Shri Abhaya Jain Granthalaya, Bikaner
Angpavittha Sutani
Front matter
(४)
लगे, फिर फाम चल निक्ला । चालू काम में भी बाधाएं
कम्पोजिटर और मशीनमेन में से किसी न किसी का अन
बाधाएं उत्पन्न होती रही और काम चलता रहा ।
कम्पोज में हमें सुत्तागमे को प्रति ही काम में ले
धित रूप में। संशोधन को हुई प्रति प्राप्त करने में भी
हुई, परन्तु तपस्वीराज मु. श्री लालचन्दजी म. सा. की
पार्श्वमनिजी म. सा. से संशोधित प्रति प्राप्त हो गई।
अपनी प्रति शुद्ध की और फाम चालू किया। गेली
चंडालिया अन्यत्र प्रकाशित प्रतियों से मिलान फर के देख
होने के पश्चात् में देखता। मैं किसी प्रति से नहीं f
फरते हुए जहाँ शंका होती, वहां अन्य आवृत्ति की प्रति
और आवश्यक लगता वहां शाब्दिक परिवर्तन भी करता
के चार अंगसूत्रों का यह प्रथम विमाग सम्पन्न हुआ ।
संघ के अन्य प्रकाशनों की तुलना में इस प्रकाश
हो है । इसके लिये खास नया टाइप मंगवाया गया और य
अत्यधिक महंगाई भारतभर में बढ़ फर सीमातीत हो ग
भी प्राप्त होना कठिन होगया। किसी प्रकार बम्बई मे प्र
इतना खराब कि रोम के ऊपर नीचे के कितने ही काग
हो गये । पर्चा भी बहुत हुआ। इत्यादि कारणों से पुस्ता
गया है।
आशा है कि जिनवाणी के रसिफ महानुमायों
उपयोगी लगेगी।
इस समय दूसरे विभाग का भगवती मूत्र शतक
हमारा प्रयास है कि यह भी पाटकों को रोया में शीघ्र पर
संताना
१२-१३-१९७६
शुद्धि-पत्र पृष्ठ २ पंपित mY अराद्ध पिस्वस्वेहि पथ्यं.. २० ११ १६ विस्वस्वेहि सत्यहि पुण्यं ३ ग १२ १४ पट्टगंसि दिग्जाणं सत्ये० सामुदाणियं सरफुलि बा, पूर्य या पट्टणसि दिज्जमा २ १३ ६ २२ २४ 고 घसमाणे उवरए परिमत्तवा अच्छे सिया छायए तेमयादि महदणबंधाई अवट्ट करायं पवईए पुच्छए णियहसत्तू सत्ये० कुलेहि सामु सबकुलि यां, फाणियं चा, पूर्य या घसमाणे वा उपचरए परिमृतपुण्या उच्छे सिया घायाए से यावि महवणवंधणाई अवहट्ट कारयं से पन्यईए तुच्छए णिहयसत्तू २३ २३ F
(६)
परित
दहि
सन्ह
-
है
दमनाराजगड
दत्तिर
बन्दननादाने अद
दतिर
माग्ने हिरादे
बिहराइ
ममनमाड
१३
गोपना
गोगमा
चरितम
३
चरितदिगड
बरि -- मिन अस्वाध्याय ज्य ४ . . . निम्न लिखित चौंतीस कारण टालकर स्वाध्याय करना चाहिये। आकाश सम्बन्धी. १० अस्वाध्याय .. कालमर्यादा १ बड़ा तारा टूट तो • एक प्रहर २ उदय अस्त के समय लाल दिशा जवतक रहे ३ अकाल में मेघगर्जना हो तो बिजली चमके तो : एक प्रहर " . विजली कड़के. तो शुक्ल पक्ष की १-२-३ को रात प्रहर रात्रि तक ७ आकाश में यक्ष का चिन्ह हो जबतक दिखाई दे ८-९ काली और सफेद धूअर जबतक रहे १० आकाश मण्डल धूलि से आच्छादित हो । ... औदारिक सम्बन्धी- १० अस्वाध्याय ११-१३ हड्डी, रक्त और मांस, ये तिर्यंच के ६० हाथ ५. दो प्रहर ६ दोपहर .
तबतर
-
में
१६
मे भीतर हो । मनुष्य के हो तो १०० हाय
भीतर हो । मनुष्य को ही यदि जली या धुल
न हो तो १२ वर्ष तक।
१४ अशुचि को दुर्गन्ध आये या दिगाई दे
१५ श्मशान भूमि-
सौ हाथ से कम दूर हो तो
१६ चन्द्रग्रहण-संट ग्रहण ८ प्रहर, पूर्ण होतो १२ प्रहर
१७ सूर्य ग्रहण
१२
१८ राजा फा अवसान होने पर, जबतक नया राजा
घोपित न हो
१९ युद्ध स्थान के निकट
जवतक युद्ध
२० उपाश्रय में पंचेंद्रिय का शव पड़ा हो, जबतक पड़ा रहे
२१-२५ आषाढ़, भाद्रपद, आश्विन, कातिक और चैत्र
की पूर्णिमा
२६-३० इन पूर्णिमा के बाद की प्रतिपदा.
३१-३४ प्रातः, मध्यान्ह, संध्या और अर्द्धरात्रि १-१ मुहूर्त
....उपरोक्त अस्वाध्याय को टालकर स्वाध्याय करना
चाहिए । खुले मुंह नहीं बोलना तथा दीपक के उजाले में
नहीं यांचना चाहिए।
नोट:- मेघ गर्जनादि में अकाल, आर्द्रा नक्षत्र से पूर्व मोर स्वांति
के बाद का माना गया है।
चले
दिन रात
,
। अंग-पविटु सुत्ताणि आयारो .4 ... पढमं अक्षयण सुर्य मे आउने ! तणे भगवया एवमत्सायं ॥ १ ॥६ए गेमि जो सगा भवर, जहा पुरधिमाओ ला दिसामओ आगो भइमंसि ? दारणाओ या दिशाओ आगो अहमंसि पयस्थिमाओवादिनामी आगो अहमसि,उत्तराश्री या दिशाओं आगो अहमंसि, क्षात्री वा विसामो आगो अहर्मनि ! अहो दिखाओ गा आगो अहमतिअण्णवरी या दिसामी अणुदिसाओ या आगओ अहमति ! एवमेगेसिंगो पार्य भवा. अस्थि मे भाया उपवाइए पत्थि में आया उपचारप फे अई आसि के पाइओचुभो इह पेचा भविस्तामि ॥२॥ पुण जाणेशा सहमदयाए परवागरणे. अपगेसि या अतिए सोचा. तजहा---पुरस्थिमाओ या दिसाओ आगमोअहमसि. जाप अण्णवराओवादिसायी अणुमिसाओ या आगओ अहमति. एकमेगरि जणायं भवइ. अस्थि मे आया उपवाइए, जो इमाओ-दिसाओ अणुदिसाओ या अणुसंचरह, सध्यानी दिसानी सच्चाओ अणुदिसाभी जो आगो अणुसंचाइ सोहं । से आयाबाई, लोयाबाई, कम्मावाई, सिरियाबाई ॥३॥ अफ- रिस चऽई फारसु चऽई फरओ यावि रामशुष्णे भविस्तागि; एयाति सम्याति लोगसि फम्मसमारंभा परिजाणियया भवति ।।४॥ अपरिण्णायकम्मो खट अर्य पुरिसे, जो इमाओ दिशाओ या अणुदिसानी वा अणुसंचरह, सम्वामी दिसायो सम्बानी अणुदिसाओ गहेइ, अणेगावाओ जोगियो रांधेद, विस्वस्ये फासे पति- संयेदे ।। ५ ।। तत्थ खटु भगवया परिणा पवेश्या ॥६॥ मस्स चेय जीवियस्स परिवंदणमाणमयणाए, नाईमरणमोयगाए, दुक्सपडियायोउं ॥७॥ एयावंति सव्वाति लोगसि फम्मसमारंभा परिजाणियबा भवंति ॥८॥ चस्सेते लोगंसि फम्मसमारंमा परिणाया भति से हु मुणी परिष्णायफम्मे-त्ति वेमि ||९|| परम अज्मयणं पढमो उद्देशो ॥
*:::::: । -- ।" -- + . H: "':.:::. . -:: :: : । " if ": :: ::-', : if ... ', ::||१|| .:: :: :: :: ना: :: :: :: in 1,01:1fitting fr: . hinf 11 miपाने Fan ||१in it, , अपंग पागले, गे गरी यंग मागे , in पमा जागी, नाग, गर गणेगा, गंग कठिमी, अगेकमः, मे भिगनी, गाजिम अपंग उयागमे, अपंग उयरमन्छे. अप्पेगे पागमकी, अग पाराम, अपंग पिट्ठमी, अप्पगे पिम, अप्पंगे उरगम्भ, अप्पेगे उरम, मणेगे हिययमन्भे, अप्पेगे हिययमच्छे, अप्पेगे यणमभे, अप्पंगे शणमछ, अपेगे खंघमभे, अप्पेगे संधमन्छे, अप्पेगे याहुमभे, अपंगे बाहुमच्छे, अपेगे हत्य- मम्भे, अप्पेगे हत्थमन्छे, अप्पेगे अंगुलिममे, अप्पेगे अंगुरिटमन्छे, अप्पेगे णह- मन्भे, अप्पेगे णहमच्छे, अप्पेगे गीवमन्मे, अप्पेगे गीयमच्छे, अप्पेगे हमभे, अप्पेगे हणुमच्छे, अप्पेगे होहमभे. अप्पेगे होटमन्छे, अप्पेगे दंतमभे, अप्पेगे दंतमन्छे, अप्पेगे जिन्भमभे, अप्पेगे जिम्भमच्छे, अप्पेगे तालमन्भे, अप्पेगे तालुमच्छे, अप्पेगें गलमन्भे, अप्पेगे गल्मच्छे, अप्पेगे गंडमभे, अप्पेगे गड- मच्छे, अप्पेगे कण्णमब्भे, अप्पेगे कण्णमच्छे, अप्पेगे णासमन्भे, अप्पेगे णारामच्छे, अप्पेगे अन्धिमन्भे, अप्पेगे अच्छिमच्छे, अप्पेगे भमुहमभे, अप्पेगे भमुहमन्छे, अप्पेगे गिडालमन्भे, अप्पेगे णिडालमच्छे, अप्पेगे सीसमन्भे, अप्पेगे सीसमच्छे,
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पार fraternitinा.
HRA सरस का सामना मेरे यारामा पनि ।
दलीय मोहिमा गाभाविधाय.
से अंग-पविट्ठ गुत्ताणि सत्य समारंगोऽपि अणे या गपगुजागा, जसोते उदगारंभा परिण भवंति से हु मुणी परिणायकम्मे तियेमि॥२०॥ पङमं अज्झायणं तइओद्दे से बेमि-णेव संग लोय अभागनेजा, णे अताग अगाइसजा, जे। अभाइक्पह, से अत्तागं अन्भाइमा, जे अत्ताणं अन्भाइड, अन्भाइक्लइ ॥२८॥ जे दीहलोगरात्यल्स रोगाणे, से अगत्यरस सेगणे; जे 3 स्थस्स खेयण्णे, से दीहलोगसत्थस्सा लेगणे ॥२९॥ वीरेहिं एवं अभिभूय । संजारहिं सया जत्तेहिं सया अप्पमत्तेहिं ॥३०॥ जे पमत्ते गुणटिए से हु दंडे पवुच्चइ । तं परिणगाय मेहावी इयाणि णो जमई पुखमकासी पमाएणं ॥३ लजमाणा पुढो पास-अणगारा मोत्ति एगे पवयमाणा जमिण विरूवरूवेहिं सत्य अगणिकम्मसमारंभेणे अगणिसत्य समारंभमाणे, अण्णे अणेगरूवे पाणे विहिर ॥३२|| तत्थ खलु भगवया परिणा पवेइया, इमस्स चेव जीवियस्स परिवंद माणणसूयणाए, जाइमरणमोयणाए, दुक्खपडियायहेउं से सयमेव अगणिसा समारंभइ,अण्गेहिं वा अगणिसत्थं समारंभावेइ अण्णेवा अगणिसत्यं समारंभमा समगुजाणइ । तं से अहियाए तं से अपोहिए ॥३३॥ से तं संबुज्झमाणे आय णीयं समुहाय सोचा, खलु भगवओ अणगाराणं या अंतिए इहमेगेसि णायं भवः एस खलु गंथे, एस खलु मोहे, एस खलु मारे, एस खलु णरए । इत्थं गढिा लोए जमिणं विरूवरूवेहि सत्यहिं अगणिकम्मसमारंभेणं अगणिरात्थं समारंभमा अण्णे अणेगरूवे पाणे विहिसइ ॥३४॥ से बेमि, सति पाणा, पुढविगिस्सिया तणगिरिलया, पत्तगिस्सिया, कगिस्सिया, गोमयगिस्सिया; कयवरणित्सिया, सन्ति संपाइमा पाणा, आहर संपयति । अगणिं च खलु पुट्ठा, एगे संघायमा- वजति, जे तत्य संघायमावति ते तत्थ परियायचंति, जे तत्थ परियावति ते तत्थ उहायति॥३५॥ एत्य सत्थं समारंभमाणस्स इचेए आरंभा अपरिणाया भवति एत्य सत्य असमारंगमाणस्स इथेए आरंभा परिणाया भवति ॥३६॥ तं परिणाय मेहावी व रायं अगगिसत्थं समारंभेना, गवण्णेहिं अगणिसत्थं समारंभावेजा, अगमिपत्थं समारंभमागे अण्णे न समगुजाणेशा । जस्सेते अगणिकम्मसमारंभा परिणाया भवति, से हु मुणी परिप्णायकम्मे ति येमि ॥३७॥ चउत्योद्देसो ।। एसो. . तंगो करिस्तानि समुहार मंता मइभ, अभयं विइत्ता, तं जे णो करए, आयारो सु. १ अ.१ ३.६ परए, परमोस्टर, एस अनगारे नि पयुवा ॥३८॥ चे गुणे से आप? जे आर से गुगे । ३९॥ टुं-मई-तिरिव-पाई पारामाणे रुबाई पासइ, सुगमागे सद सुभद, रह-अई-निरियं पाई मुच्छमाणे त्येनु मुच्छति, समु यानि एग लो- वियाहिए । एत्य अगुते अगामार. पुणे पुणे गुगासार यमनायारे पमत्तेऽगार मायसे ।। ४० लभमागा पुनो पारा, अगगारा मोत्ति एगे पश्यमाणा; बगि विरूपलहिं तस्येहि यशसदकम्मनमा भेनं वणसहसत्य समारममाणे अपये अणंगल्ये पागे पिहिसद ॥४१॥ तत्य खटु भगवया परिणा पवेश्या । इमस्त चेव जीवियत्त परिवंदण, मागा, पूयगार, जाइमरण मायगार दुनवपटिपायोट से रायमेव यणसहसत्य समारंभा, अहिं पारासरी समारंभावे, अण्गे या वगासदसम्म समारंभमागे समाजाशर, तं से अहियाए, तं से अयोहिए ।। ४२॥ में तं संदुज्दामागे आयागीय समुटाए गोधा भगवओ, अणगाराणं या अंतिए यह मेनसिं गायं भवा-एमा स्खल गंधे, एस खलु मोहे, एस बट मारे, एरा रुट गरए । मत्य गदिए लोए; जमिण विन्यस्येहि सत्यहि वारसदकाम्पसमारंभेग यासाराम समारंभमाणे अग्गे अणेगरूवे पाणे वितिसद ॥४३ ।। से बेमि-मपि जाइधम्मयं, एयपि बाधामय, इमपि युधिधम्म एपि पुष्टिधम्मय; दमपि चित्तमंतयं एयपि वित्तमंतय; इमंपि विगणं मिलाति, एबंपि हि मिलाति; मंपि आहारगं, एयपि . आहारग; इमपि अनिश्चयं, एयपि अगिधय; इमपि असासयं, एयंपि असासर्य; इमंरि चयावचइयं, एवंपि चयावचक्ष्य; इमपि विपरिणामसम्मयं, एयपि विपरिणामधम्मयं ॥४॥ एत्य सत्यं समारंभमाणस्स इमेए आरंभा अपरिणाया भवति । एत्य सत्य असमारंभमाणस्त इचए आरंभा परिणाया भवति । तं परि- प्गाय नेहावी णेव संयं वराइसत्य समारंभेजा, वपणेहि वणसहसत्यं समारं- भावेजा, णेवणे यणसएसत्य समारंगते समाजाणेका, जसेते यणस्राइसत्य- समारंभा परिणाया भवंति, से हु मुणी परिणायकम्मे ति बेमि ॥४॥ पढमं अज्झयणं पंचमोद्देसो ॥ से बेमि, सतिमे तसा पाणा, जहा-अंटया, पोयया, जराटया, रसया, संसयया, समुच्छिमा, रस्मियया, स्ववाहया, एस संसारत्ति पपुआ,इ, मंदसावियाणी ॥४६॥ णिज्माइत्ता पडिलेहित्ता पत्तेयं परिणिध्वाणं, सम्वेसि पाणाणं सव्येसिं गंयाणं, E ६ sinal शानि || 4 511 1F : it : १. 11: : Mon, Rifa in Hindi म.in/ minister of try: मेर जी!! प, ArTime, रागमन , MEETIREME, 3 गमागम मगजमायो से तं गमगाण आगामी माय गोगा नगरी, मागा पदमंगगि णा गया- रागी, एग मटु मां, पगमार, एम गराए। मगहिरो निमित्य समागमारंभपंतगकार सत्य समारंगगाणे अण्णे अणगाव पाणी विहिंगः ॥ ॥ सेमि-अप्य अपार | वहति, अपेंगे अजिणार महति अपंगे मंगाए यईति, अप्पंग सांगियाए यांति, एवं दिययाए, पिताए यसाप-पिन्छाए-गुमाए-बालाप-गिंगाप-विशाणार देता दादाए-णहाए-हामणीग-अटीग-अटीमिजार-अट्ठाप-अणट्टाए- अप्पंगे हिसिंग मेत्ति या वहति, अप्पेगे हिंसति मत्ति वा वह ति, अप्पंगे हिमिति गति या वहति ॥५२॥ एत्थ सत्य समारंगमाणस्म होइ आरंगा अपरिणगाया भयंति पत्य सत्य असमारंभमाणस्स होइ आरंभा परिणगाया भवति ।।५३॥ त परिणाय मेहावी णेवसर्य तसकायसत्थं समारंभेजा, गेवण्णेहिं तसंकायसत्यं समारंभावेला, गेवणे तसकायसत्य समारंभंते समगुजाणेजा, जस्सेए तगकायमत्थममारंमा परिणाया भवति, से हु मुणी परिणायकम्मे त्ति वेमि ।।५४॥ इइ छछोद्देसो । पहू एजस्स दुगंठणाए,आयकईसी अहियति णया । जे अशत्थं जाणइ,मे बहिया जाणइ, जे बहिया जाणइ, से अशत्थं जाणइ । एयं तुलमण्णोमि । छह मंतिगया दविया गावकरांति जीविट ||२५|| लजमाणा पुढो पास, अणगारा मोत्ति एगे पत्रयमाणा; 'नमिण विरूवबहिंसर हिं, याउकामसमारंभेणं वाउपत्थं समागमाणे अण्ण अणेगरूबे पाणे विहिंसइ ।।२६|| तत्थ रूलु भगवया परिणा पवैया, इमस्स चेय जीवियस्स परिवंदण-मांणण-पूषणाए, जाइमरणमोयणाए. दुक्खपडिघायरेट, से - आयारो मु. १ न. २..? स्त्यमेव वारा मनाभा,अग या पास गमाभावेद अणे मा बाउसय समारीने समजामा में यार त में अमोमीर ।। ...७ मेगपुक्षामाणे आपानीयसद्वार मोगा मगरओ अगगारापंया अंतिए नेगेमिंशा गर- एस मानगो, परन्तु मोरे, सम मारे, सरकाएर गनिए, रंग, अमित विम्याट्रिनहि याउपरानाप बास समाजमाण अगे अगर पाण वि.८॥ मनि, सांत संपारमा पागा, आप संपति परिमं च मलु पुढामगे मचायमावति । ये तत्व संघायमावति, ते तत्य परिवारी, सत्य परियारपति, ते तत्य यति ॥ ५९॥ एत्य गर्ग नमा- भमाणमा गए आभा परिणामा भनित्य सत्य असमारभमाणस गए आरंभा परिणामा भवति ॥६॥ परिणाय मेहामीणेच गर्ग वाउगत्य नमा- रंजा व बालगत् समारभारजा, जेवण पाउन समारंभाले रामशु- जाना जलेर घाउममममाभा परिमाया गति से मुणी परिणायकम्ने नि मि ॥६॥ गत्य विजाग यायमाणा जे आयारे ण रमति, आरंभमागा विणर यति, दावीया, अशावयागा, आभिसत्ता पक्राति संगं ।। ६२॥ से ससुम सवरामण्णागयरमाणेणं अप्पा अकाणि पायकम्र्मणो अगासि॥६॥ परिणाय महावी व सीनिकायसन्ध समाजा, वगेरी मावाण- फायसत्यं समारंभावेशा, वणे उदीयणिकायसत्यं समारंभंत रामराजाज्जा । नाए. उस्मीयागिकायसत्यममामा परिणत्या मंति, से हुमणी परिणायकामे चि वेमि ॥६४ || सत्तमोसो ।। पदम जयणं समतं ।। ।। लोगविजणो णाम वीयं अज्झयणं ॥ जे गुणे से मल्हाणे, जे मूहागे से गुगे, इसे गुणही माया परियायेणं पुणो पुणो बसे पमत्ते, जिदा-माया मे, पिया मे, भाया ने, भणी मे, भजा मे, गुत्ता मे, धूवा मे, मुण्डा मे, सदि-गया-गंगंध-संयुया गे, विवित्तोवगरण-परिवण-भोयश- स्टायणं गे, इत्थं गदिए लोए बसे पमत्ते॥६५॥ अहो य राओ य परितप्पमाणे, कालाकालसमुद्राई, संजोगटी, अट्ठालीभी, आलुपे, सहसाकारे, विणिविचित्ते एत्य सत्य पुगो पुगो ।।६६।। अयं च ग्बद्ध आठयं इगंगेसि मागवाणी तजहा-सो- सपरिणाणेहि परिहायमाणेहिं, चक्नुपरिणाणेहि परिहायमाणेदि, घाणपरिणाणेहि ..
जदिया गदि बगह, तविणं गया गियगा पुयि परियति । माया ने गिर इयं गमुहिए, साझाविहाराण, अंना चपट मपट्टाणधीरो मुहुनमचि जोमा- माया नशियम पच्छा पामिना पाटन नव ताणा, या, मरणाए, यानुसार अमित च ग्वा वयं संपदाप, नयी में एगया मूदमा उगद १६ गंडमाण र कांग शामिगाः, विणाविनांग गिरवर पग अफम्म नाणा पागः । परिवाए गाया, गणगारिनिपटा II.|| अहोयरायो फामपरिणाम परिहायना अंगविट्ट मुत्ताणि परिहायमाणेहि, रगणापरिणाम परिहायमाहि, फ्छा परिचण्डया, गा में नव नाणाए, या, गरगाए, वा । तुम पि लेनिधन वागाण. या, गुणाण, या 1 में ण हामाण, ण किट्टा, ण रहा, " यिभूमार ॥६८ यए.। ची अंट जायणं च ॥६९|| जापिय र पमना । म हता, छन्ता, भना, पिना, विपिना, उगविना, उनागहना, अकई करिस्लिामिनि मण माणे || हि या यदि गंवाने या गं गया णियगा न पुब्धि पानति, तमि गाई नागाण या गाणाण, या 115६॥ व्याध्यमगेण या मंगिहिगिची दि. C, गरि संजयाणं गायगाए, । तओ से एगया गंगगमुप्पया मनुष्य पनि ॥ १२॥ दिया गनियमाने या णं एगया णियगा तो पुश्यि परिहानि, छो या त भियंग पन्छा परिरिया। गाने ने नव नाणाण, या गाणाण या नुमरि लिणार नाणाण, या मरणाप, या ||३|| जागिनु दुग्ध पंताय गाय, अणमि. चम्पटु ययं पराग, स्वर्ण जाणादि पटिए|४|| जाय मायपणाणा अपरिलीणा, गनपणाणा अपरिमीणा, पाणगाणा अपरिया, जारपणाणा अपरिणा, परिगणणा अपरिमीणा, पण विल्यम्य पण्णादि अपरि- हायमा आयष्टुं गरम गमगुवा गिजागि नियमि ॥७॥1 पद मोहसो समत्तो।। भई आट ग महावी; पणमि मुस्के ।। ७६|| अणाणाप पट्टा वि एग नियति पदा मांग पाटया ||3|| "अपरिग्गाहा भविम्यामा" गट्टाण, द. कामे अभिगार, अणाणा, मुगिगो, पटियां नि, त्यं मोरे पुगो-पृगो गण्या, णा इध्याय, पो पागण॥ ८॥ विमुना ने जगा, जे जगा पाग्गामिणी दाम अलोमेण परितमांगे मालामालगना, गंजोगटी, अट्टालो मी, आप, गहनाकारे, विनि- विपिन पत्य, गाय पुगो-पुगो ।। ८० ॥ से श्रायबले, में णादवले, से रायणवले, आयारो सु. १ अ. २ उ. ३, ४ ९ से मित्ताले, से पिचनले, से देवरले, से रायरले, से चोरवले, से अतिहिवले., से शिविणरले, से समगवले, इथेएहि विल्वरूवेहि कोहि दंडतमायाणं संपेहाए भया कजा । पावमुक्क्षुत्ति मण्णमाणे अदुवा आसंसाए ॥८१॥ तं परिणाय मेहावी, व संयं एएहि कन्जेहिं दंई समारंभिला, णेवण्णं एएहिं कन्नेहि दंड समारंभा- विजा, एएहि कोहि दंड समारंमतंवि अण्णं ण समशुजाणिजा ।। ८२॥ एस मग्गे आयरिएहिं पवेइए, जहेत्य कुसले गोवलिपिज्जासि त्ति वेमि ॥८३ ॥ ची अज्सयणं बीओद्देसो समत्तो ।। से असई उच्चागोए, असई णीयागोए । णो हीणे, णो अहरिले गोऽपीहए, ३६ at संखाए को गोयापाई ? को माणावाई १ कसि या एगे गिझे १ ।। ८४ ॥ तम्हा पंडिए णो हरिसे, णो कुम्पे, भूएहिं जाण पडिलेह सायं, समिए एयाणुपस्सी, तंजहा~-अंधत्तं, बहिरत्त, मूयत्त, काणतं, कुंटत्त, खुजतं, पडभत्तं, सामत्तं, सबलतं ४. सहपमाएणं, अणेगरूवाओ जोणीओ, संधायइ, विरूवरूवे फासे पडिसंवेदे ।।८५|| से अज्झमाणे होवहए जाइमरणमशुपरियट्टमाणे ॥८६॥ जीवियं पुढो पिर्य है इमेगेसि माणवाणं खित्तवत्युममायमाणाणं ॥ ८७॥ आरत्तं विरतं मणिकुंडलं, सह हिरण्गेण इत्थियाओ परिगिज्ज्ञ तत्येव रत्ता ॥८८॥ "ण इत्थ तवो । वा, शियमो वा, दिस्सइ," संपुण्ण बाले जीविउकामे लालप्रमाणे मूढे विप्परियस- - मुवेइ ॥ ८॥ इणमेव गावकरांति, जे लणा धुवचारिणो; जाइमरणं परिण्णाय, है चरे संकमणे दढे ॥९० ॥ णस्थि कालस्स णागमो ॥ २१॥ सचे पाणा पियाउया, ।। सुहसाया, दुक्खपडिकूला, अप्षियवहा, पियजीविणो, जीविउकामा १९२॥ सव्येसि जीवियं पियं ॥ ९३ ॥ तं परिगिझ दुपयं चउप्पर्य अभिजुजिया णं, संसिं- चियाणं, तिविहेण जा बि से तत्थ मत्ता भवदअप्पा वा हुंगा वा से तत्य गढिए चिट्टइ, भोयगाए ॥१४॥ तओ से एगया विविहं परिसिहं संभूयं महोवगरणं भवइ । तपि से एगया दायाया वा विभयंति, अदत्तहारो वा से अवहरइ, रायाणो वा से विलुपति, पस्सइ वा से, विणसइ वा से, अगारदाहेण वां से डज्झइ ॥१५॥ इइ से परस्सअट्टाए कराई कम्माई वाले पकुव्यमाणे तेण दुक्खेण संमूढे विप्परिया- समुवेइ ।।९६॥ मुगिणा हु एवं पवेयं ।। ९७।। णोतरा एए, जोय ओई तरित्तर, अतीरंगमा एए, णोयतीरं गमित्तए । अपारंगमा एए णोय पारं गमित्तए वा, दमो . 1. Th FI -- १० अंग-पबिट्ट मुत्ताणि ।। ९८ ॥ आगामि न आयाय, गति टागे न मिट । मितई परमेष सपिठामि चिट्ठर ॥ ११॥ सो पागमा पशि ॥१०॥ बाल पु फामनगाणे असमियाको दुकानी दुकान आप अणुपरिवार नि येनि ॥ १० ॥ बीअं अज्शयणं तइओद्देमो समत्तो । तश्री से एगया रोगगनुपाया गप्पति ॥ १०२ ॥ जेहि वा गदि संवगड, ते या णं एगया गियया पुधि परिलनि । गोया ते नियगे पन्छा परिव गाल ते तर ताणाए. या, मरणार या, नुमं पि नेमि गाद ताणाए, या सरकार वा ॥ १०३ ॥ जाणितु दुकानं पतंय मायं ॥ १०४॥ मोगा में व अणुगोपट इहमंगेसि माणवाणं, तिविहेण, जावि से तत्य मत्ता भवद- अप्पा या, बहुगापा से तत्थ गदिए चिट्टर; भोयगाए ||१०|| तभी से एगया विपरिसिद्ध संभू महोवगरणं भवद, तंपि से एगया दायाया विभयंति, अदत्तहारो वा से हर रायाणो वा से विलुपति, णसइ वा से, विणत्मद या से, अगारदाहेण वा से सवा ॥१०६|| इद से बाले परस्स अट्टाए कराणि कम्माणि पट्यमाणे तण दुक्से मूढे विप्परियासमुवेइ ॥१०७॥ आमं च छंदं च विगिंच धीरे ॥१०८|| तुर्म चेच तं सटमाटु ॥१०९॥ जेण सिया तेण जो सिया ॥११॥ दणमेव णाय. बुझति, जे नणा मोहपाउडा ॥११॥ थाभिलोएपन्याहिए. ते भो वयंति- एयाई आययणाई ॥११२॥ से दुरावाए-मोहाए-माराए-गरगाए-गारगतिरि- पखाए ॥११३।। सततं मूढे धम्मं णाभिजाणइ ॥११४॥ उदाहु वीरे, अप्प. मामो महामाहे ।।११।। अलं कुसलम्स पमाएणं, संति मरणं मंपदाए, भंडरधम्म संपहाए ॥११६||णालं पास अलं तव एएहिं, एवं पाम मुणी ? महब्भवं ॥११७॥ णाइवाइन्न कंचणं ॥११८॥ एस वीरे पमिण जे ण गिविनइ आयाणाप ॥११९|| "ण मे देह" ण कुपिना. थोवं लद्ध ण दिगण, पढिसेहिओ परिणमित्रा ॥१२०॥ एयं मोणं ममगुवामिनामिनि वमि ॥१२॥ बीमं अज्झयणं चउत्योद्देसो समत्तो ।। जमिणं विस्वस्वेहिं सत्येहिं लोगरम कम्मममारंभा कचंति, तंजहा-अप्पयो से पुत्ताणं, धूयाणं, मुण्हाणं णाईणं, धाईप, राईणं, दामाणं, दासीण, कम्मकराम i है। आयारो सु. १ अ.२ उ. ६ ११ फम्मकरीणं, आएसाए, पुढो पहेणाए, सामासाए, पायासाए, संणिहि-संणिचओ कन्जइ, इह मेगेसि माणवाणं भोयगाए ॥१२२॥ समुट्ठिए अणगारे आरिए आरि- याण्णे, आरिवदंसी, अयंसंधित्ति, अदक्वु, से णाइए, णाइआवए. णाइयंते समगुजागइ ॥१२३ ॥ सन्बामगवं परिणाय णिरामगंधो परिवए. ॥१२४॥ अदिस्समाणे कयविकारसु; से ण किणे.ण किणावए,किर्णतण समणुजाणइ ॥१२५॥ से भिक्खु कालण्गे-बलण्णे-मायण्णे-खेयण्णे-खणयण्णे-विणयण्णे-ससमयण्णे-परसम- यण्णे-भावण्णे-परिग्गरं अममायमागे, कालागुट्ठाई, अपडिण्णे दुहओ छेत्ता, णियाइ ॥१२६॥ वत्यं-पडिग्गह-कंत्रल-पायपुंठण-उग्गहं च कडासणं, एएसु चेव जाणेजा ॥१२७॥ लद्धे आहारे, अणगारो मायं जाणेजा से जहेयं भगवया पवेइयं ॥१२८|| लाभुत्ति ण मज्जिजा, अलामुत्ति ण सोइजा, बहुंपि लर्छ । णिहे, परिग्गहाओ अप्पाणं अवसंकिना, अण्णहा णं पासए परिहरिना ॥१२९।। एस मग्गे आयरिएहिं पवेइए, जहित्थ कुसले गोवलिंप्पिजासित्ति वेमि ॥१३०॥ फामा दुरइकमा, जीवियं दुपडिवूहणं; कामकामी खलु अयं पुरिसे, से सोयइ, जूरइ, तिप्पड़, पिडुइ; परितप्पइ ॥१३६॥ आययचक्खू लोगविपस्सी लेगस्स अहो भाग जाणइ, उ8 भाग जाणइ, तिरियंभाग जाणइ ।।१३२।। गढिए लोए अगुपरियमाणे, विइत्ता इह मचिएहिं, एस वीरे पसंसिए जे बद्ध पडिमोयए ॥१३३॥ जहा अंतो तहा बाहिं जहा बाहिं तहा अंतो ॥१३॥ ति र अंतो-अंतो पूइदेहंतराणि पासइ पुढोवि सवंताई पंडिए पडिलेहाए ॥१३५।। से मइभ परिण्णाय माय हु लालं पच्चासी, मा तेसु तिरिच्छमप्पाणमावायए ॥१३६॥ * कासंकासे खलु अयं पुरिसे, बहुमाई, कडेण मूढे,पुणो तं करेइ लोहं वरं वड्डे अप्पणो ॥१३७॥ जमिणं परिकहिलइ इमस्स चेव पडिवूहणयाए अमरायइ महा. सद्दी अट्टमेयं तु पेहाए ॥१३८॥ अपरिण्णाए कंदइ से तं जाणह जमहं वेमि ११३९ ते इच्छ पंडिए पवयमाणे, से हता, छित्ता, भित्ता, लुपइत्ता, विलुपइत्ता उद्दवइत्ता, अकडं करित्सामित्ति मण्णमाणे, जस्सवि य णं करेइ, अलं बालस्स संगेणं, जे वा से कारइ वाले, ण एवं अणगारस्स जायइत्तिं वेमि ॥१४०।। बीअं अज्झयणं पंचमोद्देसो समत्तो ।। “से ते संबुज्झमाणे आयाणीयं समुट्ठाए तम्हा पावकम्म णेव कुज्जा; ण कार. दुर प । 1 - सहे वेज्जा ॥१४१॥ सिया तत्थएगयरं विप्परामुसइ, छसु अण्णयरसि, कप्पह ।।१४२१ सुहट्टी लालप्पमाणे सएण दुक्खेण मूढे विप्परियासमुवेइ । सरण विप्पमाएण पुढे जं सि मे पाणा पचहिया, पडिलेहाए णो णिकरणयाए एस परि दिपहे मुणी जस्स, त्थि ममाइयं ॥१४४॥ तं परिण्णाय मेहाची विइत्ता रोग वीरे णो सहते रई जम्हा अविमणे वीरे, तम्हा वीरे ण रज्जइ ॥१४६|| फासे अहियासमाणे, णिबिद गंदि इह जीवियस्स ॥१४७॥ मुणी मोणं समायाय, धुणे कम्मसरीरगं; पंतं लूहं सेवंति, वीरा संमत्तदंसिणी ॥१४८॥ एस ओहंतरे मुणी, तिपणे मुत्ते, विरए वियाहिएत्ति बेमि ॥१४९॥ दुव्बसुमुणी अणाणाए, १२ अंग-पविटु सुत्ताणि वयं पकुवइ, पवुचइ कम्मोवसंती ॥१४३॥ जे ममाइयमई जहा से चयइ ममाइयं से पंता लोगसणं से मइम परिकमिजासित्ति बेमि ॥१४॥ णारई सहते वीर तुच्छए गिलाइ वत्तए ॥१५०॥ एस वीरे पसंसिए, अचेई लोयसंजोय, ॥१५॥ एस णाए पवुच्चइ, जं दुक्खं पवेइयं इह माणवाणं, तस्स दुक्खस्स कुसला परिणा मुदाहरंति ॥१५२॥ इइ कम्म परिणाय सव्यसो ॥१५३॥ जे अणण्णदंसी से अणण्णारामे, जे अणण्णारामे से अणण्णदंसी ॥१५४|| जहा पुण्णस्स कत्थइ तह तुच्छस्स कत्थइ जहा तुच्छस्स कत्थइ तहा पुण्णस्स कत्थ ॥१५५॥ अविय हणे अणाइयमाणे । एत्यपि जाण, सेयंति णस्थि ।।१५६॥ फेयं पुरिसे कं च गए। एस बीरे पसंसिए, जे बद्ध पडिमोयए, उष्टुं अहं तिरिय दिसासु ॥१७॥ से सबओ सध्यपरिणामारी ण लिप्पद छणपएण, वीरे ॥१५८ रो, गेहावी . यणस्सखेयो जे प बंधपमुक्खमण्णेसी ॥१५९॥ कुसले पुण णो बढे, णो मुक्के ॥ १६० ।। से जं च आरभे जं च णारभे । अणारखं च ण आरभे ॥ १६१ ॥ परिणाय लोगसणं च सव्यसो ।। १६२ ।। उहेसी पासगस्स णत्थि ॥१६३ ॥ पाले पुण णिहे कामसमगुणणे असमियदुक्खे दुक्खी दुक्रवाणगेव आवर्ट अणु- परियदृश ति वेमि ॥ १६४ ॥ छोद्देसो समत्तो।। लोगविजय णाम बीअमज्झयणं समत्तं ॥ -सीओसणिज्ज णाम तइयं अज्झयणं- सुत्ता अगुणी राया मुणिणो राया जागति ॥१६५॥ लोयसि जाण अहियाय - -- -- - आयारो सुः:१.अ. ३. उ. २, ३ दुक्ख ॥ १६६ ॥ समयं लोगस्स जाणित्ता, इत्य सत्योवरए ॥१६७॥ जस्सिमे पहा व-रूवा य-गंगा य-रसा य-फासा य-अभिसमयागया भवंति, से आयवं-णाणवं- धेय-धम्मव-भयं-पण्यागेहिं परियाणइ लोयं मुणीति वचे धम्मविउति अंजू आवट्ट- सोए संगमभिजाणइ सीउसिणाई,से णिग्गंधे, अरइरइस हे फरसय गो वेएइ जागर- बेरोवरए-वीरे एवं दुक्खा पमुक्खसि ।।१६८ ॥ जरामच्चुवसोवणीए गरे सययं मूढे धम्म णाभिजागइ॥१६९॥ पासिय आउरे पाणे अप्पमत्तो परिवए ॥१७०॥ मंता एय; मइम-पास ॥१७॥ आरंभ दुक्खामिणति णचा, माई पमाई पुण-एइ गम्भ; टवेहमायो सहरूबेतु अंजू , माराभिसकी मरणा पमुबइ ॥१७२|| अप्पमचो कामेदि, उबरओ पावकम्मेलिं, वीरे आयगुत्ते जे खेयाणे ॥१७॥जे पनवजायस- त्यस खेयणे, से असत्थस्स खेयण्णे; जे असत्यस्स खेयण्णे, से पनवजाय सत्यत्स # खेवणे ॥१७४|| अकम्मरस ववहारो ण विवइ, कम्मुणा उवाही जायइ ॥१७॥ । कम्मं च पडिलेदाए, काममूलं च जं छणं ॥१७६।। पडिलेहिय, सव्वं समायाय है दोहिं अंतेहिं अदिस्समाणे ||१७७॥ तं परिणाय मेहावी विइत्ता लोग, वंता 2 लोगसणं से महमें परफनिम्नासित्ति वेमि ।।१७८।। पढमोद्देसो समत्तो ।। जाई च बुझिं च इहज पासे, भूएहिं सायं पडिलेह जाणे । तम्हाऽतिविजो परमति णवा, संमतदंसी ण करेइ पावं ॥१७९|| उम्मुंच पास इह मचिए हिं, ६ आरंभजीती उभयाशुपत्सी । कामेसु गिद्धा शिचयं करंति । संसिचमाणा पुरिति गम्भ ।।१८०॥ अवि से हासमासज. इंता गंदीति मण्णइ । अलं बालरस संगणं षा वेरं बढ़ेइ अपणो॥१८॥तम्हा-तिविमो परमति णवा, आयंकदंसी ण करेइ पावं ॥१८॥ अग्गं च मूलं च विगिच धीरे, पलिच्छिदिया णं णिकाम्मदंसी ॥१८॥ एस मरणा पमुच्चइ से हु दिहभए मुणी, लोयंसी परमदंसी विवित्तजीवी उवसंते समिए सहिए सयाजए कालखी परिचए ॥१८४|| बहुं च खलु पावकम्म राव पगडं, संमि घिई कुबहा, एत्योवरए मेहावी सव्वं पावकम्मं झोसेइ ११८५॥ अणेगचिंते खलु अयं पुरिसे से फेयणं अरिहए पुरइत्तए से अण्णवहाए, अण्ण. परियावाए, अण्णारिग्गहाए, जणवयवहाए, जणवयपरियावाए, जणवयपरि- ग्गहार ॥१८६॥आसेवित्ता एयमढ़ इचेवेगे समुढिया, तम्हा तं बिइयं णो सेवे णिस्सारं पासिय गाणी ॥१८७|| उबवायं चवणं णचा, अणण्णं चर माहणे ॥१८८॥ से ण उणे ण ठणामए, उणत णाणुजाणए ।।९८९॥ णिविद गदि अरए पयासु जयत उचार गामी ॥१९॥ गथं परिणाय इहज वीरे, सोयं परिणाय चरिज दंते। उम्मन्न १४ अंग-पविट्ठ सुत्ताणि अणोमईसी णिसणणे पारोहिं कम्गेहि ॥१९०॥ गोहाइमाण हाणिया य वीरे लोभरत पासे गिरयं महंत । तम्हा य वीरे विए वहाओ, विविज्ज सोय लहुमूष लडं इह माणवेहि, णो पाणिणं पाणे समारमिज्जासि-त्ति वेमि ।। १९२ तइयं अज्झयणं वीओद्देसो समत्तो ।। संचि लोगस्स जाणित्ता ।। १९३ ॥ आयओ बहिया पास, तम्हा ण हैताण विधायर ॥१९४|| जमिण अण्णमण्णवितिगिच्छाए पडिलेहाए ण करेइ पावं फम्म किं तत्थ मुणी कारणं सिया ? समयं तत्युवेहाए अपाणं विप्पसायए ॥१९५।। अणण्णपरमं णाणी णो पमाए कयाइवि । आयगुत्ते सया धीरे, जायामाया नावए ॥१९६॥ विरागं रूवेहिं गच्छिज्जा महया खुट्सए हिं वा ॥१९७।। आगई गई परिण्णाय दोहिंवि अंतेहिं अदिस्समाणेहिं से ण छिज्जइ, ण 'भिज्जइ, णडजइ ण हम्मइ कंचणं सबलोए ॥१९८|| अवरेण पुचि ण सरंति एगे, कि.मसतीतं ! किंवाऽऽगमिस्सं ? भासंति एगे इह माणवाओ, जमस्सतीतंतं आगमिस्सं ॥१९९।। णाईयम णय आगमिस्सं, अर्ट णिअच्छंति तहागया उ; विहूयकप्पे एयाणपस्सी; णिझोसइत्ता खवए महेसी ॥२००|| का अरई ? के आणंदे ? एत्यपि अग्गहे चरे। सव्वं हासं परिचज, अलीणगुत्तो परिव्वए ॥२०१॥ परिसा! तुममेव तुम मित्तं, कि यहिया मित्तमिच्छसि ? ॥२०२॥ ज जाणिजा उचा. लक्ष्य से जाणिज्जा दूरालश्य, जं जाणिज्जा दूरालयं तं जाणेजा उचालइयं ।। २०३॥ पुरिसा ! अताणमेध अभिणिगिज्य एवं दुक्खा पमुघसि ॥ २८४ ।। पुरिसा ! सच- मेय समभिजाणाहि, सघस्साणाए से उवहिए मेहावी मारं तरइ सहिओ धम्मा मायाय सेयं समगुपस्सइ ।। २०५ ॥ दुहओ, जीवियस्स परिवंदणमागणपूयणाए, सि एगे पमार्यति ॥२०६॥ सहिओ दुक्तमत्ताए पुट्ठो णो संझाए; पासिमं दविए होए लोयालोयपयंचाओ मुबइ त्ति बेमि ॥ २०७॥ तइओद्देसो समत्तो॥ से पता कोई च, माणे च, मार्य च, लोभ च, एयं पासगस्स दसण, उपरयमत्याल पलियतकररम आगाणं सगडभि ॥२०८ ।। जे (गजगदग जागड, जे मध्य जाणइ से एग जाणद ॥२०९|| सबओ पम. मान, सो अपमतस्य नात्य भयं ॥२१॥ जे एग णाम से बहुं णामे, र धीरे सया आगयपण्णाणे, पमत्ते बहिया पास अप्पमचे सया परकमिनासि ति Saner सो समेमाणा पलेमाणा पुणो पुणो जाई.पकति ॥२२९॥ अहो य राओ य जयमाणे आयारो सु. १ अ. ४ उ..१.२ १५ ने पहुंगामे से एगणामे ।।२११॥ दुक्ख लोगस्स जाणित्ता, यंता लोगस्य संजोग, जति वीरा महाजाणं, परेण परं जति णावतंति जीवियं ॥२१२।। एग विगिंचमाणे पुढो विगिच पुढोविगिंचमाणे एर्ग विगिंचइ ।। २९३ ॥ सष्टी आणाए. गेहावी १२१४॥ लोगं च आणाए अभिसगेयाभकुओभयं ।। २१५ ॥ अस्थि सत्य परेण परं, त्यि असत्यं परेण परं ॥ २१६ ॥ जे फोहदंसी माणदंसी, जे माणदंसी से मायादंसी, जे मायादंसी से लोभदंसी, जे लोभदंसी से पिजदेसी, जे पिकादंसी से दोसदंसी, जे दोसदंसी से मोहदंसी, जे मोहदंसी से गम्भदंसी जे गम्भदेसी से जम्मदंसी, जे जम्मदंसी से मारदंसी, जे मारदंसी से गरयदंसी, जे परयदंसी से तिरियदंसी, जे तिरियदसी से दुक्खांसी ॥२१७॥ से मेहावी अभिणिवाहिका, कोई च-माणं च-माय चलोइं च-पिटाच-दोसं च-मोहं च-गच्मं च-जम्मं च-मरणं च- गरयं च-तिरियं च-दुक्वं च एवं पासगस्स दंसणं उपर यसत्थस्सपलियंतकरस्स ॥२१८॥ आयाणं गिसिद्धा सगडगि ॥२१९॥ कि.मत्यि ओवाही पासगरस ? ण विनइ ? गल्थि त्ति वेमि ॥२२०॥ चउत्थोद्देसो समत्तो॥सोओसणीयं द शाम तइयज्झयणं समत्तं ।। सम्मत्तं णाम चउत्थं अज्झयणं । से वेमि--जे य अईया, जे य पडुप्पण्णा, जेय आगमिस्सा अरहंता भगवंतो ते सध्ये, एवमाइक्वंति एवं भासंति एवं पण्णविति, एवं परविंति-सचे पाणा, २०३६ सचे भूया, सचे जीवा, सच्चे सत्ता ण हतम्या, ण अजावेयव्या, ण परिघेतवा ण स्व परियावेयब्बा, ण उद्दवेयवा ||२२१।। एस धम्मे सुद्ध, गिइए-सासए-समिच लोय खेयण्गेहि पवेदए, तंजहा~-उहिएसु वा, अणुटिएस वा, उवविएसु वा अणुवढिएसु पृष-५ वा, उवरयदंडेसु था, अणुवस्यदंडेसु चा, सोवहिएसु वा, अणुवहिएसु वा, संजोग- रएसुवा, असंजोगरएसु या२२शातच चेयं तहा चेयं अस्सि चेयं पवुच्चइ ॥२२३॥ तो ते आइत्तु ण णिहे ण णिक्खिवे, जाणितु धम्मं जहा तहा ॥२२४|| दिवहिं णिवेयं गच्छिना ॥२२५।। णो लोगरसेसणे चरें ।।२२६॥ जस्स णत्यि इमा णाई अण्णा तस्स को सिया ? ||२२७॥ दिढे सुर्य मयं विणाय, जं एवं परिकहिज्जई ॥२२॥ MIN सि. यो धन उम दकि ni जे आसवा ते परिस्सवा, जे परिस्सवा ते आसवा ।।२३१॥ जे अणास- ते अपरिस्सवा, जे अपरिस्सवा ते अणासवा ।। २३२ ॥ एए पर संयुशमाणेले च आणाए अभिसमिचा पुढो पवेश्यं ।। २३३ ॥ आवाइ गाणी इह मागवा १६ अंग-पविट्ठ सुत्ताणि गि ॥ २३० । चउत्थं अज्झयणं पढमोद्देसो समत्तो।। . संसारपडिवण्णाणं संयुज्झमाणाणं विण्णाणप ताणं, अट्टावि संता अदुवा पमत्ता, अ सद्यमिणत्ति-चेमि ॥२३४ ॥ णाणागमो मच्चुमुहस्स अत्यि। इच्छापणीया बैंक णिकेया कालग्गहीआ णिचयणिविट्ठा पुढो पुढो जाई पकप्पयंति ॥ २३५॥ मेगेसिं तत्थ-तत्थ संथवो भवइ । अहोरवाइए फासे पडिसंवेदयति ॥ २३६ ॥ वि कूरेहिं कम्मेहिं, चिट्ठ परिचिट्ठइ; अचिटं रे िकम्मेहिं णो चिट्ठ परिचिटइ ॥२३ एगे वयंति अदुवावि णाणी, णाणी वयंति अदुवावि एगे॥ २३८॥आवंती के चंती लोयंसि समणा य माहणा य पुढो विवायं वयंति, "से दिडं च णे, सुयं च मयं च णे, विण्णायं च णे, उपमु अहं तिरिय दिसासु सबओ सुपडिलेहियं च सचे पाणा, सब्जे जीवा, सच्चे भूया, सधे सत्ता इंतव्या-अजावेयवा-परिघेतन्त्र परियावयन्धा-उद्दवेयन्वा । एत्य पि जाणह, णत्थित्थ दोसो।" अणारियवयण ॥२३९॥ तत्थ जे ते आरिया, ते एवं वयासी--"से दुहिडं च भे, दुस्सुयं च दुम्मयं च भे, दुविण्णायं च भे, उन्हें अहे तिरियंदिसासु सव्वओ दुप्पडिलेहियं भे; जेणे तुम्भे एवमाइक्खह, एवं भासह, एवं पण्णवेह एवं परूवेह सव्ये पा सधे जीवा सव्वे भूया सव्वेसत्ता, हतया, अमावेयव्या, परिघेतव्वा-परियावेयल उद्दवेयया एत्यवि जाणह णत्थित्य दोसो।"अणारियवयणमेयं ।२४० वयं पुण एक माइक्खामो एवं भासामो, एवं पण्णवेमो, एवं परूवेमो, “सध्धे पाणा, सधे जीव सव्ये भूया, सब्बे सत्ता, ण इतव्या, ण अजावेयन्या, ण परिघेतव्या, ण परियावेयया ग उहवेयवा, एत्यवि जाणइ, णत्थित्थ दोसो ।' आरियवयणमेयं ॥ २४१ ॥ पुत्र शिकायसमय, पत्तेयं पत्तेयं पुच्छिस्सामो, ह भी पवाया ! किं भे सायं दुक्खं उदाह असायं ? समिया पडियपणे याचि एवं बूया-सव्वेसि पाणाणं, सम्वेसिं भूयाणं, सव्येसि जीवाणं, सत्येसि सत्ताणं, असायं, अपरिणिधाणं महाभयं दुक्खं ति भेमि ॥२४२।। चउत्थं अज्झयणं बीओईसो समत्तो।। उमेरे णं पहिया य लोयं, से सव्वलोमि जे केइ विण्णू ॥२४३|| अणुवी २१ आभोवरया अहातहं लेगमुहमाणा पाईप पढीण दाहाणं उईणं इद मुसि परि- मारक संघदसिणं आओवरयाणं अहातहा लोगसमुहमाणाणं किमत्यि उवाही ? पासगस्स मित समत्तो ।। सम्मत्तं णाम चउत्यमझयणं समत्तं ।। X म आयारो सु. १ अ. ५ उ. १,२ १७ नाम, गिरिपतवाद गत्ता पलिय चीि, गरे मुगवा धामविलनि अंज; प्रारंभ माना गया, एवमा मंगगिलो ॥२८॥ तं मने पाया दुक्माग गुगटा परिदारनी, प्रति कम परिणाय मध्यसो ॥२४५|| आगामी पदिए अमित, एगमगाणं महा पुगे सी ॥४६कति अगा, अरेहि अपागं ॥२४॥ जट्टा गुमाई कटाई एव्यवादी पमत्यद, एवं अत्तममाहिर अनि ॥२४८॥ विगिच पोई, अनिकपमागे, म गिम्दाउर्ग मोर 11|| दुन्नबाग अद्यागमन, पुदो फागाः च फाने, लोरं च पाय, वि. 1' दमानं ॥२०॥ ने गिबुडा, पायेहि कम्मेहि भगियामा ने विवादिना ॥२१॥ म तम्हाऽनिविभो यो पटिगंजलि भामिति रेमि ॥२५॥ तइओद्देसो समत्तो।। भावाला, पीलए गिनीला, गहिना पुस्यगंजोग हमा उपमर्म ॥२५.३ ॥ तन्हा अविमणे वार, गारए समिण गहिए, सया अप. ।।२५.४ । दुग्णुचरी मग्गो वाराणं अनियगामीणं ॥२०॥ विगिन मंसमोगिन, एस पुरिन दीप बारे आयानि वियादिक, जे धुगाइ ममुत्मय यनिना भनेमि ॥२१,६ ॥ गिनादि पलिहिण्गेहि आयाणमायगदिए बाले, अचोटिणाधणे अगभियंतगंजोए । नमामि अरियाणा आगाए लभो दिय-त्ति बेमि ॥२५॥ जस्स गर्दिय पुरा पन्छा, मझे तरस कुत्री सिगा ? ॥२५८ ॥ से हु पण्णाणमंते बुरे आरंभोवरण, मम्ममयंति पामह, जेग यी यह घोर परितार्य व दारणं ।। २५९॥ परिछिदिव बाहिरगं च माय, निकम्मदंसी हद ममिएहि ॥ २६ ॥ कम्माणं सफल दट्टण तओ गिज्झाइ वयवी ॥२६१ ॥ जे बलु भो ! वीरा ने समिया महिया गयाजया संघदंसियो ri रियापन- चिदिनु ।। २६०॥ साहिल्सामो गाणं वाराणं सामियाणं माहियाणं, सयाजयाणं awe न विवद गरिय त्ति वेमि ।। २६३ ॥ चउत्थं अज्झयणं चउत्थोद्देसो लोकसार णाम पंचमं अज्झयणं आवती केयावंती लोयसि विपरामुगंति अटाए अणट्टाप वा । एएसु ने लिणाममंति, गुरु से कामा, तओ से मारस्म अंतो जओ ने मारस्म अंतो त PAPRA ममता . त्या पनि भागणामानि THE||२०|| एगे समेगु गिटे परिगिजामाणे, पण 'फा पो पुगो, माती यानी लोनि आरंभाती ।।२७१।। एमुलगी, एथति गाने परिपननमाणे रमा अदुकोहे बहुमाणे-बहुमाए बलोहे बहुराए-चमडे गहुगळे बहुगंकप्पे, आगवकी) १८ सेवा ॥२६८॥ कानामा ।। २६९।। पायेहि कम्मेहि अरारणे सरणति मण्णा ॥२२ मेगेमि एगनरिया भवद, जे पलिउच्छपणे उद्रिययाय पायमाणे “मा गे के अदा" अण्णाणामायदोसे सययं मूढे धम्म णाभिजाणइ ||२७३ ।। अटा पया माणव? कम्मकोविया अणुवरया अविजाए पलिमुरग्यमातु आवमेव अणुपरियति ति बेगि ॥२७॥ पंचमं अज्झयणं पढमोद्देसो समत्तो।। आवंती केयावंती लोयंसी अगारंभजीविणो एएसु चेव अणारंभ जीविणो ॥२७॥ एत्थोवरए तं झोसमाणे “अयं संधीति" अदक्खु, जे इमस्स विग्गहरा अयं खणेत्ति अण्णेसी ॥ २७६ ॥ एस मग्गे आरिएहिं पवेइप, उहिए णो पमायाए, जाणित्तु दुक्ख पत्तेयं सायं ।। २७७ ।। पुढो छंदा इह माणवा, पुढो दुबग्य पोयं से अविहिंसमाणे अणवयमाणे, पुढो फासे विप्पगोल्लए। एम समिया परिया, वियाहिए १२७८ ॥ जे असत्ता पावहिं कम्मेहिं उदाहु ने आयंका फुर्मति इइ उदाहु धीरे ते फासे पुट्ठो अहियासए ॥ २७९ ॥ से पुव्वं पेयं, पच्छापेयं भेउरधम्म विसण- धम्म अधुर्व अणिइयं असासयं चयावचइयं विप्परिणामयम्म, पासह एयं स्व. संधिं ॥२८० ॥ समुप्पेहमाणस्स फाययणायस्म इह विप्पमकस्म गत्यि मग्गे विरयस्स ति वेमि ।।२८१ । आवंती केय वंती योगमि परिग्गहावंती;-से अप्प वा, बहुयं वा, अगुवा, थूल या, चिनमतं वा, अचिनमा वा, एमु चेच परिग्गहा वंती ॥२८२॥ एवमेवेगेसि महाभयं भवइ, लोगवित्तं च णं उबेहाए ॥२८३|| एए. । - पा मि 17 एगे विद्धय मुणी अण्णा लांगमुहमाणे ॥२९७॥ इति कम्म परिणाय परययतणो अपणेसी ॥३००11 सम्म ति पासहा ते मागं ति पासहा, जे मोणं ति घुगे कम्ममरीरगं, पंत रहं सेवति, वीरा संमत्तदसिणी ।। एस ओहतरे मुणी, m S आयारो सु. १ अ.५ उ. ४-५ मंगे अपितामओ ने मुटियनलणीशिपा, पुरिगा! परमन पिपरियगा, ' एसुचव मोरं नि मागा२४ासे मुन ने, अवस्य च में, धनग्यो अन्य २८॥रय विसा अशागारे दोहराय लिपिग्गए ॥२८६॥ पमते पहिया पान, अपमतो परिष्यप, ॥२८॥ गोणं मम अणुयारिभामिति पनि ॥ २८८ ॥ पंचमं अक्षयणं बीयोद्देसो समत्तो ॥ आती यानी गति अपरिगहायंती मनु व अपरिग्गहापंती मुमा बई ली, पहियाण निमामिया ॥२८॥ ममिया, पगे आरिणदि पोहए जहित्य भए संधी बानिए माय संधी दुलोमा भयइ तरहा बेमिणो गिरोस पीरिक ॥२९॥ जे पुष्पहाई णो पजागिवाई, जे पुन्युटाई पलागि- पा, जेपो पुष्टाईगो पन्नाणियापि तारिसीप गिना, जे परिणाय लोग- मोमति, एवं नियाय मुगिणा पोत्यं ॥२९॥ इह आगाम्सी पंटिए अगिट, पुष्पावरराय जयमागे सया मीलं मपहाण ॥२९२गुपिया भवे अकामे भांश ॥२९॥ मना चेव गुज्ताहि, किं ने बुण बद्धाओ ? मुखानि नट दुरई ॥२९४॥ जदित्य कुगरलेटिं परिणाविवेने भासिए, जुए. हु बाले गम्भागु रथ ॥ २९५ ॥ अस्मि चेयं पन्युरोड, स्यमि या उणसि या ।। २९६ ॥ सेतु MEANI ame . ! - सध्यसो से न हिंसद संजमइ जो पगभइ, उबेहमागो पत्तेयं सायं ।। २९८ ॥ नया वगाएसी गारंभे कंचणं सम्रलोग, एगप्पमुहे विदिगप्पडणे गिविण्यचारी अरए पयामु ॥२९॥ ने वसुमं सबसमन्यागयामागेणं अप्पागणं अकरगिझ पावफम्म पामहा तं समग ति पामहा, ॥३०१|| ण इमं समं सिदिलेहिं अहिज्जमाणेदि गुणागाहिं यंक्रममावारहिं पमत्तेहिं गारमावसंतहि ॥३०२।। मुणी मोणं समायाए, दुप - तिपणे मुत्ते विरण, वियाहिपत्ति बेमि ॥३०३॥ तइओसो समत्तो।। गामाणुगाम दूरजमाणस्स दुनाय दुप्परफनं भयड अवियत्तस्स मिक्खुणो ॥३०॥ ययसावि एगे वेश्या कुष्पति माणवा, ठण्यराणे य गरेमहया मोहे मुंघाइ संबाहा बहवे मुसो २ दुरस्कमा अजागओ, अपासओ, एयं ते मा छोड़ । 22 : : - . नाग ||30"}} पाया, फाया " {{३ ० / 'I! | if Priyanf fair sky, { in vi , f गागा famr, if 11: साग पागंगागमा पनि आगमिनाया जामगार तिमि ॥२१॥ गणो कपि, णो पागणा, गोसासारण णो माग मर्याकरिण, नागुते; जापगंगरे, परिवाए गया पाचं, पण मोगरामणुतागि सासि-निवेगि ॥३११॥ पंचमं अज्शयणं चउत्योद्देसो समत्तो ॥ से चेमि-जहा, अवि हरए पडिपुणे समरि भोगे चिट्ठर उवरतपसारमय. माणे, से चिट्ठा सोयमज्झगए, से पास, सबओ गुत्ते, पास लोए. महेरिणो. जे य पण्णाणमंता पबुद्धा आरंभोवरया सम्ममेयंति पासह; कालस्स कंखाए परिव्ययंति त्ति चेमि ॥३१२॥ वितिगिच्छासमावण्णेणं अप्पाणेणं णो लभइ समाहिं ॥३१३॥ सिया वेगे अणुगच्छंति, असिया वेगे अणुगच्छंति, अणुगच्छमाणहि अणणुगच्छ- माणे कहं ण णिव्यिन्जे, तमेव संचं णीसंकं जं निणहिं पवेइयं १३१४॥ सहिस्स णं समगुण्णस्स संपन्वयमाणस समियंति मण्णमाणस्स एगया समिया होइ समियंति मणमाणस एगया असमिया होइ असमयंति मण्णमाणम्म एगया समिया होइ असमियति मण्णमाणस्स एगया असमिया होइ ||३१|| समियंति मण्णमाणस्स समिया वा, असमिया वा, समिया होइ उवहाए ॥३१६।। असमियंति मण्णमाणस्स समिया वा, असमिया वा, असमिया होइ उबहाए ॥३१॥उवहमाणो अणुवेहमाणे चूया-"उबेहाहि समियाए इथेवं तत्थ संधी झोसिओ भवइ " ॥३१८॥ से -- . प .
IF आभभूय अदक्खू, अणभिभूए पभू णिरालंबणयाए; जे महं अबहिंमणे ।।३२३॥ र पवाएणं पवाय जाणिना, सहसम्मइयाए, परवागरणेणं अण्णेति वा अंतिए सोचा मा ॥३२४॥ मिहेसं णाइबट्टेना मेहावी सुपडिलेहिय सवओ सन्वयाए सम्ममेव समभि- सो समतो। वारे आगमेण सया परक्कमेजासि त्ति वेनि ||३२६।। उर्दु सोया, अहे सोया, तिरिय - - २१ त आयारो सु. १ अ..६ उ. १, २ उद्वियल्स ठियस गई समणुपासह, इत्थवि बालभावे अप्पाणं णो उवदंसेजा ।। ३१९ ॥ तुमंसि णाम सन्चेव, जं हंतव्वति मण्णसि, तुमंसि णाम सचेव, जं अजा- वेयत्वंति मण्णसि, तुमंसि णाम सचेव, जं परियावेयवति मण्णसि, एवं जं परिघे- त्तव्यंति मण्णसि, ज उद्दवेयवंति मण्णसि | अंजू, चेहपडिबुद्धजीवी तम्हा ण हता, ण विधायए; अणुसंवेयणमप्याणेणं जं हंतव्यं णाभिपत्थए ॥ ३२०॥ जे आया से विण्णाया, जे विण्णाया से आया, जेण वियाणइ से आया, तं पडुच्च पडिसंखाए, एस आयावाई समियाए परियाए वियाहिए त्ति वेमि ॥३२॥ पंचम अज्झ- यणं पंचमोद्देसो समत्तो ॥ अणाणाए एगे सोवट्टाणा आणाए एगे णिरुवढाणा एयं ते मा होउ, एयं कुस- लस्स दंसणं ॥ ३२२ ॥ तदिट्टीए तम्मुत्तीए तप्पुरकारे तस्सण्णी तण्णिवेसणे, अतार मार साए परिवयंनि समाहिं ॥३१॥ मागाह अगगुगन्ध इयं ॥३१४॥ सहित ॥ समिया होइ समि जाणिया ॥३२५॥ इह आरामं परिण्णाय अल्लीणगुत्तो परिबए, गिठियही सोया वियाहिया; एए सोया वियक्खाया, जेहिं संगति पासहा ॥३२७॥ आवदृ तु उवेहाए, एत्य विरमिज वेयवी ॥३२८|| विणइत्तु सोयं णिक्रवम्म एसमहं अकम्मा जाणइ, पासइ, पडिलेहाए णावखइ, इह आगई गई परिण्णाय अचेइ जाइमरणस्स वट्टमग्गं विक्खायरए ॥३२९।। सवे सरा णियदृति, तका जत्य ण विज्जइ, मई तत्य ण गाहिया, ओए अप्पइट्ठाणस्स खेयण्णे ||३३०॥ से ण दोहे ण हस्से ण वहे ण तसे ण चउरंसे ण परिमंडले,ण किण्हे, ण गोले, ण लोहिए, ण हालिदे ण सुकिल्ले ण सुरहिगंधे ण दुरहिगंधे ण तित्ते ण कडुए, ण कसाए, ण अंविले, ण महुरे, ण लवणे, ण कक्खडे ण मउए ण गुरुए ण लहुए ण सीए ण उण्हे ण गिद्धे ण लुक्खे ण काऊ ण रहे ण संगे ण इत्थी ण पुरिसे ण अण्णहा परिणे सण्णे ॥३३१|| उवमा ण विजए, अरूवी सत्ता, अपयस्स पयं णत्थि ॥३३२॥ से ण सहे ण रूवे ण गं ण रसे ण फासे इथेयावंति त्ति वेमि ॥३३३॥ छट्ठोद्देसो समत्तो । ॥ लोगसार णाम पंचमज्झयणं समत्तं ॥ ७ एगया समिषा लवणे, । समियंति मना वामसमिति मन्ना भाउवेहमानो अ भेज ओजनामाणे पद माणोसु आधार से गरे, जरिममाओ नाइओरालो गुरू २२ अंग-पविट्ठ गुत्ताणि धूतापलं णाम छठें अज्ायण रिलहियाओ गति, आप रोणाणालित ॥३३४॥ से REE सिस हियाणं णिरिणादाण समाहिगाणं पणाणता गतिमाग, एयं एगे महान विप्परफमति, पासह एगे अगिसीरमाणे अणतपणे ॥२३५॥ से येगि-रो जहा गुग हराए विगिविचिो परापलासे उम्मगं से णो लाइ ॥ ३३६ ॥ इव रागिणो चयति, एवं एगे अणेगरूये बुलेहिं जाया, रूयेदि सता, ग. थति, शियाणो ने ण लहंति गुगलं ॥३३०॥ अ पास तेहि गुलेहि आया जाया ॥ ३३८॥ गंधी अहवा कोटी, रायंसी अवमारियं । काणियं शिगिय में कुणियं खुमियं तदा ।। उदर पास गूगं च, सूणिच गिलासिणिं, येवई पीठ च, सिलिवयं गहुमेहणि सोलस एए रोगा, अग्लाया अणुपुरवसो, अहण पुरु आयंका, फासा य असमंजसा ॥गरणे तेसिं रांपेदार, उपचाय चणे च ॥ परियागं न रोपेहाए, तं सुणेह जादा तदा ॥ ३३९ ॥ राति पाणा अंधा तमंसि ति दिया तामेव राई अराई अइ अब उनावयफारो पटिरावेएइ, सुरहिं एवं पर ॥३४० ॥ राति पाणा घासगा, रसगा उदए उदएचरा आगारागमिणो पाणा किलेसति ॥ ३४१॥ पास लोग गहन्ग ॥ ३४२॥ भागमखाटु जंतवो ।। ३४ राता कागेगु माणया, अवलेण पई गति सरीरेण पभगुरे ॥३४४ ॥ ॥ मंगुकाले, २ वाले पनु,रोगा पाहुणा, आउरा परियानाए ॥ ३४' णा पारा, अल तोप.हिं । एयं पास गुणी ! मदनगर्ग, णाया जानणं ।।३४ भायाण गो ! रारा गो ! घूयवार्थ पोदास्यामि इह गल्तु अत्तत्ताए हिं गलहिं अनिरोणार, अभिराभूगा, अमिराजाया, अभिगिना, अभिरामा, आ संयुमा अनिशिता अपुष्येण महागणी ॥ ३४७ ॥ तं परणामतं परिदेवमा माणेनगानि ६ ते नगति; "दोषणीया अज्झोनवणणा," अपादकारी जण अतारिने गुणी णय ओदंतरण, जगा जे विष्णजना ॥ ३४८॥ सप रात्मणो संगेइ गाई गुणाग से तत्य रमद १॥ यं णा गया समगुवासिमासि गि ॥ ३४२ ॥ छळं अज्शयणं पढमोहेसो समत्तो ।। आउर रोगमागाए, नदना पुषसंजोग, हिना उनगम, पसित्ता गोरंगि ri जे अचेले परियुसिए तस्स णं भिक्खुत्म णो एवं भवई परिजुणे मे वत्यं जाइ- पता चोधासिस्मामि, परिहिस्सामि पाटणिस्सामि ॥३६०|| अदुवा तत्थ परफमंतं भुको परशमनं परिवार अभिममण्णागए भवद ॥३६१जयं भगवया पवेडयं तमेव अभिसमे विपरमा॥३४८॥ वामागिरीयमाणाणं दवियाणं पास, अहियासियं ॥३६२॥ आगयपण्णाणाणं - नया समगुर बाहा भनि, पयगुए.य मंससोणिए, विरसेणि कट्टु परिष्णाए, एस तिणे 1 ar4 आयारो सु. १ अ. ६ उ. ३, ४,५ २३ ननु वा अणुवसु वा जागितु धम्म जहातहा, अहेगे तमचाइ कुसीला, पल पटिग्गाई कंत्रलं पाय/रणं विउसिना, अणुपुष्येण अणहियामेमाणा परीलो दुरहियागाए, कागे ममायमागस, श्यामि या मुहुतेग या अररिमागाए भेओ एवं अंतरायहिं फानेहि आफेवलियहि अपहण्याचेए ॥३,०॥ अहेगे धम्ममायाय आयाणपमिहरु पगि. दिए चरे अप्पलीयमाणे दडे ॥३,६॥ सर्व गिदि परिणाय पस पणए महामुणी ॥३५२।। अइअप सम्बो संगं "णमहं अत्यित्ति १६ एगोहमति" जयमाणे एत्थ विरए, अगगारे, सम्बोगटे, रोयंते, जे अचले परिपुसिए संविस्यह ओमायरियाए ॥३५३ ॥ से आयुट्टे वा, हए या, हुंचिए वा, पलियं पकत्य, अनुवा पकाय, अतहेहिं सहफासेहि, इइ सरवाए एगयरे अण्णायरे अभिण्णाय तितिक्रमाणे परिवण, ले च हिरी जे य अहिरीमाणा, चिया सच दिसोत्तिय संफासे फासे समियदंसगे ॥३५४ ॥ एते भो णगिगा पुत्ता, जे लोयसि अगागमगधम्मिगो, ॥३५"आणाए. मामगंधर्म" एस उत्तरवाए इह माशयाणं पियाहिए.||३५६॥ एत्योवरए तं झोसमाणे, आयाणिज परिणाय परियारणं विगिनः ॥३५७ ॥ इह मेगेसि एगचरिया होड, तत्थियरा इयरेहि कुलेहिं सुद्धतणाए रावेसणाए से मेहावी परिवर, सम्भि अदुवा दुम्मि अदुवा तत्य भेरया पाणापाणे किलेसंति, ते फासे पुट्ठो धीरो अहियासेकासि त्ति येमि ॥ ३५८॥ वीओद्देसो समत्तो । एयं खु मुणी आयाणं सया सुअग्यायधम्ने विधूयकप्पे मिझोसइत्ता ॥३५९॥ स्मामि, तुत्त नाइस्मामि, सई जाइस्लामि, संघिस्सामि, सीविस्सामि, उकासिस्सामि जय . A नाए नहि अचेल तणफासा पुमंति, सीयफासा फुसंति, तेउफासा फुसंति, दंसमसगफासा पुसंति एगयरे अण्णयरे विस्वरूवे फासे अहियासेट, अचेले, लाघवं आगममाणे, तवे रे अमिनहा " प्रदकी सव्वश्रो सब्यत्ताए सम्मत्तमेव समभिन्नाणिवा एवं तेगि महावीराणं चिराई पुन विरए वियाहिएत्ति वेमि ॥३६३|| विरयं भिक्त्वं रीयंत चिरराओसियं उरई जि.विकार REचनाण कालांटर, महान जोर दाग ER एवं 'मार्यान्यनंदन REE मणरमाणा,माण सणामारनामा नहरणा मांड्या 1EE र नातिनगणना अण्णा नाम दिया। मताई, तन्नांतर गाणनुमान का चलने का नामांत बान्ता गतिमामा तनाणा ||माधाय च नमान कंप सुनारण जा या य मात्रा र नामुळण काय करावं बर्ग नइलो जनजी स्त्र में जन्म दिया यमाला य ऋणुपुयण साना नानी र 'माण्णा जॉरिजनी" गगन नशा विनाणा माना । अमोरगा नानाचायनाला नया क्यान ।।३। जान्नका उता सवार यनाणा "अनला" माणक चाया मदन गाच्या या नियमाणा अंग आयागोयानादान | शापानष्ट देशनिगः पननाणा बाश्चि दिनारणानी ॥ ३५॥ मुहान गयो गोबियलय कारणा, गिन्यान जान चांगनती मगर || आयोग प्रामुग जुग जाननांत मोमवेता ाियनाणा मानांत ग्रामीण भारत यात गलन मछुटामय जमिनी माणमा | मानों उनन्न णायमा अग्नी आम्मा "पानाण" जाना, मनाया ननाप्रमाणे “चार र अशाणार नण दियो याद दिन !! भाष नामनामना, नणययन गई नागा सनुरागाईन अन्य मार नारे 51 ना माना गया। प्रालिलो भामा मानना नोन को रिन ।। मन ना मानगर, नगाई गई मांग प्रदान का मान ८. कमा सननी 11 र, मनकामना
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पहाए, अमण वा ३ वक
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." आयारो सुः१ अ.८ उ.७ २९ गम्हे पडियण्णे अहा परिजुण्ण वत्यं परिहवेजारत्ता अदुवा एग साडे अदुवा लापवियं आगममाणे, जाव सम्मत्तमेव समभिजाणिया, जस्स णं भिक्खुस्स वह एगे अहमंसि णमे अन्यि कोइ ण याहमवि कस्स वि, एवं से एगागिणमेव समभिजाणिमा लापवियं आगममाणे तवे से अभिसमण्णागए भवइ जाव वाणिया ॥४२९॥से भिक्खू वा भिक्खुणी या असणं वा ४ आहारेमाणे णो ओ हणुयाओ दाहिणं हणुयं संचारेसा आसाएमाणे, दाहिणाओ या हणुयाओ णुयं णो मंचारेज्जा आसाएमाणे से अणासायमाणे लापवियं आगममाणे, अभिसमण्णागए भवइ । जमेये भगवया पवेश्यं तमेव अभिसमेद्या सन्यो जाए सम्मत्तमेव समभिजाणिया ॥ ४३० ॥ जस्सणं भिक्खुस्स एवं भवइ, लामि च खलु अहं इमंमि समए णो संचाए मि इमं सरीरगं अणुपुटवेण हेत्तए,से अणुपुत्रेणं आहारं संवना अणुपुष्येण आहारं संघट्टित्ता, कसाए र किचा,समाहियचे फलगावयही उट्ठाय भिक्खू अभिणिबुडचे अणुपविसित्ता वा, गयरं वा, खेडं वा,कबडं वा, मंडबं वा, पट्टणं वा, दोणमुहं वा, आगरं वा, में वा, संगिवेसं वा, णिगमं वा,रायहाणि या, तणाई जाएजा,तणाई जाइत्ता से नाए एगंतमवफमिजा, एगंतमवकामित्ता, अप्पंडे-अप्पपाणे-अप्पबीए-अप्प- :-अयोसे-अप्पोदए-अप्पुत्तिंग-पणग-दग मट्टियमकडासंताणए पटिलेहिय २ चय २ तणाई संथरेला तणाई संथरेत्ता एत्यवि समए इत्तरिय कुला ॥४३१|| तं सच्चवाई ओए तिण्णे, छिण्णकहकहे, आईयटे अणाईए चिचाण भिउरं कार्य इय विरूवरूवे परिसहो वसग्गे अस्सिं विसंभणयाए भेरवमणुचिण्णे,तत्थावि तस्स परियाए जाव अणुगामियं त्ति वेमि ।।४३२॥ छट्ठोद्देसो समत्तो।। भिक्खू अचेले परिसिए तस्स णं भिक्खुस्स एवं भयइ चाएमि अहं तणफार्स यासित्तए, सीयफासं अहियासित्तए, तेउफासं अहियासित्तए, दसमसगफासं यासित्तए, एगयरे अण्णयरे विरूवरुवे फासे अहियासित्तए हिरिपडिच्छायणं ई णो संचाएमि अहियासित्तए, एवं से कप्पइ कडिबंधणं धारित्तए ॥४३३॥ चा तत्य परकम भुजो अचेलं तणफासा फुसंति, सीयफासा फुसति, तेउफासा ते, दंसमसगफासा फुसंति, एगवरे अण्णयरे विरूवरूवे फासे अहियासेइ अचेले वियं आगममाणे जाव समभिजाणिया ||४३४।। जस्सणं भिक्खुस्स एवं भवड़ च खलु अण्णेसि मिक्खूर्ण असणं वा ४ आहट्ट दलइस्सामि, आहडं च साइ- सामि १ जस्सणं भिक्खस्स एवं भवइ अहं च खलु अण्णेसि भिक्खूणं असणं वा ४ man.
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अनियमिकमा गायि गाया
र भगिनी निरगिणी गिलाणग, farm गा.लि.
गावगावटि हरणाप ॥२०॥ आहद परिण लियामि, आर
मानामि आदद परिण आगगाम, आईचणी गाविस्यामि २
हद परिग,गो आणगस्मामि,आदर गाइमिगामि ३ आहट परिणं
कानमामि, आहई ची माइभिमामि ४ एन से हाकिटियामेन, मारामा
जाणमाग मतं विरए मुगमाहियोगे तत्यानि तस्म का परियाण, से तत्य
निकारण, इमेय विमोहाययणं हियं मुहं मा मिसोमं आणुगामिग ति बेमि
२८॥ अळं अज्झयणं पंचमोद्देसो समत्तो।
ने भिक्खू एगेण वत्येण परियुसिए पायविइएण, तस्सणं णो एवं गवइ, “विश्यं
थं जाइस्सामि" से अहेसणिलं वत्थं जाएजा, अहापरिग्गहियं वा वत्थं धारेना
आयारो सु.१ अ.८ उ.७ २९ जाव गिम्हे पडिवण्णे अहा परिजणं वत्थं परिवेजा२त्ता अदुवा एग साडे अदुवा अचेले लाघवियं आगममाणे, जाव सम्मत्तमेव समभिजाणिया, जस्स गं भिक्खुस्स एवं भवइ एगे अहमंसिणमे अत्यि कोइ ण याहमावि कस्स वि, एवं से एगागिणमेव अपाणं समभिजाणिजा लायवियं आगममाणे तवे से अभिसमण्णागए भवइ जाव समभिजाणिया ||४२९॥से भिक्खू वा भिक्खुणी वा असणं वा ४ आहारेमाणे णो बामाओ हणुयाओ दाहिणं हणुयं संचारेजा आसाएमाणे, दाहिणाओ वा हणुयाओ वामं हणुयं णो संचारेज्जा आसाएमाणे से अणासायमाणे लापविय आगममाणे, तवेसे अभिसमण्णागए भवइ | जमेयं भगवया पवेइयं तमेव अभिसमेघा सन्वओ सम्बत्ताए सम्मत्तमेव समभिजाणिया ॥ ४३० ।। जस्तणं भिक्खुस्स एवं भवइ, से गिलामि च खलु अहं इमंमि समए णो संचाए मि इमं सरीरगं अणुपुत्रेण परिवहित्तए,से अणुपुब्वेणं आहार संवट्टेना अणुपुष्वेण आहारं संवट्टित्ता, कसाए पयणुए किचा,समाहियचे फलगावयही उद्वाय भिक्खू अभिणिव्युडच्चे अणुपविसित्ता गाम वा, पयरं वा, खेडं वा,कबडं वा, मंडबं वा, पट्टणं वा, दोणमुहं वा, आगरं वा, आसमं वा, संगिवेसं वा, णिगमं वा,रायहाणिं वा, तणाई जाएबा,तणाई जाइत्ता से तमायाए एगंतमवामिना, एगंतमवकमित्ता, अप्पंडे-अप्पपाणे-अप्पवीए-अप्प. हरिए अप्पोसे-अप्पोदए-अप्पुत्तिंग-पणग-दग मट्टियमकडासंताणए पडिलेहिय २ पमन्निय २ तणाई संथरेजा तणाई संथरेत्ता एत्यवि समए इत्तरिय कुना॥४३१॥ तं सचं सच्चवाई ओए तिण्णे, छिण्णकहकहे, आईयटे अणाईए चिचाण भिउरं कार्य संविहूय विरूवरूवे परिसहो वसग्गे अस्सिं विसंभणयाए मेरवमणुचिण्णे,तत्यावि तस्स कालपरियाए जाव अणुगामियं त्ति बेमि ।।४३२॥ छोइसो समत्तो।। जे मिक्खू अचेले परिवुसिए तस्स णं भिक्खुस्स एवं भवइ चाएमि अहं तणफास अहियासित्तए, सीयफासं अहियासित्तए, तेउफार्स अहियासित्तए, दसमसगफासं अहियासित्तए, एगयरे अण्णयरे विरूवरूवे फासे अहियासित्तए हिरिपडिच्छायणं चऽहं णो संचाएमि अहियासित्तए, एवं से कप्पइ कडिबंधणं धारित्तए ॥४३३॥ अदुवा तत्य परकमंतं भुजो अचेलं तणफासा फुसंति, सीयफासा फुसंति, तेउफासा फुसति, दंसमसगफासा फुसंति, एगयरे अण्णयरे विरुवरूवे फासे अहियासेइ अचेले लाघवियं आगममाणे जाव सममिजाणिया ||४३४॥ जस्सणं मिक्खुस्स एवं भवइ अहं च खलु अण्णेसि मिक्खूणं असणं या ४ आहट्ट दलइस्सामि, आहडं च साइ. निस्सामि १ जस्सणं मिक्खुस्स एवं भवइ अहं च खलु अण्णेसि भिक्खूणं असणं वा ४
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अगं अजायण सत्तमो यो समत्तो।।
अणमानाभी गा अगली,
मोम
११३८ नाणं, गुमा मम्माम पारगा; अणु संग भागाती
उः ४३.गाए.पषध किया,अप्पा तितिका; fres,
साहाररोग अनिय ॥४४०|| जानिए णानिमग्ना, मर गोनि पाकि
1 मोजा, जीविए, मरणे सहा || मझाया णिशाही, ममातिगणुगाला तो
हिं विउस्सिा, अज्दात्यं गुहम सए ।।४४१॥ जमिनुवा जाणे, आरोगरग
पप्पणो; तस्सेय अंतरवाए, विप्पं सिमोन पंलिए ।।४४२|| गागे वा अदना रणे,
डिलं पडिलेहिया; अप्पपाणं तु विणाय, तणाई संयर गुणी ॥४४३।। अणाहारो
अटेजा, पुटो तत्थऽहियासए; गाइवेलं उवचरे,माणुरोहिं वि पुट्टया४४४ासंसपगा
जे पाणा, जे उ उदृमहेचरा; मुंजंति मंससोणिय, णटणे ण पमनाए १४४.५ ॥पाणा
हं विहिंसति, ठाणाओण वि उन्भमं; आसवेहिं विवित्तेहि, तिप्पमाणोऽहियाराए,
।४४६।। गंथेहिं विवित्तेहिं, आउकालस्स पारए; पग्गहियतरगं चेयं, दवियत्रा बिया-
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, आयारो सु१ . ९ उ. १ ३१ rotest असं से अपरे धम्मे, गायपुत्तंग साहिए; बायरभ पटीचार, विहिया तिधा तिहा[४४८ाइरिएनुण मिवाहिलं मुगिमा सए; विउन्सिय अगाहारो पुटो तत्याऽहियामप|४४९॥ई दिए गिलायगो, समिर आहार मुणी; तालि से अगरिहे, अचले से समाहिए. १४५०/ अभिपने परिणामे, मंकुचए पसारप; काय- साहारणहाए, इत्थं वा वि अचेपणे ४५१॥ परिफमे परिचिलते, अदुवा चिट्टे अहा. या ठाणे परिफिटते, गिसिसाय अंतसो १४५२। आमीरोडणेलिस मरणं, ईदि- याणि समीरए; कोसावाम गमागम, नितई पाउरेसए ।४५३। जओ पक्ष समुप्पन्न, ण तत्य अवलंयए; ती उपासे अपाणं, फासे तत्थ अहियासए ।४५४१ अर्थ चाय- यतरे गिया, जो एवं अणुगलए; मध्यगायगिरोदेवि, ठाणामीण विठगमे ।४५५॥ अयं से उत्तमे धम्मे, पुस्वट्ठाणरस परगहे; अचिरं परिले हित्ता, विहरे चिट्ठ मारणे 1४०६।यनिनु गमासा, ठावए सत्य अप्पर्ग; बोसिरे सबसो कार्य, ण में दे परीनहा।४५ नावीनं परीसहा, उपसग्गा इय संखगा; संखुडे देहभेयाए य पण्गेऽहियासप. ॥४८॥ भेउरेमुन रोया, कामेसु बहुयरेसु विज्छा लोभ ण सेवा, धुर्ववर्ण संपेहिया |४५ सामएहिं गिमतेगा, दिस्यमाय ण सह; तं पटि- युज्ज्ञ मारणे, सर्व गुमं विगिया ।४६०१ सम्बटेदि अमुच्छिए, आउफालस्स पारए; तितिक्वं परमं गया, विमोहप्णय हिय त्ति वेमि।४६१। अट्ठमोद्देसो समत्तो।। ॥ उवहाण-सुयं णाम नवमं अज्झयणं । अहासुर्य वारसामि,जहा से समणे भगवं उहाए;संखाए तसि हेमंते, अहुणा पव्व- इए इत्था ।४६रा णो चेविगेण वस्रोण, पिहिस्सामि तसि हेमंते; से पारए आव- कहाए, एवं खु अणुधम्मियं तस्स ।४६३। चत्तारि साहिए. मासे, बहचे पाणजाइयो आगम्म; अभिरुज्झकार्य विहरिमु, आरुसियाणं तत्थ हिंसिनु।४६४|संवन्टर साहियं माम, जंण रिकासि वत्थगं भगवं; अचेलए तओ नाई, त बौसिरिज वत्थामणगारे १४६५/ अदु पोरिसिं तिरियभित्ति, चक्खुमासभ अंतसो शायड; अह चम्युभीया संहिया, ते हेता २ बवे कंदिसु ।४६६। सपणेहिं वितिमिस्सेहि, इत्याओ तत्थ से परिणाय सागारियं ण सेवेइ य से सयं पवेसिया हाइ १४६७जे के इमे अगारत्या, मोसीभाव पहाय ने झाइ; पुटो वि गाभिभासिनु, गच्छणाइवत्तइ अंजू ॥४६॥ जो मुकरमेवमेगेसि, णाभिमासे अभिवायमाणे हयपुब्वे तत्थ दंडेहि, लूसियपुष्वे अप्पपुण्गेहिं ।।४६९।। फरसाई दुत्तितिक्वाई, अइअच मुणी परफममाणे; आघाय- णट्टगीयाई, दंडगुज्झाई मुट्टिज्माई।४७०/गढिए मिहो कंहासु, समयमिणायमुए , ३२ अंग-पयि? सुत्तामि मोए अदा; पपा सो ठराना, गन्दा पायाने अगाणाए । भविमा. ३ए दुये गाने, मात्रा अभीगा मिलने पगनगए लिहियो, म अहियापदम ते १४७२।। पुचि न आउपाय, नेउपायन याटपावन गाई वायर रिसाद गुफापं न सम्पनी जगा, एमाई गति परिलीपिनवाई में अभियाय परिवधिप दारिस्था, न गंवाय से महावीरे ||१३|| अदु थारा नमनाए, तमजीया र आयरत्ताप; अदुवा मायनोगिया, मना मन्नुमा मधिया पुदी वाला भगवं : एबमोसि, सोयदिप टम्म पाले; कम न मनमो जना, नं पटियाटर अवगं गगवं।४७' दुसिंह समिन नेहावी, शिरिदमनसायमगेलिगं पानी; आपा यमदवायसोपं जाग च सम्यमांगमा ४७६|| अश्यनिय अगाउटिं, सयमनि करणयाए; अस्मियित्री परिमाया, सम्बकम्मानहानी में अदक्तु ।।७। अदा. दं गले सेवे, सम्पनो कम्मुगा र अदक्ट; किचि पावगं भगतं अव्वं विपर्ट नित्या ||४७८! गो नंबई व परवत्य, परपापविन अँनिमा; परियभियान माणं गच्छइ सबहिं अनाजपाए ॥४७९|| मायगे असतान, पानिद रखनु पटिन्गे; अन्टिमिनी पमधिमा गोवि यद्यए मुनी गाय ॥४८०.. अपं तिरिय झाए, अपं पिट्टी व पदाए; अयं बुद्दए पटिनानी, पंपही चरे दयमाने :८१सिसिसि अद्वपटियजे, तं वोसिव यत्यमगगार; पसाग्नि बाई पर याने, को चलंदिया नयति।४८२। एन विही अणुकतो, माहणेन मदमया; बहुमो अन्य- ोग, भगयया एवं स्थिति त्ति येनि ।।८। पढमोइसो समत्तो । चरियासगाई जाओ, एगइयाओ जाओ युट्याओ; आइक्यताई सपगासगाई, ई सेवित्या से महावारो॥४८४ा आवेग-ममा-पयानुपनियमालानु, एगया मो; अदुवा पलियट्टागेनु, पलानेनु एगया याटो ।।४८५॥ आगंतारे आरा- गारे तह य नगरे वि एगया यातने नुनागे नुजगारे वा, नक्वनूले वि एगया मो ॥४८६॥ एएहिं नी नयोहिं, समगे आनी पतेरन्यासे; राई दियं गि दमागे, अपनते समाहिए झाइ ।।४८|| हिंरि गो पगामाए, वह भगवं डाए; जग्गाई व अपाप, इनि माइ २ अरहिणे ॥४८८संयुजानाने रवि, आसिनु भगवं उहाए; गिक्वन्म एगया रामो, यहिं कनिया मुहुचागं ४८९|| सयहिं तत्युवनग्गा, मामा आनी अगल्याय; मनपगाय के पाना, दुवा जे पक्सिगो उपचति ॥४९०!! अदु कुचरा टवति गामरक्याय तेहत्याय; अदुगानिया उपनगा इत्या एगइया पुरितो य ॥४९॥ रहलोह- ई परलोइयाई नामाई अगवाई: अवि मुन्भिदुन्निगंधाई उद्दाई अमेगस्थाई आयारो सु. १ अ. ९ उ. ३, ४ हिनासा समा समिर, फासाई पिरूपस्याई आई रई अभिभूष, रोग माहणे बहुनासा९सास जगेहिं तत्य पुग्छिन, एगचरा वि एगया राओ; अव्वाहिए साइत्या, पेमाणे समाहिं अपरिणे ॥ ४९३ ।। अयगंतरंसि को एत्म, अहर्म- त्ति मिक्स आइद अयमुत्लने से धन नुगिणीपफसाइए. शाइ १४९४॥ सिप्पैगे पति, मिसिर मानए, पयायंते; संसिप्पेगे अणगारा, हिमयाए गयायमसंति ।।४९५॥ संघाटिओ पोमिदनामो. एहा - समादधमाणा, पिहिया या सस्वामी, अददुरले हिमगमफामा ||४९६॥ तसि भगवं अपविणणे, अहे वियो अहियालए, दविए, निम एगमा राओ वाइए भगतं समिनाए ॥४९॥ एस विहीं अणुगन्ती मानणेग महमपा: यदुनो अपहिष्ण, भगवया एवं रागति तिमि ॥ ४९८ ॥ णवमं अज्जयणं बीओद्देसो समत्तो।। तगासे, सीयफामे, ते उफान य, दंगमसगे य; अदिवागार सया समिए, फासाई विल्वरूबाई ।। ४१९ ॥ अह दुमालादमचारी, यजभूमि च मुभभूमि च; पंत संज्ज सेविन, भारगगागि चेव पनागि।२८०लाहिं तरगुवसग्गा, बहये जाणवया रासिनुअह लहदेसिए मन, कुरकुरा तत्थ हिसिंमु गिवईमु ।। ५.०१ ॥ अप्प जगे गिवारे, लसगाए सुगए. दसमाणे; घुटुकारंति आहेसु 'रामणं कुक्कुरा दसंतु' त्ति 1॥२.०२।। एलिक्वार जगे मुज्जी, यहवें वनभूमि फरसासी; लटिं गहाय गालियं, समगा सत्य य विहरिसु॥२०शाएवं पि तत्व विरंता, पुट्टपुष्वा अहेसि मुणाए.हि; संचमाणा नगर हिं, दुचरगागि तत्य लाटेहिं ॥५.०४॥ गिहाय दंट पाणेहि, ते कार्य योसिसमगगार ।।अह गामकंटप, भगवं, ते अहियासए अभिसमेघा ॥२०॥ णाओ संगामसीसे घा, पारए तत्य से महावीरे एवं पि तत्थ लादेहि, अलद्धपुत्वो चि एगया गामो ॥५०६॥ उवसंकमंतमपटिणं, गामंनियंपि अप्पन, परिणिक्ख- मित्तु सिसु, एयाओ परं पलेहित्ति ।। ५०७ ॥ हयपुख्यो तत्थ दंटेण, अदुवा मुट्टिणा, अद्ध कुंताइफलेणं; अदु लेलुणा कयालेणं, इंता ईता बये फैदिसु ॥५०८॥ मसाइ लिण्णपुयाई,उटुंभिया एगया काय; परीसहाई टुचिंस,अदुवा पंसुणा उवकरिसु १५०९॥ उचालइय गिहणिमु, अदुवा आसणाओ खलइंस; वोसढकाए पणयासी, दुक्खस हे भगवं अपडिण्णे ॥५१०॥ सूरो संगामसीसे व, संवुडे तत्य से महा- वीरे, पडिसेवमाणे फरसाई, अचेले भगवं रीइत्या ॥५१॥ एस विही अणुपंतो, माहणेण मईमया; बहुसो अपडिणगेण भगवया एवं रीयंति, ति वेमि ।।५१२॥ णवमं अज्ज्ञयणं तइओद्देसो समत्तो।।
३४ अंग-पविट्ठ गुत्ताणि आम ना, मग पोगा पाना, गो में गाः ::| मगर नगन, मार, नगर गरे, न infrmer amri गगा मा. मन familsमामी' आगाम मिला अस मा । अपार ओमपुरमा मानिनीमनमा मा आपापा मग नाम दया मामा, अभिमानमा अविपिना मjane anim जागामा, अदुमा मेटम दया गया पदमागमा अलिाग महामार, गरिय पान ममानी !! अणे कामानिया, नाम जानामिरया ||२०|| गाम पपिरम पावर का, बामने कई पाटाप गरिगदगिया मग, आपयोगमा विस्था ।।२२।। अव नागा मिडिगा, अगोमेनियो गा; भागमा नि, गया जिला महाप. ॥:२२|| अतु, माइन , गागा, गागविलीन अका; गोमाग भूमिमाया, सर या विष्ट्रिय पुरी॥ २३॥मिनियंगसी, तमिमनिय परिहारती पाने मगर, गमागी पागमेzिn.२४॥ अविना का मु या, सायरि पुरागकुम्माग; अनु मुकाम पुलागं का, लो पिर अनदप. दविप ॥५२५ ॥ अवि हा महानी, आगमा अनुमकुप.शा उद्यमग तिलिच, परमाणे ममाहिमारिणे ॥१२६ ॥ अफगाः विगयगेही य, मदरूवमु अमुहिए. शाद; मत्यो वि परफममागो पपमायं मपि कुन्धिमा १२७॥ मयर अमिसमागम्म, आयय जोगमायमोहीए। अभिगिरे अमाइले आवकर भगवं समिभागी || एम विही अणुपंती मादणेण मध्मया; यामी अपटि. पोग भगवया एवं रोयति त्ति बेमि ।। ५२८ ॥ चउत्थोद्देसो समत्तो ।। उवहाणसुयं णवमझयणं समत्तं ॥ ।।बंभचेर णाम पढमो सुयक्खंधो समत्तो।। ...... ....
बिइये सुयक्रखंधे पिसणा णाम पदम अग्नयर्ण सेमिना मिसपुगी या नादापात विवादिगाप, रामाणे, से पुरजागा अमन पापा पापा या गाममा पाटि गा पलिया सपा, दारणया, मगन, मिरम, गाजीदपण या मोमिन, रयमा या परिपा. प्रियं, तमनार असनापानामा या मरममा, परदस्थगिमा पापागास था, अफागुपै अगनिनि गमागे मावि मते को पटिगा ॥५२॥ में गआदध परिग्गादिप शिया से है प्रामाय एगरमधर्म, सममिता जो भागमति वा अरे मग का, अप्पर असाय-अमीर, भरविलोमे अगोदए, अम्पनिंग-पग-दग-महियापायाला विगिंचिय दिगिचिय उम्मीर दिगोहिम निमोय तो सनयामक मुशिया पीया, जन भी चारा मोनप या पायप, या, से नमायाय पगंतमरामिका, एगंतमलपामिता, अहे भाटिनम या, अद्विरामिसि मा, पिरामिनि या, गुसरामिति या, गोमय- ससिमिया अपर या सहप्पगारभि परिसंसि पहिले यि २ पमटिय २ तो गंगवामय पट्टिपणा ॥५३॥ मे भिनप या, मिक्णी या गाहापापुल निंद- यापटियाए. अणुपनि समागं, मे जाश्री पुश ओमहीनी बागमा कसिणाओ मानिआओ अविदलपदा अनिरिचिण्णाओ, अयोनिधण्णामी तरणिय या लियाटि अगाभिषामम्मिय पदार, अपामुयं अणेसनियंति मणमा सामे संत को पदिगाहमा ।।५३१॥ से मिस्या, भिवग्युणी चा, चार पबिहे समाणे से जामो पुरा ओमहीओ जागेश, अफनिणाओ असामियाओ, विदलकराओ, निरिच्छ- चियाभो, चोल्लिगाओ, सरगिया छियाटि अभिपति मयि पहाए, फासुग एमगिति मणमाणे लाभे मेने पहिगाहेला ५३२शाने मिक्स या भिमाणी या नाय पविढे समाणे मेज पुण जागेमा, पिएमं पा बहुरयं वा, भुष्यि पा, मं| या, चाठलं बा, चाउलपब या, राई संगशियं, अफामु अणेवाणिति मण्यमाणे लामे संते णो पटिगाहिया ॥५३॥ से मिक्सू या, भिमणी या, बाप पबिटे समाणे से जं पुण नाणिवा, पिदुर्य या नाव चाउलपलंय या असई मद्धिय दुक्सुत्तो वा मम्मिय तिक्त्तो या मयि फासुगएराणिचं नाप लामे संते पटिगाहिमा ॥५३४।। से भिक्खू या भिक्गुणी या, गाहायलं चाय पविसिठकामे णो अण्णाटस्थिपण ना P ।
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आयारोसु. २ अ.१ उ. १, २, ३ मनाए चाणो पाणाए वा पविमिमा या गिरसमिम वा ॥५४४॥ एयं खलु तरस भिक्खुस वा भिक्षुगीर या सामग्गिय 5 सबढेहिं सगिए. सहिए सयाजा त्ति पेमि ॥ ५४५ ॥ पढमं अज्झयणं पढमोद्देसो समत्तो ।। से मिक्युवा भिरखुणी वा गाहावइकुर पिंडयायपडियाए अणुपविटे समाणे सेज पुण जाणमा, असणं वा ४ अहमिपोसहिए सु वा, असमासिएसु वा, मासिएसु वा, दोमासिएसुया,तिमासिएमु वा; चाउमासिएसुवा पंचमासिएमु था, उमासिएसु वा उऊन वा, उसंधीनु वा, उउपरियट्टेसुवा, बहवे समगमाहणअतिहिकिवणवणीमगे एगाओ उक्साओ परिएसिभमाणे पेहाए, दोहिं उक्साहि परिए सिजमाणे पेहाए, तिहिं उक्साहिं परिणसिममाणे पेहाए, चउहिं उक्गहि परिएसिज्जमाणे पहाए, कुंभीमुहाओ या कलोवाइओ वा, संणिहिसंगिचयाओ वा परिए सिंघमाणे पेहाए तहगारं असणं या ४ अपुरिसंतरकडं जाव अणासेवियं अफासुर्य अणेसगिर्वाणो पडिगाहिज्जा ॥५४६॥ अह पुण एवं जाणिचा पुरिसंतरकडं जाव आसेवियं फासुर्य जाव पडिगाहिन्ना ॥५४७॥ से भिक्खू वा २ जाव पविढे समाणे से जाई पुण कुलाई जागिना; तंजहा-उग्गकुलाणि या, भोगकुलाणि या, राइप्णकुत्लागि चा, वत्तियकुलाणि वा, इक्खागकुलागि वा, हरिवंसकुलाणि वा, एसियकुलाणि वा, वेसियकुलाणि वा, गंडागंकुलाणि वा, कोट्टागकुलाणि या, गामरक्खकुलाणि चा, चोकसालियकुलाणिवा, अण्णयरेतु वातहप्पगारेसु कुलेसु अदुगुछिएसु अगरहिएसु वा, असणं वा ४ फासुयं एसणिज जाव पडिगाहिजा ॥ ५४८ ॥ से भिक्खू वा २ गाहवइकुलं पिंडवायपडियाए अणुपविढे समाणे से जं पुण जाणेज्जा असणं वा ४ समवाएं सु या, पिंडणियरेसु वा, इंदमहेसु वा, खंदमहेसु या, महमहेसु वा, मुगुदमहेसु वा, भूयमहेसुवा, जक्वमहेतु वा, णागमहेसु वा, यूभमहेसु वा, चेश्य महेसुवा,रुक्समहेसु वा, गिरिमहेसु वा, दरिमहेसु वा, अगडमहेसु वा, तडाग- महेस या, दहमहेसुवा, णईमहेसु या, संरमहेसु वा, सागरमहेसु वा, आगरमहेसु वा, अण्णयरेसु वा, तहप्पंगारेसु विरूवरुदेसु महामहेसु वट्टमाणेसु, यहवे समण- माहण-अतिहि-किवंण-वणीमए एगाओ उक्खाओ परिएसिजमाणे पेहाए, दोहिं जाव संगिहिसंगिचयाओ. वा परिएसिनमाणे पेहाए तहप्पगारं असणं वा ४.अपुरि- संतरकई जाव णोपडिगाहिला ॥५४९|| अह पुण एवं जाणिज्जा, दिपणं जं तेसि
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परिमामय गायिभागि २ समारना ।
यानी कि पाप सम्हागे Mr Family
मंदिया पन्जना पिया पारि: HEME
।। ५.५.४ ॥ गट नाग भाग लिए पा सामगि गरी
समिण सहिए गयाजा. नि बभि ।। ५.५.५ ॥ बीओद्देसो समतो ।।
से एगइओ अण्णयर गधि आगित्ता पिपिता द्वेज वा बगेडा बा, सुशे गार
गो सम्म परिणमिना भण्णयरे वा से दुबसे रोयाकि रामुपजिश मेपली बूर
आयाणमेय ५५६॥ इद खलु मिक्स्सू गाहावददि या, गादापदणीहिं था, परिवा
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आयारो सु. २ अ. १ उ. ३ ३९ यएहिं था, परिवाश्याहिं वा, एगजं सद्धि सोई पाउं भो ! यइमिरस हुरत्या या, उवस्सय पडिलोमाणे णो लभिया, तमेव उवस्सयं मंमिस्तिभावमावजिम्मा अण्ण. मण्णे या से मते विपरियासियभूए इस्थिविग्गहे या किलीवे या तं भिक्षु उवसंक- मित्तु बूया 'आउसंतो समणा ! अहे आरामंसि वा, अहे उवसायंसि वा, राओ वा, वियाले वा, गामवम्मणियंतियं कटु, रहस्सियंमेहुणधम्मपरियारणाए आउट्टामो' तं चेवेगइओ साइनिना, अकरणिज्जं चेयं संखाए। एए आययणाणि संति संचि- हमाणा पचवाया भवंति, तम्हा से संजए गियंठे तहप्पगारं पुरेसंखडिं या पच्छासंखडिं वा, संखडिं संखडिसंपटियाए णो अभिसंधारिष्ना गमणाए ॥५५७|| से भिक्खू वा २ अण्णयरिं संखडि वा सोचा णिसम्म संपरिहावह उस्सुयभूयेणं अप्पाणेणं धुवा संखडी' णो संचाएइ, तत्थ इयरेयरेहिं कुलेहिं सामुदाणियं एसिय बेसिय पिंडवायं पडिगाहित्ता आहारं आहारेत्तए, माइहाणं सफासे गो एवं करिला, से तत्थ कालेण अणुपविसित्ता तत्थेयरेयरेहिं सामुदाणिय एसियं वेसिय पिंडवायं पडिवायं पडिगाहित्ता आहारं आहारिना||५५८॥से भिक्खू वा २ से जं पुण जाणेजा गामं वा जाव रायहाशि वा, इमंसि खलु गामंसि वा नाव रायहाणिसि या संस्खडि सिया तंपि य गामं वा नाव रायहाणिं वा संखडि संखडिपडियाए णो अभिसंधारेला गमगाए, केवली बूया आयाणमेयं ||५५९|| आइण्णा अवमा गं संखडि अणुपविस्समाणस्स पाएण या पाए अवंतपुवे भवइ, हत्येण वा हत्थे संचालियपुटवे भवइ, पाएण या पाए आवडियपुव्वे भवइ, सीसेण या सीसे संघट्टियपुटवे भवइ, कारण वा काए संखोभियपुवे भवइ, दंडेण वा अट्ठीणा वा मुट्ठिणा वा लेलुणा वा कवालेण वा अभिहयपुव्वे भवइ, सीओदएण या उसित्तपुब्वे भवइ, रयसा वा परिघासियपुष्वे भवइ, अणेसणिज्जेण वा परिभुत्तपुव्वे भवइ, अण्णेसि वा दिनमाणे पडिगाहियपुटवे भवइ, तम्हा से मंजए णिग्गंथे तहप्पगारं आइण्याऽवमा णं संस्खडि संखडिपडियाए णो अभिसं. धारिजा गमणाए ॥५६॥ से भिक्खू वा २ गाहावइकुलं पिंडवायपडियाए । पविढे समाणे से जं पुण जाणेजा, असणं वा ४ एसणिज्जे सिया अणेसणिज्जे सिया वितिगिच्छसमावण्णेणं अप्पाणेणं असमाहडाए लेस्साए तहप्पगारं असणं वा ४ लामे संते णो पडिगाहिबा ॥५६॥ से भिक्खू वा २ गाहावइकुलं पविसिउ - कामे सब भंडगमायाए गाहांवइकुलं पिंडवायपडियाए पविसिब्ब वा गिक्खमिच . .
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fortu.६६।। परमं जाय तोमो समत्तो।
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गा inामा मादाग', गोमा
संवा मे मम्मा पागा, मनीषा, मारिया योगा, यसमा
अगिमगा मोसमा
उपागमा उमामिगत तापानी का पयाग
पागणपुजारिगणाणुपहनामाणुओनिता, नया सगा पुरे
या पच्चासतारिया infe स्पिटियागो अभिगधारे गमगाए ॥५
से भिमाका २ गाहबगुल पिटवारियाण. परिट्र रामाणे से जपुजा
सामना जाय संगलं वा हरिमाणं पहाण, अंतराने मग्गा अप्पंटा
संताणगा णो जत्य बहये रामणमादण नाव उवागमिरति, अपाय
पप्परा णिमयमणपयेसाए पप्णस्रा वायणपुगपरियणाणुपेडपम्माणुओग
सेयं णचा तहप्पगारं पुरेसंम्खादि वा पच्चासंति वा संसदि गलतिपहिया
संधारेज गमगाए, ॥५६८॥ से भिररस या २ गादावलं जाल पविसिड
से जं पुण जाणेजा, खीरिणियाओ गावीओ सीरिजमाणीओ पदाए, मरा
सारी ग.२ ५.१ २.५ oine x k: firetr: ... watva for ६६, irrit ETAH s, myadrier, AREER REATRE istigerita मा ughtenment, mahafapitigungenger - marte AERemarathi hिainisemini ai, HEArk म में fati irre signifies, पर यह समार Twittefat fun at the s * स्मामालियापर्म अपक्ष- म चउरमोमो समत्तो ।। THI am मार्ग से मनाया, are मिमा, अगर गिदिमान येहा meम पहाण, भामा परिन, अनि परिमाण अगापिg FAmaदया अपदमागमो समयदशामानिदि- Fari मल, मे (मागवि बाई २. उपसकमागि, माजोपमा सेनामा माग समे रोमालिया निशान पा, पागा मानिया, सानिया, k Amir " tha ਝ अंग-पक्टि --- ਹ ਲ - ਵ ਰ ਵ ਵਾੜ ਜਾਣਾ ਦੀ ਵt : : : : :ਣਾ, ਵਾੜ ਵਾਰ, ਦਾ ਵ ਵਾ ਵਿ ਦਾਲ ਦਾ ਹਲਵਾਰ ਨੂੰ :: ਸ ਹ : - ਦਾ, ਦੇ, : : * : : ਨਾਰਵੇ . . . . : : : ::: ਦਾ ਕੀ ਬਣਨ ਦਾ , it , it ਮੰ - : : : -in-ਝ ਵਾ --. ਦਾ ਵਾੜਾ . i » ਨ ਕ, , , ਨਾਚ ਦਾ, ਦਲ ਦਾ, ਵ ਵਾ ਨਾ ਤਾ ਦਾਨਵੀਂ , ਵ , , ਦਾਜਾ ਦੇਣ, ਤੋਂ ਨ :- . ਵ ਰ ਵਾ. - - := = ਇਹ ਹਰ : : ਦੇ ਲ ਵ ਵੱਵਾ ੜ ਤੋਂ , - ਲੈ ਵੜੇ ਤਾਣ ਨਾ ਵਾ ਵੀ ਕੀ ੴ ੴ ਦੀ - ੬ ਣ ਤ ਨਾਂ निन्दा २ भाव काणे मंदारा से गाया मा का, मंटन का पास ਵ, - ਦ ਵ ਚ ਕ ਦਾ, ਕਾਸ਼ !, ਦਾ ਕੜਾ ਵੱਜੇ - il ਦੁ ਦੂਰ !- 11 ) :: - -- : ' ਨੂੰ ਹੱਕ ਤੇ ਵਪੂ : : : ਢ -ਫੜ ਨ ਢ , ਹੱਥ, , ਦਾ-ਦਾਦ, ਵ =ਣੀ ਦੁ੬ ਵਿਕ ਢ = ਛਸ ਛੰਬ ਨਾmਫ ਵਜੇ ਵਾਰ 45 ਦਾ '> < ਢ ਣ ਕ ਜ ਤ = ੬ ਸੂਬਾ ਬ ਬ. ਦਾ ਦਾ ਦਾ ਵਾ, ਵੀਣੀ ਦਾ, ਫ , ਤ , i ਦੇ ਚਾਵਾਂ , ਥ ਦ ਤੇ 31 ( ਗ, ਲ ਫੋਨ ਕੁ ਵਾਰੀ, ਢ ਧ ਵੀ ਛੱਕ ਕੇ
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का मामला.
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कान की रिमा निहिनामी गादासा का
- fanniमिया दगमा का पारा मिलियापारिसिमर
४४ अंग-पचिट्ठ गुताणि उण्णमिर २ अयानिय २ गिलागो गालिसिय २ जाइन गो गाहावई अंगुलियाय नालियर जामा, गो गाई मुभियाण तबिजग र जाएगा, 'गो गाहावः अंगुलिगाए उमरिग २ जाएगा, यो गाहान वैदिश २ जारज्जा, णो वयणं फलं व ८६॥ अह सत्य पनि मुंजमा पहाए, तंजहा- गाहावई वा जाव कम्मकरि वा मे पुख्यागेर आलोज्जा, “आउसो त्ति या,भनि तिया दाहिसि मे एत्तो अण्णगरं भोयणजाय" से रोने न परोहा ना मतं वा दन्धि वा, भायणं वा सीओदगवियडेण ना, उसिगोदगवियरेण वा, उच्छोले वा, पहोएडा वा, से पुवामेव आलोएज्जा “आउसो त्ति, वा भइणित्ति वा, गा एयं तुम हत्य वा, मत्तं वा, दधि वा, भायणं वा, सीओदगवियडेण वा उसिगोदगवियडेग वा, उच्छोलेहि वा, पहोवेहि वा, अभिकखसि मे दाउं एगेव दलयाहि " से सेवं वयंतस्रा परो हत्थं वा ४ सीओदगवियडेण वा २ उच्छोलेत्ता पहोइत्ता आहट्ट दलएज्जा तहप्पगारेण पुरे कम्मकएणं हत्थेण वा ४ असणं या ४ अफासुर्य अणेसणिज्न जाव णो पडिगाहिज्जा, अह पुण एवं जाणिज्जा णो पुरेकम्मएणं उदउल्लेणं तहप्पगा रेणं वा उदउल्लेणं (ससिणिद्धेण) वा हत्येण वा ४ असणं वा ४ अफासुयं जाव पडिगाहिज्जा, अह पुण एवं जाणेज्जा णो उदउल्लेणं ससिणिद्धेणं सेस तं चेव, एवं ससरक्खे उदउल्ले ससिणिहे मट्टिया, उसे हरियाले, हिंगुलए, मणोसिला, अंजणे, लोणे, गेरुय, वणिय, सेढिय, सोरहिय पिट्ट कुकास उक्कुट्ट संसटेणं ।।५८७|| अह पुण एवं जाणिज्जा, णो असंसढे, संसढे तहप्पगारेण संसट्टेण हत्थेण वा ४ असणं वा ४ फासुयं जाव पडिगाहिज्जा ॥५८८॥ से भिक्खू वा २ से जं पुण जाणेज्जा पिहुयं वा बहुरयं वा जाव चाउलपलं वा, असंजए भिक्खुपडियाए चित्त- मंताए सिलाए जाव मक्कडासंताणाए कुटिंसु वा, कुटिंति वा, कुट्टिस्संति वा, उप्फणिंसु वा ३ तहप्पगारं पिहुयं वा, जाव चाउलपलंचं वा, अफासुयं जाव णो पडिगाहिज्जा ॥ ५८९ ।। से भिक्खू वा २ जाव समाणे से जं पुण जाणिज्जा बिलं वा लोणं उभियं वा लोणं, असंजए भिक्खुपडियाए चित्तमंताए सिलाए जाव संताणाए भिदिसु वा, भिंदति वा, भिंदिस्संति वा, रुचिंसु वा ३ विलं या लोणं उभियं वा लोणं अफासुयं जाय णो पडिगाहिज्जा ॥५९०॥ से भिक्ख या जाय समाणे से जं पुण जाणेज्जा असणं वा ४ अगणिणिक्खित्तं तहप्पगारं जो आगारी सु. ६.१ उ.७ Horse girn .. Hetam Manm पदम समय उद्योगो समायो । माने, माया प्रो. हिमा ftorineetinमामी सास- गाई , ४ ने गिना काम में भाग लिया मोसासी 47, fornere, पर अपटन यि, महदद नगर अानं या m. न! | Rform मा २ सब मम पुसमा अपने सर मदिन पगार अगर्न गा ४ बाराममनोवलिया. Pावती मा 'माया' imनिर्णयार, गहियोति अराम vafमाणे पारसमभिन्ना, पहा आउनाड पाऊ-पासमा नियमावntom गारमा मह मिसाल पुलावदिशा भारतमगार महिमोति अंगपा, ४ सामसले को पटिगादिना ॥५९५|| से मिक्ल्यू या २ जाय पबिट्टे समाणे से पण जाणेन्ना अमंक- विकायाइष्ट्रिय नहप्पगारं असणं या ४ अमानुयं जायनोपडिगाहि से भिक्य या भिकन्यगी या से पुण जागिम्जा, अमन वा ४ मा तद चव एवं अगणिकायटियं लाने गंत जो पडिगाहिन्ना, 'बत्र "यायागमय" असंनए भिक्पटियाए अनगि उस्मकिय २ कि योहारय २ आटु दलाएम्जा, अद्द निक्यू पुन्योरदिहा बायको हिज्जा ||५९॥ से मिक्य या २ नाय पट्टेि समाणे नेसपुर Eि असणं वा ४ अन्युमिणं असंनए, भिक्युपहियाए, दुप्पंग या, बिहुका- तालिंग या, पत्तगया, साहाए या, साहानगंग या, रिहुणेग या, वा, चलेग वा चल्यगंग या, हत्यंग या, मुंगवा, पुनिज्ज वा, करम से पुम्बामेव थालेपजा “आउला त्ति वा, भगिनि ति या, मा एवं ढम- एमव दलवाहि"से संबं तल पो नुधा वाजाय वाइनााट्दर था, ४ अञ्चुमिनुष्य या नाव फुमाहिं था, वीयादि वा, अभिकंपति तइपगार असनं या ४ वगाइकायपाटियं अन्जानुयं असगिन लाने पो पटिगादिपना, एवं तनकायचि ॥ ५९९ ॥ से मिक्यू या २ बार पर्व समागे से पुरा पानगजायं जागेडा, तनहा टसोन वा, इमंबा, वा, अण्णव या तहप्पगार पागगजाय, अहुणाघोय, अंगविलं, अयोधतं, असारमा अविद्धल्य, अनुवं, अंगसगिन्ज जाय जो पहिगाहिन्ना ॥६००|| अहम एवं नागिना चिसयाय, अदिलं, तं, परिगवं विद्वत्य, भानु जार पडि हिज्जा ॥६०ा ने मिन्यूया, २ नाय पविठू समाणे से नं पुण पाग जन्जा, तनहा-तिनंदन बा, तुमोदगंवा, दयोदन वा, आयाम या; सेविका मुद्रविड या, अगवा तहगाई पागगनायं पुयाय पालेएल्मा "भा निवा, भगिनित्ति या, दाहिमि में एत्तो क्षणवरं पागगनायं से पतं पवे यरवा “श्राटगतो समगा! तुमचंयं पागगजाय पहिग्गंण या हिमचिया तहपगारं अलगं वा ४ असायं नाव पोपटिगाहिज्जा ।।५९८तिकि यायचियानं मिदाहि तहप्पगारं पागमनायं सदं वा गिन्हिबा, परोया से दिद, ४६ अंग-पविट्ठ सुत्ताणि - का २ नाव समाणे से पुरा जानेजा, असणं वा ४ वणसहक या आयारो सु. २ न. १ उ. ८ ४७ सुर्य लाभे गंते जान पटिगाविभा॥६०२॥ से पिरमा २ जाय रामाणे से --- पुग पानगं जाणेधा अपतरहिवाय. पुरवीए चाय संतागर ओइट गिरिखचे या असंजय भिनुपटियाग, उदरलेलेण गा, रासिमिक्षण था, सकसारण 1, मग या सीओदरण या, संभोएत्ता आदटु दलाए जा तहणगारं पाणग- यं अफामुयं लाभे संते णो पडिमाहि॥६०३|| एयं खलु तरस भिपतुरस वा मधुणीए या सामग्गियं ॥६०४॥ सत्तमोद्देसो समत्तो । से मिक्सू या २ बाय पनिटे गमागे से जे पुण पाणगजाय बाणिया, संजा-अंबाणगं चा, अंबाटगपाणगं बा, कपिपागग या, माउलिंगपाणग या मुभिवःपाणगं या, दाडिमपानगं का, खजापाणगं वा, णालिएपाणगं वा, फरीर- पागगं या, कोलपाणगं बा, आमलगपाणगं बा, चिंचापाणगं वा, अण्णया वा - तहप्पगारं पाणगजायं सदिय समय सायगं असंजए. भिनपटियाए छण या दूरोण या, बालगेण या, आवीलियाण या, पीलियाण परिसाध्याण आहट्ट दलएडा, तहपगारं पाणगजायं अफासुयं लाभ संते णो पटिगाहिया ॥६०५॥ से मिक्स्सू या २ जार पबिहे सगाणे, से आगंतारेनु वा, आरामागारेतु वा, गाहावइकुलेसु था, परियावस हेनु था, अप्पगंधागि वा, पाणगंधागि या, सुरभिगंधाणि या, अग्याय २ से सत्य आसायाडियार मुन्छिए, गिडे, गढिए, अशोवयाणे 'अही गंधा २' णो गंधमााइमा ॥६०६॥ से भिक्त्र, या २ नाव समाणे, से ज पुर्ण नाणेसा, सालुयं वा, विरालियं या, सारावणालियं या, अण्णयरं या तहप्पगारं आमग असत्यपरिणयं अफासुर्य जाय णो पटिगाहिया ॥६०७ा से भिक्खू था २ नार पनिटे समाणे से जे पुण जाणेगा, पिप्पलि बा, पिपलिचुणं या, मिरियं वा, मिरियपणं या, सिंगवरं या, सिंगवेरचणं वा, अण्णयरं वा तहप्पगारं आमंग असत्यपरिणयं अफामुयं जाव णो पहिगादिना ॥६०८|| सें भिवायू या २ जाव पविढे समागे से नं पुण जाणेजा, पलंबजाय तंजहा अंबपलंय यां, अंबाडगपलयं वा, ताल पलंच या, शिशिरिपलंचं वा, सुरभिपलंय वा, सप्टइपलयं वा, अण्गयरं वा तहप्पगारं पलंबजाय आमग असत्थपरिणयं अफासुर्य अणेसगिर जाव लामें संते णो पढिगाहिना ६०९॥ से भिखू वा २ जाव पविढे समाणे से जं पुण पवालजायं जाणिवा, तंजहा-असोत्थपवाल या णग्गोह- DH पा, पृन पिण्णागं वा, म वा मग गा राम्निा, सो, ना पुराणपत्य पागा पाना is on: जमा-गरमा, का परं गा सपगार गार गाना mil of ॥६११॥ से मिला ना २ जार , Hari लार जानिए संजहा-उंबरगंगा, जग्गो मा, मि, सोया या, चा, तहपगार मजा आग गाणी जाव णो परिमा हिमा ॥६१२॥ से भिर या २ जान रामाणे रोज पुण धागिजा, आमदारी करोग 2 अणुप्पसूया, एत्य पाणा नाया, एत्य पाणा गुहा, पाणा अयुग:ता, एत्य पाणा अपरिणया, एत्य पाणा अविश्रया जान णो पलिंगारिणा ॥६१३|| से मिक्युवा, २ नाव समाणे से जं गुण जाणिया, उच्टुमेरग वा अंककरेलयं पा, वा, सिंघाडगं वा, पूइभालुगं या, अण्णयरं या तहप्पगारं आगगं असत्यपरिणय जाव णो पडिगाहिज्जा ||६१४|| से भिना वा २ रोजं पुण जाणिया; उम्पर्क वा, उप्पल णालं वा, भिसं वा, भिसमुणालं वा, पोक्खलं वा, पोषखल विभंग वा, अण्णयर वा तहप्पगारं, जाव णो पद्धिगाहिज्जा ॥६१५॥ से भिवरख वा, २ जाप समाणे, से ज पुण जाणिज्जा, अग्गयीयाणि वा, मूलचीयाणि वा, संघीयाणि वा, पोरवीयाणि वा, अग्गजायाणि या, मूलजायाणि वा, खंधनायाणि पा, खंघजायाणि पा, पोरजायामि चा, णण्णत्थ तफालिमत्थएण या, तफालिसीसेण या, णालिएरमत्थएणवा,खजूरमत्या एण वा, तालमत्थएण वा, अण्णयरं या तहप्पगारं आमं असत्थपरिणयं जाव णो पडि- गाहिज्जा ॥६१६॥ से भिक्खू वा २ जाव समाणे से जं पुण जाणिज्जा, उच्छु वा, काणगं, अंगारियं संमिस्सं, विगदूसियं वेत्तरंग वा, कंदलीऊसयं वा, अण्णयरं चा, तहप्पगारं आमं असत्य परिणयं जाय णो पडिगाहिबा ॥६१७॥ से भिक्खू या २ नाव समाणे से जं पुण जाणिज्जा, लसुणं वा, लसुणवत्तं वा, लसुणणालं पा,लसुणकंद वा, लसुणचोयं वा, अण्णयरं वा तहप्पगारं आमं असत्य परिणयं जाव गोपडिगाहिज्ज॥६१८॥से भिक्खू वा,२ जाव समाणे से च पुण जाणिज्जा, अच्छिों आयारो सु. २ अ. १ उ. ८-९ बा, कुंभिपक्क, सिंदुर्ग चा, पिटय या, पलगं बा, कारायणालिग या, अप्परं या सहपगार आगं अरात्मपरिणरं जाव णो पदिगाहिज्जा ॥६९९|| से मिस्सया २ जाय सुमागे से जपुग जाणिज्जा, कर्ण वा कागदग या, कगायलियं या, चाउले था, चाउलपिढे या, तिलं चा, दिलपि या तिलपप्पड़गया, अप्पयर था, तहप्पगारं आम असत्यपरिण जार लाम संत गो पदिगाहिज्जा ||६२०॥ एम खट तसर - मिकचुस्स मिक्युगीए वा सामग्गियं ॥६२१॥ अट्ठमोद्देसो समत्तो ॥ द ग्पट पाणं वा, पढीणं या, दाहिणं या, उदीणं था, संतगइया सहा भवंति, । गाहावा या जाय कम्मकरीओ वा; तसिं च णं एवं युत्तपुष्पं भवद जे इमे भवति १ समगा, भगतो, मीलमंता, बयमंता, गुणमंता, संजया, संयुडा, संभचारी, उवरया ५ मेहुणाी धम्माओ, यो खलु प.सिं कप्पद आहाकग्मिए, असणं या ४ भोइत्तए - या पाइनए वा ने 5 पुण इमं अहं अप्पगो अट्टाए गिहिय, तेजहा-असणं वा ४ सयमेयं समणाणं गिसिरामी, अविचाई यय पच्छावि अप्पगों अट्टाए असणं का ४ चेइस्लामो एयप्पगार गिग्योसं सोचा गिंसम्म तहप्पगारं असणं या 2 ४ अफासुर्य अणेसगि जाव लाभे संते यो पटिगाहिमा ॥६२२|| से मिक्रतू वा * २ समाणे यसमाणे या गामाणुगाम या दूइमाणे से जं पुण जागिज्जा, गाम श्री वा जाव रायहाशि वा, इमंसि स्खलु गामंसि वा जाव रायहाणिसि वा संतेगइयस्स ६ भिक्खुस्स पुरे संधुया वा पच्छासंथुया वा परियसंति, तंजहा-गाहावइ वा जाव फम्मकरीओ या तहपगाराई कुलाई णो पुवामेव भत्ताए वा पाणाए वा णिक्खमेज्ज चा पविसज्ज या, कंवली वूया, 'आयाणमेयं । पुरा पेहाए तस्स परो अढाए असणं या ४ उपकरेन्ज था, उवरखडेन्ज या, अह भिक्खूणं पुष्योवदिट्टा ४ जं जो पर्व तहप्पगाराई कुलाई पुष्यामेव भत्ताए या पाणाए वा पविसेज वा णिक्खमेज्ज वा। संतमायाय एगतमवधानिमा २ अणावायमसंलोए चिट्टेमा, से तत्थ कालेणं अणु- पविसिन्जा २ तत्थियरेयरेहिं कुलेहि सामुदाणियं एसिय वैसियं पिंडयाय एसित्ता आहार आहारिज्जा ॥६२३|| सिया से परो कालेण अणुपविट्टस्स आहाकम्मिय असणं वा ४ उवकरेज्ज वा उवक्खडेज्ज वा, तं चेगइओ तसणीओ उवहेज्जा, 'आहटमेव पचाइक्खिस्सामि ' माइहाणं संफासे, जो एवं करेज्जा, से पुल्यामेव भालोएका धाउसो त्ति वा भागिणि तिवा, णो खलु में कप्पा आहाकम्मियं असणं है। : . . -- :.........! .... । " ... ! '! ::;;! !" .... ! ...' :::: :: :, :: :: :: :: : 1 :: :: :: :: :: :: :: :: :." .::::::. :: ..! . !!!!! . - . - ।"titiniu ..!! " 111111 11!! ff :: : - I, :, मयपरिम: मोमो : का गे, गजानना पाणी, माना : गीत पर गाय ग म IT If;.: . पर गमगुण्णा भाग जाल पगा.11 ..! MAP तहस भिापुस्य मिमणीय, या सामगिणे ॥६३०नवगोगो सगत्तो ॥ में एगइओ साहारणं वा पिटवायं पटिगाहिला, माणात जस्स-जस इच्छद तस्म-तमा बई-पद्धं दलगड, मारामारी गोकर- से तमायाए तत्थ गच्छेचा २ पुयामेव आरो" मारगंगा गमा! सं मम पुरे-संथुया वा पच्छासंथुया वा, जहा-आयरिश वा, उपझा ना, परि वा, धेरे वा, गणी वा, गणहरे वा, गणावच्छेए या, अवियाई पासिं राई : - या, आयारो सु. २ अ.-१ उ.. १०,११ दाहानि" से सेव चयंत परो याज्जा, काम खलु आउयो! अहापजत णिसिराहि चावइयं २ पो वयद तायव २ मिसिरेजा, सध्यमेयं परो वयह सध्यमे मिसिरेमा ॥६३॥ से पगडी नगुगं भोयगजाय पदिगाहिता. पंतेण भोयणेण पलिच्छाप "मामेयं दाइयं संत दळूणं मयमायए, आयरिए वा नाय गणायच्छेदएवाणो पद्ध, मे फराद किंचिवि दाय सिया" मारहाणं संपारी णो एवं करेग्जा, से तमायाए, । तत्थ गल्छेना, २ पुवामेव उत्ताणार हत्ये पटिग्ग फट्ट "दम खरा हम नलु ति"आलोएना, जो निचिनि निगहेजा ॥६३२|| से एगो अण्णयरं भोयण. । घायं परिगाहिता, भयं भयं भोगा, वियप विरसमाहराए, माइहाणं संफासे, जो एवं फरिना ॥६३३।। से मिक्बू वा २ से जं पुण जाणिज्जा, अंतरुच्चि था, उच्चुगंडियं या, उच्छुचोरगं या, उच्छुमेरगं या, उच्छुसालगं वा, उच्चुटालगं वा, सिबलिं वा, सिंबलियालग था, असि खन्दु पटिग्गहियसि अप्पे सिया भोयण. जाए, बहुउदिायधम्मिए, तहप्पगारं अंतरच्यं नाय सिंबली थारगं या अफासुर्य पाय जो पहिगाहिजा ।। ६३४ ॥ से भिक्ग्यु वा २ से जं पुण जाणिज्जा, बहु अहियं वा मंस वा मच्छं या बहुकंटग अरिंस खलु पटिग्गहिंगसि अप्पसिया मोयणजाए, बहुउदिायधम्मिए-तहप्पगारं बहु अद्वियं या मंसं वा,मच्छं या बहुकंटगं लामे संते जाव णो पटिगाहिज्जा ॥६३५।। से भिक्खू वा २ जाव समाणे, सिया णं परो बहु अहिएग वा मंसेण वा मच्छेण वा उपगिमंतेज्जा “आउसंतो समणा अभिकखसि ! बहुअद्वियं मंस पडिगाहित्तए ?" एयप्पगारं णिग्योस सोचा शिसम्म से पुव्यामेव आलोएज्ना “आउसो ति वा भणिति या, णो खटु में कप्पद से बहुअढियं मंस पडिगाहित्तए, अभिनखसि मे दाउं, जावयं तावइयं पुग्गल दलयाहि, मा य अहियाई “से सेवं वयंतस्स परो अभिहट्ट अंतो पटि- ग्गहगंसि बहुअढिय मंसं परिभाएत्ता णिहट्ट दलएज्जा, तहपगार पडिग्गहगं परहत्यसि वा परपायसि वा अफामुयं अणेसगिन लाभे सते णो पडिगाहिज्जा, से आइन्च पडिगाहिए सिया तं णोहि ति वाला, णो अणहित्ति वएला, से तमायाए एगंतमवफमेन्जा २ अहे आरामंसि या, अहे उघस्सयंति वा, अप्पटाए जाय अप्पसंताणए, मसग मच्छग भुच्या अट्टियाई कंटए गहाय से तमायाए एंगतम- पचामिज्जा २ अहे . ज्झामथंडिलसि चा, जाय पमजिय २ तओ संजयामेव न दर ति है . - " 1 " - . ........... . . . . 1 '- .. ::: : :.:. !! ....:.::.11 ... ! in: ... !! Hin; it : ! समय: MAHARMini भागमा तार : As Tfast | रगना जार मामाको माया घय सामागं गाःमिनीची मागणीभी 15.1 11 रोज पुण उस्मयं जाणिका अगंजय निषायाममाण किवण-वणीमा पगणिय २ समगि पागाईमाः जना मा जान तहप्पगार उबरसाए अपरिमंतरगट जार अणामना जो टापामा हियं या एज्जा, अह पुण एवं जाणिना पुरिमारगर जाम आमेशा लेहित्ता पमज्जिता ती संजयामेव ठाण ना रोजे या गिगी नामा ॥६५॥ से भिक्खू या २ से जे पुण उवस्मयं जाणिज्जा, अराजार निकायुपदि फटिए वा, उपिए वा, उण्गे वा, लिते चा, घढे वा, मढे चा, राम या, - आयारो मु.२१, २ उ. १ प. या मारगर TT Tr, या, का , विरगोगायो परिरमा पनि सोमवारशा मे भिसा Train दिमागमा मारि. को, जहागिरगार cिt, मामा निसारगारे उपरगा अगिरे मोटापा बानिया, जानिए परम जार आणि पनि नामो समान भागमा से मिलता २ उपमं माना निरनिसर्गणा उदगमालिका, दानि गा, मुमानिया, पामिया, पुरनिया, गया, पानिया, दरियामा सागामो टन माहरा, वशमा का गिरतापगार उरगर, अस्मिना, भार भोला सानेपानिनादिया नाशा आग एवं जामिना, पुतिकरारनामे मिया, भियुपी गा, पुण नवराय भानिया, अजय, निसाय पी र फलगं यानि का उद् या मोवा सादर son पामिर, सहमगार उपरसए अपु. रिमारगो जाय पान मा नया नियंपा गया, अपुग भागिमा पुरिगारगो गाव एजा से भिमा सेज पुण उपाय पानिजा, जासंगि चा गमिका माग या पागायति या मियालसिया मगतमि रा सहप्पगारंनि, हाशिमामागि, भय आगादगादेहिं कार- नाणे या सरमिसीहिय वा वजा ॥६६॥ से आराम मिया गो गत्य सानोदगनिपडेग ना, उसिगोदवियोग या, हरभागिदा, पायानि था, अन्लीगिना, देतागि या, मुई या, उन्होज या पोपज मा, यो सत्य उनाद पगरजा, तनहा-उपार का पारायण या, वा, तं या, पित्तपा, पूर्व या, योगिर्द वा, अण्णयरं या गरीरावयां फेवली यूगा "आयागमेयसे तत्य उस पगरेमाने परटेज या, पोटा या, से तत्थ पयामागे परमाणे वा दरर्थ या, नाप सीरंगा अण्णवरं या कार्यसिदियजाय दोष या पागाणि या अभिद- मेय वा जाव यबरोयेज्ज बा, अब मिला युध्योपदिहा एरा पाया जायचं राह- सिमाया, - अंग-पविट्ठ सुत्ताणि प्पगारे उवस्सए अंतलिस्खजाए णो ठाणं वा सेवा वा मिसीहियं वा चेएज्ज ॥६६१।। से भिक्खू वा २ से जं पुण उक्स्सयं जाणिज्जा राइस्थियं सखु सपमुभत्तपाणं तहपगारे सागारिए उयस्सा णो ठाणं वा सेज्ज वा णिसीहिय व चेएज्जा, आयाणमेयं भिक्खुस्स गाहावइकुलेण सद्धि संवसमागरस अलसए । विसूइया वा छड्डी वा उव्याहिजा अण्णयरे वा से दुक्खे रोगायके समुप्पोनी अस जए कलुणवडियाए तं भिक्खुस्स गायं तेलेण वा,घएण या, णवणी एण या, बसाए वा उव्वट्टणेण वा अभंगेज्ज मक्खिज्ज वा, सिणाणेण वा, कोण वा, लोहेण वा, वण्णेण वा, चुण्णेण वा, पउमेण वा,आवंसेज्ज वा पसेज वा,उव्वलेज्ज वा,उवट्टेज वा, सीओदगवियडेण वा, उसिणोदगवियडेण वा, उच्छोलेज्ज वा, पच्छोलेज्ज वा, पहोएज्ज वा, सिणाविज्ज वा, सिंचिज वा, दारणा वा, दारुपरिणामं कह अगणिकायं उज्जालेज्ज वा, पज्जालिज्ज वा, उज्जालित्ता २ कायं आयावेज वा पयावेज वा अह भिक्खूणं पुवोवइट्टा एस पइण्णा जाब जं तहप्पगार सागारिए उवस्सए णो ठाणं वा सेज वा णिसीहियं वा चेएज्जा।।६६||आयाग मेयं भिक्खुस्स सागारिए उवस्सए वसमाणस्स इह खलु गाहावइ वा जाव काम करीओ वा अण्णमण्णं अफोति वा पहंति वा भति वा उद्दविंति वा अ भिक्खूणं उच्चावयं मणं णियंछेज्जा एए खलु अण्णमण्णं उफोसंतु या मा या उफोसंत जाव मा वा उद्दवितु । अह भिक्खूणं पुबोवइट्टा एस पइण्णा नाय ज तहप्पगा सागारिए उवस्सए णो ठाणं वा सेज वा णिसीहियं वा चेएज्जा ॥६६३॥ आयाग मेयं भिक्स्स्स गाहावइहिं सद्धिं संवसमाणस्स इह खलु गाहावइ अप्पर सअट्टाए अगणिकायं उज्जालेज्ज या पालेज वा विझावेज वा अ भिक्खू उचावयं मणं णियंरेज्जा, एए रूट अगणिकायं उज्जालंतु व जाय मा वा विज्शावेतु अह भिक्खूणं पुचोवदिट्टा जाव जं तहप्पगारे उक्साए, णो ठाणं वा सेज्जं वा मिसीहियं वा चेएज्जा॥६६४ ॥ आया. णमय निकखुक्स्स गाहावइहिं सद्धिं संवसमाणत्स इह खलु गाहावइरस कुंडले वा, गुणे वा मणी वा, मात्तिए वा, हिरणे वा, मुवणे या, कडगाणि या, तुडियाणि या, निमरगाणि वा, पालंयाणि वा, हारे वा, अशहारे या, एगावली वा, मुत्तावली या, माणगावली वा, रयणावटी वा, तमणियं वा कुमारि अलंकियविभूसियं पेहाए,
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मा ... ... ... . : 1111: :: भिना:..ना" आयो 713, 1ो का 11, TT कानो नेगगी, मराणे 30 अगता, अगं कामी," : गि Firm १ । र, निपूर्ण पोसला जात ना ॥६०१ ॥ " fo| २ गे में उयस्मयं जाणिज्जा तगमग पालमुना, गो जान सागर उपस्सए णो ठाणं ना जाना णिमीहिना गाना ॥६०२ ॥ मे मिला से में पुण उवस्मय जाणिज्जा, तणमु या, पलाएको वा अर्थ चेपज्जा ।। ६७३ ।। मे आगंतारेगु ना, आरामागारेगु वा, गातावाला परियायम हेमु या अभिमागणं अभिकारण गाहम्मिएकि ओवयमाणोहिंगो उपए- ॥ ६७४ ॥ से आगंतारेसु वा जाव परियायस हेमु वा, जे भयंतारो उपवाद्धिय वा वासियं वा कप्पं उबाइणित्ता तत्थेव भुमो भुमो संरगति, अयमाउगो! कालाइ किरिया वि भवइ ।।६७५।। से आगंतारेमु वा जाव परियावस हेमु वा, जे भयंक उडुबद्धियं वा वासावासियं वा, कप्पं उवाइणावित्ता तं दुगुणा दु(ति)गुण- अपरिहरित्ता तत्येव भुनो भुजो संघमंति, अयमाउमो! इत्तरा उबहाणकिरिया र भवइ ।। ६७६ ।। इइ खलु पाईणं वा पडीणं वा दाहीणं वा उदाणं या संतंग सद्दा भवंति तंजहा गाहावइ वा जाव कम्मकरीओ वा तेसिं च णं आयारगे णो सुणिसंते भवइ त सहहमाणहिं, तं पत्तियमाणेहि, तं रोयमाणेहिं ब्रहवे सा माहणअतिहि किवणगीमए समुहिस्स तत्य तत्थ अगारीहिं अगाराई चेइ भवंति, तंजहा-आएसणाणि वा आययणाणि वा देवकुलाणि वा महाओ वा पत्र वा पणियगिहाणि या पणियसालाओ वा जाणगिहाणि वा जाणसालाओ या कम्मंताणि वा दम्भकम्मंताणि वा बद्धकम्मंतागि वा,वश्यकम्मंताणि वा वणकम्मत वा इंगालकम्मंताणि वा कटकम्मंताणि वा सुसाणकम्मंताणि वा संतिकम्मंताणि मुण्णागारकम्मंताणि वा गिरिकम्मंतागि वा कंदराकम्मंतागि या सेलोवठ्ठाणकम्मत ܪܝܺ ܐܵܪܙܹܐ *ܪ ܀ ܝܺܐܬ݁ܕ݂ ܀ -: ܘܰܬ݂ܢܳܪܳܐܕ݂ܕ' ܕ݁ܐܝܺܐ݈ܐ ܫܐ;" ܐܢ݈ܬ݁ܘܶܬ݁ܪܶܐ܇ ܃ ܃ ܨܲܟ ܕ:: ܐܝܵܕ݂ܕ݂ܢܐ ܪܽܪܬ݂ܳܐ ܫܰܬ݁ܳܐܟܰ ;; && ;iܐ,; ܕܕ݂ ' - ܐ̱ܢܳܬ݂ܳ ܫܐܲܝܕ݂ܚܠܳܐ ܬ݁ܰܙܬ݁ܗܺܙ ܕ݁ܳ ܀ ܐܢ܀ .» ܕܪ.ܪ ܠ ܐ ܨ ܗܬܪ ܠܐ: ܙܐܶܢ݈ܬ݂ܪܶܐܐܪ ܕܨܠ ܐܝ $" , £ ܀ ܀ܐܪܽܪܰܪܶܕ݂ܨܳܕ݂ܨ ܀ ܚܐܐܐܐܺ..- ;؛؛؛؛ ܪܝ܀ ܬ;; ܝܪܽ ܨܶܪܽ ܬܐܬܐ :1܇ ܀ ܛܰܐܺ ܐܶܕ̈ܝܕܰ ܐܺܗ݈ܽܘܺܝ ܕܪܺ1 ܕܐ = ::: ܐܬ݁ܝܺܛܽܕ݁ܪ ܫܝܪ 33܀ ܘܐܲܝܪܐܗܪܢ܀ ܫܺܐ܆ ܗܵܘܽܪܳܐ܆ : ;:::ܐܕ݁ܳܟ݂ܪܳܨܶ ܪܽܚܶܕ݂ܶܐܶܙܳܟ݁ - , ܟ݁ܪܳܐ ܐܵ ; - i , qvܝܙܕܗܵܕܸ,' ; ܐܺܝܐ ܐܢ .41 : 131 ܚܶܬ݁ܳ 9 -ܪܨܶܪ ܐܺܝܬ݁ܶܝܘܰܪܶ3 ܝܬ ܃ ܃ ܫܪ܂ ܀ ܐ܀ ܝܳܐ܆܆܇ ܝܵܐ ܐܲܟܼܵ܃ ܃ ܨ ܨ ܝ؛؛ ܛܼܲ:4܃ ܃ ::; :ܕܼ ܐ،ܬܳܐ ܃ ܊ܬܕ݂: ܞ ܙ ?! ܢܳܐ ܬ݁ܪܳܝܺܕ݂ܝ ܀ ܠܐ܀. ܕܪܐܝܳ - '. :; ܝܺܝ. 3.:: ܕܕ -??; - $.3'; ܐ ܕ ܐ ܕ ܐ، ' ܪܪ ܫ*.-. ' ܢ ܙܪܶ ܫܼܲܐ ܙ..ܚ: ܨܬܛ ܐܰܐv. -& ܢܝ ;.;,. ܝܼ؛؛ ܀ ܀ ܕ ܕ: ܕ؛؛ ܠܼܲܝ ܙܕܬܪܘ ܫܝ & ܕ ܐܝܺܘܳܗ݈ܫ.܀ ܀ ܀ ܀ *ܐܙ, . x 22 ܀: * ; ܐ, ܚܵܪܝ;
आपकने मन, मटहराई स्यापक ६० अंग-पबिट्ट सुत्तानि पदर न्दन्टह- हाक देने ਦੇ ਭਲੇ ਲੜ ਦ ੜ ਵੋਟ ਨਾ अमरबह-ली ਦਾ ਵਰ ਦਾ ਕਤਲਵਾਰ ਛੜਾ ਜੀ ਦ ਦ - ਦ ਵ ੜ हमारे गहनदी ਵਾਕ ਬਾਣ ਦਾ ਵਕਤ ਨੂੰ ਦੇ ਦੇਵੋ में अमर छन् । रेम कर रहे का ८, नर उपन, ६ कर लिमुळे किरण दा ६८३ ल ननु तल जुनन्दुि बना लेन्जाम्सयपत दीलेलो सनत्तो। उमेर देकडे दन्नने इ. ह-बनादेवाहिना ८ परमार पिवईपर मेडिकल बिन्दु दुपारनन नावं निवडक विपद : इंद. मन "C" निन्दकई उनि में दो दिया है. बताता सविनले ६ नमः ८ पदनाम हार का सामादि कापड स sar मा रवारका पविसेज्ज वा ।।६८७ ॥ से आगंतरेसु वा अणुवीइ उवस्मयं जाएज्जा, जे वस्मयं जावएण वा णरणीएण वा, वसाए वा अभंगेति वा मवेति वा णो पण्णस्स जाव पगारे उतचताए, तहप्पगारे उस्सए णो ठाणं वा जाव चेएज्जा॥६९३॥ से भिक्खू वा, हत्येचार से जं पुण उवस्सयं जाणिज्जा, इह खलु गाहावई वा जाव कम्मकरीओ वा, या आप अपगमण्यत्स गायं सिणाणेण वा कशेण या लोहण या वणेण वा चुण्गेण वा पडमेण वापा, आसंति चा पर्घसंति वा उचलति वा उबहिति वाणो पण्णस्स णिक्खमण जाव आयारो सु. २ अ. २ उ.३ मिसिया वाणालिया वा चेले वा चिलिमिली या चम्मए वा चम्मकोसए वा चम्म- छेदणए वा दुब्बद्धे दुणिक्खित्ते अणिकंपे चलाचले भिक्खू य राओ वा वियाले बाणिक्खममाणे वा पविसमाणे वा पयलिन वा पवडेज वा, से तत्थ पयलेमाणे कामाचा पबडेमाणे वा, हत्थं वा पायं वा जाब इंदियजायं वा लूसेज्ज वा, पाणाणि जाव काल सत्ताणि वा, अभिहणेज्ज वा जाव ववरोवेज्ज वा, अह भिक्खूणं पुन्वोवइट्ठा जाव किस्मज तहपगारे उक्स्सए पुरा हत्येणं पच्छा पाएणं तो संजयामेव शिक्खमेज मार तित्थ ईसरे जे तत्य समहिहाए, ते उपस्सयं अणुण्णवेन्जा, कामं स्खलु आउसो ! कहने प्रहालंदं अहापरिण्णाय वसिस्सामो जाव आउसंतो जाव आउसंतस्स उवस्सए जाव साहम्मियाए तओ उवस्मयं गिहिस्सामो तेण परं विहरिस्सामो ॥ ६८८ ॥ भिक्बू वा २ जस्सुवस्सए संवसिज्जा तस्स पुत्वामेव णामगोयं जाणिज्जा तो पच्छा तस्स गिहे णिमंतेमाणस्स अणिमंतेमाणस्स या असणं वा ४ अफासुयं जाव गि का गो पडिग्गाहिज्जा ।। ६८९ ॥ से भिक्खू वा २ से जं पुण उवस्सयं जाणिज्ञा ससा- माउसो गारियं सागणियं सउदयं णो पण्णस्स णिक्खमणपवेसणाए, णो पण्णस्स वायण जाव दुस्स भिऽ अम्माणुओग चिंताए, तह पगारे उवस्सए णो ठाणं वा सेज वा मिसीहियं वा मत्तो ।। वेएज्जा ।। ६९० ॥ से भिक्खू वा २ से जं पुण उवस्सयं जाणिजा गाहावइकुलस्स महि, पसज्झ मझेणं गंतुं पंथर पडिबद्धं णो पण्णस णिक्वमण जाव चिंताए तह पगारे सेय विस्सए णो ठाणं या सेनं वा णिसीहियं वा चेएज्जा ।। ६९१ ।। से भिक्खू वा २ संति नि जे पुण उवस्मयं जाणिज्जा इह खलु गाहावई वा जाव कम्मकरीओ वा अण्ण- या ॥६८पण्णमकोसंति वा जाव उद्दति वा णो पण्णस्स जाब चिंताए सेवं णचा तहप्पगारे परिभाइयाउबस्सए णो ठाणं वा जाव चेएका ॥६९२२॥ से भिक्खू वा २ से ज पुण उवस्मयं माणे सनिनाणिमा इह खलु गाहावई वा जाव कम्मकरीओ वा अण्णमण्णस्स गायं तेल्लेण वा मा हिं भार उमरिया ':
: नोकरे ||... मा २ गा Immar सेना मो मेगा रोग, मिना मेगा संजा भांग सगा गया रोजा भापदंगागरागा रोगगा माता,रामरिसाहाये.. भिस मिमणीए वा सामग्गियं जं सबहिं राभिए राहिए सया जएमति ....... ....... समका रोगमा रोजा भोजता माग जा, रोमा भोगा, अपरिसाहा गया संमा भोगा, राउनगग्गा गया से भी शिवराया गया रोजा भोस, तहणगाराहि से जाहिं रोविकमाणाहिं पगहिक तराग बिहार विहरेज्जा, णो किंचिषि गिलाए जा ॥ १७ ॥ एस पन्नु त पदम त्ति वेमि ।।७१८ ॥ तइओद्देसो समत्तो ॥ सेज्जाणामविइय- मज्झयणं समत्तं ।। ॥ इरिया णाम तइयं अज्झयणं ।। अब्भुवगए खलु वासावासे अभिपयुद्धे बहवे पाणा अभिसंभूया, बहवे वीय अहुणुभिण्णा, अंतरा से मग्गा, बहुपाणा बहुवीया, जाव संताणगा, अणमिक पंथा णो विण्णाया मग्गा" सेवं णचा णो गामाणुगामं दूइजेज्जा, तओ संजया घासायासं उबल्लिएजा॥७१९॥ से भिक्खू वा २ से जं पुण जाणिज्जा गाने या जाच रायहाणि वा, इमंसि खलु गामसि वा रायहाणिसि वाणो महई विहारभूनि जो महई वियारभूमि, णो सुलभे पीढफलगसेजासंथारए णो सुलभे फासुए अन् अहेसणिज्जे बहवे जत्य समणमाहणप्रतिहिफिवणवणीमगा उवागया उवागमिस्सति य अघाइण्णा वित्ती णो पण्णस्स शिक्खमणपवेसाए जाव धम्माणुओगचिंताए सेव गचा तहप्पगारं गाम वा णगरं वा जाव रायहाणि वा णो वासावासं उयल्लिएका आयारो सु.२ अ. ३. उ. १ ६५ ॥७२०॥ से भिक्खू वा २ से जं पुण जाणिज्जा गाम वा जाव रायहाणिं वा, इमंसि खलु गामसि वा रायहाणिसि वा महई विहारभूमी महई वियारभूमी सुलभे जत्थ पीढफलगसेजासंधारए सुलभे फासुए उच्छे अहेसणिजे णो जत्थ बहवे-समण जाव उवागया उवागमिस्तंति य अप्पाइण्णा वित्ती जाव रायहाणिं वा तओ संज- यामेव वासावासं उबल्लिएज्जा ॥७२२|| अह पुण एवं जाणिज्जा चत्तारि मासा वासावासाणं वीइकंता हेमंताण य पंचदसरायकप्पे परिसिए अंतरा से मग्गा बहुपाणा जाव संताणगा णो जत्थ बहवे समण जाव उवागया उवागमित्संति य सेवं णचा णो गामाणुगाम दूइजेला||७२२।।अह पुण एवं जाणिजा चत्तारि मासा वासा वासाणं वीइकता हेमंताण य पंच-दस-रायकप्पे परिखुसिए, अंतरा से मग्गा अपंडा जाव असंताणगा बहवे जत्थ समण जाव उवागमित्संति य सेवं णच्चा तो संजयामेव गामागुगाम दूइज्जिज्जा ॥ ७२३ ।। से भिक्खू वा २ गामाणुगाम दूइज्जमाणे पुरओ जुगमाय पेहमाणे दळूण तसे पाणे उद्धट्ठ पाय रोएज्जा साहट्ट पाय रीएजा उक्विप्पपायं रीएजा तिरिच्छे वा कट्ट पार्य रीएन्जा सइ परकमे संजयामेव परिकमेजा णो उज्यं गच्छेजा, तओ संजयामेव गामाणुगामं दूइजेन्ना ||७२४॥ से भिक्खू वा २ गामाणुगामं दूइज्जमाणे · अंतरा से पाणाणि वा वीयाणि वा हरियागि वा उदए. वा महिया वा अविद्धत्थे सइ परफमे जाव णो उज्जुयं गच्छेना, तओ संजयामेव गामाणुगाम दूइजेज्जा ॥ ७२५ ॥ से भिक्खू वा २ गामाणुगामं दूइज्जमाणे अंतरा से विरूवस्वाणि पचतिगाणि दस्सुगाययणाणि मिल- क्वृणि अणायरियाणि दुस्सण्णप्पाणि दुप्पण्णवाणिजाणि अकालपडिबोहीणि अकाल- परिभोईणि सइ लाढे विहाराए संथरमाणेहिं जणवए हिं णो विहारवत्तियाए पव- 'जेजा गमणाएं केवली बूया 'आयाणमेयं ' ते णं वाला “अयं तेणे अयं उवचरए अयं तओ आगए" ति कट्ट ते भिक्खं अकोसेज वा जाव उद्दवेज वा वत्थं पडि- ग्गहं कंबल पायपुरणं अच्छिदेज वा भिंदेज वा अवहरिज या, परिदृविज्ज वा, अह भिक्खूणं पुयोवइहा पइण्णा जाव ज णो तहप्यगाराणि विरुवस्वाणि पश्चंति- याणि दस्तुगाययणाणि जाव विहारवत्तियाए णो पवनेजा गमणाए, तओ संजयामेव गामाणुगांम दूइजेजा' ।। ७२६ ।। से भिक्खू वा २ गामाणुगाम दूइज्जमाणे अंतरा से अरायाणि वा, गणरायाणि वा, जुवरायाणि वा, दोरजाणि वा, वेरजाणि वा, विरुद्धरजाणि वा, सइ लाढे विहाराए संथरमाणेहिं जणवएहिं .णो विहारवत्ति- वा, पाउणिज वा, णो पाउणित वा, तहप्पगारं विहं अणेगाहगमणि सइ लादे पार सिवा, पाणेसु वा, पणएसु वा, वीएसु वा,हरिएस वा, उदएसुवा,मट्टियाएतु अविद्धत्थाए, अह भिक्खूणं पुबोवाट्टा जाव जं तह पगारं अणेगाहगमनि वा २ गामाणुगाम दूइज्जमाणे अंतरा से णावासंतारिमे उदए सिया, से अजोयणमेराए अप्पतरो वा, भुज्जतरो वा, णो दुलहेज्ज गमणाए । ७२९॥ अंग-पविट्ट सुत्ताणि याए पवज्जेजगमणाए, कंवली वूया 'आयाणमेय' ते णं वाला 'अयं तेगे? चेव जाव विहारवत्तियाए पवजेज गमणाए तओ संजयामेव गामाणुगाम दूने ||२७|| से भिक्त्व वा २ गामाणुगामं दृदृजमाणे अंतरा से विहं सिया से बात विहं जाणिजा, एगाहेण या, दुयाहेण वा, तियाहेण वा, चउयाहेण या, पंचाहे णो विहारवत्तियाए पबब्जेज गमणाए, केवली बूया 'आयाणमेयं अंतरा से व जाव गमणाए, तो संजयामेव गामाणुगाम दूइज्जेज्जा ॥ ७२८ ॥ से मिर, पुण गावं जाणिज्जा, भसंजए भिक्खुपडियाए किणेज वा, पामिचेन्ज वा, वा गावं परिणामं कटु थलाओ वा णावं जलंसि ओगाहेज्जा, जलाओ वा थलसि उकसेज्जा, पुण्णं वा णावं उल्सिचेन्जा, सणं वा णावं उप्पीलाबेज्जा, तह प्पगारं णावं उद्वगामिणिं वा, अहेगामिणिं वा, तिरियगामिणि था, परं जोयणमेरा णावार भिक्खू या २ पुवामेव तिरिच्छमंपातिमं णावं जाणिज्जा जाणित्ता से तमायाः एगतमवकमिज्जा, २ त्ता भंडगं पडिलेहिज्जा, पडिलेहित्ता एगओ भोयण करेज्जा २ ससीसोवरिय कार्य पाए य पमरजेज्जा पमज्जित्ता सागारंभतं पर क्खाएज्जा पञ्चक्खाइत्ता एगं पायं जले किया एगं पायं थले किचा तओ संजय मंब णावं दुरुहेज्जा ||७३०॥ से भिक्खू वा २ णावं दुम्हमाणे णो णावाए पुर दुनहेज्जा, णो णावाए अग्गओ दुरुहेज्जा, णो णावाए माओ दुलहेजा, बाहाओ पगिझिय पगिझिय अंगुलिए उवदसिय २ ओणमिय २ उण्णमियर णिज्झाएजा ॥३१॥ से णं परो णावागओ णावागयं वएना “आउमंतो समगा! एयं ता तुम गावं उपासाहि वा वोकमाहि वा खिवाहि वा रज्जूए वा गहार आकसाहि" यो त परिणं परिजागेला तुसिणीओ उमेहेता ।।७३ सेणं परो । णावागो णायागयं वएजा“आउसंतो समणा ! णो संचाएसिणावं उपासित्तए वो बोधसित्तए वा ग्विवित्तए वा रज्नुयाए वा गहाय आकसित्तए आहार एयं णावाए रस्तय संयं चेव णं वयं णावं उकासिरसामो वा नाव रज्जूए वा गहाय आकति - or -
आगारी मु.२ ७.३ ३.२
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यममा मनमा मार्ग का विस, मासु, अनि
रिमेय समाए, पो म परम उप
प्रदरियाप मिस मिमीर या मामगि
जमान गरिए गमा मटका frus.. ॥ इरियामायणे
: पन्मोद्देसी समत्तो।।
परी मागभी पाय २५.ा, "भावी ममता ! सान गनग
या सपनाम का गिलाद, एमिनम निस्पस्यानि मरगनायागि
भारत में ना जुर्म दाग या पनि।" मी ग स परिष परिमागिना, नुगिनीयो
वदना ।।७३९॥ गे परी गावरागए. गावागय काममा एमषं गम गाथाए
भरमारिए भव से यादार, गदाप जावाओ नगगि पविगसह, एपप्पगार
निया ममानिसम्म से य नापरवात गिगा प्रियागत वावरानि तालिया
नियहिन या उपर या करिना seel अर पुनभयं नागिन्ना अभि
भरकामा ग्यतु बाला प्राहा गहाय गावाश्री उदगास पनि मुखामेव
पपया 'आदती गाहामा यी
पनिम्मद
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मामि । ::: :::.:. : ... ....... ....... ....................: 1 म N । ' in E१४२ ॥ में गिर मन्त्रि भी ना गिना Trianा, जपान गणिप {७४२ ॥ में निकाला २ अागि पानीमारिय पारगिजा विभ आ लगिनिया ना निगोदित गा, गोमा पुण एवं प्रा पारए मिया उदगाओ गार पाउगिता तो गंजया उमण या गणि वा कारण उदगीरे चिटिज्जा ॥४४|| से शिकाना २ उदरा वा चा कायं णो आमजिज ना पमज्जिज्ज या लिमिज ना णिहिज्ज वा लिज्ज वा उव्यहिज्ज वा, आयायिज्ज ना पयाविज्ज या, अह पु० विगोद- काए छिण्णसिणेहे काप तह कार्य आम० जाच पयाविज्ज वा० तओ संजय गामाणुगाम दूइजेजा ।।७४.५।। से भिरण वा २ गामाणुगाम दूइमाणे णो सद्धिं परिजविय परिजविय गामाणुगाम दूइशिना, तओ संजयागेव गामा दूइजिजा ।।७४६॥ से भिक्खु वा २ गामागुगामं दृदजमाणे अंतरा से जंधान रिगे उदए सिया से पुवामेव ससीसोपरियं कायं पाए य पमज्जेज्जा पमडि जाव एग पायं जले फिना एग पायं थले किया तो संजयामेव जंघामंत उदए अहारियं रीएज्जा ||७४७|| से भिक्खू वा २ जंघासंतारिमे उदए । रियं रीयमाणे णो हत्येण वा हत्थं पारण वा पायं कारण वा कार्य आसाएज अणासायए अणासायमाणे तओ संजयामेव जंघासंतारिमे उदए अहारियं रीए ||७४८॥ से भिक्खू वा २ जंबासंतारिमे उदए अहारिय रीयमाणे णो सा वडियाए णो परिदावडियाए महइमहालयंसि उदगंसि कार्य विउसिना, संजयामेव जंघासंतारिमे उदए अहारियं रीएजा, अह पुण एवं जाणिना पार सिया उदगाओ तीरं पाउणित्तए तओ संजयामेव उदउल्हेण वा ससिणि?ण कारण उदगतीरे चितुवा ।।७४९॥ से भिक्खू वा २ उदउल्लं वा कायं सदि ता
आपारी मु.२ १.३ ३.२
६९
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सीन utensifirmirriasari"मा.
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या या भागामा, मा,
Hri महायाना पागा,
MA: MALE परमा
पाया!!! मग , प मा, माता
Bा मन्तिमा भयाको यो काममा,
माया,
माएका माग सनरे, मो अमेय गामार्ग
31 माल का गाना
पा, नमानियाहातिया, माया, पायनिक मावि
निमियामागेजवाने पर 11
से परी मंगागरी मारना,
मामा मंगा मिनिगरिय पार,
में यावर गाय आगरा से परी बादाति महाय आमना, से जो सुमंगे
निभा मती गंगामय गामागुगा कि
पाराने माहिती या मागमा पाएमा पयामा आद.
गमना : राग गाने ना माग राबहामी मारमा प्रयाग
यी गालिगा मगुस्सा परिवमति से यहगने यालरए, बानगे अगुजयने ?
में अनुदा, अधम अधजने अपजस १ एमपगाराम पनिणागि पटो
भी माइसनेमा, यमगारानि परिमाणिगी पुनोत्रा ||७.६॥ गं बात
* सरस निरग भिनगुनिए या गामगि ४ा हरियाजायणे बीओ.
* देसो समत्तो॥
है सरपंतिम वा, से भिक्यू वा २ गामागुगामं दूइनमागे अंतरा से वागि वा, फलिया वा, रक्सगिहाणि वा, पव्ययगिहागि वा, स्क्व वा चेयक, थूभं वा चेहरा दूइज्जेज्जा ||७५८॥ से मिक्व वा २ गामाणुगाम दूइजमाणे अंतरा विदुग्गागि वा, वणागि वा, वणविदुग्गागि वा, पन्चयाशिवा पन्वयविदुग्गानिक पव्ययगिहागि वा, अगडागि वा, तलागाशि वा, टहागि वा, गईओ वा, वाई ७० अंग-पविट्ठ सुत्ताणि वा, पागाराणि वा, जाव दरीओ वा, कूडागाराणि वा, पासादागि या, णूनम्ति आएसगाणि वा, जाव भवणगिहागि वा, णो बाहाओ पगिझिय २ अंगुलिया उद्दिसिय २ ओ० २ उप्गनिय २ शिझाए ज्ञा, तओ संजयामेव गाना फच्छाणि वा, दवियागि वा, णूमागि वा, वलयागि वा, गहणागि बा, गह चा, पुक्खरणीओ या, दाहियात्री वा, गुंजालियाओ वा, सरागि वा, सरसरपंतियागि वा, णो बाहाओ पगिन्झिय २ जाव गिझाए जा, बूया आयाण-मयं जे तत्य निगा या, पसू वा, पक्खी वा, सिरासिवा बा, सहा जलचरा वा, थलचरा वा, खहचरा वा सत्ता, ते उत्ततेन उत्तसेच या, वित्ततेच वा, या वा सरणं वा कंग्वेदा, "चारित्ति मे अयं समणे" अह भिक्त्वणं पुन्योवइट्टा ६ पइण्या जाव ज णो बाहाओ पगिझिय २ जाव गिज्याएदा, तो मंजया व आर रिय उवज्झाएहिं सद्धिं गामागुगामं दूइझेशा ॥७५९|| से भिक्खू वा २ आपरिक उवझाएहिं सविं गामाणुगाम दूइडमाणे, णो आयरियउयज्झायत्स हत्येप इत्थं जाव अणासायमाणे तो संजयामेव आयारियउवझाएहिं सद्धिं गामाणुगत दूइनिळा ॥७६०॥ से भिक्यू वा २ आयरियउवझाए हिं सद्धि दूइब्दमाणे अंतर से पाडिवाहिया उवागच्छेज्जा, ते णं पाडियाहिया से एवं वए जा “आउसं. ममगा! के तुन्भे ? को वा एह ? कहिं वा गञ्छिहिह ! जे तत्य आयरिए: उवझाए या से भासज्ज वा, वियागरेज्ज वा, आयरियोवन्झायल भासमाणत्त विवागरेमाणस्स या जो अंतराभासं करेजा, ती संख्यामेव बहाराइगिए दूर जेसा ॥७६१।। भिक्च वा २ अद्दाराइणियं गामाणुगामं दृदृज्जमाणे राइणियम हत्येण हत्यं नाथ अणासायमाणे तो संजयामेव अहारागि गामाणुगाम इन्जिना||७६३ाने मिक्य या २ अहाराइगियं दृइज्जमाणे अंतर से पाविदिया उवागच्छेज्जा, ने पारिवाहिया एवं वएज्जा, आउमंतो ! समा'' आधारो सु. २ म. ४ उ. १२ , अपन, सरस, पोषण से एमाल । एमप ममा, पपने गार गाय riya Timi मा श्री A...- Fr] शामियाना मगर मार पीर मोग, सदर मामांग, रमा म र ममामोर . भानु र भानी का मागिनत या, यिनुना, गा, गीका गरमाई raf armathrimaza. समान भावनामाई गानामा मानिस समाया से Eि२ मे alrnegie मामा मामाया भाग '. मासामशिनाचनमामिया मारा जमारा ३१ मे मिरगा भाग भागा महान गागा मोगा, आय माना गमागोवा, भाना अनवारोना, सहपगार, भासे मार गरिय कमहुये गिट्दुर মসলা ধৰিণতিমাছ আমি जो मानिमा ८.|| से मिलाया २से पु० जाणिजाय भागा सपा मा भाग भागा अगमामोसा सदगार भाग असाव अशिरिष जाल अभूत्रो. भासं भाजा, से मिक्समा २ मुमै मातमागे आमंनिए मी एवं मारमा, होले लिया गोनेशिया या शिवा अददा नि का सागे ति ना तेणेतिमा चारितिया माई निया एमाई तुमते जागा वा पपगार भासे सावध सकि- माना ॥७८२॥ से मिक्या २ पुगे आमनेमाणे प्रया, आयुगे ति या आउगीति या आठ- या उपागगेत्ति या मम्मिपत्ति या भग्मपियेतिया र अभूओवभाइयं अभिमन्यः गाशेजा !|७८२॥ से भले आमंतिए य अपरिसुणेमाणी गो एवं वएपना,
७२
मम्मा, मोत भीभी उन्मग गच्छेम्मा, जावतमाहीए वसंत
सेआनोनमा रिडियानम्माते माननगा एल्सा, भारी
वडियार पारन न्नियाद नायनारजापजा, दुनियाको
तेआनोगा' कानि' तिक्त, अकोमंति का नाम व
वत्वं या पायंका कंगवा पायतुंछ अश्टिदेन का, हार पनि
संग-पट्टि
सुत्ताणि
विहं जातिमा, इनारे बलु विहंदि वे आमोदगा उपडिपार
गानागुगानं दुनिया में नित्या मानानुमान दम्ममा
आइर एवं कार्य का गद या कव या पायन देहि निक्विाईट
पोलिक्विजावंदद कारज्जा, अंजलि कलजारम:
को मानवारियं कुम्मा दो रायनारियं कुष्मा को परं उपकनितु :
सो माहा ! एक दुआनका व्याडियार दिदि
अकति का शव परिष्कृति वा, एपमान या दयनं वाको पुका
विहरेजा, अमुल्नुए कार ननाहोर तो संज्यादेव गामानुगनं दू
1185२॥ एवं नु तल निक्युल्ल मित्र वा नागिनबट्टे
सहिए नया बरनाले जि वेनि III] तइओ तो समत्तो। त
अपझयण समत्तं ।
।। भासज्जायं नाम चउत्यं अज्झयणं ।
से निक्यू या २ इनाई वयापाराई सोया निलम्न इमाई अगायाराई
परिसलाई मानिन्ना, के योहा या वायं विति नान वाकवि
मायार वा वायं विउंति लोहा का वायं विनंति, बानो या पन्न
अडानी वा पति, नववं नवना विनाकार :
चे हानि, अर्व चेयं सानिमा, अनवा ४ लमियोलनिया
मुखिय, अदुवा आगर में आगर, अदुवा इ को एड, अदुवा एर
एहिद, एत्यावे आगरागर, एत्यविड एड, त्यति एटि
133 अनुवाइट्टिामन सनियार मरमान नाना,वहा
दुश्मन, रहुवया, इलिया, परित्वया, मुनगया, अमत्यवय,८६.
पपई, भवनापन, उनीपारायण, अतिपोवनीप, दीप
" . आयारो सु.२ ७.४ उ. १०२ प, गाय, पण तसे पगरया पदस्मानी REAT, जार पर मरमा परी maritten inhinागामी का mit विद्वामागो, गनिमार में भाग मा मायामा 10380 दिनाना-माग. पना, मार मार्म, मर गई पर माना गया 'अनाम"MA REE माया आगमनाग पमा अगागमा अगना गांव महमारनाsam. पालाई मानिनु या भारी मा भामिनि था, मग ना, wif का, पनवमर्मत का माननामाई मनन primitiनग. मेवाडामि मानलाई म भन समयमाया 15नि निमा २ मे पुFilme with माना मामा मामा : गागा, भानन भासा भागागागा 3.5 से मिलना सेदपुर भानिय गान सभा, माना मोसा, जान मामा मागोगा, भायभामा अमागा, राष्ट्रपगा! भास गाय माय फाय कल्प गिदुर पाम भदवार गगपगार परिवारमारानना भूभावमा अनिय माजी भासा ||S८-||मेनिन्जा २.से पु० जाभिभारा समा सदमा नाय भागा असमागोमा नपगाई मार्ग असायन रिति जाय अभूमी. पवाद अनिमगा मामा, मे निममा २ पु आतिमाणे आमंतिए या अपदिनमा यो पर्व परमा, होले निमा गोले ति या पनुले लिया का कुलो नि या पडदाने लिया साणे सिमा सेने नि या चारिप ति या माई ति वा मुगालाई नि पा प.पा तुम ते अगमा या एगमगारं गाणे गायर्थ राकिल रियं जाय अभिप जो भागेना ||७८१॥ से भिवा या २ पु आमंत्रमाणे मामलिए या अपटिमुगणेमागे पर वाया, अगुगे नि मा आउगोलि या आठ- तारो लिया ग्रावगे ति या उपारगेत्ति या धम्मपतिया भम्पपिति या एयपगारं मागं अमाययं जार अभूऔषधाइये अगिप गाजा ||७८शा से - मिक्स्य वा २ इरिंग आमंतेमाणे आमंतिए, य अपहिगुणेमाणी गो एवं यएज्जा, होलीया गांची या प्रांगणं णयट्य 11८३11 में मिक्य या आमनमाणं आमंतिपय अरडिनणंमागी एवं वपना, आउनी नि: गम् माया पिकानट विमाट या स्यणी माया विमाट उदट वा गरिएका नदेन, माया गया जयलमा या जयड, गो एयष्यगारं भासं भामिन्मा पाई भिमन्युमम मियाण. या मामग्गिय मध्यंदि गमिट महिए गया जप में निम्बा २ जहा बंगल्याई सवा पांगाना नहावि नाई जा एवं यः ज्यपगारात मामा युध्या युट्या कृष्पति माणवा, नमयाविनायगाराहि मान मार्ग मावन जाय गो मांगम्जा ॥ १९ ॥ में मिक्य या २ नहा बंगइयां ७८ अंग-पविट्ठ सुत्ताणि भगिगि नि या भगवट निया मावि नि या व्यामिण नि या अभियान या धम्मपियोन वा एयचगामा अगाय नाव अभिकन भागहा ॥३४१. में मिकन्यू वा २ गो पय बपना, गोदन या गदयनि वा विन्दुदेवी या पाटयान या गियटदयान या पटट या वामं मा या पट मिटर 11 १.८५ || म भिकन्यु यार, अंनिपनि या गुज्माणुचरिणानि या मंछि वा गिवाए, वा पोवाजा वा युद्धबन्लाइंगनि वा ।। ७८६ ॥ प.यं तु , नि बेमि || ८ || मासाज्झयणस्स पढमोद्देस्रो सनत्तो ॥ मजदा-गटी गीट घा, कुटी कुटीर बा, जाय मदुगद्गुणानि या, इत्याग प्रत्यरिणनि या, एवं पाद णका-गण-च्छिणनि या, यायाण नहप्पण यमिकन्या भासजा || 9421 में भिग्य या २ नहा धगध्याई कबाई पानि तहानि नाप वपन्ना नजट्टा-ओवी आयगीर या, संयमी नया गा, यमी यधनीट या, नांगी जगमीट या, अभिग्य अभिया या पनि पदिष्ट या, पागाध्य पामार वा दरिसणिही दरिसणी वा, जे यायः नष्प्यगारा प्रयप्पगाराहि मागाहिं बुध्या युटया जो अष्पनि मागवा, तयावि तहत गारा एयध्यगाराहि मासाहि अमिकम्य मामिळना। तहष्णगारं मागं श्रमायनं डर भागगना || ८ || में भिनग्य वा २जहा वेगव्याई नयाई पानाजा तंजड़ा- पाणि या नाव भवगिहाणि या, तहाबि ताई यो एवं वएना, नजला-मुक ४ या मुटुकर , या माहट : या कालाण दवा करणिय वा एयप्पणः म्याई पासना, जहा-~-यप्पाणि या जाव भवगिहाणि वा तहावि ताई पड़े आयारो सु. २ अ.४ उ.१, २ ७५ र यएज्जा, तंजहा-आग्भकरेंड या सावजकडे या पयत्तम इ वा पागाइय पामाइत्ति या दरिमणीयं दरिंगगीपति या अभिस्य अभिम्चेनि चा पडिरू पडिस्वेत्ति या एयपगार भामं असार जाच भाज्जा ।। ७९६ ॥ ने भिन्न वा २ असणं या ४ उपस्वडिय पहाए, तहाविहं तं जो एवं वएज्जा, तंजदा- .. गुकडे इ वा नुटकडे इ वा साहुकरें ३ वा नदाणे इ या करगिज इ या एयप्पगार भासंमायनं जार णो भासज्जा।।७९२ाले भिक्य या २ अराण वा ४ उपखटिय पदाए, एवं यएमा, जहा-आरंभकडे त्ति या सावभकडे ति या पयत्तक ईत्ति या गदयं भदए, ति या जमदं जग त्ति वा रसिय रमिए सि या मगुण्णं मणुणे त्ति वा एयणगारे भासं असावं जाय भासेसा ॥ ७९३ ।। से मिक्प वा २ मणुरस वा गोणं या महिमं या मिगं या पमुं वा पक्खि या सरिसिय चा जाटयरं वा से परिदकार्य पहाए जो एवं यएमा ले इ वा पमेइले ५ या पंदेड या बल्झे इचा पाइने ५ या एयप्पगार भामं साव जाय जो भामिया ।। ७९४ ॥ से भिक्यू. वा २ मणुस्सं जाव जलयरे या मे नं परिवृहकार्य पहाए एवं यएचा, परिबूट. काएत्ति या, उयचियकाए ति या थिरसंघयणेत्ति वा उपचियममसोणिएत्ति या बहुपडिपुष्गई दिएत्ति वा एयप्पगारं भागं अमाव जाव भासिक्षा ।। ७९५ ॥ से भिक्यू.या २ विरुवावाओ गाओ पेहाए, गो एवं वएजा, तंजहा---गाओ दोडाओ त्ति वा दम्मेत्ति वा गोरहत्ति या चाहिमति वा रहजोग्गत्ति वा एयप. गार भासं सावज्जं जाय अभिख गो भासिना ॥ ७९६ ।। से भिक्खू वा २ विरुवरुवाओ गाओ पहाए एवं बएबा तंजहा-भुवंगवेत्ति वा धेणु त्ति वा रस. वह ति वा हस्से इ वा महल्लए. इ वा महबए इ वा संवहणि ति वा एयप्पगारं भात असावज जाव अभिकख भासिज्जा ।। ७१७ ॥ से मिक्स्य वा २ तहेब गंतु- मुबाणाई पव्ययाई वणागि या मक्खा महट्टा पहाए णो ण्यं वएज्जा, तंजहा- पासायजोग्गा इ वा तोरणजाग्गाइ वा गिहजोग्गा इ वा फलिहजाग्गाइ वा अग्गल-णावा-उंदगदोगि-पीढचंगवर-णंगल-कुलिय-जंतलट्टी-गाभि-गंडी-आसण- सयण-जाण-उवस्मय-जोग्गा इ. चा, एयप्पगारं भासं सावज्जं जाय णो भासिज्जा ।। ७९८ ॥ से भिक्खू वा २ तहेव गंतुमुज्जाणाई पन्चयाणि वणाणि य मकवा महल्ला पेहाए एवं घएज्जा, तंजहा--जाइमंता इ वा दीहवहा इ वा महालया Eri न मा नंगा या पायक्लज्जाइ वा वेलोइयाइ वा टालाइ वा बेहिया इ वा एयप्पगारंमः पेहाए एवं वएज्जा, तंजहा-असंथडा इ वा बहुणिवाहिमफला इ वा बहुसका इ वा भूयल वित्ति वा एयप्पगारं भासं असावज जाव भासेज्जा ।।८०१॥ ७६ अंग-पविट्ठ सुत्ताणि इ वा पयायसाला इ वा विडिमसाला इ वा पासाइया इ वा जाव पहिर इ वा एयप्पगारं भासं असावज जाव अभिख भासिज्जा ॥ ७९९ ॥ से निज वा २ बहुसंभूया वणफला पेहाए तहावि ते णो एवं वएज्जा तंजहा-का सावज्जं जाव णो भासिज्जा ॥ ८०० ॥ से भिक्बू वा २ बहुसंभूयावणाला भिक्खू वा २ बहुसंभूयाओ ओसहीओ पेहाए तहावि ताओ णो एवं एन तंजहा-पक्का इ वा णीलिया इ वा वीइ वा लाइमा इ वा भन्जिमा इ वाय खज्जा इ वा एयप्पगारं भासं सावजं जाव णो भासेज्जा ॥८०२॥ से मिक्यु २ बहुसंभूयाओ ओतहीओ पेहाए तहावि एवं वएज्जा,जहा-रूढा इ वा बहुसंग इ वा थिरा इ वा ऊसदा इ वा गम्भिया इ वा पसूया इ वा ससारा इ वा एय गारं भासं असावज जाव भासेज्जा ॥८०३॥ से भिक्यू वार जहा वेगइयाई सदन सुणेज्जा, तहावि एयाई णो एवं वएज्जा, तंजहा–सुसद्दे इ वा दुसहे : एयप्पगारं भासं सावज्जं जाय णो भासेज्जा, तहावि ताई एवं वएज्जा, तंजहा-दुर सुसहे त्ति वा दुसई दुसद्दे त्ति या एयप्पगारं असावजं जाव भासेज्जा ||८८४ एवं ल्वाई कण्हे त्ति वा ५ गंधाई सुभिगंधै त्ति वा २ रसाइं तित्ताणि पा फासाई कक्खडाणि या ८॥ ८०५ ॥ से भिक्खू या २ वंता कोई च माणं च म । च लोहं च अणुवीइ गिट्टाभासी गिसम्म भासी अतुरियभासी विवेगभासी सनि याए संजए भासं भासेज्जा ।। ८०६ ॥ एयं खलु तस्स भिक्खुत्स वा भिक्खुणाय । या सामग्गियं ।। ८०७ || बीओसो समत्तो । चउत्थं अज्झयणे । समत्तं ॥ ॥ पत्थेसणा णाम पंचमं अज्झयणं । से भिक्खू वा २ अभिकंखेज्जा यत्यं एसित्तए, से जं पुण वत्यं बाणिज्जा, जहा-जंगिय-भगिर्य-साणयं-पोत्तयं-खोमियं वा तलकई वा तहप्पगारं वय १८०८॥जे गिग्गंधे तरुणे जुगर्व बलवं अपायके थिरसंघयणे से एग वत्थं धारेजा आयारो सु. २ अ.-५ उ.-१ ७७ गो विइयं, जा गिग्गंधी सा चत्तारि संघाडीओ धारेला, एग दुहत्यविधारं, दो तिहत्यवित्थाराओ, एगं चउहत्यवित्यारं, एएहिं वत्येहिं असंधिजमाणेहिं अह पच्छा एगमेग संसीविजा १८०९।। से मिक्खू वा २ परं अद्धजोयणमेराए वत्य- पडियाए णो अभिसंधारेजा गमणाए ।।८१०॥ से भिक्खू वा २ से जं पुण वय जाणिना अस्सिाडियाए एगं साहम्मियं समुहिस्स पाणाई जहा पिडेसणाए ॥८११॥ एवं बहवे साहम्मिया, एग साहम्मिणि, बहवे साहम्मिणीओ, बहवे समणमाहणा, तहेव पुरिसंतरकडं जहा पिंडेसणाए ॥ ८१२।। से भिक्खू वा २ से जं पुण वत्य नाणिना, असंजए भिक्खुपडियाए कीयं वा धोयं वा रत्तं वा घट्ट वा मह वा संसट्ठ वा संपधूमियं वा तहप्पगारं वत्यं अपुरिसंतरकडं जाव णो पडिगाहेब्बा, अह पुण एवं जाणिजा पुरिसंतरकडं बाव पडिगाहेजा ।। ८१३ ॥ से भिक्खू या २ से जाई पुण वत्थाई जाणिज्ञा, विस्वरूवाई महद्धणमोलाई तंजहा-आइणगाणि वा, सहिणाणि वा, सहिणकल्लाणाणि वा, आयाणि वा, कायकाणि वा, स्त्रोमि- याणि वा, दुगुल्लाणि वा, पट्टाणि वा, मलयाणि वा, पत्तुण्णाशि वा, असुयाणि वा, चिणंसुयाणि वा, देसरागाणि वा, अमिलाणि वा, गजलाणि वा, फालियाणि वा, कयहाणि वा, कंबलगाणि वा, पावरणाणि वा, अण्णयराणि वा तहप्पगाराई वत्थाई महद्धणमोल्लाई लाभे संते णो पडिगाहिज्जा ॥८१४॥ से भिक्खू वा २ से जाई पुण आईणपाउरणाणि वत्याणि जाणिज्जा, तंजहा- उद्दाणि वा पेसाणि वा, पेसलाणि वा किण्हमिगाईणगाणि वा णीलमिगाईणगाणि वा गोरमिगाईण. गाणि वा कणगाणि वा कणगकंताणि वा कणगपट्टाणि वा कणगखइयाणि वा कणग. फुसियाणि वा वग्घाणि वा विवग्याणि वा आभरणाणि वा आभरणविचित्ताणि वा अण्णयराणि वा तहप्पगाराणि आईणपाउरणाणि वत्थाणि लामे संते णो पडिगा- हिजा ॥ ८१५ ।। इचेयाई आययणाई उवाइकम्म अह भिक्खू . जाणिज्जा, चउहिं पडिमाहिं वत्थ एसित्तए ॥ ८१६ ॥ तत्थ खलु इमा पढमा पडिमा-से भिक्खू या २ उद्दिसिय २ वत्थं जाएबा, तंजहा-जंगियं वा भंगियं वा साणयं वा पोत्तय वा खोमियं वा तूलकडं वा तहप्पगारं वत्यं सयं वा पं जाएजा परो वा णं देना, फासुयं एसणीय लाभे संते पडिगाहिन्ना, पढमा पडिमा ।। ८१७॥ अहा: परा दोचा पडिमा से भिक्खू वा २ पेहाए २ वत्थं जाएब्बा, तंजहागाहावई मिड रगा। त्य र मा " " : "T है। जमाना Rm TETTER: " . १२|| संगल सा निकालना गामि fr या जातियां B.३|| गोओशो रामत्तो। छळ आजायण समत्तं ।। ।। ओग्गह-पडिमा णाग रात्तमं अजायणं । समगे भनिरगामि अगमारे निणे अपने भाग पर गो गाने का ओ करिस्मामि लिगमुटा राज गते ! RAM RET I . .५ ॥ में प्रणुपविसिना गाम का जाव० णेत सां अधिगणं गिति :2AT, वाण अधिसणं गेण्हावेजा, जेवणोणं अदिपणे गित गमणुजाणमा जति गति पटनद तेसि पि जाइ उत्तगं वा मत्तगं वा दंडगं ना जान चम्मयणगंवा लगि म्यागेज उग्गहं अणुण्गविय अपडिलेहिय २ अपमानिय २ जो गिना या पगि वा तेसिं पुयामेव उग्गई जाइमा अगुण्णविय पटिलहिय २ पमजिय २ तओ संजयामेव उगिहिना वा पगिहिना वा ॥ ८७५ ॥ से आगंतरिनु या ४ अणुवीइ उग्गहं जाएजा, जे तत्थ ईसरे जे तत्य रामहिटाए. ते उग्गई अणुण्णवेजा कामं खलु आउसो ! अहालंदं अहापरिणाय यासामो आउसो नाव आउसंतस्स उग्गहे जाव साहम्मिया एइ ताव उग्गहं उगिहिस्सामो तेण परं विहरिस्सामो ।। ८७६ ॥ से किं पुण तत्थोग्गह सि एवोग्गहियंसि ? जे तत्य साहम्मिया संभोइया समणुण्णा उवागच्छेन्ना, जे तेण सयमेसित्तए असणे वा ४ तेण ते साहम्मिया संभोइया समगुण्णा उवणिमंतेजा, णो चेव णं परवडियाए उगिझिय २ उवणिमंतेजा।।८७७ ॥ से आगंतारेसु वा ४ जाव से किं पुण तत्थोग्गहंसि एवोग्गहियंसि जे तत्थ साहम्मिया अण्णसंभोइया समणुण्णा उवा- आयारो सु. २.७ उ.१.२ ओभानोले मानि पौदे का पाया गगारए गाने मरानोगे अमिर परमडिपाएनिमिय २ शनिमा ८.२८ ।। मे आगंगारंग का नाम से विधीममि मोदिपनि सनापमापा गाना या मालिका कामोदर बापमान भी गम अमाप पाविशारच नादचा को अपमान देगा आपका ग परनिनि गटर से समायातरम गगन्टिना माने जनामा नटद भूमीमा ठोत्ता मेल इम' नि आपसे घेर , स पानिया पापानिति पनि 11 ८७१, 1 से मिस्त या २ से गुण उग्ग बाणिमा दहियार पुखीए मागितामा पुराग बारमशागार तमगारं उग्गाको उगिणमा पनिदेय या।८८00 मिमाण टग्गां जानिमा भूमिका सरपगारे अंसारिकार बरे बाबा उग्गा, गिज या पगिनीज मा ८८.|| मे मिलाया २ पुन उगाई जानिमा गुलियांग का जारी अगिणन कामे मिरपना २ मिना ४ अगरबा प्यार बार भो उग्गांगिया1८८ मिसयूवार से पुण दरग मागिना मगा- गारिक सागगि सउदय सपि मग्नसपनु रामसरा जो पगरस निवसमायसे ভাখি, তা ণা অ্য, ওয়াহিয়, তাৰ - पनु-गताणे यो ठगई टगिवन या २॥ ८८४ ॥ से मिक्स या २ से ज पुग दगई जागिज्जा गावालाकुला मामलेणं ग पंये पटिमलं या जो पारस 'नाय चिताप से एवं पना तदपगारे उबरसाए जो उग्गा उगिज्ज वा २ 14८५॥ से मिनर या २ सेकं पुण उग्गई जाणिज्जा, ६ मुटु गाहावई या भार फम्मकरीओमा अण्णमण्यं अकोमंति या तव ताद-मिणाण-सोओदगविय- चादि निगिणाइ य नहा सिजाए आलारगा गयरं उग्गवत्तवया ॥८६॥ से मिरवार ने पुण उगई जाणिज्जा आणगंलियो णो पणारा जाय चिंताए, उदपगारे उपस्सए यो ठग्गा उगिहिन या २८ एयं सन्द तस्स भिक्षुरस र या सामग्गिय १८८८11 उग्गहपडिमाझयणे पढमोद्देसो समतो॥ से आगंतारेनु या ४ अणुवीइ उग्गाई जाएज्जा, जे तत्य ईसरे समहिहाए, . -- अणुजाणावेज्जा, कामं स्खलु जार विहरिस्सामो ॥८९१|| से किं पुण तत्थोग्ग- हंसि एवोग्गहियंसि अह भिवायू इच्छेजा अंबं भोत्तए वा से ज पुण अंच जागिना | सअंडं जाय ससंताणं तहपगारं अंबं अफासुयं जार णो पडिगाहिज्जा ॥८९२|| से भिक्खू वा २ से ज पुण अंबं जाणिन्ना, अप्पंडं जाव अप्पसंताणगं अति- २ से जं पुण अंचं जाणिज्जा अप्पंडं जाच संताणगं तिरिच्छच्छिणं वोच्छि फासुयं जाव पडिग्गाहिज्जा ॥८९४॥ से भिक्खू वा २ अभिकंखेज्जा अंबभित्त वा से जं पुण जाणिज्जा, अंग्रभित्तगं वा जाव अंबडालगं वा सअंडं जाच संताप अंग-पविट्ठ सुत्ताणि ते उग्गहं अणुणविज्जा नाम गालु आउसो ! अदालई अहा परिष्णाय नसागो जान आउसो! आउसंतरस उग्गाहे जान साहम्मियाए ताव उग्गई उग्गिहिरमा तेण परं विहरिस्सामो ॥ ८८९ ॥ रो किं पुण तत्थ उग्गहंसि एवोग्गहियसि । तत्थ समणाण वा माहणाण वा दंडए वा छत्तए वाजाय नम्मछेदणए वातं णो अंती. हिंतो बाहिं णीणेज्जा, बहियाओ वा णो अंतो पयेसेज्जा, णो सुत्तं वा णं पडिबोहे णो तेसिं किंचिवि अप्पत्तियं पडिणीयं करेजा ॥ ८९० ॥ से भिक्खू था? अभिकंखेज्जा अंबवणं उवागच्छित्तए जे तत्थ ईसरे जे तत्थ समहिद्वाए से उगाई रिच्छछिण्णं अयोच्छिण्णं अफासुयं जाव णो पडिग्गाहिज्जा ॥८९३।। से भिक्खू व वा अंबपेसियं वा अंबचोयगं वा अंबसालगं वा अंबडालगं वा भोत्तए वा पायर जाणिक जागि अफासुयं जाव णो पडिग्गाहिना ।। ८९५ ।। से भिक्खू वा २ से जं पुण अंधभित्तगं वा जाव, अप्पंडं जाव संताणगं अतिरिच्छच्छिणं वा अवोच्छिणं वः । अफासुयं जाव णो पडिग्गाहिजा ।। ८९६ ॥ से भिक्खू वा २ से जं पुण अंधभित्तग वा जाय, अपंडं जाय संताणगं तिरिच्छछिण्णं वोच्छिण्णं फासुयं जान पडिग्गाहिजा ॥ ८९७ ॥ से भिक्ख वा २ अभिकंखेजा उच्छुचणं उवागच्छित्तः जे तत्य ईसरे जाव एव उग्गहंसि० ।। ८९८ ।। अह भिक्खू इच्छेना उच्छं वा पायर वा से जं उच्छं जाणिजा, सअंद जाव णो पडिग्गाहिजा। अतिरिम च्छिणं तहेव, तिरिच्छच्छिपणे वि तहेव ॥ ८९९ ।। से भिक्खू वा २ से जं पुत्र अभिलेझा अंतमच्छुयं उच्छुगंटियं वा उच्छुचोयग या उच्छुसालगं वा उप दालगं वा भोत्तए वा पायर वा ।।९०० से जं पुण जाणिज्जा, अंतरुच्छुयं वा जान हालग वा राअंटे जाव गो पडिग्गाहिजा ॥ ९०१ ॥ से भिक्खू वा २ से जं आयारो सु. २ अ. ७ उ. २ ८७ सानिया या अशा बागो पलिया.er, . रिक्तिप९.२ किमान वर fer या॥१.३॥में मिसनमा २ निलंगानुपानि, शो farmir nा भार नपा २ अगिया काय वा, दमाई सा, नाग-नोमग पा, नया भोरप मा, पामा तुम imiyनया जापान पोर या मा परिमा अनिमाविजार पटिगाना -५॥ निगा या भागबारेम या ४ बार उपयनि जेस, गादा गा गादानापुनाग या याई भापमाई याममा ।।१६। अमिर जागिपजामाक्षि सतदि पदिमा उगई समिनि ॥९०७॥ सत्य मटमा परमा परिमा-से भागतारेगुना ४ अनुनी उगाई जाएपना काय दिहिगामी । पदमा पदिमा १.८॥ अहावराटोमा परिमा-जसा मिस्स्स प ग "आन पर भगेमि भिात अद्याप उग्गा गिदिस्सानि, असिमित उग्गा उग्गदिए 'यटिम्मानिट १० ॥९०९ ।। आहा तगा पहिमा-गरमणं मिक्स्स पर - मया "अईन अण्णागि लिणं अढाए, उगाई उगिटिस्गानि, असि चटग टग्गदिस यो उपरिरमागि।" ० ५० १९१०॥ अहा- नटत्या परिमा- जाम भिरग एवं भगा "अहं च म्हलु अण्णेनि भिकम्पूर्ण अढाए, उग्गई गो दगिनिमामि अण्णनि न उग्नई उग्गहिए. गरिमानि " च० प० ।।९११ ॥ Tr'अहा. पंचमा पदिमा-जाणं निमचं भरा, "आई व मनु अप्पगो अढाए मदगई उगिदिमानि, यो दोप्नं, जो तिम्, जो चटार जो पंचाहे ।" पं०५० ॥९१२।। अदा. सहा पटिमा- भिमा या २ नरसेव टम्ग ठपल्लिएजा,जे तत्य अहा समयागार, जहा-बकरे या जाय पलाले या तस्स लाभे संघीज्जा, तरस अलामे उस्कुलए ना सथिए या विहरेजा। उ०प०॥९१३|| अहा. सत्तमा पटिमा से मिस्तु या २ हापंथगय उगाई जाएज्जा, तंगहा--युद्धविसिल वा, फरिलं अहामगठमेव तस्म लामे मंगमेशा तस्स अलाभे उमओ वा सब्जिओ या पिहरेज्जा । सत्तमा प० १९१४॥ दोयासि सत्तण्डं परिमाणं अण्गयरं, जहा पिडेमणार ॥९१५॥ सुयं मे आउ ! तेणं भगवया एबमासायं इह खलु धेरेहि
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पासवग नामिरेसा ॥ ९४२. ।। ग भिमा! ना २ पण iffi..
माणुगरंभगाणि ना, मगिकारणाणि ना, महाराणि ना, आगगाणा
কুকুৰাগা না fry না? বগি না, সি
त्तित्तिरकरणाणि वा, कयोगकरणाणि वा, कालिंजरकरणागि ना, अरंसिक
तहपगारंमि थंडिलंसि णो उपारपागवणं नोसिरंजा || ९४३ ॥ से निकल
२ से जं पुण थंडिलं जाणिजा, नेहाणसट्टाणेमु गा, गिल पिठाणमु ना, तरपन
ठाणेसु वा, मेरुपरणटाणेमु वा, विसशकवणटाणेगु या, अगणिपरणटाणेमु का
अण्गयरंसि वा तहप्पगारंसिणी उमारपासवण नौमिरजा ॥९४४॥ से भिनत की
२ से जं पुण थंडिलं जाणिज्जा, आरामाणिवा, उजाणाणि चा,
वणाणिवा,
नि
का
IR त्ति बेमि ||९५४ ॥ दसममज्झयणं समत्तं ।। आयारो , पु " अण्णयरंसि वा तहप्पगारंसि थंडिलसि जो उच्चारपासवणं योसिरज्जा ॥९४६|| HIT मिक्खू वा २ से जं पुण पंडिलं जाणिज्जा, तियाणि वा, चरकाणि वा, चत्र बायकर असंलोइयंसि अप्पपाणंसि जाव मकडासंताणयंति अहारामंसि वा उस्सयंसि तओ । वा, अपर संजयामेवं उचारपासवणं वोसिरेजा, उच्चारपासवणं वोसिरित्ता से तमायाए एगंत- BY17 मयको अणावायंसि जाय मकडासंताणयंसि अहारामसि वा, ज्झामयडिलसि या, वाह अण्णयरंसि वा तहप्पगारंसि थंडिलसि अचित्तसि तओ संजयामेव उच्चारपासवणं अगनि परिद्ववेजा ॥९५३ ।। एयं खलु तस्स मिक्खुस्स २ वा सामग्गिय जाव जएजासि सु. २ अ. १० संडाशि वा, देवकुलागि वा, सभाणि या, पयाणि वा, अण्णयरंसि या तहप्पगारी पंडिलंसि जो उचारपासवर्ण वोसिरेज्जा ॥ ९४५ ॥ से मिक्ख वा २ से जं थंडिलं जाणिमा, अहालयागि चा, चरियाणि वा, दाराणि वा, गोपुराणि व राणि वा, चउमुहागि या, अगयरंसि या तहप्पगारंसि थंडिलंसि णो उचारपासया ३ वोसिरेला ||९४७ ॥ से भिक्खू वा २ से जं पुण थंडिलं. जाणिचा, इंगालडाहेर वा, खारडाहेनु वा, मइयडाहेतु वा, मध्ययूभिवासु वा, मइयचेइएम अण्णयासि वा तहप्पगारंसि पंडिलंसि णो उम्पारपासवणं बोसिरेना ॥ ९४८ ॥ में मिक्सू वा २ से जं पुण थंडिलं जाणिना गइयाययणेमु वा, पंकाययणेसु वा ओघाययणेसु चा, सेयणहमि वा, अण्णयरंसि वा तहप्पगारंसि थंडिलंसि णो उचार पासवर्ण योसिरेना ॥ ९४९ ॥ से भिक्ग्यू वा २ से जं पुण थंडिलं जाणिजा, णवि यासु वा, मट्टियवाणियामु णवियानु गोप्पलिहियासु वा, गवाणीसु वा, म्याणार वा, अण्णयरंसि वा तहप्पगारंसि थंडिलंसि णो उच्चारपासवणं वोमिरेला ।।९५० । से भिक्खू वा २ से जे पुण थंडिलं नाणिया, डागवञ्चसि बा, सागवचंसि वा मूलगवचसि वा इत्थंकरवचंसि वा, अण्णयरंसि या तहप्पगारंसि यडिलसि णे उच्चारपासवणं वोतिरेजा ।। ९५१॥ से भिक्य वा २ से ज पुण थंडिलं जाणिजा असणवणंसि वा, सणवणंसि या, धायइवणंसि वा, केयझ्यणसि या, अंबवणंसि वा असोगवणंसि वा, णागवणसि वा, पुण्णागवणंसि वा, चुण्णगवणंसि वा, अण्णयरेस वा तहप्पगारेसु वा पत्तोवेएसु वा, पुप्फोवेएसु वा, फलोवेएसु वा, वीओवेएस वा, हरिओचेएसु वा णो उच्चारपासवणं योसिरेजा ।। ९५२ ॥ से भिक्खू वा २ सयपाययं पा परपाययं वा गहाय से तमायाए एगतमवफमेजा, अणावायसि मरित चामालत्रमा य, मान सोयपडियाए णो अभिसंधारेना गमणाए।।९५८॥ से भिक्खू वा २ अहावेगल्याई ९२ अंग-पविट्ट सुत्ताणि ॥ सद्द-सत्तिक्कयं णाम एगारसमं अज्झयणं । से भिक्यू वा २ मुइंगसहाणि वा, गंदीसहागि वा, झटरीमहागि वा, अण चराणि या तहप्पगाराई विल्यम्याई वितताई गद्दाई कण्णमोवगाडियाएको अभिसंधारेजा गमणाए ॥ ९५५ ।। से भिक्यू वा २ अहावेगढयाई सहाई सुगेड तंजहा-वीणासहागि वा, विपंचीमहागि वा पिपासगमहागि वा, तूणयसहागि वा, पणयसदाणि या तुंबवीणियसहाणि या, दंकुणसहाणि या अण्णयराई वा तहप्पगाराई विरुवरूवाई सदाई वितताई कण्णसीयपडियाए णो अभिसंधारंजा गमगाए ।। ९५६ ।। से भिक्खू या २ अहावेगइयाई राहाई मुणेइ तंजहा-तालसहागि वा, कंसतालसहाणि वा, लत्तियसहाणि वा, गोहियसहाणि वा, किरिकिरियसद्दागि वा अण्णयराणि वा तहप्पगाराई विरूवरूवाई तालसदाई कण्णसीयपडियाए णो अभि- संधारेजा गमणाए ॥ ९५७ ॥ से भिक्खू वा २ अहावंगइयाई सहाई मुणे तंजहा-संखसहाणि वा, वेणुसद्दाणि वा, वंससदाणि या, खरमुहीसहाणि वा पिरि- पिरियसदाणि वा अण्णयराई वा तहप्पगाराई विरूवल्वाई सहाई शुसिराई कण सहाई सुणेइ तंजहा-चप्पाणि वा, फलिहाणि वा, जाव सराणि वा, सागराणि वा सरपंतियाणि वा, सरसरपंतियाणि वा, अण्णयराई वा तहप्पगाराई विरुबरुबाई सहाई कण्णसोयपडियाए णो अभिसंधारेजा गमणाए ॥९५९॥ से भिक्खू बा अहावेगइयाई सद्दाई मुणेइ तंजहा-कच्छाणि वा, णूमाणि वा, गहणानि वा, वणाणि वा, वणदुग्गाणि वा, पन्चयाणि वा, पव्ययदुग्गाणि वा, अण्णय- राई वा तहप्पगाराई विरुवरुवाई सहाई कण्णसोयपडियाए णो अभिसंधारना गमणाए ॥९६०॥ से भिक्व वा २ अहावेगइयाई सद्दाई सुणेइ तंजहा- गामाणि वा, णगराणि वा, गिगमाणि वा, रायहाणिआसमपट्टणसंणिवेसागि वा, अण्णयराई वा तहप्पगाराई सहाई णो अभिसंधारेजा गमणाए॥ ९६१॥ से भिक्खू वा २ अहावेगइयाई सद्दाई सुणेइ तंजहा-श्रारामाणि वा, उज्जाणाणि वा, वणाणि वा, वणसंडाणि या, देवकुलाणि वा सभाणि वा, पवाणि वा तहष्यगाराई सद्दाई णो अभिसंधारेज्जा गमणाए ॥ ९६२ ॥ से भिक्व वा २ अहावेगइयाई सहाई सुणेड़ तंजहा-अट्टाणि वा, अट्टालयाणि वा, रा वा, अण्णयराई चरियागि རྩtr , s: *, ༔ ༔ ཙེ༌ 4»ཁང་བ་ཆར་ : - : , ༤༤ ཙེ '''༤ ,, ''ཎས , , , , ༔ ༔ t 1:༔ གར་ ཀཾ༔ » ༈ ཡཙ - ; ***་ : t:: :: ཡཾ 4 - རིག 3•: ཡ *ཧ བ་ ::༈ རཾ:༤ • པ༣ པ tཨཔ ཨུ་ཟླང་བ༔ ལ་ པ༑ པཎཡཔལ : '''ཨ5• 4 5#ry * སཊ ཨནྣམ བཙ ༩ : ,་ :3: 1:ག་བརྒྱུ ༔ 5:44 4: ༈ ཙྩ༢ ཟླ་ ༄༅༅༔ ཨ པ ཨཱ པ པ ཨ, Fཀ༌ཙམ་ན༔ བ , སྶ པ| པཎཨལཙr • : •rt: s - * :yi :: ::; ༤ '' ༈ – ས༔ ༩༤༩:༤ t, * h ', rti མ, :: ཡཐཊྛིཏཾ , f༔ ཨཱསཱཙཱ༔ ཨ, ''ཏཱ, = ཝ • tr, ༢ ཙྩ “༣ ༔ :i; * ཁཙཔཾ༔ ''ལསྶཔགེ ; #' ct it: ; ; '1:, ཝཱསམུཙྪ ན པསུ ༔ ༔ ༔ »str ༣ f-57ད་མt * སྶ ::f*** ཡ it fr. པr''' སཙྩཾ yi; ts: ཟླ༌ ཨཱ༔ ཨཨཔྤf , , ti, པཎྞཙཝF , བསྒྱུ? 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उनि वा सोनिक जलं वा णीहरेज वा विसोहेज वा णो तं सायए णोतं.णियमे ॥९८२॥ सिपा णो तं सायए णोतं णियमे ॥९८३॥सिया से परो दीहाई वालाई दीहाई रोमाई दोहाई भमुहाई, दीहाई कक्खरोमाई दीहाई वत्थिरोमाई, कप्पेज वा संठवेन वापत सायए णो तं णियमे।।९८४||सिया से परोसीसाओ लिक्ख वा जूयं वा णीहरेसका विसोहेज्ज वा णोतं सायए णोतं णियम।।९८५॥सिया से परो अंकंमि वा पलियंति ९६ अंग-पविट्ट सुत्ताणि ककेण वा चुण्णेण वा, वणेण वा उल्लोटिजवा, उव्वलेज्ज वा णोतं सायएको । णियमे । सिया से परो कार्यसि गंडं वा भगंदलं वा, सीओदगवियडेण वा, गोदगवियडेण वा, उच्छोलेज वा, पोवेज वा, णो तं सायए, णो तं णियमे । लियाने परोकायंसि गंडवा जाव भगदलं वा अण्णयरेणं सत्यजाएणं अच्छिदेज वा विच्छिदेव वा, सिया से परो अण्णयरेणं सत्थजाएणं अच्छिदित्ता वा २ णीहरेज वा णो तं सायए णो तं णियमे ॥९८१॥ सिया से परो कायाओ सेय परो अच्छिमलं, कण्णमलं वा, दंतमलं वा णहमलं वा, णीहरिज वा विसोहिमय वा तुयट्टावित्ता पायाई आमजिन्न वा पमजिज्ज वा एवं हिहिमो गमो पायाइ यब्बो, सिया से परो अंकसि वा पलियकसि वा नुयट्टावित्ता, हारं वा अद्धहार का उरत्यं वा, गेवेयं वा, मउडं वा, पालंचं वा सुवण्णमुत्तं वा, अविहिज्ज व पिणहिन वा णो तं सायए णो तं णियमे ॥९८६।। सिया से परो आरामंसिप उज्जाणंसि वा, णीहरित्ता वा पविसित्ता वा पायाई आमनेज्ज वा पमज्जेज वा तं सायए णो तं णियमे ॥९८७॥ एवं णेयव्वा अण्णमण्णकिरिया वि ॥ ९८८ सिया से परो सुद्धेणं वइबलेणं तेइच्छ आउट्टे सिया से परो असुद्धेणं वइबने तेइच्छं आउद्दे, सिया से परो गिलाणस्स सचित्ताणि कंदाणि वा मूलाणि वा वा हरियाणि वा खणित्तु वा कहित्तु वा कट्टा वित्तु वा तेइच्छं आउट्टाविज्जा तं सायए णो तं णियमे।।९८९||कडवेयणा पाणभूयजीवसत्ता वेयणं वेइंति ॥९९८ एयं खलु तस्स भिक्खुस्स २ वा सामग्गिय जं सबहिं सहिए समिए, सया संयमिणं मण्णेज्जासि त्ति वेमि ||९९१॥ तेरहममज्झयणं समत्तं ।। ॥ अण्णुण्णकिरिया-सत्तिक्कयं णाम चउद्दसमं अज्झयणं । से भिक्खू वा २ अण्णमण्णकिरियं अज्झत्यियं संसेइयं णो तं सायए णो . णियमे ||९९२॥ सिया से अण्णमण्णं पाए आमजेज वा पमज्जेज्ज वा गोत भाति- त आयारो सु. २ अ. १५ ९७ पए पोजियो ॥९९३|| स र ॥९५४॥ एवं मनु राम मिपास २ न सामग्गिय बाजामि नि वैमि ॥९॥ चउद्दसममायणं समतं ।। ॥ भावणा णाम पणरहमं अक्षयणं ।। तेषं कालेग ने रामपणे समय भगवं महावीर पंचहत्तरे गानि होत्या, जहान्युत्तरादि नए सत्ता गन्नं वागले, भुत्तरा गम्भाओ ग साहरिए. रयुत्तरा, बार, हरयुत्तराहिं रामओ सभत्ताए मुंडे मागिताअगाराओ अणगारि ध्याए, इत्युत्तराहिं गतिणे पटिपुगे अध्याराए. गिरावरणे अर्णत अणुत्तरे फेवर. मरणागदसणे समुप्पण, साइणा भगवं परिगिन्युए।।९९६।। समणे भगवं महावीरे, माए. औसप्पिणीए सुसममुगमाप, समाए.बीदताए, मुसमाए, समाए, पीपंताए, रामदुसमाए समाए पाइपंताए, दुराममुसमाए समाए बाइपाताए, पण्णहत्तरीए बामेहि मासेदि य अनणयमे हिससे दि, जे से गिम्दा चाउये मासे अहगे पयले, आसादमुद्दे, तस्य गं आसाद मुखरस महीपरखेणं हत्युत्तरादि णक्सत्तेणे जोगमुवाग. रण, महाविजयसिदत्यपुपुत्तरपवरपुंटरी यदिसामोवत्थियबदमाणाभो महाविमा. गाओ वा सागरोवमाई आउयं पालहत्ता, आउखएणं, टिवनवारण भनक्सएणचुए चहत्ता पद खन्टु जंयुद्दीवणं दीये, भारदे यासे, दाहिणाष्टुभरहे दाहिणमाहणड पुरसंणि. वेसमि उमभदत्तस्त मायणरस कोदारसगोत्तस्स देवाणंदाए. माहणीए. जालंधरस्स गुत्ताए सीहुभवभूषणं अप्पाणेणं कुच्छिसि गम्भ वते, समणे भगय महावीर तिण्णागोयगए, यावि होत्या, चहनामिचि नाणइ चुएमित्ति जाणड, चयमाणे ण जाणेद, सहमे णं से काले पण्यते । तओ णं समगे भगवं महावीरे हियाणुकंपए णं देवेणं नायगेयं त्ति कटु जे से वासाणं तचे मासे पंचने पक्खे आसोयबहुले तस्स णं आसोयबहुलस्स तेरसीपक्खणं इत्युत्तरादि णग्यत्तेणं जोगमुवागएणं बासीदि राईदि. एहि पीइयत्तेहिं तेसीइमस्स राई दियस्स परियाए यमाणे दाहिणमाहणकुंडपुरसंणि- सामी उत्तरखत्तियकुंठपुरमगिवेसंसि गायाणं खत्तियाणं सिद्धत्यस्स खत्तियस्म कासवगुत्तस्स तिसलाए, खत्तियाणिए वासिढसगुत्ताए असुभाणं पुग्गलाणं अपहार करित्ता, सुभाणं पुग्गलाण पक्खेवं करित्ता कुन्छिसि गम्भं साहरइ, जेवि य से तिसलाए, पत्तियाणीप, कुच्छिसि गमे तपि य दाहिणमाइणकुंठपुरसंशिसंसि उसभ.....को.....देवा....जालंधरायणगुत्ताए कुग्लिसि गच्नं साइरह ॥९९७॥ समणे , - सामी गमगे भगवं महावीरे पंचधाइपरिबुडे तंजहा---खारधाईए-मन्नणधाईए. . गभ आगए तओ णं पमिइ तं कुलं विपुलेणं हिरण्णेणं सुवणेणं धणेणं धणे मंग्वमिटप्पवालणं अईय २ परिवहइ तं होउ णं कुमार "वद्धमाणे "॥ १००३ ९८ अंग-पविट्ठ सुत्ताणि भगवं महावीरे तिणणाणोवगए यावि होत्या, साहरि जिस्मामित्ति जाणइ, शाह रिएमित्ति जाणइ माहरिजमाणे वि जाणइ समणाउसो ! ॥ ९९८ ॥ तेणं कालेणे तणं समएणं तिमलाए खत्तियाणीए अह अण्णया कयाइ णवण्हं मासाणं बहुपडि पुग्णाणं अट्ठमाणं राईदियाणं वीइताणं जे से गिम्हाणं पढमे मासे दोघे पक्थे चित्तमुझे तस्सणं चित्तसुद्धस्म तेरसीपरखेणं, हत्युत्तराहिं जोगमुवागएणं समः भगवं महावीरं आरोयारोयं पसूया ॥९९९॥ण राई तिसला खत्तियाणी राम भगवं महावीरं आरोयारोयं पसूया, तं णं राई भवणवइवाणमंतरजोइसियविमाण- वासिदेवेहि य देवीहि य उवयंतेहि य उप्पयंतेहि य एगे महं दिव्ये देवुद्धोए देव- सणिवाए देवकहकहे उप्पिंजलगभूए यावि होत्या ॥६०००॥ ज णं रयणिं तिसला ग्वत्तियाणी समणं भगवं महावीर आरोयारोयं पसूया त णं रयणि बहवे देवा य देवीभी य एगं महं अमयवासं च, गंधवासं च, चुण्णवासं य, पुप्फवासं च, हिरणवा च, रयणवासं च वासिंसु ।। १००१ ॥ ज णं रयणि तिसला खत्तियाणी समणं भग महावीर आरोयारोयं पसूया, तं णं रयणिं भवणवइवाणमंतरजोइसियविमाणवासिक देवा य देवीओ य समणस्स भगवओ महावीरस्स सूइकम्माई तित्थयराभिरोयन करिमु ॥ १००२ ॥ जो णं पमिइ भगवं महावीरे तिसलाए खत्तियाणिए कुञ्छिति माणियाणं मोत्तिएणं संखसिलप्पवालेणं अईव २ परिवडइ, तओणं समणस्स भग वओ महावीरम्स अम्मापियरो एयमढे जाणित्ता णिवत्तदसाहसि वोकतसि सूत्रि- भूयंसि विपुलं असणपाणखाइमसाइम उवक्खहावेंति उवक्खडावेत्ता गित्तणाइसपर मंबंधिवग्गं उपणिमंतति उवणिमंतेत्ता बढे समणमाहणकिवणवणिमगाहिं भिन्यु इगपंडरगाईण विच्छटुंति विग्गोति विस्साणेति दातारेसु णं दाणं पन्नभाइति विक हित्ता विग्गोवित्ता विस्माणित्ता दायारेसु णं दाणं पचभाइत्ता मित्तणाइसयणसंबंभिः वगं भुजावति भुजावेत्ता मित्तणाइरायणसंबंधिवग्गेण इमेयारूवं णामधेज कार, जीणं पभिइ इमे कुमारे तिमलाए खत्तियाणीए कुच्छिसि गम्भे आहूए पमिद इम कुलं, विउलेणं हिरणेणं मुघण्णेणं धणेणं धण्णणं माणिकेणं मोतिह तओर A ममगन भगरओ महावीरस्म अम्मापियगे पामावनिया, समणोवासगा यावि टिइन्स्यएणं चुए चइत्ता महाविदेहवासे चरिमेणं उत्सासेणं सिकिस्संति, युझि- . आयारो सु. २ अ. १५ गवण-नाराय-नेतागपाइए अंबधाईए अंकासा माहारिमाणे रम्मानि- हिमतले गिरिकंदासमतीने विष नरपायये Iगुगुलाण संचय ॥१००४॥ ओ नंगमने भगवं महावीर पिण्यायारिप सिनियत्तमालभाये अणुस्मुगाई उस- माणुरसगाई नटखगाई फाममोगाई गदफरिमरगम्यगंधार परिवारमाणे खच विहार गमगे भगवं महावीर फामयगोते तस्मक इतिणि गाम शायमारिति, अम्मापिउनतिए “यसमाणे," गहमम्गुइए "समगे" भीमभयमेव उरा अनेलय परिमई महा ति कद येदि से णामं कर "समांग भगर्व महानार"॥१०८६॥ ममगाम भगाओ महानरम पिया कामोत्तेणं तर लिग नाममा एवमाहिति, रोनहासिद्धरणे इ चा, संसद या, जमंसद वा १०० ममस्म भगवओ महावीररस अम्मा वाशिमगोना तीसे तिगि णामया, एबमाहिति नजा-तिमन्ना या, विदेहांदण्या इया, पिय- कारिणी या १००८॥ गमगाम पं भगरी महायाग पित्तियार 'मुपासे' - कामगोग, रामणान भगयी महावीरम्म बेटे भाया गदियणे कागवगोरोग, नमगाम ण भगवओ महावीरम्न शेट्टा भाणी सुदंराणा कामयगोत्तेग, समणाम भगवश्री महावीरन भगा जमोगा कोटिया गोत्तेणं समगरम भगवश्री महावीरगम भूया कासवगोत्तेणं, नीमेणं दो गाममा, एवमाहिति, तंजदा.-आगोमा र वा, पिवगणा या, मारगम्म णं भगवओ महानारत्म णतुई कोसियगोत्तेणे तास दो गामा, एममादि पति, नजला--मेगबई इबा, नमवई इ वा ॥१००९॥ . होत्था, ने णं बदई वासाई समगोवागगरियागं पालइत्ता, उई जीवणिकायाण गरनवगणिमित्त आलोइत्ता गिदित्ता गरहित्ता पडियागिता अहारिई उत्तरगुण- पायच्छित पडियनिता कुमसंथारं दुहिता, भत्तं पचवाईति, भत्तं पनक्साइना अपच्छिमार मारणंतियाए, मलेहणाए सियसरीरा कालमासे कालं किया तं सरी विषहित्ता अच्चुए कप्पए देवत्ताए उववण्या, तओर्ण आउवखरणं भवक्खएणं स्मति, मुचिसति परिगिव्याइस्मंति, सम्वदुक्याणमंत करिसंति ।। १०१०॥ तेणं कालेणं तेणं समएणं समणे भगवं महावीरे णाए णायपुत्ते णायकुलगियत्ते विदेहे में आ
पादि, बीति बनाई मनिरयाविधिनदंडादि ! । मुनि
वन्ययावा, मोहा कृतमनर, इय गमलय सुरमन !! बाना
मेरिल्लीरमपनयनहल्लिराहि दहिं । गाय..पले धनियले दर
देवा, हुई मानहानरहिं .११.२० लेकाले नम
हेमंत, पदम माने बदन पञ्चे, मसिरहुन्ने, नल नगाविपुललद
परन्लेग, मुनर दिवने, बिदर नहुनें। दृत्युनरावलोकन
थार, चंदनहार लिवियारमहलवादिगार देवनमुयानुरारपरिवारमा
पडे उरी देव व्यागन्द्र, व्यागजिना ईनियतिमाः ।
पौसमश्या विनामेमो, दादे पदिवइ चरिना
१०२ अंग-पविटु सुत्ताणि
नामुहि बाटोमदर्श, च्च वहति का अनुमकदा ।
पुरी नुत बहंदी अनुमा दाहिने सामना अवरे बहंदि व
आउन पाने ।। १ कई व कृमि, उनका बहा कराने
हमारे दर गगनुमहिं !! ८ ॥ विदत्यकार:
रम्भ । १० वि पनि आठ वटम्बिई बहुव्हिाचे
गानिमार छयार विकार परिसर छ भने माग
माले २ उचामनिवेदन..
भूमिनागमति २ चंदई नियन्हल्यादतिकोना माविक
हामी निविकीनदलवाहिनाको यार, बोरिना सहिदपुर
दो मिनट, आम का अनुया, तीन ये जानकारी
माल नगरी महाल ईनल आना पडला
नमः मग मा दादाहियाने कामचनुर्विदलो को
म टेबिदे देवराया नमाल नायनहाल मुलायाहिर
यो मटिल परिच्छिना "अहनिमंत" निकर
बाहर, नीमनी मात्र महावीर दाहिने दाहिन वाने का
को कानः सिद्धा मोकार काट कोना, "में अका पार
टिकट मानावं चरिन पदिया,ममा चार पडिदिना देवपरितन
परिब अनिय विनय व १० देबो नाल्यो
-- . . आयारो सु. २ अ. १५ १०५ आपदमरानिक्लेवगाअगभिर नि नरगा गावगा ||१०३८॥ अनावरा पंगमा गालगा, मानोपराममोपनगोई से निग्गी की अगामामोषणभो, या मा, अमालोइयाभोपाभो.सेनि पागाई ना ४ अमिणच ना माय उदया, नाला भाला मानायगी निर्णय, जो अगालोयरा. भोयगमोति पंचमा भायना ।।१०३९।। प्रयायता (पटमे) मामए सम्म माम फामिण पालिए नारिए रिहिट अहिए आगाए आराहिए यानि भाइ १०४०॥ पढगे ! मस्याए पागाइवायाओ चेरमा ।। १०४१ ।। अहायर दो महरा पानयामि स मुगाना पदोमं से कोहा या, लोहा या, भया या, माना या, मामयं मुग भारोबा, मेवगंग मुम भानावेथा, अपि मुलं भारत मनम गुजाणा, विविध शिविण मगमा ययगा यायला तस्स भंते ! पटियामामि जाय बोसिमामि ।।१०४२ ।। तसिमाओं पंच भाषणाओ भवति ॥१०४३ ॥ तटियमा पदमा भाना, अगाइमामी से गिरगंये णो अपणुवी भासा; कवली धूया अगवाहमासी में भिग्गंध समाथि मोमं ययगाए, अणुवी भारी से गिग्गी, जो अगाणुचीडभामिनि पदमा भाषणा ॥१०४४|| अहावरा दीया भानणा, कोई परिजागाइ से जिग्गंधे, गो कोरणे लिया, कवली यूया, कोदपत्ते कोहत्तं समा- यण्या मोमं ययगाए, कोई परिजागाद से गिगी, णय कोदणे मियनि दोगा भायणा ॥ १०४५ ॥ अहावरा तया भावणा, लोभ परिजाणाइ से गिग्गय, गो य लोगणए सिया, फेवली धूया; सोभासे लोभी समावएडा मोसं वयगाए, न्योमं परिजागह से मिगंध, गो य लोमगर सियत्ति तया भावणा ।। १८४६ ॥ अहावरा नउत्या भावगा, गवं परिजाणाइ से गिग्गय जो भयभीनए सिया; केवली चूया, भयप्पत्ते भीरू. रामायएडा मोगं ययणाए, भयं परिजाणइ से णिग्गंधे, गो भयभीगए सिय तिनउत्था भावणा ।। १०४७ ।। अहावरा पंचमा भावणा, हामं परिजाग से गिग्गंधे, गो य हासगण, सिया, केवली गा, हासप्पते हासी समा. यएला मोसं वयणाए, हामं परिजाणइ से णिग्गथे, जो य हासणए सियत्ति पंचमा भाषणा ।। १०४८ ॥ एयायता दोगे महन्धए सम्म कारण फासिए नाय आणार, आराहिए या वि मवइ । दोचे भंते ! महन्वए० ॥१०४९ ।। अहा- वरं तय भंते ! महस्वयं पमस्खामि सव्यं अदिण्णादाणं; से गागे वा, णगरे वा, माणइ, तंजहा-आगई गई ठिई चयणं, उववायं भुत्तं पीयं कई पडिले मंतरजोइसियविमाणवासिदेवेहि य देवीहि य उपयंतेहिं य जात्र उप्पिंजलगमा यावि होत्था ॥ १०३०॥ तो णं समणे भगवं महावीरे उप्पण्णवरणागतमा स्साणं ॥ १०३१॥ तओ णं समणे भगवं महावीरे उपण्णणाणसणधरे गोयन परूवेइ, तंजहा-पुढविकाए जाव तसकाए ॥ १०३२॥ पढम भंते! माग पचक्खामि, सव्वं पाणाइवाय से सुहुमं वा बायरं वा तसं वा यावरं वा भंते ! पडियामामि गिंदामि गरिहामि अप्पाणं वोसिरामि ॥१०३३ ॥ तलिम गिग्गये, णो अणइरियासमिए ति, केवली बूया अणइरियासमिए से कि पाणाई ४ अभिहणन या, यत्तेज वा, परियायेन वा, लेसेज वा, उहवेत. इरियासमिए से णिग्गंगे, णो इरियाअसमिए ति पढमा भावणा ॥ १०३५ पाइए, गुओरधाइए तहप्पगारं मग गो पधारेना, मग परिजागाइ से नि नमगावगी उमारिया, जे यई परिमाणाद सेणिग्गंणे जा य वई : १०४ अंग-पविट्ठ सुत्ताणि आवीकम्मं रहोकम्म लवियं कहियं मगोमाणसियं सवलोए सवजीवाण, सुन्न भावाई जाणमाणे पासमाणे एवं च ण विहरइ ।। १०२९ ॥ जणं दिवसं सम.. भगवओ महावीरस्स गिव्वाणे कसिणे जाव समुप्पण्णे, तण दिवस भवणवइया अप्पाणं च लोग च अभिसमिक्ख पुत्वं देवाणं धम्ममाइक्खइ तो पन्छा समणाणं णिगंथाणं पंचमहव्ययाई सभावणाई जीवगिकायाई आइक्खइ, भर पाणाइवायं करेजा ३ जावधीवाए तिविहं तिविहेणं मणसा वयसा कायसा, स पंच भावणाओ भवति ॥ १०३४ ।। तत्यिमा पढमा भावणा, अहायरा दोचा भावणा, मग परिजाणाइ से गिग्गये, जे य मणे पावए गहिरिए अणयकरे हेयकरे भैयकरे अहिकरगिए पाउनिए, परियाविए. प. यमणे अपावर ति दोवा भावणा ।। १०३६ ॥ अहावरा तथा भावणा, परित्राणाद में निर्णय जा य यई पानिया सावन्ना मकिरिया बाव भोग इरियासमि स ? मिनमा मायणा ॥ १०३७ ॥ अहापरा चटत्या भाषणा, आयाणभंटमत्तमा ত";", , , ' মাগমগিনিগনি মিয়া -alifa. में गिग्गा पागाई भगाई जीवाई गनाईज माता का ना, ना आयागमनमायणामनिए में गिगा'
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अरणे वा, अप्पं वा, ईना, अवा, शृलं ना, चित्तमंत या, अचित्तमा या पंच भावणाओ भवति तत्थिमा पढमा भावणा, अणुवीइ मिउग्गहं जाई से नि पाणभोयणभोई से णिग्गंथे णो अणगुणवियपाणभोयणभोई, केवली बूया, अणणु वियपाणभोयणभोई से गिग्गंथे, अदिषणं भुजेजा, तम्हा अणुण्णवियपाणभोयणभं- वरा तच्चा भावणा, णिग्गंथे णं उग्गहसि उग्गहियसि एतावताव उग्गहणसी- सिया, केवली बूया, णिग्गंध णं उग्गहंसि अणुग्गहियंसि एतावताव अणुग्गहणर्स अदिण्णं उगिण्हेजा णिग्गंधणं उग्गहसि उग्गहियंसि एतावताव उग्गहणसी:- १०६ अंग-पविटु सुत्ताणि णेव राय अदिणं गिहिजा, णेवणेहि अदि गेहावेजा अण्णंपि अदि गिण्हतं ण समणुजाणिज्जा जावजीवाए जाय योगिरामि ॥ १०५० ॥ तरिसमा णो अणणुबीई मिउग्गहं जाई से णिग्गथे केवली व्या अणणुवीई मिउग्गहे जाई - णिग्गंधै अदिणं गिण्हेजा अणुवीइमिउग्गह जाई से गिग्गये णो अणणुवीइग्नि उग्गहं जाई त्ति पढमा भावणा ॥ १०५१ ॥ अहावरा दोघा भावणा, अणुष्णविष्ट से णिग्गंथे णो अणणुण्णवियपाणभोयणभोई त्ति दोघा भावणा ॥ १०५२ ॥ अ गिरग सियत्ति तथा भावणा ॥ १०५३ ॥ अहावरा चउत्था भावणा, णिग्गयेणं उ. हंसि उग्गहियंसि अभिक्खणं २ उग्गहणसीलए सिया, केवली बूया, उग्गहंसि उग्गहियंसि अभिग्वणं २ अणोग्गहणीले अदिण्णं गिण्हेजा गि उग्गहंसि उग्गहियसि अभिक्खणं २ उग्गहणसीलए सिय त्ति चउत्था भा ॥ १०५४ ॥ अहावरा पंचमा भावणा, अणुवीइमिउग्गहजाई से जिग्गंथे साहम्मि जो अणणुवीइमिउग्गहजाई, केवली बूया, अणणुवीइमिउग्गहजाई से गि साहम्मिएमु अदिण्णं उगिण्हेजा, अणुवीइमिउग्गहजाई से णिग्गंथे साहम्नि जो अणणुवीइमिउग्गहजाई इइ पंचमा भावणा ॥ १०५५ ॥ एतावताव महराए सम्म जार आगाए आराहिए यावि भवइ, तच भंते ! मह ॥ १८५६ ।। अहावरं चउत्थं महव्ययं पचक्खामि सव्वं मेहुणं, से दिलं मामं वा, निरिकग्नजीणियं बा, पेव रायं मेहुणं गच्छेबा तं चैव अदिष्णाद बनारया गाणियबा, जाव वोमिरामि ॥ १८५७ ॥ तरिसमाओ पंच मान भवति ॥ १८५८ ॥ तन्धिमा पदमा भाषणा, णो गिग्गंथ अभिरक्षणं २ र कई काइनए गिया, येवली बृया, गिग्गशेषणं अभिनख २ इत्थीणं कहं कहे यो मो... HTTAR E६ १०६.४.१ ARE RAT KART- R TED rini पानी म. ke thinkinपर मे Katariandit सोनोगevar An, REAL ME यो amirxnESTS या * मरियर की शुमा, विनीय पERI HAI - शोमा irritteningershasrt सम- AE मालाममा १८६३ | MIR दर मयार, प्रय २t sxerat 44 भने :मय सण परिग से अपी की या amit या चित्रात पाने की पति FTदि. परिसर मा अनि पारग से सम- ATMEN सलमानायचे मामा अनिधि Ever, भोपी भीम मामा सहा गुणे, गयो । यो , यो रामो गिझेदा जो मुना, गो अहमयमा यो Saralism या arrel गणुकामगुनहि संहदि सन्नमाणे Finarमय शशिभपा गतिमिंगा सवियलिपनायी सभासो HT१६६|| समागमोद सा रोगविसमागमा दोसा
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आयारो सु. २ अ. १६ १०९ ने महलयं ।।१०८१ ।। होएहि पनमहलहिं पाहि य भाषमाहि यो अनगारे अहान अदाफप्पं अहामाग सम्म कारण फासिना, पाहिला, हरिता, पिहिता, भागाए आराहित्ता यायि भया ।। १०८२॥ पणरहम समयणं समत्तं ॥ । विमुत्ती णाम सोलसमं अक्षयणं ।। अगिममावामनुति अंगो, पलोवप नुपामिद अणुत्तर; पिऊतिरे विष्णु अगार- गणं, अभीम आरंभरिगई नए ।। १०८३ ।। सहागय मिजयुमणेतसंजय, अणे- विष्णु जनमेसन नुदेति वायाहिं अभिव गरा, सरेहिं संगामगर य कुंजर १७८४ ॥ तहप्पगारे िजद हीलिए, ससदफामा फल्सा उइंरिया; तितिक्रए पनि अनुढचेयमा, गिरिव्य वारण ण गंपवेयए ॥ १०८५ ॥ उचेहमाणे कुसलेटिं "पत्ते, अक्तदुक्ली तसथावरा दुही; अन्ट्सए सव्यसहे महामुणी, तहा हि से स्ममणे समाहिए ॥ १०८६ ॥ विऊ णए धम्मपयं अणुत्तरं, विणीयतण्हस्रा गिल्स हायओं; समाहियस्मन्गिसिहा व तया, तो य पणा य जसो य बहर १८८७ 11 दिसोदिसिंडणंतजिणेण ताइणा, महप्पया सेमपया पवेश्या; महागुरु- तास्सयरा उईरिया, तमेव तेकत्तिदिसं पगासया ॥ १०८८॥ सिएदि मिक्सू लासिए परिव्यय, असमियागु चएन पूर्ण; अगिरिराओ लोगमिणं तहा परं, निज्जई कामगुणेहिं पंडिए ।। १०८९ ॥ तदा विमुपास्स परिणचारिणो घिईमओ स्वखमम्स मिक्युगो; विसुष्माई जंसि मलं पुरेकर्ड, समीरियं मप्यमले व नोइणा १०९० ॥ से हु परिणा समयंमि वइ, गिराससे उबरय मेहुणा चरे; भुयंगमे पुगतयं बहा नहे, विमुगध से दुहसेन माहणे ॥ १०९१ ।। जमाहु ओई सलिलं उपाय, महासमुदं व भुयाहिं दुत्तरं; अहे य णं परिजाणाहि पंडिए, से हु मुणी मंतकडे ति युचा ॥ १०९२ ॥ जहा हि बदं इह माणवेहि, जहा य तेसि तु मा वमोक्ख आहिओ; अहा तहा बंधविमोक्ख जे विऊ, से हु मुणी अंतकडे त्ति - पुचद ।। १०९३ ॥ इमंगि लोए परए य दोमुषि, ण विज्जइ यंधणं जस्स किंचिवि; से हु गिरालंबणमप्पइटिए, फलंकली भावपहं विमुच्चा त्ति बेमि ।। १०९४ ।। सोलसमं विमुत्तिज्झयणं समत्तं ।। सदाचार णाम बीओ सुयक्खंधो संपुण्णो॥ * इइ आयारो
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了
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年度
单
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सूयगडो सु. १ अ. १ उ. २ १११
नई ॥१९॥ ते णावि संधि णमा णं ण ते धम्मयिक जणा। जे ते उ वाइणो
गं ते ओहंतराऽऽहिया ।।२०॥ ते णावि संधि णद्या ण, ण ते धम्म विऊ जणा।
-उ याइगो एवं ण ते संसारपारगा ॥२६॥ ते णावि संधि णचा णं, ण ते
विऊ जणा। जे ते उचाइणो एवं ण ते गम्भस्स पारगा ॥२२॥ ते णावि
णमा णं, ण ते धम्मविज जगा । जे ते उ वाइणो एवं ण ते जम्मस्स पारगा
३॥ ते णावि मंधि णया णं, ण ते धम्मविऊ जणाजे ते उ वाइणो एवं ण
हुसंवरस पारगा ||२४|| ते णावि संधि णचा गं, ण ते धम्मविक जणा । जे ते
पाहणी एवं ण ते मारस्स पारगा ॥२५॥ णाणाविहाई दुक्खाई अणुहोति पुगो
।। संसारचछायालम्मि मच्चुवाहिजराकुले ॥ २६ ॥ उच्चावयाणि गच्छंता
भेमेस्सति गंतमो। णाययुत्ते महावीरे एवमाह जिणुत्तगे ॥ २७ ॥ त्ति वेमि।
॥ वीओ उद्देसो ॥
आघायं पुण एगेसिं उबवण्णा पुढो जिया। वेदयति सुहं दुक्खं अदु या
पंति ठाणी ॥२॥ण तं संयं कई दुक्खं कओ अण्णकडं च णं । सुहं वा जइ
दुक्खं सेहियं वा असेहियं ॥२॥ सयं कई ण अण्णेहिं वेदयंति पुढो जिया ।
गय तं तहा तेसिं इहमेगेसिमाहियं ॥३॥ एवमेयाणि जम्पंता बाला पण्डियमा-
। णिययाणिययं संत अयाणता अवुद्धिया ||४|| एवमेगे उ पासत्या ते भुजो
प्पगम्भिया । एवं उवटिया संता ण ते दुक्वविमोक्खया ॥५॥ जविणो मिगा
हा संता परियाणेण वज्जिया । असंकियाई संकंति संकियाइं असंकिणो ॥६॥ परि-
"णियाणि संकेता पांसियाणि असंकिणो। अण्णाणभयसंविग्गा संपलिंति तहिं तहिं।।७।।
रह त पवेज बझं अहे वज्झरस वा वए। मुच्चेज्ज पयपासाओ तं तु मंदे ण
ईई ॥ ८॥ अहियप्पाऽहियपण्णाणे विसमतेणुवागए । स बद्ध पयमासेणं तत्थ
नयं गियच्छइ ॥९॥ एवं तु समणा एगे मिच्छदिट्ठी अणारिया । असंकियाई
कति सकियाई असंकिणो ॥१०|| धम्मपण्णवणा जा सा तं तु संकंति मूढगा।
रम्भाई ण संकति अवियत्ता अकोविया ॥११॥ सव्वप्पग विउकस सव्वं मं
हूपियां । अप्पत्तिय अकम्मसे एयमह मिगे चुए ||१२|| जे एयं णाभिजामंति
बच्छदिट्टी अणारिया। मिगा या पासनद्धा ते घायमेस्संतिणंतसो ॥१३॥ माहणा
समणा एगे सवे गाणं सय वए। सबलोगे विजे पाणा, ण ते जाणंति किंचण॥१४॥
लिया चव धायगेस्मति तसा ।। ४ । इणमण्णं तु अण्णाणं इहोगेसिमा णालं कुतो अण्णाणुसासिउं ।। १७ ।। वणे मूढे जहा जंतू मूढे णेयाणुगामिए । वि एए अकोविया तिव्वं सोय णियन्छई ॥ १८ ॥ अंधो अंध पहं गतो दूरमा गच्छद । आवज्जे उप्पहं जंतु अदुवा पंथाणुगामिए ॥ १९॥ एवमेगे गियर धम्ममाराहगा वयं । अदुवा अहम्ममावन्ने ण ते सव्वज्यं वए ।।२०।। एकर वियकाहिं णो अण्णं पज्जुवासिया। अप्पणो य वियकाहिं अयमंजू हि दुम्मई 1.! एवं तकाइ साहेंता धम्माधम्मे अकोविया । दुक्खं ते णाइउद्देति सउणी जहा ॥ २२ ॥ सयं सयं पसंसंता गरहंता परं वयं । जे उ तत्थ विउस्संति ते विउस्सिया ।। २३ ।। अहावरं पुरक्खायं किरियावाइदरिसणं । कम्मचिंतर संवेयइ परं अवियत्तं खु सावज ॥ २५॥ संतिमे तउ आयाणा जेहिं कीरइ पार कीरइ पावगं । एवं भावविसोहीए णिवाणमभिगच्छई ।। २७ ।। पुत्तं पियार रम्भ आहारेज असंजए । भुजमाणो य मेहावी कम्मुणा गोवलिप्पइ ॥२८॥ मणसा जे पउस्संति चित्तं तेसिं ण विनइ । अणवजमतहं तेसिं ण ते संयुडचा पावगं जगा ||३० ॥ जहा अस्साविणिं गावं जाइअंधो दुरूहिया । इच्छई पर गंतु अंतरा य विसीयई ॥ ३१ ॥ एवं तु समगा एगे मिच्छदिट्टी अगारि जं किंचि उ पूइकडं सट्ठीमागंतुमीहियं । सहस्संतरियं भुंजे दुपक्खं च ॥१॥ तमेव अवियाणता विसमंसिअकोविया। मच्छा वेसालिया चेव उदगह भियागमे ।।२॥ उदगम पहावेणं मुसिग्वं तमंति उ । ढंकहि य कंकी आमिरात्यहिं ते दुही ॥३॥ एवं तु समगा एगे वट्टमाणमुहेसिगो। मा ११२ अंग-पबिट्ट सुत्ताणि गिलनरतू अमिलरनुस्स जना युत्ताभासारण हेर्ड से रियाणाइ भासिय तऽशुभ ॥१५॥ एवमण्णाणिगा णाणं वयंता निरागसंग । णिच्छात्मण नाणंति मिला अबोहिया ॥ १६ ॥ अण्णाणियाणं वीमेशा अण्णाण ण णियच्छइ । अपनो म हाणं संमारस्स पवगुणं ॥ २४ ॥ जाणं काएणऽणाउट्टी अबुहो जं च हिंसइ ।। अभिकम्मा य पेसा य मणसा अणुजाणिया ॥ २६ ॥ एए उ तउ आयाग ॥ २९ ॥ इच्चेयाहि य दिट्ठीहिं सायागारवणिस्सिया । सरणं ति मण्णमाणा संसारपारकखी ते, संसारं अणुपरियर्सेति ।। ३२ ॥ त्ति वेमि ।। ३ ॥ तइओ उद्देसो॥
रण सूयगडो सु. १ अ. १ उ. ४ देवउत्ते अयं लोए बम्भउत्ते इ आवरे ॥ ५॥ ईसरेण कडे लोए पहाणाइ सहावरे । जीवाजीवसमाउत्से गुहदुक्खसमणिए ॥ ६ ॥ सयंभुणा कडे लोए इइ वुत्तं महे- सिणा । मारेण संयुया माया तेण लोए असासए ॥ ७॥ माहणा समणा एगे आह अण्डकडे जए । असो तत्तमकासी य अयाणता मुसं वए || ८ }] सए हिं परियारहिं लोग घृया कडे ति य । तत्तं ते ण वियाणति ण विणासी कयाइ वि १॥९॥ अमगुणसमुप्पाय दुक्खमेव वियाणिया । समुप्पायमयाणता कहं णायंति संघरं ? ॥ १०॥ मुद्धे अपायए आया इहमेगेसिमाहियं । पुणो किट्टापदोसेणं सो तत्थ अपराई ।। ११ ॥ इह संबुडे मुणी जाए पन्छा होइ अपावए । वियहम्यु जिहा भुजो णोरयं सत्यं नहा ॥ १२ ॥ एयाणुवीइ मेहावी बम्भचेरेण ते वसे । पुढी पाबाउया सरे अक्खायारी सयं मयं ।। १३ ।। साए सए उवहाणे सिद्धिमेव अण्णहा । अहो इहेव वसवत्ती सम्यकामसमपिाए ॥ १४ ॥ सिद्धा य ते अरोमा य इहमेगेसिमाहियं । सिद्धिमेव युरो काउं सासए गठिया णरा ।। १५ ।। असंखुडा अगाईय भमिहिंति पुगो पुगो । कप्पकालमुवनंति ठाणा आसुरकिरिसिया ॥१६॥ त्ति बेमि॥ ॥ पदम अज्झयणं चउत्थो उद्देसो । एए जिया भो ! ण सरणं वाला पण्डियमाणिणो। हिचा णं पुष्यसंजोय सिया किचोवएसगा ॥१॥ तं च भिक्खू परिण्णाय वियं तेसु ण मुच्छए । अणुकात्से अप्पलीणे मझेण मुणि जावए ।। २।। सपरिग्गहा य सारम्भा इहमेगेसिमाहिये अपरिग्गहा अणारम्भा भिक्बू ताणं परिवए ॥ ३ ॥ कडेसु घासमेसेन्ना विऊ दत्तेसणं चरे । अगिद्धो विप्पमुको य ओमाणं परिवजए ॥ ४ ॥ लोगवार्य ट्ठी गिसामेजा इहमेंगेसिमाहियं । विवरीयपण्णसंभूयं अण्णउत्तं तयाणुयं ।।५।। अणते गिइए लोए सासए ण विणस्सई । अंत णिइए लोए इइ धीरोऽतिपासई ॥६॥ अपरिमाणं वियाणाइ इहमेगेसिमाहियं । सव्यत्य सपरिमाणं इइ धीरोऽतिपासई ७ ॥ जे केइ तसा पाणा चिठंति अदु थावरा । परियाए अस्थि से अंजू जेण दन्ति तसथावरा ||८|| उरालं जगओ जोग विवजासं पलेंति य । सव्वे अकंतदुक्खा यि अओ सच्चे अहिंसिया ॥ ९॥ एवं खु णाणिणो सारं जंण हिंसइ किंचणं । अहिंसासमयं चेव एयावतं वियाणिया ॥ १०॥ युसिए य विगयगेही आयाणं I दुस -- पत्थए अवि सुरसे ण य तं लभेग णो ।। १६ ॥ जइ कालणियाणि कासिया जा . : गुना मुगः नमो: Hi Hunt गुगनपुगे ।। || देवा गंगा अगरा मिनरा गलगिता । गरसेडिमारणा ठाणा ते विनत', काग ग गंगr गम्मगदा कालेण जतनो वाले ना मषणम्प आउलानि हः ॥३१ जे यावि बहुरमुप गिया भमिग मादण गिराए सिया। अमिणगडहि मदिर किसे चरे जइ वि य भुजिय मासमंतसो। जे इ. मायाइ मिनई आगता मला मुच्छिया मोहं जंति णरा असंवुडा ॥ १०॥ जययं विराति जोगवं अणुपागा पं ॥१२॥ ण वि ता अहमेव लुप्पए लुप्पंती लोगंसि पाणिणो । एवं सहि एहि पर गुण्डिया विहुणिय धंसयई सियं रयं । एवं दविओवहाण कम्मं खवा तपरि माहणे ॥ १५ ।। उठियमणगारमेसणं समणं ठाणठियं तवस्सिणं । डहरा सुमार :: :: :: :: :: :: :: :: :: मेगा मानो परमो उनी नाभि जगई पुठो जगा को पालियो । गगन : गाई गोर तिव्वं ते कम्गेहि किमः ॥ ७ ॥ मह पाग विशेगाष्ट्रिय अविषण्णे यह धुवं । णाहिसि आरं कओ परं चेहासे कम्मेहि किय:॥ ८॥ जए विय पंतसो ॥ ९ ॥ पुरिसोरम पायकम्मुणा पलियत मणुयाण जीवियं । राणा इह पर दुरुत्तरा । अणुसासणमेव पयामे वीरेहिं सम्भं पवेक्ष्यं ॥ ११॥ विरया वीरा र ठिया कोहकायरियाइपीसणा । पाणे ण हणंति सव्वसो पावाओ विरयाऽभिगिया अणिहे से पुढेऽहियासए । १३ ।। धुणिया कुलियं व लेवयं किसए देहमणारः इहिं । अविहिंसामेव पव्वए अणुधम्मो मुणिणा पवेइओ ॥ १४॥ सउणी जह में पुजारा दविन मित्सुं नमहियं को सरगति संनित्तए।॥१७॥ घशामेहि माविमा बदाहिनाधिई बजीनिय गावस्यए गंगित ।। १८ । ईति य शं मनाइयो माय पिया यमुपाय । पोनादिन पासी नुमंलंग पर पि हामि पोरागो ।॥ १९॥ सपणे नज्यिा मोई जति गरा अबुटा । विराम चिसमेहि गादिया ते पायेkि विभया ॥ २०॥ तमादपि सय पंरिए पाबाओ विरपऽमिनिटे । महाशित मिदिपई, पेयाटन ॥२१॥ ययालियमग्गमागओ मण- एम नियुचिमा वित्तं च गायत्री आरम्भ न सुथुठे चरे ॥ २२ ॥ । ॥ बीअं अक्षयणं बीओ उद्देसो॥ य जहाद में यह मवाय मुणी १ मा । गोयग्णतरेण माहणे अह- अण्णेमि खिणी ॥१॥ जो परिभवः परं जणं संसारे परिवत्तई मई। अगिया उ पाविमा इ संसाय मुणी 7 मई ॥ २॥ जे याचि अणायगे विच पसगराए लिया । जे मोणपयं उपाहिए जो लो समयं मया चरे उम अध्यरम्भि संजमे संमुद्धे समणे परिव्यए । जे आवकहा समाहिए पटमकासि पंडिए ॥ ४ ॥ दूर अणुपस्सिया गुणी तीयं धम्ममणागय तहा। हि माहणे अवि हण्णू ममम्मि रीयइ ॥५॥ पण्णरामते सया नए ममुदाहरे मुणी । नुहमे उ सया भट्सए. जो मुझे णो मागि माहणे बहुजणगमणम्मि संवुडी सम्बटेहिं गरे अणिलिए । हरए व सया अणा- मं पादुरकासि कासवं ॥ ७॥ बहवे पाणा पुदी सिया पत्तेयं समयं समी- जे मोगायं उयटिए विराई तत्थ अकासि पंडिए ।। ८॥ धम्मस्स य पारए रम्भस्स य अंतए ठिए । सोयति च णं ममाइणों णो लमति णिय ॥ ॥ इहन्बोगदुहावई विऊ परलोगे य दुहं दुहावहं । विद्धसणधम्ममेव नई को गारमावसे ॥ १०॥ मदयं पलिगोव जाणिया ना वि य वंदण- हं। सुहुमे साले दुद्धरे विउमंतापयहिन संथवं ॥ ११ ॥ एगे चर ठाण- तयणे एग समाहिए सिया । भिक्खू उवहाणवीरिए वइगुत्ते अब्दात्त- 1१२॥ जो पाहे ॥ यावपंगुणे दारं सुण्णवरस्स संजए। पुढे ण उदाहरे .
तागोर दारं ॥ २३ ॥ तं गमिसागर जे मन mfETITIगा I से गिण्ट हिंग ति उत्तम गयमित संराउनहाय परि।। २४॥ उत्तरमा अहिया गामधम्म इद में अणुस्मुर्य। जमी निरया समुद्रिया कासवल। धम्मचारिणी ॥ २५॥ जे एय चरति आहियं णापण मध्या महेसिया अभिकखे उवहिं धुणित्तए । जे दूमण एदि णो णया ते जाणंति समाहिम कयकिरिए ण यावि मामए॥२८॥छण्णं च पसंस णो करे ण य उस पर ॥३०॥ण हि णूण पुरा अणुस्सुये अदुवा तं तह गो समुट्टियं । मुणिणा साना ..... :: :..." !! :: : उट्टिय ते समुहिया अण्णोण सारेति भम्मओ ||२६ ॥ मा पेह ॥ २७ ॥ णो काहिए होज संजए. पासगिए ण य संपसारए । णमा धम्म माहणे । तेसिं सुविवेगमाहिए पणया जेहि सुजोसियं धुयं ॥ २९ ॥ अणिहे सुसंवुडे धम्मट्टी उचहाणवीरिए । विहरेज समाहिईदिए अयहियं खुदुहेण हा पुरा आहियं णाएणं जगसम्बदंसिणा ॥ ३१॥ एवं मत्ता महंतरं धम्ममिणं सहिया जणा। गुरुणो छंदाणुवत्तगा विरया तिण्ण महोघमाहियं ॥ ३२ ॥ त्ति बेमि ।।
११९ ! पोस णे ताय पुढो ते खुड्डिया इमा। पियरं पोस एवं लोगो उत्तरा महुरुल्लावा : जणं गमे ॥५॥ पासामो जामु ताव अकामगं परिकम्म . समीकयं । हिरणं ..::: कालुणीयममुढिया। णे जायं मालुया वित्रद्धो णाइसंगेहि दूरए ॥११॥ एए ...... ाणाइसंगेहि मुन्छिया वियं णायकंखिन्ना सोचा झ्या। बुद्धा जत्थावसप्पंति माहणा अदुव खत्तिया । त्थस्सरहजाणेहिं विहारगमणेहि ॥ १६ ॥ वत्थगंधमलंकारं इत्थीओ 'जयामु तं ॥ १७॥ जो तुमे णियमो तस्स सब्यो संविजए तहा ॥१८॥ वेव णं णिमंतेंति णीवारेण व सूयरं नए । तत्थ मंदा विसीयंति उन्ना- उवहा. तजिया । तत्थ मंदा भी गिद्ध इत्थिसु। मा ई. चा •. 74 यणं मीर को जाणइ परा-
मगर METIMARATHपा माग
या । गाणं गाई वान्ट इत्या ना कुद्धगामिनी ॥ १६ ॥ प.प.भो कमिमा
फरगा दुहियाराया । हत्थीना गार्मवित्ता कानाचग गया गिह ॥१॥ तिबेमि।
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॥१२॥ आयाममायार निकामिनाया। दणियोगमायण
दहिटगारिया ॥ १८॥ अमंग परिगीगि नागे नागे ति मुर्ग।
foir बाबा मागायनमः य ।।१५ || राय दीप मुरिमार,
म
॥ तइयं अज्झायणं वीओ उद्देसो
अहिगे मुटुमा संगा गिरणं जे दुगत्तरा । जय पग विसीयति न
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सुपगहो सु. १ अ. ४ उ. १ १२१ साभाराय रिमी ॥२॥ आगिने देनिनकानावापा महारिसी। पारासरे गं भोपा थोपानि हरियाभिम॥३॥ र पुन महायुरिना आहिया मिया । मोया दीगोदगं मिसाइए मगमगुस् ! तत्य मंदा लिसानि साइमिया व गाभा । पिलो परिमागिरिमप्पी ग गंगग ।। , गेगे इमामनि सायं सात विनय आधि मग परमं न ममाहिम ॥६॥ मा एवं अवमाता अपेणं पाना । यस अगोक्या अगोहारिब जह ।। || पागाइयाए रहना मुनापार, अमेजया । अभिवादाणे बहता मटुणे य परिगहे॥८॥ एवमेंगे उ पागया पति अगारिला । एधानमं गया बाला नियमासगपरंमुहा ॥९॥ जहा गदै पिचागं वा परिपीटेज मुनगं एवं विणणा- यगिरा दोनो तत्थ ओ सिया ? ॥ १०॥ नहा मधादणे णाम थिमि भुंगई दरं एवं विष्णवमित्याग दोनो सत्य को सिया ? || ११॥ जहा विहंगमा पिंगा थिमि मुंजा दगं । प.चे विगगिधामु दोसो नत्य को निया ? ||१२॥ एकमेगे उपासत्या निन्छट्टिी अगारिया। अशोचवण्या कामहिं पृयणा इव तरुणर, ॥१३॥ -भणागयमरसता पच्युप्पणगगगगा । ते पन्छा परितपंति खाणे आदम्मि जोमणे ॥१४॥ जेहि काले परितं ण पच्छा परितप्पए । ते धारा बंधणुम्मुया णाव- तवंति जीवियं ।। २५ । नहा णाई यरणी दुत्तरा यह मंमया । एवं लोगसि गारीओ कुत्ता अईमया ।। ६६ । जेहिं नारीण संजोगा पृयापिटओ कया। सन्चमेयं गिरातिया से लिया नुसमाहिए ।।१७।। ए.ए. आचं तरिस्मंति समुह यवहारिणी । जत्य पाणा विसणगासि विनंती मयफानुगा ।॥ १८॥ तं च मिक्लू परिणाय सुब्बए. समिए चरे । मुसावायं च वधिज्जा अदिण्णादाणं च बोसिरे ॥ १९॥ उदृमहे तिरिय वा जे के तमथायरा । सम्पत्य विरई कुम्जा संति गिज्याणमाहियं ।। २० । इमं च धम्ममायाय कानवेण पयेइयं । कुब्जा भिकम्यू गिलाणस अगिलाए समाहिए । २१ ॥ संखाय पेसलं धम्म दिद्विमं परिणिबुडे । उवमग्गे पियामित्ता आमोक्साए परिव्यएज्जासि ।।२२ ॥ त्ति चेमि ।। ॥ इत्यिपरिष्णा णाम चउत्यं अज्झयणं पढमो उद्देसो।। -1 जे मायरं च पियरं च विपजहाय पुषसंजोगं । एगे सहिए चरिस्सामि * आरयमेहुणो विवित्तेनु ॥ १।। मुटुमेणं तं परिकाम्म छण्णपएण इथिओ मंदा । १ :
. सुयगडो सु. १ अ. ४ उ. १ १२१ पारायंगे रिनी ॥२॥ आनि देथिलाधामायण महारिभी। पारामरे गोमा चीयानि दरिवागि य॥३॥ एए. पुर्ण महापुरिमा आदिना इह नपा । मीना बालोदगं सिता गंयमगुसा ।।४तत्म मंदा मिसीनि इचिया र गहना । पिट्टी परिमपंति रियाः य रामगे ॥५॥ हमेगे भातनि सान मारमा विभाजितस्य आरिवं मम्ग परमं च समाहिय ॥६॥ 1 एवं अवान्ता अपेण सुग्यता एयरा उ अा अगोहारिय रह ॥ ७॥ पागाइका नमुना मुगावाए अमंजया । अविण्यादाणे वता मेहुणे परिग्गदे ॥ ८॥ एवमंगेट पामत्था पति प्रणारिया । इत्थीवम गया घाला नगवामयनुहा ॥ ९॥ जय गण्ट पिटागं वा परिपालेग्ज मुहुनगं। एवं विष्ण- मियानु दानी राय को लिया ? ॥ १० ॥ बहा मंगादगे शाम थिनियं मुंबई गं एवं विजयनियर्यानु दोगो तत्थ ओसिया ? ॥ ११ ॥ जहा विहंगमा रिंगा यमियं भुजा दगं। एवं विनयमित्याभु दोसो नस्य नओ गिया ? ||१२॥ एयगंगे उपासस्था मिच्छनिट्टा अणारिया। अझोपवण्या मानहिं पृयणा इयतनणर॥१३॥ अगागयमांता पन्नुषा गगनगा । पन्छा परितगंति लाणे आउम्मि जोधणे 1१४ ॥ जेहिं काल परिपतंण पन्ना परितपए । के धीरा पंधणुम्मुफ्ता णाव- वंति जीवियं ॥ १५॥ जहा गाई चरणी दुना इह मंमया । एवं लागलि गारीश्री दुना अम:मया ।। १६ । जेहिं गारीण मंजोगा पृथयापिट्टी गया। सम्बोयं गिरा किया त ठिया मुममाहिए ॥ १७॥ एए और तरिमंति समुई यवहारिणो । जत्य पाणा निसगामि किती सयकामुणा ॥ १८॥ तं च भिमन्यू परिणाय मुबाए समिण चरे । मुगावावं च वशिना दिण्णादाणं च वीगिरे ॥ १९॥ उपमहे तिरिय वा जे कई तसथावरा । सम्पत्य चिरई कुज्जा संनि गिध्यागमादियं ॥ २० । इमं च धम्ममायाय कासवेण पवेयं । कुजा भिक्षु गिलाणस्म अगिलाए समाहिए । २१ । संस्खाय पेसलं धम्म दिहिम परिणिबुडे । उवमुग्गे गियामित्ता आमोक्याण परियएम्जासि ॥ २२॥ ति बेगि ।। ॥ इस्थिपरिष्णा णाम चउत्थं अज्शयणं पढमो उद्देसो । जे मायरं च पियरं च विघजहाय पुनसंजोगं! एगे सहिए, चरित्सामि आरयमेनुगो विवित्तेमु ॥ १॥ मुटुमेणं तं परिकाम्म छण्णपएण इथिओ मंदा ।
यति अभिक्खणं पोमवत्यं परिहिंति ! कायं हे वि दंमतिबाह उदद कर समभिजाणे । णो सहियं पि विहरेना एवमप्पा मुरस्खिओ होइ ।।५।। आम उस्सविया भिवग्यु आयसा णिमंतंति । ए याणि चेव से जाणे सदाणि विस्वस्त आणवयंति भिण्गकहाहिं ।। ७ ।। सीह जहा व कुगिमेणं णिन्भयमेगचरं विवेगमायाय संवासोण वि कप्पए दविए॥ १० ॥तम्हा उ बनाए इत्थी विसलि- संथवं से ण कुन्ना अणगारे ।।१३।। अदु णाइणं च सुहीणं वा अप्पियं दह एगया- १२२ अंग-पबिट्ट सुत्ताणि उध्यायं पि ताउ जाणम् जहा लिगति भिवग्गुणो एगे ॥ २ ॥ पासे भिम गि मणुव्बजे ॥ ३ ॥ सयणाराणहिं जोगे िस्थिओगया णिति । एयानि से जाणे पासाणि विरुवरूपाणि ॥ ४ ॥ गो तामु चाखु संधज्जा णो वि यम ॥ ६ || मणबंधणेहिं णेगेहिं कलुणविणीयमवगसित्ताणं । अदु मंजुलाई म पासेणं । एवित्थियाउ बंधति संयुड एगइयमणगारं ॥८॥ अह तत्य णमयंति रहकारो व णेमि आणुपुच्चीए । बद्धे मिए व पासेणं फंदते त्रि मुच्चए ताहे ।। ९॥ अह सेऽणुतप्पई पच्छा भोगा पायसं व विसमित्स। कण्टगं णया। ओए कुलाणि वसवत्ती आघाए ण से वि गिरगंथे ॥ ११ ॥ जे एवं अणुगिद्धा अण्णयरा होति कुसीलाणं । सुतवस्सिए वि से भिक्खू णो विहरेसह त्थीम् ॥१२॥ अविधूयराहि मुण्हाहिं धाईहिं अदुव दासीहिं । महई हि वा कुमा गिद्धा सत्ता कामेहिं रक्षणयोसणे मणुस्सोऽसि ॥१४॥ समणं पि दळुदासीणं तर ताव एगे कुप्पंति । अदु वा भोयणेहि णत्यहिं इत्थीदोमं संकिणो होति ॥ १- कुम्बंति संथवं ताहिं पभट्टा समाहिजोगेहिं । तम्हा समणा ण समेति आपहि संगिसेमाओ ॥१६॥ बहवे गिहाई अवहद मिस्सीभावं पत्थुया य एगे। धुवन मेव पवयंति वायावीरियं कुसीलाणं ॥ १७ ॥ मुद्धं रवइ परिसाए अह रह म्मि दुफाई करंति । जागति य णं तहाविऊ माइल्ले महासदेऽयं ति ॥ १ मयं दुपाई च ण वयइ आइटटो वि पकथइ बाले । बेयाणुवीइ मा तो गिलाइ गे भुनो |१९|| ओसिया वि इत्थिपोसेमु पुरिसा इत्यिवेयरोग पणास मणिया वेगे णारीणं बस उवकर्मति ॥ २०॥ अवि हत्थपाययाए वा बदमंगरक्को । अपितयमागितावणागि तन्टिय म्यारसिंचणाई य ॥२१॥ कणणामच्छेयं का उच्छयणं निकांनी । एल्थ पावसंतत्ता ण बंति पुर्ण कासी
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सूयगडो सु. १ अ. ७ १२९ जाणी ॥ २४ ॥ पुढोयमे धुणइ विगयगेही । संणिहिं कुम्वइ आतुपण्णे। तरिठं सई व महाभवोत्र अभयंकरे वीर अणंतचक्त ॥ २५ ।। कोहं च माणं च तदेव मायं लोभं ठत्य अशत्तदोसा ! एयागि वंता अरहा महेसी ण कुबई पाव ण फारवेइ ।। २६ ।। किरियाकिरियं येणइयाणुवायं अण्णाणियाणं पडियच ठाणं । से सम्भवायं इइ चेयइत्ता उवहिए संजमदीहराय ॥ २७ ॥ से वारिया इत्थि सराइभत्त “, उवहाणयं दुक्खखयट्टयाए । लोगं विदित्ता आरं परं च सर्व पभू यारिय सख्य- वारं ॥२८॥ सोचा य धम्मं अरहंतभासियं समाहिये अपदोवमुद्धं । तं सदहाणा य नगा अगाऊ इंदा व देवाहिव आगमिस्संति ॥२९॥ त्ति वेमि || । कुसीलपरिभासियं णाम सत्तमं अज्झयणं ।। पुदवी य आऊ अगणी य वाऊ तण-रुक्व बीया य तसा य पाणा | जे अंडया जे य जराउ पाणा संसेयया जे रसयाभिहाणा ॥१॥ एयाई कायाई पवेइयाई.एएसु जाणे पहिलेह सायं । एएण कारण य आयदंडे एएसु या विष्प- रियासुर्वेति ॥२॥ जाईपहं अणुपरिवट्टमाणे तसथावरेहिं विणिघायमेइ । से जाइ 'नाई बहुकुरकम्मे जं कुबई मिमइ तेण बाले ।। ३ ॥ अस्ति च लोए अदु वा परत्या सयग्गसौ या तह अण्णहा वा । संसारमावण्ण परं परं ते बंधति वेयंति य दुणियागि ॥ ४ ॥ जे मायरं वा पियरं च हिया समणवए अगणिं समारभिक्षा। अहाहु से लोए कुसीलधम्मे भूयाई जे हिंसइ आयसाए ॥५॥ उजालओ पाण गिवायएज्ना गिब्वावओ अगणिं णिवायएला । तम्हा उ मेहावि समिक्ख धम्म ण पहिए. अगणिं समारभिन्ना ॥६॥ पुढवी वि जीवा आऊ वि जीवा पाणा य संपाइम संपयंति । संसेयया कढसमस्सिया य एए दहे अगणिं समारभंते ॥ ७ ॥ हरियाणि भूयाणि विलम्बगाणि आहार देहा य पुढो सियाइ । जे छिदई आयसुहं पहुच पागटिभ पाणे बहुणं तिवाई ॥ ८॥ नाई च बुद्धिं च विणासयंते बीयाइ असंजय आयदंडे । अहाहु से लोए अणज्जधम्मे घीयाइ से हिंसइ आयसाए ॥ ९॥ गम्भाइ मिति वुयावुयाणा णरा परे पंचसिहा कुमारा । जुवाणगा मज्झिम थेरगा य चयति ते आउखए पलीणा ।। १० ।। संवुज्झहा जंतवो माणुसत्तं दटुं भयं वालिसेणं अलम्भो.। एगंतदुक्खे जरिए व लोए सकम्मुणा विपरियासुवेइ ॥ ११॥ इहेग मूढा पययति मोक्खं आहारसंपज्जणवज्जणेणं । एगे य सीओदग- - जे सिद्धिमुदाहरंति ॥ १५ ॥ उदगं जई कम्ममलं हरेज्जा एवं सुहं इच्छामित्त १३० अंग-पविट्ट सुत्ताणि सेवणेणं हुएण एगे पवयंति मोक्खं ॥ १२ ॥ पाओसिणाणाइसु णत्यि मोर खारस्स लोणस्स अणासणेणं । ते मज्जमंसं लसुणं च भोघा अण्णत्थ वासं प कप्पयंति ।। १३ ।। उदगेण जे सिद्धिमुदाहरंति सायं च पायं उदगं फुसंता। गस्स फासेण सिया य सिद्धी सिझिसु पाणा बहवे दगंसि ||१४॥ मच्छा य कु य सिरोसिवा य मग्गू य उट्टा दगरक्खसा य । अट्टाणमेयं कुसला वयंति उद अंधं व णेयारमणुस्सरित्ता पाणाणि चेवं विणिहंति मंदा ॥ १६ ॥ पावाई का पकुव्यओ हि सिओदगं ऊ जइ त हरेज्जा । सिझिसु एगे दगसत्तघाई मुस जलसिद्धिमाहु ॥१७॥ हुएण जे सिद्धिमुदाहरंति सायं च पायं अगणिं फुसंता । सिया सिद्धि हवेज तम्हा अगणिं फुसंताण कुकम्मिणं पि॥१८॥ अपरिक्ख दिई ' सिद्धीएहिं ति ते घायमबुज्झमाणा । भृएहिं जाणं पडिलेह सायं विज गहायं तसः रेहिं ॥१९॥ गति लुप्पंति तसंति कम्मी पुढो जगा परिसंवाय भिक्य । तम्ही विरओ आयगुत्ते दटुं तसे या पडिमहरेजा ॥२०॥ जे धम्मलद्धं विगिहाय वियटेण साहटु य जे सिणाई । जे धोवई लूसयई व वत्थं अहाहु से णागगि दूरे ॥ २१ ॥ कम्मं परिण्णाय दर्गसि धीरे वियडेण जीवेज य आदिमोक्वं बीयकंदाइ अभुंजमाणे विरए. सिणाणाइमु इत्थियामु ॥२२॥ जे मायरं च पिय हिचा गारं तहा पुत्तपमुं धणं च । कुलाई जे धावइ साउगाइं अहाहु से सामान दूरे ॥ २३ ॥ कुलाई जे धावइ साउगाई आघाइ धम्म उयराणुगिद्धे । अह आयरियाण सबसे जे लावए जा असणस्स हेऊ॥२४॥णिवायम्म दीणे परभोय मुहमंगलीए उयराणुगिद्धे । णीवार गिद्धे व महावराहे अदूरए एहिइ घा ॥२५|| अण्णस पाणसिह लोइयस्स अणुप्पियं भासइ सेवमाणे । पार चेव कुसीलयं च णिस्तारए होइ जहा पुलाए ॥ २६ ॥ अण्णायपिण्डेणऽहि एजाणो पूयणं तवसा आवहेना । सहेहि स्वेहि असनमाणं सन्वेहि । विणीय गेहि ॥ २७ ॥ सव्वाई संगाई अन्य धीरे सव्वाई दुक्खाई तितिक्षा अखिले अगिद्धे अगिएयचारी अभयंकरे भिक्खू अणाविलप्पा ।। २८ ।* जाआ मुणि भुंजएज्जा कंग्रेज पावस्स वियेग भिक्खू । दुक्खेण पुढे धुयमा संगामसीसे व परं दमेना ॥ २९ ॥ अवि हम्ममाणे फलंगावयट्टी समागम सूयग़डो सु. १.अ. ८ १३१ अंतगरस । गिधूय कम्मण पवंचुवेइ अक्सरवर या सगई त्ति बेमि ॥ ३०॥ वीरियं णाम अट्ठमं अज्झयणं दुहा ये नुयक्खायं पीरियं ति पाई। किं तु वोरस्स वीरत्तं कई चयं पवु. घई ॥ १.॥ कम्ममंगे पवेदेति अकामं वा वि मुव्वया । एएहिं दोहि ठाणेहि जेहिं दीसंति मचिया ॥ २॥ पमाणे कम्ममाहंमु अपमायं तहावरं । तन्भावा- देसओ वा वि बाल पण्डियमेव वा ॥३॥ सत्यमेगे नु सिक्वंता अइवायाय पाणिणं । एगे मंते अहिडति पाणभूयविहेडिणो ॥ ४ ॥ मावियो कटु माया य कामगोगे समारभे । हंता छेत्ता पगभित्ता आवसायाणुगामिगो ॥ ५ ॥ मणमा वयसा.चेव कायसा चेव अंतसो | आरओ परओ वा वि दुहा विय असंजया ॥६॥ वेराई कुव्वद वेरी तो वरेहि रजई । पायोवगा य आरम्भा दुक्ख. फासा य अंतसो ॥ ७ ॥ संपराय शियच्छति अत्तदुपाइकारिणो । रागदोसस्सिया -. बाला पावं कुम्वति ते बहं ॥ ८॥ एयं सकम्मविरियं बालाणं तु पवेइयं । इनो : अकम्मविरियं पण्ढियाणं मुह मे ।।९।। दविए बंधणुम्मुक्के सवओ छिण्णवंधणे। पगोट पारगं कम्मं सहं कतई अंतसो ॥१०॥ णेयाउयं सुयक्ग्वाय उवायाय * समीहए । भुको भुटो'दुहावाम अमुहत्तं तहा तहा ।। १६ ।। ठागी विविठाणाणि चहत्संति ा संसओ। अणियए अयं वासे णायएहि मुहीहि य ॥ १२॥ एव- मायाय मेहावी अप्पणो गिद्धिमुद्धरे । आरिय उवसंपने सव्वधम्ममगोवियं ॥१३॥ सहसंमइए णद्या धम्मसारं मुणेत्तु वा । समुवहिए उ अणगारे पञ्चक्खायपावए ॥ १४ ॥ जं किंचुवकाम जाणे. आउक्खेमस्स अप्पणो । तस्सेय अंतरा खिप्पं सिक्वं सिक्वेन पण्डिए, ॥ १५ ॥ जहा कुम्मे सअंगाई सए देहे समाहरे । एवं पावाई मेहावी अज्झप्पेण समाहरे||१६||साहरे हत्थपाए य मणं पंचिंदियाणि य । पावगं च परीणामं भासादोसं च तारिसं ॥१७॥ अणु माणं च मायं च तं परिणाय पण्डिए । सायागारवणिहुए उवसंते णिहे चरे ॥ १८ ॥ पाणे य णाइयाएज्जा अदिण्णं पि य णायए । साइयं ण मुसं बूया एस धम्मे वुसीमओ ॥ १९ ॥ अइकम्मति वायाए मणसा वि ण पत्थए । सव्वओ संखुडे दंते आयाणं मुसमा- हरे ॥ २०॥ कई च कबमाणं च आगमिस्सं च पावगं । सव्वं तं णाणुजाणंति आयगुत्ता जिइंदिया ॥२१॥ जे याऽयुद्धा महाभागा वीरा असमत्तदंसिणो । अमुदं तेसिं परतं सफलं. होइ सव्यसो ॥ २२ ॥ जे य बुद्धा महाभागा वीरा स
अंगपनि मुत्तानि
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੬ ਛੇਵੀਂ ਤੋਂ : * ਨੌਰਟ ਦਾ ਸ਼ :
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: : : : : ਵਡ ! ਨੇ ਤੇ
ਨਾਵਲੇ' :: : ਵ।
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- ਏ ਤੇ ਦੁਲ ਕਲਣ : ਦਾ
ਵਾਲਾ :: 1 : ਬਾਲ
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सूयगडो सु. १ अ. १० १३३ पार पासवणं हरिएनु ण करे मुणी । वियडेण वा वि साह? णावमझे कयाइ ॥१९॥ परमत्ते अण्णाणं ण भुजे कयाइ वि । परवत्यं अचेलो वि तं विज रेनागिया ।।२० ॥ आसंदी पलियंके य गिसि च गिहतरे। संपुच्छणं सरणं विध परिजागिया ॥ २१ ।। जसं तित्ति सिलोयं च जा य वंदणपूयणा । चलोयंसि जे कामा तं विश परिजागिया ।। २२॥ जेणेहं णिव्यहे भिक्खू अण्ण- वणं तहाविहं । अणुप्पयाशमण्णेसि तं वि परिजागिया ॥ २३ ॥ एवं उदाहु ग्गये महावीरे महामुणी । अणतणाणदंसी से धम्म देसितवं तु ॥ २४॥ भास- गो ण भासेजाणेव यम्फेस मम्मयं । माइहाणं विवमेजा अणुचितिय वियागरे २५॥ तस्थिमा तइया भासा जं वइत्ताणुतप्पई । जं छण्णं तं ण वत्तव्वं एसा गणा गियण्ठियां ॥ २६॥ होलायायं सहीवाय गोयावायं च णो वए | तुमं तुम । अमणुणं सव्वसो ते ण वत्तए ॥ २७ ॥ अकुसीले सया मिक्खू णेव संसग्गियं "ए । सुहरूवा तत्युवस्सग्गा पडिबुझेन ते विऊ ॥ २८॥ गण्यत्य अंतराएणं (गेहे ण णिसीयए । गामकुमारिय किर्ल्ड णाइवेलं हसे मुणी ।। २९ ।। अणुस्सुओ रालेतु जयमाणो परिष्वए । चरियाए अप्पमत्तो पुट्टो तत्यऽहियासए ॥३०॥ म्ममाणो ण कुप्पेज वुधमाणो ण संजले । सुमणे अहियासेजा ण य कोलाहल करे -३१॥ लढे कामेण पत्येना विवेगे एवमाहिए। आयरियाई सिक्खेज्जा वुद्धाणं प्रतिए सया॥३२॥ सुत्सूसमाणो वासेज्जा सुप्पणं सुतवस्सियं । वीरा जे अत्त- ग्णेसी घिइमंता जिइंदिया ॥ ३३ ॥ गिहे दीवमपासंता पुरिसादाणिया णरा । वीरा बंधणुम्मुक्का णावकसति जीवियं ॥ ३४ ॥ अगिद्धे सदफासेसु आरम्भेसु मिस्सिए । सव्वं तं समयाईयं जमेयं लवियं बहु ॥ ३५ ॥ अइमाणं च मार्य च परिणाय पंडिए । गारवाणि य सव्वाणि णियाणं संधए मुणि ॥ ३६ ॥ त्ति "मि ܨܲܝܸ S । समाही णाम दसमं अज्झयणं । आच मईमं अणुवीइ धम्म अंजू समाहिं तमिमं सुणेह । अपडिण्ण भिक्खू उ माहिपत्ते अणियाण भूएसु परिवएज्जा ॥ १ ॥ उ8 अहे यं तिरियं दिसासु सा य जे थावर जे य पाणा। हत्थेहि पाए हि य संजमित्ता अदिण्णमण्णेसु य णो हेजा सुयक्खायधम्मे वितिगिच्छतिण्णे लाढे चरे आयतुले पयासु । आयं ण ܟܚܪ Aur : " More ܕ : ܝܼܟܼܝܼܟ जाविधको मरणानिसी नरेन्ज भिरायलमा निमुफः ।। २४ ।। जाना पुदी सत्ता आरजाया तहागणी! पाटजीवा पुदी सत्ता लगाया सीयगा Tसरदारज के.गा। मगसा ययगा चेय कायसा चेव अंतगो ॥ १२॥ संघुटे महापणे धीरे इत्तेमणं चरे। एरणासनीए गिवं वज्जयते अणेसणं ।।१३।। * पाईच समारम्भ तनुहिएमा या कई । तारिस. नु ण गिण्डेज्जा अण्णपाणं पण ते ण कम्पए, ।। ३५॥ दांत गाणुजाणेज्जा आयगुत्ते जिई दिए । ठाणाई नुयंगडो सु. १ अ. ११ १३५ निगाई दुहाई मता नेवासुधानि महन्माणागि ॥२॥ यूपा मुनि अगामी निमा कमिम ममा ! म ण माण व जारसयतम दिन लागुजाणे ।। २२ ।। मुझे लिया जाए पादूरपज्जा मुधिर प य भवन । विधर्म मिगुरक पाय पूरगट्टी मिलोयगानी । परिपका ॥ २६ ॥ निमार हाउ निरायो भार दिउसो गिया. मग्गे णाम एगारसमं अायणं कापरे मागे अपना माहणेन नाममा । वं मरणं देना पाविता और सर कुन १ ॥१॥ माग गुतरं मुख मध्यवति । नागामिण जहा कि गो यूहि महामुणी ॥२॥ो यह पुष्मिा देवा अनुय माणुमा । लेसि कपा मग आइपोग्न का गो।। ३ ।। जर यो गइ पुन्छिज्जा देया अनुष मागुसा तेतिमपहिगारमा मागणारं गुफा में 11 ४ ॥ अणुपुष्येण महाघोर "कासग पवेदयं ममाया ओ पुलं गई यवहारिणी ॥ ५॥ अतरितु तरंगे तारेस्रति अगागया। गोगा पश्चिमन्यानि तवों से सुणे में 11६1 पुढवी. 11॥ महायरस तमा पाणा एवं उपाय आहिया। एपाए जीवकार गावरे को विश्वई ।। ८ । सम्यादि अणुनुशीहि मा परिलहिया । मन्त्रे अमंतदुनया य.अभी सवये सिया ॥१॥ यं यु णागिणी सारं जंण हिंसा कंचण । महिना मानयं चेक एयावंतं पियागिया ॥ १० ॥ उष्टुं अहे य तिरिचं जे फोड तरा- यावरा । सम्बत्य विरई कुरुमा संति गिवाणमादियं ।। ११ । पभू दोसे गिरानिमा - मुमंजए ।।१४।। पूई फम्म सेवेजा एस धम्गे. पुसीमओज किंचि अभिकंखेशा . -/ मं मंति समीणं गागेनु नगरेसु वा ॥ १६ ॥ तहा गिर समारम्भ अस्थि पुण्णं ति जो पाओवाजा Trit मा गोहानगर पाउनुपमा अगुभा ॥१॥ मग मोजागा जोगगंगईगजीन णागन । जो माग जाण अगामान जाईन भरणं नजगोलवा ॥३॥ अहो विगनाण पिउन जो आमन जागररांगा नादां नोजण गिज नसो मामिउमरितार किरिया ॥ २१ ॥ गरेमको अराजमार्ग मंतु रमेमु अनुस्ममाणे । यो जोनियंणो मरणालिनी आगाणगुते वलया विमुझे । आहत्तहीयं तु पवेयदस्म णाणप्पकारं पुरिराय जागं । सओ य धम्मं असीलं संतिं असंति करिस्मामि पाउं ॥ २ ॥ अहो य राओ य समुहिए हिं तहाग पडिलभ धम्मं । समाहिमाघायमजोसयंता सत्यारमेयं फरसं वयंति ॥ २॥ विसोहियं ते अणुकाहयते जे आयभावेण वियागरेज्जा । अट्टागिए होइ बहुगुगल जे णाणसंकाइ मुसं वएजा ॥ ३ ॥ जे यावि पुट्टा पलिउंचयंति आयाणमस्तु वंचइत्ता । असाहुणो ते इह साहु माणी मायणि एस्संति अणंतघायं ॥ ४॥ कोहणे होइ जयभासी विओसियं जे उ उदीरएज्जा। अंधे व से दंडपहं गहान) अविओसिए धासइ पावकम्मी ।। ५॥ जे विग्गहीए अण्णायभासी ण से समे हो। अझंझपत्ते | उवायकारी य हिरीमणे य एगंतदिट्ठी य अमाइल्वे ॥६॥ से पेरले। सुहुमे पुरिसजाए जच्चण्णिए चेव सुउज्जुयारे। बहुं पि अणुसासिए जे तहया ने। हु से होइ अझंझपत्ते ॥ ७॥ जे यावि अप्पं वसुमं ति मत्ता संखाय वायं अपरिक्त कुन्जा । तवेण वाहं सहिउ त्ति मत्ता अण्णं जणं पस्सइ बिम्बभूयं ॥८॥ एमंत. कुडेण उ से पलेइ ण विजई मोणपयंसि गोत्ते । जे माणणढेण विउकासेजा वसु मण्णतरेण अबुज्झमाणे ॥ ९॥ जे माहणे खत्तियजायए वा तहुग्गपुत्तेतह लेच्छा वा । पवईए परदत्तभोई गोत्ते ण जे थब्भइ माणबद्धे ॥ १०॥ण तस्स जाई कुलं व ताणं णण्णत्थ विजाचरणं सुचिण्णं । णिक्खम्म से सेवइगारिकम पसे। पारए होइ विमोयणाए ॥११॥ णिकिंचणे भिक्खु सुलूहजीवी जे गारवं हो सिलोगकामी | आजीवमेयं तु अबुझमाणो पुणो पुणो विप्परियासुर्वेति ।। १२॥ जे भासवं भिक्खु मुसाहुवाई पडिहाणवं होइ विसारए य | आगादपण्णे सुविभाषि- १३८ अंग गमिष्ट्र गुप्ताणि आहत्तहीयं णाम तेरसमं अज्झयणं त्ति वेमि।। .
सूयगडो सु. १ अ. १४ १३९ पा अण्णं जणं पण्णया परिहवेजा ॥ १३ ॥ एवं ण से होइ समाहिपत्ते जे णवं भिक्खू विउक्कसेना । अहवा वि जे लाहमयावलित्ते अण्णं जणं खिंसइ लपण्णे ॥ १४ ॥ पण्णामयं चेव तवोमयं च णिण्णामए गोयमयं च भिक्खू । जीवगं चेव चउत्यमाहु से पंडिए उत्तमपोग्गले से ॥ १५ ॥ एयाई मयाई गिंच धीराण ताणि सेवंति सुधीरधम्मा । ते सव्वगोत्तावगया महेसी उच्चं अगोत्तं न गई वयंति ।। १६ ॥ भिक्खू मुयचे तह दिधम्मे गामं च णगरं च अणुप्प- चेस्सा | से एसणं जाणमणेसणं च अण्णस्स पाणस्स अणाणुगिद्धे ॥ १७॥ अरई इंच अभिभूय भिक्खू बहूनणे वा तह एगचारी। एगतमोणेण वियागरेजा एगस्स जतो गइरागई य ॥ १८ ॥ सयं समेचा अदुवा वि सोचा भासेज धम्म हिययं पयाणं । जे गरहिया सणियाणप्पओगा ण ताणि सेवंति सुधीरधम्मा ॥१९॥ केसिंचि तकाइ अयुज्झ भावं खुई पि गच्छेन असद्दहाणे । आउस्स कालाइयारं वघाए लद्धाणुमाणे य परेसु अढे ॥ २०॥ कम्मं च छंदं च विगिंच धीरे विण- इज ऊ सम्बड़ आयभावं । रूवेहि लुप्पंति भयावहेहिं विजं गहाया तसथावरेहि ॥ २१.॥ ण. पूयणं चेव सिलोयकामी पियमप्पियं कस्सइ णो करेजा । सव्वे अणढे परिवजयंते अणाउले या अकसाइ भिक्खू ॥ २२ ॥ आहत्तहीयं समुपेहमाणे सव्वेहिं पाणेहिं णिहाय दंडं । णो जीवियं णो मरणाहिकखी परिव्वएज्जा वलया विमुक्के ||२३|| त्ति वेमि ॥ ॥ गंथो णाम चउद्दसमं अज्झयणं ।। गंथं विहाय इह सिक्खमाणो उहाय सुत्रम्भचेरं वसेजा। ओवायकारी विणयं सुसिक्खे जे छेय से विप्पमायं ण कुना ॥ १ ॥ जहा दियापोयमपत्तजायं सावासगा पविउं मण्णमाण । तमचाइयं तरुणमपत्तनायं ढंकाइ अव्वत्तगर्म हरेजा ॥२॥ एवं तु सेहं.पि अपुढधम्म णिस्सारियं बुसिम मण्णमाणा । दियस्स छायं व अपत्त- - जायं हरिसु णं पावधम्मा अणेगे ॥३॥ओसाणमिच्छे मणुए समाहिं अणोसिए गंतकरि ति णचा । ओभासमाणे दवियस्स वित्तं ण णिकसे बहिया आसुपण्णो ॥४॥ जे ठाणओ य सयणासणे य परकमे यावि सुसाहुजुत्ते । समिईसु गुत्तीसु य आय- पण्णे वियागरिं ते य पुढो वएजा ॥५॥ सद्दाणि सोचा अदु भेरवाणि अणासवे तेसु परिव्वएना । णिहं च भिक्खू ण पमाय कुना कहकह वा वितिगिच्छतिणे --- .
पाभिगो मिना || माविमा गुण उ नोहादियाएर अगारिया गया ॥८॥ण नेमु कामायाणगानीमा कागजाता ति पडिमुणेमा गेम नगर पगार मजा || वर्णगि मूरम जमा अद मग्गासागंगि हिय पया । तेणे महा इणमेन मे जमे तुहा रामगुमान ॥ १०॥ अह तेण मूग अमूहगरम कारा पा राबिनेगनुत्ता। एआरमंतर उदाहु वीरे अणुगम्म अर्थ उनणे समां ॥ ११॥ गणेगा जहा अंधकारंसिरा मग्गं ण जाणाइ अरममाणे। से मृरिया अमुग्गगेणं मग्गं नियाणाइ पगानि ॥१२॥ एवं तु सेहे वि अपुढाम्मे भम्मण जाणाद अबुजामाणे। से कोविए कि वयणेण पच्छा मृरोदए पामइ नवयुणेन ||१३|| उ अहे यं तिरियं दिसानु तर य जे थावर जे य पाणा । सया जाए तेमु परिकाएजा मणप्पओसं अविकममा ॥ १४ ।। कालेण पुन्छे समियं पयामु आइनग्नमाणो दवियस्स वित्तं । तं सोपकारी य पुढो पवेसे संखा इमं केवलियं समाहिं ॥ १५ ॥ अस्सि मुठिनातिविहेण तार, एएसु या संति णिरोहमाहु । ते एवमक्खंति तिलोगदंसी ण भुजमेयंति पमान. संगं ।। १६ । णिसम्म से भिक्ग्य समीहियर्ट पडिभाणवं होइ विसारए । वियागरंति बुद्धा हु ते अंतकरा भवंति । ते पारगा दोण्ह वि मोयणाए संसोदिन। आयाणअट्टी वोदाणमोणं उवेच्च सुद्धण उवेइ मोक्ख ॥ १७ ॥ संखाइ धर्म पण्हमुदाहरंति ॥ १८ ॥ णो छायए णो वि य लूसएजा माणं ण सेवेज पगातः च । ण यावि पण्णे परिहास कुन्ना ण याऽऽसियावाय वियागरेजा।।१९।। भूपा भिसंकाइ दुगुंछमाणे ण णियहे मंतपएण गोयं । ण किंचिमिच्छे मणुए पयार असाहुधम्माणि ण संवएज्जा ॥ २० ॥ हासं पि णो संधइ पावधम्मे ओए तही फरसं बियाणे । णो पुच्छए णो य विकंथइज्जा अणाइले या अकसाइ भिक्खू ॥२१॥ संकेमा याऽसंकियभाव भित्र विभज्जवायं च वियागरेज्जा । भासादुयं धम्मरानु ट्रिएहिं वियागरेज्जा समयासुपपणे ॥ २२ ॥ अणुगच्छमाणे वितहं विजाणे तह तहा साहु अककासेणं। ण कत्थई भास विहिंसइज्जा णिकगं वावि ण दीहइमा ।।२३ ॥ समालबेज्जा पहिपुण्णभासी शिसामिया समियाअट्ठदंसी। आणाइ मुर १४० अंग-विट साणि ... •-- - 41 N ६॥ अकुन्यओ ण णत्यि कम्मं णाम विनाणइ । विण्णाय से महावीरे जेण सूयगडो.सु. १ अ...१५ १४१ यण मिउंजे अमिसंधए पावविवेग भिक्खू ॥ २४ ॥ अहायुइयाई सुसिक्खएना इजया गाइवेलं वएना से दिहिमं दिहिण लूसएजा से जाणइ भासितं समाहि २५ ।। अल्ट्सए जो पच्छण्णमासी णो मुत्तमत्यं च करेज ताई । सत्थारभत्ती अणुवीइवाय सुयं च सम्म पडिवाययंति ।। २६ ।। से सुद्धसुत्ते उवहाणवं च धम्म जे विदइ तत्थ तत्थ । आएज्जवको कुसले वियत्तेस अरिहइ भासिउ तं समाहिं २७ ॥त्ति मि॥ ॥जमईए णाम पण्णरसमं अज्झयणं ।। - नमईअं पडुप्पण्णं आगमि च णायो । सव्वं मण्णइ तं ताई दंसगावरणं- ए ॥ १॥ अंतए वितिगिच्छाए से जाणइ अणेलिमं । अणेलिसस्स अस्खाया सा से होइ तहिं तहिं ॥ २ ॥ तहिं तहिं सुयक्खाय से य सच्चे सुआहिए । सया चेण संपण्णे मेत्तिं भूएहिं कप्पए ।।३॥ भूएहिं ण विरुज्झेना एस धम्मे युसी- तो। सिमं जगं परिणाय असि जीवियभावणा ॥ ४॥ भावणाजोगसुद्धप्पा णावा ण आहिया । णावा व तीरसंपण्णा सवदुक्खा तिउदृइ ।। ५ ।। तिउ- ई उ मेहावी जाणं लोगसि पावगं । तुति पावकम्माणि णवं कम्ममकुवओ जले न x ण मिज्जई ।। ७ ।। ण मिज्जई महावीरे जस्स पत्थि पुरेकर्ड | वाउ व्व जालमधेइ पिया लोगसि इत्यियो ॥ ८ ॥ इत्यियो जे ण सेवंति आइमोक्खा हु जणा। ते नणा बंधणुम्मुका णावखंति जीवियं ॥ ९ ॥ जीवियं पिट्टओ किच्चा अंत पावंति कम्मुणं । कम्मणा संमुहीभूया जे मग्गमणुसासई ॥ १० ॥ अणुसासणं. पुढो पाणी वसुमं पूयणासु ते । अणासए नए दंते दढे आरय- मेहुणे ॥ ११ ॥ णीवारे व ण लीएजा छिण्णसोए अणाविले । अणाइले सया देते संधि पत्ते अणेलिसं ॥ १२॥ अणेलिसस्स खेयपणे ण विरज्झज्ज केणइ । मणसा वयसा चेव कायसा चेव चक्खुमं ॥ १३ ॥ से हु चक्खू मणुस्साणं जे कखाए य अंतए। अंतेण खुरो वहई चर्फ अंतेण लोहई ॥ १४ ॥ अंताणि धीरा सेवंति तेण अंतकरा इह । इह माणुस्सए ठाणे धम्ममाराहिउं गरा ॥१५॥ गिहि- यहा व देवा वा उत्तरीए इयं सुयं । मुयं य मेयमेगेसिं अमगुस्सेतु णो तहा ॥१६॥ अंतं करति दुक्खाण इहमेगेसिमाहियं । आघायं पुण एगेसिं दुल्लमेऽयं समुस्सए *. . बाद M गा। जो पुतिमा.मी || vanatil दोगामा या पंगण. पारगामा मापानीमा नि समिप सपिगमा जागो गो गाणामारण जो ॥१||म समगे अणिगिरणियाणभागाणार्यनमगालागंजयविनोईन माणंच मायं न लोन पिदार्मामी जी आगाणं अः पहोसहेऊ तओ तो आयाणाओ पुणं पििनया पागाध्याया सिमा देश दविध वोसहकाए समगे ति यो ।।२॥ एत्य वि भिका अार. रिणीप र दंते दरिए योसट्टकाए मंविधुणीय विरुवस्व परीसहोयराग्गे अज्यपजोगगुदादा- उपढिए ठिअप्पा संखाए परदत्तभोई भिक्यू त्ति वने ॥३॥ एत्थ विनि, एगे एगविऊ वुद्धे संलिण्णसोए मुरांजए मुसमिप, मुसामाइए आयवायपने विक दुहओ वि सोयपलिहिण्णे णो पृयणसकारलाभट्ठी धम्मट्टी धम्मविऊ गियागपडि. वण्णे समियं चरे दंते दविए वांसहकाए णिग्गंये त्ति वने ॥ ४॥ से एक्मर . . || IIT REET || , P- जाणह जमहं भयंतारो ॥ त्ति वेमि ।। पढमे सुयक्खंधे समत्ते ॥
सिमिया य समप, अपाङ्गद रमणाउता! ते चत्तारि पुरिसनाया घुझ्या । धम्म सूयगडो सु. २ अ. १ १४५ मिनियारला दिनानिमियान गुमगि । माय गाई १३ यावा 3. मन मे भापEिT नटाणे सिनाए. 14. ! अमिनटी ले जायगा रिकाम अगा शो दिमाया अनुयायी या आगम पुगनिमासे पुरि नारे गापामा मागं मोजाय पनि में तय ननारि पशि- जापानद पीना अपने नाम परमार नी माय गो पाराए रिलाप, सेलिगि से भिषण एवं क्या-मान दुरिया अपना सारको मागम गारियम ए. पुरिया मार्ग प्रद पपउगरपो जमिनमामी, जोस मा पयं पठमयरपोरा 3 एवं उशियामा परि मागि मिल गारसा मानो जार मगम्म मानिएम परममा पीपरी उगिरिरमानितिमदद या में गिरा अभिमान पुनरिनिगगि पुनरिणी सरि टिकारा मना-उपपा भी परगावया ! उपयादि । मासे पाप पठम. "यरपोपटरीयामिपि नाप समगाउलो ! अष्टे पुग से जागिय भाइ । भने ति ARE गमनं मग मदायीरं नियाय गिधाभोग दनि जमरातिदित्ता गमंसित्ता एवं वयामी-किटियार गमगाउसो ! अखं पुणो न जागामो रामगाउगो ति। गम भगः मदापीर ने गया कि यमिगधीओ य आमतता एवं ययामी-इत गमगाटसो! मासामि विनायमिक्टिमि पयेपनि सभडं सोडं सणि- मितं गुमो भुमो उपदमि से मिजाय न मा मपअप्पाइदद समणाउसो! मुक्खरिणी युद्धमा । नाम नबटु मए अप्पाइदै समगाउसो ! मे उदए. इए। कामगोगे य ग मए अप्पाइटर रामगाउसो ! से सेए पुपए । जगजाणायं च म मए अभ्याटु समगाउसो! ते यो पटमयरपोगरीए पुदए । रायाणेच म. अपाइदट्ट समगाउगो ! से एगे मदं पउमवर पोहरीए बुपए । अण्णdi 44 r च खलु मए, अपाहद्ध समगाउसो ! से मिस्र युपए । धम्मतित्यं च खलु मए अप्पाहटु रामगाउमी-1 से तारे युपए । धम्मफई च पल मए अप्पाहद? राम- माउसो मे गद्दे युपए । गिवाणं च खलु मए अप्पाइट्ट समणाउगो से उप्पाए पुरि माये। मनोगे बिग मेमानी अवाले मम्गनिममममममम मागोafurna तान तानं न म उदा म पारं अपने पउमारोह कदद इह तुया में परिभामे रिणि । जा जान अनि हवाए, जो पासप अंतरा पुकारिणी सेगस गिगाणे दोगे पुरिसजाए ! अहावरे तो पुरिमगाए । पुरिने पतिमाओ दिशाओ आगम्मत पुलों तीसे पुकारिणीय तारे ठिसा पासप तं गं मई पउगवरपोण्डरीगं अगुस्सा जाय पडिरुवं । ने तत्य दोणि पुरिराजापपासद पहीणे तीरं अपत्ते पउमपरसोड रीयं णो हत्याप णो पाराए जान सेयसि णिसणे। तए से पुरिसे एवं बस अहो णं इमे पुरिसा अखेयण्णा अकुसला अपण्डिया अवियत्ता अमेहावी का मग्गट्ठा णो मग्गविऊ णो मग्गा गइपरियामण्णजं गं एए पुरिसा एवं म अम्हे एयं पउमवरपोण्डरीयं उणिक्खिस्सामोणो य खलु एवं पउमयरपोण्डरावंत उण्णिक्खेयव्वं जहा णं एप पुरिसा मण्णे । अहमंसि पुरिसे सेयण्णे कुसले पनि वियत्ते मेहावी अबाले मग्गढे मग्गविऊ मग्गस्स गइपरिकमण्णू अहमेवं पउमर पोण्डरीयं उण्णिविवस्सामि त्ति कट्टइइ वुच्चा से पुरिसे अभियामेतं पुसिसि जावं जावं च णं अमिधामे तावं तावं च णं महंते उदए महंते सेए जाव अंग पुक्खरिणीए सेयसि णिसण्णे तचे पुरिसजाए ॥४॥अहावरे चउत्ये पुरिराजाए। अह पुरिसे उत्तराओ दिसाओ आगम्म तं पुक्खरिणिं तीसे पुक्खरिणीए की - ठिचा पासइ तं महं एगं पउमवरपोण्डरीय अणुपुन्युट्टियं जाव पडिस्क। तत्थ तिणि पुरिसजाए पासइ पहीणे तीरं अपत्ते जाव सेयसि णिसणे । तए है पुरिसे एवं वयासी-अहोणं इमे पुरिसा अखेयण्णा जाव णो मग्गस्स गइपरिकमा जणं एए पुरिसा एवं मण्णे-अम्हे एयं पउमवरपोण्डरीयं उणिक्खिस्सामो पो खलु एयं पउमवरपोण्डरीयं एवं उणिक्खेयव्यं जहा णं एए पुरिसामणे। अहमद पुरिसे खेयपणे जाय मग्गरस गइपरिकामण्णू, अहमेयं पउमवरपोण्डरीव एवं यो गुतागि -
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(HAMITE: HT) Timi Taramiti
पुना मायाको मागमाना
भवः काममगा ना मारणामा गामि गाणा. तशभर मम्म
पुना मगमगाना गाना मिलगडा
पणतारो गर्यगण धम्गेणं पदम्मामोतमागाणा गर्यतारी जटा मए एम
धम्मे सुयक्ग्याए, मुषणले भगा जहा-पायवाला कमरममत्यमा तिरिमै
तयारियंत जीव एस आयाराव कमिणे एग यि जीवह, एरा मए णो जश्व
णिज्जइ, अगणिशामिए सरीरे करोयवाणि अहीणि भवंति आसंदीपंचमा पुरिका
गाम पचागच्छति, एवं असंते असंविज्जमाणे। सितं असंते असंविज्जमागे टेनि
तं सुयक्खायं भवइ-अण्णो भवद जीयो अण्णं सरीरं, तम्हा ते एवं णो विपडिवे.
देति-अयमाउसो! आया दीहे त्ति वा हस्से त्ति वा परिमण्डले त्ति वा वत्ति वा तसे
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HTRA.1 10:41
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सरीरे धरमाणे धरइ विणम्मि यो धरह। एयंत जीवियं गवइ,
आदहणाए
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रामनगर
एलमा मिसन
इंग-धि
नोए ! ए . मला
गन्तामा मामानगाया
m
वाम गोमाग त्याला मगर, गोर
अपरानन्यजीरा नाममगोगो माया
नमोसन
SIT आपका पन्जा
म. हमागल्यानपानमन्छ
अपि गाना नको
आगोमा
- म लगाए और आग!
मम मम मुगिनाए कराईट
मान
मा.
तर काय ना भन्दा के
--
मनर और मग आ आ
में मामला
एक मारमण
. । सूयगडोसु.२ अ, १ १४९ गए, अपि अंतगो रागमायावि। से रिण विणायेगाणे हणं पायमाणे पय पया. आर अंतसो परिममाव मागिता गायत्ता एवं पिजागा; शामित्य दोसो। एवं विपरिनित जहा-किरिया या जाव अगिरपद वा । ए.५ ते रुबेदि काम्नसमारंभेहि निरूपन्याई कामभोगाई समारभति भोषणाए । एय- । अगारिया विप्प टिपण्णा तं गहमागासं पतिपमाना जाय ३६ ते णो गो पाराए, अंतरा कामभोगेनु लिममा । दोघे पुरिसजाप, पंचमहन्माए हिए ॥१०॥ अहावरे तो पुरिमनाए सरकारगिए ति आहि ह पाईगंवा ६ मंतेगश्या मगुस्सा भति मणुपुष्येणं लोग उपयपणा । तं जहा- या बेगे बाप तमिच महंते एगे राया गपद पाव सेणावइपुत्ता । तेसिं एगइए उसो भवइ, काम ते समणा य मादणा य पहारिनु गमगाए जाय मर एम धम्मे गुपसाए सुपगते भाइ । पद बाट धम्मा पुरिसाइया सरिया पुरिगप्पणीया पुरिसम्भूया पुरिसोइया पुरिसमभिरामप्यागया मेव अभिभूय चिट्ठति । से नहाणामए-गण्डे सिया सरीरे जाए, सरीर संयुद्धे अमिसमभागए, सरीरमेव ममिभूम चिट्ट, एवमेव भग्मा पुरिसाइया जाय समेव अमिभूय चिट्ठति । से नहाणामए-अरदं सिया सरीरे जाया शरीरे हामहीरे अमिममण्णागया सरीरमेय अभिभूय चिहा, एयगेय धम्मा वि पुरि- या नाव पुगिसमेव अभिभूय चिट्ठति से जहाणामएपम्मिए सिया पुढविजाए वेमंत पुदविअभिरामण्णागए. पुदविमेव अभिभूय चिहर, एवमेव धम्मा वि माझ्या. जाय पुरिसमेव अभिभूय चिटंति, से जहाणामए-रक्खे सिया पुदवि- र पुषिसंयुट्टे पुदधिमभिसमण्यागए पुढविमेव अभिभूय चिद, एवमेव धम्मा पुरिसाइया जाय पुरिसमेव अमिभूय चिटंति । से नहाणामए-~-पुकावरिणी या पुदविजाया जाम पुदविमेव अमिभूय चिट्ठद, एवमेव धम्मा वि पुरिसाध्या 3 पुरिसमेव अभिभूय चिति । से जहाणामए-उदगपुक्सले सिया उदगजाए च. उदगमेव अभिभूय चिट्ठए, एवमेन धम्मा वि पुरिसाइया जाव पुरिसमेव अभि य चिट्ठति । से जहाणामए-उदगयुन्युए सिया उदगजाए जाव उदगमेव अभि- य निहा, एवमेव धम्मा वि पुरिसाइया भाव पुरिसमेव अगिभूय चिट्ठति । जं य इमं समणाणं गिरगंथाणं उद्दिढ पणीयं चियंजियं दुवालसंयं गणिपिडगं, तं - 17 -- Pra Pririt ब मानि॥ ११ ॥ FATEST निका न; पानागपनामा नमिन एग कनगमगा गागा मागि गमगार, मागाराम मुबा गाने गाइ। इस प्रदिगा मानि-नागे परिस किरिगमाया जोकिमिमान ग परिगरिमामयपरि गोनिसियन र दो दिन पुरिया पगहा कारणमााणा माटेपुशपयसिम्पडिया परितप्पामि या अहगेयमनासि, परोगा जमाइया सोयद का जूइया.. वा पीडइ वा परितप्पा ना परी एनमकासि । एवं सेनाले राकारण वाम वा एवं विप्पडियेति कारणमावणे । महावी पुण एवं विपडिवेदेति परितप्पामि वा, णो अहं एवमकासि । परो वा में दुक्खइ वा जाव परित मावण्णे-अहमंसि दुक्खामि वा सोयामि वा जूरामि वा लिप्यामि या पीडामि । णो परो एवमकासि, एवं से मेहावी सकारणं वा परकारणं वा एवं विपनि। ते एवं विप्परियासमावति ते एवं विवेगमागच्छति ते एवं विहाणमागच्छति। कारणमावण्णे। से चेमि पाईणं वा ६ जे तसथायरा पाणा ते एवं संघायमाग- णिरए इ वा अणिरए इ वा । एवं ते विरूवरूवेहि कम्मसमारम्भेहिं विस्वावा एवं संगइयति उवेहाए । णो एवं विप्पडिवेदेति, तं नहा-किरिया इवान कामभोगाई समारभति भोयणाए । एवमेव ते अणारिया विपडिवण्णा तसा माणा जाव इइ ते णो हवाए णो पाराए अंतरा कामभोगेसु विसण्णा। पुरिसजाए णियइवाइए त्ति आहिए। इचेए चत्तारि पुरिसजाया णाणापण्णा भार मावणणे-अहमशिनुमानामिना गांगामिना जरामिया तिप्पामि या पहने - . ::. --- " . M com - नरत ܕ݁ܘܳܛܳܬ݂ ܕ݁ܰܘܽܝܝܶܪܺܝܽ ܆ ܓܼ ܪܵ܃܇܆܇ ܀ ܇ ܇ ܪܲܐܵ ܕܼ܃܇ ܇ ܐܺܕ݂ ܀ ܬ݁ܝ݂ ܫܵܐ، ܟܼ ܃ ܇ ܕܪܵ܃ ܂ .ܙܝ ܐܝ ܀ ܪܨܨܠ ܀ܢܬ݁ܘܺ ܀ܕ ܝܬܝܐ ܨ ܀ ܐܫܪ܇ ܕܥܲܕܪܵܬܸܐ. ܕܙܬܐܢ ܐܬ݂ܳ ' ܝܶ ܐܲܪ ܙx: ܫܪܗܕ݂ܪܳܐܬܶܐ ܀; eܘܶܐܕ݂ ܙܝܺ. ܡܽܘܕ݂ܺ, .:. ܀.:-܆܇ ܀ ܝܺܙܬ݁ܐܬ݁ ܕܶ ܕ - ܀܀ ܝܺ ܬ݁ܪܶ ܀ ܪ ܂ ܀ . ܘܺܝܬ݂ ܬܶ ܦ ܠ ܐ ܘ ܞܙܐ - ܬ݁ܪܶ ܗܶ ܀ X. ܐܙܬܟܟ ܕ. ܀܆ ܕܼܵ 5܃ ܃ i܇ܗܽܘ ܕ݁ܺܐ܀ ܗܺܝܪ ܇ ܀. ܐ̱ܡܰ.| ܐܢܕ݁ܚܶܛܶܝܢ ܀:gܩܢ، ܐ ܐ܀ܢܳܬ݁ܘܗܶ܂ ܃ܝܼܲ ܝܢ;;s- ܐܺܝܨܶ ;::ܕ݁ܠܳܐ ܝܳܕ݂: ܙܨܶ ܝܺܛܳ ܝܺܕ݂ :ܛܼܲ ܕܺܚܝܢ ;". ܐܼ ، ܐܸܕܸ -;: ;.. ܬ݂ܢ ܙܕܐ .|ܢ ܢܺܐܕܙܙܕܝܺ ܀ ܝܨ ܪܕܲܦ݂ܪܺܝܪ ܀ ܝܼi .ܕ݇ ܐܲܢܵܐ ܕܝܰܬ݂K .14 ܢܨܶܝܪܳܐ ܕ݁ܞr ܣܛ ܛܺ-]*-$. ; ܨ ܩܸܝܐ܂. ܛܺܗܶ ܝܕ݂ܕ݂ * ܕ ܀.ܫܪ،،ܘܬ݂ ܀ ܐܺܕ݂ܰܚܕ݂܇ ܨܲ:.; ܕ݁ܐܽܘܪܺܞ ܕܐ ܟ݂ ܊ ܃ ܂: ܕ݁ܟ݂ܪܘ ܨܿ ܂ ?. ܢ: ܥܼܲ. ܇ ܀ , ܐܶܝ܀܀ ܓܰܕ݂ܙ,'. ܊..ܙܕ݂ܪܶ ܃ ܃ ܂ : ܗܙܟ - ܛܶ ܀ ܀ ، ܡܵܨ,22ܐܰܟ݂ ܝܼ̈܆ ܚܺܠܐܨܶ ;:ܕܼ ܀ ܝܓ.܂ . ܨ 38 ܕܼܿ ܀ 1؛ ܚܲܬ݂ܐܶ: ܐܐ::- ܐܳܟ݂ܶܙܶ :ܟ -܀ ܕܼ ܕܸܕܼܪܝܼܕܼ ܐ ܕܼܪܵܕܹܝܨܲ*** --; :", ، ܆ ܪܽ ܐ݈ܤ܂ ܨ ܒ ܬ݁ܶܐܕ݂ ܪܰܙܘܽ ،، ܀ ܀.ܪܚܕܢ ܙ. ܨܶܝܝܶ ܃ ܃ܚܼܲ؛ ܀ .;. -r' ,.' ܓܰ܀ ܥܺܝܬ݂ ܐܰܚܺ. ܕܪ. ܕ. ܬ݁ܝܪܺܝܽ .ܟ . ܀ ܐܕܕ ܗܐ. ܐ ..ܬܝܼ܆܊ iܪ ܝܝܺܕܶܓ݂ܳr; ܬ,4܃ ܨܲ ܀ܬ݁ܕܶ܂ :... ܕܸܕܼ ܀܆ ܐܼ، ܜ܆܆ ;: ܕܶܝܐ ܀ ܝܼ ܊ ܪܼܐ܂ ܕ݂ܰܙPriu . ܂ܬ݁ܪܳܐ܃ ܃ ܃ ܃ ܃܇܇ ܐܼܼܲ ، ܐܵܗܵܐ،،، ܝܼ : ܀܀ ܕ ܢ܂ ܚܪܰ܆ ܪܲܢ ܗܵܢܵܕܹ. ܪܽ܃ ܊ ܯ ܗܽܘܢ ܀ ܕ !?:vrf F - f ܕܼ܃ ܃ ܃ ܊?: ;F- F' : - ::. ;-- - i ] xj ; -qiii - rf : i ffix ? ! rnxnryriis: ?ܐ܊ : :i'1: ܐܶܕܰ;;ri i ::: - :: if " i irify riri :; 33 ? - RGFܐ ?,f ; ;; vir rr " ; rtrfit ti ? niP ' rt'i ; f ?}";%'_ ;f'frrrr ' ' i ? r'fxli ; grifgrcgat;' ܐܳܙܶ: ];;; ; ; .n ' it ; " } ? 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Gf fir ?? ! | ;; vir qur 3:17 ?3 ܐܶ??oiiri qfxfrojfifir 3177f ' ijv fanfft ? m 1rr1iriminifi ? cr fP r}2 णाओ उपमंने उद्विप पटिगिरओ से मिन। जेगिय शर्म संपराश्यं कर्म किन्नइ, णो तं मयं करेइ गो अण्णाणं कारगइ अपि करत ण समजागह। से महओ आयाणाओ उपरांते उपद्विप पहिरिए । से भिनत जाणेला अमा वा ४ असिस पडियाए एगं साहमियं रामुहिस्स पाणाई भूयाई जीवाई सत्ताई। समारम्भ समुहिस्स कीय पामिचं अच्छि अणिसट्टे अभिहाई आइ सि । चेइयं सिया तं णो संयं भुंजह णो अण्णं मुंजायेइ अण्णं पि भुजंतं ण समशुजागा इति से महओ आयाणाओ उपसंते उपढिए पडिविरए । से भिक्खू अह पुरा एवं जाणेजा तं विजइ तेसिं परकामे । (जस्सहा ते वेश्यं सिया तंजहा अप्पगो पुत्ताइ. णट्टाए जाव आएसाए पुढो पहेणाए सामासाए पायरासाए संणिहिसंगिन किन्जइ इह एएसिं माणवाणं भोयगाए) तत्थ भिक्खू परकडं परणिहियमुग्गमुम्पाय- पत्तमसणं कारणहा पमाणनुत्तं अक्खोवंजणवणलेवणभूयं संजमजायामायावदित णेसणासुद्धं सत्थाईयं सत्थपरिणामियं अविहिंसियं एसियं वेसियं सामुदानि बिलमिव पण्णगभूएणं अप्पाणणं आहारं आहारेजा अण्णं अण्णकाले पाणं पाणकाडे वत्थं वत्थकाले लेणं लेणकाले सयणं सयणकाले। से भिक्खू मायपणे अण्णयरं दिस ?f ?? : ?? T-܇ -܇ ܐܼܲܝ݂ ܙܪ .
गमगही २ अ.२ mirareneur giri * FRamai RITER, E PRERमोrar 4. TREPRENEL : 1 in riskari MER MAHARA ... Resi mrinatri मसान ARE.... Mixit in 24 Trafere! निमा पार॥१॥ । फिरिपाठाण पामबीध अमायणं ।। प, अg UASTHAN पर yatram मे स्मरण परम अंदमान मियते । पानिमा मोगमा मामा मामा मंगे आता मागे सोयागीयायाने सादे मुगमा मंगेपण्या गे मुस्या यो दुस्मा पारदमादान संपादनापर पना गा ging गा देग माने पायो नगारा I विगामे talahim freयामाई गतिमा।
मेव घराओ कप्पेइ अण्ण वि कम्पावेइ अण्णं पिकप्पंतं समणुजाणइ । ते एगई सालाओ का गहमतालाओ वा कष्टकनोंदियाए पडिपहित्ता सयमेव अगगिरा झाड अफोग विझामावेइ झामतं पि अग्गं तमणुजाण, इइ से महया डान भवाने एगइनो केगइ आयाणेगं विन्द्ध समाणे अदुवा खल्दाणेणं अदुवा तुरा थालए गाहावड़ण वा गाहावह पुत्ताण वा कुण्डलं वा मगिं वा मोत्तियं वा सयमेव अवदाइ अोग वि अवहरावेइ अवहति पि अण्ण समाजाणइ इ से महया कर भवइ ।। से एगइओ कंगड़ वि आयाणेगं विद्ध समाणे अदुवा खलदाणेगं अदुवा राथालए तमगाण वा मादणाण वा छत्तगं वा दण्डग वा भण्डग वा मत्तगं. लदि वा भिमिगंवा चेलग वा चिलिमिलिगं वा चम्मयं वा छेयणगं वा चन्म कोमियं वा सयमेव अवहर जाव समगुजागइ, इइ से महया जाव उपक्वाइन भवइ ॥ में एगडओ णो विइगिंळद, तं जहा-गाहावई वा गाहावइपुत्तान सयमेव अगणिकाएणं ओसहीओ शामेह जाय अण्णं पि झामतं समणुजागर, डी में मदया जाव उपक्वाइत्ता भवइ । से एगइओ जो विइगिंण्ड, तं जहा-माहा. वईण या गाहावइपुत्ताण वा उहाण या गोणाण वा घोडगाण वा गहभाग वा सर १६२ अंग-पवित्र सुत्ताणि क्वाइत्ता नवा । से एगइयो नवनियमावं पडियाय तमेव सुमनं वा अगर वा तु पाणं इंता जाब उपक्वाइना भवइ । से एगइओ सोनियंतिम पडिमंधाय तमेव नगुल वा अन्य वा तसं पाणं ताजा आहारं आहार इह से नया पावेहिं कम्नहिं अत्ता अक्वाइत्ता भव ॥ १६ ॥ से एमडी परितामझाओ उद्वित्ता अहनेवं दृणामि त्ति कछु तितिरं वा वट्टगं वा लाव वा कवीवर्ग वा कविज वा अग्गरं वा ततं पागं हंता जाव उपस्वाइत' भवद । एगइप्रो कगइ आयाणे विन्द्धे समाणे अदुवा खल्दा अदुवा नुराधानएन गाहावईश वा गाहावइपुत्ताग वा सयमेव अगणिकाएवं सत्ताई शान्ने अण्णेन वि अगणिकाएक दरलाई झामाइ अगणिकाएणं सत्ताई झामतं पिअ. सनगुजाणड, इट से महया पाककहि अत्ता उखाइत्ता भवइ । से एगइ कंगई आयाण विन्द्धे नमाणे अदुवा खलदाणे अदुवा तुराधालए गाहावर वा गाहावडपुत्ताग वा उट्टाग का गोगाण वाघोडगा वा गहाण वा सयमेव घूराओ कम्पेड अग वि कप्पावेई कप पि अणं तमणुजाणइ, इइ से महया वार भवद । ले एगइओ केणइ आयाणेणं विरुद्ध समाणे अदुवा खलदाणेणं अदुवा सुरा थालएणं गाहावईण वा गाहावइपुत्ताण वाहतालाओ वा गोतालाओवाघोडग ...
सूर्यगडो सु. २ अ. २ गो विइगिंग्इ, त जहा-गाहावईणं वा गाहावइपुत्ताण वा उट्टसालाओ वा जाव हमसालाओं वा कण्टकबोंदियाहिं पडिपेहित्ता सयमेव अगणिकाएणं झामेइ जाव उमणुजाणइ । से एगईओ णो विइगिंछइ, तं जहा--गाहाबईण वा गाहावइपुत्ताण माजाव मोत्तिय वा संयमेव अवहरइ नाव समणुजाणइ । से एगइओ णो विइ. गठइ त नहा-समणाण वा माहणाण वा छत्तगं वा दण्डगं वा जाव चम्मछेयणगं या सयमेव अवहरई जाव समणुजाणइ । इइ से महया जाव उवक्खाइत्ता भवइ । से एगइओ समणं वा माहणं वा दिस्सा णाणाविहेहिं पावकम्मेहिं अत्ताणं उवक्खा- इत्ता भवइ, अदुवा णं अच्छराए आफालित्ता भवइ, अदुवा णं फरसं वदित्ता भवइ, कालेण वि से अणुपविठ्ठस्स असणे वा पाणं वा जाव णो दवावेत्ता भवइ,जे इमे भवंति वोणमंता मारकंता अलसगा वसलगा किवणगा समणगा णिउज्जमा वणगा पवयंति ते इणमेव जीवियं धिजीवियं संपडिव्हेंति, गाइ ते परलोगस्स अट्ठाए किंचि वि सिलीसंति, तें दुक्खंति ते सोयंति ते जूति ते तिप्पति ते पिट्टति ते परि- तप्पति ते दुखणजूरणसोयणतिप्पणपिट्टणंपरितिप्पणवहबंधणपरिकिलेसाओ अप्पडि- विरया भवति । ते महया आरम्भेण ते महया समारम्भेण ते महया आरम्भसमा- रम्मेण विरूवरूवेदि पावकम्मकिचेहि उरालाई माणुस्सगाई भोगभोगाई भुंजित्तारो भवति। ते नहा-अण्णं अण्णकाले पाणं पाणकाले पत्थं वत्थकाले लेणं लेणकाले सयणं सर्यणकाले सपुष्वावरं च णं हाए कयबलिंकम्मे, कयकोउय-मंगल-पायच्छित्तै सिरसा हाए कण्ठेमालाकडे आविद्धमणिसुवण्णे करिपयमालामउली पडिबद्धसरीरे वग्घा- रियसोणिसुत्तगमलदामकलावे अयवत्थपरिहिए चंदणोक्खित्तगायसरीरे महइ- महालियाए कडागारसालाए महइमहालयंसि सीहासणंसि इत्थीगुम्मसंपरिवुडे सब्ब- राइएणं जोइणा झियायमाणेणं महयाइयणट्टगीयवाइयतंतीतलतालतुडियघणमुइंग- पडप्पंवाइयरवेणं उरालाई माणुस्सगाई भोगभोगाई भुंजमाणे विहरइ । तस्स णं एग- 'मवि आणवेमाणस्स जाव चत्तारि पंच जणा अवुत्ता चेव अब्भुहति । मणह देवा- गुपिया किं करेमो? किं आहरेमो ? किं उवणेमो ? कि आचिट्टामो ? किं भे हियं इच्छिय ? किं में आंसगस्स संयइ १ तमेव पासित्ता अणारिया एवं वयंति- देवे खलु अयं पुरिसे, देवसिंणाए खलु अयं पुरिसे, देवजीवणिजे खलु अयं पुरिसे, अण्णे वि य णं उवर्जीवति । तमेव पासित्ता आरिया वयंति-अभिकत- - TRA --- लिया जाव ने नओ विमुनमाना मुमपलमयत्नापसमूपचापपमा ठाणे अगारिप अफेयर, जाय अगम्यग्यकीयमग्गे गंतमिन्छे अमाह वागत्म अधम्मरकवरम विभंगे एवमाविम्यहमद पाईन वा म- मगुत्मा भयंति-गिहत्या महिला महारम्भा महापरिग्गहा अचम्मिया अध अधम्मिट्ठा अधम्मावाई अचम्मायजीविगो अधम्मपलोई अधम्मा विगत्तगा लोहियपाणी चण्टा महा मुद्दा माहस्सिया उपकुंननगमायानि कूटकरसाहसंपओगबहुला दुस्मीला दुव्यया दुप्पडियागंदा असाहस पाणाड्यायाी अप्पडिविण्या जावमीयाए जाय गव्याओ परिग्गहाओ विरया जायभवाए सन्याओ कोदात्री जाव मिच्छादंमगनाटाओ अपडि सब्याओ पहाणुम्मदणवगगंधविलेवणसदफारिसरसरूवगंधमल्लालंकाराओ अ १६४ अंग-पविट्ट गुत्ताणि मागीय मान; farmire पनि आगामी मोगरा ग निगि ना गाय fair I गाणे गाने गनो मितिमा भिअगायदा मग in AIRPET: A पसमापिया निर्मग एका ''7:; '':: 1:: it: { } ''་ में जमा-आरिया को आया मागोमाग पीलागोपा देगे , चंग रगमंना भेगे मध्या में दुगना को मुन्या मेग मुम्लाग । मनवनि परिमाया नि, यो आगो जता पोगपगा। नगर अभियांग जाय मागोवा गायनाए परिनिपुति चणि ।। ६ आरिण कवर जाय माय गो गाहु । दोन धम्मकायम विना एकमाएका माया नमाम दाग निगम एवमाहिट | मे भवंति आशिया आपहिया गामनिनिया का ग्पटु तमल ठागरम मिग्मगाम विभंग एबमाहिए ॥ ३९ ॥ अहावरे । अधम्मसीलगनुदायारा अयम्मेण चव वित्ति कम्पमाणा विहति । हण हिंद
ܚܪ ܨܳܪܶ ܚܰܝ ܐ݈ܢܳܐ ܕ݁ܰܐܪ܀܀ .܆ ܢܼܲ ܧܼܲܨ ܐ ܆ ܐܳܕ݂: ܪܪܪ . ܟ݂ܝܺܕ݁ܺܙܪܰܐܕ݁ܪܶ :- !;.
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I to fit I lift | || Tur forn fapy 【T A lesil if 4.4 : fini Al fari iri IN TI TTI IN THT Iff ari MINI II TTI Fri fruft, Ora Learfrar THE दुलहयाहिए, यावि भयद । ग ठाणे अण्णारिए अकल जान असम्बन्। पहीणमगंगे पगतमिच्छे अगाह। पटगम्म ठाणस्म अधम्मपनयम विर्भग HIRT | 22 | INT AIM H INFREA PIT THIRT इह ग्वटु पाणं वा ४ मंगदया मणुस्सा भाति । तं जता-अणारमा रिग्गहा धम्मिया धम्माणुया घम्मिट्ठा जार धम्गेणं चैव वित्ति काप विहरंति, मुसीला मुव्वया सुप्पडियाणंदा मुसाहू सवाओ पाणाइवायाओ- विरया जायचीवाए, जाव जे यायपणे तहप्पगारा सावना अघोहिया बना :: Rise 에 : 1 ;; :: is it' !! * It It rifi Art 1 1 L !
ܪܽܙܕ݁ܟܐ:ܪܺܛܺܐ ܕܐܕ݁ܪܺܐܪܢܐܝ iܪܐܵܢܐ: jitܕ݂ܳܐܺܝܪܽܐ: fuitaRe :::: jܬܵܬ݁ܢܳܐtp : 2 : iܫܠܝܳܐ ܝܺܨܕܕܙܐ,ܬ݁ܢܳܝܬ݁ܬ݁ܳܐ ܬ݁ܺܐܫܕܬܐܫܪܐܝܪ ܐܺܐܺܨܶܕ݁ܺܝܢܳܐ ܕ݁ܰܐfflܪܬܪ ܐܐܐܐܐܬܐܬܐ ܪܪܙܠܙܐܪܐ --ܐܰܪܬ݁ܐܶ ;32:i % : iܐܬ݁ܝܺܬ݁ܪܽit ; iiܬ݂ܪܪܳܐ1ܐܐ ܐܘܬ݁ܬ݁ܫܰܪܳܐ܃ :ii ? : ofܐ 4ܐ ܣܺܝܪܺܙܪܶܙܨܶܪ ܪܺܝܰܢ:} ܒܝ ܘܪܳܐܛܺܞiܫܪܵܪܵ ܕ݁ܪܳܝܶܐܬ݁ܐܐܐܬ݁ܢܳܪܽ ܬ݁ܪܳܐܪܰܐܐܰܠܝ ifitifܬܐܬܪ 44 ܬܐܪܐܐ܃:: 24܃ ܐܳܝܺܪܽܪܝܺܬ ܕ݁ܬ݁ܰܐܪܶܐܬ݁ܥܶܝܺ ܐ̱ܝܳܪܶܐܰܫܳܕ݁ܪܶܬ݂ܪ ܐܳܕ݁ܺܐܐܐܬ݁ܪܶܕ݁ܶܕ݂ܨܳܐܙܶܝܶܢܪܪܐܐܕi .; iiܬ݁ܐܬ݁ܪܶܙܳ rܕ݁ܢܳܐ ܫܪܵܪܵ ܬ܀ ܕ ܐܬܐ,:fa :: ::: 18. : ni.' ::: ::: ܐܪܐܪ1: 1 ܐܰܘܶܪܽܘܺܢ ܗܐܶܬ݁ܪܳܝܺܬ݁ !?:af; ܪܕܐܙܕܪ ܐܪ ܇ ܕܵܢܸܪ ܪܪ ܕ݁ܪܵ}" ܀ 1 : 3 ܕܰܪܸܢ ܪܵܐ ܪܵܕ݂ܕ݁ܳܪܽܢܳܫܳܐ ܕ݁ܳ ܐܪܺܐܶ ܡܽܪܳ ܪܪܐ: ܐ. ;:: -Xܐܕ.: :ܐܝܬܐ܇ 3ܕܵܪܵ܃ ܝܿܬܐ ܪܝܺܪܺܐܶܬ݁ܺ܂ܕ݂ ܪܽ ܪܽܕ݂ ܕ݁ܺܪܽܪܺܝܢ ܐ̄ܬܵܐ: 21 ܕܲܪܝܐܐܪ1f'se; ;܀ ܨ ܐܪܰܘ:2: ܪܶܓܰ ܕܶ ܨܶܝܪܳܪܳܐ ܪܽܘܙܳܐ ܕ݁ܺܝܬ݁ܽܝܶܐ܃ ܐܳܘܰܕܨܳܐܪܽܬ݁ܺ .; ܪܺܝܬ݁܀ ܢܸܪܰ ܣܺ܂ ?x.;
अप्पडिविरया । से जहाणामए रामणोवासगा भवंति अभिगयजीवाजीया उमान गोवाहणए भूमिलेगा फलगसेना पहरोमा केरालोए बम्भनेरवाने परमाण- णाओ तालणाआ उगावया गामाण्टगा बानी परीसहोवसग्गा अहियाति:- णियाघायं गिरावरणं कसिणं पडिपुण्णं केवलारणाणदंसणं समुप्पाउंति, समुप्पाडि तओ पच्छा सिज्झांति बुज्झति मुचंति परिशिवायंति सव्वदुक्खाणं अंतं करति एगचाए पुण एग भयंतारो भवति, अवरे पुण पुनकम्मावसेसेणं कालमाने का किच्चा अण्णयरेसु देवलोएसु देवत्ताए उववत्तारो भवति । तं जहा-महहिए महज्जुइएमु महापरकमेसु महाजमेमु महाबलेमु महाणुभावेसु महासुरखेतु । तत्थ देवा भवंति महटिया महज्जुइया जाय महासुक्खा हारविराइयवच्छा कडा डियथम्भियभुया अंगयकुण्डलमढगण्डयलकण्णपीढधारी विचित्तहत्याभरणा विधि मालामउलिमउडा कलाणगंधपवरवत्थपरिहिया कल्लाणगपवरमल्टाणुलेनगरा भासुरबोंदी पलम्बवणमालाधरा दिव्येणं रूवेणं दिव्येणं वण्णेणं दिव्वेणं गंधेणं दिन फासेणं दिव्वेणं संघाएणं दिवेणं मंठाणेणं दिव्याए इवीए दिव्वाए जुईए दिवार पभाए दिव्याए छायाए दिवाए अचाए दिव्वेणं तेएणं दिव्वाए लेसाए दर दिसाओ उज्जोवेमाणा पभासेमाणा गइकल्लाणा ठिइकल्लाणा आगमेसिभहया में भवति। एस ठाणे आयरिए जाव सव्वदुक्खपहीणमग्गे एगतसम्मे सुसाहू। ठाणस्स धम्मपक्खस्स विभंगे एवमाहिए ॥ २३ ॥ अहावरे तचस्स ठाणस्त मात- गस्सविभंगे एवमाहिनइ । इह खलु पाईणं वा ४ संतेगइया मणुत्सा भवति । जहा-अपिच्छा अप्पारम्भा अप्पपरिग्गहा धम्मिया धम्माणुया जाव धम्मेग वित्ति कम्पमाणा विहरंति सुसीला सुव्वया सुप्पडियाणंदा साहू एगचाओ पारा. वायाओ पडिविरया जावीवाए एगचाओ अप्पडिविरया जाव जे यावणे तहान गारा सावन्ना अमोहिया कम्मंता परपाणपरितावणकरा कति तओ विएगमासे १६८ संग-पचिट्ठ सुत्ताणि चासाई गायणारिवागं गाउणति २ माचार आनाशि उप्पणागि वा अशुप वा बाई भत्ताई पनि पनपाइसा नाईलाई अणरागाए. छेदेति, अगल- छेदिना जस्मटाए नारइ गमागे मुडभाने अण्डाणमारे अदंतवणगे अप लदानलझे माणात माणणाओं मीलणाओ जिंदणाओ मिराणाओं गरहणाओ र तमढें आराहेति तम, आराहिता नरमेहिं उस्सारागिस्सासेहिं अणंत अ बाई दोचल गतसम्म साह २५।। एवमेव समगुगम्ममाणा इगे चेय दोहि ठाणेहि समी- नूपगडो सु. २.२ सारा भारतलाम सुरफागनुमालीगणमा गगमात्री पावणनाभी अमरा, frik या मिनिया मानिनिरिहा गहना पुदिना विधिमा अभिगया बजिम्मानुरागरमा । अपमानायगे भट्टे असे पागले सम अगटे उarlert अनुपयाराविपरभायगा चारापिट पनिमानिनीत दिए पोम अनुपामा समजिगर मानुगाम. भी समाजादिगामाग ओगट- कमलामगार दिनमाना या समयमुनमगरवापीसदीय- या महामि तपोकम्मा भग भायमान निरोग पचा- यण विहार विदामा वामाई माग गरिमार्ग पानि पाउमिना आईनि उमगनि ना, अशुपानि का मामलाई असार पति को भनाई अगरनार परक्यापला माई भत्ता अमाप छत या मता असणार नाआनोग्यपनिंजा समाहिता कालमाने का दिया अपयरगु २. देवोपन देवताए, व्यवसारो भति, सं जहा- माहिएन महानुपएगु जाय मदानुस्खेमु समं तदेव जाग एण्ड आयरिए भाय एगतमाम साह । तवरस ठालाल गौरागला विनों एयमाहिए ॥ २४ ॥ अविशद पग पाले आदिम विराई पर पंटिए आहिराइ निरयानिई पदुग बालदिए आमिाइ नत्यर्ण माग राघो अविर एमाहाणे आरंभहाण अगारिए, नाय असन्य गणपईण. मनोगतमिच्छ अगा, तो जा सा रापओ दिए ए.सटाणे अगारंगहाणे आरिए चाय सम्बदुस्प पाहणमग्गे एगंतगम्ने साहू, सत्या ना सा सम्बओ बिरया- विरई एमाणे आभारंभट्टाणे ए.सहाणे आरिए जाय मध्यनुवग्यापहीणमग्गे -- - अति, से नहा-धम्मे चेय अधगे चेय, उयसते चेय अणुवसते जेव, तत्याने से पदमहापस अधम्मपक्सास विभंगे एबमाहिए तस्राण इमाई विगितेवढाई पाया- दुरगयाई भयंतीनि मक्खायाई जहा-फिरियाबाईणं अकिरियावाईण अण्णागियवा- इंग वेणहययान तेचि परिगिव्याणमामु तेवि परिमोपात्रमासु तेवि लवंति सावगा =ܐ,!? i ; -r - rif - rijf - triff11 ;; ; ? ! * f' ؛ .rifiirrjfitf'ftiSirftnot j'f { ! f -iir fruf :::: riff vij zif- ? qiiif- ' " f iir ris grrfI - liff ܕ݁ܺ farif : f_ ܒ,: fcii ! fir { : rcrrri zrjfif 3rrorff܆ ff - 3 - trifi1rrnr fxxgf - 1-1 : frrrrgi܀ ( 'r :: rus : Ifcriftifiirrri fiir : ; zfܕ݂ mni ? " ; ? cf 21T3 - frufܢ܆ "rr-ri{ 'r xqmi'-?{ 'fI:'n'f'"{ {{{{{Tiff'; 'f { '{;-if;-if ?[?rfrin/'qf ;??c भूया सव्ये जीवा सव्ये मत्ता ण इतव्या अन्नावयवा ण परियन्ना ܙܕܢܐ ܕ 5܃ ܃ ܃܇܆܃ ܃ ܕܿ :' ܨ . | . : -܇ "? ܙ ܙ ܙ ܙ ! ܚܘܕܕ ܀ ܘ ܙ .
ते सूयगडो सु. २ अ. ३ १७१ पन्या ते णो आगनुच्छेयाए ते शोभागनुभेयाए जाव जाइजरामरणजोगिजम्मण- गरपुगभवगभवागमवपवंचकलंकीमागियो गनिस्तंति, जाव अगाइयं च णं गवयग दहमदं चाउतसंगारकतार भुमो भुमी गो अगुपरिपट्टिरसंति, मिति जाव सत्वदुक्खाणं अंत करिस्मेति ॥ २८॥एहिं यारसहिं कि.रिचा. रोहिं बमाणा जीवाणो सिन्दिानु णो युनिंदानु णो मुल्जिमु णो परिगिव्याईनु जाय १ सम्बदुक्खाणं अतं करेंनु वाणो करेंति वाणो करिस्संति या । एपंसि चेय रसमे किरियाठागे वट्टमागा जीवा सिडिझनु मुशिनु मुबिसु परिणिभ्याई सु जाय विदुक्खापं अंत करेंमु या करंति वा करिसंति या। एवं से मिलव आयट्टी सयहिए आयगुत्ते आयजोगे आयरफमे आयरक्खिए आयाणुकम्पए आयगि- केदए आयाणमेव पडिमाहरेखासि ति वेमि ॥२९ ।। ।। आहारपरिण्णा णाम तइयं अज्झयणं । मुयं ने आउसं! तेणं भगवया एवमरवायं । इह खलु आहारपरिष्णा णामायणे रस गं अयमझे। इह. खटु पाईणं वा ४ सम्बओ सध्यावति य णं लोगसि चत्वारि- नयकाया एवमादिति । तं जहा-अग्गीया मूलवीया पोरीया बंधवीया । तसिं गणं अहावीएणं अहावगासेणं इहेगइया सत्ता पुढवाजोगिया पुटवीसंभवा पुटवी- कमा तम्बोगिया तसंभवा तदुवफमा कम्मोयगा कम्मणियाणेणं तत्ययुधामा णाणा- बहजोगियानु पुढामु रक्सत्ताए विउद्देति ॥ ते जीवा तेसिं णाणाविहजोणियाणं दवाणं सिणेहमाहारेति । ते जीवा आहारंति पुढवीसरीरं आउसरीरं तेउसरीरं माउसरीरं वसइसरारं । गाणाविहाणं तसथावराणं पाणाणं सरीरं अचित्तं कुव्यंति गरिविद्वत्यं । तं सरीरं पुवाहारियं तयाहारियं विपरिणय सारुवियकडं संत । अवर य णं तेसिं पुढविनोणियाणं रक्खाणं सरोरा णाणावण्णा णाणागंधा जाणारसा गागाफामा णाणासंठाणसंठिया गाणाविहसरीरपुग्गल विउब्धिया ते जीवा कम्मोवय- गगा भवतीति मक्खायं ॥ १॥ अहावरं पुरक्खाय इहेगइया सत्ता रुक्खजोणिया क्वंसंभवा रक्युफमा तजोगिया तस्संभवा तदुवकमा कम्मोवगा कम्मणियाणेणं त्ययुफमा पुढवीजोणिएहिं स्क्वेहिं रुक्खत्ताए विउति । ते जीवा तेसिं पुढवी- जोगियाण रुक्खाणं सिणेहमाहारेंति, ते जीवा आहारेंति पुढवीसरीरं आउतेउवाउ- वस्सइसरीरं-णाणाविहाणं तसथावराणं पाणाणं सरीरं अचित्तं कुव्यंति परि- विद्वत्यं । सरीरं पुस्याहारियं तयाहारियं विप्परिणामियं सारूवियकडं संत । अवरे
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नगि LEHदा मामा
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चरणगा भगति लिनपुरमागरमागता गो
मायभवा कामकामातीमिपावरगंगा तदरमा कमारवाणगा कमाल
गणं तत्थयुकामा कमजोगिन मग अनार विनित जीता।
वियकंद मंतं अरेवियतमिग्नबनागिगाणंअध्झादाण सरीरामागारमा
रुवारजोगियाणं रुकावाणमिमेरमादांतिने जीता आहात पुटपीमरोरं जावमा
मक्खायं ।। ।। अनावरं पुरनावायं दहेगइया सत्ता अझारोधमोणिया :
भवा जाव कम्मणियाणणं तत्थबुकमा नायजोगिए.सु अारोहमु अक्षारोहत
विउति ते जीवा तेसिं रुलायजीणियाणं अज्झारोहाणं सिणेहमाहारेति ते
आहारंति पुढवी सरीरं जाव सारा वियकई संतं अवरवि य णं तेसि अक्षारोहको
याणं अज्झारोहाणं सरीरा णाणावण्णा जायमग्वायदाअहावरं पुरक्खायं इनाम
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सूयणटो गु. २.४
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भाग पन्ना, Mer
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जापानिन AATE NEAR सय परिग्मी,
हामिला र ME 3 गाया याद
ऐन परे सेनाप पा गाना गाया
माया याri fR पायनियम न पानि
पदारमाने में TET Rem गावास का मारायशुनस्स या
मो. या गरिमामय गाय परिनिमामि गालि
हरिमान विगामागोवा मुने जागामाणे गा अमिगभूमिमणि
- पमटिगानित भया ! एक वियागरेमाने मनियार दियागर
श-ताना गरिन आइना से पाप सरम गाहाकार या राग
हात्तरंग या रणों या परिमग या सणे गिलाय परिगिलागि स्य
दण वाहमामि लिपटारेमाने दिया या रात्री या मुते वा जागरमाणे या अमि.
समय निजामटिपनि पाविनायनिनादणे, एवमेय माले वि सध्यसि पाया
जय मनि मनाया या रात्रीचा मुग या जागामार्ग या अमित्तभूए, मिटा.
हिर नियं पादविटवायांचनदण्टे । तं जा-पागाइयाए जाय मिच्छादगणमाये ।
FATHE.१ !! 17rill एमांग 4.11 MAHARE निकाय नि jिागकामना गमा आगामि गिनारो॥४॥ गुदरता गममा अगि गरिमा नियमई महागा तेणं कालणं तेणं ममरणं रायगिरणाम णयरे होत्या रितिथिमिप। दिसीभाए पत्थ णं णालंदा णामं वाहिरिया होत्था अणेगणरायसंनिविद्या (वण्यओ) जाव पडिरुचे । तस्म णं रायगिहरग यरस्रा अड़िया उत्तरपुर। पदिमवा । तत्थ णं णालंदाए बाहिरियाप लेवे णाम गाहायई होत्था अविन/ वित्ते वित्थिण्णविपुलभवणसयणासणजाणवाहणादणे बहुधणयहुजायरूवरजए आ-/ V- .. . . . ." www स धम्ममुद्रा का ॥५५॥ नियम ॥ णालंदइज्ज णाम सत्तमं अज्ायणं ༤ ཀཱ ར , ༔ ༔ རྫསཾ ༔ : * ཁ༣ • བ པ དེ བྱཱ ཎ ༩ ༣༠.f;", “ ༄༅༠ ཋ ས ཙན, ༔ ::: ::༌ རྣམ༌ 1: w, :2:ཙ ; ཁམ: བ མ༑ རཱ ཡ ; 1:31: • •ཏF༌ ༣ ཙ?r- '' བས༔ ཡུམ:; གཙཔཚ9༔ མ་ཟླ r++r1g;, སྶཔ་ ཝཱ ཙ པལ ༧ ༣ ; པཎ, r༣:; rn, ; . ༔ ༔ ད :: 4:ཟླས: * , #ft ; gi? ༣rry བ་ 1: ཀུ }} |: : 5: , z=' ;, rཙarr:ཨ། - པ : ཝཡ:5,ཙཱམཱ; 3 རྣམ ༣༣:་ ༢:;i| it s - ༈ ས ས ས པ ཀཱ་ཀཱཔ;' : j• པ :ཨུདྡནས वडर भवट ! भगवं च उदाहु संदंगाइया नलगतेस-1 इंदबा बाय कलमले की क्रिया अपराई आवरिपई किनिदिई निदे भाडाने बामेव कति करनापारलेडनार :: वन्दुबरमा, समकामालनुपरस्सा भाड, बाद आया. मानवारवादडे निक्यिने भइ। स्पो गइया माता मंति। नहा-महन्छा महारमा नागार बार दुन्यडियानंदा नाव नत्रामी परिणामी अपाविरद बरही स्नकम्तमायाननो आनरपंवार दंडे स्विते ती तमो गुनगनयार दुग्गड़गानि नवंत, देपावले ते नहाकाया दे विडिया देयरमा आयरनोइनोव मला नतिजा-अम्मा गरिंगहा पन्निया इलाम परिगाहान पहिवरया कारवाए, जेई नमःवालकाना गानि नति। कमावि बुचंति वामन्याउर भड़ाना संगइया नमुना नयति तं नहा--अन्मिन्ना अजारमा अमरगा बनाया इन गवानी परिग्महामो अगाडेरिया, बेटे गल यानो भानरमंदार दन्डे निक्लिने। तभी आप दे। तभी मु, गनापार मेगड़गानिदो नति। ते पाावि कुरका आपारमानांतर वन्डे निक्विने भवइ । नो बहुवया लेकर यवतचे अनावानेलाई एवं विपडिदेत भईसह विचंति कार बाउर भर भजन गडया पर ददाज्या जननकाल पानी आनर १९२ संग-पविट्ट सुत्ताणि यह त । अयारे में पाए भनद-भाव में . -- दन्डे गिस्तिते, तभी बिनव्हति दे तो नु, . अररिया अवमहका मानवविका, कछुईरहटिया, जो ... वयता नीत, कभी विनुमाता नुहोरल्नुपवार यति। तत्व -- सूयगडो सु. २ अ. ७ १९३ रेता पारलोइयत्ताए पञ्चायति । ते पाणा वि बुचंति, ते तसा वि बुधति, ते हाकाया ते समाउया ते. बहुयरंगा जेहिं समणीवासगस्स सुपचक्खायं भवह व णो णेयाउए भवइ । भगवं च णं उदाहु संतेगइया पाणा अप्पाउया, जेहिं गोवासंगस्स आयाणसो आमरणंताए जाव दण्हे गिरिखत्ते भवइ । ते पुवामेव लं करेंति, करत्ता पारलोइयत्ताए पच्चायति । ते पाणा वि वुचंति, ते तसा वि यति, ते महाकाया ते अप्पाउया ते बहुयरगा पाणा जेहिं समणोवासगस्स सुपर- आयं भवइ, जाव णो णेयाउए भवइ । भगवं च णं उदाहु संतेगइया समणोवासगा वति । तेसिं च णं एवं बुतपुर्व भवइ-णो स्वलु वयं संचाएमो मुण्डा भवित्ता व पचहत्तए । णो खलु वयं संचाएमो चाउद्दसमुद्दिपुण्णमासिणीसु पडिपुण्णं सह अणुपालित्तए । णो खलु वयं संचाएमो अपच्छिमं नाव विहरित्तए वयं च सामाइयं देसावंगासियं पुरत्या पाईणं वा पडीणं या दाहिणं वा उदीणं वा एया- या नाव सन्चपाणेहिं जाव सव्यसत्तेहिं दण्डे णिक्खित्ते सन्चपाणभूयजीवसत्तेहिं विमंकरे अहमंसि । तत्थ आरेणं जे तसा पाणा जेहिं समणोवासगस्स आयाणसो आमरणंताएं दण्डे शिक्खित्ते । तओ आउ विप्पजहंति, विप्पजहित्ता तत्थ आरेणं वेव जे तसा पाणा जेहिं समगोवासगस्स आयाणसो जाव तेसु पञ्चायंति, जेहिं -अमगोत्रासगस्त सुपञ्चक्खायं भवइ । ते पाणा वि जाव अयं पि भेदे नाब णेया- ए भवइ ॥ १२॥ तत्थ आरेणं जे तसा पाणा जेहिं समणोवासगस्स आयाणसो -आमरणंताए दण्डे णिक्खित्ते ते तओ आउं विष्पजहंति विप्पजहित्ता तत्थ आरेणं सचिव नांव थावरा पाणा जेहिं समणोवासगस्स अट्ठाए दण्डे अणिक्खित्ते अणट्ठाए दण्डे णिखित्ते तेसु पञ्चायति । तेहिं समणोवासगस्स अट्टाए दण्डे अणिक्खित्ते अगट्टाएं दण्डे गिक्वित्ते, ते पाणा वि धुचंति, ते तसा ते चिरट्टिइया जाव अयं अपि भेदे से:...। तत्थ जे आरेणं तसा पाणा जेहिं समणोवासगस्स आयाणसो आमरणंताए... तओ आउं विप्पजहंति विप्पजहित्ता तत्थ परेणं जे तसा थावरा पाशा जेहिं समगोवासगस्स आयाणसो आमरणंताए...तेसु पचायंति, तेहिं समणो- वासगस्स सुपच्चक्खायं भवइ, ते पाणा वि जाव अयं पि भेदे से... । तत्थ जे आरेणं थावरा पाणा जेहिं समणोवासगत्स अट्टाए दण्डे अणिक्खित्ते अणट्ठाए णिक्खित्ते ते तो आउं विप्पजहंति, विप्पजहित्ता तत्थ आरेणं चेव जे तसा पाणा जेहिं गयावि एगइया वेयणं वेयंति, जाव पंचिंदियतिरिक्खजोणियाणं मणुस्सा सास वा से चेवणं से अमुरकुमारत्तं विप्पजहमाणे मगुस्सत्ताए वा तिरिक्सजोगिता रगा० अभंतरगे नेत, बाहिरने मेन, अतरगे कमाए, अहिमंससोगिया. रहिरावले, बाहिरए उरालिलए, मस्साणनि एवं व विग्गह गड़समायाम णेरइयाणं दो सरीरगा० तेथए त कमाए नेत, गिरंतरं जाव वेमाणियाणा मेर याणं दोहिं ठाणेहिं सरीरुप्पत्ती सिया, सं० रागेण चेन, दोसेणं चेव, जार मी याणं । णेरइयाणं दुहाणणियत्तिए सरीरगे० रागणिव्वत्तिए चेव, दोसगिरि चेव, जाव वेमाणियाणं ॥ २९ ॥ दो काया० तसकाए चेव, थावरकाए ! तसकाए दुविहे पण्णते० भवसिदिए चेव, अभवसिदिए चेव, एवं थावरकएति वित्तए, पाईणं चेव, उदीणं चेव, एवं मुंडावित्तए, सिक्खा वित्तए, उवहावितर ॥ ३० ॥ दो दिसाओ अभिगिज्झ कप्पड़ णिग्गंथाणं वा, गिरगंथीणं वा, पन्ना स जित्तए, संवसित्तए, सज्झायं उद्दिसित्तए, सज्शायं समुहिसित्तए, सज्झायम जाणित्तए, आलोइत्तए, पडिफामित्तए, प्रिंदित्तए, गरिहित्तए, विउहित्य, विसोहित्तए, अकरणयाए अन्मुहित्तए, अहारिहं पायच्छित्तं तवोकम्म पडिवदितर, संलेहणाझूसणा झुसियाणं भत्तपाणपडियाइक्खियाणं पाओवगयाणं कालं अगल- विइया, गइरइया, गइसमावण्णगा, तेसिं देवाणं सयासमियं जे पावे कम्मे कारा जे देवा उद्योववण्णगा कप्पोववण्णगा, विमाणोववण्णगा, चारोववष्णगा, चार. तत्थगयावि एगइया वेयणं वेयति अण्णत्थगयावि एगइया वेयणं वेयंतिणेरइयान सयासमियं जे पावे कम्मे कज्जइ तत्थगयावि एगइया वेयणं वेयंति अपत्य समियं जे पावे कम्मे कम्मइ, इहगयावि एगइया वेयणं वेयंति अणत्यगी एगइया वेयणं वेयंति, मणुस्सवज्जा सेसा एकगमा ।। ३२॥ णेरइया दुगार तिरिक्वजाणिएहिंतो वा उपवनेमा, से चेव णं से णेरइए णेरइयत्तं विपनाम दुयागइया प० त० रइए णेरइएसु उववज्जमाणे मणुस्से हिंतो वा पनिंदिन मणुस्मत्ताए या पंचिंदियतिरिक्खजोगियत्ताए वा गच्छेज्जा, एवं असुरकुमाराति २०४ अंग-पविट्ठ सुत्ताणि दो दिसाओ अभिगिज्झ कप्पइ णिग्गंथाणं वा णिग्गंथीणं वा, अपच्छिममारणतिर माणाणं विहरित्तए, तं जहा-पाईणं चेव उदीणं चेव ॥ ३१ ॥ वीयं ठाणं वीयो उद्देसो
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सासुरसंगामंसि वा वट्टमाणंसि केवलकप्पा पुढवी चलेना, इच्चेए हिं तिहिं० दिईया, तेरससागरोवमहिईया । कहि णं भंते ! तिपलिओवमट्टिईया देवा किचि- जोया परिवसंति ?. उप्पिं जोइसियाणं हिहिं सोहम्मीसाणेसु कप्पेसु एत्थणं तिपलि. विमदिईया देवा किञ्चिसिया परिवति । कहि णं भंते! तिसागरोवमट्टिईया देवा निसियां परिवसंति ? उप्पिं सोहम्मीसाणाणं कप्पाणं, हेहिँ सणंकुमारमाहिं देसु अप्पेसु एत्य णं तिसागरोवमट्टिईया देवा किदिवसिया परिवसति । कहि णं भंते! इटिं लतगे कप्पे एत्थ णं तेरससागरोवमहिईया देवा किनिसिया परिसंति समागरोवमडिईया देवा किदिबसिया परिवसंति? उप्पिं बंभलोयस्स कप्पस्स -1१००॥ सकास्त णं देविंदस्त देवरण्यो बाहिरपरिसाए देवाणं तिण्णिपलिओष- माई ठिई प सकस्स ण देविंदस्स देवरणो अभितरपरिसाए देवीणं तिणि- लेलिभोवमाई छिई प० । ईसाणस्सणं देविंदस्स देवरणो बाहिरपरिसाए देवीणं विरिणपलिओवमाई ठिई प० ॥१०१ ॥ तिविहे पायच्छित्ते प० तं० णाणपाय- ठाणं ठा. ३ उ...४ २३५ दाए महागईए दाहिणेणं तओ अंतरणईओ प० त० खीरोदा, सीहसोया, वाहिणी । जंबूमंदरस्सं पञ्चत्थिरोणं सीओदाए महाणईए उत्तरेणं तो अंतरण- प० त० उम्मिमालिणी, फेगमालिणी, गंभीरमालिणी । एवं धायइखंडे दीवे त्यमद्धेवि अकम्मभूमीओ आढयेत्ता जाव अंतरणईओत्ति, गिरवसेरा भाणि- जाव पुक्खरवरदीयद्वयंचत्यिमद्धे तहेव गिरवसेसं भाणियध्वं ।। ९८ ।। ठाणेहिं देसे पुढवीए चलेना. तंजहा अहेणमिमीसे रयणप्पभाए पुढवीए मला पोग्गला.गिवतेना, तएणं ते उराला पोग्गला णिवयमाणा देसं पुढवीए महोरए या महिदिए जाव महेसक्खे इगीसे रयणप्पभाए पुढवीए अहे मनागमचिय करेमाणे देसं पुढवीए चलेना, णागमुवण्णाण वा संगामंसि माणसि देसं पुढवीए चलेंजा, चेए हिं० । तिहिं ठाणेहि केवलकप्पा पुढवी चलेज्जा अहेणं इसीसे रयणप्पभाए पुढवीए घणवाए गुप्पेला, तरणं से घणवाए ए समाणे घगोदहिमेएजा, तएणं से घणोदही एइए समाणे केवलकप्पं पुढविं रिया, देवे वा महिडिए जाय महेसक्खे तहारुवस्स समणस्स माणस्स वा । दुई जसं चलं वीरियं परिसकारपरकम उबदंसेमाणे केवलकप्पं पुढविं चालेजा, १९९ ॥ तिविहाः देवा किळियसिया पतं. तिपलिओवमढिईया, तिसागरोव- अहं एकाविहारपडिम उवसंपत्तिाणं विहरिस्सामि ? कयाणं अहं अपच्छिम- काइयाणं तओ सरीरगा प० त० ओरालिए, तेयए, कम्मए । एवं वाउकाइयवनाणं , जाव च उरिंदियाणं ।। १०७ ।। गुरुं पडुच्च तओ पडिणीया प०० आयरियपडि. लोयपडिणीए, परलोयपडिणीए, दुहओलोयपडिणीए । समूह पडुच्च तओ पडिणीया प० त० कुलपडिणीए, गणपडिणीए, संघपडिणीए । अणुकंप पडुच तओ पहिणीया प० त० तवस्सिपडिणीए, गिलाणपडिणीए, सेहपडिणीए । भावं पडुच्च तओ पहि- णीया प० तं० णाणपडिणीए, दंसणाडिणीए, चरित्तपडिणीए । सुर्य पडुच तओ परिणीया प० तं० सुत्तपडिणीए, अत्यपडिणीए, तदुभयपडिणीए ॥ १०८॥ तओ पितियंगा प० तं० अट्टी, अहिमिंजा, केसममुरोमणहे । तओ माउयंगा प० तं० मंसे, सोगिए, मत्युलिंगे || १०९ ॥ तिहिं ठाणेहिं समणे णिग्गंथे महाणिवरे महापज्जवसाणे भवइ तं. कया णं अहं अप्पं वा बहुयं वा सुयं अहि निस्सामि ? कयाण २३६ अंग-पविट्ठ सुत्ताणि च्छित्ते, दंराणपायग्छिरो, चरितपायश्चित्ते । तओ अणुग्याइमा ५० त० हत्य कम्मं करेमाणे, मेहुणं सेवेमाणे, राइभौयणं भुजमाणे । तओ पारंचिया प० त० दुढे पारंचिए, पमत्ते पारचिए, अण्णमणं करेमाणे पारंथिए । ती अणवठ्ठप्पा प० त० साहम्मियाणं तेणं करमाणे, अण्णधम्पियाणं तण करेमाणे, हत्थतालं दलयमागे । तओ णो कप्पंति पयायेत्तए २० पंटर, वाइए, कीये, एवं मुंडावेत्तए, सिक्खावेत्तए, उपटावेत्तए, संभुजित्तए, संवासित्तए । १०२ ॥ तो अवायणिका प० त० अविणीए, विगइपडिबढे, अविओसियपाहुई । तओ कप्पंति वाइत्तए २० विणीए अविगइपडियो विउसियपाहुः ॥१०३|| तो दुसण्णप्पा प० त० दुढे मूळे बुग्गाहिए । तओ मुसण्णप्पा प० २० अदुढे अमूढ़े अबुग्गाहिए ॥१०४|| ती मंडलिया पव्यया प० तं० माणुमुत्तरे कुंडलवरे म्यगवरे । तओ महइमहालया ५० तं. जंबुद्दीवे दीवे मंदरे मंदरेम, गयंभुरमणसमुझे समुद्देमु, बंगलोए कप्पे कप्पेस ॥ १०५ ॥ तिविहा कप्पठिई ५० त० सामाइयकप्पठिई छेदोववणियकपटिई णिव्विसमाणकप्पठिई । अहवा तिविहा कप्पठिई ५० त० णिव्यिद्वकप्पटिई, जिग- कम्पठिई, धैरकप्पट्टिई।।१०६॥णेरझ्याणं तओ सरीरगा प० त० वेउचिए, तेयए, कम्मए । असुरकुमाराणं तओ सरीरमा प० एवं चेव एवं सव्येसि देवाणं । पुढबी. णीए, उवज्झायपडिणीए, थेरपडिणीए । गई पडुच तो पडिणीया प० त० इ.
या अहं मुंडे भवित्ताअगाराओ अणगारियं पव्वइस्सामि कयाणं अहं अपश्चिम- दिलमान समागमे प० त० उर्दु अहं तिरिय | जया णं तहारुवस्स समणस्स ठाणं ठा. ३ उ.४.. २३७ मारपतियसलेहणा[सणाझूसिए भत्तपाणपडियाइरिखए पाओवगए कालमणवख- माणे विपरित्सामि । एवं समणसा सवयसा समायसा पागडेमाणे समणे जिग्गंधे महाणिनरें महापनवसाणे भवइ ॥ ११०॥ तिहिं ठाणेहिं समगोवासए महाणिजरे महापजवसाणे भवइ तं० कयाणं अहं अप्पं वा बहुयं वा परिग्गहं परिचइस्सागि ? भारणति यसलेपणा सणाझसिए भत्तपाणपडियाइक्खिए पाओवगए कालं अणवकख- माणे विहरिस्मामि १ एवं समणसा सवयसा सकायसा पागडेमाणे समगोवासए महाशिवरे महापन्नवसाणे भव॥११शातिविहे पोग्गलपडियाए प० त० परमाणु- पोग्गले परमाणुपोग्गल पप्प पडिहणिजा, लुक्वत्ताए वा पबिहणिना, लोगते वा पहिणिजा ॥ ११२ ॥ तिविहे चक्खू प० त० एगचक्खू, विचक्खू , तिचक्खू । उमत्येणं मणुस्से एगचक्यू, देवे विचक्खू , तदारूवे समणे वा माहणे वा उप्पण्णणाणदसणधरे से णं तिचक्खुत्ति वत्तव्यं सिया ।। ११३ ॥ तिविहे अमि- वा अइसेसे णाणदसणे समुप्पजइ सेणं तप्पढमयाए उद्यमभिसमेइ, तो तिरिय पच्छा अहे, अहोलोगेणं दुरमिगमे प०. समणाउसो ११ ११४ ॥ तिविहा इसी १० त० देविट्ठी-राइड्डी-गणिट्टी। देविट्ठी तिविहा प० तं० विमाणिही, विगुम्विणिट्टी, परियारणिवी । अहवा देविट्ठी तिविहा प० त० सचित्ता, अचित्ता मीसिया । राइटी तित्रिहा १० त० रणो. अइयाणिड्डी, रणो णिज्जाणिड्डी, रणो बलवाहणकोस. कोट्ठागारिही। अहवा राइट्ठी तिविहा प० त० सचित्ता, अचित्ता, मीसिया । गणिद्वी तिविहा प० तं० णाणिड्डी, दंसणिड्डी, चरित्तिडी । अहवा गणिष्ट्ठी तिविहा प० त० सचित्ता अचित्ता मीसिया ॥ ११५ ।। तओ गारवा प० तं० इडीगारवे, रसगारवे, सायागारवे । तिविहे करणे प० तं० धम्मिए करणे, अधम्मिए करणे, धम्मिया- धम्मिए करणे ॥११६ ॥ तिविहे भगवया धम्मे प० तं• सुअहिनिए, सुल्झाइए, सुतवस्सिए । जया सुअहिलिय भवइ, तया सुज्झाइयं भवइ, जया सुज्झाइयं भवइ तया सुतवस्तियं भवइ । से सुअहिनिए, सुज्झाइए, सुतवस्सिए सुयक्खाएणं भग- वया धम्मे पण्णत्ते ॥ ११७ ॥ तिविहा वावत्ती प० तं० जाणू, अजाणू, विति. गिन्छा, एवमझोववज्जणा परियावज्जणा!! ११८॥ तिविहे अंते प० त० तो ग 1 दुग्गाहिए । तओ सुसप्णमा प० तं० अदुढे अमूढे अनुग्गाहिए ॥१०४ात तं. जंबुद्दीवे दीये मंदरे मंदरेनु, मयंभुरमगसमुद्दे समुद्देन, बंगलोए कप्पे कमेनु ॥ १०५ ।। तिविहा कप्पठिई ५० त० सामाइयकप्पठिई छेदोववगियकमादि। काइयाणं तओ सरीरगा प० त० ओरालिए, तेयए, कम्मए । एवं वाउकाइयवसाय, जाव चाउरिदियाणं ॥ १०७ ।। गुरु पडुन तओ पडिणीया प०० आपरियाडि- णीए, उपप्यायपडिणीए, येरपडिणीए ।गई पडुच तओ पडिणीया पतं- ह. लोयपडिणीए, परलोयर डिणीए, दुहओलोयरडिणीए। समूह पडुन तओ पडिगोय. ५० त० कुलपडिगीए, गणपडिणीए, संघपडिणीए । मणुका पडुच तो पहिया प० त० तपस्सिरडिगीय, गिलाणपडिगीए, सेहपडिगीए । भावं पटुच तो पहि- जीया प० तं० पाणपडिगीए, दंसगरटिगीए, चरित्तपडिगीए । नुवं पडुन पहिगीया प० त० तुत्तपडिगीए, अत्यपडिगीए, तदुभयपडिगीए ॥ १०८॥ तो पितियंगा प० तं० अट्टी, अहिमिजा, केसमंसुरोमगहे । तओ माउपंगा या तं. मंते, सोगिए, मत्युलिंगे॥१०९ ॥ तिहिं ठाणेहिं समगे गिगये महालकर महापवसाणे भवइ तं० क्या गं अहं अप्पं वा बहुयं वा सुयं अहिडिलानि कपा अहं एकलविहारपटिम उपसंपनित्तापं विहरित्सानि ? कया अहं अपमिन- २३६ अंग-पविट्ठ सुत्ताणि च्छित्ते, दंसणगायच्छिते, चरित्तरायच्छित्ते । तो अगुग्याइमा प० त० हत्य कम्मं करेमाणे, मेहुणं सेवेमाणे, राइभोयगं भुंजमाणे । तओ पारंचिया प० त० दुहे पारंचिए, पमत्ते पाचिए, अण्णमणं करेमाणे पारंचिए । तओ अणवट्टप्पा प० त साहम्मियाणं तेणं करेमाणे, अण्णधम्पियाणं तेणं करेमाणे, हत्थतालं दलयमागे । तओ णो कप्पंति पयावेत्तए २० पंढए, वाइए, कीये, एवं मुंडावेत्तप, सिक्वावेत्तए, उबट्टावेत्तए, संभंजित्तए, संवासित्तए । १०२॥ तो अवायणिका प० ते अविणीए, विगइपडिबळे, अविओसियपाहुई। तओ कप्पंति वाइत्तए त० विधि अविगइपटिबद्ध विउसियपाहुडे ॥१०॥ तओ दुसष्णप्पा प० २० दुढे मू मंडलिया पन्यया प० तं० माणुनुत्तरे कुंटलबरे रुयगवरे । तओ महइमहालया : गिविसमाणकप्पठिई । अहया तिविहा कपाठिप० त० गिम्विकपलिं, बिग कप्पईि, धेरकप्पट्टि।।१०६॥णेरड्याण तो सरीरंगा प० त० वेउत्रिए, तेपए. कम्मए । असुरकुमाराणं तो सरीरगा प० एवं चेव एवं सम्येसि देवापं । पुनः ।
ग.DI..२ কলামিবাগৰাৱকিয়া থানায় ফাণ- रिस्मानि। एवं समयमा सवयसा सकायमा पागदमागे समणे निध ( महापयंसाणे भवद ॥११॥लिदिलाणेहि समगोपागप महामियर नाणे गया त०. फयाण अई अपं ना बहुवं. या परिगई परिचइस्तानि ? ई मुंडे भविताअगारामो अगगारियं पदलामिकमा रहे अपत्रितम संदेहगांरागासिए भत्तपाणपहियाइसिम पाओगए फाल अग- हरिस्सामि ? एवं समगमा समयमा समायगा पागलेमाणे ममगोवाए, रेमहापचयसाणे भव॥११॥तिविहे योग्गलपटियाए पने० परमाणु- परमाणुयोग्गल पन पटिहणिमा, सुक्खताप वा परिणिका, लंगने वा ॥ ११२॥ तिविहे चयू प० त० एगचरम्य , बिनकल, तिचस्व । मगुस्से एगचक्म्बू, देवे विनाम, तहाल्ये समगे वा मावणे या गर्दसणघरे से णं तिचक्युत्ति वत्तवं सिया ।। ११३ ॥ तिविहे अमि- प० त० उष्टुं अहं तिरियं । जया गं तहाम्चस्म समणस या माणस सेमें णागदसणे समुप्पाइ सेणं तप्पटमयाए उममिसमेइ, तो तिरिय न्छा अरे, अहोलोगेणं दुरमिगमे प० समणाउसो ।। ११४ ॥ तिविहा इश्वी देविटी-राइष्टी-गगिट्टी। देविट्ठी तिविहा प० त० विमानिट्टी, विगुन्धि गिट्टी, गिट्टी । अहवा देविट्ठी तिविहा प० त० सचित्ता, अचित्ता मीसिया । राती प० तं० रणों. अइयाणिधी, रणो णिज्जाणिनी, रणो बलवाहणकोस. रिही । अहवा राइट्टी तिविहा प० त० मचित्ता, अचित्ता, मीसिया । गगिनी [प० त० णागिट्टी, दसगिट्टी, चरितिट्टी! अहवा गणिष्टी तिविहा प० त. । अचित्ता मीसिया ॥११५ ॥ तो गारवा ५० त० इष्टीगारवे, रसगारये, रवे । तिविहे करणे प० त० धम्मिए करणे, अधम्मिए करणे, धम्मिया- र करणे ॥११६ ॥ तिविहे भगवया धम्मे प० तं सुअहिलिए, मुज्झाइए, स्सिए । जया सुअहि लिय भवइ, तया सुज्झाइयं गवइ, नया मुज्झाइयं भवइ सुतवलियं भवइ । से सुअहिन्निए, सुज्झाइए, सुतवस्सिए सुयक्वाएणं भग- धम्मे पणत्ते ॥ ११७ ॥ तिविहा वायत्ती प० त० जाणू, अजाणू, विति- डा, एवमझोवयज्जणा परियावज्जणा ||:१९८॥ तिविहे. अंते प० त० O . ." . - 1 १ . -- -- ... . - । . i " : . . . . :- . .. . R 1 ܕ 3 ܀ - है . . .. -- - " . . ५ १ ५ ::::::::::::::::: .::.: ..... PREHEFT : Rift.is. in मग बाम: Mrfar.. म. ए. परमार मां का नाम : ६ ५ : मामा उम्मी- मानाम मा farm पालिका पनि पिर नगमा गमिक पाना : पति: ८ ८. जग हानिक लिगमणाम सपना माणुगत पाप गता भापतिम परि- - हापा.ठा. १० मन पाया गया नागा in natur १ . अन मामले मग परमपरस्त मार्य मानिने या पाना पटि- ३. मन मार मोक्ष मा. मम्म नगमा महामाई मनि गाणे भग मेरे भुक्रगोग दरोगा गर्व महावीर ॥ गं मी वित्त- जिसमें ना राम महावीर मानचित विग दुयानमग गांगे आप पयामे गि उनीह भारी व विष्टिया ३ गभगय महापारे गं मी दामदगं रमा दाय प्रियुटने गरे भगर महावीर नुहि धर्म पावर, न- साधन चसम भगवं महावीर पगं मां से बग्ने मुनि जान पनि गाणस भगाओ महास्य चाउम्पप्यारणे Roगमगा समाओ मायगा मावियाओ जणं समणे भगवं महावीर मई पटममरे जाय पदियुद्धतं का समर्ग भगवं महावीर नउधिो देये पण. to-भावमयामी वाणांतरा आइसयासी माणवासी ६ जण समणे भगवं नारे एगं मा, टम्मानली जाय पटियुद्ध तंणं गमगे भगवया महावीरणं गाईए अगवदग्गे दीइम चाउरंतसंसारन्तार तिणे ७ जणं समण भगवं बार एगे मई दिगपरं नाव पहियुदे तां समरस भगवो महावीरस्स ते अणुनरे नाव समुप्पण्ये ८ जण रामणे भगवं महावीर एगं महं हरिवे- व्य नाव पटियुदे तण समणस्स भगयो महावीरस्म सदेवमणुयासुर लोगे ला कित्तिवष्णसाद सिांगा परिगुल्यंति इस बलु समणे भगवं महावीरे इइ. १ गं समग भगवं महावीर मंदर पप्पए मंदरचूलियाए उवरि जाव पहियुद्धे तं समगे भगवं महावीर सदेवमणुयामुराए परिसाए मझगए केवलिपण्णत्तं धम्म या पाणये नाव उवदंसेइ १० ॥ ९२ ।। दसविहे सरागराम्मदंसणे प० तं०- सुग्गुवएस आणई सुत्तवीयसदमेव, अभिगम वित्थारमई किरिया संखेव माई ।। ९३॥ दससण्याओ ५० तं०-आहारसण्णा भयसण्णा मेहुणसण्णा गदसणा मोहसाणा माणसष्णा मायासण्णा लोहसण्णा लोगसण्णा ओहसण्णा
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एगम अामागम्म प्राणायापला उगमनमा वागमतिमा। नमिण
गाय गण नागमा आगाणा । संतगड्या मासिद्धिगा जे जीवा
पण गाणे मिति नजितिन मुभिगति परिणिबाइराति सध्या
दुकना मी फार मानि ॥ ॥ १॥ दोहा पणता, राजा-अहादरे चंग, अणट्टा
चेय। नुने रामी पणना, जा-जानरासी नन,अजीवरासी चेन । दुविहे बंधणे
पण्णने,तं जहा-रागमणे , दोगभणे नेता गुप्याफग्गुणी णापत्ते दुतारे पणत्ते ।
उत्तराफग्गुणी णवत्त दुतार पणते । पुवामहवया णरणत्ते दुतार पणते। उत्तरा
भवया णवत्ते दुतार पणत्ते इमीसे णं रयणप्पभाए पुढवीए अत्यगइ.
याणं णेरइयाणं दो पलिश्रीवमाई ठिई पण्णता । दुझाए पुढवीए अत्येगइयाणं गैरइ.
याणं दो सागरोवमाई टिई पण्णत्ता । असुरकुमाराणं देवाणं अत्यगइयाणं दोपनि
वमाई ठिई पण्णत्ता । असुरकुमारिंदवजियाण भोमिजाणं देवाणं उकोसेणं ।
दो पलिओवमाई ठिई पण्णत्ता । असंखिनवासाउयसणिपंचदियतिरिक्खज
अत्थेगइयाण दोपलिओवमाई ठिई पण्णता । असंखिनवासाउयगम्भवफंति
पंचिंदियमाणुस्साणं अत्यगइयाणं दोपलिओवमाई ठिई पण्णत्ता। सोहम्मे क
गइयाणं देवाण दो पलिओवमाई ठिई पण्णत्ता। ईसाणे कप्पे अत्येगइयाण
पलिओवमाई ठिई पण्णत्ता । सोहम्मे कप्पे अत्थेगइयाणं देवाणं उकोसे
रोवमाई ठिई पण्णत्ता। ईसाणे कप्पे देवाणं उकासेणं साहियाई दोर
ठिई पण्णत्ता | सणकुमारे कप्पे देवाणं जहण्णेणं दो सागरोवमाई ठिई
javो पानी-मनी, र पतेभरगीगारी नितारे दिमासे परवमयमाप, या जगनिपिग सागरोगमाई पि० । अमुरामाण देवाणं समयाको ०३ देशी मन रमाई aranter सोनम गुम -:: ताना-गरम, LET Timना, ताजा, देय पारिनाम मारमा निशा Emat ::: देवी शादि पार करने Er marrier . thi gaति पनि Parenticism, I-देने मामा- मामी मालय निशा सा पन। reafte n और भगाया पायालय पोयमा टिपण्णता । दोग वार याग लियसागरोगा कि पगा। सघाए. णं पुः M गायाग तिन्ति पटियमावि अमग्निजयासाठयमगिनिदियतिरि बोगियांग उगोमा सिणि पालोरमाई लिई प० । असंखिजयामाउयराणिगन्ग नियमगुरसाग टफोन निणि पलिओपाई पि० । सोहम्मामाणेमु मापसु गयाग देवागं तिणि पलिओवमा लिई प० । संगमारमादिदेमु फापस आ गइयाग देवाण तिणि सागरीयमाई ठिक प० । जे देया आभंकर पफर भाभ पभंकर चंदं चंदावतं चंदन चंदवत चंदयण चंदन्टेस चंदवाय चंदसिंग सिटुं चंदन नंदुत्तरयसिगं विमाणं देवत्ताप, उवयष्णा तेसिण देवाण उपोर्ट तिणि सागरोयमाई लिई प० ते ण देवा सिण्डं अदमासाणं आणमंति या पा मंति वा उसमंति या णीसमंति वा । तेसि णं देवाणं तिहिं याससहस्सेहिं आहार समुप्पज्जा । संतेगड्या भवसिखिया जीवा जे तिहिं भवग्रहणहि सिजिजामा निसरसंति मुचिरसंति परिणिन्वाइरसंति सव्वदुस्वाणमंत करिरसंति ॥ ३ ॥ चत्ता FET
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म".:"म: AMIREOमामा अभियंगगाए।
म.inामा गागराए भारनियम"
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TITLE 1. AAP सिया !
गग मागिता रोको mil | र अनुहीने
बागरा प... मियां गिगद णीलयो र
दरे । म सा नागा १०, Hoरहे हेग
हानि रम्म एम. एरवाए। नागमोहेणं गगनया मो
र फम्मपगडीओ बाई। महाणखते सततारे प० ।।
सम्वत्ता पुषदारिआ ५० (अभियाइया रात्त |
यत्ता दाहिणदारिआ प० । अणुराहाइया सत्त
गिट्ठाइया सत गायत्ता उत्तरदारिआ प० ।
त्यगइयाणं णेरड्याणं सत पलिआवमाई
पाणं उफोसेणं सत्त सागरायमाई ठिई ५०
डपणेणं सत्त सागरोयमाई ठिई प० । अमुर
उओषमाई ठिई प०. | सोहम्मीमाणेसु
ओवमाई टिई प० । संगकुमार कप्पे अत्येगइ
इं ठिई प० | माहिंदे कप्पे देवाणं उगोसेणं स
। बंभलोए कप्पे अत्येगइयाणं देवागं सत्त सारि
: समं समप्पमं महापभं पभासं भासुरं विमलं
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पारपालीममा ९० प. पु. भेगामा
बदमागमाई २० गुमाग देवा गाया :
A. संगमागमन गमानदेशान भट्ट
पमा भिरमा माया देवाणं अट्ट गागरीय
१० या अघि हिमादि यागरणं पर चंदा नरागं सुर
प्रांगारिया अशा अमानमामिग विमा देवताप, उमण
देवा गोमे अटु गागरायमाई ठिई ५० ते णं देवा अई
मामा आगल या पाणनिया असतिया गाममति या। तमि
अदि मासमदरसेदि आहाटे समुप्पा । संतेगड्या भव सिसिया जीवा गे
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आहारयगरीरकायपोगे आहारयमीससरीरकायपओगे कम्मयसरीरकायपोगे । - पचारमभागं बारसीप बागमागतमीपनगमभागं न ममी उदमभाग पा. पदम भागं जाव पारगेमु पारगमागं । कणकपत्ता पणासमहुनमगुत्ता प०, तं०-सतभिमय भरणि अदा अगलेगा साई तटा जेट्टा। एएकणकवत्ता पण रसमुहुत्तसंजुना ॥६|| चेत्तासोएम णं मागंमु पारगमुदत्तो दिवसो भवड, एवं चंत्तासोएमु णं मासेमु पण्णरसमुहुना राः भवड़। निकाअणुपवायत्म पुचरस पण्णरस वत्यू पण्णत्ता । ममाणं पण्गामनिहे पओगे प० तं जहा-सममणरओगे मोममगाओगे सबमोममणपओगे अमचामोसमगरओगे मनवहाओगे मोसरप. ओगे सचमोसवइपओगे अमघामोमवउपओगे ओरालियसरीरकायपओगे ओरा. लियमीगमरीरकायाओगे वेउवयमरीरकायपओगे बेउनियमीससरीरकायपओगे कम :::.............. 102th fr: :: :: :: :: :: :: : ( गाणे 171 y: It if: ::::::: similf मा if I IME: If If मारले मनुर': । :: TIMERfafar शिम : Mirmiti मिनि ॥ १४ ॥ पण प;"., .in.ful 1, गाग गरे नि यारे । मतोमा का य, Ani || Priyी, ना : वेयर नीतियR, DAY As: 1 || २ | मी अग्हा पणार पण ii 1811: 'म पहिला पगागभाग पाण- रसभागण गंगा fro--परमार पटगं भागं वीआए दुभागं तमाम विभाग नदी नानी पनमागं मट्रीए छभागं गतः गीए रातभागं अगीप असागंण मागं दामीप दगभाग पारसी र रमेन पणामागं । तं चंगामाणे २ चिद, तं-पढमाए ar.
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। अंग-पबिट्ट सुत्ताणि अट्टापस समणमासीको उमोमिया समस्या होत्यः । तमग भगवया महा वीण नमणाग णिशाग सय वयाण रस मा ५०, तं०-ययठक का पछा, अगिभ यग, पलक गितिमा य, सिगागं सोमयाग । १ ।। वायरम ण भगवी सनूलियाल अहात्त पयतहलाई पयग्गंग पगत्ताई । चमीए णं लिपीए अटारसाको लागिहाग १०, तं.-भी जाणी लियादीसा कास्या खरोटिया न माविका पदाःया उमत्तरिया अस्तरपुद्धि (स्थि) या भोगायया वेणाया गिण्या अंकलिवि गणियलिवि गगनालली [भूयलिवी] बाईसारखी मादेगरीलिखी दानिलिवी बोलिदिलिवी । अस्मिात्यांपवायरस ण पुरमा अटाररा नत्थू प० । धूमपभार णं पुढवीए अहारतुत्तरं जायणमयसहरसं माइंदा प० । पासामाढणं मातमु सः उकोनेणं अट्ठारस मुहुत्ते दिवस भवइ रा गण अहारम मुहुत्ता राई भाइ । इमीसे ण रयगप्पभाए पुढीए अत्यं. गया .याग अवारस पलिओचमाई टिई प० । लट्टीए पुढवीए अत्यगइ. . गा राग अलारस सागरोचमाईटिई १० । असुरकुमाराणं देवागं अगंगइ. मा सास पलिगोगमाई टिई प० । सोहम्गीसाणेसु कप्पेमु अत्येगइयाणं देवाणं BI मोगमाई ठिई ५० 1 महस्सारे कप्पे देवागं उग्रोसेणं अट्ठारस मागरो । ins Bioआण कप्पे देवागं अगंगध्याण जहणणं अट्टाररा सागरोकमाई 13.40 | ये 5 रामाले महाकालं अंजणं रिलु मालं समा दुगं महादुर्म । aai गाल पल पलमगी गुगु कुमुदगुग्मं गलिणं णलिणगुम्म पुरी 1 विमाग देवताए उपयणा तेसि णं देवागं (उमासणं) मारा सागा 6ि 10 से ण देवाण अहारमहि अदमासेहिं आगमति miनिया Suld tणासति ।।तेसिणं देवा अट्टाररावासमरमहि at मापा । गगगा मा सिनिया ( जीना) जे अहारसहिं भरगहणेहि भासने मिति मुरिमति परिणिधारांति सम्वनुमायागमतं करिस्पति ॥ १.: ॥ भी पायजामा १०ife....नित्तणाए, रांघाडे, अंडे, कुम्गे, गुने य रोहिणी, मात्रा, मागी, नीरमाइश ॥१॥ दावाहये, उदगणाए, मंगोली दस । दिपले, तर कंका, पाहणे, सुसमाइ ग ॥२॥ अवरे य गौरी", पणतीसगे। अंदीवेणं दीये सारे भा उपोसेणं ए.गणवीरा .
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मा आगनिया पालिका उपाणीगांतिना। तमिण देवाणं
THए बागमहल आहार गया। गांगमगा गामिलिया जीवा ओ
नगर भागहहि मिशिस्मति युझिमनि मुनिस्पति परिणिध्वाइस्मति मध्य
याण करिगति ॥ ३० || पानाम गिनाटगुणा पण्णता, तं जहा-स्नीणे
भिणिवाहियणागावरण, खाणे सुयणाणावरण, खाणे ओहिणाणावरणे,
खाणे
पहाणाणावरण, ग्नीश केवलणाणावरणे, सीण चालुदमणावरणे, खाणे
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या उपोषण सलीम मागरीमा टिप। अमासागर या आग
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देवाणं तत्तीम पालीवमाई टि. प० । मोरगागागु काप्पा अगदयापं देवाण
तेत्तीसं पलिओयमाई टिई प० । विजयजयंतनयंतभाराजिए म तिमाणेगु उपयोस
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नियमानुपाठिामा गमवणे सुगम
जाणुमेहमानले (अमित) पुरोला का, अमायाम गर परिसरस.
मनपा अयरिग भवा, मनुमाण सागरम वगंधा पाठमाओ ,
समाहरो वियन रियममगीयो जापानीहारी मरी, भगय न अदमागीय
भाग भागमामा, मामि गं अदमागी भागा मागणीकसि
नयमि आशियममापिपरपयांपपसुपरिणामियाणं अमोहिग.
अपनायभामत्ता परिमार, पुणवत्या वियपं देवागुणागारमनपरस्सम
गरपिरिसगमलगभवमोग्गा अरही पाय पसंतचितमागमा धर्म
साग, अगटस्भियपायांगया नियमागया दति, भागया समाणा अरहओ
समूले मिडियामा नि, नओ जो विय, अरईसो भगतो विदति
तिमी नि य न जायणराव गाण माद, मारी गया, सचक्षण
जि ....::---- . TE मा ना. ह .. ना. :::: --- नाला 11.४. विहिं . .मालयावर ५० ::::{लीसा प० ॥ ४६॥ मारिया सयालीस ...
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३८६ अंग-पविट्ठ सुत्ताणि चउरासीइ सामाणियसाहस्सीओ पण्णत्ताओ । सम्वे विणं बाहिरया मंदरा चउरा. सीई चउरासीई नोयणसहस्साई उडे उच्चत्तणं प० । सधे विणं अंजणगपचया चउरासीई चउरासीई जोयणसहस्साई उढे उच्चत्तेणं प० । हरिवासरम्मयवासियागं जीवाणं धणुपिट्टा चउरासीई जोयणसहस्साई सोलस जोयणाई चत्तारि य भागा जोयणस्स परिक्खेवेणं प० । पंकबहुलस्स णं कंडस्स उवरिल्लाओ चरमंताओ हेटिले चरमंते एस णं चोरासीई जोयणसयसहस्साई अबाहाए अंतरे प० । विवाहपणतीए णं भगवईए चउरासीई पयसहस्सा पदग्गेणं प० । चौरासीई णागकुमारावाससय सहस्सा प० । चोरासीई पइण्णगसहस्साई पण्णत्ताई। चोरासीई जोणियमुहसय- सहस्सा प० । पुवाइयाणं सीसप हेलियापञ्जवसाणाणं सट्टाणटाणंतराणं चौरामीए गुणकारे प० । उसभस्स णं अरहओ कोसलियस चउरासीइ गणा चउरागीय गहणरा होत्था । उसभस्स णं अरहओ कोसलियस्स उसासेणगमोक्खाओ चउरा सीइ समणसाहस्सीओ होत्था । सम्वे विचउरासीइ विमाणावासमयसहस्सा सत्ताग उई च सहस्सा तेवीसं च विमाणा भवतीति मकवाय ॥ ८४ ॥ आयारस णं भगवओ सचूलियागस्स पंचासीइ उद्देमणकाला प० । धायइमंडरा णं मंदरा पंना. सीइ जोयणसहस्साई सव्वग्गेणं प० । रुयए णं मंडलियपनए पंचामीइ जोयग सहस्साई सम्यगेणं प० । गंदणवणस्स णं हेछिल्लाओ नरमंताओ मोगंधिया कंडगा हेहिले चरमंते एस णं पंचासीइ जोयणसयाई अबादाए अंतरे १० ॥ ८ ॥ मुविहिस्स णं पुष्पदंतस्स अरहओ छलमीइ गणा छलमीद गणटरा होगा। मुम सस्स णं अरओ छलसीइ वाइमया होत्था। दोचाए णं पुढीप अमनादेस- भायाओ दोवस्म पगोदहिस्म हेहिले चरमंने एगणं हलगीजोपणमहागाई अबादाए. अंतरे प० ॥ ८६ ॥ मंदरग णं पायस्य पुरथिमिलामो चामं गोभमा आवामपनयम्म पास्थिगिले चरगत एम सलामी जोपणमामा अबाहाए अंतरे प० । गंदरग णं पागम्म दलिमित्रानो नरमलामो दगार आवामपन्वयम उत्तरिट चम्म एम मनामी जोपणमहगाई HY अंतर १० । एवं मंदाम पगिनिदामी नामनामी मंगम 3REITTER पुरथिमिको चरम एम मलामी जोगमाया ! मेव दाम नमिलामो नातागोदामी एम - - . ܢ ܕܨܙ ..; .. ܐܺܢ • . ،، ܀ ܕ .. ܚ܃ ܃ ܃ ܃ ܃ ? . '")?- | '- ܕ '! ;(.! ;... ܬܝ .܂ ܐ f- ;; & w.܃ ܃ ܃ ܃܇܇܆܇ ܀ ;' ;ܨ ܕܝ :; ܃ ܃ ܘܰ،܀ ،، ܪ ܪ܃ ܃ ܕ܀ | ܬ ܕܕ܂ tha ३९० अंग-पविट्ठ सुत्ताणि कंचणपव्वयसया प० ॥ १०२ ।। पउमप्पभे णं अरहा अट्ठाइनाई धणुसयाई उम उच्चत्तेणं होत्था । असुरकुमाराणं देवाणं पासायवडिंसगा अढाइनाई जोयणसयाई उष्टुं उच्चत्तेणं प० ॥ १०३ ॥ सुमई णं अरहा तिष्णि धणुसयाई उद्वं उच्चत्तेणं होत्था । अरिडणेमी ण अरहा तिणि वाससयाई कुमारवासमझे वसित्ता मुंडे भवित्ता जाव पव्यइए । बेमाणियाणं देवाणं विमागपागारा तिणि तिणि जोयण सयाई उर्दु उच्चत्तेणं प० । समणस्स भगवओ महावीरस्स तिणि सयाणि चोदम- पुवीणं होत्था । पंचधणुसइयस्स णं अंतिमसारीरियस्स सिद्धिगयस्स साइरेगाणि तिणि धणुसयाणि जीवप्पदेसोगाहणा प० । १०४॥ पासस्स णं अरहओ पुरिसा. दाणीयस्स अद्भुट्ठसयाई चोदसपुवीणं संपया होत्था । अभिणंदणे णं अरहा अछुट्टाई वणुसयाई उद् उमत्तेणं होत्था ॥ १०५ ॥ संभवे णं अरहा चत्तारि धगुसयाई उई उच्चत्तेणं होत्था । सवे विण णिसढणीलवंता वासहरपव्यया चत्तारि लत्तारि जोपण सयाई उझुं उचलेणं चत्तारि-चत्तारि गाउयसयाई उम्बे हेणं प० । सब्ने निणं चक्रवारपव्यया गिसढणीलवंतवाराहरपबयए णं चतार गत्तारि जोयणसयाई उम् उच्चत्तेणं च तारि लत्तारि गाउयसयाई उको हेणं पणते । आणयपाणएमु दोगु कम्यम् चत्तारि तिमाणमया प० । समणस्स णं भगवओ महानीरस्म चत्तारि मपा वारेमा सदेवमणुयामुरंमि लोगमि वाए अपराजियाण उद्योसिया वाइसंपया होत्या ।।१०६।। अजिए, गं अरहा अद्धपंचमाई घणुसयाई उ{ उनलेणं होत्या । सगरे णं राग चाउरंतचकवट्टी अपंचमाई धणुमयाई उहुँ उत्तेणं होत्या ।। १०७ ।। राहो नि गं वकावारपाया सीयासीभोयाओ महाण ओ मंदरपव्ययंतेणं पंच-पंच जायण ग्याई उई उचत्ते पंच-पंच गाउपगयाई उधेडेग प० । सबने शिणं वागाकडा च-पंच जोयालयाई उ उननेणं होत्या, मूले पंच-पंच जोपणापाई fil 10 उगभेणं अरहा कोगलिए पंच भणुगमाई वर्ष लगानेणं होत्या | Hit या चाउरतचावडी पंच भणमयाई उ अवरोण होत्या। मामाद कपनमान्दता बानारपनाया मंदापन पनन जोगमाई जाने पंच-पंच गादयगया की प० । महोf METRi?' मिरा न.पंच जीणमा उनी यानि 01 सन निणारा . vika kinnary सामयामो स०५००-८०० रसोई गारवा या भाषusi.मी. रममा नपा जय० १.८ मु पंगु माया. { मत. Hatो परमानी माग समानिया या पाहापागोयाAMRAT यामाग जोगवा माई नगदेनमारमा गहिया गया या निद मंगलगाया गया TA पुरिमगपति मनि र गरिमा अगागो अगारिमै पाया|१०९॥ सपमुकाम विभागा मन-मन बीयनया उपद प० । गत गोमाता निरागारमा गमणरंग भगायो महालीगमन मयारमा अग्गिी गागन नाममा गाई फारपरिणागं अगिला देश भारत महात्मा उपरिक्षाओ नरमंती अनिल मानाया ममामि नगल जोगणममा अपाप पर पगदिम मि ।। ११०॥ मागास्मांग दोन गाणे माना अट्ट जोगगया उपय० मीमे ग्यभार पुदीप, परने हम गोपगमन बागमतरमीमेमविप समगस्य गं गगयो महा- भारस्य अट्टमया अगुजरांवगाइयाण देयाग गदाणाग ठिशामा आगमेसि. भागं उफोसिया अणुनर्गनाइयपया होगा। इमाम । रयणप्पभाष. पुदीप बागारमाियी भूमिमागाओ अदि जोगणपति गरिए पारं चरइ । आइओ अग्निनिरम अढ सयाई गाईगं गदेवापासुगंमि लोगंमि याए, अपराजियाणं जोगिया यामपया हारमा १५णयपाणयारणअच्चुएमु फापसु विमागा पर- नायगागाई उई उपग प० । गिटटरमणं उपस्टिाओ सिहरतलाओ गिमदरस बागहरपध्ययरग रागे धरगितले एमगर जोयगसयाई अवाहाए, अंतरे पाते । एवं जीन्टगतकसम्म वि । विमलगाहणे णं कुटगरे ण णव धणुसयाई उई उपतेग होत्या । इनीसे रयणप्यभाप, बहुसमरमणिकाओ भूमिभागाओ गवर्ति जायगमएति सवध्युरिगे तारारूये चारं चरइ । गिगदमस गं वासहरपव्ययस्स उव- शिलाओ सिहस्तलाओ इसीसे जरयणपगाए पुढवीए पढमरस फंडा बहुमन्मदे- . । :: - - :: ... !"; :: :: :: ::!! Urine: . -- -- -:::: ...! :::::::::'. "; it to it ::: || !! . 12} }}: I', SHIV in. .:: :: ::10HP नाम : या :: PK TEST::::नमा भाग १० || ११.५|| of Pr: :.:41:24 जणामी यान iffma१०||११६।। दारि-नारिजोपणसारमा आगामण पणना ॥११७॥ दास मायामासदेगमापा मगमणानाओ नउदिशि पन पंच नोगमामाई अमानाप तर मंदरपना पणते ॥ ११८ ।। महमारे कप्पे मागावागमा रगा प० ॥ ११९॥ गीण रगणापमाए. पुदतीपरगणरस रग उरिटायो नरमंताओ गुटगरम कदमोटि चरमंते एस णं सत्त जोयण- महमाई अवाहाप, अंतरे पण ॥ १२०॥ हरितारारम्मगाणं वामा अट्ट जोयण- स्माई साइरंगाई वित्थरेणं प० ॥ १२१ ।। दाक्षिणभरहस्स गं जीवा पाईण. डीणायया दुइओ समुझं पुढा णय जोयणराहस्साई आयागेणं प० ॥१२२|| अजियर अरहओ साइरेगाई णव गोहिणाणसहस्साई होत्था, मंदरे ग पचए धरणि- ले दस जोयणसहस्साई विक्रमेणं पण्णत्ते ॥१२३|| जंबूदीवेणं दीये एगं जोयण- ।
-- । समयाओ-गणिपिडग-आयारे इस्सं आयामविक्रमेणं प० ॥१२४ ॥ लवणे समुद्दे दो जोयणसयराइरसाई लिविसंमेश प०॥ १२५ ॥ पासस्स ण भरओ तिणि सयसाइरसाओ नासं च सहस्साई उफोसिया साक्यिासंपया होत्या ।। १२६ ।। पायदखंडे चत्तारि जायणसयसाहस्साई चपावालविरखंभेण पपात ॥ १२७ ॥ हरणस्म उदस पुरस्थिनिलाओ चरमंताओ पयस्थिमिले चरमते एस पंच जायण. हस्साई अबाहाए अंतर पाते ।।१२८॥ भरहे नराया चाउतिचपावही न नयसहस्लाई रायमझे वसित्ता मुंडे भपित्ता अगाराशे अणगारियं पनप. २९॥ नंबूदीवत्स ण दीवस्स पुरथिमिल्लाओ इयंताओ पायदसंरचक्क- Eस पथिमिले चरमंते एसणं सत्त बोयणसयसहस्साई अवाहाए अंतरे ते ।।१३०॥ मादिदेणे कप्पे अट्ट विमाणावाससयसहरसाई पणताई ॥१३॥ व्यसणे अरद्दओ साईरेगाई गव मोहिणागिसहरसाई होत्या ॥१३२॥ पुरिस. ण वासुदेवे दरा वाससयसहस्साई सव्वाउयं पालइत्ता पंचमाए पुढवीए गेरइ. रयत्ताए उबवणे ॥१३३॥ समणे भगवं महावीरे तित्यगरमवग्गणाओ पोहिलभवग्गहणे एग बासकोटिं सामणपरियागं पाउगित्ता सहरमारे कप्पे विमाणे देवत्ताए उपरणे ॥ १३४॥ उसमसिरिस्स भगवओ चरिमरस य वीरवद्धमाणस्स एगा सागरोवमकोडाफोडी अवाहाए अंतरे पगत्ते ॥ १३५ ॥ गणिपिडग दुवालसंगे गणिपिटगे पणते, तं नहा--आयारे, सूयगडे, राणे, समवाए, हपण्णत्ती, णायाधम्मकहानी, उवासगदसाओ, अंतगटदसाओ, अणुत्तरोव. यदसाओ, पण्हावागरणाई, विवागमुए, दिहिवाए। से किं तं पायारे ? न्यारे णं समणाणं गिग्गंधाणं आयारगोयरविणयवेणयहाणगमणचकमणपमाण. गर्नु जणभासासमिइगुत्तीसेकोवहिभत्तपाणउग्गमउप्पायणए सणाविसोहि सुद्धामु . म्हणवयणियमतयोवहाणमुप्पसत्यमाहिवाइ । से समासओ पंचविहे पण्णत्ते, तं इा--णाणायारे, दसणायारे चरित्तायारे, तवायारे, विरियायारे । आयारस पं रेत्ता वायणा, संखेना अणुओगदारा, संखेजाओ पडिवत्तीओ, संखेसा वेदा, खेबा सिलोगा, संखेजाओ णिज्जुत्तीओ । से णं अंगठ्याए पदमे अंगे दो सुय. वंधा, पणवीसं अल्झयणा, पंचासीई उद्देसणकाला, पंचासीइं समुद्देसणकाला, हारस पयसहस्साई पयग्गेणं, संखेना अक्खरा, अणंता गमा, अणंता पज्जवा, . ....
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मवाओ-गणिपिडग-समंवाए, वियाहे य लोगटाई च पोपल्वणया आयविति । ठागस्स परित्ता मावणा, भणुओगदारा, शंखनाओ पडिवत्तीओ, संखेमा वंदा, संखेमा सिलोगा, संगहणीओ से गं अंगठ्याए तदए अंगे, एंगे सुपरवंथे, दस अक्षा. बावीसं उदेशमकाला, एकाची समुहेमगकाला, बावतरि परामहस्सा पण्णत्ताई । संखेज्जा अक्षरा, अणंता गमा, अर्णता पज्जया, परिचा पंता थायरा, सासया फाडा शिक्षा गिकाइया निणपणत्ता भावा आय- पण्णविमति परुविनंति देसिति गिदमिति उपदसिमति । से एवं वंणाया एवं विण्णाया एवं चरणकरणस्यणया आधविति । से तं ठाणे ॥ से किं तं समवाए ? समवाए णं सममया सूइति, परसमया सहति, परसमया सूइज्जति, नाव लोगालोगा सुइज्जति । समवाए, गं एकाइया i एगुत्तरियपरिवुद्रीय, दुवालमंगस्स य गणिपिढगस पाटबग्गे समणुगाइ. गसयस, बारसविह वित्थरस्स मुयणाणस जगजीवाहियस्स भगवओ समा. मायारे आहिडाइ । तत्य य णाणाविहप्पगारा जीवाजीवा य यणिया ग, अवरे वि य बहुविहा विसेसा गरगतिरियमणुयसुरगणाणं माहानरसास. वासमंवययप्पमाणउयवायनवणओगाइयोवहिवेरणविहाणउवओगजोग. माय, विविहा य जीवजोणी, विक्खंभुत्सेहपरिरयप्पमाणं विहि विसेमा य मंद. महीधराणं, कुलगरतित्थगरगणहराणं मम्मत्तभरहाहिवाण चफीणं चेव चमा हराण य, वामाण य गिगमा य समाए । एए अण्णे य एवमाइ एत्थ वित्य- त्था समाहिति । समवायरस णं परित्ता वायणा जाव से गं अंगठ्याए न अंगे एगे अक्षयणे एगे सुयक्वंचे एगे उद्देसणकाले एगे समुद्देसणकाल चयाले पयसयसहस्से पयग्गेणं पण्यते । संखेनाणि अक्वरागि जावं चरण. रूयणया आयविज्जति 1 से त समयाए ॥१३९॥ से कि त वियाहे ? रिया- उसमया बियांहिति परसमया विया हिज्जति ससमयपरसमया वियाहिज्जति, वियाहिज्जति अजीवा वियाहिज्जति जीवाजीवा वियाहिज्जति, लोगे किया- इ अलोगे वियाहिलइ लोगालोगे वियाहिबाइ । वियाहेणं णाणाविहसुरणरिंद. रेसिविविहसंसहयपुच्छियाणं जिणेणं वित्थरेणं भासियाणं दव्यगुणवेत्तकाल. पदेसपरिणामजह त्थियभावअणुगमणिक्खेवणयप्पमाणसुणिउणीवक्रमविविहप्य- 1 .
३९६ अंग-पविट्ठ सुत्ताणि गाणगापयागिया लोगालोगयागमा गंगारमा मदनरणमामानं मरन प्रतिगाणं गायनायगाभिदिगाणं तमामा मुभिसामगहा. ४ युक्षियमणाणे नीमगारमा गुणगाणं नागाणा अंगणाओ मुयायविहपगारा तीगयित्या य गुणात्मा । विगारमण परिना गायणा गा अणुओगदारा माओं पहिलाओ संगीन वटा मागोगा गंगाभिनुनीओ। सेप अंगठ्या पंगे अंग गया पग माग अायणमाए. दम उगगगह- साई दम मांगगमारमा बत्ती गागरणगारमा नाउरामी पयालाई पय- गणं पारामा अनावराणेशागमाअणता पाना परिचातसा अर्णता शायरा শিখা রা গিন্ন। ক্লিাস টিগবান। মাথাণনিবিগলিটি বিজ্ঞান सिमति गिदसति उपदमिति । एवं आया से एवं गाया से एवं विणाया एवं रणकरणपस्वणया आपविति। मे गिया ।१४०1 से कितं णायाधम्मकदाओ? याधम्मकलागुणगायाणं णगराई उमाणाईचेदयाई वणगंडारायाणी अम्मापियरो गोसरणाई धम्मायरिया धम्मतहाभो हलोइयपरलोइयामीवि संसा भोगपरिमाया अजाओ मुगपरिग्गहा तबोचहागाई परियाया संपणाओ भत्तपमयखाणाई पाओ- गमणाई देवलो गगमणाई मुकुलपमायायाई पुणवाहिलामा अंतकिरियाओ य आघ- यति जाव णायाधम्मकहामु णं पव्वइयाणं विणयकरणजिणगामिसासणवरे संज. पडण्णपालणधिहमइयवसायदुबलाणं तवणियमतवीबहाणरणदुखरभरभग्गयणिस्स- पणि सिहाणं घोरपरीसहपराजियाणं सहपारदराजा सिमालयमग्गणिग्गयाणं विसयमुह- च्छासावसदोसमुच्छियाणं विराहियचरित्तणाणदसणजइगुणविविहप्पयारणिरसार. एणयाणं संसारअपारदुखदुग्गइभव विविहपरंपरापवंचा। धीराण य जियपरिसह- सायसेण्णधिधणियसंजमउच्छाह णिच्छियाणं आराहियणाणदंसणचरित्तजोगणिस्सा- द्वसिद्धालयमग्गमभिमुहाणं मुरभवणविमाणसुक्खाई अणोयमाई भुत्तूण चिरं च गिभोगाणि तागि दिध्याणि महरिहाणि ती य कालफामचुयाण जह य पुणो लद्ध- द्धिमग्गाणं अंतकिरिया । चलियाण य सदेवमाणुस्सधीरकरणकारणाणि बोधण- गुसासणाणि गुणदोसदरिसणाणि दिटुंते पञ्चाए य सोऊण लोगमुगिणो जहाडिय- सणम्मि नरमरणणासणकरे आराहियसनमा य सुरलोगपडिणियत्ता अति नह सय सिर्व सचदुक्खमोक्वं । एए अण्णे य एवमाइअत्था वित्थरेण य । णाया- । समवाओ-गणिपिडग-उवासग०अंतगड. ३९७ धम्मकलामु पं परित्ता वायणा संज्जा अणुओगदारा जाय मंगाओ संगहणीभी। मेग अंगठ्याए रहे अंगे दो नुयासंधा एगूणवीमं अायणा, ते समातओ दुविहा पण्णता, तं जहा-चरिता य फपिया य, दम धम्मनाणं वग्गा, सत्य एगमेगाए धम्मकहाए पंच-पंच अक्खाइयासयाई एगमेगाए अरसाइयाए पंच. पंच उपक्वाइयासयाई, एगमेगाए उपस्वाइयाप पंच पंच अबम्बाइयउवाखा- श्यासयाई, एवमेव सपुवावरेणं अनुढाओ अवावाइयकोडीओ भीति मस्या- याओ, एगृणतीसं उद्देमणकाला एगूणतीस समुहेसणकाला संज्जाई पयसहस्साई पयग्गेणं पण्णता, संखेना अक्खरा जाव चरणकरणररूवया आयविज्जति । से तं णायाधम्मकहाओ ॥ १४१ ।। से कि त उवासगदसाओ ? उवासगदसानु ण उवामयाणं णगराई उपजाणाई येइयाई वणसंडा रायाणो अम्मापियरी ममोसरणाई धम्मायरिया धम्मकहाओ इहलोइयारलोइयानिविसेमा उबारायाणं सीलपयवेर- मगनुगपचक्माणमहोश्वासपडिवनगयाओ सुयपरिग्गहा तपोवहाणा पडिमाओ उवमग्गा संलहणाओ भत्तपचक्वाणाई पाओवगमणाई देवलोगगमगाई सुकुलपचा. वाया पुगो बोहिलामा अंतकिरियाओ य आघविज्जति । उवासगदसासु णं उया. सयाणं रिदिविसेसा परिसा वित्याधम्मसवणाणि घोहिलाभअभिगमसम्मत्तविसुद्धया थिरतं मूलगुग उत्तरगुणाइयारा टिई विमेसा य बहुविसेसा पडिमाभिग्गहग्गहणपालणा उयसग्गाहियासणा गिरुवसग्गा य तवा य विचित्ता सीलबयगुणवेरमणपचक्रवाण- पोसहोववासा अपच्छिममारणंतिया व संलेहणाझोसणादिं अप्पाणं नह य भावहत्ता यहूणि भत्ताणि अणमणाए य छेयइत्ता उबवण्या कप्पवरविमाणुत्तमेसु जह अणु. भवति सुरवरविमाणवरपाहरीएसु सोक्खाई अणोवमाई कोण भुत्तण उत्तमाई तओ आउक्त्रएणं चुया समाणा नह जिणमयंगि बोहिं लक्षण य संजमुत्तमं तमरयोघ- विप्पमुक्का उति नह अस्वयं सव्वदुक्तमोक्वं । एए अण्णे य एवमाइअत्या वित्थरेण य । उवासयदसासु णं परित्ता वायणा संखेजा अणुओगदारा नाव संखे. जाओ संगहणीओ। से णं अंगट्टयाए सत्तमे अंगे एगे सुयरखंधे दस अक्षयणा दस उद्देसणकाला दससमुद्देसणकाला संखेज्जाई पयसयसहस्साई पयग्गेणं पण्णत्ता । संखेज्जाई अक्खराई जाव एवं चरणकरणपरूवणया आघविनंति । से तं उवासग- दसाओ ||१४२|| से किं तं अंतगडदसाओ १ अंतगडदसासु णं अंतगडाणं णगराई ३९८ अंग-पविट्ट सुत्ताणि उजाणाई गाई नगला रामामो सममाधियरो समोगराममायरिया पगाहा इहलोइमपरलोइ गइ हिनिमेसा भोगारिया पनजाओ गुगरि गातोरा पनि माओ बनिहाओ ग्नमा अजगतं नमो न समय गत्तरगविली य गंजगी उत्तमं च बं आमिनणया तनी चियाओ गमिदगुतीओ व ता. अप्पमायजोगी सज्जायजाणाग य उत्तमाणं दोण्हं मिलणा पत्ताशय गंजमूनम जियपरीमाण चउनिहकमानयम्मि जन केवलस्म लंगो परियाओ जत्तिओ य जह पालिओ मुणिहिं पायोवगओ य जो नहिं जत्तियाणि भत्ताणि छेयत्ता अंतगडो मुगिन तमस्योपविप्पमुको मोरगाहमणुत्तरं न पत्ता। एए अण्णे य एबमाइअत्या वित्या. रेणं परूवेई । अंतगडदमागु णं परित्ता वायगा सम्पज्जा अणुओगदारा जाय संले. उजाओ संगहणीओ, से णं अंगठ्याए अट्टगे अंगे एगे मुयासंघ दग अश. यणा अट्ट बग्गा दस उद्देसगकाला दस समुहेमणकाला संग्वेज्जाई पगमयसहस्माई पय- ग्गेण प० संखेज्जा अक्षरा जाव एवं चरणकरणपरवणया आवविज्जति । से तं अंतगडदसाओ ॥१४३॥ से किं तं अणुत्तरोववाइयदसाओ ? अणुत्तरोनवाइयदमामु णं अणुत्तरोववाइयाणं णगराई उज्जाणाई चइयाई वणसंडा रायाणो अम्मापियरो समोसरणाई धम्मायरिया धम्मकहाओ इहलोगपरलोगइनिविसेसा भोगपरिचाया पच्च- ज्जाओ सुयररिग्गहा तबोवहाणाई परियाया पडिमाओ संलेहणाओ भत्तपाणपचक्रवा- णाई पाओवगमणाई अणुत्तरोववाओ मुकुलपञ्चायाया पुणो घोहिलाभो अंतकिरियाओ य आघविनंति । अणुत्तरोववाइयदमासु णं तित्थकरसमोसरणाई परमंगलजगहियाणि जिणाइसेसा य बहुविसेसा जिणसीसाणं चेव समणगणश्वरगंधहत्थीणं थिरजसाणं परिसहसेण्णरि उबलपमद्दणाणं तवदित्तचरीत्तणाणसम्मत्तसारवितिहप्पगारवित्थरपस- त्यगुणसंजुयाणं अणगारमहरिसीणं अणगारगुणाण वण्णओ उत्तमवरतवविमिट्टणाण- जोगजुत्ताणं जह य जगहियं भगवओ जारिसा इनिविसेसा देवासुरमाणुसाणं परि. साणं पाउब्भावा य जिगसमी जह य उवासंति जिणवरं जह य परिकहति धम्म लोगगुरू अमरणरसुरगणाणं सोऊण य तस्स भासियं अबसेसकम्मविसयविरत्ता णरा जहा अब्भुइँति धम्ममुरालं संजमं तवं चावि बहुविहप्पगारं जह बहणि वासाणि अणुचरित्ता आराहियणाणदंसणचरित्तजोगा जिणवयणमणुगयमहियभासिया जिणव- राण हियएणमणुण्णेत्ता जे य जहिं जत्तियाणि भत्ताणि छेयइत्ता लभ्रूण य समाहि- समवाओ-गणिपिडग-पण्हा विधागसुपं ३९९ मुत्तमम्झागमोगमुत्ता लयमा मुशिलोमन अरेगु यानि न त तस्य विनयसो तओमया मागेमा कादिति या नाय काय एए अग्गे य पयमाइअरमा वित्यरेणा अणुनरोपवादमा परिना यायामा अणुओंगदारा गाओ मंगानाओ यार ग अंग ने मुगाने दम अमायणा तिगि नागा दा उद्देसगका दश समुरेमगकाला संलाई पर- मुसहरमाई परागण पनि अनि बार एवं चाणकरणकावाया आपविति । सेनं अतरावधायदा मी १४४॥ से पिं.सं पावागरणागि ! पहायागरणेसुअढतरं पगिंगम्य अटुन अगणिगय अदा पनिकालिदा. सं विकासमा जागनुयन गरि विमा मंगाया आपविपासागरणादगातु गं ससमयसमयपण्णायपरोगामविविएपमारामासिवाणासययुगउपसमगाण- पगारआयरियमासिमाग विस्थर वीरमदेसीदि विनिमनिरपरगनियागं च समलि- यांग अदागंगुवा मसिमणिलामआरममाइया AfrEमामिणपिशाम- বিলাইশগণমাহি বাসগন্যালগলি अदमयमदयकालसमयदासमतित्यगत्तमरम टिकिरणारजागं सुरगिमरलगा- हम सख्वसध्यण्णुसम्मयम अयुइनधियोहणकरसरा पायायकराण पहा विविधगुणमहत्या जिगयरप्पणीया आघधिनंति । पहायागरणेसु णं परित्ता वायणा गंम्वेशा अणुओगदारा जाय मंग्वेजाभी संगहणीओ। से गं अंगद्वयाप, दागे अंगे पगे सुयशवंधे पणयालीसं उगणकाला पणयालीसं समुहेमणकाला संजामिपय. मयसहस्सागि पयग्गेणं ५० संखेषमा अनपरा अगता गमा नाय चरणकरण- पररगया आयविमति । से तं पण्डायागरणा ॥ १४५ सेवित विवागनुयं ! विवागमुए थे मुफटपाडाग कम्माणं फलविवागे आपविज्जति रो समासओ दुविहे प०, तं०-दुइशिगे चेव मुह विवागे चंय । तत्य गं दस दुहविवागागि दस मुहाविधा- गागि। मे किं तं दुहवियागाणि १ दुइवियागेगु ण दुविवागाण गराई उजाणाई चेहयाईवणमंडा रायागो अम्मापियरो रामोसरणाई धम्मायरिया धमाकहाओ णगर- गमणाई संसारपबंधे दुइपरंपराओ य आवविज्जति । सेतं दुहवियागागि । से कित मुह विवागागि मुहविधागेसु मुहविवागागा णगराई उम्नाणाई चेश्याई वणसंटा रायाणी अम्मापियरो समोसरणाई धम्मायरिया धमकहानी इहलोइयपरलोइय-
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समवाओ-गणिपिडग -दिट्ठिवाए ४०१ अर्णता पनवा नार एवं चरणकरणपरवणया आधविनंति से विवागनाए ॥ १४६ ॥ से किं तं दिठिवाए ? दिट्टिवाए णं सत्वभावपरूवणया आयविनंति । से समासओ पंचविहे पण्णत्ते, तं जहा-परिकम्म, सुत्ताई, पुत्वगय, अणुओगो, चूलिया । से किं तं परिकम्मे १ परिकम्मे सत्तविहे पणत्ते, तं जहा-मिद्धसेगिया- परिकम्मे, मगुस्ससे गियापरिकम्मे, पुगियापरिकम्गे, ओगाहणसेणियापरिकामे, उवसंपजसेणियापरिकम्ने, विधजहसेणियापरिकम्मे, चुयाचुयसेगियापरिकम्मे । से किंत सिद्धसेगियापरिकम्मे ? सिद्धसेणियापरिकम्मे चौदसविहे ५०, तं०-माउया- पयाणि, एगट्टियपयाणि, पाओकृपयागि, आगासपयाणि, के उभूय, रासिबद्धं, एगगुणं, दुगुणं, तिगुणं, केउभूय, पडिग्गहो, संसारपडिग्गहो, गंदावत्त, सिद्धरलं, से तं सिद्धसेगियापरिकम्मे । से कि तं मणुस्ससेगियापरिकम्मे ! मणुस्समेणियापरिकामे चौदसविहे प०, तं.-ताई व माउयापयागि जाव गंदावतं मणुस्समदं, से तं मणुस्ससेगियापरिकम्मे । अक्सेसाई परिकम्माई पुटाइयाई एकारसबिहाई पण्ण- ताई । इचेयाई सत्त परिकम्माई, छ ससमझ्याई सत्त आजीवियाई, छ चउपाण- इयाई सत्त तेरासियाई, एवामेव सपुष्वावरेणं सत्त परिकम्माई तेसीति भवतीति मक्खायाई, से तं परिकम्माई । से कि तं सुत्ताई ? तुत्ताई अट्टासीति भवतीति मस्खायाई, तं०-उजुगं परिणयापरिणयं बहुभंगिय विप्पाड्याविण (ज) यचरियं] अणंतरं परंपरं समाणं संजह [ मासाणं] संमिणं अहाचयं [अह- बाय-गंदीए सोवत्थिय (वत्तं यं) गंदावतं बहुलं पुट्टापुहं वियावत्तं एवंभूयं दुआवतं वत्तमाणप्पयं समभिरूढं सबओभई पणाम[पस्सास-गंदीए.] दुपडिग्गई । इयेया बावीस सुत्ताई छिण्णछेयगइयाई ससमयसुत्तपरिवाडीए इचेयाई बावीसं सुचाई अछिणछेयणइयाई आजीवियसुत्तपरिवाडीए, इचयाई बावीसं सत्ताई तिकणइयाई तेरासियतुत्तपरिवाडीए, इचयाई बाबीसं सुत्ताई नउफणइयाई ससमयसुत्तपरि. वाढीए, एवामेव सपुवावरेणं अट्ठासीति सुत्ताई भवतीति मक्खायाई, से तं सुत्ताई। से कि तं पुन्वगय ? पुव्वगयं च उद्दसविहं पण्णत्तं, तं जहा-उम्पायपुव्वं, अग्गेणीयं, वीरिय, अत्थिणत्यिप्पवाय, णाणप्पवाय, सच्चप्पवाय, आयप्पयाय, कम्मप्यवाय, पचक्वाणप्पवाय, विज्जाणुप्पवायं अवॉ, पाणाऊ, किरियाविसालं, लोगविंदुसारं । उपायपुवस्स णं दसवत्यू पण्णत्ता, चत्तारि चूलियावत्यू पण्णत्ता । अग्गेणियस्स ४०२ . दग चोदस सेसाणं ग-गदि गुलानि :: :: ::RATE ना ! म अनारस १०, TRA TIME MA माग गण प० । गजपताना आपलग गो गल 10 कमानी पानी वत्यू १० | विजापानाम सपना | अनारम णं पटना बारम कल प० । नागारमा पहिरिगानिमालगणं पुजा नीम बल प० । योगनिमारस्य पुनम पाणी या प० । टारमे व बारम य मणि । गोलगमा नीशापणारग अणुप्पयागम्मि॥ बारम ए कारगगे, चारगो वेग्गर नशूणि । शीगा गुग शेरगम नउदगमे पाणवी माओ। चनारि नवालग पढना दगा चूलवर पणि । आउलाण नउगह, नृलिया गस्थि " मे नं पुस्यगण । मे किंरा अणुमागे १ अणुओगे दुविहे प०, तः मूलरहमानोगे य गडिगाणुओगे य । से किरा मूलपढमाणुओगे ? एत्य में अरहंताणं भगवंताणं पुख्यमवा देवलोगगगणाणि आई चवणाणि जम्मणागि य अभिमेया रायवर मिराओ सीयाओ पध्वजाओ तया य भत्ता फेवलणाणुप्पाया य नित्थपयत्तणाणि य संघयणं गठाणं उत्तं आउं वणविभागो सीसा गणा गणहरा य अना पवत्तणीओ मंचस्स चउब्धिहराज वानि परिमाणं निणमणपन्चायओहिणा- णसम्मनमुयणागिणो य वाई अणुत्तरगई य जत्तिया सिद्धा पाओवगया य जे जहिं जत्तियाई भत्ताई छेयइत्ता अंतगढा मुणिवरुत्तमा तमरओषविप्पमुक्का सिद्धिपह- मणुत्तरं च पत्ता, एए अण्णे य एवमाइया गावा मूलपढमाणुओगे कहिया आध. विजांति पण्णविनंति परूविजंति, से तं मूलपढमाणुओगे । से किं तं गंडियाणु ओगे ? गंडियाणुओगे अणेगविहे प०, तं.-कुलगरगंडियाओ तित्थगरग- डियाओ गणहरगंडियाओ चफहरगंडियाओ दसारगंडियाओ बलदेवगंडियाओ वासुदेवगंडियाओ हरिवंसगंडियाओ भबाहुगंडियाओ तवोकम्मगंडियाओ चित्तंत- रगंडियाओ उस्सप्पिणीगंडियाओ ओसप्पिणीगंडियाओ अमरणरतिरियणिरयगइ. गमणविविहपरियट्टणाणुओगे, एवमाइयाओ गंडियाओ आघविनति पण्णविनंति परूविनंति, से तं गंडियाणुओगे । से किं तं चूलियाओ ? जणं आइलाणं नउण्इं पुयाणं चूलियाओ सेसाई पुव्वाई अचूलियाई, से तं चूलियाओ। दिहिवायरस समवाओ-जीवरासी अजीवरासी ४०३ परित्ता वायणा, संखेजा अणुओगदारा संखेजाओ पडिवत्तीओ संखेनाओ जुत्तीओ संखेज्जा सिलोगा संखेज्जाओ संगहणीओ। से गं अंगट्टयाए वारसमे गे एगे सुयक्वंधे चउद्दस पुन्बाई संखेजा वत्यू संखेना चूलवत्यू संखेज्जा हुडा संखेज्जा पाहुडपाहुडा संखेज्जाओ पाहुडियाओ संखेज्जाओ पाहुडपाहुडि. ओ संखेज्जाणि पयसयसहस्सागि पयग्गेणं पण्णत्ता, संखेज्जा अक्खरा अणंता मा अणंता पज्जवा परित्ता तसा अणंता यावरा सासया कडा णित्रद्धा णिकाइया नणपण्णत्ता भावा आपविज्जति पण्णविज्जति परूविज्जंति दंसिज्जति णिदंसिज्जति वदंसिध्नंति, एवं णाया एवं विण्णाया एवं चरणकरणपरूवणया आघविनंति, त दिहिवाए, से तं दुवालसंगे गणिपिडगे ।१४७/ इचेइयं दुवालसंगं गणिपिडगं तीतकाले अर्णता जीवा आणाए विराहित्ता चाउरंतसंसारकंतारं अगुपरियटिस, चेइये दुवालसंगं गणिपिडगं पडुप्पण्णे काले परित्ता जीवा आणाए विराहित्ता पाउरंतसंसारकंतारं अणुपरियदृति, इच्चेइयं दुवालसंगं गणिपिडगं अणागए काले रणंता जीवा आणाए विराहित्ता चाउरंतसंसारकंतारं अणुपरियट्टिरसंति, इच्चेइये दुवालसंगं गणिपिडगं अतीतकाले अणंता जीवा आणाए आराहित्ता चाउरंतसंसार- तारं वीईवइंसु, एवं पडुप्पण्णेऽवि, एवं अणागएऽवि । दुवालसंगे णं गणिपिडगे ग कयाइ णासी, ण कयाइ णत्यि, ण कयाइ ण भविस्सइ, भुविं च भवइ य भविस्सइ य (अयले) धुवे शिइए सासए अक्खए अन्वए अवहिए णिचे । से जहा णामए पंच अत्यिकाया ण कयाइ ण आसि, ण कयाइ णत्थि, ण कयाइ ण भविस्सह, भुवि च भवइ य भविस्सइ य, (अयला) धुवा णिइया सासया अक्खया अन्वया अवडिया णिया, एवामेव दुवालसंगे गणिपिडगे ण कयाइ ण आसि, ण कयाइ णत्थि, णं कयाइ ण भविस्सइ, भुवि च भवइ य भविस्सइ य (अयले) धुवे जाव अवहिए णिचे । एत्थ ण दुवालसंगे गणिपिडगे अणंता भावा अर्णता अभावा अर्णता हेऊ अर्णता अहेऊ अणंता कारणा अर्णता अकारणा अणंता जीवा अर्णता अजीवा अणंता भवसिद्धिया अणंता अभवसिद्धिया अणंता सिद्धा अर्णता असिंद्धा आघ- विज्जति पण्णविनंति परूविज्जति इंसिज्जति णिदंसिज्जति उवदंसिर्जति । एवं दुवालसंगं गणिपिडगं इति ॥१४८॥ जीवरासी अजीवरासी दुवे रासी पण्णत्ता, तं जहा-जीवरासी अजीवरासी य । अजीवरासी दुविहा , .
܀ :1 ܕ: (::: ܐܐܐ ::: ܐ '11 : 1 ܬܐ > ܕ '15 : 11] ܢܺܐܝ:1!ܝܶܐ܃ ܃iia ilui tilܐ!Turc . ,jiciܐ ܐܐܐ ܙܐ܀ 4 .ii-ܬ݁:) ܐ;;3 : 1܇܆ ܐ::: 1111111 ܝ ܥ1ܪܐܐܐܪܐ ܢܐ::I :::} } 1 : 1ܝܪ111 11 : 12ܐ ܐܬܐ ܝܐ: ܢܐ -1:-::: ;: ܛܐܝܝܺ ܕ݁ܐ 1 : 1 ܝܐ ܙ ܐ ili- : i ܐܐܫܺܙܝܰܐ ܝܺܫܳܬ݁ܐ 111111. :! ') ?i: : ܨ ܃ ܃ ܃ ' .(ii 1ܝܬ݁ܘܺ,iii ; ! : ii ! :::: :: t11iI in ܃ ܃ ܃ ܃ ܃ ܃ ܃ ܃ ܃ ܃ ܕܐܐ :]: ii- . : .1 : , iii ! : 11 : 1..i' ܐ ' ܐ ' .iurܐ ܐ̱ܪܝܐܝܬܐ• ܀ : :: .; ,; :.. ܘܝ ܙ;;!.܂ ܀;:-،،، ܃ ܃ ܃ : ; -;1;::- :: ", ܐܳܝܰ ܕܶܢܳܝܢ ܀ ܐܐ ܐܪ ܢ;! .f ;?:::: 14 ܕ:: ;: .ܕ;.- 1-4 ; ;; ܪܐ܃ ܃ ܃ܪܺ، ܐ ، : :ܐ ܙܙ ܃ ܃ ܃ ;: .…; ;;;; ;; ; ܂ .., ܪ܆ ܀ - ،،،، ܝܝܟ ܪܙܙ ܚ ܀ ܕܫܪ ܕ܂ ܃ ،،، ܙ ܀܂ ܚ ܙ ,1 ܙ rܫ ܀ ܙ ܨ. ܪ ܪ ܀ ܢ ܀ ܀ ܀ ܀ ܨ समवाओ-जीवरासी अजीवरासी ४०५ भाओ णरएसु वेयंणाओ ।। १४९ ॥ केवइया णं भंते! असुरकुमारावासा ५० गोयमा! इमीसे णं रयणप्पभाए पुढवीए असीउत्तरजोयणमयसहस्सबाहल्लाए उवरि एग जोयणसहस्से ओगाहेत्ता हेहा चेगं जोयणसहस्सं वज्जित्ता मझे अहत्तरि जोयगसयसहस्से एत्य ण रयणप्पभाए पुढवीए चउसद्धिं असुरकुमारावाससयसहस्सा प० । ते णं भवणा चाहिं वट्टा अंतो चउरंसा अहे पोस्वरकयाणियासंठाणसंठिया उक्किण्णंतरविउलगंभीरखायफलिहा अहालयचरियदारगोउरकवाडतोरणपडिदुवार- देसभागा तमुसलमुमंदिसयग्घिपरिवारिया अउज्झा अडयालकोट्टयरइया अडयाल- करवणमाला लाउल्लोइयमहिया गोसीससरसरत्तचंदणदद्दरदिण्णांचंगुलितला काला- गुरुपवरकुंदुरुफतुरुक्कडझंतधूवमघमघेतगंधुद्धयाभिरामा सुगंधवरगंधिया गंधवट्टि- भूया अच्छा सण्हा लण्हा घट्टा मट्ठाणीरया गिम्मला वितिमिरा विसुद्धासप्पभा समि- रोया सउलोया पासाईया दरिसणिना अभिरुवा पडिरूवा । एवं जं जस्स कमई तं तस्स जं जं गाहाहिं भणिय तह चेव वण्णओ।। १५०॥ केवइया णं भंते ! पुढविकाइयावासा प० गोयमा ! असंखेना पुढवीकाइयावासा २० एवं जाव मणुस्स त्ति। केवइया णं भंते ! वागमतरावासा प० गोयमा! इमीसे णं रयणप्पभाए पुद- वीए रयणामयस्स कंडस्स जोयणसहस्सत्राहल्लस्स उरि एग जोयणसयं ओगा- हेत्ता हेहा चेगं जोयणसयं वजेत्ता मञ्झे अहसु जोयणसएसु एत्य णं वाणमंतराणं देवाणं तिरियमसंखेना भोमेजा णगरावाससयसहस्सा प०, ते णं भोमेला णगरा चाहिं वट्ठा अंतो चउरंसा, एवं जहा भवणवासीणं तहेव णेयन्वा, णवरं पडागमाला- उला सुरम्मा पासाईया दरिसणिजा अभिरूवा पडिरूवा ॥१५१|| केवइया णं भंते! जोइसियाणं विमाणावासा पण्णत्ता ? गोयमा ! इमीसे णं रयणप्पभाए पुढवीए बहु- समरमणिचाओ भूमिभागाओ सत्तणउयाई जोयणसयाई उट्ठ उप्पइत्ता एत्य णं दसुत्तरजोवणसयबाहल्ले तिरिय जोइसविसए जोइसियाणं देवाणं असंखेना जोइ. सियविमाणावासा प०, ते णं जोइ सियविमाणावासाअभुग्गयमूसियपहसिया विविह- रमणिरयणभत्तिचित्ता वाउचुयविजयवेजयंतीपडागछत्ताइछत्तकलिया तुंगा गगण- तलमगलिहंतसिहरा जालंतररयणपंजरुम्मिलियब मणिकणगथूभियाया वियसिय. सयपत्तपुंडरीयतिलयरयणद्धचंदचित्ता अंतो बाहिं च सहा तवणिजवालुयापत्थडा सुहफासा सस्सिरीयरूवा पासाईया दरिसणिज्जा अमि०॥ १५२ ॥ केवड्या णभंते !
४०६ अंग-पबिटु सुत्ताणि वेमाणियावासा प० १ गोयमा ! इमीसे णं रयणप्पभाए पुढवीए बहुसमरमणिजाओ भूमिभागाओ उद्वं चंदिमसूरियगहणणक्खत्ततारारूवाणं वीइवइत्ता बहूणि जोयणाणि वहूणि जोयणसयाणि वहूणि जोयणसहस्साणि बहूणि जोयणसयसहस्साणि बहुइओ जोयणकोडीओ बहुइओ जोयणकोडाकोडीओ असंखेजाओ जोयणकोडाकोडीओ उन्हें दूरं वीइवइत्ता एत्थ णं विमाणियाणं देवाणं सोहम्मीसाणसणंकुमारमाहिंद. वंभलंतगसुक्कसहस्सारआणयपाणयआरणअच्चुएसु गेवेजमणुत्तरेसु य चउरासीई विमाणावाससयसहस्सा सत्ताणउई च सहस्सा तेवीसं च विमाणा भवतीति मक्खाया, ते णं विमाणा अचिमालिप्पभा भासरासिवण्णाभा अरया णीरया णिम्मला वितिमिरा विसुद्धा सबरयणामया अच्छा सण्हा घट्टा मट्टा णिप्पंका णिकंकडच्छाया सप्पभा समरीया सउज्जोया पासाईया दरिसणिना अभिरुवा पडिरूवा । सोहम्मे णं भंते ! कप्पे केवड्या विमाणावासा प० १ गोयमा ! वत्तीसं विमाणावाससयसहस्सा ५०, एवं ईसाणाइसु अट्टावीसं बारस अट्ट चत्तारि एयाई सयसहस्साई पण्णासं चत्ता- लीसं छ एयाई सहस्साई आणए पाणए चत्तारि आरणच्चुए तिगि एयाणि सयाणि, एवं गाहाहिं भाणियध्वं ॥ १५३ ।। णेरड्याणं भंते ! केवइयं कालं ठिई प० १ गोयमा ! जहण्णेणं दस वाससहस्साई उक्कोसेणं तेत्तीसं सागरोवमाई ठिई प० । अपज्जत्तगाणं णेरइयाणं भंते ! केवइयं कालं ठिई ५० ? गोयमा ! नहण्णेणं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेण वि अंतोमुहुत्तं । पजत्तगाणं जहण्णेणं दस वाससहस्साई अंतो. मुहुत्तूणाई । उक्कोसेणं तेत्तीसं सागरोवमाई अंतोमुहुत्तूणाई । इमीसे णं रयणप्पभाए पुढवीए एवं नाव विजयवेजयंतजयंतअपराजियाणं देवाणं केवइयं कालं ठिई प० ! गोयमा ! जहण्णेणं एकत्तीसं सागरोवमाई उकोसेणं तेत्तीसं सागरोवमाई । सबढे अजहण्णमणुकोसेणं तेत्तीसं सागरोवमाई ठिई प० ॥ १५४ ॥ कइ णं भंते सरीरा प० १ गोयमा ! पंच सरीरा प०, तं०-ओरालिए वेउन्धिए आहारए तेयए कम्मए । ओरालियसरीरे णं भंते ! कइविहे प० ! गोयमा पंचविहे प०, तं०- एगिदियओरालियसरीरे नाव गम्भवतियमणुस्सपंचिंदियओरालियसरीरे य । ओरालियसरीरस्स णं भंते ! के महालिया सरीरोगाहणा प० १ गोयमा ! नहणणं अंगुलअसंखेजहभागं उफोसेणं साइरेगं जोयणसहस्सं, एवं जहा ओगाहणसंठाणे ओरालियपमाणं तहा गिरवसेसं, एवं जाव मणुस्से ति उपोसणं तिणि गाउयाई ।
समवाओ -जीवरासी अजीवरासी काविहे भंते ! उधिमारे पग गोपमा! दुनि, पो-निदिय- वंशिमगरे पनिदियोगियर भयं जार पगारे आदनं जाग अणुता गणागि नागि रमनीरगनी परिवाया। आलम मैने ! कविर ५०१ गोयगाफार प० गातार ५० मिमगुस्स- आहायरीरे अमरसाहायसदीरे ? गोगमा मगुस्मामार यसरी यो अमा. माआहारयमगर, पब मरगाहारमगारे नियममादारय गरीरे मुन्छिमामाहारगरीरे ! गोयमा ! गमानिसमगुरमभामाग्य मरीर को नुमिमममाहायरी | जमनायतियारहरपसार किं कम्मभूमिगा० असम्मभूमिगा गोमा ! का गोभमनिगा ना कम्मभूमिगा० मि. संमेलनासाउग अमरोजगानाठप० १ गोयमा सच सामाउय० पो कामाठया संखयासाटग. दिपाय. अपातयः ? गोगमा! पाजतब भी अजनतय । म प कि सम्मदिट्टी मिच्छविही सम्मामिछट्टिी. गोयमा ! सम्पट्टिी को मिना दिडी. जो सम्मामिछलिट्टी जा सम्गमिटी किंमनप० मंगर संजया. गंजय० गोयमा ! मंनया को अमेनया जो संनयासनयजद संजय० कि पमत्तसंजय० अपमत्तमजय० १ गोयमा ! पमत्तग्न५० णो अरमननयमद पमतगंजय० कि रित्त अगिरिता ? गोगरा ! दृष्टिपत जो अगिट्रिपतन वयमा विभागियना आहारयसरीरे समनटरंगसंटागमेटिए । आहारयगरीररस के महालिया सरीरोगाणा प० १ गोयमा ! जहाण देणारयणी उपोमे पति- पुण्या रयौ । नयासरीरे भंते ! फदविहे १० ! गोगमा! पंचविद ५० एगिदियतेवामरीरे वितिचउपंच एवं जाव गेयेभरमण भंते ! देवस्म पंमार- नियममुग्याए समोहयरस ममाणरम के महालिया सरीरोगाणा प० १ गोयमा! मीरपमाणनेता विक्संभमाणं आयामेणं नहोणं अहे नाव विजाहर ढायो उफोसेणं जाव अहोलोइयग्गामात्रओ, उसुनार सयाई विमागाई, सिरियं भाव मगुस्सवेत्तं, एवं नाव अणुनरोपवाइया । एवं कम्मवगीरं मागियन ॥१५५।। भेव विसयसठाणे, अभितर बाहिरे य देशोही । ओहिस्सा सुशिहाणी, पडियाई चैव अपडिवाई।॥ १ ॥ १५६ ॥ कइबिहे गं भते ! ओदी १० १ गोयमा ! दुविहा - - ऊंग-पबिट्ट कुत्तागि 2-नावावदार व खोलननिर क.. एक नवं ऑन माणिकर. : नीय य दन नारी नायला वेचणा, नव दुक्का ॥ अनुवादानिया णि नेव. मणिचार || १ इयणं ना िनीतं देवणं बाति जनणः बंगाणं बपति ननण देवणं देवति ? गौचना गन्डका एवं चत्र देवणापर्य नाणियों 1. १५.८ | कद णं मात ! नाना पण्णता ? गोकना चलताना पण नागे. *. जादा-जिहाणीचा कालेज पन्ना नया एवं लताप नाणियान ।।... तमा य. महारे, आहानीयाणा इव । पोजाना णाद. जागति, ग्झदनाणा व मजे १. ॥णेयः णं, मत गणना हान णिमणमा तयोः परियार- गावाः तमो पनिगानणमा तन पनिका गया तो पन्छा दिबणयः ? हता गोदना ! ए सावं. माणि यवं ।। १६० ।। कहि ना !" मानदि ५० ? गोयना ! हदि आग पर जहा-जाणामणिहानाहार गाणा- मिलनाडर डिणानणिनाकार. पारनामाणिहनावार. मानानणा-णितना ओबाम गाणामणिहत्तावारणेन्छयाणं मत कति मानन पा ? गोपन्ना ! बिहे पर, जहाजाणा-णि नादार गाणा-णितासार दिउणा-णिाचार गलगानणि नाना-नानागानणिहानाहार मोलाणाणा-णि नाडाला जाद नाणिकगं. ॥ १६१ णित्यगई ण मान! काल दिया उसकारण ५० गोयन्तः ! जहण्णाग पाई तन्मय उदगो णं बारन माल एवं निरिचना मागाई देवगई. :: निद्विगः णं, नी ! के ज्ञान दिया निझणयार, प ? गौचना : जहणणं. ६ सय उमानणं हन्मान एवं निद्धिकाचा उच्चाटणाः । उनीनै णं. ." त्यापनापुन्दरणेन्डका वा काल दिया उवदागों एवं उवकाल- दंडोनाणियनो उम्मगादडओ योन्तक मत ! जाणामणिनाउन कर मामालिनी परत ? गोदनानिय निकाय नियनिय निय दिय निय ८अ वेदगंण माण दिनाणि, जान माणिय जि। १६२.! मनविते मत : मंत्रपणे पाणन ? गोगना!' हाबी नंगपणे पाणन, ते बार-दानमाणानवनवणे निभाणानायचयो, णानामबयाणे - णासादनंबमण बान्दियानंदपणे वयणे । गोया णं मौत । मित्रपणी : गौचना ! गई संबवणाणं अयणी णेद अदि गोद जिला व या जगाला समवाओ-कुलगर-तित्थयराइ ४०९ अगिट्ठा अकंता अप्पिया अणाएजा असुभा अमणुप्णा अमणामा अमगाभिरामा ने तेसिं असंघयगत्ताए परिणमंति। असुरकुमाराणं भंते ! किसंघयणी ५० ? गोयमा! घण्हं संघयणाणं असंघयणी वट्टी व छिराणेव पहारू जे पोग्गला इट्टा कंता पिया मगुण्णा मणामा मणाभिरामा तें तैसि असंघयणत्ताए परिणमंति, एवं नाव थगियकुमाराणं । पुढवीकाइया णं भंते ! सिंघयणी प० ? गोयमा ! छेवसंघयणी ५०, एवं नाव संनुच्छिमपंचिंदियतिरिक्खजोगिय ति । गम्भवतिया उचिहसंघ- यणी, समुच्छिममणुस्सा ठेवसंघयणी, गम्भवधांतिवमणुस्सा छबिहे संघयणे ५० जहा असुरकुमारा तहा वाणमंतरजोइसियवेमाणिया य ।। १६३|| कइविहे गं भंते ! संठाणे पण्गत्ते ? गोयमा उन्धिहे संठाणे पण्णत्ते, तं जहा-समचउरंसे १ णिग्गोहपरिमंडले २ साइए ३ वामणे ४ खुज्जे ५ हुँढे ६ । रइया भंते ! किंसठाणी प० १ गोयमा ! हुंडसठाणी प० । असुरकुमारा गं मंते ! किंमठाणी ५० १ गोयमा ! समचउरंससेठाणसंठिया ५०, एवं नाव थणियकुमारा। पुढवी मसूरसंठाणा प०, भाऊ थियुयमंठाणा ५०, तेक सूइकलावसंठाणा प०, वाऊ पहागासठाणा प०, वणस्सई णाणासठाणसंठिया प०, वेइंदियतेइंदियचउरिदिय. संमुच्छिमपंचेंदियतिरिक्खा हुंडसंठाणा प०, गन्भवतिया उबिहसंठाणा ५०, संमुच्छिममगुस्सा हुंडसंठाणसंठिया प०, गम्भवतियाणं मगुस्साणं उबिहा संठाणा प० । जहा असुरकुमारा तहा वाणमंतरजोइसियवेमाणिया वि ॥१६४ ॥ काविहे ण भंते ! वेए पण्णत्ते ? गोयमा ! तिविहे वेए प०, तं जहा-इत्थीवेए पुरिसवेए गपुंसगवेएरइया णं भंते ! कि इत्थीवया पुरिसोयो णपुंसगवेया प० १ गोयमा! जो इत्थीवेया णो पुरिसवेया णपुंसगवेया प० । असुरकुमारा ण भंते ! किं इत्थीवेया पुरिसवेया गपुंसगवेया ? गोयमा! इत्यावेया पुरिसवेया णो णपुंसगवेया, नाव यणियकुमारा, पुढवी-आऊ-तेज-वाऊ-वणस्सई वितिचंउरिदियसमुच्छिमपंचिदिय- तिरिक्खसमुच्छिममणुस्सा णपुंसगवेया, गन्भवतियमणुस्सा पंचिंदियतिरिया यतिवेया, नहा असुरकुमारा तहा वाणमंतरा जोइसियवेमाणिया चि ॥ १६५ ॥ कुलगर-तित्थय राइ तेणं काले ण ते ण समए ण कप्पस्स समोसरणं णेयवं, जावं गणहरा सावचा गिरवच्चायोच्छिण्णा ॥१६६|| बुद्दीवे णं दीवे भारहे वासे तीयाए उस्सप्पिणीए सत्त कुलगरा होत्या, तं०--मित्तदामे सुपासे य सयंपभे । विमलयोसे सुघोसे ani mammy ! | .:: A1, ARTI, to... ना पनि Kari ! म म: ॥२॥ीणीने मार माग गर्मागे गं पोगविना नसतो, it proft गनिमगत य मिपान मार इ । म परे गमग ..|| गुग्गी दर सियासिए । म गीगणे माण निर्णय ||| गरे मुराणे भ, मिलीजामीन माग मागणे सियाना सतिए 10ोवियोगा निगमगा गोलि उमरियपात्तमार्ण ए.ए. नियमिामगं ।। ८ || गीतको भार नारोहमीसे गोरागिणीए चउ. नाग तिगण माग होत्या, तं० -- ममदेनी विजया रोणा [सिमरया मंगला गुनीमा य । पुस्ची लागणा रागाणंदा विष्टः जगा गामा || ९ || सुजसा मुख्य अरा मिरिगा देनी पभाई पउगा। वप्पा सिगा य नामा तिराला देवी य जिण. माया ॥ १० ॥] १६८॥ जंयुद्धीवेणं दीये भारो वारो इमीरों ओस पिणीए चउ. चीमं तित्थयरा होत्या, तं0--उराभ अजिरा संभव अभिगंदण सुमइ पउमप्पह मुपास नंदप्पह मुविहि-पुप्फदंत सीयल सिमंस वासुपुमा विमल अणंत धम्म संति कुंथु अर मटि मुणिमुव्यय णमिणेमि पास वहमाणो य ।। १६९ ॥ एएसिं चउवी. साए तित्थयराणं च उव्वीसं पुस्वभवया णामधेया होत्या, तं०-पढमेत्य वइर- गाभे विमले तह विमलवाणे चेव । तत्तो य धम्मसीहे सुमित्त तह धम्ममित्ते य ।। ११ ।। सुंदरबाहु तह दोहबाहु जुगवाहू य लढयाहू य । दिण्णे य इंददत्ते सुंदर माहिंदरे चैव ।। १२ ।। सीहरहे मेहरहे रुप्पी य सुदंसणे य चोद्धव्वे । तत्तो य गंदणे खलु सीहगिरी व वीसइमे ॥ १३ ॥ अदीणसत्तु संखे सुदंसणे गंदणे य बोद्धव्वे । ओसप्पिणीए एए तित्थयराणं तु पुत्वभवा ।। १४ ।। १७० ॥ एएसिणं चउब्बीसाए तित्थयराणं चउन्त्रीसं सीयाओ होत्था, तं जहा-सीया सुदंसणा सुप्पभा य सिद्धत्थ सुप्पसिद्धा य । विजया य वेजयंती जयंती अपराजिया चेव ॥ १५ ॥ ।
समवाओ-तित्थयराइ ४११ अरमपम नंदपभ मरम्पह भगिनुप्पमात्र तिमहा यजमा मागरदरा यणागदत्ता य॥१६॥ अमरकर शिषटफरामगोरमा तह मोहराचा देव- कुरुत्तरकुरा विसाल नंदापमा सीया ॥ १७॥ एमाओ सापानी ममि पर जिगवरिंदाणं । मध्यनगवच्छलाण सम्बोउयसुगाए या १८यि उशिता मागुतेहिं साइटु (ह) रोमवेदि । पन्छा पति सार्थ अनुग्दिरिंदणागिंदा ॥ १९॥ चलचालकंटलधरा मनंदविउनियाभरजधारी | मुरअनुयंदिया वहति सीय जिणंदाणं ॥२०॥ पुरओ यहति देवा पागा पुण दाहिणमि पारास्मि । पचत्यिमेण असुरा गम्ला पुग उत्तरे पासे ॥२१॥ उसमी व विपीयाए, पार. चईए अरिद्वबरणेमी । अवसेना तित्ययरा निकलता जम्मभूमीम् ।। २२|| सम्मे वि एगदूसेग [निगगया जियरा चउम्लीये । जय माग अनलिंग पर निति- लिंगे कुलिंगे य ।।२३ ॥] एपो भगवं वीरो [पासी मली य तिहि-निदि सपदि । भगवं पि मासुपुत्रो छहिं पुत्सिमएहि मिनसंती ||२४॥ दमाण मांगा राइगाणं [च वत्तियाणं चचहि सहस्तेहि उसनो सेसा उ सहस्परिपारा ॥ २५ ॥1] सुमइत्य विषमता निग्गी वासुपुष्य नोयर्थ । पामो माही य अह. मेण लेसा ठ टेणं ॥ २६ ॥] एएसि गं उसीगाप, तित्ययाराम चउयी पदममिक्खादायारो होत्या, तं०-सिस मदने मुरिंददत्ते य ददौ य । पउने य सोमदेवे मादिदे तह सोमदत्ते च । पुस पुगम्बम् पुगणंद गुपदे पर य विषये य । तत्तो य धम्मसीहे सुमित्त तद वग्गादेय।। २७ ॥ अपराजिय विस्ससँग वीसहमे होह उसमसेणे या दिण्णे यादत्त धणे बहुले. य. आशुष्कीए ॥२८॥ एए विमुखलेसा निणयरमत्तीइ पनलिउचाउ । -कालं ते सग पटि. लामेई निणवरिंदे॥२९॥ संवन्धरण मिक्खा लदा उरामेण सायणादेश सेसेटि चीयदिवसे लद्धाओ पदमभिस्याओ॥३०॥उसगरम पदमभिवाता खोयरस आनि लोगणाहस्स । सेसाणं परमण्णं अमियरसरसीवमं आसि ।।३१।। सम्बेसिक निणाणं नाहिय लखाउ पढमभिक्खाउ । तहियं यमुधाराओ सरोरत्तीभी घुट्टाओ ॥३२॥ १७१।। एएसिं चठन्धीसाए तित्ययराणं चउनीसं चेयमक्या होत्या, तं.---णग्गोह सत्तिवण्णे साले पियए पियंगु उत्ताहे। सिरिसे व गागरखे माली य पिलंदखुरुक्खे य॥३३॥ तिदुग पाडल जंबू आसत्ये खट तहेव दहिवणे । गंदीरुक्खे तिलए अंबयरक्खे असोगे य॥३४॥ चंपय बउले यातहा वैद्यसंस्करखे ifr ܫܪܶܐ܀ ....": "3 : . ....... ... ... ... ... !!... 22. ...: .... ....... ....... ॥३॥ :: " Hit in : कोको inf|| ११ ||१०३।। मिण सिगो गाजा-अंशी ना मामा की गोगा। माया नामगि माया भारणि पाणि य पालिका | १२ || उमा भारतमा मानिया गमती य । पु. I am - गाय ॥५३॥ जमिणी गुफजूला य गरणय आगाउ । उतारित कुलगंगा गजमा गुणेहि उगवेया । नाणं परमा सिमी गाणं ॥ १४ ॥ १७४ ।। जंयुहीवे णं दीवे गारो वागे मासे ओगपिणीप बाराचारिपियरी होत्या, तं जहा-उरामे सुमिते विजण रामुरविजए ग आसमेणे य । निस्समेणे य गरे मुदंगणे कत्तवीरिए चैव ॥ ४' ।। पउगुत्तरे महाहरी विजए राया तहेव य । बंभे बारसमे उत्ते पिउ. णामा चपट्टीणं ।। ४६ ।। १७५ ॥ जंबुद्धीने णं दीये भारहे वासे इमीसे ओस. पिणीए बारस चकाटिमायरो होत्या, तं जहा-मुमंगला जावई भहा सहदेवी अहरा सिरिदेवी । तारा जाला (जाला तारा ) मेरा वप्पा चुलणि अपच्छिमा ।। १७६ ।। जंबुद्दीवे णं दीवे भारहे वासे इमीसे ओसप्पिणीए वारस चकवट्टी होत्या, तं जहा-भरहो सगरो मघयं [सणंकुमारो य रायसद्लो । संती कुंयू य अरो हवइ सुभूमो य कोरब्यो ।। ४७ ॥ णवमो य महापउमो हरिसेणो चेव राय- सदूलो । जयणामो य णरवई, बारसमो बंभदत्तो य ॥ ४८ ॥] एएसिं बारसण्हं चकवट्टीणं बारस इत्थिरयणा होत्या, तं जहा-पढमा होइ सुभद्दा भह सुणंदा जया य विजया य । किण्हसिरी सूरसिरी पउमसिरी वसुंधरा देवी ॥ ४९ ॥ लच्छि मई कुरुमई इत्थिरयणाण णामाई ।। १७७ ।। जंबुद्दीवे णं दीवे भारहे वासे इमीसे , समवाओ-चक्कयट्टी-बारदेव ओमनी परवदेवापानगरियो होरया - 4 hot नोति महगि ! अमिरादे सुदीचे दार गार पाने में माना tirst -मिया मागरमा गई देवनदा ५१॥ भने धोये भार हे मागे fri. मारी रोकायामा ममदार मानाया. मानती अपराधिय २७ मार दिक्षा मार्ग १८॥ पुथारे दोन भाई पादांगे औगभितीपा दरमहा होपयतं जड़ा-टामसि साहाया भोग जातामा मुममा रिपदेगा या गुyि. यता ओपना मा महाया भगिहा REET Reeration. महसमागम मागुमेला भगकार अवय अमं trianRE. गंभीरमपुरपटिपुराना यमुनगामा मापा मागुम्मामादिमाजापगदरंगा मगरदेशमा आर. मना पारदरवारा( रभारदर(रिभाविभागिदड महाराज विमच्या महापरासायगा दुसरा धोरा धारपरिशा सुनिमि मनुस्मना महाराविहादगा अक्षम शोमा गमिया दत अनियादा हन्टमुनगगनी नागमतिमंदगधरा परमिट गोत्मनिरामधारी दलप्रयोदयापणा कायापलि.परनाifort. गच्छनामा परनमा सम्मोउपमुरभिगमरचितगोमागविमतिचिनार. मालाध्ययमा अट्टमयविमनस्यगरमादरविरायगगा मगमपदिलिया विधामपिल मियः सारयणपनियमरणभीरननियोगदमियरा परिणाम गोदायकोमेमपाससा पयरदित्त या परमीदाणरम गरिदा गाया ममयसमा कमा अगाहियरायतेवरन्सीप, दिघमाया मीरापीयगरसमा दुये दुरे रामरेगा मायरी होत्या, न नहा-विट्ट बार अपले नाप राम मानि सकिने ॥५३॥१७९|| पप सिणं गवाई बन्ददेवयामुनाणं पुष्पमानिया मामाघरमा, तं. विस्मभूः पश्यप धगदर मनदत्त निकाले । नियमित्त ललियागते पुमनार गंगदचे य॥५४॥ एयाई मामाई पुष्यभये आणि सासुदेवाणं । एलो भल्देवाण ... "''''.'. !! !' ....... ....... ! :::: :: :: :: : * :: '. - : : :: :: :: :: :: :: :: :: Pahity .:!: !! :...!! . ' ' ":"iti. !! मन ॥१२NIA नर गीको । सो !ी को 1.11 ।।६२ ॥ अनिया Fari हिमाणक:गामी रामा गागले आहो. मामी ॥ ६॥ रामा एगो गुण मि से गम न मिसिया भागासोः ॥ ६ ॥ १८४ ॥ जमलीगे नागे एरपए वासे भीगे जोगाणी डायरा होगा, जहागण शुनः अग्गीरोणं च दिशेण न। इनिधिषण नगरि परिमो सोमन॥६६॥ वदामि गुत्तिसेणं मनिममेण ताल मिरीण | गुजाराम राय णिनियानगगन ॥ ६७ ॥ अगंज निणामः गदग आणत अभियणागि । उपरांत नायरयं चंदे सर गुतियण च ।। ६८।। आइपासं न सुपारी देवेसर दियं च गादेवं । णिवाणगयं र भ(गोरं नीगनु सामकोई ना६९॥जियरागमगिसेणं बंदे नागरायमग्गिउत्तं च । चोकसियपिनदोसं नारिसेणं गयं सिकिं ॥ ७० ॥ १८५ ॥ जयुद्दीवे णं दीवे आगमिस्साए उस्राप्पिणीए भार हे वासे सत्त कुलगरा भविस्संति, तं०--मियवाहणे मुभूगे य सुप्पो य सयंपभे । दत्ते मुहुगे बंधू य आगमिस्साण होक्खाइ ।।७।। ॥ १८६ ॥ जंबुहीये णं दीये आगमिस्साए उस्सपिणीए एरवए वासे दस कुल. गरा भविस्संति, तं०-विमलवाहणे सामंकरे सीमंधरे खेमंकरे खेमंधरे दढधणू दसधणू सयधणू पडिसूई सुमइ ति ॥ १८७ ॥ जंबुद्दीवे णं दीवे भारहे वासे आगमिस्साए उत्सप्पिणीए चउवीसं तित्थयरा भविस्संति, तं०-महापउमे सूरदेवे, सुपासे य सयपभे । सव्वाणुभूई अरहा, देवस्सुए य होक्खइ ॥ ७२ ॥ उदए समयामो-तित्यपराइ पेदार पुने पहिले साजिशनिवाला RE PAN मिले।३।। अम निगार निभायम निम्ममा निट मार, भागनिरसेन हो!!Sil मेवरे (मोजिमी मम देवोरमाए अरहा, अगसनिशा ७५!! raar Hit केवटी आगमिस्त दोरी, भमविभाग देगा !! चमार निरपरा पुषमाविमा भर नाम fake..... मेगिय मुगम दामगार सामान सुदे ग गया, २४:51 पोद्रायः देव हमारा पा 1 रोहिनिमुलगा वेष सतरे mind पटना भयापदार्गमा सत्तार दासमय साई पद यहीद भोटो farm TEAfter 11८०॥ १८॥ एपी मनु मmonfi स्मंग, गर्म मायरी मगिरमी arter AMA पदमसिगनीमी भावनि, म पनि गरि, मासे मायतनामिनि ॥ १०.०॥ अदुपये मा. Ramipriy उसभिगोययाम चाहिनी भावनिक इदमे गायक मुद्धदने यागिरिलंत गिरिभूमिरिमोमेमम॥८॥परमे महार विमरवाहणे विपुखरामा पासो ने भागलि महालया [८२ एएनिधारमई चायटीपारग गिरी , पारस मादित भारण इत्थीरममा भविमति 11 १९१।। दिदी भारपा आगाज सार, उस्माए पर मनदेवासुदेवरिया भगिति, परमानुमाया भविमंति, पर इन्टदेवमायले भपिरमति, कामामंडन्या भारत- उत्तमपुरिगा मन्दिामपुरिमा पाहामरिगा ओरंगी रोगीमय गोप गायत्री भागिययो भाव पोरगीतगवसमा दुये दुधे राम कारया भाग मनिस जहा-पदे य मंदमिते दीडयाह हा महामाया महापके बगीय गनगे 11८३॥ दुविन्टय निविदाय भागनिमाण वाणिोनिया विनामो भुमी य मुदसणे । आगंदे गंदणे पउमे मंकारगणे य अधिो ॥८॥१९२॥ एएपि गंगवण्इं बलदेवयानुदेवाण पुरविया पर मामयमा गविरति, पापागाय- --- . .. न - --- . -- .. Teो माग - ....... ! . . . . . . . . . : : { . " 1 : Print Print । यो ::, my!!: ! ": !! [1 Pa! :: :: :: | ".. || Trit मा: ET, :: : Hy, InfoTerias ।। 2. AIR , II 4 1 1 17, infe. माग को || २ || Holl of sari, rtifit | भागनिगा ril, मागगा || ".३ || १५५ ।। 1. पारस ना मारत, पानि, बारग ३ गणा fift | नागागा मारिता, णा जागागागर भारगति, णा मनमायगे निमावि, नागानिमाति, सजा- उत्तमपुरिया मनिरामपुरिगा पहाण परिसा जाग दोनो रामगवा भायरो भार सति, णा पटिमन भरिति, णा पुरागवणागा, णय सम्मायरिया, शियाणभूमीओ, णव णियाणकारणा, भागाए परमार आगमिस्साए भागियया । एवं दोमु वि आगमिस्माए भाणियव्या ॥ १९५ ॥ यं एवमाहिति, तं जहा- कुलगरवंसेइ य एवं तित्ययरवंद य नायिय दसावंसेड य गणभरवसेड य इसिवंसेइ य जइवंसेइ य मुणिवंसेइ य । गुण्इ या मुअंगेइ वा मुयममासेइ वा सुरः खधेइ वा समवाएइ वा संखेइ वा सम्मत्तमंगमक्खायं अज्झायणं ति बेमि ॥ १९६॥ ।। समवायं चउत्थमंगं समत्तं ।।
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