Agarchand Bhairondan Sethiya Jain Parmarthik Sanstha, Bikaner

Company Vyaphar Praveshika

Baanthiya,kasturmal · 2011/01

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होलकर हिन्दी प्रधमालाका १६ वाँ पुष्प
कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
कस्तूरमल वांठिया।
प्रकाशक
"श्रीमध्य-भारत हिन्दी-साहित्य-समिति"
इन्दौर
प्रथम सस्करण
।
१९२४ ई०
मूल्य

प्रकाशक- "श्रीमध्य-भारत हिन्दी-साहित्य-समिति" इन्दौर। - LeeMed मुद्रक- रिखयदास घाहिती, "दुर्गा प्रस" मे०४, चोरबगान, कलकता।

समर्पण
dede
मारवाडियों में विख्यात
मेसर्स विडला ब्रदर्स लिमिटेड
के स्वामी
श्रीमान् पाबू रामेश्वरदासजी पिटला
सादर समर्पित
लेपक
mum-BUFFE13

नो पाहार (शासभिका वि ज्ञ जनताके हाथोंमें आज अपने परिश्रमका तृतीय उपहार समर्पित करते हुए, मैं इस पुस्तिकाके सम्बन्धमें दो शन्द कहनेकी और क्षमा चाहता हूँ। सन् १९१६ में मुझे इन्दौरके कामर्स और इण्डस्ट्री विभागों चेम्बर आफ कामर्सके मन्त्रित्वकी उम्मेदवारी करनी पड़ी थी। मेरी नियुक्तिकी हुजूर गिनती भी पेश हो चुकी थी। परन्तु इन्दौरके पण्डित और हिन्दुस्थानी दलोंकी प्रतिद्वन्दताके कारण मेरी हुजूर विनती फाइलों हीमें रह गई । उसी समय वहाँसे एक व्यापारी मासिक पत्रकी भी योजना की गई थी। और उसके हलकारे स्वरूप कम्पनी आइनके आधारपर लिखा हुआ मेरा "कम्पनियोंका कारोबार" शीर्पक एक ट्रेपट छपा था। हिन्दीमें उस समय 'कम्पनियों के कारोवार, पर कोई भी पुस्तक नहीं थी। हालांकि अगरेजी नहीं जाननेवाले हजारों ही नहीं वरन् लाखों मनुष्य कम्पनियोंके शेअरोंका व्यापार किया करते थे। उक्त ट्रेक्ट यद्यपि इस कमीको पूरा करनेवाला नहीं कहा जा सकता था, तथापि फिर भी उसका 'स्वार्थ' आदि सामयिक पत्रोंने अच्छा स्वागत किया था। उसी समय मैंने इस 'विषयकी सरल सुयोग्य भाषामें जहाँ तक हो सके + सम्पूर्ण पुस्तक भेट करनेकी भी इच्छा जाहिर की थी। इस विषयकी सामग्री इकट्ठी होती गई, परन्तु कई कारणोंसे सक- लित नहीं की गई। कई सलनोंकी 'कम्पनियोंके कारोवार थे, , लिये मांगें भी आई, परन्तु मेरे पास उसकी एक भी प्रति नहीं होनेसे इस विषय में सिवा चुप साधनेके और कुछ उपाय न था। इसपर घम्बईके जीवनने मेरे साहित्यके कामको एक प्रकारसे वन्द सा कर दिया। मैं इन्दौरसे बम्बई चला आया था। स्वास्थ्यकी गड़बड और अन्य पारिवारिक कारणोंसे जब मुझे यम्बई छोड़कर अपने देशी राजपूताना स्वदेशी स्टोर कलिक के मैनेजरका भार उठाना पड़ा, तो उस समय भी इस कार्यके फलीभूत होनेको आशा न रही। क्योंकि इस कम्पनीका सारा हिसाब हिन्दीमें रवनेका मैंने निश्चय किया था। और हिन्दी एवम् अङ्रेजीमें हिसाव कितावसे भिक्ष सहायक मिलना एक प्रकारसे असम्भव था। दैववशात् और कुछ कार्यके चिशेप भारके कारण मुझे ।। महीने तक फिर विस्तरेकी शरण लेना पडा, और उसी अर्सेमें तब मैंने अपने इस सकल्पको पूरा करनेका निश्चय किया। परमात्माकी कृपासे वह पूरा हो गया। यद्यपि इस विषयकी अगरेजीकी "कपनी मन्त्रित्व" फीसी हिन्दीमें पुस्तक लिखने और उसके परिशिष्ट रूप भारतीय. कम्पनी आईनका हिन्दी अनुवाद देनेकी मेरी.उत्कट। अभिलापा थी, परन्तु जब तक यह पूर्ण न हो तब तक नोचन सका वही भेट कर देना ठीक समझकर यह पुस्तक भेट की है। आशा है इसे विश जनता अवश्य अपनावेगी।

भारतवर्ष हम भारतीयोंका देश है। परन्तु यहाँ पर भी एम विदेशी हैं। हमें अपना कारोवार अधिकतर विदेशी भापा हीमें रखना पड़ता है। यही हाल कम्पनी कारोवारफे सम्बन्धमें है। जो कागजात कम्पनी रजिस्ट्रारको, प्रत्येक फम्प- नीको भेजना आवश्यक होता है, उन सबका अंगरेजी हीमें होना अनिवार्य है। देशी भाषामोंमें ये स्वीकृत हो नहीं किये जाते। इतना ही नहीं परन्तु यदि उनका अगरेजी उल्था फरफे रजिस्ट्रारके यहां पेश किया जाय तो वह उल्या ही मूल कागज समझा जाता है। देशी रियासतोंमें भी अब सर तरफ कम्पनी- आइन स्वीकृत किया जा रहा रहा है। उसमें अलबत्ता अंग. रेजीके साथ देशी भाषायें भी स्वीकृत कर ली गई है। परन्तु इससे विशेप कुछ नहीं किया जाता। आडोटरके नियम ज्योंके त्यों उद्धृत कर दिये गये हैं, परन्तु आज तक किसी रियासतने आडीटरोंके तैयार करनेके सम्वन्धमें चेटा नहीं की। सरकारने भी इस सम्बन्धमें अभीतक जैसी चाहिये वैसी चेष्टा नहीं की है। घबई कलकत्ता आदि प्रधान शहरोंको छोडकर जहाँ कि लण्डन पास हिसाव परीक्षा मिल सकते हैं, अन्यत्र सिवा कुछ लोगोंको ( Government certified Auditer) नियत करनेके और कुछ नहीं किया है। हां, पिछले पांच घर्षों से "वंबई में अकाउण्टसी डिपलोमावोर्ड" स्थापित हुआ है। जिसमें पास शुदा विद्यार्थियोंको तोन वर्ष तक अपरेंटिसके तौरपर किसी लण्डन पास शुदा अकाउण्टफे यहा काम करनेपर दिसाय परीक्षक' को प्रमाण पत्र मिल जाता है। परन्तु ये । (घ) सर्व हिसाव-परीक्षक । अगरेजी हिसाय हीकी बारीकियों जानते हैं। देशी पदतिसे हिसाव कैसे रक्पा जाता है, वह इन्हें ठीक ठीक नहीं मालूम होता। और न इन लोगोंको देशी भापामों हीका विशेष परिचय होता है। यह कह देना कि देशी हिसाय बिलकुल गँवारू है। ठीक उतना ही सत्य है, कि जितना भारतीयोंको असभ्य कहना सत्य है । जिस समय यूरोप टेलीपर, ईटोंपर हिसाय रक्षा करता था, उस समय हमारे इस देशमें विदेशी विनिमयके, साझेके, फन्साईन्मेंट मादिके हिसाव युक्तियुक्त रक्खे जाते थे। देशी और विदेशी हिसाव-पद्धतिकी तुलना करना इस भूमिकाका उद्देश्य नहीं है। अलबत्ता यह बात सत्य है कि, हम भारतीय, जमानेके साथ चलनेमें पछाड खा चुके हैं, और फिर भी खा रहे हैं। जमा नेके साथ हम तय ही चल सकते हैं कि, जब हम पूर्णत. सचेष्ट हों। देशी-पद्धतिसे किसी भी प्रकारके हिसाब रखने में अड़चन नहीं आ सकती। केवल हमारी चेष्टा की जरूरत है। यदि हम आइनको इस प्रकार परिवर्तित करा दें कि, जिसमें देशी भाषाओंको स्वीकार कर लिया जाय, और विदेशियोंके हिसावोंके अलावा सब हिसाव देशी भाषा हीमें रसना अपना फर्तव्य समझे, तो हमारी इस विषयमें भी उन्नति दूर नहीं है। लेखक- पंक्ति शुद्धि १ अशुद्धि सिस्सों १७ हिस्सों लिये २२ लिये ये नर्स १४ नरी स्पष्ट २१ मैंने १४ मैं कारण काफी आवश्यकता अशातीत ७६ १५ आवश्यकनासे आशातीत नं०४के १ नं०६ के पएडसिव ८१ पहेसिव होल्डरोंके सभी १३ होल्डरोंकी सूची उसको डीडका ६३ यगलमें डीडकी रसीदका जाना जाता ट्राझीशन २ यास्मीशन ( Bill) (Will) ८० २० उसके नोट-चकाया हिस्सोंके टिकटका नमूना, ६४ की जगह भूलसे पृष्ठ १२० में लग गया है अतः पाठक इसे सुधार कर पढे।

घूमकर करेगा ४८ প্রযুক্তি पक्ति शुद्धि Rs 5/- ४ Rs 3/- Yomca 34 Vames १०६ फम्पनीमीपूजी ११.० १०६ में दिसेदारके उस दर्ज को १६ दिम्सेदार उसफे दर्ज घूझकर नहीं करेगा ४७ বা ३ हिस्सेदारोफा १११४ नियमों २० नियमा पतीर ४६ १० भोर जो शहादतके ४६ १० शहादत तोर आदि आदिका पते ज्योरे जीमें १५ पंजीमें से कमी उनपर उनपर सर हिस्सकि स्वामीकी ५३ सबकी सादा सभा Imbilcts २१ hability १ interest ૨ Intel kc डिफरेंस प्रफरेंस २ ८ पते १ ६ ऐसी समा serves series . ६ अन २२ सय १७ हिस्सों २० लिये ये १४ नरी अशुद्धि पृष्ठ पंक्ति शुद्धि सिस्सों लिये ५८ नर्स स्पष्ट २१ ट्रस्ट १४ मैं कारण १ काफी आवश्यकता अशातीत ७६ आवश्यकतासे आशातीत नं०४के ने०६ के एएडसिव ८१ पहेसिव होल्डरोंके सभी १३ होल्डरोंको सूची उसको २० उसके डीडका ६३ बगलमें डीडकी रसीदका ८० ७ जाता दाझीशन (Bill) २ ट्रांस्मीशन (Will) ७ नोट-चकाया हिस्सोंके टिकटका नमूना, ६४ को जगह भूलसे पृष्ठ १०० में लग गया है अतः पाठक इसे सुधार फर पढे।

ܘ ܐ

॥ श्रीशंभजे ॥
कम्पनीव्यापार प्रवेशिका
पहला खण्ड
कम्पनीको परिभाषा।
-
वि स्तृत साझेदारीका नाम ही कम्पनी है । अर्थात् जय
सामियोंको सल्या १० अथवा २० से अधिक हो
जाती है। तव वह सामा रजिस्ट्री कराना पड़ता
है, और रजिस्ट्री किये हुए साझे ही को हम सय
लोग कम्पनी कहते हैं। कम्पनीसे साधारणत
यह भी समझा जाता है कि, इसकी जोखम परिमित
है। अस्तु पहले इसके कि कम्पनी क्या है और कैसे बनाई
जा सकती है, हमारे लिये यहाँ यह जानना उपयोगी होगा कि,
ऐसी वृहत् साझेदारी वनानेके कारण क्या हैं? और कम्पनी.
आइनके अनुसार बनी हुई ये कम्पनियाँ उनसे फिन बातोंमें
अच्छी और किन बातोंमें धुरी हैं ?
कम्पनियोंका आरम्भ-काल आदि।
इस ससारमें कोई ऐसा पदार्थ नहीं है, जिसमें गुण और

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका ૨ दोप दोनों न हों। जिस पदार्थ में, जिस सगठनमें, ये दोनों बातें न पाई जाय, उसे हम लोग नहीं अपनाते। इन्हीं गुण दोपोंका तारतम्य एकके बाद दूसरी चीजका आविष्कार कराता है। जमाना उन्नतिकी ओर प्रगति कर रहा है। परन्तु इससे यह न समझना चाहिए कि, प्रत्येक सुधार अन्तिम-सुधार ही है। समयके साथ साथ उस सुधारका भी सुधार आवश्यक हो जाता है। वस्तुत यह साझ पो पइति भी व्यापारकी किसी जमानेकी असुविधाओंको दूर करनेके लिये आविष्कृत हुई थी। समयने' इस सुधरी हुई पद्धतिमें भी, अब सुधार आवश्यक कर दिया है। ससारके आदिमें किसी भी प्रकारका व्यापार न था। यह इतिहासज्ञोंका अनुमान है। परन्तु सभ्यताके साथ साथ जैसे जैसे मनुष्यकी आवश्यकताएँ बढती आई है, वैसे ही वैसे व्यापारका भी विकास होता आया है। पहले तो इसका रूप केवल अदला बदली (Barter) था। परन्तु जब पैसे (मुद्रा) फा आविष्कार हुआ, तबसे इस अदला बदलीके व्यापारने परीद- विक्रीका रूप धारण किया है। इतने पर भी यह तबतक गाँवके गाँव ही का था न तो कोई तब अपने गाँवसे परगांवमें चीज बेचने जाता था, और न परीदने। परन्तु दिन प्रति दिनकी बढ़ती हुई आवश्यकताओंने व्यापारको अन्तर ग्रामीण पीछे अन्तर-नागरिक ( Inter municipal )अन्तर-देशीय ( Interstate ) और अब अन्तमें अन्तरराष्ट्रीय एवम् विश्वव्यापी बना दिया है। इसी परिवर्तनने पहले साझा और अब कम्पनीकी 1 my कम्पनी व्यापार प्रवेशिका पद्धतिका आविष्कार कराया है। ज्यों ज्यों व्यापार बढता है, त्यों त्यों उसमें पहलेकी अपेक्षा विशेष पूँजी और विशेष श्रम आदिकी जरूरत होती है। साझा भी इन्हीं सुविधाओंको जुटाने. के लिए निकला होगा, ऐसा हम सहजहीमें कह सकते हैं। साझेका प्रथम दोप। साझेकी पद्धतिमें सबसे पहली खामी जो अब मालूम पडती है, वह पूँजी सम्बन्धी है । आजका व्यापार अन्तर राष्ट्रीय, अन्तर- जातीय एवम् विश्वव्यापी है। आजके व्यापारमें प्रतियोगिता और प्रतिद्वन्दताका साम्राज्य चहुँ ओर फैला हुआ है। इस हालतमें सफलता पानेके लिए, व्यापार में लाखोंकी ही नहीं,वरन् फरोडोंकी पूँजी लगानी पडती है। इसका सम्बन्ध दो तरहसे हो सकता है। प्रथम साझा और दूसरा कर्ज। कर्ज अथवा उधार लेनेके लिये, जमी हुई पैठ और अच्छी सास होना चाहिये । साप अच्छी आथिक स्थितिसे जमती है। परन्तु अच्छी सास और पैठ होनेपर भी यह नहीं कहा जा सकता कि, प्रत्येक व्यापारी अपनी स्थितिसे बाहर, कर्ज आदि ले सकता हैं। अलयत, अच्छी पैठ वाला शतपति, वुरी पैठ चाले सहस्र- पतिको अपेक्षा दश गुना अधिक व्यापार कर सकता है। परन्तु इसकी भी एक सीमा है। इसलिये जमानेके उपयुक्त व्यापार करने योग्य पूँजी फर्ज द्वारा नहीं जुटाई जा सकती । और न ऐसा साझे द्वारा ही बन सकता है। थोडेसे लक्षाधिपति अपने सन प्रकारके व्यापारका सङ्कोच कर, किसी एक व्यापारमें कम्पनी व्यापार प्रवेशिका जिसका उन्हें पूर्वानुभव नहीं है, अपनी सारी पूजी नहीं लगा सकते। ऐसा करने में उन्हें भारी जोपम उठाना पड़ती है। इसके अलावा इस प्रवन्धसे उन्हें अपनी पैठ विगडनेका भी धोका रहता है। इसीलिये कम्पनियाँ पोली जाती हैं। साझेकी दूसरी असुविधा। साझेकी दूसरी असुविधा प्रवन्ध सम्बन्धी है। यह असुविधा साझा विशेषके अनुसार मिन्न भिन्न हुआ करती है। उदाहरणके लिए मान लिजिये कि, एक परिवारमें चार भाई है। वे अविभक- कौटुम्निक पद्धति पर रहते हैं। उन्होंने अपने कुटुम्बके भरण पोपणके लिए अपनी अविभक कौटुम्धिक-सम्पतिसे एक व्यापार अथवा फर्म (पेढी) पोल रखी है। उसका प्रबन्ध भी उन्होंने अपने सबसे बडे भाईको ही जो, घरका मालिक है दे रखा है। ऐसी फर्मको हमारा साझा सम्बन्धी आईन, अविभक्त-कौटुम्विक- फ़र्म (Joint Hindos Family fhim) कहता है। ऐसी फर्ममें घर मालिकका ही अधिक अधिकार होता है। उसकी इच्छाके प्रतिकुल एक पत्ता भी नहीं हिल सकता। यदि दुर्भाग्य. वश इन चारोंमेंसे कोई भी भाई मरजाय, तो साझा-नीतिके प्रतिकुल भी साझका काम ज्यो का त्यों चलता रहेगा। इसी प्रकार इस फर्मसे अपने आप सम्बन्ध तोडने वाले भाईका साझीदारीके नियमानुकूल पिछले नफे नुकसान (हानि लाभ) का हिसार पूछनेका भी कोई अधिकार न रहेगा। घर-मालिक इस फर्मके कार्य सञ्चालन निमित्त आवश्यकतानुसार कौटु- ।

५
कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
त्रिक जमीन जायदाद, जर वा जवाहरात आदि सब कुछ अपनी
इच्छानुकूल रहन व्यय कर देगा। अन्य भाई इस यातमें कुछ
भी न घोल सकेंगे। वस्तुत सामान्य साझीदारीके कोई भी
नियम ऐसे साझेको लागू न होंगे।
साझेकी तीसरी असुविधा।
ऐसे साझा विशेष को छोड़ कर भी, यह कहा जा सकता है
कि, साझेकी पद्धतिमें कई सुधारणीय दोष हैं। इनमें सबसे
घडा दोप जोखमका है। जिस प्रकार व्यापार बढ़ता जाता
है, उसी प्रकार उसका सञ्चालन भी एकसे अनेक हाथों द्वारा
होने लगता है। इस दशामें जोनमका भय हर घडी लगा रहता
है। उन सञ्चालकोंमेंसे कोई भी, यदि उस व्यापारको नुक
सानमें उतार दे तो, सयको उसके किए हुए पापका प्रायश्चित्त
भुगनता पडता है। आजकलके जमानेमें विश्वासघात होता
भी बहुत कसरतसे है। साझ का निष्कर्ष है, परस्परका विश्वास।
वस्तुत ऐसे विश्वासघातके कडुये फलोंसे निर्दोष सामियोंको
बचाये रखनेके लिये ही कम्पनीकी पद्धतिका आविष्कार हुमा
है। सामान्यत. कम्पनी और साझ में इतना ही अन्तर है कि,
साझ की बनावट तथा आयु सामियोंके पारस्परिक विश्वास,
और सम्वन्ध पर निर्भर रहती है। परन्तु फम्पनीकी बनावट
एवम् मायु इन दोनोंमेंसे किसी भी घातपर निर्भर नहीं रहती।
दुसदे, साझ में प्रत्येक साझीदारको व्यापार प्रबन्धका अधिकार
रहता है। वह अपने अधिकारको पीछे घेच भी सकता है।

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका ६ यह बात यद्यपि सत्य है, परन्तु इस प्रकारका अधिकार कम्पनीके हिस्सेदारोंमेंसे किसीको भी आदिसे प्राप्त नहीं है। उसका प्रवन्ध सदा चैतनिक-अधिकारियोंके हाथमें ही रहता है। और उनसे पुरे भलेका जवाब भी पूछा जा सकता है। घस्तुत. कम्पनियां कई प्रकारकी होती हैं। उनमेंसे मुख्य दो भेद हैं। प्राइवेट और पब्लिक । इस भागमें केवल प्राइवेट कम्पनीकी विशेषताओंका ही विवेचन किया जायगा। कम्पनी फेसे बनाई जा सकती है, उसको रजिस्ट्री करानेके पहले उसके उत्पादकोंको क्या क्या करना होता है ? इत्यादि बातें अन्यत्र यताई जावेंगी। अस्तु, कम्पनी-आईन धारा २ में प्राईवेट कम्पतीकी परिभाषा (व्याख्या) इस प्रकार की गई है प्राईवेट कम्पनी वह है (१)जिसके नियम उपनियमों(Articles of association) के अनुसार- (क) कोई हिस्सेदार अपने हिस्से किसी गैरको न दे या - घेवे। - (ख) नौकरोंको छोडकर जिसके हिस्सेदारोंकी सख्या ५० से अधिक न हो। (ग) जो सर्वसाधारणको अपने हिस्से अथवा डिवेन्चर्स खरीदनेके लिये न उकसावे । (२) और जो ऊपर दिये हुए नियमोंका सदा पालन करती रहे।

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका प्राइवेट कम्पनियोंका अधिकार ।। इन प्राईवेट कम्पनियोंको आईन द्वारा निन्न-लिपित अधि- कार प्राप्त है (१) इसके खोलनेफे लिये फेवल दो ही आदमी आव. श्यकक हैं। (धारा५) (२) विवरणपत्रके एवजीका पत्र भी इन्हें फम्पनियों के रजिष्टारफे पास नहीं भेजना पडता। (धारा ६८) (३) रजिस्ट्ररी होने के साथ हो वह व्यापार भी शुरू कर सकती है। (धारा १०३) (४) इसके डाईरेक्टरोंकी सख्या कमसेकम एक हो सकती है। उन्हें पूर्व स्वीकृति देने अथवा प्रोसपेक्टस (विव- रणपन) सही फरने अथवा कुछ शेयर (हिस्से) खरीद करनेकी भी कुछ आवश्यकता नहीं है। (५) शेपरों (हिस्सों) की घटनी अथवा व्यापार शुरू करनेके पहिले कुछ ( Minimum subscription )जमा होना भी इनके लिए आवश्यक नहीं है (धारा १०१ (८) (६) स्टेटूटरी रिपोर्ट ( Statutory 1eport) निकलना व रजिस्ट्रारके उसका दाखिल करना भी आवश्यक नहीं है। (धारा ७७) (७) वार्पिक विवरणके साथ ( Annual summary) नफे नुकसानका व देनलेनका आँकडा (Profit &loss acco unt and balance shoot) को रजिस्ट्रारको इन्हें नहीं भेजना 4 २ कम्पनो व्यापार प्रवेशिका 1. . पडता । (धारा १३१) . (८)प्रीफरेन्स हिस्सेके मालिकों एवम् डिवेञ्चर होल्डरोंको भी इसका नफे नुकसानका हिसाय, आँकडा एवम् आडोटरको रिपोर्ट मादि पाने अथवा देखनेका अधिकार नहीं है। (धारा १४६ ) प्राइवेट कम्पनीके सुभीते। ऐसी कम्पनी खोलनेवालोंको सामान्य साझेकी अपेक्षा नीचे लिखे सुभीते रहते है - (१)इसके सामियोंकी जोखम परिमित हो सकती है। (२) इमेके दायरेक्टर्स ( सचालक या कार्यकर्ता) परि- मित अधिकार वाले होते हैं। साझियोंकी भांति उन्हें इच्छा- नुसार काम करनेका अधिकार प्राप्त नहीं होता। इनकी नियुक्ति एवम् पृथकरण मामूली तौरसे हो सकती है। (३) ऐसी कम्पनीको पब्लिक कम्पनीकी तरह पूजी यढाने तथा उधार लेनेकी सब सहुलियत प्राप्त रहती हैं। (४) ऐसी कम्पनी अपने भागीदारोंको घरमें ही अपना हिसाव किताव दिखाती है। जनसाधारणके सामने अपना हिसाव किताव दिखानेके लिये, उन्हें कोई मजदूर नहीं कर सकता। (५)जब चाहे तप उपयुक्त प्रकारको कम्पनी पब्लिक- कम्पनीके रूपमें परिवर्तित की जा सकती है। (६) कर्मचारीगण भी इससे लाभ ले सकते है।

है कम्पनी व्यापार प्रवेशिका प्राइवेट कम्पनी पब्लिक कैसे बन सकती है ? प्राइवेट कम्पनीको पब्लिक कम्पनीका रूप देने के लिये निम्न लिखित बातें करनी पडती हैं। (अ) ऐसी कम्पनीको पहले इस हेतुका अपने हिस्सों दारोंकी साधारण सभामें ( General mectings of share. holders ) विशेष प्रस्ताव (Special Rursolution) स्वीत फराना पडता है। (आ) कम्पनी पब्लिकके रूप में रजिस्टर कराने के लिये रजि- स्ट्रारके पास प्रास्पेक्टस (निवरण पत्र) अथवा उसका एवजीका पत्र पेश करना पड़ता है। । (३) इसके अतिरिक्त कम्पनियोंके रजिस्ट्रारके पास स्टेट- टरी-डिक्लरेशन (Statutory Declaration ) और विशेष प्रस्ताव (Special Resolution ) की एक नक्क भेजना जरूरी है इन तीनों यातोंके सम्पादन हो चुकनेपर कोई भी प्राइवेट कम्पनी पब्लिक कम्पनी बनाई जा सकती है। - कम्पनी व्यापार प्रवेशिका 10 दूसरा खण्ड कम्पनियां कितनी तरहकी होती हैं ? छले खण्डमें फम्पनीके दो भेदोंका विवेचन हो चुका है। वे भेद हिस्सेदारों सम्बन्धी हैं। वस्तुत कम्पनीकी विशेषता ही हिस्सेदार और जोपम है। जैसे हिस्सेदारोंके हिसाबसे दो भेद किये गये हैं, से ही कम्पनियोंके जोखमके हिसाबसे तीन भेद किये जा सकते हैं। एक तो वे जिनके हिस्सेदारोंकी जोखम उनके हिस्सोंतफ ही होती है। इनको कम्पनीज लिमिटेडयाई- शेयसे (Companies Limited by shares ) कहते हैं। दूसरी वे जिनके हिस्सेदार जब कम्पनीका काम समेटा जावे, तव अपने हिस्सोंसे ज्यादा कम्पनीके नुकसान पेटे कुछ रकम देनेकी प्रतिज्ञा करते हैं। ऐसी कम्पनियोंको कम्पनी लिमिटेड चाई ग्यारन्टो (Companies Limited by Guarantee) कहते हैं। तीसरी वे जिनके हिस्सेदारोंकी जोखम साझेकी भांति अपरिमित होती है। इन्हें अनलिमिटेड-कम्पनीज ( Unlimited Compames) कहते हैं। ऐसी कम्पनियाँ माजकल बहुत ही कम है। कम्पनी कौन और कैसे खड़ी कर सकते हैं ? कम्पनियाँ तीन प्रकारसे खड़ी की जा सकती है। पहिली .

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका घे जो रायल चारटर ( Royal chan ter) से स्थापित हों। दूसरी घे जिनके लिए वाइसरायको फौंसिल (व्यवम्यापक ) में एक पृथक धारा पास की जाय। इन सय तरीकोंसे कम्पनी खडी फरनेको अंग्रेजीमें इनकारपोरेशन ( Incorporation ) फहते हैं, पहिली दो तरकोनोंसे कम्पनियाँ बहुत ही कम पडी होती है । और यदि यह कह भी दिया जाय कि, फम्पनी आईन के बन जाने यादसे शायद ही कोई फम्पनो इन तरीकोंसे पही की गई हो, तो भी कुछ हर्ज न होगा। कोई भी सात (प्राईवेट कम्पनी पडी करने के लिए केवल दो ही आदमी काफी है। यह पिछले भागमें कहा जा चुका है,) आदमी मिल कर फम्पनी खडी कर सकते हैं, और उसे भारतीय कम्पनी-आईनके अनु- सार रजिस्ट्री करा सकते हैं। कम्पनी की रजिस्ट्री " रजिस्ट्रार आफ जाईन्ट-स्टाक कम्पनीज' के दपतरमें होती है। बबई, कलकत्तादि प्रेसीडेन्सी नगरोंमें, यह एक स्वतन्त्र आफीसर होता है। परन्तु और और स्थानों पर इस कामका भार किसी दूसरे आफिसग्के सिपुर्द कर दिया जाता है। कोई भी कम्पनी रजिस्ट्री करानेके पहले कम्पनी पड़ी करने वालोंको आगे कहे हुए काजगात तैयार करने पड़ते हैं। और जन इनकी छपी हुई असली नकल रजिस्ट्रारके दफ्तर में दाखिल कर दी जाती है, तव रजिस्ट्रार कम्पनी रजिस्ट्री कराने का एक प्रमाण-पत्र देता है। इस प्रमाण पत्रको इनकारपोरेशनका प्रमाण-पत्र कहते हैं। कम्पनी पडी करने वाले व्यक्तियोको प्रोमोटर्स कहते हैं।

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
१४
शख्सोंका इंग्लैण्ड आदि शहरोंमें भी वडा दौरदौरा था।
परन्तु पीछेसे जय ये लोग, लोगोंको धोखेमें डालने लगे, और
जबसे इस व्यवसायमें आशातीत फायदा होने लगा है, तबसे
इन लोगोंकी सत्ता भी कम हो गई है। कम्पनी आइनने
ऐसे लोगोंके फरेवोंसे जनताको बचाये रपके प्रिप, प्रोस्प कृस्
अथवा विवरण पत्रिकामें कतिपय बातोंका लिखा जाना
अनिवार्य कर दिया है । इसके अलावा आजकल फाउडसे शेयर
भी उन्हीं लोगोंको दिये जाते हैं, जो कम्पनीके सबसे ज्यादा
हिस्सोंके मालिक है। येही लोग कम्पनी पही करते है, उसने
हिस्से भराते है, और उसका सारा काम काज देखते हैं।
इस सब सेवाके लिए उन्हें दफ्तर खर्चके अलावा कुछ कमीशन
मिला करता है। यह कमीशन कहीं कुछ पैदा किये मालपर,
कहीं कुछ बिके हुए मालपर और कही नको मुनाफे पर लगाया
जाता है।
मेमोरण्डम आफ अशोशियेशन
यह पत्र, कम्पनीको सनद या पर्वाना है। जिस प्रकार
पर्वाना अथवा सनद राज दरवारमें दी गई जागीर आदि वस्शी-
शका निर्णय करती है, उसी प्रकार यह सनद कम्पनीके
न्यापारफा और तत्सम्बन्धी सारी बातोंका निर्णय करती है।
जय यह सनद रजिस्ट्री हो जाती है, तभी कानूनी रूखे कम्पनी
कायम हुई समझी जाती है। जितना इस सनदमें लिखा
होता है, उससे बाहर वह कम्पनी कुछ भी व्यापार नहीं कर

१५
कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
सकती। अत इस सनदको बनवाने में बड़ी चौकसीसे काम
लिया जाता है। यह, सदा इस कामके अनुभवी धकीलों, चैरि-
स्टरों अथवा सालिसटरोंसे धनवाई जाती है। ये लोग कम्पनीके
व्यापारकी पूरी पूरी दूर देशीका विचार करके यह सनद यनाते
हैं। यह सनद हर घडी नहीं बदली जा सकती। यही नहीं
परन् इसकी प्रत्येक धाराको बदलनेमें भी बडी बडी दिक्त'
है। इसलिये सनदके धनवाने में जितना सर्च पडे, उसे व्यर्थ
सर्च न समझना चाहिये।
इसकी रजिस्ट्रीसे केवल इसके नीचे हस्ताक्षर करने वाले
व्यक्ति ही नहीं बंधते वरन् वे सब व्यक्ति भी, जो पीछे इसके
हिस्सेदार हों, सभी वद्ध हो जाते हैं। इस सनदमें निम्नलिखित
धाराएँ होती हैं।
(१) कम्पनीका नाम -इस धारामें कम्पनीका नाम लिखा
जाता है। नामके चुनाव में कम्पनी आइन धारा ११ विशेष
ध्यान देने योग्य है। यह विशेष प्रस्ताव द्वारा परिवर्तित
हो सकती है । इस प्रस्तावकी प्रति रजिस्ट्रारके दपतरमें दाखिल
करना आवश्यक है । परिमित जोखम वाली कम्पनीके नामके
पीछे “लिमिटेड" ( Limited ) शब्द लगा रहना चाहिये ।
इस शब्दका प्रयोग केवल अपरिमित जोखम पाली अथवा
परोपकारी व लाभके लिये नहीं चलाई गई कम्पनियोंके लिये
माफ है।
(२)कम्पनीके रजिस्टर्ड दफ्तरका स्थान--इस धारामें उस

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
१६
-
प्रान्त शहर अथवा उसके हिस्सेका व्योरेवार नाम लिखा
जाता है, जहाँ कि उस कामनी का रजिस्टर्ड दपतर रखना
निश्चय हुआ है।
(३) कम्पनी का उद्देश और कार्य -इस धारामें कम्पनी
के कार्य क्षेत्रका विस्तृत विवेचन रहता है। मामूली काय
क्षेत्र-लिस कर अन्तमें इस प्रकार लिख देनेसे कि, यह कम्पनी
उपरोक्त कार्यों को करती हुई, वे सारे काम भी कर सकेगी जो
इनके करनेमें सहायक हों अथवा इनके साथ साथ हो सकते
हों। (so da all such other things so are mondental
oi conducive to the attainment of the above
objyots) काम नहीं चलता। जैसा कि ऊपर कहा जा चुका है।
कम्पनीके सब कागजातों से यह सनद वाला कागज हो ऐसा
है, जो बडी ही मुश्किलसे घदला जा सकता है। परन्तु इस
सनदमें भी यह उद्देशकी धारा ऐसी है, जो सर शेष धाराओंसे
यहुत ही मुश्किलसे परिवर्तनको जा सकती है।
(४) जोखमको धारा--इस धारामें इसके भागीदारों
की जोखम परिमित अथवा अपरिमित होनेका व्योरा लिखा जाता
है।इस सम्वन्धमें यदि कम्पनोके हिस्सेदारोंको जोखम उनके
हिस्सोंदारों ही तकको है, तो यह लिखा जाता है कि हिस्सेदारों
को जोखम परिमित है।
(५) पूँजी-इस धारामें कम्पनीको पूजी कितनी होगी और,
घह फैसे फैसे हिस्सोंमें विभककी जायगो? वे सब बाते' लिखो
-

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
जाती है (धारा ६१७)
(६) कम्पनी खडी फरनेवालोंके नाम-अन्तमें जो लोग
कम्पनी पडी करना चाहते हैं, उनके नाम, पता मय हिस्सोंको
संल्याके जो वे लेना स्वीकार करते हैं, लिपे जाते हैं। कोई भी
सही करनेवाला एक हिस्सेसे कम नहीं ले सकता। अर्थात्
प्रत्येक सही फरनेवालेको कमसे कम एक हिस्सा तो लेना ही
पडता है। ज्याद वे चाहे लें और चाहे न ले। इसकी प्रत्येक
सहीकी साक्षी करना आवश्यक है (धारा)
परिमित जोखम वाली कम्पनीके डाइरेक्टरोंको अथवा
उनमेंसे कुछ को जोखमका यदि सनद पत्रमें उल्लेप कर दिया
जाय, तो अपरिमित की जा सकती है।
कई फम्पनियाँ इसी सनद पनमें आरम्भिक सर्च व
शेयरोंकी रिकी पर कमीशन दिये जानेका भी उल्लेख कर
देती हैं।
कम्पनीके उद्देश्य, निशेप (Special) प्रस्ताव द्वारा अदालतको
मजूरीसे बदले जा सकते हैं। यदि उद्देश परिवर्तनसे कार्या
लयका स्थान परिवर्तन आवश्यक हो, तो रजिस्ट्रारके यहाँ अदा
लतके हुफमको कम्पनीके उद्देश परिवर्तनके विशेष प्रस्तावको
प्रति दापिल करनेके पश्चात् किया जा सकता है।
मेमोरेण्डमकी भाषाके विषयमें, कम्पनी आइनमें कुछ नहीं
लिपा गया है। परन्तु-वृटिश भारतके अतिरिक्त स्थानोंमें
रजिस्टरी हुई कम्पनियोंके सम्बन्धमें धारा २७७ (११) में
३
17
.

है कम्पनी व्यापार प्रवेशिका लिपा है कि, ऐसी प्रत्येक कम्पनीको वृटिश-भारतमें व्यापार करनेकी भाशा प्राप्त करनेके लिए, अथवा व्यापार, कर सकनेके लिए, अपने सनद-पत्रका यदि वह पहलेसे अंग्रेजीमें नहीं तो अंग्रेजी अनुवाद भी साथमें दाखिल करना होता है । अस्तु वृटिश भारतमें रजिस्ट्री होनेवाली कम्पनियोंके लिये अप्रत्यक्ष रूपसे सनद पत्र आदिका अंग्रेजीमें ही तैयार करना आवश्यक । यह सनद पत्र टाइप किया हुआ, अथवा छपा हुआ रजि- स्ट्रारके दफ्तर में सनद पत्र नं. १ के साथ दाखिल करना होता है। इस सनद-पत्रके, आईनके परिशिष्ट ३ में अ और च, स और द, इस प्रकार चार नमूने दिये हैं। परन्तु उनमें उद्देशकी धारा पूर्ण विकसित रूपमें नहीं बनाई गई है। अतएव इस पुस्तकके परिशिष्टमें इनको स्पष्ट करनेके लिये एक सूतके मीलका सनद पत्र एवम् नियम उपनियमोंका हिन्दी उल्था दे दिया गया है (धारा २२ व २४)। परिमित जोपम वाली कम्पनीकी पूजी नियम उप- नियमोंकी धाराके अनुसार ही घटाई अथवा बढाई जा सकती है। (धारा ५०) यदि नियम उपनियम इस बातमें चुप हों, तो प्रथम उनको तदनुसार परिवर्तित किया जाता है। पूंजी परिवर्तनके लिये अदालतकी मजूरीमें विशेष प्रस्ताव प्रयोजनीय है। घटाई हुई पूजी वाली कम्पनीके नामके साथ एन्डरिडयूस्ड (Reduced) भर्थात् घटाई पूँजीका शब्द जोड़ना अनिवार्य है। धारा०४५.७

१६
कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
Form No 1
Number of
Certificate
The INDIAN COMPANIES Act, 1913
Filing Fee Rs 5/-
Declaration of Compliance
with the
Requitations of the Indian Compaies Act
Made pursuant to Section 24 (2) on behalf
of a Company proposed to be zegistered as
Limited
I.
of

- २० कम्पनो व्यापार प्रवेशिका do solemnly and sincerely declare that I am Here insert "An sdvocat Attorney or Pleader enti tled to appear before & Eli gli Court who is engaged in thre forma tion of thic Company for Limited, and that all thi requirements of A perron ni the Indian Companies Act, 1913, in 1cs- ined the pect of Matters piecedent to the registia- Articles as a tion of tho said Company and incidental Director, there to have been complied with, save Afanager or & Secretary only thc payment of Fecs and sums raya- of the Coinble on registration And I make this pany solemn declıration conscientiously believing the same to be true Presented for filing by पूंजी परिवर्तनके विशेष प्रस्तावकी सूचना रजिस्ट्रारको धारा ५१ के अनुसार देना परमावश्यक है। आर्टीकल्स आफ एसोशियेशन । सनदसे द्वितीय श्रेणीका उपयोगी कागज कम्पनीके लिये आर्टिकल्स आफ एसोशियेन्स है। सनद कम्पनीको बाहरी

।
-
-
-
--
7
। २१
कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
। क्षेत्रमें याँधता है। और ये मार्टिकल्स भीतरी कारगारमें। इनको
हम कम्पनीके नियम उपनियम कह सकते हैं। फम्पनी आइन
में इन नियम उपनियमोंके सम्बन्धमें लिखा है कि..-
१-चे छपे हुए होने चाहिये ।
२-ये अनुच्छेद ( पेरेग्राफ) में विभाजित होने चाहिए और
इन अनुच्छेदकी सरया अनुक्रमसे लगी रहनी चाहिये।
३-इन पर सनद पत्र पर सही करनेवाले प्रत्येक व्यक्तिकी
साक्षीके साथ सही रहना चाहिये (धारा १२)
कम्पनी आईन धारा १६ में लिखा है कि, इनमें कम्पनीकी
पुँजो यदि हिस्सोंमें विभक्त हो तो उसका और रहना चाहिए।
और यदि हिस्सोंमें विभाजित नहीं, तो उन लोगोंकी तादाद
देनी चाहिए कि, जिनसे कम्पनी रजिस्ट्री कराई जा रही है।
प्रत्येक कम्पनी अपने लिये हर बातमें नये आर्टिकल्स पनाये,
यह कोई जरूरी नहीं है। फम्पनी आइनके परिशिष्टमें ऐसे
नियमोंकी एक नियमावली दे दी गई है, जिसको यहाँ चहाँसे
कम्पनी अपने सुभीतेके अनुसार घटा यढा अथवा सुधार
सकती है। जिन जिन यातोंके लिये कम्पनीके बनाये हुए
नियमोंसे नियम न पाये जायें, उनके लिये सब कम्पनियोंको
इसी नियमावलीके नियम लागू होते हैं। ये नियम टेबल ए
के नामसे प्रसिद्ध हैं। भाजफल प्राय हर कम्पनी अपने ही
बनाये हुए नियम रखती है (धारा १८)
प्रत्येक पब्लिक कम्पनीके कमसेकम दो डाइरेक्टर होने

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
२२
चाहिये। और अगर इन नियम उपनियमोंमें कोई भी डाईरेक्टर
निर्दिष्ट नहीं किये गये हों, तो सनद पत्र पर सही करनेवाले
व्यक्कि ही साधारण सभा में, नये सञ्चालक चुने जाने तक
सचालक माने जावेंगे (धारा ८३ ए० वी०)
यदि नियम उपनियमोंमें संचालकोंफे नाम दिये हुए हों तो,
इनके साथ सञ्चालकोंकी सूची, फार्म न ३ के अनुसार
और
उनका प्रतिज्ञापत्र फार्म न० २ के अनुसार भरकर रजिस्ट्रारके
यहाँ दापिल किया जाना चाहिए । (धारा ८४)
पूँजीके बढाने व घटानेका भी इनमें कुछ नियम होना
चाहिये। (धारा २०)
प्राइवेट और अपरिमित जोखम पालो एवम् जिनकी जोखम
ग्यारटीसे परिमित हो ऐसी कम्पनियोंको सनद पत्रके साथ
ही नियम उपनियम रजिस्ट्रारके यहाँ दाखिल करने होते हैं।
परन्तु हिस्सोसे परिमित जोखम वाली कम्पनियोंके लिये यह
मावश्यक नहीं है। (धारा १७)
सनद-पत्र एवम् नियम उपनियमोंकी प्रति प्रत्येक हिस्से.
दारको, मांगने पर एवम् नियम उपनियममें निर्दिष्ट मूल्यपर जो
ज्यादासे ज्यादा १)रु प्रति प्रतिका हो सकता है, दी जाना
चाहिये। (धारा २५)
ये नियम उपनियम विशेष प्रस्ताव द्वारा परिवर्तन व परि-
वर्द्धित किये जा सकते हैं। परन्तु ऐसे विशेष । प्रस्ताव
छपे हुए होने चाहिये, और इन छपी हुई प्रतियोमसे एक

२३
कम्पनो व्यापार प्रवेशिका
Form No II
Number of
Certificate
"THE INDIAN COMPANIES ACT"
1913
Miling Feo Rs 5)
Consent to Act as D. ector
of
Limited
(To be signed and filed with th. Registrar of
Joint Stock Companies pursuant to Section
84, Subsection 1 (1), of the Indian Companies
Act, 1913 )
To the Registrai of Joint Stock Companies
We the undersigned, heroby testify consent
to act as Direotors of tho.
Limited
pursuant to Section 84, Sub section 1 (), of the
Indian Companies Act, 1913
Presented for filing by

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
२४
Signature
Address
Descriptio
-
+
4.
1
Dated this -day of
-19
Section 84 (3) of the Indian Companies Act
provides that,
"This Section shall not apply to a Parvato
Company nor to a prospectus' issued by or on
behalf of a Company after the expiration of one
year from the date at which the Company 18
entitled to commence business
If & Director singes by "his Agent authorised
in writing" the authority must be produced and
a copy filed
1

२५ कम्पनी व्यापार प्रवेशिका Form NO. III Number of Certificate... "THE INDIAN COMPANIES ACT" 1913 Filing Teo Rs 5/- List of the persons who have Consented to be Directors of Limited (To be delivered to the Registrar of Joint Stock Companies, pursuant to Section 84, Sub section (2) of the Indian Companies Act, 1913) To the Registrar of Joint Stock Companies I tho undersigned, hereby give you notico, pursuant to Section 84, Sub section 2 of tho Indian Companies Act, 1918, that -tho following persons hava consented to be Directors of

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
पश्चात् अथवा पहले कभी भी प्रकाशित किया जा सकता है।
कम्पनी आइनने प्रास्पेक्टसमें नीचे लिसी वातोंका उल्लेख
आवश्यक बताया है -
१-प्रत्येक प्रास्पेक्टस तारीख वाला होना चाहिये।
२-उसमें लिखी हुई डाइरेक्टरोंकी अथवा उनके मुपति-
यारकी नीचे सही होना चाहिये
३-कम्पनीकी सनद मेमोरण्डम आफ असोसियेशनकी
नकल, और उसपर सही करनेवालोंके नाम पता व प्रत्येकने
लेने किये हिस्सोंकी तादाद लिखी रहनी चाहिये। और यदि
कम्पनीने फाउण्डर्स डिफर्ड हिस्से निकालें हो तों, उनकी
सख्या व कम्पनीकी मिल्कियत व मुनाफेमें, उनके मालिक
हिस्सेदारोंके मतालकी हद्द व प्रकृतिका ब्यौरा लिखा रहना
चाहिये।
४-प्रत्येक डाइरेक्टरको कम्पनीके नियम उपनियमोंके
अनुसार अपने पदकी योग्यताके लिये कितने हिस्से कम्पनीमें
लेना होगा । उसकी तादाद व उनके मावजे अर्थात् पुरस्कारका
व्यौरा।
५-नियुक्त अथवा नियुक्त किये जानेवाले सचालकों,
डाइरेक्टरों घ मेनेजरोंके नाम पता च विवरण।
६-डाइरेक्टर लोग हिस्सोंकी चटनी करना शुरू करें
उसके पहले कितने हिस्सोंको मांग आना जरूरी है, और प्रत्येक
हिस्सेपर प्रार्थनाके साथ वटनीके पश्चात् कितने रुपये,

२६
कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
लिये जावेंगे उनकी सख्या भी लिपनी चाहिए। इस नियमसे
जनता डाइरेक्टर लोगोंके धोपेसे बच सकती है। इसको
अंगरेजीमें मिनिमम सबस्क्रिप्शनलाज ( Minimum
subscription clause) कहते हैं।
नकदके सिवा पूर्ण अथवा अपूर्ण भरे हुए हिस्से अथवा
डिवेञ्चर दिये गये हों, तो उनकी तादाद ।
८ कम्पनीको अपना व्यापार घेचनेवाले विक्रेताओंका
नाम पता विवरण और प्रत्येकको हिस्सोंमें, अथवा डेवेञ्चर
अथवा नकद दी जानेवाली रकमकी तादाद ।
१-व्यापारकी दी गई अथवा दी जानेवाली खरीदीकी
कीमत या उसका दिये जानेका व्यौरा। इसी धारामें यदि
मिल्कियतसे ज्यादा कुछ रुपया दिया गया हो, तो उसकी
तादाद पृथक तौरसे लिपानी चाहिए।
१०-यदि कम्पनीके जन्म दाताओंके, कम्पनीके घे हिस्से
जो उन्होंने जनताको देनाजाहिर किया है, किसी कम्पनी अथवा
कम्पनियोंको कमीशनसे विका देनाफा अभिवचन दे दिया
हो, तो उनका नाम और कमीशनका उल्लेख। इस प्रवन्धको
अंगरेजीमें अएडर राइटिंग कहते हैं।
११--प्रारम्भिक पर्च का तपमीना।
१२-~-किसी प्रोमोटरको पिछले दो वर्षों में मानजेके बतौर
दी गई अथवा अभी दी जानेवाली रकमका व्यौरा प उस माव
जेके एवजका विवरण।

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
१३-कम्पनी के लिये किये गये पणोकी तारीख, व 'दोनों
पक्षोंके व्यक्तियों के नामका व्यौरा व ये पण कब और कहाँ जन
साधारण, जो चाहें देख सकते हैं उसका उल्लेख होना चाहिए।
१४-कम्पनीके आडीटरोंका नाम व पता।
- १५ यदि डाइरेक्टरोंसे किसीका भी कम्पनीके लिये ख
की गई मिल्कियतसे अथवा उसके लिए किये गये पणोंसे प्रत्य
व परोक्षसे सवध हो तो उसका उल्लेस।
१६–यदि कम्पनी भिन्न २जातिके हिस्से निकाले, तो इन
मताधिकारका व्यौरा । (धारा ३)
इसी विवरण-पत्रमें कम्पनीका नाम, उसके चैंकर्स अथ
सराफ सालिसिटर अर्थात् चकोल, मैनेजर संकटरी, आदि
विवरण एवम् रजिस्टर्ड दपतरका पता भी लिखा रहना चाहिए
यह विवरण पत्र इस प्रकार लिखा रहना चाहिये कि, जन
साधारणका इस मोर ध्यान आकृष्ट हो। इसमें किसी भ
विषयकी गलतफहमी न होनी चाहिये। सक्षिप्त होनेके साथ
साथ सब आवश्यक विपयोंसे परिपूर्ण होना चाहिये। इसके
साथ एक छपा हुआ, हिस्सोंका प्रार्थना पत्र भी रहना चाहिये।
प्रत्येक विवरण-पत्र पर यह छपा रहना चाहिए कि, इसकी
एक प्रति रजिस्ट्रार जाइन्टइस्टाक कम्पनीजके दफ्तरमें दाखिल
की जा चुकी है । (धारा १२)
किसी मिथ्या अथवा गलत वातके लिखनेसे वे सब डाई.
रेक्टर एवम् प्रोमोटर्स जिनकी आनासे उक्त विवरण पत्र-प्रका. -

। कम्पनो व्यापार प्रवेशिका शित किया गया है उस व्यक्ति अथवा व्यक्तियोंके प्रति उत्तरदा. यी है कि, जो इसके विश्वासपर कम्पनीके हिस्से अथवा डिवे- ञ्चर खरीदकर किसी प्रकारकी हानि अथवा क्षति मिथ्या अथवा गलत यातसे उठायें। यदि यह बात किसी साक्षर विद्वानके अथवा सरकारी पत्रोंके आधारसे लिखी जाना सिद्ध हो जाय, तो इस भारसे वे मुक्त हो जाते हैं। (धारा १००) प्रत्येक कम्पनी अपने लिये विवरण पत्र तैयार करे, यह कोई जरूरी नहीं है। हमारे देशमें कई कम्पनियोंने विवरण-पत्र निकाला ही नहीं है। ऐसी फम्पनियोंको हिस्सोंकी प्रथम चटनी करनेके पश्चात् विवरणपत्रका एचजी-पत्र तैयार करके रजिस्ट्रार ज्वाइण्ट कम्पनीके दपतरमें दाखिल करना होता है। इसी एवजी पत्रका नमूना आइनके दूसरे परिशिष्टमें दिया गया हैं । (६८) विवरण पत्र अथवा उसके एवजीके पत्रमें लिपी गई शर्ते हिस्सेदारोंकी साधारण सभामें ही, सिर्फ परिवर्तन की जा सकती है । (६६) इसी पत्रके साथ रजिस्ट्रारके यहाँ कम्पनीका रजिस्टर्ड दफ्तर कहाँ स्थित रहेगा, उसकी इतला देना भी जरूरी है। (धारा ७२) व्यापार शुरू करना । प्रत्येक कम्पनीको अपने कर्यालय एवम् अन्यान्य व्यापार धानके थाहर अपने नामका साइन पोई, अंग्रेजीमें .

कम्पनो व्यापार प्रवेशिका
३
हुमा रखना पड़ता है। इसी प्रकार अपने नामकी मुहर (Seal
पत्र व्यवहारके कागज पत्र, नोटिस, यिल, चाउचर मा
स्टेशनरीकी चीजें भी अग्रेजीमें छपी हुई, रखना एक अति
"चार्य आशा है। (धारा ७३)
सिवा प्राइवेट कम्पनीके कोई भी हिस्सोंकी पूँजीवाल
पब्लिक-फम्पनी अपने रजिस्ट्री होने पर व्यापार शुरू नहीं क
सकती। इसके लिये उसे रजिस्ट्रारसे साटोंफिकट प्राप्त करन
पडता है। व्यापार शुरू करनेके सम्बन्धमें कम्पनी आई.
धारा १०३ में लिखा है कि, कोई भी कम्पनी उस समय तव
किसी प्रकारका व्यापार नहीं कर सकेगो अथवा फर्ज उधार
न ले सकेगी जब तक कि
(१) नियम सबस्क्रिपशके कुल हिस्से नमरा जायें ।
(२)सचालक लोग पदकी योग्यताके हिस्से प्राप्त न करले।
और उनपर प्रार्थना व घटनी पर ली गई रकम न अदा कर दे ।
सेकट्री अथवा डायरेक्टर रजिस्टारके यहाँ इन शौके
घराघर पालन होनेकी इत्तिला पत्रक न ०४ अथवा ५
के
अनु.
सारन दापिल कर दें।
(४) जो कम्पनी विवरण पत्र नहीं निकाले यह उसका
एवजी-पत्र रजिस्ट्रारके दफ्तरमें दाखिल न करें।
उपरोक धारामें उल्लिखित पत्रफ नं०४ अथवा ५ के अनुसार
डायरेक्टर अथवा सेमस्टरीके प्रतिज्ञा अथवा शपथ पत्र दाखिल
कर देने पर रजिस्टार कम्पनीको व्यापार शक करने urrem

३३ कम्पनी व्यापार प्रवेशिका Form No IV Number of Certificate TE INDIAN COMPANIES ACT 1913, Filing Fee Rs 5/- Declaration Made on behalf of Limited that the conditions of Section 103, Subsection 1, of the Indian Companies Act, 1918, have been complied with I, of 11 boing Here insert thro Secrotary's of a Limited • Diroutor do solemnly and sincerely declare That the amount of the Share Capital of the Company offered to the public for subscriptaon is Rs.

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
३४
That the ninount fixed by the Memo
randum or Articles of Association and
named in the Prospectus as tho min
mum subsoription upon which the Com
pany may proceed to allotment is
Rs
That Sharesheld subject to the pay
mont of tho wholc amount there in cash
havo beon allotted to the amount of
Rs
That overy Director of the Com
pany has paid to the Company on each
of the Sharcs taken or contracted to be
taken by him and for which he is liable
to pay in cash a proportion payable on
application and allotment on the shares
offered for public subscription
And I declare that the foregiving
statements are true to my knowledge
and belief
Presented for filing by
(Signature)
Dated this
-day of 19
+

३५ कम्पनी व्यापार प्रवेशिका Number of Form No.V. Certificate ... *THE INDIAN COMPANIES AOT" 1913 Filing Fee Rs 5/- Declaration made on behalf of Limited That the conditions of Section 103, sub section 1, of the Indian Companies Act, 1913, have beon complied with, I, the undersigpedof _being of do solemnly and sincerely declarem That the amount of the share Capital of the Company other than that 188ued or agreed to be issued as fully or paidup otherwise than in cash 1B Rs. That the amonnt fixed by the Memorandum and Articles of Association and named in the कम्पनी व्यापार प्रवेशिका ३६ 1 Statoment in liou of prospectus as the minimum subscription upon which the Company may procced to allotment is Rs. That Shares hold subject to the payment of "he whole amount there of in cash have been allo tted to the amount of Rs. That Every Directors of the Company has paid to the Company on each share taken or contracted to be taken by him and for which ho is liable to pay in cash, a proportion, equal to the proportion payable on application and allotmont on thc sharcs payable in cash I declare that the foregoing statements are true'to iny knowledge and belief Presented for filing by 1 (Signature) Dated this day of 19 Yote This declaration is to be filed beforo 1 commencing business only in case of Company filing Statement in lieu of Prospectus.

३७ कम्पनी व्यापार प्रवेशिका -- पत्र प्रदान कर देता है। जय तक विचरण पनमें उल्लिपित न्यू नतम सस्या (NManiinum) के हिस्से न भरा जाय, संचालक लोग हिस्सोंकी घटनी प्रारम्भ न कर सकेंगे। और यदि विवरण पत्रमें न्यूनतम संख्या निर्दिष्ट नहीं की गई हो, तो दिये गये कुछ हिस्सोंके भरा जानेफे पश्चात् पँटनी प्रारम्भ की जा सकेगी। प्रत्येक हिस्सेकी कीमत फा कमसे कम पांच शताश रुपया प्रार्थना के साथ एकत्रित किया जाना चाहिए । (धारा १०१) यदि विवरण पत्रके प्रकाशित करनेकी तारीखसे १२० दिवस में न्यूनतम सप्याके घरावर हिस्सोंको प्रार्थना न एकत्रित होंगी तो तत्पश्चात् १० दिवसमें जमा हुआ फुछ रुपया पीछे। लोटा दिया जाना चाहिये । इस अवधिके घीतने पर डायरेक्टर लोग मिलकर एवम् पृथक पृथक दर ७ प्रतिशत प्रति वर्ष के व्याजसे उक्त रकम अदा करनेके जोपमदार होंगे। प्रत्येक बॅटनीका ब्यौरा पत्रक न ६ के अनुसार बँटनीसे एक महीनेमें रजिस्टारके यहां दाखिल करना आवश्यक है। जो हिस्से पूर्ण अथवा अपूण नकदके अतिरिक दिये गये हों, उनका ऐसे दिये जानेके पणको प्रतिलिपि दाखिल करनी चाहिए। (धारा १०४) यदि कम्पनीने हिस्सोंकी पटनी पर किसी प्रकारका अडर राईटिग कमीशन दिया हो तो उसका ब्यौरा पत्रक न०८ के अनु सार रजिस्ट्रारके दफ्तर में दाखिल किया जाना कम्पनी व्यापार प्रवेशिका ३० Form NO VI. Numbor of Certificate. . THE INDIAN COMPANIES ACT, 1913 Filing Teo Rs 5/- Roturn of Allotments of Limited from the -day of 19 to the -day of 19 Made pursuant to Section 104, Sub section 1, of the Indian Companies Act, 1918 (To be filed with the Registrar Joint Stock Oompanies within one month after the allotment is made ) ta Number of the 1 number of the -Shares allotted payable in cash Rs. Shares allotted paya. ble in Rs Shares Rs ..: number Amount of the so allotted कम्पनी व्यापार प्रवेशिका uumber Amount of the Shares so allotted Rs Amount paid or due and payablo on each such -Shares Rs Amount paid or due and payable on each such- -Shares Rs number of Shares allotted for a deration other than cash Rs nominal Amount of shares 80 allotted Rs Amount to be treated as paid on each such Share Rs The consideration for which such Shares have boon allotted is as follows congl. Nemes, Addresses and Description of the Allottees Namo in full Address Description Number of Shares allotted Preference Ordinar Presented for filling by (Signature) Dated this -day ot 19 .

.
कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
और यह कमीशन जब तफ थोडा थोडा करके मुनाफे
मेंसे नहीं भरा जाय, तर तक आकडेमें दिखाया जाना चाहिए।
जो कम्पनी उपयुक्त प्रमाण पत्रके प्राप्त करलेने पूर्व व्यापार
शुरू कर दे अथवा कर्ज आदि ले ले तो, प्रति दिवसका रु०
५०० जुर्मानेके दडका विधान है।
प्रत्येक कम्पनीको जिसे इनकारपरेशनका प्रमाण-पत्र
मिल चुका है, उस तारीखसे एक वर्ष के भीतर व्यापार प्रारम्भ
कर देना चाहिये । यदि यह अवधि यों ही बीत जाय तो उसे
फिर नई तौरसे रजिस्ट्री कराना होती है। पहले का प्रमाण
पत्र निकम्मा है।
अन्डरराइटर्स कौन है ?
इस जगतमें उद्योगियोंके लिए कमाई के कई तरीके हैं,
और जो लोग मेहनतसे डरते हैं उनके ही मुंह पर सदा
मक्खियाँ भिनभिनाया करती है । अण्डरराइटर्स भी इसी प्रकार
के उद्योगी पुरुष होते हैं। जब कोई, नई कम्पनी निकलती है,
और उन्हें ऐसा अनुमान होता है कि, इसके हिस्से हाथों हाथ
विक जायेंगे तो वे उस कम्पनीके जन्मदाताओं से यह तय
कर लेते हैं कि, यदि वे उन्हें प्रति शेअर पर कुछ कमीशन देना
स्वीकार करें तो वे उनके कुल हिस्से जो इस समय जनताको
ये बेचना चाहते हैं, बिका देगे। कदाचित जनता ऐसे सारे
हिस्से न खरीदेगी, तो वाकी बचे हुए हिस्से वे स्वयम् खरीद
लेंगे। इस प्रयधसे कम्पनी चालोंका और अपडरराइटरोंका
.

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
दोनों ही का लाम है । कम्पनीको इस घातकी चिता मिटजाती
है कि, उसके हिस्से कौन खरीदेगा? माना कि उन्हें इस
प्रयधके लिये प्रति हिस्से पीछे कमीशन देना पडता है, परन्तु
यह बहुत ही थोडा होता है। इसके अलावा यह कमीशन बेचे
जानेवाले कुल हिम्लोंके चिक जाने पर ही दिया जाता है। यदि
फुल हिस्से न विके हों, तो वाकी बचे हुए हिस्मोंकी रकम
में यह कमीशन को रकम वाद दे दी जाती है । इन अण्डररा-
इटरोंफो इनके ऊपर पदे हुए हिस्सोंका रपया मी उसी प्रकार
भरना पड़ता है, जैसे और हिस्से परीदने वाली जनता भरती
है। इस प्रकारका कमोशन देनेका धारा १०६ कम्पनी को पूंजी
में स्पट विधान है।
कम्पनीकी सनदमें पूँजीका खुलासा रहता है। उसमें
लिखा रहता है कि, कम्पनीको पूँजी कितने लाख रुपयों को
किस लागतके किस प्रकार के हिस्सोंमें विभाजित होगी?
इस सनदमें लिपो हुई पूँजीको “आथोराइज्ड केपिटल"
अर्थात् अधिकारित-पूजो कहते हैं । इसके दूसरे नाम भी है
जैसे शेअर केपिटल और नामिनल केपिटल । अधिकारित पुँजी
के .अक्सर आरभ से ही नहीं च दिये जाते ।
फम्पनीके डायरेक्टर लोग इस अधिकारिल पूजी में से कुछ ही
हिस्से शुरू में लोगों में बेचने की सूचना देते हैं । पूँजीका यह
मश तर ईस्यूड अर्थात् जारो को हुई पूँजी कहलाती है ।
शेष बची हुई पूंजी 'अनईस्ड पूँजी' कहलाती है। इस जारी
फुल हिस्से
६
१

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका ४२ फी हुई पूंजी में से जितने हिस्से जनता खरीद लेती है उसे सबस्काइब्ड कैपिटल अर्थात् भराई हुई पूँजी कहते हैं। इस जारी किये हुए हिस्सों की रकम परीदते ही कम्पनीके दपतरमें भर दी जाय, ऐसा डायरेकर लोग नहीं करते। वे चाहते हैं कि, इन हिस्सोकी रकम कुछ तो हिस्सोंके लिए दरपास्त करते समय, कुछ उनकी पैंटनी हो जाने पर, और पाकी पीछे, जव और जिस तरह से ये चाहे कम्पनीके दफ्तर में अथवा जहां सूचना दें, भरदी जाय । अस्तु इस साहित्यमें उस पूँजीको जो हिस्सोंकी पँटनी होनेसे मिलती है, काल्ड- अप जमाशुदा कैपिटल अर्थात् पूँजी कहते हैं । शेप अनकाल्ड पूंजी कहलाती है । और जितनी पूजीसे डायरेफर लोग कम्पनीका काम चालू करते हैं, यह उस फम्पनीका वर्किग- कैपिटल अर्थात् पूँजी कहलाती है । यह कम्पनीकी स्थायी- मिल्कियत, व प्रार भिक खर्च की तादादको याद करके निकाली जाती है। आईन धारा ७५ में लिखा है कि, जहा कम्पनीकी अधि. कारित पूँजीका उल्लेप किया जाय, वहाँ वैसी ही स्पष्टतासे जारी की हुई एवम् भराई गई पूँजीका भी उल्लं प रहना चाहिए। इसके भ गका २० १०००) तक के जुर्मानेका भी इसी' धारा में विधान है। कंपनीकी स्थावर और जंगम मिल्कियत । कम्पनीकी मिल्कियत दो प्रकारकी होती है। एकको फ्लो । ।

४३ कम्पनी व्यापार प्रवेशिका टिग अथवा सरस्यूलेटिग और दूसरी फो फिक्स्ड मिल्कियत कहते हैं। उदाहरण के लिए रेने कम्पनीकी मिल्कियतका ही विचार कीजिए। रेलके चाले, सिलिपर, गाडी, जन तथा रास्ता आदि जिसके द्वारा रेल कम्पनी माल इधरसे उधर लेजानेका काम करती है, वे सर उसको फिक्सड अथवा स्थायी मिल्कियत है। कई लोग इस प्रकार की मिल्कियत को घेस्टिग मिल्कियत भी कहते हैं। और ऊपर की हुई व्यारयाके अनुसार इसका यही नाम ठीक ऊँचता भी है। इस मिल्कियतके अलावा जो रकम उनकी सिलकमें है, और जो लोगोंमें लेनी है, अथवा किसी प्रकारका व्याज उपजा रही है, अथवा जो स्टोर आदि काममें आनेका सामान परीदा पहा है यह सब फ्लोटि ग अथवा मरक्यूलेटिग पूंजी (मिरिकयत) है। किसीने इन दोनों प्रकारकी मिल्कियतकी व्याख्या इतने ही में कर दी है कि, जिसके टके बांट लिये जाय यह फ्लोटि ग, और जो उसी तरहसे फाममें ली जाय वह फिक्सड मिल्लियत कह- लाती है। डाइरेक्टर्स सामान्य साझा, साझियोंके पारस्परिक विश्वासपर टिका होता है। ऐसे साझे प्रबन्ध आदिके काममें सव सामियोंका समान हक होता है। परन्तु कम्पनीके हिस्सेदारों के लिये यह बात नहीं है उनमें पारस्परिक विश्वासका कोई नाता सम्बन्ध जोडनेके लिये नहीं होता। अस्तु, कम्पनीके प्रवन्धका . कम्पनी व्यापार प्रवेशिका १२ की हुई पूँजी में से जितने हिस्से जनता परीद लेती है उसे सबस्काइड कैपिटल अर्थात् भराई हुई पूंजी कहते हैं। इस जारी किये हुए हिस्सों की रकम परीदते ही कम्पनीके दपतरमें भर दी जाय, ऐसा डायरेकर लोग नहीं करते । वे चाहते हैं कि, इन हिस्सोंकी रकम कुछ तो हिस्सोंके लिए दरपास्त करते समय, कुछ उनकी चटनी हो जाने पर, और याकी पोछ, जव और जिस तरह से वे चाहे कम्पनीके दफ्तर में अथवा जहा सूचना दें, भरदी जाय । अस्तु इस माहित्यमें उस पूँजीको जो हिस्सोंकी बॅटनी होनेसे मिलती है, फाल्ड अप जमाशुदा कैपिटल अर्थात् पूँजी कहते हैं । शेप अनकाल्ड- पूंजी कहलाती है । और जितनी पूजीसे डायरेफर लोग कम्पनीका काम चालू करते हैं, वह उस कम्पनीका वर्किंग- फैपिटल अर्थात् पूंजी कहलाती है । यह कम्पनीकी स्थायी. मिल्कियत, व प्रार भिक खर्च की तादादको वाद करके निकाली जाती है। आईन धारा ७५ में लिखा है कि, जहा कम्पनीकी अधि कारित पूँजीका उल्लेप किया जाय, वहाँ वैसी ही स्पष्टतासे जारी की हुई एवम् भराई गई पूँजीका भी उल्लेख रहना चाहिए । इसके भगका रु० १००० तक के जुर्मानेका भी इसी धारा में विधान है। कंपनीको स्थावर और जंगम मिल्कियत । कम्पनीकी मिल्कियत दो प्रकारकी होती है। एकको फ्लो । ....

होगा यह प्रतिदिवसके रु०५०) तकके जुर्मानेके दण्डका दोषी कम्पनी व्यापार प्रवेशिका हिस्से लेनेका पण रजिस्ट्रारके दफ्तरमें दापिल नहीं किया जाय (धारा ८४) प्रत्येक डाइरेक्टरको अपने पद-योग्यताके हिस्से दो महीने, अथवा उस अवधिमें जो कम्पनीके नियम उपनियमोंमें निर्धारित कर दी गई है, प्राप्त कर लेने होंगे। यदि वह ऐसा नकरेगा तो, उसका स्थान रिक्त समझा जायगा। और जन तक कि वह उक्त हिस्से न प्राप्त कर लेगा, पुन नियुक्त नहीं किया जा सकेगा यदि इस अवधिके पश्चात् भी ऐसा व्यक्ति सचालकका कार्य जना पद योग्यताके हिस्से प्राप्त किये, सम्पादन करता रहेगा (धारा ८५) यह सर परेक्टरोंके पुरस्कार आदिका कम्पनीके नियम, उपनिय. किसीने लेख रहता है। कहीं प्रति बोर्ड मीटि ग, कहीं खरे में फर। पर, फुछ प्रतिशत और कहीं कुछ वर्षके लिये एक नियत तो उम् नियत कर दी जाती है। इन्हीं नियमों उपनियमोंमें पुरस्कार पानेके अधिकारोमें भी भेद किया जा सकता है। इस विषयमें प्रत्येक कम्पनी स्वतन्त्र है। प्रत्येक कम्पनीको दाइरेक्टरोंकी एक सूची रखना पडती है, और इसको एक नकल प्रति वर्ष वार्षिक विवरणके साथ ( Annual summaly) रजिस्ट्रारके यहाँ दाखिल करनी होती है । (धारा ८७) अर्थात् कम्पनीके पहले सवालंक --

1
कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
४६
को सबसे पहली साधरण स्टेट्रटरी मिटिंगमें समर्थन की
जाती है।
कम्पनीको बहियां।
कम्पनीका आँकडा-कम्पनी-आइनमें लिखा है कि, प्रत्येक
कम्पनी उचित तौरकी हिसावकी बहियाँ रक्खेगी, जिनमें कम्प
नीके व्यापार एवम् लेन देनका पूर्ण व्यौरेवार व सच्चा हिसाब
लिखा रहेगा। (धारा २३०)
प्रत्येक कम्पनी प्रति वर्ष एक बार, और अधिकसे अधिक
पंद्रह महीने में सव हिसाव पका किया करेगी, और उसका
आँकडा भी तैयार करेगी। यह आँकडा कम्पनीके आडोटर
द्वारा परीक्षित होगा, और इसके साथ आडिटरकी रिपोर्ट लगी
रहेगी, अथवा उसका हवाला इस आँकडेके अन्तमें दिया रहेगा।
'यह
रिपोर्ट
साधारण सभामें पढ़कर सुनाई जायगी, और
कम्पनीके सदस्योंकी जाँचके लिये सुली रहेगी (धारा १३१)
प्राइवेट कम्पनीके अतिरिक्त सव कम्पनी इस परीक्षित
आँकडेकी एक प्रति प्रत्येक हिस्सेदारके उस दर्जको कराये हुए
पतेपर, उस साधारण सभाके सात दिवस पहले जिसमें यह पेश
की जानेवाली होगी, भेजी जायगी। इसके भगमें कम्पनी एवम्
उसका वह प्रत्येक कारिदा जो जान बूझकर ऐसा करेगा
२०१०००) तकके जुर्मानेके दण्डका दोपी होगा। धारा (१३१)
यह आँकडा जहाँतक हो परिशिष्ट ३ के फार्म एफके अनु
सार तैयार किया जायगा और इसमें कम्पनीकी पूँजी व लेने
।
-
।

कम्पना व्यापार.प्रवेशिका र देनेका स्पष्ट तौरपर बयान रहेगा। (धारा १३२) इस आंकडे पर साधारण कम्पनियोंमें कमसेकम दो गयरेक्टरोंके, और यदि उस कम्पनीका केवल एक ही डाय- कटर होगा, तो फेवल उसके और कम्पनीके मेनेजरके हस्ताक्षर हंगे। सराफी कम्पनियोंमें कमसेकम तीन डाइरेक्टरोंके ताक्षर रहेंगे। इसके भगर्म कम्पनी एवम् उसके वे सय फसर जो जान बूझ कर ऐसा करेंगे रु० ५००) तकके मनिके दण्डके दोपी होंगे। (धारा १२३) इस आंकडेकी एक प्रति रजिस्टारके यहाँ वार्षिक विवरणके हाथ साधारण सभामें पेश हो जाने के बाद दाखिलकी जायगी। धारा १३४) हिस्सेदारोका रजिस्टर। प्रत्येक कम्पनी अपने हिस्सेदारोंका एक रजिस्टर रक्खेगी जसमें (१) प्रत्येक हिस्सेदारका नाम पता घ व्यवसायका यौरा लिया जाया करेगा । यदि कम्पनीकी पूंजी हिस्सोंकी मोगी, तो प्रत्येक हिस्सेदारके हिस्सोंकी अनुक्म सख्या, एवम् इस पर भरे हुए रुपयोंका भी व्योरा लिखा रहेगा। (२) प्रत्येक व्यक्तिले कम्पनीके हिस्सेदार होनेकी एनम् (३) प्रत्येक हिस्सेदारके हिस्सेदारी त्यागनेकी तारीप मी लिपी रहेगी। इस आशाके भगमें कम्पनी एवम् उसके त्येक कारिन्दे जो ऐसा जान बूझकर नहीं करेगा प्रति

कम्पनो व्यापार प्रवेशिका
Y
दिवसफे २०५०) तक जुर्मानेके दण्डका दोषी होगा।
(धारा ३१)
डारेक्टरोंका रजिस्टर-प्रत्येक कम्पनी जिसकी पूँजी
शेअरोंमें विभक हो, प्रतिवर्ष फमसे कम एक यार उन व्यकि
योंकी एक सूची तैयार करेगी जो उस चर्पकी साधारण
सभाके याद सदस्य पद त्याग कर चुके होंगे।
इस सूचीमें सव सदस्योंका (वर्तमान भूत पूर्व) नाम,
पता व व्यवसायादिक विवरण उनके हिस्सोंकी तादादके साथ
लिखा रहेगा। यदि गत भधिवेशनके पश्चात् हिस्सोंका
तादला भी हुआ हो, तो उसका भी व्यौरा लिखा जायगा।
(धारा ३२)।
आइनके तृतीय परिशिष्टके के ४ ई फार्म के अनुसार यह
विवरण दिया जायगा । इसके भ गमें कम्पनी ऐवम् कम्पनीका
प्रत्येक अफ्सर प्रति दिवसके रु० ५०)के जुर्मानेका दोषी होगा।
किसी भी प्रकारका रस्ट ( Trust ) कम्पनीकी पहियोंमें
दर्ज नहीं किया जायगा (धारा३)
प्रत्येक कम्पनी यह रजिस्टर साल भरमें ३० दिवस तक
विज्ञापन देनेके पश्चात्, बन्द कर सकेगी, (धारा ३७)
मारगेज रजिस्टर-प्रत्येक कम्पनी अपने सर मारगेज वचारजेज
आदिका व्योरा सम्बत १६१४के भारतीय कम्पनियों के निययोंमें
दिये हुए फाम न के अनुसार रजिस्ट्रारको देगी।
(धारा १०६)

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
एवम् इनका एक रजिस्टर अपने यहाँ भी रखेगी (धारा
१२३)
इसके भगमें कम्पनीका यह सचालक जो जान बूझकर
ऐसा फरायगा । अथवा करनेकी इजाजत देगा, ज्यादासे ज्यादा
२०५००) तक जुर्मानेके दण्डका दोषी होगा।
कार्यवाहीका रजिस्टर। प्रत्येक कम्पनी अपनी साधारण
और डाइरेकरोंकी सभाओंकी कार्यवाही एक रजिस्टरमें दर्ज
फरेगी। और ऐसो प्रत्येक कार्यवाही जिसपर उस ही समाके
अथवा उससे आगामी सभाके सभापतिके दस्तपत होंगे।
यतौर उसके निश्चित किये जानेकी शहादतके होगी । (धारा
६३)
इन सब कितागोंको माइन 'स्टेटू टरी कितारें' कहता है ।
इनके अलावा भी कम्पनीको कई और कितारें रसना पडतो
है-जैसे (१) डाइरेफरोंका उपस्थिति पनक, (२) शेअर
ट्रान्सफर रजिस्टर (३) अजण्डा रजिस्टर (४) इकरारनामों
की किताव (५) हिस्लोंका प्रार्थना एवम् बॅटनीका रजिस्टर
(६) किस्तका रजिस्टर (७) डियेञ्चरके स्वामियोंकी सूची
(८) हिस्मोका खाता (8) शेजर सार्टीफिकटकी कितायें
(१०)शेयरोंके तबादलेका रजिस्टर । जो भागीदार शेअर रजिस्टर
देखना चाहें, वे कम्पनीके दफ्तरमें जाकर देख सकते हैं।
परन्तु यदि वह उसकी प्रतिलिपि चाहता हो ने उसे प्रत्येक
१०० शन्दोंके लिए छ माना भरना ५

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
अथना चहियोंको मापाके लिए माइनका कोई प्रतिवन्ध नहीं,
है। कम्पनी चाहे जिस भापामें ये बहियाँ रख सकती है।
इसी तरहसे वह अपनी सनद आदि अन्य कागजात भी चाहे
जिस भाषामें बना सकती है। परन्तु जो कागजात रजिस्टारके
दफ्तर में पेश करना होता है, यदि वे भी अगरेजीसे अतिरिक्त
भापामें तैयार किये जाय, तो इनके साथ उनका अगरेजी अनु.
बाद भी पेश करना पड़ता है।
कम्पनीकी सभाएं
(स्टेटूटरी सभा)
कम्पनी आइनमें लिखा है कि प्रत्येक कम्पनी व्यापार
करनेके अधिकार प्राप्त करनेके ६ महीने पश्चात् हिस्सेदारों
की साधारण सभा आमन्त्रण करेगी। और ऐसी सभा 'स्टेटूटरी
सभा' कहावेगी।
इस सभाका निमन्त्रण, सभाके दिवसके कमसे कम १० दिन
पहले उसके प्रत्येक हिस्सेदारको दिया जायगा ।
इस सभा कम्पनीकी प्रथम रिपोर्ट जिसपर कमसे कम
हो डाइरेक्टरोंके और जहाँ एक ही डाइरेक्टर हो तो सिर्फ
उस हीके दस्तपत रहेंगे, पेशकी जायगी। यह रिपोर्ट स्टेट.
टरी रिपोर्ट कहलायगी।
इस स्टेटू टरी रिपोर्ट में दिये गये हिस्सोंका उनपर प्राप्त
रकम एवम् रिपोर्ट की तारीखके सात दिन पहले तिकके
T

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
कम्पनीके आय व्ययका और डाइरेक्टर, सेनेजर, आडीटर व
सेक्रेटरीका नाम व पता आदि पूर्ण व्यौरा दिया जायगा। यह
रिपोर्ट कम्पनीके आडिटरों द्वारा तस्दीक होगी, और इसकी एक
प्रति रजिस्टारके दफ्तरमें भी दाखिल की जायगी।
प्राइवेट कम्पनीके लिये उपर्युक्त सभाका करना वाध्य
न होगा। (धारा ७७ )
इस सभामें डाइरेकर लोग कम्पनीके सदस्योकी एक
सूची, मय उनके पते ब्यौरे व लिये गये हिस्सोंके व्यौरके साथ
तैयार करेगी और समाके समयमे प्रत्येक सदस्य निरीक्षणके
लिये तैयार रक्खेगी।
साधारण सभा।
प्रत्येक कम्पनी कमसेकम साल्में, और अधिकसे अधिक
पन्द्रह महीने में एकबार अवश्य साधारण सभा निमन्वित करेगी।
इसके भनमें कम्पनी एवम् उसका प्रत्येक आफिसर २० ५००)
तकके जुर्मानेके दण्डका दोषी होगा। और अदालत कम्पनीके
किसी भी सदस्यकी प्रार्थना आनेपर इस अवधिके पश्चात्,
साधारण सभा निमन्वित करेगी अथवा करनेकी आशा
जारी कर देगी। (धारा ७६)
इस चार्षिक साधारण सभामें कम्पनी आइन धारा १३१
के अनुसार तैयार किया हुआ लेन देनका आँकडा, आडिटरकी
रिपोर्ट | साल भरके कार्य पर, डाइरेक्टरोंकी व्यवस्था आदि
पेशकी जायगी।

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका ५३ इस वार्षिक साधारण सभाका निमन्त्रण प्रत्येक सदस्यको समाके दिवसके कमसेकम ७ दिवस पहले दिया जायगा। इसी सभामें आगामी वर्ष के लिये, कम्पनीके नियम उप नियमोंसे पदत्याग करनेवाले डाइरेक्टरोंके स्थानमें नवीन डाइरेक्टर, विगत आडिटरोंके स्थानमें नवीन आडीटर शेअर होडरों द्वारा चुने जाते हैं। मुनाफे आदिका दिया जाना भी इसी सभामें निश्चित एवम् निर्मित होता है। मुनाफेके सम्बन्धमें कम्पनी आइनमें लिखा है कि, मुनाफा पूँजीमेंसे नहीं दिया जायगा। यदि मुनाफा काफी होगा, तो सालके मध्यमे भी डाइरेक्टर लोग मुनाफा दे सकेंगे। ऐसा मुनाफा इनटेरोम-डिवीडेण्डके नामसे कहा जायगा । साधारण- सभामें प्रकट किया जानेवाला मुनाफा डायरेक्टरोंकी सूचनासे विशेष न होगा। परन्तु उन हिस्सोंपर कि, जो कोई ऐसा कारखानोंके अथवा मशीनरी बनाने योग्य पूँजी जुटानेके लिये दिये जाये गे कि, जिसका काफी अर्से तक लाभप्रद होना अशक्य होगा, पूँजीमें स्थानीय सरकारकी आज्ञासे व्याज दिया जा सकेगा। (धारा १०७) असाधारण व विशेष सभायें कार्य विशेषके लिये निमन्त्रित सभायें असाधारण अथवा विशेष सभाये कहलाती हैं। इसके निमन्त्र- पटरी ही है। - " आर T 11 - ५३ कम्पनी व्यापार प्रवेशिका है कि, कम्पनीके डाइरेफरोंको उसके दशमाश भराई हुई पूँजीके हिस्सेदारोंकी जिन्होंने कभी उनपर सब हिस्सोंके स्वामी की किस्तें अदा कर दी हैं। प्रार्थना आनेपर और उनके सभा निमन्त्रणका उद्देश लिखकर कम्पनीके दफ्तरमें जमाकरा देनेपर कम्पनीको साधारण सभा निमन्वित करना होगी। और ऐसी सादा सभा असाधारण-साधारण-सभा कहलायेगी। यदि इस प्रार्थनासे २१ दिवसमें डाइरेक्टर लोग सभा माम- वित न करे गे, तो प्रार्थी हिस्सेदारोंको अधिकार होगा कि, वे तीन माहके भीतर सभा आमन्त्रित करले। और इस समामें स्वीकृत प्रस्तावके समर्थनके लिये, यदि कम्पनीको साधारण समाकी आवश्यकता होगी, तो डाइरेक्टर लोग पहली सभाके दिवससे ७ दिनमें फिर सभा आमन्त्रित करेंगे। यदि वे ऐसा न करे तो हिस्सेदार स्वयम् ऐसी सभा घुला सकेगे। कम्पनी आइन धारा ७ में लिखा है कि, कम्पनीके नियम उपनियमोंके भङ्गमें और उनके अनुसार साधारण सभा तमाम हिस्सेदारोंको १४ दिवसकी लिखित सूचना देकर, कोई भी ५स्सेिदारों द्वारा बुलाई जा सकेगी। ऐसी सभामें प्रत्येक हिस्सेदारका एक मत होगा। असाधारण व विशेष प्रस्ताव । घह प्रस्ताव जो मत दे सकने वाले उपस्थित हिस्सेदारों, अथवा उनके प्रतिनिधियोंके तीन चतुर्थाशके बहुमतसे उस सभामें, जिसमें उसके पेश किये जानेकी यादस्तूर सूचना दे

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
।
दी गई है, पास हो तो उसे असाधारण प्रस्ताव कहते है।
(धारा ८१ ) इसके अलावा जो प्रस्ताव असाधारण प्रस्तावको
भांति स्वीकृत होने के पश्चात् फिर पहली समाके कमसेकम १४
दिवस याद और अधिकसे अधिक एक माह पहले निमन्त्रणको
गई सभामें बहुमतसे समर्थित है, तो वह विशेष प्रस्ताव
कहलाता है।
विशेष प्रस्ताव निस्त्रलिजित कार्यों के लिये प्रयोजनीय है।
(१) कम्पनीका नाम परिवत्तन करनेके लिये। (धारा
११) नाम परिवर्तनमें स्थानीय सरकारीकी भी आज्ञा प्राप्त
करना आवश्यक है।
(२) कम्पनीके सनद-पत्र वाले उद्देशकी धाराको परिवतन
करने के लिए (धारा १२) इसके लिये अदालतको पूर्व आज्ञा
आवश्यक है।
(३) कम्पनीके नियम उपनियमके परिवर्तनके लिये।
(धारा २०)
(४)पूँजी घटानेके लिये अथवा वेभराई हुई पूँजीको रद्द
फरनेके लिये (धारा ५५) इसके लिए भी अदालनको पूर्व आमा
भावश्यक है।
(५) विनाभराई हुई अथवा विना मांगी हुई, पूंजीको
कम्पनीका काम समेटनेके समय ही मांगने अथवा भरानेका
निश्चय करनेके लिए। (धारा०६६)
(६) सञ्चालकोंकी जोखम अपरिमित करनेके लिये (धारा १)

५५
कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
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+
(७) कम्पनीके कारोबारकी तहकीकात करनेके लिये
इन्स्पेक्टर नियुक्त करनेके लिये (धारा १५२)
(८)प्राइवेट कम्पनीको पब्लिक कम्पनी बनानेके लिये
(धारा १५४ )
(६) कम्पनीका काम अदालनके द्वारा, अथवा स्वयमेव
समेट लिया जाय । इस पियका प्ररताव पास करनेके लिए
(धारा २०३)।
(१०) काम समेटनेके लिये "लिकीडेटर” नियुक करनेके
लिये (धारा २१३)
(११) फम्पनीके हिस्सोंके छोटे, बडे अथवा भिन्न भिन्न
रकमके करने के लिये । (धारा ५०)
इसी प्रकार असाधारण प्रस्ताय धारा २०३, २०६, २११,
२१२, २३४ और -४ के सम्बन्ध प्रयोजनीय हैं।
असाधारण एवम् विशेष प्रस्तावकी प्रतियाँ टाइप द्वारा
लिखी हुई, अथर छपी हुई होना आवश्यक हैं । (धारा ८२)
इसकी प्रति अन्य फगजोंकी भांति रजिस्ट्रारके यहाँ भी दाखिल
करना पड़ता है।
हिस्से और उनके भेद।
कम्पनीको पूँजी इकट्ठी करनेके तीन साधन है। उनमें
पहला हिस्सों, दूसरा स्टाफ, और तीसरा डिरेञ्चरफा है।
स्टाफफा प्रयोग हमारे देशमे बहुत ही कम है । यद्यपि आइनने

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
-
स्टाक सम्बन्धी नियमोंका भी विधान कर दिया है, परन्तु
भारतवर्ष में भाजतक किसी भी कम्पनीने अपने हिस्सोंक
स्टाफमें परिवर्तित करके इन नियमोंको व्यवहृत नही किया है
लगभग प्रत्येक कम्पनीके नियम उपनियमोंमें भी हिस्सोंकी
स्टाकमें परिवर्तन करनेका एक उपनियम होता है। पूर्ण भरे
हुए हिस्सोंको स्टाकमें परिवर्तित किया जाता है। अस्तु:
पहले हिस्सोंकी पूर्ण जानकारी प्रयोजनीय है।
हिस्सेकी परिभाषा कम्पनी आइन धारा २ (१६) में इस
प्रकार दी गई है । "शेअर अर्थात् हिस्सेसे कम्पनीकी पूंजीमें
हिस्सा प्रयोज्य है, और इसमें स्टाफ भी अन्तर्गत है। स्टाकको
जबतक कि प्रकट अथवा अप्रकट रूपसे पृथक नहीं किया
गया हो।" शेअरकी उक्त परिभापा, परिभाषा नहीं है। जिस
शब्दकी परिभाषा करनेकी चेष्टा की जा रही है, वही फिर
उसमें दुहराया जाता है । इंग्लिस्थानका सन् १९०८ का कम्पनी.
आइन भी इस विषयमें इतना हो दोप पूर्ण है। न्यायाधीश
फेअरवेल ( Frewell) ने सन् १९०१ में बोरलेण्ड ट्रस्टी प्रति
वादी स्टील ब्रदर्सके मुकद्दमे में शेअरकी व्यारया करते हुए कहा
।
था कि
"A share is the interest of a shale holder in,
the Company measured by a sum of money for
the purpose of liabilety in the first place and
of interest in the second; but also consisting of

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
,
& selves of mutual covenants entered into by all
the shareholders interest
याने शेअर हिस्सेदारको कम्पनोमें वह मताला है, जो
प्रथमत कम्पनीकी वैयक्तिक जोखमको प्रदर्शित करता है, और
दूसरे प्रत्येक व्यक्तिके मतालकी हद गंध देता है। केवल
इतना ही नहीं, परन्तु यह तमाम हिस्सोंदारोंको आपसमें एक
दूसरेसे किये गये पणोंके समान याँध देता है। ये हिस्से कई
प्रकारके होते हैं।
(१) डिफरेंस (शेअर) हिस्से। इन्हें व्यापारी लोग व्याज.
के शेअर अथवा हिरसे करते हैं। इन हिस्सोंवालोंको मुनाफा
पूर्व निश्चित दरके अनुसार ही मिलता है। यदि कपनीका
मुनाफा पासा हो, तो उसका लाभ इन्हें सधारणत नहीं
मिलता। इनके मुनाफेकी दर कम्पनीके मुनाफेके साथ साथ
न तो घटती है, और न पहुधा रहती ही है। इन हिस्सेनालोंको
अलपत्ता आर्डिनरी हिस्सेवालोंकी अपेक्षा कुछ अधिकार
विशेष रहते हैं। इन विशेष अधिकारोंका कम्पनी नियम
उपनियमों में उल्लेख रहना है। इन्हीं विशेष अधिकारों के कारण
इन हिस्सोंको अगरेजोमें प्रोफरेन्स हिस्से कहा है। यह अधि
फार दो प्रकारका हो सकता है। एक तो सिर्फ मुनाफे
सम्बन्धी, और दुसरा मुनाफे एवम् पूंजी सम्बन्धी। मुनाफेके
विशेष अधिकारके अनुसार इन्हें निश्चित दरले मुनाफा देने
बाद पचा हुआ मुनाफा ही बर हिस्सेदारोंमें बांटा जा सकता
-
८

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
.
है। जबतक मुनाफा काफी वडा न हो तबतक मुनाफा पाने
पहला हक इन्हें प्राप्त है। पूँजी सम्बन्धी विशेष अधिका-
अनुसार इन हिस्सेवालोंको कम्पनीके काम समेटनेपर का
दारों व डिवेञ्चर वालोंका पैसा चुका देनेके बाद, घची
कम्पनीकी पूँजीमेंसे अपना रुपया पहले प्राप्त करनेका हक रह
है। ये प्रीफरे स हिस्से भी दो प्रकारके होते हैं। एकको भ
रेजीमें प्रिफरेस और दूसरेको प्रिफर्ड हिस्से कहते हैं।
दोनोंमें अन्तर केवल इतना ही है कि, दूसरी किरमके हिस्सों
च्याज प्रति वर्ष इकट्ठा होता जाता है। और जब तक
हिरसोंका सारा व्याज मुनाफे मेंसे पाई पाई न चुक जाय, =
तक न तो प्रीफरेंस और न किसी अन्य प्रकारके हिस्सेवालों
मुनाफा
घाँटा जा सकता है।
(२) आडॉनरी हिस्से। ये भी कई प्रकारके होते।
आडोनरी, डिफडे आर्डिनर, और फाउण्डर्स हिस्से। मामू
आडॉनरी हिस्सोंको उक्त दोनो प्रकारके प्रिफ स हिस्सों
मुनाफा वाँट देनेके पश्चात् मुनाफा बांटा जाता है । यदि मि
सिस्सोंको पूँजी सवन्धी भी विशेष अधिकार प्राप्त हों,
कपनीका काम समेटते समय उनको पूँजी लौटानेके पश्चा
जो बचे वह सब इन्हीं हिस्सेवालोंमें हिस्सोंके हिसावसे वाट
जाती है। यदि कपनोकी पूंजी केवल प्रिफेस और आर्डीनर
हिस्सोंमें ही विभक न हो, परन्तु डिफर्ड अथवा फाउडर
हिस्से हों तो मुनाफे आदि के लिये हिरसे भी डिफर्ड व फाउ

५४
कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
ण्डर्स हिस्सोंकी अपेक्षासे प्रिफस हिस्से हो जाते हैं। बहुधा
अर्डीनरी हिस्सोंके मुनाफकी भी एक सीमा पाँध दी जाती
है, और खासकर उस समय जर कि, कपनीकी पूंजी कई प्रकारके
हिस्सोंकी बनी हुई होती है । जर इन हिस्से वालोंको
उक्त सीमातक मुनाफा मिल चुकता है, तो उस वर्ष के शेष
बचे हुए मुनाफे मेंसे फिर कुछ मुनाफा प्रिफस आदि हिम्से
वालोंको चांटा जाता है, अथवा दोनोंमें जिस प्रकार चांटा
जानेका कम्पनीके नियम उपनियमोंमें लिया हो चांट दिया जाता
है। जब डिफर्ड और फाउडर्स हिस्से नहीं होते, तर फम्पनीका
शेप बचा हुआ मुनाफा इन्हींको मिलता है। इन सब प्रकारके
हिस्सोंके मुनाफे एवम् पूंजी सम्बन्धी अधिकार-निशेष
कम्पनीके नियम उपनियमोंमें दिये हुए होते हैं।
(३ कमीशनसे हिस्से । ये भी एक सास प्रकारके आर्डी-
नर्स हिस्से हैं। कम्पनीके उत्पादक लोग उसके प्रपन्यका भार
अपने सिर न लेते हुए कम्पनीसे विशेष लाभ उठानेके लोभ
का लोभ नहीं छोड़ सकते । अस्तु, वे कम्पनीके प्रबन्ध कर्त्तासे
जिमेसाधारणत लोग कम्पनीके पजएट कहते हैं, उनका कमाया
हुमा कमीशन भी उनमें बाँट लेना चाहते हैं। और कम्पनीके
एजएट लोग "जाताधन आधा दीजिये बांट"की उक्तिके अनुसार
अपने कमीशनका कुछ हिस्सा उन्हें बाँटनेका आपसमे इक
रारनामा कर लेते हैं। यद्यपि हिस्मोंके साथ इस कमी
शनका कोई सम्बन्ध नहीं है, तथापि इस कमीशनके उतन

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कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
६४
उस समय तक उन्हींको गिनी जाती है जबतक कि, उनके
रुपये उन्हें लौटा न दिये जायें। अस्तु उसे रहन व्यय करना
अथवा उसमें किसी भी प्रकारका परिवर्तन करना हो, तो इन
लोगोंको आशाके रिना नहीं किया जा सकता। कमी कमी
डिवेञ्चर निकालनेवालो कपनियाँ इनके लिये फिसो खास
मिल्कियतको यवन नहीं करतीं, परन्तु कपनीकी सारी मिल्कि
यत पर एक तरहका हक कायम कर देती हैं। इसे अंग्रेजीमें
ए फलोटिंग चार्ज आफ जनरल लियन, (A floating charge
of General lion) कहते हैं। इससे कम्पनी अपनी मिल्कियतका
व्यापारको फलदायी सदुपयोग करनेके हकसे नहीं महरूम की
जाती। परन्तु इस दशामें सु अथवा फु प्ररन्यका बहुत असर
पडता है। इस लिए कपनियाँ यहुधा अपनी स्थावर मिल्कियत
साफ तौरसे चरक कर देती है । और जंगम मिल्कियत पर
जनरल लियनका हक दे देती है।
प्रत्येक डिरेंचर होल्डर कपनीका कर्जदार है। चाहे
यह कर्ज बुनियाद या वे बुनियाद (Secured or
unsceurel ) हो परन्तु जर कपनीका काम समेटा जाता
है, तब इनकी चुकाई होनेके बाद ही हिस्सेदारोंमें कपनीको
शेष पूजी बांटी जा सकती है। इनका सूद भी एक प्रकारका
देना ( chui ge) है जिसे करनीको मुद्दतपर देना ही पड़ता
है। फपनीफे नफा कमाते न कमानेपर, यह दिया अथवा नहीं
दिया जाय ऐसा नहीं हो सकता।
"
।
।

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
डिवेंचर्स कितनी तरह के होते है ?
डिवे चर्स दो तरहके होते हैं। एक रिडिमेवल और दूसरे
इरिडिमेपल । रिडिमेवल डिवेंचर्स घे हैं, जिनको कपनी कुछ
मुद्दत याद चूकता कर देनेका वादा करती है। और जिनको
ऐसा करनेका कपनी किसी प्रकारका वादा नहीं करती परन्तु
जव बने तर,चुका देनेकी हां करती है, उन्हें इरिडिमेयल अथवा
परपेच्यूअल डिवेंचर्स कहते हैं । रिडिमेयल डिचर्सके चुकानेके
लिये कपनियाँ हरसाल मुनाफेका कुछ हिस्सा अलग कर देती
हैं जिससे कि, मुदतपर उनको चुकाने योग्य रकम जुड जाय,
और उनका
भी दरसाल चुकता रहे । कुछ
कपनियाँ इन अस्थिर डिरेचरोंको प्रतिवर्ष चुकाती रहती हैं।
परन्तु इस तरहसे नहीं कि अनुकम सरयासे ही चुकाये जायें
इसके लिये वे प्रति वर्ष लाटरी डाला करती है । इस लाटरीमें
जिनका नयर आ जाता है उन्हें सूचना दे दी जाती है कि, तुम्हारे
डिये चरका रुपया अमुक महीनेकी अमुक तारीखको चुकाया
जायगा सो कपनीके दफ्तरमें आकर ले जाना, और वाँट जमा
करा जाना । इस प्रकारके चुकारेको "रिडेम्पशन वाईलाट"
कहते हैं।
व्याज

६८
कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
दी अ०व० कम्पनी लिमिटेड।
।
(प्रार्थना-रकमके जमाको रसीद ।)
प्रा०प०
स०
को श्रीयुत'
.
आज ता०
अक्षरे रुपये
वाचत उपर्युक्त कम्पनीके शेअर नग
के हिसारसे प्रार्थना रकमके भर पाये।
आने पाई
के प्रति शेअर रु०
टिकट
सूचना-यह रसीद सावधानीसे से रक्षित की जाय और
फिर बँटनी पत्रके साथ लौटाकर शेअर-सार्टीफिकट इनके
बदले में ले लिया जाय।

६६
कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
दी अ०व० कम्पनी, लिमिटेड
(भारतीय कम्पनी आइन १९१३ द्वारा रजिस्ट्री की हुई।)
वॅटनी पत्र।
व०५०
पक आनेका
सं
टिकट
तारीख'
महाशय,
दी अ० १० कम्पनी लिमिटेडके डाइरेक्टरोंकी आशाके अनुसार
इस पत्र द्वारा मैं आपको यह सूचना देता हूँ कि, भापकी
प्रार्थनाके मुताबिक उन लोगोंने इस फम्पनीकी पूँजीमें रु०
के शेअर नग
आपको देना मजूर किये हैं।
शेअरोंकी चटनी होनेपर रुपये प्रति शेअरके हिसायसे
ऊपर लिपे हुए शेअरोंके हिसावमें आपकी तरफ
लेना निकलते हैं, जिनमेंसे आप रु. प्रार्थना रमकके रूपमें
जमा करा चुके हैं। अब बाकी रु. आपकी तरफ और
लेना है, सो कृपया कम्पनीके सराफके यहाँ शीघ्र जमा फरादें।
कृपया रुपया जमा कराते समय यह चटनीपत्र सायले
जाना न भूलें।
श्रीयुक्त
भवदीय
२०
.
मन्त्री

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
।
को रुपया
बटनीकी रकम पानेको सराफकी रसीद ।
आज तारीख
'उपर्युक शेअरोंकी चटनी
की रकम जमा कराये सो जमा किए हैं।
फार दी अ०३० कम्पनी लिमि०
---
खजानवी
(यहाँसे फाड़कर दिया जाय।)
(यह चुख्ती कम्पनीके सराफ फाडकर अपने पास रख ले)
दी अ० १० कम्पनी, लिमिटेड ।
चटनी पत्र संख्या
रकम लेनी रु०

०१ कम्पनो व्यापार प्रवेशिका दी० अ०व० कम्पनी लिमिटेड । भारतीय कम्पनी आइन १९१३ द्वारा रजिस्ट्री कराई हुई।) बँटनी पत्र। य प. एक आनेका सं० टिकट ता० प्रेय महाशय, . रु० वाद शेअर दी अ० २० कम्पनी लिमिटेडके डायरेकृरोंकी ओरसे मुझे आपको यह सूचना देनेकी आज्ञा मिली है कि, उन लोगोंने आप की प्रार्थनाके अनुसार इस कम्पनीकी पूँजीके शेयर नग आप को देना स्वीकार किए हैं। शेअरोंकी प्रार्थना व बँटनीकी रकम प्रति शेअर रु. के हिसाबसे लेनी की प्रार्थना रफमके वाकी लेना जो कृपया कम्पनीके सराफ- के यहाँ शीघ्र जमा करा दे। जर शेअर-सर्टीफिकेट तैयार हो जायँगे तर आपको सूचना दे दी जायगी। और भाप इस पत्रको प्रार्थना रकमकी घ फाल की रफमकी रसीदके साथ लौटाकर वह प्राप्तकर सकेंगे। इनके विना लौटाये, सर्टीफिकेट साधारणत. नहीं दिया जायगा। धोयुत' भवदीय, मंत्री।

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
७२
सराफकी रसीद।
आज ता.
अक्षरे
सिर्फ शेअरोंकी चटनीको रकम जमा कराये
सो जमा किये हैं।
कोह०
फार दी अ० व० कम्पनी लिमी०,
रु०
खजानची
(यहाँसे फाडकर दिया जाय)
(यह चुख्ती कम्पनीका सराफ फाड कर अपने पास रख ले)
दी अ० ब० कम्पनी, लिमी०।
बँटनी पत्र सख्या
रकम लेनी
.
-

कम्पनो व्यापार प्रवाशको
दी अ० १० कम्पनी, लिमिटेड।
ता.
प्रिय महाशय,
-
का एक चेक
मुझे बडे दुपके साथ आपको लिपना पडता है कि, आप
की
शेअरोंकी प्रार्थनाके अनुसार डायरेकर लोग आपको
कम्पनीकी पूँजीमें किसी भी तरहका हिस्सा देनेसे लाचार हैं ।
कृपया इस पत्र में बीडा हुआ रुपया
आपकी जमा कराई हुई प्रार्थना रकमका चूकता सम्हाल ले ।
इस चेकके नीचे लगी हुई रसीदपर सही करके यदि आप
भुगतान पानेके लिये भेजेंगे तो बडी कृपा होगी। चेकके साथ
रसोद भी लगी है, इसलिये आप रुपयोंकी पहुँच अलग लिपने
का कष्ट न उठाये ।
श्रीयुत
भवदीय,
मंत्री।
बम्बई ता०
स०
दो फ० ख० बैंक, लिमिटेड,
एक आनेका
टिकट
आर भाईरको नीचेकी रसीद
फाया श्रीयुत
सही कर देनेपर रुपये देवे ।

३
.
।
कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
नियोंके लिये कारण होगा। परन्तु प्रत्येक कम्पनी अपनी आव
श्यकतानुसार अपने ही ढङ्गका रजिस्टर बना सकती है।
संख्या लगानेके लिये आजकल एक प्रकारकी छोटीसी
मशीन आती है। यह मशीन, एकबार, दोबार, तीनवार, और
यार बार एक ही सख्या छापे ऐसा उसमें प्रवन्ध होता है।
इसके संख्या क्रममें कभी गलती नहीं पड़ती। यह मशीन
बहुत,सस्ती आती है। और प्रत्येक कम्पनी इसका उपयोगकरके
सख्या लगानेकी मानवीय सुलभ भूलोंसे अपने आपको
क्षित रख सकती है। साथ ही बहुत ही योडे समयमें प्रार्थनाओं-
पर, रसीदोंपर, एवम् इनके दर्ज करनेकी किताबमें सख्या
भरनेका काम एक साथ व शीघ्र सम्पन्न हो जाता है।
प्रार्थना व बॅटनी रजिस्टरके आदर्श फार्ममें फुल २३ खाने
है। इसके घडनेमें यह बात भी लक्ष्यमें रखी गई है कि,
हिस्सोंकी अर्जियाँ आवश्यकता अशातीत सरयामें आयेगी।
और शेअरोंकी टनी उनके अनुसार न होगी। कई प्रार्थियोंको
प्रार्थित-हिस्सोंसे कम और कइयोंको एक भी हिस्सा नहीं मिल
सकेगा। इस दशामें उनकी जमा कराई हुई रकम पीछी
लौटाना होगी। अस्तु, एक ही स्थानसे इन सब बातोंका पता
लग सकनेके लिये, इतने विशद-रजिस्टरकी आवश्यकता है।
परन्तु आजकल हिस्से अधिक सख्यामें भरा जानेको बहुत ही
आशा की जा सकती है। कम्पनियाँ हिस्से भराने के लिए
- प्रलोभन देकर भी अन्तमें हतोत्साह होती है। अस्तु

जस्टर।
अमा कराने की तारीख
रोकड अथवा पास बुक पृष्ठ
ररस लोटाई गई
रोकड अथवा पैंक पास बुक पृष्ठ
पेशगी किस्तके जमा रु०
पाकी लेना
शेअर सार्टीफिकट सख्या
शेयरोंपा साता पृष्ठ
ਕਿ

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका ७६. नियोंके लिये कारण होगा । परन्तु प्रत्येक कम्पनी अपनी आव- श्यकतानुसार अपने ही ढङ्गका रजिस्टर बना सकती है। सख्या लगानेके लिये भाजकल एक प्रकारकी छोटीसी मशीन आती है। यह मशीन, एकगर, दोयार, तोनयार, और यार धार एक ही सप्या छापे ऐसा उसमें प्रवन्ध होता है। इसके संख्या क्रममें कभी गलती नहीं पड़ती। यह मशीन बहुत सस्ती आती है। और प्रत्येक कम्पनी इसका उपयोगकरके सख्या लगानेकी मानवीय सुलभ भूलोंसे अपने आपको सुर- क्षित रख सकती है । साथ ही बहुत ही थोडे समयमें प्रार्थना- पर, रसीदोंपर, एवम् इनके दर्ज करनेकी किताबमें सरया भरनेका काम एक साथ व शीघ सम्पन्न हो जाता है। प्रार्थना व बटनी रजिस्टरके आदर्श फार्ममें कुल २३ खाने है। इसके घडनेमें यह बात भी लक्ष्यमें रखी गई है कि, हिस्सोंकी अर्जियाँ आवश्यकता अशातीत सत्यामें आयेगी। और शेअरोंकी चटनी उनके अनुसार न होगी। कई प्राथियोंको प्रार्थित हिस्सोंसे कम और कइयोंको एक भी हिस्सा नहीं मिल सकेगा। इस दशामें उनकी जमा कराई हुई रकम पीछी लौटाना होगी। अस्तु, एक ही स्थानसे इन सब बातोंका पता लग सकनेके लिये, इतने विशद रजिस्टरकी आवश्यकता है। परन्तु आजकल हिस्से अधिक संख्यामें भरा जानेको बहुत ही आशा की जा सकती है । कम्पनियाँ हिस्से भरानेके लिए प्रलोभन देकर भी अन्तमें हतोत्साह होती है। अस्तु

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कम्पनी व्यापार प्रवेशिका साना न०१७ से १८ आसानीसे कम किया जा सकता है। इसी प्रकार कई मनुष्य ऐसा भी समझते हैं कि, शेअरोका कुल रुपया एक साथ जमा करा देनेसे कपनीके सचालक लोग उन्हें प्रार्थित शेर पूर्ण ही दे देनेको ललचा जावेगे। अस्तु, चे पूर्ण रुपया जमाकरा देते हैं। प्रार्थना और बँटनी पर लेना रुपया बाद देकर याकी रुपया खाने १६ में दिखा दिया जाता है। शेअगेंकी प्रार्थनामों के सम्बन्धमें एक बात खास ध्यानमें रपनेकी यह है कि, जिन प्रार्थियोंको डाइरेक्टर लोग हिस्से दिलाना आवश्यक समझ कर उनकी प्रार्थनाओंपर किमी प्रकारका चिन्ह करदे, बॅटनीके समय उनका ही सबसे पहले विचार होना चाहिये। मार्थनापत्र लेने के पश्चात् हिस्सोंकी घुटनी करनेका काम है। जिस प्रकार प्रार्थना पत्र रजिस्टरमें प्रतिदिन तैयार होते जाय, उनकी चॅटनीका निर्णय कर देना चाहिए। क्योंकि जस्तक पॅटनी पत्र प्रार्थीके नाम डाकमें नहीं छोड़ा जाता तन तक वह अपनी अर्जी वापिस कर सकता है। और चटनी पत्र डाको छोड देनेपर कम्पनी और उसके बीच एक प्रकार पण सम्पन्ध्र स्थिर हो जाता है। जर चटनी निश्चित हो जाती है, तो हिस्सेदारों को इसकी इत्तला दी जाती है। इस इत्तलाको 'चटनी पत्र' कहते हैं। ये पटनी पन प्रार्थना लेना बन्द होने और चटनी निश्चित हो जानेपर छपाये जाने चाहिएँ । परन्तु जिन कम्पनियों के हिस्से

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
11
।
-
पश्चात् एक माहके भीतर रजिस्ट्रारको फार्म नं०४ के अनुस
बँटनीकी सूचना देना होती है।
घुटनीसे तीन महीनेमें साधारणतया प्रत्येक कम्पनीव
हिस्सोंका प्रमाणपत्र प्रत्येक हिस्सोंदारको देना चाहिये। इस
प्रमाण पत्रपर कमसेकम दो डाइरेक्टरोंके दस्तपत होते हैं
प्रत्येक प्रमाण-पत्रपर एक आनेका टिकट और कम्पनीक
मुहरका लगा रहना जरूरी है। प्रमाण-पत्र दिये जाने
अवधि, कम्पनी अपनी इच्छानुसार घटा बढा भी सकती है
केवल अपूर्ण भरे हुए हिस्सोंका प्रमाण-पत्र देने में सरसे भार
असुविधा यह है कि, आगामी किस्तोंके देनेके साथ यह प्रमाण
पन भी पुश्तपर किस्तके जमा करानेके लिये कम्पनीको भेजन
पडता है। अस्तु, अपनी विवरण-पत्रिका कम्पनीको प्रमाण
पत्र दिये जानेकी अवधिक विषयमें उल्लेख कर देन
चाहिए।
यह प्रमाण पत्र प्रार्थना पत्रके रङ्गके कागजपर ही छप
घाना चाहिए। साधारणतया यह दो भागोंमें छपाया जाता
है। जिनमेंसे पहला भाग प्रति पत्रिकाके तौरपर कम्पनीमें ही
रहता है, और दूसरा भाग हिस्सेदारको दे दिया जाता है
इस प्रमाण पत्रकी पुश्तपर हिस्सोंने हस्त-हस्तान्तरका हिसाब
रखने के लिये कई खाने होते हैं। इस सबका परिचय नमूनेसे
स्पष्ट है।
पत्र प्रार्थना, बँटनी परम् किस्तोंके जमाकी रसीद

किसी प्रकार नष्ट हो जाय,
कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
लेकर दिया जाता है। यदि इनमेंसे कोई रसीद खोजाय अथवा
एकरार दिया हुआ प्रमाण-पत्र पोजाय, फट जाय अथवा अन्य
तो सञ्चालकोंको कम्पनीके नियम
उपनियमोंके अनुसार अधिकार होता है कि, वे ऐसे हिस्सेदारसे
क्षति-पूरक पत्र लिखवाले । इस क्षति-पूरक पत्रका नमूना
इसी पुस्तकमें दिया गया है।
इस पनपर स्टाम्प एक्टके
अनुसार भाट आनेका स्पेशल एएडसिव स्टाम्प लगाना
होता है।
हिस्सोंकी बॅटनी फर देने पर हिस्सोंपर वाकी लेनी
रकमको विवरण पत्रिका अथवा कम्पनीके नियम उपनियमों में
लिखी हुई किस्तोंके अनुसार वसूल करनेका काम है। परन्तु
पूर्व इसके कि, हम हिस्सोंको किस्त मांगने परम् वसूल करनेको
परिपाटीसे परिचित हों, हमें शेअर होल्डरोंके सभी 'याने
मेम्बर्स रजिस्टरका जान लेना आवश्यक है। पयोंकि जब तक
किसी व्यक्तिका इस रांजस्टरमें नाम दर्ज नहीं किया जाय
तब तक वह आइनको रूसे कम्पनीका सदस्य याने हिस्सेदार
नहीं माना जाता। अस्तु ।
यह खाता दो यशोंमें विभक्त रहता है। एक अशमें केवल
द्विस्सोंका और दूसरे अशमें उनपर ली गई रपमोंका जमा
सर्व रहता है। इस प्रकार के सातसे प्रत्चोक हिस्सेदारने तिने
हिस्से लिये हैं, और फिर हस्तान्तरित किये हैं:
का उल्लेप रहता है। यह खाता प्रथमत

पञ्चाारीख इस प्रमाण पत्रके प्रत्येक हिस्से पर निम्नलिखित रकम कम्पमा करा दी गई है :- करानेकी मेनेजिग पजन्ट सके दस्तखत चटन प्रार्थना पर रु० १६ बँटनी याने शेअर मिलनेपर प्रमा प्रत्ये पहली किस्त रु० दूसरी रु० अर्वा १६ तोसरी फेवलपर पृथक लेस द्वारा हस्तान्तरित (येचे) किये गये हैं। असुन वेचे गये विरीददारका हिस्सोंकी पडतनेकी सख्या तादाद रू० परीख | विक्री लेख मैनेजिंग एजन्ट के दस्तखत - ৰাপ্তি घाना रहता रखने

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
लेकर दिया जाता है। यदि इनमेंसे कोई रसीद खोजाय अथवा
एकगार दिया हुआ प्रमाण पत्र खोजाय, फट जाय अथवा अन्य
किसी प्रकार नष्ट हो जाय, तो सञ्चालकोंको कम्पनीके नियम
उपनियमोंके अनुसार अधिकार होता है कि, वे ऐसे हिरसेदारसे
क्षति-पूरक पत्र लिखवाले । इस क्षति-पूरक पनका नमूना
इसी पुस्तकमें दिया गया है।
इस पत्रपर स्टाम्प एक्टके
अनुसार आठ आनेका स्पेशल एएडसिव स्टाम्प लगाना
होता है।
.
हिस्सोंकी पॅटनी फर देने पर हिस्सोंपर याकी लेनी
रकमको विवरण पत्रिका अथवा कम्पनीके नियम उपनियमों में
लिपी हुई किस्तोंके अनुसार घसूल करनेका काम है । परन्तु
पूर्व इसके कि, हम हिस्सोंकी किस्त मांगने एवम् वसूल करनेको
परिपाटीसे परिचित हों, हमें शेअर होल्डरोंके सभी याने
मेम्बर्स रजिस्टरका जान लेना आवश्यक है। क्योंकि जब तक
किसी व्यक्तिका इस रजिस्टरमें नाम दर्ज नहीं किया जाय
तब तक यह आइनकी रूसे कम्पनीका सदस्य याने हिस्सेदार
नहीं माना जाता। अस्तु ।
यह खाता दो बंशोंमें विभक्त रहता है। एक मशमें फेवल
हिस्सोंका और दूसरे अशमें उनपर ली गई रकमोंका जमा
पर्च रहता है। इस प्रकारफे पातेसे प्रत्येक हिस्सेदारने कितने
हिस्से लिये है, और फिर हस्तान्तरित किये हैं, इन मर
का उल्लेख रहता है। यह पाता प्रथमत घंटनी रजिस्टर

८२ कम्पनी व्यापार प्रवेशिका शेअर सार्टीफिकेटकी नकलकी प्रार्थना। श्रीयुत डाइरेफ़र साहव, सं० दी अ० ब० के०, लि०, नवीन साटोफिकेट दिया गया। मन्त्री नं० का महाशय, वायत साटोफिकट न० मेरा शेअर साटोंफिकेट नं० यावत कम्पनीके शेअर नग अक्षरे जिनकी संख्या तक है, फट गया है, अथवा कही गैरपते रखा गया है । इसलिए प्रार्थना है कि मुझे उक्त शेअरोंका नया सार्टीफि- कट दिया जाय। यदि इसके देनेसे आपको किसी तरहका नुकसान उठाना पड़े, तो उसे पूराकर देने और सदैव आपको ऐसे नुकसानसे बचाये रसनेकी मैं इस पत्र द्वारा प्रतिज्ञा करता हूँ। साथही यह भी निवेदन करता हूँ कि, मैंने उक्त शेअर सार्टीफिकट जान बूझकर नहीं सोया है। यदि वह भवि" फभी मिल जावेगा तो आपको लाकर दे दूंगा। साक्षी (गवाह)। भवदीय, पूरानाम शेअर होल्डरफेद . पूरा नाम व्यवसाय 'पूरा पता:: .. .

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
खताकर तैयार किया जाता है। भिन्न जानिके
के लिये पृथक पृथक पाते यही रखना चाहिए। इस
में अकारादि क्रमसे पाते डालनेकी ओर निशेष ध्यान
की आवश्यकता नहीं है, घरन् चटनी रजिस्टरके सिल
से ही पाते डाल लेना उपयोगी रहता है। इस खातेके
पृष्ठ पर अमुक हिस्सेदारका पाता लगाया गाया है, इसके
निके लिये एक निघण्ट वर्णा-नुकमसे तैयार कर लिया
ता है । अंग्रेजीमें इस प्रकारका निघटु म्बरों के हिसाबसे बनाया
ता है। इस भाषामें ए ई आई ओ यू और वाय ये छ स्वर
। अस्तु प्रत्येक वण छ वर्गों एवम् छ उपवर्गों में विभक्त
: दिया जाता है। उदाहरणार्थ, अलार्डिस ( Allardice)
मक व्यक्तिका नाम निघण्टुके अवर्णके अवर्ग एवम् आई
विमें लिया जायगा। हिन्दीमें भी इसी प्रकार निघंटु
नाया जा सकता है। हिन्दी वर्णमालामें १६ स्वर और ३३
पञ्जन मिलाकर पुछ ४६ अक्षर हैं। इनमेंसे ऋ,ल, ल, ए, ऐ,
तो, अ अ , ट, अ, और ण, से प्रारम्भ होने वाले नाम शायद ही
सुननेमें आते हैं। अरतु ११ अक्षरोंको कम कर देनेपर कुल
१८ अक्षर निघटुके लिये रह जाते हैं। इसी प्रकार यदि हम
इस्व दीर्घके भेदका विचार न रसकर मानाओंकी श्रेणी नियत
करे, तो आई ऊ ए वो इस प्रकार पांच श्रेणियाँको जा
सकती है। और इसी मात्रानुक्रमसे ये पांचों श्रेणियाँ उपणि
योंमे विभक्त की जा सकती हैं। अब यदि हम उपर्युक व्यकि

१२ कम्पनी व्यापार प्रवेशिका शेअर सार्टीफिकेटकी नकलकी प्रार्थना श्रीयुत डाइरेकर साहब, दी अ० व० के०लि०, नयीन साटोफिकेट दिया गया। स० नं० मन्त्री पावत कम्पनीके शेअर महाशय, वायत साटोफिकट नं0 मेरा शेअर सार्टीफिकेट न० नग अक्षरे जिनकी संख्या तक है, फट गया है, अथवा कहीं गैरपते रखा गया है। इसलिए प्रार्थना है कि मुझे उक्त शेअरोंका नया सार्टीफि कट दिया जाय। यदि इसके देनेसे आपको किसी तरहका नुकसान उठाना पड़े, तो उसे पूराकर देने और सदैव आपको ऐसे नुकसानसे बचाये रखनेकी मैं इस पत्र द्वारा प्रतिज्ञा करता हूँ। साथही यह भी निवेदन करता हूँ कि, मैंने उक शेअर सा फिकट जान बूझकर नहीं खोया है। यदि वह भविष्यमें फभी मिल जायेगा तो आपको लाकर दे दूंगा। भवदीय, पूरानाम शेभर होल्डरके द० व्यवसाय पूरा नाम पूरापता व्यवसाय पूरा पता: साक्षी (गवाह)।

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका से खताकर तैयार किया जाता है। भिन्न जातिके हिस्सोंके लिये पृथक पृथक पाते वही रखना चाहिए। इस पातेमें अकारादि क्रमसे प्राते डालनेकी ओर विशेष ध्यान देनेकी आवश्यकता नही है, वरन् पटनी रजिस्टरके सिल सिलेसे ही पाते डाल लेना उपयोगी रहता है। इस पातेके किस पृष्ठ पर अमुक हिस्सेदारका खाता लगाया गाया है, इसके जाननेके लिये एक निघण्ट वर्णा-नुक्रमसे तैयार कर लिया जाता है । अग्रेजीमें इस प्रकारका निघटु स्वरोके हिसारसे बनाया जाता है। इस भाषा ए ई आई ओ यू और वाय ये छ स्वर हैं। अस्तु प्रत्येक वण छ वर्गों एवम् छ उपवर्गों में विभक्त कर दिया जाता है। उदाहरणार्थ, अलार्डिस ( Allardice ) नामक व्यक्तिका नाम निघण्टुके अवर्णके अवर्ग एवम् आई उपवर्गमें लिपा जायगा। हिन्दीमें भी इसी प्रकार निघटु यनाया जा सकता है। हिन्दी वर्णमालामे १६ स्वर और ३३ व्यञ्जन मिलाकर कुछ ४६ अक्षर हैं। इनमेंसे ऋ,ल, ल., ए, ऐ, ओ, में अ, ८,अ, और ण, से प्रारम्भ होने वाले नाम शायद ही सुनने में आते हैं। अस्तु ११ अक्षरोंको कम कर देनेपर कुल ३८ अक्षर निघटुके लिये रह जाते हैं। इसी प्रकार यदि हम ह्रस्व दीर्घके भेदका विचार न रपकर मात्राओंकी श्रेणी नियत करे, तो आई ऊ ए व ओ इस प्रकार पांच श्रेणियाँको जा सकती है। और इसी मात्रानुक्रमसे ये पांचों श्रेणियाँ उपणि, योंमें विभक्त की जा सकती हैं। अब यदि हम उपर्युक्त

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
हिस्सोका प्रमाण-पत्र हिस्सेदारानको दे देती है, वह इस
सूचनामें प्रत्येक हिस्सेदारको इस प्रमाण पत्रकी पुश्तः
किश्तके रुपये जमा करानेके लिये कम्पनीमें भेज देनेकी
इत्तिला दे देती है। कोई कोई कम्पनी प्रमाण पत्र दे देने
पश्चात् किस्तोंकी अदायगी की पृथक रसीद नहीं देती। ये
व्यवहार ठीक नहीं हैं। चाहे प्रमाण-पत्र दिये गये हों अथः
नहीं किस्नकी पृथक रसीद दी जाना उचित है। इन रसीदों
प्रति-पत्रिका प्रमाण पनोंकी गैरमौजूदगीमें मूल बाउचरों
काम देती है। दूसरे, किस्तकी प्रति दिवसकी आयका हिसा
रसनेमें इनसे बडी सहलियत रहती है। अन्यथा इसके लि
एक पृथक रजिस्टर सोलना आवश्यक हो जाता है।
किस्तकी सूचना देनेके पहले किस्तको सूची तैयार कर
चाहिए। इस सूचीकी खाना बन्दी इस पुस्तकमें दे दी र
है। यह सूची कई प्रकारसे उपयोगी रहती है। प्रथम
हिस्सेदारमें किस्तफी लेनी रकम जानने के लिये उसके प्रमाण
पत्रको प्रति-प्रत्रिका अथवा उसका खाता देखनेकी दिद
उठानी नहीं पड़ती। दूसरे यह सूची साथकी साथ धकार
किस्तकी सूची भी तैयार करतो जाती है। इसकी गै
मौजूदगीमें बकाया किस्तकी सूची तैयार करना वडा भा
-
काम हो जाता है।
कम्पनीके हिस्से जैसा कि पहले कहा जा चुका है अन्यान
भांति खरीदे व बेचे जाते हैं। कई कम्पनियोंकी बटन
-

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कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
१०
रु० १०००) से आगे प्रत्येक रु० ५००) पर
२)
प्रत्येक ट्रान्सफरके साथ शेअर सार्टीफिकटका कम्पनीमें
आना जरूरी है। विना सार्टीफिकेटके दिया हुआ ट्रान्सफर
निष्फल है। ट्रान्सफर पत्रमें शेअरके सार्टीफिकेटका जिक्र कहीं
भी नहीं होता। इसलिए कम्पनियाँ एक स्वरकी मुहर
दी अ०व० कम्पनी लिमिटेड,
शेअर बेचनेकी प्रार्थना।
शेभर
सार्टीफि-
टिकट
कटन
मैं *
निवासी
का बलिहाज रु०
जो कि मुझको धनामा
रहनेवाले
* यहाँपर बेचनेवालेका नाम व पता लिसा जाय।
| यहाँपर खरीददारका नाम व पता लिखा जाय।
,

६१
कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
'से प्राप्त हुये है, मेरे हिस्से नग
जिनकी
सख्या से
तक है और जो दी अ० २० कम्पनी लिमि-
। टेड (वारिस) एडमिनिस्ट्रेटर अथवा एक्जीक्यूटर (कार्यवाहक)
को, अथवा जिन्हें वे लोग फिर वेचदें उन सयको उन शर्तों पर
जिनपर मैं इस समय इनका मालिक हूँ, और कम्पनीके मेमोरे-
एडम व आर्टीकल्स आफ असोसियेशनकी शर्तों पर बेचता है।
और मैं उक्त परीदार इस समय उपर्युक्त हिस्से उन्हीं शर्तों के
अनुसार परीद करनेका इकरार करता हूँ।
यतौर साक्षीके आज ता० माह
सन्
ई० को हम दोनों नीचे दस्तखत करते हैं।
साक्षी (गवाह)।
दस्तखत बेचनेवाला
पूरा नाम
पूरा पता
व्यवसाय
दस्तखत परीददार
पूरा नाम
पूरा पता
पूरा नाम
पूरा पता
व्यवसाय'
व्यवसाय
न

-
कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
१२
वनवा लेती हैं। इस मुहरका मजमून इस प्रकार होता है।
यह स्टाम्प साधारणत: ४ अथवा इञ्चसे विशेष लम्बी नहीं
होती।
मुहरका नमूना।
द्वान्स्फर लिखे गये हिस्सोंका साटीफिकट न. कम्पनी
में जमा करा दिया गया है।
ता०
मन्त्री।
ट्रान्स्फर साटीफिकेशनका हमारे अधिकतर रिवाज नहीं
है। परन्तु पाश्चात्य-देशोंमें यह बहुत प्रचलित है। अस्तु
प्रत्येक कम्पनीमें सार्टीफिकेशनका एक पृथक रजिस्टर रहता
है। उन देशोंमें शेअरोंकी बिक्रोमें साटोंफिकट डिलीवर
करनेके स्थानमें इस प्रकारके ट्रान्स्फरकी डिलीवरी दे दी
जाती है। अस्तु।
जव कम्पनीमें ट्रान्स्फर-डीडशेअर सार्टीफिकटके साथ
रजिस्ट्री के लिए पेश किया जाता है, तो वह उसी क्षण रजिस्टर
करके नहीं लौटा दिया जाता है। ट्रान्स्फर स्वीकार करनेका
अधिकार सचालक मण्डलको है। और इनकी स्वीकृतिके लिये
सचालक मण्डलकी बैठकमें एक पृथक प्रस्ताव पास किया
जाता है। अस्तु ट्रान्स्फर डीड जमा करानेवालेको उस समय
रसीद दे दी जाती है। इस रसीदका नमूना
आगेके

१३ ता०२१०२२ ग्रह्मदत्त देवदत्त १२० हिस्से तस्या ३८७०१ से ३८८५० तक दफ्तरका समय ११ से ३ बजे तक शनिवारको ११ से १ बजे तक ट्रान्स्फर-डीडका नमूना । दी अ०३० कम्पनी लिमिटेड ट्रान्स्फर डीडकी रसीद। रसीद सख्या ४६ यम्बई डीड सप्या ३३ ता०२ १०.२२ बेचनेवालेका नाम ब्रह्मदत्त खरीदारका नाम देवदत्त शेअरोंकी तादाद व १८० हिस्से ३८७०१से३८८५० कम सख्या सा फिकट सस्या ४०६ वारत २०० शेअर जमाकरानेवालेका नाम केदारनाथ नया शेयर बाजार यम्बई फार २० य० कम्पनी लिमिटेड सचालक मण्डल मन्त्री सूचना-प्रत्येक ट्रान्स्फरकी स्वीकृतिपर निश्चय २२ को तैयार रहेगा परन्तु इसे केदारनाथ कराने नयाशेअर बाजार वम्बई फिकट नं० सार्टीफिकट ४०६ यारतशेअर कम्पनी व्यापार प्रवेशिका २०० का 8 कम्पनी व्यापार प्रवेशिका पृष्ठमे दे दिया गया है। ट्रान्स्फर रजिस्ट्रीकी फीसका व्यौरा प्रत्येक कम्पनी के नियम उपनियमों में दिया होता है। उसी प्रकार प्रत्येक ट्रान्स्फरको फोस लेली जाती है। इस फीसकी पृथक रसीद देनेकी कोई आवश्यकता नहीं है। क्योंकि बिना फोमके कोई भी ट्रान्स्फर कम्पनीको पहियोमें रजिस्ट्री नहीं होता। अस्तु ट्रान्स्फर डीडकी रसीदें एवम् ट्रान्स्फर रजि स्टर इसके वाउचरोका काम हिसार परीक्षाके लिये दे देते हैं ।। ट्रान्स्फर डीडकी रसीदके साथमें एक और रसीद भी कम्पनियों में होती है, जिसे बकाया हिस्सोंका टिकट कहते हैं । इसका उपयोग उस समय होता है जब कि एक सार्टीफिकटमैसे कुछ हिस्से हस्तान्तरित न हों और उनके लिए नवीन सार्टी फिकट बना न हो। इस टिकटका नमूना मागेके पृष्ठमें दे दिया गया है। इस टिकटमें यह भी लिख दिया जाता है कि, बकाया हिस्सोंको हस्तान्तर करनेके ट्रान्स्फर-डीड अमुक तारीख तक कम्पनीमें रजिस्ट्री करा देना चाहिये, अन्यथा नया सार्टीफि- फट तैयार कर दिया जायगा और जो इस टिकटके एवजमें अमुक तारीपको दे दिया जायगा। प्रत्येक ट्रान्स्फरके साथ यह टिकट कम्पनीमें जमा करानेपर ट्रान्स्फर रजिस्ट्री किया जायगा और पकाया हिस्सोंके लिये नया टिकट दे जायगा। इन ट्रान्सफरोंका एक रजिस्टर रक्पा जाता है। रजिस्टरमें परीददारका नाम दर्ज हो जानेपर ही यह - --- १५ कम्पनो व्यापार प्रवेशिका सदस्य नहीं हो जाना घरन् सदस्य रजिस्टरमें नाम दर्ज होनेपर यह सदस्य समझा जाता है। भोर सदस्य रजिस्टर में नाम तमी दर्ज होता है, जर कि संचालक मण्डल अथवा ट्रान्स्फर स्मोकार फररोषालो उपसमिति उन्हें स्वीकार कर लेती है इस रजिस्टर तो काम हैं । प्रयत तो बोर्ड के समक्ष पेश किये जानेवाले ट्रान्स्फरोंको सूची उपस्थित करना, ओरा दूसरा सद- म्य रजिस्टर तैयार करने में नफल नहीका सा काम देना है। ट्रान्स्फरके सम्बन्धमें यह बात ध्यानमें रखना चाहिए कि जय एक सा फिकट के पूर्ण हिम्से एक ही व्यक्तिको येचे जायें, तो उसके लिये नया प्रमाण पर नहीं तैयार किया जाय । घरन् उसो प्रमाण परकी पुश्तपर छान्स्फरके दिये हुए पानोंकी खाना घदी पूर्ण करके परीददारको सौंप दिया जाय । नया साटोफिक्ट फेल उसी दशामें तैयार किया जाय जय कि पुश्तपर और नाम दर्ज करनेकी नगद्द न हो अथवा पूर्ण हिस्से एक ही व्यक्तिको हस्तान्तरित न हों। और जर ऐसा मौका माता है, तो इस साटॉफीकटके टुकडे कराने पड़ते है। इसको अगरेजीमें स्खिटि ग (Splitting) कहते हैं। हिटिंगकी फीम अलाहदा ली जाती है। सिटकी रसीदमें लिपी मुइतके भीतर यदि स्ट्रिट को स्ट्रिट करानेको प्रार्थना न की जाय, तो नया सार्टीफिकट तैयार कर दिया जाता है और यह इस रसीदके एवजमें दे दिया जाता शेयर बेचनेके अलाना उनके स्वामी --- " कम्पनी व्यापार प्रवेशिका ६६ प्रकारसे भी होता है। खामी परिवर्तनको अंगरजी ट्राझीशन कहते हैं। जब रजिस्टर्ड हिस्सेदार फौत हो जाता है तो ये हिस्से उसके उत्तराधिकारीको मिलते हैं। परन्तु उत्तरा धिकारी उस समय तक उनका मालिक नहीं समझा जाता जबतक कि, कम्पनीकी बहियोंमें उसका नाम दर्ज न हो। उत्तराधिकारीके नाम हिस्से लिसानेके लिये या तो मृतक हिस्सेदारका रजिस्टर बिल (Bill ) अथवा लेटर्स आफ एड मिनिस्ट्रेशन ( Letters of Administration ) कम्पनीमें रजिस्ट्री करवाना होता है। इसके रजिस्ट्री करवाने के फार्मका नमूना इसी पृष्ठमें दे दिया गया है। उसकी फोस भी दासफर फोसके मुताविक ली जाती है। परन्तु उत्तराधिकार पत्र पर स्टाम्प ड्यू टी नहीं लगती। दी राजपूताना स्वदेशी स्टोर्स कं. लि. अजमेर । मृतक शेअर होल्डरके विरासत नामेके रजिस्ट्री करानेका फार्म मृतक शेअर- होल्डरका . - पूरा पता - व्यवसाय

६७
कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
नग
से
तक
हिस्सोंकी तादाद
घउनकी मम सख्या
फौत होनेकी तारीख
विरासत नामेफे रजिस्ट्री
करानेकी अथवा मजिस्ट्रे.
टके सार्टीफिकटकी तारीख
धारिसों अथवा
कार्यवाहकोंका नाम
.
..
..
.
..
पूरा पता
.
...
व्यवसाय
विरासत नामा
दाखिल करने
वालेका नाम
वारिसके दस्तखत
सं०
शेभर रजिस्टर पृष्ठ
रजिस्ट्रीकी फीस

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका ES + "THE INDIAN COMPANIES ACT” 1913 Form E as required by Part II of the Act (Section 32 ) .. Summary of Share Capital and Shares of the Company, Lamted, made. up to the -day of 19 ( being the day of the First Ordinary General Meeting in 19 Shares of Rs each Nominal Share Capital Rs divided into Shares of Rs , each Total number of shares taken up to the date -day of__19 which number must agree with the total shown in the list as held by existing members Number of Shares issued subject to payment wholly in cash Number of Shares issued as fully paid up otherwise than in cash Rs Number of shares issued as partly paid up to the extent of otherwise than in cash, Rs, ... 1 1 per share 1 EE कम्पनी व्यापार प्रवेशिक 0 . -pei share There has been called up on each share of shares. Rs There has been called up on each of shares Rs. Thore has been called up on each of shares Rs Total Amount of Calls received, including payments on Application and Allottment Rs Total amount (if any) agreed to be considered as paid on shaies which have been issued as partly paid up to the extent of Rs Total amount of Calls unpaid Rs Total amount ( if any ) of sums paid by way of commission in respect of shares or debentuies or allowed by way of discount since date of last Rs. summary Total amount (if any) paid on shares forfieted Rs. Total amount of shares and stock for which share warrants are outstan- Rs ding Total amount of share-warrants issued and surrendered respectively since 1 कम्पनो व्यापार प्रवेशिका १०० . date of last summary Rs,'. Number of sharis or amounts of stock comprised in each share-warrant Ro Total amount of debt due from the company in respect of all mortgages and charges which are required to be registered with the Registrar of Companies under this Act Rs 1. When there are shares of different kinds or amounts (o g, Preference and Ordinary, or Rs 200 or Rs 100 ), state the number and nominal values separately 2 Where various amounts have been called, or there are shares of diferent kinds, state them soparately 3 Include what has been received on forfeited as well as on existing share 4 State the aggregate number of shares forfeited (if any) List of Persons holding shres in the company Limited, on theday of and of persons who have - 19 1D Occupations ress and Names, Add- Folio in Register Ledger Containing particulars Namo full Fathers Name Address Ocompation or caste Number of shares held by existing members at Date of Return Number Particulars of shares transferred sin ce the Date of the Last Return by Dato of registra- persons still Members tion of transfer Number Particulars of shares transferred sinco tho Date of the Last Return by Dato of registra- persons who have censed to be memtion of transfer bers Account of shares and an account of the shares so held the last return showing their names and addresses held shares heroin at any time since the date of कम्पनी व्यापार प्रवेशिका rhs Rema- कम्पनी व्यापार प्रवेशिका १०२ Names and Addresses of the Peisons who are the Directors of the Company Limited, on the 19 -day of Names Addresses, Names and Addresses of the persons who are the Managers of the Company Limited, on the day of 19 Names Addressos Note - Banking Companies must add a list of all thier places of business Ido hereby certify that the above list and Summary truly and correctly states the facts as they stood on----- -19 ( Signature) (State whethor Director, Manager or Scoreday of १०३ कम्पनी व्यापार प्रवेशिका tary ) 1 State the aggregate number of shares forfie. ted (if any) 2 The aggregate number of shares held, and not the distinctive numbers must be stated, and the column must be added up through out so as to make one total to agree with that stated in the Summary to have been taker up When the shares are of different classes these columns may be subdivided so that the number of each class held, or transferred may be shown separate 4 The date of registration of each transfer should be given as well as the number of shares transferred on each dato The parti. culars should be placed opposite the names of the Transferor, and not opposite that of the Transferree, but the name of the Transferee may be inserted in the “Remarks" column, immediately opposite the particulars of each Transfer आइन के ज्ञात अज्ञात भङ्गकी सजा।

१०५ कम्पनी व्यापार प्रयोशका आइनके ज्ञात व अज्ञात भंगकी शिना (सजा) शिक्षा (सजा) पावश्यक कार्य और उनका मन पाइनकी धारा हिसाब रिसीवर द्वारा या रु०५०० तक जुर्माना मासिक आँकढेका अपराधी-रिसीवर रजिस्ट्रारके दफ्तरमें दाखिल करना- शेगरोंकी धारा १०१ फे १०२ कपनी एवम् हिस्सेदार दोनों घटती विरुद्ध चटनी की क्षति पूर्ण करना इसकी करना अवधि बँटनीके दिवस से दो पार कर सकी है। अप०- वे डायरेकर (सवालक) जो जान बूझकर मन करते हैं, अथवा करवाते हैं। वेटिकट शेअरोंकी स्टाप आइनके अनुसार जयतका घुटनीका पत्र देना १०४ फेहरिस्त आदि दाखिल न पँटनोसे एक मासमें किये जाय तवतक प्रति दिव- रजिस्ट्रारके दफ्तरमें सका रु०५००) तक जुर्माना । बटनीकी फेहरिस्त अप०-जो कपनीका हुकाम दाखिल न करना जान बूझकर यह भङ्ग करे। और रजिस्ट्रार की जाँच पडतालके

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
१०६
लिये पूर्ण अथवा
अपूर्ण भर दिये गये
हिस्सोंके कण्ट्राफ्टों
को पेश करना।
धार्षिक आँकडा-आइनके अनु १३१ २० १०००) तक जुर्माना ।
सार प्रत्येक
अप०-कपनी एवम् उसके
१५ महीनेमें न हुकाम जो ऐसा जान बूझ
कर करे । अप-उक्त ही।
कपनीके भाडोटर "
द्वारा आडिटन
ही तैयार करना।
"
कराना।
एक प्रति कपनीके "
प्रत्येक हिस्सेदा
रोको साधारण
सभाके ७ दिवस
पहले न भेजना।
कपनीके मैनेज १३३ २० ५०० तक जुरमाना।
र डायरेक्टर
अप०-उकही।
मादिकीसही
बिना काम प्र.
काशित व वितर
णकरना।

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
कन्ट्राक्ट
लेनदारों के नाम जो हुकाम जान बूझकर
छुपाना। ऐसा फरे अथवा करने में
साथ दे ।
मैनेजर अथवा ६१(डी) २० २००) तक जुरमाना
ऐजेएटका कंप च कम्पनीको
इच्छापर
नीकी तरफसे
कण्ट्रा का पूरा करना न
कम्पनीका नाम फरना निर्भर रहना।
लिखे यिना फरना, अप०--मैनेजरव एजेण्ट पर
परन्तु डायरेकृरों
न करना निर्भर रहना।
के ससक्ष उसकी
शर्ते' आदि न
पेश करना।
पिना रजि १२२ (२) २० १०००) तक जुर्माना
-जो शरस जान बूझकर
ऐसा फरे अथवा करावे।
डिवेञ्चर
अप०-
स्ट्रारके सर्टि
फिकृके निका
सार्टिफिक डिवेञ्चर, डिये १०८ प्रति दिवसका ५०) जुर्माना
ज्चर स्टाप अप०-कम्पनी अथवा उस
अथवा शेअ का आफीसर जो ऐसा करे।
रोका सार्टि-
फिकट पॅटनी.
से ३महीनेमें

न देना और म्पनी व्यापार प्रवेशिका १०८ आडिटरकी अफोंके साथ १३१ १०००) रू० जुर्माना रिपोर्ट- हिस्सेदारोंको न बताना- रुपया उधार-धारा १०३ से १०३ प्रति दिवसका का रू०५००) लेना विरुद्ध उधार जुर्माना । अप०--जो मनुष्य इस प्रकार काम करे। व्यापार धारा १०३ के १०३ लेना। अनुसार रजि- स्टारकासार्टि " फिकट प्राप्त कि. ए विना शुरू कर करना। आइन विदित १४७ ऐसे समयके कम्पनीके देने के जिम्मेदार हैं। अप०-प्रत्येक मनुष्यजो रोंसे छ महिनेसे ऐसा करे पृथक २ रूपसे अधिक करना। कम्पनीकी पूँजी ६५ एक सालका कारा वास घटाने पर पत- । अथवा जुर्माना अथवा राज करने वाले दोनों। अप०-फम्पनीका न्यूनतम सख्या से भी न्यून मेम्ब- काम लेनदार

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका
कण्टाफ्ट
लेनदारोंके नाम जो हुकाम जान घूमकर
छुपाना। ऐसा करे अथवा करने में
साथ दे।
मैनेजर अथवा ६१(डी) २०२००) तक जुरमाना
ऐजेण्टका कप
व कम्पनीको
इच्छापर
नीकी तरफसे कण्ट्रा का पूरा करना न
कम्पनीका नाम करना निर्भर रहना।
लिखे मिना करना, अप०--मैनेजर व एजेण्ट पर
परन्तु डायरेकृरों न फरना निर्भर रहना।
के ससक्ष उसकी
शर्ते' आदि न
पेश करना।
बिना रजि १२२ (३) २०१०००) तक जुर्माना
-जो शरस जान बूझकर
फिकृके निका ऐसा फरे अथवा करावे ।
डिवेञ्चर
स्ट्रारके सर्टि
अप०
लना
सार्टिफिकृ डिवेञ्चर, डिवे १०८ प्रति दिवसका ५०) जुर्माना
ञ्चर स्टाप
अप०-फम्पनी अथवा उस
अथवा शेअ का आफीसर जो ऐसा करे।
रोका सार्टि
फिकट चॅटती-
से ३ महीनेमें

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका " , संचालक डायरेकर न देना। तबादलेका सार्टिफिकट दापिलेकी तारीपसे ३ महीने में न देना। इनकी सूची ८७ प्रति दिवसका रु०५०)ज० अथवाइनमें अप०-कम्पनी व उसके हुक्काम परिवर्तनकी दोनों जो ऐसा जान बूझकर करें अथवा करावे । स्ट्रारको न देना उपयुक्त हि- ८५ अवधि खतम होनेसे प्रत्येक स्सोंके लि दिवसका रु० ५०) जुर्माना। ये बिना दो अप०--अनुपयुक्त सचालक महीनेसे अ. इतला रजि. धिक तक काम करते रहना। पिना स्वी. ८४ रु० ५००) का PM कार किये अफसर - कम्पनो व्यापार प्रवेशिका प्पोंका ना. किये हुए म लिख क रसूची देना कम्पनीसे ८१९० २० १००० तक जुर्माना अप०-जो डायरेफर ऐसा करे कट्राफोंसे अपना सबंध अन्य डाय रेफरोंसे प्र काशित न J - करना। " घयमें सबंध ऐसे कण्टा ११ वी रु. १००० तक जुर्माना कृरोंके वि. तथा चोट अमान्य होना। जप०--उपरोक्त रखने वालों का मत देना कम्पनीके यै ११ सी० उपरोक्त नेजर आदि अप०-कम्पनी व उस के प्रत्येक अफसर जो ऐसा करे की नियुक्ति में अपने स म्वन्धको म कम्पनी व्यापार प्रवेशिका ११२ ? प्रकट करना काम समेटना। काम समे- २१७ (५) प्रति दिवसका रु. ५०) टनेकी आ अप०-वह व्यक्ति जिसकी शाकी प्रमा- प्रार्थना पर अदालतसे यह णिक नकल आज्ञा दी जाय रजिस्ट्रारके दफतरमें दा- खिल न करना इकरारनामे पर्याप्त टिकट स्टाम्प आइनके अनुसार आदि न लगाना घनावटी हिसाय-काम समेटी हुई रुपनी २३६ सात वर्ष तकका के हिसायको पहियोंमें कारावास एवम् झूठे हिसाय लिखना। जो व्यक्ति इस प्र. जुरमाना । अप० कारका काम करे " झूठी शहादत-जान बूझकर कम्पनीके २३८ काम समेटते समय ठी गवाही देना। ठा पत्र-किसी व्योरेमें ऑकडे २८२ आदि अन्यान्य पत्रमें झा ययान करना। विदेशी कंपनियाँ-जो धारा २७७, २७७ रुपया ५०० ८ और प्रति ११३ कम्पनी व्यापार प्रवेशिका करे। का पालन न दिवसका ५०) जुर. माना 'अप० --वह कपनी और व्यक्ति जो ऐसा न करे। विगत इत्यादि-रजिस्ट्रारके मांगने १३७ प्रति दिवसका रु०५०) पर व्यौरे आदि का जुर्माना । अप०-कपनी पुलासा न करना एवम् यह कारिन्दा जो ऐसा जान बुझकर फरे अथवा करा दे। पहियोंकी जांच-इत्तला मिलने पर १४० प्रत्येक दोपके ५०) जाँचके लिये पेश रु० जुरमाना। करनेसे इन्कार करना। कपनी द्वारा नियु क्त इसपेक्टरोंको अप०-कपनीके प्रत्येक जाँचके लिये न अफसर। - दण्ड उपरोक्ता " . देना। लिमिटेड-शब्दका विना रजिस्ट्री २८३ जवतक यह उपयोग कराये उपयोग। किया जाय प्रति दिव सका ५०) जुरमाना। अप०-यह व्यकि जो ऐसा करे।

म्पनी व्यापार प्रवेशिका ११४ लिक्विडेटर-की नियुक्तिकी इत्तला २०८ रजिस्ट्रारको न करना। अप०-लिक्डेिटसेटर। मेमोरएडम आफ-परिवर्तनके पश्चात ५० प्रति दिवसकारु०१७) एसोसियेशन अपरिवर्तित प्रति जुर्माना अप० कपनी देना। एवम् वह व्यकि जो ऐसा करे। शेअर होल्डरोंको २५ प्रत्येक अपराधीके मागने पर व कंप लिये १० रु। नीकी नियत फीस अप-कपनी। भर देनेपर भी प्रति न देना। पूँजी अथवा हिस्से ५३ प्रति दिवसका २० दारोंकी वृद्धिकी --कपनी इत्तला रजिस्ट्रारके एवम् प्रत्येक अफसर दफ्तर में दासिल न जो ऐसा करे। करना। रजिस्ट्री न कराना । १२२ (८) रु० १००० तक पूँजी- ५०) अप- डिवेञ्चर- जुरमाना। अप०-उपरोक कपनीका काम-कार्यालयके बाहर ७४ २० ५०) तक प्रति साइन दिवस जुरमाना। अपराधी-पूर्वोक्त नामका -- - ११५ कम्पनी व्यापार प्रवेशिका " दिवस जुरमाना। कपनी एवम् बोर्ड न लगाना। कामनसील अथवा ७४ २० ५०० तक जुर्माना अन्याय कागजोंका अप०--कपनीका वह न लगा होना। अफसर जो ऐसा करे, प्रासपेस्टस- डायरेक्टरोंकी सही (६२) २० ५००) तक प्रति की एक प्रति रजि स्ट्रारके दफ्तरमें दा अप०--- पिल किये पिता प्रत्येक अफसर जो प्रकाशित करना। ऐसा करे। प्रासी (अधि. विना टिकटकी प्रा रु० ५००) तक जुर- कार पत्र) क्सीके अधिकार माना । अप०-रिसी- पर वोट देना। वर। रिसीवर पदरित करनेकी ११६ इत्तला रजिस्ट्रारके यहा न देना। अपनी नियुक्तिकी ११८ प्रति दिवस २०५०) इत्तला रजिस्ट्रारके तक जुरमाना । यहाँ न देना। अप०- वह व्यक्ति जो ऐसा करे। रजिस्टर्ड आफिस के स्थानको सूचना ७२ रजिस्ट्रारके यहा अप०-कम्पनी " म्पनी व्यापार प्रवेशिका लधिडेटर-की नियुक्तिकी इत्तला २०८ रजिस्ट्रारको न करना। अप०-लिमिडेटसेटर। मेमोरएडम आफ-परिवर्तनके पश्चात ५० प्रति दिवसका रु०१७) एसोसियेशन अपरिवर्तित प्रति - जुर्माना अप० कपनी . देना। एवम् वह व्यकि " जो ऐसा करे। शेगर होल्डरोंको २५ प्रत्येक अपराधीके मागने पर च कंप लिये १०)रु०॥ नीकी नियत फीस अप०-कपनी। भर देनेपर भी प्रति न देना। पूँजी- पूंजी अथवा हिस्से ५३ प्रति दिवसका २०, दारोंकी वृद्धिकी इत्तला रजिस्ट्रारके दफ्तरमें दाखिल न जो ऐसा करे। करना। रजिस्ट्री न कराना । १२२ (८) रु० १००० तक ५०) अप-कपनी एवम् प्रत्येक अफसर डिवेञ्चर- 1 जुरमाना। अप०-उपरोक्त फपनीका काम-कार्यालयके वाहर ७४ २० ५०) तक प्रति दिवस जुरमाना। अपराधी-पूर्वोक्त नामका साइन 1 ११५ कम्पनी व्यापार प्रवेशिका वोर्ड न लगाना - कामनसील अथवा ७४ २० ५०० तक जुर्माना अन्याय कागजोंका अप०-कंपनीका वह न लगा होना। अफसर जो ऐसा करे, प्रासपेक्टस- डायरेक्टरोंकी सही (९२) रु० ५००) तक प्रति की एक प्रति रजि दिवस जुरमाना। स्टारके दफ्तरमे दा अप०-कपनी एपम् सिल किये विना प्रत्येक अफसर जो प्रकाशित करना। ऐसा करे। प्रासी (अधि- रिना टिकटकी प्रा. २० ५०० तक जुर. कार पत्र) फ्सीके अधिकार माना। अप०--- -रिसी- पर वोट देना। पदरिक्त करनेकी ११६ इत्तला रजिस्ट्रारके यहा न देना। अपनी नियुक्तिकी ११८ प्रति दिवस रु०५०) इत्तला रजिस्ट्रारके तक जुरमाना । यहाँ न देना। अप०--वह व्यक्ति जो ऐसा करे- रजिस्टर्ड आफिस के स्थानको सूचना ७२ 'रजिस्ट्रारके यहा घर। रिसीवर- " - 1 " कम्पनो व्यापार प्रवेशिका रजिस्टर्ड पता " 1 1 - सिल करना। A दाखिल न करना। अप०-कंपनी डायरेक्टरोंकी-न रसना और न ८७ जुर्माना प्रति दिवस सूची उसकी प्रति रजि- रु०५० तक। स्ट्रारके यहाँ दा अप०-कपनी पवम् जो व्यक्ति ऐसा करे अथवा करावे। मेंबरोंकी सूची–धारा ३१ के अनु- ३१ उपरोक्त जुर्माना।। सारन रखना। अप०--जो करे अथवा करावे। जांच करानेसे अ ३६ प्रत्येक इन्कारका रु० थवा प्रति देनेसे २०) जुरमाना एवम् इन्कार करना। जबतक यह रहे तवतक प्रति दिवसका रु०२०) जुरमाना। अप०-उपरोक्ता शेअर वारएट देने ४७ प्रति दिवसका ५०२० पर इनको दर्जन करना। शेयर वारण्ट देने ४५ उस व्यक्तिकी क्षति पूर्ण करना। अप०- रएट जमा करते कम्पनी। " जुरमाना । अप०-उक्त " वाले व्यक्तिका या .

अप० कम्पनी एघाउसका कम्पनी व्यापार प्रवेशिका समय नाम न लिपना। फदामोंकी सूची वि०२ नकदके १०४ वी० प्रति दिवसका रु० पूर्ण अथवा अपू ५००) जुरमाना । अप०- र्ण भरे दिये गये कपनीका प्रत्येक यफ हिस्सोंके इकरार सर जो ऐसा फरे। नामोंके रजिस्ट्रार की जांच आदिके लिये उपस्थित करना। डिवेञ्चर छोहरों प्रति देनेसे १२ प्रति टियम स० २० फा यथनाजाच जुमाना। से इन्कार ARo-मायनी परम् करना। टपणा यद अफसर जो मारगेज सूची न गाना 2016 का जुर्माना 412~प्रत्येक डाइरेफर मगर अथवा अफसर जो या पारे। प्रति प्रति दिवसका २० २० जमाना। की सूची imp अपामा FAR म.

कम्पनी व्यापार प्रवेशिका ११० कारकरना। प्रत्येक अफसर जो ऐसा फरे। विशेष घ असा प्रत्येको ८२ (4) प्रत्येक प्रतिका जो धारण प्रस्ताव मेमोरण्डम इसके बिना दी जाय घ मार्टि २०३० जुर्माना। अपराधी-उपरोका छपी प्रति न फल्ममें एक ल्गाना चा- हिये एवम् प्रत्येक हिस्से- दार को न भेजना। " रजिस्ट्रार के ८२ (8) प्रत्येक दिवसका रु० २०) यहाँ एक प्रति अपराधी-उपरोक। दाखिल न करना विशेष प्रस्ताव डाईरेकरोंकी ७१ प्रत्येक दिवसका रु० १० जुर्माना। रिमित करने वाले विशेष प्रस्ताव की जोपम अप . प्रति रजिस्ट्रार फे यहाँ दापिल कम्पनी व्यापार प्रवेशिका न फरना उसके समर्थनके प्रश्चात प्रत्येक मेमोरण्डम अथवा आर्टिकल्स के साथ इस की प्रति न लगाना। कायस भरनेके २०६ प्रति दिवसका ५०) विशेष प्ररताव जुर्माना। की प्रति रजि- स्टारके यहाँ न . भेजना। की सूचना डेटर। काम समेटनेकी रजिस्ट्रार के २१७ (३) प्रति दिवसका ५०) व अन्तिम सभा दफ्तर लिकी जुर्माना अप०- -लिको डेटर द्वारा दाखिल किया जाना। हिस्से छोटे हिस्सों ५१ जुर्माना उपरोक। अप०- को घर्ड हि- कम्पनी व उसका प्रत्येक स्सोंमें घटेको अफसर जो ऐसा करे। छोटोंमें अथवा हिस्सोंको स्टाक में परिवर्तन कर- कम्पनो व्यापार प्रवेशिका र० नेकी इत्तला रजिस्ट्रार को दफ्तर में १५ दिवसके भीतर न देना। पूँजी कम करना पूँजी कम करनेकी ६२ परि इत्तला रजिस्ट्रारके यहाँ न देना। कमीका प्रस्ताव प्रत्ये. ६२ क प्रतिके साथ न भेजना। पूँजी वृद्धि- पूँजी वृद्धिकी इतला ५३ प्रति रजिस्ट्रारको न देना। अपर पूँजी- प्रत्येक विज्ञापन आदि ७५ रु. अधिकारित पूँजीके साथ भराई हुई एवम् जमा कराई हुई पूँजीकी तादाद न लिसना। कपनो आईनले ३२ परि १३६ प्रति शिष्टके जो फार्मके अनु सार भरकर रजिस्ट्रारके यहाँ न देना। पत्रक- A

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.
११३
कम्पनी व्यापार प्रवेशिक
लिक्कीडेटर द्वारा कार्य २४४ प्रति दिवसका
समेटे जानेवाली कप
५००) तक जुर्माना
नी इचलाको नियमित अप लिकीड टर।
समयके भीतर न पहूँ-
चाना।
कपनीके लेनदारोंको
प्रति न देना।
विज्ञापन (प्रोस्पेक्टस) १००- क्षति पूर्ण करना।
में सशयात्मक पात, अप० चे व्यक्ति-जो
लिखना जिससे हिस्से ऐसी- संशयात्मक
खरीदने वालेको क्षति धात लिखने दे।
हो।
स्टेट्रटरी रिपोर्ट-प्रत्येक हिस्सेदारोंको ७७ प्रत्येक दिवसका
प्रति न भेजना और २० जुर्माना । अप०
रजिस्ट्रारफे यहाँ भी प्रत्येक डायरेक्टर
दाखिल न करना।
जो ऐसा करें।
डायरेषटरका-जिस प्रयन्ध अथवा यो० २० १००० तक
पता देना। कंट्रासे डायरेक्टर जुर्माना । अप० वह
का सम्बन्ध हो उसके डायरेक्टर जो ऐसा
विषयमें मत देना। फरे।
oscos
समाप्त
55
-

यारोपक - प्रसिद्ध तत्वज्ञानियोंमें फेण्ट और चक्लेका स्थान घडा ही ऊँचा है। योरोप निवासी उक्त दोनों तत्वशानियोंके ग्रन्थोंको चढे आदरको दृष्टिसे देखते हैं। योरोपमें नास्तिकवादको जडमें कुठाराघात इन्हीं दोनों तत्वज्ञानियोंने किया है। इनके अन्य बहुत ही उच्च कोटिके हैं। जो लोग अंग्रेजी भाषाके प्रथ पढ सकते हैं चे तो उनके लिये मूल ग्रन्थोंका स्वाध्याय कर अपनी शान पिपासा सहज ही शान्त कर सकते हैं। किन्तु वे लोग जो अग्रेजी नहीं पढ़ सकते उनके लिये हिन्दी भापामें उक्त दोनों तत्त्वज्ञानियोंके ग्रन्थोंका निचोड तथा सक्षिप्त जीवन चरित्र भी तैयार कराकर प्रकाशित कराया गया है। इसलिये आप अमी एक कार्ड द्वारा "वक्र्ले और केएटका तत्वज्ञान" नामी पुस्तक मँगाकर पढ़ लीजिये। यद्यपि तत्वज्ञानका विषय गहन होनेसे नीरस और अरुचिकर होता है, तथापि इस पुस्तकके पढनेमे आपका जी लगेगा। पढते समय उप- न्यासकासा आनन्द आवेगा । हरेक विषय अच्छी तरह समझमें आ जावेगा। मूल्य | छपाई, सफाई । कागज वगैरह देख कर आप सन्तुष्ट हो जावेंगे। पता "य-भारत हिन्दी साहित्य-समिति इन्दौर

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Company Vyaphar Praveshika

Author
Baanthiya,kasturmal
Title
Company Vyaphar Praveshika
File name
Company Vyaphar Praveshika
Text
OCR done
Citation
1924
Published
2011/01
Publisher
Hindi Sahitya Samiti Indor
Language
Sanskrit
Pages
132
Library
Agarchand Bhairondan Sethiya Jain Parmarthik Sanstha, Bikaner
Classification
Literature
DLI number
546659
Barcode
4990010025112.00
Scanning centre
C-DAK, Kolkata
Digital publisher
Digital Library Of India
VMLT id
CDHLoRlUuJM
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