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Shree Jagjivan Ram Our Unke Vichar

Dr,rajendr Prsad · 2010/12

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श्री जगजीवनराम और उनके विचार

प्रामक
बपनीमरान अभिनमान पाच समिति,
नई दिल्ली
१६५५०
मुन्य
क्रॉनिकस प्रस
मोरी रिस्ठी

मंगम कामना
२ मबककामना
मौजपजीवनराम प्रमस्ति
४ गगीवन राम
५ राम गुप्प पानीपन राम
प्यक्तित्व
. परिचय
८पी अपनीषमएमके विचार
महरमा गारची ५
मेषितीपार गुप्त
रत्तात्रेय पणापन करमारकर
.राजेम प्रताप
बाबा साहेब कासकर ११
मारापप तरोबा काबरोककर .
मारापप पर सारा संग्रहात "

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10
Jy bmrt 2001 uu
roroctial admiratson
to Jagjinan Ren for his
hand omorged th
tra gold oo ol Ero.
baba Gund...

तुस न सक परती-पन-याम
मन्य तुम्हारा पावन माम ।
सेपर तुम-सा सम पछाम,
सफम काम जग-जीवन-राम ।
मैथिलीशरण गुप्प

श्री जगजीवन राम प्रशस्ति
सवा हामसमायक्यो रामोय अगजीवन'
सवा मनसु मतो यया बैदहि जीवन ॥
सर्वेषु समदृष्टियों निर्णित्वाम्मनप्रिय
सकपोकहितस्पा समस्यागस्य निश्चय ।।
अल्लभापी महायलो मदुबाक सरल सुषि
बपुःप्रवर्षसपन्नो यस्यास्ति हृदय मदु ।
ददातु भगवामस्मै दोर्पायुश्च यशःथियम
दशकल्याणकार्यपु मग्नाम घरको सत ॥
इस माग सुमित्राय भारतीकुमुमफिता
दत्तात्रण सप्रम सादरं च मपिता ।।
दपात्रेय परशुराम करमारकर
(नाविन्य मंत्री प्राप्त तरकार)

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जगजीवन राम 1. राम प्रसाद उभीसचीस वर्ष हुए बर मैने पहले यह भी बपौवनराम से परिचय किया। सस समय वह हाल ही में काम कर माये पे मोर पटने में कुछ सासनिक सेवा के काम में विसचस्पी के पसे । मेरा यह सौमाम्य रहा है कि बनेकानेक होनहार युवक मुझसे मिला करते है बार अपने काम मार भविष्य र समन्य म सलाह मिमा रहे। मी जगमीवनराम से यब मौन वाया मा इमी तय की बात हुई पी और मैने उसी समय एक लिया कि वह एकगन मा होनहार, काम करने वाले व्यक्ति है । उसके बार यह माहिस्ता-माणिस्ता कापस के काम में मा युटे मार र समम बाया वो मोरों के साप ग-यात्रा भी करते यये । जब १.10 में देश में पहले-पहल कांग्रेस मरित्र-मरत बमाने की बात चली गौर महारमा नौ मे या पर्व सपाई कि वगर गवर्नर पा पचन ने किया मस्त्रियों की राय मे ही सब काम किया करप तब कांप्रेम मधिमाल बना सकेगी तब पहले पुर में समा बबनरोने दम तफ कामबम देना नाममूर कर दिया। इस समप मनेक प्रान्तों में काग्रेसमा वामत बा । इममिए कोई मग्निमरम पानिक पति मे रिमको कोप्रेम के सदस्यों का समबन न हो बम नही माता पा । हो भी बर्ममट की नीति अनुमार गवर्नरो ने प्रयान लिया कि ममी गमों मे फिनोम विसी तरह मरियम बन जाय । ऐमा ही प्रयत्न किार में भी किया पया मोर पूण दिनारे मिए पी यूनिस , मरित्र मंडल बनाया । उम समप पी जपजीवनराम बहाँ की पाएसमा क एक सदस्य ने पये पे मौर मी पूनिम ने इस बात का बहुव प्रयल गिन्या कि समझा किसी तरह से पार करके अपने मविरम में से हैं और उनक माष जो हरिवन सबस्प पे उमरी महामना बा प्राप्त परपर पीनगीवनराम म एकबारमा उम बीम को नामंजूर कर दिमा मौर नमः रिये। मपी पर को टुारा रिया। यह बाव मुमको मालूम हो पा और मने रमी समय माग्मा गांधी मोम बान गरी मृबना दी पी जिमम यह बहुत प्रम हुए और सिमरामगोतम स्मरण गहाने अपने किसी मैम में मौ विकम्यिाथाम घटना र पामरौ प्रगामौर प्रेम पीपपगीवन राम के प्रतिपाबहमीर भीगा मया और मानव लिया शिवामपन पामे और पाम करने वाले ही नही है पर ममय पर प्यार पाने में भी रिमी म पी नहीं ऐसे। उमरेबापमह यहाँ तक मुझे स्मरप विकार प्रानीप अग्रिम कमी की कार्यकारिपी में परीफहए मोर पुष्परिनों बार पप्रिम मधिमाल बनाया तारमरो पालिमा-

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जगजीवन राम शराजम प्रसार उमौसीम वर्ष हुए पर मैंने पहले-पहल पी गयीवनराम से परिचय किया। उस समय यह हाल ही में पाकेज छोकर माये पे और पटने में Tv सानिर सेपा के काम में विसनस्पी ले रहे थे । मेरा यह सौमाम्प हा है कि मनकाम होनहार पूषक मुझसे मिला करते हैं और मपने काम और मविप्म के समय में समाह मिमा करो। भी बगीवनराम में बब मौरा बाया पा इमी ता की बात हुई थी और मैने उसी समय त लिया कि वह एक हगन बाप्ते होनहार काम करने पाले पति है। उसके बाप मह माहिस्ता-माहिस्ता प्रिंस के काम में या पुरे और पब समय आया तो मौरों के साप पात-यात्रा भी करत पय । बा १७ में देश में पहले-पहल पग्रिम मरिष-मंडल बनाने की बात पती मोर महारमा बी ने यह पर्व हगाई कि मपर गवर्नर यह पवन रेमिमा मात्रमा की पप मे ही सब काम किया करप तब काप्रेम मनिमारक बना सफेगी तब पहले गुस्मसमी गवर्नरों में इस तरह कामपन देना मामरमर दिया । इम समम भनेक प्रान्तों में कांग्रेस का बामत वा । ममिए कोई मग्निमहम पानिक पति में निमको पाप्रेम र सदस्पों ममपनमा बम नही मकना पा। वो भी पवर्नमट की नीति के अनुसार गवर्नरों ने प्रयल पिया छि सभी गाहा में पिनी न मिमी मग्विाल बन जाये । ऐमा ही प्रयत्न बिहार में भी गिरा मया मार एक दिनों के लिए पी पूनिमम मग्नि-माल बनाया । उम ममम मी समगीवनराम महाँ की पाराममा क एकरस्य चुने गय पे मोर पी मूनिम न इस बात मा गाल प्रपरम श्मिा बिना किमी दर में पारपरक मपने मत्रिमंस में मोर मामा जो हरिजन सदस्य में उनकी मायता मा प्राप्तकर पर श्रीनगगीवनरामम एकवारसी इम पीर को नार्मर कर दिया और उनके रिसे हुए मात्री पर पो दुष्य रिया। या बात मुझको मान्म हो मर्मा मौर मेने उमी ममप महारमा पापी मोम बातमी मूचना परी की जिमने परमात प्रमाम हुसप मौर रिमामाता मत स्मरमा सम्हाने माने पिसी मेम में भी निक किया था। इस घटना रेबार गोमरी प्रशा और प्रेम पीसीपन पाम प्रति पाबह बार भीम पपा और मैंने दम लिया कि वह ममन बाठे मोर पाम करमे मालही नही ह पर ममय पर स्पाप परने में भी मिमी से पीछे नहीं पैसे। समपार यह मा तक मुमेम्बरमा विशर मानापमपम पमेये पारिनीम परीमहा मीरजापुटनिारेबाइ परिममे मम्मिमान बनाया तो उनको पाकि- १० जगजीवनराम और उनके विचार मटरी मेली के पर पर नियुक्त किया गया । नम पर पर एकर गन्होंने मपनी पवारही मौर काम को सूब बळी पय से संभामा जिसकी प्रशंसा उस समय में ममी लोग किया करते उमका सदस्य कांग्रेस और काम-रपियों के साथ दिन प्रतिदिन पिक पनिष्ट होवा पया मौर १९४१ मे फिर या महात्मा जी का महान माम्योमन मुगमा उममे उन्होंने यमोचित मान लिया। १९४५ में जब बेमीय मंत्रिमंडल में काम न धरीक होने का निश्चय किया तो उसमें स्वागत पयास सतकी बोर गया पौर उनको स्पान सिमा बस्था ननकी कम पीतो भी पम दिमाग सन्होंने सभी वएलपी भाष मेमाका। पिछले पाच वर्षों में बहाम रिमाग + मन्त्री है और एम परमरकोने ममारियों की स्थिति को मुपाने के लिए भाकाम किया है वह कपल माग्न मरसार को कानून की पितार्यों में कानूनों में ही मामम नही होता पर निस पर उनकी समस्या मुगरी है पर दबाने में ही उमका पना पूरी तरह से पत माता। अनुनम काफी रहीन इन बीच में प्राप्त कर पिया है और अपने विषय में पन्होंने बच्चा भपिपार प्राण कर लिया है। मारा जीवन बाम करमे की नमम है पप से मही गले मारगोटीक मममत है सामान मार करने में नही हिस्ते । गा कोई स्बीर मामने माती तो उन पर हर पहल में विचार करके हीमोई गप कायमपणे इमार तिर निचित करमेन पर पात रमम रिपने नहीं। मेरा उनमे सम्म मौर मधिक मि प्रतिदिन पनि होता गया और बौर में बाधा लगा कि उनका अविष्य और अपिट रम्बल होगा। अभी ममी भवस्या कम हो रही जा सकती है और मिलिए काम काभत्र और काम करने का ममम मार पनि मौ रन सामने पावर और हमाप यही नामावना बार मरिन्दा है कि यह समय और पति को देवमीममा में उमोहपरनामे गायँगे प्रिम नगलास रम्हाने बाराम पिता है और मपने काम में मफम हाने पये है।

राष्ट्र पुरुप जगजीवन राम मो काका साहेब कारोबार हमारे देश में सेमित मातियों का समाा मरपन्त पुराना । इस समाम का हरू करने की कोषिष प्राचीन काल से होती बाई है। विश्वामित्र मौर मी रामषन पी के समय से कोपि होती माई है। पचत मौर कमा सरित्-मापर मी कपागों में भी मीम मारि बनेकपन्य बावियों मा वि माता है। इन सोगों की पिरनिष्ठा भूमि निष्ठा मोर स्वामिनिष्ठा उच्चकोटि की पाई गई है। सन्तों ने इनके बीच हमेसा काम किया है और इन बातिर्यो म बन्यो सम्त भी तैयार हुए है।पहा-यहाँ परिवान केरा मिनिष्ठा सिर करने के बवसर पैरा हुए, पहा-यहाँ इन गातियों का मारण युक्त उम्मेन बावा ही है। वना होते हुए मी ये सब बातियां देव के विराट ममान में पूरी-पूरी पुल मिमगई है। इनकी बम्प संसहति की सागिय मे गौर नपेमा के कारण मी इमको हमेसा दूर ही रमा गया। सामारिक बहमों ( Prejudices) कारण इन बातियों के प्रति बहुत मायाप हुवा है। ऐमें मन्यायों का परिमार्जन करना मार इन जातियों के विकास में विणाप पोकठिनाया है उम्हार करना बार ई पूर्णतया बपनामा मार का युगाम है। मारतीयों की सामागिक कमजोरियों को बराबर मौर तुरन्त पहचानने वाले और उससे साम रठाने पार्ने अंग्रेजों ने हमें बतापा कि सामारिक मग्याप दूर करमे का काम माहिस्ता-माहिस्ता नही हो सकता ! नमस्ते पर पीबाग मुभाने का काम पचास बर्षकी योजना बनाकर हम नही कर मामलों में बीमारनों में नमोर्यो पीच गो काप किया पाबही इमाम मौर इमर उद्देश्य मे स्माम ने और माईधर्म नमीकर रेवा। युग में बहो मार्य हम होप मामारिफ पैषिक वार्षिक मीर राम मेष में कर रहे। मोका काम सबगे मन्टा एमसिए बिना गाता है कि उनके प्रम न मे इम उपे धित माठियों में श्रेष्ठ कोरिमन्त राहुए।मारा "म युग का कार्य भी तमी अन्छा मिना पापमा पर इन उपेक्षित मानियों में में मारे देगा मामकरन या मेटा पर होंगे । इतना ही नही किन्तु ममस्त मानव गाति बस्याग के लिए अपनी वायु मनकोंगे। भागात अतित मातियों में रावए के नेता पैदा होते है, मौर में मानवा!

भी जगजीवनराम और उनके रिपार । रोनों के लिए यौम्य कारण भी है बार दोनों की उपमोपिता भी है। मेकिन दोनों की कौटि मित है। बिमदिकारण मौर गलत सामागिमावर्स के कारण इन उपेंमितों के प्रति अन्याय होता । उस महिमिलाफ मोर उसके समर्षको सिमाफ मान का काम म्यायनिष्ठ गुणारक सबमौका भी है और पेशित जातियों के स्वाभाविक मेतामा का भी है। ऐम मोप माते-मावे इतने सारे बन गाहे कि मनुष्य जाति पर उनमा विश्वास ही मर हो जाता है । सबों के साथ माना पाहिए, उनको परास्त परसा चाहिए। उनसे हायो ग्याप मिन्ने पो मामा कभी भी मही एवनी चाहिए। बहोगा मपिगार हो मपनो जाति का प्रतिनिपित होना चाहिए । सिमी पर भी भगमा रग्पना परमपी है। दुनिया का सब कोम मपने स्वाप की ही बात सोचते हैं। हमें मी माहौकरना चाहिए । मानी पानि का मपटन करके और गातियो मे माते एना मग मी उशगता मती रिवाना और हमेणा गागरक पहना यही हमारा कर्तस्प है। मम मोपा की जीवन दृष्टि । हलो काम होत जा पाते है कि करिबादी तन दिम पीयों को स्मात्ति हम जानता । अपने मपिपार की रामिए ऐसे लोगों से मामा पालिए पहमी हमें मगर । मेक्निाम बानत है किनारा ममात्र ऐमे कोमामा बना हमा नहीं है। सपनों गमार मा वर्ग मोमा में रोम भी मोगमार प्रति प्यार परत मिए नौरों मनात है। उसमें तनिष्ण वाता। स्वायमो भूमार मरों के हितो PAPमा मोगिम पर प्ले है। परस्पर विधाम के कारण राष्ट्रीय ममम्म बगर समारमाता मबरा माहोने पााममिए अपने और मपनी जाति रमाप वाचा" एगार मप बन जाना अभियान का वायुमरस बहाना मोर राष्ट्रीय तापसा माना गयामा गित मोगा मेपेशिवाकीओररेगा समपी गामि माना मा छोरिया और परोपकार महीनीवनपी ममता पाई मापी मनुपरणहम क्यामरे' मग मी पिर सचिन और अधिक दुषी बनता पनी ही पारीमी गती मामा हम पर्यो न मोष और मारा मग्याप पाप्पान पर। मगर मम्मि बाम मिा पर्यनेमा पा मारामागी' मार रामिए प्रपाल ने माना और मानी वाशिमा मुटभी पार मप माप रमी में मताप पपो न माने' मनुप्प याति गिमाविमन मान मषिप्यनिष्पगोपीपमान माम माम परीक गर' पर मर मिरे लोपापी गौडा इपि। मेन देन रिपाई मामलोप भी उगनीवन राम दूमरीमोरि राष्ट्रपुरप है। मामा मरे मे मगर लामो मन में उनके प्रति भार है। और इमोभिए हम TA अमिमापन पर प्रान र गगरीप मोर मारोम्प है। और मा बनाव पर पारेमोगा की मंग्या बानी राममा परम मोप पर प्राप्तहा।

व्यक्तित्व जिस चेहरे पर जगही फूह के निर्मक नैसपिक मोलेपम से भरे हुए सौन्दर्य की ममम है प्रामीणों की सिपाई है और पुनिया की रगीन पातियों को कष्ट साधना की मानबीम फरमा प्रतिनिधित होती है वह हमारे देश के राष्ट्रीय गापरण के युग में पैदा होने बामे बसाधारण म्यक्तित्व का पहरा है। उसकी सिबाई, भोमेपन मोर मान बीम परुमा पीय योगी दृप्टिमा बसाधारण योग्यता का प्रतीक है बस रंगीन बातियो पारो में उनकी मानों को मापा ही उनकी योग्यता का बखान करती है ठीकसी ही इस चेहरे की विऐपता है । पक्तित्व में चेहरा मोर माही म्पक्तिल के मुर्गों को मामर करते है। जगजीवनराम का म्पक्तिस्व उन हरे में गोमता है। उनकी मिहनसारिता उनकी सपाई और ईमानदारी मार सबसे गरी उनकी इम्मान परम्ती-सभी समय बेहरे की रेसानों में सिपियर है। इस म्पक्तित्व की पुण् शाकिया दखिए फिर चेहरे की रेखामों से मिलाए . बिहार का एक माय । B-सात साल का बबोष बामा हाप म रंग लिए से पेट की चोटी पर मुंह फुलाए बेटा है। यह सोष पाहै 'मुझे गुरु की ने निरपराम क्यों पीटा ? मैं कब म पाठाण में नहीं पहूँगा। ऐसी पाठमाला में जो मी मुझे पाने के लिए कहेगा उसको इसी से मरम्मद करमा । * . . हाई स्कृत में रासिम होने का प्राी एक महून पान । मास्टर करता है पर मास्तरो मात्र होने के मारे तुम्हारो फोम मार हो गापपो। किन्तु यह दरपास्त मही रेता है बस्ति परीया में यानी ममापारण योग्यता बिनाकर पीन मार करावा है। . पापको पा-मेमा का माझमण । मारा गांव ममतदातीवादीप गयी। भानवर बहे या पेहे और निम्म्या के ममेरे परों की दीवार मी रिमित होकर पमीन म पो है।पमा पाल का एक साप रात में बम मेमा म माश्मम में मपने पर सामान भी रपा कर रहा है। उसने मब सामान बचा सिया पिस्नु भपने मामेंट किए हुए ५..तो अमी अमौन में ही रखे पे। पहबभिमन्यु की पण बसक परम्पूर में कर कर अपनी इन प्रिय मॅट को नियम हाया। देखने पाने पर है।

श्री जगगीवनराम और उनके विचार अमन के हाई मत का वार्षिकोत्मा । पश्मिानृमी पर्म का वातावरण । हिन पम नेता मापीय जी पधारसमर्ष स्वाभिमान सं ते महो समापे और दमित मानि तोग एक हीन भावना से इस पौरप मति पय कोरेक पे है कि एक मापून पामा प्रथम श्रेणी में रत्तीभ हमावा एक भाषपूर्ण लेख परकर मुनाया। लोग चौक कि मामयीय गो में रमे अपने असम में बैठा लिया है। माब के समर्ष हम दोनहार बार की प्रतिमा मलित होकर उसकी मां सेकस।वोहार बबुमा माम पामो दिन का मारमी बनिहन । पतिमा सरिका बोरिया पहलाल स बाकी सोनोरेशमबीप बी माना मेरो योहार टोलम डोहरा समाबपना पान बोला न माह मुहकार्ष मेडी, नमाई। . . . मन् १. कोज वर्मा। बमरा मानपान का बाप-मा पातामा रेगि सान । मातामुनी राम की वरा याम हमा । ममीन पर परसबी की पानि नियमाबाई राम रातका माप-नार्य लामा मन्नारा। और इस बीहा नमनाए पापनालाई पानी पिन अवप्टिीप-पम नम्मेलनमा भार जीप प्रतिनिपि मगामेता भी पाया है। पुनिया म पार पटक पए। भारत भागा-निरामा पालपासोरिया म्पत्ति भारत मम मन्त्री पानीमा रामहीमा मामियत और सिर में बसपा पिपास पारप मौत पर भी विजय प्राणरमा। ग पुनबमे उनकी या परमम्म को बोरब मामी बनानेबापे पक्सिवको धाप-बह मौरनरी पण मास्तिकमा रावमापाराभारते है। भी पमत्कार। परिसर को ये गा मावि सरेपरेपो रेना में माकार हो रही मराभिमानो ममापी गरी पोलीपरचकरापार बिमा बनाममा कम माफ करायाकी मीन नही मानी रम मारनी बारामा निर्माता गाभा में भी प्रेम की भेंटरलालिरापागार रामप्रतिमामी को माता पिम मावीम गौ प्रभाषिताए मारे में ममा लिगार मौन हो । माने रे माती जीवन में मेहर या अमर्गप्पा मम्मेलन और मुनिमामो मरम्प न प्रान्तीय पाप ममा सो सम्पना की पोस्मिानी को सरल र भारत र पम मौरपार मम्पिावरम प्रीयम का विराग एक रमनामा मानिरागलाम।। ष्ट्रीय गाबीनमा मेवान में पर सिमी मिना मिला और मालीप मेगन में मलेबिरामएकबारे मामा मामी और शारे पमपासौदा राष्ट्रीय सीमाना रना LITT OTT फिल सम्होंने मयों के मापाचारों में पीड़ित पातियों का पस मकर कमी पामिक प्रतिषिमा का परिचय मही दिमा मौर म कमी जातोय ममंठीप को मापना म ग्न प्रतिनियाबागेवावों का साप दिया जो मारतम्बापानता मंग्रामबिलों बाति- पीड़न नाम पर एक बम-पर्प पारना चाहती पो और माधौगोहरिबन मान्दो नका विरोध करती पो । इम प्रसर उन्होंने पाक्ति गालियाँ दुईमा के उशरको बात सोचते हुए भी मार मयों की मालोचना करते हुए भी कमी सामाम्मवादियों का माय नहीं रिया। बल्कि मापाम्प के ममकों की मोर में हासपने पर होने एक देशमा स्वाभिमानी शेवरह महर 'मे रेशमाहीमही बनना चाहता। इसके माप ही उन्होंने मश पलितों और मोपितों का पा लिया और उनकी पुरंगा रे सही सामारिक मौर माषिक कारोमो समझा । उन्होने कहा 'यपि हिन्दू समान के चेक मन्तगत बास्मोदि रैलामो या मम्म हरिजन मीच मममे गाते है तो वह उनका मपना दोप नही बस्तिपी माति बातो का दोपहै। यह एक सामायिक पापि है। 'मगिों को मुक्किामो में है कि एमे ममान का निर्माण किया गाय जिममें कि को महतरमहो। 'मापिक कारणों मे मामाविसावा टूटता पा रहा है मौर उप जाति के लोगो मेनाईमाधी तमा माचो पेगे तक को माना पुपर दिया है कि उनमें सम्मिो मे भगोपापेगा मानाने का माहस नही किया। 'भस्मता को ममस्पा मार्पिक है इनलिए ग्म उमा पिमप दृष्टिकोम मे मुम्माना चाहिए। इस प्रकार मयों पार्मिक समाधान में पोडित गाति में सम्म म बासा गरपी गुपी का एक काम बागर भारत का पहला प्रम मन्त्री बना पापात् संचार मंत्री। अमीषनराम के पतितकी ये मामिलामार मारत उन मों पतितकी तस्वीर माममे नापने तमगे निरहान रमित गाड़ियों के सपूत-पम में बम्म गर मी भारत को राति मोर माहित्य का मत पिया। और मिना विमहिमाकप मे पौरख के मामन मबर्मोपामिम्माभिमान पाताना प्रतीत होता है। रमतों में माता का मगम को मानववादा काममा मे मागिर और मसमिक्षेत्र में को निर्मात्रकारी काम पिपा बहो पाम मा उपरीमनराम में भारत के वनमान राष्ट्रीय पापरन सरनौनिक सेफ में किया मौर मेग लोप मरने गुमनकर्म-समारपी योग्यता मे महल होने पर मी मन मोर मब बर्मों के लिए पूग्य बन पये ये रमौ प्रकार मात्रा परिसर मी नप्रिय बन मा । माममिए नही मित्रारको प्रसनीतिक रुपमा मपिक किस श्री जगनीवनराम और उमहे विचार - सिए कियाप एक बरमान है।म्मानिमात बाप्पन की मे सफलताएँ बाहरीप है- वो किमीषप पिट सस्ती और बदब सस्ती है। किन्तु बाश्मी की मारमिमत गमके मरने का भी मिट एता है। माश्मो सफलतामा गगा होता है।यो मापमा सकमतानो गिहासन पर बैठकर मारमियत को सारंभीम बही से नीचे मिर वाचा बह मफना सराबोर मसफरताओं से पोय ममता है। किगीवनराम का पवितल उम मारमियत को पानी है जो नातागो कमिहामन पर बैठकर भी इम्सानियत की गार्यमाम महो म मोच नही रखप पर मौ सगेसा पर्म-संकट दिमाई रिमा रमन मरस्लामी + मिहामनी को त्याम दिया किन्तु फिर भी यह एका भारमी बना पारमादि मन अपने म जीवित रहने वाले इसान की मग वामा माती। उनका पलाई 'मेनो मिर्ष मनुष्य मात्र के मुगे पर निवास करता है। इसीलिए मापति मुमार म मिाम रखना मोर सनम भूगर पिता भुषार गोपी बारामार।। बनवता की पितारी म्पनिको चिन्ताहै। राममतिकबामीमतास सुम में मनेक मला मनापना की मापीननाको चिन्ता में मुकाही मालेप्रोन होते मौर राप्गमागग के उम्पानमगोन निमगाएपरिषय विबाबा मे मार गापूर विभागार भी यह मोष है "पा माली मात्र मार पाम.महम अमनौ मावारी भागहमरते पारिवागत गीतिर मागारी है। जनता के लिए या कोई मही पती। जाना मिर-माम मरोहपरमी उगा पाना मी गयी रसि मोवन बाप समा मन न ममस्याओ को नहीं किया जाता पर र पो अपार माल्यापार चाहे गिमी मी साप में मनाम पी रस्तुएं मी बनाने और बता शिम मारही उपनिनिर मनी मायामा असमानी मिलमा तनाबासी उप लिए गिनी पामबीमही । जगती कापी पाच मिमी मुमग्गिा गाव में मारी लाई गाली बेटी भी पर गरगा बाबारामान पराप म मुपरिपन मरने है। यह मस्तिव भी एक तिवार में पगमार मार मानी माग बमोदी मुवर्ष पग्पिों सदी मगतिर।

श्री जगजीवन राम कुए सोम एसे ही होते हे चिन्ह रेखत ही लगता है जैसे मातृभूमि के सन् प्रतिनिधि पुत्र बेई समझे पक्तित्व में परती की विराटता पो पपार्प रप में उपाटित होती है। बाबा उस पती पुष नहीं होते जो पापाण और भूमि से बनी है, बस्कि उस पसुग्गएको कोस की उपर होते है यो रत्नगर्मा है और सबसहा है। श्री बमबीवनराम का म्यक्तित्व भी ऐसार मर्ममेर के रस पृप्पा-पुत्र की कल्पना साकार हो उठती ईगो कहता है भूमि मेपे मा है म पुप्पी का पुत्र है। ऐसे पृणी-युष राष्ट्रीय जीवन में स्पवृक्ष के भमर फम होते है बो भपने अमृत बान से राष्ट्रको भो बमरता प्रदान करता है। एष्ट्र की मारमा पन है भूमि उमका परीर मौर सस्कृति उसका गंगार होती है। राष्ट्र का बारमरप बम ही भूमि को विराटता और मसाविका गंगार पाकर असाधारण पक्तित्व बन पाता है। राष्ट्र मे बन बहुताते है किन्तु राष्ट्र को मारमा की विराट मभिम्पक्ति मिमके गोबन में मुमरित हो पाती है ये बिरले हो होते है। राष्ट्रीय जीवन के काल्प-दम पर कभी-कभी ऐसी बहार माती है जब उसमे असाधारण व्यक्तित्वों समर फम बारित पुप्पित और पमित होते है। भारत में राष्ट्रीय मामरण एक बसम्त तु पी जिसमें ऐमे ममर फर्मों की सृष्टि हुई। पौ बगबीवनराम उन्ही में से एम है। बाप राष्ट्रीय बागरण काल मे गायी पौ बट-वृक्ष की छाया में पनपने भामे रहित पातियों को पनचेतना के सर्वाधिक लोकप्रिय नेवा है। मिम तए ने परेमप्रसारका पक्सिरब भारत के ठेठ किसान का-सा व्यक्तित्व है नमी प्रकार भी जगजीवनराम भो प्रामदेवता की गिमूवि । परि किसी को बताया न जाए और साधारण अंग-भूपा में अपनीवनराम बी को कोई विदेशी मर्पिषत रखे तो उम्र पह भारत का सीधा-सारा किमान सममेगा । मारगी मापौवन का गंगार है। उनकी खादी की भारतीय पोपार में पान का पमलार नहीं होना है। क्योकि राजनीतिक क्षेत्र में सावन वितानपासोको पर-वहाँ पुनिया ने नये मिसान्तों पा प्रभाव गीप पाता है वहाँ सामागम के पमकार का प्रभाव भी मन पाता पितु भी नगगीवनराम बम्बर मौरबाप मरम भाउमहीन भारतीय प्राम-मसति + प्रतीकीर मराठा मोर मारगो सश मन्ना मार मानकारी भी प्राप्ती है। गिमप महारमा गांधी ने हिमा मौर सापरेमिशान्तों में परमोनिका मैतिक और मानवीय मन्त्री मौर ईमानदार बनाने G - भी जगजीवनराम और उनके पिचार कामापर्य प्रस्तुत किया नसी सएस मावस की प्राप्ति पक्तिमपने जीवन म भी अम्बर और बाहर दोनोम-मन्बाई और ईमानरामो प्रतिविम्बित करने की परमारीमाधोपी यह मान नैतिक प्रेरणा मि रामाविक पक्तियों में प्रतिफपिन हा उनमें भी पपगोपनराम माम्मति माल लता है। बिहार प्रान्त बारा खिम छोटे मार में लिपातिको पोरमें बायपर मी अपने बर्म-नमान की तमाम विषयवासम्म पाषाओं को पार करते हुए मायनिक गोषन का यस्ता पश्मिा । रसित गति तमाम दुपयों को मानवे ह मौर रन माम मागो के प्रति एक रिवोह गराए भीमाप राणेया के देश मिपूर्ण परमी रिमित नहीं हुए यदि मापने प्रतिषियावारी गति से संबई पिणा और पीपत मातियों में गप्ट्रीयता की भावना भारत मत बनने एवं अपने अपिटारीको प्राप्त करने की प्रेरणारी। प्रतिषिमानावी वात रहित गातियों से मपिकाकोमामो समग स्वाधीनता संपर्ष मे असम माती पी। भारतीय स्वाधीनता नाम को मपों का बादोलन बनाकर इन सोचे तोपो को सुमगा करती की। jिी अपगमम मिताधिकारोबी समस्या को पप्ट्रीय समस्या मनाना और हमरा निरालपणाममायारामिदान माना। मीमि माप प्रतिषिमा पादियागारमेंमार और मामापारियो समान भाव गराकर मामा पापी मापं पर माम बाने। मूला अपवन राम का परिवार मारा मिलेगा ने पाला नाही मग विषमागपत्रमारमेहमप. मान पान मा निमुवान पाम कोमेड माविमोगमामा मामारमामागोमर बाबर यमर पिता नौ जानीराम का नाम । परिवार कब मान मापको बाबू में कम सोचानिmaraft गरनीक पितामाहामा पन में हीदी मया मामीमालेती सामान पर पैर में मौकर। माल मालीबाद में बार नेपामा मुस्तान मामाने हिन्दी एवं भरीमा मात्र प्राप्त गा। णेरा-मोटा काम भील नागारम मापको देना महामारी मिल rt frम परमाप माराम का पारामा (परमा ) और मी माय सनातर मामामा माग सम्मान में रामेबार जब बाग अलीग (अहम माना पाप्यार और सारिया पा) में मारने पानी मानीपाईपामारामचिन पासबापत imविार-रमनाशीतग प्रमऔर स्ने पररा। उनको नुपमfr Tana तास पान माम मा । और बातम दाम में मनी ममापा मार बर मात्रा रानासा और पिमही माम बापू जी मी मम वापिनाया।

जगजीवनाम १६ गाबू पा ४साम के हो गये । फिर पमाने मी सरादी कीबह दिखनेमीण मरयन्त प्रबसपी। बस फिर क्या था । बसमानरमरा मारके एक स्मातीय कम्पा बासम्ती' से बापका विवाह निश्चित हुमा और सार बीतते भापका विवाहमा होममा । बासन्ती की उमस पासपी पी। सेमा की मौकरी बमीमारी पौ। परन्तु यह और पांच साल से अधिक नहीं बनी। बाप स्माष मानी। मनिममफमर म बापकी किसी बात पर बिमा पई। बाप अपन को नियाप मानते बेमौर इमपारण मापी मापने से इन्कार कर दिया और नौकरी छोड़ी। समाष की यह तस्विता मापके परिवार म बमबात है। नौकरी छोड़कर माप परवा गांव मा पए। यही मापकी पाली मम्तान का जन्म हुमा । बच्चे का नाम सत्ता रणा मया । 'बाग मी कापरा बहिगांव में अपना पर बनाकर बसनेमा हुमा । बी मकान बना मिमा गया किन्तु सन्तहात पाहाँ पाकर बीमार हो गए। पचपि मापक बरे भाई बलिमार में होते थे और बापने भी मपने लिए यहाँ पर बनवा लियापा निम्तु पहली मन्तान का वहाँ जाकर बीमार होना भन्छा नही मामा मया और इसको अपम नममा इम मतिरिक्त पार सेर होने के कारण यहाँ रोपटर मोरपंच की मी मुविधा समम परम हो सस्ती पो। माप पुन घरमा गांव या पए । यहाँ मापने एक मौर पर मनापा। पारसम्म का स्थायी पर हो गया। बहुत दिन मापोकारमही एना पड़ा। कमाते में बापको एक स्थान मिल या। महाँ की कमाई से खेती के लिए पात्र में बमीन खरीदी। इसके कारण परिवारपी भाषिक मपस्या सुपर पी। 'बापू जी की पूरदक्षिता एप प्रबनपता के कारण परिवार को पत्री म भान ने नही सवामा मोर ग भी इस पृटुम्ब को कर्म मना पड़ा। मुमतान में पते हुए ही 'बापू गी' ने पिवनारायन सम्प्रदाय के एक महन्त - पिवनारायणी मतभी सलाही पी। गुरु और पिबर पर भापपी बटूर प्रया पी। वन पूजामौर राम में पूर्व भारपायो । मापकी बपने गुरु घिवनारायण परबटूट मापी । गुपजी का परम स्थान चन्द्रवार' पार गागीपुर।पहा मी याला बापने परम हो पायो। बगमार गौ को भी मात्रा मापने की पौ। गुरु मनि पार्मिक प्रवृत्ति और पित्ताकारप भाप भी एक महम्त माने जाने हवामाप पति देने के विव । बाबविषानों मारा और अमुक्ति-युक्त बातों को मापसन्द करते मापके प्रचारका फर यह हमाफि मनेक तोगों में बारिमाए यए मत्सकका अनुमरण किया। पाप गर्ग गिप्प मार दी बिहार में हमापका स्वमाव विनय मोर पसानु था। मानने वाला कमी मापक पर से बाती हार नही गया । निम किमी को कुछ रिमामह मानिए उमकोरेरिया फिर उनमें वापिस नहीं मापा मार तागा नहीं गि। वामा टापी पुरता बचपन माहिर मामले में । -मोटे रोग 1 २० भी जग परामर का इसार भीकरतेते पेरिसोरमातोमाशेस्वोरिपोसारकोमेगा सहावा मामी तय मापने भो उतको २२ मे परमगारोको महारवा करगरिए ना तलावास माने मार गिरा पा । फगत मागपरिवारमा मापारासापामा मही पड़ा। हम परमाणम बनजी हम रखमोप पात है। ERHI AR ANपरामरायोजिम के प्रतिनिधि हान पर भी परिभाष उरता मारतानाaanारण पिता मी घोभी राय से मिरगे याचिरागत है। पायबापो बिरालोगोपनीनो तकतोफ पो । मापके मुहस्ते म कोई Ft महीपा। नरामा बोपमा पड़ता था। या देतकर 'बापू पाने एकमा बममाया। दुमपोगरबाप नबनाकर मुस्के के बीच पनपापा । परोपकार एरभारबरलाग को यह पापपा उनके पुत्र में पौ बाई। कलकत्ता में बहुत रिन रामेमोरमौरतबिरने से पर शरीर पर गया तब 'बापू पीसपने मारा पए। वाहप पी पिनारामन पंप के बहुत से पन्नों को मापने हाप ऐ शिला। रमको समिपि गोरप पावर्ष पौ। मोररोजड़मे बार हो रवा पास में हर सात सन्तानों बाप मारपी पम्तान बाप ५वस १९.८ कोह।। बक बार के दो पुत्र और पाप काकिया हो चुकी पौ । किन्तु रारा पुष पोप सातको मायु में ही मर पपा वा। समिए मोमण पुष पाकर पिता का एप पुरित हो गया । इस पुत्र का नाम उन्होंने बमगोपन राम रमा। माम का पासक मानी गोवन पर प्रभाव पड़ता है यह मान्यता पुरानो है। 'बा' पो की मौत बात पर मामोसी पी। इसलिए नाम चुनने में उनोंने बहुत सूम-बूम का परिचय रिया । यह सबर की माप महीं पुते यहाँ मरने मनोरों को-एक पिता भपने पुल को इस दुनिया में है भी मूकप रिया । उनका बिस्वास ठीक निकला और हुई बीर मोबग एम मे अपने कार्य में बाबू पो उनका - प बगीपमराम २१ गया है । उन्होंने एक दिन भपने छोटे पुत्र को बपन पास युगया। मत्यम्त नह से अनेक बार पुत्र के सिरमौर पीठ पर हाथ फेरा । फिर गद्गद् कस मे बामे एक को तो पुण्मप्रेगी पठा पाया परन्तु तुमको तो सभी हिन्दी भी मही पड़ा पाया। मग परन्तु मानो तुम किसी बात का हर्य नहीं होगा तुम साझे-साफ पास होते बायोमे । सन्त पिता का पितृभक्त पुष को दिया गया बागीरि विफम नहीं मा। पुष भी बाग अपनी कौन्ति अपनी योग्यता गौर मपनी सफलता का श्रेय अपने पिता के इस बाशीवि को देता है। जगजीवन राम के पिता की मायभन ५ वर्ष की होगी जब उनका देहास्त हो गया। मृत्यु के समय बापको कुछ मौ कष्ट नही हुवा । बोयों को कसना मो मही यी किमान बापका मन्तिम दिन है। स्नान कर स्वम्ह वस्त्र पहने हुए थे। शिवनारायण संव-सम्प्रदाय के अनुसार संवपति (भगवान) की पूजा करने के निमित्त 'नारी' मपाने के लिए कोर्गों से महावा । पर अब मापके भयों ने ही 'गापी' गाने को अपने बिन के लिए टाल दिया तब मापने सास बोंबी मोर 'सत्तोक' को बसे गए। पिता को मार देने का काम छोटे पुष ने किया। मापौवन राम की मस्पाइस समय पह सर्प की पौ । परन्तु इस पर भी दस रिनो ठक मापने विधि-विधानों के बनुसार गोपन विवाया नमक खाना छोड़ दिया पर से बाहर निकमना छोड़ दिया और किसी निपिय बीब का बाप नहीं किया । इस दिन भार हुमा और एक बची के समान भया एवं निष्ठापूर्षक मापने सब नियमों का पालन किया। योग्प पिता का बास रठ गया। किन्तु उस स्थान की पूर्ति भावा बी एवं गोपाईने कररी। मापको कभी पिसी चोच कामगार नहीं होने दिया। मापकी पाई में किसी प्रकार की बाधाम पहुंचे इसका बड़ा भात रहा । पर का कोई काम यहाँ तक बनवा वा मापसे मही हिना बाता मा। पर मर की दया यही थी कि पाका मपना सारा पान पठाई में ममाये । मापके पुर कपिल मुनि विमारी मौ बापका पिप रूप में बात रमत । गुम्पा होने से मापको पहाई में किसी किस्म का विप्न मही माया । परने पर बाप मौजूद म्यान रखते थे। पड़ा पाठ पार करने के बाप हीपर सेमेलने के लिए निकाले। गुम बापको प्यार भी करते च । पितु एक दिन गुरु मे मापको पोट दिया एक माके में बापरा मना हो गया था । उमने मापको माप और पवाब में मापने उसको मारा। मामा म सका मौरपोर मे पिलाया । गुरुयो ने सममा गरारत एदी की है और न पूण- तण और रेत मा दिया। रामक स्वाभिमानो पा । रसम हर पल मिया कि मयाम पाउमाना में न पोगा । स्कट में मापी पट्टी हाने मार एक बाम में पहेमा । यहाँ एक मोटी कमो तोपी मौर क पा पर पड़कर बैठ पए। मापका मन प्रतिहिमाको भावना मे गोप पा। पारका निभार पाकियो २ श्री नगगीवनराम और उनके निवार कोई यहाँ भावेमा गौर पाठयाहा बमने के लिए करेगा उसकी इसी पाठी से मरम्मत पगा । जाने की छुट्टी समाप्त होने पर सब करके तो पाठशाला मा गए पर भाप नहीं पारे । मापकी एक पुरहई । समके पर मेने गए और में वापस लौटकर बमा माए हिपहाँ बाप मही है । मग मापकी बोर मार गोर-पोर में गुरु हई। कुछ मापको खोजते हुए गाग में पहुंचे। यह देखकर हैरान रह मय विमाप एक मोटी समो मेकर पेड़ पर ठगए है। का उनके इस उन सपको पेनकर र गये । पहल तो बाप पास उतरने मोर पाटपामा बाने को राजी नही हुए। बाप पापियों में बहुत समनाया बुमाया, फस्त भाप नीचे रखर माये और पाठगाला पहुंचे। यहां कुरु के पौर एए बार कहा बठ पुर बो पिडा इस पाठमामा में बाम नही पागा। मारे गए यहाँ तक पहुंचेगा इसका पुर बी को ध्यान मथा। लकी मां भी यह कह की पीमि चनका पाका मय इस पाग्याला में नही पोना । परन्तु गुपसी भी मामने पाये मये। पर पहुंचे। उनोंने इनकी मां को विश्वास दिलाया कि इस प्रकार की घटना फिर म होगी। इसके साथ बात समाप्त हो गई। इन परिष पर इनरी माता बोका गहरा प्रभाव पाहै। भाईदो काकते पते। मकी पढ़ाई मोर परिणका पास रखना तो माता भी परमा। मोने ही करें पाया गौर मोम्प बनाया। मपि बह पड़ी मिली नही है पर पहन पार्मिक और पूजा-पाठ भत नियम करने वाली है। पायर ही पोई बात होती हो । सैकको मन प्रमाती ननकटस्प है। रामायण मावि वर्मप्रचो बहुत सप उन्हे स्मरण बचपन में मापको पी-पुरु का बड़ा चाय था। बमा ची मौर मुरबा पार से पाते थे। सिकार पर टैगी बही की रिया के ऊपर में माप मा की बाब बनाकर माई निकास देते। ममाईमीनी सफाई से उतारते थे कि किसी रोमाप पर संबह ही मही होता था। मां यही समझती मी निरोप पहाता पाता है । एक दिन बयपुर मापने यह मेर होता तब सब लोप हंसनासकर नोट-पोट बए। माप बोकस - पतप गाना यात्री और पीका मेला । पड़ने के समान सामने में मी माप मपने से सापियों में। बरे प्रति चियापको अपने पिता से बचपन में ही मिकी पी। छोटी अबस्था में ही मापको ई-प्रार्थना भवन रोहे भारि फष्ठस्थ करा दिए गए। बिब पाने को पर पमापन हनुमान चालीसा पान-तोता बादि भी मापको मार करावा पया। हनुमान चालीसाना तो बाप रोग प्रात स्नान के बाद पार करते थे। रविवार को रामायण का मान करते पे और मरने के बोप जमा होनौर उनको मुनते । बन-सेवा की मापना उसी समय में भापके एबम अकुरित है । माय बाप आपको बहुत प्यार पसे। उनका काम भी पाप करते थे । उनी चिट्ठी पत्री मिलने से कमी मापने इम्फारमही किया ! सपनापिपरहेमोगमापको मानते हो किन्तुसरे भी मापको जगजीवनराम २३ - एक होनहार यासा समम कर प्यार करो ये। एक रिम पाम को बाप चीका मेमणे पे। बेस-वेको मापका पाप मनमाने ते परपा, मया ।त्ते में बाते में उस कर मापको भोर से काट लिया। ति महरे सगे थे। बारा फर पड़ी । पर कुत्ता बहरीमा नही पा मत विपचिन्ता की कोईयात महो पौ। परम्तु विपत्ति कभी भकमी नहो माटी । माप घर के पीछे एक परसाती माला बहता है । वर्षा-ऋतु में यह माता मरफर बहता । माला अधिक चौडा मही किन्नु पानी का प्रवाह वेग होता है। माप अपने एक मित्र के साब नामे में बहाने गए । बरमात रेरिन थे। मामा माहुमाया। दोनों साभी निरसकहोपर पानी में पर। तरमा रोगों में से कोई नही जानता मातेर बाराका एक प्रयास बेग माया मोर दोनों मा गए । मापी वा हाय-पर मारकर बाहर निकल पाया । सघ्या का ममम पा। कोई पास न था । मापके मिए निकलना कठिन हो पया। मापी भी कोई उपाय बापतो बाहर निकालम के लिए मही मोच सका। अकस्मात् उमी ममय मुभा पराती हुई एक मुसहरिन निकल पाई। उसने मापकी हालत देनी मौर मटम मपन हामी हामी मापको मोर सासेकसी का मिरा जब बापकहाम मया गया तब उसने मापको किनारे पर बीग लिया । बापी मा इस घटना को कमो महा मूठी। मारपी जान बचाने बातो मुमहरिन को भी कमी नहीं मुलाया गया । यह मापका इमरा पम्म पा। इमसम्म की भी दी मुमहरिन फिर रमको में भुमाया गावा? पाप गौ परीमा समाण करमाप पारा में गाकर पाने समे। यहाँक मिरिस कम मीर उसके बार राई स्कूल में मापन मपना नाम निवाया । रम समय मत विधाषियों के लिए कोई मुक्षिणा महा प्राप्त पी। मत हान के नाते नहीं बस्ति मपनी पोग्यता कारण मापने मपनी पीम माफ परसा ही। पर माप म्यारह मातरेच मी मापा मोनपुरा गांव के प्रोमुतमाम की मरकी स पहा बिगाह एमा । सात माल बार मापरा मौमा हमा। १८-१९ को बायु में मार पर पत्नी का मारमा पया। पितु मम मापी पाई को नही। अस्मि दमने बापका पढ़ाई में और यह मिता । माप उप मिना पा मा इमराय मापरी पानी मापी पत्नी मोहोबह तनो पति-परापमा पो दिएर पार माप म्युनिमिपल- बनार में मारा ही रह पर मार रात का मी परममा मौर पम्मी ने मापको प्रतीक्षा में जमीन पर बैट-टे मारौ रात मुसार दो। पिमु मात मान बार मार पालो पत्नी निम्मम्ठान पवस्वासकामहोपगा। १९१५ में मापा नरा विवाह कानपुर में श्री इमामी देगी मे हुमा । परमारस्थाने ही मार मामी ह । मार मारम की मौ एक पारसी परीक्षा भी जगवीपनराम मोर उमक विचार। । १९२१ में माप पहली बार कमकतामए । इस समय माप पुवावस्था में पम रख पुसे। महाँ एक मास पर सत्ता में समय किया । यहाँ एहते हए ही मापने पिनारायण सम्पराम के एक बुत से रविदास पंच की दीक्षा की। बहाते से अब भाप-बापस मौटने लगे तर बापको बड़े माई ने म्पये के नोट रिए बार कहा इसको मपने पास रखी और बब मरपन्त मावस्यकता पोतासमें से हर्ष करना । परमाने मरमापने उसमें से २ रपये हे मिए और प्रेप को रजत मामो म परत कर हाँग में चार मनाने के कमरे के सदर जमीन में मार दिया। एक मास बार बचानक गायबम्बर भयकर बाबाई। बाद मी माषी रात के समय माई। जब भापको मार नही उस समय हरवाये तरबार का पानी मा पुका था। मुहल्ले वालों की महापता ये सामान निकालने गौर मुरमित स्थान पर पहुंचने म सफा हुए । पानी बराबर बह रहा पाय सबके मुरक्षित स्थान पर पहुंचने के बाप बापको बमोम में गड़े पर्यो का स्मरप भाया। पानी रम समय बहुत पर भाया था। पर मापने हिम्मत नहीं हारी। बारगरते पानी की परवाहन कर बाप स्पया निकाल से भाये और यह बपती मा को सौप रिया । मापफे पर से निकलने के कुछ मिनट बार मकान हार मिर पगा। पापी रात के बाद पानी कम होने लगा । मुशहोने पर पब मापने अपने मकान की मोर मगर समाई तो देखा कि यह मूमिगत हुमा पाई। मकान के मरने तक को पानी बहास यया था। इस समय बापके मन को सीपस्मा हुई होमो इसकी सहम में पसमा कीमा सकती है। इस घटना में तीन साल बार की बात है। १९२१ मा महीने में महामना मानमीम जी बारामाए । यहा सागनिक सभा में उनको अभिनम्दन पर दिया गया। उसको बापने पढ़ापा। महामना मायोरणी उससे बहुत प्रसन्नाए। पापको महाममा माम्नीय बी ने अपने पास पुलामा मौर कहा कि प्रवेषिका (निम्स) परोक्षा पास कर हिन-विषय-विधालय में परने बाना बहाँ पड़ाई को सारो म्पबस्था हो पाया। १९२१ में मापने प्रबमिका परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास को । गमित मे बापको सत प्रतिपतक मिले। इमभे उत्साहित हो बोर महामना माम्बोय पीपषन को पारकर बाप नियरिणाव्य गए । १९२० में वहां से मा एस सो पास किया । फितुमहाकावासादरक मापको मषित एवं मको प्रतीतामा । पुन भाप कमाता बले गए । यहाँ गए मापन १९.. मबी•एम की.की परोसा राम को। भापकी इन्हा नोकरी करने नही पी। रिन्नु माई बापह पर मापने भाबकारी विभाग के इम्सपेक्टरी के लिए प्रार्थना-पत्र दिया । बिस लि भापको यहाँ नौकरी पर पाना वा उमौ दिन बाप अस्वस्थ हो गए। गेम बड़ा और निमोनिया मेंबरल पमा । इसमें कई सफाइ मा मा मीर नपर बहालोका तिमि टप्त गरेमबन्न रास भरविप पोप तमा मुरेन्द्रनाथ बमर्गी के समाम इस पटना के कारन माप बोपन बगजीवनराम का प्रयाह मी परम गया और अब मापने सब विधामाँ से मुख मोड़कर रमित पाति की सेवा में अपना जीवन उत्सर्ग करने का निश्चय कराया। छात्रावस्था में ही भाप रसित मातिनी सेवा में लग पमे से मोर बापने विरास समा का संपटन किया था। कवि के कामों में भी माप कुमुपहिस्सा में लगे। १९५२ में माप कहता से मपने माप मासे हुए थे।ास समप गांधी जी ने मपना मनमन त किया पा मार सकेगात मोसार मारोहन मारम्भ हुमा । अस्पृश्यता निवारण संप (मो पीछे पगार हरिजन सैष-संप के नाम में परिवर्तित हुमा ) की स्थापना भी रो पुती दी । बिहार में इस कार्य का मूमपात करने के लिए सूर्यपुरा के रामा भी अधिकारमण प्रसार मिह को मप्पक्षता में एक समा गई। सर्भ दिल मस्पृश्यता के इसक को मर्ममा बम्त करने को मुकदेव पुरे कि वानर निर्भय' पिस प्रकार इसकी मा. मेकर हिन्दू समान से सममम एक पापाई को काटकर मलग कर देना चाहता था। पदि गांभीगी परसात के माम्न मरे मी मपने प्राणों की बागी न मगा देते तो मानसा-निर्गम देने वालों के मनोरपोरेपूण्होने मैं क्या मेरेहप गया पा। इस कारण हिल इस कक को मिटापे के लिए हम करने का प्यारे । पासमा पटमा के भनर मनुमन इस्लामिया हास' में हुई बी भी बमनीषनराम को भी बुलाया गया था सत्ते में पहन के पारम हाते मार बंगाम मेतामों में इनका परिचय तो पा पर यह पहला मरसर पापा बाप विहार के प्रान्त मरक मेताओं के सामने माप मोर मापको योग्यता मोर पनि तपा प्रभाव को सावनिक रप से सीकार किया गया। २५ वर्ष के युगको महमा म प्रशारका सम्मान मिस तो रमसीमा मस्पाोगी। मापन इस मरमर का पूरा काम नठाया । बुरफोचित-पपता और भावेप माप भापम में था। रामेन मा बापकी तरफ भारपए, मापनी मावना कीपर की गई । 'सरदम माफ ही बन-रधाम मोमाइरी के संपाल कानों मे मापकी मेवाओं में साम उठाया । यह मस्मा 'विहार हरिवन मेगक मैप में विलीन हो गई और आप भी इस मो चुने पये। मंत्री को नियत से बार अपने काम में जुट गए । मावों में रियों के लिए मापने कुएं नपाए । हरिन बासरोकिए पाटपासामों को स्पापना की। बापको १५) मामिक इस कार्य मे मिमने । सो मी माप इमीमार्य में समा देन। १९१४ में भूपम्प मापा। गांधी जी भीनमयनर पर रिहारमा । मापने प्रथम बार हमी मौके पर मावीमान किया और उमरे में पराबर यापीओमार मौ सर्प माप गिाम महामा मुमेर मपिरान ममापनि पुने गए। पग की मारियों परमार उत्तरोत्तर पनवे गाणे है। किन्तु उस नमय भी रिमोपी यसमा इतनी दूर नहीं पहुंची पीकि बाप एक नि पापीन भाखमंत्री भी बनन। राजनीति मे मी युगर-नयमो मपनी मोर बीरा । यहाँ पापा भी की।

भी जगजीवनराम और उमके विचार कोरिस में सभी विचारों के पति के सामायिक विचारों में नहीं भी किसानूमी है। पाति-मेव पर्न मेव का कार्ग विचार उममें से मी भनेर मन में व्याप्त है। कहता से मुरकरणे हए उनसे मी पुर फरमा अनिवार्य है यामापको पहले ही दिन पता बत गया। दूसरी मोर मापने देखा कि यहाँ तक मेवा मंगल का प्रश्न है उससे बापका कोई मतमेर नही। यह सामायिक सन्तति का पमपाती है। किन्तु मा समागको छिम-भिम करके नही बस्कि समार का हवय मौर मन एवं उसके विचार मरण करमह सामास्ति करना चाहता है। पगगीवन पम की ठोस मत्व मौर वास्तविस्ता पोषनेपाली पृद्धिको सपना मार्ग चुनने में देर नमसी । कापस के प्रति मविषठ भक्ति एवं मिष्टा रमते ए पार्मिकट्टरता तथा सामाजिक विपमता मौर बार्षिक पराधीनता से किस प्रकार पापा सकता है इसका सरम मार्ग बापने पूर लिया । यही कारण कि पलितों की सेवा करते ए भी माप काम के चोटी के नेताओं के विश्वासपात्र । कानपुर १९१५ में अमित मारतीय दलित बागीय मेतामो का एक विराट सम्मेमन हुआ। माप भी इसमें सम्मिलिताए । यही नही बाप इसके संयोरों में से 'एकरे। इस सम्मेलन का रेश्य मा रमित पातियों की बस एक संस्था स्थापित करना। पितु यह सम्मेलन मारे देश के लिए एक मपठन की नीव गाने में सफल हो सका। राष्ट्रमा हरिवनों ने बखित मारतीय-अमित गाति-राष (All India Deppressed Olassos League) की स्थापना की। इस मए तपटन के माप प्रधान मंत्री ने पपे। इमी पर्प इसकी बिहार पाबा के भाप मप्पा जुमे गये। मापक स्फूर्तिमप एष प्रेरपारायी मेतृत्व ने इस संगठन को माता सता पान पी। मापके स्वभाव के माधुर्य और मापकी को संग्रहाक वृत्ति ने पेस-मर के कार्यकर्तामा को एकत्रित करने मौरस मंस्था को बल्यान बनाने के लिए उनको इस कार्य में प्रवृत्त करने में सहायक हुई। इसका पहला बधिवेशन मबना में मापकी होमम्पमता में मामौर इसका नाटन भाषी जो मे किया। दगिपा एक्ट १९३५ मनुसार देवरे बम्बर प्रान्तीम बसेमकियो का चुनाब १९१७ मेहमा। काग्रेस में यह निर्वाचन-मंग्राम पाने का निश्चम किया । हरि बनों के लिए स्थान मुरसित रखे गए पे। मी बगीवानराम की कार्य कृमतता स समय देखने में माई । बिहार में रिजनों के लिए सुरक्षित एक भी सीट कांग्रेस में नहीं पो'। परम्तु भापकी इससे भी गौ मा कठोर परीक्षा होनी ममी ऐप भी। काम में सरकार की भोर से यह मायामनन मिलने सब किगवर्नर दिन-प्रतिदिन पा रोग मर्रा के पासन कार्यों में हस्तक्षेप न करेंगे मंत्रिमाा बनाने और पासन मुरसे दरकार कर दिया। बिहार में सरकार ने पटपुवती मंत्रिमंडल बनाने का यम्न भिापी यूनुसे मुम् मचिय बनाए पए। इस मम्पिमात में बापको भी एक मन्त्री बनाने और कांग्रेस - १ । जगबीवन राम पाटी से मापको फोड़ने का मल किया गया । मरिसके अतिरिक्त बन का प्रोमन भी दिया गया मौर दबाव भी। लेकिन जिन लोगों में श्री जगजीवनराम को कमवाया, उनको इस म्पत्ति परिंग मोर उसको पहरी राष्ट्र भक्ति का परिचय म बा। उनका विचार माफियांव में पता समाग के वस्माचारों से प्रस्व सभागका एक मिश्रित संवा मालाकांक्षी युवक मौर नहीं तो प्रतिहिंसा की भावना से ही ग्नका साथ देमा मौर पिरेधी शासन को मगदूत बनाने में सहायक होगा । किन्तु बमगोगनराम पो सन्त परम्परा और स्विर भक्ति की कोरियो म पता पा–स प्रबह सोम के सिकारमाए मौर उन्होंने देशद्रोह और समारोह करने से इन्कार कर दिया। पापी भी सरकार पटम रामप्रसाद मारितार्यो मे उनकी इस दाता परबपाईके संदेश भेरे। कुछ दिनों बाद कांग्रेस मधिमास बने । बापको मापकी राष्ट्रभक्तिमा पुरस्कार पार्लमेंटरी सेरेटरी की नियुक्ति के रूप में मिला । यदि बापकी मायु कम म होती और माप कहो माए होते तो मापके मन्त्री होने में कोई सन्देह नही था। विकास मौर शिक्षा विमान के रे पाममटरी-मेवटी बनाए गए पे । बापने इस पर पर हत हए हरिजनों को स्थिति सुधारने की मोर पूरा-पूरा ध्यान दिया । सगै मौर कामेयों में हरिपन हारों का पीस माफ कर दी गई। पुलिस म हरिमन सिप गाने गये। हरिजनों को विधाप्ययन में प्रवृत्त करने के लिए डाल दतिया दी गई। पार्म- मैटरी सेग्रेटरी के माते विहार मसेम्बही म मापने यो भाषण पिया उससे मापकी योग्यता की आप सब पर बैठ पा । विरोपियो को निरत्तर करने के लिए माप एम प्रकार तों तवा मागों को संजोते पे किग ए पातये । माप पब मोन्ते में संप्रमाण मोर सापार बोस। इस समय का मनुमन जापको मविप्य में पा सामपर सिख हुआ। सितम्बर १९१९ में महायुर प्रारम्भ हो गया। भारत से समाइ मिस बर्मर परनमर ने भारत पी मोर मे पुरबोपषा करी। मारतीय जनता युर समपने का मलिप्त रखना चाहती थी। रिटिश सरकार को काम पुर में सहयोप येने के मिप तैयार पी परिबह तत्वात रेप में उत्तरापी मामन की स्थापना करना स्वीकार कर में टिप सरकार कामपार मकायरमा पाकामी मंत्रिमरों में इस्त्रोफार दिया बोरएमा प्रान्तों में मानेग्म-पम्प या गवर्नर-राम्य स्थापित हा गया। मापने भी पांप्रेम का मादेय मिर-मापे पर एला पामन मार म मुस होने पर माप बिहार प्रारमिन पग्रेिस समटी के मंत्री बहुमत म पने गये मोर १९४५ तक इस पर पर रहे। १९४० में गांधी जी ने वैयक्तिक मस्यामह मारम्भ किया । माप मी इममें सम्मिमित हए । इस ममय मापकी पत्नी मी गाम गाई वर्ष का पुत्र पा। मिस्तु मापन साताप-पुर सेम समय मुग मोरना कायरता माना । वह भापकी पहली प्रेम यात्रामी। सितम्बर १९८१ में अकस णिहाने पर सदिम नया दलित-गावियों के मेमटन कार्य मंगुट मए ।

भी जगजीवनराम और उनके विचार । - । ममम्त १९२ मामा। गांभी को 'भारत छोड़ो मोहन प्रारम्भ या ) काग्रेस महासमिति के बर्मा वषिषन सम्मिलित होने के बाद आप पटना पापत मा रहे थे। मार्ग में ही गिरफ्तारियां हो हो वा परमाप पटना पाईच हो गये। इस बिन तक साम्दोलन का संचारुन पटते में करते है। बमेरिकन सैनिकों के यहाँ पर चने के बाद इसे गिरफ्तार किया गया और बारी बाप रेस मेम पिसे गर्भ। मजनूपर १९४॥ में अत्यधिक रग्यावस्था में बाप केसे छोड़रिये गये । मापकोस समय चौबीसै 'युमार एतापा। पर्दन म मौरब इवापा। पुलाई १९४मैंस बीमारी से मुक्त हो म । स्वस्थ होने पर मापने भारत के विभिन्न प्रान्तो का दौरा किया। पति पाति-मम का मरिन पापको अपक्षता में कानपुर में होने वाला था। किन्तु घर कारसके नाम से हीचौक पटी और उसने इस पर प्रतिबन्धकमा दिया। स्म भी भूमामाईबेसाई के प्रपलो में कांग्रेस कार्य समिति के सबस्म पिडा कर दिए गए। सुरोप में पुर समाप्त हो चुका था। पति-गवर्नमेंट को बगह रिटेन म परमी-गवर्नमट में स्थान निमा बा। फमत मारममावत ने भी कांग्रेस और लोप के नेतामो को शिमला में बुमाया । कांग्रेस और मीर के शेष पर पर पो बातचीत को बापमे पंडा की एष्टि से देखा। माप साम्प्रचायिकता से नहीं समझोता करने के पिरोपी ये बहा दलित पातिपो की उपेक्षा कर मुस्किम-कीप को काप्रेस के समान मानने के भी विरोधी पे। इस समय बापने अपने विचारों को गिस पूना किन्तु गिनमता एप पामीनता पाम प्रष्ट किया उसने बापरे स्वतन पक्तिस्वकी छाप सब पर बिठा दी। पूना पैक्ट के सम्बन्ध में पापी मीरा दिये गम एक बातम का मी मापने प्रकार एप से निरोप किया। उनकी इस लता में सबको पक्ति कर दिया। उनका यह स्थान पममी तक बप्रष्ट हो पा । इससे उनके महमोनिदीको विरित हो गया कि यह युगक मिसान्त को पक्ति से ऊंचा मानवा बरक्तिर मग एवं मक्ति भी उसको सिमान्त के साथ समझौता करने के लिए प्ररित नही कर सम्ती। ये ममम माने पर कठोर सत्य काने से भी नही पूक्त तण मम्माषित कष्ट उनको मनके निरिट पर दिया भी नही सकते । रपये की अपेमा भी मोति मोर मन की हा बायती होन्वी बोर मनेक बार व्यक्ति इस पिचार अपने सिवातों का भी परियार कर देते है। किन्तु मापने बता दिया कि माप इस मेपो रेग्मक्ति नही मार सपने अमीरत सिमान्दो बार मापनों के लिए पो सेगा पप्ट महने को मार्ग प्रस्तुत है। सिमला-बार्ता बसा हो। १९४१ में प्रान्तीम बनीय असेमिमा का पनाया।नाव में यहाँ ममेक प्रान पे यहा एक पह भी प्रश्न बा किया हरिजनों के हित की प्रवक्ता कापस है ? . अम्बेडकर पतित पातियों का एक मात्र एक अपने को मानते और उनका कहना था कि सौरपूत कार परेधन भारत के हरि बों को एकमात्र प्रतिनिधि संस्थाई कमिस बार इम्ति-वाति संघ में सन इस बारे - । जगमीक्न राम २४ को चुनौती दी। पी बमबीरन राम का नेतृत्व संनम्नकीपल वा उनकी कार्यक्षमता सूब चमकी । १९४५ के निर्वाचन परिणाम • ममेकर पारेको प्रातकाप्त कोहरे ने समान भिन्न-भिन्न कर दिया । हिरिप मन्त्रिमात मिपान के पास वा कोई उपाय ऐसा ऐप नही रहा था विसझे बह पर यह कह सई कि हरिजनो के बास्तविक प्रतिनिधि में अम्बेडकर हे। रसित पापियों की एकमात्र प्रतिनिधि सस्पा रमित पातीय संघ के समापति की इसिमत से इन्हें कैबिनेट मिशन' के समम पुनामा पया। इस समय पहली बार मी अपनीवन राम पमित बावियों के मसिक भारतीय नेता के रूप में रंग-मंच पर माप । कांग्रेसको भापकरुप में में ममेकरका जवाब मिल गया। भारतीय राजनीति में या पटमा भीषणीवन रामदेवयक्तिक रकर्प की दृष्टि से 'मही पस्कि से भी यह घटना महत्त्वपूर्ण है। भारतीय समाजका संगठन छिम-मिल होने से बच गया। १९४५ में भी मेहरू नेतृत्व में ग्रेिस ने मम्तरिम मरिधरह बनाया। 'कप्रेिस हाईकमार ने इस समय मापकी सेवार्थो मौर योग्यता को भुमाया नही । बपि मापकी रामास समयमा ३८पामकी पी फिर मी मापको प्रममंत्री बनाया गया। पर भारत के स्वामीन होने पर पहमा राष्ट्रीय मन्दिरम बनाया गया तो पुन माप पमममी बनाएमए ।स्वामीन भारत का प्रथम श्रममंत्री होने का पौरपद मिमा। अप्रैस १९५२ समाप इस पर पर पे। इन नौ में पमिको की अवस्था मुपारने उनको उनके अधिकार दिलाने और भारतीय ममिकों का विष के प्रमिकों के साप सम्बल बोररहिए मापसे जिस तत्परता और मगन से काम किया उसका प्रत्येक प्रसा की। पामियामंट में कमी भाप असावपान मौर बनुषत नहीं पाय भए । भोले मापने गितने विक पाहिमाम में पेश किए, उतने हायर ही मिमी मम्म मनाने पेपपिए, और पास कराप । इनके मम मन्त्रिस्यकम में जितने कानून बने पामर ही किसी रेप में उतने कम समम में इतने कानून बने होगे। भमियों की स्थिति सुधारने के लिए मापने सबप्रपम मारी एक्ट' मे महत्व पूर्ण पोपन कराए और इसका क्षेत्र विस्तृत किया। न्यूनतम मारो बनेपा कानून बमापा । यह मेविहर मगदूरों पर भी लागू हो सके इसलिए पेठीहर मजदूरों की कारिक स्थिति की बांधा। मित-माहिती मार मगरों के बीच होने वाले प्रमों को निपटाने के लिए ट्रिम्मत की स्पापना की। मिस कारखाने में ५. मा इममे पिक मगर काम करते हो उसमें श्रमिकों के हितों की रक्षा और उनकी मुब-गणि भागोभीनमातलिए समर मफमर' की नियुक्ति मला मापन कानूनन भाव- यकर रिया। भारत का प्येय 'पित राम(सपायर स्टेट) स्थापित करना है। इस दिशा में आपरे प्रयल गे पाना गेटा करम रखा गया या भारत के गुरु पुन मगरित श्री बगीवनराम और उनके विचार रपोर्मो में मग को एम्फाईज स्टाम्प्योरेम्स एकर' (सेपा नियुक्ति एग्म-धीमा अधिनियम ) के अन्तर्गत सामाजिक मुरमा का पहला हाम प्राप्त मा । यह कानून ममी २५ माब मरों पर ही मामूहमा है। इससे मजदूरों को स्वास्म-पीमा प्रसूति एक बीमारी के काल में मुरमा तपा चिकित्सा सम्बन्धी मुरिमाएं प्राप्त होता है। बाप को चोप किसी प विप कोषपाती नहीं मानते । मापको माम्पलाई किमिस पर मिम मालिकों के समान मजदूरों का भी अधिकार है और मिस तथा कार पाना दोनों क मामेबारी से पलाना चाहिए। विसस्ट्रियल रिस्सप्यूट्स एकर (मायो मिर विवाद मधिनिपम) आपके इन विचारों का ही परिणाम है। इस कानून के मम्तर्गत मानिको मौर मग प्रतिनिधियोको एक कार्यसमिति बना वो है जोकि मित के बम्बर रोजमरी होने वाले ममको का फैममा करती है। बापका सबारम बात का अपस्न रहा कि मिस-मानिक बौर मगदूरानो अपने सामने राप्य हितको सबा रखें मार अपने सुना पिता तथा सामूहिक हितों के ऊपर सार्वजनिक हित को स्थान । माप यह कमी नहीं चाहते कि माधोगिक उत्पादन में मौधोगिक सगड़ों के कारप किमी प्रकार की बाधा माये। इसमिए मापका सा प्रयत्न पहा है कि दोनों भवा राष्ट्रहित को सोपरि रखें मोर दोनों मिलकर कार्य करे। हिम्तु इसका गर्म मह मही कि मगरा को पावन निर्वाह योग्य वेतन न मिले उनके बच्चे अधिभित हे मौर बस्मात्प्पकर गरेरी कोठरियों में है। मगर स्वास्पकर, हमारा, तपा मुम्बर परो में रहे इसके लिए मापने बड़े पैमाने पर पर बनाने की योजना बनाई की और इसके अनुसार भाओं को संस्पा मे पर मन एक बार ममी बन पे है। चाय बागों में काम परमे वाले मजदूरी साप मी 'म्यूनतम वेतन' का निमम काम हो इसके लिए भापको मगीरप प्रमन करना पड़ा। मस्त में वापका यह प्रयत्न उपाहामा । १९४० में माप प्रथम पार इस रेप से बाहर गये मोर अन्तराष्ट्रीय प्रम परिपर जेनेवा अभियपन में भारत सरकार के प्रतिनिधि मानेता के रूप में अम्मिनित इए। १९५ में पुन नेवा पए मोर इस बार अन्तर्राष्ट्रीय प्रम-परिषर बापहो सर्व सम्मति से उम अधिवेशन का सम्मान निषित किया । परिपर पप्पत नावे बापने यो मापन बिया पाया भनेक वृष्टिों से महत्वपूर्ण है। देवीहर यारो भी समस्या बापका एक प्रिय विषय रहा है । १९५७ से उनके संबटन को बोर आपका म्यान बस बरमर पर भी बापने उनको मुलाया नहीं । १९४७ में जब बाप मनेवा से वापस बोर पे तब बाप मारत मीटते हुए जमरा में हवाई पटना की मपेट में मामए। रात पर परम-नरम बानू पर तड़पत मौर टपटाये हुए पो ।राहिना पैर टूटे हुए पाई बहार में फंस गया था। उसको निकामठे हुए माप मां की हाणपूर गपी। पुटने मोका एक पैनात पपामा और यहां से भून की बारा वा ही पी। दो पहिया टूट पनी नी । परीर का ऐसा अगीवनराम कोईभागममा जहाँ मापको चोट नगी हो। इस परमार समान गरम रेत बिछौना पनीहरी प्यास बुमाने के लिए पानी नही पा । एक पापी की मेहरबानी में पानी की पर मिल पाती पी। मृत्यु बब सिर पर मेरा रही थी बीवन का कुछ मरोसा महाँ मा स समप इन पानी की बूरों ने ही ममत का काम किया। मापका यण आपमे पहले ही यहाँ पहुँच सका था । बसमय के नागरिकों को मारा हुमा कि हवाई पटना में भारत के प्रम-मंत्री मीरतो एक बार मामरिमों मे बसरा मस्पवासयधिकारियों को उनके लिए अपना न देने की तैयारी रिलाई । परन्तु इसकी मावस्यकता मही पड़ी। पमहरिन बहाँ रहे फिर दो मास विलिंगान अस्पताल में रहे। टूटी टांग पुर पर, पर यह हमाटिमा माप परीर परमपना गमिट प्रभाव छोड़ा गौर भाग मी मापका पाहिला पैर पूरी तय सीषा मही मुा सकता । आप और मापका परिवार सपीय में भार्गव को कभी मही मूल मकता निमकी सेवा के फलस्वरप माप पुन देश सेबाके योग्य हो सके। प्रमियों के अधिकारों ने एक सतर्क पक और साबमान प्रारो है। पमिकों को सरकारी सहायता की गावस्यकता पर्यो है यह मतात हुए मापने मिखा पा 'हम उन श्रमिकों को अपनी दृष्टि से मोमक नही कर सकत को संगठित नहीं पोमपने पांव पर सरे होने के बारे में सोच भी नही सपने पोइस स्पिति म नही कि अपनी मांगें तथा भिकाय मालिकों बनवा सपा सरकार के सामने रकमक | 40 मह मत्पन्त मावस्यक है कि सरकार उनकी महायता के लिए ग्ना पाम पाय मार जब उनके सवा उनके मालिकोंरीप कोई मया हो तब उनके पारिश्रमिक एवं चमके काम की अवस्थाओं को मुपारने का प्रयत्न करे । मदिम से और स्पष्ट पपी में कहूँ तो कहना होगा कि ममिकों को बहुत बड़ी मम्पा सानों बाय-बागानों तपा इममे मो मषिक बती के काम के लिए इस देश में सामो पौषों में नियुक्त है । मशिक्षा मज्ञान तथा कमगोरी के शिकार होन के कारण म श्रमिकों को मवस्था बरयम्त बसन्तोपपा है। पारमि और छोपित मानवता के अधिकारी के लिए निरन्तर मपर्प करने पापोर पोश। वे सरनौतिक स्वाधीनता पाकर प्रमन्न होने वाले मही। - - उनी पुकार है 'यपि १५ अगस्तबार हमें रागनीतिक मागा मितपसमापि ममी तक हमने मापिक गामारी नहीं प्राय पी। बाम्तविक बागानी है परोगी वमा अणिमा को दूर मरना तथा रेस के मानों मेहनतम्मों को उचित मुख-मुविधाएँ, एन बहन की स्पस्प अवस्था दया गम मे कम दो बास पेट भर भोजन देने का मास्यासन देना। पितु मातमी हो सकता है कि मम बौर पूंगी रोना मापम में भाई-बहिन कीए पनि कर और पूंजीपम पोलिाइयो को पचाने क्या पोरे में कोना हापों में पान का एक होना गेरा पाप।

३२ भी अगीवनराम और उनके विचार मुझे मर होनो के हापों में समान का सारा धन एकत्रित न हो इसी विचार से माप उपोर्गों का राष्ट्रीयकरण पणे से पमपाती है। नागरिक हवाई उामन का राष्ट्रीयकरण सी प्रेरणा से माप करपे है। बारम संचार के सामानों पर किसी एक म्पत्ति का मही राष्ट्र का भषिकार होना चाहिए, यह भावना हो इसके पप्ट्रोफ- करन की प्रेरक कारम। पो भूमि को बोतता है बहही स बमीन का मासिक होना चाहिए । माप इस सिद्वान्त को मानते है। इस प्रसंग में बापके निम्न विचार प्यान देने योग्य है "जिनकी बीवकामा मुम्प साबम खेती करना हो तपा चिन्हें खेतों में स्पर्म काम करने में किसी प्रकार की मिभक हो सके बधिकार में मूत मर मौजमीन म पनी चाहिए। उन्हे मी जमीन से हटा देमा चाहिए पो हम मोतने या खेत में भय काम करने में अपनी हेली समामते है और अपनी प्रतिप्य और जास्माभिमान के विपरीत मानते है। जमीन की पैसाबार पाने ता मानबीप-मम का समुचित उपयोग करने के लिए सामूहिक मा सहयोपिक बेटी की व्यवस्था करने पर भी इस बात का ध्यान रखा बाप किऐसे म्पत्ति को जमीन नरीवाय मिसके परिवार लिए खेती के सिमाप माजीविका के लिए मौर कोई चपा हो । मिस परिवार की जीविका मीर पेट पालने का बौर कोई सापन तथा सहाय हो उसका जमीन पर किसी मौ रप मार हासत में हकम होना चाहिए। यो जुरबपने हाथ से लती करता हो बस उसका ही जमीन पर अधिकार हो। मह होने पर यहाँ बमीन पर डावस्यकता से अधिक कोर्गों को पाने का मार म होगा वही खेत में परिमम करने माता भी मुखौ सम्पन्न एप मानवान होगा। केमोप मनि-मरस म बाप संचार-सावन बिमार के मंत्राईबार मनिमरत में माप ही सबसे सस्प-बयस्क है। किन्तु बाप समय में ही इन महान्-मस्तामों से पाप जीवनरक पहिये रकमही गये है पीरगति से राष्ट्र-निर्माप के पटित मार्म पर गतिमील है । साधारणतया सफम्ताए पक्ति को पम्मी बना देती है किन्तु माप इसके अपवार मोकिन सफ्तामों को गोपन की परम सिरिनहीं मानते । आपके लिए वा ये नव-मानव के निर्माण के स्वण को साकार करने वाली पूर्व-पौठिकाएँ मात्र इसीलिए मान मापनी संचर्पीड और मियादीत हैनन्सानिपत के महा स्वप्न की पूत्ति के लिए। मोति-पास्त्र के पारचारप पिकान मेकायो पापहना है अप्ठ चित्रकार बह है पो चित्र बना सकता है पर भेष्ट मनुप्य महामहीमो उचित कार्य कर सकता है बतियहां बो उचित कार्य करता है। मेष्ठता कोई पोम्पता मही है बसिया तो सतत क्रियासमता है। पौ बमजीवनराम के अनबरत मिाधीस म्पक्तित्वको प्रवा मी बौमिए है कि भविप्न निर्माण के लिए प्रियापीत वर्तमान के सरीव मदीक है। - - श्री जगजीवन राम के स्फुट विचार 'जब तक भूल-चूक के पुराने पापों का माम निशान मिटाकर नया मम्माय मुह नहीं किया बाता तब तक कोई भी शोकप्रिय सरकार संतोष को सास नहीं है सन्ती । 'मगार वर्ग म उन मगारों को सम्मा सबसे म्यारा है जो किमयों पर काम करते है। मकिन हमारे लिए धर्म की बात है कि वही सबसे अधिक पर-रसित है उन्ही पर काम का मोम मबसे अधिक पाता है और उन्हें उस हर तक पाया मार गोपित किया पाता है जिसे कि आम के समान में मारमी को प्रतिप्या के मिस बिलाफ समझा पाता है। 'मगरकोट और कारखानों में प्रतिष्ठित करम तवा समान में उचित स्मान रिसाने में ही पास्वनिक सराग्य है ।मायो ! हम सब मिलकर उसके मिए कार्य करें और मपन स्वप्नों के मारत का निर्माणको। 'मामागवारियों से मफत हाईकाने वाले पति मर गीपतियो से नही गरते। उन्होंन तो सिर्फ पूंजीपतियों को अपना मुमार करने के लिए ममम दिया है। 'प्रमावरण में गिमी मी राजनीतिक यह को सरकार बममे का हक है महिम पमे यह एक मही कि वह मपने राजनीतिक प्यों की पूर्ति के लिए मा को पुम 'ममारपार मौर साम्पमा मनावा पापीमार भी निमने कि भारतको राबनीतिक मामारी बिनाई है मार बह पर उम मानिक टि भी दिलाएमा। 'मारव मरकार की समीतिमासस्य एमे अपहीन ममागमा निर्माप परना है कि मगरमौर पुगोपति उपाप में मानौशर मम वा मम । सामना पिमा पन पुर हमला माय नही है बधि मनोमानि तय क पपने लिए यह मावन 'उत्पादन मोगा बर न वो मुगास्फीति कापमा गा माता है बोरम पावन मान का #चा उठाया या माना है।

भी जगवीमराम और उमडे विचार 'साम विमानन का सिदान्त ता बायोपिक प्रजातन्त्र की पुरणात है। इसके लिए हम सबको मिलकर काम करना है ताकि हम सहकारी राष्ट्र-मगत बनाने की विषा में अधिक प्रगति कर सके ममोकि यही तो हमारा काम है। 'यपि सायना से काम किया वाय तो सभी बिमारों में सममीवा हो सकता है। मजदूर पम्पबाब के पात्र है क्योकि राजनीति रतों के गुमराह करने का प्रबल करने पर भी उनकी और से इस विसा में परम प्रतिक्रिया हुई है। 'यपि मारमी के पास पैसा है तो वह सपरिष नीष वा स्वााँ होने पर भी पा मारमी समझा पाता है मौर मावर्ष परिण होने पर भी एक मगर कामावर मही किमा जाता। लेकिन मम के बिना पूगी का कोई महत्व नही । 'किसान मोर मगर राष्ट्र की रोर है। यक्तिक सुपार पापीमार का सार है जिसे निमार्मबार स्वीकार नहीं करता। बन्तर्राष्ट्रीय क्षेत्र में परवी पाने माता भारत की तटस्थता नीति का मापार भाभी पो सिमान्त है। उन्हे मपिता घोपग बरोमी तपा अमाव के बिरसा होना पाहिए पर इनम मी पर पम्हे समी कीमत पर वायापी को नामम रखना चाहिए। 'पर्याप्त उत्पादन के बिना राष्ट्रीयकरण कोई मर्म नही । बस त गत्पादन को बहाया नही बाता मबारीबाना प्प मिला सिर्फ मिनिमय का एक डायम माग पम्पत्ति नही। मै मतोमाम्यपारी और न समारामारी। में वो सिर्फ मनुष्य मात्र युगो पर निवास करता है। 'मगुर का मतलबत शारीरिक मम करने वालों से ही नही बल्कि दिमाग हवा कलम का काम करने वालो से भी है। 'मरिकीमत बीर मामको स्थिर करनाtोमर्गको भी स्थिर करना होपा। "राष्ट्रीय समस्याओं को मुकमाने का मात्र पाय यह है कि उस रिसा में पा काप्ति की भावना समा राप्रोम हित की दृष्टि से प्रपल च्यिा पाय । ' सिमानारी प्राप्त करने से हीमोगो का उत्तरदायित्व समाप्त नही होणावा। 'परियौवन-मान को ऊपर मही नगया मया पो हमारे देशको समृरियामही हपाठी । 'भरले राष्ट्रीयकरम से हमारे मसले हामही होंगे पप्ट्रीयकरण के सार-साप हमारे चरित्र में मी परिवर्तन माना बररी तमी हम बम-साधारणको पमाई लिए काम करना सीख सकेंगे विममे कि फिर एक दूसरे को मोपन करम का मदतर ही म मिल सके। - । जगवीरमराम के स्कट विचार ३५ 'ममता विहीन राष्ट्रीपहरण से हमें कोई माम महाँ होपा। 'सिर्फ मापिक मेत्र में ही नहीं बल्कि सामायिक मार पनीतिक क्षेत्रों में मी घोपन समाप्त होना चाहिए। क्योंकि उन सबका पारस्परिक सम्बन्ध है और ये एक दूसरे के साथ सुपे हुए है। 'मारत सरकार ने प्रतिज्ञा की कि वह मम के साथ माय करेगी। सरकार ने इस मोति का ऐमान किया है कि मागार भारत में मेलवाए अपनी मेहनत के फलों तपा उचित गोवन स्तर का उपमोग करें। धम को व्यापारिक वस्तु नही समानना चाहिए और उसे भी नौकरी में मान- पोषित अवस्थामों को प्राप्त करने का हक है। उद्योग में सामीवार होने के कारण भमको सामीरारीसे होने वाठे माम पोप्राप्त करने का हक है लेकिन उसे मपनी जिम्मपारियों को भी पहचानना चाहिए। 'परीबी और मपिता को दूर करने में तबा मेहनतकों को वित्त मुविधाएं, पन-सहन कीसस्प मयस्याएँ एवं कम म कम दिन मर में रोबार पट मरमा मुहम्या करने में ही वास्तविक मागावी है। मम बौर पुगी को मापस में पाये भाइयों की तए पबहार परमा चाहिए। 'राष्ट्रीय मापात में होकत मौर कारखाना घरेलू मोर्ष का एक मप है तपा हरेक मगर मिपाही है जिसकी गागरफता मेहनत तपा मिानारी के पाम पर दीपीकोमा तराबमार के लिहाफ मसी पाने वाली हमारी सराईका मविप्य निर्मर है। 'जमीन दा की हाकिम पर काम कर सकते है। 'सती-बाड़ी में होने वामे पमपी स्थिति का इमरे प्रम से मुकाबला करने के लिए मारत क एनेपाल को मापम + पाम गान की सराव नही । खेती-बाड़ी में काम करने का मजारको हामत रन जानवरों सी या उसमे भी बरतर है गो किसों में महाठ 'एमे मोपोयिक उपकरपा को पाकिमपने कामकरोमिए एन-मन का रषित स्तर मुहम्पा नही पसे जीवित रहन के लिए नामारिकरावा करम का कोई नहीं। कामार मिर्फवमी पोम्प मौर जिम्मबार बन महोईपरपिरहें उचित मपिणच मच्छो मयूरी एनके लिए उपमुक्त परसपा पर्याप्त मामाचिर सेना प्ररान को वाप। ममप ममपवितम्यापार में लगाई मई मबमे बुरी पूगी है।

भी जगबीवन राम और उनके विचार 'हमारे पास अनुशासन उपकरण संगठन वषा रस पीर की कमी है जिसे कि अमरीकी लोग 'किस वए पानना चाहिप करते है । 'एक बार हमारे अधिक उत्पादन कर केने पर साधारण पस्ति को भी मवम अधिक मिलना चाहिए। 'मगार वर्ग पूंजीपतियो का सबसे मन्या पाहक है। इसलिए यह नारा होना चाहिए 'इस वर्ग की कम सक्ति बढ़ामो । मम या प्रकरण की सहायता के बिना मह भाषा नही की जा सकती कि सरकार बाली स्पान पर काम कर सकती है। 'तब तक म दो पुट विराम मरिब मार न पान्ति ही हो सकती है जब तक कि पिरोपी पर किसी एकरे लिए प्रपलनकर। वागारी और पुष मतद मामिरी गेम सही है बस्कि ये एक मुसी राग्य की स्थापना में प्रत्येक पषित का भय और ममाव से बाबापी रिलाने के लिए सावन मारे। परसा किमकानों की समस्या मात्र सी हो ऐगी तब तक मतो सरकार समान में मोरमको मालिक उपोष में पान्ति की मात्रा कर सकता है। 'एनीतिक इपिसारकप में की जाने वाली हातातों की मसफमता निश्चित है और सरकार मपनी सारी पक्ति मोर सापनो को गाकर उनका मुकाबला 'कोई भी सरकार एमी पारंपायोको महने के लिए हमार महीयो कि उसे चुनौती देने का रसको मत को रटने के लिए की हो बारे बह फिर भमके नाम पर कितनी ही प्रगतिप्तौत क्यो महो भम को ऐसे असामाजिक तत्वों की कुयो जनाबों से अपने को पचाना चाहिए, चाहे में तय फिर उसके अपने ही बम्बर के हो या बाहर। 'हम साल पहले कविसो नेवारों को किसी प्रेम की अपनी रसोई म खातिरदारी करमेबगायबेम बाना ग्याराबासानबा। 'हिम धर्म तमा समाव के हित के लिए हिनधर्म के कर्मचारों को चाहिए कि निया को बतायें कि हिनधर्म में सफोर्मता नही है। 'यपि समार का कोई मंग पररक्षित तवा पिणाहमा हो तो मता कोई राष्ट्र पा ममान स्तिमाली बन हम्मा मौरन वह दूसरे मामलों का ही मुकाबला पर माना। करेगी।

30 जान गन सेन्ट पिष 'हरिवन समापन मोर मा दो कमरमही रसा चौर पर लिबर पाएर मिमी उपनन भनने को रिमो नमी माह को नहीं मुनेमा। 'मनाया है जो जनताका मन माया राई और सपा देशमा हरिगिम निशान्त माह ममर्यन परमाईया मम में मामम्मा है या नहीं। पापरी पोहरममार एपला गापा रिन्नुहरिन पार नहीं है। "किमी एक वाम पार्टी कमाणे मगम काम नपा फैलाने के लिए गरोग ज्या भाषे भून मागको महामना पापना गाना एक माराम है। शिप ममरमा बत मौनता माला पम नहीं तो बह पृष्मी मही । मगर मरमान को वर्तमान मबस्वात्रों के मनु मही बना ममता तो उसे जीवित पो ना कोई हक नहीं। 'साइन बोर वितरण योजना से मनुमारहाना चाहिए -मे चाहे राप्तीय परप हो या गो मापीठा हो वह नाम रो। 'अदिहिन समार और कभन्तर्मत बास्मीकि रामो या भय हरिजन मीच समझे गाते हवा या उनका सपना रोप नही बस्कि कंत्री गाति बारा दोष है। यह एक मामाणिकम्पापि है । यह उनके मुंह मे नही एती रिम्होन गरा नाम देने के लिए नन्हें नीच काम करतो मगपूर दिया है। 'हरिगों में मपन मौजूदा पेयो को इसलिए मही अपनाया frसभी सामो को बन्ला ममावेप पस्किइसलिए अपनाया कि समान में गहे मीप पेशा स्वीकार पाने के लिए मगपूर किया। 'मपियों की मुक्ति इसी म है कि ऐम महारानिनि रिता पाय जिसमें कि कोई मेहतर म हो। 'मार्मिक कारणों सामाणिक सपा दूरणा पा रहा है भार र जातिक कोषों में माई, बोबी तथा मोपी पगे तापो मेभामा गुरु कर दिया। मिनु न तिमी में भी मौका पपा अपमाने का साहस नही दिया । 'मस्पृष्यता की समस्या मार्पिक है मलिए उसे उसी विशप दृष्टिकोण से मुभाना चाहिए नि पिणए लोग ही जिन्हें । पातना मॅऔर समानता तपा बादसार भीमानवीय दामवा में रपापाता । महारमा गांधी राम-राग्य समसोबास्त पिपरेसान।

रे श्री पगमीवनराम और उमविचार 'ऐमे वातावरण में बो कि पारस्परिक अविस्वास तमा मरेर से भरावा है भीर बहा कि विरोपी विचारपाराएँ एक दूसरे के खिलाफ नियतापूर्वक मौत पुर चमा पी केवल भारत ही महात्मा मापी के पान्ति मोर प्रेम के सम्मेध गरिए इस दुसी दुनिया में ममन चैन की स्थापना कर सकता है। 'प्रान्तीयता मा नवीनतम मूव बहा मी बपना मरा सिर उठाये उसे तुरन्त हो कृषकमा चाहिए। प्रगावस्त्र को चाहे व्हाइट हाट में पेटष्ट किया गया हो चाहे अमरीका में वागा किया गया हो ता चाहे म्स मे बिसूर किया गया हो लेकिन यह एक पिशमनाt Bा है- उसे वास्तविकता से कोई मतलब नहीं। किन्तु कांग्रेस ने पिस प्रजातन्त्रको अपनाया है और रामपिता महारमा पापी में गिसे हरा भरा किया है वह भारत में पाति मीर सरि मनमो लाने बाया है। हमारी वामापी संसार की शान्ति के लिए पारष्टी होनी मौर हमारा मैतिक तपा भौतिक बल मग मौचित्य तथा न्याय की मोर होया । 'मिरायी रेप इस पमप सार्वजनिक याति की पवरपस्त मचिम मे गुगर हे है। उनमें से कोई मी गम किमी विदेभी पक्ति का बस मुकाम पमा पसन्द मही करेगा। 'जन सुरक्षा अमाप (Publio Safety Ordinan00) कर्मकारों की मागासी को रोकने के लिए नही बस्ति गुमण कर्मकारो को रोकने के लिए बनाया पया1 'ऐसे रिसी भी रोग को पौषित पनेरा हक नही बोकि वपमे कामको को चपिठ मनूरी नही रे पाता । 'ऐमे संघों की स्थापना हो यो कि अपने सामने कोई गौर उम्म न रखकर सिर्फ काम-करों के हित-माधम में सो रहे भो केबम कामकरो उचित रामों के लिए ही और बिन नेता बनता के लिए हो जीवित ए और मैवापिरीयो को सिर्फ अपने माम के लिए ही न पर्ने। इन बसावा म्पर्ष के संब किसी तप मी पापित 'परि विकासवाद और मामी की स्थामाविक मनाई के सिताम्त को म माना बाम मोरा पिकाल तक स्थिर ही है तो फिर मानवता के लिए कोई भाय नहीं रह सकती। 'नतिक मूल्य हो मास्तव में बसची मूरत है जो कि दुनिया में शान्ति स्थापित m जगजीवनराम के राष्ट्र विधार पर साने गौर दुनिया को बचा सरत है। 'यों ही समान में पन दौलत में प्रति मारर कम होता पार्यगा मौर उसके स्थान को ईमानदारी गौर कठिन परिभम ग्रहन करग पूंजीपति मी बम-दौलत का मोहोर ये। 'बाबादी को प्राप्त करने का मौमिक गेम गरीबी को दूर करता था। 'हमारे मोों में मममी मागावी का स्वाद नही लिया है क्योकि भागारी को मारन मोर बस्त्र केप में मममते है जो कि मार काणी तादाद में नही । साम्पमापी संसार के लिए प्रास बन गये है। 'भारत की मापिर समस्या उत्पादन की समस्या पर मापारित मिलिए परि इसका कोई स्थायी हल निकामना है तो उत्पादन वामे बढ़ाना होगा । 'यो काम स्वये पुषले गय है ये जानता है कि जबरदस्ती कुषमे जामे में कितने पष्ट हाते है इसलिए हमें हिमा के मार्ग का अनुसरण नही करना चाहिए । 'मगरों की मनमरया में एकता कायम रहनी चाहिए और उममें नौकर सपा मसूर पोकि मयूरी कभात है से निभानन नहीं होने देने चाहिए। 'यदि म मपर्ने गर्यो को पूरा मरना चाहता है तो उमे मगबूत बाबार पर अपना मोर्चा कायम करना चाहिए । 'सरपार मगर जनता पी दया को सुधारना चाहती है मफिन बातम राब पीने की बात मा उनकी उन्नति में बाबा ने मामी मी प्रकार की अन्य मारों को नहीं होते तब तक मिपी मयूरी देने में कोई मतमय हम मही होमा। 'माइनिग मोपोमिक विकास मे हमारी पुरानी देहाती मार्पिक प्परस्पा बिस्सुम छिप-मिम हो गई है। इस मौरा पुनिया में हम पीछे की मार सर गमना सपा अपनी पुरानी प्रजाती मे गिभा बहप करना नही मूमना चाहिए । मागादी में हमारे राष्ट्रीय गौरव को बनाया है। 'पानी पी ने हमें विकास का मार्य बताया है, भान्ति का मार्ग महाँगो किहिसा में जाकर समाप्त होता है। 'जब तमाम मगर मग को एन-मन के माऐ सर तथा मम्मान स्पान कागो कि रमबिए पपुस्ता विवास नही रिमा रेल ब तक हम सताप साप मही है पसे । राम काटिनबीर मिानराम पाम मौर निरन्तर अधिक से अधिक काम यही बाब भारत माता की मांग है।

Vo भी जगजीवन राम और उमके विधार 'यो कि मानायक भाषिक विकास कार्यक्रम से मानता है या मसंतोप अमि म्यक्त करता है माना किसी और तरीके से उसमे बाबा गमता है-पाहे सरकारी कर्मचारी हो चाहे पूंजीपति भार पाहे मगार-यन साधारण के मतानुसार बह रेसद्रोही । कानून माहिर मामवीय समन्पोको म्पपस्थित करने के लिए बमाया माता है । इसलिए उसका उपयोग इस रेस्य की पूर्ति के लिए होना चाहिए न कि उसके मपने किए। 'मियारी महत्व कारण वाचाल बन्तर्राष्ट्रीय पापारिक समझौतों में सौदा पटाने का एक परिया बन मया इममिए दूसरे देशों या इन सौपाबागियों पर निर्भर रहने में सपा साप ही अधिक मूल्यने से हम अपनी भाषिक माबारीकी सेन-देन से कोई माम नही रठा सकेंगे। 'विस मान्तरिक पक्ति ने हरिजनो को सदियों तक सामाणिक बस्याबारीको सहन करने में समर्ष किया पही बान्तरिक पपिन रोटी और प्यार के संघर्ष में उनकी सहायता परेपी। 'मकर्मकार संपो के स्वापूर्व नेतृत्व में सिताफई योकि यह पूजीवार के विकाफ मपने स्वार्थ या पार्टी के गेम्पो की प्रतिकिए कर्मघर तम पर मिपावन मम गौचारियो के बिना भी काम कमा सकता है किन्तु पूचीमादी भम के बिना काम करने में असमर्थ है। 'अपनी समस्यामोमो मुमनाने के लिए हरताल मगारों का मन्तिम एशियार है। 'हरिजन समस्या सब सामायिक समस्या नही ही बरपा पूर्णम्म से बाधिक ममस्या बन पपी क्योकि हमारी बातर माठियां गरीब है। इसलिए हमारा सबसे अधिक प्यान मरीबी को दूर करने की मोर है। 'धर्म परिवर्तन की बात करना सर्वचा काररपन को विधानी है.योपिकापर यहाँ मौजामगा वहीतकारा गायपा इसलिए हम कापर नहीं बनना चाहते। 'बाग विचारों के साथ विचारों को ही सामा चाहिए। मैतिक इषियार ऐसे पति की रक्षा मार राति करता है जिसकी रचना एमर पत्तियो का पुनर्निर्माण मावस्यक है । गमरे के मस्किारों का मार करना सिष्ठाता।

जगजीवन राम के रफ़्ट विचार 'विमिम रेमों में इस सियास्त के बारे में फैममा हो चुका है कि मन्तिम मता बनता ही हाथ में है और इस ममाने में किमी मी ऐसी चीन को निस कि जनता मुव पसम्बनही करतो कोई भी मपर से उन पर घबरबस्ता नहीं हार सकता। 'मारत में सबसे बपिक क्षोपित मानम समुराय मगार वर्ग है । गर्ने सिर्फ पूंगापविही पोपित नही कर ऐ बस्किए एक ऐसे कर्मकार संग भी है जो कि अपने पेनीपत ममेपन के कारण उन तोपों का सोपा कर थे। बाजप-रोमिए सोपा को हीरोप देना चाहिए । पोरवागारियों प्रप्ट्यापारियों तवा पोपण करने वालों का मो किचून पूमा करो। पहिफार करने बगार उनकी पूजा करते। मौर यहाँ तक किये उनके पास पार्मिक कार्यों के लिए पैसा मामन मी बाते है। 'सवर्ष हिमुमो को हरिवों का ग्यायमनत तवा रचित मान गएँ देना पाहिए। पारस्परिक पिावास स्थापित करने तथा बानो पोको पारे-मीरे एक करने के लिए सिर्फ एक ही रास्ता। 'मार्ममार का मापीनाव समाबत एक जैसे ही है। रोनी के बीच सिर्फ सामनो का मेर है । मार्म पहा साम्पबाव को बाहर से सामू करने में विश्वास यहाँ माहारमा पापी मान्तरिक विकास गरिए उमी रेग्य की पूर्विपरना चाहते थे। 'मारत सरकार अपने राम्प क्षेत्र में बाहर की किसी सरपी भी परमपित को या भारत को निरसी पक्ति के साथ एक सूत्र में बांधने के लिए किए गए किमी प्रगल को सहन नहीं करेगी। 'हम मिर्को गौर कारखानों को पमाने के लिए सिर्फ मामिका को ही नही परसमा पाइने है कि उन पर मजदूरों का नियमन हो। 'महारमा गांधी को सिमाएं मंचर्प बिलाफ सहकारिता हिमा के विनाफ बहिना पूना के बिमाफ प्रेम प्रथा ऐसे मंकीर्ष स्थान में नहीं पानी पा मी प्रपा म हो म मा पता विमान के निसाफ मातृत्व के स्थापन रे मिजास्त पर माषा ति दी। महारमा पापी पेसा महानतम मान्तिकारी कमी भी पैदा नहीं पा राम पग्य बारे में हम यो पुष्पौरागिक नाभा में पा माते है उसमे नही अपित महरा मई रमा रामपम्प की स्पना में है। 'हमारे नौगवानों को मस्पष्ट रुपा पाल्पनीय मार्गों की छाया पीछे मही भामना चाहिए पति अपन पामगहोम + मुषारने में भपने मोनमा देना चाहिए।

श्री अगरीवमराम और उनके विचार 'मार्षिक दवा [सामायिक म्यवस्था में इस प्रकार के शान्तिकारी परिवर्तन होने चाहिए कि जिसमे मुट्ठी भर फोर मौवनगा सके पर कि कार्यों केय भूमे - 'भूमि पटटा प्रगती सत्पारकों के लिए जिनमें कि सबसे ज्यादा संम्मा चेत मगरों की? किमी तरह का प्रकोमम नहीं क्योकि उने मामम है कि उत्पादन बनाने मे उनके नर का कोई माभ नहीं उम्ह तो मिर्फ निश्चित मीही मिमेनी। मोहोन उत्पादन कर सकते है उनके पास काफी बमीन नही मौर जिनके पास काफी जमीन है न पाण सरिया मा प्रमृत्ति कुछ मी नही। पम के पौरख को मरम्पमेव स्वीकार करना चाहिए । पो होग अपनी मेहनत के मोर पर रहते है ये समान के बो उपपोपी सरम्य है उन्हें उनका उपयोगी भार माय मिलना चाहिए । बरि भिम राष्ट्रको विकास बचाना है तो उनके हितों की बपाय रक्षा होनी चाहिए । 'एक उपकुम का यफमर जो कि मगदूरो को निकट मानब मममता है उनकी पमी भी ठीक सेगा नही कर सकता। 'मैं इस बात की परवाह नही करता कि छात्र किस मार का अनुसरण करते यी है किन्तु पया कोई ऐसा बार है जो कि बनुशासन हीनता की सास करता हो। को भी 'बार' मामसमिए मानादी की म्पबस्पा नही करता। पप्पूर्णक बाबीम करना मार्सबार काही तरीका है। महात्मा पानी की योजना में इसके लिए कोई स्थान नही। 'परपमार पप्टाचार में रत होगो को प्रोत्साहन रे पाहो उस समय केवम सरकार से ही मोरवागारी सप्टाचार तपाइमरी एपार्यो को हटाने की मामा करना बाव बडो भामा करना है। 'मैफिमी भीम्पक्तिको २४ प तक अपने को ममी की स्थिति में रसमे केभिए पुनौती देता। मुझे सन्देह नही किरम समषि के बाद ऐसा म्पक्ति हि-ममार को होना ही अधिक पसन्द करेमा । 'भारत पूजीपतियों ने मफा कमाने के सिमा मौरपुष नही मीचा है। 'मगारों को दावा करने का हक मि इस अधिकारको मनी समम मा बिना मोचे विचारे उपयोग में माना उचित नही। जो नागारी मार हमारे पास है उमे हम ममती बाबारी महाँसम्से क्योंकि यह मेरम राजनीतिक मागादी है। बनता के लिए यह कोई मापने नही रखती।

जगमीवनराम के स्फुट विचार जब तक कि महम-महन के स्तर को मार नही उठाया गावा रसकी गरीबी उचित भोगत वस्त्र तवा मकान की समम्पार्मो को हल नहीं किया जाता बबवर गोपन अम्पाप तवा भात्याचार, चाहे किमी मी स्सस्प में हो भूतकाल की वस्तुएं मही बन गाते और बब तक कि उमे मर वय की रवि के लिए सभी मावस्यक सबमर नही मिस गाते तब तक पा मागावी उमके लिए किमी काम की नहीं। मग तर यो विधान बनाया गया है या बनाये गाने को है रममें एक माप दिराम तक को यम के खिलाफ मिर महीं किया जा सस्ता । 'हमारा ऐपय ऐम ममार का निर्माण करता हाना चाहिए यहाँ कि मगर मौर मिर्फ मगर ही सारे उचोपो के प्रबन्धक हो और यहाँ प्रम को पूगी के ममान स्तर पर स्थापित किया जा सके। 'भारत मरकार का प्रम-विधाम एक दिन बायोगिक नमवत में विकमित हो जाएगा। 'हमारी मारी कार्यवाहियों में हमारी यमुमाई करन वाला मिसान्त प्रम बार प्रोत्साहन है म फिहिमा पूपा या भय । 'भारतीय मसति मादमी को मब बारो मे पर रखती है और मानवीय पशिल को मपूर्वप में विकसित करने में विश्वास करती है। जब हक काप्रेमी कोग रचौम वाडेट में पाम करने वाले दोनो वएक मगर समुराय के साप अपने सम्बन्यों को फिर से स्थापित उपा ममत नहीं कर मेरी तब तक ये कार ममी का मुकाबला करन में मसफल ऐसे मार माल बर सरफर में मरानता को पासियों को ही केवल पूट देने में मफल हमि । 'मैं मैतिक पुन पस्तीकरप में ही एमे शिव के निर्माण का माग पता हूँ सिम कि विचारपापमापीच काय? बिहम मप्ट हो गई हो। सपने काम में सोख मभी मुग्गर पुनों को लाने के लिए सभी वरा मे स्पी बमो। जातीयता काफिलाटूवा जापाई और बह पिरले ही गा रहा है। यह मान स्पए हो जानी पाहिए कि मगर प्रगी को प्रपति का मतमय हाका कोई भी बादमीनामाम नही पता ममान में स्थान नहीं पाएमा । सिवनी जम्दी हम रया-कसी को बतम परये रमना ही हमारे लिए मा है पयोकि यह रणा-यप हमें हमारी कमगोरियों की पार गिमात है।

भी जगजीवन राम और उनके विचार 'जब तक कि पूर्ण समानता के भाव प्रबहनही हो पाते तब तक देश की भागारी व मुरसा पहरे में देगी। 'कोई भी सरकार पराप हाइमेस देने में प्राप्त होने मामे कमेकित राजलको इट्ठा करने में दिलचस्पी नहीं रखेगी क्योकि यह छोपों के परिष को नए करके एका किया जाता है। 'पानबम्बी का सबसे बड़ा साम यह है कि बच्चे मना साना मामे अच्छे कपड़े पहनेंगे फूक पायेगे तमा माता पिता की मोर से उनकी उचित परवाह वमा देख-माम होगी । उस भाबी पारी के बागार तथा बवाष विकास के लिए ये प्राथमिक मबस्वाए जिसे कि विभिम परिवार तथा टूटी हदियो के मगहो परप्टों के भूत बप भी पाप्त नही हागे। 'मणार-वर्म की समस्यायो म कान्तिकाप परिस्थिति के लिए केवल विधान की मामश्यकता नहीं बलि सप्ट रूप से पुए मोर करणेपी भी मावश्यकता है और पापा कि होर्मो मनोविज्ञान में परिवर्तम माया बाये। । 'जोकोर अपने गश्य की पूर्ति के लिए करमौर अपमान के जीवन से मृत्यू को मभिक पसन्द करतो जहर सफा हो । यो कोम मनो गण्य के लिए गये है ना सामन दुनिया में कोई मी पति बड़ी नही ए सस्ती । 'अयस्क मताधिकार को ठीक दौर मे वमत में काकर ही पर-पमितो को मुक्ति प्राप्त हो सकती है में नहीं चाहता कि हरिजन रक्षा-कयों का पारा मेकर मपनी प्रगति के लिए पोजना बनाएं। हरिजनों को मम्माप के मामने पुराने न टिकने के लिए एक पाना चाहिए । ऐमा अपमाने के लिए उन्हे भी कीमत चुकाना पड़े इसका परवाइमही। इसका मतलब हमही किये उनकोमाँ के खिलाफ यो कि उन पर बरपानार करते है हिंसा का पापप में। उनमें बरमाने की भावना नही मानी चाहिए, किन्तु सापही सन्मान के सामन सिर भी न मुकाएं। 'भगीर की ममयूवी उमके सबमे कममोर मोड़ पर ही निर्भर पती परि जनतामाको मन कमजोर एना है तो समान बौर राष्ट्र सम्पूर्ण रुप में मयस्व नही हो सकते। चपि मारत एकरीब पेश है और उसका पानी ताकत मी माम मागको है फिर भी उसने संसार के मान को बो अपनी मोर बीचा उसका कारण है कि मही एक ऐमा रेप रिमने कि अहिमा को अपनाया है बौर सप्तार को बताया कि मन् गाय की पूवि मर्ग मायनों से ही हो सकती है। .

जगजीवन राम केसट पिचार 'पैसे वो यह समौ कोगों का कर्तपई किन चनकोसों का विरोप कर्तव्य है यो कि बम्ही स्पिति में है कि उस विचारधारा से सम्बन्ध स्पापित करने के लिए प्ररपेक प्रयत्न कर गो कि पूर्व मा पश्चिम यही मे भी एन कर बाई हो । 'अपनी नई पाई हुईबाबारी को सुरसित तथा पूर करने एवं मातृभूमि को नौरव के सचतम शिखर पर लाने के लिए यह मावस्यक मत है कि मनिवार्य रूप से परिष का निर्माम किमा बाम, मारमानुपासन बारम-मंयम ठया विस्तृत दृष्टिकोन पो मामय पिया जाये। 'राष्ट्रीय-संस्थाएं माप जबरदस्त मापने प्रपस निसान म हमारे विशाम २ सप्ट सीमापि। रचनात्मक कार्यों में गांधी जी का चारिक महत्व देखते हुए, मार मी बपनी और मसर्राष्ट्रीय परिस्थितियों का विचार करते हुए कार्यक्रम बनाए मातहै। "पिछड़ी जातियों का एक सबस्म गितमी पति के साग मपनी जातियों की समति करने के लिए माणिक वीर सामायिक म्पबस्था में परिवर्तन करना चाहता है पहमति हमारी योजना में नही है। इस योगमा में विपमता दूर नहीं हो सकेगी। पाबात सही है कि निर्धनता तो रेस बार पर्यों में भी है । यह निर्यनवा पर होने पर पिणी पातियों की दसा मुघरेपी मेकिन गो समुराय सामाजिक मारिक मस्तितिक वेषों में पिण्णा हमा है उस पर अब तक बिसेप प्यान नही दिया जायगा दूसरे के मुकाबले में पीछे ए हो मायया । पंचसीय योजना में मितने पहन से प्यान रेमा पाहिए, महाँ दिया गया है। 'मापी बी समान गौर सत्ता का गव दूर तक बिकनीकरण करना चाहते । मार्क्स ऐमा मानते थे कि पोषक बप की प्रचलित म्यवस्था में मुषार मम्मप नहीं है। इसलिए सोपित वर्ग का मपठन करके समान के ममी पचों को उमौ वर्ग के हाथ मोडेमा पाहिए । 'ममी पो की राति एकही अनुपात में हो सामुनी हो पाने पाप मा मार की मसमानता हमही यायमी। 'पापी और मार्म केय में मम्तर तो नहीं मफिन बोना मार्ग में मौलिक अंतर है। रोगों का हार्दिक प्रश्न एक ही मा था। पापी यो पर्व मंपर्प को बचाना चाहते पे पोषक यो हाय को परमना चाहते थे और योपितों में आम मम्मान तपा मारम-निर्भरता भरा नही माननिक स्पिति को बदलना चाहते थे। पाणीप मसनि गरने नहीं पल पहले मे मित-मिन यो मोर ।

४६ मी बगीवनराम और उनके विचार सम्प्रचार्यों की संसविरों का एक सुनर सामंजस्य रहा है। अरबस्त ग्रार मापना बिदेसी ससपियो को अपनाने में प्राप्तीय संसति बरखती रही है। यदि न बसग महामारी पस्कृतियों को माप्तीय मसति से पृषक करने का प्रयत्न किया बाय वो भारतीय साविको मात्मा का हनन करना होगा । क्योंकि भारतीय संसतिका मूळापार इसकी सारवत बाधुनिकवा है। यामी इस सिजगत को मोमत किया गया भाखीय संस्कृति बापी समझी गई मौर समाज में मिमता पाईगई। मै यह मो मानता है कि रिमी रेस की संस्कृति पर्म के सर ही पत-प्रतिमत नही निर्भर करती। एक हीरेप में यने वाले की सहति एक-सी हो मायापक नही है। भाषा कारन सराति अमग हो वाय यह मायापक नही। राष्ट्र भाषा हिन्दी तो होनी ही पाहिए । परि एक मात्र हिन्दी का सामाग्य होणायतो बच्चा है किन्तु यह पम्भव नही परिहो पोतोकांसवानिगागात मानी। मिरे मन और एप पर गाबी बी मामयीय पी रामेन बाबू पनाहरसास मेहरका काफी प्रभाव पगमेरी माता जी के मारम-सस्कारमौर गको उपात्त भावनामों ने मुझे अपने बारे में सोचने सममने का अवसर दिया है। 'मुझे भगवान में पूर्ण विश्वास है । उनकी पालुवा का मापस पाने म अनिवनीम सुबो की प्राप्ति । बम कोई परेशानी बाई नन्हीं की छपा से पर हुई। 'उन मानेकोगो को यो सपियों न बह भएतकोजावे हे बनके साथ अपूतपन का माहार किया जाता पा हमारे परिधान में कारों की गारटी है । उनको कुछ सुविधाएं भी की है। संविमाम पो भूमिका में ही स्पति वर्ग बौर मगसर की समानता की पारठी पी पर है । राष्ट्र सामुगयिक पौवन के विभिन्न क्षेत्रों में पिमेहरो पह विचार करके उनको कुछ मूलभूत पिकारो की मी गारंटी गई है। वस्पृश्यता का यन्त कर दिया पया और बम पति नरम मिम मा परमस्यान कारण भेदभाव करने का निषेध कर दिया गया।। 'कानून बनाने और नमको पार करने में तथा उनके अनुसार प्पाहार कराने में सदा मन्तरमा परखा है। मबर पर कानून का सम्बन्ध ऐसे लोगों के साथ हो गितकी सम्मा नपच म हो सका जो अपने अधिकारों के प्रति समय हो तब उस पर नमक करने में देर लगाना वापरलार होता है। परिगणित मातियों को संस्मा ऐमी नही हैगिसका कोई महत्व म हो। उनकी सन्ताना बाप म्ो है। वे मिन बमोम्पतामों होनवानों और पूमा क पिकार रहे वा पिन मारमीचे होए है उनसे मुक्त होने के लिए में पटपटा पे । - जगजीवनराम के स्फुट विषार 'चितिहर मगर की समस्या का वास्तविक समाधान तो भूमि-परस्पा में मान्तिकारी परिवर्तन करने पर ही होगा ।इम विषय में समी एकमत है कि भूमि परस्पा इस एप की होनी चाहिए जिसमे खेत जोतने पासे काश्तकार मौर राग्य के मियान कोई मौ रलाहम ऐ मार पमौन उन्ही नोमा ये साप बनोबस्त पी माय पो 'ममम में बात गोतने बासे'। कठिनाई तो तब पदा होती है जब यह तय करना पाता है कि बम में नवजोतने मामा' कौन है ? प्रचसिन बारमा के भनुमार मोई भी मस्ति मसही पातने मामा जान मिया या मकता है गो भपमे ररेट या मैनेगर का अपने से दिये गये वीगार्गे मे पात-प्रतिसत मागे से बनी करा सकता है। विवपूर्ण भूमिबतरण के प्रस्ताव रे माय म यह परिमापा ही वो मिरोप का कारण है। गरि जमीन गोतने वाला' का बही मर्म माना बाय (मो रि बस्नुन उमका मप) तोपमीन का पुन वितरम या सरन ही गाम । विपयायो वपनो मौर बीमारो को छोड़कर और कोई भी पति गो बार्मिक या सामागिर या मार्मिक कारणो मे हम बोतना बौर सेती से सम्बन्धित अन्य दिमी कार्य को स्वय मौर अपन परिवार के ममी नीरोग मार ससम म्पनियों के सापकम से कम मग मी माायता परने में मपनी हेली सममता हो म मममी मेत गोतने वामा म मानना चाहिए। गा मगर समापे मी बाऐं वहाँ विम्स में या नमार मगारी देकर नहीं बम्मि मगर पदावरही पर। 'भूमि का पुनर्वितरण केबल सेतिहर मगदूरा की ममम्मा मुमारने मार बमक किसान की मामी हाम्त ठीक करने के लिए ही पारी मही है बल्कि राष्ट्रीय हित में भी यह मावश्यक है। मनार की पहावार बनाने की कोई बायोजना पति फडन रेमी पब तक मिसान लत पर बुर मेहनत करेगा। मारे मारी एम्बेती करानी मौर पुरसती करने के बीच भारी भन्नर है। मोर पैदावार पहने की मपेभा दूसरे में पह मे बीस प्रतिपत तक पिक होती है। 'किमान के तुरनदी करल मे पैदावार हममा मपिक होती है। यह एक राष्ट्रीय ममस्पाई मौरमको हम मी उमी म्प में करना होगा । केबस जमीदार मन्त परमे तमा राम्प और पिमान पौष कामाका हमे मरमपि-ममस्या हलम हापी और नापि-समान्ति दूर होगी। भूमि-पपस्पा फिर मे मये रूप में बनानी होगी मोर हमरे लिए दर मकस्य और माइम मे पाम भरना होपा पारे निति सार्प बालों पा बोकि भपिषतरबरिमानह विगप भी क्यों न मामा पा! म ममस्या का गमावान इसी मंत्र में 1--जमीन जोतन बातों पी। गोतन पाना फोन 'मोहम पमाता है।

मी जगजीवम राम भोर उनके विचार बार्षिक मौति चाहे वह बमीन के सम्बन्ध में हो या रोग के बारे में हो ऐमी होनी चाहिए जो वर्तमान सामापिक-आर्षिकरचे को मरत देनौर सरिधान के बदर मौजूप निरंपारमा सिमान्वारा बनाये सम्य को पूरा करने में सहायक हो। या नीति केवल यही हो मन्त्री है गो घोपप और गिरोहन का मात कर असमानता एवं विषमता को दूर कर है, और यो उत्पारक भम और समाज सेवा में मोहए सब कोपो में यह मानना उत्पम करे कि राष्ट्र की सेवा लिए काम करये किसी भ्यक्ति- विपके एि नही पो समाज में गमको उचित पर्वा बार प्रतिष्ठा रे बिससे में अपने मम चरित्र मोर पबहार बम पर मषिका बार यो उनको इस बात का विश्वास दिलाया कि बपने प्रम में फस में से उचित मान ममस्य पायेंगे। वह उमी ममय समय है पातों कारखानों और समार-सेवा में प्रम करने बामो के प्रति एमार का विचार मार दृष्टिकोष एवं ममोवृत्ति परम वाम । वर्तमान सामाणिक-आर्षिक गरेका गरमने के लिए ठोस कार्रवाई करना और बड़ा काम उठामा मिहायत पहरी है। 'परिगनित जातिमोरेमोगो के समापारा निर्धारित तपास परम्परामत पे। बपना माल पार करने के माधुनिक व बौर रंगबानने के कारण प्रतिशिता में नहीं टिक सन्ते । उनका पेसा सनसे अधिक मामे बोहए लोगों मेशीन लिया है और रहे रेकार बना दिया है। मेकिन इन पर लाये हुए सामायिक योम को जिम्मेरारी को भी उनसे पूरा करवाया ही बावा है। रे पनी इच्छा के विषय में काम करने को माचार किये जाते है। यदि में इनको गोड रे तो उनको मनेक वरण से रण्या धमकाया जाता है। यहाँ तक कि कुछ मामलों में भी उन पुषित गौर हेस कापो को नारा छोड़ देन के विषय फैसले रिये है पचपि यह संविधान द्वारा रिपे गये नागरिकता के अधिकारों के प्रतिकूल है। सतई और चौकस पने के बावगूग वैयक्तिक स्वत बता पर किये गये ऐसे हमको को ये बेचारे नाही रोक सकते क्योकि इनके पाम पन कहाँ जिससे ये मुप्रीम कोर्ट में बाकर उसके बिम्म । 'शिक्षा की दृष्टि सै परिमाणित पाविया या पिमीद है। मरिचका पन सहन बार पौषन-मान उंचाकरलामो यापारी है कि इस दिसा में उनको प्रारम्पक सुभिधाय पी जाय । गरीयो भार सामायिक परिस्थितियों के कारण उनके लिए अपने बम्पों को सिमाना सम्भव नहीं। 'गरीब हरिवन छात्र अधिकारियों मेपास की धूप और पैरवी। कर सकते। हरिजन मौ रागे दाम इसके लिए मह पररी है कि सनी सरकारों (मार और राम्प) बमों के बदर परिभाषित बाठिमों के माँ को मी गगगीवन राम के रफ्ट विचार अरारकी भिसा देने के लिए उदारतापून म्पबस्था होनी चाहिए। विमो भी बढ़ाने में उनके राशि को नहीं रोकना चाहिए । यहाँ बहरी हा उनके लिए सम्म कामिनों में स्थान सुरक्षित रखने चाहिए । होस्टम उनके लिए बहाने चाहिए । निपत सिमा को उत्साहित करना चाहिए जिससे ििपत हो जाने पर उनमें बरोजगारी मोर पकारी 'मरि हरिजनों पिस्सियों देहातों के मोर गरीब मोमो के मकाना के स्थानी समस्या कालकर पिया गाय तो बेगारी समे पीबारदाने भी बहुत कम हो गाय । वाम हमारा मान सहरों की मम्दी बस्तियो को मोर मया है मेकिन गत पम मोब मह पानने है कि हमारे मषिकाम गांगों में यहाँ हरिवनों की बस्ती होती है वह हिम्मा पहा की मन्दी बस्तियों से कहीं अधिक गमा गुगरा होता है। 'हरिजनों क बार जन्म भूमिहीन बर्मो क पर रेहातो में जिम ममीन पर बने हुए है उन बमीनों पर उनका पसिसकारी हम हो गाना चाहिए। कानून के द्वारा इसकी व्यवस्था पीप होनी चाहिए । मद्रास सरकार ने एक योजना स्मीत की है मिसाएपमित बर्म को मकान बनाने के लिए जमीन मुफ्त दी गापगी। प्रत्येक परिवार को पानी वामी ममीन में ३ मैट्स (करीब १५. वर्ष गय) और मूकी जमीन में ५ मैग्स (करीब २५० वर्ग मर) दिया पाता है। मार्च १९५ भन्न तहगमम परिवारों को घर बनाने में लिए जगह दी । मैमूर मरकार में भी हमी प्रकार की कार्रवाई की है। मम्म प्रदेषों की सरकारो को मो एमा प्रथम जस्य करमा चाहिए। 'परिवपित बातियों मन्दर एक ऐसा भी हो मानना है कि उनकी वर्तमान पोषनीय हान्य मा मूल कारम उनका हिन्दू पम में हाना ही है। उनका म्यास है कि ज्यों ही दिन पर्म एवं ममाग के पेरे मे निकल गायेमे त्योंही में मकान रहने एवं उनकी मामारिक और मार्पिक अयोग्पताएँ र हो गापगी । इस रिचार का मेने कभी समर्थन नहीं किया गौर परिवणित प्राप्तियों पारा मामूहिण वर्म-परिवर्मन के विचार का सवा प्रतिरोध किया है । मारतोय पलित बातीय मग को नोति मी यही पाई। पति बिगी बादमी की गाविस्काम हो जाता है कि मा मिस पर्म को स्वीकार पर साकारह उपरे बरम धर्म मे पेष्ट है और यह परिमासिकान मर्म परिवर्तन करताता ऐमे धर्म परिवर्तन के विरोध करने पा कोईरण नहीं। सामूहिक पर्म परिवर्तन के मामले में पह मिशन नाग नही हाता मोर इस प्रकार पाहिक पर्म परिवर्तन की मावना का मामोर मचा विरोष करना चाहिए। 'हाफिक जामसिए अषमा पदिमाइयों से पुटकारा पाने लिए पर्म-परि ५० भी जगणीवमराम और उनक विचार । गर्दन को कमगोरी मोर कायरता का विल माना पाता है । मे बार भी ऐमा मामताई कि हिनधर्म के मन माप उपर बिवने कपित्त वापरम पड़ा रिप गये है उनको हटाकर हिन्दू धर्म का मुधार करके उसको अपने गौरवपूर्ण स्थान पर स्थापित मिन्या पा सकता है बम्पवस्था और शति-पाति का गसी से बनी अस्त होना चाहिए । ऐमी बातों में राम्प की सहायता कानून की मदद सरा वाव पर होती है। मै उन पोमो मे सहमत नही हो या कहते है कि सामाजिक कुमार के क्षेत्र में सरकार को हस्तक्षेप न करना चाहिए। समान के अन्दर नीमन मैतिक मानगो या रमने गौर समान सुधार कार्यो म सबा राम्प ने हस्तक्षेप किया है मार रावण बरता है। किसी भी स्मृति को देन हौथिए, उसमें आपको इसके बाद प्रमाण मित मायेगे। जातियाँ और बो को मिटाने में सरकार को ठोस कदम म्ठाना चाहिए । पाति प्रथा को मिटाने के लिए हमें तो कमर कस कर निहाय बोल ही देना है। माग अपने माम मे माई सब रकावटो मौर बापायों को दूर करने में परिमभित बाधियो भने ही समर्थन हो किन्तु उनकी यह बसहाय अवस्था बात देर तक या हमेघा म ऐगी । हरेक चीर की एक सीमा हा है। अब किसी बादमी के पोरग पर गाव मार डाला जाता है तो यह बपौर हो जाता है और प्राय निराम हो पाता है। निराभा में मावमी कुछ भी कर सकता है। 'मरवा मा न करवा' इसे मही भूतना चाहिए । 'कमालूम किम पर्मशास्त्र या भाचार पास्त्र के अनुमोरल से इन वर्गों के साम यह समानुपिक बार किया पाता है। सरियो से उनकी उपेक्षा की जा रही है। मैं निरा पावादी नहीं है। मात्र मी में यह निवास कलाई किस विपास प्रत्येक भाप इनकायोरे साप म्यायपूर्न बरखाप किया थायमा मौर समान इस स्थिति को मुबारने का हर तरह से प्रयत्न परेगा। 'सरकार के सामने बाई मनेक कठिनाइयों बार समस्यामों का सफावा पूर्वर धामना किया है। नौम भारत के निर्माप का ही भाभार है कि मर-नारी केबीच कोई मर न है बहीन समाज की स्थापना हो मिस जाति धर्म और विपास के मेकामे का विचार किये बिना प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पति के लिए समान अवसर मिते सभी मारेपन-सहन सुख-सुविधा एष बीवन-मान में तरक्की जगजीवनराम के स्ट विचार हा। हम माम तक पहुँचने के प्रयल में परिगणित मावि मौर मम्प सापित बर्मों प्रतिनिधियों का वियप उत्तरदायित्व है। मिरा र विश्वास है कि यह ममय दूर नही बर रसित भौर मोपित गातियों मोम मी सभी क्षेत्रों में दूसरों के बराबर बम मायमे दवा ये बी वापिक मौर मनिक समृद्धिको बढ़ाने में सपना धरान रन में हिमी से पीट न हेग।

Shree Jagjivan Ram Our Unke Vichar

Author
Dr,rajendr Prsad
Title
Shree Jagjivan Ram Our Unke Vichar
File name
Shree Jagjivan Ram Our Unke Vichar
Text
OCR done
Citation
1955
Published
2010/12
Publisher
New Delhi,jagjivan Abhinandangranthsamiti
Language
Sanskrit
Pages
54
Library
Bhartiya Vidya Mandir Shoudh Pratisthan,bikaner
Classification
History
DLI number
514627
Barcode
4990010022326.00
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