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Maharashtra Ke Puraskrat

Sageer Ahamad Choudary · 2011/03

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महाराष्ट्र के पुरस्कृत एकाकी

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महाराष्ट्र के पुरस्कृत एकांकी
छायानुवादक
सगीर अहमद चौधरी
कृष्णा ब्रदर्स, अजमेर

[इन एकाविया ना मचन, अ य भाषा म रूपातरण, फिल्मीकरण व रडियो-
वरण करन स एव मून मराठी लेखको की अनुमनि परम आवश्यक है।
सेवाधर
प्राशर जया अग्रवात
इलाम
मगरमा गाधी माग अजगर
म्यस्तिर प्रिटम हापा भाटा, धरमर
प्रथम 1949
सारण
1 आदि
कामपार

भूमिका जहाँ तक महाराप्ट के साहित्य या प्रश्न है, मैं अभिमान पूर्वक यह यह सकता है नि मराठी साहित्य राष्टीय स्तर पर हिंदी भाषा एव माहित्य को सराहनीय योगदान करता आया है। इस बात का कतई झुठलाया नहीं जा सरता है। इसी लिए मुझे अत्यत हप हो रहा है कि आज मैं पाप (नाटय- प्रेमिया) बहुत ही करीब हो रहा आज जो हिटी रगमच पर नाटकों का अभाव है, वह वगाली रगमच और मराठी रगमन पर नहीं है । बस इसी अभाव का ध्यान मे रखत हुय, मैन मराठी नाटका एव एकापिया को अनुवाद करन वा वीडा उठाया है । अब चूकि मै खुद महाराष्ट्र म बम्बई का रहवामी है एव मरी शिमा-क्षा यही हुई इसलिए मुझे मराठी भापा ना समझन और वोनने म काई विशेष कठिनाई नहीं होती है और रहा सवाल हि दो वा ता वह मुझे विरामत म मिनी है । अत छायानुवाद परत समय और भी मजा आया । छायानुवादित एवाकियो की ए विशेषता यह भी है कि इन सभी लघु- नाटका को महाराष्ट्र य क प्रतियोगिताओ में अब तक कई पुरस्कार प्राप्त हा चुके है । पहन का मतलब यह है कि ये मार एकापी मराठी रंगभूमि क श्रेष्ठ एकाकी है। जव म छायानुवादक व प म वहां तक सपन हो चुका है निणय पाठया पहायो में है क्योर्षि निणय करन का पण अधिवार म मापस हो सोपता है।

मैं प्रकाशक कृष्णा वदस का, मूल मराठी लखका का, अपने बुजुगों का,
एव रगमच सहयागिया का विशेष आभारी हू जिहान मुझे इम काय म,
ममय-समय पर मागदशन और अपना पूर्ण सहयोग दिया।
यति रिमी शत या मचन म बाई आपत्ति हा तो बेहिचर आप मचप्रेमा,
छायानुवादक स पन व्यवहार कर मरते है।
सगीर अहमद चौधरी
१/४ बादरी हाऊस
गणश नगर मरात नाका,
जंबरा (पूर्व)
बम्म ८००

गुवा रगर्मियों के नाम

अनुक्रमणिका
मूर मगटा रामसार
तारपा नाम
1
जया पवार
.
-
'जगु देशपार को अजय दास्तार /
'हाऊन देट"/31
3
पित्रमार
'पाट मार मो रिटन"/50
। गुगर सपा
'मता 19
"/72
5
नवापार
"रपेशी"/87
पापा T-"सपोर महमद पौधरी'

"जगु देशपान्डे की अजब दारतान" [रगमच प्रकाशित होता है दाहिने तरफ देश- पाडे का घर दिखाई देता है। लोगो को भीड जमा है औरतें रो रही हैं घर के बाहर अर्थी पडी है, तिम तयारियां चल रहीं हैं । क्योंकि आज जग नाय देशपांडे की मृत्यु हो गई । सभी लोगो पर दु ख का पहाड टूट पड़ा है। एक आदमी हाथ मटकी पडता है, शेष चार अर्थी उठाते हैं । औरतें जोर से रोती हैं श्मशान भूमि को यात्रा आरम्भ होती है। इसी यात्रा के समानातर एक आदमी दौडता हुआ दिखाई पडता है, सदा नाक की सीध मे चलने वाला, मध्यमवर्गीय, यही है वह, जगनाथ देशपाडे सभी जयराम श्रीराम, जयराम श्रीराम, जयराम श्रीराम, जयराम श्रीराम । एक आज यानि रविवार, यानि एक डिसेम्वर । जगन्नाथ देशपाडे की अचानक मौत । दूसरा ऊपर दूसरे म जिले के निवासी देशपाडे सबको छोडकर चल बसे। तीसरा इन शार्ट जाग का दो एण्ड । चौथा साला देशपाडे चूतिया मूल मराठी रचनाकार "जय त पवार [1 ] खल्लास।

- - सभी जयराम श्रीराम, जयराम श्रीराम । एक देशपाडे, असिस्टेण्ट क्लक गवन मण्ट डिपाटमण्ट इमारत क्रमाक 14 मे रहने वाले, दूसरी मजिल, दाहिने तरफ का आखिरी मकान, बरसातो मे खास बरसाती पानी टपकाने वाला। सभी जयराम श्रीराम, जयराम श्रीराम । दूसरा जग नाय देशपाडे, कद 5 फुट चार इच, सिर पर हमेशा च दन पोतने वाले ईश्वर मे सदैव आस्था रखने वाले सभी जयराम श्रीराम, जयराम श्रीराम चौथा साला देशपाडे तो गया, मगर हमारा तो पूरा सण्डे खराब कर गया। वैसे बेचारा था एकदम घा साधा। हमारी बिल्डिग की एक मशहूर हस्ती, सबका लाडला, घर मे पत्नी गभवती तीसरा गभवती ? यह अगर पहले बताता तो, क्या मारी जाती तेरी मती। चौथा डजण्ट मटर बाप बनते-बनत चल बसा। (आगे मटको पकडने वाला) प्यार जगुभाई, तू हमें छोड- कर चला गया और हम अनाथ हो गये। तेरा स्नह और प्यार हमारे लिए आज बेरी हो गया । तू जब जिदा था तो सारी बिल्डिंग में सूर्य की किरणों की तरह हमेशा खुशिया छाई रहती थी । तुम्हारे मुख में सदा सच्ची और खरी बातें निकलती थी । सारा वातावरण क्तिना पवित्र लगता था तू इतनी जल्दी चला जायेगा हमे अब भी यकीन नहीं हो रहा है। इधर भाभी बेचारी गभवती । उनका उधर सातवा 2) शकर प्रसाद- दुख और भी बहा। उनको अब कौन सभालेगा ? जगु भाई ऐसे विक्ट समय मे ऐसा घात किया। अब आनेवाला हर हवा का झोका तेरी याद लेबर भायेगा। एक नरेन्द्र वर्मा- दूसरा वजरगी चाचा- तीसरा चौथा 79 स्पोस्टस क्लब' समी जयराम धीराम, जयराम प्रीराम, जयराम श्रीराम जयराम श्रीराम । देशपाई बस-बस ब द करो रोना धोना-वेवुनियादो, दिखावटी, बेसुर हारमोनियम की तरह - बन्द करो प्लीज- करो यह ककश जयराम श्रीराम का शोर, स्टापइट, स्टापइट . आई से। - सभी जयराम श्रीराम, जयराम थोराम । देशपाई सालो- कम से कम मरने के बाद तो सुनो। बद करो, बेफ्जुिल रोना-पीटना प्लीज बद करो तुम्हारा यह शोक गीत येस आई एम हैप्पी- मैं तो बहुत ही खुश हू आज-~-बिकाज देशपाण्डे इन डेड दुई- साला मेरे साथ स्वय से पिछले पतीस सालो से छल-कपट करने वाला, देशपांडे को आज छोडकर चला गया-माई डियर ब्रदर एण्ड सिस्टर टुडे इज माई इन डिपे डेस है ~आज मैं आजाद हो गया हूँ-मुक्त हो गया आज मुझ पख लग गये हैं. इसीलिये कहता है, प्राथना करता हूं, बद करो शोक गीत, वाद करो रोना- हूँ- 3]

.
धोना-आज तो नाचो-गावो, मजा बरो, खुशिया
मनाओ।
समो
देशपांडे
-
जयराम श्रीराम, जयराम श्रीराम ।
(दशको को) शायद आप लोगो को ताज्जब हो रहा होगा
कि अभी थोडी देर पहले मरा देशपाडे अपनी ही शवयात्रा
मे नाच रहा है। पर मुझे नो, एक्स्यूलेटली नो, जरा
भी गम नही । चार-चार घटे मदिर के बाहर लाइन
लगाकर देशपाटे भगवान को कभी खुश नहीं कर सका,
पर भगवान देशपाडे की मृत्यु के बारे म इतना एफिसिएट
हो सकता था? घोर आश्चयजनक बात है, है न । एक
राज की बात बता रहा है आपको यहाँ अपना कोई
नही–दरवाजे पर खड़ा होने वाला मित्र अपना नहीं-
एम्पलायमट एक्सचेज मे काल करने वाला आफ्सिर
अपना नही-गैस का नम्बर निकालने वाला एजेट
अपना नही खाते समय अन्न अपना नहीं-दिमाग
मे आने वाले विचार अपने नहीं - आफिस मे साहब
अपना नही- पानी देने वाला प्यून अपना नहीं- सबके
सब बस पराये पराये से
सत्य है तो वैवल दूरिया,
आदमी से नादमी की दूरियां जो सदैव दूर से तमाशा
दखना अपना क्त्त व्य समझती हैं। और ऐसी भीड लगा
तार हमार आपके, नजदीक, चौर म ऑफ्सि मे-- सडक
पर- गाडियो मे- घर के सामने वाली खिडकी मे-
बस इसी तरह फैली हैं-सजूर के पह को तरह जिसका
न फल काम आता है और न ही छाया। हमेशा लगता
रहता है कि यहां सब अपने हैं। पर अच्छा हुभा आज वह

रिश्ता भी टूट गया, ईश्वर तुझे कोटिश धन्यवाद ।
थैक्स ए लाट । एक मिनट, नही, शायद वैस सभी पराये
नहीं होत इस समय मन मे आनद की एक लहर
दौड रही है, पता नही क्यो ? बार-बार मन कह रहा है,
भगवान बबार म जल्दी कर दी। थाडे दिन और रुक
जाता तो क्या बिगड़ जाता? इन पंतीस सालो में याद
रखने वाला केवल वह एक क्षण
(मच के दूसरी मोर श्रीमती देशपा. को सात्वना
देते हुए एक पडोसन)
श्रीमती देशपाडे (रोकर) केवल दो दिन और रुक जाते तो डाक्टर ने
परसों की ही तारीख दी थी पर यह
सब इतनी
जल्दी-
पडोसन चुप हो जा बहन, चुप हो जा ऐसी बातें अपने हाथो
७. मे नही होती
श्रीमती देशपांडे यानि तुम्हारे भी मिस्टर ?
पडोसन आटो मे बैठते ही पाच ही मिाट में
श्रीमती देशपाई वह हमेशा कहा करते थे कि पहले लडका हागा, मैं ही
बेवकूफों की तरह झगड पडती कि लड़की होगी । अब
मुझे क्या पता था कि वह अचानर
पडोसन चुप हो जा, चुप हो जा
देशपांडे इतनी जल्दी चल बसू गा विमी को भी पता न था, अर्थात
मुये भी नहीं। और दो दिन नहीं मरता तो तो
तो सम्पूर्ण जीवन वा चीज हो गया होता, बस देवल
वही एक क्षण या चीज होने का, वरना शेष जीवन का
5]

? कहा गये तो सडवीज ही हो गया था। पर साला हमारी सभी किसी ने सुनी जो ऊपरवाला सुनता सभी जयराम श्रीराम, जयराम श्रीराम । देशपाडे मत सुनो मत सुनो अवसरवादियों, मत मुनों पाचवा (छठे से) अजी सुनिये, भाई साहब शुशुशु आपको कुछ पता चला ? छठवा क्या पाचवा आपके पडोसी गये देशपाडे जी छठवां हमारे कौनसे पडोसी? पांचवा अरे वही जनाब 4 स्ट्रक्शन डिपाटमैट वाले, (छठां याद करने की कोशिश करता ह पर याद नही आता) अरे वही यार ठीक माढे दम बजे आफ्सि मे पहुँचने वाले बहुत कम बोलने वाले-(जभी भी याद नहीं आता है) अरे यार वहीं केंटीन मे खुद के चाय पैसे मुद ही देने वाले । वही यार । उही साहेबान की यह शवयात्रा छठवा ऐसा क्या (याद न आते हुये भी) बहुत बरा हुआ अरे अरे बहुत बुरा हो गया पाचवा वही तो यह भी क्या जाने की उन है ? छठवा दखो न यार कर मरता ता कम से कम एक सी एल तो ठा सकता था। ठीक है चलो पर अभी याद क्यो नहीं आ रहा है कोन देशपाडे ? याद नहीं आता। देशपाडे उसे कभी नहीं यार आयगा' आफिस मे मेरी बगल के टेबल वाला भी मुझ याद रखे, ऐसा कुछ भी न था मेरे पास । आफ्सि म किसने, विसकी टोपी बदली और विसन, कसे निमकी मारी वेवत ऐसे ही लोगो को याद रखा जाता है। 6] और मेरे पास तो ऐसा एक मी विस्मा नहीं। ऐसे कार्य निश्चित करके भी मैं नही कर सकता था। वहीं साला, हम मिडल क्सास बालोसी, मात्मा की आवाज का इवार । सच कहूं तो, यह पराये-पराये से लगने वाले, जिंदगी भर टोपी पहनाने वाले लोग, जिन-जिन के सिर पर टोपिया बदली, उनमे एक सर मेरा भी था, ऐसा मुझे लग रहा था जिंदगी भर! (दिराम) मैं यह बार वार जिंदगी भर-जिंदगी भर रट रहा हू, आप लोगो को बहुत ही मेलोड्रमिटिक लग रहा होगा। है न? पर लेखक न स्वय ही इस तरह के सवाद लिसे हैं। वैसे भाप लोगो को रिझाने के लिये दुष्ट विनोद भी इसमे हैं । पर जितके ससार का, सम्पूर्ण जीवन का, लडकपन का, अवानी का एक मेलोड्रामा हो गया, उसके डायलाग मेलोडमटिक नही होगे भ्या २ बोलिये न चुप क्यों हैं ? नही होंगे ? (विराम) जवानी का मेलोड्रामा । बचपन क्व आया और क्व गुजर गया पना भी नहीं चला. याद रहा तो केवल अम्याचोर अवस्था में आने वाली जवानी। वह भी पूरी जिंदगी भर नहीं-सिफ कुछ ही पल बदलते मौसम की तरह लगने वाले वह कुछ पल [ जगन्नाय देशपाडे अपने कमरे में बैठा है । एक लड़की जिसके हाथ में एक पेन और विताब है, फिल्मी चाल- चलते हुये प्रवेश करती है। खिडकी पर आकर घर जाती है।] लडको ऐ' शे शु शु जगु कौन है ? सडकी मैं पूजा ! मदर माऊँ?

7
लडकी
ए, तू इटर म है न?
7
लडकी माइस या आटग?
जगु साईमा
सडको फिर तो अदर आती हूँ । वह क्या है वि एक सवाल ही
नहीं आ रहा था मां बोली पडाम के दशपाड जी, के
जगु के पाम जा
नगु पौनसी क्लास म है तू
लडकी इम वार एम एस सो म । पॉम भी बोड वा चले गये ।
जगु नसा सवाल है,
लडकी (किताव खोलवर। यह क्या
[ दोना गणित हल करने के लिए अवते हैं। प्रीज ।)
जगु (दशको म) व मे में ज्यादा होशियार ता नहीं था, पर
गधा भी नहीं था--हमार ममय बोड को पहली एस एस सी
पचपन प्रनिशत लेकर पास की। गणित वम ठीक थी, पर
क्सेि मालूम । पूजा को गणित हल करने में दो तीन बार
का समय लगा । पर हल करके ही दिया । पुस्तक
के पीछ
भी वही उत्तर था। वह शायद बहुत खुश हो गई थी।
पूना एक्दम बराबर आया रे उत्तर ! अब आगे वा मैं खुद ही
कर लूंगो पर यदि नही आया तो तेरे पास ही हल कराने
आऊँगी, चलेगान।
नगु अं हो बा जाना मतलब कि-जब फ्स जाय
तब। गणित मे ।
पूजा
पर तू उस कागज पर क्या लिप रहा था ?
8]
]

जगु में कुछ नही वह से हो कुछ
पूजा स मतलय ? चिट्ठी लग रही है ? किसे लिप रहा या
?
मा यता।
नगु (घबरामर) अर चिटठी चिटठी कुछ नही कविता लिख
रहा था-
पूजा भूठ मत बोल' दिखान (वह दिखाता है। पूजा जल्दी-
जल्दी पढती है) बस इतना हो ?
इतन मे तुम जो आ गई मी लगी ?
पूजा अधरी है । पूरी तो कर (पहत हुम चनी जाती है)
जगु वह आई और चली गई सिफ गई नही मन पर एक
अचानक अजीब एहसास छोडवर चली गई। मन बहने
लगा कि उसे गणित न आये और वह
[पूजा पुन आती है। ]
पूजा ऐ, म दर पा सरती हूँ?
जगु अर तू आ ना ? अत्र विस सवाल मे फस गई?
पूजा (अल्हड की तरह हँसकर) गणित 1 उसी दिन वाला।
जगु
पूजा तूने जो हल निकाला साफ गलत हो गया
जगु गलत हो गया? लेविन पुस्तक के पीछे तो
पूजा गलत छपा था।
पूजा तेरी कविता पूरी हो गई। मुझे देखा है
जगु (जेब से निकालकर) हां हां । ये देख । जरा ध्यान से पढ़ना
[ वह पढना शुरु करती है, पढ़ते रहती हैं । जगु उसे
खुशी से देपने लगता है, पडकर समाप्त करती है ।
जगु कैसी लगी?
मतलब
[9

-
पूजा बहुत ही अच्छी है पर वि.युत समझी नहीं-
जगु समझी नही? फिर अच्छी य स बोल रही है ?
पूजा सिम्पल यूस्ट देने के लिये।
जगु मैं बताऊँ अप?
पूजा तु समान में माई ? चल यता ।
[ पूजा यठती है, फ्रीज।]
जगु मैंने उसे अथ बताया। पर यह तो पूरी की पूरी टयूब
लाईट पी। सारा अश उसके सिर पर से चला गया। मैंने
और भी बवितायें सुनाई पर रिजल्ट जीरो या जीरो
कुछ भी पल्ले नही पहा उसके । वैसे तो वह पविना के
मामले मे बहुत कमजोर थी। पर उसे इस बात की खुशी
थी कि मैं कविता लिघता है। वह मेरी एप यन्तिा
को अपने घर कर गई। कभी भार पढने के लिये ।
उसका सूब हँसना और खूब बोलना-बस यही चद यादें
मेरी पास छोड गई।
पूजा ऐ यह ले तेरी पुस्तक । कविता अच्छी लगी । ठीक है,
मतलब मुय नही रे पिताजी को । वह कहने लगे- 'ऐसे
लोगों के दिमाग मे कब क्या-क्या आता है ईश्वर को ही
मालूम ।" पिताजी का भी एक मित्र था कवि, पर सिफ
कवितायें हो करता रहता था। नौकरी वगरह कुछ नहीं ।
ऐसे ही भटकता फिरता है । अभी भी मिल जाता है कभी
कभार । मतलब देख न, मेरे पिताजी को समझ मे आती
है कि नहीं कविता।
जगु अं? अगली बार मैं दूसरी कविता भेज दूंगा।
पूजा ठीक है-(पूजा भाग जाती है)
10]

जगु आनेवाना हर दिन कुछ न कुछ मुशियां लेकर आता था। पहले-पहले सपनो मे घोरो यो तरह मान वानी पूजा, अब साक्षात् रोज घर आने लगी थी। मैंन उसे कविता समझाते की कोशिश छोड दी थी, साला अपना एक तो पहला. पहला प्रेम यह भी अव्यक्त प्रेम । पूजा की मात कुछ निराली पी। ऐसा लगने लगा दीनू को मे बताना चाहिये । इस तरह अगर मन ही मन मे दवापर रखा तो मैं मर हो जाउ। लेविन लेकिन अगर पूजा के दिल म ऐसा बुछ न हुआ तो तो गजय हो जायेगा । पर फिर निश्चय ही कर लिया कि दीन को, अपने सबसे करीबी दोस्त को अव्यक्त प्रेम वहानी यताऊँगा हो । माला वह भी जल जायेगा अपनी प्रेम कहानी सुनकर [मच २ एर’ ओर से दीनू या प्रवेश, जगु उसे आवाज देता है । दोनो वैठ जाते हैं । जगु अस्वस्थ ।। दीनू जगु मुझे ऐसा लग रहा ह पितू कुछ पहना चाहता ह । जगु में, हो यह क्या है दीनू ? वसे मैंने तो पहले से ही तय दिया था पर वह क्या है दीनू शुरुआत कसे यरू समझ मे नही माता। दोनू विसी शुरुआत ? जगु में? वही तो कह रहा हू उसका क्या हुआ मालूम है ? नहीं जाने दे नहीं नही अब तो जाने ही दे एकदम डॉपरक्ट ही बोलता हू दीनू मैंने, मेरा मतलब मेरा न वह क्या ह न “ऐसा है न- दोनू (जोर से) क्या हुआ है ? 111 १ जगु प्रेम हो गया है - धातू तू और प्रेम मगु हो, मैं और प्रेम। धोनू फिर तो कमाल ही हो गया। मतलब सीधा सीधा लकडा बोना। लफडा नही रे वह प्रेम । दीन हां शुरु शुरु म प्रेम ही लगता है बाद में चेज लफडे में ही होता है । मतलब शादी दिया तो भी । लगिन क्यो रे दोन ह वो क्या नाम है ? जगु पर तुझे नाम क्या चाहिम ? मुझे नाम वाम नहीं बताना है दीन फिर बतान की शुरुआत ही क्यों की थी, झक मारने के लिय ? तुम साला लोग सब अधूरा अधूरा ही करत हो जगु अरे पर नाम म क्या रखा है ? दान वही ता में पूछ रहा हूँ | उसके उसमे क्या है ? जयु वैसे अव तक बिल्कुल ठीक तरह से देखा नही उसे दीनू सारा गुड गोबर कर दिया। अरे फिर प्रेम किस पर कर उसका नाम रहा है? जगु (स्वप्न मुद्रा मे) उसकी नाज चालो पर, खिलखिलाकर हँसने पर खूबमरत बालो पर उसकी तरफ जब देखता Fता मैं अपने आप तक को भूल जाता है। मतलब केवल आसे ही बोलने का काम करती हैं। दीनू वाह, क्या बात है- माँ कसम । मैने अव पोडी एस एस सी वी गणित की भी तमारी कर ली है। वसे भी उसकी प्रिलिम शुरू होने वाली है- 12 ] घर कर लिया। एण्ट्री में गनिया दोन जगु तू साला मरने दम तक भौदू ही रहेगा । अर लफडे तो हमने भी बहुतेरे क्यि है। लकिन एक्जामस का चिता हट । अव तुझ जसे अज्ञानी को मैं ही ट्रेंड कर देता पर अब में भी इस फोल्ड से रिटायर हो रहा हूँ। जगु । मतलब । दीतू मेरे बापू ने, बस कुछ ही दिनो मे, दो हाय के चार हाथ करने की सोच ली है। और घर में भी सबकी एक राय हो गई है। वैसे में तैयार नही था पर लड़की देख डाली और बोल दिया चलो हम तैयार हैं, तब से परे हैं एक पैर पर ही शादी के लिये जगु कोन खुशनसीब है रे वो? दीनू वही रे, अपने मास्टर साहब को पूजा। उसय पिता न कहा "उधर बोड को परीक्षा खत्म होते ही घरी मडप के बोड पर खडा कर देगें वैस गरी का, जितने जल्दी हाथ पीले हो उतना ही अण्ण- [दोनो एक्दम क्रोज होते हैं] उस दिन मैं पहली बार जिंदा मरवाज दि फस्ट डेथ आफ देशपाटे-m हक्ने वाला दित अचानक वहाrsxvafarल प्रदान की चिता जली, और Matar का रना हो गया। उस मागी Ram वर अपना ही चेहरा Mero ..... लगा बrTRAMEE करे

लोगो की
एष भो आदमी पधा बदलवाने तर बाता
ही मतलब क्या हुमा इसका ?
मसरा वो मिस्टर तुम्हारा दाहिना क्या है, मरा भी चायाँ कया
एपदम स नाकाम हो गया है।
पांचवा
फिर तुम लोग मिच्युअल अण्डरस्टैण्डिग के साथ का
क्यो नही बदलते ?
पठवा
मतलब ये कि इनका ये दाहिना वधा और उनमा बायाँ
वधा
देखिय मिस्टर तुम आते हो या नहीं, वि नीचे रख दू
[पोछे से आठ और नौ आते हैं। कया बदलवा
लेते हैं]
देशपाडे (पहेली वाली ही मुद्रा में) उसके बाद शादी के मडप मैं,
में क्व वठा, मुझे खुद पता नहीं चला। आज भी अपने
पडोस में रहने वाली पूजा अब भी अपनी ही बीवी है,
इसका एहसास मुझे कई बार हुआ।
[जगु देशपाड और उसको औरत चौपाटी बीच पर
बठे है।
जगु यहाँ से, सूरज का दूबना कितना अच्छा लगता है न ?
औरत । हूँ
जगु तुझे सूरज को डूबत देखकर अच्छा लगता है।
औरत छी
जगू नही ? 'अरे पगली देख पक्षी कैस कतारो मे उडे जा रहे है,
अपना बसेरा लेने के लिये । 'मासमान गहरे नीले रंग से
रग उठा है।
और यहाँ देखो, समुद्र की लहरों में कितना जोश उमड
आया हैं । कितना मनमुग्ध वातावरण है, है न ?

औरत यह क्या फिजम यकवास लगा रखी है। तुम मारा मनप लगता है, यू हो गयो दोग ? मै तो वोर हो गई। (जम्हाई लेती है) फिर क्या करें? औरत (अनिच्छा से) भेल बायगें। जगु ए हो न क्या कहना चाहती हो। मौरत मुझे मुष बहना था, अपना पासा मा प्रस्ट : जगु (अधीर होकर) क्या है वो प्राइवर औरत शी भावा । तुम्ह ता सब ध निमार Tarer है । तुम्हारी कुछ तयारी aft कम शादी में मेरी सहेली ग पढो, वह भी आज द बार- यह किस्सा फिर नहीं होगा। [जगु देश : होना।

गई तो सभी पूछने लगे, तुम्हे क्तिने ? छाटे यो साय
नही नायी?
जस उन सबको खवर ही नहीं है। फिर वहन लगो भर
बाप र बाप, अभी तक एक भी नही ? कुरेद-पुरदकर पूछ
रहे थे। यशोदा न पहा, डाक्टर को दिखाओ anा
दिखाये ? मेरा सिर । गभ रूबता ही नही तो बच्चा कहाँ
से आयगा। अब तो घणा होने लगी है ऐसे ससार से ।
एसो बदनामी से तो अच्छा है गले में पत्थर बांधू और
जगु पहली बार लगा यहाँ से उठू और कही जाकर जान दे दू।
पर पैर ही नही उठ रहे थे। जस मेर जीवन की सारी
होर दूसरो के हाथों म थी। खुद पर हो घणा करना,
अदर ही अदर घटना और विना नीद के रात विताना
मौत से भी भयकर होता है दोस्त । आज मरे सभी गरतो
पर ताले लगे थे और उसको चाथिया दूसरा के हाथ में
यो। (विराम) घर को भुलाने के लिये आफ्सि में जावर
बैठ जाता था। सादे नौ से शाम छ तक। रजिस्टर पर
सही ठोकी कि बस फाईल म हो गड जाता था में। साला
वगली वाली टेविल पर बैठने वाला गोखले, हमेशा गप्प
मारता और मिसेज खारकर सारी की तरह हेसता ।
तीसरा अब अभी और पितनी दूर है शमशान भूमी
आठवा यस यहाँ से क्वल सात मिनट की दूरी पर।
तीसरा
यह तो म पिछले आधे घण्टे स सुन रहा है।
चौथा क्यो भाई तुम शमशान भूमि के बारे में ही बता रहे हो
न? नहो नही मुझे लगा की हाऊसिंग बोम्पलेक्स की
मिटिंग हान वाली सात मिनट पर
6]

२
आल्यो यो भाई, रा गधाह में बया में सी म ट्रीट बोल रहा
हम । अर पिछली बार जय भामर रान मरे न तव में
सात मिनट मे बठकर आया था। रायरेक्ट सोमट ट्रोट ।
चोया
रयो साला, ठडे हो गये क्या सार! बालो जयराम
श्रीराम, जयराम श्रीराम
सभी जयराम श्रीराम, जयराम पाराम
में आई मम इन मर ?
मैनेजर यम रम इन देशपाटे।
जगु साहब तुम आपन बुलवाया
भनेजर हा मने ही बुलवाया था।
जगु किस लिए सर? बुछ मिस्टेक हो गइ क्या ? (दर्शयो
स) अपनी तो एकदम पट गई थी। सच कहता हूँ, मैं
वहुत डरा हुआ था। वसे भी साहेब की धनी-धनी मूछा
से और टाच की तरह चमकने वाली आंखों से मैं बहुत
दरता था। इससे पहले, अप्रैल में साहब की केविन म कभी
नहीं आया था।
मनेजर छी छी देशपाडे, मिस्टेव वगैरह कुछ नहीं। आपको
एक गुड यूज दनी थी।
जा आं? क्या?
गुड यूज
मैनेजर अरे भई ऐम चौविये घबराय मत । हाथ मिलाइये पहले
मम आन शेष हैड, प्रमोशन की लिस्ट में आपका भी
माम है मिस्टर देशपाडे, हम लोग अब आपको प्रमोट करने
वाले हैं।
जगु (खुशी से) सचमुच सर'
मनेजर येस, आप ही पाईनलाईज करने वाले हैं। आपके साथ
तीन और हैं। रेगे, शुक्ला, और मिसेस बिचारे सापकी
17 ]

सर में चल - लगन और इमानदारी का नतीजा है यह मिस्टर देशपाने कीप इट अप । जगु ? मनेजर हो, (देशपाडे जान लगता है,) मिस्टर देशपाड, गुड लक । जगु (सुशी से) इतना खुश था कि साहब का भी Thank you बोलना भूल गया। (टेबल के पास जाकर) अर वो खार- कर वाई, एक खुशखबरी है । खारकर चाय या कॉफी? जगु लिमका। खारकर वो हो जजी शुक्ला यहाँ आइय, गोखले यहाँ आओ, देशपाडे साहब पार्टी दे रहे है। गोखले क्यो देशपाडे, लडका या लहकी? खारकर छी वावा आपको तो मैनेस भी नहीं। ऐसे यही एकदम डायरेक्ट पूछा जाता है ? जगु अरे वसा कुछ भी नहीं है । अभी-अभी म साहब की केबिन से जाकर आ रहा है मरा मतलब उन्होने न ही मुये बुलवाया था गाखले पर क्यो रे क्या जगु मुझ प्रमोशन मिल रहा है। गोखले क्या बोल रहा है पारकर बांगरच्युलशन मिस्टर देशपाड गोपले अर इसको तो मुझे बिल्कुल हो कल्पना भा नहीं थी। देशपाई मुभ भी कहो यो । चला यहाँ रोज मर-मर मरता था, उसका कम म बम योहा पन ता मिल रहा है। मिस्टर देशपाटे अब क्वल लिमया से काम नहीं चलेगा। 18 ] १ ?

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(रुककर) डॉयलाग बाजी समौ चलो वही मही। लिममा विथ सम लाइट जगु (पसीना पोदते हुए) थैक्यू, पारकर वाई। [सभी चले जाते हैं। जगु (दशको से) बहुत दिनो के बाद एक अच्छी घटना ता घटी साला अभी दो घण्टे भी नहीं बीतें, लगन लगा सके काफिडे स आ रहा है- :--बहा सामर खात-पात मन खार कर बाई को ऑष भी मार दी, भगवान कसम । लग रहा था औरत हो तो ऐसी खारवर बाई जसो । वसे कई रातो को में अपनी पली को खारवर बाई ही समझता था, वह मजा ही कुछ और था ज्यादा हो रही है शायद ? माफ करना। पर क्या कहे' मन पर काबू नही रहता है। पर तुरन ही को शस हार अपनी मोघो राह पर चलन लगता है । पर सच कहता है, प्रमोशन का हैंगओवर उतर ही नहीं रहा था। पत्नी को जब यह बात बताई तो वह उसी समय स्वादिष्ट भोजन बनाने को तयार हो गई। बहुत दिनो के बाद रात अच्छी गुजरी, दूसर दिन सवेरे आफ्सि म पचा- प्पून देशपाई आपका साहन ने बुलाया है। जगु (साहव की केविन म जार) यस सर, मनेजर आइय देशपाड माहब आइय । जगु साहय दुध वाम था? मनेगर हो पाम हा है । यो क्या हुआ देशपाई यो षया है कि पल मंन तुमसे कहा था प्रमोशन के विषय में। जा हो हो-येम सर, फायनालाईज हो गया क्या मोगर हो अभी अभी पायनालाईज होकर आया है मतसब 20 प्राब्लम क्या हुआ कि, कल ही मैंने तुम्हें अभिनदन किया। जगु येस सर फिर? भनेजर इसम बुरा मत मानना मि देशपा डे, तुहारा नाम कैंसल हो गया है। जगु षिवरापर) यह क्या कह रहे हैं सर ? भनेजर युअर नेम इज के सल्ड फाम दि लिस्ट । अभी-अभी मिटिंग से आ रहा हूँ, आई ट्रायड माई लेवल बेस्ट बट, आपयो जी एम के बारे मे तो पता ही है, उहोने खुद मि गोखले का नाम प्रमोशन लिस्ट में डाल दिया था। अव इस तरह से किसी न किसी का नाम तो लिस्ट में से पेसल करना ही था। आपको तो पता ही है, रेगे इज सानियर मोस्ट पसन शुराना का भी क्लेम था, और एक लेडी भो चाहिय लिस्ट में साहब का बाग्रह या, इसीलिये मै मजबूर हूँ। आई एम सॉरी। मिसेज विचारे को रखना ही पडेगा। बुरा मत मानना देशपा है। आपको हुई तकलीफ व मारण में शामिदा हूँ [मैनेजर बोले चला जा रहा है जगु देशपांडे चुप- चाप बाहर निकल जाता है। जगु देशपाटे वा हेड अगेन एण्ड अगेन-किसी को कपर लाने के लिये मिसीन पिसी को तो खाई में गिरना ही था। और इस मिसी के लिये चुना गया मुझे । मिस्टर देशपायो-बैटिंग भी मिली ही नहीं- आयु सीब म नेवल पोलिडग ही लिखा पा (दिराम) बोर हो गये न? भापको महसूस हो रहा होगा कि मिस्टर 21 ] । देशपाडे सठिया गया है, है न ? अपने जीवन की कहानी हमे क्यो सुना रहा है। हमारा बहुमूल्य समय नष्ट कर रहा है। आपका कहना सही है । अपन जीवन की पीडा इस तरह कोई ओपाली कहता है क्या ? लेकिन नो आई एम ईजाइग माई डेथ । वध पर क्ब बोझ पडा पता ही नहीं चला जीवन रूपी शमशान भूमि का- सभी जयराम श्रीराम, जयराम श्रीराम । एक चलो शमशान भूमि आ ही गई माली । चतो कोई भी एक डा सर्टिफिकेट लेकर आगे पहुंचे। तीसरा ठाक है म जाता हूं--- पाचवा अवे गर तू मत जा । निकलते वक्त तूने ही क्या दिया था न अब अ दर प्रवेश भी त् ही करना । तीसरा अ दर मतलब जिधर ? पाचवा अपग की औलाद सब शीss पाचवा अबे मैं उम गर की औलाद कह रहा हूँ। छठा ठीक है मैं आगे चला जाता है । लडाई झगडा नहीं । अत तर तो कम से कम एक्ता रखो भाई। (वह भाग निकल जाता है) दूसरा अरमि अगरवतो आपके पास है न ? सातवां (पापिट मरते हुये) हो । हैन । इमरा मिल रहा है न? मानव पारेट रहा है न । जल्दी हाय म आ ही रहा है । (उसे बगरबत्तो या पट मिलता है, पिर मक्याना घुमना प्रारभ रिमी है।) 22 ] . आठवा अरे रुक जाइये, रुपिये प्रथम पैर की ओर जाना है। चौपा विम शास्त्र में लिया है पहले मिर की ओर से, पर पाठवा आपको क्या मालूम चौथा फिर क्या आपको ही सर मालूम है ? मठिया पिछले दस सालों से मैं य धधा कर रहा हूँ। चौथा अच्छा-अच्छा लोगो को पहुंचाने का पाठयां शट अप चौधा तुम घटअप। (दोनो क्षगडे पर उतर आते है छठा दीडकर माता छठया बर प्राब्लम हो गया । अब और बैठो माराम मे घार घण्टे तक २ एक क्या हुआ छठवा वर सीमट्टी का प्यून मर गया । एक्दम अघानर पर गया। छठा उसके दीनी वालो के पास इतनी जोर से आवाज लगाई पर वह बदा हिला तक नहीं। इमरा पर मरा विस तरह छठवा अब हिल हो नही रहा है, तो क्या समझे। भबे गधे की औलाद ! चूतिया चल मेर साथ-- (दोनो जात हैं।) अब इस गडबडी म सबने सब पैर छुआर दर प्रवेश कर गये । ये तो वही हुआ जानेवानी की जान जाणेदेखो। पाचवा जगु 23-1

शाती
यालो या मनोरजन । और इस मनोरजन का जिम्मेदार
लेखक, अब देखो न निदयो ने कितने वर डायलाग निख
डाले है । हिलो मसाला फिल्मो की तरह । वैसे इतनी
बार मर चुका ह कि यह माक्षात मरना उसके सामन बहुत
छोटा लग रहा है। (विराम) मेरा सारा जीवन
एप तमाशाई यनकर रह गया । मेर सपने का दफ्न कर
दिया गया। मार डाली गई मेरी कियटीविटी, गुम हो
गई मेरी शाती मेरा जीवन तो किसी गली के मोड पर
पडे कचरे को तरह है, जिसके पास म्यु सिपालटो को गाडी
कभी नहीं आती।
पर अब सुनाई दने लगी है मुझ मेरी आवाज़
की आवाज । उसकी प्रतिध्वनिया मरे काना म गुजने
लगी हैं । मरी औरत को नौवा लगा है। शादी के दस
साल बाद नया अकुर फूटने वाला है। और इधर मैंने
आज समाप्त कर दिया है अपना दसवा अवतार बस
वही एक क्षण था उसी मे समा गई था मेरी सम्पूण
कविता पियेटोविटी
न है पर अधूरा अधूरा
पहला (दूसर से) वह अ त के डायलाग बोल रहा है बीच का
सीन छोड़ रहा है वह उसे बताओ।
दूसरा ऐ मिस्टर तुझ बीच का भी सीन करना पटेगा।
जगु सचमुच वरना होगा क्या ?
समी हो करना ही होगा।
तीसरा येम येस अधूरा अधूरा कुछ भी नहीं चलेगा
औरत और मेरा राल बाओ मत, डायरेक्ट छलांग लगाकर ।
24]
आकाक्षा
मारा तो मुये सभी

जगु सारी सच पूछा जाये तो मुझे उसे छोड देना था पर
नहीं कुछ भी छोडा नही जा सकता
उस दिन ब मेरे
मकान के पास से गुजर रहा था मैंने उसे घर में बुलाया ।
(वर्वे का प्रवेश) क्याध बर्वे साले दोस्ती वगैरह भुना दी
क्या ? पहले-पहले तो बहुत आया करता था । अव अचा-
नक एकदम आना क्या य द कर दिया ? हा ?
बर्वे ग्राऊण्ड फ्लोर पर रहता हूँ न इमलिये
जगु चल ताश खेलते है, मडीयाट । वस भी आज सनडे है ।
बर्वे नहीं यार
जगु अरे आ भी जा
बर्वे घर पर तो कोई नहीं हैं न ?
जगु होगा तो भी क्या हुआ ? ठीच है चल गप्पे ही मारते हैं।
बहुत दिनो के बार आज बहुत खुश दिखाई दे रहा है ।
क्या बात है?
जगु कुछ नही यार कोई बात करनेवाला मिलना ही नहीं
चव
आजवल
जगु और कोई मिल जाधै तो क्या बात कहें यही समझ में
नही आता । और वैसे भी आम घर पर भी कोई नहीं
हैं बहुत खालीपन सा लग रहा है ।
य अर वाह । फिर ताश निवाल यार। पहले भी मैंने कई
बार बोट चढ़ाय हैं । याद है या नहीं ?
जगु मैं भी चढाऊँगा जरूर एक बार
बर्षे कमाल है जगु आजब तुझ एक बार भी मडी नहीं मिली
जगु एक बार मिली थी, वो भी एक और एक ही बलर सी-
क्या पायदा?
25]

। मिसेज जगु देवल हाप ही नही डाला-अपनी बाहो म बसवर पर (इतने में मिमेन देशपाडे का प्रवेश । बर्वे को देख वर आग बबूला हो जाती है।) भोरत इम पहले बाहर निकालो। इसे घर में घुसने की इजाजत फिसने तो ? नीच कही या। उठो पहले बाहर परो इमे। जगु अरे पर ! मैंने ही बुलाया है आज तो माड से मारूगी इसे जगु पर क्यिा क्या है इसने मिसेज पाडे उसी से पू छो और सुनकर मुछा पर ताव देना बर्वे अरे कुछ नही यार मैंने सुबह सुबह सिफ पूछा दूध है क्या? मिसेज औरत अब हिडे, शरम आती है क्या सच बोलन को ? तुम सुन रहे हो इसको अरे इसने मेरे शरीर पर हाथ गला। जगु बर्वे नही जगु यार, अल ह यह सब मिसेज पारे वया मररमाथा ब ये म मत बाल दुनिया को दिखाने में रिये । मिमेगा अरे देश क्या रहे हो ? परडो उसे । चवें यमी-नानायर-पोरे मिगेम परि तुम मिप चिरलाते रहो यह घरे । मैं दियाती है उसे । (मार लेती है भीरब माग जाता है।" मिन पारे धरिया पहन सा, चूष्टिया । ओ मैं एर औरत परता मौर तुम एप मा होरर गो रहे बम पर मे याहर नापी लोगों की 26] नामद कुछ लोग जगु अरे पर अब चिल्ला क्यो रही है ? मिसेज पाडे पत्थरो पर जाकर सिर पटक लो तुमसे अच्छे तो पत्थर हैं । एक पराया आदमो घर में घुसकर भापको पत्नी पर हाथ डाल दा है और तुम ऐवन देखत रहो । नामद हो तुम क्या हुआ भाभी? मिसेज पाहे मेरा सिर और क्या ? तुम रोग जाजो यहां से भोर इ है भी साथ ल जाआ (रोने लगती है) जगु (दशको से) उस वक्त मन गरती की। मुझे बर्वे को कम से कम एक थप्पड तो मारना ही चाहिये था। पर नहीं हो सका मुयसे । उसो के बाद घणा हाने तगी गुद से घृणा बिरिहग मे कानामी होने लगी कि मेरी पत्नी को होनवाला बच्चा उस वका साला खुद क मह पर का भी नहीं जाता इस मौत को भी मैने अत तक महा है । अत तक। (कुछ देर सनाटा । इस मूड से बाहर आता है।) पर अब छुटकारा मिला ही क्या है सब यझटा से मुझे उसका आनेवाला बच्चा जहाँ रह सुखी रहे~-अब उसकी चिंता भी मुझे नहीं रही । अब तो पूर्ण समाधान 4 साथ मैं चिता पर जलने को तयार हूँ। (सब लोग चिता पी तैयारियां कर रहे है । सातवा मटका लेकर चिता के चारो ओर घूम रहा है । पत्थर के सहारे मटके मे छेद करता है और पुन घूमने उगता है ) सॉलोमन अंडे सोमवार को जम मगलवार को नामकरण चुधवार को शादी गुरुवार को बीमार 27 3 - अरे कोई है वह कौन पटन दे रहा है ? नाटक अभी पत्म नही हुआ अरे वक्पो पर्दा खोलो जत्दो बोलो गुवार को मोरियम मनिवार यो मौत रविवार को दफना दिया गया मंग! दैट वाज दी एण्ड आई सॉलोमन नहे। जिसके पूर जीवन म बोलन साया कुछ भी पटना नही घटी यह सालोमन तीसरा चलो अतिम नमस्कार वर लो। अगि देनी है-- [मब अन्तिम नमस्कार करते हैं। अग्नि दते हैं। विता जलने लगती है। इतने मे चित्रगुप्त अपने सहयोगी के साय प्रवेश करता है। उनके हाथ में एर यडा रजिस्टर्ड है । पर्दा गिरने लगता है। अधिकारी वाह (पर्दा पुलता है) देशपाड बैंठा है, शेष सभी चले जात हैं । आप ही माननीय थी देशपाई ? दूसरा जग नाव देशपाडे? जगु हो । यो ? आप कौन ? अधिकारी मैं चित्रगुप्त और यह मेरा सहयोगी । जगु अरे मतलब आप लोग मुझे स्वय लेने आये हैं । অমিদী अरे मराया जापको जला भी डाला? जगु हो, आज मैं बहुत खुश हूं क्यो ? अधिकारी गलती भयकर गलती हो गई। जगु पर हुआ क्या ? मैं जला हूँ चलो, ले चलो न, मैंने सभी काई पाप नहीं दिया है। मुझे स्वग मे ले चलो। अधिकारी देखिये मिस्टर देशपाण्ड अब आप गडबडी मत बीजीये । गडबडी? क्यो अब क्या हो गया লগ্রিী आप गलती से मरे हैं। आज मरने वालो की लिस्ट में आपका नाम नहीं है। 28 ] फिर? जगु आप यह क्या उल्टा-सीधा बोल रह है। अधिकारी हम उल्टा नही बल्कि सीधा सीधा बोल रहे है। आपकी मृत्यु और पतीस साल के बाद है। जगु नही भई गलती मत किजिय म जगु देशप। ड मर चुका हुँ । जल भी चुका हूँ वह देखिय देखिय वह रही मरी राख। अधिकारी वह तो दिखाई दे रहा है हमे। ज्यादा चतुर बनने की काशिश मत करो। यमराज का कानून तोडा नहीं जा सक्ता । हम आपको अपने साथ नहीं ले जा सकते हैं। जग. अधिकारी आपको पुन पथ्वी लोक म जाना होगा। सहयोगी और पैतीस साल ना, नो, ऐसा नहीं हो सकता। यह झूठ है अधिकारी अरे वाह साहब, साक्षात ईश्वर की बात को मानने से इकार कर रहें है ? काफी चालू लगते हैं आप सहयोगी पध्वीलोर का है न। जगू अर पर मैं जाऊँगा कहाँ ? সহিষ্কার अर हाँ, यह तो एक समस्या हो गयी है । (सहयोगी कान में कुछ कहता है।) अवश्य रास्ता है, एक माग अवश्य है --अर हम ईश्वर यो ही थोडी कहलाते हैं ' तुम अमो के अभी पृथ्वी लोक मे जाओगे वह भी अपने ही घर मे-आपकी पत्नी को लडका होने वाला है न ? चलो अभी के अभी तुरत जाओ जग नहीं साहब, नही। में आपके पैर पक्डर हाथ जोडता है भीख मांग रहा हूँ आपसे, मुझ पुन पथ्वीलोन मत भेजो। एसा मत करो साहब जग - 29]

अधिकारी चलो, हमारी बदनामी मत करवाओ"
देशपांडे
सच कह रहा हूँ साहव मुझे वहाँ नही जाता है मुझ
पर उपकार करिये माय
अधिकारी रूकिय यह एस नही मानेगा।
[दोनो मिलकर देशपांडे को जोर का धक्का देते
हैं। यह गोल गोल मच पर नाचने लगता है।
धोरे धोरे पाश्व मे एक बच्चे को लोरी सुनाई पड़ती
जग
(दशको) रुक्यि रुक्यि साहेबान, यह सब झूठमूठ का
ड्रामा है ऐसा कुछ भी नाटन में नहीं है इस तरह से
लेखक ने कुछ भी नही लिखा है भूठा है यह सब अरे
कोई तो कटन दो र कोई तो बटन दो रे नाटक तो
पहले ही खत्म हो चुका था। ब द करा यह सब रुक्यि
कटन प्लीज बटन।
पता
द्वारा च देरो पत्रिका,
सम्पादकीय सहायक
विश्व विनय 403, भागोजीकीर माग
माहीम, बम्बई 400016 ।
.]

"हाऊँज इंट"
[पर्दा खुलता है । कॉलेज के हॉस्टल के रूम का एक
कमरा । टेप रेकाडर पर अग्रेजो धुन चल रही है।
"अरे हट" "क्या बकरी है," 'माना की टाग
साला," | विनोद शर्मा कह रहा है। उसके पीछे-
पीछे धनश्याम, हाथ मे पानी का गिलास लेकर
भाग दौड कर रहा है । सीन मे एकदम शात बाता-
वरण ।
विनोद शर्मा डियर मण्ड, नमस्कार करने का भी समय नही क्योति में
कोई एम पी , एम एल ए या कॉपरेटर नही, लेखक हूँ।
म विनोद शर्मा पर समय ऐसा है
दुवे खड्डे म।
विनोद शर्मा यू आर राइट । अब देखिय न, कुछ सूझ ही नहीं रहा है ।
पूछिये क्यो भाई, पूछिय पूछिये । पिछले दो माला से
में लगातार, एकाकी लेखन मे इनाम ले रहा है । और
अब मैं तोसरा साल, इस साल जोतकर हैटेंट्रोर करना
चाहता है। पर आज जो भी उठता है, नाटक लिखने
लगता है, इसलिए यू ना मुसे सालिह माइडिया नहीं मिल
शर्मा गया,
रहा है।
दुवे हजार बार वह एका है जनता से बात मत पर।
मूल मराठी रचनाकार "राजा गाव'
1

ये इसलिये तू पल के एक महान लेखक के मूड का सत्यानाश विनोद अवे दुब, मेरे दोस्त इसी जनता ने हमारा साटर सराहा इस लिये तो अपना नाटक प्रथम आया। क्या है न ठीक ? हाँ। दुबे मूख, महामूख, बेवकूफ और मेरे उच्च बुद्धिदेव गुरदव, चार पैट पीस, दा साडी और ललित वार वाली पार्टी, इतना सब करने के बाद हमारा नाटक प्रथम आया, भूलना मन । बिल एडजस्ट करते समय कितना भारी पड़ा, खाने के वक्त तो सब, ये लाआ वो लाओ, डबल लाओ, उसमे वा डालकर लालो हमका बियर हो मगता है। और वाउचर साईन करते समय सबन मुह पर लिया। अत म सेक्रेटरी होने के नात मुभ हैगआवर होना पडा, बेकार का टन आवर साला। विनोद शर्मा (जपने ही ख्यालो गुम दुब का गितास अपने हाथ मे सक्र) मिल गया, मिल गया। दुबे क्या? पानो मे विनोद अबे कचरा नही, आइडिया, सालिड आइडिया मिल गया। दुबे जनाव यह गिलास है अगर टूट गया तो हाथ मे घुसगा। और फिर नाटक क्या लिखेगा? घटा। विनोद अबे दुवे अ हां, दुब। विनोद दुव ववकूफ ? मैं तुमसे ही बोल रहा हू, मिस्टर दुव, सुना तुमने में नाटय नही लिखूगां । अरे एक गिलास टूट जायेगा क्चरा 7 कर रहा है। मेरो प्रतिमा को राम तेरी गगा मैली समझा १] .

दुबे एमा मन वोल बाबा. ऐसा मत बोल, वरना तिवारी सर
मुझे गोली मार देग। अबे एक राज की बात सुन, इस
साल पिछले साल से ज्यादा बजट पास करवाया है। मा
कसम हम अव कुछ करना चाहिये।
विनोद कुछ करना है, इसलिये कुछ भी करुंगा उनमे से मैं नहीं।
मुझे जो अच्छा लगेगा जवेगा वही वरूगा मै। अच्छा त
ही चता य नाटक लिखार मुझ क्या मिलता है ।
दुवे रायल्टी
विनोद बेवकूफ । मुझे मिलता है (कुछ देर रुकवर उसे पकड
कर) अबे खिडको से बाहर देख, जग को प्रकाश देने वाला
सूप, उसे क्या मिलता है ? उस पेड पर बैठकर गाने वाली
जाने दे दीमा है हाँ तो उस क्या
मिलता है ? अब यहाँ से देख हो
अरे । ये तो मन
[मन का प्रवेश-उदास चेहरा-गलौर मुख ।
दुवे
क्यो वे मनू । क्या हुआ
?
विनोद फेम फार्म का कुछ प्राब्लम हो गया है क्या ?
दुवे पिछले चार-पांच दिनो से देख रहा है, जरूर कुछ तो हुआ
है इसे।
विनोद ये
मन् । अरे कुछ तो बोल यार, घर पर सब ठीक हैन ?
बाप से गहा बरवे भाया है क्या?
फिर इस तरह उल्लू की तरह मुह बनाकर क्यो बैठा है?
प्रेम भग हो गया है क्या ?
मन् ऐसे बैठते हैं ! प्रेम मग हाने पर?
विनोद मतलब
वह कोयल
.

मनू मरे प्रेम भग ही सही, कम मे गम इस बात को खशा होतो कि कोई मुममे भो प्रेम कर रहा है । दुबे फिर तुम क्या हो गया है, निस की परेशानी है ? मेनू परगानी ? साला तुम्हारी हो रही है । और हम तान साल समय साप हैं। विनोद क्यो नहीं। मतलब तू तेर आलीशान घर पर और हम इस फटीचर हॉस्टल म। दुबे चल छोड यार पर है तो ए हो करेज में न । मनू मेरा यह आखिरी सास है। दुवे हो भाई हम तो एक सास और बिताना है। मन तुम लोगों ने कभी मेरे मन का विचार रिया ? दुवे अरे पर इतने सालो के बाद आज ही या आया ये मन मनू बहुत सहा रे, बहुत सहा पर अब सहा नहीं जाता। विनोद मनू कल वह इटर माटम को हिरनो आँखा वाली दीपा दोनों क्या हुआ र ? क्या हुआ उस ? मन पाडे सर के साथ भाग गई विनोद उसमे कौनसी नई बात है ? मुझे तो दोनो पर पह- से हो शक था। दुबे लकिन तू क्यो शोक मना रहा है। वही तू तो नहीं मरत था उस पर? मनू मरता था ? अरे पिछले पांच साल से न जाने क्तिनी लड- विया पर मर चुका हूँ पर हमेशा-नो एण्ट्री। कभी रिर्स को बाला तक नहीं। क्यो, 34]

दोनो
क्या र क्यो।
मनू डेआरिंग ही नहीं हुई साली ।
विनाद फिर केवल मर-मर के क्यो मरना ' अब तू भी एक लड़की
पटाले बग।
दुबे क्मिी से नही जमता है ।
मनू ठीक है मुझसे नहीं जमता, पर कोई लडकी मुझे क्यो नहीं
पटा लेती हर बार लडके ही क्यो पटाये । अरे लडका
पटाके देखो तब मालूम पडेगा इन लडक्यिो को, यह
पटाना कितना भारी पडता है ।
विनोद (धीरे से) दुवे इण्टरेस्टिग सबजेक्ट ।
मनू मेरा भी एक सपना था। कॉलेज छूटते ही रोज शाम जूह
बीच पर किसी लड़की से मुलाकात करने का । और थो
मां को शर हो गया है" ऐसा हो रोजाना कहती है,
और मैं 'मिया बीबी राजी तो क्या करेगी मा पाजी'
यहता रह । फिर बाहो मे बाहें डालकर समुद्र की लहरो
के साथ तोगा की नजरो से बचकर अपने ही प्रेम मे मग्न
झूलत रहे । एक नारियल पानी खरीदने का, एक हो।
उमका पानी में पिऊ और मलाई वह खाये । और फिर
किनारे बैठकर, हवा को भी पता न चले ऐसी गोलमाल
बातें करने का। एक सुर गजरा खरीदने का, उसवे
बालो मे लगाने का सौभाग्य प्राप्त करने का।
दोनों फिर?
मनू फिर जेर मे पैसा हो तो ऑटोरिक्शा से उसे पर छोड़ने का
और खुद बेस्ट को बम से सौटन का। इतना सा छोटा
सरना है मेरा, पर यह भी पूरा नहीं होता? क्या पमी
.

है मुझमें । अब माना कि में अनिलकपूर या सजयदत्त नहीं पर साला ए के हगल भी तो नहीं । मनू • क्लास नहीं मिला पर एक्जाम तो हर सान पास करता हूँ, यह भी अच्छे नम्बरो से। विनोद प्यार मे सब अनोखा हाता है यार । क्या अनोखा ? यह दुबे समोसे खाता है तब भी नाक बहती रहती है। फिर भी सारा दिन लडकियो से घिग रहता है । और तू तू विनोद के बच्चे। विनोद हम तो रायटर ह यार । अपनी रायटिम पर सब फिदा है। लोग राइटर ? चार लान सही लिख के बता । अरे तुम भी लडकियो धुमाते हो तो मनू ने ही कौनसा पाप किया है ? अब वी कॉम की रह रोना वर्मा हर आठ दिन के बाद बायफ्रेंड बदलती है । साली यह भी एक दिन के लिये मेरे हिस्से मे नही आती, हमारी मिलिंग की वह रेखा इसी साल जस्ट एस एस सी पास हुई वह भी उस बुर के साथ घूमती है। यह साल बले बेचन वाले भइये भी औरतें पटाते है और मामात मनू एक्दम कोरा' ईश्वर यह क्या कोई याय है पटाऊगा बम साथ लिया। निणय कर लिया। दुवे अपने बालन की। मन् मिती तो ठीक नहीं तो टेलरिंग मलिज को भी चलेगी। लेकिन मैं मो भर सब रहेगा। सारी जालिम दुनिया के मामने उसके घों पर हाथ ग्यर पुगा । तुम को भी जलाऊंगा । एक तो साला मौरीपरके तिन ? भी हो, अब में लडकी दोनो 36]

4
करता हू इसीलिये सयको बलन होती है । अरे कॉलोनी
की तारियां भी मुझ नहीं देखती ? कुछ भी हो में लव
परूमा । लडकी पटाउँमा यस
दोनो (चिल्लासार) दाउरा दे ।
(मधकार )
(शिस्ट का स्टेडियम राग और मैच या वातावरण और
लोगो की भावने मन हेमा आग बैठे है। विनोद-दुरे कुछ
दूर पर सब मंच दख रहे हैं ।)
दुवे . येम, हो इज आउट ।
विनोद क्या कह रहा है।
दुवे: वह देख (उंगली दिखाता है, नीचे की ओर- एक बैंप पर
मन और हेमा मैठे है।)
विनोद क्या बात है ' मानना पडेगा यार, हेमा महाय को पटाना
इन नाट जोग कैसे पटी रे उसको २
मनू होने वाली घटना होकर ही रहती है हेमा । आखिर हम
भी किसी से कम नही, निश्चम रिया और हो गया ।
हेमा सहाय (तालियो की गडगडाहट) सुनील ने अपना खाता खोला।
मनू अरे मैं भी अपना खाता खोलता पर किसी ने मुझे इ ट्रो-
यूस ही नहीं दिया। तकदीर भी क्या चीज है आज
सुनील उधर है, और मैं इधर हूँ । सोचा भी नहीं था कि
एक दिन एसा आयेगा, देख, देख अभी भी साले की
पुरानी आदत नही गई, इसी शॉट पर वह हमेशा आउट
होता था।
हेमा सहाय
यानि

मनू अब यानि क्या ? जस्ट हम हॉफ्पैट पहनना सीप रह थे, उस वक्त सुनील और मैं गैलेरी में सेलत थे। मगर म्टैण्ड । हेमा सहाय सचमुच । हेमा सहाय मन् सचमुच क्या? सुनील हमेशा पहली बॉल का मेहमान, नवस होता था वचारा, बहुत बुरा लगता था मुझ फिर? मनू बुरा लगता था, दया आती थी और उस पुन खेलन श मौका देते थे। हेमा सहाय (आश्चय से देखते हुये) मन्नू, मेरा इण्ट्रा दे न सुनील से । मनू लेगिन फिर क्या रेमा सहाय पथरावर एमान बर म। मनू वैमा नही है दिन हेमा सहाप लेकिन वेविन कुछ नही, मेरी पहचान गुना 7 से बरातो पडेगी यह भी आज ये आज ही आज मैं बहुत खुश है। मन गुश हेमा सहाय हो । सुनौल को और मर मन की दोस्ती है इसलिये । मनू । दोस्ती तो थी। हेमा सहाय थी। मन होहमा यो। अव नही। यग? मन गया है। वह क्या है हेमा सुनीस + या प म जो परपोरम, यिा पान इनिया म सोटममा उम युर गुनाया ! तम गमयम है। तम समर माने गा भी नहीं रहता। अगर समन स गुगर भी याहो 38 ] रेमा साप गदन नीचे कर लेता है पर मेरी ओर आँख उठाकर देखता तक नही मुझे भी बुरा लग रहा है पर क्या करू होन वाली बात होकर रहती है। ओवर पिच बॉल है प्यारे, मण्ट फुट पर खेत मा सहाय मनू तुझे विधेट का पापी शान है। तू अपने कॉलेज की टीम स क्यो नही बेलता। मनू पालिटिक्स बहुत ही गदी गजनीति खेली जाती है । अब मही मायने में देखा जाय तो म मिटिलर आटर बैटसमैन, पर वह मुझ ओपनिंग में ही भेजकर बलि का बकरा बनाना चाहते है । आई हेट दिस पालिटिक्स, इससे तो अपना जिम खाना ही अच्छा है। हेमा महाय । ए मनू मैं आऊगी तेरा गेम देखने । क्व है मैच? मनू इस साल नो चाम । हम पहले ही राऊड मे हार गये। अपांत मैं खेला नही उस समय बीमार पर . रेमा सहाय स्याहमा था? . क हेमा सहाय तू बीमार पान मनू हा याद आया बेड पप हमापा । ऐमा सहाप वह क्या होता है? मंन बड पच नही मालुम, या पप नही माम, मुझगद मातम है ? यह विर श्केिट वालो को ही होता है। हेमा सहाय यौन सी बीमारी है यह ? मनू योमारी ? हो, हेमा और पपमा म तो पंड नही पहा सरत, मैप पेसा नहीं जा सस्ता । टेराफिक वालियों भी गरमाहट) 39.

हेमा सहाय
आज दिलीप बहुत अच्छा खेल रहा है।
मनू कौन ये दिलीप गावस्पर । इनफ्लुए स का घोडा ।
हेमा सहाय ऐसा मत बोल मन । उसी ने तो हमारे कालेज से
फाईनल जितायर दिया, दख देख पहली रणजी मच नम
खेल रहा है वह। अगले साल के टेस्ट मच के लिय तो
फ्विस (तालिया को गडगडाहट)
वॉव दिलीप की सेचुरी हो गई। म अभी आटोग्राफ
लेकर आती हू । (दौडकर विंग म चली जाती है)
[ अधवार । पुन होस्टल का सीन ]
मनू माटोग्राफ लेन गई और क्सि लेबर लौटी। वो भी पूरे
पब्लिम के सामने । मैं तो निम्मा की बोटल ही मारने
वाला था पर उसने हलमेट पहना था।
विनोद गुस्सा करके कुछ फायदा होगा क्या?
मनू अब गुस्सा भी नही करू तो क्या करू । जिदगी मे पहली
चार लडकी पटाई वो भी क्तिनी मेहनत करके ।
दुबे तेक्नि ८ टोडक्शन वराते ममय मैंन कहा था कि यह
त्रिवेट को बहुत दीवानी है।
मनू उमी दीवानेपा वा फायता लेकर झूठ बोलकर तो मैंने
उसे पटाया।
सुये माले हमने भी क्या तुझे मदद नहीं थी। पिछले दो महीने
से त्रिवेट की सभी किताबें लाकर दी।
विनोद युग स्टाल वाले को पैसे भी नहीं चुराय अब तक ।
मन पर बटुत भारी पड़ता है झूठ बोलते वक्त । अरे मरे बाप
न सभी यपट में यात्र स प्रिस्ट नहीं खेला और उसके
माय तार सक्स तापी यात सरनी पड़ती है।
40]

-
?
विनोद पर उसे घुमा तो रहा है न ?
दुबे पिछले दो महीनो से मजा कर रहा है।
मनू विन खाये पीये सात-सात घण्टे स्टेडियम में बैठने मे मजा
है । केले के छिलके, प्लेट-गिलास और फल के छिलके
पीठ पर झेलने मे मशा है ? क्यो ब दुब
विनोद फोरगेट ईट यार । अगर लडकी चाहिय तो बहुत कुछ
सहन करना पडता है।
मनू कर रहा हूँ यार सब सहन ही तो कर रहा है। पर
सहनशक्ति को भी कुछ लिमिट होती है । अब तुझे तो
यह नाटक के डायलॉग लगेगे । पर सच कहू मै उसे दिल
की गहराइयो से प्रेम करने लगा है।
दुवे जैसे शाहजहा ने ताजमहल से किया था।
मनू यह तुझे बताकर भी यकीन नहीं होगा विनोद जी।
विनोद यकीन हो गया मुपे । क्तिने साला के बाद भाज तूने
मुझ विनोद जो कहा है।
मनू तुम दोनो की क्सम, मां असम वह भी उतना ही मुझसे
प्रेम करती है रे ।
विनोद यकीन हो गया रे।
मनू लेकिन मेरा दिल जल रहा है।
दुबे एक अठनी दे।
मनू क्यो?
दुबे • फायरब्रिगेड वालो को फोन करके भाता है।
। मन मजाक मत करो यारो, जमाना बहा जालिम हो गया है।
विनोद अब रुकावट पाहे की है।
[41

अब मन क्या करू ? विकेट के अलावा दूसरी बात करने ही नहीं देतो । उसकी एव हो रट है तोप क्रिकट, शरीर किट, यहाँ तक की भगवान की पूजा वो भी विकेट । यिनोद दुवे गवत, दुबै,। मनू पता है जब उसने दिलीप गावस्कर वा किस लिया उस दिन तो साला मरा पयज ही उड गया था। दुवे यू आर लकी। मनू दुबे बेवकूफ तेरे प्रेम में कम से कम कोई बिलन तो है । सच कहा जाय ता यह तेरी टेस्ट की घडी है। मनू टेस्ट की घडी हो या रणजी हो, मैं आज सबकुछ कह बस । मैं उसे माफ-साफ कह दू गा कि मैं तुमसे विनोद जल्दीबाजी मत कर । बेकार म गडबड कर डालेगा। दुये देख यार हम तेरे साथ मदद परन को तयार हैं पर समय क्या विनोद दूग मानदे। . मनू नहीं यारो, नही-आज रिजल्ट लगार ही रहेगा। साला साच-सोचकर टीचर बनने का समय आ गया । पिछले आठ दिन से पाम पर नही गया, कॉलेज पो गुटली मारो, रातो को नीद नही सिफ रवट बदलता रहता है। इसलिये कल रात चाप ने मेरा विस्तर गैलरी में पैर दिया। इतना परेशान हो गया कि कल रात देसी पी, वो भी गवनमेण्ट की। इसलिये अब सोच लिया कि भाज पंसला होकर ही रहेगा । दूध का दूध, पानी मा पानी गों एक साथ बीयरपल अपना ख्याल रखना। 42 ] .

-
हेमा सहाय
मनू नथिंग इग दूध का दूध पानी या पानो ।
[अधकार] [भाग का दृश्य । हेमा चहल पदमी कर
रही है । शायद मन को प्रतीक्षा कर रही है। बच
पर बठती है । मनु का प्रवेश
हेमा सहाय अरे मन, श्या बात है ? लगता है रात भर सोय नही ।
आखें भी लाल भडक हैं।
मनू आज मुबह सुबह झगडा हा गया इसलिये ।
हेमा सहाय
झगडा क्सिके साथ?
मनू भईय के साथ, साला दूध मे पानी डालता है।
और यह क्या मनू । अब तक साटे पाच भी नही बजे,
हमेशा की तरह लट स्विंग होगा इसलिये में बखयर थी
ता आज पाच पच्चीस को आवर तून या पर दिया।
तुम्हारी स्पीड अय बढ़ने लगी है हाँ ?
मनू मेरी स्पीड जो थी वही है । तुम्हारी एच एम टी घडी
खराब है । पौन छ बजे है, सामने वालो घण्टा घरवाली
घडी मे देख लो।
हेमा सहाय
वह युनिवर्सिटी का है, उस पर मत जा
मनू नुछ भी मत बोल, इतना विशाल राजाबाई टावर उस पर
मैं कसे जाऊगा? बयार मे पैर फिसल गया तो
हेमा सहाय पहले ही ओवर म बॉलर का लथ मिली नही इसलिये
वटसमैन का क्से भी स्ट्रार नहीं मारन चाहिये। टेस्ट मच
पाच दिन का होता है । पर्शस से बेटिंग करनी चाहिय ।
मन् पर कभी कभी बरसात होती है न ।
हेमा सहाय तू कितना भी आउट ऑफ द ऑफ स्टप बोलेगा तो भी
मैं मेरी विवेट नही गिरन दूगी। तुम्हार हृदय के पिच
A3 ]

गी।
की तरह
पर मुझे स्कोर बनाना है । फिर यह मैच हा या ट्रेनिंग
मंच हो । मैं एक एण्ड पकड़कर रखू
मनू उस समय तक क्या मैं फिल्डिग करू 12th मन
7
हेमा सहाय नही रे मन जल्द हो तुझे प्रलोज इन का बुलावा आने
वाला है । मैंने अपने इंडो को सव बता दिया है। विश्वास
रस आने वाले वरसात से पहले शादी का शिडयूल घाँक
आऊट किया जायगा। हनीमून का दौरा जरूर होगा।
तू पैड पहनकर तैयार रहना ।
मनू पंड? सिफ पड ? है डालाऊज नही चाहिये । पर
बांधकर तैयार रहना बहती हो । अरे तुझ पति चाहिय
या नाइट याचमैन । शादी ब्याह मै सेहरा यांधा जाता है,
पैड नहीं । हो हो सकता है इगलड मे बांधा जाता होगा
उनका भरोसा नहीं है न कुछ भी करते हैं। पर राइट
राइट युमार राइट ।
गुम्मा मत पर मन मैंने जानबूझकर पाऊसर नहीं डाला।
योलन का रनअप गलत हो गया, पर फिसला और
बाऊस हुआ। तेरी बसम मन, इसरे बाद मेरी एक
भी डिलेवरी से तुझे तालीफ नहीं होगी और अगर हुई
भी तो पर रेस्ट गो।
मन हेमा में कुछ और कहने पापा हूँ। शांती से सुनोगी?
हेमा सहाप मममोटसमैन सपर से रता नहीं।
मंन गायर तुम्हें भन्दा म सगे।
रेमा सहाय । बया पर परता है। मगर पंदबंट पर माई बोकारो
हेमा सराय

सिक्स मार देना या फिर थोडा नीचे झुकवर छोड
देना।
?
मनू हमारी शादी हो क्या ऐसा नहीं लगता तुम्ह
मा सहाय ऐसी गुगली मत फैक मन । मेरे जीवन से इस तरह रन
आउट होगा तो मुझे स्टेण्ड कौन देगा। मुझे छाहर मत
जा । मैं पागल हो जाऊगी किसी भी समय किमी की
बॉल पर, किसी भी जगह मेरा क्प हो जायेगा । मैंने
माना कि मेरा जीवन, एक लिमिटेड ओवर मच है । परतु
सबके सब ओवस तुम अकेले को ही फकने पगें । मेडेन होगा
तो भी चलेगा। तू चाहे तो मुझ क्लीन बोल्ड कर,
मगर इस तरह इनजड मतकर।
मनू तो फिर जो मैं कहूगा आज सुनना ही होगा।
हमा सहाय तू केवल उगली ऊपर कर । मैं किसी भी प्रकार का विरोध
न करते हुये सीधे प्यार के पवेलियन में चली जाऊँगी।
मनू अपनी शादी के विषय मे तुम्हारे डैडी से मिलना
चाहता हूं।
माय है मनू मुझे मा य है । मेरे मायके के टॉस को
हारकर मैं ससुराल की फिलडिंग फ्रू गी। मेरे दिल के
स्टेडियम मे तेरे पूज्य आडियस होगे। तुम्हारे तनख्वाह की
स्टैस्टिक र गी । तुम्हारा हर इक्रोमेण्ट मेरो सेंच्युरी
होगी। तेरा बोनस मेरा पसनल रिकाड होगा, तेरा
प्रमोशन मेरा बल्ड रिकाड होगा । मेरा ससार यही मेरा
क्रिकेट होगा।
मनू देखो हेमा, नवम्बर में मुझे प्लाट का पजेशन मिल रहा
है, इसलिये दिसम्बर में शादी करेगें।
हमा सहाय
[ 45

हेमा सहाय हेमा सहाय क्या-क्यो और जब पहली ही इनिग म हमारा लडका हागा रियली। यू आर ग्रेट मनू, यू आर ग्रेट हनीमून को वहा जायेगें? मनू तुम जहाँ कहोगी वहां। दिल्लो जायेंगे, नये साल के शुरुआत से ही पहली जनवरी को ही निकल पगें। मनू पहली जनवरी ठीक है, पर दिल्ली ही क्यो? क्योकि क्याकि वहा जाने से वहां जाने से पाचवा क्रिकेट टेस्ट देखने को मिलेगा। कितना मजा आयेगा। मनू (गुस्से से) हा हा क्यो नही बहुत मजा आयेगा । और हम एक पार्टी भी करेंगे अपने हनीमून म चोपगेस्ट के लिये इमरान पान को बुलायेंगे बस । मनू मजार मत कर। हेमा सहाय हेमा सहाय हेमा सहाप तो उसका नाम रखेंग वट तुरत पोजोआन सेरे" इनिग लडकी नाम बाल दख मनू अब मजाक बद पर। मनु हेमा आज तक मैं सचमुन तुमस मजार परता रहा उसके लिये मैं माफी मांगता हूं। मुझे सचमुच रिकेट खेलना नही आता, सिप तुम्हारा प्यार पान लियं अन तर मैं तुमसे झूठ बोलता रहा हमा आज से प्रिोट पिन हमेशा के लिये बद। पिछन चार महीनो से तुम्हारे इस क्रिोट ने मेरा इतना गिर फिरा दिया है कि रास्ते में घनत ममय भी कट सेट पट, सट रता रहता है। भाजपन तो रात को ए सपना आता है fr में वान' स्टेडियम म भाम रहा। भोर ए माटा रादास बंट मार

हेमा सहाम
हेमा सहाय
मुझे मारने के लिये मेरे पीछे आ रहा है। मुझे मार रहा
है और में भी इस्ट स्टण्ड मे भी वेस्ट स्टण्ड में दौड़
रहा हूँ । इसलिये अब प्लीज नो मोर क्रिकेट । मुझे
समान की कोशिश करो हेमा । आफ्टर जाल एवरी थिंग
इज फेयर इन लव एण्ड वार ।
हेमा सहाय तू भी मुझे माफ कर मनू ।
मनु मतलब तुम्ह भी क्रिकेट अच्छा नहीं लगता
नही क्रिकेट मुझे अच्छा लगता है बहुत अच्छा लगता है ।
मनू फिर माफी विस लिये
अब तक तुम्हें अधेर मे रखा, तुम्हें फसाया, तुम्हारे साथ
प्रेम का नाटक किया इसलिये।
मनू (चिल्लार) व्हाट
हेमा सहाय येम मनू । मैंने तुमसे कभी प्यार नही दिया ? मेरा प्यार
है क्रिकेट पर। वह भी सुदर गेम खेलने वाले दिलीप
गावस्कर से । अब जिस तरह तुम मुझे पाने का उपाय कर
रहे थे उस तरह मैं दिलीप को पाने के सपने देख रही थी,
अत मे केवल तुम्हारे कारण ही मुये सफलता मिली।
मैंने तुम्ह अपना आधार बनाया। क्योकि दिलीप से से
बोलू गो इमकी रिहसल तुम्हारे साथ करती रही और मैं
सफल हो गई । अगले महीने ही हमारी ए गेजमेट हैं।
तुम आओगे तो दिलीप को अच्छा लगेगा । स कोच मत
करना क्योंकि मैंने तुम्हारे बार मे सब कुछ उसे बता
दिया है और उसने भी बहुत लाईटली लिया है । अजीब
बात तो यह है कि उसने भी हंसते-हंसते बोला-एवरी
?
47 ]

थिंग इज पेयर इन सब एड वार । ओ २ । बाय बाय
मनू।
[हेमा चली जाती है।
मनू स्वतन सेना की तरह] वैल इन 1980 व्हेन आई प्ला
अग स्ट पाकिस्तान । नो नो प्लीज । ओफ । हैल विद दीज
फोटोग्राफम । यौह श्योर बेबी ओ के । बल निकट
इन इण्डिया नाउ ए ज । (हसता है) बिहाइण्ड एवणे
सबसैमफुल मैन देयर इज ए वुमन । नही तो इतना अछा
गेम मे कभी नहीं खेल पाता। येस आई एम प्राउड आफ
हर । मरे यश मे उसका भी हाय है । अरे हेमा, देख तो
कौन आया है। यही वह विकेट का बा-शाह जावेद
मियादाद । आइये न सर, मैं अपने आपको बहुत खुशनसीव
मानता हूँ जो आप जैसा महान खिलाडी हमारे घर आया।
ओ हा क्या बात है कपिल, सनी, रिचम, बाथम,
जहीर, शास्त्री, मदीप वठो-बंठो यार और यह क्या तुम
बाहर खडे हो थामस । नसीब । नही दोस्त तुमसे मुझ
कोई दुश्मनी नही हैं । नमीब | इतना बुरा मत मान यार,
यस यस, हँसना, देख-देख हमा भी हस रही है । हमा
हेमा एक्सक्यूज मो । तुम सवको एक साथ देखकर शायद
घबरा गई है । अब आप ही देखिये न हमेशा टी वी और
अखबारो मे आने वाले लोग साक्षात हमारे घर में आ
गये। उसे अब भी यकीन नहीं हो रहा है । हेमा-हेमा-हेमा-
(चिल्ला र विर्ग की ओर भागता है)
विनोद दोस्तो, इस शाक के बाद मनू अपने आप को सभालन
सका, उसका पागलपन हेमा के नाम के साथ बढता ही
गया और एक दिन
४]
1

हेमा सहाय [सडक पर शोर, बस को रोक, भीडभाड] विनोद रास्ते पर दौडते समय बस के नीचे आ गया। सारा गेम खत्म । यदि हम लोगो ने उसे उपसाया न होता तो शायद य घटना न होती । इस सबके जिम्मेदार हमी लोग है । शायद आठ महीन हा गय इस घटना को दुबे [दूसरी ओर से हेमा और मनू का प्रवेश] मनू आठ केस ? सात हुय होगे। हेमा सहाय तुम पुरुषों को क्या मातृभ पडता है । आठ ही हुये हैं। मनू आठ । यानि हमारी शादी होकर छह महीने हो गये होगे क्योकि उसके पहले के दो महोन तो याद मत दिलाओ बात पुरानी विनोद दोस्तो कैसा लगा अब ये नाटक। चौका दिया न बाप सबको । आप लोगो को लग रहा होगा कि मैंने झूठ क्यो बोला । क्या करे साहब हटट्रोक करना था। नाटक में जीतन के लिये तो सेह मोड जरूरी था। अब हकीकत यह है कि नाटर वा मनू मेरे लखन का काल्पनिय मनू था । और यह एकदम हकीकत का मनू है । जीता जागता । एक कोरी सच्चाई मनू अबे विनोद वहा चता गया भाई। विनोद तो दोस्तो मरा हुआ मनू नाटक का था और यह हमारा असली मनू । वास्तविक जीवन का मनू । मनू इसमे कोई नई यात थोड ही है । कालेज के जमाने से ऐसा 'हो होता आ रहा है नाटक य लिखता है और ट्राफी मैं मारता हूँ। [ अन्धकार । पर्दा । समाप्त।] पता मारा, भारतीय स्टेट गैफ, नरीमन पाहट, बम्बई [49

"पॉईट ऑफ नो रिटर्न"
पर्दा अब तक बद है।
टेप रेकाडर पर अनाउसमेट शुरू होती है ।
चिनाय बॉलज प्रस्तुत-"पाइट ऑफ नो रिटन'
अग्रेजी लेखर-मररोनाल्ड वाटर
हि दी रूपांतरण-सगीर अहमद चौधरी
दिग्दशन परिकल्पना-लाड डोरोष दास्ती
सह निर्देशक-रामकृष्ण गाडगोल
प्रकाश परिकल्पना-मायक्ल प्रॉक्टर एवं इस्माईल पारकर
वैशभूपा-मानू अथैया
समीत-आमित देसाई
[पर्दा खुलने लगता है। अनाउसमेण्ट आगे चल रही
है । रगमच पर कोई नेपथ्य नहीं। मच पर प्रकाश
बहुत कम है। मच पर पीछे की ओर बारह कुसिया
हैं । कुछ क्षण बाद, एक आदमी जिसका नाम न
है, जैव से घिटठी निकालकर, हाय मे सेकर, मच
के मध्य भाग पर आकर खड़ा होता है।
टेप रकाडर पर भूमिया-कपिल मुखर्जी, रूपल मिश्रा, मिस
वदना पाटिस चिनॉय कॉलेज के माय इक्कीस कलाकार!
टेप बाद करो प्लीज प्लीज।
मूल मराठी रचनाकार "विजय मोडकर'
,
स
-

अ [चिट्ठो खोलता है। पता साफ करते हुरे विठो पढने का प्रश्न करता है। हम को मिझो तुतो हैं। शायर उसे भूलने का भर है। इसपिएम भूलने को तगारो मे मिटो खोतकर रखा है। नमवार दशको । अभी-अभी कुछ देर पहो जिस er का अनाउमभेष्ट हुआ है। यह नाटक रिसोराया हम पेश करने मे असमय है। यही कहने के लिये मैं यही आपके सामने आया था। [उसी समय रसको मे से एर आरमो जिसका नाम "म' है जोर से चिल्लाता है। रुरिये, एक मिनिट [स्टेज को ओर आने लगता है। "" गश होकर पसीना पोंछने लगता है, राज पुग पड़ने लगता है, तब तर "ब' मंच पर पहुँच पुगा है। मैं मरी भोर से और पिनाय की ओर से सभी दर्शको एक परीक्षकोमा, और इस प्रतियोगिता के सपासनों से सरोद सुम मांफी माग रहे हो? (चेहरे पर गमता साते हुये) मा गांगगी ही पड़ेगी उससे क्या होगा? मया होगा? सिफ माफी मांगने से ही छुटकारा नहीं मिल जाता मिस्टर । लपिन हमारी साइड गोनगी? यही कुछ कारणो वासी ? अ व अ अ व म य म व अ में? हाँ कारणों वाली ही। कठिन होगी पर सीट तो नहीं न ? नही सही पर आपसे मतलब, आप हैं कौन ? मैं, चिनॉय कॉलेज या एक शुभचिंतक । पिछले दस साल के इतिहास म चिनॉय कॉलेज मे ऐसी घटना कभी नहीं घटी। सच है। प्रतियोगिता के नियमानुसार एक बार खुला यह पा चालीस से पचास मिनट के बाद ही गिरता है । उस समय तक खुला हुआ यह पर्दा यानि चिनाय को सरेबाजार खुली हुई इज्जत और यह माद, जसे कब्रस्तान में फ्ला हुआ प्रकाश चिनॉय कॉलेज की वोति यो अधेरो मे फसाकर चालीस मिनट तक रखगा। चालीस मिनट ? मानता हूँ पर इसके अलावा अव कोई रास्ता भी तो नहीं। तुम सहन पर सकागे? नहीं कभी नहीं । मैं ऐसे ही घर चला जाऊगा। मतलब जा ही रहा है। (रास्ता रोककर) लगिन कुछ तो पता चले हो सकता है, मैं यहीं खडे खडे कोई रास्ता सुझा सदू । देखिय, इसान को इज्जत और सस्था को इज्जत दोनो अलग अलग बातें हैं। आपका कहना सही है और मैं समझ भी रहा हूँ। [थोडा विचार कर दशकों से] पल हमारे कॉलेज हॉल मे पाइट आफ नो रिटन को ग्राण्ड रिहसल थी। वहा रसद और निर्देशक की आपस अ म अ .

प 4 मे तू तू मैं मै हो गई। एकाकी के इटर प्रिटेशन पर वाद विवाद हो गया। खुद हो लेखक मन्चन, परमीशन कैसल करने के लिये अपना पन बायो- जको को दे दिया । अब ऐसी हालत मे तो आपकी तैयारी है। वही एकाको ? में? नही, कोई दूसरी, मजा जायेगा, जस्ट फॉर प्रोल । नही वावा । मैं कोई हमेशा नाटर मे काम करने वाला कलाकार नहीं है। हां कभी जरूरत पड गई तो (कलाई को घडी देखकर) केवल 35 मिनट का तो सवाल है। ब ब म नहीं, नही "मैं घर जल्दी लौटूगा महके आया हूँ। देखा जाये तो 35 मिनट आप और देर से जायेंगे पर सस्था के निये म • अरे, पर स्लिप्ट नहीं है, डायलाग नहीं है। भूमिका का पता ठिकाना नहीं है। स्क्रिप्ट इम्प्र वाइज करेंगे-डायलॉग सूझे वह-पर भूमिका जो हिस्से में आयेगी वह--मजा आयेगा। (नवस होकर) पर कैसे होगा? वह मुझ पर छोड दो (घही देखकर) अभी 33 मिनिट का समय है हमारे पास । (अपनी धही देखते हुये) नही । 37 मिनट है । नहीं यार नहीं। टू बी एक्जेक्ट (घडी देखता है) 321 मिनट है. (पुन घडी देखर) नहीं, नही मेरी घडी के अनुसार 37 मिनट तो हैं ही। अ [53 म हमने ऐमा लिया तो? म कैसा? अ -- व ब अ य इससे अच्छा हम एक दूसरे की पही बदल लें। मगर उससे क्या पक पडेगा? मतलब मैं वहूगा 37 मिनट, तुम बहोगे 324 मिनट । हटो यार यह बेवकूफी होगी। झाट क्यों ? हम द ही स पूरत है। (विंग मे खद प्रतियोगिता के आयोजन से) क्यो भाई कितन हुये ? (अ दर मे) इकत्तीम] लो-भब और सुनो। पर उनकी घडी कैसे ठीक होगी ? हो या ना हो, उसी को अब सही मानकर हम चनना होगा । क्याकि उ ही की घडो के अनुसार पालीस मिनट य बाद ही यह पर्दा गिरेगा । चलो शुरू करें ? अरे पर मुझसे नहीं होगा ? डाट वरी मै जो हूँ तुम्हारे साथ। [ इतन में अ' जेब से रूमात निकालता है, पसीना साफ करता है ] ठीक है ? (चुटको वजार) भाबुलात आ बु लाल और याद नहीं आ रहा है ? (बटार आवार मे) आयुनाल (सही है। इसी तरह वायुलाल' अ ब घ . 7 अ या की? अ टापूलाल 54 ] राईट | शिवजी ? (गणित का उत्तर मिलने वाला आन-द) कोतवाल ब मुर्गी ? (अब एक सय पक्डकर) भण्डा। अ या मैं! ब मुर्गी के अण्डे बावन ? उस परवठा कौन? तू जो वठने वाला निकलेगा वह रावण । (हंसता है) [दानो हंसना शुरू करत है [ब कुसिया लगाता है उतरे जरिये भा रनाता है नपथ्य लगात समय नीचे लिखी पक्तियां भी पोलता जा रहा है। भआपने मुझे पहचाना? अ नहीं भाई तुमने अपना नाम यहां बताया ? मैंने पूछा भी था । अर, पर यह क्या कर रहे हो ? बहुत जल्द पहचान जाओगे - जो कर रहा हूँ वह-और मुझे भो-तुम पहचानने की कोशिश करो। दिमाग पर जरा जोर दो। (याद करते हुए) अं, याद ही आता (घडी देखबर) अब 26 मिनट ही रह गये है। वह भी कम पडेमें एर-एक महानी से पर्दा उम्ने के लिये ऐसा ही लग रहा है। (बुआ तैयार करता है। झुक-शव उसको सलाम करें, सब सुबह शाम या मेला है, व अ य म य [55 अ व शाम सवेरे जाकर झके, उसया नाम पहला है। (जल्दी से) कुआ। दौडते रहता है पर घोडा नही आगे का मत बता गाडी जिस पर चलती है राईट ? एक्दम राईट । चल आगे बता? म वह-रास्ता व अ कौन सा ? ब शहर से दूर मस्ती में चूर अ ब सुबह सुबह लाली, सारे दिन हरियाली, (आन द से) गांव 5:। [दोनो हंसना शुरू करते हैं। दोनो को अवस्था अब आठ-आठ साल के बच्चे जैसी हो जाती है । गले मे तती लटका कर स्क्स जा रह है] (बच्चे की तरह) अब हम सल के मित्र तुम्हें कहानी का पता चले इसलिये पहरे मैं तुम्हारी भूमिका करू मा, बाद मे तुम्हें अपनी भूमिका स्वय करना। ममझे? ऐमा मत बोल । समझे एसा बोल, ओह नाईस समझे ऐ। रघुआ क । (कधा पकाकर खींचता है) अपनी स्लेट मुझे दे । लेक्नि मैरी स्लेट पर तो पाठ लिखा है। इमोलिये दे। उस पर तेरा नाम थोडे ही लिखा है। नाम वहां लियन यो कहते हैं मास्टर ? म ध अ 56 ] ब अ ख म अ वरवास मत कर दे दे तेरी स्लेट और अब मुझे? यह ले मेरी स्लेट। (स्लेट उल्टी सीधी घुमाकर) लेक्नि तेरी स्लेट पर तो कुछ भी नहीं है । मुझे मास्टर मारेगे तो? अगर नही देगा तो मैं मारू गा बोल देता है हो । दे दे यहा न। [उससे स्लट खीचने लगता है। 'अ न देने का प्रयत्न करता है, लक्नि ' उससे खीच लेता है।) हूँ। चल जा अब । तू जा, में इस पर अभ्यास पूरा करता है, फिर आऊंगा। नही तो मास्टर हाथ पर छड़ी लगायेगा । तू जा चल तू भी चल, उठ देख नहीं तो ऐ मनू जब मास्टरजी तुझे मारेगें तो कितना मजा आयेगा, तुझे अभ्यास करके भी सजा और मुझे न करके मजा। नाम बताया तो याद रखना । (बाल पकडकर) चल उठ बे । [उसे उठाता है और साथ लेकर चलने लगता है। अब कितने मिनट रह गये हैं ? पांच-या ज्यादातर ६स । क्यो? सिंफ इतना ही (घडी देखर) भव तक तो (बडो की तरह) स्कूल चलने के लिये कह रहा हूँ (बच्चो की तरह) मास्टर की मार से बचना चाहता है क्यो। हमारा मजा किरविरा करना चाहता है क्या घ अ । अचल लेकिन मेरी स्लेट खाली है मनू । [ 57 अ च म मुदौको स्लेट भी भरती है क्या ? चल- (पाश्व मे स्मूत के घण्टे की आवाज ।] ब। अब अपनी अपनी भूमिका करेंगे। चर अब विसो शहर वा सोन लगायें। कुआ तोड़ने जाता है) (उस राककर) नहीं, इस गाव को नहीं छोड सक्ते इतने म हो क्या समझ होगे लोग? गाव ने और एक दो सान बरत हैं। पर मुझसे नही होगा? होगा । तूने किया भी है हर बार । इतने ही सीन से तेरा करेक्ट रायजेशन पूरा नहीं होगा । तून तो न जाने कितने बार मेरे साथ छल-कपट किया है। अपने स्वार्थों को पूरा करने के लिये तून मेरा (हसकर) ठीक कह रहे हो, इतने ही रोल से परपेक्शन नही मिलेगा। (याद करत हुये) हमने अगर राधा का सीन किया हो? (सहमर अचानक) राधा ? बोन राधा? मैं पिसी राधा वाधा को नहीं जानता। राधा के सीन के बिना, इस कहानी को रफ्तार नही मिलेगा और मुझे, तुम्हे उसके बिना उत्साह भी नहीं अ य अ आयगा। म लेरिन कोन राधा ? कैसी राधा ? [पुन तुरन्त बचपन का दृश्य शुरू होता है। प 58 ] भ ! रघू हा मैं अब रघू, मेरी निश्चित भूमिका मिल गई तू मनू राईट यु आर राईट । ए मनू । रधू, राधा के सामन उँची आवाज म मत बोल, बोल स अ व म ? क्यो ? यह राधा तेरी फोन नगती है रे ? उस दिन जब मास्टर ने तुझे छडी मारी तो यह तेरे हायो को सहला रही थी। ए राधा यह क्या तेरा पति बनने वाला है ? ए साती शर्मा गई, देख शर्मा गई। ए राधा बोल देता हूँ तू मरी ही औरत बनेगी वही होने पर। ऐ धू, कह देता हू राधा के बार मे कुछ भी उल्टा सीधा बोला तो देख लेना हा । उसकी और मेरी जमती है। ये है की नही राधा । ऐ तू ही बता न साला कडवूराम, तू होशियार होगा पर उल्लू तो दिखता है। राधा तेरे साथ जचेगी क्या ए राधा तू चिदा मत हा। (ताली बजाकर) अच्छा हुआ अच्छा हुआ, तुझ उत्तर मिल गया, तुझ उत्तर मिल गया। रुक साले रुक, तेरी खबर लेता हू झव, नीच झुर अब तेरी बारी है ऐ राधा अब तू जा ऐ राधा हिलना मत-हो एसे-नही तो मारू गा याद रख। है) ऐ राधा आंख वाद लेन ऐतू आख मत र द करना अब देखना से लड़की की तरह रोयेगा। ठीक है मैं खुद ही अपनी भाष बद कर लेता हूँ । य अ अ अ म [59 ['अ' वा हुआ है । 'अ' पीछे से दौडकर आता है। उसको पीठ पर पूदकर बह जाता है। ताह ताह ताही लाल घोडा माडी, जामुन के पड पे, क्तिने अण्डे हैं। (उगली दिखाकर) एक फिर से (भागकर जाता है पुन वृदकर बह जाता है) नाह-ताह ताडी लान घोडा माडी, जामुन के पड पे क्तिन अण्डे हैं।' । अ गलत अ ब पाच. अ गलत ब फिर से (राधा चली जाती है) ऐ राधा कहाँ भागती है, हक साली रुष भाग गई ऐ रघू, तू मुझ से कितना भी छल-कपट कर ले, पर राधा के विषय मे मुझसे सहन नहीं होता। एसे रोन से राधा जसो पत्नी चोड मिलेगी। तू देखता रहे । बहा होने पर राधा को अपनी पत्नी कैसे बनाता लेक्नि राधा तुझसे शादी नहीं करेगी, यह तो मुस करेगी शादी। राधा क्या राया का बाप भी करेगा शादी। अ बयों पयों ? 60 ] अ व लेकिन वाप कैसे शादी करेगा। ब (कोने मे बैठा है) (अ आता है) तू मुझसे कुछ कहने आया है मनू ? हा, मतलब अब फेवल 17 मिनट रह गये हैं । अब क्या करेगे। लोग गाव मे उलटी-सीधी बातें कर रहे है । कौन है वह कमीना आदमी । राधा ने कुए मे वूदने की कोशिश की। छोटी सी उम्र मे उसे बहुत बडा सदमा पहुंचा है । वह खाती नहीं, कुछ बोलत' नहीं । मुझे लग रहा है, कहानी बहुत काम्पलीकेटेड होती जा रही है। (जार से) जव तक इस कहानी का अ त नहीं हो जाता। हम दोनो यही रुकेगे। अभी 15 मिनट है बाकी । (घडी देखकर) ठीक है। [दृश्य बदलता है। 'अ' रघू बनकर आता है । मनू एक कुर्सी पर बठा है। मनू ओ मनू कौन है? मैं रघू । अरे ऐसे अवेरे मे क्यों बैठा है । मैं तुझे मुबारक- वाद देने माया हू । भई त्ने तो कमाल ही कर दिया। ब, क्या कह रहा है, कैसी मुबारक्वाद रघू । मुबारक हो, अगले महीने ही तेरी राधा के साथ शादी होने वाली है। मेरी शादी राधा से रघू यह क्या कह रहा है ? [ 61 अ अ च अ - व इतना बड़ा काम कर डाला है। तूने । राधा को गाव के जगल म (आश्चय से) मैं ' कौन कहता है ऐसा । किसन उहाइ यह अफवाह ? मेरा नाम लगा रह हैं सब ? अव मारा गाव ले रहा है तेरा नाम । ममया यह तेरा काम होगा, तूने ही उडाई होगी मयाह । तरी बचपन से आदत है यह तू मुझे हमशा फसाता मा अ अ ब अ हो- समझ ने मैने हो उहाई है अफवाह, पर गाव वालो नै कस सच मान लिया। तग गाव गया भाड म, राधा जो कहगी वह सच होगा वही सही आदमी का नाम बतायेगी। आज नहीं तो क्ल, पल नही तो परसा नही मनू नही कल दोपहर को ही उसने नाम बताया विसका किसका नाम बताया उसने । तेरा। गलत है यह । तू झठ बर रहा है। इस बार में झूठ नहीं कह रहा हूँ। राधा का बाप आया या मेरे पास मेरा मतलब ऐसे प्रसग के समय उसे भरे पाम आना ही था क्यो? किमलिये ? बही तुझ पर शका होगी। लग्नि मैंने उसको शया दूर कर दी। अ व अ ब स देसी पहले बताया न, एक भी शब्द मूठ नहीं कहा मैंने । मने पहा, मैन ही राधा रे साय मुह काला किया है ।

ब अ व ? राधा ने अ रघू कमीने, कुत्ते नीच, मुन पहले अब तू कुछ भी कर ल बच नहीं सकता। क्योकि राधा ने खुद ही तरा नाम बताया है । में मेरा नाम यह कैसे हो सकता है। हो नही सकता पर अब हो गया है । मैंने खुद राधा के बाप को समझा कर कहा, मैं यह शादी नही करू गा, यह पत्थर पर खीची लकीर समझो । मै खले बाजार में ना कहगा और कुछ ज्यादा हुआ तो बम्बई भाग जाऊ गा पर गाती नहीं करू गा । आप राधा को समझा दीजिये । वैस की राधा मनू से प्यार करती है और मनू भी उसे जो जान से चाहता है। इसलिये बेहतर यही होगा वह खुद ही उसी का नाम ले । (हसकर) और अत्र लगता है, राधा भी राजी हो गई है। पर राधा ने गलत किया। सबट खडा कर दिया है। और तू सही सलामत बच रहा है बिल्कुल शरीफो की तरह। यह तो अपना बचपन से ही चलता आ रहा है, लफडे करू में और फसे तू । ('ब' जान लगता है) कहा जा रहा है ? राधा के घर । वह तेरा नाम बतायेगी । तू इस तरह अबके नही बच सकता। मूख है तू । हर रोज अगर एसे ही किसी न किसी का नाम लगी तो वैश्या और उसमे पर क्या रहेगा। लेकिन असलियत बाहर भानी चाहिये । वह तो सात महीने के वाद माने ही वाली है। नीच कमीन चडाल तेरे मुह मे कोडे पडे। मैं शादी से इकार कर दूगा। म अ । ब अ य ब [ 63 अ ना व ब अ तू इकार नही कर सकता । और तुझ यह करना भी नहीं आयेगा। क्यो? मैं चिल्ला चिल्लाकर बहूगा ऊ हाँ तू चूप रहगा । उसी के साथ शादी करेगा नहीं तो गाव वालो के हाथो मारा जायेगा। मुझे उसकी परवाह नहीं है । लक्नि तू ऐसे नही बच सरता। मैंतरा पर्दाफाश करूगा। त ऐसा नहीं कर सकता। क्योकि राधा की इज्जत । दिदोरा पूरे गाव मै पिट जायेगा। वैसे भी तू रिलोजान से चाहता है उसे यह से भूल सकता है । जा रहा हूँ। वैसे शादी तक तो मेरा तोहफा मिल ही जायेगा और हा-मैं आज ही रात को बम्बई जा रहा है। [पाश्व मे रेलगाडी की आवाज । उही कुसियों के जरिये दीवानखाने का दृश्य लगाया जा रहा है । मे लगा? सुपब एक्सोलेण्ट फण्टास्टिक विजुल ए मजे हुये एलाकार भी तरह। [' भी दीवान पाने को पूरा करने मे मदर कर अ घ घ से भी मैंने तो ज्यादा नाटक में शाम नहीं किया है अब तुमने माप लिया इसलिये इतना समय बीत गया । विस्युत बचपन से ऐर क्यों? चलो चिनाय को अथ गई, तुम तो गल हो परन जा रहे थे। येश (गा से पत्र पुन निशालार) अनाउममष्ट गिर माया था, बालते समप गया, पूल गया तो 1 [हसकर घडी पी मोर देखता है] अव कवल 12 मिनट बाकी हैं अब इसकी क्या जरूरत है। (पुन चिटठी पर नजर घुमता है| नमस्कार दोस्तो । आज जो एकाकी अनाउस २ रुकिये २ (ब' को आश्चय से देखता है चिट्टो फाडने लगता है) आपने मुझे पहचाना (नाटकीयता से) नही। ब . सइट मरे चेहर पर अब काफी फक पड़ गया है, पिछले तीस साल से मैं भोपाल में था। पन्द्रस-बीस दिन हुए मैं यहा पर आया है। कमाल है आपने मुझे नहीं पहचाना फिर भी इतने सालो के बाद मैंने आपको बराबर पहचान लिया है, मिस्टर। यकीन मानिये, मैं सच कह रहा है। मैंने आपको पहचाना नही. आप रघुनाथ श्रीवास्तव है, न, 1 अ लो प्लीज मोट यु । और आप मेरा नाम जानकर शायद आपको खुशी नही होगी मि श्रीवास्तव 1 पहेलिया मत बुयाओ नाम बताआ? मैं में मनोहर महाजन । (सहमकर) ओह मन कैसे हो? आपको बददुआ से तो ठीक है। वसे तरा से चल 7 च 1 च 1 T बस ठीक । राधा कैसी है ? राधा मजे में, एकदम मजे में है। उसकी तपियन के बारे में अब चिंता करने की कोई जरूरत नहीं। 165 ? (डरते हुये) और मुना अरे यार, तेरा हो तो बटा है, फिर उसके बारे मे पूध्ने के लिये इतना हिचविचाने की क्या जरूरत है । एम ए कर रहा है, वहुत होनहार और होशियार लड़का है। मा के अत्याचार के बावजूद इस मुकाम तक पहुंचा है वह । राधा अत्याचार करती थी। पुगनी या. आखो के सामने आत ही । पर हमारे लाउ प्यार के आग किमी का कुछ नहीं चल पाता था । सुर मा बनकर मैने उसकी परवरिश की, बड़ा किया। उसस मुझे बहुत सी उम्मीदें हैं। तेरे और भी दो बेट है न ? हा कालेज कर रहे हैं, पर दोनो एक दम निकम्मे ! केवल मुगा सीधा-साधा है। दुनियादारी से दूर बहुत दूर जामुन के पेड पर कितने अण्ट है वह भी ठीक स गिन नही पाता बेचारा। बाय दा तुम्हारे कितने बच्चे है ? एम भी नहीं इसलिय तो वह पत? हा वह सत मु मिला। फिर दोनो ने क्या सोचा? मतलब राधा का क्या जवाब है। कानूनी भाषा जो तूने खत म तिखी है, वह वमतलब है, ऐसा तुम्ह नही लगता? हां मही बात तो यह है कि हमे आपस मे ही समझ लेना चाहिये । मतलब तुम्हारे तो दो बटे हैं और मुना मेरा बंटा है यह गाषित करना तो इतनी दूर अ अ H अ 4' (चिढवर) तेरा स्वाभाव बदल नही सक्ता रघु, खुद को वगुनाह साबिन बग्ना और हो । जिटगो म भी हार नही मानो। न ही कभी फसा हैं। दूसरो को फसाकर गुद को बेगुनाह साबित करना बहुत बडे थोम का काम है। य। रघु याद है ? मेरी बचपन से स्वाहिश पी, कि एक बार, एक बार लफ्डा मैं कर और उसमे पसू तू । पर इच्छा पूरी हो इतना मूख त कभी नहीं बन सका। आयोडायार लेकिन स्वाहिश मरती नहीं । खैर तो मैं क्या कह रहा था, हा, मुना राघा वा पसला सुनना है तुझे क्या पहा राधा ने? तरी बचैनी को थाहा और बड़ा दू, तो शायद तुझे बुरा नही लगगा? लकिा क्यो? क्योकि वह आज नही है इसलिय कल शाम को 6 बजे आस, सी रॉक होटल, कमरा न 147 इतजार अ ब अ य ar य ब व अ व अफ्कोस, राइट आन टाइम मैं दरवाजा खुला रखूगा (जाने लगता है) आ के (चिल्लाकर) कम्पलीट ब्लैक आउट--प्लीज कपिल साहब कुछ जोरदार संगीत बजाओ, क्लाइमैक्स सीन है, ऐ यू वह लाइट निकाल दो, वह भी आई वाट कम्पलीट- कम्पलीट लंके आउट। [ 61 अ ब [रगमच पर पूर्ण अधकार होता है । एक जोरदार सगीत बज रहा है। पुन प्रकाश आता है । "#" का प्रवेश होता है । मन्, मैं रघु अब केवल नौ मिनट बाकी हैं फिर तो इस झझट से छुटकारा मिल जायेगा। आ जाओ दरवाजा खुला है। (रघु पास आता है) इस बार तुम्हारा आसानी से बच निकलना मुश्विास है मि रघुनाथ थीवास्तव। [ब' का चेहरा दशक की ओर है, वह कुर्सी पर वठा है। बीच बीच में बोलते समय राह उठता है । क्यो? क्या मुश्किल है ? तेरा आसानी से वचकर निकलना ब अ व (चेहरा बिगडा हुआ है) . अ ब आजकल राधा क्या कर रही है ? वह मन कैसे पता चलेगा? क्यो ? नहीं तो क्या मुखे पता चलगा? वह मर गई। (चौक्कर) मर गई? कसे ? पब? चार साल हो गय। ओह नो पिर वह मेरा खत । मुझे दे गई। फिर क्या मोना तुमने? मुद्रा के बारे में? ब अ य ब अ व व 7 व अ हो मुधा के हो। सोचना क्या है, फैसला तो उसी समय हो गया। मतलब में मुन्ना को ले जा सकता है। सवाल ही नही पदा हाता । क्यो ? वह मेरा लडका है । (जोर से हसता है) जिंदगी में पहली बार पक्मा खा गये श्रीवास्तव। इम्पासिबल, केवल छह मिनट रह गये हैं, फिर सारी कहानी पर अपने आप ही पर्दा गिर जायेगा । (विराम) बोल किसका लहवा है वह वह तेरा नही है। फिर किसका है? तेरा? वह मेरा भी नहीं हैं सुन कान खोलकर सुन राधा का वाप और मुना का बाप एक ही है। (चिल्लाकर) नही, तेरा दिधारा पराब हो गया है। पागल हो गया है तू। राधा के सदूक से खत और फोटो मिले । अब विश्वास नहीं हो रहा है तो जाने दे, पर तू चकमा खा गया यह तुझे मानना ही पडेगा। पर तेरी तरह फंसा नहीं। मानता हूँ लेकिन आज तू बच नहीं सकता। अब केवल पाच मिनट ही बाकी है। (उठने का प्रयरन करता है ।) रघु रघु मुझे मुबारक- बाद दे। P ब अ ब म ब [१ पार मिनट रह गये है। एक्सीलष्ट परफारमेम- दे ['अ'हाय मागे करता है, ''के पर होने के कारण 'अ' के शरीर पर गिर परमा। 'अ' उसे नेकर घूमता है दशक की ता18 समय दशयों को 'ब' के पोठ मे राति है। 'अ' सरपका जाता है। नाचे नि है। 'अ'को ध्यान आता है कि वह शायदाग 'अ'के ध्यान में सबकुष अब तक आता." एक मिनट इधर ध्यान दीजिये । (दशरोसे) परदार ! बोई हिला तो (घडीदवार मे अभी तीन मिनट बारी हैं। और Fruirl शिग बात ये निय? व थाज गयटी में पी और पनेगा तू । य हापलेम । पम से महाथ तो मिना। अ क्यों? इस परफारमस मे लिये घयवाद थ ओह । थ ययाद । कर रहा है] or • गुपय गारयेसग एविंटग चला निकालो अब । उठो " गिर ! पुन ['ब' उठने की कोशिश मे m वा , पून हो गया है। मैंने नहीं किया यह छन। हर यहाँ मर गया है । यहाँ खून हो गया है। [पुष कसाकर मआयोजक बनकर मत से प्रवेश करते हैं शायदा 701

नियमानुसार यह पर्दा तीन मिनट तक खुला रहेगा । कोई
जगह से न हिलें । किसी ने जस चालाकी करन की
कोशिश की तो यह छुरा भोक दूगा मै अव पर्दा गिरने
में दो मिनट है । काई मेरा पीछा नहीं करेगा पर्दा नियमा-
नुसार दा मिनट तक खुला ही रहेगा । मुझे यहा से भागना
है । मन पसा हूँ और न फसू गा हट जाओ
['अ',मच से पूदकर हाय मे छुरा लेकर, घशको के
चौच से होता हुआ भाग जाता है। पाश्व मे ककरा
सगीत । 'व' मच के मध्य मे मरा पडा है।]
-
।
पता
F/14, पालम अपरेस हाँसग सोसायटी,
महात्मा फुले रोड,
मुलु ड (पूर्व)
बम्बई-400081
[H

व किस बात ये निय? आज गडबडी मैंन पी और पनेगा तू । होपलेम । कम से कम हाय तो मिना। व अ क्यों? . घ अ इस परफोरमस ने लिये घयवाद दे मुझे धयवाद' ओह । धन्यवाद । ['अ' हाय मागे करता है, 'म' के पास शक्ति न होने के कारण 'अ' के शरीर पर गिर पड़ता है। 'अ' उसे लेकर घूमता है दशक की तरफ । उस समय दशकों को 'ब' के पोठ मे छुरा दिखाई देता है। 'अ' सकपका जाता ।ब' नीचे गिर पड़ता है । 'अ' को ध्यान आता है कि वह शायद अभिनय कर रहा है] मुपब मारवेलस एविटग चला निवानो अव । उठो केवल चार मिनट रह गये है। एक्सीलण्ट परफोरमस ['ब' उठने की कोशिश मे पुन गिर जाता है । 'अ' के ध्यान में सबकुछ अब तक आ जाता है । एक मिनट इधर ध्यान दीजिये । (दशको से) यही सचमुच खून हो गया है। मैंने नही दिया यह खन। यह आदमी यहाँ मर गया है । यहां खून हो गया है। [कुछ कसाकर मआयोजक बनकर अलग अलग विंग से करते हैं शायद अ' को पकडना चाहते हैं।) खबरदार ! कोई हिला तो (घडी दखबर) पर्दा गिरने मे अभी तीन मिनट बायो है। और प्रतियोगिता में 70]

--
१
नियमानुसार यह पर्दा तीन मिनट तक खुला रहेगा । कोई
जगह से न हिलें । विसी न जरा चालाकी करने की
कोशिश की तो यह छुरा भौर दू गा में अब पर्दा गिरने
मे दो मिनट है । काई मेरा पीछा नहीं करेगा पर्दा नियमा-
नुसार दो मिनट तक खुला ही रहेगा । मुझे यहा से भागना
है । म न पसा हूं और न फसू गा हट जाओ
['अ' मच से पूदकर हाय मे छुरा लेकर, दशको के
बीच से होता हुमा भाग जाता है। पाश्व मे ककरा
सगीत । 'व' मच के मध्य मे मरा पडा है।]
पता
F/14, पालम अरेस हॉसिग सोसायटी,
महात्मा फूले रोड,
मुनु ड (पूर्व)
बम्बई-400081
1

आज का
"फॉर्मुला 19.....
[मय के एक कोने में, एक टेवुस, कुछ कृसियां, फोन
इत्यादि पड़ा है। किसी फिल्म का आफिस सग
रहा है । एए प्रोग्यूसर गैठा है।]
प्रोडूसर (फोन की घाटी) हैलो जी हाँ में बोल रहा हूँ। (साहब
एक काम था) बोलो भईया, [पोडा सा वक्त है आपके
पास] क्यो विसलिए भईया, म एक फिल्म की कहानी
सुनाना चाहता हूँ] सौरी भईया, टाईम नहीं है।
दूसरा पोन बजता है । क्या है भईया ?
अपाईण्टमेण्ट कसिल हो गया है । ओ के ओ के
कोई बात नही । हैला अभी अभी मेरी एक अपाइण्टमण्ट
बैंसल हुई है । आप चाह तो अभी इसी वक्त आफ्सि म
क्या आ रहे है ? ठीक है मैं इतजार पर
रहा है।
[पाश्व मे पश्चिमी सगीत एव आमउसमेट आरम्भ
होता है।
लेखक (प्रवेश करता है) नमस्कार, मन जी,
प्रोडूसर नमस्कार।
सेखक मैने अभी कुछ देर पहले पब्लिक टेलीफोन से, फोन
आ जाय
किया था।
मूल मराठी रचनाकार "सुधीर कवडी"

1 - प्रोडूसर हां, हाँ, याद आ गया, कोई कहानी को लेकर, ओह ! येस लेखक मेरे पास बहुत सी कहानियां है सर कौन सी चलेगी प्रोडूसर भईया एकदम फेश स्टारी चाहिये विल्कुल ताजा मसाला लेखक तो सुनिये एक गरीव नव जवान है प्रोडूसर एक मिनट एक मिनट कहा बम्बई मे या गाव मे लेखक सर गाव की एक मरघट कुटिया मे प्रोडूसर गाव सबजेक्ट तो बढिया है नेशनल अवाड तो मिल ही गया समझा भईया। लेखक जनाब हमारा नवजवान पढा तिखा है, पर निकम्मा है, एक नम्बर का गुडा है देखा सर, इम देश की कितनी बड़ी समस्या को मने उठाया है, प्रोडूसर हो भाई हमार देश मे केवल तीन ही तो समस्या है, एक डाकू समस्या एक स्मगलिंग ममस्या और तीसरी गुडो की समस्या। लेखक अब गरीबी मपंदा हाने की वजह सीधे बम्बई आने के लिय आकुल दरवाजे पर अपना बोरिया बिस्तर बाधकर पड़ा है। [मच के दूसरे होने मे मा बाप दरवाजे पर सी आफ परने के लिये पडे हैं । लडके के हाथ मे शानदार सूटकेस है । लडका मा बाप के पैर छू रहा है।] सभलकर जाना बेटा माई बम्बई के बारे से बहुत कुछ उल्टा-सीधा सुख रखा है, वेटा विजय आप फिकर ना करे डह, में सभाल ल गा वम्बई को, सिफ आपका आर्शीवाद चाहिये वस दोनो जामा बेटे और सफल हावर लोटना याप 173 विजय तू प्रोडूसर ता वह बम्बई पहुँचता है और वहां उसका बचपन का सापी मिल जाता है। लेखक सो। यहाँ वह एक दूमर को देखत हैं प्रोडूसर और पलेश बैंक उनके बचपन का गीत शुरू होता है [पाव मे गीत चल रहा है, यह दोस्ती हम नहीं तोडेगे बच्चो वाली सायक्लि पर दोनों बठे हैं।] रवि विजय रवि तू [स्लो मोशन में दोनो मिलते हैं, पुन गाना गाते हैं एक्जिट] प्रोडूसर अब आगे बोलो भईया लेखक नही मर वैसे मैं कुछ अलग ही लिखने याला था। प्रोडूसर अजो अब आपको कौन पूछता है । जोडतोड तो हम खुद ही कर लत हैं। लेखक फिर भा एक प्राब्लम है । प्रोडूसर कैसी प्राब्लम ? लेखक सर, क्या है कि विजय का दोस्त रवि भी अनएम्पलायह है और गलत रास्तो पर जा रहा है प्रोडूसर यह तो और अच्छा है । वरी गुड सिचुएशन, यही पर एक मुजरा डालेगें। लेखक प्रोडूसर भईया सीधी बात है गलत रास्ते पर जायेगा तो कोठे पर तो जायगा हो और वह एक बडा दलाल बन गया । लेखक नही रवि दलाल नहीं हो सकता। प्रोडूसर तुम उसको यनाओ यार दलाल! लिपी लियो - मुजरा? 76 [लेखक लिखने की माईमिंग करता है। मच पर दूसरी ओर सीन चल रहा है। रवि यह मेरी खोली है बैठना। [पाश्व मे तबले और पेटी की आवाज] विजय लेकिन यहाँ ये गाना बजा रवि यार यही तो अपना धधा है। विजय मतलब तू? रचि हाँ, यार हा साली नौकरी नही मिली इसलिये और कर भी क्या सकता था। विजय अर पर तुम पढ़े लिख हो और उस पर तुम प्राह्मण भी हो रवि जातपात भल जाओ यार, गांधी फिल्म नहीं देखी क्या, बापू क्या बोला था । और जात क्या पट भर देगी? [दोनो फ्रिज होते हैं] प्रोडूसर वाह । दिस इज लाइफ | यही तो लाइफ है। वद करो। अब एम मुजरा डालो [दृश्य शुरू होता है, टोना का प्रवेश । मुजरे का गीत चल रहा है ] टीना कैसे हो मेरे राजा विजय तू यहाँ ? रवि बज गया इसका बाजा, मतलब न इसे पहचानता है विजय अपने गांव की टीना अरे जा । मैं रीना वीना नहीं रवि हो यार, तुझे धोखा हुआ है यह टोना ही है । पर एक'म रीना की जिराक्स कापी, सेम टू सेम नो चेंज अरे यह टोना हु -- विजय [ 77 टीना रवि टीना रवि मेरा बाप गण होगा कभी तुम्हार गांव मे एसा मत बोल यह पागल पछी कहाँ से पकड लाया रे? पागल पछी मत बोन। यह ता अपना बचपन का दोस्त रवि है। गाँव म, ] [दोना फ्रिज होते हैं] प्रोडूसर वम-बस अब आगे मुनाओ भईग। लेखक मैं अब क्या सुनाऊँ सर, आप ही तोडफोड कर लीजिय प्रोडूसर फिर राइटर किस बात के हैं आप ? (विराम) ओके, ओके ना प्राब्लम आपको स्टोरी लाईन पसद आइ हम, हम इस पर फिल्म जरूर बनायेगें पर आग का लिखोग लेखक सिम्पल है सर, यह सीन खत्म हुआ क्ट रीना अकेली पह के नीचे बैठी है गाना गा रही है। [पाश्व में गीत लेखक बटटू-मुजरा लेखक प्रोडूसर तुम्हारा मबजक्ट क्या है ? लेखक गरीबों पर अत्याचार प्रोडूसर राइट ना प्राब्लम गांव जमीदार का सीन [मच के दूसरे ओर से जमींदार का प्रवेश] जमोवार उस साले हग्जाम को हाजिर करो? [विजय के बाप का प्रवेश] क्या व हज्जाम ससुर, लडका एम ए हुई गवा तो या चने के पड पर चढत है। हाँ बाप नाही हुजूर । आगे? - ? बाप जमींदार कल हमार दादी बनाने काह नाही आया बुखार या हुजूर। जमीदार कोल्डारीन काहे नाही ली। हां ताहरे घर टी वो नाही है न । अपने छोकरे को काह नाही भेजा। कर इम्तेहान चनन है हुजूर जमीबार अ तोहरी को, के पढ़ लिखकर का करेगा तुम लोग केवल हजामत बनावा बस । बाप मालिक जिदगी भर तो यही पिया पर अब हमार छोरा पढ़ लिखकर कुछ बन जाये यही हमार इच्छा है । जमींदार (लात मारता है) अरे हट, अब अगर ढाढी नाही बनी, तो तोहरी खाल खिंचवा के उमा भूसा भरवा दगे हाँ [सबके सब फ्रीज होते है] लेखक सर, अगर अयाय दिखाना तो अलग ढग से दिखाओ प्रोडूसर भईया, अयाय कम से कम अ याय लगना ही चाहिये । लेखक सर, सिफ कुए या तालाब पर बलात्कार दिखाकर अयाय नहीं दिखाया जाता शहर मे भी ऊँचे स्तर पर अलग ढग से हाने वाले मयाय का दिखाया जा सकता है। प्रोडूसर बलात्कार "इसाफ का तराजू'। हा एक रप सीन इसमे जरूर चाहिए लेखक : रपसीन? किम पर? प्रोडूसर हीरो की बहन पर लेखक कौन करता है ? भोडूसर सौन बरता है, अरे वही जमीदार का लडका लेखक पर मोडमर उसमे क्या पठिन है दयो। महकी स्कूल जा रही है ठोर है सामने से जमींदार का सहा आता है। [ 79 [पाश्व मे सीन शुरू होता है] वाह गाव को गोरो, कहा चली छोरी? किसन राधा किसन स्कूल मे। राधा किसन स्कूल मे (हसता है) जाने दो हमका मालिक हम तोहार पैर पडत हैं। किसनावा को जो छोकरी पसद मा जात है, क उबरे पर पर नाही सटिया पर पडत है भगवान के लिय हमको छोड दो अरे वाह । भगवान के लिये तोहमा छोड दे और फिर राधा किसन हम का करें [रीना का प्रवेश, सबके सब मौज होते हैं] लेखक रोना की ए टी? प्रोडूसर हां भईया रीना को ए ट्री। लेखक पर होरो तो विजय है। प्रोडूसर पिक्चर चलना चाहिये तो इधर रीना ही चाहिये । [पाश्व मे सोन प्रारम्भ होता है । रीना (गुलेल से पत्थर मारती है) अरे छोड द का क्सिन रीना तू? रीना हो हो हम तोहार माई छोड ऊका। क्सिन नही छोडेगें जा? शेना तोहार तो वाप भी छोहेगा (फाईट मारती है) मिसन ई तोहरा बहन महगा पगा रोना। रीना अरे जा जा पानी मे मुह घोपर आ जा, जा स्कूल मे जा । अरे हम नाही पढ़ सब तो या हुआ तू तो पद राधातू अव ] रोना कोन अरे तू 7 राधा हम तोहार ऊपकार कईसे चुकाये में दीदी चरई भापा छोड। राधा । अच्छा हम जान हैं दीदी प्रोडूसर इधर अब जमीदार ध। लडका बदले की आग मे जल रहा है वह गरीबा की बस्ती म आग लगवा देता है क्ट बैक टू बोम्ने टीना अब विजय के प्यार मे पागल उधर सचमुच को आग इधर प्यार की आग, वाह व्हाट ए काट्रास्ट लेखक व्हाट दी हैल [पाश्व मे मच पर सोन चल रहा है। टीना विजय पढ रहा है। कितना पढते रहोगे ? विजय टीना मन कहा और क्तिनी दर पढत रहोगे, कभी एक नजर इधर भी तो देख लिया करा विजय जा पढने दे डिस्टब मत कर [टोना नाचना प्रारम्भ करती है विदिया चमकेगी फ्रोज प्रोडूसर रवि की एट्री रवि को शाक लेखक सर शाम तो मुझे लग रहा है वही हाट अटक न हो जाय मेरा। प्रोडूसर चुप रहो भईया "सिफ विग्युलाइज करो [रवि चेहरा घुमाकर चुपचाप निकल जाता है। विजय और टोना को एक्जिट] प्रोष्ट्रसर : इधर एष और गाना लेखक फिर एक गाना? [81 गाव विजय के क्या ? । प्रोडूसर भईया, पूरा एल पी रिकाड भरना है एक्दम इमोशनल गाना दोस्त दोस्त न रहा कट बाप का खून लेखक प्रोडूसर गरीबो पर अत्याचार दिखाना है न, फिर थीम छाडकर कैसे चलेगा। लेखक हा थीम छोडकर केस चलेगा प्रोडूसर खून विजय के बाप का दल्जाम रवि पर लेखक क्यो? रवि पर क्यो? प्रोडूसर भईया मिचुएशन डिमाण्ड और सब्त रवि ब्राह्मण और विजय हज्जाम । रवि की टीना पटा डाली विजय ने । सिम्पल वरी सिम्पल बनला लेखक पर यह कसे हो सकता है ? प्रोडूसर सिम्पल एफ सीन और एड करो, विजय और रवि का झगडा बस [मच के दूसरी और सीन चल रहा है । रवि (चिल्लाकर) विजय । विजय क्या है रवि मर दोस्त । रवि मत कहो मुदोस्त । विजय मगर क्यो? रवि आज से मर गया रवि तुम्हार लिय । विजय । ऐसा मत बोल पार, तुझे अपनी दोस्ती की कसम । रवि थूकता हूँ मैं तुम्हारी दोस्ती पर विजय । न रविन ऐसा न बोल दिल को चाट लगती हैं सुनकर। रवि यूठे हैं तुम्हारे यह आंसू - मगरमच्छ के आसू मत दिखाओ। दोस्ती के नाम पर कर हो तुम 82 ]

रीना
विजय रवि?
रवि टीना पस द भाई इसलिये झूठा नाटक किया तुमने कहा
जिराम वापी है रोना जसी दिखती है।
विजय बकवास बद करो। रवि तुम मरी बात सुनो
रवि पहले तुम मेरी बात सुनो आज तक तुमने मेरी दोस्ती
देखी है अब दुश्मनी दखना।
प्रोडूसर गाँव । रात का समय । रवि विजय के पर की तरफ जा
रहा है।
रवि (रीना रगही अडाकर गिराती है। रवि चाकू निकालता
है।) कौन है ?
हम है।
रवि टीना त
रोना टीना
का कहत है बाबू हम रोगा है ?
रवि
तुम टोना नही हो?
रीना बस हुई गवा अब नाटक मत करो नही तो (हुल
देती है)
प्रासर इसने म अदर से आवाज आती है सून सून
लेखक पून किसका
प्रोडूसर विजय के बाप का रवि और रीना को एक्जिट कट टू
कोट सीन
कोटयाय मिस रीना हाजिर हो
वकील बोलो जो यहगी सच महूगो, संघ के सिवा कुछ नही
कहूंगी।
रोना में जो भी मागे जो आपने बोला जा
यकोल रवि को पहचानती हो
?
[83

रीना
हा।
वकील क्व से।
रीना कल से।
वकील तुम्हारी और इमको मुलाकात कैसे हुई
रीना विजय के घर के बाहर
वकील दैटस आल युअर आनस
आप जा सकती हैं
रोना थेक्यू (एक्जिट)
कोटबाय विजय हज्जाम हाजिर हो (प्रवेश, रसम दिलायी जाती
कब से?
वकील आपका नाम ?
विजय विजय हज्जाम ।
वकील भाप मुजरिम को पहचानते हैं ?
विजय हो।
वकील
विजय
बचपन से
वकील अब तक आपकी दोस्ती कायम है ?
विजय हाँ।
वकील बम्बई मे आप दोना का एक गहा हुआ था
?
विजय दोस्ती मे होता ही रहता है ।
वकील विजय इसन तुम्हारे पाप का खून क्यिा है ऐसा
इल्जाम है।
विजय यह आरोप वेवामा जैसा है । वकील साहिब
प्रोडूसर बोट सीन हिजोल्वड नया सीन विजय और रवि गते
मिलते हैं।
विजय रवि
84

7 ? रवि विजय विजय रवि, रवि यह क्या किया तुमने क्या किया। विजय मरा गुस्सा मरे बाप पर निकाला। रवि विजय तुम भी यही साचते हो विजय हाँ रवि रवि पिर पोट मे तुमने विजय दोस्ती के लिय झठ बोला। विजय रूक जा। हम असली कातिल का पता लगाना होगा, चल मेरे साथ प्रोड्रमर आई बात ममझ मे भईया जातीय भेद खतम फिल्म टक्स फ्री लेखक सर पर मुझे तो कुछ और ही दिखाना पा प्रोडूसर क्या दिखाना था २ लेखप राजनतिक नेता जातिवाद को बढावा देते हैं ऐसा दिखाना रवि प्रोडूसर सिम्पल है । जमोदार यादि रागर्नतिक नेता । सिम्योलिक पू सी लेखर ओ आई मी। प्रोडूसर अब रवि को एण्ट्री जमीदार के घर पर रवि ठाकुर (चिरलार) जमोर कोन है? म तुम्हारी मौत जमींदार रवि तुम रवि हो, मैं तुम्हारी मौत १ [ 85

प्रोडूसर रवि यपटता है, फाईट सीन, चाकू जमीदार को मारना
चाहता है इतने में आवाज
पुसिस रूपो रवि, अब हम देखते हैं
रवि आओ मिस्टर अधसत्य, नदी आ गय
प्रोडूसर और क्या चाहिय तुम्ह, जिंदगी के मभी रग दिखा चुके हैं
प्रेम, दुश्मनो, बदला जातिवाद, राजनंतिम और क्या
चाहिये तुम्हें इससे ज्यादा हमीपत रोल और क्या हा
सक्ता है
लेखक और सब तो ठीक है पर रीना टीना का क्या
प्रोडूसर सिम्पल दी एण्ड का फामु ला, रीना को रवि के साथ और
टीना की विजय के साथ शादी
लेखक
प्रोडूसर माग गाना दी ऐंड
लेखक सच कहा आपने दी ऐं वह भी मेरा स्वय का
अवसर होता है, हम जैसे लोगो के साथ परपबठक
कब तक
?
इसके बाद
7
वब तक।
पना
76 जय प्रकाश नगर
गारगांव (पूर्व)
बम्बई-400063
861

"दरवेशी"
[दोपहर बीत चुकी है। पृथ्वी पर सध्याकाल का
समय धीरे-धीरे अपना अधिकार जमा रहा है। एक
वक्ष के समीप अम्बुल दरवेशी और सलीम मालू एक
दूसरे की छाव का आश्रय लेकर बैठे हुए हैं। सलीम
गदन नीचे झुकाये अपनो सुधबुध खो बठा है। बोच
चीच मे कुछ बुदबुदा रहा है और अब्दुल उसके शरीर
पर स्नेह से हाय फेर रहा है।
सलीम
अग्रा
अप्दुल बोल
सलीम
आफ्ताब अपने घर की ओर रवाना हो रहा है न ।
अम्दुल ही
सलीम यस ऐसे ही लेट रहने को मन करता है-~-शरीर बहुत दर्द
मर रहा है।
अम्बुल सह ले बेटा। तू तो मद का बच्चा है, क्या परें? इस
पापी पेट पे खातिर कुछ भी करना पड़ता है, ऊपर वाले ने
माचिर पेट जो दिया है।
सलीम अध्या । नाम मत से उतरा। अब तो उसमे नाम से भी
चिढ होती है।
आदुल ऐसा मत बोस वेटे । यो तो हमसे पहीं ज्यारा अक्लमर
मूल मराठी रचनासर "जयन्त पवार"
[87
--

।
और मन्दगार है-अगर उसी ने पैट दिया है, तो उसे
भरने की अक्त भी सबको उसी ने दी है ।
सलीम , हां बिल्कुल ठीक । बहुत बाल-बाल द रखा है इस शरीर
पर। रोज के रोज अगर पांच पचास भी उखाता क्या
फ्क पड़ता है गुजा तो हो हो जायगा, चमडी के नीचे
पट तो सही सलामत रहेगा न ।
अ.दुल ये तू नही बोल रहा है सलीम तरे जस्म बोल रहे है
पर एक बात गाठ बांध ले, हर जरूम की दवा भी उसी ने
दी है। तभी तो तू मौत के मुंह से भी बच निकला।
(नजर शू य म रखकर) तुझ तो याद भी नही हागा तरी
जम को पहानी। बहुत पीछे छूट गया वह छोटा सा
पहाड जहाँ से एक बार आ रहा था मैं -अकेले । सिर
पर था नाला आसमान और पर तले थी पथरीली पाली
जमीन निडर हावर बिा लपडो के सहारे एक एक
पदम आगे बढ़ा रहा था-धन स धन जगल पार किय
नदी नालो को पीछ छाडता चला जा रहा था
वि
अचानक बगल में खलबली मच गई
पछी डर के मार भागने लगे। मुडवर देखा ता जगल मे
आग चुकी थी, और वो आग अजगर की सांस की तरह।
प.पवार मारती हुई पहो को घासफूसो वा निगलने
लगी। सारा का सारा जगन आग को गिरपत मे आ चुद।
था। दसत हा दखत सारा जगल जावरा स साली हो
गया-वहाँ से मुभ भी बाहर निक्लना याम अभी
निक्ला हो या पि, अचानक मन दया-पि सामन बुध
हिल रहा है, फाल प पर की तरह | नजदीय गया
सब जानवर
3]

सलीम तू था वहाँ, तब बहुत छोटा था। भूख से मर रहा
था या पानी के बिना कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था,
शायद तुम जानवरो की भगदड मे तेरी माँ छाड गई तुझे
एक तरफ भाग, एक तरफ तू, मैने आगा देखा न पोछा ।
एक्दम तुझे सीन से लगाया और जगल के बाहर की और
भागने लगा। बढे को आज लकडी मिल गई थी। मैं
तरा सहारा बना और तू मेरा। एक दूसरे को परछाई
का सहारा लेकर चलन लगे- आज भी चल रह है । बहुत
दूर तक का सफर तय कर रह है। पर चलने की ताकत
देने वाला है वो ऊपर वाला बेटा । ये हमेशा ध्यान रखना
हर बदे की देखभाल करता है।
सलीम हा ठीक कहत हो अब्बा । उस जगल की आग मे राख हो
गया होता है। उपरवाले की मेहरबानी से हो तो मुझे
चार पैर, सिर और एक वडा पट मिला, एक भालू बनाया,
सब उमकी ही तो महरबानी है । वाह र उपर वाले,
वाह।
-
अब्दुल म समय सक्ता हूँ बेटे तरा दद-पर सह ले भाखिर भालू
के बाल ही तो है दरवेशी सी रोटी दाल, ये जिंदगी होती
हो है साली छिनाल,
उसम तेरा भी बुरा हाल, मेरा भी बुरा हाल
[सलीम को आंखो के भाव बदल जाते हैं।
सलीम अब्बा-बादल देख कसे फैल रह हैं।
अम्पुल (चोखता है) हरामखोर साले । भासमा सबेईमानी करने
याले।
[89

-
7
ससीम ठीक रहा अव्या वो देख वादन व से विस्ती की तरह
आया और चूहा बनकर, दुम दबाकर भाग निकला।
अग्दुल नालायक वेर्टमान माले । अपने पिता समान विशाल
आसमा को छोडकर, दो मिनट की खातिर चमकने वाली
विजली की गोद म धुरान वाले साल
सलीम ये बिजली कोन अब्बा
अन्दुल जगमग मायाजाल फ्लान वाली छ दाता वाली जादूगरनी।
सलीम फिर बादल क्यो जाता है उसके पास -
अब्दुल पिता के समान विशाल आसमान यो छाती में उसका दम
घुट रहा है ऐसा लगता है उसे | आजाद होना चाहता
है । विमी का भी सहारा लेना नही चाहता है वो ।
इमलिय जादूगरनी की गोद म जाता है और बरसात का
पानी बनकर बाहर गिर जाता है । पर ये उस ऊपर वाल
से देखा नही जाता, उस फिर गुस्सा आता है वह तपने
लगता है और बह हुए बादल को फिर एक बार अपनो
गर्मी जोर से आसमान के पास भेज देता है
सलीम फिर क्या पिता उस क्यूल करता है ?
भन्दुल
सलीम क्या फिर दोनो सुखी हो पाते है ?
अग्दुल
सलीम बोल न अव्वा । बोलने
अग्दुल चाप की छाती गहरा सम दर होती है बेटा।
[पाश्व में जोर से बिजली की मायान, मोर
फिर पूण अयार।
10]

[प्रकाश | अन्दुल मदारी का खेल आरम्भ करने
वाला है । समय की आवाज गूजती है । लागो की
भीड जमा होने लगती है। तालियां और सीटिया
बजने लगती हैं। सलीम लोगो के सामने धूम घूमकर
सलाम करता है।
अग्दुल जय काली कलकत्तं वाली तरा वचन न जाये खाली
घुमा तेरी लकड़ी
बेटा सलीम, सलाम पर सबवू' । हरेक
– सलाम कर, ऐ शाबाशऽऽबच्चे लोग बूढे लोग ताली
बजाओ-जोर से-और जोर से- [जनता तालियाँ
बजाती है] आपने अभी तक भालू का कमाल देखा-
भालू का धमाल देखा। अव आगे गौर से सुनो भाई
माययापकान यो सावधान रो-दिमाग यो थोडा
परेशान बरो-
बाप, मा बच्चो बूटी भाई बहनो, सब लाग बडे घ्यान से
सुनो जिसके लिये भाप लोग तरम रह है जिसकी राह
आप आखो से देख रह है, वह शुरू होने जा रहा है,
जगी कुश्तीsss-मेरी और सलीम की
[जनता जोरदार तालियो से स्वागत करती है। इसी
धीच सलीम बाकी की तपारिया कर रहा है । जमीन
पर कपटा मारता है। सामान को गठरी माधता है
इत्यादि, इत्यादि।
मग्दुल कुश्ती मादमी और जानवर कोss-दिमाग और ताक्त की,
शेर और हाथी की, अब देखो, कौन जीतता, कोन हारता
है--ये दुनियां है छोटे माटे की, खरे खोटे कीss अच्छे
पुरेशीबादशाह वजीर पो, ये दुनिया रंगीन है, ये
[91

भन्दुल दुनिया सगोन है । चलाने वाला चलाता है चलने वाले चलते हैं -रोने वाल रोत हैं, यही पर सडर मरते है । जो लडता है वही जीतता है- में लड्डू गा सलीम लगा हम लटग जीतने के लिये- हम लडग जीने के लिय । ता होशियार रहना भाईयो- हाथ बांधवर मत खड रहना भाईया आपको आपके मो की सम है। तो सलीम आ जा सामने आ जा- तमाम लोग फिर से एक बार ताली बजाओ। [जनता जोरदार तालियो से उनका स्वागत करती है। बेटा सलीम आख से आख मिला, घरावर अदाज लगा-क से कधा मिलाss- [दोनों दण्ड बठक करके आमने पडे होते हैं। आंख से आँख मिलाते हैं ! पाश्व मे तारों को धुन धीरे- धीरे सुनाई पड़ने लगती है । धुन तीव्र हो रही है । तब तक दोनो एक दूसरे का अदाजा लगा रहे हैं। तारों की आवाज जसे ही तीव्र होती है दोनों एक दूसरे से भिड जाते हैं। लोगों को पुसफुसाहट, दशहत भरी आवाजें एवम बातचीत । एक दशक जोर से "याह"| कह उठता है । इसी दरम्यान सालियों की गडगडाहट और तारों को आवान एए दूसरे में लीन हो जाती है । अग्दुल सलीम पूम क्रोधित हो गये हैं। दोनों में खूब सपा झपटी - १]

--
-
होती है। नीच मे ही अब्दुल नीचे गिरता है।
परतु दूसरे ही क्षण व पु रटता है - औ मौका
पाते ही सलीम को उठाकर पटक देता है। उसकी
छाती पर चढ़ दौठता है, जोर की परश हसी
हसता है । तालियो को गडगडाहट पुन
उठती है।]
अब्दुल देखो-मैं जोत गया, अब्दुल जीत गया, जीत गया मैं-
सलीम हार गया -मने अभी अभी हराया इसको आप
लोगो के सामने, दरवेशी जीत गया-
भालू हार गया-अक्ल जीत गई, तारत हार गई- अरे
क्या देखते हो ? हाथ छोडो तालिया बजाओ, आपको
आपके मा की क्सम है-जोर से-और जोर से.
[तालियो को गूज बढती जाती है, धीरे धीरे अधिकार
होता है एक प्राश की आवृत्ति मे अब्दुल दिखायी
देता है।
अब्दुल भाई साहबss-दादा लोग भार के बाल ले लो-वाल
के ताबीज ले लो-गण्डे ले लो - नाखून ले लो- जो
पहनेगा भार के बाल वह होगा मालामाल-परेशानी टल
जायेगी-दुश्मनो को जडे उखड जायेगी-गम दूर हो
जायेगे ख्वाब पूरे हो जायेगे । दाम ज्यादा नहीं, फायदा
कम नही पेट का सवाल है भाईयो, ये बूढे अब्दुल के,
बेटे सलीम के-बस पापी पेट का सवाल है।
[वाणी मे एक अजीव दु ख का समावेश । अदुल
की दयादृष्टि सलीम पर घूम रही है ।
[93

-
ले ला भाई सावsss, ताबीज ले ला-गडे ले लो-
नाखून ले लो- जो खरीदेगा भालू के बाल यह होगा
भगवान, खदा का लाल ।
सलीम (क्हराता है) अब्बा बहुत दरद हो रहा है रे ।
अब्दुल अपनी तो साली जि दगी है ही एक बाजारू ।
[ताशें की आवाज दूर पाश्व मे कहीं खो जाती है।]
दृश्य तीसरा
[सलीम कराह-फराह कर बेसुध पडा है । अब्दुल
सलीम के जख्मों पर दवा दारू कर रहा है । बीच
गेच मे वेदना से असाध्य होकर सलीम उलटने
लगता है।
अब्दुल अब कैसा लग रहा है ?
सलीम ये दद मिटगा अब तो मौत के ही साथ अम्बा
अब्रल
दवा और लगा देता है।
सलीम मत लगाओ अब्बा, ऐस क्तिने और दिनो तक चलेगा?
अन्दल
सलीम ये सेल, तुम्हारी और मेरी मारामारी, बवास बाजी।
अन्दल क्यो रे ? आज अचानक अनमने से क्यो बोल रहा है
सलीम ऐसे जीने से में तग आ गया हूँ, खतम होने जा रहा है
अन्दुल ऐसा न बोल मेरे लाल ! खेल है, इसीलिय तो गुजारा चल
रहा है चल तर बाल निकालने है तेर वालो पर तो सब
लोग मर मिटते हैं एक भी ताबीज बेकार नही जाती हैं।
सलीम सचमुच अ वा मेरे बालो से लोगो को परशानिया दूर
होती है?
अम्दुल
क्या ?
14]

सलीम हमारत म मुसीबतें टलती है ? चन-लाराम मिलता है ?
शाती मिलती है ?
लस
सलीम बोल न अव्या, सच म एसा हाता है।
अग्दुल (अनमने मन स) हो, बटा हाता है ।
सलीम तू लागा को धोखा देता है अना।
अब्दुल (बाश्चय से) सलीमऽऽऽ
सलीम हाँ में जानता है। हमारी तानीज से न सुख मिलता है न
चैन मिलता है, और न हो परशानी हटती है। गर एसा
होता तो मेर शरीर पर तो बाल ही बाल हैं तो फिर म
क्यो इस तरह मारा मारा फिरता है, तेरे माथ एक-एक
पंस के लिये, शरीर पर जन्म लेकर भी वाल उखाडने
दता हुँ । बोल न ! मन्बा बोल ।
अदुल (सलीम हाथ परड कर स्नेह से नीचे बैठाता है) पागलो
वी तरह बातें मत क्यिा कर चल दिया मिधर लगा
है । मैं दवा लगा देता
।
सलीम नहो!
अन्धुल पर आज इत्ते दिनो बाद क्या हो गया है तरे को?
सलीम
सब कुछ पूछना है आज?
अग्दुल अब और क्या है?
सलीम (अब्दुल पर नजर रखकर) आज सवाल खत्म नहीं होगा
अब्बा, अपनी कुश्ती के खेल मै, हमेशा तेरी ही जीत होती
है, मुझे मारता है तू म मार खा लेता है, क्यो? मुझम
तो तुमस ज्यादा ताक्त है, म जवान हू और तू बूढा। फिर
भी हर बार तेरी ही जीत, क्यो अब्बा क्यो ?
१
[95

अन्दुल क्योकि म हुँ तेरा वादशाह और तू है मेरा गुलाम । तरे
गले मने गुलामी वा फदा डाला है, उसी के सहारे में
तुझे नचाता है । मग दिमाग तुझे गुलाम बनाता है । और
इसी तरह मलीम और अध्या को, गुलाम और बार शाह
का रिश्ता जिंदगी भर बनाये रखना है । यहाँ मैं खेलईया
है खल के चषय्यूह को रचान वाला, दुर्योधन और तुम
सिफ उस चत्र यूह के द्वार को तोडने वाले अभिम यु ।
सलीम लेकिन क्य तक ?
अब्दुल जब तक में बादशाह है।
सलीम क्यो?
भन्दुल क्योकि म आलमद है, हिम्मत वाला है, चालान है होशि-
यार हैं, सलीम इस दुनिया मे केवल ताक्त ही काम नहीं
करती । मने दुनियादारी देखी है यो ही धूप में बाल
सफद नही क्यि । समार म पापी पेट की खातिर भडवे-
गिरी करने वाली औलाद का अनुभव लिया हैं मने । और
तब चालाक वना है। दरवेशी बना । कडाके की सदियो
मे, खुले बदन, सद रात काटी हैं, बरसातो म अकेले मीलो
चला है । धूप मे पैर मे छालो का भी कडा अनुभव क्यिा
है । जिंदगी के मायने समझ गया हुँ मै । जिंदगी का मत
लब अर्थात भला-बुरा, काला गोरा, लाल-पीला, हरा-
नीला, भालूओ का समूह, मुटठी भर पेट की थैली को
भरने के लिये अपने पद के बाल को बेचकर चलने वाला,
लाचारी के जख्मो को सहकर पुन पुन पिघलने वाला,
आक्रोश करने वाला-गले की रस्सी को फिर भी खीचता
हुआ चल रहा है एक दरवेशी-हर मिनट हर संकट में वो
96]

अजाम देता है एक नय खेत को दरवेशी के डमरू की भावाज यानि माल की आबरू । उसे लोगो का दिल बह- लाना है, दिल बहलाते वक्त रास्ते में आने वाली मुसीबतो का भी सामना करना है। मैं जैसे नचाऊ, नावना है। जिसके हाथ मे हाती है रस्सी यही कहलाता है परदेशी उसको ही सब जयह वाह वाही' सलीम मतलब ? अब्दुल - सीधा सा मतलब है बेटा, जिसकी लाठी उसकी भैस । [अब्दुत के प्रत्येक वाक्य से सलीम क्रोधित होने लगता है । जोर से चीख पडता है।] सलीम अब्बा | मुझे भी चाना है दरवेशी। अब्दुल चया 755 सलीम हां, अब में भी बनना चाहता हूँ दरवेशी। अब्दुल नही तू नहरे बन सकता, प्याल छोड दे । सलीम क्यो? दुल योरि त है एक बेवकूफ जानवर | बिना अक्ल का अनपढ़। सलीम मुझे भी चालाक बनना है। अन्दुल उसके लिये दुनियादारी सीखनी पडती है । पटे हाल बीना पडता है। सलीम दुनियादारी सौखमा फटेहाल जीऊगा। बाहर की दुनियाँ मे मुझे छोड़ दे अब्बा । मुझे पहने होशियार बनना है और फिर दरवेशी । हाप मे डमरू लेकर, नये नये खेल करना है । पब्लिक के सामने। में बनूगा लईया-खेल के वक- ध्यूह को रचने वाला रचयिता तेरी जगह पर । बजाऊँगा मैं [971 भी जोर से डमरू, करू गा खेल की पुकार, कुश्ती का इशारा-जोर से तालिया बजाओ भाइयो-जोर से और जोर से-में जीत गया-म जीत गया-मने हरा दिया इसको ताली वजाओ (बडबडाते रहता है) मन्दुल , ये पागलपन छोड़ दे सलीम । इतना आसान नहीं है ये । तुझसे नहीं हो पायेगा? सलीम क्यो नही होगा ? तेरी ताल पर नाच सकता हूं' अपने ही बाल उखडवाकर दे सकता हूँ, अनमने मन से मार या सक्ता हूँ तो मन्दुल कुछ ज्यादा ही चपड-चपड परने लगा है तू ? सलीम हो, माज तक चुप रहा- पर अब चुप रहने वाला नही हुँ, अम्बा मुझ बाहर की दुनिया में जाने दे। अग्दुल बाहर जाने का ख्याल छोड दे सलीम। सलीम क्यो' इतना सता कर, लानार बनाकर भी अब तक पेट नहीं भरा तेरा म तो जाऊँगा ही अव्वा । सलीम को नजर शरीर के घाव पर टिकी है। अग्दुल कुछ विचार मग्न है। आदुल सोच ले। सलीम अब कुछ भी नहीं सोचना है। सिफ दरवेशी बनना है-- खेल करना है। भग्दुत बहुत पछतायेगा सलीम- सलीम अब तक पछताता हो आया है। अब और क्या पछताऊगा? यव ता सारी जिगी अच्छी तरह पितानी हैं यस । अतुल (निश्चित रूप मे) सय तू जा सकता है सलीम-तुला सरता है। मेरिन मरी एर बात गाठ बाघ ने, तू कभी नहीं 08

,
जीत सक्ता तिडप तडप पर मर जायेगा। धोबी का
कुत्ता बन जायेगा न घर का न घाट का खत्म हो
जायेगा तू।
[अन्दुल बोलते बोलते कापने लगता है, पोरव में तीव:
बिजली की कडकडाहट होती है, फिर शुरू होती है,
बादलों मे बरसात के पूर्व का शोर शराबा।
दृश्य चौथा
[मच पर अधेरे मे एक प्रकाश की आवृत्ति उभरती
है। उस प्रकाश मे मन्दुल दिखाई देता है । हार्थों
मे ताबीज लेकर चिल्ला रहा है, उसको आवाज
कमजोर पड रही है । नजरे लाचार हो गई है।]
अब्दुल ले लो भाई साहब ताबीज ले तो-
ख दद मिट जायेगे, अधूरे ख्वाब पूरे हो जायेगे,
हट जायेगी परेशानी,
सवर बायेगी जिदगानी, ले लो भाई साहब तावीज ले लो-
ले लो भाई साहब ले लो- कुछ तो बोलो--
[बोलते बोलते हताश होकर खुद ही गैठ जाता है।
इतने मे दूर से "अन्या" की आवाज सुनाई पड़ती
है । अब्दुल आवाज को दिशा की ओर देखने लगता
है । सलीम दिखाई पड़ता है।]
[सलीम दौडकर माता है, बहुत पुश मुद्रा मे है।
सलीम • अब्बाऽऽऽ अम्बा देख, देख में आ गया।
अब्दुल • कौन सलीम ! तू तू क्यों आया यहाँ ? तू तो होशियार
चालाक बनने गया था।
[99
.

) सलीम सलीम हाँ, बन गया में अब्बा होशियार और चालाक । देख ती जि दगी, तरी ही तरह जि दगी के रगो को देखने के लिये भटका, चालाब बन गया, अब और क्या चाहिये। अब्दुल में नहीं मानता। तू बेअक्ल | तू क्या बनेगा अकलमद भले बडी वडी बातें कर में यकीन नहीं करने वाला। सलीम तो मैं क्या करू किन यकीन करें? अब्दुल कुछ मत कर जस आया वैसे ही लौट जा। सलीम अब्बाsss--तू कहता है ये ? जम्दुल हो हमारा रिश्ता तो उसी दिन टूट गया, जब तूने मेरा साथ छोड़ा। क्यो अब्बा भूल गया त् यपना खेल ? भूल गया वो वाल ? यो ताबीज? भूल गया वो कुश्ती ? रिश्ता करो टूट सकता है अग ? मग्दुल । (व्यगात्मक) फिर-फिर तुझे कभी भी याद नही आई मेरी । वढा कमे जीता हागा? सह रहा होगा या मर रहा होगा? क्या साता होगा ? कैस सोता होगा ? कस दिन गुजार रहा होगा कुछ भी याद नही आया सलीम याद भाई बहुत याद आई तरी । पर होशियार चालाक भरलमद यादमी दूसरो ने दुख दद सट भूल जाते हैं । और अब में अक्लम द हो गया है अन्या । बहुत दुनिया दयी। पहाडो नदी नालों-म बहुत भटका । बार अप सिफ एक आखिरी मकसद बचा है। अदुल कोन सा मयसाद? सप्लीम मुझ दरवेशी रनना है। अम्दुस तू नहीं बन सावा- ? 7 -- 0] - सलीम अब मुवे मालूम है। वैमे भी तेरा जनाजा बहुत जरदी निकलने वाला है, एक एक दाने दाने को तरस रहा है तू । काई चार दाना भी नही डालता। अब्दुल हाँ तुझे तो खुशी हो रही होगी। सलीम नही दया आती है, इधर देख अब्बा ये देख तेरे लिये में खाना लाया देख । देख क्तिना सारा है [सलीम झोली उसकी तरफ बढ़ाता है। अब्दुल अविश्वास से सलीम की ओर और फिर झोली की ओर देखता है।] अन्दुल बेटा ss- सलीम तेरी भूख मिट जाय गी! बहुत दिनो से इतना खाना भी नहीं देखा होगा तूने अब्दुल हाँ बेटा, मेरे वास्त लाया है न तू सलीम सिफ तेरे हो लिये अब्बा-लेकिन एक शत हैं। क्या सलीम म दरवेशी बन गा । सिफ एक खेल, मेरी जि दगी के मास- का सुनहरा दिन | तू बनेगा भालू और मैं दरवेशी। दल बहुत भूख लगी है वेटा ~खाना दे दे थोडा सा- सलीम म बजाऊगा डमरू, तू पब्लिक को सलाम करना-में पुकारू गा तुझे-त साथ दगा--में जीतूगा जगीकुश्ती- तू हार जाना- मम्दुल मुझे कबूल है वेटा, सब क्वूल है, पहले थोडा खाना दे दे555- सलीम (पश हंसी) पहल ऐल फिर खाना- ? अब्वल ? - [ 101 [रस्सी मब्बा के आगे फकता है। अब्दुल स्वय ही न चाहते हुये भी वह रस्सी गले मे बांधता है। सलीम डमरू बजने लगता है और अ.दुल लाचार होकर सब पब्लिक को सलाम करने लगता है । पांचवा दृश्य [खेल काफी रग चुका है। सलीम के अमरू की आवाज फाफो जोशपूर्ण है । अब्दुल पुन पुन पब्लिक को झक झुक कर सलाम कर रहा हैं खेल के बहुत सारे पहलू बीत चुके हैं। केवल आखिर तमाशा शेष है जगी कुश्ती का पब्लिक को सासें रुकी हुई है। सलीम देखो भाई बहना, बच्चा बूढो अब शुरु होने वाला है जगी कुश्ती का खेल-आज एक जानवर दरवेशी बनकर तमाशा बनाकर खेल रहा है अपने मालिक को, अपने बादशाह को । देखो लोगों में उसे पुकार रहा हूं-ये दुनिया रंगीन है, ये दुनिया सगीन है, चलने वाला चलता है, रोने वाला रोता है । जय काली कलकत्ते वाली, तू भी देख तू भी देख अब तमाशा-(डमरू बजाता है) सब लोग ताली बजाओ ऐ शाबाश जरा जोर से हो और जोर से तालियों की ककश मावाज सुनकर सलीम एक अजीब अनुभव के वातावरण में खो जाता है । उसफी सांखों के सामने घूमने लगता है पुराना दृश्य जिसमे अग्दुल सलीम के बाल नोंच रहा है । नाखून निकाल रहा है । सलीम सहायता के लिये जोर जोर से चीख सलीम वस कर अध्या, अब नहीं सहा जाता 1 स पर- 102 ]

अब्दुल पट का सहारा मत छोन सलोम-तेर बाल और नायून
परिनक खरीदने के लिए टूट पडती हैं, अच्छी रोजी मिल
जायेगी।
सलीम नहीं चाहिये ऐसो रोजी । वस पर अम्बा (ध्याकुल हो
उठता है)
अग्दुल मुह बदार बेटा- मन, मुन पब्लिक को तालियां जार से
यजावा, और जोर से और और--
[शालियों को मायाज बढ़ते जाती है अग्दुल जोर
जोर से बाल खींचना शुरु करता है सलीम की चीख
पुकार अपने चरम सीमा पर पहुंच जाती है।
[श्य बदलता है, सलीम अस्वस्थ होता है।
सलीम बहुत दिय हैं दद, जस्म बस अब जख्म नहीं होगे । अब मैं
वन गया हू दरवेशी-तूने हजारो वार मुझ
पे
जुल्म
किये-
में सिफ एक बार करू गा तू भी देख एक बार मरकर ।
अब मुझे भी जीतना है । मुझम तो ताक्त तुझसे ज्यादा थी
न, पर तू तो ठहरा अक्लमद, मेरी पूरी जिंदगी बरवाद
पर दी, मुझे हर सेल मे तडपाता रहा अब म अक्लमद हो
गया है, मुये भी तेरी ताक्त का अदाजा हो गया है ।
ध्यान से सुन अव्या मैं तुझे अपनी अक्ल के जरिय हंसा
हँसाकर मार सक्ता हुँ ।
अब्दुल (घबरा कर सलीम के पास आता है) पगले ये क्या कहता
है तू?
सलीम म ठीक कह रहा हूँ।
मन्दुल गलत मत समझ मुझे बेटे।
103 ]

सलीम आज हो तो सही ममझा है मन अव्या । तू मुझे गलत रास्तो पर चलता रहा, अव में भी तुझे उसी रास्ते पर चलाऊंगा । तेरी छाती पर बैठूगा मु भी तालिया मिलेगी सोटिया मिलेगी, अपना मकमद पूरा करना है, बहुत दिनों का इतकाम लेने आया हूँ। अब्दुल ऐसा मत कर बेटेss, सलीम इतनी जल्दी अपना वादा भूल गये अचा, मैंने दिया तुझे खाना और बन गया दरवशी वस मिफ एम खेल । अदुल अव और खेलने को मत बोल. और नही हागा मुयसे बेटा वस- सलीम (कामयाब होने वाली नजरो से) तो देखा भाईयो । अब शुरू होन जा रही है हमारो जगी कुश्ती। हम लडेगे जोतन के निय। अब्दुल नहीं नही, हरामखोर सलीम यही हरामखोर बुला रहा है अम्बा आगे बटो-आंख से आख मिलाओ- अब्दुल नमक हराम माले। सलीम वय से धा मिलाओ । [ये बोलते ही वह अब्दुल पर टूट पडता है । पाश्व मे तारों की धुन बजने लगती है। अन्दुल प्रतिकार करने मे असमय है । अब्दुल अचानक हंसने लगता है, जोर जोर का ठहाना मारकर हसने लगता है । पब्लिक को खुसफुसाहट शुरू होती है । अग्दुल हसते रहता है । सलीम आग बबूला हो जाता है। एक ही झटके में उसे नीचे गिरा देता है। क्षण भर की 104 1 , - शांती । सलीम अब्दुल के पास अपना मुह से जाता है। और जोर से हसने लगता है। सलीम । मर गया-मर गया माधिर-देखो, देखो मैने मारा उसको-एक भालू ने दरवेशी को मारा-एफ मुलाजिम ने मालिक को मिटा दिया, जुल्मी को हटा दिया--मरे देखते क्या हो ताली बजामोss! [लोग सवेह मरी दृष्टि से सलीम को देखने लगते है । आपस में हो कुछ पुरधुबाने लगते हैं । सलीम का हंसना रूक जाता है । एक गम्भीर बातावरण निर्मित होता है। लोगों को खुदबुदाहट अव धोरे धीरे बढ़ने लगती है। सलीम अरे सुना आपन ' तालियो से स्वागत परो भाईयो- तालिया बजाओ-दाद दो मेरे माल को-सब जुल्म खत्म हो गये-सब-मा क्सम - अब तो बजाओ.) एक तू मूख है। सलीम अरे? क्या कहा ? दूलरा तूने अपने मालिप को मार डाला क्यो ? सलीम मुझे भी तो मारता था वह हर खेल मे- में भी हार मान लेता था। एक सच है. पर कभी तुम्हारी जान से तो नहीं खेला। सलीम हो, पर बहुत जुल्म किये । उससे तो मर जाना यही ज्यादा बेहतर है । तालियो बजामो लोगों चौमा त भी तो उसे यातनाए दे सकता था। सलीम मुझे बदला लेना था। पांचवा : पर मालिक को मारकर तुझे क्या फायदा हुआ, क्या मिला? छठा बोल न क्या फायदा हुआ? - 105 ] , सलीम + तालियां बजाओ साहबान, तालियां बजाओ- क्या तुमने जो किया वो ठीक है। ? पिसी की हत्या कर देने से प्रश्न मिटा नहीं करते। सलोम . तालियां दे दो सिर्फ साहबानों- एक, ऐसा क्यों किया? सलीम आपको तालियो की खातिर भाई साब-बस आपकी ही तालिवा की खातिर- दूसरा . तेरा साथ हम क्यो दे? तीसरा खेल खत्म होने जाने पर हमारे रहने का क्या अथ' (अतिम वाक्य, सब एक-एक करके बुदाबुदाकर जाने लगते हैं । सलोम पागलों की तरह सबको रोकने का प्रयत्न करता है । 'तालियां बजाओ, तालियां बजाओ को प्राथना करता रहता है। पर तु सब वहा से निकलने को तयारी मे है। आखिरकार सव चले जाते है शेष बचता है पेवल सलीम । सलीम लोगों को प्रस्थान की दिशा की ओर देखता रहता है । और जोर से तिरस्कार याली नजरों से, 'तालियो यजाओ तालियो धजाओ' चिल्लाता है।] सलीम देव । देख अब्बा-सब माग गये रे! दागले साले- देख । देख न अब्बा! देख न अम्बाsss देख न रे ! [सलीम अदुल रो उठाने का प्रयत्न करने लगता है, कि रगमच का पर्दा गिरने लगता है। पता जयंत पवार C/o चदेरी पत्रिका, संपादकीय सहायक विश्वविनय, 803 भागोजी कोर माग, महीम, यम्बई 400016 106]

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Maharashtra Ke Puraskrat

Author
Sageer Ahamad Choudary
Title
Maharashtra Ke Puraskrat
File name
Maharashtra Ke Puraskrat
Text
OCR done
Citation
1960
Published
2011/03
Publisher
Krishna Brothers Mahatma Gandhi Road Ajmer
Language
Sanskrit
Pages
116
Library
Shree Jubilee Naagari Bhandar Bikaner
Classification
Literature
DLI number
551205
Barcode
4990010031969.00
Scanning centre
C-DAK, Kolkata
Digital publisher
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