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Ikai Dahai Sekada

Vimal Mitr · 2010/12

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इकाई दहाई सैकड़ा
हैं।
.00
वाय
नकल
हरम
विमल मित्र
जनुराय
दिनेश आचार्य
स्वम्य
आग
राधाकृष्ण प्रकाशन
पभी
पहाता

0१९६६
गिमन मिग वपत्ता
प्रसार
आमरवा
गधागाप्रपन दिना
मुर
“वाममार गग
राष्ट्रभाषा पिरम न्ति
१२पय1०ग

यूरे
हैं।
वाय
नकल
म्वस्थ
का
आग
मन्टू
ससार-यात्रा की सारी जिम्मेदारिया से मुझे
एटकारा देकर तुमने हमेशा मेरी महायता की
है, इसलिए 'साहब बीबी गुलाम,' "रीदी
पोडिया मान और 'इसाई, दहा, नरडा'
पी रचना सम्भव हा पायो । मेरी इच्छा है कि
म वृति वे माय तुम्हारा नाम मलग्न रहे।
पिन
सभी
हाता

The time i all come when thies un will shinc onks upon
1 world of free men who recomnise no master cxcept
rez on when tyrint and slaves puests and their stupid
or hugecrotital toolsssell no lonoer cuist esc-pt in history
or on the stre
wdfarquis de Condorcet
1741-179

राज्य-परिक्रमा के बाद राजा राहित राजधानी वापम आय । ए बूटे ब्राह्मण ने सामन आकर राम्ना राय लिया। "कौन? "मैं हूँ, राजा रोहित ब्राह्मण ने पूछा, 'लोट क्या आय?" राजा रोहित न रहा, 'मैं यर गया है। श्राह्मण न कहा 'चलते चनने जा थर जात हैं वहीं ता अन्न-श्री हैं। जा सत्यकाम हैं वे भी अगर नित्रिय वठे रह तो उनका भी पतन अनिदाय । इसलिए तुम चलते चला यागे वटो चरवति चरवति ।" राजा इमचे बाद घर नहीं लौट पाय। वे फिर स परिश्मा रन निक्स परें । लेकिन फिर एक दिन राजधानी लौट आय। उमी ब्राह्मण ने फिर म रास्ता रोग लिया। 'पर क्या लौट आय' राजा रोहित न पहा, इमतरह लगातार चल रह्न से क्या लामहै?' ब्राह्मण ने कहा, 'बहुन लाम हैं । जा चल मरता है वहा तो स्वम्य है। स्वस्थ आदमी हो म्वस्थ मन का अधिकारी है। उसकी आमा वा विकास होता है। यह क्या चरम लाम नहीं है ? तुम चलन चला, आग वढो-चरैवेति चरवति ।" राजा इस बार भी घर नहीं नोट पाय । फिर निकल पहे। लक्नि राजा रोहित फिर एक दिन लौट । ब्राह्मण देवता मागहे थे। "फिर क्यों लोट माय?" 'अब चला नहीं जाना। बाह्मण ने कहा, 'यह क्या? जो आराम करता है उसका भाग्य भी आराम करता है। जारठ सहा हाता है उसका भाग्य भा उठ सहा हाता साई, दहाई, सरडा । है। जालटता है उसका भाग्य भी धराशायी हो जाता है। जा आगे बढना है उगरा माग्य मा आग परता है। तुम आगे बडो सामन-चरवति- चावनि। "ग पर गजा रोहित का फिर नौटना पड़ा। पूमते घूमते जय फिर से रापम आय ता रही वारण फिर मिला। मैं और नहा पूम माना } मै आप उप भी अब और नहीं सुन पा आप पृभ ममा परें। मनया म हा सकता है यह उपदेश नाम जाना मगम बरामने प्राण मुमरगया। बोला नहा माय गहना ही पालियुग है, जाग उनादापर उठ पड हाना प्रता और चलत रह्ना मनयुग है । इमलिए तुम माग या गमा गहित और आग दो चरवेनि घरवेति से माया म मापु है और लोग्ना नहा हुना। राजा राहित न पिर मे चलना शुरू किया। frमालय ग म मामारी गिरगपूर्वी गीमान्त पाणी, मोगल, अयोध्या মিমি জদি সময় মায়ের গলঃধংগিনীপথি পা शुगरापरे या हुई मारत ने याग और पिर विश्व-हाण्डमा माना पार या आगवाना र आपिर म युग-युगान्तर में या ITERगार । वह गला रोगिल भी नहा है वह ब्राह्मण भी है। आना माना है उप मुननाता भी कोई नहीं है। 3-मारगर है। यह उपवागवायरता, 2 शुभम जयममुन म मान बनना हुमा पाई नहीं जानता पापब मान गया पर रजिस्ट्राई सिको पता नहीं था। माग मापारमानमय यात्रा पर गिरनही सपाते। सब सपना पर अपन समयमा जमीन पर राज और मरदूर निएर रामान गडारिया है। उन दिना भीर पीगारमा! गाय में ए महिला हाती गिरा मनपा पे मारा जात, राम मा घर रहा है वहाँ सर आगे इकाई, दहाई, सरडा वटा। उनकी पनी भी दम्पती। तभी म लागा का पता लगा कि यह मकान शिवप्रमाद गुप्त का है। वक्ता क माहूर नामी, प्रमिद्ध दाभक्त । एक ममय ये पालिटिकन मफरर शिवप्रमाद्र गुप्न का नाम किमी व लिए जनजाना नहीं था। बडे आमिया का नाम पतने मे जिनन पाय हैं ठीक वनी ही मुनि भी हैं। शिवप्रमाद पहते पहन जब इम मकान म जाय उम ममय मुहल्ले व क्तिन हो नोग उनमे मिसन आय । उस समय जो जाना जाना शुरू हुआ. बह फिर कभी नहीं हाा। "वडे आदमी हान मे क्या हुना, मिजाज वितन 'शिव' की तरह पाया है।" शिव का मिजाज अमल म क्या है कि पना । लेकिन शिव वा टडे मिजाज वाना मान नेन पर उपमा को ठीक-ठीक बटान म आमानी हाती। इमने जावा शिवप्रमाद वायू का गिव व वह म भी मेन था। शिवप्रमाद गत पहले, 'अरे नहीं जाप लाा वहते क्या हैं आज जा हाल है उमम दिमाग ठडा रखना मुदिक्षत हा गया है।' फ्रिक्ल, दिमाग़ गम रसकर या पनि वे माय काम चलता है, लोग कहत, व वायू" 1 अन वा वायू ही नहीं, मुरल के कई रिटायद वद्ध नाम के समय सिर, गना और कान ढवे ना बटने । जपवार का कर बाहोती, वाम और यम्युनिम्ग को लेकर याने हातीं। गव व पाम करने वायर एव विषय, यर था उनका अनीत । वनमान और भविष्य मे रगा व जोग भून कालेर मिरयपान । गभी दिनमबीन ग्निाशीनमवीर बिन उम्ती-- या दिन थे वे नी, जनार । पहां गया वह मान- माग उम ममय पाई- सिगाई को पद थी, भगवान और ग्रामा म नागा की अदायी । अब तो भव युध्यन गया है । नड दियो आफ्नि जाना नोकरी वग्न । महकपर, राम्न और पामिनी घूमनी । म बीना पम परवान ही नहीं नग्नी। हर गरही ये बातें उठनी । लेकिन रिमोहन पर पहुंचन ग पहरे ही बढीनाय आ पहुँचना।

- इवाई दहाई साडा वानाय आपर पता आपर लिए पूजा की जगह हो गयी है। बानाथ ना उग ममय समर म आना ही शिवप्रसाद वाबू र लिए पूजा नी जगह हाना था या मव जान गय हैं । गुरु गुरू म जरा अजीव लगा। मतावाम गुF TF शिवप्रमा वायू ने हसत हमन वहा था यही रगना नादार पा रहा हू सी म यर वा न दिन आप इस वोमना क्या वह रह हैं ? पूजा मरना यया मामला है जनार | आज भी इडिया सारी दुनिया म एतना जाग है या रिमनिरा जग बनलाग्य वह सब है इमी से तो दुनिया भाभी रिली हुई है। चट-गूय चर रह हैं । नही तो दयते इडिया न कर गानिस्ट-मार ज्यान पर निया हाता शिवगा वाचूठठाार जोर ग हमने एकमनिल सोलनेवाली हमा। पण वर गव ना ना जाना भाई पूजा बरसे मनको तप्नि होता है मी ग परता। बचपन पी आरत पड गयी है पाइनहा पाना पात चौग्न जमीनीधी। मभी पूछत, आप क्या बचपन महापूजा आर? निगा वायू बग्न हो ग बारह माल की उम्र से हीरता हूँ। मानपरनागथा इमग परता है। आज भी मौक आमजनु गारापरताह---यह दगियन मरी मागपोटो पहार मनाम परगनाहापजापर नमम्बार दिया। गाने पम म मामा का एक पाट दीवार पर दगा था। पापी यहा बापजागि। पूरा दावार को तर पोट्रेट भून रहा था। सब सोग उगारहीन सग। विमा पावू पहन मग 'माय मन बी पोई भी साथ पूरी ननावर पापा गाम आजगाता है। मैं मा मा नालायर लटयाई भार arनमा राजावन म जारी गरिय है गिरमा मायूपा गला भरमाया। पामा माग और नगापन नही-नरी आप पूना परा " और नारा।

इशाद, दगई मकहा गन के नौ बजे में माहे नो वन ता शिवप्रमाद गुप्त का पूजा करन का समय है । उमममय कोई गानमाल नहीं कर मक्ता । क्वन टनना ही नहीं, सुबह म रात होनता मारे दिन दम घर में जैसे सुवपूण शान्ति छायी रहती है। यहाँ ममी खुा है। इस युग के लिए गायद अजीव वान है। अगर कही कोई शिकायत है भी, ता वह किमी के कान म नहीं जाती। हरर का मन जम खुशी मे भरा था। माकर उठन पर मभी कहत-वाह | फिर रात को मोन जात ममय भी निम्चिन हाकर बह-वाह 'म युग मे यह कम मम्भव हापाया, यह इम मुल्ले के लागा के लिए एक समस्या है। कुछ लाग माचते इसका कारण सायद पसा है । जरुरतम ज्याला पमा होन पर शायद मी गानि का साम्राज्य मम्भव हा मरता है। क्नि पैसा क्या क्लबत्ता गहर म अक्ले शिवप्रमार गुप्त व पाम ही है । और किनी में पाम नहा है ? व वायू व पाम क्या पम की कमी है। पविनागवायू का ही क्या पम का अभाव है ? अनाथ बाबू क तीना नडये निगपार है-तीना ही गजे- टड जाफिमर हैं रुपया चारा ओर पिटा पहाह । मभी इम मुहल्ल की वडी वडा विल्डिगाव मानिस है। पनारमेंट नाट रमिजग्टर रडियाग्राम मभी कुचनो बाहर से दिखलायी दन हैं । नजर म आनवानी नभी चौजा काइन लोगा य यहाँ इन्तजाम है । लेकिन मभी यहां शिवप्रमाद वाचू वे पर आकर जमे थाडी दर युती हवा का मवन कर जान । शिवप्रमागुप्त के माय दो यान करने पर जम सभी का उम्र वः जाता। पिन ऐमा क्या हाता है बाई मी नहीं समझ पाता । मुबह ऑफ्मि जान समय मा आर मी हाती। शिवप्रमाद बानू का चीजें सम्हानने लिए नहीं ! उस काम के लिए नाग आरमी है । वह याम बद्रीनाथ वा है । उमरी नौरग इसीलिए है। शिवप्रमाद वागू न मन्ग पी आर टापार वग 'पता है, वदानाय आजप न गाना मीग रहा है आम्म्दि वनगा। बद्रीनाय गम मजम मिटपिटा गया। पार कतार धनगा ? उम्नाद गया है कितना लेना है?' मन्ना का भी आरचय हुआ। वानी, 'बया कर रहा? वह और मारमा, तर तो हो चुरा 1 इवाई, दहाई, सरडा , जर नहा, तुम्ह पता नहीं + मुमह मैंने अपन काना सुना। ठड स दिदर रहा था और मुनता ह या सगीन चा रहा है । पहले ता ममम ही नहा पाया मैंन गाचा शापद सावन गा रहा है फिर लगा कि यह सुरीला गला ताबद्रानाथ या घार मोर पिमा वा हा ही नहा सकता। मानका जमा छाडो गन बार वी वातावा फिर बहोग जापिग व तिा दर हो रग है। जर मार काबान नगर उमा म पूर्वान, कौन मागानाभा रहा पा र वात न ! मुर न करा रतात हा वया। इसके या पया है ? मा मन रग गया । वाली दखती है तुम्ह रिमा बात का होग हा रहा है मुरम कुदरगना हा नहा है। 'वार जग ना प्यार कराम भी कुछ नग विगडा और मर कहने गेही या-गया? मान ग तू ना तो बहानाथ, भाग दम कमर मे । बहानापन भागार जान बचायी। सग्निशियमा बार हमने लग। यार नाफा लिगता घर नग गया पीवी वाया जाती होगी उग युध पिना की गदा दान क्या वहतीहो।' वार उगा 1 ग तुम्हाग वाम ग चलगा ? उमा निशा रह पामाग' वगनाथ व पिनाता तुम्गग व मिनट भी काम नहीं चला।' पगा उगापाम नम पर पानागा? मर्गवरा भारतमाया ! रार मतानचा बाजुरा भारी पानापाTि विगार बारवान सरिता मग सारा वाम तुम्हा पती योर पा अपमानाची तयाधीशाय पल-जम रह गय ।' मा परयया, बनना गर? पपना मा पिरा नहा हाना पा न "तना बमानपानपगारापा। तिला पाना मी गपटा दिया है ? तु तामातम -- काई, दहाई, मकहा ही है पैमे बालोन मुझे कभी भी नहीं पापना, मकान,गाहो, रमिटर रेडियोग्राम मैन कुछ भी नही चाय मब अपन आप आ गया । वास्तव म प सब तुम्हार भाग्य मही आया है। मन्दान जरा गुस्मा दिपलाया । दाती, जाना आमा, तम्ह वगै हा रही होगी। Freमाद वाव ईसन सग । चुर्ना परन चुके थे। चीज-चम्न ना सत्र टीव हा चुकी थी। शिवप्रमादवार नबमर म निकलने के पहले पूछा 'क्ज न गाडी निकाल ली क्या? बद्रीनायवाटर ही महाया । वहा म वाला जाहाँ, निरान रहा है। गाडी की बात सुनकर गायः मन्दा का ध्यान आया। पीच में शारी "तुमने सदावन के लिए गाठी यरादन या कहा था।" शिवप्रमाद वादू धूमकर याने, “हो, कहा ता था। सात बुधवह रहा था क्या "उसकी गाटी पुराना हा गयी है न, दमा मकर रहा था। मुझे इर लगता है, पता नहीं क्व एक्सिडेंट वर वट। शिवप्रसा- बाबू.-"यह रहा है तासरीन दान ! और मैं गुना उमसी उपम गाडीपर पदहा नहीं पाया। "लेरिन अभी मननी रीना क्या अच्छा होगा "गाह रमना ना गोरोनी है ' दम-दाम म लिन जान परना एसिडेंट हान र रमादा चाम है । उस दिन सपन आफ्रिम ही का एक क्लर दमनीचे दबकरमर गया।" अचानर टनोपान की घटी दजन म वात दोच मही र गयो । की आवाज मुनत ही बीनाथ न पार रिमावर उठापावित्रमा वा पभी भी सुद टलीफोन नहीं उठान । শৰা বৰ বৰ প্ৰধৰ বাসার দিবস। িম সিনা এ বি FTER माद बाबू पर रहत उतना दर तीफार। हमारा नागा माय मम्मा रगना पाता। यही जानॉफ्रिम गा रह हैं, नाम का मान प्राय बरे पासो अगर वही मागिना और भी दर हाना और मीटिंग मी पमा एरो हाता। इन मीटिंग म लौरत-नोग्न हा infriनियम- " इसाई, दहाई, सक्डा ग्यारह बज जाते । मुग्ल्ले के वकू वायू अनाय वा वगरह वाबू पोन पा सौर जाना रात का लोटन पर भी शिवप्रसाद बाद पूजा करने बगे। पूजा नियम म होनी चाहिए फिर माना। शिवपमा बाबू कान पर जा रहे थे। गतान पृद्धा 'क्या आज भी तुम्हारी बाई मीटिंग है ? जिप्रगा यापू ने कहा 'अरे नही वही मुशिल म दाल दिया है उन मागान। पिन सागान? और मौन ? वही पी० एम० पी० वाो। मुझे लेकर सीचतान पर र" हैं। रह है rि आप हमारी तरफ स इलेवान लडिये । मैं जितना ही पना हरिभाई, में किसी भी दन का नहीं हू, बचपन रोनि स्वाथ भाव म दामा वाम परता आया है आज भी कर रहा हूँ, जव तर जिन्ता रहूगा पगा। हो तो-मवा के लिए गजा हूँ क्नि तुम्हारो पार्टी वार्टी म TE सपिन य साग मिमीभीतरह सुनन यो तयार नहीं होते। सिफ मुझे “रपना पार्टी म पगाटना चाल है-या तो डॉ० प्रफुल्ल घोष पी पार्टी मान पती हागा ना तो अतुय पाप की वीच की माडी नहीं चलेगी। मार रिमाग म प मम नहीं घुमना । पूधा तय क्या तुम मीटिंग मनाहामा पिरक्या वहा और गर में जा रहा है,यरीपहा । वह दियामिबिना मोकोआना पा में पुष भी परगा। मांग पूरगा-दसू मां गया कहती हैं। पर और नहीगावराम होरबनने की और धनने लगे। बगनाय नी पाग-पत्र की गठरी निय पोछे-पोछ चल दिया। यह गठरी गरिमा' घायू व माय गामाती है और पिर गाय ही यापग नागा । यीमाय भा गाय माय जाता है और यात्र में साथ ही सौरता माजी गुमाएर दोनल पर मनिवागार धावू बायोपिम मार गिटार शिवगा वायू में यहाँ कता है टाइपिस्ट आगमन है। पूरा मॉपिग गपागच मरा है । बलात्ता जब तानाव और परामरवाहमा पातरी यात माग है। धीरे धीरे मकानापी Fotati मामी बड़े हैं। पानि यार राहर नरो नोगारो भैर का दाई, सक्दा गया है। उस समय में ही शिवप्रसारदा की बुद्धि न रग दिलाया । तनी यह जोकिम साता। उन्होंने माच लिया या कि आगामी पाच-दर माल में पकना ऐमा ही नहीं रहगा। जो बगा। जगल और नारिया के पार पश्चिम म चन्दननार, चवटा और बदलना पहुंचा। दक्षिामनादवपुर और गरिया मे पर डायमड-हावर त फसगा। और नत्तर में दहानगर, दमाम का पोर्दै डाट कहा तक पाव फसाया कुटदार नहीं है। इसके अलावा ही० बी० मा० प्रानकर है दुआपुर है कल्याणी है। जावपुर गरिया और नरद्रपुर मभी रनर प्लान के अनुसार बने हैं। शिवप्रसाद बाबू अपनी दूगिता पर मन-ही-मन प्रसन्न गत। जम यह उन्ग का वलकत्ता है। यह प्रेटर करता रम उन्ही व हायों गा गया । पमा जा जा रहा है मो ता आ हा रहा है साथ ही एक और नामी चीन हाय लगी है वह आ मतनि । यह आरमतृप्ति ही गुज-परिवा गमवस दहा प्रॉफ्टि है। दम 'प्रॉष्टि देवून पर ही शिवप्रसार गुप्त ने हिम्नान पार मवाला बनाया है। जॉफ्रिम म घुमन ही दवा एक अजनबी वटा है। वाली नहीं है। शिवप्रमाद वावू दे आत ही दह उठकर बटा हा गया । नमस्कार किया। जाप कौन हैं में टीम में पहचान नहीं पा रहा । लाप मुझे नहीं पचान पायेंगे । मैं एव जो काम मे जाया है जमीन कीमीट-परान का काम नहीं है। पवादवावून पहा 'सचिन मग कामना जमान की खरीद-फरोख्न वरना ही है। 'वह जानता हूं सेक्नि में उम काम म नी आपा। मैं जपर म आग अपर " नुरिताचाई न आपने नाम पिग्गी मंत्री है' कहार एक चिरगतिवमा वाव दे हाय मे दी। चिगे तर शिवनादवाबू ने बद्रीनापरायुनाया ! वटीनाय वार था जान हीरवार 17 इस ममय बापा घटै रिमी राय बानु नर्गरपाऊँमा अगरकाईयार नो रठाना मगर मनमाने देना। .

न्याई, दहाई, मकडा
इगर वा वीनाय का युनारर फिर कहा, जोर जॉपरटर से कह दो
fr मुझे रिंग न यर में व्यस्त है।'
पतासायमिन्न भिन्न मुह नाव जग अलग रूप हैं। हिंदुस्तान पार
या का जब नाला हाता। बहूपाजार यी मधुगुप्त लन म उम समय
धुए का वाताच भग होता है जयवि शिवप्रसाद वायू च गुरु वरिन इया
मन म पर है । इगा मह की अधरी गला म मदाकिनी न लवको
पाना पागा | 'मा मुममान पण हुआ । दमी मुहल्लम अपन मकान
मी बिरयोग गवत पातार वा मडर पर इवा को विट मेलत
Pा । इसा यार जग बड होन पर मुरल्ल व तडका म मिलन का
इजाजत मिना ।सीन दूर ग । स्यागमन मिलाप गे मो नाराज हाती ।
जरागीरा घटावाजा करन ही मो डाटता। मां उगे औया के मामन
मापरता मरना न साय इतना मिलना-जुनना अच्छा यात
नहीं है।
गगाकरना पिन मां व लाग सराव तो नहा है !
यमय तह नामाना होगा मैं बता सोग गरार हैं. उनर

इकाई, दहाई, संक्डा म मभी खराब हैं। सदाव्रत मन हा मन जरा हमा। इसके बाद नम्बर खोजकर एक मकान के मामन जाकर दरवाजा खटखटाने लगा। क्या मजे की बात है । वचपन म इमी गभू क यहा मा आन नहीं देती थी । भू के पिना विमी आफ्मि में की कग्न य । हाथ म टिफिन का डिवा लिये मुबह साढे आठ बजे बस-स्टॉप वी नार दौडत हुए जाते य। तभी म पना नहीं क्या, मां को इन लोगा मे वडी घृणा हो गयी थी। वमे मन मदान वटा हो गया है । लागावे घर जान मे अव उमे कोई भिभव नहीं है । वह गभू के माय गप्प लगा सक्ता है, वठ सकता है। क्मिी को पता भी नहीं लगेगा । वह अप इम मुहल्ले का रहल वाला नहीं है । इसी से कोई आपत्ति भी नहीं करगा। "कौन" अदर म जनानी आवाज आयी और माय ही विमी न दरवाजा साल दिया। फॉर पहन छाटी-मी लडकी। 'भू है? घर 'भया तो बार गय हैं । घर नहीं हैं। 'काव । बौन-मे कब गभू का वा कनव नी है क्या? लडकी ने कहा, 'सामन गली का माड है न, माड पर ही दगे एक बतागवाने की वान । उमी के पीछे भया का क्लव है। मदायत न पहले तो मारा, जान दो, जब वनव नक कौन जाय पर मिन जाता ता कुछ देर बठ लता । फिर कोई माम वाम नी नहा है। किताबें सरोदने के लिए कॉलेज स्ट्रीट आया था। बिना ल चुवन वे वाद अचानक पुरान मुदल्ल की याद आयी और घर चना जापा। उदारत लौटते-लोटन भी आग बढन नगा। एक बार हाय म बंधी पदी म ममय दया। काफी समय है। जानी-पहचानी वही गती। इनन दिना म कुछ भी नहीं बदला है । लम्बी-लम्बीदुमजिता निमजिनो इमारतें। टमा- टम भग नौर एक-दूगर मे मटी हुइ । मोड पर की वह डाई-क्लीनिंग की दान अभी भी वम ही है । पहले घर म गरज नहीं था। पिताजी को सहा पर ये एप मान के गरजम गाडी रमार आना पता था। आफ्यि

वाई नहाई सकडा
बानू ला नोट र हैं। गरी गली हाने में क्या हुआ, भाड म्यूब थी।
इननी-मा गला में एक गाडी भा आ जाती तो मुश्किल होती-लोमा को
मगनानी चोरिया पर चढवर पडे होना पडना।
मजा मार पर जाररमात बा।पपरल-पडी एक छोटी-सी दूकान
निगतापी दा । दूर म ही मालूम हो जाता है मूडी-यनाग की दूकान होगा।
सनातन दूरान व पीछे की ओर दपने की काशित की। वही तो
होगा चागिा दान या काय । एक बार सोचा दुकानदार म पूछे। लेकिन
दूवानलार उम ममय अपन ग्राहा का सम्हालन म लगा था। द्वान की
बाजू ग ही प पतली मीमर मी गली चली गयी है। वहाँ स मकान के
अरयो रोगना दाग रहा था। दाए लोग जन्तर जा रहे थे ।
मामाच रहा था अदर जाय या नहीं। अचानक एक आमाका
जर जान नग मारत न पूछ लिया यहाँ बाई मनब है क्या?
आग्मा न मुडमर दगा। मगमन को नगा चेहरा जम पहचाना
पाना-गा है । उम्र म उमग कुछ ही बडा होगा।
जारमा जान मारहा हो।
गगन न पूमा अदर गम् है क्या ? भूटत ।
अलग पापी नारगन की आवाज़ आ रहा थाहगी बम गर
साथ
उग मागमा न गारा बाआर अच्छी तरह नेपा। फिर यहा बच्चा
जरा टग्यि दराता है।
मान परी मप पर मडा रग।
अता जात हा उम नाग्मा ने आवाज दा, 'भू तुम्ह कोई बुला
रग]
बागोर ग गुनायी गिया । इस यात पे माय ही अन्ना
गागपास गरा।
मौन बमा रग है।
वन मुन्नतिप्रमा' बाबूरापाप्य पुत्र।
गम जगनद भी ममम पाया।
मा यसरी भएन मुनम पहरे जा गिरप्रमाद बापू जर

इकाई, दहाई, सैरडा वालीगज मे मकान बनवाकर चले गये हैं।' फिर भी जस किसी ने पूछा, 'किसका पोप्य पुन पोष्य पुन क्या रह रह हो" " "पाप्य पुन को पोप्य पुन नहीं तो जमाई कहेंगा? वुनापे तक जव कोई बाल-बच्चा नहीं हुआ, तो उस गाद निया "मदारत, अपन मदाव्रत की वात कर रह हो वह बाया है ? कहाँ है?' 'बाहर खडा है । तुझे बुला रहा है। गभू न गिरते पडते गली के बाहर आते ही उमे वाहा म जकड लिया। अरे, च । सदाव्रत, वात क्या है ? जचाना इम मुहल्ल म तेरी गाडी कहाँ है ? पंदल ही आया है " उस अंधेरा गली मे सडे सदावत को लगा जम वह पत्थर । जमे वह हो। म नहीं था। मर चुका था। एक्दम फामिल। मधुगुप्त लेन के पलक्त्ता की मिट्टी के नीचे दबकर फॉसिल हा गया है। युग-युग की घुटन- भर अधकार म जैम उमकी आखिरी समाधि हा। वह नहीं है। वह खत्म हा चुका है। दुनिया से जसे उसका अस्तित्व ही मिट चाहे। 'क्या र पहचाना नहीं ? मैं ही तो हूँ भू । पदल क्या आया है । तरी गाडी कहाँ गया" मदानत कोई भी उत्तर नहीं दे पा रहा था। वह उम घर का वाई नहीं है. उसके माता पिता, जिरवह अपना समझना आपा है उमरे पाई नहीं हैं इतने दिन उसने नकली जिन्दगो वितायी है। इनन दिन की पुराना मब याने एक-एक कर या आने लगी । वह जर तर ममझ भी नहीं पाया । उममे छिपाया गया। मच यात यह दने से क्या उमगा यह नुनमान हाता ' वर्ग लाम भी क्या होता । लेकिन रिमो न बतलाया क्या नहीं। 'क्या रे तेरी तबीयत ठीक नहीं है क्या? मिर दर कर रहा है मदाप्रत वे मुरम जम इतनी देर बाद शद फूट । वोता आज चलू भाई, फिर विमा दिन आउंगा। आज अच्छा नहीं लग रहा।" "इतनी दूर मावर एमे ही वापस चला जायगा मान, बसर करव मवार र जरा देर बठ, एव पर चाय पीवर चल जाना, और नहीं तो मगवत न कहा, "नहीं, आज चलमा । फिर विमी दिन आऊंगा।' 1 7 २२ साई, दहाई, राबडा 'तो फिर पर आयगा" 'अभाग न वह माना ममय मिलाहो पर दिन चला आऊगा। पर मगन वहाँ और नग सापहीनही पाया विगा न उग बनलाया बस नही उम बता दरम विभो वा या विगहता? शिमोन उग पर विवाम स्यानहारिया यह पया विश्वाग मरने लायक भीना है। महारत मधुगुप्त मन यो सररी गली से जलती-जली चलन पगा। पयायो रन पर जमे उग पाई पहचान लेगा। होपन होमगात गाय बम-स्टाप पर आगरबा। या बापून का क्या बात है जनार' जाजवल ता आपना पनाहा ही रना पाप बुरी तर पंगे हैं। शिवप्रमा- वायूप घय पी गत साहिय अब ता धेगा रमाकागार। गया अब मावनिह पर तो गवनमट न ही जमानशा पधा तुम पर यिा है। मैंन तो उगnिi० राय यो वह रिया fr पास पुष्ट मारहातिमा ? वग ठाम अपिमिती गभी तो स रह है अगर मान बगान या राम भानगे तोमग यहाँ जायें। ममगरागाररहिए तारायन बराबग । गुलर राषभर पुराने दोन है। बाप बात न चौसा महा 10 राय आपने पुराने दोन है या बार मना मातम मान मन ही चौप मिनिस्टर हो गये हैं हम मागान ना माय मा म गापर दिये हैं। पतरता गजिन না বল না সংবাদ মাধুলা পি র ণ पूमार मारा रामपि उप ममय मापा तन ये मान म रतापा। मोनिमगवार मोरिय होता। मवान उग समय समझ तीनीपाएपशिया सरें।

इवाई,गई, मण्डा व मत्र मिप याने ही नहीं था। ये बातें कुछ ही लाग जान पान । रिमी किसी दिन अचानक टलोपान आ जाता। शिवप्रमाद वा रिमीवर उठान बुद्ध दर वान करत: फिर मलाररट त्रीपान छाड तनाबले-- 'लगता है य लोग मेरी जान लेकर मारेंगे। ममी पूछत, 'क्या, या हुआ ? क्मिन दलीफोन किया था।' 'और कौन करगावही आप लामाका मगर।' मयर का नाम सुनकर सभी को जरा भाचय होता। मारा रसरता जैम शिवप्रमाद वायू की राय लने के लिए नालायित रहता है । शिवप्रसाद या की राय लिय बिना जस मिनिस्ट्री टूट जायगी मारा पत्ता तहस नत्म हो जायगा। काई फोन ऐन समय पर नाना रिमभी मुस्लि में पह जाना मनगपूछनी, "अब फिर से वहाँ जा रह हार विरमा वाव पहले, 'हो आऊँ अवानर बुलाया है । नहीं जाने से सराव लगगा।मोचेंगे मैं किमी की परवाह ही नहा करता।' इमा वार बद्रीनाप का दुलार वन बद्री, कुन म गाडा निगलन कायह बहुत अरस पहल जर मलावर बनकर इस परम आयी थी, मुट बाद रणे धुपचाप गहल्यी रा मारा नाम वरतो शिवरमाद बाबू में वे वही मग्नत व निया एक बार ता लगातार तान दिन तक भरे आदमी का पता ही नहीं लगा। घर पर मरता नही ? पार । मुबह बा-पीकर पर म निरन राम का लोट आने का दान थी। वह दिन गुजरा, मग नि भी निकला। उमा वार वा गिनी निवस गया। फिर भी काई गयर नहीं, पता नहीं उम ममय घर मे इतने नोरर चारर भी नहीं । यही बाई विडेंट ही ता नहीं हा १ परम पाईपवर मनवाना तर नहा था। पूछे भी ना विमग पनिरव जान निी दिनमा नहा धनलाया। मलि दिन वो अपन-आर गुजरे। उन दिना गारा भी नहीं था। मधुगुप्त मन ये मरान को गिनी पीद से मन्दा नीन नि मारी ओर देतो सही रही। पिर भी पनानही । हिन्दू मुगिरम दगार ममय पर अदर बाना सही हरग कांपती रहो । मल

इसाई दहा सवडा
आमानिस हर समय पर बना रहता। मताने रितनी ही बार पहा
भी-माज ही न जाागतो करा आफ्न आनी है। इस मार-चार और
मन-राराची व गमय तुम्हारे न जाने स मा हा जायगा -
बमा निमोनित गदग अपाल निहो या रात, घाटी
भारी वानव निएगा सामन धरना दना । उम ममय मानो
मगता-frrनि जसे पटगानही रात बीतगी नहीं । दिन
दुगनिहाया गुगर व गुजरत ही हैं। शिवप्रमाण वायू य भी वै सार
दिन गुजर गमे । न जान वहाँ वहाँ माटिंग परत फिरत, मारे दिन, मारी
रानी महान व या शायद सुबर में गमय घर लौटत । इमने वा जरा
र विश्राम पिया नहीं दि कोई और युनान आ जाता उमा समय थोडा
बात पर महापरिनित पन्ना मन्ा कहती
मगर तुम अपनाजसंग हाणा
शिवमा बाबू रत अग्नि मर बजग रहन म कामवमचनगा'
गभी अगर परम गातार बठ रह तो तन लोगा वा क्या हाल
उरपा पति तो गसार है पुलिग है, यही
frTET बापू ना जान त 'जो बात गमता नही हा
उपर या मर पिया पर औरला की बुद्धिम पर पर दबा बाम
सिया
"गा निगुरा हागर पार ही पाय मव गरबा राम
पापीनी गरिमा बाबू गो जैस योगमाराम मिरा।
मति नरमी मारिग जमती यार बार चाय जाती
पाrt freी हा बार शान मगार मारी धान मुनी । धनी
गरम मनमाया पारीवारा दस म परमार दी बाम चल रही
श्रीमान र मार र धारर पूजागर गय पिर यहा । रामवायू
मिferrm Trयाम बापू पान मसर हागा पौत सिटी मसर होगा
गोमन सिउनसामानौना गम थी।
उग गमरमर मरीपूर है।मार साईगरी या दूसरे ही

इकाई, दहाई, मकडा २५ दिन वरासात म मीटिंग हावी। वहा म नौग्न ही फिर आमनमान। मन्ना को कभी-कभी डर भी लगना। इस तरह घर का अंधेरा छाड मस्जिद म दीया जलात पहा मुद का घवान ठप हा जाय । मन्दा पूटनी, इधर तुम कई दिनामे जॉपिन नहीं जा रहे हो, तुम्हारा आफ्मि कौन दख रहा है ?" शिवप्रसाद वायू मवान मजवाब दन, विजनम पहन दिदा पहले । देश देवनदाल ता पितन ही हैं । तुम्हार न दवन म कुछ जानवाना नहीं है।' शिवप्रमाद बाबू बहते, मैं क्या जानकर दखता है ? अगर नहा दयना हो तो शायद बच जाऊँ। लकिन पता है इस देश के लिए बिनने लागा न प्राण ग्यि है । हमारा नागा या कद और जेल में टी० बी० के शिका हो गय । खुदीराम और गापीराम माहा वा पानी हुई, यनानदाम जनगन पर मरे-अगर जान हमलोग न दमें ना उन लोगा का प्राण देनावता हो गया। आँखा १ मामन इधर उधर वे नामी लूट-पाट कर मजे दायें, यह ता और देश नहीं पाता, इमी मे तो माता हूँ। नहीं ता मरा वना है ? अपना बिजनेस करता र और आराम से वा-पी र पा रहे। मन्दा य माग बातें मुनती लक्नि उमम विरोध करन या माहम नगें पा। और उसरे विरोध करन पर निवप्रमा' वाचू मुननवाले ना मी नहीं हैं। शिवप्रसाद वागू हमा म अपना मर्जी के मुताविव चा है जाज भी चत रह हैं । आज मा क्मिी किती नि वचन नाते हैं कुछ पता नग चनता। बग्न वा ममय ही कहो मिलता है? बाहर के कमरे से अचानव पति रामटर आत दख मतावान रह गयी। 7 मन्दाने पूरा करा हा शिवप्रसाद वायू-वगैनाय वहाँ गया। 'वह ता तुम्हारा पूजा का इनाम कर रहा है। शिवप्रमा बार डीना परन-पान पान कट म गाडी निकालन लिए बहमाना है। नश स्नी गन में क्या हिरवा वाहर जाना है ?

इसाई दहाई
एव बार जाना ही होगा।
याई समग मीटिंग है?
मन्ना पार पाचनती रही। बीनाय भीमबर पावर मालिर
पाम नापा । बागा कुज ने गाडी बाहर कर ली है हुजूर ।
जाम करड बार शिवप्रमार वान पिर नीच उतर गये। उ
जाविमा र गाय यात परन की फुरगत रही है।
बनानाय नी जानवाना था। मटा न पूछा था। वहां जा रहे हैं
नाम पता है?
जानही।
पोई टेवापान जाया था?
पहनाना मातम मासि वो तो बाहर र कमरे म य बाबू के
यात वसगरमा रगहूँ।
ताम गमय अचानर बाहर जान पी क्या जरूरत आ पडी।
पभो या गान गाहान की आवाज आयो। बद्रीनाथ नाहर
मागा ति बाहर पढ़चने म पढ़ते ही गाटी पर दी थी। युज ग
मगर पगार म कुछ पता नही TIT। यावू कहाँ जाने हैं यहां नही
जान उगा कुपनी मासूम परना मुपित है। वश ही गुममुम है । दिन
गत गया नरह पाम पिय जाताहै। जगवरी जाता है सौरबर उगर
चार ममा वा नगरला । गरज परवाज पर रियोना गोनार र
Tऔर मगगा आवाजनपर सागरपिर आपरतााजरोपामी
THI || मIT पानगह नाज 'नागिना गशिप्रमाद थार्य
पापामबरहा।
पिम यार पारयामबाजार की गनीम गये। मालिका
गारता मारमा परने सगा। फिर आरगाहो म वठ
PTI मारिनो मन जाना होता है। मान बाहर और भी
frieो गरीधा पहा ािही दरसना होगा, पुष्टी
TITUTौर भीतिनाही गायि आपर ही होने लगीं।
गेर परदा नगा या बाहर भाप गाम बैठने बटन

शाई दगई, ममता । कुजन एवनीटर दवार इनिन चार वर पाामा वा मद चुप रज चुपचापाटी बनाता है। गरवा का कार दौलना शिवप्रमाबाबू कापसन्द नर्ग है । वानवारिन स्वापर ये मामन पहुंचन विमाद पा मोरे व दार कुन टक्मी नारा मर रिनार पर गाडी मार कर बाहर निकला। 'टक्सी चति बन हीना टसी मितीन ।। देर गनी है। इन्तजार Tना पड़ता है। FTERIदवाबू को पार राई उरी राम पामी आत ही मट म बट गप रिजी मार धूमार बोर गगना में सभी कानवानि परापर कान पर गाये मार बज चुपवार वटा ग्य गत वे नौ वन हय । दानव ममरी गुजार ६४३ महादयी । बनाता नमरये एर और नन युग आना। जिनी fr"हा जागाजानी हाद। पनामा गुगना का दावा मागे की जमएर दान गमलम नहीं मापी वह मानी नमें माली । अव बाइजाता है ना मदनद व नान पर मी जापिर मर मर वा छा जाना है और यधार। बग बहरहा है तागा मान राम्नी गता है। कुन पहा नर्गमाचता। मिमय याने आना । मन्नानी नग मान। दाना नग्न मय वाताम निरन बनाम बाद वर बाल अग्निाबाबूमोर माय मरममावना र मर-अ-मब अपना বল শাি সা ন ম শপ কি পাস পর रानी माचत नानि र मान ! rमा करोंमा ग्याला हाना नही चाहापा। नपान गनुना पा! मन मान की उस समयमयातनन बान मगन न रारामा पान जान या गारगमनमरहनामा निरनन मनायी।

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जा रहार,माडा २६ "आमिर कुछ कमानी, क्या हुआ माया क्या नहीं? नहा नुम पर्गम जाना । मुझे कुछ नहीं हुआ है। मारिनी बुद्ध नहीं ममम पायी । पचा, 'तव बनला क्या बात मदान न पहा तुमम पहना बजार है नुम नहीं समझागी। लेपिन कल भोगापा नरी आर नी नहीं पा रहा नुभे हुनाका " - तुम लाम ही क्या मुझे T-दवननान हा तुभ मय वा नही बतलान ' तू वह क्या रग है ?" 'मां मैं तुम्हार पावा पहता हूँ तुम यहाँ म जाना । मुझे जा र जबन रहना इस बार मन और बुद नही वहा । उदया वहा हो गया है उमरादा अपना इनाहा माना है। मगरन भी कम दिन नाम न जान कमा हा गया। अपन पिछत जीवन का एर-एर घटना या करन मत पत्र का चाला क्या मिला और क्या नहीं मिला। उमर वार मरिमा न माना नहीं माचा । उमा मन-बुर का कर रिमन मिर पाया है ? पिनामा परम तिनी दर में लिए दवा है। वह शाररिन रिजना और अपन दूर वामा म लग गया है। और मा । उस पर-गृहम्धी ग हो पुग्मत नहा है। मान्टर माहब वे मान व पाम पहुपत होदा गली में बना यत-गा गाहियो ग है । एक मर पिनामी की भी है। गाटी के अन्ना बज चुपचाप बटा पा। मगत तौर पहा धूमार द्वार राम्न में गती य अलर आया। आर मीर नहीं थी। मास्टर माहव व मान प मामन पचार मदान ने दरवाजा गरमटाया। मास्टर माग सन बार बापू न अमही का दरवाजा शाही है बटर आ जाओ। मात्र मारवारबmanो हो।

. इवाई दहाई सरहा . अभी उरा पर तुम्हारे वार म ही सोच रया था। भर वार म ही गार रहे थे बारवादन का हो माच रहा था पहल तो राज ही तुम्हार पर जाना था उम गमय तम्हार पिताजी की हालत प्तनी अच्छी नहीं थी, पनि दगा जब ना तुम लागा पी हानन वाफी अच्छी हा गया है---- गयी है न गावाम गम बानपा जवार नही पाया। क्वल बोला जा हुई ताहै। सरिन पो तुम लामा वीनार मिफ तो चार लागा की हासन अदा है दा की हालत ना अदी नहा हुई देवा व लाम लागा की हात नापाय परम भीगरानो गया है। बात गव हैन ? पगार यार अचाना या गा क्या पूर रहे हैं मनायत कुछ भा नहीं रामझ पाश। 'टे-ग नाम पर विधी दरी मला चिट्टा र तरिया उगादगग ऊपर अपनी जान पनि रह था सारे वमर म गर जमा थी पारासार पिनावें वापियामागज गिर पड। मशिनरी ना? गगन नपहा गव है। मैं मायीमार रहा था। मामथ न गवान ता टीव ही उगया। मामथसोना मग एक रिवार्षी। मैं उमहिला पढ़ाता हूँ। एगियर हिस्ट्री। पाहा आन पर गम मपन माता हिन्दी का यह सवाल पूछ लिया। मन भी मारा मामयन पासत वात तानगवही परवात ना मैन पहनना मानी था। तसी तुम ना या ध्यान आया। मायापालगाता गमागोगा जवाय मिल हा गया। PITRर या अनिता उट। वान रामभ समान बार निगामाकारितामा माप-गाए लिगाई- मामा पागा रवाना है मस्निर जगह उगरे परोंग दिया पामग्मगfrnापारम मिलोसही याम नामी सीमागीमाई रात नगा।

या दहाई,माडा सदानत रदार बाबू की बान गनी नहीं समझ पाया। तुम कुछ समन पा रहा या नहीं? सदानात न बहा 'मैं आपस एक और बात पद्धन वाया था।" लदिन तुम पहरे मेरी वात का उत्तर दा, सपन पिताजी की ही मिमाल ले सा। अब तो तुम लोग पागे बडे जादमी हो गप हो, तुम्हार पिताजी के मन म कोई दुसनरी है ' बाद कष्ट काई यात्रा मात न कहा, 'वह ता मुझे नहीं मालूम। 'सक्ति 'मानूम नहीं कह दन माता काम नगी चलगानाहारा काम पतन पर भी मरा ताना वलण। मुझे नहका का पहाना होता है मुझे तो उत्तर दना ही होगादोलिए में तमी म माच था यह मवाल सदावत सपूछना होगा। मतलब पापोरम मिनन म बादमीना कीडम गिरती है पानी' आर अगर मिलता है ता अपन इरिमा म निम मिली है ? कितना का मिली है । अभाव म घटारा पाना भाता एर नाह की पीडम ही है-चीर है न ? सात न वाच महीण इस विषय पर पिर रिदिन दान वगा।" "मुझे बतलानात हो, इन सनयन तार पिताजी कानन कितनी है শ্বাই বিনামী বা দীন স্বামী কালি ৰাৰ বিল के बाद उनर विजनम मगर पनी उन्नति वन हा गदीराम लागों ने माप मनमार है इमोजिन "नहीं, पिताजी तो रिमो पारी मार नहीं है । पिताना न निज नम 7पना समाया है।' "नेकिन उनकी इनमस्तिनी है? मान'मुझे माफ कीजिय माम्टा माय, मने एपनी मानन ना है। मर माता पिता मुझे कुछ नानी बलातमैं अपरा की ना हूँ अमल मैं उन लोग नावानगर यी वान बनगन में मार पाम आपापा। पसरस अाने पहन,' सरसनीहा,मान "ई दिनास अच्छी तरह मान पा रहा गा नहीं पाताम . ३ ३० झाई, दहाई सक्डा . मना आना पिगर पाग नाऊ विमा पाम जारर अपनी बात कहूं-- टीर नहा कर पा रहा था दमा आपर पास चला आया। अव चल शाप आर माय मरी यह मुजारात अन्तिम मुलाकात हो। अर गुना-सुना जा वो रह हो पिन मान तब तर सहा पर पहुंच चुरा था। इतनी जगहा के रहत यह मारपर गाय प पाग ही क्या आया अपने म माये इग भोला नाय स अपनी बात पर वह कौन मी सहानुभूति चाहता था जो मामा गर अपm भला-बुरा ना समभता, उस पर दूगरे की भलाई घराई वावान लवर या सटात बच पायेगा? चलते चलते जरा मायत प गिर पा योम भी बढ़ गया। पास-पास मशिनने लोग चन गर अमीर-गाटो रिवा ट्राम। समयन को लगा जमे व माना है उगा अपना का नहा है। गहम्यो की छोटा माटी बातें जग उगरी आगार गामन जापर वोपन लगा। उमर मरे म बिस्तर दीवार गमय पर पया नगवा जानी मात ममय उमग या नहा मा नातापि और बुध चाहिए या नी। गव वितन छोटी छोटी यागजिनरा भी मामाभी नगधा। रविन आज यही बानायडीपान गावाम माश्म विमी पर भी विश्वास नहीं सापा-370वायाप्रापीमा हैननग्निावार मब कुछ समझ ममा होनि मां-बार पर भगमा पर उगन स्तिनी ही वार हर frपाहे अपना पिर मारान पायापापी। यही भूग विश्यारा जगमात्र गात जावत पर बोभा पनवर था। रामाष्ण परमहग जागनमी निगा पर विराम नहा रा वम गात हस गगुना आया। बिनविवाग परोपापा रन से भरोग गर"ना राया। माया पिर ग अपन प्यान म मागूल होने जा रह पेशिअघाना Pाडा! आपापा बाभीमर्ग जाग गमप अभी माना ही गाऊँगा। गाना गान ना पना हा मार गरनुष गुन मिया हा सम

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इसाई हाई सक्डा
.
एर दान जया दरावर तो आआ तुम्हारे पिताजी घर म है या नहीं
उग गमय सात घाग था। पर अगर दम आन वे बाद बोला
नहा पिताजी तान हैं।
बार बार न पहा था विस समय घर पर रहते है ममझ म नहा
जाना बरी मुशिल हुई।
पिर मुधगावकर महा पब आन पर मिन मरगे?
गुबा व ममय।
तर सुरह ही आऊगा।
पगर मागमाह चन गर । दूमर दिन सुबह होत ही जा पहुंचे
पिताजा उग गमय बठनपान म बट थे। शिवप्रमार यानू मास्टर माहर व
परपान न पाय । लरिन इगसपाई पर नहीं हुआ।
जारको
मैंगराया मास्टर आपरे पहर सदायतका मास्टर कार
नाय गया पधपहना था।
क्या कहना चादन हा परियारपय बढ़ान हाग?
जा
गिरगा' वार काम आगमा याताय ना पूरी बात सुने बिना
ही धान लगिय मैं पपा गाधारण आरमी हूँ पानी या पमीना एडा तर
पगार या पावता। मैं अपना गामध्य के अनुसार आपनोद र
है। बग आपारा निना मिलता है।
पचाग।
पचागपगएर पगाश्याग देन पी तात मरी महा है।
अगर हाता तामैं सदना! मानाय माचन हागे-मैं बिजनम पग्ना
। समान गरीन बचना दनाना पगाई सपिन यासर म विउनम
पामार गनमा गमय हा ना मिलता।यल ही गिय न ऑपिग स माग
"नापुर पापा
मनीपुरमा मग्नीपुर म प आजान युध जमीन का
नीरा बायनर म । बाइ म वर्ग मर-मुष्प यर गगरे।

इशा गई महा
किन यह सब छानिय इमम स्याना दना मरी मामय्य व वाहर है।
कतार बाबू ने कहा 'मैं वहा वात कन ताजाया या आप मीतन
म्वाह कुछ कम कर दीजिय ।
कम" शिवमार या जमचों पहे। अच्छी नहन कर बाबू
का दबा । माघारण कपटे । मा पन यार । पराम पुरानी चपन । ओर
पर माटा च मा। डबल एम०ए हैं मुनकर नहर का पान वनिए रंग
निया। भले यागमा वाग्मिार तासराव नही हो गया ।
कम कर दीजिय मतलब
वगरवा न कहा 'आजकल बाजार की जा हारत है सररत हुए
पनाा पर तना मरो रवाना है-आप कुछ पर बम र दात्रिय।
चारा जार वाट वगरह मा रहा है। इन हाजन म रितना ही पनि गहम्या
चलाना मुरित हो रहा हशा गरतला वढी ताना म है।
शिवप्रसार वा जोर मुव हा उट । वाल वाप वाटिर न पहे करें
-
एना अजीव जामी शिवप्रमा' वाचू न अपनी पारी रिटाम नहा
रा। यह कया इस ताटी का नामी है रिन का बापू नहा।
वान, इन ममयम पाउ बटन का समय नहीं है । जग जोर पान
नाना है ना ही नहर बी०० पट रह है।
टपून बग्न र अलावा आप और क्या है।
देगर वार नका ममय ही नहा मिना औकामगा। मर
पारमा एक हाटपूरान है --दिन भर म घ डरारापगताम् ।
'तब ताजापाशीपारमातही।
मा तापमाता हीह
कुन मिनार पितन रपय हात है।
जापरत है पचाम और तीन नाम तारानीम पर मीम
गुजागहा जाता है।
विसा वाद न पिसाव गार वहा कतारएर मोचानाम
पर हुए और उन
"उन मोगा की बात बार दानिय व गला बदनीनरी

वालाई मरता
"
तर जाएगी गुजर बम हाती है।
यो । यात मर रहा था वा मुस्लिम गुजर होती है ~~-हिस्ट्री
मनाई गईमा मप आता है जब इमा तरह मुश्किल में गुजारा करना
होता है इरिनाममा तरट की सिंचएन ए यार १७७० म आयी थी।
गमय ना फिर भी गान ताप हो गयी है। १८६६ व अपान न समय
व भी नहा था सा नर मैं चतू कई काम हैं।
मगर के पार या जाती रहे मिशिवपमा वान रामा। पूछा,
आपर नौका ।
वात गुनगा कार या नमागे पर।
मर आपिसम नाग परेंग? मैं आपको दासोराय मगना
दूगा।
पर वायू एपम म बुध भी नही यह पाय । बुधदर उटवर बोल
मिर पर ममर रहा है। पय दशरन साता हूँ, नौरोबर
7
‘মুস ঘাট "মিয় ঘূেৰ দা লা নিনা ঃ ভাশ গ
पायेंगे प्रापनाओनर आमा यो हो मुम उरुरत है।
रिनारामा दागा
उन मागाया और यामा मज जायेगा।
मगर बार हम पर यात तर नारिया ! माममा सडेंट अन्य
गराव मागरम हाय पस्त होउना रियर चोपट हा जायगा---
मीना धागा'मा अनाया यह ता आप जानता हैं विदाकी
ifratam है । तिनाही म पाग पिलायेंगरीन वो भी पगा
11

इकाई दहाट, मरडा 7 . टटा हातानिए भागते भीगते जाकर पटा जाते। पटने के मिवाय मनाया जन कुछ जानता ही नहीं था। जान दतन गिना दाद जब अचानत दुनिया के माथ पहली मुलाकात हुई। पहनी दास्ती। उम पहला निबटा मही एक जार का धमालगा। मुम्ह हातही मा कमर में आयी । महारत न मिर उठावर एक बार दवा, फिर मुह फेर लिया। हो रमाका, क्लािममय जाया सदावन अचानक कोई जवाब नहीं द पाया। 'क्या रे, तुझे हुआ क्या हवन गारी भी नहीं ल गया । वान वना ह' वर कर रह कि तेरा गाडी पुरानी हो गयी ह एक नयी गाटा मगना होगी। गाडा क लिए गुम्ना हा ता गाडी चाहत ही ना नहीं मिल जाता | नाना एक माल पहा स नाम रबिटा कराकर रखना हाता है। फिर भी मदावत न कुछ नहीं कहा। नमा एमाएक निवप्रसाद वाब कमर म आप। 'अर या हुआ? पतरात इतना दर तर यहाँ थे ? पार-गना वचवार म पड गरहा क्या? मारत बना भी पिता सामन महन हारर बात नहीं कर पाता था। पिताजी के माप उमरा मम्पत्र दिनना है । दिन भर म उन माय मुलायान ही विन्ना दरवनिएहाती बचपन में ही उन घर म अरते दिनाना के बीच रिन कार हैं दाग्न नहा, भाई-बह्न नहीं। मुरल मन सक्नि जनमवाना मना था। शिवप्रमाद वा का क्या टनर , दह टोर नहीं कर पाया। "आज मर माप आपिस पाना । जर तुम्ह भी म मर-मन नामाग्गिा माविना वा मी मुनकर जग आ चपटना । बोला तुम क्या उम मोनापिम मवगगा निवारवार तुम चुप रहा हर बात म बोरता हो वह " में बछेगा पादनिकासा में टीमें एक

.
शाइतहाई माग
परगा याम मानना हा
गरपायर ाही र पिन जान कौन मावान या भावी
शिन बान और पट1 बार मैं आज म बज निहलगा तयार
।
मान, 'मरीवा क्याटमा तुमन तो कहा था मा
निता गाराग-पग लिा ही ना नाराज है।
गण 'नागवा मिर टठाया। मां का नार बर वाना
मैंन ना गाय दार म वद रहा मुम गाहा ना चाहिए । मेरा क्या
मिाग गगहा है
जिमा रावू मार या पार तयार अवाक गय। इा तर म
गामीनारनवरता थापा उन आँयाक मामाहा यह सहका
मानदार भी जग विपास नना हुआ । म लहर
गा7 जग मा पातमा है। जाज यह Tा वडा हा गया।
गात य पग पर महा मूरा गया है। इतना तम्बाला गया है । शिर
प्रगावारगमगवगा। उगन नपणा जगदगरा नगम

कर दाई, सरडा
३६
बाद म एक्दम में नमीन का भाव बढेगा, वर्गवटा"
शिवप्रसाद वान काफी हॉट लगायी। झारा-मा ऑफ्ति। अदर
पान वग्न पर मारे आफ्मि म सुनायी दना है। ममी चुपचाप मुनते रह ।
निम्नर ऑफ्मि म टाइपरायर की बटम जन काना का वहीबराव
पानी।
नदी बाबू न टाइपिम्ट वी और रणग पर कहा 'ए मिस्टर इतनी
गट-पट यया कर रह हो' मुनते नहीं, अदर कितना चिन्न-या मची
'चिल्ल-माहा रही है तो मैं क्या कर।
आफ, जग धीर वीर काम पग्यि न मुनानी नहीं द रहा।'
D
वा मुनने वापर कुर है भी नहीं। एपदम व्यापारिक वात। कतक्त्ता
पनामाठ-सत्तर मील के बीच की नारी दवार जमीन मम्ने नाव पर
गर यहां या दाम पर बचा पाती है। रपय वीर हिमाव
विगपर यहाँ हजार का दाम पिया जाता है। तन पर एक
गिन नो पता वहा होगा। और भी उडा) १९७५ पार्टीन य
पा- सनातना बढ जायगा, यह कमावादमा पाया था 'बोई भी
गाच पाया । माच पाप पेमिफ शिवप्रमाद वात।
शिव या कीटमी मन नाराबाउमीन सगेकर, पार
पायर गहा बनासर जगल बा र म वन निपा है। उन मर जगगें
का भाव आज एक हजार १ हजार पावरहा है। वर्गम पक्टिक
दन म चढ़ार आजार बता दे आपिमा य वा गरेला पम जगे
कान है। गरिन उनम ने बाई नहा जानना, जीवनानाम नमी दिननी
हो रहा-बाही नाग बिराममय दनगपाडा यानी आपमा हार
स पान चबान चान बनरत्ता आते है जराचेर आउनहार
और चचिन या परबग बग्नजद न विधााराप गापाको
र मापापन्नी ररत है उम मम मिाग मनही पानी पिउनरी
परलो घाईजान' और गहर म नारागवानी है। माग
नापान लिमही सरना रिमीनियापुर ताजा पाता। मगुप्त

Yo इवाई, दहाई सरडा सा का पता को दूरान व पौधे जिम समय रहूबाजार म सनि द्र Tभू आनिगम के लिए नया नाटव चुनन न लिए मीटिंग करते हैं वे भा ना जान पायेंग। बक गायू, अविनाश पातू अनिल वार- हिन्दुस्तान पार व पेंगन गइम का भी पता नग चनगा कि अदर ही अन्दर क्या पहयत्र चल रहा है क्या मताह हो रहा है क्या जालमाजी हा रना है। पपुर उन व कतार वार भी नहीं जान पावि ऐंगियेंट हिस्टीक पैजा मकब नाथूराम गाग्म न महाराज अगर कायून रिया और कर भगवान बुद्ध पाया करता है माला-त्म-नुग। रातारात क्लवत्ता वाल जाता है दुनिया बन जाता है । मानत भी वल जाता है । पिवमा यातून मारी दनिया का चिन्ला म पड हान हैं तर जचा ना पाा* किरातारात उनका गुट का नगा भी बदन गया है। मानत बगहा गया है। गायत मर मुन रहा था । सुरा रहा था और देख रहा था। बचपन ग ही वाया य काराबार की बातें गुन गया है। ओचा ग साज हा दावा। आगा मानस और हाय म वम लिय लाइन-वा साइन वतन बट हैं और प. उना भाया मालिक है। उग मा वया यहा एक दिन इन नागा या भाग्य विधाता बनकर बरना होगा ! मा आफ्मि प अदर जमीन व माय म पमा- वहानवान बरामीटर वीजार नजर रग सारी जिग। गुजारनागा लाग और प्राफिट । पाउड गिलिग पस पी लवर पुर! माना ग गात वा गिरधारा टूट गयी। शिवप्रसाद वागडे सग। गिमाई गाईप । माई किन । अभी में यह गय दान वा तुमग TIP यह भा नग रह रग कि तुम अभी गायटी पारित तुम जानाारा ग्गना जरूप है। अपन लिए तुम पारमा प्रामान पनाग, या तम्या पाठीर भग्ना हागा । मैं तुम्हार मार पभोपाम नगपरना चाहता। मगत पाचार गनुप मनना रहा।

धाई दहाई, मेरा - 'इतन दिन तक मन तुमा यह मर नहीं वहा । लरिन व धीर पीर यदी हाई हाती जा रही है। हमारे हिम्गे, बायापारी, महामान, गता गमायण सब-उछ फिर में निपने का समय आ गया है । आज मनग इडिया पीहा गया है, लकिन रतन दिना वाद यह माचन वा टाम आया है कि हम उ मावादी सापड है या नहीं। जोर लापर बनन निए हम सा-या करना चाहिए। जिम हा म पाहुना उमन नुन पर नहीं हुए। मन जा वगन नहीं दना, तुम वही दगार आज दा रह हा। यह और भी बदरगा। तुम नाग सादा उपभाग कर रहा, इसी के हम मामा की अपभा तुम लागावी निम्नदारी भी रपान है तुन माग ही ८ को मार वहानाग । स्कन-नित्र में जन दिन जापानिपाद का वह बहुत ही रम है, तुम नागा को अमला एन ता अव:ई है। यौरवाई भी प्रादर हान पर तुमको बनी म दिजनन या नोरगम लग देवा, नेविन मैं नहारा करियर सुगव नगे करना चाहता-तुम नाचा। गूर बच्चा दरह न माना कि तुम कौन-मा वरिपर पान्द करा तुम जा मध चाहोग में वहा दन को वापिस पाप का चिना न करना मगर इच्छा हो ना समरिया मग्न हा पू०१० जा मरना । टारिया पा चेम्ट चमनी उहाँ भी तुम्हारी इच्छा ना ना मोहा-मैं मच पन्न डाम पर दूगा। जारपल डालर का याग्निात है एक्सचेंज ट्रेवुन ता है हा, नैरिन तुमरा पार पता हा मिनिट्रीम मग पाम है। मुब टोर कर मदार म तुम्हें कुछ भी नहा माचना हा।। फिर अपना हाका मन मयादा बार 'चागता अपना ग इस मामने म माम मा होदिपोन कारख है । निमार वादून अचानर बात करना। अन्दा तुम्गार टयूग य, जान का नाम पाटनमा बदारनाप रा रीमेटनी टनरे माय मर्ग मुनागत हुई है। "क्यों 'नो गाय मुलाकात कम हई ' वगना मच्चा है वर्ग प्रनिस्ट । पद भी मानना ई विनिम्गाद बन्ट पॉनिती। आर भी मुझे यह पटना पार है। "मने आमीन एनिमर पाम पर अपना मम पर .

इवाई दहाई, सवडा वम पर देने का कहा । एकरम सिली, तुम्नी हो । मुनरर उस दिन मुझे गर हेगा आयी थी। वस मैं हमा नही था लेकिन उमी दिन समझ गया कि इम आमी मे जीवन म कुछ भी नहीं होगा। उसा समय जान गया, जामी पम्पलीटली फेल्यार है-उममे कुछ भी नहीं हागा"-इसके मा. कुछ देर म नितिप्रमा वारसे पिर पहने लग 'असन म तुम्हें यगर वाताना वार है तुम बनाइट क्वालीफाइड क्वाइट एजूकेटेड, य बातें तुम मुभम पारा अच्छी तरह से जानते हो यह मब ऑनेस्टी आज यजमाने नहा चरनी। यह 'गर्वान्बल ऑफ द फ्टेिस्ट का जमाना है। पर भी एर तरह की लडाई है । यह दुनिया ही लडाई का मदान है। हम लोग जो मांग-मदी गाते हैं करा पाते ह वापि युद जिता रहन के कि उमारना ही होगा। हिमा अहिंगा की बात नहीं है। इसी तरह हम माता का मासर कोई यचे रना चारता है तो उस नाप नहा लिया जा गरगा। उग यया गोपनिया जा सकता है ? तुम्हा बोलो। इसलिए हम "मला जपना आत्मरमा कति मनप रहना है। "म आत्मरक्षा के लिए मगीसभा टिग निम्न होता होगा। यह भी एक तरह का घम है। और पम-गरमा वान ना पाहिदू नास्त्राम है ही-"मी से यह रहा था frभा मी एम प योर है पहरी मुम भी उमरे प्रिमिपग पर ममत 7 परबगार हो जाने क्या नाम था उगा' ताणाप राय। 'हो माय गय वान छोड़ा। यह मब पहने व लिए ही आज तुम्हें यहाँ में पाया । आज गामा य मामले पर मीटिंग है मैं यही उनरूगा, मी माजरा पार म। बज तुम्ह पर पहचारर मुझे यहाँ स स जायगा।' पहार गारी ग उतर १४ । यो 'मुज, इधर फुटपाथ पर गारी पा गपार में उस समय अपार भीड़ जमा थी। चारा और बडे-बरे पार मग गे प। 'पोतुगीज गानानार गामा घोडा। 'गोमा समानापासा परोलियममा बापू मीटिंग की भीडम घुम गये। परगान करपा रान कहा, 'बज,भभी परमही जागा मुझे गगमार-म्दौर घोर दो।

साई, दहाई, राकडा "वहबाजार "हो, वहीं मेरिकन कॉटेज के मामन-मधुगुप्त लेन ।' गुज ने मिटती पुतले की तरह स्टियरिंग होल घुमा दिया। " मधुगुप्त लन पी गली के नुकाड पर बताने को दूरान के पीछे उस गमय गमागम बम छिटी हुई थी। क्लर के लिए यह राजमर्रा की यात है। जर सारे मम्बर आ जाते हैं मब आर्टिस्ट आ पहुँचत हैं तव गुरु होता है रिटमर । वम इस बार का ड्रामा नया है। काजीपद मारिरियर आदमी है। वामर-लॅरी आपिम में काम करता है। मवमे ज्याला जो उमी वा है । बगर बता रता है- हमेशा कल्चर-कल्चर करत हो, कल्चरका मनार ममनन हो? दमन पटा है ? वर्ना गॉ पाहै टनमिविलियम्म पा? आपर मितर पढा है मगुप्त नन काय के विमी मेम्बर ने यह मव नहीं पाया। वे लोग आफ्मि मे नौररी वग्न हैं, मिनमा डामा देगते हैं, उनकी पाच वादामे पगागिरि भादुरी और अहाद्र चौपरी ता है। डा०1० राय और भारो माद विद्याविनोद का नाम मुन रपा है। उम मव पर कभी मिर नहायपाया। उनो लिए पाई लियाई मान यंगला अपवार। हाँ, ता उमी कालीपद न ही एक सटम्ट टक्नीर का नाटर नित ना। 'मग मिट्टा , अयात पाविम्नान मे चने आप रिपडिया को पृष्ट- भूमि पर । नाटर हीरोदन प्रधान है। गुरु मे अन्न तर सराइन ही मय-बुध, दूसरे मारे रोन से डरी हानिानि पनी वार नाटर पग गया, बाला प को एण्टी पार्टी नाकामी कहना पडा---'न भाई, तुभम बाट है। माल्नेश डा महार हम लोग अब तर ना पहचान पाये। रमोनिगमरी मिट्टी का रिहमन शुरू हो गया है। चन्दा हुआ, अमा भी हो रहा है । मुसिन हुन हीरोइन को लररामह भी मिल गया। सासार रितनी ही मऽपिया को बुला-युगाार नाया-दान-गुनन मे गमोटार पीपोमती देमरी और पॉन्ग जूडे नानपरिमी वी उनका अगर परना मुशित है। लेग्नि दा-एप टिन रिहमन होन में बाद ही एनऐर निार आना। बाई टोरगे दिया उग्चारण नहीं कर इवाई, दहाई, सबडा पानी काई चदरिदु बोलने में गडवडा जानी।फांसी कहत वह्ते 'फामी पह जाता। आगिर कालीप ने सागे आ छाता कहता- दयता हूँ एक स्यूरत हीराइन के लिए ने सराब होगा-मर ड्रामा की थीम ही चौपट हा जायेगी। सारे मम्मर गय धार होगान का मोज म लग गये ।स्टार रगमहल और विसरूपा म जितने जम्पचार थियेटर हान सरगर हारोइन का पाज मोउन परनत। मिमी या मिनार Tभू कहना यह कमा रहेगी? तो प इसके अलावा पाच या गाभर पाट वडा स्टिफ है। इमा तरह काई-नाईकमा निरत हा आती । मिमी का लागर पाट पि है मिमी या यू एवम पट हाना तो किया या स्टेपिंग पर। जगाहाना पागा वगाम भा न मिलती। जिसका भी वनब मनाना पाप रिजवरना। जासिर जर मरा मिन्टी वा स्टज होना लग भग नागिन हा गया पुन्ली नाम वा लडी आयी। भत्त न कालोप पान र पान मुह ल जाकर धार म पूछा पार पमन है? पानाप' उग गमय पर पता को आर देश रहा था। वर पर मा-7 आर माय साया तापट एप पचायनरमाचता और बार-चारमामयारा ओरगना। पाय पानापूधा दाना पा रहे हा पातारा गया। यात यन्तार बोला, 'आपन पौन-कौन गदामामाभाग ग्यिारे। मापागपावन स्वणलता पाटा मवनर या पार किया है माणममिनिय जिगरी जगी मर्जी पायम अनाया पाट दिया है टारमारिमा आंगिक सिगान दाम म पानीटारा सन्यम बात मरती है?" पुायामासागर देती रग रग माने' गिरी पोर मार नहीं पड़ ป 7 देसाई, दहाई, वडा ४५ कालीपट न चाय की चुम्वी ना । गिरी पाप का नाम नहीं गुना, इन ला को सर ड्रामा करना भी एक आपा है। क्या वह समझ म नहीं आ रहा था। पास बरे गभू न धार में कना "दमी काल ले कालोपद, एमो फिगर जोर नहीं मिलगा-वडा मुक्ति मन्टा है। - अचानक अपना नाम मुनकर शमून मुटकर दवा । लकिन ठीर म पहवान ना पाया। कोट पट-टाई पहा ध्यान म चेहरा दबकर ही पहचान पाया। "जर मदाबत क्या हान है ? गनू न उठार सावन का दाना हापा मे जबड लिया। यहाँ लहरियो भी मा मवती हैं सदाप्रत न नहा माचा था। उरा सकार हुआ। क्लब के मारे मम्बर उसकी नार ताद र । मावत ने कहा 'तुममे एक काम या जरा बाहर आयगा? वडा जरग वाम है। वाहर क्या, यही वठ न, उस दिन यहा तक आपर बना गया, आज बटन जरा। कयर मदायत वाहाय मीचार उसे वठा लिया। मावत की वटने की जरा भी इन्ठा नहीं थी । लेरिन न बठना भी अच्छा नहीं लगता था। मदावत का रोमी अजीव जाबहवा मान का पहते सभी मोरा नहीं हुमा या । टीन को छत । दावार पर वरत-मी तमवीरें टॅगी थी। रामकृष्ण परमहम कापागा गिरी पाप की पोटा। और भी रिनना हा पोग प्रेम म मढी भूत रीयी। सिगरट का घुनो, चाय के रानीगन-गन । मभी मान की आर रह य । नाप इन साग मरिमा जम्री काम म बाधा पड़ी। मामन न पूछा, तुम लोग गायर योई काम कर रहे थे।" गनून पहा 'नर्गनहीं, तू बटावातीप- तू अपना काम कर। पानीप-शिरपूछन मII, "अच्छा आप मा मरती है ? गुन्नी न रहा, 'मन ता परत हा गनूवायू या बलारिया या रि मैं गाना नहा जाननी । अगर जानता होती तो स्टार म दाम मिल जाता, माप

इकाई, दहाई सवडा
मोगा व यहाँ नहा आ होता।'
साताप न वहा अर नहा, गान-पान की मुझे जरूरत रहा है।
यस हा पूछा अगर जानती तो मरी मिट्टी म एवाध गीत डालता पर
बाई बात नहीं है । नाच जानता है ?
मायन करम वठा-बठा बोर हा गया था। वम यह भी एक जगह
है। मागरमाहरम जाना दुनिया जम यहाँ पन्म भूठी पड जाती है।
एक आरम्ट्रिा और दूसरी आर रियलिज्म । यह रियलिस्म हो एक दिन
हिस्टाहा जायगा । तरबार वाव जस नाग उसा पर रिसच करेंगे। प्रोपे
सर माग मारी माग थीमिग विग। डाबरट लेंग। मारत न लडकी
अच्छा तर गर। तन मार लोगा ये वीच वहा एक लम्बी थी।
परीस्मिा नगर का गाव नहीं । चाय पावर एक पान मुह म रण लिया ।
गिपरम गाल पहले तर इम घटना या कल्पना ता नही की जा सकता
पा जितिनाज यह सत्य है-पाना स तरह सहज और मव । सडकी
कायाने काना नर ना आ रहा था। आग मुह चेहरा-कुछ भी टिग्य
सायो TIय था। दिन आज का मारी घरनाला ने जग उम पागल
बना पिया था । मुर दया अपना जमान की परीद फगन का आफ्गि,
पाम को हाजग पार का मामा अभियान माटिग, और उगा के बाद मधु
गुप्त नन पनर बहबाजार मगति सघ को यह यावन्वा राव कुछ जम
यहा यमन यमन गा लग रहा था । माग्न का पगा, सपनुछ जम छिन्न
निनादूगर ग बिनबुल अलग ! मग भी जग मल नहीं है !
गाना मूवी आर घूमार गगत न कहा, 'तुभग एक याम था
दामू जरा यार ल ।
गभू उठगमा आ।वाना, TR |'
.
परप बाहर पार गगन गगहा गया, भू भी आया । पूधा,
पमा कह रहा था। अपर।
गामा बनना गया, पद भी नहीं मग पाया।
पुमा वामगारोन है रा परन याया है।
ममूना दायन मरणहूँ। पना नना, बर पाएगा या नहीं।

इकाई, दहाई, सहा मदाबत न रहा, "क्तिन ही दिना म तरी बार 'जाऊँगाऊ माच रहा पा-मैं अव पायद ज्यादा दिन तात्ता नहीं रंगा । श्या करंगा वृद्ध तय नहीं कर पा रहा। वितायत धनाजा इम ममय बन जा सकता हूँ क्या ? सवार म राज ही ता दयता है, कितने ही साग जमना चीन बोर म्म म घूमन जा रहे हैं। गवय और माहिया नी जान है भापत ता सभी इग्नंट रिटन है ।' सेकिन मुझे वोन ल जायगा? हार-एक्मन ही नहीं मिलता, आजकल बडी मम्नी हो गयी है।' भू ने कहा, “इमरी तुझे क्या । तर पितानोता है उनो साय ना शिनने ही मिनिस्टरा की जान-पहचान है। "वह मब रह्न द । असन म मेरा एक बोर ही जान है-तरे पास में एप मर ही काम से आया हूँ। नरा वह दाम्न कहाँ है ? वही उनि पाला, जो बह रहा पा सनू ने कहा, "कौन सा कह रहा था तरे वार म? सदावत म स्वर. म बोता वमे मैंन उसकी बात पर कुछ ध्यान मही लिया है उम बात बनिए जरा भी वरीर नहीं है लकिन बात जब उठी है, तब जरर ही कहीं दुध हुना है। 'कौन-मौ वात ? मू कुछ भी समझ नहीं पातर मगत की बार एक्टव दयता रहा। सरावन नकहा 'यच्या, नमें बसा सगता है। तू नो पानी दिनों मे मुझे जानता है मर पिनाजी का भी दमा है पिन अमल म बात क्या है आज मैं पिताना ऑफ्रिममग्याया। साचा, यान चलारंग। नपिन रिमन पूछ, यही ठीक नहीं कर पाया। सेरिन सभी-कमी मारता ई-मादमीमा दिपार पसा उमरी वय पर ही हागा' बा-मीरा बय टगरी हेरिष्टिा :-क्या इतना हा मोरेंन्ट पस्टर हैरि मावना . 1. .

इकाई, दहाइ, सरडा 7 । लग्नि में कुछ भी नहीं समझ पा रहा। पिन यह आग्मी रही है जिमनी जगान मे पहनी वार सुगा कि मैं पन पिनाजी मा गिप्टेड मन है । मुझे गादरिया गया है । लेकिन मैं दता या कुछ भा ह 'तना जानन को तो मुझे भी अधियार है कि मैं किन फमिना वा 7-जमल म मर मां-बाप कौन हैं ? वे लाग वहां रहते हैं अभी ना जिगहैं या नहीं भू न इतना देर बाट मानन व चेरे की ओर अच्छी तरह म । आचय | पर समय मा सात म मुहल क सारे लडके जलते ये। आज इना दिशा यात भू यो नगा जम सगवत टूट चुका है । नगे गाला का क्या हुमा पग्निास गारी लार नहीं निकलना भाई। लगता है मेरा बुर मीन-सा चीन पर भा मरा राइट नही है । मैं लाइफ वी इम निया म जग दृमपागर हूँ। जर तू नागिन याता म पडा है । म तो, तू किनना वहा आदमी रज पटका र माय मुर का मुगावा करप दमन ' क्तिने ही मा पानिनी कमर मामा भी नहीं पाते, पान पहनने की बात मासा और गाय तझे नन्मासूम में जानना है यस, ट्राम और टमगाम जा मपेटमा टरिलिन की चाट और गरडिन ट्राउजर जगतम व रिनन पानाम है ? यही दप न गारे दिन आपिगम पाम परम प. पतव म ाार बटन हैं । आपिर क्यो हम मामा पगम जग पग पता है ? भाई-बहन लिमन पढ़ते हैं इसी से मग TITBघ गमय पाट जाते हैं। हम लोगा की तेर साय वरा घग । अगर तभै गर है तो क्या हम लागा को राइट है। असल म माम सागवड दगपामर हैं। परन पूमर 7 पर मन सगा। हमार गाय बुध और बनवाना था पाना ना पायीमध्यो पलर म निार ही पी। भू भौंचक * पारा निगमग पिप गनी पार पर मपुगुप्त लन की ओर गालीपी।ग जाार गामने सटा हो गया। पूछा 'यह षा, आप तो ।

सार, दहाई, सरहा
४६
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मारत ने भी दमा वही लहगी। कुन्नी ।
कुन्ती ने कहा, 'मिये, अभी तर आप लोगो का कुछ भी ठीक नहीं
है. पहल ठीपरिय फिर मुझे बुलाइयगा
वहार वह जान गीभूगे वान पर की। वाली, 'दमिय,
यापन कहा पा इमो म मैं आप लागावे यनत्र म आयी हूँ। नहीं ता मुझे
और भी काम है।"
'लक्निकानीपद बालोपट न हो ता 'मरी मिट्टी निमा है. काली
पदनलापमपया कहा
पुती न का, 'दसिर मैं नव-वस जानती है या नहीं जानती, मैंन
गिरं पाप का नाम सुना है या नहीं मुना इन वाना वा इम्तिहान दन
आपर यही नहीं आयी है। मुझे जो लोग पाट दते हैं व मझे दार ही
पाट त है मरी परीमा लेार पाट नही दने ।'
लविन रादर और क्यि न मैं बालीपर में पूछता हूँ।'
लेक्नि बुन्नी और नहा रुको जाा जात बह गयी, अब अगर मुझ्ने
साम रानाहातो पहने मर पर जारर पिचर रपयदे आइयगा तब
पाम बग्न आऊगी, बिना हाय म नगद रुपए आय अब कही भी नहीं
जाऊंगी।
बहार लहरी चनी गयो । उसे वापस लान के लिए समूवी मारी
वाशित सारी सुशामद मार गया।
तमू चुपनाप महा था। समयत ने कहा, 'वह यहाँ रहती है ? पा
पता है
पीनार देगत हुए गभू ने कहा, 'करगी क्या मुदल मुली
नार परली फिरनी है । दमा न आजवल पिनना घमण्ड हो गया है इन
सागाको। और कालीपद भी अजीब है, परना ता है अम्मपार डामा,
उगा लिए इसनी पूधवाघ ति बात को और जब हम लोग पिच
हतर रुपए में सादा दे नहीं पायगे तो इतनी जांच परताल भी गया
सनि देगन म तो ठीर हो है, शायद पाट टी रो नहा बर

५० वाई, दहाई, सवडा 7 पानी? 'अर यह वात नहा है वह एक्दम बर्नाड शॉ हो गया है-यही अपना पालीपत | हम लोग बाई नाट्य साहित्य की उन्नति के लिए तो डामा पर हा रह पर रह हैं जिसस एक रात चाप-बटलट खा पायें जरा मौज मजा करें, और क्या । मरे अलावा दो नाट-प्ल कर पान पर गवनमट म एवाध हजार रुपया वसूल कर लेंग। हो, तो मीलिए इतनी सुगामा करनी पड़ रही है। उन सागा कोपमा देना हागान गिफ रपय रपय भी देन हांगे ऊपर से खुशामद भी करनी होगी। गाटा सपा नर पहुंचाना भा होगा मा अलग 1 आजकल इन लोगा वी पूध निमाण्ड हैन । इसस ता भाई पहन अच्छा था, लडके गढी मछ माफ बरा सहगीवापाट परते थ सर इन सब बाता या छोड तू इन याता पर ठिमाग मन परामर। गाजत न पहा "मैं दिमाग नग सराव पर रहा, लेकिन मैं उम भागमा गएष धार पूरना चाहता हूँ नि उह सबर वहाँ म मिली" मरिन लाल-ल तानाज आय नहा है मैं पूछ रगा। सरिन मरा नाम मन सना । मैंने पूछा है यह न यह दना । मैं फिर आउमा। नगर बात सन है ता मुझे सव-बुध नय मिर स मोचना होगा बिनीयो भय ताजिग तरह देखा है अब उस तरह पाम नहीं चलगा। गभू न पीठ थपथपावर उमरी हिम्मत यड़ाया, 'अरे, तू पढ़ा लिया हैदरामय पाता पर इतना ध्यान क्या देता है ' तू हम नोगा की तरह मूग मानता है जहाँ ता मरा गयाल है दुलाला न मजार म कहा होगा। मा भूमागाप भाप मनाम था । उमन करा, 'ठीक है फिर frमानि आना मैं पूध रगूगा । अब जरा अदर जारर दे, आमिर एमापयामरा नारारहाररक्या पती गया' अण्डा !" पार मर गई पनी गा-जाणापट गुमसुम वठा है। सभा का पारा पाहमा है। गभूमपहा "क्या पापीर मया हमा' एन्ती साल इकाई, दहाइ, सरडा " १ पाला हाकर क्या चली गयी कानापद ने एक मिगरेट सुलगाया । वाला "ऊंह, उमम नहीं होगा मेरा सब्जेक्ट है रिफ्यूजी प्रावतम उमरे गले अभी तक वही मलॉडी लगी हुई है ' अर वादा, यह डा० एल. राय का 'च द्रगुप्त' तो है नही या मवाड-पतन भी नहीं है-वापती आवाज़ म एक्टिग करन का समय क्य का जा चुका है काई सवर हा नहीं रखता। इसन + आन स डामा की कर मस्निना बहा रिव्यालून हा गया है इसका भी विमी को पता नहीं है-और टेनमि विनियमन व बाद से अमरिकन डामा होलसेल चेंज हा गया है। वांगला दा मोई इस जानता भी नहा । उम ओरगक्तिपर वठा था। उसन रहा लेकिन हम लोग डामा अम्गवल म ता नाम पिता नहीं रह हैं । हम साग तो मजा करन लिए हा डामा कर रहे हैं। पातीपर गुम्मा हा गया। वाला, तव वही परा। मौज करव ही अगर दा की उन्नति करना चाहते हा क्ग, लकिन दावा, मुझे तव माफवरा। इमसे ही अगर बगाली जाति का नाम रोशन होता हा तो वही बरा पाई भी नहीं रागा । सरिन मैं वह दना हूँ एक दिन इन वगार म ही इन्मन, टनमि विनियम्म योर आपर मिलर पाहांगे। मरी यह 'मरा मिट्टा' ही एपनि वगानी कन्नर का गौरव होगी। फिर मू की बार हाय वगर वाला ला एक मिगरट निवाल, दम ताना-नगाता घर जा। 0 पज या यहाँ आन ही छोड दिया था। चलते-चलते सादत मपुतुप्न मनपार कर ट्राम रास्ते पर आगा।इम ओर पुटपाय पर चलना मुश्विन है। राम्न म ही बाजार सग गया है। एक बार यस म चटन की कोशिश यो। भूनन लवते तारा वर्ग-बडी हवन डेकर बम । ट्राम स जान पर एम्प्नना चेंज करना होगा। यार सान टार नहा कर पा राया। पापा पुटपापपर चलता रहा। मोघे एक्दम दमिण की आर अचाना एकमाती टी रोरवर मात बट हो रहा था। टक्माबात न पूछा रह जायेंगे -

इकाई दहाई, सरण
'बानागज
पनि दरवाजा सानार टक्मा म पठन ही एर गरबड हुई।
त्रिय य लोग मर पीद लगे हैं।'
गायत पाछपते हा भौनसा रह गया। वहा नडी कुन्ती । कुती
पो भी आश्चय हुआ। भू वा। काम इसी मामी को तो देवा
गौन' पाछे-पीछे कौन सा रहा है।
कुता न पाछ की तारणारा पर दिया । अंधेरे के कारण साफ निस
सायी पहारगया। फिर भागात उस जोर बटा। लेकिन भीड म
धनी पता नहीं चला । कुछ लोग मिफ महजनक लगे।
गायन ने पूछा बा?
पायर युन्ना भा गोज रही थी । योला 'यह है न ।"
सपिन र म उगन किम पिलाया, ठीक से समझ में नहीं आया।
गभी शागें । मीये गा आदमी । अपन अपने काम से जा रह थे । काई
भीजपगधा जमानीसगता था। यम-म-बम रिमी व चेहर से ता ऐमा
नहाना था। और मदरना भी ठीर नहीं पा । गाथ मन्ती भी थी।
गगन सोबर रयमा वोलार आया। पूछा तुम व जाजागी'
बुनी ने कहा आप अगर जरा छाडदत मुझे
नगमा हाम
आपविगार जायेंगे।
टगार गगहा थी । गगन कहा तुम बटा मुझे यात्री
गव जाना है। तुम जाना छोड दगा।
समापना पगी। मीप यसिागरापायरया ओर जार मोड पर
मी पुना पपचाप वही थी । गदायत न अगर पूछा 'डा सागा ने
परामा पिया ना
गागातकी आरगा।बोता याप भीता उमीपलबम
"
मारना यही frगारापरवानता भी नहीं। मू मे पोगा
पमपान गापा।

S मार, दहाई,माडा बुली न रहा, तब नुनिये, माप शायद नहीं जानत वहाँ फिर मत जाइयगा। " "क्या। "व मर वम्युनिस्ट है' कुन्नी न रहा। मावत को इममे पहले पायद इतना आश्चम कभी नहीं हुआ था। सम्युनिष्ट । उमन जगध्यान स लडकी का भार दमा जान यमासह माहान लगा। हर से ता वमी नहा लगती। अब मममम आया--- लोग पोछ नया लगा लकिन पुत्री ने गुद ही मपाई नी । मानी, शायद आपमाचन हांगे मैं यार म उन लागावा यदनाम कर रही हूं। शायद मोचते हांग मरा कोई सरार मतलब है लक्नि विश्वास परिय मैं किमी नी दन को नहीं हैं। मैं पाप्रम माप भी ना कम्युनिस्टा व माय भी नहीं हूँ। मिपम के लिए पेट पालन के लिए यह पा करना पड़ रहा है। मरी मानी हाठा को निप- चिर दसरायद नापकालगगानि मरी हालन मन्त्री है, लगिन मत्र मानिय मेर इम बगम मिप तान रुपय है । साया था इन सामान बुध एल्वाम मिलेगा, लक्नि बुध भी नहीं मिला। जपर ग मरी पाव लिगाई और बुद्धि पर टिकी पहा मय दगार मुझे गुम्मा मागमा मैं चलीआयी।" माग्न चुप ही रहा। मप ही ता नही न मिल स माती पहन रमा है या इननी दर वा पिसायीहाला पर का लिपस्टिक नी अब साफ-साफ नजर आन नगी । वन म सेंट लगाया है। आ रही एक और माड मात हा मावत ने पूछा, "तुम यहाँ जागा ?' लामान बुद्ध की जयार ना लिया। मरान मारत न दया- मायाकी भरी है। बीच-बीरम चटर पर सहर का रानी बार पहनी।लेरिन करा पर था परना और हा~मुप मा गमन मनहा मा रहा पानीमानी आविर गाया हा गावा है अमानर सरवी गाये हार वटा, यहीं। ARI 7 अचानर या हो गया याई दहाई, मरहा कुन्तीन कहा, 'अचानर नही आपोमैं जानती नहीं, पहचानती नहीं स तरह आपमे मव-कुछ कहना भी नहा चाहती थी। आपने ही मुझे गाडा म क्या बठाया' में चार डाकू या वरान लडकी भी तो हा सकती हूँ? आप मुझे परचानने तक नही हैं आपका ब्लर मेन भा तो कर सपती 7 हूँ नामल र सुनकर मदाग्रत वा और भी आश्चय हुआ। वोला, “ना मन पापे मारे जानता हो । टीर ठीर मान नहीं जानती, लक्नि स्तिन ही मुह मुना है मैं भी ना वगगमरता है आपने मुभ पर विश्वाम परवे गाडी म यया बठा निया। मायन न पग गाडी म बटन के लिए तुमने ही तो कहा था । लकिन मैं तो आप लिए अनजान हू । इस तरह अनजान लडपिया योगाराम बटारर मुश्किल में पड़ सकते हैं यह क्या नापतो मालूम ना. मगतहमपडा। माना जपनी फित्र में कर लगा तुम्ह चिता करने की जरुरत नहीं है। सुम्म जाना वर्ग है मुम बताना दा में पहुँग दगा।' सुना तर ता पाडा महत पुरी था। वोली, मैंन उन लोगा को पानि पहा है या मात्रिए आप माग हो गय हैं पागनि पम्युनिस्ट मान यया हाता है, तुम जानती हो" गुनी न मानना ओर नगा। पिर पूमा 'आप भी क्या कम्यु १ 'हा तुम सम्पतिम्गम पापी नाराज हा ' कम्युनिस्ग के माय मुम्हारा ना मस जोग कग वा। सुभान महा 'हम लोगापा मेर-जोल नहा है तो निमाहागा? पार हम अपना पान पारकर यही घरे बाप है ए कप में, गर-पुष गरम मोग जानवरकी तरह गाय-वरिया की तरह गुजर पर ही बार है .पा अपना देश है? यदी पाग और रोगनी, समरमर माग-पर मर मरा हमारा अपना है?

५५
7
.
इसाईहाई, माहा
"तुम नागा वा नहीं है ता विमरा है। यह दा तुम सोगावाही
ना है और रिमा है
"अमीरों का साग वमा हम लामा र बार म मापने हैं हम
याग वा सान हैं, जिस तरह डिन्त है वाई परवाह करता है वैसा
क्या परवाह बनो। म लार मरें या निमें उन लागा का क्या
जाता है "
मुनार मयत को जम हमी आन लगी। थोडा मला भी लगा।
मदात न पूछा, "यर सब तुम्हें रिमन भियनामा पम्पनिम्ना
पुती न वा 'निनायगा कौन हम गा का आसें नहा है'
हम लाया बमबार नहा परत' हम लाग गरीव, मलिए क्या हमारे
frमाग नहा है? साता आप नाज सात मारा गय। त्रिम ममर आयो
पार परनना यो अव माहा पहनती हूँ। बनबुधदा-सुना है, तब भी
का कहना चाहता है रिदूमर र धे पर रमरर बन्दूर चला रही है
टक्सी ड्राइवर एप मरतार या माटव पास यावर अचानर एस
7
'रिधर जाना है मा "
पावर पा उगह बतलातर मन न पुन्नी व पूत्रा, 'तुम कहाँ
कुलीन रण, 'वानीगन म दना मा तक बाहर है।'
'यह ठार है रिर मी जगह का दुधनाम ता होगा?"
गमन नाजिय पुग्पाप पर।
'मरिन मैं आपाई यीमा मात्र रिया? मग मूरत दगार?
दुतान मग, यह ता मानुम नहीं। और आप ममीर मारमी हैं मा
प्रगब यह जानन का भी मुझे राई उरत नहीं है। उन नागारिस
निरनन र गमन वहा गराब हो गया पा इनी से गुम्ने में बहुत-तप
पहनी। आप सुगन मानियेगा।
घरता दोनों ही पुर। पिर मान न हो पहने दिया।

क इकाई दहाई, मेवडा कुन्नीन कहा, 'अचाना नही, आपको मैं जानती नहीं, पहचानती नही दम पर आपमे सर-कुछ कहना भी नहीं चाहता थी। आपन ही मुझे गाहामा काया' में चोर, डार या सराब लदका भी तो हो सकता हूँ ' याप मुझे पहचानने तक नहीं हैं, आपको लकमेल भी तो कर सकती 7 समल ग सुनकर मानत को और भी आश्चय हुआ। वोला मामला मान जानती हो। 'टी मान नहा जानती, लक्नि कितने ही मुर सुना है में भी वहा हा सरमा १ आपने मुझ पर विश्वास परवे गाडी म क्या पठा निया, मगवान का गाटी म बटन निए तुमने ही तो कहा था । सरिन मैं तो नापा नि अनजान ह । इस तरह अनजान लडकिया सा गार। म बार मुश्विन म पड सरते हैं यह क्या आपसे मालूम ना माप्रत गपग। चाता अपना पित्र कर गा तुम्ह चिना करन की जरूरा नहीं । म जाना नहीं है मुम बाना दा में पहुंचा दगा। पुना नर ता पारा गाहा धुरी था । वानी मैंने उन लोगाको पम्युनिस्ट है क्या सानिा आप नाराज हो गय हैं नागरिन यम्युनिष्ट मान क्या होता है तुम जानती हो नुनीन गापा बार तपा। फिर पूछा, "आप भी क्या रम्य ? ' तुम कम्पम्गिम पापी शायज हा । वम्युनिस्ट साय गुहागामना मत मारग वड़ा। गुन्तान पहा 'हम मोगों का मल-जोर नाग है तारिगरा होगा? पामा धान होररयही पायाप हैं पर पहेम, सब-नुष पहा मग जानवरों की तर गाप-यररिया मी तरह गुजर गोमाय है या पया अपना देश' पहा चारा और रोगनी, पमर-मर पारपर गरमरा हमाग अपना है'

पाई, न्हाई, सरडा
"तुम सोगा वा नही है ता किमका है। यह दश तुम लोगा काही
ता है । और रिमरा है।"
'अमीरोंका व साग क्या हम लागा व वार म साचते हैं हम
माग या सात रिम तरह जिना है वाई परवाह करता है | वना
वचा परवाह वग्न नग। हम लाज मरें या जियें, उन लागा का पा
गता है
मुनार मनात वो जमे हमी आन लगी। याडा मजा भी लगा।
मान न पूछा, 'यह सब तुम्हें रिसन मियनाया ? कम्पनिस्ता
.
कुन्ना न कहा, मिनायगा यौन हम नागा व वया में नहा है?
म नाग क्या अगवार नहीं पत' हम लाग गरीव हैं दनलिए क्या हमारे
"माग नहीं है । पसरता आर आज मान मान हा गय । जिम ममय आयो
पर पहनती थी अब मारी पहनती हैं । वल कुछ दवा-मुना है तव भी
करना चाह्न हैं कि दूमर व रघे पर सार बन्दूक चला रही हूँ
राहा वर एक मरतारपा मापाम सारर अचाननस
.
विपर जाना है व
पावर का जगह बतलारर मावत न पुन्नी म पूछा, 'तुम रही
एनोन का बाजागर म रहना मर इतर वाहर है।
वह टार है फिर भी जगह का बुदनाम ता हागा
मन मातिय फुटपाथ पर।
पिन में बागमाई यगरम मोच लिया? मगे मूरत दगार'
7
नरम 'वह ता मानम नहीं । और आर अमीर आर्मी हैं या
जानाबाना मुझ कोई उम्रत नहा है। उन सागार व म
-बागमन बहा सुगर हा गया पा मा में गुम बहन-नुष
भाप नुरा न मानिसगा।
र तर दोनों ही धुप रहे। पिर मत न हा पहना दिया।

६ इवाई, दहाइ सवडा ? हा, अभी तुम्हारी उग्र कम है, लेपिन एवं वात याद रसना-आदमी रास्प ही सर-बुध नहीं है। मुग दुस खुशी रज यह सव गरीय- मीर की परवाह नहा करत। मैं जिगा म विनन हो गगेन आदमिया मिराह और वितन हो रश्मा मा भी जानता हू, पर मिफ बाहर पाया भातर दाना ही एक हैं। अगर आप मरा हारत जानत होने ता यह बात नहा रहते। फिर वाव मारत को बार दायर बाली जानत हैं बिना माये रहा यया चाज हाता है ? जानत हैं फार वरना रिस रहते हैं ? और frग बहन हैं पानी पर पान गारर पट भर हात का बहाना करना बार जरा र चुप रहा फिर अचानर बोला अच्छा नमस्त, हाजरा पाय आ गया है टमोरारनाम्य । तभार आवाज गुनार दाना चौर पड़े। पाक म लग लाउनस्तावर गभापण भाजावाज आ रहा था। जाग पीद हर तरपनीर थी। जहर गाम पर गद यता लवचरर रहे थे---और हजारा लाग मुग्य पर मारा। यामा यह पिनांमार याट राज्ञ सुबह ठीक पाँच बज घूमन आप। मापन उमग्नि एकाएर मवर आयी पामरा जनता व हाथा अमिहागन बार यहां या राजाबरीगया। गबर आयी वैटिन पाहा गया। प्राग यो गग्याक्ति में दम पता न मारी दुनिया में गरव मराटी। हिटगा म गिफ हमी नि उह घूमा जान में दर हुई। पर गय पारिज हजनिटन इग निद्वार का स्वागा रिया । सभान मार frarir गन गगरा म म अतान र गाय जा रिट दाया वह वियप मिस मगराया। भारत म आज हम प्रजापति यग द्वारा शापित गमार-व्ययम्या नही पाहायलापण रनि ममाज-वा-माग मार है। आपम परमर माता रान पिलाय और मामी वासून चूम, महम अगिा मानन पारामारग पगार सानिया पिन नगा। मनाने रिमबारना र पिया जाग गाजा है हमारी मारा मसीका मानिलिम यू ही है। सरिन इमी में इकाई, दहाइ, मकहा ७ एक हिम्से म माज भी पुगीज कॉलोनी का जहरी पोहा रह गया है। वैम बाज यह बहुत ही छोटा और मामूम लगता है लेकिन मैं वह दना हूँ, एक दिन यह उहा पाहा हा जानलेवा हा जायगा। आज हम गोजा की वान पर रह हैं। भारत सरकार ने मुक्त करन का भार यगर अपन पर नहीं लना चाहती ता मार ऊपर छाड द। हम मान्नि चाहत हैं, और क्रान्ति का क्या मूल्य दना होता है वह भी जानते हैं। इमी प्रालि व सनिका के " लिए दम गाडी अभी भी भीड वाटनी चल रही थी। बुन्ती 7 एकाएक मृह ग्वाला। कहा, 'दा, य लाग भी कम्युनिस्ट 'किरान कहा, कम्युनिस्ट हैं " "मुझे मालूम है मैं सदका जानती है।" तुम उन्हें कम जानती हो?" पुन्ता फिर मे हमा। वाली, ' मैं मार करों म जो जाता है। मग पया ही ता नाटक करना है । मोचन हाादारी औरता की तरह मैं मा रमोईघर में दाल भान पवाती है और मनुवार पटती हैं? आप भी जा नहीं जानत मैं जानता हूँ, आपम बहुत ज्यादा जानती हूँ। इसी म ताकद रही थी। मदाप्रत बाना, 'जानता हा वह कौन हैं ? वरीजा भाषण दे रहे हैं । वह है मेर पिना। मैं शिवप्रसाद गुप्त का नहवा हूँ। मामने माप तयार भी शायद लाग इतना नही हग्न । अंपरेम मग यत टीर म दा नहीं पाया सैक्नि नाम मनन हा ती डर मेरि गी। हाजरा पार मे वायू शिवप्रमा' गुप्त अभी मा वाल जा - 'गोना हमाग है हमाग मानभूमि का अभिन बग है। यही अभिन्नग बाज दूगरे के पज म है। दा छुडाना गैहा। उम्मत हान परनिना करनी होगी। मन, मस और स्या निष्ठा आर हमारे जावन म ना है परितकी बुनियाद मगर नहीं बना पाते है ताप दार पिर जग-गी जिदिति राव यह गामा ही मारे भाग्न बोहामवर जायगा पर

इकाड, दहाह, सवडा
चनावना दिय दता हूँ
--
दुनिया म बटन-युछ होता है जो नजर नहा आता। या नजर आने
पर मा उगरा मरत्व समझ मनहा जाता । १६४७ के याद से शहर म
माधम रता था। वात न चीत वाई-योई आदमी एकाएक बड़ा आदमी
ना गया और दूगग शिक्षा बुद्धि और क्षमता व होते हुए भी धीरे धीरे
नाच मी जोर जान नगा । या व दूमगंधेणाकाई सहारा न पाने के कारण
बीम वा पीनय म डबा था। दूगरी आर अखबार की कोई वढी-सी खबर
यो। तर म तिर लागा यो चौरा नाम स्टालिन की मृत्यु हो गयी
या ग न स्पूननिर सोडा। गुबह मुबह जा लोग बम टॉम में झूलते
भूनन माफिम जान 4 माय म अपवार लार चलत। समय मिलने पर
बनी पावभी यही चमर-मर वा वाई फिल्म आने पर मिनमा
पगरमामन जारर साइन लगात । T आजाद है, जब क्या चिन्ता ।
पट्रोनगम हा गया अच्छा रहा।मामट चीनी कपा–गभी चीजावे
दाम या गप । टीर है बडे वगर जिम गिर पपाना है रापाये। 'यह
भाजा भग १ -पार विल्यानवान चिल्लायें। मोनूमट के नीचे
मांउगाकर पर गरमागरम भाषण हैं। हम लोगा म वह गव नहीं होगा,
जम्माना । हम साग मेगा गान पीत गते गाते हैं अब भी वही
परेंग। बग्निपार निजीम गमय ग पन की बिटिश हुकूमन तप यही
frया आज भावही करगाहा गोगनपा ममों महीपसान है जनाब!
या गय माचा वा गमय हमार पाग पद है?
गतिनगर यायू पहा माच रह थे। उह लग्या को पढ़ाना होता
है।यगय याा भी मिली है। मामय न ध्यान ग्लिा शिया, अच्छा
गा।
मामय मातमोपी पर सो रहे थे। रास्न म वही भौर थी।
मवार-मा frnनिय मन ही मन मारा आ ग्ह ५। 'यार' ये घाट
rr नपा पुग्नरनिरागार पगिरिसाइनान-यह पुस्तक
पाणी ।भाभीभीतिनापाया है। वगरवा पसते-पसा
reral "म नारिपन र राता हुई।परिवोल्यूशन

इकाइ, दहाइ, मवडा जमी घटना का एक्दम मे उलट दिया । माचते-माचन क्व घर क पाग आ गये,ध्यान ही नी ग्गा दरवाजा बटपरातनवटपटात नावाज़ दी, " | ओगर ।' अन्दर म दग्वाजा मानकर किसी ने पूछा, विम चाहत है ? बार बाबू मक्परा गया दिम चाहते हैं--मनला? अपन पर आने म भी मुक्ति पदार वावू ने पूछा "आप कौन हैं ?" उन्होंने भी पूछा, आप कौन ?' अरे, क्या अपन पर म भी नही घुमन देंगे। तभी शायर सदर नजर परी । मब-बुद्ध नया-नपा-मा लगा । माचन पर कुछ अजीव-गा लगा । क्या नून म मरे रे घर घुम आये बीम माल में इस पर म रह रह हैं, फिर भी यह गलती र वठे । चाग और दगार धान, "रिय, मन गाय गुलती की है।' घर के मालिक जग मुमरराये। फिर पूछा जाप शायद इस माल्ले म तय है ? 7 बेतार वादून पहा, या क्या हान लगा इम पडेपुरर म्गेट में गल मुझे वोम मात्र हा गय हैं। 'यह फरपुर स्टीर ता नहीं है यह ता मोहनबागान रा है।' अजीर तमाशा है' नेतार वाव न पहा, 'युरा न मानियेगा, जरा गालमाहा गया। सहारमहर पर आ गये। इस बार भून वगवा चाम नहीं आया। अपन पर वे ठीर मामन पहुंचन ही हरिचरन गाव न पहा, "अर मार मान्य पगार वायू रिहा, कौन हरिचग्न बावू 'आज ता गजव हो गया मैं गली ग आज माह्नबागान रा पहुंच गया बसे आज मुझे वर्ग रहने - बीग मान हरचरन बाबू न बीच म ही रोगिया । वान "आपमे पर यात पहन में निरा नई नि मे चारपाट रहा है। आप तामिगत ही नहीं। पाशेअरमे पहले मैंने आपस महा था, तायदा होगा।

इकाई, दहाई, सरडा
बार बाबू- हाँ हाँ याद क्या नहीं होगा।'
आपन कहा था, मवान साला कर देंगे।
बटार बानून हामी भगे हो, कहा तो था।'
'और यह भी कहा था वि दो एव महीने म ही छोड़ देंग। मा आज
परीर एक माल हो आया लेकिन नर और राह देखना तो मेरे लिए
मुग्नि है। आपिर मैं भी तो साधारण जाटमी हूँ जरा मेरी भी तो
माचिय । रिनना मुरिल से गुजर वर रहा है वह मैं ही जानता हूँ।
बार या ने कहा आप बिलकुल ठीक कहते हैं । जमा समय जाया
है गुजर परना पहा हा मुगिन हा गया है। मैं एक लव का पढ़ाता हूँ,
उसका नाम है यमन । लरका खूब ही अच्छा है मिलियट बाय । पना है,
उमरे पिता आज वह रिया--समय वटा सराब है मेरी छ महाने की
ननग्यान नहीं पायेंग।
हरिचरन वा यात्र
वह सब सुनकर तो मरा कोई लाभ होगा
ना आप पर परमाता कर रहे हैं यहा बताइये-एक डेफिनट डेट
बनना नीजियर और नामपाऊगा।
दक्निर इट
पर बापू मान लगा फिरवार जरूर, कोई डेफिनेट टट ता देना
हानिए । आपा। काफी तकलीप हो रही है समभ रहा हूँ। सेरिन में
परम भूल गया था पर्जी माह एक्टम भूल गया था । यई ग्निा म
र औरहीमा गोच रहा था। हिन्दी म एम समय आता है जर
मी गरम पासपरमिटा इमी तरह गरार लिआन हैं। एक बार
एगा। ममप आपा था गदरीन पिपरी राधाम। पर इस युद्ध के वार
आप गामन र म मान्नि आया है' मारती वात-टमियन, जमनी
सपना गया इटिया मार्गगन हो गया, योरिया में पार्टीशन हो
१
रिपराया । बीप मा या 'ये गय बातें मैंन पहल भी
मिनाही कार मनी । अब था? मगवानी कर मरा मानमानीवर
र बाद न " मगामी परगारमहानि माया

वाद, ', गाडा
मरसन नहा पाडगा
"दिनकर घाही, यह भी तो बतलाइय? मुझे इसी महीन के
अदर मरान चाहिए।
पेटार वा चार 'माली कर दूगा। वह ना रहा हूँ इसी महीने
-
.
अन्दर मै एकाएर गल की आवाज गायो। वेदार वा न एर बार
अदर का आर दया। बोल, तपन हैं मगे भतीनी न मरी मावाज मन
मी भारा री, जग चटर्जी मार के माय एक वात करण
'कारा, तुम उरा जन्दर तो आत्रा~-ए वाम है।'
केदार वापून उन्दर जाकर पूछा, 'क्या री क्या हुना
अच्छा, तुम क्या हातुमन क्यामाचर इमो महीने के अदरमरान
ग्राली पर तन का वह पिया है। यह पर छाहार वजाआगे ? कहाँ
मिलेगा पर मलकत्ता म मवान मिलना या प्तना ही सामान है "
लेकिन उम वनो तानीफ हो रही है। मने गायदा वर दिया है।
तुमन वापदा वा लिया? इमीलिए ना मन तुम्ह बुलाया।
जात्रा, उमग जापर कहा कि व मान भिनगा नब जाएंगे।
यह पोहा कता है। मैंन उमग वाया जा कर लिया है।
लग्नि पया वापराही मव-गुध है मकान छोडवरहम माग जाएंगे
जोगिए युध-न-बुध तो हाही पता है आउभवानीपुर हार
आ रहा या गुना पय मोरिंग-याटिंगहा गरी है।
दिम बात की मीटिंग
'और ाि गाना वीइिन लोगा का अरल सादय, इंडिया म
बार भी जमे हैं । मभी घने गय, निति गर, श्च गर पुतगी। अभी
अमेगहना गाल---यह तोटर
वाहातातीक
हो रहा है या नर्गगमती जिस तरह हम सागा ये गाण धारने
गारय पाहा रही है। हम कम जमार वटे हैं।'
म और नहा गर पापा बोला, 'तुम वाता! गोमा पिए या

-२ २११०३१ । 1 रहा है, यह जानार मुझे क्या करना है ? तुम जाकर चाटुज्जे साहब म - आधारिहम लोगो को जब मकान मिलगा तभी जाएंगे।' पिन मैंने तो यह लिया है। तुम्हार का का वीमन नहा है । जाओ, जल्दी से यह आओ।' देशार पार न कहा जाऊँ? 'जम जापाग, तुम ता मार दिन बाहर रहत हो, और मैं यहां कितनी मुरिल गे गमय कानी है तुम क्या पता ' मवान छाडकर अब अगर आप पर पड हाना पर ता वया वगग एप महान व अदर तुम्हे नहीं मशामिनमा जाओ। पगार वायू बाहर आये । रिचग्न अव यहीं नहीं थे । तव तवं चने पथे। नग, जरा आग वरपर दस जाना, अभीभा पायत ज्यादा दूर पी गया। तुम जारर व याना मि जर मान मिलेगा तभी जागे इगम परत जाना मम्भन नगहागा। फिर हम लोग पिना भाडा पिता पहना रह । हा मारािया नो ठार म द रह है।' मगर वायू उमा हारत म पिर ग गय पर आय । परेपुपुर स्ट्राट पर भी अनगिाला साग । यतार या गावन लगे-~~~ा ही ता वाफा निराजन मगान गाला लिया गया। उस परवी जास्त है।गरि उमाईमगर वात ता नाया। फिरभा अगर एक महीन म पर न गिन तर चाटामाहा । चाटुग्न गाहा ! मामन हा हरिपग्न बार पा र थ। उसी पाई मुडकर दया। मग बापू ने पापा चादर मार विवा। नारायगय गाईलोर था) अनजान आगमा भा भरपरा मगर माय नम मैं गरम पहा नहा पाया, मैंन गागा रिपराया-मा युध गानिएगा I दाम-माया गार गार वार मोरयामा मामिव महान पासामा माग कायरायर रिगया सन आता गर या वा पुगन गिगायोग महाना किराया दाह। तान पमर। मार मगा। नरिनना यार रामरम्मतवगायनिए कहा इकाई, दहाई, संबडा " है। बभी मफेदी भी नहीं कराता मरम्मत की बात कहते हो पर छोड़ दन का वहता है। क्या किया जाय । वमे उसे तकलीफ़ तो जरूर हो रही है। हम भी ता पुतगोड लोगा म गाना याह देने को कहत है। नौट ही रह थे। एकाएक दाहिनी ओर से कुच गानमात मुनाई दिया। पेदार वायू ने चश्मा ठीव कर लिया। वहा लम्बा प्रॉमान ना रहा था। अव फिर रिम वात का प्रमिान ? गली व आम-पाम जो इधर-उघर जा आ रहे थे धमकर पडे हा गय । "क्या हुआ जनाब ' विम बात का प्रमिशन?" केदार बानून मुडवर पास के आदमी की आर दया, "कौन आया है ? थोडी दूर म आवाजें आ रही थी 'हमारी मांगें पूरी करो।" 'नही तो गद्दी छोडदा। "ये लोग मौन हैं ? क्या कह रहे है "अत्याचारिया को मजा दो--मजादी। कोई नरी समझ पारहा या य लोग कौन हैं। देखते-दावन जुलूम काफी पास आ गया । वेगार दावू दरन लगे -जुनूस की लाइा व सिरे पर व पार पडेपर न जान क्या-क्या लिया था। 'बगालिया वो आयें अभी भी नहा मुली हैं। हाय रे वगानी जान "क्या हुआ जनाय ? किस बात का प्रॉमान है?" एक ने कहा, 'मुना नहीं नहींजी स्ववायर म गाती चली है देह सो घेवगूर पुलिम की गाली के शिकार हो गय । पिर भी "नया पिया था उन्होंने ?' "परले क्या, मि, जुलूम नंबर विधानराम मे मुलाकात करना चाग्न थे अपना अधिकार मांगना चाहन पे-पही उनका इमूर था। दप आइप रास्ता सून से भर गया है। जो लोग मुन रह ये ममी बह्न लग, "क्या ? क्या? नित्य नोगा पर यह मत्यागार क्या "पही ता है जनाब हामी राग्य इमोसिएगीराम और गोषण नाम माहा पामो ये तन पर भूले | इसमे ता प्रिदिप राग्य यही अम्हा . m इकाई, दहाई, कहा था। पमरा-बम विटेगा रा य है, यह तो मालूम था। आज के ये लोग तो वा बल पाच मिटिगा की गोली साकर हमने आजादी हासिल की और य नाग मज से मार मोटा तनस्वाह् टवार रहे हैं।' उलूम गामन में गुजर रहा था। दहाती किमान परिवार की औरता पापड । पनग लिए जागे आगे व ही चल रही थी और पीछे थे लाइन या-लाइन लादमी । नग पांव पर कपडे पियरे गाल धमी आंखें । बेकसूर मूग । ममा क चहर उत्तरित : जुलूस क दाना बोर थाटो थोडा दूरी पर धनीप्टर म लाग थे। वही चिल्ला रह य अत्याचारिया को मजादा! और गभी गा पाहवर चिल्लाते । 1 - पिर आवाज या नकर रहने "मारा मांगें माननी हागा गर जोर म पहा हमारी मांगें मानना हागी उमी आज म साटर चिल्लाने रहा नागरी घोडा मीहभागिताती ना तो गदी पार भाग पाग व सागा म भी पुगपुमाह शुरू हो गयी। यह गरकार अपामारी है दगका पतन जारी है। विधानराय यया इसके बार भी पाप गरी मागस बट रहा। और हा साग गड़ेगडे यह मब सहगे पिपरयममा जानिए। गुनने गुण नाग नागर लागावाटगगन जमे एक सदे में गोतो 2 गगा। पा 'आप मागान पीताarrrrram HTM

वाई, दहाई, मा
देर बाद यह यह नुपचाप देख रहे थे और सुन रहे थे। हरिचरन
वायो ददन जा निका, अब वह वान ध्यान में उतर चुकी थी। उह यह
भी ध्यान नहीं रहा कि उन्होंने मान मालिक मेवाई वायदा किया है या
एर महीन व अन्दर उहें घर छोडना होगा। उनरे मन में बार-बार एक
ही वान आ रही थी। वे लाग सचमुच दुग्गी हैं। उन पर गवनमटप
यत्यामागवा अन्न नहीं है । तब क्या हो' लढवे पाई यमे नरेंगे?
वान्न पिता न मेहगाई के कारण यापीछ महीन की तनम्बाह नहीं दी।
ममय न ता टोर ही नहा । ममार म बहुत-युध हाता है जादिनलामी नग
दना ।गी म म काई-गोई आदमी तो अमीर हो जाता है। मनायत में
पिता न ता पूब टामटाम पर ली है। इस मंहगाई ये उमाने म वे एकाएक
इतने बडे आमीषम हा गय?
मानत-माचा दिमाग चाराने लापारमाधीरे धीरे घर की मार
लौटन लगे।
मरतार टक्मो हाइवर एकमन स गाडीचता रहा था।
गदायत न रहा, "गाडी घुमा लो-धुमामा गाडी।
पहन-बहन मागत विचारों म मा गया। आनन फेर वानू का
या आ गयो । मब ही नो,यर यावू नहीएक रिन पूषा या---तुम्हार
पिताजी की इन्वम चितनी है ' महायत युद भी नहीं जाननायर
पिता की इलम जितना है?
नागी यो जरा पहल रामविहागे एक्यूर मार पर उतार दिया
मदान ने पूछा था, 'यहाँ गबहो जाओगी?'
सुनो, "पाय हा पानोपाट कब है । घरपर वासी हैं।"
'तप नुम रहती यहाँ हो?'
'जारामको।'
पापद अनजान आदमी का पता वा साना नहीं चाह्नो पी। अपनी
अगता हालत पापरिचय कौनदना पाटना है कुन्ती का मरनत पर
गाला है। उसो बात गुनार समता पारम्पनिम्ों से मारी

३६ इकाई, दहाइ, सबडा नाराज है । मिफ् कम्युनिस्टा पर ही नहीं, अमीरो पर भी गुस्मा है । कुन्ती वा उतारकर उमी व वारे मे मोचने मोचते सदारत को और दिमी बात ना घ्यान हा नहा रहा। रवमा विधर जा रही है यह भी भूल गया । इतने गि कॉलेज म पटा ! उमा जिम भी विनना ही लड़कियां पढती थी। उसमम रिमा भी साथ उनकी जान पहचान नहीं हुई। शायद वह गभा में बार रता था इमो मे परिचय नहा हुआ। सिप लडविया ही नहीं सपा सभा उमका स्याता मलजाल नहीं था। वलास शुरू हा के टीव पहा उमारी गाडी यतिज पचता और बनास खत्म हाते ही स्टाट हो जाता। पर गाय वचपा की जादत था। पायोई उगरासार इशारा कर पता-'घमडी' गात पा लिगा व माय ज्याना मलजोल नहा बनाना भी लागा को पगडीपना लगता था। -एव न यातचीत करने की पाशि भी की। मिगरट बढ़ायी। शायर उमरी गानोम बटन का लोभ था। उसकी गाड़ी म यटार उगाय मग गिनमा देखना चाहा जसा मन कॉनजाम हाता है। किन गात यो जार म ज्यातिपर न मिलने के कारण ही पायद दारना राजम पायी। और सक्यिों ? एसा नहीं कि हविया से बान पाल परायासत की इच्छा नहीं हुई। बनासम ही कई वार एE पार माय जात भी लड़ी। सक्ति वही गुरु और वहीं अन ।न जाने बगा एक मोर मागापा ओवा मुत्र और चहर पर छा गया। पिभी उग आर नहीं बना। और भी पायान है। उस समय सतावत पम्ट ईयर म परता पा। उगनिदाय एस्ट्रार था। तय हुआ था दिगभी पलिज रा मापसम-समानूमर गीप जापर ट्वटर हाग । उग जुग में लड fruो भी शामिल होगा पर मानिस हा म वहा जापा। सभी यमित मागा? मसटर होगय तभी इज गाडी सरर आ पहुंचा। हरी निगा नाम आन मा पदी पूछा था नाप या एमगोगारमानी नाग? मातम मे मिमरह गया । यम मनहरीमा सिन निामे 4 गाप याा परना पार रहा पा सरिन पा रहा, या ।

इसाई, दहाई, मेडा हुआ उसे, जवार तक नही दे पाया। किमी तरह सिप 'नहीं कहकर ही गाढी में बैठकर घर चला आया। बचपन म ही सदावत वडा गीला था। अभी भी गर्मीला है, लेकिन पहले जिनना नही । अव ता फिर भी कुन्ती माय एक ही टक्मी में बठकर उसमे कितनी ही बातें कर डाली दिनन ही सवाल पूछ डान, काफी उत्सुक्ता दिपनायी। लहवा में से कोई-कोई पीठ पीछे कहता-'लाडला वेटा ।' गायद इतन दिना वह मां-बाप का लाडला ही था। जम म उसे काई भी कमी, काई भा तकनीफ नही हुई । अब लाता है कि दूसर लटका की तरह यभाव की जिदगी ही उसके लिए अच्छी रही। उन लोगा की तरह यावागगर्दी करत घूमना हो उसके लिए अच्छा होता। तब उस इम नयी दुनिया के सामने-सामने पडे हात यह भिभक नहीं होती। वर भी आज मधुगुप्त लन म गभूक काय म नि मकाच वठा हाता। तब इम तरह कुन्ती कामहर के मोड पर उतारकर जम आफ्त टन गयी नहीं माचता। पदार यावू के अलावा और किसी भी टयूटर मे पढन पर उसका यह हाल नहा होता। 1 'विधर जाना है, मा ब? मदायत अवाना जम माते-से चौपड़ा। इननोदर तर अपन पिधन दिशा को याद मे इतना गाया था कि पता ही नही रहा विघर जा रहा है। मात न बाहर की आर दवा । इमो पहले कभी इस ओर ता नहीं आया। नायर यही टालीगज है। दोना आर टीन पी चालियों और सपरन मापहे । यहाँ जो लोग रहते हैं व ही शायद शरणार्थी हैं । रान म और महर पर उहदगा है। पारिम्नान बनने के बार ग हो य लाग आ रह हैं और गहर को भीड बढ़ रही है । य हो लोग जुलूम निकालते हैं मडव और राम्न गन्द करते हैं गडबड परत हैं । अमवारा म वह इन्ही गागा के बारे म ता पडता रहता है। सारत बना हिन्दुस्तान पार चलो। टमा धूमकर उल्ली आर लिने मगी। दयनी हाइवर मानी शायद जरा आम्मा हुआ था । बार बहवासार मय लडकीया गाध रिप आ रहा है। पिरएक जगह उमे उनार भी दिया । वपा मा बगया और क्या इकाई, दहाई, सकर नाराज है । मिष पम्युनिस्टा पर ही नहीं, अमीरो पर भी गुस्सा है। कुता मा उतारवर उमीयारे म मोचन गोचन महावत को और किमी बात मा ध्यान ही नहा रहा। टक्सी विघर जा रही है यह भी भूल गया । इतने गि काम म पडा । उगरे पॉरेज म भी कितनी ही लडरियां परती थी। उनम म पिमा भा माय उसकी जान पहचान नहीं हुई । गायद वह गभी ग वचकर रना था, इसी ग परिचय नहीं हुआ । मिफ लडकियां ही पही तहमा सभा उगमा ज्याला मलजाल नही था। वलाम शुरू हान के टोर पहले उगको गायनिज पहुचती और क्लास खत्म होते ही स्टाद Pा जाती। यह पाय वचपा का आरत था। कोई-नाई उसरी नार इशारा कर यहता--'धमडी ।' गायनमा विमा क माथ ज्याला मनजोल नही बढाना भी लोगों को पमडीपना लगता था। दा एक ने बातचीत करन का वोशिश भी की। गिगरट बढ़ायी। दापट उमनीगाडी म बठने का लोभ था। उमवी गाडी म बार उनी र पम म मिनमा पना चाहा जमा सव वॉलेजा मे हाता है। लेकिन गावत को आर म प्यातिपर न मिलन के कारण ही शायर ना TT जम पाया। और सहरियो ? एसा नहीं कि उडविया में बात धीत गपी मापन की या नही हुइयास म हावईवार व सदवा ये माय बागी पडा। लक्ति यही शुभ और वही अत । न जाने गाएर समान गाना आया मह और चार पर छा गया। पिर भी उग और नायड़ा। औरमा पावान है। उस समय मगत पम्ट ईयरम पटना था । उगनिता गुरमदान यो। तय हुआ था frगभी कनिज स मामलगमामा मनीष जार सटर हाग । उम जग म नड- सिमीयामागायनानिए यामबहाना था।मभी समान-मापा मग हा गप सभी जगाडी सरर आ पहुंचा। 1 गिनाम आज या नहीं है पूछा था आप यया एमगाम गापमा जान मगतम गे मिरर रह गया। गमागमन यह पिनन हा (नागे उपर गप बात पाना चाह रहा पा पिन पता नहा, नया इवाई, दहाई, मेण्डा हुआ उसे, जवार तक नहीं दे पाया । मिमी तरह सिफ 'नहीं बहार ही गाडी मे बैठकर घर चला आया। बचपन गहा सदारत बना दामीला था। अभी भी शर्मीला है, लेकिन पहले जितना नहीं । अब तो फिर भी पुतीम माय एक ही टवगी म बटार उसमे पिती ही बात पर डाली तिने ही सवाल पूछ डाले, पापी उत्सुक्ता दिपलायी। लहवा म से कोई-कोई पीठ पीछे वता- साहला वेटा।" शायद इतने दिना वह मां-बाप का लाडला ही था। जम स उग योई भी कमी कोई भी तकलीफ नहीं हुई । अब लगता है विदूगर सहका की तरह अभाव भी जिनगी ही उगो लिए अच्छी रहती। उन सागा दी तरह आवारागर्दी परत घूमना ही उग निा अच्छा होता। तब उस इस नमी दुनिया के सामने-सामने परे हात यह भिभव नहीं होती। यर भी आज मधुगुप्त लेन म सभू ये काय म नि माच या हाता। तर इम सरह पुता वा राडा के मोड पर उतारवर जसे आपत टल गयी नहीं माचा पदार वाबू के अलावा और किसी भी टयूटर ग पढन पर उगरा यह हान TI हाता। 'विघर जाना है सा'य?" मावत अपार जम गान-गे चोर पहा! इतनीटर तर अपन पिएर निा की याद म इतना गाया थाfr पता ही नही रहा विघर जा रहा है। गत न बाहर पी ओर दया । इमग परत मी दग ओर तानानाया। Tार यही टानीगन है। दोना जोर टीर यी चानियां आर पपरन 4 भार। यहाँ जा सोग रहने हैं यही पायद शरणार्थी हैं 1 गात म और मर पर उहदया है। पाकिस्तान बननय याद मे होय मा7 जागा भौर पर वीर यह रही है । यही सोग जुम निमारत ,गर और गलगलग गहन परत ।अगवाग मवरही मागा वार मापदना रहता है। मानन कहा 'ग्निान पाम पना। कापूमरर टली योर मन मगी। टपगीयर का भी नायर गामा हुआ था । वायू बवादार गम मसोमा माप रिया है। तार भी लिया । या मा पा थोर बया 1

वाई, दहाई सबडा
मार दिया वह किमी भा तरह ठीक नहा कर पा रहा था। और फिर
ना दूर टालीगज की ओर ही क्या वहता रहा । जब फिर वही कालीघाट,
जिधरम आया था।
रामविगरा एव यू न माह पर एप जानी पहचानी मूरत दसकर सदा
अन नार उठा । तातो अभी तक सटी ही । आम पास और भी बहुत
ग नागा की भाड है । वे लोग पता नहीं किम बात को लेकर बहम कर
थे।
पुटपाथ व पाग गाही रक्त ही कुती की नजर भी उम पर पड़ी।
गार मह निराकर मामत न पूषा 'तुम अभी तप खडी हो?
इस तरह म पाडी जाएगी-बुन्ता नहीं सोचा था।
सलामत न फिर पूछा, अभी तर घर ही गयी ?'
मुन्तीन मिर हिनाया, वहा नदी
पालीपाटबर जानवाली थी रुपय मित?
नव इमानर अपलापही हा घर नहीं जाना ?
पुता रहा में चला जाऊगा नाप जाइये ।
गत टीर नगर पा रग था क्या पह। फिर जम डरत डरत
मग नासा सोचा तो मापी दूर है गाने म दर लगेगी।
इस पर मुनी न मा सति जाऊँगा बस यगन्द्राम ता गर वर
मात न सदर की आर दगा । मग या ट्राम बुध भा नहीं है । ' स्पा,
यग-सामबर है।
घमाम गाताना टिपरनाम घोडी गयी है। परीय डढ
गोपाल्मीमा ।
मनारसमपहा सतिहमसोग ना अभी उगाजारमाय । उम
गमयमा पुषभारापा।
'उग समय था उगामा होहुआ।
गिरम पागजामोगी
पुनीम पारमायिा।

इकाई, दहाई, सकडा
मगवत ने जल्दी से दरवाजा गोल रिया ।वाना 'वठा, यहाँ कब तक
गटा रागा कहा बोर ही पहुंचा द हाँ तुम्हें जाना हा ।
कुन्नी न आनाराना नहा की । टवमी म वठ गयी।
म्पार का आर से चना। उपर न तुम्हें घर छोड दूगा।
'नहीं, मर लिए वार म इतना पमा विमतिरा मराव व रह
'इसलिए वितुम मुसावन महा।
कुना न कहा मुमावत म पया अगा पडी हैं मैरी तरह और भी
दा-नान मो आदमी मुसिल में पड़े हैं।
"पनि उता में पानता नरी, नुम्ह जानता है इमी म तुम्ह
गाडी में वटा पिया।
'लेरिन आप मुझे जानते ही गिनना है ' मरा का जानते है
मि मेरा नाम छोडकर मरवार म और क्या जानते हैं
मदाबत जरा मुनरगया। वहा यह और जानता हूँ कि
तुम
अम्पचार करा म हाम करती हो । और ना एक बात शनना है
'तुम वम्युनिस्टों म पा रगती हा जोर वडे आमिया स दरता
हा।
नविन पुना यह वात मुनार हेम नहा पानी। वमे ी सम्भीर रन।
गि कहा, यह बात दाहिरा आसरातनी गनिनादूर तरनता
जाना होगा। मुझे अगर देगाप्रिय पार रे पाम ही उदार ता बरी कृपा
ही।
'यहाँ तुम्हारा गोन है।
मर र निगर है।
पहले तो यह नहीं बतलाया पा
पहन बनसान की उम्त नाई ।
मुगात नपिर नायग, नरिन अपन पर जान मन गया
भारति है मुझे उगमा तानार नाहगा।
'नागिरी न दीजिए।
4

हवाई, दहाई, माडा
'हमतिर पिकही मैं तुम्हारा पता 7 मालूम कर ल, यही बात है
पुनार कहा नहीं नही जाप मेरा पता जान लेंगे तोइसमे नुकसान
पया है।
कभा-रमा तुम्हें तग करने पहुंच सकता हूँन ।'
मुभ तग करनवाल लोगा वी वहाँ कमी नहीं है । कितने ही आते हैं।
मैं पाई पान न ता नहीं।
तुम्न रन की पाई जरूरत नहीं है। मैं विमी यसव का मेम्पर नहीं
है मैं हामा देवता भी नहा है और पविग ताखर परना जानता तक
पहा | आज पानि तार मिफ ता दिन गये विनर गया है वह भी
अपाहीजरीकामम
नमी तुन्नी न पहा मुझे यहा उतार दीजिए । देशप्रिय पार जा
गया।
टमा पी। ती हीरवाजा गातार उतर गया । वानी,
जरमा चना मसार।
मात न पग पिन तुमने अपन पर का पता तो बतलाया ही
कुन्नी ने पुपर माया। फिर का हमारा मान आपर लायन
राहै।
पिर भी जात या सू गायर यभी विगी नाम आ जाऊ
अगर रतना हा है ता मुनिए-वत्तीग या, अहार टाना,मरपर याई
-
गानो
महा टार है पा रहगा, यदा-बहुत शुक्रिया।
इमर था और गागना अच्छा नहीं लगा। टयमा पर दी।
गणार 41 महरदयाती पर यह बगर व पोटियो ये अदर
पुग मोगर बाल उगाो और पुध नर्गना पड़ा। गरदारगी ने
गासारसाग
-
Trnmnmमाया। पुनी उमी ये अजार यही हा

इकाई, दहाइ, मंकडा गयी। माट सम्भे वे पीछे खुद को टंक लिया। मुडकक आगमी उमे नहीं देव मरते थे। एक गाय पर आराम म वटी, आउँ वन्द यि जुगाली पर रही थी। वानिा दिय दरवाजे व ऊपर पीता की प्लेट मवेगले व मालिरमा नाम निमा था। अंधेरे के कारण टोक्मे दिलायी नहीं दे रहा था। कुली काफी देर वही मही रही। अब नर वह जा चुरा हागा । पिर ननिर बाहर की आर भाववर देमा। टकमी नहीं है । चली गयी । मरे वाट पीर घीर पोटिको से निवनायी। नहीं टक्मा नहीं है। फुटपाय पार कर बुन्नी मडर पर बापी। फिर मडर पार बरबम- मगप पर भाररसडीहा गयी । वहाँ और भी कई आत्मामडे ह । उनम म यई उनकी आर तजनवरा म देम रह ये। देखें। जब नर गायद बम भी चरन लगी हागी। काफी दूर पर एक इवल र मिनायी दी। कुन्नी न माहा बच्दी नरह मम्हातार रिमी तरह आ की मोट पर जाह पर ही मी। दाजरा पाय की मीटिंग काफी दर परत मम हा चुकीपी। जो नाग वाम-पासरत हैं, या पार म धूमन बान है । आफिस मे सौग्न वाट नाम का जरा हवामागे भी होता नाय ही विना पाका नमानी दमन पामिरता। पहले म कोई सदर नहा मिनती।सदर जानने को मिमी को गार दिलपम्पो भी न यो। मिनमा और डामा दउन कलिए फिर भी रिक्ट लेना होता है । यहाँ तो धिनान की। किमो नि काममा मीटिंग ता निमा दिन जनमय की। कभी पी० एम० पी० रा कुछ पनी आर० एम. पा. या पारवर लाररायुध अनगिनत पार्टी, अनगिनत राय । गमा निनिन्द्रीपर मरना चाहा है। पर सरकाई देश-मेवा रना चाहता है । मच गरीबों का नमाई वरना चाहत। ममी गर्ग यम- चिन्नर हैं। कुन गाडीमापार यि नियत जगह पर रहा था। frमाद बाबू अच्छा मापा दत है। पार का मारा जनता उनर माम मुग्प हो गरी पा । उनरी एक-एर बान गबन माग बग्म

इकाई, दहाई सरडा
र थी। यह वह रह ये, 'जिन्गी वे भाथ सुलह हो सकती है, लेकिन
मौन ये गाय नहीं । मौत की मौत नही हानी मत्यु अविनाशी है
जिग गमय वह मच म उनर उग ममय दर काई माय रहा था कि
नमाजी मुभाष वा अगर जिदा हात ता वह भी इतनी आग नहा बरमा
गातथा
पाडा पाग आन हो कुज न गाडी का दरवाजा खोल दिया। गाडी
म यगर शिवप्रमाद या न माटी की चादर पास म रख ला। बोल
1
पिरकाष यान जा
जी।
मरा भाषण गुना तिना सुना गुरु स'
'जाही।
या गया। गुग की पजपा आग्न है। नर मारिंग वाट बजवा
गगयान का जवाब देना होता है। र यार ही बापूजी का भाषण उम
अदा समा
समकमा नगा?
बदा बच्छा।
शिवसमा पाइना पर हा नता मान । पूटा मरा अच्छा गाया
शिौरीपा?
यापराहायागया।
गमा मन म गुन रह 'पिमान गडवह नहावी?'
माता पितने हा मयानामा पाय कुन पाना पता। यही
पिम है। गर-गुध अन्मा मानना नाता। पुजा यह मान लिया है।
विमा पापी मादायगेवग्न लिए पा सर करना जरा
है। नाग मान ी गुजामा । मज गिर मापा र गाडी डाव वग्ने
एय
गि गमप घर र मामा पहुँ। पारात हा पुरी दी।
२१ युनियर उमन पा लिग लिया। बत्तीम बी

इकाई, दहाई, मंकडा वहीर टाका, संकण्ड वाई लेन। यह भी उम बार ही है । चितपुर पार कर उत्तर की ओर जाना होगा। चाई लेन-इसलिए जर ही काफी छोटी बौर सेंकरी गली हामी। लड़की ने कहा था-हम लोगा का घर गन लायक नहीं है । क्लरत्ता म जान लायक रितन घर हैं । टेवडी बने ही विगया चुवाया, लेकिन मदर दरवाजे की बार दखने हो चौक पहा । गैरेज में गाडी नहा थी। तब क्या पिताजी यभी तक ना लौट ? मीटिंग में क्या बोर कहा चल गये 7 तमा मी दिखनायी दी। देवने गाड़ी परगान लगती थी।मदावन को देमत ही बोली, 'इतनी देर कर दी मानकल व जात हा उपर करता में गोली चनी है इतनी रान कर दी, मुझे फिक्र नरी हाती? सदावत होगा की तरह अपन कमर की ओर ही जा रहा था। मन्दा ने फिर कहा 'तुम भी घर पर नहीं रहत वर भी बाहर जायें। फिर में सिरे लिए यह गाम्यो मम्हातवंठी रहूं' मावत ने कहा, 'पिताजी मोटिंग ग नहीं लौट" यान स क्या होता है । फिर निकन गप हैं।' कहाँ गये हैं।" "और वहाँ जायगे देशनवा | अपने पारागार के लिए जा, यह तो मममम आता है, पिन कहाँ मग्निीपुर म बाट भायी वह नायग। गाना मे कौन जाने क्या हो रहा है वहाँ भी जायेगे। पर मे एक नका है उपका भी यही हात फिरविमा लिए पर की चौरीगा?' "मरिन पिताजी कोनया रिमा न बुनाया है 'उरें मवर दनवारे नोगामी करा कमी है 'पूना रस टही ये 4 गाना परोस रही या तभी टमासान आपा-पताना विधानराय, अनुत्य पोप या प्रपु नरदणि दाता। बम काण्व पर गए । मारत ने और कुछ नवापार घार मौरिपोचकर ऊपर नना 7 - अषितपुर । नहर को यह एक ग्राम और जगmifz. म्नान पार मधुगुप्त ना, डलहौजी ग्यापर और पडेपुर र स्ट्रीट की तरह इकाई, दहाई, सका ग भी बिना मान राम नगी चलता । चितपुर राड जहाँ वीडन स्वायर व या गाधी उत्तर की आर चना जाती है, उमा के नाम-पास के इलावे की पार कर रहा हू । दिन य समय यहाँ नारर युद्ध भा पता लगाना मुश्किल है। पांच दूगर वाजागा तरह इमर पास भी जाहाबाजार है । मडर के मोना आर बरतन टुसा और नम्बापू या हारमोनियम-तपल की दूकान है । रामन्यायी पिपिया 7 वार ताक्न पर दाना और एक-दूसरे म सनी साइन कालान पाने पिलाया दंगा। वम उनम बाई मास बात नहीं है। या ता गान चांग की नहाना हुसे गुडगुना, चना मुरमुरा या हार माशयम-नाना या त्रिी हो रही है । मारा व मजा, मूमा चीजें । लक्नि रात पो यह जगह रगाह उटनी है । तब इस जगह या मेहरा ही बाल जाता है। गडर के दाना जार माग पुरपाय और उम पर चलते सकडा नाराग। पला मजिन पर नागाची भीर । लकिन दूसरी मजिल पर ? दग टग परसा ट्रामा या नाराज व वाच ही मानर हल्ला मचता-- गया गया-गया पारा आरग भी था जमना ।- क्या मार, जग-सा और हान पर दाम ना जा जान ना ग तरह उपर की जोर तारपर चला जाता + गग-गुनार पता यीजिए । उगनार पा मुराग शिगितार पी बापाज आती। सहरियो पहना राग गुग्गमगा हो टार गा! उगा सुरंग प गम्त एम सीधे नार पामाप पर नगर या तुपमा स्वग ना मानते है तब पहुँचा जा सरता है। जो पदपतयमाहागिपार सांग है । सविन राम व ममय ठीक उसी हम नाय उना मारा गयागन जान कहाँ गायब हो जाती है। frपाईगार आगमी ट्राम या बम या चपट म आन मे बच जाता है। मरिना कोईगामुच घर म आ ही जाता है। और तबदाम भगागाशी सार सग जाता। तब उपरयो रनिंग से नगर गभीनीपानमा सरे। पारस लोग नीपगी ओर PP और माम जारी आरआर की मार दगोगान दगमगा साइ, दहाई, माहा काई-या मिर भुजाये तीर की तरह सुरग र अदर जा घुमने । पिन पनरानी व पाट के पापलानून दूमरही हैं। परानी पुगन जमान की औग्न है । कहती तीन चौयाई गुजरसर यह चौया आ लगी, अनीतर मूछदवार नामी नहा पहचान पानी वेग, और तुम नाग आमी पहचाना?' दूमरी मजिन पर मोदी र मगर ही पारातीका यमग हा पर उगन ही वहो ग एवम गदर दरवाजे तर नज़र जाता है । चाहन पर मव पुप दसरा जामाता है। सुबह दरवाजा गुतन स नेर गत ये एक्श वजना-भाभी रात प तीन बज तर भी मदर दरवाजा खुला रहता है। किमी दिन नोबन्द ही पहा हाता लेपिन कुफीवाला हाहा, या पूताना हा हा, या गुडा बदमाश, गिग्दवट ही हा गभा नजर जान हैं। एसयार चेहरात ही पपराणी आरमी का परवान नती है। परिया या भी यही मियतानी। पनी-वाट यो बिन्नी हो या मिट्टी की पर- या पग धेरी, चूहा पार पाना भी अगली चीज है। यानीगर मिरने चाहिए। पपरानो गुट भी पा का गम अच्छी न म जानती। इा मुत्र मोर नीकितनहामान है। मकान भी कम नग लडपिया कामी कमी नाहर वार जान नही गा भर जान गौ तरट । पिन ना नाग यहां रत हैं उनम में वह सा है। जा लोग यहाँ आत व नी जानत है रि यहाँ पमा ही मन-बुध ।पमा पॅर, नगपट गातिर परारम्मान ग म पात पर पन जान हैं। लरिन गातिर एगी करना होगी निनौर फिरवरयही माना परे। एप वार तो पचगनी र पट म आता है भूरभा और यहीं नहा परयना। पयगनी इमीग मसा मनाती हुई सत्ती-सागौडी, गाआ पी, मुममा पहा राजा और जगर जो हाता है या नही बनता । सभा का मालूम है रि गातिराव नाम यो ची मिा पपराना करीही मिलती है। पर गना पना परतो है मेक्नि नमागम नहीं है । रहती है-~पमा सूर्ग, अमना मान दूगी वा म तुम्हारा परम नुहाग मरा परम मम। आर गर मतम याताई बनतम मुझे टगोग। तब मोमग मार नो गया इकाई, दहाई मकडा परलोभी गया। पाम म हा मुफ्त की दान है । सुफ्त वक्डे को भुनी हुई टांग और Freी महती का बलिया वदा जायकेदार बनाता है। दूर-दूर से खरीददार आओहैं। पांच व गावेग म माल मजारर रखता है। देखते ही लार टप पन लगता है । जति भाव एक्दम सस्ता है। रात के समय ही ज्यादा भार रता है। फिर भाकाम-काज वे वाच ही पिसी तरह ममय निकाल पद्म- गीयपमरमामने आरर आवाज दता मां।' कौन मुफ्त ? क्या बात है बेटा? टगर दीटी न यमर म ताला लगा है। शायद टगर दीदी है ही? पा' तरा युछ पसायाती है क्या सुपर परना हो मा यहा सोई तीन रपया छ आना बासरी थ। 'लपिपरा वारा छोड हा पया पसे भी क्या वभीवासी रमन Tiro वटा । तुम साग रगान चेहरा दगत ही राब-युध भून जात हो। ग सादामयारी रपर कोई काम करता ? मैंन तुभग पहल हा पहा पा बा गुपन फिर भी गडा रहा। पूछना 'वया टगर दादी कहा गया है ? मायगा नहीं याग्गा नहीं तो जायगी पही वेटा मही जो वारा ती थी न मत्रह मपर पमरे म अब बारह नम्बर म आ गया है पहचानना है न 'हो तो, प' यामाहीएर नि मिजाज निगार चुनवा वसान चली गयी थी। पतीपा-या पर पुनया धमाउंगी। मैं भी कर दिया-ताजाआ या गायी म मरा-वया मुग गया रसापर यम थामा हाँ तो, पपी भी। मन मांग ममिर मर पिया। दोनामा आगीप दिया।दा मान परमागम पर सारा पिर एक दिन काम म एक बच्चा दवाय गादिसणी आ पचा-गमा गया, पिरी पूरी हो गया है।" मग पुगनी याने हैं । यतिम गुपन माहीन जान, पर और सर किमपि जानती।। भगराई --रि' .

दरा', दहाः, सरहा
नर पपरानी वती-'शि वारि यह पमरानी का नट ही
आगरा था-जगई मौसएका पट नुक्सान सत्तर हेद मो पर म
पिा नव पद पर रहा है। इसीलिए a वामनीस अब बती हूँ-~~गजमा
हम ना माना नहीं जाननी, बटा जानती हैं। साती या नहीं'
।
पभरानीका या कुछ भी हा मनन लापर होती हैं। मारे नि अपन
परमगाट पर बठी-बठी पनट चलाती है। मिरखान एल गॉदरेजी
आरमारा है उसमे सप सरर पन्त म चावी बायनी है । और काम हा
या नहा, विन्दू वा पुरारती । तोविन्दू' आबिन्दू।
पपराना ना भरोसा है--विन्दू। विहा पसरानी व लिए गाना
बनाता है। इतनी बडी गरम्यी मम्हालनी है। एष दरबान है वह नाम व
लि। यह सब यहाँ रहता है वाई नहीं जानता। वास्तव मन्दूि हामत्र
माको देशमान ररती है और पथरानी रे हुस्न मी तामील करती है।
पागनी कमर में टनीडान है। सागर एते ही पहा रहता है।
मानिस मार भी टाइम पान है तो टेलीफोन करत है नही तो नहीं ।
उन्हें भी दिन ही नाम रहते हैं। बीच-बीच म दारोगा-युनिस
मिपाहिया रामोन माना है। वे सानिशदिन आनवाल होते हैं मन
पल ही पसरानीहाशिपार र दत है। -वाउन वगरह परा मम्हार
कारगिए, हम मा रह है।
"मा पपराना पट २ मामने ही वारर हारिरहमा जाँज टाम
मन (डिया)मा वदलिमिटेड याश्मि ने रिविन पनर का मेरेटरी
जान मायाना सापमपा अमिट मुटरा नमन मार और मरा
गाया मजय! मरय मरवार। मगर र रम्प-नन्द परान वान है।
या पाट दिया है आसनगर और गरम ! मानॉजिकल,
निदारिर माल स्मिी नोटहरानाटर वाली नहीं छोड़ा।
दुनान मा पान रग मानासाना र सापा। नैरिन ऑति में
गिनार आगिर मतीनाही माय हो निदान में सरार मान
गोर माह अगरी गह आपकारगरारना रहा था।
मिमी, दे। जिपमेन गेनर लिए उद बिना फीमन निर

झाई, दहाई, सरडा वाम नहीं चनगा तातता साचन स यया फायदा अमलन पहा धत्तेर का, यह यहाँ ल आया तू ? यह तो रडियो का . मुहता! मजयन पहा उसस क्या हुआ ? हम लोग कोई इस काम से तो नाय रहा है-म लागतो आर्टिस्ट गोजने आय हैं। दुमाल गायाल तनिर गम्भीर आदमी है। हाथ म एव पाटपालिओ बग है। उमम पट यावर पाम साय ल जाया है। कुछ नकद रुपय माहैं। यगर एडवाग मांगपठ। दुनार गायाल पूछा कौन सा घर । गुपन अपनी दूकान पर बठा गो का घुधनी पका रहा था। मिच मगाता मोर प्याज डालार मा धुघनी बनायी है वि सौंपीसीधी सुगध ग सारा पोट्टी गुलजार हो गयी है। पुपता उतारपर परोठ रोक्ना गुरु परेगा ।इम मुरल प रह्नवाल पयादातर रात को गाना नही पकाते,सुफ्त पयापी चाट और परोठ गारर ही गुजर कर लते हैं । पमरानी व पलट म अधिशारिरायगर रात वो पाना पकान का समय नहीं पान । बाबू मांगा व पगग गाना यगून वरन हैं। गुपन न घुपनी यात-बान हा वा गार जातो अटर जाकर गृप आमिरगे तिनी न पागिा? और टगर के कमरमा ताला अगर गला हो नो आपर मुभ बता मरा गई यहाँ पपगना का पर कौन-सा है यता गात है?" गुरत ने मुरवर दगा। उग या करा की फुरगत नहीं है। यदली पाहै नानी भीनी या एगही तिाम यादू सोगा की भाह पयागतय Pाता है। पपरानामा पर। गानी गदया। पहर दगत हा पहपान गया, आपिगार वार पर मामा आय है। पहा है पर ६ मार दरवार ग अदर पल जाइए। सनमान पागग मन्नार नहीं हुआ। बागा व यान पाग गर। भाई तुमनापी व रहना हो। हम साग एर काम

एवाई दगई, माहा
मयाय हैं।
वा काम है पहिय न
"यहाँ उना गुग नाम गे वाई एक्रेन' मतनव नाटर वगरह म
राम करती है।
कुन्नी मुग । मुपर मनी पडरिया का पचानता है । वाला नाटक
करती है ? नहीं बाबू नाय ताकानी नगररता नाटक बग्नवारी
पाईलहरी पहा नगरती यह तामगद पडरिया का मकान है।
यमन न पहा मृगव नहर्ग हान म का वि इता है। हम पन
देंगे पाट र चनाजागा म नाम वीराइसकी है या नहीं
मुपन न पहा मैं नानना मव नहीं जानता। हाँ आर नामा
पूध में।
मुक्त न रहा हो उम दरवाजे म मोघे यन्त चन गदए। अन्ट
कार जानकी मोटी है। मादाम सर चकर मामन ही दीपा-मा
पररवाजा। वहीं पूछ लना।
मजयनका नाना तुम लोग न तो वाटर ही गर रग में
बसता ही जाता हूँ।
पिन धीर घr नोनाहार धुन। मजयागा मान
था। इटा का परान बीच मा मनपक्टिा बन्द न्न
रगया। आँगन रे कान घुमाया। म नारायः पाप
है। नन-पागाना मबधा र बिलाप गमड पाचार वटी ५ ।
दूमग मरिन रिजार नान-नान कमर । युध नगें ।
गवारे या पिन विमा रमर गारमानियम और पपरतान
यावाबा रहाानांत आचराग नि नारामनगर
मदमाता पररावे मगरगरीगरीमिरा-भीमाचा
होत ही मार दगा। बोरा आन।
दुनानम्मानन गदर अमर आगमतरना।
'कौन है
Tई औरत हाद गग निर रमाईपर की गरम
.

इकाई दहाई सकडा । गयी। 'दगी मे पूछ अमल । अमन भाग बड़ा। पूया पानी, तुम लोगा यहाँ कोई कुनी गुहा इना है? विदूम गरम हया भी है मह मानना हागा। बाएँ हाय रोवन की ना जग सम्हालवर टी पी। मुजरा कर रहा "आप लोग मारो दिए। एपित गौन है ? पपरानी ने नायऊपर ग सुन लिया था। परत की स से राब गा। दिन पर पन्त चढ़ते कहा मो ये भले आदमिया के लडके आय है पाा नहा पिम मोज रह हैं। फिर एतार वी ओर दपवर पहा, आइए आप लोग ऊपर आगा। उप आनमिया की आवाज मुनार और भी कई लडकियां रेलिंग पाम का जुरी। एय-दूगर के कपर गिरती-पडनी सब सी सब हंस रही भाग जय एपटा उसी ओर दपता सीढ़ी पड रहा पा। धोला, अरे ना माहेमा दान पर मागी बठ जाएगी। गाप-दा-गाय और भी जार को सिलपिलाट । उनम एम शायद पापापस थीयाना 'स्पर आइन मी मारत की मशीन हमार पाग है। दुसान गापाल भी पायपीचे ही था। हारकर बोला, "ल सजप, गबरगरमतारामनगर Tगर पमराणी वापरा या गया था। रिने अन्दर धुगार पाया। रिहा मा य साग आय हैं।' कथा या गुम मागामामी भानिए पहो-बहते पारपाई पर arfगनी न दन पर की गाडापागम्हाता । बोली, "तुम लोग गन्द्रिावग मुगियो गीच मा तो " Pागरान दमही पा रहा पा। अमम भी भुष टी नहीं पर

इसाई दहाइ, मरहा
पा रहा था । वह भी गुडा था। लेकिन समय वठ चुरा था। कमरा कापी
तरतीर मे मजा या । चारपाई नीचे एक काम की पोक्दानी रखी थी।
मागबमरा अगरबत्ती को गाय में महा रहा या सिलोना समरी पाँच
की आलमारी रती थी। दूध का प्याला हाय म लन हुए पपरानी ने पूछा
"तुम्हें कौन-मी पमद है ? तीना वा एव हो पमरेम दटगे।
राजय ने कहा, "हम लाग कुन्ती गुहा रा चाहते हैं। वहीं जा डामा
जरती है-हम ताग नाटर सेल रह हैं
'नाटक "
.
"जी हाँ, हम लोग जॉज-टामान (इडिया) प्रावट लिमिटड ऑफ्मि
7 आ रह हैं हमार रिकिान पर की ओर में 'जा एक दिन आदमा थे
नाटा मेमा जागा । हम ताग हीरोन पात्र रह हैं । मुना है, आप यही
अनी गुहा नाम की मोइलाडी है । उस हा पोज रह हैं।'
पारानी ने कहा, 'चुन्नी नाम की तासाई लडकी नहीं है टगर है
चागनी है जुधिरा है-सहरिया मरी कई हैं सभी दवन-गुनन म अच्छी
है, चाल चलन भी अच्छा है।'
मजयन पूछा 'लेकिन उन्हात बारमी राम म पाट रिया है व
शाग वा नादरमभागल पाएंगी?
'तुम सोग दा सान, तुम नागर र दसन म का बुराई है ' ओ
चिन्द्र राजा तो उन सको बुला ला। बहना ऑप्रिय म मरे पर
सरर आप है।
और बहन की दर नहीं हुई। चार-पाच मारियां गिलपिलानी हुई
मा पहुंची।
पपगनी न महा, "हो रा, टगर वहाँ गयी? मापद कमरे म नही
'मा, टगर नहा है तो न गी । वामनी है अपित है गुलाबी है
{}ল্পানী ধীমণঃ মুনী মহিন ঘন হলো
या सापपरानो के मामन धिमाकी दोगन की हिम्मत नहीं
हाती। ममा परदूगर म पटी पीपीवी स्वनी लग रही थी।
साम मासाला सो जग दम पुट रहा पाए सचिन पगला आमी

८२ इकाई, दहाई, मडा पहचानन म गलती हा वग्नी । योनी, 'तुम लाग बातचीत करो न दूसरे यमर म जापर न लोगा म बात परा। दडी अच्छी लडवियाँ ह-मैं तो या माधा- गावात पमट वरती है। मरी लडकिया का भी वही हाल तभी तानसे कहता हु मैं गुन दीवन ही रीमो जोर नमर पात ही राधा भरा किया वे गुना का पार नहीं पाजाग।" पिर जरा ससर कहा गुलाबी बोर न बात कर न बेटा । भन घर व पड आय है आफ्मि म पर मोगायलाग रपय दंगे, सान पा महत देंगे-यारन । आगिर म दुवान मायाल का आर देगपर पद्मरानी ने "देग रहान या, 'न लविया कानप रह हो न, ऐमी लडरियां तुम्ह सोना गाय म दान पर भी दहा मिलेंगी अच्छा एव वाम परा, तुम जरा गुहा "ग गुलाबी व बमर म जाकर अक्ल म बातनीत कर लो भाव- तार बरला महवा यडी नाजुक है। मर गामन वात करत गर्माता है। जा न गुलावी वट वो अपन वमर म ल जान-जा। दुताल मा याल न वहा लेरिन म लाग तो पुती गुहा या खोज रहे । गुगा है बगर या एकिग मरती है।' थामनी तभी बाल उठा हम लाग क्या पमन्ट नहीं आयी? और मदन गाय हा उमन आग पिरावर एक बांग-मा पटाक्ष पिया। मजपा र पा वह उट यहा हुआ । बोला 'साप है दुलालग में जरा टेग मरता हूँ आपन यया पहले कभी प्ल रिया है" धागती र कुछ रहन ग पहले ही दुपात सायानी टोगा। वाला, हा रहो , बाई उम्रन नहा है। चुना गा अगर होती ता हम सोगा यायाम नता। वाहरका आवाज या पपानसर पपगनी बोल उठी 'सा रगर मारपी-पापा टगर यहाँ था।' गन मारे अगावियों कोषमरे म दागी पुनी नहा माना था। मगर ग पोरगपी । पपरा 7 कहा, यह मो मेरी टगर बीमार पर पग है ग? गिगतान पर यह तुम्हारात इकाई, दहा, मरडा कर लेगी। क्या रा टगर, बाबू लागा को डामे के लिए लड़का चाहिए-~ तूवर पायेगी" बुतान दुनाल सा यार की और दया। य लोग क्या उमे पहचानत हैं ? पिर परानी की आर दार का 'मैं प्ले व ना ना जानती नहीं मां मैं न कर मानी है कि उन कहा "वहगा कौन बेटा य लोग युता नाम की रिमा रडका का सोज रहे है । तो मैंन रहा कुन्नी नाम को ता काई है नहीं इनम म कोई परदाता " चुन ला १ दुनान मा यार और अमल घोर तब तर उठ गटे हुए थे। वाले "अमल महम नाग कुन्नी का मानन जाय ये। मुना था कुना गुना यही रही है, “मी पधराना वे पलट म कुन्नी का कमा एक सरह हुआ। बाली, 'आप का विमन बतलाया "हम लागावी जान पचानक एक आदमौन। कुन्नी न फिर पूछा आप नोगान उम दया.' "उमरान गया है पनी उमदे माय पप दिया नहीं। अपनर टनीफान वाघा बज उठा। चारपाद व पाम मे सिवर उठावर पपगना ने कहा 'यो। कुन्ती न दुनान गापाल काबार घूमकर कहा 'नही आप लोग का गलत सबर मिली है। इन्नो नाम वीरम पनट म तो कोई नहीं है। यहाँ मैं हूँ, मेरा नाम टार है इमरा नाम दामना है उमका जुपिका और उमरा गुलाबी है। और जा है नये कमाराम इन ममर महमान है। गटा जनाब "मम में काई नहीं करता। जानाग यहाँ पा रन आत हैं हम अपन कमर म बढाना है। अभी तक नहीं ममन पार आपनि मह वपात्रों याबाठा है। दुपार मायाल न और दगे नहीं की। नमन वा मावना हुआ बाहर घसागमा गजय मापद नब भी बरहना चाता था । वाता, तर गरीपगिन आपरान मरी हम नोगावा काम पर जाए' बाहर जान नपिरावजी 'एमजय, चना या !

इकाई, दहाई, सरडा
गय पिरना सा। बाहर नीचे व आंगास भी कई लोगो गे
आरा पान म आया । होगरता है वाय् लोगा ने आना शुरु कर दिया
। अब पपराना र पनट गुलजार होन का टाइम हो गया । अय
मुफ्सा दूवान स पकड पोटोग, गोश्त की घुघना और मुगलाई परांठा
पा आना गुहागा । नौर उमा वात बजू भादूगान म बातला का आना
गुरू होगा। फिर मा आठ यान वे वाद पद्मगनी के निजी भागार मे
या निरग। । य दूसरा तरह की वातन। उम बोतल म माल व साय
मिना रना है। यह तुम जितनी चाहागे उतनी हा मिलगी । पद्म
रानी सारा गत गप्लाद कर माती है। फिर आयगी कुल्फी मलाई आलू
रिरिया और पाट पोरीवाना तब आयगा वला या हार और जूई
वचनवाना और तभा हारमोरियम और तब ये माय गुम होगा-चाँद
ग' मा चारा तिरमा गनदया
पपरामान लापान रगारमुर पुमाया। याग ती वगरह चली गयी
पाए तव भा गडाया।
पपगना न थारी नही तो दिन सनरा पना ही नहीं है ।
यासू लाग आर लौर जाते हैं। यान क्या है री ? सुकर ये तीन रुपय माढे
घ आना यापी घाड हैं ? नामिरहुआ क्या है तुझे कहती है पापा
उग रहा है या
सुनोप मागे यात गुना र पिए हो ताप आयी थी। धोनी "सुपर
पर अभी उमा पार आया है।'
और उगाईप गरीन ग मेरा विरापा बागी पडा है गो
'य'माया -पहार पम मदमगरुपये दमनारनिरापर
परानी महापमपि-- यह र गौ साप आज वटा मुसित मेला यी
PATममय दोगामा बाम औरया राहावामगी। मग
बामाबामामो
पपगनी पर गोरीयामारी म रगत हा पहा
मोरंगार म मन मा लगानी लाग्य वर्गम बाग बग
PRET Rो और शिमगार मा मा दाना गया ।
"

वाई, दहाई, मकहा ८५ - टगर, मैं भी गरीब आदमी हूँ,मरा दूध पी रहाँ म आएगा। इसके मिवाय घर का टरक्म है। तुम लाग अगर किराया नहीं दागी ता मेरी गुजर बस होगी, यता में क्या अब जवान हे जाइम उम्र म अपन कमर म ग्राहक बठाऊंगी ' तू अगर कमरा छोड द ता मैं आज ही अटाई-गो रपय म उठा द । लेकिन मरे तो परमम ही नुक्मान दिया है । तुम लाग तावह दस्ती नहीं हा। उम ममय माचा या टगर की उम्न बम है अनी जरा जमा । फिर सूध कमाएगी, बाद म ही दगी-तुम ता ममभार हा बा । माद चार म एक बार मी नहीं मानी। बुन्नी न अपराधो की तरह गिर नीचा दिये कहा वाप योमार है वापता बीमार आज हुना है पहल क्या हुआ था? इमा पहन तुमन बितन गिन गगाजल छिडकार दूवान राता है जरा गिनार बताना व्यापार लक्ष्मी है। वह उपमो ही अगर बचता हा जाय ताकाग बार रिपना है । भर मत घर व डा आवर पूछन हैं-'टगर वर्ग है टगर कहाँ है । हाय, बचार दिल वलान आते हैं 'नरामु लिये लौट जात हैं । देपार तग्ग जाता है यदा । याती मी पाइम नगह टाराना नरी चाहिए । इसम तम्हाग भता नहा होगा, यह वरना दलाई। मम ना घटा तुम मग पमग माती बरोजगई मौम्पय म नयी नयी रगगा। अपना भी नुव गान मत पग और मुझ गरीब मां का भा नुकमान मत गुलीन का, 'अब म रोज़ आया वगा।' पपरानी प्यार भर गदा म वानी, मैं ता तुम्हार मन में लिए हो रहती हूँ। गम्हारी मां अगर जिन्दा हाती तो वह भी यही पहनी। पहीता गुलाबी है न । गुमावीमी ग्रहम्पी है मानिर है बच्चे का भी है। यह पग आनी है घर नाभी नागा नहीं करनी पर माराम पाजनिबटा. घर बगायोगिता पिनारगजप बरे में बगारर दूपानमालती है। मा में रात में यारह यत्र या एर यब टीच घर घनी जाती है। मुन पालानी नाना मुम्हागता महीना तर पिरापा को यात्रा ना पता पास भी नहीं सोगनो।'

शा दहाई, साग गुन्ता पप रहा पुचमा नहा वाली। पप्रगान दूध व वगरे म घट भरते हुए कहा तुमम् यह तो नापहारि अपना का मन दगा यूढे वाप का मत तमा-पाता T आर गार दिन पुनदरें उगा। यह ता हो यह ग्ा बटा ! तुम गम्प पर वो डराना पर व लिए यहाँ लायी हा हानत सच्चा होन पर स्याह गायब अपना गहम्या मम्हानांगी। तुमम वह परन का क्या पहा II, दग - मैं क्या पिशाचह नहा बना टगर से मां-बाप स पदा TIहूँ। जमान पग पगज मया झमट चल रहा है, क्या परू युछ गमन मगना जाता पागना न वाच महीरा भमर विम नहीं है, वटा । गिरे नभर नहा रे ग मिट मारही ता पटी भन भल पर प सर यहाँ दौर जात र यात मुह मगर थाना र क लिए नि साजने - ताना नहा पर दूगग हा झमट है-जगता है अय पर पानाहागामा। कपा धारना क्या होगा? गिया नादती? सानका मुगावत ता यगे है। यम्ताका मराा टग। दस पर निगा रहा था। घर वर्द माल स बहावर चौरह रुपय पर दिया है।नगन। वा परम ाग्नी होगा जरि उम मवान व पाछ मैन गोपयगर्म है। 7 तर नया जगना लगवाया है। बत दरयान आया था। बाना मरान पाना होगा। छ महीा पा गमय शिया भी तर रिमा पर नहा । अब मुना है गुले मगाएर वाम भागमगादगे। मौन मगया? बार उमान का मानिस । वा-दह पर यनेंगे, उगमे पापी रिगा प्रrmग गमयम वर्ग मे आ रग। पगनीना मग यार सामना है? उगाना है Mr?

झाई दगा मकहा ८७ मा अचानक तभी मुफ्त कमर म बापा। वोगा, आज एग-वरा बडी पटपटा बनी है। एक टलाऊ क्या, पारानी न मह बनाया। “तून का दिमाग वेच साा है । तुझे पता नही आन पूनो है? पूनो मे नि मुझ गारत माती अग का उघ नो छून दया है । यह दम नगराना नहीं, गरम दूध पो रगहूँ।' फिर जम अचानक पाद नापी। "या विद विद वहाँ गयो री, मरे लिए जग वान वा तन तो गरम करा। इमरे वा पुना की ओर घूमार कहा - दिन मे बेटी, पा नहीं पगहा गया है कमर म एम चपा चरन है गीधे यही भी नहा हा पाता । वदन म टूर रहा है । अव दाती हु दिन पूरे हा आय । मुफ्त तय तामर कमर म चना गया। उमर पाम वक्त नहीं है। गुना भी गायर वृछ और कनवानी थी कि अचानक फिर म टलीफान की पायजा नगा । युनीन कहा आज जानी मा." 'बर आ रहा है न नामां कसमें जहर आऊ। विना आप काम में चलेगा परमापा पमर गे निकल गयी। पारानी न टलीपनि वाग्मिीवर हाय मलार पहा, हता। " , ए म्या पोग पिस पान टवर पर पलाय शिवमार या गनमा तप 'पर देगा पाना की नाय-चम्ट माइड, यही जारा गोशा, चितपुर मराग नोर निदी में कुछ भी रहार नहीं Primfrमातिरामद ट्रस्ट आर हाप साता दूगगे बात है। म गार र बार म नहीं मार रहा हूँ। ईश्वी बार अनी मा मापीबाप मामा. आर. टी. गावात-पाग साह रेमनान है। उस पार यह दया मागे पर समीन पर है- माना, मी एपनि यम्नी हागा। पम या विद्याधरी तर—यह हार एग्विाम अभी मर पालो पहा या मरी ही नबर दम पर

इकाई, दहाई मकहा
गवग पहल परी।
मनायत चुपचाप सुन रहा था।
जिग ममय पारिम्नान बना सभी के ता मिर पर हाथ था।रिफ्यूजी
मा-आवर म्याटा स्टान पर जमा हा रहे थे। तुम उम गमय वापी
धारे थे । श्यामाप्रमाद वाबू और मैं इन सारी जगहा म घूमत थे । अगर
पासुन नही होता नो मैं भी ग्रेटर वेलवटा मिटी अच्छी तरह स नहीं
ग पाता । उपर यहपाजार का मारवाही वम्युनिटी न वापी पमा दिया
गवन मन न भी पगडा ग्पया पन किया । यहाँ जितना मस्जिदें थी,अघि
फाराम रिपजी वग गय । जगत् का अभाव फिर भी रहा । स्याला
बाजार मुसलमाना वी जितनी दूपाने या उनम हिदू लोग घुम बठे।'
इगर याद उग ससर वहा यह मानना तुम्हारे लिए जारी है
हमा म यह रहा है। आज तुम भी एक इडियन सिटिगन हो, तुम्ह वोर
न पाधिाार है-गा यू गुड नो। लग्नि आज तुम लोग दप रह हा
या मार दयुत बार दयुत विनना बुध हो रहा है । *सरा ष्ट तुम्हे
पान मा चागिा। पारिस्तान में न हार पर यह मव कुछ भी नहीं
हा-और अगर पारिस्ता नहीं हाता तो मरा यह लड-स्पस्यूतान भी
इतना पनारियनहरा परता।
शिवप्रमा? या जग और भी उत्साहित हो गय। 'सोचत होग,
जिनम यी यात म पॉरियम सपर डिगवान क्या कर रहा हूँ ? लगिन
नुमो तो दानामियम पर है। तुम जानन हाग राजनीति से गाय अथ
तिराषितना भल है प्राइम मिनिस्टर ये एष सरचर पर गयर
मार व भाराम पमा तजीमा जाती है इमरम्परचूनान का
भी पास है। अगर पारिहाता तो मरा विजनग भी पनारित
नही परता। मरिन पारिगान आगिर यना यया तुम जानत हा?
वपपा महीमायत को पिता पे लसनर गनन पी आरत है। आज
भी मग यह पागहा। मगवत धार यच्चे की सर पाप सुनता रहा
पानिरिमन याया कुछ पता है?
गनाईजसाय परिया।
नगवा मगम मा गए माया पसगे। हिन्दी पापिया

। 7 ८६ इकाई, दहाई, मका भा वटुन-कुद लिखा है । मैं उम मब के बारे म नहीं कह रहा। असनम, में इनसाइड सर्विन म या न, इसी म सीट जानता हूँ। पाकिस्तान को जम विसन दिया कहो न । ब्रिटिश गवनमट ने " सदावत न पिर भी कोई जवाब नहीं दिया। 'नहीं ब्रिटिश गवन मट नहीं । तब विमन ? कौन? महात्मा गाघो? जवाहरलाल नहीं सरदार पटर' मुहम्मद अला जिन्ना लियाक्त अनी मा महरावर्ग? नहीं, नाजिमुद्रीन माव? वह भी नही तोकौन ?' शिवप्रमाद बाबू जम क्मिी ममा म भाषण दे रह हा । 'अमन म इनमे म बाइ भी जिम्मदार नहीं है, इमर पीछे न हिन्दू हैं, न मुमलमान-पीय है बहकर सामन की ओर जरा मुत्र । आवाज जग धीमी की। बाल, 'मैं उम ममय हाइ कमा- वे इनर मदिन म था, जमली मोरेट तुम्ह में वनलाता हूँ तुम्गरा जान रखना जरूरी है असल सीक्रेट थी कौन जान क्या मीट थी। शायद कोई मीनेट होगी, लेकिन वह मापिन नहीं हो पाया । अचानर टलीफोन की नावाज म सब गोलमाल हो गया। शिवप्रमाद वावू न रिमीवर उठाकर कहा, हता।" फिर बहन लगे, 'हाँ हाँ, जान । दम्नावज, डीडम-मब मरे भाफ्गि म ही हैं साल पुलिस का भावह रमृगा। इतनी जिम्मदागे मरी है। लेकिन मुझे लगता है रिपयूजी ना कुछ गडबड जर करेंगे। लक्नि जब डिकी हो चुकी है इजकरमट बार निकल गया है तर दमुल करने के लिए मारपीट धार उपाय हा वाद जबरम्नी जा जब मारिन हा ही गया है समा गया, मैं पपग सेकर अपन लटर को जापर पाम भेज रहा हूँ हाँ, मरा लडका। उसको मारा गरवार सममा रहा हूँ और पसायच्या नमम्कार। रिमीवर गार आवाज, "दयनाथ, द वावू का दला हिमावाद पदबटान हहद डाव अन्दर अप।निवप्रमार वाचून कहा, हिमाशु वा जावपुर को जमीन व जा एएम अपने आफ्रिम में है वह पाान सादा जरा । मनात वह मर लेकर गोलद वाव पाम जायेगा। हिमा वायूचर गये।शिवप्रमाद वावुन रहा, 'तुम्हें भेज रहा हूँ क्योंकि

१०
इवाई, दहाई, सकडा
तुम भी पुष्-युध समझ लेना चाहिए । अपनी पम के एडवोरेट गोलक
बाय गारविहार्ग मरवार। उनो साथ मुलाकात भी होगी, जान
पहचान भी हो जायगी। हो जात्यपुर की वस्ती भी तुम्ह एस दिन दिखला
गा रिफ्यूजिया ने उग जमीन पर मकान बनारर मौरी पट्टा पर
। जग गोचो उस प्लाट को अगर येच भी दूं तो इस समय कितना
शहाणा ' और कुछ हा अगर वम विराय कपट ही बनवा दिये
जाएँ नाभा हर माने रम-गरम स्पिनीट मित्राटी परसेंण्ट प्राफिट
भगा । मातिए तो वह रहा था कि पारिम्नान व वनने से अपना तो कोई
नागान महाहा । तुम्ही वहा न पाविस्तान न हान परश्या रिपयूजी
पोआन और रिप यूजी लाग अगर हा जाते तब क्या जमीन वा भाव
घाना या जाता ' तुम्हा यहो न-यह तो एक तरह से अच्छा ही
प्रा।
तभा पादपि हिमाशु चार आ गये गिरप्रसार वाबू ने सारे पपस
न कापारिय। फिर यहा 'यह लो और गोला या कामान
सहारा टाला मा म है। नहीरा टोना सन पहचानते हो न । और अगर
Tो मानम मा मज जानता है । रज बतला दगा । जाओ! कुछ पहना
TET गिर पपम ददना । यह गाहा सब समझ जायेंगे।
नारीया गावन जस उस।
पा गालार उठ गाहमा । बाना 'अच्छा"
पन र IT पर हो गया। यह पिननी ही चार बाबू को यहाँ
यकीर गरमान पर लाया है। इस जगह को अच्छी तरह से
पापानाम मस्तिपुर राइ पर दृफिर स्यादा रहता है । सक्ष
माग है। उगो म दाम-माशाभी सभी यारी गमय के लिए फिर
गामा है। मरिन पज सया मा दादपर है । मिजाजपा मी टा।
आरमोरीशे ओवर-टेर परायी भीमति नहीं करता । यह
गमगारडायपर था।
सपिली गीटपर बगपामपिन जगधार नहीं रोष पापा ।

माई, न्हाई मात
गा। चनाते चनात ही कुज न पीछे मुहकर दवा। मान पूछ ही
वठा, 'जगरी टाला मेरपड बाई लन पहबानत हा"
बन मब जानता है। हाइव पत-रत पसरा हा चुरा है। वोरा,
"जानता हूँ घाट या
'पाले वीरमाहाका पर पड़ेगा या माद बार न पगा.'
मर-बाई लन पहल परेगी रिन उम गरीम गाडी तो जा नहीं
-
मनात ने कहा 'पहले तुम वहा चरा । मुन एr मिनट म पाग
नरी गरा। तुम उली र बाहर ही मागे ना देना । मैं पदन ही जारर
अपना राम निपगा।
गच हो ना त्या तास गन को वान बाहै
गाय वाम ता है न मा अलावा जर का रनरालो लहरी
नामाहामिया आना-जाना भी हाफिर भीलवीन
पग पा-द- पर जान लाया नहीं है। शायद ति पुगन टूट पटे
मानमरमर साररता गगी लमनगम की पाबात है
जतिराम बार-लोइ रे या मो भी TT नि राज का
गनसरजिन बैंगन पाटिका म गयी, वह नाना आदमी
त है। उनकामा वापर न माग यह मात शिराय काही हा तब
माधम नर्ग है। बम-गे-बम प्रहाद-गो पर गिया नादत हीही।
मेरिनानी गुगर बरा है मशिन नहीने का मुना।
सानियामनाराज व से नाराज अनायबालातोम
मोग है।
मर-बार सन घाटदार का नाम नहीं जाती।
मनन गारामबार निानर मनी राजार तारा मेंगरी,
शिनि । द गे मग हेर नारया हास होजन म
तापाता रमादावारा प्लास्टर मम जमदार पिता
II बना एनालिनाने पाम रेभान राडा
रामा मामार यह ग्रापासपोर का और नागपका
marमुनारीदरान।

६२ इवाइ दहाई, मपडा मावत न परिट मे नागपुर बाहर निकाली। इसे पता याद ही या फिर भी पवार मिना सना अच्छा होता है। बत्तीस-बी, अहीरी टानागप-याई लन। दायार पर लिग मकार-नम्बरा या देयता हुआ सदाबत गला के अदर पुरा गया। L U हिमा वायू पिछा गोत्रह माल से इस लड डेवलपमट सि डोक्ट गि म काम पर रह हैं। वार ना देगत ही समझ जात हैं जमान पगा है। पानी पता है या नहीं। जमीन ढालू है या एवमार। हिमा बार यो यर मर किमा न गिरा लाया नहीं है । पहल एप वकील ५ पर्ग मीगिरी परन पे। शिवप्रमा? वा उह वही ग ले आय थे। उस ममय जापिग पाग था। प्ता पार नहीं थे। हिमाशु बाबू ही मनेजर अनी गर उपप।शिवप्रमा वान को आपिम दमने का समय ही कितना मिनाया। ग्रिटिस गरनमा अभी जान ही वाली थी। हर ओर बदइत जामा पती पा। यामाप्रमार याद गर म मिनिस्टर हो गय । यार-गस्त गभी मिनिम्बर नहाता पामिरी रात्रटरी। सभी न सोचा शिवप्रमाद यायभापहा मिनिस्टर हा जायग। या ता मिनिम्टर न तो स्टेट मिनि परनीता डिबार वार रिल्ली जा रह थे। सnि बुध भा नरा हुए। पाय माचा होगा नि मिनिस्टर बनारही पामगे ' गाय म पगडा पहन पारामा धूमगा गादी मिलगी हा गवता है मागतना पगार मिल । पर करवान पर हर यन लाल पगाया परग रा| ति यम इतना हा । मिनिस्टर ता यम भी हाथ म रहेंगे ही। वाम पार्टी भी हाप म रहगो । पायदा बदर रा ही होना है। फिर बार मगमगार कोषमा जमरत । टीप पिया सिंग हान म पिंग मरर हाना यही यग्या है। शिवप्रगार याच वहा हुए। पर आपिम या नामग्गिामाद न माल मिया। निगा वायून आमो भया पाया। माय माना और हिगाया--हिमा गुबार म तीन गुण 21 शिव air बार पिया हिमाशु याव मारत मापामयान गमभान

साइ, दहाई, माडा
लग।
गिमागुवा क्ल, “य पुगना फाइने पर दथिए।
एर गटर फाइल टवारे पर गय पिताजी नहीं हैं। दूसरे
दिन म हो गवान दार वस पर आश्मि जा पहुँचना । मालिन नाम
पर माता मगन था। गुस्- म पितारी की चयर पर बटन जरा
मिनाहाना नमाजी मुभाष राह की एर वडी विलिंगा की नौकरी मजित
पाटनीच का दान पर दिखाया दना लान-मोजाइन
गादिया और चीटी जम जामिया की माटबजा दीकर परसान
मार चीटियो मर कोहरा मान जाती है । और मिर पर भरी पाना
पाय पहाड और नादार गायिनूमिट ' चारा भार पेंटेड गा
पारानीवार पर लान-की-लाइन को गायानो पर माडे यर
हैं, जशहरलाल नहर माइकारान र मामन मुटटी बाप भापकर रहा है।
মিণির ৪০ গান য দ বাকিমামামামা
मुरी र माय।
चारा पार पाडापनमदात मारन गता। रही-मर
माम जाब छिा हुआ गदा उटना। पर भी काम मर या
उनगाधिकारी है। हागरता है वह "म वा वाडयाना फिरना
उत्तराधिकारीना बहा है। राम गोग्य का उत्तराधियरी इमर एवय
या भागौर। यह जानाही या पुरता है। पार उम पुराने का काम
चना लिए यहाँ बटा गया है।
प्रामार माता में आमिर तर पराजमान र
माने में गुरवेचन ता । लरिन युद्धनी ममम मन आपा
Fऔर
नियम नी धरने नहा पहा। जम मगरम
पोशाम-वर परिना इमो परमाम और न मियन में वनरे
जावन मानमत निरनता है । यी अमृत चर में सरर मधुचर मा यष्टि
उमरिन यह और नहीं गा पा था, अागिमा वायू हम
परनामनी
गिधौरीदरम

इकाई, दहाई, मकडा ' इस फम की। मान हर महीन इस फम से पिताजी क्तिना ड्रॉ करते हैं ? हिमाशु बाबू ऐसे प्रश्न के लिए तयार नहीं थे। फिर अपने को सम्हाल वर बोले, हम लोगा की बलेस शीट है। अपनी बले स-पीट हम लोगा को ज्वाइट स्टाक कम्पनी के रजिस्टार के यहा सबमिट करनी होती है। मैं दिग्वलाता है । अभी लाया। सदावत ने कहा 'नही नही उसकी कोई जरूरत नहीं है । मैं ज़रा ऐस ही जानना चाहता था। इस बिजनस से पिताजी की एप्रोवसीमेट इनम कितनी है ? आपका तो मालूम ही होगा। शिवप्रसाद बापू ही तो इस कम्पनी के मनेजिंग डायरेक्टर हैं उह अपने दोयस का डिवीडेंड मिलता है। इसके अलावा एक एलाउन्स है साढ चार सौ म्पय महीने का। साढे चार सौ रुपय। सदालत ने मुह मे कुछ नहीं वहा । सिफ साढे चार सौ रपय । पिताजा की इसम इतनी कम है ? इतना बदा मकान, यह गाडी, डाइवर, नौकर घावर, महागज महरी-मब साढे चार सौ रुपय मे । लेकिन कुज की तनस्वाह हो तो अम्मी पिये है। और भी कितने ही खर्चे है । सभी तक उसर कॉलेज की फीम थी मास्टर माह की फीस थी। फिर उसकी कितावा या खर्चा। उसन खुद तान जाने कितने रपयो की किताब सरी हाती हैं। जब जो चाहा उमे मिला। उसी गाडी पुरानी हो गयी है फिर भी उसका खचाता है ही। हिमाशु बाबू शायद सदाव्रत के मन की बातें समझ गये । बोले,"अपनी कम स्याा रिच ता नहीं है। इस समय उतना प्रापिट कहाँ हो रहा है जब ता किनन हो लड स्पवयूलेशन आफ्यि हो गय हैं, कई राईवल कम्पनियाँ हो गयी हैं। पर्ने जसा प्रापिट अप वहाँ है । साबन ने जवाब म मिफ कहा, जाह 'इमो से तो अपने स्टाफ की तनम्वाह भी नही यदा पाते। 'एक कला को वितना मिलता है। हिमावाचून रहा, जा देना चाहिए उतना नहीं दे पाता। वह जा - इकाई, दहाई, मकडा इस फ्म की । माने हर महीन इस फम से पिताजी क्तिना डा करते 2" हिमाशु बाबू ऐसे प्रश्न के लिए तयार नही थे। फिर अपने का सम्हाल कर बोल 'हम लोगा की वले स शीट है। अपनी बलेन्स शीट हम लोगा को ज्वाइट स्टाक-धम्पनी के रजिस्टार के यहा सबमिट करनी होती है। मैं दिखनाता हू । जभी लाया। सदावत ने कहा, नही-नहो उसकी कोई जरूरत नहीं है । म जरा से ही जानना चाहता था। इस विजनेस से पिताजी की एप्नोक्मीमेट इन्कम क्तिनी है ? आपको ता मालूम ही होगा।' शिवप्रसाद बाबू ही तो इस कम्पनो के मनेजिंग डायरेक्टर है, उह अपने शेयस का डिवीडड मिलता है। इसके अलावा एक एलाउन्स है साढे चार सौ रपये महीन वा। साढे चार सौ रुपय। सदारत ने मुह मे कुछ नहीं कहा । सिफ साढे चार सौ रपये । पिताजी की इसम इतनी कम है ? इतना बडा मकान, यह गाटी डाइवर, नौकर चाकर महाराज महरी -~-सब माढे चार सौ रुपये म । लेकिन कुज का तनम्याह ही ता अस्सी रपय है। और भी वितन ही खर्चे है । अभी तक उसक कलिज को पीस थी मास्टर साहब की फीस थी। फिर उसकी कितावा का खर्चा । उसने खुद ही तो न जान क्तिन रुपया की किता खरीद डाला हैं । जव जो चाहा उस मिला। उसरी गानी पुरानी हा गया है, फिर भी उसका खर्चाता है ही हिमाशु बान शायद सदाव्रत के मन की बातें समझ गये । बोले, अपनी फम ज्यादा रिच तो नहा है। इस समय उतना प्राफ्टि कहा हा रहा है ? अवता क्तिन ही लड स्पेक्यूलशन आफिस हो गय हैं,कई राईवल कम्पनिया हो गयी हैं। पहा जमा प्राफिट र कहाँ है ।' सदावत ने जवार म मिफ कहा, आह । "इसा स तो अपने स्टाफ की तनख्वाह भी नहीं बढा पात।' एक क्तक का क्तिना मिलता है। हिमाशुवायू न रहा जा दना चाहिए उतना नहीं दे पाता। वह जो । ।

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इकाई, दहाई, सकडा
'नही कहा कुछ भी नही। पिताजी को पूछ रही थी। मैंने कह दिया
दिल्ली गय है।
हिमाशु वाबू ने कहा जोह, जब सममा, शायद पाक-स्टीटवाली
प्रापर्टी के बारे म बात करना चाहती होगी मैं ठीक से नही जानता । अंग्रेज
लोग तो जा रह है न अव सब कुछ मारवाडी लोग खरीद लेना चाहते
"
मदानत ने कहा “अच्छा जाप जाइये मैं फादल देखू ।"
कहकर जस हठात याद जाया। गोला "एक बात और हिमाशु बाजू
उस वस्ती के मामले का क्या हुना? वही जिसकी फाइलें लेकर मैं उस दिन
गोलक बापू के यहा गया था उसका क्या हुआ
उमका मारा इन्तजाम हो गया है।'
क्या इन्तजाम?
"वकील का काम वकील ने किया। उहान पपस वगरह देख लिये
है । हम त्रागा की ओर से कोई पला नहीं है । जब सिफ कब्जा करना बाकी
-
वजा करना माने?
हिमागुवाबू ने कहा ये सब रिफ्यूजी लोग यहाँजाकर जम गये हैन ।
किमी जमीन है कुछ ठीक नहीं जिसे जहाँ जगह मिली घर बनाकर जम
गया है। जबकि दखिय इही लोगा का गवनमट में हजार रुपये लोन और
कम्पनसेन + मित हैं कपडे की दूकान खोली है। खा पीकर मजे स
घूमत है। पाकिस्तान म जा लोग जाये है--इन लोगों की वजह से बम टाम
नर म जगह ना मिलती। जापको ता मालूम ही है । जसे यह इही का देश
हो। हम लोगो को तो जम जादमा ही नहीं मानते।'
'तो नहीं मानें बव क्या मुकदमा करके इहे हटायगे ?'
हिमा वायू जरा मुसकराये । बोले, "नही नहीं, मुकदमा करके क्या
इन नागा को हटाया जा सकता है । जहाँ जा जम गया है उस वहाँ से
हाना मुश्किल है । गवनमट भी उन लोगा स कुछ कहने की हिम्मत नही
पर माती !'
क्या गवनमट क्या डरती है !

. इकाइ, दहाई, सरडा हरगा नहा? उन लागा का नौ ता वाट दन का अधिकार है। चुनाव हान बाल हैं, दसाये उन्ह नाराज नहीं करना चाहती। कम्युनिस्ट ना नी नो उही लागा की वकिंग पर चुनाव लड रह हैं। गवनमट और अदालत I कुछ भी नहीं हारा। "तब उन लोरा को कसे हटायगे ? "मारपर । राता रात काम खत्म करना होगा। नहीं तो उन mn पोध कम्युनिस्ट पार्टी है। आर रापट जमा कुछ हाजाय ता हमला किमान-सम पंन जायगे । इमी स वह सब ममता नही परना है। हम सा का मय इन्तजान है। किसी दिन मिड-नाइट म जाार मर नापड वगरह ताड फाडकरार लेंगे 'सकिन व नाग जायगे कहाँ ? यह व ला सन । रारट पार का दम वाघा जमान हम नागा न रमा तरह रिक्नम कर ली। और अपन इसी मुदत वे एक विजनेसमन हैं। उनमी भी उपजमान रिपजिया न दवा ली थी। उहान मनमनमात समसामTITाजारमान माल हा पर माता भी चल रहा है, उस पर नो सत्र ए मा अलग। अभी तर का पता नहा हो पाया है। शिवप्रसादवा मन वारिस बहा कि विना मार नायर ना जानयान नहा है। जब तक दावार का निर नहा पूरा दन लामा भी नमन न नहा आपगा।' उदिन रान का ना महारत टमी नार गलाज रिपपूजा कालाना सापाया। उमा दिन का वा उमबार आन गामक करिनार का बच्यो 'गमा उमान पर फट चियडा टाटा स्टामा और याचिया रानागापडे तपार रिय है। मगर जातिको बयर पर बटा पठाउमायनाको सपना परन उगा । हिमाशुवास वर वार कगारप हो तारमा वनपट दिल रहा है। अभी आप्रिनाम शायद एक-एक हिना वा हात हैं। उन लागा कति आफ्रिमा रिन्दा है। आरिपुरोधाराधारावाला मनारदाना बजट और वनन्म-पाटन नागा कारवान पर रहत है। बुध हा दिना म मगरतरा पता लग गया किहिमागु बार गुरमीएर शादल हैं। हबारा-नागा धन-वन शाक इकाई, दहाइ, सकडा वीच एक मरा हुआ कागज । हिमागुवाबू आफिस आत ही जपनी चेयर टेवल खुद ही डस्टर से झाड लेते । हिमाशु बाबू काम करत-करते कहत 'तुम लाग सारे काम चपरासी स कराते हो यह ता कोई अच्छी बात नही है । चपरासी है माफ़िस के काम के लिए उस चाय लन क्या भेजते हो ? चपरासी क्या तुम लोगा के घर का नौकर है ? नन्दी कहता, तो हम लोगा का टिफिन की छुट्टी दाजिय ।" हिमागु बाबू क्हते, वगालिया में यह बडा भारी दोप है । हर बात में वहस करेंगे। वगाली वहस करने म हो गय। मिलिटरी म क्या ऐम ही बगालिया को नहीं लते" सदाव्रत अपन कविन में बठा-बठा सब सुनता । मुनने म खूब मजा जाता। 'कहता हू, टिफिन करने का अगर इतना ही शौक है तो गवनमट आफ्मि म नौकरी क्रोन | सारे दिन वठे वठ घटा भर टिफिन रूम में विताकर मजे से घर चल आते, यहाँ क्या आ गये । हम लाग कोइ खुशामद करने तो गये नही 4 ' तुम लागा को बुलान भी नही गये थे कि अर भाई तुम लाग जाओ तुम लोगा के बिना मारा काम-काज रुका पडा है।" तभी एकाएक गल की नावाज बदलकर कहते "दत्त, चिटठी टाइप टाइपिस्ट दत्त कहता जी जरा देरी होगी इस मशीन से और काम नहीं चलेगा। एक नया मगीन मगाइए।" हिमाशु वाबू कहते वह तो कहोगे ही । एक दिन मन अक्ल ही उस मगीन परटाइप क्यिा है । अकेले हा आफ्सि की सारी फाइलें क्लीयर की हैं, और आज उसी काम के लिए इतने सार लोग हैं। मैंने मालिक से तभी पहा था ज्यादा बादमी न लीजिए । ज्यादा लागा सजा काम होगा सा तो दौरा रहा है। नन्दी में गायद और सहा नहीं गया। बाता, 'लेकिन हम लोग काम नहा परत हैं तो करत क्या हैं ! आप सामन हो ता वठ हैं।" एसा घाटी छोटी वानाकी वजह से सारा बाफ्सि जस पत्थर हो गया इकाइ,हाइ, मकहा 1 - था। सदावत इनक पहल ना नहा जानता था कि जहां से उसके घर की नाय हा रहा है, जिस पर स उमसी म्या चलता है, जिस आप के बूते पर उसकी मुद की पढाइ लिगइ हुइ, वहा न इतनी शिकायतें इतना बरा- ताप । इनम पाईना ताबा नहीं है । इन लोगा का साठ या सतर रपय महाना मिलत हैं। और सदावत अपना पहा क पदानम ही ता पचास रुपय उड़ा दता है। एक दिन हिमा वा वविन म आय। उदारत ने कहा, "अच्छा हिमा वायू एक बात पूछना थी।" 'कौनसी वात कहिए?' कह रहा पारि क्या इन नाका, मान इन्हीं कुद क्लर्को का वनम्बाह नहा वढायी जा सकती। यही काइ चार-पांच पर महीन।" 'चुप, चुप।' हिमावाचू न बार कहन हुए अपन हाटा पर बेंगुनी रपी बोर वाल, ' व लाग नुन ली। इनना चार मन कालिए।" मनात न नावार धीमा करत हुए कहा नहीं, एक दिन दा, टिफिन समय उधना नहा उपाय । निफ चाप पावर हा रहा। और काई बान नहीं है। अस्ति रहानाय घर म मर सिएना नाता है, यह उन लोगों को मालूम है। मिाा बाबू पुनपुनाए, व और आप न नागा व माय अपना तुलना कर रह है. नहीं तुलना नहा कर रहा रिन गान ममय जान का जाता है। बर्गनाय सप्त धाता है, वादउनुहाग।' हिमाण वारन गरा, 'अर नहा रा रा ना निरिए। न सामान पर लिप कुछ ना नहा का है। इस नौकरीन पर हा पर पान रह है। यहाँ नोरम न मिलन पर पपा करत जग मुन्' थार वनस्याह बहान का नाम न साजिशान नोगा। यह मिजेगा।' मुरारत न रहा, नहा मैं ना एम हा बह रहा था। गार बना . नही, बार बार वह व मन रहत दगा है वापर महान वान 1 उन नागा पर ना पड़ेगा। दादा गम म बापजा, नहीं दा पराव

Ikai Dahai Sekada

Author
Vimal Mitr
Title
Ikai Dahai Sekada
File name
Ikai Dahai Sekada
Text
OCR done
Citation
1966
Published
2010/12
Publisher
Radha Krashan Prakashan
Language
Sanskrit
Pages
101
Library
Bhartiya Vidya Mandir Shoudh Pratisthan,bikaner
Classification
History
DLI number
515014
Barcode
4990010022675.00
Scanning centre
C-DAK, Kolkata
Digital publisher
Digital Library Of India
VMLT id
BmEZTCieLPQ
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