Sanmati Library, Jaipur
Prashnaramayana
Front matter
२. ३
अध्याय चक्र।
2
दोहाचक्र.
६
राज
.
४
२४ २५ २६ २७ २८ २९८
४
२३/४०४१४२४१३.
||
२२ ३९ ४८ ४९ । ४४,३११०
२१/३८१७४६:४५/३६११
.
२०३७ ३६१३५३४३३.१३
१९१८ १७१ १६ । १९ ४
सूचना.
जिसकोप्रश्नकाफल जाननाहो उसकोउचित किहिल
अध्यायचक्रपै अंगुली रक्खे और उसी के अनुसार
पहिला दुसरा आदि अध्याय निकाल फिर दोहा
के किसी कोठे पै अंगुली रक्खै उसद्दी अक्का वाडा
निकालकर शुभाशुभ फल समझ लेय।
गोस्वामीतुलसीदासजी कृत
प्रश्नरामायण
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जिसको
शिवलाल गणेशालाल ने
मुम्बई टाइप से
निज लक्ष्मीनारायण यन्त्रालय में
छपवाकर प्रकाशित किया
मुरादावाद
द्वितीयवार ] सन् १९०४ [२००० कापी
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पाथेयं यन्मुमुक्षोः सपदि परपदमाप्तये प्रस्थितस्य ।
करयोगाला निधो कलिमलमथनं पावन पावनानां
विश्रामस्थानमेकं कविवरवचसां जीवनं सज्जनानां
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182-
गोस्वामी तुलसीदासजीकृत
प्रश्न रामायण
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नलाल
4.
10
दोहा।
वाणिविनायक अंवरवि , गुरुहर रमा रमेश ।
सुमिरि करहु सवकाजशुभ,मङ्गलदेशविदेश ॥१॥
गुरु सरसइ सिन्धुरवदन,शशि सुरसरि सुरगाइ
सुमिरचलहुमगमुदितमन,होइहिसुकृतसहायश
गिरागौरि गुरु गणप हर, मङ्गल मङ्गल मूल ।
सुमिरत करतल सिद्धिसव,होइईशअनुकूल॥३॥
(४)
भरत भारती रिपुदमन, गुरु गणेश बुधवार ।
सुमिरत सुलभ सुधर्मफल,विद्या विनय विचार।
सुरगुरु गुरु सियरामगण, राउगिरा उरानि।
जोकछुकरियसोहोइशुभ,खुलहिंसुमङ्गलखानिए
शुक्र सुमिर गुरु शारदा, गणप लखन हनुमान ।
करियकाज सवसाजभल.निपटहिनीकनिदान
तुलसी तुलसीरामसिय, सुमर लखन हनुमान।
काज बिचारेहु सोकरहु,दिनदिन बड़ कल्याण ७
दशरथराज न ईति भय, नहिं दुख दुरित दुकाल |
प्रमुदित प्रजा प्रसन्नसव,सबदुख सदा सुकालादा
कौशल्यापद नायशिर , सुमिर सुमित्रा पाँय
करहु काज मंगल कुशल, विधिहरि शंभुसहायह
विधिबश वन मृगया फिरत,दीनअन्ध मुनिशाप।
सोसुनि विपतविषादबड़,प्रजाहिशोकसन्ताप/१०
सुतहित विनती कीन्हनृप,कुलगुरु कहा उपाय।
(५) होडहि भल सन्तानमुनि,प्रमुदित कोशलराय११ पुत्रयज्ञ करवाय ऋषि , राजहि दीन्द प्रसाद । सकलसुमङ्गाल मूलजग, भूसुर आशिर्बाद ॥१२॥ रामजन्म गृह गृह अवध. मङ्गल गान निशान | शकुन सुहावन होय सुत,मंगलमोद निधाना३३॥ राम भरत सानुज लखन, दशरथ वालक चार। तुलसी सुभिरत शकुन शुभ मंगलकहव प्रचार१४ भूपभवन भाइन्ह सहित , रघुवर बाल विनोद । सुमिरतसवकल्याणनग.पगपगमंगलमोद ॥१५॥ करनवेध चूडाकरन , श्रीरघुवर उपवीत । समय सकल कल्याणमय.मंजुल मंगल गीता१६। भरत शत्रुसूदन लखन, सहित सुमर रघुनाथ । करहुकाजशुभसाजसव,मिलहि सुमंगलसाथ१७ राम लखण कोशिकसहित,सुमिरहु करहुपयान। लक्षलाम जय जगतयश, मंगल शकुनप्रमान१८ " (६) मुनिमखपाल रूपाल प्रभु,चरणकमल उर आनु । तजहुशोकसंकटमिटहि,सत्यशकुन जियजानु१६ हानि मीचु दारिद दुरित, आदि अन्तगत बीच । राम विमुख अघ आपने,गए निशाचर नीचार शिला शापमोचन चरण, सुमिरहु तुलसीदास.। तजहु शोक संकटामटहि,पूजहि मनकी आस२१ सीय स्वयंवर समय भल,शकुन साध सवकाज। कीरतविजय विवाहविधि,सकलसुमंगलसाज२२ राजत राजसमाज मह, राम भंजि भवचाप । शकुनसुहावनलाभबड,जयपरसभाप्रताप ॥२३॥ लाभ मोद मंगल अवधि, सिय रघुबीर विवाह सकलसिद्धिदायकसमय,शुभसबकाजउछाह२४ कोशलपालक वालउर, सिय मेली जयमाल । समयसुहावन शकुनभल, मुदमंगल सवकाल२५ हरषि विबुध वरषहिं सुमन, मंगलगान निशान।
(.)
जयजय रविकुलकमलरवि,मंगलमोदनिधान २६
सतानन्द पठए जनक, दशरथ सहित समाज ।
आए तिरहुत शकुनशुभ, भएसिद्धसवकाज२७॥
दशरथ पूरण परव विधु, उदित समय संयोग ।
जनकनगरसर कुमुदगण,तुलसी प्रमुदित लोग२८
मनमलीन मानी महिप, कोक कोकनदवन्द ।
सुहृद समाज चकोरचित,प्रमुदित परमानन्द२६
तेहि अवसर रावण नगर,अशकुन अंशुभअपार।
होहिं हानि भयमरन दुख, सूचक वारहिवार३०
मधुमाधवदशरथ जनक, मिलवराज ऋतुराज ।
शकुन सुवननवदल सुतरू, फूलत फलत सुकाजा
विनय पराग सुप्रेमरस, सुमन सुभगसम्वाद ।
कुसुमित काज रसालतरु,शकुनसुकोकिलनाद३२
उदित भानुकुल भानुलखि,लुके उलक नरेश ।
गए गँवाइ गरूरपति, धनुमिषहये महेश।।३३॥
(८)
चारि चारु दशरथ कुमर,निरखि मुदित पुरलोग।
कोशिलेश मिथिलेश को,समय सराहन योग३४॥
एक वितान विवाह सव. सुवन सुमंगलरूप ।
तुलसीसाहतसमाजसुख सुकृतसिन्धुदोउभप३५
दाइज भयउअनेक विधि,सुनसिहाहि दिशिपाल
सुखसम्पति सन्तोषमय,शकुन सुमंगल माल ३६
वरदुलहिन सव परस्पर.मुदित पाइ मनकाम ।
चारु चारिजोरी निरखि,दुहुसमाज अभिराम३७
चारिउ कुमर विवाहि पुर. गवने दशरथ राउ।
भएमंजु मंगल शकुन, गुरुसुर शंभु पसाउ ३८
पंथ परशुधर आगमन, समय शोच सब का हु।
राजसमाज विषाद वड़,भयवश मिटा उछाहु३६
रोष कलुष लोचन भ्रकुटि, पाणि परशु धनुवान।
काल करालविलोकिमनि सव समाजविलखान।।
प्रभुहि सौपि सारंग मुनि, यीन्ह सुआशिरबाद।
नि
(९)
जयमंगल सूचक शकुन, राम राम संबाद ।४।
अवध अनन्द बधावनो , मंगल गान निसान ।
तुलसी तोरन कलसपुर,चवर पताक वितान४२
साज सुमंगल आरती, रहस विवश रनवास ।
मुदित मात परिछनचली,उमगत हृदयहुलास ॥
करहिं निछावर आरती. उमग उमग अनुराग।
वर दुलहिन अनुरूपलवि.सखी सराहहिभाग ।
मुदित नगर नरनारिसव,शकुन सुमङ्गल मूल ।
जयधुनि मुनिसुर दुंदुभी, बाजहिं वरषहिं फूल ॥
आए कोशलपाल पुर, कुशल समाज समेत ।
समयसुनत सुमिरत सुखद,सकलसिद्धिशुभदेत॥
रूप शील वयवंश गुण, समविवाह भए चारि।
मुदित राव रानीसकल,सानुकूल त्रिपुरारि ४७
विधि हरिहर अनुकूल अति,दशरथ राजहिआजा
देखि सराहत सिद्धसुर,संपति समय समाज४८
कीन्ह कुचाल। (१०) शकुनप्रथम उनचासशुभ.तुलसीप्रति अभिराम। सब प्रसन्न सुर भूमिसुर, गोगण गंगाराम।१६। अथ द्वितीयाध्याय। समयराम युवराजकर , मंगलमोद निकेतु । शकुन सुहावन सम्पदा, सिद्ध सुमंगलहेतु ॥१॥ सुरमायावश केकयी, कुसमय कुटिलनारिमितहोइछल,अनभलाजकिकालर कुसमय कुशकुन कोटिसम, रामसीय वनवास। अनरथ अनभल अवधिजग, जानहुसरबसनास३ सोचतपुर परिजनसकल, विकलराउ रनवास। छलमलीनमनतीयमित,विपतिविषादविनास४ लखन रामसिय वनगमन,सकल अमंगलमूल । सोच पोच सन्तापवश, कुसमय संशयशूल॥५॥ प्रथमवास सुरसरिनिकट,सेवा कीन्हि निषाद कहव शुभाशुभ शकुनफल, विसमयहरष विषाद६ , (११) चले नहाय प्रयागप्रभु, लपण सीय रघुराज । तुलसीजानव शकुनफल, होइय साधु समाज७ सायराम लोने लपण, तापस वेप अनूप । तप तीरथ जपजागहित,शकुन सुमंगलरूप ॥८॥ सीता लपण समेतप्रभु, यमुना उतरि नहाइ । चले सकल संकट शमन,शकुन सुमङ्गल पाइ। अवधशोक सन्तापवश, विकल सकल नरनारि। वाम विधाता रामविनु, मांगत मीच पुकाराि१० लखन सीय रघुवंशमणि, पधिकपाय उर आनि। चलहुअगममगसुगमशुभ,शकुनसुमंगलखानि११ ग्राम नारि नर मुदितमन,लखन रामसियदेखि । होय प्रीति पहिचानविन,मान विदेशविशेखि १२ वनमुनिगणरामहिमिलहिं मुदितसुकृतफलपाइ। शकुनीसदिसाधक दरश,अभिमत होइअघाइ।१३॥ चित्रकूटपयतीर प्रभु , बसे भानुकुल भानु।
(१२) तुलसी तप जब योगहित,शकुन सुमंगलजानु१४ हंसवंश अवतंसजब , कीनवास पयवास । तापससाधक सिद्धमुनि सबकहँ शकुन सुपास १५ विटपबेलि फूलहिंफलहिं,जलथल विमलविशेपि मुदित किरात विहंगमृग,मंगल मरति देखि १६ सींचत सीय सरोजकर, वये विटप वट वेलि । समउसुकालु किसानहित,शकुनसुमंगलकेलि १७ हयहाँके दक्षिणदिशा , हेरि हेरि हिहिनात । गये निषाद विपादवश,अवध सुमन्तहि जात।१८। सचिब सोच व्याकुल सुनत,अशकुनअवधप्रेवश। समाचार सुनिशोकवश, मांगी मीचु नरेश॥१६॥ सम राम कहिरामसिय , राम शरनभये राउ । सुमिरहि सीताराम पब,नाहिन पान उपाय२० रामविरह दशरथमरन, मुनिमन अगम सुमीच । तुलसीमंगल मरणतरु,शुचिसनेह जलसींच२ १ - धीर वीर रघुवीर प्रिय ,सुमिरि समीर कुमार। अगम सुगम सबकाजकरु,करतलसिद्ध विचार२२ सुमिरि शत्रुसूदन चरण , शकुन सुमंलमान । परपुरवादविवादजय जूझजुत्रा जयजानि॥२३॥ सेवक सखा सुवन्धु हित,शकुन विचारु विशेपि । भरतनाम गुणगणविमल,सुमिर सत्यसबलेख२४ साहिव समरथ शीलनिधि,सेबत सुलभ सुजान। रामसुमिर सेइयसुप्रभु शकुनकहव कल्याणा२५ सुकृत शीलशोभा अवध, सीय सुमंगल खानि । सुमिरशकुनतियधरमहित,कहवसुमंगलजानि२६ ललितलपण मूरति हृदय , प्रान धरे धनुवान | करहुकाज शुभ शकुनसब.मुदमंगल कल्याण२७ राम नामपर रामते, प्रीति प्रतीति भरोस । सो तुलसी सुमरतसकल,शकुन सुमंगलकोस२८ गुरु आयसु आए भरत, निरखि नगर नरनारि। .
(१४)
सानुज सोचत पोचविधि,लोचन मोचतवारिरक्ष
भूपमरन प्रभुवनगवन, सबविधि अवध अनाथ
रोवतसमुझिकुमातुकृत,मीजहाथधुनिमाथ।।३०
वेद विहित पितुकर्मकरि, लिये संग सबलोग।
चले चित्रकूटहि भरत,व्याकुल राम वियोग।३०
रामदरश हियहर्षबड, भपति मरन विषाद ।
सोचत सकल समाजसुनि,राम भरत सम्बाद३२
सुन शिष आशिष पावरी, पाय नाय पदमाथ।
चले अवध सन्तापवश,विकललोग सबसाथ३३
भरत नेम व्रत धर्मशुभ, रामचरण अनुराग ।
शकुनसमुझसाहसकरिय,सिद्धहोयजपजाग३४
चित्रकूट सव दिनबसत, प्रभुसिय लषणसमेत।
राम नाम जपजापकहि,तुलसी अभिमतदेत ३५
पयपावनि वनभूमि भलि, शैलसुहावन पीठ।
रागाह सीठ विशेष थल,विषय विरागहि मीठ३६
.
(१५)
फटिकशिला नन्दाकिनी, सिय रघुवीर विहार ।
राम भक्ति हित शकुनशुभ, भूतल भक्तिभंडार ३७
शकुन सकल संकट शमन, चित्रकूट चलिजाहु ।
सीतारामप्रसाद शुभ, लघुसाधन बडलाहु॥३८
दिये अत्रितिय जानकिहि, वसन विभूषण भूरि ।
रामकृपा सन्तोप सुख,होहिं सकल दुखदूरि३६
काककुचालि विराधवध, देहतजी शरभंग ।
हानि मरन सूचक शकुन,अनरथ अशुभ प्रसंग४०
रामलपण मुनिगण मिलन, मंजुल मंगलमूल।
सतसमाज तव होइ जव, रमाराम अनुकूल ४१
मिले कुम्भसम्भव मुनिहि , लषणसीयरघुराज
तुलसीलाधु समाजसुख,सिद्धदरशशुभकाज ४२
सुन मुनि प्रायस प्रभु कियो, पंचवटी वसिवास।
भइमहि पावनि परसपद,भासवभांतिसुपास४३
सरित सरोवर सजलसब,जलजविपुल बहुरंग ।
.
. (.१६) समय सुहावन शकुनशुभ,राजाप्रजाप्रसंगा.४४॥ विटपबेलि फूलहिं फलहि,शीतल सुखदलमार। मुदितबिहँगमृगमधुपगण, वनपालकदोउवीर४५ मोदाकर गोदावरी , विपिन सुखद सबकाल | निर्भय मुनि जपतप करहि,पालक रामकपाल ४६ भेट गीध रघुराजसन , दुहुदिशि हृदयहुलास | सेवकपाय सुसायवहि,साहिवपाय सुदास॥४७॥ पढहिंपढावहिं मुनितनय,अागम निगम पुरान । शकुनसुविद्यालाभहित, जानवसमयसमान ४८ निजकर सींचत जानकी, तुलसीलाइ रसाल । शुकदूती उनचास भलि,वरपा कृषी सुकाला४६ तृतीय अध्याय। दंडकवन पावनकरन , चरणसरोज प्रभाउ । ऊपर जामहि खल तरहि, होय रङ्कते राउ॥१॥ कपटरूप मन मलिनगई, शूर्पनखा प्रभुपास । 17
(१७)
कुशकुनकठिन कुनारिकत,कलहकलुषउपहासर
नाककान विन विकलभइ,विकटकराल कुरूप ।
कुशकुन पाउन देवमग, पगपग कंटकरूप ॥३॥
खरदूपण देखी दखित, चले साजि सवसाज ।
अनरथकुशकुनअघाशुभ, अनभलअखिलअकाज
कटुकुठाय करटार टहिं , फेंकहिं फेरुकुभांति ।
नीचनिशाचर मीत्रुवस,अनीमोहमदसाति।।५।।
रामरोपपावकप्रवल, निशिचर शलभसमान ।
लरत परत जरिर मरत, भएभसमज़ग जान
सीतालषण समेतप्रभु, सोहत तुलसीदासः ।
हरपतसुर वरपतसुमन, शकुन सुमंगलवासा॥७॥
सुभट सहस चौदह सहित, भईकाल वशजानि।
शूर्पनखा लंकहि चली,अशुभ अमंगलखानि॥८॥
वसनसकल श्रोणित समल,विकटवदन गतगात
रोवत रावणकी सभा, तात मात हा भ्रात ॥६॥
(१८)
कालकि मरति कालिका, कालराति विकराल ।
विनपहिचाने लंकपति,सभासभय तेहिकाल१०
शूर्पनखा सब भांतिगत, अशुभ अमंगल मूल ।
समयसाढ़सातीसरिस,नृपहिप्रजहिप्रतिकूल११
बर बशगमनतरावणार्हि, अशुकन भये अपार ।
नीचगनतनहिमीचवश, मिलिमारीचविचार १९
इतरावण उतरामकर, मीचु जानि मारीच ।
कपट कनकमृगवेषतव, कीन्ह निशाचरनीच१३
पंचवटीबट विटपतर, सीतालखण समेत ।
सोहत तुलसीदास प्रभु, सकल सुमंगल देत१४
मायामृगपहिचानि प्रभु, चलेसीयरुचि जानि ।
वंचकचोर प्रपंचकृत, शकुन कहव हितहानि१५
सीयहरण अवसर शकुन, भय संशय संताप ।
नारिकाजहित निपट गत,प्रगट पराभव पाप१६
गोधराज रावण समर, घायल वीर विराज ।
(१९) सरसुयश संग्राममहि, मरण सुसाहिव कान १७ रामलपण बनवनविकल, फिरत सीयसुधिलेत । सूचतशकुन विषादवड़, अशुभ अरिष्ट अचेत १८ रघुवरविकल विहंगलखि, सोविलोकि दोउबीर। सियसूधि कहिसियरामकहि, तजीदेहमतिधीर१६ दशरथते दशगुणभगति, सहिततासुकरिकाज। सोचत बंधुसमेतप्रभु, कृपासिंधुरघुराज ॥२०॥ तुलसी सहित सनेहनित, सुमिरहु सीताराम । शकुनसुमंगलशुभसदा,आदिमध्यपरिणाम ॥२१॥ सकलकाजशुभसमउभल, शकुनसुमंगल जान। कीरतिविजयविभूतिभलि,हियहनुमानहिं आन सुमिर शत्रुसूदन चरण, चलहु करहु सवकाज। शत्रु पराजय निजविजय,शकुनसुमंगलसाज२३ भरतनामसुमिरत मिटाहि कपट कलेशकुचालि। नीति प्रीति परतीतिहित, शकुनसुमंगलशाल२४ (२०) रामनाम कलिकाम तरू, सकल सुमंगल कन्द । सुमिरत करतलसिद्विजग, पगपगपरमानंद २५ सीताचरण प्रणाम करि, सुमिरि सुनामसनेम। सुतियहोहिंपति देवता, प्राणनाथ प्रियप्रेम २६ लखणललित मूरतिमधुर,सुमिरहुसहित सनेह । सुखसंपति कीरतिविजय,शकुनसुमंगल गेह २७ तुलसी तुलसी मंजरी, मंगल मंजुल मूल । देखत सुमिरतशकुनशुभ,कल्पलताफलफूल २८ खलवल अंध कवंधवश, परेसुवंधु समेत । शकुनसोच संकटकहव, भूतप्रेत दुखदेत ॥२६॥ पाईनीच सुमीच भलि, मिटा महा मुनिशाप । विहंगमरणसियसोचमन,शकुनसभयसंताप३. कहिशवरीसबसीय सुधि, प्रभुसराहि फलखात । सोचलमयसन्तोष सुनि,शकुनसुमंगलबाता३१॥ पवनसुवन सन भेट भइ , भूमिसुता सुधिपाइ। - -- 4 लाल स्यपुर (२१) सोचविमोचन शकुनशुभ,मिलैसुसवकआइ ३२ रामलखण हनुमान मन, दुहुदिशिपरम उछाह। मिलातुसाहिब सेवकहि,प्रभुहिसुसेवकलाह३३ कीन्हसखा सुग्रीव प्रभु, दीन्टिवाह रघुवरि । शुभसनेहहित शकुनफल,मिटहिसोचभयभीर ॥ वलीवालिबलशालिदलि, सखाकीन्हकपिराज । तुलसीरामकृपालको, बिरदगरीवनिवाज ॥३५॥ बंधुबिरोधनकुशलकुल. कुशकुनकोटिकुचालि । रावणरविकोराहसो, भयोकालवशवालि ॥३६॥ कीन्हवासवरषानिरखि, गिरबर सानुजरामः । काजविलंवितशकुनफल, होइहिभलपरिणाम।। सीयसाधकपिभालसव, विदाकियेकपिनाथ । । जतनकरहुआलसतजहु; नाइरामपदमाथ ॥३८ हनूमानहिय हरषितवः समजुहारे जाइ । मंगलमूरतिमारुतिहि, सादरलीन्हवुलाइ ॥३६॥ - - -- (२२) डाटे वानर भालुसब, अवधिगयेविनकाज | जोमाइहिसोकालवश कोपिकहाकपिराज॥४०॥ जानशिरोमणिजानजिय, कपिवलबुद्धिनिधान । दीन्हमुद्रिकामुदितप्रभु, पाइमुदितहनुमान ॥४१ तुलसी करतलसिद्धिसब, शकुनसुमंगलसाज | करिप्रणामरामहिंचलहु, साहससिदिसुकाज४२ नाथ हाथ माथे धरेउ, प्रभु मुदरी मुहँ मेलि चलेउसुमरिशारंगधरि, आनहिसिद्धिसकलि ४३ संगनील नल कुमुदगद, जामवन्त युवराज । चले रामपद नाइशिर, शकुनसुमंगलसाज ४४ पैठिविवरमिलितापसिहि, अचइपानिफलुखाइ शकुनसिद्धिसाधकदरश,अभिमतहोइअघाइ ४५ बनचर विकल विषादबश,देखिउदधि अवगाह । असमंजसवड़शकुनगत,विधिवशहोइ निवाह ४६ सर्वसभीत संपाति लखि, हहरे हृदय हरास ।
(२३) कहतपरस्पर गीधगति, परिहरिजीवनास ४७ नवतनु पाइ दिखाइप्रभु, महिमा कथा सुनाइ। धरहुधीरसाहसकरहु, मुदित सीयसुधिपाइ ४८ तुलसी रामप्रभाउ कहि, मुदितचले संपाति । शुभतीसरउनचासभल, शकुनसुमंगलपाँति४० अथ चतुर्थाध्याय॥ रामजनक शुभशकुनभल सकलसुरुतसुखसार। पुत्रलाभ कल्याण बड़, मंगल चार विचार ॥१॥ दशरथ कुल गुरु की कृपा,सुत हित यज्ञ कराइ। पायसपाइ विभागकरि,रानिन्ह दीन्ह बुलाइ ॥२ सव सगरभ सोहहिं सदन,सकल सुमंगलखानि तेज प्रताप प्रसन्नता, रूपनजाहि वखानि ॥३॥ देखिसुहावन स्वप्नशुभ, सकुन सुमंगलपाइ । कहहिं भूपसन मुदितमन, हर्ष न हृदय समाइ ४ (११) स्वप्न शकुन सुनिराउकह, कुलगुरु आशिर्वाद । पूजहि सबमनकामना, शंकरगौरि प्रसाद ॥५॥ मासपाख तिथियोगशुभ, नखत लगन ग्रहवार। सकलसुमंगलमलजग,राम लीन्ह अवता॥६॥ भरतलखणारिपुदमन सव,सुनव सुमंगल मूल। प्रगटभये नृपसुकृतफल,तुलसी विधिअनुकूल ७ घर घर अवध वधावने, मुदित नगर नरनारि। वरषिसुमनहरषहिंविबुध, विधित्रिपुरारिमुरारिक मंगल गान निसाननभ , नगर मुदित नरनारि। भूपसुकृत सुरतरुनिरखि,फरे चारुफलचारि॥ पुत्रकाज कल्याणनृप, दियेदान बहुभांति । रहसविवश रनिवाससव,मुदमंगल दिनराति१० अनुदिन अवध वधावने, नितनव मंगलमोद । मुदितमातुपितलोगलाख,रघुवरबालीवनोद११ कर्णवेध. चूडाकरन, लौकिक वैदिककाज । .
(२५)
,
गुरु आयसुभपति करत, मंगलसाज समाज१२
राज अजिर राजत रुचिर, कोशल पालक बाल
जानुपानिचर चरितवर, शकुन सुमंगलमाल १३
लहे मातपित भागबश, सुतजग जलधिललाम।
पुत्रलाभहित शकुनशुभ,तुलसी सुमिरहुराम१४
वाल विभूषण बसनधर, धूरि धूसरितअंग |
बालकेलि रघुवर करत, बालबन्धु सब संग १५
रामभरत लछमन ललित, शत्रुशमन शुभनाम ।
सुमिरतदशरथसुवन सव, पूजहिं सबमनकाम१६
नामललित लीलाललित, ललितरूप रघुनाथ।
ललितवसनभूषणललित,ललितअनुजशिशुसाथ
सुदिनसाध मंगल किए, दिये भूप ब्रतवन्ध ।
अवधबधाब बिलोकिसुर, बरषत सुमनसुगंध१८
भपति
भूसुर. भाटनट, याचक पुरनर
दियेदानसनमानिसव, पूजे कुलअनुसारि।१६||
नारि।
(२६) सखीसु आसिनि विप्रतिय, सनमानी सबराय । ईशमनाय अशीषशुभ, देहिंसनेह सुभाय॥२०॥ रामकाज कल्यान सब, शकुन सुमंगलमूल । चिरजीवहु तुलसीशसव,कहिसुर वरष हंफूल२१ राम जनम शुभकाज सब, कहत देव ऋपिाय। सुनर मन हनुमानके, प्रेम उमँगन समाय|॥२२॥ भरत श्यामतन रामसम, सवगुणरूप निधान । सेवक सुखदायक सुलभ,सुमरत सब कल्यान२३ ललितलाह लोने लषन, लोयन लाह निहार। सुतललाम लालहु ललित,लेहुललकिफलचा। मंगल मूरति मोदनिधि, मधुर मनोहर वेष । राम अनुयह पुत्रफल,होइहि शकुन विशेष २५॥ सोधत मखमहि जनकपुर, सीय सुमंगलखान। भूपति पुण्य पयोधिजनु,रमा प्रकटभइआन २६ नाम शत्रु सदन सुभग, सुखमाशील निकेत ।
(२७) सेवतसुमरत सुलभसुख,सकल सुमंगलदेत २७ बालक कोशलपाल के, सेवक पाल कपाल । तुलसीमन मानस बसत, मंगल मंजुमराल २८ जनकनन्दनी जनकपुर, जबतें प्रकटी आय | तवतें सव सुखसम्पदा, अधिक २ अधिकाय २६ सीय स्वयम्वर जनकपुर, सुन २. सकल नरेश । आए साज समाजसज. भूषणबसन सुदेश ।३०। चले मुदित कौशिक अवध,शकुन सुमंगलसाथ । आएसुन सन्मान गृह, आने कोशलनाथ॥३१॥ सादर सोलह भांति नृप, पूजि पहुनई कीन्ह । विनयबढ़ाई देखसुन, अभिमत आशिषदीन ३२ मुनिमांगे दशरथ दिये, रामलषन दोउभाय । पायशकुनफलसुस्तफल,प्रमुदितवलेलिवाय३३ श्यामल गौर किशोरवर, धरेतूण धनुवान । सोहतकौशिक सहितमग,मुदमंगलकल्यान ३४ (२८) शैलसरित सर बाग वन, मृग विहंग बहुरंग । तुलसीदेखत जातप्रभु,मुदितगाधितुतसंग ।३५॥ लेत विलोचन लाभसब, बढभागी मगलोग। रामरूपा दरशनसुगम, अगमयाग जपयोग ३६ जलद छांह मृदुमग अवनि.सुखद पवनअनुकूल हरषत बिबुधबिलोकिप्रभु,बरषत सुरतरुफूल ३७ दलेमलिनखल राखिमख.मुनिशिष आशिपदीन विद्या विश्वामेत्रसव, सुथल समर्पितकीन ३८ अभय किएमुनि राखि मख, धरेवाण धनुभाष । धनुमख कौतुकजनकपुर,चले गाधिसुतसाथ ३६ गौतम तियतारन चरन, कमल आनि उरदेष । सकल सुमंगलसिद्धिसब करतल शकुनविशेष४० जनक पाय प्रिय पाहुने, पूजे पूजन योग । बालक कोशलपालके,देख मगन पुरलोग॥४१॥ सनमाने आने सदन, पूजे अति अनुराग | (२९) तुलसीमंगल शकुनशुभ, भूर भलाई भाग ॥४२॥ कौशिक देखन धनुषमख, चले संग दोउभाय । कुमरनिरखिपुरनारिसव,मुदितनयनफलपाय४३ भपसभा भवचाप दलि. राजत राजकिशोर। सिद्धिसुमंगलशकुनशुभ,जयजयजयसवोर४४ जयमय मंजुलमालउर, मंगल मूरति देषि। गान निसानप्रसूनझरि, मंगलमोद विशेषा४५ समाचार सुन अवधपति, पाए सहित समाज । प्रीतिपरस्परमिलतमुद,शकुनसुमंगलसाज ४६ गान निशान वितान पर, विरचे विविध विधान। चार विवाह उछाह वड.कुशलकाज कल्यान४७ दाइज पाय अनेक विध, सुतसुतबधुन समेत । अवधनाथ भाए अवध, सकल सुमंगललेत ४८ चौथ चारु उनचास पुर, घर घर मंगल चार । तुलसी सब दिन दाहिने, दशरथ राज कुमार४६ )
(३०)
अथ पञ्चमाध्याय।
रामनाम कलिकामतरु, राम भक्ति सुरधेनु ।
शकुन सुमंगल मूलजग, गुरुपद पकंज रेनु ॥१॥
जलाधिपार मानस अगम, रावण पालितलंक।
सोचविकल कपिभालुसब,दुहुदिशि संकटशंक २
जामवन्त हनुमन्तवल, कहा प्रचारि प्रचारि।
रामसुमर साहसकरिय, मानिय हिये न हारि३
रामकाज लगि जनमजग, सुन हरषे हनुमान ।
होयपुत्र फल शकुन शुभ, रामभक्त बलवान॥४॥
कहतउछाहु बडाइकपि, साथीसकलप्रवोधि ।
लागतरामप्रसादमोहि,गोपदसरिसपयोधि ॥५॥
राषितोषि सवसायशुभ, शकुन सुमंगलपाइ ।
कूदिकुधरचढिानिउर,सीयसहितदोउभाइ॥६।
हरिषिसुमनवरषतबिबुध, शकुन सुमंगल होत ।
तुलसीप्रभुलंघेड़जलाधि,प्रभुप्रतापकरिपोत ॥७॥
राहुमात माया मलिन, मारीमारुत पूत। समयशकुनमारगमिलहिं छलमलीनखलधूत ८ पूजापाइ मिनाकपहँ, सुरसा कपिसंबाद । मारग अगम सहायशुभ, होइहिरामप्रसाद॥६॥ लंकालोलुप लंकनी, काली काल कराल । कालकरालहिदीन्हिवलि, कालरूपकपिकाल १० मशकरूपदशकंधपुर, निशिकपि घर घर देषि । सीयविलोकित्रशोकतर, हरषविषादविशेषि ११ फरकत मंगल अंगसिय वाम विलोचन वाहु । त्रिजटासुनिकहशकुनफल,प्रियसँदेहवडलाहु १२ शकुनसमुझित्रिजटाकहति सुनिसियअवहींआज मिलिहिरामसेवककहिहि,कुशललषणरघुराज १३ तुलसीप्रभुगुणगणवरणि, आपनिवात जनाइ । कुशलक्षेमसुग्रीवपुर, रामलषणदोउभाइ ॥१४॥ सरुपजानकीजानिकपि, कहे सकल संकेत ।
(३२)
दीन्हिमुद्रिकालीन्हिसिय,प्रीतिप्रतीतिसमेत १५
पाइनाथकरमुद्रिका, तिय हियहरप विषाद ।
प्राणनाथप्रियसेवकहिदीन्हसुभाशिरवाद॥१६॥
नाथशपथपणरोपिकपि, कहतचरण शिरनाइ ।
नाहिबिलंवजगदंबअब,आइगयेदोउभाइ ॥१७॥
समाचारकहिसुनतप्रभु, सानुजसहितसहाय ।
आयेअवरघुवंशमणि, सोचपरिहरियमाय ॥१८॥
गये शोचतंकट सकल, भये सुदिन जियजान ।
कौतुकसागर सेतुकरि, आयेरुपा निधान ॥१६॥
सकलसदल यमराजपुर, चलनचहत दशकन्ध ।
कालन देखत कालवश, बीसविलोचन अंध २०
आशिष आयसु पाइ कपि, सीयचरण शिरनाइ ।
तुलसी रावण वागफल, खात वराइ वराइ २१
शर शिरोमणि साहली, सुमति समीर कुमार।
सुमिरतसवसुखसंपदा, मुदमंगलदातार ॥२२॥
(३३)
शत्रुशमनपदपंकरुह, सुमिरि करहु सबकाज ।
कुशलक्षमकल्याणशुभ, शकुनसुमंगलसाज २३
भरतभलाई की अवधि, शील सनेह निधान ।
धरमभगतिभायपसमय,शकुनकहवकल्यान २४
सेवकपाल कृपालु चित, रविकुल कैरव चंद ।
सुमिरिकरहुसवकाजशुभ, पगपगपरमानंद २५
सियपदसुमिरिसुतीय हित,शकुन सुमंगलजान ।
स्वामिसोहागिलभागवड, पुत्रकाजकल्यान ॥२६
लछिमनपदपंकजसुमरि, शकुनसुमंगलपाइ ।
जयविभूतिकीरतिकुशल, अभिमतलाभनघाय।।
तुलसीकाननकमलवन, सकलसुमंगलवास ।
रामभगतिहितशकुनशुभ, सुमिरततुलसीदास२८
रूख निपातत खातफल, रक्षकअक्षनिपाति ।
कालरूपविकरालकपि, सभयनिशाचरजाति२६
वनउजारिजारेउ नगर, कूदि कूदि कपिनाथ ।
हाहाकारपुकारसब, भारतमारतमाथ ॥३०॥
. (३४) पूछवुताइ प्रबोधि सिय, आइ गयेप्रभुपाय । क्षेम कुशल जयजानकी, जयजयजयरघुराय ॥३१ सुनिप्रमुदित रघुवंश मणि, सानुज सेनसमेत । चलेसकलमंगलशकुन, विजयसिद्धकहिदेत॥३२ राम पयान निशाननभ, वाजहिं गाजहिं वीर शकुन सुमंगल समरजय, कीरतकुशलशरीर॥३३ कपासिंधु प्रभुसिंधु सन, मांगउपथ नदेत । विनयन मानहि जीवजड,डाटेनवहिअचेत ३४ लाभ लाभ लोंबा कहत, क्षेम करी कहक्षेम । चलत विभीषणशकुनसुनि,तुलसीपुलकितप्रेम। पाहि पाहि अशरण शरण, प्रणतपाल रघुराज । दियोतिलकलंकेशकहि, रामगरीवनिबाज ॥३६॥ लक अशुभ चरचा चलति. हाटवाट घर घाट । रावणसहित समाजभव, जाइहिवारहबाट ३७ ऊकपातदिक दाहदिन, फेंकरहि भ्वान सियार उदितकेतुमत हेतुमहि, कंपति वारहिवार ३८ (३५) रामकृपा कापभालु करि, कौतुक सागर सेतु । चलोपारवर्षत विबुध, सुमनसुमंगलहेत ॥३६ नीच निशाचर मीचवश चले साजि चतुरंग । प्रभुप्रताप पावक प्रवल, उडिउडि परत पतंग४० साजिसाजि वाहन चलहि, यातुधान बलवान । अशकुनअशुभनगनहिंगत, प्राइकालनियरान॥ लरतभालु कपिसुभटसव, निदरि निशाचरघोर। सिर पर तमरथ रामसा,साहिबतुलसी तोर४२ मेघनाद अति कायभट, परे महोदर खेत । रावण भाइजगाइ तव, कहाप्रसंगअचेत ४३ उठि विशाल विकरालबंड, कुंभकरण जमुहान । लखिसुदेशकपिभालुदल,जनुदुकालुसमुहान४४ राम श्याम वारिधसघन, बसन सुदामिन माल। बरपतसरहरपतविबुध,दलादुकालु दयाल॥४५॥ राम रावणाहिं परस्पर, होति रारि रणपोरः । लरत प्रचारि प्रचारिभट, समर शोर दुहँ ओर४६ -- वीसबाहु दशशशि दलि, खंडखंड तनु कीन्ह । सुभटाशिरोमणिलंकपति, पाछैपाँउनदीन्ह ॥४७ बिबुध वजावतभी, हरपत बरपत फूल । रामविराजत जीतिरण, सुरसेवकअनुकूल॥४८ लंकाथाप बिभीषणहि, विबुधवसाइ सुवास । तुलसीजयमंगलकुशल, शुभपंचमउनचास४६॥ षष्ठाध्याय रघुवरायसु अमरपति, अमिय सीचिकपिभालु सकल जिआये शकुनशुभ, सुसिरहुरामसपालु ? सादर आनी जानकी, हनुमान प्रभुपास । प्रीतिपरस्पर समउशुभ,शकुनसुमंगलवास ॥२॥ सीताशपथ प्रसंग शुभ, शीतल भयउ कृशानु । नेमप्रेम व्रत धरम हित, शकुनसुहावन जानु ३ सनमाने कपिभालुसब, सादर साजिविमानु । सीय सहित सानुजसदल, चलेभानुकुलभानु॥४ (३७) हरपतसुर वरपतसुमन, शकुन सुमंगलगान । अवधनाथगवने अवध,क्षेम कुशल कल्यान॥५॥ सिंधुसरोवर सरित गिरि, कानन भूमिविभाग। रामदिखावत जानकिहि, उमगिर अनुराग ॥६॥ तुलसी मंगल शकुनशुभ, कहत जोरियुगहाथ । इस वंश अवतंस जय, जय जय जानकिनाथ॥७॥ अवध अनंदित लोगसव, व्योम विलोकिविमानु। मनहुँकोकनदकोकमन, मुदितउदितलखिभानु।। मिले गुरुहिजन परिजनहि,भेटत भरतसप्रीति। लपणरामसियकुशलपुर, आयेरिपुरणजीति॥६॥ उदवश अवधननाथ सव, भम्बदशा दुखदेखि | रामलखणसीतासकल, बिकलबिषादबिशखि ॥ मिलींमातु हितमीत 'गुरु, सनमाने सवलोग । शकुनसमयविसमयहरप,प्रियसँयोगवियोग।११ अमरमनंदितमुनिमुदित, मुदितभुबन दशचारि। घरघरअवधवधावने, मुदितनगरनरनारि ॥१२॥ , (३८) सुदिनसोधिगुरु बेदिविधि, कियोराजअभिषेक । शकुन सुमंगलसिद्धिसव, दायकदोहाएक ॥१३॥ भाँतिभाँति उपहारलइ, मिलत जुहारत भूप। पहिरायेसनमानिसव, तुलसीशकुनअनूप॥१४॥ जयधुनि गान निसानसुर, वरषत सुरतरुफूल | भयेराम राजाअवध, शकुन सुमंगलमूल ॥१५॥ भालुविभीषण कीशपति, पूजेसहित समाज । भलीभाँति सनमानिसव, विदांकिये रघुराज१६ सुख, घर बन सकल सुपास। तरुसुरतरुसुरधेनुमहि,पभिमतभोगविलास १७ रामराज सव काजकह, नीक एकही आंक। सकल शकुनमंगलकुशल, होइहिवारुनवांक१८ कुम्भकरण राबण सरिस, मेघनाद सेवीर । ढहेसमूल विशालतरु, कालनदी केतीर ॥१६॥ सकलसदल रावणसरिस,कवलितकालकराला सोचपोचअशकुनअशुभ,जायजीवजंजाल ॥२०॥ रामराज संतोष M- (३९) अविचलराज विभीपणहिं, दीन्हराजरघुराज । अजहुंविराजतलंकपर,तुलसीसहितसमाज २१ मंजुल मंगल मोदमय, मूरति मारुत पूत। सकलसिद्धिकरकमलतल,सुमिरतरघुबरदूत २२ शकुनसमयसुमिरतसुखद, भरत आचरणचारु । स्वामिधरमवतप्रेमहित,नेमनिबाहनिहारु ॥२३॥ ललितलखणलघुवंधुपद, सुखदशकुनसवकाहु । सुमिरतशुभकीरतिविजय, भूमिग्रामगृहलाहु २४ रामचन्द्र मुख चन्द्रमा, चित चकोर जवहाई । रामरामसवकाजशुभ,समयसुहावनसोइ ॥२५॥ भूमिनंदनी पदपदुम, सुमिरत शुभसव काज। वरषाभलिखेतीसुफल,प्रमुदितप्रजासुराजा॥२६॥ सेवक सखा सुवंधुहित, नाइलखणपद माथ । कीजियप्रीतिप्रतीतिशुभ, शकुनसुमंगलसाथ२७ राम नाम रतिनामगति, राम नाम विश्वास। सुमिरतशुभमंगलकुसल,तुलसीतुलसीदास २८
(४०)
विप्र एक वालक मृतक, राखेउ राम दुआर ।
दंपतिविलपतशोकप्रति, आरत करत पुकार२६
राम शोच संकोच सब, सचिव विकल संताप |
वालकमीचुअकालभइ,रामराजकेहिपाप ॥३०॥
विवुध विमलवाणी गगन, हेतु प्रजा अपचारु।
रामराज परिणामभल, कीजिये चेगिविचारु ३१
कोशलपाल कृपालुचित, वालक दीन्हजिआइ।
शकुनकुशलकल्याणशुभ, रोगीउठेनहाइ ॥३२॥
वालक जियाविलोकिसव, कहत उठाजनुसोइ।
शोचविमोचनशकुनशुभ,रामकृपाभलहोइ॥३३॥
शिलांसुतियभइगिरितरे, मृतक जिएजगजान।
रामअनुग्रहशकुनशुभ, सुलभसकलकल्यान ३४
केवटनिशिचर विहंगमृग, किए साधुसनमानि ।
तुलसीरघुवरकीरूपा,शकुनसुमंगलखानि ॥३५॥
रामराज राजत सकल, धरम निरत नरनारि ।
रागन रोष न द्वेषदुख, सुलभ पदारंथचार ॥३६॥
(११) वकउलूक झगरतगये, अवध जहांरघुराउ । नीकशकुनविवरिहिझगर,होइहिधरमनिआउ३७ यती श्वान संवादसुनि. शकुन कहव जियजानि। हंसवंश अवतंसपुर, विलग होतपयंपानि ॥३८॥ रामकुचर चाकरहितव, सीतहि लाइ कलंक । सदाअभागीलोगजग,कहतसकोच न शंक॥३६॥ सतीशिरोमणि सीयतंजि,राखिलोग रुचिराम । सहे दुसहदुख शकुनगत,प्रियवियोग परिणाम वरणधरम आश्रमधरम, निरतसुखी सबलोग । रामराज मंगलशकुन, सुफलजोगजपयोग॥४१॥ वाजिमेध अगणित किये, दियेदान बहुभाँति । तुलसी राजारामजग, शकुनसुमंगल पाँति ४२। असमंजस वडशकुनगत , सीताराम वियोग । गवनविदेश कलेशगलि,हानि पराभवरोग॥४३॥ तियमणि सियअपराध विनु प्रभुपरिहरिपछतात। सोचसमाज न राजसुख मनमलीन कशगात४४ (४२) पुत्रलाभ लवकुश जनम, शकुन सुहावनहोइ । समाचार मंगलकुशल, सुखद सुनावैकोइ ॥१५॥ रामसभा लवकुशललित, किये राम गुणगान । राजसमागमशकुनशुभ,सुयशलाभ सनमान४६ बालमीकि लवकुशसहित,आनीसिय सुनिराम। हृदयहरषजानवप्रथम,शकुनशोक परिणाम४७॥ अनरथ अशकुन अतिअशुभ, सीताअवनिप्रवेश । समयशोकसंतापमय, कलहकलङ्काकलेश॥४८॥ सुभगशकुन उनवाजरस ,रामचरितमयचारु । रामभगतहितसफलसब,तुलसीविमलविचारु॥ अथसप्तमाध्याय। रामलषण सानुजभरत, सुमिरतशुभसबकाज। सहितप्रीतिप्रतीतिहित,शकुनसकलशुभकाज॥ सुखमुदमंगलकुमुद विधु , शकुनसरोरुहभानु । करहुकाज सबसिद्धिशुभ,मानिहिये हनुमानु ।२ ॥ रामकाजमणि हेमहय , रामरूप रविवार । .
- , . कड़वनीकजयलाभशुभ शकुनसमय अनुसार। रसगोरस खेती सकल , विप्रकाज शुभसाज । गमअनुग्रह सोमदिन, प्रमुदितप्रजासुराज॥४॥ मंगलमंगलभमिहित , नृपहित जय संग्राम । शकुनविचारवसमय सम, करिगुरुचरणप्रणाम५ विपुलवनिजविद्यावसन , युधविशेप गृहकाज । शकुनसुमंगलकहवशुभ, सुमिरिसीयरघुराज ६॥ गुरुप्रसादमङ्गल सकल , रामराज सबकाज । यज्ञविवाह उछाह व्रत,शुभ तुलसी सबसाज॥७॥ शुक्रसुमंगलकाजसब , कहवशकुन शुभदोरिख । यंत्रमन्त्रमणि औषधी,साहससिद्धि विशेषि॥८॥ रामरूपाधिरकाजशुभ , शनिवासर विश्राम । लाहमहिप गजवनिजभल. सुखसुपासगृहग्राम राहुकेतु उलटे चलर्हि, अशुभ अमङ्गल मूल । रुंडमुंड पाखण्दप्रिय,पसुरअमर प्रतिकूल॥१०॥ समयराहु रविगहनुगत , राजाहप्रजाहिकलेश ।
(४४) - शकुनसोचसंकटविकट,कलहकलुष दुखदेशा११॥ राहुसोमसंगम विषय, अशकुन उदधि अगाधु । इतिभीति खलदल प्रबल, सीदहिभूसुरसाधु१२ सातपांचग्रहएकथल , चलहिं वामगतवाम । राजविराजी समयगत,शुभहितसुमरहुरामा१३॥ खेती वनिविद्यावनिज , सेवाशिलिपसुकाज । तुलसी सुरतरु सरिससब,सुफलराम के राज१४ सुधासाधु तरतरु सुमन, सुफल सुहावनि बात। तुलसीसीतापतिभगति, शकुन सुमंगलसात१५ सिद्धसमागम संपदा , सदनशरीर सुपास । सीतानाथ प्रसादशुभ,शकुन सुमंगलबास॥१६॥ कौशल्या कल्याणमय, मरति करति प्रणाम । शकुन सुमंगल काजशुभ,कपाकरहिं सियराम१७ सुमिर सुमित्रा नीमजग, जेतिय लेहिं सुनेम । सुवनलषण रिपु दबनसे, पावहिंपति पदप्रेम १८ दशरथनाम सुकामतरु, फलइ सकल कल्याण ।
(४६ ) .krn.M नहिं सपर्नेहुँ संतोप सुख, जहाँतहाँमनछोभ॥२७ पय नहोइ फलखाइजपु. राम नामपट मास । शकुन सुमंगल सिद्धसव, करतल तुलसीदास२८ वडकलेश कारज अलप. वडीयास लहुलाहु ' उदासीन सीतारमण, समयसरिसीनरवाहु॥२६ दशदिशिदुखदारिददरित, दुसह दशा दिनदोप। फेरे लोचनरामअब, सव सुरवसाजसरोप ॥३०॥ खेतीवनिजन भीखभाल, अफल उपाय कदंव। कुसमय जानव वामविधि, रामनाम अवलंब३१ पुरुपारथ स्वारथ सकल, परमारथ परिणाम | सुलभसिहि सवशकुनशुभ,सुमिरतसीताराम३२ भागभाग तजि भालुतलु, आलस ग्रसे उपाय। अशुभअमल शकुनसुनि, शरनरामके पाय॥३३॥ गइवरपा करपकविकल, सूखत सालि सुनाज । कुसमयकुशकुनकलहकलि,प्रजाहिकलेशकुराज । तुलसी तुलसी रामसिय, सुमिरहु लषणसमेत ।
(१५) धर्णिधामधन धरमसुख,सतगुणरूप निधान १६ कलह कपट कलि कैकई सुमिरत काजनशाइ। हानिमीचु दारिददुरित, अशकुनअशुभ अघाइ२० रामवाम दिश जानकी, लषण दाहिनी ओर । ध्यानसकल कल्याणमय, सुरतरु तुलसी तोर२१ मध्यमदिन मध्यमदशा, मध्यम सकल समाज । नाइमाथ रघुनाथपद, जानव मध्यमकाज॥२२॥ हितपर बटै विरोध जव, अनहित पर अनुराग । रामविमुखविधि वामगत,शकुनअघाइ अभाग२३॥ रूपण देह पाइय परेड, विनसाधन सिधिहोइ । सीतापति सनमुखसमुझि,जोकीजियेशुभसोइ२४ पहिलेहित परिणाम गत, वीचवीच भल पोच । शकुनकहब असरामगति, कहाविसमेतसकोचर ५ रमारमापति गौरिहर, सीताराम सनेह । दंपतिहित संपति सकल,शकुनसुमंगलगेहा२६॥ प्रीति प्रतीति न राम पद, बडीमाश वड़ लोभ ।
immers. (१७) दिनदिन उदयानंदअय, शकुन सुमंगलकेत ३५ उदवस अवध नरेश विन, देखदुखी नरनारि । राजभंग कुसमाजवड़, गतग्रहचालि विचारि३६ अवध प्रवेश अनंदवड़, शकुन सुमंगल माल । रामतिलक अवसर कहव, सुख संतोपसुकाल३७ रामराज वाधक विबुध, कहव शकन सतिभाउ। देख दैवस्त दोपदुख, कीजिये उचित उपाउ३८ व्याधिविपतिसवदेवकत,समयशकुनकहिदीन्ह । मंद मंथरा मोहवश, कुटिल केकई कीन्ह ॥३६ ॥ रामविरह दशरथ दुखित, कहति केकई काक । कुसमय जाय उपाय सव, केवलरामविपाक४० लपणराम सियवसतवन, विरहविकल पुरलोग। समयशकुनकहरामवश दुरवसुखयोगवियोगा४१॥ तुलसी लाइ रसालतरु,निजकर सीचति सीय। कपासफलभलशकुनशुभ,समयकहवकमनीय४२ सुदिनसाँझ पोथीनेवति , पूजि प्रभातसप्रेम । ,
-
(४८).
-
शकुनविचारब चारुमति,सादर सत्य सनेम४३॥
मुनिगनि दिनगनि धातुगनि, दोहादेखिविचारि ।
देशकरमकरताबचन शकुनसमयअनुहारि ।४४)
शकुनसत्यशशिनयनगुण अवधिअधिकनयवान।
होइसफलशुभजासुजसि,प्रीतिप्रतीतप्रमान ४५
गुरुगणेश हरगौरिसिय, रामलषण हनुमान ।
तुलसीसादरसुमिरिसब शकुनविचारविधान४६
हनमान सानुज: भरत, रामसीय उरानि ।
लषणसुमिरितुलसीकहत,शकुनविचारवखान४७
जोजेहि काजहि अनुहरै, सोदोहा जगहोइ ।
शकुनसमयशुभसत्यसव,कहवरामगतिगोइ ४८
गुणविश्वास विचित्रमणि, शकुन मनोहर हार ।
तुलसीरघुबर भक्तउर,विलसतविमलविचार ४६
इतिश्रीगोस्वामि तुलसीदासजीकृत
THE रामायण समाप्त.
HO
--
२१
,
..
पुस्तकों का सूचीपत्र।
रामशतक-भापाटीका सहिन मूल्य
रामायण साहिनीचन्द-इग में सम्पूर्ण रामायण का
सार अतिरमणीक छन्दों में वर्णित है मूल्य
श्रीरामस्वर्गारोहण-गोस्वामी तुलसीदासजीकृत ,
जानकी विजय गोस्वामी तुलसीदासजी कृत मूल्य )
लावनी अहिरावणवध-मूल्य
00
दोहावली-मूल्य
FIL
मूरामायण-कविवर श्रीसूरदासजी कृत यह पुस्तक
आजतककहीं नहीं पीकेवल हमारे यहां सुंदर अक्षरामें छपी
तैयार है यदि रामचरितामृत पानकरना होता इसे अवश्य
नीजिये तिसपर भी कपडे की जिन्दका मूल्य.............)
मनुस्मृति-मूल,अन्वयांक और मेधातिथि-सर्वज्ञना-
रायण-कुल्लक राघवानन्द-नन्दन और रामचन्द कृत संस्कृत
व्याख्या उपरोक्त छ टीकों के अनुसार भापाटीका सहित
चिकने कागज पर अत्युत्तम छपी है उत्तम विलायती कपड़े
सी जिल्द का मूल्य ?) पुढे की जिल्द का मूल्य ॥-,
डाकव्यय ।)
श्रीमद्भागवत।
मूल, अन्वयांक, माषाटीका, टिप्पनी, माहात्म्य, चित्र, और सूची सहित.
श्रीमद्भागवत जैसा ग्रन्थह उसको कौन नहीं जानताई इस
कारण उसकी तारीफकरनासूर्यको दीपक दिखाना परन्तु
यह अवश्य कहेंगेकि इसपुस्तककोसीउखपतासे सर्वसाधा-
रणको लाभकारी करदियाइ सोदेखनेसही विदित होगाजपा
उत्तम बंबईटाहप, चिकना सफेद कागज अन्दरकपड़ेकी २ दो
जिल्दोमें तिसपर भी मु.. ) राकव्यय १) पृष्ठ संख्या
२१७६ है और जो एक साथ दशपुस्तकें खरीदेंगे उनमें
१पुस्तकं मुफ्त दीजायगी।
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पुस्तकें मिलनेका पता-
शिवलाल-गणेशी लाल
लक्ष्मीनारायण छापाखाना
मुरादावाद.
३
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