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Uttradhikar

Prafulla Prabhakar · 2011/03

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उत्तराधिकार
हिन्दी उपन्यास
प्रफुल्ल प्रभाकर
प्रकाशक
हिमकर प्रकाशन
अजमेर

प्रवामक निवास- चन्द्रमोहन 'हिमकर' 3, गुलराज क्वार्टर्स नमीरावाद रोड, अजमेर (राज ) 305001 - - सस्करण 1990 मूल्य 6000 रुपये आवरण प्रकाश आटिस्ट मुद्रक- मनोहर आर्ट प्रिन्टर्स क्डक्का चौक, दक्षिणी वाडा, अजमेर-305001 Hindi Novel-Uttradhikar (Hindi Nove By-Prafulla Prabhakar

आदरणीय सुविख्यात
कथाशिल्पी एव उपन्यासकार
श्रीयुत राजेन्द्र अवस्थीजी
को
सादर भेट

उत्तराधिकार मेरा नही आपकाही है।
उत्तराधिकार आजादी के बाद आये सामाजिक, चारिदिर,
नैतिक
अवमूल्यन या महज एक स्थिर-चित्र (स्टिल-फोटोग्राफ) है।
इममे लेसक, दृष्टा के रूप मे मैंने अपनी अोर से कुछ भी तो नहीं
जोडा है।
घर, सडक, नुक्कडो, चाय की दुकानो, अखवारो, कार्यालयो
की मेजो पर ताश खेलते बाबूमो की गर्म वातचीत, चर्चाएँ अनिरजित
हो ऐसा नही । यह चित्र ही कुछ ऐसा है।
इतिहास मे पढे उजले, गौरवमय समाज का कोई सकेत, चिह,
अवशेप ढू ढने पर भी नही मिलता । यदि है तो कितावो, वाचिक या
सस्कृति की मौखिक झठी आत्मप्रशसा के ढकोसलो मे ।दोष क्सिका
और कहा है समझने मे आपको अधिक परेशानी नही होनी चाहिये।
नई पीढी को उत्तराधिकार में जो मिलना चाहिये और जोमिला
है उससे वह पूणरप से व्यक्तिवादी, स्वार्थलोलुप, भौतिकता से
जमिन, कठोर शब्दो मे बहू निमम हो चुकी है तो भी गलत नही
होगा । जिसके परिणाम हर क्षण कौन सहन नहीं कर रहा आप ही
विचार करले । सामाजिक, नैतिक, आर्थिक, विघटन चरमोत्कर्ण पर
है अभी और होगा । पर सच यह है सस्कार मे इहें आपने दिया भी
क्या है, तब वह उत्तरादायी हो तो क्यो?
इन सबके वावजूद आईये । आप-हम मिल वतमान समाज के
जर्जर, गलित चित्र को मनमोहक उजले इतिहास के अनुरूप बनाने
का यत्न तो करें । सभवत कोई सुधार आये।
जिमसे क्ल नई पीढी प्रस्तुत उत्तराधिकार जैसे प्रश्न फिर
पापवे-मेरे सामने ला खडे न करद ।
प्रस्तुन उपन्यास का चित्र कसा है स्वय देख ने । मेरे प्रस्तुत
उपन्याम से कही अलग तो नही ।
धन्यवाद
विनीत
प्रफुल्ल प्रभाकर

एक शामें सर्दी मे जल्दी ही पीले रंग को छोड काले में बदल जाती हैं । चारो ओर एक सनाटा, चुप्पी। प्रावाज के नाम पर पैगे पर बने घोसलो मे पथियो का फु-रना या हल्के चहचहाना भर । अपने वाड मे चुपचाप बिस्तरे पर लेटे ट्यूबलाईट पर मडराते दो-चार मच्छर जसे कीटो को लगातार इधर से उधर उडते देख रहा है। पात तगामे छिपकली से वे बेखबर हो एमा नहीं उधर छिपकली भी अपने काम मे दत्त- चित है। तभी पोच से टॉक्टर प्रसाद और नस की भावाजे माती है । पहिये। थे यास बाबू कैसे हैं अब । कैसे नहीं । कहिये बस मैं हूँ । विनीत का कोई समाचार । नहीं। अब तक तो नहीं। आ जायेंगे वे । फोन पर उनके सचिव ने बताया था कि दिल्ली से बाहर हैं और उनका कायक्रम भी व्यस्त है। क्या फरेगा वह इतने पैसो का । यहाँ में अपनी प्रतिम श्वासें ले रहा हू पर । भाप परेशान न हो। डाक्टर्स की रिपोट भी मा गई है। वही इलाज लिखा है जो चल रहा है। छोडिये भी, डाक्टर प्रसाद । धौन सा इलाज करना रह गया है। मन चाहता था विनीत एक वार प्रा जाता तो उसे सब सम्भला चैन से इस शरीर को छोड देता में। उसको सूचना तो मिल हो गई होगी अब तक। तीन महीने पूरे होने जा रहे हैं मापके अस्पताल मे। एक सप्ताह छोड मॉपरेशन, लगातार प्रापरेश म से घबरा गया है। इस तरह जीने का क्या प्रथ है। महज सुबह होते सूरज को देखते शाम तक दिन को काटना, फिर लम्वी रातों को । सब अनावश्यक लगता है। मापने दवा तो ले ली थी। कुछ देर बाद इजेक्शन भी लगाने हैं । हो, दवा दे गई थी नस । माप माराम वर डॉक्टर सब चलता रहेगा। डॉक्टर प्रसाद पास खडी वालो नस को निर्देश देते चले गये हैं ।

अब फिर अकेला हु अपने कमरे मे। सामने कोन म बैठी नस स्वेटर वुनने म लगी है। उममा ध्यान मेरी मोर नहीं है। सीन मे तज दद उठन लगा है। चाहत हुए भी बिस्तर पर रखी घण्टी के बटन को नहीं दवाता में। इस दद मे भी अनजाने सुख को ढूढन लगता है। प्रायें बन पर चाहता हू सा जाऊ । पर एमा नहीं कर पाऊँगा जानता हू । तीन महान से जर बीते यहाँ केवल सो ही तो रहा हूँ । डॉक्टस ने उठार उठन तक कनिय मना क्यिा हुआ है । अपने वक्ष पर प्रापरश स के टापरा म चुभन का अनुभव करता है । पूरा वक्ष काट-छांट दिया गया है। हाथो की अगुलियो से पैरा न कोई म्थान ही हूँढ पाता जहा इजक्शनो की सुईया नहीं गडाई गई हो। सारा शरीर छलनी सा जान पडता है मुझे। विनीत के नही पाने का अथ उसकी व्यस्तता नहीं हो सकती। अवश्य ही उमका अहंकार ही अधिक है । तोम वप से अधिक एम ही निकल है । जब उसने और मने कभी बैठार ठीक से बात भी नहीं की। एक टेवल पर बठ कर साथ खाना खाया एक घर की छत के नीचे साये । पर कभी मुने और न कभी उसे ही पिता अथवा पुत्र होन की क्सिी हल्की सी मवदना न छुपा तक भा हो। हर क्षण मेरा ध्यान अपने व्यवसाय के विस्तार को टूटना रहा। एक के बाद दूसर उद्योग, मर गानो को बनात चल जान का भूत मर पर सवार था। उन सारी योजनानी में विनीत को कैसा भी अधिकार नहीं द रखा infr उसका कोई मुल भी हो । सार दाम मेर अपन मर निर्देशा, मेरी योजनायो यो साकार करत चले जात ध । उन सारी भागदौर उलझनो यम्नतामा म उम्र में गुजर गई याद नहीं पाती । अब समय मरा पक्ड से दूर हो गया है । चाहत हुए भी उस छू तक नही मरता। समय हाय स बार की तरह कैसे खिसक्त चला गया प्रब हो जान पाया हू विशाल मोद्यागिक सस्थानो यो बनान वाला म इम बिस्तर पर लटा उना सिसित हात, हाथ-पाय पसारन या कल्पना भर कर सरताह जार प्रधित क्या। थेयाम बार । पाडा हाय दीजिये । इरशन लगाना है। कौन । सोनल । हो, इधर मार लगा दा। यह हाप भा रहा है मर वाम । हिला भी नहीं पाता म । बापटर सोनल मर दिग्दर दूसरी मार मा इजरान सागली है। म पनीर मा गई थी श्रेयास यापू। 2 हो । जागी रातो वे स्वप्न देख रहा था दाक्टर और हो भी नया सकता है। माराम बरेमाप । दिल्ली से इजेक्शस आ गये अभी शाम को। विनीन के पाने की कोई खबर, डाक्टर । नहीं। मुझे बताया नहीं प्रसाद साहब ने । ठीक है। अक्टर वमरे से बाहर चली गई है। नस को देखता हू कोई वितार पढ रही है वह । हाथ को रजाई के अदर पर लेना चाहता हू। हिला नही पाता। चाहते हुए भी नस को नहीं रहता। घडी पर नजर जाती है दस ही बजे हैं अन तर । लगता ऐमा है रात के कोई दो बजे हो। अनत शाति है सारे अस्पताल परिसर में । कैसी भी ग्रावाजें नही, हो भी क्या सकती है। विनीत के सचिव ने ही भेजे हैं इजेक्शस । वही करता है यह काम । उसे समय वहाँ है कुछ करने तक पा । पता नहीं रहा होगा वह । एक वेवजह जिन्दगी क्यो जी रहा हू मै समझ में नही पाता। सारे कारोवार प्रयाह सम्पत्ति को भूल जाना चाहता हू । सिफ दौडत जाना प्रार अपनी 'उम हालत पर सोचता हूं तो कुछ भी तो नहीं। बस इतना सा एक विस्तर, हायटर्म, दवायें, प्रॉपरेश स इनसे अधिक कुछ भी तो नहीं। लगता है पूरे जीवन की भागदौड का पथ इहे पा लेने से अधिक कुछ भी नहीं। न जान या मंत्र उस दौड मे भागता रहा म। अपना कहने को कोई भी नहीं। एक PTET विनीत । उसे समय नहीं मुझसे मिलने पाने तक वा। हो, दौड मे उलझ गया है। उसे मत मालूम है नहीं। अमीटर जागा अच्छा लगता है और कुछ नहीं । श्रेयास वावू दवा ल ल। क्या करोगी, देवर दवा का समय हो गया। दे दो। तुम्हारी ट्यूटी है ग्वाह । श्रेयास वाव पार सात नहीं। *2 मिलते है प्राप। जागने और मान मेंrmiti.iree इ

या सोने रहना जैसे काम ही तो बचे हैं। प्रा हमेशा के लिये सो जाना
चाहता हूँ।
ऐसा न पहें प्राप।
पयो न बहू । साते-जागते पर भी क्या रहा हूँ म । बस कहने को जी
रहा है। सच तो यह है विनीत स मिलो की चाह मे वही मेरे प्राण तो नहीं
प्रटके है वही।
आप सोचिये नही। भाराम परें । यह दो कैपस्य्म ले ।
हो, दे दो । ग्लास घोडा और पास लामो। प्रब ठीक है ।
हाँ यस यो ही लटा हूँ। तुम पाराम रो जाकर ।
बिना कोई उत्तर दिय अपनी कुर्सी पर जा बैटनी है।
देखना हू नस टेबल पर रखी वाईबिल को उठा पिसी रेशमी कपडे में लपट
अपनी रेवुल को दराज मे रख दिया है। हाथ से वश पर क्रॉस सा बनाते
माये ब - कर ली हैं । उसका ऐसा करता सुपद लगता है मुझे। हल्की नींद
ले लेना चाहता हूँ।
X
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दो कमरे के वाइ पोर वाली खिड़की के पास लगे जामुन के धने पेड से पत्तियो वी तेज अावाज से मरी नीद खुल गई है। खिडकी पर लगे कांच के बाहर धुध सी जमी है । बाहर पेड के होने का प्राभास सा होता है। ऊपर रोशनदानो स पक्षियों की आवाजें लगातार मेरे कानो मे गूज रही है। उसमे ताजगी है, उत्साह है । एक पूरे दिन की यात्रा पर निकलने से पूर्व बैठे बतिया रहे हैं। रोज ऐसा ही होता है। सुबह उडर दूर प्राकाश में परा को तोलते शाम होने से पूर्व लौट पाते हैं । उहे कुछ भी तो पता नहीं कहा जाते है के, कितनी लम्बी दूरिया पूरी कर शाम को फिर वही लौट आत हैं । सोचता हू चाहे नही भी जानते हा यहाँ तक जाकर लोट पाना है पर शाम को लौट माने में उनके क्सिी घर, घोसले का ज्ञान तो उह है ही। जहाँ न हे पक्षी, पक्षी न सही अण्डे ही मान ले लौटकर उन्हे सहेजना है, दुलराना है, चह- चहाना । उनकी अबूझ जिगी का यह छोटा सा अहसास ही उनकी उ मुत्तता, स्वच्छदता, पालाद का प्रामास यत्रतत्र बिखेरता है। सोचता ह पूरे जीवन दौडते-भागते में ही लोटा भी था तो वह घर पही से भी नहीं था। बस चूने-पत्थर से बनी शानदार इमारतें जिनमे लौट- कर थके शरीर को बस डाल दिया था मैने । सिफ सूरज के निक्लने की प्रतीक्षा में और फिर उठकर चल दिया था शाम थान मोर ने अपने शरीर पर, अपनी प्रात्मा पर। वह सिफ खुद को निर्मित व्यस्तता ही थी जिसका उम्न के इस पड़ाव पर प्रायर, शरीर मे झांक कर, मन मे समारर देखता हू तो लगता है फिजूल था वह सव । पर मन के धागे से बंधा न जाने कहाँ-कहाँ की ऊँचाईयो को छूकर प्रान टूटे पतग सा डाक्टर के स्पेशल कॉटे7 मे पड़ा है। ऐसे पतग की तरह जिसे कोई छूना तक नही चाहता। सामने टेबल पर रखी मलाम धज उटती है । सुमधुर हल्की ध्वनि । नस ने जागते ट्यूबलाईट को जला दिया है । कमर मे रोशनी फैल गई है। दीवार पर लगे शीशे मे झोक्ते उसने अपने बालो को सवारा। टेबल से ग्लास को उठा मुह साफ करती है। वही रखो दवा की शीशियो से दवा ले मुझ तर पाती है। 5 थे याम बाबू। हा, महो। पाप जाग रहे हैं। नहीं, कुछ देर पहिले ही जागा था। पर मन देखा तो आपको या तो वद थीं। नहीं । तुम्ह लगा होगा। प्राप दवा ले । इतनी सुबह भी दवा ही दागी तुम । हो। यह दो गोलिया तो नी ही है ना पायो। भूल जाते है आप भी रोज ही लते क्या । नाराज हो गई तुम। नहीं वैसे ही वह रही थी। दवा राज ही तो लते है प्राप। वह तो ठीक है। ले टू गा। तुम नाराज नहीं होनो। कही नाराज हू आपसे । डाक्टर प्रसाद भी पाते ही होंगे । आपका चर- अप होगा । याद है आपको । आज प्रापरेशा होगा आपका । ल ही तो वह रह थे डाक्टर प्रसाद इजेक्श स आ जायें तो पापरेशन हो। मिस मजुला स्तिने मॉपरशन होगे मेर। उसकी चिन्ता न करे पाप । चिता नहीं कर रहा । पूछ रहा श्राप दूध ले लें। मेरे सीने पर तौलिया रख चम्मच स धीर-धीर दूध पिलाने लगी है वह । दूध पत्म कर मर होठा पर दूसरे तोलिये से पौंछ देती है। दूध का वतन टबल पर रख देती है। । प्रामा डाक्टर। गुण मानिग । श्रेयास बा । यह लीजिये आपके लिये गुलाब लाई है। प्राज तो जल्दी जाग मय पाप। गुड मोनिंग दाक्टर । क्तिन अछे हैं गुलाब । मुबह वीघे म घूमना अच्छा लगता है। वहीं से ले आयी अापके लिय । 6 घूमना तो मुझे भी अच्छा लगता है। पर जर तय माप बिल्कुल ठोप न हो जायें। घूमने के बार मे सोचिये भा नहीं। म, ब्लड प्रेशर रिया। नहीं। पर हो रही थी। हावटर सानल । प्रापरेशन दे है मेरा। हा । श्रयास बाबू । माईनर मॉपरेशन है। विनीत साहब या फान पाया पारान का। विनीत का फाा पाया या । क्या यह रहा था। रहा है क्या । पापके लिय जानकारी ल रह जास्टर प्रसाद स । पान के बार म तो नही मुना मैन । नही मायगा वह । यस जानकारी हो ले रहा होगा । आना होता तो कह भवश्य देना। तुमने कहा नहीं सोरियस ह मै। आज फिर प्रापरेशन होगा मेरा। यह तो डाक्टर प्रसाद न बता दिया था उनको। तब भी नहीं कहा उमने वर पा रहा है वह । पाप भी श्रेयांस याबू, बच्चो की तरह जिद करने लगते हैं। बच्चो वी तरह नहीं सानल एक यूटे पिता की तरह यहो। जिसके जीवन पौर मृत्यु की डोर पिता को हो न माटम हो क्ब टूट जाये वह । "सी प्रशुभ बात नही कह माप । पाराम करे। में चलती हूँ। नस, श्रेयास बाबू का ब्लड पशर च कर लेना। सुबह के सूरज की पहली गिरणे मेरे चेहर, कमरे मे फ7 गई है । नस न मरा ब्लडप्रेशर लिखा है। हरवे पोले प्रकाश में कमर ग रखी हर चीज पीली खिन लगा है। मरे मन पर छाया योभ कम होन लगा है। एक्टक उगते सूय यी किरणो मे कुछ खाजन लगता हू तीन महीने बीते । पहली बार मृत विनीत ने बात की है डाक्टर से । सुखद लगता है यह साच । उसे ध्यान है मेरा । व्यस्त हो गया होगा। व्यवसाय है। मरा भो ता यही हाल रहा है । इ सप्ताह महीना घर का ध्यान नहीं रखता था मुझे भी। विनीत या कोई दोप नहीं। प्रा जायेगा वह । सोनल कहती है अब तो म पहिले से अच्छा भी हूँ पास रखी छोटी टबुल पर रखे गुलदस्त मे रखे गुलाव देखने लगता हूँ पितन सुदर, ताजा है यह । पास बैठी नस से बहता हूँ-

मजुला, यह गुलाब देना मुझे।
यह लीजिये।
क्तिने सु दर हैं यह ।
हा बहुत सुदर ।
मजुला। इनमे खुशबू कहा है। नही है ना। अधिक खुशबू तो नहीं ।
यही तो कह रहा था मैं वैसे सु दर बहुत है । पर इनमे अपनी कसी भी
महर नहीं । दिखावटी ज्यादा लगते हैं । इनमे खशबू क्यो नही है मजुला ।
खुशबू वाले नहीं है यह । देशी गुलाबो म खुशबू होती है । यह तो कलम
बाध कर तैयार किये गये हैं।
तुम ठीक कह मजुना देशी, अपनी परम्परा वाले गुनाब नहीं हैं
यह । तव खुशबू कैसे हो सकती है। लो डाक्टर प्रसाद भी पा गये ।
और कसे है श्रेयाम बाबू । खूब प्रसन्न नजर आ रहे हैं प्राज तो।
हा । इन गुलाबो के लिये मजुला से पूछ रहा था इनमे खुशबू क्यो नही
होती।
आप भी आन द लेते है बातो का। ऐसे हजारो लाखो फूल आपकी
कोठिया मे लगे है और पाप ही पूछ रहे हैं इनके लिए ।
मजुला कह रही है देशी गुलाबो मे हो खुशबू पाती हैं । इनमे वैसे नहीं।
यह तो ठीक ही वहती है वह। देखिये नौ बजे भापरेशन है मापका ।
हा विनीत साहब का फोन आया था। आपके लिये पूरी जानकारी ली मुझसे
उ हाने ।
क्व पान वो कहा उमन ।
यहा पान के लिय तो कुछ नहीं बताया उहोन । अव तो दिल्ली ही हैं ।
जब चाहग चले पायेंगे।
देखो कब आता है वह ।
पाप थोडा मोर प्राराम कर लें। नम यह लो। इजेक्शन लगा देना।
-
यम,सर।
म चलता हूँ। ठीक नौ बज प्रॉपरेशन है ।
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तीन ऑपरेशन के बाद कार में डाक्टर प्रसाद की आवाजें मरे काना मे सुनाई दना रही थी। मैं पूरी तरह से उनकी बातचीत समझ नहीं पा रहा था। बेहोशी की स्थिति छायी थी मुझ पर । तब ही मतीत में याद माता है-- मेरे पिता मुझे अपनी गोद मे लिप बठे है। वडा सा चौक जिसमे भीड लगी हुई है। मेरी प्रायु काई छ वप का रही हागी । पडित न मेरे पिता के, पिर मर ललाट पर लिक लगाने वहा था. प्रापरे सुपुत्र का नाम श्रेयास प्रसान्त ही शुभ रहेगा। मेरा नामकरण सस्कार था वह । पिता के अलावा दादी थी। मेरी माँ मुझे जन्म देने के बाद ही शरीर घोड चुकी थी। पिता लक्ष्मीनारायण उस क्षेत्र के प्रतिष्ठित व्यापारी थे। उ होने दोबारा दाती से लाख कहन पर भी विवाह नहीं किया। दिन रात अपने काम म लगे रहो। कई बार लम्ब समय के लिये घर में बाहर रहते ! नाती की देखरेख मे म रडा हुआ। उनका सुबह स मदिर जाना, घर पर पूजा पाठ का काय अनवरत चलता रहता । तेज सर्दी में भी मूर्योन्य से पहले उठ मागन मे लगे तुमी चौर की परिश्मा, पूजन, भूयदशन उन जीरन के स्थायी अग थे। वे चुपचाप करती रहती। म अया कुछ समझा न समझा देखा करता। उन दिना शिक्षा का प्रसार इतना नहा था। गांव के पण्डिाजी मारर अक्षर नान कराया परते। अपनी पायु में वे ऐम ही दिन जोडता चला गया। पिता अपने काम में लगे रहते उह पर म पाते-जाते देवता इससे अधिक कुच नहीं। उनका क्या उपवसाय या तर नहीं समझता था म। को ही समय बीतता गया। दीपावली की रात थो ठीक से याद है। माग मा था। पिता वाल कमरे में लोगो को भीड थी। दादी उमने पास बैठी थी। तब रान का सामूहिक भावाना स चौर गया था मैं। मरो प्रायु परह मासपास रही होगी। एक प्रबोध उम पो बह। निरा से उट पिना ये कमरे की चौखट पर हा दुप्रा था। दाटी कोट मुझ पर पसा उहाने मु गोजो से बुध वहा । मुशोमो मेरे पाम पा मग हाप में 10 पाड घर पर ले गये और दादी के पाम बिठा लिया था। उन्होने मुझे अपनी बाहों में भर लिया था। उनके चेहरे पर दृढ़ता या भाव था। अपनी धीमी आवाज मे उहोने कहा- र्थ यास वायू । तुम्हारे पिता नही रह अब । म भी पता नहीं कब तक साथ हू तुम्हारे । सोचती हू जीवन का लम्बा सफर तुम्ह अकेले ही पूरा करना होगा। लक्ष्मी यो व्यापार मे घाटा लगा था और उसी सदम म प्राण त्याग दिये उसने । मग पूरा प्राशीर्वाद है तुम पर। धीर-धीरे घर, कारोबार सम्भालो। मुशीजी, श्रेयास वाबू को व्यापार सिखाते जाना। - जी । बुप्राजी। मु शोजी। लक्ष्मी का नाम रखने वाला ही यह बचा है बड़ी हवेली पारोबार को भय तुम्ही सम्भालो। मैं तुम्हारे वाम म समयती नहीं। उस पडे कमर म लोग जब निस्पद आखो से मेर पिता के शव को लगा- तार देखते रहे । दादी मा दीवार पर सिर टिकाये बद पाषा मे कुछ सोचती रही थी बस । वे सब सुबह होने की प्रतीक्षा में बैठे थे। मुझे दादी की गोद मै नीद मा गई थी। X चार समय कैसे बीत जाता है पता नहीं चलता। आज मु शोजो, दादी मा ई भी तो नहीं बचा। दादी मां ने उनकी मृयु से पूर्व ही मेरा विवाह कर । था। कहती थी मेरे विवाह के बाद ही सुख से मर पायगी वे । पिना जगह सारा व्यवसाय, कारोबार सम्भाल लिया था मैने । मु शोजी एक ग प्रहरी की तरह हर क्षरण मरे साथ लग रहते । उही का किया है सब । आज समाज में जो भी प्रतिष्ठा है उसके पीछे उही पा वरदहस्त रहा मुझ पर । यही कारण है पिता के तैलचित्र के पास उनका भी बड़ा सा व लगाया हुआ है मैने । पिता से अधिक मेर जीवन को व्यावहारिक बनान उत्तरदायी रहे है वे । पाप नाश्ता कर लेते। हा, मनोरमा । क्तिना समय हुमा । नौ बज रहे है। प्राज तो आपको कही बाहर भी जाना था। आपके सचिव माणिक वह थे फोन पर। मनोरमा। ईश्वर की कृपा है प्राज मेरे सातवें प्रतिष्ठान का उदघाटन गये दिनो इसी कपड़े के मिल की तैयारी म लगा था मै । प्रापको बधाई। ईश्वर आपको और सक्षम बनाय । मापको मेहनत रग रही है। रमा मेरा कुछ भी तो नहीं है । सब तुम्हारा ही है। मैं तो निमित्त मात्र । पता नहीं सब कसे होता जाता है । कौन- मै मारिण। माआ। बैठो। सब व्यवस्था ठीक से हो गई। जी हो। मन्त्री महोदय ने फोन पर बताया शाम चार बजे तक ही पहुच पायेंगे वै । वे पहिले देबिनेट मीटिंग है बा- मे भी दो कायमो को निवटाकर ही धनें ।

कोई बात नहीं । प्रा तो जायेंग नावे ।
प्रायेंग जर मरी सीधी उनसे ही बात हुई है।
ठोक है। अब तुम चीफ सेक्रेटरी मार से भी बात कर लो। उहे
मनीजी के बदले हुए कायक्रमो को सूचना दे दो।
कर दूग। आप कब तक पहुचेगे मिल पर ।
तीन बजे के पास पास मत्रीजी को साथ लेता हुमा पहुच जाऊ गा । तुम
जाकर सारी अवस्थामो को एक वार और देख लो। मैं अभी दो बजे तक
माफिम में ही हू कोई खास वात हा तो फोन पर बता देना।
पच्चा मै चलता हू । नमस्कार ।
मनोरमा तुम भी चलती तो अच्छा था।
मैं क्या करू गो वहा जाकर। आप तो वहा की भीड, चकारीध मे खो
जाते है । फिर आपके समग या कोई पता नही यहा बि तक सोगे।
यह गलत नहीं। करें भी क्या । सार काम हैं ही कुछ ऐसे। सरकार,
उसके अफसरा, मत्रिया का तालमेल बिठा लेना कठिन काम है। पर ईश्वर
की कृपा है सब हो जाता है। ज्यादातर काम माणिक हो निबटा लेता है ।
मुझ तक' तो पाने ही नही देता कैसे भी वामा को। विनीत स्कूल से कब
लौटेगा।
शाम को ही पायेगा।
तुम विनीत को लेकर चली माना ।
नहीं । कठिन होगा मेरा पाना। वैसे भी वर गी क्या ।
जसी तुम्हारी इच्छा।
फोन की घण्टी बजती है। पोन उठा पात करता हू
कौन । हरिवाम् । कैसे हैं माप । माणिर बता रहे थे शाम चार बजे तक
हो आ पायेंगे माप । हा हो । भाप चिन्ता न परें। सब कृपा है पाती।
अभी कुछ देर माफ्सि मे हू फिर मापने बगले पहुच रहा हू । ठोर' है । एक
भो तर पर पहुँचेंगे माप । म मा जाऊगा । नमस्कार।
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अच्छा मनोरमा चर् म । आफिस में बैठेगा थोडी देर । फिर सार दिन
यही काम चलता रहेगा आज तो। हरि वायू का फोन था। तुम्हारा क्या
वायक्रम है वैसे।
कोई विशेष नही। शाम रेडिज क्लय जाना है। वहाँ सगीत या कायक्रम
है। उसके बाद घर लौटना।
अच्छा है मन बहल जायेगा तुम्हारा ।
चलता हूँ।
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पाँच हरिवार प्रदेश के वरिष्ठ मत्री है । उम्र पचपन साठ के आस-पास । पर मन से कही भी बूढे नहीं हुए हैं। मिल के उद्घाटन भाषण मे उन्होंने देश पी गरीब जनता के लिए सस्ता कपडा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी कपडा निर्माताओ को आहान के स म कही । श्रोताग्रो मे अधिकाश मजदूर वर्ग था। वह मत्रीजी के भाषरा मे निमग्न था। उनके चेहरे पर आशा की लहरें हिचीले खा रही थी। माईय । हरियावू । मापका उद्बोधन वडा प्रोजस्वी, प्रेरणादायी रहा । हमारे मिल के सारे कायकर्ता, श्रोतानो ने जी भरकर सराहा। श्रेयांसजी। छोटी सी बात है हमारा काम ही यह है शब्दो से लोगो के सामने सुनहरी स्वप्न प्रस्तुत कर दना । अमल करना न करना तो पाप पूजी- पतियो के हाथ म है। हम तो कह सकते है, मापको याद दिला सकते हैं मापके कत्तव्यो की। वह भी आवश्यक है। आप याद दिलात रहते ह यही, क्या कम है वरना इन गरीब फुटपाथो पर जिन्दगी बिता देने वाला के लिये किसी के मन में पाई हमदर्दी पहाँ है। श्रेयांसजी। उदघाटन सम्पन्न हो गया। आपको बधाई। प्रागे क्या इलजाम है वह भी देख लें हम । आपके सपने हरियायू के हिस्स पी मिठाई पा क्या हुआ। माप निश्चित रह । मारिणर प्रापके हिस्से की मिठाई आपके वगले दिन मे ही छोड पाया है कीमती अदैवी मे सजगर । मापने इतनी यावादी के क्षेत्र मे मिल लगा देते की आज्ञा दे दी, जमीन मोडिया के भाव बशीश पर दो । यही क्या कम है। फिर हमारा भी तो कोई फज बनता ही होगा। यह तो माप जाने। हमने तो आपके इस सत्र की गरीब प्रावादी को रोजगार मिले, देश का उत्पादन ब यही सोच जो भी वर पाये लिया। हमारे पास की व्यवस्था तो की ही होगी मापने । पाप भी दिन बातों में उलझ गये। श्रेयांसगे। देश पी गरीबी, तरक्की, उत्सान, विरास जैसे पाम हमारे जिम्मे पोड दें। 131 सामने दरवाजे से ट्रे मे तासेज कीमती द्राक्षासव की लबालब भरी दो बोतलें लिये साहिला हरिबाबू के मोफे के पास रखी तिकोनी टेवुल पर रख देती है । साहिला, हरिबाबू को विशेष रूप से प्रिय ह । उसने शरीर पर पहने भर कपडे पहन रखे है। उमरे झुक्ने से विस्तृत हा भारी हो गई गोलाईयो को देख हरिबाबू खुद को नियंत्रण में नहीं रख पाते- साहिला जी। इस द्राक्षासव की क्या जरूरत रह गई है। जन मार मा गई है। आप मे कौन सी कम मादक्ता है इस अगूर के रस से । प्रामो मेरे पास वैठो। आपकी सेवा मे पहिले यह शीशे तो तयार पर थे यास जी बुरा नही मान तो साहिला खुद शीशा भी है और अगर भी। इह देखकर कुछ भी याद नहीं रहता। सब भूल जाते हैं हम । हरिबायू, आपकी सेवा करना तो हमारा धम है। साहिला भी आपकी खूब प्रशसा करती है। लामो । एक उधर भैयास जी को। आप नही लेंगी। नही, मैं नहीं लेती। पाप नहीं पिला सक्ते क्या। अपने हाथो से छमा तक नहीं मैंने कभी। तुम्ह जरूरत भी क्या है हम जो हैं । लो मे हाथो से ही पीओ। नहीं । पहिले पिताऊँगी प्रापरो। हम सेवा ता करने दीजिये । प्राधिर आप हमारे मेहमान है। यह तो ठीक है । पर इतने दूर बैठकर सेवा नहीं होती। हरिवायू ने उसे खीच अपने शरीर से लिपटा लिया है। ट्रे में रग अगूर तुच्छ या उठा साहिला को खिला रहे हैं । साहिता । एक बात बहू अगूर जैसी योमलता और मान्यता दोना चीजें माय तुम म ही देनी हैं । तुम्हारे सपश स ही नशा हो आया है मुझे। ममो न तो प्रापन दागासव ही रिया और मुझे छुआ हो कहा है। इतनी जस्ती नगा हो जाता है पापा। तुम जा मेरे पाम हो मेरे । ययास या घाटा पाप मा ता घन लते । अगूरो का तर होटेलीपोरा यी पप्टो यस उटना है। ययाम बाय उटने हुए बहन 16 हरिबाबू । हमारे भाग्य मे वहां है। मैं प्राया माणिक का फोन माया होगा। श्रयास बायू सोफे से उठ पास वाले कमरे में चले जाते हैं । साहिला । लो मेरे हाथो से पियो तुम । सभी कहाँ । पाप तो पी ले पहिले । और क्तिनी पिलामोगी। चलो और नही पिलाती हरिबाबू । अब तक मापने जो पी वह तो फलों वा रस था। मेरी माखो मे भार कर तो देखो माप खुद ही जान जायेंगे अभी तो बहुत प्यासे हैं माप । क्या कह रही हो साहिला । यह सब मुझे कहने दो। सच कहा तुमने बहुत प्यासा हू अभी तो में । उधर थे यास बाबू ने कमरे में घुसने को पर्दा उठाया वही रूक जाते हैं । हरिबाबू साहिला के पूरे शरीर को तेजी से सहला रहे है । उसने भी हरिबाबू को अपनी बाहो म क्सकर जकड रखा है। साहिला । और पिला दो माज तो । तुम्हारे हाथी पीते मर जाना चाहता है। सच तुम ही समझी हो मेरी प्यास को । हरिबाबू । जितनी पी सको पियो। भापकी सेवा में कैसी भी कमी नहीं माने दूगी। साहिला । कौन सा नशा हो तुम । समभा नही में। हरिबाबू । यह कोई बद शराब की बोतलो का नशा तो नहीं जो सुला दे भापको। मेरा नशा तो किसी को भी जगा सकता है। जीने की चाह पैदा घर सकता है उसमे। सव महतो हो साहिला | वाई हरिबाब को जगा दिया तुमने । यहते हरिनामू सोफे के सोने पर सिर टिका देते हैं । थेयास वावू पर्दा हटा मादर माते हैं । उठो। बहुत समय हो गया। साहिता खुद को हरिवाबू को गहों से अलग होती, कपडे ठीक करती उठती है। पास तो परेशान पर डाला हरिमा । 17

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कोई बात हो। आयुर्वेद मंत्रालय भी तो इही के पास है प्रदेश का ।
प्रदेश के सारे वैद्य कीमती भस्मो से बनी दवामो से जवान बनाये रखते हैं
निक)। इह यही आराम करने दो। और यह तुम्हार लिये कुछ पत्रम्-पुष्पम् ।
सौ-सौ के नये नोटो की पाच गड्डिया साहिला ये हायो मे थमा देते हैं ।
इन कागजा को क्या जरूरत है। घास जी, वैसे ही सेवा वरन दीजिय
ना मुझे । आपके लिये तो दुनिया हो घाड रखी है मैन ।
साहिला । रख भी लो। सच तुम्हारे रूप के आगे वागज के दुवडे ही हैं
यह । चाह तो तुम भी यही बेडरूम में पाराम करो।
ठीक कहते है । अाप भी यही सो जामो ना आज तो।
सुबह से निकला हू । चलू गा अव ।
चले आप ! मुझे भी तेज नीद पा रही है।
सडखहाते परो से दरवाजे पर छोडने पाती है।
गुग्नाईट, श्रेयांस साहब । अब सोयेंगे हम भी ।
खट से दरवाजा बाद वर पदर चली गई है । सोढिया उनर कार में मा
पैठता है। चार स्टाट पर तेजी से मिल के महाते से निकल सनाटे मे बेसुध
शात सडक को चीरता पर की ओर निकल जाता है।
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सुबह जल्दी पर से निरल दफ्तर म जा वैया है। नये मिल के मैनेजमट के साथ वानपीत परती थी। मारिगर के मारे को प्रतीक्षा कर रहा हूँ। पमरे मे गये दिनो हुए उदघाटन के बडे-बडे रगीन चित्र लग रहे हैं जिनमे हरिवाव मत्री महोदय विशेष रूप से मुखरित है। दरवाजे पर हल्की माहट होती मानो, मारिएका नमस्ते । बैठो। शाम के चित्र वडे जल्दी पनर मा गये। मापने लगवा भी - यह तो परता ही था। अपने मायक्रम का समाचार पत्रो, रेडियो, दूर- दशन पर अच्छा प्रचार रहा । हो, देखा, पढा था। मापने इम मिल के मैनेजर को पास्ट के लिये नाम नहीं बताया। मैं क्या यह सकता हू । क्त ही हरिबाबू का फोन आया था उनका पहना है साहिला रायजादा मो मनेजर बना हूँ म । मत्रीजी घी यात टालन पी स्थिति मे नही हू। मने साहिला को नियुक्ति पत्र भिजवा दिया है। वैस पढ़ी-लिखी, स्माट है ही वह । सोचता ह काम सभाल लेगी। सभालने जैसा तो है भी क्या । सारा वाम तो आप देखते ही है । आपकी विश्वासपात्र भी है साहिला जी। म नीजी का सुभाव मान लेने म कोई हन नहीं है। चलो जैसा भी है । लो साहिला खुद भी भा गई । नमस्कार, श्रेयासजी। माइये वैठिये । कैसी हैं प्राप । अच्छी है। कौन सी उलपन में डाल दिया है। मित्र के मैनेजर के पद के लिये कहा है मापने । मेर वम का तो नहीं लगता यह काम । r . . 1 19 - प्रापयो करना क्या है। पाराम से मिल के माफ्मि में वैठिये । योडा. बहुत मिलना, होलसं, एजे टस से विजनेस प्रमोशन पर बातचीत करना। वाकी सारे काम तो श्रेयांसजी भोर में मिलकर करते रहेंगे। माणिक जी, माप तो जानते ही हैं। इतनी रेग्यूलर यहा हूँ मैं। मेरी पसनल लाईफ भी छिपी नही। सुबह ग्यारह-बारह बजे से पहिले तो सोर भी नही उठती । दूसरा माज यहाँ, कल वहाँ घूमना । वह सब करिये। हमारी मिल को क्या प्रापत्ति है। भापको यात्राओ म मिल ये प्रॉडक्शन के बारे मे भी बातचीत करती रह । हमारा काम तो आपके बटे लोगो के सम्बयो मे और सरल हो जायेंगे। यासजी को भी पूरा सहयोग मिलता रहेगा। साहिलाजी, पाप निश्चित रहें। धीरे-धीरे सब समझ जायेंगी पाप । लो सबसे पहले तो हम जो शेमस मोपन कर रहे हैं उसके विज्ञापन पर पहिला हस्ताक्षर मैनेजर के रूप मे करें। आपके शुभ हाथो से ही जारी करें शेमस । जितनी राशि के शेअस है माणिक जी। तैतीस करोड रुपये के हैं। दो महीने मे सारा पैसा इक्टठा हो जाये। हमारे दूसरे प्रतिष्ठानो के शेअर्स का बाजार भाव देखिये जितनी ऊंची दामा मे विक रहे हैं। श्रेयासजी की प्लानिंग का जवाब नहीं । माणिक' जी । देखा मापने साहिलाजी मे कितनी योग्यता है। दो मिनिट मे काम को समझ लिया है इ होने। सर, श्रेयासजी प्राप भी हस्ताक्षर कर दें ताकि यह विनापन समाचार पत्रो का भेजे जा सकें। आपने इसके लिये सारी व्यवस्थाएं कर ली हैं। शेअर मार्केट, दलाला को फाम्म भिजवा दिये हैं ना। मब काम गये सप्ताह ही पूरा हो चुका है। माज विज्ञापन जा रहा है। इसी सप्ताह देश के सभी पत्रो मे छप जायेगा। इस महीने के प्राधिर तक तीस प्रतिशत पैसा तो हमारे पास मा ही जायेगा। हो, चालीस प्रतिशत से ज्यादा शेमस जारी भी नहीं करें। सात परसेंट शेमस साहिलाजी के नाम करवा देना। बाकी सब माप समझते ही हैं । माज आप उद्योग भवन जारर मिस्टर पाण्डे से मिले । कोशिश पर बल्म वाली फैक्टरी को फाईम का क्या हुमा। . 0 पाप साब से मिला था मै । कुछ अडचने बता रहे थे वे। अब नही कहगे पे । इण्डस्ट्री मिनिस्टर ने उनसे बात कर ली थी। सारी समस्या पैसा की है। वह भी कर दिया है यने । पाण्डे साहब प्रसन्न हैं अब । आप केवल यही वह श्रेयांस बाग के सचिव हैं प्राप। हो पायें माप । अभी पॉफ्सि में ही हू । काई दिमत हो तो फोन पर मुझमे बात करें। नही अब क्या परशानी हो सकती है । चल में। मासिक कमरे से बाहर निकल पाते हैं। श्रेयासजी। आपके उपकारो से क्से उऋण हो पाऊंगो में। आपके मन को विशालता को कोई सीमा ही नहीं है। ऐसा कुछ भी नहीं। तुम्हारा भी क्तिा सहयोग है मुझे। सच तो यह है कि बिना विश्वासपात्र लगा के इतने बड़े प्रतिष्ठान चलाना फठिन काम है। मिलजुल कर जितना हो जाये काफी है। उस दिन कोई दिक्कत तो नहीं हुई ना। नहीं । कोई विशेष नहीं। हरिबाबू जागने पर मेरे कमर मे आ गये थे। सुबह दोनो ने साथ ही नाश्ता क्यिा । मेरी गाडी से ही घर लौटे थे वे । प्रापकी प्रशसा करते रहे थे। मेहरवानी है उनकी । उनका पूरा सहयोग है मुझे । चार मिल्स तो उही के सहयोग से लगे हैं जब वे उद्योग मत्री थे। जमीनें दिनाना, विदेशी मशीनो के आयात की सुविधा, अधिक्तम रुपया सरकार से दिलवाने जसे काम बढी सहजता से करवा दिये थे उन्होने । पूर राज्य म त्रीमण्डल मे प्रभावशाली मलिया की श्रेणी म आते है। उधर केन्द्र की राजनीति मे भी अपसी राग अडाऐ रखते हैं। राज्य और केन्द्र दोनो जगह एक जबदस्त प्रभामण्डल बना रखा है उन्होंने। कई बार मजाक मे कह भी देता हू उन्ह मुख्यमन्त्री क्यो नही बन जाते । जवाब मे कहते हैं किंग मेकर हैं थे। रहते हैं राजा बनने से मच्छा है राजा बनाकर शक्तिशाली बने रहो। तुम्हारी प्रशसा करत नहीं यकते दे। मुझे भी कहते रहते हैं। पता नहीं क्या देखते हैं मुझमे । पागल से हो जाते हैं और मेरे पास पावर तो वे । तुम कह रही हो तुम्हारे मे क्या देखते हैं वे । तुम्हारे में क्या नहीं है। सब तो यह है तुम्ह पाकर तो कोई भी पागल हो सकता है। 1 21 भाप बातें क्तिनी करते हैं उम दिन रात का वही सने यो यहा मने तब तो टाल गये प्राप। अभी मै बाम करना चाहता हू पागल होना नही । अाज तो इतना मात्र मेवप्रप, खादी सिल्क को साडी। सूब सरा मार प्राक्पा लग रही हा। प्रापये मिल की मैनेजर इतनी सादी और गालीन तो होनी ही चाढेि । जब ममाज के विभिन क्षेत्रा रे गोगा से मिलना है तब तो और भी जरूरी हो जाता है। तुम सब समझती हो। यह जान लेना पितोग क्या चाहत हैं, उनकी माशाएं क्या हैं जरूरी है और यही सफलता हो सकती है मिमी के जीवन की। और आपकी सफलता क्सि म है। मेरी सफलता तुम हो। मुंह देखी वातें खूब कर लेते है पाप । हो । सुनो। मिल के मनजिंग स्टाफ की एक मीटिग रख लेना । म उप- स्थित होऊँगा उसमे । तुम्ह जिनके साथ पाम करना है उनसे परिचित तो होना चाहिये। वह सब मुझ पर छोडे । सब कर लू गी मै । यह तो अच्छी बात है। मेरी एक चिता और कम हो गई। क्व रख रही हो मीटिंग । तुम्हारा नाम नये मिल के पूरे स्टाफ को भेजा जा चुका है। पुछ जरूरी मिल सम्बन्धी, व्यवसाय सम्बधी, उत्पादन ये वार में समय समय पर माणिक' बताता रहेगा। उस पर अवश्य ध्यान देशा होगा तुम्ह । श्रेयासजी। धीरे-धीरे सब समझ जाऊगी। वल तो मापने पद दिया है मुझे। देखिये कैसे काम करती हू मै भी। सच तो यह है मेरे पास भी पाई निश्चित वायत्रम नही था जिदगी का। सुबह उठना, देर रात घर जाकर सो जाना' प्रालसी हो गई यो में। भव कुछ तो अनुशासन भायेगा जीवन में । अनुशासन की कोई बात नही। जरूरी तो है नहीं हर रोज मिल जामो हो । रोज यो डार, पत्र व्यवहार घर पहुच हो जायगा। देखा जायेगा। ठीक है। कही जाना है। । । . 22.

हो । यागार जाऊँगी कुछ खरीददारी करनी है। शाम घर पर आईये
आज माना कठिन रगा । उद्योग म त्रीजी के घर जाना है। जरूरी
बातचीत करनी थी उनसे । माणिक गया है क्या जवाब लाता है वह । तुम
चलो। माफ्सि के दूसर काम निपटा लेता हू बैठा-बैठा।
पापको घयबाद मेर को दिये गये पद के लिये।
उसकी कोई आवश्यक्ता नहीं। हर दृष्टि स तुम योग्य हो उस काम के
लिये।
घर कब पा रहे हैं।
जरदी ही पाऊँगा।
जैसी मापको इच्छा । मालिक हैं पाप । चलती हू मै ।
लापरवाही के साथ टवल से चमडे के बग को कधे पर डालती मॉफिस
के बाहर चली जाती है । म प्रॉफिस को फाईले दखन लगता है। सोचता हू
साहिला वाकई योग्य है मेरे काम के लिये।
23

सात सिविल लाईस प्रदेश के मत्रियो वा प्रावामीय क्षत्र। जिसमें दूर स देख कर ही मत्री की उपस्थिति का अदाजा लगाया जा सकता है। भीड भरे वगले, बाहर खडी कारो के काफिले, जोपों का हुजूम, विधायको, जनता, छुटभैये सफेद चोले धारण विये नौजवानो की भीड से ही समझा जा सकता है सरकार है या नहीं। दूसरी मोर एकाघ ऊंघता, बोडी फूक्ते कास्टेबिलों बगले के बरामदे मे लेटे दो-चार गांव वालो की उपस्थिति मत्रीजी के घर से बाहर होने की जानकारी देती है। सामने रामबली पाण्डेय, उद्योग मत्रीजी वो कोठी पूरी तरह प्राबाद है। सरकारी प्रमले का हुजूम, सफेद ढीले ढाले घुटक्नो से नीचे लटस्ते कुतों में चहलकदमी करते पायकर्ताओं के साथ लोगों की भीड । बगले मे जगह दिखाई नहीं देनी। ड्राईवर को कार बाहर सडक पर रोक्ने को कहता है। बाहर निकल ड्राईवर से घूम प्राने को कहता भाड को चीरता मत्रीजी के सचिव तर पहुचता हूँ। पाण्टेय साहब क्या कर रह हैं। अदर जनता से मिल रहे हैं । मापने लिये बहू मदर । हो । वह दो। जी। श्रेयांसजी आये हैं। प्रापको प्रदर ही बुला रह हैं । मन्दर कौन लोग हैं। कोई खास नही। सरकारी अधिकारी हैं, मत्रीजी ने बुलाया था उह। उनसे मिल लिये हैं। पाप हो माएं। ठोर है। माईये । माईये । योस बाबू । हमारे प्रति वरिष्ठ उद्योगपतिजी। बैठिये । क्श हुमा मापके काम का। मधुमून यता रहे थ आपका प्रोक्ट बहुत यहा है। उसकी मौपचारिकताएं तो पूरी परवा देने । पायजी। छोटे से प्रजिवट यो वडा बता रहे हैं मधुसूदन जी। प्राज मारिषर को उद्योग भवन भेज दिया था। निबटा माया होगा सारा याम । 24 भौपचारिपतामों जैसी कोई बात नही। प्रापरा माशीर्वाद हो जाये फिर सय काम हो जायेगा। श्रेयासजी। माप भी हमारा ध्यान यहा रखते हैं। सुना साहिलाजी को मैनजर बना दिया है मापन । हा । देखिये क्या कर पाती है यह । पजी। इन पोरता से कोई वाम सम्भलता है। पाप बहुत सीधे हैं । किमो पहने मे मा गये माप । मैने प्रापयो एव' काम बताया था। याद नहीं रहा मापयो। इस बात को तो भूल गया म । वह भी हो जायेगा । मापके भतीजे के निये वह रहे हैं ना पाप । उसने भी परशान कर रखा है मुझे । सरकारी नौकरी के लायक तो है नही यह । वरना यही भी पुसेड देता उसको। दसवी भी पास नहीं कर पाया। इतना बड़ा हो गया रहता है जनता की सेवा करेगा। वैसे जोड-तोड मे कम नहीं बठता वह । हमारे विधानसभा क्षत्र में दूसरा नेता पर नहीं फडा सयता उसके रहते । पूर क्षेत्र मे पच्छा प्रभाव बना रखा है उसने । उसकी इसी विशेषता ने मेरा मन मोह रखा है। वला का बहादुर मोर क्रूर विस्म या पट्ठा है। पाण्डेयजी, उसके लिय भी जरूर कुछ करेंगे। परेंगे नहीं। मापकी किसी छोटी-बड़ी फैक्टरी मे मैनेजरी का काम दे दो उसे । रही मापने काम की बात यह भी होगा ही। कितने करोड का प्राजक्ट है यह। नब्बे वरोड का। हमारा उद्योग विभाग सब करवा देगा। हमारी गहलक्ष्मी की सेवा मे किनने परसेंट शेमस रखोगे इसम । पाण्य साहव । सब आपका ही है । आप जसा क्हग कर लेंगे। नही भाई श्रेयासजी। साफ माफ बता दो। पाठ-दम परसेंट तो कम कम रखना जरूरी है। भजी, वह भी हो जायेगा । प्राप तो कृपा बनाये रखें हम पर । 251 धे यांस बाबू । हम तो मापकी सेवा के लिय हो तो बैठे हैं। सब करमा देंगे। पाप तो जानते ही हैं पांच माल के बाद क्या होगा ईश्वर ही जानता है। हमने भी जनसेवा का रास्ता बटा गलत चुन डाला। जब से स्वतत्रता सग्राम में यूदे बाहर निकल ही नही पाय इस गोरखध चे स। जनसेवा वा जुनून मवार था -िमाग पर । उन दिना न घर का पता रहता था ना गुट का ही। पूरा जीवन झोर दिया हमने तो। हमे मिला क्या । लोग हमे बुरा पहते हैं । मुख्यमत्रीजी को हमसे बात करने का समय नहीं । माप ही बतायें जनता को आशामो को कैसे पूरा पिया जा सयता है । आपकी राष्ट्र के प्रति को गई सेवामी यो कभी नहीं भुलाया जा सकता। पाप जसे कमठ और निष्ठावान लोग नहीं होते तो आजादी क्या हाती है नई पीढी जान ही नहीं पाती। देश गुलामी को जीरो मे जकडा होता अब भो। श्राप समझते हैं हमारी सेवामा, त्याग का मूल्य । तर ही फोन का बजर चिहुक्ता है। फोन | भेज दो उसे । लो मेरा भतीजा भी प्रा हो गया । प्राओ। बेटा रामावतार । इसी के लिये तो कह रहा था मै । माप श्रेयासजो हैं । प्रात के बडे उद्योगपति । . नमस्कार जी। ताऊ पहा से आ रहे हो। आपका पुलिस डिपाटमट निकम्मा और गैर जिम्मेदार है। क्यो क्या हो गया। होना क्या था । आपके एग्रीकल्चर फाम की हदब दी करवा रहा था। गाव वाला ने हमारे लोगो पर हमला बोल दिया। हमारे सत्रह कायकर्तामो को गम्भीर चोटें आई। थाने में रिपोट दज कराने गये तो एफ० माई पार लिखने तक को तैयार नहीं मापका पुलसिया विभाग । कोई गम्भीर बात तो नही हुई ना । गम्भीर जैमा तो कुछ नही। गाव के दो लोग मारे गये झगडे में । क्या यह रहे हो रामावतार। वहां है वे लाग । 26 मजी | लोग क्या लाशें वह माप । साथ ले माये जीप में डालकर चिंता नही बरें सब ठीक कर दिया मैन । वह तुम जानो। होशियारी से काम पिया परा। इस तरह की हिंसा नहीं चाहन हम । जब प्रपन ही लोग ऐसा परेंगे तो कैसे काम चलेगा। ताऊ भाप गार हो परेशान हो रह हो। यह सारी घटना गई रात की है । किसी को कुछ मालूम नहीं। मब तुरत फुरत कम हो गया। पर। इस माफ्त को भी देखेंगे। तुम दो चार दिन यही घर पर ही रहना मद। ताऊ मैं भी समझता हूँ। पदर जामो तुम। पाप एस० पी० को प्रच्छी तरह समभा देना। कडव' मिजाज वा है वह। सब देख लेंगे । तुम जाकर आराम करो। हमार बीच से उठकर वह म दर चला जाता है। देखा श्रेयाम बाबू कितना भुभारू पट्ठा है हमारा रामावतार । कठिन से पठिन परिस्थितियो म भी नहीं घबराता यह । आपने उद्योग विभाग को तो वह ही दिया होगा मेरे लिये । वह हमारा काम है आज ही बुनया टूगा। मैनेजिंग डायरेक्टर को । थोडा उसका भी ध्यान रख लेना । अपने गाव के पास ही पा रहने वाला है। पक्का आज्ञाकारी है हमारा। इसलिए तो ले माये हम अपने विभाग मे उसको। हमारे काम के लिये सार वादूना या चर्वा बना जैसे-तैसे गगा पार करा ही देता है। अब मुझे प्राज्ञा हो पाण्डय साहव । हो । सुनो । प्रापकी मैनेजर नाम भूल ग मैं। कोन साहिला। हा, हा। वैसा नाम है यान ही नहीं रहता। उसे मजना कभी सब तारीफ सुनते हैं उसकी । हमार हरिबाबूजो वहत रहन है । प्रापसे मिलने भेगा ज्ह। बडी समझदार है और लगन वाली महिला है। 27

वह तो हम जानते हैं यासजी । मिलेंगे उनसे भी।
प्राज्ञा हो मुझे।
प्रापसे मिलकर मन खुश हो जाता है। वरना सारे दिन फालतू मिलने
वाला को विच-मिच, बक्वास सुनते-सुनते घबरा जाते हैं हम । हमारी उम्र
भी तो देखो। क्तिना काम ले सकते हैं इस पुरानी मशीन से हम । और जोर
से खिलखिला पडे थे।
यह तो सच कहा आपने।
मिलते रहिये । चलू में।
नमस्कार।

आठ । देर रात घर पहुंचा है। सीढियां चढ़ मपने बेडरूम मे मा गया है। पास वाले कमरे मे रमा और विनीत सो रहे हैं। कमरे को लाईट जला कपडे बदलता हू । बिस्तर पर प्राराम से लेटा दिन भर मिलने वाले लोगो, उनकी वातो पर सोचता हूँ । नीद पा नहीं रही। वैसे शरीर पूरी तरह थक वर चूर हो गया है । उद्योग मन्त्री से काम बन जाने की बात से खुशी होती है । चलो जैसे तैसे काम हो ही जायेगा। साहिला का निणय भी गलत नहीं रहा । पास कमरे से चल रमा मेरे कमरे में आई है। माप खाना खा लेते। पास भूख नहीं है । मानो वैठो। कई दिनों से न सुबह न ही शाम भोजन कर पा रहे हो घर पर। नई मिल के समाचार देखे थे। सूब अच्छा बना दिया है मापने । उसी की व्यस्तता में सारा समय लगता रहा है मेरा। एक और प्रोजेक्ट की तैयारियां चल रही है। वह तो मचा है। पर कुछ समय घर में भी दिया करो। विनीत पूरे समय अकेला रहता है । अब तो समझतार भी हो गया वह । थोडा उस पर भी ध्यान दो तो अच्छा रमा । समय ही वहा मिलता है। इतना सोचने तक का भी। सुबह से देर रात तक' का नियम सा बना हुआ है मेरे जीवन में भौर करना भी पडता है । इतने पुराने उद्योग, फिर नये लगने वाले मिला, कारखानो को योजना उसके सम्बघ में लोगो से मिलना । हा नुम्हारो चिता अवश्य रहती है सारे कामो के बावजूद। फिर भी कभी समय से घर नहीं पाते कभी। नयी केबल्स की फैक्ट्री का काम हो जाये फिर कुछ भाराम भरू. काम भी खूब बढ गये हैं। *

तुम जानो । इन सबके बावजूद भी तुम्हारे में काम की लगन है, मेहनत
से पूरे परते हो सारे काम ।
रमा। सब तुम लोगो के लिये ही तो करता हूँ।
अब केवल्स वाला कारखाना लगा लो। फिर कुछ समय के लिये नये
काम हाथ मे नही लो। कमी तो किसी चीज की है नहीं। मापने क्या नहीं
किया है। अधिक नहीं भागना चाहिये पूजी के पीछे।
तुम सही कह रही हो सब काम ठीप चल रहा है।
हा। उममे क्या कमी है। एक बात जरूर है पिता का प्यार, भापका
मागदी नहीं मिल पा रहा है विनीत को हमेशा बहता रहता है वह ।
अरे, रमा । सब समझ जायेगा वह भी धीरे-धीर । हमे विसने समभाग,
रास्ता दिखाया । उम्र के साथ सब हो जाता है। अभी तो बच्चा हो है वह ।
पाप समझेगे नहीं मेरी बात ।
क्यो नहीं । ठीक कह रही हो तुम। पर मेरी योजनायो, कामा से समय
मिले तब ना । घर पर कौन नहीं रहना चाहता । सब चाहत हैं पत्नी,
के साथ उठे-बैठे।
लगता है नाराज हो गये मेरी बात से ।
ऐसा तो नहीं। यही चाहता हू मेरो व्यस्तता को समझो तुम
ममझ लिया मैने । वुछ खाना खा लेते ।
रहन दो। सोए पर । मुवह फिर वही भागदौड मुरू हो जायगी । लाट
,
बच्चों
वुमा दो।
रमा न उठ लाईट बद पर मेरे पास मा लेट जाती है । पहती है-
६ल- दखत सान नहीं माठ प्रतिष्ठान बना डाले मापने एक से एर
बया
पर पीपा है । सब उसी पा दिया हुया है। घर मुह करोना।
हो तुम्हारे पमरे को लाईट जलती देय जान लिया मैंने तुम मा गरे
हो। रोग परेले-मरेले मात परशान हो जाती। अपार देर में मात हो
तुम भी लगता है तुम पर म, साय हो भी पार नही भी।
रम ममप तो तुम्हारे पाय हो।

उत्तर में रमा ने अपनी बाह मेरी कमर पर डाल दी है। सांसो मे पुशबू सो फैल गई है । कई दिनो बाद रमा मेरे साथ है। देखो कन सुबह मामि..more क्त की बात इस समय नहीं। नीद मा रही है मुझे। तुम भी सो जाम्रो। रमा का समेत समझ चुप हो जाता है। नीद न उसे भा रही मोर न मुदो हो । उसने मेरी मोर से दूसरी मोर करवट बदल सी है। मैं भी उसको और मुडकर उसको श्वासो को मादा गध मे यो जाता है। अगुलिया से उसके रेशमी बालो को सहलान लगता हूँ।

थे यास सूटिंग प्राइवेट लिमटेड पा वडा बोड प्राकर्षय वाता है । कार मुख्य द्वार से प्रवेश पर माफ्सि के पास जा खडी होती है। कार से उतर प्रापिस मे जाता है। दरवाजे पर सतरी खडा है । झुक कर नमस्कार करता है। साहिलाजी भा गई क्या। जी। उधर मीटिंग हाल मे हैं। आप भी उधर पधारें। इधर आफिस मे कौन हैं। अभी-अभी मिनिस्टर साहब माये हैं । उद्घाटन थाले । इनके पास ही बैठता है। मैनेजर माहब को बता दो मेरे लिये और हरिबाबू के लिये। पहता प्रापिस मे घुसता हूँ । नमस्वार, हरिया। अहोभाग्य हमारे पाप पधारे । भाइये थे यासजी । मुख्यमत्रीजो की कोठी से लौट रहे थे । सोचा मापपी मेनेजर साहिला को मुवारपवाद देता निक्लू'। हम पर प्रापया पूरा स्नेह है। मेरी बात ज्या की त्यो मान ली मापने। अच्छा लगा जानवर। मापकी हर बात मादेश होती है हमारे लिये । कसे टाल सक्त हैं हम । साहिलाजी को दो-चार दिनों से याद कर रहा था। उनसे बात भी हो गई थी। पर मिलना नहीं हुमा । मोचा मुवारवबाद के बहाने मेंट भी हो जायेगी उनसे । ध्यक्तिगरा कृपा यी है भार मापो। मुझे फोन पर देते साहिला मो भिजवा देना मापसे मिलने । श्रेयास गावू । यह हमारी प्रापसी बातचीत है। मापयो क्या रहना है। जमी पायरी इच्छा है। मुख्यमत्रीजी को समय मिल गया आरम मिरना। अपनी गरज मे बुलाया था उ होने । रामलिन नाम नम सास रखो है पी० एम०२ । पाप का भतीजा रामावर अपनी गुण्डाई र मार 32 क्या वह रहे हैं आप । गजा पर दिया आपने तो। बड़ी दूर पीकही नमस्कार। बठिय। साहिताजी ही है मा माप। पर RT पाककृपा है। पिर बधाई जसीran" निवार दे रहे हैं। महिन पढ़ महिने मे उह रिसोनिगम पा प्रध्यक्ष बना दंग रही पापये काम की बात । रामबलि पा इस्तीपा मागाये। एकाध पिन मद्योग विभाग भो मापने हरिया के पास पा रहा है। सारी गोटिया याम बाबू । राजनीति है यह । तलवार घी धार पर चलना पड़ता है। होना लो पर नमर में पाटा गले पहा उतरता है। इस घोटीसीपासे रामवलि सोचता है सारे काम गुण्डागर्दी से ही पल जाते हैं। माटे मे समस कहाँ समझता है लोग। जनता है कोई जागीरदारी तो नही। सो Net नमवार। मत्रीमहोदय, यास जी। निसमापन तो सारा तोर तरीका ही बदल डHN०२ नहा माता। नौ गाव वाला को मार गिराया। अगर पाने पायरो से हा जने भुने बढे थे । उहूँ भी मौरा मिल गया। सारे अगवार रग सासे । रामबलि इस्तीफा दें। दिराधियों को प्रमुन्न मांग है। पार्टी यो इमेज मा सत्यानाश कर डाला उहोने । सब मोर पू-प हो रही है सो० एम० को। हरिबाबू । हमन तो दो बादमियों के मरन से यार सुनी थी। श्रेयासमा दो या मतलव दो तो होता नहीं दो भादमी, परिमोर, दो रच्चे मार गये हैं। बापयो जानरारी में दो मादमियों तर मो जाापारी सी० एम० का क्या स्प है पायजी ये पिये। रूप या होगा। पार इस्तीफा देने यो मह दिया गया है उनको । यह तो अच्छा नहा हुमा । भभी परसो हो तो ये थेयरस घे पारपाने की बात पूरी कर पाया था उनके साथ। घबरानो मत। सब ठीक हो जायेगा। पाल्य या मोर गा पार्टी से भो गलत नहा है। जमा कर पाया हूँ। बोर कर लाये है प्राप भी। , मनजर भी पा गई। को।

साहिला । सुना, उद्योग विभाग भी हरिया को मिल रहा है एक ने दिना म्। लगा हरिया चार उठे हैं. श्रेयाजी भी मजाय करने से बाज नहा माते । अभी जो विभाग है यही क्या कम है और जिम्मेदारियां लना उचित भी रही। माननीय मत्रीजी, भापको पायगमता से कोन अपरिचित है। माफिस का नौकर पायाफी-नाश्ता रख गया है। श्रेयासजी । राजनीनि मे एक दिन भी नहीं चल सक्ते अाए । अभी काम हो जान दो पिर देखते हैं अट किस परवट बैठता है। प्रापको पता नहीं रामबलि सो० एम० के सामने ही प्राग बबूला हो गये। मुश्किल से राजी किया है म्तीफ के लिये। उनकी पसाद वे निगम या अध्यक्ष बना जायेगा, उपम किसी प्रकार भी दखल नही होगी जैसी शतों पर तो भाने दे। उनके पास जो लौडा बा अमला है उससे सी० एम० भी घबराते हैं एक बार तो । हमने सारी मध्यस्तता को है इस मामले म । रामबलि यो बम में कर सेना ऐर-गर के बम की बात तो है नही । खेर । छोडो हमार पचडे यो। भत्रीजी, वाफी। हरिवायू हैरत से साहिला को देखते मरी मौर मुखरित होते कहते हैं- श्रेयाजी। आपकी मैनेजर को पमद अच्छी है। हमारी पस द कह रहे हैं। आपने इहै मैनजर वा दिया अब तो आपको पसर ही बहलायेगी। साहिलाजी कॉपी ही पिलानोगी। पाप मादश दें और क्या मगवाया जाये। तुम भी ता जानती हो हमारी इन्या । है। पर माफ्सि मे तो पॉपो हो मिल सकती है बाकी सब घर पर। पक्की विजनेस वाली बन गई हो। अच्छा भी है। श्रेयास बालू भाग्यशाली हैं। अब हम लेगें। हम तो से यह मरते हैं। प्राररोण्डवा म बधाई दे। वह तो टीय है। पर अभी सब मर हो रखिये। मरे साय दिन्ती घरापा क्या रहा। यूब जानती

आप जब भी कह चलेंगे।
इस सप्ताह तो कठिन ही लगता है। अगले सप्ताह हो पायेंगे। वहा पार्टी
हाईवमान से मिलना था।
हरिबाबू के साथ साहिला प्राफिस से बाहर निरल प्रात है। मत्रीजी की
कार भी प्रा गई है।
चरें। श्रेयासजी। रात दस-ग्यारह बजे तक फोन पर बात करना
मुझमे ।
हरिबाबू की कार चल दी। हम दोना के अभिवादन का उत्तर हाथ हिला
पर दिया है उ हान।
मानो साहिला बैठते हैं । कुछ जरूरी बात करना है तुमसे ।
35

अाज अपने कायालय मे जमकर बैठा हू और सारी फाइलें निवटा डाली हैं। चाय के घूट के साथ अखबार उठा देखा लगता है। पहले पृष्ठ पर हो प्रमुपता के साथ सा है । उद्योग मत्री रामबलि पाण्डेय का इस्तीफा मजूर । प्रदेश के उद्योग मयो रामवलि पाय न स्वैच्छा और नैतिकता का ध्यान में रखते हुये मत्रीपद से त्यागपत्र दे दिया। श्री पापय ने कहा है- प्रारंभ से पार्टी के लिय एक वफादार सैनिक की तरह काम करते रहे हैं और प्राग भी करते रहा। इमो म प्राग छपा है-प्रदेश मन्त्रीमण्डन के वरिध म जी श्री हरिवार अन्य विभागा के साय उद्योग मन्त्रालय का काय भी दर्खेगे । अखबार टेबल पर पटक हरिबाबू को टलीफोन मिलाता हू । कोन, वर्मा जी वाल रहे है । मन्त्रीजी है। क्या बहुत भीड है वगले पर। वात कराम्रो। कहिये श्रेयांसजी का फोन है। बधाई हो हरिबाबू बधाई हो । ठीक है शाम वो आ रहा है क्या सी० एम० के चलना है। चलेग । प्रजी, अकेले क्यो पाऊँगा। जैसा आपका आदेश । मामने खडे मारिंगक' को बैठने का सकेत करता है। पाठ बजे पहुंचे जाऊँगा । प्रापरे यहा । अच्छा श्रेयासजी। फिर हरिबाद के पास पा गया उद्योग मयालय अब दोना हाथो से लक्ष्मी बटारिये । उनसे ही बात हो रही थी अभी, माणिव' । वह तो मैं समझ ही गया था। रामबलि पाण्य के त्यागपत्र का नतीजा है। यह लो माणिक हमारी नयी फैक्टरी का बड़ा हिस्सा खा भी जाता और टकार भी नहीं लेता। इस बार हरिवाबू ने गजब की पटवनी दी है पापजो को। नमस्कार। तो बह बैंस। पार तो एस पूछ रह हैं जमे प्रापको कुछ भी नहीं मालूम । 36 ० सब मुझे कुछ नहीं मालूम । वैसे भी राजनीति मेरा क्षेत्र भी ही । कुछ बतायो भी। गाव के झगडे मे रामावतार के साथ के ज्यादातर लोग हरिबाबू के ही काले भेडिये ही तो थे। एक-दा नही पूर नौ लोगो को मौत के घाट उतार डाला। इधर हरिबाबू ने विरोधियो अखबार वालो से हाथ मिला लिये। फिर तो यह सब होना ही था। गये दिनो प्रदेश की राजनीति, मुख्यमनी पर रामबलि के बरते दबदबे को देय हरिबाबू घात लगाये बैठे थे मौके की। इस पार तो पाण्यजी को धूल चटा दी इन्होंने । मेरे समझ म नहीं पाती तुम्हारी बात । अभी परमो ही तो हरिवाबू कह रहे थे रामबलि जी को किसी निगम के पद दिये जान की सिफारिश करके आये हैं मी० एम० को। वह भी गलत नहीं । वह तो इस्तीफा दिलाने का तरीका था। प्राश्वासनो से क्या होता है। अभी हरिबाबू छोडने वाले कहाँ है। पार्टी के विधायको से ही उह पार्टी से निकाले जाने की माग खटी करवा दी है। सत्तर विधा- गयो के दस्तखत है उस ज्ञापन पर जा मुख्यमन्त्री, हाईकमान का दिया गया है । सी० एम० भी यही चाहता है। पाण्डे वी गुण्डागर्दी से वह भी चमक्ता है। हरिबाबू के साथ सी० एम० वे यहा रात के भोजन पर मुझे भी जाना है प्राज। अच्छी बात है। माणिक । शेग्रस की क्या हालत है । अच्छी विक रहा है। गये दिन के प्राक्डा के अनुसार बाईस प्रतिशत शेमस तो बिक चुके है । वम से रोग शाम को पूछ लेता हूँ । अब तो प्राप हरिबाबू को कसकर पकड लो । उद्योग विभाग भी इनके पास ही है अब तो। तुस ठीक रहते हो। वैसे भी उनकी पूरी कृपा है हम पर। जी भरकर सीधे हैं पाप । गलतफहमिया मत पालिए इन लोगो के लिए। इनकी तो सेवा करते रहिये । जहाँ चूके इहाने नजरें बदली। तोताचश्म होते हैं यह सारे के सारे। ऐसा मत सोचो। कम से कम अपने हरिबाबू के लिये तो नहीं । तुम तो देख ही रहे हो चार बड़े कारखाने, मिल तो इनकी मेहरबानी से ही बने हैं। . 37

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यह काम तुम करो। मैं घर हो आता हूँ । ध्यान पाया घर वाली फाईल
में कोई पाठ-दस जापान की पार्टियो के नाम लिखें हुए हैं जो हमारे लिए
एल० सी० को व्यवस्था कर सकते हैं वहा पर ।
अपनी कुर्सी से उठ बाहर प्रा गाडी म बैठना
घर, चलेंगे साहा।
हो। चलो।
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आपसी बात से बिल्कुल असहमत नहीं है। हरियाव अपने लिय तो वहा हैं जो पद्रह-वीस साल पहिले थे । आपके तो मित्र ही हैं । चाहो तो तुम भी चलो शाम को सी० एम० के यहां भोजन पर। आप ही हो पायें। वहा सगा भी क्या आप लोगा वो वाता है। जैसी तुम्हारी इच्छा । उद्योग भवा का क्या रहा। मनजिंग डायरेक्टर मधुसूदन पाण्डेय की एक हजार अडचर्ने । पर ऐसा क्यो। रामवलि ने सव से ठीक से समझा दिया था उसे । प्रापको खुश करने को कह दिया होगा। रामबलिजी से मेरी उद्योग भवन से ही वात हुई थी। उन्होने साफ कह दिया था दम प्रतिशत शेअस पहले उनके नाम होकर पहुच जायेंगे तब सोचना शुरू करेंगे वे । अजीव प्रादमी है। जव मैने सारी बाते मान ली थी उनकी । फिर.... श्रेयासजी। पाप भी उस पर नाराज हो रह हो आज सड' पर भी गया है। अब तो हरिवाबू करेंगे सारा काम । फिर भी माणिक, मुझ पर भरोसा नही क्यिा उन्हाने इसी का दुख है। दुख मत करिये । आप जसे तो नहीं थे वे । चिता जैसी कोई बात नहीं, सब हो जायेगा। साहिलाजी नहीं हैं आज वे मिल तो नहीं गई थी। घर पर ही होगी। बात करवाऊ उनसे । रहन दो। याद मे पर रगा। अभी क्या कायक्रम है तुम्हारा । माज मुबह जापान टलेक्स भेजा था। देवल्स से सम्बधित मशीनों की कीमतें भोर क्तिने समय म डिलवरी दे सकते है जानकारी सेनी थी। बा के लिय एल० सी० वे वार मे वहाँ दो-तीन पमों को टैलेक्स द रखा है पोन भी बुक पराए हैं। प्रापिम म हो बैठना पडेगा शाम तय । जवाब ले। पावश्यप है। 38

यह काम तुम करो। मैं घर हो आता हू । ध्यान पाया घर वाली फाईल
में कोई पाठ-दस जापान को पार्टियों के नाम लिखें हुए हैं जो हमारे लिए
एल० सी० को व्यवस्था कर सकत है वहा पर ।
अपनी कुसी से उठ बाहर प्रा गाडी म वैठना हू ।
घर, चलेंगे साहब।
हो । चलो।
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ग्यारह
रात पे दस बजने वाले हैं। प्रजीव पाटने वाली सर्दी पड़ रही है। पार
मुख्यमत्री की कोठी के प्रहात म जा सकती है। मेरे साय भटक स साहिला
ने भी दरवाजा खोला। बाहर पटे सुरक्षा गाड से बात कर दोनो पाच म प्रा
गये हैं। दरवाजे पर तैनात सुरक्षा पमचारी पूछता है-
प्रापयासप्रसादी है।
जी।
वह दरवाजा पोलता है। हम दोनो महमान यदा जा पहुचते है।
मामो बैठते हैं।
हम दोनो प्रत्य त योमती सोफो पर बैठ जाते हैं। हमारे यहा के टली-
फोन की घण्टी बजती है। फोन उठाता है।
जी, मैं भैयास । पा रहा हूँ।
हरिबाबू अादर ही हैं । वही बुलवा रहे हैं।
हम दोनो साथ लगे कमरे में घुसत है।
प्राईये । श्रेयासजी। साहिलाजो कैसी हैं पाप। बैठिय ।
अच्छी हूँ।
अब तो पाप प्रसन हैं । रामबलि से प्रापका पीछा छूट गया। व्यथ ही
परेशान हो रहे थे भाप । हमारे पर विश्वास रखिये सय वाम जमा देंगे।
आपका तो पूरा माशीर्वाद है हम पर ।
अजी। जो अपने हैं उनके लिये सब किया ही जाता है ।
कौनसी नई
बात है।
मुख्यमत्रीजी यहां नहीं हैं ।
अदर ही हैं। कुछ पाईले निवटा कर पाते ही होगें। देर रात तर
काम करते हैं । दिन मे समय कहा मिलता है । मुबह से शाम तक लोगों का
मिलना, सचिवालय, उदघाटन, भाषण केन्द्रीय मंत्रिया की भावभगत में
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समय बीत जाता है। रात ही मिलती है फाईलो, घर के, व्यक्तिगत कार्यों के
रिये । और साहितानी आपके मिल का क्या हाल है।
अच्छा चल रहा है।
मुखमनी नौचनीलालजी आ गये।
नमस्कार साहब ।
आप प्रदेश के वरिष्ठ उद्योगपति हैं । यह साहिलाजी है। इनके मिल की
मैनजर हैं।
नमस्त । वैठिय प्राप लोग । हाँ हरिबाबू । रामबलि ने तो सारे विभागो
पा भट्टा वा दिया जा उनके पास थे। अब वन विभाग के अध्यक्ष बनने
पो रट लगा रखी है । बूढे हो गये पर कुछ भी नहीं समझते। कौन समझाए
उनको। दिन में चार छ फोन ठोर डालत है। मैन तो बात करना ही बद
कर लिया है उनस ।
छोडिये भी पाप रामबलि को। उस जैसे हजारो चला दिये हमने ।
प्रापको एसे भ्रष्टाचारी लोगो के पारे में सोचना भी नहीं चाहिय । पाँच-सात
दिन मे सब णात हो जायेंगे। पापो हमे भोजन पर बुलाया है कही भूल तो
नहीं गये।
हरियावू । मजाव करने लगे नाप तो । सामने वाली अलमारी म से कुछ
मामान ले प्रामा।
हरिबाबू अपनी धोती सभालत उटते हैं ।
माप वैठिये । मैं ले पाती है। क्या लाता है।
चलो तुम ले आया। दो बातल अग्रेजी, एक स्वदेशी प्राशा को। हमारे
नौप दीजो स्वदेशी का ही प्रयोग करत है।
हरिबाबू जोर से ठहाका मारकर हसे थे । साहिला मालमारी से दो
पातलें, ग्लासेज उठा लाई ।
साहिलाजी। यह स्टीरियो भी चला दें।
जी, चलाती है।
कमरे म पाश्चात्य सगीत धीमा-धीमा उभरने लगा था। साहिला जमीन
पर विधे मधमली कालीन पर घट ग्लास तयार घरने लगी।
हरियाय पाईये हम सब उधर जमीन पर ही बैठने हैं।
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मारोह
। मपि पर बैठकर पाना बरा पोपवारिक लगना
है । माहिलाती, उपर ही यंटा।
हम गर उार पश पर विधामापर जा कहा।
माहित न पहिला नाग बना मुग्यग त्री का दिया : रि हम दोनों
पा।
माप भी तो र, साहिला जी ।
नही। आप सा जात है मैं हाय तर नहीं सगाती।
सीजिये । पहिने में हाय र गाता हूँ।
पाप मम नही पर यह रही हैं आप गुद पपन हाया स पिलायंगे तो
पी ममती हैं अयथा नही ।
ता हरिवायू । हम ही पिला देत है । मेजवान तो हम ही हैं।
आर रहने दें मैं न गो।
गुना प्राजकन ता हरिबाबू न मिल पा पाय देखती है भार ।
इहाने मिल के सारे काम मेर पर हो छोड दिया है। पूरा तो करना ही
पडता है जब जिम्मेदारी ली है ता ।
प्रच्ची बात है। समझदार लगती हो। भार तो हमस दूर बैठी हैं ।
हरिमायू जरा प्रदर जाकर भोजन की व्यवस्था को जानकारी ल । मैं
साहि नानी से बात कर रहा है।
हरियावू वपन उठार जदर चले गये हैं । उ हाने दरवाज पर मुझे उससे
साथ जाने का सपत भा किया पर समझा नही मै। फिर भी उठार हरिवाचू
के पास चा दिया।
श्रेयामजी पापा हो घर है। थोडा हरिबाबू वा हाथ वेग दे मार।
जी, देखता
मैं कह रहा था साहिलाजी प्राप भी कौन सी मनेजरी के भजट मे पड
गई। राजनीति म पाईये प्राप। हमारे प्रदेश की तान सीटें खाती पड़ी हैं।
चुनाव सिर पर है। आप पार्टी की मम्बर तो हैं ना।
मम्बर नहीं हैं। दमग राजनीति के बारे म मेरी खास जानकारी भी
नहीं है।
42

- । पाप थे यामी के मिल वी मैनजर है हरिवायू प्रापती प्रशसा करत नही थक्ते मापको पैसो की कोई कमी नहीं। हम मापसे गुश हैं। यही राजनीति की प्रलिफ, ये प है। अधिक्तम लोगा को प्रसन्न रखना मोर पुद भी मान द करन का दूसरा नाम सरल शब्दो में राजनीति भी हो सकता है। लामो, एक गिलास पोर तयार पर दो। लाईये । माग बढे दिलचस्प हैं । सरन शन मे समझा दिया आपने तो। ग्लाम को ले तजी से गले से तीच उतार दिया है उ होने । लो, एक और । तुम्हारे हाथो से तो लगता है जो ही नहीं भरेगा मेरा । सबसे पहिले तो कल ही पार्टी की मेम्बर बन जाप्रो। फिर हाईकमान स बात कर तुम्हारे टिकट का दतजाम भी करवा देता हूँ। पर पाप तो जानते हैं चुनावो मे कितना खच होता है । तुम बडी भोली हो, अरे, यह मिल वाला उठायेगा तुम्हारे मारे खच । चि ता मत करो। हम भी तो बैटे है । मुझे लगा था नौच तीलालजी अपन नियन्त्रण म नही है। तुम तो चुनाव लडन की ठान लो। फिर देखो सीधा देविनेट मिनिस्टर बना डालेंगे तुमको। नाप तो बातो से आकाश म उडाये ल जा रह है मुझे। इधर मामो मेरे पास । प्राकाश मे उडा रह है तुमको। हम जो कह दगें पूरा कर ही दम लेन है । वीरनगर की साट हमारी पार्टी के नाम लिखी हुई रामयो। वही स लडवा देते हैं। तुम भी क्या याद करोगी। पहने नोच दीलाल बाज भी भानि भपट पटे थे मुझ पर । मै समय भी नहीं पाई थी उनकी इच्छा । विरोध स्वर मे बोली थी- मापको क्या हो गया है। कुछ भी तो नहीं। राजनीति म सफल होने के कुछ जम्री तरोने ममना रहा हूँ। छोटी छोटी बातें हैं जिनसे किसी को भी तुम चुनरिया मान सक्ती हो। हमार क्षेत्र में सहनशीलता, निष्ठा होना प्राव । माप बहुत परेशान कर रह हैं । हरिदाबू से अधिय तो नही ना । उगम Bafr. * 11, मटिया गये हैं। हरिबाबू सब सुना रह थे मिट गया। उह सुनकर ही तुम्हार लिय त पागनी क नोच दी बाबू ने हाथ बढा कमरे की लाईट युभा दी थी और मैंने उनके लगातार चलते हाया यो पूर शरीर पर महसूस किया था । हफ्त से वाले ये--- साहिला । मजार मत समझना । हमने कह दिया है तो पत्थर की लकीर मान लो। तुम्ह चुनाव जिताना, फिर मत्री बनाना मरा काम है। नीच दोजी, क्तिने चालार हैं आप । अभी भी तुम चालाप हो मान रही हो हमको। तुमसे पहली बार मिर हमे लगा तुमम वे सारे गुण हैं जिनसे लोग युश होते हैं । नौचदीजी ने अधेरे में टटोलत बिजली जला दी थी। मेरे बाल सवारत बोले- लो, जानो। पास वाले कमर म से दोना को बुला लामा । पता नहीं क्या कर रह हैं वहा बैठे। पास कमरे के दरवाजे को खोलकर देखा व वैठे बातें कर रह थे । मर आवाज देने पर चले पाये थे। मरे पास स निकलते हरिबाबू न मुझे ध्यान स देखा और मुस्कराते नौच दोजी के पास चले गये । जी। मै तैयार हूँ। यही आशा थी मुझको । हरिबाबू साहिता को क्ल ही मेम्बर बनवा दो पार्टी कार्यालय में जाकर । चलो भोजन कर लो। पास के भोजनकक्ष मे जा बैठे थे। मैंने तीनो के लिये भोजन की प्लेटस तैयार कर दी उ ह । तीनो सामा य स्थिति में नहीं थे। हरिबाबू । हमारा विचार गलत तो नहीं लगा ना पापको। कोई गलत बात हो तो बता देना । विचार-विमश, स्वस्थ आलोचना की कद्र करता नौच दोलालजी हमसे क्या छिपा आपका। तुम समझदार हो मैं जानता हू । साहिलाजी को चुनाव लड लेने दो। फिर आप और मैं मिलकर दस रामबलियो से निपट लेंगे हम । जोरदार ठहाका मार हसे थे वे लोग। भोजन समाप्ति के बाद नीच दोजी बाहर कार तक छोड़ने प्राय थे हमको। पूरी शालीनता के साथ दोनो हाथ जोडकर विदा किया था। 44

बारह
सुबह होने वाली है । अभी हला अधेरा फैला है चारा पोर । टेलीफोन
को घण्टी बजती है । फोन उठाती हूँ।
कौन बोल रह है इननी सुबह ।
साहिलाजी बोल रही हैं आप ।
जी । बहिये ।
मैं वर्मा, हरियावजी का निजी सचिव बोल रहा हूँ। मत्रीजी ने कहा-
वाया है नौ बज तयार रह । पार्टी प्रापिस जाना है अापको।
धर्माजी । दिन में नहीं जा सकते क्या ।
मत्रीजी पूरे दिन व्यस्त है अपने कायक्रमा मे । सो पार्टी प्राफिस नौ बजे
जाने को वह रह है। आपकी सदस्यता पा फाम मगवा लिया था। भरकर
देना है उसे ।
ठीक है। मैं समय पर तैयार हो जाऊँगो । मत्रीजी से कहे मुझे लेते
निकल जावें ।
जी, पह दूगा।
फोन रख सोचतो हू । अजीब स्थिति है जो कार्य कर रही हूं उसी से
थक जाती
हू, समय नहीं मिलता यह नया काम और लगा दिया नौच दीजी
ने। फिर भी बिस्तर से बाहर प्रा तयारी म लग जाती है। एक घण्टा तो
कम से कम तग ही जायेगा।
सारे काम को निबटा बाथरूम में घुसतो ह । अचानक घण्टो वाती है
वोन है भाई।
दरवाजा खोनती ह । हरिवायू बिल्कुन तरोगामा, माल fram,
कीमती चश्मे से भोक रह है मुझे।
प्राईये । आप दो मिनिट बैठे। अखबार राई ।
और सारे कामो को पूरा कर लिया है। प्रागय ।

- हम मत्री जो ठहरे। अब तुम्ह भो मनो बनना है । आदता में सुधार लाप्रो । जल्दी उठना जरूरी है । कई बार तो हम मुवह पाच-छ बजे तक तो दौरे पर पिल जाते है । तुम तयारी करो देर हो जायेगी। जल्दी से स्नान कर बाथरूम से निपल पाई है। मत्रीजी बैठे अखबार पढते चाय पी रह है। मेरी ओर दपते रहते हैं- मुश्किल से अढाई महीने बचे हैं चुनाव होने में। नौच दीजो भी पक्के पारखी हैं । एक नजर मे जान लिया क्तिनी योग्य हो तुम । भाग्यशाली हो। वरना लोग एडियां घसीटते डर हो जात ह पार्टी टिस्ट के निये और नहीं मिलता उनको। मब आपकी कृपा है हरिबाबू । हरिकृपा ही कहो। हम ता खुद हरि के भक्त है। ईश्वर की इच्छा के बिना एक पत्ता भी नहीं हिल सकता। लो जल्दी करो। साडी बाघ रही तैयार हूँ मैं में कोई सहायता वर तुम्हारी। रहने दें। माप तो वैसे ही वृपा बनाय रखें। कृपा का का काम तुम्हारा है। पात्रो, चलें प्रा। हो । चलें। दोनों डाईगम से बाहर निम्न मात हैं । इला । जा रही हूँ मैं । शाम तर ही आ पाऊगी। घर का ध्यान रखना। भो । ठीक है। मानो बठो । पार्टी पापिम चलेंग। पार तजी से चल दी है। हरियार बैठे पीछ छूटते सरह मायागमा यो एण्टा दर जा रट हैं। उनका एक हाय मेरी गोद म है। मरी पोर देते पहते हैं- मिल गो नौपरी तुम्हारे पत्तित्व के मामने बहन घाटी है। पारा ममय गया तुमन । गर । योग बात है। देर प्राय समन-मापद ! नौररी परने या चैन पोर हो होते हैं । तुम्हारे जादा पारिनार यहाँ स यही । तक होना चाहिये। श्रेयासजो को मुख्यमत्रीजी को सारी पोजना समभा दो थी उस दिन । उनस कोई बात हुई । हा। प्रसन्न थे। क्यो नहीं होम । वे जानते है हमारी योजना यो। उसके मीठे फलो की कल्पना चुटकी म बर डालते है । पूर तीस लाख का खर्चा है चुनाव का । हसत हसते ही मान गये। वहा एक बार ही तो लगाना है। बाद में तो कई धं यास वाबू थैलियां लेकर घूमते दिखाई देग । हसी-बातचीत म कार पार्टी कार्यालय के बाहर जा खड़ी हुई। दोनो चाहर निकल जाते है। चलो । खजाचीजो भी यही हैं नमस्कार हरिबाबू । और राधावल्लभजी से चल रहा है । प्राज यही रुक गये थे क्या । आजाल यही रहता हूँ। घर-बार छोड दिया है। पार्टी प्रापिस से ती सौ रूपये महीना मिल जाता है । बच्च बड़े हो गये उनकी चिता से मुक्त हू । अच्छा है। खूब काम करो। बठो माहिनाजी। राधारल्लभजी पार्टी प्रॉफिस के प्रमुख हैं । यहा का सारा काम इही के जिम्म है । जब से मैं पार्टी भा सदस्य बना हूँ इह इसी हालत मे दषा है यहाँ । पुराने निष्ठावान लोगो में से हैं। कैसा भी परिवतन नहीं इनमे । हमारा क्या है हरियावू । आपको याद है पार्टी मे मै ही लाया था आपको। उन दिना तो समाजवादिया का भूत चढा हुना था माप पर । देखत-देखते इतनी तरक्की कर डालो प्रापते । हमारे तीन नम्बर में लड़के की नौकरी के लिये कहा या प्रापको मैने । कहा तो था । साहिलाजी का फाम ल लो। इनवा चुनाव पूरा कर लें। फिर पापका काम कर देंगे। इस बार ध्यान रहेगा। हरियाबू । यही चपरासी हो लगवा देने उसको। प्रापका लडका चपरासी की नौकरी करगा शर्मिदा कर रह है मुझे प्राप। मोर क्या करेगा। पढ तो पाया नहीं वह । मैंने सारा समय पार्टी की सेवा म लगा दिया । बच्चे, पली मव भला बुरा कहते हैं, मैं क्या कर सकता हू । सच्चे कायरता की भूमिका रही है मेरी ।

घबराईये मत । मर हो जायेगा । अच्छा लगे प्रव। माप तो साहिलाजी को प्रागीर्वाद दें। जनसेवा के क्षेत्र म मा रही हैं यह । हमारे प्राशीवाद से क्या होगा। पार्टी में अपर बैठे लोगो को वाष्टि चाहिये। पहले पाप धुजुर्गों का माशीर्वाद पाया है। मरी पूरी शुभवामनाएँ हैं। अब चरेंग । मुझे कई काम परा हैं । मैं और हरिबाबू कार मे मा बैठते है । सनिवालय चलेंगे। राधावरलभ । पुराने स्वतन्त्रता सेनानी रहे हैं। सुभाषवाबू के साथ वर्मा, रगून वलपत्ता मे नई साल रर । पर समय के साथ खुद को बदल नही पाय । यही कारण है जहाँ थे वही वैट है पाज । पार्टी की ओर से पहिले रेट सो स्पये मिलते थे। नौचदजी से लड-गडर मैंने तीन सौ रुपये करा दिय । पार्टी के पास भी पैसा कहां है। पार्टी प्रॉफ्सि की पुताई जमा छोटा काम वीस-पच्चीस वर्षों स नहीं हुआ। साल म एकाध बार यहा सब इक्टठे होत है। मब अपनी-अपनी समस्यामा न्यक्तिगत स्वार्थी की लडाई लडर चले जाते हैं। किमी को इसको दुदशा का ध्यान नहीं । गये बार पार्टी का झण्डा पहराया जाना था। कार्यालय मे पटा पुराना झण्डा पडा था। मैंने उसी समय नया मगवा कर दिया । पापो ऊपर चरें। सचिवालय को लिपट से चढ हरिबाबू के कार्यालय म घुसते हैं । वठो। साहिला । यहा से सरकार चलाते हैं हम । मुख्यमत्रीजी यश नम्बर मिलामो जरा। मुख्यमत्रीजो हैं घर पर। क्षमा कीजिये, आप हो बोल रह हैं। हरिबाबू वात करेंगे। नमस्कार, सरकार । साहिलाजी का पाम भरपर भी सचिवालय पहुंचे ही हैं। हा ल लू गा । क्य भेजना है। अच्छा पाप हो जा रह है। शाम तर घर भिजवा दूगा। अदा जी। पोन ब” कर देन है । तुम्हारा चायोटा भेजना है हाईकमान को। यही समझ नहीं पा रहा पार्टी के प्रिय क्य से काम पर रही हो, क्या लिखें। मर। रेंग बुध और प्रान क्या कायम है तुम्हारा। + 48 -- मुझे मिल जाना या। स्टाफ की मीटिंग है। श्रेयाम बाबू भी आ रह हैं उसम । चाहो तो वीरनगर चलो हमारे साथ । तुम्हार भावी निर्वाचन क्षेत्र मे जा रहे हैं। आप ही हो पाएँ अभी तो। फिर भी चलू गी। नीच दीजी के साथ कोई कायम बनाएंगे वहा का। वह अच्छा रहेगा। वहा के मायकर्ताग्रो नागरिको से उस रूप मे परिचय होगा तो ज्यादा प्रभाव- शाली रहेगा। आप जैमा उचित समझे। मिन वाली मीटिंग में जाना है अभी। ग्यारह बज रहे हैं। वह सब करती रहो। पर लगातार सम्पक बनाये रखो। पता नहीं कर क्या काम हो जाये तुमसे। मेरे, नौच दीजी के साथ तो दिल्ली पाना-जाना बना रहेगा तुम्हारा। आपसे दूर और अलग कहाँ हू । चलू गो में। शाम को मिल रही हो ना। फोन पर दूगी प्रापको। ठीक है। अभी चलो तुम ।

तेरह
दा घण्ट म प्राफिम मे वठी हु । गया पूग सप्ताह एमा वाता है की पाय
परन सा मन हा नहीं बना पा रही है। मिल मम्ब भी तो विरोप वाय है मा
नहीं। कुछ पाईर यी घर से ही पूरी र भिजवा दी थी। य म नौद ।
जो म मिना ह निपा की हा 7 क्या - Tया नहीं का की हा तुरी
पौन । प्राग्रा माणिव ।
माहिाना ग चल रहा है।
यस या गे। बुध विशेष नहीं। उ7 का स्थिति है ।
।
दुम ना तो तोहा। एप और अं यांगजी हैं और उपर नौ च ।।1
गा। समझ नही पा रही म ।
नामा र परेशान र यार। उममे क्या परमाना है। तर
महाा 41 भाग 1- है वग। पीरनगर तो सुरात स्थान है और फिर उस
17 12 । पप तो जोगी। गारी ग्रापिर सवाया थे याने
ग्रा और पूरी तर तयार पासा र म जी171
PHATTजा 7 R गौराको वामौत तो मामा
f-777-17 महिमा म हो रहा ।
7

नमस्कार साहब । शेअस । अपना चालीस परसेंट का लक्ष्य तो पूरा हो चुका है। आप कह तो पांव परसेंट और दे दें बाजार म । हाँ। हाँ समझ गया। नहीं देंगे। मिल पा रह है । माईये । यही हूँ मैं । प्रापका काम जोरदार है। चानीस परसेंट शेप्रस बिक भी गये । सारी याजना श्रेयासजी वो है । वाफी मगवामी । अब तो बैठना होगा। याप तो वेहिचक लड लाजिये चुनाव । सब देखा जायेगा। दयू गी । अभी कुछ मोच नहीं पा रही मैं । यहा रख दो। ता माणिक चाय लें। देखेंगे फिर। बाहर कार स्त्री की आवाज पातो है । ग्राईय श्रेयासजी। साहिला बधाई हो । प्रभी तुम्हारे में बात करने के बाद सी० एम० साहब या फोन पाया। वीरनगर से तुम्हारे नाम का निणय कर लिया है पार्टी हाईकमान ने। हो गया निणय । वधाई हो साहिलाजी । प्रदेश की भावी मत्री महोदया । मैंने सी० एम० साहब से सुबह ही बात को थी। तव तो कुछ नहीं कहा उन्होने । अभी पद्रह मिनिट पहिले उनके सचिव ने बताया था उह । वायरस म देश था दिल्ली से । तब ही नोच दीलालजी ने मुझे फोन कर दिया। वरत खुश थे वे। खुशी की बात तो है ही । जिगरे नि उहोन पहा काम हो गया । माणिक । ज्यादा खुश तो वे इस बात से है कि रामवलि पाण्य के आदमी को मात दे दो उहोने । रामसिनो प द्रह वोग टिना से अपने लोगा का लेकर पड़े हुए थे देहली में । यहा भी मात दे दी पा-यजी को। रामवलिजी किसके टिपिट के निय गय ५। प्रय क्या बताऊ उनके लिये । पुरयात तस्वर शरसेन की वकाता पर रह थे वे । उसो टिक्टि दिला देते तो चांदो के साथ सी० एम० की जान को बने रहते हमेशा के तिये । इसीलिय नीच दाजी ज्यादा पश। यह तो सब हो गया। पर साहिलाजी तो मानस वना ही नहीं पाई है इसके लिये।

. ऐमा कुछ नहीं । इनसे पूछार ही दिया गया है सर । श्रेयासजी । भागदौड का जीवन पसाद नहीं मुझे। माथि प स तो पोई तकलीफ है नहीं मुझे। माप हो देखिये कितनी जिम्मेदारी का पाग है। प्रार्थिय की कोई बात नहीं। समाज में, लोगो मे प्रापका यश भी तो बहना चाहिये । पापको जो अवसर मिला है उसका लाभ उठाना चाहिये । सी० एम०, हरिबाबू को सलाह पर मैंने तुम्हारे चुनाव या मारा घच उठाने का मोचा है। तीस लाख रूपये सच हो जाये। सोचता हू तुम सरकार म रहोगो तो हमारा प्रतिनिधित्व अपने-आप हो जायेगा। तुम्हारी सहमति, मेर द्वारा खच की जिम्मेदारी से लेने पर ही तो पूरा जोर लगाकर नौच टीजी टिकिट को व्यवस्था पर पाए हैं। अब उनसे थोग भी कुछ कहा तो बुरा मान जायेंगे। व्यवहार में भी अच्छा नहीं लगता। खैर, भाप जैमा चाहगे होगा। मेर चाहन मात्र से ही नही। तुम खुद सोचो कोई गलत काम तो हो नही रहा । हाईकमान को सी० एम० अब दूसरे उम्मीदवार के लिय कह यह भी उनकी प्रतिष्ठा के खिलाफ होगा। भव कुछ नही मोचो। मत्री बनना है तुम्ह यही लक्ष्य रखो जीवन का। धे यासजी पाप बडी जिम्मेदारी डाल रह हैं मुश पर। देवो क्या कर पानी हम। क्तिना समयाया तुम्हे बुद्ध नहीं करना । चलो, नौच दोजी से मिल प्रात हैं। पहल माल म र लो मोठी पर हैं कि नहीं। माणिक' । पूछो जरा। माणिक फोन मिलाते हैं। हता। मुख्यमत्रीजी हैं । कहाँ, मचिवालय गये है । ठीक है। सचिवावलय गये हैं। पलो, वही मित्र लेंगे । माणिव' तुम भी चलो। मार हो मार्य। मुझे उद्योग भवन पाईर दने जाना था। मशीनो की प्रायात के कागजात दिल्ली प्रॉफ्मि को भिजवान थे। सारी प्रौपचारिषताएँ पूरा पसरा ली यौँ । दामहीन पम से कम पार लग जायेंगे पभा तो। 52

तुम उद्योग भवन जा प्राओ। हम दोना सी० एम० से मिल आत है ।
उनका मार्गदर्शन भी तो लेना है । अब आगे के लिये क्या और कैसे करना है।
वार्यालय से बाहर निकल मात हैं।
अच्छा माणिक शाम को फोन पर बात करना मुझसे ।
जी अवश्य ।
मैं चलता हूँ।
४
53

रामवलि पाय जिसके टिकट के लिये गये थे उसके समथक लोगो की भाड है । दो ती दिन राजधानी मे रहगे यह लोग । फिर अपन गावा का लोट जायेगे। मौज मस्ती के लिये प्राय हुए हैं। साहिला का टिकट पक्का हो गया । प्रागे के लिये क्या प्रादेश हैं। तयारी करे आप । साहिलाजी के कुछ अच्छे फोटोज तैयार करवाये । चार प्रेस कान्फ्रेंस कर डालें। प्राज साहिला का नाम, वीरनगर के प्रत्यागी के रूप में परिचर पार्टी की पोर से समाचार पत्रो म भेज रहे है हम । बहुत अच्छा है। जैसा प्रापका पादेश । धे यामजी । उधर मर मचिव को यह कि हरियातू को बुलवा के। कुछ दर पाप उधर ही बढ़ें। ठीक है। हरिया के लिये कह देता हू उ है । श्रेयासजी हमार वीर से उठ वाहर चले गय हैं। अपनी धूमने वाली कुर्सी पर लापरवाही से बांहें पसारते, मुस्कराते नौव दीजी बोल- देखो साहिला तुम्हारा टिकट पक्का करा दिया हमने । अव चुनाव मे जुट जानो। ज्यादा समय इन दिनो चुनाव, उसकी रणनीति, अपने क्षेत्र के कायरानो, लोगो से मिलने में लगायो। श्रेयाम बाबू की वैसाखिया को छोड दो। यह लोग तो व्यवसायी वग के है। जब तक तुमसे, सरकार म इन का काम निकलता रहेगा मक्खिया की तरह मण्डराते रहेग । इन लोगो की अधिक पिता नही करनी चाहिये। मिल की मैनेजरो का काम भी ओड दो। गज- नीति मौर नौकरो दोनो काम साथ नहीं चल सरते । अभी चुनाव हो जाएँ। बाद म घाड दूंगी। चुनाव स क्या होता है। अच्छा नहीं लगगा प्रभा । श्रेयामना भी गलत साधन लगेग मरे लिये। र । मर रहने का मतलब है तुम्हारा सारा ध्यान चना पर हो रहना पाहिय वासी सारे याम गौ मातबर चलो और लगातार मर हरिवा साथ मापक बनाये रखो। पोरनार चुनाव का हरिबाबू को प्रभारी बनाया है। मैंने, तुम दाना म मापसी समझ भी है, दूसरा हरिवाबू यहा के मार्ग- पर्तामों को भी प्रभार से जानते भी है । तुम्हार चुनाव सत्र म मुस्लिम पर सातापो से सुना ज्यादा है। वस मत ताम्रा की हमारी पार्टी ३ प्रति निष्ठा है । दो-एक वार में भी ना जाऊंगा। वहां सारा काम तुम्ह ही करना होगा। कुछ दिना वीरनगर म हो रहो तो ज्यादा प्रच्छा रहरा। सी० एम० साहय । अधिप दिना ता रहना कठिन होगा मेरे लिये। क्या इसमे क्या परशानी है। मेरी लडकी इला भी बड़ी हो गई है। प्रधिव' दिना अकेली नहीं छोड सक्ती उसे। तुम्हारे लडकी भी है । मुझे नहीं मालूम । तुम्हार पति क्या करत हैं। रहने दीजिये इस वात को। वह एक अलग कहानी है जिसके लिये अब कुछ भी नही कहना चाहती। जो बीत गई सो वात गइ ही मान ले प्राप । जैसा तुम ठीक समझा करो। क्तिनी उम्र की है वह । सोलह-मत्रह साल की हुई है अभी । बच्ची ही है अभी तो। हा वह तो है फिर भी मुझे बडी चि ता रहती है उसको । स्वाभाविक है। मा जो हो उसको। में तो समझता था अविवाहित हो हो तुम । इतनी बडी लडकी को मा कही से भी नही लगती हो। खूब ताजा हो अभी तो तुम एकदम गुलाव की तरह । मजाक खूव करते है आप। बिल्कुल नहीं। तुम्हारे गुलाबो को छूकर, उसकी खुशबू को मूघकर ही तो कह रहा हू मै । उस दिन वो पागल ही कर दिया तुमने । उस दिन का नशा भी उतरा नहीं है। जादू ही कर टाला है तुमने । या ही प्रशसा कर रहे हैं आप तो। एसा तो कुछ भी नही है मरे में । यही ता विशेषता है तुम्हारी। तुम्ह अपने रूप-लावण्य का ही पता नहीं है। अजीव सादगी है तुम्हारी भी। जावश्यक्ता से अधिव मेहरवान हो रहे हैं। प्रच्छे सहयोगियो के साथ एसा सोचना गलत भी नहीं। इस सब में तुम्हारे गुणो की प्रशसा ही अधिक है। हां, याद प्राया प्राज शाम पार्टी के दफ्तर म वीरनगर के कायर्तामा को एक मीटिंग रखी है। उसमे तुम्ह पाना है। सबसे परिचय कर लो। हरिबाबू न बुलवा लिया था उह । 56

कितनी बजे पहुंचना है वहा ।
सात वजे के पासपास पहुच जाना । मैं आठ तक ही पहुच पाऊगा । क्यो
नि शाम को सात बजे राज्यपाल जी के यहा जरूरी बातचीत के लिये जाना
है । हरिबाबू वहाँ होगे ही। कोई असुविधा नहीं होगी तुम्ह । जमुना भाई के
खादो भण्डार से कुछ नई सादिया ले लना । अव जीवन का सारा तरीका
बदलना होगा तुम्ह ।
वह सब कर लगी म ।
फिर मुझे माज्ञा हो अभी। घर पर इना को तेज बुखार है। वह कह
रही थी दिन म उसके साथ हो रहू मैं। शाम को पार्टी दफ्तर पहुच ही
जाऊगी।
खुलकर काम करो। तुम्हारे सामने पर्द वडी जिम्मेदारिया हैं। मेरी
शुभकामनाएँ। इला का ध्यान रखना।
अच्छा नमस्कार।
तुम घर का काम देखो।

पन्द्रह प्राज पार्टी कार्यालय में कायाप्रो, हरिया के खास लोगो, प्रसतुष्ट विधायको का मजमा लगा हुआ है। सारे लोग ऊंनी आवाज में बहस कर रहे है । राधावल्लभजी, पार्टी कार्यालय के प्रभारी सीढियो के पास मुडे पर बैठ अखबार पढने में व्यस्त है । उह पास के वडे कमरे मे हो रही चर्चाप्रो का कैसा भी ध्यान नहीं है और न ही उनको कैसी भी रुचि है उसमे । तटस्थ भाव को सरलता स उनके चेहरे पर पढा जा सस्ता है। हमारी गाडी पोच में जा रुक्ती है। आईये । साहिलाजी। श्रेयासजी, हरिबाबू, मुझे देख वहा कायकर्तामा म उत्सुकता होती है । जाईये । श्रेयासजी। और कसे हाल है भाई कब प्राये आप लोग । करीव चार बजे पहुच गये थे। मुग्ह ग्यारह बज तो फोन किया था थापने। करीम भाई, रघुनाथ चाचा, मोहसिन भाई सर आ गये हैं ना । मोहसिन भाई वहा नही थे । बाकी सर प्रागये है । हरिबाबू मापकी एक प्रावाज पर पूरा वीरनगर यहा आ सस्ता है। आपसे मिलिये । साहिलाजी है माप । वीरनगर प्रापके क्षेत्र की प्रतिनिधि होगी यह । आम चुनाव मे जिता दीजिय द हे। बाकी मिनिस्टर बनाने की जिम्मेदारी मुझ पर छोड दें। आपके क्षत्र से पार्टी के कई लोग आय चले गये म त्री तो कोई वन नहीं पाया। इस बार मारक क्षत्र का हो मिनिस्टर बनेगा। हरिपावू । माईय मदर चलकर बैठत हैं। सारे लोग मदर जा वठत हैं। मरे पाम हरियावू वैठते हैं। हरिबा हाय र दगार से सवका युग होने को कहत हैं। पिर स्वय पड़े होकर कहत हैं। 58 प्रिय साथिया, श्राप लोगो म पार्टी के प्रति जो निष्टा मोर उत्साह है उसकी इज्जत परता हू मैं । मेरे छोटे से स देश पर चलकर यहाँ पहुच, आप पर गव है मुने । मापके क्षत्र से चुनाव के लिये साहिलाजी को टिपिट दिया गया है । इहोन समाज सेवा के क्षेत्र म जितने काम किये है उनको शब्दा म नहीं रहा जा सकता । इस समय प्रदेश के बडे कपडा मिल श्रेयास मूटिंग्स की मनेजर हैं यह । माप लगातार सी० एम० साहब से जनरावा क क्षत्र म पान क लिय कहती रही है। मुख्यमत्रीजी ने इनको लगन, निष्ठा से प्रभावित हार प्रयास किया और टिस्टि दिलाया। प्रापसे मरी प्राथना है भाने वान चुनाव मे इह भारी बहुमत से जिना कर विधानसभा में भेजें। मापक क्षेत्र में साहिलाजी चाहती हैं अधिक से अधिक उद्योग लगाये जायें जिससे प्रापमा वीरनगर प्रौद्योगिक प्रान्ति की दौड़ में पीछे नहीं रह । तालियो की गडगडाहट के बीच हरिबाबू मुझे दो शब्द रहने को कहते हैं । हरियाबू मापने कह दिया बहुत है। मैं क्या कहू अप। नही । नहा । पाप भी कुछ तो बोलिये । अपने ही स्थान पर खड़ी होती है। कुछ भी कहन जैसा रियति म नहीं हूँ। फिर भी हिम्मत कर बहती हू- प्रिय भाईया, प्रादरणीय हरिशराबूजी, वैसे राजनीति मेरा क्षेत्र नहीं है लेकिन समाज के कमजोर वर्ग की समस्यामा यो जितना जल्दी सुल नाया जाये मेरी हादिक इच्छा रहती है । मुझे लगता है इस काम के लिये जब तक हम सरकार म शामिल नहीं होते उसका हल नहीं निकाला जा सकता। सापके क्षेत्र में पानी की कोई समस्या नहीं है। राज्य सरकार ने आपके वीरनगर म विसी प्रकार के उद्योग लगान के लिये कभी नहीं सोचा । मै चाहती हू वीरनगर मा त का बड़ा प्रौद्योगिक केन्द्र बन । श्रेयास सूटिंग्स के मालिक श्रेयास बाबू यही बैठे है मैं उनसे प्राथना करती हूं कि कवल्स का बहुत बड़ा पारखाना जो शुरू मरने जा रहे हैं उसे वीरनगर मे ही लगायें जिससे वहा के लोगा को अधिक से अधिक रोजगार मुहैया कराया जाकर जनक जीवन हम खुशहाली ला सकें। वालियो की गडगडाहट होती है। थोडा रुस कर अपनी बात जारी रखती - 59 मुख्यमन्त्रीजी, हरियावूजी चाहते हैं मैं प्रापके क्षत्र स चुनाव लडू । इन पर मुझे हार्दिक प्रसन्नता है। मावश्यकता है आप, वीरनगर के सभी नागरिक जो हमारी पार्टी को हमेशा सहयोग देते प्राये है वसा हो प्रेम बनाये रखें और पार्टी पी अच्छी छवि मापने वना रखी है उसम चार चाद लगाए । मापको इस समय मैं इतना ही कहना चाहती है। मापके साथ हमेशा मिलना-जुलना वना रहेगा । पापका सयोग, आशीर्वाद मिलता रहेगा। मरा विश्वास है। धन्यवाद। मेरे भापरण की समाप्ति पर फिर जारदार तालियां बजाई गई। उप स्थित लोग आपस म मेरे भाषण की प्रशंसा कर रहे थे। वीरनगर के पार्टी मुखिया न खडे होकर मुझे हरिबाबू को सहयोग का आश्वासन दिया। सब लोगा के लिये चाय-नाश्ते की व्यवस्था थी। उसके बाद हम तीनो उटार वाहर निकल जाते हैं । किसी ने मुझे चलते रोस्कर पूछा- साहिलाजी वीरनगर पव पधार रही हैं। यह तो पाप बताईये क्व वुला रहे हैं आप। हरिबाबू जी, साहिलाजी, को लेकर वीरनगर कब मा रह है। पाप कहते हैं तो मैं मा जाऊँगा। पर साहिलाजी को आप खुद लिया ले जाएँ वह अच्छा रहेगा। आपके क्षेत्र की उम्मीदवार हैं आपका पूरा अधिकार है उन पर। वह तो सही कह रहे हैं पाप। पर चुनाव अभियान के मुहत पर माना ही होगा। मुहत पर तो भाई रघुनाथजी मुख्यमत्रीजी भी पायेंगे । वह चिता नहीं करें प्राप। अच्छा अभी हम लोग चलेंगे। सी० एम० साहब के जाना है । वहा भी एक मीटिंग रखी है। वीरनगर जल्दी ही पायेंगे। हरिबाबू । नमस्कार। मच्छा, चलते है। ४ सोलह हमारी कार सुख्यमत्रीजी के निवास पर जा रूकती। सुरक्षा कमचारियो को कह कर तीना मेहमान पक्ष म जा बठते है। हरिवाबू हमारे बीच स उठ कर अदर चले जाते है। कुछ समय याद नौच दीजी, हरिबाबू लौटते है । मैं और श्रेयासजी उनके सम्मान में खड़े हो जाते हैं। वैठिये, पाप लोग । क्षमा करना राज्यपालजी के यहा अधिक समय लग गया इसलिए पार्टी दफ्तर नही पा सका। वीरनगर के लोगो से भाप लोगो की बातचीत हो गई। जी हो । वहा के लोग भच्छे लगे। उनमे पार्टी से लिये पूरी निष्ठा है। होगी क्यो नही । हरिबाबू के पढ़ाये हुए लोग है सारे। यह अक्सर वहां जात भी रहते हैं। श्रेयासजी आपके काम की प्रगति कसी है। अच्छी है। मशीना के प्राडस दे दिये है। बाजार में जारी किये सारे शेप्रस भी बिक गये। जमीन का मामला अभी पूरा नहीं हुआ है । उस क्षेत्र के लोग विरोध कर रहे हैं कि वहा फनटरी नही लगाइ जाये। हा मेरे पास भी बडी शिकायतें भाई हैं । पर मैं भी यो ही देख रहा था। हरिबाबू इनकी जमीन वालो समस्या को भी देखिय जरा । वह तो कठिन लगता है मुझे । श्रेयासजी एक काम क्यो नही करें माप । प्रापका केबल्स का कारखाना वीरनगर में ही क्यो नही लगा लेते। वहा सब तरह की सुविधाएँ हैं। राज्य सरकार वहाँ कारखाना लगाने पर अनुदान भी देगी प्रापको। वह तो सही है । लेकिन दूर पड जायेगा। शहर जैसी सुविधाएँ तो है नहीं वहीं । मापके कारखाने के लोग ही तो रहगे। सी० एम० साहब के मार्गीर्वाद से कोडिया में जमीन भी मिल जायेगी वहाँ पर। हरिबाबू पापकी बात से सहमत हूँ मैं। उस क्षेत्र के मोद्योगिक विकास के लिये जरूरी भी है । माप तो भेयांसजी वही का मानस बना लें। सरकार 61 की प्रोर से जो भी सहायता बन पडेगी पूरी करवायेंगे। इस बात को प्रार साहिलाजी के चुनाव को ध्यान म रयपर भी सोचें । जमीन सरकार की ओर से ही दिलवा देग प्राप। वोलिये पौर क्या चाहते हैं हमस प्राप। पापा मादेश है। पर मुझे कुछ समझ नहीं पा रहा। समझ म नही ग्राने जसी काई बात नहीं है। साहिलाजो के चुनाव क्षत्र के विकास के लिये इतना तो पाप कर ही सक्त है। पार्टी कार्यालय की मीटिंग में साहिलाजी न मापको सम्बोधित करते हुए नये कारखान को वहा लगाने की घोपणा भी कर दी थी। मुझे स्वीकार है। कोई परशानियां प्राय तो आपको ही सभालनी होगी। माप पिसा प्रकार की चिता नही करें। हरिदाबू पाप जितना जर सम्भव हो इनकी प्रावश्यकतानुमार जमीन की व्यवस्था करा दें। जी। मैं देख लू गा। हरिबाबू । प्रापपा विभाग के अधिकारी पूरा सहयोग नहीं कर रह । धेय रखिये थोडा। वहां के मनेजिंग डायरेक्टर को बदलने के लिए सी० एम० साहब स कह भी चुका हू । जसे ही उसका तबादला होगा सारी समस्याएं हल हो जायेंगी। आपने मुझे कई चितामो से मुक्त कर दिया है। वह हमारा क्त्त य है। प्रदेश की प्रगति मे आप उद्योगपतियो का सहयोग भी तो हम चाहते है। यही क्या कम है हमारी बात रखर माप हमारा सम्मान ही बढा देते हैं। सी० एम० साहब चीरनगर क्व चलने का सोचा है प्रापन । साहिलाजी के चुनाव अभियान का मुहत भी करना है । चले चलेंगे। प्राय श्रेयासजी पहल तैयारियों तो कर लें। आप जब सकत परेग चल चलेंग। साहिलाजी के चित्र के साथ फोटोज वाले पास्टस भी मान क्ल म पर पान वाले हैं। बड वनस बनाने वाले टकेदार को वह दिया है। वह सोय पोरनगर मोहसिनजी के यहा पहुचवा दगा। प्रेस मे इनका जीवन परिचय, पार्टो म की गई सेवाग्रो के एक-एक पेज के दिनापन सभी समाचार पत्रा को भेज जा चुके है। पूर समय राज प्रापित किये जायेंग। साहिलाजी प्राप द्वारा की गई प्रसवास समाचार देश लिय ये मन । अच्छा बोली हैं 62 पाप। कुछ और खुलार, पूरे प्रारमविश्वास के माथ अपनी बात कहे। सारे पत्रो ने अच्छा कवरज दिया है। कल देहनी से पार्टी प्रभारी महामोजी भी पा रहे हैं । उनसे भी साहिलाजी को मिलवाना है। मेरे पर उनका पूरा स्नेह है। हम दो कोई नो साल तक स्वतत्रता प्रादोलन के समय जेल मे साथ- साथ ही ये । उस प्रेम को माज भी वैसा ही बनाये हुए हैं। नोच दीवाजी ग्रापका प्रताप कहा नहीं फैला है। अच्छी तरह मालूम है हम। पी० एम० हाऊस में ज्यादातर लोग प्रापको नजदीक से जानते हैं इमसे बड़ी बात हो भी क्या सकती है। अजी, पी० एम० साहब को क्या कह । जव मैं हाईकमान मे था अक्सर बुला लिया करते घण्टो वैठे विमिन राज्यो पर चर्चा किया करते। मेरे पर वडा विश्वास है उनका । गये वार अपने राज्य में मुख्यमन्त्री किसे बनायें समस्या खड़ी हो गई थी। कहने लगे नोच दी वावू पाप ही सभाले मुझे कुछ समझ मे नही पा रहा। मैंने भी हसते-हसते जिम्मेदारी उठा ली। हरिवाबू थकान अनुभव हो रही है। प्रदर जाकर व्यवस्था करो। हम मा हो रहे है। साहिला तुम भी हाथ बटा दो जरा हरिबाबू का। तो श्रेयासजी सब सोच लिया ना मापन। जी हा । सोचना क्या है। पापका पादेश सिर पाखो पर रखकर चलता हू में तो। फिर ऐमा करो एक बार वीरनगर हो पायो हरिवाबू के साप । वहा जमीन प्रादि देख आओ। मुझे खुशी है । सव शुभ ही होगा। मापके काम भी एक मुख्य वात मोर बता दें । मापकी कम्पनी के उत्पादन का बड़ा हिस्सा राज्य सरय रहो खरीद लेगी। हम यह देंग विभिन्न विभागा को। भव तो प्रसन्न हैं पाप । प्रापको मार्केट ढूढ़ने की परेशानी भी नही करनी होगी। पापन ता मर मुह को रात छीन ली। बडे कृपालु हैं प्राप । हमने उद्योग नहीं लगाये तो क्या आपको परेशानियो को तो भली प्रकार समझते हैं हम । माप लोगो को परेशानी, अमुविधामा के लिय हम पहले से हो चिया रहती है। मामो मादर चलें। वही बैठकर साहिलाजी के चुनाव पी रणनीति पर विचार कर लेंगे। हम दोनो उठ मुख्यमत्री के कमरे म बा बैठत हैं। उधर हरिया, साहिला के भोजन-पानी को पूरी व्यवस्था कर डाली है। 63 लो साहिला हमारी मोर से पियो अाज नुम। भाप लीजिय ना। नही। पहले तुम लो। हमारे मन्त्रीमण्डल की भावो मी तुम्ही हो। प्राप लें श्रेयासजी और हरियार यह आप ग्लास ! अाज तो जमकर पियो आप लोग। बहुत प्रसन्न हू आज । माहिला जी की प्रेस का फेस म इहोने धीरनगर क्षेत्र के विकास, वहा के लोगो की स्थिति को सुधारने के लिये जो भी कहा पढकर भला लगा मुझे। इनमे नेतृत्व के सारे गुण हैं । मुझ प्राशा है सार कामा को जिम्मेदारी से पुरा कर लेगी यह । नीच दो वावूजी। बाकी दो निर्वाचन क्षेत्रों के लिये पार्टी हाईकमान कितना पैसा भेज रहा है। हरिवाचू । पार्टी हाईकमान कुछ भी नही दे पायगा। पापको हम ही सारी व्यवस्था करनी होगी। वहाँ कौन सा रूपया रखा हुआ है। पी० एम० हाऊस गये दिना बात हो गई यो मेरी। दो उम्मीदवारो के लिये थोडा बहुत तो कर दिया है मने और भी हो जायेगा। धेय रखिय । भार समय बलवान होता है । उनका भी कुछ तो होगा हो । श्रेयामजी जसे और भी कई लोग है मरी नजर मा चिता मत करो । लो साहिला एक ग्लास मौर बना दो हमारे लिया लाईये । मुझे दे। लाली । क्या ग्लास बनाया है तुमने। मेरे पास मारर बैठ जानो। तुम पास होती हो दिमाग तेजी काम करने लगता है। सार शरीर में बिजली सो दौड जाती है। रहते नोव दी जा मेरो गले म बाहें डाल दो। उ ह हरियाबू, श्रेयासजी या ध्यान ही नहीं रहा। मेरे सकोच को समझत बोल- साहिला । यह दानो हमसे अलग लोग तो हैं नहीं। अपने घर के तोग है । लो एक ग्लास पोर बना दो फिर आज का राशन पूरा हो जायेगा हमारा। मह लीजिये। सापो, सामो। मरे ग्लास पात हाय को दोनों हाथो में दवा पोन र एफ हाय करारना मेरध वक्षस्थत वरसमाये। बोले- 64 रितनी कोमल, चदा सी देह है तुम्हारी । हरिबाबू कभी छूकर तो देखो शरीर को। पूर शरीर म माग लग जायेगी तुम्हारे । साहिला हम तो हिल भी नहीं सकते इतनी पिला दी तुमने । तुम हो पास मा जाम्रो ना। मरी पोर झुरते मेरे क्वे पर अपने चेहर यो रख दिया था। लगातार चुम्बन देत रहे। सारे दिन सरकार के कामा से जी घबरा जाता है। सुबह उठन से माने तक रोज एक सी जिन्दगी । लो खाना खाएँ पर। उनके हाथ शरीर उन पर हुए शराब के प्रभाव के कारण उनके वश म नही थे। पीछे लगी मसनद पर पसर जात हैं । पाप भोजन तो परिये। नहीं। कोन सा भोजन । पीने के बाद भी कोई भोजन करना है क्या । हम भूख नहीं है। आप लोग करें। हरिया. मैं श्रेयासजी धीरे-धीरे भोजन करन लगे हैं। उधर नौर दी चाबू मसनद पर लेटे-लेटे ही खर्राटे भरने लगते है । हरिबाबू क्तिना समय हो गया । साढे ग्यारह बज रहे हैं। अब चलना चाहिये । ठहरिये श्रेयासजी । नौच दोजी को उनके बेडरूम में सुला पाते हैं। हरिवायू और श्रेयासजी मिलकर नोच दीजी को सहारा दे उठाकर पास ये कमरे म जा सुला ग्रात हैं। हरिबाबू । नीच दीजी का परिवार यहा नही रहता है क्या । परिवार मे दो लडकिया है। उनकी कर ही चुके है। वे ससुराल में रहती हैं । एक लडका विदेश में व्यवसाय करता है। साल म कभी एक-दो बार मुश्किल स यहा पाता है। उसने वहा शादी कर ली है। वही प्रसन्न है वह । इस प्रकार नोच दी वावूजी समभो अकेले ही रहते है। इनके लडने का लम्बा-चौडा कारोबार है विदश में । उसी में लगा रहता वह । पाईये, अब हम चल सकते है। तीना बाहर आ कार में बैठते हैं । सेज सर्दी की वजह से सुरक्षा कम- चारियो । दरवाजे के पास छोटा सा प्रगहन जला रखा है और वैठ ताप रह 65 --- सत्रह मुख्यमत्री निवास से कारा, सुरक्षामिया, पीछे पत्रकारो की गाडियों का काफिला वोरनगर की ओर चल पडा था। गुरुपम श्री नौचनीतालजो और मैं एक ही कार मे थे। आग पीछे कुल मिलाकर कोई पदह मौलह गाडिया थी। नौच दीजो खूब प्रसान ये । नगर प्रमुख मार्गो जहा से हमारी गाडिया निकल रही थी। पावागमन को बिल्कुल रोक दिया गया था। 67 गति से पाडियो का काफिला जा रहा था। नौच दीजी बोले- हरिवाबू, श्रेयासजी तीन दिन से वीरनगर में पडाव डाले पड़े है । हरिवाबू वहीं क नागरिका के साथ मिलकर श्रेयासजी के वारखान की जमीन का काम करवा दिया था। तुम्हारे कारण ही वीरनगर में श्रेयासजी केबल्स वाला कारखाना लगाने को तैयार हो गये। वरना उस दिन जो बातें हुई थी बेमन से ही हा-ना कर रह ये वे। मापने भी कितने कम समय म सरकार की ओर से जमीन दिलवा दी उनको। यहाँ शहर मे जिस जमीन को श्रेयास बाबू ले रहे थे कई प्रकार की दिक्कतें पार झझट थे उसमे । मैं समझती हू अभी चार-छ महीन तक तो जमीन नही ल पाते व । आपने तो कोडियो के भाव दिलवा दी उनको। परते भी क्या । तुम्हार लिय जितना भी कर पायें कम ही लगता है मुझको। तुम्हारे विधानसभा म आ जाने से मुझे बडो सहायता मिल जायेगी। तुम भरी शक्ति बनो। फिर देखो नितनी सहजता से पार्टी के भरमौर बाहर के विरोधियो से निपट लेता हू मैं। यह देखो इस गांव से ही वीरनगर विधान सभा क्षेत्र प्रारम्भ हो जाता है। पार की विडमी से बाहर भांजवर देखती हू। सडक के दोनो पोर हाय जाने मरे नौ गेजी क बडे रगीन पोस्टम, राडा के दोना पोर से वार गर वह-बड बनस हवा म भूल रह है । कारोका काफ्लिा कुछ धीमा पड़ता है। नगर न पुसत हा सडर के दोनो मौरस नागरिक नीच दो वायू प्रमर रह के गानभी नारे लगाने लगता है। कुछ माग वन विज्ञान मार पर लोगान गाना रोता है। नौ रस वाहर निगलत है। मुझ भी प्रमर रह 66 बाहर मान का सरत ररते है । नागरिक ने मुख्यमत्री से मालापारी लाद या है। कुछ न मरे हापा म नी मालाएँ दी हैं। नौप से वायू रहत है-- मोहसिन नाई। माप साहिलाजी है। भारर क्षत्र में पार्टी न इन। विधान सभा का टिट दिया है। जा। हुजूर । हरिबाबू न बताया यहा र लोगों से। सेठ श्रेयामजी भी यही है। साहिलाजी का घर टिकट दिया उधर इनना बडा कारमाना भी लग रहा है हमारे यहा। इनर मा जान स तो हमारक्षेत्र की तरक्षा होगी हम लग गया है। प्रमा से साहिलाजो न लम्बो बोडी योजनाएँ प्रापर वारनगर के लिए मर सामन रस दो हैं। पाप लागा व विपास म पनी बडो दिलचस्पी है। भापका काम है जोरदार वाटो स गिताए इनका। हम तो मापद हुक्म तावचार है। जब स सुनाव गुरू हुए है आपको पार्टी का प्रादमी जीतता रहगा। चलो । डर वगले चलकर बैठेगें। मोटा स्तिनी यज रखी है। माटिंग तो ग्यारह बजे होगी। उसके पहिने तो फस्ट्री । शिलान्यास करना है पापको। लो हरिवाबू, श्रेयासजी भा मा गय । नमस्कार, मुम्पम यो साहय । मसार भाई। और सब तयारिया हो गई। भव वाम पूरा हो गया । मैं जरा पास के गाय वाला से मिलन चला गस था। माहिलाजो के बनस, पोस्टस पहुचे है या नही जानकारी लने चला गया था। माईये डार वगरे पलार वठते हैं। मोहसिन भाई मरी गाडी मे बैठ प्राप। गाडिया या वाफ्लिा दार वगले की जोर चल पडता है । हरिबाबू कसा माहौल है यहा का। वैसे तो टोक है। पर उधर गांवो मे रामबलि पाण्य के लोग भी तेरा डालकर पड है । उनस भी मिला था। वह रह 4 पापन्यजी ने माहिलाजी के प्रचार काय के लिय भिजवाया है उनका। उन लोग स मावधान रहना। धूत और बदमाश लोग है सारे के सारे । कौन-कौन लोग ।

और तो खास नहीं । रामावतार खुद भी पडाव डाले पड़ा है। नाब के समय गडवड जरूर करेगा वह । उमको विना मत करो। गांव वाले हत्याराण्ड में मुहर नाम है उसा।। चुनावो तक के लिये अ दर करमा देते है उसको । मजिस्ट्रेट से कहलवा देना रिमाए पर ही रख उसे । जमानत भी मत होन दी। फिर दखत हैं क्या कर पात हैं उनक लोग। उसके दूसरे लोग गडबड कर तो एक सौ इक्यावन में सबको बद करवा दो। तब ही काम चलेगा। इन लोगो का भरोसा नहीं कभी भी क्लवा करवा सक्त है वाम सर समझ रहा हू तुम्हारी बात । गाडिया का काफिला डाक वगले परिसर म जाता है। वहाँ उपस्थित नागरिक पुनिस, क्मचारी सतक हो जाते है। मुख्यमत्री जी की जय-जयकार हान लगती है। याम बापू के साथ मालिक हाथ में बडी बडी मालाएं लेकर खते हैं। श्रेयाम वावू सीढिया उतर पार पाते हैं। पहले मुख्यमत्री जो को माला पहिनाने है फिर मुझे वडा सा गुलदस्ता भेंट करत हैं। डाक वगत की बाहरी दीवार पर मरे, नौच नीजी के बड़े-बडे चित्र, पोस्टस, बैनस तो हुए हैं । गाव के प्रमुख जनप्रतिनिधि लोग वहा एकत्रित हैं। एक और से नारा की आवाज वून द होती है--माहिलादेवी जिदावाद जिन्दावाद • साहिला वी। प्रामो प्रदर चलवर बैठन हैं। माहसिन माई, रघुनाथजी पाप भी पर चले। हम सब लोग बडे मे मेहमान क् म रमे सोको पर जा बैठते है । मुर- ममीजी ने अपना चश्मा उतार धोती की गय स साफ करन लगते है। मोहमिन भाइ जो इस क्षेत्र के रमठ वाया है उनकी आर दयते पूछते हैं- रामवासि के पितन लोग मार हुए हैं यहां अब तक! कोई हो सो लाग ता होंगे हा साहा। उन जोगारो franार को गतिविधियां चल रही हैं। तोड़फोडता नहीं पर रह जागा तोड नहीं कर रह पर निदलाप रसन क प्रचार में लग" ₹याला ना डरा धमारद है। दिन-रात पाम बलिर इन हमारी नता 68 गाव से उस गाव तक घूमते रहते हैं। साहिला जी के वैस रात म तोड देते हैं। इनके खिलाफ दीवारो पर बेहूदा नारे लिख गये है। अफमोस की बात है। समबलि खुद भी पाये है कभी गये दिना मे इधर। नही साहब । उनका तो नही देखा हमने । शायद व सारी बातचीत उनके भनीज और शारसन से फोन पर ही करते रहते है। समभा। बाहर से एस० पा० साहब को बुलवानो जरा । मोहसिन जी खडे हो बाहर निकलते हैं। एस० पी० कमरे में प्रवेश करते है। नौच दी वायू उन्ह पास बैठा को कहते है। दयाल साहब । इस क्षत्र में कुख्यात तस्कर शारसेन के लोग अपना पडाव डाल पड़ है । उन मर पर बसे ही कई मुकदमे चल रहे हैं । उन सबको चुनाव होन तक जेल में डलवा दें। कुछ वच जाये उन्ह एक' सौ इक्यावन म बाद करवा दें। यस सर । प्रभा वीरनगर का एक चक्कर लगाकर पाया हू । पाप जिन लोगों के लिये कह रहे है सबको पहिचान लिया है मैंने । पाप जैसा कह रहे है हो जायेगा, सर। बम यही कहना था आपको । यहाँ पूरी शाति के साथ मतदान होना चाहिये । इसके लिये जो भी उचित समझ करे। पूरी जिम्मेदारी भापकी हो है। माप जाकर काम करें। . यस मर। एस० पी० बाहर चले जात हैं । हरिबाबू की ओर देखत नौच दीनी पड़ते हैं- आर जिस फैक्ट्री का शिलान्यास करवा रहे ये वह काम पूरा हो गया। सब पूरा है। आप फ्रेश हो लें। चाय नाश्ता कर लें वही चलना है प्रा। मैं जरा मालूम कर लेता हू। रघुनाथजी जिस जगह शिवा यास होना है वहा लोगो की भीड़ जमा हो गई है क्या मालूम करें। पर साहब वहा ता सुबह से मेला लगा हुआ है। शिला यास वाले स्थान के पास बानी हरलो म थंयास केबल्स कारखाने के मॉडल को देखन मजमा सा हुआ है। 69 अच्छा है। साहिलाजी प्रापपा जमार मापण दना है वहाँ । हो, यह गल म सोन का इतना भारी हार डाल रखा है। जनता क ीच शोना नही देना । उतार द इसको। इमसे क्या होता है। साडी म छिा जायेगा यह तो। तर ठीक है । नौच दीजी चलें प्रव। चलो। हम सब बाहर निगल जाते है । गाडियो म बैठत है। वारो का काफिला चल पडता है। मुख्य सड़क के दोनो मोर लोगा को भीड है। यहा क नाग- रिवा म उत्साह है। हमारा काफिला मुले मदान म जा रूपता है । बडा सा मच बना रखा है। उसी के पास शिला यास किये जाने वाले प्रयास केवल्स का बडा सगमरमर का पत्थर लगा हुप्रा जिस रेशमी पर्दे से ढका हुअा हैं । गाडियो के रूकने के साथ ही सब लोग तेजी से वारा से उतरते हैं । मुख्यमत्री जी के वहा तक पहुचने के लिये सुरक्षा कमचारी रास्ता बनाते है । मच से पापणा होता है- माननीय मुख्यमत्रीजी वीरनगर पधारे। यहा के नागरिक उनका हार्दिक स्वागत करत है। मु यमनीजी के प्रथम प्रयामा से हमारे क्षत्र म प्रदेश का सबमे वडा तारा का कारखाना श्रेयास केवल्स लगाया जा रहा है। हमारे क्षेत्र से साहिला देवीजी चुनाव लड रही हैं। इ ही का सकल्प था हमार नार मे ग्रह कारखाना गाया जाये। मुग्यमत्रीजी न तालियो को गडगडाहट के वीच श्रेयास केवल्स का शिला यास किया। फिर तेजी से हरिबाबू नौच दीजी थे यासजी, म, मोहसिन भाई मच पर चढ जाते है। सबने अपना स्थान लिया। माइप पर पापणा होती है- हमार प्रदेश के मुख्यमत्रीजी पार्शीवार के हम अपन विचार प्राट करेंगे। प्रिय वीरनगर के नागरिको भाईयो वहिना । जाप लोग राजधानी म लगातार मुझसे मिलत रह अापके क्षर के विकास पर चर्चा करत रह हैं । राज्य सरकार ने आप द्वारा सुझाये कार्यों पर विचार रिया और अनुभव रिया नि यहा प्रौद्यागिक विय स की जरूरत है। हमने उद्योगपति धेयासती स उनके नय कारवान को यहा लगान का अनुरोध किया। मुझे वो है हान मरी पान को रखा। माल एस वपके मर यह कारखा वाम 70 करना शुरू कर देगा। इसस प्रापके यहा के नागरिको को रोजगार मिलेगा। इस अवसर में राज्य सरकार के दो बड़े उद्योग यही लगाये जायेगे की घोषणा करता है। हमारी पार्टी ने साहिलाजी को आपकी सेवा के लिये यहा भेजा है। श्रार चुनाव मे इहे प्रचण्ड बहुमत से जितावर विधानसभा मे भेजें। मापके वीरनगर से अब तक कोई भी नुमाई दा मग्री नहीं बना। मैं कोशिश करूगा । आपका वान को जोरदार ढग से सरकार तक पहुचाने के लिए साहिलाजो को मत्रोपद भी दिया जाये। अब साहिलाजी दो शब्द कहगे- अादरणीय मुख्यमन्त्रीजी, हरिवाबूजी, उद्योगपति श्रेयासजी और प्रिय नागरिका । मापकी सेवा का सकल्प लेकर साहस कर पाई है कि वीरनगर से विधानसभा का उपचुनाव लड़ । पाप हमारे मुख्यमन्त्रीजी के हाथ मजबूत करें। आप जब भी मुझे याद करेंगे सारे काम छोडकर मापकी सेवा मे चली भाऊगी । आपके इस क्षेत्र में वडे अस्पताल को आवश्यकता है आपके ही साथी मोहसिनजी ने मुझे बताया। मैं आशा करती हू जल्दी हो आपके यहा वडा अस्पताल सरकार बनायेगी। प्रापसे मेरी प्राथना है अपना अमूल्य वोट देकर मुझे विधान सभा में भिजवाएं। धन्यवाद । तालियो की गडगडाहट में अपना भापण समाप्त करती है। हम सब मच से उतर कारो मे मा वैठते है। फिर वारो का काफिलो डाक बगले की प्रोर चल पडता है । हरिबाबू नौच दीजी से कहत है- प्राज गांव वालो ने भापके शाम के भोजन की व्यवस्था यही की है भाज हम सप को यही रोक्ना चाहते है यहां के लोग। हरिशबू । मेरा रूकना तो सम्भव नहीं होगा। भोजन की तकलीफ भी मत दो। हल्वा नाश्ता कर लेते हैं । फिर चलेंगे। मोहसिन भाई बोलते हैं- हुजूर । एक दिन तो रूमते पाप । आज तो कठिन रहेगा। अब तो माते-जाते ही रहगे। हा, देखो रामा- पतार के लोगो से उलझने की जरूरत नहीं है। उनसरी सूचना राजधानी में देते रहो। एस० पी० को कह दिया है मने सब ठोक कर देंगे थे। मोहसिन भाइ अब पाप सब लोग चले। थोडा आराम करना चाहता हू । हरिबाबू पास पास कमर मे इन लोगो के साथ बैठकर यहा की समस्यामो का लिन जो। मैं साहिलाजी से बातचीत कर रहा हूँ। 71 वहाँ के सब लोग उठ पास के कमरे में चले जाते हैं। मैं और मुख्यमत्री जी बचे हैं यहा । नौचन्दी जी के चेहरे पर थकान साफ लिखाई देता है । मरी मार दखते कहत हैं--- साहिला । तुमन जीत लिया हमका तो। शाम को मना तो नहा होगा मेरा। हरिबाबू, श्रेयासजी माते रहग । दरवाज को याद कर दो। भोडा माराम लर ले। दरवाजा बंद कर लौटती है। नीच दो बाबू पहते हैं मेरे पास प्रापर वैठो तुम। सोफे पर उनके पास जा बैठती हूँ। मेरे हाथ को अपन हाया म ले चूमने लगते है। हाथ को छोड उ होने दानों वाह मेरी कमर में फसा तो है । धारे- धोरे हाथ को बढाते वक्षस्थल तक ले आये हैं। उनके चेहरे पर काम भावना का वेग उमरता है । कहते हैं- साहिता, तुम पास होती हो तो मारी थकान, परशानिया खत्म हो जाती हैं । कंसा गुदाज शरीर है तुम्हारा । सस्त वक्षस्थल पानी पानी कर डालता थालिंगन मे क्सकर जकड लिया है मुझे। यौडा मेरो पौर मुडो जरा। मर पन्च के पोधे हाथ डाल ब्लाउज के बटन दो-तीन बटन बाल डाल हैं उ होने । मने भी विशेष आपत्ति नहीं की। थरयरात हाठा यो मर वक्ष पर रख दिया है । चिहुकते रहते हैं साहिला और पास प्रायो। मेनका सा रूप और सुघड शरीर है तुम्हारी। यह गोलमपिंड पागल कर डालेगे मुझ । वहते पूरे शरीर को मरे पर डाल दत हैं। हफ्त प्रस्फुट गन्दी में साहिला, मरा बस चले तो तुम जो कहो पर डालू मैं । तुम्ह कसा ला बहुत परशान कर डालते है याप तो मुझे । मापा बुहापा यही नहीं मलता। साठ स पर तो हैं ही प्राप। साहिला पुराना घो पाया है। पाटा-पाटा या यहावत तो सुना है ना तुमन । 72

वहो देख रही हू । अापके वाजुभो म गजव को ताक्त है भी तो।
तो तुमने क्या समक्षा कमजोर हू मैं ।
मैंन यह तो नही कहा पापको ।
परेशान तो तुम कर डालती हो। तुम्हारे चेहरे पर झूमती बालों को
लटें, कमर के नीचे तक झूलत वाल गजव जादू फर डालते है मुझ पर। भाज
रात तो शहर चलकर मेरे साथ ही रहना तुम । वइ दिन हुए तुम्हार रूप के
रस को पिय ।
।
ऐमा क्या कह रहे हैं। अभी क्या पर रह है पाप ।
मह । एसे पूरा मान द नहीं पाता। यहा का वातावरण इतना स्वतत्र
पहा है । यहाँ तो कहो जो बहला रहे हैं हम अठखेलिया ही सम को बस । जी
भरकर तुम्हारा रूपमाधु य तो पूरी प्राजादी के साथ ही हो सकता है। इसम
दो शरीरा का एक हो जाना कहा है।
बाहर से रिसी ने घण्टी बजाई है। नोच दी बाबू कहते है--
कोन सिरदद मा गया देखना तो।
सोफ से खडी हो दरवाजा खोलती हू । हरिबाबू हैं।
भाईये । हरियायू ।
क्या हो रहा है साहिला।
रामबलि पाण्डेय के लोगो को खुराफाता की बात कर रहे थे। हरिबाबू
रामवलि के खिलाफ वाला प्रादोलन तो ठण्डा पड गया दिखता है।
नही । नहीं। सब चल रहा है।
हरिबाबू, अव म और साहिला तो शहर जा रह हैं। जाप श्रेयासजी
को लेकर प्रात रहना।
शाम को रूकते तो अच्छा रहता। सारे गाव वाले पडोसी गाव वालो
को लेकर पा रहे हैं।
वह सव प्राप ही सम्भाल लेना। दो मीटिंग्स रखी हैं सचिवालय मे ।
उसम शामिल होना जरूरी है।
73

माप चाहे जायें। साहिलाजी को यहा रूकना चाहिये। अाखिर इनका चुनाव क्षेत्र है। नागरिको, मतदातामो से मिलना जरूरी है इनका । ठीक है इहे रोक लो। अभी कुछ विश्राम करके मैं तो जाऊगा । माप लोग कब तक प्रामोगे। अव तो कल ही पाना होगा। ठीक है । माप लोग अपना काम करें। मैं माराम कर लेता है।

अट्ठारह मुल्यमनी निवास पर धीरनगर से कोई पचास-साठ जोपों, बसो में लोग इक्टठे होकर पाये हैं। काफिले मे मवसे प्रागे खली जीप में साहिला, हरिवायू, पोछे चलती कार मे श्रेयासजो हैं। मुख्यम श्री निवास के सुरक्षा मचारिया ने सारी बसो, ट्रका को बाहर सडक पर ही रोक लिया है । केवल साहिला, हरिबाबू, श्रेयासजी ही प्रदर पा पाये हैं। हरिबाबू ने बरामदे म जा घण्टी बजाई है। नोच दी बाबूजी स्वय दरवाजा खोलते हैं । बधाई हो साहिला । कोई संतीस हजार मतों से हराया है तुमने शकरसेन यो । उसे भी छठी का दूध याद मा गया हो। मोहसिन भाई प्रापका काम बड़ा अच्छा रहा। अच्छा हुग्रा है साहब । वीरनगर म लोग प्रापस मिलन ओर मुबारकबाद देन माय है। । अच्छी बात है। मेरी और से सबको बधाई दें। हुजूर प्रापसे सवकी गुजारिश हैं साहिलाजी को म त्रीमण्डल म शामिल परें। अापने वायना भी किया है हमारे लोगों से । वह भी करेंगे । थोडा इतजार करिये माप । अगले कुछ दिनो में आपको मालूम हो जायेगा । एक दो दिनो में विचार करू गा। पाप लोग अदर'चल कर वठे । मुह मीठा करे । सब लोग सो० एम० साहव की अगुवाई मे अटर वडे हॉल मे जा वठत है। कायकर्ता लोग स्टील की प्लेटो म मिठाईया लेकर आये है । नोच दीजी ने सबसे पहिले मिठाई का वडा सा टुकडा ले साहिला को अपने हाथो से खिलाया, फिर हरिबाबू की पीठ थपथपाते कहते हैं- हरियावू को वहा का चुनाव प्रभारी बनाना जरूरा या । रामबलि के गुण्डों को पूरे क्षेत्र में फटकने तर नहीं दिया तुमने । गजब की नाकेबदी कर डालो तुमन । मान गया तुमको हरिबाबू । नौच दीवाबूजी प्राप दो बार ही तो प्राय हैं वीरनगर फिर इतना सब कम मालूम हा गया अापको। कोई इन्द्रजाल के जादू से दखत रह ये क्या वे । 75 इद्रजान का जादू ही समझो तुम्हारी, साहिला से, रामवलि के गुण्डा को खदेडने भी सारी गतिविधियो को रोज रात को यही घर म कसर वीडियो फ्लिम्म देखता रहा हूँ। वीरनगर में हुई छोटी से छोटी घटनाप्रो के समाचार विडियो फिल्म पानी रही है मेर पास । आप तो ऊची चीज है। कमाल है। हरिवायू प्रदेश का शासन चलात हैं हम । इतना ध्यान नहीं रखग तो एक दिन म पटरा बैठ जायगा हमारा। पाप लोग इस काम को जल्दी पूरा करो मुझे गवनर साह्न के यहा अगले दस मिनिट में पहुंचना है । हम क्या करना है माप जायें। हम लोग यही बैठे है। प्राप भले ही बैठे मुझे देर लग सकती है। वहां स लौटने में। जैसा उचित समझे प्राप। फिर हो मायें माप । ठीक है। तो मैं चलता है। साहिला तुम भी चलो मरे साथ । गवनर साहब से मिलवा देंगे तुम्हे भी। बहुत थकी हुई हू पाप हो हो पायें। अरे, चलो भी जरूरी बातचीत करनी है तुम्हार मामले में हा। माहमिन भाई, हरिबाबू, श्रेयामजी सव मुझे सी० एम० के माथ जान को कहते हैं। सबसे विदा ले नीचन्दीबाबूजी के साथ बाहर खडी कार मे जा हूँ। प्रागे सुरक्षा कमचारियो की गाडो, फिर हमारी कार बाहर पडी बसा, लोगो से बचती-निकलती है। नौपदीजी की गाडी को देख लोग जिदाबाद-जिन्दावाद के नारे लगाने लगे हैं। उत्तर में हाय हिलाकर सबा अभिवादन करते हैं। कुछ ही क्षणो म फर्राटे से गाडी मुख्य माग पर मा गई नौच दो वावू कहत है-- पहा मत तो साग सिर हो या नाव मेरा। यहा साप तुम्ह सार ले बैठती प्राया। गवनर माहब के ज्यादा देर तगमा क्या। उनके यहा ता कौन रहा है। सरिट हार पर रह है। यही कार बात करेंगे तुमस। तज गति स सडक पर दौडती गाडिया मार हाऊस प्रहाते मना करती हैं। नौच दोगर मोर मैं गारी से उतर मुख्यमत्री के मारक्षित कमरे में चल 16 । जात हैं। पूरा सक्टि हाकम हरकत मे पा गया है। मुख्यमन्त्री के ड्राईवर ने कुछ फाईलो के बस्त, अटैची ला दी है । कमरे में घुसते है। नौच दीवाबू ने कमरे को अन्दर से व द कर लिया है । वहा टबुल पर भोजन यादि की व्वय- स्था है । शानदार कमर, कीमती भाउफानूस छत से लटक रहा है । खुशबूदार वातानुकूलित कमरा । मेरा हाथ खीचते पलग पर विठाते है । खुद भी जूतिया उतार पलग पर पसर जाते हैं। मेरी मोर पायें गडाते कहते हैं- वहो साहिला कैसी रही हमारी योजना। उस टटपू जिये मिल वाले की नौकरी कोई तुम्हारे लायक है। तुम्हारे लिये ऐसे पालीशान, शानदार महल होन चाहिय । लो पर देर नहीं करो पास मा जामो। हमारी देशी पाशा को नई बोतल खोलो, दो पंग तयार करो। माज मैं जी भरकर खुश हू । पहिले पिलानो माशा फिर तुम्हारी जवानी का रस भी छककर पियेंगे अाज । मेरे मत्रीमण्डल की मबसे प्रभावशाली मत्री बनाने जा रहा हू तुम्ह । मेरे साथ प्रदेश पर राज करोगी तुम । पाप सब कामा मे बहुत जल्दी करते हैं। वीरनगर के लोगो से मिल भी नही पाई मैं। वेचारे क्तिन लोग वहा से बसा, ट्रको, ट्रेक्टरो मे भरकर जुलूस के रूप में पाये ये आपके यहाँ । साहिला बहुत भोली हो तुम । जो लोग पाये थे अब वे तुम्हारे आगे-पीछे हमेशा बने रहगे। अगले चुनावी तक तुम्हें ज्यादा मिलने की कोई जरूरत नहीं उनसे । लो एक पैग और दो जल्दी । वीरनगर तुम्हारा क्षेन है यह गलत नहीं । पर एक दो दिन में मत्री पद की शपथ लेते ही पूरे प्रदेश की मत्री हो जामोगो तुम इस बात को क्यो भूल रही हो। जमकर राज करो। लो मेरे हाथ से पिनो माज तो। मोर नौचदीजी ने मुझे अपने पास खीचते, बांहो म लिपटा लिया था और होठो पर ग्लास लगा दिया था। दर मत करो। ग्लास खाली करो। तुम्हारे लिये भगला ग्लास मैं बनाता है। बहुत तेज और तल्ख है यह । तेज तो होगी ही यह, तुम खुद भी तो क्तिनी गम हो भूल क्या जाती हो यह । लो इस ग्लास को भी खत्म करो। मोर नहीं नौचदी बाबू। 77

नहीं क्या साहिला माज तो जितनी पियो कम ही होगी। तुम्हारी नई
जिन्दगी या पहिला सुनहरा दिन है।
मेरे को पूरा ग्लास पिला उन्होन बोतल उठा मुह म लगा ली और
देखते देयते गटगट करत माली वर फश पर विछे कीमती गलीच पर फेंक
दी। उन पर तज नशा हावी हो रहा था। बोले-
दूसरी बोतल खोलो साहिला।
भव ज्यादा नहीं, बहुत हो गया।
तुम क्या सोच रही हो हम नशा हो गया है। अभी तो पी हो रहा है
हमने । लाओ जल्दी लामो।
लडखडात उठ पास टेबुल के निचले हिस्से म रखो वोतल उठा लाती हू ।
उसमा ढक्कन नहीं खुल रहा मुझसे मुझे लग रहा था मरा शरीर नियत्रण मे
नहीं था मरे। मेरी और पूरते पूछते हैं-
लाग्नो मुझे दो तुमस नही खुलेगा।
मर हाथ से झपटते से बोतल छोन मुह म दवाकर जोर से घुमाते उ हाने
खोल डाला था।
छोडो ग्लास का क्या करेंग। मेरे पास प्रायो।
मैं उनके पास पलग पर जा बठी थो। मेरे लिय वठ पाना भी कठिन
लग रहा था। लेट जाती है।
यह ठीक है । लेट जानो तुम । लेट लेटे ही पियो।
पौर उहोने फिर मेरे मुह पर वोतल लगा दी थी। मैंने एक घूट भी
नही लिया।
क्या कर रही हो दो-चार-पूट तो और लो।
नही । माप चाहो तो लो। मरे मे हिम्मत नही और पीने की।
और उहोने चौथाई बोतल से ज्यादा एक बार में ही गले के नीचे उडेन
ली थी और उस पश पर फैरते मर शरीर पर झपट थ।
साहिला । क्या सुदर नाम है तुम्हारा । जसा नाम वसा शरीर भी।
।
78

लैंडखडाते हाथा से एक-एक कर मेरे सारे कपडे उतार फर्श के कालीन पर डाल दिये । मैं लगभग बसुध सी हो रही थी। मुझे हल्का-हल्का ध्यान है। मेर पूरे शरीर से खेलते रहे थे। वोच-बीच मे मेरे नाम की आवाजे मुझे सुनाई देती रही थीं। उसके बाद मुझे याद नही कब में नशे की हालत में होश खो बैठी थी। फिर भी जरूर लगता रहा या वे मेरे शरीर से खेले जा रहे थे । x 19

उनीस
-
सुबह जल्दी मेरी नीद पुल गई यौ। वाथरूम म जा स्नान वादि से
निपट फिर बिस्तर पर जा बैठी थी। नौचदी बाबू को झिमोडत जगाती है।
सामन बोवार घडी म माठ से अधिक का समय हो गया है। नौपदीजी
बडबडाते स्वर मे कहते हैं---
सोने दो, अभी तो रात बाकी है। क्यो जगा रही हो।
उठिये भी। नौ बजने वाले हैं। रात वीत गई।
रात को भी छोडो। तुम्हारा नशा तो नहीं उतरा है ना भभी तक ।
उठो तैयार हो जामो। चलेंगे फिर।
चनना कहां है। गवनर के यहा तो चार बजे चलना है। यही भोजन
करा, माराम परो।
अपने कपडे सम्भालत 38 वायरूम म जात हाथ बढा घण्टो का बटन
दवा देते हैं। व मर चले गए हैं। बाहर से पादर वाली घण्टी को मधुर
मावाज कमर म फैल जाती है। उठ दरवाजा खोलती है। मस्टि हाऊस का
मैनजर है-
गुडमानिंग मडम । अापको बधाई हो।
गुडमॉनिंग । थैक यू। ब्रेकफास्ट भिजवा दें।
यस मडमा
मैनेजर द्वारा दिये गये अखबारो को पलग पर रख देखने लगती हूँ
सारे समाचार पत्रो के मुख्य पृष्ठो पर मेरे बडे-बडे चित्र छपे हुए हैं । नाच पर
माश्चय म खो जाती है। लिखा है-
साहिलादेवी को प्रदश मत्रीमण्डल में कैबिनेट मिनिस्टर बनाया गया।
भाज शाम चार बजे राजभवन में वे अपन पद को शपथ लेंगी। साहिलादेवी
41 गृहमन्त्रालय के साथ, उद्योग विभाग, महिला विकास मन्त्रालय, समाज
वल्याण मत्रालय दिप गये हैं। इस प्रतिरिक्त मुख्यमत्री के कार्यो म भो वे
सहयोग करेंगी।
80
।

मेरी मानसिक स्थिति एक क्षण को तो लगा प्राय लुप्त सी हो गई थी। मुझे समाचार पत्रो, यहा तक कि स्वय तक को विश्वास नहीं हो रहा था । सोच रही थी वही स्वप्न तो नहीं देख रही मै। नौवदीबाबू ने तो मुझे कुछ भी नहीं बताया। उधर बाथरूम से धोती बाधत डेसिंग टेबुल पर जा वहा से चश्मा उठा पहिनते हैं । मेरी प्रोर देखन के साथ उनकी दृष्टि पर ग पर रख प्रतवारा पर जाती है । पुलक्ति हा पूछते है । देख लिये अखबार। अब कहो नौच दीवाबू क्तिना विश्वास करते हैं तुम पर । आज शाम चार बजे गवनर हाऊस चलना है । वहा शपथ समारोह रखा गया है। गये दिन जसे ही तुम्हारे जीतने का समाचार मर सचिव न दिया। मैंने उसे तुम्हें दिये गये मत्रालया का प्रस्ताव बना, शपथ समारोह की तयारी के प्रादेश दे दिये थे। मेरी राज्यपालजी से फोन पर बात हो गई थो । याज का दिन तुम्हारे जीवन का सबसे स्वणिम दिन है। पूरे प्रदेश में बच्चे बच्चे की जवान पर तुम्हारा नाम हो रहा होगा। उधर रामवलि पाण्डेय ठर की चार बोतले पीकर पड़ा अपने भाग्य को कोस रहा होगा। हा, एक मुख्य बात और समझ लो अब जनता के लोगा, नेतामो, थयास स भी पूरे रोबनाव के साथ मिलो। अधिक फालतू बात करना उचित नहीं । गहमत्रालय का काम सबसे महत्वपूर्ण है जो मेर पास था तुम्ह दे दिया है मैंने । उसमे पूरी मेहनत और सतकता को प्रावश्यकता है। श्रेयास अब ज्यादा पीछे पडेगा तुम्हारे जितना उचित हो उतना ही करो। इन लोगो के साथ जादा मम्ब ध रखन से प्रशासन ढीला हो जाता है। दूसरा लोग-ब ग अखबार पाल उटपटाग, मनगल वातें करने लगते हैं । प्रापके निर्देशो को समझ रही हू मैं । पर मापन बहुत जिम्मेदारियां डाल दी है। मेरा अनुभव तो है नहीं। अनुभव, वाय धीरे-धीरे सब समझ म मा जायगा उसकी पिक मत परो। तुम्हारे पास हर विभाग के सचिव हैं, पूर म त्रालय में काम करन वाले लोग हैं । मैं जानता हू तुम सब ठीक से सम्भाल लोगा । इस सबम मुख्य बात यही है किसी पर अर्थ होकर विश्वास मत करो। जितना वह बह रहा है समझो पाँच प्रतिशत ही सही है। बाकी सब मुल्लमा चट्टी बोरी बातें तो नाश्ता करो। यहा से चलेंग नही तो लोगो को भीड जमा हो जायगी बुछ ही देर म यहा। पर हमारे यहा होन को किसी को जानरारी तो है नहीं । - 81 धीरे-धीरे समझ जायोगी मुख्यमन्त्री प्रदश म वहां हो सकता है। हमारे लोग ना क रूख से समझ लेत है । उन्ह किसी से पूछना तक नहीं पड़ता। हम लोगा की यही समस्या है। दस मिनट आराम से कही नहीं बैठ सकते हम । लोग भूता की तरह पीछ पडे रहते है ।। चलो तैयार हो जानो जल्दी। तव ही घण्टी बजती है । उठ दरवाजा खालती हूँ । हरिवाबू, उनके साथ दूसर मनिया की भीड हाया म बडी बडा मालाएँ लिये, तेजी से प्रदर घुसत हैं । बधाई हा, बधाई हा के साथ सबने मुझे मालालो से लाद दिया है। फिर मुख्यमत्री जी की पोर बढ़ते उह भी मालाना से गल तक लाद देत हैं । बैठिये माप लोग। शाम चार बने सब लोगो को पहुंच जाना है गवनर हाऊस । नौचदीजी अापके कहन की जरूरत क्या है । साहिलाजी दो मिनट बाहर खडे लोगो का अभिवादन भो स्वीकार कर लो। हरिवाबू के साथ कमरे स निकस समिट हाऊस' की सीढिया उतरन लगती हू तब ही साहिलादेवी जिदाबाद के नारे प्रामाश का सिर पर उठा लेत है। पार्टी कायकर्ताप्रो, विभिन महिला सगठनो से सम्बंधित काय- कर्ताग्रो न मालामो स एक बार फिर लाल दिया है । मैं फूला के भार को भी सहन करन म अममथता मनुमय कर रही है। दूर एक कार मा रूमती है उत्सम रामबलि पाण्डेय, रामावतार, दूमर कायकर्ता उनके पीछमा रूपा कार से तार शकरसेन मालाएँ लिय मरी पोर मा मुझे बधाई देते हैं । सबर प्रति भाभार व्यक्त करती है। उधर मुख्यमत्रीजी सीढ़ियां उमर मानो पार म जा बम्न है उनका सचिव मा बतात हे मुख्यमत्रीजी मुझे बुलया रर हैं। पस्थित ने विदा ले मुखमत्रोनी को पार मजा बनी। पार बल दी है।

बीस मत्रीपद की शपथ लेने के बाद सचिवालय में गाज मेरा छठा दिन है। कार्यालय में बैठे अपने निजी सचिव, विभिन्न मत्रालय के प्रशासनिर अधि- कारियो के साथ प्रा त की समस्यामा, योजनामा पर बातचीत कर रहा हूँ । उमम अधिकाश रूप से वे ही लोग सक्रिय हैं। मैं उनकी बातचीत का उत्तर लगभग हा ना या कही कोई सुझाव जसी बात जा मुझे उचित लगती हैं कह देतो हूँ । हरिबाबू स्वय चल मेरे कमरे में आये हैं उपस्थित अन्य लोगो से दोबारा मिलन आने का कहती हू । वे उठार चल दिये है । आईये । हरियावूजी वठिये । प्रापका काय तो प्रारम्भ हो गया। प्रसनता की बात है। उधर म भी कुछ खास मुद्दा पर अपने सहयोगियो से बातचीत कर, उन्हे निर्देश देकर पाया हू । सोचा साहिलाजी से मिल माऊ । सुवह जबसे पाकर बैठी हू एक के बाद दूसरा फिर तीसरा चला पा रहा है मिलने । दस तरह के लोग उतनी ही बातें, समस्याएं परेशान सी हो गई है। पता नहीं नई-पुरानी कौन-कौन सी बात, चर्चाएं फाईल, निर्णय । अभी तो अधिक समझती नही पर जिनको ठीक समझा उन फाईलो को अवश्य निपटा दिया मने। अजी, यह तो सब चलता रहगा। कुछ दिनो में प्रस्त हो जानोगी। थोडी मी सावधानी का मावश्यता है । बालो कुछ विशेष नहीं। श्रेयास बाबू गई रात आये थे। पूर्व प्रसन थे। नौच दो वाबू ने उद्योग विभाग तुम्ह दे निया इसलिए । अब काम समझदारी से करना। यह नहीं हो श्रेयास तुम्हारे पर दिये उपकारो के बदले तुम्हारी छवि हा सराव कर डाले। क्योकि इधर भखबार में छपा है देख ही लिया होगा तुमने । मुझे मवा ध्यान है। उनकी असलियत अच्छी तरह जानती है। उनस मेरा परिचय पुराना है। प्राप निश्चित रहे । व जिस साहिता की छदि मन मे बनाये हुए हैं वह साहिला अव मर चुकी हैं। मापन, नीच दोबाबू ने मुके ना जम दिन है। 83

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चलो कल मा जाना। इन दिनों वही वाहर जाने का कोई कार्यक्रम नही हे मरा। बल देखू गो। हरिबाबू उठ मरे कमरे से बाहर चले गये हैं। दरवाजे तक उह छोडने जाती हू । मेहमान कक्ष मे वठे श्रेयासजी पर मेरी दृष्टि जाती है । मुझ देख अपनी जगह से सोरलास खड़े हो गये है। पूरी ध्र दा से नमस्कार करते हैं । पर मैं उनके चेहरे के भावा को सरलता से पढ़ लेती हूं कि मुझसे वे खिन है। विना उनस बात किये अपने कमरे में या फोन उठा सचिव को श्रेयासजी को मेरे पास भेज दने को कहती हूँ। थे यासजी प्रदर माये है उनके हाथ मे बडा ब्रीफकेस है। बठिये। श्रेयासजी। कैरो है प्राप। अच्छा हू । आपने तो हम भुला ही दिया । पूरा एक घण्टा समाप्त हो रहा है तब जाकर आपसे मिल पा रहा है। आप तो अपने पुराने शुभरि तको को भूल ही गई है। ऐसा तो नहीं है। हरिबाबू पा गये थे उनसे बातो मे देर हो गई। प्रयथा नहीं ले । कहिये मेरे लायक कोई काय । काम तो बहुत सारे हैं। बीरनगर वाली केबल्स फैक्ट्री का पैसा मिल जाता तो बम्बई से मशीने मगवा लेता। हरिबाबू ने सारे काम करवा दिये थे । मशीने बम्बई पहुच गई हैं । फिर क्या दिक्कत प्रा गई मगवा लीजिये जो भी मगवाना है। उद्योग भवन के मैनेजिंग डायरेक्टर चैक जारी नहीं कर रहे हैं। प्राप उह फोन कर देती तो अच्छा रहता । श्रेयासजी, मनजिंग डायरेक्टर को मुझसे अधिक मत कहलवाईये । वह रामबलि पाण्डेय का प्रादमी है दूसरा गय दिनो के समाचार पत्र तो मापने देखे ही होगे अापके और मेरे सम्बधो को लेकर प्रखबार वालो ने कितना भला-बुरा छापा है। मेरी छवि को बिगाडने पर तुले हैं यह लोग। प्रखवार नसे थे पर उसम ऐसी गम्भीर बात तो लगी नही मुझे। माप गम्भीर नहीं मान रह क्योकि आपका काम अटका हुआ है। माप प्रदेश के गहमत्री के रूप मे मेरी छवि की कल्पना वरिये। क्या नहीं लिखा है। भाप अपन काय को करवाने के लिये मेरा किस प्रकार से उपयोग करते रह हैं साफ-साफ लिखा है उहोने । । । 85 शरय समारोह म राज्यपाल जी मी तुम्हारी प्रशसा कर रहे थे । रहन लग बड़ी बुद्धिमान लगती है। मर जगह यूर प्रशसा हो रही है। एक बाम तुम्हारा समझ नही माया रामलि के भतीज और उसके पायवापाको तुमने जा भिजवा दिया । रामबलि बहुत लाल पाल हो रहे थे। इस कायम इतनी जल्दी ठीर नहीं। रामलि कितना गुण्डा और प्रभावशाली है तुम्ह कुछ भी नहीं मालूम है। नौच दौवाव ता भी परात है। यह तो मैं ही था जो उमको बदलार मत्रीमडर त त्यागपत्र दिलवा ही दिया। हरिगबू । उनके भतीज ने किमी निगम म उस पद दिय जान का प्रसाद भिजवाया पा मोर नही करन पर बलया रवा देगा की धमकी भी दी थी। वह चाहता था महिला कल्याण वोर म उसे अध्यक्ष बना दिया जाये। माप तो जानते ही है रामावतार महिलामा या कसा ल्याए पर पायेगा। नौ- जवान लोग हैं दिमाग स काम नहीं लत । सार काम चाहत है दादागिरी से पूर करा लेंगे। देखती हूँ क्तिना हा-हल्ला करता है वह । तुम सन्न रहो कुछ नहीं कर पायगा वह । तब ही सचिव न फोन पर बताया धेयासजी मिलने पाय है। उ ह वहीं विठा लेने को कहती हूँ। हरिबाबू कल रामबालजी वा भी फोन पाया था बड नाराज थे उनके भतीजे और कायरतामा को बद किये जाने के कारण । आज शाम पर बुलवाया है उनका बातचीत के लिय । अाप भी चाह तो अवश्य माईये। अजी। जब पाण्डेजी बहा है तो मैं क्या करू गा पाकर वे ही बहुत हैं । वैसे तुम चाहा तो नोच दीवावू से सहुलियत से वान कर देखा गमवलि काम का अवश्य है। उसके पास भो ब्राह्मा विधायक का पूरा दल है दूसरा प्रदेश को गुण्डा राजनीति में तो सर्वोच्च स्थान है उनका। छोडिय भी। मुझे वैसी राजनीति तो करनी नहीं है। उधर नोवदीजी से उनके बारे में बात करने का मतलब भी भाप खूब समझते है । प्राज मत्रो- मण्डल को मोटिंग भी तो रखी है सी० एम० साहब ने। ऐसो मोटिंग तो चरतो ही रहती है। क्या रखा है उसम । अच्छा चलूगा पर। उधर भी कुछ नागा को मिलने बुला रखा है। प्रव तक मा गये हागे। शाम घर को भोर ग्रामो मान । ठोर है आप चलें। शाम को तो पाण्डेयजी मा रहे हैं मरे यहाँ। दो क्या बात होती है उनसे क्या तवर है उनके देखना चाहती हूँ। - 31 जाता चलो कल मा जाना । इन दिनो कही बाहर जाने का कोई कार्यकम नहीं हे मरा। पल देव गी। हरिबाबू उठ मरे कमरे से बाहर चले गये है। दरवाजे तक उह छोड़ने हूँ। मेहमान कक्ष में बैठे श्रेयासजी पर मेरी दृष्टि जाती है। मुझे देख अपनी जगह से सोल्लास खड़े हो गये है। पूरी श्रद्धा से नमस्कार करते हैं । पर मैं उनके चेहर के भावो को सरलता से पढ़ लेती हूँ कि मुझसे वे खिन्न है। बिना उनसे बात रिये अपने कमरे म मा फोन उठा सचिव को श्रेयासजी को मरे पास भेज दन को बहती हू। थे यासजी प्रदर माये है उनके हाथ में बड़ा श्रीफकेस है। वडिये । श्रेयासजी। करो है पाप । अच्छा हू । आपने तो हमे भुला ही दिया। पूरा एक घण्टा समाप्त हो रहा है तब जाकर मापसे मिल पा रहा हूँ । पाप तो अपने पुराने शुभचिन्तको का भूल ही गई है। ऐसा तो नहीं है। हरिबाबू पा गये थे उनसे बातो में देर हो गई। म यथा नही लें। कहिये मेरे लायक कोई काय । काम तो बहुत सारे हैं । वीरनगर वाली केबल्स फैक्ट्री का पैसा मिल जाता तो बम्बई से मशीनें मगवा लेता। हरिवाबू ने सारे काम करवा दिय थे । मशीनें बम्बई पहुंच गई हैं । फिर क्या दिक्कत आ गई मगवा लीजिये जो भी मंगवाना है । उद्योग भवन के मनजिंग डायरेक्टर चैक जारी नही कर रहे है। आप उह फोन कर देती तो अच्छा रहता। श्रेयासजी, मैनेजिंग डायरेक्टर को मुझसे अधिक मत कहलवाईये। वह रामबलि पाण्डय का मादमी है दूसरा गये दिनो के समाचार पत्र तो आपने देखे ही होगे मापके और मेरे सम्बधो को लेकर अखबार वाला ने क्तिना भला बुरा छापा है। मेरी छवि को विगाउने पर तुले हैं यह लोग । मखवार से थे पर उसमे ऐसी गम्भीर वात तो लगी नही मुझे। पाप गम्भीर नहीं मान रह क्योकि आपका काम अटका हुआ है। प्राप प्रदेश के गृहमत्री के रूप में मेरी छवि की कल्पना करिये। क्या नही लिखा है। माप अपन काय को करवाने के लिये मेरा किस प्रकार से उपयोग करते रहे हैं साफ-साफ लिखा है उहोने। । 85 साहिताजी। युरा मान गई प्राप। उस सच्चाई को पाप मना भी नही कर सकती। क्तिना रूपया तुम्हारे पर सच हुआ है। जिमका कसा भी हिमाय नहीं हो सकता। मुख्य तो मभी प्रापके चुनाव पर बत्तीस लाख रूपर से अधिक मरे याम देवास के शेमस म स हो सस दिश। उम भूल सरती हूँ माप। श्रेयाजी मापन चुनाव भ प लिया हापर मैंन भी एक पसा लगान को भी प्रायना की घो क्या मापसे । माप यह दें यदि मन कभी पहा तव' हो। साहिला । तुम ऐसे बदल जामोपी। साचा भी नहीं था। तुम यो क्रा एक मामूली बाबू की पत्नी । जिसे सहारा देवर मैंन पर दिया, मात्र सरकार मे मत्री बनकर बैठी हो तो मेरी वजह उप रहिये श्रेयास वाव । पाप वह व्यक्ति है जिन्होन मेरे पति को पहिल नौकरी से निकलवाया फिर वह पावित, मानसिक यातना देकर पागल कर डाला। माज से पद्रह साल स मधिक बीते मरा पति पागलखाने को सीखचो के पोदे अपना सिर फोड रहा है। पाप में इतना भी मानवता नहीं थी कि उन पर तरम पाते। मेरे शरीर के रोम-रोम का रस निचोड हाला मापने और उसी के सहारे एक के बाद दूसरो, फिर तोसरी मिल पर मिलें खडी वरत चले गये। पाप हर रात विस्तर वदरते रहे मरे। मेरी विवशता, मेरी बटी को जिदा रखने के लिये सब पता नही क्यो में वह सब सरतो चना गई जो मापने पहा माहिना । तुम भूल रही हो। इस राजनीति का उजाला हमेशा नहीं रहगा । इमे पान के लिये तुमने क्या नही किया वह भी मुभसे नहीं छिपा है। चुप रहिए थे यास वावू । निकल जाइये यहा से। मैं मापके लिए अब कुछ भी नही वर सक्तो। वत कर लिया, सह लिया । माप जिम तरह के जीवन के अभ्यस्त है उससे वहा नक काई हो नहीं सकता किसी के लिए भो। साहिला, तुम अपनी मौकात भूल गई हो। सत्ता क नशे म तुम्हारी बुद्धि पर परदा डाल दिया है। चलता हूँ मैं। देखता हूँ रितने दिन इस पद -ह पाती हो तुम । प्राज हो।नोरन्दी बाबू से मिलता है। श्रेयांस वाचू मिल जाईये मर कमरे से। य', मुझे का पदम उठाना पड़े। 86 । तुम जसी औरतो से और क्या प्राशा की जा सकती है। मै भी देख लू गा। जाता है। पर याद रखना मै जिसे इस जगह लाकर खडा कर सकता हू कल उसे सड़क पर खड़ा कर दन में एक क्षण भी नहीं लगेगा मुझे। श्रेयास वावू । निक्ल जानो यहा से । मरो तेज आवाज को सुन मरे सचिव दौडे कमरे मे आ गय । घबराते पूछते हैं। क्या बात है मैडम। कुछ भी नहीं । इह वाहर भिजवा दो और अकेला छोड दो मुझे। सब लोग कमरे से बाहर निकल गये है। अपनी कुर्सी पर सिर टिका प्र िवद कर लेती हूँ । कैसा भी ध्यान नहीं रहता मुझे। होश पाता है तब देखा मेरी साडी जगह-जगह से प्रासूओ से भीग गई है। अपनी कुर्सी से उठ बाथरूम में जा मुह धो अपनी फुर्सी पर प्रा वैठती हू । माज अचानक यह सव कमे हो गया समझ नहीं पाती। पर सोचती हू जिस मानसिक यत्रणा पो पन्द्रह वप मैंन सहन किया है उसकी परिणिती जैसी' हुई उसका मुझे तनिक भी दुख नहीं है । श्रेयांस वाबू मुझे एक विलीने के तरह मुझे पैसो के प्रभाव में अगुलियो से खिलाते रहे मुझे। चुपचाप अपन कमरे से उठ, लिपट से नीचे उतर कार मे मा वैठती है। डाईवर से वगल चलने को कहती हू। मन बहुत उदास है प्राज । जो भी हुमा मच्या हो रहा । दिन-रात श्रेयासजी की किचकिच तो खत्म हुई। 87 साहिलाजी। बुरा मान गई माप। उस सच्चाई यो पाप मना भी नहीं पर सरती। कितना रूपया तुम्हारे पर पच हुमा है। जिमका पसा भी हिसाय हो हो सरता। मुख्य तो प्रमो मापफे चुनाय पर बत्तीस लाय रूपय स प्राधिक मरे श्रेयांग पचम ये समस म सही लगा लिया। 37 भूल सकती है माप। श्रेयासजो। मापन गुनाव म ग्रच पिया होगा। पर मैन सभी एक पैसा लगाने को भी प्रासना यो पो या मापस । माप यह दें यदि मैन कभी पहा तर हो। साहिला । तुम एते बदल जामोगा। साचा भी नहीं था। तुम पी क्या एक मामूली वायू यो पली। जिसे सहारा दवर मैन पर दिया, मान सरकार म मन्त्री बनपर बैठी हा ता मेरी वजह से । चुप रहिये थे यांस याबू । पाप हा यह व्यक्ति है जि होन मेरे पति को पहिल नौकरी से निकलवाया फिर उ ह माथि, मानसिक यातना देकर पागल पर डाला। माज से पद्रह साल से अधिक बीते मरा पति पागलखाने यो सीखचो ये पोचे अपना सिर फोड़ रहा है। पाप म इतनी नी मानवता नही थी कि उन पर तरस पाते । मर शरीर के रोम-रोम का रस निचोड हाला मापने मोर उसी के महारे एकक वा दूसरो, फिर तीसरी मिल पर मिले पडो परत चले गये। पाप हर रात विम्तर बदलत रहे मरे । मेरी विवशता, मेरी चटी का जिदा रखने के लिये सब पता नहीं क्यो में वह सय परती चली गई जो मापने रहा। माहिला । तुम भूल रही हो। इस राजनीति का उजाला हमेशा नही रहगा । इसे पाने के लिये तुमने क्या नहीं क्यिा यह भी मुझसे नहीं छिपा है। चुप रहिये श्रेयास बाबू । निक्ल जाइये यहा से। मैं मापके लिए प्रय कुछ भी नही कर सकती। बहुत कर लिया, सह लिया। पाप जिम तरह के जीवन के अभ्यस्त है उससे वडा नक कोई हो नहीं सकता किसी के लिए भी। साहिला, तुम अपनी मौकात भूल गई हो। सत्ता के नशे म तुम्हारी बुद्धि पर परदा डाल दिया है। चलता हू म । देखता हूँ कितने दिन इस पद रह पाती हो तुम। अाज ही नोचदी बाबू से मिलता है। श्रेयास बाबू निकल जाईये भरे पमरे से। यह न हो मुझे कोई दूसरा वाम उठाना पड़े। । 86 । । तुम जैसो पौरता से मोर क्या प्राशा की जा सकती है। मै भी देख लू गा। जाता है। पर याद रखना मै जिसे इस जगह नाकर खडा कर सकता हू कल उसे सड़क पर खडा वर दने में एक क्षण भी नहीं लगेगा मुझे। श्रेयास बाबू । निक्ल जाम्रो यहा से । मेरी तज आवाज को सुन मरे सचिव दौडे कमरे मे आ गये । घबराते पूछते है। क्या बात है मडम । कुछ भी नही । इह वाहर भिजवा दो और अकेला छोड दो मुझे। सब लोग कमरे से बाहर निकल गये है। अपनी कुर्सी पर सिर टिका, पाखें वर कर लेती हू । कैसा भी ध्यान नही रहता मुझे। होश आता है तब देखा मेरी साडी जगह-जगह से मामूओ मे भीग गई है। अपनी कुर्सी से उठ बाथरूम मे जा मुह धो अपनी फुर्सी पर भा वैठती हू । माज अचानक यह सब कैस हो गया समझ नहीं पाती। पर सोचती हू जिंस' मानसिक यत्रणा को पद्रह वर्ष मैंने सहन किया है उसकी परिणिती जसी' हुई उसका मुझे तनिक भी दुख नहीं है । श्रेयांस वाबू मुझे एक खिलौने के तरह मुझे पैसा के प्रभाव मे अगुलियो से खिलाते रह मुझे। चुपचाप अपने कमरे से उठ, लिफ्ट से नीचे उतर कार में प्रा बैठती हू । गईवर से वगले चलने को कहती हू । मन बहुत उदास है प्राज । जो भी हुप्रा प्रच्छा ही रहा । दिन-रात मासजी की किचकिच तो खत्म हुई। 87 इक्कीस रात के कोई नौ वजन वाले हैं। इला पाने कमरे म वठी या तो पढ़ रही होगी या सो गइ होगी। बाहर प्रहाते में किसो गाडी के रूकन की पावाज आती है। दरवाजे पर आ किसी ने घण्टी बजाई है। मुझे माश्चय होता है सुरक्षा क्मचारियो ने उह रोका तक नहीं जो भी लोग आये हैं । उठ दरवाजा खोलती हू। रामबलि पाण्य प्रोवरकोट पहिन मेरे सामने खड पाईये पान्थ्य जी। माप तो जल्दी पाने वाले थे। पापकी ही प्रतीक्षा कर रही थी। फिर लगा शायद माज नही पायेंग। आना तो जल्दी ही था। पर मजिस्ट्रेट के यहा बापी समय लग गया। वह मेरे भनीजे रामावतार को जमानत तक करने को तयार नहीं। बहुत समभाया पर माना नहीं वह । दखेंगे उस भी। कब तक नहीं करता वह । उसे अभी हम क्या है शायद मालूम नही ह उसे । पायजी प्रापको कौन नहीं जानता। वैसे ही जिद पर पा गया होगा। जिद पर तो नही था वह । कह रहा था ऊपर से प्रादेश हो ऐसे हैं । लगता है नौच ती बाबू की हरक्त है वह । मैंने भी सोच लिया है उह भी ठीक से समझा दंगा कि वे मेरे साथ अधिक होलहुज्जत नही करें वरना परि- वाम ठोक नही होगे। माप बेकार हो इतना परेशान हो रहे है । सब ठीक हो जायेगा। क्या खाक ठीक हो जायेगा। मरे पक्ष के विधायक के सामने कसी रिकिरी हो रही है प्राप भी कहा समझ रही हैं । राजनीति के दगल म यह पहली मात खा रहा हू मैं। नौच दी वावू सी० एम० हैं वह भी मरे बल पर। कल से ही देखो क्या गुल खिलाता हू बनके खिलाफ। मुझे पार्टी से निक्लवान का पूरा पडयान चला रखा है उहोने । चार दिन उह जमीन नही दिखा दी ता फिर लानत है मुझ पर। ठीक है रामावतार अदर है तो क्या हुया उसके मोर कायकर्ता तो नही मर गये। देखता हू मैं भी। 88 आप बहुत उत्तेजित हो रहे हैं। प्रापको समस्या का हल तो मेर पास है और चुटकी बजाते ही सब ठीक हो जायेगा। साहिलाजी ठोक है । गहमश्रालय मापके पास है पर नोच दो बावू जो अडियल बने बैठे हैं। उनका कसे समझायोगी आप। उनको चिन्ता माप मत कर । वह मेरा काम है। प्राप तो हुक्म करिये करना क्या है। माप समझ ही नहीं रही हैं मेरी बात जरा सोचिये मेरे विधायका मे मेरी कितनो हेठी हो रही है। मब कह रहे हैं म अपने भतीजे तक को नही बचा पा रहा। चलो मापका यह काम मैं अमी कर देती है। पर प्रापमो मेरा भी एक काम करना होगा। एक नही पचास काम कहिये। रामबलि आपके लिये जान दे देगा। ब्राह्मण हू यदि मैंने कह दिया तो पीछे नही हटू गा। आप तो काम वताईये करना क्या है। छोटा सा काम है। आपके लागो से रहवर यास के मिलो कारखाना मे एक एक कर हडताले, तालेब दी करवा दे। यह पाप कह रही है। समझ नही पा रहा भाप यह सब क्यो चाहती हैं। पापके और उनके सम्व ध तो बड़े खास हैं। खास सम्बन्ध ये कभी अब मैं जो कह रही हू यदि प्राप करवा सकें। तो जो पाप चाहगे सब इसी समय हो जायेगा। फिर भी तो बताइये बात क्या है। पायजी, प्राज सचिवालय, मरे कमरे म ही उहोने जो मेरा अपमान क्यिा उसे भूल नहीं सक्ती म। वे अपनी औकात भूल गये थे ऐसा लगा मुझे उनकी बातो स । एक सड़क के मादमी से भी गन्दी भापा में पेश पाये मेरे साय । मैं कोई उनकी रखैल या लाडो तो है नहीं। क्या कह रही है प्राप। 2 यास था क्या। गांव से पाया निपट मूख दो पैसे का आदमो। वहो तो उसका काम ही तमाम करवा दूंमाज रात को ही। नहीं, अभी उसको प्रावश्यक्ता नही। अभी तो जितना मने प्रापमे कहा उत्तना हो जाए वही काफी होगा। सेठ बना फिरता हैं वह । अक्ल ठिकाने पा जायेगी। 89 साहिलाजी आपसे वायदा रहा मेरा एक नही उमरे सार कारखानो म कल ही ताले ठुक्वा देता है। उसके मिलो के सारे मजदूर नता मरे घर पर रहते हैं दिन-रात । सुवह ही बुलवा लेता हू । सबका भर काम क लिये क्या सोचा है प्रापन । आपके काम के लिये सोचना क्या है मजिस्ट्रेट के यहा फोन मिलायो इसी समय। मिलाता है। उसे साफ कह दो सुबह जमानत ने आदेश घर से ही जल भिजवा दे। रामावतार के घर आते ही श्रेयास के काम पर लगा देता हू उसको भी । लो बात करो सुद ही बोल रहा है। फोन सिटी मजिस्ट्रेट बोल रह है । मै साहिला देवो । दखिये। रामा- वतार पर गाव वाला केस है, कल सुबह ही उसकी जमानत के पादश जल भिजवा दें। आप कठिनाइ कह रहे है । कुछ भी सुनना नहीं चाहता जो कह रही है उसे पूरा करके कल फोन पर बताये मुझे । हा, हां सब मालूम है मुझे उस केस के बारे मे । पर जा कहा जा रहा है वैसा ही करें। दखिये सक्षेप मे यही कहना चाहती है कि उसकी कल तक जमानत हा जानी चाहिय नहीं तो जमानत करने के लिय जापने जो एक लाख रूपये की माग का है आपके खिलाफ जाच के मादेश कल ही हो जायेंग। मैं कुछ नहीं सुनना चाहती। कहत फोन को पटक देती है। पाण्डेयजी की पोर देखती है । उनके चेहरे पर विजय की मुस्कान है । कहते हैं- मान गये आपको । प्रशासन ऐसे चलता है। यह सरकार के नौकर सोचते हैं सरकार के लोग चला रहे हैं। उधर नौचदीजी का पारा चढ जायगा । जव उह मालूम होगा। उनकी चिता छोडिये । म बात कर लू गी उनसे । एक सीय, वफादार, नौजवान पार्टी के कायकर्ता के साथ हो रहे जुल्म को मैं बर्दाश्त नही पर सरती। जवान लडके है गलतिया हो ही जाती हैं। मबसे बड़ी बात तो मापको प्रतिष्ठा की है। इस बात को चि ता अधिक है मुझे। पापका पार्टी म क्या स्थान है मैं समझती हूँ। साहिलाजी। आप जैसी समझदार, नेक नेता की जरूरत है हम । यह चूने-खू मट, सठियाए लोग पता नहीं कैसे शासन चला रह हैं। उपर क 90 भरोसे ही गाडी चल रही है । समय काफी हो गया । अब चलू ग गा मैं। प्रापसे बडा उपकार क्यिा है मुझ पर । पाण्न्यजी शमि दा कर रह है पाप तो मुझे। पापको समस्या क्या मेरी नही है। ठीक है नीच दो वायू के साथ प्रापके सम्बध इन दिना ठीक नही है । पर पार्टी से वफादार सनिय तो हैं ही आप एक बात जरूर ध्यान रखे माज की आपके साथ रही बातचीत को गुप्त हो रखें माप । यह कहने की आवश्यक्ता नहीं हैं प्रापको। रही आपके काम की बात वह कल ही हो जायेगा। उनकी मिल के सारे मजदूर नेता मेरे टुक्डो पर पल कर नेता बने है । क्ल हो बुलवा लेता हू। पाप पाराम करें। पापका अपमान करन वाला आदमी सच वात तो यह है जिन्दा रहने लायक नहीं है। चलता हूँ। पायजी को दरवाजे पर छोडने पाती । अभिवादन के बाद वे अपनी झोगा जीप मे जा बैठे है जिसमे चार छ वन्दुकधारी भी बैठे वतिया रहे हैं। जीप वगले से बाहर निकल गई है। दरवाजा ब द कर अपने कमरे मे बिस्तर पर पर लेटती हू । सोचती हूँ श्रेयास जैसे समाज कटको का उखाड़ फेंकने का उपयुक्त समय मा गया है अब । 91

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ऐसी बात नहीं है मैडम । हमारे विभाग का क्या दाप है इसमे । दूसरा थे यासजी का कौनसा सारा पैसा लगा हुआ है इन उद्योगो मे जनता का पैसा - माप एक काम कर जनसम्पक विभाग को कहकर इस दुघटना की राज- कीय स्तर पर जांच कराई जाने की विज्ञप्ति प्रेस को जारी करवा दें मेरे नाम से । राज्य सरकार की पूजी भी तो इसम लगी हुई है। अभी यह देता हूँ जनसम्पर्क विभाग के निदेशक को। वे घर पर ही होगे। तव ही फोन की घटी बज उठती है। फोन उठाती हूँ कौन । नमस्कार । एक मिनिट रूकिये। माथुर साहव आप भपन कमरे में जाएँ कोई जरूरी बात करनी है। मेरे सचिव कमरे से बाहर चले गये हैं । कहिये पाण्डेयजी । हा, देखे है समाचार पत्र । पर यह समझ नहीं पाया इतनी भीषण आग लगी कैसे। प्रापको एसा नही करना चाहिये था। थोडा ता धय रखते और देखिय मने हडताल, तालाबदी के लिये जरूर कहा था। पर इस सबसे तो नुक्सान ही नुकसान है। राष्ट्रीय हानि को भी सोचिये जरा । खैर, थोडा ध्यान से काम करें इतनी जल्दबाजी और उग्रता की पाव- श्यकता नही है । आप शाम मा पा रह हैं जरूर भाईये, पर कुछ देर थे। हा, थे यासमी को कोई प्रतिक्रिया मालूम हुई क्या। ठीक कह रहे माप वह तो अब होगी । मागे हो कर उनसे मत करिये पाप । हा, शाम को मिल रहे हैं। फोन रखती हूँ। इला कालेज जाने को तैयारी कर रही है। उससे पूछती है- और बटे कैसे चल रहा है तुम्हारा काम। अच्छा ही है मम्मी। माज का क्या कायक्रम है पापका । कोई विशेष नहीं। सचिवालय जाऊगी थोडी देर के लिये । प्राप भी शाम को फिल्म चलती मरे साथ। यह सम्भव नहीं। तुम ही हो माना। ठीक है, मैं जा रही हूँ। 93 फिर फोन को घण्टी बज उठतो है । सचिव माय पूछत हैं - थे यासजी का फोन है। मना कर दो उह घर पर नहीं हूँ मैं । सोफे से उठ ड्रेसिंग टेवल पर जा चठती हू । वालो या संवार माडी बदलने लगती हू । बाहर मा सचिव माथुर से सचिवालय चलन का कहती हू। दोनो कार मे बैठते है । मुख्य द्वार पर खडे सतरी ने अभिवादन किया है। उत्तर मे हाथ हिला दती हू । गाडी मुख्य मडव पर तेज गति से भाग जा रही है। माथुर साहब मुख्यमनीजी के यहा मिलते हुए सचिवालय चलेंगे। जैसा माप कह । गाडी मुख्यमत्री निवास के अहाते म जा सकती है। माथुर जाकर घटी बजाते हैं । दरवाजा खुला है। दरवाजे पर हरिया है । भाईये साहिलाजी । सी० एम० साहा मापको याद ही कर रहे थे। गाडी से उतर नौच दी वावूजी के कमरे मे जाती हू । माथुर बाहर कार में जा बैठे हैं। प्राजो, साहिला । कैसे चल रहा कामकाज । श्रेयासजी के मिल वाला समाचार तो देखा ही होगा तुमने । हो पहा था। कुछ देर पहिले फोन आया था उना। बडे परेशान थे। यह रह उद्योग मनालय से उनके कैवल्स वाले कारखाने का पैसा नहीं मिल रहा इधर कपडे वाली मिल मे सारा नाश हो गया। कुछ भी पता नहीं लग सका बता रहे थे श्रेयास। सबसे ज्यादा दुख तो मरने वालो का है। कह रहे ये तीस- पतीस लाख रूपया तुम्हारे चुनाव पर लगा दिया उहोने । तुम एक जाच आयोग का गठन कर डालो मोर समाचार पत्रों में विज्ञप्ति जारी करदा दो राज्य सरकार की ओर से। वह मैंने जनसम्पक विभाग को कहलवा दिया है। वस बस काफी है। इससे और कुछ नही तो श्रेयास के दिल पर ठपने छोटे तो पड हो जायेंगे। जाच पायोग यो रिपोट मायेगी तब की तब देखो जायेगी। हरिवाए, साहिला की सूझबूझ देख लो तुमने । हम जो साच रहे थे साहिला वह वाम परके ही मिलन पाई है। ये 94 नौच दीवादू इनको काबलियत की झूठी तारीफ तो मैंने कभी को नहीं मापसे । हम कम पारखो मत समझिये पाप । समे कौन सा शक है। ला कॉफी पियो आर लोग। थोडे गम हो जापा। नौव दोबावू काफी से हो गम करना चाह रह है क्या । सुबह-सुबह तो इसी से गम हो जाईये । उसका समय रात का है। रात को उसके साथ साहिता भी साथ हो तब ही गर्मात हैं हम तो अव । वरना हरिबार आप तानो इन घुटनो मे पहा ताकत रह गई है हमारे । और ठहाका मार के हस पडते हैं । मेरो और उहोने विशेष ढग से देखा है। फिर बोलत है- श्रेयास का फोन आये तो दो मीठे शब्द वोल लेना बस । दुखी तो है ही बेचारा । तुम्हारे चुनाव और इस अग्निकाण्ड में तो मैं समझता हू काफी दव गया है वह । इश्योरे स वाले भी पता नहीं क्ब तक पैसा दे पाते हैं। पैसे से क्या हो जायगा मिल दोबारा शुरू होने मे चार-पाच महीने तो पाराम से लग जायेंगे । खर, करता रहगा उसे काम करना है तो। और क्या कायक्रम है तुम्हारा। सचिवालय जा रही थी। सोवा पापसे मिलते हुए निकल जाऊ । वह तो अच्छा किया । परसो देहली जा रहा हूँ। तुम भी चाहो तो चली चलना । हरिबाबू भी जा रहे हैं। चलेग । मुझे प्राज्ञा दे इस समय । चलो तुम । हरिवाबू भाप बैठो। प्रापसे पूरी बात हुई कहां है। बाहर दरवाजे तर हरिबाबू छोडने पाये है। अपनी गाडी मे जा बैठती हूँ। मरे हरिबाबू को नमस्कार करते ही कार तेजी से बाहर मुख्य सडक पर मा गई है। मैडम, सचिवालय ही चलना है ना भव । हात तेजी से हम सचिवालय परिसर म जा पहुचत हैं। लिपट से ऊपर चौथी मजिल पर पहुच अपने कमरे मे जा बैठती है। पूरे सचिवालय मे भोड-भाड का वातावरण है। सचिव कक्ष से माथुर कहते हैं श्रेयाजी का फोन है। 95 लामो मुझे दी। हा। कहिये । पढ लिया था। वडा दुख हुअा अापके व्यवहार से बिलकुल अस तुष्ट नही हूँ मैं । सुबह जसे हो पढ़ा जनमम्पक निदे- शक को मैन विज्ञप्ति भिजवा दी और सचिवालय भी दोहपर इमीलिये प्राई कि एक जाच आयोग का गठन कर दिया जाये। क्यो नही। पाप भी अपना एक सदस्य उसमें अवश्य रख सकते हैं। देखिये श्रेयासजी राज्य सरकार का भी तो कितना पैसा लगा हुआ है उसमे। हमसे अधिक से अधिक जो भी सहायता हो सकेगी जरूर करेंगे। केबल्स मिल्स के बारे में भाज ही बात कर लेती हूँ मनजिंग डाईरेक्टर से । माप चिता नहीं कर ईश्वर सब अच्छा करेगा। ऐसे नहीं क्षमा करने की बात कहकर मिदा कर रहे मुझे माप । विल्कुल नाराज नही हू मापसे । पाप भी उद्योग भवन हो पाईये। अभी ही वात कर लेतो हू । धन्यवाद । नमस्कार । फोन रख देती हू । सोचती हू |यास वावू का दिमाग हल्के से भटके में ठोक होने लगा है। खिडकी से सचिवालय परिसर मे घुस प्राय जुल्म और नारेबाजी की मावाजे आ रहा है। खडी हो नीचे देखती हू । माग खुली जीप मे शकरसेन मालाएँ गले म डाले खडे है । पोछे लम्बा जुलूस है। अपनी कुर्सी पर प्रा वटनी हू । सचिव कक्ष से घण्टी बजता है । फोन उठा सुनती हूँ- यह नोचे कौन लोग है माथुर साहब । वीरनगर के लोग हैं । मुझसे ही मिलना चाहते ह । पर बात क्या है । वह तो आपमे हा मिलने को कह रहे है । ठीक है। दो-चार लोगो को चूलवा लें। अगले कुछ ही क्षणो मे शरसेन, मोहसिन भाई, रघुनाथजी मेर कमरे मे प्रवेश करते हैं। बठिये पाप लोग। इतना वडा जुलूस शबरजी किस वजह से । साहिलाजी। वीरनगर की जनता याय मागने आई है आपके पास । इनके साथ प्रापकी सरकार ने, सेठ श्रेयास प्रमाद ने धोखा किया हैं । कैसा धोखा। क्या कह रहे है आप । श्रेयास केबल्स के लिये प्रापने गरीब लोगो के सता पर कब्जे वरन के प्रादेश जो दिय है वह गलत है । बातचीत के समय यास सेठ ने पाच हजार रूपये बीघा जमीन के हिसाब स पंसा दने को कहा था अब वे एक हजार 96 (रा रूपये बीघा जमीन के सौदा तय होने की बात कर रहे है। उनका सचिव माणिक गये सप्ताह गाव गया था। वहां उसने एक हजार रूपये बीघा जमीन का भाव तय होने की बात कही। गाव वाले भडक उठे। पूरा गाव आपसे मिलन पाया है। मै इसमे क्या कर सकती है। माप लोगो के साथ श्रेयासजी या उनके मादमी माणिक ने क्या भाव तय किया मुझे कुछ भी नहीं मालूम । शकरसेन तमककर कहते हैं-साहिलाजी। भाव कुछ भी तय हुमा हो गाव वालो ने यह निश्चय कर लिया है श्रेयास बाबू को गाव की एक गज जमीन भी नहीं बेचेंगे वे। शकरसेनजी जमीन के भाव को तो मभी भी बातचीत करके ठीक कर सकते हैं पाप लोग। यो भी सोचिय वीरनगन में इतने वडे कारखाने मे आपके क्षेत्र के लोगो को काम भी मिलेगा, अहा का रोजगार वढेगा । यह सब झूठी बातें हैं । हमे मालूम हुमा है जो मिल वहा लगाया जा रहा है वह पूरा का पूरा माटोमेटिक है, कम्पोजिट प्लाट लग रहा है । सौ- पचास नौकर-चपरासियो की नौकरी मिल भी गई तो उससे काई बहुत बड़ा भला हो जायेगा। ,हम नही मानते । हम तो मापसे यही कहने पाये है कि गाव वाले एक गज जमीन भी देने को तैयार नहीं है और आपकी सरकार या थे यास बाबू हमारे पर जोर डालेंगे तो पच्छा नही होगम। हम उस मिल को कभी भी नही लगाने देंगे। मोहसिन भाई । श्रेयासजी के मिल की सारी मशीनें जापान से मा गई हैं। ऐसी हालत मे कितना मुश्किल हो जायेगा उनके साथ । देखिये, साहिलादेवीजी। हम तो आपको इज्जत करते हैं। मापसे वीर- नगर के लोगो की गुजारिश है कि किसी भी कीमत पर वहाँ इस कारखाने को नहीं लगन दिया जाये। वीरनगर के अलावा यासजी कही भी कुछ करें तो हमे ऐतराज नही । प्रभी हम सब लोग श्रेयांसजी के घर ही जा रह है। पाप लोग बात करके देखें उनसे । वे क्या कहत हैं। हो सकता है जो कीमत जमीन की चाहते हैं आपको मिल जाये । देखिये मिनिस्टर साहिबा । जो आदमी हमारे गाँव के भोले-भाले किसानो के साथ शुरू मे ही दगा कर सकता है उसका मागे हम कैसा भी विश्वास नहीं कर सकते। सारे गांव के लोगो ने निश्चय कर लिया है कि हमारे को बार- पाने के लिये जमीन देनी ही नहीं है। हम भी देखते हैं कैसे लगाते है वे . । । 97 । कारणाना। मनी तो हम वही थेपासबापू IIT जा रह हैं। प्रापा यही प्राथना है नि सरकारी दयार किमो माग ग नही डार प्रार। मुगायत्री जी न शाम को बातचीत करने को कहा है। उनस भी मिन लेंगे। हम भा हो। माप मिल लें उनसे । मैं विचार रूगी। मैं भी उस बात पर लता हूँ अभा। अच्छा नमस्कार साहर। नीर लाग र तजार कर रह हाग। सब लोग उठ तजी स कमर से बाहर 7 गये है। सचिव मायुर मर पास पात हैं- मडम । इस चकार म बिल्कुल हाथ नहीं जा पाप । इन लोगो के माय रामवलि पाण्य के भतीजे रामावतार भी प। वे मिलन नहीं प्राय मापस नोचे दूमरी जीप में बैठे हैं। एसा लग रहा है श्रेयासजी 7 खिलाफ किसी न भडका दिया है इन लोगो को। यरना यहो ताव के लिय श्रेयासजी के मिल के गेस्ट हाऊस म दस दस दिन वही पड रहते थे । मापुर साहब कुछ समझ नहीं पा रहा । मैं कर भा क्या सकती हूँ। श्रेयामजी से बात कर लेती और at क्या। मेरे विधानसभा क्षय म इतना वडा कारखाना लग रहा है' मुझे ता खुशी थी। प्राप जरा उद्योग भवन ने मनजिंग डाईरेक्टर स मेरी बात करवायो। इनसे बात करने के बाद श्रेयांस जी से बात कर गी। लामो मुझे दो। कोन । मैनेजिंग डाईरेक्टर पाण्यजी बोल रहे हैं। नमस्कार । अापके यहा से श्रे पास केवल्स को दी जाने वाली राशि का चक क्या साहुमा है । उनके कारखाने की मशीनें भारत पहुच गई है । वे छुडवाना चाहते है । प्राप जब तक चैक नही देग क से सम्भव होगा वह सब कुछ । क्या । उन्हाने प्रोजक्ट का इनिशियल रूपया भी जमा नहीं कराया है जब तक । क्तिरा स्पया है वह । कुल सौलह करोड । अच्छा, मच्छा तीन करोड वाकी है। ठीक है जब वे करवा दें आप जल्दी ही चैक जारी करवायें। नमस्कार । फान रख देती है। लगता है श्रेयास वावू चक्कर म पड गये हैं। इधर गाव वालो का या दोलन । देखती ह स्थितिया क्या रूप लेती है। फान उटा माथर को घर चलने को कहती हू व फाईनो का वस्ता लिय मर मर म प्राय है। आईय मडम चलते हैं। दोनो लिफ्ट से नोचे या वार म वठ घर की ओर निकल पडन हैं। १ 98 तेईस नीद मान लगी है। बैठी फाईले निवटा रही थी। रात के दस से अधिक बज रह हैं । इला भी फिल्म से लौट आयी है और अपने कमरे में सो रही है। वाहर अहाते मे किसी गाडी के प्रा रूबने की आवाज माती है। बाहर से किसी ने घण्टी बजाई। सोचती हू लोग इतनी देर रात को भी मिलना चाहते है । लगता है मेरी व्यक्तिगत जि दगी तो राजनीति म पाने के बाद समाप्त हो गई। तेज थकान के बावजूद उठ दरवाजा खोलती हू। सामने रामबलि पाय वडा सा शाल पाढे पडे हैं । इस समय पापन्यजी। मापने ही तो वहा था कुछ देर से ही मिलने पाऊ। वह तो ठीक है। अाप बैठिये । पैसे प्रापक पाने वाली बात ध्यान मे ही नही थी मेरे । नीद सो माने लगी थी वस सोने ही जा रही थी। कहिये क्या - समाचार हैं। समाचार तो आपको सब मालूम ही होगा। प्रापको जानकारी म दो नई बातें अवश्य जोडना चाहूगा। पहली श्रेयास सीमट दूसरा श्रेयास खाद के कारखान में भी माज दोपहर बाद तोलाय दी हो गई है। अभी अपने पर दोना कारखाना के मजदूर नेताओं को विदा करके प्राया है। रामावतार ने बडो भागदौड की । सुबह जल्दी ही घर से अपने पादमिया को ले निकल गया यो । पहिले पोरनगर गया वहीं गांव वालो से वात वर जुलूस तैयार करवा शकरसेन को आपके पास सचिवालय भिजवाया । फिर \ यास सीमट, श्रेयास पार्टीलाइजस जा वहाँ के मजदूर नेताप्रो से बात कर हडताल की घोषणा भरवा दी। एक क्षण भी वेचारा कही रूका नहीं है । वीस-वीस जीप, कारें दो दिनो से दौड रही हैं। बडा खर्चा हो रहा होगा फिर तो पापका । वह तो हो ही रहा है। पर शकरसैन उठा रहा है सारे खर्चे को। खूब पैसा कमाया है उमने जब हम मत्री थे। - 99 पर वह तो मरे पिलाफ चुनाव म खड़े भी तो हुए थे। वह सब चलता है। मैंने उसको साफ बता दिया है साहिलाजी वा उस दो कौडी के कारखान वाले ने जो मरमान किया है उनका क्षमा नही पर सकते हैं। हमारे कहन पर सब कर सकता है वह । मेरी समझ में नहीं पाया कुछ । सीधी सी बात है पापके सम्मान की रक्षा के लिये भागदौड कर रहा है, पंसा पच कर रहा है तो वह मापका सेवक बन गया है। उसकी पीठ पर मापका हाय रहेगा तो फिर सब काम फतह कर डालेगा वह । सब ही फोन को घण्टी बजती है। उठा वात करती हू- फोन । नोच दी बाबूजी। नमस्कार । हा, जानकारी तो है मुझे। कौन रामवलिजी करवा रहे है सब । हरिबाबू ने बताया है पापको। आप चिन्ता मही करें कल रामबलिजी से मिलने की कोशिश करूगी में। क्ल ही चलना है ना चलेंगे। अच्छा, नमस्कार। लो यासजी ने हरिवाबू को बताया कि यह सार काम आप करवा रह छोडिये भी साहिलाजी। नीच दीवायू के दोनो कुत्ता की परवाह नही करता मैं । माप तो हुक्म करिये भाग क्या करना है। वैसे भी नीच दीजी ने बताया कि हरिबाबू को लताड लगाई है उन्होने । हरिबाबू ने बडो गलती की थेयास सेठ को लेकर सी० एम० साहब के यही पहुच गय । इस पर बिफर पडे व। यह वह थे इन सेठो को मेर वगले लान की जरूरत नहीं। एक खास बात मोर कही हरिवाबू को कि इस सेठजी के सम्बध म जो भी बात करनी है मुझस करें। गलत क्या कहा हाने । गृहमत्रालय तो आपके पास ही है। नौच दी बाबू करा करगे। फिर एक यात इसम और समान झाई सी० एम० माप पर पूरा भरोसा करता है। पापने भो गजब हो कर दिया उन पर। हरिबाबू वैसे उनके करीब के लोगो मे माने जात हैं। पर माज तो मापने बताया उस हिसाब से तो हरिबाबू को पोछ छोड दिया प्रापन , ऐसा कुछ नही है पायजो । वन हो वह दिया होगा। २ - 100 साहिलाजी राजनीति मे ऐसे ही नही कहा जाता दूसरा एक-एक शब्द पा महत्व होता है। मापने जो बताया उससे साफ जाहिर है नौव दोबाबू की मबसे विश्वासपात्र बन चुकी है पाप । हमारा भी ध्यान रखिये। जब भी अवसर प्रायगा और मेरे से जो सम्भव होगा सब करूगी मापके लिये। नौच दीबाबू के विभाग से हमारे खिलाफ जो भी अफवाहे हो धीरे-धीरे उह भा साफ करें माप । मेरा व्यक्तिगत उनसे कोई झगडा है भी नहीं। प्रमी थोडा रुककर जरूर करें। यह श्रेयास वाली बात ठण्डी हो जाये जरा । माप देखते जाइये, कैसे मैं प्रापके हित में काम करती हू। मोका लगा और नौच दीवावू मान गये तो सीधा म श्रीमण्डल में भाजायेंगे माप । मत्री- मण्डल मे पता नहीं कब माना हो, नहीं हो फिलहाल किसी निगम मे अध्यक्ष ही बना लें। तो उसी में अपनी सवाए देता रहूगा। छोडिये, यह सब आगे की बातें है । आप तो श्रेयास को भोर कैसे सबक सिखाया जा सकता है बतायें मुझे। अब तो जो हुआ है वही क्या कम है। इसी से चक्करपन्नी हो गया होगा वह तो मभी इसकी प्रतिक्रिया देखिये आगे की सारी योजना मेरे दिमाग मे है। जब-जब आपसे सकेत मिलते रहो। काम बढ़ाता जाऊगा अपना । वसे हरिवाबू भी जरूर नाराज होग मुभसे । पर जब प्रापका साथ पकड लिया ऐ तो उनकी मिन्ता नहीं करता मैं । हमार सामने तो सीखा है राजनीति करना वह । कल देख लेना सारे अखवार श्रेयास के सारे उद्योगो मे हडताल और तालेवदी के समाचार होगे । क्ल दिल्ली जा रही हैं माप । विचार तो है। नोच दीवाबू कह रहे हैं। पार्टी हाईकमान से मिल माने के लिये। देख लेना । अभी तो ज्यादा अच्छा है दो-चार दिन यही रहकर यास की प्रतिक्रियाना, गतिविधियो को समझो आप। अभी वह हरिबाबू को माने पक्ष में ले आपको भी नुक्सान पहुवा सकता है। पापको इन दिनो सतक रहना चाहिये। मापका कहना सही है । कितना समय हुआ। ग्यारह से अधिक बज गया है। पाप सपक बनाये रखें मुझसे । ममी तो मुझे तेज नीद आ रही है । 1011 माराम करें माप । दिन भर काम में लगी रही। प्रभी तो दख रहा या पाईले निवटा पर ही उठी पी माप । पया परू । मापने जिम्मेदारिया जा टाल रपी है मुझ पर । मजार पर रही है. हम हैं क्या चीज । एर प्रना विशाया ही तो हैं । मापके महत्व या मैं समझती हू । क्षमा करें नाप द भी नहीं जानत । आपने इतना सम्मान दिया कृपा है । चलू गा में। एक बात विशेष म्ह है माप श्रेयास से बात करना तर भी बद कर डालें। सिर पटक्ने दो। देउता हू मैं भी यच तक प्रापपी शरण मैं नहीं पाता वह । चलू में। अच्छा, नमस्कार। नमस्कार। X चौबीस रात के सनाटे में कार सडक पर तेजी से दौडी जा रही थी। राष्ट्रीय मार्ग पर जापागमन अधिक था। एक बाद टूमरी गाडी या तो सामने से सर से निकल जाती या पीछे से ग्रागे को सडक पर फिसलती गुजर जाती। पाचे मेरे साय नौब दीवावू घर से चलते समय ही स्वदेशी की आधी से अधिव' बोतल गल के नीचे उतारकर कार में सवार हुए थे। बहुत देर से विचारने की मुद्रा मे गाल पर हाथ ररो कोहनी को कार मे रखे तकिये में दबाये सोचते रह थे । इस बार हाथ बढा उहोने मेरी गोद में रख दिया था। धार से बोले- साहिला। तुम्ह नीद पा रही है। नही तो। मुझे लग रहा है । मेर क वे पर अपना सिर टिका लो। मेरी पोर से किसी प्रतिक्रिया को न देख उहोने मुझे अपनी बाहो में सोच लिया था। सच्चाई यह थी कि चलते समय दो-तीन पेग मुझे भी अपने हाथो से पिता दिय 4 उहोन माने ही नहीं। बडे प्यार से बोले थे- लया रास्ता है इसके बिना क्टगा नहीं ले लो, हमारी बात मान भी लो। नही चाहत हुए भी पी ली थी। सोचा रात ठीक से कट बोत जायेगी। इस समय तक हल्का असर मुझ पर भी होने लगा था। नीचन्दीबाबू की बाहा का कसाव बढ रहा था। वह प्रादित मुद्रा में लगातार चूमे जा रहे थे। मुझे कैसी भी आपत्ति नहीं थी। विश्वस्त थी मैं कि नौपदीबाबू ग्रह निकारक जीव ही तो हैं । हल्की हंसी मी मा गई थी मुझे। जिसे सुना जा सरता था। मरा हाथ दबाते नोच दीजी ने पूक्ष था- सुख म डूब गई हो लगता है। हो। या ही मान लें। भला लग रहा है। क्यो नहीं। अव तो तुम परको राजनीतिज्ञ बन गई हो। यास बाबू के कारखानो, मिला को बद करवा दने ये कोई लाभ हुमा तुम्ह । 103 मेरा इन बातो से कोई सवध नहीं। प्रापन मे मान लिया थेयास बाबू के साथ हुई घटनामो म मुझे कोई सुख मिला हो । हरिबाबू कह रहे थे। उहोने तुम्हारा अपमान कर दिया था सचिवालय में मेर साथ कोई एसा व्यवहार किया भी नहीं जिसस में नाराज हाऊ । फिर यह सब हरिबाबू की बनाई हुई कहानी है। उस सेठ को घर ही ले माये इस सम्बध मे बात करने के लिये । डाट कर भगा दिया मैंने । हरिवा का यह तरीका अच्छा नहीं लगा मुझे। उनका मिल जल गया या हडताल होगई इन बाता को चाहते तो मुझ से सीधी बातें करत । सेठ इधर-उधर की बातें करता रहा। अच्छा नहीं लगा मुझे। हम सरकार चला रहे हैं। दो-चार सेठ लोगो की कृपा से तो सरकार चलती नहीं कि उही के सहारे बैठे रहे या सारा समय उनके लिये ही देते रहें । भाप बुरा नहीं मानें तो लगता है हरियावू की राजनीति कुछ इसी तरह की है। वह तो शुरू से यही कह रह हैं । हमने ध्यान नहीं दिया। मोर इसी का नतीजा है हमने कभी हमारा सोधा हाथ कहे जाने वाले रामवलि पाण्डेय के साथ हमारे सम्बध खराव हो गये। रामवलि की सबसे बड़ी खराबी यह है कि जल्दो उत्तेजित हो जाता है। उखाइ-पछाड शुरू कर देता है । यहा तक कि हिमा तक करवा डालता है। पाण्डेय है ना चौवीस घटे भग की तरग में रहता है। उसकी वफादारी में कोई कमी नहीं है। जान दे सकता है जिसके साथ भी हो वह । इन दिनो हमस क्टा-पटा रहता है पर खुल कर मेरे सामने नही भायेग कभी वह । उसम आंख की बडो शम है। भाजकल पता नहीं दिन कामो म उलझा हुआ है वह । वग्ना कभी-कभी फोन पर जरूर बात पर लेता था या सचिवालय मर कमरे में भाकर बैठ जाता था। उसके भतीज का क्या हाल है। वह भी नहीं दिखता। वह रामलि पाय से पाच पुट ज्यादा गहरा है जमीन मे । कभी मिलना हमा उससे । नहीं । जानती भी नहीं पौन है वह । मुझे वरना भो क्या है उसके बारे में जानकर। भापका मागदशन चाहिये मुझे तो। मुझ हरिबाबू मौर न हो रामरलि पाण्डेय पी चिता है। मुझे तो दोना एक जसे ही लगे। वैसे रामरलि जागीरदार मादमी है। हरिमायू कत हम, पार्टी वापिस में नाइ लगाता था। उनके क्षर म कोई प्रभार नहीं उतरा। अंपास प्रस. . 1048 लागी को साथ लगाये रहता है। थोडे बहुत और हाथ पैर मार लेता है । इससे अधिक कुछ नहीं। कार का मटका सा लगा। नौच दोबावू ने आगे की सीट पर अत्रत ड्राईवर से कहा- हुसन । नीद पाने लगी है क्या । नहीं साहब । स्पीड लेकर का ध्यान नहीं रहा। पाप आराम से बात- चीत करें। नीद आ रही हो तो आने वाले स्थान पर रोक कर चाय पी लेना। मुझे लग रहा है तुम्ह जब नीद आती है तब ही गलती करते हो। मुश्किल से पाच-सात मिनिट के बाद ही कोई गाव मा गया था। हुसैन ने चाय की होटलो से कुछ मागे साईड म गाडी को रोका । मैं दो मिनट मे चाय पीकर माया साहब। हुसैन । चाय तो मेरे पास रखी है। तुम्हारी चाय से काम नहीं चलेगा। ड्राइवरो को तज चाय चाहिये। माप लीजिये चाय। तुम लो। रात को चाय नहीं पीता मैं । यमस फ्लास्क से चाय निकाल पी लेती हूँ। थोडी ले लेते पाप। मेरी रात वाली चाय मेरे थैले म रखी है । ले लू गा मैं । अभी सुबह होने म चार घण्ट वाकी हैं । तब तक ही पहुच पायेगे हम । नौप दीवाबू ने थैले से वोतल निकाल मुह पर लगा ली थी। अधिक से प्रधिर पेट मे डाल ली। हुसैन भी तोट प्राया था। ध्यान से चलामो हुसन । व चिन्ता नही है साह्य । दिल्ली मारराम स पहुच जायेंगे। उसने गाडीको स्टार्ट कर तेजी से रपतार म ले पाया था। कुछ देर शाति छायी रही थी। फिर नीच दीवाबू ने मरी बगल म हाय डाल लिये थे। बहू मरी गोदी में प्रधलटी हालत म अपना सिर रख लिया था। मेरे गाल म हाय डाल लाऊज के नीचे के तीनो बटन खोल दिय । मोर गोकपिओ 105 मेरा इन बातो से कोई सवध नहीं। आपने कैमे मान लिया श्रेयास बाबू के साथ हुई घटनानो मे मुझे कोई सुख मिला हो। हरिबाबू कह रह थे। उहोने तुम्हारा अपमान कर दिया था सचिवालय म मेरे साथ कोई एसा व्यवहार किया भी नहीं जिससे मैं नाराज होऊ । फिर यह सब हरिबाबू को बनाई हुई कहानी है। उस सेठ को घर ही ले पाये इस सम्बध मे बात करने के लिये । डाट कर भगा दिया मैंने । हरिवावू का यह तरीका अच्छा नहीं लगा मुझे। उनका मिल जल गया या हडताल हागई इन बाता को चाहत तो मुझ से सोधी बातें करत । सेठ इधर-उधर की बातें करता रहा। अच्छा नहीं लगा मुझे। हम सरकार चला रहे है । दो-चार सेठ लोगो की कृपा से तो सरकार चलती नही कि उ ही के सहारे बैठे रहें या सारा समय उनके लिये ही देते रहें । माप बुरा नहीं मानें तो लगता है हरिबाबू की राजनीति कुछ इसी तरह की है। वह तो शुरू से यही कह रह हैं । हमने ध्यान नही लिया। और इसी का नतीजा है हमने कभी हमारा सीधा हाय कह जाने वाले रामवलि पाण्डेय के साथ हमारे सम्बध खराब हो गये। रामवलि को सबसे बड़ी खराबी यह है कि जल्दी उत्तेजित हो जाता है। उखाड-पछाड शुरू कर देता है । यहा तक कि हिमा तक करवा डालता है। पाण्य है ना चौबीस घटे भग की तरग में रहता है। उसकी वफादारी में कोई कमी नही है। जान दे सकता है जिसके साथ भी हो वह । इन दिनो हमसे क्टा-कटा रहता है पर खुल कर मरे सामने नही पायेगा कभी वह । उसम आंख की बडी शम है। प्राजकल पता नही किन कामो म उलझा हुआ है वह । वरना कभी कभी फोन पर जरूर बात कर लेता था या सचिवालय,मरे कमरे मे पाकर बैठ जाता था। उसके भतीजे का क्या हाल है। वह भी नहीं दिखता। वह रामबलि पाण्य से पाच फुट ज्यादा गहरा है जमीन मे । कभी मिलना हुमा उससे। नहीं । जानती भी नही कौन है वह। मुझे वरना भी क्या है उसक बार में जानकर । भापका मागदशन चाहिये मुझे तो। मुक न हरिबाबू मोर न ही रामलि पाण्डेय की चिता है। मुझे तो दोनो एक जस ही लगे। वसे रामबलि जागीरदार प्रादमी हे । हरिबाबू कल तक पार्टी वाफिस मे भाड़ लगाता था। उनके भत्र म कोई प्रभाव नही उनका। प्रयास अस. 1041 पच्चीस सुबह से शाम होने माई पूरा समय हाईकमान के महामत्रो, कार्यालय, केन्द्रीय मत्रीमडल के यहा एक के बाद एक मिलत-मिलते ही दिन पूरा हो गया । दिन मे दस मिनिट भी विश्राम करने को कही नहीं मिले। जिनसे भी मिले नौपदीबाबू ने राज्य मश्रीमडल मे मेरे काय को महत्वपूण एव निष्ठा से किया जाना बताया। उ होने तो महामंत्री को यहा तक भी कहा कि क्त- मान में मैं राज्य की राजनीति में उनके लिये दाये हाथ के रूप में काम कर रही है। नौच दोबाबू के केन्द्रीय हाईकमान कार्यालय मे, मत्रीमण्डल के लोगों के साथ गाढे सम्बधा को अपनी प्राता से देखा लगा उनकी हर बात को वह लोग पूरी गभीरता से ले रहे है । गये दिनो हरिबाबू की पूजीपतिया के साथ रहे गठब धन को भी पार्टी हाईकमान के सामने उ होने अनुचित पोर पार्टी की छवि का धूमिल करन की कायवाही बताया। उनकी इस बात पर पार्टी द्वारा वठोर कदम उठाने तक की बात कही गई। सारी बातचीत नौचदी बापू के तरीको को मैंने वारीका के साथ समभा और परखा था। रात के दस बजने को है । नौच दीवाबू राजधानी में किसी वरिष्ठ नना से मिलन गये हुये है। प्रत वे जिन लागो से मिलने का कायक्रम बनाकर पाये है उसे पूरा करने में लगे है । दिन भर की थकान से नीद नही पा रही। परो में तेज दद हो गया है । नौबन्दीजी का वग खोल असम रखी उनकी भाशा की वोतल निकाल टेवल पर रखे ग्लास म एक बडा पग वना तत्री से गले के नीचे उतार लेती है। शायद इसस ही नीद पा जाये। तक्यिा लगा लेट जाती हू । कमरे में लगी वातानुकुलन की मशीन के गम हवा के मौके काटती सर्दी मे भले लग रह है । बचेनी सी अनुभव कर रही हू । बिस्तर पर लेटे लेटे हाथ वढा टेवल पर रखी बोतल से एक बडा पैग और तैयार कर पी जाती हू। नौच दो बाबू की तरह धीरे-धीरे पीना रठिन है मेरे लिये । वडी तल्ख और काटने वाला स्वाद है इसका । मब लगा भाशा का हल्का सा प्रभाव मुझ पर होने लगा है। सुखद लगता है। हाथ बढा टेबल पर रखे ट्राजिस्टर को चालू कर फिल्मी गाने - 107 से खेलने लगे थे। गुलियो से सहलाते रह 2 । उह तज नशा हो पाया था। भरे शरीर पर लगा था अनगिनत चीटिया रेगन लगी थी। इस बार मैंन वा को उन पर पूरा दवा दिया था। व मदमस्त हो गये । घोरे स अस्पुट शब्दा म बोल- क्तिना सभाल कर रखा है तुमने इनको । अच्छा लग रहा है । एक हाय अभी भी मेरे वक्षस्थल पर यहां स वहाँ चल रहा रहा था। एसा लगता था उन पर काम का भूत चढ़ा हुआ था। एक तज तूफान उनम उठा और शात हो गया था । उहोने अपना सिर मेरो गाद म रख लिया या। कुछ देर उनक हाय हल्के-हल्के मेरे शरीर पर यहां से वहा चलते रहे फिर रूक गये थे । अव व सामान्य रूप से लेटे, तेज नश मे डूप नीद लेने लगे थे। मुझम उनकी आयु देख कर एक मजीव दया का भाव उमडा था। फिर बिना किसी समेत के अपना सिर पीछे सीट पर टिका लिया था।

पच्चीस सुबह से शाम होने प्राई पूरा समय हाईकमान के महामत्री, कार्यालय, केन्द्रीय मत्रीमडल के यहा एक के बाद एक मिलते-मिलते ही दिन पूरा हो गया । दिन में दस मिनिट भी विश्राम करने को कही नही मिले। जिनसे भी मिले नौबन्दीबाबू ने राज्य मंत्रीमडल मे मेरे काय को महत्वपूण एव निष्ठा से किया जाना बताया। उ होने तो महामंत्री को यहा तक भी कहा कि वत- मान में मैं राज्य की राजनीति में उनके लिये दायें हाथ के रूप में काम कर रही है। नौच-दीवाबू के केन्द्रीय हाईकमान कार्यालय मे, मत्रीमण्डल के लोगो के साथ गाढे सम्व धो को अपनी पावा से देखा लगा उनकी हर बात वो वह लोग पूरी गभीरता से ले रह है। गये दिनो हरिबाबू की पूजीपतियो के साथ रहे गठबन्धन को भी पार्टी हाईकमान के सामने उ होने अनुचित पोर पार्टी की छवि को धूमिल करने को कायवाही बताया। उनकी इस बात पर पार्टी द्वारा कठोर कदम उठाने तक की बात कही गई। सारी बातचीत नौपदी बापू के तरीका को मैंने वारीकी के साथ समझा और परखा था। रात के दस बजने को हैं । नौच दीबावू राजधानी में किसी वरिष्ठ नेता से मिलने गये हुये हैं। प्रत व जिन लागो से मिलने का वायक्रम बनाकर प्राये है उस पूरा करने में लगे है। नि भर की थकान से नीद नही आ रही । परो मे तेज दद हो गया है। नौचदीजी का बंग खोल उसम रखी उनकी माशा की बोतल निकाल देवल पर रखे ग्लास म ए वग पग बना तजी से गले के नीचे उतार लेती है। शायद इससे हो नीद मा जाये । तकिया सगा लेट जाती है। कमरे में लगी वातानुकूलन को मशीन के गर्म हवा के भोक वाटती सर्दी म भले लग रह हैं। वैचेनी सी मनुभव कर रही है। बिस्तर पर लेटे लेटे हाथ बढ़ा टबल पर रबी बोतल से एक वडा पंग मोर तैयार कर पी जाती तरह धीरे-धीरे पीना पठिन है पर लिय । वडो तल्ख मौर काटने पाला स्वाद है इसका। मव लगा भाशा का हल्का सा प्रभाव मुझ पर हान लगा है । सुखद लगता है। हाप बढ़ा टेबल पर रखे ट्राजिस्टर को चालू पर फिल्मो गान हू। नौचदी बाबू की - 107

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अब तुम्हारी कायशैली नेतृत्व के तरीको से ही ईर्ष्या होने लगी है उसे । जब भी मौका मिलता है तुम्हारी बुराईया शुरू कर देता है । मुझे ऐसे दोगले लोग अच्छे नहीं लगते। क्योकि प्राज तुम्हारी बुराई कर रहा है अवसर आने पर मुझे छोड दगा ऐसा नहीं है। ऐसे लोगों पर भरोसा नहीं किया जा सकता। लाप्रा, बोतल तो उठा दो जरा । हाथ बडा टेवल से बोतल उठाकर देती हू । वे चौथाई अधिक पी जात हैं मौर नीचे फश पर लुढका देते है । बोल पडते हैं- साहिला । पार्टी के महासचिव कह रहे थे मुझे के द्रीय मत्रीमण्डल मे लिये जाने की बात चल रही है । मैन कोई रूचि नहीं दिखाई उसमे । बेकार है अधिक जिम्मदारिया उठाना । भभी ही कितना काम है। पूरे राज्य का काम सभाल रखा है । पार्टी का काम भी उतनी ही निष्ठा से करता है । यही क्या कम है। साहिला। नीद मा रही है तुम्ह । हा तेज नशा पा रहा है । माप भी सो जाईये ना प्रव । मभी वहा सो पाऊगा । मैं भी बकार की वात लेकर बैठ गया । तो इधर मुह करो । एसे कसे सोया जा सकता है । अभी तो हमारी प्यास बाकी है। पब कुछ नही नौचन्दीजी । थप गई हू दिन में मैं । प्राप भी सो जायें। ला कम्बल डाल लो। मरे पर कम्बल अल दिया है उहोने । मरे से सटकर सो गये हैं। 109 सुनने लगता हू। तर ही दरार पर लगी घण्टी बज उठली है। उठ दरवाजा खोलन जाती है। मेर पैरा म तेज लड़यडाहट शराब के नशे के गरण प्रा गई है । दरवाजा पोती है। सामन नीच दोजा शाल मोर खड़े हैं । उ होने पास ही पड़े प्रपन सचिव को उसरे कमर म जा पाराम वरन का निर्देश दिपा। फिर कमर म प्रवेश करत दरवाज को सदर स वन्द र लत हैं। उनकी दृष्टि टबल पर जाती है मुस्कराते पूछते है- अच्छा तो हमारे स्वागत की तैयारिया चल रही हैं। मैं भी यही सोच रहा था। लामो हम भी दो-चार पैग बना दो। मुवम अधिक शक्ति लगतो नही कि उनके लिये पंग भी बना सक । फिर भी कोशिश करती है। मेरा हाय स्थिर नहीं है। सो शगव ग्लाम की जगह टेवल पर फैल जाती है। उधर नौच दीवावू शाल उतारते मरी हालत देख लेते हैं। प्यार से कहते हैं--- तुम लेटो । तुम्हारे बस की बात नहीं है मैं ही ले लू गा । तुम तो बिल्कुल तयार होकर बैठी हो । मेर पास पलग पर बैठते थैले से दूसरी बोरस निकाल, खोल साधे मुह में लगा लेते हैं । गटगट कर पाधो से अधिक बोतल खाली कर दी है उन्होन। धीरे से टेवल पर रखने के बाद मरी भौर मुडकर कहने लग-- केन्द्रीय वित्त मत्रा और योजना आयोग के अध्यक्ष से मिलकर आ रहा है। हमारे प्रात को चार सौ करोड रूपये केन्द्र सरकार और दगी यह निश्चय हुमा है । तुम साथ पाई हो तो धन तो अपने माप दौडा चला यायेगा । पार्टी के महासचिव से तुम्हारा मिलना मावश्यक था । सम्बध इमी तरह वनत हैं। कुछ लोग यहाँ तुम्ह जानने लगे हैं और रा भी प्रभाव देख ही लिया होगा तुमने । गहर सम्बध भोर प्रभावशाली प्रभामण्डल बना रखा है मापने यहा। सब करना पडता है। एक बात समझ नहीं पाई हरिबाबू के लिये प्रापका विरोध जसा स्वर क्यो था। छाडो भी उनकी बात । पूजीपतिया के साथ खुले तौर पर सम्बध रखन वाला मादमी घातक होता है। पार्टी के प्रति निष्ठा हमेशा सदिग्ध ही रहती है उसकी । उसने तुम्हारा नाम मुझे सुझाया, तुम्ह चुनाव लडवाया सब किया 1 108 अब तुम्हारी कायशैली, नतृत्व के तरीको सही ईष्या होने लगी है उसे । जव भी मौका मिलता है तुम्हारी बुराईया शुरू कर देता है । मुझे एसे दोगल लोग प्रच्छे नही लगते। क्योकि माज तुम्हारी बुराई कर रहा है अवसर आने पर मुझे छाड देगा ऐसा नहीं है। ऐसे लोगो पर भरोसा नहीं किया जा सकता। लाया, वोतल तो उठा दो जरा । हाथ बडा टेबल से बोतल उठाकर देती है। वे चौथाई मधिक पी जाते हैं पौर नोचे फश पर लुढका दते है । बोल पडते है-- साहिला । पार्टी के महासचिव कह रहे थे मुझे के द्रीय मत्रीमण्डल मे लिये जाने की बात चल रही है । मैंने कोई रूचि नहीं दिखाई उसमे । बेकार है अधिक जिम्मदारिया उठाना । अभी ही कितना काम है। पूरे राज्य का वाम सभाल रखा है। पार्टी का काम भी उतनी ही निष्ठा से करता हू । यही क्या कम है । साहिला । नीद पा रही है तुम्ह । हा तेज नशा मा रहा है । माप भी सो जाईय ना अब । अभी कहा सो पाऊगा । मैं भी बकार की बातें लेकर बैठ गया । लो इधर मुह करो। ऐसे कैसे सोया जा सकता है। अभी तो हमारी प्यास वाकी है। भव कुछ नहीं नीच दोजी । थक गई हू दिन में मैं । माप भी सो जायें। लो चम्बल डाल लो। मेरे पर कम्बल डाल दिया है उ होने । मेरे से सटकर सो गये हैं। IC छब्बीस वित्त आयोग के अध्यक्ष से मिलने के बाद मैं पोर नीच दीवायू पार्टी के महासचिव के कार्यालय पहुंचे हैं। विभिन्न राज्योस प्राय पार्टी पदाधिकारियो में निर्देश के रूप मे वे कुछ पह रह हैं। उनकी यातचीत के बीच हम दोना जदर जाना नही चाहते । वैसे महामचिव ने नोच दीवात को देख लिया था। दानो वाहर रखे मुड्डो पर जा बैठत हैं। मुख्यमनोजो किसी बात पर गभीरता स मोचने लगे है । उनका सारा ध्यान स्वय के विचारो म लगा हुआ है। अन्दर बैठे लोग व हर मा गये हैं। घटी बजाकर महासचिवजी ने हम प्रदर बुलाया। दोनो उठकर मदर जाते हैं । पाईये नोच दीलालजी। कैसे चल रहा है अपना राज्य काय । इनका परिचय। यह साहिलाजो है। हमारे म त्रीमाल की दबंग सदस्या । इनके पास गृहमत्राय जमा महत्वपूण विभाग भी है। प्रापन लगता है वडी जाच-परख के बाद इनका चयन दिया है। पाक- पक व्यक्तित्व है। मापके प्रदेश के समाचार मिलते रहते है। आपके मत्री- मण्डल में दा-एक सदस्य प्रभी और हैं जो पापकी छवि पर यदाकदा कीचड उछालते रहते है। लगातार इस प्रकार के समाचार हाईकमान को मिलत रहते है । उन लोगो को ठीक करन की जरूरत है। भुवनेशजी। करने दीजिये। अपनी सीमा को वे जानत हैं होना-जाना तो कुछ नहीं है। पर कुछ लोगो का स्वभाव हो दिरोध करन का बन जाता है। प्रत्येक बात किसी भी काम से सतुष्ट नहीं रह पात व लोग। उह पार्टी की छवि तक का ध्यान नहीं रहता। विना सिर-पर के उटपटा ढग से कुछ भी वोलते रहना उनकी आदत हो गई है। कई बार ममभाता है पर उनके कानो पर जू तक नहीं रेंगतो। हरिवावू को ही ला पूजीपतिया के साथ शुरू से गठव धन करने के हजारा आरोप है उन पर। लाखो करोडो रूपयो के घोटाला मे उनका सठ लोगो के साथ उनका नाम जुड़ा हुमा है । मैं भी देय 110 रहा हू पितनी उबलकूट करते है यह लोग । सीमा से बाहर होने पर एक मिनिट भी नहीं लगा निकालन में । आपके इस स्वभाव से पूणत परिचित हैं हम लोग। ऐसा होना भी चाहिय । बीमार और फिजूल के लोगो को कब तक घसीटा जा सकता है। इन दिनो यहाँ मापक कद्र सरकार में आने को जबरदस्त बात चल रही है। नित नई बाते सुनता रहता हूँ। मुझे तो क्षमा करें भुवनेशजी। अब वुढापे मे क्या कर पाऊँगा। वही कह समस्याये हैं। मुझे लगता है इस समय मेरी वहाँ अधिक मावश्यकता है। आपकी आयु की बात तो अवश्य समझ पाती है लेकिन पार्टी मे रही प्रापको सेवामा, आपके अनुभव का लाभ हाईवमान को मिले इसमें अनुचित कुछ भी नहीं है। पी० एम० ने पार्टी ऑफिस में सारे महामत्रियो से इस सम्बध मे दो-तीन बार बातचीत भी की है। भुवनेशजी, आप हमारे राज्य के लिये भी तो सोविये । क्यो साहिला । हा। आपका राज्य मे रहना श्रेयस्कर होगा। भुवनेशजी। सी० एम० साहब ठीक कह रहे हैं। देखिये, अच्छा हुमा प्रापसे बात हो गई। पी० एम० से भी इस सम्बध में अपने उग से बातचीत करू गा। आपको केन्द्र में ल लेते और वहा किसी पौर को काम सभला देत । मेरे वश को बात अब नही रही । मायु का प्रभाव पडे बिना कहाँ रहता वह तो ठीक अजी, नोच दीजी। आप पर कौन सा प्रभाव मा पाया है उन का। प्रापक राज्य का काम तो साहिलाजी हो सभाल लेंगी। इस पर तो भरोसा है ना आपका। । इनका ज्यादा अनुभव नहीं है राजनीति मे। नौप दीवावू वसे पी० एम० खुद चाहते है पार्टी और राज्य सरकारो के अधिक से अधिक स्थाना पर नवयुपको को अवसर दिया जाये। उसमे उनकी भावना यही है कि सैकण्ड लाईन लीडरशिप भी साथ-साथ बनती जाये। विचार मच्छा है। इसमे व्यावहारिक परशानियां अधिक लगती हैं मुझे। नवयुवको का हाल तो जानते हो ह प्राप। सेवा के नाम शून्य हैं सबक सव । कम काम करके अधिक प्राप्त करने की भावना बूट-फूटकर भरी है हम लोगो मे।

नौवन्दीजी, मापको-हमारी जैसा भावनाएँ यहाँ है अव । पाप ना जानत हो हैं हमारे समय मे कितना काम, जिम्मेदारियों होता थी। बदले म हमने पिसी चीज की कभी पाशा की ही नहीं। अपना मिशन या देश का स्वतत्र पराना, फिर लोरतत्र की स्थापना। मपने उद्देश्य R पूणत मफलता भी रही हमारी। साहिलाजी, मैं और नाच दीवायू दो बार बल में साथ थे। स्वतता भादोलन के समय हम लोगा पर पागलपन छाया हुमा था । साहिला नहीं समझ सस्ती उन बातो को। इन लोगो को क्या मालूम कि वैसी कुर्वानियो के बाद देश प्राजाद हुमा । कई-कई महीी हम घर पर नहीं गये। कोई सूचना तप नही रहती थी हमारी घर वालो का 1 पर सब मिलाकर हमेशा मस्तो पा मालम छाया रहता हम लोगो पर। कभी साचा भी नहीं था कि हमारे पूरे जीवन के बलिदान के बाद हम क्या मिलेगा। सच देखा जाये तो मिला भी क्या। अभी भी दिन रात जनता की सेवा हो कर रह है । लगता है यह ज म तो सेवा करने को हो लिया है हमने । भुवनेशजी। मापका बडा लडका क्या कर रहा है इन दिनो। बडा और छोटा क्या दोना अमेरिका म रहते हैं । वही उद्योगो म लगे हुए हैं। यहा पाच-सात साल म एकाध-चार प्रात है। अभी तीन साल पहिले उनकी मां शान्त हुई तब प्राये थे। यस एक पुत्री है जो चार छ महीन मे सभाल जाती है। घर में अकेला ही है। देर रात तक यही कार्यालय म वठा काम निवटाता रहता हूँ। वाकी दा-चार घण्ट नीद लन साथ यही गोरपधधा शुरू हो जाता है। मान ता पाप लोग यही है। शाम को मेर साथ ही भोजन करें। नौच दीजी गये बार प्राय ये तव स्वदेशी छोड दने की कह रहे थे । ले रह हो या छोड दो। कहाँ छुटतो है भुवनेशजी। और पाप देवीजी। यह भी चख लेती है । पर अधिक नहीं। वह तो समझ गया था मैं । प्रापके साथ रहने वाला कोई भी कसे बच सकता है । अच्छा है मन बहल जाता है आपका भी। हाँ, यही समझ लो। तो शाम का निश्चित हुमा माप दोनो मेरे यहा हो भोजन करेगे । सोच लेंगे। बाद नय दिन के 112

ऐस नहीं। निश्चित करो। प्रापके लिये विशेष व्यवस्था करानी होगी
मुझे।
मापका भाग्रह है। टाल भी नहीं सक्ता मैं मोर काम क्या है माज
प्रापको।
कुछ विशेष नहीं। थोड़ी देर के लिये पी० एम० हाऊस जाऊगा। पी०
एम० ने मीटिंग रखी है। मुश्किल से एक घण्टे म मा जाऊगा। उसके बाद
सीचे घर । प्रापका क्या कायक्रम है
कोई विशेष नही। साहिलाजी को कुछ परीददारी करनी है कनाट
प्लेस के खादी भण्डार से। कुछ देर धूमेगे फिर आपके यहा पहुच जायेंगे।
माठ-साडे माठ बजे ही पहुच जायेंगे।
बिल्कुल ठीक है। मैं भी नौ बजे के आसपास ही घर पहुच पाऊगा।
तो हमे पाशा दीजिये । ताकि हम लोग भी घूमते-फिरते अपने काम पूरे
कर लें। शाम को भा रहे हैं हम ।
फिर चलिये माप लोग। मैं भी दो-चार लोग बाहर बठे हैं उनसे बात
कर लू । आज का समय दे रखा था इन लोगो को। दूर के राज्या से पाये
हुये है।
अच्छा, नमस्कार
साहिलाजी, पाप भी ग्रामत्रित है भोजन पर ।
धन्यवाद । जरूर पाऊगी।
हम मा गाडी मे बैठ गये हैं। नौच दीबाबू ड्राईवर से कहते हैं--
हुसन । कनाट प्लेस वाले खादी नण्डार ले चला।
हमारी कार तजी से चल दी है। नौच दोजी के चेहरे पर मुस्कान है।
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113

सत्ताईस शाम के पाठ बजे होगे। खादी भडार से खरीददारी करने के बाद ब्यूटी पालर से निवृत्त हो नौच दीवाबू के पास मा गई थी । उह अपने कुछ जरूरी काम निवटाने थे। इसलिये उन्होने गाडी मुझे दे दी थी। मुझे देख नीच दी बाबू ने मुस्कराते कहा था- तुम्हारा तो रूप ही बदल गया। कहा से पा रहो हो। थोड़ी देर कनाटप्लेस के ब्यूटी पालर म ठहर गई थी। साडी भी वही बदल ली। सोचा भुवनेशजी के यहा चलना है सा कपडे बदल लू मैं । बडी समझदार हो। बैठो एक एक पैग ले ले फिर चलेंगे। भुवनेशजी भी नौ बजे से पहिले तो लौट नहीं पायेंग। जल्दी जाकर भी क्या करना है वहा । बैठो और पैग बना दो बढिया से । नोच दीजी बैठे अपनी स्वदेशी की बोतल से पी रह थे । उनके आग्रह पर पलग पर वठे दो पैग पूरे मन से तयार किये । एक उनकी ओर बढा दिया। लीजिये। और तुम्हार पग कहां है। मेरे पास है । माप तो लीजिये। मैं भी ले लू गी। एसे नही । अपने हाथो से पिलाऊगा तुम्ह । मेरी और झुक्ते स्वय के हाथ वाला ग्लास मेरे मुह पर लगा दिया और मेरी प्राखो मे देखत रह थ । प्रधिक देर मत करो। ग्लास खाली कर डालो एक्दम । उन्होने स्वयं के हाथ को अचा कर पूरा ग्लास पिला दिया था मुझे। घोरे से बोले साहिला । सौंदय के साथ नगा भी जुड़ जाय वो मान र सौ गुना बढ़ जाता है। तुम्हारा रूप मोर शराब मिलकर क्या हो जाता है शादा में नहीं कह सकता है। इसे वम महमूस हो पिया जा सकता है। तुम जब 114 पास होती हो तो कई बोतलो का नशा तो विना पिये हो जाता है। तुम्हारी पाखो मे हजार सागरो का नशा है । माप तो शायरी भी जानते है नौवन्दीजी। बिना वजह तारीफ कर रहे है माप तो। साहिला । शायर नहीं हान का दुख ज्यादा है। हम शायर या कवि होते तो तुम्हारी तारीफ में इतना कह देते कि किसी ने आज तक न तो किसी सुदरी के लिये कहा होगा न कोई भविष्य वह ही पाता। लो अब तुम अपने कार्यों से हमारी प्यास बुझानो। बडा पंग बनाकर दो। साथ ही थोडा पास मोर हो जानो। जिससे तुम्हार रूप का नशा भी हम पर हो जाये। लो पिया। प्रापके पास ही तो हू । नहीं। कहा पास हो। जिसे तुम पास कह रही हो वह तो शरीर से है मैं तो चाहता हू मेरी आत्मा के साथ जुड जामो। शरीर से पास तो हो ही तुम। . इसके साथ ही नीच दीजी ने दोनो वाहा म भर लिया था मुझे। फुस- फुसान के ढग से कहने लगे- साहिला । तुम खुद एक कविता हो, महाकाव्य भी कह दूं तो गलत नहीं होगा। वैसी ही नाजुकता, लवक, खुशबू तुम्हारे में है। कितनी सरस हो तुम । कविता में कमी लग सकती है नीरसता प्रा जाये पर तुम हमेशा एक सुदर कृति ही बनी रहोगी विश्वास है मुझे। लगातार मेरा ललाट चूमते रहे थे। अचानक उनकी दृष्टि दीवार घड़ी पर गई । चौकत से कहते है- सवा नौ बज गये साहिला । चलें। समय हो गया। भुवनेश बाबू भी लौट आये होगे अब तक। भव रहन भी दीजिये । यही अच्छा लग रहा है। क्या करगे वहा जापर कल चले चलेगे। ऐमा नही होता साहिला । भोजन का कह दिया था उहे। नही जायेगे तो बुरा मानेंगे । पार्टी के महासचिव भी हैं। इतना तो शिष्टाचार रखना पड़ना है उनके साथ। चलिये फिर। अधिक देर नही करें। मापो चलें। 115 लडखडाते से उठे यव । गतियार म चलत हुए बिल्कुल सतुलित हो - थे। ध्यान से देखने पर ही प्रदाजा लगाया जा सकता है कि उन्होने पी रयी है। सीढ़िया म उतरते मेर कये पर हार रख लिया था उ होन । नीच पोच में बडी गाडी म जा बैठ 4। हुसन के टीन म यहा चाय पी रहा था। चाप छोड हमार पास मा गया। कहा चलना है साहय । नाथ एवे यु भुवनानी के यहा चलेग। तुम तो गई बार चले थे। रास्ता याद है ना तुम्ह । जी हा याद आ गया महासचिवजी के यहा चलना है ना। विल्कुल ठोक जगह पहुच गये हो हुसैन । देर मत करो। तेजा से चल चलो। गाडी चल दी थी। गोल मार्केट से हाते कनाटप्लेस, कजन रोड से होत हमारी गाडो निकल रही थी। नौच दोजी, पिछली सीट का सहारा ले बाहर पोछे छूटती दुकानो को एक टक देरो जा रह थे। उहोन मरा एक हाथ अपन हाथो मे ले रखा था। बैठे हल्के, कभी जोर से दबाये जा रहे थे । उह सुखद लग रहा था। भागे खुली चौडी सडक पर बाएं हाथ की सड़क पर मुड गई थी। कुछ आगे चल रूक गई। कोठी के बाहर लगी बडी नेमप्लेट पर लिखा था- भुवनेश त्रिवेदी। नौच दीबाबू दरवाजा खोल बाहर निकल गये थे। भापो, साहिला। भुवनेश बाबू भी आ गये हैं। उनको गाडी प्रदर ही पड़ी है। दोनो कोठी से बरामदे तक पहुचत है । नौच दोबाबू ने घटी बजाने का समेत दिया। घटी बजी । दरवाजा खोलत बूटे ने पूछा- किससे मिलना है मापको। भुवनेशजी से। परे। नौच दौबाव हैं आप। पाईय । दूना हो गया हू मो साफ दिखाई नहीं देता रात को मुझको। क्या कर रहे हैं भुवनेशजी। अपने कमरे में बैठे फोन पर बात कर रहे हैं किसी से। पापक आगे-माग तो माये ही हैं। चलो अदर। 116 बाहर हवा मे तेज ठडक है। तीनो अन्दर घुस पाये हैं । इधर बैठे है भुवनेश वायू । अदर चले मामो। हम भोजन की व्यवस्था म लगे हैं। हम दोनो कमरे मे प्रवेश करत हैं। भुवनेशजी की दृष्टि नौचन्दोजी पर जाती है। पाईये । नौच दीवाबू, साहिला जी। वैठिये । देर करदी पाने मे । साढे पाठ ही आन वाले ये माप लोग । हा। देर हो गई। साहिलाजी को खरीददारी मे बहुत देर लग गई। फिर हम भी थोडा आराम करने लग गये। पाप कब माये पी० एम० हाऊस से । नौ बजे के ग्रासपास ही प्रागया था। पी० एम० तो छोड ही नहीं रहे थे। फिर उह घर पर दो-तीन मुख्यमश्रियो को मिलने का समय दे रखा है कह कर हो आ पाय है हम तो। मापकी स्थिति के बारे मे कह दिया है उनको । पापको केद्र मे लिये जाने वाली बात प्रव खत्म सी ही समझे पाप । यह अच्छा किया मापने। मेरी वाली बात पर क्या कह रहे थे पी० एम० । वह तो कहते ही रहते हैं। हमने आपको सकट से उबार दिया इतना ही समझ लें बहुत है। अच्छा पिया मापने । भोजन की व्यवस्था तो हो चुकी है । चलें। एक तो देर से पाये । मा गये हैं तो मेजबान पर छोड़ दें कि माप कब तक भोजन कर पाते हैं। वैसे भातिथ्य मे कोई कमी नहीं रहेगी विश्वास करें माप । पहिले एक-दो दोर हो जाये उसके । साहिला मेरी टेबल की दराज मे दो बोतलें रखी हैं एक निकाल लामो । टेवल की दराज मे रखी एक बोतल निकाल लाती है। नीचे गद्दो पर ही बठत हैं सब । एक एक ग्लास बना दोनो को देती हू । भवनशजी मेरी ओर देखत कहते हैं- भाप भी तो एक ग्लास उठाईये । हमारा साथ तो देना ही पड़ेगा। मेरी मोर से बिना उत्तर की प्रतीक्षा पिये नौपदीजी को कहते हैं- माप ही कहिये इनको।

4 साहिला । एक ग्लास पद के लिये भी तो बना लो। भुवनेशजा तो दो. चार यास लोगो के साथ पी लेते हैं । इनको मधिप' शोर नहीं है । तुम वकार हो हिचकिचा रही हो । लामो में बना हूँ तुम्हारे लिये। आप लीजिय । मैं बना लूगी। तीनो ग्लास टकराते हैं । नौचदीजी ने भुवनेशजी के दीर्घायु होने की बात कही। लो। एप-एक ग्लास पोर बना दो साहिला । एक दौर पोर खत्म हपा । तव भुवनेशजी बोले चलो भोजन करें प्रव। तीनो उठ भोजा पक्ष में चले गये। वहाँ बैठ भोजन करने लगे। उससे निवृत हो भुवनेशजी के कमरे मे पाये तब नीच दीवावू ने कहा- अव चलेंगे भुवनेशजी। समय हो गया हमार भाराम करी का। प्रार भी आराम करें। नौप दीवावू ठीक कह रहे हैं पाप। सुबह जल्दी एयरपोट जाना है मुझे। पी० एम० विदेश जा रहे है कल । उहे विदा करने जाना है। प्रार गाडी मे चलकर वैठिये । साहिलाजो से बात करनी है मुझे। जरूर करिये। कहते नौच दीबाबू जा गाडी म वठ गये थे। भुवनशजी मेरी मोर वढे और वोल- अगली बार प्रानो तो जरूर मिलना। भाज तो हम व्यस्त थ। फिर मापके प्रदेश की राजनीति पर तुमस चर्चा करू गा। नौचालीबाबू का प्रदेश के विधायको, पार्टी के प्रदर-बाहर जितना विरोध है उाना किसी भी प्रदेश के मुख्यमत्री के साथ नहीं है। पुराने प्रादपी है निवाह रहे हैं इनका । यहा दिल्ली म बैठा इनकी वकालत करता रहता है। वरना पी० एम० तक दुषी हैं इनके कारनामो से। अधिक कुछ वह भी नही सकत । वहा रामवलि जसे प्रभावशाली व्यक्ति से विगाड रखी है उहोने । वह तो हमन ही नवेल डान रखी है उसके वरना दो दिन मे उधेह कर रख दे इनको। जैसे यस गाडी चला रहे हैं। अगली बार जरूर मिलना । अवश्य मिलू गी । चलू । नौच दीवायू प्रताक्षा कर रहे होग। 118 हा । रामलि पाण्टय को कहना मिलने बुलाया है मैने । उसको जाते हो भिजवा देना। कह दूगी। अच्छा, नमस्कार । नमस्कार । भाई नोच दीजी। मेरे गाडी मे बैठते ही गाडी चल दी थी। नौबन्दीजी ने पूछा- और क्या कह रहे थे भुवनेशजी । कुछ विशेष नही। कह रहे थे प्रदेश का काम निष्ठा से करू मै । साथ हो आपको पूरा सह्योग करने को कह रहे थे। पुराने मित्र हैं। अभी तुम गजनीति में आई हो तो उनका मागदशन भी जरूरी है। धीर-धीरे सब सीख जानोगी। वसे भुवनेश बाबू मुझसे थोडे नाराज हैं। मापसे नाराजगी क्यो हैं । अपन प्रदेश के रामबलि पाण्डेय इनका भतीजा है। उसे मत्रीमण्डल से हटा दिया है। वह अक्सर इनसे मिलता रहता है। यह भी लगातार जोर डाल रहे है किसी निगम मे ही उसे अध्यक्ष बना । इस बार वहा चलने पर सोचेगे । उसका भी कुछ कर ही दें। इनको नाराज करना भी उचित नही है । लेकिन मागे से रामबलि से मैं कोई बात नहीं करना चाहता। तुम मेरी सहायता कर सकती हो। रामवलि से चाहे व्यक्तिगत चाहे फोन पर ही बात फर लेना । उसका क्या विचार है, मेरे लिये क्या सोचता है। तुम चाहो तो अपनी तरफ से हा भी कर लेना उसके प्रस्ताव पर। उसके आदेश करवा दूगा। इससे वह खुश भी हो जायेगा। और तुम्हारा उस पर एहसान भी हो जायगा। मेरी ओर से कह देना कि बिलकुल नाराज नहीं हू उससे । पाप कह रहे हैं तो पाण्यजी से बात कर लू गी । वैसे माप जानत ही हैं मादमी टढ़ हो हैं कुछ। टेढ़ा तो क्या है उसे तो कोई भी कुर्सी चाहिये हुकुम चलाने के लिये। भुवनेशजी का ही लिहाज सोचता हू। वरना उसको कसी भी पास डालने पाला नही मैं । ऐसे कई छुटभैये ठीक कर दिये हैं मैंन । रामवलि से बात करके देखू गो क्या कहते हैं वह । तुम तो कह देना वह साफ-साफ बता दे किस जगह बैठना चाहता है पह। देखेंगे वही से अपना भादमो हटाना भी पड़ा तो हटा देंगे। पर उसको 119 तो कही बिठा हो देंगे। कल भी भजनेशजो अलग ले जाकर उसके लिय तो कह रहे थे। वैसे मेरे हाथ से निकल गया वह नही तो आ मी बडे काम का है। पडित है ना टाग अपनी ही ऊची रखेगा। भव सब जगह तो ऐसा चलता नहीं। वह गधे-घोडा सर को एक ही लपडी से हाक्ना चाहता है। उसे मालूम नहीं अब जनता कितनी जागरूक हो गई है। तुम पर छोडता हू उसकी जिम्मेदारी । दो-चार दिन म उसकी मशा बता देना मुझको । बातें करते रेस्ट हाऊस प्रा पहुच ये हम । सीढियां चडते नौच दोबाबू न मेरा हाथ पकड लिया था। एक सोढी नीचे थे वह मुझसे हर बार । लगा जैसे किसी बच्चे की अगुली पक्डे उसे अपने साथ सीढियो पर चढा रही हूँ मैं । सर्दी और शराब के रशे मे चुपचाप चढते जा रह थे। अपने कमरे तक ना मैंने दरवाजा खोला। प्रदर पहुचने पर नौचदीजी ने परो से जूतियाँ उतार एक ओर फेंकी एकदम कम्बल म घुम गय थे। में साडी बदलने लगी थी। इस बीच एकाध बार पाखें घोल मेरी मार उहोने देखा फिर सो गये। मैंने भी साडी बदली और उसके पास ही बिस्तर पर जा लेटी थी। हाथ बढा पास जलते बल्ब को बुझा दिया था। x 120 अठाईस - अपनी तीन दिन की देहली यात्रा पूरी कर मैं और नीच दीजी लोट पाये थ। यात्रा कई रष्टियो से अच्छी रही। पार्टी के तरीको, लोगो को समझने का प्रवनर मिना साथ ही हाईकमान वे उच्च पदाधिकारियो से मिलना भी हुमा । इन सब म विशेष वात थी कि रामवलि पाण्डेय देहलो मे किस प्रकार का प्रभाव रखते है यह भी जानने को मिला। सुबह के कोई दस बजे होंगे। अपने ड्राइंग रूम मे बैठी समाचार पत्र देख रही हू । तभी फोन की घण्टी बज उठती है। उठा सुनती हू-कौन पाण्डेयजी। नमस्कार । धन्यवाद । हा, यात्रा मच्छी रही। और प्रदेश के क्या हाल हैं। भा रह हैं पाप । मैं घर पर हो हू मभी बारह बजे तक फिर सचिवालय जाऊगी। प्रतीक्षा कर रही है। अदर घटो वजातो हू । नौकरानी मायी है। दो जगह चाय-नाश्ता दे देना थोडी देर मे । इला और तुम ठीक से रहना। जो। मालकिन । खुश है हम लोग। बेधीजी पून पाद करती थी सापको। एक्दम बच्ची है वह । उसको मालूम कहाँ है मुझे कितने काम रहते है बाहर । रात-दिन एक हो जाता है। कार रूबने की आवाज से मेरा ध्यान बट जाता है। देखती हूँ। पाण्य जी हैं। भार से उतर मपनी मस्त चाल चलते मुझ तक मा गये है । नमस्कार । साहिला जी। पाईये, पाण्डयजी। कैसे हैं माप । प्रसन्न हूँ। हम तो रोज ही फोन मिलायर पूछ लेते थे कि माप लौटी है कि नहीं। फोन पर माज मापकी पावाज सुनी तो भला गया। भयो पा तो है ना मुझ पर । रोज क्यो पूछ रहे थे मेरे लिये। 21 बस यो ही। सत्तापक्ष के मत्रियो में बम आप ही हो जो मुझसे खुलकर बात तो कर लेती हो। बाकी मनी लोग तो बात तक करन मे घबराते हैं । उह डर रहता है कही नौचदी बाबू को खबर न पड जाय कि व लोग मुयम बात तक तो नहीं करते कही। सव के सव हिजडे और कायर है। दिल्ली यात्रा कैसी रही यह बताईय आप तो। छोडिये यहा की नमक-हल्दी की राजनीति को। वहा आपके चाचाजी भुवनशजी से मिलना हुआ । उनकी सादगी, उच्च विचारो ने मेरा मन मोह लिया। यापकी बडी तारीफ करत रहे थे । क्या कह रहे ये चाचा । अच्छा किया उनसे मिल पाइ प्राप । पार्टी हाई- कमान, पी० एम० हाऊस तक उनका सिक्का चलता है। आप भी देखती जाईये । इन नोच दी बाबू को चि िदया नही उडा दी मेंने तो मरा नाम भी रामबलि नहीं । में भी देखता ह ठीक रास्ते पर आ जायें तो कोई बात नहीं । प्राप तो बेकार हो परेशान हो रहे हैं। वहा भुवनेशजी को एक वायदा कर पाई है कि प्रदेश लौटने के बाद एक सप्ताह म या तो मत्री मण्डल या किसी भी निगम मैं पापको शीपस्थ पद दिलागो या मै अपना पद त्याग दूगी। प्राप मेरे लिये पद छोडें अच्छी बात नहीं है। वैसे भी हम पाराम में हैं । प्राप हो सके तो किसी निगम मे अध्यक्ष ही बनवा दें। हम तो दो रोटी निकाल ही लेगे वहाँ से । पाप ही बता दें यापकी रूचि सि म है। यह काम रुचि के तो होते नहीं। जहाँ गोट बैठ जाय वही अच्छा है। उद्योग निगम मापके पास हो है उसी म अध्यक्ष लगवा रे नौचदीजी जरूर कुछ दाँवपेच परेंगे मैं जानता हू। उह समभाने का काम मेरा है। और सोच लीजिये। सोचना क्या है सरकार से प्रादेश निकलवा दें। फिर देखिय मापके उद्योग विभाग का कसे तराश देत है हम । उधर भैयास वावू का तो पूरा पटरा ही विठा दते हैं हम चुनरिया में । हा । यामजी के क्या हाल है। वह तो यराव ही हैं । | यास मूटिंग्स तो भग्नि को भेंट हो हा गया पा याद म माम मोमट, सांस फ्टीसाईजर मिल की वालपदी करवा दा 122 . थी हमने । वीरनगर के लोगो ने श्रेयास के घर जाकर उसके ही पुतल जला दिये । हमारे हत्थे चढ़ा है इस बार वह । देखती जाईये । आपके चरणा मे दस वार नाक रगडेगा आकर । उसने सवको हरिबाबू जैसा लडकीवाज ही समझ रखा है क्या। पापयजी, पाप तो उत्तेजित हो रहे है व्यय म हो । देखिये । साहिलाजी प्रापका अपमान करने वाले को मैं क्षमा नहीं कर सकता है । कुछ अपशब्द जरुर निकल गये है मेरे मुह से उनके लिये खेद प्रकट करता हू । चाचा कैसे है। प्रसन हैं। दिन-रात पार्टी के कामो म लगे रहते हैं । उ हाने हम भोजन पर बुलाया था। उन्होने नौचदीजी को इस बार झाड लगाई या नहीं मेरी वात को लेकर। आपके लिये जरुर वहा था उहोने । पूरी बात तो मै सुन नहीं पाई थी। भुवनेश चाचा कहगे कैसे नहीं। उनका सगा भतीजा लगता है में । एक चार मुझ पर उबल पडे कहने लगे-रामबलि, हटा साले नोच दी को मुख्यमनी बन कर बठ जा वाकी मै सभाल लू गा। पर मैंन हो मना कर दिया । मुख्य मत्री बनना और मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डालना वराबर है। अपने पाराम से मत्री बने रहो और चैन की वासुरी बजामो। दुनिया भर के सिरदद हैं उसमे । म तो किंगमेकर हू और रहूगा। वह वो ठीक पापन्यजी। पर जिस तरह की जल्दबाजी माप वरत हैं उससे काम नहीं चलता। कौन सी जल्दबाजी है मरी। श्रेयासजी के सम्बधम की गई वायवाही। उसम पोडा भी धय नही रखा मापन। साहिलाजी । जहा उबाल की जरुरत है हमे लगगो वहा रुकेंगे नहीं हम । यही बात ही हम म है जिससे पार्टी पौर विपक्ष क मत्रो, विधायक घबरात हैं हमारे थे । वरना हिंजडा की कोई कमी तो नही कही भी। डके या चोट को रहते हैं पूरा परक दिखाते हैं। प्राखिर पापय कुल म नम लिया है हमन । हमार सन्द ही ब्रह्मवाक्य होते हैं। 123

लीजिय नाश्ता करिये माप ।
दानो वैठे चाय नाश्ता करत रहे थे। इसी बीच एक दूसरी बार पाकर
करती है कोठो म । हरिबाबू निकलते हैं ।
हरिबाबू हैं।
कोई बात नही पाण्डेयजी। भाने दीजिये उ है ।
नमस्तार, हरिवाबू ।
नमस्कार साहिलाजी, पापन्यजी।
बैठिये।
जल्दी मे हूँ । यो हो मिलने चला माया । मोर देहनी मे कसा रहा ।
माप वैठिये भी।
नहीं। अभी तो चलूगा मैं। नौच दोजी याद कर रहे थे उनसे मिल
लेना । पाप लोग बैठे।
कहते हरिवाबू तेज कदमो से चलते अपनी कार म जा बैठे। उनके बैठने
के साथ कार तेजी से बाहर निकल गई थी।
हरिबाबू, कुछ नाराज लगे यहाँ मेरो उपस्थिति से क्यो साहिलाजी गलत
तो नही कह रहा मैं ।
उनकी नाराजगी भोर प्रसनता से क्या होता पाण्डेयजी। पाप पार्टी के
प्रभावशाली विधायक है प्रापसे मिलकर पार्टी हित की कोई भी बात तो की
ही जा सकती है। नोच दीवावू भी नाराज होने हैं तो मुझे क्या फक पडता
है। सभालो प्रपनी दुकान । मैं अपने काम मे अनावश्यक देखल पस द नही
करती।
आपको इस दृढ़ता का कायल हू मैं। हमे देखिये मत्रीमण्डल मे रहे नहीं
रहे कैसा भी दुख नही हमे । रामवलि पाय माज भी उतना ही पलमस्त
है। साहिलाजी। अब चलेंगे हम । उद्योग निगम वाल काम को भूल मत
जाना माप।
पाण्डयजी। वह मापका नही मेरा काम है। समझिये हो चुका वह
काम । कल हो देख लें समाचार पत्रोम अपना नाम माप ।
124

देखते हैं । अच्छा चलते हैं ।
ठीक है । मुझे भी नौच दीजी से मिलने जाना है।
रामबलि कार में जा बैठे है । कार चल देती है। उसमे ड्राईवर सीट पर
तस्कर शकरसेन बैठा गाडी चला रहा है। मेरे से दृष्टि मिलते ही दोनो हाथ
जोड नमस्ते किया है उसने। मैने भी उत्तर म हल्के से अपना हाथ हिला
दिया। कमरे आ बाहर जाने की तैयारी में जुट जाती है।
125

लीजिये नाश्ता करिये प्राप।
दोनो वैठे चाय नाश्ता करते रहे थे। इसी बीच एक दूम
रुक्ती है कोठी मे। हरिबाबू निकलते हैं ।
हरिवाबू हैं।
कोई बात नही पाण्डेयजी। पाने दीजिये उ है ।
नमस्कार, हरिबाबू ।
नमस्कार साहिलाजी, पाण्डेयजी।
वैठिये।
जल्दी मे हू । यो ही मिलने चला माया। और देहती मे कैसा र
माप वैठिये भी।
नही। प्रभो तो चलू गा मैं। नौच दीजी याद कर रहे थे उनस
लेना । आप लोग बैठे।
कहते हरिवाबू तेज कदमो से चलत अपनी कार मे जा बठ। उनर
के साथ कार तेजी से बाहर निकल गई थी।
हरिवावू, कुछ नाराज लगे यहाँ मेरी उपस्थिति से क्यो साहिल.
तो नही कह रहा मैं ।
उनकी नाराजगी मोर प्रसन्नता से क्या होता पाण्डेयजी।
प्रभावशाली विधायक है मापसे मिलकर पार्टी हित को को
ही जा सकती है। नौच दीवावू भी नाराज होते है तो
है। सभालो अपनी दुकान । मैं अपने काम में मनावर
करती।
आपकी इस दृढ़ता का कायल हू मैं। हमे
रहे कैसा भी दुरा नही हमे । रामबलि पाय
है। साहिलाजी। प्रब चलेंगे हम । उद्योग
जाना प्राप।
पाण्डेयजी। वह पापा नही मरा
काम ! कल ही देख लें समाचार पत्राम
124

देखते हैं । अच्छा चलते हैं।
ठीक है । मुझे भी नीच दौजी से मिलने जाना है।
रामलि कार म ा वठे हैं । कार चल देती है। उसम ड्राईवर सीट पर
तस्कर शकरसेन वठा गाडी चला रहा है। मेरे से दृष्टि मिलते ही दोनो हाथ
जोड नमस्त किया है उसन । मैंने भी उत्तर म हल्के से अपना हाय हिला
दिया। कमरे आ बाहर जाने को तयारी म जुट जाती है । x
।
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उन्तीस शीघ्रता म तपार हो नौपदी यायू यो योठी पहुंचती है। बाहर गट पर पढे सुरक्षा समचारी स सी० एम० के वार म जानकारी पर पाच म जा पटी बजाती है । नौच दी वायू ये नौकर ने दरवाजा पोला है । मदर जा प्रतिपि रक्ष मे यह जाती हू। कुछ देर बाद व मरे पास मात हैं। पडे हा अभिवादन करती हूँ वैठिय साहिलाजी। से चल रहा है। कृपा है भापकी। हरिवायू पा फोन आया था। मागवला हो रह थे। रामवलि को तुम्हार यहा दमा होगा उहोन । वह रह ये पार्टी की जो लोग छवि पराव फरने पर तुल हुए हैं उही को प्राप प्रश्रय दे रही हैं। बहुत समभाया पर उनसी समझ म नहीं पाया। हरियायू ने अपना असतोप और तुम्हारे प्रति उनके मन मे दर प्रमतोप यो प्रस्ट रिया उहोने । आपके निर्देश पर ही बुलवाया था पायजी को मन । वरना मुझे क्या आवश्यकता है उनसे मिलने की। इस बात का प्रापने हरिवाए से रहा या नही। क्या कहू उससे । समझना तो चाहता नहीं वह । उस पर तो उस सठ का भूत जो चढा हुआ है। सुनना ही नही चाहता वह । छोडो हरिबाबू की बात । पाण्य का क्या हाल है। उसके दिमाग मे कुछ समझ माई या नही या वही ढाक के तीन पात । नही मेरी बात मान ली उ होने । उद्योग निगम म मध्यक्ष बन जाने का प्रस्ताव मैंने रखा था। और बिना किसी वहस ये तयार हो गये वह । अच्छा पिया तुमने । कर देगे। माज ही आदेश निक्लवाने या कह रहे थे। वह भी हो जायगा। तुम अपन विभाग से एक पनल वनावर भिजवा दो। 126 मरी स्वीकृति के बाद प्रादेश जारी हो जायेंगे। पर एक बार तुम और सोच लो । एसा न हो तुम्ह परशान कर दे यह । प्रादमा सीधा नही है वह । देखी जायेगी। सब सभाल लू गो। अभी सचिवालय जा रही हू पैनल बनवाकर भिजवा देती हू । माप देख ले। माज ही समाचार पत्रो को उनका माम चला जाय तो ठीक रहेगा मैंने इस ढग स ही बात की है उनसे । तब ही मेरी बात मान पाये हैं यह । करवा देगे। चिन्ता मत करो। हरिबाबू से भी बात करके देखना। तुमसे बिना वजह ही नाराज क्यो है । पाय को मेरे कहने से बुलवाया था। तुमने कह देना। कोई लाभ नहीं दिखता मुझे। प्रागे हो इस सम्बध मे कोई बात नहीं करना चाहती उनसे । खुद क्यो नही समझ जाते है वे । पाण्डेयजी पार्टी के विधायर है, मापके कहने से बुलवाकर बात करली तो क्या बुरा हो गया। हरिबाबू जिस छवि की बात करते है पार्टी की वह तो दिल्ली में मापने देख ही ली। उनकी खुद की तस्वीर साफ नहीं है वहा पर। प्रदेश की अच्छी बुरी छवि से क्या होता है। हाईकमान क्या सोचता है, इसे नजरअदाज तो नहीं किया जा सकता। तुम्हारी बात से शत-प्रतिशत सहमत हू । हरिबाबू इस बात को कहा समझ पा रहे हैं। ऊपर से चावुक पडा तो ठीक होने म एक मिनिट भी नहीं लगेगा। बसे पाण्डेय मेरे लिये कुछ कर रहा था। वह भी जिद्दी तो है ही। मैंने खूब ठने छोटे मार दिये है। मापके प्रति उनका विद्राही स्वर कुछ ढीला पडा है। उद्योग निगम मे लेलें। सरकारी गाडी, थोडा रोपदाब वढ जायेगा तो बिल्कुल ठीक हो जायेंगे ऐसा मानती वह तो कर ही देंगे। पाण्डेय से एक बार मिलना जरूर चाहता हूँ । मेरा विचार है एक-डेढ महीने उह काम करने दें। फिर देखते है शायद व स्वय मापसे मिलने भा जाये। यह उचित रहेगा। मेरे प्रागे हो मिलने का जय कही मरी कमजोरी ही नही मानले वह । तुम ठीक कह रही हो। फिर भी एक नजर हमेशा उसकी गतिविधियो पर रखना जरूरी है। कोई उल्टी-सीधी बात न कर बैठे वह । 127 .

क्या कर पायेंगे वे। जब मत्री थे तब ही नहीं कर पाये तो एक निगम के अध्यक्ष बन जाने से क्या हो जायेंगे । आप पूणत निश्चित रह । मेरा पूरा ध्यान रहेगा उन पर। आप भी थोडा विश्वास में लकर काम लें उनसे तो मैं समझती हू हानिकारक तो है नहीं वह । बस जोश म जल्दी प्रामाते है । कुछ वडवोले मधिक है। वे कह रहे थे क्सिी समय मापके दायें हाथ की तरह काम करते थे वे। गलत नही कहता वह। पर उसको उटपटाग गतिविधियो से परशान हो गया था मैं। पाय होकर कट्टर ढग से तानाशाही चलाना चाहता है और वह भी जनतत्र म । सोचता है जैसे चाहेगा हाक लेगा जनता को। उनके भतीजे रामावतार के दिन रात गुणगान करते रहग । जो बदमाश और हिस्ट्रीशीटर है। कोई पचास वार तो उसको, उसके गिरोह के लोगो को पुलिस से मैंने छुडवाया। पता नही इतनी हिम्मत कस कर लेते हैं यह लोग । हिम्मत तो जवान लोग ही करते हैं जब पापका, रामबलिजी का उसे आशीर्वाद प्राप्त हो। साहिला। मुझे ही दोप दे रही हो तुम। करें भी तो क्या पार्टी के आदमी का रिश्तेदार जो है वह। अपने बच्चे भी ऐसा करें तो निबाहना हो पडता है। हा, सुनो। आज रात्रि को एक दिन के लिय देहली जा रहा हू वहा मुख्यमत्रियो की बैठक है। केन्द्र सरकार ने सभी प्रातो मुख्यमत्रियो की बैठक बुलवाई है। प्राप हो पायें। लेकिन जाने से पहिले पायजी वाला काम जरूर करते जाना। नहीं तो मेरा सिर खा जायेंगे वे । कठिनाई से तो समझाया है उनको। वह हो जायगा । तुम भोजन करती जानो। नहीं रहने दीजिये। सचिवालय जाकर पनल बना, उसकी प्रौपचारिक- ताएं पूरी कर फाईल भिजवा देती है। यह ठीक है। प्राज यहा घर पर बठर सारे पुराने काम निबटाना चाहता हू । सचिवालय जाते ही पहिला काम पाण्यजी वाला कर देना । मुझे माज्ञा दो। हा । तुम चलो। कोई दिक्कत हो तो फोन पर बात कर लेना मुभम् । नमस्कार। खुश रहो।

तीस गत राधि की गहरी नी से मेरा शरीर और मस्तिष्क तरोताजा पोर स्फूत हो गया था। मायया गये कई दिनो की भागदौड, यात्राआ को थकान से जीव वैचेनी सी पैदा हो गई भी । सुवह वे मूरज की रोशनी बिडरियो से छनकर मेरे कमरे में फैल रही है। बाहर वीचे से चिडियो की चहचहाहट धोरे-धीरे बढ़ने लगी है । कोठी के बाहर की सड़क पर भावागमन भी बढ रहा है। अपने विस्तरो म लेटी छा की मोर देखे जा रही है। कोई विशेष उद्देश्य नहीं बस यो हो । नीद खुल गई है । सा-सात, माठ बजे होगे । सोचती हूँ कुछ देर लेटी मलसा लू फिर तो सारा दिन सामने पडा है जिसमें विभिन्न काय करने हैं । पास टेवल पर रखे फोन को घण्टी बज उठती है। कुछ देर तो उठाती नहीं। एक बार बद होन के बाद फिर से वज उठती है। इस बार उठा सुनती हू--- कौन । नमस्कार पाय जी। मजो, धन्यवाद देकर क्यो शमिदा कर रहे हैं मुझे । नहीं-नही नौपदीजी को समझाने की जिम्मेदारी मेरी थी। गये दिन ही प्रेस नोट जारी हो गया था। अब तो प्रसन्न है। हाँ वे दिल्ली गये हैं। पर हो पा जायें, कोई दस और ग्यारह बजे के बीच मे। हा, उद्योग भवन चले, चलेंगे। भापके सम्मान कायक्रम मे शामिल होकर खुशी होगी मुझे। फोन रख रही हू पाप मा जायें। चाय पर प्रतीक्षा कर रही है। नमस्सार। सोचती हू पादयजी को उद्योग निगम मे स्थान देकर अच्छा ही रहा । कम से कम सी० एम० साहब का मिरदद कुछ तो यम हुप्रा ! इनको लेकर वे मनावश्यक तनाव मस्तिष्क पर बनाएं रखते हैं। विस्तर से निकल दनिक कार्यों को निबटाने म लग जाती है। अधिक समय है नहीं पाण्डेयजी के भाने में। बाथरूम से निवृत हो बाहर जाती है। कपडे बदलती हूँ ! तब ही फोन की घटी बज उठती है । कुछ देर नहीं उठाती। पता नहीं किन-किन ये फोन पाते रहते हैं । घटी लगातार बज रही है। बातो को ठीक करने के बाद फोन उठाती 129 हा कहिये । कोन । गहमचिय वाल रहे है। क्त तकलीफ की। क्या यह रह हैं नौच दो बानू को कार दुघटना में मृत्यु हो गई। यहा से मिला समा- चार । दिल्ली से वायरलेस मैमेज है। बहुत बुग मा । हा, मैं दिल्ली चली जाती हू । आप भी पहुव रहे है । नही । एमा मत करिये । माप यही रहकर राज्य की व्यवस्था देखें । अभी एक घटा यही हू । दावारा सम्पक परें प्राप। तब तक मैं जाने की व्यवस्था कर लती हू । फोन रख रही हू । आप देहली से और विस्तार से जानकारी ल ल । ठीक है। मेरी माखो के सामने अवेरा सा छा गया है। अभी कल की ही तो बात है उनसे प्राराम से वातचीत हुई। कुछ सोच नहीं पाती। बाहर किसी गाडी के रूकने की आवाज पाई, दरवाजा खोलती हू । पाय जी हैं। फोन की घटी बजती है। उठा सुनती हू- कौन गहसचिर जी । हा। कहिये । कहा, अखिल भारतीय प्रायुविनान गस्पताल में भर्ती कराया गया था। ठीक है पाच-सात मिनट में ही जा रही हूँ म । माईये । पाण्यजी गजब हो गया। नौच दीजी बावू को देहली मे कार दुघटना में मृत्यु हो गई। अच्छा । आपको कहाँ से मिला यह समाचार । दुख की बात है। आपके पाने से दो मिनिट पहिले हो गहमचिव ने फोन पर बताया है मुझे। पाण्डयजी आकाशवाणी को समाचार भिजवा दो फिर जल्दी स देहली चले चलत है। बहुत बुरा हुआ। आकाशवाणी का काम गृहमचिव करते रहगे। हम तो अभी ही चल दत है । मैं घर पर कह देता हू वस । यौन। रामावतार । अरे भया मी समय दिल्ली जा रहा है। वहाँ नौच दीवाबू की कार दुघटना म मृत्यु हो गई है। और याते प्रभो नहीं हो सकती। मेरे पाने का निश्चित नहीं है। देख लू गी। वहा जाकर सारी स्थिति साफ होगी। फोन रखने के साथ ही लगातार घटी बजती रही है। हम दोनो में से कोई नही उठाता। पाटयजी। चाय लीजिये। रहन दीजिये। विलम्भ करना उचित नहीं। बस चल दो एक्दम । -- 30

माना मूटक्स उठाने लगी हू । पायजी ने भाग्रह पर मेरे हाथ से ले
लेते है।
मुझे दो । माप क्यो तकलीफ पर रही हैं।
बाहर खडी कार मे आ बैठने हैं। ड्राईवर वगले के गेट पर खडा पुलिस
वालो से बात कर रहा है। साहिलाजी की गाडी मे बैठत देख दौडता माता
कहिये मैडम । कहा जाना है।
देहली।
इसी समय चलना है।
रामप्रसाद गाडी में बैठो।
जी।
तेजी से हमारी कार मुख्य सडय पर प्रा गई है। दुकाना, पान के ठेलो
पर खडे रेडियो पर समाचार सुन रहे हैं। उनके चेहरो पर अधिक जानने का
भाव झलक रहा है। कार तेजी से दौडती राष्ट्रीय माग पर मा गई है।
रामप्रसाद पीछे मुड पूछता है-
अचानक दिल्ली का कायक्रम कैसे बन गया मडम ।
पाण्टेयजी उत्तर देते है - रामप्रसाद, नीच दीवाबू इस दुनिया में नहीं
हैं। कैसे हो गया यह ।
कार दुर्घटना हो गई है।
राम । राम। बुरा हुमा।
घबराम्रो नहीं। सीधे दिल्ली जितना जल्दी हो पहुचा दो।
बस, चल ही रहे है।
ड्राईवर ने कार को गति बढा दी है। गाडी हवा से बात करने लगी।
रामप्रसाद । ध्यान से जरा। दूसरी दुघटना मन कर बैठना ।
चिता नहीं कर पा यजी।
चलते - चलो। साहिलाजी वहा किनसे मिलना होगा।
131

. सीधे अखिल भारतीय आयुविज्ञान प्रस्पताल चलना है। वही भता रखा है उह। ठीक है। पार यजी। सारा मामला चौपट हो गया। सब ठीक हो जायेगी। अभी पहुच जात है हम । जो होनी थी उसका कौन टाल सकता है। अब ता साहिला जो प्राप ही सभालिये प्रदेश के काम को। मेरे वश की बात नहीं है पान्यजी। माप बिल्कुल मत घबराईये। हम जो आपके साथ है। वहाँ चाचा भुवनेशजी से भी सलाह कर लेंगे। सच तो यह है कि प्रदेश को नेतृत्व प्राप ही दे सकती है। और सारे के सारे प्रयोग और हिंजडे है । एसा नहीं है पाडेयजी। ठीक कह रहा हू मैं। वैसे हरिवाबू ने तो भागदौड शुरू भी कर वी होगी। पर जायेंगे कहा वे । हाई-कमान म तो भुवनश चाचा ही देखेंगे मामले फो। वहा पहुचने पर उनकी कमर ही टूट जायगी। वहा चलने पर एक एक धोज साफ हो जायगी। आप तो साहस करके इस चुनौती को स्वीकार कर लें। चाचा से मैं बात कर लू गा । पाण्डेयजी, माप हो सभाल इम जिम्मेदारी को। प्राप समझती नहीं। मेरे नाम पर कई दिक्कतें आयेगी। मेरी रूचि भी नहीं है। मुझे तो किंगमेकर ही बना रहने दें। बाकी आप चाहगी तो सेवा करता ही रहूगा। मापन कम समय में अपनी कायशली की जो प्रदेश मत्री- महल, जनता मे छवि बनाई है उन सबको देखत हुए पापको ही इस काम को संभालना चाहिये। और मेरे सहयोगी विधायक प्रापके इशारो पर काम करते रहगे। रामप्रसाद ने सडके के वाई मोर गाडी रोक ली है। सामने खेत में बुए पर पानी का पम्प चल रहा है। मडम । रेडिएटर में पानी डाल ल । गाडी गम हो गई है। मारने प्रचा. नक पहा चलने के लिये। कोई बात नहीं कर लो। 132

जल्दी हो काम पूरा कर ड्राईवर अपनी सीट पर जा बैठा और गाडी चल
दी थी।
साहिलाजी। नौच दीवाबू के शव को प्राज ही ले मायें या क्ल पर
रखें।
इस बारे में तो वहां चलवर ही मालूम हो पायेगा।
भुवनेश चाचा स भा वात कर लेंग इस सम्बध मे।
देख लेंगे।
पूरे छ पटे की लम्बी यात्रा के बाद देहली को सीमा में पहुच गये थ
रामप्रसाद, मखिल भारतीय मायुविमान अस्पताल चले चलो मब ।
जो हो।
कुछ ही समय म अस्पताल के प्रहाते मे कार जा सकती है। मैं मोर
पाईयजी वाहर मा तेज कदमा से चलते स्वागत रक्ष पर पहुचते है । पाडेयजी
बढ़ जानकारी प्राप्त करते हैं। मालूम होता है दो घटे पूर्व ही उनके शव को
पार्टी महासचिव मोर अ य कायकर्ता प्राकर ले गये हैं और पार्टी कार्यालय में
जनता के दशनाथ रखा गया है।
पायजी और मैं गाडी म मा बटते हैं। पार्टी के कार्यालय चलेंगे वही
लोगो के दशनाथ उनका शव रखा हुआ है।
मुख्य माग पर मा कार पार्टी कार्यालय के लिये चल दी।
133

इकतीस स्वर्गीय मुख्यमत्री का शव विशेष विमान द्वारा प्रदेश क विमान तल पर उतरा। वहा उपस्थित विशाल जनसमूह से नोच दीयात्रु अमर रह क नारा से प्राकाश गुजित हो गया था। विमान का दरवाजा खुला, उत्तरन के लिय सीढिया लगा दी गई थी। पुलिस की पूरी व्यवस्था यो। विमान म सवप्रथम हरिबाबू महानिरीक्षण, सेना के जवान तेजी से ऊपर चढ़ पाये मोर मुख्य- मत्रीजी के शव को लेकर धीर-धीरे सीढिया से उतर विमानतल पर लाये। फूलो से सज्जित ट्रक पर उनके शव को रखा गया। चारो और उपस्थित जनसमुदाय, मत्रीमण्डल के सस्य, विधायक ने एक बार फिर नीच दीवाचू अमर रह के नारो से आकाश को गुजा दिया। शव का लिये ट्रक धीरे-धीर आगे बढन लगा। पीछे विशाल जनसमुदाय, कारा, जीपा को दूर तक दिखन वाला काफिला चलने लगा। लगातार नौच दोबाबू अमर रहे के नारा से आकाश गूज उठना था। सडर के दोनो और खड़े नागरिका की भीड दखा जा सकती थी। ट्रक के ऊपर भागे को योर हरिवाबू, रामबलि पाडेय, माहिला देवो दिखाई दे रहे थे जो नागरिको द्वारा बीच-वाच म रोक कर उन पर रखी जा रही मालामा फूला को ढग स नौव दोवायू पर डालते जा रह थे। मत्रीमडल के ग्रय सदस्य पीछे वारो जीपो में बैठ जुलूस के साथ बढ रह थे। जुलूस पार्टी कार्यालय पर जा पहुचा वहा उपस्थित पार्टी कायकर्तामा ने ट्रक पर चढ़ सावधानी से नौच दीना के शव का उतार पहिले से पन मच पर ले जाकर जनता के दशनाथ रख दिया। पार्टी के कायक्र्ता, जना के लोग, दिल्ली से प्रधानमत्री के प्रार से मेज ये प्रतिनिधी, नीच दीवायू के सम्बधी लोग बैठ शोक कर रहे हैं। प्रश म सावजनिक अवकाश पापित दिया जा चुका है। पाम होने को माइ। दाह संस्कार के लिये तयारिया शुरू हो गई। एप बार फिर शव को सज्जित ट्रक पर रखा गया। सेवा के जवान, पुलिस के लोगो ने उमडत जन सलाप को नियत्रण म रमन को व्यवस्था पर ला। 134 . भवयाया मागे पो पोर पढन लगी। सब मोर से नोच दीबाव अमर रहे के नार ला रह हैं। शमशानघाट तक शवयात्रा पहुच चुपी है। सेा के लोगा के सहयोग से नोदी के शव को उतारा गया। लोग चिता जमाने लगे। उनके शव को रख दिया गया। सेना के वैण्ड ने मातमी धुन बजाई, सलामी दी इसके साथ पनि प्रज्वलित की गई। चारो मोर एक बार फिर पूरे जोर से- नीच दी चावू पमर रहे को पानाज से माकाश गूज उठा । चिता तेजो से जल उठी। दिल्ली से भाये प्रतिनिधि न साहिला देवी के पास जा कान में कुछ कहा । लगभग डेढ घटे तक सब लोग वहा उपस्थित थ । बाद में धीरे-धीरे सब बाहर मा अपने वाहना म बैंठ लौट गये। साहिला देवी, हरिबाबू, रामबलि पाण्डेय एक ही कार स लोदे । साहिला देवी ने पाडेय मौर हरिवाबू से कहा- कल सुवह पाठ बजे पार्टी दफ्तर में नये मुख्यमत्री के चुनाव के लिये सभी को उपस्थित होना है । दहली से पार्टी महासचिव भुवनेशजी माज रात्रि हो यहाँ पहुच रह हैं। उनस भी बातचीत होगी। वे विधायको से नये नेता प सम्बध में उनकी राय लेंग। सभी विधायका को कार्यालय में उनसे एक एक कर मिलने का यह दिया गया है। पाण्डेयजी बोच म ही बोलते हैं-साहिलाजी भाप घर जाकर स्नान पाटि से निवत हो जायें। मैं आपके यहा आ रहा है । फिर हवाई अड्डे चल भुवनेशजी को भगुवानी करनी है। ठीक है। माप भाजायें मैं तैयार मिलू गी । हरिबाबू प्राप भी मेरे यही पा जाये । साथ ही चलेगे। साहिला जी में सोये हवाई अड्डे पहा जाऊगा । इही बातो का करते गाडी साहिताजी के बगले जा पहुंची थी। साहिला तो दरवाजा खोल बाहर निकल माई । अच्छा, पाडेयजी माप घर हो मायें मैं तब तक तैयार हो लू हरिवावू और पाडेयजी को ले कार बगले के प्रहाते से बाहर निकल जाती है। साहिंताजी धक कदमा से घर में प्रवेश करती हैं। 135 बत्तीस हवाई अड्डे पर पार्टी के महामश्री भुवनेशजी को अगवानी मे विधायक, साहिलाजी, रामबलि पाडेय, हरिबाबू, पार्टी कायकर्ता उपस्थित हैं । अगले कुछेक क्षणो मे विमान उतरता है । सब लोग विमान के पास जा पहुचते हैं। भुवनेशजी, उनके साथ दो भय पदाधिकारी नीचे पाते है। तव ही भुवनेशजी जिदाबाद के नारो के साथ उपस्थित लोगो ने उन्हें मालामा से लाट दिया है। वे सीधे कुछ दूर पर खडी कार मे जा बैठते हैं। फिर साहिलाजी, हरिबाबू, रामबलि पाडेय, कार मे आगे रामावतार भी अपना स्थान ल वैठ गये हैं। कारा का काफिला पार्टी के दफ्तर के लिये चल दिया है। पार्टी कार्यालय पर भुवनेशजी के पहुचने के साथ वहा उपस्थित कायकर्ता- पा ने फिर-भवनेशजी, जि दाबाद के नारे लगाये । बिना उन पर कसा भी ध्यान दिये भुवनेशजी कार्यालय मे जा वठते हैं । वे कहते हैं- आप लोग सब बाहर जायें तो काम शुरु किया जाये। काफी समय लग जायेगा सभी विधायको की राय मालूम करने मे । सब लोग एक-एक कर वाहर पाने लगते हैं। भुवनेशजी ने रामवलि पाडय और साहिला को उनके पास रुकने को कहा है। वे दानो उनके पास ही बैठ गये हैं। फिर एक-एक कर विधायको को प्रदर बुलाया गया, उनसे बातचीत की गई। रात के कोई चार बज गये। बीच बीच मे चाय-काफी, नाश्ते के कई दौर चलते रहे । महामत्रीजी ने सबकी राय जानने के बाद पान्यजी के कान म कुछ कहा । पाडेयजी के चेहरे पर मुस्कान फर जाती है । उहोने भुवनेशजी को बधाई दी। भुवनेशजी न साहिलाजी को वधाइ दो कि अधिकाश विधायका ने उन्हें ही मुख्यमंत्री पद के लिये योग्य उम्मीदवार माना था । भुवनेशजी इस समाचार को बाहर उपस्थित विधायको कायकर्ताप्रो को सुना देने के लिये पहा । पाडेयजी अपने स्थान से उठ बाहर गये उहाने वहां उपस्थित लोगों से दूसरे दिन प्रात ग्यारह बजे राज्यपाल के न्हा साहिलाजी के शपय कायक्रम 136 की सूचना भी दी। मत्रीमण्डल के सम्बन्ध में पूछे जाने पर पत्रकारो को उन्होने बताया कि कल दिन म मनीमण्डल की घोषणा कर दी जायेगी। इसके बाद भी विधायक वही जमे रह । साथ के क्मरो मैं बैठे मत्रीमण्डल म किन लोगो को लिये जान की सम्भावना रहगी पर चर्चा, अटकलबाजी करते रहे। भुवनेशजी ने साहिला से कहा- साहिला, प्रसनता की बात है आपके यहा सभी विधायको ने आपको मुख्यमत्री बनाये जाने की बात कही । इनके अलावा पार्टी हाईकमान का भी मापके लिये ही निर्देश था। जनतात्रिक ढ ग स सब काम सम्पन हो गया अच्छा रहा। अब पाप प्रदेश की बागडोर मजबूती से पकड कर चलाए । मनीमण्डल के सम्बध में भी बात कर लेंगे । नौच दजी के मत्रीमण्डल के पार्टी विरोधी, लोगो मे से एक का भी दोबारा मत लाइये । तव ही प्रापका उद्धार हो सकता है। पाप ठीक कह रहे हैं । अच्छा होगा प्राप ही इस सम्बध मे अपनी राय जाहिर कर दें। मुझे विशेष कुछ कहना नहीं है। रामवलि आपके विश्वासपात्र रहे हैं उनको अवश्य सिफारिश करता हूँ। उनके लिये प्रापको सिफारिश करनी पडे तो अच्छी बात नही होगी। मेरे लिये हमेशा सीधे हाथ के रुप मे रह ह व । हरिबाबू के लिये क्या कहेगे । प्राप। उहें लेकर ज्यादा दुविधा में पड़ जायेंगी पाप । काले धन और पूजी पतियो के साथ उनके गठजोड पहिले ही पार्टी की छवि खराव कर चुके है । समझ गई मापका सकेत । चुस्त प्रशासन और पार्टी के लिये प्रापका यह कदम उचित और आवश्यक है। इहीं बातो में सुबह हो गई । मेरा मन भविष्य की जिम्मदारियो, मुख्यमयी जैसे प्रभावशाली पद, उसके मात्मिक सुख मे उलझ गया था। प्राखो में तेज नीद जसा जो कुछ समय पहिले लग रहा था वसा कुछ भी नहीं था । मन हवा मे पतग की तरह कभी ऊपर कभी नीचे फर्राटे के साथ उड रहा था। मेरी चुप्पी को देख पाण्डेयजी सहसा बोले- कहाँ बोगई साहिलाजी। 137 ?

यस यो हो सोचने लगी थी रिमाप लोगो न मुझ पर इतनी बड़ी जिम्मेदारी डाल दी है। पता नहीं बस पर पानी इवा काम। माप हमारी नता है। वाम तो हम सबको मिल जुल पर ही बरना होगा। एक्दम निश्चिन्त रह पाए । सब हो जायगा। परान ये कुछ नहीं हो। जब मैं और चाचा भुवनेशजी घर जायगे। विश्राम के बाद मोष राज्यपालजी के यहा पदर जागा मापको मर सन माम मावश्यकता नहीं समनवा मैं। नही। पाप घर पर माईये साथ ही पगे राज्यपालजी के यहाँ । चलें भुवनराजी, पायजी, हरियाद मौर में बाहर पडी कार म मा वैठन हैं। ड्राईवर को तेज नीद पा रही थी। गाजीरावरवाजो के पलने से जाग उठा पाचह। पायजी वहाँ चलना है। साहिताजी का घर छोड़ दो। फिर मेरे घर चलो। कार चल दी। सामन मूर्योदय हो रहा था। प्राज का दिन मेरे जीवन में उन्नति का सबसे बड़ा दिन तग रहा था मुझे। पाण्डेयजा भुवनराजी से चुपचाप वंह बातें कर रहे थे । मेरे मनगाहे भी गभीरता मुझ पर हावी हो रही थी। पता हो नहीं चला कब मेरे बगल पर माकर एक गया थी। बाहर निक्ल भुवनेशजा, पाण्डेयजी सबको नमस्कार किया। भाप दस बजे तक मा जायें। मैं तैयार मिल गो। हम आ रहे हैं।

तैतीस दिन में राज्यपाल महोदय के यहा शपथ समारोह सादे ढग से सम्पन हुमा । बाईस सदस्यों के मत्रीमण्डल ने शपथ ली। अधिकांश मत्रियो की सिफारिश भुवनेशजी या रामवलि पाण्डेय को ओर से ही थी। पाण्डेयजी प्रदेश के गृह, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे महत्वपूण विभागो को झटक लेने में चतुरता कर गये थे। वित्त विभाग भुवनेशजी ने जोर डालकर मेरे को ही दे दिया था प्राय मनिया में अधिकाश के पास नाममाय जसे विभाग ही थे। उन्ह उगता था मात्र मतुष्ट कर देने की दष्टि से अनुग्रह के रूप में मत्रीमण्डल में शामिल कर लिया गया था। ताकि पार्टी विधायको के पार्टी के प्रदर बनी घडेबदी से छुटकारा पाया जा सके । इस सव मे भुवनेशजी की पहल सूझबूझ की रही थी। हरिवाबू मनीमण्डल में नहीं लिये गय थे। इससे व्यक्तिगत रुप से मुझ से नाराज दिखाई दिये थे। शाम ढल चुकी थी। भुवनेशजी, रामवलिजो को मेर निवास पर भोजन के लिये मामत्रित रिया हुआ था मैंने । घर को व्यवस्था पूर्ण हो चुकी थी। बाहर पुलिस, सुरक्षा का वडा प्रबध था। ग्राज की रात्रि इस बगसे म भौर बितानी थी। कल से मुख्यमत्री निवास में रहने जाने की सारी तैयारिया पूरी को जा चुकी थी। पाण्डेयजी तो चाहते थे माज का रात्रि भोजन मुख्यमत्री निवास में ही प्रायोजित किया जाये। पर मैंने भाग्रह कर उन्हें समभा लिया था। पूरे दिन प्रदेश के विभिन स्थानो, व्यक्तियो, कर्मचारी संगठनो, उद्योग पतियो के लगातार बधाई के तार, टलीफोन, सदेश पाते र। मालामो, फूलो का तो यह हाल हो गया कि बगले के पिछवाडे मे बडा पहाड़ सा वन गया था। इला की सहेलिया दिन भर यहा स वहा चिहकती फिर रही थी। बधाई सदेशो मे श्रेयासजी का तार भी था। उसी से मरा मन उनके साथ रह मेरे व्यवहार ने पीडित कर दिया था मुझे। मेरे म आत्मग्लानि का भाव उमड़ पाया था। अपने को स्वय को दृष्टि में बोना अनुभव करन लगी थी। पर विचार परने पर इस निष्कप पर भी पहुचो कि उहीन क्ति चतुराई 139 । से मुझे मेर पनि से अलग विवा फिर कैसे प्रत्येक कदम पर मरा सत्त दहिक शोपण करत रहे थे वे। मुझे याद नहीं पाता उहोने शायद ही कोई अवसर घोडा था जिसमें उनके लाभ के लिये मरा उपयोग नहीं किया हो । व्यतीत के हर क्षण को दोबारा स्मतिपटल पर चित्र रूप म देख मरा मन उनके प्रति एक गहरी घृणा मे डूब गया था। उह मैंने एक मोठे जहर के रूप में हो निष्कप रूप म पाया था। अभी भी मरी समझ में नहीं पा रहा कि जिस स्तर पर प्राज में पहुची हू उसम उनका योगदान किस रूप में है। सच वा यह है कि बीती जिदगो को कितना भी मी कुरेदती जाऊ उसमे मुझे कुछ भी नहीं मिलेगा ग्लानि, पश्चाताप और खुद पर तरस खाने के अतिरिक्त । इसलिये सोचती हू व्यतीत की और स मा फेर वतमान के बार म सोच काय करू ! क्याकि जो समय निकल गया उसने मुझे नये अनुभव, पुरुप चरित्र को समझन का अवसर तो दिया ही है। बाहर लान में कार पा रुकती है। अपन सोफे से उठ बाहर मा देखती हू भुवनेशजी, पाण्डेजी मा पहुचे हैं। नमस्कार । त्रिवेदी जी। साहिलाजी, नमस्कार । ठोर समय पर प्राय हैं हम । पापको शिकायत नहीं होनी चाहिये। आईये। मापस कैसी शिकायत । आप कर भी नही सरती। रामरलि को हमन कहा भाई साहिताजी से नही प्रदश को मुख्यमत्री के यहा चल रहा है समय का पूरा ध्यान रखना । मुख्यमत्री भी मापकी कृपा से ही बनी हू म । तीनो ड्राइग रूम म मा गय । सोफा पर आ बैठे। कमर म हल्का हला सगीत बज रहा था। भुवनराजा उसका प्रान द लन लग । जवाब बोल- कितनी सुन्दर, सुरुचिपूण मजावट कर रखी है मरे म । मन म बडा सुकून मिल रहा है। लग रहा है शाति म ड्वे उपवन में आ गय हा हम । क्यो रामवलि जो। चना मार ठीक कह रह है। यहाँ पर मुझे प्रार वहा सुर मिल रहा है। पहित भी आता रहा ह पर पहिले मुझे स्वर्गीय नौपदी बाबू का हता 140 सा भय लगा रहता था। पाज साहिलाजी मुख्यमनी है प्रदेश को फिर भी कैसा भी नयापन नहीं लग रहा । पाडेयजी मुख्यमत्रो आप ही बन जाते तो मुझे जिम्मेदारियो से छुट्टी मिल जाती। कसे बन जाता है। चाचा ने हवाई अड्डे पर कदम रखते ही पहली बात कान म कही थी कि साहिलाजी के अलावा वे किसी और के नाम को विधायको के मुह से सुनना भी नही चाहगे यह । फिर क्या था हमने ब्रह्मपस्न उठा लिया विरोधिया के खिलाफ । आपको पता नही है शकरसेन नोटो के बक्से के बक्से उठा लाया था और मागने वाल विधायको के आगे डाल दिये थे कि उह जितने रुपये चाहिये उठा ले जाय। पर किसी को मजाल थी कोई उसे मेरे रहते हाथ भी लगा लेता। जितने नये मत्री बने हैं उनमे से ज्यादातर हरिबाबू के प्रादमी थे। पर चाचा ने ऐसे शतरज जमाई कि हरिबाबू को सबसे पहले मात दे डाली। उह अलग बुलाकर इ होने साफ कह दिया कि साहिता देवी के नाम के अलावा यह किसी भी नाम पर सहमत नहीं होगे दूसरा यदि उ होने कसी भी गडबड की तो उनके खिलाफ सारे काडा को फाइल प्रदेश मे आई० जी० पुलिस को उसी क्षण भिजवा दी जायेगी उधर पार्टी से भी निष्कासित कर दिया जायेगा। तब जाकर हरिबाबू के लगाम डाली जा सकी है। वरना वह तो चाचा भुवनेशजी के यहा पहुचने से पहिले मुख्यमत्री बन जाने के स्वप्न सजोकर बैठा हुआ था। रामवलि, हरिबाबू को जितना मैंने कह डाला बाद मे सोचा तो लगा ठीक नहीं किया। पर वह मेरी बात समझने की कोशिश ही नहीं कर रहा था। अत मे मजबूर होकर डाट लगानी पडो मुझे । साहिलाजी, उससे बचकर रहना । वस रामबलि पूरी नजर रखेंगे उसकी गतिविधियो पर। त्रिवेदी साहिब । सच्चाई तो यह हैं रामवलिजी को पूरा ध्यान देना होगा, साथ ही हर कदम पर मेरा सहयोग करना होगा। यह करेगा क्यो नही। पाप चिता नहीं करें हमारा एक मिशन था मापको सत्ता मी बागडोर सभालने का पूरा कर दिया हमने तो। माप जाने, पाडेय जानें । स्तिना समय हुअा है अभी। सारे माठ बज रहे हैं। रामबलिजी, माप राज्यपालजी के यहा मिल आईये। तीन प्रमुख बातें जो मैने बताई थी सी० एम० के सदेश के रूप मे समभा दे उन्ह । यही 141 पी० एम० आजायें फिर । साथ हो भोजन करेग । पापको प्रतीक्षा कर रहे हैं तब तक। अधिक समय नहीं लगाना वहा । पाप बातचीत करें। उनस मिलार प्राता हूँ। रामवलिनी अपने स्थान स उठ कमरे से बाहर चल गये हैं। उनकी कार स्टार्ट होने और वगले से बाहर निकलने की प्रावाज पाती है। भुवनेशजी मेरी मोर देखते कहत हैं- ने दो-चार जरूरी बातें वहा थी भेंट के दौरान । दिन म राज्यपालजी से बात करने का अवसर ही नहीं मिला । रामवलि सब समभा आयेगा उहें । साहिलाजो अब बताईये क्या सेवा करेगी पाप । पाप प्रादश करें। सब व्यवस्थाएं हैं। सबसे पहिले तो हमे स्वदेशी प्राशा के दो-तीन ग्लास बना दें। प्राग की फिर सोचेंगे। भुवनशजी को प्रसन करने के लिये पास रखी टेबल के नीचे से प्राशा की बोतल निकाल एक ग्लास बना उह देती - और आपका ग्लास । प्राप लीजिय । मेरा मन नहीं है लेन का। साहिला। मन पर ध्यान मत दो। यह देखो कि तुम्हे में कह रहा हूँ । चलो, मेरे ग्लाम से ही पी लो। मेरे पास ग्रामो अपने हाथो से ही पिलाता हू तुम को। इतना कहकर भुदनेशजी मेरे पास खिसक माये थे। उन्होंने एक बाह मरे गले में डाल दी थी। कये पर पड़ी साडी को हटा नीचे गिरा दिया था । अपने हाथ के ग्लास को मरे मुह पर लगा बाले ये- एक बार में खाली कर डालो इसे । यह ग्लास तुम्हार नाम । आप जिद कर रहे हैं इसलिये पो लती हूँ मैं । क्यो । दिल्ली म तो पी ली थी ना तुमने । यहा तो तुम्हारा घर है । जी भरकर पी सक्ती हो तुम। लामो, वोतल ही दे दो मुझे। मेरे हाथ से बोतल ले पहिले पूरा ग्लास भर टवन पर रख दिखा उसके बाद मुह पर लगा प्राधी से अधिक हल के नीचे उतार ली थी उहोन । 142 उनके कानो के रोएँ कपकपा गये थ । आखो मे तेज चमक फूट पड़ी थी, गाल लाल हा गये थे । टेबल से ग्लास उठा एक बार फिर मेरे होठो पर लगा दिया था । कापते वोले- लो इसे भी पूरा करो। इसके बिना मजा नहीं पायेगा। यह ज्यादा हो जायेगी। इससे तज नशा हो जाता है, मुझे। वही तो मैं चाहता हूँ । सारे तनावो से मुक्त हो जानो तुम । लो, खत्म करो इस। उनके हाथो से एक धूट पी ग्लास अपने हाथो मे ले पास की टेबल पर रख देती हूँ। देखती हू भुवनेशजी की आखो मे तेज नशा उतर भाया है मुझ दोनो बाहो म भरत कहते हैं- साहिला । पानी में क्या रखा है। असली नशा तो तुम हो। उससे क्यो अलग कर रखा है मुझको तुमने । इक शब्दो के साथ भुवनेशजी सोफे पर बैठे-बैठे मेरी गोद में लेट गये पौर दोनो हाथो से मेरे वाला को सहलाने लगे बोल- दिल्ली जब भी मानो घर तुम्हारा है भाना मत भूलना। बस फोन पर पूछ लेना। बगले में कार रूकने की आवाज आती है। वे पूरी सतकता से बैठ जाते हैं रामबलि लौट आया है शायद । भोजन करा दो हमे तो। फिर चलेंगे दरवाजा घुलता है । रामवलि ही है। उह देख भुवनेशजी पूछते है-- ठीक से समझा दिया ना उनको। वे एक बात पर पड गये फिर कहने लगे सुबह प्रापसे फोन पर मोर बात कर लग। समझा देंगे उनको भी। चलो, भोजन करलें हम लोग । तुम्हारा ही इतजार कर रहा तीनो उठ भोजन कक्ष में जा बने हैं। भोजन समाप्ति पर भुवनेशजी कहते हैं--- रामति । बहुत थकान हो गई माज सुबह से तो। प्रब तुम पर चतो। 143

हम माज तो साहिलाजी के यही सो जात हैं। सुबह नौ बजे तक प्रा जाया
तुम । फिर दोनो साथ चलें चलेंग राज्यपाल के यहाँ । क्या ठीक है ना। फिर
फल ही दिल्ली निक्ल जायेंगे। हम वहा भी बहुत काम करने हैं जाकर।
फिर मुझे माना दें। सुबह नौ बजे मा जाऊगा।
ठीक है। तुम भी माराम वरी। थक गय होगे।
रामबलि हम दोनो को अभिवादन कर बाहर चले गये हैं। कार की
मावाज से लगा कि उनको गाडी वगले से बाहर जा चुकी है।
साहिला । हमार सोन को क्या व्यवस्था रहगी।
माप उधर कमरे में पाराम से सोएँ। चलिए।
उह हाथ का सहारा दे पास वाले कमरे में ले जा विस्तर पर सुला दती
हूँ। उन पर कम्बल डाल दिया है। उसे तेज नीद पा रही है। मैं अपने
बमरे में जा लेटती है।

चौतीस राज्य की मुख्यमन्त्री बनने के बाद आज पहली सचिवालय पाकर बैठी हू । गये दिनो विभिन्न स्थानो पर स्वागत कायक्रम चलते रह । सबसे शानदार स्वागत वीरनगर की जनता की ओर से हुआ। जहा के सारे कायक्रम की ध्यवस्था शकरसेन ने की थी। रामबलिजी ने कायक्रम की अध्यक्षता की। वहा के लोगो को प्रसन्नता सर्वाधिक थी। फोन की घटी बज उठती है। उठा सुनती हू कौन । पाण्डेयजी । मुझसे मिलना चाहते है माप । प्रा जाईये । कोई विशेष वाय नहीं कर रही मै । फोन रख देती हू । बाहर नीचे खिडकी से देखती हूँ। सचिवालय परिसर म लगातार लोगों का माना-जाना, कारो को तेजी से आ रूकना, चले जान का क्रम सा बना हुआ है । दरवाजा खुलता है । पाण्डेयजी है । माईये रामबलिजी। उनके साथ शकरसेन भी है । वे उसे पास वालो कुर्सी पर वठने का सकेत करत हैं। साहिलाजी, हमारे शकरजी बड़ी परेशानी म मा गये है। पेट्रोलियम मत्रालय से अपने प्रदेश के लिये एल० पी० जी० गैसे रिफिलिंग स्टेशन की मनुमति ले माये हैं। लेकिन अपने यहा राजधानी में कोई जमीन ही नहीं मिल रही। माप हो वतायें कहा लगाएँ उस प्लाट को। पता नहीं कितनी मुसीवतो के बाद इह लाईसेस मिल पाया है। शकरसेनजी माप कहां लगाना चाहते हैं। गैस का मामला है नगर क्षेत्र मे तो खतरा ही रहेगा। खतरे जैसी तो मैडम कोई बात नही है। आप तो हम जमीन एलाट करवा दें यही। तो कृपा होगी मुझ पर । वीरनगर हमारे विधान सभा क्षेत्र मे लगा लें। श्रेयासजी को तो वहां के लोग मीन दे नही रहे । मापका उनसे अच्छा सवध है वहां ठोर रहेगी। -- . वहा से लाने-लेजाने की परेशानी रहगी। यातायात मे हो बड़ा खच हो जायेगा। रामवलिजी मेरे विचार से तो वीरनगर श्रेष्ठ रहेगा। ठीक है शकरजी से और बात कर र गा। यह चाहते हैं प्रापका सक्त हो जाये तो जमीन सस्ते दामो पर मिल जायेगो इह । इसम क्या परेशानी है। प्राप करवा दें इनका नाम । मुझे प्रसन्नता हो ही होगी। क्तिनी जमीन चाहिये मापको। रामवलिजी, प्रदेश का एकमात्र रिफिलिंग स्टेशन होगा इसलिए प्रार समझते ही ह जमीन कितनी चाहिये शकरसेन जी, मैडम की ओर से झडी मिल गई है बाकी हम सब करवा देग। चिन्ता नहीं करें अब पाप । मेरा काम ही समझो आप । मापका ही काम है। अच्छा। साहिलाजी, मैं चलूगा। काफी काम निबटाना है मुझे। भुवनेशजी से सुबह फोन पर बातचीत हुई थी। प्रापसे मिलना चाहत है व । दिल्ली बुलवाया है आपको। उनका फोन भी आ जायेगा । मापके पास । ठीक है । वात कर लूगी उनसे । आपका काय कसे चल रहा है । श्रेयासबाबू की बद पडी मिला, कारखाना के कमचारी, उनके नेता रोज मिल रहे हैं। हडताल, तालाब दी हुये कई महीन हान माये कसी भी शान्ति का माहौल बन नही पा रहा। श्रेयासजी बीमार पडे हैं उ ह मिला को कोई चिता नही उहोने मजदूर नेतामो से साफ कह दिया है कि वे किसी प्रकार की सहायता नही कर पायेंग। प्रार्थिक रूप से टूट चुके हैं वे। उनका लडका विनीत ही इन दिनो काम सभाल रहा है। सारे कार्यों का वागडोर इमो ने सभाल रखी है। श्रेयासजी न केवल्स के कारखाने के लिये पास गाव म जमीन ले ली है उसका निर्माण काय विनीत ही देख रहा है। श्रेयासनी तो मप्ताह • दस दिन में एक बार जा देख पाते हैं। चलिय अच्छा है उनका लडका काम कर रहा है। वह बम से कम पिता के पदचिहो पर तो नहीं होगा। नवयुवक है उत्साह से काम कर रहा होगा। पूरे जोवन यासजी उस पर किसी प्रकार का ध्यान नहीं दे पाये। दो-एक बार उससे घर पर मिली हूँ कुठित ही लगा मुझे। भाप क्व मिली उससे। 146 वह मेरे यहा लडकी से मिलने कभी-कभी माता रहता है। मम समझा घा बालज में पा रहा होगा। पर लड़की ने बताया कि वह पढ़ाई पूरी करके अपना व्य साय करता है। एक दिन मैंने उसी से पूछा तब मालूम हुप्रा श्रेयास जी का लड़का है वह । जवान बच्चे को देखकर खुशी हुई मुझे। वह श्रेयास जी से स्वभाव में बिल्कुल अलग है। गभीर और कम बात करने वाला है। अच्छा साहिलाजी मैं चलूगा । केबिनेट मीटिग कर रखी है पापन । वस सूचना भिजवानी है सब लोगो को। इक्कीस तारीख को रखी है। कोई खास मुद्दे प्रापकी नजर मे हो तो मुभसे बात कर लेना । बाकी ता बजट पर ही मुख्य रूप से चर्चा रहगी । दो-एका मुख्य वि दु हैं उन पर घर जाकर प्रापस चर्चा कर लगा। ठीक है । जैसा उचित समझे । माईये, शकरजी चले । नमस्कार साहिलाजी। । नमस्कार। पाण्यजी क जाने के बाद इला और विनीत के बारे में सोचने लगी है। विनीत को अवसर घर पर इला से बातें करती देखती हू । लगता है दोनो में अनकही आपसा समझ पैदा होने लगी है इस सब में मुझे कोई बुराई नही लगता। जैसे चल रहा है देखत हैं पागे कैमी स्थितिया बन पाती है । तब ही फोन को घण्टी बज उठती है । फोन उठा सुनती हू। सचिव न बताया दहली से पार्टी महाम श्री का पोन है । भुवनेशजी बोल रह है। नमस्कार । कहिये क्या प्रादेश है । पी० एम० ने ग्यारह तारीख को मिलने का रखा है। प्रा जाऊगी। योजना आयोग के अध्यक्ष से भी मिलना है। अच्छी बात है। प्रापमे एक ही निवेदन है हमारे राज्य के अगले वप के लिये अधिक्तम राशि जो सभव हो मजूर वरपाईयेगा। थापना ही देखना है हमारे राज्य के बार मे तो। मै दम की शाम ही ग्रा जाऊँगी। हा, हा । प्रापको ही मेहमान हू । आपका स्नह है मुझ पर । नमम्बार । रामबलिजी पूरे उत्साह से काम कर रहे है । पूरा सहयोग है मुझे। आप चिता नहीं करें। धयवाद । नमस्कार । फान रख कैलेण्डर पर नजर डालती हूँ नौ तारीख तो हा भी गई याज । कल ही जाना देहली। सोचती हू रामवसिजी भी साय चलें तो अच्छा रहेगा। सचिव से पाण्डेयजी से वात कराने को कहती हू। फिर घटी बजती है।

पाण्डेयजी बोल रह है। अभी भुवनेशजी का देहली से फोन पाया था। पी० एम० ने मिलने बुलाया है परसा। योजना प्रायोग के प्रध्यम से भी बात होगी। पाप भी चलेंगे तो मुझे वही सरलता हो जायेगी। ठीक है। क्ल रानि नो बजे के मासपास चलेंगे । प्रजो, विमान से ही चलेंगे। फोन य कर रही हूँ। दोबारा फोन कर सचिप को योजना मत्रो, योजना प्रायुक्त को शाम घर बुलवाने के लिये कहती है । यहां मन नहीं लग रहा है। सचिव से नीचे गाडी को व्यवस्था के लिये यह अपने कमरे से बाहर निकल पाई है। लिफ्ट से नोचे मा गाडी में बैठती हू । ड्राईवर पूछता है- मैडम कहा चलना है। घर। पौर कार मुख्यमत्री निवास की और चल पडती है। 148 पैतीस एक पखवाडे से अधिक समय बीता, अजीब बचनी जागते मस्तिष्क में लगातार चनती रहती है। देर रात्रि खुली पाखो से जागता करवटें बदलता रहता है। पास सो रही पत्नी मनोरमा बीच-बीच मे जब भी जागती है मुझे सुलाने का प्रयास करती है पर स्वय सो जाती है। दिन और रात म मुझे कैसा भी प्रतर नहीं लगता। चुप लेटा छत पर लगे पखे को लगातार देखत जाता है। वहाँ से नजर हटती है तो पता नहीं क्यो मेरे दाये हाथ पर रखी टेवल जिस पर दवाईया की शोशिया, इजेक्श स पडे हैं वहाँ जाकर टिक जाती सभी सुबह के नौ ही बजे हैं। पत्नी सुबह के आवश्यक कार्यों में लगी है। मेरे अधिकांश योद्योगिक प्रतिष्ठानो की तालाबन्दी को, साथ ही मेरी चिन्तामो से पूणत परिचित है। उसकी बातो का अधिकाश समय मुझे नैतिक साहस बनाये रखने का होता हैं । जो कही अच्छा भी लगता है। पर व्यवहार मे, सासारिक आधारो पर वैसा होता नहीं है। मेरे मिलो के मजदूर, उनके घर वाले पा जब मुझे बेरोजगारी से उनके जीवन की नासदी के लिये बताते हैं तो भला नही लगता। उन मजदूरो मे अधिकाशत लोग है जो अपने यौवन म मेरे यहाँ काम करने लगे और अव वृद्ध हो चले है। इन लोगो से मेरा लम्बा और परिवार सा सम्बन्ध है । इही लोगो ने दिन-रात काम करके मेरे व्यवसाय को श्रीवृद्धि की। उनके दुख से कैसे प्रांख बद कर सकता है। पत्नी चाय ले पाई और मेरी मोर देखे जा रही है । कहती है- चाय लीजिये। फिर क्या सोचने लगे। कुछ नहीं बस या ही। विनीत क्या कर रहा है। कपडे पहिन नीचे प्रा हो रहा है। दिन-रात मिल के काम मे लगा रहता है । तुम्हारे पर ही गया है वह । न खाने को न सोने की फुसत उसे। मनोरमा जिन लोगो के जीवन में कुछ प्राप्त करना है उन्ह इसी लगन से काम करना पड़ता है। मुझे प्रसनता है । 149

प्रापो, विनीत बेटा। बैठो नाश्ता कर लो।
प्रापको तबियत कैसी है मय । प्रापके आशीर्वाद स क्ल मरे मिल भारत
टेक्सटाइल का उद्घाटन होगा। प्रापको, माताजी को चलना होगा उसम।
जरूर चलेंग। पर समझ नहीं पाया इतना बडा काय तुमने कस कर
लिया।
मुझे करना था सो हो गया ।
अच्छा है । उद्घाटन कौन कर रहा है ।
प्रदेश की मुख्यमत्री साहिलाजी काम कर रही हैं।
कोन । साहिला मुख्यमत्री।
जी। हा । माप तो चौक से गये। उ होने मुझे प्रोत्साहन दिया है । गये
दिनो भी मिला उनसे उनका रुख हमेशा सहयोगी रहा ।
कैसी है अव साहिलाजी।
-
मच्छी है।
तुम्हारा उनसे परिचय कसे हुया ।
उनकी लडकी मरे साथ यूनिवर्सिटी मे दो साल पीछे पढ़ती थी। पहिले
मेरा उससे परिचय हुआ था। उस समय साहिलाजी राजनीति म भी नहीं
थी। उन दिनो दो-चार बार उनके घर भी गया था।
ठीक है । खूब काम करो। पर यह लोग राजनीति के हैं इनसे चौक्ता
रहना भी प्रावश्यक है। यह वात हमेशा तुम्हारे मन म रहनी चाहिये । एक
कदम भी इधर स उधर नहीं होना चाहिये।
वह मुझे याद रहगा । डाक्टर पाता ही होगा। प्राप दवाएं लगातार लत
लेता हो हू । तुम्हारी मा सेवा करती है। सच कहू जव से बीमार हुमा है
घर में रहने का अवसर हो अब मिला है मुझ । वरना जीवन का अधिकाश
हिस्सा मैंने पर से बाहर ही निकाल दिया। तुम पर अधिर ध्यान नहीं द
पाया । यह कमी हमेशा पटकती रहती है।
पिताजी मार द्वारा लगाए भौतिक मुरिधानो ये जगल म मा मापको
नीड़ में पहचहाती मेरो मायाज तर भी सुनने का मामो प्रसर नहीं
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मिना । किशोरावस्था से यौवन देहलीज पर कब मैंन पैर से यह सारे क्षण प्रारको मावा म कभी स्थिर नहीं कर पाये माप । वस चाहने नहीं चाहते में बड़ा होता गया। पैतृक सस्कार के रूप मे मापसे सच कहू मुझे क्या मिला याद नहीं कर पाता में। एक पिना के रूप म भापको महज देखा और समझा इससे अधिक कुछ नही । पर वीत समय ने जरूर इम प्रायु मे ही समझा दिया है कि जि दगी की राह मुझे स्वय खोजनी होगी और उसी मे लगा भी है। विनीत । मेर दोप टू ढने स तुम्हे कोई लाभ नहीं होगा। प्रसन्नता है जीवन की कडी सच्चाई को तुम समा गय हो। जिस सस्कारहीनता को लेकर मैंने जीवन जिया है उससे मधिक तुम्हे और दे भी क्या सकता था। व्यतीय का मुझे कैसा भी सुख अनुभव नहीं होता। जो बात है हर क्षण अनुभव करता रहा उसे तुमने इस कटुसत्य के रूप में मेरे सामने उधेड कर रख दिया पाश्चयक्ति हू मैं। नई पीढ़ी के हो तुम और इतने समझदार हो जानकर भला लगा। तुम बिना हिचक जीवन मे आगे बढो मेरा पाशीर्वाद है। पहने-कहते पिताजी बेहोश हो गये थे । झकझोरते मैंने कहा था- पिती, क्या बात है। पीछे खडो मा न साडी के पल्लू से मांसू पोछत कहा था- विनीत । घबरामो नही होश आ जायेगा उह । एक बात ध्यान से सुनो तुम ही नहीं समाज के हजारो युवक-युवतियां ऐसे ही जीवन को जी रहे है । तुम तो विश्वविद्यालय मे पढे हा वहाँ कुछ भी नहीं देखा क्या । यह सच है तुम्हारी नई पीढी इस अभिशाप को भोगने को विवश है लेकिन बुजुग पीढी * लिये सहानुभूति का मन मे ला पानो तो तुम दोनो अपने-अपने समय में सुख से अभी भी सकते हो। स्वय के जीवन निर्माण मे आज का सत्य ही काम पाता है कल के मादश नहीं। क्योकि प्रादश, मा यताएँ युग के सत्य बदलते रहते हैं। इस समय में इतना ही कहना चाहती हू । डाक्टर प्रसाद मा गय हैं तुम जाग्रा काम करो। मैं सभाल लूगी इह । होश आने पर तु हे देव विचलित हो जायेंगे । आईये । डाक्टर प्रसाद । नमस्कार । विनीत जी। कैस है श्रेयामजी । आप बैठे चैक अप कर लेता मा ने मुझे बाहर जाने को कहा है। मैं अपना ब्रीफकेस उठाए बाहर चला जाता हूँ। 151 मनोरमाजी। इह माराम वरन दें। अधिर वातनीत स यह मानसिक नियत्रण यो देत है। और यहाग हा जात है। मेरी राय म इह प्राप मेर प्रस्पताल म भर्ती करवा दें। कुछ दिनो यहा रहगे परिवतन भी हो जायेगा। माप चाह तो पाप भी रह सस्ती हैं। सारी व्यवस्था है वहा पर । जैसा माप उचित समझे । यहा घर पर जागते-सान हममा पोर चितामा मे डुवे छत को देखते रहते हैं। मिला के बद हो जाने के बाद सोचत हुए हो अचेत हो जाते हैं। आपको दी हुई दवा से इह लाभ है। मिल के मजदूरा को खराव हालत पर परशान रहते हैं। वे लोग इनस मिलने आत रहते हैं। माप यह दवाएँ और इजेक्श स प्रौर मगवा लीजिये। वारी मैं इनके अस्पताल जाने पर सोचकर बताऊँगा। मापने विनीत के विचारो को बताया था। इहे कम से कम बात करने दें उनसे। क्योकि यह कहते मधिर नहीं वस सोचते रहते हैं उसी से इनका स्वास्थ्य और खराब हाता है। इस बात का विशेष ध्यान रखें। डाक्टर प्रसाद, कोशिश करती हू ऐसा नही हो पर इनकी अस्वस्थता, विनीत की इच्छामो को टोक पाना दोनो के घमसक्ट से उबर नही पाती। फिर भी ध्यान रखू गी। मनोरमाजी। मैं चालता है। डाक्टर प्रसाद अपना बैग उठाये शात कदमा से दरवाजे को मौर बढ गये हैं । उहे जाते देखती रहती है। 152 छतीस वेहली में पार्टी हाईकमान की मीटिंग के बाद सचिवालय के अपने कमरे में आकर बैठी हू । देहली मे भुवनेशजी, पार्टी के अन्य उच्चस्तरीय पदा- धिकारियो के साथ विचार-विमश, उनके निर्देशा से मुझे लाभ ही हुआ है। साथ ही मुझमे काय को निष्ठा से करते चले जाने की भावना को बल मिला मौर मेरा मात्मविश्वास दृढ भी हुला। रामबलिजी के साथ होने से मुझे किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई। राज्य के कई मामलो पर पार्टी हाई- कमान से अकेले ही बातचीत की। सच तो यह है उन विषयो पर मुझे वात करनी होती तो मेरे लिये कठिनाई हो सकती थी। टेलीफोन की घटी बज उठती है कोन है मातुर साहब । हरिबाबू है। मदर भेज दो उह । आईये हरि बाबू, वठिये, कस हैं प्राप। कृपा है अापको। कहिये । कोई विशेप काय । हा, विशेष भी मान सकती है पाप । श्रेयासजी गम्भीर रूप से बीमार हैं। प्राज मस्पताल गया था। मापसे मिलकर प्रत्यन्त प्रावश्यक बात करना चाहत है । मापकी सुपुत्री से भी कहा था उहोने । थे यास वावू को मुझसे क्या काय हो सकता है। खैर, प्रयास करूंगी . मिलने का। प्रयास नहीं मंडम माप मिल हो लीजियेगा। व शायद उनके वद पडे मोद्यागिक सस्थानो के बारे म बात करना चाहते हैं । ठीक है मिलने जाऊंगी। किस प्रस्पताल म है । डाक्टर प्रसाद के यहां हैं। समझ गई मैं । मापका कार्य कसा चल रहा है। मन्दा ही है । माप क्या नहीं जानती। 153 पाय करते रहिये। अापकी देहली यात्रा कैसी रही । सुखद रही। नया बहुत कुछ सोपने को मिला। मैडम । माप बुरा नही मान ती युछ पूछना चाहता हूँ । जरूर पूछिये । वैसे भी मेरे मुख्यमन्त्री बनने के बाद शायद प्राज हो पहली बार भेट हो पा रही है आपस । पाप किसी कारण नाराज तो नहीं है मुभसे । पतई नहीं । प्रापसे नाराजगी का कारण क्या हो सकता है। आपकी तो प्रामारी हूँ मैं। मुझे राजनीति मे लाने का घेप पापो ही है । मापन ही पार्टी मे सदस्य बनाया मुये। माज जिस स्थान पर पाई है आपके सहयोग के विना सम्भव नहीं था। माप सच माने उपकार मानती हू अापका। एसा मत कहिये अापके मुंह से एमा सुन मला नहीं लगता। पाप में योग्यता है, कुछ कर गुजरने की भावना है। फिर भापको जो कुछ भी अवसर मिला है उसके लिये पूणत योग्य है। एक उत्सुक्ता अवश्य है मुप म। माप मेरे बारे म स्वस्थ दृष्टिकोण रखती है फिर जोपन मुझे कसे भी कार्यभार के योग्य नहीं समझा। इसका उत्तर नहीं खाज पाता मैं । आप विधायक है, पार्टी के वफादार सैनिक हैं यही सेवा कौनसी कम है । रही मत्रीमडल मे नही लिये जाने का कारण उसके लिये स्पष्ट कर दू मापको मत्रीमडल के चयन म अधिकाश रूप से पार्टी हाईकमान के प्रादशो के मागे मुछ भी नहीं कह सक्ती मैं। वैसे आप काम करते रह, अपन क्रियाकलापो से यह विश्वास दिला दें कि अनुशासन की सीमा जिह लाधन को मारने कोशिश की थी वह अब भापके मस्तिष्क से साफ हो गई है तो समय माने पर प्रापका जरूर कोई जिम्मेदारी दी जा सकती है। मापको मेरे वार मे मही रिपोट मिलती नहीं है या कुछ गलतफहमियाँ प्रवश्य हो गई हैं। मुझे कभी भ्रम नही होता । तस्कर शकरसेन के साथ मिल मत्रीमण्डल के गठन के समय जो तरीके आपने अपनाने चाहे किसी से छिप तो हैं नहीं। मेरी बात का बुरा नहीं मानें बाप। कई दिनो बाद आपसे बात करने का अवसर पाया है तो मैंने कह भी दिया अन्यथा कहने जसी आवश्यकता भी नही माननी मैं। 154 ऐसा कुछ भी नहीं था मैडम । रामबलिजी ने प्रापको। सही सूचना नहीं दो है में समझ गया। हरिवाबू। सही क्या है आप और मै दोनो ही जानत हैं । अनावश्यक चर्चा से कोई लाभ नहीं । आप इस बात को या भी मान ले राजनीति है यह इसम कई दृष्टिकोणो से एक बात को समझा, परया, जाना जाता है। रही रामवलिजी की बात व्यक्तिगत जीवन मे व क्या है अधिक जानकारी नही मुझे पर हर कदम पर मर दायें हाथ की तरह मेरा सहयोग किया है और प्राज भी करते है। मडम । प्रापने मेरे प्रति जो धारणा बना ली है मैं समभवा हू उसे इतनी बल्दो साफ नहीं कर पाऊगा मैं । समय के साथ हा सकता है स्थितिया, चेहरे आपके मामन साफ होत जाएँ और पाप नई दृष्टि से कुछ सोचन लगें। अच्छा चलू गा मैं । प्राप घे यामजी स अवश्य मिल ल । शायद अधिक समय के मेह- मान नहीं हैं है । कही यह न हो मापसे जो बात वे करना चाहते हैं मृत्यु से पूर्व यह नहीं पाएं । नमस्कार । चलूगा मैं । एक वष्ट जरूर करें पाप डाक्टर प्रसाद को फोन पर बता दें आज शाम ही उनके अस्पताल जाऊगी मैं। कितने बजे तक जा पायेंगी माप । यही कोई पाँच छ वजे के पासपास । कह दूँगा मैं । माप मिल लेंगी तो उनकी मात्मा को शान्ति मिलेगी। चलूगा मैं। नमस्कार । हरिवाबू। हरिबाबू उदास कदमो से चुपचाप मेरे कमरे से बाहर चले गये हैं । उन्ह मैंने जितना साफ-साफ कह दिया सोचती हु गलत नही था वह । भपने व्यतीत, धे यातजो, हरिबाबू के बारे में सोचने लगती हू । 155 सैतीस डाक्टर शाम पडो पर उतर आई है। पांच मात गाडिया का लवाजमा डाक्टर प्रसाद के बडे अस्पताल के अहाते में पता है। डाक्टर प्रसाद निक्ल बाहर पाते हैं। मालाग्रो से स्वागत करते। मेरे सचिव माथुर उह ये यासजी के स्पेशल वाड के बारे में पूछत हैं। उत्तर म वे कहते हैं- मायुर साहब दिन म प्रापमा फोन मा गया था। पाप लोगो की प्रतीक्षा हो कर रह ५ हम लोग। इधर से मा जाईये महम। कैसा स्वास्थ्य है श्रेयास वावू का । कसा भी सुधार नहीं है। ईश्वर पर छोड दिया है उनके जीवन का। रहा हमसे जितना हो सकता है वह कर हो रहे हैं । प्रायो, इला वेटी। मेरे साथ बटो इला भी है। पर से चलते समय पहने लगी सेठ प्रयास जी को देखना और मिलना चाहती है वह । सो उस भी साथ ले भाई म । सोचा उसका घूमना भी हो जायेगा। चलते श्रेयांसजी के काटज तक पहुचे हैं । डाक्टर प्रसाद कहते हैं मैडम माप और इलाजी दो हो मदर जायें तो श्रेष्ठ होगा। अन्दर सेठ साहब के सुपुत्र विनीत जो, उनको माताजी भी हैं। अधिक लोगा से ठीक नही रहगा। हमार साथ चल रहे अमला वही रूक गया है। मैं और इला पदर जाते हैं । श्रेयासजी के खून चढ़ाया जा रहा है। मुझे देख चाहत हैं उठे वै । उनके पायजा लेटे रहन को कहती हूँ प्रापकी तबियत कसी है यासजा। हाय के सक्त स पास बठने को कहते हैं। फिर चुदबुदाते स कहते हैं- पापको इसलिए तकलीफ दी कि मेरे मिला के हजारो मजदूर तालावदी, हडताला के कारण सहक पर आ गय हैं । आप कृपा करें मुय पर वे द्र सरकार से बात कर सारे प्रौद्योगिक प्रतिष्ठानो का राष्ट्रीयकरण करा शुरू करा 156 , मुझे एक पैसा नहीं चाहिये । पर मजदूरो के चहरे पर लिखी भूख को नही दख साता मैं । यह तुम्हारी बेटी है ना। हा। श्रेयासजी। केद्र सरकार से बात कर जो भी हो सकता है क्यिा जायेगा। प्रापको इस हालत को देख पुरानी सारी बातो को भूल जाना चाहती हू मैं । साहिला। तुमसे यही प्राशा थी मुझे। मरे मन पर पड़ा भार दूर कर दिया है तुमने । मेरे लडया विनोत तुम्हारी वेटो की प्रशसा करता रहता है उसकी मा का। हा । श्रेयासजी। एक-दो बार इह इला के साथ अवश्य देखा है मैंने । साहिला । जीवन समर से चलते-चलत एक वार और कहना चाहूगा इला मुझ दे दो। वहू बनाना चाहता हू मैं । इला और मरी दृष्टि मिलती है। वह कहती है- मम्मी । लोरसभा का चुनाव लड़ने का निश्चय कर लिया है मैंने । शादी परके अपन भविष्य को किसी एक के साथ वाघ देना नहीं चाहती मैं । मभा लम्बी उम्र सामन पडी है भर । इला । मुझे बहुत सी ग्राशाएँ है तुमस । विनीत । मेर हमार मित लेन का अथ ठीक से नहीं लगा पाये तुम । मेंने तुमसे विवाह जैम वधन म उलयर फस जाने की भी सोची भी नही थी। मेरे जीवन क रास्त अलग हैं, उद्देश्य अलग हैं । इला वेटी। राजनीति जिरो तुम भविष्य मान रही हो कठिन रास्ता है वह । क्सिके सहारे चलना चाहती हो तुम । मम्मी। यह दृढ निश्चय हे मरा । शररसेन मेरे साथ है। क्या रहा शरमेन, तसर । तुम कुछ भी कह सक्नी मम्मी। मुझे भी स्वत यता से जीने का अधि- कार है और मेरे जीवन पर प्रापक से भी निययण को बर्दाश्त नहीं कर पाऊगी में। मैं कुछ भी विनीत, यामजी चौरी इला की पोर देस जा रह हैं । यह पाऊ हिम्मत नहीं रही मुभमें। पाम रखी कुर्सी पर धड़ाम से वठ जाती है । कुछ देर बाद उपस्थित लोगो का ध्यान पाता है माहस कर बोन पाती -

साहिला । क्षमा कर दी इह उत्तराधिकार में हम कुछ भी तो नही द
पायें हैं। दोप इनसे अधिक हमारा है । इला वेटी, इधर
कहते श्रेयासजी बेहोश हो जाते है । डाक्टर प्रसाद यहा आ गये हैं।
उपस्थित लोगो से प्राथना के स्वर मे कहते हैं-
पाप कृपा करके बाहर आ जायें। श्रेयासजी गभीर हैं।
एक-एक कर हम लोग वाहर मा गये है। सब साथ हैं पर अपन-पो
अजनबियो को तरह ।
इतिधी।
158

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Uttradhikar

Author
Prafulla Prabhakar
Title
Uttradhikar
File name
Uttradhikar
Text
OCR done
Citation
1959
Published
2011/03
Publisher
Chandra Mohan Himkar Nasira Bad Road Ajmer
Language
Sanskrit
Pages
177
Library
Shree Jubilee Naagari Bhandar Bikaner
Classification
Literature
DLI number
551202
Barcode
4990010031966.00
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C-DAK, Kolkata
Digital publisher
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