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THE
HARIDAS SANSKRIT SERIES
127
CE
THE
SRI-KOSA
[A HINDI SANSKRIT DICTIONARY)
Edited of compiled by
PANDIT SRĪ KEDĀRNATH SARMA
श्रीकोषः*
[हिन्दी-संस्कृत कोष]
सम्पादक
पण्डित श्रीकेदारनाथ शर्मा ।
PUBLISHED BY
JAYA KRISHNA DAS HARI DAS GUPTA
The Chowkhamba Sanskrit Series Office,
Benares City.
तृतीयसंस्करण]
मूल्य २)
[सं० २००३

जयकृष्णदास-हरिदास गुप्त:-
चौखम्बा संस्कृत सीरिज़ आफिस,
बनारस सिटी।
१९४७
प्रथम संस्करण १९४०
द्वितीय संस्करण ९४४
तृतीय संस्करण १९४७
Registered According to Act XXV of 1867.
PUBLISHED BY
JAYA KRISHNA DAS HARIDAS GUPTA
The Chowknamba Sanskrit Series Office,
BENARES
All Rights R-served by the Publishers,

- प्राक्कथन - प्रिय सुरभारती भाषानुरागियो ! आज आप लोगोंके समक्ष सानन्द हम इस श्रीकोषको उपस्थित कर रहे हैं। यद्यपि वर्तमान काल में संस्कृत भाषा का-हमलोगों की विमुखताके कारण-हास होता जा रहा है जिसे देखकर हमारा मुख और भी अधिक नत हो जाता है कि जो भाषा सकल भाषाकी जननी है वही आज ऐसी दुर्दशाग्रस्त दीख रही है । ऐसे विकराल कालके कव. लरूप हमारी पवित्र भारती हो रही है। आंग्ल भाषाके बहावके साथ बहने वाले विद्वान् क्या छात्रतक इस पुण्य-मयी-देवीको Dead Language (मृतभाषा) कहकर इसका तिस्कार कर रहे हैं। जो छात्र इस भाषा के अनुरागी हैं उनकी दीर्घ कालसे यह शिकायत थी कि दुःख है कि हिन्दीसे संस्कृतका ऐसा कोई भी कप नहीं है जैसा कि अन्य भाषाओं का है ऐसी विकट परिस्थितिका ध्यान देकर हम एक हिन्दीसे संस्कृत, कोष बनाने के विचारमे थे हो कि इसी बीचमें "विद्या विलास प्रेस के अध्यक्षने हमें एक इस ढङ्गका कोष बनाने के लिए प्रेरित किया, अस्तु हमने यह "श्रीकोष" आपके सम्मुख प्रस्तुत करने. की चेष्टा की । इसमे प्रायः सभी चलते-फिरते शब्दोंका समावेश प्राचीन शब्दोंसे ही किया गया है जहांतककाव्य, काष आदि से प्राचीन शब्द मिले हैं, दिये गये हैं - यत्र तत्र प्राचीन शब्दोंके अभाव में नवीन शब्दों का भी समावेश किया गया है । इस "श्रीकोष में शब्दसमूह वर्ग- रूपमें दिये गये हैं, यथा देवताओंके नाम यदि जानना हो तो स्वर्ग वर्ग में देखना चाहिये । इसी रीति से अन्य वर्गोंसे तत्तत् व्यक्ति तथा वस्तुओं का नाम जानना चाहिये । इस "श्रीकोष" में संज्ञाप्रकरणमें हरsho [२] गीतिका छन्द भी बना दिये हैं जिससे छात्रोंको शब्द शीघ्र याद हा जाय। छन्दमें शब्द संस्कृत के हैं और वे शब्द कहीं ( पदमें ) विभक्तिमय तथा कहीं विभक्तिरहित हैं । छन्दको पढ़नेसे उसमें आये हुए शब्दों को छात्र गण गद्यांशमें देखेंगे तो उस देखनेके कालमें वे शब्द भी याद हो जायगे जिनका समावेश छन्दमें नहीं हुआ है। इसमें संख्यावर्गको छोड़कर सभी वर्गमें शब्द अमरकोष के समान हैं। शीघ्रतावश इस कोषमें त्रुटियां आगयी हैं उनके लिए आपसे करबद्ध प्रार्थना है कि उन त्रुटियोंको सुधार लें। अन्तमें, मैं भारतके श्रेष्ठ विद्वानू सकलशास्त्र-पारङ्गत त्रिवृद्ध पूज्यपाद पण्डित श्री दामोदरलाल गोस्वामीजी महाराजके श्रीचरणों में भक्ति- पूर्वक श्रद्धाञ्जलि अर्पण करता हूँ जिन्होंने इस पुस्तकके कई स्थलोंमें सत्परामर्श देकर लेखकको गौरवान्वित किया है। तत्पश्चात् भट्टिकाव्य आदि उच्च कोटिके ग्रन्थोंके टीकाकार तथा हिन्दी, संस्कृत एवं नेपाली भाषाके कवि पूज्य पण्डित शेषराजजी शास्त्री काव्यतीर्थ [ नेपाल ] तथा विद्यारत्न पण्डित नरेन्द्र केसरीजी पौड्यालय एवं पण्डित ब्रह्मशङ्करजी साहित्यशास्त्री और पण्डित रामचन्द्रजी झा ग्याकरणाचार्यके प्रति भी कृतज्ञता प्रकट करता हूं जिन्होंने मुझे इस कार्यमें आंशिक सहायता दी ।। कात्र्तिकीपूर्णिमा १४-११-४० विनीत- प्रणेता।

काम
*समर्पण *
भगवान् पतितपावन प्रसन्नानन
श्रीविश्वनाथजी-
BRED
के
-
युगल चरणों में-
'त्वदीयं वस्तु गौरीश!
तुभ्यमेव समर्पये
-केदारनाथशर्मा

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विषय-सूची वर्ग स्वर्गवर्ग पृष्ठ | वर्ग १ दिग्वर्ग कालवर्ग भूमिवर्ग ३४ ३४ AN ३ ३ शैलबर्ग অঙ্কন पुरवर्ग गृहवर्ग गृहवस्तुवर्ग देशवर्ग भासिनवर्ग র कर्मजसमावर्ग कुलवर्ग देहवर्ग ३९ मुरब्बा अचारवर्ग ६ नशावर्ग ईधनवर्ग रस (खाद )वर्ग शाकवर्ग मसाले आदिकावर्ग तस्वर्ग पेडोके नाम पुष्पवर्ग १५ फळवर्ग मेवावर्ग १७ बास मादिवर्ग पशुवर्ग पक्षिवर्ग कीटवर्ग २६ जलजन्तुवर्ग २७ सर्पादिवर्ग २८ रोगवर्ग २९ । चिकित्सावर्ण २९ | यानवर्ग ३० खेती आदिके नामका वर्ग ३१ पाठ्यवस्तुवर्ग ३१ | युद्धवर्ग ३३ / मल्लयुद्धवर्ग ३३ भाभूषणवर्ग धातुवर्ग रत्नवर्ग रवर्ग ব্যাথা भनवर्ग ४५ ४८ मोजन वर्ग मिठाईवर्ग तेकवर्ग ( २ ) पृष्ठ | वर्ग ६२ वर्ग वेदादिवर्ग संस्कारवर्ग नवीनप्रकीर्णशब्द प्रकीर्णशब्दवर्ग धर्मवर्ग सम्प्रदायवर्ग वाद्यवर्ग संख्यावर्ग ५० विरामके चिह्न ५२ सर्वनामवर्ग ५२ अव्ययवर्ग ५३ / क्रियाविशेषणवर्ग ५९ भाववाचकसब्ज्ञावर्ग ५९ विशेषणव ६. क्रियावर्ग ६१ / कुछ नये शब्द ASNA साङ्केतिक भडोंका स्पष्टीकरण- स्वर्गादि वर्गमें जो १, २और ३ अङ्क आये हैं उनका तथा क्रियावर्गमें जो १ से १० तक अङ्क हैं उनका तात्पर्यार्थ निम्नरीतिसे है- १% पुंलिङ्ग यथा-१ स्वर्गः स्वर्गशब्दपुंलिङ्ग है । २= स्त्रीलिश यथा-१ लक्ष्मीः अक्ष्मीशब्दस्त्रीलिाहै ३ नपुंसकलिङ्ग यथा-३ शाम्=शा शब्दनपुंसलिङ्ग है। इसी रीतिसे क्रियावर्ग में भी १ से १० तकके अङ्कोंसे भ्वादिसे लेकर चुरादि तकका ज्ञान करना चाहिये । यथा १ से भ्वादि, २ से अदादि, ३ से जुहोत्यादि ४ से दिवादि, ५ से स्वादि, ६ से तुदादि, ७ से रुधादि, ८ से तनादि, ९से मयादि, १० से चुरादि। १ ॥ श्रीः॥ * श्रीकोषः .. मङ्गलाचरणम् विधाज्ञानसुधादात्री लक्ष्मीकीर्तिशुभप्रदे । समबुद्धिधरे वन्दे सर्वसिद्धिफलप्रदे ॥ स्वर्गवर्ग: सुरलोकको ही स्वर्ग द्योदिव, त्रिदिव त्रिदशालय कहा। निर्जर अमर सुर विबुध संज्ञा देवतोंकी है अहा ॥ गन्धर्व किन्नर भूत असर सिद्ध विद्याधर तथा । सब यक्ष रक्ष पिशाच गुह्यक देव सम हैं सर्वथा ॥१॥ स्वर्ग-१स्वर्गः, १नाकः, १त्रिदिवः देवगण (दूत)-१आदित्यः १विश्वः, १त्रिदशालयः, १सुरलोकः, श्योः, १वसुः। २दिव ३त्रिविष्टपम् । देवजातिविशेष-१विद्याधरः, १यक्षः, देवता-१अमरः, निर्जरः, १देवः, १त्रिदशः १विबुधः, १सुरः । इन्द्रारि, दानव, असुर, दितिसुत; दैत्य सुरद्विष भी कहो। सर्वज्ञ कहिये बुद्ध जिन वा सुगत गौतमको अहो । बस, शाक्यमुनि औ शाक्यसिंहको बौद्ध सेवी जानिये। ब्रह्मा विधाता आत्मभूको, विधि प्रजापति मानिये ॥२॥ असुर-१असुरः दैत्यः, १इन्द्रारिः, गौतमबुद्ध-सर्वज्ञः, १सुगतः, १बुझः, १दानवः । १दितिसुतः १सुरद्विषु । १जिनः । बौद्धमतसेवी-१शाक्यमुनिः, ब्रह्मा-ब्रह्मा, आत्ममूः, १विधिः, १शाक्यसिंहः। विधाता, १चतुराननः, १प्रजा- पतिः, १कमलासनः रक्षः, . . , श्रीकोषे- . " हरि विष्णु माधव शौरि केशव कृष्ण दामोदर वहो । वसुदेव ानक दुन्दुभिः वसुदेव को संज्ञा कही ।। बलभद्र नीलाम्बर हलो बलदेवको ही जानिये। कन्दपै मन्मथ मदन कामः कामदेव बखानिये ॥३॥ विष्णु-१विष्णुः, १हरिः, १माधवः, परेवतीरमणः, १नीलाम्बरः, पहली, १कृष्णः, केशवः, १शौरिः, १कामपालः१,हलायुधः, १अच्युताम्रजः १दामोदरः, १ऋषीकेशः। कामदेव-मदनः, १मन्मथः, वसुदेव-१वसुदेवः, १आनकदुन्दुभिः, १कन्दर्पः, १कामः । बलदेव-१बलभद्रः, १बलदेवः, अनिरुद्ध-अनिरुद्धः, १उकापतिः। लक्ष्मी रमा पमा सुकमला लोकमाता भार्गवी । है इन्दिरा श्रीः हरिप्रिया वह * लोक जननी धामकी । अनिरुद्धको अनिरुद्ध कहिये वा उषापति बन्धुवर । हरि-शंखको तो पाञ्चजन कहते महोदय मान्यवर ।।४।। हरिचक्रको कहते सुदर्शन औ गदा कौमोदकी। तलवारको नन्दक कहो कौस्तुभ कहो * मणिमोदकी । श्रीवत्स उनका चिह्न है औ शाङ्ग उनका चाप है। है सूत दारुक, अश्व उनके मेघपुष्प सुग्रीव हैं ॥५॥ लक्ष्मी-२लक्ष्मीः, २पद्मा, २कमला, विष्णुका शङ्ख-१पाञ्चजन्यः। इन्दिरा, ३श्रीः, २हरिप्रिया । चक्र-३सुदर्शनम् । २भार्गवी, २लोकमाता। गदा-२कौमोदकी। विष्णुकी तलवार-१नन्दकः । घोड़ा-१शैव्यः, १सुग्रीवः, मणि-१कौस्तुभः । मेघपुष्पः, १बला- धनुष-३शाम् । चिह्न-१श्रीवत्सः। मन्त्री-१उद्धवः। सारथी-दारुकः। छोटे भाई-गदः। कहते खगेश्वर ही गरुड़को तार्क्ष्य नागान्तक सखे । शिव रुद्र शङ्कर शम्भु पशुपति, ईश हैं* भवको रखे । अजगव कपर्दै प्रमथ कहो शिव धनु जटा औ पारिषद् । * ऐसे चिहमें लिखित पद केवल पादपूरणार्थ है। " " " " स्वर्गवः - प नामसे जिनके सदा है दूर रहती कुल विपद् ॥६॥ गौरी भवानी पार्वती कात्यायनी गिरिजा कहो । हेरम्ब लम्बोदर विनायक विघ्नराज गणेश हो ।। हैं कार्तिकेयः शक्तिधर भी स्कन्दके शुभ नामजन । शृङ्गी तथा भृङ्गी मुनन्दिक ख्याति रखते नन्दिगण !! ७ ॥ गरुड़-१गरुडः, पताक्ष्यः, पन्नगा- पार्वती-२कात्यायनी, २गौरी, भवानी शनः, १खगेश्वरः, १नागान्तक । २गिरिजा, २पार्वती। शिव-शङ्करः, १शम्भुः, १ईशः, गणेश-विनायकः, १विघ्नराजः, १पशुपतिः, शिवः, १भवः, १रुद्रः लम्बोदरः, हेरम्बः गणेशः । शिवजटा-१कपर्दः । कार्तिकेय-१कार्तिकेयः, कुमारः, शिवधनुष-३अजगवम् । १न्दः १षडाननः, १शकिधरः। शिव-पारिषद-प्रमथः । नन्दिगण-१शृङ्गी, भृङ्गी, नन्दिकः। इन्द्र, मघवा, शक्र वासव सुरपति शचीपति नाम है। इन्द्राणि कहिये वा शची, अमरावती शुभ धाम है। उच्चैश्रवाः मातलि यथाक्रम हय सूत हैं सुरराजके। जिनके सुयशसे दूर होते पापतक नरराजके॥८॥ इन्द्र-१इन्द्रः, १आखण्डलः, १शची. इन्द्रनगरी-२अमरावती। पतिः, १पुरन्दरः, १वासवः, १वृत्रहा, इन्द्रका घोड़ा-उच्चैःश्रवाः । १मघवा, १शक्रः, १सुरपतिः । सारथी-१मातलिः । इन्द्राणी-२पुलोमजा, २शची, वन-३नन्दनम् । २इन्द्राणी। महल-वैजयन्तः। वृषाकपि-१वृषाकपी । १पाका वृषाकपायि-२वृषाकपायी* । शासनिः। ऐरावतः और अभ्रमुवल्लभ इन्द्रगजके नाम भी। है हादिनी पवि कुलिश अशनिः वज्रके बहु नाम भी। देवषिको कहते सुरषिः और सुमर्धा सुरसभा। है व्योमयानं और विमानः वायुयानोंकी प्रभा ॥९॥ नभ गगन अम्बर व्योम पुष्कर विष्णुपद द्योदिव यथा । आकाश और अनन्त खं सुर वम संज्ञा है तथा ।। *नित्य द्विवचनान्त होते हैं। " पुत्र--'जयन्तः श्रीकोषे- Nada .. . पीयूष अमृत औ सुधा मन्दाकिनी सुरदीर्घिका । *यदि भाग्यसे मिल जाय मित्रो ! तो लिखो तद्भूमिका॥१०॥ इन्द्रका हाथी -- ऐरावतः, १अभ्र. राख -१क्षारः, २रक्षा। मुवल्लभः। भस्म-१भूतिः, ३भस्म । वज्र-३वज्रम् , ३कुलिशं, यमराज-१कालः, १यमः, १कृतान्तः, १पविः, हादिनी । १अशनिः । १अन्तकः। विमान-३व्योमयानं, १विमानः । राक्षस-राक्षसः १यातुधानः, देवर्षि-सुरषिः ( नारद वगैरह) १रात्रिञ्चरः। देवसभा-२सुधर्मा, २देवसमा । वरुण-१प्रचेता, १वरुणः, १पाधी, अमृत-पीयूषं, ३अमृतं, २सुधा । १अप्पतिः स्वर्गगङ्गा-२मन्दाकिनी, २सुरदीपिका हवा-१पवनः, समीरः, १मारुतः, सुमेरुपर्वत-१मेरुः, १सुमेरुः, १समीरणः। हेमादिः, १सुरालयः । देववृक्ष-१मन्दारः, १पारिजातः, आँधो-पानी-११झन्झावातः । १सन्तानः, कल्पवृक्षः३हरिचन्दनम् । आँधी-१प्रकम्पनः, १महावातः। सनकादिमुनि-सनत्कुमारः, प्राण-१प्राणः 1 ये शरीर में वैधात्रः। अपान-१अपानः । भीतर रहने अश्विनीकुमार-१अश्विनीसुतौ, समान-१समानः वाले पाँचवायु १आश्विनेयौ*। उदान-१उदानः के नाम हैं। स्वर्गवेश्या-२स्ववेश्या, अप्सरसा व्यान-१व्यानः देवताभोंके गवैया-हाहा, १हहः। वेग-१जवः, परयः। भाग-१अग्निः, वैश्वानरः, वह्निः, जल्दी-३शीघ्र, ३द्रुतम् । १पावकः १अनलः, १ज्वलनः, लगाताह-नित्यं, ३अजस्रम् । १कृशानुः। अधिकतर--१अतिशयः, बाढम् । वड़वानल-१वाडवः, १वडवानलः। कुबेर-१कुबेरः,१धनाधिपः, १किनरेशः। मागकी लवर-पशिखा १हेतिः। कुबेरका बाग-३चैत्ररथम् । चिनगारी-१स्फुलिङ्गः, कुबेर-पुत्र-१नलकूबरः। १अमिकणः । निर्गतज्वाला-२उल्का । कुबेरका स्थान-१कैलासः । वनकी भाग-१दावः, १दवः, कुबेरपुरी-२अलका १वन हुताशनः। कुबेरका विमान-३पुष्पकम् । *नित्यद्विचनान्त होता है। नित्यबहुवचनान्त। . :

स्ववर्गः। . सनातन, सनत्कुमार- } चतुःसनाः १ किन्नर-१किन्नरः,१किम्पुरुषः,१मयुः। आकाश-३आकाशं, ३गगनं खजाना-१निधिः, १शेवधिः । ३अम्बरं, ३नभः, ३खम् । दशावतारनामानि मत्स्य-मत्स्यः? परशुराम-परशुरामः १ कच्छप-कच्छपः १ राम-रामः १ वराह-वराहः १ बलराम-बलरामः१ नृसिंह-नृसिंहः १ बुद्ध-बुद्धः १ वामन-वामनः १ कक्लि-कर्की । २४ लीलावतारनामानि सनक,सनन्दन- पृथु-पृथुः१ नृसिंह-नृसिंहः १ नारद-नारदः १ कूर्म-कूर्मः १ वराह-वराहः १ धन्वन्तरि-धन्वन्तरिः १ मत्स्य-मत्स्यः १ मोहिनी-मोहिनी २ -यज्ञः १ नरनारायण-नरनारायणौ १ वासन-वामनः १ कपिल-कपिलः १ परशुराम-परशुरामः १ दत्तात्रेय-दत्तात्रेयः १ रामचन्द्र-रामचन्द्रः १ हयशीर्ष- हयशीर्षः १ ब्यास-व्यासः १ हंस-हंसः १ बलदेव-- बलरामः १ ध्रुवप्रिय-ध्रुवप्रियः २ बुद्ध-बुद्धः १ ऋषभ-ऋषभः १ कल्कि-की १ नवदुर्गानामानि शैलपुत्री-शैलपुत्री २ काली-कालरात्रिः २ ब्रह्मचारिणी-ब्रह्मचारिणी २ अन्नपूर्णा--महागौरी २ अन्नपूर्णा २ चन्द्रघण्टा-चन्द्रघण्टा २ कूष्माण्डा-कूष्माण्डा २ सिद्धेश्वरी सिद्धिदात्री २ वागीश्वरी स्कन्दमाता, वागीश्वरी २ सिद्धमाता - ६ श्रीकोषे- द्वादशज्योतिर्लिङ्गनामानि सोमनाथ-सोमनाथः १ रामेश्वर-रामेश्वरः २ मल्लिकार्जुन-मल्लिकार्जुनः नागेश्वर-नागेश्वरः १ महाकालेश्वर-महाकालेश्वरः २ विश्वनाथ-विश्वनाथः १ ओङ्कारेश्वर-ओङ्कारेश्वरः १ व्यम्बकेश्वर-यम्बकेश्वरः १ वैजनाथ-वैद्यनाथः १ केदारनाथ-केदारनाथः भीभशङ्कर-भीमशङ्करः १ घृष्णेश्वर-घृष्णेश्वरः २ नृपदशरथपुत्रपुत्रवधूनामानि राम-रामः १ दाशरथिः १ सीता-सीता २ जनकतनया २ लक्ष्मण-लक्ष्मणः १ सौमित्रिः १ माण्डवी-माण्डवी २ भरतभरतः१ उर्मिला-उर्मिला २ शत्रुघ्न- शत्रुघ्नः १ श्रतिकोति-श्रुतिकीतिः २ पश्चपाण्डवनामानि युधिष्ठिर-युधिष्ठिरः १ धर्मराजः १ नकुल-नकुलः १ मर्जुन-अर्जुनः १ पार्थः। सहदेव-सहदेवः १ भीम-मीमः १ वृकोदरः १ द्रौपदी -द्रौपदी२, याज्ञसेनीर दिग् (दिशा) वर्गः। आशा दिशा प्राची तथा पश्चिम उदीची तारका। घभवृष्टि विद्युत् चञ्चला विधु मेघ नीरद चन्द्रिका ।। दिशा-२काष्ठा, आशा, २दिक । ईशान-३ऐशानम् पूर्व-२प्राची। दक्षिण में होनेवाला-३अवाचीनम् । दक्षिण-२अवाची। उत्तरमें होने वाला-३उदीचीनम् । पश्चिम-२प्रतीची। पूर्वमें होनेवाला-३प्राचीनम् । उत्तर-३उदीची पश्चिममें होनेवाला-३ प्रतीचीनम् । दिकोण चार हैं बादल-३अभ्रं, मेघः, १वारिवाहः, आग्नेय-आग्नेयम् । १धनः, १धाराघरः, १जलधर: नेऋत्य-नैऋत्यम् । १बलाहकः । वायव्य-३वायव्यम् । मेघ-समूह-२कादम्विनी,रमेषमाला। १ ..

- कणः। दिगवर्गः। मेघ गर्जन-३स्तनितं, ३गर्जितम् । निर्मलता-१प्रसादः प्रसनता। बिजली-२विद्युत् , २चञ्चला, २ चपला चन्द्रको कालिमा-१कलङ्कः, २तडित् , २सौदामिनी, २शम्पा । ३लाञ्छनम् । बिजलीकी कड़क-१ बज्रनिर्घोषः। अत्यन्त सुन्दरता-२सुषमा, २परमाशोभा। बादलपरका धनुष-३इन्द्रायुध, शोभा-२शोभा, २कान्तिः, २द्युतिः, ३शक्रधनुः। मेघ-ज्योति-१इरम्भदः । २छविः । मेघ-बरसना-२वृष्टिः ३वर्षम् । ठण्ड (पाला)-तुषारः, ३तुहिनं, ३हिमम् । मेघ न बरसे (सूखा)-१अवग्राहः । ध्रुव-ध्रुवः खूब जोरसे वर्षा होना-धारास- अगस्त्य = १अगस्त्यः, कुम्भसम्भवः। म्जातः, १आसारः,। अगस्त्य-स्त्री-२लोपामुद्रा फुहारेदार-वृष्टि-१शीकरः, १अम्बु. *तारा-२तारा, इनक्षत्रं, २तारका । बृहस्पति-१बृहस्पतिः, १सुराचार्यः, मोला-१वर्षोपलः । १वाचस्पतिः बदली-३दुर्दिनम् । शुक्र-१शुक्रः, १दैत्यगुरुः, १भार्गवः, माच्छादन करना-३अपिधानं, १कविः । १तिरोधानम् । मंगल-भौमः, १कुजः, १महीसुतः, चन्द्रमा-१चन्द्रमाः, १चन्द्रः पहिमांशुः, १अङ्गारक: १विधुः १इन्दुः, १क्षपाकरः, बुध-बुधः, १रौहिणेयः। नक्षत्रेशः। शनैश्चर-१शनैश्वरः, १सौरिः। कला-२कला। राहु-१राहुः, १सैं हिकेयः, विधुन्तुदः। चन्द्रको गोलाई-१बिम्बः, (१)सप्तर्षि-१चित्रशिखण्डी। ३मण्डलम् । सूर्य-१सूर्यः, परविः, १अः, टुकड़ा-३खण्डम् । १भास्करः। चांदनी-२चन्द्रिका, २कौमुदी, सूर्यका सारथी-१गरुडाप्रजः, ज्योत्स्ना। १सूरसूतः। *तारा शब्द हिन्दीमें पुंलिङ्ग है। (१) सात ऋषियों के नाम- कश्यप, अत्रिः, भरद्वाजः, विश्वामित्रः, गौतमः, जमदग्निः, तथा वशिष्ठः । २ - - श्रीकोषे- : , सूर्यकोगोलाई-परिवेषः, १परिधिः। घाम-१प्रकाशः, १आतपः। किरण-१किरणः, ३असं, १मयूखः, थोड़ा गरम-३कोष्ण, ३मन्दोष्णम् । १अंसुः, १मरीचिः, रश्मिः । अत्यन्त गरम--३तिग्मं, ३तीक्ष्णम् । प्रभा-प्रभा, २दीप्तिः । मृगतृष्णा-२मृगतृष्णा, २मरीचिका । काल (समय) वर्गः। दिन बार वासर दिवस वेला याम प्रात अहर्मुखम् । पल दण्ड घटिका प्राह सायं रात्रि औ रजनीमुखम् ।। ऋतु चैत्र माधव शुक्र शुचि नभ भा आश्विन बाहुलः । तप मार्ग माघः पौष तैष: ग्रीष्म सुरभिः फाल्गुनः । हेमन्त वर्षा शरत् युग औ अब्द हायन वत्सरः । शिशिर वदि सुदि पौर्णमासी दर्श औ संवत्सरः।। समय-१कालः, १समयः, १दिष्टः । तृतीयपहर (तीसरा पहर)- तिथि-तिथिः। १अपराह्नः। पडिवा तिथि-२ प्रतिपत् । पूर्णिमा-२पौर्णमासी, २पूर्णिमा । दिन-३दिनं, १दिवसः, १वासरः । पूर्णिमा (पूर्ण)-२राका। सबेरा-१प्रत्यूषः,३अहर्मुखं, ३प्रभातम्। पूर्णिमा (अपूर्ण)-अनुमतिः । सन्ध्या-सायम् , २सन्ध्या, १पितृप्रमुः। अमावस्या-२ अमावस्या, १दर्शः । रात-निशा, २रात्रिः, रजनी, आमावस्या-(अपूर्ण)-२सिनीवाली। २क्षपा, २शर्वरी आमावस्या--(पूर्ण)-१कुहूः । रात (अन्धेरी)-२तमिला। आमावस-पूर्णिमा--१पक्षान्तौ, रात ( उजेली)-२ज्योत्स्नी। * २पञ्चदश्यो। कई रात्रियां-३गणरात्रम् । सूर्यग्रहण-१उपरागः, १प्रहः । रातका पूर्वभाग-१प्रदोषः, १रज. चन्द्रग्रणह--, नीमुखम् । राहुग्रसित सूर्य-१सोपप्लबः, प्रहर-१प्रहरः, १यामः। १उपरक्तः। प्रथम प्रहर-१प्राणः। राहुग्रसित इन्दु-१सोपप्लवः, द्वितीय प्रहर-(दोपहर) मध्याह्नः । १उपरक्तः । * नित्य द्विवचनान्त है। , . " कालवः। . , , पूंछदार तारा-१अग्न्युत्पातः, ऋतु-१ऋतुः। १उपाहितः। वसन्त-१वसन्तः, १पुष्पसमयः, सूर्यचन्द्र-१पुष्पवन्तौ* १सुरभिः। पलकमात्र काल-१निमेषः। प्रोम-१प्रीष्मः, १निदाघः, १ उष्णः। पल-पलम् .. वर्षा-२प्रावृट् , ३वर्षा*। घड़ी-२घटिका। शरत-२शरत् । घण्टा-२होरा। हेमन्त-हेमन्तः । दण्ड-१दण्डः। शिशिर-१शिशिरः। वेरा-२वेला। साल(वर्ष)-१संवत्सरः १वत्सरः सप्ताह:-~-१सप्ताहः। १अब्दः, १हायनः, १वर्षः। पक्ष-१पक्षः। शताब्दो-२शताब्दी, ३वर्षशतकम् । वदी-१कृष्णपक्षः । युग-३ युगम् । सुदी-१शुक्लपक्षः। सत्ययुग-३कृतयुगं, (१)३तपोयुगम् माह-मासः। त्रेतायुग-३त्रेतायुगं, ३ज्ञानयुगम् चैत्र-१चैत्रः। द्वापरयुग-३द्वापरयुगं, ३यज्ञयुगम् । वैशाख–१वैशाखः १माधवः । कलियुग-३कलियुगं, ३दानयुगम् । जेठ-ज्येष्ठः, १शुक्रः, प्रलय-१प्रलयः, १कल्पः। भाषाढ़-आषादः १शुचिः। पाप-३पङ्क, ३पापं, ३कलुषं, सावन-१श्रावणः १नभः । ३कल्मषम् भादो-१भाद्रपदः, भाद्रः, १नभस्यः पुण्य-३पुण्यं १धर्मः, ३सुकृतम् । क्वार-आश्विन: १आश्वयुजः। भानन्द-आनन्दः,२प्रीतिः१प्रमदः कातिक-१कार्तिकः, १बाहुलः । अगहन-१मार्गशीर्षः, १मार्गः। कल्याण-३कल्याणं ३शिवं ३भद्रं, पृस-१पौषः, १तेषः १सहस्यः । ३मङ्गलं ३शुभं ३कुशलं, ३क्षेम, माघ-१माघः, तपा। भव्यम् । फागुन-१फाल्गुनः तपस्यः। भाग्य-३दैवं ३दिष्टं, ३भाग्य,नियति + किसी-किसी समय उगता है और जब उगता है, उत्पात होता है। * नित्य द्विवचनान्त होता है। * नित्य बहुवचनान्त । (१)तपः परं कृतयुगे, त्रेतायां ज्ञानमुच्यते द्वापरे यज्ञमेवाहुर्दानमेकं कलौयुगे , , . १हर्षः। . .

१० श्रीकोषे-- , , कारण-१हेतुः, ३कारणं, बीजं, सत्त्वगुण-३सत्वम् । आत्मा-१क्षेत्रज्ञः, १आत्मा, १पुरुषः। रजोगुण-३रजः । प्रकृति-प्रधान, २प्रकृतिः । तमोगुण-३तमः भूमि ( पृथ्वी ) वर्गः। पृथ्वी मही वसुधा धरित्री मेदिनी धरणी धरा । भूः भूमि क्षिति उर्वी क्षमा क्षोणि और वसुन्धरा ।। अपर मरु: धन्वा स्थलं खिल स्थान क्षे प्रान्तरम् । केदार सैकित मृत्तिका बिल छिद्र रेणुः समतलम् । वन विपिन शार्कर कच्छ जनपद गर्न धूलिः काननम् । उद्धातिनी रज शर्करा मृत् बालुका औ विष्टपम् ।। भूमि--१भूः २भूमिः २अचला, खेत-३क्षेत्रं ३केदारम् । २मही, २धरा, २धरित्री, धरणिः, पाँतर-२प्रान्तरम् । श्वसुधा २ठवीं, २पृथ्वी, २मेदिनी पथरीली-जमीन-१शार्करिलः । २विपुला,रत्नगर्भा, २पृथिवी। रेतीली-जमीन-सैकितः । जगह-३स्थानं, ३स्थलम् । कछाह-कच्छाः, अनूपम् । मिट्टी-मृत् , २मृत्तिका। बस्तो-१जनपदः, १नींवृत् । मच्छो-मिट्टी-२मृत्सा, २मृत्स्ना । बालू-रसिकता २कालुका। उपजाऊ-मिट्टी-२उर्वरा । कङ्कड़-२शर्करा, १कर्करः। रवारी-मिट्टी-२क्षारमृत्तिका धूरा-२धूलिः ३रजः, परेणुः । ऊसर-ऊषवान् , ऊषर:* । गड्डा-१गतः, १अवटः। निर्जल-देश-१मः, १धन्वा । १खल्लः । परती-रखिलं, ३अप्रहतम् । ऊची नोची-जमीन-२उद्घातिनी। जगत्-जगत् , १लोकः, ३भुवनं, बराबर-, ३समतलम् । ३विष्टपम् । पुल-सेतुः, २आलिः। जंगल-२अटवी, ३अरण्य, ३विपिनं, बिल-३बिलं, ३छिद्रं, ३रन्ध्रम् । इगहनं २काननं. ३वनम् । बाम्ही-३बल्मी कं, १वामलूरः । . -- - *विशेष्य-लिशानुसार लिङ्ग जानना चाहिये । जलवर्गः। ११ शैल ( पहाड़ ) वर्गः। गिरि शैल पर्वत अद्रि प्रस्तर शिखर पाद उपत्यका । कन्दर गुहा गहर दरी भृगु शृङ्ग सानु अधित्यका ॥ पहाड़-१पर्वतः, १अद्रिः, १गिरिः, । पर्वतके ऊपरका भाग-२अधि. शैलः १अचलः गोत्रः १धरः । त्यका। उदयाचल-१उदयः पूर्वपर्वतः । पर्वतके नीचेका भाग-२उपत्यका श्रस्ताचल-१अस्तः,१चरमक्ष्मामृत् । पहाड़ी-२ -२पर्वतमाला। पत्थर-१पाषाणः, १प्रस्तरः, १उपलः, पर्वतका समभाग-१प्रस्थः, १खानुः १शिला, १ग्रावः । कृत्रिम-गुफा-२दरी, १कन्दरः । पर्वतकी चोटी-१कूटः, ३शिखर, अकृत्रिम-गुफा-२ गुहा, ३गवरम् । ३म् । ढालुआ-चट्टान-१प्रपातः १अतटः, पर्वतका मध्यभाग-१ कटहः १भृगुः। की तलैटी-१पादः, १प्रत्य- खान-खनिः२, १आकरः । न्तपर्वतः। जलवर्गः। पानीय पय जल वारि सलिलं सिन्धु सागर अर्णवः । कूपार पारावार उदधिः अब्धि औ रत्नाकरः। तटिनी नदी धारा प्रवाहः वाचि ऊर्मिः दीर्घिका ॥ उल्लोल जलकण तीर कूलं पार पात्रं कपिका ।। जल हास बुद्बुद स्रोत निर्झर भ्रान्ति कुल्या पुष्करः । वीनास पल्वल खेय सरहद पङ्क अन्धु सरोवरः। पानी (जल)-३जलं, इसलिलं, ३पयः क्षीरसमुद्र-क्षीरोदः । ३पानीयं ३वारि, ३ नीरं ३क्षीरं, खारा-समुद्र-२लवणोदः । ३अम्बु, ३आप:* नदी-२नदी, तटिनी, सरित् । समुद्र-१समुद्रः, १सिन्धुः, १सागरः, गङ्गा-नदी-२गङ्गा, रविष्णुपदी १मन्धिः, १उदधिः, १अर्णवः, २भागीरथी। १रत्नाकरः, १जलनिधिः। यमुना-नदी-२कालिन्दी, २सूर्यतनया *नित्य बहुवचनान्तः। :

१२ श्रीकोषे- . . झील-ह्रदः, . नर्मदा-नदो-२रेवा२नर्मदा,२सोमोद्भवा भरना-१निर्झरः, १झरः । गोदावरी-२गोदावरी । जलका फेन-जलहासः, १फेनः। सरस्वती-२सरस्वती, रविधिपुत्री, बुल-बुला-बुबुदः । २६षद्वती। नहर-२कुत्या। गोमती-रवासिष्ठी। नाली-२प्रणाली। सरय-२सरयूः । तालाब-तडागः, पुष्करः । सिन्धु-१सिन्धुः। छोटा तालाब-१कापारः, १सरः, कावेरो-२कावेरी। एकदम छोटा तालाब-वेशन्तः, ताप्ती-२तापी। १पत्वलः। ब्रह्मपुत्र-१ब्रह्मपुत्रनदः । कृष्णा-२कृष्णा । (१) बावली-२वापी, २दीपिका । धारा-२धारा, १प्रवाहः । कुमां-१कूपः, हिलोर-हिल्लोलः, २ऊर्मिः २वीचिः, छोटा कुमा-२कूपिका । भङ्गः, १तरङ्गः। कुएंकी जमीन-१मुखबन्धः । बड़ी लहर-१उल्लोलः, १कल्लोलः। १वीनासः । बिन्दु (छोटा)-१विन्दुः, १जल. जमुअट-१नीवारः। करणः, १पृषतः । रहट-१अरघट्टः । जलभंवर-१आवतः। कुएंकी गडारी-२कूपघटिका। किनारा-३कूलं, १रोधः, ३तीरं, थाला-२आलवालम् । ३तटम् । खाई-२परिखा, ३खेयम् । रेतीला-तट-३पुलिनम् । ३सैकतम्। कांद = १कदमः । इधरका किनारा-अवारम् । कोचड़-१चिकिलः । १पकः । उधर -३पारम् । पौंसरा,(प्याऊ)-२प्रपा, २पानीय- नदीका पाट-३पात्रम् । शालिका। बाढ़-१परीवाहः। पौसरेपर जलपिलानेवाला- सोंता-स्रोतः। १जलपानकारयिता। , : - (१) पञ्जाबकी पांच नदियों के नाम संस्कृतमें- शतदुः, विपाशा, ऐरावती, चन्द्रभागा तथा वितस्ता ।

गृहवर्गः। १३ -5 , पुर (शहर) वर्गः। पथ मार्ग पदवी वप्र वीथी विपणि पूः शृङ्गाटकम् । नगरी पुरी पुर नगर पत्तन राजधानी गोपुरम् ।। २पुरो, नगरी, , शहर-पलाह-१प्राकारः १वरणः । ३पत्तनं, ३पुरं, ३नगरम् । सड़क-१मार्गः, १पथः, ३अयनम् । राजधानो-२राजधानी। सदर सड़क-१घण्टापथः। गांव-१प्रामः। रास्ता-२पदवी, २पद्धतिः। छोटा गांव-२प्रामटिका । पगडंडो-२एकपद। टाउनहाल-सभागृहम् । बगीचा-३वद्यानं ३उपवनम् । कोठरी-वासगृह, गर्भागारम् । चौक-३चतुष्पथम् , ३शृङ्गाटकम् । कनवोकेशनहाल-उपाधिवितरण. गली-२९ध्या २प्रतोली, २विशिखा। बाजार-आपणः, निषद्या। सीमा-१सीमा। दूकान-२विपणिः, २पण्यवीथिका। शहरका फाटक-३पुरद्वारं, दूकानदार-१पण्यकः। ३गोपुरम् । दूकानदारिन-२पण्यका। . गृह ( घर ) वर्गः। गृह गेह मन्दिर भवन आलय वेश्म सद्म निकेतनम् प्रासाद सौधः राजसदनं धनिक हयं मन्दिरम् ॥ घर-३गृहं, ३गेई, ३वेश्म, ३सम । , पक्की दीवार-३ एड्कम् । इनिकेतनं, भवन, आगारं, छप्पर (छाजन)-३पटलम् , ३मन्दिरं, गृहाः,* १निकायः, ३ छदिः। १निलयः १आलयः ओरी-३बलीकं, ३नीध्रम् । कोठरो (कमरा) १प्रकोष्ठः । खिड़को-२खडक्किका ३प्रच्छन्नं, भोसारा (दालान)-१प्रघाणः, ३अन्तरिम् । १प्रघणः, १अलिन्दः। जगल-१जनालः। दीवार(भीत)-२भित्तिः, ३कुड्यम् । झरोखा-३वातायनं, १गवाक्षः । * निस्य बहुवचन है।

१४ श्रीको- - न शाला। .. जाली-२जालिका। चीर-फाड़का घर-शस्त्रचिकि- त्सालयः। खम्मा १स्तम्भः। अस्पताल-चिकित्सालयः । थून्हा-१स्थूणा। अस्पतालका वार्ड-३शुश्रूषागृहम् । दासा-नासा। धर्मशाला-२धर्मशाला। सरदल-२शिला। चौकठ-३ चतुष्काष्ठं, २द्वारशारवा । सङ्गीतशाला--सङ्गीतालयः। नाट्यशाला-२नाट्यशाला, २नृत्य- देहली-२देहली, २गृहावग्रहणी । किवाड़ा-३कपाटं, ३अररम् । रगमञ्च-१रङ्गमञ्चः। वेवड़ा-विष्कम्भः, ३ अर्गलम् स्कूल-२पाठाशाला। सिटकिनी-२विष्कम्भिका । कालेज-महाविद्यालयः। ताला-३द्वारयन्त्रम् । यूनिवर्सिटी-१विश्वविद्यालयः । ताली-२कुञ्जिका। इजीनियरिगकालेज स्थापत्य वि. दरवाजा-३द्वार, १प्रतिहारः, रताः। धालयः। माला-(ताखा)-१आलम । साइन्सकालेज-विज्ञानविद्यालयः। आंगन-अमनम् , ३चत्वरं, आकालेज-१ कलाविद्यालयः । ३अजिरम् । इण्डस्ट्रियलस्कूल-२शिल्पपाठशाला चबूतरा १मञ्चः । टेक्निकलस्कूल-२कलापठशाला । वेदी-२वितदिः, श्वेदिका। कन्यापाठशाला २कन्यापाठशाला। बैठका-२शाला। लायब्रेरी-पुस्तकालयः। मण्डप-१मण्डपः, १जनाश्रयः । बाननालय-१वाचनालयः, वाचन- किला-१दुर्गः। मन्दिरम् । महल-१सौधः, राजसदनम् । आफिस-१कार्यालयः। अटारी-२अट्टालिका, ३शोमम् । पोस्ट माफिस-१पत्रालयः राजमहल-१प्रासादः, ३राजसदनम् मेस-२छात्रभोजनशाला । रनिवास-३अन्तःपुरम्,३अवरोधनम् । होटल-२पण्यभोजनशाला । धनीजनका घर-३हयं । वोर्डिग (होस्टल)-१छात्रालयः । ३घनिकमन्दिरम् । अजायबघर-१विचित्रालयः । मन्दिर-मन्दिरं, १देवालयः, म्यूजियम-१ १धर्मालयः। र-३शुल्कस्थानम् । - , - - . . गृहवस्तुवर्गः। १५ म्युनिसिपलिटीकी इमारत घोडसार-२वाजिशाला, २मन्दुरा। ३नगरसभाभवनम् । फल-१कुट्टिमः, २बद्धभूमिः । डिस्टिक्ट बोर्ड की इमारत दोतल्ला (खण्ड)-३द्वितलम् , ३नगरान्तसभाभवनम् । ३द्विभूमिकम् । कचहरीकी इमारत-न्यायालयः। तीनतल्ला (खण्ड)-३ त्रितलम्' मठ-१मठः। त्रिभूमिकम् । मठिया-२मठिका। सीढ़ी-३आरोहणं, ३सोपानम् । झोपड़ी-१उटजः, २पर्णशाला। काष्ठकी वांसको सीड़ी- कुटी-१वासः, २कुटी। २अधिरोहिणी। यज्ञ-स्थान-३चैत्यं, ३आयतनम् । इंट-२इष्टिः, २इष्टिका । शयन-गृह-३शय्यागारं,३तल्पगृहम्। चूना-२सुधा । सौड़ी-घर-३अरिष्टं, ३सूतिकागृहम्। खपरा-१खपरः। भण्डार-३वस्तुग्रहम्। गारा-कदमः। रसोई-घर-३पाकस्थानम् । कड़ा-१अवकरः, १सङ्करः । कारखाना-२शिल्पशाला। मोरी-मोरिका । दवाखाना-१औषधालयः। चन्दोत्रा-१चन्द्रातपः। शराबको दूकान-३मदिराविपणिः। तम्बू-३दूध्यं, २पटकुटी। अखाड़ा-१अक्षवाटः। कनात-१काण्डपटः। चिडियाखाना-२पक्षिशाला। पर्दा-२यवनिका । गोशाला-२गोशाला। घरके ऊपरका कमरा-२ चन्द्रशाला हथसार-२गजशाला। गृहवस्तु ( चीज ) वर्गः। सम्मानी तितः शिला औ यन्त्र मुसलः कंचिका । सह नागदन्तः अश्ममालम् शम्ब औ व्यवहारिका ।। दीया-१दीपः, ३दीपकम् । बिजली बत्ती-२विद्युज्ज्योतिः ॥ बत्ती-२दशा, वर्तिका। बिजलोका बल्व-३विद्युत्-गोल. दोअट-१दीपस्तम्भः । दीपकम् । गैस-हस्तदीपः। स्वीच-२विद्युत्कुञ्जिका। लालटन-१कांचकोपः। दियासलाई-२दीपशलाका। - .

श्रीकोषे- चक्की-२पेषणी। डोरा-३सूत्रं १तन्तुः। सिल-३शिलापट्टम् , २ शिला चर्खा-१तकुलासकः। लोढ़ा-१शिलापुत्रः। चाकू (छूरी)-२रिका । श्रोखली-३ठलूखलम् । कैंची-२कर्तनी। मूसर-मूसळः, ३अयोग्रम् । सरोता-२शंकुला । साम-१शम्बः। भट्टी-२भ्राष्ट्रिका । खरल-१खल्लः । चूल्हा-२चुल्ली। इमामदस्ता-३अश्ममालम् । स्टोव-२ मृतैलचुल्ली। सूप-१सूर्पः। अङ्गीठी-रहसन्ती। चलनी-२चालनी, तितउः। छीका-३शिक्यम् । झाडू-२सम्मानी, शोधनी । डोरी-रज्जुः। कूची-१कुचिका। उबटन-३उद्वर्तनम् । बुहारो-२व्यवहारिका, तराजू-२ तुला। खंटी-१नागदन्तः। डराडी-१तुलादण्डः। अरगनी-३वस्त्रधारिणी। पलड़ा-३तुलाफलकम् । :-२सूचिः। पसंगा-तुलाकूटः। सूआ-१सूच। वटखरा-क्यौतबम् । कोल-२कीलिका। कोठी-१कोष्ठः। टेकुरी-१तधैः। चौर्घाड्या -२चतुष्काष्ठा। सूत्र-३सूत्रं, १तन्तुः। देशवर्गः।* संसार-संसारः, विश्वम् जिला-मण्डलम् । देश-देशः। उप-मण्डल-उपमण्डलम् । प्रदेश-प्रदेशः। हिन्दुस्थान- -भारतं, आर्यावर्तः, प्रान्त-प्रान्तः। हिन्दुस्थानम् । * वर्तमान कालमें विदेशोंके तथा भारत के कई नगरोके नाम शास्त्रीय प्रमाण न होने के कारणसे नहीं दिये गये।

श्रासनवर्गः १७ अजमेर-अजमीढः। कानपुर-कर्णपुरम् संयुक्तप्रान्त-संयुक्तप्रान्तः । बिहारप्रान्त-विहार प्रान्तः। मध्यप्रान्त-मध्यप्रान्तः। पजाब-पञ्चनदप्रान्तः, पञ्चनदम् । बङ्गाल-बंगप्रान्तः, बंगः। मासाम-कामरूपप्रान्तः। उड़ीसा-उत्कलः । मद्रास-मद्रासः। बम्बई-मोहमयी, मुम्बापुरी। सिन्ध-सिन्धुः। नेपाल-नेपालः । काशमीर-काश्मीरः। गुजरात-गुर्जरः। तिहुत-मिथिला, विदेहस्थानम् । कटक- लाहौर-लवपुरम् । मैसूर-महिषासुरपत्तनम् । वर्मा-ब्रह्मदेशः । मारवाड़-मरुप्रान्तः। राजपूताना-राजस्थानम् । नागपुर-नागपुरम् । बनारस-वाराणसी, काशी। मथुरा-मथुरा। भयोध्या-अयोध्या। माया-माया। कांचो-काञ्ची। द्वारका-द्वारकापुरी। लखनऊ-लक्ष्मणपुरम् । जगन्नाथपुरी-नीलाचलः । पटना-पाटलिपुत्रम् । भागलपुर-भगदत्तपुरम् (अनदेशः) कन्नौज-कान्यकुब्जः । बरार-विदर्भः। उज्जैन-उज्जयिनी। दिल्ली-इन्द्रप्रस्थः, हस्तिनापुरम् । नासिक-नासिकः। पूना-पुण्यपुरम् । भोपाल-भूपालः । कर्नाटक-कर्णाटकः । आंध्र-आन्ध्रप्रदेशः। सीलोन-सिंहलः, लङ्का। , - . आसनवर्गः। मासन-३आसनम् । कोंच (मोढ़ा)-३वेत्रासनम् । सेज-२शय्या, ३तल्पम् , २खटवा, बेंच-३पोटं, १फलकः । १पल्पङ्कः, १पर्यङ्कः । कुर्सी-३उच्चासनम् । मचान-१मधः । स्टूल-३उच्चपीठम् । २ श्रीको श्रीकोष- S वर्ग:। , , गद्दी-२गर्दिका । ऋषियोंका मासन-२वृषी । चौकी-२चतुष्पादिका। चटाई-१कटः। तिपाई-त्रिपादिका। गलोवा-१कुथः। तखता--३काष्ठप टम् । जाति और जाति उपयोगी वस्तु भूदेव ब्राह्मण विप्र द्विज राजन्य क्षत्रिय बाहुजः । सब वैश्यजनकी है सुसज्ञा, वैश्य अयः अरुजः ।। ब्राह्मण-१विप्रः, द्विजः, ब्राह्मणः भाथी-२भना। १अग्रजन्मा, भूदेवः। हथौड़ा-१घनः, १अयोधनः । क्षत्रिय-१क्षत्रियः, १राजन्यः, बढ़ई-१बर्द्धकिः, १तक्षा, १रथकारः। १बाहुजः। वसूला-२वृक्षादनी। वैश्य-१वैश्यः, ऊरुजः, १अर्थः। आरा-१क्रकचः, ३करपत्रम् । शुद्र-शुदः, १वृषलः । वर्मा-श्वेधनिका, २आस्फोटनी। खी-२महिला, २स्त्री, २नारी। कुल्हाड़ो-२सुधितिः, २कुठारिका । नपुंसक-षण्डः, १क्लीवः। टांकी-१टकः । मनुष्य-१मनुष्यः, १मानवः, हज्जाम-१नापितः, १दिवाकीर्तिः, १मस्यः, १पुरुषः, १नरः । १क्षुरी, १मुण्डी। कोहार-१कुम्भकारः, १कुलालः । लोहखर (लोखर)-२क्षुरधानी, कोहारका चक्का-३चक्रम् । छूरा-१तुरः। कैंची-२कर्तसं, २खण्डधार दण्डा-१मुकुरः। आंवाँ-१आवापः। तेली-तेलकारः, १चाक्रिकः । कोल्हू-३तैलयन्त्रम् , १परञ्जः । सुनारका कांटा-२नाराची । ठठेरा-१ताम्रकुट्टः, १सकारः । कसौटी -३निकषः, महीर-१आभीरः, गोपः । ३शाणः। अहीरिन-आभीरी। सुनारकी धरिया-२मूषा। गोड़-गोण्डः। लोहार-लोहकारः, १व्योकारः। बहंगी-२भारयष्टिः। -हरिजनः (नवीनशन्द)। , सुनार-१स्वर्णकारः। . " मछुत-हरिजनः कर्मजसञ्ज्ञावः। m . भार-१भारः, १वीवधः । तमोली-ताम्बूलिकः । कहार-१कहारकः। तमोलिन-ताम्बूलिका। मल्लाह-धीवरः, कैवर्तः, १दाशः। भुंजवा (भड़भूजा)-भ्राष्ट्रमिन्धः । जाल-१आनायः, ३जाल । कलवार-१शौणिकः, १मण्डहारकः। की सुतरी-३शणसूत्रं, कुर्मी-१कूर्मियः। ३पवित्रम् । रेह-रेणुः १क्षारः। मछली वेधी कांटा-३वडिशं, धोबी-१रजकः, निणेजकः । ३मत्खवेधनम्। चमार-चर्मकारः । दी-सौचिकः मोची-१वादकृत् , १पादुकाकारः* । जुलाहा-१तन्तुवायः, कुविन्दः । भिश्ती-२६तिः । ढर्की-३तन्त्रकाष्ठम् । मेहतर-१श्वपचः*। करघा-१वायदण्डः। डोम-१चाण्डाला। कर्मजसञ्ज्ञा ( नाम ) वर्गः। कहते जिसे हम बादशा, सम्राट उसका नाम है। राजामहीपतिभूपभूपति, नृपति नृप बहु नाम है । सम्राट-१सम्राट , १सार्वभौमः शिक्षा मन्त्री-शिक्षामन्त्री। की स्त्री-२सम्राज्ञी। कला .१कलामन्त्री। महाराज-महाराजः । स्वायत्तशासन .१स्वायत्त- राजा-राजा, नृपतिः, १तृपः, शासनमन्त्री १पार्थिवः, १भूपतिः, १भूपः, न्याय -१न्यायमन्त्री। १महीपतिः, पार्थिवः। यातायात,,-यातायातमन्त्री । रानी-२राज्ञी। डायरेक्टर-१पोलोचकः। पटरानो-२महिषी,पट्टराज्ञी । खजांची-१कोषाध्यक्षः। मन्त्री-मन्त्री, १सचिवः, १अमात्यः दरवान-१द्वारपालः। प्रधानमन्त्री (प्रीमियर)- मास्टर-१अध्यापकः, १गुरु, १प्रधानमन्त्री। शिक्षकः। " * उक्त शन्दोंके पयायमें,अन्स्यजः, वा अस्पृश्यः का प्रयोग भी होता है श्रीकोषे- : . - १ .. विद्यार्थी-१छात्रः, १शिष्यः पहरेदार-१प्रहरी। १विद्यार्थी* १अन्तेवासी। बेगार-१विष्टिः। ब्रह्मचारी-१वर्णी, ब्रह्मचारी। नौकर-१सेवकः, १दासः, १मृत्यः । पुरोहित-१पुरोधाः, १पुरोहितः । चरबाहा-१चारकः । महन्त-१मोहान्तः, १मठाधीशः। महावत-१हस्तिपकः । ज्योतिषी-१ज्यौतिषी, १दैवज्ञः, साइस-१भोगिकः। २गणका, ज्योतिषी कोचबान-१सारथिः । वैद्य १वैद्यः, १चिकित्सकः । कुली-१भारवाहः । डाक्टर चिकित्सिकः । दूत-१सन्देशहरः, १दूतः । लेडी डाक्टर-१चिकित्सिका। एलची-१रणदूतः। हकीम-१यूनानी चिकित्सकः । डाकिया-१पत्रवाहकः । साहित्यिक-१साहित्यिकः, १कविः। भेदिया-१चरः, १गुप्तचरः, वैदिक-वैदिकः। रसोइया--(पाचक ) पाचकः । मोमांसक-मीमांसकः। भण्डारी-भण्डारी। नैयायिक-नैयायिकः, १तार्किकः । कारीगर-शिल्पी, १शिल्पकारः। वैयाकरण-१व्याकरणवेत्ता शाब्दिकः। वनिया-१वणिक । धर्माधिकारी-१धर्मशास्त्री, धर्मा जहाजके व्यापारी-पोतवणिक् । व्यापारी-व्यापारी। दार्शनिक-१दार्शनिकः। बेचनेवाला-१विक्रेता। पुजारी-पूजकः, १अर्चकः। खरोदनेवाला-क्रेता। योगी-योगी, १ऋषिः। दूकानदार-१पण्यकः । मुनि-१मुनिः, १ऋषिः। दूकानदारिन-२पण्यकाः। प्राचार्य-१आचार्चः दलाल-१घटकः, १मध्यस्थः लोडर-१नेता, नायकः । कीमत-३मूल्यम् पंडा-देवलः, १देवाजीवः । किसान-१कृषकः । घाटिया-१गङ्गापुत्रः (गंगापर जमींदार-भूस्वामी १भूमिपतिः। दान लेनेवाला) ताल्लुकेदार--प्रधानभूमिपतिः । धिकारी। । . * यह शब्द आटेके कोषका हैं।

कुलवर्गः। ७ पटवारी-१ग्राम लेखलेख्यः पटेल-(मुखिया ) १मामाधीशः । भिखारी-१भिन्तुकः । उधार देनेवाला-- उत्तमः लेनेवाला-अधमर्णः पूंजी-३ मूलधनम् । मामद-लाभः। सूद--१व्याजः। नुक्सान-हानिः। ऋण-( कर्ज ) ऋणम् । सूदखोर -१कुसीदकः । गया-१गायकः। मसखरा-१ विदूषकः । नाचनेवाला-नर्तकः । भाड़-१विडम्बकः, १वहासिकः। मृदंगो-१मार्दशिकः। संपेरा-१विषवैद्यः, १अहितुण्डिकः । जादूगर-१ऐन्द्रजाली। मोना-१मोणः। बहेलिया-१लुब्धकः, भृगयुः । चिडोमार-१शाकुनिकः, १जीवान्तक कसाई-मासिकः, १वैतंसिकः । चोर-चौरः, १तस्करः, १स्तेनः । डाकू-१पाटचरः। लुटेरा-१लुण्ठकः । कैदी-१बन्दी। जेलर-कारागाराधिपतिः। १कारागारः। करोड़पति-१कोटीश्वरः। लखपति-लक्षाधीशः । जेलखाना कुल-(परिवार ) वर्गः। पूरुष पुरुष मानव मनुज स्त्री जनक जननी पिता। परिवार भ्राता बन्धु भगिनी आर्य साध्वी मां सुता ।। कुल-१परिवारः, १कुटुम्बः, १गोत्रः। दादी-२पितामही । पिता-१जनकः, १पिता। परदादी-१प्रपितामही। दादा-१पितामहः। चाचा (काका)-१पितृव्यः । परदादा-१प्रपितामहः । चाची (काकी)-२पितृव्या । माता-२माता, २जननी, २जनयित्री, भाई-भाता । २प्रसूः। भाई (बड़ा)-१अप्रजः,१ज्येष्ठनाता। .

२२ श्रीकोषे- तृजः। न . भाई (छोटा)-१कनिष्ठः । नानी-२मातामही। भाई (सगा)-१सोदरः, मामा-मातुलः। १अगभ्यः, १सहजः । मामी-२मातुलानी। सौतेला भाई-१वैमात्रेयः, १विमा- मौसा-- १मातृष्वसापतिः । मौसी-२मातृष्वसा। बहिन-२भगिनी, २स्वसा। फूफा-पितृष्वसापतिः । भौजी, भावज (भौजाई)-२प्रजा- फूत्रा (बुधा)-२पितृष्वसा । वती, भ्रातृजाया। सास-२श्वश्रूः। भतीजा-भ्रात्रीयः, १भ्रातृजः । ससुर-१श्वसुरः। स्वनी-२पत्नी, २पाणिगृहीती, शाला १श्यालः। २द्वितीया २सहधर्मिणी २भार्या, शाली-२३थालिका। श्जाया २दारा:* ममेराभाई-२मातुलेयः। स्वपति-१धवः, १प्रियः पतिः, फुफेरामाई-१पितृष्वज्ञेयः, १पितृ- १भत्तो। स्रीयः । पुत्र ( लड़का )--१पुत्रः, १तनयः, मौसेरामाई-१मातृष्वयम् १मातृ १सुतः, आत्मजः, १सूनुः, १तनूजः । भानजा-भगिनीपुत्रः। पुत्री (लड़की)-१कन्या, भानजी-२भगिनीपुत्री। २दुहिता, २सुता। बहनोई-भगिनीपतिः, १आवृत्तः पोता-पौत्रः। दामाद-१जामाता। परपोता-१प्रपौत्रः। नाती-१नता। देवर-१देवा, १देवरः। नादिन-२नप्त्री। देवरानी-२देवरपत्नी । परनातो-१प्रणप्ता। जेठ-१वत्यप्रजः। परनातिन-२प्रणत्री। जेठानी-२पत्यग्रजा। एक वंशके व्यक्ति-१सगोत्रः, पतोहू-२पुत्रवधूः । १स्वजनः, १बन्धुः, १बान्धवः । नातेदार-१सम्बन्धी। परिचित-१परिचितः। नाना-माताहः। मित्र-३मित्रं, १सखा, १सुहृद् । * पुंल्लिा बहुवचनान्त। ध्वस्त्रीयः। . , : , देहवर्गः। घनिष्ठ-१निकटतमः १अन्तरगः । सुहागिन-२पतिवती, २सौभाग्यवती, सखी-सहचरी, २सखी, आलिः । २सुभगा। दासी-२चेटी। राड़-२विधवा, २रण्डा। बहू-२वधूटिका, २वधूः। छिनार-२कुलटा, २ पुंश्चली। सती-२सती, २सावी, पतिव्रता वेश्या-गणिका, २वेश्या, २एक पत्नी। २रूपाजीवा। ७ . देह शरीर वर्गः। तनुदेह विग्रहमुर्तिकायः अङ्ग इन्द्रिय मस्तकम् । कच केश चूड़ा अलक बर्वर भाल वेणी लोचनम् । श्रुति अक्षि नक्का रोम भृकुटी पक्ष्म आस्य दर्शनम् । चक्षुः नयन भ्रूः अश्रु श्रोत्रम् वक्त्र वदनं आननम् ।। जिह्वा रसज्ञा ओष्ठ काकुद रदन दन्त कनीनिका । गज कण्ठ नासा पास्य ग्रीवा गण्ड नासा दाढिका ।। भुजबाहु अंसः कक्ष कूपर हस्त कर पञ्चागुलम् । नख नखर मुष्टिः प्रसूति चलुकः मुछटी चतुराङ्गलम् देह-३शरीरं, १कायः, १देहः,२मूर्तिः, खोपड़ी-१कपालः, १खपरः । २ तनूः १ विमहः, बाल-कचः, १ केशः, रशिरोरुहः । ३कलेवरम् । (पके हेए)-३पलितम् , अङ्ग-१अवयबः, ३अजम् . ३गात्रम् । १श्वेतकचः। इन्द्रिय-३इन्द्रियं, ३करणं, १गौः। बाल-(घुघुराने)-१अलकः, मन-३चित्त, चेतः, ३हृदयं, ३स्वान्तं, ३मानसं ३मनः । चुटिया- -२शिखा, २चूडा। बुद्धि-२बुद्धिः, २मनीषा, धिषणा, जटा-२जटा, २शटा। २षीः, २प्रज्ञा २शेमुषी, २मतिः। काकुल (पटिया)-१वर्वरः २कबरी, अहङ्कार-१दर्पः, १ अहङ्कारः । चोटी (स्त्रियोंकी)-वेणी, शिर-३शिरः ३शीर्षम् । माथा-३मस्तकम्। मांग-१सीमन्तः २ तनुः, , . . , २ प्रवेणी श्रीकोषे- . . ललाट-१भालः, ललाटम् , गला-कण्ठः। ३अलिकम् । गर्दन-२ग्रीवा, २कन्धरा । त्यौरी-२मस्तवलिः,२मस्तकरेखा। घांटी-२कृकाटिका । भौंहे-२ भ्रूः, २मृकुटी। कंधा-१अंसः, स्कन्धः। आंख-३अक्षि, ३लोचनं, ३नेत्रम् , कांख-१कक्षः, ३बाहुमूलम् । ३नयनम् , इचक्षुः। बांह-भुजः, १बाहु, बरौनी (मांखकी) ३ पक्ष्म कोहनी-१कफोणिः, ३कूपरः । श्रांखको पुतली-२तारका, कलाई-१प्रकोष्ठः। २कनी निका। पहुंचा-१मणिबन्धः। कोर ( कनखी)- हाथ-१करः, १पाणिः, १हस्तः । १कटाक्षः, ३अपाङ्गदर्शनम् अंगुरी-१अङ्गुलिः। आंधु-३ अश्रु, ३अस्त्रम् । अंगूठा-१अङ्गुष्ठः । कान-१कर्णः, १श्रषणः, २श्रुतिः, अंगूठेके पासकी अंगुली- २ तर्जनी। ३श्रोत्रम् । कनपटी-१गण्डस्थकः । उसके बादकी-२मध्यमा नाक-२नासिका, २नक्का २अनामिका। मुंह-३आननं, ३वक्त्रं, ३मुख, २कनिष्ठिका। ३वदनं, आस्यम् । हथेली-३करतलम् , ३पाणितलम् । मोठ-ओष्ठः, परदनच्छदः,१अधरः पजा-३पश्चागुलम् । जीम-३रसज्ञा, रसना, २जिह्वा । नह-नखरः, १कररुहः, १नखः । लार-स्यन्दिनी । बित्ता-रवितस्तिः। तालु-३ताल, काकुदम् । मुट्ठी-२मुष्टिः । दांत-परदनः, १दशनः, १दन्तः । पसर-१प्रसूतिः। मसूढ़ा-३दन्तमूलम् । चुल्लू-१चुलुकः । गाल-१कपोल:, ९गण्डः । अञ्जुली-२अजुलिः। दाढ़ी-२दाढिका, चुटको- मोछ-३श्मश्रु चिकोटी-३नखक्षतम् । उर वक्ष कुच चुक कुचाग्रं क्रोड पृष्ठिः पौरुषम् । गर्भण्ड कूवर जठर रीढक कुब्ज कूवर मेहनम् ॥ " . - २५ : " कलेजा-३बुक्कम् । देहवर्गः। श्रोणी नितम्बः शिश्न मुष्कः योनि च्युति बुरि पिण्डिका । अरु जघन गुद जानु पाणिः पाद चरणं वस्नसा ॥ पादतल कङ्काल बुक्कं रस गोर्द प्लीहा शोणितम् । अन्नं वपा औ अस्थि धमनी वीर्य मांस लोहितम् ।। तिल माष धातुः चमै मज्जा स्वेद कफ औ दूषिका । शिंघाण मूत्रं औ पुरीषं प्रस्राव मल विष्ठादिकम् ।। छाती-३वक्षः, ३ठरः कंकाल-अस्थिपञ्जरः, १कङ्कालः । चूची-१स्तनः, १कुचः उरोजः । दिमाग-३मस्तिष्कम् । चूचांका अप्रभाग-३चूचुकं, ३कुचाप्रम् । पिलही-१यकृत, २प्लीहा (हिन्दीमें गोद-१अङ्कः, १क्रोडः। लीवर भी कहते हैं) पीठ-३पृष्ठम् , १पृष्ठदेशः। हड्डी-३अस्थि रीढ़-१पृष्ठवंशः। अतड़ी-३पुरीतत् , ३अन्त्रम् कूबड़-१कुब्जः। शिरा-२स्नायुः, २वस्नसा। पेट-३जठरं, ३उदरम्। चरवी-१मेद:- २वसा। तोंद-३तुन्दं, गर्भण्डः नाड़ी-२धमनी, २नाडी। कमर-२श्रोणिः, २कटिः १नितम्बः । मांस-३पिशितं, ३मांसं मूत्रेन्द्रिय (पुरुषको) पशिश्नः । ३आमिषम् । अण्डकोष-१मुष्कः, १वृषणः । वीर्य-३शुक्र, ३वीर्यम् । मूत्रेन्द्रिय (स्त्रियोंकी) २योनिः, लोहू-३लोहितं, ३शोणितम् , ३रकं ३भगं, २च्युतिः। १रुधिरः गर्भाशय-१गर्भाशयः, १जरायुः । मज्जा-२मज्जा। गुप्तेन्द्रिय-३गुदं, ३अपानम् । जांघ-१जधा, १ऊरुः, ३जघनम् । धातु-धातुः। टेहुना-१जानुः, १अष्ठीवत् । चमड़ा-२त्वक् , ३चर्म । पैरकी गांठ (घुटी)-१गुल्फः मस्सा-१माषः । तिल-तिलः । पांव-पाजः, १चरमः, १अमिः । थूक-३निष्ठीवनम् । तलवा-३पादतलम् । नाकका मैल-१शिघाणः। पड़ी-१पाणिः श्रीकोषे- - " ७ " " कर्णका मैल-३कर्णपिञ्जरम् । विष्टा-२विष्ठा, ३पुरीषम् । श्रांख दूधिका। पेशाब करना-२लघुशङ्का । पसीना-१प्रस्वेदः। पाखाने जाना-२पुरीषक्रिया। बल्गम-१कफः, १श्लेष्मा। पेशाब घर-मूत्रस्थानम् । पेशाव (भूत)-प्रस्तावः, मूत्रम् पाखाना (संडास) ३पुरीषस्थान वस्त्र (कपडा) वगः । अंशुक वसन कौशेय और्णम् चीर क्षौमं टोपिका। पट चैल शा कपड़ा-२वस्त्रं, ३चैलं, द (मफलर)-कण्ठांशुक ३ अंशुकं, ३वसनम् । ता--१अङ्गरक्षकः। (सूती) ३कार्पासम् । -१कञ्चुकः। (रेशमो) ३कौशेयम् । कोट-३कोटम् । (ऊनी)-और्णम् । वास्कट-अर्धकोटम् ३ऊर्णामयम् । नेकटाई-कण्ठपटिका। (अच्छा)-३सुचलम् । जामा-यामः। चिथड़ा-१कन्या। धोती-३परिधानीयम् । पाकेट (जेव)-१स्यूतः किनारा-२दशा। बटन-३ बटनम् , १वीटिका। धारी-२घटी। पगड़ी-शिरोवेष्टनम् । काछ-१कच्छः। साफा-२उष्णीशम् । लंगोटा-३कौपीनम् । टोप-२शीर्षण्यम् । चद्दर-३उत्तरीयम् , १प्रावारः। टोपी-२उष्णीशिका। (रेशमी) ३ क्षौम, पैरका मोजा-२पादत्राणवस्त्रम् । ३ दुकुलम् । खड़ाउन-२पादुका। भगौंछा-१अङ्गोच्छः, ३उपवस्त्रम् जूता-३उपानत् । तौलिया-३उपवस्त्रम् । लहंगा-३चण्डतकम् । रूमाल-३करचैलम् साया-३अन्तर्वस्त्रम् । हाथ का मोजा-३हस्तत्राणवनम् साड़ी-२शाटी। " पेण्ट-१यामः।

भाभूषणवर्गः। चुंदरी-३चोरी। घंघट-३अवगुण्ठनम् । सिल्ककी ओढ़नी-३सुचीरम् । रजाई-३तूलपटी, नीशारः । साड़ी-२कौशेयाशाटी। दुपट्टा-२द्विपटी। धोतीकी गांठ-(औरतोंको) कम्बल-३ऊर्णवस्त्रम् । २नीवी, १वसनप्रन्धिः । बिछौना-३आस्तरणम् , ३ास्तरः। चोली-२कञ्चुकी। तोषक-२तूलिका। कुर्ती-२अङ्गरक्षिका । तकिया-डपधानम् , १शिरोधानी। बुर्का-१निचोलः, १प्रच्छदपटः। मशहरी-२मशकहरी । आभूषण (गहना ) वर्गः। भूषण मुकुट माला वलय अवतंस वाली कुण्डलम् । आदश कज्जल चूर्ण कात्री हार लाक्षा कङ्कणम् ।। गहना-आभूषणं, अलङ्कारः, बंगुरो-२बङ्गुरिका । ३भामरणम् । कड़ा-३कटकः, ३वलयः । मुकुट-३किरीट, मुकुटः। ककना-३कङ्कणम् । चूड़ामणि-३शिरोरत्नं, पहुँची-२पञ्चका। २चूडामणिः। अंगूठी-२ऊर्मिका, १अङ्गुलीयमम् । बेदा-२पारितथ्या। भारसी-३हस्ताभरणम् । कुण्डलम्-३कुण्डलम् । करधनी (स्त्रीकी)-२रसना, बाली-२वाली। २काची। तरकी-१कर्णावतंसः, २कर्णिका । (पुरुषकी)-२शृङ्खला । नभ-३नासिकाभरणम् । पैरका कड़ा-१हंसकः, हार-१हारः,२माला, २सक। १पादकण्टकः। ब्रास्लेट -१हारः, २माला, झांझ-२किङ्किणी,। कण्ठा-३वयकम् , २कण्ठभूषा । धुंघुरू-२क्षुद्रघण्टिका। बाजू (विजावट)-३केयूर, पायजेब-१नूपुरः, १मजीरः । अगदम् । छागल-१पदचारुकः । चूड़ी-१कम्बुः, १शखः। पैरका छल्ला-१चरणरागी। " २८ श्रीको- पैरका बिछिया-१पदरजकः । महावर-२लाक्षा, अलक्तकम् । मेहदी-२नखरञ्जिका, २मेदिका । सुर्मा-३स्रोतोञ्जनम् । काजल -३कज्जलम् । सीसा (आइना)-१दर्पणः, १मुकुरः, कंघो-२कङ्कतिका। अबीर-३अबीरम् । गुलाल-३गुलालम् । बुक्का-१चोवा, १पिष्टातः, १पटवासका। चन्दन-३चन्दनम् । खुश्बुदार चूर्ण-३सुरभिचूर्णम् उबटन-३उद्वर्तनम् । धातु ( सोना चांदी आदि ) वर्गः । तपनीय कनकं स्वर्ण अथवा हेम हाटक काञ्चनम् । रङ्ग रजतं यसद शीशं औ लोह तुत्थं कांस्यकम् ।। सिन्दूर गन्धक इङ्गुलं हरिताल पारद अभ्रकम । चुम्बक शिलाजतु पित्तलं अय स्वर्णमाक्षिक गैरिकम् ॥ रेडियम-रेडियमः। | सिन्दूर--१रक्तरेणुः, ३सिन्दूरम् । सोना-३वस्वर्ण, ३सुवर्ण, ३कनके, शिलाजीत-३शिलाजतु । ३हिरण्यं ३हेम, पहाटकं, गन्धक-१गन्धकः, १गन्धरसः। ३काश्चनं, ३तपनीयम् । हिंगुल-३हिडलं, ३इङगुलम् । चांदी-रजतं' ३रूप्यम् , हरताल-३हरितालम् । ताम्बा-३ताम्रकं, ३शुरुवं, ३वरिष्ठः अभरख-३अभ्रं, अभ्रकम् । रोगा-२रङ्गं, ३वङ्गं, ३त्रपु । फिटकिरी-२स्फुटी, २स्फुटिका जस्ता-रीतिहेतुः, ३यसदम् । पारा-१पारदः। सोसा-३शीशम् । गेरू-गैरिकम् । लोहा-अयः, ३लोहम् । चुम्बक-१चुम्बकः। तूतिया-३तुत्थं, ३वितुन्नकम् । कांसा-३कांस्यकम् । थोरियम्-थोरियमः }(१) पीतल-रीतिः, ३पित्तलम् । योनिम-यूरेनिमः। (१) ये धातु परमाणुवमके काममें आती हैं ।

रंगवर्गः। . रत्न और उपरत्न वर्ग। मणि रत्न हीरक वजू मरकत नीलमुक्ता दूरजम् । सह पद्मराग प्रवाल कांचः पुष्परागः मौक्तिकम् ।। जौहरी-१रस्नपरीक्षकः। पुखराज-१पुष्परागः । जवाहरात्-१रत्नराशिः, १मणिराशिः। गोमेद-१गोमेद।। रत्न-१मणिः, ३रत्नम् । लहसुनिया-३वैदूर्यम् । लाल-लालः। मोती- २मुक्ता, ३मौक्तिकम् । हीरा-३वज्रः, ३हीरकः। मंगा-१प्रवालः, १विद्रुमः । पन्ना-३मरकतं, ३गारुत्मतम् । चुन्नो-३हीरकखण्डम् । माणिक-३माणिक्यं, १पद्मरागः । कोहनूर होरा-१प्रकाशपुज नोलम्-३इन्द्रनीलं, ३नीलम् । द्योतकः वजः। . रङ्ग वर्ग: श्वेत कपिलः हरित नीलः औ पोवपाटल धूमलः । रक्तहरिणः चित्रकर्बर कल्माष श्याम: उज्ज्वलः॥ रङ्ग-१वर्णः, १रागः। । चितकबरा-१चित्रः पीला-१पीतः, १हरिद्राभः । भूरा-१कल्माषः, १करः । हरा-पहरितः, १पकाशः, १हरित् । -१कपिलः,१पिशाः, १पिंगः। काला--१कृष्णः, १श्यामः । सफेद-१श्वेतः, १शुक्लः, १धवल: गुलाबी-१पाटलः। १श्वेतरक्तकः । गौरः। १शुभ्रः १सितः, नीला-३नीलः। १वलक्षः, १उज्ज्वलः। लाल-लोहितः, परतः । बादशाहपसन्द-१विचित्रः। पाण्डु-हरिणः,१पाण्डुरः, १पाण्डुः। कपूरी-१कर्पूरकः। सिन्दुरिया-१शोणः । १कोकनदच्छविः। भंटई-नीलः । खसखसो-१बहुवर्णः । * सम्राट जार्जके मुकुटमें जड़ा हुआ है। - मटमैला-१धूसरः श्रीकोषे- - पात्र (वर्तन ) वर्गः। : भाजन मणिक स्थाली घटः चरु भाण्ड कर्पर तप्तिका । कंकमुख दर्विः कटोरा औ कुण्ड नन्दा हण्डिका । बतन-भाण्ड, ३भाजनं, २पात्रम् कसोरा-१कचोरः । परात--३वृहस्थालम् । मट्टीका घड़ा-३मृत्भाण्डम् । हण्डा-१अलिअरः, १मणिकः। सुराही-जलशीतिका। बटुत्रा-२स्थाली, ढकनी-२ढक्कणी बघोना-२पातिली । १चरुः । परई-२पालिका। कड़ाहो-स्वेदनी, १कन्दुः । पुरवा-३मृत्तिकापानपत्रम् । कड़ाहा-१कटाहा, १कपरः। १क्वणनः तवा-१तापः, ३ऋषीजम् । दाद-आलिअरः । नन्दा। तई-१तप्तिका। हड़िया-२हण्डिका। भाड़-भ्रष्ट्राः। डाला-३ढल्लकम्। भट्टी-२भ्राष्टिका। टोकरी-१करण्डः। कलछ्ली-दविः, १कडच्छदकः । फूलडाली-१पुष्पकरण्डः। सड़ली-१कङ्कमुखः । बाल्टी-२जलधरी: चिमटा-१सन्देशकः। पोकदान-२पतग्रही। थाली-२स्थालम् । पेटी (ट्रङ्क)-२मञ्जूषा। कठौती-२काष्ठपात्री। बोरा-गोणी, रशाणी। घड़ा-१घटः, १कलशः । थैलो-२भस्त्रिका। झारी-२जकपात्री। लोटा-३जलपात्रम् । बेग-३वस्त्रकोशं, ३करोटकम् । लुटिया-३ जळपात्री। मनोबेग-२चर्मरत्नभस्त्रिका । गडुवा-१गड्डुकः। कुप्पी-२कूपी। गिलास-३पानपात्रम् कुप्पा-१कूपकः। कटोरा-१कटोरा। शीशा-२कांचकूपिका । कटोरी-२कटोरिका। बोतल-१कांचकूपकः। . थैला-१स्यूतः।

भोजनवर्गः। ३१ अन्न वर्गः। गोधूम मसूर चणक चक्रक माष कोद्रव तूबरी । यव मुद्ग सर्षप राजिका तिल आढकी अणु वर्जरी ॥ गेहूं-गोधूमः, १सुमनः। सांवा-१श्यामकः। जव-१यवः, १शितशूतकः। कोदों-१कोद्रवः १कोरदूषः। अरहर-२ आढकी। ककुनी (हंगुनो)-१प्रियङ्गुः । गल्ला-३अन्नम्। मकई-१मकायः, १महाकायः । अन्न-३अन्नम्। ज्वारा-१यावनालः । धान-धान्यम्। मडुरा-१मडकः। (साठी)-१षष्ठिकः । सरसों-(सफेद) सिद्धार्थः। बाजरा-२वर्जरी तिल-तिलः। सरसों-१स पः। तीसी-१अतसी, २क्षुमा । मटर-१हरेणुः। राई-राजिका। मूंग- मुद्गः। बर-२वस्त्ररजनी, ३कौसुम्भम् । मोथी-१मकुठकः। बाल (भुटा) २धान्यमञ्जरी। तूहर-२तूबरी, रतुवरी । छीमो-२शिम्बा, २शमी। चना-१चणकः । उड़द-१माषः, १जीर्णकरः। टूड़-१तुण्डः शस्यशूकम् । कुल्थी-१कुलत्यः, १चक्रकः । डण्ठल-२नाडी, ३नालम् । मसूर-मसूरः, १मजल्यकः। भूसी-१तुषः, ३बुषम् । .. . .. . . भोजन वर्गः। पक्वान्न तन्दुल दालि ओदन सूप्य यूष: पोलिका । पिष्टान्न पर्पटयूप लोपत्री शष्कुली करपट्टिका ।। वटी वटकः घोलवटकः पक्ववाटिका वेसनम् । पत्रवटिका चूर्ण सक्तुः मल्लपूपः तेमनम् ।। पकवान-३पक्वान्नम् । पाटा (जत्रका) चिक्कसः । आटा-३पिष्टं, ३पिष्टान्नम् । चांवल-३तन्दुलं, ३तण्डुलम् । (गेहूंका) ३गोधूमचूर्णम् चांवल (पका हुमा) १ओदनम् , श्रीकोषे-- " - .. दाल-श्दालीः। (पकी हुई) ३सूपम् जूस-यूषः । मांड-३मण्डम् । खिचड़ी-१खेवरः। लोई-२लोपत्री। रोट -२करपाटिका। सचू-१सक्तुः। चपाती-१चर्पटी। फुलकी-२पोलिका । रोटी-२रोटकम् (हाथी आदिके लिए)। पूड़ी-शष्कुली। फूट्टाकी पूड़ी-पूर्णपोलिका । बाटी (लिट्टी) २ अङ्गारकर्कटी। पूश्रा-पूपः, १अपूपः। मालपूमा-१मल्लपूपः। कचौड़ी-२कर्चरिका। पिट्ठो-२पिष्टिका। बड़ा-१वटकः। बड़ो-२वटी दही बड़ा-१घोलवटकः । कोहड़ौरी-१कूष्माण्डवटिका । पकौड़ी-१पक्ववटिका। पापड़-१पर्पटः। बेसन-३ बेसनम् । फुलौड़ी-२पुष्पवटी। खड़बड़ी-रखण्डवटी। बफौरी-२बाध्वबटी। कचालू-पक्वालुः । धुत्रांस-२धूमस। पानबड़ा-२पत्र वटीका। रिकवछ-१अलीजमत्स्यः । शाक-तरकारीशाकः । कढ़ो-२बेसनी। भाजी-२भाजी । भर्ता-भरित्रम् । दाल तरकारी वगैरह- ३व्यञ्जनम्। तिमना-३तेमनम् । सगता-२शाकदालिः। निमोना-३हरेणु-व्यञ्जनम् । पीड़ी-२पिण्डी। लवरी-लेहिका। चिवड़ा-१चिपिटः। लाबा-१लाजाः। भूजा-भरुजः। फरूही-१पृथुकः। घुघुनी-१कुल्माषः। उम्बी-२लुम्बिका। होरहा -१होत्मकः । सेव-सेवम् ।

२ खाण्डवादिवर्गः ३३ मिठाई वर्गः मिष्टान्न मोदक शर्करा गुड़ दुग्ध क्षीरं छच्छिका । दधि तक मधुशीर्षक पयः घृतपूर पायस लप्सिका। मिठाई-३मिष्ठान्नम् । मनरला-१इन्दुरसा । गुड़-१गुडः। खाजा-मधुशीर्षकः । चीनो-(शर्करा)-२ शर्करा, सिता गुड़धनियां-१गुडधानाः । मिश्री-३ सितोपला, २ सहा । खोर-३पायसम् । खांड-१खण्डः । लप्सी-२ यवागू: २ लप्सिका। राब-३फणितम् , २मत्स्यण्डी। हलवा--१संयावः। लड्डू-३मोदकम् । दूध-३दुग्धं, ३क्षीरं, ३ पयः । जलेवी-२कुण्डलिनी। मलाई-२सन्तानिका। सकलपारा (मीठा) २ शर्करापालिका दही-३ दधि । गुलाबजामुन-२दुग्धपूपिका । शिखरन-२शिखरा, २रसाला पेड़ा-१पिण्डः। मट्ठा-३ तक्रम् बर्फी-दौग्धिका। लसी-सरः। गुझिया-२, छाँछ-२छच्छिका। घेबर-१घृतपूरः । घी-३वृतं, आज्यं, १सपिः, मोतीचूर-मुक्तामोदकः मक्खन-३नवनीतम् । तेल---३तैलं, १स्नेहः । कडुआ तेल ३कटुतैलम् । तैल वर्ग। गर्जनका तेल-२करालतलम् । मिट्टीका तेल-३खनिजतकम् । 490 खाण्डवादि वर्ग: ( अचारमुरब्बाका वर्ग) मुरब्बा१खाण्डवः। चटनी-१अवदंशः। प्रचार-१आचारः। काली-३कालिकम् । ३ श्रीको श्रीकोषे- AN चाय-२कामरूपिका*। | काफी-२हषदा विजयादि वर्गः। (नशा वर्गः) मांग-विजया। शराब (अंगूरकी)-३द्राक्षामद्यम् । गांजा-२तरिता। तम्बाकू-१तमाखुः । अफीम-१ अहि फेनः। वीड़ी-लघुतमालकाका ताड़ी-३तारिकम् । मांस-३पिशितं, ३मांसम् । शराब...२मदिरा, २ सुरा, ३मद्यम् । कोकीन -३श्वेतमयम् । इन्धन वर्ग: लकड़ी (जलानेकी)-३इन्धनम् । कण्डा-१करण्डः। कोयला-१लाहलः, १कोकिलः । उपरो-३वपलम् । गोहरा--३गोहलम् । करसी-३करीषम् । गोइठा-१गोविट । पत्थरका कोयला-१प्रस्तर-लाहल: रस ( स्वाद ) वर्गः मोठा-१मधुरः । खट्टा-१खट्टः तीता-१तिक्तः। ९कषायः। कडुमा-१कटुः। नमकीन-१लवणीयः। चट-पटा-१मधुरतिक्तः । | कषैला- - शाक ( तरकारी वगैरह ) वर्गः शाक आलुः पीतपुष्पा शिम्बि शिम्बा भण्टिका कोशातकी वार्ताकु भेण्डा औल्ल तुम्बी पोतका । * आसामको संस्कृतमें कामरूप कहते हैं और चाय प्रथम भारतमें आसा. ममें ही पैदा हुई अतः, 'कामरूपिका भानामकी पैदाइशसे ।

वेशवाहवर्गः। ३५ , शङ्खालु गोभी लशुन सूरण कारवेल्लं वास्तुकम् । रक्तालु क्षुरिका पुदिन पाण्डुक मे वनाद बृहत्फलप् ॥ शाक (तरकारी)-१शाकः । पोई-२पोतका, पोतकी। श्रालु-१आलुः ३आलुकम् । लहसुन-लहशुना, १यवनेष्टः । भण्टा-२भण्टाकी, २मण्टिका, प्याज-१पलाण्डः, १मुखदूषकः । १वातोकुः। खोवा-२शीतशिवा, शमिश्रेया। परवल-पाण्डुकः, १पटोलः । २पालक्या, क्षुरिका। नेनुआं-२महाकोशातकी ! चौराई.---१मेघनादः, तण्डुलीयः भिण्डो-२कोशातकी, रमेण्डा । कोहड़ा-१कूष्माण्डः, ३बृहत्फलम् । वथुमा-३वास्तुकम् , ३वस्तूकम् । लौकी-२अलावुः २तुम्बी : जलसुर-३ चन्द्रसूरं, २चन्द्रिका । सितलोको-२कटुतुम्बी। मेथीका साग-१ मेथिकाशाकः । सतपुतिया-२सप्तपुत्रिका। बनेका साग-१चणकशाकः। करैला-३कटिल्लं, ३कारवेल्लम् । पुदिना-पुदिनः, १व्यञ्जनः । खेखला-२पीतपुष्पा, २कर्कोटकी । प्रोल-१कण्डूलः, ओजः, १सुरणः। कुंदरू-१बुद्धिनाशकः । रतालू-१रक्तालुः। गोभी-२गोभी २ गोजिह्वा । सताल-सप्तालुः। (फल)-२पुष्पगोभी। कटहल-१पनसः। पत्तेदार ) २पत्रगोभी ।- बंडा-१शङ्खालुः। किवांच-२कण्डूला, कपिकच्छूः । अरवी-२आलुकी। लेम-२शिम्बी, रशिमित्रः। केला( कच्चा)-३अपक्वकदली। वेशवार (मसालेका) वर्गः। अजमोदिका मरिच उपस्कर वेशवारः जीरकम । धान्याक कटुवीरा हरिद्रा हिङ्गु शुण्ठी धान्यकम् ।। एला त्रुटः कुश्ची कुलज पथ्या बहेडुः मधुरिका । सैन्धव लवण पत्र लवंगः चन्द्रबाला मेथिका ॥ मसाला-१वेशवारः, १उपस्करः । अजवाइन-अजमोदिका। गरम मसाला-१पकवेशवारः । धनियां-धान्यकं ३वान्याकम् । जीरा-३जरणं, ३जीरकम् । सौंफ-२मधुरिका, २वातपुष्पा ।

३६ भीकोषे- " ब कालीमिर्च-३ बल्लिज, हींग-३ राम ठं, १ हिडः । ३ मरिचम्। मंगरैला-१ कुश्ची, १ उपकुञ्ची। २ कटुबीरा। हलदी-२ हरिद्रा, २ काश्ची। कुलअन-१ तीक्ष्णमूल, कुलजः । नमक (नोन)-३लवणं, ३लोणकम् । मेथी-२ मेथिका। लौग-१ लवङ्गः, १ देवकुसुमः । (संधा)-३ सैन्धवम् । लायची...२ एला २ चन्द्रबाला । राई-२ राजिका। छोटी लायची-२ त्रुटिः, २ निष्कुटिः हरे-२ हरीतकी, २ पथ्या। सोठ-१ शुण्ठी, ३ नागरम् । बहेड़ा-१ बहेडः, विभीतकः । तेजपात-२ तेजपत्रम् । आंवला-२ आमलकी, ३ धात्रीफलम्। . . me , तरुवर्गः (पेड़ोंके नाम) तर वृक्ष वट पिप्पल खदिर शाखोट किंशुक जुलः । बब्बूल चन्दन वल्कलः औ भूर्ज केशर फेनिलः ।। पेड़ (रुख)-१ वृक्षः, १ महीरुहः, बड़-१वटः, न्यग्रोधः । १शाखी, १विठपी, तरुः, १पादपः पीपर-१अश्वत्यः, १ पिप्पलः । पेड़को छाल-१ गच्छः। सेमर-१स्थिरायुः, १शाल्मलिः । पेड़ की गोंद-१ सारः, २ मज्जा, पाकड़-१ प्लथः, २ पर्कटी। १निर्यासः। पलाश १ किंशुकः, १ पलाशः। छाल--२ वक, २ छल्ली। शीशो-२ शिंशपा, २ पिच्छिला। पेड़का बकला-३वल्कः, १वल्कलः । सखुमा-१ सालः, १ अर्जरसः । खोडर--१ कोटरः। सिहोर-१ शाखोटः, १पीतफलः । शोर-२ शिफा, २ जटा। और-१ दन्तधावनः, १ खदिरः। वरोह-अवरोहः, १प्ररोहः छितवन-शारदः, सप्तपर्णः । ,, जड़-३ मूलं, १ बुध्नः । भोजपत्र-भूर्जः, १बहुपुटः डाली-२शाखा। नीम-१पारिभद्रः, १निम्बः । ""धड़-१स्कन्धः, १प्रकाराडा कचनार- कोविदारः; १कुद्दाकः । धतूर-१चत्तूरः। अगस्त-१अगस्त्यः, १मुनिद्रुमः मदार-१ मन्दारः, १ अर्कः। अशोक-१अशोकः, १वजुलः । " " , .

३७ पुष्पवर्गः। देवदारु-१देवदारुः, ३ किलिमम् । , केशर-केशरः, १बकुलः । चन्दन-३चन्दनं, ३मलयजम् । बबूल-१पीतपुष्पकः, १ बब्बूलः । लाल-३ रजनं, रक्त अङ्कोल:--अकोलः १विकोचकः । चन्दनम् । रीठा-१ अरिष्टः, १ फेनिलः । 4 - " . पुष्प (फूल ) वर्गः। लज्जालु शतपत्री जपा बन्धूक चम्पक मल्लिका । कल्हार सुमना कुन्द गणिका यूथिका शेफालिका ॥ इन्दीवरं अरविन्द कमलं पद्म पुष्कर पंकजम् । तामरस शतपत्र नलिनं सारसं सरसीरुहम् ।। फूल-३पुष्पं, ३ कुसुमं, २सुमनसः* दुपहरिया-१बन्धुजीवः, १वन्धूकः सुमम् । केवड़ा-२क्रेत की, ३ केतकम् । चम्पा-२ चम्पा,१चम्पकः, केशर-केशरः, नागकेशरः। १ चाम्पेयः। अडहुल-ओरडः, २ जपा। कमल-३कमलं ३पद्म, ३नलिनं, कुन्द-१कुन्दः, १माध्यः । ३पङ्केरुद,सरोजं,अरविन्द, ३पङ्कजम् कनइल-१करवीरः, १शतप्रासः। ,, (लाल)-कोकदम् । (सफेद)-३पुण्डरीकम् , (लाल)-१रक्तकरवीरः। (नीला)-३इन्दीवरम् । कचनार-१कोविदारः। कुंई-३सौगन्धिकं, ३ कल्हारम् । मौलिसरी-१बकुलः, १केशरः। गुलाब-२शतपत्री, पुष्पराजः अशोक-१ अशोकः। चमेली-२सुमना, २मालती, रजातिः गेंदा-२पद्मचारिणी । वेला-२मस्लिका, २भूपदी । छुईमुई-१लज्जालुः । नेवारी--२शेफालिका, २सुवहा । रात्रिगन्धा-२रात्रिगन्धा । बासम्ती-श्वासन्ती, २प्रहसन्ती । नरगिश-२नरगिशा । जूही-यूथिका, २ पुष्पगन्धा । गुलमेहदी-३प्रावृटपुष्पम् । (पीली) २स्वर्णपुष्पिका, सिंघाड़ा-१शृङ्गारहारः। " . * सुमनः २नित्यबहुवचनान्त ।

श्रीकोषे- : CD फल वर्गः। चल चूत आम्र रसाल जम्बू पेरुकं चामृत फलम् । गुडपुष्प कदली लकुच क्षीरी बिल्व डहु बदरीफलम् । अञ्जीर द्राक्षा नारिकेलः सेव द्राक्षा गोस्तनी। खरर अक्षोटक तथा वादाम तूदं दाडिमी ।। करमर्द शृङ्गाटक नपुंस, कन्दखबूंजः स्फुटी। जम्बीर चिना कर्मरंङ्ग कृष्णबीजं कर्कटी। शहतूत-३तूदम्। माम-आम्रः, १चूतः, १२सालः, काबुली शरदा-३श्वेतफळम् । , (खुशबूदार)-१सहकारः । नीबू-नीम्बूकम् । जामुन-जम्बूः जमोरा-१जम्बीरः, १दन्तशठः। ममरूद-३अमृतफल, पेरुकम् । अमड़ा-१आम्रातकः । फरेन-२राजजम्बूः, १फलेन्द्रः । इमलो-२चिश्चा, अम्लिका। कटहलका कोना-१कोषः। कथ-१कपित्थः। महुश्रा-१मधूकः, १गुडपुष्पः। कमरख-~-३नागलले, ३कर्मराकम् । कमरख-३बुस्तम् । करौंदा--१करमर्दः । बड़हर-१लकुचः, १डहुः । बेल-३वित्वं, ३श्रीफलम् । खीरा-३वर्षोद्भवं, ३त्रपुंसम् । बैर-३बदरीफलं, २बदरी। ककड़ी-२ककटी। गूलर-उदुम्बरः, १जन्तुफलः । फूट-२स्फुटी, २स्फुटिः। मनार-१दाडिमः, १दन्तबीजा। खरबूजा-१खबूंजः, दशाङ्गुलः । केला-२कदली, ३रम्भाफलम् । तरबूज-तर्वजः, ३कृष्णबीजम् । शरीफा-सीताफलं, ३शीतफलम् । १कन्दः। खिन्नी-राजादनी, क्षीरी । सुथनी-१पिण्डालुः, २कन्दगुडचिः । पपीता-३एरण्डं, ३चिमिटम् सिघाड़ा-१शृङ्गाटकः, १त्रिकोणः । गाजर-१गृञ्जनः, गाजरः। फरुषा-१मृदुफल: १परुषकः। नासपाती-३रुचिफलं, ३अमृताहम् । मूली-३मूलकं, ३हस्तिदन्तकम् । सेव-सेवं, ३बदरम्। चुकन्दर-चुकन्दरी। अंगूर-२द्राक्षा, २मधुरसा। अादी-३आद्रकम् । नारंगी-१नारङ्गः, १नारङ्गकः। मूमफली-२मण्डपी। . , , .

३६ . , . पशुवर्गः। मेवावर्गः मेवा-नीरसफलानि, शुष्कफलानि । नारियल-१नारिकेलः । अखरोट---१अक्षोटकः । मञ्जीर-३अञ्जीरम् । दाख-१द्राक्षा, २मधुरसा। चिरौंजी-१प्रियालः, १मुनिवरकभः । किममिस-क्षुद्रद्राक्षा, २निर्जीजा। खजूर-खर्जरः। बादाम-३नेत्रफलं, ३बादामम् । छोहाडा-२मधुरसा। पिस्ता-३चारुफलं, निकोचकम् । काजू-२काजुका। वंशादिवर्ग:। (बांस ) घास, तृणों के नाम तृण शष्प नादेयी कुशः इक्षु वेत्रः दुग्धिका । नड़ तूल तेजन मुञ्ज शर पिचु कांस वेणुः कच्चिका ।। बांस-वंशः, वेणुः, १तृणध्वजः पोर-पोरः। तृण-वृणं, ३ अर्जुनम् । गांठ-प्रन्थिः। (कमल)-२शष्पं, ३बालतृणम् वेत- वेत्रः, १वेतसः। घास-पासः ३यवसम् । जलबेत-१जलवेतसः, १नादेयी । दूधी-२दुग्धिका, २क्षीरावी खस-३स शीरं, ३सेव्यम् । दूर्वा-३हरितं, २दूर्वाः कपास-२ कार्पासी, २बदरा। कुशा-१कुशः, १दर्भः, ३बहिः । बग--१बङ्गः। मूञ्ज-१शरः, १मुजः । नर्मा-२भारद्वाजी। कांस-१कासः, १कासेक्षुः। बिनौला-२तूलशर्करा । नरकट-पनडः, १पोटगलः । ऊंख-इक्षुः, मधुतृणः । रूई-१तूलः, १ पिचुः । गेड़ा-३काण्डम् । सन-शणः, १मातुलानी। पशुवर्गः। (जानवरोंके नामः) पशु सिंह गण्डक व्याघ्र ऋक्षः हरिण मृग वानर वृषः । वृक् नकुल सूकर शल्य गवयी कोक खिखिरि ओ शशः।। गोधेनु वत्सः महिष महिषी मेष गोपति कुक्कुरः। मार्जार छागल शृङ्ग पुच्छः ककुद कम्बल सैरिभिः ।। " , श्रीकोषे- S जानवर-१पशुः। दुम-१दुम्बकः । गौ-२गोः, २धेनुः । खुर-१खुरः, १शफः । सांड-गोपतिः, १गोस्वामी। शेर-१सिंहः, १मृगेन्द्रः, केसरी लवलीवर्दः, १ वृषभः। १हरिः। कुब्ब: १ककुदः, १ककुत् बाघ-१व्याघ्रः, १शार्दूलः । गलुत्था-१कम्बलः, १गळकम्बलः।। चीता-१चित्रकायः। नाथ-१नाथः भालू-ऋक्षः, भल्लूकः । गुहा-निर्याणः, १पादरज्जुः भेडिया-वृकः, १ईहामृगः । बकेन गौ-२वष्कयिणी। कोका-१कोकः। कलोर,,-२प्रष्टौदी। हिरण-१हरिणः, १कुराः, १मृगः । थन-३ऊघस, ३आपीनम् । गेंडा-१गण्डकः, १पुङ्गी। बच्छा-१वत्सः, १तरणकः । बन्दर-मकटः, १वानरः १कोशः। (नाथा हुआ)-१नस्तितः, लंगूर-गोलाङ्गुलः। १नस्योतः। सूमर-१वराहः, १शूकरः । (जवान)-१दम्या, १वत्सतरः। कुत्ता-कुक्कुरः, १सारमेयः। भस-२महिषी। बिल्ली-१विडालः, १मार्जारः, भैसा-महिषः, १सैरिभः सियार-१शृगालः। भेड़-१मेषः, १ खरगोश १शशः १शशकः। बकरा-१छागः, १अजः, बकरी-२अजा, २छागी। नेवला-१नकुलः । सींग-३शृङ्ग, विषाणः । साही-१शल्यः, १शाश्वित् । पूंछ-१पुच्छः, ३लाङगूलम् । नील गौ-२वनधेनुः, २गवयी। गदहा-१खरः, १रासमः। पक्षि ( पंछी ) वर्गः। पक्षां विहग खग द्विज मयूरक बह, खञ्जन, कोकिलः । चक्रांग हंस मयूर मेचक शारिका शुक कौशिकः ।। चिड़िया-पक्षी, १खगः, १विहगः, | मोर-१मयूरः, १वहीं, शिखी, १द्विजः, १अण्डजः, १शकुन्तः । शिखाबलः। - , *बैलके कंधेपर उठे हुए भागको "कुब्ब" कहते कीटादिवर्गः। " PRB . मोरकी बोली-२केका भरदूल-भरद्वाजः, व्याघ्राटः। मारका पंख-३पिच्छं, ३वहः, तीतर-१तित्तिरिः । १शिखण्डः। कठफोरा-शतच्छदः, काष्ठकुट्टः । मोरपंखका चिन्ह-१चन्द्रका, हरेवा-पहारीतः। मेचकः। वटेर-वर्तिकः। मोरकी कलगी-२शिखा, २चूडा टिटिहरी-टिट्टिभः । स-१ चक्रा, १हंसः गिद्ध-१गृध्रः। 'सिनो-२चकाही, २बरटा। चोल्ह-१आतापो, चिल्लः । सारस-१सारसः, १पुष्करातः । बाज-१श्येनः, १शशादनः । सारसी-२सारसी, २लक्ष्मणा -१वायसः, १काकः। सुग्गा-१शुकः, १कीरः । " (डोम)-१द्रोणकाकः, कोयल-१पिकः, १कोकिलः । १काकोलः। कोयलकी बोली-२कुहूः । लाल-लालः । पपीहा-१चातकः, ३सारतः । वुलबुल-१बुलबुलः। चकोर-१चकोरः, १चन्दिकापायी। रुरुश्रा-कर्क रेटः, १करेटुः । मैना-शारिका उल्लु-१कौशिकः, १उल्लूकः, १धूकः। बकुला--१बकः, १कहः । मुर्गा-१कुक्कुटः, १चरणायुधः । बत्तख-कादम्बः, १कलहंसः। चमगीदड़-२अजिनपत्रारजतुका । चकवा-१चक्रवाकः, १चक्रकोकः । पंख-१पक्षः, ३पत्रं, ३पतत्रम् । चकवी-२चक्रवाकी। बाजू-वक्षमूलं, पक्षतिः । खडलिच-१खञ्जनः, १खञ्जरोटः । चोंच-१चञ्चुः, श्रोटिः । गौरैया-१चटकः, १कलविङ्कः । भण्डा-अण्ड, १पेशी, कोषः। घोंसला-३नीडः, १कुलायः । कीटादि वर्गः। (कीड़े मकोड़े, आदिके नाम ) अलि कोट लुता मक्षिका वनमक्षिका च पिपीलिका । खद्योत यूका मशक लिक्षा शलभ मत्कुण सीमिका ।। उर्दश उत्कुण षट्पटी मधुप सरघा झिल्लिका ॥ है माचिका दीका मघुप मधुकर भ्रमर मधुकमक्षिका ॥ .. , - श्रीकोषे- RDAR " " कीड़-मकोड़ा-१कीटः । मक्खो-१मक्षिका, २माचिका। दीमक-२दीका, २सीमिका : शहदकी मक्खी-२मधुमक्षिका । चींटा-पिपीलः। सरधा। (लाल)-रक्तपिपीलः। डांस--२वन मक्षिका, १दंशः । चींटी-२पिपीलिका। बरे-गन्धोली। (लाल)-२रक्तपिपीलिका ! झींगुर-२झिल्लिका, २झिल्ली । खटमल-१मत्कुणः, १उत्कुणः । मकड़ी-१ऊणेनामः १लूता । जू-२यूका, २षट्पदी। काजाला-लता । लीख-२लिक्षा, रिक्षा। जुगनू-१खद्योतः, १ज्योतिरिक्षणः मच्छड़-१मषकः, १वज्रतुण्डः। चीलर-१स्वेदजः । फतिङ्गा-पतङ्गः, १शलभः । जलजन्तु वर्गः। जलजन्तु कच्छप मत्स्य शृङ्गो वर्मि शकुल शुक्तिका कमठी गरनी, मकर ददुर मीन रोहित रक्तपा ।। जलजन्तु-जलजन्तुः, यादः । -२वमिः घड़ियाल (मगर)-१मकरः । सिधी-१शशी। सोस-१शिंशुमारः, शिशुकः । मंगुरी-मद्गुरः। नाक-कुम्भीरः, १नकः । केकड़ा-१कुलीरः, १ कर्कटकः । कछा-१कूर्मः, १कच्छपः, १ कमठः। जोंक-२रक्तपा, २जलोका। कछवी-२कमठी ,रडुली। मछली --मीनः, १मत्स्यः, झषः। ग-१ध्यङ्गः । १अण्डजः । मेढ़क-भेकः, १मण्डूकः गरई-गरनी। कौड़ी-१बराटकः, १कपर्दकः । रोहू-१रोहितः। " (फूटो)---१काणवराटकः । टॅगरा-१सपादमत्स्यः । मेढ़की-रभेका, २वर्षाभ्वी सीधरो-२शफरी। घोंघा-१शम्बूकः, षोधः । सीपी-२शुक्तिका, २शुक्तिः । कवई-१कवयः। , " दादुर-१दर्दुरः सौरी-१शष्कुलः।

४ रोगवर्गः। सर्पादि वर्गः। पन्नग उरग अहि ब्याल भुजनः नाग सर्प भुजङ्गसे। भूषित महेश्वरको समझ होते सभी जन दङ्गसे ।। अलगद अजगर सरट पल्ली शतपदी गृहशोधिका ।। निर्मोक राजिल द्रोण गिरिका पाखु गोनस गोधिका ॥ शेषनाग...अनन्तः, १शेषः, केचुआ-१शि की, १किन्चुकः। १अहीशः। छिपकुली-२गृहगोधिका, २पल्ली। सांप-अहिः, १सपः २भुजगः, गिरगिटान-१सरटः, पकलासः । १भुजङ्गः, १नागः १व्याला मूसा (चूहा)-१आखु: १मूषिकः । १उरगः, पन्नगः। अजगर-१शयुः, अजगरः । चूहिया-२बालमूषिका, रगिरिका । गोनस-तिकित्सः, पगोनसः । छळून्दर--१छछून्दरः । दोमुंहा- १राजिल:, १डुड्डभः । गोह-२गोधिका, २निहाका । डेडहा- अलगर्दः, १जलव्याकः । सांपका शरीर भोगः । बिच्छू-वृश्चिकः, १अलिः १द्रोणः । का दांत-अहिदंष्ट्रः,२आशी: का प्रांड-३अलम् । को केचुलो-१निर्मोकः, गोजर- २कर्णजलौका, २शतपदी । का फन-१स्फटा, १फणा । रोग वर्गः । ( बीमारियों के नाम ) गद रोग ग्रहणी श्वास द्रुः, अर्श धर्मविवचिंका। ज्वर कुष्ठ मृच्छा मोह कक्षा, गुल्म मेह मसूरिका ।। बीमारी-१रोगः १व्याधिः, १गदः, प्रांव-आमातिसारः । १आमय: मलमूत्रबन्द-१विबन्धः, १आनाहः । ज्वर-१ज्वरः, १जूर्तिः। लीवरको खराबो-श्यकृत-विकृतः जड़या-शीतज्वरः । खांसी-१कासः, क्षयथुः । तिजारी-व्याहिकः। शूल-३उदरशूलम् । टी० बी०(तपेदिक)-१क्षयः, १राजरोगः, १यक्ष्मा । दमा-श्वांसः। पेचिश-ग्रहणी। जुकाम-२प्रतिश्यायः। पाण्डु-१पाण्डुरोगः पाण्डु* । फुन्सी-२पिटिका। " श्रीको- ७ कखौरो-२कक्षा। फोड़ा-१स्फोटकः, १स्फोटः । छीक-छिक्का। कै-३वमनं, १वमथुः । खुजली-२कण्डूः २कण्डूया । फीलपांव-३इलीपदं, ३पादवल्मीकम्। छलका-१उच्छालकः । बिवाई-१पादस्फोटः, २विपादिका । पेटमें जल होना-१जलोदरः । दाद-१दगुः। पोतेमें जल होना-१अन्त्रजलः । कोढ़-१कुष्ठः, ३मण्डलकम् । मांस बढ़ना-१अण्डवृद्धिः । सेहुंभा-१किलासः, १सिध्मः। अम्हौरी-२धर्मविचिका। बवासीर-१अर्शः ३दुर्नामकम् । घाव-१व्रणः, १अरुः । भगन्दर-१भगन्दरः। स्वप्नदोष-स्वप्नदोषः। पथरी-२अश्मरी, ३मूत्रकृच्छम् । प्रमेह-१मेहः १प्रमेहः । प्रमेह-१प्रमेहः, मेहः । कड़क-३कृच्छ्, ३मूत्रकृच्छ्रम् । गोला-१गुल्मः। धातु गिरना-१धातुक्षीणः । सूजाक-१उष्णवातः। गर्मी-१उपदंशः। गंठिया-श्वातरोगः। कमजोरी-२क्षीणता, दुर्वलता । खूनखराब-१रक्तविकारः। घेघा-१गड्डः, गलगण्डः । प्लेग-२महामारी। हैजा-२विसूचिका। मुंहपाका-१मुखपाकः। चेचक-२शीतला। फुल्ली (फुलो)-२पुष्पिका । थनैल-१स्तनपाकः । छोटो चेचक-मसूरिका । झिझिनिया-२झिझिणी। पिलही-२प्लीहा। गर्भपत-गर्भपातः। लकवा-१पक्षाघातः । मुर्छा-१मोहः, २मूर्छा ।। आंख भाना-२अक्षिपीडा । मृगी-१अपस्मारः। दांतका दर्द-२दन्तव्यथा, १दन्तरोगः। चक्कर-१भ्रमः। कानका दर्द-२कर्णव्यथा, पागलपन-प्रमादः, १उन्मादः। १कर्ण रोगः । हिस्टीरिया-, पोरिया-१पीतरोगः । हिचकी-२हिक्का। संग्रहणी-संग्रहणी। . . " *शरीर पीला पड़ जाता है।

यानवर्गः " चिकित्सा वर्गः। (दवा वगैरहके नाम ) औषध कषायः वटी वटिका कल्क सेक विरेचनम् । व्रण लेप विदिलम् वर्ति चूर्णम् बस्तिकर्म रसायनम् ।। दवा--३भेषजं ३औषधं, ३भैषज्यम् । ! पिचकारी देना-३वस्तिक। काढ़ा-१काथः, १कषायः। सूईदेना-३सुचिकाभरणम् । अवलेह-१अवलेहः । मलहम्-लेपः। गोली-२ गोलिका। पट्टो-३वनपट्टम् । मलहम-पट्टो-२लेपक्रिया। रस-१रसः। सलाई-२शलाको। कल्क-१कल्कः। खपची-३विदलम् । मिक्श्चर- -१औषध-रसः । बांसको-विदलम् । चूर्ण-३चूर्णम् । बत्ती-चत्तिः। जुलाब-३रेचनं, ३विरेचनम् । चीर-फाड़-३शल्यकर्म, शिस्त्रकर्म। सेक-१सेकः। क्लोरोफार्म-२मूर्छाकरी। भस्म-भस्म । घावभरना-३व्रणरोपणम् । रसायन-३रसायनम् । उसखा-३औषधिनिदानपत्रम् । यान वर्गः। (सवारी वगैरहके नाम ) गज उष्ट्र घोटक यान शिविका चक्र स्यन्दन पिण्डिका। नौका विमानं शकट बड़वा रश्मि तोत्रं डोलिका ॥ सवारी-३वाहनं, ३यानम् । हाथोका दांत-गजदन्तः, विषाण। हाथी-१गजः, पनामः, १इमः, १करी, सूड़-१शुण्डादण्डः । १द्विपः, १हस्ती। की कनपटी-१गण्ड:, १कट: (पील)-१दन्ती १वारणः, १पील कामद-१मदः। , (मकुना)-१मत्कुणः। ,, सूड़का चिह्न-१वमथुः, का बच्चा-१कलभः, २करशीकरः। १कारिशावकः। खंटा-३आलानम् । .

श्रीकोषे- - , टटू-१पृष्ठ्यः, १स्थौरी। वेड़ो-१निगडः, २शृङ्खला । पहिया-चक्रं ३रयाङ्गम् । कसनेको रस्सा--- २कक्ष्या, २वना। , पुट्टी-१प्रधिः, २नेमिः। हौदा-१बरण्डकः । नाहा-२नाभिः, २पिण्डिका । भूल-कुथः, १वर्णकम्बलः । आरागजः-१अरः। मङ्कुश-अङ्कुशः, १सृणिः । पचरा-प्रत्यरः। ऊँट-१उष्ट्रः, १क्रमेलकः। जमाठ...१युगः, १प्रातः। का बच्चा-१कलभः। सगुना-१युगन्धरः ९कूबरः । खच्चर-१अश्वतरः, १खच्चरः । पीढ़ा-३पीठम् । घोड़ा-१अश्वः, पयः, १तुरगः, रथका छाजन---रथ गुप्तिः, १वरूथ १घोटकः। डोली-२डोलिका, २दोलिका। घोड़ी-२बडवा, अश्वा । पालकी- शिविका, ३याप्ययानम् मोटर-मृत्तरः। चारजामा-३पल्ययनं, ३निर्याणम् रेलगाड़ी-१धूम्रशकटः,३वाष्पयान लगाम-२ कविका, १खलीनः । नाव-२नौका, रनौः, ५तरणिः । रास (वागडोर)-पश्मिः । डोंगी-१उडुपः, १प्लवः । चाबुक-१चर्मदण्डः, ३तोत्रं, कशा। वेड़ा-१बेडा, २वेडी । तोवड़ा--१प्ररोहकः, बजड़ा-२झिल्लिका। नाल १नालकः। जहाज-पोतः । बैलगाड़ी-२गन्त्री,३ कम्बलिबायकम् भस्तुल-१कूपकः, १गुणवृक्षकः । छकड़ा-१शकटः। पतवार-१कर्णः। स्थ-१स्यन्दनः, १रथः । डांड-१नौकादण्डः, २क्षेपणी । काधुरा-२धूः, ३यानमुखम् । कृषिफर्मोपकरणनामावली । खल धान मेथिः पाशु सीता, वेण्ट ईषा लागलम् । कुदाल, अवदारण असिद औ दारुफाल फलं हलम् ।। हल-३लागलं, ३हलम् । हलकी लकीर-२ सीता । का फार-फालः, ३फलम् । पचखा-३पश्चागुलम् । जुमाठ-१युगकीलकः, २शम्या। हरिसा-२ईषा, १लाङ्गुलदण्डः । MAHA- . , .

। पाठ्यवस्तु वर्गः। हेगा-१लोष्टभेदनः, १कोटिशः मुठिया-२मुष्टिः । कुदारी-१कुदालः, १कुदालः । वंट-१वेण्टः, १वण्टः। फरहा.-१ काष्ठकुद्दालः, १अत्रिः। हंसिया-असिदः, ३दात्रम् खनति-३खनित्रं, ३अवदारणम् । घसियारा-१शष्पलुञ्चकः । खुरपी-१धासभेदी, १क्षुरप्रः, १शष्पभेदी। , पेज-३पृष्ठम् पाठ्य वस्तु वर्गः। दैनन्दिनी कागद कलम मसि पत्र वेष्टन तूलिका । पञ्चाङ्ग कर्कट पृष्ठ पञ्जी ग्रन्थ पुस्तक पट्टिका ॥ कागज-३कागदः, १कार्गलः । रजिष्टर-२पञ्जी, २पञ्जिका । पोथी-३पुस्तकं, १ग्रन्थः । कापी-३लिपिपुस्तिका। पन्ना-३पत्रम् । पेन्सिल-२तुलिका। कलमः २लेखनी। जिल्द-आवरण पृष्ठम् । फाउण्टेनपेन -- २धारालेखनी। डायरी-२दैनन्दिनी परकाल-३कर्कटम् । भखवार-३समाचारपत्रम् । रुल---रेखादण्डः। दैनिक भखबार-३ दैनिकसमाचार- बेठन (बस्ता )-३वेष्टनम् । पत्रम्। लोखता--३शोषकपत्रम् । साप्ताहिक,,-३साप्ताहिक स्याही-२मसिः । पाक्षिक दावात-२मसिधानी। द्विदैनिक ,,-३द्विदैनिक भईसाताहिक-अर्द्धसाप्ताहिक,, सिलेट-लेखनपट्टिका। मासिक -३मासिक नकशा-३मानचित्रम् । त्रैमासिक पत्रा-३पञ्चाङ्गम्। छमाही ३अर्द्धवार्षिक टेक्स्टबुक-३पाटापुस्तकम् । वार्षिक ,-३वार्षिक ३ ,,-३पाशिक " बोर्ड-३श्यामपट्टम् । " " " " श्रीकोष वर्ग:। भारीकी सुसज्ञा , । " २ चमूः, ३सैन्यम् । लड़ाई तथा उसमें प्रयोग होनेवाले अस्त्रोंके नाम ) रण युद्ध संख्यं समर आहव जन्य आयोधन कहो। सङ्ग्राम मित्र 1 तुमुलं है अहो।। लड़ाई-१सङ्ग्रामः, १समरः विग्रहः, धनुषको रस्सी-२मौर्वी, रज्या, १रणः १आहवः, ३आयोधन, १शिजिनीगुणः। ३युद्धं, ३जन्य ३सङ्ख्यम् । तीर-१बाणः, १शरः, १विशिखः (घमासान )--३तुमुलम् । (लोहेका )-१नाराचः। फौज (सेना)-१सेना ३बलं । तरकस-१निषङ्गः, १इषुधिः,तूणीरः २अनीकिनी २वजिनी, २वाहिनी, तीरन्दाज-१कृतपुङ्खः। मुगदर-१मुद्गरः, द्रुघणः । मोर्चा-१व्यूहः, १बलविन्यासः। गदा-२गदा। परेड-२खलूरिका। गुप्ती-२करवालिका, २इली । चांदमारी-३लक्ष्यभेदनम् । ढाल-१फलकः, ३चर्म। पैतरा-३मण्डलम् । बेवड़ा-१परिघः, १परिपातनः । योधा-१योद्धा, १भटः, १योधः । गोफना-१क्षेपणीयः। शत्रुयोधा-प्रतिभटः । किरिच-१पट्टिशः । सेनापति-१सेनानीः,-१सेनापतिः। बा-१कुन्तः, १प्रासः। टोप-३शीर्षण्यं ३शिरस्त्राणम् । सांग-शक्तिः । जिरहवखतर-१कवचः, ३वर्म बी-२शक्तिः। ३तनुत्रम् । त्रिशूल-३त्रिशूलं, ३त्रिशीर्षकम् अस्त्र-शस्त्र ( हथियार)-३आयुध । शल्य-१शङ्खः, ३शल्यम् ३प्रहरणं, ३अनशनम् । बीधारी-१शक्तिहेतिकः । तलवार-३असिर, १खगः । फरसा-१परशुः, १परश्वषः । कटारी-१कृपाणः । फरसाधारी-१पारश्वधिकः । छूरा-२क्षुरिका । रथका योधा-१रथिकः । गड़ांसा-खड्गः । फांसी-१पाशः। धनुष-३कार्मुकं, ३कोदण्डं, १चापः, वज्रः-१कुलिशः, ३वज्रम् । ३धनुः। भद्धचन्द्र-१अर्द्धचन्द्रः, १क्षुरप्रः । , खेलवर्गः ४६ , लाठी-श्यष्टिः। टॅक-यन्त्राव्यहतगतिका । लग्गा-१लगुडः। गोला-बृहमालीकः । दराडा-१दण्डः। बारूद-३अग्निचूर्णम् । बन्दृक-२भुशुण्डी, रनलिका। अस्त्र-३अस्त्रम् । को गोला-नालोकः । शस्त्र-शस्त्रम् । तोप-२शतघ्नी। मृत्युकिरण-१मृत्युकिरणः । दूरमारतोप-२दूरभेदिनीशतन्नो । उड़नबम-१असूत विमानः । मल्लयुद्धवर्गः। अखाड़ा-१अक्षवाटः। मालखम्ब-१मल्लस्तस्भ: लंगोट-३कौपीनम् । मुगदर-मुद्गरः। कुश्ती-३बाहुयुद्धं, ३ नियुद्धम् । दाव-१बन्धः। खेलवर्गः। जल केलि क्रीडा चूत कन्दुक, रास भ्रमरक कैतवम् । चतुरङ्ग वीटा पत्रक्रीड़ा, गेन्दुकः अष्टापदम् खिलौना-३क्रीडनकम् । शतरज-३अष्टापदं, शारिफलम् । गेंद-१कन्दुकः, १गेन्दुकः । तास-३क्रीडापत्रम् । फुटबाल-१पादकन्दुकः । तासका खेल-३पत्रक्रीडनम् । चौपड़-३चतुरङ्गम् । लटू-३भ्रमरकम् । पांसा-१पाशकः, अक्षकः । हिंडोला-हिन्दोलः। दांव-१पणः १ग्लहः। भंवरी-२भ्रमरी। छींटा-छींटो-२जलक्रीडा। चकई-भ्रमरिका। गुल्ली-२वीटा। वाटरपोलो-२जलकन्दुकक्रीडा। घुड़दौड़-अश्वधावनम् । डण्डा-१दण्डः । गुल्लो-दण्डा-दण्ड-वीटा। जलोत्सव-जलोत्सवः ।। कौड़ीका खेल-३वराटीकीडनम् । शिकार-२मृगया, १आखेटः । आंखमिचौमल-निमीलक्रीडा । पुतली-२पुत्तलिका, २पाञ्चालिका । जुमा-३द्यूतम् । पातशबाजी-२अग्निक्रीडा । छिपौमल (लुकोमल )-२निला. खेल-क्रीडा, २केलिः, खेला । यन क्रीडा ४श्री० ५० श्रीको - . . वेदादिवर्गः। वेद-१वेदः, २श्रुतिः ( वेद ४ हैं) मिलते हैं शेष दुर्लभप्राय हैं। ) ऋग्वेद-१ऋग्वेदः १ । धर्मशास्त्र-३धर्मशास्त्रं, २स्मृतिः, यजुर्वेद-१यजुर्वेदः । २धर्मसंहिता । सामवेद-सामवेदः ३ । पुराण-३पुराण ३पञ्चलक्षणम् । अथर्ववेद-१अथर्ववेदः ४॥ (पुराण १८ हैं) उपवेद-उपवेद (उपवेद ४ हैं) १ब्राह्म, रशिव, विष्णु, ४पाय, मायुर्वेदः-१आयुर्वेद (ऋग्वेदकाउपवेद१) ५भागवत, ६नारदीय,७ मा एडेय, धनुर्वेद ---१धनुर्वेदः ( यजुर्वेदका ८भविष्य, ९अग्नि, १०ब्रह्मवैवर्त, उपवेद२)। ११वाराह, १२लिश, १३वामन, गान्धर्ववेद-गान्धर्ववेदः ( सामवेद १४स्कन्द, १५कीम, १६मत्स्य, का उपवेद३)। १७गरुड़ और १८ब्रह्माण्ड । स्थापत्यवेद-१स्थापत्यवेदः (अथ. शास्त्र-शास्त्रम् (षट्शास्त्राणि ) वैवेदका उपवेद४)। दर्शन-(फिलासफी)-३दर्शनशा. बेदांग-१वेदाः ( ६ हैं) स्त्रम् , ३दर्शनम् । (दर्शन शिक्षा-शिक्षा (पाणिनिशिक्षा आदि) शास्त्र ६ हैं इन शास्त्रोंको वेदो. कल्प-१कल्पः (आश्वलायन आदि पाज भी कहते हैं। ऋषियों द्वारा प्रणीत शास्त्र विशेष) १ न्याय-अन्यायः, ३तर्कशास्त्र, व्याकरण--३व्याकरणम् , २आन्वीक्षिकी, ३गौतमदर्शनं, ३शब्दशानम्। ३न्यायदर्शनम् ज्योतिष-३ज्योतिष, ३ज्योतिशास्त्रम्। २ वैशेषिक-३वैशेषिक, ३कणाद- निरुक्त-३निरुक्तम् ( वेदार्थनिर्णायक दर्शनं, ३औलुक्यदर्शनम् । शास्त्रम्) ३सांख्य-३सांख्य,३ कपिलदर्शनम् छन्द-३छन्दः। ४योग-१योगः, ३योगदर्शनं, वेदशाखा-२वेदशाखा। ३पतञ्जलिदर्शनम् । उपनिषद्-२उपनिषद् ( आध्यात्म. श्मीमांसा-१मीमांसा, पूर्वमीमांसा, विद्या, ब्रह्मविद्या, यों तो उपनिषद्, ३जैमिनीदर्शनम् वेदोंकी प्रत्येक शाखापर एक एक ६ वेदान्त-१वेदान्तः, १उत्तरसीमांसा, है किन्तु अधुना ३५ उपनिषद् ही ३व्यासदर्शनम् ।

वेदादि वर्गः। ५१ [शरीरधारियों के उपयोगी ४विद्याएं कारीगरी-शिल्पशास्त्र, रशिल्प. विद्या। १भान्विक्षिकी-२आन्विक्षिकी अश्वविद्या-२अश्वविद्या, शालि. ( आन्विक्षिकीसे आत्माका ज्ञान होत्रम् । होता है) गजविद्या-२गजविद्या, रहस्तिविद्या, श्त्रयो-२त्रयो । (धर्माधर्मका ज्ञान होता है।) ३पालकाप्यम्। श्वार्ता वार्ता । (वार्तासे अर्थानर्थः इतिहास (हिस्टरी)-१इतिहासः, का ज्ञान होता है) ३पुरावृत्तम् । दण्डनीति-२दण्डनीतिः । (दण्ड. सायन्स-३विज्ञानम् । नीतिसे, नीति अनीतिक ज्ञान साहित्य (लिट्रेचर)-३साहित्यम् होता है) काव्य-३काव्यम्। पाकशास्त्र-२पाकविद्या। ( भोजन काव्य (चम्पू)-१चम्पूः । बनाने आदिकी रीतियां) कहानी-आख्याथिका, २कथा सामुद्रिकशास्त्र-३हस्तरेखाज्ञानम् २प्रलन्धकल्पना। ( हाथकी लकीरोंसे भूतादि बातें उपन्यास-१उपन्यासः कल्पितकथा जानना) कोष(डिक्शनरी)-१कोषः । *तिलविचार शास्त्र-३तिलविचार पहेली-२प्रवलिका, २प्रहालेका । ज्ञानम् (तिल, भौंरी, लहसुन मसा समस्या-२समस्या। आदि देखकर भूतादिकी बातें चौसठ कलाएं-२चतुष्पष्ठि कलाः । जानना) कला-कला ( वायगीतादिकम् ) शकुनशास्त्र-३शुभाशुभचिह्नज्ञानम् । पदार्थविद्या-२पदार्थविज्ञानम् । अर्थशास्त्र-२अर्थविद्या, २सम्पत्तिः । समाज विज्ञान-३समाजविज्ञानम् । विद्या, ३ अर्थशास्त्रं,३खम्पत्तिशास्त्रम् मनोविज्ञान-२मनोविज्ञानम् । नोति-२नीतिः,३नीतिशास्त्रं, १नयः । । भाषाविज्ञान-३भाषाविज्ञानम् राजनीति ( पालिटिक्स)- राजनीतिः। विद्युत्विज्ञान -३विद्युद्विज्ञानम् । रसायन ( केमिस्ट्री)-रसविद्या व्यवहार शास्त्र-३व्यवहारशास्त्रम् । ३रसायनशास्त्रम्। कृषिशास्त्र-३कृषिशास्त्रम् । * तिल, भौंरी, लहसुन मसा होहि दाहिने अंग। जाय बसो वन खण्डमें रहे लच्छमी ( लक्ष्मी) संग ॥ इति । .

પુર श्रीकोषे- संस्कारवर्गः। गर्भाधान-गर्भाधान गर्भस्थापन- यज्ञोपवीत-३उपनयनम् । संस्कारः। वेदारम्भ-वेदारम्भः। पुंसवन-३पुंसवनं (यह संस्कार केशान्त-केशान्तः, ३गोदानम् । बच्चा पेट में आनेके ४ मास समापवर्तन- समापवर्तनम् । बाद होता है) बगत-श्वरयात्रा, २विवाहयात्रा। सीमन्त-१सीमन्तः। बराती-१वरयात्रिकाः। जातकर्म-जातकर्म विवाह-परिणयः, १विवाहः, नामकरण--३नामकरणम् । १उद्वाहा। निष्क्रमण-३निष्क्रमणम् । विवाहाग्निपरिग्रह-विवाहाग्नि. अन्नप्राशन-३अन्नप्राशनम् । परिग्रहः। मुण्डन-३मुण्डनं, ३वपनम् , त्रेताग्निसंग्रह-पत्रेताग्निसंग्रहः । कच्छेदन-१कर्णवेधः २ कर्णच्छेदनम्। निवृत्तिधारण-३मुनिवृत्तिधारणम् ७ N नवनि प्रकीर्ण शब्द। एयरोड्रम-३विमानविश्रामस्थानम् । ए भार० पी.-२वायुयानाक्रमणसूचिकासमितिः । सिविकड-१पुरगृहरक्षकः । हवाईहमला-३विमानाक्रमणम् । ब्लैकग्राउट-१प्रकाश निरोधः । रैक्टर(१)-विश्वविद्यालयस्य संरक्षकः । लार्ड रैक्टर(२)-विश्वविद्यालयस्य मधानसंरक्षकः । * नित्यबहुवचनान्त (१) यथा हिन्दू विश्वविद्यालयके (रैक्टर ). पूज्यपाद महामना पं. मदनमोहनजी मालवीय थे। (२) यथा अधुना हिन्दू विश्वविद्यालयके ( लार्ड रैक्टर ) महामान्य वायसराय श्रीयुक्त लार्ड वावेल ( Wavel गवर्नर जेनरल प्रकोर्णशब्दवर्गः। ५३ चान्सलर(१)--विश्वविद्यालयाध्यक्षः । प्रो-चानललर(२)-विश्वविद्यालयस्यसहायकाध्यक्षः। वाइसचान्सलर(३)-(कुलपतिः) प्रो० वाइस चान्सलर-सहायककुलपतिः । विश्वविद्यालयकी सीनेट-विश्वविद्यालयीय परिषत् । यूनिवर्सिटीलेक्चरर-विश्वविद्यालयस्य व्याखाता। प्रकीर्णशब्दवर्गः। अफसर-१अधिकारी । आनरेरी मजिस्ट्रट-(समरीपावर अर्जीदावा-भाषापदः। युक्त) पट्टावैतनिकन्यायकर्ता। असेम्बलो-२सभा। मांटेकी कल-पेषणीयन्त्रम् । असोसिएशन-२समितिः । इन्स्पेक्टर -निरीक्षकः। अस्पताल-चिकित्सालयः। इन्स्पेक्ट्रेम-निरीक्षिका। अन्तर्राष्ट्रीय-अन्ताराष्ट्रियः । इनहान-परीक्षा। आनरेरी-अवैतनिकः। इन्स्टीट्यूशन -संस्था। आनरेरो मजिस्ट्रट-अवैतनिक इमारत-देखिये, "गृह आदि" न्यायकत्तो। इजलास-न्यायस्थानम् । एक्सरे-शरीरान्त र्दशियन्त्रम् । (१) यथा सम्प्रति हिन्दू विश्वविद्यालयके ( चान्सलर ) श्री ५ महाराजाधिराज- काश्मीर नरेश ( वर्तमान )। (२) यथा आजकल-हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रोचान्सलर दो हैं- (१) श्री ५ महाराजाधिराज जोधपुर नरेश ( वर्तमान )। (२) महाराजा दरभंगा नरेश ( वर्तमान ) (आपके पूज्य स्वर्गीय पिताजी भी इस पदको भुषित कर चुके हैं)। (३) वाइस चान्सलर-यथा आजकल क्रमशः-प्रयाग, कलकत्ता, पटना और काशी विश्वविद्यालयोंके- डाक्टर ताराचन्द डाक्टर-राधामुकुन्द श्रीयुक्त-सी० पी० सिनहा डाक्टर सर राधाकृष्णन् एवं लखनऊकी यूनिवर्सिटीके श्री राजा विश्वेश्वर दयाल सेठ । - श्रीकोषे- एक्जिक्यूटिव कौसिल-कार्य- कारिणीसभा। खुर्दबीन-अणुवीक्षणम् । एक्जिक्यूटिव अफसर-कार्य- खंटा-नागदन्तः। सञ्चालकः। एलेकशन-निर्वाचनम् । गगनभेड़-गृध्रः । एलेक्टर-निर्वाचकः। गर्वनर-प्रान्तपतिः। गवर्नर जेनरल-१ भारतशासकः। कंजर्वेटिव-अनुदारः। गवाह साक्षीदाता। कचहरी-न्यायालयः। गवाही-माश्यम् । कमिश्नर-मण्डलाधिकारी। गार्ड-धूम्रशकटनिरीक्षकः । कमीशन-नियुक्तसमितिः । लाभः । ग्रामोफोन-पूर्वोक्तवाद्ययन्त्रम् । कमेटी-समितिः। कम्पास-दिग्दर्शकयन्त्रम् । घड़ी-घटीयन्त्रम् । घड़ोसाज-चटीयन्त्रकारः । कला-कला। कलक्टर-मण्डलाधीशः। चमार-चर्मकारः । कांग्रेस-राष्ट्रियमहासभा। कांफ्रन्स-सम्मेलनम् । चश्मा-उपनेत्रम् । चारा काटने की मशीन-घास- कान्फेडरेशन-सधः। काम्यूनिटी-समुदायः। चित्रकार-चित्रकरः। काम्यूनिस्ट-समुदायवादी। चीफ जस्टिस-प्रधानन्यायाधीशः। कालेज-महाविद्यालयः। चीनका प्याला-चीनपात्रम् । कार्पोरेशन-बृहन्नगरपरिष्कारिणी चेम्बर-सभा। सभा। चेयरमैन-अध्यक्षः। कापोरेशनका मेयर-बृहनगरपरि- चेयरमैन (स्त्रो) अध्यक्षा । फारिणीसभाध्यक्षः। कमरा-छायाचित्रयन्त्रम् । छत्रसाल-छत्रसाल पतिः । कोतवाल-कोटपालः' नगरपालः । कौंसिल-सभा, परिषद । जज-व्यवहारदर्शकः । , श्राव स्टेट-राज्यपरिषद् । जस्टिस-न्यायाधीशः। .. कतनी।

प्रकीर्णवर्गः। ५५ थ जमन-शामरायः। डेमोक्रेसी-प्रजातन्त्रम् । जामिन--प्रतिभूः। त जामिनी-प्रतिभाव्यम् । तेलकी कल-तैल निष्कासन. जिला-मण्डलम् । यन्त्रम्। जूरी-सभ्यः। तोप-शतधनी। जेल-कारागारः। थर्मामीटर-ज्वरमापकयन्त्रम् । झण्डाभिवादन-झण्डाभिवादनम् । थानेदार--पुरमागरक्षकः । थियालोफी-ब्रह्मविद्या टाइपराइटर-करलिपिमुद्र कयन्त्रम्। थियासोफिस्ट-ब्रह्मविद्यावादी । टाइपिस्ट-करलिपिमुद्रकः । द टाकीज हाउस-चलचित्रपटालयः। दक्षिण पक्षी-गान्धिवादी। टिकट-चिटिका। दस्तखत-हस्ताक्षरम् । टो० टी० भाई०-चिटिकानिरीक्षकः। दमकल-वारुणयन्त्रम् । टेलिफोन-शब्दसंवादयन्त्रम् । दुर्वीन-दूरदर्शकयन्त्रम्। ठ ठग-धूर्तः। धौंकनी-भना। ड डाक्टर-चिकित्सकः । नगरपिता (सदस्य)-नगरपिता । डाक्टरिन-चिकित्सिका। नगरमाता-नगर माता (यदि म्युनि- डिपुटी कलक्टर-उपमण्डलाधीशः सपलिटीकी सदस्य कोई स्त्री है तो) डिक्टेटर-अधिनायकः। नस-धात्री, परिचायिका। डिक्री-राजाज्ञा। नालिश-व्यवहारपदम् । डिस्ट्रिक्टबोर्ड-नगरान्तसभा । नेशन-राष्टः। डिस्ट्रिकबोर्डका चेयरमैन-नगः नेशनल-राष्ट्रियः । रान्तसभाध्यक्षः। नेशनललिस्ट-राष्ट्रवादी। डी० लिट-साहित्याचार्यः । नैयायिक-नैयायिकः। डिपार्टमेण्ट-विभागः। डेमोक्रेट-प्रजातन्त्रबादी। पटवारी-ग्रामलेखा-लेखकः । .

- श्रीकोषे- ५६ पटेल (मुखिया)—प्रामाध शः प्रधान प्रोफेसर ( Head of the पनडुब्बी-जलान्तर्वर्तिनौका । department) प्रधानप्राध्यापकः परीक्षक-परीक्षकः । फाउन्टेनपेन-धारालेखनी। पाचक ( रसोईदार)-पाचकः । फुटबाल-पादगेन्दुकः । पारसल-पत्रालय-पोटलिका। फेडरेसन सङ्घः । पालियामेण्ट-प्रजानियुक्तसभा । फोर्सपम्प-जलोत्क्षेपकयन्त्रम् । पालिसी -नीतिः, चतुरता । पिचकारी-जलविक्षेपिका । बजट-आय-व्ययलेसा । पी० एच० डी०-दशनाचार्यः बम-अग्निगोलकास्त्रम् । पुलिस-राजपुरुषः, पौररक्षकः । पेशगार-प्रवेश कारः। बन्दूक-मुशुण्डो। पोलिंगस्टेशन- मतदानस्थानम् । बन्दूकको गोली-भुशुण्डीगुलिका । बम बर्षी-अग्निगोलकास्त्रवर्षी । पोस्टमास्टर-पत्रालयाध्यक्षः । पोस्टमार्टम-शवपरीक्षा । वायकाट-बहिष्कारः। बार-असोसिएशन-वाक्कोलसभा पोस्टमैन-पत्रवाहकः । बारूद-अग्निचूर्णम् । पासरा-प्रपा | बालिग-व्यवहारज्ञः पिलानेवाला-जलपान- बिजलीका तार-विद्युत्सूत्रम् । कारयिता। प्रधान-प्रधानम् । कापंखा-विद्युत्व्यजनम् । प्राक्लेमेशन-घोषणा। बल्व-विद्युद्दीपः । प्राब्लेम-समस्या । बिल-प्रस्तावः । बोन-वीणा। प्रपोजल-प्रस्तावः । बुकिंग आफिस-चिटिकालयः ।। प्रिन्सिपल-शिक्षाध्यक्षः। बोर्ड-काष्ठपट्टिका । प्रिंवीकौंसिल-बृहन्यायालयः प्रेस-यन्त्रालयः। बोडिंग-छात्रालयः । प्रेसिडेण्ट-सभापतिः, अध्यक्षः । ब्लाक-चित्र-प्रतिकृतिः प्रकाशक-प्रकाशकः। मजिस्ट्रेट-न्यायकर्ता । प्रोगाम-कार्यक्रमः । मनिमाडर-द्रव्यादेशः। प्रोफेसर (प्राध्यापक )-प्राध्यापकः मशोन-यन्त्रम् ।

प्रकीर्णवर्गः। ५७ -- मसौदा-पाण्डुलेखः । राष्ट्रस्वामिनी-राष्ट्रस्वामिनी । मास्टर-शिक्षका, अध्यापकः । रिकार्ड-ध्वनिपट्टिका । मुकदमा- अभियोगः। रिजोल्यूशन-प्रस्तावः । मुखतार-मुख्यतारकः । रिपोर्ट-विवरणम् । मुख्याधिष्ठाता-मुख्याधिष्ठाता। रेगुलेशन-नियमः, ब्यवस्था । मुद्दई-वादी, पूर्वपक्षी। रेडियो-वनिविक्षेपकयन्त्रम् । मुद्दालेह- -प्रतिवादी, उत्तरपक्षी रेलगाड़ी-धूमशकटं, वाष्पयन्त्रम् । मुद्रक-मुद्रकः । रेलकीपटरी-धूम्रशकटमार्गश्रेणी मूवमेंट-आन्दोलम् । मेजारिटी-बहुमतम् । लाउडस्पोकर-ध्वनि विस्तारक- मेम्बर-सदस्यः । यन्त्रम् । मेस-छात्रभोजनालयः। स्वायब्रेरी-पुस्तकालयः। मनेजर-व्यपस्थापकः। लीग आव नेशन्स-राष्ट्रसङ्घः मोटर-मृत्तरः। लेटर बकस-पत्रमजूषा । मोटरका ड्राइवर-मृत्तर-चालकः लेजिस्लेटिव असेम्बली- मोटर साइकिल-मृत्तरद्विचक्र. व्यवस्थापिका सभा। यानम् । कलिल म्युनिसपलिटी-नगर सभा। का अध्यक्ष-नगरसभा. वकील-वाक्कोलः। ध्यक्षः। वर्किंग कमेटी-कार्यसमितिः । म्यूजियम्-वस्तुसंग्रहालयः। वामपक्षी-साम्यवादी। वायस चांसलर-कुलपतिः । यातायातमन्त्री यातायातमन्त्री। वायल चेयरमैन-उपाध्यक्षः, युनिवर्सिटो-विश्वविद्यालयः । र उपाध्यक्षा (स्त्री हो तो) रजिस्टर्ड-रक्षीकृतम्। वी०पी०-मूल्यप्रदेयः । रजिस्ट्रार-परीक्षाध्यक्षः,लेख्यपत्र. बुर्का-अवगुण्ठनम् । रक्षकः। वेटिंगरूप-विश्रामालयः । राष्ट्रपति-राष्ट्रपतिः। व्याकरण-व्याकरणवेत्ता। * यदि कोई स्त्री हो तो कुलपतिका " ५८ श्रीको- वैरिस्टर-वरिष्टवाक्कीलः,वागीटरः वोट-मतम् । वाटर-मतदाता, मतदात्री था। शिक्षा... शिक्षा शिक्षिता-शिक्षिता। शाटण्ड-शीघ्रलिपिः स्कूल-पाठशाला स्मशान-पितृकाननम् । स्मशान शान्तिपूणशान्तिः । निर्जनस्थानम् । स्टीमर-वाष्पनीका। स्टेथिस कोप-वक्षःपरीक्षायन्त्रम् । स्टेशन-मजः । स्टेशनमास्टर-मञ्चाधिपतिः । स्टेण्डिङ्ग कमेटी-स्थायिसमितिः । स्टोव-मृत्तलचुली। संस्थापक-संस्थापकः । सञ्चालक-सञ्चालकः। स्वायत्त शासन मन्त्री-स्वायत्त. शासनमन्त्री। सचलाइट-उल्का । सायन्स-विज्ञानम् । साइकिल-द्विचक्रयानम् । सदस्य-सदस्यः। सभानेत्री-सभानेत्री, सभापत्नी, सभापतिका। सर्टीफिकेट-प्रमाणपत्रम् । सिगरेट-लघुतमालशलाका । सिगार-तमालशलाका। सितार-परिवादिनी। सिविलसर्जन-प्रधानचिकित्सकः । सिनेमा-चलचित्रपटालयः । सिष्टर-प्रधानधात्री। सुनार-स्वर्णकारः सुपरिटेण्डेण्ट-पर्यवेक्षकः । सुपरवायजर-कार्यनिरीक्षकः । सुर्ती-तामलपत्रम् । सेलेक्ट कमेटी-विशिष्टसमितिः । सेक्रेटरी-मन्त्री। सोशल-सामाजिकः । सोशलिस्ट-साम्यवादी। सोशलिज्म-साम्यवादः । स्कीम-योजना। हाइकोर्ट-प्रधानन्यायालयः । हस्साम-स्नानागारः। | हेडमास्टर-प्रधानाध्यापकः । प्रेस-करमुद्रणयन्त्रम् । होटल-पण्यभोजनालयः। युधिष्ठिर-युधिष्ठिरः, धर्मराजः। भर्जुन-धनञ्जयः, पार्थिवः, अर्जुनः । द्रौपदी-द्रौपदी, कृष्णा, याज्ञसेनी। श्री, श्रो:-श्रीः । रजत-जयन्ती-रजतजयन्ती । स्वर्ण-स्वर्ण हीरक ,,-हीरक कुर्सी-विष्टरं, भव्यासनम् । टेबुल-उच्चचतुष्पादिका। स्टूल-पादपीठम् । बैंच-फलकः ।

- " सम्प्रदायवर्गः। श्राराम कुर्सी-कोमलासनम् । गज-हस्तद्वयो (कपड़ा वगैरह) रूपया-रूप्यकम् , रजतमुद्रा । एक कोश-एक क्रोशः (दूरी वगैरह) अठन्नी-अष्टाणकी। एक बीघा-एकविप्रहारः(दूरीवगैरह) चवन्नी-चतुराणकी। दुअन्नी- चाणकी। एक मन-एकमणम् ( अन्नवगैरह) एकन्नो-एकागको । एक पसेरी-एक-पञ्चसेरी (,) आना--आणकम्। एकसेर-एक शेटकम् (,) पैसा-ताम्रकर्षम् । एक पौत्रा-एक कुडवः (,) कौड़ी- काकिणी। एकछटांक-एककणमा (,) अधेला-अर्ध-ताम्रकर्षम् । एकतोला-एकतुला (सुवर्ण आदि) गिन्नी-सुवर्णमुद्रा। एकमासा-एकमाषः (,) नोट-कामदीय-मुद्रा। एक रत्ती-एक-रक्तिका (..) जनेऊ-यज्ञोपवीतम् । इण्डियन-भारतीयः। मोहर-मुद्रा। एलेक्टेड-निर्वाचितः। खली-पिण्याकः। एजुकेशनल-क्षिक्षासम्बन्धी । कोल्हू-कोल्हकः । आलमारी-काष्टाम्बरी। एक हाथ-एकहस्तः (कपड़ाआदि) सा० आई० डी०-गुप्तचरः, चरः। धर्मवर्गः भार्यधर्म वैदिकधर्मः यहूदीधर्म-यहूदीधर्मः। जैनधर्म-जैनधर्मः। मुसलिमधर्म-यवनधर्मः । जरथोस्तीधर्म-जरयोस्तधर्म: .. .. - सम्प्रदायवर्गः माध्वसम्प्रदाय-माश्वसम्प्रदायः। सिक्खधर्म-नानकसम्प्रदायः । रामानुज,-रामानुज ,, राधास्वामीमत-राधास्वामीमतम् । वल्लभ -वल्लभ निम्बार्क -निम्बार्क ब्रह्मसमाज-ब्रह्मसमाजमतम् । आर्यसमाज-आर्यसमाजधर्मः । मद्वैतवाद,-अद्वैतवाद ,, राधावल्लभी-राधावल्लभीय, प्रार्थनासमाज-प्रार्थनासमाजमतम् । कबीरपन्ध-कबीरसम्प्रदायः । नास्तिकपन्य-अनीश्वरवादीमतम् ।

श्रीकोषे- , मा . पियानो-३वायुवायम् । वाद्यवर्गः मञ्जीर वंशी वाद्य मुरज: वेणु वीणा खञ्जरी । जलयन्त्र आनक शृङ्ग डमरुः ढोल मुरली झल्लरी ॥ बाजा-३वाधं, ३वादित्रम् । तानपूरा-१तानपूरः। ढोल-१ढोलः, १ढोलकः । तम्बूरा--२तौम्बुरो २वीणा, मृदंग-१मुरजः, १मृदयः। ३तुम्बुरुवाद्यम् । पखावज -१अङ्कथः, ३पक्षवाद्यम्। बांसुरी-२मुरली, २वंशी। नगारा-१पटहः, १आनकः । बीन-वेणुः। डुग्गी-डिण्डिमः। -३श्ङ्गम्। खञ्जड़ी-२खञ्जरी। हारमोनियम-हस्तवाद्यम् । ढाक-१ढक्का,१पटहा, यशः। डमरू-१डमरुः। सितार-२सप्तभिः, २परिवादिनी, महुअर-२मधुरी त्रितन्त्री। | माल-२झल्लरी। मांझ-झझरः। बजानेकी लकड़ी-१कोणः । सारंगी-१शारजी। । मजोरा-१मजीरः । जलतरंग-३जलयन्त्रम् । घंटा-२घण्टा। झंझताल-झज्झतालः। घुघुरू-३घर्धरम् । संख्यावाचक विशेष वर्ग: एक-एक। ग्यारह--एकादश । दो-द्वि। बारह-द्वादश। तीन-त्रि। तेरह-त्रयोदश । चार-चतुर् । चौदह-चतुर्दश। पांच-पञ्चन् । पन्द्रह-पञ्चदश । छ:-षटा सोलह-षोडश । सात-सप्तन् सत्रह-सप्तदश । माठ-अष्टन् अठाहर-अष्टादश । नव-नवन् । उन्नीस-ऊनविंशति दश-दश। बीस-विंशति ।

- संख्यावर्गः। BHAR एक्कीस-एकविंशति । बाईस-द्वाविंशति । तेईस-त्रयोविंशति । चौबीस-चतुर्विशति । पच्चीस-पञ्चविंशति । छब्बीस-पविशति । सत्ताइस-सप्तविंशति । भट्ठाइस-अष्टाविंशति । उनतीस-ऊनत्रिंशत् । तीस-त्रिंशत् । एकतील-एकत्रिंशत् । बत्तीस-द्वात्रिंशत् । तेतीस-त्रयस्त्रिंशत् । चौंतीस-चतुस्त्रिंशत् । पतीस-पञ्चत्रिंशत् । छत्तीस-पत्रिंशत् । सतीस-सप्तत्रिंशत् । भड़तीस-अष्टत्रिंशत् । उनतालील-उनचत्वारिंशत् । चालीस-चत्वारिंशत् । एकतालीस-एकचत्वारिंशत् । बयालीस-द्विचत्वारिंशत् । तेंतालीस- चौथालीस-चतुश्चत्वारिंशत् । पैतालीस-पञ्चचत्वारिंशत् । छियालीस-षट्चत्वारिंशत् । सैंतालीस-सप्तचत्वारिंशत् । अड़तालीस-अष्टचत्वारिंशत् । उनचास-ऊनपञ्चाशत् । पचास-पञ्चाशत् । एक्यावन -एकपश्चाशत्। बावन-द्विपञ्चाशत् । तिरपन-त्रयपञ्चाशत् । चौमन-चतुःपञ्चाशत् । पचपन-पञ्च-पञ्चाशत् । छप्पन-षट्पञ्चाशत् । लत्तावन--सप्तपञ्चाशत् । अट्ठावन-अष्टपञ्चाशत् । उनसठ-ऊनषष्ठी। साठ-पष्ठि। एकसठ-एक षष्ठि। बासठ-द्विषष्ठि । तिरसठ-त्रयः षष्ठि । चौसठ-चतुःषष्ठि। पैसठ-पञ्च षष्ठि । छालठ-पट षष्ठि । सड़सठ-सप्त षष्ठि । अड़सठ-अष्ट षष्ठि। उनहत्तर-उनसप्तति । सत्तर--सप्तति । एकहत्तर-एक सप्तति । बहत्तर-द्वि सप्तति। तिहत्तर-त्रयः सप्तति । चौहत्तर-चतुः सप्तति । पचहत्तर-पञ्च सप्तति । छिहत्तर-पट सप्तति । सतहत्तर-सप्तसप्तति । अठहत्तर-अष्ट सप्तति । उन्यासी-ऊनाशीति।

६२ श्रीकोषे- लो-शतम् । अस्सी-अशीति। पंचानबे-पञ्चनवति । एक्यासी-एकाशीति । छियानबे -षण्णवति । बयासी-यशीति । सत्तानबे-सप्तनवति । तिरासी-त्र्यशीति । अट्ठानबे- अष्ट नवति । चौरासी-चतुरशीति । निन्यानबे-ऊनशतम् । पचासी-पञ्चाशीति । छियासो-पडशीति । हजार-सहस्त्र। सतासी-सप्ताशीति । दश हजार-अयुत, दशसहस्त्र। अठासी-अष्टाशीति । लाख-लक्ष । नवासी-ऊन-नवति । दश लाख-दशलक्ष, प्रयुत । नब्बे-नवति । करोड़-कोटि। एक्यानबे-एकनवति । दश करोड़-दशकोटि । बानबे-द्विनवति । भरब-अर्बुद । तिरानबे-त्रिणवति दशमरब-दशार्बुद । चौरानवे-चतुर्णवति । पनाम-पद्मम् विरामके चिह्न । पूर्णविराम-पूर्णविरामः । यथा-(।) अर्धविराम-अर्द्धविरामः । यथा-(;) पदविराम-पदविरामः, अल्पविरामः । यथा (,) विस्मय भादिबोधक-विस्मयादिबोधकम् । यथा-1 सम्बोधन बोधक-सम्बोधनबोधकम् । यथा-1 कोष्ठ-कोष्ठकम्-यथा [ ] ( ) टिप्पणी सूचक-टिप्पणीसूचकम्-यथा- संयोजक-संयोजकम-यथा (-) आदेशक-भादेशकम-यथा ( ) उद्धहरणचिह्नम्-उदहरणचिह्नम्-यथा-(“ ") प्रश्नचिह्न प्रश्नचिह्नम् । यथा-(१) मा- ३ समुच्चयवर्गः। संक्षेपचिह्न-संक्षेपचिह्नम्-,-(.) श्रीयुक्त ( श्री. ) प्रदर्शक चिह्न-प्रदर्शकचिह्नम्-यथा-(:-) * सर्वनामवर्गः। मैं-हम-अस्मद् ( अहम् ) पुरुषवाचक। तुम (तू)-युष्मद् (त्वम् ) भाप-भवत् ( भवान् ) [पु.] पुरुष वाचक आप-(स्वयं ) आत्मन्-(आत्मा) [पु.] निज वाचक वह-तत् (सः) पु. अदस् ( असौ) पु. यह-इदम् ( अयम् ) पु. एतत् ( एष) पु. } निश्चयवाचक कौन-- किम्-(कः) पु. प्रश्न वाचक क्या-किम् । पु. जो-यत् [पु.] सम्बन्ध वाचक । कुछ-किञ्चित् -(किञ्चित् ) कतिपय अनिश्चयवाचक कोई-किम् अपि ( कोऽपि ) पु. समुच्चयवाची- वरन्-प्रत्युत। और-च, एवं, तथा। या-वा, किम्वा, अथवा । भी-अपि। क्योंकि-यतः। क्यो-किम् । नकि-नच, नतु। मगर-किन्तु । कन-परन्तु । लेक-अपि तु। इसलिए-अतः। इसीलिए-अत एव । , कि-यत् । - * नोट-हिन्दीमें स्त्रियां कह सकती हैं-"हम जाते हैं।" यहां "हम जाती हैं भी होता है । यथा मैं जाती हूं-हम जाती हैं वा हम जाते हैं।

६४ श्रीकोषे- अव्ययवर्ग:- जिससे-येन । ताकि-यथा। भगर-चेत्, यदि तोभी-तथापि। तो-तहि। चाहा-कामम् । यद्यपि-यद्यपि । - सम्बन्धवाची- सिवा ऋते। बाबत-विषये, सम्बन्धे, साथ-सह, साक, साधे, समम् , । बदले-स्थाने । द्वारा- विरुद्ध -प्रतिकूल, विपरीतम् । मारफत द्वारेण, द्वारा वनिस्पत-अपेक्षया। - स्वीकारवाची- खैर, मच्छ-अस्तु । बहुत अच्छा-बाढम् इसी तरह हो-एवमस्तु । | हां-ओम् । आनन्दवाची - वाह-वाह-साधु-साधु। . शाबास-धन्य, धन्यम् । जय-जय-जयतु जयतु । - अनादर वाची- छिः छि:-धिक् धिक् । | राम-राम-राम, राम ।। विस्मयवाची- | महो-अहो, चित्रम् । भोफ-हो। भाचर्यम् ।

- गतिवाची। - दुःखवाची- | अफसोस-कष्टम् । सम्बोधनवाची- अरे रे। क्या हो-किं भो। क्रियाविशेषणवर्गः। सीतवाची- मचानक-अकस्मात् ,सहसा। वास्तविक वस्तुतः। वृथा-वृथा, व्यर्थम् । दर-असल-यथार्थतः। जैसे-तथा, तेन प्रकारेण । निश्चय-किल, नूनम् । जरूर-अवश्यम् । वेशक-निस्सन्देहम् । किसी भी प्रकार येन-केन- जैसे-वैसे-यथा-तथा। प्रकारेण । श्रापसमें-मिथः । परस्परम् । योंही-इस्थमेव । लड़ाई के समय मापसमें- किसी प्रकार-कथमपि । अन्योन्यम्। इत्तफाकिया-दैवात् , संयोगात् । खुद-स्वयम् । जल्दी जल्दी-सत्त्वरं-सत्त्वरम् । संत-मैत-वृधा, अपरिश्रमेण, जबर्दश्ती-हठात्-बलात् । अनायासेन। धीरे-धीरे-मन्दं, मन्द, शनैः शनैः। यका-यक-महसा, अकस्मात् । शायद-कदाचित् , स्यात् । श्राप ही आप-स्वयमेव । ऐसे-इत्थम् । कैसे-कथम् । जैसे-यथा। . ५श्री० ६६ श्रीकोषे- ६ PIRI . खैर-अस्तु। परिमाणवाची- निरा-केवलम् । कुछ-पत् , किश्चित् । प्राय:-प्रायः, बहुधा, प्रायेण । लगभग-सम्भवतः, अनुमानतः। मनमाना-यथेष्टम् । बस-अलं, पयाप्तम् । निपट-निसान्त, सर्वथा। इतना-एतावत् , इयत् । बिलकुल-नितरां, सुतरां, सर्वथा । उतना-नावत्। बहुत-अति, अत्यन्तं, बहु । कितना-कियत् । अधिकतासे-बाहुल्येन, विशेषतः, जितना-यावत् । बहुधा। काफी-अलम् । एक-एक करके-एकैकशः। केवल-केवलम् । बारी-बारोसे-पर्यायेण, क्रमेण, थोड़ा-ईषत् , न्यून, अल्पम् । क्रमशः। । - स्थानवाची- यहां-अत्र। पीछे-पृष्ठतः, पृष्ठदेशे, पश्चात् । वहां-तत्र। नजदीक-सन्निधि, निकटे, समीपे । '-कुत्र। बगल-पार्श्वदेशे। जहां-यत्र। तरफ-अभिमुखं, सम्मुखम् । एक जगह-एकत्र। चारों ओर - सर्वतः, परितः, दूसरी जगह-अपरत्र, अन्यत्र चतुर्दिक्षुः, दिशि-दिशि । दोनों जगह-उभयत्र । इधर-उधर-इतस्ततः । सब जगह-सर्वत्र जहां-तहां-इतस्ततः, यत्र तत्र । ऊपर-उपरि, उच्चैः, उपरिष्टात् । बाहर-भीतर-अन्तर्बहिः । नीचे-अधः अधस्तात् । ऊपर-नीचे-उपर्यधः । वाहर-बहिः। जगह-जगह-स्थान-स्थाने, स्थले- भीतर-अन्तः, मध्ये। स्थले, पदे-पदे। मागे-पुरः, अग्रे, अग्रतः, पुरस्तात् , पुरतः। , भाववाचक०। ६७ समयवाची- - - , आजले-अद्यारभ्य, अद्यप्रमृति । फिर भो-भूयोऽपि, पुनश्च, पुनरपि । इस समय-साम्प्रतं, अधुना, इदानीं, जब-यदार्नी, यदा, यस्मिन् समये, सम्पति, एतर्हि काले अवसरे वा। उस समय-तदानीं, तस्मिन् काले, कब-कदा, कस्मिन् काले, समये वा । अवसरे, समये वा। तब-तदा, तदानीं, तस्मिन् काले। तब-तदा। तबतक-तावत् । तबसे-ततः प्रभृति, तदारभ्य । जबतक-यावत् । पहिले-पुरा,प्रथम, पूर्व, प्राक् । एक समय-एकदा। पोछे-पश्चात् अनन्तरम् । कवतक-कियत् समयपर्यन्तम् । जल्दी-शीघ्रं, द्रुतम् । अबतक-अद्यावधि। देरसे-विलम्बेन । आखिर-अन्ततोगत्वा, अन्ततः । धीरे-धीरे-शनैः शनैः। अब भी-अद्यापि। शट-पट-झटिति। भाजतक-मद्यप्रमृति । प्राज-अध। आज भी-अधुनापि, इदानीमपि । सुबह-प्रातः। इस साल-वर्तमानवर्षे, अस्मिन् वर्षे सन्ध्या-सायम् । ऐषमः। कल-गतेद्युः, पूर्व दिवसे, दिने वा ह्यः परसाल-परारि, अप्रिमवर्षे, कल ( आगामी ) श्वः, परेयुः । संवत्सरे, अब्दे वा। बार-बार-मुहुर्मुहुः, पुनः, पुनः । परसाल(गत)गताब्दे, संवत्सरे बा । हमेशा-सदा, सर्वदा। कभी-जातु, कदाचित् । फिर-फिर-पुनः, पुनः। अक्सर--बहुधा, प्रायः । प्रतिदिन-दिने-दिने, प्रतिदिनम् । कितनी बार--कतिशः, कतिबारम् . " भाववाचकसंज्ञावर्ग:- अकाल - दुर्भिक्षम् । अङ्क-संख्या। अचम्भा-आश्चर्य, विस्मयः। मकाज-क्षतिः, हानिः । अज्ञान-अविद्या, मोहः । - .

, 4 . - , श्रीकोषे- अत्याचार-अन्यायः, दुराचारः । अहङ्कार-गवः, अहङ्कारः, दर्पः । अधमता-नीचता, अधमता। आ अधार-आधारः, आश्रयः, श्राकांक्षा-इच्छा, अपेक्षा । अबलम्बः। श्राग्रह-निबन्धः,हठः,अभिनिवेशः । अधिकार-स्वामित्वं, स्वत्वम् । आचार-व्यवहारः, शुद्धिः, अनर्थ-अनिधः, हानिः। आचरणम्। अनादर-अवहेलना, तिरस्कारः माजमाइश परीक्षा। परिभवः। आजादी-स्वतन्त्रता, स्वातन्त्र्यम् । मनीश्वरवाद-नास्तिकता माज्ञा-आदेशः, निदेशः, निदेशः । अनुकरण-अनुकरणे, अनुकृतिः। मातङ्क-भयः, त्रासः, अनुनय-प्रार्थना, स्तुतिः, विनमः । आदत-अभ्यासः, स्वभावः, प्रकृतिः अनुभव-अनुभूतिः, शान, बोधः । आदमियत-मनु यता, मानवता । अनुराग-प्रेम, अनुक्तिः, प्रीतिः । मादर-सत्कारः, प्रतिष्ठा, सम्मानम् । मनुशीलन-परिशीलनं, अभ्यासः। आपत्ति--आपत् आपत्तिः, दुःखं अपयश-अपयशः, अकीः, कलङ्क: कष्टं, विपत् , अपराध-आगः, दोषः अपराधः । आभा-शोभा, कान्तिः, युतिः, छविः । अपील-पुनर्निवेदन, पुनविचारप्रार्थना माय-धनागमः, धनप्राप्तिः। अभाव-असत्ता, अविद्यमानता। आयोजन-आयोजना, प्रबन्धः । अभिज्ञान-अभिज्ञानं, परिचयः । प्रारम्भ-उपक्रमः। अभिवादन-नमस्कारः, प्रणतिः । आराधन-सेवा, भक्तिः, पूजा। ममन-शमः, शान्तिः, आनन्दः । श्राराम-सुख, शान्तिः, विधान्तिः। भमानत-न्यासः, निक्षेपः । आलोचना-विवेचमा । भरमान-इच्छा, कामना, लालसा। भावभगत-स्वागत-सत्कारः, मर्जी-प्रार्थना, निवेदनम्। सम्मानं, सस्क्रिया। मथे-अभिप्रायः, प्रयोजनं, तात्पर्यम्। आवाज-शब्दा, निनादः, ध्वनिः, अवधि-सीमा। निनदः। मवस्था-स्थितिः, दशा, वयः। श्राविष्कार-उत्पादनं, प्रकाशनम् । मसर-प्रभावः। श्रावेश-क्रोधः, आवेगः असूया-दोषाविष्कारः । आशनाई-प्रेम, प्रीतिः। विपत्तिः। , ६६ भाववाचक। विद्या। . प्राशङ्का-सन्देहः, संशयः, भयः । आशय-अभिप्रायः, तात्पर्यम् । आश्चर्य-विस्मयः। माश्रय-आधारः, अवलम्बनम् । आसकत-आलस्यं,जडता,मान्यम् । आसरा आश्रयः, अवलम्बनम् । आसानी-सौकर्य, सौविध्यम् । आहट-शब्दः, ध्वनिः । श्रहिस्तगा-मान्द्यम् । इ इन्तजाम-प्रबन्धः, व्यवस्था । इन्तजार-प्रतीक्षा, परिरक्षणम् । इसाफ-न्यायः। इकबाल-ऐश्वयं, भाग्यम् । इकरार-प्रतिज्ञा, प्रणः। इख्तियार-अधिकारः स्वामित्वम् । इच्छा-कामना, अभिलाषा, ईहा । इजाजत-आशा, आदेशः, इरादा-सङ्कल्पः, विचारः। इलजाम-अपराधः, दोषः अभियोगः इलाज-औषधं, चिकित्सा, उपायः । इल्म-कला, इल्लत लाञ्छनं, दोषः, कलङ्कः । इशारा-सङ्केतः। इश्क-प्रेम, प्रीतिः। इश्तिहार-विज्ञापनं, विज्ञप्तिः। इस्तीफा-त्यागपत्रम् । इस्तमाल-व्यवहारः, उपयोगः । ई १ ईजाद-नवनिर्माण, आविष्कारः । ईमान-विश्वासः। ईक्षण-वीक्षणम्। निदेशः। , इजत-प्रतिष्ठा, मर्यादा, सम्मान, , गौरवम् । ऊंचाई-उच्चता,विशालता, उत्तुङ्गता। उज्र-बाधा, आपत्तिः। उत्कण्ठा-औत्सुक्यं औत्कण्ट्यम् । उत्पत्ति-उद्भवः, जन्म, जनिः । उदारता-औदार्य, सरलता, सारत्यं, दाक्षिण्यम् । उदासी-उदासीनता, औदासीन्यम् । उदाहरण-दृष्टान्तः। उद्धार-मोक्षः, मुक्तिः, उद्धारः। उद्यम-प्रयत्नः, यत्नः, प्रयासः उद्योगः, व्यवसायः। उद्योग-उपायः। उद्वेग-व्याकुलता, उद्विग्नता । उधार-उद्धारः । . ८ इत्तला-सुचना । इतमीनान-विश्वासः, विश्रम्भः । इनकम-(आंग्लशब्दः) आयः, अर्थामगः। इनकार-अस्वीकृतिः अस्वीकारः । इनाम-पुरस्कारः, पारितोषिकम् । इबारत-लेखः, लेखनशैली। इम्तिहान-परीक्षा, परीक्षणम् । . .

श्रीकोषे- क १ क . उन्नति-वृद्धिः, सत्थानं, अभ्युदयः।। एकरार-प्रतिज्ञा, प्रणः, प्रतिश्रुतिः। उन्माद-उन्मत्तता, चित्तविभ्रमः । एक्जामिनेशन--(आंग्ल शब्दः )- उपकार-अनुप्रहः, उपकृतिः परीक्षा। साहाय्यम्। एजूकेशन--(आंग्लशब्दः)-शिक्षा । इपक्रम आरम्मः । एतबार-विश्रम्भः, विश्वासः । उपदेश-शिक्षा, शिक्षण, एलेक्शन-निर्वाचनम् । अनुशासनम् । एडूस ~ सङ्केतः । उपाधि-धर्मचिन्ता। रायबहादुर, एहसान-कृतज्ञता। महाराजः, राजा, महामहोपाध्यायः, ऐ शर्मा, वर्मा, आचार्यः, कटारे, ऐंठ- हठः । कविराजः, पाठकः मिश्र इत्यादि । ऐब- दोषः, आगः। उपासना-सेवा, पूजा । पैयासी-बिलासः विलासिता, भोगः। उपेक्षा-उपेक्षा, अनादरः,तिरस्कारः ऐयारो-- गुप्तभेदः । उमंग-प्रमोदः, हर्षः। श्रो उमर-वयः, अवस्था। श्रोट-व्यवधानम् । उम्मेद-भाशा, सम्भावना । ओहदा-पदं, स्थानम् । उलहना-उपालम्भः, उपालम्भम् । औ उल्था-अनुवादः। मोघाई-निद्रा, लघुनिद्रा। उल्लास-आहादः, आनन्दः । औघड़पन -स्वैरिता। उसूल-सिद्धान्तः, ध्येयः। अवसर-अवसरः, कालः । अवकाशः। ऊधम-उपद्रवः। ऊहा-तकः, अनुमानम् । कठिनता-कर्कशता, काठिन्यं, ऋ कठोरता। ऋण-ऋणम् । कटुता-तीक्ष्णता। ऋद्धि-धनं, वृद्धिः, समृद्धिः। कतल-घातः, हननं, हत्या । कदर-प्रतिष्ठा, सम्मान, आदरः। एकता-एकत्वं, मेलः, ऐक्यम् । कपट-माया, धूर्त्तता, छलम् । एकवाल-भाग्य, तेजः, प्रतापः। कबूल-अङ्गीकारः, स्वीकारः। . . . , भाववाचक.॥ ७१ , , . कब्जा--स्वामित्वं,अधिकारः,स्वत्वम्। किस्सा-कथा, कथानकम् । कमीनापन--क्षुद्रता, नीचता । कीमत-मूल्यं, अर्घः। तुच्छता। कीर्तन-गुणगानं, वर्णनम् । कमाई-उपार्जनं, अर्जनम् । कानि-यशः, समज्ञा। कय--वमथुः, वमिः, वमनम् । कुचक्र-षड्यन्त्रम् । करामात--चमत्कृतिः, चमत्कारः। कुहराम-क्रन्दनं, रोदनं, विलापः । करार-प्रतिश्रुतिः, प्रणः, प्रतिज्ञा । कर्ज-ऋणम् । कृपा-दया, अकनुम्पा, अनुग्रहः। कल्पना-रचना, भावना, कृतिः । कृषि-कर्षणम् । कल्याण-क्षेम, मङ्गलं, कुशलम् । कैद-कारावासः, बन्धनम् । कोरकसर-न्यूनाधिकता। कवायद-व्यायामः, युद्धाभ्यासः । कोलाहल-कलकलः। कविता--काव्य, कवित्वं, कविता । कोशिश-चेष्टा, यत्नः, उपायः । कष्ट-पीडा, बाधा, व्यथा, दुःखम् । कौटिल्य-कुटिलता। कसर-न्यूनता। वैरम् । कौम-जातिः, वर्णः। कसरत-व्यायामः । कसूर-दोषः, अपराधः। क्रोड़ा-क्रीडा, केलिः, खेला। कातरता-व्याकुलता, अधीरता। हानिः । क्षति-नाशः, कानून-नियमः, विधिः, राजनियमः। क्षमा-सहिष्णुता, क्षान्तिः । काब्लियत-योध्यता। विद्वत्ता । क्षय-क्षतिः, क्षयः। काबू-अजिकारः, बलम् । क्षुधा-क्षुत् , बुभुक्षा। कामयावी-सफलता, सार्थकता । क्षेम-कुशलम् । कायरता-कायरता, भीरुता। कायापलट-परिवृत्तिः, परिवर्तनम्। खट-पट-कलहः । वैमनस्यम् । काररवाई-कृतिः, कार्यम् । खण्ड-विभागः, खण्डः। खतरा-त्रासः, भयः, भीतिः। कारण-निदानं, हेतुः, निमित्तं, बीजं, आदिकारणम् । खबर-वृत्तं, समाचारः, उदन्त: कालिमा-कृष्णता, कलङ्कः, कालिमा। वृत्तान्तम् । किफायत-न्यूनता, हीनता । खयाल-चिन्ता । ध्यानम् । किसमत-देवं, दिष्टं, भागधेयं । खराबी-दुर्दशा । दोषः, अवगुणः । भाग्यं, नियतिः, विधिः। खरीद-क्रयणम् । - श्रीकोषे- . , . गुजर-निर्वाहः। खर्च-व्ययः। गरमाहट–उहणता। खलल-प्रतिबन्धः, बाधा। गरीबी-दरिद्रता, दारिद्रयम् । खातिर-सम्मानम् । गर्जना-गर्जना। खिचाव-आकर्षणम् । गल्ती-अशुद्धिः, त्रुटिः। खिताब-उपाधिः, पदवी। गवाही-साक्ष्यम् । खिदमत-सेवा, मृतिः। गश-मूर्छा। खुराफात-उपद्रवः। गश्त-म्रमणम् । खुशनसीबी-सौभाग्य, सुभगता। गस्सा- कवलः,ग्रासः। खुशबू-सुगन्धिः, सुरभिः । गाम्भोर्य-गम्भीरता, गाम्भीर्यम् । खुशहाली-सुसमाचारः शुभदशा। गालो-गाली । (भर्तृहरि शतक) खुशी-मोदः, हर्षः, आनन्दः,प्रसन्नता गीत-गीतः, गानम् । खुशामद-चाटुकारिता। गीलापन-आर्द्रता, क्लिन्नता । खूबी-वैचित्र्यं, उत्तमता, विशेषता खेद-पलानिः, दुःखम् । गुण-गुणः । खेल-क्रीडा, खेला। गुनाह-अपराधः, दोषः। खोज अन्वेषणं, गवेषणम् । गुमान-दर्पः, गर्वः, महङ्कारः । खोदाई-खननम् । गुलामी -दासता, किङ्करत्वम् । खौफ-आतकः, भयः, त्रासः । गुपचुप- -गोप्यम् । ख्याति-विश्रुतिः, प्रसिद्धः, । गुस्ताखी-धृष्टता। खवाहिश-सामना, इच्छा । गोराई-धवलता, शुभ्रता । गोलाई-वर्तुलता, गोलत्वम् । गढ़ना-रचना, निर्माणम् । गति--प्रवेशः, गमनं, यानम् । गौआ-किम्बदन्ती, जनश्रुतिः। गदर-उपद्रवः, विद्रोहः, विप्लवः । गोहार-आहूतिः, आह्वानम् । गौर-विचारः, विमर्शः, ध्यानम् । गन्दा-पहिलः। गन्ध-गन्धः सुरभिः। ग्लानि-क्लमः, खेदः, ग्लानिः । गपशप-व्यर्थवार्ता, गम-शोकः, चिन्ता। घटना-योजना, मेलनं, गरज-आवश्यकता, अभिप्रायः देवगतिः। भाशयः, प्रयोजनम् । घटतो-न्यूनता।

भाववाचक०॥ ७३ , घबराहट-व्याकुलता, विकलता चालबाजी-धूर्तता, छलं कपट, वैकल्यम् । छद्मता। घमण्ड-दर्पः, गवः, अहङ्कारः । चाव-लालम्रा, प्रबलाभिलाषा आभमान:। विधाड़-चीत्कारः। घात-प्रहारः, हननं, आघातः वधः। चितवन-ध्यान, भावना कटाक्षः । घिचापच-द्वैधम् ,सन्देहः, संशयः। चिकनापन-स्निग्धता, चिक्कणता। घिसाई-घृष्टिः, घर्षणम् । चिढ़-क्रोधः, रोषः। घुड़को-भत्सना, तर्जनम् । चिल्लाहट-क्रन्दनं, रोदनम् । घस- उत्कोचः। चिह्न-चिह्न, लक्ष्म, लक्षणम् । घेराव-वेष्टनं, आवरणम् । चुगुली-पिशुनता, पैशुन्यम् । घोटाई-घोटनम् । चुनाव-वरण, निर्वाचनम् । घोषणा-घोषणा चूक-अपराधः । विस्मृतिः । घोखान- रटनम् । चूना-स्यन्दनं, च्युतिः, क्षरणम् । चूमना-चुम्बनम् । चञ्चलता-चञ्चलता, चपलता, चूसना-चूषणम् । चावल्यम् । चैन-शान्तिः, सुखम् । चकाचौध-चाकचिक्यम् । चैलेंज-(आंग्लशब्दः) आह्वानम् , चकाचकी-कलहः । समराह्वानम् । चढ़ाई -आक्रमणम् । आरोहणम् । चोरी-स्तेय,चौर्यम् । चतुरता-दक्षता, पटुता नैपुण्यं, चोट-व्रणः। चातुर्यम् । चमकदमक-उज्ज्वलता, दीप्तिः। चमत्कार चमत्कारः अद्भुतकर्म । छटपटी विकलता, व्याकुलता, चयन-संग्रहः सङ्कलनम् । चर्चा वार्तालापः वर्णनं, अनुशीलनम्। छटा-प्रकाशः, छविः । चलन-गमनं, प्रस्थानम् । कम्पनम् । छपाई-मुद्रणम् । चसका-अभ्यासः। छल-कपटः छमत्वम् । चाकरा-भृत्य कर्म, दासता। छाटना-तक्षणम् । चाल-गमनं, रीतिः। प्रथा छान-बोन-अनुसन्धानम् । कपटः। छिपाव-भपद्धतिः, गोपनम् । वैकल्यम् । , ७४ श्रीकोषे- , . . : " छिछालेदर-दुर्गतिः, दुर्दशा। जीवन-प्राणधारणम् । छुट्टी-अकाशः, भुक्तिः। जीविका-जीवनवृत्तिः, जीवननिर्वाहः । छोटापन-नीचता, लघुता। जुदाई-विरहः, वियोगः, पार्थक्यम् । छोह-दया, कृपा, अनुकम्पा । जुमला-वाक्यम् । जुर्माना-अर्थदण्डः। भाई-म्भा, जुम्भणम् । जुर्म-अपराधः, दोषः । जईफी-स्थाविरम् , वृद्धता । जेठाई-श्रेष्ठता, ज्येष्ठता। जन्म-जन्म,उत्पत्तिः, उद्भवः,जनिः । जोखना-मापनं, तोलनम् । जमघ-समूह, समवायः। जोड़ाई-योगः, जोडनम् । जमुहाना-जम्भा, जम्भणम् । जोवन-यौवनं, तारुण्यम् । जलन-तापः, दाहः, ईर्ष्या । जोर-शक्तिः, बलम् । जवाब-उत्तरम् । जोस-आवेशः, मनावेगः । जबान-भाषा। जोह-प्रतीक्षा, अन्वेषणम् । जहालत-मूर्खता, जाड्यम् । जौहर-अद्भुतकर्म । जांच-मनुसन्धान, परीक्षणम् । ज्यादती-आधिक्यम् । जांचपड़ताल--अनुसन्धानयुक्त ज्वाला-वह्निशिखा, अर्चिः।। परीक्षा। जागरण-प्रबोधः, जागृतिः । झञ्झट-प्रपञ्चः। जाड़ा-शैत्यम् । झगड़ा-कलहः, उपद्रवः । जादू-इन्द्रजालं, माया। झटपट-शीघ्रातिशीघ्रम् । जाप-जपनं, जपः। झुकाव-प्रवणता, प्रवृत्तिः, प्रगतिः। जायदाद-विभवः, सम्पत्तिः, धनम् । जालसाजी-कूटप्रबन्धः कूटकमः। टंकाई-टङ्कन, सीवनम् । जिक्र-चर्चा, प्रसङ्गः। टण्टघण्ट-मिथ्याडम्बरः। जिद्द-हठः, दुराग्रहः। व्यर्थोडम्बरः । जिम्मेवारी-संरक्षा, उत्तरदायित्वम् । टण्टा-कलहः। जीत-जयः विजयः। टहल-सेवा, भक्तिः । जीना-जीवनम् । टाइटिल - (आंग्लशब्दः) पदवी जीर्णोद्वार-पुनद्धारः, पुनःसंस्कारः। उपाधिः। . . , .. -- भाववाचक०॥ ७५ डेवढ़-क्रमः। ड्यूटी (आंग्लशब्दः)-सेवा, धर्मः, कत्तव्यम् . टालमटोल-व्याजः । टीका-व्याख्या, टिप्पणी।। टेक-नियमः, हठः। टेढ़ापन-कौटिल्यं, वक्रता । ट्यूशन ( ऑग्लशब्दः)- शिक्षणम् । ट्रान्सफर ( आंग्लशब्दः)- परिवर्तनम् । ट्रान्सलेशन--(अग्लशब्दः )- अनुवादः। ढङ्ग-शैली, प्रणाली, रीतिः, युक्तिः । ढकोसला-पाखन्छ । ढिटाई-धृटता, उद्दण्डता। ढिलाई-मान्द्यं, मन्थरता, शैथित्यम्। ढोलढाल-मन्द-शिथिलः । ढोंग-पाखण्डः, प्रपञ्चः । ठ ठगी-वश्यकता, प्रतारता, धूर्तता ।। ठट्टा-परिहासः, विनोदः, हास्यम् । ठण्डा-शीतलता, शैत्यम् । ठहराव-निश्चयः, दृढता। ठहाका-अट्टहासः। ठीकठीक-यथार्थतः। ठेस-आघातः। ठोकर-प्रत्याघातः। " . तकदीर-देवं, भाग्यम् । तकरार-कलह, उपद्रवः । तकाजा-रेरणं, नोदनम् । तजबीज-विचारः, सम्मतिः, निर्णयः। तजरुबा-अनुभवः, अनुभूतिः । ज्ञानम् । तर्क-भयः, भीतिः, त्रासः। तत्व-सारः, याथाय॑म् । तदबीर - उपायः, प्रयत्नः, यत्नः । तनखाह-वेतनं, निर्देशः। तन्दुरुस्ती-स्वास्थ्यं, नैरोग्य, आरोग्यम् । तन्द्रा-आलस्यं, तन्द्रा । तफसील-विवरणं, सूची। तबदीली-परिवर्तनम् । दुर्दशा, दुर्गतिः। तरकीब-युक्तिः, उपायः। तरक्की-वृद्धिः, उन्नतिः । डकैती-घाटी, डाकः । डपट-भर्त्सना, तर्जनम् । डर-त्रासः, भीतिः, भयः । डाह-ईर्ष्या। डिफेक्ट-(मोग्लशब्दः )-त्रुटिः, दोषः। डींग-मात्मश्लाघा, आत्मप्रशंसा । डुबाव-निमज्जनम् । डेरा-निवेशः, आवासः, स्थानम् ।

श्रीको- तरीका-प्रकारः, ७ तरजुमा-अनुवादः। तरदुत-चिन्ता, विचारः। थकावट-परिश्रान्तिः,श्रान्तिः,श्रमः। तरावट-आर्द्रता, क्लिन्नता। थिरता-धीरता, स्थिरता । शैली, विधिः,रीतिः। थरथराहट-कम्पनम् । तर्क-तकः, अनुमानम् । द तलाश--अन्वेषणम् । दखल-अधिकारः। तवालत-कष्टम् । दगा-उलं, कपटः, छद्मत्वम् । तशरीफ-मर्यादा, प्रतिष्ठा, प्रतिकृतिः दफन-शव क्रिया। तहकीकात-निरीक्षणं, दया-कृपा, दया, अनुकम्पा । अनुसन्धानम्। दरखास्त-प्रार्थनापत्रम् । ताज्जुब-विस्मयः आश्चर्यम् । दर्द-पीडा, बाधा, व्यथा । तादात-सख्या । दद-दपः, गर्वः, अहङ्कारः। ताना-उपहासः, भषिक्षेपः। दर्शन-अवलोकन, निरीक्षणम् । ताबेदारी-सेवा, दासता। दलील-विवादः, तर्कः। तामोल--आज्ञापालनम् । दशा-अवस्था, स्थितिः, दशा । तालीम--शिक्षा, दीक्षा । दस्तखस्त-हस्ताक्षरम् । ताल्लुक-सम्बन्धः, दहेज-यौतुकम् । व्यवहारः प्रयोजनम् । दाग-कलङ्कः, लान्छनम् । तासोर-प्रभावः, गुणः । दाम-अर्धः, मूल्यम् । तिजारत-व्यापारः दिवाला-भृणशोधनाक्षमता। तिरछापन-वक्रता, कौटिल्यम् दिक्कत-क्लेशः, कष्टम् । तिरस्कार-अनादरः, परिभवः, दिगभ्रम-दिगभ्रान्तिः । अबहेलना। दीक्षा-मन्त्रोपदेशः, मन्त्रदीक्षा। तुर्रा-विशेषता, महत्ता। दुःख-पीडा, व्यथा, क्लेशः । तुलना-समता, साम्य, साहश्यम् दुराचार-दुराचारः, दुव्यवहारः। तेजी-प्रता, शीघ्रता, तीक्ष्णता, दुराव-अपद्धतिः, गोपनम् । तोहमत-दोषः कलकः। दुर्व्यवस्था-कुप्रबन्धः । दुराचारः । त्याग-उत्सर्गः, विसर्जनं दान, दुलार-स्नेहः, प्रेमः । त्यागः। दुश्मनी-शत्रुता, विरोधः, वैरम् । . .

भाववाचक०। ७७ देन-देयं, ऋणम् । देनलेन-दानादानम् भादानप्रदानम् देर-विलम्बः। दोस्ती-मित्रता, मैत्री, सौहार्दम् । . , धरोहर-निक्षेपः, न्यासः। धब्बा-लाञ्छनं, चिह्नम् । धाक-प्रतापः, प्रभावः । धावा-आक्रणम् । धुलाई-प्रक्षालनम् । धूर्तता-वचनं, धूर्तता। धैर्य-धीरता, गम्भीरता। धोखा-छल, कपटः । . नामवरी-यशः, कीर्तिः, ख्यातिः, प्रसिद्धिः। नालिश-अभियोगः । नाश-वंसः, नाशः, क्षयः। नामर्दी-नपुंसकता, क्लैव्यम् । नाराजगी-अप्रसन्नता। निचोड़-सारांशः, सारः, निछावर-न्युज्छनम् । निठुरता-निष्ठुरता। निधन-मरणं, नाशः, मृत्युः । निपटारा-निर्णयः नियन्त्रण-निग्रहः, शासनम् । नियति-भाग्यम् । नियम-विधिः, पद्धतिः। निर्वाचन-वरणम् । निषेध-प्रतिषेधः, अवरोधः । निष्कृति-प्रायश्चित्तम् । निहोरा-विनयः,प्रार्थना। नॉलेज-( आंग्लशब्दः)-विद्वत्ता पाण्डित्यं, योग्यता। नुकताचीनो-रन्ध्रान्वेषणं , छिद्रान्वेषणम् । , " नकल-अनुकरणम् । नजर-दृति, उपहारः। नजाकत-सौकुमार्यम् । नजीर-उदाहरणं, उपमा । नपाई-मापनम् । नफरत-घृणा । नफा-लाभः, आयः। नफीस-उत्तमः, सुन्दरः । नमूना-आदर्शः। नवीनता-नूतनता, नवीनता। नसीव-भाग्यम् । नसीहत-शिक्षा, उपदेशः । नाँच-नर्तन, नृस्यम् । नाता सम्बन्धः नुकसान-क्षतिः, हानिः । नुमाइश-प्रदर्शिनी। नेकचलनी-सच्चरित्रता। नौबत-अवस्था, परिस्थितिः । न्यौता-निमन्त्रणम् । प्यूनिटिवटैक्स-दण्डकरः श्रीकोषे-- " . . पकड़-प्रहणम् । पूंछताछ-प्रश्नः, जिज्ञासा, पृच्छा । पछताव-पश्चात्तापः। पूजा-पूजा, अर्चा, बाराध', सेवा, पद-पदवी, स्थानं उपाधिः । पूजनम् । परख-परीक्षा। पेन्लिन-(ओग्लशब्दः)- परवरिश-पालनं, रक्षा, पोषणम् । बाईकवृत्तिः। परवानगी-आदेशः, आज्ञा । पेशा-- व्यापारः, व्यवसायः । पराधीनता--परवशता, परतन्त्रता। पैगाम-सन्देशः, वाचिकम् । पराभव--पराजयः, अभिभवः । पैदाइश-उत्पत्तिः, जन्म, उद्भवः । परामर्श--विचारः, विमर्शः। पैमाइश-मापनम् । परिचय--परिचयः, अभिज्ञानम् । पैरवी-प्रयत्नः, उद्योगः। परिणाम-परिणामः, फलम् । प्रणाम-प्रणामः, नमस्कारः, प्रणतिः, परिपाटो-शैली, रीतिः, श्रेणी । अभिवादनम् । परिश्रम- उद्यमः, श्रमः। प्रतिज्ञा-प्रतिज्ञा, प्रणः । परिष्कार–परिष्कारः। प्रतिवाद-प्रतिवादः, विरोधः, पहिचान-चिह्नम् । खण्डनम् । पहुंच-गतिः, प्रवेशः। प्रतिष्ठा-महत्ता, गौरवम् । पाजीपन-दुष्टता, नीचता। प्रयास-श्रमः, उद्योगः ।। पानी-मर्यादा, प्रतिष्ठा, सम्मानम् । प्रयोग-उपयोगः, प्रयोगः, व्यवहारः। पाप-पापं, किल्विषं, कल्मषम् । प्रयोजन-अभिप्रायः, आवश्यकता। पार्टीशन-(ओग्लशब्दः)- प्रशंसा-स्तवः, स्तुतिः, प्रशंसा, विभागः। श्लाघा। पालन-पालनं, पोषणम् , रक्षा। प्रसङ्ग-अवसरः, प्रसङ्गः । पिघलना-द्रवणं, नलनम् । प्रस्ताव प्रस्तावः, विषयः अवसरः। पिसाई-पेषणम् । प्रवेश- गतिः, प्रवेशः। पाना-पानम्। प्रारम्भ-उपक्रमः, आरम्भ: प्रारम्भः। पोलाहट-पीतिमा। प्रार्थना-निवेदन, अभ्यर्थना, प्रार्थना। पुकार-आह्वानम् । प्रेम-स्नेहः, प्रेम, प्रीतिः । पुरस्कार-पारितोषिकं, पुरस्कारः। प्रपोगण्डा-(आंग्लशब्दः) पुष्टि-दृढता, प्रौढता। प्रचारकार्यम् । , .

भाववाचक०॥ ७९ , , फजूल-व्यर्थः। फते -- अया, .. - प्रसन्नता-प्रसन्नता, हर्षेः । बचपन-शैशवं, बाल्यम् । बचाव-रक्षणम् । फजीहत-दुर्दशा, दुर्गतिः। बड़प्पन-गौरवं, महत्ता। बढ़ती--वृद्धिः। फजलखर्ची-अपव्ययिता। बदगोई - नन्दा। -स्पन्दनम् । बदनामो–कलङ्कः, दोषः । विजयः। बदनीयत -कुत्सितध्येयः। फरक-भिन्नता, भेदः, अन्तरः। बदमाशी-शठता, धृष्टता । फरमाइश-आज्ञा, निदेशः, आदेशः बन्दोबस्त-प्रबन्धः व्यवस्था फरियाद - अभियोगः। बपौती-पैतृकधनम्। फर्क-भिन्नता। बयान-वर्णनम् फर्ज-कर्तव्यम् । बरकत-उन्नतिः, वृद्धिः फसाद-उपद्रवः, विद्रोहः । बरताव-व्यवहारः। फाका-उपवासः, व्रतम् । बल-बलं, शक्तिः, सामर्थ्यम् । फायदा-काभः, आयः । बलात्कार-बलात्कारः, हठः । फीस-शुल्कः। बसेरा-निवासः, आवासः । फुफकार-फुत्कारः। बहलाव-विनोदः, नोरञ्जनम् । फुरसत-अवकाशः। बहार-शोभा, आनन्दः, हर्षः। फूट-वैरं, विरोधः, विद्वेषः बाजी-पणः । फेर-भ्रमः, चक्रम् । बाढ़-अधिकता। परीवाहः । फैलाव-विस्तारः विस्तृतिः । बाणिज्य-व्यापारः, व्यवसायः । फैसला-निर्णयः। बादशाही -साम्राज्यम् । फौत-निधनम् । बानगी-आदर्शः। ब बारीकी-सूक्ष्मता। बकवाद-जल्पनम् ।। बिगाड़-विप्रहः, कलहः । बकबक -प्रलापः, वृथावादः। बिछोह-वियोगः, बखेड़ा-कलहः उपद्रवः। विदाई-गमनम् । वगावत-विद्रोहः, राजविद्रोह । बुढापा-वृद्धता, स्थाविरम्। बचत-आयः। बुराई-नीचता, दोषः। , . ब .

श्रीकोषे- बुलावा-निमन्त्रणम् । बेइन्साफी-अन्यायः । बेगारी-आजूः। वेहोशी-मूर्छा, मोहः बेलौस-सत्यम् । बैठक-अधिवेशनम् । बैर-विरोधः, रिम् । बोलाचालो-वार्तालापः । बोलबाला-प्रसिद्धिः, प्रभावः । बौछार-वर्षा, वर्षणम् । व्याह-परिणयः, विवाहः, उद्वाहः व्योरा-विवरणम् । " भजन-कीर्तनं, वर्णनम् । भक्ति-श्रद्धा, सेवा। भय-त्रासः, भौतिः, भयः । भरोसा-माशा, विश्वासः, भर्ती-प्रवेशः। भलाई-हिताभिलाषा। भिन्नता-भेदः, अन्तरः। भीख-भिक्षा, याजा। भीड़-सङ्घर्षः । भूख-क्षुधा, बुभुक्षा। भूल-भ्रान्तिः, श्रुटिः। भेद-भेदः, अन्तरः। भैयाबन्दी-सौहार्दम् । मजबूती-दृढता, पुष्टिः। मजा-स्वादः । आनन्दः, हर्षः मजूर-अङ्गीकारः, स्वीकारः । मद अभिमानः, गर्वः, दर्पः । मदद-सहायता। मन्शा-अभिप्रायः, आशयः । | मर्म-मर्म मशक्कत-परिश्रमः। मश्क-अभ्यासः । महंगी-महर्घता। महावरा-अभ्यासः, वारधारा । मान-प्रतिष्ठा, गौरवम् । माफ-क्षमा। मार्जन-प्रक्षालन, मार्जनम् । मालकियत-स्वामित्त्वम् । मिठास-मधुरता, माधुर्यम् । मिन्नत-विनयः, प्रार्थना, निवेद मिलाप-मेलनं, संयोगः । मियाद-अवधिः। मीमांसा-विचारः, तत्त्वविचारः मुमाइना-निरीक्षण, पर्यवेक्षण मुराद-कामना, इच्छा। मुरौमत-सङ्कोचः, शीलः । मुलाकात-समागमः, मेलनम् । मुसीबत-कष्ट, विपत्तिः, विपत् मुस्तैदी-तत्परता। मुहकमा-विभागः । मुहब्बत-प्रीतिः, मित्रता। . - . मकसद-मनोरथः, कामना। मजमून-लेखः, विषयः। मुहलत-अवधिः।

भाववाचक०। . . . मृत्यु-निधनं, मरणम् । मेल-संयोगः, समागमः। मेहरबानी-कृपा, दया। मैथुन सम्भोगः, रतिक्रीडा। मैलापन-मलिनता, मालिन्यम् , मोटाई-पीवरता, स्थूलता। मोद-आनन्दः, मोदः । मोह-भ्रमः, मोहः, अज्ञानम् । मौका-प्रसङ्गः, अवसरः । मौज-विनोदः, आनन्दः, सुखम् । मौत-मृत्युः, मरणं, निधनम् । मौर-वरशिरोवेधनम् (उदाहे)। य यकोन-प्रत्ययः, विश्वासः, प्रतीतिः। यति-विरामः, विधामः, यतिः । यथार्थता-वास्तविकता । यश-कीर्तिः, समज्ञा। याग-यज्ञम्, यागः । यात्रा-प्रस्थानं, यात्रा। यकायक-अकस्मात् । यादगारी-स्मृतिः, स्मरणम् । युक्ति-युक्तिः, उपायः। योग-सङ्गमः, संयोगः । योजना-योजना। रकम-सम्मत्तिः, धनम् । रक्षा-रक्षा, पालनम् । रखवाली-रक्षणम् । रगड़-सघर्षः, दुराग्रहः । रचना-कृतिः, रचना, निर्माणम् । रटन-मननम् । रण-सङ्गरः, युद्धं, सङ्गामः । रति-प्रीतिः, आसक्तिः, अनुरागः । रफ्तार-पातिः। रशद-सामग्री। रस्म-रीतिः, प्रथा, परिपाटी, प्रणाली रहन-आचरण, व्यवहारः । राज-शासनं, राज्यम् । राय-विचारः, विमर्शः। राशि-समूहः । रिपोर्ट-(आंग्लशब्दः) सूचना । घटना। रियायत-न्यूनता। दयापूर्णव्यवहारः रियासत-वैभवं, राज्यम् । रिश्ता-सम्बन्धः। रिश्वत-उत्कोचः। रिस-क्रोधः, रोषः। रिहर्सल-(ओग्लशब्दः)नाटकाभ्यासः रिहाई-मुक्तिः । रुकावट-बाधा, प्रतिबन्धः। रुख-आकृतिः, अनूकूलता। रुचि-मनोवृत्तिः, इच्छा । शोभा, कान्तिः। रुतवा-प्रतिष्ठा, पदम् । , . रगत-दशा। रञ्जीदगी-मनोमालिन्यम् । रडापा-वैषव्यम् । रण्डीबाजी-वेश्यागामिता। ६श्री.

श्रीकोषे- , " , .. . रूखापन-रूक्षता। लिखाई-लेखः, लिपिः। रूढि-प्रसिद्धिः, प्रथा। लिपाई-लेपः, लेपनम् । रूप-आकृतिः, रूप, आकारः। लियाकत-योग्यता। रूपरेखा-आकारप्रकारः। लीला-कौतुका कल-(भाग्लशब्दः)-विधिः, नियमः। लुत्फ-मानन्दः, स्वादः । रोमाव-प्रतापः, प्रभावः। लुच्चई-नीचता। रोक-प्रतिबन्धः । लूट-लुण्ठनम् । रोजी-व्यापारः, जीविका । लेक्चर-(आंग्लशब्दः)- व्याख्यान रोब-प्रभावः। वक्तृता। रोष-क्रोधः, रोषः। लेख-लिपिः, लेखः । रोशनी-प्रकाशः। लेप-लेपः। रौनक-छविः, शोभा। लोप-नाशः, क्षयः, अदर्शनम् । लोफरी-दुष्टता, क्षुद्रता। लगन-सम्बन्धः, ध्येयः। वकालत-तार्किकता। लज्जत-स्वादः। वचत-प्राप्तिः, उपलब्धिः । लज्जा-त्रपा, लड़कपन-शैशवं, बाल्यम् । वचन-वचः। लड़ाई-झामः, समरः, सङ्गरः । वजीफा-छात्रवृत्तिः, वृत्तिः । लपालप-शुद्धः। वमन-वमथुः, वमिः। लपेट- वेष्टनम् । वय-वयः, अवस्था । ललक-कामना, अभिलाषा । वर्ग विभागः, श्रेणी। लाइफ-(ओग्लशदः)-जीवनम् । वर्षा-वृष्टिः। लाइसेंस-अधिकारः, आज्ञापत्रम् । वश-अधिकारः। लाचारी-बिवशता। वहिष्कार-त्यागः, बहिष्कारः। लाञ्छन-कलङ्कः। वास-निवसनम् । लाट-समूहः । विकार-विकृतिः। लाड़-लालनम्। विकाश-वृद्धिः, विकसनम् । लाभ-प्राप्तिः, मायः। विक्री-विक्रयः। लाली-रक्तिमा, अरुणिमा । विचार-परामर्शः, विमर्शः। व्रीडा। । .

भाववाचक०॥ ३ , विजय-विजयः जयः। विजिट-(ग्लिशब्दः)-समागमः विद्वत्ता-बुद्धिमत्ता, पाण्डित्यम् । विधि-विधिः, नियमः। विनोद-मोदः, आनन्दः। विपत्ति-विपत्तिः, भापत्तिः। विराम-अवसानं, विश्रामः । विरोध-बैरं, विद्वेषः। विलाल-केलिः, क्रीडा विहार-आनन्दः, विहारः । वीरता-वीर्य, बलम् । वृत्तिजीविका। वेग-प्रवाहः। बेश-नेपथ्यम् । वैराग्य-विरतिः। ब्यथा-पीडा, बाधा। व्यवसाय-व्यापारः, उद्यमः। व्यवस्था-विधिः, नियमः। व्यवहार-आचरणम् । व्यसन-व्यसने, दुराचारः। व्याख्या -टीका, व्याख्या। शरारत-दुष्ठता। शर्त-सन्धिः। शहादत-प्रमाणम्। शान्ति-स्थिरता, शान्तिः। शान-गौरवं, उत्कर्षः। शावासी-धन्यवादः, साधुवादः । शासन-निदेशः, शाषनं, आज्ञा। शिकायत-निन्दा। शीत-शीतलता। शील-आचरणं, स्वभावः । शुबहा-सन्देहः, वैध, संशयः । शूरता-शौर्य, सामर्थ्यम् । शेखो-प्रगल्भता, धृष्टता । शैतानी-दुष्टता। .. शोरगुल-कोलाहलः । शोहरत-प्रसिद्धिः। शोषण-शोषणम् । .. . शक-शङ्का, संशयः, सन्देहः । शकुन-निमित्तं, लक्षणं, चिह्नम् । शक्ति-शक्तिः, पराक्रमः । शठता-धूत्तता। शपथ-शापः। शब्द-नादः, ध्वनिः। शयन-स्वापः, निद्रा। संयोग-संयोगः, दैवयोगः। सचाई-सत्यता। सदमा-आषातः, दुःखम् । सत्याग्रह-शान्तिपूर्वकामहः । सत्यानाश-सर्वनाशः। सफर-यात्रा। सफाई-विमलता, स्वच्छता । सफेदी-शुक्लता, श्वेतिमा। सवर-तुष्टिः, सन्तोषः । सरोकार-सम्बन्धनः, प्रयोजनम् । सर्दी-शैत्यम् ।

४ श्रीकोषे- सूचना-विज्ञापनम् । सूजन-शोथः। सूझ-अद्भुतकल्पना। सूद-कुसीदः। सौर-पर्यटनं, विहारः, वायुसेवनम् । सोच-शोधाः, चिन्ता। सोहवत-सहयोगः, साहचर्यम् । सौगन्ध-शपथः। सौगात-उपहारः, उपायनम् । सौजन्य-सुजनता। सौहार्द-मित्रता। स्तुति -- स्तोत्रं, स्तुतिः, स्तवः । स्नेह-प्रीतिः, प्रणयः। , सलाह-मन्त्रणा, मन्त्रः। सलूक-व्यवहारः। सवाल-पृच्छाः, प्रश्नः । सवाल-जवाब-प्रश्नोत्तरम् । सहयोग-साहाय्य, सहायता। सहारा-आश्रयः। सहूलियत-शिष्टता, सभ्यता । साज-सामग्री, प्रसादनम् । साजिश-कूट प्रबन्धः, षड्यन्त्रम् । साथ-मैत्री, पारस्परिकव्यवहारः । सारांश- निष्कर्षः सिङ्गार-प्रसाधनं, शृङ्गारः । सिंचाई-सेचनम् । सिकुड़न-सङ्कोचः। सितारा-भाग्य, देवम् । सिद्धि-सफलता। सिफारिश-अनुरोधः। सिलसिला-क्रमः। सिलाई-स्यूतिः, सीवनम् । सीख-शिक्षा। सीधापन-सरलता। सुकृति-सुकृतिः, पुण्यम् । सुध-स्मृतिः, संस्मरणम् । सुधार-संस्कारः, संशोधनम् । सुभीता-सुकरता, सौविण्यम् । सुरत-कामक्रीडा, रति लीला सुस्ती-शिथिलता, खिन्नता। सूक्ति-सुभाषितम् । , . हंसी-परिहासः, हास्यम् । हक-स्वत्वं, अधिकारः । हत्या-घातः, वधः, मारणम् । हथकण्डा हस्तकाण्डः । हर्ज-क्षतिः, हानिः। हलचल-विक्षोमः, क्षोभः । हांक-आह्वानं, आकरणम् । हार-पराजयः। हाल-समाचारः, परिस्थितिः हिकमत-उपायः। हिदायत-आदेशः। हिफाजत-पालनं, रक्षणम् । हिकमत-असभ्यता। हिम्मत-आज्ञा, शासनम् । हुकम-आज्ञा। , विशेषणवर्गः। हुकूमत-शासनं, निदेशः । हैसियत-योग्यता, सम्पत्तिः, प्रतिष्ठा । हुजत-व्यर्यविवादः। हैसियत-प्रणः । हुरदंगा-उत्पातः, उपद्रवः । होम-हवनम् । हुनर-विद्या, कला। होशियारो-चतुरता, दक्षता हुलास-अभिलाषा, उत्साहः । कुशलता। हो-हुल्लड़-कोलाहलः। हौसला-उत्कण्ठा। हुलिया-स्वरूपं, भाकृतिः । हास-दुःखम् , अवनतिः। हुश्न-सुन्दरता, सौन्दयम् । ह्लाद-भानन्दः। विशेषणवर्गः। . , . . 4 गतसंज्ञज्ञः। अंकक-अङ्ककः। मच्छा-रम्यः, सुन्दरः, रमणीयः, अक्लमन्द-बुद्धिमान् , । विमलः, निर्मलः, सुखकरः । अकिञ्चन-अकिञ्चनः, निर्धनः, अछूत-अस्पृश्यः, स्पर्शायोग्यः । दरिद्रः, निस्वः। अजब-विचित्रः, चित्रः, अद्भुतः, अकेला-एकाकी, एककः, एकः । आश्चर्यकारी, विस्मयप्रदः। भखण्ड-अविभक्तः, निरवच्छिन्नः । मजान-निर्घोषः, अज्ञः, अनभिज्ञः भखिल-अखिलः, निखिलः, पमप्रः, अबोधः। सम्पूर्णः, सर्वः। मटल-अचलः, स्थिरः, अचञ्चल: भगम-अगम्यः, दुर्गमः । दुर्बोधः अटलः । दुज्ञेयः। मतुल-अतुलनीयः, अनुपमः, अगाध-अतलस्पर्शः, निम्न, अप्रमेयः । गभीरम् । मथाह-अतलस्पर्शः। मग्रिम-आद्यः, प्रथमः, अप्रयः, अदना-साधारणः, तुच्छः । भधम-नीचः, ह्रस्वः, पापी। अचूक-अवश्यम्भावी, अमोघः अधमरा-हतः, अर्धमृतः। भचेत-अचेतः, मूञ्छितः विसज्ञः, अधर्मी-पापी, धर्मविमुखः। अग्रिमः।

८६ श्रीकोषे- ई , अधीन-अधीनः, वशगः । श्राला-उत्तमः, श्रेष्ठः । अधीर-चञ्चलः, चलः , चपला, आशावान्-आशायुक्तः,आशावान् । धैर्यरहितः, अधीरः। आसान-सुक्करः, सरलः। अधेड़- अर्धवयस्कः, वृद्धकल्पः । इ अनजान-अज्ञातः, अपरिचितः, इज्जतदार-प्रतिष्ठास्पदः । अविदितः। इतना-इयत्, एतावत् । अनपढ़-निरक्षरः,अशिक्षितः, अपठित इनेगिने-गगनीयः, कतिपयः,न्यूनः । अनमोल-अमूल्यः, बहुमूल्यः। अनर्गल-उच्छृङ्खलः, निरङ्कुशः, ईमानदार-सत्यवक्ता, विश्वसनीयः, निरर्गलः । विश्वासपात्रः। अनाथ-अशरणः, निराश्रयः, ईशभक्त-ईशभक्तः । असहायः, निरालम्बः। अनित्य-नश्वरः, नाशवान् । उऋण-ऋणमुक्तः, ऋणरहितः। अन्धा-नेत्रहीनः, अन्धः। उगा-उदितः,अउकुरितः, उद्गतः। अवारा-वृथाभ्रमणशीलः। उचका-लुण्ठकः । भश्रुत-अश्रुतः। उच्छृखल-स्वेच्छाचारी, निरङ्कुशः मसल-वास्तविकः, यथार्थः, उजड्ड-अशिष्टः,मूर्खः,असभ्यः । तात्त्विकः । अकृत्रिमः। उज्ज्वल-निर्मलः, धवलः, श्वेतः। असमान- अनुपमः। उठल्लू-चश्चलः, अस्थिरः। अलीम-अनन्तः, असीमः । उतारू-उद्यतः,कटिबद्धः, बद्धपरिकरः। भाखिरी-अन्त्यः, अन्तिमः। उतावला-चञ्चलः, स्वरावान् भागत-आगत:, आयातः, उपेतः। उत्साही-उत्साही, उत्साहवान् आगामी-मावी, आगामी। उदार-दाता, सरलः, दक्षिणः। आजाद-स्वाधीनः, स्वच्छन्दः, उद्योगी-अध्यवसायी, उद्योगी, स्वतन्त्रः। यत्नवान् । आजिज-उद्विग्नः, व्याकुलः, उन्नतिशील-उन्नतिशीलः । उद्वेजितः। उस्ताद-शिक्षकः आतुर-पीडितः, दुःखितः, रुग्णः । आभारी-कृतज्ञः, ऋणी। ऊंचा-उन्नतः, उच्चः, विशाल:, , . . , विशेषणवर्गः ७ , क ऊजड़-निर्जनः, शून्यः। कजूस-कृपणः, ऊल-जलूल-वृथावादः । कम्बख्त-दुष्टः, भाग्यहीनः । कच्चा-अपकः। ऋग्वेदी-ऋग्वेदीयः। कट-कटिया-विषकारी। ऋजु-सरलः, निष्कपटः, अवक्त्रः। कट्टर-हठी, आग्रही, द्रढी । कड़ा-उत्कटः, कठोरः, कर्कशः।ल एकचाल-समानमार्गः। कडुत्रा-कटुः, कटुकः एकरङ्ग-एकवर्णः, एकरणः। कनकटा- एकान्त-निर्जनः, शान्तः। कबरा-कधुरः। एहसानमन्द-कृतज्ञः, कृतवेदी। कम-स्तोकः, न्यूनः, अल्पः । कमजोर-दुर्बलः, निर्वलः, अबलः । ऐचा-ताना-बलिरः, केकरः,खोणः। कमसीन-अल्पवयस्कः । ऐठवाज-उद्धतः, उद्दण्डः। कमाऊ-उद्यमी, श्रमी। ऐतिहासिक-इतिहासवेत्ता । कमीना-अधमः, नीचः, दुष्टः । इतिहाससम्बन्धी। कर्जमन्द-ऋणी, ऋणजीवी । ऐयास-विषयी, विषयासक्तः। कर्तव्य-करणीयः, अनुष्ठेयः । ऐबी-दोषी। कर्मशील-कर्मशील ऐसा-एतादृशः, एवम्भूतः, ईदृशः, कसैला-कषायः। एवम्बिधः । काककण्ठी-कटुभाषी। मो कागजी-कागदीयः, पत्रीयः । भोछा-तुच्छः, नीचः, लघुः। कातर-भीरुः, अधीरः, ॐवती-भक्तः ७० व्रती। कातिल-प्राणहर्ता, घातकः, क्रूरः । मोहदेदार-पदाधिकारी,लब्धपदः । काना-एकाक्षः, काणः औ काबिल-अभिज्ञः, विज्ञः, योग्यः । भौघट-दुर्गमः, दुस्तरः। कामयाब-सफलः, फलीभूतः । भौघड़-यथेच्छागामी, मनस्वी । कामी-कामुकः, कामी। औझड़ी-उपद्रवी। कायम-स्थितः, विद्यमानः,वर्तमानः । मौंधा-नताननः, निम्नमुखः । कायल-शिथिलः। , , . .

श्रीकोषे- : ७ : । - कारगर-हितकरः। खेलाडी-क्रीडकः, खेलकः । काला--श्यामः, मेचकः, कृष्णाः । खोखला-अन्तः शून्यः। कुडौल-कुरूपः, विकृतः। खोजक-अन्वेषकः। कुवांरा-अविवाहितः, कुमारः। कर-क्रूरः, निर्दयः। गजा-खल्वाटः, खलतिः कैसा-किम्विधः, कोहशः। गन्दा-अपवित्रः, मलिनः, दूषितः। कोमल-मृदुः, सुकुमारः, कोमलः । गम्भीर-अगाधः, मम्भीरः। कोरा-नूतनः, नवीनः, नवः । गवार-मूखः, जडः, पामरः । कौलक-वांशिका, कौलकः । गठीला-हृष्टः, पुष्ट', हृध-पुष्टः । गद-गद-पानन्दितः, हर्षितः खल-शून्यहस्तः, निर्धनः सुप्रसन्नः। खचित-जटितः, उत्कीर्णः । गप्पी-वृथावादी, मिथ्याभाषी । खट्टा-खट्टः। गरम-उष्णः, तप्तः। खड़ा-उत्थितः। गरीब-दरिद्रः। खतम-समाप्तः। गवैया-गायकः, गायकः । खप्ती-उन्मत्तः। गहन-गम्भीरः, अगाधः। खफा-कुपितः, रुष्टः, क्रुद्धः । गहरा-गम्भीरः, अतलस्पर्शः। खरा-कर्कशः, खरः, तीक्ष्णः । गाढ़ा-गाढः, प्रगाढः । खराब-दुष्टः, नष्टः, गाफिल-असावधानः, अनवहितः। खान-दानी-कुलीनः, वंश्यः । गाभिन-गर्भिणी, गर्भवती। खामोश-धीरः, शान्तः। गारत-नष्टः, प्रणश्यः। खारिज-वहिष्कृतः, च्युतः। गाहक-प्राहकः। खालिस-शुद्धः। गिरफ्तार-गृहीतः, बद्धः, प्रस्तः । खुला-मुक्तः । प्रकटा, प्रकाशितः । गीला-आर्द्रः, क्लिन्नः । खुश-प्रसनः, मुदितः, आनन्दितः । गुद-गुदा-पुष्टः, स्थूलः, खुशबूदार-सुरभियुक्तः, सुगन्धयुक्तः । गुप्त-प्रच्छन्नः, अन्तर्हितः। खंखार-घातकः, क्रूरः। गुल-गुला-( देखिये "गुद-गुदा") खूनी-निर्दयः, धातकः, अत्याचारी। गुस्ताख-धृष्टः, उद्धतः, उद्दण्डः । खूब-अधिकः, बहुसुन्दरः, शोभनः। गंगा-मूकः, अवाक्, स्तब्धः । " . । . कोमलः।

विशेषणवर्गः। . श्वेतः। घ " गृहस्थ-गृही। चिरपुरा-तिक्तः, कटुः। गैर-अन्यः, अपरः, द्वितीयः । चुकता-निःशेषः, सम्पूर्णः। गैरमुनासिब-अयोग्यः, अनुचितः। चुस्त-सङ्कचितः, दृढः। गैरहाजिर-अनुपस्थितः। चूतिया-असभ्यः । गोरा-उज्ज्वलः, धवलः, शुक्ला, चोखा-तीक्ष्णधारः, निशितधारः। चौकना-सतर्कः, सावधानः, गोल-वृत्तः, वर्तुलः, गोलः। अप्रमत्तः, स्थिरचित्तः। गोल-मोल-अव्यक्तः, अस्पष्टः। चौकोर-चतुरस्रः, चतुष्कोणः । चौपट-नष्टः, भ्रष्टः। घटक-घटकः, मध्यस्थः । चौपहल-वर्गाकारः, चतुष्पावः । घटिया-व्यभिचारी, दुष्टः । चौरङ्गा-चतुर्वर्णः, चतुरङ्गः । घना-सान्द्रः, निविडः। घानष्ठ-गाढः, प्रगाढः। छबीला-शोभनः, रसिकः, सुन्दरः । घमासान-भीषणः, भयङ्करः । छली-धूर्तः, छली, कपटी। घरेलू-गृहसम्बन्धी। छर-छरा-क्षारयुक्तः। घिसा-घृष्टः। छिछला-उतानः। घुसा-प्रवेशितः। छनि छिना--उपद्रवी । घिरा-वेष्टितः। छुट्टा-मुक्तः, अबद्धः । एकाकी । घोर-दारुडः, भीषणः । छूछा-शून्यः, रिकः । छैला-रूपवान् , सुन्दरः। चञ्चल-चपलः, चञ्चलः, चलः । छोटा-हस्वः, लघुः। चण्ट-चतुरः, धूर्तः। चकनाचूर-चूर्णितः। '-वनवासी, वनेचरः, चटोरा-लोलुपः, लोभी। आरण्यकः। चमकदार-कान्तिमान् , भास्वर। जङ्गी-वीरः, सैनिकः, योधनः । चलता-पुर्जा-व्यवहारपटुः, उद्यमी। जञ्जाली-प्रपञ्ची । चलता-फिरता-जनमः। जईफ-स्थविरः, वृद्धः, प्रवयः । चिकना-स्निग्धः, चिक्कणः । जड़ाऊ-उत्कीर्णः, जटितः। चतचोर-प्रियः,मनोहरः, रमणीयः । रमणीयः। जबर-पुष्टः, , बली।

६० श्रीकोष- च्युतः। : .. . जवान-युवा, तरुणः। डिस-मिस-पदच्युतः, पृथक्कृतः, जवाबदेह-उत्तरदाता, उत्तरदायी। जयकारी-जयप्रदः, जयकारी। डेवड़ा -सार्धगुणितः। जहरीला-विषाक्तः, विषमयः। जाकड़-अवलोकनार्थः। ढङ्गी-पाखण्डी। जारी-चलमानः, आरब्धः। ढालुभ-प्रवणः, क्रमशोनिम्न । जालिम-अत्याचारी। ढीठ-प्रगल्भः, निर्भीकः। जालिया-मायावी, वञ्चकः, धूर्तः ढीला-शिथिलः. इलथः। जाहिर-प्रसिद्धः, विदितः ज्ञातः । ढोंगी-प्रपञ्चकः ।। जुदा-भिन्नः, अन्यः। जुल्मी-अत्याचारी। तङ्ग-क्लेशितः, द्रुःखितः। जेठा-ज्येष्ठः, अयः। तगड़ा-निरामयः, स्वस्थः जोशीला-प्रभावशाली, आवेशपूर्णः। तजुरबेकार-अनुभवो । झका-झक-विमलः, विशदः । तनहा-असहायः, एकाकी। झक्को-उन्मत्तः, प्रलापी, प्रमत्तः। तर-शीतः, आद्रः झगड़ाल-द्रोहशीलः। ताबेदार-वशानुगः, आज्ञाकारी। तिकोना-ज्यस्त्रः, त्रिकोणः । टटका-नूतनः, नवः, नवीनः, नव्यः। तिगुना-त्रिगुणः । टिकाऊ-स्थायी, दृढः, पुष्टः। तितरवितर-विशीर्णः,छिन्न-भिन्नः। टुटपुंजिया-अल्पवित्तः, स्तोकधनः। तिरछा-वक्रः, कुटिलः, तिरश्श्वीनः। टेढ़ा-चक्रः, कुटिलः, तीखा-खरः, तीक्ष्णः। टोनहा-मायावी, छली। तीता-तिक्तः। तेज-निशितः, कुशलः । उण्डा-शीतकः, शीतः। तैयार-उद्यतः, प्रस्तुतः। ठग-व धूर्तः, प्रतारकः । तोतला-अस्पष्टवादी, अव्यक्तवादी । ठूठा-शून्यः, रिक्तः। ठोस-सारवान् , निविडः, धनः। थका-क्लान्तः, श्रान्तः। थिर-स्थिरः, धीरः। डामा डोल-चलः, अस्थिरः, चञ्चलः। थर-थरा-कम्पितः। ट न . , विशेषणवर्गः। थोड़ा-मल्पः, न्यूनः,। धनिक-सम्पन्नः, धनी, धनिकः । द धर्मी-धर्मी, धार्मिकः। दगाबाज-छली। धीर-गम्भीरः, प्राज्ञः, विज्ञः। दबङ्ग-प्रभावशाली। धुरन्धर-धुरीणः, धुर्यः। दबीज-स्थूलः, गाढः । धू-वञ्चकः, धूर्तः । दम्भी-अहकारी। धूसर-पाण्डवर्णः । दरबारी-सभासद् , सभ्यः। दाखिल-प्रविष्टः, अर्पितः, दत्तः । नङ्गा-नग्नः, विवन्नः । निर्लज्जः। दानी-दाता, दानशीलः, दानी । नकली-कृत्रिमः। दाहिना-सव्यः,दक्षिणः, वामेतरः । नक्कू-बृहन्नासिकः, महाघ्रागः । दिखावटी-दर्शनीयः। नजदीकी-निकटवर्ती, समीपवती । दिलचस्प-मनोहरः, योभनः । नदारद्-अगोचरः, नष्टः। दिलदार-उदारः, सरलः । नन्हा-हस्वः, लघुः। दिलावर-उत्साही, हृदयालुः । नफीस-शोमनः, सुन्दरः। दिल्लगी बाज-हास्यकारी, हासकः । नमकहराम-कृतघ्नः, अकृतज्ञः। दुगुना-द्विगुणः। नमकहलाल-कृतज्ञः, कृतवेदी । दुतर्फा-उभयपक्षीयः, उभयपक्षा स्वामिभक्तः। वलम्बी। नया-नव्यः, नूतनः, नवीनः । दुनियादार-संसारी, गृहस्थः गृही। नरम-कोमल: दुबला-कृशः। नरमदलो (लिबरल)-नम्रदली। दूरन्देश-दूरदर्शी, दीर्घदर्शी । नशेबाज-मादकद्रव्यसेवी। दूरगामी-दूरगामी नाउम्मेद-हताशः, निराशः, आशाहीनः। दूसरा-द्वितीयः, परः, अपरः,अन्यः । नाकाबिल-अयोग्यः, अनहः । देशो-देशजः, देशीयः, देश्यः । दैनिक-आह्निकः, दैनन्दिनः। नाखुश-रुष्टः, अप्रसन्नः, क्रुद्धः । नागवार-असह्यः, अक्षम्यः, अप्रियः। दोतल्ला-द्विभौमः, द्वितलः । नाचीज-असारः, तुच्छः। दोमुहां-द्विमुखः, कपटी। दोषी-दोषी, अपराधी। नाजुक-सुकुमारः, कोमलः । नातेदार-सम्बन्धी। नादान-मूर्खः, अबोधः, बालः । , , , . . धक्काड़-बलिष्ठः। , श्रीकोषे- - . " . नापसन्द-अरुचिकरः, अप्रियः। नामझूर-असम्मतः, अस्वीकृतः। नामुमकिन-असम्भाव्यः, असम्भवः नाराज-देखिये "नाखुश" नामद-नपुंपकः, कातरः, भीरुः । नालायक-अयोग्यः। निकम्मा-तिरर्थकः, अनुपयोगी। निठल्ला-अव्यवसायी, निरुद्यमः : निठुर-निष्ठुरः, कर्कशः, कठोरः निडर-निर्भयः, साहसी, निर्भीकः । निपुण-दक्षः, चतुरः, पटुः, नियुक्त-नियुक्तः, स्थापितः। निरङ्कुश-उच्छृङ्खलः। निराकार-आकृतिहीनः, निराकार निर्गन्ध-गन्धरहितः । निर्मूल-निराधारः, निर्बीजः । निर्लज-अब्रीडा, नित्रपः। निरोग-निरामयः, नीरुजः। नीच-अधमः, अवरः। नेक-साधुः, भद्रः, सुजनः, सज्जनः । नेक-चलन-साधुवृत्तः, सदाचारी । नेस्तनामूद-प्रणष्टः, निर्मूलः, निर्बीजः। नौसिखुमा-नवशिक्षितः। नौसरिया-धूर्तः, छादमिकः । पका-दृढः, पक्कः, पुष्टः, निश्चितः । पचगुना-पञ्चगुणः । पचरङ्ग-पञ्चवर्णः, पञ्चरङ्गः। पतित-पापी, धर्मच्युतः। परोपकारी-दयालुः, परोपकारी, परहितैषी। पसन्द-प्रियः, रुचिकरः, रुच्यः । पहला-आयः, आदिमः, प्रथमः । पागल-उन्मत्तः, प्रमत्तः । पाचक-पाचकः। पाजी-नीचः, दुष्टः, असभ्यः, अशिष्टः । पाबन्द-बाध्यः, विवशः। पीड़ित-दुःखितः, पीडितः । पुनीत-पूतः, मेध्यः, पवित्रः । पुरवासी-पौरः, पुरवासी, पुरजनः । पुराना-प्राचीनः, पुरातनः, पुराणः । पूरा-पूर्णः, पर्याप्तः। पेटू-उदरम्भरिः, कुक्षिम्भरिः । पैदा-जातः, उत्पन्नः, उद्भूतः। पैना-तीक्ष्णः, निशितधारः। पोढ़-प्रौढः, सुदृढः । पोखूता-अचलः, स्थायी। पोशीदा-गुप्तः, प्रच्छन्नः। प्रकट-व्यक्तः, स्फुटः। प्यासा-तृषितः पिपासितः, तृषार्तः । प्रवीण-निष्णातः, निपुणः, सुचतुरः । प्रेमी-प्रणयी, प्रेमी। .. , . . , , : पङ्किल-मलिनः, पङ्किलः, कर्दमः। पञ्च-जननायकः, नायकः, मध्यस्थः । फक्त--केवलम् ।

HA . , फसी-( ) सुन्दर, . , विशेषणवः। फजूल-निरर्थकः निष्प्रयोजनः, बिगाडू-धर्मनाशकः, कार्यध्वंसी। ध्यर्थः, निष्फलः। बीहड़-विकटः, विषमः। फटा-विदीर्णः, भिसः। बुजदिल-कातरः, भीरुः । फर्स्ट-( आंग्लशब्दः) प्रथमः, बुरा-निकृष्टः, निन्धः। भाद्यः । श्रेष्ठः, उत्तमः, वरेण्यः । बेअक्ल-मूर्खः, निर्बुद्धिः, मन्दबुद्धिः । फेल-( आंग्लशब्दः)-असफलः । बेईमान-अविश्वसनीयः। बेचारा-अनाथः, असहायः । बेजा-अयोग्यः, अनुचितः। दर्शनीयः, चित्ताकर्षकः । बेफिक-निश्चिन्तः, अशोकः । ब बक्की-जल्पाकः, बावदूकः । बेहतर-उत्तमः, उचितः । बेहाल-विकल:, भाकुलः । बड़ा-विपुलः, विशाल:, बृहत् । बदचलन-दुराचारी, दुर्वृत्तः, बेहूदा-मूर्खः, असभ्यः। दुर्व्यवहारः। बेहोश-गतसंज्ञः, मूञ्छितः । बदनाम-कलङ्कितः। बौड़म-प्रमत्तः, उन्मत्तः । बदबूदार-कुत्सिगन्धः, दुर्गन्धः । भकुत्रा-अल्पबुद्धिः । बदमाश-दुष्टः, उपद्रवी। भक्त-भक्तिमान् , भक्तः, सेवकः । बदहवाल-व्याकुलः, अचेतः भगन्तू-पलायनशील बरखास्त-पृथक्कृतः, च्युतः। भड़कोला-दीप्तिमान् । बरखिलाफ-प्रतिकूलः, विरुद्धः। भड़-भडिया-बहुभाषकः, जल्पाका । बरबाद-प्रणष्टः, श्वस्तः। भदा-कुरूपः, मभद्रः, विकृतः। बरामद-लब्धः, प्राप्तः, अधिगतः। भयङ्कर-भयङ्करः, भयप्रदः। बलवान्-बलवान् । भरपूर-पूर्णः। बहादुर -बीरः । कुशलः। भला-मजनः, साधुः, उत्तमः, भद्रः। बहाल-पुष्टः। भारी-गुरुः, सारवान् । बाको-शेषः, अवशिष्टः। भींगा-आद्रः, क्लिन्नः। बागी-द्रोही, राजद्रोही। भुक्कड़-बुभुक्षितः, घातः। वाया-वामः, सव्येतरः। भेदिया-कर्णेजपः, भेदकः, गुप्तचरः । वारीक-सूक्ष्मः, अति कृशः। भोला-भाला-सरल। . बिकाऊ-विक्रयः। मजूर-मोकृतः, स्वीकृदः ।

६४ श्रीकोषे- . सर्वः। . मक्कार-मायावी, वञ्चकः । मुमकिन-सम्भवः। मग्न -निमग्नः। मुलायम-मुहुः, कोमलः । मजबूत-प्रौढः पुष्टः । मुश्किल-असमन्जसः, कठिनः। मजबूर-विवशः, अशक्तः, अक्षमः, मुसल्लम-सम्पूर्णः,समप्रः, निखिलः, अवशः। मजेदारस्वादिष्टः, स्वादुः, मुस्तैद-तत्परः, उद्युक्तः, आसक्तः। स्वादः, युक्तः । मुहताज-परमुखापेक्षी। मझला-मध्यमः, माध्यमः। मूर्ख-मूर्खः, देवानां प्रियः*। मददगार-सहायः, सहायकः, मेहरबान-कारुणिकः, दयालुः, कृपालुः सहयोगी। मोटा-मांसलः, स्थूलः, पीवरः । मनगढन्त-कल्पितः, काल्पनिकः। मौजूद-प्रस्तुतः, वर्तमानः, उपस्थितः । मना-प्रतिषेधः, वर्जितः, निषिद्धः । मौसिमी-ऋतुजः, ऋतुसम्बन्धी। मशहूर-प्रसिद्धः, प्रख्यातः, विश्रुतः। मौनी-वाचंयमी। मस्त-आनन्दमग्नः, मत्तः। मस्तना-प्रमत्तः, मत्तः। यजुर्वेदी-यजुर्वेदीयः । महंगा-महर्घः। याचक-याचकः। महज-केवलः, शुद्धः। यज्ञकर्ता-याज्ञिकः । माकूल-योग्यः, उचितः, अनुकूलः । मामूली-तुच्छः, साधारणः । रक-निर्धनः, दरिद्रः । मालूम-विदितः, ज्ञातः, अवगतः । रङ्गीन-रञ्जितः, वर्णितः । मासिक-मासभवः। रंगीला-प्रेमी, अनुरागी, रसिकः । मिस्ल-सदृशः, तुल्यः, समानः । रक्षित-रक्षितः, पालितः। मीठा-मधुरः, मिष्ठः। रचित-निर्मितः, कृतः, विहितः । मुख्तसर-सविक्षप्तः, सङ्कुचितः । रण्डीबाज-वेश्यागामी। मुख्य-अग्रेसरः, मुख्यः, प्रधानः । राजकीय-राजकीयः। मुनासिव-योग्यः, उचितः। राष्ट्रीय-राष्ट्रियः, राष्ट्रसम्बन्धी। मुफीद-लाभकारी, लाभदायकः । (अन्तर्राष्ट्रीय-अन्ताराष्ट्रियः) मुफ्त-निर्मूल्यः, अमूल्यः। रिहा-त्यक्तः, मुक्तः। * यह शब्द अब गोष्ठी मादिके समयमें ही प्रयोग होता है। , .

विशेषणवर्गः। ६५ . रूखा-शुष्कः, नीरसः, रूक्षः । रोगी-रुग्णः, रोगी। शराबी-मद्यसेवी, मद्यपः। शराबोर-अतिक्लिन्नः, अत्याः । शरारती-प्रगल्भः, दुष्टः, धृष्टः । शरीक-संयुतः, मिलितः। शामिल- शिक्षित-शिक्षितः पठितः। शैतान-अत्याचारी, दुष्टः । शोख-निर्भयः, प्रगल्भः । शोषक-शोषकः। ल 'गड़ा-खजः। लचीला (लचकदार)=जपनशील: लजोला-लज्जाला, त्रपिष्णुः । लज्जतदार-स्वादिष्टः, स्वादयुक्तः । लठैत-यष्टिधरः, याष्टीकः। लाचार-विवशः, असमर्थः । लाजिम-योग्यः, उचितः। लापता-गुप्तः, नष्टः। लापरवा-प्रमादी, अनवहितः। लायक-योग्यः, प्रशंसनीयः, श्लाघाहः। लालची-लोभी, लुब्धः, लोलुपः । लुटेरा-पाटच्चरः, लुण्ठकः । " , , व वंक-कुटिलः, अरालः। वञ्चित-प्रतारितः, वञ्चितः। वर्तमान-विद्यमानः, प्रस्तुतः, वतेमानः। वाकिफ-परिचितः, विदितवृतान्तः । वासिन्दा-वासी, निवासी। विदेशो-बदेशिकः, विदेशीयः । विविध-अनेकविधः, नानाविधः । विस्तृत-आयतः विस्तृतः। वैरागी-विरागी। लङ्गो-मित्रं, सखा, सुहृद् । सगा-प्रोदरः, सगर्व्यः, सगोत्रः। सजग-सतर्कः, जागरूकः । सजीव-जीवधारी, जीवयुक्तः । सज्जन-साधु, सुजनः। सदर-प्रमुखः, प्रधानः। सपाट-समतलः। सफल-फलयुक्तः, सफलः । सफा-विमनः, स्वच्छः। सफेद-धवलः, उज्ज्वलः, श्वेतः । सब्ज-हरितः। समेत-सहितः, अन्धितः, युक्तः । सयाना-चतुरः, निपुणः । सरदार-प्रधानः, नायक । सरल-उदारः। सरहदी-सीमासम्बन्धी, सीमाविषयी।

६६ श्रीकोष- - सुनहला-काश्चनवर्णः। , , , . सराहनीय-इलाधीनीयः, प्रशंसाहः, स्तुत्यः। सरीखा-तुल्यः, सहसः, समानः । सस्ता-अरुपमूल्यः, सुलभः । सहनशील-क्षमी, क्षन्ता । सहपाठी-सहचरः,* सतीत्यर्थः, सहयोगो-सहचरः, सहयोगी, सहायकः। सहज-सुकरः, सरलः, सुखसाध्यः। सांवला-श्यामः, श्यामलः । साझीदार-अंश शहरः, अंशभागी। साथी-वयस्कः, सहचरः। सादा-केवलः, शुद्धः, विनीतः, शुक्लः। साहसी-साहसी, साहलिकः। सिड़ी-प्रमत्तः, उन्मत्तः । सितमगर-अन्यायी, दुराचारी। सिरताज-श्रेष्ठः, शिरोभूषणम् । सुघड़-शोभन:, सुन्दरः, रूपवान् । सुजन-विज्ञः, भद्रः । सुथरा-स्वच्छः, विशारदः । सुन्दर-शोभनः। सुरीला-सुस्वरः, मधुरध्वनिकः । सुस्त-शिथिलः, अलसः । सुहावना-रमणीयः, ललितः । सूना-रिक्तः, शून्यः। सूम-कृपणः । सौखीन-रसिकः। ह हंसमुख-स्मितमुखः, पुलकितवदनः । हकदार-अंशभागी हट्टा-कट्टा-स्थूलः, हृष्टः, पुष्टः। हठी-आग्रही, हठी। हत्यारा-घातकः, क्रूरः ।। हथ-लपक-पाटच्चरः। हलका-अल्पः, ह्रस्वः । हसीन-शोभनः मनोहरः, हाजिम-पाचकः । हाजिर-प्रस्तुतः, हितकरः ! हितू-हितैषी, हितेच्छुः, हितकरः । हिम्मती-साहसी, साहसिकः । होनहार-भावुकः। होशियार-निपुणः, चतुरः। . . *एक गुरुके यहां पढ़नेवाले छात्र भापसमें एक श्रेणीमें न होनेपर भी सतीर्थ्य कहलाते हैं।

क्रियावः।
क्रियावर्गः।
मघाता है-तृप (४) तृप्यति । भावे-कर्मणि-तृप्यते ।
अचरज करता है-(नामधातु ) चित्रीयते ।
अच्छा लगता है-रुच (1) रोचते । भावे-रुच्यते ।
अपमान करता है-अप-मनु (४) अपमन्यते । क. अपमन्यते ।
अभिमान करता है-अभि-मनु (४) अभिमन्यते ।
अलग होता है--वि युज (४) वियुज्यते ।
आंकता है-अङ्क (१०) अङ्कयति, अङ्कयते । क. अङ्कयते ।
आंजता है-अन्न (७) अनक्ति ! क. अज्यते ।
माग्रह करता है-आङ्ग्रह (९) आगृह्णाति, आ होते ।
आदर करता है- दृ (६) आद्रियते ।
आचमन करता है-आङ् चमु (१) आचामति ।
भाता है-आजम (१) आगच्छति ।
मानन्दित होता है-आउनदि (१) आनन्दति ।
भागधन करता है: -आराध (४) भाराधयति ।
मालिङ्गन करता है -आङ लिगि (१) आलिङ्गति ।
आवाज करता है-शब्द (१०) शब्दयति, शब्दयते ।
आशा करता है-आङ् शासु (२) आशास्ते ।
माह भरता है-व्यथ (१) व्यथते ।
इन्तजाम करता है-प्रबन्ध-प्रबध्नाति ।
इलजाम लगाना-णिजन्त-दूषयति दू-षयते ।
इलाज करता है-कित (१) चिकित्सति ।
इशारा करता है-सम् कित (१) सङ्केतति ।
इस्तेमाल करता है -उप युज (७) क. उपयुज्यते ।
उकताता है-उत् विज (६) उद्विजते ।
७ श्री०

श्रीकोषे--
उखाड़ता है-उत् खन (9) उत्खनति-उत्खनते ।
उगता है-उत् इम (२) उदेति ।
उगलता है-उत् गु (६) उगिरति, उगिलति ।
उधारता है-उत् घट (१०) उद्घाटयति, उद्घाटयते ।
उछलता है-उत् शल (१) उच्छलति ।
उठता है-त् स्था (१) उत्तिष्ठति ।
उड़ता है-उत् डीक (४)उ ड्डीयते ।
उतरता है-अव तृ (6) अवतरति । भा० अवतीर्यते ।
उतावला होता है-उत् तमु (४) सत्ताम्यति । भा. उत्तम्यते ।
उतरता है-उत् तू (१) उत्तरति । क० उत्तीर्यते । ( पार होता है
उलीचता है-उत् क्षिप (६) उत्क्षिपति-रिक्षपते ।
उलटता है-उत् लठ (६) उस्लुठति ।
उलाहना देता है-उप आइ लभ (१) उपालभते ।
उबालता है-क्वथा (१) क्वयति ।
ऊंघता है-ध्वप (१) स्वपिति ।
एक करता है-सम् प्रह (१) समहति ।
ऐ
ऐठना--एठ (१) एठते।
भो
मोकता है-तुत् गृ (१) उगिरति ।
मोढ़ता है-आङ् छदि (10) आच्छादयति, आच्छादयते ।
औ
मोटता है-तप (१) तपति (पानी औटाता है, दध औटाता है )
करता है-कटी (१) कटति। (दिवन समाप्त होता है.)
कतरता है-कृती (६) कृन्तति ।
कमाता है-मब (१०) अर्जयति-अर्जयते ।

क्रियावर्गः।
करता है-म (6) करोति । क० क्रियते ।
कसता है-द-द्रढयति (नाम धातु)
कहता है-वद (१) बदति । क. उद्यते ।
-भाष (१) भाषते । क. भाष्यते।
कांखता है-विलपति ।
काटता है। -कृती (६) कृन्तति ।
छिद (७) छिनत्ति छिन्ते । क• छियते ।
काढ़ता है-उत् धृ (१) उद्धरति-उद्धरते । क. उद्धृयते ।
कातता है-कृती (६) कृन्तति ।
कांपता है-कम्प (१) कम्पते । भा० कम्प्यते ।
कूजती है-कूज (१) कूजति ।
कूटता है-कुट्ट (१०) कुट्टयति-कुट्टयते ।
कूदता है-कुर्द-कूदते।
कृपा करता है-अनु कम्प (5) अनुकम्पते ।
कोप करता है-क्रुध (४) क्रुद्ध्यति । भाः क्रुध्यते ।
कोलता है-कुश (१) काशति ।
कोशिश करता है -यती (१) यतते । चेष्ट (१) चेष्टते ।
कौरता है-(भूजता है ) भ्रस्ज (१) भृजति--मृज्जते ।
खतियाना है-लिख (१) लिखति ।
खदेड़ता है- दूरी कृन (6) दूरीकरोति ।
खरीदता है-क्रीज (९) क्रीणाति-क्रीणोते । क. क्रीयते ।
खर्च करता है-व्यय (१०) व्ययति ।
खलोटता है-लुण्ठ (६) लुण्ठयति-लुण्ठयते
खरोचता है-आर लिख (१) आलिखति
खांसता है-कास (१) कासते।
खिझता है-क्रुध (1) क्रुद्धयति ।
खिलता है-वि कम (१) विकसति ।
खींचता है-कृष (१) कर्षति ।

१०० श्रीकोष-- खजाता है-कण्डून (३) कण्डूयति, कण्डूयते । खुलताहै-प्रकाश (२) प्रकाशते । भा० प्रकाश्यते । खुश होता है-मुद (१) मोदति । खेता है-क्षिप (६) क्षिपति, क्षिपते । खेलता है-खेल (१) खेलति । खेलति । क्रीड (१) क्रीडति । खोखता है-कास (१) कासते। खोदता है-खुर्द (७) खूर्दते (देहमें घाव आदिको) खनु (१) खनति- -खनते ( जमीनको खोदता है) खोलता है-उत् घट ( १० ) उद्घाटयति-उद्घाटयते। मुच्छ (६) मुञ्चति-मुञ्चते । क. मुच्यते । प्रकाश (१) प्रकाशयति-प्रकाशयते । aten " ग गय॑ते । गढ़ता है-घट (१) घटयति-घटयते । गरजता है-गर्ज -गर्ज (१) गर्जति । भा. गलता है-गल (१) गलति । दु (१) द्रवति । भा० द्रूयते । गरम करता है--तप (१) तुपति । भा० तप्यते । गंवाता है-नश (४) नश्यति । गाड़ता है-कील (१) कोलति । नि-खन (१) निखनति-निखनते गाता है- (१) गायति । क. गीयते । गारता है-गृ (१) गारयति । (१) निस्-पीड-निष्पीडयति-निष्पीडयते । गल (१०) गालयते ( घोतीसे पानी गारता है) गिनता है-गण (10) गणयति-गणयते । गिरता है-पत्लू (१) पतति । भा० पत्यते । गुद-गुदाता है-गुद (१) गोदते । गुम होता है-णश (१) नश्यति । गूजता है-गुञ्ज (१) गुञ्जति । गूथता है-गुम्फ (6) गुम्फति । ग्रन्थ (९) प्रथ्नाति । गौर करता है-ध्ये (४) ध्यायति ।

क्रियावर्गः। १०१ घ घटता है-घट्ट (6) घटते । अप-चि-अपचीयते । घर-घराता है-शब्द (१०) शब्दायते । विनाता है-घृणां कृ (८) घृणां करोति । घिसता है-वृध (१) वर्षति । घुड़कता है-तर्ज(१०)तर्जयति-तर्जयते । भस(१०)भर्क्सयति-भसयते । घूमता है-भ्रम (१) भ्रमति । परि अट (१) पर्यटति । भ्रम (४) भ्राम्यति। घूर्ण (१) घूर्णयति-घूर्णयते घेरता है-बु (१.) वारयति-वारयते । धोकता है-रट (१) रटति । -घुट (१) घोटते। घोरता है-(६) घुडति । " घोटता ह USA h चखता है-चष (6) चषति-चषते । स्वाद (१) स्वादते । चढ़ता है -आह रुह (१) आरोहति । क. आरुह्यते । चबाता है-चर्ब (9) चर्बति । चमकता है-द्युत (१) योतते । (१) मा. द्युत्यते । रुचि (१) रोचते। चम्पत होता है-चपि (१०) चम्पयति-चम्पयते । चयन करता है-सम् ग्रह (१) संग्रहति । चरता है-चर (१) चरति । क. चर्यते । र्चा करता है-चर्च (१) चचंति । चलता है-चल (१) चलति । चहचहाती है~-कूज (१) कूजति । चाटता है। -लिह (२) लेढि । चाहता है-इ(६)इच्छति । कमु(१)कामयते । वाछि(६) वाच्छति । चिकनाता है-ष्णिह (१०) स्नेहयति-स्नेहयते । चिताता है-चित (१०) चेतयते । uw १०२ श्रीकोष- Ant चुगता है चिपकाता -लस (१) लसति । भा० लस्यते । चिल्लाता है-कन्द (१) क्रन्दति । चीरता है- (९) हणाति । चि (५) चिनोति-चिनुते । क. चीयते। चुगली करता है-सूच (१०) सूचयति-सूचयते । चुप होता है-तूष्णी भू (१) तूष्णीम्भवति । मौनम्-अवलम्बते । चुभता है-तुद (१) तुदति । चुराता है-चुर (१०) चोरयति-चोरयते । मुष-मुष्णाति । चूकता है-विस्मृ (१) विस्मरति । चूता है-च्युत (9) च्योतति । चूर्ण करता है-चूर्ण (१०) चूर्णयति-चूर्णयते । चूमता है-चुवि (१) चुम्बति । चूसता है-चूष (१) चूषति ! चौथता है-लुञ्च (१) लुञ्चति । छलता है-वञ्च (१) वञ्चति । छाता है-छद (१०) छादयति छादयते । छिपाता -गुपू (१) गोपायति । लिलता है-तक्ष (१) तक्षति । छीनता है-आङ छिद (१) आच्छिनत्ति । छूता है-स्पृश (६) स्पृशति । क. स्पृशते । छेकता है-रुधिर (७) रुणद्धि-रुन्धे । क• रुभ्यते । छेदता है-छिद्र (१०) छिद्रयति-छिद्रयते । छोड़ता है-मुच (६) मुञ्चति- मुच्यते । क. मुच्यते । त्यज (१) त्यजति । क. त्यज्यते । छौंकता है-धूप (१) धूपायति । (शाक आदि) छोरता है-मा छिद(१) आच्छिनत्ति । " जंचता है-रुच (6)। रोचते । भा(९) भाति ।

क्रियावर्गः। -- " क. जड़ता है-अट (१) जटति । जपता है-जप (१) जपति । क. जप्यते । जलता है -ज्वल (9) ज्वलति । जलाता -दह (१) दहति । क. दह्यते । जल्दी करता है-वर (१) त्वरते । भा० स्वर्यते । जांच करता है-निर् ईक्ष (१) निरीक्षते । क० निरीक्ष्यते । अनु सन्धा (३) अनुसन्दधाति । जानता है-बुध(४)बुध्यते । क• बुध्यते । ज्ञा(९)जानाति । ऋ० ज्ञायते । जाता है-गम(१)गच्छति । क० गम्यते । व्रज(१)वजति । इण(१)एति ! ईयते । या (२) याति । षिध (१) सेधति ! जिद करता है-निर् बन्ध (९) निर्बध्नाति जीतता है -जि (१) जयति । जीता है-जीव (७) जीवति । भा. जीव्यते । जोमता है-जिमि (१) जेमति । जुड़ता है-जुड (६) जुडति । जोड़ता है-जुड (१.) जोडयति-जोडयते । जोतता है। हल (१) हलति । कृष-कृषति । जोखता है-तुल (१०) तोलयति-तोलयते । भंखता है-वि कप (१) विलपति । सम् तप सन्तपति । झगड़ता है-वि वद (१) विवदति कलहं कृ (८) कलहङ्करोति । झरता है-क्षर (१) क्षरति । अ (४) झोर्यति । झाड़ता है-मार्ज (१०) माजेयति-मायते । झांकता है-दृश (१) पश्यति । दृश्यते भुकता है-नमति (१) क. नम्यते । झूलता है-दुल (१०) दोलयति-दोलयते । झेपता है- लस्ज (१) लज्जते । भा० लज्यते । टपकता है-स्यन्द (6) स्यन्दते । भा० स्यन्दते ।

श्रीकोषे-
m
टपकता है- (१) स्रवति ।
व्रण (१०) व्रणयति-व्रणय ते । ( रोग आदि)।
टहलता है-परि अट (१) पर्यटति ।
टलता है-टल (१) टलति.]
टांकता है-टकि (१०) टङ्कयति-टङ्कयते ।
टूटता है-त्रुट (४) त्रुध्यति । भा• त्रुटयते ।
टांगता है-अव लम्ब (१) अवलम्बते ।
टेकता है। (१) अवलम्बते।
उगता है-बच्चु (१) वञ्चति ।
ठहरता है-स्था (१) तिष्ठति। मा० स्थीयते । वि-रम (6) विरमधि-
विरमते । भा०विरम्यते ।
ठुकराता है-तिरस् कृ (८) तिरस्करोति ।
ठोंकता है-तड (१०) ताडयति-ताडयते ।
डपटता है-तज (१०) तर्जयति-तर्जयते । भर्स (१०)मर्सयति-मर्सयते।
डरता है-भी (३) विभेति । त्रसी (४) त्रस्यति । भा• त्रस्यते ।
डंसता है-देश (१) दंशति ।
डालता है-नि क्षिप (6) निक्षिपति-निक्षिपते । नि अस (४) न्यस्यति ।
डाह करता है-ईध्ये (1) ईय॑ति
डिगता है -वि चल (१) विचलति ।
डींग मारता है-कत्थ (१) कत्यते ।
डूबता है-मस्ज (६) मजति । भा. मज्यते ।
-
ढंकता है-पि धा (३) पिदधाति, पिदधत्ते। क. पिघीयते ।
दड़ता है-टुण्ढ (१) दुण्ढति ।
ढोता है-वह (१) वहति-वहते । क० उह्यते ।
तकता
है
-रक्ष (१) रक्षति । क० रक्ष्यते ।

१०५ क्रियावर्गः। तपता है-तप (३) तपति । भा० तप्यते । तय करता है-निस् चि (५) निश्चिनोति, निश्चिनुते । तरता है-तृ (9) तरति । तरसता है-तृष (४) तृष्यति । -तर्क (१०) तर्कयति-तर्कयते । तानता है-तनु (८) तनोति, तनुते । क तन्यते । तेज करता है-तिज (१०) तेजयति-तेजयते । तोड़ता है-भञ्ज (७) भनक्ति । क. भज्यते । तालता है। -मा (२) माति । क० मीयते । तुल (१०) तोलयति, तोलयते । तर्क करता है " थकता है-श्रमु (४) श्राम्यति । भा० श्रम्यते । थमता है-स्तम्भ (५) स्तम्भनोति । थर थराता है -कपि (१) कम्पते । थूकता है-ठिबु ४) ठोवति । द दण्ड देता है-दण्ड (१०) दण्डयति- दण्डयते । दबाता है-दमु (४) दाम्यति । भा. दम्यते । दफनाता है-निखन (१) निखनति । क. निखन्यते दया करता है-दय (१) दयते। दवा करता है-कत (१) चिकित्सति । दुत कारता है-तर्ज (१०) तर्जयति-तर्जयते । दुःख देता है-पीड (१०) पीडयति-पीडयते । क्लिश (९) क्लिश्नाति । दुःख (१०) दुःखयते। दुलारता है-लल (१०) लालयति-लालयते । दुहता है-दुह (१) दोग्धि, दुग्धे । क. दुह्यते । देखता है-हशिर (१) पश्यति । क. दृश्यते । ईक्ष (१) ईक्षते । देता है-दा (३) ददाति-दत्ते । क० दीयते । दद (१) ददते । उत् सूज (६) उत्सृजति । ।

श्रीकोषे-
देर करता है-वि लवि (१) विलम्बते ।
दोष लगाता है-दुष (४) दूषयति-दुषयते ।
दौड़ता है-धाव (१) धावते ।
धक्का देता है-धक्क (१०) धक्कयति ।
धरता है -१ (१) धरति धरते ।
धंसता है-वसु (१) वंसते ।
धुनता है-शुध (४) शुध्यति । (रुई धुनता है )
धूप देता है।
-धूप (१) धूपायति ।
धूपमें बठता है-धर्म सेव-धर्म सेवते । ( घाम खाता है )
धोता है-प्र-क्षल (१०) प्रक्षालयति-प्रक्षालयते ।
धाकता है-मा (१) धमति ।
ध्यान कराता है- ध्यै (१) ध्यायति ।
नकल करता है। -अनु कृ (4) अनुकरोति । क. अनुक्रियते ।
नमता है-प्र नम (१) प्रणमति ।
नष्ट होता है। -नश (४) नश्यति ।
नहाता है-अब गाड् (१) अवगाहते ।
नाचता है-नृती (४) नृत्यति । भा• नृत्यते ।
नाथता है-नाथ (:) नायति ।
नापता है-मा (२) माति । क० मीयते ।
निकलता है-निस् क्रम (8) निष्कामति ।
निखोरता है--निसकुष (९) निष्कुष्णाति ।
निगलती है-गृ (6) गिलति, गिरति ।
निन्दा करता ह-णिदि (१) निन्दति । गहें (१) गर्हते
निपटता है-निवृत (१) निवर्त्तते ।
निभाता है-निर् वह (6) निर्वहति-निर्वहते
नुकता-चीनी-करता है-दुष (४) दूषयति-दूषयते ।
नोचता है-लुञ्च (१) लुञ्चति ।

क्रियावर्गः। १०७ प पकता है-पच (१) पच्यते । पकाता है पचति । पचते । क. पच्यते। पखारता है-प्रक्षल (१०)-प्रक्षालयति । पछताता है-अनु (७) तप-अनुतपति । भा० अनुतप्यते । पश्चात् तप पश्चात्तपति । भा० पश्चात्तप्यत्ते। पटकता है-पुथ (४) पुथ्यति । पढ़ता है-अधि इ (२) अधीते । क. अधीयते । पठ (१) पठति । क. पठ्यते । परखता है-परि ईक्ष (6) परीक्षते । पसरता है-प्रस (१) प्रसरति । क. प्रतियते । पसाता है-प्रनु (१) प्रस्रावयति । पलटता है-प्ररा वृतु (१) परावर्तते । प्रति, भाङ्गम (१) प्रत्यागच्छति । पसीजता है-प्रविद (४) प्रस्विद्यति । पहिनता है-परि धा (३) परिदधाति-परिधत्ते । पाता है-आप ल (५) आप्नोति । क. आप्यते । पार करता है-पार (१०) पारयति । तीर (१०) तीरयति । पालता है-रक्ष (१) रक्षति । क. रक्ष्यते । पाल (१०) पालयति, पालयते। पिघलता है-टु (१) द्रवति । पीटता है-तड (१०) ताडयति, ताडयते । पुकारता है-आङ् हज (१) आह्वयति-आह्वयते । आक (८) आकारयति । -प्रच्छ (६) पृच्छति। पूजता है-अर्च (१) अर्चति । क० अर्यते । पूरा करता है -पूर (१०) पूरयति-पूरयते । पूरा होता है-पूरी (४) पूर्यते। पेशाब करता है-मूत्र (१०) मूत्रयति, मूत्रयते । पूछता है.

श्रीकोषे- - १०८ पोसता है-पुष (6) पुष्णाति । क. पुष्यते। प्रतीक्षा करता है-प्रति ईक्ष (१) प्रतीक्षते । प्रसन्न करता है-प्रंज (९) प्रीणाति-प्रीणीते । प्रसन्न होता है-मुद (१) मोदते । भा० मुद्यते । हृष (४) हृष्यति । भा• हृष्यते फटता है-स्फट (१) स्फटति । फटकता है-प्रस्फुट (१०) प्रस्फोटयति-प्रस्फोटयते । फड़कता है-स्फुर (6) स्फुरति । स्पदि (१) स्पन्दते । फहराता है-उत् श्री (१) उच्छ्रयति-उच्छ्रयते । फांसता है-पाश (१०) पाशयति, पाशयते । फाड़ता है-४ (१) दृणाति । फिसलता है-स्खल (१) स्खलति । फूंकता है-फूत् कृ (६) फूत्करोति-फूत् कुरुते । क० फूक्रियते । फटता है-'फुटिर् (१) स्फोटते । फूलता है-श्वि (१) श्वयति । ( देह फूलती है) फुल्लति । विकस (१) विकसति । फेंकता है-क्षिप (६) क्षिपति । क. क्षिप्यते । फाड़ता है-भिद् (९) भिनत्ति-भिन्ते । क. भिद्यते । बकबक करता है. जल्प (१) जल्पति । बचाता है-शिष (१.) शेषयति-शेषयते । रक्ष (१) रक्षति । बजाता है-वद-(१०) वादयति । बतलाता है-शिक्ष (१) शिक्षते । क. शिक्ष्यते । बदलता है-वि नि मेङ (१) विनिमयते । बनाता है-रच (१०) रचयति-रचयते । बरसता है-वर्ष (१) वर्षते । बास करता वस (१) वसति । भा० उभ्यते । बहता है-वा (२) वाति । वह () वहति । बहलाता है-वि नुद (६) विनोदयति-विनोदयते । है। - क्रियावर्ग:। १०६ बांचता है-वच (१.) वाचयति-वाचयते । बांटता है-वि भज (6) विभजति-विभजते । विखेरता है-कृ () किरति । क. कीर्यते । बिगड़ता है-दुष (४) दुष्यति । भा० दुष्यते । बिसारता है-वि स्मृ () विस्मरति । क. विस्मयते । विहरता है-वि हृ (१) विहरति, विहरते । बोतता है-वि अति-इण (२) व्यत्येति । भा• व्यतीयते । बुझता -निर् वा (२) निर्वाति । बुनता है-वेञ् (१) वयति, वयते । क. ऊयते । बुहारता है-मार्ज (१.) मार्जयति, मार्जयते । बूकता है-चूर्ण (१०) चूर्णयति, चूर्णयते । मेंचता है-वि क्रीन (९) विक्रीणाति, विक्रीणीते । क. विक्रीयते । बैठता है-उप विश (६) उपविशति । भा० उपविश्यते । आप (२) आस्ते । भा० आस्यते । बोलता है-कथ (१०) कथयति, कथयते । क. कथ्यते । है। भ भरता है -भृ (१) भरति, भरते। भागता ह है- परा अय (1) पलायते। भीगता है-क्लिद (४) क्लिद्यति । भीख मांगता है -भिक्ष (१) भिक्षते । मूंजता है-भ्रस्ज (६) भृजति, भृजते । भूलता हे-वि स्मृ (१) विस्मरति । क. विस्मयते। भेजता है-प्रहि (५) प्रहिणोति । भौंकता है-बुक्क (१) बुक्कति । मरता है-मृङ (६) म्रियते । भा० म्रियते । मलता है-मृद (8) मृनाति । क. मृद्यते । महता है-मन्थ (१) मन्थति । क. मथ्यते मांगता है-याच () याचति, याचते ।

श्रीकोषे-- , मांजता है-मृजू (२) मार्टि । मानता है-मन (४) मन्यते । मान (१०) मानयति, मानयते । भारता है-हन (२) इन्ति । क० हन्यते । मिटता है-लुप (४) लुप्यति । भा० लुप्यते । मिलता है--मिल (8) मिलति, मिलते । क. मिल्यते । मिलाता है-मिश्र (१०) मिश्रयति, मिश्रयते । मुसकराता है-स्मिक (१) स्मयते । मूड़ता है-मुडि (१) मुण्डति । वप (१) वपति, वपते । क. उप्यते ! मूर्छित होता है- मूर्च्छति । सेटता है-नश (४) नश्यति । मोड़ता है-मुट (१०) मोटयति, मोटयते । यत्न करता है-प्र यति (१) प्रयतते भा० प्रयत्यते । यज्ञ करता है-याग कृ (८) यागंकरोति, यागंकुरुते । याद करता है-स्मृ (१) स्मरति । क. स्मयते । रङ्गता है-रव (१) रजति, रजते । रखता है-रक्ष (१) रक्षति । क. रक्ष्यते । नि धा (३) निदधाति, निवत्त । क. निधीयते । रचता है-रच (१०) रचयति, रचयते । रटता है-रट (१) रटति। रमता है-रम (9) रमते । भा. रम्यते । रहता है-वस (१) वसति । रीझता है-रम (१) रमते । भा० रम्यते । रुचता है--रुच (6) रोचते । रुच्यते । कुसता है-रूष (१०) रोषयति, रोषयते । रेकता है-रास (१) रासते। रेगता है-रिगि (१) रिङ्गति । रोकता है -नि-विध (१) निषेषति । क. निविष्यते । रुधिर (५) रुणद्धि, रुन्धे । वृजी (१०) वर्जयति, वर्जयते । " क्रियावर्गः। १११ रोता है-रुद (२) रोदिति । भा० रुयते । लंगड़ाता है-खजि (१) खञ्जति । लगता है-लग (१) लगति । लजाता है-लस्ज (१) लजते । भा० लज्ज्यते । त्रपूष (6) पते । लड़ता है-युध (5) युध्यते । भा० युध्यते । लटकता है-लाब (१) लम्बते । क. लम्ब्यते । लड़खड़ाता है। -स्खल (१) स्खलति । लपटता है-वेष्ट (१) वेष्टते। लपकता है-धाव (१) धावते । लांघता है-लधि (१) लङ्घते । लिखता है-लिख (६) लिखति । क. लिख्यते । लिपटता है-श्लिष (४) शिलष्यति । क. शिलध्यते । लीपता है-लिप () लिम्पति, लिम्पते । क० लिप्यते । लूटता है-लुण्ठ (१०) लुण्ठयति, लुण्ठयते । लेटता है-लेट-लेटथति । लोकता है-प्रहण कृ (८) ग्रहणं करोति, ग्रहणङ्कुरुते । लोटता है-लुठ (६) लुठति । लौटता है-परा वृत (१) परावर्तते । वश करता है-वश कृ (८) वशीकरोति, वशीकुरुते । क. बशीक्रियते । शक करता है-शकि (१) शकते । सम् शी (२) संशते । शान्त करता है-सान्त्व (१०) सान्त्वयति, सान्त्वयते । साम (१०) सामयति, सामयते । शेखी करता है-कत्थ (१) कत्थते । शोरगुल करता है - शब्दं कृ (८) शब्दङ्करोति । संभालता है-सम् भल (१०) सम्भालयते । संवारता है-प्रसाध (१) प्रसाप्नोति । सटताएं-लस (1) लसति। सजता है-षस्ज (१) सज्जति । सन्देश देता है-सम् दिश(१)सन्दिशति, सन्दिशते । क० सन्दिश्यते ।

a श्रीकोषे- समाता है-सम् मा (२) सम्माति । सरकता है-सकि (१) सकते । सराहता है-इलाघ (१) श्लाघते । प्रशंसु (१) प्रशंसति । सलाह करता है-मन्त्र (१०) मन्त्रय ते । सहता है-सह () सहते। सिकुड़ता है-सम् कुच (६) सङ्कुचति । सींचता है-सिच (६) सिञ्चति, सिञ्चते । क. सिच्यते । सीखता है-शिक्ष (७) शिक्षते का शिक्ष्यते । सीझता है-पच (१) पच्यते । सीता है-षिबु (४) सीव्यति । क. सोव्यते । सुनता श्रु (१) शृणोति । क. श्रयते । सुनाता है- शुभ (१) शोभते । सूघता है-ध्रा (6) जिघ्रति । -णिजन्त-सूचयति । क. सुच्यते । सकता है-तप (२) तपति । क. तप्यते । सेवा करता है। -सेव (4) सेवते । सोता है-ध्वप (२) स्वपिति । भा• सुप्यते । निद्रा-निद्राति । शील-शेते । भा० शय्यते । सौपता है-नि क्षिप (6) निक्षिपति, निक्षिपते । है- -- सूचना देता है। Anmole ह हंसता है-हस (१) हसति । भा• हस्यते । हटता है-अप गम (१) अपगच्छति । क० अपगम्यते । अपसरति था। हांपता है-श्रभु (१) श्राम्यति । क० श्रम्यते । हवन करता है-हु (३) जुहोति । हिसाब करता है: -गण (१०) गणयति, गणयते । है-अस (२) अस्ति । बृतु-वत्तते । होता है-भू(१)भवति । भा भूयते । उत् पद(४)उत्पयते । भा० उत्पद्यते । जनी (४) जायते। भा• जन्यते । हौरा करता है-न (१) नदेति । बाद करता है-हाद (२) हादते ।

परिशष्टम् कुछ नये शब्द कापीहोल्डर-मुद्रणपत्रवाचकः १ श्रक्स करनेका कागज-अक्षनिर्मा- किताबफरोश-पुस्तकविक्रेता १ णपत्रम् ३ कुंजड़ा-शाकविक्रेता अखवारवाला-समाचारपत्र विक्रेता केन्द्रीय असेम्बलो-केन्द्रीयपरिषद् बालपिन-लघुसूचिका २ शिक्षा मंत्री केन्द्रीय- की गही-लघुसूच्याधारः१ शिक्षासचिवः१ कोआपरेशन-सहयोगः इण्डियन सिगनलकोर-भारतीय- कंट्रोल-नियन्त्रणम् ३ संकेतवाहकसेना खाद्यसंकट-खायसंकटम् ३ एक्सपोर्ट ड्यूटीज-निर्यातकरः खाद्ययाचकमंडल-खाययाचक्रमः एटमबम-परमारवाग्निचूर्णम् ३ ण्डलम् ३ खुदराफरोश-प्रकीर्णवस्तुविक्रेता *कमाण्डर-इन-चीफ-प्रधानसेनापतिः कनवोकेशन-दीक्षान्तभाषणम् ३ गन्धी-गान्धिकः १ का हाल-दीक्षान्त- | गवर्नमेण्ट संस्कृतकालेज-राज- भाषणस्थानम् ३ कीयसंस्कृतपाठशाला * जैसे पुण्यभूमि नेपालमें इस पदपर श्रीयुक्त हिज एक्सलेंसी पर मोहन शम्शेर जंगबहादुर राणा हैं। । इस पदपर माजकल सरजोन सार्जेण्ट महोदय हैं (Sir John sarjent) । ब्रिटिशसत्ताके प्रारम्भ होनेके अनन्तर १५० बर्ष पहले भारत में शिक्षाप्रसारके लिए सर्व प्रथम काशी में यह कॉलेज बना है। इसमें दो विभाग हैं-गवर्नमेन्ट संस्कृत कॉलेज और ऐंग्लो संस्कृत विभाग । इसकी इमारत में दो कॉलेज हैं, एक राजकीय संस्कृत पाठशाला और दूसरा क्वीन्सकॉलेज। पहले दोनों कॉलेजोंके एक ही प्रिन्सिपल होते थे। जैसे-'प्रिन्सिपल ऑर्थर वेनिस । इन दिनों भिन्न भिन्न होते हैं। जैसे सम्प्रति संस्कृत कॉलेजके प्रिन्सपल डा. मालदेव शास्त्री एम्. ए. डी. फिल. । म. म. पं. गोपीनाथ कविराजके अवकाश प्रहण करनेके बादसे हैं, और क्वीन्सकॉलेजके प्रिन्सपल डा. विजयशङ्कर हैकरवाल एम० ए० हैं। ग " श्रीकोषे घुड़दौड़-अश्वधानम् ३ की जगह-अश्वधावन नरेन्द्रमण्डल-नरेन्द्रमण्डलम् ३ स्थानम् ३ की सभा-नरेन्द्र- मण्डलपरिषद् २ चन्द्रकान्तमणि-चन्द्रकान्तमणिः । के चांसलर -नरे. चीफजस्टिस-सर्वप्रधानन्यायाधीशः न्द्रमण्डलाध्यक्षः १ के प्रो०-नरेन्द्र- छापनेवाला-मुद्रकः १ मण्डलोपाध्यक्षः १ जर्राह-भारतीयशास्त्रचिकित्सक नाइट-सिस्टर-निशाधात्री २ जस्टिस-प्रधानन्यायाधीशः १ नौसेना-जलसेना। जहाजी-महानाविकः १ प जांचनेवाला-परीक्षकः १ कारणिकः पहिया बनानेवाला-चक्रकारकः १ जिल्दसाज-पुस्तकवेष्टका १ परराष्ट्र सचिव-परराष्ट्रसचिवः १ जिमींदार असोसिएशन-भूमिप. पुकारनेको घण्टी-आह्वानचण्टिका तिपरिषद् २ पेपरसेटर-प्रश्नपत्रनिर्माता १ प्रफरोडर-संशोधकः १ टाल-इन्धनस्थानम् ३ प्रेसिंडेशल-अध्यक्षात्मकः टेलीप्रिंटर-संवादमुद्रकयन्त्रम् ३ प्रोक्टर-विश्वविद्यालयकार्याध्यक्षः १ टेलीविजन-संवादसूचकयन्त्रम् ३ फीता-बन्धनरज्जुः २ डे-सिस्टर-दिवाधात्री २ फेरीवाला-पर्यटन विक्रेता १ फोटो उतारनेवाला-प्रातिकृतिकः तबलची-तालवाद्यकः ब द बजट अधिवेशन-व्यापारवाचनम् ३ दवा बेचनेवाला-औषधविक्रेता १ दाई-धात्री २ बजाज-वस्त्रविक्रेता दांत बनानेवाला-दान्तिकः १ बीज बेचनेवाला-बीजविक्रेता १ धुनियां-कार्पासधारकः १ भारतसचिव-भारतमन्त्री १ कुछ नये शब्द ११५ मटेरियल साइन्टिस्ट-भौतिकविशाः । रोकड़िया-द्रव्यधारकः १ नवेचा रोशनाईवाला-मसीविक्रेता १ मरम्मत करनेवाला-परिष्कारकः १ रंगसाज-रंगाजीवः १ मालिक-स्वामी १ माली-मानिकः १ मालाकारः१ लाइनोमशीन-एकरेखाक्षरयन्त्रम् मुनोम-व्यापारलेखकः १ लाइनोमशीनका टाइपिस्ट-एक- मुंशी-लेखकः १ रेखाक्षरयन्त्रमुद्रकः १ मुहर्रिर-लेखनजीवी १ लाइनो मशीन चालक- एकरेखाक्ष- मिनिस्ट्री-मन्त्रिमण्डलम् ३ रयन्त्रचालक: मीनाकार-धातुचित्रकरः १ मोदी-नानाव तुविक्रेता शीतला छापनेवाला-शीतलासूची. मोनो टाइपकी मशोन-एकाक्षर. वेधकः यन्त्रम् ३ मोनोटाइपिस्ट-एकाक्षरयन्त्रमुद्रकः १ संगतराश-प्रस्तरपरिकारका सिटीजन-नागरिका मोनोमशानचालक-एकाक्षरयन्त्र- सिपहसालार-सेनापतिः १ चालकः १ सूर्यकान्तमणि-सूर्यकान्तमणिः ह रफूगर-वसनरन्ध्राच्छादकः । हलवाई-आपूपिकः १ रसोईदारिन-पाचिका र हवाईसेना-वायुसेना राशनकार्ड-खायपत्रम् ३ हवाईसैनिक-वायुसैनिकः १ राशनकी दूकान-खाद्यविपणिः हाउस आव कामंस- साधारणजन- राशनका अफसर-खायाधिकारी १ राष्टसचिव राष्ट्रमन्त्री १ सिद्धपीठनामानि राष्ट्रदूत-राष्ट्रदूतः १ राष्ट्रदूतिका-राष्ट्रदूतिका २ ज्वालाजी-जालन्धरपीठम् ३ रिजर्व ड-सुरक्षितः जगन्नाथपुरी-उड्डीयानीठम् ३ राशिचक्र-राधिचक्रम् ३ कामरुकामाक्षा-कामरूपपीठम् । रेजोडेंट-राजदूतः १ [इनके अतिरिक्त ५१ उपपीठ भी हैं रैपर-पत्रावरणम् ३ जिनमें विन्ध्याचलकी देवी, मैहर राज्य सभा २ ११६ श्रीको की शारदादेवी तथा काशीकी विशा- । राधारमणीयसम्प्रदाय -राधारम- लाक्षादेवी आदि हैं। विन्ध्याचलपर णीयसम्प्रदायः तीन शक्तियां हैं-विन्ध्याचलमाता २ लघुत्रयी-लघुत्रयोर (रघुवंश, कुमा- महाकाली २ और अष्टभुजादेवी २] रसम्भव और मेघदूत) पूज्यशङ्कराचार्यपीठनामानि बृहत्त्रयी-बृहस्त्रयी २ (माघ या गेरीमठ-शृङ्गेरीपीठम् ३ शिशुपालवध, किरातार्जुनीय गोवर्द्धन-गोवद्धनपीठम् ३ : र नैषधचरित) द्वारका-द्वारकापीठम् ३ पञ्चमहाकाव्य-पञ्चमहाकाव्यानि ३ ज्योतिष्पीठ-ज्योतिष्पीठम् ३ ( रघुवंश, किरातार्जुनीय, माघ, कुमा- [इनके अतिरिक्त कुछ लोग कांची- रसम्भव, और नैषधचरित) पीठ भी पांचवा पीठ बतलाते हैं । प्रस्थानत्रयो-प्रस्थानत्रयी २ (उपनिषत् ब्रह्मसूत्र और भगव ीता) दशविधमाधुनामानि पांच देवियों के नाम भाश्रम-आश्रमः सरस्वती-सरस्वती दण्डधारी अहल्या-अहल्या २ तीर्थ-तीर्थः द्रौपदी-द्रौपदी २ याज्ञसेनी २ *चन-वनम् तारा-तारा २ अरण्य-अरण्यम कुन्ती-कुन्ती २ गिरि-गिरिः मन्दोदरो- मन्दोदरी २ पुरी-पुरी "अहल्याद्रौपदीतारा, भारती-भारती कुन्तीमन्दोदरी तथा। सागर:-सागरः पञ्चक ना स्मरेत् नित्यं पर्वतः-पर्वतः महापातकनाशनम् ॥" द इति श्रीकोषः समाप्तः। *यदि कई बन स्वामी एक साथ आते हों तो वहां वनानि आगच्छन्ति" ऐषा प्रयोग हो सकता है।

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Shriikoshha

Author
Kedaaranatha
Title
Shriikoshha
File name
Shriikoshha
Text
OCR done
Citation
1946
Publisher
Jaya Krishna Das Hari Das Gupta , Benares
Language
Sanskrit
Pages
126
Library
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Classification
General Reference Works Encyclopaedias
DLI number
368927
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