Shree Jubilee Naagari Bhandar Bikaner

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2011/03

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.
Witik
तलविया
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साहिर लुधियानवी
राजपाल एण्ड सन्ज,दिल्ली

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दो शब्द उर्दू मे तो खैर, 'साहिर लुधियानवी का बडा नाम है। उनके कविता संग्रह 'तल्खिया' के वीस-एक सस्करण छप चुके हैं और वे नई पीढी के उदू शायरो मे सब से लोकप्रिय शायर समझे जाते है अब हिन्दी मे भी वे किसी परिचय के मोहताज नही रहे । लेकिन प्रत्येक पुस्तक को प्रस्तावना लिखनी या लिखवानी एक परम्परा-सी बन चुकी है और हमारा देश अच्छी बुरी समस्त परम्परामो के कडे पालन का अभ्यस्त हो चुका है, अतएव इन दो शब्दो द्वारा मैं केवल यह परम्परा हो पूरी कर रहा हूँ। 'साहिर' की शायरी और उनके व्यक्तित्व के बारे मे, जैसा कि मैं कह चुका हू, मै बहुत कुछ लिख चुका हू । फिर मैने सोचा कि अपनी ओर से कुछ लिखने की बजाय मै उदू के उन समालोचको की रायें यहा अकित कर दू जो अब तक 'साहिर' और उनकी शायरी के बारे मे छप चुकी हैं। लेकिन फिर यह सोचकर मैंने यह विचार भी छोड दिया कि जो पाठक 'साहिर' को नहीं जानते वे उन १ जिसका हिदी स्प मापके हायो म है। २ इससे पूर्व 'उद् के लोक- प्रिय शायर' नामक पुस्तक माला मे मैं उनकी रचनामो का चयन, प्रस्तावना के रूप में उनका जीवन-चरित्र, भौर उनकी शायरी पर विस्तार से समालोचना पर चुका है। और अभी हाल मे उनके फिल्मी गीतों की एक पुस्तक 'गाता जाए बजारा' भी छपी है।

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सूची १२ १४ १७ १८ २० १ रद्दे अमल २ एक मजर ३ एक वाकया ४ यक्सूई ५ शहकार ६ गजन ७ नज़ कालेज ८ गजल ६ माजूरी १० साना पाबानी ११ सरज़मीने यास १२ गजन १३ शिवस्त १४ राजल १५ क्सिीको उदास देखकर मेरे गीत १७ अरामार १८ एव शाम १६ सोचता हू २० नाकामी २३ २४ २७ २८ ३४ ११ ४०

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१३
५२ ये किसका लहू है
५३ मफाहमत
५४ माज
५५ गज़ल
५६ नया सफर है पुराने चिराग गुल कर दो
५७ शिकस्ते जिंदा
५८ लहू नजू दे रही है हयात
५६ मावाजे प्रादम
६० गजल
६१ मतान एगर
६२ तेरी अावाज
६३ गजल
६४ वफादारी
६५ अजनबी बन जाएं
६६ मेरे प्रहर के हसीनो ।
६७ परछाइया
६६
१००
१०२
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५२ ये किसका लहू है
५३ मफाहमत
५४ माज
५५ गज़ल
५६ नया सफर है पुराने चिराग गुल कर दो
५७ शिकस्ते जिंदा
५८ लहू नज़ दे रही है हयात
५६ आवाजे प्रादम
६० गजल
६१ मतान ए-गर
६२ तेरी नावाज
६३ गजल
६४ वफादारी
६५ अजनबी बन जाएँ
६६ मेरे अहद के हसीनो।
६७ परछाइया
१०७
१०८
११०
११२
११३
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दुनिया ने तजुति-श्रो-हवादिस' की शक्ल में जो कुछ मुझे दिया है वो लौटा रहा ह में

रहे अमल
चन्द कलिया निशात की चुनकर
मुद्दतो महवे - याम' रहता हू
तेरा मिलना खुशी की बात सही
तुझ से मिलकर उदाम रहता हू
१ प्रतिक्रिया
२ मानद की
३ गम में हुवाहमा

मेरे गीत तुम्हारे हैं
१३
एक मन्जर'
उफक के दरीचे से किरनो ने झाका
फजा तन गई, रास्ते मुस्कुराये
सिमटने लगी नर्म कुहरे की चादर
जवा शाखसारो ने धूघट उठाये
परिन्दो की आवाज़ से खेत चौके
पुरअसरार' ले मे रट्ट गुनगुनाये
हसी शवनम - आलूद पगडडियो से
लिपटने लगे सब्ज़ पेडो के साये
वो दूर एक टीले पे आचल सा झलका
तसव्वुर म° लाखो दिये झिलमिलाये
४ जवान शाखामों ने
१ दृश्य
५ रहस्यपूण
२ क्षितिज के
३ वातावरण
६ भोस भरी ७ कल्पना मे

१४
साहिर लुधियानवी
एक वाकया
अधियारी रात के आगन मे ये सुबह के कदमो की ग्राहट
ये भीगी-भीगी सद हवा, ये हल्की-हल्की बुदलाहट
गाडी मे हू तनहा महवे-मफर' और नीद नहीं है आखो मे
भूले - विसरे रूमानो के रावो की जमी है आखो मे
अगले दिन हाथ हिलाते हैं, पिछली पीतें याद आती है
गुमगश्ता खुशिया आखो मे आसू बनकर लहराती है
सीने के वीरा गोगो मे इक टीस-मी करवट लेती है
नाकाम उमगें
रोती है उम्मीद सहारे देती है
वो राह जहन म' घूमती है जिन राहो से आज आया हू
क्तिनी उम्मीद से पहुचा था, कितनी मायूसी लाया हू
४ सोई हुई ५ वीरान योन।
१ घटना २ पोला ३ यात्रा-मग्न
६ मस्तिमम
मे

मेरे गीत तुम्हारे हैं १५ यकसूई ? ? ? अहदे-गुमगश्ता की' तसवीर दिखाती क्यो हो एक आवारा-ए-मजिल को सताती क्यो हो वो हसी अहद जो शर्मिदा-ए-ईफा न हुआ , उस हसी अहद का मफहूम जताती क्यो हो ? जिन्दगी शो'ला-ए-बेबाक बना अपनी, खुद को खाकस्तरे खामोश वनाती क्यो हो ? मै तसव्वुफ के मराहिल का नही हू कायल' , मेरी तसवीर पे तुम फूल चढाती क्यो हो कौन कहता है कि आहे है मसाइव का इलाज, जान को अपनी अवस" रोग लगाती क्यो हो? एक सरकश से१२ मोहब्बत की तमन्ना रखकर, खुद को आईन के 13 फदे मे फमाती क्या हो ? मैं समझता हू तक्दुम को तमदुन ५ का फरेब, तुम रसूमात को ईमान बनाती क्यो हो? जब तुम्हे मुझ से जियादा है ज़माने का खयाल, फिर मेरी याद मे यू अश्क" वहाती क्यो हो ? तुम म हिम्मत है तो दुनिया से बगावत कर दो। वर्ना मा-बाप जहा कहते हैं शादी कर लो। १ खोए हुए (बीते) दिनो की २ जिसको कोई मजिल न हो ४ जो पूरा न हुमा ५ घृष्ट शोला ६ मौन राख ७ सूफीवाद के + सीढियो का ६ अनुयायी १० विपदामो का ११ व्यथ १२ उद्दण्ह १३ पानून के १४ पविनता १५ सस्कृति १६ रीति रिवाजो को १७ सासू

साहिर लुधियानवी
शहकार'
मुसव्विर | मै तेरा शहकार वापस करने आया हू
।
अब इन रगीन रुखसारो मे थोडी जर्दिया भर दे,
हिजाब-पालूद नजरो मे जरा बेवाकिया भर दे।
लबो की भीगी-भीगो सल्वटो को मुजमहिल' कर दे,
नुमाया गे पेशानी पे" अक्से-सोजे दिल कर दे ।
तबस्सुम-ग्राफरी' चेहरे मे कुछ सजीदापन भर दे,
जवा सोने को मखरूती'° उठाने सरनिगू' कर दे ।
घने वालो को कम कर दे मगर रखशदगी दे दे,
नज़र से तम्बनत लेकर मजाक-माजिज़ी१४ दे दे।
मगर हा, बच के बदले इसे सोफे पे बिठला दे,
यहा मेरी बजाए इक चमकती कार दिखला दे।
६ व्याकुल
१ महान कलाकृति २ चित्रकार
गाला मे
४ लज्जाशील
५ होटो की
७ माथे के रग पर ८ हृदय की जलन
का प्रतिविम्ब ६ मुस्कराते १० गोल और नुकीली ११ झुकी हुई
१२ चमक १३ मभिमान १४ विनयशीलता

मेरे गीत तुम्हारे हैं
१७
गजल
मोहब्बत तर्क की मैने, गिरेगा सी तिया मैंने
जमाने ! अब तो खुश हो, जहर ये भी पी लिया मैने
अभी जिन्दा हूं लेकिन सोचता रहता हू खलवत मे'
कि अब तक किस तमन्ना के सहारे जी लिया मैंने
उन्हे अपना नही सक्ता मगर इतना भी क्या कम है
कि युछ मुद्दत हसी रवायो म खोकर जी लिया मैने
बस अब तो दामने-दिल छोड़ दो बेकार उम्मीदो
बहुत दुख सह लिये मैने, बहुत दिन जी लिया मैंने
१ एकात मे

१८
साहिर लुधियानवी
नज़-कालेज
ऐ सरजमीने-पाक के याराने-नेक्नाम' ।
वा-सद-सुलुस शायरे-पावारा या सलाम ।
ऐ वादि-ए-जमील | मेरे दिल की धडकनें,
प्रादाव कह रही हैं तेरी वारगाह मे।
तू आज भी है मेरे लिए जनते सयाल ,
हैं तुझ में दफ्न मेरी जवानी के चार साल ।
कुम्हताये हैं यहा पे मेरी ज़िन्दगी के फून,
इन रास्तो में दफ्न हैं मेरी खुशी के फूल ।
तेरी नवाजिशो को भुलाया न जायेगा,
माजी का नक्श दिल से मिटाया न जायेगा।
तेरी निशातग्वेज' फजा-ए-जवा की खैर,
गुलहाए-रगो बू के हसी कारवा की खैर।
दौरे-खिशा में भी तेरी कलिया खिली रहे,
ताट' ये हसीन फजाय बसी रहे ।
हम एक खार१४ थे जो चमा से निकल गये,
नगे - वतन१५ थे हद्दे वतन से निकल गये ।
१ कालेज की भेंट २ पवित्र भूमि के ३ यशस्वी मित्रो । ४ सकडो
(बडी) शुद्धहृदयता के साथ ५ सु दर घाटी ६ सभा-स्थल मे ७ खयालो की
जन्नत ८ चित्र ६ आनद-दायक १० जवान वातावरण की ११ सुगधित
फूलों के १२ पतझड की ऋतु मे १३ प्रलय तक १४ काटा १५ देश के
लिए लज्जा की वस्तु

१९
मेरे गीत तुम्हारे हैं
गाये हैं इस फजा मे वफानो के राग भी,
नग्माते-पातशी से वसेरी है आग भी ।
सरकश' बने हैं, गीत बगावत के गाये है,
बरसो नये निजाम के नक्शे बनाये हैं।
नग्मा निशाते-रह का गाया है बारहा,
गीतो में प्रासुमो को छुपाया है बारहा ।
मासूमियो के जुर्म मे बदनाम भी हुए,
तेरे तुफैल मूरिदे-इल्जाम भी हुए।
इस सरज़मी पे आज हम इक बार ही सही,
दुनिया हमारे नाम से वेजार ही सही।
लेकिन हम इन फजामो के पाले हुए तो हैं,
गर यां' नही तो यां से निकाले हुए तो है ।
(लुध्याना गवनमैंट कालेज-~-१९४३)
जिंदगी को बेनियाजे-आरजू करना पड़ा
प्राह किन आखो से अजामे-तमन्ना देखते
१ उद्दड २ व्यवस्था के ३ मातरिक मानन्द का गीत ४ वार-बार.
५ मारण ६ दोप के भागी ७ वोझ र यहाँ

२०
साहिर लुधियानवी
गजल
देखा तो था युही किसी गफलत-गमार ने'
दोवाना कर दिया दिले - बेइख्तियार ने
ऐ आरजू के धुदले सरावो । जवाब दो
फिर किस की याद आई थी मुझको पुवारने
तुझ को खबर नहीं मगर इक सादालौह को
वर्बाद कर दिया तेरे दो दिन के प्यार ने
मैं और तुम से तर्के-मोहब्बत की आरजू
दीवाना कर दिया है गमे-रोजगार ने
अव ऐ दिले-तवाह ! तेग क्या खयाल है
हम तो चले थे काकुले - गेती सवारने
१ लापरवाही जिसका स्वभाव हो २ सहहरो ३ सरल स्वभाव याले
४ प्रेमदास्यागने की ५ सांसारिक दुप्पो ने ६ मसार रूपी के

मेरे गीत तुम्हारे हैं
माग्रजूरी'
खलवत-ओ-जलवत मे तुम मुझसे मिली हो बारहा,
तुम ने क्या देखा नही, मै मुस्करा सकता नहीं ।
मै कि मायूसी मेरी फितरत मे दाखिल हो चुकी,
जब भी खुद पर करूं तो गुनगुना सकता नहीं ।
मुझ मे क्या देखा कि तुम उल्फत का दम भरने लगी,
मे तो खुद अपन भी कोई काम आ सकता नहीं ।
रूह - अफजा है जुनूने - इश्क के नग्मे मगर,
अव मे इन गाये हुए गीतो को गा सकता नहीं ।
मैने देखा है शिरस्ते - साजे - उल्फत का' समा,
अब किसी तहरीक पर वरवत उठा सकता नही ।
दिल तुम्हारी शिद्दते - एहसास से वाकिफ तो है,
अपने एहसासात से दामन छुडा सकता नही ।
होकर भी बेगाना ही पाओगी मुझे ।
मैं तुम्हारा होके भी तुम मे समा सकता नहीं ।
तुम मेरी
१ विवशता २ एवात में और सब के सामने
३ स्वभाव मे
४ प्राण-वधा ५ प्रेमो माद ६ प्रेम रूपी बाजे । टूटना ७ प्रेरणा
६ साज ६ अनुभूति की तीव्रता से

२२
साहिर लुधियानवी
गाये हैं मैने खुलूसे-दिल से' भी उल्फत के गीत,
अब रियाकारी से भी चाहू तो गा सकता नहीं।
किस तरह तुमको बना लूं मै शरीके-ज़िन्दगी ?
मैं तो अपनी ज़िन्दगी का वार उठा सकता नही ।
यास
की तारीकियो मे डूब जाने दो मुझे,
अब मै शम्मन-ए-यारजू की लौ बढा सकता नही ।
४ बोझ
१ शुद्धहृदयता से २ पास से ३ जीवन-साथी
५ निराशा मी ६ अपकार मे ७ मापाक्षा-रूपी दीपक

Yffଙ୍କ
मेरे गीत तुम्हारे हैं
१३
खाना-प्राबादी
(एक दोस्त की शादी पर)
तराने गूंज उठे है फज़ा मे शादियानो के,
हवा है इत्र-आगी', ज़र्रा-जर्रा मुस्कुराता है ।
मगर दूर, एक अफसुर्दा मका मे सर्द विस्तर पर,
कोई दिल है कि हर आहट पे यूही चौक जाता है।
,
मेरो आखो मे आँसू आ गये 'नादीदा आँखों' के'
मेरे दिल मे कोई गमगीन नम्माँ सरसराता है।
ये रस्मे-इन्किता-ए-अहदे-उल्फत , ये हयाते-नौ ,
मोहब्बत रो रही है और तमदुन' मुस्कुराता है ।
ये शादो खाना आवादी हो, मेरे मोहतरिम भाई,
मुबारिक कह नहीं सकता, मेरा दिल काप जाता है।
१ सुगधित २ उदास ३ मनदेखी भोसो के ४ प्रम-काल की
समाप्ति की रीति ५ नव जीवन ६ सस्कृति ७ मादरणीय
V

२४ साहिर लुधियानवी सरजमीनेन्यास' है जिन्दगी। . जोने से दिल वेज़ार है, हर सास इक आजार है। कितनी हज़ी है जिन्दगी । अदोहगी वो वपमे अहवावे - वतन' वो हमनवायाने - सुखन' । पाते हैं जिस दम याद अब, करते हैं दिल नाशाद अब । गुजरी हुई रगीनिया, खोई हुई दिलचस्पिया। पहरो रलाती है मुझे, अकसर सताती हैं मुझे। वो जमजमे , वो चहचहे, वो रूह-अफजा' कहकहे । जव दिल को मौत आई न थी, यूं बेहिसी छाई न थी। वो नाजनीनाने जोहरा - जवीनाने वतन २ जिन मे से इक रगी-कबा, आतिश-नफम'४ आतिश-नवा' १ निराशाओ की भूमि २ कप ३ शोकाकुल ४ शोक ग्रस्त ५ स्वदेशीय मित्रो की महफिल ६ सहवाणी (मित्र) ७ दुसी ८ गान ६ प्राण बद्धक १० स्पदनहीनता ११ १२ देश की सुदरिया १३ रगोन वस्त्रो वाली सुदरी १४ ज्वाला मय श्वासो वाली १५ अग्नि भाषी वतन', - मेरे गीत तुम्हारे हैं २५ - - करके मोहब्बत - प्राशना' रगे - अकीदत आशना । दिले नाकाम को, खू - गश्ता-ए-पालाम को । दागे जुदाई दे गई, सारी खुदाई ले गई उन सातो की याद मे, उन राहतो की याद मे । मरमूम सा रहता हू में, गम की कसक सहता हू मै सुनता हू जब अहवाव से' किस्से गमे - अय्याम के । बेताव हो जाता हू मै, आहो मे खो जाता हू मै । फिर वो अज़ीज-ओ-अकवा' जो तोड कर अहदे - वफा । अहवाब से मुंह मोड कर, दुनिया से रिश्ता तोड कर । हद्दे - उफक से उस तरफ, रगे-शफक से" उस तरफ । इक वादी-ए सामोश'२ को, इक आलमे - बेहोश की। गहराइयो म सो गये, तारीकियो मो४ खो गये। १ प्रेम से परिचित २ श्रद्धा के रंग से परिचित ३ दुखो का मारा हुमा ४ क्षणो की ५ सुखा की ६ मित्रो से ७ दिनो के (सासारिक) दुखो के ८ मित्र । प्रेम निभानवी प्रतिज्ञा १० क्षितिज की सीमा से ११ ऊपा दे रग से १२ निस्तब्ध घाटी १३ बेहोशी की हालत दी १४ अपवार म .

साहिर लुधियानवी
उन का तसव्वुर नागहा,
लेता है दिल मे चुटकिया।
और ख् रुलाता है मुझे
बेकल बनाता है मुझे।
वो गाव की हमजोलिया,
मफलूक' दहकां-जादिया ।
जो दस्ते - फर्ते - यास से,
और यूरिशे - इफलास से ।
इस्मत लुटाकर रह गई,
खुद को गवा कर रह गई।
गमगी जवानी वन गई,
रुसवा' कहानी बन गई।
उनसे कभी गलियो मे अब,
होता हूँ मै दोचार जव ।
नजरे
झुका लेता हूँ मैं,
खुद को छुपा लेता हू मै
क्तिनी हज़ी है ज़िन्दगी।
अन्दोहगो है ज़िन्दगी ।।
१ निधन २ किसानो की बेटिया ३ निराला को अधिाता (के हाथ) से
४ निधनता के मारमण (अधिक्ता ) से ५ बदनाम

मेरे गीत तुम्हारे हैं
२७
गजल
खुद्दारियो के खून को अर्जा' न कर सके
हम अपने जौहरो को नुमाया न कर सके
होकर खराबे - मै तेरे गम तो भुला दिये
लेकिन गमे - हयात का दरमा न कर सके
टूटा तलिस्मे-अहदे-मोहब्बत कुछ इस तरह
फिर
आरजू
की शम्मन फरोजा न कर सके
हर शै करीव आके कशिश अपनी खो गई
वो भी इलाजे - शोके - गुरेजा न कर सके
किस दर्जा दिलशिकन' थे मोहब्बत के हादसे
हम जिन्दगी में फिर कोई अरमां न कर सके
मायसियो ने छीन लिये दिल के वलवले
वो भी निशाते - रूह का सामां न कर सके
१ सस्ता २ गुणो को ३ पराब के हाथो खराब होकर ४ जीवन की
चिन्तामो का इलाज ५ प्रेम-काल का जादू ६ प्रकाशमान ७ मारपण
८ विमुख प्रेम का इनाज : हृदय मजर १० मात्मा का तृप्ति या हप का

साहिर लुधियानवी
राजल
हवस - नसीव' नजर को कही करार नही
मै मुन्तजिर हू मगर तेरा इन्तजार नही
हमी से रगे - गुलिस्ता हमी से रगे-वहार
हमी को नज्मे - गुलिस्ता पे' इख्तियार नही
अभी न छेड मोहब्बत के गीत ऐ मुतरिव
अभी हयात का माहौल खुशगवार नही
तुम्हारे ग्रहदे-वफा को मै अहद क्या समझू
मुझे खुद अपनी मोहब्बत का एतबार नही
न जाने कितने गिले- इसमे मुजतरिव' है नदीम'
वो एक दिल जो किसी का गिला-गुज़ार" नही
गुरेज़ का नही कायल हयात से २, लेकिन
जो सच कहू तो मुझे मौत नागवार नही
ये किस मुकाम पे पहुचा दिया जमाने ने
कि अब हयात पे तेरा भी इरितयार नही
१ लोलुपता प्रिय २ चैन ३ उद्यान की व्यवस्था पर ४ गायक
जीवन का
६ वातावरण ७ वफादार रहने की प्रतिज्ञा को ८ शिकायतें
- माकुल १० साथी ११ जो किसी की शिकायत न करता हो १२ जीवन
भागने के पक्ष मे नही हूँ १३ प्रप्रिय

२६
मेरे गीत सुम्हारे हैं
रेगजारो मे' वगूलो के सिवा कुछ भी नही,
साया-ए - अय- गुरेजा से मुझे क्या लेना ?
बुझ चुके हैं मेरे सीने में मोहब्बत के कवल,
अब तेरे हुस्ने • पशेमा से मुझे क्या लेना ।।
तेरे आरिज़ पे ये ढलके हुए सीमी प्रासू,
मेरी अफसुर्दगी-ए-गम का मुदावा' तो नहीं।
तेरी महजूर निगाहो का पयामे - तजदीद
इक तलाफी' ही सही, मेरी तमन्ना तो नही ।।
00
००
१ मरुस्थलो मे २ भागते हुए बादल की छाया से ३ लज्जित सौंदय से
५ ग्रम की उदासी का ६ इलाज ७ लज्जित नजरों का
८ नवीकरण का सदेश ६ क्षतिपूर्ति

२८
साहिर लुधियानवी
शिकस्त
-
अपने सीने से लगाए हुए उम्मीद की लाश,
मुद्दतो जीस्त को' नाशाद किया है मैंने
तूने तो एक ही मदमे से किया था दोचार,
दिल को हर तरह से वर्वाद किया है मैने ।
जब भी राहो मे नजर आए हरीरी मलबूस',
सद पाहो मे तुझे याद किया है मैने ।।
और अब जबकि मेरी रूह को पहनाई मे,
एक सुनसान-मी मम्मूम' घटा छाई है।
तू दमक्ते हुए प्रारिज़ की शुअाएँ लेकर,
गुलशुदा शम्मएँ जलाने को चली आई है।
मेरी महबूब ये हगामा - ए - तजदीदे - वफा'
मेरी अफसुर्दा जवानी के लिए रास नहीं ।
मैने जो फूल चुने थे तेरे कदमो के लिए,
उनका धुदला-सा तसव्वुर' भी मेरे पास नहीं ।।
एक यखबस्ता उदासी है दिलो-जा पे मुहीत,
अव मेरी रूह मे वाकी है न उम्मीद न जोश ।
रह गया दव के गिरावार सलासिल के'४ तले,
मेरी दरमादा जवानी की उमगो का खरोश६॥
१ जीवन को २ दिन ३ रेशमी लिबास ४ मात्मा की विस्तीरणता में
५ दुखी ६ गालो की ७ रश्मिया
८ वुझी हुई है प्रेम के नवीकरण
का हगामा १० उदास, दुभी हुई ११ कल्पना १२ बफ की तरह जमी हुई
१३ घाई हुई १४ वोमन जजीरों का १५ दुखी १६ जोर

२६
मेरे गीत तुम्हारे हैं
रंगज़ारो म' बगूलो के सिवा कुछ भी नही,
साया-ए- अग्ने • गुरेज़ा से मुझे क्या लेना?
बुझ चुके हैं मेरे सीने में मोहब्बत के कवल,
अव तेरे हुस्ने - पशेमा से मुझे क्या लेना ॥
तेरे पारिज़ पे ये ढलके हुए सीमी ग्रास,
मेरी अफसुर्दगो-ए-गम का मुदावा' तो नही।
तेरी महजूर निगाहो का पयामे • तजदीद
इक तलाफी' ही सही, मेरी तमन्ना तो नही ।।
.
१ मरुस्थलो म २ भागते हुए बादल की छाया से ३ लज्जित सौदर्य से
५ गम की उदासी का
७ लज्जित नजरो का
८ नवीकरण का सदेश १ क्षतिपूर्ति
४ रजत

३०
साहिर लुधियानवी
गजल
हवस - नसीव' नजर को कही करार नहीं
में मुन्तज़िर हू मगर तेरा इन्तजार नही
हमी से रगे - गुलिस्तां हमी से रगे-बहार
हमी को नज्मे - गुलिस्ता पे' इलियार नही
अभी न छेड मोहब्बत के गीत ऐ मुतरिव'
अभी हयात का माहौल' खुशगवार नही
तुम्हारे अहदे-वफा को मै अहद क्या समझू
मुझे खुद अपनी मोहब्बत का एतवार नही
न जाने कितने गिले इसमे मुजतरिब' हैं नदीम
वो एक दिल जो किसी का गिला-गुज़ार" नहीं
गुरेज का नहीं कायल हयात से२, लेकिन
जो मच कहू तो मुझे मौत नागवार नही
ये किस मुकाम पे पहुचा दिया जमाने ने
अब हयात पे तेरा भी इरितयार नही
.
१ लोलुपता प्रिय २ चन
३ उद्यान की व्यवस्था पर ४ गायक
५ जीवन का ६ वातावरण ७ वफादार रहने की प्रतिज्ञा को ८ शिकायतें
६ माकुल १० साथी ११ जो किसी की शिकायत न करता हो १२ जीवन
से भागने के पक्ष मे नही हूँ १३ अप्रिय

मेरे गीत तुम्हारे हैं
३१
किसी को उदास देसकर ।
दिन से,
तुम्हे उदास सी पाता हू मैं कई
न जाने कौन से सदमे उठा रही हो तुम
वो शोखिया वो तबस्सुम, वो कहकहे न रहे,
हर एक चीज़ को हसरत से देखती हो तुम ।
छुपा - छुपा के समोशी
मे अपनी वेचैनी,
खुद अपने राज की तशहीर' बन गई हो तुम।
मेरी उमीद अगर मिट गई तो मिटने दो,
उमीद क्या है बस इक पेशो-पस है कुछ भी नहीं।
मेरी हयात की गमगीनियो का गम न करो,
गमे हयात गमे यक-नफस है कुछ भी नही ।
तुम अपने हुस्न की रअनाइयो पे५ रहम करो,
वफा फरेब है, तूले-हवस' है, कुछ भी नही ।
मुझे तुम्हारे तगाफुल से" क्यो शिकायत हो,
मेरी फना मेरे एहसास का' तकाज
मैं जानता हूँ कि दुनिया का खौफ है तुमको,
मुझे खबर है, ये दुनिया अजीब दुनिया है ।
यहाँ हयात के पर्दे मे मौत पलती है,
शिकस्ते - साज की आवाज रहे - नग्मा है ।
१ विनापन २ दुविधा
३ जीवन का गम ४क्षण भर का गम
(एक श्वास से सम्बधित) ५ रमणीयतानो पर ६ लोलुपता की दीघता
७ उपेक्षा से
८ मृत्यु ६ चेतना का १० साज के टूटने की

३२
साहिर लुधियानवी
मुझे तुम्हारी जुदाई का कोई रज नही,
मेरे सयाल की दुनिया मे मेरे पास हो तुम ।
ये तुमने ठीक कहा है, तुम्हे मिला न करू,
मगर मुझे ये वता दो कि क्यो उदास हो तुम
खफा न होना मेरी जुर्रते - तसातुब पर,
तुम्हे खवर है मेरी जिन्दगी को ग्राम हो तुम ।
?
मै अपनो रूह की हर इक खुशी मिटा लुगा,
मगर तुम्हारी मसरत मिटा नहीं सकता।
मैं खुद को मौत के हाथो मे सौंप सकता हूँ,
मगर ये बारे • मसाइब उठा नहीं सकता।
तुम्हारे गम के सिवा और भी तो गम हैं मुझे,
निजात जिनसे मै इक लहजा पा नहीं सकता।
ये ऊचे - ऊचे मकानो की डयोढियो के तले,
हर एक गाम पे भूके भिकारियो की सदा ।
हर एक घर मे ये इफतास और भूख का शोर,
हर एक मिम्त' ये इन्मानियत को आहो-बका ।
ये कारखानो मे लोहे का शोरो-गुल जिसमे,
है दफ्न लाखो गरीवो की रूह का नग्मा ।
ये शाहराहो पे रगीन सारियो की झलक,
ये झोपडो म गरीबो के बेक्फन ताशे।
ये माल-रोड पे कारो की रेल-पेल का शोर,
ये पटरियो पे गरीवो के जर्द-रू बच्चे।
१ सवोधन के दु साहस पर २ मुसीवतो का चोझ ३ क्षण भर के लिए
४ पदम पर ५ अावाज ६ मोर ७ माह, फर्यादें - राज्य-पयो पर

मेरे गीत तुम्हारे हैं
गली गली में ये विकते हुए जवा चेहरे,
हसीन पासो मे अफसुदगी-सी' छाई हुई।
ये जग और ये मेरे वतन के शोख जवा,
खरीदी जाती हैं उठती जवानिया जिनकी ।
ये बात-बात पे कानूनो-जाते की गिरयत'
ये जित्लतें, ये गुलामी, ये दौरे - मजबूरी।
ये गम बहुत हैं मेरी जिन्दगी मिटाने को,
उदास रहके मेरे दिल को और रज न दो
फिर न कीजे मेरी गुस्ताख - निगाहो का गिला
देखिये आपने फिर प्यार से देखा मुझको
१ मलिनता २ पकड

३४ साहिर लुधियानवी मेरे गीत मेरा महबूब - मेरे सरकश' तराने सुनके दुनिया ये समझती है, कि शायद मेरे दिल को इश्क के नग्मो से नफरत है। मुझे हगामा - ए - जगो - जदल मे कफ मिलता है, मेरी फितरत को खूरेजी' के अफसानो से रंगवत' है । मेरी दुनिया में कुछ वकत नहीं है रक्सो-नग्मे की, नग्मा शोरे - प्राहगे - बगावत'' है । मगर ऐ काश । देवें वो मेरो पुरसोज" रातो को, मैं जब तारो पे नजरें गाडवर आसू बहाता हूँ। तसव्वुर बनके१२ भूली वारदातें याद आती हैं तो सोजो दद की शिद्दत से पहरो तिलमिलाता हू । कोई रवावो में, स्वावीदा१५ उमगो को जगाती है, तो अपनी जिंदगी को मौत के पहलू में पाता है ।। मै शायर हू मुझे फितरत के१६ नज्जारो से उल्फत है, मेरा दिल दुश्मने नग्मा मराई हो नहीं सकता। मुझे इसानियत का दर्द भी बर.शा है कुद्रत ने, मेरा मकसद ८ फकत शोला-नवाई हो नहीं सकता । जवा हूँ मै जवानी लज़िशो कार' एक तूफा है, मेरी बातो मे गे - पारसाई२२ हो नहीं सकता। १ विद्रोहपूण २ युद्ध और सघप के हगामे मे ३ पान द ४ स्वभाव ५ खून बहाना ६ रुचि ७ महत्व ८ नृत्य और संगीत की सगीत १० विद्रोह के सगीत का शोर ११ दद भरी १२ वल्पना बनकर १३ घटनाए १४ तीव्रता से १५ सोई हुई १६ प्रकृति के १७ गीत गाने का विरोधी १८ उद्देश्य १६ केवल २० प्राग बरसाना २१ भूलो, गिरावटो, कमजोरियो का २२ पवित्रता का रग है प्रिय

मेरे गीत तुम्हारे हैं
मेरे सरकश तरानो की हकीकत है तो इतनी है,
कि जब मैं देखता हू भूक के मारे किसानो को,
गरीबो, मुफलिसो को, बेकसो को, बेसहारो को,
सिसकती नाजनीनो को, तडपते नौजवानो को,
हुक्मत के तशदुद को अमारत के तकब्बुर को,
क्सिी के चीथडा को और शहनशाही खज़ानो को,
तो दिल तावे-निशाते-बज्मे-इश्रत ला नहीं सकता।
में भी तो ख्वाब-पावर' तराने गा नहीं सकता।
,
चाहू
१ अत्याचार २ धन दौलत ३ घमड को ४ वैभवशाली समाज के ऐश्वय
को सहन नहीं कर सकता
५ सुलाने वाले

साहिर लुधियानवी
१
अशयार
हरचद मेरी कुव्वते-गुफ्तार है महबूस,
खामोश मगर तवाए-खुदनारा नहीं होती।
मानमूरा-ए एहसाम मे है हन-सा वर्पा,
इन्सान की तजलील गवारा नहीं होती।
नाला हू मै बेदारी ए एहसास के" हाथो,
दुनिया मेरे अफ्कार की दुनिया नहीं होती।
वेगाना-सिफत ३ जादा-ए-मजिल से गुज़र जा,
हर चीज सजावारे-नजारा१५ नहीं होती।
फितरत की मशीयत भी वडी चीज है लेकिन,
फितरत कभी वेवस का सहारा नही होती।
१ शेर २ यद्यपि ३ वा शक्ति ४ वदी १ अात्म प्रदान वाली
प्रकृति (स्वभाव) ६ अनुभूतियों की बस्ती ७ प्रलय मची हुई है ८ अपमान
३ सहन १० तग हूँ ११ अनुभूति की चेतना के १२ चितनवी
१३ अपरिचिता की तरह
१४ मजिल के रास्ते से १५ जिसे देखना
अनिवाय हो १६ इच्छा

मेरे मोत तुम्हारे हैं
?
एक शाम
कुमकुमो की' जहर उगलती रोशनो,
सगदिल पुरहौल' दीवारो के साए ।
ग्राहनी बुत देव - पैकर अजनबी,
चीखती चिंघाडती सूनी सराए ।
स्ह उलझी जा रही है, क्या करु
चार जानिव अर्तमाशे - रग - ओ - नूर'
चार जानिब अजनवी बाहो के जाल ।
चार जानिव सूफशा' परचम चुलद,
मै, मेरी गरत, मेरा दस्ते - सवाल।
ज़िन्दगी शर्मा रही है, क्या करू ?
कारगाहे - जोस्त के हर मोड पर,
स्हे-चगेज़ी. वरअफगदा-नकाव''।
थाम | ऐ सुबहे-जहाने-नो को जो,
जाग ऐ मुस्तकबिले-इन्सा के ४ ख्वाव ।
आस डूबी जा रही है, क्या करू
.
१ बिजली के हडो की २ पत्थर दिल, भयभीत करने वाली ३ लोह
४ देवो के से प्राकार वाले ५ चारों पर रग और प्रकाश की कपकपाहट है
६ लहू बिखेरते हुए ७ झडे ८ मागने वाला हाथ ६ जिंदगी के कारखाने
(क्षेत्र) १० चगेज ( जालिम बादशाह) की मात्मा ११ नवाब उलटे
१२ नव ससार की सुबह १३ प्रकाश १४ मनुष्य के भविष्य के

३८
साहिर लुधियानवी
सोचता हूँ
रसवा',
सोचता
हू कि मोहब्बत से किनारा कर ल,
दिल को बेगाना-ए-तरगीवो-तम ना' कर लू
सोचता हूं कि मोहब्बत है जुनूने
चद वेकार से बेहूदा खयालो का हुजूम ।
एक आजाद को पावद बनाने की हवस,
एक बेगाने को अपनाने की समइ - ए- मौहूम।
मोचता हूँ कि मोहब्बत है सरूरो - मस्ती,
इसकी तनवीर से रोशन है फजाए-हस्तो।
सोचता कि मोहब्बत है बशर की फितरत',
इसका मिट जाना मिटा देना बहुत मुश्किल है
सोचता हूँ कि मोहब्बत से है ताबिदा हयात,
आप ये शमन वुझा
देना बहुत मुश्किल है।
सोचता हूं कि मोहब्बत पे कडी शर्ते है,
इस तमदुन मे मसरत पे वडी शर्ते हैं ।
सोचता हूँ कि मोहब्बत है इक अफसुर्दा-सी' लाश,
चादरे - इज्जतो - नामूस मे" कफनाई हुई।
दौरे - मर्माया की'२ रौंदी हुई रुसवा हस्ती,
दरगहे मजहबो - इखलाक से ठुकराई हुई।
१ अभिलाषा तथा प्रेरणा से रहित २ बदनाम उमाद ३ भ्रमात्मक
प्रयत्न ४ प्रकार से ५ जीवन का वातावरण ६ मानव प्रकृति ७ दीस
८ जीवन ६ सस्कृति म १० खिन्न सी ११ इज्जत रूपी चादर में
१२ पजी (के आधिपत्य) के युग की १३ धम और नतिकता की कचहरी से

मेरे गीत तुम्हारे हैं
सोचता हूँ कि वशर' और मोहब्बत का जुनू',
ऐसे वोसोदा तमदुन म है इक कारे - ज़बू'
सोचता
हूँ कि मोहब्बत न बचेगी जिन्दा,
पेश-अजा-वक्त कि सड जाय ये गलती हुई लाश,
यही बेहतर है कि बेगाना - ए - उल्फत होकर,
अपने सीने में करू जज्वा-ए-नफरत की तलाश ।
और सौदा-ए-मोहब्बत से किनारा कर लू ।
दिन को बेगाना-ए-तरगीवो-तमन्ना कर लू ॥
मौत आ गई न हो मेरे जोके - उमोद को
महरूमियो मे कैफ-सा' पाने लगा हूँ मै
१ मानव
हाथ खीच कर
प्रानन्द-सा
२ उमाद ३ बुरा काय ४ इस से पूर्व कि
५ प्रेम से
६ घृणा भाव की ७ प्रेमो माद से ८ माशावाद को

४० साहिर लुधियानवी नाकामी - मैंने हरचद गमे - इश्क को खोना चाहा, गमे - उल्फत गमे - दुनिया में समोना चाहा वही अफसाने मेरी सिम्त' रवा' है अव तक, वही शोले मेरे सीने मे निहा' है अब तक । वही बेसूद खलिश है मेरे सीने मे हनोज वही बेकार तमन्नायें जवा हैं अव तक। वही गेसू मेरी रातो पे है बिखरे - बिखरे, वही आखें मेरी जानिब निगरा हैं" अब तक । कसरते-गम भी मेरे गम का मुदावा न हुई, मेरे बेचैन सयालो को सुकू' मिल न सका। दिन ने दुनिया के हर इक दद को अपना तो लिया, मुजमहिल रूह को'' अदाजे-जुनू'२ मिल न सका। मेरी तखईल का शीगज़ा-ए बरहम है वही, मेरे बुझते हुए एहसास का आलम है वही । वहीं बेजान इरादे वही बेरग सवाल, वही बेरूह कशाकश'६ वही बेचैन खयाल । आह । इम कश्मक्शे-सुवहो-मसा का अजाम । में भी नाकाम, मेरी समी-ए अमल भी नाकाम ।। १ मोर ५ मभी २ अग्रसर ३ छुपे हुए ४ चुभन ६ क्श ७ देख रही हैं ८ गम की मधिक्ता ६ इलाज १० शाति ११ व्याकुल मात्मा को १२ उमाल का ढग १३ पलना का १४ विखरा क्रम १५ स्थिति १६ निर्जीव सीचातानी १७ सुबह और शाम की सीचा तानी १८ वाम करने की कोशिश

मेरे गीत तुम्हारे हैं
४१
मुझे सोचने दे
मेरी नाकाम मोहब्बत की कहानी मत छेड,
अपनी मायूस उमगो का फसाना न सुना ।
ज़िन्दगी तल्ख सही, जहर मही, सम' ही सही,
दर्दो आजार सही, जब सही, गम ही सही।
लेकिन इस दर्दो-गमो-जब की वुसत को तो देख,
जुल्म की छाप्रो मे दम तोडतो खलकत को तो देख।
अपनी मायूस उमगो का फसाना न सुना
मेरी नाकाम मोहब्बत की कहानी मत छेड ।
जल्ला गाहो मे ये दहशतजदा सहमे अवोह
रहगुज़ारो पे फलाकतजदा लोगो के गिरोह ।
भूख और प्यास से पजमुर्दा सियहफाम' जमी,
तीरा ओ-तार मका' मुफलिसो बीमार मको' ।
सौ ए-इन्सा मे२ ये सर्माया-मो मेहनत का तजाद,
अम्नो तहज़ीब के परचम तले पोमो का फमाद ।
हर तरफ आतिशो-पाहन का ये सलाबे-अजीम ६,
नित नये तर्ज पे होती हुई दुनिया तकसीम ।
लहलहाते हुए खेतों पे जवानी का समां,
और दहकान के छप्पर मे न वत्ती न धुग्रा ।
.
१ विप २ पीडा तथा रोग ३ दद, गम, अत्याचार ४ विशालता
५ भातक्ति ६ जनसमूह ७ निधनता के मारे हुए ८ म्लान
है काली
१० तग और प्रधेरे मकान
११ वासी १२ मानव जाति
१३ पजी
तथा परिश्रम १४ भेद, टकराव १५ माग और लोह का १६ प्रबल
बाढ १७ किसान

४२
साहिर लुधियानवी
१
ये फलक
बोस' मिलें दिलकशो-सीमी बाजार,
ये गलाजत पे झपटते हुए भूग्वे नादार ।
दूर साहिल पे वो शफ्फाफ मकानो की कतार,
सरसराते हुए पर्दो मे सिमटते गुलजार ।
दरो- दीवार पे अनवार का मैलाव रवा
ते इक शायरे - मदहोश के रवावो का जहा ।
ये सभी क्यो है ? ये क्या है ? मुझे कुछ सोचने दे,
कौन इसा का सुदा है, मुझे कुछ सोचने दे।
.
अपनी मायूस उमगो का फसाना न सुना।
मेरी नाकाम मोहब्बत की कहानी मत छेड ।।
४ उज्ज्वल
१ गगननुम्बी २ मनोहर मोर रजत ३ गगी पर
५ पुष्पवाटिकायें ६ प्रवाशा ७ वहती वाढ ८ मदहोग
।

मेरे गीत तुम्हारे हैं ४३ प्रशप्रार १४ अकाइद' वहम हैं, मजहब खयाले-खाम' है माकी अजल से जहने-इन्सा' बस्ता-ए-ौहाम' है साकी 'हकोक्त-आश्नाई" अस्ल म गुमका-राही है उस्से - आगही पर्व-ए-इबहाम' है साकी मुबारक हो जमीफी को खिरद की१ फल्सफादानी१२ जवानी बे नियाज़ - इवरते - अजाम है साकी हवस होगी असोरे - हल्का- ए - नेको - बदे - पालम मोहब्बत मावरा - ए - फिके - नगो - नाम'५ है साकी अभी तक रास्ते के पेचो सम से दिल धडकता है मेरा जौर-तलवार शायद अभी तक साम' है साको वहा भेजा गया हू चाक करने पर्दा-ए-शब को१८ जहा हर सुबह के दामन पे अक्से-शाम'' है साको मेरे सागर मे में है और तेरे हाथो म बरवत२° है वतन की सरजमी म भूक से कुहराम२१ है साको ज़माना बर-सरे-पैकार२२ है पुरहौल २३ शो'लो से तेरे लब पर अभी नक नग्मा ए-खय्याम२४ है साकी १ मा यतायें २ अपरिपक्व धारणा ३ प्रादिकाल से ४ मानव ७ माग भूलना ८ नान रूपी दुल्हन ६ भ्रमो की पाली हुई १० बुढाप को ११ अक्ल की १२ दाश निकता १३ परिणाम के भय से उदासीन १४ ससार की ( मे ) अच्छाई बुराई के घेरे की बनी १५ नाम और बदनामी की चिन्ता से ऊपर १६ प्रवेपण या तलाश की अभिरुचि १७ अपक्व * रात के पर्दे को १६ शाम का प्रतिबिम्ब २० साज २१ शोर २२ सघषशील २३ भयवर २४ उमर खयाम का नग्मा (शराव और प्रेयमी का गुण-गान) मस्तिष्क ५ भ्रम प्रस्त ६ सत्य का नान

साहिर लुधियानवी
सुबहे-नौरोज'
फूट पड़ी मगरिक से किरन
हाल बना माजी का फमाना गूजा मुस्तकबिल का तराना
भेजे है अहवाव ने तोहफे अटे पडे हैं मेज के कोने
दुल्हन बनी हुई हैं राहे
जश्न मनायो साल ए-नौ के
निकली है बगले के दर से"
इक मुफलिस दहकान' की बेटी अफसुर्दा, मुर्भाई हुई सो
जिस्म के दुखते जोड दवाती आचल से सोने को छुपाती
मुट्ठी मे इक नोट दवाये
जश्न मनायो साल ए-नो के
भूके, जद,
गदागर बच्चे
बार के पीछे भाग रहे हैं वक्त से पहले जाग उठे हैं
पोप भरी आखें सहलाते सर के फोडो को खुजलाते
वो देखो कुछ और भी निक्ले
जश्न मनाओ साल ए नौ के
मुझे मालूम है अजाम रूदादे-मोहब्बत का
मगर कुछ और थोडी देर सग्री-ए-रायगा कर लू
१ नव दिवस का प्रभात २ अतीत का ३ मिनोन ४ नव वपके
५ दरवाजे से
६ क्सिान ७ भिखारी
८ प्रेम कथा का ६ व्यथ प्रयत्न

मेरे गीत तुम्हारे हैं ४५ गुरेज आमादा , मेरा जुनूने - वफा' है जवाल शिकस्त हो गया तेरा फुसूने-जेवाई। उन आरजूमो पे छाई है गर्दे-मायूसी , जिन्होने तेरे तबस्सुम म परवरिश' पाई। फरेबे-शौक के रगी तलिस्म टूट गये, हकीकतो ने हवादिस से फिर जिला पाई । सुकूनो रवाव के पर्दे सरकते जाते हैं, दिमागो-दिल मे है वहशत की ' कारफर्माई१२ । वो तारे जिनमे मोहब्बत का नूर ताबा ४ था। वो तारे डूब गये लेके रगो-रअनाई । मुला गई थी जिन्हे तेरी मुल्तफित" नजरें, वो दर्द जाग उठे फिर से लेके अगडाई । अजीव आलमे अफसुदगी है रू-ब-फरोग, न अव नज़र को तकाजा न दिल तमन्नाई। तेरी नज़र, तेरे गेसू, तेरी जवी, तेरे लव, मेरी उदास तबीयत है सबसे उकताई। मैं ज़िन्दगी के हकायक से२° भाग आया था, कि मुझको खुद मे छुपा ले तेरी फुसू जाई'। विरतता १ प्रेमो माद २ घट रहा है ३ शृगार का जादू ४ निराशा की धूल ५ पालन-पोपण ६ जादू ७ वास्तविक्तायो ने ८ दुघटनामो से १० सपने और शान्ति के ११ मुझलाहट की १२ पम- १४ ज्योतिमय १५ रग और रूप १६ कृपालु १७ उगसी की स्थिति १८ बढता हुमा १६ माथा . शोलता १३ प्रकाश २० वास्त विस्तामों मे २१ जादूगरी साहिर लुधियावी मगर यहा भी तमायकुब क्यिा हायक ने, यहा भी मिल न सकी जानते - शकेवाई। हर एक हाथ में लेकर हजार पाईने, ह्यात' बन्द दरीचो से भी गुजर आई। मेरे हर एक तरफ एक शोर गूज उठा, और उसम डूब गई इथतो की शहनाई। कहा तलक' कोई जिन्दा हकीकतो से बचे, कहा तलक परे छुप चुप के नग्मा पैराई । वो देय सामो के पुरशिकोह' ऐवा से किसी किराये की लडकी की चीस टकराई। वो फिर ममाज ने दो प्यार करने वालो को, मज़ा के तौर पर वरशी तवील" तनहाई । फिर एक तीरा-प्रो-तारीक झोपडी के तले, सिसकते बच्चे पे वेवा की आख भर आई। वो फिर विकी किसी मजदूर की जवा वेटी, वो फिर झुका क्सिी दर पे गहरे-बरनाई । वो फिर किसानो के मजमे पे गन-मशीनो से, हुकूक याफ्ता'• तवके ने१ प्राग वग्माई। सुकूते - हल्का - ए - जिंदा से२ एक गूंज उठी, और उसके साथ मेरे साथिया को याद आई। नहीं-नही मुझे यू मुत्तफित नज़र से न देख, नही नही मुझे अव ताबे-नग्मा-पराई१३ । मेरा जुनूने वफा है जवाल-आमादा, शिकस्त हो गया तेरा फुसूने जेवाई। १ जिंदगी २ प्रान दो की ३ तक ४ गीत छेडना ५ वैभव হার্দী ६ महल ८ प्रधकारपूरण ६ यौवन का गौरव १० स्वत्वधारी ११ वग ने १२ कारागार में महाते के सनाटे से १३ गीत छेडने की शक्ति . ७ दीघ मेरे गीत तुम्हारे हैं ४७ कुछ बातें देश के अदवार की बातें करें, अजनवी सरकार की बातें करे। अगली दुनिया के फसाने छोडकर, इस जहन्नुमजार की बातें करें। हो चुके औसाफ पर्दे के वयाँ, शाहदे - बाज़ार की बातें करें। दहर के हालात की बाते कर । इस मुमलसल रात की बातें करें। मन-प्रो-सल्वा का जमाना जा चुका, भूक और अाफात की बातें करे । आओ परखें दीन के प्रौहाम को इल्मे - मौजूदात की बातें करे । जाबिर - प्रो - मजबूर की बाते करें, इस कुहन' दस्तूर की बातें करे । ताजे - शाही के क्सीदे'' हो चुके, फाकाक्श जमहूर की बातें करें। गिरने वाले कल की तौसीफ क्या तेशा-ए-मजदूर की१५ वातें करें। १ नरिद्रतापो की २ नरक भूमि ३ वेश्यानो की ४ ससार के ५ वह जमाना जब खुदा अपने नेस वदो के लिए प्रास्मान से फरिश्तो के हाय खाना भेजता था ( इस्लामी रिवायत ) ६ अाफतो की ७ घम के भ्रम को ८ वतमान वस्तुप्रो के ज्ञान की पुराने १० रिवाज की ११ प्रशसा पाय (प्रशसा म) १२ भूखी जनता को १३ राजमहल की १४ गुण गान १५ मजदूर ये फावडे को ('फरहाद' की अोर सकेत है मौर समाजवादी युग ? की भोर भी)

४८
माहिर जुधियानवी
चकले
7
ये कूचे ये नीलामघर दिलकशी के,
ये लुटते हुए कारवा जिन्दगी के,
कहा हैं कहा हैं मुहाफिज खुदी के
सना - ख्वाने • तकदीसे - मशरिकर कहा हैं ?
ये पुरपेच गलिया, ये वेरबाब' वाज़ार,
ये गुमनाम राही, ये सिक्को की झनकार,
ये इस्मत के सौदे, ये सौदो पे तकरार,
सना - रवाने - तक्दीसे - मशरिक कहा है
तअपफुन' से पुर नीम-रोशन ये गलिया,
ये मसली हुई अधखिली ज़द कलिया,
ये विकती हुई खोखली रग - रलिया,
सना - रवाने - तकदीमे - मशरिक कहा है
वो उजले दरीचो मे पायल की छन-छन,
तनफ्फुस की उलझन पेतबले की धन-धन,
ये बेसह कमरो मे खासी की ठन ठन,
मना - रवाने - तकदीसे - मशरिक कहा हैं ?
ये गूजे हुए कहकहे रास्तो पर,
ये चारो तरफ भीड सी खिडक्यिो पर,
ये आवाजे खिचते हुए आचलो पर,
सना - रवाने - तकदीसे - मशरिक कहा हैं ?
?
१ पात्म सम्मान के २ पुव की पवित्रता के गुण गाने वाले ३ निद्रा रहित
४ सतीत्व
५ दुगध ६ मद्धम प्रकाश वाली ७ श्वास

४६
मेरे गीत तुम्हारे हैं
ये फूलो के गजरे, ये पोको के छोटे,
ये वैवाक नज़रें, ये गुस्ताख फिकरे,
ये ढलके वदन और ये मदकूक चेहरे' ,
सना - जाने - तकदोसे - मशरिक कहा है ?
ये भूसी निगाहे हमोनो की जानिय,
ये बढते हुए हाथ सीनो की जानिव,
लपकते हुए पाव जीनो को जानिव,
सना - ख्वाने - तकदीसे - मशरिक कहा है ?
यहा पीर भी पा चुके हैं जवा भी,
तनोमद बेटे भी अब्बा मिया भी,
ये वीवी भी है और बहन भी है मा भी,
सना - स्वाने - तकदोसे - मशरिक कहा हैं ?
मदद चाहती है ये हव्वा को वेटो,
यशोदा की हम-जिन्स , राधा को बेटी,
पयम्बर की उम्मत' , जुलेखा की बेटी,
सना - रवाने - तक्दीसे - मशरिक कहा है ?
बुलापो, खुदायाने - दी को बुलानो,
ये कूचे, ये गलिया, ये मन्ज़र दिखाओ,
सना-रवाने तकदीसे-मशरिक को लाओ,
सना - ख्वाने - तकदीसे • मशरिक कहा है ?
?
१ क्षयग्रस्त २ बूढे ३ हृष्ट-पुष्ट ४ सहजातीय ५ अनुयायी समुदाय
६ मजहब या धम के ठेोदारों को

५०
माहिर लुधियानवी
13
तरहे-नौर
ममई-ए-वका-ए-शौकते अमकदरी' की सर,
माहौले सिश्तवार मेरे शीशागरी को खर।
वेज़ार है पनिश्तो क्लीमा से इक जहा,
सौदागराने - दीन की मौदागरी की सैर ।
फाकाकशो के खून मे है जोशे-इन्तिकाम',
मर्माया के फरेबे जहा-परवरी पी खैर ।
नवकाते-मुलज़ल मे है तनज़ीम' को नमूद",
शाहनशहो के जाब्ता-ए-खुदसरी की'२ खैर ।
एहसास बढ रहा है हुकूके-ह्यात का,
पैदाइशी हुकूके - सितमपवरी की खैर ।
खदाजन है मजाहव को "लाश पर,
पैगम्बराने दहर की पैगम्बरी की खैर ।
सहने जहा मे' रक्सकुना हैं तवाहिया,
आका ए हस्तो-चूद की२१ सनमनगरी को खैर।
* नई नीव
१ बादशाहत के वचाव का प्रयत्न २ पत्थर बरसाते हुए वातावरण मे
३ पाच ढालने की ४ मस्जिद और मटिर स ५ घम के व्यापारियो की
६ बदला लेने का जोश ७ पूजी के ८ समार को पालने के फरेब ६ निचले
वर्गो म १० सगठन ११ प्रादुर्भाव १२ विद्रोहियो को कुचलने के कानुन
१३ जीवन के अधिकारो १४ अत्याचार करने के म सिद्ध अधिकारो की
(Divine Right of Kings ) १५ गतान १६ हंस रहा है
१७ मजहबों की १८ दुनिया के पैगम्बरों की ११ ससार के भागन म
२० नृत्यशील २१ अतीत और वतमान के मालिक (खुदा) की
इब्लीस'५

मेरे गीत तुम्हारे हैं
शोले लपक रहे हैं जहन्नुम की गोद से,
वागे-जना मे' जल्वा-ए-हूरो-परी को खैर ।
इन्सा उलट रहा है रुखे-ज़ोस्त से नकाव,
मजहब के एहतमामे-फुसू • परवरी की खैर ।
इलहाद कर रहा है मुरत्तिव' जहाने-नौ',
दैरो-हरम के होला-ए-गारतगरी को खैर ।
१ स्वग की वाटिका मे २ हूरो और परियो के जलवे की ३ जीवन के
मुख पर से ४ जादू चलान प्रध ५ नास्तिकता ६ सम्पादन ७ नव
ससार ८ मदिर मस्जिद ध्वस या फूट डालने के प्रयल की

साहिर लुधियानयी
ताजमहल
ताज तेरे लिए इक मजहरे-उत्पन' ही सही,
तुझको इम वादिये-रगी से अकीदत' ही मही,
मेरी महब । कही और मिला पर मुझ से ।
वज्मे-शाही मे गरीगो का गुज़र, क्या मानी ?
सन्त जिस राह पे हो सतवते-गाही के निशा,
उस पे उल्फत-भरी रूहा या सफर क्या मानी?
मेरी महबूव, पमे - पर्दा - ए तगहोरे - वफा',
तूने सतवत' के निशानो को तो देखा होता।
मुर्दा शाहो के मकाविर से' बहलने वाली !
अपने तारीकर मकानो को तो देखा होता।
अनगिनत लोगो ने दुनिया मे मोहब्बत की है,
कौन कहता है कि सादिक न थे जजवे उनके ?
लेकिन उनके लिए तशहीर ४ का सामान नही,
क्योकि वो लोग भी अपनी ही तरह मुफलिस'५ थे ।
ये इमारातो मकाविर१६, ये फसीलें, ये हिसार",
१ प्रेम द्योतक
२ रमणीय स्थान ३ श्रद्धा
४ प्रेयसी ५ शाही
दरबार मे ६ अक्ति ७ शाही वभव के ८ प्रात्मानो का (प्रेमियो का)
६ वफा (प्रेम ) के विज्ञापन के पर्दे के पीछे १० वभव ११ मक्बरो से
१२ अधकारपूरण १३ सच्चे १४ विज्ञापन १५ निधन १६ इमारतें
और मक्परे १७ विले

मेरे गीत तुम्हारे हैं
५३
मेरी महबूब
-
नुमूद',
मुतलक-उल-हुक्म' शहनशाहो की अपमत' के सतू
दामने - दहर पे उम रग की गुलकारी है,
जिस में शामिल है तेरे और मेरे अजदाद का खू ।
उन्हे भी तो मोहब्बत होगी,
जिनकी सन्नाई ने' वस्शो है इसे शक्ल-जमील' ।
उनके प्यारी के मकाविर रहे वे - नामो
अाज तर उन पे जलाई न किसी ने बदोल'।
ये चमनजार",ये जमना का किनारा, ये महल,
ये मुनक्काश
१२ दरो-दीवार, ये महरान, ये ताप ।
इस शह्नशाह ने दौलत का सहारा लेकर,
हम गरीबो को मोहब्बत का उडाया है मजाय ।
मेरी महबूब रही और मिला कर मुझसे
.
.
हयात इक मुस्तक्लि गम के सिवा कुछ भी नहीं शायद
सुशी भी याद आती है तो यासू वनके पाती है
१ स्वेच्छाचारी २ महानता
४ ससार के दामन पर
५पूर्वजो ६ कारीगरी ने ७ प्रदान की है ८ सुदर रूप
है जिसका
कोई राम व निशान तक नही १० दीप ११ उद्यान
१२ चित्रित

५४
साहिर लुधियानवी
लम्हा-ए-गनीमत
१
मुस्करा, ऐ ज़मीने - तीरा - प्रो - तार'
सर उठा, ऐ दबी हुई मखलूक'
देख वो मगरिबी उफक के करीव
आधिया पेचोताव खाने लगी
और पुराने कमार खाने मे
कुहना शातिर बहम उलझने लगे
कोई तेरी तरफ नही निगरा'
ये
सद जजीरें
जग-खुर्दा' है, आहनी'२ ही सही
प्राज मौका है, टूट सकती हैं
फुसते - यक - नफस१३
गनीमत जान
सर उठा ऐ दबी हुई मखलक
गिराबार,
१ दुलम क्षण २ अधकारमय धरती ३ मानव जाति ४ क्षितिज के
५ जूएमाने म ६ पुराने ७ जुवारी ८ मापस म है देख रहा
१. योभल ११ ज ग खाई हुइ १२ लाहे की १३ एव सास (क्षण)
घी फसत

मेरे गीत तुम्हारे हैं
तुलून ए-इश्तराकियत'
जश्न बपा' है कुटियानो में ऊँचे ऐवाँ' काप रहे हैं,
मजदूरो के बिगडे तेवर देख के सुल्ता काप रहे हैं ।
जागे है इफ्लास के मारे, उटठे है बेवस दुखियारे,
सोनो मे तूफा का तलातुम, पाखी मे विजली के शरारे ।
चौक चौक पर, गली-गली म, सुर्स फरेरे लहराते हैं,
मजलूमो के बागी लश्कर सैल-सिफत उमडे आते है ।
शाही दरवारो के दर से फौजी पहरे खत्म हुए है,
जाती जागीरो के हक और मोहमल' दावे खत्म हुए हैं।
मोर मचा है बाज़ारो मे, टूट गये दर जिन्दानो के.
वापस माग रही है दुनिया गसब-शुदा हक'' इमानो के ।
रुमवा वाजारी खातून १२ हक-ए नसाई13 माग रही है,
सदियो की खामोश जबाने सहर-नवाई१४ माग रही है ।
रौदी-कुचली आवाजो के शोर से वरती गूज उठी है।
दुनिया के अन्याय नगर म हक की पहली गूज उठी है।
जमग्न हुए है चौराहो पर आकर भूखे और गदागर
एक लपकती आधी बनकर, एक भभकता शोला होकर।
१ साम्यवाद का उदय २ उ सव हो रहा है ३ महल ४ निधनता
५ जोर
७ तूफान का रूप धारण किये हुए ८ व्यक्तिगत
६ निरयक १० कारागारो के द्वार ११ हडपे हुए अधिकार १२ अपमानित
बाजारी औरतें १३ स्त्रीत्व का अधिकार १४ मावाज से जादू जगाने का
अधिकार १५ भिखारी
1५
-

५६
काधो पर सगीन कुदालें, होटो पर बेर
दहकानो के दल निक्ले हैं अपनी विगडी
आज पुरानी तदबीरो से' आग के शोमले।
उभरे जज्बे दव न सकेगे, उखडे परचम ज
राजमहल के दरबानो से ये सरकश तुफा
चन्द किराए के तिनको से मैले बेपाया'
काप रहे हैं जालिम सुल्ता, टूट गये दिल :
भाग रहे हैं जिल्ले • इलाही मुंह उतरे है
एक नया सूरज चमका है, एक अनोखी
खत्म हुई अफराद की शाही , अब जमहूर की

मेरे गीत तुम्हारे हैं
-
अजनबी मुहाफिज
अजनबी देस के मजबूत गराडील' जवा
ऊचे होटल के दरे-खास पे इस्तादा है।
और नीचे मेरे मजबूर वतन की गतिया
जिनमे आवारा फिरा करते हैं भूखो के हुजूम
जर्द चेहरो पे नकाहत की नमूद
खून मे सैकडो सालो की गुलामी का जमूद"
इल्म के नूर से प्रारी महरूम
फलक-ए हिन्द के अफसी नजूम'
जिनकी तखईल के पर
छू नही सकते हैं उस ऊचो पहाडी का सिरा
जिस पे होटल के दरीचो म खडे है तनकर
अजनबी देश के मजबूत गराडील जवा
मुह मे सिग्रेट लिये हाथो में ब्राडी के गिलास
जेब मे नुकरई१२ सिक्को की खनक
भूके दहकानो के 13 माथो का अरक ४
रात को जिसके एवज ५ विकता है
क्सिी इफ्लास की मारी का तकदुस-यानी
क्सिी दोशीजा-ए-मजदूर की ८ इस्मत का गुरूर
१ अपरिचित रक्षक (अमरीकी सिपाही जो दूसरे महायुद्ध म अग्रेजी राज्य
की मोर से भारत को जापानी आक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए बुलाए गये
थे) २ भारी भरकम, लम्बे चौडे ३ खास दरवाजे पर ४ खडे हैं ५ कमजोरी
की ६ झलक ७ जमाव ८ वचित ६ भारतीय गगन के १० उदास तारे
११ क्ल्पना के १२ रजत १३ क्सिानों के
१४ पसीना १५ बदले में
१६ निधनता को मारी का
१७ पवित्रता
१८ विवश कुमारी को

साहिर लुधियानवी
महफिले-ऐश के गूजे हुए ऐवानो मे'
ऊचे होटल के शबिस्तानो मरे
कहकहे मारते हैंसते हुए इस्तादा है
अजनबी देस के मजबूत गराडोल जवा
जव
इसी होटल के करीब
भूके मजबूर गुलामो के गिरोह
टिकटिको बाध के तकते हुए ऊपर की तरफ
मुन्तजिर बैठे है उस साप्रते-नायाब के
बूट की नोक से नीचे फेके
अजनबी देस के बेफिक्र जवानो का गिरोह
कोई सिक्का, कोई सिग्रेट, कोई केक
या डवलरोटी के झूठे टुकडे
छीना-झपटी के मनाज़िर का मजा लेने को
पालतू कुत्तो के एहसास पे हम देने को
भूके मजबूर गुलामो का गिरोह
टिकटिकी वाध के तकता हुआ इस्तादा है
काश । ये बेहिसो-बेवकअतो-चेदिल' इसा
रोम के जुल्म की जिदा तमवीर
अपना माहौल बदल देने के काविल होते
१ महलो म (सुसज्जित कमरो म) २ शयनागारों म ३ दुलभ क्षण के
४ दृश्यो का
५ जड, महत्वहीन और निराश

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साहिर लुधियानवी
बुलावा
देसो दूर उपक की' जो से झाक रहा है सुर्स सवेरा
जागो ऐ मजदूर किमानो।
उठो ऐ मज़लूम इन्सानो।
धरती के अनदाता तुम हो जग के प्राण विधाता तुम हो
धनियो की खुशहाली तुम से खेतो में हरियाली तुम से
उचे महल बनाये तुमने शाही तख्न सजाये तुमने
हीरे, लाल निकाले तुमने नेजे भाले ढाले तुमने
हर बगिया के माली तुम हो इस समार के वाली' तुम हो
वक्त है धरती को अपना लो मागे वढो हथियार सभालो
उहो ऐ मजलूम इसानो।
जागो ऐ मजवर किमानो।
देगो धरती पाप रही है गर्द, फरेरे' ढाप रही है
पप्टी ज्याला फूट पड़ी है वस्त है थोडा जग पडी है
पंन रहे हैं पाल के घेरे थामो अपने मुरी परेरे
तुम हो जग-जनता ये सैनिक पाप IITT, मत्य ये रक्षय
भाये प्रादी,
जुल्म
पाले
पाली पुटियामो में उजाले
क्या गरेगी नुमो गाही तुम हो यहादुर गुग गिपारी
जागो मजदूर रिगानो।
उट्टो ऐ गउनूम इगा।
दगो दूर उमर यी जो से, भार साहै मुग गोरा
।
।

मेरे गीत तुम्हारे हैं . शहजादे जहन' मे अजमते - अजदाद के किस्से लेकर अपने तारीक घरोदो के सलाम खो जामो मरमरी स्नावो की परियो से लिपटकर सो जायो अवपारो पे' चलो, चाद सितारी मे उडो यही अजदाद मे विरसे में मिला है तुमको दूर मगरिव की फजाग्रो मे° दहकती हुई पाग प्रहले - सर्माया की प्रावेजिशे - वाहम' न सही जगे - साया - प्रो - मेहनत ही सही दूर मगरिव म है-मशरिक की फजा में तो नही तुमको मगरिव के बसेडो से भला क्या लेना ? तीरगी'' खत्म हुई, सुख शुमाएँ' फैली दूर मगरिव की फज़ानो मे तराने गूजे फतहे - जमहर के१२, इन्साफ के, आजादी के साहिले - शक पे७ गैसो का धुपा छाने लगा आग बरसाने लगे अजनयी तोपो के दहन ४ रवावगाहो की छतें गिरने लगी अपने बिस्तर से उठो! नये पाकामो की ताअज़ीम करो और-फिर अपने घरोदो के खला में खो जाओ तुम बहुत देर-बहुत देर तलक सोए रहे . ५ रजत १ मस्तिष्क २ पूर्वजो की महानता के ३ प्रधेरे मै ६ वादल के टुक्डो पर ७ घातावरण म पूजीपतियो की ६ परस्पर खीचातानी १० अघकार ११ किरने १२ जनता की विजय के १३ पूरब के तट पर १४ मुह १५ शयनागारो को १६ आदर स्वागत

६२
साहिर लुधियानवी
शुआ-ए फर्दा'
तीरा-मो-तार फजायो मे सितम खुर्दा वशर
और कुछ देर उजाले के लिए तरसेगा
और कुछ देर उठेगा दिले-गेती से धुआ
और कुछ देर फजाओ से लहू बरसेगा
और फिर, अहमरी-होटो के तबस्सुम की तरह
रात के चाक से फूटेगी शुमानो की लकीर
और जमहूर के बेदार तनावुन' के तुफल''
खत्म हो जायेगी इसा के लहू की तकतीर२
१
और कुछ देर भटक ले मेरे दरमादा नदीम१६
और कुछ दिन अभी जहराब के४ सागर पीले
नूर-अफशा'५ चली आती है उस्से-फर्दा
हाल, तारीको-सम-अफशा, मही, लेकिन जीले
१ भविष्य का प्रकाश २ तग और अधेरी ३ वातावरण म ४ पीटित
मानव ५ धरती क हृदय से ६ लाल होटो के ७ मुस्कराहट ८ विरतो की
६ जनता के १० चेतन सहयोग ११ फल-स्वरूप १२ कतरा कतरा टपफ्ना
(म खचने की क्रिया) १३ पके हारे साथी
१४ विपके
१५ उजाला
छिडक्ती १६ भविष्य रूपी दुल्हन १७ अधकारमय तथा विप बिखेरता हुआ

मेरे गीत तुम्हारे हैं
६३
बगाल
7
जहाने कुहना के' मफ्लूज' फरमफादानो' ।
निजामे-नौ के तकाजे सवाल करते है-
ये शाहराहे' इमी वास्ते बनी थी क्या
कि इन पे देस की जनता सिसक-मिसक के मरे ?
जमी ने क्या इमी कारण अनाज उगला था
कि नस्ले-यादमो-हव्वा' बिलक-विलक के मरे
मिलें इसीलिए रेशम के ढेर बुनती है
कि दुरुतराने - वतन तार तार को तरसे ?
चमन को इसलिए माली ने खू से सीचा था
कि उसकी अपनी निगाहे बहार को तरसें ?
ज़मी की कुव्वते-तख्लीक के सुदावन्दो' ।
मिलो के मुन्तज़िमो'• सत्तात के फजन्दो।
पचास लाख फसुर्दा'२ गले - सडे ढाचे
निजामे-ज़र के खिलाफ एहतजाजी करते है
खमोश होटो से, दम तोडती निगाहो से
बशर'५, वशर के खिलाफ एहतजाज करते हैं
(बगाल के अकाल के समय)
२
१ पुरानी दुनिया में पगु ३ दाशनिको ४ नव व्यवस्था के
५ राजपथ ६ मानव जाति ७ देश की बेटिया ८ उपज शक्ति ९ मालिको
१० प्रवघको ११ बेटो १२ निर्जीव १३ पूजीवाद के १४ विरोध प्रकाशन
१५ मनुष्य

६४
साहिर लुधियानवी
फनकार'
मेंने जो गीत तेरे प्यार की सातिर लिवरपे,
अाज उन गीतो को बाजार में ले आया हू ।
आज दूकान पे नीलाम उठेगा इनका,
तूने जिन गीतो पे रक्न्वी थो मोहवत की प्रसासरे ।
आज चादी के तराज् मे तुलेगी हर चीज़,
मेरे अफकार' , मेरी शायरी, मेरा एहसास ।
जो तेरी बात से मनसूर थे , उन गोतो को,
मुफलिमी जिम' पनाने पे उतर आई है।
भख, तेरे खे-रगो के फमानो के एवज़,
चद अशिया ए-जरूरत की तमनाई है।
देख इस अर्मा - गहे - मेहनतो - साया मे,
मेरे नग्मे भी मेरे पास नहीं रह सकते।
तेरे जल्वे किसी जरदार' की मीरास सही,
तेरे खाके भी मेरे पास नहीं रह सकते ।
आज इन गीतो को बाजार मे ले आया है।
मैने जो गीत तेरे प्यार की खातिर लिक्खे ।
१ कलाकार २ नीव ३ रचनाए ४ सम्बधित थे ५ खाद्य-पदाथ
६ रगीन चेहरे के ७ जरूरत की चीजों की ८ मेहनत और पूजी के क्षेत्र मे
६ पूजीपति १० रेखा चित, श: चित्र

मेरे गीत तुम्हारे हैं
कभी-कभी
कभी-कभी मेरे दिल मे खयाल पाता है
कि जिन्दगी तेरी जुल्फो को नम छायो म,
गुजरने पाती तो शादाब हो भी सकती थी।
ये तीरगी' जो मेरी जीस्त का मुकद्दर है,
तेरो नजर को शुमामो मे खो भी सकती थी।
अजब न था कि मैं बेगाना ए- अलम रहकर,
तेरे जमाल की' रमनाइयो म खो रहता।
तेरा गुदाज बदन , तेरो नीम - बाज' आँखें,
इन्ही हसीन फमानो मे महव' हो रहता।
पुकारती मुझे जब तल्खिया ज़माने की,
तेरे लबो से' हलावत के घूट पी लेता।
ह्यात'3 चोवती फिरती वरहना-पर४ गौर मै,
घनेरी जुल्फो के साये मे छुपके जी लेता।
मगर ये हो न सका और अब ये पालम१५
कि तू नही, तेरा गम, तेरी जुस्तजू भी नहीं ।
गुजर रही है कुछ इस तरह जिन्दगी जैसे,
इसे किसी के सहारे को आरजू भी नहीं ।
१ अघेरा २ जीवन का भाग्य ३ रश्मियो मे ४ दुखो से अपरिचित
५ सौदय को ६ लावण्यतामा मे ७ मदुल, मासल ८ मधखुली ६ निमग्न
१० कटुताएँ ११ होटो से १२ माघुय, के, रस के १३ जीवन १४ नगे
सिर १५ स्थिति
ब
है

साहिर लुधियानवी
जमाने भर के दुखो को लगा चुका हू गले,
गुजर रहा हू कुछ अनजानी रहगुजारो से।
मुहीव' साए मेरी सिम्त बढते आते हैं,
हयातो - मौत' के पुरहौल खारजारो से ।
न कोई जादह न मजिल न रौशनी का सुराग,
भटक रही है खलानो मे जिन्दगी मेरी
इन्ही खलामो मे रह जाऊगा कभी खो कर,
मैं जानता हूँ मेरो हम - नफस' , मगर यूही,
कभी-कभी मेरे दिल मे खयाल आता है
.
अपनी तबाहियो का मुझे कोई गम नही
तुमने किसी के साथ मोहब्बत निभा तो दी
' भयावह कटीले जगलों से ४ माग
१ भयानक २ जीवन तथा मत्यु
५ पूय मे ६ सहचर

.
मेरे गीत तुम्हारे हैं
६७
फरार
अपने माजी के तसव्वुर से हिरासा' हूँ मै,
अपने गुजरे हुए ऐयाम से नफरत है मुझे।
अपनी बेकार तमन्नामो
पे शरमिन्दा हूँ,
अपनी बेसूद उमीदो पे नदामत है मुझे ।
मेरे माजी को अधेरे में दवा रहने दो,
मेरा माजी मेरी जित्लत के सिवा कुछ भी नहीं ।
मेरी उम्मीदो का हासिल, मेरी काविश का सिला,
एक बेनाम अजीयत के सिवा कुछ भी नहीं ।
क्तिनी बेकार उमीदो का सहारा लेकर,
मैंने ऐवान सजाये थे किसी को खातिर ।
कितनी बेरब्त' तमन्नामो के मुबहम खाके १२,
अपने रवावी मै वसाये थे किसी की खातिर ।
मुझमे अब मेरी मोहब्वत के फसाने न कहो,
मुझको कहने दो कि मैने उन्हे चाहा ही नही।
और वो मस्त निगाहे जो मुझे भूल गई,
मैंने उन मस्त निगाहो को सराहा ही नहीं।
१ पलायन, नराश्य २ प्रतीत के ३ कल्पना ४ भयभीत ५ दिनो
से ६ व्यय ७ प्रयल का ८ बदला ६ क्प्ट के १० महत ११ अनमेल
१२ अस्पष्ट चित्र १३ कहानिया
प्राग

साहिर लुधियानवी
मुझको कहने दो कि मै आज भी जी सकता हू,
इश्क नाकाम सही, जिन्दगो नाकाम नही ।
उन्हे अपनाने की ख्वाहिश, उन्हे पाने की तलब,
शौके-बेकार' मही, सबइ-ए-गम-अजाम नहीं ।
वही गेसू , वही नजरे, वही पारिज, वही जिस्म,
मैं जो चाहू तो मुझे और भी मिल सकते है।
वो कवल जिनको कभी उनके लिए खिलना था,
उनकी नजरो से बहुत दूर भी खिल सकते हैं।
१ चेकार शोर २ दुखात बेष्टा ३ ॥ ४ गाल

मेरे गीत तुम्हारे हैं
फल और प्राज
[१]
कल भी बूदे वरसी थी,
कल भी बादल छाये थे,
और कवि ने सोचा था !
बादल, ये प्राकाश के सपने उन जुल्फो के साये हैं,
दोशे-हवा' पर मैखाने ही मैसाने घिर आये है।
रुत बदलेगी फूल खिलेंगे झोके मध बरसायेंगे,
उजले-उजले खेतो में रगी आचल लहरायेंगे।
चरवाहे बसी की धुन से गीत फज़ा मे बोयेंगे,
आमो के झुडो के नीचे परदेसी दिल खोयेंगे ।
पीग बढाती गोरी के माथे से कौदे लपकेंगे,
जोहड के ठहरे पानी में तारे आखे झपकेगे ।
उलझी-उलभी राहो मे वो आचल थामे आयेंगे,
धरती, फूल, आकाश, सितारे सपना-सा बन जायेंगे।
कल भी वूदे बरसी थी,
कल भी बादल छाये थे,
और अवि ने सोचा था
-
१ वायु के कधे पर

७०
साहिर लुधियानवी
[२]
आज भी बूदें वरसेंगी,
आज भी वादल बाये हैं,
और कवि इस सोच म है
?
वस्ती पर वादल छाये है, पर ये बस्ती किसकी है
धरती पर अमृत बरसेगा, लेकिन धरतो किसकी है?
हल जोतेगी खेतो मे अल्हड टोली दहकानो की',
धरती से फूटेगी मेहनत फाकाकश इन्सानो की।
फसलें काट के मेहनतकश, गल्ले के ढेर लगायेंगे,
जागीरो के मालिक पाकर सब 'पूजी' ले जायेगे ।
बूढे दहकानो के घर बनिये को कुर्की अायेगी,
और कर्जे के सूद मे कोई गोरो बेची जायेगी।
आज भी जाता भूखी है और कल भी जनता तरसी थी,
आज भी रिमझिम बरसा होगो, कल भी बारिश बरसी थी।
आज भी बादल छाये हैं,
आज भी वूदें बरसेगी,
और कवि इस सोच मे है
१ किसानो की

मेरे गीत तुम्हारे हैं
७१
हिरास
तेरे होटो पे तबस्सुम की वो हल्की-सी लकीर,
मेरे तखईल मे रह-रह के झलक उठती है।
य अचानक तेरे आरिज़ का खयाल पाता है
जैसे जुलमत में कोई शम्मन भडक उठती है।
तेरे पैराहने-रगी की जुन्खेज महक,
रवाब बन-बन के मेरे जहन में लहराती है।
रात को सर्द खमोशी मे हर इक झोके से,
तेरे अनफास', तेरे जिस्म की पाच पाती है।
.
मैं सुलगते हुए राजो को अया" तो करदू,
लेकिन इन राजो को तशहीर से१२ जी डरता है।
रात के रवाब उजाले म बया तो कर दू,
इन हसी रवाबा की ताबोर से" जी डरता है ।
तेरे सासो की थकन तेरी निगाहो का सुकूत",
दर हकीकत'५ कोई रगीन शरारत ही न हो।
मैं जिसे प्यार का अदाज समझ बैठा हूँ,
यो तवस्तुम" वो तकल्लुम" तेरी पादत ही न हो।
१ भय २ मुस्कराहट ३ कल्पना म
४ पोलों का ५ मधेरे
६ रगोन लिवास की ७ उमाद-पूण
६ मस्तिष्क म हवास
१० भेदो को ११ प्रकट १२ विज्ञापन से १३ स्वप्न-पल स १४ चुप्पी
१५ वास्तव म १६ मुस्कराहट १७ बात चोद (का ढग)

७२
साहिर लुधियानवी
१
सोचता हू कि तुझे मिलके मै जिस सोच मे हू,
पहले उस सोच का मकसूम' सगझ लूं तो कहू
मै तेरे शहर मे अनजान हूँ परदेसी हूँ,
तेरे अल्ताफ का मफहूम समझ लू तो बहू ।
कही ऐसा न हो पात्रो मेरे थर्रा जायें,
और तेरी मरमरी वॉहो का सहारा न मिले ।
अश्क बहते रहे खामोश सियह राता म,
और तेरे रेशमी आचल का किनारा न मिले।
३ तात्पय
४ सगमरमर
१ भाग्य (परिणाम) २ कृपामो का
की बनी (धवल, गोरी) ५ सियाह (काली)

मेरे गीत तुम्हारे हैं
इसी दोराहे पर
अब न इन ऊँचे मकानो मे कदम रक्खूगा,
मैने इक बार ये पहले भी कमम खाई थी।
अपनी नादार मोहब्बत को शिकस्तो के तुफैल,
ज़िन्दगी पहले भी शर्माई थी झुझलाई थी।
और ये अहद' क्यिा था कि ब-ई-हाले-तबाहर,
अब कभी प्यार भरे गीत नही गाऊँगा ।
किसी चिलमन ने पुकारा भी तो बढ जाऊँगा,
कोई दरवाजा खुला भी तो पलट पाऊँगा ।
फिर तेरे कापते होटो को फुसूंकार' हँसी,
जाल बुनने लगी, बुनती रही, बुनती ही रही ।
मै खिचा तुझसे, मगर तू मेरी राहो के लिए,
फूल चुनती रही, चुनती रही, चुनती ही रही।
बफ वरसाई मेरे जहनो-तसव्वुर ने मगर,
दिल म इक शोला-ए-बेनाम-मा लहरा ही गया
तेरी चुपचाप निगाहो को सुलगते पावर,
मेरी बेजार तबीयत को भी प्यार आ ही गया।
--
१ प्रतिना २ यो तबाह हाल होने पर
तया कल्पना ने ५ बैनाम सा शोला
३ जादू भरी
४ मस्तिष्क

साहिर लुधियानवी
अपनो वदली हुई नज़रो के तकाजे न छुपा,
मै इस अदाज का मफहूम' समझ सकता हूँ।
तेरे जरकार दरीचो की बुलदी की कसम,
अपने अकदाम का मकसूम समझ सकता हूँ।
'अब न इन ऊँचे मकानो मे कदम रक्खूगा',
मैंने इक बार ये पहले भी कसम खाई थी।
इमी सर्माया प्रो-इफ्लास के दोराहे पर,
ज़िन्दगी पहले भी शर्माई थी मुझलाई थी।
१ प्रथ
२ स्वणिम ३ उठे हुए कदमा का परिणाम

मेरे गीत तुम्हारे है
७५
एक तस्वीरे-रग
मैने जिस वक्त तुझे पहले-पहल देखा था,
तू जवानी का कोई ख्वाब नजर आई थी।
हुस्न का नग्मा ए-जावेद' हुई थी मालूम,
इश्क का जज्बा-ए-बेताब' नजर आई थी।
ऐ तरबजारे-जवानी की परीशा तितलो,
तू भी इक बू-ए गिरफ्तार है, मालूम न था।
तेरे जलवो म बहारें नजर आती थी मुझे,
तू सितम-खुदाए-अदबार है, माल्म न था।
तेरे नाजुक-से परो पर ये जरो-सीम का बोझ,
तेरी परवाज को आज़ाद न होने देगा।
तूने राहत की तमन्ना म जो गम पाला है,
वो तेरी रूह को प्राबाद न होने देगा।
तूने साये को छानो मे पनपने के लिए,
अपने दिल, अपनी मोह पत का लहू बेचा है।
दिल की तजईने फुसुर्दा का असासा' लेकर,
शोख रातो की मसर्रत का लहू बेचा है।
१ भमर सगीत २ विक्स भावना ३ यौवन रूपी उद्यान ४ बादी
मुगध ५ दुर्भाग्य के हाथों पीडित ६ सोने चांदी का ७ उहान ६ फौरी
सज्जा
६ निधि
१० मानन्दका

साहिर लुधियानवी
जरम-सुर्दा' हैं तसय्युल की' उडाने तेरी,
तेरे गीतो मे तेरी स्ह के गम पलते हैं।
सुमगो पाखो म यू हसरते लौ देती है,
जैसे वीरान मज़ारो पे दिये जलते हैं।
इससे क्या फायदा रगोन लवादो के तले,
रह जलती रहे, घुलती रहे, पज़मुर्दा रहे ।
होट हमते हो दिसावे के तबस्सुम के लिए,
दिल गमे-जीस्त मे वोझल रहे प्राजुर्दा रहे।
दिल की तस्की' भी है ग्रासाइशे-हस्ती" की दलील,
ज़िदगी सिर्फ जरो-मीम का पमाना नहीं ।
जीस्त एहसास' भी है, शौक भी है, दद भी है,
सिफ अनफास की तरतीव का अफसाना नहीं ।
उम्र भर रंगते रहने से कही बेहतर है,
एक लम्हा जो तेरी रुह मे वुसमत१४ भर दे।
एक लम्हा जो तेरे गीत को शोखो दे दे,
एक लम्हा जो तेरी लै मे मसरत भर दे ।।
६
तप्ति, सतोष
१ घायल
२ कल्पना की
३ सुर्मा भरी 6 वस्त्राक ५ मुझाई
हुई ६ मुस्कराहट
७ जीवन के गम दुषी
१० जीवन के
सुख ११ अनुभूति
१२ श्वामो की १३ कहानी
१४ विशालता

मेरे गीत तुम्हारे हैं ७७ . एहसासे कामरी' उफके रूम से फूटी है नई सुबह को जौ' जुलमते शब का जिगर चाक हुअा जाता है । तीरगी जितना सभलने के लिए रुक्ती है, सुर्ख सैल और भी बेबाक' हुगा जाना है। मामराज अपने वमोलो पे भरोसा न करे, कुहना जजीरा की झकारे नही रह सक्ती । जज्वा-ए नुसरते-जमहूर की बढती रौ मे, मुल्क और कौम की दीवारें नही रह सकती। सगो-पाहन की चटानें हैं अवामी' जज्बे, मौत के रेगते सायो से कहो, हट जायें। करवटें लेके मचलने को है सैले-अनवार, तीरा ओ तार' घटामो से कहो, छट जाये। सालहा-साल के वेचैन शरारो का खरोश'४, इक नई जीस्त का दर वाज'६ किया चाहता है। अज्मे-आजादो-ए-इसाब - हजारा जबरूत', इक नये दौर का आगाज किया चाहता है । , १ इष्टसिद्धि का अनुभव २ रूस के क्षितिज से ३ किरन रात की सिपाही का ५ सियाही ६ बाढ ७ प्रचड ८ पुरानी ६ जनता की विजय पाने की इच्छा की १० परपर मोर लोहे की ११ जनता के १२ प्रकाश का तूफान १३ अधेरी १५ जिदगी का १६ दरवाजा सोलना १७ मानव स्वतत्रता प्राप्त करने का सकल्प १८ अत्यन्त महानता सहित १६ प्रारभ १४ जोश

साहिर लुपियानवी
घरतर अपयाम के' मगरूर सुदामो मे पहो
प्रासरी बार ज़रा अपना तराना दोहराए ।
और फिर अपनी सियामत पे पशेमा होपर,
अपने नाकाम इरादो TT Tफन ले पायें।
सुर्ग तूफान पी मोजो पो जपहने के लिए,
कोई जंजीरे-गिरी' काम नहीं पा सकती।
रकम परती हुई फिरतो के तलातुम को सम,
अर्मा ए-दहर पे अब शाम नही छा सकती।
(रूसी मेनामोरे जमा मीमा पार परने पर लिसी गइ)
१ उच्च जातियो के
२ बोझल जजीर ३ नृत्य
४
की
तूफान
५ जीवन क्षेत्र पर

मेरे गीत तुम्हारे हैं
७६
मेरे गीत तुम्हारे हैं
अव तक मेरे गीतो में उम्मीद भी थी पसपाई भी,
मौत के कदमो को आहट भी जीवन को अगडाई भो।
मुस्तकबिल की किरने भी थी, हाल को वोझल जुलमत' भी,
तूफानो का शोर भी था और स्वाबो की शहनाई भी।
आज से मै अपने गीतो मे प्रातिशपारे भर दूंगा,
मद्धम लचकीली तानो मे जीवट-धारे भर दूंगा।
जीवन के अन्धियारे पथ पर मशअल लेकर निकलूगा,
धरती के फैले आचल म सुख सितारे भर दूगा ।
आज से ऐ मजदूर किसानो | मेरे राग तुम्हारे है,
फाकाकश इन्सानो । मेरे जोग बिहाग तुम्हारे हैं ।
जब तक तुम भूखे नगे हो, ये शोले खामोश न होगे,
जब तक बे-आराम हो तुम, ये नग्मे राहत-कोश न होगे।
मुझको इस का रज नही है लोग मुझे फनकार न माने,
फिक्रो-सुखन के ताजिर मेरे शेरो को प्रशार न मानें।
मेरा फन", मेरी उम्मीदें, आज से तुम को अपन हैं,
आज से मेरे गीत तुम्हारे दुख और सुख का दपन है ।
तुमसे कुव्वत लेकर अब मैं तुमको राह दिखाऊँगा,
तुम परचम लहराना साथी में वरबत पर गाऊँगा ।
आज से मेरे फन का मकसद' जजीरें पिघलाना है,
आज से मै शबनम के बदले अगारे बरसाऊंगा।
१ मधेरा
२ माग के टुकडे ३ मानन्द-दायक ४ कलाकार
५ चितन और काव्य के ६ क्ला ७ शक्ति ८ भडा ६ उद्देश्य

८० साहिर लुधियानवी 7 में नहीं तो क्या मेरे लिए ये तकल्लुफ, ये दुख, ये हसरत क्यो मेरी निगाहे - तलब' आखरी निगाह न थी हयातज़ारे जहा की' तवील राहो मे हजार दीदाए हैरा' फुसू बखेरेंगे हजार चश्मे - तमन्ना बनेगी दस्ते - मवाल" निकल के खलवते - गम से नजर उठाओ तो वही शफक' है, वही जो है, मै नही तो क्या? -१४ मेरे बगैर भी तुम कामियावे - इश्रत'' थी मेरे बगैर भी प्रावाद थे निगात - कदे१२ मेरे बगैर भी तुमने दिये जलाये हैं मेरे बगर भी देखा है जुलमतो का नजूल मेरे न होने से उम्मीद का जिया'५ क्यो हो बढी चलो मै ए इश्रत जाम छलकाती तुम्हारी सेज, तुम्हारे बदन के फूलो पर उसी वहार का परतो'" है, मै नही तो क्या ? ३ दीघ भरे नन ५ जादू ६ इच्छुक नेत्र १ इच्छुक नेत्र २ जीवन से परिपूण ससार ४ पाश्चय ७ सवाली का हाय ८ उदास एकात से कपा १० चमक ११ सुख वैभव में सफल १२ मनोरजन स्थल १३ अधेरो का १४ उतरना (उमडना) १५ हानि मदिरा के १७ प्रतिबिम्ब १६ मुख वभव की

कैसी?
मेरे गीत तुम्हारे हैं
मेरे लिए ये उदासी, ये सोग क्यो आखिर ?
मलोह चेहरे पे गर्दै - फुसुर्दगी'
वहारे • गाजा से पारिज को ताजगी बख्शो,
अलील' आखो मे काजल लगायो, रग भरो
सियाह जूडे मे कलियो को कहकशा' गूधो
हज़ार हापते सीने, हजार कापते लब
तुम्हारी चश्मे - तवज्जोह के मुन्तजिर हैं अभी
जिलो में नग्मा - प्रो - रगो - बहारो-नूर लिए
हयात गर्ने - तगो - दौ' है, मै नही तो क्या
?
, सलोन २ उदासी की धूल ३ पाउडर ४ पोलों को ५ बीमार
६ माकाग-गगा ७ कृपा दृष्टि के ८ संगमे
है भाग दौड म व्यस्त

८२ साहिर लुधियानवी खुदकुशी से पहले उफ ये बेदर्द सियाही ये हवा के नौहे', किसको मालूम है इस शव को सहर हो कि न हो । इक नजर तेरे दरीचे की तरफ देख तो लु, डूवतो आयो मे फिर तावे-नज़र हो कि न हो । अभी रोशन है तेरे गम शबिस्ता के दिये, नीलगू पर्दो से छनती है शुभार्ये अव तक । अजनबी बाहो के हल्के में लचकती होगी, तेरे महके हुए बालो की रिदायें अब तक ।। सद होती हुई वत्ती के धूए के हमराह, हाथ फैलाए बढे पाते हैं वोझल साये । कान पौंछे मेरी आखो के सुलगते आसू, कौन उलझे हुए बालो की गिरह सुलझाये ॥ आह ये गारे-हलाकत", ये दिये का महबस', उम्र अपनी इन्ही तारीक १२ मकानो मे कटी। जिदगी फितरते - बेहिस की पुरानी तक्सीर, इक हकीक्त थी मगर चद फमानो मे कटी । कितनी आसाइशे५ हसती रही ऐवानो मे, क्तिने दर मेरी जवानी पे सदा वद रहे । कितने हाथो ने चुना अतलसो - कमरवाब मगर, मेरे मलबूस की तकदीर मे पेवद रहे । १ विलाप २ रात ३ सुवह ४ देखने की गति के ६ नीलिमा मय ८ घेरे म ६ लटें १० विनाश की ११ कारागृह १२ मधेरे १३ निष्ठुर प्रकृति की १५ सुप वैभव १६ महलो में १७ लिवास की . ५ दायनागार ७ किरने कदरा १४ अपरा

मेरे गीत तुम्हारे हैं
५३
जुल्म सहते हुए इन्सानो के इस मकतल मे',
कोई फर्दा के तसव्वुर से कहा तक वहले?
उम्र भर रेंगते रहने की सजा है जीना,
एक दो दिन की अजीयत हो तो कोई सह ले ॥
कही जुलमत' है फजानो पे' अभी तक तारी"
जाने क्व खत्म हो इन्सा के लहू को तकतीर,
जाने कब निखरे सियहपोश' फज़ा का जोबन ?
जाने कब जागे सितम-खुर्दा बशर की तकदीर ॥
अभी रोशन है तेरे गम शविस्ता के दिये,
आज मैं मौत के गारो मे उतर जाऊगा ।
और दम तोडती वत्ती के धुए के हमराह,
सरहदे - मर्गे - मुसलमल से' गुजर जाऊगा ।।
YAGO
४ कष्ट
१ वध-स्थल मे
२ पल के ३ पल्पना रो
५ प्रघेरा
६ वातावरण पर ७ छाया हुमा ८ बूंद-बूंद टपकना ६ पाला (दुख-पूण)
१० अत्याचार पीडित मनुष्य ११ निरतर मृत्यु की सीमा से

४ साहिर लुधियानवी १ ११ फिर वही कुंजे-कफस चन्द लम्हो के लिए शोर उठा डूब गया, कुहना ज़जीरे - गुलामी की गिरह कट न सकी। फिर वही सैले-बला है, वही दामे-अमवाज नाखुदामो मे सफीने की जगह बट न सको । टूटते देखके देरीना तअत्तु ल” का फुसू , नब्जे-उम्मीदे-वतन' उभरी, मगर डूब गई। पेशवाओ को निगाहो मे तज़ब्जब पाकर टूटती रात के साये मे सहर२ डूब गई । मेरे महबूब वतन ! तेरे मुकद्दर के खुदा, दस्ते-अगियार में किस्मत की इना५ छोड गये । अपनी यक-तर्फी सियासत के तकाजो के तुफैल, एक वार और तुझे नौहा - कना" छोड गये ।। फिर वही गोशा ए-जिंदा है वही तारीकी', फिर वही कुहना सलासिल२०, वही खूनी झनकार । फिर वही भूख से इन्सा की सितेजा-कारी२', फिर वही मानो के नौहे१२, वही बच्चो की पुकार ॥ १ पिंजर का कोना "फिर वही कु जे-वफस फिर वही मयाद का घर" २ पुरानी ३ आपत्तियो का तूफान (प्राधिक्य) ४ लहरों का जाल ५ नावकों मे ६ नौरा की ७ पुराना गत्यवरोध ९ जादू ६ देश की माशा की नब्ज १० नेतानों की ११ असमजस १२ सुबह १३ भाग्य क १४, गंगे के हाथ मे १५ वागडोर १६ एक पक्षीय १७ मातनाद करते हुए १८ जेल का कोना १६ प्रधेरा २० पुरानी जजीरें २१ जूझना २२ विलाप

मेरे गीत तुम्हारे हैं
तेरे रहबर' तुझे मरने के लिए छोड चले,
अर्जे-बगाल' 1 इन्हे डूबती सासो से पुकार ।
बोल चटगाव की मज़लूम खमोशी । कुछ बोल,
बोल ऐ पीप से रिसते हुए सीनो की बहार ।
भूख और कहत के तूफान बढे आते है,
बोल ऐ इस्मतो इफ्फत के जनाजो की कतार ।
गेक इन लौटते कदमो को, इन्हे पूछ ज़रा,
पूछ ऐ भूख से दम तोडते ढाचो की कतार ।।
जिंदगी जन के साचे में ढलेगी कब तक
इन फज़ामो मे अभी मौत पलेगी कब तक
(शिमला का फैस की असफलता पर लिखी गई )
?
7
१ पप प्रदान
२ बंगाल की भूमि ३ सतील मोर नारीत्व

साहिर लुधियानवी
प्रशप्रार
नफ्स के' लोच मे रम' ही नही, कुछ और भी है
हयात' सागरे-सम ही नहीं, कुछ और भी है
तेरो निगाह
मेरे गम की पासदार' सही
मेरी निगाह मे गम ही नही कुछ और भी है
मेरी नदीम' । मोहब्बत की रिफअतो से न गिर
बुलद, वामे-हरम ही नहीं, कुछ और भी
ये इज्तिनाब
है अक्से शऊरे महबूबी.
ये एहतियात", सितम ही नही, कुछ और भी है
इधर भी एक उचटती नजर, कि दुनिया मे
फरोगे-महफिले जम १२ ही नहीं, कुछ और भी है
वसाये है फिर
अब इस जमी पे इरम' ही नही कुछ और भी है
नये जहान
प्रादम ने
१ श्वासो के २ जाने का सकेत ३ जीवन ४ विप का सागर ५ लिहाज
रसने वाली ६ साथी
1 ऊंचाइयों से ८ ऊचा स्थान केवल हरम-सराय
की छत (ही नही) ६ विमुखता १० तुम्हे अपने प्रेयसी होने के ज्ञान का
प्रतिबिम्ब ११ सावधानी १२ बादशाह (जमशेद) को महफिल का उत्थान
१३ मानव चितन ने १४ स्वग

मेरे गीत तुम्हारे हैं
८७
नूरजहा के मजार पर
पहलुए - शाह मे' ये दुस्तरे • जमहूर को कद्र,
कितने गुमगश्ता फसानो का पता देती है।
कितने खूरेज़ हकायक से उठातो है नकाव,
कितनी कुचलो हुई जानो का पता देती है।
लगे।
कैसे मगरुर शहनशाहो की तसकी के लिए,
सालहा - साल हसीनायो के बाजार
कैसी बहको हुई नजरो के तनय्युश' के लिए,
सुख महला म जवा जिस्मो के प्रवार लगे।
कसे हर शाख से मुह-वद महकती कलिया,
नोच ली जाती थी तजइने - हरम' को खातिर।
और मुर्भा के भी आजाद न हो सकती थी,
जिल्ले-सुवहान को उल्फत के भरम की खातिर ।
कैसे इक फर्द के होटो को जरा सी जुबिश,
सर्द कर सकती थी वेलौस' वफाओ के चिराग ।
लूट सकती थी दमकते हुए माथो का सुहाग,
तोड सकती थी मये-इश्क से लवरेज अयाग"॥
१
१ बादशाह की बगल मे
२ जनता की बेटी की ३ भूली बिसरी
कहानिया का ४ रक्तिम घटनामो स
५ विलास
६ हरम की शोभा
७ वादशाह
८ व्यक्ति के ६ निष्काम ११ प्रेम-रूपी मदिरा से १२ भरे
हुए प्याले

साहिर लुधियानवी
सहमी-सहमी सी फज़ानो मे ये वोरा मरकद',
इतना खामोश है, फरियाद - कुना हो जैसे ।
सर्द शाखो मे हवा चीख रही है ऐसे,
रूहे - तकदीसो वफा' मसियाल्या हो जैसे ॥
तू मेरी जान | मुझे हैरतो - हसरत से न देख,
हम मे कोई भी जहानूरो जहागीर नहीं।
तू मुझे छोड के ठुकरा के भी जा सकती है,
तेरे हाथो में मेरे हाथ हैं, जजीर नही ।।
१ का २ न्याय की दुहाई दे रहा हो ३ प्रेम तथा पवित्रता की मात्मा
४ विलाप कर रही हो ५ पाश्चय और उत्कठा

मेरे गीत तुम्हारे हैं
जागीर
फिर उसी वादी ए-शादाब में' लौट आया हू,
जिसमे पिनहा मेरे ख्वाबो की तरबगाहे हैं।
मेरे अहबाव के सामाने - तअय्युश के लिए,
शोख सोने है, जवा जिस्म, हसी बाँहे है।
?
सब्ज़ खेतो मे ये दुबकी हुई दोशीजाये',
इनकी शरयानो मे किस किसका लहू जारी है
किस मे जुरत है कि इस राज की तशहीर करे ?
सबके लव पर मेरी हैबत का फुस' तारी है ॥
हाए वो गम - प्रो - दिलावेज़" उबलते सीने,
जिनसे हम सतवते-अावा का२ सिला13 लेते है।
जाने इन मरमरी" जिस्मो को ये मरियल दहका ५,
कैसे इन तीरा" घरीदा म जनम देते हैं
7
ये लहकते हुए पोदे, ये दमक्ते हुए सेत,
पहले अजदाद की जागीर थे अव मेरे हैं।
ये चरागाह, ये रेवड, ये मवेशी, ये बिगार,
सबके सब मेरे है, सब मेरे है, सब मेरे ॥
१ हरी भरी वादी २ निहित ३ बीटा-
गामा
विलास की सामग्री ६ कुमारिया ७ रगों में 5
fortyा
१० छाया हुमा है ११ गम और मनोरम
२wtar
१४ संगमरमर के बने १५ क्सिान fukrit

साहिर लुधियानवी
१
इनकी मेहनत भी मेरी, हासिले-मेहनत भी मेरा,
इनके बाजू भी मेरे, कुव्वते-बाजू भी मेरी ।
मै खुदावद हू इस वुसमते - बेपाया का,
मौजे-आरिज भी मेरी, नकहते-गेसू भी मेरी ।।
मै उन अजदाद का बेटा है जिन्होने पैहम ,
अजनवी कौम के साये की हिमायत की है।
गदर की साप्रते-नापाक से लेकर अब तक,
हर कडे वक्त में सरकार को खिदमत की है।
खाक पर रेंगने वाले ये फसुर्दा ढाचे,
इनकी नज़रें कभी तलवार बनी हैं न बने ।
इनकी गैरत पे हर इक हाथ झपट सकता है,
इनके अबरू की कमानें न तनी है न तनँ ।
?
हाए ये शाम, ये झरने, ये शफक की लाली,
मैं इन पासूदा फज़ाओ मे" ज़रा झूम न लू
वो दबे पांव उधर कौन चली जाती है
बढके उस शोख के तरशे हुए लव चूम न लू'
?
१ परिश्रम का फ्ल २ बाहो की शक्ति ३ भगवान ४ मसीम विशालता
५ पोलो की (म पदा होने वाली) लहरें ६ देशो की मुगप
८ प्रगुम क्षण शियिस १० टि यी ११ पान दचषक यातावरण मै
७ निरतर

मेरे गीत तुम्हारे हैं
मादाम
आप वे-वजह परीशान-सी क्यो है मादाम' ?
लोग कहते हैं तो फिर ठोक ही कहते होगे।
मेरे अहबाब ने तहजीब न सीखी होगी,
मेरे माहौल में इन्सान न रहते होगे ॥
नरे-सर्माया से है रूए-तमदुन को जिला',
हम जहा है वहा तहजीब नही पल सक्ती ।
मुफ्लिसी हिस-ए-लताफत को मिटा देती है,
भूस प्रादाब के साचो मे नही ढल सक्ती ।।
लोग कहते हैं तो लोगों पे ताज्जुब कैसा?
सच तो कहते है कि नादारो की इज्जत कैसी ?
लोग कहते है~मगर आप अभी तक चुप है,
आप भी कहिये गरीवो मे शराफत कैसी?
-
नेक मादाम
वहुत जल्द वो दौर आयेगा,
जब हम जीस्त के अदवार परसने होगे ।
अपनी जिल्लत की क्सम,नापकी अजमत की क्सम,
हम को ताग्रजीम के १२ मेग्रार' परखने होगे ।।
१ 'मैडम' का उदू रूपातर २ मित्रो ने ३ वातावरण मे ४ पूजी
के प्रकार से ५ सम्यता के चेहरे की ६ चमय
७ कोमलता के भाव
को
८ गिप्टता
६ निधनो को १० जीवन के युग ११ महानता की
१२ शिशचार के १३ मादश या मापदड

साहिर लुधियानवी
हम ने हर दौर' मे तजलील सही है लेकिन,
हम ने हर दौर के चेहरे को जिया वरशी है।
हम ने हर दौर मे मेहनत के सितम भेले है,
हम ने हर दौर के हाथो को हिना बख्शी है ।।
7
लेकिन इन तल्ख मुबाहिस से भला क्या हासिल
लोग कहते हैं तो फिर ठीक ही कहते होगे।
मेरे अहबाब ने तहजीव न सीखी होगी,
मैं जहा हू वहा इसान न रहते होगे ॥
१ यास में २ पपमान ३ चमक-दमय ४ महेंदी ५ षटु विवादास

मेरे गीत तुम्हारे हैं
1
ये किसका लहू है
(जहाजियों की बगावत-कवरी १६५३)
ऐ रहवरे • मुल्को
कोम' जरा
प्रासें तो उठा, नजरें तो मिला
कुछ हम भी सुनें, हम को भी बना
ये किमका लहू है, कौन 17
धरती की सुलगती छाती के वैन में है
तुम लोग जिन्हे अपना न मरे, दो दृ हैं
सडको को जवा चिल्लाती है, ना. तेि हैं
ये किसका लहू है, मंग'
ऐ रहवरे - मुको --!
ये किसका सह है, -7
वो कौन-सा जज्बा था कि जिन' हिग
अनसे हुए चोरा गुलान टमट, पिता
जनता का लहू फौजा में
निकला में मिला
ऐ रह - - इंका
ये
किट्ट है. कर ग?
-
क्या कोमो-वचन की ही
जो देश का
पही
जो वारे-वार्ग 2
५ गुलामी दार 2

१४ साहिर लुधियानवी - ? फना ? ये किसका लहू है, कौन मरा? ऐ रहबरे मुल्को कौम बता ये किसका लहू है, कौन मरा ऐ अज्मे देने वालो, पैगामे-बका देने वालो। अब आग से कतराते क्यो हो, शोलो को हवा देने वालो । तूफान से अब क्यो डरते हो, मौजो को मदा देने वालो ! क्या भूल गये अपना नारा ऐ रहवरे - मुरको - कौम बता ये किसका नह है, कौन मरा' ममझौते की उम्मीद सही, सरकार के वायदे ठीक सही हा मश्के-सितम' अफसाना सही, हा प्यार के वायदे ठीक मही अपनो के कलेजे मत छेदो, अगियार के वायदे ठीक सही जमहूर से यू दामन न छुडा ऐ रहवरे मुल्को कोम वता ये ' किसका लहू है, कोन मरा हम ठान चुके है अब जी म हर जालिम से टकरायेंगे तुम समझौते की आस रखो, हम आगे बढते जायेंगे हर मजिले-पाजादी की कसम, हर मज़िल पे दोहरायेंगे ये किमका लहू है, कौन मरा? ऐ रहवरे • मुको कौम बता ये क्सिका लहू है, कौन मरा ? ? ४ मावाज १ मृत्यु का सकल्प ५ अत्याचारका मन्यास २ जीवन-सदेश ३ लहरा को ६ गैरों के ७ जनता से मेरे गीत तुम्हारे हैं १३ १४ मफाहमत' नोबे - अज २ ज़रों को मुश्तप्रल' पाकर, बुलदियो पे सफेद और मियाह मिल ही गये। जो यादगार थे वाहम' सितेजाकारो को', ब-जे-वक्त वो दामन के चाक सिल ही गये ॥ जिहाद सत्म हुआ, दौरे माशती' आया, सभल के बैठ गये महमिलो मे दीवाने । हुजूमे - तिश्नालयां की" निगाह से प्रोभल, झलक रहे हैं शरावे हवस के पैमाने । ये जश्न, जश्ने - मसरत' नहीं, तमाशा है, नये लिवास मे निक्ला है रजनी का जुलूस । हजार शम्मए - उखुवत" बुझाके चमके है, ये तीरगी के उभारे हुए हसी फानूम ।। ये शाखे - नूर" जिसे जुलमतो ने सीचा है, अगर फली तो शरारो के फूल लायेगी। न फल सकी तो नई फस्ले-गुल के" आने तक, जमीरे - अज़ मेरे• इव जहर छोड जायेगी। (बम्बई, १५ अगस्त १९४७--स्वतत्रता दिवस) १ समझौता २ घरती की ढलान पर ३ उत्तेजित ४ गोरे और काले ५ परस्पर ६ लडाई भगडे की ७ समय की कृपा से (के वारण) ६ मित्रता का युग १० कटो के बजावो म (लला मजनू के विस्से की और सक्त है।) ११ प्यासो के गिरोह की १२ लोलुपता रूपी १३ सुशी का उत्सव १४ डाका मारने का १५ मानव समानता के दीपक १६ प्रकार के १७ प्रकाश की शाखा १८ अधेरों ने १६ वसन्त २० धरती की प्रात्मा ८ घम युद्ध शराब ऋतु के

साहिर लुधियानवी
साथियो । मैंने बरसो तुम्हारे लिए
चाद, तारो बहारो के सपने बुने
हुस्न और इश्क के गीत गाता रहा
आरजूमो के' ऐवा सजाता रहा
मै तुम्हारा मुगनी , तुम्हारे लिए
जब भी पाया ये गीत लाता रहा
आज लेकिन मेरे दामने-चाक मे
गर्दे-राहे-सफर के सिवा कुछ नही
मेरे बरबत के सीने मे नग्मो का दम घुट गया है
ताने चीखो के प्रबार मे दव गई हैं
और गोतो के सुर हिचकिया बन गये है
में तुम्हारा मुगनी हू, नग्मा नही हू
और नग्मे की तस्लीक का साजो-सामा
साथियो । अाज तुमने भसम कर दिया है
और मैं--अपना टूटा हुआ साज़ थामे
सद लाशो के अवार को तक रहा हू
मेरे चारो तरफ मौत की वहशतें नाचती हैं
और इन्सान को हैवानियत जाग उठी है
बवरियत के खूख्वार इफरीत'
अपने नापाक जबडो को खोले
१ आकाक्षाप्रो के २ महल ३ गायक ४ फटी हुई झोली मे ५ यात्रा
के भाग की धूलि ६ वाजे के ७ रचना का ८ बवरता
६ हिंसक देव

मेरे गीत तुम्हारे हैं खून पो-पीके गुर्रा रहे है बच्चे मानो की गोदो मे सहमे हुए है इस्मतें सर-बरना' परीशान हैं हर तरफ शोरे-ग्राहो बुका है और मै इस तबाही के तूफान मे आग और खून के हेजान मे, सरनिगू और शिकस्ता मकानो के मलबे से पुर रास्ता पर अपने नग्मो की झोली पसारे दर-च दर फिर रहा हू मुझको अम्न और तहजीव की भीख दो मेरे गीतो की ले, मेरे सुर मेरी नै मेरे मजरूह होटा को फिर माप दो साथियो ! मैने बरसो तुम्हारे लिए इकलाब और बगावत के नग्मे अलापे अजनबी राज के जुल्म की छाव मे सरफरोशी के रवावीदा जज्वे उभारे और उम सुबह की राह देवी जिसमे इस मुल्क की स्ह अाजाद हो आज जजीरे-महमियत' कट चुकी है और इम मुल्क के वही बर१ वामो दर २ अजनबी कौम के जुल्मत अफशा फरेरे१३ को मनहूस छापो से आजाद है खेत सोना उगलने को बेचैन है ० १ १ मतीत्व २ सिर से पर तक नगी ३ आतनाद ४ प्रचडता ५ मिर झुकाए ६ बासुरी ७ घायल + सिर बेचने ( मरने ) के ६ सोई हुई भावनायें १० परतत्रता की जजीर ११ सागर और धरती १२ यतें और दरव जे १३ अधकार फैलाते हुए झडे ६८ साहिर लुधियानवी वादियाँ लहलहाने को बेताब है कोहसारो के सीने में हेजान है सग और खिश्त बेरवागो-बेदार हैं उनकी आखो मे तामीर के रवाव हैं उनके रवावो को तकमील का स्प दो मुल्क की वादिया, घाटिया, खेतिया औरतें, बच्चिया- हाथ फैलाए खैरात की मुन्तजिर है उनको अम्न और तहजीव की भीख दो मानो को उनके होटो की शादाबिया नन्हे बच्चो को उनकी खुशी बरश दो मुल्क की स्ह को जिन्दगी बरश दो मुझको मेरा हुनर' , मेरी लै बरश दो मेरे सुर वरश दो, मेरो नै बरश दो आज सारी फजा है भिवारी और मै इस भिखारी फजा मे अपने नग्मो को भोली पसारे दर-ब-दर फिर रहा हू मुझको फिर मेरा खोया हुआ साज दो मै तुम्हारा मुगनी, तुम्हारे लिए जब भी आया, नये गीत लाता रहगा। (११ सितम्बर १९४७-~माकाश वाणी, दिल्ली) ४ जागे हुए १ पवत मालामो के २ प्रचडता ५ निर्माण या उसारी के ६ पूर्ति का रही हैं ६ पला १० वातावरण ३ पत्थर और इंट ७ भीख की ८ प्रतीक्षा कर

मेरे गीत तुम्हारे हैं
६
तरवजारो पे' क्या वीती, सनमखानो पे' क्या गुज़री ?
दिले-जिन्दा' ! तेरे मरहम अरमानो पे क्या गुज़री ?
जमी ने खून उगला, प्राममा ने प्राग वरमाई,
जब इन्सानो के दिन वदले तो इन्सानो प क्या गुजरी?
हमे ये फिक्र, उनकी अजुमन' किस हाल में होगी,
उन्हे ये गम कि उनसे छुट के दोवानो पे क्या गुगरी।
मेरा इल्हाद' तो खैर एक लानत था सो है अब तक ।
मगर इम अालमे-वहात म° ईमानो प क्या गुजरी?
ये मजर कौन-सा मन्जर है पहचाना नहीं जाता।
सियह खानो से कुछ पूछो, विस्तानो पे क्या गुजरी ?
चलो वो कुम' के घर से सलामत आ गये, लेकिन ।
खुदा की मुम्लफ्त मे 'सोरता जानो पे क्या गुजरी?
(पाकिस्तान)
१ लीडा स्थलो पर २ मदिरो पर
३ जीवित हृदय
४ मृत
५ महफिल
६ नास्तिकता
७ बवरता की स्थिति में ८ मधेरे घरो
(खडहरों) से ९ शयनागारो पर १० काफिरो की बस्ती के ११ राज्य मे
१२ जली हुई आत्मानो (जीवो) पर

१०० साहिर लुधियानवी - ? नया सफर है, पुराने चिराग गुल कर दो । फरेवे जन्नते फर्दा के जाल टूट गये, हयात अपनी उमीदो पे शमसार: सी है। चमन मे जश्ने वुरूदे बहार हो भी चुका, मगर निगाहे - गुलो • लाला' सोगवार' सी है ।। फजा में गम वगूलो वा रक्स' जारी है, उफक पे खून की मीना' छलक रही है अभी । कहा का मेहरे - मुनव्वर'', कहा की तनवीरें २ कि बामो दर पे१३ सियाही झलक रही है अभी ।। फजायें।४ मोच रही है कि इन्ने - आदम ने५, खिरद गवावे, जुनू ग्राजमाके क्या पाया वही शिकस्ते-तमन्ना१८, वही गमे-अय्याम' निगारे-जीस्त२० ने सब कुछ लुटाके क्या पाया? भटक में रह गई नज़रे सला' को युसनत२२ म, हरीमे-शाहिदे-रअना२३ का कुछ पता न मिला। तवील राहगुज़र२४ खत्म हो गई, लेग्नि, हनोज अपनी मुमाफ्त नामुतहा न मिला ।। १ भविष्य स्वग घोसे में २ जीवन ३ लज्जित ४ वसतये मागमन का उत्सव ५ फूलों की नजर ६ उदास ८ नृत्य ६ क्षितिज पर १० मुराही ११ दीप्त मुरज १२ उजाल मोर दरवाने पर १४ यातावरण १५ मानव जातिन १६ बुद्धि १७ उमा १८ माता का टूटना १६ गामारिप दुप २० जीवन को गुदरी २१ पूप २२ विशालता २३ सुर प्रेपमो पा रनिवाम २४ माग २५ मभी ता २६ यात्रा पा २७ मत (मंजिल) ७ वातावरण

मेरे गीत तुम्हारे हैं
सफर-नसीव रफीको' । कदम बढाए चतो,
पुराने राहनुमा लोट कर न देखेंगे।
सुबह से तारो को मौत होती है,
शबो के राज दुलारे इधर न देखेंगे।
तुलूए
.
१ सहचर मित्रो २ पथप्रदशक
३ प्रभातोन्य
४ रातो के

१०२
साहिर लुधियानवी
शिकस्ते-जिन्दा
[ उस चीनी शायर को-जिमने चियागकाई शक की जेल मे लिसा "बीस
साल कैद | कागज के एक पुर्जे पर लिखे हुए कुछ लफ्जी के जुम म हो सकता
है मैं बीस साल तर सूरज की शक्ल न देख सकू । लेकिन क्या तुम्हारा यह
गला सडा निजाम जो हर घडी बिजली की सी तेजी के साथ अपनी मौत की
सरफ बढ़ रहा है, वीस साल तक बाकी रह सकेगा? ]
खबर नही कि बलाखाना - ए - सलासिल मे'
तेरी हयाते - सितम - आशना पे' क्या गुजरी
खवर नही कि निगारे सहर की हसरत मे
तमाम रात चिरागे - वफा पे क्या गुज़री
मगर वो देख फजा मे गुवार-सा उट्ठा
वो तेरे सुख जवानो के राहवर आए
नजर उठा कि वो तेरे वतन के मेहनतकश
गले से कुहना' गुलामी का तोक'° उतार आए
उफक पे' सुबहे-वहारा का१२ अामद-आमद है
फजा मे सुख फरेरो के ४ फूल खिलते है
जमीन खदा-ब-लव है।५ शफीक' मा की तरह
कि इसकी गोद मे विछडे रफीक मिलते हैं
१ कारागार का टूटना
२ कारागार रूपी विपत्तिगृह ३ अयाचार
से परिचित जीवन ( जिस पर अत्याचार हुए हा ) ४ प्रभात की सुदरी
५ वफा स्पी दीपक ६ वातावरण मे ७ घोले थमजीवी ६ पुरानी
१० पटा ११ क्षितिज पर १२ वसत का प्रभात १३ प्रागमन १४ भदों
4 १५ मुस्करा रही है १६ ममताभरी १७ साथी

मेरे गीत तुम्हारे है
निकस्ले-मबस-मो-जिंदा' या वक्त प्रा पहुंचा
यो तेरे नाव होरन में ढाल पाये हैं
नजर उठा वि तेरे देश की फजाया पर
ई
के साये हैं
वहार ई जनतो
४
,
दगेदा तन' है वो यहवा ए मोमो-जर' जिगरी
वहुन ममान ये लाए थे तातिगने-युहन
रखाव घेट, गजल-ख्या हो', वग-फर्मा हो
कि जश्ने-नुसरले मेहनत है जाने-नुमरते फा'
में तुझ मे दूर नही लेकिन ए रपी'• मेरे
तेरी वफा को मेरी जहदे-मुस्तक्लि" पा सताम
तेरे पता को, तरी पर्ने वा • हमीयत को
धडकने पोलते हिन्दोस्ता ये दिल या सलाम
२
१ पारागारी मोर व दीपरा टूटने या २ भा शरीर ३ पूगी
(साम्राज्य) मी वेश्या ४ पुराने जुवारी ५ माज ६ गीत गामो ७ नृत्य
परो ८ श्रम की विजय या उत्सव ६ पला यी विजया उत्सव
१० साथी ११ स्थायी मयप १२ गौरवशील परती को

१०४ साहिर लुधियानवा - लहू नज़' दे रही है हयात' मेरे जहा मे समनज़ार' ठूडने वाले यहा वहार नही आतशी वाले हैं धनुक के रग नही, सुरमई फिज़ारो मे उफक से ता-ब-उफर फासियो के भूले हैं फिर एक मजिले-खू-वार की तरफ है रवां वो रहनुमा जो कई बार राह भूले हैं बुलद दावा - ए - जम्हूरियत' के पर्दे मे फरोगे महबस-प्रो-जिंदा है, ताजियाने" 'हैं बामे-अम्न है जगो-जदल के मनसूबे व शोरे-अद्न, तफावुत के" कारखाने हैं १४ दिलोप खौफ्के पहरे, लबोपे" कुपले सुकूत सिरो पे गर्म सलाखो के शामियाने है मगर मिटे है कही जव और तशदुद से" वो फल्सफे कि जिला दे गये दिमागो को कोई सिपाहे-सितमपेशा'" चूर कर न सकी बशर की जागी हुई रूह के प्रयागो का ५ क्षितिज से १ भेद २ जिदगी ३ उपवन ४ अग्नि बवडर क्षितिज तक ६ लहू बिखेरती मजिल ७ चल रहे हैं ८ पध प्रदशक ६ जनतन के ऊचे दावे १० कारागारों का उत्थान ११ कोडे १२ शाति के नाम पर १३ याय के शोर के साथ १४ भेद भाव १५ होटो पर १६ नुप्पी के ताले १७ हिमा से १८ चमन १९ जालिम सेना २० मााव की २१ पात्रो को

मेरे गीत तुम्हारे हैं
कदम-कदम पे लहू ना दे रही है ह्यात
सियाहियो से उलझते हुए चिरागो को
रवां है काफला ए-इतिका ए इन्सानी।
निज़ामे-आतिशो पाहन का दिल हिलाये हुए
बगावतो के दुहल' बज रहे हैं चार तरफ
निक्ल रहे है जवा मशालें जलाये हुए
तमाम अर्गे जहा' खौलता समुन्दर है
तमाम कोहो-बयावाँ हैं तिलमिलाये हुए
मेरो सदा को दबाना तो खैर मुमकिन है
मगर ह्यात की ललकार कौन रोकेगा
फसीले आतिशो पाहन बहुत बुलद सही
बदलते वक्त की रफ्तार कौन रोकेगा
नये खयाल की परवाज रोकने वालो
नये अवाम की तलवार कौन रोकेगा
पनाह लेता है जिन महवसो की तीरा निजाम
वही से सुबह के लशकर निकलने वाले है
उभर रहे है फ्जायो म अहमरी' परचम'
किनारे मशरिको मगरिब के मिलने वाले है
हजार बब२ गिरे लाख प्राधिया उठे
वो फूल खिल के रहेगे जो खिलने वाले है
१ मानव विकास का काफला २ आग और लोहे के राज्य का ३ ढोल
४ ससार (की धरती) ५ पयत, जगल ६ मावाज ७ लोह और प्राग
की फसीत (प्राचीर) ६ उडान ६ कारागारोबी
११ कडे
१२ बिजली
१० सुख

साहिर लुधियानवी आवाजे-मादम दबेगो कब तलक आवाजे-मादम' हम भो देखेंगे रुकेगे कव तलक जज्बाते-चरहम' हम भी देखेंगे चलो यू ही सही ये जोरे-पैहम हम भी देखेंगे दरे - जिंदा से देखें, या उम्जे - दार से देखें तुम्हे रुमवा सरे - बाजारे - पालम हम भी देखेंगे जरा दम लो माले-शौकते-जम हम भी देखेंगे व-जोमे - कुव्वते - फौलादो - पाहन देख लो तुम भी ब-फैजे - जज्वा - ए - ईमाने - मोहकम' हम भी देखेंगे जबीने-कज-कुलाहो' खाक पर खम'' हम भी देखेंगे मुकाफाते-अमल', तारीख की कुहना13 रिवायत है करोगे कव तलक नावक फराहम'६, हम भी देखेंगे कहा तक है तुम्हारे जुल्म मे दम हम भी देगेंगे ये हगामे विदा ए-शव है, ऐ जुनमत के फरज़ दो सहर के२० दोश पर२१ गुलनार परचम२२ तुम्हे भी देखना होगा यह आलम२३, हम भी देखेंगे (पाकिस्तान म प्रगतिशील लेखका, शायरो और पत्रकारो की गिरफ्तारी पर) .१५ . ५ हम भी देखेंगे १ मानव की प्रावाज़ १ प्रचड भावनायें ३ निरतर अत्याचार ४ कारागार वे द्वार से 4 सूलियो की ऊचाई से ६ ससार रूपी बाजार में । बादशाही ठाठ का प्रतिम त्रियाकम ८ लोहे की शक्ति के घमड पर ९ दृढ विश्वास के भाव की कृपा से १० टेढी टोपिया ( ताज ) रखने वाले माथे ११ झुके हुए १२ कर्मों का बदला (किये की समा) १३ पुरानी १४ परम्परा १६ इक्ट्ठे करना घडी १८ अधकार के १६ बेटो २० सुबह के २१ क्धे पर २२ गुलाबी २३ हालत १५ तीर १७ रात के जाने की झडा मेरे गीत तुम्हारे हैं १०७ - राजल जब कभी उनको तवज्जोह म कमी पाई गई अज - सरे - नौ' दास्ताने - गोकर दोहराई गई विक गये जवनेरे लय' फिर तुझको क्या शिक्या, अगर जिन्दगानी वादा - प्रो - सागर से बहलाई गई ऐ गमे दुनिया तुझे क्या इल्म' तेरे वास्ते किन वहानी से तबीयत राह पर लाई गई हम करें तर्के-वफा', अच्छा चलो यू ही सही और अगर त-यफा से भी न रसवाई गई कसे-कैसे चरमो-पारिज गर्दै • गम से बुझ गये कैसे - कैसे पंकरो की शाने - ग्रेनाई गई दिल की धडकन म तवाजन"ा चला है, खैर हो मेरी नज़रें बुझ गई या तेरी रमनाई१२ गई उनका गग उनका तमबुर उनके शिकवे अर वहा अब तो ये बाते भी ऐ दिल । हो गई गाई - गई जुरते इन्मा पे४ गो तादीव के पहरे रहे फितरते - इन्सा को६ यि जजीर पहनाई गई अर्सा ए-हस्ती म७ अब तेशाजनो का दौर है रस्मे - चगेजी उठी, तौकीरे - दाराई गई १ नये सिरे से २ प्रेम कथा ३ हाट ४ शराब और प्याले में 4 ज्ञान ६ प्रेम का परित्याग ७ नत्र और पोल गम वी धूल स ६ गरीरा (सुदरियो) को १० शृगार की शान ११ सतुलन १२ सौदय १३ कल्पना १४ मानव साह्म १५ शिक्षण रूपी दडये १६ मानव प्रकृति को १७ ससार रूपी क्षेत्र म १८ बुदाल याला का, अर्थात श्रमजीवियो वा (फरहाद वो पोर सकेत है) १६ चगेज़ ऐमे (अत्याचारी) राजामो की नीति २० वादशाही - सम्मान

१००
साहिर लुधियानवी
मताभए गर'
मेरे रवाबो के झरोको को सजाने वाली
तेरे रवावो मे कही मेरा गुजर है कि नही
पूछकर अपनी निगाहो से बता दे मुझको
मेरी राहो के मुकद्दर मे महर है कि नहीं
चार दिन की ये रफाकत जो रफाकत भी नहीं
उम्र भर के लिए आजार हुई जाती है
जिन्दगी यू तो हमेशा से परीशान मी थी
अब तो हर सास गिरागार' हुई जाती है
मेरा उजडी हुई नीदो के शबिस्तानो में"
तू किसी रवाब के पैकर की तरह आई है
कभी अपनी सी, कभी गैर नज़र आती है
कभी इखलास' की मृरत कभी हरजाई है
प्यार पर बस तो नहीं है मेरा, लेकिन फिर भी
तू बतादे कि तुझे प्यार कर या T करू
तूने खुद अपने तबस्सुम से जगाया है जिहे
उन तम नामओ का इजहार करू या न करु
तू किसी और के दामन को क्ली है लेकिन
मेरी रात तेरी खुशबू से बमी रहती है
तू कही भी हो तेरे फूल से पारिज की कसम
तेरी पलके मेरी पाखो पे झुकी रहती हैं
१ गर की सम्पत्ति २ भाग्य मे ३ प्रभात ४ माय ५ रोग ६ ममह्य
७ शयनागारोम
६ नि स्वायता (प्रम) १० मुस्कराहटस
११ गाला की
८ माकार

१०६
मेरे गीत तुम्हारे हैं
तेरे हाथो की हरारत' , तेरे सासो की महक
तैरती रहती हैं एहसास को पहनाई मे
ढूढनी रहती हैं तसईल की बाहें तुझको
सद रातो की सुलगती हुई तनहाई में
तेरा अल्ताफो-करम एक हकीक्त' है मगर
ये हकीकत भी हकीकत म फमाना ही न हो
तेरी मानूम निगाहो का ये मोहतात पयाम
दिल के ख करने का इक और बहाना हो न हो
कोन जाने मेरे इमरोज का' फर्दा क्या है
कुरवते११ वढ के पशेमान भी हो जाती है
दिल के दामन से लिपटनी हुई रगी नजरें
देखते - देखते अनजान भी हो जाती है
मेरी दरमादा ३ जवानी की तमन्नामा के
मुजमहिल४ राव को तावीरवनादे मुझको
तेरे दामन मे गुलिस्ता भी है वोराने मा
मेरा हासिल' मेरी तकदीर बतादे मुझसे
१
१ गर्मी २ चेतना की ३ विस्तीणता में ४ पल्सना की ५ कृपा,
अनुकम्पा ६ वास्तविकता ७ कहानी ८ प्रेम युक्त नजग का प्राजका
१० क्ल ११ सामीप्य, प्रेम १२ लज्जित
१३ विवश
१४ पाकुल
१५ स्वप्न-पल १६ प्राप्ति

साहिर लुधियानवा तेरी आवाज रात मुनसान थी, वोझल थी फज़ा की' सासें रूह पे छाए थे बेनाम गमो के साये दिल को ये जिद थी कि तू पाए तसल्ली देने मेरी कोशिश थी कि कमबख्त को नीद आ जाये देर तक पासो मे चुभती रही तारो की चमक देर तक जह्न' सुलगता रहा तनहाई मे अपने ठुकराये हुए दोस्त की पुरसिश के लिए तू न आई मगर इस रात को पहनाई मे यू अचानक तेरी आवाज़ कही से आई जैसे परबत का जिगर चीर के झरना फूटे या जमीनो की मोहब्वत म तडप कर नागाह' आसमानो से कोई गोख सिताग टूटे शहद-सा घुल गया तल्खावा - ए - तनहाई मे रग-सा फैल गया दिल के सियाह खाने मे देर तक यू तेरी मस्ताना सदाएं गूजी जिस तरह फूल चमकने लगें वीराने म तू बहुत दूर किसी अजुमने नाज म थी फिर भी महसस क्यिा मैने कि तू आई है और नग्मो म छुपाकर मेरे सोये हुए स्वाव मेरी रूठी हुई नीदो को मना लाई हैं १ वातावरण वी २ मस्तिव ३ हाल चाल पूछना ४ विशालता ५ सहना ६ एकात कडवेपन म ७ मधेरे घर में ८ मावा ६ नाजों भरी महफ्लि -

मेरे गीत तुम्हारे हैं
रात की सतह पे' उभरे तेरे चेहरे के नुकूश
वही चुपचाप-सी पाखे, वही सादा सी नजर
वही ढलका हुआ पाचल, वही रफ्तार का सम
वही रह-रह के तचक्ता हुआ नाजुक पैकर
तू मेरे पास न थी फिर भी सहर' होने तक
तेरा हर साम मेरे जिस्म को छूकर गुजरा
कतरा-कतरा तेरे दीदार की शवनम टपकी
लम्हा - लम्हा तेरी सुशबू से मुअत्तर गुजरा
अब यही है तुझे मन्जूर तो ऐ जाने-वहार'
मै तेरी राह न देख्गा सियाह रातो म
ढूढ लेगी मेरी तरसी हुई नजरे तुझ को
नग्मा - प्रो - शे'र की उमडी हुई वरसाता म
अव तेरा प्यार सतायेगा तो मेरी हस्ती
तेरी मस्ती भरी आवाज मे ढल जायेगी
और ये रूह जो तेरे लिए बेचैन सी है
गीत बनकर तेरे होटो पे मचत जायेगी
तेरे नग्मात'', तेरे हुस्न की ठडक लेकर
मेरे तपते
हुए माहौल' म आ जायेंगे
चन्द घडियो के लिए हो कि हमेशा के लिए
मेरी जागी हुई रातो पो सुला जायेंगे
.
१ स्तर पर २ नैन नक्श ३ चाल को लचक ४ शरीर ५ सुबह
६ दशन ७ प्रत्येक्षण ८ सुगधित १वहार प्राण
११ वातावरण
१० गीत

११२
साहिर लुधियानवी
गजल
हर कदम मरहला-ए-दागे-मलीव' आज भी है
जो कभी था वही इसा का नसीव आज भी है
जगमगाते हैं उफर पार सितारे लेकिन
रास्ता मजिले हस्ती का मुहीव' आज भी है
सरे-मवतल जिहे जाना था वो जा भी पहुचे
मरे मिपर वोई मोहतात' खतीव ग्राज भी है
अहले-दानिश ने जिमे अमर-ए-मुमल्लम' माना
अहले दिल के लिए वो बात अजीव आज भी है
-
वो तेरी याद है या मेरी अजोयत कोशी'.
एक नश्तर-मा रगे जा के" करीब आज भी है
१२
कौन जाने ये तेरा शायरे-पाशुपता-मिज़ाज'
कितने मगरूर सुदाओ का रकीब आज भी है
१ पासियो को कठिन मजिल २ क्षितिज पार ३ भयानक
४ वध
स्थतम ५ चबूतरे पर ६ सावधान (चालाक) ७ उपदेशक ८ बुद्धि
जीवियो ने ६ अकाटय मिद्धात
१० कष्ट प्रियता ११ शाह रग रे
१२ खिन्न स्वभाव वाला शायर १३ प्रतिद्वन्द्वी

मेरे गीत तुम्हारे हैं
११३
वफादारी
खूने-जमहूर' मे भीगे हुए परचम लेकर
मुझसे अफराद की शाही ने वफा मागो है
सुबह के नूर पे ताग्रजीर' लगाने के लिए,
शव की सगीन सियाही ने वफा मागी है
और ये चाहा है कि मैं काफला-ए-मादम को
टोकने वाली निगाहो का मददगार बनू
जिस तमन्दर से चिरागा'' है सरे-जादा-ए-जीस्त"
उस तसव्वुर की हजीमत का गुनहगार वनू
जुल्म-पर्व' कवानीन १४ के ऐवानो से१५
वेडिया तकती है जजीर सदा
देती है
ताके-तादोव से इन्साफ के बुत घूरते है
मसनदे - अद्ल से शमशीर सदा देती है
लेकिन ऐ अजमते इन्सा के सुनहरे ख्वाबो
मैं किसी ताज को सतवत का परस्तार नही
मेरे अफकार का२२ उनवाने-इरादत२३ तुम हो
तुम्हारा हू-लुटेरो का वफादार नही
१ जनता के
लहू
मे २ झडे ३ व्यक्तियो की (व्यक्तिगत) ४ प्रकाश
पर ५ सजा ६ रात की ७ पडी, भयार ८ इसानियत के काफले को
कल्पना से १० प्रकाश ११ जीवन रूपी राह पर १२ पराजय का
१३ अत्याचार के पाले हुए १४ कानूनो के १५ महलो से १६ अावाज
१७ शिक्षा के ताक्चे से १६ “याय के सिंहासन से १६ मानव की महानता के
२० दबदबे या धाक का २१ उपासक २२ काव्य का २३ वास्तविक शोषक

११४
साहिर लुधियानवी
अजनवी बन जायें
चलो इक बार फिर से अजनवी वन जायें
हम
दोनो
न मै तुमसे कोई उम्मीद क्यू दिल-नवाजी की
न तुम मेरी तरफ देखो गलत-अदाज' नज़रो से
न मेरे दिल की धडकन लडखडाए मेरी बातो मे
न जाहिर हो तुम्हारी कश्मकश का राज नजरो से
तुम्हे भी कोई उलझन रोकती है पेश क्दमी सेर
मुझे भी लोग कहते हैं कि ये जल्वे पराए हैं
मेरे हमराह भी रुसवाइया है मेरे माजी की
तुम्हारे साथ भी गुजरी हुई रातो के साए हैं
तारुफ रोग हो जाये तो उसको भूलना बेहतर
तअत्लुक बोझ बन जाये तो उसको तोडना अच्छा
वो अफसाना जिसे तक्मील तक लाना न हो मुमकिन
उसे इक खूबसूरत मोड देकर छोडना अच्छा
चलो इक बार फिर से अजनबी बन जायें हम दोनो
२ माग बढने से
३ मतीत की
४ परिचय
१ नमात्पादक
५ सम्बध ६ पूर्ति तर

मेरे गीत तुम्हारे हैं मेरे प्रहद' के हसीनो वो सितारे जिन की सातिर कई वेकरार सदिया मेरी तीरा-वस्त' दुनिया म मितारावार' जागी कभी रिफअतो पे लपकी कभी वुमतो से उलझी कभी सोगवार' सोई कभी नग्मावार' जागी .१३ जाना वो बुलद • वाम तारे वो फलक मुकाम तारे जो निशान देके अपना रहे बेमिशा हमेशा वो हसी, वो नूरजादे' वो सला के शाहजादे जो हमारी किस्मतो पर रहे हुक्मरा हमेशा जिह मुजमहिल'' दिलो ने अव'दी'२ पनाह जाना थके-हारे काफलो ने जिन्हे खिजे. -राह जिन्हे प्राशिको ने चाहा कि फलक से तोड लायें किसी राह में बिछाये किसी सेज पर सजाय जिन्हे कममिनो से ४ चाहा कि लपक के प्यार करलें जिन्हे महवशो ने मांगा कि गले का हार करलें जिन्हे बुनगरो ने चाहा कि सनम' वनाके पूर्जे ये जो दूर के हमी है इन्हें पास लाके पर्जे * युग के १ मधकार पूर्ण २ सितारो की तरह ३ ऊंचाइया पर ४ विशालतानो से ५ निराश, खिन्न ६ गीत गाती हुई ( प्राशापूण ) ७ ऊचे स्थान वाले ८ भाकाश वासी ६ प्रबार पुत्र १० ( विशाल) १३ पथ प्रदशक १४ प्रबोध बालकोने १५ चाद जैसी सुदरियों से १६ मूर्तिकारो ने १७ मूतिया पूय में ११ निढाल १२ स्थायी

साहिर लुधियानवी
जिहे मुतरिवो ने' मागा कि सदायो म पिरो लें
जिन्हे शायरों ने चाहा कि खयाल मे समो लें
जो हमारी दस्तरस से रहे दूर-दूर अब तक
हमे देखते रहे हैं जो व-सद-गरूर अब तक
मेरे अहद के हसीनो वो नज़र . नवाज" तारे
मेरा दौरे-इश्क - पर्वर' तुम्हे ना दे रहा है
वो जुनूं जो आबो-आतिश को असीर' कर चुका था
वो खला की' समतो से भी खिराज ले रहा है
मेरे साथ रहने वालो मेरे बाद आने वालो
मेरे दौर का ये तोहफा तुम्हे साज़गार आए
कभी तुम खला से गुज़रो किसी सीमतन की खातिर
कभी तुमको दिल म रख कर कोई गुल-अजार आए
(जनवरी, १९५६)
१ गायको ने २ अावाजो म
३ पहुच से ४ अत्यन्त घमड के साथ
५ मनोरम ६ प्रेम पालक युग
। भेंट ८ उमाद
६ पानी और माग
को १० बदी या बस में
११ शूय की १२ विशालतामों से
१३ रजत-बदन (प्रेयसी) १४ पुष्प-वरण (प्रेमी)

परछाइयां

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मेरे गीत तुम्हारे हैं
११६
जवान रात के सोने पे दूधिया पाचल
मचल रहा है किमी ख्वाबे-मरमरी को' तरह
हसीन फूल, हसी पत्तिया, हसी शाखें
लचक रही है किसी जिस्मे-नाज़नी को तरह
फजा म घुल से गये है उफक के नम खुतूत
जमी हसीन है, रवाबो की सरज़मी की तरह
तसव्वुरात को परछाइयां उभरती है
कभी गुमान' की सूरत कभी यकी की तरह
वो पेड जिन के तले हम पनाह लेते थे
खडे हे पाज भी साक्ति किसी अमी की तरह
इन्ही के साये में फिर आज दो धडकते दिल
खमोश होटो से कुछ कहने सुनने आये हैं
नजाने कितनी कशाक्श से', कितनी काविश से
ये मोते - जागते लम्हे चुराके लाये हैं
यही फज़ा थी, यही रत, यही जमाना था
यही से हमने मुहब्बत की इन्निदा की थी
धडक्ते दिल से, लरजती हुई निगाहो से
हुजूरे-गैव मे२ नन्ही सी इल्तिजा की थी
कि आरजू के क्वल खिल के फूल हो जायें
दिलो नज़र की दुआये कबूल हो जायें
१०
तसव्वुरात की
परछाइया उभरती है
१ मरमर ऐसे (सुदर) सपने की २ सुदरी के बदन की ३ क्षितिज
के ४ रेखायें, नैन नक्श ५ कल्पना की ६ भ्रम ७ चुपचाप
८ साक्षी
६,१० प्रयत्न से ११ प्रारम्भ १२ भगवान की सेवा म

१२०
साहिर लुधियानवी
तुम आ रही हो ज़माने को प्राख से बचकर
नजर झुकाये हुए और बदन चुराये हुए
खुद अपने कदमो की आहट से ऊपती, डरती,
खुद अपने साये की जुबिश से खौफ खाए हुए
तसव्वुरात
की परछाइया उभरती हैं
रवा है छोटो सो कश्ती हवाग्रो के रख पर
नदी के साज पे मल्लाह गीत गाता है
तुम्हारा जिस्म हर इक लहर के झकोले से
मेरी खुली हुई बाहो मे भूल जाता है
तसव्वुरात की परछाइया उभरती है
मै फूल टाक रहा हूँ तुम्हारे जूडे में
तुम्हारी आख मसर्रत से झुकती जाती है
न जाने आज मै क्या बात कहने वाला हू
जवान खुश्क है आवाज रुकती जाती है
तसव्वुरात की परवाइया उभरती हैं
मेरे गले मे तुम्हारी गुदाज' बाह है
तुम्हारे होटो पे मेरे लबो के साये है
मुझे यकी है कि हम अब कभी न विछडेंगे
तुम्हें गुमान है कि हम मिलके भी पराये हैं।
तसव्वुरात की परछाइया उभरती हैं
मेरे पलग पे विखरी हुई कितावो को,
अदाए - अज्जो-करम से उठा रहो हो तुम
मुहाग-रात जो ढोलक पे गाये जाते हैं,
दवे सुरो मे वही गीत गा रही हो तुम
तसव्वुरात की परछाइया उभरतो हैं
१ मुडोल २ विनय मोर कृपा की अदा से

मेरे गीत सुम्हारे हैं
वो लम्हे कितने दिलकश थे वो पटिया कितनी प्यारी थी,
वो सेहरे कितने नाजुक थे वो लडिया क्तिनी प्यारी थी
यस्तो की हर-हा गादाव गली' स्वावो का जजीरा थी गोया
हर मौजे नफम', हर मौजे सवा", नग्मो का जखीरा' थी गोया
नागाह' लहरते येतो से टापो को सदायें आने लगी
बारूद को बोझन बू लेकर पच्चम से हवायें गाने लगी
तामीर के रोशन चेहरे पर तसरीव का वादल फैल गया
हर गाय मे वहशत नाच उठी, हर शहर म जगल फैल गया
मगरिब के मुहरजय मुल्का से कुछ साकी - धर्दी - पोश आये
इठलाते हुए मगर प्राये, लहराते हुए मदहोश आये
सामोश जमी के सीने मे संमो की तनावें गडने लगी
मक्खन सी मुलायम राहो पर बूटो की खराश पड़ने लगी
फोजो के भयानक बैंड तले चों की सदायें डूब गई
जीपो को सुलगती धूल तले फूलो की कवायें डूब गई
इन्सान की कीमत गिरने लगी, अजनास "भानो चढने लगे
चौपाल की रौनक घटने लगी, भरती के दफातर'२ वढने लगे
वस्ती के सजीले शोख जवा, वन-वन के सिपाही जाने लगे
जिस राह से कम ही लौट सके, उस राह प राही जाने लगे
इन जाने वाले दस्तो मे गैरत भी गई, बरनाई।
माओ के जवा वटे भी गये, बहनो के चहेते भाई भी
बस्ती पे उदासी छाने लगी, मेलो को बहारे खत्म हुई
प्रामो की लचकती शाखो से झूलो की कतारें खत्म हुई
१3 भी
१ आन द दायक गली २ स्वप्नो का टापू ३ श्वास ४ हवा की लहर
५ भण्डार ६ मक्स्मात ७ निर्माण र ध्वस का ६ बबरता १० प्रावरण
११ मनाजो के १२ दफ्तर १३ जवानी

१२२
साहिर लुधियानवी
धूल उडने लगी वाजारो मे, भूरा उगने लगी पलियानो मे
हर चीज़ दुकानो से उठकर, रूपोश हुई तहसानो में
बदहाल घरो की बदहाली, वढते-वढते
जजाल बनी
महँगाई बढकर काल बनी, सारी बस्ती कगाल बनी
चरवाहिया रस्ता भूल गइ, पनहारिया पनघट छोड गई
कितनी ही कवारी अबलायें, मा-बाप की चौखट छोड गई
इफलास ज़दा दहकानो के' हल-बैल विके, सलियान विके
जीने की तमन्ना के हाथो, जीने ही के सव सामान विके
कुछ भी न रहा जब विकने को जिस्मो की तिजारत होने लगी
खलवत मे भी जो ममनून' थी वो जलवत मे जसारत"
होने लगी
तसव्वुरात की परछाइया उभरती हैं
तुम आ रही हो सरे-बाम बाल विखराये
हजार गोना मलामत का बार उठाये हुए
हवस-परस्त निगाहो को चीरा-दस्ती से
वदन की झेपती उरियानिया' छुपाए हुए
तसव्वुगत की परछाइया उभरती हैं
१ निधनता के मारे किसानो के २ एकांत में ३ निपिख ४ खुले माम
५ घृष्टता ६ लोलुप ७ उद्दण्डता ८ नग्नताएँ

मेरे गीत तुम्हारे हैं
मैं शहर जाके हर इक दर' पे झांक आया हूँ
किसी जगह मेरी मेहनत का मोल मिल न सका
सितमगरो के सियासी कमारखाने में,
अलम-नसीव फिरासत का मोल मिल न सका
तसव्वुरात की परछाइया उभरती है
तुम्हारे घर मे कयामत का शोर बर्पा हे
महाजे - जग से' हरकारा तार लाया है
कि जिसका ज़िक तुम्हे जिन्दगी से प्यारा था
वो भाई 'नर्गा-ए-दुश्मन' में काम आया है
तसव्वुरात को परछाइया उभरती है
हर एक गाम पे' बदनामियो का जमघट है
हर एक मोड पे रुमवाइयो के मेले है
न दोस्ती, न तकल्लुफ, न दिलवरी, न खुलूस
क्सिी का कोई नहीं आज सब अकेले है
तसव्वुरात की परछाइया उभरती हैं
वो रहगुज़र जो मेरे दिल की तरह सूनी है
न जाने तुमको कहा ले के जाने वाली है
तुम्ह खरीद रहे है जमीर के कातिल
उफक पे खूने-तमनाए-दिल की' लाली है
तसव्वुरात की परछाइया उभरती है
१ दरवाजा २ जुभाखाने में ३ सोव ग्रस्त विवेक ४ युद्ध-क्षेत्र से
५ शत्रु के घेरे म ६ कदम पर ७ शुद्ध हृदयता ८ मनोकामना के रक्त की

१२४
साहिर लुधियानवी
सूरज के लहू मे लिथडी हुई वो शाम है अव तक याद मुझे
चाहत के सुनहरे ख्वावो का अजाम है अब तक याद मुझे
उम शाम मुझे मालूम हुआ, खेतो की तरह इस दुनिया में
सहमी हुई दोशीजायो की'
मुस्कान भी बेची जाती है
उस शाम मुझे मालूम हुआ, इस कारगहे जरदारी मेरे
दो भोली-भाली रूहो की पहचान भी बेची जाती है
उस शाम मुझे मालूम हुआ, जव वाप की खेती छिन जाये
ममता के सुनहरे ख्वावो की अनमोल निशानी विक्ती है
उस शाम मुझे मालूम हुआ, जब भाई जग मे काम आयें
सरमाये के कहवाखाने मे वहनो की जवानी बिकती है
सूरज के लह मे लिथडी हुई वो शाम है अब तक याद मुझे
चाहत के सुनहरे रवावो का अजाम है अब तक याद मुझे
तुम आज हजारो मोल यहा से दूर कही तनहाई मे,
या बज्मे-तरव-आराई म ,
मेरे सपने बुनती होगी बैठी आगोश पराई मे।
और मैं सीने में गम लेकर दिन-रात मशक्कत करता हूँ,
जीने की खातिर मरता हूँ,
अपने फन को रुसवा करके अगियार का दामन भरता हू ।
-
मजबूर हू मै, मजबूर हो तुम, मजबूर ये दुनिया सारी है,
तन का दुख मन पर भारी है,
इस दौर मे जीने की कीमत या दारो रसन या ख्वारी है।
१ हरुण कुमारियो को २ पूंजीवाद वे कारखाने मे ३ वेश्यालय में
४ भान दायक महफिल मे ५ परिश्रम ६ गरो का ७ काल में ८ मूली

मेरे गीत तुम्हारे हैं
१२५
मै दारो-रसन तक जा न सका, तुम जहद को' हद तक आ न सकी,
चाहा तो मगर अपना न सकी,
हम तुम दो ऐसी रूहे है जो मजिले तस्की२ पा न सकी।
-
जीने को जिये जाते है मगर, सासो मे चिताये जलती है,
खामोश वफायें जलती हैं,
जारो मे' , रबावो को रिदायें जलती है।
सगीन हकायक
-
और आज
इन पेडो के नीचे फिर दो साये लहराये है,
फिर दो दिल मिलने आये हैं,
फिर मौत की आधी उट्ठी है, फिर जग के बादल छाये है ।
मैं सोच रहा हूँ इनका भी अपनी ही तरह अजाम न हो,
इनका भी जुनू बदनाम न हो,
इनके भी मुकद्दर मे लिक्खी इक खून मे लिथडी शाम न हो।
.
सूरज मे लिथडी हुई वो शाम हैं अब तक याद मुझे।
चाहत के सुनहरे स्वाबो का अजाम है अब तक याद मुझे।
हमारा प्यार हवादिम की' ताप ला न सका,
मगर इन्हे तो मुरादो की रात मिल जाये ।
हमे तो कश्मकशे-मर्ग-वेग्रमा ही मिली,
इन्हे तो झूमती गाती हयात मिल जाये ।।
१ सग्राम २ पान्ति की मज़िल ३ बटोर यास्तविक्तामों को भूमि
मे (ससार मे) ४ पादरें ५ उमाद, प्रेम ६ दुर्घटनामों की ४ येपनाह
मृत्युको खीवातानी

१२६
साहिर पुधियानवी
बहुत दिनो से है ये मश्गला' सियासत या,
कि जब जवान हो वच्ने तो न हो जायें ।
बहुत दिनो से है ये रान' हुक्मरानो का,
कि दूर-दूर के मुत्यो मे पहत वो जायें।
बहुत दिनो से जवानी के रूपाव वीरा हैं,
बहुत दिनों से मुहब्बत पनाह दूढ़ती है।
बहुत दिनो से मितम-दीद शाहराहो में'
निगारे ज़ोस्त की इस्मत पनाह द ढती है ।
चलो कि आज मभी पायमाल हो से,
कहे कि अपने हर-इक जरम को ज़वा कर लें।
हमारा राज़, हमारा नही सभी का है,
चलो कि सारे ज़माने को राजदा कर लें
-
चलो कि चल के सियासी मुवामिरो से कहे,
कि हम को जगो-जदल के चलन से नफरत है।
जिसे लहू के सिवा कोई रग रास न आये,
हम हयात के उस पैरहन से नफरत है ।
कहो कि अब कोई कातिल अगर इधर पाया,
तो हर कदम पे ज़मी तग होती जायेगी।
हर एक मौजे-हवा रुख बदल के झपटेगी,
हर एक शाख रगे-सग होती जायेगी ।
१ मनोविनोद २ उमाद ३ अत्याचार पीडित राजपथो मे ४ जीवन
रूपी प्रेयसी ५ कुचली हुई ६ जूएबाज़ो से ७ जीवन के
लिवास
से है हवा की लहर १० पत्थर की रग

१२५ मेरे गीत तुम्हारे हैं ये कह दें, उठो कि आज हर इक जगजू से जित' है। कि हमको काम की खातिर कलो की हक नही, हम किसी की जमी छीनने का मत है । हमें तो अपनी जमी पर हलो की हा ख न करे, कहो कि अब कोई ताजिर इधर का र जायेगी अब इस जा' कोई कवारी न बेची ये सेत जाग पडे, उठ खडी हुायेगी । अब इस जगह कोई क्यारी न वेची । क की, ये सरजमीन है गौतम की और ना कभी। इस अर्जे-पाक पे वहशी न चल सकेंगे लिए, हमारा खून अमानत है नस्ले-नौ के कभी ।। हमारे खून ५ लश्कर न पल सकेगे फसलें, श रहे। कहो कि आज भी हम सब अगर खमो नही । तो इस दमक्ते हुए खाकदा की' खैरनो से, जुनू को ढाली हुई एटमो बलाइनही । जमी की खैर नही पासमा की खैर बार, गुजश्ता जग मे घर ही जले मगर इसजाये। अजब नही कि ये तनहाइया भी जल बार, गुजश्ता जग मे पैकर जले मगर इसायें ॥ अजव नही कि ये परछाइया भी जलज ४ नई पीढी के १ मावश्यकता २ जगह ३ पवित्र भूमि पर ५ धरती की ६ उमाद की ७ पिछली ८ शरीर

१२६
साहिर लुधियानवी
बहुत दिनो से है ये मरगला' गियामत का,
कि जव जवान हो बच्चे तो पल हो जायें ।
बहुत दिनो से है ये रात हुक्मरानो का,
कि दूर-दूर के मुत्को मे बहत वो जाये ।।
बहुत दिनो से जवानी के साथ वीरा हैं,
बहुत दिना से मुहन्धत पनाह दूढनी है
बहुत दिनो से मितमन्दोद शाहराहा में
निगारे-जीस्त' को इस्मत पनाह द ढती है ।।
,
चलो कि आज सभी पायमाल' म्हो से,
यह कि अपने हर-इक जरम को जवा कर लें
हमारा राज, हमारा नही सभी का है,
चलो कि सारे ज़माने को राजदा कर लें।
चलो कि चल के सियासी मुकामिरो से' कह,
कि हम को जगो-जदल के चलन से नफरत है ।
जिसे लहू के सिवा कोई रग गस न माये,
हमे हयात के° उस पैरहन से नफरत है ॥
कहो कि अब कोई कातिल अगर इधर पाया,
तो हर कदम पे जमी तग होती जायेगी ।
हर एक मौजे-हवा रख बदल के झपटेगी,
हर एक शाख रगे सग' होती जायेगी ।
१ मनोविनोद २ उमाद ३ अत्याचार पीडित राजपथो म ४ जीवन
रूपी प्रेयसी ५ कुचली हुई
६ जूएबाजो से ७ जीवन के ८ लिबास
से ६ हवा की लहर १० पत्थर की रग

१२७
मेरे गीत तुम्हारे हैं
उठो कि आज हर इक जगजू से ये कह दें,
कि हमको याम की खातिर कलो की हाजत' है।
हमे किसी की जमी छीनने का शौक नही,
हमें तो अपनी जमी पर हलो की हाजत है।
कहो कि अब कोइ ताजिर इधर का रुख न करे,
अब इस जा पोई कवारी न बेची जायेगी।
ये खेत जाग पडे, उठ खडी हुई फसलें,
अब इस जगह कोई क्यारी न बेची जायेगी ।
ये सरज़मीन है गौतम की और नानक की,
इस अर्जे-पाक पे वहशी न चल सकेगे कभी।
हमारा खून अमानत है नस्ले-नौ के लिए,
हमारे खून पे लश्कर न पल सकेंगे कभी ।
कहो कि आज भी हम सब अगर खमोश रहे,
तो इस दमक्ते हुए खाकदा की खैर नहीं ।
जुनू की ढाली हुई एटमी बलामो से,
जमी की सैर नही प्रासमा की खैर नही ।।
गुजश्ता' जग मे घर ही जले मगर इस बार,
अजब नहीं कि ये तनहाइया भी जल जायें।
गुजरता जग में पैकर जले मगर इस वार,
अजय नही कि ये परछाइया भी जल जायें।
४ नई पीढी के
१ मावश्यकता २ जगह ३ पवित्र भूमि पर
५ धरती की ६ उमाद की ७ पिछली ८ शरीर

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1957
Published
2011/03
Publisher
Rajpal & Sons Kashmiri Get Dehli
Language
Sanskrit
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135
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Shree Jubilee Naagari Bhandar Bikaner
Classification
Poetry
DLI number
551286
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4990010032042.00
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C-DAK, Kolkata
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