Bhartiya Vidya Mandir Shoudh Pratisthan,bikaner
Sarat-sahitya (xxx)
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पुसम साहित्य माला तीसा पुष्प शरत्-साहित्य (तीसों माग) विराज वहू, वचपनकी कहानियाँ भमुधदात्य- पं० रूपनारायण पाण्डेय - प्रकाशक हिन्दी-ग्रन्धरत्नाकर (प्राइवेट) लिमिटेड, पद
मूम्प : एक स्पया पपास नया पैसा
दूसरी पार
नवमर, १९५०
मंगल नाराम प्रेमी मैनेजिंग गाइरेस,
हिन्दी मग्यरत्नावर (पाइरेर) समिरर दीराबाग, बम्पर ।
मुद्रा मोमाराम पर, मानमर, मारपती (पनारम) २१४-१४
प्रकाशकी ओरसे
'नियम कई शत् माका तीसरा उपन्यास माना गया
सन् १९१४ में प्रचपित हुभा । इसकेगमा पौदह वप पारेक
पा दोरी (बड़ी बहन) और 'चन्द्रनाम रिस पो बहुत
समयता पा र मोर १९११ और १९१५ में प्रकासित हुए। नी
रपनामोंसे धादिस्प-बमका प्पान उनकी भोर माफ्ति मा भौर
मश पाठने भनुमान किया कि साहिस्स-गफ्नमें एक प्रधिमाशाली
नक्षत्रका उपप रोपा। इसके बाद दो प्ररत् बापूने बगावार बीस
पर्पत उपन्यास कसानियों नाक मौर निगपारिविसकर मंगा
सादिस्पको एकसे एकभकर उनका स्नीसे सम्म कर दिया, जिनम
हम्परे पाठक मरतक काफी परिचित हो चुकरें।
विराज महकमी हिन्दीमे एकाधिक अनुवाद हो पुफिर
मी हम परासाविक प्रेमी पठको यि यह पद और मामाणिक
अनुसार प्रापिठ र ये हैं। परित्रहीन समान या भी
4 सपनारायण पणेयका पिया दुमा है।
परफमकी कहानियाँ (छे मर गएस) सन् १९३८ में एय
पाक स्गवास पार प्रति दुई पी। वे भी इस मागम मधधित
हो गी । परन्तु मूह पुस्तकको । मानिमिसे एक कहानी
कमर पाराको हमने छोड़ दिया है। मीकि पर मीशान्त
प्रथम पम (१.५ से ८१ ठक) नाममा हेर-फेरी साप
प्रमपित रो पुची है। एक ही पुसमाधम उसकी पुनराधि
अघिस नहीं मादम ई!
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विराज बहू दुमही निसले समग्राममें नीर और पीर पड़ता रो माय। उस तरफ मुरे बहाने कीर्तन करने, टोल पम्पने और गॉग पीनम नया का नहीं था। उसने पूरे गोरे शरीरमें असाधारण सभा | गाँधम जैसे उसकी पीपपरमें प्रसिदि पी गवार के रूप वैसी हीरनामी भी दीकिन छोटे भाई पावावरकी प्राति विहार मिन की। पाठिंगना और तुला पाय था पिसारे पर गमी होनेकी खबर सुनकरी घामबाद उसका परीर न बने रेसा रोने ब्गा प सपने मारी तय ऐसा मून मी नी या भौर गगारफ्नपत मी नहीं फटपता या । मेरे दो ला-पीकर, बगसमें बता रसाकर परसे निकायमा या भीर हुगधीकी कचहरी पमिम मोरो एक पेपर नीचे भाग्न मा रेता पा । दिनमर मबियों दिखार वो कुछ माग था, पर छामो पा ही मर भाकर पपने पासमै बन्दर देठा पा । रावको पार, मिरची वगैप भने हायसे बन्द करता मोर पसीसे रि-रि बरा रेठा सब सोता था। बाब सरे वीर मरफ एक मोर पेटा सम्पम् पी या पा । रसी समप उसकी भारी मान इरिमती पुपलेसे माकर पीठ पीछे पुरन कर 4ठगह मौर माइकी पीठ में मुंह छिपकर ने संगी। नीरने एप दीवाही सहारे रस या मोर भदराम्से एक सप मानके सिरफर रस्सर प्यारसे परा- भाग स्मरे-मेरे तू रोती सौगहन ! मिती मुहरगरकर माकी पीटमरम भासू गाकर मौर्य-मामीन मर गाठ मार दिये हैं और पानी कार गाग दी है।
बिराम यह
नीर र पोटाअरे, तुते पानी पी है। ऐसी दो मास पनेपर
मोनीपती पानी है। किन्तु गाडमा मह दिये।
परिमाने रोते रोते मा-पोती!
“मोरमा पर बल को पारदरिमवीन सब पर हुए
नीत्वरने पर मोटर बार पुत्ररा-मिगड बह !
पड़ी पापा नाम मामी है। नौ पकी मदम्बाम उनका मामा था,
सबसे लोग उस बियब बहकाकर पुरान उसकी भरसा १९२
बर्षकी होगी। सासक मरन पारत पही इस परकी पापा। सपना
मसाभरण पुनरी है। पारपंप साह पर उस पर पुष हुया था, जो और में
ही मर गया। ससे पा निसन्तान है। या रसोईपरमै काम रोयी।
पति पुकारनेपर बोरसे थर मार मागिनी एक साथ देतार कर
उठी । बोली-लमही, स्टे नामित करने या पी।
मीटरने का क्यों न बमने से कानी परसा, बो परावर
छ। किन हुमने गाया माँक दिये।
विरामने पानी को होग, भोकर वसी, न मर घोपा, न मोदी
बरी, गोमत्यम पुसकर बमला सोड दिया और मरवाये पदारलती पी।
माव एकरप नहीं मिल । इसे पीटना पाहिए ।
नीमरने कहा-वहीं, नीमरानाको भामरे या एप भए मेव
देना चाहिए।-भपापान सूने एकाएक मासाम्पस दिसा ! पर काम
ती देय नही।
हरिमती मागे पीछे सही पी। पौरेसे बोली- रामस्य लिप बुरा
या।
'मा भीर सिौरव पेक्षा महा दो टीकरी" मम पिण
पोगने दुई किमीमारने (मर - उमरम मने मी पर
दिन मोपा पार पापा उदा दिवा स्य। किशमिली पर समसार सोस
पीलिपिक मौतरसे मोहा मनहाता पार।
पर भूमकर एगो गई।सरी-गारो मार में सनी
मी मी, मी जे पी 1 पो पाराम बरन पगा।
विराज
परिमतीने पा-पो न मेपा पागम क्षार देते, भाम पाने गे?
मा नही।
नीरने परा-अप्स सामान।
इसी बीच मौकरने भाकरा-नयमन बाबा बैठे।
मीणावग्ने कुछ ममाविम होकर धीमे स्वरम कारस मीच ही मार
पैर गये।
पिराने चौरस मीवरसे मुन रिमा । उसने से निसार, विस्तार
महा-बारासे बाने एका पिर स्वामीकी भोर स कर
कहा-अगर म सरेसे ही यह सब पीना पुरुरवा में सिर पटककर
बनरेगी। भाजार मा समसा पाहै?
मीवर कुछ नही बोल सुपचाप माना हाप पर सिाधी
गरसे बगियामें पा गया।
इस बागमें एक व्यसे सरस्वती नदीकी एक पाय पारा मुमूर्प गमा-मामीकी
वीप सौपकी तरह बाहर बायी भी। उनमें सेवार मप दुमा पाबीन
चर्म गौगोगोंने पानीक लिए करमाँ सोद रखी पाँ। उसी पारपास
सेवारसे पुष उपसे कर्म दुई सीप सफ ानी मीतरटे मसंस्म
माणिस्पों वय पूपर्म चमकपी । किनारेपर एक काम पर पक्षी
समापिस्तूपको दीवारते किसी भी दिक्को बपके वेब गावी परम
सिसकार महाँ मा पा या। इस परकी गुर रोग शामको उमी परपरके
एक सिरेफर उस मत मात्मा दिए पापक बधकर रख पाती थी। उसी
सफरफ एक किनारे गानका राप पडो हुए नौपर माफर बैठ
गया । नदी रो मिनारोंपर बोला भामक दाग भौर सोझाइये।
दो-एक बात पुराने पंफ और मारके पेड़ नही पानीको पातक कार
मनी घानार हुए । इन सके उपर न बने कितने समयसे
कितने ही पम्पिाने मान मत कमाये तिने सम्मको पम्पोस र पहा
किया कितने ही घर खाये और पिने ही गीत गाये हैं। उनकी ममामैं
दोनों भारसान कुछ देर मुफी बैठे थे।
पाएकरिमती अपने माईकी गोवा पास और मी लिसा भार
विजया
d
रोटीमा मैमा मामी प्रमको बोरम व्यर पार में पुभरी है।
पपने यही उम्मीकी माय विसापर, सह, नीरा-4
बोगम सांसे करती है।
हरिमतीको विश्वास नहीं हुमा । उसने कहा-मार, म गे पोरम
गेलो मीलगते हैं। अन्य दाश में मांग पी मांग है।
नारने कहा- उनके पास न इससे मंगते हैं।
परिमतीने माईक मरी मार देते हुए पूझ उनी का नहीं है।
राम नया पोतर ना, भानकी कोठार गा- मी नरी !
नाबग्ने पारसे नई बार य हिमवर काछ मी मरी
मोम हानेर भने पास का मान रखना चाहिए ।
हरिमवीने पासो पिर समी लोग उनको पेड़ा-थोड़ा स्मों नही देव ?
नीकारने का दाने दी उमाविमा ११
परिमतीने या-वो क्यों नहा रेते गरारदमारे तो साना है।
नीमने पर मा-- मी व्य पानही रे सा ! स्प्रेषन तू
मकी बहू होगी पान धब देना ।
पाकिम होने पर मीर मुनकर परिमती भगा गा। मन मारको
मी मुहिसकर बोली-यमो।
नीवर दोनों हा बार उसा मामा पूम रिपा। माँ पापी
सोमपानको पदपार र प्य पाठ साल से, करमती
नि RS) पो म उवा माता उनको यह बौर परेका वीरमर
Rो सिधार गई पी मरने दो उसे पार पोसार एना मागि
| मोबाइरने सम पानेर गावपरके रोगियों की दशम भये ६,
सन दिया , गंग पिपा, मेरिन परमरकर मौ मपनी मापाधी इन
मप्ये समपी भाग भरेगना नही । इसी व्यसने हरिमती को
मोमे गार पारा-पोता है। इसीसे दरिमची मावासना सोय
4 जपमम्मामले Bाग एवारा मम मम me
पवार मिया माग्नेपिरोहम मनाते है और सिर्षा बोरमी।
मामारपणाम।
विराज पर ५ सदाकी मतीम मुहिमर पुपरोसी। इल्ने पुरानी दासीकी भावाब मुन पहा-यै मामी दूध फैने थिए मुगायो, माभो। फूटी भर्पत हरिमतीने मि उठाकर विनती के स्वरमै प्रा-बदा म करन रोकि ममी दूप नही पिपगी । क्यों नहीं मिलेगी पहन। हरिमतीने कहा-अमी मुझे मिलकुछ भूल नहीं है। नीमगरने सकरका में तो पा मान रेग्य, पेकिन ये गार मार देती हैबातो न मानेगी। नौकरानीने महसि फिर पुकारा-पूर्ण। नीदरने पटपट पानको कमा कर कहा-पा, कप पदककर दूप मा पान में नही बैठा है। हरिमठी मुंगष्टकाकर धीरे-धीरे पछी गई। उसी दिन दोपहरको बिराने याची पोसकर पति सामने रख दी और बोड़ी दूर पैठकर कहा-मम्म तुम्ही बताभो मैं भाकाम सा पीच रोग- रोग हमारी पाठीमें फ्रे ! मह न साऊँगा वह न खाऊँगा पा मी न लासँगा भम्तमें मम्मी भी री! नीमेवरने कहा-यह इम्नी सरकारी तो! विसबने काा-स्नी, फिरुनी है। देरफेरकर कमी यह, कमी वा! खाम इस साग पात साप मा मद सा सकते है। यह कोरधार तो! नही कि सब पी पिक परें । या तो देहाव है। यहाँ तो क्स यही पोबारको मामे मिटती है । उसे मी खाना तुम छोड़ बैठे हो। अरे पुढी कहाँ गई। माकर ससे पाकर। ना सो नही होगा।-देखो भाव भगर पाटीमें कुछ मी पपा गंगा पो मैं तुमारे पैरोम मि परफार धन दे दूंगी । नीयबर कुछ योग नहीं, सिवा एभा जावा या । पिरास्ने हराकर कहा- स्पा हो। मेरी हमें भाग या बाधी है। दिन-दिन तुमारी मुगक पटती गती है या मी जर है। सीकी रिखार देने कमी है, पर जरा देखो।
बिगम पर
नीपरने का सब देता है।पा मारे मनका भ्रम है।
निराग्ने पा-मनम प्रमहै। कमी नहीं बनते हो, मगर म एक
दाना मी कम खाते हो तो मैं बता दे सक्ती रचीभर मी रोग दो दोहरीर
पर हर रखार ही समझ पाती , सोसते हो?-योटी, पता
रसकर चौरस मीतरते अपने दादा पीनेका दूप से भा।
परिमती एक मोर सदी माइको वा परपी थी। पर सा रतार दूध
तेने पली गई।
मिराब फिर बोली-रेखो नेम-परम पर ए बहुत दिन पो थान
उस परकी मैसी भाई पौ। ठोंने मुनकर इतनी पोग उमरम
मामी छोर देनेसे भौतीकी मोर मारी बाती परीरकी कि पर भी
है।-नाना पान होगा। अन्तम न जाने स्पाका क्या हो भाप ।
तुमको महसी नहीं छोड़ने दूंगी।
नीर्यवर (सपा पोला--मष्ठा मब मेरे पदहेजसूर मसाया
यो सब ठीकदोपया।
पियम्ने चिदकर कहा-गी-बमारीशीटप फिर पीत्कार।
नीमरने भमतिम मौर अस्त होकर मा-बाद नही या गिन!
सपनका सम्पास टारा फूटता नहीं। पार, विनी रपे तुम्हारे कान
इमेठेन।
वियर होठयमें एसी सी साप बोलीबाद नी। मुझे छोरी
पर तुम्ने क्या F कम मस्पापार दिया है। गाये पर, की
भागार तुम मुझसे बिना पिट भरवावे । म सामपुर हो।
नीपतर ठहाका मारकराँस पड़ा। इसने पा-मामी सब बात
पारमपर में हम तुमको प्यार करने मगाया।
पिरावती गार योय-बानी राम कुमरो-र्य मा रहा है।
दारमतीने भाकर राव येरा भारी मात्र पास रख दिया और फिर
दय मेकर रा परने कयौ। रियग्ने ठरा बाप भोसे मोर रि पति
प्रस मार रेठ गा योग्यगये पता मुझे ११त् पार गा|
। वर्गगा। स्थित पंग वेबसते बोरी-गरपाठीवन
पिरायमा
छोरी भवस्थामै मार होना नहीं।
नीमने पूज-पों टीमें नहाँ ! मैं होमवरमसिॉग
बहुत छोरी उमरम ही मारो चाना मा है।
स्पिन र हिमरी नही। मेरी बात और है मीधि में शुमारे
आप पड़ी थी। इस विा मरे कोर एयरी उप मनद पा रेठानी मीना
पी बस सातकी उमरमें ही कापी पन गर । संमिन में भोर होगा
पर मी वो देखती। होरी उमरमें ही बो बाम मोर मारपीट शुरु
माती पर पड़ी होने पर मी पर नहीं होती । सीते तो मैं मम्मी पूंर्य
पारका ममी नाम ही नहीं देती। नहीं को भी पाये ही मार्ग
दिए पपरीवार पापक बापते परकी भाइ पी। भीमेवरसे
बाप दी वापगी और नगद एक बार पये ! गो मी में पाती है कि नहीं, सभी
सो साल मोर राने दो।
मीरने बायसे सिर स्टार सहा-सुम पा सरे र
सदकी चोगी।
नियमने पा-पये पी नगी । बगर र एकमाता वो हमें
म्मो पर परमें गमनी प-सी मा नहीं ! तुम भय सा मुझे सीन जे पये
देकर मोल नहीं प्रमे ये देवरमात्मै स्पषमो सम ना देने पो।
ना ना तुम न पाय में दसा नरो। हम गोंकी ये रीति
में पहीहंगी।
नीरने भौर मी विरत र पाया तुम किस्ने बताग कि
हम हो!ी पति पीपना। यह ठीक किम भेग पीलामो
उपमे पिन, अमी पलीक म्यादमें एक पैसा मी नवे । मैं
पूरानाँगा।
सामी पहरे और मौका भय देसार बियब स पड़ी। बोरी-
गाम परासीमाबो गी-
बारी संघ
मेक पावे। समाजामधामॉमप-परिषद मोर माम-पत्रिपा
अपने तमाम रखते है पेसा ही पारे।नुवार
१४
बियम पह
सा बिरास, सान दे चुका है-एक बार मुह माना ही पगा।
मान पॉरी!
नीवर पठाया।
रािबने लेफनसे कहा तुम क्या समझते हो कि माय बीवन पर
तुमायी, उसमें और किसी को कुछ बोधनका एक नहीं है। तुमाय गोर
पारेही कर सकते हो।
नीरने मावोंको हकी बनानेकी गरबास नकी चश की, लेकिन
पसीनत भीर मुना रेतकर हसन सका । किसी क्यान-मपर
उसका रोना देतार
राजबीच ही बोल उठी-ठीक दोहै। उसका रोना तुमने देखा किन
मेय ऐना देखनेवाय मी को इस दुनिया है। यों पर उसने उस पार
सकी चिोको टुपनगर व हुए मा-भोरममी से होते
१पार दिन और धार ए साना-पीना-सोना गार दिवारी-उसकादी
पा पदम हापोहाय रे रहे हैं। पर पर हुम्बार भौर पीता है फिर मो इस रागी
निर्षस दोको टेबर रोगीको देखने-पने आते हैं।--मपणाममा मेरे मी मगवान
है। पीपार फिर एक बार प्रतीनीधे तरिया दारापरप-यो।
नीचर पर बहुत सी सी-सी मुस्सयार मा गर। उल्ने
रेसे कहा--तुम मौरीको क्या बसा मरोसा है ये बास-पाठमें मगधन्दी
दोहाई देती हो।
विराजतनीस उठ बैठी भोर प्रोपई वाली नहीं, मगवान्मर रेया
गुमेकी मरोसा हम बोगो नहीं। हम कीर्तन नहीं करती, गुल्सीपी माता
नही पानती मुर्दे कनेको नहीं बाती इससे हम होगीको नहीं, मग तुम
होगा।
रिराम्रोष ऐपपर नीन्यपरकोटी भा यह । उनने कामोधम
परोरिराम, मपमुपही ऐमापन एक तुम ही नहीं मी ऐसी।
मगवान्स ममा रहने र मिनाजोर पारिए, उतना मोर मौरतोषी में
नदी शेता-नम नुमायया ।
रियस माह
७
छोरीसस्पर्म पाहोना ठी नहीं।
मीरने पूजा-पयों ठीक क्यों न ! मैं दो मकिपरियोग
बात छोटी उमरमें ही म्पादोबाना भणहै।
पिराज सिर हिलार मोच-नही। मेरी बात भौर, पाक में गुमारे
सप पड़ी थी। सिए मेरे कोर एयरखी दुर ननद या रेटानी मी नदी
पी। मैं इस नत्री उमामही पीपी मगर थी। विनम मौरपेगा
पर मी यो देलती है। डोरी उमरमें ही बो बर-धीर परपौर शुरू से
पाती रही होने पर भी नहीं होगी। इसे थे मैं मनी पूरक
प्यार ममी नाम री नी रेती। माँ ममी मोरी खरे मार
निए पोस्वरोला मोपात बारसे भी भाइ सी सी मेबरसे
घददीभावमी और नगर एयर पये ! यो मी में पानी नहीं, मम्म
ऐसार भोर पने रो।
नौबतरने भाधरसे सिर ठाकर कप-तुम स्प
मसी पेनोग्?
मिराने कापये मी न गी । भगर र एकावासाम
समे देकर परमें बह गनी पड़ती मानी ! तुम संग क्या मुझे ठीन मै स्पये
रेकर मोल नहीं यये थे। देकर म्पाद, सा पंप सी स्पसे नहीं देने पो!
ना ना गम इन सब बामे दमा न। म मेगकी को
मैंपही कमी।
नीमने भोर मी विस्मित हार काला विन माया कि
हम लोगो गतिमा बना है। यह कि हम योग पीपालेको
रूपमे देते? पेकिन अपनी सीमा पर पैठा मी नास्ते में
टको धन पगा।
सामा पारे भौर पोखेका भाव देलार लियजस पड़ी। बोटी-
परमपरक पा घरी माते। बोहाभामें सच
रासहॉसामानोप-परिसर मम्मपतियों मा
अपने संप्रम रखाइन पेमा ही पाहै। -ममुपारक
रिराजगह
भमा-मण नही करना | भर स्पो, कोई महाना पर उठनबना।
नीमार भी इस दिया । बोप-पमा मैं पहाना पर उठ बहा
बियग्ने पानही एक दिन भी नहीं। यह ऐप योगमारे शत्रु
भी नही
सीलिए मुझे कितने दिन उपवास कर काटने पो सो मेरी
यह धनती हैमरे या सा! सता ?
बिराने पंसा दिया और मका पोरा बोरसे पकाकर योग-तुरे
मरे मिकी कसम, उठो नही ।-ये, पदी चा कोरी बहसे दो संदेश तो से
भानही नहीं गरन हिलानेसे कुछ न होगा। माय पेर ममी नहीं मप।
मैया रीतीक ठठ मोगे तो मैं मीन नांगी। कारावको ने
एक बागर संदेश बनाये।
हरिमती दोबती हुई गह भीर सप्तरीमें पाक्स संदेश गार नीमपरक
सामन रमरिये।
नीबरस पड़ा। योम-मा समी बवामो, इवने सरेण क्या में
मप त्यसकता।
पिराने मिठाइकी मामा दलकर, सिरहार पहा-यापीत करते-करते
मिनकोबर सामो, ना सकोगे।
नीबरने कहा-पिर मौ साना दो पाया।
पिम्ने कहा-! या तो माटी ताग न छोड़ने प्रमोगे, महीत या
र मषित मात्राम खानी पायी।
सगे पास सीपार नीबारने मागुम्हारे इस निपने पुस्म' मार
वोरोपावकिबिसीकनमें गार पाबा!
टीवार उठी-मुझकोमी भैया
पिरास्ने पमबार सायकली। सागे नही जायेम।
मुख्यममें वापर पवा पागा इस शिकायतका
२
जगमग टेद महीने परकी बात है। पांच दिन मोग पुतबार मात्र
मे मौनगरको दुपार न पापियाने बानी पर परमार, बनेपमे
वियस पर पु का पीनार, पसर विना यमपर उसे रिय दिया था पर लिएर मार एक मारिपरी पो भुपपाप पड़ा रेस या मा । हरिमनी तपासी पीरे धीरे पता मत दी थी। दोड़ी देरम हो विगन नार- बोर मतो माह पीटर बिलगमे, रोमी पोधी पाने उसकोठरीम रावर पुराये कोठरी से प्रकाशित से वठी । नीमारने उसकी और देखकर पिरास्ने -पानन्द बागी पूध मानी पी गाउँ, पूसा सम्पन भेग । पार सिपाने पुरनों पर बैठकर हाते सामी माये की गमी मनुमय कराना, सुतार नहीं है। नहीअनधी, इस मारपतम मैया मन मा पर परसा हो या! भाव समेरे ही सुना कि पारि मोती मोरपी हा देशम मालपारगमरमें सिर रसनेको जगह नहीं है। मीवरने पत होकर पूजा-मोठी किस परेको पता निकली। निगम ने परा-बायको-माँ प्रविध योरको परो माण! भारा, उसम सही मा कम्पवा-पम्प पिटो सनीपरको रातो सिके पारमधनकनार पर पानसे हमारे शरीरपर पाबने देखा परीर से महाया। मम पापीघालून सूनकर बार हो गया। स्ट पर पड़ी देरखा रोची रही। उत्तरेर मानता मानी कि धीमाबत मटा कर दोगी तभी तुमारी पूज्य पदावर पर कुछ वा-पिमीना यो मानी पानेावे नियमका रोन मास मौदाँले मीग गा और ये द याद गिर पो। नीरने विसित गरमा-गुम सा उपचास किये हुए हो। टोन ग्रामा मामी नहीं साठी 1 सिप यसो एक मही इसे था पर ममर पानी सिा या साधी पास नही सुनती । भीमरने पाहत ही बसर होरर मापा या माय पयस्पर नहीं है। पियन बोसी हारते भने माँ पोते मा- पान नहीं है। मत पापडपन मगर गुम नारी होडर मत दो गन पनि पिपम यह मा चीन प समाह पावे हि ऐते दिनों में उस दुलार मानेपर मतार मांतर पाने अमता वापर कापाको किरियर अमे-यै माये पूधा दान मा यही है। वारयना पायो यस्तो बाहर कामे भग। पूर्व मुखीसे उठ बैठी, बोडी बायी भाभी। वो पित्र देर न कर।बा भने राहिए देखवावे मडी ए रान मोगना। एटी देरी से एक दौ। नीमावरन बिरा- मी माग समी परिक तुमठे मी पायी जय। विराने सार गर्दन रिचार प्रा-पान समझो।पारे मार, पारे भौगों ए पतसे पहार और कोई नहीं मार मा मा पोन पनेर समदी बहुत दुख भोर कर होता , पिन पनि गनेते तो बाघ संत मुर साबो, भार पंच रिनसे मना पि पिन पिता भोर पुमाना मारे एक बार मी सपाटन हुमा कि उपम है- कान दम्पभो तो मनी किती गन को रेल से नौकर से सपा देवर बोचत! नियमोटी-मोरते मों पायल्पम पिरासासा किया १, सो मैं पानपा देववार, हिनि मेरी व परे। अगर तुम मला ही में एक दिन मीम जीती। मांगराएर पुण्ने पसे । पर या प्रेम राम- पाई समय रोग नली, एम- नामे युमर पूये नही इन दो माहाग रेमो वामने नदी जमी, माते शिरते काय माँगी रीना मी कोर मीना है। उसमान बताकर मार गये थे, सोही ठीक बार मई लोग प्रिोपोजानते समाते में, भारत महा समाते । नीने पानी, नहीं समाये, दम पर समझा दो। विराग्ने पा-में में समता सती में दो स्पो, तमलो पार को कोई पो बगी, बही समय में भय महागने को-मी कसा गोश दी है-मार पियम त रठी । इस बार
विराजपा
रिपार पहेकी जाती और मामेका रसप हायसे अनुमान
पोजी-मीठो नही।
नीलांवरने गर्दन बिमार कहा-नहीं।
वियनमा-पिर कोई सकी बात नही | भाव ओ सूखहग को?
प, सब कती सेमारी कमसे सब पाती भान भगर कोई
मेय एक हाय मी काट गरे यो शरद मुझेप नहीं जायेमा ।
इसी समर या नौकरने पाहर से पुधरवर कामेनी मा मेरो
सुमवर मना रोगा।
नीमारने याबा, ना भरपोर मरत नहीं है।
वो मी नौकर परिमाका मनुमविक किए बसाया। पिरामने यह देखकर
मानाही मला एक पर और ममी परेपर
तीन-चार दिनद मायाम करके नीवर बार पस्टीमम्मी
ठामा पाइनेम मोवी मोह पार ने पारा ठाकर, वम एक
पार पार न तो वो मेरा हिमन्स मस नहीं करेगा। एक बार की रख
दो ऐक्टा को हायर मात्र या स्ठ मा।और कप पर कर नहीं
म्भ, पास होकर रोने गया।
नौकारने पूम-में क्या बात पने नि
मोठी बाद पता भागने लगा-सोमा ताऊँ । मैमा असे काम
मी पहीनीची धामें काम म्पिा मावा सारना part, मी
होनही बनता ( रा प समिपे मार उसने दोनों पैर पहिये।
मौमारने माहिले पैर मार मालर,
कारन ।
मोतीबा में पी0 बाया।
उसने बोने मागे नागार मनी मनम्ता पार न पत्र
समीप रोगियांची सेवा कर विषय पर इतना मलिक गया
मा किमारपस गाम विधीको मी बोई कठिन पेग होने उसे एक बार
रिपये मिना उस से साम्सना और भामाख्नकी पापी मुनमा गीर
थाम्पीर सन्नौ किमी दर पीरवन मावा मा। नीमरद मी यह
बाना पानामा समान किया कमभितमेम
पिपत्र वह
१२
बेपकी दवाफी मपेशा उसके पापी प्ठ उपायके से पानीपर भक्षिक
भादा रखते। इसी मामी विसीको मुलनीय सकता था। माठी
मोहन भौर एक बार रोकर, और एक बार पैसेंची पूड देनेची प्रार्थना करो,
बाल पोग्वा हुमा पा गया । नीगर गीग्न होकर सोचने च्या । पति पर
भर मी कुरुकमधेर पा, गौम्न सो कुछ नहीं। सोचने पक परसे मार
कैसे निरसे । पिसबसे प पहुच ररता प्य। उस थमने पर बात कैसे
मानपरबाये!
ठीक इसी समन भीवर भागनसे परिमतीने बोरसे पुकारकर कसदारा,
मामी मावर मार सोने किए करती है।
नीरने माब नही दिया ।
पत्रमर बाद ही रिमठी शुभाकर हाबिर हो गई। बोटी-सुनाई नही
पड़ा दावा!
नागाररन गईन रियर कहा- नही।
परिमतीने पापही पोहा-मानसाना बा, सबसे पही पेठे! मामी
करती १-पेटनेकी भारत नहीं है, पसार जय सो गो।
नीलामरने बीरेसे पूज-तेरी मामी म्या पर यी है पूम?
हरिमतीने पा-ममी-यमी साने ठी।
नीमेवर ने पुकारते हुए मा मेरी मम्मे पान एक काम करेग्मे !
हरिमवीने मि दिलाकर करानगी।
नीबारने भौर मी कोमड भागममे पहा-अनुपये मेरी पारर भार
अवा मे मा।
বার পর সব্য।
वीरने परा-हौ।
परिमठी उपर भोर्स पवार योप-ना पा! मामी ठीक इसी पर
किये सपने पर्स हैं।
नीमरने भागिरी कोशिश पर हुए सा-तो नाभलेमी !
परिपतीने रोट गिर रो-तीन पार गरा-मारा।
मेगी तुम मरो।
वियस पर
रम समप दिन दोबो मार देब धूप भोर देमहर तक मना
पार निकलने की बात पर मोप मी नहीं इसलिए जय होल्प मानका
राब पको कोठरीम भाकर ट रा हरिमती कुछ देरवा मनयन पती
पस्वी यासिर में गा । मीर मुफ्पाप पर अपने मन व्यायचे
मासिनेगा दिपाठको टोकरित हर पर सनेसे विराजमा
मन पसीन सकता है।
बबन पाया रह चुन था । विराम मन परके दे मोर पिने
सीट पर पर पहु, ठीक नीचे एक सरिया सामे, उन्मय र
सपने मामा-मामीको पार पोका एक सम्मासिस पीपीसी
पीतामाकी पासे गाव कवर उभान पर मुस्कुस बसा है और किस तरह
उसकी माँगका संदुर और हायी भूहि बच गहfera, क्रार
दुप मी याकारी सम्पस न होती थी। इसी समय नौकरने परमाप्रस
डीएनए उसे पुधरकर मेरी एक बाठ मानोगी !
मराने रात बम रखार सिर उठाकर, पूछा-को, सामाव
मानो होना
यिने -मननेडी होगी तो बम्प मामी । स्पा पार है।
नीमरने वममर मोबारा-पानेते कोई धरय महालियब, तुम
मेरी बात न मान की।
मराने सिर प्रम नहीं किया। सम उठाएर पत्रको सम्पस करने लिए
एक बार रिहा गर ! नेम मन नहीं लगा सकी। पनप पौदार
मीटर रीमतर नरम हो उयर उठकर बैठ गा।-सा प्रो में बात
मानगी।
नीर मुमरा दिया । रिपरिपाते हुए गाम-भाव परको
मोती भापा धार रो रोवे मेरे पर पकाकर बैठ गया। उसे तपसकट
परम में देरी की एन पी बिना उसका प्रेमन्त नगी पगा। मुझे एक पर
ना होगा।
पिराब हवामी र मुन-सी पैठी रही। गोड़ी देर बोटी- रोमी
शरीरको टेकर मामामे।
२
पिया पर
१४
क्या कविराय, मान दे पुरा है-एक पार मुझे बाना ही पमा ।
जबान प्यों दी।
नीयबर पुपटा रहा।
रामने सपनसे कहा-तुम क्या समाप्त हो कि तुमाय बन कर
दुमा उसमें मोर पिसीको कुछ बोल्नेकाम नहीं हारा यो से
पारेपही कर सकते हो।
नीरने पाठीको हस्ती बनानेकी गरबसे स्नेकी पाश की, किन
पहीका सभीर मुनगर यह स न सका । किसी तरहसन-मयर
उसका रोना रेलकर
मिराबबीच ही योजठठी--- तो! उसका रोना तुमने ऐसा सेकिन
मेरा ऐना रेलनवाम्म मी कोई इस दुनियाम । यो पाकर उसने उस पार
सोडी विटीयो उपर फैले हुए कहा-मोद ये मर्द मी से होड
हैं। पार दिन भोर पार र साना-पीना-सोना छोडार विद्यारी-उसका
यापदम दाहापारेरो११ पर-पर दुलार भीर पीटारिमी इस एगी
निमको पर रोगीको रेतने-जूने वाते हैं। मणभो मेरे भी ममपान्
१। यो पार फिर एक बार जाती मीपे रिपा दबाबर यह पर दी।
नीवर होठोस पदुत की दवी-सी मुम्बयार मा गर। उसने
धीरेसे काम भौरतोंकोसा पेण मरोतापास-पातम मगवानी
दोहाई देती।
बिगत ठरेटी और प्रेषक मयोभीनहीं, भगवान्म रक्स
तुम्ही मरोगामि होगे नहीं। हम पर्सन नहीणी गुनसोपी माग
मही जनता मुन्नेको नहीं बाती इमासे हम दोयोको नी, भीग गुम
रोगोहै।
नियमप रेगर नीतपरकोसी भा गर। टमने कहा-पोषन
रोपियन यमुपही ऐना है। पर एक तुम ही नहीं, गमी ऐसी
अयान मराना एमसिए बिना बोर पारिए, उतना मोर मोरतीराम
माय शोर।
पिराजपा
१५
विराम भोर भी खाएर बोटी-नहीं। बहरमा भारठा गुण है।
खेकिन अगर शरीर की ही इतनी पतस है तो घरफ, शरीरमें तो
मौर मी मषिक है। सैर, बहस होगा न हो, तुम पार मिनी पार करो
में तुमको मारोगी शरीर पर निकमने नही दूंगी।
नीलवर सुप होकर मेट गपा, सि कुए नहीं योग । मिराब मी सुदर
वाप पड़ी थी फिर 'म हो गइ पर्व पर उठ गर। गमग टिमर
पार सहा-बावी करने कोठरी माह हो देवा पति पगपर नहीं है। सन्दीसे
निमयेको पुरा । पूज-ये रे दादा का ग १ मार बाहर तो
दपमा।
¥य गैरवी र गर । पारस्पैच मिनयम पनी हुए स्टी । मोर्ग-कही
नहीं है। नरिमा किनारे मी नहीं।
रिराम गईन बिगार मोगइमार रसोईपर दरवाजेपर माकर
गुममुम होकर बैठ गी।
३
वान साबबादकी बात है। हरिमतीको मुसराप गये दो ग्रीन हो गये।
छोरा माई कतार पता एकही पर है पर उसम पूमा-चौका मग हो
गया है। शाम धरपुया पार पामय परामरेम एकट्य घटा
उपर नीर पुपका पेठा बा । विराम सुपचाप माकर पास सड़ी हो गह।
रिने उपर रेतकर कहा- तुम एनएक माँ!
वियम्ने एक किनारे पैटकर का-एक बात पूछने भार।
ममा पूणे!
विरामने का-सा सानेसे मरण हो पावापता सकते हो।
नीवर कुछ न बोमा
नियमने पापा दो सा ऐ नहीं हो स मा कि दिन-दिन
तुम इस व्य खते क्यों मा ।
किसने किसूना भया।
पिराज पर
पिराबने पामर पति मुमपर धोखें रिकार परा-स्या समोर
बतायेगा तब ही में बागी! मळा, यह सा स्वमुच भने मनकी बात कर
पेहो।
नीदसर माया । पात समाव हुमा बाम–नारे, या पास नही
है।किन हमसे सही मूह होती है, इसी से पूछा हूँ किया।
मसी पोरने
तुमसेप दिया है या म प ही ऐसा समझ बैठी हो?
विराग्ने रा समामा क्वाब देनेकी काई बरख नहीं समझी। पा-
तुमसे रिखना कहा कि मेरी पूर्व काम्पाद ऐसी सगा न ये यनि एमने
एक न सुनी। जो कुछ नगरी पास थी पापढी गइ, मरेम सब गाने
मी पछे गये। नूप लिए जमीन मिरों रख दी, दो माग स्व गते ।
उसफर या दो साले भकाल पाया है। अब तुम्ही पवाभो, दामादकी
फाई का तर महीने महीने पैसे दे सकोगे १ बरा रोल दो गई, वो यत्रो
मा-पटी बाते सुननी पोगी। पाभिम्पनिनी की है हमारी निन्दा
किसी पर न मुन सगी । भगवान् भने मन्तम सास माह काय !
तुमने पेसा काम पौ किया।
नीबर मैन बना पा।
पिराव पाटी गई-- सिवा अब रिन-यत या मा करने
विपारसे उसकी चिता में पुनगुनार, म मेरा मी सर्वनाश करो मा
में न रोने गी । र सो तुम एक काम , पो-पार पीपे कमीन बार
पारच तो स्प्पे सिमा परो भोर गले में पड़ा गयर रामार पापमे
मोकि ये कप मेकर मुझे पुरमारे लिये । हम मेग गरीब से
भपिक नहीं है सरते। इससे पूरी माग्पमें अपना मा पुरा को बरा से
पो हो।
फिर मी नीशापर मान होगा। उसो की बोर देतते राकर रियम्ने
पदा-नपराग।
बोटाने एकमा नाम प्रेगर हापा बता है। मीन मगर
ममी युपमेयराटगे रियम, तो दरमापस्य होगा।
पिरानने-रागा भौर सा! अपरार गिरगने भीर माम्नम
पिराजा
सूर और मि हिपना मन भरनेसे ये मामी भनौ। मेरे सा
बाम दोरीनमिस लिए पम्हारें। रेडर हम ही दो प्रापी।
मी गुबर हो अपमा । और मगर पिता दो नहीं हुमा तो तुम बोरम
ठाकुर दोहोरी।
इसके पंप दिन गार, रावस बजे समय नीमेवर पिनेपर देय
योत गुडगुती नाही मुंहसेच्या उमाम् पी गा पा । परसा समकार
समयर लिगर शान करने से, पर ठी मने लिए न सा-या
एक पान मा रही भकिएकाएकधीमधी पाम्पकापा
सम्म बाम:
सोको नी एक मोर रसार नीस्क्रने फनीषी मार सकर बारा--
भरे पानी सप नहीं हो पा इट।
नियमने-सौ में उन पर नही की। किमुसा पदकी तय
भावना मी रेती ।।
कारने एपमर बार कहामैं पंटित मोनही विएम। सबवावे
मीना नहरी नि मेरी समर्म नही माता कि सप सदा सप रोख
है। सबसे मी सन पा, मोर मा मी समोसा साप रोमा।
निरामेमा-अम, पावित्री और सत्पपानी की को।
स्पनि म दुए स्वामी प पमहासे होय था। पर स्पा स्म
से सन्या है।
नारसे फरा-पो नही समता ! को स्पावित्रीले समान सटी पर
मन मे हुए पतिको बयभ सच्ची हैं।
विरामने बिना किसी दिपक दिया-बी में मी यम
पोबर जसको एप्रन्सस पड़ा। गोध-तुम मापा टनर समान
सठी हो।येतो ठारे या
पुनरा रा समर एक मोर रमते हुए निराकने पानी लय ।
स्टीम में ही मन उनसे मोमे कम! मेरी सी सनी चरम मात
मी दो टी-न्नुि मनसे, और भानसे, हमसे मार
पिराजया
कोर है, पर बात में नहीं मानती । पाहे सावित्री हो, भाई और मौर, में रितील
तिकमर मी कम नहीं।
नीमरने उतर नही दिया, और पानी मेरी मोर उपचाप देता
पा। विराम सामने दिसा रनार पान प्रगाने मेटी थी, वीसका सूर्य प्रसाए
उसके मुनपर पाया था। उसी प्रकाधम नीटपरको स्पा देश पाकि
विरासी बॉम्बों में एक मत पवित्र मोति ष्टी पदपी है।
नीठातरने टरहे-भरते रसको भार पड़ता ममीकर लोगी।
विराख उठी मोर पति रोपर माणरमकर बोभी-तुम यो बावाद
रावि मगर दोष समारनेके बाद इन दोनों चरणों सिया मन मोर कुस
नपाना हो भोर में मगर पपार्यम सती यो पुरा समय पानेपर में भी उनी
(सापित्री) की वय तुमको या सई पार उधर प्रदशनी परणार
सिर रतार मर सपा मापेका सिन्दूर भोर पापोंडी पूड़ियाँ भने हुपरी
चिवापर मोबा।
नामपर मस्त होकर ठठ पेठा मोरबोध-भाव तुमको यह पसा हो गया
विराव
मिराबकी रोनों माँस पाइहाही मी उतई होटॉर गावदी
मीठी बोर कामम सी भा गई। उसने कराया तिर मी सुनना, माग
नहीं। भाजपो चल पाणीप दो कि परछे म इन दोनों बरपाली
भूट मिले और मैं तुमारी गोवर्म पिर मार, उमाप मर रेती र मा
भागे पर कुछ मोहन को उसका ग प यया !
नौगावरन ररकर, उसे लीपकर मपनी पाठीतेगा हया भार ग्रा--
भाग या मारेपा सिमीने !
अपने पतिकी तीस मुप रापार पर पाप रोने बी, 10 उधर
नारिया।
नीदररने रिहा~भार मा हो तुम्न ऐण नहरपा, रिया रा
मा !
निराम्ने पुस्माप सपने मौन प्रेसिपे र नहीं उठा। मृतु सरम
-पिर नि दिन मुनना ।
चिरामा
नीमरने पिर पर नहीं दिया। उसी पय टेबैठे वसईमा पर पारे
उँगली भयो दुए उपचाप उसे मानवना देनेगा। कोनो विवाहम निक
बाहर सप र शब्ने कारण या कुछ उखानमें पड़ गया थभीर जब
पासेकी ज्यास्पोका मम नही पर पता या । उमस रोमासे स्थावार
माह पाया था। कोटीम पान नहीं पोतरमें पानी नहीं, मी नहीं।
कोका ग स्माता गया। बायम पम्प मौन पसार कोसर थे।
उपरते वदाने तगारे लिए माना-व्यना शुरू कर दिया था। उसके
समुर मौसमी पारद लिए एक मोठी, कापवा चिनियाँ मेजय
राब पर सब बानी। कितने ही न रचनेवासे भपिस उसपार
मी कापसे नायरने किया रस। समप पर निम्न पर बने
ख्या-बान पारितीने ये सरबाट विराम का दी है।
शिव एक मह उपर उठाकर मुसपई और मोमी-पपा, एक
बात पूर्ण समसब बहामोगे!
नीनारने मन ही मन पार भसि पित होरा-कौन-सी गाव!
निराकी सबसे बड़ी मुन्दरता उसके मुसकी मनोरवी की। एक बार
पीसो र नारी मुसली पोर रेमी या रोटीमा,
काठी कुछ को नहीं है।
नीरने मिहित्यारा-नहीं।
निराख्ने पूम-नयर मैं कान्तिा हाती, गे सा तुम मुझे इतना
चारते-पवना प्यार करते है
पा भद्सव प्रश्न सुनार पर्याप 50 मिरिमत दुमा स्थापि उसकी
मातीपरसे से एक मारीयोश वातावर गया।
उसने पE TER सटे हुए प्रा-में-दो बचपनसे एक परम सन्दको
ही प्यार करता थापा, इस एमर से पार किया अमर भी
वित होती हो वा ख।
पिरने दोनों हार पनि गमे गये और भौर भी पत मुंडे मार
मा-में क्वामि साखे ! वाम तुम मुझे ऐसे ही प्यार !
रिमीवर रस मुलको गुपचाप देनाठाया।
MSप्रेमसाप अपने भामस्से सावधानी साप पति
परिसरमै काय चिन्ता मकरो।सास मरते समय
PRIMeपगई। प्री मटकी भाण परमनपेटी
AMPAT मोरिया में सातिमोभारगी। तुम ममा
Artiपोमते मुरप्रय पापमो इमर्म हमाग तरबन
Revoकोटामा गमेने बाप-तुम मी बननी पियन
दिपाया
मिटमेगा-उन कास्परो होरिया मन कसे मान सिमा
रें।
परदे बार रेपो रेख-सी सोप रा है कि तुमने से
रघरस्य गर, रवी पर एक तरफ सिर रसार टेर
र और सरसो रे बाटो हुप से पेटो-मेय मन मुझे रवा देता
है। स्टरा पनीर उतना दम पुर मी अम्नेको नहीं बीमते ।
मरची तुम सपो मुझे ऐसे दो पार करते। ये भम्पार,
स्रोगाम की नहीपर सन्ते । सन्नी स्त्रीको प्यार न करना
-सप है। इसीसे में बनी है कि बगर में पानी इसी माहोटी,
ते इतना ही प्यार-मार पाती।
भरने कोई मबाप नही दिया।
सरसिर गार दिखने एकाएक हाथ बहार भनुमानसे सामीकी
मोसे रेसा और फिर कहा-पा बोलमि भार को।
पर प्रेमसे उसका दाप हयकर मारी गसेसे कहा-से वाना !
समामा-गुम मो भूकमठे हो कि नौ वर्षकी मस्पर्मे मेरा मार
• रायो भूग आते हो तुमको प्रनेके बार मैंने तुमको पागा
महाप रेकर मी मा नहीं धन पाd कि मैं मी उतम मित
More यहाँ की। उसकी कमर भाँकि योनीसे पूरव रहे
विपजह २१ मन मा किया है- माय नियमने भागे पाने नहीं दिया। पतिका मुह आपसे पद पर पोळ उटी --में सब अनती है। और कुछ पन मा न बान, या निमम गनती है कि तुमको बीमार न पहने एंगी। ना पान होगा। मिसलाबो पापना हो या देदो र निस्मिन्ट अभो। फिर इसके बाद सिर पर मगन् । मोर परमो नीचे में है। नीवर मी सास सेवर दुप हो गया। । 8 महीने भौर मी गुबर गमे । रीका प्यार होने से ही साय मार म्मीन-बाराका परमारा कराकर भग हो गया था। नीररिस्में भागा या उसका कुछ हिस्सा उसी समय गियें रखकरना पड़ा था। प्रनेकी भारत मही पीतापरने एक सेकी मी सहायता नहीं की। माली कुछ कमीन और पूंजीपपी, उसे नीठावर एक बार एक गि रसार पानाईकी शाईचा सर्प हुयने गा और पसी पकाने गा । इस प्रकार वह दिन-दिन मपनेकोप नाग-पापम बमवा गया। मेकिन ममता मारे परमपनी पाप- चापर किसी तर एकदम नहीं दे सका। मार तीसरेपार उस मोइस मोकनाप मुसऱ्या माफी माहिए कुछ पदोबा गपे। मादम सही विरामने यह सब सुना । नीलीवर मेसे ही भीतरामा पर पोसे निमार उफ्माप उसके सामने भार तपो हो गर। उस परेको देखते ही नीर मारा उठा। मम्मान और छोमसे नियसमें भाग-सी बायीबी। मेकिन इस मासको दबाकर फगकी भोर उँगीसे रायकर, प्रशान्त गम्मोर स्वरमें उसने कहा- टो। नीधार पलंगर बैठ गया। पिराब मी उसके पैरों पस नीचे बैठ ग"। योगीरेन्यो, भाजपा कम कर मुझे उरिन करो नहीं हो मैं मान धमारे पैरसम सादगी नीबार समझ गया नियमने सब बातें सुन औरें। इसीसे बहुत सरते पिराम पर २२ हुप, प्रेरन् प्रकार उसका मुँह मना राय रखार मंद कर दिया और सीपार उसे अपने पाठ बिठाते हुए स्निग्म प्ठसे कहा- बियम, गधारण बावामें हीरत सरह मापेसे बाहर न हो या करो। अपने मुँहरसे पवित्र हापायकर विरामने मा-भगर इससे भी भावमी मापेसे बाहर नहीं होता है तो फिर कासे होता है वामो? नीलपरको एकाएक इसका इस बार नहीं सम्ा । पर सुप पैठा रहा। वियम्ने मा-गुप क्यो ग गये। बबाल दो। नौकरने पीरेसे कहा--समाप देनेको एप मी नहीं है विरामकिन विपन बीचमै हरी रोकर का उठा-मा किन-किन काम नही पदेय । या मरोसा कमी न रखना कि मेरे ही परमैं सो शेयरोग माय भपम्पन र बायगे भौर में अपने कान से सुनकर सहगी। माथे माज इसका कार उपप को नहीं तो में मपनी ग्यन रेगी। नीबाबरने टरत-टरते कहा-एक ही दिनमै इसका फ्षा उपाय करूँगा विराज। गिरावने कहा-मय दो दिन बाद ही पा उपाय परोगे, परा मुत समाभो। नायवर उप हो या। गिराने पा-एक पूरी न ए सानेवासी भाग पर अपनेको मापने- की कोशिश न करी इस तर मेरा सपनाधन कये। जितने दिन बीबगे, उन्ना ही तुम इस पफनमें अनेको पाठे पामागे । मैं तुमारी राईदेवी है दममे मीत मंगता है तुम्हारे पय पन्नी ममी, इसी पदो इजा कोई उपप बगेपुरकारेकी कोई या निकालो। पासात-बाते भांमुपोत उसका गरा मर भापा । मोन्दा मुनी बाते उसी प्रवीमे धन-सी घुमनेगी। भने हापसे उसके मात् पोन्त हुए नीबरन परितेमा-च तर भारत आइनस का दागा विराम! अमर एक साप्त पूरा फल हो गई तो मैं मम्नी भीनी-पानी याद मुग में मांगा । मेक्नि पेप टारनेग तो ऐना नगोगा-परसोरोला।
यिराम पर
२३.
खिने गए 18स का सोच लिया है। एकता भगछे र पसल
टी-सीर नाही या मरोसा है? उसपर म्पामा पानीमोर सेनदागेका
करा स्पा। मैं सर सासवी सेकिन सुमारा मपमान नही सर
सड़ती।
नी पर माप भी इसे मप्टी टप थनमा पा सीमे १८ पानी
विराजने फिर कहा-मुसको क्या एक महील। दिन-रस सोच करते
परते तुम मी मौरपर सामने ही सो गये हो। मा सोनेत्री रे पानी
पाती बायो-महा मी देर प रसर माँ कहो, या घटना
सानेरी कि मुझमें है। बोगीनकी पारस खा मौर सवा देना पागा !
नीमारने पास एक सामौर रियाद मास्टर होगा।
एममर पुप यार Aपम्ने काम्ने पूर्यको पाल-पोसार भावी
बनामारे बरबरानो ने। दिन मगर पळे मालूम होगा कि उसकारण
इतना दुजाना पोगा दो ठसे अचम्मम ही नाम गाती, मी मने सिरप
गान न गराठी रे मरवान् । मायादी, उनको नहीं,
फोरमी नहीं। तब मी कसी पर हमारे कोरोन सून पूल्ने उन
पनिक मी रमा नही माती-सरसनहीबाठा!
पवना पार, एकगारी समी संसार पर मुप-मी रोपी मोही-
पार भोर समारोपारो मोर मार कासी छाया ! मी तिनेही
दुती दान गया होने लगे। किन दीग एक न लाने में
है। ऐसे मे समपम इम टोग पराये मेरो स्मों पदातिर मादी
बनायेंगे ! पू समुर फोरमी नहानामा भादमी पर पयर
अपने पाको नहीं पा सकते हो हम या पार्यायो दुमा ये दुपा, भर
अमरबन से सकोगे।
२ छोर मी सीगार नवरने 10-सत्र समा?
नियम मार मेने शामिाम मामने कतम तारो प्रतिज्ञा की, टसका
क्या होगा।
पिराध मुरन्त माटठी मी न हग सिटिमाम भार सोमवार
यिराम यह २४ सोपा मारा स पर समगे । फिर मैं मी तो दमाग भाषा भंग है। ऐसा करनेसे मगर कुछ पापभोप होगा हो उसे मफ्ने सिर- मार कर बम- पपमान्तर नरक मोग दंगी में कोई पर नहीं है। अब दुम नमो। घमारमा स्वामी एपम यो पोर दुलपापा सिम्से तनिक भी गि नहीं पा मेकिन अप यह भपिशन सह सकती थी। पास्तव में पति ही उता सर्पख था। उसी पतिके दिन-रातकी चिम्वासे स्मे हुए उपास मुनी भोर देखकर उसका स्वस विदीर्ण होता था। परभमीतक किती यमाई ऐकार पात कर पी थी, लेकिन अब न कर की। टीसे पतिकी छाती में मुंह पिपर फूटफूटकर रोने लगी। दाहिना हाप विराब सिरपर रखकर नीर मुफ्लाप पत्थरकी मतिता नियम होकर बैठा पा । देरतक पेनेरे पाद विराग दुस्वादुपिकी वीदा परम्ने संगी। सपा से ही पतिकी छाती में मुंह रिपाय रोखे पते पाही- पपपनसे सेकर मी मुझे मार, मी तुमाय म उवय पा सन्ना नही रिसार पग, कमी तुमको मुंर फुयपे नही देला । पर पर तुम्हारे मरी रफ देखते ही मरे कसे में पपनको तिा बनने दगी म मफ्ना सपास न रातोपरा मेरी दी तरफ एक पार निहार रेपो । भम्हमे मा तुम सपमुप मुझको परकी मिजारिन बना गंगे। भौर पर मा गुम सदन कर सकोगे। पिर मी नीवर एक अपर मदे सका। मनमनेकी तर धीरे-धीरे शीर सिरफर आप फेरने हगा--उतालीम गलियों पपने हगा । एती समर हार पाइरस दी उसी पुरानी रासी मुन्ने पुपरकर पदापनी पूरा मग ! विरामसार उठ बेटी । भारसमे मर भोर भाप र पोटरी बार निसमार। मुम्दरीने शिर पूज-पूमा सत्य ! राम्ने भस्म सरममा- तुम होयो र पाना बनाना पगा, मैं तो भर पुण्न राऊँगी । दामीने मोर बोली भाषाम, नो परको मुनापर करा-पार हा
वियस पर
२
स्या गुम्न रातमा मोगन गुरु बन्द कर दिया ? न साबर मापी तोप
गई।
स्यिबाप पसार उसे सामठी र पोरकी रफ से गा।
पूमेकी रोशनी विरायो मुखपर पायी थी। योकी दूरपर बैठी रासी बासे
घर उसकी भोर निहार पो थी। एकाएकाठठीच करती हूँ महरानी,
गुमाएमा पम्ने किसी मनुष्मम ही नहीं देखा। ऐसा समतो मापदे गों
महाग पाँमा नहीं है।
उसकी भोर मुंह कर पुछ विग पर नियमने मा-तू क्या राग
महारगषी मी खबर रखती।
मुनरीकी भासा गमग ३५१६ पपड़ी भी।विसी अमानम पामी
मुन्दरीही पदी पी भार उसकी पारख भाग मी एकदम मिट नहीं
मटी-उसे कुछ मी माद न कर उस पार हुमा भार कर
विपन होगा । किन सोदागिनई सौम्ाम्पटे वा सिटही बंचित नहीं हुर,
उसके गाव पिपुरम उसकी या मुत्रीवि पी है। उसने ईसकर -
राग रबाडोपी कुछ न कुछ मबर को रखती हो गहरानी । नहीं तो उस दिन
मासे पूग न कर देखो।
भाषी सिब सपनुप ही शोषितो ठी। बोम्पापही बाते
यो किया करता है मुन्दरी ! उसने बोकी पापा का बिपदमों
या मारती ! मौर मुहकोशीमा बेघर सुनाती है! परमोधी मादमी ६
मुन पागे वोपा कागे, गोड!
मुन्दरी कुछ कर मोटी-पानी मुन ही पो पायेंगे बहानी ! मामी
कोरबाट पात!
मराने कापातम बात नहीं। पासा मुझे समझावगी। इसके
मियोहारपार सम्पत हो गया उसकी बात ठटान बखही पारे।
मुन्दरी भयो एउटी-हाँ होला गया बायनी 1 40 मी दो मुझे
उरा बार
नियने मषित होकर बा-गरीमा नौरी मेरे पहारेगी और
विराम या ૨૧ बोको अगा उसके पास दो बायगी ! तूने ही वा पहा था कि उस दिन मागमाचे पसे गये। मुन्दरीने का सच ही ये का था बयनी । रो महीने हुए ये बछे गये ये, मेकिन भव देसवी सभा गये हैं। और मेरे बानेकी बातचे पती हो पहरानी, सो सिपाही पुराने आता है तब 'नही' से कर गोबीया जम्मेवार मौर हम लोग ? दुलो परमा । बिस वापर उन म म मायूँ ! विरार पमर मुम्बरीकी भोर तामती पी, फिर बोली- क्या इस गार समीर। मुम्बरीने रेतकर करा- पानी । यह बात उनोन ही सरीरा और बदी तम् गाकर परे है। सत्र पाती है बायनी, सचमुच पनाम्मर है। भादसा मुन्दर नाक-नाया है। भोख पारा विराब एकाएक रोगार योग-पर-उहर, चुप य । पर हर वा मने तुमसे महीं पूछ । यह पता कि तुमसे प्या पा मबती मुन्दरी मनमें बोल उठी सेकिन उस भारको पिार धीमी रमें बोटी-पात भोर पाऐगी पर वही तुमारी ही पर। पर विराज पुष हो रही। पदापर वाव म्प समय देनी होगी। दो साल यह महासागर एक नमीदाराप भावा । बारारका छोरा येय यमकुमार बारपाटन भोर ताल। उसके पाप उसे मीरारी काम-काज गिठि और पस करने दिए, लासकर सर पार एपने मंगास, प्रदीपिसी इस्लाम भेना पाते थे। परमास पाया भाया सेपिन कपारी मकान म होनेसे माम उस पार, प्राककिनारे एक मामः पागम सागर दता था । मनि बिस दिन पा यहाँ मापा उस दिनसे रिटी कामगार पान भी नहीं परवा । उसे पधिरी शिकार करना पड़ा था। द्वितीकी पोतम पोटपर धेि सन्दूर पर एप पार पंच धिकारी इचे गाव पर परेरिन नदी किनारे किनारे पर चिरिणम शिकार करता मिला था। या मीने हुए, एक दिन म्प्पा समप, गोहि-पगडी मुनी मामा मनु रञ्जित, मौगी पीती पहने दियबा पर उमने नम पर गर । विराम पर - पिपत्र पर २० पाचपा पार भोरसे पोप मौर मोठे शोभरम पिसी रमे देसाई नही रेवा था । सरफेना-भाकर, पानीटे मा पहा उमार भयको भालें उपरको स्टारिनु भनी मारमी उसकी पार मोक्ष होगा। रामेन्द्र परिपागा सोगकामाते इस तरह मारा मा । पातक हो सम्पषि-स्तुपफर तो और उसने विराबको देखा। उसे से एमए पर पिणतीमा मनपा मी इदना स्प होतात पोरसे मासे नफेर समाविधिसित सासरी गायरा भनुबमधीम समयको मानोर निहाजमा । बिरामकिसी ठप भौम पोती स्य निरम करमर साब पत। रामेन्द्र में मार देर मोर मी सड़ा या र पीरसे ग्रेट गया । यही सोच-सोचते गालियर सम्मत दुमा साथ, इस होटेसे गौरम, यौकोर मा भादमी नहीं पता रखना मरम्व कप से और कहाँस ला गया ! समपूर सैम्दपीका परवर मी उसी गरुको उसने पायावर प्रासच्मिा और उसी महीसे उत्तर दिमागर्म एक ही पिता पर गई पूरा कर समार ही नहीं था। इस बार बार मी रो फेरियम उठा साम्मा (भा । उसरबराबने पर पवार सुन्दरीको गदर पारपर बोचा सुन्दरी, पदों पर स्पायक मथरपर कोर बारमी सहारे, उसे मना कर दे कि पर कमी हमारी बगिया परन रसे। मुमरी मना करने मागिन पास पहुँचते ही हतबुदो गर । बोरी-- बाष भाप! यन्द्रने मुनरी मरी मोर देखार पूण-तुम मुह अपनी नहीं ? मुम्बने पापी मारको मान नहीं पापना ! मानती , मो या' मुन्दरीने नती है। गन्द्रबोध-सा मा एक बार यहाँ मा सस्ती हो? मुनरीने समससे सिर कर धीरेछे पूछवियापूर्वी ! काम है, क्य माना । यो पार क्यूट फोन मार, पा पच गया।
पिरास पह . २८ इसकवाव किसनी ही दफे मुन्दरी सिपा, समारेमें उस पारकी पमीदार पचारीमें गई। फिवनी बाते की, मार पाँसे मैर पाकर एक भाप पारे सिर पर कोई मी पाव विराम सामने उठानेकी रम्मत नहीं कर सडी । मुन्दरी कुछ रफ न थी। परािको प्रचानती थी और मप्टी तग धनती थी कि यह मामाहरसे चाहे चिटनी मपुर मौर कोमा विसाई देवी हो, मेकिन इसमें मीठरकी प्रति बड़ी उम भौर पर समान है। बिरामर्थ प्रेम पफ पीच मोर पी-पापा उसघ कठिन मपरिमेय साहस । चाहे भादमी हो, घारे साँप-विग्छ भौर चाहे भूत-प्रेत, मा बिसेमा अनो ही न थी । एक कारण यह मी था, बिससे सुन्दरी उसके सामने मदन लोड सकी थी। चूम मीतर उनी सरकार, सुन्दरीकी बोर हर विरान मा- मम मुन्दरी दूसो किन्नी दो बार वहां गई-माई कितनी ही मी को १ सेकिन मुझे सो तूने एक मीगत नहीं क्तागी। मुन्दरी पप साहबुद्धि से गा किन पौरन ही संमतकर यो-मम किसने कहा बहपनी कि मैं बहुत-सी बाते कर भाइ। विराबने कहा-किसी ने नहीं-मैं पाप ही धनती है। मेरे दिम पीकी भोर भौर मी दो भाने, दोकानन ! बता कर इनामर्म कितने एसेमा दस रुपये। मुंदरी मरस बोड नहीं मम । उपरपर एक पीसी जापा-सी गई । पूसची (पटी रोशनी में मी नियम्ने उसे देख लिया और यह भी समक्ष गा कि मुन्दरीका कोई बयान नहीं समगा। विराग्ने कुछ मुसरारा-गुर वेरा इवना पा रहेग नहीं हो सध्या कि तू मेरे सामने मुंह लोब्बर १ का सई । एमपी कार भा-बाय स्पपे ऐर, मन्तौ भारमी मेषम सिकार बनना पाती है। परसे इस परम र म रमना । दापका पानी पैपर सबने में भी मुझ पिन मासूम होती है। इन रिन तरी सत्र माते नहीं बनती थी, पर दिन पासे या मी मुन सीय रे भौचरम बो दर सपा नोर पापा बाार पर भा। गरीर है की काम पंपापी पेर पुसमानी नबानीम पा र मुफी
विराज था.
हैपाको शिर नहीं सकता किन भरपर भादमियान सर्वनाथन
सुमरी कुछ पाना पारसी बी, परन्तु उसकी बीम मरमें ही बलापर
रमा।
पर म मिाम्ने देतीमा। देखकर कहा- योभने पर रोगा।
ये नवासे मैं विधीये नहीं की। मैं नहीं समझ पी रे भोपन्मे बंधा
पानोरात मामा पर भवन कम गई है।य, मासे तुझे मार दे
दिसा, फरसे मेरे परमै न पुचना ।
पर क्या इस पोर रिस्मबसे भनार होकर बैठी थी। ससे उसका
पानापनी उठ गया यह उसकी उममें एक महम्मवार की और उसकी
मनमें किसी तय नहीं बैठती थी। पाठ दिनोंकी रसी। उसने विपक्का
मार देला पूर्यको पाल-पोसबर यदा किया, समान के साथ तीर्थयात्रा
पर भाई।। मी परिकारही एक महि।भार सोशियने ममें
न पुलनेको दिमा । पोम भोर ममिमानसे उसका गम मर मापा -
माम रिम्नी हो मायाब, किसनी ही बात उसी नार दोगमाई,
मेकिन मासे एक उम्द मी न निकास, हिस-सी होमसकती यां।
विग्रस्न मन-ही-मन सब मामा मेकिन पदीयी। पियार
देखा, पतीन पानी कमर कम से गरा। पास ही एक पतली कन्टीम
पनीमााणेयर उसके पास गई । मेभिन नबनेमा सोमबार ममरमें
स्थिर होकर मय रख दिया मेरमा-नारे हामका पानी पूनेसे मी उनका
अविरमा डेग्मी ने एसी रामटे स्पोसिये।
पुदी विरस्कारका मी बाब न दे।
विणाने एक पूर्ण प्राण्टेन माहिर सी उठाकर रात पनपोर
भन्यवर, मामी भागलाई मोम होम मोदी नसे पानी कानक
थिए ।
सिराबोधनेर एकर सारी मनमें मारा किया उ
पोछे-पीछे सर मेकिन यह भरभरपूर्ण संकरी की ग्रा, धाय मोरकी
पाथीर, समपाम बने भबने सम्पपिस्सूप, या पुपना एयरवा रस, ये सब
पस उसकी भौता मागे फिर नये! मावे शतक रोगटे सरे हो गये, सिरक
--
विराट
प उठे- अल मावामें 'परी मैवारी पार पर सम्म दो-
छोरी।
रो दिन पारावरने पूज-समरी नही लाइ परवी पिणच !
मियम्ने का-मेने उसे बना देरिया।
मारने परियाय सम्बार भाजपा किया। पेन्नि बवामो को
उषा
बिरामने करा-रोगा सा मैले सरमुख दी उसे पा दिया।
तर मी नोकर इस पाठपर विश्वास माँ बरी परमे
भार, उat kी मोर वाक ए गोमयको से पुर दोगी!
विना दर रे, या मीठो वा परो कितने रिमो पुरानी दासी ।
उसनेमा बिमा पार
मियने कहा-निमपस समसार ही धुप दिया है।
मीधारने इस पिपरापही वो पूvartदेस मा समना
लियन स्पो मनोमायरो समा गई। पुराप समर टन स्याम्
की, रिपोजी-मने मा समहा, पुजा पा } भव गुम मा समोदी
दुमयमोपाय, रक्षकी सीमा से मिादी र पौष में पाये गई।
महमारने चमक बिबादि गर, इयर नहीका
पोई परे मर बाद मेमर, स्पीमार पर रोमर परिसेल-मन
पुरा को दिया सरन काम न या!
माकी पब मुंह पर दी । उसोसार पोीम!
नने मी विसरमा-पोममो परेरान मानवी गई।
पापी सी मनसे पंपपास पर पति परोस
मम्मम्मे हमार पियम्ने पहा-गुम गामि बायो। -रना मी
है। मुनते ही ऐजगात पर उठते रो, नेपाम दुनना मी पर
विपस पाह
नौमारने कुछ अपार मापा यह मी मानसे सुननेत पप होता है?
समसमें नहीं माण नियम, कासे पाप नहीं होता है।
विराग्ने प्रा--तुम सम समझते हो। न समझते हो इपने काम योगद
बनौपदीबात न पते ।-आषा, देर न करो स्नान र भाभो रसोर
पार हो गई।
नीर दरपाकी पोलरपर बैठ गया और बोम--सपमुच मारियम
परका काम-पानरेगा।
विरा मांस उपकर बोली-कामगा। पूरी नहीं है, छोट रस्म भी
न। काम न पनेते मैं मो सारे दिन बैठी यती है। मछी बात है।
मम न पोमा बमसे कर (मी
नीरने माना बियर, पा न होगा। नौकर-दासीका काम में
गुमको नहीं करने से सध्या । सुन्दरीने कोर कसूर नरीमा पच
पपाने लिए तुमने उसे मना कर दिया है। बोमे समकिनही ।
मियम्ने माना, सपना। उसने सयमुप मफ्यम विना है।
नीअम्बरने पूज-मा भपय!
क्सिबने कराया मैं नही खासगी-मो, पेठे न यो, स्नान
कर मामो।
सना पार नियर मी दरवायेसे पार से मर । पोड़ी देर बाद मेट
भाकर, नीरको उसी वराटे रेलर मोशी गपे नहीं १ ममातक
नीलाम्बरने कोमला सरम का-सा मेचिन स्थिय, या वो मुझसे
परवात न हो समेगा । मैं तुमको नाचि से करने ग्र!
पर नर व प्रदा नगीं हुई। उपमर पतिकी भोर देसार
पोपमा म्येगे, जय मर्ने ।
नीमेपरने प्रादेलो, मुमरी को नहीं रहना पाहवी हो भौर पिसीको
सगे।म परम भोली मे होगी!
विराने पापा से , मगर भर किसानो नहीं रगी।
नारने शिर मीका नहीं, यह न होगा। बस बिन्दा
विगतका
मार-मपान भी है। मोरयेग मुनरसा हो।
रासह प्रवसेएर पैन गई। बोली-मोहल्ले म सुसर स्मा
रही, बटम तुम यही दर है। में पैसे रहेंगी, मुझे रोग, मा सब
ए
प्रेम और भाममसे मोम ग्लायर नीसबरने कहा।
मिराकने पाता है। भारत में समान गई। अपर में
मैंरी भोर देखते, मरे युमनपर प्यान देने, मेरी एक मी गाव जनने, को मार
मेरी पराधा नहीं की।
नगर ने पानि तुम्हारी पर भी पास नहीं मुत्री ?
सिने और रेपर सा-ना, एक भी नही बीपीठमी
पोरन कोईर यक देवे दो। तुम यही बाब कम पाप
रोगा तुम्हारी पवन पेरो, इनिपा मुमारी परनामी होगी । पर की एक
बार भी सौपा कि मेरा स्पाइसगा।
नानपरने मेरे एक मागिनी तुमय शेयी मेरी बदनामी हमारी
सरामीनोमी.
मकी राम एपदमशिन उटी । वीसीहोर गोय-स्थे, रे
गाणे मनतानेकी पाते। मा मेरी हम ऐसी मासे पकनेकौ महा।
एममर पुर रहबर र रवीगुम हमानी ही परोपने दो,
भोर फुछ नहीं सोचते-गात भाव यर पाव मुन महसे मिपानी पर
पीमानो तुमको मान परमें मुहको मोप्रानीय काम करने में बार
भावी न भगर मुमको कुरा अय तो रसों ही मुझपे पून
पर पर दामभर दिए यही प्रसीम शाम पाना पाया। पहार
tire नुमपे मरनी चापोर ऐपना नोगा प्रो मुना भी मार
पगा इसलिए तुममेण भी न । मापना पियरनेस मोबारात
मदीपदी.
नीड पर नाना रत ममिपोगा कोई बाप मरे 10 दुप देखर
गुरुपार परतीसी मोर रोता रहा। रि भोग उग्रार परिसे बागपर
म्हारे मनी बात भी है। मोर पप समाएर
पिराज 1 प्रेषकर पाये। राम अपनी तप धनवीच में साम ठकर मौ तुम्हारा र साननी र मईगा। नियमने कहा- मैं मी ऐसा ही समसटी पी। किन से काम पिनारमा पर मेरी समयमै महाँ माध, ही माफी माया ममता मी सम्प भाये पिना रुच मी ठोक- टीशान नहीं होता । किन इस दोपहरम में तुमसे धपका नही करना चाहती। मैंबो काठी करो। मामा, स्नान कर भामो। 'ताकार नौसर पुका यया । बिसने पिर ग्रा-पूरी मारो हो सास होने पाते। उसके पासे मामाकी सब बाघोंपर मैंने उस दिन मनमें चिर पर देखा - तुमने मे एक मी बात नहीं सुनी। बम बोल मैनेमा तुमने कार दिया और अपने मन मरते गये। बादमी अपने पर नौकर-पानकी मी एकभाव रखता है, मगर तुमने या मी नही रखी। नीवर जाने हो वाम पाकियने दीप दी रोककर कहा- नाना मैं तुमसे पास नागो किसने गोयल और प्रयास सरस नाम मेपर मेने कसम साईकि तुम कोई पाव भीगी। मार अगर एका एक बात न उठ पावी यो द्वम या सब मेरे मासे न सुन पवे । म पारद तुमको गर न बारे ममम में सिर ते एक दिल तो पई पी, मार पोरनेम ऐरोग के इस मुम मुझे मारने पड़े थे। गुमको या विभास नहुमा पास मेरी नीपत सपर वोरिन मैन कसम साईपी किमी बीपरीको बा को गुमसे नहीं हामी। पास मेरी यह कमी नही यै। मौरफे मि उपठे ही दोनों में मोस मिस गई। नीचर ससा उठ पा, यि ऐनों हाप समय, पापये हुए सर्मप्र उख-पान होगा रियर । महाग पीपट टीक नहीं है। मतामो, मावीम्पय। मुर्ग क्वाना होगा। रिसे अपने हार मानेको पेश करते हुए विपकने मा-कोलो,
२४
पिराज पर
नीटारनेहा कसने रो, तामी स्सा हुआ है।
बियाने पीसकर हा-मा छ मीठो मही हुमा! मी
पीसको विश्वास नहीं हुमा । बोध-नही थमी नही।
कई सार पुरानी बात पर मेयी न दुखावीसार निए
में अनेक पार पमा मौम पुन।
"मा बामीन मी" पर विराम सपने को सुपार, ३०
दरबार पेठ यां।
मेर उसका मन मा मना, किन्तु पिर पुरोध नही। दो-तीन
मिनट पुसा बैठा पान उठार या ।
राबरियामावर बियब हिी सिलपी भी। नीवर मारपरग
पुफ्याप देपामा एकाएक योग रात ममें दो दमको माय
पण मी कोई रोग वा पाप नही या ना खान सम्हारे पूर्वमा
पाप नायकम्।
बने मिठार पूण+पा होता।
नीने करा-माय सर्व तन और मन मायाम्ने मन
मोम्ममाया था परन्तु
लियम्ने पूछ-परनुसार
मार नीचर पपा।
एवमर उसरी मतीय परनक बार पिएबने री स्वरा-पा
पर मापार रामकोरगये।
नौकरने परा-भानसान को समाको मात्रा मराठे।
"कार ROरि मिनी सामने थ्यो।
दममा पुप पर मारने उनका भने माय
फोबत नही नुनी सही पार पहै। पौन सा पर मरेख मेरा दी
"
T
मन र सिर रखकर देना पार करा-माता मादी
पादो।
दिया नीबारने पा-गुमाय दोष हो नहीं सा हँगा। चेकिन मार एक मम गात नईमा तुम यफ वाय मन्य मियाँडी तुम्ना परकी देसवीरो मेदिन मा एक भार मी नही सोती कि तुम सा नीमिया ऐसे गुपदीन मूर्त पड़ी। वही इमारे पुसि समय पप है। नहीं हो तुम कुन-करमान करने मात दी नही थी। पिराव गुपचप मिट्टीरिखळी गी। मन पण, उसने मनमें विणारा हिसाबरमी । ऐकिन उसस्ते पान रखा। मरभुमार पूम- तुम क्या पापनते हो कि ये न पावे मुनार में सुए होती। मीरने पूजन पाते। क्यिनेपाली, जैसे में राज्यनी दो लाती थी, सिप मारे आपमें पकार ऐसी हो गई है। वम श महते हो कि पासब सुनकर मुझे मरुपया होतीमाबो मे गाउँ पता, मतका मह देकनेको जी चाण। नीबारने रेखा या बहुत कम गायन समय ए किमाव इटनी बद अपमी। इससे यह मीवर ही मीतर इन्छित और कुस्ति होला । मन एकाएक या गा मौन सोच साबिमा कार उसे पसम करे। स्थम्ने प्राप, म, म मुरवे मुरवे पार पक गमेमन भोर पोगका उनी नममै विपस्मठे धमर नहीं पता। पर दम वो मेरे पति दो बार ही सोय अस्पाते हमारे भाभव, पवनी दी हुई हमको भी सा इससे भक्ति मुसमें और कुछ मही रेस पर पहमें मा बारूदी साठे पी बीमप्पा मार पर बात मारपर लवे हो। म सा रुपमा रोमपर परतीसा इसी रूप दमको सा रकना पास्वी है। नौमर बायर गया । खराकर प्र उम~~मा ना, या मो बालम ही पोरठी-अंक नही। इससे मैंने एक दिन तुमसे पूम या किमगर में कासित होती खेतम मुझे प्यार करते या मा, भार! नाभरने सिर लिन मापार। मेकिन उस समय माने तो पाया
विराश पाहू
सिस्ने पापा किदुम पाकुरिस्त होनेपर मी मुमार प्यार
परसे, मीकि मुझसे विचार किया है।म गिरिसड़ी देरी मोर मिरिसाधी यह
हूँ। मुझे दे पा मुनावे तुम अब नही गयी! पासे मी तुमने मापातकरी
योपोन्मोजनेष भोर भाममासे उसकी मालोम बार भर भागे और
पोशाम पमझनेगे।
पारंपते ही नीहारने पर पयासे उतरकर उसमाप मा।
सिबने स्वर एक दिन पर दिया था दिप पद छेनेसे रिमेष
नसीराबा
नीमावरको एकाएक ही बात पादमा गटसन एकाएक उठकर
Aण्णम रिना राय अपने दोनों हापोंमें ले लिया और पुपचाप उसी पम
बैठ गया।
रिणम्ने बाएँ से मनी भौतह गर्य।
उस एकको बड़ा देखक दोनों प्रापी गुपचाप मागवे ये। नीरने
एकाएर पी भोर मुंद पुमाकर मीठी बामासे पूण-भाव गर्न वना ग्रेप
पी भामरा राव!
Aण्मने सामने बैठी पोंगी।
नौसरनेमा-नेटो कोई दुरी बात नहीं की।
पिन फिर बिगर स्टोमीर मापसे बोटी-कर भी परोक
पुर्य प्रत न कही। पात बुरी बात है।मापत सराब! इसी दिशा
गुन्दरी
पवादे पियन गई। पुप हा दी।
एसम्म र पार मीसाबरने पा-गर इस मापपर गुमन मुन्रीको
पार दिया।
पसार विराजपयी।
नौबताने मोरि पुष नहीं पूण!
FिORE भारी भारपाने गो-देगोनियम पुरी
पापी मई मन-बुरा ना मममी | उमने पुरा ने गामगि
गलमे ठमे दिपा । पुनरिया का सार यह समान
विराजबह अगर हम माने न सुन पाईयो न खी! मौरन बाना भर में मुनन्य मी नहीबारवा । मोर एक स्ठीसकर, बीरेसे करपर परमार, मीस सोपा। . . . भरपारे न्यार दिन बाद ही छोटे मार वतने यौबते बया भार असायी सीकर मना रिम्प ममप पर खिा पादस्सिरी भोर दूल्य दरवाजा लिया था मार उस बने एकपटी-सी बैठापना में पो मने परको सभी तरह उबान-मुंदर मोर जप मुफ्प बनाकर पर पोभाराम यमा पायो वा पासे मी पापो मासे मषिलोच्या पाच्या नहीवा परमा घरेही सम्बन्ध मिसाए गये थे। इस तरफ विराजने पाया दिनम्मर कसे ही यना पहा मुद का वारसे तर काम चल्या हो उसरना ही पावा या ससक क्या बो काम पासी बरती थी उन नमाने योग्य मारे स-पास सामोको नवर अपार मा एकान्तम पर मेवी की और इसलिए उसे अधिक पक्ष गतिक बामना पड़ा था। एकल इसी दया यह ग्रम कर दी थी, वनेम एमएफ उस रासे, म्ही पिसे, सीने श्रीमी और मीठी यापासे पुवाय--पये, रात तो बहुत हो गई। गिराने पीसर सिर उठाया । पुप्रग्नेबाख्ने ऐसी ही पापा परित कर कसरी में मोहली। राख्ने विस्ति दाबर मा-कौन छोरी बह बनी रह गये। मोरिस्तीने पारी में है। भय पस माम। पिया स्टार टही पास गा। ये गाने पीसे पूछा-बेठीमा को गरे। नियने कहा- मोहिनीने बीबी, एस व मका नही रखना पर पहो गई। उकएका र मुनार पियशोमादम मा कि मेरी बह ग्रेगी।
३८
पिरामा
मिन्त्रित होकर पूज-सा हुमा छोय यह !
मोहिनी तुरन्त पार न २ सकी। पन पा वामांपते माँ पाण्वी
दुई मनेको मात दी।
अब पपरापर विरामने पूछा-क्या हुभा मेरी बात मोदी सो नही।
मरसी मरे हुए गसेसे मोहिनीने पाठपके उपर नायि।
पर उसे साप सम्मन निकासा होगा वी?
नियरग किन उसने अपने मन भाव माते हुए -सम्मान
निफसेगा वो इसमें टरनेशी सा बात है छोय ।
मोरनीने पूण-दो कुछर नहीं है बीबी !
बिरामने पहारमा किन नाशिस्नेि
णेरी बहने पा-मोवा मुनर्गने ।
बिराज एबमर सपाटे मार पड़ी दीपिर मोचन मंस समय
गा मा भोर पानेहीबारत नहाँ । मुसर्या पाना उनपर १२ से पान
पवा? उसने नाहिर है। मगर इसमें रनेकी बात नहीं होरी
महापानी ही रहोगी। देर बारोगहने पाकीरी
मने तुममे कमी भाषा वाटपात नहीं की। मैं बात करने सोम्प मी नहीं है।
सामानभनी सोरीपनी एकपात मानोगी।
उसीभावाने हो पियारप मासेगमा पामर और मषित
भाईदोर बोली-पीन नंगी पान!
मोहिनीनमायो रिर पपरहार बढ़ाना।
रियापदादीपोटेकोमल दापने सती गीली बिले पार
निर उपम एसोनेशरण दिया।
पिएम्ने बिमित दोहरा-पा पारेयो दोणेरी बह !
होरी गाने भारावो और भी पौमी पोरा-से मेपारमा गिय
एगा, भिन सयरा उसगरम परोपीये।
मे पदमे सोचा मी म प पेसी त मरम्मत् ना भंग मिस्नेही
मानुभूतिने पुपरएि विरानो भमिभूध पररा| उन मुगसे कोई
पात न निकलना पिन बाती बोग" पपरवर प्रेम बहमसे
विरामप एग्ने गो सब पर बन्दीस पुकार ग्य-अमो नहीं छोरी गह, मुना । छोटी पाने और भाकर पुछा-पायी! पिरम्ने योगी उसी पिसे हुरठ पहर उस परम गरमा-श्री पेठा न करना चाहिए। ये पडूने पर उयपर होमो सरमें पूम-मो बीरी १ मा न करना पाहिए। बिराम्ने मा-छोटे रम्य मुनगे तो क्या मंगे! गाने का-सेभिन पर ये सुन न पायेंगे। मार न सही, दो दिन बाद दो उनको मायम ही हो अवगा । तर क्या होगा। छोय बहने प्रा-उनको ममी न दम रोग्य धीमी । परताय मेरी माँ मरते सम्प छिपाकर मुसको या हारगा पी। सरसे मैने इसे न कमी पाना मोर न ममी बाहर बाग । तुमारे पैर पड़ती ही इते से थे। उसकी इस कातर प्रार्थनाको सुनकर पिरानकी मलिसे भासू गिर पड़े। उसने स्तम्प दोकर मारपरक साम अपने मनमैं इस नारी म्पमा जाय, जिससे रक्त-सका कोई सम्बप नहीं, पर गे पोवर मरों वायकी तुलना करता मिररलीसे मास पोम पेदुए गसेसे पा-भाकी पर बात मने यमतः पाद रोगी मान । येकन यह हार वो मैं से नहीं लगी। इस सिवा छोरी पह, पिसीको सपने पविसे रिमाकर कोर मी काम नहीं करना पारिए । इससे गर्म और मुझे पोर्नीको पापा मगी होना पड़ेगा। मेय पाने पा-तुम सा बात नहीं बनती हो, इसीसे करती हो। धर्म- भषमा रुपात्र मुत्तको मी गोपीय। मैं ही मरते समय या मवावगी ? फिर एक बार माँस छकर, भनेको मारकर विराबने करा-मैने मोर सबको पापाना छोट बा र तुमने ही इक्ने दिनतक नहीं पपान सभी मेशिन में मरते समय कोर मयाब न देय पोग्न । गरबाव इसी बीच तुमारे मन्तवामीने भाप ही रिण दिया है। अब बायो, मान, गुरु पठ हो गई, मारो यो। भापक पानेका मौन न देकर, विश्व पति पासे हट गई। ।
४० पिराज पाहू मेशिन पप भीतर भी नहीं जा सकी। भैपरे बरामदमें एक फिनार पोतीका मौरस मिसाएर मेररही । इस समय माथि और मुकदमेकी मात उसे याद नायी। उस पोहा पोहनेवाली पनि मेरी पहली स्पा मोर सहानुमलिसे भरी पानीटसे मार भाने मर्गी | उसकी मालोंसे मरनकी तग निरन्तर कर पाने खमा। भार उसके पपमें से भाषिक पुल इसका चोग्ने भगा कितने दिनतक, इवने पास पार माया छोरी बहको न पापान सकी परमाननेकी तक नहीं की। पाच कि उसने पीठ पीछे कमी मेरी बहकी निशा नही की मेकिन मी मानापेर म उससे कोर पपी मात मी महा। बहुत देर पिसीको पमा से दममरमें तीन भकारो और देवी से ही छोये या भाब उसी पयको मीवरी तबतक पीरकर ममाणित पर गई । सोचते-गोरके, रोते-रोते मापन कप पाणे गई।भपानफ विसीम पगनेसे पासपदाकर उठ बैठी। टख्ने देना नीटपर उसक सिरहाने पेठा हुभा है। नायेपरने सोपौ -मीवर पये, गत माग बमास रोमेडी। विरामन दुख नहरमा । पर स्पामाको दिशा सदाय मेकर पुरचाप मौतर मार निवासी तय पर दी। با एक सालपीत गया। अगदी छाडपम यो मान मी फससास नहीं स्मी । ति परतीरोग्रामग ममरतक मान पोपन होता पा उत्तम बहुत-सी वो उसी मोहम्मरे मेवानाम मुत्तने नरमी है। ग्रमेना परत मिया गया है। पर मी सपो मादम हो गया रे माई पीवापरने दी एम स्पने उसे गाया है। मा एक मर गया है। पोपर पूछे पिर गपा है।बिगो भर रिच तरफ रेतर हस्निाय नगर महीं भाय। परीर प्तिी नकोत देता एपनेगे सिर पर भस्म भए भम्पर मनपाउनासे थप पर भौरे धीरे मरगन्न होनेगागरे बनारसे टमा ममप मी पेमा दीरो बर। एसे पिरान बरसमिती पीरो बार
पिराजबह
४१
निपटार हिमा मिससे स-दस्ती र मेवी , शेषन भब उस परमें
ऐसा कोई भी मादमी न था, बिससे या पाव फो। पाठक अगर कोई
मिाने मेंटने माता पा उसका स-एम पना बरवा, दो मी पर मनमें
विएगी। समापसे ममिम्मानना है, ना पाण्यात टोकी सामा
रप बारसे मी वर ठहै। सिरिस्ती किसी मममे भर उसे जान भी
उम्पानी, माठमोरेमनेसे ही माम अब उसमरेका
परम और विजेना मे पाहै। कोयगनी मगनी मलमस्त पो
पोपते ।-स्तु र सरी पड़ी पटी है। मारेकर शाकमाई
ही एरोम च्या रेती है। उसे उठाकर बाहर भनेको मोति से मग
उसे अपने परम दो नहीं मिली।
इसी तय दिन पर ये थे। इस बीच, मीचबरने भपी मरी पहन
हरिस्तीको भानेकी दो पर कोधि की, डेनि टन व्यग्रेने नही मेम।
पर दिन गमग हुए उसने एक पर रिला । परिमती दनुरने उसध
सासर नही दिया । यि मागे उसका नाम नहीं लिया
साठा या एपरम भाग-बग बी है। उसने पूरको पार
पवना पापा, माता समान पार किया मार भावकल समा सकता
उलिए भारी पाहै।
भाव परे नीवर गावी सरसानेते सयमा उपाय मुरबिरे व्य
और भने पार पोख-या समुरने पवायता नही दिया ! वान पाना
६ल बारकी बुगावर मी पान न देत सामा।
यको काम रोकर एक बार र उपमा, पर कुछ करना था।
देविन मिना एबोटेही स्टमा।
उसी दिन वोमरको बा मरार मोक्न पर पैर उसने रिसे
मा टस नाम से ही गुम का टटवी हो। देखिन उसने साकार
मस्राव किया।
वियव पती पैसे परे ! मात उभार बोकी-में- ये, मर
बाजार बोध-पोगन ! मैं माप ही से देना है।
पिराज पर विपन पर पति महावी पी पिर पोलीदेसवा तो अपण और उठकर बनेगी। नीविरने गेकार मा-माम बगभी मान पर तुम ऐसी क्यों होती पपी दो से विमुखी मह गह से! पिपने भूमकर नीगवरकी पाठ प्यान देकर मुन्नी । गोम-मरों पदमनेसे ही बायना पाणीमर फिर बाहर हो गई। इस दो-तीन दिन बाद, तीसरे पाय, पारक चण्डीमपपमें भाग व्य नीमार गुनगुनाफर कुछ गा याप। विराब उसके पीछे भाकर कुछ देर गुपचाप रही। फिर सामने भाकर सही हो या । नीरने सिर पर कहा-पा। पिराबतीती नमसे कती रही कुछ नाव न दिखा। नौसपर सिर नीचा कसेही वियबने स्त्री भावाम्म का-परा फिर सिर उठाभो, देन। नौकरने न सिर उठाया न कुछ उसी बिया पुप या । वियब पात्री ती वय कठोर मरसे बोली-भान तो मम । सा दम ध्याना पिरपुरु कर दिया। नीमर कुछ नहीं बोम-परसे मॉल नीची पिसे काटका पुतण्य-स्य मेटा या। एक तो वा सासे लियबसे रखा। दूसरे पर 30 दिनोट पर पारदमा हेर मन गह। यह मन्दाग्नेका मी कोई उपाय न पाकर पिस पदी से ममा उठेगी। का रतक विराग मी सिफर मासे खड़ी पी। शिर योगी-पही और है। गौग्रेका दम म्याकर 'भम मोठा बाबा' बन बैठनेका यही हो समय है। यह कार या मीटर की गई। पहन बीत गया। दूसरे दिन नबिरसे नहीं पा गप्पा । बसकोष सब सागर मेरे ही पीतावरको पार में सुबममा मौर बोल- पूर्वर सम्रने मुझे तो चावतक नहीं रमा | प्रम मी एक बार कोधिध करके देखो शामरगानको दो दिन किए परन सको। पीवर माईक मरती मार देतार मोठा-मारे यते मन में मा कोधियाँगा।
पिया ४५ बार उसकी लंवा समहम मकरसे हुभा । मेकिन मम मन- कामावसिार योमरी मैले मेसी शहर , मैसे ही हमारी मी को। नसे, समास मे में मर गया तुम ही मासे हो। पारने मा-को सस नहीं। उसे मैं तुमारी बरा नही समझ सकता। ममा बर मार्ग की उमर नहीं रिया, ये मेरी ही पिहीचा पो देने मो। नीमचरने मेरे मारकी इस बातको मी सीमा प्राये सत्य नदी ही में समा मेवा सैर, ऐण हो गयी। इस पावर में उमस मगमा करना नहीं चाहता। मेकिन मेरी निवडा पार हो सटप नावे किपाकी सब को मैं पूरा नही र सका किन नसभा पि.को मेने इमो चपा नहीं है। पर स्वामो किबो मार सकोसेबा नहीं। पवारने सिर पर मानही । मापसे मुमधे घूम थ! नीमरने का पूजनेसे क्या होता। पीवापरने मा-अप समादीवा। नीलम माय-कारखी। उन्होट फन गेतिर मी उसनेमानेको समायर कहा-वो तुम या नही कर बोये। पवारने मा-की नहीं। से एक दर, वैसी में सुर । पर गुरमन परे । यस मेक्ना मी पाहते, न नरसिमफ में कोई बात नाया। परमेय समाच पदों है। उसकी प्रत सुनकर एक बार नौकरिबीका कठीसे उमप या महतोहरेन नही उसने अपनेको पेग माम । सोमरमा- भन्म भयो, निको- भागेर भो। पीतावर मी प्रेक्ति हो उम पोम, बार माँ गुस्सा होवेरोम बाटो मा सदी मते! नोमाने म्ठे पणाम दिखाते हुए कहा-मामें मार शारद पर नही देरा चारदे, तोहर अभी मेरे मागस ! विर मी पावावर सपनेनाथ पाकि नौकरने गरमा-
४४
मिराज यह
भर एक एम भी नही-भो।
गवार नीबरका रकबा मुमसित बा।
पंचावरको फिर कुछ पा सास नहीं हुमा । पर रिसे भार
हो गया।
यह मामुनी तुनकर सिर बाहर निकल पाई और पवित्र शव पारकर
मीवर ताप गई। बोडोन मान-मनहर मी मा भाति
जागा बिना मावा, बिटम सब मेग !
नावरने मच भाषसे कपा-माना हो या रसे बसें । मैं
सर सर समता , पिन पूर्ववा नहीं।
रामपा-पेकिन तुम दोबसे नही। यह भयर पर पमकर
हर निकाला तो बापर करा लोगेा भी की सोचा है।
नावारने करा-नहीं। बोसोभनेवाले ने सोमो सोचार बार
दुखी नहीं होता।
अपने काटीको सम्बना मोर महाभारत पाना सिम
देउ किए सोमना-विवारना मिपा!
मामात पिराने वीमें नहीं कही और नीसा कानों मी उससे
बमवर्ग महाँको मी नौकरने मनमा मा-उसे मैं पहा
काय ही माना है। सिपा, पिता परते-पनेसे मात्र खिा मिर
बारमारि सम एक बार सपथावर रोम-देखो यम, पोटिका
होने भरपीटने की पथे महाराज को नीचे पाना पाहै-मो
एक बहुत ही मनुष्य है।
वियर मातर-दी-मीपर सभी य रही थी। रोमीपासप अरसे काना
बिना पर काममै परिपव करना उल्ना सान नहीं दिया है
नीचे वय मोदी यसको मैं दो नही य सती बिमोवा-सरम होती
है। पोषणम पर पहेयमताच परी, मुझे वो एक भाभममें पना दी
होगा। अमर तुम मेरे मात्र मन रसार नकोदोकम कम उससे
पपई न मिठो मकर अपनी मांगोंको
पेपार मी साबमा बाहर निकल गई।
इस इछे पति मार पोम कावार राम भार कम हो sit नौकर उससे परिचित है। न माना गया रकमानी प्य मूर्ति र निकर सबप मरीचित यो। या समित कर बस परत्या। फुपरेर पाप होरान उस कमरेम मार पाये--इस व्यास मोसो हो। दिन पर भागा है नमो नहा-धोकर पूछ-पाठ करदो और पागे। स्विने दिन मिरता है उल्ने दिनोपायपिर एक बार पति कमे में पूल महार, पापही गई। इस कमरेकी रीमारमै राबा- रणा एक पर स्टन यादवकी भोर देस देवर नीम्सर मासा ये पड़ा येन कोर देवन से, तरसे पोरन ही भी पौधार बार वा गरा। भार भाब! उहरिव दिनभर उसका मा दया कि वारसार उसकी मामों में भीर मर-मर पाते थे। सिका पोका भी प्राठमो सानपा था उसने ऐसी स्टोर गाव बससे उसने प्रयचे, तमी सतपुली और भारम-मानिकी सीमा नहीं की। विनर ससने एक रपानी मी मरमें नहीं सम्म । रोती हुई कार ही परसे चार कोठरीसे उस कोठरीमें बनी यो। सवार छप्पा समर मी एका मागे दीपक पाप गरे मोगरा, उपने प्रनाम लिया में फार बोरसे पेरी। सारे परम बार न पा, सपाय ममा पानीकार मरम नहीं पा । पार को बामेपर एक पर बैठकर ही उठ गया था, तासे ममातरमेय न था। पियवा रे गावाप से को, क्या परे! माष लालन- पर मौका समरन दिखा दिया। पारसी माह मेरे भांगनमें भीपी पर पूरफूटकर रोने पर यही वर्ष अरसे निम्न स्या-मेरे भम्वर्यामी मना, एक बार मे भार घोस उपाकर देसोचो भादमी और पोप कोई पर करना नहीं बनता, उसको भासमय देना पर भैर नींवर सगी । उस समय यतः ना व गरे नगर । --
विपखवा
४५
क्विज कोठरीम बापर, उसके पैरों पर बैठ गई। मगर नीमने रसकी
भोर न मोरेता और न कोई पाठ ही की।
इस रेर बाद बिग्रबने पति परपर सफ्ना एक पपरस्प, पेन
नौकरने परन्त ही पैर हटा दिया। पांच-पार मिनर भौर मी उपचाप ही
बीव मये। मियनका सोया हुमा भमिमान पिर बीरे धीरे बगने सगा । यो मी
वर मोठे स्वरम बोली-पमे मोग्नर।
नीमेवर नाही योग । तराने मान विनमा एप नही सापा।
फिसपर सम्म हो, बरा !
बीमासने इसका मी कुछ बवाब नही दिया ।
विरामने मावाभो म ।
मी वरने उदास मावसेना-सुनदर मा शेगा !
रामने कहा-छो भीमने तो सही।
जमकी मीरा सहम उठ बैठा और विरामी परेपर एम-सी पीची नगर
गहार बोम-मैं तुमसे मा गुम्बन वियव, कोई लिना मही है।
उसकी उस परि मोर गोश्री भावाबसे सिय मा-पति भीर पो
गा-पैसा मात्र भौर गम्मीर ठ-स्वर पो सहने और पमी विसी दिन नारी
मुनामा।
७
मागराक में पोसाकमे कारखाने । इस मुस्की
पांच माविकी महिमा मिन बनाकर ब च माती बम
सानको भायली हुई विराग्ने उनमेस एक व्यको मुमार उससे
साँचे बनाना सील लिया। पर मार दी रिमी और काय करनेम
भमापारप पर। दोदो दिनों में यह काम पीसकर बहसबसे भड़े सांप
मनाने थ्मी । पप मापारी पर बाहर नगर पैसे देकर तम्से ने खरीद
बनेगे । इस पर पा रोग माम्मत माने ते मा ऐने बगी । मगर स्थी
मारे अपने पतिरपागे इस भातको प्रकट नहीं कर सभ।
मीटवर बसोपा हर पाप रत गमेगा पाप पगमे उट माती
भार राम करती थी । भाग यसको मी सौर बनाने भार भौर पर
पर किसी समय उसी लगा होगा। नीलारसी भात एकाएक पुल
गई। पहमपर पिसीको र देशहरापार सिट माया पिरामहाप उस
समय मेगामिहीसे मरे हुए थे और भास पास बने हुए सारे एर उपर
पोये। एक वरफ ठपम गीली चीनपर, पाको पीपी।
भावोन दिरसे पति और पत्नी ग्रह नदी दी। उस मामुभीसे
नगरकीरोनी बांस भर बारे। शमन यही बैठ गया भीर उध्ने गियर
बमीनार हुए सिरको सापपानी मपनी गोदम रल बिया । पर पियमा
F पर नरा दुई र एक बार मरा दिवानबार, दोनों को भीर
समेकर पा भी तय सोयो । नौमारने मार से अपनी मांस छ
पर्य और दूसरे हापसे पास दो रते हुए टिमरिमा को पय उम्म
पर एफरक फनी के मुतकी भोर निहारने या माया हो गया,
इतने दिन हो उसने देखा नहीं। स्पिनी लिरिकोनोम एवमी स्पारी दोर
गई है। मौके पर सुन्दर सुठ मापेपर इश्चिम्यहम्नी सुम्पर रेवाल
पाणी! एक समझ न भानगाठी बम्पक असीम मेदनाये उसका समूण
रस मीतर-ही-मीवर ते मसोठ म्हा। मसापपानीसे एक पीनी की
व पिरासीद मालोंबी पसार टपक पाये। उसके गिरतुदीरामने
मंस मोटार रेसा। समर पुरवा पाणी यी। पिर रोनी पप फेमकर
पसमितीवे पर या मोर गोरी मर पिाकर करमरकर उपचाप पपी
पी। बीमार उसी प्य ठा-बैठा रोने बया! ही देखक कोई कुछ
नी मोटा । रिस राव बीकनेको दुई भाषा करने पीस
नीरने मार, प्रतिस्थ होकर, फनी मसकस राप रनकर स्नोपूर्वक
मा-समोर उपमें मत पड़ी गो पाम पामे विराम।
"प"मार पियन स्टी और पतिबा राम पमर कोठरी मोटर
पारसोयी।
की नीवरने कामो लिया दिन माने मामा भर
प्रम-र भाभो । मैं मौ बराचे हो भाई।
विग्रने भये पावर सा होगा?
पिपज या
नीबारने पा-यहाँ पैसा कमाने पिम्ने दी रास्ते हैं। यहाँ मोईन-कोर
सूरत किस मागी। सा मानो विराज दो-चार महीने का वापर हो।
पियरने पूज-तिने रिनमें मुने बुरा स्पेगे।
नीबारने प्रा. मीने मातर ही एटा इंगा, सपन देता है।
'भप्यापार विराज सहमत हो गई।
पार-पांच दिन के बारमाहोमाई। पिरान मामा परको पाठ-रस
कास्तक पन्नगादीपरीवाना होता है। लेकिन विराई म्पपहायमें मामान
फोरमपम देन पड़ा।
नीचर मस्त होएर ताकीद करने लगा।
नियम काम पते परने पर बैठी-माज तो मैं न आऊँगी। मेरी सीपत
वैक नहीं।
नीमर पिस्मनसे भरार होकर बोयबीयत पर है।
मिरापने कहा- पीपत सो पार लगी। पौ करार र
एटकाये, पीतकी काय कमरपर उठाकर नदीसे पानी नए पापी ।
उस दिन गादी पैर गई । रातको पात न समझाने अपने मनाने वसने दो
दिन बाद बना मगर किया । ये दित पर फिर गाड़ी पापी ।
नीमापरने भाकर सरदी को लिए एकदम पर गई। पोसी नदी
मैं कमी न पाऊँगी।
बीमारने और मिरिमत होकर प्रा-समोगी या नही।
विराब रोने लगी-नहीं, मैं नपऊँगी। मेरे पास गहने काममा
कप पारें । मरीन इलिको सम्पन किसी तय नी पलंगी।
नीबरन गुस्मसेमा-भाव सचमुच तुम्हारे पास गहने ना, मगर
समेन वो तुमने एक दिन उनकी मोर मांस उठाकर नहीं देखा।
पिराजपथाप पातीक से बाल पोग्ने भनी ।
नोमाने रिका
मैं उमस्या है। मरे मनमें सम्हा दो पारे-
सीसे या पेकिन पेषा पा पुम्स-मासे तुम हो भा गया होमा । मगर भर
देखा.नही माया ! पम्ही मात , तुम मी सब-स्मार मरो और में
मी मप्रकर नौकरने मादी ग्री।
पिराज पर
दोहरोनीवर पर मीटर हो या पा। पीचवर मी भान पंपसे पपा
या। मेरी पहूने कौली सपिसे प्रेमा सरम परिसे पाकीदी, इरान
मान्यवर माफ परना, मैं तुम्को श्श समासा, दो दिनको समीरी
नगई।
RBI कुछ नी ।
मेरी पाने काठमीमा येऊन रस्पनीय! विपदा समय एक
पार त भारदो-दो दिन बाद भगवान् बार रेंगे।
गिराने पीरसे गाम दो दिस सादी विरहगेरी या।
छोरी ने कुछ बोर देते हुए फरा-तोचमो वीगी, बठा मयोप
तय धिमाने दो। मैं पाती है दोरिनम तुमारे उपर भगवान बार
मकर रोये।
रामने एक बार तिर उठापर हमला पाछ, छेकिन EिR AOR बार
पुप यगई।
होती गहने कान सोपी वी!
पर मी पिएम्ने सर हिसार मानी। समरे नादसे उठ उनम
महरले रिन्य में एक दिन भी नहीं रिसा उगी। जो मुझसे नहीं हो सकता
काम करने लिए मुझसे मन को छोटी गई। इकना पार पाने कमी।
श्वन गर्यबहने व्यता समांती मायाबसे पुरारकर पायाभो नहीं
बीपी मुबान य इमको महाँसे वाना होगा । गपे बिना में कमी न
मागी।
पिरान भूमार महोगी। ममर सिर मार लीरोबर बोली-
मोर धमक्ष मई | मायर सुन्दरी भामो पो !
मेटी ने सिमरा-भापी पी!
निगमने कालनीसे पोपने पाती हो!
पहने प्राको दरवी जी तुम याते पीपमा ।
विरार फिर कुछ देर पयो र बार बली-ए कुचेरठे
एर मर मागाई।
रहबोली इथा म पागल हो जाता है व उससे ररना होता
प. बिरामबह ! - श्री। इसके सिवा मोरे मारे ही लिए नी । सोएकर देतो, इसे लेकर भौर भी पाया अनिए होस।। विराब कुछ रेखक रि पुप रही। उसके बाद उसरमावसे सिर ग्यकर पोय-नालिसी तय न बाउंगी। पीर यह करार होय महको प्रमुफ्रका अबकाश न रेडर से हर गई। मार पब उसे वैसे हराने सगा। उसके पास टक सामने उस पार दो रिनसे पड़ी धूमधाम्से एक नहानेका पार माया गया था और नमि पानी न पनेपर भी मसी पानेका मचान बैंप पा या । विराज मन-ही-मन समस पई किया सब क्या हो या है। नीवर एक दिन स्नान परमापा वो पूछा-उस पार पर पार कौन कोय बाप! पिरान एकाएक बियर उटी, पोडी-मैं क्या पर्ने ! मार ते पसे हर गई। उसका माप रेलकर नौकर भवार हो गया । किन्तु उसी दिनसे नियमन पळ-पेपर पानी मरने लिए नरीपर बना एकदम पर दिया ।बर पा यो त मरेभोर या कुछ रात बीते नदीपर पती र सिमपर भम परमानेपर मी कभी उपर मुंदन पणी । सेफिन भीवर-री-मीवर राणा, म्य भौर पर मारे मानो उसका रम पुग्ने । भव प इस भालापार मौर सप्प पात्रता साफ प माने परिपागे मी मान लोड सी। चार दिन बाद एक दिन नौकर ही पारसे पैरकर (सते हुए मोगा- मये समीरन साम-बाबदेसी हो बिराम! वियन समसफर मनम्ने माक्से पोष्ठीदेसी क्यों नहीं ! नवर स-स्ते योग में सोक्तावा भादमी पागडयो नहीं है। नदीम वो चार मेरी मामिमायने धपको नहीं है, किन पर मारमी मवीम एकवी गिरीसर सी गमे दिनभर ख मा । मिराब पी। बापिसी तरह भने पतिको नाप नारे सकी। नीमेवर कारने सगा-पार पर हो र नहीं है। मो भारम्पिा हिाकी पासाम्न सारा दिन उठे पनेसे सिपारियों से मंगी। मज म मेगाको वो निचय ही पड़ी ममुविधा होगी। नियमने कहा-होगी तोपा किया बाम ।
पिरास या चौतरने पुण् उत्रित होकर का-पिन ऐशा मोशे।वी लेकर भगमन करनेको स्पा मोर कोई बगा नहीं।।ना, ना कम सपेरे ही पारी बारामासँगारिको दो और भी सीपहार मोशन हमारे पर सामने पास नहीं होगा। पविकी का मुनकर पटर गई। उसने मन होम प्रा-ना ना, तुमको पासाने बानेशी वस्ख नही । नदी कि इमारी ही ना, वो गुम मना र बामोगे। नीमकर विस्मित रोया । योग-तुम पावी माहोमियान सही हमारे समेकी जिम्नु मा उठे मामा परेका विचार न करना चाहिए। मैं पर से मारकर बाउंगा । म मानेगा वो मैं सर सर सब घाट-बाट सोर-पोरकर * दूंगा । इसके भार बोकर सकर। मुनकर बि सपाटेमै भा गई। र परिसे बोली-तुम बरसे सगारनेदामोप! नीबारने का क्यों न बगाभारमी है वो सा मी पाहा भस्माचार करेगा और उसे साठे यता र पिने कहा-सावित कर सकोगेकपा मापाचार पखा। नीवारने शमार काम हनी परसराम व परवा । साफ देख या जियार पर या मार तुम पापी हो साबित कर समोर सया या नहीं, यह मैं देता। मिराब सषमर पतरकीबोर पर धष्ठिसे ताकती योपिरोय- दोमाय उनिक टमारतोनिको ऐनों बन पानेको नहरा, उनके मरते याच मुनकर मेम करेंगे। नीमारनेरा- पियने कहा-और कैसे ? तुम बारापेथोसे बना पात। ऐसे समापसे मह पास एक मरते बाहर मर्मबीर सही नहीं गया एण्यम मायाय हो उठा 1 कोरसे पौत्तार योमर मुह कुषा-मिटी समसको रेसाहर पड़ी खाने बना दिया करती है। तुझे पर दोनी न मानो नहीं बुध।
विरासपा
५२
मुला उठाते-उठाते रानमें पाप्रामा पीरब भार सरनपीलता नहीं
न गई थी पर मी उठी मोर मोती-कार चिलाभो नही । किस तर
होनी सूख जाना हरता है सो गुम मास मही पानवे-सेबिन में बनती है
और मेरे भन्तपामी मानते हैं। इस बार भगर तुम कुछ करने यमोसो मैं
पारसा गी।-प्र-कासे वियम्न सिर उठापर देना, नीरा पाय
एकपम विष हो गया है। उसकी दोनों माम्नामे विहर इसरि पर।
उस नसामने पण एकदम सकुचाकर, सिमसार, बरा सी सेगा । बा
एक मी बात न कार रेसे सिसक गई। उपसे बानेर मी नीवर
उसी पण लामा । उसके बाद एक बी साँस जोपर गार पर,
पप्पीम्प पर किनारे सम्म होकर बैठ गया।
उस पचने सोचे-समझे बिना एक ऐसी जया बोगी न पी
पोरसे सिर उठाना हो पाक से ही बोरकी कार वार पर विपुल
निष्पन्द गोपा। नीदरले साना विरामकी पही मालिरी बात बने
मी णिचसे पाती है। उसे उस पर गरी प्रतम परमार
पतीपर मेरी दुई विरामका पका दुबा की मुसमा प-पर पाद पाने
या सरीतो यह तो भर उसे परनेडोपाकी नहाँ राग दिन
कैसे करते और बाभमाय नारी से मपसे गरी पठा पी।कुदी
पासे वियश्री कठोर मात तीरकी तय ही उसकेपमें जगी थी। किन्तु अब
पाठे-बैठे सिनारी सोचने पमा उतना ही उसका पार पा
सोम, पल मरने और. मिम्ने ही नहीं गा बसि पीरे धीरे पापदा पौर
निरममममम बदम्वा मी दिखाई देने गया। उसकी वियन सोपडभारती
पिराध नहीं है, पाकिसने समम की-कितने दी युग-युगातरी है।
उसका विचार पोपसरोरिनो प्यार, रो-एक भसारण बावोंसे ही नही
किमा सकता। उसका एएस किस पीक्से मय। यह बात तो उन्हें
पड़कर मोर कोई नहअना1
मरौ पार नीगारकी मॉत्यो सरकर करवासू गिरने ब्गे। या
भकरमात् रोनों आप बोर मा उपर उनकर, गम्स का उठा-
मयमाम् मेयो पुछ, सब से दोनोमिन मेरी नियमको न लेना!
विपावर
पाप ही एक प्रयप का मैस उसे मियतमाको ससते
ओरसे पिम्मी किर उसकी भोर मनेगा।
पागार भितरवाले सामने माकर तह दो गया । राम
मोटरसे बेद । उसने पत्र देकर आवेगपूध पो हुए ममें पुकाराम
रिराम परठीपर भीपी पड़ी ऐपी थी। मौकर उठ बैठी।
बीमारने पा-क्या करती से विराम दरबायकोगे।
पिराध र धाप सवा पास आकर खड़ी हो गई।
नीबाबरने मरा करा-सोनोरा!
भाकी नियमन रमाडौ-सी शेररिसे कहा-म माग वो नही पायो ?
नीरसेमा- सारंगा!
पाव वेग पारकी युरोकी भय नीलपरी कोम गार गी । पदना,
मा मौर अभिमानते उसाठ ५ गया। सबहीनको व्य पौसरका
एक बार पारपर मा गा। बिराने तो साइ देखा नही इसपर
भनयनम ही पर पुरी मारती पुर येपर मोच-भर दिर कमी में ऐसी
बात नहीं पाएंगी-योगे, मायेगे तो नहीं ।
नगर थप स्वरमै किती वय 'ना' मर कारख-रखे
भीरे-धीरे से मिराने की सोच से ही नीर साता दुमा मोवर
पुण्कर भोले मरकर लंगपर चकर पाया।
उसकी मुंदी र दोनों मौसीकोनाडे लगायर भीमुमोकी पारामा पसी ।
पतिका ऐता पाय रखने और कभी नहीं देखा था। मासस उसकी समसमें
या गया। सियाने एस रेटकर परे प्रेम थोर स्नेह खामका सिर अपनी
गोपने रसार या मापसे रसके बाद पंधने यो।
पौर पर सामान पर फरमें देने और ना होने या हो भी
न नहीं सोहा, कोई बात नहीं की। म दोनों गुपयाप रिपर परे
पिन पाठ और पानी में मन-सीमन हो पाते दो गई, में बन पाता है,
मत उनमसामने हो मुना ।
विराम पर फिर भी नीवर सोच सा था-रियन पर बात जानी सानप से भई। यि मनमें इतनी बड़ी हीन धारणा से उपर किया उसे मार सकता है। पर वो परस्वीर दुम्स-कर्णकी कोई इव नहीं उसपर ऐबरोज या क्या होने ब्यामिन नहीं बीतये कि भला हो पाता। बाय-बायम मनोमाविम्प सायना होते ही रग मा-मापर मतभेर! मसे बड़ी या बात है कि उसकी ऐसी विराप दिनपर दिन सौ साली नाही है और समोर देखने पर मी र दुमी सागरका किनारा की रिताई महा देवा । मपनानक श्रीपरममि नीमेवरकी भरा मन्दि ची मामलसर वर विश्वास था। यापही विचारने भगा। उल्ने मनमें किसीको योग नहीं रिया, पिसीका पुरा नहीका-साको निन्दा नहीं की। पपीमपपमै दीवारपर मे हुए शाम की गयोहार चित्रो सामने लाशेवर पा रोकर बनेगा-मेर मगधन्, मगर एक्ने दुस्सम गाना हो चाहत ये वो मुझको इग्ना निस्मय मापनामा तुमने। पाकिस्ना निम्पाप। इस पावको उत्से पर कोर नही बनता । विसना-पाना सीना नहीं, कोई काम-काज करता बानता नही। बान पर दोन-पुस्तिोषी सेवा करना सौला ण रेषा मगवान्का माम सेना और मन्न करना । इससे दूसरोका पुराव-ममम दूर होता थापेकिन आम कुसमपम उसका भनाल से दूर हो। भव तो उसके प्रस कुछ भी नही पम गया । इसीते दुम्लाकीमामय भारी-करते उसने कितनी बार मफ्ने मनमें सोधभर पाँ नही पंगा बिपर साप मा उपर नियमको बार बम पउँप । म मा इस गप पीदियो परप्रेगष्ट, किची देव-सम्बिर परफर बैठाप, भपया किसी पनीचे पदर व मुभी दो सगा। मारीची नकी, पाप-पी से मिरा हुमा पर, ममले परिचित पर पोर पर लोगों मुख, सबको पर किसी रसम बपमा स्वमि मी पर कसा पाएकन मी पित प सकेगा। इसी पर उसने मामइसी पानीमपरकी दाम्यनमें उसने मम्त समप ममने पिताजी सेवा की। भीर.उने यंगा पहुंचाया विराज या है, पही उसने पूँटका या पागहै-उसका म्पा दिया है। इस पर इस म्पानको ममता या किस तयहोर सांगा! या यहाँ बैठकर, दोनों से भफ्ना महार पे हुए गठेसे रोने बगा। उसो मा यही इतना ही हाल है! मफ्नी प्यारी बहनको पापा रेभापाल रात्री कोर जबरता नहीं मिल पाव! किसने ही दिनोसे पर मानको नहीं देस पया-उसका उप कण्ठसे 'दा'कार पुपरना मी नही सुन पाया ! परापे परम या मा दुल उठा यो बिना ऐपपयो, पर कुछ भी नही वामान सन। अब परिरामागे उसका नाम सेना मी पठिन है। पर उसे पाब-पोसार मो इस उप मुख्य सकी, किन मा कैसे मो? पा पेटकी सगी सहोदरा गान है उसे गोरमै सेकर, मोर पदावर रखना बहा किया। माँ कहाँ गपा, उसे मी सामर गया भोर इस ए शिवनेरी मम्प-उपपास सहे हैं। किन टीको रोते गार पर किसी वय परबार एक का मी नहीं गा सम। ये सब बातेमाबान्ता मौर छोये पान यती है। विराम धनती र मी नही बनती कमी एक बात मी नही करती । यो विषयमें पा से पपरकी मूसिवय सदा कप एक दम गूंगी बन गाहै। मास्यास मी नीम्बर को एन-सा शुम्ता कि उसने मननी-मन उसी निरपराध नको अपरापी बना रहा है। किन्तु इस विपकी प-सी पचा करनेवरका यस्ता बन्द है। कोई बात पते पण उसे रोकारका उठता है-ये सब बाते गने रो। पायबानी रो-मेकिन उसकी पावॉकी बात नही। वह राबरानी शुम्दा उच्चारण कुरुइस स्पसे कर उठ गाती है कि नीबारदप भीतर भाग-मी मुग उटती है। पर इसी धाकासे मनदी-मन म्याकुल हो उटवालकही उसपर गुम्मनोग पाप न प-और कहीं उसका भरपाप नोचमा पर मायान्से प्रापना परवा या छिपाकर मस्पदमाकर नदी में बहा माय था। इसी क्प उस दिन पर ये थे। दुर्गापूच पा पहुंची। भर से या नहीं गया । विराबसे जियकर हीसे कुछ यो म्पप संपर करके एक पोती भौर कुछ मिमा मोक मेकर उख्न मुम्रीमोपकर पड़ा।
पिरामबह
मुन्दरीने बैठनेमिए मासन मा रिया समातू मर बार। नीलारने
भास्नपर बैठार अपने फटे-पुपने मैसे-चुपके भीतरस या बोगी निकालकर
मा-देम्स मुंदरी दूने तो उसे प्रत्य पोसा है। मा, एक बार देत मा । पर
भागे नोपमा महकर उसने पारसे भास छ।
मुम्दरी नबोकी बात बनती थी। गायक समी मानते हैं।
उक्ने पूलकासी को मार !
नीमरने यर्दन दिखाकर कहा-माम नही।
मुम्बरीम पुदि विपना थी। उसने और कोई मान नहीं किया । दूसरे
पिन सपेरे दी जानेकी पाच पानसे नौवावर उसे कया-पर्च देनेको तपार
हुमा, र मुन्वरीने नहीं बिपा पानही बड़े वा तुम्ने मोची मोड से
डी, नही तो यह मी मैं न चिठी-तुम्हारी ही उप मेने मी तो उसे मारमी
बनाया।
मीरप आसाँसे फिर माँस गिर पोपा मुंह परकर बार-बार उन
पाँच्ने च्या । ऐसी मोरना उसने पितासे नही पाई थी। घमी पाते tr
उतने भूट की , पन्याय दिया। गडी कारण उस पर सर्वनाथ
इमा।।
1
नौकातरमे उठवे-उठने सुन्दरीको विशेष साबमान कर दिया कि उसके
पुरल- करणी सर पर कानम म पाने पर । नीवर पो बनेर भाषी
सदरीने मी पाँचस्से अपने मोर पंछ मि। इस भावमीने समी मन ही मन
प्यार करो पे-समी मकिपारखे थे।
उस दिन विम्यादी पी 1 तीसरे पार विराने सोनेकी कोठरीम पर
मीवरसे बरबाबा यह कर किसा। मप्पा होते नोवे कोइ पापा कार
परम पुस भाया पौर सिने नौ पप मी मैया, करकर बारसे ही
मावावगाई।
सूख से नीमवर बीमा नियार सामने था सामा।
सम्पनिकम मिटाने प्रनाम लिया, फोर मह मिम । फिर मन मममीको मगाम
कनेविर मी मोर पसे।
उनका सामनाबरने मी भाकर चामराज रमाईपरमें मी नहीं
विराम पर
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५७
है। सोने की कोठरोप भर मी बन्द है। उसने बिन में पत्र देकर पुकारा-
परमो ममाम हरनेक सि भारियन
निराखने मीतर ही मुझे नुसार ठनही सती ।
मापसे बानेपर रोड़ी ही देरमें फिर सीने पच दिया ऐपन नियम
पोली नहीं। मेरे बारस हो औरेसे लिसीन बाबी में मोहिनी,
मारवापसोलो।
फिर मी सिबने बबार नहीं दिया।
मोहनी बोटी या न होगा ली। सारी रात रस दरवापर का पना
पो वो मी तो रोगी-चिन्तु भान मारा माघीवार किये बिना रस
साहसे नही दंगी।
मा परपाय सोबार Aराम सामने भा ली । उसने देखा, मोहनीक
बार पर्म लानेही सामग्रीकी टोकरी और गरिने र प्रभमें नौ दुर
मंग। दोनों पारी को पार रखार मोहिनीने रिपपरोपर सिर
रसार प्रणाम मिा।फिरपा-मुक्के और पही मसीसीबी मैं
तुमारो सौ रोई। बस, इस सिबा में मारे मरत और कोई मसाज
मिरामने कल माताको भाषासे पंजर पाप कमेटी बहहरे हुए
सिरपराप रस दिया।
मोमानी परी रोकर रोटी याबसौहार दिन मौसू नहीं गियना चाहिए
मपरम भातुमते गोप नहीं सकती बीबी। बगर तुम्हारी पेरणीस्वामी
मेरी रोगई हो तो उसी बोरसे प्रेमाची किमगछे जा ऐसे ही
पिन वा बात है।
मोशनी पनपर विराम्मे परमपी रखकर कोठरी में रख दी भोर स्वर
निमा यौ। मापा मार मी थपी वय समा गालि मोहिनी
दिन रात उसर मौन रखदी।
इमार पिटने ही पर्व मापे-गो मार विगम्म लि दरपाय बन
नहीं किया। यही सब पीन र भारत भापार पूर्ण किया परा।
दूसरे दिन सारमा मन्तमारते बरामदेमें फैली मग मात्र यी
यिरामबह
मुन्दरीने माकर प्रपाम किया।
वियाने भसास देकर बैठनोहा।
बैठने हो सुन्दरी ने कहा-पर रात दो गइ थी इसीसे पाप र कान
भारोमेकिन पाहे पो सो बहू ऐप धन्दी वो म कमी न अपी।
बिरामी कुछ समसमै म भासा । यह उसका मुंद ताकने कमी।
मुम्दरी करने लगी-परमे कोई नहीं है। योग पूमने पि
पर गये १।। एक दी बुआ। उसकी पर भीड़ी पारी सान।
पोय-मेय मेध। दामादतको एक पासी रही मेसी लाटी एसपी
पोटी मेपर पूज्यका मार भने भार!-सके बाद नीच चमार, बेहया
भादि नपने क्या-क्या वाली पी, मिलेमने कुछ प्रमरा नहीं।
पिराग्ने विस्मित दोपर पूछा किसने किसे पारे।
मुन्दरीने मा-और किसे हमारे बाफो।
पिराध मीर हो उठी । वा कुछ भी नहीं मानती थी इसीस कुछ भी न
समझ पाई । उसने कामरे बापूको किसने मागे दो पता ।
मवत्री तुन्दरीने कुछ विस्मय होकर कहा-पही यो में इसनी देरसे का
पी बहू । पूर्वकी दी पिला सासको किचना पमप्, कितना दिमाग
धोती नही गयी। पाकर उसने या पोवी मांचक मीसरसे निकाकर
रखी।
भर विराब सब समझ गई। या एकटक उस पातीकी भोर ताकने समी।
उसमीर मौर बाहर मागव्य यई।
नीमेवर गार गया था समैग्गा, इसका पुष टीक न पा । सुन्दरी
उसकी यानरल सकी बच गई।
पारको नीचर मोबस करने बैठा पा । मीकर माफर, यह पत्री वसक
सामने पुण्यूमर रनार विराम्ने काा-सम्बरी मार देगा।
सिर उठाकर देखते ही नीवर रस एकपम मुरा गया। उसन कराना
मीन भी किया मेद इस तय विरामागे पुल बायगा । उसने
नी पूण पुपचाप सिर बिपा।
बियने कहा-टनोंने मों नहीं की तो भरपेर गाोिं रेकर य दी
विपशपा
बाप मररी पास आकर मुन देना।
कर मी नोकरने न सिर उपाया और न को भरी पाठ मुननेकी
पमा प्रारधी पिराव मी धुप यो ।
नीलोररकी गप्पा च एकदम बाती यही। या B हुए मीव मुखसे
कमी भमुमा करने च्यारिबिर सि उसे ऐम मार ठस
सिमे माय बरत थी।
घामको नमार मुन्दा पगमा पार-बार पूराबर सब शव मुनी । घर
हा- परमने गये वो वस्र ही पर मर्म हैपी न मुम।
मुम्हरीने सिर दरभा अत्रे ठोरी पाई।
नीबारका मुंररिक उटा। योगगुम्ने वा किनी गरे।
मुन्दरीने सरा-मेर दोर नही वारी।
मने प्रारमित होकर मारने का दिन नौकर
पासे ठी मुना होगा!
सबने मानही वा । मरी फुपिया साख्न ऐसी कापरी मुनार,
एवापर र भार मरकाये हि पूण्नी म्या मागठे ही नहीं मिशी!
एम्मर मुम्प मुतने रिपर यर नीहारनेगा-मस, मेरी पूरी पालेमे
इण् पुतीमा गई या कुछ मोमाय नु ता ent?
प्रोंका रचर देते-देते मुम्दरी माता गा पी। सम्में कराया---
मोरगी।
भाषा समुह पर नीबाबरने पूछा-बान पाया, मुन मारमा
मुन्दरीने गर्दन दिनकर फा-ना मुना मी नहीं माद।
रामा
मपत्री मुमरी वीक्ष उमे। गोही ना मैर माते ! तुमन पूज
गुम देसावा, इसीसे या पायर मय ही रहेगी।
नीबा सिमसार पीरेसे पोपटक है।
इसके बाद मुम्दसौर मादी और अपमाप देलते गाय, एक टीस
कर पर बर मामा गोला-मश का भाव वा पिरवीन
भाऊंगा।
विराम यह सुरपने शान्तिपीसी। प्रशाम उसका सूर म पाएको करने मेवानी, उतम दो परेसे स्मातार एकही माताको सक्दो व्य प्रकारकर मी पा नीवर दारको मिस मही समयी। सम्बे हदीसे पानगपू, रात हुई माजबामा । और किसी दिन बसौभाना हावबाद झेगी। रखनी दर माद नीरा पान सुन्दरीबी उत्सम्यान ममताकी भोर गया और यमा" कार पछ दिया । मुररीकी सरारा एककोपारप पा । उस मोहम्मे निताई मगुही एपी समय माप निस्म । एक बार उसकी मुधि पर भपन परपाती धूपदमाये थे। उनकी गापूस भी मास सामने गौन मा परे इस मासे उस रोंगटेसो अवे' यति भनेक कारपीसे उस भाग्य म गये थे, भोर समांदारी भनुपर सीसम्म गरम ही पास गई ये वो मी रस निकारापारिक प्राम मागे मफ्नी हनवा प्रकार होने की सम्मापनाचे पाग मारे मीना - नीर भनेर पर पुलिस पिचसे पाग बन्द करने भार- रिन्नुमने नम रामने दो रेस पड़ा कि नीबार मैय भा रहा है। मिलाद पर बोझा साप उसकी पतीध पने स्यौ। म मुसपर पापम्द्रमा प्रकाप परया था। नर नर मार पड़ा, फिर अपने पार से एक मम्मी सोनार, सलामो स्वरम गोमासे जमा नहीं हैदरी, समी र यी है। सपा भी इसे से थे। अपर माराम सठाकर ने मा। मुन्दरीभ कारगर पीट गई। नौकरनेछ- मिना दिवा बाने बामेराम मीन रे सम्रा श्रीरकन शेष पमा भानुभौमे उसघ्र प्यास्पच हो गया। मुन्दरीने पर जोपा सिप मागे करमा-विध, कुछ मोहो, भाप सामेय 'ना'मा मन नहीं देता। रार रखने पर मापने एफ ए टते म्पसे पुमाकर
पिराजपा
बाप बॉफ्ती हुए बोली-चो पिर भ भीतर आइए। इक्ना कार पर
मीवर पनी गई। नीयबर उसके पीछे पाकर मांगनम सा हो गया ।
मुन्दरीने सयमरमें ही प्रेरकर नौसर व पाच मुडभर रुपये रतार
प्रमान रस प्रपाम रसा मोर या पैकी एड मासे म्पार सड़ी
नीमेवरको मिसम्म हरिबो देखकर उने इतर करा-
रस वा लोकर वाम्नेसे वो काम न बमेगा बाबू । म पिरमाकी दासी
हैं। पर होनेपर मी या बोर सिर्फ मे हो।
मौकाकर घर उपए रायकर या नावावर चादरेमें गाँधी दुई मर
उसे बोली-भाजी, ये पर मापहार दिए हैं।तीपात्राय देवा
नामसे हमें समा रस दिपा था । सो बाना बोहो नहीं सका भाव देक्वा सर्म
होपरापर मये।
मामी नामपरसे कहोम नही गया । ममी वर तर समरीने
भावामी परमें बायो। मा भाप धार, मेन रेसिए, उन मामात
किसी तय मासूम म होन पारे।
नौसर सपना दो पारवा मा कि मुररी सा रेरा उठी-
इयर परिए में ना मुगी । माम मेय मान न रखेंगे, दोस्प बानिए, में
सिर परकार मराऊ गो।
ममीतक सम्बकाप पावरेश वासिय पा। इस बीम "स्या से
यादा र निता गांगुम झुमे रमानेते मौतर सीप भागनमें
भार सोशे गये। गुम्बरीने चापरा छोड़ दिया और नीयर बार
पपगा।
समर निवाई मुंह बाये मवार को दो पेपर ष्यतो
नी मान
मुम्दरी मनमै वो गोभित हुई, र पब मारसे योगना, मरे ममालिक थे।
निवाईने का जुम्वा परमै सानेको मी नहाँ।नी गवको पाई।
काम था, पीठे बाये ।
'मी काम वा कार निगई होठ बार मुख्यये।
पिगम पर कि उन से बड़े भारमीको गोलम धून मोकना साब नही है। मुम्दरी उस मुस्मगाटा मतप पर समझ गई। निवारकी पपरथा पपास सारी पर ही पी। सिरक ग्रह माने या पक गये थे। मह-यावी सापट, सिरा मोरी पोरी, ममत्रपर सरेका पन्दनका दिल भीतक पपस्थान पा । सुन्दरी उनकी भोर एकरु देखती थी! उसपीला भई मात्रा निसाए सम्म म पा| "सीसे कुछ उमित होकर का वठेस पप मोल रही हो देख रही है। स्पानगीो। देस यी है कि तुम मी मापन हो मोर बो के गरे पर भी मामण है। किन दोनों किना भाकाश पावरका अन्तर है। बात समझ न पाने के कारण नवाईन पूण-श्रम मन्तर ! हुन्दरी मुसकाकर पाटीयो भादमी परे, भाम्म न लायो । असर राम आकर ठो । मैं इसम सादर करती, गगुटी महाएम बमारी तरफ रेलपर सोच पी पी कि मेरे मासिका परीकी बनिम्ती रख पाकर रो तुम से ही विचन ही गांगुनी कर बाते ! मुम्बरी पर पाठ सुनार निवाई प पौर स्मिपसे बाते य गो, उन मुहसे गोड नहीं फूय । मुम्दीने टिम उठा ठी भोर मान मरते-मरते मिल होगमाप कहा-ष न करो मन देवता मैने सच पर ही जी है।भायही नहीं, बराबर रेखती भा पी। मानिस बनकली मार देलव ही पति पापिया माठी, माम्म पड़ता है जैसे उन गरेपर भासम्पनको रिसोरखी है। और मफ्ना बनेट देला देखते इसी मातीराम- पसे या सिडतिमकर स पड़ी । निठाई पासे ही इप्पानी भाप पेमे, मर कोपरी पाहो उठे। उनकी भोर मा भगारा हो गई। सिगार पहा-ना पमरन पर तुरी, मैंनबाबगा। सुन्दरीने मिठे हुए पास भाकर सिर ४-५ नशेमा । स्मे समान फ्यिो । म दो तुम होगवा मरनेस मा गोरप बो मेरे सुनी मालिकको ऐनहर सिहो। ।
पिपडपट्ट
नवा मार उठता हुए। मुम्दीने उनके सुपट्टे करा
रूपमा मौर सते हुए - टोमैटो, ये मेरे सिर कलम ।
अम निवाई मफ्ना दुपट बोरसे कार पुराते हुए पूमे न मा म
प, वेरा सस्थानास दो!-मावि शाप देते हुए देखते पाये।
मुम्दरी वहाँ बैठकर थोड़ी रेखा खूप ती यो विपरित उठकर
सखर परमाम बर पर परि-भीरे सवी पी-पापा और का पद !
मम इसको पाते हैं। एक्ने मुल में यनेपर मी पर हमेशा हर
पही साध्वी पती,फिर मी धनकी भोर मांग उठानेकी रम्मत
नता पदवी-पनो मागलया।
९
सीरपनही सकटे, पास पाभा मेशिन पर पात विस्त
होकर पानीठक पहुंचनेको पाकी नहीं रही। उस दिन माना
रजे माईकी उत्तरकी मुभा । पिस्ने सब मन मार मुना । पिर
गम्मौर होकर मा~-उताएकान कार ना पिएमा ।
पुमा निमारकी गई। मी गई-अनती तो उस सी बाप्पास
और मौसम ही नहीं है।
अपने सामीको पुखार 10-तुम मुमरीक दिर पर गये में?
नीबाने मसते सकरा दिया-बहुत दिन पाठे पास
बाननाए गया था।
"मानना । सुनती है का पाठपान पहुच सरामरो गया।"
इसना पार कर मरने कामसे पीगा। इसके बाद मने दिन बीत
गये। सूर्यनायव निल निपने भौर पस्त होते हैं। उन्हें रखधको
उपाय न होने परप ही पास गीत गा भोर या मी 'मय करने
गी। रात परेपर एक गारी गामा मया और गरीने यी।
अपना मोर प्रसर हो गई। गो उठकी भोर देखने माध,
साकीसते माप हो जाती। धूपो रेषा गया सम्मा नाग
एटको गातार सहर पसार, गिरकर से दहा विरामी और
पिराशर . ६४ मी सी ही करण भएपसी ही मपानको ठठी। स्वामी साप बाम्बीत गमग होती ही नहीं। इस पर पोरकी तय माता मान्य है, उपर सेमा देती ही नहीं। तमी उससे रखे। मठ मेरी रहमही परती। या मौका मिब्वे ही मा-ख पाकर उप किया करती है। पहले पारे विराग्ने उस हापसे पुरकाय पनेकी पर पेश की, लेकिन एकर नहीं हो सकी । बोले मह परनेपर या गटते पिट मठी मो माव कानेपर पैर पर रेती। उस दिन पणारा पा । बहुत रोय पर धुपार माई और बोली- भमीतक कोई उन्म नहीं है, पम्मे न पीसी, बप नवीम एष मोवा गा भावें। उत्त पार पासे बम्मेयरका बार बार पुमा उसका नीर बनाकर कर दिपा गया था। रानी जेठानी पोनों स्नान करने गइ । स्नान कर बरसे बाहर निकाले की देला थोड़ी दूरपर एक ही नीचे पीएर गफमार सका है। वस मगर उस सम्प मा पूर्ण व्यसे मन्मभर दूर महाँ दुमा पा तो मी दोनोंने उसे पहचान मिा । छोय पम्पसे तिर्यपियकर, सिमरकर बराब पीछे या ली। विरामको मा भार्य कुमा। रहने धमेरे पाभादमी भाया से। किन दरख ही उसके मन में एक सम्माना उसे कि शायद या रोग इसी व्य पारा दिया करता है। वो ही एक सेपिर विराम दुरिमा यी, उपाय देवगनीम राप फरार चकर मोदी-लड़ी न योग ग, पीमा। उसे साप पर देव चाम्से दरबार पहुंचार निराब एकाएक कुछ सोपारा गई। उसके बार बीमी पाब्वे बैरकर रामेन्द्रसे कुछ पूरीपर कर पड़ोगे गई। उसकी दोनों मोरपी पी। हरपुरे असा प्रकाराम में राग ठरस्किो माना। उसने सिर मीचा कर लिया। नियमने मा-माप मले भारमाबमान से वारमी है। माफ्ली पासी मादि। रामू इदि हो गया-उभार न दे सका। ।
मिरास यह विराम पाने गौ-मापी बादाप पाहे मिाची बोआप बिस अमरपर सपा मेरा फिर उस पारका मार सरसे दिखापर पा- पाप दिने मपम र पातको रस पाटको एक- याबी पनी मैं मी मानती हैं। पता, माप पोई मामान नही है। बाल दिन पारे अपनी दासी एप मैंने भापड़ा यो मानेर मि मना कर दिया था, गा मापने नहीं सुना। रामेन्द्र मिप या म्यसे इराना बामभूत हो या परिसनेपर भी कुछ बहन सभा विराने-आप मेरे स्वामी को नहीं बानठे बनते होवे होमी पर न माते। इसीसे मान को रेती कि और कमी माने से उनको मात्र पेश कर देखियेगा। इन मार गिराम बीरे धीरे पत्ये मापरमावर सोपी पो उसने रेखा पीतावर एक गामा एक मध्ये सहारे। बहुत सीसे उससे गोवाल नहीं थी, वो मी उसने पुभिरकर भामी मिस तम ममी पावर पीपीपा परिवान। पटक मारते ही विराना बय और मा योगदार मीवर पर्च गई। पर सारा मफ्नी बात वो उसी दम भूम गर, स्थान छोरी मार सम्प, मन-दी मन अत्तम्त सौरम्म रमे। पापस यही सोमनेगी कि स्पाबाने हे मेरे साने देत पाया या नहीं। किन्तु परिखक बना न पड़ा मगमग रस मिनाक बाद उस परसे मार-पीर बम्द और पी रथयात्तथर हुन पड़ा। विरार पोम चामे गा मोर पाठकी मनिधी र बैट पर। नीर भर्ष भभी नारामार बाहर भाकर मर भी गाया। पीतवस्ने गरना प्रम पर चमर मन यार सुनया या । उसके पारही पठार पोपत बापा मत मारकर उसे वोरयन और उपर परीब पाएमा । सामने धमसे पीकर परतावर सिर उया कि सामने ती पम्पनी वयोमायो देसारमा शेर सगपा।
बिरामबा
जमीनपर पड़ी हुई मेठी महको सम्बोधन पर नीमवरने का-मीवर
बेटी, कोई र नहीं।
परापती दुई पर पी गा। तब नीमेबरने मबारसे मा-
बर्ष सामने तेरा अपमान नही या मेकिन मेरी इस पाठकी भूबार मी
भगमना न करनाA बस्तर में इस परम र ससक पहनी
सकेगा। तू उसपर मो हाप उठायेगा उसे ही सोर गगा। इसका कार
बाबमा पाया कि साहस पोरकर पीवावर र ठठा-परपर पाकर
मारने तो मा गय फिस्त कारण मानठे हो !
नीवर धूमकर बड़ा हो गया । मोव्य-नही पानना भी नही भादवा ।
पीतारने कहा-सो पो जानना चाहोगे १ रेक परता है, नतो मुस
पिस्कुक पर शेरपर दी मागना होगा।
नीम उसका वास्ता या फिर योग-पर मेवार किसे मागना
पोया यह में बानता। इसे पार न कराना परेगा । भवन मा मैं इसे
बतचाप चावा क पा नही होता, पफ तसे सापक पना
हो परेगा।
इना पाकर नीदर ग्नेको दुमा कि पीतावर सहसा सामने भार
जरा हो गया । बोम-तो फिर तुमको मी बस्य देवगर पाया कि दूसरेका
शासन करने पर मफने परका घास्न करना ममा।
नीभर तामता र गया । साहस पाकर पैदराने भा-बानते तो
हो कि उस पारका पाट किसका है। ममा । मने तमीसे कोरी बाको पारपर
मानेको मना कर दिया था। भाप राव ये उठकर पा मामी साम नहाने गई
थी। मैनपने इसी तप रोज सती हो ।
नौकरने पिरिमत होकर का इसी मपपपपर तूने हाप उठाया।
पीतारने का-पा मसुन दोघे। पर भारतका पका क्या
माने पकना या क्या नाम है उसका उसकी दोश-विदेशमें सुस्माविकी सीमा
नही है।माम मामी उसाप माप येताबा करती यो स्पी!
नपर कुछ समझ न पाकर म उठा-मैन बा करवा पारे।
बि!
पिराम बार
१७
पीचरने कहा--पीना बही ।
ड्ने बानी मौली देना।
पीवारने मुत्पर (सनेका-सा मार मार कहा- अनता हूँ म
मुख देल नही सकते-मेरा परम्पाप मावान् परेंगे सेफिन'
नौवबरने भेंटकर करा-फिर मगवान्का नाम अपर ममता है। स्पा
मेगा सोका।
पीवार पाक ठप | कुछ कर सर सर करने गा-भाँससे दे
बिना बात काना मेरा स्वमाव नहीं है। प्रता, भार परम शासन न कर
सको तो दूसरेको मारने लिए न पद दौड़ा परो।
नीरफ सिरपर जैसे भास्मात् मटीकी पोट पर गई । मनमा उद्धान्त
मिमूद रिसे वास्ते पर उसने मन्वमै पूज-भार पटेखक कौन बसे खा
पा बियन बहू ! तूने मफ्नी भालसे देता है।
पीतावर दो-एक पा पीछे और पुत्रा सड़ा कर बोग-दो, मौसम
दी-भाष पटेसे शायर अधिक ही होगा।
फिर नीवर कुहरेखक उपचाप वाकता यार बोम-मपम, मगर
यही तुमा ठो मा कैसे माना कि बात करना भावसान पा!
पीवावर मुंह फेरकर (सकर बोला-या पो नहाँ मानना थेग्न मेरा भी
मार-पीट करना उचित नहीं हुमा मौषि पर पार छोटी बह ए नही
बनाया गया है।
पपमरकी उपेवनासे नीचर दोनों हाप उयकर दौरा परन्तु साधक
गया । पावरक मरी मोर देखता हुमा योग- एक मानबर और फिर
ोग भाई परा । पहा माई होकर मैं तुझको पाप नहीं दूंगा | समा करता है।
मगर भाव तूने अपने गुरमबिए बो या उसके लिए मगवान् उसे धमा
नहीं करेंगे-। कार वा पीरसे सपने पकी तरफ भाकर हरे हुए
बरको खुद अपने से पौंपने लगा।
वियम्ने कानमार सर मुना। या मोर सपासे यह सिरसे पैरतक
बार-बार कांप उठी। एकवार विचार किया कि सामने पार पानी सब
बात कर दे, सिमा टसके पैर नही रटे। पतिक सामने पर यह बात कैसे
विरासह मपने मासे उधरण परे कि उसके स्मर एक पर पुष्पकी पुरुष सरि पड़ी है। बेदा पॉपकर नीवर बार पच गया । दोपारको पाली पोसपर राम भादमें बेटी रखी, रातको पति सो बानेपर पुरेसे भाकर मिनेपर पापी मौर समेरे उसकी नीद मुख्नो पाछे हो पार निकल गई। इसी तय मापसे पते सदो दिन बीत गपे भौर नीवरन कुछ नही पूछा तब और पक स्पकी का उसके मन भीतर वीरे-पीरे सिर उसने गी। सीक सम्मम हतनी बड़ी परनामी मातम पतिक मनमें कोई कोता न उपस होनेका कोई संगत कारण उसे नहीं मिला। पास मम्नासे पर विस्मित हुमा पर सम्माषना मी बिरालो जानवना नहारे सकी। एक तरफ इन दो रिनोको उठने से एक-छिपार वितामा, पैसे हो दुरुप कर पड़ी उसे पर भाधा सगी पीरमर पारा उठेगी भब कुमार पटना पनना चामे समा मारिसे मन्तवक बारमार, स्वामी परणार नीचे अपने सारा पोत उसारकर स्वस होगी उसकी पानी दूर हो जानगी । फितु मां पर कुछ मी तो नहीं दुमा। नौवापर पदीया। एक बार रामने यह भी सोचने पेश की कि सम्म स्वामीने इसपर सियस ही नहीं किया। ऐकिन फिर उसने सोचा कि उसका इस तय सम्पूर्णस्मते भने म्पिाना या पति मन हन्दह नहाँ उत्पप कर या र मिस बावकोपा भाप इतने दिनवक रिपती माई से मर भाप सीपार से कोपर दिन मी ही व्य बीत यमा । दूसरे दिन सपेरे विराज मपपादित माकुबसे परफा काम पंप पर गी थी । साध उम्मसपर्क गहरे मन्तरको मार पम्प या मकर मात बाहर निस भार फि भगर माने होर समयकी वाल्पर विपास होर रिया हो हो। नीर ब-पाठ समाप्त कर रटनेवामही पा विराम मापीकी सप उससामने पार हापनेच्या। बिस्मिा नौवांतर सिर उठातेही विराम बोरखे होठसे गोठपाकर कर
निराशा
सही-तामो, मैने म्यामा । मुहले बोलेमोनही ?
नीम सिरिमा योग-तुम हो मागतो पिरती हो, पाव विसस करें।
भागवी विरोइम या एक बार पुकार माँ ने पे !
नौमारने पायो मादमी मागत फिरे उठे पुकारने पाप होता है।
पाप रोखीयो पापो कि तुमने टेबलाकी पातर पिपास
सपनाATEमस्या?
वियबरेभोर गुल ये 1 भामुमोले कि मते विस्थारबाही-
सपनी, और हमने सोपियासा!
तुम्ने यो बिमारे पास नही की थी?
लियन वरपमानसे उधर दिपाया, की की।
नीने प्रा-सोमने इरा दी रिमात मी किया है।
बिरामनेरी भो ज्वे हुए प्रमा-मगर वियस ही किया वी
सिर उधौ पकी हर मुझे मम्मों नहीं दिया।
वीररिता बजेलिसे की-सी उम्मत निर्मपीते उसका
मुमसमपाल उमास्तिो उठाना छप उठाकर काम वो पाच
थामी, पपपरकी वय मोर एक बार कान मा।
पसार ही निगम ने पाप धुनोंठगा और तुरस्त की
पठिी अतीथेरसे गिरकर रोनों हाथ यो गर फूटपूर नेगी।
नहारने नेते नही पेशा उसकी भी बातों भौखोमबार मर पाये।
पापी सिरपर फ्याप रागिना राम रखकर मन-ही-मन बापीपद देन
गा। मन ममाप बोर कम स्पा, सरिसबने मिर ठामे
मिना किस-उससे मैने मा मापानते हो।
नीबरने पूर्व मुखरसे प्रा-पन्य, उठे मानेते रोग
Rपा।
तुम दिने बहा!
मानारने तर काका ने यही किन एक मपापित
मारपीटे बाद भी है, तो पो हम पर ही की है, पर में पता है। हर
। बिराजपा था, १ बामात इस सिवा और स्पा हो सकता। विराको भौतास फिर मौसू पानेयो। नीमरकाने मा-पिन काम भन्डा नही किया। मुन्शबताना चाहिए मेंदी पर उसे समाप देवा । मुझे बहुत दिन पारेरी उम् मनका मान मात्म हो गया पा-तिने ही दिन सपेरे मोर धाम उते रेल मी किया है, पेकिन तुमने मना कर दिया था उसीका तयार करके किसी दिन कुछ नहीका। उस दिन शमते माकाधम बारम पे ये भोर बाघोंदी हो रही थी। रातको पति-पत्रीम फिर पचा पी। नौवांवरने महा--भाब दिनमर में उसकी मतीधर्म दीया। शिराब सरकार पर उटी-पौ। किसलिए । दो बाते नपनेते मगवान सामने अपराधी ना पागासथिए । मम और उन्ना मारे विराब ठट बैठी। बोडी-ना, पहन होगा, किसी तयन होगा। इसे लेकर तुम उसे एक एप मी न कर सकोगे। उसक मुम्म भोर औलो भागको यस फरफ नीचर भस्मम्त विस्मित होकर बोय-में तुम्हारा पनि मेरा क्या नाम नहीं है। बिना सोचे-विचारेही पिनारळी-पाले पति मौर काम करो उसरबादमा पम्प कप्पना । साकार नीळापर सपमर स्तमिगत-पा दोहा। अम्तको पीरेसे 'महा' कार, एक पसरप, रबर परमार गुप हो या। बियब उसी तएपड़ी पड़ी रियर होकर सोचने गी कि भाव या रेसी पाठ समसा मेरे मुरते निभाई। पार पाकी परीके गिरनका पौम्प पर होने लगा और खुम दुई सिदकासे मीगी मिहीपी गैषी सौदापनी गंध भीतर पाने लगा। मीवर पति-की पोनी मागी उपराप सन्म होकर पीये। बहुत रमाद नीयबर गहरे भात-खरम-से मम्ने मनमें दोकाया हो- उदा-मसिना निकम्मा भीर अपाय राब, यह ता रे पार साता पैसा और सौके पास नहीं। विपन्न पाना पारा मेन उसरे ग मोड ही माँ मम । बात
दिरामय
दिनी बार भार रस भन्म खरेल-पीड़ित दम्पतिक बीय सबिता पाव
होवे दीपा पिरामिल हो गया।
१०
दोसर सम्म भी किसी न दलकर मेरी का पेटीई भाई और
निरास परोपर गिर पड़ी। सामाने मपराध किया था, सम मपसे म्मान
होर पर दो दिनीवे मा सो दुपांगली शाम की। पर बोली-ग्ने धाप
न देना बोगी, मेरे को मार देतार उनें उमा पर रो। हो ममा
घो में मिभूमी नहीं।
सय पसार उसे उठाते हुए, विपादपूर्व गम्भीर स्वर मियाने मा-
में शाप न मी गान । मे कुछ मिगाइनेकी उसमें डाकत मी नहीं । मेन
तुमची मती मममीकी पेपर बिना किसी अपयका पमना दुर्गा मैया वो
नही नरेंगी।
मोतीनी काप उौ । मांसू सती हुई बोध-कमा गोली उरका
ऐसा न रेक्ताने उनको नापी बनाया वही पमा
रंगेत्र मी ऐज रेस-रेक्या नहीचा निकी मेने मानवा न मानी
हो। पर में दी पारिन किसीने मेरी पुगर नही हुनी । एक मी दिम ऐख्य
महीपाली--पाते यावे वाहात गाया।
ममीतक यिने नम नही किया था कि ये पहली रिनी पनपटपर
एकविता गाय काम दाम पहा है। हमारा ठहीदीमापेर सा
परमारप निशान
सोयगाने सति मुख नोवार गमन रमई।
पिराने पूम-भोट माग पा?
स्यामानस मरे छोटीपटू तिर नरीम पवी पी। उसने सिर पर
दुए से भीरेसे पाप मानेर उनको शान नहरी गा मेरी ।
सो तो मैं बनती।किन मारा ति पीय!
मोहिनी देर हो लिए सच रोजी-रोम बीवी
विराव सोयी, उसकी खोटे बाग निम्ने यो मन
पिरामा
दरे हुए न कष्ठसे बोली-कसे साबिमा ने छोये बह!
गोटी सिर कुछ पर कर योगी-मुझे मम्मास हो गया। यगी !
बिरामने से उसकी बात मनसे मनी ही नही मिात कष्ठसेना-
भीर उसीएसमा परनेको मन माई है?
मेठानी महकी भोर देखकर छोरी बहने प्रा-हो बीबी तुम प्रसा म
होभोगी वो उनका मानिस होगा, मोर सानेकी दो बात करती रोबोस सोते
तुमीसे सीता । मेरा को कुछ सोम हमारे ही परीकी
पपीर दोपर विराम का उठी-नही कोयबा नहीं । पछी बात न का
पैता भपमान में महाँ पा सकती।
महिनीने बरा करा-मना भपमान होना दीपा गुरु भपित
मनावर तुम्हारा भैस स्वामी-माम्म संसारमें नारिपीको नसी
नहीं होता, फिर मी तुम बोस यी हो उसे खाना पड़ता तो हम्मय पूरा
भावा । उनक मरकी रेसी गायब हो गई है, मनमै सुन्न नहीं है यह सब तमन
प-रिन मोलसे देखना पाता है। ऐठे स्वामीका इसना तुमारे भय
एसपी मी नहीं साम्ती पीरी।
मियनपुर हो रही।
होम बहने रोनों हासे मदीसे उसके पैर पर ये मौर का-पतार
गीची उमें समा कर रिवा तुम्हारे मासे मने बिना मैं किसी तय मा
होमी 1 तमोप्रा न होगी तो उन कोई भी नहीं गया सगा पीरी।
सिग्ने पैराय सिये और हापसे छोरी की ठोड़ी पमपर कमा-
क्षमा पिया।
एक बार फिर विरामकी परपरब मोठे मार मणमुख छोरी
पी गई।
विलियम भमिमूलकी ठग उसी भाबहुत देखक बोकर
। उसएप पन्तसम्से कोई सेवा पुकारकर कानेखा-
देखन सील पराज!
यो मुष दिनकरी रस में
(मकान उसनेसीया रखा मोसमय उस
विराया ७३ पदोसारपनासे पर उस देवार इस परम प्रवेश किया। Aपन राप रते रसोईपरपरामकिनारे सम्म होकर सी पीती दीरेठीही पी। मेटी गाने पस बैठाकर निराक पैर पर भौरेस काजी स्या पागप रही। विपस्ने र पिसकर वीय स्वामें उत्तर दिया-नरन्सी । बाय बहने सामने पाय तुम्ना कर मुझको मपराधी न बनामो काली । में हो तुमारे इन दोनों पैर्गी पूझ दोम्म मी नहीं है। किन तुम बढायो, सो ऐसी हो पी१ बेग्यको भान तुम्ने खाने क्य नही दिया। निराग्ने पान तो खानेको मना नहीं किया। छोटी पाने कामना नही या यह ठीक है, लेकिन एक शर पार रोनही गई सानेकर बैठार टाने कितनी बार पुभरा एक बार बाल- तक रिला । या ना को इससे एलरोवाकिनी ? एक बार भगर पास पीनावी हो पा पानी छोरर कमी न । वो मी वियव धुप दी। छोय मनेगी-आप 8 में कार मुझे पान कोगी गी। तुमने रमेपास कामाय मेहकर उर्ने साम्ने बिठाकर भोग्न परापा-धरमें इसे पमा काम उमारे दिए मोर कोई कमी नहीं था। भार पात पूर्ण एने इसी पिम्ने प्राय वा उसम एकाप पाकर बरसे सबको पुरानो मिपाकर देख, ना पाकर उसे ताबमर रहोरपरकम मार दिया और बहे परिवार मेरी पाने पानसे देश, एकप पपरक पात्र माना बहकिने मोटे पात्र मत मीर उस पर पभाषा मुमानाप रखामा मोर कुछ मोन परमार और बोर वापर न रेलकर ने इसे नदी किनारे ठोका पत्र रिया ।
पिराम ७४ दसते देखते में की मानेसे कर-कम भार गिरने गा चिन्नु भिसी मोतीम हा भाम्नस्तक 'न था । योनी बहुएं--पनी मेठानी गुरबाप एक दूसरे मठाती रही। राने भति सब स्वरमै पहा-त् भी तो पर सी गुने मी तो पकाकर स्वामी भाये यासी रहनी पाती है। वही बता, दुनिया में म्मा मामी आमने रेटार बाम्पका ऐसा मोबन करना रेल सकती। पासे यह वा पिर रे मम दो भाये यही पाकर मुझ गाडी है-में कुछ न बोगी। छोरी एक बात मी नसकी उसकी भौसासे उसी तए भगावार मरनेगा। विराजपने भगा-व-संयोगसे भगर किसी दिन रसोमि कोई दोर होनेते उहोंने एक और मौ कम लाया है वो खरे दिन मेरे स्वयक मीतर फैसी मुर्गा पुम्ती सी६ पापाई भौर नहा धनता तू बनती है ये बा। भौर भाग उनकी भूखके समय पर बो गार देना पड़ता --सो यामी पार माना मिल गया । भागे पालन न कर सकी, सगनीकी मती पर फार जाफर गिर पड़ी भीर दोनों से उसके ममेसे मरकर पोरसे रो उठी। इसके बाद नग्न बानॉकी पदोनों बहुत रेतक एक दूसरे उसे सम्पपया। बड़ी दरवको योनी भमित्र नामक युपपाप भामुमी से भीगते थे। इससार बिरामने मिठापर कहानी में से पा ऊँगी मी पारि मेरा दुस समानेवाग परे सिवा और कोई नहीं है। मैंने बहुप सोप-पिपारकरलाकि मेरे यहाँसे हरे रिना उनका यामपूर न होगा। सेपिन राने तो मा मुल देखे बिना एक दिन मी न पिता गया। मैं ऊँगी बठा, मेरे बानेम द टन रेसमी। छोरी पाने मांग उठापा-मोशमोगा। यिक सूने दरोटोपर एक पठिन बुझी हुई उदी सीकी रेसा लिय गा। व्यन पख एक पार उसी मनमें इपिता मी भादपिकी भी। उस पार बोडीया से पानी पानसमा बाना होता है। मुन्द्री । उमसे मनपर पप प्रापर भीर नहीं है। सोबा पारेको मापन-रातकी J
चिराय या
म
कोमिट अवगो।
भरली बार मसन्म समयदर मोहिनी काप उठी और म्पत कर उसके
मुंबपराम रतार काठठो भी यह मापर मी न मना जी,
भास्मसत्पाती गातोपाव से पप होता है और वो पानोंसे सुवा
ठसे में पाप माता है।ही , या मारो गई ते तुम पैच !
नियम्ने सपत्यारा-सो नहीं बनती। स या परती है कि
उनमय में मानेको नही दे सकती। मान मुझे पूर साबमन मित
वयस्य तूरोनों पदोंमें मेरा देगी !
"वमान देवी "वार मोहिनीने साधा पैठार शित बोनी फेर मर
गोरते परमा-सो मुझे मी मात्र एक मिपा दोगी, पोस्।
पियाने पूछा-पा!
गोरी ने तो एक मिनट टारो, म माती है।
रखना बार उतानेको पैर सावे ही गिने उसका मापा र
या भारा-मरी नहीं। में एक निस्कससे नहाँ बैंगी।
मी गाने बारा-पीन मेगी !
विराम बाबोर र मगर बोटीना पाकिमी दरानगा।
सीध मी कुछ न मे हम्पी।
होय माने पर स्कर सि ठानीकी इस भारिमा उत्तेजनाका
बम बिमा, उसके बाद वहाँ बैठ गई और उसे घेरते पर पास मगर
कायो मुनो जीबी ! पदम नी मों, पर तुम मुझ पार नौकरती
मी वय पर नही खी। इस पर मोटे पिना
यो पिस्ने वारेमवाओं को पुष, इसकी कोई फिनती न भाग
होंने भी मर उटाहर देखा और तुमने मी जेरी पन मार पुाय।
भर पा पार रेसो, मगर मुझे इस सम्म रेडार खन र पठी, दो
तुम किस तरस मामहोपो करती।
पिराजमान देसको तिर बारएगा।
जोरी वा उठभर पचेगा और मामी दी एकरी येन तरकी
खानेकी साम्प्रीसे मरकर मर भोर सामने रख दी।
पिराग पडू ७५ विराव स्पर रोकर रेल दी थी ! किन्तु म परम पास मार रन्क बाँचमा एक छोर उठाकर उसमें एक सोनेडी मोर गोपने म्यो, म उससे नहीं गा गया। उसे बोरसे पीछे टेलर पिठा सठी-ना, यह सिसी क्य नहीं होगा-मर अनेस मी नहीं। मोस्निी उस परेको समाफर सिर उसार योग-ोगा पो नही, निमय घेया । यह मेरे बेठबने मुझे माइक समय पी। इन्ना पर भारी बांधकर, मर और एक बार मेयनीषी धरण रख मापेस गाकर, पापरवी गई। ११ ममणका रम्ने निका पहला मौका कारखाना एक दिन एकाएक बन्द हो गया और पविकीमोधपी पावर यिनको रेने भाइ। सौगोकी क्रिी पर होनेसे परमपनी तप-वयकी सावो वा मनुविधोका पोप ध्यातार बनेगी। पिराकने पुप होकर मना । उसकारास एक छोरी-सी सटोरकर यगई। मकाने समय उसका हिस्सा मपम उसे नहीं मिम, इससे पाठिठोर पी गई रे बमोप अधिमाकी पकी से समलेगी कि उस कोय-सी साँसमें सा पा, उस मौनी माइमें कैसा धान उठ रहा था ! पान्त-मौन पी मरमें सी भाग परम्ची, ना समानेकी पमतात्मा पदेगी। भीमबरने वापर करा-उत काम मिल गया है। भानेपाम दुर्गापूमते ही कार एक नामी कीर्तन-दमी पा सम्म प्रयोगा। सर मुनकर विरामका पारा मुर्दे मेसा रक हीन हो गया। उमा स्पमा गपि मान रोडर, गपिकाई जप, सन म भारमिपछि सामने प्रता- माता पिग्गा खनाहार होगा। मप मौर पिकारते मारतीम सम्प गने भी मन पर मना नहीं कर सकी। पौर कोई उपाय बो ना! संप्पा मबहार, मीनाकर मुसका मन नहीं देख पाया, पाही हुमा। मा निपानम पानी से पड़ी-बड़ी भपने पर पिाको पर-प्रान्तम 1
विरासत
मषित करते-करते से दूर हय्या पय पारे और ठी वय स्विका
पर सुनने का बहुत देर साय भस्मन्द मुस्पास्मसे बैर उसी वयसो
पर-गरी मम्नियाको निरन्तर मना करती हुई उस देवमण्वि
पनुपम यौवनकी छोमा न मने भागावर हो बाने पी।सूल गई मुत
मुरता गमा और शिमलामाविक हो उठीसे गा पर यानी पीन
निरन्तर रेत की। मप उसे देखने कोई नही। पीस पेटी
या। एक महीने मामा, मी माइक बीमार पनीरण माग
गर।नीर दिनकी मेगा प्राया ही नहीं पळ । म बावा है, न यका
अपकार है। दोनों भौम मसर स गती है। और गरम परती
है। पिरान कुछ देत पठी, म कुछ समझ मेवो है मेन मी
नीकानेको भी भी नहीं धारण, भव साधारण पो-पास करने में
मी उसे मन्ति माम हवी है।
कदिन हर तीसरे पार बगड़ा मगर सिरम ने मावा
है। सी रातमें से दिमरिमावा दुमा रुपात दपक उपमें कर
रसोरम प्रवेश करना परवा है। स्वामी परमें यते मही, इसाप पर
परनिको माग मोचन नहीं बनायी रावको बनाती है परन्त हर समय
उसे दुलार गया है। सामीजा साना बानेर पाप-पैर पर
पापी है। इसी या उस दिन पीठ है। भामा पिएपने हर
देवता मुंह उपकर देखने लिए नहीं करवी और परली पर माना
भी नहीं रखी नसकी पूछ समय से गोमे माँ सरस मधाम
करती है मन ही मनपस महापरीकि भगवान्, बिस ग्रहमेस
पीक उसी गम भय दीप सहै।
उस दिन सक्नको धम्ति मी । सरैसे ही गोरकी वर्ग मनेका नाम
नानी पी। तीन दिन भर मोमने पद विराध मनपासते म्माल
होर सपा उपपम्त विठोनेपर उठकर बैठ गई। सायबर परमें म पा।
मोरइना पर पनेपर भी, परों से मीपमपुरके एक नाम पिम्प यहाँ
कुछ मानिकी माणसे नाना पाया कि प्रगया IAS व्य
पठको ही मही एंगा, मित तय भी हो, उसी दिन स्न्यात भेट
३
पिरामबह मामा । परसों पीठा कर गया, मारा दिल भी बीद चमा, मयर उसके वर्णन ना हुए। को दिनों बार भाग लिया दिनमें कई बार रो। सकसी तय मेरे नहीं या पपा सपान पर पाकर, एक चोख्यिा सिरपर मार पिसे-कॉफ्ते बाहर गस्से किनारे मार साहो गई। पक भकारबीच मौतक नम गई उसने भानसे देम्प, न ही कुछ न त पाकर और भाई । मीगे कप' पर मांगे पपीमापकी सीपीका माय बर या बैठ गई और इनो र पार फिर रोने की। सामने, उनको सा तुमा । एक तो दुम्ल कर भर मनाहारसे उनकी दो माहो रही है उसपर या परिश्रम ! को बीमार तो नहीं पर गये। कहाँ विधी पोड़ा-माइट नामे वो नहीं भा गये ! मा हुमा, सा सपना भारतो म्पा-परमे बैठे बैठे या कैसे करें। किस तय मा उपाय करे ! और एक विपचि पाई कि पीतांबर मी पर नहीं है। तीसरे पार वा कोम बाये मेने गया है । सारे परम पिरान एकदम मोटी है और स्वयं भी मस्वत्पर । भाष रोपारसे दुलार बार उतर गया है मगर पर ऐतीय पी मौकीर पीयनपी, मिसे बहसावी । रिमठे म्सने पानी पानी पिसा है। पानीमें मीमने कारण उसे बड़ा मादम पाने गा सिरम पार भान । पर किसी तय हायों और पैरोंको फोर देकर सौपी गार छठ खड़ी हुई और पपीमपपर मीटर बार कमीनपर ही पेराई पम परपर सिम फरम्ने गी। सदर दरवाजेपर किसीने परवा दिया । विपकने एक बार कान पाकर मुमा । दूसरा पा पाने साप-ही-साथ 'पातीमार पा-मामे दो पर उसने किया खो दिये ! भप च पड़ीमर पापा ठगर नेम मी भएमईपी। हिमाम को पार पापा पा ठस मोरस्ते किसाना बाका प्प । उसने कहा- दारा ठाकुरने एक सूसी पोती मांगी है।। मगर भी तय समझ नही पाई। बसम्म मायरसेपण तक ताकत पने बार बोली-पोती माँगते । बने बयान दिया-गोपाल महापकबापती गति पर भी ना होग रे।
विषम
ऐसे निपकीय र यमरमने रसने स्पा-सा होकर देखना
पास सोपने मी मम्मी किन्न समसमी चना मसपथ। मप १,
वसी मीप सम्पाप मचा गाय मा गया कि परे दिन कोंने इस
खामा-पिपा न।
दिन से नही रख यमा | साये सिमेना मेकर, रीमा बाम
मेर या मरेम गई और बायको सोन गीत ऐपमा
निका पानि इ० मीन या भाग एका मी तसे न देख मा।
पामार मार ट्यारे पुरेखक सदी रोलर होगटीयी। इस
पादक मारबराका ससकर रस रिसा मौरी सोमबार
पार निकासा पर मम्पकार पाकिस्तुपा मीपण स्वय, मनी
भागयोगसे मी fes पड़ने भयका ग यह कमी उसी गतिको
यहाँ ऐकस बागमे मेरफ्प, पनई सांवर पासाकी मेय-मेरी
छोपड़ियों पी।बि उसी भोर गई। बार कोई दीवार नी ने
एकदम मापन तो पर पुराए-मुक्ती !
पुकार सुनकर तुम्ती रोपनी शर्म से बार बार सिमपसे या
हो गया।
इस बफरेमें तुम मेरे भाई की।
स्पिचने मान्पोरेसे पाक्तरे।
पायावर उमसी हवाम से पास भइमय मापनाका
बोर म उसे सोने न ।
नियमने उसकी भोर देवर कशमा न तुम्सी, जय की
पसीने और रो- मनरने बाद पापा मार रियल मरम्म
पॉप दिवे बोरा-सेनि ल मोरे पामते मा प्रम नेणा मी।
परम पता न सगे।
विराने मिरमा-गे।
रसाद तुम्सीने मौकर या विचारा पियाने मना कर
का पारख नहीं है, मम सररमा सकेगा। भोर या कलमारने
पिराज या गतिविपन स्तम्मित होगी। गोपाठी न गोगाचे एक पुररे नावेका भारमीप पा । उस पिना बहुत दिनों से बीमार थे। पेरिन पाभिवेणीमा गंगा-पापा' या गह भी । भाग रोपार उनकी मृत्यु हो गा। राह पर भमी सरोग मेरे हैं। गाने सब सार देर अन्वमें बतया किपर मासास दाध बकरी पराबर किसोको नाडीकी परस सीसीसे या भी उसी दिनसे साप थे। विण्बमसाठी दुई मीस भाई और एक धोती रेफर पितरपर पाती। मन भाभीसे एप परे पर मीतर उसकी मी बरेली। बुखार, सुचिन्ता और भगाारसे मुगा होगी १-या एक अन-यूमर भी पिसका स्वामी पार परोपकार करनेमे बगा। उस धमागिनको काने सुनने के लिए और सा पानी पता:भाष सत्र सिमित शिव मस्तिष्क गर-पार जोर देकर काने भगा -लियन स्मारमें टेप कोई नहीं है। वरे में नहीं है, बाप नाही, माई नही है--स्वामी मी नहीं हैयम्पन। उनके पास पने सिमा नाम शान्त होनेका कोई दूसरा स्थान नहै। पार सपा शरमे भीगुगकी सकार, हवामी सरसनाहरम यही नहीं है, नहीं शम्द निस्सार उसके पानी भनौष मीवर गुम्ने ख्या। मपारेमे पाप नही कोटामें पान नही मागमें पानही पेसरम मममी नही-सुख नदी, शान्ति नही, स्वास्प नही, परम छोय वह नहीं। समर साथ भाव उसका स्पी मी नही । मय प, भाभव महलमा सिसिमफ विमेप कोर सोमका भाप मी उसके मनमे नही उठा । एक साल से थामीभी सपहीनयर सौ दिस्सेका एक हिस्सा भी, बबन पाया है उसे पसे पाक ना देया किन्तु भाव नभने पैसा एक क्यका स्तम्भ भपस्यद उसे अनुमतिय पन्य देने म्मा। उप जिन विदेशी पामक प्राम । २ पापमापी सहन की कोई बापापी पाती पासवास चले गयी। तब उसे परिपा समेतमा या किसी भी बिमारे बार पपरम् स्वर और सप परिपोष हरिबाड मरवारम परते। इसी भावाना
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पिराज यह
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रहू । बलि हाय तु नहीं-न्ने सन गंवा दिया है। बभब भने मापम
स्थिरत ही उसका नासाठी सी।
नीमरन मा-सिकी भाखोंमें भूए झोकना ग्राठी गिराव'
11 बड़ा मूत इससे उस दिन पीवतरकी किसी पर नि विश्वास
नमें विपा । किन यह माय मा उल्ने समय भाइचारी काम किया
पानी यत् स्यों नहीं पाती हो यो । यो छठ पारित
पारपर पी.
वियनका दाना सि माटीक पागमनी सय दामन रम् ।
तयारि पठत्वरका स्पा परमपाव रिया-सह बात सिर भी यी कि
पा पाच नुनकर तुम न्ति बोगस पभोग, शापर तुमारा सपना न
एगा इसासे । सचिन वा मप मिथ्या है। तुम सरप-धरम भी नहीं है, भब
तुम तुम्न मी नही या यकिन तुमने इन बात नहीं पी। एक पशुको मा
रखना या छाकरखे सम्पराठी चिन्नु नुमको नी दुर! भरे मादमी,
प्रेमार स्त्रीको परम भकटी छोड़कर किस पिप्प परम तीन रिना तुम
गोको वमपर रस या यथे, बामा !
भानावर मात न कर सका । 'बवावा हूँ मार पो पात
रखमा सर्व प्रनका रिम्न उठाकर उसने रियम मा वकार
परत तीच माय । पहा रिम्स उसक कपारमें व्यार सन-से नारे तुकार
गिर पा । रस्त-रेमते उसकी मसके कोनस पार होय किनारेखक
सून पंपा।
ग सफ्मे माया रवाकर स्पिन चिस्य उम्मे-मुझ माय !
नागर छ भौर मुंह पसेपन स्प। पेमा माय नहीं।
पिन पूर हो मेर पम्नेसे-या मुंह पर न रिसा-मममी, दूर हो ग!
मियब उठकर सड़ी हो गई। पाय-यदी है।
एक पय भागसपर सासा कर सड़ी होकर गर्य-किन सा
साये मार मारेगा कि बुखार उपर नुमने मुझको म्पप निकास
दिपवर टम सह सको।म्न तीन दिनसे कुछ सापा-पिमा नहीं दो मी
मिराम पर
कर प्रान्त भावी प्रकार दिपा-भाव मागीकर सो गो, यह बात कर
सुन मेना।
नीरने सिर हिमपर कानही भाव ही सुनगा । कों या
उसकी मिका दंग रेखार ने दासमें मै विरान सरमा-
भगर नक्सा!
नीमेपरने मायान्न की होमा । क्यामा ।
स्यिमनशा-मैं मा किसी तरान बतावेगी। पास सार सोमो, का
मुन सकोगे।
नीमारने इस सीपर ३० पान न दिया। रोना बॉल पर सिर
उठाना । ग्न सीमै भन या तुपरी या भाफन मान न पा, रिख भोर
मा मार बाहर निकल पीपी। उसने मवाना करम कहा-ना किसी
पानी लिना मुने मारे बापका पानीक मे नगी मिगा ।
निराम पीक कोरबन पावा कामे नागत मेनेस मी मारमी
“स तय नही पीक उठा। मतदावे-भसगावे परवाने प्रस्तक
पाहार अमीनपर बैठ गइ । योसा मा ! मेरा घुमा पानी
नहीं पियोगे!
ना किसी ठप नहीं।
विराने पूझ-यो।
नाबर पिस्ण उम-उसपर पूम्पी हो, मो?
रिपब पुफ्पाप स्किर सि त्वामी मुखी भोर गाठी यो मन्दमें
श्रीरसे बोली- समा गई । पानी पूएंगी। मैं मी निजी वय नहोगी।
स्मोकि काम तुम होस होगा, तब आप ही समस भोगे । स समम बम
मन मामे नही हो।
नोवाच स सह सकता है, मेकिन अपनी बुद्धि ऐनधी अव नहीं
सम्य मान मियोपनीर प्रने माने माँग पिया है पही
दो मी ऐ? गेय माय मने का नया नही स्पिा, बो में काम नही
विपनपा
५
१२
हारे पापम यारे बादल हाये थे, टिप-टिप को पानी गिर पाया।
नीबार सुरेखाको पौवटर सर रसार सी समप सो गया पासासा
उसके सोपे हुए पानोंमें बापच आई-नाये!
नीरसार रस मेटा प्रमद स्मन नाम सुनार ऐसे परिसी
परम पिरे प्रभातम भापी माहोपर उठ गयी।
या मौत मात्र हुमा पार भापा । देखा, मोगरमें सका नुसत्ये पुनर
या मारी एव पनपनमै र एक बीप सोमवार, यार,
पटे रेदपठे सो पत्र वा बहुमा नहर टोट भाया या भोर रगड़
परीय या उसके बाद न पनेकर उसे वीरभा गायी।
नुसतीने पूछ-~ग्य पोगा।
बीमार विधी वन उपकी भोर ठाकठा हुमा योज-ब किसे
पुकार यापा
मुस्तीने पारीको ही पुभरा पापूर्ण। पर राव पीठे
मोर भैपो मार मरम्परे परसे मोरे पारामारख्या यससे सबरे
परपा पुम पर अपने पग मापा किदव पावससे का काम कम!
चार मन-ही-मन समस्या या थेरन कुछ रोटा नी ।
गुम्सी मोगोइन बिपी किसने खोये । जान पाया
महो पर पर मामा हरा पा पा ।
खाना-नारे जितने पोये, विस मोड़ थे, किडनी शादियाँ
फा सन्को देठे, सोते नीर-विहन न वापा पा, न खा प्रमाण
एक पास गया बोध-परस्पा पापन मरे सिरपर सपर मया
है! पा पाया टने या पार मानेको पापी मा दिन मा,
इ० बाया नहीं, मीरा पापी किसी कारणसे एपमर मी या
को है। ये कर मैं पा जि पद्मः काम अरसे करय रिया।
सासमा अमने ऐम मुस्सप होकर दिलानेगा कि उसकी सारी
दुभिन्ठा एकरम को छ महाप्रपा वा तौके से बोला,नासे-
पिरासपा इस मम्मपरमे दमारे पिए भीस मोगर या है। इस ममीको छोकर राणे कोगे। रफ रेवार नीमेवरच नपा उतर गया पापा मुखको क्या हो रहा । विराने पेती भाषासे रह पसरमा-इस साम्मरसे अनेक मिए सोच पी पी, मेकन तुमको छोड़कर नहीच सकी। बाल उठाकर देखा मेरी में कुछ नहीं गया। मोमोस सम्म तय नहीं समता एक पग मी पम्नेकी मधि नहीं है। मैं पाती मेकिन स्वामी होकर बोलोग्न तुमने मुसापर जगाया। उससे भी मैं तुम्का मुंह नहीं दिखारगी। तुम्हारे पैरो नीचे मरनेका मही मेप बसे पहरा ओम था इसी बोमतो मैं मसी ग्योर नहीं पायी की। भार उसे मी धोती है। कार माथेका रफ पते-पोच्च मा लिनुपरसे फिर एक बार अन्धकारपूर्ण सागम कर माल होगा। नीमरने फुटपाना पारा, येकिन भान न हिम समरोदर पीछे पीछे माना पाणा, मेन उठ नहीं सका । कछी न्यपूर्ण मसे उसे भरा पपरी मूर्ति बनाकर वियम मोबसे मोसो गई। भाव एक बार ठस सरस्वती नदीकी भोर भाँख उठाकर देखो, र मायम होगा । बवास पा सम मम्माम्मे, धीरे गानबासी नदी पवन के प्रतिम रिनाम से टीस पसे दोनों किनारोंको मार देब धारासे पा योपिस प्रपत्यारे उपर एक दिन बसत प्रमातमें ऐनी मारमानोंको असीम ने मुससे एक माप बैठे हमने देना पा, म्सी से पत्क्ससे उस हिराब मार #श्री राम किस हस कर प-फ्ते भावर पदरी ऐ यह ! नीचे गाय स-पशि मुार प्राचीरफी रोमासे पा सादरकराफर भैरे बनाती हुई पापी थी। उसी मोर एक पर कर देतर प सामने खम्ती यो । उक्त नाच पम पत्थर, सिर पर पारमेसे पिय नीम भाका, सामने काम, चार ओर पना काम निसम्म मन मोर रस भीतर न से भारत का मास्मास्यापी प्रापि बैठकर मफ्ने मासे भफ्ने राप पैर मन्न्ती साप पेरकर पने ख्मी।
पिपत्र पा. १२ समाप्रशमें गारे याद आये थे, रिपरिप पर पानी गिर या पा । नीमेवर मुझे माफी धौलपर सिम रसकर पिसी समय मो गरा था । साता उसके साये हुए का!में माराम भारपानी! नीबारपाकर उठ बैठा । शापर सामका नाम सुनकर ऐसे ही किसी पपा मादयसे सि प्रमावमें भरायची इसी व्य मास होकर उठ मैठी थी। प भासे मलवा दुमा पार भाया । देखा यांगनम सरा मुबसी पुचर या। सारो गत मन-मनमै र एक शो नीचे लोम्बोसकर, कर, पपेगपरे पासे पकाएमा, बहुभा नीमार मेर आया पा मोर दरवावे पराठा । ठसकेबार न गाने का उसे नीद मा गा पी। गुण्सीने पूल-माग गोगा ! नीचर इम्युनिकी क्या उसकी भोर ताठा मा पोन्म-तत् रिते पुकारपाया तुम्सीने परा-हको ही पुचराई बाप । स पार यस बात पोर में चार मांी हमारे से मोरे पाषा मोगबरपाया। इसीसे सबरे रमाण जुन्न पावर बनने पम माया कि उस पारम्से कुछ प्रम निकम ! नागार मन-ही-मन सा समक्ष गपा मेछिन कुछ बोय नहीं। सुम्सी योग- स्ने पो लिएकी किसने खोटी।बान पाया। पहप पार पर गई हैं। इस पर पापम गया। नदी किनारे-किनारे तिने पो पे बितन मोड ये, स्विनी मारियाँ सबको रेलसोमठे, नीमर-मिटने न नहाया या न खपा प-मसा एक पहा पपा बोध-पाप्पा पागम्पन मेरे सिरपर स्वार गमा है। स्पा मगर उसे या पार बानेको बाकी होम कि रिना भने पुछ साया नहीं, मन भी स्सा या की किसी कारणसे अपमर मी पर साचो है। कर मैं यह पैसा भद्मुत काम सरेसे करता फिर या। यह सब भोलेक समने ऐस्स मुस्पपकर सादनेमा पिउसकी सारी पुभिन्ठा एकरम भो पुछ गई। सीवर टेम्ग सेवक से वोमवा नाम-
विराज पर
पोरवा म्द्र मगर्स परकी भोर भागा।
सदन समाप्त होनको था, पश्चिम भाप्रपम सदिखने परम्प
बारमंत्री से मना धम्म मुसार निभ प उठ समन परम
पुसकर पा सीधा रसोईपर पाकर सपा पुमा । पावि र उस सम्म मो
मामन निहुमा गत पवित्र परम हुभा माव सूखा पा, सिम्पो
भोर पोकाये, किसीने गेड़ा गोहै। भैरमै उसने गोर नहीं किया
पा इस सम्म मातकी एका देतार ही समझ गया कि यही सीप या
हुभा मोम पानाही मणहार भूते स्वामी र बियब बरसे पदी
दुई मकारम मार भीम म्ग या की, इसी पिए ससने मार साह,
प्रभास बन पात सुनकर यम और पिस्कार मारे पानी मयारक पाश्रम
पर परमेर पी गई है।
नीबारी वेठ, दो से मुंह पर, मिपीपी तय मानाव
करता हुषा भार मारकर रो उठा । म किया ममीवा जैगर पी भाई,
तब उसकोट पानेकी बात मान सोच सका-अपनी फनीको नया
पापा बिना किसी संशयमा समस्या पाच बिचना सामिपान
है, मापनेपर भी पयम भने बामय मेर वा कमी इस सपो मार
करना नहीं चाहेगी। इसीलिए उसका रस मीवरसे शनी पस्वी हसवय
हाहाकार कर उठा । इसके बाद पर बोण पसार, रोमें राम ने
पमार, विना विभाम मेि मारबार करने माया में सन पगा
नियन व बा!
सन्पा रो मह, इस भरमें विसीले एक न एमा, रोम
किसीने साना बनाने प्रवेश नारी किया। पे-रोते नीरकी भोली
भौरा गया किसीवे मांस नहीं प्रेजे, रिमी से पाये नीरको
किसाने वाने Aए नहीं आया। बाहर बोरसे पानी बरसने गा, बनेगहरे
अंसारका पर विकी रेसा चमक-धमककर उसी बन मौसका
मा उसित का पुगी तर म अनेगी का भी पाठ
मटा नही भान नहीं होगी, एकरम वमानमें मुंह गमर मो-में
पिरामा
मा टसर्थ नार दूरी, ताप हो धुप था। गारकी भोर एक मसर
कोमात मुनार, ऐर भाष्य उसने देखा परापर एक मादी सही
है। पत होकर उसके सामने ला हवे होये गएमट निधार वर
पड़ो। यो मार उस एक विछी नमार पीबार उस तरफ पथ
गरा मेरी बहने प्रस पायपरतीपर विर रतार से मनाम बिरा मेसे ही
नीर मकर स्वरमे कुछ माटीमाद रम्भारप पर समोरसे ।
उम । विस्मित गोये सर मा मना हुमा सिम उठाये, वस्त
नवर बीर सावन बने मो भाम होगा ।
मेरी मग जीवनमें भाप इसी बार अपने स्वामी सिमा प्रतिकार करणे
दी होकर सकी हो या। मोसुमारे शेमसे दे, माहो मे एनौ नेत्र
उपम उसने मातम मा पस्कर ने इसमें सीने मारमहापा
र ये सर मी म्पा हम गैरने गये। तुम बसको ठो गो में मासे उस
परपसरप्रम रंगी।
पीतोरी उटाया मामयीदो!
मोशनीने तुल्सी मुंइसे जितना मुना था और माप निम्नानुमानलमा
पास रोते मुन्म दिया।
पीवाम सरबम सास करनेबाम्ध भादमी नहीं । म-वनी गदा
पानी में नवय भायेगी।
भेटी बहने से भार नही मी रवा मी पायम र मह
१-हो सकताटी मीकी दो व गाने अपने गोदमें मार ख
भिमा सिपा, सोग ही किसने भी है, कौन फ्वा मायरियो।
पावरने परे पास ना किया, मम्में किया मा-अम, मैं सोय
या है। बरा वाचार का मामी माया पर दो नही मी गा!
मीनीन हिर निस्पकर 40-कमी नहीं। राप खानपाती।
पात्री नी मा, नही हो प्राण रेलवे।
"भम,मामी देवर वावर सूखा मरमसे बाहर पप गया।
माव एमएफ मामी एि उतभी सरार हो गया। मेमोको ज्वाकर,
अपने मामीचे मयको मामा पर पयामास ए मेवर, बीवनमें
मियम पर
बार उसने पामे पार पुष्प-कार किया। मोका पुगरकर पायापार
मांगन सा अपरो भोर मुमसे ये हो सकारो ! सदाकी मरने
बोर रेसा नहीं खा
इना साम्दोमा-सा गुा मुंहमें मार मौर पनी पर, वा में
मार गम्ने समपर पम गपा । पारपंच दिन नामा होने व
रसुवामान सेगमा या
मर-छोटी बह परापर मार मार पही सोप पी पीये
(स्त अरती मोर देम नहीं सकते पान बने या दो माहै।
नोभार पप्पीमय बीच बाँस रेनमा स्तम्प पठाप। सामनेकी
मार रामापी जुगल-पेड़ोध चियर रैमा । मह पर अमत् रेस
है।आरमारी का पानी पी व नौकर पाया पैदा भाषा ते
मनसे पोय परय अषय ये। सबसे गा पर स्तुप्पी गाणीम वार्य
Mara-पारवा चीरने पपनी माग मा पार से भरा।
गररेक्वाली बात उसके विकर कोई भय बस्फा म्मम नउस वय
समय साप पुकार बनेसे रे सामन पार बोरे बासे,
पा सब निकट प्राय सीते पक्के पाणे, पर इस परो
योगानेष मपास पान जाने सिदना और किकनी गारमधमेकिन
सपनही हुमा । म प, इस निष्पा कारण अपने अपनी मसमपाको
तो
माउ मब गा माप कमी किसी Aन नहीं पर
सबब से नहीं बोला सिना पाना उसने सीप नरी। अमरमर
पापाने पे उस पार यिब उसने रामायण महाभारत पाना और
पोषा-बच विधी पनी सित सेना सोचा थममा पमन्यो पात माया
नई पटम पापी म समापी पारा उसको कुरा हो सका पी।
बरस सम्पयमे कोई मुक्ति मी र मनन कर समता वारणेट
अवस्पाम महागाने भर कमी पीर साय और कमी बियप जय
स्वीमरपखकोची भी।
मरामारावार ससमैनी। इसपर उठे उखना मानती
यो। एक पर नियबने बर सार नरके फेरमै कारमल निकास
पिपलपा
रिया | सास्ने रानोको पुरा दिया बोर मिश्र मत्सना सभा या-
हिारी गुम्नको इछ तय ग्रन चाहिए ।
पिम्ने रोते-
रामा पा-उसने मुझे प्रठे माय था।
तब उनोंने पुषको सुधार स्म परा दी को किया भव मिर कभी
विपकी पर आप न उठाने। उस समय उसकी भवस्या चोदा पपकी यो,
गाव यामम तीस बपका पाकन ठपसे मालूम नीमेपरने उस
रितिक मावासीयासम्म उम्पन नहीं किया।
भाव स्तम्भ होकर बेठे दुर नीडोरने पुण्ने दिनोधी पा सब मीर
कहानी पार कर पळ अपनी मावासे यात्री मिधा माँगी, उसके बाद
भने उनी चामत् रेक्वाको रा-पार सीपी गाणेम दुखदायर, समार
पने गा-पन्तयामा भगवान् ! तुम सा देख ऐसे। उसने बस
ख्यामा मरयम वया, ब सारा प्रप मेरे ही सरपर पदकर उसे सयम
गोरो। पाय भनेक दुल पार गरमन उसे और इन्स न दना ।
उसपी पोनों पन्दाकानी भास गिर ये ये| एनएफ उतनपान
गो गया।
वीकारने विस्मित कर देता छाये बहू गाड़ी दूर है। उसके
उसपर सायरप-मा पर। उठने स्पब रमसे कपा-मैं भापी बेटी र
बाप् । मोतर पाम् । नहा-बार पात्र व्यापळे गोड़ा मान करना होगा ।
पर नौगार मचा होकर देखता रण किसने से युग शव गये,
किसने उठे खानेपानी पुप्रय । छोट पहने रिका-गपू, रखोर
होगा।
भरी नीचर सपा । एकपर ठसन स्परा शरीर प उदय । उस
पार पापही पीच पाहाये उग्र-सोहरोग्य पर्य!
.
गोषम समन मुना, समीने पिस मिमा किरियब हनीम सार
न गइ । यस पर्वापरने विश्वास नहीं किया । पर मन ही मन राई
करने कमासिनरी में रखने मोह, स्ने सायरा को न
विरामा हुए भपाटी ही भात भागी । नर्म नाप मे मिनारकिनार भूमफिरकर श्रीर किनारेकी भस सारे कन-गमो मने भादमियाँठे रसी-रची नकार मोबमास कोई पिठन पाया पपा मनवे मियर समविलास हो मा कि मामीने मोर पाहे वो किया हो, पानी में हमार नाम। ० सम्म पहले उसके मनमें एक सनो उटा पा भर फिर वही सर मग मीवर पर काम्नेगा। मगर विसीक मागे उमार करना उपाय नहीं पाएसर मोहिनी माये पाना शुरू यिा वायभीम परकर, कानों में गायै रेकर पीछे पर 2- दो रेखीरेवा मी मिमा, दिन मीठ, रात मौरीपारम ठगे भरपूपिणी भोर देखार पोळी-मेरी बीच दो ममतामय मालो और कोई आने या न बाने, मेवाती है। ना सारा पही गई। मन कोप नहीं किया। एमएफ ए ऐसा गा गामा का, असे कोर दूमय ही भावमी शे। मोरिनीने बेठ गोगा कर दिया। सना पपेसार अय मादम पर, पूज-कार, बप-बय र सारो परना उखने मन मे। सारे संसारमें और उसने नाममा दुमा पा' या उयने समय किसी ममम्मी मय उनकी भावीमे धुम गई। बीमारने का पेट मैने मना ही ऐप ममीन किसान सन क्षारोगामी | मिति तय मा मामा-ममता पर पी गई। मर और रामती भो, मा इसाठे क्यै गई । मोीिनी पहुए भी पचनको । पर उसका अधकप्रद एक दिन बीमपने गनेकी रात पती से और उस दिन भने स्थान सारा मार मुहे साप मई मेनका नहीं पपी। पारने मासे एक दिन पूसागुममा रासे बोती, तकली। मापिनीने मा-ई। उन अपूकावीसी पोती। प्रवाभने सारमा-निगो मुनकर निन्य रैगे। मिनीने सर मापते पायोम मौर सा पर सवेरेंगे।
पिराज पर
अपना काम पर, मैं अपना काम लगी। इस हास्यमे अगर मैं उनकायमा
एकीको मेनिन्दाको सिस-भोसोंपर से सीरप कामसे सभी गई।
१३
पमा महीने बीत गये । भागामी पारदीया पूल बाद भामास
में, साम, माकाम, इनामें, सर्वत्र फैला फिर रहा है। तीसरे पहर बीमार
एक भासनपर सिर । देबरपन्त , मुल कुरा पीय-सा
प्रेरी-छोरी भयए मोसोम पैगम्म भोर विश्वमापी करमा। महामारतकी
पोथी म पर ससने विपया बहको समापन पर कोटी अन पासा
है, भाव मै बगैया माना न मा ।
फे विना किनारी पोची पाने निरामरप मेये याही दूरपर
बेटी मस्तक महामारव सुन यी भी। दिनकी बोर देखार पोठी-नहीं बापू,
भर मौसमपी भा भी सकते।
दुम्स ससुरफे मर पने कारण अब यै स्वाधीन है। स्वामी और
रास-आसियों को पाप सेकर मात्र मो मापीर मा जी और पा समर
पारेही भेव कि पूग विर्नोमै मरी येगी । मग मी उसे कुछ पता
नी। उसकी माता मान मामी नहीं -4 महीने पहले सपोकाटनेसे
मेय भाई मर गया, पर कुछ भी पानी पानी।
नखरने एक साँस छोड़कर पाान परवाह न पाठीवो मया
रोन । एक जमाना दुम्स बह 8 सगीय।
सामन्त पारी में गनको पार रगत दिन पाद भान टवकी
सूखी भांसोम बोस रिसाई रिसे । मिस राको पारने साँपकानेपर उसकी
ऐना को पार का या कि मुझे प्रेई और सा नहीं दिए,
अपने फ्षी धूध मेरे माथेमे मुतौ रे रो। इस भगर में नहीं क्य, वो पिर
पकना भी नहीं पाता और यहार ठपकी कार को मारबती बन्द
ज्यकर मामातार उसके पैर नीचे सिर रगदग या विपक्षी पावनासे
पुरकाप पानेको भागते मन्तिम पतिक उसने पर नहीं मो। उसी दिन
नीर मफ्ना भासिरी ऐना पेन उप हो गया था मात्र किन उसकी नन्दरी
विपना
मौसम भासू मा गये। पविता साप्पी छोटी बहू अपनी मासों और
गुसम्पसे पैगम पुप होगी।
नीर परि-परेि मनेगा-उसके लिए भी उठना सनी का
क्य, मेरे पोशावरको व्य पियको भी भगर मयवान् उठा सेते तो पाय मेरे
थिए मुसा दिन था। सो वोमा नी । ये भर पड़ी हो गई, उसमे
समक्षा गई। वायो बेटी अपनी मामीका या क मुनार उस
हरमा मा हामोगा मावोगा सिर उठाकर देख मीन समी।
सुन्दरीको शवनी मारम-मनि हुई कि उछे का मन नही र सभी पौर
भामग दो महीने पर उसने नीकर भागे यह कहकर खिमा उस
एतको मियन मरी नहीं बधिर रामेन साप पर छोड़कर पी गई।
नीमेवरा मानसिक उससे देखा नहीं जा पाया। उसने समझा
किस पावको सुनकर पा श्रेपो पर होकर धापर इस मुसिको भूब
अपमा । पर माकर नीचरने या पाठ मेरी बासेही थी।
उसी बातो स्मरण छोटी गाने पर रेर जुप यार कोमड स्परसे
मानवसेकानेकी बात नहीं।
से मागा माल यह पूछेगी कि मामीको सा मुना था
क्या क्याप गा!
मेय बने कहा-वित मातको सब पनवे कि भीगीने नदीम प्राण
दिये है वो
नीमेपरने सिर रिचार काया नहीं हो समय मेरी।सना पर
मिपानेसे मोर वाराहम उसमपने पारमी हैहम उस पपा बोस
और नहीं पड़ा देंगे। यामारप बयप। स उखनी-सी मनी
मा चिटनी मा मेयै मह गई। रममा पाप मेरी गगने
अस्पन्त कोपरब मुस्वरसे काा-ये स्पा पार सप नीबापू ।
फोन समाते माप जीबीकी पाते।
मेय मामिलाये सयौ।
नीचरने पापी मही। बेटी, ससपरें । म पन्ती हो
प्रेप मानेपर उस फार्मको मन नहाएका मान बरा-सी थी, तब मै ऐम
प
मिया या
भी भार कम नदी से याद कमी वही पीउसपर भस्मार और
नम्न मने किया है, मैं समता , उसे स्वयं भयग्रम् भी नहीं सह सकते,
जो मनुष्प वारी।
नीबारने हापसे एक भोर पोर पा-यार पानेस गठी पर
पवी पेरी, अभागिनने तीन दिनसे कुछ वासा-पिपा न स्य, परसे पो
पठे मेरे लिए कुछ पास मास माँगने या यो इस मपरापर मैने-इसके
माग ३० बोम नहीं गरा । पोतीवार मुंह मरकर, उम्पी हुई माये
पारवही गर, पाममा स्टने म्मा !
छोरी का माप मी उघी तय रोगी थी। उसके मुंइसे मी कोर गाव नहीं
सकी। इसी क्य बहुत समय बीत गया । बहुच दर बार मुख
मातिस्प रोबर समज पसर, नीमारने ~पत सी बाते
म न्यनती हो ममी मुनो पेटी । मादम नी किस स्पा, उसी रातको पर
भयन, उन्मय होकर मुरी पर पहुँच थी उसके पार मोर-पोंक
मेमसे सदरी उस पगडीको उठी रात रामदया पार पपा माई
उसकी पाठ पूर्ण होठे नसोते ही मोहिनी मपमेको भूयार, यम-परम भूक
र उस कठो पटटी--पर कमी रुष नहीं है, कमी करना है।
मेथी में माप य ऐसा भ्रम फोर उनसे नहा रा सोया तो
सुन्दरीका मुंश्वक नही देखती दी।
नीमारने धान्तमारसे पापा मो मन मुना है। शायद तुमारी बाव
रानो बेटये, उस परम प्राण र पेमपन्य ज्ञान दिने पसे
पी उसने मुझे मर्पण पर रिपे थे। सो से नयी गा, मात्र मी मरे
पर भर्सि पार जैसे का मने एपकी मातरी वावक
सर रसने मगा।
जोरी मुग्ध होकर उमझन्स पोर माँ मरे मुसकी भोर सापये
पी। उस मुलम प्रेममा हिब-नएकी निक-सी मी अग नही पीपी
भीम मचा भोर भनन्त सम्मकी मनिनीय मीमा । बा गोमें
मापर प्रभाम कर नीर परपरक असे ध्यान रह गए।
सम्प्पाप समवे समते पर मन ही मन मोम, मायने पीपान किया पा,
७
इसे एक दिव भी रनोरन नहीं बना पाहती थी।
मे पार पो माग यै माय भी मौर मई भादमौकी का
मास स्वामी, . मीनेके पि-पुत्र पाच-सा रामदासी मौर
अपित पीसे बाय १ भर स्या । स्थानपर सरते या नौदरसे पर
पुनार या मासि ऐने भी पौ। उसे बरसे रो-रोणे सारे मोरोगे
पौर, पण एक पार बीटने पार पर प्रदेश र रारा गोदम
सिमरा भीपी गिर पड़ी। उस रात उसने पानी पिया
रावामी नही छोपा मोर माटो रसकर ही मोहा-बोम समाज
नया पापा भाभीसे तो बसि रखी भी कोष बरती की
को जैसे ठीक पहनी मानती श्री संकोच मी नही करती थी। उसन
मा स्ना और सारे उपक्रम र वाराहा। समापने पाले दिन
मी मारकी मिकी साबरमदाबा गोठेही परबर रोईपी।
उसके सी गराको माने एख्ने दिन हवना Tre दिया ऐसा कोई
ऐसा पग-रविमा उन सपा सीप और हेपकी जीम्म नही
यो । मफ्ने दावाने यो स्वर भागे यने अपने बरे इसको सम्म
मानमा। उसे अपनी ससुरामा उपर या अपन्न हो गई, पोटे सराकी
पर भरसे मूल उठे हरकी नही भौर उसकी पुलिया पाकी मोरस
उसने एसय में फेर म्या।
पनि बार उसने अपने स्वामीको दुमर पाराको दर
पीभम पूमने बाहरी इस पर सहम-बार मेर समो। और
भयरी पोलेम हो, म मी सपहो।
स्वीडन पनेफ मुक्ति पार रिमय पर ही साममम्प समस्य
और फिर एक बार सर मापार सपने मारी करने पथ गया ।
पामा माय नेगी। पूरीने मलरीको गुप्तममते दुग मेय वा, मेविन
पा माईकोरले गा साविमा मैं पहनदिशा
समीर ने सभी और मलेको
विराज र पूर्व प्रेपसे होठ पाकर पुप हो यो। यकी पर उपधा भार उम्स मी अधिक निष्ठुर म्पपहारने छोरी बहके दमन सी चोट पहुँचाद, इसे पन्तपामीके सिमा और रिसीने नहीं माना । मेरी बहन पोनर मननी मन बेटानीको स्मरप पर पीये तुम्हारे सिवा भौर पैन मुक समझेगा । नुम कही मी हो मुमने मगर मुझे सम्म कर दिया है, तो यही मेरे पिस कुछ है। छोरी या सरासे निम्म प्रतिकी है। भाव मी पर उपचाप सबकी सेवा करने पणी किसीसे भी कुछ नहीं कहा। ठोविम्पने का मार प्रयेने में बिना पा इसरिए पर कई दिन या मो रस बैठनेी बस्त नही पुर। ने दिन नीरने मत्पन्त निस्मित हार प्रा-तुम नही पहामीह! मेरी बहने पुश्पाप गर्दन हिमरी। येमको गाइ लिये राग पास भाकर मुन्न भी। नीरने मा-या नहीं सकता मेरी । तुम मोदी परों स योगी भीर या पार से सा होमा बेपमे। गोरी पाने से ही मर Bाये गन विचार मा-ना बापू, मैं कही न समी। मेरी समायोकी माप दास्त बहुत भी है। विषय पीको मानेकी उन बायाँने भनेकपार पान की थी फितुपासी क्य नही गर । सबनीबार समझवा छोरी बहू म मरे हो पारण नहीं गाठी। न्तु मम स्ने परम पापों मरी पड़ी पना राहती है या या किसी वय नही समास सत्र । पूम-स्मों में क्यों श्री नहीं ग सकेगी! सोये रह धुप यी। नक्साभोगी वो मेय बना न इग्नये! मेरी महुने प्ठसे कहा-भाप बाइसे मैं एगो । पों! अन्य बहरि कुछ देर चुप यार से मनदी-मन एक सपने मतको पम्पसे दूर करने पण परने स्मी उपार भूक पैरकर बहुत पीरेसे योग- प्रारर कमी या बायें दसोस में कहानब सागी बापू ।
पिरामबा वीवर पर उमादेब सिमाधी पासे मासे पाश्मिा बनेपर सस होता,ताही अपवार उख्ने या भोर देता मिनु सपा दिए । त्यही सपनेको समाकर मापात पापमय-सी सी र मोम- हिरी, उम मो मार ऐसी पमम्मनी बात कहो, ऐसी बम दो बमो, को पिर मेरा सा उपाय होगा। मेटी माने पामर भाँ मगर मान दपक मौतर बसा। उसो भार संघमशीन स्वर पौमे स्वरसे मा-में बनूस नहीं हो गई। बापू ! भाप गोपीगो कहिये। सतक पन्द्रमा और सूर्पको उपर होने देगो साफ किसीकी किती वावर विचार नहीं मांगी। माई और मान पास-पस सरे होम, भवार होकर, उसकी भोर ताकने यो। तम्ने वैसे ही मुदस्सरमै मास्वामी परम तिर रहार मानेका बरन जोडीने भाफ्ले मोम विमा पापा कमी किसी सपना नहीं हो सकता । तीमी गीची निम्म्य ही और मागी। बक मिगी इसी माघासे उनकी यह देखती एंगी। मुसते ही पाने पिए नसीमेगा पापूना कार एक सांसमें बहुत मोड सनक कारण या सिर पर हमने थी। अब नीचर और या नही गया। मपई उगक भाकर बाहर निबने पोर मारने गो। भादमें अफर उसे निकामनाए पामार माग गया। टीने एक बार वा मोर नाम गर देखा उसके पास भार माने पोलो फै पाठ विठा, पाच पाम्पस विपमा भारी मासे सिमटकर मकर स्ममें रोते हुए पा-मामी ! मी तुमने पान नहीं पाई मामी मुझे पारो। कोय बहने पर उसकेम्पे उठाकर मती गामा और उसके मासे मरमार भपने कम पिसीपुरं पा रसोई परम पी गई। स्थिर मरना ही उचित प्रेकिन वा मी नही । उसी रावको मरनेके विराज या ठीक पारेषणमैं, उसके परिन मापी दुस-रेम्पते पीडित सुबह भोर मिल मक्षिपने मनार मौर ममारकी ममम बोरसे, मरनेही पार सम्म साने विमिर गाने पैर पसा दिया। मपुत्रे छातीपर रहकर पापा भने शाप पैर भोपासे पपी पी, उसी समय कामे गिरी । उस भयानक समसे पीकपर, सिर उठाकर, उसी तीन प्रकाशमें उस पर पानाने पर और नी मी पपनेए बनाया गया सबका मन उसकी नवर । पड़ गया। जैसे भक्तक ठीक इसी भरोधाम गुपचाप मोस मोठे सभी मार देत ये से। पार पाते इति हो रपारसे उसे पुकार उठ । रिराव रख मसानक स्वरमें का उटी-ये मधु पुस्प मरे पपत्र पानीतक ना पिपगे, किन्तु पा पापिय दो पिपेय | भी नाम है। हारी चीफनो मुंहपर मध्या हुमा कोया से दायर कर पल से गाय , ठीक वैसे ही विरामी प्रमाडित महिपके सामने समका भतुम्नीय समस्प एरस मी सार मुख्यकर रात से गया। मा स्वामीको भूब गई, पाकी भू मा, मरपको मा या और एकर प्राप-पपस उस पार पारसी मोर धम्ने यी। फिर मेरस सरकार काममाटो साप अपकारी भाकाशी मेवी पोरठी दुर बिसी र या। विपनको फैली कुरकुपित होकर मफ्नी भोर डार मार। एक बार मरदार उसने पानीकी बार देखा एक पार गरन पुमाकर परती भोर देशा, इस बार फासे मने राधे बम्पन सोर पटक माखेतीमा परे पनमें भाकर गायब हो गइ। उसो तेस पैरों शम्बसे फिटने ही बीच-बनु सससस, सर सर फरक या डागारर गये पर उसने उपर प्यान ही मही विसावर मुनम पास प्प पी पी। पंचानन अकुरखमोमें उसन पर प| पून चहाने मकर नगर बार टवका पर रेस मार पी। इस मापकी बहु शेरमी बचपन में इस गाँव माया समो णपारा यन-पापान गए पी। पोड़ी ही देरी पर मुन्दरीकी पर सिपले पास गर सोहो गर । इसम्ममय रोपपेरे याद होग्य नामक पावरने अपनी पी ठस पारी भोर र दी। अनेक गोंको पर पैसे मसे मुन्दरीधे उच पर पहुँच माया है और मात्र मी व्य या है। किन्न माग एकी म्यहरोसिम्पो .
पिपम मह
पुपचाप बैठी है। अन्सारमै विरामका मुंह बान्नी रस पासा, रेस मी
मेवा तो प्रधान न पा | मने पटक पास भाकर दरसे ही बरे किनारे
एक मस्य पसीने शरीरको कम हुमा देखकर वियम्ने मासे मदम।
मुम्परीने पुरेसे पिर प्रश्न किया-किसने इस म्प मायया।
नियमने मापीर होपरा-मेरी पर उनके सिवा और कौन हम
व्य सारे सुन्दरी से बार-बार पूरा दी है। सुन्दरी मप्रतिम शेष
सुप होगी।
मौर मी ऐपएक बार एक सुसमित बमरने जैसे ही मर ग्यानेक
उपाम मिना नियमने सुन्दरी भोर साकार पात् पाप न पगा।
मुन्दरीने का नहीं गा में महा नहीं देगी वो डोग सरेहरगे।
भयो बह ग्रो नहीं। फिर मेट होगी।
वियम्ने और कुछ नहीं कह । मुन्दरी गायकी मेरी बैठकम माने पर
मर गई।
मागरम सुन्दर मुड पम्प विरामको पर, मिनारामार, रिली-
की भोर पत्र दिया । मैडर एपको दबाकर मोरकीला पन्ने गी। दूरपर
पक किनारे मौन एमेन्द्र नीमा मह किये मरिरपान करने गा। राम
पत्परकी मत्रिी मय पानीकी बोर वाती हुई बैठी थी। मान पन्ने
मठ मदिरा पे थी। शराब ना उस पर रखो उचप्त और
मखिकको तम्ममाम बना पाया। बयस समप्रामची ही बाहर हो
गपा ताबा उठार विरामके पास भायनियमन मेश विसरपर
मेटयेये, माथेपरसा आप सिर पर भा गपापा-पिसो
पावा उसे दोगन पान भाषा कौन पास य पर उसने पान
दीनही दिया।
पिन राजेन्द्रको मासा हो गया। मिसी मकर स्नमें बम भोले
मा पानेपर भूत-प्रेत मपसे मारी रपम पैसो हम्प मप पायी है
ठीक सी उप उसके मनमै भी माती भाषा ठो। या वाक्य
हो या कुमार बात नहीं सका।
भवप इसी रमवीर उसने स्सा नही किया। स्मारिन
पिपलका
मस मनी मन पीमख पिय नौदम, गगम, पान मसाk
मामोमोते देख पने प्रेम-साना-सोना भूगार बनगमे मन
बारेमा मनमे भी समान पा हो सर पार समुन्दरीन
सोनेसे क्याबर, नसोधनमें भी थी म माग मायेण्से अमित
उकर गुरु तक या माने इस माम्शेरपंगम हो नीरा ।
स्थाने नो भूमकर, दोनों किनारोबायो एक घरमय, बहुते
पुण्ने परगर भौर पर स्मैक मीवरठे होकर गा भी। मा-जगह गडबी
कवियों और पर्भकी सभेने को अस्खा BIR सम्पूर्ण स्थानको पोर
बन्पकारसे मर रहा था। इस हान, मोशन पासे राकेद्रने पास
उमेरकरकण्ठकी यायाय, सी या यम-नु-पाप-पाप
भाभी पर ठिये या पोपी शामिया बगैयणगी।
विराने मधुमाकर रेला । सामने एक छोय-सा दीपक मापा था,
सीरीय प्रचामे ऐनोंकी औसे पार -प्रमे भी दो पुती औरत
समस वा एमरित्र क्यामीनपर तो होकर मी उस हिको असर सपा
पारित मात्र अपने अधिकार मीतर अपनेको प्रयो नऐ पूरी,
पास जिम्ने माना सिर सीमा नही रस सत्र उसने गर्दन काम।
मन मराज वाठी होकी । परपुश रहने सो भव
मुसपर कोई भाषण नहीं है, Eि - मापातक नहीं है। इसी समय
गमा पनी अपार श्री र एक धीमीवर पुस्ते ही पानेवाले
मेर फोरकर शाम-माय गरिर हयनेमें मस्त हो गये। पापा नदी भपेश
श्व की बी, सीए मारेका भान शुत ही वेब ए। 'भोरे,
मापन! मार रामाने र समनेवाको सावपान पर उनके उपर
नम रार स्पिन कुछ म व्यपमा, मीवर भाइये मार माप काम
पापा।
वियन मोहपा मोर मंत्र-भावितकी गय उसके पैसे परे थपर, कमर
मेवर पैर रखते दो मामात् मैना रे! मार पिन्य उटी।
उस चोभारते एकेन्द्र पर उठा। सभी मसा पुपर्थ मनीम उस
सम्म विराबड़ी दोनों वाले और रचते मना हुमा माँगता मेहर मुम्बई
पिपजपा वीनी नेत्रॉकी स्यमा उठाए मठवाव्य अपनी उस भनि सामने व साये हुए कुछेको वय एक मात्र विजय पर करणे पता हुमार यपा। मिना भने सम्बकार परके नीचे गोले ठटे और सिने सौंपर पैर सपने मनुम्म से उता है वैसे ही विराज सर मार मा गई। उसने एकगार पानीको भोर रेसा और उसके बारही 'मैमा रे | यह स्पा किसा मन ।' मारा उसी पन्धकारपूर्व भार बीच र पड़ी। र पभनेबामे मामी भावनार र उठे इमर उपर रोड़ पर बिससे पम्प उभनेको हो गया। इस सिया में और कुछ भी नहीं कर पाये। प्रापपपसे की भोर वार मी ठप दुर्मेध अन्धकारमें कुछ मी न देख पामे। रामेन्द्र अपनी बाइसे बरामी नहीं किया उसका सारा न उवर गला भयो भी परमापा। १० देरमें पारा सिपाक्से पम्प बाप हो पाहर निकसमापा | मादीने उमिन मुससे पाठ माकर पूज-बाबू साहन सा मिा भागमा ! पुलिसमें सबर रेनी होगी। रामेन्द्र गिम्भी वय उसके माकी भोर ठान्ने पार भये हुए गयेसे मोमो मेने मे गाई ति व्यहोरमाम पर। गई माँझी पुराना भावमी या, भावको पपास्वा पा। समी पापानवे बेसीसे मामय मृग प्रमेसे ही पार गमे ये, इस स्मन इस बारसे उसकी माँगई। पाऔर सबको बमा कर पशु पाम देकर ममोको मायामा पास हो गया । गरे पस पहुंचार राजेन्द्र ने स्वस्तिश्री सॉस यी। गत गतिक स्पन्न पने जन्मभरमै मामने सामने मैठकर उसने को मांसपेशी भी उन स्मारकर पाचन सम्पनी दूर मार भी उसके परम पापी माने गी। उसने अपने कान पर मन ही मन मा-इस बीकनमें मानाप्रम कमी नगा। किसी भीटर मा पिदुमा है कोई नरीमनवा । न्य पपीने पफ्नी पाप माँगोधे उसी पैतृक प्राप नही रबिन इसको पपन्न या माम्म उसने समक्षा और सी भरपसे विधी मी समय उस मैं पर गा एका मरोसा उसे नहीं पा। भबक मूसंपुष्यमाते ही पमिम शुभप सती स्या पौर, पर उसेशन नशा भाग उस परिम्ने मफ्ने बिराजा १०१ कपित कनमें पापा होश हुमा कि पते सेन्म प सकता है, लेकिन वीपित विपपर इसने बरेचीदारम भी लेख्नेकी चीय नहीं। उस दिन तीसरे पार बो मी विराको सियाने बैठी थी उससे पूछपर पिरान्ने यना किया गठी मत्वाम्मे है। गुठ दिनतक पाच-पोपमा विकारगारम उसे बोध हुबातमीसे वापीरे-धीरे अपनी गाव रमरण करनेकी चेस कर दी थी। एक-एक करके बहुम्-सी बात उस पार मी भाई। एक दिन वर्पणी पतम उस स्वामीने उसके सतीस्पक स्परच्या किना प्पा । पीडासे पर, उपग्रससे शिपिड ट्री हुई उसकी देर और विकास मन उस निवारण अपघारको मन नहीं कर सका। दुम्लएर दुल ठळावे यार बहुत दिनों ही पार पागम्-सी हो पी थी। उस दिन ममिमान और उपासे 'म उन रन देगी' कहकर सारे संपन वोड़-तारकर नदी में इस मरने यापी किन्तु मी नहीं। उसके बाद पर भोर मानसिक विकारकी कम मा मरेपर पर भी मोर भाषी राम नरीमें परफर रफर किनारेफर पहुँच गई पी । मंगे सिर मौर मीये कपोंसे सारी रात मणी बैठी यहाँ पती दी थी। मनभे न बने से एक पारपर सर पर गइ थी । बस इतना ही बार माता है। यह मार नहीं पाव कि कौन यहाँ ममा, मयमा, पिस्ने दिनोंसे पायें इस उय पड़ी है। और मार मावा कि इत्यागिनी मुख्य रे, पपुस्पन भाभप सेकर याबके बाहर हुई थी। इस मागे मोर फुलपा सोष न पाती थी-सोचना मी नहीं चाहती थी। इसके बार कमा मष्ठी होने मी उठार योहा पहा यम्ने गो। किन्तु मपिम्पको भोरसे भनी चिन्ताको उसने प्रापालसे मम्म रहा। वासी पना दी पर उसके शरीरका प्रत्पेक मा-परमाणु दिन-रात भीवर-भीतर भनुभव भषप्य रखा थपिनु से पा पड़ा हुआ है उसमय-सा कोना म्यार देखने में भी मपसे उसन स्परा मोर ठना पड़ मावा या सिर पर भाने खगता पा मोर उसे रोहोजीसी भागी बन पानी पी ।
पिराम पा
एकदिन भगान मीनेमें सरे नही मी उसके पास बार बोम्म कम
मकी गई हो, अब नर्म रहसि बन्यत्र माना होगा।
पियन भम'कार चुप होसी । बा मी म्स बपताम्मे ही बी।
उसने समझा था कि इस बीमार पुलिमान कोई भारमीप-समन शायर नहो।
उस्ने मा-बुरा न मानना पम्मी में पूती कि योग तमको परे रत
गरे थे, वो फिर लसी दिन देखने भाये नही । वे सा नमारे अपने बारम्प
नही ।
विराग्ने का नहीं। टम तो मैंने कभी मालसे नहीं देखा । एक दिन
भपाकी रातमे मैं विदेषी पास ममें स गई थी । बन पाया है में मेग
ममा परके मुझे यह रस गये थे।
मीने मा-मोर, बस इसी प्रमाण पर मोची।
विराने मामा का नाम मेरा-मैं वहाँ पढ़मी, बर्षे मरे अपने
भावी ।
यह भी मषिक अवस्थाकी यो भौर गिय मन्छ समायोकारप म्स
उपर कुछ ममता भी उसे हो गई थी। उसने दमासे मांगे स्वरम काही
प्रमोसन्नी 1 बरा सावधानीसे सना yo Rनमें मम हो बभोग्य।
मिराबने पत्थर का मन भीसा होऊँगी में यह मांग भी
यैक न होगी और यहा मी मान होगा।
रोमपार उसगामी मौसमी भौरा परेकार गया था।
उस मोफी मालोमे मोस् म माये । योम-मा नहीं म समय पची,
मामी हो सकता है।
पूरे दिन मा अपना एक पुराना बारेका कमा मौर कुछ पाप दे
गई । लियब उसे मेम, प्रणाम करके बाहर गयी पी, मासा बैरकर मोम
में अपना मुंह देगी एक पीपा भयर हो
"हैपो नहीं भी रती मार मा रमै गेट भाकर एक
भावना पियक्कापमै देकर पा मम्पत्र पी गई। पिच फिर एक बार मफ्ने
मोर पापर पैर मार मार भैठी | मने मुसो प्रविधिमकी भोर
देखते हो एक भीम पनासे उसका मुंह भने भाप मुल हो गरा ।पको
।
मियज वह फार मोने में मुँह मियाकर पागम्मार भावस्वर पर उठी । उसका सिर मामा है-उतको भाकाम अये पाव सम्पन का है। उधारे नुसको इस य स सिस्ने पररा !पा मारता रिमामाल कहाँ गई। मनुबनी पुतनमा रंग किसने हर दिया। मगलाम् । पासा मारी रप तुमने दिया | मगर कमी मेरो गईगे या मुससे सामने करेगी। मिठने बिनता सोम प्राप गते उपने दिन बमाण एकरम निमूह होकर नहीं मानी । इससे पार भापति शीप, घोड़ी-सी मात्रा, भन्त समय नदीची ध्य भम्पन्त गुप्त पन्तसम्म उस समय भी पायो यो मोरयामप ! उसे मुसा रेपर-नार-मको सम्मि अनमेर मानेर बाद ऐयाम्पा मेरे मन सामीषा मुत ते सलर रिसाई रे था सम्मो-मी साठा समान होता था कि ये च्यिा है ना वो मगन मपसा पिया है वो मा परमपराप भमा नहीं ऐसाठा ! प्रपोच प्रायभिच स्पा - पीक न भरपामी तो बान्त है, पार्थ पाप मैंने नहीं किया। तपापियो कुकिया पापा ने रिनो को स्वामीकी सेवा की है उससे नही पोपुछ बासगा। बीच-नीच पदी योउन मनमें तो ग्रेप नही किया मगर एकाएक पेपर मार गिर पई भौर सर मोक- करायो वा मेरे माफी मोर देसकर या करेगे। ऐसा ऐनेपर पा सम्ममय मा रेगे इस कहना किन्ने रंगसे, सिनी म्पसे रमार, संगारकर ने बिए पाग-रातभर बामकर पिया देवी पी और भानेपर उठ पती पानीसे मोर और मुंह मोती और फिर नये मिस्से ही प्रसंगधे सोपने बैठी थी। शब मययन् ! उसके उस विचित्र मित्रोमोस क्य गनी पैसे रहर तुम्ने चूर-चूर र रिमा ! या पपने स्वामी कापर मोची गिरकर माफमारे माया र बार उनके मार्ग मोर से कयी। उस कमरेम एक मोर बीमार मीभी। रियलोस तपोवे देसकरा उठकर पस मा मा और पिस्मपके सरमै पल्ने गी-सा हुमा यी मी ऐसी हो। छ । धौर एक भावी प्रिय नेता कारण बन्ना भादवा है।
१०४ रियम्ने परपर मासे पण राम भोर पिसी भोर मार न करा परिसे बाहर निकल गई। हरिन गोभी मीचमारसे मरी और उनम पोम माम्से गुंब यी मा एककिनारे दोर म उसने अपने भनम्पस्व शान्त दोनों पर घरे बीपनकी परेसान मनिधिस यात्रा किए आगे पापा हम उसकी काठी को चीरकर एक समी साँस बार निभाई। उसने मन ही मन मा- भगवान् । शायर तुमने यह अम्मा ही किया। अब हमर भाँत ठळापर मी नहीं देखगा-पा मुख और रे भौवें पायद इसी यात्रा योग है। गोकोपयोंने पनाकिया पागिनी मुम्य है। इसीसे उसके लिए या मुक उठाकर अपने गौरका मुख अपने स्वामीन मुख देशना निफ्टि हो गया है। वापर इस मुखका ऐसा होना ही माय मयतमाम विधानविर- विराज रास्तेपर पटनेम्पी। १६ किसने ही दिन बीत गये। विराम सीताचि करने गई थी किन्न उसकी टूर्य दुई काम न कर सकी शस्यने विरार दिया । एपसे मिया ही उसकी उत्पीविधवा या-या मील माँगती है नीचे पकार खाती भौर पर नीचे दी गयी है।इस पर्तमान विनमे उरी पिम बीमा रीमर मी हि मैह नहीं है। उसके भरीरपर माकन पर बम बने हुए योरेसे रखे वाम, मियामे मिी दुई एक मैत्री करारी है। इस समर सी ही उसकी रोया की बदौसाय प भमी उसकी भक्त्या पचीस वर्षकी। एक दिन इसी सकी तुम्ना स्ममि मी नहीं मिलती ! भवीक्स तोपर, मध्य पर मपमान्ने मैसे उसे नरे मिते गा दिया है। यह भाप मी सग मारे। भू नहीं सकी करा रोपा । एक दो कुछ मंगवे समारों कानेमै उम्ध मा बामरी स्वाथान मी या पर उम्मेगडेसे सप नही निका पता मोर दूसरी बात या ना भूमी उसे पाग दर पर मरना होगा। मरने पर स्थान किस देशान्तरम है-पापसानी मानी किन्तु यह बनती
पिपाए
लिमार सवार को करार है। पर
यस्यमतीतररा स्पोमोसिएसोये, और सभा
सोचिरहो उठा पररप असते सार स्वार्थी
घटस सपने साकोरेबिर मो भूनन पर पारपर
भास्टो य पो थे।
पापा से परामर या पापो मेरेर उसमग का
सस्पनों है? को रिस भूमियापर, सभ्य व मा)
परार सात स्नो पुस्यप सम्पप्तर मेयो।मार विते
पासपनोये पो उठ नहोस।
पिर परे धीरे रोपने पेर रिमा -पसी, पुरणप, मतीम राम
पासेपो बीमारी पार भत्ता यई भयो नया पथम,
मनपन और भाषा पेर मोमन । उसकोदो गर सरायो, र असर
रिकी बिन्तु भर पन वाग्मे । भाम भार भूरार क्षेप
दी थी कि पापी क्या गम्पस्पान हैTu fee मा ५
इतने देश भूमो मा यस्ता विभाम किसे मिा ममा
पान उठेगी?
रिन समाप्त हो गया, इसी बरसे री पोरीपरणे भस्पोन्मुख
भन्तिम बा आमा की गई। मध्याफी परापनि योप भीवरसे सी
दुरभार उसके कानोम पड़ी। समीर बम उपकी मन्द मा खाने
मपरिमित पारप-वधुओं की पात मंगम मातियों माप उठीरारामा
पारपाई किस सय दीपक मन्मती, परीपक र पाँ
रिसाती फिरती , बर गमेमै भाँस गम्पर मनामी
पोतरेपर दीपक रसार भगवान परयो भैन सा सम्मान कर
गी। यह सब इस पर भी देखने की पौर कानौये मुन्ने भन्।
भाषा दिन बाद उसकी भाँसीम भार भाये। समिरमर
वर्ष बीत गये। पकिसी परमै सन्ध्याकाफी स्य सकी, वितर
मुलको रमण र झापन परयों में उपमी भापु भोर ऐप लिए प्रार्थन
नही रन सब पिताओंको मह मापन दूर रस्तीका
पिपायर पना ये है। गने ऐश नहीं सोचा था। यह हाश नहीं हुई थी। समालती थी और रो रिन बीते सब ठीक परम्प, किन्तु ऐरो दिन करके पार-पैन यीने बीत गये, जो कुछ भी ये न हुषा ! र मार माने दिन मोगिनीकी बायस महारठे बियर उपर उस मनमें एक स्पान मार बाग उठा पा उसकी बापर स्पिास भी किया था । यदि उसका राप ठीक हो पाव तो परफ्नकी बाते पार करके पा शायद मन ही मन नियमों सम्पूर्णम्पसे पम्प मीर सकी । वास्तवमें समा नेमिय, उटी मामीको योग मार मापसे हमण करने एि एक समय यह भाप मी म्माकुमई की, पिन पर मुनोग उसे मिटा गोदामों और होते है। एक को संसारमें ऐसे किछी दालकी, ऐसे किसी कारपकी पाकस्सन्म की न कर सकती, जिससे इस भावमीको इतने गुस्सम मकर कोई हरर मा हो सकता है। मामी मी हो मा कुरी, अब मै उमर भूप भी नहीं परवी फिन्त उसक दारा पागकर अनेक भयम्प अफ्पपकी बोली मापनी उल्क प्रति पूरी गिफ्की मी से सीम्य नहीं रही, वैसे ही, उस ममागिनीभेर पड़ी स्मरण र, उस स्मिोगको इस तर मनमें प्रकार को भारी भनेको इस प्य सिविल एप करता य पाउस उपर मी उसका पिच मतान नहाँ हुभा। एक दिन या में फुमय भाकर पोळी-रावा परमे, पर प। नीरन कुए विस्मित होकर ही पानके मुंही पोर रे । कारण स्पा मदीना प्रकायम क्विानेकी बाब हुई थी। पूरीने राग मनका माप समानरमा-एक दिन मी भय पना नहीं चाइनी, कापी । उप समारको देवर नीमरने बय विप्परकी सी (सकर मा-- पों रे पूर्व सा बात है। पूरीने भवन घोर कर मास् रग रते थे, मर रो पड़ी। मभुमिकत सरम योगी पर सा होगा। वर्ष यहाँ मम नहीं माया इम सर्व- प र प्रतिदिन एक गा । ना, मैं किसी तय एक रिन मी नही मौ। नस्क्रने स्नात पाप पर बीमार, पस पठार कहा- -मेर गानेसे
पिराण
स्पा में समय हो अगा रे! इस मेक ऐडी भाण में नहीं
रखा प्री-स्से पट बहिन बोशेना रोपा पर बरही हो।
पाणी व मुनकर पूरी और अधिक रोती हुई गोली म यो उसे
रमश इस पर पार किया करते हो ! कि सोच-सोपसरी तो दम देते हुए
तुमने सन 18 में उठे हमेघा गार परवा ।
प्रयत उसी वय माविमाकरेगा मोर कौन है में सुध हो बनती है।
नौकरने कमा- उसे नहीं माररठी!
टीने भोर पर मत भाक्से मामा, नहीं गवरली । उस पाद
रनेसे पापोवा।
नगरमा-सोचा।
पपोता। उसका नाम टेनेसे मैं मपवित होगा स्नान करना पता
बाव तम्ने विमापसाव देसा की स्नेप्रेमी मरमें
ही पर गई है। नवरले पान मी मोर देसार कठिन स्परम
का-पूरी
मुनार पर या भोर भत्ता दिख हो पो । पर बादायकी दुसरी
मान है। बसम्म दोहपर अफ्ष करनेपर भी कमी उपवाका येथी
मासो देसी ऐम सर नहीं सुना। हनी यमी परम्पर्म वापर
धोम और धामपानसे उसका मिक यया।
बीहार भोर मुण्न पार कराँते उस म्या पूर्व भालॉर्म भोपा
देकर कार रोने की। योगरगरा मोमन सम्म पस ही गा।
वीमे पर दासीर सानेकी सामग्री मेबार आप भार सही दी।
नीटारने न हो मुभा और नारी।
शाम हो दुध । नौशावर रोपास वारि माहिक सम्पस बरसे
प्रय मास्नपर ही पपाप पैदा है। पूर्वने चुपकेसे पीछे मार पुग्ने रेसर
पानी पीम्स मर रख रिया | उस पपनधि करनेन मही तरी
है। सनम मपान पर, मामासे मर साम्पमा परी वय भाकर
परिपार करती थी। नौकारको पण या स्मारन हो मामा मोर मतकी मात्र
पिरामर
मौरी हो उ । यो सिपर राप रसार कोमा सरमे टमन मा-
पूरी पीठ पर वाक स्परागकी गोदर्म भीपी गिरकर, नाय
कर रोने ममी। नीर उस सिरफर एकाप रार पुपचाप बैठापा।
बहुत देर बाद मैने समांसी भाषाम्मे भा-भव कमी न पॅगो दाया।
नीमेवर हापसे उमरगाने पर उभर करता हुमा योगना मग
कभी न करना।
ये तुप होकर पैसे ही पड़ी थी।
उस मनकी बात समतारीमेबरने कोमठ सरप्रा-मारी बड़ी
-गुम्बन है। जब नाम ही नहीं पूरी उसने उसे म्पकी तय पठा-पोसा
मोर ठेव मावा समान हो गइ। और मेग बो बारेमद, मेकिन तेरे
मुंहसे यह बात निसाना पोर भाषा पूरीने मांस पच्छे फेम कहा-पा
माँ हम कोपौनस तय कर पायेगा।
पायी गई, सो देवा में बनवा र भोर को सपो मन्तयामी ।
पनवे पभाप मी नहीं बनती थी उस समय या गडहोगा
पी। उसको भय भी धन मा पोप होय तो या भास्मात्पाही करती मा
काम नखी।
ध्यने और एक बार माल पर उसमे हुए माराम का-वो भग
नहीं गाभाषी रादा!
।
"
विपज पर
या और कुछ नहीं।
ये रिये पड़ो।
नीने आपसे मम्मी मौर्स पंसर का-पर अपनी बाकी-
कामनाको-दो बार सब मुमसे मारती थी। एक साप मा मन्त्र
समय यह मेरी गोवमे सिर रस सके और दूसरी साप यह कि सीता-सावित्रीकी
स्पोकर मरनेके बार उहाँ सति पर व्ययभमागिनकी सभी साम
मिर गई।
पूर्व उप होकर मुन्नेमगी।
नीवर यामुौसे २२ गछेको साफ पर योगा--तुम सम्ी उस मफ्यम
समावेहो। मना मीर पवा इमछे मैं मी धुप पद्य किन हा
मगमन्को शेखापागो देखते कि किसको किस भरापा
बोमा सिरपर ध्यदर बाम गई। तूही का मैं किस मुंहसे उसे दोष में
उसे भाषीवार रिसे मना से र! नहीं पान सेतारको नममे पापार
तिनी भीनी शे उसिताफ मेरा कोई मोम, कोई शिप्रयत नहीं है।
इस मम पापर भी अपने दोपसे उसे मने का रिमा मगवान् कर, भगर्छ
ममें भी मैं उसे पाट।
पापागे कुटान सन्ध पापिर उसका गग एकसम च गया । टने
पदीसे उठकर मांच से दादा ओत पते पंछठे भाप मी पेरिसा | सरसा
से मन पदाकिसे भी हो गये हैं। रोदर मा-गोपन
होगों पगेण पेरिन में तुमको एक दिन ठिए मीही मोठा नहीं
गेर सानो, नहीं होंगी।
नीम्सर सिर पर मध।
मिराब बगमपपुरोगी पार ये था यी थी। इसी गका पमरम
पर मनुरिए मयुशम्पाकी लोग गइ थी, तब उस सनेमें मौर पर इस
मानेमें बिना अन्तरमा बामपने पर अपी। उसी दुसरे
गहमें गिना ही प्रवर होर विभामकी मिधा मैगने गी, उसे अपनी
पर उन्ना ही श्रेप और तीस मान बगी। पालिसी मी भरपठे भी
मी विवम करनेो गी नहा। उसकी संसी परम्पमें परिवर्तित होगा,
विराम या । । गौमी से ठी। पूय सिरपर हाथ रसार प्रेमा सरम टमन मा- म्यारे! पूरी पीठ पर वाम्मी प्य रायकी गोरमै मापी गिरकर मर मिय कर रोने समी। नीमार ठसक मिरपर एकाप रहार पुष्पाप मगा। बहुत देर पर पूरीने समासी भावान मा-भव कमी न कहूँगी दादा ! नीमवर हापस उसकोको पर उभर करता हुभा पाडा-ना सब कमी नकाना। टीप होकर से ही पड़ी थी। उ मनकी बात समझकर नोब्बरने कोमम स्वरमाया दरीसी गुरमन है। भर नाव ही नहीं ये उसने तुम मांफी तय अध्य-पोता और मावा समान हो या पीर जोग ये पार करें, मेकिन रे मुंइसे पा पाठ निम्ना पोर मप। पूरीने मांत पम् ते कापा यो स्म बर्गीको इस तय कर पकी यह ! पर क्यों गई सो मैं बनवाई भीर से सब मन्दयामी है, या पानसे यहभाप मी नहीं मानती थी-उस समर या पागा होगा पी। उसको भी मन मा होस दोष का माम्मदवासी कसी, र काम नपणी। पूरीने भौर एक पर मॉस पर उसको दुइ भापम्मे का भर मग नहींगभावी दारा। मो नहीं माठी । भानन उपर नहीं बन सासे नहीं पाती। इना पाक ओर करके अपनेको समामार पप बार ही उसने कहा-मिस मराम पर मुझे मार गई मगर उसमेग्नेनीप-सी मो या राठी छपराठी--एक दिन भी कही नहीं पती । यह बात सामाप ही नहीं समातीरी। पूरीने मुंहध्याये यार ही गरन हिमकर पा-समासी गरा नीमरने दोसम भाकर पाटो पहीप्रपना थाना पाती, भारे नहीं पाती। पास रपये से हम मग मास नहीं रेल पते मन में मार मरते ही देत पाप देखना ही निल मुहे पापे यर
या मोर ग ना।
टी रि रो पड़ी।
नीमरने राफ्छे मम्मी माँस पंजर का-या अपनी साथी-
प्रमनाकी-दो गई थप सब मुझसे पाकरवी पी। एक साप यह कि भन्न
समय पर मेरो गोदमे सिर रस के मोर दूरी साप मह कि सीता-सावित्रीको
तयोर मनेके बाद उनी सविर पर अप। ममागिनी समोसा
मिर गई।
पूरी धुप होपर मुनने मी।
नीर मांसमोसे मे गठेको साफ कर रोध-तुम समी उस मत्यप
पते थे। मना नहीं कर पा इससे मैं मी तुप गया है। लेकिन पहा
मगधन्को से भोला। वो देते हैं कि किसको भूब, किस मापन
मोध सिर पर बाब गांव का मैं किस मासे उसे दोप! मैं
उसे माघीवार रिसे दिना से रहूँ नहीं गान संसारकी नरम पा पारे
मिनीमनी हो उस सिमफ मेरा कोई होम, कोई शिघ्रपतनी।।
इस मम पाकर मी मने रोपम उसे मैंने गवा रिमा भगवान् , मगर
ममम मी मैं उसे पाऊँ।
पा मागे मन सध यहीपर उसका मग एपरम गया । येन
पदी उठकर भांपतेरा मोर ठठे यो भाप मो ये दिया | सस
उठेन पकिए हीजे बाय। रोडर मायोप्य
होगपणेरा बेकिन मैं तुमको एक दिन यि मी कही मोठा नहीं
मेहन्दी नही होगी।
नीर सिग्रस्य स्ख।
विराज बगपापपुरीश्री गापर पेट मा यो यो । य गो पसारम
पर मनुए मृत्युसम्मात्री सोब गर पी, म उस बने और मरन
भाने तिना अन्तरमा पर माने पर गयी। उसकी दुक देर
गम बिना प्रवर हर विभामगै मिण मेंगने गी उसे अपनी
रेपर उसना ही प्रेम और सीह माने व्यी। पसिौ मीरपसे प्रो
मी विकम करने गरी नरें। उसकी ती यस्मामें परिवर्तित होगा।
गिराया
गीमी हो उ4 1 4 मिपर राप रसार कोमा सरम उतन मा-
यी।
पूरी पीठ पर वारश्री स्य पादाकी गोरम यापी गिरकर, नरम
पर रोने संगी। नीमर उस फिर एक रसार उपचाप यहा।
बहुत देर बार पूंपने भांसी भावाम पा-भर मी न मंगी दारा।
नीबर हापसे उसके सीने पर उपर मता हुमा बामना भय
कभीवपना।
पूर्व पुप होकर पसे दी पड़ी थी।
उसके मनकी बात समझकर नीमेवरने कोमम स्वरमा-
पापड़ी
है-गुम्बन है। का नाम ही नहीं ये उसने मुठ माँकी व्य पाला-पोसा
है और देव माता सम्मान हो गई है। बौर मेगये पाहेर्ने, मेकिन मे
मरसे यह बात निकम्ना पोर भपराप है। पूर्यने मौत पर पैसे का-का
सोम को इस व्यपर थी मई।
पापो गई मै तो बस में अनता हूँ भोर से बो भन्दमामी ६,
पा पानवे पर भाप मी नहीं मानवी थी उस समय पर पामबहो गह
श्री । उसको बरा मी अन मा होश होय तो पर मास्मालाही परली पर
काम न करती।
पूर्वने मोर एक बार भोस पंफर उसी भाग्रम का~यो भग
क्या नहीं यामाधी वारा!
मो नही मावी। मानेच उपाय नहीं है यान इसोस नहीं भाती । इना
कार बोरकर मपनको समाबर वनभर बाद ही उसने कहा-मिस
भवला या मुझे मार गई भगर सोमैग्नेली म्य-सी भी पापी
पार पाठी-एक दिन मी ही नहीं यदी 1 यह बात स्पा माप दी
वी सम्माठी पूं।
गने प्रिये पर ही गर्दन हिमर पासमझाती गरा
नीबरने पेम भार को पदी का पान । पाबाना पाठी?
माने नहीं प्रती । पासा दग यै सो तुम रोग अब सी रेस पते,
दिन में मासे मरते ही रेत पर। देवनारी मिप मुझे साये गा
"
विराजमा
याऔर ना।
र रो पड़ी।
नीमरने हाम्रो अपनी माँस पर मा-या अपनी सापकी-
ममनाकी-दो गा गा तब मुझसे मारती श्री। एक पाकिमन्त
समाप वा मेरो गोदमें सिर रख सके और हरी साप पाकि सीता-सावित्रीकी
रामोहर मरने व उही सति पास पय | भामिनकी समोसा
मिर गई।
यै पुप होकर मुनने पी।
नीलवर मौतुर्मोसे मे गरेको खफ करके पोयम समी उस मफ्यप
पाते हो। मना नहोर पाठा इससे मैं भी कुस यता हूँ। मेपिन पता
मगमन्मो से पोतापाता देखते हैं कि कितने भूड, समपराका
गोमा सिफर लादकर या इस गई। वही का मैं सि मरसे उसे दोप! म
उसे मासीवाद दिने बिना से ऍ! नहाँ पान, संसारकी नमरमें सवार
स्विनी रमानी हो उठ तथा मेरा कोई वोम, कोर शिप्रयत नहीं है।
इस मम पाकर मी अपने पेपमे उसे मैन गैमा विमा, भगवान पर, अमछ
सन्ममें भी मैं उसे पाऊ।
पा भाये कुपन पत्र पॉपर उसका गम एकरम प य । पटीन
मन्दीसे उठकर भौच से पराया पेंन्ते पर भाप मोरो रिया | सरसा
उसे धन पहा कि दाब ठेकशीठे गाये हैं। रोकर पाया रहा
पहों पये राग येकिन मैं नुमको एक दिन भए मी कहाँ मोठा नहीं
मेर सती, नहाँको गी।
नीर मिम्बर पय ठा।
मग स्पायपुरीश्री यापर ये मा यो पी। इसी णको पानरम
पपल मृत्युसमाकी सोब या थी, काउस बने और अब इस
पाने विना अन्तरमा पमपने पर य पी। उसी दुरडयो
पर्म जितना भर होकर विभामधी मिय मैंगने भी उसे अपनी
पर उखना ही श्रेप और खीस माने थी। पपिसी भी भरपसे पों
भी सम्म रोप्रे यरी नहीं। उसकी मंसी पम्पम परपर्तित होमर,
पिपज बहू या टसे सस्म हो गया है। इसीसे माइंकाकी सौम्य नहीं थी कि पर पाँधक न पहुँच पपे | मापनसे ही उसे पर फा विश्वास पकि शरीर निष्पाप न हो ये कोई पने स्वामी पारपामै प्राणत्याग नही कर पाती। पाइसी उपायसे मरने पर एक बार अपने शरीरकी परत कर मेना पाही -उसका प्राथमिच सम्पूर्ण हुमा कि नहीं। इस पौधाम उपाय हो सकनेपर पानिय शेरबहे भानन्दसे जीवन के उस किनारेपर सड़ी होकर उनकी पर देल्वी मेठी येगी। किन्तु रामोदर मरी इस पार पाकर उसके हाय और पैर्यमें परम था पपा, मुंहसे भपित माधम सून बने ध्या। मग भागे किसी त्य फैमेिं चम्नेकी वाब नहीं दी। या वाण होकर एकाने थैकर मपसे रोने गी। यह बैना मवाना पाप है, जो इतना करो मी उसकी मन्तिम भाष्ठा पूरी नहीं हुई। उसका मा पन्म तो गया, दूसरे सम्पमें भी माध्य नहीं रही सपा भोर क्या करेगी १ बाधा नहीं है, तो भी पा सके परपर सारा दिन आप बोरर स्वामी परम प्रार्थना करने की। दूसरे दिन धारक पर भासपास सीमाधार मानेका दिन था । सोरते ही उस सरकपर मेगादियो भने गी । उसने हिम्मत पर एक गाडीभानसे प्रार्थना की। यूदा गादीवान उसका रोना वेसार राजी हो गया और उसे अपनी गायोपर पड़ार पारस पहुंचा गया। विराने निभप विमा मन्दिरके मासपास दीपो यह भी यगी । यहाँ कितने ही कोप भावे करते यते । शापर किसी उपाबसे पा एक बार मेरी मारे पास समर मेल सके। कितने ही र-नारी कठिन मास्पिोंसे पीड़ित किसनी ही कामनाएँ करी, इस रेषमन्दिरको परकर इपर-सपर को हुए है। उन्ही बार भार राम्मे गव दिवार पछातिका भानुभव किया। उनकी व्य उपक मीमाधि है, सम्मा है। बाम्सीको पर यहाँ पुपचाप पपीय सफेगी किसीकी मी परि मान नहीं की किसीडा मी मर्महीन प्रेदम चरितार्थ न लेगा। पर चार रखने एवम भी उसे पाण्म कि । मेकिन ऐग तेथपे साथ भने म्या । मापसेर पुन बाडेम बिना कुछ साफे-फिमेरिन बीत गये किन्तु पर मौर मी रिन रपयेगे, ऐसी बाधा नहीं या कोई मान- मह भी मरोसा नही या मरो पारेर मुसुन्न।पा समीकम्प पिर ।
पिपशप एक पर सपने कैयार करनेगी। उस दिन भाषामे मारक असे हुए थे। टीसरा पर हो न हो ही पिरा पन पाने व्या । सबेरे उसके मासे बहुत-सा रस निक अनेक कारण, उसी मवकास र मानो एकदम माप हो गई थी। उसने मन ही मना- बन परवा पाच ही सब सम्पत हो गयया । उभीसे या मंदिरक पाछे मुंह मसे पड़ी थी। दोपारो देवताकी पूयो पुग्नेपर पर भौर दिनों तय उठकर बैठकर प्रधाम नहीं कर सकी-मन ही मन प्रणाम र बिमा । ने दिन वा स्वामी परपों में बिनठी ही करती आ योगा ममोप नहीं है। काम उसने कर राम उम्से इस मपर उसका गया नही या रेस मही उसने पास है कि उसका अपमे कमा भपिपार न यस समझे भूसे पिना भयप करने वप इस सन्मको यार दूसरे कम- तक मास न हो सके, पही मिपा उसने मैगी है। किन्तु भारदिनका बन्त होने साप साप उसकी पिता पारा साथ एक बार्ममार्ममें मुग याप मियान मार नहीं या विद्रोहका मान दिखा पड़ा। उसके सार विचम मरकर एक मपूर्व अभियानका सुर मनियनीय मापुरसे बज उठा। पर उसमें मन कर मन ही मन मा यही करने की ये फिर तुम्ने मोहाया! उते मायम नहीं हुमा किर उसत्र मपंग मा हाप निमार परिक्रमाकी यामें फैल गपा है। सा उसी पर एक दिन मया पाकर प मकर सर, प्रत्येषि कर उठी-उसके मुंहसे 'बारा एन्द निम गया । यामागनेकी ण थी । ति पारमोने न रेकार इस समय सीपापो समधने में कुपा दिया था उसने बसन्त अमित मोर म्पमि पर मार को ऐप का-सहाप! अन इस वय याम पर माहै! मुझसेमा मपाय हुमा-अपिक पोट तो नहीं गी! किने धैरन मुंइसे कपड़ा प्यार देखा इसके बाद और एक अस्फुट मर पाप हो गई। यह भादमी नीचर मा। या एक बार पर देखने पर गया। रमें मर्म बस्व हो गये । पस्चिम प्रितिस्पर अदा न ।
पिराज या रिममप निमी और किसी हुई सूर्यकिरणोनी मनाी भामा मंसिर पापर, पेड़की घोरपर फैल गई थी। नीमरने र सोकर पूर्यते का-उस बीमार मीको मैने बोरसे कुछ सिपान । रेस पार उसे रेस-अन पागको मिलारन है। पूरीने देखा, पती एकर मामी भोर ताक पी।सपा पीरसे पास पर सी हो गई । उसके मुसका हिस्सा पासे रेप भ्य, तो मे बन पड़ा उसने गा मुख पाने कमी देखा है। पूम-प्पी, तुमय पर 'सप्तणाममें प्रकर पहली सी। विराकी सबसे मुसर पाच उसके मुसभी रेसीपी। इससीको समस्त संपर कोई भी न्द्रों भूल सकता था। 'मरे सह वो मामी है।" काम पूँयै उसी पड़ी उस की शीर्ष पर उपर भी पदार अब रणकर ये उठी। नीभार पूरपर सफा गया था ।बापीठ न सुनकर भो वा समय गया । परपार नियनको सिरसे परत देता उक्त बार शान्त बरसे पहा-यौन पेयै उठ।इना गर, पानको मम्म एमकर, भीकी जीप को मेरे यारकी मग उठाकर भीसे गाये हुए देन पाले माने रेकी भोर पम्म गया ! . चिकित्सा बिए उत्तम स्वास्थ्यकर स्पानमें धम्पि, पिसबसे पात छपा गया गुणमर की गई, फितु किसी व्य ठसे राबी नहीं किया बा सका । पर मेयर बनेकोमा पिसी तय राजी नहीं । नावरने को मारमें पुमार प्रा-और कितने दिन मन ! पोलिस तप पना पारे, यने रे । अब तुम इसे और रिक न करो। बारस्करी स्वामीकी गोदमै सिर रखकर उसने पाले यहाँ भागेदन किया पाकि उसे ससे पामे सनी ममी एम्मापर मुम्म दो। पर उपप, परकी पर एक साम्प्रेपर और तामीर सपर उसकी सासर तुप्पा इस बात को गो कोई भागोते देखा पी उसका भनुभव कर रो रेवा । रिच यक-
विपन बह
मनीट
मधिक समयमें ही बियब सारसे बेहोप-छी पो गठी चिनु योड़ा-सा
समग होते ही परमी र एस सी गैरसे वाया रती है।
नीर उसी प्रमाणे पोरार प्रायः ही सी नहीं पा और
प्राय दी मासोंमें मौसू मरे हुए शर्मनापरवाहै भगवान्, तुमने बहुत पण
रिमा अब धम्य परो यो मनुष्य परव्येक गनेकी पारी कर उभरे उसके
इस परमाया-मोहका सपनपाट दो।
प्रमागिनीका पार पर मह उत्तर भारपण देतार नीर मन ही
उता है। सप्टर पीव गमे।ससे पोर विकास
प्रार होने सगे भावरिनमर प्रभप करके देर पहले या हो गई थी।
सप्पा बाद उसने मौत सोबार रेसा। पूर्व रोठे पेठे उस पर प्रस
पर सो यी ।कारी मह मियाने पास बैठी है। उसे रेखबर वियम्ने
मा-छोटी बहन
मेरी महूने उसके मुरम मसाला पीसी में मोहिनी हूँ।
या!
छोरी बाहुने हमसे बिताकर पागुम्रे पैके पाठ सो यो।
एगी। बहुत
छोटी बने माउस तरफ संपा-पूच कर ये।
'तोपिर मैं मीक" पार वा पास कर मन ही मन बप करने
(पारशीनाम मासे पुमाकर प्रपाम किया। इसके बार
छोरी पूरी की भोर मर चुपचाप धम्ठी यी रिपोरे-धीरे बोली-
यन पायो भारतीय गोपन, नि मेमना यही है कि
दूसरे ममम तुमने मेरो फिर तुम सो व्य मफ्ने निकट पढ़ें।
कससे हो मोर्गोको मातम हो गया था कि निगमका बीवन लम्स
समाप्त हो पाया है इस समय उसकी बात मुनार भेटी बहू अपमाप
राने भगी।
विराब भय तूप हापम है । उसने गमको मोर मी पीमा रके सुपर
गुफरा-छोरी बड, मुन्नयने एक बार उप सती है। मेरी बहने
भी रास्ते करा-मब उसे क्यों मुमती दो बोपनी भायेगी।
बिराम या । विराने करा-भायेगी री भायी। एक पार गुम भेगो । में उस सम्प कर मामीपार रेय भव मुह रिसीव उपर प्रेप नहीं है, किसी प्रति कोई सोम नहीं है। मगधम्ने मामा के मेरे स्यमीको मेय सिा, व में भी सभीको क्षमा करकेबाना पाठी हूँ। णेरी पहने रोते रोते माया भगवान्की समा सानी ! बिना पपराप इतना दण देकर भो उनकी मनोकामना पूरी नहीं पा तुमको भी ग्य मे जाना चाहते हैं। एक हाय छे ठिया तो मी भगर सुर्मे हम होग पस होते विराब रस उठी मोही-मुझे पर तुम क्या करणी ! गोव-मोहम्सेम परनामी हो गई-मेरे बीते यनेमें वो सब कोई मम नहीं मान ! छोरी गोर रेफर का उठी-मम येसी । इसके सिवा पायोटी बनामी-सका योग नहीं परते। वियम्ने मा-बम मेम नहीं रखे मगर में रखी है। पनाम्य छठी नरी है मिस एप है। मेरा अफाप पारे मितना भोगा हुमा हो मेरी बहू, उसके बार हिन्दू परकी भीका गीवित पना और नहीं। तुम पाती होकि ममथान्के रया नहो। किन उसकी बात पूरी होने के पास ही फूटी उम्सी दुई स्थर सर चिमा उसी-भोर मपवान्की पी दया है। पठरू पा पुरोगे यी पी और मुन पी थी। पर उससे मर्माप्त नको सका भोर मह इस भय पिम्म उम्र । येकर फिर बोग-उनकी घरा सी भी दया नही है, उनके मय-स्य मी विचार नहीं है। ये भस्ठ पपी, उनने कुछ नहीं हुमा-और हम गोको हो पर इस घय गरेपे । उसके रोनकी भोर वाफार दियब पुषपण स्ने म्पी। ना सी सी मपुर सी पप-विवारक पी! उसपर नापरी प्रोपर स्वरमें गोम- पापडी पिस्थ नहीं। यै गैर मार उसके गोसे मिरकर बोरठे ये उठी-गुम मरो नही मामी, हम न नी गे ! इस मा लामो-चोर कहीं पो-गुमारे पै पपती मामी, भोर १० रन क्लिो ।
विपना पूर्णके रोनन पद मुनार, माहित बीचमे ही छायनीबर नेगी माम प्रस पाकर मुनने मा । येक महमें दो बापा, महीपार यह मामीसे म्पासार क्ति पने सिए चिरी करनेगी। भाकी क्यिमो रोनों भोपोंसे वाकर पीपली भोस्की र गिर पड़ी। मेय माने पछी क्य समाचार उसके भार पंछे और पूरीको पीपकर मग किया । पूर्व मेटी बहूपी असीम मुंह छिपाकर, स्पको स्मती हुइट फरकर रोने की। पावर नाव बिराच उसमे हुए गलेसे ग्रर-घर काने मी-रो मन पूर्व मुन । नीमवर धारमै खराबोकर सुनने मगा उसने न म्मिा कि पिरान वन्य सम्पूर्ण और मागा, उसकी पत्रमान मन्त हो गया है। नगर प्रने मी-बिना समझे उनको दोप न रे पूरी । उननसा सम्म विचारतो भी कितनी दयास पाठको बाब मुझसे बदन कोई नहीं बनता । भरना हो मेय ना? या मेरे न यनेपर ही दम मेग समझोगे। मोर की। कि पकाप भोर एक माँस उन्होंने हे की है, सो वो रो दिन भामे पीछे घरीर नहाता । किन्तु इन्नी-सी सम्म रेकर उनोंने मुझे तुम गोको गोप येय बिग-पर तुम मेय किस तप भूगे पूरी! सारमेय बिरा!-प्रकर रोती ही पी। भगवान्की रसा मा सुस्म विचार एक मसरपर मी उसने विस्वस नही मिा पकि माप उसे मोर मस्साघार मौर मविचार ही बन पाने ज्या । इगरेर पर विरामने करा-पे, बहुत रेरसे नहीं रखध मय एक बार अपने दायको ठो बुमरे। सीमगर भाइ मा दी था। उसके पास भावे री छोमै बह छीना पर पड़ी रो गई। नीमबरने म्पिाने मेयर मीन राहिना गप सप पानी उपकर अपने अपने छे म्मिा मौर पर नाड़ी देखने मा। सरनुप मियममें भी कुछ बान श। नीमरने इस प्रसे ही या मनुम्पन कर भिमा कलार बोरसे इन्नी पाकर गी! भोर ठसा उतरने सायही पत सम्मनस समाप्त हो जाम । इस समय नाही रेतर मी पिराजवा उसने यही समझा। पियमने कहा- हाय दलो।कार ही यहाँस पड़ी। सहसा पाया मर्ममेदी पयिासहर उठी। इसीको बर यह इनाम धन हुमा है, या बास समीध पार था गई। देवनासे नीम्बरका मुख विवर्षो गया। घन पदया, विराकने मी यह देख पाया। उसने घेरन पहार प्रा-ना ना, या गत मने नहीं प्री। सम ही प्रती हूँ, जब पिठनीर। इना पार, पेण पर सपना सिर स्वामीत्री योदमें उसकर रस रिया। फिर मोदी- ममने मोर एक बार तुमपो कि मुझे धमा स्परमें 'किमा पार नीशायरने हाफ्ठे पानीमा पाम। विराजसपर बाँचे मरे पड़ी थी। फिर धीरेखेकाने खगी-बानकर या अनयन इल्ने दिन तुम्हारी पत्ती करने में न धने किन्ने भपात और गरयों मैंने भी कोरी यह हम मी मुनो, पूर्व मी मुनी तुम लोग सब भूबर माय मुझे मराये। मैं व्यती। इतना पार पाहामगार स्थामारपरणलोग्ने बगी। बीबरने सियानेध किया प्यार पर उम उस दिये । बिराज हायसे बार-बार व्यावार उनके पैकी र अप मामे ज्याप्ती हुई बोली-मेरा सर एक इतने दिन पार सामा। मोर कुण् ना। ए मेरी पुर निम्पाप है। भर पल्टी, यार या देखती गयी। पार पर करपरकर पतिकी योरमें मैं मिपाकर मकर स्वर योग- इस स्य मुले दिने यो कसीमना नहीं। इसरा पर सुप हो गई। या रिपुरक गायी। समीता मारिये पेठे ये। रातपाय बन्ने पारप ममप करन मी । नरम पार पानेकी पत-भस्पतामधी गाव-निगोप्य पाकी बाव-यही दाकिन उन सभी पाठीमें पति उसर एनम पति-प्रेम था। पड़ीमर भ्रमने किस स्य उस सदी अम्मीको समया-फमा पहुँचाई, मायी।
दिरामा नपर दिनास रायके सामने मैटर भीमरर मान करना पण प। उस दिन गोपनीय पूर्यको पुछारकर, ओय पर पुपरम पकने संगी। उससारस समय पुकारना मन्द रोगपा पर समस्त रखने गी। फिर उसने किसीकी भोर देशा नही फिर उसने विपसे कुछ का नहीं। स्थामीकी देशपर सर रतार रिपके माम-साष दो इसिवा सारे पुरुष मन्तगपाल --समाप्त-
बचपनकी कहानियाँ
बचपनम मेय एक मित्र या ठसका नाम या यह। पचास-साठ सास
पार-वर्षात् इल्ने दिन पर बिसको ठीक धारणा ही तुम न कर प्रमोगे-म
दोनों पर जोर से संगम-स्मक एक परम पाते थे। हमारी मास्था उस
समप दस-म्पाय साबकी होगी। भादमीको ग्रा रने, माने ने धम
तो दिमागमे थे, किनकी कोई मिनठी नाही । उसने एक दिन मपनी माँको
अचानक रबरका परिसार ऐप भारतमें राम था किमाथेरकर
माया तो उन एक परम मोपमा मा भौरमा सात-भाठ दिसामढ़ाकर
मैन नायब होरकास विप पर मासर रसरो। अमने माफर
पापाने मैठेगे, तो फिर इसे उमम उपाय करने का नहीं मिया ।
मुनकर मापने कराना। उसके गुरमी को यार नहीं पा
भानीरी फोधिसे बुम्म उमर भागकर ठनोंने हिला-पसा था और
भाषाएकबो नाम का। उनकी मापीथा मी से ही
मिव मात करे। किन पर्त यह कि बस समय म्यूबासकी पीयम
भावोगा वमीठे उसे परमै माने यि मसर रस रिसा अवय ।
उठ पा सम्सी बन गई मेन मन ही मन परमपनी माँ उस
पिगपा । पारप पह पाक में रस सिरम मसर भरनेशियम
भी। पापनवा पाकिपर मै माखरप्रे भन्न भौर पुभिसको सना बयपर है।
सके पिता पनी इस येई घर पुए, पुराना पनुरुपार ना
पचपनकी कहानियाँ विनिय इमारत बनवाद। ठमीसे यात्री मांगी मी इमपने गुरु मारायने उसमें मकर उनके परमोची रम्से परको और अपनेको पवित्र र। मेजिन गुरु महाराण, भरपुरते इतनी दूर भाने म्पि गये नहीं होते। मका पार पा मौका हाम भापा है। स्पैकि गुरु महापब रस्पापगंगास्नान करने लिए काशी माये। पर मेरते समय नवचनी (स्की मौ) को भाटीरि देते प्यपैगे। मस्की मो मानन्दसे मी नहीं समासी गुरु माग गत और सेवासी पारीमें बुरी इल्ने दिन बार उनकी मनोकामना पूरी होगी-परमै गुमर पर पड़ेंगे। पर पविष हो गयया । नीमा कमरेते मसपारपत्राय रिया गया । नया निधान पग बनाया गपा-गुम्बी उसपर सोयेंगे | इसी कमरे एक कोनेम गुम्सीक पूय- पए स्थान ठीक किया गया मोंकि विमविपर पने असारमै गुम्बी पन साँगे-माने उभरने में उनका होगा। कुछ दिन बाद गुम्बी भाकर उपरिपत हुए । येकिन पैसा खराब दिन था देवा पुर्योग पा ! माघधर्म का प्रायत्री पय पाई हुई थी। मेसी मेरी बा चट यो प, पैसोही की वर्षा हो गी थी। बापी और पानी बमनेन नाम ही नहीं मेते थे। पर मियां पायान बनाने और कौए कायर सपने में की में इम्नी मस्त भी उने दम मारनेकी फर्सच नहां पी। इधी बीपर्म मा अपने रायसे भापकर गुस्थी पगम मसारी गझ गई मिने पिण गई। मातचीतम रात हो गई पारे पके हुए गुम्नष सा-पीकर पर्यापर ग्यार मे गये। नौकर-चाकर पुरी पा गये। परिया पग और गुगुमे विमनेर गर प्रमाचिन गुस्मीने मन को मन अपनी पेशी नम्बरानीको मन आशीबार रिसे | भान गारी पदमै भकस्मात् उनकी नींद उपर गई। पतसे पकार मसारी फोमपर उनके सूर पुए पेट स्पर पानी गिर गाया-उनकी घर को यी थी। बोर ग पनी लगना उस या! सम्पर पाग उठ पके पेरको पेन्ने हुए प्रने मो- नन्दरानीने वो नाममाया पबपनकी कहानियाँ है मेदिन देसवा , पाकी मी भूप लाकर छत इवनी अस्दी रिफ गई है। निवारच पलंग मारी नहीं था। मसारीसमेत उसे गुरु पूसरे कोनमें मीच गये और उसे फिर पेट से। मेकिन एक मिनट भी नहीं पीने पापा रोनों भाई कैसे हो दी थी किरिसीदो-पार र ठमा पानी ठप ठप-पपेर ठीक उसी स्थानपर पक पड़ा। स्मृपिरान महाठप फिर उठ बैठे पिर पगको जींचकर दूम किनारेफर के गये । पोसे इस सिसे उस सितक पर मर जान पाती है। रिटे, फिर पेरो उपर उसी मगह रपसे पनी गिय । र ठळकर, परका पानी पसार पम्प सापकर भोर एक किनारेपर से गमे येन मेग्वेदी पर भी यही पानी पाने गा । फिर सॉपकर सोपे कोनेपर मे पये सेकिन यह भी यही हासभा । अपनी रगेवार देखा, सिमेना मी मीग गया सोनेका उपाय नहीं है। स्मृम्मिन मुकिम्मे पर गये । बरे भावमी टारे, मया मी ना, अनी र नहीं। पर्याय खोजकर पते रगता है और पहों यना मी सवरेसे लाम नही । फ्पा ठिकाना फी र मत प्री पाना सिरफर न गिर पड़े । ररते हुए र्याय बोमर गुमची बरामरेम भाये गा एक मेन बार मा यी थी मेकिन भारमी कोई न था। भापम पीर भय प्रया मा था। जैसा पोरफा पनी रस या भा, सी ही बारकी हवा पायी पी । सो पना मी कठिन । नौर-पार म कहाँ पर होते है। या मी पारे नहीं मान्त । बोरसे पिस्कर पुश्चय, मेगन मर नहीं बोत्म । एक तरफ एकप पड़ी थी। दो पिसार गत माकर उसपर भार बैठते। मथर होकर गुम्दी उसीपर यकर मैठे। उमाने मनमें पा भगाप भनुभव किया किस्से उनकी मायाको बड़ी टेस कमी, फिन मौर उपस हो साथ! उत्तरसे पन्नेयी टवी हवाम भरनेमे प्रनीकी मरें मिली ईपी और मेम-उपकर गुम्बी उमर पापी पाँ असे रोएँ सदेरो दमपमकी कहानियों १२३ ये थे। माघी पोती सोकर उनौने दोको मम्म व्य उक म्यिा और रोनों पैर, मांतको का उपर उठाकर माराम पनेा मर मिया । पान मोर मायममै बापा पानेसे रे शिपिको यी यी मनमें सौस मर गई थी नार योम्से पर मारी से यो थ। गुम्बी परमें हमेशा सीय सरा मोन करते थे, माब यो यदिया भोग्नी स्वमग्री पाकर उनोंने खूब स्कर ख लिया था। उसपर पतको घोनेको नहीं किया था। फस यह हुमा किरोली रनरें गश्तक माकर य गई । गुस्थी बहुत पाहाये। इसी समय एकाएक एकनपा उपद्रव उठ समा हुभा मिसका गुरुचीको पगडमी नही पा । बडे-बामपयोंने न बने प्रसि भाकर उनका पारा मनमनाना शुरू कर दिया । मार्सेकी पर उठना नही पाटी था, उनोंने वावाब दे दिया था। गुरपका मन भानसे मर गया-च गर्ने ये परमप मम कितने । पाहाम फेरठ एक ही रो मिनर या, ये निभित पा निमित हो गया-गुम्रेको माटम हो गया कि ये सूनके प्यासे पषु मार, ससारमें कोई भी ऐस्य बहादुर नहीं है, यो इस सेनाका सामना कर स। मजार प्ररनेमें बेसी जुम्मे पैसे हो सान होने की । गुम्न्ी देबीसे उठकर पोस मागे, मेकिन मम्मोंने उनका पीछा नहीं भेन। मरे मीतर से पनी परष रिकना बूमर पा, पैसे ही बाहर मपमा मारे चैन न । गुस्ट पर-बार गातार इम-उपर हाय-पैर पमते थे, भैगोम फरकारकर मप्योंगो ममाते थे, मेकिन किसी वय टनके प्रो रोकर पवे पे । गुम्- की इस योमबायसे भमर रो-बार मभार हीर होपते थे तो उनकी बगा भेनेए नई मामा यती थी—पने उस्स्पइसे और सैकड़ों मपम हम्म पर देते थे । गुम्मी परामरेमे इस मिस उस सिता ऐरने-भागने ये और इस गोषी अनुम भी उनी से पसीना माने व्या-उनका गहने भगा कि मध्य प्राकर पिलाये पुकारें । येकन यह गिफ्नने पत ऐमी रोगाये, यह साचार पपये। उनने पसनाकी नमसे देगा कि उनकी बेटी नन्दपनी बरसा परयो गुग्गुमे गरेफर मबारी मीवर मायमसे सो योपिक और येग मी मानी- मामी बगइपर बिखर रेफिमक साप सोये हैं। बस उनको मोना-
पचपनकी कहानियाँ
दिमा-ऐसा, रामनारा हो गया ! काम-काज परका चूमे चाय, तुम मेर
जामो, उस दमाशको यो पभो मारते मारते यहाँ पर मभो ।
न्यू पिता उसी समय उसरसे नीचे उतर येथे | मीसा बेतहाशा
मिगहना और पिस्पना देस-मुनकर वह मांचकसे हो गर । गोमे मा बात
है। हुमा मा यो पिम्म यी हो?
नन्दयनी रो पड़ी । बोटी-तुम भपने इस पानी को परसे निकारणे
नहीं सो मैं भारती गंगाम इकार इस महापाप का मायभिच करेंगी।
सम्पूर्ण पिवाने पूण-उसने किया था।
नवरानीने कहा-बिना किसी कारण ठस्ने गुम्बकी मा रण की
ग्रा सम्पर मपनी भोंसे देखो तो सही।
म सबने कमरे मीतर गये । नरयनीन स्व शम्मवार का पौर
छन सब करत बिस्साई । म पतिसे प्रा- पाच मरेको मेकर केस
गग्रस्ती निम सकती है मुम्ही बताभो !
गुम्मी स्प समझ गये । आफ्नी मूलवापर र माप ही 'हो हो बार
हौस पर।
सर्व पाप पूसरी भोर मुंह फेरकर सर । धापद उनें भी रेसी या
पीपी।
नौकराने माकर कहा-पन्सार कोठी कमी नहीं है।
भौर एक मौकरने माफर पर दी किया मोठी परम भेटे पेग्पूग्ण कर
पेरें । मोमीने उनको रोकमा, माने नहीं दिया ।
मोसी माने नन्दरानीकी बहिन । उसका पति मी पापा पासोही
पूरे मादसमें पता।
एक बार संगमग पहा रिस्ठक सामने अपने परसी पोमटपर फेर
नही रखा
२-पचन चोर
उन रिनों पायें तरफ मा सार फैल गई कि स्पनारायण बदके ऊपर
रेखन पुस मनेगा मेडिन पुणा काम सफा पहा है। इस कारण यह है कि
दषपनकी कहानियाँ १२७ पुकी देवी सीन पकी रात्रि माग यी है। परिवाना मिना पुम नहीं पन समय । फिर समर फेमी किसे बम्चे फार गीते ही पुरक सम्मे नीचे गाद दिये गये हैं, मन कसम एक थरकी सम्परा है। उसके मित्र बनेपर पुब नैयार हो गयगा । नामी मुना गा किरकपनी भावमी परी सोमें जर मोर मोम पसर गये। कोर नहीं कर सकता किन कहाँ पहुँच गयेगे । उनको पहचानना मी कठिन है। रोपि उनमसे को मिवारी मेसम है, को साधु-सन्यासीका पाना बनाये। मौर कोर गुणों यो वर मठो धूमय है। यह अफवाह बहुत रिनोसे बैठी हुई थी इसलिए भासपस गेवाम सनेमामे हर रे हुए ये मोर सम्दोका या हराम पर किसीको मामका पाइनेबाम्म सम्पनीका बारमी ही समस बैठते थे। हर एक सही समझता था कि भाभी उसीकी बारी, शायद उसी रम्बा पाकर पुरक नीच रफ्ना दिया व्यपगा। किसी भी मनमे शान्ति न पी सभी परोंमें सनसनी थी। उसके उपर मसमारोंकी खबर मी थी। मम दो मेग नौकर थे, ये माकर बतमवे ये कि उस दिन यह वायरमै एक पा पानेपाम पमा गया है। कमी सीताको एक गलीम भोर एक मादमी पर गया है। यह एक मेरेमको पपार मानी मोगमे गाया था। इसी सयकी नित्स ना कितनी ही समर पुन भी थे। साचेकी गलियों मे सदर शिकार किसने से बेगुनाहगरे पल भौर पीटे गये, किसी व्य मुशकिससे उनी प्राण बचे मोर इस भस्माचारको सयर को मुंहसे हमारे देशममारे गागम मो पहुँपने बगी। ऐसे ही एमपमें एक पाना एक दिन एकाएक हमारे गौबमें मी हो गई। गाँवधी याफे पास ही कुछ पतरेपर, एक वागी मीवर एक मामण ओर उनकी प्राणी दोनों गठे पे | वा मुली मे | उनके मन-वाम को नही था मेकिन दुनियाम मोर दुनिया के सभी मामा म मावि सामान भमा माय बारे । उनले एक व्या मतीय था। उसे उनॉन मग कर रिसा, मार उसका हिस्सा नहीं दिया । येनेकी मसना भी उन दोनोंने कमी नहीं। मतीमा श्रेषपीर भाकर काा-सुनी रखा था हावा-गरता चा
पपपमकी काानियाँ
और अपने हिसके कान कपड़े मोर गारपोषी सामग्रीका दावा करता था।
करवा पा–में कुछ मील नहीं माँगवा । माई सब मेरे पुरखोपी, मरे बाप
चरिस्मा हम्म करनेवासे तुम न होते हो?
इस उसकी चाची रम्य मचाकर पिय पिलर मोमोको भीर ममा पर
दी थी। प्रती पी-हीर (मधीमा) दम मारने माया है। या गुणणाम
मार टाउनेत्री धमनी देता है।
रामकाता-भीमाठ, किसी दिन मारपरीसक्छ स्मा।
इसी तय रिन बात ये थे।
उस दिन भगरेर हो गई। रोनों मोर गरमागरमी कप पम्मे। हीस्न
भाग में लाकर पापा भास्मिरो मनमा पापाचा, मेरा हिस्सा
जो मुझे मिझना चाहिए, दोगे या नहीं।
चामान मिलकर कायम वेरा कुछ नहीं है।
हीमने भी तमकार का नहीं है।
पापाने करा-में हों नहीं है।
सोस्ने का-तुम कबो हो । म भफ्ना हिस्सा मेपर ही मेगा ।
चारी रसोईपरम पी। बाहर निकमर बाय--वो फिर समपन वापर
युमम।
हीरामने कहा--मरे पिता के सर्ग गये, मह भा नहीं सकेंगे। मैं बार
तुमारे पापागेको धुम मऊँगा। उनमै घामद कोई ममी बीसा हो । यस
भाकर मेप रची-रटी हिस्सा बैट देगा।
इसकसद र मिनाक दोनो भोर मिस मात्र इस्तेमाल किया गया
पापही मिली नहाँ सन्तो।
बनेपा होराडगम्प गया कि भावी इसका फैला करके यंगा-
या तम्से ने बाता है। सापपान पना!
रसगापर मीतरसे पापीने गरकर पा-यो बना दीसमारोन!
माकनाये सामा सेना।
हीरामापसे सीधा पपुर नामक गांवमें पहुंचा। त गयौ मुम
गीय मुसम्मान पते पं । महर्रम में मिनिन उनी मागे री-बरी
है पचपनकी कहानियाँ साठियों पर बरसे भीर भनी कसरत तथा परखर दिसाते थे। टिमॉन सय पिया और उनकी गाठामे नमसूरती भए पीठसकी पुस्मिो मी थी। इसीसे बहुत मोय या समझते थे किस और उनके बयार पाटी पपनेयम को नहीं है। ऐसा कोई प्रम नहीं मिसको ये नर सपवे रो। सा पुलिस मपसे हर शाम्त यते है। हीरायग्ने स्वीफ मियो पास वापर पा-ये दो रुपये पगी हो। एमाण बोर एक तुमारे भार।काम पूरा कर दो, ठप और भी एनाम मिलेगा। योनी पसे रायमें समर बीफ मियाने रेसर राकमा बाम पार! हीपमध्ने पास देधर्म तुम दोनों भाइयों को कौन नही जानता! मुम्हारी पाठीवरसे निभास सानरान पाभोंने कितनी बारीपर मफ्ना पम्प पर रिया। तुम पारो सो सा नही कर सकते हो। पर मिपान मौसका इका-पुप को बाबू पानका गोगा मन पायेगा तो फिर हमारी भान न करेगी। पुटिसको यह मादा कि बीरनगर गाँपपर हम दोनों भाइयोंने पीठ घोरसे विपास अबूध दसर पराया।येकिन र इमे मोसपर पहचान नही सका, रसीसे उस वध हम व्य पथ गये। रायथ्ने वा मामक सायमा-कोर नहीं पाचन सफा ! रहीमने कहा कोई परवाना से ! सिरपर बहुत गहरा पप्पा या था गायर पम्पोसमे थे, माधेर पड़ा- मदुरसा का पा, हा महापर्व अटी पी। मोपोंने समझा कि हिन्दुओंधी अपरागपुरीसे अमन ही माकर रामि गये। पहबानो क्या, समनी गन टेकर न जाने का मामार सिप । पण्याने उसका राप पम लिया। कहा-ऐसा ही म एक नमें रवा या मियों। मेरे पापा दो पिर भी मेरा पाडापत हिस्सा दनको पार सफसेरे मेपन राची रामथी ऐसी पोतान एकपल्य महा मी दार नहीं बगाने देना गाजी । वही पम्पा भी गमय कही सेंदुरा या बगार, एपमें मम्मी पटो ऐकर एक र धापा मापनम भार पधपनकी कहानियाँ बाकर पा भाभो और यही मोफी धमकी की रिस्मो सि, में फिर रेस कंगा किसे क्या होता है। मेयो कुरा प्राकनारे, सब पर पर एमा । टोक पाम हाने पाखे, धम्पुरे, चो क्स, श्रम पवे रो मायगा । ख्तीफ मियों गनी हो गये । यह म हो गया कितीफ और महमूद दोनों मार, षही साम्पाछाक पानगर, मेस पनाकर भाव ही विमा सानो पाने पाचा भर मा धमग । उनप हीराखायेगा। एकारबीच दिन पा । दिनभर बाद हीयमम्मी चाची जगरपाने अपने पतिको सियनेमिए आंगनसे मिले हुए पपूरेपर भासन रिमा और पाणबार सामने रखी। मुसी चाचा फगतार ने किए मैठे । अभारण फस परमूड और दूध, यही पल्महारधा सम्पन था । मुहरी बारी-पातिक ये, इसरिए प्रपत्र भाएर करनेसे उनकी तपिम्स सयमहोबनेटर पा। परपर पानमै गम (म्चे नारिय) म पनी रमा पा। उसे पीने लिए पापाने से या पाच उठाया से ही ठीक उसी समय-पराग्य टकर म्वी और मामूर, दोनों माई साम्न साहो गये । यही सिरपर बी सी फाहो वही माना गया वही मापेमरमे विपा हुभा सेपुरका मैका, बार आपने नही बाकी ची मोटी भाटी। पापाहायसे फायरका पत्र धम-से भरतीपर गिर पड़ा । बगरखा बोरसे पीस पड़ी--मरे मेजबामे, दोदो दोदो भाषा-थर पाने आये १ चम्चा चोर- बना चोर। सामने छोठ-से मेरानमें रोग माहा, गोप गोरे-गोरे कलेकमा होकर ज्यतराज व प भाव मी लेख ये। ये मी किनाते हुए पर उमर मागे- पारनेपाछे पाये समर्शक पार भाये है।मको पको ध्येिचये। पर बतानेर राम मी तीफ मौर मामूर साप भागामा। भार साकी मारमें हिय हुभा था। उसने पर रंग देखा मो पौमी भाषास कहा-सद पा से मिपा बन बर माग्गे 1 मोमो मेम परफर पार घोघरि मनमाना दिन हो गया। स्ना पर पायाति पम्पत हो गया।
बचपनकी कहानियाँ
ब्तीफ मिनि शहरकी भीर को सर पाहे न मुनी हो किन पर्यो
सा गनेष हुनालायर पिये बनेट्री अम्मार उसके भनातक भी पहुँच
घो। पस मरमें ही उसकी समझमें भा गया कि इस भपरिचित भरपनी
भा, ऐसे मेसम, सासार सारा सम्मा-गड़ा येन गाये हुए वे भगर
पाहिये यये तो उनकी एक मी यही सात नी येगी ।
या पासमार ही रोना माइ मन पर मागे । सेफिन भायनेसे क्या
रो सकता था। यह पानी नहीं थी। दिनका उरेय मी बुध गया था-
सप्पास य नाबाये उसे बीटा बम था या यागिरी यार बाक्स
बागाकी मिमा एक ही पुकार मुन १ यी पी-
पथे! परा!
पर या सामेका
प्रय माद मामूद किपर मागा कुछ पता नही पिन समारतीफ
मेमाने वा भारसे पर लिया। पापाप एपाने रिए डाग
पुआ एक गदेगा प्रद पड़ा। इस बार सब बोग गरेयाके किनार
साबर उसे ताकसार इस मारने मो।बचीफ ब मिनिस्ता
यादव सिमसा पापा। या फिर पानीम सिर कर देता था। फिर मा
बार सिर उठाठा पावभी देखा भाकर माता था।
ठरपियो दस तय इरसार भौर पनी पीकर अपमण हो गया।
पाठिन्य री हाप गोपर पाना चाहता था कि पायका फारनेग्रय
पोर न्त्री या पपने नहीं आया, उमा परी मेधा प्रेष भोर
सन्दा मटा या था। पावे पे किया फिर पाप या व्याये।
प्रामों में है। उसके मद मरमें यह संतुर से माया !
पगरी सभी मुझ गली भी गम्पात मी पुटकर एक टरफ मूड या
पर मात्रा मेंदुर मी घुमकर मेहमरम पर गया था।
वीफ मिर्प पारेपमत वेध और उसकी सुनव ही धन !
इसी बीच में कुछ मधिक उत्पाही मग पानी में उतरकर म्तीफको किनारपर
पसर गये। बारापेकर बस यही कारण पाकिया सीफ मियाँ है
भर दूसरा उसका मा मामूद मियों है। मनेगमे नहीं है--
पोरनहा।
૧૫૨ पचपमकी कहानियाँ इसी समप में उसी गासे निकला-उपर एक मामले गया था । हुस्म मुनकर उस गदैवा किनारे गया । मुझे देसकर पह उत्तेस्ति मीर पिर एक गर मापेसे बाहर हो गई। समी एक स्वरसे कहने मो-उनाने एक मम्मोंका चोर पड़ा है। देचारे फीस मिपाकी दशा देखकर मेरी भौसम भोस् या पये। उसमें योजनेकी मी साब नहीं दी। गम्मा पगली, सैदुर और सपिरन मिस्र उसकी मचीर सूरत बना दी थी। यह पेवा समको हाप गोपग पा मोर रेखा था। मैंने मेमोसे पूछा-स्ने किसीका मा गया है। किसन भफ्ना मका पनेकी नाविश की है। उन गौनेमा-या कौन जाने ! मैने पा-मन्त्र पामा कहाँ बिसे इसने पड़ा था ! लोग बोले- यह भी हम नहीं व्यनवे । मैंने कहा-वो फिर तुम इस एप मारत क्यों? उनमेसे पफ भादमी को शायद कि पुरि रखता पा, वामान परवा , यवको इसने गरेको गदैमा मीटर कीसम गार रहा। रोग-नौ हो यहाँसे मैन पाकर निना, वायगा । पशि दने लिप पुनः सी नीचे मारगा। मैंने कहा-क्या सोचो त, म मापीकी कही बलिरी बावी? उनोने का-मरा क्यों होग्य बीता होगा । मैंने कहा-गको दस्दमें गार देनस वा मा कमी पेठा य समय। मेरी बात भोर मुक्ति तप उनसे पहुटो ठीक बन पड़ी। प्रले भोग पेटम में इसखिए यह सोचनेन भवसर ही किसी ने नहीं मिम । मैंने करा--उसे मेह रो। फिर उस भावभीसे पूछा-वीस मिपों, मामम मा स्पसप बतायो। मग मम्प पाकर ठीपने रोते रोज मा सम्बाहातगादीरामको वाचा मुलगी भोर उनकी श्री साप किसीकी सहानुभाव नहीं पी । मुनकर यमपमझी कहानियाँ १३३ इस मोगोभेम्तीफ मियॉपर तरस मी माया । मैने कहा-पतीफ मियाँ भर भने पर वामो । भरकमी पसा काम न करना। उसने कान फो, नाक रगड़ी । रिमा-सुराकी कसम मायूची भम ऐसा प्रम कमी नहीं कींगा । मेकिन मेरा माई कहीं गया । मैंने मा-माईकी चिन्ता पर भाकर करना तीफ मिर्यो । भमी तो यही गनीमत समझो कि तुमारी भपनी गन बच गई। स्वीकगदावा यसमावा किसी ठप भने पर गया । बहुत पप्त गये फिर एक भार पासके दूसरे मोहम्मे-भोपाम् योमर्म- घरका इल्प और शोर गुम मन पड़ा । पोपाल पार्क परकी नौकरानी गोपाममें गळकी सानी करने लिए गई थी। उसने गएिकरी पटनेको बुबारका गा पसीय ठो पा उससे सोचा नहीं गया । एकाएक उसके मीरसे एक किर सूरत आदमी निकन मौर उसने फुर्तीसे छार नौकरानी दोनों पैर पर सिमे । नौकरानी बिना ही पिम्हाठी है कि मो दौडो दौड़ो भूत मुझे साये ठेठा है, रखना ही भूव उसका मापसे बन्द कर पाता है-मैया, निमम नहीं मुहमा-मैं भूत-परेत नहा में भावमी है। नौकरानीपी सिगाट सुनकर पर मासिक पोपा बाबू राम मटेन भोर सापम नोकर-पार कर गांणय दौर भाये । इसके पसे को घटना हो मुकी पीपा गायर सब भेग मुन पुणे । इसथिए वा भाई-सी दुर्गवि छाटे माइकी नहीं हुआ। सक्ने सबसे पिपासप्रमिया कि वीरका माई महमूद है मूठ नहीं। पोषाक पान उसे छोड़ दिया, और उसकी या पके गाँसकी सूरत मठी मैनरपा-पोट मियों तुम मिदमीमर पार येगा इसीबिए पर एमे मेवा है। मेरा पहन रंगपंग पो गगे मोर पसे पर पने पामो । यमन मानकर, FAR ऐकर मैक्दो सयम र मामूद बासि पहरिया।
१३४
पचपनकी कहानियाँ
मह को मनगढन्स कहानी नहीं है, उपमुए मारे गाँव में हुए एक सम्प
पटना है।
३- पलिदानकी विभीपिका
उसका पुकारनेका नाम या स्। टस भभासा एक नाम बार था,
एकिन मुन पाद नहीं है। आप शायद सन्ठे होंगे किस धरा पर मर्थ
पिप मा बारा मी है। मास्म नहीं उसका मा नाय किसने रापा मग्राफने
या भीर किसीने छेकिन यह
सपा सरको पारा था। इतना सार्थक
नाम बहुत कम भेगोंघ शेता है।
मूल पदाइ समाप्त फरकम का निर्म म हुए। मेय भा
पाटी या बस्ने मा-में रोमगार कल्या। पढ़ना भेकर, मासे रस रूपये
माँगकर उसने ठेकेदारी घर। हम साक्पिोंने कहा-पस तुमारी पूरी
सो सिर्फ दस म्है इस पेसे स्पा होमा ।
उसने सिरमाऔर किसना पाठिण यही
सभी उसे प्यार करते थे, या पाहीमा मा पुग। उसे धम मिल
गया। इसकादम्य व समम मामाही में रेल्ता पामिरी
माय फा म्यूप्रेसे पी मरम्मत मेरे-मोटे काम सूप या है।
हम लोगों को देखकर रेसन रिममे करवा पायथो बभो हो-चही वो
भी बिसरम गैरहामिमी पर बमयी।
एम भेगा भोर मारे, सप मुधर में पाते में कम माइम
सप मिस्तरी था। वस मिटा सेमे हमेच्या एक इमामालेकी अगरी
नाइनगिरी, एक ी पुरी और करनेके मिए. एक नुश्रीसी की मोर एक
पोरेका नार-ये सर मोबार पर यव थे। क्या बने पास रख सम्पन
उसने जमा किया था, ऐकिन ऐसा कोई काम नहीं या पिन भौमसे
कर न सटा हो। सूम्मा मा भयेकी मरम्मत करना, सोटका
फ्रेम पना सम्म फटे हुए परेकी सिम्बई पर रेना इलादिन गाने स्पा-क्पा
भीर फिल्ने काम बार देखा थापा कमी किसी कामपि नही
करक्षा। भोर काम मी की सपना और मसूरती साप पखा। एक
वयपनकी कहानियाँ रफ मोर नाना पब । यस् कुछ पैसा रगीन भागमसरोद धया। पासको सीये भौर कागबते उसने एक स्टिोना पनामा । उन सिमेनको पर उसने टाइ रफ्पे सुरलिये। उन्हीं पैसैसे उसने मरफेट भुनी मूंग- प्रमिया हम गोंको सिखाई। साम्पर साम मीतने को हम सब स्पाने हुए। मिनास्टिकमी कसरतमें गोद बराबर नही था। उसकी मे पा से असाधारण था से ही टसमें माइसकी मी सोमा नमी थी। रविसे पाते हैं, माछापर या सस्ता हीन । समीकी सहायता ए पा पार गवा या समीकी मिचिम या सबके पागे साप देने पर उपस्थित होगा। उसमें वह एक बात सहा दोष या किसीको उपनेका मोम मिध्वे ही वह किसी पय भनेको संभाल नहीं पता था। इस मामलेमें मन गुम्मा-रे उसके लिए बराबर थे। हम कोई सोच नहीं पासे पे किराने ऐसे अद्भुत उपाय पर मरमें ही उसे पैसे इस गये। एक ऐसी पटनाएं मुनिए। मोसमें मनाहर परीके परम मापनकी पूम भी । भाषी रातको पविरानका सम्पसभामा तो देखा गया कि बलि देनेवाय द्वार गैरालि है। मेग उसे बने यि दोष नि कर देखा प पेठकी पीड़ास होध मापदपया। मेगाने घेयर म यह सार दी तो सब घेग सिरफर हाप रखार बैट गर । भर मा दोसा किया था। इवनी यवको शक (बकि रेनेशाय) पाँ मिळेगा! यह तो या अन दुमा ! देसीती पूच मर्य, सन्वि गयी है। इनमें एक मारमी का राज्य पारेकी ममि दे सष्ठा है- उसरापम इदनी बात है कि एक ही हमे गरेका सिर पर दे। भनेक बकरे इस वयाग्राम। मा भेग उपस गरे गये। बन्दको मोठे गाया गया। उठ व्य भार सुनकर बोगना मुमते न होगा। होने पानी न करो। देवीको पूर्ण विक पोगा सा माना सपनाम होगा । देवीका कोप ससस पोगा।
पचपनी कहानियाँ
मलने पर मनाएको । पुटपनमा फाम मन विमा पा
किन अब वहाँगा।
बोपने माये थे रे सिर पम्ने म्गे। इस मौर ११ मिनटवर
मह । नियमानेर सप मरमप सरन पूछा पूरी न हो
सब महापाकोपसे कोई न करेगा।
सकसफर मार भनेको माबो- खग मापार सरी
भारेवसरा अभ्यास दमा उमाया।
इस बासको न माननरामटेकी गात नहीं की।
भएका देखकर पटरी स्वामी पिता दूर । म यधिक स
पर परस्ट पारेको रेबी नासर मन पर उसके मात्र सेदुर स्यामा
गला ग पायेगी माम रामे गई। इसके बाद स्पिकर उसका या
बमान मौसर रता गया। पर मराठोग परसे 'मे' 'म
पर मिस्रने और अपनी मक्षिका प्रमण प्रदान बने ब्य। उसय
हम उस पारे विवर रोम मिमियाना भन्तिम मार्चनाद न जान
कहाँ गया । यी सबन जैश एक-भरम पर रम और पूरी
यातसे नीचे गिरा। साथ ही परि कमरे हुए उसे रक्षध श्राप
एम मोर उसने पोकी भरती मार दिया। अबमर अपनी संत
या।
धीरे धीरे द्वारा और चपरिपाटका मिमा सम मा पहा!
दूधय मो सारा पासोमा कप पापा उस पर भरका टीम
गागा गम्पा गमे या फूफी या परिनार गर। हर उसी बात
प्रय आ गदन रसो गई। उमा भी वैसा ही कन पाछे देखते हुए,
माचौकी भीश गए मिसान मोर भिनेत्र काम मन्द मुरमा ।
बाले गोकी ममम माता मठ मति मकर प्रभारी
पुकार र उटी मिदापका र रउ मा साँसका सही
वटा और ये गिरा। पान पर दो उप सरीरकर रस
पया राय परार सामने से माहिरोबार परिसाद पारा
स्रिो गया । उसको दुर गरसे निरम र रवी बापने उस बयाकी
हुए गन्ने यचपनी कहानियाँ मोकार मी दास कर दिया। रायपनेपाछे पारसको व्यगरसे दो पंटये । भोपनमै भीर होग गुस ठपसे कोमार रहे थे। समन नरामदेम उनी पावर ठे हुए मनोहर पटी मासे मार ध नाम मा ये एकरएक एक महर हुंकार कर उखा। सप घोर-गुव यम यया । सन मेग सिम सपणे स्पे। या मा! की असम्मा मत फैली मोरोपनी पुतानों पर उपर धूम सी थी। उसने पिस्मार औरसे और पंढा (परा) को। पर किसी मादमीने र बरते जमार दिया-और पंठा वो नही है। हमारे सिको बहिदी मत्ती ११ इन् भने बाप मनसे सने हुए को सिर पर ऐवीन व पुमा पर यरय उपख नही है। पानोमा । मरे उपसून समार। प्रय यमो, नहीं तो भाग में जिसे पऊँगा उसका सार मनुष्य की इसपर “सर , स महामाये पर वह मंग मार, उप- पशिष्ठ पारस उस गोरफर पहुंच गया। उसका सरा टस समयकवारे साप निर उपर चूम था । मम समपना हुआ उसका वर्णन नहीं करा अमळा। सभी एप भाष वारेमे मार मार्ग, ही पररान ए पर नमाग्नेकी काधि पापा-मुक भार रेड-ए कियही म उस्पत। गया ये पब म रा रा या मरमा परनेपर कभी दुध होया । फोर मिर पर पूर म गा मोर पुटीर रस मकर मसी पैरोंमीवर सिर स्पिने बोशियरन गा, सोध गम नि माम ऐवारा किस्सा इम पुग्ने मा । एक भारसी दूसरेको परिकर भागनेको प्रेषिण मत समय के आगे मिरमा उसले यवन गरे । टेकिन यह मिनट दो मिनर होगा | उसाद साग मापन सामया। सद मार ग्य-मनादर पर का। पुरोषित पी गया पुरोस मामप रोगी बारम्ये ये, इस मापदमै मौका पार से ही रेषा-
૧૨૮
वयपनकी कहानिर्मा
की प्रतिमाफी भारम वापर पि गये थे। गुरुरेव पास्नपर भट यापाठ कर
पेपरपर ठठार मारेको रामनई पक मोरे सम्मेली भादम पर
पिये। मेकिन मनोहर बापू गत मोरे थे इसलिए उनके दिए इपर-पर
मागना पाठिन याने भागे पदकर पाम आपसे उनका एकाप
पसकार पर लिया पार पा-पो, बन्मिापर मपना गा रखो।
पर तो पदकी पनकी म्प की मुझी उसपर वाहन आपमें उसके
सौदा के मारे परम माप सूस गये । स्मासे गमेसे वा निधी करने
ग-अस् ! रेय ! बरा पात रोकर रेसो में पास नहीं हूँ, भावमी में
नायेमे तमारा पाचा बोवाई मैमा । प्रमार बाप मेरे मेरे भाई तय ।
मल्न पहा-मैं कुछ नही पानवा | मुसपर खून सवार है।पये,
मैं धमारी पनि गा मावाका मादेश है।
घरबी मराठय बोरसे ये उठे-ना येय माताका भारोध नहीं है,
नहीं है। माछा वो मान-मनी-मी माण।
सूने मारा-मातकी माता ! या अन तुरको। भौर पम पति
वांग ! फिर मुझ पाटा कारनेके पि दुमभोगे । मोटो।
परीन रोक्-पेव कहा-कमी नहीं मैमा मा कमी पठि नागा । मैं
मावा मागे तीन बार करार प्रविश करता भासे मेरे परम पनि
बन्दो गया।
कास्ने प्रा-ठीक पते इन !
घरबी मोसे-ठीक रवा हूँ मैसा, लिम्पुर ठीक-अप कभी नहीं । मय
पप बरोय में पौधको मातंगा।
सामने हाय मोमबार मा-बायो, तुम्का र देगा। पिन पुरेख
किपर मया ! और गुरुदेव पाया।
यापकर पर फिर एक बार हुंकार पर पेंग मारकर अकुरखारेकी
रामनकी भोर मे भागेगा सही मरिमा पीछेसे और सम्मेली भाइसे
वो पुरे ममेकी मयस बात रोनकी मानब सुनाई पड़ी। महीन भोर माटे
गमे ये दोनी शम्द ऐस बस और सिगनबाडे किम अपने समास
न सका-शा पर पोरसे सते हुए उसने अपने आपका डॉम
वयपनकी कमियों
१३९
रिमा और एकगार परके मार नियस गया।
मोगा मानेको बाको नहीं पापा सून सवार होने की
waछी-स उसकी पाथकी थी। एस्सू तानी रमा
सोराया था। पंच मिनरके भीतर ही सम भागे हुए पेग फिर भाकर
समो गये।
देवीची पूच तर मी बाकी थी। उसमें स्पेष्ट मि पड़ गया थ। उस
मये पोर-गु मीटर परजी माराम सारे सामने गार-बार प्रविण करने
व्येस पबच मेकरेला कस मरे ही अगर उसके पापो कार पपास
सेन पवा वो मेरा नाम मनोहर पर नहीं।
मेन सो से नहीं माने। सर उठकर सीमा परसे ऐसा पश्व
एम साप-माठ रचना उसका मूल पा ही नही मा। साल माठ दिनमै
तर एक दिन परेम भिकार मनोर पटक परमें पुसकर बम्पने उन पर
एसएस मेम से पिस्ट इस मापसे पुरत्रण पा गया।
मेर, गा पाहे जो हो, देवता माने पटीने ये अभियान न करने की
कम लाई पो उसे उमाने नहीं तोड़ा। उनो परसे का प्रयका विमान
उठाया।
४-पचास साल पहले
सहयोग किस्सा है। इन लोगों की बाते सुनी तो बने । भोर मुस
ते गोको उनले गुटोंने देखी मी है। पाए माउ मा अमेवा पधिम
रंगाकोमपात् हुगी दंगान वारि दिम-इम बोगी उपाय गाव
मपिता
उस मो पाथे, पर्थात् सरी-मानीके महसे सुना है कि मापन
ने कोई मी या सम ऐसी न थी, जिसपर धमले पर पम्ना
परेसे ही हो मुझेरे जैसे गेमी येते ही नगी विष्र मी ।
गार साकिनारे पेड़ों मैं, सार-प्रसार किसे यते इनके
एक परम पड़ोसी घटी भोर मे हाफमें, मम्मे सो मारी और बार
अपमारे गले मेटे-बोटे कारहठे मे। इन दुको 'प्रपा प्रते थे।
बचपनकी कहानियाँ भारदस्ती पर मेय प्रय। मेरे रोने कोनेसे मेरी सदी ये नरम पड़ी, मयर नपन मुझ साप से बने सिए सिौ सय पार नहरों एमा। योग-भी घने मानेमें ब्मभग भाठ पोकी होमो या, पौरनी रात होने के कारण भने सब समता पा । मेपिन पस्खा ठीक नहीं-मत। भगर मैं समपसे न पर सका तो पाप होमवार, पक्षले गऊओ संभावंगा या यो भारंगा या अपने को समाएंगा। गतेका मप सार इस रफ मी ठोप पन्ते है । परीची एकरम 'ना' पर बैठीं । मुझसे रोम-त् कमी नाँच समना । मगर पारीसे माग जागया तो तेरे मास्टरकोलि विहार क्या दूंगी ! या कमठे कम फ्यस बैंच मारेंगे। अपार होकर दूसरी परकीय निकाटी । वम पसे बानेपर में पोसरम नपने बनेका गाना पर शरीरम तक माया हुभा मैंगोभ पर मार परसे समा। नरीकिनारे-किनारे समाज और भार-बमबागों कमीतर रोकर दो-दाई मीत रव दुमा पब गया । सि मगरफर हमारे गौवका कन्चा यस्ता प्रक्ट्रिक ऐसत्र मी मासे माकर मिका पा, उसी मार भाकर मैं सदा हुमा मोर माग रस मिनर बार मुझ स्पन माता दिवाई विपा। मुच रेनकर वोगा बहुत सा-या उसके पार में किस तय पना कर पाया है-यह सुनकर स मा । उसने मा-अमो रेषता को माम्मम है, गी होया । इतनी दूर माम मप मो और नौ सम्म । नपनने सावित्री ए जान सैमा भौर वा उपरार मेरी पोती संगमें पोप ये मेरे सानोमिए । पम्ने मध्ये भामा रोपारको हम रोमी बतपुरमै मपनी मुभाई पर पहुंचे। नपनत्री हुभा गरीब नहा भी साने पानना कोई कर नहीं था। सोनीपती नामकी मची पी, नरी मेरी श्री, म पनी वन्य पा पि उसमें मार-भाग भागा करता था। मैं नम कर नहा माया । गुभाषी पण परम पिउ गपूध और रे, मारन मापन परोस गई।
बसपनकी कहानियाँ मोधो पर नमनकी बुमाने पहा-न्य पार पाँच कोस पैरस पहार मागबमी फिर मेराराना होगा । अब कुछ देर मेरपर भायम करम प, धूप कम होनेपर वीमे पार न्यना । इमान भेय सन मेरी माइश पूरी करने-मरे बिए पासी कम- विरों पर गया। सन पौर में रोनों पैर पसार इसने यस गये थे कि सा गये। हम्पी मोसा पुर्णमा पर बन गप थे। दिनको भोर देखकर नपन पुत्र तिल-सा रेख पा, मेकिन महसे उख्ने कुछ नहीं था। रस-पना मिनरम हम दोनों पांरपारिपबिते समय वन पैर कर बुमागच स्स्से देने का लेकिन उनाने लिये नही श्रेय दिये। बोली- मफ्ने पम्पोको इन समाधी मियाई देना। मेरपेम पासही कमनियौन ग्मा या नमन पाप गळकी रम्प मौर. पारिने दापी गमी बॉस यी दी किन गऊो मेर रोज मनाही वा । दो कोस मी न स पास कपास हो या मोर मानसमें पनामा विवाद दिया। रास्ते पनों सरफ पार पीपट मगर और परफेय, गो पर गबर भाफ्समें ऐसे मिल गमे ये कि हमें पना भैपय म गया था। विक मगरम्पा पचेकी पते मरमा दुई परिनाम का प्रकाश मा उपर मार पाया था। सपने मा-मैन म मेरी ग्रा वरफ भाकर माने गये एपस गडकी रस्म पम में। मैं तुमारे गरिने पंगा। मैने प्रा-मौ नयन दारा! मानने पाक नहीं, पो हो । पामो, । मैं रोनेपर मी समझ यमा नपरकी भाग सणार महै। पारे की पम्मी बोडकर हम पम्ची ग पहुंच गपे। माम्पसमा बार, मार-संसार भर भी ना हो पाया। पपसे पुराने भैरो पर मोची पपने उमा मिसे मि मिहार, पने पथैन पर्श गर, मार परिकम र मही रस्सी दी, जिससे रोम रमान शाप मक्ष पर पथ! अप्पामा विधीमो खी
परपात्री करानियों
पामाको परहॉफ मे गये। पामोरे सुगसे उपी हुए धूम मा मी नाफ
भौर मरमें मौययी थी।
इसी समय सामने व्यमय ५.4 पई पासपर विधीमी गम
भरार निकली हुई बीस मनाई मी-पाप रे! मार यमरे! भरे को
गयो । ल्यमो! साप ही साप मठियों बरसनेका घम हुमा । उसके बाद
ही पायम यया।
नक्न समारेमें पाकर मा हो गया | रोम-सत्म हो गया !
मैंने रममा सत्म हो गया नपन रादा!
एक भारमी ।भाकर सर सर पर उसने कुछ सोचा उसक
माद करायो भैया हम योग म्प होशियारोपर पहें।
गस बार तरफ, नयन वाहिनी परफ भोर में ऐनाक बीच में, इस म्प इम
लोग भागे से।
मानते मुना भा गायीच-बीचम रेक पिकार हुए म्योकी यो
भी देसी, इसलिए पाकनेस मी सब समझ गया । "मरे कोई पामो ।
पचमोकी बीन पुकार उस समय भी मेरे रोनों कानोंमें गूंज रही थी।
मने रखेपरखेगा-नगन गा ये तो सामने ही सोहम
गाय से मगर मार
नपानही मैवा मेरे पवे नहीं मरेंगे। छरेन हापुर
नही हो सकते। देखते ही माग खरगे । पोहोवे ।।
गऊ, मैं भौर नपन, चनों पीरे-पीरे बागे मने मंगे। मपर मारे पैर
पैप प्रेये, सास नहीं ले पा या प ऐसी हात की। पकी मना और
धूक मारे थमीतक भी नहीं देख पाया । द्राबीस एप मागे बाते
री देख पम, एम गोचे भार पार भपमा पायद रेकर पा
भारमी मगर एक पाकर पानी पारमे छिप गये ।
नपक्ने एमपण खरे होकरी मपानक मरी भाषास्त पिस्यार
भा-सासरयर । तुम लोगोको स्वाये रेवा-मना मन म सप
भिमर पवमा माय बे तुम से एक मारवा न होगा !
पिसीने इसका पलार नर्स दिया । हम बने पौर मी म भागे गगन
क्यपनकी कहानियाँ रेखा, गहमें एक मारम्भे मुंह मिटीमें पड़ा है। उसके उपर पुण्णेश बन्द्रमन काठ पाया थ। नगनने सुपर रेसा मीर सपनापर उठा । उस भादमी नारसे, कानोंसे मुंहसे सून गया था। पर उस पैर उस समय मी पर-पर पंप ये थे। उसकेकी मिशाली सोम कैसी हो पर पी, पेकिन उसका पप मिरी पर उभ मिखर गया । उसके राम एक्वारा मठिमोद पारसे पूर-चूर होकर अश्य पड़ा था। नपर सीस ठठप सा हो गया । पोय-भरे पापियो, अरे नरफर वीरो। तुम्ने घर से एक मिलारीफ, एक चम, प्राण से म्मेि ! यह गुम्ने सा या ! स्पनका प्रमेन पर ममानक सम्म से साथ बदनासे मर म्या । किन उपरसे कोई बच नहीं भाया। नबनमे इस पुन्हापौर पदनाम प्रधान कारण या पाका र मी एक पर बेमय या गुम्से क्यै छे पुत्र प। उसके गोमें मारे मोर पोंकी तुम्ही माय पी नाबसे माता सपा लिबास मा परे परम तय-उपकी अपी पी। उसके परमे एक भेर-स अमवाय मी घ, जिसमे बैठन्य महाप्रमुन पट (निब) स्पापित था। हमर पार "ए मंत्र (हरिनाम) को बिना प पानी नहीं पीता था। रफ्नमें उसने पम्पमम पामे पेपी पदी दी। मर भनी पोशिमसे उसने इतनी पिय हासिक परी मपेकी पेपी ममें चम्ब। ये रोपनी अकुरीत्री मनमें पेठकर या सव संसपरे विभासागर, मत मारि मय व नित्य पाव यत योतक मुरसे पड़ता है। मांस पवाटा माँ और उसका पति भागे हर किसी रिन माटी खना भी डर देगा। नपन देना होनेका मी एक मेय-स्य इतिहास है। उसकी मस्त्पा पीतव्यम्म हैमेखिन स पम्वोस की म प्रेती एक मामले में सकरमा एक बार साबमा रगत भीर में यमापा या । मेरो रादी एक ओ माई सिरे यो और नामो पपे। रामने उस परिये घरपी पाकर मोर पशु-या सर नपन पुष्पा था। दसे पुरप्रप पावे ही प श्रीषा नाप (नदिया) पण मया और
पपपनीमानियाँ
किसी गोसाइ मायनसे मंत्र भर, सिर मुसा, गुम्सीकी माय पनार
गोषको भय । उस रिनसे मा पर मोर कारा। नगन बा-ब
भाकर मेरी दादाको परतीपर मि रसकर ममाम रभवा या! पानाएकी
विपना पी नबनकोनका भािर न था इसलिए या किसी भी पेमा
पचा मेकर परीके पैरों पास रस देता पा परी उसे अपने पैरें अंग्रेसे
चू देवी पी नमन उस पचेने उठाकर मासे, मले बराबर माकर काय
मा-माँगी भसीस वीमिये कि भरकी मैं मर बी पति परम्म
बबिस्ले तुमारे परीकी धूम मफने हापसे मेकर मारें बगाए। गरी
मी स्नापूर्वकसकर पाती श्रीमान अपकी मेरे पाणीवादसे म्पका
जन्म पायमा ।
नयनको मात्राम भार मर बाते । र कावानी पड़ी भाष्य को
न करता मनी । मेरे पानी कोई ए नही मैं भापाप है और यह बात
और कोई न बने दम तो भी तय मानती हो । तुमसे तो मैंने कुछ भी
न मागा मंथी।
दारी करवी-मेरे समपार मिट गरे। नयन । से मक और
भगवान्म विलास रकानेवाले भादमी इस संसारमें कितने सगाको
तू कमी नगना तेरी बरनी केरा फरक ना देगी। म् किए
चिन्ता नपर।
नक्न मा पोम्ता-पोस्ता मदेव । गरी बाते बच कापी पी-का
मार यही प्रसार प्रना । देव भूमना नहीं ।
या न मने बार मफ्नी भालसे देखा है। इसीभिए, जिन वैष्णोकी
मी मनसे सेवा करना है, उनमिसे एककी इस प्रकार मेरमी सब
इत्पादेसर या भगर इस तय की मारे भापेसे पार और चिकित
हो यो इसमें पिस्मयनकोई बात नहीं थी।
नमनने प्राचार गरीब वैन्मय मीत मायबर मामको परमेयम
ग्रा या । उसके पास सा पानेकी भाचासे पापियो तुमने उसकी इस्पा कर
गीरो-परभान पैते दीपो हापमो होंगे। पास्म मेको
मी रखे तर मार मा।
पसपमधीमानियाँ मात्र पर्ष भादसे मार मापा पार माने देते न सुनौसे ऐठा है। अपने पुरसार मापते मस्त गप गया। अपनी या परम- परको क्वेयन दे-मायया गया। स्वी पर भी दोनो पोदी पर मैस पर तय मात्र ठा। मनाया! कासरी ! मागम में ! तुमार रखे। एना मार रहे मेरो गरीसे मेि हुए मैचों को नितम्र, ग्ने मनसायवे ए मारेलो, मेरे पास इतने सवे । नें न पोरना । मम्मत रोवेसमिर पायो सयो। किन पिर तुर्म खपरान डिस देता है। मेरे साप यो वा वामनमम र मग भर प भी पार बारे वो तुम मे BIS ए ग्राफर मुमगा समवेगा। ज्य सत्र में नपन मती है भोर रही । हाम्ने मेरा ग्राम मुन्योभी, पा मोसोयटी एप मेमर भिसारिको मारठे भूम्वे हो? एपम्पो, म सिपारों और कुछ भी गये बीते हो। गाँस पाये माय भाया था उस पेड़ो नीचे सपाटा म यया, पिसीने ५ सी। दो-धीन मिनर पुप यबर पपने और भी अधिक मोबार परी गम्भीर पुत्रायो, मामामे, पये परे मेहर में परब रिमाल ना पाया। राहम दो-तीन घरो पर रामनने पारासर उठा लिा-पो मैप, भारत होगामारी परीक्षामा विवरणो में । ये सच मार-धे मोबर तो वो मनुषो से पटक सम्म मेरो पस्थी सय रन पर पाम हो मी रे मातिर सार मग अपने ना इस बीधर्म मरा र पूर यया च भर पाच गावाने -नवराय। नपन सपा बोग-यो गे माई, मापस ना सिप्रस्फुधे भारका समय दो नई बने, योन मोम पार पने ये मारना की दालन महै।
पमपनकी भानियाँ
हम रोनों भागे से। नपन विपुल धुप था | मने पार-गरका प्रमरिमे,
पर उसने एकका मी बयान नहीं रिमा सिप हो या ना पाया था । फण् दूर
माये गाकर एक बरेसे पेमकी छायाम, सूर पने भकारके बीच पाठिठकार
मा हो गया । बोपना मैया मौलौते मेवाने एस्पा देखर साने
उसप्रेसप रिसे बिना मुझसे या न गमगा | पक्षण-पप्पो प्राणनेन
भाग में इन पापियोंसे मार दंगा।
-कैसे परम गोगे नपन दादा !
क्या मैं एक सानो मी न फका प्रऊँगा ! सामानों
मिबार सीम्प पठीसे पीट-पीसकर उसे भी मार गमगे।
परपर मारने भानन्दसे में मार प्रम्म भौर उत्साहित व्या से यह
भी कोई ना व्यका ले था मेरी समसमे । इन मग गरेमें मैंने न बने
कितनी व्ययी बाते सुनो भी फिन भर समझ पाकिम नमन
दादाने अने नही दिरा नहीं हो मैं ही पीएम करके एकको परमता । मैने
मानपन दादा तुम मम सय एकको पमे पना में ही पीकर
मार गर । मेन की मेरी मप दूर यई तो!
नगनने रिसकर मा-मैपकी मारसे नहीं मरेगा भैमा पह महो।
कार म्पन्ने एक मपम सा पसा उन बटोरकर भये हुए पारमिते
निमम भीर मा मेरे सम्म समाफर उसने पा-उको पाकर इसी कगा
सायो मैया में भी दो-एकको फोगा। मेकन देखो रोने चिन्मनेकी
भाबसुनकर रना नहीं।
मैंने मा–ना सम्प। पाय ओ मेरे आप में है।
ठन नपनने पासी पनी पमो का गाये, सी पी पान शाम की
और पिर यच मार झानियों किनारे-किनारे मुग्नसनी
सहारे उसी र भैरवन ।
प्टेयने समझा कि हम मेग बडे गये इसते निमित होकर और भापे
ये भौर से हुए मिलाकी र म्मेवार और शोध कर रेखये कि
उस पर पा । एकाएक नमते एम्ने देख्य पिस ही एक पानी भारी
नयन लापारकर प ठठा-बकीन मा
बयपमकी कहानियाँ
नपर योग-4 नयन जाती है। ऐसे ही समय । मागा नहाँ कि मप।
मेदिन नपनकी पात पूरी होने साथ ही मैंने गुत-से पैकी भागनेको
भार सुनी और खाम्प उसी बप ही मस्फा मा स्वरसे कोईरो उस और
ते पुसमुदाकर एक भापी उपर गिर पड़ा।
नगन विस्थार योग-मैमा, एक साको फामा, पौर सग
माग गये।
पर गुम खबर पाकर मैं नहीं ला होकर उसने म्मा। मैंने बोरसे
चिमभकरमा-उसे यहाँ पर भी नपन रावा, मैं पीकर मारगा। तुम
नम्पराम्ना।
पन्नेमा-नी मैया तुमी मारना।
और एक परम पम्द सुन पका यन परवाहै नपन्ने समयका
हम मारा इसीसे पर भारमी फिर सिम्म उठा। री-एक मिनके पर मैंने
देखा एक भारमी अंगदावा, ममदाता हुम्म भा या और उसके पीछे
नमनपर।
पात मावे हीदाबादमी पर रोता हुमा मेरे पैसे मिपर गया । स्पनने
मौका एम मारकर उसे उठाकर मना किया । भव उस भामदीको देसार
मैं अप उठा । मुंहम उसने प्रति प्रेत रखी थी और उसमें पसीचमें
चुनेकी रिपती भी बीमामा तुषम और कमबोर पा, पैसा म्या।
सेमोक्पाले फ्य एक बीपदा मेटे या । यह बराबर ये सामा।
उसके गामें एक र पप्पा मारकर नमनने का सुपर रामपरे।
को मैं पूरे उसका समसारमावरे । तुम भादमी थे। उनके नाम और
परमपर बा।
पायो उपभारमीने कुछ पवना नहीं थापा, पर पीपर और एक
मन हम पाते ही उसने अपने समापिमा नाम और पते क्या दिये।
नम्नने पहा-पाद र गा मरम्प ना। भय क्या, रेप मिवारी
गिर पानेपर दने ममेड सिने हाक मारे थे !
उसनेमा-पही चावात ।
नफ्लने पीसकरा-winneTO A-AI
पचपनकी कहानियाँ उसी तय , मिस वप ने उस वैजय मिसारीको परदेसाथ! फिर मुझसे कहा—भैया इमर बड़ भाभा । रेखो इस खेटे पाप-सात हामें ही इसे जम कर देना चाहिए | रे गा तुमारे एम फिवनी वापत है।-भोर तू सारे रेर स्पों पर यामे इन्ना कार नबन्ने कान पाकर उसे राहमें बिठा रिमा मोर उसके मापसे डेटने पडसे ही उसकी पीठ में फसकर रो-तीन मते ऐसी बाई का माप मोर गमा! म नयनने मुझसे कमा-तों मैसा भव मारो तो वापर ऐसीन हायमें ही काम तमाम हो यमग्न तुमे अधिक कप नहीं करना पड़ेगा। नबन रागा स्वर मठ मया, उसमा पोराही पैसे स्वर मा । पा पायरेबार मेरे गरे सरो गो, मेरे बाप-पैर बैंपने भो। मैने से होकर कहा-मुम्से काम न हो सकमा नपन दारा। नमन्नेमा-उमसे न हो सकेगा। मम सो में ही इसे सतम करता है। मैंने गिनती सरका-ना नवन गरा, मारो नहीं । मेकिन या भारी व्याकर परती पर मेट गया तो था तक ठस्ने महापपेर रिपये भोर न से ही प्रापरचने सिए कहा। मैंने कहा-पो, इसे स्किर पाने पहुंचा। पा मनकर नयन से चीक उठा । योग- पाने ! पुलिस पफर्मे । मैंने भा। इसने से एक मादमीको माप से दी मासे पासी पर बदायेगे। जैसी करनी देसी मानी । नपन भय र उप या । इस बार उस पुरेसे एक और मठीका हम मारकर योग-भवे । मेकिन पारिबानुब मी नहीं । नयनने का-साम मर या स्पा ! सो रस हियोन रोपाहै पागद दो-तीन दिन पेमें पान पना मी नही म्पा । उसपर एमप भो हत्या करने और उग्ने । सामे पूरो। उठकर पर प। सपर यामारमा उसी व्य पाया। तब नपनने उसी नाक पर एप सारमा-नही मय न । हो गया। होष मानेपर
बचपनकी कहानियाँ
पाप उठकर र रमा अपच । चगे ना हम मी पर गई। रात रे
मा मध्ये चिन्ता कर दी हॉगी।
गाने पळवार ने कहा- मेरो सानपन गराथिमको
मर देव सोमण्या पठा।
नपनन -क्या नया !
म्ने करा-पसी होती । न कर पंग रोधीपा हमारी पान्ती
पुस्तक में लिखा है।
नमनने पह-निसानपा!
नपा–सिसा att। बला परम में मुमती ठिार मार
दिखागा
नपने रिम्स मान कपा-काते सा हो मैया, एक भारमाकी
इस्पावरमें एक भार भारसीने मारा था।
मनका- यहोटो। पही या उसी अस्व स्था। हम बगाने
तुममें पक्षो।
नपनन व्यकिर गरा-किन सभी क्वि राख सेवघरोपी
नरना।
मनपा-का नहीं ऐसी नपन रारा!
नरनने एकाएक कुछ बाब नहीं दिया। पर सांपकर मान्न
पावा, सभोग मन्यपिपोती पण ना रे सकसे, इसएि ।
मगे नहीं पम्दा साठे य म्नुप मा भन्पाप करता है यह साल उस
निमी में नहीं बन पाया मार मार भी नहीं बन सका। और यही बात
गावे सोचते कुछ दूर ण पम्न बार ने पूछा-मा नपन राय, ये
येरर फिर मो मनुपकी हत्या करये!
सम्न मानो या, भा न करेंगे। मारक में म्न्यि वस्तकम
परामर नहीं।
इस कपास में मषित प्रक्षम नहीं थे सन। उन सीना ही नेगे
मसमें ग्रेक पानुस पानपान प्रा-सकिन ये योग हत्या कर
पए हो पि-उने सय वो नहीं मिी'
पचपनको काानियाँ वपन पनम्ना दोन सोच या था। योभमा पर्ने, पर एक पिन सय मिपी । पर से ही पत होकर गोम-मैं वो इवना पन्ता मी मैया, धमारी गरीबी यस्ती हैं। तुम और यो ऐना सकिसी दिन ठबसे पूछना। मेकिन और सहनेतक मैं सत्र नहीं कर सका । परम पैर रखते ही सब म्मोरेबार हा भपने हाप-पैर कनेको फिर पारों बाद देकर- मैने सफ्नो शरीर भागे, भांग-मर-बाप भारि मय-सम्पयः पपोषित गम्न साथ विस्तारसे पर यम । मादिसे पन्ततमाम ग्रेगो ग्र-विमकी का पुनार पारीन एक सौच मेड़ी मौर मुहे मी पास सीतार मुप-सी पीया। नयन मरतक उपचाप सुनपापा मेरी बात समाप्त होती पण स्पर सदी पैरों पास रबार उसने सापांगी, मळ तो यो हो कि मा, तुमारे रो मारे ही फस और भापे। न सुभाने और न किसे तुमारी मी गहर्ष माइयों ने पहने । रापीने बरपा-मैं होनपर मममी बसेका गी। मेपिन रे स्पो मैं मी नही सी नपन ! य इन सपने ठार मोगमै म्याना। मेशिन एक गात भाव में तुमसे पापो नमन भी पाप बाब नहीं नफनने का-कों में। वाराने मा-पोजर पा रपये मकर मेमोको भफ्प पि उकते है।मान में, भार उमे बोमन संमार पाकर पापा योग से यो स्पा वा। नपनने का होता पौर क्मा, पंचका मोर मी मरत। उससे नमन पापा पोहा भोर सिमा भारी होता मी! ।। नयन गरेका भय या भारती और मानता परमपन । मेकन उसने पर कुछ नही मा। पाठी परमि रहार पूरसे परोको प्रनाम कर, पंससे मात गार पा गुपचाप पण पवा।
१५३ पचपनकी कहानियाँ ५-निमय लख एम मोमो चारमें उन दिनी परा पाने म्ा था, इसी बीच एकाएक हैवन पा । उस जमाने में नाम्से ही छोग पाय उठने ये अमर किसी भोमो में किसीफो काम्प मर्यात् य हो जाता तो यह सबर सुनकर होग पास मागने मवे थे। मगर कोई काम्पम मर जाता वो उसे मसानक माँगने टिए भादमियोका मिना मोहास होता । दिन उस दुर्दिनमै भी हमारी स्वीमें एक भारमी ऐसे थे, मिनको ऐसे प्रोम खाफ्ठा करने में कोई मापचि नही पी। उनोने सौका मुर्ग म्यनेमें भीमानाकानी नहीं की। उसका नाम था गोपचा। उनकबीवन व दो नई मसान पहुंचना था । मोहमो मेम पिसीको कोई कठिन पसाप्प सेमरी होती तो पा रोग सर पर कर उसको सार मेवे यसे थे। का मन पवे ये किमान उसके पचनेकी कोर माया नही, यमर-पेपने सपन रेरिया है, ये पग-गे पम्य पाछेदी नगे पैर, मंगोता पर गळे उस वर्षपर पहुंच गये थे। हम कां मर और नवयुगक उनके ये । मुंश मारकर गोपाळ पान हम लोगोंसे कामठे ये-भरे मुनते हो, माग पवन प सबम बना गुमने माठ यो पररी मिना । 'पदारे प्मणने या पामन पास्म यान। स्म मेग करते-होबा यार स्पो नहीं है। भापती एक मामान मुनवे पीएम मग भैगोळा कर हानि हो व्ययगे। पाच पाते-डीक-ठीक, पही वो चाहिए माई । इसे बढ़कर पुश्मन श्रम संसारमै मूल्य नहीं है। हमारे एमबम् मी पा। मस्को तुम मेग बनने की हो। ठेक्रारीके पिठी कामसे भगर पा बाहर न गया होवा या वो पा कमी ऐठे काम एि ना नहाँखा था। उस रिन संपार समान ठास मरते पायाने भाकर प्रा-विष्णू पपिस- की मी नान पाव भाग नहीं लेगी। मनकर हम मेम पीक उठे। विप्मू पपित पर गरीब थे।
१५४ बचपनी कहानियाँ सम्म हम मेगाने पं विमुपर मट्यपास पड़ा था। पापुर चमके रोगी ये मोर हमेपासे पानीका ही उन मारा और मरोसा प्य। संसारमै उनका अपना कानेको मोर कोई नहीं था। मैंने इनिपाम उनके बयबर सीय पौर भखार निस्पाय भावमी भौर कोई नही देखा। पकमान पाठ पडे गेोगको पारपाई पर पिने समेत पपिसी पनीको इम प पर मोचरसे निमार मांफ्नमें से मारे। पगितली माय बाँसे परे सुमसे उपर वाफ ये । संसारमें और किसी पीके साथ उस मसदार पबसिी तुम्ना नहीं हो सकती। उसे एक बार देखकर फिर जीवनमर भूभ न य समय । मध ठरते समय परत महापयन परि-सेवा में सामन पगा वोलता मागन देगा ! किती करने पर ही सस् । ठा-पह काम मैं करूँगा पष्टिती। भाप योग! पितुस्प गुरमौर इस नावेसे यह मेरी माता।। हम सब मेग मानते थे: मयानातक परिणतनी बिए पैरामना बसम्मम है। हमारा सा उन परसे पांच मिनरका राष्ठा हफते पत खनी दूखक सनेमें भी उनको भाष पपेसे कि सम्म माया पा। परिपतवी बरा रेतक पुप गार गोडे-बाते समर उनके माम मय-स्प सेदुर नही म्णा देगा ! "अमर गाउँमा पपिसी, बस पाउँगा", कार स् एकम्बॅगमे पर मीतर बार दुरषी सिम्मी दमपा और उसमें वियना सेंदुर सप पम्विाइन मगम भर दिखा। 'यमनाम सम प्रते हुए हम मोग परसे पमिध्वाइनकी अमरा किए बार के भाये। पमितमी बुझे पनि पोखरेपर एप रस पुपचाप साये। गंगा किनारेका मठान पसि पात पूरपर भा-याग तीन प्रेस होगा। पही परम्ने समएको नीचे रखा स प रो बजे हमे । म्म्य परपाईप सहारा मिशनों पैर फैयार बैठ गया। कोई-कोई पानसे - ऐन भरण पर-उपर पिठ होकर ये । प्रसकी पर पन्द्रमाची
पापनकी कानियाँ
खिरी हुई चैरनीम मसानकी वास् बरु खाडी पमक गी पी।
प विन्मुस सुनसान या मारमीका नाम-निशान भी न था।
गया उस परसे ठंढी उपरकी पक गौते माम मरे उठ रही थीं।
गो-कोईभरम परोसे भाकर कराती थी।
धारसे माडीपर कि एमड़ी बासी, पापा ने कितनी
रमे च महौं मार पहुंचेगी। मखमरफ प्रसपर रोमों पर। माते
सम्म स्म मेम उन पुकार भाये। उनके मी भानेमे पाने कितनी
देर होगी।
माया गया उस पारक चिपिच एक महरा काम बारह उसमोर
बोरगर उपरी इलाके संयोयो वा थर साप ब्तिा मा मागे इस
परकी भोर, बदने व्या | गोपा पाचाने गकर कहा-
पाव भम्रो नही
देन पावे रे ! पनी परमता बन पड़ता है। इस परेम पर पानीम भीगना
पायो प्रापोर न मारेगी।
पास कमी पाणी बगान यी। कोरबा ना रामवक नीकुछ
दूरपर व्यपारीक भामके पागमें माडोकी मोमी समजन पानी
परसतेम उपनी पूर भागकर बना-चौड़ना तो नाम न है।
देखते ही देखते मानधम पार पया गई। मेधकारमें पौरनी हर
गई। उस पारसे पानी परम्नेका सम्मानॊम पहुँच-पीरे-धीरे पर निरन्से
निखरो उदय । पानीकी दस-पंच भगकी पूरे सीरकी वय माफर इम
मेर पर पड़ी। स्मारै माँ मैं, पर सोचते ही सोपवे मूहम्पर
पानी परहने मा । मुर्गाओं प्रा ग्रा। माप ने किए पसे
बिस बन पड़ा उपर ग पममी क्य माग सदा हुमा । न किस गा
कुछपा नहीं यसमय।
पपेर पारस पानी बरसकर पा पारसना गये, व एक-एक
परम्पमेय पोट भाये। बाद बफ हो बानेसे दिन प्रशासकी
त्यानी चायें-मोर फैल गई।
इसी बीपमें मनी पर माड़ी मी पा मह यो । गाडीवान सामग्री
गरमी और और सब साम्मी खारकर भैरबनेका उघोगर
बचपनकी कहानियाँ
मेक्निोफानी पानी पिता न पाये।
गोपाड चाचाने माये सारे ऐसे दो पी। गरेकी रामि परते
निकम्तेही नहीं।
पवनेम मपीने कहा-अया, मस्तू कहाँ गमा! सब और भाये, पही
नहीं देख पाया । उसने तो मुख्गन बनेको पाकर मारेपी पर तो
नही भाग गया।
रापाने सार सन होकर पा-या ऐख ही। भपर इवना उरता
पा दोभासे मार रहीमों या में होता ये चाहे कि पास गाज
सार पाती दो मी मरेको मेकर कही न जाता।
मन्नान पूम-मुरेको मकर सनसे क्या होगा पापा!
पाने माया होगमा बतानपने क्या-क्या होगा।
पा मसान हैन । यह भूत-प्रेव जयते।
मापीने का-मसानमे मोठे एनेमें मापको स्याम नही गया
पापाची!
पापा पोमेरा मुझे। बबनता है, मैने कपस कम एक एपर मुसो
मस्पन पये और महोगे।
इसपर मनी भोर क्या काग, पुप होगा। सचमुप इस समय
पाका गईरना कतीपा।
मनमै रोया पड़ी हुई। पापाने एक झाड भपने सबमें कर
मागोमेकी या रखनसे नहीं पम्पा । मैं गदा खोरवा मग
पहाप माँ नीचे किनारेपर मे भामो ।
पापा वा रिए गदा वारने मे मोर इम ठोम मतियों कर नीचे
बानेये।
नोमाने कामपा माई रेसा, मुरा पर ते ना हो गया है-
पाचाने किसी तरफ रेले मना ही मार दिसा-मम्प नी ! उपरका
माफ मारेकी रुप सब प्रेमीग गये हैं!
नोनने मापन ग पानीस भीगनेर सिमर पिचक ची?
बचपनकी कहानियाँ चाचा मेमी चो ना। पारा लि उठ । बोरामा खिमान्न मोर रहा कि किनारेपर मन पोपी ही य गइ थीं । नन्द्रधनम स्पर मुरे बरपर ही भी। एकाएक पा मार-मन हिसार मोग-बाग मुरा भमी से बिक ग्य। पापा मम्ने पत्र काम समात पर पुरेपी कुराबर गाजे-बरे वा ररक बादमी मने कभी नही रता नरनातून समकामाम शरीक हान भावी पो है ? सभी छमिया म मा, मैं पिताम्मा । यभावहीन भर रोचीन मिनर यास । भने नरन्तु पर उठकर पंप-सात मी हमर सा र रग एमा वाय-ना पापा, उम्मन भावीप पाव। सचमुच नुध हिब्रया।। पान मसीरिक व्यरछे सित हुए बार-गुम माम मुसाना पात-रिसन समझे म यर मुरैनी मोत दिसउ। नस्नन करा---पर दलिप, फिर किया। पाचन मा--दो दियो बानता है किसलिए । तर गयमा पर्यटए- उननाच गाठ पूर्ण मी न होने पर कि मारमात्मा र कमर rय शुभा ना मारो कार उठ बेटा और मकर नादुर भर * वना भाषरम निम्म उनमें नोनैरेनको नहीं की मर गर 'हम सन सदम सिरपर पैर रखर मग सगा पपासान्न साटेर या उसे अंपते पस्त सपा प्रती । पर मार कर नतो मग सस्ते में मारपन टापानी सायर म्माटर पनीमै पुस पो। उस पर मरने गए ने मर गरिताने लगेगा पम-राम-राम- "
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स्वपनकी मानियाँ
पर यह मत भी मैंरपरसे मिाायकर पिने स्मा--भोर निक
भो रे नरेन, भोरे पीप प्रगो नहीं में सब-और थामो-पैर भामो।
भक्षी भाषाब हमारे काम पहुंची। अपनी मूलवापर मत्पन्त अमित
होकर हम सभी मैट माये । गोपापाचा रसेप-फ्ते अपरेसे होकर
पनीसे पार निकले । म्खुने उनके पैर छूकर पुरुषम्पक साप करा-
समी मेग पानी परसे माग गरे, मेकिन मैं माको छोड़कर नया सका,
इसीसे माफ भीतर घुस गया था।
चामाने का-सूस किया भैया मम्मी मम्मी की मामो भी
तय हमें गयाकी पात् भार स्नान करो । ऐसा शैवान मन मने चिन्दगीम
नहीं देखा।
किन पाचाने मन-ही-मन को थमा कर दिया । समके किना
निम्न होना उनके लिए मो असम्भव है। ऐसी मानक रातम असे मानमें
फासयका मुदा और उसका गना सिमेना, किसीसे सस् नहीं ररा-किसी
पीबसे उम्म्ररित नहीं दाम ! यह साम्म साासकी पाय पी।
मेयोने चितामें भाग देनेए सस्का नाम किया तब गापड
बापाने पोर भापति रमा-ना यह न होगा 1 सम्वकी म सह मन
पायेगी दो बार फिर मेरा मैं नहीं रेगी।
ममता दी गई। इस मोय गंयामें स्नान पर पर मैदे, उस समय
सूरय रोगापा।
६-देवघरकी यादगार
मस्सप्रनेसे हवा परम्ने सिए मैं समर थारा पा । भावे समय
भिवानी मा पिता पर-पार याद मा पी, सिन मा या कि
"पण धीर गरर, दोनोंने मिडकर म दिसे से रहितों एयरमें यने ।
पौर रे मी पर हो गई, ससररने म रिसा किया रम्ने म मन्त्री
मगह यमो । बहुमा यहम्मापिस बरकर भापि होगा।"
एप परम्नेसे गधारपत जिना मम रोण इसे गोग अन्वे,
फिर भी हमापदम्ने भावे दी है। मैं भी भासा । पहारदीवारीसे पिरे हुए
पपपनकी कहामियों पागः मीसर बने हुए पासे परमे यता हूँ। रास तीन बसे पास ही कही एकभारमी फ्ठे समर जैसे बेसुरे ग से भगन ग्रना गुरू कर देता है। मेरी नीद तुम पती है। पाय मोमर स्पममें भारत मेठ पता। धीरे धीरे गत सम्मत होन गावी पिहिमोका आना-पना मोर पापाना शुरू हो जाता है। मैं रेखता था, उन चिदियोमें सबसे पासे बहुत वा रोप उटती है। भैण मायर होने मी नही पाता हरपुटेमें ही उन चिनिया गाना एकहो दावा है। इसके बाद एक-एक करके युगुष, मामा, सावित मोर टुनटुनी नामकी चिनिमा माती हैं। पाक परमो मामा फेा प उसम, मेरे परफ सकुश पंचम सा-निारे पीपाकी पोरीप, बेस चिड़िया माती थी। भको मैं मौतोंसे देख नहीं पाता पा मेकिन हर रोज मोम सुनते-सुनते ऐसा पम्पास हो गया जैसे उनमेसे हर एकदिमा मेरी पानी हुई। पीसे रगकी पन-पा नामकी चियाका एकमा परेर कर भावा मा ! दीवार किनार यूहिण नामक पिपपती सकी सबसे ऊँची सम्पर बैठकर यह पेसा नित्य मोठया और अपनी पामिरी ३ मा या । एकाएक पेस हुमा किन पने मों का पेड़ा ऐ दिनतक नहाँ माया । यह देसकर में प्पट रो उठ्य । मनमैं सोचने ब्या-फितीन उन पर वो नहीं मा ! इस तरफ बोरिपाच-विदोमागेकी कमी नहीं है। पिदियोको फरार बार भेना ही इन पिडीमागेकी वैविच है। अन्न तीन दिन बाद पौरिन फिर पापेन भाया । उसे देखकर आन पड़ा, जैसे सचमुच एक भारी चिन्य दूर हो गई। सो सय समेघ मम रखा है। तीसरे पार प्रबार मार किनारे माकर बैठठा। मने यम्नेकी सक्छि भनेमें न थी किनमें पी उनकी पार एकर दान करता है। देखय पा, सम्पपिच या मप्पा ग्यास्पो परको रोगी यहाँ थे, उनमें सियोंकी ही सम्मा मपिक है। पहले ही कप मसिन अपिला व्यती नस भावी भी, निके पैर पर पछे थे। मैं समन म्पा, दर्ने मेरो मेरी नामका रोग है। पैत्री निमिए-इन पुस्मताकी यो उपने यि पारी तब भी मैं पपएनफी मानियों परवी धीरे योग्य पन्ने दिन नही थे, गर्मी पड़ने की थी रेखता या कोर- कोलूप कसे मोजे प्रने रावी पी। किसीका देलता पा, उसकी साड़ी इसनो नीलो कि जमीनमें मेर गीहै। यपपि इसस पहने पापा परवी थी,णे मो अपने पैरों ऐबको कोवानी मेगकी नवरीस छिपा रसना पारी। और मासे पर मुह दुख होता पण एक गरीब परी भीखको देखकर । बा मसीही माती थी। उसके साप न कोई भारमीप स्पन्न होता या न फोर सी-सोय। सिर्फ तीन ठे-गोरे पकी-मर गते । भवस्था उसकी जान पाया। यही चोरीस-पचोस पकी होगी किन्तु उसकी देश फैस दुमी मोर जी पी पैसे ही मैंर पीप-पीम था उसमे से एक मूर मी एक न पा। मपने घरीरमा बोस समार पन्नेको पति उसमें नहीं पी वा मी सबसे भेटे बचे या गोदमें मिले राधा पी। वह पम्मा मपने पैरोंसे पानी समता पा सेकिन उसे पर परमैं भी छापर ओइ महीमा फासी पी। उस भारतको पि न बने कैसी दीन मोर पकी हर भी । न पड़ा पा मुसे रेलकर उसे से ज्या भाती है। किसी क्य उस स्थान पर अपर पापी माना पाइपी पी। फरे-मेमे भौर पातीसे सीनी पनोंको किसी तपशंकर स्पि ना सी पासे थवी भी। घायर ठम्ने सापा रोप में किसी उपयसे-बा-राम्से थे नी हुमा या इठ संपार परगने स्वास्म ठीक करनेवाले साम्बायुमें, इस भस्पन्त सापक यम्नेसे ही प्राप्त कर गो-उसकी नुम्ती रिमेको अपगी पा माराय अगी । रोगसे पुराना पाकर उसकी बात नि ठौट भापगी-फिर अपने चाकी, परकी सेवा कर मारम भने नारी-बीयनको सफल- माकपा मगी। मैं सनीठा अपन मनमें रखा पकिसमिया उसकी श्रीरमा कामना हो सकती है। या भारतकी नारी। उसे इससे कि पनेको मात कर किसने सिखाई। मैं मन-ही-मन उसे भागीर वा पाकिया भायेम्पर भरने पर मैर पाक-ग्नि तीन बौने उसकी सारी बीचमी गति पून । नदीको पम्पोसकर मनुप बनानेका अक्सर बचपमफ़ी कहानियाँ १११ पाये । पारिसकी मी किसकी बी, ठसका पर मा, पर कुछ में नहीं बनता। सारे मारतको मसम्म नारियोंत्री प्रतीक होकर पर वैसे मेरे मन भीतर एक ममिठ गहरी हीर-सी पर गह, जो साम्मे मिरनेम नहीं। मेरे स्थप यहाँ एक नवयान मित्र भाया था। उसकी सेवा निःस्वाथ पी। कामे पब मैं बछ बीमार मा ब उसने से मन गाकर मेरी सेवा की पी से दी गएँ भी मैने उसे अपनी सेरा कसे पाया । बीच-बीच मा कावा पा-पए वारा, भाषा या माये । मैं का पा-उम मामो भार ने यही ठार मा काम पूर्ण रगा। सपा असहिष्णु शेर पवा या कि माफ्ठे मी मंपिक यो चिने ही लोग पाँ सरते-मवे ।। मय पूपिप निरपेया नहीं तो मूस से भोगी। इसपर मैं पता कि मूल कस सपनेपर मी पम पर मायगा ग्रेफिन बेगर गा-गा, मारे-मार फिरना मुझ नहोसगा। मामा शेर भागे हो पूमने पम बाता था । मेकिन वे समप मुझे सावपान कर देना था कि देखिये, बरेम पर न मैटिमगा । नौकर को पुनर कर यमेन बने एका पौखियेगा। पर करेत सो कुछ अधिक होते है। वे रिसीसे नहीं बोलते भेकिन अपने उपर किसी पर पड़ना पसन्द नहारते। उस दिन मेरे मिन घूमने गये थे। संप्पा होने में ममी रेर थी। मैंने रखा, काछे भावी भूस पैरा करने सम्मको पूरा कर विमर सेब पसे सपने मेरोंगोगेर ये। सम्ममा में बात-म्पपिक रोगी थे, इसी कारम संपासे पारेको इनको पर मीवर पहुँचगानकी मस्त है। उनच ना देखकर मुझे म्पेसा हुमा कि मैं मी छ र यस सकता है। मैंने सोचा पर, मैं मी बरा पोड़ी दूर भूम भाई। उस दिन पी गहन पूखा परम | मरकार से माया । सांगा मैं मा। मगर एकाएक वरिपर प्रमबाग रोमी। उसन बता-अमुबारक ।
बचपनकी पहानियाँ
मूमकर देखा एक मुघा मरे पीछे भा या था।
मैंने उसे पामो , मेरे साथ पगा। परी या पखक
पहुंचा देगा!
यापूरपर सर होकर तुम हिमने मगा।
मैं समझ गया किया गयी। मैंने कहा-चो फिर मरे साथ था।
सबक किनारे एक मस्टेन रोपनीमें मैने देसा, उच्च स्पाना था।
रोगकै कारण पीठपर रोएँ भर गये थे । स्रा बैंगवाकर रखता था।
स्मान र पवान होया म उसमें का, ताकत होगी यह स्पार धन
पमा । उससे प्य-वरा भनेक स्वाम परते-करते मैं अपने रे सामने भा
पहुँच ! परक लोमर मैंने उसे मीवर सुध्मया । मैंने कहा-भा मीवर भा ।
भागत् मेरा प्रविधि है।
कुघा वार ही लो-सरे पूँण हिमवा या, किसी तय मीवर पुसनकी
हिम्मत न कर सन।
इसनेम बास्टेन सेपर नगर मारा । उसने घरू बन्द करना पास । मन
का पद न करो बुम ही पने दो । भार माचा मीटर माने तो इसे
खानेको देना।
मयमग एप पर गर मैंने सबर मेर अना का नहीं मापा, की
पम गपा।
दूसरे दिन सरे पार भावे ही मैंने देस्य, मेरा काम पतिथि पाटको
बाहर सहा है। मन कहा- मने तुझे खानेका म्योता दिया पप भामा
मो नही।
इस मामें मेरा मैं वास्या हुमा ग र म्य'० मिनेगा।
मन परा-माम त् भाकर ना बिना सामे न सपना ! समसा !
एक उममें उसने पर मेरस पंछ हिमाई। घायर ठसका मतम या
अकि समारोन!
राको नौकरने भाकर बल्यया कि वही पुचा भाकर भाष परिक
परामरके नीष मनम बेटा है। रहरमा ग्रामसने गुलाकर मैने का रिगा
पिर मुच मेय पतिपि । उसे पेरभर स्पोरना ।
बपपनकी कहानियाँ पूरे दिन सपा कि मेय मविपि फिर नहीं गया । मामानदारीको मपारासिमपमा मारामसे निश्चिन्त होकर म्म पुपा है। मैंने कहा- सैद होगा तुम उसे खाने पिरेना। में यनता पाक रोग बहुत-सी बनेगी सामग्री पीती है, इसलिए कुपोलियने में किसीने भापति न ऐगी। मेकिन भापति यी और मुत मीभापति थी। दम्परी रोईन कसा मभितर हिस्सा इस अगर मागकी सीरम चावा था परन्तु मुझे यह माधम न पा । माकिन कमसिन बी रेलने-सुनने भी अच्छी भी । साम ही खाने में उसे कोई विशेप विग्रर न मा । नौरोको उसी के साप पूरी जानुभूति थी। इसलिए मेरे भविपिको रोम उपवास करना पता था। ती पार में सफर मिनारे सफर बैठा । देखा मेरा भविपि पारी बार मोमीनपर बैठा है। यही नियम निम्मच रोगमा | मन में यम्ने पता नपा मेरे साथ-साय बतायामैं पूस्ता-रे मातपि, भाग मांस कैसा पा पादचामें कैसा स्पद माया! पारिम्भकर नाव देता। मैं समझता कि मास उसे बहुप मम्म व्या । मैं या नहीं बन पा A मानिने मारकर उस पार निकल दिया परमाग मीतर एमने ही नहीं रेती । इसौते पर उता परके सामने मार- पर मैन पव। मरे नौकरी भी इसमें सानिय पी। एमएफ मेरी बीमठ क्या हो गई, दो दिनवक में उपरस नीचे उतरकर नही मा सका। रोबर समप उमर काम मिनेपर पा-पो मार पाकर सम्मस किया पा भौर मुभी र सिरकोसे पहले पूरे पे हुए नीले भाकाशकी भोर मनम्मा पर मनमें पह सोच रहायक मेसो परे पा मान्तर उनी मन्त्री होने सी उन भाकोमोरची पद-बोलता पिया निम्पायरे बापरपमें उसे पाने मिए पिस्ने पसे काम देते मिनीने कानुन बना दिवा एक नहीं मुनी, उनाद गम कानूनकी मारण को मेरसी पर, रेशीमाई ठगने हुए है। या गाव निम्नो प्रपित पर रेना पाहवे येमेसी किसान विपवार्मोन इयदा अप्ठान है। विरमना भौर से पवे। । .
उनक
पचपनकी मानियाँ
सदस्य तुझे हुए दरपासे कमरेके पर इकी परमहीं देस पड़ी। मुंह
बहाकर रसा भतिपि साम्ने मा पूo दिय ग्राहै। बोपार सम्म सम नैकर
स्पेये, उनकी प्रेमरियाँ बन्द है। पपी मुसोयम पर या एकरम में
कमेके सामने थाफर मिहै। मन सोचा, रो दिनसे मुझे नहीं देखा, इसीस
याद मुझे देखनेक भाया है।
मैने पुकारा-माभो मविपि, मीवर पाया।
पानी भाया, यही व सभा कहिपने व्या ।
मने पूर्ण स्थ पुकारे भाव मा लाया ।
एकाएकथन पड़ा कि उसकी दोन मौत से गरमी हावी पास
एकातम मेरे भागे उछ नामिण करना चाहता है। नौकरौंको मैने पुकारा ।
परपाबा सोनेका शम होते ही भविपि यहाँसे भाग ला हुमा ।
मने नौकरसे पूण भाव फुधेको खानेबिए कुछ दिया है।
उसने करा-बी नहीं। माचिनने उसे मारकर भपा दिया था।
मने कहा-भाग तो बहुव-सा जानेका सामान बचा था। यह सब
स्पा हुमा।
नौकरने पा-मामिन सय में गई।
रंगामा मनकर मेरे मिकी नीर टूर मह । वा भाँले रग-रगर
कमरे भीतर भाये और मय मुसहर बोकी ते नियम होती
सबारमियोको दो लानेको नही मिथ्य और भाप पहले उत्तेको सुनकर
सिमा
मेरे मित्र मानते हैं किससे मर भकाय मुक्ति मौर नहीं ये सपती ।
मनुप्पो न देकर कुचेको देना-भन्मेर सी तो है!
मुनकर में पुप हो या । संसारमें पिसा प्रवास सार पार पपता
हैामान मोमीको से समझाया।
पेर, पाबारे यो हो पिर मविपिका मुगार समा गया,
पिट ठग्ने
परामरे नीचे भागनकी भूममें फरम निषित मनसे मान दिए बगह कर
की। भब उसका मामिनसे रचम पपा है। दिन रह गया सौख्न पार मैन
पचपमकी कहानियाँ
सरके परामरेसे देखा अतिपि इसी तरफ रेसता हुमा पम्ने दिए मार सदा
है। मेरे यम्ने बानेका समय हो गया य न ।
मेरा शरीर सपस नहीं हुआ। भारोम्प न होनेपर भी रेखपरसे मरा
होनेका दिन भा गया। तो मी तप-रायके गाने पर रो दिन भोर
भाव मेरेसे साम्पन ना शुरू हो ग्यापारकी गायसे व्यना है।
पारकर बाहर गादियों बाहर पड़ी दुई उनपर सामान मा व्यने म्या ।
भविधि बहुत मस्त वा-अम्मिों के पथ परापर ौरम, भीतर-बाहर
मा-चाकर पौकसी करने मा, ते पा रेल मात्र या हो कि कहीं मुझ को न
अप, टन अप । पसे भक्ति उत्साह उसीम नम भा या ।
एक-एक कर मारियों स्टेशनको पर मेरी गादी मी साने गी।
स्टेशन गारा दूर न था। वहाँ पहुँचकर उतरने स्मा ये रेखा, मेरा भविपि
सामने मा।
मैंने कहा-पो रे, त् यहाँ मी मा गया ?
म्सने पूछ रिभकर इस प्रश्नका उत्तर रिया-सा चन, उसले म्या
मान ये।
किर सरीदे गये। माम्मम्मारकी सैड हो गई।
मिल्ने मान सबरीक ट्रेन टने क्स से ही एक मिनरी
देर ।
स्पपी मेप सबार पाने मासे थे, उन सबको मैंने सीध-न्यम
दिया 1 पाया नहीं तो मेरे पाविपिने ।
गर्म हवाम धूप सम्र सामने पर्देकी या मई। घने इसे उसी
परे भीतर मैंने मस्या देखा-स्मनके पाटकबार मेरा मतिषिमा
कर मी मोर वाकया है। टेन सौटी रेकर पाये।
पर मैग्नेश माप पा उसाा मुहे भने मनके भीतर की नाही
मिस्म । यही पपा माने ज्या क मेप भविपि आवरकर देना
कि परम पारेका पसन्द है-उसके मातर मानेन भई
चपनकी कहानियों
सायद यम बरे होकर ऐ-तीन दिन मेरी या ऐसेगा-पर सपारेकी
सौपारीमें किसी समय परक पुम पाकर पुपाप छिपकर उपर पर आपया
और मेरे यने कमरेको लोभेमा । मुझे न पर फिर पका कुचा ग्रहमै दी
बाभप प्राम करेगा।
सासर उससे भपिकाठमीब उस घारम वृस्य नहीं है तो मी पा
देवपरम गनेकी गारमार उस हवेने पार ही भाव में मिलकर गोरे
बाठा हूँ।
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