्रथम राप्रदा हार पर
प्रदेशी ? उपर-नियमा मनदेशी ॥ . . ।
आर-सिप सपदेसी, सिय थप्रदेशी
प.हेगा। दो पला जीव कास थाधी बम
1. 'नमा मपट
॥ पता नारी कास यात्रा कम मप्रसा।
१, सपा सप्रदेशी पणा थने थप्रदशा १३ * प्रभागा यन यप्रदशी
'३॥ एवं एप्रिय वीन वैमानिक मुधी वाय. बदबा ॥ पाच स्थावर काय याश्री
1
)
)
.
सप्रदेशी घाणा थने अप्रदेशी घणा ॥ इति प्रथम हार संपूर्ण ॥ १ ॥ वोर्जु याहारक धार कहे ॥ याद्दारक एक जोय याश्री केम सप्रदेशी ? के थप्रदेशी ? उत्तर-सिय सयदेशी, सिय अप्रदेशी ॥ एम नारकीथी वैमानिक सुधी चोयीश दंगकना एक एक जीव कद्देवा। घणा जोय यात्री समुच्चय जीयने पांच स्थावरमां तो सप्रदेशी घणा थने यप्रदेशी घणा । शेप नरकादि रए दमकमा घणा जीयोमा प्रत्येक प्रत्येक दमकमा ३ नांगा जंपर प्रमाणे जाणवा । यामाहारिक यात्री समुच्चय एक जीव कैम सप्रदेशी ? के यप्रदेशी ? उत्तर-सिय सप्रदेशी, सिय थप्रदेशी। यम नारकादि चोवीश दमक यने सिझ पचीस दंगक कहेवा ।। घणा जोव याश्री समुच्चय जीव ने पांच एजियमां सप्रदेशी घणा ने यप्रदेशी घणा यने शेप नारकादि योगपीश दंगकना घणा जीयोमा प्रत्येक प्रत्येकमां ठ(२) नांगा जाणवा।। सर्व सप्रदेशी होय १, यथवा सर्व यप्रदेशी होय २, अथवा एक सप्रदेशी यने एक अप्र. देशी ३,यथवा सप्रदेशी एक यने अनदेशी घणा , यथा सपदेशी घणा यने यप्र. देशी एक ५, यथया सप्रदेशी घणा यने यप्रदेशी घणा ६, एना नांगा तो छ थाय पण
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11. परमपा ।।
....." मप्र::| || सप
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।। यात्रा समु.
+'माप्रयामा जागा
म. समन्वय नावन
"। 4 मया (मय थप्रदर्शा।।
।' ३', " ५। । घm || यात्रा मम । जावन (मतगवानमा प्रत्यकमा
२ •
In ॥ नवा नव्यहार मण ॥ ॥ वाण मज्ञाहार कहे ठ॥ सड़। एक
जोर फास था। सिय सप्रदेश, सिय यप्रदेशी ।। एम मोल दमक सझीना एक जीव
थायी कहंगा ।। पणा जीव थाश्री समुच्चय जीवने सोख दमकमां प्रत्येकमां त्रण जांगा
पुयोफ॥ थसंज्ञो समुच्चय एक जीव थने यावीश दमकमां सिय सप्रदेशी, सिय थप्रदेशी॥
पणा जीर यानी एजियमांसप्रदेशीपणा, यप्रदेशी घणा॥षणा नारकी थसंज्ञी यात्री
॥११॥
नांगा ६ पूर्वोक्त ॥ गम दश जयनपति, मनुष्य थने याणव्यंतर मळी यार दंगक कहेया॥ शेष व्रण विकछिय, तिर्यच पंचेंजिय थसंशी घणा जीप याश्री प्रत्येकमा भण नांगा पूर्वोक्त । नोसंझीनोयसंझी यात्री समुच्चय एक जीव सिय सप्रदेशी, सिय थप्रदेशी ॥ एम मनुष्य यने सिट एक जीव थाश्री कदेवा ॥ घणा जीय, पणा मनुष्य थने घणा सिष्मां नोसंझीनोथसंही थाश्री प्रत्येकमां प्रण नांगा पूर्योक ॥ इति चोथु संझीझार संपूर्ण 11 पांचमुं वेश्याहार कहे ते ॥ सलेशी तो एक जीव ने घणा जीव योधिक प्रथम प्रार- बत् जाणवा ॥ कृष्णवेशी, नोलखेशी यने कापोतलेशी गक जीवने घणाजीय याश्री श्या- हारकवत् कद्देवा ॥ नवरं दंगफ यावोस कद्देवा ।। तेजु लेश्या समुच्चय जीव थने पंदर दंग- फमां प्रण नांगा पूयोत ॥ पृथ्वोकाय, यकाय यने वनस्पतिकायमा प्रत्येक प्रत्येकमा पोगा पूर्ववत् कद्देया ॥ पद्मखेश्या अने' शुक्लेश्यामा समुच्चय जीव, तिर्यच पंचें. Fay, गण श्रने पैमानिक प्रत्येकमा ३ जांगा पूर्वन्ति ॥ अशी जीप अने सिबमा ३ ll gil | मनुष्यमा ६ नांगा प्वाक्क ॥ इति पांचमुं खेश्याधार संपूर्ण ॥ ५ ॥ INI
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थाश्री तेर दमकमा प्रत्येकमा ६ नागा पूर्ववत् ॥ शेष नरकादि र दमकमा प्रत्येकमां ३ नांगा पूर्ववत् ॥ मानकषायी, मायाकपायीमा समुजय जीव ने पांच स्थायरमा क्रोध कपायी माफक ॥ नारकी यने देवता याश्री तेर दमकमा ६ नांगा पूर्ववत् ॥ शेष पांन दंडकमां ३ नांगा पू० ॥ सोनकषायी समुशय जीव थने पांच स्थायर प्रत्येकमां क्रोधवत् ॥ नार• फीमा ६ नांगा पूर्वयत् ॥ १७ दंगकमा प्रत्येकमा ३ 'नांगा ॥ यकपायी समुयय जीव, मनुष्य थने सिम्मा प्रत्येकमां ३ नांगा ॥ इति कपायघार संपूर्ण ॥ ॥ हये नय, नाणघार कहे ते ॥ समुन्य झानी, समुगय जीव, सोख दंगक यने सिक नगवान प्रत्येकमां ३ नांगा पूर्ववत् ॥ प्रण विफजिय प्रत्येकमा नांगा पूर्ववत् ॥ एम सिय ने मतिज्ञानी, श्रुतझानी पण रए दमकमां कद्देवा ॥ यवधिज्ञानी, समुच्चय जीव थने सोसे दमक प्रत्ये- कमां ३ नांगा ॥ मनःपर्यवहानी यने केवल झानी, ममुच्चय जीव यने मनुष्यमा प्रत्येकमां ३ नांगा पूर्ववत् ।। समुच्चय यज्ञानी, मति थशानी यने श्रुत यज्ञानी, समुभय जीव यने १५ दंगक प्रत्येकमा ३ नांगा पूर्ववत् ।। पांच स्थायरमा सप्रदेशी घणा, यप्रदशी घणा ॥ विनंग SEXEXE
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२
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मा.पापा मम
प्रत्यामागगा। नम
यन म.प्रयसमा ३ जागा
पुरन । पारस्थामा सादा ! य', घ" 1, ३६। ममुच्चय जाव. मनुष्य थने
सिख यफपाययत् ॥ इति वेदद्वार संपूर्णः ॥ १२ ॥ ये १३ मुं शरीरधार कहे ते ॥ सश- रीरी, समुचय जीयने २४ दंगक याधिक प्रथम. छारवत् ॥ उदारिक शरीर यात्रि समुच्चय जीपने पांच स्थावरमां सप्रदेशो घाणा, अग्रदेशी घणा ॥ शेष पांच दमकमां प्रत्येकमा उदारिक शरीर यात्री३ नांगापूर्ववत् ॥ वैकेय शरीर यात्री, समुच्चय जीवने वान- कायमा सप्रदेशी घणा, यप्रदेशी घणा ॥ शेप सोल दंगकमा प्रत्येकमा ३ नांगा॥ याहारक शरीर यात्री समुचय जीवने मनुष्यमा ६ नांगा पूर्ववत् ।। तेजस कार्मण शरीर याश्री समुशय जीपने चोयीश देकरु.थोधिक प्रथम द्वारवत् ॥ यशरीरी,समुञ्चय जीवने सिझमां ३ चांगा ॥ इति शरीरकार संपूर्ण ॥ १३ ॥ हये २४ मुं पर्याप्तिकार कहे ठे॥ याहारप्रजा, शरीरमजा, भियग्रजा यने श्वासोच्वासप्रजा ए चार प्रजाना पर्याप्ता यात्री समुच्चय जीवने पार स्थावरमां सप्रदेशी घणा, ने यप्रदेशी घणा ॥ शेष योगणोश दमकमां प्रत्येकमा ३ जांगा पूर्ववत् ।। जापाप्रजा ने मनप्रजामा संझीवत् ॥ याहारप्रजाना यपर्याप्ता यमाहारक- पत् ॥ शरीरमजाना यार्यासा, इंडियनजाना अपर्याप्ता, श्वासोच्चास प्रजाना अपर्याप्ता,
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पदमापदमना वार॥
थप श्री जगवती श० १०मान उद्दशा साथी १४ हार
पढमापदमना बाल
गाथा ॥ जीवा र हारग २ व ३ सगिण ४, संस्सा ५ दाग ६ सजय कसाण ७ ॥ नाणे ए जोगु १० वयोगे ११, वेग १२ य सरीर १३ पजत्ती, १५ ॥१॥ जो जेषपत्त पुरो, जावो सो तेण यपढमो हो । सेसेसु दोश् पढमो, थपत्त पुवेसु नावेसु ॥२॥ भावार्थ-जे जीव जे नाव पूर्व पाम्यो ते नावे करी ते थप्रथम (थपढम) १॥जे नाव पूर्वे नयो पाम्यो, ते नावने पामधू ते प्रथम (पढम) २॥ हवे पहेलु जीवछार कहे रे ॥ एक वचन याश्री जीव, जीवनावे यप्रथम (यपढम) केमके जीवपणुं तो वे ज॥ काइ नबुं पामवु नयी, ते यपेक्षाए १॥ एवं नारकीयो मामी वैमानिकना दमक सुधा ते ते नावे थपढमपाणु कहे २५ ॥ सिक, सिक जाये पढम केमके सिरूप पूर्वे पाम्यो नथी, तेनुं प्रथम पामवापपुं ययुं ते अपेक्षाए २६॥ ए.एक वचन याश्रि२६ दंमक यया ॥ बहुवचन यानि कहे ते ।। जीवो, जीवनावे यपढम ॥ अपेक्षा पूर्ववत् समजवी १॥ एवं - -
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नाग एक अपरमज कहेया केमके विग्रहगतिने विषय नाहारकपणुं यनंति वार पामयाथी २५ ॥ मिरू थनाहारकनाये प्रथम (पढम) केमके सिझने थनादारकपा प्रथम प्राप्त गने से थोशाग २ ॥ ए. एक वचन थाथि २६ दंगा यया ॥ बहुपचन थाथि २६ दंगक पूर्ववत् जाणया ॥ प ५२ दंमा यया ॥ एवं थाहारक थनाहारकना सर्व मळी १०२ दंगा यया ॥ इति याहारककार संपूर्ण ॥२॥ हो प्रिनुं नव्यहार कदे ॥ एक गगन याधि व्यसिहिक जीव, जव्यसिद्धिक नावे यपढम (यप्रथम ) फेसर नपर्नु नगपाणु थानादि, माटे नव्यपणे प्रथम ( पदम ) नहि, एम थलव्य सिपिणं पण पठम ज जाणवू १॥ एवं नारकीयो मामी वैमानिकना दंझक सुधी, से ते नारे थपरम कदेवा २५ ॥ एवं पहुबरने पण २५ दंगक थपढम ज कहेवा ॥ एवं ५० पंगा घगा ॥ एवं ५० दंमफ याव्यसिस्किना पण कदेवा ॥ नोनव्यसिलिकनोय- नम्पसिझरना जीय नोनव्यतिकिफनोयनव्यसिफिकने नावे पढम (प्रथम), नो-
पदमा
परमन)
गवट्ठ
जव्यमितिकनोरनव्यमितिकपणान प्रथम पामपापा ने अदा । ॥ वं मिहना
दमकमा पान नावन यामा यानिमा पटमा ! पं.दं.च गवं वचन २.
वचने पण २ दम क. Famik htia . यया । म मळी 10 दमक यया ॥ इति
नव्यहार म ||
दानाहार: ॥
"क. पवन या-14.1 ३ ३ । नाव अपम । अप्रथम । कमक सझीपा पूर्व
याति वार 41 42 न अ५:10 ) 13 नाकाथ। माम!, ५ म्यावर, विगलंप्रियना ।
दंगक वजन
infatatथी त ने नाव पदमपाणं कद,
10 एक वचन
याधि ११ दमन यया ॥ ३ वर पचन याण " दमा यपदम, एवं ४३ दमक यया ॥ य.
संझी जीव. 2. इ. नाव अपदम ( यप्रथम ।। ॥ नारकीर्थ। मामी वाणव्यंतर सुधी,
ते ते नाव यपर'म कहवा ।। ज्योनिपी मानिकमा यसंझी नपजे नहि, मादे असंझीपणुं
साजे नहि, तेथी ए २ दंमक वर्जवा ॥ ए. एक वचन यात्रि २३ दमक थया ॥ एवं घर
॥१८
पचने पण २३ दमके श्रपरमपण कदे, प ४६ दंझक थया ॥ नोसंझीनोयसंझी जीप,नो- संझीनोयसंझी नाये परम (प्रथम) केमके प नायर्नु प्रथम पामवापणं है, ते अपेक्षाए १॥ मनुष्यने सिम्मा पाप परम (प्रथम) प ज खाने ॥ ए ३ दमक एक वचने यया ॥ एवं बहु बचन थाथि पण प्रणे दंगके प्रथमपणुंज कहेयं ॥ १६ दमक ।। सर्व मळीने ६ दंझक थया॥ ए. संझीहार संपूर्ण ॥४॥ हवे पांच, खेश्याहार कदे ॥ एक वचन थाथि सलेशी जीप, सखेशी जाये यपढम केमके पूर्वे सखेशीपणानुं य. नंति पार पामj थयुं , ते अपेक्षाए १ ॥ नारकीयी मामी वैमानिक सुधीमां, ते ते नावे थपढमपणुं होय २५॥ ए. एक बचन यानि २५ दंगक, एवं बहु वचन यानि पण २५ दंगके थपालमपणुं लाने॥ ए ५० दमक यया॥ एवं समुशय कृष्णावेशीजीव, कृष्णसेशी नावे थपढम १॥ नारकोथो मामी वाणव्यंतर नुधी, २२ दंगके पण यपढम ।। ग २३ दमक एक पचनना, गर्व २३ बहु पचनना दमक, सर्व मळीकृष्णलेशीना ६ दमक। एवं नीयलेशोना
पोज.
पटमना
॥११॥
४६॥ कापानना ४६ ॥ न दाना र वचन ॥ दनक. वह वचन ।। एवं ३ दंगक
यपटमया ॥ पालनाना , दमा क. वचन ॥ ३८ वचन ४॥ दमक अपटमपा॥
शुक्लाशीना दाग , दमक अपटम" कदय । अतः। जीच. यलगी नावे पढम । प्रथम ।
कमक अलीपणानु प्रम पावापान अपदा || मनुष्य न मिकमा पण
पढमा) nu वचन : दम्ब वह वचन : दमक प्रथमपण. ॥ ६ दंगक यया । एवं
२४ा दमक मन मळीन पया॥ निलच्याफार मपण ॥ ५ ॥
दवन दृष्टिहार कद ।
एक वचन यानि समष्टि जव समष्टि नाव का प्रथम, त कोइ समष्टिपाणं प्रथम
पाम्या ने यपहा ।। काश्यपढम, त नग प्रतिपनिन ( पमवा ) यी समदृष्टिपागं फरीथी
लाध्युं तं यपंकाप १॥ एवं नारकीयी मामी ५ स्थावर वर्जिन वैमानिक सुधी, प्रथम सम्य.
स्त्वना साने करी, प्रथम द्वितीयादि साने करी यपढम २०॥ सिद्ध समष्टिनावप्रथम
१॥ ए २१ दमक एक वचनना थया॥ एवं २१ दमक बहु वचनना, ते समदृष्टिनावे प्रथम,
॥११॥
ए.५२ दमक नामिप्याष्टि जीर, मिथ्याष्टिनाये यपढम ॥ एवं नारकीयो वैमानिक सुधी परम करना २५॥ ए. एक बननना २५ दमक, एवं बहु वचन याश्रि पण २५ दंगल, गा ५० दंगक घया। समामिध्यादृष्टि जीव, समामिथ्याष्टिनाये गक वचने, समु- गाजीपने मोक्ष दमक, मिय पनम, सिग अपढम ॥ पढम केमके नवी दृष्टि पामयापणुंठे पी१॥ग नारकीचो मांझी, "स्थायर, ३ विगछिय, 10 दमक वर्जि १६ दंगके प्रथ- मार, ". १५ दंगक एक पगनना, ने १७ दंमक बहु वचनना, ग. ३४ दंगके सिय पदम, लिप थापा॥ मळी १५६ दमक यया ॥ इति दृष्टिद्वार संपूर्ण ॥ ६ ॥ दये सातमु संयतकार कहे ॥ एक वगन थाथि संगत जीय, संयतनाये कोइ प्रथम, कोश्यपढम, थपेक्षा समष्टिवत् १॥ मनुष्ण संगन ना कोई पदम, कोइ थपढम २॥ ए एक वचने २ दमक, एवं बहुवचन यानि दंग पदमपाणु कई ॥ ४ दमक यया ॥ थसंयत जीय, यसंयत जाये परम, प्रसंगामा थनंती पार पाम्यो ते यपंक्षाए १॥ एवं नारकीयो मामी वैमानिक बोल. परमा- रदमना सुधी, २४ दमक न न नाव अपट मघा कद व २५ ॥ २५ दंमक एक वचन आश्रि, एवं २५ दंक बहुवचन अाश्रि अपदम जाणवा ॥ T 10 दमक यया ॥ मयतामयनि याश्री समुच्चय जीव, नियच पचयि यन मनग्य : दमा एक जीव याश्री, तम त्रण दंमक घणा जीव व्याश्री मा दमक थया। मयनामयत नाव याश्री. मिय प्रथम सिय थप्रथम नावना समापन ॥ नामयतनावमयत जीव नामयतनायसयन नाव पढम कम गर्ने प्रथम पामवाषण त ने अपका ॥ मिकमा पण । गत पढमपा कहेच ॥ एक वचन थाश्रिमकः ॥ एव वर वचन याश्रि व दमक. प्रथमपाणु कहे व ॥ सर्व मळीने ६४ दंझक थया ॥ इति मयतहार माण ॥ ॥ दवे याचमु कपाय हार कदम ॥ एक वचन याश्रि सकपायी जीव, मकवाय नाव अपदम कमक सकपायपणाने यना- दिपणुं ठ तथा । ॥ नारकीय। मामी वैमानिक सुधी सकपाय नाव यप्रथम २५ ॥ ए एक वचनना २५ दंगक॥ एवं बहु वचन याश्रि पण २५ दमके ते ते नाव अपढमपणुं कहे, ॥
ए ५० दंमक यया ॥ एवं शोधकपायीना ५० दंमक ॥ मानकपायीना ५० दमक । माया- कपायीना ५० दमक | सोनपायीना ५० दमक। सर्वत्र यपढमपणुं कहे ॥श्यकपायी जीप, यकपायी नावे कोइ पढम, ते यथाम्यात चारित्रनो प्रथम सान पामवायी। कोश यपदम, ते यथाण्यात पारिननो द्वितीयादि खान पामवाथी १॥ एवं मनुष्य १॥ ते ते नाये कोइ पढम, कोइ थपढम जाणवा २॥ सिझ, यफपायी नावे पढम जाणवा, केमके स- आपणाने यनुगत थकपायजायतुं प्रथम पामवापणुं ठे तेथी ३॥ ए ३ दमक एक वचन यानि एवं यहु वचन थाथि ३ दंगके पूर्वोक्त एक वचननी रीते ज्यां जे खाने त्यां ते कहेg ॥ एवं ६ दंगफ यया ॥ सर्व मळी २५६ दंझक थया॥ इति कपायकार संपूर्ण ॥७॥ हवे नममुं ज्ञानधार कहे ॥ एक वचन थाथि ज्ञानी जीव, ज्ञाननाये कोइ पढम, केमके कोश् झानी पणानोलान प्रथम पामे ते थपेक्षाए । कोइ यपढम (अप्रथम) केमके कोइ पनिवाइपणाथी छाननो खान फरीथी पाम्यो ते अपेक्षाए. १ ।। एवं नारकीथी मांझी ५ स्थावर गर्जिने वैमानिक
गोल.
पढमा-
पदमना
॥१२०॥
न नपाt.30 या
एक बहु
सुधी, ज्ञाननाव पदम अपटमा? कदय : 00 मिसन नाव पढम.कम प्रपम लान
पामवाथी २१ ॥ ॥क वचन : ' टम
२. दमक, पण पपानीजा-
णवा ॥ए ४२ दंम्क थया..!-न-11 1 दमय नपान माथ। [३: HELLE. 7-1न ने
बहु वचन याश्रिना २ दर, ३.11 !! " मानना । दमक पm न जाणवा ॥
एवं अवधिज्ञानना एक वचन व पचन ...।
। गिलत्रियना
वचने ६ दमक व या न । पदमयप पचन नाम मन पयर
झानना एक बहु वचन ४ दम पाण IR1 माण पलानी, न त ता 12 वह
वचने ६ दंम पूर्ववत जाणव ॥ अमानअहान नाव अपटम. अपना अनाद काळय।
यज्ञान- पामवापाणु के न व्यवहार ) ॥ ॥ नारकीय। वमानिक सुधी, न त ना अप-
ढमपणुं लाने २५ ॥ ए एक वचनना २५ दमक । एव बहु वचन यानि २५ दमक एमज
जाणवा॥ एवं ५० दंगक यया ॥ एमज मतियझानीना एक बहु वचन ५० दंमक जाण-
वा ॥ एवं श्रुतयज्ञानना पण, एक बहु वचने ५० दमके पूर्ववत् जाणवू ॥ विनंगशानना
॥१२०॥
३४ दमके ते, ५ स्यावर, ३ विगप्रियना एक वचनना १६ दंझक वर्जिने यपढमपणं होय ॥
सर्व मळीने ३५० दंडक यया ॥ इति शानहार संपूर्ण ॥ ए॥
हो दशभु जोगद्वार कहे ॥
एक वचन याश्रि सयोगी सयोगीनाचे यपढम, यनादि काळथी ए नावनुं पामया-
पाणु वे ते अपेक्षाए १ ॥ एवं नारकीथी मांनी येमानिक सुधी ते ते नावे यपढमपाएं
कहे २५ ॥ ए एक वचने २५ दंगक एवं बहु वचन याश्रि पाण २५ दंगके यपढमपणुं
फदेई । प ५० दंगक थया ॥ एवं मनयोगीना एक यचने १७ दमक, बहु वचने दमक, ए
३५ दंगके ते ते जावे यपदमपाणु जाणवू ॥ पचनजोगीना एक वचने २० दंगा ।। बहु वचने
२० दमक । र ४० दंगरे यपढमपाणुं कहेषु ॥ काययोगीने ५० दंमके ते ते जाये सयोगीनी
परे फहे । थजोगी जीव यजोगीनाये प्रथम, प्रथम साननी अपेक्षाण १॥ एवं मनुष्य
सिन्ने गाये पढम, ए एक वचनना ३ दमक॥ एवं घटु वचनना ३ दमक, ग ६ दमके
पदमपाणु कदेवु ॥ ए १७० दंझक यया ॥ इति जोगद्वार संपूर्ण ॥१०॥
चोल,
पदमा-
1१२१॥
.
.
.
।
हमारा गार करना
कचन यात्रिसामान -1 1) : '2 13:21. मोअनादि.
पणं ने न अपना सार ..
3 रन सिह-
पान प्रथम रसायमाना 777
मानिकता
दंभक सध। म कटः ....
दंरकवर २६॥ वचनना
1711111
गवयगामारावनुनाना US ht
1-14 . मागाग-
बनुत्तानी गति समील। म ययान उपया सपा ॥१॥
देव बदहार कहन॥
3
एक वचन यानिसबंदी जीव, संवेदी नावे अपढम, कमक यनादि काळ थाना लान
पामवाथी १॥ एवं नारकोथी मामी वैमानिक सुधी ते ने नाव यपढमपणं जाणवू २५ ॥
ए एक वचने २५ दंगक ॥एवं २५ दंगक बहु वचन यानि पण यपदम जाणवा ॥ ए ५०
॥१२॥
दमक थया गयं ग्रीवेदना एक बहु वचने ३२ दंझके ।। एवं पुरुषवेदना एक बहुपयने ३२ | दंझके । पयं नपुंसकना २५ दंगके अपढमपणुं कहेg ॥ अवेदी जीव यदीना कोई पढम, केमके यवेदी नावनो प्रथम सान पामयायो । कोश्यपढम, केमके यदी नावनो द्वितीयादि साज पामयाथी १ ॥ एवं मनुष्यने दंगके पाग ते ते 'नारे पतम यपदमप जाण ॥ सिहमा यवेदीनावे, पढमपाएं ज खाने, द्वितीयादि खाननो यनाय ते तेथी। ए ३ दंगक एकवचनना, एवं ३ दंगक बहुवचनना पण जाणया ।। १६ दमक थया ॥ सर्व मळी १४४ दमक यया ॥ इति वेदधार संपूर्ण ॥ १२ ॥ हवे १३ मुं शरीरहार कदे ठे।। एक वचन थाथि सशरीरी जीव,सशरीरी नाय थपढम, यनादिकालथी एनो सान पामवाधी॥ एवं नारकीथी मामी चैमानिकना दंझक सुधी ते ते जावे श्यपढमपाणु कहेवू २५॥ गणक पचनना २५ दंगके ने बहुवचनना २५ दंगके ते ते नाये यपढमपणुं जाणवू ॥ए ५० दमक थया॥ एवं उदारिक शरीरना एक बहुवचने २२ दमके ॥ एवं वेकेयना एक बहु- घरमा- चरमना ॥१२॥ चरमाचरमना वाल॥ [६. कमालयन । अथ श्री नगवनी गत । गाथा ॥ जीवा । दाग : : माता ।। नाग [ जा 0 दवप्रथम जाता 1.नाप -- तयपदापना । पगाना नागन-न- का चम्म कमर नरादि, it 1. ..) + न. : २५ जावनी 41 41 पगन ... मानावयचाम. कमक मिटपणाना ना ना न अपदा॥m v६ दमक कवचनना. व २६ दमक बहुवचनना, प.५२ दमक थया ॥ इनि प्रथम जावहार' | दव वीजें याहारकहार कहे ॥ यादारक जीव, याहारक नाव काश् चरम, फेमकं फरीर्थी याहारकपणू न पामशे, सिद्धि- १२ गमनथी, ते अपेक्षाए ॥ कोश् जीव यचरम १ ॥ नारकोथी मामा वमानक सुधा, तत जाव कोइ चरम, केमके-नरकादिपणे फरी याहारकपणुं न पामशे, ते अपेक्षाए । कोश अचरम । फरीथी नरकादिपणे याहारकपाणुं पामवापी २५ ॥ ए २५ दंमक एकवचनना, एवं बहुवचनना २५ दंगक, एवं ५० दमक यया ॥ थनाहारक जीव यनाहारकपणे अच- रम, केमके थनाहारकपणाने यनाशपणुं ने तेथी १॥ एवं नारकीची मामी वैमानिक सुधी थनाहारकनावे कोश् चरम, केमके नरकादिपणे फरी यनाद्दारकपणुन पामशे ते अपेक्षाए, को यचरम २५॥सिक अनाहारकपणे थचरम, थनाहारकपणानो नाशनी ते अपेदाए २६ ॥ ए एक वचनना २६ दंडक, एवं वहु वचनना २६ दंगक ॥ सर्व मळी ५५ दंगक यया ॥ इति थाहारक हार ॥२॥ हवे त्रिजु जव्यहार कहे ते ॥ जव्यसिधिक जीव, जव्यसिद्धिक नावे चरम, केमके मोक्षगमनथी ते नावनो नाश थवाथी १॥ एवं ना. रकीयी मामी वैमानिक सुधी, ते ते नावे कोश् चरम, सिपणुं पामवे करी ॥ काश् यचरम २५ ॥ ए २५ दंगक एकवचने, ने २५ बहुवचने, एवं ५० दमक थया ॥ यत्नव्यसिद्धिक
जीर यनयमि..।
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१
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॥१२४
घनानना
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.
पनाया। ना.
11] 1. मायम131॥
....... .. . .
..द.सा। अमरजीच.
यमः।ता. सिम
11 नाग्यायो मामी चाव्यतर सुधा जाप
२३ ॥ ॥ एकवचन २. बहुवचन २६. म। ०६ दमक, थया ॥ नामझानायसी जीय,
नांसझीनायसंझौता यचरम १ ॥ मनुष्य तं न नाव चरम, केमकं मनुष्यन केवखीपणे ॥२४॥
--- फरी मनुष्यपणानो असाल ते तेथी २॥ सिद्ध ते ते जाये यचरम, केमके ते नायना पर्या. यतुं (अनपगम ) यनाशपणुं ते तेथी ३ ॥ ॥ ३ एकवचने, ३ बहुवचने, गवं ६ दमक थया ॥ सर्व मळी ६ दमक थया ॥ इति संझीहार ॥ ४॥ हवे पांचमुं संश्याहार कहे वे ॥सलेशी जीव, सोशीलाये कोइ चरम, केमके जे निर्याण पामशे ते सोशीपणाना चरम, कोइ थचरम १ ॥ एवं नारकीथी मामी वैमानिक सुधी कोइ चरम, को यचरम २५॥ प. एकवचनना २५ ॥ बहुवचनना २५ ॥ सर्व मळी ५० दमक यया ॥ एवं कृष्णवेशाना एक बहुवचने ४६ दंगके ॥ नोखलेशीना ४६ दमके। कापोतलेशीना ४६ दंगके । एवं तेजु- सेशीना एक घटुवचने ३७ दमके ॥ पद्मशीना एक बहु यचने छ दंगके ॥ शुक्खलेशीना एक बहुवचने पदमके । सर्वत्र कोश्चरम कोश्यचरम ॥ योशी जीव, योशीला थचरम १॥ मनुष्य ते ते नावे चरम, अपेक्षा नोसंझीनोयसंशोवत् २ ॥ सिते ते जांच यचरम, केमके ते नावना पर्यायर्नु यनाशपण वे तेथी २॥ ३ एकवचने, ने ३ बहुवचने, ६ दंगक यया ॥ सर्व मळी २४ा दमक थया ॥ इति लेश्याछार ॥ ५॥ हवे व्यं दृष्टिधार कहे छे॥
चरमा चस्मना योल, , -- -- " समदृष्टि जीर समष्टि नार नामा माती पानी एननाव यचरम नम:। - मात्र मिस ने न नात्र प्रचाम Fउनना। १२. मन मादर. 11. प्राम यपदामाद) २. गरम . । । . - ग का -7 11/10 दम्रया ।। समामि - नाव न न ना .... 1. IT ..मामा मा. निक, नुवा नेन नाय काम. ॥ ॥ ५.चनना ।। दमक न " दमक बहुवचनन। । ३d दमा या !! म मामा नमिता ५ ।। दव मातम मयनहर कह ) मयन हाय संयतनाव का पिगमनधा चाम का यचरम ? ॥ एवं मनुष्य का चरम, कार अन्वरम कवचनना २ दमक, न बहुः वचनना २, एवं ४ दंमक ॥ असंयत जीव, त्यसयत जाव काश् चरम, काइ यचरम १॥ C niनाकी मां मानिा. सुधी ने से जांप कोइने गरमपाणु, का२॥ ....... २५॥ एक बनना २५, ने पयरगना २५, ग. ५० दंकक यया ॥ संयतासंयत जीव, गंगनाप ना कोइ परम, न कोई अचम्म १ ॥ तिर्यच ते ते नात्र पूर्ववत् २॥ मनु. एनेने नां पूra ३॥ ए. एकापने ३, ने बयपने ३, गर्व ६ दंगक यया । नोसंय- या गोरगे नारे यगरम, केमके सिन्ने सिपणाना पर्यायर्नु थनपगम (आना) arjiची सिप गमज जाण २ ॥ए पकवचनना २, ने पदरममा २, पर ४ दंगरे याममसा मळीने ६५ दमक यया ॥ इति संयनकार ।। 30 आग कपाय हार कहे ॥ सापापी जीप, सकपाय नाये का चरम, कोश यम १॥ नारकीची मानी मानिक सुधी ने ते जाये कोई चरम, कोइ यचरम २५ ॥ niपले २५, ने पवने २५, गर्थ मळी ५५ दंका यया ॥ एवं मोधकषायीने ५० minापागीने ५० दम ॥ मायापायीने ५० दमक । लोनकपायीने ५० दंगके कोइ परम, कोइ परम ॥ श्रफपायी जीय, श्यकपाय नावे याचम्म १ ॥ मनुष्य ते ते जाये बोल. परमना ॥१२६॥ को चरम, कम कथा 1351 नाप ले व्यपेटाए । को चरम एकवचन ३ टा. { मनमा यया ।। नि कपाय कार । ७ नं। बाप अचम्म. क.मक कान अप, 3 ' , '. ', १ . या नामा मानिक धा तं तं नाव को: च.म. !..। ...... Aiti ! .11॥ोयच. रम। सिर तर नार म 1.12.1..नना नाज हाय नअपनाए २१ ॥ ॥ वचनना ... न पचपन। ". Id. यया ॥ नतिझानी तत नाव एक बचने वचन ४० दम.. ॥ न डान। 60 टन ।। {पानं। ३४ दमके ।। मनःपर्यवसानी ४ दमय कोई चम्म, कोई अचम्म, कभक केवउझान मानिए फर। मति झानादि न पाम त अपक्षाए चम्म ॥ केवलझान। ६ दम अचरम ॥ यझानी जीव य- झान नावे कोश् चरम, केमके अज्ञानने फरी नदि पामे ते यपकाए । तेथी विपरीत जे ॥१२८ यानव्य ते झानने नदि पामे ते थपेक्षाए को यचरम १ ॥ एवं नारकीयी मामी वेमा. निक सुधी, ते ते लावे कोइ चरम, कोइ यचरम २५ ॥ए एक वचनना २५, ने बहुवच. नना २५, एवं ५० दमक यया ॥ एवं मतियज्ञानना एक बहुवचने ५० दमके ॥ श्रुत यज्ञानना ५० दमके ॥ विनंगझानना ३४ दमके कोइ चरम, कोश्यचरम ॥ सर्व मळीने ३५० दमक यया ॥ इति शानदार ॥ ए॥ वे दशभु जोग घार कहे ते ॥ सजोगी जीव, सजोगनाये कोइ चरम, केमके यजोगपाणु पामवानी यपेक्षाए । कोश्यचरम १॥ एवं नार. कोथी मामी वैमानिक सुधी, ते ते लावे कोई चरम, ने कोइ यचरम २५ ॥ ए. एकवचने २५, ने बहुवचने २५, एवं ५० दंगक यया ॥ एवं मनजोगीना एक बहुवचने ते ते नावे ३४ दमके ॥ एवं वचनजोगीना एक बहुवचने ते ते नावे ० दमके ॥ एवं काययोगीना ५० दंडके कोई चरम, कोई यचरम ॥ ययोगी जीव, ययोगनावे अचरम १॥ मनुष्य ते ते जाये चरम, केमके मनुष्यने थयोगीपणे फरी मनुष्यपणानो यक्षान दे, ते अपेक्षाए २॥ सिह ते ते जावे यचरम, केमके ते नाव- नाश थवाप' नथी, ते अपेक्षाए ३ ॥
दोल.
चरमना
॥१२७॥
ए एक वचननना नवचनना
दरम. पया ॥ सम; 150 दंगक
यया ॥ इनि जागा 10 प्यार कर, साग, ।' ज. सागा.
गव नना नाव अचम्म काम इ. न ना. अनारसपा प्रपा ' || 'नारक।।।
मांनी वमानिक । न ने जान को कान.. ..fear ! २ . : Y
न पामश ने अपद।। ।। चीन का अचम्म ॥२॥ ॥ (मर ने नार पिचरम.
कमक सामागवननाचगाना ना ना नअपना..। करसन 2. नाचिन
२६ ॥ स मळ। दमा 'प्रया ।। ।। पापना 4] 12 दमक ने नाव
(मागागवन्नान। पर जागया || पत्र म.7 100 टक या ॥न पगागहार ॥॥॥
दव १२ मु बंद हार कद ॥ सवर्द। जाप सवदं। नाव का चम, मकसद कीय।
न पाम, त यपदाण॥ काम अचम्म त फराथी पाम त यपंक्षाए। ॥ व नारकीय। मामी
वैमानिक मुधी ते तनाव को चरम, को अचम्म, २५ ॥ पकवचन २५, ने बहुव-
चने २५, सर्व मळी ५० यया ॥ एवं स्त्रीवेदना एक बहुवचने ३४ दंगके ॥ पुरुपवेदना
॥१२७॥
एक बहुवचने ३२ दंगके । नपुंसक वेदना २४ दंगके ॥ ते ते नावे कोश् चरम, कोई यचरम ॥यवेदी जीव, अवेदनावे अचरम २॥ मनुष्य अवेदनावे कोश्चरम, केमके यवेदपणे युक्त मनुष्यपणाने जे बळी फरी नहि पामे ते अपेक्षाए ॥ कोई अचरम, केमके कोश फरी पामशे ते अपेक्षाए २ ॥ सि ते ते नाये अचरम ३॥ ए एक वचने ३, ने बहु- वचने ३, एवं ६ दमक यया ॥ सर्व मळीने १३५ दंगक यया ॥ इति वेदधार ॥ १२ ॥ हवे १३ मुं शरीरधार कहे रे ।। सशरीरी जोव,सशरीरनावे कोश् चरम, केमके सिगमनथी फरी शरीर नहि पामे, ते अपेदाए ॥ तेथी विपरीत को यचरम १॥ एवं नारकीय) मामी वैमानिक सुधी, ते ते नावे कोश् चरम, केमके नारकादिपणे फरी शरीर नदि पामे, ते अपेक्षाए । तेथो विपरीत को यचरम २५ ॥ए एक वचनना २५, ने बहुवचनना २५, एवं ५० दमक यया ॥ एवं उदारिक शरीरी ते ते जावे, एक बहुवचने २२ दंगके ॥ एवं वैकेय शरीरी एक बहुवचने ते ते जावे ३६ दमके ।। एवं थाहारक शरीरी ते ते जावे एक बहुवचने ४ दंगके ॥ एवं तेजस् शरीरी ते ते नारे एक बहुवचने ५० दंगके ।।
परमा. परमना ॥१२॥ एवं कार्मण शरीने न जांच क. वहनन । दमके का चरम, न कोई अनरम ।। थारीरी जीर. असागरना - म. ३ मर नने सिर ने। न जापन अनाशप म ठे, न थपक्षाय ।। IIT सन । 11-न दमा रया ॥ सर मळीन २१४ दमक थया । निर ॥ १ ॥ य म पनिहार बद ने ॥ ५ पया- प्तिा पानि जीव पयानि 415 १२म का अचरम || नारकीय मामा वैमानिक मुधा न त नाच । चरम न ५। यनरम २० ॥ ॥ ॥ वचनना २०. ने पहुवचनना ५०, ए ४० दगम थया । एव यादार पयामिना ते ते नाव एक बहुपचने ५० दमके ॥ एव शरीर पयाप्तिना एक वरवचने ५० दमक ॥ एवं प्रिय पर्या मिना ५० दंगके ॥ एवं श्वासोच्छाम पर्याप्तिना ५० दमके ॥ एवं नापा मनपर्याप्तिना ४० दमके कोइ चरम, कोइ यचरम जाणा ॥ ॥ २७० दंमक थया ॥ ५ अपर्याप्तिए अपर्याप्ति जीव, थपर्याप्तिनाव कोइ चरम, कोइ थचरम १ ॥ एवं नारकीयो मांमो वैमानिक सुधी, ते ते जावे कोश् चरम, कोइ थचरम २०॥ ए एक वचनना २०, ने बहुवचनना २०, एवं ४० ११२८॥
दंगर यया ॥ एपं यामार शपयामिना गक पहु परने व दमकेगवं शरीर अपर्याप्सना ५० देमके ॥ इनिग थपर्यातिना ५० दमके ॥ एवं श्वासोवास थपर्यातिना ५० पंग । नापा मन व्यापाशिना 0 दमके कोई चरम, कार यचरम ॥ सर्व मळीने १६० देम यया ।। इति पर्यापिकार ॥ १५ ॥ सर्व मळीने दंगरु २५०४ यया ॥ गागा ॥जो जे पाविनिति पुणो, नावं सो तेण थपरिमो होइ ।। यात पिजोगो जम्स, तंग नावण सो चरिमो ॥१॥ नापार्य-जेजे नारने फरीने पामे, ते ते नाय करी थचरम होय ॥ नायनो य- रगत पियोग, ते तणे नारे करी गरम होय ॥१॥ ॥ इति परमागरमना घोल संपूर्ण । आहारक अनाहारकना बोल॥ थप भी न्याहारमा प्यानाहारफना पोस पनपणा पद २० माथी सख्या रे॥ गाथा ।। याहार नविय २ सारी ३, सेस्ता ४ दिहि ५ संजय ६ कसाए ॥ ...
बोल,
नाण
भनादा.
रकना
१२९॥
--
जोग योग 10 बंद य" मगर " पनि '३॥१॥
दय प्रपम यातार 1 ! .. जय -17 वचन ग्राधिकाच्याहारक ने
कायनादारक न द ग १.. (२५ कपल म्यान तथा म गुणगाण नथा
मिपा अन्त
। 17 : II I: चमा'मधीक पचन जाण ॥ समु.
अयजीव पचन । 1-1 13 विग्रन गनिन यि निगाद तथा
लगा तयाहारक घाणा
। । । महाना पिट पम, विग्रह
1474 - 11 मा. ना. चणा त का वम्बत
।।। . . ..ailalit मानिक निधी जाण ॥ नवरं एके-
प्रिय ५. रसय घिन। ५. जावा ॥१॥३५ वा. नव्यहार कह ॥ नव्यसिद्धिक
एक वचन याश्रियादारक यनादक, न युक्ति पूर्ववत् ॥ एवं नारकीथी मामी वैमानिक सुधी
जाणवू ॥ बहु वचन यानि नव्यमिरिकमा योधिक न एकप्रियना दमक वर्जिने ३ नांगा॥
गा-
॥१२९॥
एवं अजव्यसिद्धिक एक वचन याश्रि, बहु वचन याश्रिने जाणवू ॥ नोनव्यनोय- नव्यसिक्षिक एक वचन यानि एक यनादारक ॥ एवं सिक पण बहु वचन यानि यना. हारक ॥ २॥ ये बिजु संक्षी द्वार कहे ॥ एक वचन यानि संझी जीव, कोइ थाहार. फ, ने कोइ अनादारक, विग्रह गतिनी अपेक्षाए। संझीनुं वायु दयायी संझी शेष काख यादारक, यावत् वैमानिक सुधी ।। बहु वचन यानि संझीने पि ३ नांगा, वैमानिक मुधी । यसंही जीय, एक वचन यानि कोइ याहारक, कोश्यनाहारक ॥ एवं नारकी यावत् पाणव्यंतर सुधौ ॥ बहु वचन यानि यसंझी जीव, याहारक ने यनादारक घणा, एफ नांगो । यसंझी नारकी बहु बचन यात्री ६ नांगा॥ एवं १० नवनपतिमा,६एकजि. यमांयनंगक ॥ ३ विगछिय, तिर्यच पंचजियमा ३ नांगा॥ मनुष्य वाणव्यंतरमा ६ जांगा॥ नोसन्नीनोथसन्नी मनुष्य, सिम्मा एक बचने थाहारक ने थनाहारक ॥ बहु वचने नो. संझीनोव्यसंझौमां याहारक न यनादारक समुद्घात आधी घणा ॥ मनुप्यमा ३ जांगा ॥ सिलो अनादारक घणा ॥ ३ ॥ ये चीथु खेश्याहार कहे ॥ सखेशी तथा ससेशी नारकी.
घोगामीपनिक सुधी, एक. पपने काइ स्याहारक, काइ यमाहारक। बहुवचन याश्री म.
ससी, पण मी कापात it समुराय ने एकऽियना ५ दंझक वजिन. बीजामा नांगा
पहु बतन शाधि तंजु श्यामा रोपण। बनम्पनिमा ६ नागा. बौना दवलोक
सुपीना देवतुं नेमां थागमन वे मार्ट ॥ शेष जीरोमा जागा ३ खाने ॥ जन तेजुलेश्या होय
सेने ३ जागा, ओपने नहि ।। पद्म शुक्स सेश्या तिर्यच पचप्रिय, मनुप्य, वैमानिकन विप
दोग। एक पगन थाधि थाहारक, बहु वचन यानि जांगा ३ ॥ यवशी जीव नथा
मनुप्प तपा सिक एक वचन बहुवचने थनाहारक ॥ ४॥ हवे पांचमुं दृष्टि धार कई ठे।।
समष्टि जीप कोश्थादारक, कोथनाहारक ॥३विगप्रिय समष्टिमां ६ नांगा । सिद्ध
शलाहारक ॥ शेपमा नांगा ३ साजे । मिथ्याष्टिमा समुच्चयजीवने एप्रिय वर्जिने, शे.
पमा ३ जांगा ॥समामिपारष्टि जीव, थादारक एकेंघिय, ३ विगखें जिय वर्जिने, वैमानिक
सुधीमा एक पडु पचने थाहारक ज होय ॥५॥ हर संपत्ति हार कदे ॥ संजति
मनुष्य ने समुघय जीव कोइ यादारक, कोथनाहारक, बहु वचने ३ नांगा । यसंजति
॥१३०॥
एक पचने कोइ थाहारफ, कार थनाहारक ॥ बहु वचने समुथय जीवने एफजिय वर्जिने, शेपमा ३ नांगा। संजतासंजति समुयय जीय, पंचशिय तिर्यच ने मनुष्यमा एक बहु बचने याहारणा ॥ नांसंगतना यसंपतनोसंयतासंयत समुशय जीवने सि एफ बहु बचने अनादारक ॥६॥ हो सातमुं कपाय द्वार कहे ठे॥ सफपायो जीव कोइ थाहारक, को अनादारफ, गर थैमानिक मुधी, बहुवचने समुचय जीवने एडिय वर्जिने, शेषमा ३ नांगा ।। मांध करायी जाने विष एमज जाण ॥ नवरं देवमां६ जांगा केमके देवमा स्वनाथ) सोन पर होग, मोधादि पहु न होय तेथी, क्रोध कपायी एक पण साने वेतेयो ॥ मान फपायी माया कापायी देव नारकीने विपे ६ नांगा, शेपमा समुच्चय जीवने एकैछिय वर्जिने पण atar खाने । लोन कपायी नारकीमा ६ नांगा, शेपमा जीव एकेजिय वर्जिने ३ नांगा लाने ॥ अफपायी नासंझोनोयसंतीनी परे जाणवा ॥७॥ हये याठमुं ज्ञान हार काहे ॥ मानी एक पचने समदृष्टिनी परे, मतिज्ञानी श्रुत हानी, ३ विगजियमा ६ जांगा, शेपमा ३ जागा । थपपिहानी एक पचने तेमज बहुवचने तिर्यच पंचेप्रिय थाहा- :
प्पादिने विप थादारक थनादारफ, शंपने विष ३ नांगा ॥ विसंगज्ञानीने विप एक समुच्चय थज्ञानी, मति ध्रुन यशाना, कवचन पूर्ववत् ॥ बहुवचन जीयपद एकाध्य पृथ- थाहारक पण थनाहारक. पण ॥ मनुष्यपट जागा व दवाड्या. न मिपद अनादारक, पण . । , ZEE Ththalal Entry | tim itizoba -11-11.... .... (Attitibit at hist .: . ! it Peo bt) .tr । - ।.:... mahiti FLHR HERE: Pahanbi '. I RE bpbt) • 1.hte Huutu . :! - usjine -- -- . -- -- HER .
घडवचन निर्यच पंछिय, मनुष्य यामारक, मिजंग ज्ञान सहिगने विपद गमिग निर्मच पंचडियमनुप्यने पिप उत्पनिनो संजय माटे॥शेष स्थान निगगिनिगमती विपेनांगा ३ ॥ ॥ हो नप, योग हार का सयोगीने गिरागुष्य जीपने एप्रिय वर्जिने, शेषमा ३ लांगा ॥ मनयोगी यायोगी समामिष्यामिनी परे, नारं वचनयोगो३ विगतेजियने, कायजोगने पिप समुश्चय जीपने एप्रिय पणिने, शेपमा नांगा ३ ॥ अजोगी जोष मनुष्य, सिक, यानाहारका | ये दश उपयोगकार हे मा. कार ग्यनाकार उपयोगने विषे जीय पजिय चर्जिने, शेषमा नांगा ३॥ सिक नाम ॥ १० ॥ हये यग्यारमुं वेद हार कहे ॥ सयेदने विष समुरुषय जीपने, प्रिय पानी, शेषमा ३ नांगा ।। स्त्री पुरुषवेदने विष एकवचने तेमज पहुयचने जोगादिन विष एकेका प्रते ३ नांगा || नपुंसक वेदने विष जीव गप्रिय पर्मिने व्रण नागा ॥ जीवगा प्रिय प्रसारक घणा थनाहारक घणा, यदी गेम फेयळी, एक यछुपचने, जीयपदे गनुग पर एयरने थाहारक, कोयनाहक, बहुवचने जोवपदे याहाम्फ पण, नालाग्य पण, गनुपने विपेनांगा ३॥ सिन्ने विष तो अनायाग्क ॥ ११॥ यं पारमुंभारी मार का ॥ २६.1.1 ने 14. अना। . -- 4 यापन । '. IF . पर तन पगप 10 मनपा ' . .' . : 24 - 14 ... 01 वन दाय, घाजान नसाय ॥ पनि स्याम नादार । न पचन । तर पर्यातिए थपर्यास का याहारक, का अनादरक ।। नपग्ना व यानि यात नारी, देप मनुप्यने विप ६ नांगा ॥ समुच्चय जीवन एकप्रिय जिन शेपन पि३ जागा ॥ जापा, मन पर्याप्सिने विप समुच्य जीपने पंचडिय तिर्यंचमा नांगा ३॥ नारकी देव ॥२३२॥ IN गगन Hिai | मांग यहनने जागदिदंकक कदवा ॥ जेने जे होग नयन ॥ यापन नाव मन यानि अपान नारकी देव मनुमन vिati नांगा ॥ १३ ॥ ॥ अनि ग्राहक नामाकना यो नर्ग। पंधिशतकना बोल श्रीनगन २६मांनी धिनकना गांड विग्यत ।। गागरि, दिना घनाणे॥ FIR मायाजोग१० सांग २१ समागम नामाई 11॥ Haनी गाया जाएगाना गाया करे॥ inादि पनाति, पांगादिना ॥ सामिानस २.२ गमाRin मरगती मांगी जामियमकामां मटाराना का प्रमाणे-
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हवे बंधीना ४ नांगा कहे ते ॥ वंधी, पंधर, बंधिस्सर-बांधतो दयो, वांधे ठे, बांधशे १॥ पंधी, पंधर, न पंधिस्सइ-मांधत्तो दयो, पधि ने, वांधशे नहि ॥ बंधी, न पंधर, पंधिस्सर, बांधतोदयो, बांधतो नथी, बांधो ३॥ पंधी, नवंध, नवंधिस्सइ-बांधतोहयो, वांधतो नथी, बांधशे नदि ४ ॥ बंधी व्रण काम थाभि वे, तेमा प्रथम पापकर्म (यशुन कर्म) वां. धया याश्रि २५ दमकमा जे जे बोस लाने तेमां कोण २ नांगा साने ते कई ठे। समुच्चय जीपमा ४० योस साने, तेमां समुच्चय जीय १ ॥ सलेशी २॥ शुक्सलेशो ३ ॥ शुक्लपक्षी ४ ॥ समष्टि ५ ॥ सनाणी ६॥ मतिज्ञानीयादि शानी ४ ॥१०॥ नोसन्नायउत्ता ११॥ थवेदी १२ ॥ सकपायी १३ ॥ लोन कपायो १४ ॥ सजोगी १५ ॥ मनजोगी १६ ॥ वचन. जोगी १७ ॥ कायजोगी १७॥ सागारोवत्ता १५ ॥ यणागारो यउत्ता २७ ॥ ए २५ बोसमां नांगा साने । थसेशी १ ॥ केवली २॥ यजोगी३॥ ए ३ बोलमा एक चोयो नांगो खाने । यफपायीमा २ 'नांगा साजे ॥त्रीजी ने चोयो ॥ शेष बोस २३ रहा, तेमां पहेलो ने बीजो ए २ नांगा सारी ॥ नारकोथी मांगी मनुष्य पनि वैमानिक सुधी २३ दमकमा EVI बोल. शतकना ॥१४॥ जे जे ठेकाणे जेटला जेटसा योस साने, तेमा पहेलो बीजो ए २ नांगा लाने॥ मनुष्यमां समुच्चय जीवनी परे नांगा उतारवा ॥ हवे झानावरणीय १ ॥ दर्शनावरणीय २॥ नाम ३ ॥ गोत्र ४ ॥ यंतराय ५ ॥ ए कर्मना लेगो यधिकार कहे ते ॥ समुच्चय जीवमां ४७ पोल साने, तेमा समुच्चय जीव १ ॥ सोशी २ ॥ शुकलेशी३ ॥ शुक्लपक्षी ५ ॥सम. कितष्टि ५ ॥ सनाणी ६॥ मत्यादि । हानी १० ॥ नोसन्नाववत्ता ११ ।। यदी १२ ॥ सजोगी १३ ॥त्रण जोगी १६ ॥ सागाराव उत्ता १७ ॥ यणागारो वत्ता १७ ॥ ए १७ वो- समां जांगा साने ॥ यलेशी १॥ अजोगी २॥ केवली ३॥ए ३ मा एक चोथो नांगो साने ॥ यकपायीमो बीजो ने चोथो वे नांगा साने ॥ शेप बोल २५ रह्या, तेमां पहेलो ने योजो नांगो साने ॥ हये मनुष्य वर्जिने २३ दंझकना सर्व वोसमां पहेलो ने बीजो ए २ नांगा साजे ॥ मनुष्यमा समुच्चय जीवनी परे नांगा उतारवा ॥ हवे वेदनीय कर्म बांधवा च्याश्रि कहे ठे । समुच्चय जीवमा ४ बोल लाभे, तेमा समुच्चय जीव १॥ सलेशी २॥ शुहरुलेशी ३ ॥ शुक्रपदी ४॥ समकितष्टि ५॥ सनाणी ६॥ केवलझानी ॥ नोसन्ना- .....
वउत्ता ॥ सवेदी ए ॥ यकपायो १० ॥ सागारोपवता ११॥ याणागाराव प १२ घोलमा ३ नांगा लाने विजो नांगो वर्जिने ॥ विजो नांगो वेदनीय कर्मना बंध याधि मूलथी ठेज नहि ॥ योशी १॥ यजोगी २॥ ॥ २ मा १ चोथो नांगो साने ॥ शेप ३३ बोल रह्या, तेमां पहेलो ने बीजो ये नांगा आने ॥ नारकीयो मामी मनुष्य वर्जिन २३ दमकमा पहेलो ने चीजो वे जांगा लाने ॥ मनुष्यना दंगकमां समुच्चय जीवनी परे जांगा जाणवा ॥ मोहनीय कर्मनो विस्तार योधिक यशुन कर्मनी परे जाणयो । वे थायुज्य कर्म बांधवा याश्रि कहे ते ॥ समुच्चय जीरमा ४५ बोल लाने, तमां यलेशी १॥ केरती २ ॥ याजोगी ३॥ ए ३ मां एक चोथो नांगो लाने ॥ समामिथ्यात्वष्टि १॥ थवेदी २॥ य कपायी ३॥ एत्रणमा त्रीजी ने चौथो ए वे नांगा खाने । कृष्णपक्षीमां पदेखो ने बीजो ए २ नांगा लाने ॥ मनःपर्यव सानो १ ॥ नोसन्नावत्ता २॥ ए २ मां १-३-४ ए ३ तांगा लाने ॥ शेप ३७ वीस रया तेमां चार नांगा लाने ॥ नारकोमा कृष्ण पक्षी १ ॥ कृष्ण लेशी २ ॥ ए २ मां पदेला ने जोजो ए २ नांगा लाने ॥ समामि- पंषि. मुतफना ४ ध्यात्व दृष्टिमा न चाया पर नागा लानं ॥ शेष ३२ मा ४ नांगा लाने ॥ हवे दश नवनपति ॥ वाणव्यंतर ॥ ज्योतिषी ॥ वैमानिक ॥ १२ देवलोक ॥ ए अवेयकमां ॥ कृष्णपक्षीमा पहेलो ने त्रीजा पर नांगा लाने । समामिथ्यात्व दृष्टिमा विजो ने चोथो पर नांगा साने, पण एटदुं विशेष जे ए ग्रेवेयकमां समामिथ्यात्व दृष्टि नथी । शेष जेटला जेटला बोल जे जे ठेकाणे रह्या, तेमा नांगा लाने ॥ चार अनुत्तर विमानमा २६ बोल लाने, तेमां ४ नांगा लाने ॥ सर्वार्थसिझमा २-३-४ ए.३ नांगा लाने । पृथ्वी १ ॥ पाणी २ ॥ वनस्पतिमा २७ बोल साने तेमा कृष्णपक्षीमा १-३ प २ नांगा लाने, तेजुलेशीमा १ विजो नांगो साने, शेष २५ वोसमां ४ चांगा लाने ॥ तेज वाउमां बोल २६ लाने, तेमां पहेलो ने विजो ए २ नांगा साजे॥ त्रण विगलेंजियमां बोल ३१ साले, तेमां समदृष्टि१॥ झान ३॥ ए ४ घोलमा एक विजो नांगो साने, शेप २७ पोलमा १-३ ए २ नांगा लाने ॥ तिर्यव पंचेंजियमां बोल ४० साने, तेमां कृष्णपक्षीमा १-३ ए २ नांगा लाभे ॥ समामिथ्याबदृष्टिमा विजो ने चोयो . नांगा मान । समष्टिमान ४ ॥ पोखमां-३-० शेष वाम ३३ मां नांगा लाभे ॥ मनुष्यमा ४ बोस लाने ॥तेमा थोशी १॥ क. यही २॥ जोगी ३ ॥ ए. ३ मां एक चौथो नांगो खाने ॥ कृष्णपक्षीमा १-३ ५.२ नांगा साने ॥ समामिथ्यात्यष्टि १॥ यदी २॥ यकपायो ३॥ ग३ मा ३-४ प. २ नांगासाने समष्टि ॥ज्ञान ५॥ नांसनायता ॥ घोलमा १-३-४ ए३ नांगा दान || ३३ पोखमा नांगा लाने ॥ इति प्रथम योधिक उदेशः समाप्तः ॥ १॥ दो अनर्गमनगादि ५ उशा कहे ते ॥ थनंतरोधयन्नगा ते एक समय उप- ग्याने वो दोग ने १ ॥ यनंतरोगागा ने एक समय थाफाश क्षेत्र स्पाने ययोहोय मे २॥ अनंगरोहारगा ते एक समय याहार सीधाने जेने थयो दोय ते ३ ॥ थयंतर- पमानगा पा समय प्रजा योज्याने जेने थयो होय ते ४ ॥ ५ उदेशा ११ घार २५ PATE यधिकारे करी यताये ये ॥ पाप कर्म (यगुन कम) बांधवा यानि समुच्चय जी. पर्मा १० पोल साने, तेमायो थखेशी १॥ समामिथ्यात्वदृष्टि २॥ मनःपर्यवज्ञान ३ ॥ ।
बंधि.
बोल.
के. याज्ञान ।। नोसन्नावपत्ता ५॥ यदी ६॥ यकपायी ॥ मनजोगी॥वचनजोगी
ए ॥ यजोगी १० ए. १० चोख प्रथम समये न होय ॥ शेष ३७ बोल राह्य, तेमा २'नांगा
लाने, ते पहेलो ने वोजो ॥ नारकीय। मामी १२ देवलोक सुधीमा जे जे ठेकाणे जेटला
जेटला योस खाने तेमांयी समामिश्यावष्टि १॥ मनजोग २ ॥ वचनजोग ३ ॥ एत्रण
घण बोल वर्जया, शेष जेटला जेटला बोल रहा तेमा पहेला ने वीजा नांगो लाने ॥ नव
मेवयक, पांच यनुतर विमानमा जेटला जेटला बोल लाने, तेमांची ये चे बोल वर्जया ।
मनजोग १॥ वचनजोग २ ॥ शेप जेटला २ चोल रहा तेमां पहेलो ने बीजो नांगो खाने ।
पांच स्थावरमा जेटला चाल लाजे, तेमां ये नांगा लाने ते पहेलो ने बीजो ॥त्रण विगखें.
:: जियमाथी १ वचनजोग वज्यों, शेष ३० योस रखा तेमां ये जांगा लाने, पहेलो ने चीजो ॥
तिर्यंच पंछियमाथी ५वोस वा ॥ समामिथ्यात्वदृष्टि १॥ विनंगझान २॥ यवधि.
ज्ञान ३॥ मनजोग ४ ॥ वचनजोग ५ ॥ शेप ३५ बोल रह्या तेमा २ जांगा लाने, पहेलो
ने बीजो ॥ मनुष्यमांथी ११ बोल ना ॥ यलेशी १ ॥ समामिथ्यात्वदृष्टि २॥ विनंग-
॥१३६॥
दान ३॥ मनापान || केवलान ५॥ नोससायमा ६ ॥ यदी ॥ यक. पागी ॥ गननांग | वनजोग १०॥ यतेशी ११ ॥ शेष चोख ३६ राधा तेमा २ नागासाने, पर सोने धीजीए समुशय यशुनकर्म ग्राधिका ॥तेमझानापरणीय१॥दर्शatणीय पदनीय ३॥ मोहनीय ४॥ नाम ५॥ गोत्र ६॥ अंतराय॥पकर्मनो विचार योनिकी परे जागयो ॥ यायुष्यका पांधवानी यधिकार कहे ॥मनुष्य वर्जि २३ दमक गांजे समान ने, नेते सर्व योसमा निमो नांगो खाने । मनुष्यमां कृपाणपक्षी एक पातमा चिनी नागी खाने ॥ शेष ३५ पोतमा २ नांगा खाने ते त्रिजो ने चोथो ॥ रीले पासागादि ५ मेशा जाणया ॥ इति पांचमो उनेशो समाप्तः ५॥ दवे परं. नगंगागादिशा पाहे ॥ परंपरोययतागाने घणा समय उपने यया होय ते१॥ पपरोगागा ते घाणा साय याकास मंत्र स्पश्यनि यया होय ते २ ॥ परंपरोयादारगा नणा समय प्रादारलीधान या दोग ते ३ ॥ परंपरोपकानगा ते चणा समय प्रजा पाण्याने या दोय ते ५ ॥ Ujाना ११ हार, २५ दंगक, । पापकर्मबंधन यधि. BREARRE
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ययन याय
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न.
विपनामा चम्म
RI ARIR | ॥६३ ।। मा यामना न कद उशाना, ५ पारकम.
पंधनना थपिकार, २४ दमक, ११हारी यनाव ॥ पापकर्म माहनीय कर्म यांधवा था.
घि समुशप जीरमा ४ वोष माने, ते ४ योसमाथी थपेशी १॥ केवसझानी२॥ थ.
जागी ३॥ ए ३ बोस पर्या ॥ र ३ ने यो नर फरयाप माटे, ए ४४ पोखमा समु.
सय जीव १ ॥ सोशी २ ॥ शुकलेशी ३ ॥ शुक्रपक्षी ४ ॥ समकिती ५॥ ज्ञान ५॥ प १० ॥ नोसन्नाव उत्ता ११ ॥ यदी १२ ॥ सकपायी १३ ॥ लोन कपायो १४॥ सजोगी १५ ॥ मनजोगी १६ ॥ वचनजोगी १७ ॥ कायजोगी १० ॥ सागारोवता १५ ॥ श्यणागारोवत्ता २० ॥ ग २० चोखमा १-२-३१.३ नांगा लाने ॥ यकपायीमा एक मिजो नांगो साने शेप२३ बोल राधा तेमा १.२१.२ जांगासाजे । नारकी श्री मांझी मनुप्य वर्जिने मानिकमा व ४ प्यनुनर पिमान सुधीमा जे जे काणे जेटला जेटला बोल लाने नेमां १-२ १.२ नांगा साने ॥ मनुष्यमा ४४ वोस साने, तेमां समुच्चय जीवनी परे जे जे यो. समां जे जे नांगा काया ले ते ते जांगा कहेवा ॥ हवे यायुष्य यर्जिने झानावरणीयादि ५ कर्म बांधवा यानि समुच्चय जीवमा ४४ वोस लाने ॥ तेमांथो पूर्व २० घोस वा हता तेमांथो सकपायो । । लोन कपायो २ ॥ ॥२ वाल वा, शेप १० बोल रया नेमा १-२-३ ए ३ नांगा साने ॥ यकपायीमा १ विजो नांगो लाने, शेप २५ घोल रया तेमा १-२॥ २ नांगा साने ॥ नारकीयी मामी ५ यनुत्तर विमान सुधीमा १-२
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प्यमान योलमा नागा साले, ते समुनय जीवना दमकना पर बनाया ॥ ५४. अगीपारमो यचरम उदेशो समास ॥ ११ ॥ इति बंधिशतकना घोल संपूर्ण ॥ समवसरणना चोल॥ थप श्रीनगपती ०३० माथी समयसरणना योस लिख्यते ॥ गापाजीपाय १ लेस्स र पविख य ३, दिहिय ४ नाण ५ अनाणे ६॥ सणाय येय फसाय ए, जोगु १० ययोगे ११ एगारस गणाई ॥१॥ ११. गणा, पोज ४३, दमक २४ यने समुच्चय १, ए दंगक २५, उपर उतारवा, तेना विचार कहे ॥ --
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हवे समवसरण ॥ क्रियावादी १॥ थक्रियावादी २॥ यज्ञानवादी ३ ॥ विनयवादो ४॥ प४ समवसरण उपर ४ चोख उतारया ।। समुच्चय जीवमा वाल ४ लाने तेमा कृष्णपक्षी १ ॥ मिथ्यादृष्टि २ ॥ यज्ञान ४ ॥ण व वोलमा क्रियावादी वर्जिने ३ समवस- रण साने, यने यखेशी १ ॥ समदृष्टि २॥ शान ६॥ एवं G॥ नोसन्नावत्ता एायवेदी ॥ १० ॥ यकपायो ११॥ यजोगी १२ ॥ ए १२ वोसमा समयसरण १ क्रियावादीनुं लाने। समामिथ्यात्व दृष्टिमा समवसरण २ लाने ते यज्ञानवादी १॥ विनयवादी २॥ शेप बोल २७ मां समवसरण ५ साने ॥ ए पहेलु समुच्चयनु धार ययुं ॥१॥ वे नारकोमा ३५ चोल साने तेमां कृष्णपक्षी १ ॥ मिथ्यादृष्टि २॥ यज्ञान ४ ॥ ॥ ६ चौलमा क्रियावादी वर्जिने ३ समवसरण लाने ॥ समदृष्टि १॥ ज्ञान ४ ॥ ए ५ योलमां समवसरण गक क्रिया. यादीनुं लाने ॥ समामिथ्यात्य दृष्टिमां समवसरण २ लाने ते यज्ञानवादी ॥ विनय- वादी २॥ शेप वोल २३ रह्या तेमां समवसरण ४ लाने । ए नारकीर्नु यो द्वार ययुं ॥२॥ हवे नवनपति वाणव्यंतरमा ३७ पोल खाने तेमां कृष्णपक्षी १ ॥ मिथ्यात्व
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गांड मान ने AATM गाझियारादीनु साने । मुंहार श्रयं ॥३॥ grilam नतिमा २० गतान ने सगे ममरसरणावाने प्रक्रिया नाही ॥ अज्ञानयादी २॥ मुंह पम् ॥ १॥ से नउ १ पार २१ मा २६ Fina मां समाहा ने पूर्वगत् ॥ The मुंहार ययं ॥ हरे पण गिनिगगी ३१ पास जाने से मां पान ने पूर्वयत् ॥ १. १० मुंकार गर्ग, ॥ १० ॥ो निर्णय नगनियमां ४० योर सानं रोमा इ घाममा ३ समवसरणा प्लान पुरस्त | Anefe! पान ४ ॥ ए ५ बाहमा समयसरण , क्रियावादीनुं जाने। समामिलाrent समपसरण २ लाने में पूर्ववत् ॥ दोष श घोल राया तो समयसरण । सारे ११ मुंफार चयं ॥ रहो मनुष्य पेनियम ४ योड माने तेमा पूवाँक्त plant समय साने पुर्यगन् । यादी १ ॥ समष्टिा हान ६, नोसनाय. का || यादी १०॥ अगायो ११ ॥ जोगी १२ ॥ ॥ १२ पोखमो समयसरण मियादी खाने । समामिष्याटिगा समवसरण २ सात ते पूर्पयत ।। शेप योस शारदा
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बोल सात तेमां समवसरण एक क्रियावादीनुं खाने ॥ मुंहार य{ ॥ ॥ ये पृथ्वी पाणी वनस्पति ए ३ मा २० बाल साने ते सर्वमा ये समवसरण खाने ते यक्रिया बादी ? ॥ अज्ञानवादी २ ॥ ७ मुं धार घयुं ॥ ७॥ दरे तेउ १ थान २ मा २६ बोल खाने ते सर्वमां ये समयसरण साने ते पूर्ववत् ॥ गए मुंहार थयुं ॥ हरे वण विगलेंजियमा ३१ बोल लाने ते सर्वमा २ समवसरण माने ते पूर्ववत् ॥ १० मुं द्वार ययुं ॥ १० ॥ हवे तिर्यंत्र पंचेंशियमा ४० बोल लाने तेमां ६ बालमा ३ समवसरण खाने ते पूर्ववत् ।। समदृष्टि ? ॥ ज्ञान ४ ॥ ए ५ बोसमां समवसरण १ कियावादीनुं लाने । समामिश्यात्वदृष्टिमा समयसरण २ साने ते पूर्ववत् ॥ शेप २७ बोल राधा तेमां समवसरण ४ लाने ॥ ए ११ मुंहार ययुं ॥ हवे मनुष्य पंचेंजियमा ४३ बोल साने तेमा पूर्वोक्त ६ बोलमा ३ समवसरण लाने पूर्ववत्॥ यलेशी १ ॥ समष्टि२॥ ज्ञान ६, एनोसनाय. उत्ता ए॥ यवेदी १० ॥ अपायो ११ ॥ अजोगी १२ ॥ ए. १२ चोखमां समवसरण क्रियावादीनुं खाने ॥ समामिथ्याष्टिमां समवसरण २ खाने ते पूर्ववत् ॥ शेप योख रण रहा
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समवसरण एक क्रियावादीनुं लाने ॥ मुंहार ॥७॥.दये यी पाणी वनस्पति ए३ मा २७ बाल सान ते सर्वमा व ममवसरण साने ते यक्रिया बादी। ॥ अज्ञानयादी २॥ मुंहार ययुं ॥ ॥ हवे तेल १ वाउ २॥ मां २६ बोस याने ते सर्वमा घे समयसरण साने ते पूर्ववत् ॥ ए ए मुंहार ययुं ॥ हो त्रण विगजियमा ३१ वोल साने ते सर्वमा २ समवसरण साने ते पूर्ववत् ॥ ग. १० मुंहार थयु ॥ १० ॥ हवे तिर्यच पंजियमा ४० घोल साने तेमां ६ योलमा ३ समवसरण लाने ते पूर्ववत् ।। समष्टि । ॥ ज्ञान ४ ॥ ए ५ योसमां समवसरण १ क्रियावादीनुं लाने ॥ समामिश्यात्वदृष्टिमा समवसरण र साने ते पूर्ववत् ॥ शेप २७ बोल रहा तेमां समवसरण ४ खाने । प ११ मुं धार थयुं ॥ हवे मनुष्य पंजियमा ४ चोख लाने तेमा पूर्वोक्त ६ योलमा ३ समवसरण साने पूर्ववत्॥ असेशी १ ॥ समष्टि २॥ ज्ञान ६, ए ७॥ नोसन्नाव- उजाए॥ यवेदी १० ॥ यशपायो ११ ॥ यजोगी १२ ॥ ए १२ योलमा समवसरण क्रियावादीनुं खाने । समामिथ्याष्टिमा समवसरण २ लाजे -
रजना
पम
।
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२
'त ||
V
नयम
चनमा
J
.
|| मममरणदार ॥
हव विजा
मा समयमा
।। चन३'
या निपान चार घर पय ।
दलाया। पारमा दवलासियामा चाल जान तमा प्रधान. ६ वालमा तथा ५
पोखमा तथा समामियाशिमा पश्यन ममयमगण सान न ननारवा न गंष २१ बालमा
५ समवसरण साने ॥ ५ मुहार ययुं ॥ वे ए प्रबंगकमा ३२ बाल साने तमा पूर्वा
फ६ योलमा तथा ५ योलमा पूर्ववत् समवसरण साने ते उतारवा ॥ शेष २१ बोल रहा
नमा । सगरमरण माने ॥ ए ६ हुँघार थयुं ॥ ६॥ हवे ५ यनुत्तर विमानमा २६
१२.१०॥
घोस साने तेमां समवसरण एक क्रियावादीनुं लाने ॥ए मुंहार ययुं ॥ ॥ हवे पृथ्वी पाणी वनस्पति ए ३ मा २० बोल खाने ते सर्वमा ये समवसरण साने ते यक्रिया वादी ? ॥ अज्ञानवादी २॥ गमुं धार वयुं ॥ ७॥ हवे ते १ यान २ ए वेमा २६ चोल खाने ते सर्वमां वे समयसरण लाने ते पूर्ववत् ॥ गए मुं द्वार अयुं ॥ वे वाण विगलेंजियमां ३१ बोल लाने ते सर्वमा २ समवसरण साने ते पूर्ववत् ॥ ए. १० मुं द्वार थयु ॥ १७ ॥ हवे तिर्यच पंचजियमा ४० घोल लाने तेमां ६ बालमा ३ समयसरण खाने ते पूर्ववत् ।। समदृष्टि १ ॥ झान ४ ॥ ए ५ बोसमां समवसरण १ क्रियावादीनुं लाले ॥ समामिश्यात्वदृष्टिमां समवसरण २ लाने ते पूर्ववत् ॥ शेष २० बोल रह्या तेमां समवसरण ४ खाने ॥ ए ११ मुं धार ययुं ॥ हवे मनुष्य पंचेंजियमा U बोल लाने तेमा पूवोक्त ६ योलमा ३ समवसरण लाने पूर्ववत्॥ यलेशी १॥ समष्टि२॥ इान ६, प.॥नोसन्नाव. उत्ता ए॥ अवेदी १० ॥ यशपायो ११ ॥ यजोगी १२ ॥ ए १२ योसमां समवसरण क्रियावादीनुं लाने ॥ समामिथ्याष्टिमां समवसरण २ साने ते पूर्ववत्॥ शेष बोस २० रन्या पोल. तेमा समयसरण ४ लाने ॥ ए १२ मुं द्वार ययुं ॥ हवे यायुप्यना बंध याश्रि कहे ठे॥ समुच्चय जीपमा वोल साने तेमां कृष्णपक्षी १॥ मिथ्यावृष्टि २ ॥ अज्ञान ॥ ए ६ पोलमां समवसरण ३ लाने ॥ ते ४ गतिर्नु थायुप्य वांधे ॥ यतेशी १॥ यकपायो २॥ समामिष्याटि ३ ॥ केवलनाणी ॥ यवेदो ५ ॥ यजोगी ६ ।। ए ठ बोलवाळा आयुप्य यांधे नदि ॥ समदृष्टि १ ॥ ज्ञान ४॥ए ५ योसवाला गतिनुं वायुप्य वांधे तेमनुष्य ने देपर्नु। मनःपर्यवज्ञानी १॥ नासनावउत्ता २ ॥ ए वोलवाळा १ देवगतिर्नु थायुप्य बांध ॥ कृपा १॥नोस २॥ काणेत ३॥ ए ३ सेश्यामां समवसरण ४ लाने तेमा क्रियावादी एक मनुष्य मतिनुं यायुष्य वांधे ने शेप ३ समवसरणवाळा ४ गतिनुं यायुष्य वांधे ॥ तेजु १॥ पद्म २॥ शुक्स ३॥ ए. ३ खेशीमा समवसरण ५ लाने । तेमां क्रियावादी मनुष्य ने देव ए वे गतिर्नु थायुप्य वांधे। शेप३ समवसरणवाळा एक नारकी वर्जिने त्रण गतिनुं थायुप्प बांध ॥ शेष २५ घाख रया तेमा समवसरण ५ लाने तेमा क्रियावादी मनुष्य ने देव ए वे नतिनुं बापुष्प बांध बने नारकी देवता क्रियावादी होय ते मनुष्यर्नु वायुष्य बांधे ॥ शेष ३ समवसरणवाळा ४ गतिनुं यायुप्य बांधे ॥ दवे नारकी नानपति याणपतर ज्योतिषी तथा पहेला देवसोकथी मामी याउमा देवलोक मुधीमा जे जे काणं जेटला जेटला योस लाने तेमां कृष्णपक्षो १ ॥ मिथ्यादृष्टि २॥ अहान ४ ॥ ए ६ योजना दोय ते, मनुष्य ने तिर्यंच ए २ गतिर्नु यायुष्य वधेि ।। समष्टि १ ॥ ज्ञान ४॥ ए ५वोसना होय ते १ मनुष्य गतिन यायुप्य बांधे ॥ समामिष्याष्टिवाळा यायुप्यना थबंधक, शेष पोल जेमा जेटला जेटसा लाने ले तेमा क्रियावादी एक मनुष्यगतिर्नु थायुप्य यांधे ॥ शेष ३ समवसरणवाळा मनुष्य ने तिर्यंच एवे गतिनुयायुप्य बांधे ।। नवमा देवलोकधी मामी सर्वार्थसिक सुधीमा जे जे काणे जेटला जंटला बॉल साने ते सर्व समयसरणवाळा एक मनुष्यगतिनुं यायुप्य यांधे ॥ समामिथ्यात्वदृष्टिवाळा यायुप्यना यबंधक जाणया । ए.धार थयां ॥ ७ ॥ हवे पृथ्वी १ ॥ पाणी २ ॥ वनस्पति ३॥७३ मा २० बोल लाने वि.तेमां एक तेजुलेशी यायुप्यना अबंधक, शेप २६ बोलबाळा मनुष्य १॥ तियेच २॥ ए वे गतिर्नु थायुप्य बांधे ॥ ए मुंहार थयुं ॥ ७॥ हये तेल १॥ वाउ २॥ ए मां SAN..
पांधवाना कारनी परे जाणयो ।नवरं.समुचय जीवमा गया थायुष्य यांधते काणे मनुष्य देवगति वैमानिकर्नु थायुष्य बांधे । प १२ मुंहार थयुं ॥ ये नव्य थानापर्नु हार कहे ते । समुजय जीपमा ४ चोल लाने तेमां कृष्णपक्षी १ ॥ मिष्याटि २ ॥ अहान ४ प ६ योसमा नव्य अलव्य होय ॥ यलेशी १॥ शुक- पक्षो २ ॥ समष्टि ३ ॥ समामिथ्याष्टि४॥ शान६॥ एवं १०॥ नोसन्नावत्ता ११॥ य. पेदी १२ ॥ यापायी १३ ॥ थजोगी १४ ॥ ॥ १४ बोसमा एकता नव्य होय ॥शेप २७ योज मा तेमा जे क्रियावादी होय ते नव्य ज होय ॥ शेष ३ समवसरणवाळामा नव्य श्राव्य ये होय ॥ नारकोथी मामी १२ देवलोक सुधौमां कृष्णपक्षी १ ॥ मिथ्याष्टि२ ॥ श्रदान ४ ॥ ए ६ योसमां नव्य यानव्य वे होय ॥ समदृष्टि १ ॥ शुक्लपक्षी २॥ समामिभ्याटि ३ ॥ ज्ञान एवं बोसमा एकला जव्य जहोय ॥ शेष बोल जे जे ठेका. ये जेटमा जेटला साने तेमां समवसरण ४ ताने, तेमा जे क्रियावादी ते निश्चये ज जन्य होय ॥ शेष ३ समवसरणयाळामां नव्य यनव्य वे होय ॥ नव वेयकमा ३२ वोस 11 पाजे सेnt गा.पदी १ ॥ समष्टि २ ॥ ज्ञान ४ ॥ ए ६ योसमां निश्चय नव्य होय ॥ पोल, मिष्याष्टि१ ॥ कृष्णपक्षी २ ॥ थज्ञान ४ ॥ए ६ वोसमां नव्य यनव्य चे होय ॥शेप २० पास रहमा तेमा समवसरण ४ साने, तेमां ने क्रियावादी ते निश्चये नव्य होय॥ शेप३ समयसरण वाळा ते सत्य यनव्य घे होय ॥ पांच यनुत्तर विमानमा २६ वोस साने ते स निधय जव्य होय ॥ पांच स्थावरमां शुक्रपक्षी एकता जव्य होय ।। शेष २६ वोलमा गव्य अलव्य पे होय ॥ ३ विगसेंजियमा शुक्लपक्षीर सम्यष्टि २ ज्ञान ३ए ५ वोसमां एक्सा नव्य दोय ॥ शेष २६ घोसमां जव्य याव्य वे होय॥ तिथंच पंचेंजियमां कृष्णपक्षी १॥ मध्याष्टि२॥ यज्ञान ४॥ ए ६ वोसमा नव्य याजव्य ये होय ॥समदृष्टि १॥समा. मिप्याटि २ ॥ शुक्लपक्षी ३ ॥ ज्ञान ४ ॥ ए ७ बोलमा एकदा जव्य होय ।। शेष २७ पोस घा तेनां समवसरण ४ साने, तेमां क्रियावादी एकता नव्य होय॥शेप३ समवसर• एमाला तो नव्य थनव्य घे होय ॥ ११ ॥ हवे मनुप्यमा ४ योल लाने तेमां जेटला जेटमा योलमा नव्य थनव्यपरणु जे जे ठेकाणे खाने तेनो वर्णव समुच्चय जीवनी परे जा- neym णवो॥ ए १२ मुं धार थयुं ॥ इति समुच्चयनो प्रथम उद्देशो संपूर्ण ॥१॥ दवे प्रथम समय उपन्या थाश्रिना । उद्देश कहे ठे ॥ थणंतरोववणगा ते यांतरारहितं प्रयम समयना उपन्या १॥ थषंतरोगाढगा ते प्रथम समये जे क्षेत्र यवगायात २ ॥ यार थाहारगा ते प्रथम समय थाहार सीधाने थयो होय ३ ॥ थणंतरपजत्तगा ते एक समय प्रजा यांध्याने ययो होय ४ ॥ ए ४ प्रथम समयना होय तेने थणंतर कहीए ॥ हवे २५ दमक १२ हार उपर उतारवा; तेमां समुच्चय जीवमा ४७ बोल लाने तेमांयी १० बोल वर्जवा ते थलेशी १ ॥ समामिथ्यादृष्टि २॥ मनःपर्यव ज्ञानी ३॥ केवलज्ञानी ४॥नो- सन्नावउत्ता ५ ॥ यवेदी६॥यकपायी ॥ मनजोगी ॥ वचनजोगी ए॥ यजोगी१०॥ ए १० बोल वर्जिन शेप ३७ वोल थनंतर ४ छारमा साजे ॥१॥ नारकी यादि देश वारमा देवलोक सुधी जे जे ठेकाणे जेटसा जेटला समुच्चय योल लाने ठे तेमांथी समा. मिथ्यात्वदृष्टि १॥ मनजोग २ ॥ वचनजोग ३॥ एत्रण प्रण वोल वर्जवा केमके ३ चोख उपजतां प्रथम समये न होय ॥ नव ग्रैवेयक तथा पांच यनुत्तर विमानमा समुच्चय
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होय ते १ ॥ परंपरोगाढगा ते घणा समय क्षेत्र अयगायाने जेने यया हाय त ॥ ५९५० हारगा ते घणा समय याहार सीधा जेने यया दोय ते ३॥ परंपरपझत्तगा ते घणा समय प्रजा बांध्याने जेने थया होय ते ४ ॥ परंपर उद्देशे समवसरण उतारया ॥ यायुष्य बांधवानो नव्य यनव्यपाएँ उतारवानो वर्णव समुचय उद्देशानी परे जाणवो ॥ तेमां ए. टलो फेर जे पृषी १॥ पाणी २॥ वनस्पति ३ ॥ ए ३ मां तनु वेश्या कदेवो नहि ॥ ३ विगजियमा समकित १॥ ज्ञान ३॥ए योख वर्जया, शेपतेमज ॥ ४ उदेशा श्रया ॥ इति. नय उद्देशा समाप्त ॥ए। दवे चरम यचरमना वे नदेशा कहे ले ॥ तेमां चरमनो उदेशो समुच्चय उद्देशानो परे उतारयो । यचरमने उद्देशे सर्वार्थसिद यर्जिने तथा मनु. प्यमा थलेशी १॥ केलशानी २॥ अजोगी३॥ ए ३ वोल वर्जिन ॥ वीजा सयधिकार समुच्चय उद्देशांनी परे जाणवो ॥ ए २ उद्देशा था ॥ इति ११ उदेशा यय इति समवसरणना बोस संपूर्ण ॥ ।
मदिन लद्विना वाल ॥ योल. थप श्री सचिना यांस नगवती सूत्र शतक ७ मा ना उद्देशा वी जाथो सख्या वे॥ ५ मानना जेद नंदीसूत्रधी जाणा एटसे पूर्व ज्ञान तथा यज्ञान कह्या ॥ हवे ज्ञानी तपा यज्ञानी कदे । जीवाणं नंते फिनाणी यन्नाणी' इत्यादि कारे करी वर्णवीशुं । गाथा ॥ जीप १ गइ २ इंदिय ३ काए ४ । सुहुम ५ पजाति ६ नात्ये य ७॥ जयलिहिए य समिए । सहि १० उपयोग १५ जागी य १२ ॥१॥ सेरसा १३ क.साय १४ वेए १५ । थाहारे १६ नाणगोधरे १७ ॥ कासे १७ थंतर १५ थप्पायहुयं २० । पऊवा १ चेव दाराई ॥२॥ हवे प्रथम जीवछार कहे ते ॥ २६ ॥ १ समुशय जीरमा ५ ज्ञान, ३ यझाननी नजना ॥२ नारकीमा पहेली नारकीमा ३ज्ञाननी नियमा, थज्ञान ३ नी जना, दोष ६ नारकोमा त्रण ज्ञान प्रण अज्ञाननी -ایران ॥१४५ नियमा॥१२ दश नवनपतिमां ३ शाननी नियमा, यज्ञान ३ नीजजना ॥१७ पांच स्था. घरमा २ अझाननो नियमः ॥ २० प्रण विगछिय असंज्ञा तियेच पंचझियमा २ शान, २ अज्ञाननी नियमा ॥ २१ संज्ञा तिर्यंच पंचेंजियमा ३ ज्ञान, ३ यज्ञाननी नजना ॥ २२ सन्नि मनुष्यमा ५ ज्ञान, ३ अझाननी जना, यसंझी मनुष्यमा २ यज्ञाननी नियमा। २३ पाणव्यंतरमा ३ ज्ञाननी नियमा, यज्ञान ३ नी नजना | २५ ज्योतिपीथी मांगी नव प्रयकसुधीमा ३ शान, ३याननी नियमा॥ पांच थनुत्तर विमानां प्रण ज्ञाननी नियमा, यज्ञान नथी । २६ सिहमा १ केवलज्ञाननी नियमा। दये वीज गतिहार कहे ठे ॥ ५-३१ ।। १ नरकगतिमा ३ ज्ञाननी नियमा, ३ यज्ञाननीनजना ॥ २ तिर्यचगतिमांर शान, २ यशाननी नियमा॥३मनुष्यगतिमा ३ झाननी जजना, यज्ञान नी नियमा ॥४ देव- गतिमा ३ झाननी नियमा,३यज्ञाननी नजना | सिद्धगतिमा १ केवलज्ञाननी नियमा॥
दिना ) बोल. पोल. दये प्रिन प्रियद्वार कहे ते ॥ ३० ॥ १ सदियामां ४ दान. ३ श्रज्ञाननी नजना ॥२ एकेजियमा २ यशाननी नियमा- नति थाहान, ध्रुत थझान ।। ५ त्रण विगसेंशियमा २ शान, २ यज्ञाननी नियमा ॥६ पंगेनियमां । ज्ञान, ३ यशाननी नजना ॥ यणि दियामां १ केवलज्ञाननी नियमा ॥ हवे ना' कायद्वार कहे ॥७-१६ ॥ १ सकाश्याम पांच ज्ञान, ३ थझाननी नजना ॥ ६ पाच स्थावरमा २ यज्ञाननी नियमा । यसकायामां ५ ज्ञान, ३ यशाननी नजना ॥ यकाश्यामां १ केवल. शाननी नियमा ॥ हये पांचमुं सूदमहार कहे ठे ॥ ३-४ए । १ मूक्ष्म्मा २ यज्ञाननी नियमा ॥ २ वादरमा ५ ज्ञान, ३ यज्ञाननी जजना ॥ ३ नोसूदमनोरादरमा र केवलज्ञाननी नियमा ॥ हवे नहुँ पर्यातिहार कदे ठे ॥ ५१-२०० ॥ १ समुपय प्रजाप्तामा ५ ज्ञान, ३ शशाननो बजना ॥ नारकी प्रमालामा PANE ३ यशाननी नियमा ॥ १२ दस जयनपति प्रजाप्तामा ३ ज्ञान, ३ थशाननी नियमा॥२॥ ५ स्थायर ने ३ विगा प्रिय, असंही तिर्यचना प्रजाप्तामा २ अझाननी नियमा ॥ २१ तिर्यंच पंचप्रिय प्रजातामा ३ शान, ५ यज्ञाननी नजना ।। २२ मनुष्य प्रजातामा ५ ज्ञान, ३ य. झाननी नजना ॥ २५ वाण यंतर ज्योतिपोथी मामी नव ग्रेयेय कसुधीना प्रजातामा ३ शान, ३ यज्ञाननी नियमा ।।' पांच अनुत्तर विमानना पर्याप्तामां बाप झाननी नियमा॥६ समु. चय यप्रजाप्तामा ३ ज्ञान, नं ३ अज्ञाननी नजना॥२७ पेहेली नारकीमा यप्रजासामा ३ ज्ञाननो नियमा, ३,' यज्ञाननी नजना ॥ पांच नारकोना अपय प्तिामा त्रण शान, व्रण य. शाननी नियमाातमीना यपर्याप्तामांत्रण यशाननी नियमा, नाण नयी ॥३७ दस जवन- पति अप्रजाप्ताम' : ३ झाननी नियमा, ३ अज्ञाननी जजना ॥ ४२ पांच स्थावर ने असंही मनुष्यना या जातामां२ अज्ञाननी नियमा ॥ ४५ विगजियो यसंझी तिर्यचपंचेंजि- यना अप्रजातामा २ ज्ञान, २ यज्ञाननी नियमा ॥ ४६ तिर्यंच पंचे जिय प्रजातामा २ शान, २ यज्ञान । नियमा ॥ ४ मनुष्य यप्रजातामा ३ ज्ञाननी जजना, २ यज्ञानना नियमा॥
10 mयंता प्रजातामा ३ पान नं। नियमा, ३ यशाननी जजना ॥ ५० ज्योतिषीय। गांमी न यकसुधोना शाजाप्ता ३ झान, ३ यज्ञाननी नियमा ॥ पांच यनुत्तर विमा- नाशपातामा प्रण ज्ञाननी नियमा, यज्ञान नथी॥ ५१ नोप्रजाप्तानीयप्रजाप्तामा १ केयपक्षाननी नियमा॥ हवं 3 मुंजवत्थहार कहे ते ॥ ५-१०५॥ १ मारकी नवत्थामा ३ ज्ञाननी नियमा, ३ यज्ञाननी जजना ॥२ तिर्यच नवत्था- मा ३ ज्ञान, ३ घशाननी नजना ॥ ३ मनुप्य अवस्थामां ५ ज्ञान, ३ यज्ञाननी नजना ॥ ५ देव नारयामा ३ आननी निर:मा, ३ यशाननो नजना ॥ ५ यजवत्थामां १ केवल. शाननी नियमा॥ हो ७ मुंजव सिद्धिकहार कदे ते ॥३-१०७ ॥ १ नरसिद्धियामां ५ बान, यज्ञाननी नजना ॥ २ थनवसिद्धियामां ३ था.. नमी बनना ॥ ३ नोनवसिधियानोयन सिडियामा १ केवलज्ञाननी नियमा ॥ " • indan - हवे मुं संझौछार कद्दे ले ॥३-१११ ।। १ संजोमा ४ शान, ३ थक्षाननी नजना ॥ २ असंहीमा २ शान,श्यज्ञाननी नि. गमा ॥३नोसंतीनोग्यमंत्रीमा र केपसाननी नियमा ॥ हो १० मुंभकार कहे हे | 10-२0१ ॥ गाथा ॥ नाणनि चरिता चारित । दागाई पंच सक्रिय इंदिय सहिदसमा एयानि सत्तारे नंदाय ॥ १॥ अर्थ-बानादि, शानसकिर, दंगण मलि २, काग्नि सकि३, चरित्ताचरित सकि १, दानादि ५, दिय सहि ५, १० हार की २० बोल वर्ण ।। प्रथम शानदार-यात २॥ ? ना सहियामां ५ हरननी जना, अडान नयो । २ नस्म यसक्रियामा ३ शाननी नजना. जान नयाँ ॥ ३ मनिज्ञान लहियामा ४ छाननी जजना, झानमा य. भान दांप नहि ॥ ४ नम्न थालछियामां ? केवल इतनी नियमा, ३ यशाननी नजना ।।
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563633 वीजु दर्शनकार-वोल ॥ २१ दसण सद्रियामा ५ज्ञान, ३ यशाननी नजना १ ॥२५ तम्स यतक्रियामा नस्थि को जीयो २ ॥ २३ समदंसण लछियामा ५ ज्ञाननीनजना, थज्ञान नयी ३ ॥ तम्स यसहियामां ३ यज्ञाननी नजना, ज्ञान नयी ४ ॥ २५ मिनादसण सद्रियामां ३ यहा- ननी नजना, शान नयी ५ ॥ २६ तस्स यलछियामां ५ज्ञान, त्रण यज्ञाननी नजना ६॥ २७ समामिगदसण लबियामा ३ यज्ञाननी नजना, ज्ञान नयी 3 ॥ २॥ तस्स अल- दियामा ५ ज्ञान, ३ यताननी नजना ॥ त्रिजु चारित्रहार-बोस १२ ॥ २ए चरित लडियामां ५ ज्ञाननी जजना, यज्ञान नथी? ॥३० तस्स यसद्रियामा ४ ज्ञान, यज्ञान ३ नी नजना, मनःपर्यत्र नयी२॥ ३१ सामायिक चारित्र सद्धियामा ४ ज्ञा. ननो नजना, अज्ञान नयो ३ ॥ ३२ तम्स याछियामां ५ ज्ञान, ३ यज्ञाननी जजना ४ ॥ ३३ वेदोपण्यापनीय चारित्र लडियामां ३ जाननी नजना, य.
योर.
लदिना
॥१४॥
जान नथ। ५ ॥ ३४ तर अलावामा ५ जान, ३ यज्ञानन। नजना ६ ॥
३५ पग्दिा विगु चास्त्रि लयामा ४ ताननं नजना, अहान नथ। 3 ।। ३६ तम्म
यसयामा ५ हान ३ ग्रहानन। नजना , ॥३१ सम्म संपराय चाग्त्रि लकियामा
४ इानननजना. अहान नपा। ।। ७ नम्म यलसियामा ५ ज्ञान, ३ अडानन।
नजना १० ॥६॥ यथारयान चारित्रलच्यामा u छानन। जना, अडान नर्थ।।।।
४० नम्न अलहियामा । हान ३ अडाननं। नजना ॥२॥
चाथु चारित्राचारित्र हार-बाल ॥
४१ चरिताचरित लडियामा ३ छाननी नजना, यशान नर्थ। ॥' ।। ४२ नम्म
यलहियामा ५ ज्ञान, ३ यशाननी नजना २ ॥
पांचमुं दानलब्धिहार-चोल २ ॥
५३ दाण सडियामां ५ झान, ३ यज्ञाननी नजना १ ॥४४ तस्स थलहियामां १
केवसाननी नियमा २॥
॥१४९॥
मान सन्धिकार-वोस २॥
४६ पर सान सप्रियाना २ योस पूर्ववत् २ ॥
सात नोग सधिकार-योस २॥
UT नांग सद्रियाना २ योस पूर्ववत् २ ।।
यातमु उपनोग सचिधार-चोख २॥
५० एवं उपनांग सझियाना २ योस पूर्ववत् २ ॥
नरमुं वीर्य सन्धिद्वार-योस ॥
५१ काश्यितरियाना पूर्ववत् १ ॥ ५५ तस्स असहियामां ? केवता हान २ ॥
५३ पात वारियलियामा ३ ज्ञान, चोथा गुणस्याने समदृष्टि थाथि, ३ यहाननी
नगना ३ ॥५४ तम्म थाजियामां ५ शाननी जजना, थझान नथी ४५, ५५ मित
जीरिगतकियामा ५ जाननी नजना, यज्ञान नयी ५॥५६ तस्स सहियामां
ज्ञान, मनःपर्यय नदि, ३ थाननी नजना ६ ॥ ५० पासपंमित वीरिय सद्धियामा ३
VERMERRISESAMARTHERELES
योल.
पानी ना, यज्ञात नधी ॥५० तरस याजियामां ए ज्ञान,३यज्ञाननो नजना ॥
दाणु शक्षिय सधिकार-पास १२ ।।
दिय सद्विधामा ७ ज्ञान, ३ चहाननी नजना १ ॥ ६० तस्त याउझियामां
१ फेमसामनो नियमा २॥ ६१ धोडिय सहियामा ४ ज्ञान, ३ यशाननी नजना ३॥
६२ नरम यसझियामा ४ ज्ञाननी जना, २ यज्ञाननी नियमा ४ ॥६३ चक्कु प्रियना
पडियामा । ज्ञान, ३ थझाननी जजना ५॥ ६५ तस्स यसझियामा २ ज्ञाननी नजना
ने फेपनी नियमा, एवं शान ३ ने २ यज्ञाननी नियमा ६ ॥ ६५ प्रियना लद्धि-
पामा ४ शान, ३ यशाननी नजना ॥६६ नरस यलडियामां काननी नाना. ने
१ फेयमनी नियमा, एवं ३ इान ने २ याननी नियमा ७ ॥ ६७ जानेन्द्रियना ख्यिामा
५ शान, ३ थज्ञानना जजना ए ॥ ६७ तस्स यसद्धियामां ? कैरसज्ञान, ने २ यझाननी
नियमा १०॥ ६७ पासिदिय सहियामा ४ ज्ञान, ३ यज्ञानना नजना ११ ॥ १० तस्स
शसखियामांर कंवलज्ञाननी नियमा १२ ।।
॥१५॥
हर में उपयोग द्वार कहे। योस १४-१५ ॥ मानामा ५ जान, ३ यशाननी नजना ॥ ३ मति श्रुत सागारोवनामा जानीनजना, यानयो । प्रापिमान सागारोवपनामा ४ज्ञाननी नजना ॥ मान गागारिनामा ४ जाननी नजना ॥ ६ फेवलज्ञान सागारोपपत्तामा १ सानो निगमा || मनिशुन यज्ञान सागारोपनामां. ३ यज्ञाननी नजना ॥ Mrina मागांगरनामा ३ अज्ञानन) नियमा ॥ १० यणागारोष उत्तामा ५ ज्ञान, प्रधानमो नजना ॥ १२ पशु धगदर्शन याणागारोपउनामा ५ ज्ञान, ३ यज्ञाननी नजना ॥ १३ प्रापिदर्शन थापागागंयनामां शाननी नजना, ३ यज्ञाननी नियमा ।। ॥ सा दर्शन थापागागपनामा १ कंवलशाननी नियमा ॥ दो १२ मुं गांग प्रार कड़े ने । योस ५-२०० ॥ मांगी मनोगी TRोगी कायजोगीमा ५, ज्ञान, ३ अज्ञाननी नजना ॥ umiiint १ केसानो निगमा ||
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दवे २७ मुं नाणगोयरधार कहे ॥ नाण केहेतां ज्ञानना विपयर्नु परिमाण, गोयर कहेतां यर्थना ग्रहणनो विषय केटलो वे ? उत्तर-मति १ ॥ श्रुतज्ञान २॥ चार प्रकारे-अव्यथी १॥ क्षेत्रयी २ ॥ कालथी ३॥ नारयो ४॥ तेमां प्रथम मतिज्ञानी यादेश करीने (सामान्य प्रकारे) सर्व प्रव्य,सर्व क्षेत्र, सर्व काल, सर्व नाय,जाणे पण देखे नहीं, श्रुतज्ञानी सउपयोगी (उपयोग सहित) सर्व द्रव्य, सर्व क्षेत्र, सर्वकास, सर्वलाय, जाणेश पासें ॥ २ ॥ व्यवधिज्ञानी उपयोग देतो व्यथी जघन्य यनंतां रूपी व्य जाणे देखे, उत० सर्व रूपी अव्य जाणे देखे ॥ त्रयी उप- योग देतो जव यंगुखनो यसंख्यातमोजाग जाणे देखे, उत्। थाखो लोक जाणे देखे, ते लोकना जेवमा यसंख्याताखांमुया अलोकमा जाणे देखे २॥ कालथी जा यायलि. कानो थसंख्यातमो नाग यागलो पाठलो काध जाणे देखे, उत्। यसंख्याता उत्सर्पि- पीयो थवसर्पिणीयो एटलो आगलो पाठलो काल जाणे देखे ३ ॥, नावथी जउत्प श्यनंता जाव जाणे देवे, सर्व जावयी अनंतमो नाग जाणे देखे ॥३॥ मनःपर्यवज्ञा-
१
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1. द ॥ गुमति ॥ १५५
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4॥३३ शारदा माग पूर्व धिन। ३ ।। इति 1 कामहार ममामः ॥ दो ॥ मुंअतरछार कद्द ।। मानना २ गोद ॥ साए थपलिए १. नयनर नर्थ । ॥ माशा मपशवमिए मे अंतर ज० अंतर्मुहर्जन, उता देश उणा यई पटगमन ॥ एम ज ४ जानन पण जा " ॥४॥ दरे थक्षानना ३ नंद ॥ यया यामिन यना नया ' !| अ. पाए परसिपर्नु तर न २ ॥ RIST Rs 411. तथा मनिश्रुत अज्ञाननु अंतर ज० शंतर्मुहर्जन, उ स सागर II- I॥ {३. जानन अतर 0 अन०. उ अनसका पनु ने बना पनि व्याधिः ॥ . नि । म यता र समाप्त ॥११ ।। प्र.विडार ३ ॥ सवधा न १३.१२॥ । अवताना अमग्व्यानगृणा १ ॥ तेथी गति भुत : '. ; 'या ॥ तथ। केवलज्ञानी यनतगुणा ५॥ पाप मानना र २ ।। 11 (गज्ञान। । ॥ नथी मतिश्रुत यज्ञानी . .
मांदोमांहि गुदय ने अनंतगुण ३॥दये । नो अस्प बहुत्र कहे ठे। सर्वथी थोमा मनः पर्यवज्ञानी १॥ तेथी अयधिज्ञानी यसंग्यातगुणा २ ॥ तेथी मतिश्रुत शानी माहो. मादितुल्य ने विशेषाधिक ४थी विनंगशानी थसंग्यातगुणा, नारकी देवता.याभि ५॥ तेथी केवलज्ञानी शानंतगुण ६ ॥ तेथी मतिश्रुत यज्ञानी माहोमांहि तुख्य ने यनं. तगुणा ॥ इति २० मुं श्रदप यदुत्वधार समाप्तः ॥ २० ॥ हये २१ मुं पर्यवहार कहे ॥ पांच इरानमा एफेफना यनंता २ पर्यय ते तेनो यक्ष्प बहुत्व-सर्वथी योमा मनःपर्यव शानना पर्यय १॥ तेयो अवधिज्ञानना पर्यय यनंतगुणा २॥ तेथी श्रुत झानना पर्यव अनंतगुणा ३॥ तेथी मति ज्ञानना पर्यव अनंतगुणा ॥ तेथी केवलज्ञानना पर्यव अनं. तगुणा ५ ॥ प्रण अज्ञानना पर्यव अनंतानंत ठे, तेनी अस्प बहुत्व-सर्वथा थोमा विनं. गज्ञानना पर्यय१॥ तेथी श्रुतमझानना पर्यय यनंतगुणा २॥तेथी मतियज्ञानना पर्यव यनं. तणा३॥ये पांच ज्ञान त्रण यहान एजना पर्यवनो यल्प बहुत्व कहे ठे। सर्वथी थोमा मनः
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मोटीको
प्रकृतिना
मागगमना मान नाग का नवा एक नाग पल्या-
१७ या कामामा मागशेपमनी 33 ॥ अरनि
पमना गया।
... .. !! IT प्र.निन। स्थिति जा मागाना नागरी
नवा नाग ५ ५.२ ... पाना नाग नान। 10 टाकामामी सागरापमन।
४ ॥ नादान • गाना
माग
ना - पटनाग पत्यापमना
यमम्यानम
3.८ पटर
मामामामा सागमपमन। ।। पम्पादन
स्थिति ज०, न
कामानामा सागरापमन। त. पवन यिनि
ज० मागरना ।
नया २ाग वापसन यमर वानम गन|, 70
२० कामानामा ": . ! Hidd || नारक। ॥ ना - " बना पायना
वचन
स्थिति ज 70
. . नयनमहल यानी 10 नत्र मागापमन कामाना
विजा नाग 2 | ना • ॥ मनुष्य ॥ विच॥ ना या गुप्यना वधनी म्यिान
जण यनमुहनन। 110 वाण पक्ष्यापम ने पूर्व कामांना विजा नाग यधिकनो ४७ । व
नामकर्मनो ए३ प्रकृतिना बंधनी स्थिति कदे ॥ नरकगति १॥ नरकानुपूर्वि २॥ केय शरीर ३॥ वक्रेयनां थंगोपांग ५ ॥ वैक्रेय घंधन ५ ॥ वय संघातन ६॥६ प्रकृतिना बंधनी स्थिति ज० एक हजार सागरना नाग कर ए तेवा २ नाग पल्यने यसंख्यातमे नागे उपानी, उता वीश कोमामोमी सागरोपमनी. ५४॥ तिर्यचगति ॥ तिर्यंचानुपूर्वि २ ॥ एशियनी जाति ३॥ पंचेंजियनी जाति ४ ॥ उदारिक शरीर ५॥ उदारिकनां यंगोपांग ६ ॥ उदारिक बंधन 9 उदारिक संघातन ॥ तेजस् शरीर ए॥ तेजस् पंधन १० ॥ तेजस् संघातन ११ ॥ कार्मण शरीर १५ ॥ कार्मण बंधन १३ । कार्मण संघातन १५ ॥ ठेवटु संघयण १५ ।। हुंम संवाण १६ ॥ धनि गंध १७ ॥ खर- खरो स्पर्श १७ ॥ गुरु १५ ॥ सुखो २० ॥ शीत २१ ॥ यगुरुलधुलाम २२ ॥ उपघात नाम २३ ॥ पराघात नाम २४ ॥ नश्वास नाम २५॥ याताप नाम २६ ।। उद्योत नाम २७॥ थप्रशस्त विदायगति २७ ॥ कालो वर्ण रए ॥ तीखो रस ३० ॥ स नाम ३१ ॥ स्यावर नाम ३२ ॥ वादर नाम ३३ ॥ पर्याप्ति नाम ३५ ॥ प्रत्येक नाम ३५ ॥ यस्थिर नाम ३६ ॥
बोल.
मोटक
महर्णिमा
( स्थिति 10
नाम ."। 1.1.1.म 17राम ।। नादय नाम ८०॥ यशा-
कीविनाम ॥
५पनfift करणा-
ना सात नाग 1
+• पानम नाग नपान। उन० २७
कागावा मागरायम . ... 27 )। R. 2.100 प्रा.लिना बंधन।
"सागर.' .
In !' .. पयापमना मंग्यातम
जाग गाना
।।५।।। गनि । ॥ वानपत्रि ॥
प.२ प्रतिना ।। 4. • हार मागगरमा मात लाग करत नवा एक
नाग पत्यापमना रयानम गमन) 3.70 । मामानामा सामगपमनी 100 ।।
पंजियन। जानि । ||
नन। मानि ॥ नामयिन। जानि ३ ।। किलकुमव-
यण ४ ॥ कुटज साण ५॥ मम नाम ६ ॥ श्याम नाम 3 । साधारण नाम ।
प्रतिमा बंधनी स्थिति ज क सागरना ३५ जाग करीत नवा ॥ नाग पख्यापमन
यसंख्यातमे जागे उणान, नतु यदार कामाक्रोमी मागगंपमन। १.05 ॥ वनश्पन्नना-
॥१५६॥
राच संघयण १ ॥ समचउरंस संताण २ ॥ शुक्रवण ३ ॥ मधुर रस ४ ॥ सुरनि गंध ५ ॥ सुहासो स्पर्श ६॥ सघु ७॥ उष्ण ॥ स्निग्ध ए ॥ प्रशस्त विहायोगति १० ॥ स्थिर नाम ११ ॥ शुज नाम १५ ॥ सोनाग्य नाम १३ ॥ सुस्वर नाम ॥ यादेय नाम १५॥ ए १५ प्रकृतिना बंधनी स्थिति ज० एक सागरना सात नाग करीए तेवो १ नाग पट्यना य. संख्यातमे लागे उणानी, उत्प दश क्रोमाकोमी सागरोपमनी १५३ ।। अपजनाराच संघ. यण १॥ निग्रोध परिमंमस संस्थान ॥ए वे प्रकृतिना बंधनी स्थिति ज० एक सागरना ३५ नाग करीए तेवा नाग पल्पोपमने असंख्यातमे नागे उणानी, उत्० बार क्रोमाकोमोसा. गरोपमनी १२५॥ नाराचसंघयण १ ॥सादि संगण २॥ए २ प्रकृतिना बंधनी स्थिति ज०१ सा. गरना ३५ जाग करीप तेवा ७ जाग ने पल्यने असंख्यातमे नागे उणानी, उत्० २४ कोमा- कोमी सागरोपमनी १२७॥ यर्डनाराच संघयण वामन संगण २॥ए २ नी स्थिति जण १ सागरना ३५ नाग करीए तेवा लाग पक्ष्यना थसंख्यातमे नागे उणानी, उत्० १६ कोमाकोमो सागरोपमनी १२ए । पीळो वर्ष १ ॥ खाटो रस २ ॥ ए २ नी स्थिति ज०
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मनी ५ प्रति दानांतरायादिनी स्थिति जा थंतमुहर्जनी ते देशमा गुणवायर यात्रि, उत्० ३० मोमाकोमी सागरोपमनी १४० ॥ ए फर्मनी उत्तर प्रकृत्ति १४ नी बंध. स्थिति समुच्चय यानि कही १ ॥ ये जे जे कर्मनी जे जे उत्तर प्रकृतिनी जेटमा जे- दखा सागरोपमनो स्थिति कही ते तेटला तेटमा सो वपनो ते ते प्रकृतिनो यथाशकास जाणयो । ए समुच्चय प्रकृति १४७ ना बधनो थवाधाकाल कायो ॥ वेग जिय जेदती प्रकृति बधि तेना बंधनी स्थिति कहे ते ॥ ५ ज्ञानावरणीय ॥ ५ दर्शनावरणीय ॥१ थशाता वेदनीय ॥म २५ प्रकृतिना बंधनो स्थिति ज० १ सागरना नाग कीप तेवा ३ जाग ते पट्योपमने असंख्यातमे जागे उणानी, उत्० प्रतिपूर्ण र सागरना : जागनी बांधे १५ । शातावेदनीयना बंधनी स्थिति जव एक सागरना जाग कर तेवो दोढ भाग ते पट्योपमना व्यसंग्ग्यातमे जागे उणानी, उत्व प्रतिपूर्ण १ सागरना , नागनी १६ मिन्यात मोदनीयना बंधनो स्थिति ज० एक सागरोपमनी ते पटयने यसंग्ग्या- तमे जागे उपानी, उता प्रतिपूर्ण १ सागरोपमनी १७ ।। सोल कपायना बंधनी स्थिति जगर মনিনা । r , सागरना ' ... .) [ना । सागाना " ....... 70 सागरना प्रानm ' मारना नागन ३५॥ गगन पनि सन 10 1104 सगरनारे • नागना नागाना यम- RT 10. परदा वचना, स्थिति ९ । नाम IMIनI J० प्रतिषण रसागाना नाग।। १२ वदना : • मरना नामन। न पढ़यन यस. न म्यानम जाग गाना नपण मारना गगन। ४२ ॥ नियंचन यायुप्य १ ।। न मनुप्यनु थायुप्य २ ॥ १.२ प्रनिना स्थान ज० यानमहनना, 30 पूर्व जामी ने २२ हजार चर्पना श्रीजा नागे अधिकनी ४४ ॥ मनुष्यनो गति ! ॥ मनुष्यानुपूर्वि २ ॥२ प्र- ग्यानमग.. '- १ १५८॥
तिनी स्थिति ज०१ सागरना , नाग ते पाट्यने यसंग्यातम जागे गणानी, उ०प्रात. पूर्ण १ सागरना दोढ सातिया भागनी ४६ ॥ वजापजनाराच संघयण १॥ समचरंस संगण २ ॥ शुक्ल वर्ण ३ ॥ मधुर रस ५ । सुरजि गंध ५ ॥ सुंदालो स्पर्श ६ ॥ लघु ॥ उष्ण ॥ स्निग्ध ए ॥ प्रशस्त विहायोगति १० ॥ स्थिर नाम ११ ॥ शुन नाम १२ ॥ सोनाग्य नाम १३ ॥ सुस्वर नाम १५ ॥ यादेय नाम १५॥ यशोकीर्ति नाम १६ ॥ १६ प्रतिना बंधनी स्थिति ज एक सागरना सात नाग करीप तेयो र नाग ते पक्ष्यने यसं. मयातमे नागे उगवानी, उता प्रतिपूर्ण नागनी ६२ ॥ तिर्यचनी गति १॥ एभियनी जाति २॥ पंजियनी जाति ३ ॥ तिर्यंचानुपूर्वि ४ ॥ उदारिक शरीर ५ ॥ उदारिकनां थंगोपांग ६ ॥ उदारिक बंधन ॥ उदारिक संघातन ७ ॥ तेजस् शरीर ए ॥ कामण शरीर १० ॥ तेजस् बंधन ११ ॥ कार्म बंधन १२ ॥ तेजस् संघातन १३ ॥ कार्मण संघातन १४ ॥ ठेवटु संघयण १५ ॥ हुंम संठाण १६ ॥ कालो वर्ण १७ ॥ तीखो रस १७ ॥ दुर्जि गंध १५ ॥ खरखरो स्पर्श २० ॥ शीत २१ ॥ गुरु २२ ॥ दुखो २३ ॥ यगुरुसघुनाम मोतीपमा गोल. " नाम। यान नाम ॥ allnar पर नाम । पर ... ॥ यशुन अनाय नाम 10 ॥ अयगा- रे कनिक. माग- ५ . •THE। नत० प्रतिषण में नय • ॥ किल्ला । 'काम नाम ' । साधारण नाम 6॥Gप्रनिना मक मागग्ना ५ नाग करा तवा ॥ नागन पट्यने श्रमर यातम नाम ''न। १००. मागग्ना प्रतिपूण नागनी १२॥ ऋप- ननाराच संघयण । ॥ नियाग्मिनस वाण २ ॥ ए.२ प्रतिना बधनी स्थिति ज० एक सागरना ३५ जाग फरीप तया ६ नाग त पश्यन असंख्यातम नाग उपानी, 30 .
प्रतिपूर्ण एक सागरना " जागनी ११४ ॥ नाराच संघयण १ ॥ सादि संगण २ ॥ १२ प्रकृतिना बंधनी स्थिति ज० एक सागरना ३५ नाग करीए तेवा नाग ते पढ़यने श्य. संग्यातमे नागे जणानी, उत्त एक सागरना प्रतिपूर्ण ५ जागनी ११६ ॥ यनाराच संघ.यण १ ॥ वामन संगण २ ॥ ए. २ प्रकृतिना बंधनी स्थिति ज० एक सागरना ३५ साग करीए तेवा नाग ते पल्यने असंख्यातमे लागे उणानी, उत्० एक सागरना प्र. तिपूर्ण । नागनी ११७ ॥ रातो वर्ण १ ॥ कपायसो रस २॥ पर प्रकृतिना बंधनी स्थिति जा एक सागरना २७ जाग करीप तेवा ६ नाग ते पत्य ने यसंख्यातमे जागे उणानी, उत्० एक सागरना प्रतिपूर्ण र नागनी १२० ॥ पीलो वर्ण १ ॥ खाटो रस २ ॥ ए.२ प्रकृतिना बंधनी स्थिति जो एक सागरना २७ नाग करोए तेवा ५ नाग ते पट्यने थ. संग्यातमे नागे उणानी, उत्० एक सागरना प्रतिपूर्ण र जागनी १२२॥ नीलो वर्ण १ ॥ कम्यो रस २ ॥ ए २ प्रतिना बंधनी स्थिति ज० एक सागरना २७ नाग करीए तेवा नाग ने पठ्यने असंख्यातमे नागे जणानी, उ एक सागरना प्रतिपूर्ण र नागनी --117TH
मोस
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:1। नाम
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यादान
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नायका नाम कम
न 11 | ॥ ययावाकाल पूर्ववत
२॥ ६३६:/य।।
(गनाऽयना प्रकृतिना
पंधन। स्थिति कई ३ ॥ त्रए (प्रिय १३१ प्रकृति बाध, तमा वाभियना प्रकृति-
(३१६०
INUTE । चपनी लिलि दिन गटसो गर, प्रियांक सागरमा नाग कीपा, m, निगम २॥ नागरना नाग पररा ३ ॥ निगा सागरमा जाग करया, Em on ॥ ॥ निगमा १०० सागरला जाग करणा शेष पूर्ववत् ५ ॥ RE गगिना यतिधनी स्थिति काही ॥ अयाधाम पूर्णयत् ५ ॥ इंगि ११ प्रति पाप, ते १५८ गाथी ५ प्राति पनि ॥ सम्य- 17 गोदनीय ॥ रागामिणा गोगनीग२॥ याहारपा शरीर ३ ॥ यादारकनां यंगो. पोmunादा पंजा ॥ ॥ अवारका संपाता ६ ॥ तीर्थकर नाम पनि । सोगिया मोती जय १००० सागर से पापो यासंगातगे नागे उणानी, गत् १००n सागर प्रतिपूर्णी गरफागु १॥ देवागु २ ॥२ नी ज० १०,००० घने यंत. मुंपूर्ण पधिकती, उन पगो स्पसंगमातमो नागने पूर्ण गोगोनो प्रोजो नाग अधिकनो॥ गरफराशि नियंगति २॥एको ज० 2000 सागरना भाग परी तेगा नागनी nirmnमे लागे उगानी, उ० प्रतिपूर्ण २ नागनी । मनुष्यनी गतिनी ज०
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प्रया
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म. ग.JI
४॥ तथा
पाकापशपयामान
२. या अपघामान।
ज० या थरम्यानगृi
+: 3:३यन, अ. सम्यानमाण।
॥धी यादर पृया था.२. 1... " नयी वाटरनिगांद यन
धादर प्रत्येक पनस्पति थपपाताना ज० था माहोमादि नुय ने यमम्यानगुण। १०-११॥
तेथी सूक्ष्मनिगोद पर्याप्तानी ज० य० यसख्यातगुणी १२॥ तेथो सूक्ष्म निगोद यप. र्याप्सानी उत्कृष्ट थ० घिसेसाहिया १३ ॥ तेथी सूक्ष्म निगोद पर्यातानी ज० था विससा. हिया १४ ॥ तेथी सूक्ष्म पाउकाय पर्याप्तांनी ज० या असंन्यातगुणी १५ ॥ तेयो सूक्ष्म चाउकाय अपर्याप्तानी 3 या बिसेसाहिया १६ ॥ तेथी सूक्ष्म चाउकाय पर्या- प्तानी उ० य० विसेसा दिया १७ ॥ तेथी सूधम तेनकाय पर्याप्तानी ज० य० यसंग्यातगुणी १०॥ तेधी सूक्ष्म तेउकाय थपर्यासानी उ० या विसेसाहिया १५ ॥ तेथी सूक्ष्म तेउकाय पयानी जया बिसेसाहिया २० ॥ तेथी सूक्ष्म अपाय पर्यातानो ज० था यसंग्ल्यातगुणी २१ ॥ तेयो सूक्ष्म यपकाय यपर्याप्तानो उ० य० बिसेप्तादिया २५ ॥ तेथी सूक्ष्म अपकाय पर्याप्तानी उ० या विसेसाहिया २३ ॥ तेथो सूक्ष्म पृथ्वीकाय पर्याप्तानी जा य० असंख्यातगुणी २४॥ तेयो सूक्ष्म पृथ्वीकाय यपर्यातानी ना य०विसला. हिया २५॥ तेथी सूक्ष्म पृथ्वोकाय पर्याप्तानी न य० विसेसाहिया २६ ॥ तेथो बादर वानकाय पर्याप्तानी ज० या असंख्यातगुणी २०॥तेथी वादर याउफाय यपर्याप्तानी जय० विसे- साहिया २७॥ तेयो वादर वाउकाय पर्यासानी उ०. अविसेसाहिया २५॥ तेथी चादर ।। यामानाja ... (-1137नश्री + : २५ पानानं। या५ ॥ - न म nu विम- । - (ii.', '। : (न 10 "1.0 चादर हूं। नि: '.. ३११ • ) : २ माघ । नया का पद पयानना 10 य० मिमा- 13 : नया वाटर प्रापर. वन निकाय पयानान) ज० 20 अयानगुण। ४२ ॥ तथ। यार प्रत्यक वनस्पनिकाय यपयाताना १० या असम्यान गुण। ४३ ॥ तथ। चादर प्रत्येक वनस्पनिकाय पयातानी थ० यसंग्यानगुण ४४ ॥ इति ४४ बोलनो । थापयत्व संपूर्ण ॥
२८ बोलनो अल्पबहुत्व ॥ श्रथ श्री जगवती शतक २५ मा उदेशा पहेलाथी जीवना १५ जेदना जघन्योत्कृष्ट योगना थाश्री २० बोलनो अल्पबहुत्य लिख्यते।। सर्वथी योमा मूक्ष्म एकैनिय अपर्याप्तानो जघन्य योग १॥ तेथी बादर एकेंजिय अपर्यामानो जल योयसंन्यातगुणो२॥ तेथी येईजिय थपर्याप्तानो जण योअसं०३ ।। तेथी तजियायपर्याप्तानो जण यो यसं०४॥ तेथी परिजिय थपर्यासानो जप योग थसं० तथा व्यसंझी पंजिय थपर्याप्तानो ज० यो यसं०६॥ तेथी संझी पंजिय या- यांसानो ज० योग यसंग ॥ तंबी सूक्ष्म पजिय पर्यातानो ज० योग यसं० ॥ तेथो चादर एकडिय पर्याप्सानो ज० योण्यसं०५॥ तेथी सूक्ष्म एकेजिय थपर्याप्ताना उ० योग्यसं० १०॥ तेथी यादर गजिय अपर्यासानो उ० योग असं० ११॥ तेथी सूक्ष्म गजिय पर्या.
२८ बोलनी. बहुल. सानो उa योग यासं० १२॥ तेथी चादर एजिय पर्याप्तानो जर यो यसं०१३॥ तेथी चे. इडिय पर्याप्तानो ज० योग्यसं० १५ ॥ तेथी तेईडिय पर्यायानो जन् यो व्यसं० १५॥तेथी चप्रिय पर्याप्तानो ज० यो यसं०१६॥ तथी असंझो पंचेंजिय पर्यातानो जण यो असं १७॥ तेथी संज्ञा पंचेंजिय पर्याप्ताना जा यो यसंग रातथी वेपिय अपातानो उ० या० यसं० १०॥ तेथी तेईजिय यपयातानोज योग यसं० २० ॥ तेथी चरिंजिय अपर्या- सानो उ यो यसं० २१॥ तेथी व्यसंझो पंचडिय यपर्याप्तानो जन् यो असं०२२॥ तेथी संझी पंचेंद्रिय अपर्याप्तानो उस योग असं० २३॥ तेथो वैज्ञप्रिय पर्याप्तानो उ० यो० असं० २४ ॥ तवी तेत्रिय पर्यावानी जय योग यसं० २५॥ तेथी चनरिंजिय पर्याप्तानो उन यो० यसं० २६ ॥ तेथी यसंझी पंचेंघिय पर्यातानो न यो असं २३ ॥ तेथी संझी पंचेंजिय पर्याप्तानो उv यो असं० २० ॥ इति २० बोलनो यल्पबहुत संपूर्ण । XEXitha २४ दंडकना जीयोनो अल्पवहुत्व ॥ ZEEESARMERELY अथ २५ दंगाना जीयोनो यत्पपास्य सिम्यते ॥ संबंधी बीमा मनुष्य । यी ते काय यसंग्यातगुणा २॥ तेथी मानिक यासं० गु३ ॥ नयी १० नयनपति माहोमांहि तुल्य ने यसं गुण १३॥तेयी नारको यसं० गुण १७॥ नयी गाणध्यंतर यासं० गुणा १५ ॥ तथा ज्योतिषी संख्यात गु० १६ ॥ तेथी तिर्यच मंद्रिय मण्यानगुणा १०॥ तेथी चाउरिघिय विसेसाहिया १०॥ तेथी तेइंडिय विसेसा. दिया ? नेयो पेइंद्रिय विसप्तादिया२०॥ तेथो गृथ्वोकाय यसं० गु०२१ ॥ तेथी थपकाय प्रसं. २०२२ ॥ नवी धारकाय थसं० गु० २३ ॥ तेथी वनस्पति कायना दमके जीयो अनगुणा २५ ॥ इति २५ दमकना जीयोनी अल्पबहुत्व संपूर्ण ॥
२८ सानो उ यो यसं० १२॥ तेथी वादर एकज्यि पर्याप्तानो उ यो असं०१३॥ तेथीचे. इंघिय पर्याप्तानो ज० योग्यसं० १५॥ तेथीतेजिय पर्याप्तानो जम्यो असं० १५॥तेथी चरिधिय पर्याप्तानो जग यो असं०१६॥ तथा असंज्ञो पंचंपिय पर्यातानो ज० योग असं० १७॥ तेथी संझी पंचेप्रिय पर्याप्तानो जन् यो थसं० १॥ तेथी वेजिय अपर्यासानो ज० योग यसं०१७ ॥ तेथी तेइंजय अपयातानो उपयोग असं० २० ॥ तेथी चरिंजिय अपर्या- सानो उ. योग यसं० २१॥ तेथी असंझो पंचेप्रिय अपर्याप्तानो उम् योण्यसं० २२ ॥ तेथी संझी पंजिय अपर्याशानो ज० यो यसं० २३ ॥ तेथ) वेजिय पर्याप्तानो उ० यो यसं० २४ ॥ तेथी तेजिय पर्याप्तानो उ यो यसं० २५ ॥ तेथी चरिजिय पर्याप्तानी जम्यो. यसं २६ ॥ तेथी यसझी पंचेंजिय पर्यातानो न यो यसं० २७॥ तेथी संझी पंचेंजिय पर्याप्तानो उv यो यसं० २७ ॥ इति २७ बोलनो यल्पबहुत्व संपूर्ण ॥
२४ दंडकना जीवोनो अस्पबहुत्व ।। यया देना नीनो यस विषयते ॥ पाशी गोमा मनुष्य नयी काय inानगुणा २॥ तेथी पेगानिक सं० गु॥वी . लि गांदोमांहि नुनयन यासं० १० १३॥ तेथी नारकी यासं० गुण १॥ ॥ | Timi Rita Piy॥ यो पानिपी संगमार गु०१६ ॥ यी तिर प्रगनियमानगुणा १॥धी गर्मिय विसंसादिया १०॥यी तेईजिग पिसेसा. दिया!! HTी प्रिय मिदिमायो पोकाय याम गु० २१ ॥ तेथी अपकाय घगु० २२ ॥ श्री गायकाय गं गृप २३ ॥ नयी यसम्पनि कागना दे जात्रा Nima | इगि २५ दंगामा जीना यहाय संपूण ॥
१५ योगना ३० वोलनो अल्पवहुत्व ॥ अल्प बहुत्व. १५ योग ना० बोलनो ॥१६॥ यथ श्री जगवती शतक २५ माना उद्देशा पध्खायी १५ योगना जघन्योत्कृष्ट योग थाश्री ३० वोसनो यल्पवहुत्व लिख्यते । सर्वथी थोमो कार्मण काययोगनो जघन्य योग१॥ तेथी उदारिक मिश्रनो जण यो० थसंग्ग्यातगुणो २॥ तेथी वैयमिश्रनो ज० यो० असं० ३ ॥ तेथी उदारिकनो ज० योग यसं०४ ॥ तेथी वैक्रयनो ज० योग यसं० ५ ॥ तेथी कार्मणनो उ० योग थसं०६ ॥ तेथी याहारकनो मिश्र ज० यो० असं० ७॥ तेथी थाहारकनो मिन ज० .। यो० असं०७॥ तेथी उदारिकनो मिश्र यने वैकेयनो मिश्र उ० यो माहोमाहि तुल्य ने यसं० ए-२०॥ तेथी व्यवहारमननो जन् यो व्यसं०११॥ तेथी थाहारकनोजा योग यसंध १२॥ तेथी सत्य मन र यसत्य मन २ मिश्र मन ३, वचनना, ए योगनो ज० योगमां. होमांहि तुल्य ने यसं०१५॥तेथीयाहारक शरीरनो उ० यो० असं० २० ॥ तेथी उदारिक EERVALISAGE १ कय २ चार मन ६ चार वचन १०॥ ए १० नो उछ यो माहोमांदि तुल्य ने असं. ग्यातगुणो ३० ॥ इति योगना ३० घोसनो यरूपयहुत्व संपूर्ण ॥ जीवना १४ भेदनो अल्पवहुत्व ।। श्यथ श्री सूदमादि जोयोना १४ नेदनो अपबहुत्य लिख्यते ॥ रथयो योमा संज्ञा पंचप्रियं यपर्याप्ता तेथी संझी पंचेंद्रिय पर्याता यसंख्यात गुणा २॥ तेयो चारिप्रिय ५० सं० गुणा ३॥ तेथी व्यसंझी पंजियप० घिसेप्ताहिया ॥ तेयो घेजिय प० विय ५॥ तयो तेइंजिय प० वि०६ ॥ तेथी असंझी पंघिय थप थसं०७॥ तेथी चरिंजिय यप० वि०॥ तयो तेइंघिय यप वि० ए ॥ तेथी वेजिय अप० वि० १० ॥ तेथी बादर पडिप प० अनंतगुणा ११॥ तेथी बादर एकेंघिय अप० थसं० १२ ॥ तेथी सूक्ष्म एप्रिय यप० सं० १३ ॥ तेथी सूक्ष्म एकेंघिय पत्र संख्या १५॥ ॥ इति सूक्ष्मादि जीवोना १४ जेदनो यत्पबहुत्व संपूर्ण ।
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اپنی تملى بلے منی نکلے
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