Bharatiya Vidya Bhavan Library, Mumbai
Khubchand Chikitsa
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॥श्रीः॥ खूबचन्दचिकित्सा- (वैद्यकसार) जिसको लाला खूपचन्द आनरेरी मजिस्ट्रेट व वायग चअरमन पीलीभीत निवासीने अपने ४० वपके अनुभवमे परीक्षित, तत्काल गुण- प्रद औपधिपाका सग्रहण किया है, वही बलदेवप्रसादने खेमराज-श्रीकृष्णदासक वम्बई ( मेला का गला सम्मान सन, ) निज "श्रीवेश्टेश्वर" स्टीम-मुद्रणयन्तारयम मुद्रितसर प्रकाशित किया। म १९०३, शफ १८२८ -- - TO REFHEALधीपटवर' यमनमान ...
यह पुस्तक ग्वैमराज श्रीकृष्णदासने यम्भई स्पेवघाडी ७ वी गली खम्बाटालैन निज "श्रीषंकटेश्वर।" स्टीम् प्रेसमें अपने लिये छापकर यहीं प्रकाशित किया.
भूमिका " धर्मार्थकाममोक्षाणामारोग्यं मूलकारणम् । " अर्थात् भारोग्यता यानी तन्दुरस्ती ही ससारके चारों पदार्थ धर्म, अर्थ, काम,मोक्षको पैदा करनेवाली है,वहीं तन्दुरुस्ती विना औषधियोंके जाने हासिल नहीं होसक्ती इसलिये सबसे पहिले 'औषधिका जानना सबका फर्ज है ताकि तन्दुरस्ती कायम रहे । इसवारते सनसाधारणके उपकारार्थ श्रीमान् कुर्मक्षत्रियवशावतंस लाला वबचन्दजी आनरेरी मजिष्टने भनेक गुणयान् साधु महात्माओंसे और अनेक ऐसे ग्रन्थोंसे जिनका पता भी न था उन सबके द्वारा सग्रह करके तथा ४० वर्षतक रात्रिदिन इसीमें लगाकर जो औपधिया खास उनके इस्तेमालमें और तजमे भाई और जिनका काम रात्रिदिन अपने देशमें जियादः पडताहे उनकी शोध- न विधि इत्यादि हस्तक्रियासे तजर्ब. करके तरह तरहके रोगोंपर चुन चुन कर औषधियां सग्रह की, परन्तु प्रबल ईश्वरकी इच्छा अधीन उनके परमधाम चलेजानेसे उससमय वह प्रन्ध मुद्रित न होसका । इस अनोखे सग्रहरत्नसे लोग पशित न रहै यथार्य लाभ प्राप्त करें और प्रथकर्ताका परिश्रम भी सफल हो यह विचार करके इसे श्रीमान् पण्डित गुमानीलालशमा वैद्यजीसे शुद्ध कराके और मुद्रित कराकर आशा करताहूँ कि सजन महोदय इस अमूल्य साहसे लाभ प्राप्तकर मुझे अनुग्रहका पात्र 'बनायेंगे। कृपाभिलापी, बलदेवप्रसादवा.
अथ स्वचन्दचिकित्साविषयानुक्रमणिका । ' - ... ... .... . .... .... ... विधि न० २८ .... .... पिपप. पाप दिपप. zir. मराज उतारा भादगारी मामरण भधागग तामीका निधिन२३ भय सांभानुशोगनगिनि ग१ १५ गय सोनेगी गरमकरणनिधि न. २५ ' भय गश्मशोधनाशिनः २ "प गोमेरी मम्मपण गरी जय अपरकीयविधि ०२ भीिग शोधयिधि न. ४१६/ भय मनोदयकरणयिपि न० १६.. रय गूगः शोग्नविधि न १ "अय चन्द्रोदयकरण गरी निधि माधा-पारपाररणामि न०६ न० २. अगिरफशोधनालिदिन. १६ अध चन्द्रोदपकरण तीसरी - अप हरतारशोधनविधि न. ८ " अब मनशिशोधनयिधिन. ९ " अथ रममानिकविधि न० २१ २४ अथ युचलाशोधनरिधि न०१० अथ समानिक दूसरीनिधि न.३०२५ जय पिटकरांशोधनविधि न. ११ समय रममानिफनीसरीविधि न. ३१" अचमीटारोटियाशोधनविधि अथ रससिविभिन० २२ अथ हानाटफी गिधि न. १३ अथ धनगशोधन पधि न० १३ .. अय हरताटको दूसरीनिचिन० ३४२८ अध मोनामकीशोधनविधिन०१४ साथ सरिगयाकी विधि न. २५२९ अथ मारगोटाशोधनविधिन. १५" | सिंगरपकी विधि न० ३६ ३० अथ भिगवाशोधनविधि न० १६१८ अथ शिगरफप जरधारेकी अप पाराशोधनरिधि न. विधि न० ३७ अथ गैंगशोधनविधि नः १८ १९/श्रय शिंगरफसरियाविधिन.३८३२ अथ शीशाशोधनविधि नं० १९ अप सिंगरफकी विधि न अप फैचपीवीजशोधनविधिन २० अथ मिंगरफी विधिन० ४०२३ अय धातुओंगी या न. २१ " अथ अमक्की विधि न. ४१३४ अथ चादरसी मरमारणविधिन०२२" 'अप अभयरमायन न० नं. १२ ... . ...
विषयानुक्रमणिका। (५) . .... 17 .... " " " ... . विपय. पृष्ठांक विषय पृष्ठांक. अपअम्रककी दूसरीविधि न:४३ ३१ अथ शोरा कुरता न० ६५ - अथ सहस्रपुटी अभ्रक मारण अथ सग्रहणीकपाटरस न०१६ ५३ विधि न०४४.... ३६ अथ क्षुधासागर न० ६७ अथ तांबामारणनिधि न. ४५ ३८ अथ रसकपूरकी विधि न० ६८ ५४ अथ शीशे ( नागरस )की पहिली अथसोनामक्खीशोधनविधिन.६९-१९ विधि न० ४६ ३९ अथ सोनामक्खी मारण विधिन०७०' अथ शीशेकी क्रिया न० ४७ अथ मूनकृच्छू न. अथ कुरता रागका न. ४० अथवजमूपावनानेकी क्रिया न.७२ ५६ अथ रागखीलयालेको क्रिया न.४९-४१ अथ भूधरयन न० ७३ अथ रागशोधनविवि न. ४२ अथ शीशामारणविधि न० ७४ कुमुदेश्वररस न० ४३ अथ मृतसजीवनी वटी रस सन्नि- अथ सार (लोहा) की पहिली पातपर न० ७५ ४३ अथ पारा मारण न० ७६ अर्थ सारकी दूसरी विधि न० ५१ अथ पाराशोधनविधिपद्यदर्पणकी अथ सारकी तीसरी विधि न. ५४" रीतिसे न० अथ सारकी चौथी निधि न० ५५ । चन्द्रप्रभा गूगल धैद्यदर्पणके मत- अथ मण्डरबनानेकी क्रियान० ५६ ४६) से न० ७८ अथ मूंगेके कुस्ताकी विधि न.५७ ४७ शिगरफ न० ७९ अथ मोती कुरताकी विधिन. ५८" दया चन्द्रोदय न. ८० अथ हीराव चुन्नीमारणमिधिन०५९" अथ बुमारआसर (पैयदर्पणका ) अथ लक्ष्मीविलास रस न०६० ४९ अर्थ कुस्तासँगई सब न, ६१ ५० अथ द्राक्षादिआसवन. अथ कपूररस भीमसेनी न० ६२ "अथ लघुविपर्मतैल न. शथ भूगाककी विधि न ६३ ५१ अथ अर्कभीरी न. ८१ अय नागरस हफीम दुर्गाप्रसाद अथ गोली शूलगजकेसरी न०८५७० ग्राला न.६४... गोलीमांसीको न० ८६ विधि न० " .. " .... .... .... ... .... .... . .... ....
८७ ... .... +- .... विपयानुक्रमाणका। विषय प्रष्ठांक. विषय पृष्ठांक. गोली दामारटन दवाई न०११० गोली अजीर्णानार न० ८.... ७२ सय जिगरी हरारत और भूखकी दयाई दादको न० ८९ ७३ दवाई न० १११ अथ पीपरपाग न. ९० अथ धातुगिरनेकी दवाई न. ११२" अथ दयाई कालिजकी न० ९१ ७९ अथ लयणमास्करचूर्ण न० १११ ९९ अथ सीतभन्जी रस न० ९२ ७१ अथ हुचकीकी दवाई न० ११४ अथ गिल्टबैटजानकी दयाईन.९९७७ अथ विडगादि चूर्ण न० ११५ ९२ अथ एलादिचटनी न ९४ ७८ अथ लेप पटके दर्दका न० ११६". भय धातुपुष्टिकी दयाई न०९५ "अथ अग्रेजी दवा कलेजेके दर्द- अप सुजाकपी दया न. पोन० ११७ अय घटनीसितोपलादि न० ९७ ॥ अथदिमाकरेजशकीदयाईन ११८९४ अप माषादिमोदक न० ८० अथ दुचाकी दवाई न.११९ अथ शिगारअनक न. ९९ ८१ तथा दुचकीको पिलानेकी दवा अध मूसलीपाक न. ८२ न० १२० अध देहके विगडनेमें चोष अथ चन्दनभवलेह न० १२१ १०१ ८४ अथ अजन आँखके जाले तथा अथ आदमीके सुस्तीकी दवाई धुन्धका न० १२२ ८६ अथ बच्चोंके पसली चलनेकी अथ बहुत पेशाब आनेकी दवा न०१२३.... दवाई न० अथ अर्क जामन न० १२४ अय बयासीरको दवाई न०१०४ ॥ अथ दातके दर्दकी दयाई न०१२५ अथ एकीकी दवाई न० १०५ ८८ अथ पेचिशकी दवाई न० १२६ ९७ अथ विजयचूर्ण कम्जपर न० १०६" अथ तम्बाकूका नुसखा न०१२७ ६८ अथ आतशफी दवाई न०१०७८९/अथ कथाका नुसखा न० १२८ अथ मुस्तीफी दवाई न० १०८ "अथ पेटके दर्दकी दवाई न.१२९ ५९ अथ तालीशादि चूर्ण न० १०९९० मध खांसीफी दवाई बच्चोंकी जय हाजमे और पेटके दर्दकी न० १३० ... " चीनी न. 1 न १०२ .... ... " १ ....
पृष्ठांक " .... " " .... सिषयानुकमणिका। विषय. पृष्ठांक. विषय. अप सांप काटेकीदपाईन.१३१-१०० दवाई न० १४८ अथ स्त्रीके गर्भ रहनेकी दवाई अथ गलित कोढकी दवाई ग.१४९" न० १३२ "अथ सफेद दागकी दवाई न०१५." अपं दमा खांसी व भातु पतली | अय बिष्ट्र के काटने की दवाई यमुस्तीफी दयाई न०१३२-१०१ न०: १५१ अध कयते थाह य प्रमेहकी अथ चूर्णहाजमेका न० ११२ दयाई न० १३४ अथ धुटी यचोंकी न० १५२ १०९ अथ सुजाफफी दयाई नं०१३५ १०२ अथ चूर्ण हाजमेंका दूसरा न० १५४" अय प्रमेहकी दयाई न० १३६ अय दवा दर्द नया हाजमेकी अथ आतशकसी दवाई न० १३७ " न० १५५ ११० अथ परासीर पनी या बादी के अथ पिही तथा पेटके दर्दशी मीही हो दवाई न० १३८ १०३ दवा न० १५६ न्य गठिया य दर्दकी दाई न. १३९. समय हैजसी दवाई न० १५७ १११ अय पर्वत पेशाय ज्यादा आ अथ औररावन बन्द करनेकी नेका न० १४० दयान अप फी शान ज्यादा आने- भय आंग दुग्वनकी दया न०११९ भय प्रदरगेकी दयान. १९०११२ की न० २४१ पर अफिमायका न.१४२ अप वायमूलदर्दपी दया न० १६१" भय नामदायी दयाई न०१४३ १०१ अथ फोदा विटानको दा न०१६९ आप पुराने जमान०१५३" मधमगयन जुकाम पर अय गोगा जार युग्वारकी न.१६" असारका धीम० १४५ अप दामोंकी दया न० १५११३ अपमुमती दया न० १४९१.. -प हानी दग न० १६६ जदरमौर य भगं. अप पारसी दया न० १७ "भय रहिम सप हर दिने ०६.८ " .... " + प - - (८) विषयानुक्रमणिका। पृष्ठांका .... 4 - .... .... ... विषय. पृष्ठांक विषय. अथ खिसे पानी गिरनेकी अथ सलाई शीशैको आँग्वमें लगा- दवा न० "नकी न० १८२ • जय नासूरकी दवा न० १७० ११५ अथ लौक्स पिस्ता बनानकी अथ दया कुष्ठकी नं० १७१ विधि न० १८३ अथ शिरके दर्द और पीनसकी अध भासव द्राक्षादि दूसरा दया न०१७२ न०१८४ १२३ अथ रोगन फाफरकी विधि अथ हुचकी दवाई न०१८५१२५ न० १७३ अथ नारायणी तल न० १८६ अथ पचोंके पसलीकी दवा अथ लोहा आसव न० १८७ १२६ न० १७४ भभ दमाकी दवा न० १७२ अथ अर्फ वेल न० १८८ १२७ अथ मुस्तीकी दया न० १७६ ११८ अथ शर्यत वेल न० १८९ अथ योगराजगूगल यायपर न. १७७॥ अथ धातुपुष्टि व ताफतकी भय योगराजगूगल दूसरा दया न० १९०..... १७८ ११९/अय अजन आंग्यके जाला धुर अशिंगरयातरोगपर न.१७९ १२० फुलीका न. १२१ ... अय गोली सजीरनी न. १८० अथ बच्चोंकी सप्रदणी तथा बुखा- अय सुरमा भाखका न० १८६ १२१॥ रकी दवाई न० १९२ १२८ .... काय " - न० " इति सब चन्दचिफिरमाविषयानुक्रमणिका समाना ।
॥ श्रीः॥ अथ खूबचन्दचिकित्सा प्रारम्भ। मंगलाचरण । सुमिरि भवानी शङ्करहिं, हिय धार चरणसनेहु । संग्रह औषधिको कही, गणनायक वर देहु ॥ १ ॥ जासु नाम भव औषधी, हरण घोर त्रय शूल । सो रघुनन्दन अवधपति, सदा रहैं अनुकूल ॥ २॥ नवनीरदसम श्याम, दयाधाम नीरजनयन । बसहु सदा श्रीराम, मेरे हिय सुखमा अयन ।। ३ ।। इलाज बुखारका नं. १ जो चुखार जाड़ा देकर आता हो और उसमे खॉसी और कफ भी होतो पहिले चार रोज तक शिलाजीत लौंग, सुर्ख इलायची देना चाहिये उसके बाद जफाव- हेडा, विसौटा,गिलोय सब चीज छेछे मासे ६का काढा निमक डालकर पिलाना चाहिये, अगर खुश्की ज्यादा करैतो बजाय निमकके शहत डालकर पिलाना चाहिये, इससेभी बुखार नजाय तो एक रत्ती सारमनसलबाला, मुनक्कमें रखकर एक घंटे पहिले खिलाना चाहिये इससे
(२)
खूबचन्दचिकित्सा।
भी नफा न होतो एक रत्ती भुगेका कुस्ता और १एक
रत्ती अबरख दोनों मिलाकर पानमें रखकर खिलाना
चाहिये और अगर सर्दीका जोर ज्यादा होतोरससिंदूर
तथा रसमानिक तथा चंद्रोदय पान तथा अदरकके
अर्कमें एक रत्तीदे और अगर दवाकी गरमी कम करना
मंजूर हो तो वंशलोचन सफेद इलायची शहत तथा
शरबत अनारमें मिलाकर खिलावे और अगर ताकत
देनेकी जरूरत हो तब चांदीके वर्क, मोतीसत, गिलोय
और मिलाना चाहिये अगर दाह होतो अंडके पत्ते पिं-
डोरका चौका लगाकर उसपर रखकर छातीपर रक्खै
तथा कपूर, सफेदचंदनका फाया बनाकर कौडीपर
थोडी देर रक्खै ।
नं० २. जो शिंगरफ अदरकके रसमें बनायागयाहै
तो खाँसी, बुखार, जाडेको पानपर तथा तुलसीके
पत्तेपर तथा शहदमें खिलानेसे दूर करता है इसमें
मूंगेका कुस्ता भी मिलाकर दियाजाताहे।
नं० ३. सार, मनसलबाला फक्त मुनका और
तुलसीके पत्तमें खिलानेसे आराम होजाता है।
नं०४. गोली जिसमें कपूर, काली मिर्च, करेलेके
पत्ते शामिल हैं जाड़ा बुखारको फौरन दूर करतीहानं०
५,पुराना अवरख ज्यादा फायदा करताहे औरअगरघुरखा
वैद्यकसार । (३) रको खाँसी,कफ भीशामिल हो तव एकाचावल पीपल ६४चौंसठ पहरकी घुटी हुई मिलाकर खिलाना चाहिये। नं० ६, बुखार, तिजारी, चौथिया जो ज्यादा रोजका हो उसको २ चावल हरतालका कुस्ता बगैर मीठे कच्चे दूधके साथ देना चाहिये उस रोज सिवाय दूधके और कुछ गिजा नहीं देना चाहिये। नं०७, बुखारको १२ बारह रोज होगये हों और पेटमें मल मालूम हो तब जुल्लाव देना चाहिये, अगर वायु और कफका दोप ज्याद हो तब लंघन कराना चाहिये, लंघनकी हालतमें दवा कम देना चाहिये । नं० ८. अगर कफकी ज्यादती न हो कुछ वायु शामिल हो तब जफा, बहेडा, विसौट,गिलोयकेकाढेकी जरूरत नहीं है शिलाजीतबाला काढा लौंग त्यागकर देना चाहिये, सार, मनसलबाला मुनकेमें अवरख शह- तमें देना चाहिये, अगर खुश्की ज्यादा होतो उशीरादि काढा देना चाहिये और कासनीके पत्ते ७ पानीमें पीसकर फाडले, उसमें शहद तथा मिसरीतथा शरबत अनार तथा शरवत नीलोफर इसमें जो मुनासिब जाने डालकर मनसलवालासार १ एक रत्ती देना चाहिये दाह ज्यादा हो और बुखार चढा हो उस वक्त, १ एक रत्ती कुमुदेश्वर, रसमिसरी और काली मिर्च मिलाकर
(४)
खूबचन्दचिकित्सा ।
शहद या शरवत अनार. या शरबत नीलोफरमें देना
चाहिये नागरस नं०६४मिस्ल कुमुदेश्वर देना चाहिये।
नं०९. और जिन लोगोंको बदफेली ज्यादा करनेसे
वीर्य नहीं रहता और बुखारमें बीमार हों उनमेंसे किसी
किसीको ऐसा होताहे खुश्की ज्यादा होती है बार बार
गस आताहै, ताकत नहीं रहती, ऐसा ख्याल होताहै कि
आखिरी वक्त है उस वक्त फौरन एक रत्ती मोती, एक
वर्क.चाँदी, एक रत्ती वंशलोचन एक सफेद इलायची,
ऐक रत्ती सतगिलोय, एक रत्ती कुस्ता राँग, एक
रत्ती सार मनसलबालाशहद या शरवत अनारमें मिला
कर फौरन खिलावे इसके खिलातेही १५ पन्द्रह मिनटमें
आराम होगा अगर देर कीजावैगीतो वचना मुश्किल है।
नं. १० जो सन्निपात हो तो गोली संजीवनी
नं. ७५ पकी अदरकके रस में देना चाहिये तथा रस
सिंदूर तथा रसमानिक तथा चन्द्रोदय अनुपान उसवक्त
जैसा मुनासिब समझे उसमें दे और जो पसीना ज्यादै
हो और जिस्म ठंडा हो और साँसका वेग हो उसको
चन्द्रोदय नं० २८ का अदरकके रसमें देना चाहिये
फौरन फायदा होगा।
नं. ११, पुराने बुखार और खाँसीमें श्रींगार
अवरख,व रसमानिक व कुस्ताचुन्नी एक रत्ती.अनुपान
मोतदिलके साथ देना चाहिये लेकिन कुछ दिन खाना
वैद्यकसार ।
चाहिये घी, दूधका परहेज नहीहै लेकिन दूध क्षीरपाक
होना चाहिये और मकान तथा कपड़े वीमारके स्वच्छ
रखना चाहिये।
नं० १२. और सिर्फ बुखारमें हिरनके सींगकी
भस्म २ दो रत्तीशहदमें मिलाकर देना चाहिये आराम
हो जावेगा।
नं० १३. पित्त अधिक बुखारमें पिलासज्यादा हो
१ एक सेर पानी जोश करै जब तीन पाव रहे उसमें
एक तोला सत कागजी, डेढ़ छटाक मिसरी डालकर
उतार ले और मिट्टीके बरतनमें रख ले ठंडा होनेपर
थोड़ा थोड़ा पिलाना चाहिये प्यास बंद होजावेगी।
न० १४, कफ वातमें पिलास ज्यादा हो तब एक
सेर पानी में २५लोग डालकर जोश कर जब तीनपाव
पानी रहि जावै तब उतारकर वो पानी पिलाना
चाहिये तथा पावभर पीपलका पपड़ा पानीमें बुझाकर
वो पानी पिलाना चाहिये अगर शीसे दाह और
पिलास अंदर ज्यादा हो तब चार मासे लोगका काढ़ा
करके पिला देय।
इलाज खॉसीका नं० १.
सुश्क खॉसीमें नागरस नं०६४दो रत्ती लोकसपिस्तामें
खिलाना चाहिये अनारका छुकला चारमासे, मुरेठी,
(६) खूबचन्दचिकित्सा।
दो मासे, वेहड़ा दो मासे इनका काढ़ा करके मिसरी
डालकर पिलाना चाहिये, किसीवक्त बहुत ज्यादा हो
तो जवाखार शहद मिलाकर खिलावे कफ निकल
जावेगा, इन सबसे न आराम होतो मिसरी, काली,
मिर्च डालकर कुमेदेश्वर रस शहदमें खिलावै ।
नं० २. कफकृत खाँसीमें शिंगरफ, अदरकवाला,
नं.३६ आधरती पानपर रखकर खिलावै तथा अभ्रक
और मुंगेकी भस्म आधीआधीरत्ती मिलाकर पानपर
रखकर खिलावै तथा बहेड़ा अनारका छुकला जला-
कर थोडी २ देरमें खिलावै ॥
नं०३.तथागोली खॉसी नं ६मुँहमें डाले रहे खाँसी
जाती रहेगी तथा श्रींगार अबरख तथा रसमानिक तथा
सार तथा पीपल ६४ पहरकी शहदमें खिलाना चाहिये
तथा आककी जड़का कोयला नं. १३३-२ चावल
मलाईमें रखकर खिलावै मलाई बगैर मीठेकी, अगर
सुश्की करें तो दूध बगैर मीठेका पिलावे तथा आसव
द्राक्षादि पिलावे इसके पिलानेसे खॉसी बिलकुल
जाती रहेगी।
नं०४.बच्चोंके बुखारकी दवा खूपकला एक पोटलीमें
वॉधकर शामको कुयेके अन्दर लटका दे पीनीमें डूवी
रहे सबेरेको निकालकर झाईमें सुखा ले, उसमें से चार
वैद्यकसार। (७)
रत्ती महीन पीसकर शहद में मिलाकर खिलावै बुखार
जाता रहेगा।
नं०५.बच्चोंकी खांसीकी दवा अतीस, नागरमोथा
काकड़ासिंधी, पीपल, संब दवा बराबर पीसकर और
सब दवाके बराबर मिसरी मिला कर एक अनार
ऊपरसे काटकर दाने निकालकर खालीकर ले नीचे
कपड़मिट्टी कर दे, उसमें सब दवाभरकर बकरीका
दूध डालदे, अंगारोंपर रखकर पका ले, उसमेंसे एक
एक उंगली चटाचे खांसी जाती रहेगी।
नं०६. हैजेकी दवा-हैजावालेको अजवायन चार
मासे पावभर पानी में जोश करके जब तीन पैसेभर रहे
पिलादे, फिर एक घन्टे बाद इसीको पिलावै के दस्त
बंद हो जावेंगे तथा रोगनकापूर नं० १७३ दस १०
बूंदसे १५ पन्द्रह बून्दतक पानीके साथ पिलावै आध
आध घंटे में जितना आराम हो उतनी दवा कम
करना चाहिये तथा गोली छुदासागर, लौंगके काढ़ेके
साथ खिलाना चाहिये घन्टे घन्टे भरमें अगर पिलास
ज्यादा हो तब २५लौंग एकसेर पानी में जोश करे जब
तीन पाव पानी रहि जावे तो उतारकर वह पानी
पिलाना चाहिये तथा पीपलकी छाल सुखी जलाकर
उसको बुझायकर वह पानी पिलाना चाहिये तथा
(८) खूबचन्दचिकित्सा। हैजेमें सन्निपातकी हालत होजावै तब इलाजसन्निपातकी करना चाहिये लेकिन उसके साथ दवा हाजमेकीऔर पेशाव लानेवाली शामिल रक्खै और लंघन करा दें हैजेकी बीमारी में जबतक अच्छीतरह आराम न हो जावै तबतक खानेको नहीं देना चाहिये। नं० ७. पेटके दर्दकी दवा पेटके दर्दवालेको गोली शुलगजकेसरी गरम पानीके साथ खिलाना चाहिये तथा कुमारासव, नकछिकनीका खोर मिला- कर पिलाना चाहिये अगर पेशाव लानेकी जरूरत हो तब जवाखार या मूलीका .खार कुमारासबमें मिलाकर पिलाना चाहिये ये सुराक कुमारासव छे मासेसे दोतोलेतक खुराक खार चाररत्तीसे दी मासेतक तथा अर्क जंभीरी तथा अर्क जामन तथा मुकत्तर जामन यह भी ६ छे मासेसे दो तोले तक दर्दमें पिलानाचाहिये तथा रोगनकाफूर नं० २७३, १५बूंद तक पानीके साथ पिलाना चाहिये तथा खारनगरम पानीके साथ कमदर्दकी हालतमें खिलाना चाहिये तथा रोगन नं०१६८मालिसकरना चाहिये और इन- सेभी सेहत न हो तो दस्त कराना चाहिये और छाती पर दर्द हो जिसको हृदयशूल कहते हैं उसमें दो मासे हिरणके मोंगका कुन्ता, दो तोले वी, आधपाव दूध
वैद्यकसार ।
गरममें मिलाकर खानेसे हृदयशूल बन्द हो जावेगा
जिस औरतको हमलहो और पेट में दर्द हो तब कुसाकी
जड़ दूधमें औटाकर पिलावै ।
नं. ८. फालिजसंखियाका कुस्ता तथा हरताल
तथा शिंगरफ खुराक आधी रत्ती तथा रसमाजिक एक
रत्ती तथा तांबेका तथा सोनेका एक रत्ती यह सब दिये
जा सकतेहै, जिसका मौका देखे अनुपान हम वजन
लौंग मिलाकर शहदमें देना चाहिये अगर ज्यादा
जरूरत हो तब कस्तूरी भी मिलादे तथा अर्क खुरा-
सानीअजवायनका खेचकर १ एक तोला पिलाना
चाहियेखानेको सबसे अच्छा जंगलीकबूतरका शोरवा
देना चाहिये उसके बाद तीतर, बटेरका शोरवा देना
चाहिये और मालिसमें रोगन लघुविपगर्भतथा रोगन
हवासल यह दोनों बहुत मुफीद हैं।
नं०९. आतशक शीशका कुस्ता नं० १०७ पानपर
रखकर १ रत्ती खिलाना चाहिये खटाई, गुड, तेल,
लाल, मिर्च नहीं खाना तथा रसकर्पूर आधरती बता-
सेमें रख कर खिलाना चाहिये अगर वतासागलेसे नहीं
उतरे तो खांडकी छोटीसीगोली बनाकर पानीमें उसके
अन्दर देवा रखकर निगल जावै दवा मुंहमें नहींलगने
पावै मुंहमें लगनेसे किसी किसीको मूहा आजाता है
• सबको नही आताहै और कुष्ठभी इससे अच्छा होताहै
.
"
.
..(१०) खूबचन्दचिकित्सा।
खानेको चनेकी रोटी और घी खाना चाहिये, मीग
और निमक नहीं खाना चाहिये।
नं० १० कुष्ठकी दवा-रसकर्पूर खिलानेकी तरकीब
आतशककी बीमारीपर लिखी है तथा अंडी छीलकरएक
अंडी सबेरेको खावै दूसरे दिन दो अंडी छीलकर खावै
ऐसे रोज एक अंडी बढाता जावे ४० दिनतक४०अंडी
करे ४१ इकतालीसवें रोज एक अंडी कम करता जावे
८० अस्सीरोजमें यह प्रयोग पूरा होगा खानेमें चनेकी
रोटी और घी खावै मीठा और निमक नहीं खावे
कैसाही कुप्ट हो आराम होजावेगा।
नं०११.तिल्लीकी दवा-चरचिटेकी बाल सुखलाकर
एक कोरी हांडीमें रखकर राखकरें और राखकी बराबर
सफेद खाँड मिलावे ६छे मासे रोज सवेरेको पानीके
साथ खावे थोडे रोजमें तिल्ली जाती रहेगी।
नं० १२. खून बंदकरनेकीदवा-खून नाक, मुंह,गुदा
किसी जगहसे आवे नागररस नं०६४ शीशेका कुस्ता
नं०४७ अर्कअनार 5% आधपावके साथ एकरती
और १ एकरत्ती वंशलोचन मिलाकरखिलानेसे फौरन
वन्द होजावेगा और जो बीमार कमजोर होतो शर्वत
अनारके साथ खिला लेकिन शर्यत अनार अच्छाहो
बजारू न हो औरतके अगर खून आनेलगे वेसेही
वैद्यकसार। ११) हमलकी हालतमें खरैटीके जड़की छाल ४ चार मासे काढ़ा करके मिसरी डालकर पिलानेसे बंद होजावेगा। नं० १३. गठियाकी दवा-जोगराजगूगल अंडकी जडके कादेके साथ खिलाना चाहिये और मामूली दरदको अंडकी जड़का काढ़ा निमक डालकर देना चाहिये और हरतालका कुस्ता २ दोचावलभर गिरगौटेके मांसके साथ खिलानेसे आराम होजावैगा तथा शिंगरफ कुचलेवाला नं० ४० शहद और एक लौंगके साथ १ एक रत्ती देनेसे गठिया और वायुके दरद दूर होंगे इसकी खुराक वक्तजरूरत २ दो रत्तीतक कर सकते हैं रोगन नं० १३१ जिसकी तरकीब रोगनके साथ लिखी है मालिस करनेसे फौरन आराम होता है यह रोगन गठियाकी खास दवा है जिसका हाथ पैर गठियासे सूख गया हो इस रोगनसे अच्छा होजावैगा तथारोगन लघुविषगर्भ भी फायदा करताहै और अगर सुजाककी वजेसे हुआहे तब चन्द्र- प्रभा गूगल देना चाहिये। नं०१४. सुजाककी दवा कुस्तासोरा १ एक रत्ती पानपर रखकर खिलाना चाहिये तथा तज ८ माशे खूपकला ८माशेछुआरा नग १ इनको रातको मिट्टीके बरतनमें पावभर पानीमें भिगोय दे सुबहको मलकर छानकर मिसरी डालकर पीले तथा शीशेका कुस्ता वैद्यकसार । (१३) मलकर नाकके रास्ते उसको खींचे तो अब्बल छीके आवेंगी वादमें रेजिस निकलना शुरू होजावेगी तीन रोजतक रेजिस निकलेगी और इन तीन रोजमें मूंगकी दाल रोटी सुश्क खाना चाहिये दिमाग साफ होजावैगा और सब बीमारी दिमागकी दूर होजावेगी पीनसकी भी यही दवा है। नं० १६. कमजोरी वाह वगैरा जिसकदर कुस्तेहैं सब फायदा करतेहैं लेकिन हमारे तजरवेके रसमानिक नं०३० कुस्ताफौलाद नं० ५४ रोगनवेल नं० १३४ यह ज्यादा फायदा करतेहैं। नं० १७, अंजन नं. १२२ नम्बर० १९१ यह आजमायश करे हुए हैं नरकीव उनके साथ लिखी है।। नं० १८, दिमागकी कमजोरी और दिलके धड़- कनेकी और पित्तके बुखारकी कुस्तासंग इस्व व अकीक वंसलोचन सफेद इलायचीके साथ शर्बतअनार व शर्बत नीलोफरमें खानेसे बहुत फायदा करताहै ॥ नं १९, कमलबाय जिसको पीलिया भी कहते हैं और इरका भी कहतेहै गूमेके पत्तोंका अक दिन में तीन चार दफा सलाईसे आंखमें लगाना चाहिये और कड- तोंबीके बीजका अर्क नाकके रास्ते नास देना चाहिये इन दोनोंसे दो रोजमें आराम होजावेगा और खाने में कासनी फाड़कर वंसलोचन सफेद इलायंची शर्यत (१४) खूबचन्दचिकित्सा । नीलोफर मिलाकर पिये तथा कुस्ता संग इस्व वंस- लोचन सफेद इलायची शर्बत अनार व शर्बत नीलो- फरमें मिलाकर खिलानेसे फायदा होजावेगा। नं० २०. जहर खानेसे जिसको जहरका असर होगया हो किसी किस्मका जहरहो पनामणी असली पानीमें धोकर तीन चार दफे पिलाना चाहिये जहर फौरन उतर जावेगा। अथ सर्वधातु शोधनविधि नं० १. पहिले तेल, मग, गोमूत्र, कांजी, कुलथी इनमें सात सात बार बुझानेसे सर्वधातु शुद्ध होतेहैं। अथ गन्धक शोधनविधि नं० २. चमचमें घीके साथ गन्धक पिघला कर छोडता जावै दूधमें जब जरदी दूर हो जावै तव शुद्ध होगी। अथ अवरक शोधनविधि न० ३. अबरकको आगमें गरम करके गायके दूधमें विफ- लेके काटेमें, कांजीमें गोमूत्र में सात सात दफे चुझावे तो शुद्ध होय अथवा काला अभरक सात बार दूधमें बुझावे फिर अवरकके वर्क अलग अलग होजावेंगे तव चौलाई कागजीके अर्क में आठ पहर घोटे और चाहे आठ पहर इसी में भिगोकर दो पहर घोरै तब शुद्ध होगी।
वैद्यकसार। (१५) अथ शिलाजीत शोधनविधि नं०४. S| आधसेर त्रिफला दरदरा कूट कर ३२ सेर पानी में औटावे जब आठ सेर पानी जल जाय तब छान लेवे तिस पानीमें ३ तीन पाव शिलाजीत दर- दरा कूट कर दिनराति भिगोवे फिर पानी टपका लेवे गादि न आनेपावै तिस पानीको कढाईमें औटावे जब राब सा होजाय तव उतारले फिर गायका दूध त्रिफलाका काढा भँगराका अर्क इन तीनोंमें अलग अलग एक एक दिन घोटे तब शिलाजीत शुद्ध होय । अथगूगल शोधनविधिनं०५. ॥आध पाव गूगलको तीन छटाक विफलेके काढेमें औटा कर फिर छानकर कढाईमें पका कर निकाल ले सब गूगल शुद्ध होगया। अथ धान्यावरककरणविधि नं०६. शुद्ध अवरक एक सेर और धान पावभर दोनों कमरी या गजीके थैलेमें भरकर तीन दिन भिगोय रक्खै फिर कूड़े या कठौतीमें दोनो हाथोंसे मलै पानीमें थैलीको दो पहरतक रखे फिर अबरकके चूरणको थलीसे निकाल लेय और पानीमें रहे चूरणका धीरे धीरे पानी निकाल डालै फिर सबको इकट्ठा थैलीमें
मनसिलको तीन दिन बकरीके मूत्रमें अथवा
कुम्हेडेके रसमें ओटानेसे शुद्ध होताहै ।
अथ कुचलाशोधनविधि नं० १०.
छटाक भर कुचला डेढ़सेर दूधमें औटावे जब
गध रबडी होजाय तब कुचला निकाल कर धोय ले
(१६) सूबचन्दचिकित्सा।
भरकर फिर कठौती और पानी डाल उसी थैलीको
एक दिन भिगोय वखै सुबहको उसी तरह मलकर
अबरक चरण निकाल लेय।
अर्थ शिंगरफशोधनविधि नं. ७.
शिंगरफको दो पहर कागजीके अर्कमें घोटे और
दो पहर भेडके दूध घोटे तब शुद्ध होय ।
अथ हरतालशोधनविधि नं० ८.
तबकिया हरतालके टुकडे करके पहिले कॉजीमें
दोलायंत्रसे एक पहर पकावे फिर पेठेके रसमें एक
पहर, तिलीके तेलमें एकपहर, त्रिफलाके काटेमें एक
पहर पकाये तब शुद्ध होय और फूकने योग्य होय।
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मनसिलशोधनविधि नः
तपशुद्ध होय।
अथ फिटकरीशोधनविधि नं: ११.
फिटकरी फूला करनेसे शुट होतीहै ।
। वैद्यकसार। (१७)
अथ मीठातेलियाशोधनविधिनं० १२.
मीठे तेलियाको गायके मूत्रमें तीन दिन भिगोवै
जब उसमें सींक छिदकर-पार होजावे तब शुद्ध होगा।
अथ धतूरा शोधनविधि नं० १३.
छटाक भर धतूरा डेढसेर दूधमें औटावे जव दूध रबडी
होजाय तब धतूरा निकाल कर धोय ले तब शुद्ध होगा।
अथ सोनामक्खी शोधनविधिनं० १४.
तीन पैसेभर सोनामक्खी और एक पेसाभर
सेंधानोन दोनोंको जमीरीके अर्कमें अथवा विजौरेके
अर्कमें आचके ऊपर कढाईमें घोटे करछुलीसे जबतक
सुर्ख न होवै तबतक घोटे जाय जब खुब सुर्ख होजाय
तब जानी शुद्ध होगई अगर सेंधानोन नहीं डाले तो
भी कुछ हरज नहींहै।
अथ जमालगोटा शोधनविधि नं० १५.
जमालगोटा बक्कल दूरकर पोटली बांध दूधमें
दोलायंत्रद्वारा पकावे एक घंटा फिर जमालगोटाके
वीचमैसे जिह्वा निकाल डाले बादको पानीमें घोटकर
कोरे खपडोंपर लेप करे जब खूब सूख जाय तब छुडा-
कर रख छोडै जो चिकनापन वाकी रहजाय तो फिर
घोटकर खपटे पर लेप कर दे सूखनेपर छुडाले
तब शुद्ध होगा।
(१८) खूपचन्दचिकित्सा। अथ भिलावा शोधनविधि नं० १६. हवासे टूटकर गिरे हुए भिलावाको लेकर कपडेमें बाँधकर जमीनमें फैला कर इंटसे मसले फिर पानीसे घोयकर हवामें सुखलाये फिर दो दो टुकडे करके चौगुने पानीमें औटावे जब चौथाई पानी वाकी रहे तब उतार लेय इसी तरह दूध औटाकर धोकर वीमें भून ले तो शुद्ध हो। अथ पाराशोधनविधि नं० १७. पहिले रूमी शिंगरफ कागजीके अर्कमें घोटकर टिकिया बनाय कर सुखाय कर डमरूयंत्रसे पारा नि- काल ले फिर दो गड्डे खोदे जिसमें खरल आजाय एक गडेमें आग जलाये जिसका धुआँ निकल जाय तब उसपर खरल रखकर बोटे खरल ठंढा न होने पावे दिन रात घोटे इसको तप्त खरल कहतेहैं और इन चीजोमें घोटे चीतेने नगढेम, हर जगदम, आकके दूधौ, सेहुँडके दृध तथा अर्क, धतूरेको, अर्क, कल- हारीके अर्कमें, फनरके अर्कमें, घुचचीके अर्कमें, चीगुवारके अर्कमें लहसुनके अर्क में इन सब चीजोमें सात सात दिन और रात घोटे जब एक दवाईकी भावना पूरी होजाय तब धोय कर साफ करके दुमरी दवा डाले इस प्रकारसे पारा शुद्ध होजायगा।
वैद्यकसार । (१९) अथ राँगशोधनविधि नं० १८. राँगको तेल, मठा, गोमूत्र, काँजी, कुलथीइनमें सात सात वार झावे रॉग शुद्ध होजायगा ॥ सिवाय तेलके और चीजोंमें जो बुझाव दिये जावें तो बरत- नके मुंहपर काठका ढकना लगादे उसमें सूराख करदे उस सूराखके रास्ते राँग डाले क्योंकि राँग युझावदे नेमें ऊपरको उडताहै। अथ सीसा शोधनविधि नं० १९. सीसाको तेल, मठा, गोमूत्र काँजी, कुलथी इनमें सात सात बार वुझावे सीसा शुद्ध होजायेगा। अथ कैचकेवीजशोधनविधि नं० २०. कैचके बीजकी गिरी निकाल ले कैचके बीज शुद्ध हो जायेंगे। अथ धातुओंकीक्रियाविधि नं० २१. सब धातुओंको बनाने के बाद चूल्हेके नीचे गाड़ दे जिसमें आग जलती होय जितने साल गडी रहेंगी उतनीही अच्छी होंगी। अथ चाँदीकी भस्म करणविधि नं० २२. अजवायन ६छ तोले एक रुपये के आधी उपर रक्खे आधीनीचे रक्खे चारसर कंडोंमें उसका गोवरसे संपुटकर सुखायकर आच देवे इसी तरह बारह ऑच
.
बराबर लेकर
(२०) खूबचन्दचिकित्सा ।
दे रुपया फूल होजावेगा सुराक १ रत्ती सहतमें खावे
धातुको पुष्टकरे और ताकत करें।
अथ चाँदीवाराँगकीभस्म जगविधि नं.२३
चाँदी शुद्ध और राँग शुद्ध
राँगको पीसले फिर चाँदीका बुरादा करले दोनोंको
मिलाय कर फिर हरताल बरावरका मिलाय कर काग
जीके अर्कमें घोटै फिर टिकिया बनाकर 'सुखाकर
चार सेर कंडॉकी आँच दे इसी तरह बारह आँच दे
और हरआँचमें दसवां हिस्सा हरताल और डालता जाय
फिर घीगुवारकी वारह आँच दे हरताल न डालै जब
भस्म होजाय तब रख ले मात्रा आधी रत्तीसे एक
रत्ती तक, केसर वंशलोचन, इलायची, सपेप मोती
मिलाकर सहतमें खावै या पानीमें गोली बनाकर खावे
तो बहुत बलकर और धातुको वंसलोचन सपेदइलायची
सतगिलोय ये सब एक एक रत्ती दवामें मिलाकर सह
तके साथ खावे ऊपरसे दूध पिये धातुपुष्ट होगा।
अथसोनेकी भस्मकरणविधि नं. २४.
सोनेका चूर्ण करके कुकरौंधेके अर्कमें चार पहर
अच्छी तरह ऐसा घोटे कि सोनाअर्कमें मिलजाय फिर
टिकिया बनाकरकुकरौंधेकीलुगदीमें रख कर सरवामें
संपुट करके एक कपड़ौटी कर पाँच सेर अरने कंडोंकी
"वैद्यकसार।
(२१)
आंच दे थोडा पारा भी पहिलेही मिला ले अर्क
कुकरोंदाफाडले उसमें खरलकरैसोना भस्म होजायगा
मात्रा एक चावलसे दो चावल तक पुराने बुखारको
शीतकी सांसको बहुत गुण करताहे और ताकत देता है
अनुपान जो रसमानिकका है वोही इसकाहै कमज्यादा
मौका देखकर करै किसी वख्त आदमीका बोल बन्द
होजावै तौ १ चावल दवा और तीन चम्मच चाहके
साथ पिलावे तो उसीवक्त बोल खुल जावैगा.।
अथ सोनेकी भस्मकरण दूसरी विधिनं०२५.
सोना दो तोले कविस मिट्टीमें लपेटकर आगमें
लाल करके केलाके जडके अर्कमें या अगस्तके फूलके
अर्कमें सातबारवुझाकर टुकडेकरबराबर पारामिलाकर
खरल कर चार तोलेगन्धकतेल ऊपर देकर संपुटकरके
पांच गिरहका गढा खोदकर तीस अरनेकंडोंमें फूकदे
ऐसेही चौदह १४आंच दे तब भस्म होगा परन्तु हर एक
आंचमें पारागन्धक डालता जावे जैसा ऊपर लिखाई
अथ चन्द्रोदयकरणविधि नं० २६.
पारा,शिंगरफ, रांग तूतिया, शोरा इन सबकोटका
टकाभर लेकर केलेके अर्क में पीसकर आतशीशीशी में
भरे फिर एक हांडीमें नीचे छेद करके भीतरसे अवरख
छेद पर रखदे हांडीमें शीशी रखकर रेत भरदे मुह
(२२)
खूबचन्दचिकित्सा।
शीशीका खूब बन्दे करदेफिर आठपहरकी आंचदेठंडी
होजावे तब निकाल ले रंग गुलाबी होजायगा खुराक
आधी मुंगकी बराबर कुठवालेको मक्खनके साथ
खिलावे और सीतका पसीना आताहो तब एक रत्ती
अदरखके अर्कके साथ खिलावे और भूखके वास्ते एक
रत्ती लौंग मिला कर सहतमें खिलाने और पुष्टिक
वास्ते लौंग,जावित्री,जायफल इलायचीसपेद, वंशलो-
चन यह सब आधी आधी रत्ती चांदीका वर्क एक
कस्तूरी एक चापल इन सब चीजोंको पीस कर दवा
मिला कर मक्खनके साथ खिलावैऔर सुजाककेवास्ते
छे मासे विहीदाना भिगोकर लवाब निकालकर उसमें
मिसरी डाले और दवाके साथ वंसलोचन इलायची
सपेद सतगिलोय एकररत्ती मिलाकर लवाव विहींदा-
नाके साथ खावै।
अथ चन्द्रोदयकरण दूसरीविधि नं० २७.
पारा, गन्धक, अवरक, वंग, शिलाजीत, इलायची
सपेद इन सबको वरावर लेकर, केले के अर्क ४ चार
पहर खरल करे फिर सुखाकर रखले मात्रा २ दो रत्ती
से ४ चार रत्ती तक सहतमें खिलावे तव वीर्य वृद्धिही
काम अधिक बढे गरमी करे तो वरावर गिलोयकारस
लाकर खिलाये और ऊपरसे दूध पिलाने और प्रमेहवा-
लेको सहत साथ खिलावे तो अच्छा है।
(२४) स्ववचन्दचिकित्सा।
अथ रसमानिकविधि नं० २९.
पहले पारा मुर्गीके अंडेके भीतर भर कर उस पर
कपड़मिट्टी करे फिर एक हाँडीमें 5 पाँच सेर अर्क
आकासवेल भर कर उसमें अंडा रखकर आगके
ऊपर चढावे जब चौथाई अर्कबाकी रहै तव ५ पाँच
सेर मठा उसीमें डालदे जब चौथाई बाकी रहै तब
हॉडीको उतारले ठंढा होनेपर पारा निकालकर
साफ करले फिर ४ चार तोले सेंधानोनमें पारेको
खरल करे एक दिन बरावर खरल होतारहै फिर पारा
साफ करके इसी दो २ तोले पारामें दो २ तोले
मनसिल मिलाकर खरल करके तॉवेकी डिवियामें
भरकर उपरसे कपडमिट्टी करै फिर वालूयंत्रमें आठ
पहरकी ऑच करे बेरीकी लकडीकी फिर लकडी
निकाल कर कोयले चूल्हेके पर रहै जब हॉडी
है
वैद्यकसार। (२५)
अथ रसमानिक दूसरीविधि नं० ३०
पारा पहले रसमानिककी तरह शोधले पारारतोले
मनसिल चार ४ तोले संखिया दो २ तोले गन्धकदो
२ तोले इन सबको खरल करके आतशी शीशीमें
भरके शीशीका मुंह बन्दकरे और वालुकायँत्रमें
चढावै आँच पहर आठ ८ की करे वेरीकीलकडीकी
फिर लकडी निकाल कर कोयले चूल्हेके अन्दर भरे
रहैं जब ठंढी होजावै तब निकाल ले शीशीकी तलीमें
जो दवा रहेगी वह कीट कहलायेगी और जो दवा
शीशीके उपर मुँह पर आजाय वो फूल रहेगा
गुण फूलमें जियादद्द है मात्रा १ रत्ती वसलोचन १
मासे इलायची सपेद १ मासे दवामें मिलाकर सहत
६मासेके साथ खावै भूख करै नामर्दको मर्द करे।
अथ रसमानिक तीसरीविधि न० ३१.
पारा शुद्ध ८ आठतोला सीसा शुद्ध छे ६ तोला
गंधक शुद्ध आठ तोला मनसिल शुद्ध आठ ८ तोला
पहले सीसेको गरम करके उसमें पारा मिलायदे फिर
सबको सुरमेकी तरह स्व पीसकर आतशी शीशी में
भरकर चढायदे आँच २४ पहर की देभट्टी बनावे उसके
मुखपर चार तरफको चार झरोखा रक्ख जिसमेंसे
.
(२८) खूबचन्दचिकित्सा।
अथ हरतालकी दूसरी विधि नं० ३४.
छटाक भर हरतालको पहिले दहीमें डालकर सात
रोजतक रखदे पीछे हरतालको घीगुवारके अर्कमें
खरलकर टिकिया बनाकर सुखावै फिर पीपलकी
लकडीकी राख ढाईसेर कपडछानकर एक हाँडीमें
सवासेर राख भर कर हरतालकी टिकिया रखकर
फिर ऊपरसे सवासेर राख भरकर हाथसे खूब दबादे
चूल्हे पर चढाय कर बेरीकी लकडीकी बहुत मॅदी
आंच दे हांडीको देखता रहे राखमें दराज आवै तो
थोडीसी राख डालकर दवादे आंच मंदी करे इसीतरह
छेपहर आंच करै उसके बाद हांडी ठंढी होनेपर उता-
रले दवा निकालले टिकियाके ऊपर जो राख जम
जाय उसको छील डाले हरताल सपेद होजायगा जो
कुछ जरदी वाकी रहे तो दूसरे रोज आंच फिर देवे
हांडीकी दराजका ख्याल न करेगा तो हरताल उड़
जायगा यह हरताल जिसको रोज बुखार आताहो
या रोज बढ जाताहो या जाडा देकर आताहो या
सिर्फ बुखार आता हो या तिजारी या चौथिया
आतीही सबको डेढ घंटे पहिले एक चावल या दो
चावल अखीर चार चावल तक कच्चे दूध खिलावे
अच्छा होजायगा और सुजाकके वास्ते भेडके धका
.
वैयकसार। (२९) खोवा करके उसमें दवा मिलाकर खिलावै उपरसे कच्चादूध पिलावे अच्छा होजायगा दूध वगैर मीठेका पीये गुड तेल,खटाई,लालमिरचका परहेज करे कुव्वते वाहको गरगौयां चिडियाके गोश्तमें मसाला डाल कर भूनकर उसके साथ खावै तथा नामर्दीवालेको भी इसी तरकीबसे खिलावै उपरसे वगैर मीठेका दूध चावल खिलावै और धातु पतलीके वास्ते गायके कच्चे दूध खिलावै सात रोजतक ऊपरसे मलाई घी चावल खिलावै और सन्निपातके लिये अदरकके अर्कमें खिलावे ऊपरसेघी पिलावै और दमेके वास्ते बजरिया मछलीको मसाला डालकर धीमें पकावे उसमें दवा डालकर खिलाये ऊपरसे चनेकी रोटी मछली खिलावे तीन रोजतक, और फालिजके वास्ते मुरगीके कच्चे अंडीमें रखकर खिलावे ऊपरसे कच्चा दूध वगैर मीठेका पिलावे, और बुखारके वास्ते अदरक३२मासे अजवा- यन 8 मासे इनको पीसकर अर्क निकाल कर इनके साथ खिलावे ऊपरसे कच्चा दूध पिलावै और जिस्म- के दरदके वास्ते भेडके दूधके खोवेके साथ खिलावे ऊपरसे घी खिलावे पथ्य दूध चावल अरहरकी दाल वगैर नमक की। अथ संखियाकी विधि नं० ३५. छटाकर भर संखिया घीगुवारके अर्कमें खरल करके
(२६) खूपचन्दचिकित्सा।
लपट निकलती रहे उन झरोंखोंके ऊपर ईंटोंको ऊँचा
करदे जिससे लपट हांडीके मुखतक जाय १६ पहर
आंच होनेपर हांडीके मुखको ढकदेजब हांडीकेमुखका
रेत ऐसा गरम होजाय कि जिसमें धानकी खील हो,
जाय तव जान ले कि दवा ठीक बनगई रंग सुर्खहोगा
काला रंग हो जाय तो जानो दवा नहीं वनी दवा
शीशीकी नारमें आजावै वह बनगई या जो शीशीकी
पेंदी में दवा सुर्ख होजाय तो जानलो कि बनगई २४
पहरमें नहोवै तौ३२पहरकी आंचदे हांडीकी पेंदीमें छेद
करके अवरख लगावे छेद एक रुपये बरावर चौडाकरे
उस अवरखके ऊपर शीशी रखकर बालूभरदे मात्रा
१ रत्तीकी पुष्टिके वास्ते जावित्री, जायफल, लौंग,
केशर, वंशलोचन, इलायची, सपेद, मोती यह सब
'एक एक रत्ती मिलाकर बारीक पीस कर सहतं के साथ
खावे और फालिजके वास्ते दवा १ रत्ती जावित्री
कस्तूरी १ चावल सहतमें मिलाकर खावै और सीत
आगया हो या सांस सरदीसे बढगई हो तो रत्तीदवा
अदरकके अर्कके साथ खिलावे पूरी मात्रा १ रत्तीकीह
वाकी जैसा मौका होय कमदे बलगमीखांसीको बहुत
फायदा करताहे अनुपान ऊपर लिख चुके हैं मौकेके
साथ देना चाहिये।
वैद्यकसार। (२७) अथ रससिन्दूरविधि नं०३२. पारा शुद्ध पल पांच५ गंधक शुद्ध पल पाँचपनौसा- दर टंक दो२फिटकरी टंक चार ४ इन सबको पीसकर आतशी शीशी में भर कर रसमानिककी तरह पका लेवै आँच पहर २४ की दे माना पूरी १ रत्तीकी, यह सरदीकी बीमारीको जियादा फायदा करताहै और वल करनेमें किसी कदर रसमानिकसे कमहे और वांकी वोही तासीर है वोही अनुपान है आँच मामूली लक- डीकी करना चाहिये। अथ हरतालकी विधि नं०३३. हरताल पैसा दोरभर लेकर घीगुवारके रसमें खरल करे पहर आठ८ फिर सहजनेकी जडके रसमें खरल करे पहर आठ८फिर गोली वनायकर सुखायकर का- गजी नीयूके भीतर धरे और ऊपरसे सात कपडौटी करे और गोला बनावे तिस पीछे पीपलकी लकडीकीराख कराये हाँडीमें भरे तब गोला वीचमें रखकर ऊपरसे राख मुँहतक दाविके खूब भरै और हाँडीपर सात कपडोटी करे फिर हॉडीके मुखपर परियाधर वज्रमुद्राकरे तिस- पर तीन कपडोटी कर सुखायकर भट्ठीपर चढाय दे ऑच पहर २४ की देय ठंढा होय तव उतारले वस हर ताल बनगया मात्रापूरी १ रत्तीकी पानके साथ खावे।
(३०) खूबचन्दचिकित्सा । टिकिया बनाय कर सुखावै फिर आधाझारेकी राख करक एक हाँडीमें सवासेर राख भरकर बीचमें टिकिया बखै फिर ऊपरसे सवासेर राखभरै और खूब दवायदेय चूल्हेपर चढाय कर वेरीकीलकडीकीआँच दे हॉडीको देखता रहे राखम दराज.आवै तो थोडीसी राख डाल- कर दवादे आँच मंदी करै इसी तरह आँच छै पहर करे उसके बाद हाँडी ठंढी होने पर उतार ले दवा निकालले टिकियाके ऊपर जो राख जमजाय उसको छील डाले संखिया सफेद होजायगा जो कुछ जरदी वाकी रहै तो दूसरे दिन फिर आँच देवै संखियाकी मात्रा तथा अनु- पान तथा गुण हरताल नं३४ के मुताविकहै और कोड तथा फालिज तथा कुव्वतवाहाको भी बहुत फायदा करताहे तरकीब सब हरतालके मुताबिक है। अथ शिंगरफकी विधिनं० ३६. टके भर शिंगरफ अदरकके आधसेर अर्कमें घोटते घोटते सुखा ले शिगरफ बन गया मात्रा आधी रत्तीसे १ रत्तीतक वलगमी खाँसीको पानमें रखकर खिलावे और बुखारवालेको तुलसीकी पत्तीमें रखकर खिलाये घंटेभर पहले बुखारसे और कुबतवाहाको सहतमै खिलाने फायदा करेगा।
. वैद्यकसार अथ शिंगरफ वजरकँधेवालेकी विधि न०३७. शिंगरफको जेतीके रसमें कागजीके रसमें कांजीमें तीन तीन दिनतक दोलायंत्रसे पकावै। इति शोधन । अथ मारण। ऐसे शुद्ध हुए शिंगरफको पैसा पैसा भरकी चार डेलियोंको चार तह कपड़ेकी छोटी थैली वनावे उसमें डालकर थैलीका मुह डोरेसे बांध दे और पावभर वजरकन्धको पीसकर गीला बनाकर थैली शिंगरफकी गोलाके बीचमें रखकर ऊपरसे अंडके पत्तोंसे लपेटकर उसके ऊपर मट्टी लगाकर गोला बनावै और दस कंडोंकी आंच फूकद कंडे पांच ऊपर पांच नीचे खखै वीचमें गोला रखकर फूकदे ठंढा होने पर थैली गोलामेंसे निकाल ले इसतरह वजर- कन्धेकी १०८आंच दे हर आँचौ पावभर बजरकंधा पीसकर शिंगरफकी थैली पर लगाकर गोला बनाया जायगा और अंडके पत्ते लपेट कर ऊपरसे मट्टी लगा कर गोला बना कर दश कंडोंमें फूंका जायगा कंडे न पतले हों न मोटे हों अच्छे हों इस प्रकार फूंका हुआ शिंगरफ चन्द्रोदयसे भी अधिक गुण करताहे मात्रा १ रत्तीकी १ रत्ती लौग मिलाकर सहतमें खावे खूपचन्दचिकित्सा। सुवहको भूख करता है काम अधिक होय इसका अनुपान चन्द्रोदयके मुताबिक है वैद्यदर्पणकी रीतिसे बनाया और बरताहै। अथशिंगरफकी विधि नं० ३८. शिंगरफ १ तोला लेकर पहिले तीन दिन दोना- मडुवाके अर्कमें भिगोया जावे चौथे दिन १ तोला अफीम उसी दौनामडुवाके अर्कमें मिलाकर एक कप- डेकी पट्टीपर खुश्क करके शिंगरफ पर लपेटदे और डो- रेसे खूव बांधदे फिर १ सेर रोगन कडुआको कढाईमें आंचपर चढावैऔर बेरीकीलकड़ीकी आंचमन्दीमन्दी चार पहर दे अगर चार पहरमें रोगननबले तो आंचसे वालदे इसी तरह तीनदिन आंच दीजावै तब शिंगरफ बन जायगा पुरना होनेसे आधी । रत्तीसे १ रत्तीतक मक्खनके लाथ खाये कुव्वतवाहाको बहुत मुफीद है। अथ शिंगरफ संखियाकी विधि नं. ३९. शिंगरफ१ एक तोलाकी छोटी डली और सफेद संखियादमासेकी छोटी डली लेकर दोनोंको वनअंजी- रके दूध भिगोकर सात दफे खुश्क करे फिर तिल्लीका तेल २ दो सेर लेकर एक कढाईमें चढाव उसमें शिंगरफ संखियाकी डली चार तह कपडे में बांधकर लटका और चार घन्टेकी मन्दी आंच देवै फिर नीचे वैद्यकसार। (३३) लिखे हुए कामें दवाईको पीसकर खरल करैजब खुश्क होजावै तब रखले दवाई बनगई काढाs= पाव पानी चढावै जब s= आधपाव रहजावै तव काढा छानकर उसमें खरलकरे दवा काढेकी जाफरानश्मासे लोग मासे इलायची सफेद मासे जायफल ४ मासे अफीम ४रत्ती मूसली सफेद १तोले, खुगक एक चावल दमाको अनारके छिकलाकी राखमें दे,सूखे दमाके वास्ते जाम- नके मुकत्तरमें, पित्तीके वास्ते १ तोला मुकत्तरमें । अथ शिंगरफकी विधि नं. ४०. १ शिंगरफ२०तोले२ भेड़का दूधडा सेर,३ सफेद घुगुची४०तोले,४कुचलेका पानी 5१ ॥ सेर, ५ मीठा तेलिया २० तोले, ६ भिलावा २० तोले, ७ लौंग ३०तोले, ८ आकका दुध । सेर, १ यूहरका दूध 5॥ सेर, १० बड़ी इलायची १० तोले, ११ केशर १॥ तोले, १२ अफीम १ तोला १३शराब २ बोतल, १४ मुगेंके अण्डे २४ नग, १५ बकरेका खून 5२ सेर इन सब दवावोंको सात रोज घोटे और पकी चीनीके पियालेमें रखकर दूसरे पियालेसे ढक दे और ऊपरसे १ कपड़मिट्टी करके उस सम्पुटको बालूके बीच में हांडीमें रक्खै और हांडीका मुंह वन्दकरके कपडोती करदे और 5८ सेर कंडोमें रखकर फूंकदे निकाले तो ३
(३४) खूबचन्दचिकित्सा।
रंग सुर्ख होगा और तेलका कुछ गीलापन रहेगा
खुराक १ रत्तीसे ४ रत्तीतक, वातव्याधिको फायदा
करता है और पुटभी है अनुपान जैसा मौकाहो लेकिन
दवा सुखाकर पियालेमें रखे।
अथ अभ्रककी विधि नं०४१.
कृष्ण अभ्रक लेकर कूटके महीन रेतसा करले और
काले कुकरौंदे, जिसकी डंडी काली होतीहे उसके
अर्कमें घोटे चमक जाती रहै उसके पीछे टिकिया
बनाकर सुखाले फिर भंगको बारीक पीसके कागजके
समान टिकिया पर लेप करे फिर उसको सुखा ले
दो सरवोंमें रख गजपुटकी आंच दे.सरवोंका मुह बन्द
न करे एकही आंचमें भस्म होगारंग सुर्ख होगा।
यह एक आंचका अभ्रक १००० आंचकी बराबर
गुण करताहै और.वही अनुपान है और सरवेके अंदर
टिकियाके तले ऊपर एक एक पत्ता आकका रखदे
लेकिन २तोले दवाहो और २ रुपये वराबर टिकिया
वनावै तब दवा ठीक बनेगी।
अथ अभ्रकरसायन नं०४२.
कृष्ण अभ्रकको शुद्ध करके दो दिन जंभीरीके रसमें
घोटे तीन दिन काँजी संगके १ दिन त्रिफलाके रसमें
१ दिन सेजनेके रसमें घोटे १ दिन छुईमुईके रसमें १
वैद्यकसार।
(३५)
1
दिन असगन्धके रसमें घोटै फिर सम्पुटमें धरके १
मटकेमें कंडेका चूर्ण करके भरदे और बीचमें दवाईका
सम्पुट धरके फूंकदे जब ठंढाहोजाय तब निकाले मात्रा
एक उडद बराबर खाय नारियलके दूधके सँग खानेसे
सब रोगको दूर करे और मुरैठीके चूर्ण और ब्राह्मीके
रसमें सेवनसे आयुको बढावै और सब रोग दूरक
और शंखाहुलीका चूर्ण और गिलोय के रसमें खाय
तो उमर बढै और सब रोग दूर होयँ और मैंगरापत्र
आमलेका चूर्ण मिश्री काले तिल मिलाय उसके साथ
खाय तो बुढापा नहीं होय अँगरेका रस और दूध
मिलायके खाय मूक वक्ता होय और बहिरा सुनने लगे
जिसके पुत्र न होय उसके पुत्र होय बाल काले हों
दांत पुष्ट हों शरीर पुष्ट होजावे ।
अथ अभ्रककी दूसरी विधि नं०४३.
धान्याभ्रकको एक दिन कुकरौंधेके रसमें घोटे
और टकेभरकी टिकियाको बाँधै घाममें सुखायटिकि-
याके तले ऊपर आँकका पत्ता रक्खै सरवा सम्पुटकरके
दो सेर कंडे के बीच सम्पुट धरके आँच दे ऐसे ही चौदह
आँच दे अथवा जबतक चमक रहे तबतक केवल
कुकरौधेके रसमें पोटके और इसी तरह एक दिन
गोमूत्रसे-घोटके सात आँच दे और इसी तरह त्रिफलाके
खूबचन्दचिकित्सा।
काढ़ेमें एकदिन घोटके सात आँच देवे तिस पीछे एक
दिन आकके दूधसे घोटके ७ सात आँचदे तिस पीछे
जो बहुत लाल करा चाहे तोश्यारदिन वर्गदकी जटाके
रसमें घोट घोट ७ आँच दे अदरकके अर्कमें आखीर
वक्त जब शीत आगया हो तव दिया जावै ।
अथ सहस्रपुटी अभ्रकमारणविधि नं० ४४.
आँकके दूधकी१६पुट, १ वटके दूधकी १६ पुट,२
थूहरके दूधकी १६ पुट,३ घीगुआरके रसकी१६पुट,४
अंडके जडके रसकी१६पुट,५ कथकी१६ पुट,६मोथा
१६ पुट,गिलोय १६ पुट, ८माँग १६ पुट, ९ गोखरू
१६पुट, १० कटेली १६ पुट, ११ शालपर्णी १६ पुट,
१२पृष्ठपर्णी१६पुट,१३ सरसों १६ पुट, १४ चिरचिटा
१६ पुट, १५ बरगदकी जटा १६ पुट, १६ वेलकी
छाल १६ पुट,१७ अरनी १६ पुट, १८ चीता१६पुट,
१९तंदू १६ पुट,२० हर्डकी वकली१६ पुट,२१ पाढर
१६ पुट,२२ गोमूत्र १६ पुट, २३ आमला १६ पुट,
२४ बहेडा १६ पुट,२५ जलकुम्भी१६ पुट,२६ताली-
सपत्र १६ पुट, २७ ताडवृक्षकी जड १६ पुट, २८
विसौंटा १६ पुट, २९ असगंध १६ पुट,३० अगस्तके
रसकी १६ पुट, ३१ भेंगरा १६ पुट, ३२ केलाकन्दले
रसको १६ पुट,३३ धतूरके रसकी १६ पुट,३४ लोध
"
वैद्यकसार।
(३७)
१६ पुट, ३५ देवदारु १६ पुट, ३६ दोनों दूवके
रस १६ पुट, ३७ कसौंदी १६ पुट, ३८ मिर्च १६पुर,
३९ अनारके रस १६ पुट, ४० मकोय १६ पुट, ४१
शंखपुष्पी १६ पुट, ४२ तगर १६पुट, ४३ ब्राह्मी१६
पुट,४४सूर्यमुखी १६ पुट, १५इन्द्रायन १६पुट, ४६
भारंगी १६ पुट, ४७ घुसरायन १६ पुट, ४८कैथ१६
पुट, ४९ शिवलिंगी १६ पुट, ५० ढाक ३६ पुट,५३
तुरई १६ पुट, ५२ मूसाकर्णी १६पुट,५३जवासा १६
पुर, ५४ मछेली १६ पुट, ५५कलौंजी १६ पुट, ५६
हुलहुला १६ पुट, ५७ शतावर १६ पुट, ५८ बकरेके
खूनकी १६ पुट, और अधिक देना चाहे तो जटा-
मासीकी १ पुट, गोदूधकी १ पुट, १ गोदही १ पुट,
गोघृत पुट, शहद १पुट, खांड १ पुट, पालक १ पुट,
मैनफल १ पुट।
बाकी बरगदकी जटाके काढेकी पुढे दे जबतक
लाल होय इससे अधिक और देना चाहे तो.एक एक
पुट इन दवाइयोंकी और देदेय ।
ढाकके फूलकी १ पुट, गुड़की १ पुट, सुहागा "
पुट, चमेली १ पुट, सप्तपर्णी १ पुट, कैंच पुट,गाजर
(१ पुटे, पियाज १ पुट, ९ लहसुन पुट, उटंगन १
पुट, हिलमोचिका १ पुट, अमलवेत १ पुट, दूधी १
,
(३८) खूबचन्दचिकित्सा।
पुटे, पातालगडरी १ पुट, खुराक २ चावलसे १ रत्ती
तक खिलाया जावेगा अनुमान जैसा मौका देखें और
इस्के गुण अनन्त हैं।
अथ तांवामारणविधिपहिली नं० ४५.
तांबा बीस तोले ,पारा दस तोले, गंधक वीस तोले
सब शुधे हों तांबेके वर्क जौके बरावर काट लिये जावें
फिर पारा डाल कागजीके अर्कौ जबतक पारा चढे
तबतक घोटे जब सब पाग चढि आय तव तीन दफे
कागजीका अर्क डाल कर एक एक पहर घोट घोटे
कर धोता जाय फिर सुखा कर गन्धक डाले बारीक
खैरल करके शीशी में भर वालूयंत्रसे बारह पहरकी तेज
आंचदे तव भस्म हो फिर वीरवारमें खरल कर गज
पुटमें सात आं चदे तव सिद्ध होगा।
मात्रा रत्तीभर टेसूके फूलके काढेमें दे तो पेट
फूलना और पेशाब वन्द होजाना दूर होजाय, सन्नि-
पात फोतामें पेशाव उतरि आताहे उसमें दे वाकी
बहुत मजॉकी दवाहे।
आगे ७आंच घीगुवारकी देओ अथवा नहीं दओ
जो तावमके आनेकी भ्रांति रहिनावे तो बीयवारके
आंच देनेकी जरूरत वरना नहीं।
-
वैद्यकसार। (३९) अथ शीशे (नागरस) की पहिली विधि नं०४६. पहिले शीशेको कढ़ाईमें चढ़ा कर ऊपरसे मकोयके पेड़की पत्ती सब डालता जाय औरकरछुलीसे चलाता जाय जबतक भस्म न होवे दो दिन ऑच देय फिर कागजी या दहीके रसमें टिकिया बॉधिके सुखाकर फिर चार पहर ऑच देय दो दो घटेको ढक देय रंग सुर्ख हो जावेगा, मात्रा रत्तीभर बुखार और खॉसीके लिये कुव्वतके लिये और सुजाक पुरानी होनेकी वजह- से कमर या पिउडीमें दरद रहताहो इन सबके लिये चटनी सितोपलादमें दिया जावै बहुत नफा करताहै।। अथ शीशेकी क्रिया नं० ४७. शुद्ध शीशा एक मिट्टीके ठिकरमें एक सेर डालै आगपर चढ़ावे केवड़ेकी लकड़ीसे चलता जाय जब- तक भस्म होवै, उसके बाद शोरा एक सेर पिस कर रखले थोड़ा थोड़ा डालता जाय लेहेकी करछीसे चलाता जाय तव शोरा कीचड़की तरह पतला होजाय तभी और डालता जाय जब सब शोरा पड़ चुके जब जरा दूरसे घोटता जाय शोरा एकदम बल जायगा तब सब दवाको ठिकड़ेमेंसे छील कर इकट्ठी करके धो लेय उसके बाद वरगदकी जटाके अर्क
(४०) खूबचन्दचिकित्सा।
और केवड़ाकी जड़के अर्कमें घोंटकर टिकिया बनावे
सुखाकर रख लेय फिर पाव भर वाको चार सेर
कंडोंकी आँचमें सम्पुट करके जवतक शीशा भस्म
होकर नरम नहो जाय तबतक आँच देवै यह वैद्यककी
नहीं है हमारी जाती निकाली हुई है इस शीशेका रंग
कदर जरद होगा मात्रा आधी रत्ती आध पाव अर्क
अनारशीरीके साथ दिया जावै, तो खून बवासीर
वन्द होगा और सुजाकको अर्क गिलोय दोतोले और
शहद एकतोलेके साथ दिया जावै । और छहारा धेला
भर तज धेला भर खूवकला धेलाभर शामको एक
मिट्टीके बरतन में पावभर पानी में भिगोवे सुबह छान
कर मिश्री डालकर पिये सिर्फ यही बहुत नफा करता
है अगर इसके साथ कुश्ता दिया जावे तो बहुतही
फायदा करता है और विहीदानाके लुआवके साथ कुश्ता
सुजाको खिलावे।
अथ कुश्ता राँग का नं०४८.
शुद्धराँगको कढ़ाई में गला और भाँगइमली हलदी
पीपलकी छाल यह सब चीजें राँगके बराबर बरावर
लेकर पीस कर रख ले जिस वक्त राँग गल जावै तब
उसमें थोडीथोडी चीजें डालता जावै और करछलीसे
चलाता जावै जब सब राख होजावै तब ढक कर कढ़ा-
वैद्यकसार। (४१) ईमें दो पहर खूब आंच दे फिर उतार कर रखले जब ठंढी हो जावे तब छान कर रख ले फिर गुवारके रसमें घोटकर टिकिया बनाकर सुखा ले आठवा हिस्सा अ- जवायन नीचे सरवेमें बिछा कर ऊपर टिकिया रक्खें फिर टिकियाके ऊपर अजवायनआठवां हिस्साविछावे और आंचदे फिर खालिसघीगुवारकेरसमें घोटेऔर १७ आंच दे फिरपीगुवारके रसकेसाथमेवारहवां हिस्सापारा शिंगरफका निकलाहुआ डालकर आंचदे पाराहर आं- चमें पडेगा फिर हलदी सेमलकीमूसलीसतावरगोखरू तालमखाना वीजबंद गिलोय संभालू इन सबकी तीन तीन आंच दे यह वंग बहुत अच्छी है, प्रमेह जरियान प्रदरको परत्तीवंग, रत्तीसिलाजीत, रत्तीवंसलोचन परत्ती सफेद इलायची, १ रत्ती सतगिलोय इन सबको पीसकर मिलाकर सहतमें खावे पहले वंगको दो रोज गुलावमें घोट ले जाडेमें एक रत्ती बंग खावे गरमीमें आधी रत्ती खावे और हलदी सितावर वगेरा जो दवा लिखी हैं इनमेंजिसका अर्क निकल आवे तो उसमें घोटे और आंच दे और जिसका अर्क नहीं निकले उसका काढा करके उसमें घोटकर आंच दे । अथ रांगखीलवालेकी क्रिया नं०४९. एक छटांक रांगा चमचमें गलाने उसमें टके भर पारा डाल कर नीचे कुछ अरसेसे छोड़े जिसमें पतला
(४२) खूपचन्दचिकित्सा।
पत्र बन जाय उसके बाद दो कंडे बड़े आध आध
गजके लेवै पहिले एक तह छोटे कंडोंकीगड्ढे में बिछाये
उसके ऊपर बडा कंडा रक्खे उसके ऊपर सवासेर
शीशमका बुरादा चिछावै उसके उपर रांगके पत्र धरै
ऊपरसे फिर सवासेर बुरादा विछावे उसके ऊपरसे
फिर दूसरे कंडेसे ढक दे फिर उसको ऊपरसे एकतह
छोटे कंडोंकी लगावै फिर आग देवै जब ठंढा होजाय
तब संभाल कर खील वीनले जो कच्चा रहिजाय तो
फिर दुवारा ऐसा ही करले और शीशमके चुरादाकी
जगह कड़वी खलमें और मेंहदीके पत्तोंमें बन जाताहै
बाकी सब वही क्रिया है यह ऊपरवालेसे किसी कदर
कमजोरहे एक रत्तीशहदके साथ खाय तो कुव्वतवा-
हको फायदा करे और धातु पतली वन्द हो।
अथ रांग शोधनविधि नं० ५०.
शुद्ध रांगड-आध पाव लेकर एक ठिकरेमें रखकर
पिघलावै जब पिघल जाय तव शोरा टके भर डाल
कर छरीसे चलाता जाय जब कीचसा हो जाय तब
फिर टके भर शोरा डाले इसीभांति ६ दफे शोरा
डाले और कीवसा करे जबतक ठिकरेसे आग न
निकले तवतक करछुरीसे रगड़ता रहे जब आग
निकले तब शोराको जलजाने दे जब युझे तब उतारे
वैयकसार। (४३) छुरीसे खुरच कर महीन पीसकर एक पियालेमें डाल कर पानी डाल कर हाथसे मलदे राँग तले वैठि जायगा और पानी निकाल देय इसी भाँति तीनदफे करे फिर राँगको निकालदे कर सुखा लेय फिर बराबर हरताल मिलाकर कागजी निम्बूके अर्कमें एक पहर घोटै फिर शराव सम्पुट करके गजपुटमें फूंक देय फिर दशवां अंश हरताल डाल कर कागजीके अर्कमें घोटकर गजपुटमें फूंक देय इसी भाँति दश दफे दशा अंश हरताल डालकर फूंका जायगा तब शुद्ध हो जायगा तथा भस्म होजयगा खुराक १ रत्ती वंस- लोचन सफेद इलायची मोती चाँदीके वर्क इनके साथ शहतमें मिलाकर खावै पहिले रांग और मोती अर्क गुलाबमें तीन दिन खरल करले तो प्रमेहको धातु पुटको बहुत फायदा करेगा। कुमुदेश्वर रस नं०५१. पारा शुद्ध गंधक शुद्ध अवरख शुद्ध शिंगरफ शुद्ध मनसिल शुद्ध सारमनसल सबको पीसकर चौदह भा- वना सतावरके अर्ककी देय खुराक १ रत्ती सहत तथा शर्वत अनार तथा शर्बत नीलोफरमें खाने बुखारकी दाहमें तथा बुखार उतारनेको वंसलोचन सफेद इलाय- ची मिलाकर दे खासीमें जक्ष्मातक २ मासे मिश्री काली मिच मिलाकर शहतमें खिलावै।
(४६) खूबचन्दचिकित्सा ।
दमें मिलाकर खरल करे दो पहर भर फिर तविके
संपुट में रखकर मूंज डालकर बनाई हुई मिट्टीसे खूब
मजबूत संपुट करै फिर सुखा कर पांचसेर कच्चे जंगली
कंडोंकी आंचमें फूक देय ठण्ढा होने पर निकाले फिर
चार मासे शिंगरफ और चार मासे पारा मिलाकर अं-
डीके तेलमें खेरल करे और पहिलेकी तरह आग देय
ऐसी ही सौ पुट आंच देय हर दशवीं आंचमें तविका
नया और सम्पुट लगाताजाय तो सिद्ध होगा। मात्रा
एक चावलभर अनुपानसे देय तो नामर्द मर्द होय
पुष्टि और बहुत गुण करै । कंडे पाँच सेर कच्चे यानी
अंग्रेजी तोल ।
अथ मण्डूर बनानेकी किया नं०५६.
लोहेकी कीटिको बहेडेकी लकडीके कोयले में लाल
करके बहेडेकी लकडीके कठरेमें गोमूत्र भरकर सात
दफे बुझाय देय फिर इमामदस्तेमें कूटकर कपड़-
छान करके धोयकर साफ करलेय फिर निफलेके काढेमें
कढ़ाईमें डाल कर तेज ऑच देय उसके बाद खट्टेदही
तथा मठेसे ४ पहर घोटकर गजपुटमें ऑच देय इसी
तरह २१ ऑच देय तथा जबतक लाल नहीं हो
ऑच देता जावै आगे गजपुटका प्रमाण गढ़ा बारह
गिरहका रक्खे यह दवा संग्रहणी तथा अतीसारकी
वैद्यकसार। (४७) है। और बुखार तथा सूजनकी है खुराक १ रत्तीसे २ रत्ती तक माठेके साथ तथा शहतके साथ। अथ मंगेके कुश्ताकी विधि नॅ० ५७. मूंगा एक छटांक भर लेकर एकमलैयामें घीगुवारके पढेका गूदा नीचे भरे उसके ऊपरसे मूंगा धरै फिर मूंगेके ऊपरसे आधपाव गूदा धरे बादको मलैयाका सम्पुट करके गजपुटमें फूंक देय एक रत्ती पानमें या शहतमें खांसी बुखार और कुव्वतको नफा करताहे जियादा कुवतवाला करनाहो तो चटनी सितोपलाद जिसमे मोती और चांदीके वर्क मिलेहो उसमें खाना चाहिये।और मूगेके कुश्तेको और अच्छाकरनाचहेतो मूगेके साखको तीनरोज पहिले कागजीअर्कमेभिगोयदे अथ मोतीके कुश्ताकी विधि नॅ०५८. मोती एक तोलेघीयवारके पट्टेका गूदा चार तोलेके वीच रखकर सरवासम्पुटकर चारसेर कंडोंकी आंचमें फूंक देय एक रत्ती चटनी सितोपलाद जिसमें मोती और वर्क चांदी मिलेहो उसके साथ देना चाहियेकुव्व- तके लिये और हिचकीकी बीमारीके लिये बहुतही अच्छी चीजहे। अथ हीरा व चुन्नीमारण विधि नॅ० ५९. जो हीरा सुर्ख खिले तोसबसे अच्छाहे पहिलेहीरेको
खूपचन्दचिकित्सा।
दमें मिलाकर खरल कर दो पहर भर फिर तविके
संपुट में रखकर मूंज डालकर वनाई हुई मिट्टीसे खूब
मजबूत संपुद करे फिर सुखा कर पांचसेर कच्चे जंगली
कंडोंकी आंचमें फूक देय ठण्डा होने पर निकाले फिर
चार मासे शिंगरफ और चार मासे पारा मिलाकर अं-
डीके तेलमें खेरल करे और पहिलेकी तरह आग देय
ऐसी ही सौ पुट आंच देय हर दशवी आंचमें तांबेका
नया और सम्पुट लगाताजाय तो सिद्ध होगा। मात्रा
एक चावलभर अनुपानसे देय तो नामर्द मर्द होय
पुष्टि और बहुत गुण करे। कंडे पाँच सेर कच्चे यानी
अंग्रेजी तोल ।
अथ मण्डूर बनानेकी किया नं०५६.
लोहेकी कीटिको बहेडेकी लकडीके कोयलेमें लाल
करके बहेडेकी लकडीके कठरेमें गोमूत्र भरकर सात
दफे बुझाय देय फिर इमामदस्तेमें कूटकर कपड़-
छान करके धोयकर साफ करलेय फिर त्रिफलेके काढेमें
कढ़ाईमें डाल कर तेज आच देय उसके बाद खट्टेदही
तथा मठेसे ? पहर घोटकर गजपुटमें आँच देय इसी
तरह २१ आँच देय तथा जवतक लाल नहीं होवें
आँच देता जावै आगे गजपुटका प्रमाण गढ़ा बारह
गिरहका रखे यह दवा संग्रहणी तथा अतीसारकी
वैद्यकसार । (४७) है। और बुखार तथा सूजनकी हे खुराक 3 रत्तीसे २ 'रत्ती तक माठेके साथ तथा शहतके साथ। अथ मूंगेके कुश्ताकी विधि न० ५७. मूंगा एक छटांक भर लेकर एकमलैयामें घीगुवारके पढेका गूदा नीचे भरै उसके ऊपरसे मूंगा धरै फिर मूंगेके ऊपरसे आधपाव गूदा धरे वादको मलैयाका सम्पुट करके गजपुटमें फूंक देय एक रत्ती पानमें या शहतमें खांसी बुखार और कुव्वतको नफा करताहै जियादा कुव्वतवाला करनाहो तो चटनी सितोपलाद जिसमे भोती और चांदीके वर्क मिलेहों उसमें खाना चाहियोऔर मुंगेके कुश्तेको और अच्छाकरनाचाहेतो मूगेके साखको तीनरोजपहिले कागजीअर्कमेभिगोयदे अथ मोतीके कुश्ताकी विधि नॅ०५८. मोती एक तोलेघीगुवारके पट्टेका गूदा चार तोलेके वीच रखकर सरखासम्पुटकर चारसेर कंडोंकी आंचमें फूंक देय एक रत्ती चटनी सितोपलाद जिसमें मोती और वर्क चांदी मिलेहों उसके साथ देना चाहियेकुव्व- तके लिये और हिचकीकी बीमारीके लिये बहुतही अच्छी चीजहे ।। अथ हीरा व चुन्नीमारण विधि नॅ० ५९. जो हीरा सुर्ख खिले तोसबसे अच्छाहे पहिलेहीरको
(४४) खूपचन्दचिकित्सा।
अथ सार (लोहा) की पहली विधि नं. ५२.
शुद्ध लोहेका चूर्ण वारह पैसेभरले शिंगरफ एक पैसे
भर दोनों घीगुवारमें दोपहर घोटे फिर चार टिकिया
वनावै सरवा सम्पुट करके चारसेर कंडोंकी आँच दे
इस प्रकार सात आँच दे तो भस्म होगा, हर आँचमें
शिंगरफ पेसेभर डालता जाय यह सार अक्सर दवा-
ओंके जोगमें डालनेके काम आता है।
अथ सारकी दूसरी विधि नं. ५३.
लोहा पारह पैसेभर, मनशिल पैसेभर घीयवारके
रसमें दोपहर घोट कर सात टिकिया बनावै सरवा
सम्पुट कर दो सेरकडोंकी आँच देय ऐसेही वारहरोज
आँच देय तो भस्म हो, हर आँचपर मनशिल डालता
जाय,कुलदवामें यही शामिल किया जाताहै।कफकी
खासीमें पीपल या पानके साथ अथवा शहतके साथ
देवै ।बुखारको मुनका भून कर उसमें रखकर एक घंटा
पहिले दिया जावै अगर खुश्कीहो तब कासनीके पत्ते
फाडकर उसमें शकंजवी दारमी डाल कर उसके साथ
दिया जावै । साँसको पीपलके साथ दिया जावे।
चुरखार और सुश्कीकी हालतमें शरवत नीलोफरके
साथमें दिया जाये।
वैद्यकसार। (४५) अथ सारकी तीसरी विधि नं. ५४. असली फोलादरेत कर शुद्ध आठतोलेमें आठ मासे पारा डालै फिर शरावमें दोपहर वरावर खरल कर रुके नहींवादको सवा सम्पुट कर कपडोटीकरकेपावभरक डोंकी आंचमें फूंकदे ठंढा होनेपर निकालै फिरआठमासे पारा डाले शराब पहिलेकीतरह खरल करे और आंच देवे इसीतरह अस्सी आंच देवै और हर दशवीं आचमें सरवा नये बदलता जाय । फिर उसमें सफेद संखिया चार माशे मिलाकर शरावमें पहिलेकी तरह खरल करै और आंचदे ऐसी इकीस आंचदे हर पुट में संखिया डा- लता जाय । फिर आतशी शीशीमें भर मुखवन्द कर गेहूके कोठेमें इक्कीसदिन दबा रखरखे फिर निकाले रंग नारंगीके समान होगा,मात्रा चांवल भर है पूस,माघमें खायासात रोज खानेसे बल खूब वढ जायगा। जित- नाही पुराना होगा उतना ही अधिक गुण करेगा। और इस फौलादको दो साल तक चूल्हेके नीचे गाड़ा रखे जिसमें हरवत आग जलतीहो तो गुण अधिक हो जायगा अनुपान जो चंद्रोदयका हे वही इसकाहे । अथ सारकी चौथी विधि नं० ५५. फोलाद रेतकर चार तोलेमें चार माशे शिंगरफ मिलावे फिर कुक्कुटके अंडेका तेल निकालकर फोला (४८) खूबचन्दचिकित्सा। कटैया जिसमें भटेकी तरह फल आताहे उसकी जड़ पावभर कूट कर उसमें रखकर गजपुटमें सम्पुट करके आंच देय वादको घोडेकी पेशावमें २१ बार बुझावे, उसके बाद लोहेके खरलमें खूब बारीक करै पत्थरका खरल घिस जाताहे जब खूब बारीक होजावे तब चाहे और खरल पुख्तामें डाल लेय एक तोले हीरा दो तोले शिंगरफ शुद्ध और वन अंजीरके दूधमें तीन रोज खरल- करै जो दूध कम मिले तो उसके जडकी छाल कूटकर अर्क निकाल लेवै उसमें खरल करै फिर एक रोज आकके दूधमें खरल करे फिर एकरोज कपास नरमाके अर्कमें खरल करै फिर एक रोज सेउड़के दूध खरल करे वादको गोला बनालेवे और तफसीलजेल दवाइ- योंको इकट्ठा कर उनमें रख कर गजपुटकी आंच देय ( दवा गोला बनानेकी) १ मेंढेका सीगश्तोले, २ कछुआकी पीठ ४ तोले, यहाथीदांत तोले,४कनैरकी छाल ४ तोले, सोना- मक्खी शुद्ध १ तोलेक्ष्मेदासिंगीतोले,इन दवाइयोंके दो हिस्से करे एक हिस्से में गूलड़का दूध८ आठ तोले उसके मिल जाने पर आकका दूध ८आठ तोले डाल कर खरलकर एकरोज दूसरेरोजरसेउडकाधडालकर खरल करे उसके अन्दर हीराका गोला रखकर सम्पुट पुख्ता करके गजपुटमें फूंक देय ठंडा होनेपर निकाल वैद्यकसार। (४९.) लेने इसके बाद निस्फ हिस्सा जो दवा बाकी उसको अव्वल तरकीबसे खरल कर हीरेको औरतके दूध ख- रल करके गोला बनाकर खुश्क करके निस्फ हिस्सा दवामें रखकर गजपुटमें फूंक देय हीरा खाक हो जा- वैगा चुन्नी भी इसी तरह बनाई जावेगी जो फायदा हीराके हैं वह होंगे नामर्दीको शिंगरफ एक चावल जो संखिया मिला हुआ आगे लिखा जायगा और दो चावल हीरा मिलाकर मक्खनमें खिलाये ४० चालीस रोज तक अच्छा होजावेगा। अथ लक्ष्मीविलास रस नं.६० १ अबरख १पल,२ रसराज१० माशे३ गन्धका माशे, भांग २५ दाम, ५ धतूरेके बीज २५ दाम, ६ विधारा २५ दाम, ७ सौंफ २५ दाम, ८ विदारीकन्द २५ दाम, ९ जायफल २५दाम,१०गुलसकरी२५दाम, ११गंगेरण२५दाम, १२ शतावर२५ दाम, १३ गोखरू २५ दाम, १४ जावित्री २५ दाम,१५ कपूर२५ दाम । इन पन्द्रहों चीजोंको पीसके पानीमें चार रत्ती गोली बांधे इसके खानेसे सन्निपात, वातपित्त रोग अगरह प्रकारके रोग कोड़के और वीस प्रकारके प्रमेह जाँय नाड़ी व्रण और गुदाके रोग भगन्दर श्लीपद गुल्म अतीसार अन्तर वृद्धि पीनस छर्दि अर्शमेद आ- ( ५२) खूबचन्दचिकित्सा। उतार लेय और शीशीको वालूयंत्रमें छे पहाकी आंच देय तब बन जाताहे वाकी सब वही ऊपरकी क्रियाहै इसमें गुण अधिक होता है खून बढाने और बुखार और भूखको एक रत्ती शहद के साथ खाय । और धातु पुष्ट और प्रमेहके वास्ते बंसलोचन सफेद इलायची और सतगिलोयके साथ खाना चाहिये । अथ नागरसहकीमदुर्गाप्रसादवाला नं०६४. गेरू दो तोले सेलमखरी दो तोले मोती सच्चे दो माशे इन सबको खरलमें सुरमेकी तरह बारीक पीसलेनै बुखा- रके वास्ते कासनी फाडकर एक सफेद इलायची मिला- कर दो रत्ती दवा शिकंजवी दारमीमें डालकर देना चाहिये जो बुखारकी गर्मी जियादा होय और किसी वजहसे खुश्की जियादा हो तो दो रत्ती दवा एक सफेद इलायचीमिलाकर शर्बत नीलोफर या शिकंजवी दार- मी या शहदमें देना चाहिये पेचिश और खांसी खुश्कमें लउकसीपिस्तांके साथ देना चाहिये और खून किसी जगहसे आता हो तो वंसलोचन और सफेद इलायची मिलाकर अर्क अनारके साथ खिलावै तो फौरन खून बन्द हो जावेगा। अथ शोराका कुश्ता नं० ६५. कंडोंकी उखली बनावै कि जिसमें दवा आ जाय शोरा वैद्यकसार। (५३) छटांक भर भाँग पावभर नकछिकनी सुखी पाव भरले पहिले उखलीमें आध पाव भांग रक्खें फिर आध पाव नकछिकनी रक्खै उसके ऊपर शोरा रक्खै फिर उसके ऊपर नकछिकनी रक्खै उसके ऊपर भांग रक्खे फिर दो तह कंडोंकी तले और दो तह ऊपर रखकर फूंक देय भस्म होजायगा रंग सफेद होगा सुजाकमें पानमें रखकर खावे सेहत होगी। अथ संग्रहणीकपाटरस नं. ६६. शुद्ध गन्धक शुद्ध पाराअभरक शिंगरफसारजाय- फल बेलगिरी मोचरस सिंही मुहरा अतीस सोंठि कालीमिर्च पीपल धायके फूल घृतमें सिकी हर्ड कैथ अजमोद चित्रक अनारदाने इन्द्रयव धतूरेके वीज गजपीपल अफीम इन सबको बराबर लेय पहिले पारे गंधककी कजली करलेय फिर पोस्तके छिकलेके रसमें मिर्च बराबर गोली बनावै अतीसार संग्रहणीको दही या मठेमें या अर्कवेलके साथ देनेसे बहुत नफा होताहै। अथ क्षुधासागर रस नं०६७. सोंठि कालीमिर्च पीपल त्रिफला पांचो नोन भुना सुहागा जवाखार सन्जी पारा शुद्ध गन्धक शुद्ध सिंही मुहरा ये सब बरावर ले पहिले पारे गंधककी कजली (५०) खूबचन्दचिकित्सा । मवात उदर रोग कस्ता कान नाक मुख जीभ रोग गलग्रह शिरशूल स्त्रीरोग सब जॉय ( अनूपान) मांस संग मिश्रीसंग मट्टासंग जलसंग सुरा संग खाय तो वृद्ध भी तरुण होने सौ स्त्रियोंसे भोग कर धातु बढे शरीर पुष्ट करै। अथ कुश्तासंगईसव नं ६१. अव्वल टुकडे करके संग ईसबके अर्क केवड़ा और अर्क गुलाव और अर्क वेदनुश्कमें सौ सौ हफे आगमें गरम करके बुझाया जावे उसके बाद केवड़ा अर्क अर्क गुलाब और अर्क वेद मुश्क तीनोंको मिलाकर चालीस रोजतक खरल करै उसे खुश्क कर शीशेमें रख लेवे खुराक एक रत्ती मक्खनमें मिलाकर खावे खुश्की और गर्मीकी बीमारीको मुफीद है दिलको ताकत देता है ऊपरसे दूध पीना चाहिये और दिल दिमागकी ताक- तके लिये परत्ती सफेद इलायची वंसलोचन मिलाकर शहदमें खावै ऊपरसे अर्क वेदमुश्क दो तोला पिया जावे दिल धड़कनेके वास्ते बहुत फायदा करताहे ॥ अथ कपूरभीमसेनी नं०६२. १ शोरा कलमी २ तोले,रलाल चन्दन २ तोले ३ सफेद इलायचीके दाने २ तोले, ४ कवावचीनी २ तोले,५ रतनजोता तोले ६ केसर ८ माशे, ७ पोदी-
वैद्यकसार।
(५१)
नेका सय ८३ माशे, ८ कपूर ४ तोले, ९ गुलावका
अर्क १० तोले।
इन सब दवाओंको अलग २ पीस कर फिर सबको
मिलाकर पीसले गुलाव डाल कर, थोड़ा गुलाब रहने
देय टिकिया बनाकर फूलकी थाली में रक्खै ऊपर
फूलके कटोरेसे ढंककर आटा लगाकर तले मोटी बत्ती
से घीका दीवा जलाकर कपूर उडालेय फिर रहि जाय
तो गुलाब डालकर टिकिया बनाकर उडालेय ऑखके
वास्ते फायदा करताहे और जियादा कीमतका बनाना
चाहे और जमाना चाहे तो इस प्रकार दवा मिलावे
कौदागोद अथवा बलका गोंद १ एक तोले, कस्तुरी
८माशे,अम्बर६माशे,इनको पीसकर मिलाके जमाले।
अथ मृगांककी विधि नं. ६३.
शुद्ध रांग एक छटांक भर शुद्ध गंधक छटांक भर
शुद्ध पाराछटांक भर नोसादर छटांक भर पहिले पारा
गंधककी कजली करे फिर सब दवाको मिलाकर खूब
वारीक सुरमेकी तरह पीसे फिर धेला भर शोरा मिला
कर आतशी शीशीमें भर कर कोयलोंमें रख कर दो
सूपसे चारों तरफ धौके कीलसे मुँह शीशीका खोलता
जाय बंद न होने पावे जब रंग सुर्ख लूका निकले और
कीलमें दवाका रंग मिम्लसोनेके चमकदार होजावे तव
(५४) खूपचन्दचिकित्सा। करें फिर अदरक रसमें सात पुट देय रत्तीभरकी गोली वनावे एक गोली लौंगके काढेमें देय तो हैजा और अजीर्ण दूरहों जिस कदर सेहत होवे उसी कदर दवा देरमें देखें पेट और पसलीके दरदको भी दूर करताहै और हाजमें की कुव्वत ज्यादा करता है। अथ रसकपूरकी विधि नं०६८ शिंगरफसे निकाला हुआ शुद्ध पारा, गेरू, पुरानी इंटकी सुखी, खरिया मिश्री, फिटकरी, सेंधानोन, बांवीकी मिट्टी, खारीनोन, कविस मिट्टी इन सबको अलग२ कपडछान करके फिर पारेको एक एक दवाईमें दोदोपहर खरल करे जिस दवाईमें खरल कर उसी स- मय फिर दूसरी दवाईमें दोपहर खरल कर ऐसेही सव दवाइयों में खरल करके फिर डमरूयंत्रमें ३२ पहरकी आंच देय चार लकडियांकी, पारेमें एक एक दवा डालता जावै और दो दो पहर खरल करता रहै खुराक दो चावलसे एक रत्ती तक आतशक तथाकोढ़को तथा जिस कदर स्यूनकी बीमारी हो सबको दूर करता है। छोटीसी खांडकी टिकिया बनाकर उसमें दवा रखकर निगल लेना चाहिये यह दवा मुंहमें नहीं लगना चाहिये क्योंकि किसी किसीके मसूडे सूज जाते हैं और ताकतके वास्ते तथा खफीफ सूनके विकारके वास्ते
वैद्यकसार।
(५५)
चन्दन सफेद घिसा हुआ लौंग वंसलोचन सफेद
इलायची इन सबको दवाके बगवर मिला कर गोली
बनाकर दूधके साथ खावे परहेज गुड़ तेल मिर्च खटाई
नहीं खाना चाहिये और आतशक कोढ़ वगेरावालको
फक्त बनेकी रोटी और घी वगैर निमक और मीठेके
खाना होगी।
अथ सोनामक्खी शोधन विधि नं० ६९.
तीन ३ पैसे भर सोनामक्खी और एक पेसा भर
सेंधानोन दोनोंको जमीरेके अर्क तथा विरिके
अर्कमें आँचके ऊपर कढ़ाई में घोटे करछुलीसे जवतक
सुख न हो तबतक घोटे जाय जब स्मृव मुर्ख होजाय
तब जानो शुधगई अगर सेंधानोन नहीं डाले तो भी
कुछ हरज नहीं।
अथ सोनामक्खी मारणविधिनं०७०.
शुद्ध सोनामस्वी चार ? पमेभर गन्धक एक पैसे
भर अंडीके तेल में एक १ पहर चोटकर लखेका सम्पुट
करें और उ.परम सरयेम रद करदय और २ दो सेर
फंडेकी आंच देश निद होजायगी।
अथ मूत्रकृच्छ नं०७१.
बंगपागशुधी गन्धक इन मनकोलो कपात्र मसाल
(५६)
खूबचन्दचिकित्सा।
कर एक रोज सफेद दूबके अर्कमें घोटै एक रोज मुरे-
ठीके काढेमें एक रोज गोखसकेरसमें एक रोज सेमरके
रसमें खरल करै फिर मूपामें रखकर भूधरयंत्रमें फूक
देय फिर पूर्वोक्तरसोंमें खरल करके तीन रत्ती रस सफेद
दूब मुरैठी सेमरके रसमें दे और दूधकी खीरके साथ
देय तथा प्रातःकाल शीतल जलके साथ देय एक खुरा-
कमें दरद जाता रहेगा मूत्रके होतेही मनुष्य सुखी होवे।
अथ वज्रमूपा बनानेकी क्रिया नं०७२.
दो भाग तिनकोंकी राख एक भाग बांबीकी मिट्टी
एक एक भाग लोहेकी कीट एक भाग सफेद पत्थरका
चूरा कुछ मनुष्यकेवाल सबको बकरीके दूध औदाय
दो पहर अच्छी तरह घोटै बादमें मिट्टीकी गौके थनके
समान मूपा बनावै और उसीका ढकना बनावे दवा
वंद करके ढंकना बंद कर उसी मिट्टीसे उसकी संधै
बन्द करदेय।
अथ भूधरयंत्र नं० ७३.
मूपेको बालूसे ढंककर ऊपरसे कंडोंकी आंच देदेय
यह दवा रसराजसुन्दरसे देखकर लिखी तत्काल फल
दिखलातीहे परीक्षा करके देखली हमने तजरवा किया।
अथ शीशा मारनविधि नं०७४.
शुद्ध शीशके चनेकै दालके वरावर टुकड़े कर आठ
तोले लेकर उसमें एक तोले मनसल डाल कर चौला-
वैद्यकसार।
(५७)
ईके अर्कमें एक पहरभर घोटै फिर अडूसेके काढेमें एक
पहर घोटकर टिकिया बनाय घाममें सुखाकर शराव
सम्पुटे करके गजपुट में फूंक देय इसी तरह सात आंच
देय भस्म होगा रंग काला होगा यह पेशावकी मर्जमें
जीर्णज्वरमें और ताकतके लिये काम आताहै ।
अथ मृतसंजीवनीवटीरससन्निपातपरनं०७५.
शिंगरफका पारा शुधी दो२ टंक गन्धक शुधी तीन
३ टंक तविश्वर चार टेक सुहागा शुधी दो टंक सिंही-
मुहरा शुधी एक टंक काली मिर्च चार टक पारा
गन्धककी कजली करै फिर सब दवा डाल कर खरल
करै ब्राह्मी रसकी एक पुट देय अदरककी दो पुट देय
और सोंठि मिर्च पीपल औटाय उसके रसकी एक पुट
देय फिर एक रत्तीकी गोली बनावै अदरकके अर्कके
साथ खावै सन्निपात और मूर्छा दूर होय आमवात
वायशूल विषमज्वर दूर होय ।
अथ पारामारण नं. ७६.
पारा १ एक तोला और तेजाव गन्धकका पांच ५
तोला एक कुल्हैयामें पारा और तेजाव भरकर थोडेसे
कंडे अलहदा सुलगादे जब धुंआ निकल जावे तब उस
कुल्हैयाको कडों पर रखदे पारा खील होजावे तब
उतारले पारा सफेद खील होजायगा।
(५८) खूबचन्दचिकित्सा। अथ पारा शोधनविधि वैद्यदर्पणकी रीतिसे नं०७७. पहिले अमलतासके गूदेके काढेमें दो २ रोज घोर्ट तो मल दोष दूर होय। फिर चीताके रस या काढ़ेमें' दो २ रोज. घोटे तो अग्निदोप दूर होय । फिर ढेला यानी अंकोलके बकलेके रसमें दो ररोज घोदै तो विष दोप दूर होय । फिर धीमुवारके रसमें दो रोज घोटै तो सात कैंचलियोंका दोप दूर होय यह क्रिया मर्दनसं- स्कार है। तिसके पीछे फिर डमरूयंत्रमें उड़ालेय। जब पारामर्दनसंस्कारसे शुद्ध होजाय तब पारेको भूखा कर- नेके वास्ते और परतोड़नेके वास्ते और मुखकरनेके वास्ते और उपाय करे जो नौ ९ विप हैं उनमें शोधन करै वह विप ये हैं । वत्सनाग १ हरिद्रक जो हलदीमें होताहै २ शक्तुक ३ प्रदीपन ४ सौगष्ट्रक ५ शृंगक (सिंहिया) ६ कालकूट ७ हालाहल ८ ब्रह्मपुत्र ९ और सात उपविप ये हैं आकका दूध १ सेहुड़का दूधर कलिहारी३ कनैर ४ घुगुची अफीम ६ धतूरा ७ इन सों में सात सात दिन घोटे फिर डमरूयंत्रसे उडालेय फिर लूनीयां १ गृमा २ जलपीपल ३ कुकरौंदा १ इन सबमें सात सात दिन घोटे धूपमें सुखाय सुखायघोटता जाय धोवे नहीं कुकरौंदा आदिका अर्क निकाल कर डोला
वैद्यकसार।
(५९)
यंत्रमें पकावै चार४ पहरतक आंच दीवाकी लूकीसमा-.
न करे और चारों दवाइयोंका रस आध आधसेर एक
, १सेर पारेके लिये लेना चाहिये और डोलायंत्रके पका-
नेसे जो रस वाकी रहे उसमें उसी पारेको खरलमें
डाल कर घोटते घोटते सुखा लेय फिर डमरूयंत्रसे
उडालेय फिर उसी पारेको पूर्वोक्त रीतिसे औषधि-
योंके रसमें फिर मदनसंस्कार हे सो चौदह १४रोजतक
करे इससे बहुत गुण होतेहैं फिर इसी भांति उत्थापन
संस्कार करै पारेको घाममें सुखाय कर खरलसे नि-
काल लेय फिर नपुंसकत्व करनेकेलिये स्वेदनसंस्कार
कर सेंधानोंन सोंठिर मिर्च पीपल मूलीके वीज
अदरक राई ये सब दो २ छदामभर लेकर कांजीके
पानीसे पीसकर चार तह कपड़ाकी करके उसपर
लेप करे उस पारेको उसी कपडे पर रखकर पोटली
बांध कर हांड़ीमें लटका देय और कांजीका पानी १५
पंद्रह सेर डाले तीन दिन धीमी २ आंच देकर स्वेदन
करे इस क्रियाके करनेसे पारेमें दीपनशक्ति होतीहै और
धातुको खाताहे फिर एक हांडी में पारा रक्खे और का-
गजी निंबूका अर्क डालै १ एक दिन घाममें राखे फिर
निकाल लेय फिर उस पारेको तौले जो पारा १६ सो-
लह पैसे भर होय तो नैनियाँगन्धक शुद्ध सोलह १६
पसे भर डालै एक १ दिन घोट कर कजली करे उस
(६०) खूपचन्दचिकित्सा ।
कजलीको गूमा और जल पीपलके रसमें २ दिन घोटे
जब सूख जाय तब एक १ सेरकी एक बड़ी शीशीमें
डाले और उस शीशी पहिले एक कपड़ोटी कर लेवे
फिर धूपमें सुखाय शीशीको एक हांड़ीमें रक्खे और
हांडीके नीचे पैसा वरावर छेद करे चौगिर्द मिट्टी
लगावे तिसपर शीशी रक्खे तब बालू डाले हांडीके
गले तक शीशीकी गर्दन वालूसे बाहर निकाले रहे
और आठ पहर आंच देय दो लकड़ीकी चार पहर
धीमी आँच देय फिर दूसरी चार पहर तेज आंच देय
जब आपसे शीशी शीतल होय तब फोड़के पारेकी
चांदी निकाल ले उस चांदीके पीछे जो गन्धक राख
लगाहे तिसको छुरीसे दूर करे फिर उस चांदीको
खरलमें डाल कर पीसे फिर गूमी और गजपीपलके
रससे एक दिन घोट जब मुखै तव पूर्वोक्त प्रकारसे
शीशीमें डाल वालूयंत्रमें शीशीको रख चार पहरमन्द
आंच देय जिससे अवशिष्ट गन्धकजल जाय गन्धकके
जलेकी परीक्षा करे पहले पहर परीक्षा न करे दूसरे
पहरसे लेकर तीन पहर तक परीक्षा करे ।
चन्द्रप्रभागूगल वैद्यदर्पणके मतसे नं०७८.
१ कंचूर ४ मासे २ वच खुरासानी ४ मासेश्मोथा
४ माशे चिरायता ४ माशे ५ देवदार ४ माशे ६
वैद्यकसार। (६१) हलदी ४ माशे ७ अतीस ४ माशे ८ भारंगी माशे ९ पीपलामूल ४ मासे १० चीता ४ मासे ११ धनिया ४ मासे १२ आँवला ४ मासे १३ हर्र १ मासे १४ बहेड़ा ४ मासे १५ चाव चार मासे १६ वाय- विडंग ४ मासे १७ गजपीपल ४ मासे १८ सोंठ ४ मासे १९ पीपल ४ मासे २० मिर्च ४ मासे २१ सो- नामवरखीकी भस्म ४ मासे २२ सजी : मासे २३ ज- वाखार ४ मासे २४ सेंधा नोन ४मासे २५ विड़नोन ४ मासे २६ काला नोन ४ मासे २७ निसोत १६ मासे २८ दातौनकी जड़ १६ मासे २९ पतरज १६ मासे ३० तज १६ मासे ३१ सफेद इलायची १६ मासे ३२ बंसलोचन १६ से३३ सार३२ मासे ३४ मिश्री ६४ मासे ३५सत सिलाजीत १२८ मासे ३६ गूगल सा११८मासे सब दवाई कपड़छान करके गूगल सिलाजीतका सत और मिश्री तीन छटाक विफलेका काढ़ा करके उसमें चढ़ावे जब गाढ़ा होय तव पहिले सार डाले पाछे सब चूर्ण डाले तब फिर आठ पैसे भर घी गरम गरम करके डाले एक चिकने बरतन धर रक्खे पहिले हफ्ते मिजाजके माफिक जैसा माफिक आवे मौताज वैद्यके अधीन हे प्रमेह मूत्रकृच्छू मूत्रबंध कोएबंध पेटका फूलना कवजी लिंगकी गांठ मासकी जो देहम पड़ी होय अंडवृद्धि आंधीपीप कमरशूल
खूबचन्दचिकित्सा।
काँससुआस छई खुजली स्त्रीका रजोदोप स्त्रीका
रज जो बंद होय तो खुल जावै आदमीका शुक्र दोप
दूर हो भोजन करनेसे पहिले खाय ॥ .
शिंगरफ नं० ७९.
शिंगरफ शुद्ध काले धतूरेके बीजके तेल में २१इकीस
दफे खरल कर हर दफेमें आध पाव वीज धतूरेके सरवेमें
ऊपर रक्खै और आध पाव वीज धतूरेके नीचे रखकर
सम्पुट करके ऊपर सात कपडोटी करके सुखाले ५
पांच सेर भूवलकी आँचदे ज्यादे गरम न हो जिसमें
बीज न जलने पावै खरल हर दफे ५ पांच घंटे होना
चाहिये खुराक १ रत्ती पान या मलाई या मक्खनके
साथ खावै नामर्दके वास्ते और वायेके वास्ते रासना-
के काढेके साथ दे।
दवा चन्द्रोदय नं० ८०.
पारा शुद्ध २० वीस तोले गन्धक शुद्ध २० तोले
गन्धक शोधनेकी विधि पियाजके रसमें ४१ दफा
शोधे । गन्धक और पारेको मिलाकर १ एक घोट
वादको घीगुवारका रस डाल कर ४ पहर घोटे खरल
में घोटकर सुखाले धूपमें नहीं रक्खे सुखलाकर
आतशी शीशीमें भरदे शीशीका मुंह बन्द करके सात
कपडोंटी करे वालूयंत्रमें रखकर १२ वारह पहरफी
वैद्यकसार।
आंच दे वादमें शीशीमेंसे दवा निकाल कर फिर
२० बीस तोले गन्धक मिलाकर उपरकी तरकीवसे
घोटकर सुखलाकर शीशीमें भरकर वालूयंत्र में
१६ पहरकी आंच दे इसीतरहसे सात शीशी इसी
दवाकी गन्धक मिला मिला कर उपरकी तरकीबसे
घोट घोट कर चढाई जावेगी लेकिन आंच हर एक
शीशीकी ४ चार पहर ज्यादा बढ़ाई जावेगी यानी
पहिली शीशीकी आंच १२ बारह पहर दूसरी
शीशीकी आंच १६ सोलह पहर तीसरी शीशीकी
आंच वीस २० पहर चौथी शीशीकी आंच २१
चौवीस पहर पांचवीं शीशीकी आंच २८ अट्टाईस
पहर छठी शीशीकी आंच ३२ बत्तीस पहर सातवीं
शीशीकी आंच छत्तीस ३६ पहर इसी तरह बनाया
जावेगा इसका रंग सुर्ख वानातकी तरह होगा और १
तोले चांदीमें १ मासे दवा डाली जाय तो सोना हो
जायगा और खानेकी खुराक एक चावल पानमें या
मलाईमें या मक्खन में या सफेद इलायची पीसकर
उसके साथ दवा फांकले दवा खानेके बाद १ घन्टे
तथा २ घन्टे बाद दूध मिश्री डाल कर पिये नामर्द
मर्द हो जिसके पुत्र पैदा न हो उसके पुत्र पैदा हो
और रोगामें शपनी बुद्धि अनुसार बरते ।
(६४) खूबचन्दचिकित्सा। ॥ श्री३नमः ॥ अथ कुमार आसव ( वैद्यदर्पणका) नं० १. १ धीगुआरका रस सेर १२ २ गुड सेर ४ तोले ६६ मासे ८ ६६ मासे ८ " मासे १६ " १६ १६ " १६ ३मधु ४ लोहचूरण ५ सोंठ ६ मिर्च काली ७ लौंग ८ तज ९ पत्रज १० इलायची सफेद ११ नागकेसर १२ चीता १३ पीपल १४ पीपलामूल १५ वायविडंग १६ गजपीपल १७चाव १८ कंकोल १९ धनियां १६ " १६ १६ " १६ " १६. 17 १६ पंधकसार। " " " " १६३९ सौंफ " १६ :२० सुपारी माशे १६३३ पुहकर मूल माशे १६ २१ कटुकी १६३४ वीजवन्द १६ २२ मोथा १६३५ कंघीके बीज " १६ २३ आमला " १६३६ सेंधानोन २४. १६३७ किमाचकेबीज" १६ २५ बहेडा १६३८ गोखरू २६ रासना १६ २७ देवदारु १६४० हींग २८ हल्दी १६४१ उटंगनके बीज" १६ २९ दारुहल्दी १६४२ गदासांटिदोनों” ३२ ३० भारंगी १६४३ लोध ३१ मुलेठी १६४४सुवर्णमाखीकीभस्मीद ३२ दातुन " १६४५धायकेफूलतोले२१-४ इन सब दवाइनको कूटिके घीयुआरके रसमें डाल और मटुकामै भरदे मटुकाके मुँहपर पहिले सरवा रख- कर फिर ऊपरसे तीन पत्ते अरण्डके रखकर फिर चार तह कपडा बाँधकर फिर ऊपरसे कपडमिट्टी करदे फिर मटफेको ४० दिन लीदमें गाड़ दे फिर निकाल- कर छान ले माताज १ माशेसे ३२ मासेतक भूखके वास्ते रोटी खानेले पहिले उसको पीकर ऊपरले रोटी " १६ " खाये और पेटके दर्दके वास्ते जवाखार ख्वाह नारिक खूबचन्दचिकित्सा। " . नीका खार मिलाकर ६ मासे अर्क १ मासे जवाखार मिलाकर देवे जियादाः दर्द हो तो : तोले अर्क दो मासे खार देव वायका दर्द हो तो सुबह शाम पिलावे जिसकदर मुवाफिक आवै, उसमें सिर्फ नमक सेंधा पड़ेगा खार नहीं बवासीर खूनी और वादी दोनोंको सेवन करनेसे नफा करताहै। अथ द्राक्षादि आसव नं०८२. १मुनका पल १००८ जावित्री २ मिश्री ४०० ९ चातुजात ३ वेरकीछाल " १० त्रिकुटा ३ ४ धायके फूल २५ ५ सुपारी ११रूमीमस्तंगी" १ ६ लौंग १२ अकरकरा ७जायफल १.१३ कूट इन सबका चूरण करके इनसे चौगुणा जल डाल मटकेमें भर घोडेकी लीदमें जमीनमें गाड देय १५ दिन तक बाद निकालके भबकेमें अर्क खींच लेय भबमें इतनी दवा पोटली बाँधकर और डाल देय ।। पल१ २ केसर ३ कस्तूरी मासे 11 " " ។ १ " " १ कपूर
वैद्यकसार । (६७)
इस भाँति पोटली डाल कर अर्क खींच लेय और
प्रातसमय २ पल मध्याह्नमें २पल सन्ध्यासमय ३ पल
इस भांति खाय इसपर बहुत गरिष्ट भोजन करे तथा
स्निग्ध भोजन करैतोवीयकी वृद्धि होय और अधिक
काम बढे और खांसी स्वांसके वास्ते सुबह शाम
पिलावै जिस कदर मुवाफिक आवै और जिसमके वायु-
के दरद पालेको सुबह शाम पिलावै जिस कदर मुवा-
फिक आवे एक माशासे छटाँक भर तक पिया जावै
अथ लघु विपगर्भतैल नं० ८३.
१ धतूरेके वीज व पत्तोंका अर्क तोले २१
२ बकायनके पत्तोंका अर्क
३ आकके पत्तोंका अर्क
२१
४ नीमके पत्तोंका अर्क
२१
५ असगन्धके पत्तोंका अर्क
६ संजनेके पत्तोंका अर्क
७ अरण्डके पत्तोंका अर्क
८ मकोयके पत्तोंका अर्क
९ सेहुँड़के पत्तोंका अर्क
१० सिंधियाविप
"
२१
२०४
सोट
१. मासे ८
खूपचन्दचिकित्सा। नीका खार मिलाकर ६मासे अर्क 1 मासे जवाखार मिलाकर देवे जियादाः दर्द हो तो १ तोले अर्क दो मासे खार देव वायका दर्द हो तो सुबह शाम पिलावै जिसकदर मुवाफिक आवै, उसमें सिर्फ नमक सेंधा पड़ेगा खार नहीं ववासीर खूनी और वादी दोनोंको सेवन करनेसे नफा करताहै। अथ द्राक्षादि आसव नं०८२. १ मुनका पल १००८ जावित्री पल १ २ मिश्री ९ चातुजात ३ वेरकीछाल " १० त्रिकुटा ४ धायके फूल ५ सुपारी ११ रूमीमस्तंगी " १२ अकरकरा १ ७जायफल १.१३ कूट इन सबका चूरण करके इनसे चौगुणा जल डाल मटकेमें भर घोडेकी लीदमें जमीनमें गाड देय १५ दिन तक बाद निकालके भबकेमें अर्क खींच लेय भबके में इतनी दवा पोटली बॉधकर और डाल देय ॥ " " " " १ १ १ " ६लोग " १ १ कपूर पल १ पल १ 1 २ केसर ३ कस्तूरी मासे ४ वैद्यकसार। ३ पीपल अथ अर्कजंभीरी नं०८४. १अर्कजंभीरी सेर ५/७ अजवाइन २ हींग भुनी तोले ५-४ ८ लौंग ३ -तोले ३ ९वायविडंग ૨ १ मिर्च काली " ३ १० नोंन काला ५ सोंठ ११ नोन सेंधा " ३ इन सब दवाइनको कूट कपड़ छान कर फिर अर्क जंभीरीमें मिलाय देय फिर घीके बरतनमें २१ रोज घोडेकी लीदमें गाड देय फिर निकालकर छान- लेय पेटके दरदको और बदहाजमेको वडा फायदः कर- ताह मौताज अर्क ४ मासेसे १ तोले तक और जो अर्कछान कर दवाबचे उसकोपीसकर दो चने वरावर गोली बनालेय वह भी मुताविक अर्कके फायदा करेगी और अक छान कर चीनी या कॉचके बरतनमें रक्खे और १५ रोजतक पहिले धूप में रक्खे फिर छानकर सरदी न हो ऐसे मकान में रक्खे पेटमें वायुका विकार हो उसको भी फायदा करताहे और दाडिमी का अर्क भी इसी तरह बनाया जाता है न मुकाविले जंभीरीके कम गरम है । हाजमेंमें और दर्द और दिल मचलानेको नफा करता है और इसी तरकीबसे दाहि- " " ८ (६८) खूबचन्दचिकित्सा। १२ पीपल मांसे ८२२ कायफल ८ १३ मिर्चकाली" ८/२३ पुहकरमूल ८ १४ असगन्ध ८/२४ पाढर ८ १५ रासन ८२५ रेनुका १६ कूट ८/२६ तज १७ मोथा ८/२७ पत्रज १८बच ८/२८ इलायचीसफेद, १९ देवदारु ८/२९ लौंग २० इन्द्रजी ८/३० नागकेसर ८ २१ भारंगी ८/३१ तिलोंका तेल सेर ७२ " ८ " " " " " " पहिले तेल कढाईमें चढावे उसमें सब अर्क और विप डाल देय जब अर्क विप जल जाय तब तैलको छान लेय फिर सब दवाई दोसेर पानीमें घोलकर तेलमें चढा देय जब पानी जल जाय तव तैल छान लेय और इस तैलकी मालिश करनेसे फालज और गठियाको बड़ा फायदा होताहै और जिसममें जहां कहीं दरद हो मालिश करनेसे आराम होजायगातिल मलकर अर- ण्डके पत्ते बांध देय तब जियादः नफा होताहै।
वैद्यकसार। (६९) . " " तोले ३ १ " अथ अर्कजंभीरी नं०८४. १ अर्कजंभीरी सेर ५।७ अजवाइन २ हींग भुनी तोले ५-४ ८ लौंग ३ पीपल ९ वायविडंग ३ ४ मिर्च काली ३ १० नोंन काला २४ ५सोंठ ६राई ३ ११ नोन सेंधा " इन सब दवाइनको कूट कपड़ छान कर फिर अर्क जंभीरीमें मिलाय देय फिर घीके बरतनमें २१ रोज घोडेकी लीदमें गाड देय फिर निकालकर छान- लेय पेटके दरदको और बदहाजमेको वडा फायदः कर- ताहे मौताज अर्क ४ मासेसे १ तोले तक और जो अर्क छान कर दवाबचे उसको पीसकर दो चने बराबर गोली बनालेय वह भी मुताविक अर्कके फायदा करेगी और अक छान कर चीनी या काँचके बरतन में रक्खे और १५ रोजतक पहिले धूप, रक्खे फिर छानकर सरदी न दो ऐसे मकानमें रखे पेटमें वायुका विकार हो उसको भी फायदा करताहै और दाडिमीका अर्क भी इसी तरह बनाया जाता है न मुकाविले जंभीरीके कम गरम हे। हाजमेंमें और दर्द और दिल मचलानेको नफा करता है।और इसी तरकीबसे दाड़ि- (७०) खूबचन्दचिकित्सा। मीका अर्क बनता है लेकिन अर्क जमीरी गरम है और अर्क दाडिमी गरम नहींहै और दिल मचलानेके वक्तमें और के आनेके वक्तअर्कजंभीरीसे अर्कदाडिमी ज्यादा नफा करताहै। अथ गोली (शल गज केसरी)नं० ८५. " ८ " " १६ " ८ ८ १ कुचलाशुद्ध मासे ६४ ११ सोंठ मासे ८ २ कंजाकी मींगी” १६ १२ हरी ३ हींग भुनी १६ १३ सज्जी ८ ४ सुहागाका फूला" १६ १४ जवाखार ५ अजवायन १५ सेंधा ६ पीपल ८ १६ कालानोन ७पीपलामूल " ८ १७साँभर नोन" ८चाब १८ खारी ९ बेलकी गिरी ८ १० काली मिर्च" १९ गंधकशोधापोंगीका८ इन सब दवाइनको पीसकर अदरकके रसमें २ पहर घोटे फिर चने बरावर गोली कर लेवे और गरम पानीसे गोली खाय तो सर्व शूल जायें पेटके दर्दको बहुत मुफीद है। " ८ वैद्यकसार। (७१) अथ गोली खांसीकी नं० ८६. १ वंशलोचन मासे ६ " we w w w w w w w w we " " " " ३ बहेड़ेकी बकली ४ लौंग ५ ककडासिंही ६कालीमिर्च ७ पीपल ८ इलायची सफेद ९ मुरेठी १० कुलीञ्जन ११कत्था ६ १२ कस्तृरी १॥ १३ ववूलकी छालका अर्क १४ अदरकका अर्क तोला १० मासे ८ १५ पान बँगला २५ का अर्क इन सब दवाइयोंको पीसकर उड़द वरावर गोली बना अदरकके अर्क में खिलाने तो खॉसी बन्द हो- जाय पियाजके अर्कमें हेजेके वास्ते खिलावे । अथ गोली दार्मीक्ट नं. ८७. १सोंठ २जायफल " " मासे ८ ४ " (७२) खूबचन्दचिकित्सा। ३जावित्री मासे ४ इलायची सफेद ६ अफीम २ दाडिमी दो बड़ी कपड़मिट्टी करके आगमें पकालेय फिर सब दवाई मिलाकर पीस लेय मर्दके वास्ते झखेरीके बेरके वरावर और बालकको चने वरावर गोली बना लेय जिसको गोली खिलावै दस्त वन्द हो जावेंगे गोली उपर लिखे वमृजिबसे छोटी बनावे जैसा बल देखे उसी कदर दे और जो कम फायदः हो दस्त बन्द न हों तो १ मासे हर्र और ४ रत्ती अज- वाइन आध पाव पानीमें औटावै जब टके भर रहि जावे तब खूब टंढा करके सेंधा नमक डालकर इसके साथ गोली खिलावे, और हैजेमें खिलाई जाती है। अथ गोली अजीर्णानार नं० ८८. १जायफल २ इलायची सफेद १६ १६ ४ अफीम ८ ५ कस्तूरी रत्ती६ सवको पानी में पीसकर १चने तथा २ चने वरा- वर गोली बना लेय और नम्बर ७ के मुताविक काममें मासे १६ " ३ लौंग वैयकसार। (७३) लावे अजीरण वा हैजेमें दी जातीहै जियादः अजी- रण हो तो२ मासे हरं १ मासे अजवाइन आधा.मासा नमक लाहौरी आध पाव पानीमें ओटा कर जब तीन पेसे भर रहे उसके साथ गोली खावे हेजेंमें आध आध घंटेमें ठंडे पानीसे देय जब सेहत होने लगे तब वक्तसे देय। अथ दवाई दादकी नं० ८९. सुहागा मासे १६ " " १६ " २ मालकांगनी १६ ३ सीतलचीनी ४पारा इन सबकी कागजीके अर्कमें गोली बनाकर पानीमें घिसकर लगानेसे दाद जाता रहेगा। अथ पीपल पाक नं ९०. १दूध सेर ६६ मासे ६४ " २ पीपल ३ पिस्ता ४ बादाम ५ गोला ६मुनका ७ वर्क चाँदीके ८ नग२० (७४) खूबचन्दचिकित्सा। ८तज मासे ६ ६ ९पत्रज " १० इलायची सफेद ११ नागकेशर १२ वंशलोचन १३ लौंग " " १४ जटामांसी १५ केसर १६ जीरा सफेद १७ जीरा स्याह १८ चीता १९ नागौरी असगंध २० गिलोय २१ सोंठ २२ कालीमिर्च २३ जायफल २४ जावित्री २५ गोखरू छोटे २६ वेलका गूदा २७ खस २८ सुरासानी अजवायन rur (" ur Corrururur uru " " ६ " or corrur २९ मृह 11 " वैद्यकसार। (७५) ३० वग मासे ६ ३१ सार ६ ३२ अभ्रक पहिले पीपलको खूब महीन पीस कर फिर दूधर्मे डालकर खोवा कर लेय फिर छटॉक भर घी डालकर खोवा भून लेय फिर दो सेर खांड़की चासनी कर- के खोवा समेत सब दवाई पीस कर चासनीमें मिला कर गोली पैसाभरकी तथा टके भरकी बनाकर दूधके साथ खावै तो वायके रोगोंको बहुत फायदः करे और शरीर पुष्ट करे। अथ दवाई फालिजकी नं०९१. मासे ६४ २ कालीमिर्च ३३ पीपल ६४ ४ अफीम ५ धी गायका ६ अकरकरा ७ कुलीज्जन ८ तिलसी पत्थर इन सब दवाइनको पीस कर तीन मोताज कर लेय एक वारमें मालिश करनेमें टका भर घी गर्म करके मिलावै उसको तालूके ऊपर मालिश करके १ लौंग " " "
३२
"
(७६) खूबचन्दचिकित्सा।
ऊपरसे ४ या ५ पत्ते अरंडके बाँध देय और रजाई
उढाकर यह धूनी देय।
दवाई धूनीकी.
१ गन्धक
मासे ३२
२ नौसादर
३ मेथी
सबको पीसकर ३ मौताज कर लेय मालिशके पीछे
धूनी देय और हरताल फूककर खानेको देय ।
अथ शीतभंजीरस नं०९२.
१ हरताल शुद्ध
माशे ३२
२पारा
३गन्धक
४ मनसिल
पांच पैसा भरकी कटोरी एक तांवेकी वनवावे फिर
सब दवा पीस कर कटोरीके भीतर दवाइयोंका लेप
करदे फिर कटोरी हाँडीमें रखकर ऊपरसे बालू भर देय
४ पहर तेज आंच करे फिर कटोरीको निकाल कर
पीस लेय मौताज १ रत्ती शहद मिलाकर जिसको
शीतज्वर आता हो उसको १ पदर पहिले खानेको
देवे और खानेको दूध भात देय, दवा करेलेके रसमें
पीसी जावेगीऔर कटोरी सब दवाओंके बगवरहो यद
"
८
"
वैद्यकसार।
(७७)
दवा घोर सन्निपातको भी अच्छा करतीहे प्रमाण
नाँचका जव वालूमें खील होजावै ।
अथ गिल्टी बैठजानेकी दवाई नं० ९३
१ पाखानभेद
मासे ३२
२ समुद्रशोप
४ मेदा
५ कुचला
६मुसम्बर
> રેરા
७ गूगल
"
८ आँवा हल्दी
९अकरकरा
१० सफेद चुंगुची
११ अफीम
१२ कालीमिर्च
तोले २६-८
सबको पानीमें पीसकर ८ मौताज कर लेय सबेरेको
गिल्टी पर १ मौताज वाँध देव फिर दूसरे रोज सबेरेको
उसे खोल दूसरी मौताज बाँध देय ऐसे ७ सात आठ
रोजबाँधे गिल्टी वैठि जायगी।
(७८) खूबचन्दचिकित्सा।
अथ एलादि चटनी नं० ९४.
१ इलायची सफेद
मासे ४
२ लौंग फूलदार
"
11
३ नागकेसर
४ ककोल
५ खील धानकी
६ गुढेलके फूल
७चन्दन लाल
८ मोथा पीपल
९ पीपल
१० मिश्री
"१६
११ शहद
सबको पीसकर शहद और मिश्री मिलाकर अँगु-
लीसे, थोड़ी थोडी देर बाद कय आनेके ऊपरसे
खिलावे।
अथ धातुपुष्टिकी दवाई नं० ९५.
१ बवूलकी फली
२ तालमखाना
३वीजवन्द
૨
४ मिश्री
तोले ३॥
बवूलकी फली विना वीज छाँहीमें सुखाकर फिर
तोले १
मासे ६
मासे ६४ 11 १ ३२ " ३२ वद्यकसार। (७९) सब दवाओंको पीस कर छान लेय खुराक या७ मासे पावभर दूधके साथ खाय । अथ सुजाककी दवा नं ९६. १ गोखरू दोनों २ सालमली ३ ककडीके बीज ४ खीरेके बीज ३२ ५ कर ६ काहू ७ कुलफा सब दवा पीस कर खुराक १ पैसाभर पानी मिला कर फिर छान कर मिसरी डाल कर पीलेय । अथ चटनी सितोपलादि नं० ९७. मिसरी मासे १६ वंसलोचन इलायची सफेद तज पीपल सवको पीसकर मिसरी मिलाकर सहत यास बत अनारमें खायै बुखार या खुसकीको बहुत फायदा करतीह तरावट करतीहे और भूखको बढाती है, 11 ३२ ४ २ १ " " " (४०) खूबचन्दचिकित्सा। खुराक १ मासेसे २मासे तक अगर ताकतके वास्ते चाहे तो मूंगेकी साख मोती चांदीके वर्क यह तीन चीजें और मिलाले। अथ मापादि मोदक नं० ९८. १ दाल उडदकी धोईका १५ वच मासे ४ आटा तोले १०-८/१६ सोंठ २ गेहूँका आटा " १०-८१७ पीपल ३ जौका आटा १०-८/१८ मिर्च काली ४ चावलकाआटा,,१०-८/१९ इलायची सफेद, ३ ५ तज मासे ४२० बंशलोचन ३ ६पत्रज १/२१ केसर ३ ७ लौंग ४२२ मोती १ ८ मूसली सफेद ४/२३ गोला ९बिलाईकंद ४२४ वादाम १० कौंचकी जड ४/२५ पिस्ता ११ गंगेरण ४२६ किश्मिस १२ गोंदनीकी छाल,, १२७ छुहारे १३ गोखरू छोटे" ४/२८ घी सेरा १४ वेलका गूदा ४/२९ खॉड छटाक sila सब दवाई चूरण करके और आय वीमें भून कर खॉडकी चासनी करके लड्डू छटॉक भरका वाँध लेय " " " " २४ " " " २४ ११५ धायके फूल १ १ ४सारशिंगरफ " १ १ " 11 " वैद्यकसार। (८१) लड्डू खाय ऊपरसे पाव । भर दूध पी लेय तो शरी- रको बहुत पुष्ट करै। अथ शिंगार अभ्रक नं० ९९. १ अभरककीभस्ममासे १६ १३ गजपीपल मासे १ २ चन्द्रोदय .११४ तेजवल ३ गन्धक १६इलायचीसफेद રૂ १७जायफल 3 ६खस ។ १८ सोंठ ७वालछड १९ मिर्च काली ८ लोग १ तज १/२० पीपल १० नागकेसर १/२१ हरी ११ तालीस १/२२ बहेडा १/२३ आंवला सवको पीसकर एक पहर पानीमें घोटै फिर चने वरावर गोली वनालेय और पैसेभर फालसाकी चाल शामको आध पाव पानी में भिगोय देय सुबहकोमलकर लुआब-निकाल लेय मिश्री डाल कर एक गोली लुआबके साथ खाय तो पेशावका जियादः आना बंदहो जाय और ताकतके वास्ते दूध खाने जीर्णज्व- १ १ " 11 १२ जावित्री 11 ६ सेर (८२) खूबचन्दचिकित्सा। रके वास्ते गोलीको पीसकर सर्वत अनार ख्वाह शह- तमें खिलावै वायुके रोगोंको अरण्डकी जडके काढेमें खिलावै, और खांसीको गोली वैसेही खिलावे, अथ मूसलीपाक नं० १००. १ मूसली सफेद तोले२१-४ २ दूध गायका शेर 5३॥3 ३घी आधसेर ॥ ४ खांड़ ५ गोंदववूलका मासे ३२ ६ बादामकी गिरी ३२ ७ गोला ८जायफल ९ लौंग १६ १० केसर ११ चाव १२ डंबर १६ १३ वालछड १६ १४ कोंचके वीज शुद्ध १५ तज १६पनज " " १६ १६ " वैद्यकसार । (८३) माशे १६ " "१६ ३६ १६ " " १७ इलायचीसफेद १८ नागकेसर १९ मिर्च काली २० पीपल २१ सोंठ २२ जावित्री २३ सालव २१ चोवचीनी २५ पिस्ता २६ चिरीजी २७ कुलींजन २८ अजमोद भुना २९ पोदीनी ३० मस्तगी ३१ उसवा ३२ मूंगेकीजड ३३ कस्तुरी ३. मोती ३५ पर्फ चांदी ३६वर्क सोने १ ८ ८ " ८ ८ ८ ८ ८ नाग१० 10 सब दवाई पीस लेय और गोंद भून लेय और मूस- लीको धीमें कोराय लेय और दूधका खोवा कर (८४) खूबचन्दचिकित्सा। लेय और खाँडकी चासनी कर लेय फिर सब दवाई और खोवा चासनीमें मिलादेय फिर अवरक ४ मासे और मिलादेय और सार ४ मासे मिलादेय और सब मिलाकर लड्डू टके भरका बना लेय सुराक टके भरकी पेशाब बहुत आती हो तो कमती आवै और ताकत करे और पुष्ट होय । अथ देहके विगडनेमें चोवचीनी नं० १०१. १ चोवचीनी तोले ५ २ नागोरी असगंध मासे १२ ३ मूसली सफेद ४ लौंग १२ ५ जावित्री १२ ६कहरवा ७वंशलोचन ८चिडियाकन्द ८ ९छतावर १० कीचके बीजकी गिरी ११ जायफल ८ १२ अकरकरा ८ १३ कूलोंजन १४ केसर "१२ " " "१२ "१२ ८ " " ८ वैद्यकसार। (८५) मासे ८ ८ ८ ८ ८ " " M १५ अजवायन १६ हाली १७ मेथी १८ मस्तगी १९ गोंद ढॉकका २० सतगिलोय २१ काला विच्छू २२ इलायची सफेद २३ दालचीनी २४ पत्रज २५ इलायची लालके दाने २६ कमलगट्टेकी मींगी २७ तोदरी सफेद २८ जीरा गुलावका २९ जीरा काला ३० मृगकी जड ३१ हिजरिलयहूद ३२ डम्पर ३३ वालछल ३० अगर ३५ नदोली " " ८ " "६ (८६) खूबचन्दचिकित्सा। मासे ६ " ur ३६ किश्मिश मासे १६४३ मोती ३७ वादामगिरी ४८/४४ वर्कचांदीके ९ ३८ वहमन दोनों ,, १६४५ वर्क सोनेके ३॥ ३९ पिस्ता ४८/४६ अम्बर ४० चिलगोजा ४८/४७ संगइसम ४१ कस्तूरी ३/४८ गोखरू बडे ६ ४२उसवा "११/४९ तालमखाने इन सब दवाओंको वारीक चूर्ण कर शहतमें मिला- कर जिसमके खुन बिगडे हुएको खिलाये परहेज मिर्च खटाई गुड तैल ४० दिन तक दवा खानी होगी। अथ आदमीकी सुस्तीकी दवाई नं० १०२, समुद्र सोख तोले १३-४६ खेडचीनी तोले १३-४ २ विलाईकन्द ,१३-४/७ माजूफल ३सरफोंकाकीजड,,१३-४८ वाजकपूर १३-४. ४ कलौंजी ,१३-४/९ वेलके फूल १३-१ दरासन ,१३-४|१० नींबूके फूल, १३.४ इन सबको ब्राह्मीके अर्कमें पीसकर वेर बराबर गोली बनालेय एग गोली सुबह और एक गोली शाम- को खाय तो बल और पुष्टि करे और सुस्ती जाय । " ग ܩܝ वैद्यकसार। (८७, अथ बहुत पेशाव आनेकी दवाई नं० १०३. १ वंशलोचन तोले १५ मुसली सफेद १०८ २ सालव मिश्री ६ फली बवूलकी,,१०-८ ३ समुद्र सोख ४ तालमखाने । ६/७ विनौलेकीगिरी,,१०८ इन सबको पीसकर सबकी वरावर खाँड मिलावे खुराक मासे ९ से तोले १ तक और २ तोले रुव्वे. जामन यानी जामनकी शिकंजवी १५ तोले अर्क गार- जयाँके साथ १ खुराक खावे सुबह शाम दोनों वक्त लो बहुत पेशाव आना बन्द होय। अथ बवासीरकी दवाई नं० १०४ निमकौरीकी गिरी २ वकायनकी गिरी ३ इमली कच्चीकी गिरी गुगल भंसा ५मिश्री २१-8 सबको पीसकर झवेरीके वर वरावर गोली बनाने सुबह शाम खाय परहेज कुछ नहीं। तोले ५-४ २ पत्रज " .. " २) " (८८) खूपचन्दचिकित्सा । अथ खुश्की दवाई नं० १०५ १तज माशे २ ५मुनका मासे २ २) ३ इलायची सुर्ख दिखस २ ४ चन्दन सफेद २७ मिश्री १२ सबको पीस कर मिला लेबै पिलास बहुत होय तो खाँड़के शरवत छटाक भरमें दवाई २ माशे मिलाकर दिनमें दो चार दफे पिला थोडी पिलास होय तो शहद के साथ खाय । अथ विजयचूर्ण कब्ज पर नं० १०६. १ बेल माशे १६/११ सेंधानोन मासे १६ २ अजवाइन " १६/१२ कालानोन १६ ३वच १६.१३ सामर ४ चीता १६/१४ बुरारी ५ हींगभुनी ७ १६/१५ बढानोन ६अतीस "१६/१६ मूड़ ७ सौंफ "१६/१७ जवाखार ८पाढर , १६/१८ इन्द्रजी "१६/१९ सोंठ "१६/२० पीपल " " "१६ ९चाव १० कटुकी "१६ मासे १६ "१६ " वैद्यकसार । (८९) २१ मिर्चकाली मासे १६२५ तज २२ हर १६ २३ बहेडा १६ १६पत्रज २४ आंमला १६/१७ इलायची सुर्ख, १६ सवको पीस कर गरम पानीके साथ खाय खुराक १ मासेसे ४ मासे तक और अतीसारके वास्ते मटेके साथ खिलावै। अथ आतशककी दवाइ नं० १०७. ३ सीमा मासे १६ २ मनसल सीसाको करछेमें पिघलाये उस पर मनसल पीसकर डालता जावे जब शीशा भस्म हो जावे तब उतारलेय पान पर १ चावल रख कर खाय ४ चावल तक। अथ सुस्तीकी दवाई नं० १०८. १ वीरबहोटी मासे १५ शराव पाव ३ जायफल ६कानका मेल मासे नाग ७ १९७ कबूतरका विष्टा ". " १६ २ लौंग . ४पान , १/१५ कचरी सेंधा " १ १ १७ कचूर ܩܝ (९०) खूबचन्दचिकित्सा। सवको घोट शरावइन्द्रिय पर लेपै जो फुसी हो जावे तो मक्खन लगावै। अथ तालीसादि चूर्ण नं० १०९. १ तालीस तोले १/१४ इलायची लाल २ अतीस मय वकले तोले १ ३ नागकेसर ४ अमलवेत १६ पीपलमूड मासे १ ५पोस्तकावकला १८ चीता ६रूमीमस्तगी १ ६ ७ ककडासिंही २० पीपल ८ दारमीके दाने २१ अजवायन ९ समुद्रफेन १० जवाखार २३ सेंधा नोन ॥१६ ११ सन्नी गुलाबी १ २४ काला नोन १, १६ १२ सुहागा कचा, १२५ बुडारी नोन , १६ १३ पोदीना सूखा १२६ सामर नोन इन सबका चूर्ण हाजमें और दस्तके वास्ते जसी ताकत देखे उतना खिलाये। सबको कूट छान कगजी केअर्कमें भिगोवे गोली चने वगवर वॉधे । " १९ सोंठ " " १ १ " १२२ लौंग "१६ " 1 ३ लौंग वैद्यकसार । (९१) अथ हाजमे और पेटके दरदकीदवाई नं.११० ६१ सौंफ तोले ३७ अमलवेती मासे ६ *२ मिर्च काली ३८जवाखार १, ३/९ सज्जी गुलाबी , ४ सेंधा नोन ३/१० जीरा काला ५काला नोन , ३/११ इलायची सफेद,, ६ ६गन्धक औंलासार,, ३/१२ चकोतरेकाछिलका,,६ सबको कूटकर३दिन कागजीके अर्क में घोटै फिर ४ दिन घीगुआरके पट्टेमें घोटे खुराक मासेसेरमासे तक अथ जिगरी हरारत भूककी दवाई नं० १११ कोनेन रत्ती ६३ लोहेका कुश्ता ६ "६४ बवूलका गोंद ६ सबको पानीमें पीस कर गोली नग १२ बना लेय गोली १ पानीके साथ खाने । अथ धातु गिरनेकी दवाई नं० ११२ १ रॉगका कुश्ता मासे ३/५ सतशिलाजीत मासे ३ २ इलायची सफेद ३/६ मोती ३वंशलोचन ३/७ वर्क चांदीके नग १२ ४सतगिलोय "३ सवको गुलाबके अर्कम खरल करे सुराक नग २४ बना लेय दूधके साथ खावे। " १ (९२) खूबचन्दचिकित्सा। मासे८/१२ चाव २ अथ लवणभास्करचूर्ण नं०. ११३. १ समुद्र फेन मासे २ २काला नोन ९/१३ अमलबती , ३वायविडंग १४ जीरा सफेद भुना.२ ४ सेंधा नोन " २/१५ धनियां २ ५ खारी नोन ६पीपल १६इलायची सुर्खकेदारे,,२ २ १७इलायची सफेदकेदाने, १८ काली मिर्च १९ सोंठ १० तालीस २२० दारमीके दाने " २/२२ दालचीनी रत्ती २ " " ७पीपलामूल ८पत्रज ९ जीरा काला १ १ १ २ " " " ११ नागकेसर सबको कागजीके अर्कमें पीस लेय सुराक जितना मुवाफिक आवे। अथ हुचकीकी दवाई नं० ११४. छहारा २मुनका ३मिश्री 1५ शहत सब पीस मिलाकर थोडी र देरमें खिलाई जाये। मासे १४ घी १ मासे ६ तोले २
वैद्यकसार ।
"
"
(९३)
अथ विडंगादिचूर्ण नं०,११५.
११ वायविडंग मासे ३२५ मिर्च काली मासे १.
२ ककडासिंही १६
६अमल वेती ३२
३पोदीना
जंगीहर
11 १६/७ सेंधानोन
२८
सबको चूर्णकर मटेके साथ या जैसा मौका होवे
अजीर्णम देवे।
अथ पेटके दर्दका नं० ११६.
१ समुद्र सोख माशे १६४ तज मासे २१
२ मेदा लकडी २४५ मेथी
२४/६हल्दी
१६
सबको कूट पानी में मिलाय पेटपर लेप करें कंडेकी
आगसे सके ऊपरसे अरंडके पत्ते बाँधे पहिले हल्दीकी
पोटलीसे सके अलसीके तेलमें डुबो डुबोके ।
अथ अंग्रेजी दवा कलेजेके दर्दको नं० ११७.
१पेन किलर-कलेजेके दर्दको तो पानी दश कतरे
तक दिया जावे और जिसममें किसी जगह दर्द हो तो
मालिश की जाने नफा होता है और हेजेम भी दश बूंद
थोडी थोडी देर में देता रहे तव नफा होगा। और
मामूली दस्त केको भी नफा करता है।
३ हालौं
खूबचन्दचिकित्सा
अथ दिमागकी रेजशकी दवाई नं० ११८.
घुसरायनमें काटेदार फल होता है जिसको विन्दाल
कहतेहैं वह लेना चाहिये उसका छिक्कल छुटाकर अन्दर
से जाला निकालकर छःमाशे पानी में दशमिनट भिगो
कर मल कर पानी नाककेर रास्ते खींच लिया जा
अथवा घुसरायनका फूल दिमागकी रेजश निकालनेको
भिगो कर सूंघे और ३ दिन तक खुश्क दाल रोटी खावै
चिकनई न खाय और स्त्रीके गर्भ गिरानेको योनिमें
वत्ती रक्खै । अथवा खुबकला दो माशे साफ करके
चार पैसे भर मिश्रीकाशरबत गरम करके उसके साथ
फाँक लेवे तीनरोज चिकनई न खाय जुकामबन्द जारी
हो जावे और साफ हो जावे हरारत बुखार जाती रहै ।
अथ हुचकीकी दवाई नं० ११९.
१ इलायची
माशे
२ वशलोचन
३ जहिरमुहराखताई
अगर
५ पोदीना सुश्क
६पीपल
रत्ती
७शरक्त अनार
तोले २
यह दवा पीस कर मिलाकर थोडीरदेरमें खिलावे।
१
had
។
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१ पोदीना खुश्क " २ वैद्यकसार। (१.५) अथ पिलानेकी नं. १२०. माशे २अगर ३ इलायची सफेद मय छिकल यह दवाई पाउभर पानीमें जोश करके जव तीन पैसे भर पानी रहजाय तब थोडी२ देरमें पिलावै । अथ चन्दन अवलेह नं० १२१. १ चन्दन सफेद ६ पैसे भर गुलाबमें घिसे फिर डेढ़ सेर पानीमें घोल कर हॉडीमें रखदेय सुबहको २ टके मिश्री डाल कर अवलेह बना लेय गर्म मिजाज- वालेको खुश्की दूर करनेके वास्ते और पुष्टिके लिये ६मासे रोज खिलावे। अथ अंजन ऑखके जाले तथा धुन्धकान० १२२ १ शीसेकी गोली चलाई हुई मासे १६ २ पीपल छोटी नग ५ शीशा पत्रकरके जीरेकी तरह काटकरपीपल डाल कर सुरमेकी तरह पीस लेवे और रातको सोते वक्त लगाने तो जाला धुन्ध दूर हो जावै। दॉत दरद करते हो तो मंजन करे।
(९६) खूबचन्दचिकित्सा।
अथ बच्चोंके पसली चलनेकी
दवाई नं० १२३.
१तूतिया
मासे १
२रीठा
इनकी गोली बाजरे बराबर बनाकर घिस कर
पिलावे इससे दस्त और कय आनकर आराम हो
जायगा यह दवाई उस वक्त करें कि जिस वक्त किसी
दवाईसे आराम न होता हो।
अथ अर्क जामन नं० १२४.
अव्वल १ बोतल में ऑक्लासार गधक शुद्धतीला
और नौसादर १ तोला और सोरा १ तोला डालकर
अर्क जामनका भर दिया जावे और बोतलमें डाट
लगा कर फिर मिट्टीसे मुह बन्द करके धूपमें रख दी
जावै ४० रात दिन रक्खीरहे जब तेयार होगी। खुराक
१ माशेमे३ माशे तक जालन्धरवालेको ६ मासे दिया
जावेदमा और तिल्लीको बहुत नफा करताहै ऊपरसे धी
जियादः खाया जावे पेटके दरदको बहुत मुफीद है।
अथ दाँतके दरदकी दवाई नं० १२५.
१ पोस्त ताड तोले १७-८
२पोस्त बबूल
" "१०-८ माशे ८ ८ वैद्यकसार। (९७) ३ पोस्त कचनार तोले १०-८ ४ पोस्त अनार १०-८ ५पोस्त वेरी १०-८ ६ पियवाँसा ७फिटकरी ८ वायविडंग एक धडे पानीमें डालकर जोश दे जव आधा रह जाय तब सोते समय कुल्ली करै और दो तीन घंटे पा- नीसे परहेज करे ऐसी कुल्ली१५ या २० रोज करे और सिवाय सोते वक्तके और वक्तमें मुमानियत नहीं है और पाँच छे कुल्ली गर्म पानीसे जिस कदर मुह वरदाय शकरे और पानीकी गरमी जव मुहमें कम होजावे तब कुल्लीका पानी मुँहसे बाहर निकाल देय फिर दूसरी कुल्ली करे। अथ पेचिशकी दवाई नं० १२६. १ मस्तगीरूमी माशे ६४ जीरा सफेद २ वेखअंजवार ६५ रेशाखतमी ३ ३ मरोडफली "३/६ मिश्री पाव भर पानीसे जोश करे चहारम बाँकी रहे तर छानकर पी लेय मस्तगी रूमी मुवाकिव न हो तब कुन्दर डाले बजाय मस्तगीके । मासे ३ " तोला १ ७ (९८) खुवचन्दचिकित्सा। " 11 ३ 1 " १ अथ तम्बाकूका नुसखा नं० १२७. १ तमाकू सेरऽ२ २ दालचीनी लकडी तोला८ ३ इलायची सफेद जायफल १॥ ५ दारुचीनी ६लांग 3. ७ इलायची सुर्ख ८ सन्दलका बुरादा १ ९जाफरान १० मुश्क ११ अम्बर १२ पानका अर्क तोले २१-१ १३ अर्क के उड़ा २१-४ . सबको पीसतमाकूमें मिलाय सायामें सुखायलेय। अथ कत्थाका नुसखा नं० १२८ १ कत्था सफेद सेर 59/६ जावित्री तोले तोला ३॥ ३जायफल १॥ ४ इलायची सफेद , n८ इलायचीकलाँ ३ ५दारुचीनी माशे मासे ३ १ २ लौंग, " ३॥९मुश्क वैद्यकसार। १ (९९), कत्था पीस अर्क केउडामें और लेय फिर सबको पीस कत्थामें मिलालेय पहिले सब दवा अर्क केउडामें घोट लेय तव मिलावै और १५ रोज तक बंदकर रक्खे फिर टिकिया बनाके या केउड़ेके फूलपर सुखाकर खुश्क कर लेवे। अथ पेटके दर्दकी दवाई नं० १२९. १ नमक लाहौरी तोले २ ११ हींग तोले २ नमक साभर ११२ जीरा सफेद ३नमक काला ९ १३ जीरा स्याह नौसादर ८१४ दारुचीनी ५ अजमोद ७ १५ लबकुरतम ६ मिर्च काली ७ मिर्च सफेद , ३ १७ मुलहटी ८करफस ३ १८ अनेसू ९ अफतीमून ४ १९नमकनकछिकनी,२९ १० सम्बुलतीव ४२० तेजाव गन्धक ८ , सबको पीस मिलाय कर १ बोतलमें भर मुँह बोत- लका खूब बंद करे और ३० दिन जमीनसे गाड़ देय 'फिर दर्द भूख हाजमेको ४ रत्तीसे मासे तक खिलावे सुबहको और कुंक्तेवाहको वढावे। । । " । " " ३ १६जंजवील १ १ १ १ १ 1 "
मासे ६
"
ur
(१००) खूबचन्दचिकित्सा।
अथ खांसीकी दवाई बच्चोंकी नं० १३०.
१ बहेड़ेकी बकली
२ मोरेठी
६
३ अकरकरा दक्षिणी
४ काकडासिंही
यह सब पीस कपडछान कर अनार खाली कर
उसमें भर ऊपर मिट्टीसे लेपदेय फिर कंडेके दहरेमें
रखदेय जब उफनके आजाय तब निकाल लेय फिर
५ शहत
तोले २
६ दूध बकरीका
२-८
७मूंगा
३
इन सबको भी खूब पीसके ऊपरकी दवायोंमें मिला-
यके अनारमै भरे जब दवा अनारके अन्दर पकने
लग जावे तव उतार कर हिस्व ताकत खिलावे।
अथ सांप काटेकी दवाई नं० १३१.
हुक्केकी कायट एक चने वरावर गोली बनाकर
खिलावे फौरन अच्छा होगा वेहोश होय तो आंख
में लगावे होशमें आजायगा तर खिलाने
अथ स्त्रीके गर्भ रहनेकी दवाई न० १३२.
एक पान बॅगला एक लौंगअफीम एक रत्ती सबको
पीसकर चने चरावर गोली बनावे पानी न डाले और
"
वैयकसार। (१०१)
जब स्त्री धर्मसे निवृत्त होकर चौथे दिन स्नान करै
तब सुबहोको गंगाजलके साथ खावे उसी रोज स्त्री
प्रसंग करे तो गर्भ रहै फर्क नहीं पड़ेगा।
अथ दमा व खाँसी व धातु पतली व
सुस्तीकी दवाई नं० १३३.
आककी बहुत पुरानी जड मँगवा कर 'सायामें
खुश्क करके फिर उसकी मिट्टी साफ करे उसके बाद
एक नादमें ख्वाह जमीनमें गढा खोद कर उसको
जला दिया जावै जब जल जावै तब उसको ढक दिया
जावै उसके कोयले और राख हो जावेगी राख दो
चावल पानमें रख कर खिला केसीही खांसी होरफा
हो जावेगी और कोयले पीस कर एक बोतलमें भर मुँह
वन्द करके मिट्टीमें एक गमलामें गाड़ देय और दोनों
वक्त छे मास तक उस मिट्टी में पानी डाला जायवादको
निकाल लेय और फिर रख लेवे दो चावल गायके
दूधकी मलाई के साथ खावे सुहवतसे परहेज करे और
खांसी व श्वास पर भी ऊपरकी तरकीबके मुताविक
बहुत नफा करती है मुजवि है ।।
अथ कुव्वेतवाह व प्रमेहकी दवाई नं० १३४.
तुरुमवेल नीम पुख्तःके करीब सवा दो सेरके
'निकाल कर उसका रोगन निकलवा लेवे और खुराक
तुरमल नीमपुस्त. यानी अघपके वलके वीज ।
(१०२) खूपचन्दचिकित्सा।
१ मासेसे ९ मासे तक खावे यानी अव्वल रोज।
एक मासे दूसरे रोज २ दो मासे इसी तरह नौ रोज
१ एक मासा इजाफा करे कुल अठारह रोज इस्तेमाल
करे फी खुराक निस्क माश- मिश्री भी डाल लिया
कर तरकीब रोगन निकालनेकी यह है खेल नीम पुरस्त
लेकर मय गूदा पानी में चढावे जब उबाल आ जर
तब उतार कर बीज यानी तुरूम निकाल कर कोल्हू
पिरवा कर रोगन निकाल लेवे।
अथ मुजाककी दवाई नं० १३५.
कत्था सफेद माजू इतर सन्दलमें चने वरावर गोली
बनावै एक गोली सुबहको पानीसे खाई जावेगी।
अथ प्रमेहकी दवाई न० १३६.
सेंवलकी मूसली कूटकर ३ तीन मासे और३ तीन
मासे शकर मिलाकर गायके दूधसे खावे ।
अथ आतशककी दवाई नं० १३७..
पपड़िया कन्धा सफेद साफ किया हुआ मात्र दो
अदद इलायची सफेद चार अदद इनको बारीक पीस
झर पहिले जस्म धोकर मक्खन लगाये फिर दवा
सुश्क लगावे एक घंटे में सेहत मालूम होगी दो तीन
रोजमें अच्छा होजावेगा।
वैयकतार। (१०३) अथ बवासीर खूनी या बादी कैसीही हो दवाई नं० १३८. स्याह जीरी ३तीन तोले स्याह मिर्च १ तोले खूब बारीक पीस कर पानीमें गोली बाँधे खुराक जहाँ तक होसके १ तोलसे जियादः खावै दो तोले तक पानीसे स्वाह गायके दूधसे खावे मालाई दही न खावै सात रोज तक खावै । . अथ गठिया व दरदकी दवाई नं० १३९. अव्वल सिंघिया जहर २ दो तोला पीस कर रख- लेवे फिर पाव । भर तिलका देल उसमें मालफंगनी एक धेलाकी और अफयूँ एक पैसेकी डालकर कढाई पर चढाकर आँच देय जब मालफंगनी और अफयूँ जल जादै तब कढाईको उतार कर ५ मिनट बाद सिंधिया डाल कर मिलावै धुयेंसे बचा रहे रोगन तैयार होगया । फालिज गठिया हाथ पैर जिसके सूख गये हों तीन साल तकके मरीजको सेहत करेगा। रातको मकानके अन्दर मालिस करै वादको बरगदके पत्ते पर रोगन लगाकर चिरागपर गरम करके सेंक देय फिर वही पत्ते बाँध देय रुअड रखकर सुबहको उठनेसे एक घंटे पहले खोले और पसीना पोंछ कर मालिश रोगनकी कर दे फिर एक घंटे बाद उठे संहत हो जावेगी।
(१०४) खूबचन्दचिकित्सा। " " " " १ अथ शरवत नं० १४०पेशावज्यादा अने १ गुलाबासकेबीज तोले/४ गुलाव तीनपाव २ अनार कली ११/५ कन्द तीनपाव ३ मस्तगी 1 इनसबकाशरवतबनाले अथ फंकी नं १४१ पेशाव ज्यादा आनेव १ बब्बुलकी पत्ती मासे १/१० कनेरगान मासे २ कतीरा १११ [गाकीजड़ ३ कहू १२ धनियाँ "२१ ४ बब्बुलकी फली " १ ५ गोंद १ ६मोती १४ अजवाइनखुरा २१ ७ चन्दन सफेद "३॥ १५ इमलीकच्ची "२१ ८ गुलेअरमनी १६ जाउचीकेशीज"२१॥ ९ सतसुपारी १॥ १७ शालममिश्री"२१॥ सबके वरावर मिश्री सबको पीसकर फंकी वनावे अथ अर्क नं १४२ फंकीके साथका. १ धनियॉ तोले ३५ गिलोयहरीतोले १०८ 11 |१३ राँगकुश्ता "२१ " १॥ " २ चन्दन सफेद ३ गुलाब के फूल सेवतीके फूल ३६ गुलेगाहजुवाँ तोले ३ "३ अजवाइनसुरासानी"३ १ ३२८ मस्तकी " --
वद्यकमार।
(१०५)
"२१-४
९ कंघी
तोले १०-८/१४जामनकेपत्ते तो.२१-४
१० गुलाबका जीरा,, २/१५ मिश्री
११ मूसली स्याह , २१६खारनिम्बू मासे १॥
१२ बीजबन्द सुर्ख , ३ १७ अनारकीक लीतोले
१३ ब्राह्मी
1, ३/१८ कसेरू
सब दवायें आगपर चढाकर अर्क खींच लेय ७६
सेर, तरकीब खानेकी फंकी मासे ९ और शरबत तोले
२ और अर्क तोले १२ सबको शरवत और अर्कके
साथ फंकी खाय । पेशाब ज्यादा आना बन्द हो।
अथ नामर्दीकी दवाई नँ० १४३.
। बीरबहूटी मासे ३२६ मछलीकापित्तामासे३२
र हाथीदांत ,, ३२|७ घुगुची लाल
३ लौंग
, ३२/८ घुगुची सफेद ३२
जायफल , ३२/९ सुअरकी चरवी..३२
मीठा तेलिया , ३२/१० उसरसांडे नाग १०
सब दवा पीसके उसमें उसडसांडे डाल देय फिर
हांडी चिकनीमें भरे और हांडी तले छेद करै उसमें
सींक लगाय देय उसके नीचे एक बरतन रख देय
ऊपरसे आरने कंडोंकी ऑच देय फिर तेल निकाल
लेयू तेल लगाके पानको बांध देय नामर्द आदमी
मर्द होय।
"
(१०६) खूपचन्दचिकित्सा। अथ घुसरायन जुकामपर नॅ० १४४. घुसरायनके फलका छलका उतारकर फूल रहिजावे उसका गुण ॥ एक फूल भिगोकर सूंघे जुकाम जारी होकर दिमाग साफ होकर हलका होजावैगा और पागलको सुंघाया जावै तब पागल अच्छा होगा,और पेटके कीडे ५ फूल पिलानेसे पानी होकरजाते रहेंगे। और ५ फूल पीस कर बत्ती बनाके औरतकी भगमें रखे सात दफा भिगोकर गर्भ गिर जायगा।घुसरायन विंदालका फल काटेदार होताहै वो लेना चाहिये ज्यादातरयह फल मधुरावृन्दावनकी तरफ होताहे। अथ छतावरका घी नँ० १४५. १छतावरकाअर्क तोले ६०/१० मुरेठी २घी ३ दूध ६४/१२ जीवनी ४असगन्ध १३ पीपल ५छतावर ६ वाराही कन्द १४ शहद ७विदारी कन्द १५ खरेटी "१५ ८ कौंचके बीज " ४१६ हुलहुला ९ इलायची सफेद ४/१७मिसरी तोले ४ ,६४|११ मुनका "४ ८ ८ ४ 11 वैद्यकसार । (१०७) पहिले अर्क शतावर घी दूध शहद मिसरी अलाहदा रक्खै और सब दवा कूटछान कर १० सेर पानीमें औटावै जब चौथाई पानी रह जावै तब उतारकर छानले फिर धी दूध अर्क शतावर और पानी सब दुवाका निकला हुआ कढ़ाई में डालकर पकावै जब घी रहिजावै तब छानकरशहत मिसरी मिलाय दे खुराक १ तोले पेशाब ज्यादा आने और खूनके विकारको और ताकतको फायदा करताहे। अथ सुस्तीकी दवाई नं० १४६. सफेद कन्हैरकी छाल पैसाभर सफेद गुंजा पैसाभर संखिया निमासही गायका दूध चारसेर अवटि बांटि दवा डार जामन देमथनिकर ननु तब पासही।इन्द्रिय पर लेप करै बंगला तब पान धरै बाँधै दिन सात राति मिटै ढीलता सही । कड़ो होय बडो खड़ो चढो सर्व काल अड़ो अष्टयाम वामसंग कामको विलासही ॥१॥ १ सफेद कन्हेरकी वकली३॥)२सफेद घुगुची १॥) ३ संखिया विप३ माशे ४ गायका दूध 58 पर। अथ जहर विच्छू व सांप व अफीमकी दवाई, नं. १२७. कपासकी पत्ती पाव डाभर पानी में पीसकर पिलावे अच्छा होजाबैगा।
(१०८) खूबचन्दचिकित्सा।
अथहरकिसमके जहर खानेकी
दवाई नं० १४८.
पन्ना मणीको पानी में धोय कर दो तीन दफेमें पि
लावै फौरन अच्छा होजावेगा।
अथ गिलट कोढकी दवाई नं. १४९.
विसखपराका रस चावल धोवन मिलाय कर दिन
२३ पिलावे अच्छा होजावेगा।
अथ सपेद दागकी दवाई नं० १५०.
लीलाथोथा सैंजनेके वीज पानीमें घिसकर
लगावे तो सपेद दाग जॉय ।
अथ विच्छूके काटनेकी दवाई नं० १५१.
१ फिटकरी स्पेदका फूला रत्ती लेकर चार कतरह
पानी में घोलकर दोनों आंखमें डालनेसे फोरन् अच्छा
होताहे जादूका असर रखताहै।
अथ चूर्ण हाजमेका नं० १५२.
तोले १६/६ नोन काला मासे ८
२ सोंठ
१६
७ नोन सेंधा
३ आंवला
४ हीग भुनी
मासे ८
८ नोन सारी
५ सुहागाका फूला
९ नोनसांभर
दाम १२॥ १० नोन बुडारी
८
८
८
वैद्यकसार । (१०९) 17 १ ११ " "" हरं सोंठ आंवलाको तीन दिन भिगोकर महीन तीसकर कढाईमें चढाकर भून लेय फिर और सब दवा सकर उसमें डालदे फिर झरबेरीके वर बराबर गोली नाले। अथ धुंटी बच्चोंकी नं० १५३. मासे १/११ अजवायन मासे । पोदीना १,१२ मुरैठी काकडासिंही १/१३ सुहागाकचा सोंठ, १९१४ अमलतास ११५ नोन काला त्रिफला ११६मुनका सनाय १९१७ सहत ८ पित्तपापडा १/१८ निसोत ९ पलाशपापडा १९१९ एलुआ ३० अजमोद रत्ती अथ चूर्ण हाजमेंका दूसरानं० १५४. त्रिकुटा माशे ४८५ नोन काला माशे १६ जीरा दोनों भुने " ३२/६ गन्धक शुद्ध १६ 'नोन संघा १६७सुहागाकाफूला .नोन साँभर "१६८ हींग भुनी । पीपल " " " १ १२० हींग " " ८
.
हांडीमें रखकर आग लगादे राख होजावेगी सुगक
(११०) खूबचन्दचिकित्सा ।
सबको पीसकर कागजीके अर्कमें घोटै ।
रत्तीऽ४ खाय तो हाजमा करें ।
अथ दवा दरद तथा हाजमेंकी नं० १५५.
नोन सेंधा ऽ। पावभर अर्क सैंजने । तीन पा
सबको खरलकरके गोला बनाकर और सुखाकर सम्पुर
करके गजपुटमें फूंकदेय खुराक ६ मासे गरम पानी
साथ खावे दरद तथा हाजमेंको बहुत नफा करताहै।
अथतिल्ली तथा पेटके दरदकी दवाई नं०१५६
१ तेजाब गन्धकका तोले १
२सोरा कलमी
३ हीरा कसीस हरा मासे
सवको तीनपाव पानीमें मिलाकर एक शीशी-
में रक्खे खुराक ४ तोलेसे ८ तोले तक तिल्ली और
दरदवालेको पिलावै फौरन अच्छा होगा तिल्ली सात
या कुछ ज्यादे दिनमें अच्छी होगी तथा तिल्लीवालेको
चिरचिटा घुन्डीवाला चिरचिटेकी घुन्डी सुखाकर एक
मासे ६ लेकर उसके बराबर बूरा मिलाकर पानी
साथ खिलावे।
तोले ४
४ कोनेन
५ सत फोलाद
वैद्यकसार।
"
अथ हैजेकी दवाई नं० १५७.
नोन सेंधा सेर 51 सीरा तीन पाव ॥
फिटकरी तीनपाव s६ हीराकसीसहरा — sm
नौसादर डेढ़पाय 5७ इलायचीलालतोला१०
सुहागा आधसेर su/८ सोडा
सवको कूटकर एक हाँडीमें भरै लेकिन हाँडी वडी
हो सिर्फ दो अंगुल खाली रहे उसके मुंहपर एक कु-
इड रखे जिसके पेट में छेद करके एक नली लगावे
पट्टीके वरतनमें अनिकाले तले हाँडीके तेज आँच
रे तेजाब निकलेगा छः या सात बूंद पानीके साथ
ना संग्रहणीके वास्ते एक तोला आंवला रातको
भगोयकर सुबहको घोटकर दस बून्द डालकर पिलावे
१० दिन तक।
तथऔरतके खूनबून्दकरनेकी दवानं० १५८
खरेटीकी जडीकी छाल मासे ६औटायकर मिसरी
लकर पिलावे खून बन्द हो जावेगा।
अथ आँख दुखनेकी दवाई नं० १५९.
फिटकरी रत्ती १
मिसरी मासे १
गलायका अर्क तोला २
चिरचिटा घुन्डीवाला चिरचिटेकी घुन्डीसुखाकर एको
हांडीमें रखकर आग लगादे राख होजावेगी खुराक
मासे ६ लेकर उसके बराबर वूरा मिलाकर पानी
(११०) खुवचन्दचिकित्सा ।
सबको पीसकर कागजीके अर्कमें घोटै सुरा
रत्तीऽ४ खाय तो हाजमा करै ।
अथ दवा दरद तथा हाजमेंकी नं० १५५.
नोन सेंधा s। पावभर अर्क सैजने ॥ तीन पा
सबको खरलकरके गोला बनाकर और सुखाकर सम्पु
करके गजपुट में फूंकदेय खुराक ६ मासे गरम पानी
साथ खावै दरद तथा हाजमेको बहुत नफा करता है।
अथतिल्ली तथा पेटके दरदकी दवाईनं०१५६
१ तेजाब गन्धकका तोले १
२ सोरा कलमी
तोले ४
३हीरा कसीस हरा
सवको तीनपाव पानीमें मिलाकर एक शीशी-
में रक्खे खुराक ४ तोलेसे ८ तोले तक तिल्ली और
दरदवालेको पिलावै फौरन अच्छा होगा तिल्ली साता
या कुछ ज्यादे दिनमें अच्छी होगी तथा तिल्लीवालेको
मासे ४
४.कोनेन
६सत फोलाद
साथ खिलावे।
वैद्यकसार। (११३) ताले जाडा आनेसे घंटे ४ पहले १ गोली खिलावे हर १ गोली घंटे पहले खिलावै जाडा बुखार बंद जागा अगर गोली और तेज करना हो तो करे- की पत्ती-छटाक डाले गोली न खुसकी करेंगी पिआस लगेगी। अथ दस्तोंकी दवा नं० १६५. • जामुनकी गुठली मासेपानीके साथ खिलावै दस्त न्द हो जावेगे तथा पेशाब ज्यादे आते हों तो मासेष्ट नीके साथ खिलावे तो पेशाव कम हो जायेंगे तथा डिको दस्त आते हों तो आधपाय 5- जामुनकी उली खिलावै तौ घोडेके दस्त बन्द हो जायेंगे। अथ हाजमेकी दवा नं० १६६. । गन्धक पोंगीका पाव 5। भर नौसादर डेढ पाव = खार मूलीका आधपावs=खार चिरचिटका छ- क भरऽ-सबको पीस कर हांडी डमरूयंत्रमें उडाले पांच पहर४ की देय दरदके वास्ते तथाहाजमेके वास्ते हुत फायदा करता है वैसेही खाये तथा गरम पानीके साथ खाये खुराक 1 मासेसेरमासे तक किसी हालतमें कसान नहीं करेगा तथा गरमी नहीं करेगा। अथ कव्जकी दवा नं. १६७. वेल अदद जो पुख्ताहों गृदा लेकर बीज निकाल
(११२) खूबचन्दचिकित्सा ।
सबको पीस मिलाकर दो दोवून्द आँखमें डा
अच्छी हो जावेगी।
अथ प्रदर रोगकी दवा नं० १६०.
चूहेकी मिंगनी मासे २ दूधके साथ पिलादे कैसे
खून जाताहो बंद हो जावेगा।
अथ वायशूल दरदकी दवा नं० १६१.
१वारूद
मासे८
२ पानी
उडूसाका अर्क जिसको विसौटा कहतेहैं बून्द सः
मिलाकर पिलादे तुरंत आराम हो जावेगा और घोडे
को एक टका वारूद सराव आधपावs= मिलाकर
पिलावे तुरंत आराम होजावैगा ।
अथ फोडा बैठानेकी दवानं० १६२.
विजैसारका गोंद पानीमें पीस कर लगावेतो फोडा
तथा वद दोनों तुरन्त वैठ जावेंगे।
अथ पुराने जखमपर लेप नं० १६३.
सॉपकी केंचक आँवाहलदी मठामें पीसकर मरहम
वनाले दो दफाके लगानेसे अच्छा हो जावे गा॥
अथ गोली जाडे बुखारकी नं० १६४
करेलेकी पत्ती = छटांक कपूर मासेट काली मि
मासे ६ सवको पीस कर गोली झरवेरीके वेर वराम
वैपकसार। (११३) ले जाडा आनेसे घंटे ४ पहले १ गोली खिलावे र १ गोली घंटे पहले खिलाने जाडा बुखार बंद जावेगा अगर गोली और तेज करना हो तो करे- की पत्तीऽ-छटाक डाले गोली न खुसकी करेंगी पिआस लगेगी। अथ दस्तोंकी दवा नं० १६५. जामुनकी गुठली मासेपानीके साथ खिलावै दस्त न्द हो जायेंगे तथा पेशाव ज्यादे आते हों तो मासेष्ट नीके साथ खिलावे तो पेशाब कम हो जावेंगे तथा डिको दस्त आते हों तो आधपाव 5% जामुनकी टली खिलावै ती घोडेके दस्त बन्द हो जावंगे। अथ हाजमेकी दवा नं० १६६. गन्धक पोंगीका पाव 5 । भर नौसादर डेढ पाव ! खारमूलीका आधपावs खारचिरचिटेका छ- क भरऽ-सबको पीसकर हांडी डमरूयंत्रमें उडाले आंच पहर४ की देय दरदके वास्ते तथा हाजमेके वास्ते हुत फायदा करता है वैसेही खाये तथा गरम पानीके साथ खाये खुराक १ मासेसेरमासे तक किसी हालतमें फसान नहीं करेगा तथा गरमी नहीं करेगा। अथ कब्जकी दवा नं. १६७. वेल अदद०जो पुस्ताहों गूदा लेकर बीज निकाल
गेरू १ तोला शोरा ४ तोला चार रोजतक खार
खरल करे फिर एकरोज कांसेके वत्तेनमें खरल के
सातरोज आंखमें सलाईसे लगावे आठवें रोजसे ती
रोजतक उम्दः शरावके फाये आंखपर बांध चौथे रो
(११४) खूबचन्दचिकित्सा।
डाले फिर हर बड़ी अददष्टपीस कर दो सेर पान
औटावैजब आधसेर पानी वासी रहे तव उतार ले
ही दो सेर पानीमें किसमिस आधसेर औटावै
आधसेर वाकीरहे तब उतारले और सबवगैरं छनी
वेलके गूदेमें मिलाकर छानले पहले सबको रात
रखकर सुबहको छानै फिर उसको चीनीके पियार
रखकर मुखा ले अगहनके महीनेसे १ तोले रात
दूधके साथ चार महीने तक खावै कब्ज जाता रहेगा
अधिक पुष्टि करेगा फिर दूसरी साल खावे।
अथ तेल हरकिसमके दरदका नं० १६८
तेल मिट्टीका अव्वल दरजेका १ बोतल कपूर
तोलाहलदीकी गांठि अदद६घीमें भूनकर काली
८ मासे सब दवा मिलाकर मिट्टीके तेल में मिला
१ बोतल में भर ले शिरके दर्दको तथा जिस ज
जिस्मके ऊपर दरद हो सबको फायदा करता है।
अथ आंखसे पानी गिरनेकी दवा नं० १६
गुलावका फाया वांधे दस बारह रोजतक और लि
(११
वेद्यासार।
नजर लगाकर न देखै आराम होगा जाडोंकी मोस
करें गरमी में नहीं।
अथ नासूरकी दवा नं. १७०.
बकायनके वीज एकसेर थोडे कूटे जाय अरंडके
वीज एकसेर, शीशमका बुरादा एक सेर, बकरके चारों
पैरकी नलीकी हड्डी, सबको पातालयंत्रसे रोगन
निकालकर लगावै तथा रोगन विलमांकी बत्ती नासू-
रमें रखनेसे फौरन अच्छा होताहे रोगन सपेद हो ।
अथ दवा कुष्ठकी नं० १७१..
अडी छीलकर १ अंडी सवेरेको खावै दूसरे दिन
२ अन्डी छीलकर खावै इसी तरह रोज अण्डीबदाता
जाने ४० दिनतक ६० अण्डीकरदे और ४१ईकताली-
सवे रोजसे १ अडी कम करता जाये ८० असीरोजमें
यह प्रयोग पूरा होगा. खानेमे चनेकी गेटी और धी
खावे मीठा और नोन नही खावे कैसेही कुष्टदो आराम
हो जावेगा और रतकपूरभी खिलाया जाता है उसकी
तरकीय आतशककी बीमारीपुर लिखी है।
अथ सिरके दरद और पीनसकी
दवा नं. १७२.
सिरम दरद हो और नजला रुका हो पीनसदो और
कीड़े पडजाय उसके वास्ते विन्दालका फल लेकर
(११६) खूबचन्दचिकित्सा । उसके अन्दरका जाला निकालकर छः मासे पानी पांच सात मिनट भिगोकर मलकर नाकके रास्ते खीं छींक उसी वक्त आवैगी फिर नहीं सूंघे इसीतरह दि तक नाकसे रतूबतनिकलैगी ३ दिनतक सूखीदालरोट खिलावे पीनसके कीडे भी निकल जावेंगेऔर अच्छ होजावेगा और योगक्रिया करनेवालोंके जव गरम दिमागमें होती है तब यही दवा सूंघतेहैं ऊपर लिखेक रीतिसे दिमाग साफ होजाताहैऔर पागलको मुंघानेसे पागल अच्छा होजाताहै और पेटके कीडे पांच फूल पिलानेसे मिस्लपानीके होकर बहि जाते, पांच फूल पीस कर बत्ती बना कर सात दफे भगमें रक्खै तब गर्भ गिरजाता है यह विन्दाल किस्म घुप्सरायनमेसे है इस पर कटि होतेहैं यहां भी कहीं कहीं होतेहैं और मथुरा वृन्दावनकी तरफ बहुत मिलते हैं और पैननकिलर अङ्ग्रेजी दवासे भी दरद जाताहे और रोगन काफूर अजवायनके सतवालेके लगानेसे दरद जाता रहेगा। अथ रोगन कपुरकी विधि नँ० १७३. काफूर और सत अजवायन वरावर लेकर अलहिदा अलहिदा पीसकर शीशी में भरकर हिलादे सब दोमिन- टमें रोगन हो जायगा बचेको माके दूध में एक कता
वैद्यकसार।
(११७)
और तीन कतरा मले जाय तो पसली अच्छी
" और हैजेके लियेभी पांच पांच बून्द
पिलावै और जिस्ममें दरद हो तौवहाँ मालिश
हैजेवाला भी अच्छा होजायगा।
अथ वच्चोंकी पसलीकी दवा नं० १७४.
जायफल दो२ और जावित्री पीपल जायफलके
और कस्तुरी १ एक मासे बंगलापानमें गोली
मूंग वरावर मॉके दूधमें बच्चेको खिलावे और
रोगन काफूर अजवायनके सतवाला एक कतरेसे तीन
कतरेतक मॉके दूध में खिलावे और तीनकतरे वीसकतरे
रोगन तिली में मिलाकर मालिश करें और हरै अनैसू
अमलतास चार चार रत्तीकी पूंटी बनाकर पिलावै
जिसको दस्त नहीं आताहो तब पसली जाती रहती है ।
अथ दमाकी दवा नं० १७५.
गुलावी सज्जी आधपाव जिसके छोटे छोटे टुकडे
करके आठरोज आकके दूध भिगोय रक्खै नवमें
दिन एक मलैयामें इतना आकका दूधभरे जितनेमें
सज्जी डूब जाय फिर कपड मिट्टी करके आठसेर
कंडोमें फूंक देवे खुराक दो मासेसे चार मासेतक घीके
साथ खावै तौ दमा जाय।
(११८) खूबचन्दचिकित्सा। अथ सुस्तीकी दवा नं० १७६. दो जोंक जो नीले रंगकी होती है उनको गधेके फोतेमें लगावै जब खून पीकर जोंक गिरे तब उठाकर मुंह बांधकर तीन रोज तक रखलेवै फिर गोखरू छोटे और माजूफल और वीरबहोटी सव जोंककी वरावरलेकर घीगुवारमें पीसकर कपड़े में लगाकर छोटी छोटी बत्ती बनावै छाईमें सुखाकर आतसी शीशी में भरे. पाताल- यंत्रसे रोगन निकले और धानकी भ्रसीकी आँच करे शीशीके मुँहमें सींक लगाकर एक नांदमें छेद करके शीशी उलटी रक्खै नांद चूल्हे परर क्खै तले बरतन चीनीका रखदे देखता रहे जब रोगन निकलना बन्द हो तब रोगन निकाल लेवै उसको मलकर पान बाँधै ख्वाब न होने दे उम्मैद है कि सातरोजमें अच्छा हो जावेगा। अथ जोगराज गूगल वायुपर नं० १७७. सोंठ मासे ४ पीपल मासे ४ चावमासे ४ पीपलसूल मासे ४ चीतेकी छाल मासे ४ हींग भुनीमासे४ अज- मोद मासे ४ सरसों पीली मासे ४ जीरा दोनों मासे ८समालू मासे ८ इन्द्रजी मासे ४ पाढर मासे वाय- विडंग मासे ४वच मासेट गज पीपल मासे ४ कुटी मासे ४ अतीस मासे ४ भारंगी मासे ४ मूरवा मासे ।
वैद्यकसार।
(११९)
छैलबीला मासे४ गोखरू मासे ४ त्रिफला मासे १२
। गूगलशुद्ध मासे १०० फौलाद तोले ४ वंग तोले ४
'चांदीकी भस्म तोले नागेश्वर तोले ४ अबरख तोले
४ मन्डूर तोले ४ रससिंदूर तोले ४ सब दवाई घी
लगाकर कूटता जाय जितना जियादः कुटैगा उतना
अच्छा होगा खुराक रत्ती १ से रत्ती २ तक अनुपान
वेद्यकी रायपर जैसा मौका देखे ।
अथ जोगराज गूगल दूसरा नं० १७८.
सोंठ २५ पीपलामूल २५ चाव २५ चीता २५
सरसों पीली २५ काली मिर्च २५ हींग भुनी २५
अजमोद २५ जीरा देनों ५० रेनुका २५ इन्द्रजौ २५
पाढर २५ गजपीपल २५ वायबिडंग २५ कुटकी २५
अतीस २५ भारंगी२५ वच २५ मुरैठी २५ पत्रज २५
देवदार २५ पीपल २५ रासन २५ कूट २५ नागरमोथा
२५ सेंधानोन२५इलायची लाल २५ गोखरू२५धनि-
यां२५ हर्र २५ बहेड़ा२५ आंवला २५ तज २५ खस
२५ जवाखार २५ मूरवा २५ सबको बराबर लेकर कूट
पीसकर कपडछान करले फिर सबकी बराबर गूगल
डाले फिर गूगलसे चौथाई घी मिलाकर खूब कूटे
जितना जियादः कूटैगा उतना अच्छा होगा।
(१२०) खूपचन्दचिकित्सा।
अथ शिंगरफ वातरोगपर नं. १७९.
सिंगरफकी डली पल ४० सहत पल २४ भिला-
वेका तेल पल २४ घी गायका पल २४ इन तीनोंको
कढाईमें चढावै फिर शिंगरफकी डलीपर भिलावे पलट
पीसकर लगावै जिसमें शिंगरफ छिपजावे तथा मीठा
तेलिया पल ४ घीगुवारके रसमें पीसकर उसमें डली
धरै फिर डलीको कढाईमें डालदे कढाईको चूल्हेपर
धरकर आग वारै पहरतीन जवतकके कढाईका रस
सब जल जाय फिर डली कढाईसे निकालकर पानीसे
धो डाले तब सिंगरफ सिद्ध हो जायगा खुराक रत्ती
१ पानके साथ तथा सहतमें खाये तो सर्व वायु कफके
विकार जावें और क्षुधा करें और वीर्यकी वृद्धि होय ।
अथ गोली संजीवनी नं० १८०.
१ वायविडंग मासे १६६ आँवला
२सांट
१६७ बछ
१६
३ पीपल १६८ गिलोय
१६
" १६९ भिलावा
१६
५ बहेड़ा
" १६१० सिंगिया १६
सब दवा कूटकर गोमूत्रमें पीसकर चूंगची वरावर
गोली चनाले अदरकके रसके साथ खाय साधारण
मासे १६
"
वैद्यकसार।
(१२)
.
.
बुखार में एक गोली खाय और सन्निपातमें दो गोली
खाय और सांप काटनेपर चार गोली खाय ।
अथ सुरमा आंखका नं० १८१.
सीसाको खट्टी छाछमें १०८ बार शोध और काले
सुरमेको कागजीके रसमें ७ सातदिन घोटै तब शुद्ध
होगा इस विधिका सुरमा २ तोला और सीसा शुद्ध २
तोला पारा शुद्ध २ तोला मिसरी २ तोला समुद्र
झाग २ तोला पहले सीसा पारेकी कजली कर फिर
सब चीजोंको मिलाकर चार दिनतक खरल करे फिर
इसमें कपूर २ तोला मिलावै सुरमा बनगया सुबह शाम
लगानेसे आंखोंको बहुत फायदा होताहै रोसनी आं-
खोकी बढती है कपूर भीमसेनी पडताहे जो ऊपर
लिखाहै।
अथ सलाई सीसेकी आँखमें
लगानेकी नं० १८२.
सीसा लेकर एकसेर 53 विफलेके काढमें सो १००
बार चुझावै फिर भाँगरेके रसमें पचास ५० बार वुझा-
वै फिर सोंठके काढेमें पचास ५० वार वुझावै फिर
घीमें पचास ५. वार धुझावे फिर गोमूत्रमें पचीस
- (१२२) खूबचन्दचिकित्सा।
२५ बार बुझाने फिर सहतमें २५ वार बुझावै फिर
दूधौ पचीस २५ वार वुझावै इस भाँति सीसेको
३२५ बार बुझावै उस सीसेकी सलाई बनवाले उस
सलाईको दिनोंरातमें चार दफे खाली आँखमें फेरै
आँखसे पानी आताहो वो बंद हो जावैगा और कभी
आँख दुखेगी नहीं और आदमीके बुढ़ापे तक रोसनी
आँखकी वैसेही रहेगी कम न होगी और जिसको कम
दिखाता हो सलाई फेरनेसे आँखकी रोसनी ठीक हो
जायगी।
अथ लौकसपिस्ता बनानेकी विधि नं १८३.
१ लसौडे अदद ५०१४ तुख्मखतमी तोला १
अदर २०५ पोस्तकाछिकलातोलार
३ मुरेठी तोला १६ विहीदाना मासे
इन सबका काढाकरके बूरा आधसेर ॥की चासनी
करके सब दवाका काढा चासनीमें डालकर पकाले
फिर उपरसे इतनी दवा पीसकर और डालदे जो
नीचे खिखी हैं।
१ बादामगिरी तोला 1/2 कतीरा
२ पोस्तदाना तोला १५ गोंद
मासे ६
३ जो तोला तोला १/६ मुरैठी मासे ६
यह लौकसपिस्ता खाँसीको बहुत फायदा करता है।
२ उन्नाव
मासे ६
पल वैद्यकसार। (१२३) अथ आसवद्राक्षादि दूसरा नं० १८४. मुनका पल ५०/१५ वयूरकी छाल पल१६ .२ किसमिस पल १००/१६ महुआकीछाल पल ८ ३ छुहारे पल २५/१७ आमकी छाल पल ८ ४ बादाम - पल २५/१८ जामुनकी छाल पल ८ गोला पल १२/११ खरैटीकी छाल पल८ ६ गिलोय ४)२० कँघीकी छाल पल ८ ७ गोखरू पल ४३१ नलकी जड पल ८ ८ सतावर २२ डामिकी जड पल ८ ९ काँचकेवीज पल ४२३ गन्नेकी जड पल ८ १० मूसली पल ४ २४ गोंदनीकी छाल पल८ ११ मूसलीस्याह पल २५ धायके पूल पल ३२ १२ तालमखाना पल ४ १३ वीजवन्द पल २६ वूरा सपेद सेर si १४ वेरीकी छाल पल ४२७ गुड सेर इन सब चीजोंको कूटकर एक मटुकामं भर दे और इतनी चीजोंका चूरण करके मटुकामें डारे जो नीचे लिखी हैं। १त्रिकुटा पल ३६ इलायची सपेद पल ! २त्रिफला पल ३.५तज पल १ ३ परज पल १६ इलायची लाल पल ,
(१२४)
खूबचन्दचिकित्सा।
पली
७ चीता पल १/१४ अगर
पल १
८धनियां पल १/१५ तगर
९ चोवा चीनी पट ११६ जावित्री
१० मुरैठी पल १/१७ जायफल
पल १
११ पापाणभेद पल १/१८ लौंग पल १
१२ चन्दन सपेद पल १/१९ खस पल १
१३ चन्दन लाल पल १२० बालछड पल १
इन सब दवाओंके तोलसे छै गुणा पानी मटुकामें
भरै फिर मटुकेको एक महीना जमीनमें घोडेकी लीदमें
गाडै फिर मटुकेको निकाल कर भवकेमें उसका अर्क
खींच लेय और इतनी चीजोंकी पोटली भबकेमें डाल
दे नीचे लिखी।
१ केसर मासे १६३ कस्तूरी मासे ४
८४ धनियां
खुराक १ तोलेसे ४ तोलेतक सुवह दुपहर शाम
तीनवख्त पीवै काम अधिक बढे बंधेज होय मूत्रकृच्छ्र
मूत्राघात प्रमेह दूर होय कास स्वास यक्ष्मा दूर होय
वीर्यकी वृद्धि होय अरुचि दूर होय क्षुधाकर पांडुरोग
दूर होय सर्व उदररोग दूर होंय और खांसी
जिसमें कफ आताहो और स्वांस भी हो उसको बहुत
फायदा करता है।
"
२ कपूर
१६
PAN
वैयकसार। (१२५)
अथ हुचकीकी दवा नं १८५.
सेंधानोनको पानीमें घिसकर नास दे पानी नाकके
रास्ते सुँघावे हुचकी वन्द होजावेगी।
अथ नारायणी तेल नं० १८६,
असगन्ध पल १० खरेटीकी छाल पल १० वेलकी
छाल पल १० पाढर पल १० कटेरी पल १० वनमा
पल १० गोखरू पल १० कंघीकी छाल पल १० नीमकी
छोल पल १०अरलूकी छाल पल ३० पुनरनवा पल १०
पसारणी पल १० अरनीकी छाल १० इन सब चीजों
से आठ गुण जल डारे और सबका कादाकरे जब चौ-
थाई पानी बाकीरहै तब उतारले और काढेको छानले
और सतावर पल ६४ का रस डाले जो रस नहीं निकले
तौ आठ गुणा पानी डार कर सतावरका काढा करके
.डारे और तेल तिलीका पल ६६ डारे और इन सब ची-
जोंको चूरण करके डारे जो नीचे लिखी बच पली
चन्दन पल १ कूट पल १ बालछड पल 1 इलायची
लाल पल १छारछबीला पल १ सेंधा पल १ असगंध
पल १खरैटी पल १ रासन पल १ सौंफ पल १ देवदार
पल १ सालपरणी पल १ तगर पल ३ पृष्ठपरणी
पल १ मापपरणी पल १ मुद्रपरणी पल १ इनको
महीन कूट पीसकर डारे और दूधगायका सोलासेराऽ६
-
(१२६)
खूबचन्दचिकित्सा ।
डारे काढे और तेल और चूरण और दूध सवको कढा-
ईमें डारकर आगपर चढादेमंद मंद आँचसे तेल पका
ले फिर तेलको छानकर बोतलमें भरले जिसममें लगावे
तौ वातविकार सर्व जाँय पक्षाघात जाय संधि संधिकी
पीडा जाय भीण पुरुप पुष्ट होय स्त्री प्रसूति जाय बाँझ
स्त्री पुत्रवती होय।
अथ लोहा आसव नं० १८७.
लोहा चूरण पल ४ त्रिकुटा पल १२ त्रिफला पल
१२ अजवायन पल ४ चीता पल ४ वायविडंग पलट
नगरमोथा पल ४ सहत पल ६४ गुड पुराना पल सी
१०० सब दवाइयोंको चूरण करके वीस सेर ॥ पानी में
सब डारदे एक महीना १ दस दिन १० जमीनमें
गढा खोदकर घोडेकी लीद भरकर उसमें मटका गाडढे
फिर मटकेको निकाल कर अर्कको छानले प्रातःसमय।
पल पीवे तो अनि तीनकर पाँडु सोथ गुल्म पलीहा
स्वाँस कास भगंदर अरुचि संग्रहणी इन सब रोगोंकों
दूर करता है।
अथ अर्कवेलनं १८८.
वेल कच्चेका गूदा निकालकर काटा करके अर्क भयके
में खेचले तथा वेल पकेका काढा करनेकी जरूरत नहीं
है गूदेको पानी में घोलकर उसका अर्क खेच ले यह
अर्क पेचिसके दस्तोंको बहुत फाहदा करता हे सुराक
१ तोलेसे ३ तोले तक।
तोला ६ ९ सोरा . (१२८). खूबचन्दचिकित्सा। ७ फिटकरी सपेदका १० समुन्दरफेन तोला ६ फूला तोला ६ ८ नौसादर ११ सूजकी राखे तोलो तोला ६/१२ सुरमा तोला. सुरमाको अलहदा खूब महीन पीसले और सोराको अलहदा खूब महीन पीसले और सब दवाईको अल- हुदा पीसकर कपडछान करके उसमें सुरमा और सोरा मिलाकर फिर सबको खूब महीन सुरमाकी तरह पीसकर रखले रातको सलाईसे लगावै जाला व धुंध व फूलीको बहुत फायदा होगा। अथ बच्चोंकी संग्रहणी तथा बुखारकी दवाई नं० १९२. १ हलदी मासे ६४ गजपीपल मासे ६ २ देवदारु मासे ६५ पृष्टपणी मासे६ ३ कटेया मासे ६६ सौंफ सब पवाको कूटछानकर थोडेसे पानी में पीसकर उड़द घरावर गोली बनाले १ गोली शामको १ गोली सो. रेको सहतमें खिलावे बहुत फायदा होगा। इति खुवचन्दचिकित्सा समान । पुस्ता मिलनका ठिकाना- प्रेमराज श्रीकृष्णदास "वर टीम प्रेम-मुर्ग पौडीमीत मासे ६ लाला खूबचन्द य० पी०