Bhartiya Vidya Mandir Shoudh Pratisthan,bikaner

Rajasthan Bhu Rajasv Adhiniyam 1956

2010/12

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राजस्थान
भू-राजस्व अधिनियम,
१९५६
(राजस्थान लेण्ड रेवेन्यू एक्ट)
(एक्ट मरया १५, सन् १९५६ ई०)
(पातरकार)
जी एम गोस्वामी
सशोधनकर्ता
ची एल पगारिया
प्रकाशर
वाफना बुक डिपो
चौहा गम्ता, जयपुर
ससरण १६६८ ]
[ मूल्य ५) १०

पारना पुक डिपो
पौग रास्ता
जयपुर
सर्वाधिकार प्रकाशक द्वारा सुरक्षित है ।
[ प्राधिकृत अनुवाद ]
मुद्रक
कीति प्रिन्टर्स
महावीर पार रोड
जयपुर-३

अनुक्रमाका राजस्थान भू राजस्व अधिनियम १९५६ अध्याय १ प्रारम्भिक धारा विषय १ सक्षिप्त नाम विस्तार एव प्रारम्म २ मधिनियम से अप्रभावित कानून याख्या पृष्ठ स० श्रध्याय २ ३ ७ ४ राजर-मण्डल मण्डल की स्थापना एव निमारण ५ सदस्यों की कायविधो ६ बाई की वठक का स्थान सचिवालय अधिकारी वोड को शक्तिया ६ अधीन राजस्व प्रदालत पर माम निगरानी मण्डल के क्षत्राधिकार का प्रयाग बच को परामश हेतु मामला भेजने का अधिकार १२ क्सिा प्रश्नको उच्च यायालय के विचाराय भेजना १३ मतभेद की अवस्था मे निणय १४ रजिस्टर माटिका रखा जाना ५ ६ ६ अध्याय ३ गतम न्यायालय धौर अधिकारी (4) क्षत्रीय विमाग १५ पत्रीय विभाजन १६ डिविजन मादिक निर्माण मूसन तथा परिवतन का अधिकार (स) यायालय एव अधिकारा १७ (वितापित) १८ सेरमेट जमिश्नर मोर प्रतिरिक्त सटलमेट पमिश्नर स्पड रेपाड हाइरेक्टर भोर सहायर मूलस मध्यप 1 ७ .

C ८ द [ 1 ] २० माय मधिरारिया को frगुक्ति २०का राजस्व प्रपोल अधिकारी पदेन नियुक्तिया २२ नियुक्तिया को विज्ञप्ति (ग) शक्तिया २३ निय पाक्ति E २४ राजस्व यायालया एव मधिकारिया को क्रमगत प्राधीनता 8 यायालया मोर मधिकारिया के अधिकार एव पत्त व्य १० २६ यायालया अधिकारिया की अतिरिक्त शक्तिया २७ यायालया एवं अधिकारिया के प्रात्मजात अधिकार १२ २८ स्थायी रिक्त स्थानों का प्रस्थायो काल के लिये अधिकारिया द्वारा सभालना १२ २६ अधिकारियो को अस्थायो अनुपस्थिति (म) पटवारी कानूनगा और निरीक्षक ३० पटवारिया के सकिला का निर्माण एव परिवतन ३. पटवारिया की नियुक्ति १३ ३२ भूलेख निरीक्षण सकिला का निर्माण एव परिवतन गिरदावर कानूनगो या भूलेख निरीक्षक को नियुक्ति १४ ३४ सदर कानूनगा १४ १४ १४ - ३५ पटवारी एवं कानूनगो की याग्यतायें मादि २६ भलेख तयार करने के लिय आवश्यक सूचना देने का उत्तरदायित्व (ड) ग्राम अधिकारी तथा क्मचारो ३७ (विलोपित) (विलोपित) (विलापित) (विलोपित) ग्राम सदर ૪૨ रिक्त स्थान ग्राम सेवक पत्रिका For ग्राम सेवा का पारिश्रमिक ४५ परिथमिक कुर्की एव हस्तातरण मे प्रप्रभावित रहेगा SHE ग्राम सेवका के क्त्त व्य नियुक्तिया करने की प्रणाली * नियुक्ति के लिय अयोग्यतायें लम्बरदारो तपा प्राम सेवका को दण्डित करना, मोत्तिल करना मौर उनको नौकरी से हटाना ग्राम प्रहरा को पुलिस अधिकारिया के प्रतगत रखने का अधिकार F ७८ ५५ 30 अध्याय ४ रानस्व न्यायालय तथा अधिकारियों की कायप्रणाली न्यायालय बैठने अथरा जाच पड़ताल करने का स्थान १७ ५२. भूमि पर प्रवेश करने सया पैमाइश का अधिकार १८ ५३ बोर्ड इत्यादि के मामलों को स्थानारित करने सम्बधी सरकारी अधिकारी १८ ५५ अधीनता से अथवा अधीनस्तों के मामले स्थानातरित करने के अधिकार १५ मामला का एकीकरण ५६ यावेदनपत्र तथा उपस्थिति इत्यादि कोन १६ राजस्य यायालयों अथरा अधिकारियों की व्यक्तियों की उपस्थिति और अपना को प्रस्तुत करने तथा साती ग्रहण करने के सम्बन्ध मे शक्तिया १६ सम्मन इस्ताक्षरित और मुद्राकिव होगे सम्मना की तामील ६० नोटिस को तामील करने की प्रणाली २१ ६१ घोषणा प्राशित करने की प्रणाली ६२. फोइ त्रुटिनश पोपणा या सूचना पर प्रमाय नहीं होंगे २१ ६३ पक्षकार की अनुपस्थिति में सुनवाइ फरना २१ ६४ सुनाइ को स्थगित करना २१ धारा ६३ २ अधीन निसले गये पादेश के विरुद्ध कोई अपील नही सुनी जावेगी ६६ व्यय दिलाने और वितरण करने का अधिकार २० ६७ धुटि प्रथा भूल का संशोधन २२ ६. पर निर्णय के लिये मामला भेनन का अधिकार ६५. पच निर्णय के लिये प्रपिन मामला की काययाही पंथनिर्णय कोरा करने पे लिये धावेदन पर ७१ पंचनिर्णय के अनुकूल निर्णय देना २३ ७२. दीवाना अदालत म पुनरावेदन प्रयया याद दायर करने पर पचन २३ १३ पल सम्पति का पर समपर्ण ६५ 1 7 ૨૩ अध्याय ५ पुनरापदन, अभिटश, निगरानी तया नरसानी इम अधिनियम द्वारा स्त्रोत पील ४४. प्रथम पुनरावेदन ७२ द्वितीय पुनरावदन ७ पुस मामला मे पुनरावेदन का निपथ पुनरावेदन के लिये अपधि २३॥

८० २६ [ 1 ] विवाद परत २५ अपोलेट अथोरिटी पी शक्तियां २६ ८१ अधीनस्थ यायालय की प्राज्ञा के इजराय को रोकने की शक्ति पमिश्नर पे अभिलेस (Record) आदि मंगयाने पे अधिकार और सरकार अथया बोर्ड को मामला विचारार्थ भेजना २६ ८३ रेकड मंगवाने एवं आदेशां के पुर्नवाचन की सरकार को शक्ति ४ रेकार्ड मंगनाने तथा आदेश पर पुर्नयापन करने सम्पधी घोर्ड से अधिकार ७ ८५ सुनवाई ५५ राज्य सरकार द्वारा नजरसानी ८६ बोर्ड एवं न्यायालयां द्वारा पुनर्विचार एस्ट सं०४ सन १९०८ का प्रमार २८ १७ २७ २८ अध्याय ६ १८ २६ ३३ ३४ भृमि जिन पर किसी दूसरे का अधिकार न हो वे समस्त मार्ग व समस्त भूमि राय की सम्पत्ति होंगे। म सनिज पदार्था खान खोदने और मछली पकड़ने का अधिकार रानव या लगान को अदायगी या उत्तरदायित्व समग्र भूमि पर ६०क कृषि की भूमि को गैर कृषि कार्या में प्रयोग ११ भूमि पर अनाधिकृत आधिपत्य ४२. विशेष कायार्थ भूमि को विलग करना ६३ चारागाह के उपयोग का नियमन १४क खण्ड के किनारे वृक्ष ४४ख अनधिकृत स्प से काम में लिये गये मिना श्राक्षा के पेडों आदि की रकम की वसूली ५ आनदी का विकास १६ प्रीमियम की दरें क्लस्टर नियत करेगा १७ श्रानादी की भूमि की निलामी घास भरने के कोठे तथा फूडा रक्ट भरने की भूमि गावमे भवन निमाण के नियमन की शक्ति १०० प्रोद्योगिक एयम् व्यायसायिर क्षेत्रों की भूमि का विनय १०१ कृषि कार्या लिये भूमिका आवंटन १०२, विशेप शना पर तथा कृषि के अतिरिक्त अय कार्या के लिये सरकार द्वारा भूमि का मास्टन १०२फ भूमि जो स्थानीय अधिकारिया को सौंपी जाय प्रकरण ६ क लिय भूमि और पावारी का परिभाषा ३५ ३७ ३८ ३८ ३१ ३६ ३६ [v] १०४ स्थानीय सस्याओं द्वारा जिन ममनों में रापन अधिकारियों के अधिकार प्रयोग में लाये डायेंगे १०५ रान० टन सी अधिनियम संरया ३ श्राफ १६५५ की धारा ३१ के श्राधीन थासामियों द्वारा प्राप्त अधिकार अप्रवाहित ४२ अभ्याय ७ भूमी-मापन और अभिलेज स्ग्रह (क) सामान्य १०६ मूमापन तथा पुन भूमापन १०७ थभिलेख समह कार्यक्रम १०८ भूलेखाधिकारी ४१ १०६. फाय के सम्पादन का विवाद ४१ (स) सोमा चिद ११० सीमा पिदों की भूमापन मे सहायता १११ सीमा सम्बधी विवाद का निणय (ग) नशा एवं खसरा ११२. नस्शा पसरा पनाना (घ) अधिकर धमिलेख ११३ अधिकार अभिलेख १११ अधिकार अभिनय के अग ११५ ऐसी भूमि के सम्बध म याद ग्रामरित करना निसा कोई स्वामी न हो ४३ ११६ अनाधिरत भूमि को सानिक कार्यो म प्रयुक्त किये जाने की प्रक्रिया ११७ ऐसी भूमि पर मीमित अधिकार होने की दशाम कार्यादी ११८ निधरण एवं युदयात भूमि का रकार्ड ११८. किसी गाव की भागदी का निधारण प्राम पनि १२१. सनीनी मे दर्ज किये जाने वाले रिसरण १२२. राजा पा सत्यापन और माटों का निर्णय १२३ घासामी फे वर्ग का निधारण १२४ देय राम अया लगान के सम्बय रियाद १५ अधिसर ममिन्नेव की प्रविष्टियों के विषय में स्टायेगये मागप्रनिपटारा र यनमान लेल मंप्रद का प्रयोग ४६ १२७ भूमापन एवं भू-रेस कार्यक्रम की समाप्ति पर विचाराय अपिष्ट रियाद १२६ , ७ [I] (ड) मानविन ससर सी गुग्दा १२८ सीमा सम्बधी रियाद १२६ सीमा चिह ये सम्बध मे भूमि धारिया का उत्तर दायिन्य १३० सीमा चिहो को नएफ्रन या हटाने पर शास्ति १३१ मानचिन समरे का प्राध (च) वापिक पनिका १५२ वापिस पनि १३३ उत्तराधिकारी तथा रजेचे हसान्तरण का रिपोर्ट १३५ रिपोटदने में लापरवाही करने पर दण्ड १३५ रिपोर्ट प्रस्तुत होने पर कार्यवाहा १३६, विवादो पर निणय १३७ सम्पत्तियों की विरासत (छ) विविध १३८ अभिलेखा का निरीक्षण १३६ प्रविष्ठिया की नफ्ल १२० प्रविष्ठियों के विषय मे क्ल्पना १४०क खुदकाश्त इद्रानात सम्यघि विवाद ग्रस्त प्रक्रीया १५१ निर्णय राजस्व न्यायालयों को मा य होगा ३३ ५५ ६ ५० ५१ ५० अध्याय ७क Vावादी क्षेत्रों का सर्वेक्षण पैमाइश २४१का, परिभापाये १४श्सा, सर्वेक्षण की याज्ञा दने की शक्ति १४१गा, भूमि में प्रवेश १५१धा, सर्वेक्षण का नोटीस पहले दिया जाना १५२वा धारा १४१ चा के अधीन नोटिस तामील किये जाने के पश्चात मातण कार्य का प्रारम्भ किया जाना १५१चा सर्वेक्षण का नशा तथा रजिस्टर १४१मा सीमा विहों का लगाया जाना १४१जा यस्थायी सीमा चिहों का सधारण १४१भा सीमायो के सम्मघम रिवाद २४२मा क्लस्टर को अपील की नाना १११टा पंचाट को निर्णय हेतु भेजने की शक्ति ९५१ठा सर्वेक्षण से सम्बन्धित दस्तावेजों को, सर्वेक्षण अधिकारी या सन्चाज अधिकारी के पास भेजा गाना 0 ५३ ५४ [TU] रडा नक्शा तथा रजिस्टरों म सधारण १८१दा मर्वेक्षण शुल्क १२१या सर्वेक्षण का खरचा १४१ता नोटिस की पारश्यकताबा की पूर्ति करने में विच २Rथा नक्शा, रजिस्टरा तथा अन्य दस्तावेजों का निरी पी प्रतिया २८१वा नियम १४१धा कार्यवाहिया अनौपचारिक्ना (eniormalhtr) सरना नाशो तथा रविस्टरो मे प्रविष्टियों के मन्दन्त्र : अध्याय भूपरन्ध सर (क) सामान्य १० भूप्राय तथा पुन भूप्राध ११३ पुन पदोस्त के अनुमानत परिणाम ११४ पुन पदोवस्त के श्रीचित्य को तय करने के १४ भगरपाधिकारी ११६ भप्रायाधीसारी को भूलेव अधिकारी के मं- १७ नियम (ब) लगान वीरें १५० आर्थिक सरेरण 12 पर निर्धारण क्षेत्र या वर्ग १५० मिट्टी का वर्गीकरण १०१ लगान पी दरों का शिकाम १४0 तगान दरों का आपर २५३ दरों पामगोधन ५५ निति पय अभिलेन्य मामले १५५ स्नानाप्रराशन तथा प्रस्तुतीकरण ५६ मस्ताशे पीरवीति (ग) लगान का Ex- लगान का निधारण निधारण अप्रमायित भूमि ५. विकास के लिए मुक्ति १६० लगान निधारा के ममय येनमान , १६१ पृद्धि की सीमा १२ प्रगतिशील वृद्धि S 3 V । M [] १६३ 'पाही जोत पे लगा। निधारण पे लिए अतिरिक्त प्रायधान ६०ग १६४ पर्या या निर्माण तथा वितरण ६०५ १६५ पैदागारी लगान की वसूली पर अतरिम अवरोध ६०५ १६६ भापत्तियों पी मुनयाद तथा लगान या निधारण ६०८ १६७ लगान किस दिनाक से देय होगा ६०० १६८ नियत लगान की स्वीकृति परने का पर पो विरल्प प्राप्त होगा ६०च १६६ स्वीकृति का प्रतिफल ६०च १७० जोत का अन्य व्यक्ति को दिया जाना ६च्च १७१ स्वीकृति पे उपरात जाना ६०च १७२. बन्दोबस्त की अनधि के भीतर लगान नहीं बदलेगा ६०च १७३ माम के दस्तुर का निमाण ६०छ १७४ बन्दोबस्त का प्रविष्टियों की परिकल्पना ६०छ (घ) बन्दोरा की अवधि १५५ यन्दोबस्त की श्राधि ६०छ १७५क बदोबस्त की अरधि की शुरूडात १७६ यदोनरत की पूर्व समाप्ति ६०० १७६क बदोबस्त करने के दौरान मै, अतरिम सहायता १७ समाप्त किये गये बदोबस्त के अन्तगत भूमि का नये व दोवस्त तक स्यस्प ६०म (ड) मध्यवर्ती पुनवाचन १४- अल्प कालीन बन्दोबस्त ६०म १७६. प्रवाह से हुये भू क्षय और कछार भूमि के बन्दोवस्त पर निधारण का पुनपाचन ६०म १८० सरकार को अतिरिक्त शहरी दर घसूल करने का अधिकार (च) विविध १८१ पन्दोयस्त के कार्य की समाति के समय यादोयरा अधिकारी के पास विचाराधीन प्रार्थना पत्र एवं कार्यनाहिया ६० ६०च १८३ स्वीकृत लगानदरों पर पुनर्विचार ६०२ अध्याय १ ६०२ ७०ज ६०न १८२ भूल चूक का सशोधन ६१ सम्पतियों का वितरण १८४ वितरण १५ वितरणीय सम्पत्तियां १८६ व्यक्ति जो कि रिमानन के अधिकारी होंगे १८७ वितरण का थावेदन पत्र ૬૨ ६२ ६३ ६३ ६३ [ x ] १५८ प्रार्थना पत्र कैसे प्रस्तुत हो १८४ निमिन निलों में अवस्थित सम्पत्तियों का बंटवारा १६० मागों का एकीकरण १९१ सम्पत्ति के विभाजन को रोकने की शक्ति १२ विमानन के आवेदन पत्र की घोषणा १६३ टाइटल के सम्बध में आपत्ति १४ अपील के निर्णय तक विभाजन पर रोक १५ विभाजन की पूर्णता के पूर्व सम्पत्ति की कुर्की १६६ तजबीन की प्रणाली १६७ सिद्धात के निर्धारण प मूल्याकन की शर्ते १६८ विभाजन के लिए प्राथमिक धादेश १६६ विमानन फोन करेगा २०० संविदा सम्मत विमानन २०१ पंचों द्वारा विमानन ००२ यायालय स्वयं का निभाउन फरगा २०३ विमानन व्यय का अनुमान और उसकी पसूनी २०४ अमीन आदि की नियुक्ति और यारट जारी करना २०५ पारएट निष्पादन की प्रणाली २०६ घोपणा परना २०७ प्रस्तायों पर विचार तथा दानों एवं भापत्तियों का निरूपण २०८ कृपक की जोत का विमानन २०६ मुदपारत की भूमि २१० सयुक्त भूमि का आवंटन २११ पाटित भूमि पर क्सिी हिस्सेदार का मकान या पाहा आदि २१० सालान, घुये, जल प्रणालिया और पाल २१३ देवस्थान, श्मशान प्रयया कमगाह २१४ पसंपठित विमानन अस्वीकृति का आधार २१५ विमानन फे पश्चात् रानर का विवरण २१६ यिमान का अन्तिम पादेश २१७ घंटवार के कागजात २१८. विमान पर भाटित सम्पचि का फना देना २१६. सम्मिलित सम्पत्तियों का बंटवारा २२० सनस्य का प्रपंचनात्मक प्रयया भ्रामक विवरण २२१ फम निधारित सम्पचिया अधिक निपारित फो यापिस लोटा देगी २२. एक गाय की मिमिन्न सम्पत्तियों का एकीकरण ०२३ सरपार ये सम्पत्तिधारी के मध्य में होने षाने विमानन के समय में यह भभ्याय लागू नहीं होगा ६६ ६६ ६६ ६८ ६८ ६८ ६६ ६६ ७१ अध्याय १० ७२ ७५ ७८ राजप-संग्रह २४ भूमि पर उसरे उत्पादन पर प्रथम भार के रूप में राजस्य २२५ रामस्न का उत्तरदायित्व २२६ अनशेपा के भुगतान के नियम और दोपी ७३ २२७ प्रमाणित हिसार अयशेषा की सादा होना २२८ दातव्यों की पसूली की कायपाही ७३ २२६ मागपत्र एवं उपस्थिति पर २३० चल सम्पत्ति की कुर्की एवं पित्री 3. २३१ भूमि की कुर्को २३२ कर्ता के अधिकार और श्राभार २३३ कुर्की की घोपणा २३४ दोपी के भाग का हस्तातरण २३५ दोपी के निदष्ट हल्के, पट्टी या सम्पत्ति का विक्रय २३६ भूमि का विनय भार मुक्त होगा २३७ दाप से असम्बद्ध सम्पत्ति मे निहित दोपी के हिता के विरुद्ध कार्यवाही ०३८ विक्रय की घोपणा २३६ विक्रय कर और किसके द्वारा होगा 080 पिक्य के सम्भव सम्पत्ति पर बोली लगाने और उसके ग्रहण करने पर निषेध ७६ ०४१ पिक्य को रोकना २४० खरीददार द्वारा धरोहर रसना व उसके अभाव में पुनक्रिय २४३ क्रय के मूल का चुकाया जाना २४४ पुन विश्य से होने वाली हानि के लिए नेता का दायित्व २४५ पुन निक्य के पूर्व घोपणा २४६ अवशेष के जमा होने पर विक्य की निर्मूल करने का आवेदन पत्र २४७ अनियमित इत्यादी की यनह से विक्रय को निमूल करने का आवदन पत्र २४८ विक्रय को पुष्ट अथवा निमू ल करने हेतु प्राना २४८ अनियमितता प्रथम गलती पर आधारित दास पर प्रतिपय २५० विनय के रद्द होने पर प्रय राशि की नापिसी २५१ नेता को प्राधिपत्य दिलाना व विम्य प्रमाण पत्र दना २५. विनय की श्रामदनी का प्रयोग २५३ रानस या लगान फ विपय मे नेता का दायित्व २५३ भागीदारां या सामीदारों के सम्बंध में पूर्व मियाधिकार २५५ अधिनियम र प्रभावशाल होने के समय अपशेपी के लिय प्रावधान २५६ रिविध रानरम और घय राशिया की वसूली २५७ प्रतिभूतियों से धनराशि की घसुला ७ ७७ ७- जह ७६ ८० ८० ६० ८२क ८रक ८७ अध्याय ११ विविध २५७क धारा २५६ व २५७ में निर्दिष्ट धन राशियो को वसूली के लिये प्रावदन पत्र २५७ख विरोधपत्र (प्राटेस्ट) के अधीन भुगतान तथा मागे का उपचार ८२ २५७ग व्यक्ति जिसस धनराशि प्राप्त है की परिमापा ८२क २५७५ इस अध्याय के प्रावधाना पर अधिनियम के प्रारम्म के समय देय समस्त धनराशिया पर लागू होना २५८ व्यय प्रदि की वमूली २५६ दीवानी यायाया का क्षेत्राधिकार वहिगत होगा २६० प्रत्यायोजन ८२ख २६१ नियम बनाने का अधिकार ५२ग २६२ पटवारी इत्यादि जन-सेवा होगे ८७ २६३ परिवारण एव खण्डन प्रथम श्रनुसूची (धारा २३ देखिये) “यायिक मामला की सूची द्वितीय अनुसूची (धारा २६३ देखिये सूची उन अधिनियमा की जा रद्द कर दिये गये राजस्थान राजस्व रिधियां (विस्तार) अधिनियम १९५७ सक्षिप्त नाम तथा प्रारम २ परिभाषाए राजस्थान राजस्व विधिया का साधन राजस्थान राजस्व विधियों में सामाय रूपभेद ६० ५. राज राजस्व विधियों तथा उनक मतगत निर्मित नियमा मादि का विस्तार ६ मधिकारिया तया प्राधिकारियो का निर्देश मप लगाने का नियम कठिनाइया को दूर करने की शक्ति है निरसन तथा परिधारण १२ प्रथम अनुसूची नोट ६२ द्वितीय अनुसूची (देसिये पारा ) निरस्त की गई अपिनियमितियो को मूरी है. ६० ७ २२

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राजस्थान भू राजस्व अधिनियम, १९५६ (रानस्थान लैण्ड रेवेन्यू एक्ट) [राष्ट्रपति द्वारा २१ मई १९५६ को स्वत] [एक्ट सख्या १५, सन् १९५६ ई.] [राजस्थान राजपप गजट विरोपार दिनांक १ जून १९५६ के सण ४म में प्रकाशित हुमा ] ममि. राजस्थ अदालतों रानस्य अधिकारियों एव ग्राम सेवकों की नियुक्ति उनके लगानक निधारण, सम्पत्ति का विभाजन, राजस्व का संग्रह एव तत्सम्बधी कानून के एकीकरण एवं संशोधन हेतु, एफ अधिनियम भारत गणराय के मातवें वर्ष में राजस्थान राज्य विधान सभा द्वारा निम्नलिखित रूप में निर्मित हुधा-- (नोट 'ग्राम पधिकारियों" विलोपित--राज एक्ट १८ सन १९६३ । . - अध्याय १ प्रारम्भिक [धारा १] सतिप्त नाम, विस्तार एर प्रारम्भ - ११) यह अधिनियम राजस्थान भू-रानस्य अधिनियम १९५६ कहलायेगा। (२) इसका विस्तारक्षेत्र सम्पूर्ण राजस्थान राज्य होगा। (टिप्पणी-[यह अधिनियम भादू प्रजमेर मोर मुनेल क्षेत्र के लिए भी दिनांक १५ जून १६५ से, निगनिमे राजस्थान अधिनियम १९५८ सम्मा २ राजस्व रिमाग (म) की विनाप्ति प्रमा सस्था एफ (२८१) राजस्व 111५६-fa-३-५८ को रामम्यान राजपत्र गहर arr Hairमई १५ पृष्ठ २५१ म प्रशारित पिया गया, माग हपा] (३) यह [सरकारी गट] में, राज्य सरकार द्वारा प्रकाशित शिप्ति में नियुक्त दिनाक से प्रमाय मायेगा। - धारा २] अधिनिपम से अपमानित कानून -इस अधिनियम के किसी भी प्रावधान को व्याश्या यों नहीं को नारंगी कि किससे राजस्थान भूमि सुधारण्य पार पुनम इण पधिनियम १९५२ (०२८ म ६ मन् १६२) [या अजमेर अयोजीशन धाकरटरमीस्पिरीन एप रिपोमस एक्ट १६५ (घनमेर का एक्ट ३ मा १६५५) रामस्थाा भूराना मधिनियम १९५६ या पोम्ने मन टरोटरीज एडरिया7 (जागीर 'प्रपोलीयन) ME १९५३ ( योग्रे एक्ट XXXIY प्राफ १८५४) जहा तक कि यह पायू तर यो लागू होता है गा मध्य भारत जमीदारी प्रयोलोशन एस्ट, सम्धा २०१८ (मध्यभारत पट १३ पार ५६५१) श्रार मध्य भारत श्रमोशन श्राफ नागार एक्ट मम्मा २००८ (मध्य मारन एक्ट २८ श्राफ १९५१) जहा तक यह सुनेल र क्षेत्र को लागू होता है। राजस्थान मंतिण भू-ममय अधिनियम १६५३ (कर सं० १६ सन् १६५३) या राजस्थान टीने सो एकर १६५५ (एक्ट साया ३ १६५५) या राजस्थान परायत अधिनियम १९५३ (एटा २१ गन् १९५३) अथया धारा २६३ द्वारा खपित नहा किये गये किमी अय पानून या विधान के प्रावधान की प्रभावशीलता को प्रभावित करें या उस पर प्रतिन व लगाय। (धारा ३) न्यारया (१) विषय अशा सदभ द्वारा म.प्र.प्रयंम पो... तिन न होने पर इस अधिनियम मे- (१) 'लैण्ड रेकड आफीसर ' का अथ कलक्टर से होगा और इममें सहायक अथवा अतिरिक्त लैण्ड रेकर्ड आफीसर भी सम्मिलित है (क) म्युनिसिपलिटी' से मतलब यह होगा निमसे तात्पय राजस्थान टाउन म्युनिसिपैलिटर एक्ट १९५१ (राजस्थान एक्ट २३ श्राफ १६५१) से या अन्य किसी म्युनिसिपल कानून से जो फिलहाल लागू हो से है, (ख) 'नजूल भूमि से अभिप्राय राज्य सरकार के मातहत उस आवादी भूमि से है जो म्युनिमिलिटी या पचायत सर्किल या, गार कस्मा या शहर की सीमा के बदर है। (ग) पचायत सर्किल से तात्पर्य उस मवलप से है जिसका मतलब राजस्थान पवायत कानून १६५३ (रामस्थान एक्ट २१ श्राफ १६५३ ) या अय किसी पंचायत फानून यो फिलहाल लागू हो से है। [ ] टिप्पणी -राजस्थान मधिनियम सख्या २, १९५८ के खण्ड ४ द्वारा मो राजस्थान गजट, खण्ड ४ प्रविशेषाक दिनाक १३ १५८ द्वारा परिवर्तित किया गया (२) 'निधारित से अर्थ इस अधिनियम अथवा इसके अधीन निर्मित नियमों द्वारा निर्धारित से होगा, (३) किसी पार्टी (पक्ष) पे सोन प्रतिनिधि से तात्पय इस अधिनियम के मानद्दत बनाये गये नियमों के अतर्गत किसी ऐसे व्यक्ति में होगा नो पार्टी द्वारा उसके लिये हाजरी देन प्रार्थनापत्र पेश करने एवं मन्य कार्य करने के लिये अधिकृत किया गया हो (३ का) राजस्व अपील प्राधिकारी से अभिप्राय उस अधिकारी से होगा जो धारा २० या के बतगत ऐसे रूप में प्राधिकारी नियुक्त किया गया हो, (e) 'भू प्रपध अधिकारी में सहायक भूप्रवन्ध अधिकारी भी सम्मिलित होगा, (५) गाव से अभिप्राय ऐसे भूमि खण्ड से होगा जो स्वीकृत होकर रेकर्द कर लिया गया है अथया भविष्य में स्वीकृत होकर रेकर्द कर दिया जाय राजस्थान मूगरम्य अधिनियम १९५६ ſ (६) इस अधिनियम के अधीन नियुक्त क्सिी अधिकारी को किये गय सदम का अभिप्राय रिसी एमे सदभ से भी होगा जे कि उसी दर्ने पर उसी रीति से अतिरिक्त अधिकारी की हेमियत से नियुक्त दिये गये अधिकारियों को किया गया हो, (५) राजस्थान कारतकारी कानून १९५५ (अधिनियम सरया ३ सन् १९५५) मे परिमापित श द एर कयन जहा कहीं इस अधिनियम में प्राय हा सा ही अध प्रकट परेंगे जो कि उक्त कानून में उनके साथ लगाया गया है, और (a) स्मिो अधिकार सत्य या हित का योग कराने पाने शब्द ण्य क्यन के अर्थ म ऐसे यक्ति के अधिकार, स्वत या हिन म उमके पूर्वगामी एक अनुगामी व्यक्तियों को भी शामिल पिया जायेगा। - tra 1 श्रयाय २ रासत मण्डल धारा ४] मण्टल की स्थापना एर निर्माप -(१) राजस्थान राग्य के लिये एक समस्य-मण्डल (BOARD OF REVENUE) की धापना की जायेगो श्रीर उसे अधिनियम में आगे केरल मण्डल या जोड' नाम से सर्भित किया जायेगा। (२) इम योई का एक अध्यक्ष होगा तथा अन्य ऐसे सदस्य होंगे निनकी नियुक्ति राज्य सरकार समय समय पर करगी और ऐसे मदस्यों को सम्या कम से कम ३ होगी। (३) उपधारा (२) के अधीन को गई सभी नियुक्तियों की सूचना सरकारी गनट) में शशित की जायेगी। (1) राज्य मरकार योर्ड के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के लिये योग्यतायें निर्धारित करगी - [धारा ५] मत्स्यों को कार्यविधि -[गयनर] के पादेशानुमार-योट के सभी सदस्य अपना २ पद पदण करेंगे। [पारा ६] बोर्ड की बैठक का स्थान -रामस्व मण्डल का मुख्य कार्यालय चितमेर म रहगा लेमन राज्य सरकार की शिपय साधारण हिदायतों के अधीन यह क्षेत्राधिकार में किसी भी स्थान पर बैठ कर सकेगा। - ससार ने इस पारा प्रधान रास महल सपनों की पोपटाए निर्धारित नहाको भनेर माना बनाम पाण-१८६६पार मार. ० २५. में पस मामरा पूर्ण गमालय (पुनर) में बसो स्थापना का परमानूनीरदेव बाद मयदान र ११ मन् । हारा उमरान की गई है।

४ ] राजस्थान भू राजस्व मरियम, १९५६ [धारा ७] सचिवालय अधिकारी •--योई ये लिये एक रजिस्ट्रार की तथा ऐसे फमचारीगण की नियुक्ति की जायेगी, जो इस अधिनियम द्वारा या पतमान में प्रभापशील किसी अन्य विधान नियम या श्राज्ञा द्वारा या उसके अ तगायोट के लिये नियत कतव्यों के पालनार्थ या घोड की प्रदत्त अधिकारी के लिये श्रावश्यक हो । (१) राय सरकार के विशेष य साधारण आदेशों के अधीन उपधारा (१) फे अन्तगत नियुक्त रजिस्ट्रार तथा श्रय अधिकारी से अधिकारों का प्रयोग करेंगे और ऐसे कतव्यों का पालन करेंग जिसम बोड निर्देश करे। [धारा ८] बोर्ड की शक्तियाँ --(9) गोर्ड इस अधिनियम के अथवा राज स्थान काश्तकारी अधिनियम १९५५ (अधिनियम सरया ३, सन् १९५५) या प्रभारशील किसी अन्य विधि के अंतर्गत रहते हुए, राजस्थान के पुनर्निवेदन, निगरानी अथवा प्रसंग के लिये सबसे बडी राजस्व अदालत होगी। परतु शर्त यह है कि जहा कहीं किसी दीपानी या किसी राजस अदालत के बीच उनके क्षेत्राधिकार एत्र विचाराधिकार के सम्बध में कोई सदेह या विवाद होगा तो ऐसे मामले मे हाइ कोट द्वारा दिया गया निणय रानस्थान राज्य की सभी दीवानी व राजस्व अदालतों के लिये जिसम बोर्ड भी सम्मिलित होगा अतिम व माय होगा। (२) उपधारा (१) में उल्लिखित शक्तियों के अनाया घोड ऐसी अय शक्तियों का प्रयोग करेगा जो समय २ पर राय सरकार द्वारा उसे प्रदत्त की जाय अथवा इस अधि नियम द्वारा या इसके अनर्गत अथवा बनमान म प्रभावशोन किसी अ य विधि के द्वारा या उसके अतगत बोर्ड को प्रदान किये जाय या उस पर आरोपित हों। [धारा ] अधीन राजस्म-अदालत पर आम निगरानी--इस अधिनियम के अन्य प्रावधानों के अतगत सभी राजस्व अदालतों एवं राजस्व अधिकारी बोर्ड के अधीन रहेंगे तथा ऐमी अदालतों पर अधिकारों पर श्राम निगरानी एन नियंत्रण रखने का बोर्ड का अधिकार होगा। [धारा १०] मण्डल के क्षेत्राधिकार का प्रयोग- (१) सम्पूर्ण राजस्थान राज्य में प्रथमा उसरे किसी मार्ग विशेष मे वतमान मे लागू किनी विधि या निधान म अथवा प्रस्तुत अधिनियम के अधीन या इसके अतगत निर्मित नियमों द्वारा प्रारहित किये जाने के अतिरिक्त और इस विषय म निर्मित नियमों के अधीन, बोड का क्षेत्रा धिमार प्रयुक्त क्रिया जायगा- mmsworrowom (क) श्रध्यत अथवा बोड के किसी अ य अरेले सदस्य द्वारा, या (ख) दो या दो से अधिक सदस्यों द्वारा निमित बोर्ड की किसी बैठक द्वारा ६६म पाराधीन दाई का कोई भी सर पाठ (इंच) रिसोपपिपस्या वाले या गृमानEिE राजस्थान ने राजस्व मधिनियम, १९५६ परतु शर्त यह है कि किसी अकेने सरस्य द्वारा दिये गये निर्णय से असन्तुष्ट पक्ष को ऐसे अकेले सदस्य द्वारा निर्णय दिये जाने की तारीख के बाद एक मास की अवधि से भीतर दो या दो से अधिक सदस्यों द्वारा निमित योर्ड की किसी बच के समक्ष पुननिवेदन करने का अधिकार होगा यदि निर्णय देने वाला सदस्य यह घोषणा करता.. है कि यह मामला अपील किये जाने योग्य है। [धारा १०] (२) बोर्ड में एक चेयरमैन व कम से कम ३ और अधिक से अधिक सदस्य होंगे। [धारा १०] (३) उपधारा (१) के अधीन किया गया प्रत्येक कार्य या प्रभावित किया गया प्रत्यक श्रादश अथवा उपधारा (२) के अधीन विनरण या विभाजन के अनुसार किया गया काय या दिया गया थादेश योर्ड का ही कार्य अथवा आदेश जैसी भी स्थिति हो, सममा जावेगा। [धारा १०] (8)-कोई भी व्यक्ति बोर्ड का मेम्बर नियुक्त नहीं किया . जाएगा तप तक कि यह भाई ए० एस के रूप में कम से कम १२ वर्ष तक कार्य न कर चुका हो । [धारा ११] बैंच से परामर्श हतु मामला भेजने का अधिकार'-एकाकी स्थिति में कार्य करने वाला अध्यक्ष या योर्ड का कोई अन्य सदस्य यदि उचित समझे तो सस विषय के कारणों को लेम्बद्ध करने के उपरान्त ऐसे किसी भी कानून के या रिवाज के जो कानून के समान ही प्रभावशील हो या उसी मामले म पेश किये जाने वाले किसी दस्तावेन को युनायट के प्रश्न को धैंच के परामर्श के-लिये भेज सकता है और ऐसा मामला या कार्यवाही पैंच की राय के अनुसार ही निपटाई जायेगी। इम पारा रे प्रधान उन मामलात में स्पेशल पीत पेश नहीं हो सकती किजिनम अपील ने मारे मारी होते हैं । परस्व मन्दन का निर्णय मरणार नाम राबत हिम्मतसिंह-१६६६ प्रार. मार००-४० को ममुख रत हुए राजस्थान उच न्यायालय ने रावत हिम्मतसिंह बनाम राज्य सरको रिट पारिमा १६६७ मार० भार० ० ५२ में गमस्थान फोरेस्ट एक्ट के अधीन स्पेशल पीन गुनने को गाली मनाही की है । इस निणय स दोई फसला मेसर्स बादा स्टोर एरोली प्राइवेट लि. बनाम राय सरकार १९६५ पार० मार० ० ६२ भी प्रभावित होता है । ए० माई० भारत १९५८ सर्वोच यायानप १६८ को स्वीकार करते हुए बोड ने घनश्याम बनाम महत रामवरदास १९६४ मा0 पार 70 २१३ में निर्णय दिया निमिो हुनम तनाई को दरवास्त पर परीना पमना पन्तिम निर्णय नहीं होता है प्रपदा उप धारा ११३ अधीन ऐसे मामला म बाई पोल नहीं सुनी जा सकती है कि मपान एक मून अधिकार होता है। ए० माईo मार० १९५७ सोंग्यासद-५०४ । पायालय (पुर येथ) रोकिमा भी प्रश्न पर रैफरार साटा है । पतसिंह १ ९पार०पार००-१०१। बनाम राजपा ने राजा पधिनियम, १९५९ [धारा १२] किमी प्रश्न को उच्च न्यायालय के पिपारार्थ मेनना- (१) धारा ११ में उल्लिखित पिसी मामले में उठाये गये प्रायो यदि पर श्राम जनता से सम्माधिन मानत हुए महत्वपूर्ण मममे पार पद भी विचार करे. कि उम पर उच्च यायालय की राय लेना उचित होगा तो यह ऐसा प्रश्न दाईकोट की राय-के-लिये... भेजेगा। (२) उ-प यायालय ऐमी सुनयाद पे पार निमे यह उचित सममे इस प्रार भेजे गये प्रश्न पर अपनी सलाह को लेखयद्ध फरगा और उस मामले पर निर्णय ऐसी सलाह से साम्यरत होगा। [पारा १३] मत भेद की अपस्या म निर्णय ---(१) ना कोई मामला योड पी बैंच के द्वारा सुना जाता हो, ऐसे मामले का निणय सुनयाई करने वाले सदस्यों के घहुमत पे अनुसार होगा। (२) यदि ऐसे विषय मे आज्ञा देने के सम्बध में मतविभाजन परार हो जाय तो यह विषय किसी प्रय सदस्य को विचार हेतु भेजा जावेगा तथा तत्पश्चान् सभी सदस्यों के बहुमत के अनुसार निर्णय दे दिया जायगा जिसम वे सदस्य भी सम्मिलित होंगे नि होंने कि विषय की पहले सुनवाई की थी। [धारा १४] रजिस्टर श्रादि का रखा जाना -योड ऐसे रजिस्टर पुस्तकें और हसार न्तिाय बनायेगा और उनकी व्यवस्था करेगा जो कि नियत किये जायें अथवा जिनकी वोह के कार्या के निष्पादन हेतु आवश्यक्ता हो। अध्याय ३ राजस्व न्यायालय और अधिकारी (क) क्षेत्रीय जिले [धारा १५] क्षेत्रीय विमाजन -(१) राजस्व के प्रयोजनाथ तथा राज्य के सामाय प्रशासन के लिये समप्र रानस्थान में इतने निले धागे जितने कि राज्य सरकार पचित समझे। (२) निलोपित (३) अपनी नन्छानुसार राय सरकार किसी भी जिले को सब डिविनों में विभाजित कर सकती है। प्रत्येक सब डिविजन एक या एक से अधिक तहसीलें होंगी। -- इम भारा के प्रावधान जाता दीवानी की धारा के प्रावधाना से सहज ही मेल खाते हैं रितु राजस्थान टिने सो एकर व मपान यह धारा लाग नही होगी। गगाराम वनाम गरलाल १९६५ मा० मारनी ८ में बोह को पुन बैंच ने तय किया जिस धाप में प्रयुक्त शद मामलोना का मतलब जो के मध्य उत्पन विवाद मिन्दु से होता है ।

रामस्पान मू राजस्व अधिनियम, १९५६ [' (४) राज्य सरकार यदि उचित समझे तो एक तहसील को उप-तहसीलों में विभाजित कर सकती है। (५) इस धारा के अधीन निर्मित प्रत्येक रिले, सय दिविजन तहसीन और उप तहसील की सीमा का राज्य सरकार निर्धारण करेगी। me १६) इस धारा के अन्तर्गत निर्मित सभी जिलों, सर हिरिजनों, तहसीलों और उप तहसीलों की सूचना राजस्थान सरकारी गनट में प्रकाशित की जायेगी। (७) इस अधिनियम के प्रभायशील होने के समय यतमान निल सब डिविजन, तहसीलें एन उप तहसीलें [जिन किन्हीं स्थानीय नामों से बोले जाते हों। ] इस अधिनियम के अन्तगत निर्मित निले, सर डिविजन तहसील एव उप-तहसीलों के स्प म तब तक काय करते रहेंग जन तक कि इस सम्बध मे इस अधिनियम के अधीन अथवा इस अधिनियम के अनुपालन में कोई अन्य प्रावधान नहीं कर दिये जाय । - [धारा १६] जिले यादि क निर्माण, उन्मूलन तथा परिवर्तन का अधिकार - राज्य सरकार, राजस्थान में सरकारी गजट विज्ञप्ति प्रकाशित पर- - (क) नये जिलों सर हिरिननों, तहसीलों और उप तहसीलों का सगठन कर सकती है प्रथया पतमान निलों, सब डिविजनो, तहसीलो और उस इसीलों की समाप्ति कर सकती है, और (ख) इनम से किसी की भी प्रादेशिक हदवन्दी में परिवर्तन कर सकती है। - (स) न्यायालय एव अधिकारी [धारा १७] [विज्ञोपि४] [घारा १८] सेटलमेण्ट कमिश्नर और पनिरिन सेटलमएट कमिश्नर- राय सरकार ममम राय के लिये एक सेटलमेण्ट कमिश्नर को नियुक्ति परगा और अतिरिक्त सेटलमेण्ट कमिश्नर की नियुक्ति ऐसी सग्या वर की जा सकती है जो उसकी राय म अपित हो। [धारा १६] लैण्ड रकार्ड डाइरेक्टर और महाया भूलेस अध्यद- सम्पूर्ण राज्य के लिय राय सरकार एप डाइरेक्टर श्राफ लेएट रेफर की नियुक्ति करगो ख्या यह ऐमी सग्या में अतिरिक्त एय सहायक मूलब अध्यक्ष नियुक्त करतो कि उसो घाश्यक प्रतीत हो।

रामस्थान मूराम अधिनियम, १९५६ [धारा २०] अन्य अधिकारियों की नियुमि--- (क) (1) प्रत्येक जिले में एक फनफर जो कि जिले के लिये भूलेय अधिकारी भी होगा, और (२) प्रत्येक तहसील में एक तहसीलदार, पो नियुक्ति राज्य सरफार करेगी। (ख) (1) जिले में एक अतिरिक्त मूनेस अधिकारी, (२) जिले में सेटलमेंट अधिकारी (भू प्रम अधिकारी) (३) जिले में इतने सहाया फ्लक्टर, जितने कि यह उचित सम में और (४) तहसील में इतने नायब तहसीलदार जितने कि वह उचित समझे कि नियुक्ति राज्य सरकार कर सकती है- (ग) (१) पिसी सहायक क्लक्टर को जिले के एक या एक से अधिक सय दिविजन का प्रभारी (२) किसी तहसीलदार या नायब तहसीलदार को किसी एक या एक से अधिक उप तहसीलों का प्रभाग- राय सरकार स्थित फरेगी और (घ) (१) किसी एक जिले के लिये दो या दो से अधिक जिलों के सम्मिलित क्षेत्र के लिये किसी अतिरिक्त क्लक्टर और (२) किसी एक तहसील के लिये या दो या दो से अधिक तहसीलों के सम्मि लित क्षेत्र के लिये अतिरिक्त तहसीलदार- राज्य सरकार नियुक्त कर सकती है। [धारा २० का]-राजस्व अपील प्राधिकारी-(२) राय मरकार राजरब यायिक पादों Revenue Judicial cases) तथा ऐसे अन्य मामलों में तो विधि द्वारा विशेष रूप से प्रावहित किए जार्य के विषय मे अपील पुनरीक्षण तथा निर्देश (References) प्राप्त करने उनकी सुनवाई करने तथा उनका निपटारा करने के लिए इतने अधिकारी जो, तीन से कम न होते हये आवश्यक प्रतीत हों नियुक्त कर सकेगी। १२) इस प्रकार नियुक्त प्रत्यक अधिकारी राजस्त्र अपील प्राधिकारी कहलायेगा तथा यह अपने क्षेत्राधिकार का प्रयोग तथा अपने क्तव्यों का पालन करने के लिए ऐसे स्थान या स्थानों पर, पिनरा राज्य सरकार, समय समय पर, निर्देश दे, इजलास करेगा।' - - [धारा २१] पदन नियुक्तियां धारा १७ या १८ या १६ या २० अथवा धारा २० का के अधीन कोइ भो नियुक्ति फायालय के निमित्त की ना सक्ती है।

राजस्थान भू राजस्व अधिनियम, १९५६ [धारा २०] नियुक्तियों की विनप्ति [~~धारा १७ मे धारा २१ के अधीन को गई समी नियुक्तिया राजस्थान सरकारी गनर में विज्ञापित की जायेंगी, रितु शर्त यह है कि नायन वहसीलदार की नियुक्तियों का ऐसा प्रकाशन आवश्यक नहीं होगा। (ग) शक्तियां - [धारा २३] नियनक शस्ति-(१) राज्य में राजस्य से सम्बन्धित समी गेर अदालती विषयों में निर्म भू प्राप से मम्बथित मामले मम्मिलित नहीं होंगे, नियत्रण को सत्ता राज्य सरकार में निहित होगी और सभी अदालती मामलों को तया भूप्राय से सम्बन्धित ममी मामलों के नियंत्रण की मत्ता गोड म निहित होगी। (२) शद "अदालवी विषय" से वार्य ऐमी किसी कार्याही से है जिसमें कि किसी राजस्व अधिकारी या अदालत को उस विषय के व्यक्तियों के अधिकारों एवं उनको निम्मेदारियों का निश्चय करना पड़वा है और -प्रथम अनुसूची में निरिष्ठ विपयों को कायशाही और अानाय तया पुनरावेदन देवरेख और सदम इस अधिनियम के प्रयोजनार्थ पदालती विपय माने जायेंगे [धारा २४] रानम् न्यायालयों एव अधिकारियों की उमगत प्राधीनता- घारा एये धारा २३ के अन्तर्गत रहते हुय- ११) (विलोपिन)- १) किसी रिले म सभी अतिरिक्त जिलाधीश सब डिविजनल अधिकारी महायक निजाधीश, तहमीलदार, अतिरिक्त वहसीलदार एवं नायब तहसीलदार ऐसे निले के क्लस्टर के अधीन रहेंगे। (३) किमी सर डियोवन मे समी नहमीलदार अतिरिक्त सहमीलदार एव नायव तहसीलदार ऐसे सर टिवीन फे सव दिविननल अधिकारी के थाधीन होंग। १) किमी तहमीन में सभी अतिरिक्त तहसीलदार और नायय तहसीलदार पसी तहसील फतहमानदार फ श्राधीन रहग। १५) सभी अतिरिक्त भूमय य आयुक्त जिलाधीश अतिरिक्त जिलागीश भूप्रप प अधिकारी, तहमीनगर भतिरिक्त महसीलदार बनायर तहसीलदार सलमेण्ट कमिश्नर ये श्राधीन हाग। नियमापान को मावयप में मान राय पिया जाना प्राव हापौर तमोगा नियमों मुतावित नापनप या शुलो जमान को कोई मूमा मनारमेंट निप नहीं रसाये औरषमान का पावन उनरे रश मुदने र बारमा कर देता है तो ऐसे माममा म त म निगरानी बाराररेगा। भी बनाम खेमरा-भार पा0 10१६१ १० ] राजापान भू राय अपिनियम, १९५६ ram (६) किसी तहसील में समी सहगीजदार, अतिरिक्त सहसीलदार और नायय तहसीलदार, ऐमी तहसील मे अधिकार क्षेन का प्रयोग परने धान प्रबध थधिकारी ये आधीन रहगे। (७) मभी अतिरिक्त ण्यं सहायक होएड रेप पारेक्टर, जिलाधीश अतिरिक्त निलाधीश लेएड रेसर अधिकारी तहमीलदार, अतिरिक्त तहसीलदार और नायय तहसीलदार, लैएड रेकर डाइरेक्टर के प्राधीन रहेंग। (S) क्सिी तहमील में सभी तहसीलदार, अतिरिक्त तहमीलदार और नायय - तहसीलदार ऐसी तहसील में अधिसर क्षेत्र का प्रयोग करने याल लेण्ड रेकर्ड अधिकारी फे अधीन होंगे, और (E) पिसी स्थानीय क्षेत्र के लिए विशेष रूप से अध्याय.. श्रतर्गत नियुक्त अधिकारी ऐसे क्षत्र के लिए नियुक्त लेण्ड रेड अधिकारी पं. मातहत रहेंगे जबकि अध्याय के अतर्गत-इस.प्रकार-विशेषतौर पर नियुक्त सभी अधिकारा ऐसे क्षेत्र के भू प्रबध अधिकारी के आधीन होंगे। [धारा २५] न्यायालयों और अधिकारियों के अधिकार एर कर्नय- (१) प्रत्येक कलक्टर अथवा सर डिविजनल अधिकारी अथवा तहसीलदार क्रमश अपने डिविनन, जिले सब डिविजन या तहसील में इम अधिनियम द्वारा या इससे श्राधीन या राजस्थान काशकारी अधिनियम, १९५५ (राजस्थान अधिनियम स० ३ सन १९५५) अथवा वर्तमान में प्रभावशील किमी कानून के द्वारा या उसके प्राचीन प्रात्त सभी अधिकारों का प्रयोग करेगा और आरोपित किये गये समस्त न यो का पालन करेगा। (२) रायमर के भूप्रम ध म बी सभी विषयों का प्रभारी भूपय ध श्रायुक्त होगा जो इसके सम्बध मे इस अधिनियम या वतमान में प्रभावशील किसी अन्य कानून द्वारा या उसके आधीन दिये गये सभी अधिकारों का प्रयोग करेगा तथा निर्धारित सभी फतव्यों को पूरा करेगा। (३) समप्र राज्य की पैमाइश और भूनेच के निर्माण, पुनर्वाचन एप प्रगध का प्रभारी भूलेम्व अध्यप होगा जो इसके सम्बन्ध में इस अधिनियम द्वारा या यतमान में प्रभावशील किमी अय मानून द्वारा श्रया उसके अतर्गत प्रदत्त सर शक्तियों का प्रयोग करेगा एव सौपे गये सभी कतन्या का पालन करेगा। (४) भूले व अधिसरी अयश अध्याय ७ के प्राधीन नियुक्त किया गया कोई भी अधिकारी इस अधिनियम या शतमान में प्रभावशील किसी अन्य कान द्वारा या उसके धन्तगत प्रदत्त सभी शक्तियों का प्रयोग करेगा और सौंप गये सभी क्तव्यों का पालन परगा।

1 राजस्थान भू राजस्व अधिनियम, १९५६ [[११ (५) अध्याय ८ के अतर्गत नियुक्त किया गया कोई भी अधिकारी या भूप्रा या धिकारी इस अधिनियम या वर्तमान में प्रभावशील किसी अन्य कानून द्वारा या उसके अतर्गत प्रदत्त सभी शक्तियों का प्रयोग करेगा और आरोपित किये गये समी कार्या का पालन फरगा। (६) कोई अतिरिक्त भूप्रमध आयुक्त या कोई अतिरिकाया सहायक भूलेख अध्यक्ष या कोई अतिरिक्त निलावीश या कोई अतिरिक्त तहसीलदार उस क्षेत्र में जिसके लिए वह मुस्रर किया गया है क्रमश भूप्रस्थ आयुक्त या मूनेव अध्यक्ष या जिलाधीश या तहसीलदार के ऐसे अधिकारो एर कतव्यों का किहीं ऐसे विषयों या मामलों के समूह के सम्बय में [इस कानून के अतगन तो उस समय लागू हो] जिनके लिये राज्य सरकार निर्देश करे, प्रयोग एय पालन करगा तथा प्रत्येक अतिरिक्त भूप्राध थायुक्त या अतिरिक्त या सहायक भूलेख अध्यक्ष या अतिरिक्त जिलाधीश या अतिरिक्त सहमीलदार, उस क्षेत्र में निसरे लिये उसकी नियुक्ति की गई हो, ऐसे अधिकारों का प्रयोग या ऐसे तिव्यों का पालन करने का समय, सभी कार्यों के लिये आयुक्त या भूप्रय धायुक्त या मूलेख अध्यक्ष या , क्लक्टर या तहसीलदार जैसी भी सूरत हो, सममा जायेगा। (७) कोई महागा निलाधीश या नायब तहसीलदार ऐपे जिने या तहसील के पदा जैसी भी स्थिति हो निस लिये या नियुक्त किया गया है इस अधिनियम या धतमान म प्रभारशीन किमी श्रय विधि या उसके आधीन प्रदत्त एवं भारोपित श्रथया राज्य सरकार के किसी या मामाय या विशेप आदेश द्वारा मर्पित अधिकारों एवं कर्तव्यों का प्रमश प्रयोग पालन करेगा। [धारा २६] न्यायालयों और अधिकारियों की अतिरिक्त शक्तिपाँ (१)(सरकारी गनट में विज्ञप्ति द्वारा, राज्य सरकार (क) किसी नायर तहसीलदार को तहमीलदार के सभी या कोई अधिकार (ब) सिौ तहसीलदार को सहायक कलक्टर के सभी या कोई अधिकार, (ग) रिमी सहायक यलक्टर यो सब विविजनल अधिकारी या भूलेख अधिकारी या भूप्ररग्ध अधिकारी शनिलाधोश के मभी अथया आशिक अधिकार (घ) किमी सब हिरिजनन अधिकारी को भूनेष अधिकारी या भूप्ररयाधिकारी या फलस्टर के सभी या नाशिक अधिकार, 1. रिसी भृलखाधिकारी या गूप्रय धाधिकारी को सय डिपिननल अधिकारी या सहायक निलागेश या फलक्टर के सभी या काई अधिकार (घ) विसी फलफ्टर को भू पय धाधिकारी के सभी या कोई अधिकार, (छ) (विलोपित) (1) किमी भूप्रय घायुस्त को भूलेख अभ्यत समी या कोई अधिकार प्रदान परसाती है। - - - 1 राजस्थान मू राजार मधिनियम, १९५६ (२) उपधारा (१) पे अधीन दिये गये अधिकारों का गिदी एम क्षेत्रों में और विही ऐसे विषयों या मामलों या विषयाँ या मामला प सगा पे सम्बंध में प्रयोग किया जायेगा जिनके लिए राज्य सरकार निर्देश परे। (३) राज्य सरकार व्यक्तियों को उनके नाम से प्रथया अधिशरिया को सामान्य रूप से उन पदों प नाम द्वारा इस धारा ये अधीन सशस्त मना रानी है। यदि किसी तहसील, सय विधिजन जिले, अथवा अन्य रिसी क्षेत्र का योह पदाधिकारी, जिससे हम धारा के अन्तगत मनोनीत का अधिकार सौंप गय हो किसी समान प्रकृति एवं समान श्रेणी के पद पर किमी अय तहसील सब डिविजन जिले या क्षेत्र में स्थानान्तरित कर दिया जाता है तो भा यह, न ता कि राज्य सरकार अय निर्देश न करे, ऐसे तहसील, सब दिविजन, निले, अथपा क्षेत्र में इस धारा के अतर्गत उही (पूर्वयत् ) अधिकारों से समाविष्ट अधिकारी माना जायेगा। टिप्पणी-उक्त भारा में इस अधिनियम के अन्तगत उन अतिरिक्त प्रधिकारों का उल्लेख है जो अधिकारी अपने पारतयिक अधिकारो के अलावा प्रयोग में लायेगा। यह अधिकार स्थायी पौर प्रस्पायो दोनों प्रकार के होते हैं। इस प्रकार दिये गये नये अधिकार का प्रयोग अधिकारी म्याना वरण होने के बाद अपने नये क्षेत्र मे भी करेगा जब तक सरकार उन अधिकारो को वापिस नले ले। -- [धारा २७] न्यायालयों एच अधिकारियो के प्रात्म जात अधिकार धारा २५ एव २६ 'म निदिष्ट अधिकारों के अतिरिक्त- (क) राजस्व अपील प्राधिकारी को फ्लक्टर, सब डिविजनल अधिकारी, सहायक पलक्टर एतहसीलदार के सम्मण अधिकार प्राप्त होंगे। (ख) कलक्टर को सब डिविजनल अधिकारी सहायक कलक्टर और तहसीलदार ये सभी अधिकार प्राप्त होंगे। (ग) सब डिविजनल अधिकारी को सहायक फ्लक्टर व तहसीलदार के सभी भधिकार प्राप्त होंगे (घ) सहायक क्लक्टर को तहसीलदार एव नायब तहसीलदार के सम्पूर्ण अधिकार प्राप्त होंगे, () तहसीलदार को नायब तहसीलदार के सभी अधिकार प्राप्त होंगे, और (च) भूलेख अधिकारी प्रथया भूप्राधाधिकारी को तहसीलदार या नायन तहसील दार अथना श्रध्णय ७ या अध्याय के अधीन नियुक्त दिये गये किमी भी अधिकारी ये समन अधिकार प्राप्त होंग। [धारा २८] स्थायी रिक्त स्थानों को अस्थायी काल क लिय अधिकारियों द्वारा समालना-फलफ्टर श्रथवा सब डिविजनल अधिकारी अथवा तहसीलदार के पद के स्थायी रूप से रिक्त हो जाने के कारण जब कोई अधिकारी जिले, सय डिविजन F राजस्थान भू राजस्व अधिनियम, १९५६ [ १३ या तहसील के सी भी अवस्था हो, मुख्य प्रायाधिकारी प्रशासन का अस्थायी रूप से अधिकारी होता है तर यह राज्य मरकार के प्रादेशासक, राज्य]-म-वर्तमान-किसी भी प्रभागील कानून द्वारा यासरे अधीन क्लस्टर या मर डिविजनल अधिकारी या तहमीलार को प्रदत्त सभी अधिकारों एव उस पर आरोपित सभी कर्तव्यों का प्रमगत प्रयोग तया पालन करगा। (पारा २६) अधिकारियो की अस्थायी अनुपस्थिति कोई अधिकारी मन अपने पद से अस्थायी रूप से अनुपस्थित हो- - ११) मो हैडपार्टर पर कार्यरत अन्य ममान श्रेणी गाला अधिरारी था यदि पोइ नमान येणी वाला अधिकारी न हो, इस प्रकार कायरत कोई श्रय ऊची श्रेणी पाला अधिकारी अथग यदि कोई ऐमा उचो श्रेणी घाला अधिकारी न हो कोई अन्य निम्न श्रेणी का इस प्रकार काारत अधिरारी अपने साधारण पद पर कत्र्तव्यों को निभाते हुये अनुपस्थित अधिकारी के पद का पायभार सभालेगा और उम पर पर विधिपूर्वक नियुक्त किसी अय अधिकारी द्वारा कायभार न ले लेने तक उस पर का पार्याधिपति बना रहेगा और कार्यवाहन को प्राधि में अनुपस्थित अधिकारी के दैनिक फत्तव्यों की पूर्ति परगा और (२) यदि इस प्रकार के हैडक्वार्टर पर-कोई-समान उन्ध या निम्न श्रेणी का अधिकारी काय न घर रहा हो अधया स्वयं यह भो गैरहाजिर हो वो मुरय सचिवालय ममचारी को समय ममय पर पिसी विषय, मामले या कार्यवाही का स्थगित करने का अधिकारी होगा टिप्पणी-इम धारा वाय यह है कि किमी अधिकारी को अनुपस्थिति में, यदि इम पार्शतय भ उमा यो का कोई अन्य अधिकारी मौजूद महा हो ता, उमसे आरको श्रेणो का प्रपया नीरवीणी धिकारी उमा काय समावेगाराम ममारने वाला प्रपिारी येवल सरकाराम ही निपटायेगा और किमी गति से सम्बंधित मामन 1 मपन्धित अधिकारी के निये दोरदगा। (घ) पटवारी, कानूनगो और निरीक्षक ---- धारा ३०] पटवारिया र मफिनों का निर्माण एस परिवतन मरमर की पर रीमति से मुलेख अयन, ममय समय पर प्रत्येर निल गार को पटवारी क्षेत्रों में विभानित र सरना और मे मफिलों का संग्या सीमा म परिवतन पर मरता है। (धारा ३१] पटवारियों की नियुक्ति म अधिनियम के अधीन बनाय गरे नियमा के मातहत अध्याय ७ फे अतगत यानि पनिभायनी एपना मन लेयार करने लिये , उनम सुधार करन के लिये अपना नियुक्ति में साल के प्रासामियों पर - १४ ॥ राजपा राजास पपिनियम, १९५६ भूमिधारियां से पाया लगात, राजस्य और अन्य मतालयों पे ममह ये लिये राज्य सरकार द्वारा निशित किही भय यामापे लिये फलक र प्रत्येक क्षेत्र मे लिये एक पटयारी नियुक्त फरेगा। [धारा ३२] भृलेस निरीनण मफिनों रा निर्माण एप परिवर्तन -भूलध अध्यक्ष गय सरकार की पूर्व स्यीकृति से, प्रत्येक जिल पे पटयारी-सर्किलों को भूलेब- निरीक्षक क्षेत्र के रूप म व्यवस्थित फर साता है। (धारा ३३] गिरदावर, कानूनगो या भूलेख निरीक्षक की नियुक्ति - फ्लकर प्रत्येक भूनेम्व निरीक्षक रम इस अधिनियम के अधीन अध्याय के अन्तर्गत वार्षिक पनि कारलीय लेख संग्रह के निरीक्षण, प्रयध एप सुधार के लिये एक गिरदार या कानूनगो या भूलेख निरीक्षक की नियुक्ति करेगा। [धारा ३४] मदर कानूनगो -इस अधिनियम के अन्तर्गत निर्मित निया के अधीन भूलेखाध्यक्ष प्रत्येक निले में गिरदार, कानूनगो या भूलेख निरीक्षण र कार्य के निरीक्षण हेतु और राय सरकार द्वारा निर्देशित किहीं अय कार्या के सम्पादन हेतु एक या एक से अधिक सदर कानूनगो की नियुक्ति करेगा। [धारा ३५] पटवारी एव कानूनगो की योग्यतायें पानि -पटारी गिरनार कानूनगो अथा भूलेख निरीक्षा और सदर कानूनगो की योग्यताओं उनकी नौकरी की शता एप उनके फत्त व्यों का नियमन इस सम्नध में राय सरकार द्वारा निमित नियमों के अनुसार होगा। [धारा ३६] भृलेस तैयार करने के लिये आवश्यक सूचना दने का उत्तरदाायत्त -वर्तमान म प्रभारशील किसी विधान द्वारा या ऐसे विधानाधीन निमित क्सिी नियम द्वारा क्सिी पटवारी अथवा गिरदावर कानूनगो ग भलेख निरीक्षक अथवा सदर कानूनगो द्वारा किसी व्यक्ति का हित, अधिकार या उत्तरदायित्व सरकारी पनिमा.म.दन क्यिा जाना श्रावश्यक हो तो उसके चाहने पर पजिका के ठीर साह के लिये भारश्यक सभी सूचनाश्रा को देने के लिये ऐसा व्यक्ति स्वय बाध्य होगा। टिप्पणी -उस धारा के अनुमार जो व्यक्ति अपनी भूमि सम्बध मे कोईति अथवा प्रधिकार - वापिन रजिस्टर मे दम परवाना पाहेगा तो यह उसका स्वयं का क्त य होगा fr वह अपना व पानिक जिम्मेदार। समझने से सम्बन्धित अधिकारी को धमकी सूचना दे। [धारा ३७] [ग्लिोपित [धारा ३८] (ग्लिोपित) [धारा ३६] (विलोपित) परस्पान ने राजस्व अधिनियम, १९५६ १५ [घाग ४०] (रिलोपित) [धारा ४० का] लम्बग्दारों की सैत्राओं की ममाप्ति (१) राजस्थान जनरल क्लानेन एक्ट, १९५५ रानस्थान एक्ट ८, सन् १९५५), या तत्ममय प्रभावशील किमी भी भय विधि में किसी बात के होते हुए भी दम अधिनियम के अतर्गत नियुक्त या नियुक्त किये हुए समझे गये समस्त लम्परतार, रानस्थान लेदरवे -सशोपन) अधिनियम १६६३ के प्रारम्भ होने की तारीख में उस गाय या गायों के उस ममुदाय, निसरे या जिनके लिए वे नियुक्त किये गये के लम्बरदार नहीं रहेंगे और दम अधिनियम द्वारा उनको प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग एप उनको सांप गये कार्य एरवर्तव्यों को निभाना पद कर रेंग तथा स्त्र या लगान या राज्य के किमी भी श्रय मताला की मूली करने का कार्य ना कि राज्य मरसार अग्या निर्देश न दद, हक क पटवारी द्वारा सम्पन किया जाय।। धारा ४] ग्राम सेवक प्रत्येक गाव मे या गामें के समुदाय में निम्ना कित में से इतने प्य ऐसे कमचारी जैसे क्लस्टर, राज्य सरकार के आदेशाधीन निश करे, नियुक्त ण्य व्यवस्थित किये जायेंगे अथात् (१) पगार का प्रहरी या चौकीदार (1) एक गय मामी, और (३) ऐमे श्रय पाम सेवक निनके विषय में समय समय पर राज्य सरकार [सरकारी गनट) में विज्ञप्ति प्रकाशित करे। [धारा ४२] रिक्त स्थान -पटवारी जिसकी मलि मे प्राम या प्रामों का समूह हो पद्रह दिन की प्राधि के भीतर किमी प्राम सेवक के निधन त्यागपत्र दन या पायुत किये जाने प्रथग अन्य किम रीति के उसके स्थान के बाली हान की सूचना सहमीलदार को दगा। तत्पश्चात तहमीलदार नियमानुमार कायवाही करना। धारा ४३] ग्राम सेवक पत्रिका --(२ प्रदेश तहमोलटार अपनी नद्दमील फे प्रखेक.गाय या गोंग समूह के लिये कलकार द्वारा नियत घर घरे मीनर प्राप्त मोनम माती.क.पाधार पर निधात चिरणां महिन मभी प्राम मेयकों की पर पनिका तैयार परगा। (२) पधारा रे प्रायन बनाया गया प्रत्येक रजिस्टर स्थायी रेर्ट यार अप-टूइट रम्बा ण्य -ययित किया गयगा और ममय समय पर पाम मया को सम्या में उनके व्यक्तियों में तथा अन्य वियरणाम किय जान थान मुघार उममें टी टग से मफिन क्येि जायेंगे तथा कानूनी स्पम व प्रमाणित किय जायेंगे। [धाग ४४] ग्राम सेरकों का पारिश्रमिक धारा ४१ के अधीन नियुक्त राजस्था। भूरा मातिपम, १९५६ - एष व्यवस्थित किये जाने वाले प्राम रोमाग अधिनियम में अधीनगमित नियमों द्वारा निर्धारित परिमाण में तथा रियन सरीरे से निति पारिश्रमिर पारे में घरदार दाग [धारा ४५] पारिश्रमिक, पुर्की पर हम्ता तरण से 'अप्रभावित रहेगा किमी ग्राम सेवक का पारिश्रमिर पाटे यह भमि प प म हो या भूमि से ममाविष्ट द्वित पे रूप म हो या किमो अयम्पम होतातरण या रावस्या पारनारी अधि नियम (मग्या ३, सर १९५५) द्वारा प्रयाहित गामा प्रतिरिक्त रिमी भी श्रय भार के योग्य नहीं होगा और ग्मिी भी यायालय यो लिये यह वैध नहीं होगा कि परम पारिश्रमिक या उसके किमी प्रश को गुर परे या चचे। -टिप्पणी-उक्त धारा में ग्राम मेकर पा गरक्षण प्रगान ाि गया है। पारिश्रमिन पर गोई यायालय क्सिी भा प्रभारी डिमी नीता साता है। प्रत पनि यह प्राण प्रप्न और सकर ग्रस्त है तो भी ग्रामसेवक के रूप में प्रस्ने वर्तव्य का पूरा कर प्रनी सामाजिा प्रति ठा बनाये रख सकता है। [धारा ४६] ग्रामसेवकों के कर्तव्य -(१) इम अधिनियम के अवीन नियुक्त प्रत्येक प्रामसेवक, प्राम चौकीदार के अतिरिक्त, इस अधिनियम के नियमों द्वारा यारोपित क्तव्यों का अनुपालन करगा। (२) इस अधिनियम के अधीन नियुक्त प्रत्येक प्राम चौपीतार इस अधिनियम के अतगत निर्मित नियमों द्वारा दिये गये ए आरोपित अथवा पुलिस सुपरिंटएडेण्ट द्वारा प्रायोनित अधिकारों एनव्यों का क्रमश पालन तथा प्रयोग करेगा। -- - [धारा ४७] नियुक्तिया करन की प्रणाली -नय निलाधीश यर निदश करे कि कोद ग्राम सेवक क्मिी गाव या गायों के समुदाय के तिये नियुक्त किया नायगा अथवा तर कभी किसी प्राम सेवक का पद रिक्त हो नाय मे निर्देश के अथवा ऐसे पदों के रिक्त होने के पश्चात् ६ माह की अवधि के भीतर तहमीलदार उस पर नियुक्ति करगा। [धारा ४८] नियुक्ति के लिए अयोग्यतायें -ऐसा कोई व्यक्ति नोमि (क) ययस्क न हो या (स) अपने पद से सम्बद्ध कार्य करने के लिये प्रारश्यक मानसिा प्रथया शारीरिक शक्ति से युक्त न हो या (ग) स तेत्र में निरास.न. करता हो जिसके लिये यह नियुक्त क्यिा ना रहा हो, अथवा (घ) क्सिी फोनदारी सदालत द्वारा नैतिक पतन युक्त दुराचरण के अपराध मे अपराधी करार द दिया गया हो।

- राजस्थान ने राजस्व अधिनियम, १९५६ टिप्पणी-उक्त धारा के अनुसार ग्राम सेवक व पद के लिए केवल वयस्क व्यक्तिया की ही नियुक्ति होगी। भारतीप वयस्क अधिनियम १८७५ को धारा ३ के अनुसार वयस्त होने के लिए १८ वप को प्रायु निर्धारित की गई । वयस्कता के अलावा पाय योग्यताए भी प्रामसेवा के पद पर नियुक्त होने के लिए प्रावश्यक है जमे शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य उम प्राम का अधिवास, सबसे माघरमा नतिक चरित्र, मादि हैं । दियो नैतिक अपराध में दण्डित व्यक्ति को भी इस पद के लिए प्रयाग्य समभा जावेगा। (धारा ४६) लम्बरदारों तथा ग्राम सेवकों को दण्डित करना, मोयत्तिल करना और उनको नौकरी से हटाना ~| अपने कर्तव्यों को ठीक ढर्ग से न निभाने के कारण दोपी माम मेक, तहसीलदार को आज्ञानुमार अधिक से अधिक बीम रुपये जमाने के तौर पर देने लिये उत्तरदायी होगा। (क) इस अधिनियम के अन्तर्गत निमित-किही नियमों के अधीन प्रामसेवक या लम्बरदार यदि- (१) इस तरह काम करन के लिये तैयार न हो अथवा काम करने के लिये शारीरिक रूप से योग्य न हो या .......() किसी बड दुराचरण श्रथया कर्तव्यों की अविरल एव आश्चर्यमयी लापुर पाही या दोपी हो, या (३) अन्य किसी प्रणाली से अपने पद योग्य न रहे तो अपने याचरण का प्रमाण दिये जाने यारत सुनपाइ का मौका दिये जाने बाद मोअत्तिल किया जायेगा, पदच्युत किया जायेगा या पद से हटा दिया जायेगा। [धारा ५०] ग्राम प्रहरी को पुलिस अधिकारियों के अन्तर्गत रसने का अधिकार सरकार यह निदश दे सफ्नी है कि किसी प्रामसेवक को (धारा १७ और ४६ के श्राधीन) नोकरी देने या सना देने के अधिकार किसी विशेष क्षेत्र मे समस्त अथवा किसी एक ग्राम प्रहरी के समय में किसी पुलिस सुपरिटडेण्ट या पुलिस इसपस्टर द्वारा व्यवहार में लाये जाय, शर्ते कि इस सम्बच म क माह की अाधि के भावर निला मानस्ट्रटको पुनरावेदन पेश किया नाय । श्रध्याय ४ राजन न्यायालय तया थधिकारियों की कार्य प्रणाली (धारा ५१) न्यायालय के ठने अथवाजा पड़तान करने का म्यान (१) अध्याय ३ पे अधीन नियुक्त प्रत्येक अधिग्ररी धारा २०का में अन्तविष्ट प्रावधानों पे अधीन रहत हुए अपने कायक्षेत्र की मीमा के अन्दर पिसी भी स्थान पर अपनी श्रदालन की येठर रख सकता है और पूदनाद कर सकता है। (२) रकार किये जाने योग्य कारणों से पलारा शोह भी ऐसा अधिकारी रोमी सीमा पे याहर किसी भी स्थान पर न कोई मामला सुनेगा और न उममे पूद्रताय परगा। (धारा-५२) भूमि पर प्रवेश करने तथा प्रमाश का अधिकार कभी मासिक या लिम्बित म्पम अघयत स्येि नाय तो सभी राम्घ तया माम अधिकारी -जन १८ ] राजापा भू राजस्व अधिनियम, १९५६ और उनपे सेवक ये पर्मचारी किसी भी भमि पर प्रवेश पर मागे या पर्वा पैमाइश पर सफेंगे या सीमा फेमिशान पा सांग तथा दम अधिनियम या वर्तमान में प्रमार शील 'प्रय पान पे अधीन प्रावधारित आये पत यो म सम्धत अन्य फोह काय पर सफेंगे। परतु कोई भी व्यक्ति ठिमी घर म.या रिहायशी घर में जुई ये पिमी उगान या घाडे पाले चबूतरे पर तप तप प्रवेश नहीं करेगा जप क कि उस स्थान ५ कामिज से फम से पम २४ घण्टे यो सूचना देकर अतुमति न ले ली गद्द हो और इस प्रकार के प्रदेश के समय मकान में रहने वाला यो धाभिषय सामाजिक भारमात्रा का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिये। ....(धारा.५३) बोर्ड इत्यादि क मामलों को स्थानान्तरित करने मम्बन्धी सरकारी अधिकार राय सरकार या भलेखाध्यक्ष भू प्रयघ से संलग्न किसी भी गैर अदालती मामले या मामलों के समूह को और बाद या भूप्रवध प्रायुक्त या भूलेखाभ्यक्ष क्सिी अदालती या भूप्रमध सम्बधी मामले या ऐसे मामलों के समूह को किमी एक मातहत राजस्व अदालत या-राजस्व अधिकारी से किसी श्रय श्रदालत या अधिकारी को जो उम्र मामले में कार्यवाही करने के लिए सक्षम हो, स्थानातरित कर सकता है -धारा ५४] अधीनस्तो से अथवा यवीनस्ती के मामले स्थानान्तरित करने के अधिकार --सब डिविजनल अधिकारी, भूलेखा अधिकारी अथवा भूप्रय धाधिकारी क्लस्टर, तहसीलदार इस अधिनियम के अंतर्गत खड़े होने वाल अथवा अन्यरूप में पूछताछ या निर्णय के लिए कोई मामला या मामले अपनी फाइल मे से किसी अधीनस्त राजस्व अधिकारी के पास भेन सकता है जो कि उस मामले या मामलों की उजवीन के लिये योग्य हो अथवा किसी ऐसे राजस्व अधिकारी से किसी मामले या मामलों को वापिस ले ले और ऐसे मामले या मामलों का निपटारा खुद करे अथवा निपटारे हेतु उ ह किसी ऐसे भय राजस्व अधिकारी के पास भेज दे जिसको उहें सुनने एत्र निपटाने का अधिकार प्राप्त हो। पर तु किसी मामले में पूछताछ के बाद किसी गजस्व अधिकारी द्वारा अन्तिम आदेश के लिए कोई रिपोट पेश की जाती है तो बाद बाला अधिकारी अतिम आदेश जारी करने के पहले फरीफेन को सुनवाई का एक मौका देगा। [धारा ५५] मामलों का एकीकरण --निणय हेतु पर मुख्यरूप से एक ही प्रश्न पो प्रथया एक ही आधार को लेकर एक से अधिक मामले क्सिी एक या अधिन राजस्व न्यायालयों में विचाराधीन होंगे तो किसी भी फरीक द्वारा उम अदालत को जिस अधिनस्त अय अदालत या अदालतें हों इस विषय का आवेदनपन देने पर उन मय मामलों का एकीकरण एक ही अदालत में कर दिया जायेगा और वे सब मामले एक ही पसले द्वारा तय कर दिये जायगे। ऐसे मामले उच्चतर न्यायालयों में प्रस्तुत किये जा सकते हैं।

- - -- राजस्थान भू राजस्व अधिनियम, १९५६ [ १९ [धारा ५६] आवेदन पत्र उपस्थिति इत्यादि कौन दे ? वर्तमान में प्रभावशील किसी विधि अधीन अर्थमा इस अधिनियम के अंतर्गत अर्थमा इसके अधीन पनाये गये नियमों के अनगद किसी राजस्व न्यायालय या राजस्व अधिकारी के समक्ष क्यि जाने वाले कार्य, दिये जाने वाले आवेदनपत्र एव अस्थितिया प्रस्तुत की जा सकती है- (क) परीकेन द्वारा व्यक्तिगत रूप से, या (ख) उनके स्वरित प्रतिनिधियों द्वारा श्रथा (ग) विधि-व्यवसायियों द्वारा नो ऐसी अदालत में अधिकारी के समत यका लत करने के लिए समय हा तया परीकेन द्वारा विधिवत स्वीकृत हो- परतु राजस्व श्रदालत या अधिकारी द्वारा किसी फरीक की उसके द्वारा स्वीकृति अमिषा या यकील की नियुक्ति किये जाने के बावजूद भी व्यक्तिगत उपस्थित किसी फायवाही पारित हो सकती है। [धारा ५६का श्रावदन पत्रों, अपीलों आदि का प्रस्तुत किया जाना- (१) समस्त आवेदन-पत्र, अपीलें तथा कायवाहिया, प्रतिकूल प्रभार रखने वाले प्रावधान के श्रभार में, ऐसे न्यायालय अधिकारी श्रथा प्राधिकारी को निसमें या जिसको ऐसे भावेदन-पन, अपीलें या कार्यवाहिया इस अधिनियम या तदन्तर्गत बनाये गये नियमों अथवा तत्समय प्रभारी किसी भी अय विधि था-ऐसी-विधि के अधीन बनाये गये नियों के किमी भी प्रावधान के अधिन पेश होती है, प्रस्तुत की जायगी- परन्तु यदि ऐसे किसी भी प्रावधान के अधीन कोइ भी आवेदन-पन, अपील या कार्ययाही राजस्व अपील प्राधिकारी को पेश होती है तो ऐमा-आवेदन-पत्र अपील या कार्यवाही उस गिने-जिममं कि ऐसे आवेदन पत्र, अपील-या-कार्यवाही के लिये पूर्णत या घशत पार हेत उत्पन्न होता है-फे कलक्टर को प्रस्तुत की जा सकेगी या के द्वारा प्राप्त की जा सकेगी। (२) उपधारा (१) के पर तुक के अधीन आवेदन पत्र, अपील या कायवाही प्राप्त होने पर फलफ्टर यह देखने के लिए उसरी जार करगा कि क्या उम पर यथोचित न्यायालय शुल्क दिया जा चुका है, क्या यह उमको उस ममयावधि, यदि कोइ हो क अन्दर थदर प्रस्तुन की गई है जो ऐसे प्रस्तुतीकरण के लिये निर्धारित की गई है, क्या निर्णयों, द्विनियों और थानाओं की समस्त प्रावश्यक प्रमागोम्न प्रतिया उसके माथ मंलग्न है तथा क्या धारा ५६ के अधीन गेमा करने के लिए सक्षम व्यक्ति द्वारा उपयुक्त भूपत्र में प्रस्तुत की गई है और ततश्चात यदि पानेन्न पत्र, अपीया कार्यवाही नियमा नुल पाई नाय या क्लस्टर द्वारा देखे गये दोष यदि कोई हो, नहा यही सम्भव हों, दूर कर दिए जान र पश्चान् , कलक्टर श्रावेदन पत्र अपील या कार्यवाही को मामन य रमाई महित ग्मने सुनने तथा निपटान क लिए तत्समय सक्षम राजस्व अपाल प्राधिकारीको भजेगा। [धारा ५७] रानम्म न्यायालयों अथवा अधिकारियों की व्यक्तियों की उपस्थिति और प्रपनों को प्रस्तुत करन तथा सानी ग्रहण करन के सम्बन्ध म शक्तियां -~-(१) नाता दोगनी-(फे द्रीय एक्ट माया ५ सन 10) की धारा २० ] मरपा राजस्व प्रापिम, १९५६ १३२ एवं १३३ ग्था इस अधिनियम पे अतर्गत शिमिरा नियमों के प्रावधानों पे अधीन रहते हुए प्रत्येक राव यायालय या अधिकारी गो किमी.यक्ति को बुलाने का अधि धार होगा जिसकी उपस्थिति या वो पिसी मामले में परीर प प म जांच करने लिए या गयाही ये रूप म या विमी मामले या साप पड़ताल से सम्बन्ध में बा कि उम अधि- नियम के अन्तगत या स्तमान म प्रभावशील पिसी थ य पान पे अधोरपेदा हुई हो, क्सिी प्रपत्र पे प्रस्तुत दिये जाने लिए पारश्या समगी जायेगी। (२) प्रपत्र प्रस्तुत करने के निकाला गया मम्मन किमी याम निधि प्रपत्र को प्रस्तुत करने के लिये हो मरना है तथा युनाय गये व्यक्ति के अधिकार में मौजूद किमी प्रकार के मभी प्रपना फो प्रस्तुत करने प लिय भी हो सस्ता है। (३) इस प्रकार बुलाये जाने वाले समग्र व्यक्ति व्यक्तिगत तौर पर या अमि फ्र्ता के द्वारा, पैसा भी मम्बपिन अधिकारी या न्यायालय निदरा करे उपस्थित होने र लिए और ऐसे विषय म जिसके लिए उनकी नारी जा रही हो अथवा मिनरे सम्म में वे ययान दे रहे हों सत्य भाषण के लिये तथा चाहे गये दस्तावेजों पर अय पदा को प्रस्तुत करने के लिए याध्य होंगे। (४) यदि कोई व्यक्ति जिस पर कि सम्मन तामील हो चुस है सम्मन..फी आज्ञा पालन करने में असफल रहता है, तो सम्मन नारी करने वाला अधिकारी या “यायालय ऐसे व्यक्ति की गिरफ्तारी के लिए जमानती वारट जारी कर सकता है। (५) कोई भी रामस्य प्रधिकारी या न्यायालय उपस्थित हुए किसी भी व्यक्ति से साक्षी देने का आग्रह कर सकता है तथा उस समय उसके अधिकार या कब्जे में होने वाले किसी दस्तावेज को पेश करने की हिदायत कर सकता है। [धारा५८] सम्मन हस्ताक्षरित और मुद्रांकित होगे - प्रत्येक सम्मन_ की लिखित में दो परतें आवश्यक हैं तथा उसे निकालने वाले अधिकारी श्रथवा किसी ऐसे व्यक्ति के निसे वह इस विषय म प्राधिकृत करे उस पर हस्ताक्षर अनिवार्य है और मुद्रा भो होगी तथा उसम किसी व्यक्ति के उपस्थित होने का स्थान व समय भी प्रकित होगा और यह भी लिखा होगा कि वह साक्षी देने के लिये बुलाया जा रहा है अथवा कोई प्रपत्र प्रस्तुत करने के लिये। [धारा ५६] सम्मनों की तामील --प्रत्येक सम्मन की तामील पराई जायेगी (१) एक प्रतिलिपि भेजकर या देवर- (क) बुलाये गये व्यक्ति को अथवा (ख) उसके माय प्रतिनिधि को या वकील को या (ग) सामा यत उमके साथ रहने वाले उस कुटुम्य के किसी अयस्क सदस्य, या (२) गदि उपर्युक्त व्यक्तियों में से कोई भी न मिले या अस्वीकृत करदे तो उसके सामायत या अन्तिम बार के मकान पर सरलता से दिखाई दने वाले स्थान पर सम्मन की एक प्रतिलिपि चिपका पर, या (३) ऐसा व्यक्ति यदि किसी श्रय निल मे रहता हो तो उस जिले के फ्लक्टर को ऐमा सम्मन सएड (१) या खण्ड (३) के अनुसार तामील कराये जाने के लिये हार द्वारा भेनर, या --- परस्यान भू राजस्व अधिनियम, १९५६ (2) कारण रकई करने के पश्चात् रामस्थ यायालय या अधिकारी यदि कोई निश दे तो मी त व्यक्ति को पसे मम्मन की एक प्रति गमील के किमी अर तरार के बनाय या मके अलावा, रजिस्टड द्वार द्वारा भेजार। [धारा ६०] नोटिम को तामीन करने की प्रणाली -मम्पचित व्यक्ति को मम्मन की एक प्रति सुपुद कर या रेकर इम अधिनियम के अन्तगत-प्रत्येक सूचना की तामीज्ञ या मारताय डाक अधिनियम १८६८ (कन्द्रीय सदस्या ६ सन् १८६८) के अधीन एक रजिस्टड लिफाफ म बार द्वारा भेनकर गर्द जायगी मथवा यदि उपरोक्त हरीक मे तामील नहीं पराइ समनी तो अन्तिम रुप से ज्ञात उसके निवासस्थान पर या इस गाव में सिमं नोटिम मम्र्याचा मीन हो, आम लोगों के उठने वेटने की जगह पर, म सम्मान को पा प्रतिलिपि चिपरावर नामील हो जायेगी। [धारा ६१] घोषणा प्रकाशित करने की प्रणाली-~-इस अधिनियम के अन्तगत यदि कोइ पापणा की जायगी तो उसे करने वाले अधिकारी के कार्यालय में उस तहमाल के कार्यालय में जिममें धारणा से मम्बन्धित जमीन यिन हो और सम्बाचन जमान पर या मी समोर मान लोगों के उठने बैठने केमिसी स्थान पर 3 घोपणा की प्रनिया विपद जायेंगी और यति घोपणा जारी करने वाला अधिकारी निर्देश पर तो मम्बधित भूमि पर या उसरे श्रास पास होंडी पिटा कर भी घोपणा करवाई जा - - मयगी। [परा ६२] कोई रियश घोपणा या सूचना पर यमान्य नहीं होगे कोई भी मुग्नापत्र या घोषणा मम लिग्न किमी व्यक्ति क नाम किया या पट पर प्रामावि स्मिी मि के नियम युटिरह नाने रे करण श्रमाय नर नक नहीं होगी र तक कि इस प्रकार की त्रुनि म गाई वास्तविक श्र याय न हुभा हो। धारा ६३] पक्षकार से अनुपस्थिति म मुनवाई करना -(१) यनि रार न्यायालय या अधिकारी के ममान स्मिी मामले ग कार्यवाही में पशी से नाव पर अपया मी पात्वी किती तारोम्ब या किहीं तारीयों पर गिन पर सुनराद को नियन किया गया हो मोड पचार उपम्धिन न हो तो मामला या दायमा उमको अवयिनि म मुनी प्रनिणीत की जा मनी श्रयरा अनुम्धिात के अपराम.ला रजी.-1 मानी है। () पोई रानस्य यायालय या अधिकारी किमी मामले गायगही की मुनवाह पातारीच पर यह तय किरिमी पार्टी पर उसके सिता पार्टी द्वारा सम्मन ही ताराब श्रादि.फलिय अनियामर फोम-दाम्बिन नहा राय पार म मम्मन या सूचनापत्र मामील नहीं किये ना मा मा यह ऐमी-प्रकिया मम्पपी"शुल्क नमानरानन्य प्र में मारले या कार्यशही को निरस्त कर सकता है। [पारा ६४] युनवाद को गित करना ---(१) पोइ मो अधिकारी यश रासस न्यायालय समय पर रिमी भो मामन या कामयाबी की मुरघाट को स्थगित कर मरना है। - २२ ] राजस्थान राजा निगम, १९५९ (२) किमी मामी गा पायबाढी पी को स्थगित को ग* सुयाद मे ममय और स्था की सूचना स्थगा पे समय मौजून पगार माशिमा नाम दी जायेगी। [धाग ६५] धारा ६३ क यी निकाले गय पाटणक विद्व कोई अपील नहीं सुनी जायेगी--(१) रिगी रानाय यायाम या अधिगरी द्वारा याग्य परनिति मामले या कार्यवाही के अतिरिक्त, भारा ९३५ अमन दिय गये मिी भी प्रादेश में विरोर भी अपील नही होगी । (0) एमा फोह भी पतवार जिसा विस्त धारा ६३ पे अतगत आदेश दिया गया हो, म आदेश प याद ३० दिन पी अधि के भीतर, य-प्रमाण देते हुए कि यह सुनगाह के दिन पर्याप्त पारश उरम्मत_हान में प्रथया विलाफ पार्टी पर मम्मन या नोटिम तलप फराने के लिये श्रावश्या शुलन मा कराने में गिरा रहा, उस्त प्रादेश को समाप्त कराने लिये एक आवेदन पत्र द माता है और राजस्व अधिकारी या बिला पार्टी को नोटिम देने तथा आवश्या ममझी जान योग्य जाय करन के पश्चात् निकाल गये आदेश को समाप्त कर मरता है। धारा ६६] व्यय दिलाने और पितरण करने का प्राधमार – (१ किसी मामले या काय नाही में हुए व्यय को कोई भी राजस्व अदालत या अधिकारी रिमीमी मोमाता और किसी ऐमी रीत सद श्रीर बाट सस्ता है जो कि उसके विचार म समुचित हो। (२) राय सरकार के अतिरिक्त क्मिी अय पक्षमार को खर्चा दिलान बारत उपधारा (१) अतगत नारी किया गया थादेश -स प्रकार पालन योग्य होगा मानों वह किसी गनप यायालय द्वारा दी गई माया को डिक्री हो। "[धारा ६७] त्रुटि अयमा भृन का सगोपन –कोइ भी गजम्य न्यायालय या अधिकारी जिमने गम अधिनयम के अधीन कोइ आज्ञा किसी सायवाही मनी हो अपनी इच्छा से अथवा किमी पक्ष के प्राथनापत्र प्रस्तुत करने पर श्रावक परीन को म र म पूरा दने के रात अपने अादेश की रिसी की कोइ भुा अभाव को मामल के किसी भी महत्वपूर्ण अश को प्रभाषित किये बिना, सुगर सकता है। [धारा ६८] पच निर्णय क लिये माम ना--जने का अविकार - राजम्म मण्डल, राजस्व अपील प्राधिकारी भूप्राध श्रायुक्त अतिरिक्त भूपाध आयुक्त भूनेम्वा ध्यन अतिरिकर या सहायक भूलेखाध्यक्ष अतिरिक्त कर सग्राहक सन ििननल आफिपर म य र सग्राहक, भूलेग्वाधिकारी, भूप्रमाधिकारी, तहसीलदार और प्रतिरिक्त तासीलदार पक्षार की स्वीकृति से अपने समक्ष रसे किसी भी विवाद को अपने आदेश द्वारा पच निणय के लिये भेत मक्ते ह [घाग ६६] पर्चातर्णय क लिये प्रेपित मामलो की कार्यवाही ६८ के अधीन पच निणय के लिए प्रेपित सभी मामलों म पच निर्णय अधिनियम (केंद्रीय अधिनियम सरया १० मन १६४ ) के ऐसे मभी प्रावधान लागू होंगे जो इस अधिनियम पे मम्मिलित किमी भी यात से असंगत न हो। -- राजस्थान भू राजस्व अधिनियम, १९५६ [२३ मगे। [भाग ७०] पचनिर्णय को र करने के लिये आवेदन पत्र -जीम दिन को श्राधि के भीतर (ग्च निर्णय दिन से) पच निर्णय को रद्द करने के लिये प्रत्येक श्रावेदनपत्र प्रस्तुत कर दिया जाये। निपणी-यन किमा परकार का विमा पचायत का फ्मा मजूर मग तो व उसे प्राप्त सूचना के दिन मै २० डिना के भीतर से निणय कार करने क निय प्रावेदन पत्र [धाग ७/] पच निर्णय के अनुरून निर्णय दना यदि पच-निगाय के लिये मामला प्रेपित करने वाला राजस्व अधिकारी या न्यायालय पच-निएाय को प्रथया 4- निणय हेतु प्रेषित किसी भी विषय पर द्वितीय बार विचार करने के लिये लौटाने का पर्याप्न फारण अनुभव नहीं करे और पच निर्णय को रद्द करन के लिये कोड प्रावेदन पत्र प्रस्तुत न किया गया हो या ऐश याद-र वृत पर दिया गया हो एमा न्यायालय या अधिकारी विचार का फैमाना उन पंच निगय के अनुमा कर देगा और यदि पचनिर्णय ग्मिी विशेष मामन्ने स रूप में पश स्यिा गम हो तो ऐसे मामले म उममी अथया स्वग अपनी सम्मति के अनुमार रोमा निराय करगा। [भाग ७२] टीपानी अदालत म पुनराबेदन अथा पार दायर करने पर वन्यन -जय ता कि यह निहाय पनिणय के अनुमार न हो या उममा उल्धन करता हो या त ता ग्म मामल प ययाय म कानुनी म्प में पचनिय वैध नहीं है एमा निर्णय तत्काल प्रभावित पिया जायेगा धीर उम सम्मघम कोइ अपील नहीं होगी। पर कोई भी व्यक्ति किमी भी नीवानी अालन मे पच निणय को र कराने के भिप्राय मे या ऐमा पर नणय देने के कारण पचों के विरुद्ध कोई भी पाट र नदी कर सकेगा। [भाग ७३] यान सम्पत्ति का अधिकार उमपण -प्राना देने गला न्यायालय या अधिकारी यदि अचल सम्पत्ति करने के ममा फालय मामल का निय हो तो एम श्रादेश अपमान निगम या राम ही श्रय कार्य क सिलसिल म राम अधिकार प्रणालियां प्रयुक्त करते हुए जो पानी अदालत अपनी डिनियों के हसराय म विधिवत प्रोग मे लाती है अधिपत्य दिला सरता है। अध्याय ५ पुनरावेन, अभिदेश, निगरानी तथा नजामानी [धारा ७४] 7 अधिनियम द्वाग म्मीस्त अपान ---इम अधिनियम म प्रावधानिन प्रणाली के अतिरिक्त, रानस ग्यायालग अथवा अधिसरी दाग प्रत मिमी श्रादश के द्धि को भी पुनराबदन प्रस्तुन नहीं दिया जा मरेगा चाह पतमान में काद भा कानून पम यशी हो [धारा ७५] प्रथम पुनरापदन-सिवाय इसके कि हम अधिनियम में अयथा मार्गहन किया नाय, प्रथम पुनरारदन प्रस्तुत किया जायेगा।। .

२४ ] राजस्थाा भू राम पपिनियम, १९५६ [(क) सहगीलदार द्वारा दी गद गल पाशा से, आभूपरध या भूलरा के मामलों से सम्यधित नही हो, पलार यो (ख) अमिस्टेट लाटर या मय डिविजनल आफिमर या पलर द्वारा दी गई मूल आधा से जो भूप्रय ध से सम्पधित नहीं हो, राजस्य श्रपीन प्राधि फारी को। [अमरियजनल कमिश्नर ये पद ममाप्न हो पाने के कारण इम धारा में परि बत्न किया जागा (ग) उसय अधीनस्थ राजरस यायालय या अधिकारी की मूल अाझा पे विरुद्ध भूपरध अधिकार का (घ) उसके अधीनाथ राजस्व न्यायालय या अधिकारी की मूल प्राज्ञा के विरुद्ध भलेखाधिकारी को। (7) भूपय धायुस्त को मार के मामलों म कनस्टर या भूप्रा य अधिकारी द्वारा दी गइ मुल प्रोना र खिलाफ । (च) भूख सग्रह र सभ्य ध म भूनेव अधिकारी द्वारा दी गद मूल प्राज्ञा के विद्ध भलेम्व अध्यक्ष को और (छ) बोड को र नस्य अील प्राधिकारी भप्रय धायुक्त या भूनेम्वाध्यक्ष की मूल थाज्ञा के विद्ध। (धारा ७६) द्वितीय पुनरावदन पुनरावदन म दी गइ (आज्ञा) के विरुद्व पुनरावदन किया जाये।- (क) भूध या भनेव से असम्बद्ध मामला में क्लक्टर द्वारा पास किये गये मामलों के विन्द्व राजस्व अपील प्राधिकारी को या (ख) भूप्राध अधिकारी या धारा १८१ के अपोन काम करते हुए क्लस्टर द्वारा दी गइ अाज्ञा के विरुद्व भूप्रद ध श्रायुक्त को, या (ग) भूलेखाधिकारी द्वारा दी गइ आना के विरुद्ध भूलेखाध्यक्ष को, या (घ) राजस्र अपील अधिकारी x या भूप धायुक्त द्वारा दी गई आज्ञा के "विरुद्व गोई को (२) [ग्लिापित-- धारा ७७] कुछ मामलों म पुनरावेदन शनिपध (क) भारतीय मियाद घिधि १६०८ ( द्रीय अधिनियम सरया : सन् १६०८) की धारा ५ म निदिष्ट प्राधार पर किमी पुनगरदन या आवेदन पत्र को स्वीकार करने के आदेश के विरुद्ध अयश (ख) किसी श्रावन्न पत्र को निगरानी या नजरसानी के लिये अस्वीकृत परन के श्रादेश के मद्ध या (ग) क्मिो [xx] आना के विरुद्ध तो इस अधिनियम में स्पष्टत तिम यनाइ गइ है- कोई अपील नहीं हो सकेगी। - [ २५ रापम्दान नू परम्प अधिनियम, १९५६ - [धारा ७६] पुनराबैटन के लिये रवि (क) कलक्टर या मूलेन्च अधिकारी या भूप्ररयाकारी के पास ऐसी श्राक्षा के, निसा विरोध किया जा रहा हो, जारी होने की तारीख के बाद तीस दिन की ममाप्ति पर, (ब) रासप अीन प्राधिकारी या भूमाघ श्रायुक्त या मूत्रायल के पास ऐसी वारीख के बाद साउ दिनों को समाप्ति पर, या (1) गोर्ड के पास ऐसी तारीख के बाद नावे दिनों की समाप्ति पर- कोद पुनरावेदन नहीं किया जा सकेगा। [घाग ७६] विवादग्रस्त बादश की प्रतिलिपि को अपील के साथ मम्मिलित करना --अब तक कि प्रतिलिपि मा प्रस्तुत किया जाना किमी थाना द्वारा अनावश्यक न कर दिया जाय पुनरावेदन के प्रत्येक श्रावग्नपत्र के साथ ऐमो आज्ञा को प्रमाणित प्रतिलिपि पश की नाती रहेगी। टिप्पणी -इम पारा में यह मालप है किस्मो किसी मामले में अपील की वापसो पान प्रायनपत्र साप मारेको प्रमाणित प्रतिलिपि सम्मिलित का जाम ! माणिक प्रतिनिपि प्राप्त करने का पाप या सम्बपित न्यायानय म प्रस्तुत करने का काय पथपिने पर ही होता वाहिये। [घारा०] अपीजेट अयोरिटी की शक्तियां--(1) यदि अपीलेट अयारिटी घाई तो अपील स्वीकार कर सस्ती हैं या रेकार्ड मगा कर तथा पुनरावेदक को मुनवाद या मौका देने के उपरात सरकारी तौर पर से थस्वीकृत कर सस्ती है। पर तु जप अपोल प्राधि फे पादर हो अथवा धपील प्रस्तुत नही की जा सकती क्षेसो मिलव माने के लिये पीलाट अयारिटी गम्य नहीं होगी। (२) यदि प्रसील स्वीकार करली जायगी आपेगी जिसकी सूचना प्रतिवादी को दी जायेगी। मुनवाई की कोई तारीख तय की २६ ] रामपाल गूराम नियम, १९५६ (३) यदि पक्षमार उपस्थित हो तो 31 गुना पार पीनट अथारिटी पियार प्रस्त अपीस पी पुष्टि पर साती है उनम सशोधन पर माती या उसे पलट मानी है, या किसी विशेष जान पड़ताला या विमी अतिरिक्त साथी को सुनने के लिय जैसा यह उचित समझे, निदश कर सकती है या यह स्वयं ऐसी मतिरिक्त साक्षी यो सुने, या पसे विषयों पी , ऐसे निदश महिन जो यह उचित समझे निपटारे के लिये यापस लौटा साती है। [धारा ८१] अधीनस्थ न्यायालय की या क इनराय को रोज्ने की शक्ति-(१) यदि कोई अपील स्वीकृत परली जाती है तो अपीलट अथॉरिटी अपील के निणय किये जाने तक ऐसी श्राज्ञा के जिसकी अपील की गइ हो इनराय को रोक्ने का निर्देश कर सकती है। (२) कोई भी राजस्व न्यायालय या अधिकारी जिसने की आना दी हो ऐसी श्राज्ञा के इनराय को अपील के लिये नियत अवधि की समाप्ति के पहले किसी भी समय यदि अपील दायर नहीं की गई हो रोक्ने के लिये आदेश दे सकती है। यदि उपधारा (१) अथवा उपधारा (२) के अतगत रिसी श्राज्ञा के ईजराय को रोक दिया गया हो तो ऐसी जमानत ली जा सकती है अथवा ऐसी शर्ते लगाई ना सानी है जो कि अपीलेट अथोरिटी या राजस्व न्यायालय या अधिकारी उचित समझे। [धारा ८२] कमिश्नर के अभिलेस (RECORD) आदि मगन क अधिकार और सरकार रथमा बोर्ड को मामना विचारार्थ भेजना किमी श्रादेशकी वैधता एवं महत्ता के सम्बध में और पिसी कायवाही की नियमितता क सम्बध मे अपने आप को म तुष्ट करने के अथ से कोई भी श्रायुक्त या भूप्रब ध प्रायुक्त या भलेखाध्यक्ष या कलकर अपने अधिनस्थ क्सिी राजस्व न्यायालय या अधिमारी द्वारा तय किये गये मामले या पूरी की गई कार्यवाही के रेसाइ को मगवाकर उसकी जाच पड़ताल कर सकता है साथ ही यदि उसका मत यह हो रिसे अधिनस्थ यालय या अधिकारी द्वारा जारी किये गये आदेश या की गइ कार्यवाहिया परिवतित, निरसित या उल्टी नानी चाहिये ॐ सरकार बनाम मागया-१९६७ प्रार० मारी । मे बोड ने तय किया कि बोड रेनरेस को सुन सकता है दावजूट सक कि किसी मामले में बोड को अपील पेश होती हो ।

रासापान ने राजस्व अधिनियम, ११ तो यह अपनी राय के साथ ऐसे मामले को बोर्ड के पास आदेश के लिये भेज देगा, किनु शर्त यह है कि मामला अगला के योग्य हो अयना भूप्राय से सम्बधित हो अथवा यदि मामला गैर अगलती हो कर भूगर व से सम्बंधित न हो तो राज्य सरकार को अादेश हेतु प्रेपित करगा, और गोई अथवा राय सरकार जैसी भी स्थिति हो, इसके पश्चात् एसे आदेश जारापरणी जोकि मरी रार मे टीक हो। [धारा ८३] रेकर्ड भगव ने एक आदेशों के पुनर्वाचन की सरकार को शस्ति-राज्य सरकार प्ररने अचीनस्य किमी भी अधिकारी से भूपपप से असम्यद किमी गैर अगलती कार्यवाही के रेकर यो मगरा सकती है और उस सम्बध में ऐसी प्राक्षा द सकता है तो यह उचित समझे। घाग ८४] रेकाड मंगवाने तथा आदेश पर पुनर्वाचन करने सम्बन्धी पोडं रे अधिकार -गोई अदालती दन के अयरा भूमय से सम्बधित किसी विषय का निमफे मरा मे बोर्ड में कोई पुनरावेदन नहीं किया जा सकता हो, रेकार्ड मंगरा सरता है यदि ऐमा प्रतीत हो कि उस न्यायालय या अधिकारी ने जिसके द्वारा मामला नय किया जाय ऐमा विचाराधिरार का प्रयोग किया है जो कानून द्वारा उसमे निहित नहीं किया गया है. अयना निहिन रित गये किसी पिचाराधिकार के प्रयोग करने में असफल रहा है अथवा अपने विचाराधिकार के प्रयोग में गैर कानूनी दग से या महलपूर्ण अनियमितता से काम लिया है और उस मामले में ऐसा आदेश दे सकता है, जो रह रित समझे। [धारा ८५] सुनाई -धारा या धारा३ या घारार के अधीन रिसी मी पक्ति के विरुद्ध कोई आदेश सर सफ नहीं दिया जा सकेगा बर तक कि उसे सुनगई का एक मौरान दे दिया जाय । टिप्पो हमारा सम पत्रकार को सुनवाई का परि देती है जिस पर रेफाई गोपन, जाप पवार मालिको कार्यवाहियों के परिणामस्वम्पई पसरहाने वाला हो। पक्षकार पर मागून विलिागिसो भी प्रकार की पात्रा उस पर साप्त नहीं होगी। धारा ८५ श्री गज्प मरकार द्वारा नजासानो- --राज्य सरकार अपने आप पब कीया से अयग याद मे सम्पति किमी फेघावेदन पत्र देने पर नजरमानी र सकती है या रोक, यदल पर सस्ती है या किमी माझा को जो इस कानून के अधीन गादो बहाल रख सजी है। दिनपो-रामपान मेग रोम् (मेगमेन्ट) र १६. (एर २९ पाए १८) जोरावस्वान पर सियहिनो ११. प्राधिक हमारे तुमार पारपर सम्मति पा] ARRIT JI नियम, १९५६ १३) यदि पपगार स्थित हो तो उग गया अपोट अथारिटी पियार प्रत्त अपील की पुष्टि पर सपती है उनम मंशोधन पर मानी या उसे पलट मानी है, या पिसी विशेष जाच पातामा या स्मिी अतिरिक्त सादी को सुनने के लिय मा यह उचित समझे, निदश कर सकती है या यह स्वयमी मतिरिक्त साफी यो सुने, या पसे विषयों की , ऐसे निश सहित सोबह उचित समझे निपटारे पे लिये पापस लौटा सानी है। [धारा ८१] अधीनस्थ न्यायालय की थाना क इतराय को रोस्ने की गक्ति -(१) यदि कोई अपोल स्वीकृत परली जाती है तो अपीलेट अथॉरिटी अपीन ये निणय किये जाने तक ऐसी श्राज्ञा ये जिसकी अपील की गइ हो इनराय को रोकन का निर्देश पर साती है। (२) कोई भी रानस्य न्यायालय या अधिकारी निसने की आना दी हो ऐसी प्राज्ञा के इजराय को अपील के लिये नियत प्राधि की समाप्ति के पहले किसी भी समय, यदि अपील दायर नहीं की गई हो, रोक्ने के लिये आदेश दे सकती है। . यदि उपधारा (१) अथवा उपधारा (२) के अतगत क्सिी श्राज्ञा के ईजराय को रोक दिया गया हो तो ऐसी जमानत ली जा सकती है अथवा ऐसी शर्ते लगाई जा सकती है, जो कि अपीलेट अथोरिटी या रानस्व न्यायालय या अधिकारी उचित समझे। [धारा ८२] कमिश्नर के अभिलेस (RECORD) आदि मामान क अधिकार और मरकार कथना वोर्ड को मामना विचारार्थ भेजना मिमी श्रादेश की वैधता एवं महत्ता के सम्बध म और पिसी कायवाही की नियमितता क सम्बध में अपने आप को मतुष्ट करने के अथ से कोइ भी श्रायुक्त या भूप्रब ध आयुक या भलेला पद या कलर अपने अधिनस्थ किसी राजन पायालय या अधिकारी द्वारा तय किये गये मामले या पूरी की गइ कायपाही के रेकाड को मगर उसकी जाच पड़ताल कर सस्ता है साय ही यदि उमका मत यह हो कि से अधिनस्थ -"यालय या अधिकारी द्वाग जारी किये गये आदेश या की गइ कायमाहिया परियतित निरसित या उल्टी नानी चाहिये 8 सरकार बनाम मागया-१९६७ प्रार. मारी में बोर्ड ने तय किया कि योड रेफरेस को सुन सकता है दावजूद इसके कि निसी मामले में वोड को अपील पे होती हो।

रागापान राबत अधिनियम, PEN [ २७ दो यह अपनी राव के साथ ऐसे मामने को बोर्ड के पास आग के लिये भेज देगा, कि यह है कि मामला अगना के वोग्य हो अथवा भूमर मे सन्वचित हो प्रया यदि मामला गैर अाली हो कर भूनन व मे सन्वयित न हो तो रार सरकार को आदेश हनुमोपित करगा, और कोई अथवा रार सरकार जैसी भी स्थिति हो, इसके पश्चात् ऐसे घादेश बारा करणी जो किसी रार में टीम हो। [ग] रेसई मगर ने एक आदेशों के पुनर्वाचन की सरकार को शस्ति राज्य सरकार अपने अधीनस्य किसी भी अधिकारी से भूगर से असम्बद्ध किमी गैर अालती कार्यवाही के रेप को मंगा सस्ती है और उस सम्बध में ऐसी भाता दे सकता है जो यह उचित समझे। धाग ४] रेकार्ड मंगराने तया मादेश पर पुनर्वाचन करने सम्बन्धी पोर्ट के रिकार --पोई अदालती टन के अथवा भूपाय से मम्वरित रिसी रिपय का, निमो मारम रोई म कोई पुनरावेदन नहीं किया जा सकता हो, रेकार्ड मारा साता है यदि ऐसा प्रनोर हो कि उस न्यायालय या अधिकारी ने जिसके द्वारा मामला नय किया जा ऐमा पिचाराधिकार का प्रयोग किया है जो कानून द्वारा उसमे निहिन नहीं किया गया है या निहित सि गये किसी विचाराधिकार के प्रयोग करने में बनान्न रहा है अथवा प्रश्न विचाराधिकार के प्रयोग में गैर कानूनी दग या महत्व अनियमितता से काम लिया है और म मामले में ऐसा पासना कर जिसमझे।

८] पारा गूरावर पधिनियम, १९५५ धारा ८६] चोट नगागालगों द्वारा पुनरिगर--(१) यो अपना इया से अयश मामो गा पायवाटी पंफिमी पापे प्राथनापत्र पर अपने द्वारा या भासदाम से रिसी भी सदस्य द्वारा दी गद पाशा पर पुनयिपर पर सरता है पर उसे र संसाधित या पुष्ट पर साता है। (१) प्रत्येप अन्य रास्य यायालय या अधिगरी ग्यदा से अयया स्या रपने पाले पि व्यक्तिया प चापदापत्र पर अपने ही द्वारा प्रथया अपने पूरगामी पदाधिकारी द्वारा प्रदत पासा या पुनय गर पर साता है तथा उसके सम्म म एगे पादराद सपना है जो यह उचित सममे मि शम यह है कि- (१) फाइ भी प्राशा उस समय तक ससाधित या परिचरित नही पो जायगी जय कि उसम हित रसन यान पनपारा को उपस्थिा होने ण्य ऐसी आमा पन म पुछ कहने का मीरा नीद दिया जायेगा, (क) क्सिा भी आना पर निसरे विरुद्ध श्रील करदी गई हो अथवा जो निगरानी फी पायवाही का विषय हो, उस समय तक पुन वचार नहीं किया जा सकेगा जर तक कि ऐसी अपील या कायचाही विचाराधीन हो, (३) किसी भी थाना फोटो निजी यक्तिया के बीच रिसी अधिकार के प्रश्न पर प्रभार करती हो, कार्यवाही में सम्मिलिन पक्ष के प्रार्थनापत्र दने के अलारा पुनर्विचार नहीं किया जाये। और इस प्रकार के पुनर्विचार का कोई भी आवेदनपत्र ऐसी आज्ञा के नारी होने के उपरान न दिन समात हो जाने के उपरात प्रस्तुत पिये जाने पर स्वीकार नहीं की जायेगी। (३) इस धारा के अधीन पुनर्विचार के लिए आवेदनपन जाना दीवानी (ये द्रीय एक्ट स०५ सन् १९०८) अधिनियम की प्रथम अनुसूची के श्रादेश ४७ के नियम १ में बताये गये प्राधारा मे से किसी पर भी दी जा सकती है और उपधारा (१) एप (-) के अमीन उक्त आदेश के प्रानधान प्रयोग में लाये जायो। टिप्पणी --उक्त धारा यह प्रक करती है कि कि योड, पुनर्विचार पर किसी सस्य का माशा को रद्द कर सरला है अपग उसमे सशोधन, परिवतन पर सकता है । यह अधिकार राजस्व मधिकारी का भी प्राप्त है। पुनर्विचार, यायालय पथदा पधिकारी कभी कभी मानी इच्छा से भी कर माता है कि व्यक्तिगत मामला में यह कार्य साप रहने वाले व्यक्ति द्वारा मावेनात्र देने पर ही दिया जायेगा। (धारा ८७) एस्ट स०६ सन् १६०८ का प्रभाव --भारतीय अरधि अधि नियम १९०८ (पेन्द्रिय एक्ट स०६ सन् १९०८) ये प्रारधान इस अधिनियम के अनर्गत होने वाली अपील एवं पुनर्विचार पर लागू होंगे। अध्याय ६ भूमि (पारा ८८) जिन पर फिपी दूसरे का अधिकार न हो वे समस्त मार्ग व समस्त भूमि राज्य की सम्पचि होंगे-(१) समस्त आम सडक, गलिया रास्ते पुल ।

रास्थान नू गवस्त्र अधिनियम १९५६ २० ग गरे, तथा उपर या ननके चारों श्रार की सभी था ममल नगिया, निझर, नाने मोले व ताला, ममी नहरें तथा जल प्रणालियां सभी स्थिर एवं प्रबहमान अल और कदी भी स्थित मभी जमीन नो कि किही व्यक्तिमा पुग्पतिमा को ओ सम्पत्ति रखने के लिए हानिकप से अधिकारी है, सम्पत्ति नहीं हो राज्य मरवार की सम्पनि है केरल महता किम पर नगक्तियों यश निकाया का कोई अधिकार स्थापित किया जाय और पल उस इक जो किमी श्रय प्रभावशील कानून के द्वारा उम मे मजूर की नाय तथा हमर द्वारा पापणा की जाती है किसी समस्त सम्पत्तियों এ খানম মুনি ঋষি বয়ান ও শবউ ৎ * ঐ ভয় सरकार में समाद्वित दागे और राज्य मरकार रे पादश के अन्तर्गत कलक्टर के लिय ग्रह चन होगा कि यह निधारित गति से उनका निमारा कर मितु, रास्तों के हक চানন ঘি খলিফা ; প্লাম না ক ঘিাষ বা মরযাৰ বা পাই। (मिमी मम्पत्ति में या उम पर मरका द्वारा उमरी ओर से अथवा मार फरिद विमी श्रय व्यक्ति द्वारा विमी अधिकारी या श्रश कार कभी दारा दायर किया लापता क्लस्टर को यह हक होगा कि वह ऐमी आम नाच पडताल के पश्चात जिसकी सूचना नीगद हो से दार फे तय करने हेतु आवश्यक भादेश निराले। (३) उपधारा (१) प्रथा अपधारा (२) के अधीन दिये गए आदेश की तारीख में पश्चान् या यदि अधिक पीय एक या एक से अधिक अपीलें से प्रादेश के सिद्ध पेश योगद हो तब ऐमी तारीख के पश्चात् जबकि अन्तिम पुनरावन अधिकारी श्राश ঘ ই হরর বায় বিষয়া বগা স্নানে যা বিশ্ব ব্যায় (খি কী ঋ = साधन न पना गया हो) यदि दावा ऐसे श्रादश को बडित करने हेतु दायर किया जाय अयथा मांगी गई सहायठा इसके विरुद्ध हो। परतु पधारा (6) के अधीन निकाले गए आदेश को अस्था मे मुहद को अनि पाय सूचना प्राप्त होगा हो। १) किसी पादश या नाच पड़ताल की पारश्यक सूचनाम्म धाग के अधीन व्यक्ति को हो, यदि इस अधिनियम या इससे अतर्गत निर्मित नियमों के अनुमार र सूचना दी जायगी। (1) उपधारा (१) या अधारा (२) के अधीन निशाना किया गया प्रत्येक यादेश का फलस्टर, नियत प्रणाशी सराय कायगा। (धारा-६) सनिन पागे, सान सोने और मनी पाडने का मधिकार 1) नदिया में मदली निकालना नौकानयन या सिंगई के मभी प्रमों प्रय शिघरों समोयनित पदार्गा, मानों पर पयर की स्थानों पर राय मरार एक होगा और राज्य सरकार प, से अधिकार के पूर्व प्रयोग के लिए, सभी एक सामलित पत्रम्यान गू राम शियम, १९ (0) प.परकी मानो या अगममाम मामेक में मोदने पे काय एय पत्थर की तुगाई पेलि त भ म पर पहुगो का अधिकार भी शामिल होगा तया नि भूमि को पाने में अधिकार भी होगा कि नो मोदी पे गाय से मलग्न फार्या की पूर्ति हा प्रायर होने कार्यालय प मानान अनान मनगे नियाम गाय मशीनमरा पेपनान, म्यनिज पदार्ग 4 माह के लिये गोदाम याने तथा यूई को भाने मयान यनारे, रेल या द्राम महा ये निर्माण करने और किमी अय कार्य काने के लिए जिसे राग मर घोहने काम पर तुरा से सनग्न घपिन कर। ( ) यदि राज्य सरकार किसी व्यक्ति यो पनिज पदाय स्वाना प्य पत्थर की तुल्याद सम्बधी अपने अधिकार मापे और यदि ऐसे हर के प्रयोग के लिए उपधारा (१) तथा (२) में निर्दिक मभी या किसी अधिकार का ऐस व्यक्ति द्वारा प्रयोग किया जाना प्रावश्या प्रतीत होता कलर एक लिम्विन श्रादश द्वारा, स्पनि गरिन शर्मा पर पारक्षकों के अंतर्गत उस व्यक्ति को शक्तिया मौंर साता है निसा कि अधिकार मोर दिये गये होंगे। पर तु ऐमा कोई समपण नहीं किया जायेगा तथा "स सम्म ध में उनके जब तक सम्बधित भमि म अधिकार रखने वान अ य व्यक्तियों को सूचित नहीं कर दिया हो द्वारा उठाई आपत्तियों की सुनवाई न करली गई हो। (४) यदि पूर्वलिखित किमी अधिसरी पे उपयोग कारण क्मिी ऐमी भूमि की सतह को अधिकार में लेने या अय प्रकार से उपरोध पैदा करने से किसी के अधिकारों पर हमला हुआ तो राज्य सरकार या उसका ग्रहण करने पाला ऐसे व्यक्तियों को ऐसे आघात के लिए क्षतिपूरण देगा और ऐसे क्षतिपूरण की रक्म का हिसाव क्लस्टर द्वाग तय दिया जायेगा अथवा यदि उसका निर्णय अस्वीकृत रहे तो दीवानी अदालत द्वारा जहा तक हो सके राजस्थान भूमि अवाप्ति अधिनियम १९५३ (राजस्थान भूमि अवालि अधिनियम सरया ४ सन् १६५३) के प्रावधानों के अनुकूल हा क्षतिपूरण का हिसाब निपटाया जायेगा। (५) राज्य सरकार का कोई भी गृहीता क्लस्टर की पूर्व स्वीकति के बिना किसी भी भूमि मतह पर न प्रश कर सकेगा और न हक हो जब तक क्षतिपण तय नहीं कर लिया गया हो और उस व्यक्ति को दे न दिया गया हो जिसके अधिकारों में हस्तक्षेप हुधा हो। का (६) उपधारा (४) के अधीन प्रारधानित क्षतिपूरण देने में यदि राय सरकार का कोद गृहीता असफल रह तो कलक्टर उस क्षतिपूरण के हकदार के निमित्त उस गृहिता से ऐसा क्षतिपूरण वसूल करने की भाति कायराही करेगा मानो वह कोई भूराजस्व ही लगान हो। (७) बिना किसी वैध अधिकार पे यदि कोई किसी खान पत्थर की खान से खनिज पदार्थ निकालता है या इगता है जिमसा अधिकार राज्य सरकार में समाहित हो और नो किसी अन्य शक्ति को मांस नहीं गया हो किसी अ य कार्यवाही के लिए रास्पात राजस्व पधिनियम, १९५६ [. जाने पर कोई भी प्रभाव नहीं डालने हुए, क्लस्टर के लिन्वित आदेश पर ऐसे निचले ये या हटाये गये खनिज पदार्य के प्रत्येक टन या सके किसी श्रग पर अधिकतम ५०) के हिसार से शारित रन का टररदायी हो। परतु यदि इस प्रकार दिनार लTITई रकम क हजार से कम होगी तो शारित ऐमी कोई अधिक रकम होगी जो कलक्टर द्वारा आरोपेउ की जाय लेकिन यह रकन एक हजार से अधिक नहीं होगी। स्पष्टीकरण - 'सनिन पदार्य श के प्रति इस धारा में किसी भी प्रखर की या मिती मा शामिल होगी निसा श्राम जनता के पग होना या व्यापारिक विरोपा का होना रा य सरकार द्वारा घो पर कर दिया गया हो। टिप्पणी-यह पारा भूमि पर, सानों पर तपा नदियों पर राज सरकार के अधिकार प्राट करती है। राज्य माकार ऐम प्रधिकार पर व्यक्तिया को रापली मार पट्टों पर माती है। पद राय मरधार मपवा उपा पदार सान साते समय या मिचाई करत समय पन्य व्यक्तियों का भूमि का नुकसान पहुँचान हैं तो वह उन व्यक्तियों को सठि दंगे। पापकता पटन पर यह राति सम्बन्धित व्यक्तियों को सरकार लिवा सकती है। बा तिरिनारिमा रानूनी अधिकार र सान सा या परयर हटाय तो उस पर फोजगरी कायवाही मतिरिक्त ५१} र प्रति टन - हिसार में पास्ति नगाई जाए। यह शास्ति मंपिक म पधिक १.००) २० र हा साती है। [धारा ६०] रानस्स या लगान की श्रायगी या उचरदायित्व ममग्र भूमि पर -(१) मिराय इसके कि मी भूमि पर सरकार के किसी विशेष अनुदान के सनगत नया सरकार के साथ किये गय किमी मरिता के अनुमार अया वर्तमान में प्रमान्वित रिमा कानून के प्रारधानों द्वारा मे अनुग्न से पूर्ण रूपेण मुक्त हो, इस अधिनियम के अय प्रारथानों के रहत हुए ममस्त भूमि चाहे यह रिन्दों पर स्थित हो धार पारिसी फार्थ से प्रयुक्त हो, रार सरकार को दय राजम्य एप लगान के लिये प्रविधित होगी। () रातस्त्र या लगान की अदागी मे ऐमी भूमि को न भूमि के प्राधिपत्य का दीप प्रयधि यवा सकती है और न किसी सम्पत्ति धारक द्वारा प्रदत्त अनुदान हो। (३) राज्य मरकार रिमी पिरोप अनुदान या मस्दिा द्वारा या यतमान में प्रभार शाल धिमी कानून के प्रावधानां फे अनुसार स्मिी मूम में ऐमी प्रदारगी की जुम्मेदारी से मुक्त कर सकती है। (१) इनके अतिरिक्त कि ऐमा राजस्य या लगान ननो मुगु, मुस्नि सममीन प्रयया पुनरोद्धार के फरए राज्य सरकार को देय नहीं हो, राजस्य या लगान सय भूमि पर निधारित रिया जायेगा।

२] राजपागू यिम, १९५१ [धारा १० फ] पि की भूमि यो गर पि राया म प्रमोग-(१) कोई व्यक्ति, तोगपि प्रयोग मिगी भूमि पोरगमा हो और यो भी मा व्यक्ति निसको ऐसी भूमि या भूमि पा हिस्मा सशदता पी गदहो, उस भूमि पो या भूमि प हिस्स का ग्स पर इमारत बनााप प्रयोग म प्रथया श्रय पिसा प्रयोनन म नही लावगा मिपाय इससे कि यह राज्य सरवार से लिखित म यहा यता, गद प्रणाली य यशुमार तथा अाय प्रार दागद आमा पी शर्ता प तुमार अनुमति प्रात नहीं पर ल । (९) एसा पाद व्यक्ति जो मी भूमि को या भूमि पे हिस्से को गैर कृपि ये विसी अय फाय मे प्रयोग म लान या इहो तो यह याछिन नास के लिये पा छेत प्रणाली से पर यादित अधिकारी को दरसास्त दगा बरसा दरसात म याछिन विवरण दिया हुआ होगा। (३) राज्य सरकार नियत प्रणाली द्वारा उचिन जाच पररे या नाच का प्रसार की दायरारी यररे या तो इनानत देने म नामजूरी वर दगी अथरा ालयन शर्ता र निरधनों पर स्वीकृति प्रदान कर देगी। (४) नन कभी ऐसी भूमि या भूमि के हिस्से पे विषय में किसी व्यक्ति को गैर कृपि काय के प्रयोग के लिए इनानत देदी जाये तो उस व्यक्ति को निसे ऐसी इनाजत मिली हो राज्य सरकार को उस भूमि पे लिए, (क) राज्य सरकार द्वारा इस विषय मे बनाये गये नियमों में बताई गई रट पर नसान किये गय तराने से नगर सुधार कर (अरबन असेसमेट), तो लागू किया गया हो, या (ख) राय सरकार से नियत की गइ रकम प्रीमियम के रूप म, या (ग) दोना, दो होगे। (२) यदि ऐसी कोई भूमि-- (क) राय सरकार की निसिन अनुमति पहले प्राप्त किये मिना, या (ख) उक्त अनुमति के निधना तथा शर्तों का अनुसरण न करते हुए प्रय प्रकार से, या (ग) ऐसी अनुमति दी जाने से उपधारा (३) के अधीन इन्कार कर दिया जाने के याद,या (घ) उपधारा (४) मे निशित भुगतानों में से किसी का भी भुगतान किये बिना, उक्त रूपण काम मे लाइ नाय तो, वह व्यक्ति जो स भूमि को प्रारम्भत कृषि के लिये धारण करता हो तथा समस्त अनुवर्ती हस्तारिती यदि कोइ हा, यथास्थिति, अतिममएकारी (सपासर) सममा जायगा/समझे जायेंग और धारा ६१ के अनुसार उसे/उहें इस प्रकार वेदसल किया जा समेगा माना उसका/उनरा मिना वैध अधिकार के उस भूमि पर कजा पत्रस्यान भू राजस्व अधिनियम, १९५६ था/या कम्जा नारी रहा था और प्रत्येक ऐसी कार्यवाही पर राजस्थान टीनेन्सी एक्ट, १९५५ (रातस्याय एक्ट स०३, सन् १९५५) की धारा २१२ के प्रावधान इस प्रकार लागू होंगे मानों वह भूमि नष्ट, क्षविपस्त अथवा अयकान्त किये जाने के खतर में थी कि तु गज्य सरघर, वैसे व्यक्ति तथा अनुवर्ती हप्ता रितियों को सम्बधित भूमि से उपरोक्त भाति वेदखल किए जाने के वनाय, उस दशा मे जब कि वह/वे यथा स्थिति, राज्य सरकार को, उप धारा (४) के अधीन देय नगर सुधार पर (Urban Assessment) तथा प्रीमियम अदा करने के अलावा तीर शास्ति ऐसा जुर्माना जो निधारित किया नाय चुका दे/दें, उक्त भूमि को रखने और पि से भिन किसी अन्य प्रयोजन के लिये उपयोग करने की अनुमति दे सकेगी। [धारा ६१] भूमि पर अनाधिकृत आधिपत्य यदि कोई किसी भूमि पर अवैध कब्जा करवा है अथवा फना चालु रखता है तो उसे अतिक्रमी सममा जावेगा और वहसीलदार द्वारा उसकी इच्छानुसार अरथा उस स्थानीय सस्था के आवेदन पत्र पर जिसको देखरख में ऐसो भूमि सौंपी गई है, ऐसा अतिक्रमी भूमि से तत्काल बाहर किया जा सकता है और उस भूमि पर [ xxxx] पनाया गया कोई मकान या श्रय दाचा अथया सहित कोई यस्तु, तहसीलदार द्वारा समय-समय पर उसको हटाने के सम्मघ में दिये गये उचित समय में नहीं हटाये जाने पर, राज्य सरकार के हक में जन्त फरली जायेगी और कलक्टर के निर्देशानुमार फैसला कर दिया जायेगा। परन्तु वहसीलदार किसी एसे मकान या अय दावे को अधिकृत करने बजाय उसे या उसके किसी हिस्से की गिराने का भी हुक्म द सकता है। (0) ऐमा अतिक्रमण गरी साथ ही प्रत्येक कृषि व निममें उसने पूरे वर्ष के लिये या योश के लिये एक्त स्पेण फन्ना धारण किया हो शास्ति के तौर पर ऐमी रकम घुकाने फा मागा होगा नो सालाना लान या कर निर्धारण यया स्थिति के पन्द्रह गुना एक हो सकती है और एक रकम गू-राजस्व की पकाया के रूप में यमूल की जायगी मितु मयत शास्ति का भुगतान करने पर उसे किसी अन एकत्रित पसल का परिपोपण कान एकरण करने क्या हाने का अधिकार होगा। (३) उपधारा (१) के अन्तगत अतिवामी को उपभोग गुय करने की कार्यवाही करने के पूर्व सहमीलदार "स व्यक्ति पर विमर मग्य यम र कानुनी तौर पर भूमि में पाने में गो ज्ञान या रमने की रिपोर्ट की वाय एक सूचना तामील करापे। जिममें उम भूमि का अजय होना तया रोमी भूमि का किमा निहित सारोष सफ मानी राजस्या भू राजस्व पिरियम, १९५६ का प्रथया हाजिर होकर अपने उपभोग शूय नहीं किये जाने के पए में कारण पेश करने पे लिये भी निर्देश दगा। (४) किसी भी निम्नाक्ति मामले में, अर्थात् (१) जय कि उपधारा (३) पे प्रतर्गत दिये गये नोटिस ये जयाय म अविवामी न तो भूमि को छोडे और न हाजिर ही हो, या (२) जब कि ऐसे नोटिस के उत्तर म अतिकामी भूमि नहीं छोड़े और हाजिर न हो, कितु- (क) कोई कारण सामने नहीं रसे, श्रथया (ख) विषय की परिस्थितियों के अनुसार प्रस्तुत किया गया प्रतिनिधित्व पार श्यक अनुसधान एर सुनवाई के पश्चात् अस्वीकृत पर दिया नाय नो तहसीलदार केवल इसके खण्ड (२) विषय म अतिमामी को एक सप्ताह मे जमीन खाली करने की आज्ञा दे और उसे छोड़ दे, अतिकामी को हटाने का आदेश देगा और उसे हटायेगा या रिसी व्यक्ति को उसे उस भमि से हटाने को और कजा करन को भेजेगा और यदि तहसीलदार या उसके द्वारा प्रेपित व्यक्ति के द्वारा भूमि का आधिपत्य लेने में विरोध या बाधा डाली जाय तो तहसीलदार क्षेत्राधिकार रखने वाले मजिस्ट्रेट के पास श्रावेदन पत्र भेजगा और ऐसा मजिस्ट्रेट तहसीलदार को भूमि की पापिसी किये जाने की कार्यवाही करायेगा। (५) यदि ऐसी भूमि, उपरोक्त उपधाराओं में उल्लिखित किसी भी बात के प्रति रिक्त धारा १७ के प्रतियध के खण्ड (२) मे यणित वग में सम्मिलित होगी तो तहसीलदार सन डिविननल अधिकारी को सहमति से अतिमिर को वेच देगा जर कि उसरे द्वाग ऐसी उपधारा (२) के अधीन अवैधानिक कजे की मम्पृण अवधि के लिये वसूल किए जाने योग्य शास्ति तथा धारा ६६ के अधीन निधारित प्रीमियम नमा करायेगा। [धारा ६२] विशेष कायार्थ भृमि को विलग करना - (१) कलक्टर किसी विशेष कार्य के लिए राज्य सरकार के ग्राम सामाय आदेश के अधीन जैसे कि चीपार्यो को मुफ्त चराई वन सरवण श्राबादी के विकास या किसी अय श्राम या म्युनिसिपल काम के लिए कोई भूमि अलग से छोड मक्ता है और प्रेमी भूमि क्लक्टर की पर स्वीकृति के अलावा अय काय के उपयोग में नहीं लाइ जायगी। [धारा ६३] चारागाह के उपयोग का नियमन -चरागाह भूमि पर पराई का अधिकार गाव या गार के पेचन उही चौपाये पशुओं तक रहेगा जिनके लिए यह भूमि छोड़ी गइ होगी और राज्य सरकार द्वारा निर्मित नियमों के मुताबिक उसका नियमन होगा।

राजस्थान भू राजस्व अधिनियम, १९५६ (धारा ६४ सडक के किनारे के घृन : -(१) तमाम सड़क के किनारे के वृक्ष चिनको सरकार के थादेश से अयया खच से लगाया गया है या पाला गया है, और ऐसे तमाम वृत्त निमको स्थानीय मद या रस्म से उगाया, और पाला गया है, जो किसी डर के किनारे खडे हों, तथा जो राज्य सरकार के हों, उन पर राज्य सरकार का अधिकार होगा। (२०) ऐसे वृक्षों के मर जाने पर श्रथया मा मादि, से गिर जाने अथवा निलाधीश फे आदेश से काटे आने पर उनकी सारी राज्य सरकार की मिल्लियत होगी। धारा (४] अनधिकृत रूप से काम में लिए गए बिना प्राज्ञा के पेड़ों शादि की रकम की वसली:-(१कोई भी व्यक्ति जो, मिना याज्ञा के, सड़क के किनारे के पेड़ या उसके किसा हिस्से को, अनधिस्त रूप से येच देगा अथवा, अन्य प्रकार से उपयोग मे लेगा, अया उस पढ़ की प्राकृतिक उपर को हटा लेगा तो उससे बम पस्तु की कीमत राज्य, सरकार वाल पर सकेगी, और ऐसी उसूली, भूमिकर, का पायापी मावि ही वसूल की ला मफेगी। यह रकम उस, दण्ड, के अलास होगी, जो कि किसी कानून के अन्तगत, उस व्यक्ति को देनी पडे । ( निलाधीश का निर्णय ऐसे पड़ अथवा हिस्से अथवा उपन की कीमत, के विषय में, अन्तिम होगा। धारा E५] श्राबादी का विकास राज्य सरकार धागदी के रिकाम के लिए अलग छोडी गई मूमि को रिना करने के लिए श्रथया रोधी भूमि के बाटे आने के बारे में या ऐमी भूमि के सम्बध में कोई अदायगी के सम्बध मे और इस प्रकार के विभाजन के अधिकारों की घोषणा हेतु नजूल भूमि के मलोटमेट करने के लिए या अलग छोड़ी गहमी भूमि के लिए नियम बना सस्तो है। (२) कोई भी यति kaxxबाड़ी क्षेत्र की चोद भी जमीन, इस अधिनियम प्रवर्गव निधारित म्प से कोई प्रतिकश दिये विना, कोई भी नमीन कजे में नहीं लगा। (३) भागदी की भूमि मे, ऐमा प्रतिफल दे देने के बाद ही साग पूर्ण अधिकार प्राप्त होगा (४) इस अधिनियम के प्रमाशी न होने दे या किमी व्यक्ति के वैध माधिपत्य में होने यानी [xxx विसी पापाना पत्र पर इम पारा की कोई भी कात लागू नहीं होगी। (५) जहा इस अधिनियम के लागू होने के समय कोई व्यक्ति [xxx आवादी में क्षेत्र की किमी भूमि को मौमित अधिकारों सहित पान अधिकाम म रखे हुए होगा, वह उम भूमि म पूर्णाधिकार प्राप्त कर मरेगा जिन्नु सर्न या है कि यह ऐसा प्रतिफल पदा करे कि ना इन अधिनियम के अतगा निश्चय किया नार! - राजापान मू राजस्र पमिनियम, १९५६ (६) इस अधिनियम के प्रभावशाल होने पे यार कोई भी व्यक्ति जो, उपधारा () पे प्रावधानों पे अशुमार पे अतिरिक्त या उपधारा (१अधीन निर्मित नियर्मा पे पाहर कोई भूमि प्राबादी क्षेत्र में पदण पता है प्रथया मिना किमी सगुरित अधिकार फे ऐसी भूमि पर अलग से प्रथया अपने पड़ोगी की जमीन पर पहन से स्थित किमी इमारत या दाचे क। पढ़ाते हुए पोइ दापा सेयार परयाता है या मी प्रभावशीलता के पश्चात किसी पचित अधिकार पे अलाया तरीफे मे उपधारा (५) में संदर्भित भूमि पर अथवा ऐसी भूमि एवं अपने आधिपत्य म उपिन या भय रीति से रपी हुद भूमि, किमी अय भूमि पर कोई दाचा पनाता है, अतिरिक्त माना जायगा। और उसे किमी भूमि को पिना किसी वैध अधिकार अधियास म रम्बने याला या अधिगस में रम्बना पाल रखने वाला व्यक्ति सममा जायेगा। (७) उपधारा (६) मे उल्लिखित पुस्प भूमि ण्य ढाचों पर धारा ११ के प्रावधान प्रभावशील होंगे- परन्तु शत यह है कि- (१) धारा ६१ की उपधारा (१) (२) (३) और (४) के अतर्गत तहसीलदार द्वारा प्रयोय अधिकार, उसके द्वारा [xxxx] आपादी की भूमि के बारे में या किसी अय भूमि के बारे में जो चौपाये की मुफ्त चराई के लिए अथया आयादी के विरास के लिए या किसी अय सार्वजनिक पर आयादी के प्रबंध के उपयोग के लिए अलग रखी हुई भूमि जो कि धारा १२ की उपधारा (२) के अन्तर्गत या श्रय रीति मे क्सिी स्थानीय सस्था रे प्रवन्ध में धारा १०२ के अनुमार रची गई हों उसरे पास ऐसी सस्था द्वारा अर्जी दिये जाने पर प्रयोग मे लाय जायेगे । या स्वत और जबकि तहसीलदार स्वत कायवाही करने का विचार करे वह अपने उक्त विचार की सूचना सम्बद्ध स्थानीय सत्ता को देगा। (२) इन उपधाराओं के अधीन अतिप्रामक पर शास्तिया लगाकर ऐसी स्थानीय सस्था के फण्ड में जमा की जायेगी, और (३) धारा ६१ की उपधारा (५) के अधीन तहसीलदार द्वारा प्रयोज्य अधिकार, पूर्ववत् किसी स्थानीय सस्था के निम्मे रखी गइ भूमि के प्रवध में ऐसी स्थानीय संस्था द्वारा किसी अधिकारी की अनुमति के बिना ही प्रयोग में लाये जायेंगे। [धारा ६६] प्रीमियम की दरें कलक्टर नियत करेगा -(१) राय सरसर सरकारी गजट में विज्ञप्ति प्रकाशित कर नजूल या दूसरी भूमि के लिय नो भागादी के क्षेत्र में ही प्रीमियम की दरें नियत करेगी तथा समय समय उ ह दोहरायेगी। (२) ऐसी दर उसी गाव कस्यों या शहर या गावों स्यों य शहरों के समूह के अदर अन्य विभिन्न क्षेत्रों की तथा भूमि की स्थिति की कीमत को ध्यान म रखते हुए इस अधिनियम के अतर्गत निर्मित नियमों की संगति में तय की जायेगी।

- राजस्थान राज-व अधिनियम, १९५६ [ ३७ धारा ६७] श्रारादी की भूमि की निलामी -जन कि {xx] आपाटी क्षत्र में स्थिनि रिसा भूमि क टुक्ने लिय एक से अधिक आवेटक हो, तो ऐसे सभी मामलों यह नीलाम से मस ची गोली लगाने वाले को बेचा जायेगा-- परन्तु शन रह है कि- १२) कलक्टर मिन्ही कारणावे लन्दनद क्येि गाने पर किसी बोली को अस्वीकृत कर मरना है। () पारा ६६ को पधारा (१) और () अाधीन निश्चय की गइ दरी पर मानिनिल मनिष्ट को पूर्व स्वीकृति लेकर मौजूदा इमारतों के पडौस की भूमि डोर हार टक- बिना मगे, और 'स धारा के अन्तर्गत नियम की वायही इस विषय में राज्य सरकार द्वारा निर्मित नियमा रअन्तर्गत नियमिन की गारगी। धारा हा धाम मरने के कोठे तथा रडा करक्ट मरने की भूमि . १७) राज्य सरकार द्वारा निमत नियमा र अन्तर्गत, इस विषय में सर डिसिनल प्राध गरी प्रिमियम नया लगान तथा लगान से मुक्त रिसी गाय, कम्वे या शहर के अन्दर "नना लम्बाइ चाँगर को भूमि नोहर परा रे पट रक्ट, घुडमाल की ली और चीपायो गोराय घट रमा रमन तथा चौपाया के चारा भरन क लिए पारया कोटा क काम क लिए निपारित की नार, र सजी है- परतु गत यह है कि (1) स प्रकार की भूमि का अधिकार सम्पम नहा मागा नायेगा और भी भूमि नभाना मरगा सपकि यह प्राप्त होगी, ( ) फलकटर एसा का पुनम हरा निना ननिपुरण टिप कर संगा () यह व्यक्ति निसरोसी भूमि दी जार, मी भूमि का विनिमय शिवम मन रोयत या पहार दम्प मे स्थानान्तर नही र मरगा, श्रीर (८) यह व्यक्ति, निसो मी भूमि दी जाय हम अधिनियम या मर अधीन नमन नियमा पापीन नारा वि समस्त पाश पालन करने लिये () पधारा (२) अन्तगत टी व भूमि तहसीलदार के टर्ने क या सा उपर TrIT राजस्व अधिकारी का प्राक्षाय अन्तान पुनहाया जा सकती है, और नजर मिरमरा प्राप्त पाने याना रक्तिम पारा चार अन्तर्गत निमिन किसी भी निगम पारसना का गल्लघन करना है। टिप्पणी ~~उन धारा मनुमार सार उन मुविधा व स्वास्थ्य नियएछ ऐसी भूमि Eri arar है शिम यह ममम माप हा प्रसार मतित तौर पर भी सा, सानिये मोगों भूमि दे माहा है।

१. ] । रामापान भू राजस्व पधिनियम, १९५६ (vi) स्थानीय अधिकारी से अधिपार म आइ हु आयादी क्षेत्र ये पदर की भूमि अथवा सेक्शन १२ पे अतगत प्रारक्षित अथवा विरोप उपयोगा के लिए अलग रक्सी हुइ भूमि, और ऐसी भूमि से उत्पन्न होने वाले सभी लाभ सथा अय पस्तुण जो उम मिट्टी में लगी हुइ हा, या स्थाई रूप से उसम जुड़ी हुइ हो, भर (ख) आगादी अथवा 'यानादी क्षेत्र या 'पागदी भूमि का तासर्य गाय, कन्ये अथवा शहर पे मनुष्या से बसे हुए क्षेत्र से है तथा इसम गार, पस्ये, शहर का मोरे की स्थिति (Site) सेक्शन १२ से अतगत प्रारक्षित अथवा अलग रक्सी हुइ भूमि जो कि उस पापादीत के विकास के लिए हो और उसके प्रदर का यह भूमि, जो भवन निर्माण आदि के लिए रक्सी गइ हो उसमे भवन निमाण किया गया हो अथया नहीं ये सभी सम्मिलित है। [धारा १०४] स्थानीय सस्थानों द्वारा जिन मामलों म रानस्व अधिरारियों के आधार प्रयोग म लाये जायेंगे जन धारा १० क के अधीन या अय क्सिी स्पमे क्सिी गाय या करने की भागदी की कोई भूमि अथवा पशुआ को मुफ्त चराइ हतु या आगादी के विकास हेतु या किसी अय आम या नगरपालिका के उपयोग के लिये अलग से छोडी गद नजूल भूमि या भूमि किसी स्थानीय सस्था को सुपुर्द करदी जाय तो धारा १७ और ६८ के अनगन निलाधीश अथवा अन्य राजस्व अधिकारी द्वारा प्रयोज्य अधिकार इस विषय में राज्य सरकार द्वारा निमित नियमो के अधीन सम्बधित स्थानीय सस्था द्वारा एकाधिकार के रूप में प्रयोग में लाये जा सकेंगे। [धारा १०५] राजस्थान टैनन्मी अधिनियम मख्या ३ श्राफ १६५५ की धारा ३१ कयाधीन प्रामामियों द्वारा प्राप्त अधिकार अप्रमाहित . --धारा ६५ ६६, ६७ और १०. की को भी बात विसा भी भाति राजस्थान टेने मी एक्ट १९५५ (रानस्थान एक्ट सरया ३ सन् १६५५) की धारा ३१ द्वारा प्रासामियों को निना क्सिी चान के गाव की श्रानादी के हरफे मे रिहायशी मकान के लिये भूमि का कजा प्राप्त करने के क्येि प्रदत्त अधिकारा को न कम करगा और उन्हें समाप्त ही करेगा। अध्याय ७ भू म मापन और अभिलेस सग्रह (क) मामान्य [धारा १०६] भूमापन अथवा पुन भूमापन --सरकारी गनट में विज्ञप्ति प्रकाशित पर राय सरकार निर्देश कर सकती है कि किसी स्थानीय क्षेत्र का भूमि मापन अथवा पुन भूमिमापन किया जाय और ऐसा प्रत्येक स्थानीय क्षन किसी ऐमी विज्ञप्ति

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रामरामय पशियम, १९५६ (१) म पारा पे अधीन, मिगी विषण प प्रमभाा ग ममय यदि भूलम्य अधिकारी यह मय परन म पिपल हनिपीनमा पा अधिप य याला था या यह बताया जाय कि पनायेधानिए पजदार याला सरीर स यदपल परय दिया गया है और यति सा प्राधिपत्य मे प्रासपा पे गलाल ३ माम प अदर प्राप्त किया गया हो तो भूनेपाधिकारी मामूली पदमाघ द्वारा यह सय परगा कि पानसा पर "म सम्बध म सर्वोत्तम अधिकार रखता है और उमी य अगुमार सीमा रिह तैयार परगा। (ग) नक्शा एव ससरा [धारा ११२] नक्शा पर ससरा नाना प्रत्येर स्थानीय क्षेत्र या उमरे क्सिी सएड पे यार म जो कि भूमापन या भूलय कार्य पे श्रगत हो, भूले पापिसारी इस विषय में राज्य सरकार द्वारा निर्मित नियमा पे असार प्रत्येक गाय या उसके किसी भाग के लिये जो दिमे में हो या उसके हिस्से मे होप नशा और एक ससरा तयार करायेगा। (घ) अधिकार अभिलेख [धारा ११३] अधिकार अभिलेस -(क) भूमापन और लेसा थायरम या केवल लेस कार्यक्रम के अधीन किसी स्थानीय क्षेत्र के यार म भूलेख अधिकारी ऐसे क्षेत्र म शामिल किमी गार या उमरे क्सिी हिस्से के लिये अधिकार अभिलेख पननायेगा। धारा ११४] अधिकार अभिलेस क यग--अधिकार अभिलेग्य का निर्माण राय सरकार द्वारा निधारित तरीके से किया जायेगा और उममे निम्नाक्ति बाते शामिल हागी- -अथान् भूमापन और भूलेग्व काय अथवा भूलेख काय के प्रभाव क्षेत्र मे अवस्थित समस्त सम्पत्तिधारका का रजिस्टर जिसमें प्रत्या सम्पत्ति धारक और उसके सभी हिस्सेदार, उसके कजेदार और उसके अनर्गत गैर भूमिदार के रूप में भूमिधारण करने वाले लोगा के, यदि कोई है, हिता की मीमा और उनकी प्रकृति का निर्देश दिया जायेगा। (स) सतानी - श्रथात् ऐसे पत्र मे भूमि पर खेती करने वाले या किसी अन्य रूप मे भूमि पर बना रखने वाले या उसे धारण करने वाले का एक रनिस्टर निसमे धारा १२१ द्वारा याचित सभी विवरण शामिल किये जायगे (ग) ऐसे क्षेत्र मे राजस्म अथा लगान से मुक्त भाम को धारण करने वाले लोगों का एक ररिस्टर या (प) ऐसे अय रनिस्टर नो निधारित किये नाय । (क) खेपत - राजस्थान भू राजस्व अधिनियम, १९५६ [धारा ११५] एमी भूमि के सम्बन्ध म बाद ग्रामपित करना निमका कोई मामी न हो--(१) बाकि कोई स्थानीय क्षेत्र भूमापन और भूलेय कार्य या फैनल भूलेख कार्यक्रम के अधीन हो भूलेख अधिकारी ऐसे क्षेत्र में स्थित ऐसी भूमि की सचि पार करगा जोकि रमको किसी ध सम्पत्ति होना प्रतीत न हो और तत्पश्चान एमी भूमि को राज्य की सम्पत्ति के रूप में चिदित करने के विचार की सूचना सहिन और मे गम भूमि से सम्बधित किसा असर रे गाद रखने वाल लोगों को निमन्त्रण गते हुये आम घोषणा प्रसाशित करगा। ऐसी वोपणा की तारीब पचान् तीन माह की अधिरे भीतर, ऐसे पाट अधिकारी, प्राधार निर्देश के सहित अपनी श्रों पे (6) यनि कोद ऐसी भी प्रस्तुत हो तो भूलेग्य अधिकारी उचित पटना के बाद से सरसरी तार पर निर्णन करगा। [पारा ११६] अनाधिक्त भूमि को मानननिर रायर्यो म प्रयुक्त नि जाने मी प्ररिया ~~-भूलेख अधिकारी गरि सारा ११५ में बताई गई भूमि के लिये शेइ पार प्रस्तुन न रिया नाय या रह गज्य सरकार की सम्पत्ति तय करदी जाय जिन्तु आसपास व गार या गारा क निवासी यह साबित करें कि वे ऐसे निर्णय र पूर्व स मूमि को चरा अथा अन्य कृषि कार्यों के उपयोग म लेने रहे हैं, ऐसे गार या गायों को प्रेमी भूमि के से अशजो कि बह गमे कार्य के लिये पावरपर समझे, मुपुर्द कर देगा और गेप भूमि को राय मरार को मम्पत्ति घोषित करगा तथा तनुम्प विहित करगा। धारा ११७] एसी भूमि पर मीमित विकार होने की दशा म कायवाही.. यदि धारा ११५ - अधान जारी की गद घोषणा गल्लिन्वित भूमि में उससे या उस पर प्रविसर पभोग गिरे जाने या प्रयोग स्विनाने जो कि एकाधिकार का प्रयोग करत नहीं साचिन हो जाय तो भूनेव अधिकारी वाटअधिकारी को ऐमी भूमि रे कोइ निशान से माने पर पनीर उसकी मम्पत्ति को सौंप माती है अपना राज्य सर- पार कालि से अमाप में राजस्थान भूमि अवाप्ति अधिनियम १९५३ (राजस्थान द मम्या । मन १९५३) के प्रावधानों के अनुमार एमे या अधिकारी को क्षतिपूररा * माना है और मा जनिपूरण गरे उपभोस प्रयोरे कारण ग्यत सभी गार्गका ममानि पर दगा। धाग ११८] निर्धारिण एव खुरशान्त भूमि का माट-भन्नेस अधिारी न्युदयान के पनीर धारण का समस्त भूमि मी मीमा का निवारण र निरुपण परगा या उससे सस्प में लेबर बरगा। धारा ११६] किमी गार री भागास निर्धारण रे सिरम मूनेचाधिर स्मो निशामिया व रहने के लिये तथा उनी निरास से मन्यद्ध पाया के लिये प्रारजित किये जाने वाले क्षत्र पानिधारण निम्मा जग्गा और और rमा कर सेर को भावानी में समा जायेगा।

राजपा गूरामर पर्धािम, १९५६ टिपणा - परागे भूरे परिणामो लिया गया है । मनेगा पधिकारी गांव में रहने यापो ये मिसोसपा पारा के बारें म लिये भूमिका भारमा नरेगा-ऐगे माया गलिये मूमि गुरमित रोगा। [घा १२०] ग्राम पनिया-पिया प्रपत्र म भूमापन और भूलेग कार्यक्रम अपना भोग पायाम पे अधीन हो गया। गार पो र सूचा भूलेग अधिकार तयार परेगा जिसमें कि यह निधारित रीति मे दिपायेगा- (क) दा धारा मे प्रभारित होन पालात्र, (२) अनिश्चित ती या क्षेत्र। (ग) इस सम्मर मे निधारित रानप या लगान तथा उसरे अदा करने याले यक्ति, - (घ) मेत्र निरा राना और लगान का सम्पूर्ण भाग या कोद श्रश जो यमल दिया गया हो, छोड दिया गया हो सौंपा गया हो, लगान मुफ्त रिया गया हो या उस विषय म समीता दिया गया हो तो उससे सम्बद्ध शता एप प्राधिकारा का उल्लेस। [धारा १२१] सतौनी म दर्ज दिये जाने पाो मिचरण --(१) धारा ११४ रेराएड (स) द्वारा नियत पिसी भूमि के तोतने वाले अथवा अन्यथा प्रकार मे उसको धारण करने या उसमे अधिनाम करने वाले लोगों के रजिस्टर में प्रत्ये' आसामी के लिये निम्नाकिन विवरण दन किये जायेंगे, अर्थात्- (क) राजस्थान '[x दिन सों अधिशियम १६५५ (राजस्थान पानून ३ श्राफ १६५५) के प्रारवाना के अनुसार निरुपित उसो भूप्रपा प्रणाली की प्रकृति एष श्रेणी एवं [या श्रय क्सिी दूसरे कानून या प्रावधान के अनुसार जो उस वक्त राज्य भर मे या किसी हिस्से म लागू हो।], () खतौनी की सीमा की अपाप्ति हेतु उसके द्वारा प्रस्तुत प्रतिपल की रक्म यदि कोई हो, (ग) सनीनी के पच की तारीख और स्थानातरण यदि कोइ हो जो कि इसमे द्वारा किये हा, उनसे सम्बद्ध निवरण सहित, (घ) उसी जोत मे एर तत्सम्बन्धित क्षेत्र में सम्मिलित प्रत्येक सेत का खसरा नम्नर, (४) पिर लगान जो उसरे द्वारा दय हो, (च) भूमध प्रणाली को कोई अयश जो चाहे लिखित पट्टम सम्मिलित हो अथवा न हो, और X x [४१ राजस्थान राजस्व अधिनियम, १९५६ (2) सातटार प्रासामियों के अलावा यक्तिया के मामले में उस भूमि ₹ उसके प्राधिपत्य होने का समय क्यामे और, (त) ऐसे श्रय विवरण जो समय समय निरित किये जाय। (6) से भूमियारियों का जो पि[x राम्यान टोनमी अधिनियम १९५४ (रावस्यान एक्ट ३ श्राफ १६५५) "या पर किसी टूमर काना या प्राररान के अनुसार जो स यक्त राज्य भर म या रिसी हिम्से म लागू हो यो प्रणाली के तौर बुन पात पे लिये कोई भूमि धारण किये हुये हो रजिस्टर म गल्लेख किया जायेगा और ऐसी भूमि के सम्बर में उन यों का निर्देश रिया जागा निमें वह भूमि इस प्रकार धारण की गइ होगी। टिप्पणी -राजस्थान एक न २ माफ १९५८ फ सण्डा की प्रपम सूनि द्वारा जो राजस्थान र सह - विषा: निार १३-१५८ को प्रति हुपा (१) (३) लोक्त किया गया व (२) (मम्मिलित दिया गया । [धारा २२] इन्द्रानों का सत्यापन और मगहों का निर्णय अधिकार अभिलेय पी समम पिसद रहित इद्राना में रुचि रखने वाले परीपन सत्यापन परगे मे इदाता के मम्बर म समाप्त पाद चाहे वे मूलेस अपितारी द्वारा स्प्रेरित को अयमा रिमी अमिमी रवन गाने पक्ष के प्रावेदनपत्र पर उठाये गये हों, भूलेग्य अधिकारी द्वारा धारा १ ३ १२० और १५ प्राधानों के अनुसार निपटारा निय जायेगा। [घाग १०३] श्रामामी क वर्ग का निर्धारण -(१) रिसा आसामी दे वर्ग श्रया भूमर पाली मे मम्बधित मामले में भूलेख अधिकारी राजस्थान टोनेन्मी अधिनियम, १९५५ म स्थापित सिद्धाओं पर निर्णय करेगा। (') याद वे निपटाने में इस धारा के अमीन, मूलेचाधिकारी ऐमे जाने मे काम नेगा जो इस अधिनियम के अंतर्गत नियत किया जाय। धारा १२४] देय राजस्व अपा लगान के सम्बद्ध सिद-भूनेन अधिकारी किमा राजस्व या लगान मे सम्बद्ध किमी विवाद में, याद को तय नहीं करेगा कितु प्राकार परमारना में वर्ष में देय लगान या राजस्व वेस्प में पूर्व या में देर गार या लान पारपाई परगा रितु गा यह है कि यह ऐसे अधिनियम अथवा राजस्थान टीन भी अधिनियम १९५५ क थर्गत विमा सविदा, दिनी या पाशा द्वारा कम या ज्यादान कर दिया गया हो। धारा १२५] अधिश श्रमिन्स की प्रविष्टियों के विषय म उठाये गये झगड़ों का निपटारा -(२) अधिकार अमिलेस पी प्रविष्टिया पे सन्म में उठाये गये अन्य समस्त पियाद अधिपत्य दे प्राधार पर तय किये जाती।

राजपा राजय पणियिम, १९५६ (२) इस धारा पे अधीन भूलेगा अधिगरा रिमी विया' की पदनाय य ममय पद तय न पर सरे पि यौनमा परा अधिपत्य पामो यह मरमरी पृरनार य नारा ग६ सय परगा नि पान यत्ति माम अपि है पीर मशुमार प्रिया का निपटायेगा। (३) एस धारा पे अधार निमारा गया याह भा था रिमा -यक्ति पर त्रा विकार रम्या पाला हायानी प्रथया माल अदालत म पिसी भूमि पर अपन अधिकार का होना सारित परो पर पाय दी नहीं लगायेगा। धारा १२६] वर्तमान नेस मग्रह का प्रयोग --उमर धारा ११०१अचान नया भूमापन एवं यमरा मानचित्र नैयार न हो प्रथया नर ना धारा ११ र प्रधान अधिकार अभिलम्ब तयार न हो, तमान यमरा मानचित्र और अधिकार अभिलेय पटि नोइ हो सम्बद्ध सर पे लिए यमरा मानचित्र या अधिकार अभिलम्ब कहलायेगा। [धारा १२७] भूमापन एर भून्लेस कायक्रम की समाप्ति पर विचागथ अविष्ट विवाद: —जर कभी धारा १०६ या १.७ के अधीन विज्ञप्ति जारी कर भूमापन और लेस सग्रह का श्रथया भूलेग्व सग्रह का फाय, जैसी भा श्रयम्या हो, न कर दिया जाय तो उस समय अतिरिक्त भूलेग्व अधिकारी द्वारा अनिरिणत मामल यदि गोइ ऐसा अधिकारी नियुक्त नहीं किया गया हो तो क्लस्टर को स्थानातिरित कर दिय जायेंगे। टिप्पणी-इस धारा के अनुसार जब भूमापन या खसरा मानचित्र का काय राज्य सरकार ब - वर देती है तो आप बचे हुए मामले या तो प्रतिरिन अधिकारी को नियुक्त कर निपगय जाते है म यथा फ्लपटर को सौंप दिये जाते है। (ड) मानचित्र-खसर की सुरक्षा धारा १०८] सीमा सम्बन्धी विवाद -सीमा के सम्मथ सभी निया- धारा ११म उल्लिग्विन प्रणाली द्वारा भूलेग्य अधिकारी तय परगा। पर तु शर्त यह है कि येता की ऐसी सीमा मम्ब धी नस्वास्त हा यद्यपि सीमा मम्वधी विवाद न हों क्तुि सीमा चिहा के अभाव मे एसे विनाको काफी सम्भावना हो सकती हैं तहसीलदार को ही पश की जायगा त पा सी रे द्वारा नय की जायेगी। [Pारा १२६] मीमा चिन्ह के सम्बन्ध म भूमि गारिया का उत्तरदायित्व - (१) ग्राम-सम्पत्ति और खेतों ने ममरत सधारर से गाय ग्यत या सम्पत्ति पर गन्नी रूप से बनाये गये सामा के स्थायी रिहा को अपन पच पर ठीक अवस्था में रखने सथा उनकी व्यवस्था करने के लिये उत्तरदायी हागे और भलेय अधिकारी रिसा भी समय मे भूधारिया को आदेश दे माता है कि- राजस्थान राजस्व अधिनियम, १९५६ (क) वे इस प्रकार गामा, सम्पत्तियों या सनों पर उचित सीमा चिह लगायें (ख) उन पर उचित रूप से बनाये गरे समस्त मीमा चिन्हा के ऐसे रूप में और ऐसी सामग्री से मरम्मत कराये या न्नस पुन निर्माण क्रान जोकि इस अरस्था म निधारित कि जायें। (२) यदि ऐसे श्रादश रा पालन उसके जारी होने के बाद अदर मया ३० दिन नहीं दिया जार वो ऐसा अधिकारी से सीमा चिन्ह को धनवाने रनरी मरम्मत करवाने श्रया उनका पुन निम ए परसान को कायपाही कर सकेगा और ऐसा अधिकारी सम्बधित भूधारिया मे एसे अनुपात मे, जो वह उचित समझे खर्च किये गये दाम पमूल फरगा। (३) रनों की सीमा सम्बधी मामलों में, जहा सीमा सन्बया कोई विवाद नहीं, है, वहा उपधारा (१) व (-) के अगत तहसीलदार द्वारा उस दरखास्त के प्रस्तुत होने पर या अन्यथा मा कार्यवाही की जावेगी। [धारा १३०] मीमा चिन्हों को नष्ट करने या हटान पर शान्ति किमा मे व्यक्ति के मम्मर म निसा द्वारा इन्दापूर स्मिी भूमापन या सीमा क चिहा को हराया जाना, हानि पहुँचाना या नष्ट किया नाना सिद्ध हो जाय तो भूलेख अधिकारी यह श्रादश दमकना है कि यह रिमी एस प्रत्यर हटाये, हानि पहुचाये या मिटायगर विहार म अधिक से अधिक ५०) तर की शानिर, जितनी कि सरिडत चिन्ह के पुर्निमाए हतु अथा सूचना दने गगन को पारितोषिक दन के लिये अनिय हो। भूलेख अधिकारा एसे निशान का मरम्मत करारेगा धीर तत्सन्य धी खर्च आसपास के गागा, मम्पत्तियां या सना ऐ मधारका स जैसी भी धास्था हो, पमूल कर लेगा जैसामा उचित समझे यदि ऐमी रकम प्राप्त नहीं की जा मके या ऐसा टोपा नहीं हुदा नाम। [धाग १३१] मानचित्र रामरे का प्राध-भूलेख अधिकारी, भूमापन और भूलख मप्रद फे पाय की समाप्ति पर इस विषय म राज्य सरकार द्वारा निर्मित नियमों के अनुसार, सुरक्षा करगा और यह उनम शाबिक अथरा रीयर क श्रमाशो में निलया कि राज्य सरकार निधारण कर, सभी परितन जो कि रिमा गार के हिस्स, सम्पत्ति या मनाम होन पाले परिवर्तनों को ले7 पद पर और से मानचित्र ससर मे सीमा में याद गर भूला कामगार करा टिप्पणी 1,-रस पारा के पनुपार मानषि यसरे के निर्माण साप हो दमको भूगों को arm गिगा यि १३ हपूरा हाल है। (च) पापिर पनि धारा १३२] वार्षिक पनिश-१) भन्तन्याधिकारी अधिकार अभिलेन की मुरमा रामया उमफे लिय पिकप मे प्रयया राय मरकार द्वारा निधारित अवधि (सरपार गूराम धिनियम १९५१ में धारा ११४१ १२० में परिणत पनि पार पा गा मंगोलिया, जैसी भी प्रयस्था हो, सेयार परेगा पर "स प्रभार सेयार किय गय मिस्टर पापित पनिया पहलायेंग। (6) निधारित र ग से होते यान सभा परियता अमिलिगिा अधिमारा या हिनों पर प्रभाव डाला याली पाययाटिया का अभिलपन यार्पफ पानयामा म परन या फत्तव्य भूल वाधिकारी या होगा। [धारा १३३] उत्तराधिकारी तथा फरक हस्तान्तरण की रिपोट - (१) इस अधिनियम या इसरे श्रीन यनाये गए नियमा द्वारा तदतर यिनिमित यापिए रनिस्टरा म प्रविष्ट फी नान योग्य भूमि या सय लाम म पिसी सम्पत्ति का विरारत, इनकाल या अ य राति से किसी भी प्रकार का अधिकार या हित या ना प्राप्त करने पाले यक्ति या यह तय होगा कि यह सम्बध तथ्य का शान गार पे पटयारी को कराय सथा उस सम्बन्ध का रिपोट उस तहसील पे तहसीलदार को द द सिम रि यह भूमि स्थित हो चाहे ऐमी रिपाट उस तहसील के तहसालदार को द निमम किरह भूमि स्थित हो, चाहे ऐसी रिपोट ग्राम पटवारी के मारुन या भूलेस निरीक्षक पे माफ्त दी नाय कि तु ऐसे जे की प्राप्ति की तारीख के बाद तीन माह की अवधि के भीतर ऐसी रिपोर्ट दे दी जानी चाहिये। (९) यदि ऐसा व्यक्ति श्रायस्क है अथवा श्रय रीति से अयोग्य है तो उसका संरक्षक था उमकी सम्पत्ति की देस रस करने याला व्यक्ति ऐसी रिपोट दगा। [धारा १३४] रिपोट देने म लापरवाही करने पर दण्ड -धारा १३३ द्वारा याचित रिपोर्ट प्रस्तुत करने में लापरवाही करने वाले पर अधिक से अधिक १०) २० तक का दण्ड किया जा सकता है। [धारा १३५] रिपोर्ट प्रस्तुत होने पर आर्यनाही - (१) ऐसी रिपोट प्रस्तुत होने पर अथवा अन्य प्रणाली से इस विषय में जानकारी प्राप्त होने पर तहसीलदार श्रावश्यर जाच पडताल करगा और विवाहान मामला म यदि विरासत हस्तातरण या अय रूप से अधिकार होना प्रतीत हो तो उसका अभिलेखन चापिर रजिस्टरों में परेगा। (०) यति हाना नरण, विरासत या अय अधिकार विवाद प्रस्त हो तो इस अधे नियम या वनमान म प्रभावशील किसी श्रय विधि के श्रागत सामर्थ्य प्राप्त होने पर तहसीलदार विधि के अनुसार ऐगे मामले तय करगा और यदि इस सम्बध मे क्षमता प्रान न हो तो ऐसे मामले को सक्षम अधिकारी के पास निणय के लिए भेजेगा। [धारा १३६] निमारों पर निर्णय दय लगान या रास्न से सम्बधिय या किमी कृपा रे भूमि अधिारा अथा यग से सम्बन्धित या पार्पिर रजिस्टर की प्रविष्टियों के चिपय म उठाये गये सभी विराद धारा १२३ या धारा १ ४ या धारा १२५ के अनर्गत अयस्था के अनुसार निर्शन होंगे।

राजस्थान भू राजस्व अधिनियम १९rt [re (धारा १३७] सम्पत्तियों की विरासत - इस अधिनियम में उल्लिखित किसा भी पास के होने पर भी किसी सम्पत्ति का उत्तराधिकार या हस्तारण सम्पत्ति याल क्षेत्र में प्रचलित क्सिी सामानिक रिवान या प्रथा अथवा प्रभारशील विधि के अनु मार निस्पत रिया नायगा एष उसके द्वारा शासिन एवं नियमित होगा तथा ऐमा कानून सामानिक रिचान या प्रथा धारा २६३ वे प्रापवानों के रहते हुवे भी, उपरोक्त प्रयोजन के लिय प्रभारशील रहेंगे। टिप्पणी -यह धारा सर करता है कि भूमि वाल पेत्र में प्रभावगील विषिया विरासत तथा भाम न इतकाल के बारे में प्रभावगीन रहगे और उनक प्रावधान के अनुमार हो उनक मानव विवr निर्वीत होगे यद्यपि धारा २६३ + मतगत कुछ विधिपा रद कर दी गई है। (छ) विविध [धारा १३८] अभिलेखों का निरीक्षण -समस्त भूमापन मानचित्र खसरेय रजिस्टर नो इस अधिनियम पे अर्गन बनाये जायेंगे, राज्य सरकार द्वारा निर्धारित समय, स्थान नियवनामा पर जनता के निरीक्षण के लिए सदैव निशुल्क ग्बुले रहें। [धारा १३६] प्रपिटिग की नस्ल -इस अध्याय क अ गत व्यवस्थित रजिस्टरा तथा अभिलेवादी पनि प्ठया की नकल राज्य सरकार द्वारा समय समय पर निर रित प्रतिलिपि शुल्क चुकान पर, जन भी आवश्यक हो तैयार करगा श्रर एसी प्रतिलिरिया से निधारित रीति से प्रमाणित किया जायेगा। [धारा १४०] अपिल्टियों क सिय म कसना अधिकार धामलस में समाविष्ट समस्त प्रविष्टिया सत्य मानी जायेंगी कि तु शर्त यह है कि उह अन्यथा प्रमाणन न कर दिया गया गया हो। [१४० २] सुदास्त क इन्द्रानात सम्बन्धित विवादास्त प्ररिया -धारा २०५ २ १३६ म निहित रिसी पात रे होते हुए भा रिसी नागीरदार द्वारा पास में भारतण हेतु रसाएद र चरा रे हेतु दी हुई, जोड प्रथा चीड़ की भूमि के विपयाम, पास पाटे जा चुकने र पचात् श्रथया घास हटाने या उसके पदले गहे यह भूमि पराइ की फीस लेबर दी हुइ छोप्रया पिना ऐसी पीस के दी हुई हो, उदास रे पिय में, हया के रपाई में पी गइ इदान की शुद्वि अथवा अशुद्धि पे विषय में यदि कोई विवाद “यन हो जाये, तो ऐसी विवादास्पद भूमि का निर्णय बुदवारनको नमीन ये अधिकरण (Poerseron) पर आधारित होगा और यह मुटकारत या भूम ये श्रापटन प यिभागीकरण (Demaraation) कानून के पारधाना ये अनुमार होगा, जो उस समय लाग होंगे। किरात यह है कि को' मा समान पर आपनि उठा नहीं जा मयेगी यदि चुदकाल का कुल क्षेत्र तो जगीरदार प फज में हो कम से कम रस परिणाम से दुगने - पर भू राम अधिनियम, १९५६ से अधिक हो नोभत्र राजस्थान टाोगा पद ११५ (राजम्या अधिनियम, १९५५) फी धारा १८० को उपधारा (१) पलान (अ) ये अनगा निरिचा प्रथया नियत की गइ हो। (२) गुदयास मम्य धीमान नो परपा' भरिया या हो उसकी शुद्धि हेतु उपदफा (१) पे अगर प्रस्तुरिया TT याना यो भी आवेदन पत्र प्रथया कार्यवाही, राजस्थान भूरागस्य (मंशोधन) अधिनियम १९५६ पे धनन से पहले प्रथया उक्त पारन यनने ये ५ यर ये अन्दर प्रतुम की जानी चाहिए और उक्त अवधि के याद नहीं। [धारा १४१] निर्णय रानस न्यायालयों को मान्य होंगे। --धारा १२५ का उपधारा (३) प प्रावधाना ये अगर इस अध्याय के अधीन विमा म दिये गये सभी निर्णय उस समय तक विवाद के विषय के बारे म सभी रानर याचालयों को माय होंगे जब मक कि ऐसा विवाद श्रासामी द्वारा दय लगान श्रथया राय के सम्बध म न होगा। अन्याय ७क यानादी क्षेत्रों का सर्वेक्षण (पैमाइश) धारा १४१का ] परिभाषायें - इस अध्याय के प्रयोजनाथ, जब तक विषय या सदर्भ द्वारा अन्यथा अपक्षित न हो- (क) “श्रानादी क्षेत्र का अर्थ यही होगा तो उसे धारा १०३ के खण्ड (ख) द्वारा दिया गया है (स) भूमि का अथ रही होगा जो उसे धारा १०३ के खण्ड (क) द्वारा दिया गया है, (ग) 'स्वामी में निम्नलिखित सम्मिलित होंगे- (१) वह व्यक्ति निसका क्सिी भूमि या भू-ग्रहादि मे स्थायी हित हो या (२) ऐसे यक्ति का जेट या उसकी ओर से प्रवधक (मनेनर) या (३) ऐसे व्यक्ति का न्यासी या () ऐसा निगम निकाय निममे कोइ भूमि या भ गृहादि तत्समय निहित है या (५) किमी भूमि या भूगृहादि का तत्समय अधिवासी (घ) 'भूगृहादि से तामय इस अध्याय के अधीन तैयार किये गये किसी अभिलेख मे या किसी अन्य पूर्व में मौजूद अभिलेग्व मे इम प्रकार पर्णित क्सिी भूमि या भवन से है। (8) ' सरेक्षण में सीमा का अभिनान तथा सर्वेक्षण की प्रायगिक या इससे सम्बन्धित ममस्त थय कार्यगाईया सम्मिलित हैं।

[ राजम्यान नू रामम्द अधिनियम, १९५६ [धारा १४१सा] मनण की प्राता देने की शक्ति -(१) राज्य सरकार नरकमा पर उचित समझे मरसरीरा-पत्र में दिनति द्वारा थाना दे सकेगी कि राज्य के भीतर रिमी भी श्रापाटीया या ऐसी आपात्र के रिसी भाग का सतग रिय जाय और तटपरात प्रत्येक ऐसा श्रारादी त्र या इस भाग मरतणाधीन मनमानायगा। (२) राव नरकार उसी विज्ञप्ति द्वारा या तत्पश्चात् विक्षन द्वारा नि रे सरेगी कि ऐमा म्याना प्राधिकारी (Local anthorits) निसरा ऐसे धागातीत्र या ग्मके भाग पर अविकार न हो, इस प्रकार प्राज्ञा दिए गए सर्वेक्षण का इन्चान होगा। (३) ऐसे सोनण फाइवान स्थानीय प्राधिकारी सवे सब च में, इन अध्याय के अधीन या अन्यथा ऐसी शक्तियों का प्रयोग करगा श्रर ऐसे कर्तव्यों का पलन करगा जो पधारा (6) में निदप्ट विज्ञप्ति मे निधारित स्नेि जार। (2) जहा पधारा (१) अधीन श्राज्ञा दिये गये क्सिी मोक्षण के लिए पिसी स्थानीय प्राधिकारी कोचा छोन का निदश नहीं दिया गया हो, तो निले पा फलस्टर मे सर्वेक्षण फाइचार्य होगा। (४) उप पारा (१) के प्रान प्राज्ञा दिया गया सनण एमे अधिरारी द्वारा जो राय सरकार द्वारा नियुक्त किये जान याने अतिरिक्त भू-अभिनन्य अधिकारी (Additional Lnnd h-cord officer) के दर्ने से नाचे का नहीं होगा, निधारित रीति से किया नायगा श्रर ऐसा अधिकारी पद्पश्चान् मोक्षण का संचालन करने पाला अधिकारा कहा जायगा। (६) रात्र सरकार सर्वेक्षण का संचालन करने हतु ननी सग्या में सहायक पमिनेन्द्र अधिकारी (Assistat Recoras officer), और अन्य अधिकारी तया फमचारी नियुक्त पर सफगानिहें यह उपधारा (५) के प्रधान नियुक्त अधिकारी का महायता के लिए पापरयरु सममें। (७) उपधारा (२) फ अधीन नियुक्त प्रत्येष अधिकारी या स्मचारी एसी शक्तिया का प्रयोग करणा तथा इन फव्यों का पालन पराग जो निधारित रिच जाय या जो मर्वेक्षण का सपालन करने याल अधिकारी द्वारा उसे सुपुर्व पी जाय। [धारा १४१गा] भूमि म प्रवेश -सनण या सपालन करने याने अधिकारा फोइस अभ्याय फे प्रयोजना के लिए सक्षणधीन आनारी या संभाग के अन्दर फिमा भूमि या भूगृहादि में, सूर्यादय तथा सूर्योस्व के बीच ये घण्टा म, वय या सनण काय पालर नियुक्त फिसा प्राय अधिकारी या पमचारी द्वारा प्रवश परन की शक्ति हामी पीर (पह) प्रपश पे पारण या ऐसी भूमि अथवा भू-गृहादि म, इम अध्याय फे प्रावधाना फ अनुसरण म किये गय किसी कार्य फे फारण उसके विरुद्ध पोइ भी वैधिक पार्यपाही नहीं की जायगी।

१२] राजपा राज ममिशियम, १९५६ पर गर्न यह है कि ऐसी किमा भी भ मे या भू-गादिम जहा तत्ममय को निवास पर हो उस समय सस प्रकार प्रेवश नहीं किया जायगा जय सपनि उमर अभियासी पीरवारशिप्रात ही पर ला गह हो अथवा उक्त अघियासी को इस प्रार प्रवेश पे भाशय फाटिस - पाट पूर्य नहीं द दिया गया हो। [धारा १४१ पा] मव नण का नोटिम पहिले दिया जाना -मपारण य प्रयोजना पे लिए किसी भूम या भू-गादि म प्रमश परन ये पूर संरक्षण का संचालन परन याला अधिकारी संरक्षण पा जान थाली भूमि या भू-गृहादि ५ स्यामी पर और कहा सीमा पानी भूमिया या भ-ग्रहादि ये सामिया पर अपने इरसादराधीन लिति म क नोटेिम तामील करपोयगा तिसम उनको सा भूमि या भू-गृहदि म उसो समक्ष या से अधिकारी के समक्ष जो उसके द्वारा इस श्रार प्राधियन किया गया हो निधारित अवधि (नो रेसी नोटिस तामील पिय जान के पश्चात् तीन दिन से कम नहीं होगी) के भीतर • सीमात्रा को बतलाने पे प्रयोननाय और ऐसी सूचना दने के लि र जो इस अध्याय के प्रयोनना के लिए श्रावश्यर हो, या तो यक्तिर रूप से या अपने जेट द्वारा उपस्थित होने क लिए कहा जायगा और प्रत्येक ऐसा व्यक्ति जिस पर मा नोटिस तामील किया जायगा धिक रूप से उपस्थित होने जैसा कि नोटिस द्वारा अपेक्षिन है, और कोई भी ऐसी सूचना दने के लिए जो अपेक्षित है और नहा तक वह उमे देन क योग्य है वाध्य होगा। [धारा १४१ डा] धारा १४१ था के अधीन नोटिम तामील किये जाने के पश्चात् सर्व क्षण-कार्य का प्रारम्भ क्यिा जाना -पारा १४१ धाक अधीन जारी किये गये नोटिस की उचित तामील होने के पश्चान्- (१) सर्वेक्षण का संचालन करने वाला अधिकारी अथवा उसके द्वारा इस ओर प्राधिकृत को भी अन्य अधिकारी या कमचारी सर्वेक्षण का कार्य प्रारम्भ कर सकेगा हे ये व्यक्ति जिन पर ऐसा नोटिस तामील किया गया है, उपस्थित हो या न हो और (२) प्रत्येक ऐसा व्यक्ति जो इस प्रकार उपस्थित होने मे रिम्ल रहता है या जो ग्स प्रकार उपस्थित नहीं है, सर्वेक्षण के परिणामों द्वारा उस रीति से तथा उसी सीमा तक याय होगा मानों सर्वेक्षण उसकी उपस्थिति में किया गया था। [वारा १४१चा ] सर्वेक्षण का नक्शा तथा रनिस्टर -(१) सर्वेक्षण का सचा सन करने वाला अधिकारी, सर्वेक्षणाधीन श्राबादी क्षेत्र या उसके भाग का एक नक्शा तैयार करगा। (क) ऐसे आनादी क्षेत्र या उसके भाग के अदर की भूमियों और भू-गृहादि को नशे मे निधारित रीति में प्रथक प्रथर दिसलाया जायगा। (३) भूमि के प्रत्येक टुक्ने और प्रत्येक ऐसे भू-गृहादि को नो नशे मे पृथक दिखलाया गया है सरेतासक (Indicative) सर्वेक्षण सख्या दा जायगी। २ [ ५३ राजस्थान भू राजस्व अधिनियम, १५ (३) सरक्षण का सचालन करने वाला अधिकारी सर्वेक्षणाधीन श्रागनी या सके भाग के लिये, भी उसम स्थित सी समस्त भूमियों तथा भू-गृहादि का, जिनका माक्षण किया जा चुरा है, एक रजिस्टर तैयार करेगा। (१) पारा (१) प्रवीन तैयार किये गरे रनिटर में, ग्यपारा (३) अयोन दा प्रत्येक सोनात्मर मरेंतरण सरया के सम्बध में, उम व्यक्ति या व्यक्तियों के नाम जो सबमण के समय सके यामी रूप में उपस्थित हा हो और ऐमे अव विवरण जो निधारित किये जाय रिये जायगे। [भाग १४१] सीमा चिन्हों का लगाया जाना .-संपेक्षण का संचालन करन वाला अपकारी, क्मिी भी समय, पिसी भी भूमि पर, जिसमा इस अयाय पे अधीन मतग किया जाना 'या किया गया है, से पगरा तथा ऐसी सत्या प रीति मे, जिसे वह सत्रण में प्रयोजना के लिए पर्यात होना निर्धारित पर, अपारी या म्यायी मीमा चिह लगायेगा। परनुशा यह है रिसीमा को न्यायी मरन दीवार या भाडी द्वारा परिभापिन दिये जाने कोटा में, को स्थायी सीमा चिन्ह नहीं लगाये जायेंगे। [धारा १११ जा) अम्बानी सीमा चिन्हों का मधारय -(१) र धारा ११ या के श्रीन को अस्थायी सीमा पिर लगाये गये हों तो मौतण का भचालन काने पाला अधिकारा ग्म भूमि या भू ग्रहाति निम पर या निमसे मलग्न मी सीमा चिः स्थित है स्वामी पर उमरे हस्तानरागन लिन्दित में एक नोटिस तामील करवायेगा निममें ममे सर सर मतए कार्य पूर्ण नहीं हो पाय, ऐसे सीमा चिन्द का मधारण मया मरम्मत पान की अपेक्षा की जायगी। (क) टि एमा स्वामी प्रमे नोटिम को सामील नहीं परे तो मतण या मचालन परन साला अधिकारा, सीमा रिहया मरम्मत कर सो और इस कार्य करने पर हुधा यय ऐमे स्वामी मे मुरातच की काया ये स्प में यमूली योग्य हो। [धाग १४१ मा] मीभायों के सम्बन्ध में विराट ---(१) इस अभ्याय के अधीन मानण पाय रिये रान पेटौरान यदि सनए पी जाने वाली पिसी भूनि या मुग्रहादि की मीमात्रों पे सम्यर में किसी विवाद का मौजूट होना पाया जाय तो ऐसे पिका प निय] इम रिपय में प्रावित किसी महायक अभिलेख अधिकारी (1991ghat Rocord officer) द्वारा जार का जायगी। () - सहायक अभिनेत्र अधिकारी, अपन हन्नाजराचीन लिखित म एक नोटिस मपित पा पर नामील करपायेगारिसम पनसे उसके समता स्ययं या किसी प्राधिछन पजेट द्वारा रिमी निति रिन को परियन होने और विराट प्रस्त भूमि या भूगभाटि पर अधिकार होने या मरून प्रग्नुन परने लिए कहा जाय।

गरपाा भूमिप पिनियम, १९५५ प्रतुग साक्ष्य गण परगा, एसी सास्य प प्रभाय पर गिर परगा गया मी घोर सादय लगानिस यह प्रायश्यप सममे पर विवाद परस भूमि या गूगदादि पाप अधार पा, 7 पता म स पिसी भी पक्ष ए स्य य (Chul) पगुण दारापा निर्देश (Itcferenct) दि पिता, यह निणय परगा जि प स पक्ष या सगा प समय, उक्त नि । गृहार पर प| (1) उपराRE IT प्रयागनाय, सदापर अभिता अधिारा पा सा गया फा गुलाने पार डारा पस्थित हाने प लिए पाध्य परन, धीर । रामा स तथा उसा रीति म जसा कि सिबिल पासीर पोट, १६०% ( रेल पट सग्यार सा १६८८ फे प्रधान, न्यायालय परिसी गुपदम प लिए नामान है दस्तावना को प्रस्तुत करन के लिए बाध्य परन की शक्ति होगी। (८) ज्ञाच पूरी हो जाने ये परमार सहायर अभिलय अधिकारी, लिम्विन म एसा धाता पारित परगानिसम यह पष्ट रूप से विवाद का रिपय पतलायगा थीर स पर अपना निर्णय तथा ऐसे निणय के लिए कारणा को अभिलिखित परगा। (धारा १४१ ना] क्लक्टर को अपील की जाना -धारा ११ मा प्रधान सहायक अभिलेख अधिकारी द्वारा पारित की गइ थाना के विरुद्ध अपील कनस्टर के पास का जायगी श्रार यह ऐसी श्राशा की तारीस से ३० दिन के भीतर २ की जा सकेगा। [धारा १४१ टा] प चाट को निणय हतु भेजने की शक्ति ---(१) निनाद प्रस्त सोमाया के प्रत्येक मामले मे, जाच करने के लिए प्राधिकृत सहायक अभिलेख अधिकारा, पता द्वारा लिखित में पारदन प्रस्तुत करने पर विवाद को एप या उससे अधिक पचों (arbitratore) जो क्रमश पक्षकारा द्वारा मनोनात किये गर हों, के पास निणय हेतु भन सकेगा पार पच निर्गय दने के लिए ऐसा समय निश्चित करगा भार उनी प्राधि के लिए समय को बढ़ायगा नितना उचित हो- परन्तु शर्त यह है कि यदि सहायक अभिल व अधिकारा को यह प्रतीत हो कि राज्य सरकार या स्थानीय प्राधिकारी, ऐसे पिसी विवाद माहत र पते हैं तो वह इस प्रकार निर्देश (reference) वरन से मना कर देगा। (२) उपधारा (१) के अधीन क्येि गए प्रत्यक निर्देश (reference) और तदन्तगत मनोनीत किये गये प्रत्येक पंच पर पारविद् शन एक्ट, १४० (सेट्रल एक्ट १० सन् १९४०) पे प्रावधान, जहा तक सम्भव हो सकेगा लागू होंग। [धारा १४१ठा ] सपक्षण से सम्बन्धित दस्तावजों को, सरक्षण अधिकारी या इन्वान अधिकारी के पास मेना जाना --(१) सर्वेक्षणाधीन श्रानादी क्षत्र या प्रसकेक्सिी भाग का सपक्षण पूरा होने प पश्चात् सर्वेक्षण का सचालन परने याला अधिकारी, ऐसे सर्वेक्षण से सम्बन्धित समस्त नशे रनिस्टर और अन्य दस्तावेन, उसके इयान अधिकारी या प्राधिमरा को भेनेगा।

राजस्थान भू राजस्व अधिनियम, १९५६ [५५ (१) ऐसे नक्शे, रनिस्टर तया श्रदतावना की प्राप्ति की सचना ऐसे अधिकारी या प्राधिकारी द्वारा सरकारी रानपत्र में विज्ञापित की जायगी और कोई भी व्यक्ति जो सतण में हित रखता हो, ऐमी विज्ञप्ति की ताराख से दो मास के भीतर २ किसी भी ममय, ऐसे नस्शा, रनिस्टरों तथा अत्यनस्तावना का नि शुल्क निरीक्षण कर मरेगा। (३) यदि उक्त अवधि के भीतर सरक्षण के सम्बर में, सरवण के इन्चान अधिकारी या प्राधिकारी के पास कोई आपत्ति प्रस्तुत की गई है तो ऐसी आपत्ति पर निएय उस अधिकारी द्वारा किया जायगा निमे राज्य सरकार इस विषय में नियुक्त कर या जहा कोइ स्थानीय प्राधिकारी सर्वेक्षण का इचान होतो, ऐसे स्थानीय प्राधिकरी द्वारा राज्य सरकार को स्वीकृति से, निर्णय किया जायगा। (8) पधारा (३) के अधीन प्रस्तुत समस्त आपत्तियों पर निणय लिए जाने के परवान सतण या इन्धान अधिकारी या प्राधिकारी, यदि पारश्या हो, मक्षण से सम्ब धिन नक्शों, रजिस्टरा तया भय दसावना को, ऐसे निर्णय के अनुसार सही करसायेगा श्रीर समम्न कागजात अपनी सिफारिस सहित राज्य सरकार के पास संरक्षण की स्वीकृति हेतु प्रस्तुत कर देगा। (५) यदि राज्य सरकार सर्वेक्षण की स्वीकृति दे देती है तो ऐसी स्वीकृति सरकारी रापन म विज्ञापित की जायगी। [धारा १५१ टा] नक्शों तथा रनिस्टरों का मधारण -(१) धारा १८१ठा का पधारा (४) पे अधीन राज्य सरकार द्वारा स्वीडन सर्वेक्षण से सम्बन्धित ममत नस्रो रजिस्टर और अन्य दसावन मर्वेक्षण के इचान अधिशरी या प्राधिकारी के काया लय में जमा कराय जायेंग। (२) समस्त ऐसे नारो, रजिस्टर तथा अन्य दसावन एसे अधिकारी या प्राधिकारा द्वारा निधरित राति म मेरारित तिर जायेंग। (३) पेमा अधिकारी या प्राधिसरी ऐसे नक्शो में ऐसे अधिकारी द्वारा जो इस ओर राज्य सरकार द्वारा या मी साहदि से नियुक्त दिया जाय, निधारित रीति में और निरिक्त समया तरा पर मन परवायगा और ऐसे रजिस्टरा म का गह प्रविष्टिया को मही कर गायगा। परतुन यह है कि चिमी भा यक्ति को, मे मशोधन या शुद्धि (Correction) पे प्रयोजनार्थ एमे अधिकारी या प्राधिकार को मिसा भाम या भूगृहाति मे रसके द्वारा हिन मायाति यमघम नोटिस ने के लिए नहीं कहा नायगा। किमी नशे में संशोधन करने या स्मिी रगिटर म प्रविष्टिया को सही करन प, प्रयोजनार्थ उपधारा (३) के अर्शन नियुक्त अधिकारी, एमी शक्तियों का प्रयोग करेगा नो निधारित की जाय।

समपान रामस्व मपिरियम, १ERE प्राधिकारी को सर्वेक्षण पाय पूरा हो जात पेपरगा से समय पे भागर मा एमी सीमा तपसी पर से सधा एमी रोगि म पिसे राज्य सरकार निधारित पर, मरण शुल्म के सुगतान करा या भागी होगा पार पोइ भी सक्षण शुसिका भुगता नही दिया गया है, भू राजस्य पी यकाया पे रुप मे यसूली योग्य होगा परतु शत यह है कि- (१) सर्पक्षणाधीन पायादी सत्र या उसपे भाग की भूमिया तथा भूगृहादि के स्वामिया से घसूल पिय जाने पाले मक्षिण शुल्य या युल राशि, सहिए पे पुल पर पे १/३ से अधिक नहीं होगी, और (य) निम्नलिपिन द्वारा कोद भी सर्वेक्षण शुक भुगता योग्य नहीं होगा [१] राज्य सरकार द्वारा या स्थानीय प्राधिकारी द्वारा या 01 सर्वेक्षणाधीन पापादी क्षेत्र या रसके भाग की रिमा प्रेमी भूमि या भूगृहादि के सम्बव म नो से पत्र या मूल्य म एसी सीमाना जा निधारित की नाय से, अधिक है या () भूमि या भू-ग्रहादि का प्रत्येक स्वामा जिसने इस धारा के अधीन सर्वेक्षण शुल्क का भुगतान कर दिया है नि शुल्क तथा भूमि या भू गृहादि का प्रत्येक स्वामी जो ऐसे सर्वेक्षण शुल्क के भुगतान का भागी नहीं है, ऐसे प्रभारों (Charges) का नो निधा रित किये नाय, भुगतान करने पर इस अध्याय के प्रधान तैयार किये गये नशे से तथा रनिस्टर से प्रमाणित उद्धरण (Extract), जहा तक वे ऐसी भूमि या भूगृहादि से सम्बन्धित हैं प्राप्त करने का अधिकारी होगा। (धारा १४१णा ] मर्पक्षण का सचो धारा १४१ ढा मे निहिन प्रावधानों के अधीन रहते हुए, इस अध्याय के अधीन पिये गये प्रत्येक सर्वेक्षण का खचा- ११] ऐसे सर्वेनण का इचार्ग स्थानीय प्राधिकारा क होने की दशा मे ऐसे स्थानाय प्राधिकारी द्वारा प्रार १२] अन्य मामलों मे राय सरकार द्वारा पूरा किया जायगा पर तु शत यह है कि ग्वएड (१) के अधीन आने वाले मामले मे राय सरकार (क) राज्य की सधनित निधि (Consolidated Fund) मे से ऐसे सर्च क भाग का भुगतान करना स्वीकार कर सकेगी या (ख) ऐसे सच की पूर्ति के लिए, स्थानीय प्राधिकारी को यार की दर पुन भुग तान की अवधि और प्रतिभनि तथा तत्सदश सिक्यूरिटी जो दोनों (पक्षा) द्वारा स्वीकार की जाय के सम्बध मे ऐमी शना तथा प्रतियधों पर अग्रिम रूप में मां दना स्वीकार कर सकेगी।

राजस्थान भू राज व मधिनियम, १९५६ [५७ [धारा १४१ता] नोटिम की श्रापश्यस्तायों की पूर्ति करने में विफल रहने पर गम्ति जो कोइ भी इस अध्याय के अधीन जारी दिये गये तथा यथाविधि तामील किये गय नोटिस में निहित श्रावश्यक्ताओं का पालन करने में विफल रहता है, से अर्थ दण्ड से जो एक सौ रुपये से अधिक नहीं होगा, दण्डित होगा। [धारा १४१ था] नगों, रनिस्टरों तथा अन्य दस्तावेजों का निरीक्षण और उमक उद्धरणों की प्रतिया -(१)धारा १४१ डा की पधारा (१) में निरिप्ट समस्त नरशों रनिस्टरा तथा अन्य दस्तावेनों का ऐसी रीति तथा ऐसे घटों के बीच, ऐसे स्थानों पर तथा ऐमी शता के अधीन रहत हुए एन से शुल्कों का भुगतान करने पर निहे राज्य सरकार निधारित कर, सार्बजनिक रूप म निरीक्षण किया जा सकेगा। (() मे नक्शों रनिस्टरों तथा दस्तावेजों की या सके उद्धरणों की प्रमाणित प्रतिलिपिया एमे प्रतिलिपि शुल्का का मुगतान करने पर तथा गेसी रीति में निसे राज्य सरकार निधारित कर मजूरी पा जायेगी। [धाग १४१दा] नियम -राय मरकार सरकारी रानपत्र में विज्ञनि द्वारा निम्नलिसि के सम्बन्ध मे से नियम बना सकेगी जो इस अध्याय के प्रावधानों से धमंगत न हो. -- [१] सर्वेक्षणाचन प्रानादी थेन के भीतर किसी भूमि या भू-गृहाटि से सम्बध मे नशे तथा रनिस्टर तैयार करने उसका रूप तथा मग्रहण और सूचना को रफड करने, [२] म अध्याय के अधीन की जाने याली समस्त कार्यवाहिया का विनियमन परने [३] सदनगर की जाने गला समम्म जाच कारीनि [ ममस्त से मामलों के विनियमन पे लिए जिनका स अध्याय के अधीन निधारण किया जाना अपतित है या जो निधारित क्यि नायेग और [५] मामा या तर नर्गत का नाने यानी ममम्न कार्य गहिया रे रचित मचालन पेलि और मरे प्रयोजना तथा प्रावधानों की नियापित पनि [भाग १४१ पा] रायमाहिया श्रनॉपचारिकता (Infor unlity) द्वाग प्रभाषित नहा होंगी म अध्याय प्रधान की गोद भी कार्यवाहिया रिसी अनाप गरिकता र पारण प्रभावित नहीं होगा यशने कि उसरे प्रारधाना का मारत पर्व प्रभारपूर्ण रुप मे मामाल हो हो और इस अध्याय य प्रधान की गर कार्यवाहिया संपारण से प्रभावित नहाँ हागा शिम अध्याय र द्वारा या अनि नारी मया नामील ए जान लिए अपक्षित योर नोग्मि गरो नहीं पिया गरा था।

५८] राजापा भू राजस्व अधिनियम, १९५६ [धारा १४१ना] नक्शों तथा रजिम्टरा म प्रविष्टिया के सम्बन्ध म अनुमान ---इस अध्याय के अधीन सैयार दिये गये समस्त नागे तथा रजिस्टरा म की गइ समस्त प्रविष्टिया सही समगी जायेंगी जय तर पि उसक विपरीत साबित न पर दिया नाय परन्तु शर्त यह है कि ऐसा कोई नस्शा या प्रविष्टि किसी व्यक्ति परिसी भूमि या भू-गृहादि के या म अधिकार स्वत्य या हित को प्रभावित नहीं परेगी या उसे से अधिकार स्वत्य या ,हित को विधि अनुसार पिसी सक्षम न्यायालय म प्राभाचिन (enforcing) फ्राने से नहीं रोकगी। अध्याय भूप्रपन्ध कार्य (क) सामाय [धारा १४२ भू प्रबन्ध तथा पुन प्रवन्ध—(१) सरकारी गजट मे विज्ञप्ति प्रकाशित कर राज्य सरकार किसी निले या अन्य क्षेत्र को बटोरत अथना पुन-बदोबस्त मे, जैसी भी अवस्था हो, रग्वन की आना दे सकती है। () उपधारा (२) के अधीन निसले गये नश्तिहार की तारीख से ऐसे क्षेत्र बन्दोबस्त के अन्तर्गत, बदोवस्त की कायवाही के अन्त की विज्ञप्ति निकाले जाने तक सममा जायेगा। [धारा १४३] पुन बन्दोबस्त क अनुमानत परिणाम --राज्य सरकारधारा १४ की उपधारा (१) के अनगत, जर क्सिी निले या अ य क्षन के सम्म व मे रातस्य की नसूली के नियत किया गया समय समास होने को होगा, विज्ञप्ति प्रकाशित करन के पूर दुवारा पटोनस्त के अनुमानत परिणामा का भविष्याकन करवा दिया है। [धारा १४४] पुन पन्दोस्त के औचित्य को तय करने का कारण (CONSIDERATION)-कोई रिला या क्षेत्र पुन आन्दोरस्त से कायरमातर्गत लिया जाय या नहीं, इसका निणय करने के लिये राज्य सरकार विचार करगी। (१) यह कि राजस्व मे कोइ विचारणीय क्मीचशी होने याली है या नहीं, () कि ऐसी वृद्धि होने की अवस्था म पुन पदोस्त को स्थगित करने के सतोपदायक कारण है कि नहीं (३) कि यतमान राजस्य का निधारण अनुचित हो गया है या ऐसे पयाप्त कारण घतमान है कि नहाँ जिनकी यह मे भविष्य में राजस्व वृद्वि की कोई सभावना न होने हुये भी पुन पोवस्त करना उचित होगा।

[ राजस्थान मू राजास अधिनियम, १९५६ पर तुर्त यह है कि रात्र की ऐसी वृद्धि समीचीन मानी जायेगी किडा पुन परत की कार्यवाही म किये गये समस्त सपा को दस या के अर्से मे बेगार करदे। टिपणी-यह पारा प्रावधान रती है कि यदि राय सरकार उचित समन तो किमो क्षेत्र अपवा जिलका पुन बदोबस्त कार्यक्रम में से साता है। [धारा १४५] भूवन्वयाधिकारी -धारा १०० को उपधारा (१) के अति विज्ञप्ति प्राशित करने पर, राज्य सरकार- (१) जर तक कि बोयस कार्य के लिए प्रत्येक जिले या क्षेत्र मे कोई स्थायी भूप्राय अधेिरारी नियर न हो जाय, धारा १२ को उपधारा (6) में उल्लिखित कार्य- धारिया के लिए एक भूमरय अधिकारी का नियुक्ति करगी और (.) श्रारश्यकतानुसार सहायक प्रमथाधिकारिया की नियुक्ति कर सस्ती है। धारा १४६] भूप्रपन्याधिरारी को भूलेख अधिरारी के कर्तव्यों का हस्ता- न्तरण - कभी कोइ निला अयरा कोई स्थानीय क्षेत्र भूपपय कार्य के अधीन होगा नशे समर की चस्या तथा वार्पिर रजिस्टर के निर्माण का कार्य राज्य सरकार के बादश भूलेखाधिारा से भूमायाधिकारी को हस्तारित किये जा सकते हैं और पहथ याय द्वारा भूलेखाधिकारी को प्रदत्त अधिकारा का व्यवहार करगा। धारा १४७] नियम - राजस्थान सरकारी गट मे विज्ञप्ति प्राशित कर राज्य सरकार, भूप्राय व कार्यक्रमा के समय के भूमन धाधिकारी की प्रक्रिया के लिए नियम बना सस्ती है। () लगान की दरें- धारा १४८] आर्थिक सोदण ---जर कोद निला या अन्य स्थानीय क्षत्र भूसरप पर रखा जायगा, भूपर अधिकारी ऐसे निल यात्र के पातकारों की बाधा अवस्था के बारे मसौचए फरगा और ऐसे संक्षण के मध्य निम्नाकिन पाठोपा चिगेपर ध्यान रसेगा तथा (फ) यह सीमानिस त कोइ निला या क्षेत्र सिंचाई से लाभ नहीं उठना है और विगत भूप्राय से सत्समय तर सिंचाई की मुविधामा म मिया गया रिकास यदि कोई हो, (स) पि कार, र विगत मूषयच से मरममय तर कृषि की जाने वाली भूमि फे क्षेचरल का पृद्धि या कमी (१) पिव्यय तथा एपफ एवं रसके परिवार फे सम्मिलित खर्च, (घ) पदोपण्ड फे धान क्षेत्र में प्रथया उसके आसाम मौहर शनार, - -- - रामराा भू राजस मर्शियम, १९५६ (१) पायागमा पे साधन और यिगा भूमर पे पररात् उनम होने याला विकास यदि कोई हो, (च) जोस पी लम्बा चौड़ाद । (घ) अासामया पी पादारी या परिणाम और प्रण की मुविधाये- [धारा १४०] कर निर्धारण क्षेत्र या वा--1) धारा १८ में उल्लिम्बित अयिक सर्वेक्षण के साथ साथ या उमरे ममान होने के उपरान शीघ्र ही भप्राया भिकारी पर नधरण ये 7 या पर निधरण यग प्रत्यारोमेनिने और क्षेत्र में तैयार करेगा जे कि वोस्त पे अधीन होगा। (1) धारा १५८ मे उल्लिखित विपया अय नग्नापेन विपयों मध्य एकता बनाये रखने का भी, पर निध रण 27 या वर्ग बनाने के ममय ध्यान रसा जायेगा- (क) प्राकृतिक वात्माकार, (ब) उलगायु एवं वर्मा (ग) जनसरया एवं श्रम की प्राप्ति (घ) कृपि के साधन, (ड) बोइ जाने वाली प्रमुख फसलें एवं उनकी उपन की माता तथा बाजार में प्रचलित उनसे भार (च) जोत के लिए व्य लगान की दर, और (छ) विगत भूप्रसव के समय नि मत पर निधारण त्रया र निधारण वर्ग, यदि कोई हो। [धारा १५० मिट्टी का वर्गीकरण -धारा १४६ चे अधीन बनाये गये वर निधारण पे देना अथवा कर निध रण यों मे स्थिति गानों को भूप्रब धाधिकारी, इस मम्बध मे बनाये गये नियमों के अनुसार मिट्टी को विभिन यों में बाटगा। [धारा १५१] लगान की दरों का किास --भूषन धाधिकारी प्रत्येक पर निधारण क्षेत्र या ग मे, जैसी भी स्थिति हो, प्राप्त मिट्टी की प्रत्येक श्रेणी के उचित क्षगान-दरों का विकास करेगा। [धारा १५२] लगान दरों का अाधार -(१) धारा १५१ २ अन्तर्गत किसी रचित एन ठीक लगा दर के निधारण हेतु भप्राय अधिकारी निम्नाकित का ध्यान पसेगा (क) पदोरस के तत्कालपूर्व २० य म लगान अथया लगान की सूरत में प्रय अभिदेय के द्वारा प्राप्त रस्म । राज्य सरकार द्वारा सरकारी गनट म प्रकाशित विज्ञप्ति द्वारा असाधारण घोपित घपा को इन २० वर्पा म से घटाया लिया जायेगा।

रामस्थान ने राजस्व अधिनियम, १९५६ [.. (ब) वगेरस के तत्सालपूर्व, यो मे कृषि पत्र के सन्यन्ध में प्रचलित श्रीसनन माप। रोमे वीस वर्षों में ऐमेर शेप पर दिरे जाया जोकि राज्य सरकार ने सरकारी गट म विज्ञप्ति निकाल कर असाधारण घोपित कर रिये हैं (ग) नोह जाने वाली पसने और उनी उपर का परीणाम, (घ) बण्ड (ख) में उल्लिवित भैस'न भाषा के आधार पर ऐसी चपन का मूल्य, (ड) पिव्यय तथा कृपक एप मरे परिवार के बचं, (च) प्रत्यफ जात का यह था निममे प्रति वर्ष उमाई नहीं की जाती है, उगाई छोडने का क्रम तथा ऐसी उनाड छोडन की अवधि, (छ) कर-मुक्ति, रमागन एवं वर के न्यून समह नी गमखला, (स) गित सारत की लगान डरें यदि काइ हों और उपन का अंश वया परिरारिणत भार जिन पर ऐसी रे रिश्सिन की गइ हा, और (म) लगन दरें, यदि कोद हा, जोकि धासपास के क्षेत्रा में स्थित ममान मणी की भूमि के विषय में तय की गइ हो । (९) भूमर चाधिकारी द्वारा सिसित की जाने वाली दरें, उनसे सम्बद्ध भत्रों में पारा (१) खण्ड (प) म निर्देष्ट उपन के प्रचलित मूल्य का अधिकतम छटवा भा। होगी। [धारा १५३] टगे का मशोधन ~भूप्रपयाधिकारी म विपय ने भी कि -सरे द्वारा विकसित लान दरें म सम्पूर्ण गार या उसपे रिमी निर्दिष्ट अरा या उसरी मिट्टी की क्सिा निर्दए अंगा के लिए गिना किमो सशोधन के लागू होने के योग्य है या नम झिमी मीमा सक मशाधन की श्रावस्यावा है प्रत्येक गार के लिए टिप्पणा लिगा। टिप्पणी -यह पारा स्पष्ट करती है बिपद्यपि मगान र बोबत पधिकारी तय परता frfriइम सम्बाध की तिनता मरतार म हो निहित है। मरकार चाह को दोस्त पषिद्वारा दारानियत मगान दरोंकानाता है। [धारा १५४] निश्ति एव मिले य मामले -"म अधिनियम फेवात पर मरकार द्वारा निर्मित नियमों के अधीन योवन अधिधारा निश्चयन एवं (क) किफर प्य फिरत में देय हो या अरिस में (स) पर फेक मे अधिक किलों में दय होन की पाया- (1) मा मिनों का माया, (1) मात्रानो यतीर मिन कटारिया जाये। (ग) सान अयरा "मो किन्न पी, मी मी परत हा प्रदायगी की तागेन्नर (प) माघय विषय नितर निरस्य प्यं मिनेन किन जान लिग से एसे निपन निर्देशित हो।

- राजाप राजस्व अधिनियम, १९५६ [धारा १५५] प्रस्तारों का प्रकाशन तथा प्रस्तुतीकरण -(१) जय धारा १५५ और १५३ पे अनुसार लगान परा या पिराय हो जाय, भूतय र अधिकारा उम गम्यय मे निधारित रोनि से प्रस्ताव माशित परेगा और उन साथ मे श्रापार मा प्रकाशित फरेगा जिस पर ऐसी लगान दर नियन पो गइदा (क) सदर पदोयत अधिकारी निधारित रीति ये जन सूरना देगा तथा उम जन सपना मे नि दष्ट समय पे भापर अधारा (१) 4 गन प्राशित प्रताया पर विरोध प्रस्तुत करने की माग फरेगा। (३) यदि उपधारा (-) म निधारित समय के अदर योइ अापत्तिया प्रात का जायेंगी तो वदोषस्त प्रधिकारी उन पर विचार करेगा परमी राति से नोरि यह उचिर समभे, अपने प्रस्तामा म संशोधन कर साता है। (2) इसरे पश्चात भूपधाधिकारी द्वारा ठाइ गद आपत्तिया एवं उन पर जारी किये गये श्रादेशों सहित अपन सुभाष भूप्ररथ श्रायुक्त को प्रस्तुत करगा। [धार १५६] प्रस्तारों की स्वीकृति -धारा १५५ के अधीन प्राप्त किये गये प्रस्तावों का मेदिलमेट कमिश्नर अनुशीलन परगा और उनमे विहित विपया मे ऐसी पृछताछ करगा जोकि यह पारश्यक सममे- (२) तट पर वह अपने रिमार्क तथा सुमाया के साथ उन प्रस्तान को योड पे पास प्रस्तुन करेगा। (३) पपारा (6) के अतर्गत भेजे गये प्रस्तायों की प्राप्ति पर योड उनम निहित किसी भी मामले म पार जाच कर सकता है। (3) ऐसी पार जाच रे पररात् यदि कोइ हो, जो कि पधारा (३) म उल्लिखित है। बोर्ड ऐसे प्रस्ताना म संशोधन किये बिना ही अथवा लिखित म कारणों के लिखे जाने पर प्रसारित पर निप रण क्षेत्र या वग म या मिट्टी की श्रेणिया तथा लगान दरों में ऐसा परिप्पार परते हुये, जो वह उचित समझे, उन प्रस्ताों को स्वीकृति हेतु राज्य सरकार को भेजेगा। (५) राज्य सरकार- (1) चोड द्वारा भेजे गये प्रस्ताव स्वीकार कर सकता है या (२) निर्देश दे सकता है कि कोई उचित पाच की जाय, या (२) घोड यो पुविचार ये लिए प्रस्ना लोटा दे, या (४) ऐसे परिप्कारो ये उपरात नो यह उचित समझे, प्रस्ताव स्वीकार करे और इस प्रकार स्वीकृत लगान दरें स्वीकृत लगान दरें कहलायेंगी। (ग) लगान का निरूपण (धारा १५७] लगान का निर्धारण --स्पीन लगान दरा पे आधार पर भूप्रय य अधिकारी देय लगान का निर्धारण करगा तो तत्समय वर्तमान लगान को कम फरने बढ़ाने, उसम परियता करने अथवा अन्य किसी रूप से पूण परेगा। य दोयस्त पे अधीनत्र श्रथया प्रत्येक जिले के लिये ऐसा निर्धारण किया जायेगा।

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रामरका राजस्व मििशयम, १९५६ जोत एवं योये ने थाले क्षेत्र पा, सूगी जोती जाने वाली ये प्रतिम गाली छोती जाने पाली भूमि या ध्यान रखा जायेगा और सा लगा 'ही गगी और भूमि के लिये महण की गर स्पीत दरापे अनुसार गत पार योगी, मूगी या उसर जोतों के क्षेत्र पे सिलसिने म नियालगन ये पूणाश ये स्पम होगा। (1) ऐसी किसी साभिप्राय सूची जोती गा अथवा पनर घोरी गई तमीन पर उपधारा (१) यी पाइ भी यान, लागू नहीं होगी जो कि हम प्रसार सद्दी लान के निध रण से पचने के लिए छोडी गइ होगी और ऐसा भय लगान निधारण के पारे में पाही के रुप म जोना गया समगा जायगा। [धारा १६४] पोका निर्माण तथा पताण -१) उपरोक्त रीति से लगान व निधरण रे परत तोचन अधिकारा पदोपत के प्राचीन सिमी निले या क्षेत्र की जोतों के लिये लगान निधरण के पच तैयार करवायेगा। (२) क्सिी नोर के लगान निधरण पच म निम्नाकित विवरण होंग- (क) जोन की अरस्था, (स) उसके प्रत्येक सेत का खसरा नम्बर और उससत्रफ्ल, (ग) नोत मे अनिहित प्रत्येक सेत की मिट्टी का वर्गकरण, (घ) मिट्टी की श्रेणियों के लिये प्रथम प्रथक लगान दरें, (ड) प्रेमी जोत की मिट्टी की ऐसी श्रेणा के लिए धारा १८० के अनगन नदोवस अधिकारी द्वारा निध रित लगान, (च) धारा १६ वे अनर्गत छूट दिये गये कोई पिनास, यदि हो, और (छ) प्रत्येक जोत के लिये निर्धारित लगान की कुल नोड और धारा १६१ और १६२ अनर्गन दिये गये तत्सम्बन्धि समागन अथवा आदेश । (३) इस प्रकार निमिर पर्ग नियत प्रणाली से सम्पति आसामी को भेजा जायेगा तथा उसकी एक नम्ल भूमिधारी को, यदि कोइ हो भेजी जायेगी। (८) उपधारा (२) मे और उसके अधीन निधारित प्रणाली से सभी लगान धरण पी पाट दिये जाय तन पोरस्त अधिकारी तत्सम्बन्धी आपत्तिया प्रस्तुत परने के लिये जन सूचना प्रकाशित करेगा। [धारा १६५] पैदापारी लगान को वमूली पर अन्तरिम अरोध-- (१) यदि किसी यक्त कृपि वर्ग प्रारम्भ होने के उपरान किमी निो क्षेत्र के सम्पय में धारा १६३ को उपधारा (३) रे अगत लगान निप रण के पर्चे बाटे जाने की धम्मारना हो और बदोरत अधिकारी इससे सतुण् हो कि भूमाधरिया एवं कृपयों के दीच में वनावपूर्ण मामले रे कारण प्रथया अय किसी कारण ऐसे मिले या क्षेत्र में राजस्थान भू राजाव पधिनियम, १९५६ फमन की नागरो के आधार पर रसूल फिरे जाने गले लगान पर अवरोध लाना रचित होगा तो यह इस सन्नर में राज्य सरकार से सिफारिश परगा। (1) यन्त श्रायुक्त गेम अधिकारी की ऐसी सिफारिश राज्य सरकार को अपती सा टिप्पणी के साथ भेजेगा जो यह उचित समझे। (6) राय ससार, यदि उचित सममेगी, इस सिफारिश को स्वीकार कर मत्सन्यधीपाला दे सस्ती है। (पारा (1) अर्गन प्राशित किया गया राज्य सरकार या किमी जिले या स्थानीय त्र में पैदावार ये थाधार पर किये जाने वाले लगान की पराली पर अवरोध लगाने याला आदेश निधारित प्रणाली से प्रकाशित किया जायेगा और न्समे निर्देशित होगा--- (क) कि उम पमली परे प्रारम्भ मे, ऐसे मिले या हल्ले में कोई भी भूनिगरी लान पेदागर ये आधार पर यमूल नहीं करणा ओर (स) कि धारा १६६३ अनर्गत रिचाराधीन नादी लगान के निर्मित होने तक, ऐसे मिले या क्षेत्र में भूमिधारी प्ररक जोत के लिये रसती लगान की अपेक्षा ऐसा नागलन बसल करे कि जो लगान निधारण के पर्चे में उस समय में निर्धारित माना लगान के रूप में उल्लिखिर दिया गया हो परतु भर्न यह है कि इस मति यसूल किये जाने पाला नगदी लगान पारा १६ पे अन्तर्गत निर्णत किये जाने पाला नगदी लगान फे, पेटे ममायोजित किया गयेगा। - (५) पैदावारी लगान यी यसूली पर रोक लाने सम्बधि प्राश शमी निकाले नायेंगे नर मादेश पाने पर्ष मे सरीफ पी पसल का सिराया वसूल नहीं किया गया हो। [धार १६६] भापचियों से सुनवाई ना लगान का निर्धारण परि धारा १६८ फी परारा (१) ऐति प्रकाशित पोपणा के परपान सोस दिन की पाधि पे पर यदि अथवा भूमिगारो भापत्ति प्रस्तुत कर तो भूमर र अधिकारी इसी सुनाद करने के उपरान कानून के अनुसार उमा निपटारा पापा माने पादेश अभिनेपन करने के बाद जोत कालान वय फर! [धारा १६७] लगान रिम दिनांक से देय होगा:-धारा १६५ मे मारधानों पारा १६६ भूपय व अधिकारी के बादरा द्वारा निर्धारित लगान, पलाम की माधि पाल होने की बात से होदेय होगा रितु शर्त यह है कि ऐसे पापों के ६.] सारामू रामए पधिपिग, १९५१ अाधार पर, जो लसपस पिये जायेंग और शिह पदे यरत अधिकारी उचित समगत हुय यह आदेश द पि ऐसा लगान पिसी पूध पी सारास से ही प्रभावशील हो गयगा। [धारा १६८] नियत लगान की अस्सीत करने का पफ को विकल्प प्राप्त होगा.-निस पासमार पी जोत या लगान यादोयस्त अधिकारी न धारा १६७ पथर्गत तय पिया हो, एसे धादश पे प्रकाशित होन पे तीस दिन के अन्दर निधारित लगान की अपारति लिखित म दे सकता है। [धारा १६६] अस्वीकृति का प्रतिफल --(१) निर्धारित लगान पी अस्यीकृति १९ पक उस जोर का खाली पर देगा। (२) जोत को साली न परने पर यह अतिप्रामफ सममा जायेगा और यह प्स जोत से राजस्थान टिने सी अधिनियम, १५५ पी धारा १६३ के प्रावधानों के अनुसार घदखल किये जाने योग्य होगा। टिप्पणी-यह धारा सष्ट करती है कि यदि सपा को निर्धारित सगान स्वीकार नहीं होगा तो उसे यह जोत खाली करनी पड़ेगी और सहसीलगर उसे बेमल पर सगा। [धारा १७०] जोत का अन्य व्यक्ति को दिया जाना,-धारा १६६ ५ अतगत जोत के खाली होने पर या जोत से वेदखल किये जाने पर यह किसी अन्य व्यक्ति के लिये सुलभ हो सकेंगी अर उसको कानून के अनुसार कृपक बनाने के लिए योग्य व्यक्ति को दिया भी जा सकेगा। धारा १७१] सीकृति के उपरान्त जाता यदि धारा १६८ के प्रावधानों के अनुसार कृपक लगान स्वीकार करने से इन्कार न करे तो धारा १६६ पे अतर्गत इसके द्वारा लगान का स्वीकार किया जाना परिकल्पित किया जायेगा और यह धारा १६७ के अनुसार उसकी अदायी किये जाने के लिये उत्तरदायी होगा। - धारा १७२] वन्दोवस्त की अपधि के भीतर लगान नहीं बदलेगा पारा १६६ फे अधीन बदोबस्त अधिकारी द्वारा किसी जोन के लिये सय किया गया लगान, धारा १७५ ये प्रगत सय किये गये यदोबस्त के कार्यकाल के बीच परिवर्तित महीं किया जायेगा सिराय ऐसी दशा पे कि इस अधिनियम या रानस्थान टीनेन्सी अधिनियम, १९५५ के प्रावधानों द्वारा यह अपेक्षित हो ।

राजस्थान भू राजस्व अधिनियम, १९५६ [-य [धारा १७३] ग्राम क दस्तूर का निर्माण --(१) बन्दोबस्त के अधीन वन्दी परत अधिकार प्रत्येक जिले या अन्य स्थानीय क्षेत्र के प्रत्येक गार के लिए एक उचित माम दस्तूर का निमाण करवायेगा। () इस अधिनियम के अंतर्गत बनाये गये नियमों के अधीन बन्दोबस्त अपि पारा प्रत्यक् एसे ग्राम दस्तूर मे तय करगा और उल्लिखित करेगा- (क) सम्बधित गार में प्रचलित प्रथा, (१) रहा के निवासिया रे अथवा गार की सम्मिलित जमीनों में से जोत पार करन पाला के और उसकी उपन तथा गार की स्थिति के मवरम, और () मिनाक हैन राम्ना के लिये अधिकारा तथा अन्य प्रयोजना के मन्दरम, और (ब) 'मानन के मन्बद्ध कोद अधिकार, रिजात या अन्य पात निसा यागना ण्य 'ग्राम-दातर म प्रविष्ट किया जाना, इस अधिनियम कंपनात या अन्ययाम्प से राज्य सरकार द्वारा अपेक्षित हो। (३) नय प्राम-दम्नर नेयार हो जाय, तर मन्ययित गाव के निवासिया ५ मामन मरे परे जान का कोड सारीच दोबस्त अधिकारी तय करगा और निधारित राति मे पसी तारीख के कम से कम सात दिन पूर्व वह उस बारे म जन-सूचना प्रकाशित करगा। () पधारा ३ पे अधीन नियत किये गरे दिन तथा समय पर उपधारा (१) प अनगन पनाह दम्नर गावाद को पत्र प्राम निवासिया के सामने बन्दोबस्त अधिगरी पटगा या उसे पटवाये। (५) यदि अधारा ५ के अधीन दस्तुर गागाइ के पट्टे जाने के समय पाई यत्ति मके किसी प्रविष्ट क सम्बधम आपत्ति उठाय तो पदोबस्त अधिकारा उसे लगपः परगा तथा रस आपत्ति पर अपना निर्णय दगा जो कि अतिम होगा। [धारा १७४] बन्दोरस्त की प्रविष्टियों की परिकल्पना १७३ पन्नात निमित परतुर गायार का प्रविष्टिया वय तक सर परिकल्पित या नायगी जय सर पिपिपरित सिद्धन परदी जाय। (घ) पन्दोरम्त की श्राधि [पारा १७५] पन्दोबस्त की प्राधि -इस अधिनियम के प्रधान किये गय प्रत्यक पदोपस्त फी चवभि० वर्ष की होगी। -धारा प ६.] सपा राजन धिनियम, १९५६ परतु शर्स यह है कि राज्य सरकार भूमि पर अपिया जामण्या पे भार, कृषि योग्य भूमि पे गाल तथा लगान की पूर्णा या ध्यान म रयत F मा अयधि थीम वर्ष से अधिर पढ़ा सकती है एक शर्त भार भी है कि लसनत विगो याग्य विशेष कारणां से भूमि की गहरी क्षति, सम्पति की गमार गोपनीयता अपरापि अभिप्राय एवं अधिक मात्रा म भूमि के याहर पेरन श्रादि यिदी अ य पयन पारणा या अपस्या म अथवा किसी स्थानाय क्षेत्र के लिए राज्य मरवार या दोस्त की थीम या से यम कोद अयधि स्यामार कर सकती है। [धारा १७५] बन्दोस्त की प्राधि की शुरुयात -प्रत्येक यदोयरत की अपधि इस कानून के अगत उस दिवस स चालू होगा निस दिन से राय सरकार सरकारी गनट म, नोटीपियशन के द्वारा नियत कर । टिप्पणी-राजस्थान अधिनियम २ माफ १६५८ के सणस की प्रपम मूधिक अनुमार गो राजस्थान गजट ख ४-५ विगा। निान १३ १ १९५८ दारा प्रागित हुमा, सम्मिलित की गई। धारा १७६] बन्दोबस्त की पत्र समाप्ति -(१) धारा १७५ मे अन्तनिहित पिसी भी वात के होते हुये भी जर राय सरकार सतुष्ट हो जाय पि उस धारा के अधीन र दोस्त के लिए रसी या तय की गई मयाद के पहले ही मूरयों मे तात्निक एन विचारनाय कमी होने के कारण या उस क्षेत्र की स्वीकृत लगान दरों तथा उनसे सयुक्त १ का ऐसी हा दरा के बीच कोई विशेष अरहान के कारण अथवा और जाच से स्वाकृत लगान दरें अत्यधिक ज्यादा ज्ञात होने के कारण अथवा अय निसी पयाप्त कारण से उसमा समाग्नि करना आवश्यक हो तो राय सरकार सरकारी गनट मे विज्ञप्ति प्रकाशित र वतमान व ढोबस्त को समाप्त करने तथा सत्सम्बधीत्रको पुन वदोस्त अधीन लेने का विचार प्रक्ट कर सकती। (२) इस प्रकार की घोपणा से सलग्न अथवा उसके तत्वाल पश्चात् हा विज्ञप्ति द्वारा राज्य सरकार ऐसा अरधि की समानि की घोपणा पर सस्ती है और सम्बद्ध निले या क्षेत्र प पुन पदोस्त मे लिए जाने का आदेश दे सकती है तथा इस अध्याय के प्रावधान इस भाति प्रभावित होंगे मानों ऐसा निला या क्षेत्र व दोस्त की कार्यही के अधीन हो। (३) [x (४) [x [ ] टिप्पणी -[(३) मो. (४) उप धारा दिनांक ३१ १२५६ के विपाक गजट 4 छरे राजस्थान मधिनियम सस्या ४ माफ १६५६ के सेशन २ के अनुसार नोपित घरदी गई। [धारा १७६५] बन्दोररत करने के दौरान म अन्तरिम सहायता (१) जर कभी किसी निले या 'प्रय स्थानीय क्षेत्र को धारा १८ को उपधारा १ अथवा धारा १७६ को उपधारा () अर्गत पुन पोनरत के अगन लिए जाने ने आदेश एक सी x X ३ राजस्थान भू राजस्व अधिनियम, १९५६ दिय ना, राज्य सरकार वहा के कृपरों की मौगों पर जो यह चित सममे, अनतरिम सहायता पहुँचाने के भर से आज्ञा दे माती है। () जननिसी निले पा र न्यानीय क्षेत्र को पारा १७० को पधारा () ये अनुमार पुन रडोरम पराने के लिए श्रान्श दिया जावे राज्य मरसार अपना इन्दा में यह भा पाना दे सरनी है कि पोत अधिकारी को धारा १८ के अर्गन को नोमिक मत करना पारश्यक नहीं होगा। टिपणा ---धारा (१) (२) रामशान अधिनियम सररास प्राा १६५६ के 471 ३ द्वारा जो राजस्थान गजट विषा दिना ३११२५६ रे मनुमार मम्मि नित हो गई। धारा १७५] ममाप्त किन गरे मन्टोरत के अतर्गत भूमि का नये बन्दोपस्त तक स्वरूप --~भारा १७असी पारा (१) वै प्राधाना में अति भूमि को धारण करने वाले सभी व्यक्ति नदोवस्त दी अवधि की समाति अथरा गुणान्त के ममय, उम र दोवस्त की शतारे अनुमार ही नये नन्दोवस्त के किर आने तर मी भूमि का धारण करो। टिप्पणी -मायान ए सख्या, १ सान Y के द्वारा जो राजस्थान पर सड ४ प्र विशेषार, दिनार ३११२ १६५६ प्रति हुमा सम्मिलित रिया गया । (ड) मध्यरती पुनर्शचन धारा १७८) अल्पकालीन नन्दोस्त ~ धारा द्वितीय अनुगर के अगत स्मिी भी न्यानोयन के लिए नियत की गई बन्दोवस्त की अवधि बन्दोबस्त अधीन पूर्व निले या सम्पूरी 7 सम्बध में नियत की गई प्राधि से कम हो श्रीर एसा प्राधि समान हो जाय तो पताटर अथवा किसी रिले उहा कि स्थाया बन्दोबस्त अधिकारी नियुक्त दिया गया हो, एसा बन्नोस अधिरारी ऐमे म्यानाय क्षत्र के लिए इस अधिनिगम अन्तगत निर्मित नियमों के अनुसार यर निधारण करता। [धारा १७६] प्रभाह से हुर भूक्षय और स्टार भूमि के बन्दोरम्त पर निर्धारण का पुनर्वाचन ~~(१) जोत मे सयुक्त होने वाली कहार भूमि का, दम अघि नियम के अधीन निमित नियमों के अधीन क्लस्टर या स्थायी पदोन अधिकारी, मान निरररा परगा। () पानी के प्रग के कारण या अय म्प मे क्ट पर, जस्मिी जोत का अपि पाग्य सरह पम हो जाय तो पनस्टर या मोह स्थायी वाटोरस्त अधिकारी पर निवार पुनगंचन करणा। (३) न्यायी भूमय पाधिसरी या कलस्टर, नसी भी प्रस्या हो, पी राय म किसी जोत का भूमि का मूल्य सकी पृपि स गर पाल कानों में अथयार पारस से कारत हे पानों में म समय से लिय जान पर यह पिछली बार निधारित या गई यो तो पनिधारण या पुनपाचन किया गर इस अधिनियम के अधीन बनाने ये नियमों के मार ऐमी जमीन में परिवनित मय फे प्रसंगनुमार समा किराया ब्लन्टर प्रया व्याया पदोस्त अधिकार द्वारा नियत निगमायगा।

- ६८ ।] राजरपा र पिरियम, १९५६ (क) परोक्त पधारापा पे अधीन पिये गग पुसमा सय प्रतिम नहा र सर किरदायम्त आयुक्त उ ह स्यापार 7 परत। [धारा १८०] सरकार का अतिरित्त गरी तर पाल ग्ने का अधिकार स अधिनियम म समाहित किमी भी बात ये होत गे भी, राग गरयार किमी भा यक्त सरकारी गाट म विगति प्रमाशित पर पादश माना है निराग्य ये किमी भी याद में विकसित पाद शहरा' 7 स अधिनियम प अधीन निमित नियमाय तुमार लगान व प्रनिरिक्त पय विशप नागरिप पर दने के लिए उत्तरदाया होगा। (च) पिधि [धारा १८१] यन्दोबस्त क काय की ममाप्ति के समय बन्दोबस्त अधिकारी क पाम विचाराधीन प्राथना-पन पायपाहियों -17 गारा १८ र अधीन विज्ञप्ति प्रकाशित कर बिसी १ म य टोमस्त को याद कर दिया जाय तो उस समय दोस्त अधिकारी के विचाराधीन समस्त प्राथना पत्र कायवाहिया, जन तक कि काई स्थायी व दोरस्त अधिकारी नियुक्त क्यिा ना सर फ्लस्टर यो भन दी जायेगी तो नको निणय करने के सिलसिल म बोनस्त अधिकारी के अधिारा को काम म ला सकेगा। [धारा १८२] भूल चूर का मशोधन --स्सरणा अथया अन्यथा प्रणाली से पतास्त अधिकारी क्सिी भूल चूर का मशोधन कर सकता है जो कि- (क) र निधारण र क्षेत्र या कर निधारण के वग नान मे, मिट्टा के वर्गीकरण मे और लगान दरा के विकास म धारा १५६ का उपधारा (५) के अधीन तत्समय उसके प्रस्तानों को स्वीकृति के पूर किसी भी स्तर पर पाई जाय, और (ख) नोतों के लगान निधरण म धारा १६६ के अधीन एसे लगाना के निश्चित किये जाने के पूर्व क्सिी भी स्तर पर पाद नाय । धारा १८३] स्वीकृत लगान दरो पर पुनविचार -(१) इस अध्याय मे अथवा किसी विधान नियम, श्राशा या प्रपत्र म जो कि अभी गभारशील हो किसी भी पात के रहते हुये और किमी प्रतिकूल प्रथा सामाजिक रिवान या रीति पे होते हुये भी राज्य सरकार यदि उसे धारा १५२ वी उपधारा () के अनर्गत दोवस्त के कार्य को बद करा की विज्ञप्ति जारी परन के पूर्व यह सतोप हो नाय कि उसरे द्वारा चारा २५६ की पपारा (५) पे अधीन स्वीपत की गइ लगान रा म क्सिी भूल चूक पे मालम होने (क) र निधारण क्षेत्र या कर निधारण-यग के निमाण म, रही या (ख) मिट्टी के वर्गीकरण मे रही, या (ग) मिट्टी के किसी वर्ग के निमित लगान दर के अतर्यिकास मे रही, मंशोधन करना आवश्यक है तो श्रादश दे सकती है कि ऐसी लगान-स्वीकृत दरा का पदोस्त अधिकारी पुनवाचन कर। के कारण कि तो एमापान भू राजस्व अधिनियम, १९५६ (२) तत्प चान-बन्दोरम्त अधिकारी अपने निनि परिपत्र प्रम्बार निधारित प्रशली से बनायेगा श्रीर धारा १५५ एच १५६ के प्रावधान उसके मम्बर में प्रभावशील होंग। टिप्पणी -यह धारा सप करता है कि यदि गान निवारण में कार्य त्रुटि प्राविर नग त हो और दोबस्त को सम्मान के पूर्व काई त्रुटि म हो जाय तो गय समार शाम हो परिवानगात दरों को लागू करने का माद माती है। अन्याय ६ सम्पत्तियों का निपरण [धाग १८४] वितरण-तिरण या पार से प्रयोनन किमी वितरण योग्य सम्पत्ति को एक सेतोश्रया अधिक भागों में नाटन से है और प्रत्येक म एक अपना अधिक हिस्से सकते हैं। [धारा १८५] वितरणीय भम्पत्तियां -सम्पूर्ण सम्पत्तिया विभागका पन का जायेंगी कि तु शतं यह है कि उनका विमान होना प्रथा अथवा अयम्प से सिद्ध न कर दिया जाय। [घाग १८६] व्यक्ति जो कि रिमाजन अधिकारी होंगे - (१) विमा य सम्पत्ति का प्रत्येक हिस्मेवार ऐमी सम्पत्ति से अपने हिस्से का विभाजन माग सकता है। (२) ऐसे थार मे कई हिस्सेदार सम्मिलित हो सस्ते हैं। [धारा १७] रितपय सश्रावग्न पर निभानन के श्रावदनपत्र म निधारित विवरण होगे नया उमा साय मम्पिनिधारियों के वापिकनिस्टर की प्रमाणित प्रतिलिपि और मेय प्रपत्र जिन पर किरिमानन का अधिकार निमर है माय में क्यि जायेंगे और यममम्पत्ति के हिम्मेगर केम्प मे अमिलिमित व्यक्तियों में से किया ra या दो या दो से अधिक व्यक्तियों द्वारा सामुहिम्प से प्रस्तुन फिर ना सरग परतु शत यह है कि जर कमी कोद हिम्मा पा प्रदीवा के अधिपत्य में होगा विभाजन का कोई मी पावेदनपर पाद यह यया कत्ता द्वारा पश किया जाय श्रया अम्मदीता दातय तक नहीं मुना जायेगा नर नानीमा न मम्मिलित पाउदनयन ददिया हो या अम से फिमा एक को विरोधी पक्ष न अनाया गया हो। धारा १८) प्रार्थना पत्र कैसे प्रातुन हो -पारा प्रारधानों के अन्तर्गत किरण का प्रारेपन पर मनि के फार प्रस्तुत किया जायगा विममे कि मारित विभाजन स ग यद्ध सम्पत्ति धित हो। फिलु शर्त यह है कि कलस्टर से हिमो प्रारनारत्र को सुनवाई पय निसरफ सि सि सबसिरिजनल अधिकारी या सहाया लस्टरको जिग्मक १२ ] राज पास भू राम धिनियम, १९५९ जय - अधीनस्थ हो और यतमा म मे भारपन सत्र की गुफाई एवं विनियोग पे मम्य धर्म शक्ति सम्पन्न हो, भज गा । धारा १८६] विभिन्न नितो म सम्यित मम्पनिया का बटवारा पोई सम्पत्ति दो या दो से अधिाला में प्रयस्थित होता रिमा जिल में राम मण्डल प निदेशातुमार विभाजन रियायेगा । [धारा १६०] मागा का एकीकरण -जदा रिसीप ही सम्पत्ति पे विभाजन के लिए विभिन अधिकारी प्रथा थर बाद प्रस्तुत पर तो तनयीज के लिए सबस एपीपरण कर लिया जायगा तथा उ ह ही बार मानते हुये पर ही निर्णय से निर्णीत कर दिया जायेगा। [पारा १६१] मम्मति क विमानन को रोकन की शक्ति -(१) यदि प्राथना पत्र प्रस्तुत किये जाने पर अथवा वितरण के किमी अय स्तर पर कोह पर्याप्त कारण सम्पत्ति के बनवार की स्वीकृति के लिए श्रथया चटयारे को स्थगित करन क लिए प्रतीत हो तो फ्लक्टर मजिरिजनल अधिकारी या महायर क्लस्टर निसरे पाम एस प्राथना पत्र पश किये गय हों या ऐम प्राथनापत्र विचाराधीन हों विभाजन को स्थगित कर सकता है और तत्सम्म यी काय पाहा को समाप्त कर सकता है। २। कोई भी सम्पत्ति ऐमी रीति से विभाजित नहीं की सायेगा कि निधारित क्येि गये क्षेत्र से कम क्षेत्रफल गाली कोई एक या एक से अधिक सम्पत्ति उससे प्राप्त हो। [धारा १६२] विभाजन के आवेदनपत्र की घोपणा -ज्य विभाजन के श्रावेदन पत्र प्राप्त हो जाय तर यदि वे विधि सगत हुये और प्रत्यक्ष रूप में उसम कोई आपत्तिजनक बान नहीं हुई या धारा १६१ के अधीन अस्वीरन अथवा दायरी से मना नहीं दिये गये हा, क्लस्टर इम सम्बध म एक घोपणा निकालते हुय विभाज्य सम्पत्ति के भागीदार के रूप म अभिलिखित ऐसे व्यक्तियों को जो उन आवेन्न पत्रों म मम्मिलित नहीं हुये होग अपने मामले व्यक्तिगत रूप से प्रतिनिधि द्वारा किसी ऐसे दिन पर तो गेपणा की तारीप ३० दिन पूर्व या ६० दिन पश्चात् नहीं होंगे उपस्थित होकर और विमानन र सम्पध म अपनी आपत्तिया यदि कोद हा रसने का श्रामण द सकता है। घोपणा की प्रतिलिपिदिार को प्रपित की जायेगी। [धारा १६३] टा टल क सम्बन्ध म अापत्ति --(१) यदि उक्त निश्चित दिन को अथवा उससे पूर्व क्मिा अभिलिखित हिस्सेदार द्वारा कोई आपत्ति उठाइ जाच और समें स्वामित्व के टाइल का रियाद उठाया गया हो तो कि उस समय तक सिी सुक्षम अधिक्षेत्र वाले न्यायालय द्वारा निणित न हुआ हो तो क्लस्टर - (4) आवेदनपत्र को स्वीकार करने मे उदासीनता दिखा सकता है जब तक कि विवादास्पद प्रश्न सुरम यायालय द्वारा निणित न होय, अथवा सरस्थान भू राजस्व अधिनियम, १९५६ [१ (ख) किसी भी पहर से श्रापट कर साता है कि यह तीन मास की प्राति के भीतर रिसी दीरानी न्यायालय में प्रश्न के निर्णय हेतु दारा प्रस्तुत कर, या (ग) साधारण तौर पर ऐसे प्रश्न के मूल्यापन के लिए पूद्धवाद करने की कार्य पाही करे। (१) जर पगारा (१) खण्ड (ख) के अन्तर्गत कार्यवाही स्थगित करती जार और यदि यह पतरार श्राग्रह के अनुसार कार्य करने में असरल रहे तो क्लस्टर स प्रश्न को नसके विरुद्ध नियत दरगा1 दि वह दावा दार करता है तो कलक्टर दीपानी न्यायालय के निर्णय के अनुसार कार्य सम्पादन करा। (३) जर कलस्टर श्रापत्ति के तथ्यों के सम्बर में जाच पडताल करने की सोच को यह मूल अभियोग के निररण के मन्वय में दोगनी प्रक्रिया मग्रह, १६०% (केन्द्रीय एक्ट सग्या ५, सन् १६०८) मे प्रारहित मारथानों के अनुमार कार्य करेगा। (२) उपधारा (१) के अधीन पाटित सभी डिरियों टीगानी अदालत की डिनिया मानी जागी और इनकी अर्पलसिला न्यायाधीश या हाईकोर्ट में जैसी भी अन्या हो, उन न्यायालयों की अर्पल के नियमों के अनुसार, दार की जा सकती है। धारा १६४] अपील क निर्णय वर विमानन पर रोर-अपील की सुन पाइ परने पाला न्यायालय, अपील का निर्णय होने तक, कलक्टर को विमानन को स्थगित रसने का निर्देश परत हा विधितरी पर सना है। रेमी अपील धारा १६१ (१) (स) के अधीन किसी दीवानी न्यायालय पे चाहे विरुद्ध हो या धारा १६१३ अति फलस्टर की अदालत फेरिस्त हो। [धारा १६५] विमानन के पूर्णता के पूर्व सम्पत्ति की दुरी--(१) पाये दन पत्र के किसी भी स्तर पर बोर्ड की स्वीतिमा फलस्टर सम्पूर्ण सम्पत्ति को उर्फ फर सस्ता है और विमान की समाप्ति होने तक सीध पपन प्ररथ में रत मला है। (२) इस प्रकार की पुी पे समय सम्पत्ति से प्रान होने पाली रकम राजस्य के सुपार में घर व्ययस्या सच मे पर सहीत रस्म का दस प्रतिशत माह शुल्क के लिये पहले दी जायेगी और तय यर्नमान मम्पत्ति या नमो रिसी अंश पर मौजूदा भार म्याप किमी अन्य परिव्यय ये गार के लिए दी जायगी पर अपोप यदि कोई हो, स भूनि म हिम्मे रवने याने जागीरदारी योग्न हिम्से को अनुपात में इस प्रकार बाट दी साया मे कि साधारणत लाम पिमाजिन किया जाता है। [धारा १६६] वनवीन की प्रपाली -(8) सप्टर पटयारी पो निश देश () यह सम्पति मानचित्र पर पिसी विशिष्ट रंग से विमान्य विशेष क्षेत्र पर पिहये, १४) पगापा मू राजस्य पपिनिगम, १९५६ (प) पट इस समय मे मिट्टी पा विशेष पगारण यताये, (ग) यह विमान पो पूर्ण परो ये लिये अपोरासरे ओर पानी परमय वियरणा प्रायश्यप साराश रोगार परे। (प) सुवास ये स्प म धारण पिग गय भूगडी फ्मी यदि पोइ हो, यह एक सूरी सेयार परे। (ड) यह पधारका पो, यदि फोइ हो, य मूशियनाये, (च) यह विभा य भूराएडी ये मू यापन हेतु पोइ प्रणाली याये, (८) यह स्वामित्य तथा मूल्य सम्बधि समप्र वियरण पर पेड़ा पी एफ सूचा तयार पर, (न) यनभूमि की आय अथवा अय साधना यो शामिल पर विचरण प्रस्तुन पर, शर (म) वह परफे मुश्रा की एक सूचि यह दिखाते हुए कि ये कहां स्थित है, पिन पतों को सींचते है और मिनरे सर्चा स यनाय गये हैं तैयार परे। (२) उपरोक्त काम यो शीघ्रतिशीघ्र समाज परने पे लिए यदि पलकर उचित, समझे, पटवारी पे नाचे एक अस्थायी सहायर नियुक्त कर सकता है। ऐसे अस्थायी सहायक का व्यय प्रशमन यादी द्वारा दिया जायेगा। और तत्पश्चात् पाद-परि यय में सम्मलित कर लिया जायेगा। टिप्पणी -rम पारा से यह स्पष्ट होता है frविभाजन सम्बधी मावश्यक कार्यवाही करने के लिए कलकर परवारो को वतिय माग देगा। [चारा १९७] सिद्धान्त के निर्धारण च मूल्याकन सी शर्ते -- (१) राज्य सरकार द्वारा चिनिमित नियमा के अधीन, इस सम्बर मे विभाजन करने हेतु सम्पत्ति मे शामिल भूमियों के समस्त वर्गा के मूल्याक्न को शर्ते एवं साधारण सिद्धान के निधरण का पार्यवाही, क्लस्टर इस विचार से करगा कि उसमे निहित विभिन्न भूग्वण्डों का पारस्परिक मूल्य का अनुमान न्याय सात हो। ऐसे मूल्य की भिनता बेग्ल भूखण्डों के प्रफल के कारण ही न होकर मिट्टी के वर्ग सिंचाइ की सुविधाप्रा, उसरे भूप्रगध की प्रगति उसरे काश्तकारों की व्यक्तिगत विरोपताना और मूल्य पर प्रभार डालने वाले अन्य कारणों के आधार पर हांगी। (२) मूल्यापन की शर्ते तथा सामा य सिद्धाता के निश्चित होने पर पटवारी उसके अनुसार प्रत्येक भूखण्ड के मूल्य का प्रायड़ा यनायेगा। [धारा १६८] विभाजन के लिये प्राथमिर पादश-(१) क्लस्टर यदि पह उसे या उससे पूर्ववर्ती पिसी स्थित पर अावेदनपत्र यो खण्डिन न पर तो धारा १६६ द्वारा नियन पृछताच परने पे पश्चात् निधारित प्रपत्र म विभाजन के प्रत्येक अधिकारी के हिस्से की प्रकृति और माया की घोपणा पर मम्पत्ति, नितनी अशों में विभानित होगी मनकी सरया निदिप्ट करते हुये और प्रत्येक प्रश की माना बनाते हुए एवं ऐसे विभानन राजस्थान मू राजस्व अधिनियम, १९५६ के रिपय में उटाये गये विवादग्रस्त प्रश्नों को तय करते हुए और उस प्रणाली का निसम विमानन किरा जायेगा, विवरण देते हुये, एक प्रारम्भिक प्रादेश निकालेगा। (e) क्लस्टर पिसी ऐसे श्रादेश द्वारा निगर सकता है कि रिही दो या अधिक चापदारा पश, यदि व सहमत्त हो, विभाजन के अर्थ के लिये सयुक्त कर दिये जाय श्रीर उनके सयुक्त हिस्से के मूल्य के अनुपात म एक अय श्रम सम्पूरा सम्पत्ति से विला कर दिया जाय पार ण्मी स्थिति मे नीनान सम्पत्ति में ऐसे हिस्सेदारा के प्रवक प्रथर थधिारा सम्बध म उसी समर घोषणा करदी जायगी। धारा १६६] विमानन कौन करगा-विभाजन के प्राथमिक श्रादा प्रका शित होन पर क्लस्टर विमान से सम्बन्धित पक्षों को विमानन करने की थाज्ञा देगा अयना रह से पार्य के पच नियुक्त करने की राय देगा । धाग २००] सविदा-सम्मत विमानन'यरि परीक प्रापस में ही विभाजन परना स्वीकार करें तो- (क) एक दिनाक नियत किया जायेगा श्रर उस दिनाक तक विमानन पूर्ण किया जायेगा। (ब) सम्बद्ध अभिन्नेव की ऐसी मनिलिपिया जो वे चाहे उन्हें मुफ्त दी जायेंगी (1) पटवारी को यह निर्देश दिया जायगा कि वह रनको प्राथमिर ाश के अनुसार विभाजन करने में और विमरिन हिस्मों से सम्बघ म कलक्टर मामने पेश किये जाने योग्य अभिलेख तैयार किये गाने में श्रावश्यक सहयोग दे। (घ) वे नियत सारीस पर उपस्थित होंगे और उपयुक्त माति तैयार किये गये हिस्से क अभिलेय प्रस्तुत करेंगे जिनके साथ जायदाद का नक्शा भी हो। इस नागे मेमे अनेक हिस्सा यो पपक पृथक रगों में दिया जाये जो अनेक हिरमों में प्रदर्शन किये गये हों (6) फलस्टर ऐसे सभी हिस्सों पर अपनी उपस्थिति म सभी पक्षों थयमा उनक सम्बध म ययारिधि स्वीका प्रतिनिधियों द्वारा हस्तातर फरा लेगा और (च) मएड () के अन्तर्गन कार्य के पूर्ण होने पर व हिस्से स्वीकार किये जायें। मिशन यह है कि ये पानून के मारथाना के प्रारमिर श्रादेश पे अनुल हो। धारा २०१] पचों द्वारा विमानन -~~(1) निमान करने के लिय यदि पर पर नियुक्त परने पर नुने हुपे हों पीर पंच नियुक्त फर नो मा फलस्टर यो विमानन को गरे रनिय संप दगा। () चारदिद मन एण्ट १९५० (पेन्द्रीय एक्ट सम्मा १०, मन् १८४०) भार धान से मंदिर पर नियपिये गये धमिदेश भर पंचों की नियुक्ति और राजापार पर प्रतिपम, १९५६ सायराहिया और उनके द्वारा दिये नाो पाले पैमो ये पारे म गयामम्मर परियनन महित लागछांगे। (३) धारा २०१५ प्रायभान उम प्रसार लागदाग माना शर 'पना या पर पंच प्रतिस्थापित पिया गया हो। (८) व्यक्तिगत तौर पर पंरा का पतस्टर ये गमा उपस्थिा होना और अपन फैसले प्रस्तुन परना अथवा कलक्टर पे सामने उस पर या बाट गये दिरसा पर हस्तातर करना प्रााश्या नहीं होगा कि तुपैसो और हिस्सा पर व स्वयं हतार परग न कि पसी स्पीति प्रतिनिधि द्वारा हस्ताक्षर परायगा ।मेहता र कामटर र ममन उनर प्रस्तुत किये जाने के पहले रिये नायगे। [धारा २० ..] न्यारा नय म्यय कर रिभानन करगा ? -नय पर परस्पर विमानन परन पर अथरा उस समय मे पर निर्णय परने म एक मत न हा अयना र पर निणय अधिलपित कर दिया जाय श्ययमा पैसा रद कर दिये ताय नो क्लस्टर बय विभाजन रे पिय मे निर्णय द।। [धारा २०३] निभानन व्यय का अनुमान और उसकी चमली -(१) नर पारा • ० के अधीन क्लस्टर स्वय विमानन करन का तय करले ता यह शान नत्सम्पची सच अनुमान का कायमानी करेगी और निटश दगी कि ऐसे म्यचं प्रथमत विभाजन के प्रारी अथना सभी हिस्सेदारो से ऐसी क्सिा म और रिभानन की प्रगति रमियान ऐसे प्रकाशों पर तो सिराय सरकार निध रित कर पसल क्यिा नावेगा। (२) यदि पूर्व अनुमानित रकम अपय न पाई जाय तो पूरक अनुमान समय ममय पर लगाये जा सकते हैं और परोक्त रीति मे से ऐसी अतिरिक्त रकम पसल की जायेगी। (३) राज्य सरकार ऐसी मदा के निर्देश सहित जो कि ऐसे विभाजन के खच के निरगण मे अथवा उसके लिये सम्मिलित किये जाय नियम बनानेगी ओर रानम्व मण्डल से पर्चा के वितरण के विधान के निम्पण के लिये नियम बनायेगी। धारा २०४] अमीन ग्रादि की नियुक्ति और वारण्ट जारी करना अविभाजन के सम्यघम श्राखीरी सच याटि जमा कर दिय जाय तो एक अमीन अथवा अाय उपयुक्त व्यक्ति विभाजन के काय के सम्पादन हेतु नियुक्त पिया जायेगा और ग्म काय के लिये पलस्टर उसरे नाम के कमीशन धारण्ट प्रकाशित करगा तथा मे ममत पारश्यर पर तथा सूचनायें प्रदान करेगा। [धारा २०५] वारण्ट निष्पादन की प्रणाली -(१) अमीन अथवा अन्य यक्ति परोक्त रीति से विमानन के लिये नियुक्त किया गया हो क्मीशन गारण्ट की प्राप्ति पर- राजस्यान न राजस्व अधिनियम १९५६ (१) डायरी मेगा और उसमे यह पारट प्राप्ति की तारोम्ब, उसके निप्पाचन हतु -सर द्वारा पिया गया दिन प्रतिदिन का वितरण, उस कार्य के लिने निरीक्षित स्थान सरे समक्ष प्रस्तुत किये गये दार पर आपत्तिया ऐसे व्यक्ति एर विधान निन द्वारा पनिस भाति व प्रस्तुत की गट और उस सम्बन्ध मे दिय गरे निर्णय के कारण प्रविण क्यि जायेंग। (2) व्यक्तिगत निरानण का कार्यक्रम बनायेगा और पनगारा को सम्बपी पर पम्बवाड का नोटिस दगा। (३) प्राथमिक बादश की निराधनाओ के अनुमार निनमे प्रत्यक प्रश र अन्तात गम खण्ड बनाये जाने का विधान स्यिा हो कि जिनमे जायदाद वितरित होगी एक प्रयोगात्मक सूची नैयार करगा और उसे रिपाई पर रखेगा। (2) परोक्त कार्यक्रम के अनुसार सम्बद्ध स्थल पर जायेगा, स्वल निरीक्षण कागा, पक्षकारों को, यदि उपस्थित हो, सुनेगा और उनकी आपत्तिया पर विचार करगा सम्पनि का पटवारा किय जाने बान श्रया से सम्बंधित सभी व्यासयों को एकत्र करगा निममे रे जुबानी या लिमिन मे अपन दाव अथवा श्रापनिया प्रस्तुत करने का असर पान र ममें और ग्मी नगद पर लन्बरदारा की -पस्थिन में गमे गवेरप्रापनियों का मला करगा। (१) मा अमीन या व्यक्ति नर कारएट को अपने प्रतिवेदन के साथ लव नगा निसम यह वारण्ट राय की प्रणाली प्रस्तावित रिभातन स्वएड, गेमा व्यक्ति या एसे व्यक्ति जो वह धारण किये हो और ऐसे भप्राय मपिता पट्ट या अनुज्ञापन निनरे अधीन व महण किये गये हैं, सभी का सने उल्लेन्च होगा, प्रतिटन में माथ पा तिये नायगे -- (क) उपधारा (१) के बण्ड (१) के अन्तर्गत रची गई मूल डायरी (1) एक रगीन नगा निमरा सदर्भ धारा २०० ये गएड (घ) में दिया गया है और (ग) मे अय वियरण- पल निममे चोड द्वारा निपारित विवरण दा। टिप्पणी पर पारा स्पष्ट करती है विटयारे को वायाही मपूर्ण करने नरिय पमान प्रपा का दूमरा व्यक्ति भेजा जायेगा। वह सम्मपित राम दुनार नामा मनमा । प्रमोनमी पार्दवाही इम पारा मनुसार प्रविम नहीं है। [धारा २०६] पोपमा वरना -धारा-५ यी उपधारा (6) फे पिम्द प्रस्तुत मन पे लिये, गेमी रिपोर्ट की प्रानि पर बनस्टर य घोषणा सभी सम्बधित क्तिया सो सर लिय निति याद सारीर पर हाजिर होने प लिये बचपने थवे प्रया आपत्तिया, यदि पोर हो जारी फरणा र ऐमी घोपरा दी प्रविधिपया सम्बन्धित परीपन यो अपनी आपत्तिया यदि फोर्ड, पापा के सामील व पाना पला नि को प्राधि पर प्रस्तुत परन पे लिये भेजगा ।

६८) पापा रामाप पपिनियम, १९५६ [धारा २०७] प्रस्तावों पर विचार तथा दागों एव थापनियों का निरूपग.- निश्चित तारीख पर पलस्टर (प) प्रम से सुनेगा तथा पसला परगा-- (१) पनगारा द्वारा स्टाद गइ थापलिया अर, (२)श्रय व्यक्तिया द्वारा पेश दिये गये दारेण्यं आपत्ति र (स) सर यह दसोपे लिये प्रताया पी परीक्षा फरगा कि व प्राथमिक आदेश की शता के अनुसार है और पान प प्राधाना या पूनि परत है। [धारा २०८] कृपा की जोत । विभानन -यथा सभा पारसकार की नोन फा बंटवारा नहीं किया जायेगा और नहा एसा करना अनियार्य हुथा, प्रत्यक जोन का सगान उन हिस्सों पर बाट दिया जायेगा। [धारा २०६] सुद कारत की भूमि - ऐसी भूमि निसमे गुद फारत के अधिकार पैदा हो गया हो और यतमान में मौजूद हों, अलग से विभानित की जायेगी ताकि प्रत्येक विभानित अश मूल्य के समानता रसने वाले अय हिस्से के अनुपात में अश के रूप में प्रावटित किया जा सकेगा। [वारा २१०] सयुक्त भूमि का प्रारटन -धारा ६ मे सदर्भित भूमि के अलग सयुक्त भूमि का आपटन इस ढग से किया जायगा कि प्रत्येक भाग को उसका सा अश प्राप्त हो जो कि उसको बनाने वाले या श्ररा या प्रशों पे मूल्य अनुपात में ठना हो। (२) धारा २०६ में उल्लिखित भूमि के अलावा भिन भि न व्यक्तियों द्वारा धारण को गइ भूमि यथा सभव उनको धारण फरने वाले हिस्सेदार या हिस्सेदारा के मध्य वितरित करदी जायेगी। [धारा २११] आघटित भूमि पर क्मिी हिस्सेदार का मकान या बाडा यादि -जन विभाजन में हिस्सेदार या हिस्सेदारों को दिये जाने वाले हिस्सों में किसी अन्य हिस्सेदारा के आधिपत्य में स्थित रिसी रहने पे मकान यथवा अय भवन अथवा बगीचों या वाग्विाओं द्वारा घेरी गद भूमि का सम्मलित किया जाता आवश्यक हो या तो ऐसे अन्य हिस्सेदार के लिये यहा पर उसके व्यय से दिये गये विकास के फ्लस्वरूप कोइ विशेप मूल्य रसते हों तो पाद याला व्यक्ति प्राउएड-रेएट दने के पश्चात् ऐसी इमारतों, ऐसे बगीचों एवं पाटिकाओं एवं विकासा द्वारा प्राप्त भूमि को धारण कर सफेगा। ऐसी भूमि ण्यं तत्सम्बधी लगान की सीमा क्लस्टर तय करगा और ऐसे सर मामलों में यथा सभर एक नियत किया गया माग मवाना, बगीचों पाटिकायों अथवा विकासों ये पैसी भी अवस्था हो, मालिक के लिय श्राम सड़क से पहा पहुचने हेतु सुरक्षित परगा अथवा किसी अन्य सपत्ति पा कोइ अश उसे थलग से धानेटित किया जायेगा।

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] राजपा राय पििम, १९५६ (ग) प्रत्येय भागीदार ने हिस्से पी प्रकृमि ग मीमा थियरण सहित ऐसे भागीदार का बियरण लग जहा पोइ गगर मे अधिक भागीदारा के हिरा पा प्रतिनिधित्व परता हो, और (प) उपरोक्त रीति मे बिग शिदिरा सएट पर प्रत्येर भागीदार अथया यह भागीदारी द्वारा व्यक्तिश श्रथया शामलाती पमा प्राप्त परने प सम्यध म अधिकार आभार। (२) क्सिी अधीनस्थ अधिकारी द्वारा, निमे धारा १८८ प प्रावधान ये अतगत यनि निम पादश पे लिए मामला सौंपा गया हो तेयार पिया जायेगा, यह पलस्टर को पेश किया जायेगा जो आदेश की पुछि पर सम्मा है या रह पर सस्ता है या परिवर्तित कर सकना है या अधिक नाच पड़ताल परन पर अथया अनिरिक्त साती सुनने का निर्देश कर सरना है अथवा स्वयं ऐसी पृछताद करता है अथया साती ले सकता है. अथवा नह तनवीये स्थापित कर उ हें निणय के लिए भेन सस्ता है परतु पुति का कोई भी श्रादेश उस सम्बन्ध मे प्रस्तुत की ना सक्ने योग्य अपील की अधि के समाप्त होने के पूर्व पास नहीं किया जायेगा या यदि कोइ निपटारा न कर दिया नाय । एक शर्त यह भी है कि उस पादश को परिवर्तित करने या रद्द करने का आदेश दिया जायेगा और न अधिक पूछताछ करन या साती लेने का आदेश दिया जायेगा तन तक कि उस आदेश का समर्थन के लिए पक्षकारा को सुनवाद अथवा ऐसी नाच पड़ताल या साक्षी के वक्त उनकी प्रतिनिधित्व का एक अवसर न दे दिया जाय । [धारा २१७] नटवारे के कागजात ---(१) जायदाद के विभिन म्वएडा के सम्बध मे, क्लक्टर, बंटवार के कागजात अतिम आदेश की शर्ता के अनुकूल, प्रार्थी प्रथया प्रार्थियों के जैसी भी दशा हो जिनके हिस्सों का वे खण्ड प्रतिनिधित्व करते होंगे पत्त मे तैयार करवायेगा और उनमे विभाजन के लागू होने का दिन दर्न करायेगा तथा ऐसे प्रत्येक कागजात पर केन्द्रीय धारा सभा के भारतीय स्टाम्प एस्ट १८६८ (गफ्ट सरया • सन १८६६) को जैसा रि राय मे ग्रहित हुआ है, अनुसार स्टाम्प लगेगा। (९) ऐसी तारीख जर तक श्र यथा निर्देशित न किया जाय अतिम आदेश की पुष्टि दिये जाने के बाद या अन्तिम आदेश में क्लक्टर द्वारा जारी किये जाने के तत्काल पाद श्राने वाले जुलाई माह का प्रथम तारीख मानी जायेगी। (३) जिम दिनाक मे बंटवारा लागू होगा, इस भाति विभाजित प्रत्येक खण्ड तभी अभिमाया के लिए स्वतत्र जायदाद सममी एवं प्रयुक्त की जायेगी मानों कि वे ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों के पक्ष म जिनके हिस्से या हिस्सा या उससे प्रतिनिधित्य होता हो यह मूल रूप से ही स्वतार जायदाद के रूप मे निमित हो। (४) वंटयार के कागजात तैयार होन पर क्लस्टर वापिक रनिस्टरों का तद्नुसार सुधार परगा और भूमि अभिलेख म आवश्यक प्रविप्न्यिा करने के लिए बोड को सुफारिश करेगा।

राजस्थान राज अधिनियम, १९५६ [१ [धारा २१८] विमानन पर भापटित सम्पत्ति का स्ना देना ----विभाजन के दस्तावेज में जिस व्यक्ति या व्यक्तियों को कोई भूमि आनंटित की गई हो, विमानत के अय पक्षकारों और उनके वैधानिक प्रतिनिधिया के विरुद्ध उस सत्र व मे अलग कहना पान का अधिकारी होगा और कलस्टर धारा २१७ की उपधारा (१) के अन्तर्गत बंटवार वागतानों में उल्लिखित ताराख के पाट तीन साल की प्राधि के अन्दर ऐसे व्यक्ति द्वारा श्रावेदनपर दिये जाने पर उम स्तावेज को प्रभावशाली घोपित करेगा मानो कि यह अचल सम्पत्ति पर कना दिलाने के लिए दिवानी श्रदालत द्वारा पास की गई कोई निमा हो। धारा २१६] सम्मिलित सम्पत्तियों का बटवारा' जब किसी मम्पत्ति में दो या दो से अधिक गार या गावों पे खण्ड सम्मिलित हो तो राज्य सरकार उसके विभानन को प्रशासनिक सुविधा के लिए अनिवाय सम्पत्तियों में किये जाने का निर्देशन कर सकती है। ऐसे निर्देश की प्राप्ति पर क्लस्टर सम्बंधित सम्पत्तिधारियों द्वारा प्रस्तुत किये गये प्रार्थना पत्रों पर विचार करने के बाद, इस अधिनियम के अनर्गत निर्मित नियमों के अनुसार उस जायदाद का राजस्व ऐसी जायदाता पर वितरित कर दगा और तदनुसार यापिर पनिका में सुधार करेगा। इस प्रकार प्रथा प्रथक निर्मित जायनाने उन पर आरोपित रानर के लिये उत्तरदायी होगा। [धारा २२०] राजस्व का प्रप चनात्मक अथवा भ्रामा वितरण -इस अध्याय पे अधीन चितरण करते समय जर राम पिसी भ्रम या छल पे कारण गलत वितरित हो जाय तो गोई, पिसी भी ममय मूल सम्पत्ति के राजस्व की मी अनेक जायदादी पर जिनमें यह बाटी जाय, वितरित करने हेतु आदेश द सपना है जैसा कि छल या भम ये रहित होने पर विभाजन की स्थिति होती है। [धारा २२१] कम निर्धारित सम्पत्तिया थधिक निर्धारित को वापिस लौटा धारा २२० 4 श्रीन किसी भी मामले में बोर्ड निश दे सस्ता है कि कोई भी स्थामी निसपी सम्पत्ति पर युन निधारण हुया हो प्रतिरी अधिर मे अधिक सीन यर्प सर, निनरे पाच यह अपनी अलग नायगाद का अधिपति रहता है किसी अन्य जायदार पनिस पर अधिक निर्धारण अभिलिम्वित स्यामा को गेसी रफम जिानी पूर्व लिम्बिन जायदाद न्यून निपारित पाई जाय, देने के लिए बाध्य होगा प्रेर उमा भुगतान नहीं पिय जान पर उमरी अदायगी राम के बारे अनुसार पी नावगी और उस स्थानी पोटी नावेगा जोकि उसरा अधियारा होगा। (२) इस धारा पे धतर्गत किये गय किमा भी टुक्म शरे में कोई भी प्रश्न दियानी अथवा माल अगला मे नहाँ उटाग जायेगा। धारा २२०] पगार की विभिन्न मम्पनियों का पीसग दाग दो में अधिप रानय चुकाने वाली सम्पनिया किमी गाय यी मीमा मेशा मधित रामायाभू रामाय प्रयिम, १९५६ मम्पत्तिधारी उनकी एय सम्पत्ति में पीारण प लिग फलाटर मे प्राथना पर मान । योर पलस्टर 'प्रपा विग से सी प्राा पोम्पीमार पर साना हे पयागे मामला मे तन्तुमार यापि रनिस्टरो म भी परियान परेगा। [धारा २२३] सरकार र सम्पनिधारी माय म होने गाते निभानन के मम्बद्ध म यह अध्याप लागू नहा होगा -(१) किमी मम्पत्ति में धारण करने वाले सरकार के बीर, "स अध्याय ये प्रापधान लागू नहीं हाग और न कभा सा विभाजन जारी हो नायगा फ्लाटर ऐमा रिभानन परगा। परतु शत यह है कि क्लस्टर के प्रम्नाय राय सरकार का मामति के लिये वो द्वारा भजे जायेंगे। (२) ऐसा प्रत्येक रिभानन इस सम्पर म राज्य सरकार द्वारा निर्मित नियमा रे अनुमार किया जायेगा। अन्याय १० रानस्त्र संग्रह [धारा २२४] भूमि और उसके उत्पान पर प्रथम भार के रूप म रानस्य - (१) प्रत्येक सम्पत्ति अथवा जोत पर उसके निर्धारित राजस्व अथरा लगान और उसके किराया, लाभों अथवा उपज पर प्रथम भार होगा। (२) ऐमी सम्पत्ति अथना नोन के लगान लाभ व उत्पादन किमी भी दीरानी अथवा रानव यायालय के बादश अथवा डिग्री ये भुगतान हेतु काम म तन तर नहीं लिये जायेगे न सक कि उस सम्बध म शेप राजस्व अथवा लगान की ममम्त रकम न चुकादी जाय। धारा २२५] रानस का उत्तरदायित्व -क्सिी सम्पत्ति के सभी हिस्सेदार और धारणकत्ता सम्मिलित तौर पर श्रीर व्यक्तिगत तौर पर फिलहाल राय सरकार को देय राजस्व के लिय उत्तरदायी हागे। (२) किसी सम्पत्ति पर स्थित क्सिी जोत के सभी कृपा और हिस्मेटार घनमान में राज्य सरकार को दय रानग्य के लिये सम्मिलित तौर पर से और निजी तौर से उत्तरदायी होंगे। (३) किसी सम्पत्ति अथवा क्सिा जोत रा श्राधिपत्य प्राप्त करने वाले सभी व्यक्ति उनके ऐसे कजे प्राम करने वाले व्यक्ति से राजस्व अथवा लगान के सभा नशेपों ये लिय उत्तरदायी होंग। (४) इस अध्याय म प्रयुक्त अभि यक्ति भूमिधारा अभिप्राय किसी से व्यक्ति मे होगा जो सलाम पे लिये क ना धारण करता हो और भूमिधारी र अधिकार का पट्टेदार भी उसमे शामिल होगा।

- राजस्थान भू राजस्व अधिनियम, १९५६ [ ७३ {धारा २२६] अवशेषों के भुगतान के नियम और दोपी-रान प्रथवा लगान ऐसी शो म ऐसे समय और ऐसे स्थान पर तथा ऐसीरीति से ऐसे व्यक्तियों को दिया जायेगा जो निधारित किये जाय और इस प्रकार नहीं भुगताई प्रत्येक रस्म लगान अथरा राजस्व के अरसेप कहलायेंगे अथवा उसो सम्बन्ध में उत्तरदायी व्यक्ति दोपो कहलायेंगे। फितु शह यह है कि जन तर राज्य सरकार अयथा निशान दे तत्समय राज्य सरकार को भुगतान योग्य राजस्व या लगान का भुगतान सक्ल के पटवारी को मान, किया जायेगा।" [ धारा २२७] प्रमाणित हिमार अरगरों की मानी होना तहसीलदार द्वारा प्रमाणित हिमान का विवरण पर इम अध्याय क अभिप्राया अपशेष की रकम के मन्त्र में और उमसे सम्बद्धोग व्यक्ति के बारम प्रमागित माझी होगा। कि तु शर्त यह है कि इस बारा को कोई पाल ऐसे व्यक्ति द्वारा भवान किये नान रे इक पर भार स्वतन्त्र व प्रथक कायशही के द्वारा कलस्टर के सामन हिसार के सुधार सम्य ध प्रश्न रबन के हल पर कोई हानिकर प्रभाव नहीं हालगा। [धारा २२८) दातव्यों की वसूली की कार्यवाही ...राना या लगान के दातव्य निम्नाक्ति किसी ए या अधिक प्रणालियों द्वारा वसूल किये जायेंगे (क) किसी दोषी पर मागपत्र अयश उपस्थित पत्र की तामील द्वारा (घ) उसमोचल सम्पत्ति की कुर्स और विकी द्वारा (ग) किसी निधारित क्षत्र हिस्सा पट्टी अथवा सम्पत्ति निसके यारे म ऐसे दातव्य (घ) से हिस्से या पट्टो को स्मिो साम्ब याले हिस्सेदार को हस्तान्तरित करके। (८) ऐमे किमी निधारित हिस्से या पट्टी अथवा सम्पूर्ण सम्पत्ति का रिकी द्वारा, (च) दोगो को अय किसी अचल सम्पत्ति की विधी द्वारा रितु शर्त यह है कि खएड (के प्रावधान पिसा जागीर भूमि श्रयया भूमिधारय फी सम्पत्ति पर लागू नहीं होगा। [धारा २२६) मांगपत्र एर उपस्थिति पर यति राजस्व अथया लगान का फोद दाग शेप हो मागर उममें उल्लिवित नारीख तक थाया रहम चुपये जान निर्देश सहित दोपो पर नामी कराया जायेगा या उपस्थिति-पत्र सम अल्लिखित सारीख पर स्थित होने यापम पर जारी किया जायेगा। [धाग २३०] चन मम्मत्ति की बर्फी एर पिसी -फलस्टर को व्यक्ति की धम मम्पत्ति को माना है और ये माना है।म धारा के अन्तर्गत निशिव प्रत्येक और विकी भी पिजदाल दीवानी अदालन की दिरी के अजगत N समतिको यो विषय में लागू विधि के अनुकूल की जायेगी। माना हो युगौ द्वारा, ७४ ] राणा भूसमा पहिनिगम १६५९ दीपाती १६०८ (पेन्द्रीय पयर माया ४ मा १10) पी धारा६ पे नियम बनाये गये विवरण के प्रल या दर धारा अगर नाप में धमकायो यलिए अला रखी गइ यस्तुओं पी भी दुर्गा एवं निजी मे मुक्त रखा जायेगा। एप पिकी या मन राजस्थ या लगान ये मतालये म जोर दिया जायेगा और इसी भाति यमूली योग्य रहेगा। (धारा २३१) भूमि की उर्का -१) पहने निर्दिष्ट किसी भी प्रमिया को छोड़ पर प्रथया उमरे बजाय यलम्र निर्दिष्ट क्षेत्र हिम्मे पट्टी प्रथया जायदाद यो, निमो मम्म ध में ऐमा मतालमा शारह फर्क यर माना गौर अपने प्रश्र नगन ले मकता है और ऐसी कुर्स उम समय समाप्त हो जागेगी र सभी दानव्य चुरत हो जायेंगे। - (२) दात यों ये चुरते होने के पश्चात ममि को छोड़ दिया जायेगा और प्राप्त किया गया आधिक्य यदि कोई हो, दोपा को अयश उप्तके येय प्रतिनिधि को दे दिया जायेगा। धारा २३२] पता क अधिकार और श्रामार --क्लस्टर जहा कोई भ मे प्रत्यक्ष प्रम परे प्रधान हो उमकी कुर्की के ममय दोषो और काश्तकारों क धीच घतमान प्रत्येक मचिदा को मानने के लिए बाध्य होगा और इमी प्रकार यु की गइ सम्पत्ति के प्रय ध हेतु शक्ति सम्प न होगा और उमसे प्राप्त हाने वाले सभी कायां पन लाभों को पा मकेगा । इस प्रकार कुर्क की गई सम्पत्ति से एकत्र रकम कुर्की रे वाट शेप रहने वाले रानस्त्र या लगान की रिश्तों की अदायगी म और कुर्म के प्रय र य म लगाई जायेगी और शेप रकम ऐसे दातव्या के चुकारे हेतु फाम में ली जायेगी, जिना कारण वह फुर्क की गई हो। [धारा २३३] कुफा की घोषणा --(१) धारा २३१ २ अ तगत जर कनस्टर कोई जमीन कुर करता है, वह इम सम्म प म एक घोषणा करेगा। () ऐमी घोषणा की तारीख के पश्चात् अथवा प्रेमी अग्रिम तारीख के पूर्व ही उम भूमि क लगान के बतौर प्रथया ऐसे अ य लाभ हतु देय रकम अतिरिक्त किमी अन्य व्यक्ति के दिये जाने पर उप सम्बध मे कलस्टर का चुतारा करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति ऐमी उत्तरदायिता से मुक्त नहीं होगा। (वारा २३४) दोपीक माा का हस्तान्तरण -(१) किसी सम्पत्ति के भाग या पट्टे के विषय में कोई दात य शेष हो तो कलक्टर पहले निष्टि तरीका के अलाना अथवा उनकी याया राजस्व मण्डल की पूर्व स्वीकृति लेने पर ऐसे हिस्से या पट्टे को ऐसी स्वीकृति के तत्काल याद, प्रथम जुलाई में अधिकतम १० वप के लिए किसी एक अथवा अधिक साझीदारों को, जिनमे सम्पत्तिधारी सम्मिलित नहीं होगा दातव्य चुमाने पी शर्मा और ऐसी शर्तों पर जो घोड मामले म निर्धारित करे हस्तातरण कर सकता है और ऐसे हस्तातरण से उम सम्पत्ति के सम्बध में यह लाग होगा, सामीदारों को निजी और सम्मिलित उत्तरदायित पर किसी भाति प्रभार नहीं पड़ेगा।

राजस्थान भू राजस्व अधिनियम, १९५६ [ ७५ - (२) जन हस्तान्तरण की अवधि समाप्त हो जाय तो वह हिस्सा या पट्टे सम्बधी सम्पत्तिधारी को सरकार अथवा ऐसे हिस्से या पट्ट के सम्बध मे शेष रकम के हस्तातरण ग्रहीता के प्रत्येक दावे से मुक्त कर लौटा दी गई समझी जायगी। [धारा २३५] दोपी के निर्दिष्ट हन्के, पट्टी या सम्पत्ति का विक्रय - क्लक्टर की राय जव यह हो कि पूर्वाङ्कित प्रणालियो दातव्य की वसूली के लिए पयाप्त नहीं हाग ता उन सभी या उनमें से किसी प्रणाली के बजाय अथवा उसके या उनक अतिरिक्त किसी निर्दिष्ट क्षेत्र पट्टी या सम्पत्ति जिसके सम्बध मे एसे दातव्य देय हा, क विक्रय नीलाम द्वारा कर सकता है पर तु शत यह है कि कोई भी अन्य निर्दिष्ट क्षेत्र पट्टी या सम्पत्ति क्सिी ऐस दातव्य के लिए नहीं विश्य किये जायेंग जो कि उपजित हुइ हा, जब कि वह सम्पत्ति- (क) कोट आफ वाडस के अतगत हो, अथवा (ख) फ्लक्टर क प्रत्यक्ष प्रवध मे रही हो । [धारा २३६] भूमि का विक्रय मार मुक्त होगा'विगत धारा के अन्तगत बची गई भमि तत्काल समस्त भारो से मुक्त करस वची जायेगी और केता अतिरिक्त किसी अन्य व्यक्ति द्वारा ऐसे भूमि के सम्बध मे पूर्व से किय गय सभी अनुव घ नीलाम ५ समय कता विषल्प पर निष्प्रभाव हो सकेंगे। (२) उपधारा (१) की कोई वस्तु रहवासी गृह बनाने १ लिये या शिल्प निर्माण क लिए अथवा उपवन, तातार, नहर, पूजास्थान अथवा मरघट अथवा कब्रगाह बनाने के लिए वास्तविर अस्थायी अयवा निरतर पट्टा के मतगत धारण की गई भूमि पर लागू नहीं होगी और ऐसी भूमि ऐस पट्टो म उल्लिखत कार्यों के लिए काम में ली जाती रहेगी। (३) उपधारा (१) में किसी वस्तु के रहते हुए भी राज्य सरकार विक्रय क पूरा होन के पूर्व यह निर्देश कर सकती है कि वित्री, भूमि में धारण कर्ता द्वारा मया एस व्यक्ति द्वारा जिसय सम्बध में उत्पन ऐस हिता या अधिकारो के मतगत जिहें यह चित समझ, की जाय । [धारा २३७] दोष से श्रमबद्ध सम्पति म निहित दोपी के हितों क सिद्ध कार्यवाही -(१) जब उपरोक्न प्रणालिया द्वारा किसी मे अवशेष वसूल नहीं हो सके पोर दापी पिसी प्राय सम्पत्ति के विसी प्रश का प्रथवा सम्पत्तिमा मषवा विसोमय अचल सम्पत्ति पा स्वामी हा या उसमाई हित रसता हो, तो रसस्टर ऐमो सम्पत्ति या उमदे मश या उस प्रपन सम्पत्ति र पिस्द इस प्रकार पायवाही परगा मानो यह एसो भूमि हो जिसस विषय में इस अधिनियम र प्रावधानों के मतगत राजस्य प्रथया समान दातव्य हा रितु शत यह है रिपोरे मतिरिका रिमो पर व्यक्ति वाहनों पर ऐसी रोति से प्रमाय नहीं जाता जायगा।

समामा गूराना परिनियम १९७ (२) राजस्व या लगाा मे प्रयशपो में पग यगूम पी जाने वाला धनराशि जो पिपिसी विशेष भूमि ये सम्ब मे दाराहा, इस धारा ये मतगा नापा की विसी अचल सम्पत्ति में विस्त पायवाही पर यमूल की जा सासी है। [धारा २३८] विक्रय की घोषणा - (१) जब धारा २३८ में प्रयवा २३७ के प्रधीन पिसी भूमि प्रयया माल सम्पत्ति के विक्रय सामान्य पारित कर दिया जाय तो कलक्टर ऐसे नियित विषय या एक पापणापत्र बेची जाने वाली भूमि पर निर्धारित राजस्व व ऐस प्रयशप जिनके लिए यी जा रही हा विषय या समय और स्थान, भूमि के भार सहित या भार मुक्त बेची जान पर एसे प य विवरण सहित जा कलक्टर पावश्यक समझ एक घोपणा निकाली जायेगी। (२) उपधारा (१) के अतगत जारी की गई घोषणा की प्रतिलिपि दोपी पर निकाली जायेगी। [धारा २३६] निक्रय कर और फिमक द्वारा होगा ? -- (१) इस अध्याय के अधीन प्रत्येक विश्य एव कलक्टर द्वारा अथवा उस सम्बध म विशप स्प से उसके द्वारा नियुक्त सहायक कलपटर द्वारा किया जायगा। (२) कोई भी विक्रय रविवार अथवा अन्य स्वीकृत छुट्टी के दिन अथवा घाषणा निकाले जाने के दिन के पश्चात् ३० दिना को समाप्ति के पून सपादित नहीं किया जायगा। (३) समय समय पर कलक्टर विक्रय को स्थगित कर सकता है । [धारा २४०] विक्रय के सम्बद्ध सम्पति पर बोनी लगाने और उनके ग्रहण करने पर निषेध --किसी ऐसे विस्य के सम्बध मे कोई कतय पूरा करने वाला काई भी पदाधिकारी और ऐस अफसर क प्रवीन या उमक द्वारा नियुक्त कोई भी यक्ति प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्षरिसी भी वित्रय का जाने वालो सम्पत्तो जो उसमे निहिन क्सिी प्रत्यक्ष हित क विश्य मे काट आफ वाडस अथवा राज्य सरकार क निमित्त अवस्था के अलावा कोई बोली नही लगायगा और न उसे ग्रहण करने का प्रयास करेगा। धारा २४१] विक्रय को रोकना --जब दोपी ऐसा बकापा जिसके बारे में काई भूमि या अ य अचल सम्पत्ति बेचे जाने का हो उस विक्रय के दिन + पूर्व कलक्टर की अथवा राजस्व या लगान के चकाने को प्राप्त करने लिए नियुक्न व्यक्ति को अथवा ऐस सहायक पलक्टर को जो कि ऐसे सब डिविजा का मार्याधिपति हा या जिसमे वह जमीन या अचल सम्पति स्थित हो उसे शेप ऋण का भुगतान करगा तो विक्रय का रोक दिया जायगा। [धारा २४२] सरीददार द्वारा धरोहर रसना व उसक अमार म पुनर्विक्रय -खरीददार के रूप म घापित यक्ति को उसको वाली की रकम को २५ राजस्थान मू राजस्व मधिनियम, १९५६ [७ प्रतिशत शीघरतर श्रमानन रसनी होंगी और उसके न रपे गाने पर मूमि श्रथया घर अचल सम्पत्ति तदुपरान दुचारा चा जायेगी और ऐसा व्यक्ति प्रथम निमय के खरे हतु और द्वितीय विनय से प्राप्त मूल्य के कारण उत्पन श्रभार के लिये उत्तरदायी हा श्रार एसी रक्म क्लस्टर द्वारा राजस्य के अशेप पे रूप में उससे पसूल की जायगी। [धारा २४३] क्रय के मूल का चुराया जाना—(१) न्य वनराशि या पूश पिम्य को तारान्वये १५ दिन या उससे पूर्व नेता द्वारा कलस्टर के कार्यालय म चुपाया जायगा। () जर ज्य-राशि इस भाति न चुकाई जाय तो विम्य का व्यय चुकाने के पश्चात् धरोहर की शेप रकम राज्य सरकार द्वारा जल परली जायेगी श्रीर दोरी मना मी उस मम्पत्ति म से अथा तत्पश्चात् प्राप्त विम्य राशि के रिसी हिस्से से सम्बन्धिन सभा दाव भी न हो जायेंगे। [धारा २४४] पुन निरय से होने वाली हानि के लिए क्रेता का दायित्व से विक्रय की राशि निनरे फ्लस्वरुप पुननिय किया जाय ऐसे पभियुक्त प्रेता द्वारा लगाई गई गेली को फोमा से कम हो तो वत्सम्बधी अनर उससे राप के अयशेप पेस्प मे यमूल किया जायेगा। [धारा २४५] पुनरिय के पूर्व घोपणा -धारा २२ के श्रवर्गत दिये गये ग्यगन व परचान् कोह भी विस्या या धारा के अन्तर्गत प्रय राशि के भुगतान नहीं किरे आने पर पोइ भी पुन पाय सर तक नहीं किया जायेगा पर तक मूल चिमय के लिये निधारत प्रणाली से नगीन भोपणा नहीं करदा जाय । (घारा २४६] थपशेष के जमा होने पर विम्य को निमल करने का यावरनपन इम अधिनियम के अन्तगत येय ही पद किसी व्यक्ति की भूमि या चल मम्पत्ति उस पिम्य का तारीख के बाद ३० दिन पी अवधि क अनगन फलस्टर के पाय लय म नि नापित रकम उमा करा कर विनय यो निर्मूल परने हेतु पावेदन-पत्र प्रस्तुत पर सरना है (फ) फ्रता को देय रकम जो प्रय राशि फ.५ प्रतिशत पे परार हो, (1) चयरोपा पे सम्य य म देय रकन ये निमरा निरा गिम्य पी घोषणा में किया गया हो घर निसफ लिये विमी पा थादश दिया गया हो, भुगतान इतु सी रकम में मे यिमय के घोपणा-पत्र से प्रेमा रकम फेजमा फरार जान को सारीर फे याप पुराई गह रकम शेर परदा जायेगी, पर (ग) रिमय-व्यय यदि दम प्रचार 'समा ३ दिनों की पधि के मीतरो माय तो पताटर प्रिय पोरर फरी पर चादरा निग्रनेगा ..] रामरा रानव मधिनियम १९५६ परशा यह है कि पोई व्यक्ति धारा 37 अगा विशय यो रह परने हेतु भायेदा परता है तो यह इस धारा ये अनगा आवेदन प्रा परन का अधिकारी नहीं होगा एक शन यह भी कि इस धारा पे अधीन विमय को रद करने के मायही पदि भूमि धारा २६६ पे प्रगत सर्व भार मुक्त विनय पी गद होगी तो एसे भार पुन प्रभावशील हो नापगे। [धारा २४७] अनियमित इत्यादि की वनह से विनय से निल कग्ने श यादन पर-विनय को पिसी यास्तयिस अनियमितता अथवा प्रकारान भी सम्पादन की त्रुटि के आधार पर विस्य की तारीय के पश्चात् ३० दिन की अवधि के मीनर रिसी भी समय, रद्द किये जाने के सम्बर में कोई आवेदन पत्र क्लम्र को दिया ना साता है कि वोद भी निमय तर तक ऐसे आधार पर रद नहीं किया जायेगा पातक कि श्रापनाना क्लस्टर के सोप के लिए यह सानि न परदे कि उसे ऐसी अनियमितता या गलनी रे कारण कोद मौलिक हानि नहीं पहुँची है। [धारा २४८] विक्रय को पुष्ट अथवा निर्मल करने हेतु प्राना -यदि, विनय पश्चात् ३० दिनों का समाप्ति पर धारा २१६ अथरा ७ में उल्लिखित कोर प्रावेदन-पत्र पेश करना हो अथवा यदि ऐसा श्रावदन पत्र प्रस्तुन किया गया हो और म्बारित कर दिया गया हो तो क्लस्टर रिम्य की पुष्टि हेतु एक प्रादेश प्रकाशित करेगा और यदि ऐमा आवदनपत्र धारा ५७ के अन्तर्गत प्रस्तुत किया गया हो और स्वीकृत कर लिया गया हो तो क्लस्टर विनय को रद्द करने के लिये आदेश देगा। [धारा २४६] अनियमितता अथवा गलती पर आधारित दारों पर प्रतिबन्ध -यदि धारा २४७ के अधीन इम सम्पच म दिये गये समय के अदर कोई आवेदनपत्र प्रस्तुत नहीं किया जाय तो विक्रय के प्रकारान तथा सम्पादन के सम्बर मे हुइ गलनी या अनियमितता के आधार पर किये जाने वाले सभी दावे प्रतिधित होंगे पर तु इस धारा म उल्लिखित कोई भी वस्तु धोरे के आधार पर शिी को रद्द किये जाने के अर्थ के लिये दीनानी न्यायालय में दायर किये जाने वाले दावे पर प्रतिर नहीं लगायेगी। टिप्पणी -यह धारा सर करती है कि विक्रय से सम्बन्धित कार्यवान की त्रुटि या अनियमितताक विपक्ष मे दिय जाने वाले प्रावग्नपत्र के मतिरिक्त विनय क सम्बध मे दीवानी यायालय मे धोने के कारण की गई कायवाही सिद्ध मरने पर रद्द कराई ग साती है। [धारा २५०] क्रिय के रद्द होने पर क्रय राशि की वापसी --धारा २४ के अधीन जब भी किसा भूमि अथया अचल सम्पत्ति के विनय को रद्द कर दिया जाय तो खरीददार व्यान सहित जो कि ६ प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से अधिक नहीं होगा, अथवा व्यारहित नैसा कि कलस्टर उचित समझे, धनराशि के पुन प्राप्त का अधि भरी होगा।

राजस्थान भू राजस्व अधिनियम, १९५६ [५ (१८) धारा १०१ के अधीन कृषि कार्यों के लिए भूमि के प्रारंटन के नियमन हेतु, (१६) धारा १०६ के अतर्गत सर्वेक्षण अभिलेख कार्य अथवा केवल अभिलेख कार्यक्रमों के संचालन मे भूमि अभिलेखाधिकारियों द्वारा ग्रहण किये जाने पाले जाने के नियमन के लिए, (२०) धारा ११२ एवं १३१ के अधीन मानचित्र र तथा खसरे के निर्माण,प्रमाणी करण एर प्ररथ विधान के निश्चयन के लिए, (२१) उक्त धाराओं के अधीन मानचित्र य खसरे के स्वरूप एवं विपय यस्तु के और उनमे परिवर्तनों के अभिलेख के लिये मध्यातर ण्य प्रणाली के नियमन के लिए, (२०) धारा ११० तथा १३२ में निर्दिष्ट अधिकार अभिलेख एवं पार्पिक रनिस्टरों के निमाण, प्रमाणीकरण एवं प्रबंध के नियमन के लिए, निसमें अधिकार अभिलेख रे अवयर स्वरूप ऐसे रनिस्टर उल्लिखित होंगे जिनका विवरण धारा १११ मे नहीं दिया गया हो और धारा १२१ में उल्लिखित रिसरणों के अतिरिक्त ऐसे विवरणों के नियमन के लिए निनका उल्लेव म्वनीनी में किया जायेगा, (२३) धारा १२३, १२५ अर १२५ के अधीन नाच पड़ताल करने के समय भूमि अभिलेखाधिकारी द्वारा प्रयोज्य कार्य प्रणाली के नियमन के लिये, (२) धारा ११५ के अधीन सरकारी भूमियों को सूचि के निर्माण की रीति के नियमन के लिए और ऐमी भूमि के यारे में की जाने वाली जाच पड़ताल के दग के निधारण के लिये, (५) धारा ११८ पे अधीन गुन कारत के निम्पण र अभिलेम्वन के द ग क नियमन के लिए, (१६) गाय के याशिदा के रहने के लिए प्रारतित किये जाने योग्य क्षेत्र के निरुपण तथा निश्चयन के लिये, (२७) धारा १२० के अधीन गारों की मुचियों के प्रपन, विषय-यस्तु ण्य निर्माण फी रिधि के निर्धारण के लिए (८) से अपराशों के निवारण के लिए जय कि सालाना रनिस्टर धारा १३२ ये प्राचीन तेयार किये जायेंगे जिस प्रणाली या सरीये से परिवर्तनों को उनमें रिया जायेगा और इस प्रकार के परिवर्मनों काादार करने पर नो पीस पार पी जारगी टिप्पणी-भावान पपिनिपम ॥ पास १९५६ मेगन२. द्वारा ओ राम्पान मिर रिनांक .. १९ गन में प्रणिपा पतित पिपा गया और मरमे परिततिरपा मममा जावेग राजपा नरागस पपिडियम, १९५६ (E) अभ्याय ७ प अधीत निमा मानिनामरे और रजिस्टरां के जनता द्वारा पिय नाो या निरीक्षण या समय और सन्विागी शर्म, उमसी प्रविप्रिया पी प्रतिलिपि सेयार परने पा शुन्य उना जारी करने तथा प्रमाणित परापीरीतिारण के लिये, (३०) धारा १५७५ प्रधान यादोयस्त पे पायाम पनिपादन म य दोबस्त अभियारिया द्वारा प्रयोग्य पाय प्रणाली नियमन प लिय, (३१) धारा १५० य अधीन मिटी की विभिन्न श्रेणिया म लगान निधारण के क्षेत्रों या या प विभाजन प नियमन प लिए, (३२) धारा १५५ २ अधीन माग सम्बनी लगाना की यमूली को रोक्ने के लिए प्रादश नारी परने का प्रणाली के निधारण के लिए, (३३) धारा १७५ के तृतीय श्रनुर अतगत मामला म य दोस्त के अन्तरिम पुनपाचन के नियमन हेतु (३४) धारा १८० के अधीन विशेष नागरी-कर प्रारोपण क नियमन हेतु, (३५) धारा १६७ के अधीन विमानन के प्रयोजनार्थ भूमिया के मूत्यापन के उपनियम तथा सामा य सिद्धाना के नियमन के लिये (३६) धारा २०३ के अधीन विभाजन के सच के निरूपण और उनी विश्ता और उनके भुगतान के ममय के नियमन क लिये। (३७) धारा २३ के अधीन सरकार और विसी सम्पत्तिधारी के बीच किसी सम्पत्ति के विभाजन के नियमन के लिये, (३८) धारा २६ पे अधीन राय सरकार को देय लगान या लगान की किश्तो स्थान, समय तथा भुगतान की प्रणाली श्रादि के निधारण के लिये (३६) धारा 18 अधीन मागपत्र तथा उपस्थितिपन जारी करने किन अधिकारियों श्रथा अधिकारियों के वर्गी द्वारा व जारी किये जायेंगे और दोपिया से उस सम्बध मे यमल किये जाने वाले खर्चा के निश्चयन रे नियम ननाने लिये (१०) धारा २३४ के अधीन किसी सम्पत्ति अथवा उसके किसी निर्दिा अश या प४ को हतारित करने अथवा धारा २३५ रे अधीन बेचने की रीति के नियमन के लिये। (११) से परिव्ययो के नियमा के लिये जो इस धारा के अधीन बदोस्त के असम्बद्ध किसी भी गैर अगलती कायनाही के सम्बध म वसूल किये जा सरने है (४२) किसी भी गैर अदालती कायपाही के सम्बध मे जो वन्दोवस्त से सम्बद्ध नहीं हो, किमी पदाधिकारी या इस अधिनियम के किसी प्रावधान के अधीन शक्ति मम्पन श्रथा नाछिन यक्ति द्वारा प्रयोय कार्य प्रणाली के नियमन के लिये राजस्थान भू राजस्व अधिनियम, १९५६ [ ६७ (४३) निधारित सभी अ य विषयों के नियमन हेतु अथवा जिनका निर्धारण किया जाना आवश्यक हो अथवा जिनके सम्बध मे इस अधिनियम की उपधारा (१) के अधीन वोड द्वारा निर्मित नियमा क अतिरिक्त नियम वनाये गये हा या बनाया जाना आवश्यक हो और (४) सामान्यत इस अधिनियम के प्रावधाना के प्रयोग के लिये । [धारा २६२] पटवारी इत्यादि जन-सेवक होगे- भारतीय दण्ड विधान (केद्रीय एक्ट सख्या ४५ सन् १८६०) की धारा २१ के प्रयाजनाथ, अध्याय ३ के अन्तगत नियुक्त प्रत्यक पटवारी, गिरदावर, कानूनगो अथवा भूमि अभिलेस निरीक्षक सदर कानूनगो, प्रोर ग्राम रक्षक और उपरोक्त व्यक्तिया मे स किमो के कतव्या को अल्पकाल के लिए सम्पादन करने के लिय निमुक्त प्रत्यक व्यक्ति को जनसेवक माना जायेगा और एस सभी व्यक्तिया द्वारा या उनम किसी एक द्वारा रखे जाने वार सभी राजकीय प्रभिलेख एव कागजात सावजनिक अभिलेख एव राज्य की सम्पत्ति मान जायगे। टिप्पणी -यह थारा स्पष्ट करती है कि पटवारी इत्यादि राय समचारी भारतीय दण्ड वियान के प्रावधाना क मनुमार जन मे कहतायेंगे और इस प्रकार जन सेवक में अपने समस्त पतव्य पूरे न करले पर उन्हें भारतीय दण्ड विधान के प्रावधाना र मनुमार हा दण्ड पिया जायेगा। तथा उपरोक्त समचारिया द्वारा रखा जाने याला रेकर्ड या प्रपत्र सार्वजनिक तथा राजय सम्पति माने जायेंगे। [धारा २६३] परिमाण एर सण्डन - -इस अधिनियम के लागू होने पर निम्नाक्ति इस मधिनियम के प्रावधाना म समविष्ट अथवा उनमे सगत विषय तक सण्डित समझ जायेंगे मत- (4) द्वितीय अनुसूची में उल्लिम्बित विधान, (स) द्विताय मनुसूर्या में उल्लिवित विधान में प्रतिरिक्त इम अधिनियम के प्रावधाना में शामिल किसी विषय से सम्बद्ध पिसी सधि पत्राबगत राज्य 4 कोई कानून, पौर (ग) सण्ड (क) एव (ब) में उत्तिसित विधाना का समापन करन वाले बाई पानून, (२) इस प्रपिनियम द्वारा विमी विधि या विधान र मण्डित विय जाने म इरा पधिनियम में पारित किये जाने के तत्काल पूव अनुचित समझी जाने वाला बाई भी प्रया उचित नहीं हा सरेगी। (३) स अधिनियम प्रारम्भ के समय राजस्पाये दिसा भो स म प्रच पिसाई भी सामाजिक प्रपा, या राति जा कि वो विधि र करम प्रभावशोल रही हा यदि यह इस पपि नयम पे प्रावधानों म प्रतिकून या भगत हामी सामो समगति या प्रतिमा को सीमा तर प्रभावशील हो जायेगा।

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HERIT पियर १९५६
प्रयम अनुसूची
(धारा २३ दसिय)
न्यायिक मामता की सूची
(१) धारा ८८ को उपधारा २ मे मतगत यतरा ।
(२) रागाह भूमि पर घरावाही पशुप्रो मे हम ग सम्बध प मगर ।
(३) जगलात को भूमि से याद है य जगलात की उपज पर प्रयोग परो वाले वे
हर सम्बधी झगह मामने,
(४) भूमि सीमा का निपटारे व झगड ।
(५) साड माफ राइटस व वार्षिक रजिस्टरा म इदाज करने व भगः ।
(६) किसान की शसला या भू-स्वामित्व रखने सम्पपी भगड ।
(७) बादल, उत्तराधिकार या अय विषयक नामा तर ।
(८) रेट या रिव यू देन सम्ब चा भगड ।
(६) दस्तूर गराई या वाजिब-उल-अज सम्र धी भगड ।
(१०) रिवयू या रेट स मुक्त रखी हुई भूमि के मूल्य निर्धारण एव जाच करने
सम्बधी।
(११) जायदाद के टुबड करने व जोडने ।
(१२) इस कानून के मतगत जुर्माना करने, पेनेलटी लगाने, जन्त करने सम्ब धी ।
(१३) मुआवजा को नियत करने।
(१४) इस कानून के अतर्गत वित्री व नीलाम करन ।
(१५) ऐसे अन्य मामले को राज्य सरकार द्वारा नियत किये गये हो ।
द्वितीय अनुसूची
(धारा २६३ देसिय)
(सूची उन अधिनियमो की जो रद्द कर दिये गये)
(१) राजस्थान टरीटारियल डिवीज सपाटन स १६४६ |
(२) राजस्थान बोर्ड ग्राफ रिवे यू प्रोडौं स १९४६ ।
(३) राजस्थान रिवेयू काटस (इसिगनेशन) मोर्डीने स १९४६ !
(४) राजस्थान रिवेय कोटस (प्रोसीजर एण्ड ज्यूरिडिक्सन) एक्ट

राजस्थान नू राजस अधिनियम, १९५६ [R (५) अलपर स्टेट रिवेन्यू कोड। (६) भरतपुर रिवेन्यू कोड़। (७) भरतपुर लेएड रिवेयू मेनुअल । () वीरानेर लेण्ड रिवेयू एक्ट १६४५। (2) जूनी स्टेट लण्ड रिव यू एक्ट १९४० । (१०) वामनाडा क्लाइदे माल । (११) इ गरपुर रिवेन्यू रूल्स । (१०) जयपुर स्टट पाटस लेएड टेन्योर एक्ट १६ (१३) जयपुर लेण्ड रिवन्यू एक्ट १६/७ । (१८) जयपुर रिलेन सरिमेन एक्ट १६ । (१५) रीली स्टट लेण्ड रिवेन्यू कोड । (१६) कोटा रिवेन्यू सरकुलर्स। (१७) मारभार लेण्ड रिवन्यू एक्ट १६६ | (१८) मारवाड जागीर सेटलमेट रग्यूलेश स १ER) (१६) कानुन माल मेगाड रिवन्यू कोर्टस् एक्ट १६५ । (१०) मेगाइ रिवेन्यू कोड एक्ट १९४७ । (२१) शाहपुरा ययाइद दखल सारित १९२३ । (२) सिरोही लेण्ड रिवेन्यू एस्ट १६५७। [राजस्थान गमपत्र विपार दिनाक १३-१-५८ व सण्ड ४-7 में प्रशा]ि रानस्थान राजस्व निधिया (विस्तार) अधिनियम, १९५७ (अधिनियम मम्या, सन १६५८) राष्ट्रपति की स्वीकृति दिन क ७ जनवरी, १५८ को प्राप्त हुइ] पार पुनर्गटन राजस्थान राज्य की पतिपय सार विधिया को धातू अजमेर तया सुनल ग्राम रिश्तारित करने का प्रावधान करने पे लिए अधिनियम । चूकि नये राजस्थान राज्य सारि स्टटम रीया निाहनेशन एक्ट, १६५६ (मेन्द्रल Pट म००७ मन् १९५६) की धारा १० द्वारा निर्मित हुमा की राजन विधियों में पर पता लाने पंलिरे यह पटपर है कि प्रार-पुनाटन रानपान राज्य में प्रभावशील राजस्थान टनेन्सी एस्ट १५५ (रासरयान "क्ट स०३, सन १७५) और राजस्थान मेल्ड रपन्यू पर, १५६ (रातस्यान "स्ट म०१५ सन् १५.) को नव राजावान राय ये पजमेर मया मुनेलनों मरिस्तारित करने के लिये प्रारयान दिया जाये और नत्रयोनार्य सया अय प्रयोजना फे निवे, जो इसम नीरे अनि ६, उनमें पयुक्त मंशोधन रिये जायें अन रावग्यान राज्य में विधान मरदन तारा मारा राम्य फ माउथ वर्षम निम्न म्पेण अधिनियमित किया जाता है - - ६.] राजापार राना मिमि, १९५६ १ मषिप्त नाम तथा प्रारम्भ -१ गा अधिनियम रााग्थान राजन्य विधिया (विम्मार अधिनियम १६५७ पहलागगा। (1) यह सी मारोग मे प्रभाय म पागा ना राज्य सराार गनपत्र म थिईन द्वारा नियत पर। २ परिभापाए --गम अधिनियम म जय ना विषय अथया प्रमग म अयथा अपक्षित न हो- [१] 'निग्न दिन म अभिप्राय धारा १ की पधारा (1) ये अधीन नारी का गह पिशनि द्वारा गम अधिनियम के प्रारम्भ पे लिये नियत दिये गये दिन से है Fo, राजस्थान रानस्य विधियों से अभिप्राय प्रार पुनगठन रानम्थान राज्य म प्रभावशील राजस्थान टनेन्सी एक्ट १६५ (रानम्मान एस्ट स ३, सन १६५५) तथा रानस्थान लेएड रपे यू एक्ट, १६/६ (रानस्थान एक्ट म०१॥ सन १६५६) से है। ३ रानस्थान रानम्र निधियों का मशोधन --नियत दिन को तथा से रान स्थान राजस्व विधिया ऐसी रीति से तथा ऐमी सीमा तक को धारा और अनुसूची १ म उल्लिखित है सशोधित की जायेंगी। ४ राजस्थान रान निधियों म सामान्य रूपभेद --रानस्थान रास्न विधिया मे सत्र जब तक विपय अथवा सदभ से अन्यथा अपचित न हो और इस अधिनियम मे सा अयथा उचित हो उसे छोड कर - [१] अभियक्ति Rajasthan Gazotte जहा कहा भी प्रयुक्त हुद हो के स्थान पर अभिव्यक्ति ' Official Gazette प्रतिस्थापित की जायेगी [] श द "Rajasthan अभिव्यक्ति - Rajasthan Gazette मे अथवा अभिव्यक्ति "State of Rajasthan ' मै अथवा रानस्थान रानस्य विधियो के सक्षिप्त शीपों अथा अन्य किसी राजस्थान अधिनियमित मे हुई प्रयुक्ति को छोडकर अन्यत्र जहा कहीं प्रयुक्न हुआ हो उसके स्थान पर शद the State' प्रतिस्थापित किये जायगे और [३] राजस्थान राजस्व विधियों में से किसी विधि के प्रारम्भ या प्रभावशील होने के निदेशा से ऐसी विधि के पास अनमेर तथा सुनेल क्षेत्रा में क प्रसंग में श्रथ इस अधिनियम के प्रारम्भ का निर्देश, लगाया जायेगा। ५ राजस्थान राजस्व विधियों तथा उनके अन्तर्गत निमित नियमों प्रति का विस्तार -नियत दिन को तथा से रानस्थान राजस्व विधिया धारा ३ नथा द्वारा मशोषित रूप मे अोर सक्षम प्राधिकारी द्वारा सतर्गत बनाये गये या जारी किये गये नियम, पिनियम श्राज्ञायें तथा विज्ञप्तिया अान् अनमेर तथा सुनेल क्षेत्रों महित मपूर्ण नये राजस्थान राज्य में विस्तारित तथा लागू होगी। प्रारम्भ

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१२) राजापार रामाय अधिनियम, १९५६ अधिनियमिनिया मधा पिधिया पे प्रायभाना द्वारा प्रयया द्वारा अधियामित नियमा चिनियमा पापा तथा विशनिया पे प्रायधागा द्वारा प्रमाशिमा अधिनार यया पारोपिन निमी काव्य ये श्रमरण म अजित स्मिोमिया (shtus) या मम्पत्ति पर प्रथया लिये गये रिसी दायित्य पर एमे निरमन श्रयया अभिरमग का, हम या ये हात हुए भी कि मी हेमिपन, गंपत्ति या दागिन्य रानम्यान राजस्य विपिया पे प्राय गाना प्रतिपूल या अमगत अयया उनप अतगत अतित नहीं किया जा माता या लिया नहीं रासामा या बोद प्रभाव नहीं पड़गा। प्रथम अनुसूची नाट -~-प्रथम अनुसूची साधन मून अधिनियम लागूपर ये मत अनुसूधा प्रथा म नही प्रकाशित की जा रही है। द्वितीय अनुसूची (देखिये धारा (6)) निरस्त की गइ अधिनियमितियों की सूची 141 . १ साम्ब रवेय गिरडक्शन एक्ट, १८७६ चाम्ने लैंड रवे यू कोड, १०४८ जहा तक व आक्षम नाम्चे रेवेन्यू ट्रिब्यूनल एक्ट, १९३६ पर लागू होते हैं। , पाम्बे टीनेन्सी एण्ड एग्रीकल्चरल लेंडस एक्ट, १९४८ ५ अनमेर तालुकादास रिलीफ रेगुलेशन, १८७ ६ अनमेर लैंड एण्ड रवेन्यू रेगूलेशन १८७७ ७ पनाय लैंड रेवेन्यू एक्ट, १८८७ ६ अनमेर एलीग्नेशन श्राफ लैंड रगृलेशन १६१४ जहा तर वे अमर १ अजमेर मेरवाडा रिडम्पशन आफ मार्गेजेज रेगृलेशन १९२८ | क्षेत्र पर लागू होने हैं। १० देहली गण्ड अजमेर लेंड डेवलप्मेट एक्ट, १६४ ११ अनमेर टिने सी एण्ड लेंड रैकाइस् एक्ट १९५० १२ मध्यभारत जागीर लैंड रसाइस मेनेनमेट एक्ट, १EYE नहा सक वे सुनेल पत्र १३ मध्यभारत लैंड रवेन्यू एण्ड दिने सी एक्ट १९५८ पर लागू होत ह।

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Rajasthan Bhu Rajasv Adhiniyam 1956

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Title
Rajasthan Bhu Rajasv Adhiniyam 1956
File name
Rajasthan Bhu Rajasv Adhiniyam 1956
Text
OCR done
Citation
1968
Published
2010/12
Publisher
Jaipur,bafna Book Dipo
Language
Sanskrit
Pages
112
Library
Bhartiya Vidya Mandir Shoudh Pratisthan,bikaner
Classification
History
DLI number
514923
Barcode
4990010022593.00
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C-DAK, Kolkata
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