Agarchand Bhairondan Sethiya Jain Parmarthik Sanstha, Bikaner
Neelson
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FREKX
नेलसन ।
AAAKAXXXXXXXXX
लेखक
अखौरी कृष्णप्रकाश सिंह
प्रकाशक
हरिदास वैद्य
कलकत्ता
२०१ हरिसा रोड के नरसिंह प्रेस में
चाबू रामप्रताप भार्गव
द्वारा मुदिन ।
-
मन् १८१४
प्रथम वार ५०.]
[ मूल्य 1
12Mew
,
स जातो येन जातेन,
याति वश समुन्नतिम् ।
परिवत्तिनि ससारे,
मृत
को वा'न आयते ॥
हितोपदेश ।
میر
समपण
अनेक गणमापन,
विद्यानागा, भाषा मिय
श्रीयुत पण्डित रमावल्लम मिश्र
पम०प०
डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट तथा कलकर पूरी
चे
कर कमला म मादर
समर्पित।
श्रयारा कृष्णप्रकाश मिा-
40
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भूमिका। मर्वाधार परम पूज्य अविनाशी घटघटवासी भगवानके चरणों में वारम्वार प्रणाम है जिनके रुपा कटाक्ष में ममारी जीवों का पालन पोषण हो रहा है और सृष्टि के चित्रविचित्र कौतुक दिनरात दिखाई दिया करते हैं। यह मसार एक रंगभूमि है , जिमपर कोटि २ अभिने- तागण प्रति दिन अपना २ भला या बुरा अभिनय एक दूसरे को दिखलाते है । क्षण २ में दृश्य बदलता जाता है, घडी २ पटाक्षेप हुआ करता है और अन्त में जब किसी एक का भमि- नय समाप्त होता है तो तत्काल ही उसके कार्यों पर दृश्यान्तक पटाक्षेपपड जाता है और तर उसके सहनतकोंको अवसर मिल- ता है कि वे अभी के समाप्त किये हुए कार्य की पालोचना, प्रत्या- लोचना की तथा अपने भविष्य पार्ट में यथेष्ट रह बदल करे मनुष्यका प्रावरण प्रत्येक पात्मा को मिलता ही है, ससार को रगभूमि प्रत्येक देहधारियों को प्राप्य ही है, जन्मपट सुख दुःख के रंग से रजित हुआ ही करता है, अपनी उन्नति का सुअवमर भी कुछ काल के लिये हस्तामलक होता ही है। इतने तुल्यस्वत्व देकर प्रकृति तब बाट जोहती है कि कौन वीर अपने स्वत्वो का पूरा सदुपयोग कर ससार इतिहास में अपना नाम सुनहले अक्षरों मे लिखवा जगदादर्श बनता है। पाठक । जगत में वही नर शाई ल प्रकृति का हास्पद होता है, उसी वीर के भूतकार्यो का स्मरण मनुष्यजाति के
उद्धारका कारण होता है जो अपने को अपने देशके लिये उत्प
समझता हुआ देशागत मृत्यु से भी एकवार सामना करता
तथा मारभगाने की चेष्टा करता हुआ शरीरार्पण करदेता है श्री
मनुष्यजातिको हित कामना-रूपी योगाग्निमें अपने सुखसामान
ऐश्वर्य, दारा, गेह, देह तक को निष्काम आहुति दे देता है
यह पुस्तक एक ऐसेही कर्मवीर को जीवनी है। नेलस
एक दीन हीन पिता का पुत्र था , परन्तु उद्योग, सहनशीलत
तथा सहिष्णुता इत्यादि गुणों के द्वारा जगन्मान्य होगया
नेलसन की जीवनी हमलोगों को सच्चा स्वदेशभक्ता, सहृदय तथ
अहङ्कारशून्य होना सिखलाती है और हमें लाग्यो विद्या
बाधाओं की अजेय सैन्य के
सग्मुख अटूट
दुर्ग से ख
रहनेका उपदेश करती है।
शारीरिक दुर्बलताके रहते हुए भी नेलसनने हृदय की वलि
छता के द्वारा योरोप के हौा नेपोलियन को कैसा सबक
पढाया है- ग्रहणीय है। इङ्गलैण्ड की कौन कहे, इसका वा
जन्मदाताही था परन्तु नेलसन ससार भर का हितेच्छ तथ
रक्षक कहा जाता है।
सन १८०५ ई० मे नेलसन की मृत्यु के बाद प्रत्येक देश
के विद्वानों ने इसवीर की जीवनी अनेक भाषाओं में लिए
लिख कर गुग्णग्राहिता का परिचय दिया था, केवल अँगरेन
भाषा में ही दम बारह लेखकों ने इनकी जीवनी किस्मे, क
हानी तथा इतिहास के रूप में लिखी है।
भी
विहान देशों में देशभक्त वीरो को जीवनियों का कितना मान होता है, यह पुस्तकों को विक्री तथा प्राकृत्तियों से भली भौति विदित हो जाता है। केवल एक सदी (Southey) को लिखी हुई 'नेलसन' को दस पन्द्रह प्राकृत्तियाँ १८८५ से आजतक विहानदेश की सुरुचिका खासा नमूना है। हिन्दी भाषा में ऐसी पुस्तकों का अत्यन्त प्रभाव है। य- यपि इधर कुछ दिनों से कुछ भाषा लेखकों ने इस ओर भी ध्यान दिया है और स्वदेश तथा दूसरे देशो के महान पुरुपोको जीवनियाँ प्रकाशित कर अपने भाषा-भडार की पूर्ति कर रहे हैं तथापि इनकी सख्यायें अन्य भाषाओं में की जीवनियों के मुकाबले में कुछ भी नही है। इस साल सर्कारी रिपोर्ट से विदित हुश्रा है, कि सयुक्त- प्रदेशसे, जो भाषा का प्रधान विद्यापीठ समझा जाता है, केवल दो ही जीवनचरित प्रकाशित हुए है। पाठक स्वयं वि- चार सकते हैं, कि भारतवर्ष के इतने भाषा जानमेवाले वि. हानो में से कितने विचारी हिन्दी की ओर ध्यान देते हैं। नेलसन से वीर को जोवनी यदि किसी एक अच्छे विहान के हाथ से लिखी जाती, तो कितनी उपयोगी और मनोरजक परन्तु जब किसीने आगे पैर न दिया तो तावपेच खाकर इम पुस्तक की अति आवश्यकता देख, मैने ढिठाई क- रने को लेखनी उठाई । मुझ मे भारी से भारी त्रुटि होजाना असम्भव नही, क्योंकि मैं कोई प्रमिद लेखक तो है नही, होतो।
" जौन लाग- 7 (।) जो मेरा लेख सर्वा ग भूपित हो, तोभी आपलोगों को दयालुता की आशा है। पुस्तक लिखनेमे निम्नलिखित पुस्तकोंसे सहायता ली गई है; अत: उन पुस्तकोंकि लेखकोंको अान्तरिक धन्यवाद है। Life of Nelson लेखक- सदी (Southey) Large Life of Nelson लार्क और एम अर्थर Story of Nelson नेलसन के विषय में उसके देशवासियों को उक्ति सुनिये "He has loft is a name andun erainplo which are at this moment inspiring hundrecis of the youth of Englinda name which is our pride, and an example which will continue to be our shield and strength पर्थात नेलसन ने हमलोगोंके लिये अपना नाम और उदाहरण छोडा है, जिनमें सैकडों इङ्गलैण्डवासी युवक कर्तव्य करने को आज भो उत्तेजित होते हैं-आपका नाम हमलोगों का गर्व, • आपका उदाहरण हमलोगोंका बल और वर्म सदा बना रहेगा। 'पाठक। मुझे आशा है कि पुस्तक अच्छी नही होने पर भी नेलसन से देशसेवक के जोवनचरित से तो आप लोग अवश्य नाम उठावे गे और अपने देश कीसेवा में तत्पर होंगे। उपसहार में, मैं अपने अन्तरग मित्रों, बाबू रामानुग्रह नारायण लाल तथा नक्षत्रमय आकाश इत्यादि के लेखक बाबू सुरेशचन्द्र लाल को आन्तरिक धन्यवाद देता है, जिन्हों ने पुस्तक-सम्पादन में सहायता तथा उत्साह प्रदान किया।
नेलसन । प्रथम परिच्छेद। Lum वाल्यावस्था और वश-परिचय । रनेलसन होशियोकाजन्म नारफोक इलाके के वर्नहमथोर्थ ग्राममें २८ सितम्बर सन् वी १७५८ ई० में हुआ था। इनके पिताका नाम एडमगढ़ और माताका कैथेराइन नेल- सन था। एडमण्ड उसी ग्रामके ग्रामाचार्य थे। नेलसनकी माता बडे मान्य धरानकी थी। इनकी टाटी गनिस्तानके भूतपूर्व प्रधान मन्त्री सर राबर्ट वानपोलको यही वदन घो।
२
नेलमन।
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MC
-14 MMS
अभाग्यवश बीवी नेलसन, सन १७६७ ई० में, पाठ बच्चों
को अपने पीछे बिनवते हुए छोडकर, म्वर्गारोहण कर गई'
इनके जीवनकाल ही में इनके तीन ब का देहान्त हो
चुका था।
बीबी नेलसनको मृत्यु बिचारे एडमण्डके लिये अत्यन्त
मर्म-भेदी हुई, आठ , बोका भरण पोषण कैसे चलेगा, इस
सोचसे विचारा घुलने लगा।
कप्तान मौरिस सलिग, अपनी बहिन, बीबी नेलसनको
मृत्यु के बाद, एडमण्ड, अपने बहनोई, को सान्त्वना देने पाया।
इसने, एडमण्डको दुखी देख, एक बच्चे के भरण-पोषणका भार
अपने ऊपर ले लिया।
समय-चक्र अविकल रीतिसे सुख दुःखको अमतीक्षा
करता हुआ सदा घूमा करता है। तुम्हारा समय राज-भोग
भोगने वा भिक्षा मॉगने में क्यों न व्यतीत हो, चाहे सम प्रसन्न
रहो या अविरल अयु-धारा ही बहाया करो, परन्तु समय
एसको पर्वाह कदापि नहीं करेगा।
बीबी नन्नमन को मरे आज तीन वर्ष व्यतीत हो गये ,
हम लोगोंका चरित्र-नायक अब १२ वर्षका हो गया है। बड़े
दिनको छुहीमें नेलसन घर आया है। आज एकाएक उसकी
दृष्टि समाचार-पत्रके एक कोनेपर पडी, उसके हर्षका ठिकाना
न रहा । उसने पढा कि उसका मामा "रेजनेबुल" का कप्तान
नियत हुआ है।
-
वाल्यावस्था और वगपरिचय ।
३
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भावीने प्रेरणा को। नेलसनने अपने बड़े भाईसे पिताके
यहाँ एक पत्री लिखनेके लिये विनती को और जहानम
नौकरी करने को उत्कट अभिलाषा प्रगट की
एडमण्ड नेलसनका स्वास्थ्य इन दिनों अच्छा नहीं था, अतः
वह जल-वायु बदलनेके ख्यालसे बाथ (Bath) शहर में रहता
था , वहीं पुत्रको चिट्ठी पहुंची। उसने होरेशियोको आन्तरिक
अभिरुचि जानकर और अपनी पार्थिक दशा उत्तम न देख
कर शीघ्र ही अपनी अनुमति देदी। पिता पुत्रको प्रकृतिये
भलीभांति अभिज था और सदा कहा करता था कि होरशियो
जहाँ रहेगा वहाँ ही सर्वश्रेष्ठ होगा।
एडमण्डने शोध एक पत्र कप्तान सक्लिङ्गको इस विषयका
लिखा। कप्तानने उत्तरमें यह लिखा कि यद्यपि बिचारा होरे-
शियो बहुत दुर्बल है तथापि उसका मन मन करना उचित
नही है अत उसे भेज दो, परन्तु भय केवल इस बातका है कि
कही पहिले ही युद्ध में उसका मस्तक गोलेसे उड न जाय ।
पाठक । इस उत्तरसे श्राप समझ सकते है कि होरेशियो
को नाव्य-विद्या निपुण बनानेको पुछा कप्तानको कदापि नहीं
थी। यद्यपि नेलसन शरीरसे अत्यन्त दुर्बल और रोगी था,
तथापि भविष्य गौरव, दृढ सकल्प और उदारता जो उसके
भावी जीवनके सबसे बड़े उद्देश्य रहे, उस समय भी अपना
आभास दिखाये बिना नही रहते थे और कयो रहे ।
बाल्यकाम्न ही भविथ जीवनका अरुणोदय नही है क्या
क्या
.
~
४ MnAAA . . ८ . । नेलसन। उत्कष्ट या निकृष्ट बीज इसी अवस्थामें मनुष्य-शरीरमें प्रवेश कर पामरण नही फूलते फनते रहते हैं ? उदाहरण देखो। एक दिन बहुत ही वाल्यावस्था, नेलसन एक चरवाहेक सग पक्षियोंके घोंसले खोजता हुआ अपनी पितामहीके घर निकन पडा और रास्ता भूल गया। भोजनके समय भी व घर वापस नही पाया लोगोको भय होने लगा, कि कही वह यक्षिणियों के हाथ तो नहीं पड गया, परन्तु बहुत खोजनेपर वह एक दुस्तर नदीके किनारे स्थिर भावसे बैठा पाया गया इसकी दाटीने पूछा कि क्यों रे, तुझे अकेले डर नहीं मालूम होता जो यहाँ बैठा है। हमारे होनहार वीरने उसी भावमें उत्तर दिया "दादी' डर । डर क्या वस्तु है। मैंने तो देखा भी नहीं" धन्ध निर्भीक । धन्य तुम्हारा पौरुप ! क्यों न हो। वीर नेपोलियनको नीचा दिखानेवाला, इंगलैण्डको महामान्य बनानेवाला, वीर यदि ऐसा नही कहेंगा तो कौन कहेगा? एक दिन शीतकानको छुट्टी अन्त होनेपर, नेलसन अपने भाईके साथ घोडे पर स्कूल जा रहा था, परन्तु मार्ग हिमा- छादित रहनेके कारण लोट पाया और पितासे व्योरा सुनाया। पिताने कहा “पुत्रो। यदि हिम अत्यन्त ही अधिक हो तो स्कूल जाना ठीक नही, परन्तु पुन एक बार उद्योग करो, इस बार मैं तुमलोगोको मत्वृत्ति पर छोड देता हूँ।" हिम सचमुच हो इतना था, कि यदि वह बहाना करना चाहता तो मन में कर मकाता या परन्तु मत्तत्ति नलमनके लिये वडी -- -- वात यो ।
वाल्यावस्था और वंशपरिचय । ५ उसने अपने भाइयोंसे कहा, "हम लोग अवश्य जायेंगे, भइया। पिताने इस कार्यको हमलोगोंको सहत्तिपर छोड दिया है, इससे पीछे हटना मानो सहत्ति पर लात मारना नेलसन स्वभावसे ही पृष्ट था। इसके लिये कोई काम लेलेना ओर पूरा करदेना बाये हाथ का खेल था। कैसा भी भारी काम क्यों न हो, यह कभी घबराने वा डरनेवाला पुरुष नही था। एक दिन पाठशालाके लडकोंने मिलकर गुरुजीके बगीचेसे पके सेब चुराने चाह , परन्तु इतना साहस किसौम नही था कि प्राचीरके भीतर जाकर सेव चुरा नावे। नेलसनने कार्यको स्वय ही अपने हाथों लेकर, उन लोगोसे कहा कि मुझे रातके समय कपड़े में बांधकर खिडकीके नीचे लटका दो तो मैं तुम लोगोको सेब लादूँ। ऐसा ही किया गया , नेल- सनने सब सेब लाकर लडको विभत कर दिये, परन्तु अपना भाग उसने एकदम नहीं लिया और उत्तर दिया कि तुम लोग भयभीत थे इसी कारणसे मैंने यह कार्य सम्पादन कर दिया दूसरा परिच्छेद। भिन्न भिन्न जहाजॉपर और स्थानोंमें स्थिति । Sum क दिन वसन्त ऋतुमें, प्रात ममय ही नेल- सनका सेवक वेल्सहम पाठशालामें एक पत्र लेकर पहुंचा। नेलसनने आज्ञापत्र आया जान, शंकित हृदयसे पत्र खोला। सचमुच यह वही अपेक्षित पत्र था, जिसमें नेलसनको जहान पर काम करनेकी पाजा थी। नेलसन तो अब अवश्य जायगा। देश, इष्ट, मित्र, परिवार सभी छूटेगे। ऐसे कम वयसमे प्रिय वियोग कैसा अखरता है, सहदय पाठ खूब जानते हैं। वाल्यकालके सगो एक साथके खेलनेवाले मित्र आज छूटते है। क्रीडामें आनन्द देनेवाले सहोदरोसे अब फिर भेट हो न हो, कौन जाने। आज सहृदय नेलसनका कोमल कलेजा इन बातोंको सोच सोच बैठा जाता है। आज इसके लिये रगमें भग है। बडे टु खसे नेलसन अपने पिताके साथ घर छोड लण्डन पहुंचा। 'रेजनेबुल' (Raisonable) इस समय 'मेडवे (Medhay) में पड़ा हुआ था। नेलमन अब 'चैथम' ( Chatham )
भित्र भित्र जहानोंपर और स्थानों में स्थिति।
जानेवाली सेज-गाडीमें बैठा दिया गया। वहां पहुंचने
पर वह यात्रियोंके साथ जहाज़ पर चढनेको गाडीसे
उतरा।
गीत बडे ज़ोरसे पड रहा था। बिचारा अनभिज्ञ युवक
जहाज़ पर चढनेके लिये इधर उधर भटकता फिरता था।
इतने में इसकी किसी एक नाविक से भेट हो गई। पूछते
पाछते नाविकको यह मालूम हो गया कि नवयुवक कप्तान
सक्लिङ्गका भान्जा है। उसने कपाकर इसे घर ले जाकर
पूरे सत्कारमे प्रसन्न किया और जहाल पर चढा दिया। घरि-
त्रनायक्का प्रथम टु ख अभी विल्कुल समाप्त नहीं हुआ था।
जहाज़पर जानेपर ज्ञात हुआ, कि न कप्तान सकलिङ्ग हो वहाँ
हैं न किसी नाविकको इनके आगमनको खबर ही दी गयी है।
बिचारा बालक दिनभर नौका पर घूमा किया , परन्तु किसीने
इस पर ध्यान तक न दिया। दूसरा दिन भी योंही बीता
चाहता था, कि किसी कपालु नाविकने सपा कर इसे खाने पीने
के निमित्त कुछ दिया।
नेलसन अपनी स्वलिखित जीवनीमें लिखता है, कि यद्यपि
नाविकोंका
समूचा
जीवन अनेक टु खोसे परिपूर्ण रहता है,
यद्यपि उनका हृदय भविष्य विचार और भूत लोगोसे विदीर्ण
हुआ करता है, यद्यपि अनेक दुर्घटनाओं तथा अनेक दु खोसे
उनका हृदय क्षत विक्षत होता ही रहता है, तथापि जितना
प्रेम और समधुर वचनोंका प्रभाव, जितना मानसिक कष्ट
८
नेलमन ।
॥
प्रथम गृह-विछोहके बाद अनुभव होता है उतना कभी भविष्य
जीवन में होनेकानही।
युवक नाविकों को अपने समय सुखोंका, यहां तक कि "रेन
नौद अरु बासर भोजन"तकका भी परित्याग करना होता है।
इमन्नोगोंका चरित्रनायक शरीरसे अत्यन्त दुर्बल तथा
रोगी था। अत आदिमें जिन टु खोका अनुभव उसने किया
था, उन्हे वह आमरण विस्मरण न कर सका।
रेजनेबुल ( Raisonable ) स्पेनके झगडेके लिये किराये
किया हुश्रा जहान था। ज्योही स्पेन (Spain) सरकारसे सन्धि
स्थापित हुई , त्योंही इसको जवाब दे दिया गया और सक्लि-
को बटलो ट्रायम्प (Thumph) जहान पर हो गई । नेलसन
भी साथ हो गया। ट्रायम्फ ( Triumph ) इन दिनों टेम्स
(Thames) में रक्षकयान था। एक चञ्चल नवयुवकको चुपचाप
रक्षक-यान पर मक्खियाँ मारना कब भा सकता थाचरिवनायक
उद्योग कर वेष्ट इण्डोन ( Vest Indies ) जानेवाले एक
वाणिज्य-यान पर समयका सदुपयोग करने चला। यह जहाज़
कप्तान सक्लिङ्ग के पूर्वाधीन कप्तान जान रायबोन (John
Rathbone) को अध्यक्षता में था। नेलसन इस यात्रासे
एक निपुण नाविक होकर लौटा, परन्तु सरकारी नौकरीसे
इसे आन्तरिक घणा हो गई। नेलसन इस कहावतको कि
"करे सिपाही नाम हो सरदारका" सदा दोहराता था।
राथबोन ( Rathbone) कदाचित अपने नाव्य जीवनमें
।
भिन्न भिन्न जहानांपर और म्यानाम स्थिति।
2
---
उहिग्न और हतोत्साह हो गया था, प्रत बहनेलमनका मुह
दभायमे ऐसे जीवन में प्रवेग करनेमे मदा पर्जता था।
ननमन वापम पानके याद, उसके मामा कप्तान मयाम्लिङ्ग
ने उसको अपने महालपर ले लिया। कसानने इमको नाभ्य
विद्या भोवनमे अरुचि देखकर, अनेक उपाय अनुनय कराने के
किये और उत्साह टिया, कि यदि तुम नाव्य-विधाम पूर्ण
दक्षता प्राप्त कर नो तो तुमको प्रधान अध्यक्षयान अनुगत
लम्बो ड गी पर चटकर बनने का प्रमामान्य अधिकार शीघ्र ही
प्राप्त होगा। इम प्रकार उत्साहित हो, कुछ हो कालमें,
नेलमन चयम ( (huth im) मे टावर (Torrer ) तक तथा
म्वोम (Sucam ) को साढीम नार्य फोरलैण्ड ( North
loncl ind) तक भान जानवाले जहानमें कर्णधारका
कार्य वही निपुग्यता से करने लगा। साथ ही साथ समुद्रा-
न्तर्गत पर्वतों और बालुकामयो कृलोमे पूर्ण अवगत हो गया।
नेलसनको अपने भावी जीवनर्म इस शिक्षाले मधुर फन्नका
स्वाद ग्बब ही मिन्ना।
नेलसन ड्रायम्म ( Tiumph ) पर अपने मामाके माथ
वहुत काल तक नहीं रहा। नये नये साहमिक कार्योक
करनेकी नालसा नेनसनकै समुन्नत हृदयमें लहरा रही थी।
इतनेम इमने सुना कि दो आविष्कारक यान उत्तरीय ध्रुवको
खोजमें प्रस्थान करनेवाले है। अब तो मेलमनको लान्नमाका
ठिकाना नहीं रहा। यात्राको अनेक कष्टमय जानते हुए भी,
नेलसन। ww .. WL NANA AAMAn www उसने उत्कट उद्योग उस यात्रामें जानेका किया और अपने मामाको सहायतासे सहकारी कप्तान लटविज ( Letwdge ) के आधीन कर्णधार नियत हो गया। यह आविष्कारक यात्रा रायल सोसाइटी ( Royal Society ) के अनुरोधसे की गई थी। दोनों जहाज रेचहोर्स (Rech Horse) और कारकैस बोम्ब ( Careas Bomb) बडो उत्तमतासे सजाये गये थे तथा 'दो ग्रीनलैण्ड निवासी (Esquimaur) निपुण कर्णधार भी भरती कर लिये गये थे। जहाज ४ थी जूनको प्रस्थान कर गये। ६ ठो जुलाई को, चहौर्स (Rech Horse) एक स्थान पर, जहाँ अनेक आविष्काशी के जहाज़ रुक गये थे, हिम- वक्ष हो गया। बडे परिश्रम से २४ तारीख तक जहाज उत्तर और पश्चिम की ओर ठेले गये, परन्तु उसके बाद ये ऐसे अटके कि उद्धार दुष्कर हो गया। दृष्टि जहाँ तक जाती यो केवल तुषार के खेत पट ही दीख पलते थे दूमरे दिन कर्णधारों के आदेश से नाविकों ने जहान के लिये १२ फीट चौडा रास्ता पश्चिम की ओर काटना प्रारम्भ किया , परन्तु इतने कठिन प्रयास से भी जहान केवल ३०० गज आगे बट मका। दिन पर दिन बीतने लगे। उदार के सब उपाय पूर्बो या उत्तरी पूर्वी वायु के झकोरे बिना व्यर्थ होने लगे। अब कम वयस्क नेलसन को कप्तान ने भित्र भिन्न जहानोंपर और स्थानोंम स्थिति। - मार्ग-अन्वेषक डोंगियो में से एक का समूचा भार देकर मार्गानेष्वण में नियत किया। , तरुणा नेलसन इस समय एक अत्यन्त निर्भीक कार्य कर बैठा। एक दिन पईरात्रिको वह अपने सहचर के साथ एक भानका पीछा करता हुआ निकल पडा। कुहासा खूब पड़ रहा था। बस, थोडोहो देर में ये नोग दृष्टि की ओट हो गये। कप्तान लटविन (Letiridge) इत्यादि इन लोगों के लिये विकल होने लगे, परन्तु दूसरे दिन सुबह तक कोई टोह इन प्रगल्भ नाविको को न मिली। भाग्य से दिन निर्मल था। लोगों ने दोनो जनों को दूर पर एक भयानक भालूका सामना करते हुए पाया। दोनों को वापस आने के लिये मकेत किया गया। नन्नसन के सहचर ने उसका ध्यान सकेत की ओर आकर्षित भी किया परन्तु व्यर्थ । बन्टूक भालू को मारने के लिये छोडता जाता था। यहाँ तक कि पास को कुल्न गोली बारूद खतम हो गई । अब नेलसन के जीवन में सशय हो गया। वह भयानक भाल्नु चुटेल होकर मेघगर्जन करता हुप्रा नेलसन पर झपटा। यदि उस ममय भाल और नेलसन के बीच बर्फ पिघल- जाने से एक छोटी नदी नहीं बन गई होती तो नेलसन को जीवनी दो चार पवे में यही पर परिशिष्ट हो जाती। परन्तु परमेश्वर ने मानों स्वय एक छोटी निर्भग्नी के रूप में नेलसन पोर भाग्न के बीच मे पडकर होनहार बोर की को वह बार नेलमन। C-APA 4 नेलसन ने चिमाकर अपने मायो मे कहा 'मित्र में कप्तान के सकेत को पर्वाह नहीं करता। मुझको तो किसी प्रकार इस राक्षस के निकट पहुँच कर, अपनो बन्दक के कुन्दे से ही इसे यमपुरी पहुँचाना है। सेनापति ने दोनों भाविको पर विपत्ति पाई जान, अपनो बन्दुक को गोली मे भानुको यम- पुगेका रास्ता दिखनाया। नोका पर वापस जाने पर, कप्तान ने मेलमन को बहुत जली कटी बातो से भमना की पौर ऐसे हु.ममय में शिकारका पीछा करने का कारण पूछा। नेलसन ने होठ चबाते हुए उत्तर दिया-"महाशय ! मै रीछको मार, उसके चर्म का उपहार पिता को देना चाहता था। (नेलसन जब कभी उद्विग्न होता अपना होठ चबाने लगता था)। मार्ग-अन्वेषक डोंगियो ने समाचार दिया कि निकट ही एक होप में पूर्वीय वायु बह रही है। दोनो कप्तानों ने श्रापस में यह गय ठहरायो कि जहान को छोडकर सब कोई डोगियों पर सवार हो रवान हो जायँ। परन्तु नवी अगस्त को उत्तरी-पूर्वीय वायु के झकोर ने जहान को भागे ठेल दिया। दूसरे रोज मध्याह होते २ वायु के ठेलों से भाग्यवश जहाज समुद्र में पहुँच गया और सिमनवर्ग (Semmabuugh) के नौकाश्रय में जहाज़ ने लगर डाला। यहाँ हमारी बोर- मगडलो कई दिनो तक डेरा डाले रही। इस स्थान पर किमो प्रकार के जीव कोडे मकोडे नही पाये जाते थे। पहाड के टरें हिम के बडे २ टुकडो से खचित दीख पड़ी। ये ।
भिन्न भिन्न जहागौपर और स्थानोम स्थिति।
दूर से अत्यन्त सुन्दर हरे रङ्ग के मालूम पड़ते थे । जहाँ तक दृष्टि
जाती थी हिमहो हिम था। कही कही तुषाराच्छादित पर्वतों
से छोटी छोटी निर्भरणियाँ नीचे गिर कर मानों धर्क वीरो का
मनबहलाव कर रही थी। वेडा यहाँसे प्रस्थान कर खुशी खुशी
इंगलैण्ड पहुँच गया।
हम लोगोके चरित्र नायकने गदगद हृदय से मामा का
चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। मामाने इसे पुन सी होर्स
(Set-horsc ) पर एक नौकरी दिला दी। यह जहान ईस
इण्डोज ( East Inulies) को जानवाला था। इसीपर नेन्नमन
पागेके
मस्तुलपर
प्रहरीका काम करने लगा।
चरित्र नायकन अपने उन्नत चरित्र से अपने कप्तान शेरीज
( Shener') को मोहित कर लिया और इनकी सहायता से
बहुत गोघ्र ही मिडशिपमैन ( Aidshipman) को जगह
'बहाल हो गया।
यात्रा प्रारम्भ में नेलसन का मुख अत्यन्त प्रफुल्ल और शरीर
अत्यन्त सन्नद्ध और पुष्ट हो गया था। परन्तु इस इण्डोन
(Tast Indies ) के दूपित जलवायुने चरित्र नायक के बन
और स्वास्थ्य का झास करना प्रारम्भ कर, अठारह महीने में
इसे बिल्कुल पस्थि चर्मावशिष्ट कर दिया। डाकरोंने जवाब
दे दिया। अब ईंगलेगड़ नौट अानेके अतिरिक्त और कोई
उपाय बाकी नही रह गया। अन्त में 'डोलफिन' (Dolphu)
जहाज मे यह स्वदेग लोट पाया। डोलफिन के कप्तान पिगट
१४
नेलसन।
NAMAN
AnnNAAMAAna
( Pigot ) ने इसकी सेवा सुश्रूषामें कोई त्रुटि न को और वह
इन्ही की सपा से खदेश सकुगल लोट भी सका।
ईस इण्डीन (East Indies) की यात्रा में चरित्र-नायक
को होनहार सर चार्लस पोल्स ( Sir Charles Poles )
और ट्वीन । Travedge ) प्रभृति अफ़सरोसे जान पहचान
हो गई। इसको उस देश से लौट आने का बड़ा शोक था।
वहाँ का नुतन मनोहारी दृश्य अत्यन्त रमणीय था। ईष्ट
इण्डोज़ ( East Indies ) से स्वदेश-प्रागमन का वर्णन बडे
मनोहारी शब्दों में इस ने स्वय यो किया है-"मुझ दृढ विश्वास
होगया था, कि अब मैं अपने जीवन में हतार्थता नहीं प्राप्तकर
सकता है, मेग चित्त उन कष्टोको जिन पर मुझ विजय पाना
अत्यावश्यक था सोच २ कर विचलित होता जाता था। मुझे
सहायता करनेवाला ससारमें कोई नही दीखता था । मै अपनी
कीर्ति स्पृहा के विषय को प्राप्त करने का कोई उपाय न खोज
सका। बहुत काल तकके सान्धकार चिन्तन के बाद मेरे हृदय
में सहसा स्वदेश प्रीतिका विद्युत-प्रदीप चमक उठा और मेरा
देश और देशाधिप ही मुझे अपना सवईक और उपकारक
बोध होने लगा। उस समय मैं दृढभावसे बोल उठा, कि मै अवश्य
हो वोर हूँगा और भाग्यपर विश्वस्त होकर सकल दुख कष्टो
का सामना करूंगा।" इसके बादाभी नेलसन अपने इन अनु-
भवों का कथन बड़े प्रेमसे करता था और उसी समय से वह
सदा कहा करता था, कि उससमय मेरे अन्तर्नेत्रो में एक
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. भिन्न भिन्न जहानोंपर और स्थानाम स्थिति । प्रज्वलित विम्य आन्दोलित होकर मुझे कीर्ति अभिमुख प्रेरित कर रहा था। पाठक । आप विचार कर सकते हैं, कि नेलसनका पहिला विपण मनोविकार यथार्थ में उसको अन्तरामा का नहीं वरन् रुग्न शरीर और खिन्नमनको छाया मात्र ही थी। नेग्नसन की भो दृढ विश्वास था, कि वह पथ दर्शक आलोककी किरणें, जिन्होंने इसे महामान्य तथा जगदादर्श बनाया है मनोविकार न होकर सचमुच ही स्वर्गीय आलोक धौं। नेलसनका सहायक मामा, जैसा इसे बोध होता था, एक- दम तुच्छ नहीं था। इसके पीछे कप्तान सकलिङ्ग नौकायनी का पविक्षक नियत हो चुका था। स्वदेशागमन पर नेलसन का खास्थ्य अच्छा हो चला। नेनसन अपने मामाको कृपा से इस समय वरसेसर ( Worcester ) का लेष्टिनेण्ट (Lieutenant) नियत किया गया और १७०७ ई० में जिया न्टर (Gibralter) से लौट आने पर १८ वर्ष की उम्र लेफ्टिनेन्सोको परीक्षा में उत्तीर्ण भी हो गया। पाठक । यहाँ पर मै कप्तान सकलिङ्ग के कुछ उत्कट गुणों का परिचय भी, एक उदाहरण दे, आपसे करा देना उचित समझता हूँ। पूर्व कथित परोक्षामें सलिङ्गनेलसनको परीक्षाका प्रधान अध्यक्ष था। ननसन जब तक अपने प्रश्नीका उत्तर देता रहा, आप चुपचाप बैठा देखा किया। और और परोक्षकोंसे इस का नाम भी न लिया कि विद्यार्थी मेरा भाञ्जा है। परन्तु जब नेलसन। AMAnnrnwwwvm Wwww नेलसन बहु सम्मानके साथ परीक्षोत्तीर्ण हो चुका तब आपने परीनकोसे नेलसन को अपना भाञ्जा बताकर परिचय कराया। परोक्षको के पहिले परिचय नही करानेसे पाचर्य प्रगट करने पर आपने कहा, मै कदापि नही चाहता था कि नेल- सन अनुग्राय होकर परोक्षोत्तोर्ण हो। मैं जानता था कि नेल- सन अपनी ही योग्यता से परीक्षोत्तीर्ण होगा और यही हुआ - भी। दूसरे ही दिन नेलसन जमाइका ( Jamaica ) जानेवाली लो साफ ( Lon Stall ) महायुध-नौका पर सहकारो लेफ्- टिनेण्ट नियत हुआ। इन दिनों अमेरिकन ( American ) लोगोका हौसला बढा हुआ था। ये लोग फ्रचो (Piench ) से मिलकर इंगलैण्डके वाणिज्यका ह्रास कर रहे थे। लो साफ ( Lov Staff ) ने नौका शत्रु के एक ऐसे जहाजको एक मुठभेड में पकड लिया जिसे अमेरिका (America ) सरकार की ओर से लेटर ओंव मार्क । ( Lotter of Marquc ) मिलाया। इस समय वायु भयानक तूफान होकर बहने लगी, समुद्र उबलने लगा। कप्तानने ऐसे समय में पहिले लेफ्टिनेण्ट को + "नेटराव माक" एक ऐसा पानापन है जिसे किमो देशकी सरकार अपने लुटेरे नाविकों को देती है और प्रसिना करती है कि गवुदान के लुटने में उनकी नौकार्य यदि नष्ट हो जाये तो मरकारी म्टजाने से उनको पनि प्रति को जायगी।
भिन्न भिन्न जहानोंपर और स्थानों में स्थिति।
HumMwAA
अभी को जीतो हुई शत्रुको गौका पर जाने को भाजा दी।
लेटिनेण्ट अपने को अस्त्र-शस्त्र से समित करनेको नीचे
उतरा, परन्तु विलम्ब करने के कारण लोगो ने इसको भयभीत
होकर छिप गया समझा। कप्तान को जब खयर मिली, उसने
नोका पृष्ठ पर आकर देखा तो विजित ग-नौका को निकट
ही उभ-चुभ करते पाया। नौका के जन-मग्न हो जाने के
भयसे व्यग्र होकर कप्तान चिल्ला उठा 'क्यो आज हमारी नौका
वोर शून्य हो गई। क्या कोई योर शत्रु-नौका पर चढ कर उसे
अपना नहीं सकता ? हमारे चरित्रनायकको ऐसा ताना कब
सह्य हो सकता था? परन्तु हठात् भागे बढना उचित न समझा।
इतने में नेलसनके सहकारी लेफटिनेण्टने शत्रु-नौकापर जाने
की इच्छा प्रगट को, परन्तु चरित्रनायक उसे पोछे खीच, सिह
की नाई कुलाचे मार डोंगी पर गया और बोला "भाई।
तुमसे पहिले यह हमारी बारी है , परन्तु यदि मैं विफल लौट
आया तो वह तुम्हारी होगी।" शत्रुको नौका भारो बोझके
कारण माय जल मग्न थी, परन्तु नेनसन इसको पर्वाह न कर
जहाज़पर चढ गया और बहुत सा जल नौकासे निकाल कर
उसे बन्दो कर लिया।
कालकी कराल गति क्या कभी फेरे फिरती है ? लायों
उद्योग, करोडों परियम, मृत्यु के निर्दिष्ट समय में हेर फेर करने
को करो , परन्तु मनोरथ सफल कभी होनेका नही। नेनसन
को उन्नत अवस्था देखना कप्तान सलिगको बटा न था। इसी
नेलसन । mona -rrrnamnnnnnn. समय उनकी मृत्यु का टुसमाचार नेलसनको मिला, परन्तु कर्म को रेख मेख कौन मार सकता है, यह विचार कर चरित्र- नायक ने सन्तोष किया। नेलसन अपने प्रधान कप्तान लोकर (Locker) का अत्यन्त कपा-भाजन हो गया था। उसके उद्योगसे यह ब्रिटिश फैग शिप ( British Flag Ship) पर नौकरी पा सका । लेक्टि नेण्ट कौलिगड (Collingwood ), चरित्रनायक का हृदयङ्गम मित्र, उसके स्थानमें लोसाफ पर बहाल हुआ। हम लोग देखेंगे, कि जब कभी नेलसनकी पदोबति होती थी उसके अन्तरङ्ग मित्रकी उन्नति भी अवश्यम्भावी घी, क्योंकि बडे अध्यचके ये दोनों जने कपापात्र थे। नेलसन शीघ्र ही प्रथम लेफ्टिनेण्ट हो गया और पाठ दिसम्बर १७७८ को बैजरनग ( Badger Brng) नौकापर सेनाध्यक्षका पद सुशोभित करने लगा। नेलसनकी प्रत्युत्पन बुद्धि तथा इसके असीम वुद्धि चातुर्यको देख कर मन मुग्ध हो जाता था। जिस समय बंजर (Badges) जमैका के मौग (Montague) की खाड़ी में लगर डाले हुए था, जहाज़ में अग्नि लग गई। अग्नि ने भयानक रूप धर लिया करीब दो घण्टों मजहान धाय धायँ कर जल्न गया। नेलसनने भावी दुर्घटना को श्राशदा से अपने जहाज़ परके गोले बारूद को नौका पृष्ट पर फिकवा दिया और तोपों का मुख ऊँचा निकटवर्ती एक AARAMAN AAAAAAAAAAAAAA भिद्र भिन्न जहाजोपर और स्थानोमें स्थिति। कर दिया। अपने उद्योग से नेलसन ने सैकडों बल्कि इजा- रों मनुष्यों की प्राण रक्षा को। ११ जून सन् १७७८ में नेल- सन लोसाफ (Low Staff) पर से बदल कर हैनचिनबूक (Haunchinbrook) का कप्तान नियत हुमा । इसी समय लोसाफ (Lor Staft), जिस पर नेलसन पूर्व में था, एक जहाजी बेड़े के साथ एक अमेरिकन (American) किले पर धावा कर विनयीहुआ। जीत को लूट में प्रत्येक नाविक ने बहुत धन प्राप्त किया। यह समाचार जब उनत हदय उदार नेलसन ने सुना, तब वह साधारण प्रकृति-विरुष ऐसे सुकार्य में अपनी परोसता पर कदापि दुःख प्रकाश कर उद्विग्न न - तीसरा परिच्छेद। जीवन प्रभात। वन का ब्राह्म मुहर्त बीत गया भविष्य दे. जी दीप्यमान जीवन के आगमन सूचक अरुणो- दय को लाली के दर्शनमात्र से ही लोगों ने कहा, यह जीवन प्रभात हुआ। यवनिका के पीछे नटों ने धुंधली ज्योति में यद्यपि मनो. हारी दृश्य दिखलाया, परन्तु मन न भाया। कुछ काल के निमित्त पटाक्षेप हो गया। सहसा घण्टी बजी। नाट्यशाला की ज्योति पूर्ण दीप्त हो उठी! यवनिका उठने लगी। लालायित दर्शकों की दृष्टि तत्काल नवरजित दृश्यों पर पडी, आनन्दित हो बोल उठे “बस ठीक है। यह नायक का जीवन- प्रभात हुभा।" पीले पत्ते वृक्षों से भर गये। कोमल मुकुलित कोपल निकल पडे , परन्तु किसी ने दृष्टि-क्षेप नहीं की। अब मुख बन्द पल्लयोंके प्रफुल्लित होते ही कोकिन्न, पिक, सारिकों ने क्ष के जीवन प्रभात पर बधाई दी। , AAAAAM AA जीवन-प्रभात। वाल्यकाल को वाल्य क्रीडा अब अन्तिम रात्रि का स्वप्न हुई, अब यौवन का पदार्पण हुआ। मूछों को अस्पष्ट रेखा पूर्ण-मयत में काली छाया को नाई स्पष्ट हो गई। शरीर पर यौवन, बल और कान्ति को हधि हुई। तब हम लोग अपने चरित्र-नायक के जीवन प्रभात पर क्यो न बधाई देवें ? पाठक ' अब हमारे चरित्रनायक का इक्कीसवाँ वर्ष शुरू हुआ। यौवन के विकाश के साथ ही साथ जीवन में उल्लास को भी हदि होने लगी। वर्षों के एक से इकोस होते ही नेलसन का पद भी उत्तरोत्तर एक से इक्कीस होने लगा। वीर युवक अब कर्णधार नेलसन नहीं वरन् कप्तान नेलसन है। नाव्य-जीवन की कुल ख्यातियों और प्रतिष्ठाये अब इसके हस्त-प्राप्य होचली है। यद्यपि अभी तक कोई सावकाश उत- कर्ष प्रतिष्ठा लाभ करने का नेलसन को प्राप्त नहीं हुआ है तथापि वह अपने व्यवसाय में पूर्ण दक्ष हो गया है और परिचित ससार में इसके गुण गौरव और उत्साह का वर्णन बडी धूम से होने लगा है। एक दिन एकाएक खबर मिली, कि स्पेन सेनापति सवा सौ जहानों के वेडे भोर पञ्चीस सहन उनट सेनाओं के सङ्गज- माइका (Jamaica) होप पर आक्रमण करने को बढे जाते नेलसन ने इस सुअवसर को हाथ से जाने देना उचित शीघ्र ही उद्योग कर, पोर्ट रॉयल ( Port Royal) के फोर्ट चार्न स नामक फिलेके सोप खानेका पर्या- न मामझा।
२२ नेलमन। ANMAJAN .. वेक्षक नियत हो गया। कैयन्त सात सहन सेना इकट्ठी हो सकी। पाठक विचार करे, कि केवग्न सात महस्र सेनाओं से पञ्चीस सहन सेनाओं का सामना करना कमा दु साध्य है परन्तु नेलसन इस बात से किश्चित भी सकुचित नहीं हुआ। विचार यह ठीक हुपा, कि उत्तरीय तथा दक्षिणीय स्पेन प्रदेशों के बीच में बैठकर उनके सङ्गम का विच्छेद करना चाहिये। १७८० ई० के शुरू में, नेलसन के पाधीन पाँच सौ मनुष्य नियोजित कार्य करने के लिये प्रेसिअस t (Gracias) अन्तरोप को चले। वहाँ पहुँचने पर उन लोगों ने भयभीत ग्राम- वासियों को सन्तुष्ट कर अपना सहचर बना लिया। स्थान पर ठहरता, अपने सहायक इण्डियनों (Indians) को एकत्रित करता हुपा, २४ मार्च को यह छोटा सैन्यदल सेनजुवन नदी (R. Sanyuan) पर पहुंच गया। इसी नदी पर सेनजुवन का किला (Sanjuan Fort) दृढ भाव से खडा है। इसका हो विजय करना मानों अपेक्षित युक्ति में छतकार्य होना है। यहाँ से ही नेलसन को लौट आने की प्राजा थी, परन्तु कोई ऐसा योग्य पुरुष सेना में नहीं था जो मार्ग से अवगत हो। अस' नेलसनने ऐसे समय पर छोड कर लौट जाना उचित नही समझा। करीब २०० सैन्य जस्त मार्ग से रवाना हुई। नदी में नल प्राय सूख गया था। बड़ी २ यह पनरोप पमेरिकाक Afosquito const मोकाटी शान के निकट है।
ARRARHam काटा कि साछ हो कान में विचागचन बमा घण्टे भरके शरीर सुड गया था। चरिद्य नाय मो एक दिन २ " जीवन प्रभात । कठिनाइयों से नौका चलाई जाती थी सैनिकों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। दिन में कडी धूप और रात में भोस से ये व्याकुल हो जाते थे। ८ एमिल को चरित्र-नायक ससैन्य मेन बोर्टीलोमिपो (San Bortolomeo) के होप में पहुंचा। यह स्थान स्पेन वालों का एक छोटा मोर्चा था। यहां केवल १६ या १७ प्रहरियों के रहने का स्थान था। वीर नेलसन अपने नाविकों के साथ किनारे पर कूद पडा, परन्तु स्थान बिलकुल दलदल था। बडी कठिनाइयों से नंगे पैर ये लोग किले पर चढ धाये और तोपों पर खत्व जमा इस स्थान से १६ मील पूर्व ओर सेनजुवन (Sanjuan) का दुर्ग था। रास्ता अत्यन्त विकट और दुर्गम था। प्राट कोम तक बराबर भयानक जङ्गल हो जङ्गल था , ठौर ठौर पर कुत्र ऐसा टुप्पार बन गया था कि मनुष्य क्या पक्षियों का भी फट- कना असम्भव प्रतीत होता था। नेहमन इन टिनाया को कुछ भी ध्यानमें न लाकर, नगाल झाटमा छोटता धमने लगा। एक दिन एक सैनिक के मेव में एक प्रेम विवनि सर्प ने बाद लोगों ने जो देखा तो विय की गर्मी मे सेनिक लिया। - २४ नेलसन । A mmonwMA से एक भयानक दुर्घटना से बचा। एक रात्रि को वह वि- स्तर पर वृक्ष के नीचे सोया था, कि मुख पर एक कोडे के रेगने से एकाएक उसकी नीद खुली। वह घबडा कर जो उठा तो पैर के नीचे एक बड़े विपले अनदहे को बैठा पाया। प्रजदहा मारा गया और वह साफ बच गया। भला अदृष्ट को तो इसके हाथ मे ससार के अनेक कार्यो को सिद्ध कराना अभोष्ट था। युद्ध क्षेत्र में विजयोल्लास-पूर्ण हृदय के साथ इसकी वीर मृत्यु भय्या वननेवाली थी, तो फिर अनदहे के विय से इसके प्रागा जाय तो क्यों कर दूसरा उदाहरण चरित्र-नायक पर अदृष्ट की कृपा का सुनिये। एक दिन नेलसन प्यासा होकर जनकी खोज में इधर उधर भटकता फिरता था, इतने में इसको दृष्टि सुदूर एक निर्मल करने पर पड़ी। वहाँ जाकर इसने भर पेट जल जल एक प्रकार के विषैले पौधे के ससर्ग से दूषित हो गया था। जल के विष से इसके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव तो अवश्य पडा, परन्तु उसको गरल शक्ति इसे मार न सकी ११वी तारीखको बोरटोलोमियो Bortolomeo)लेनेके दो दिन बाद हम लोगोंका वोर सैन्यदल मैनजुवन (Sanjuan) किले पर घेरा बाँध कर बैठ गया। नेलसन को निर्भीक स- म्मति तो किले पर चढ जाने और लड़कर विजय प्राप्त करने की थी, परन्तु बिना प्रधान सेनाध्यक्ष की प्रान्ना के ऐसा कठिन पी लिया।
जोवन प्रभात ।
4.
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कार्य कब हो सकता था। अस्तु । दम दिन इसी सोच
विचार में बीत गये। दुर्ग का जीत लेना कुछ ऐसा कठिन
कार्य न था परन्तु भूमि पसम होने के कारण कठोर
परिथम अपेक्षित था। २४ तारोग्य को नेलसन को
वोरता चौर सैनिकों की सहिष्णुता से दुर्ग विजय ही
गया।
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इस समय सैनिकों में भयानक रूप से महामारी का
प्रकोप हुपा। इतने मनुथ मरे कि निकटवर्ती नदियों
मृतकों से भर गई। दो सौ मनुष्यों में से इसके तो केवल
१० ही जीवित लोटे । शत्रुप्रो पर विजय प्राप्त करके भी दैव से
यह सैन्य-समूह पराभव हो हो गया। नेलसन भी अछूता न
बचा। कुछ दिनों के बाद यह भी आमातिसार हारा भयानक
रूप से पीडित हुआ। शोधही यह जमैका होप में लौट
आया और जैनस (Janus) जहाज़ का कप्तान नियत हुआ,
परन्तु भूत दुर्घटना से इसका स्वास्थ्य अत्यन्त बिगड गया था,
अत अपने काम पर न शीघ्रहो छुट्टी लेकर स्वदेश लौट
पाया। रोग ने और भी भयानक रूप धारण किया। जलवायु
बदलनेको जब यह बाथ (Bath) शहर में जा रहा था, मार्ग में
हिलना डोलना कठिन हो गया था। रह २ कर यह व्यथा से
चीकार
तीन मासमें परमेश्वरकी कृपासे यह पुन चड़ा हो गया
पौर लाइन (London) भाकर इसने पुन वृत्ति के निमित्त
कर उठता था।
ननमन Ann. Wrywww -anormAnamnnar NAR निवेदन पत्र भेजा। चार मास के बाद अलबरमेल (Alburmail) जहाज़ पर यह कप्तान नियत हुआ। नेलसन का स्वास्थ्य अभी तक एकदम अच्छा नहीं हुमा था। जिस समय वह अपने जहाज़ को यात्रा के निमित्त ठीक कर रहा था, पुन बीमार पड़ गया। अब की बार उसने छुट्टी नहीं ली बल्कि गीतकाल उत्तरीय समुद्र में ही बिताया। बडी कर्कशता से उसने इन दुखों का वर्णन किया है 'जिससे साफ झलकता है कि नाविको के साथ असद तथा क्रूर व्यवहार से वह कितना क्रोधित रहता था। इस उत्तरीय ममुद्र की यात्रा से नेलसन को डेन्मार्क (Denmarls) के कून्नों और खाडियों का ज्ञान पूरी तौर से प्राप्त हो गया था। यह अनुभव प्रागेके दिनों में इंगलैण्ड के (England) लिये अत्यन्त लाभदायक हुआ। नेलसन का अलबरमेल (Albuumail) जहाल उत्तम नही था। खटेश लौटने पर उसको जहान को अनेक त्रुटि- यों की पूर्ति करनी पड़ी। एक दिन जब उसकी नौका डौन (Darn) अन्तरीप में लगर डाले हुई थी, वह्न किनारे पर बड़े अफसर से बातें करने को उतरा, इतने में एक ऐसाभयानक तूफान पाया कि नौका-समूह लगर उखाड २ कर इधर उधर छितर बितर हो गये। अलबरमल (Alburmail) का एक कोष-यान भी इस दुर्घटना से खिचकर निकल गया। नेलसन भयभीत जीवन प्रभात। २७ MAHAARAM AN हुआ, कही यह बालुकामयो कूली में न जा पटके । हठात् वह कूल पर दौड गया । बडे २ निपुण नाविकोको बुधि नौका- पृष्ट पर चढने में चकराने लगी। कुछ वीर उस नौका के रोकने का परियम करने लगे। परन्तु वीरवर नेलसन का साहस टेखकर सब अवाक रह गये । वह कूट कर समुद्र के उफान से कूदते हुए नौका-पृष्ट पर चढ हो तो गया। कोपयान नेलसन के असीम साहस के द्वारा जलमग्न होने से बच गया। चरित्र-नायक को अब क्य बैक (Quveck) जाने को आज्ञा मिली। यद्यपि इसके मित्रों ने और डाकरों ने इस को इस यात्रा जानेसे मना किया , परन्तु उसने भूतपूर्व एड- मिरल सैण्डविच ( Admiral Study eh ) को आजा को उनके उत्तराधिकारी कैपेल (Chapal) साइब से रद्द करवाना उचित नही समझा और कनाडा (Canadi) को प्रस्थान कर दिया। नेलसन बडा हो सटय था। वह दूसरों पर दया दि- खाने मे त्रुटि करना नही जानता था । कनाडा (Caneda) की यावा में अलबरमेल (1lburimatl) जहान ने एक मछली मारनेवाली नौका को पकड़ा। इममे नौका के खामी की कुल कमाई नदी हुई थी। नाविक ने कहा "महाशय ! मेरा एक बहुत बड़ा परिवार घर पर उत्सु कता से हमारे प्रत्या- गमन को बाट जोहता होगा, रुपा कर मुझे बन्दी न कर दया २८ नेलसन। . दिखलावे"। यह सुनकर उदारचित्त नेलसन ने जहाज को केवल छोड हो नही दिया वरन् एक प्रशंसापत्र अपने हाथ से लिखकर दे दिया, जिससे बीच में कोई जहाज उस नौका से अधिक छेडछाड न कर सके । यह हस्त-लिखित पत्र आज सक बोसन ( Boston ) में रक्षित रक्षकर, हमारे चरित्रनायककी असीम दयालुता, कोम- लता तथा उदारताका परिचय ससारको दे रहा है। बोसन ( Boston ) बन्दरसे पार होनेके समय चार फ्रेच जहाज़ोंने अलवरमेल ( Alburmail पर धावा किया, परन्तु नेन्नसनने अपनी नाथ्य विनता पर विश्वास कर बालुकामयी कूलोपर जहानोको खेंचकर फ्रेञ्च नाविकोंको आँखों में ऐसी धूल झोंकी कि वे अपना सा मुँह लिये लोट गये। इस समय की एक घटना विशेष द्रष्टव्य है। बोसूनही में नेलसन एक अयोग्य विवाह बन्धन करनेपर कटिवद्ध हुआ, परन्तु अपने एक मित्र अलखजन्दर डैरोसन ( Alexander Darison ) के विशेष अनुरोधसे ऐसा न कर पाया नहीं तो आज चरित्रनायकका जोयन विषम और विषमय हो जाता। जहान अलबरमेल ( Alburmail ) को एक न्यूयार्क (Non York) जानेवाले देशनिकासित वेडेका भार दियागया था। सैण्डीहुक ( Sandy Hook ) पहुँचने पर नेलसनने प्रधान एइमिग्ल (Admiral ) डिगवी ( Digul ) से भेंट जीवन प्रभात। Avvv -- की। डिगवो (Digvi ) नेलसन पर अत्यन्त कृपा-दृष्टि रखता था। एक रोज डिगयो (Digvi) ने कहा 'मिव । तुम्हारी नूतन स्थिति तो अत्यन्त लाभदायिनी है।" नेलसनने उत्तर दिया, "ठीक है, महाशय । परन्तु वह ईण्डीज़ ( West Indies ) बडा गौरवदायक स्थान था।" चरित्रनायकको व्यवहारदक्षता अब लोगोंपर खूब विदित हो चुकी थी। एक दिन लार्ड इड, सन्निग (Suckling) के एक अन्तरग मित्र,ने राजकुमार विलियम हेनरी (William Henry )से नेलसनका परिचय कराया। उन्होंने कहा 'यदि कुमार गूढ नाव्य विषय पर कुछ पूछनेको इच्छा रखते हो तो इस युवकसे पूछे । नेलसनको छोडकर और कोई कप्तान इस विषयको पूरी व्यवस्था नहीं कर सकता। उस समयसे राजकुमार नेलसनको अत्यन्त प्यार करने लगे और नेलसनको सुन्दरता तथा गुणज्ञताका बखान बड़े प्रेमसे करते थे। जब कभी नेलसन उत्साहसे नाव्यविषयोपर इनसे बात करता तो यही जात होता था कि नेलसनकी विच- क्षण वुद्धिको समता दूसरा कोई नही कर मकता है। पाठक ! जगत्के अनेक मनुष्योका नाम बड़ा हुआ है, अनेकाने विशद प्याति प्राप्ति की है। ऐसे बहुत अन्य मनुष्य देखे जाते हैं जिनमें गुपों का पूरा ममूह विद्यमान हो। परन्तु हम लोगोंका चरिखनायक एक ऐसा ही मर्य गुग्ण सम्पन्न - कर्मवीर या।
नेलसन। ऐसा देखा जाता है, कि जिन मनुष्योको विशेष ख्यातिको अभिरुचि होती है वे अपने ही को सर्वश्रेष्ट मानते और अपने मित्रो तथा आधोनोको गुण प्रशसा कदापि नहीं करते, परन्तु हमारी सम्मतिमें वे नराधम है। विज्ञ पाठक । नेलसन एक आदर्श पुरुष था। इसके सर्वगुणोंमें गुगाग्राहिताका अनमोल गुण प्रशंसनीय था। यदि नीचेसे नीचा सिपाही भी नेलसनको दृष्टिमें कोई विशेष-गुण- सम्पन्न बोध होता तो बिना उसकी बडाई किये वह कदापि नही रहता। नेलसनको अलबरमेन ( Alburmail ) पर को न्यूयार्क (Newyork)वालो यात्रामें ऐसा अनुमान होता था कि बाहमा ( Bahma ) के रास्ते पर फ्रेच लोगोका सामना अवश्य करना पडेगा। लार्ड इड ( Lord Hood ) ने इस पर विचार करते हुए एक दिन नेलसनसे कहा "महाशय । मै अनु- मान करता है कि बाहमा ( Bahma.) के मार्गपर अनेक बार आने जानेसे आपको मार्गका अच्छा ज्ञान होगा।". नेल- सन ने गम्भीर भावसे उत्तर दिया, 'यह ठीक है कि मैं मार्गसे पूरा परिचित अवश्य है, परन्तु मेरा सहकारी लेष्टिनेण्ट (Lieutenat ) इस विषयमें मुझसे कहीं बढा चढा है।" पाठक। इसका नाम सच्ची गुणग्राहिता है। फ्रेच लोग कैबोलो के नौकायय में धंस बैठे थे। नेलसन अपने जहाज पर फ्रेच झण्डा लगाकर 'कैयोलो' . JHANA क 1 । काय पटेग लोट पानेपा यापा, किटमने अपने बीवन प्रभात। और 'नाग्य प्रारा' के बीच टोह लगा रहा था। इतने में एक 'स्पेन का जहान उधर में प्रा निकला। म ममय प्रेनवाले घोंकी सहायता कर रहे थे। नेलसनके नहान ने फ्रन्द भाषामे उसे पुकाग। म्पेनवानीको उमके अंग्रेजी नहाज़ होनेका खप्पम भी अनुमान न था। यात ही बाराम नेनमन ने शवयोंकी सैन्य और जहानीको मग्या मालूम कर लो। सब बात मान्नुम होने पर 'स्पेन' को यह नोका फोरन बन्दी कर ली गयी। उस जीते हुए जहान पर 'नग्मन' मम्राट्का एक गजक- मार प्राकृतिक इतिहाम ( Natural listory ) के नमूने टूटने वाले अपने अनेक मानिक प्रोन मिकि माथ पकड़ा नेनमनने उनके आदर मरकाम ऋष्य युटि न की आवभगतमे उनको अपने माय विमा पिना मार, डोंगियों पर वचन्दताम विचरनेको पाता है दी। परमा उनसे एक पत्र लिखमा निया कि यदि प्रधान सेनाध्यक्षमा इम प्रस्तावको म्बीकार न कर में तो नन नोगीको अयम विना आपत्तिके बन्दी करा देना होगा। गम्ते ही मैं नेनमनको समाचार मिना कि गल गया सन्धि म्यापन हो गई। नन्नमन गीत 'अनयमित ( Alburmul) पर बटेग नीट धाया। नगमनका गया। -
नेलसन ।
KanMNAMhn
PARAN
मिलने के पहिले अपने नाविकोका बाकी वेतन दिलवा दिया।
नेलसन अपने इन कार्यों से नाविक ससारमें सर्व-प्रिय हो
गया। नेलसनको राज्यदरबार में जानेका यह पहला सुप्रय
सर प्राप्त हुआ। दरबारके नियमित सस्कार समाप्त होनेपर
उसने अपने मित्र के सङ्ग भोजन किया।
अपना लोहवर्म
उतार, कर भाज नेलसन सुखपूर्वक मामूली वस्त्र पहिन कर
मित्रोंसे मिलता फिरा। शेष दिन हंसी खुशीमें कटे।
नेलसन प्रतिदिन अपनी नीति कहानो अपने परिजन वर्गो को
सुना प्रमुदित करता था।
नायक का सचमुच हो जीवन-प्रभात हुआ।
पाठक!
।
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नेलसना naHANNA ar~n mins नखर धनका कदापि नहीं हो सकता।" नेलसन अपने समयका सदुपयोग करनेके लिये फ्रान्सको कप्तान मेकिनमरा ( Macanmara ) के सह रवाना हुमा, परन्तु भाग्य पुन इसे स्वदेश बैंच लाया। इसकी प्रिय बहिन ऐनी ( Anne ) को अकालमृत्यु से पिता अत्यन्त दुखी हो गये है, यह सुनते ही वह स्वदेश लौट कर पिताको सान्त्वना देनेके लिये उनके साथ रहने लगा। दुःख शोक तथा प्रिय-मित्र-वियोगको अग्नि यदि मनुष्यके दयमें एक सी कुछ दिन भी रहती, ती समारमें स्वास्थ्य और सुख स्वप्न हो जाते। परन्तु विषोंके लिये ससारमें प्रतिविष समय, विवेचना तथा धर्म हो भयानक शोकाग्निके लिये विपन्न जल है। मनमें शोकको मात्रा ज्योंही बढने लगती है त्योही इनका प्रादुर्भाव होता है और शनै शने इमका ह्रास भी हो जाता है। नेलसनके पिता भी अब स्वस्थचित्त हो चले। पिताको ढाढस बँधा देख नेलसन पुन, फ्रान्स लौट आया और एक अँगरेन पादरी को कन्याके साथ विवाह करनेका उद्योग करने लगा। परन्तु अपनी आर्थिक दशाको होनताके कारण उसने अपनी इच्छा पर बलात्कार विजय यदि चरित्र- नायक चाहता तो व्याहकर अस्प वेतनमें ही दु.खसे निर्वाह कर सकता था, परन्तु उसे अपने कष्टोंमें एक निरपराधिनी स्त्री को सगिनी बनाना सरासर अपनी सत्यत्तिके प्रतिकूल बोध भी है। प्राप्त 1.
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३८
नेलसन।
AMRA
AMANAAN
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एक मिनट के लिये भी नेत्रो से प्रोट नहीं होने दिया , यहाँ
तक कि फ्रान्सवालो को बिना अपना काम किये ही लौट
जाना पडा।
एक दूसरा उदाहरण और भी सुनिये। इस समय अमे-
रिकावाले इंगलैण्ड के साथ व्यापार करके अंगरेनी प्रजा-
नों के उन स्वत्वों का उपभोग-जो अमेरिकावालो को स्वा.
धीन होने के पहिले थे-शासकों को आँखों में धूल झोंककर
करते थे। परन्तु नेलसन को चबाली दिखलाना जरा टेढी
खोर थो। नेलसन ने चट इनको धूर्तता देख ली और इनको
रोकने का उपाय करने लगा। ब्रिटिश प्रजा इन धूर्त व्यापा-
रियो के कारण बडे घाटे में रहती थी।
एक दिन जब ऐसे कई जहाज़ बन्दरगाह में पा लगे, तम
नेलसन ने प्रधान अध्यक्ष से मिलकर पूछा, कि हम लोगों को
क्या देश के व्यापार की ओर ध्यान देना नही चाहिये? क्या
हम लोगो को सरकार के नेविगेशन ऐक (Navigation
Act) के प्रतिपालन का उद्योग नही करना चाहिए?
ये धूर्त व्यौपारीगण नित्यप्रति हम लोगोको प्रजा के
व्यापार का हास करते है, अत इनको रोकना हम लोगो का
"
.
धर्म है।
प्रधान अध्यक्ष ने उत्तर में कहा, कि Navigathan Act
की कुछ खबर मुझे नही है, न इन्हे रोकने की कोई आज्ञा हो
है। नेलसन ने पूर्वोक्त कानून को दिखना कर अपने कथन का
परदेश यात्रा और विवाह । ३८ ANAPAN AAAAA AhA AAAP AA AN समर्थन किया, और अभिम्नषित पाना उसने ले ही कर छोडी। मेजर जनरल सर टाम्स शरली (Major General Sir Thomas Surly ) साइब गवर्नर से भी इन बातो पर नेल- सन का भारी वादानुवाद हुपा। शरली साहब ने चिढ कर एक दिन कहा, "मैं तुम्हारे से छोकरो से गूढ विषय पर वादाविवाद करना नहीं चाहता।" नेलसन तो अपने कमी करने पर दृढ था, बोल उठा, "महाशय । इंगलैण्ड के वर्तमान राजमन्त्रो मेरी ही वयस के होने पर भी इतना बड़ा राजकार्य चला सकते है। वि. हत्ता में वयस की बहस नही होती। मैं अपने कार्य करने में वैसाही विज्ञ हूँ जैसा गलैण्ड के प्रधान मन्त्री अपने राज- कार्य में।" कोट (Crete) दीप में आकर व्यापारी जहानों को इस बात की घोषणा कर दी, कि नेविगेशन एक प्रम व्यवहार में लाया जायगा। अमेरिकन जहाज़ ने वहाँ से उस समय तो नगर उठा अपना रास्ता लिया, परन्तु एक महीने के बाद नार्ड य ग (Lard Huge), प्रधान अध्यक्ष, ने घोषणा की, कि यदि पोर्ट गवर्नर व्यापारी जहाज़ी को आने देना चाहे तो ऐसा कर सकते हैं। नेलसन अपने कर्म को खूब जानता था, तुरन्त प्रधान अध्यक्ष के यहां उसने अपील की, कि मैं इस नियम विरुद्ध नेलसन। Move ~MAN Av W V rhVM wwwww प्राज्ञा का पालन नहीं कर सकता। एडमिरल पहली दफे तो बडे कोधित हुए परन्तु फिर कुन्न बातों पर विचार कर नेलसन को उन्होने बडी बडाई की तथा अपनी प्राना रद्द कर दी। शुल्क स्थानो (Custom House) में विज्ञापित कर दिया गया, कि एक निर्दिष्ट ममय के बाद से कुल परदेशी जहाज़ जो ब्रिटिश नौकाययो में पाये जायँगे बन्दी कर लिये जायेंगे। कुछ दिनों के बाद चार विदेगी जहाज नौकाश्रय में पाये गये और विज्ञापन के अनुसार उन लोगों को ४८ घण्टे में स्थान छोड देने की माजा दी गई। परन्तु नाविकों ने साफ इन्कार किया और यहाँ तक झूठ वोले, कि हम लोग अमेरिकावासी नहीं है। पूछने पर, इन लोगों ने, चरिवनायक के जहाज़ पर, नाव्य विचाराधीशों के समुख अमेरिकन होना फिर स्वीकार किया। विचाराधीश की आशा से इनका सारा माल मता जब्त कर लिया गया। अब तो टटा बढा, विदेशियों ने चन्दा कर अपील की और साथही साथ कम्भवोर नेलसन पर ६ लाख रुपये की हानि का दावा किया। चरित्रनायक अपने जहान पर गिरफ्तार हो जाने के भय से रहने लगे। इस समय चरिखनायक की स्थिति किञ्चित टु.खप्रद थी। इस स्थिति पर शोक प्रकाश करते हुए नेलसन के एक साथी ने कहा "महाशय प्रापको प्रव- स्था करुणाजनक अवश्य है। नेलसन के लिये 'करुणा' शब्द अत्यन्त ही वृणास्पद था। - wwwwwwwwwwwwww nama this, tran. परदेश यात्रा और विवाह । मापने कहा, “करुणा। क्या यह करुणास्पद अवस्था है? महाशय। मैं जगत् मादर्श हुआ चाहता हूँ और ऐसा होने के लिये मैं प्राण को भी अर्पण कर सकता है।" पाठ सप्ताह तक चरिधनायक इस प्रकार अपने जहाज पर निगद रहे। इस बीच में मामला नाव्य न्यायाधीशों के हाथ में पा गया और पाप उनकी रक्षा में जहाज से उतरे। दुष्ट व्यापारियों ने चरिवनायका को पुलिस के हाथ में देने का वडा प्रयत्न किया, परन्तु जजों के भय से वे ऐसा कर न सके। एस समय नेवी के मुख्य सभासद इर्बर्ट साहबने, पसामान्य उदारता का परिचय दिया। पापने चरिवनायक के १. मार पौण्ड के जामिन होकर उनकी रक्षा की। घरिवनायक ने एक भावेदनपत्र इंगलैण्ड भेजा, जिस पर राज्य-व्यय से इनका पक्षसमर्थन करने को पाना हुई। पापके आवेदनपत्र सथा कार्य-विषय के प्रस्ताव पर सेट सिकत्तर ने एक "रजिसर ऐक' का विधान किया। अपने प्रस्ताव का अनुमोदन तथा पपने खत कार्य पर सरकारको सन्तोप प्रगट करते देख, पाप अत्यन्त सन्तुष्ट हुए। परन्तु प्रधान अध्यक्ष को सरकार से देश को व्यापार रक्षा पर धन्यवाद पति देख भी पाप जन ठे। पाप कहते हैं, “यदि अधिकारियों को कुल बातें मानूम होती तो. मुझको धन्यवाद न देकर, प्रधान अध्यक्ष को धन्यवाद कदापि नहीं देते। मुझे पत्वन्स बैटना होती है कि तन, मन, । mu- ৪২ नेलमन। vw noon धन देकर भी मैं अपने क्तकार्यो पर धन्यवाद न पा सका। में जितना दुखो इस प्रकार तिरस्कृत होकर हुआ, उतना नौकरी छूटने से कदापि नही होता। या तो मैं नौकरी से छुडा ही दिया जाता या मुझे कुछ धन्यवाद ही मिलता । यदि मेरे सच्चे कम अनुष्ठान का यही बदला है, तो मैं अब सदा सावधान रहूंगा, जिसमें ऐसे कामों में अग्रसर कदापि न होऊँ, परन्तु मैं इतने हो से सन्तुष्ट है कि मैं ने अपना कर्म किया . सुविन पाठक ! माज-नियम के दु खपट अनिर्णयो से चरिखनायक कैसे दुखी हुए थे, यह उनके पूर्वोभा वचनों से साफ झलकता है। रसिका पाठकवृन्द । आप लोगों के कोमल कलेजे पर चरित्रनायक के दुखो को सुनकर अवश्य हो भारी धका प- हुँचा होगा। प्रस्तु, पापके मन-विनोद का उपाय मुझे करना अत्यावश्यक है। अच्छा पाठकगण । अब आप लोग लेखक के निहोरे, उस चरित्रनायक की बारात में चलने की तैयारी कीजिये। मनोविनोद के साथ ही साथ Wedding Cake (व्याइमिष्टान्न)से भी आपलोगोंका सत्कार किया जायगा। आप इस बारात में वेश्याओं के वैसुरेगान के साथ रसिको को म ठी वाहवाही की तान यदि आप न सुने तो निमन्त्रक को, मुर्दादिल और कपण न कह कर, क्षमा करेंगे। चरित्रनायक को दिगदिगन्त में फैली हुई कौति और यश-गान तथा . । ।
A परदेश यात्रा और विवाह । देश-वन्धुपों को अन्तरामा में उत्पन्न सुरों के नकारखाने के सामने झठी-मनगढन्त टप्पो को वेसरतान को तूती को भावाज़ सुनना उचित नही। पाठक । क्षमा करेगे, दूलह ऊँचे तामझाम पर घट कर नहीं निकलेगा। अनियत्रित बारात पारटी (Nismanaged Barat Party ) कह कर निमत्रक को मिट्टी पलोत न करें। क्या किया जाय चरित्रनायक अपने स्वदेश गौरव के उस चिरम्यायो उन्नत सिहासन पर बैठ कर व्याह करने चला है जिस पर बैठे हुए को उतार कर ऊँचे तामझाम पर चढाना मानों नीचा दिखाना है। नेलसनने अपनी ब्रह्मचर्यावस्था पूरी कर, अपनी युवावस्था के पराक्रम को प्रमाणित करते हुए सर्वयेह कहला कर, ११ मार्च १७८० को, अपने उपकारक मित्र हर्बर्ट साहबकी भतीजीका पाणिग्रहण किया। ऐसे सुअवसरमें, राजकुमार हेनरी भी उपस्थित थे और उन्होंने ही कन्यादान डा आनन्द समारोह है, लेखक धापसे "जल्खये शाटी सरजाम मुबारक होवें" गदगद हृदय से गाने का अनुरोध करता है। चरित्रनायक को उदारता का वर्णन करते करते यदि इहे कर्ण वा निष्काम भीष्म कह बैठे तो अत्युक्ति न होगी। एक समय हर्बर्ट माहबने, अपनी दुहिता से चिढकर, अपनी कुम्न सम्पत्ति को उत्तराधिकारिणी अपनी भतीजी परिव- किया। पाठव ४४ नेलसन। नायिका को बनाना चाहा। यह सम्पत्ति यदि नेलसन ले लेते तो इनकी दरिद्रता क्षण भर में दूर हो जाती, যন্ত उमत हृदय, उदारचरित्र नायकने इस प्रकारसे प्राप्त परधनको मिहीके ढेले समान समझा । आपने अपने समूहको ऐसा कर- ने से रोका और बडे उद्योगसे बाप बेटीके फटे दूध रूपी मनोमालिन्यको जमाया। व्याहके बादसे अनेक मूर्ख यह विश्वास करने लगे थे, कि चरित्रनायक अब अपने सुख सम्भोगमें मग्न होकर देश-कार्यसे हाथ खींच लेंगे, परन्तु यह एकदम मिथ्या विचार था। पाठकगण । नोचे उड़त कुछ लिखावटोसे श्राप ही अनुमान कर सकेगे, कि नेलसनने कितनो कर्तव्य-निष्ठा तथा कैसी प्रेम-लिप्सासे युक्त होकर अपनेको विवाह बन्धनमें नियो- जित किया था। विवाहके कुछ दिन पहलेके पत्र देखिये (१) हमलोग विस्नग तो अवश्य ही हैं, परन्तु यह वियोग हमारे प्रेमक अशोका प्रतिदिन सयोग ही करता जाता है। जगत् मे स्वदेशका अधिकार मुझपर बहुत नियाद है। सार्वलौकिक कर्मक सम्मुख अात्मसुखका त्याग ही में अपना धर्म समझता है। कर्तव्य हो नाविकोंका मुख्यध है. अस्तु खकर्तव्य के निमित्त भनका कष्टोंसे भी भामोल्लास पर विजय पाना सराहनीय है। प्रेमजीयो नग्नमन । ध्यारी।।
परदेश यात्रा और विवाह ।
anwarwwom
-
प्यारो।
तुमने यह कहावत सुनी होगी कि "समुद्रका खारा पानी
तथा परोचता प्रेमको हृदयसे धो वहाते है” परन्तु मै इस
लकीरका फकीर नहीं है। यद्यपि में प्रतिदिन छ.कुण्ड समुद्र
जलसे मान करता है, यद्यपि मैं तुमसे बहुत दूर है, तथापि
तुम देखोगो कि तुम्हारा यह प्रेम-पिपासु निर्दिष्ट समयके कुछ
दिन पहले ही तुमसे पा मिलेगा।
प्रेमपिपासु
नेलसन ।
(३)
प्रिये!
तुम्हारे पास पत्र लिखना मानो तुम्हारी पत्री पानेके पानन्द
से किञ्चित ही भल्यानन्दका अनुभव करना है। सच्चे दयो-
हारसे पूरित तुम्हारी पत्री बाँचनेसे मेरी पन्तरावस्था कैसी
होती है यह प्रनिर्वचनीय है, मेरी लेखनी शक्तिहीना
है। सुख को पूछो, तो तुमसे वियोगमें सुख कहाँ, सम्हीं
हमारी सर्वम्व हो, तुमसे रहित यह जन पूर्ण समार मेरे लिये
कानन है, क्योंकि पूर्व से ही मुझे इस समारका अनु.
भव है। यह लोग तथा उद्विग्नताका जन्मदाता है, वर्तमान
में मेग ऐमा विचार पोर यदि वरने चाहा तो भविषमें
निर्जन
नेलसन
,
mannamruRAN
भी ऐसा ही रहेगा। प्रेम स्वयम्भू है, यह दबाव या
म्वार्थका फल नहीं है।
तुम्हारा
नेलसन ।
[
चरित्रमायक लीवर्ड होपमें कुछ दिनों तक रहे। आप
का प्रत्येक कार्य मानो देश हितके लिये ही होताधा । यहाँ पर
आपने ठेकेदारो, पारितोषिक बाँटनेवाले प्रतिनिधियों तथा अन्य
नाव्य अधिकारियोंकी अनेक चोरियां पकडौं। आपने इस
विषय में जो जांच की तो मालूम हुपा, कि इन दुष्टोंने करीब
डेढ करोड रुपयेका धोखा सरकारको दिया है।
आपने इन हिसाबोकी एक एक नकल प्रत्येक दफ्तर में
भेजी, परन्तु इन चोहोकी ऐसी साख ऊपर भी जमी थी,
कि इन लोगोंने इस विषयको आंच ही नही बन्द करवा दी,
बल्कि चरिवनायक पर हो भनेक दोषारोपणकर प्रधान अध्यक्ष
के कान भी भर दिये।
चरित्रनायक देश लौटनेके पहले, इन दुष्टोंको करामातसे
करीब करीब नौकरीसे अलग ही कर दिये गये थे। धन्य रे
राज्य-न्याय।
नेलसनके बोरिभस जहाजके नाविकोंको छोड और कोई
ऐसा नही था जो इस होपको दूषित वायुके कारण अस्वस्थ न
रहता हो। चरित्रनायक अपने सहचरोंके स्वास्थ्य तथा मनो.
-
परदेश यात्रा और विवा।
विनोदका पूरा ध्यान रखस थे। आप सदा हसौ दिलगीसे
उनका मन प्रसन्न रखते थे।
अाज हम लोगों के चरिवनायक दीप छोडकर देश लौटते
है। पाज पाप अपने ज्येष्ठ अध्यक्षसे बात ही बात में बैठे,
"महाशय मने इसने दिनोंकीनीकरीम सरकारको भगुणयाहिता
का परिचय पूरे नौरसे पा लिया, मेरी यह अन्तिम नौकरी है,
अब मैं कदापि सरकारी नौकरी नहीं करनेका, देश लौटते ही
में इस्तीफा दे दूंगा।" कप्तानने ज्यों को इनका हृदयोहार सुना,
न्योहो बिना इनसे कुछ कहे एक चिट्ठी प्रधान अध्यक्षके यहाँ इस
विषयको भेजा, साथ ही यह भी लिखा कि यदि ननसन
स्थिति परित्याग कर देगा तो ब्रिटिश नाव्य श्राधारका एक
बडा स्तम्भ टुट जायगा। चरित्रनायकने स्वदेश लौटने पर एक
प्रासापत्र पहले प्रधानाध्यक्षसे मिलनेका पाया।
नलमन देश लौटते ही बड़े सरकार के साथ प्रधान अध्यक्ष
यहाँ पहुँचाये गये तथा राज्य आदरसे भी
सक्कत हुए।
पुरानी बात सब भूल गई, परिवनायक अब पुन प्रसन्न
चित्त रहने लगे।
राजकुमार हेनरी को जो उपदेश आपने एक समय एक
शत्रु पर सपा करने के लिये दिया था, सराहनीय है तथा इनके
उनत हदयका परिचय दे रहा है।
राजकुमारके एक अपराध पर पापके नाव्यशिक्षकने कोर्ट
मानकी प्रार्थना की थी।
रामकुमार इस पभियोग
५०
नेलसन।
-uAAMAN
vvvAva
1
बेटा ! अब मैं तुम्हारा पल्प समय के लिये मेहमान है, मुझे
छोड न जानी।"
महद नेलसनको इतना वचन उमडा देनेके लिये बहुत
था। आप सत्काल ही यात्राका विचार छोडकर, सपत्नी
पिता सेवाम लीन हो, ग्रहपर हो रहने लगे।
जब पिता सो जाते थे, चरिव नायक मिया महानिमीके
सग पुष्पवाटिकामें कभी इधर उधर वालकको नाई पक्षियोंको
पकडते हुए, कभी वशी बजाकर गोत गाते हुए क्रीडा करते
फिरते थे।
ऐसे शान्त ममयमें भी नेलसनके लिये शान्ति नहीं थी। इस
समय बन्दो किये गये अमेरिकन जहाज़ोंका झगडा पुनः उठ
खडा हुआ था। कभी कभी नेलसनको इस झगडेकी एक
टकर लग ही जाती थी।
एक दिन चरिचनायक एक घोडा खरीदने मेलेमें गये हुए
थे। इनमें एक सरकारी वकन्दान अमेरिकन कमानोंके ३
नाख रुपयों के दावे का नोटिस मकान पर दे गया।
नेलसनने घर लौटकर जो नोटिस देखा सर्द हो गया।
भायो नाशका विचार विचारके हृदयको तप्त करने लगा। आप
बोल उठे "इतनी प्रवाके योग्य मै कदापि नहीं है। परन्तु
अब मै फटकार नहीं सह सकता। मैं शीघ्र ही खनानेमें इस
विषयका समाचार देता है। यदि सरकार इस बार मेरा पक्षन
लेगी तो देश त्यागकर फ्रान्स चला जाऊंगा।"
7
. A -~~ परदेग यावा पोर विवाह । चरिवनायकने एक पत्र इस विषयकासनाने में भेजा, माथ ही यह भी लिखा, कि यदि फिरती डाकसे पत्रोत्तर न मिला सो मे अवश्य फ्राम्सदेगको भरण ग्रहण करूंगा। पत्र डाकमें डालकर मापने कुल सामान देश त्यागका कर लिया। क्या देशभक्त चरिवनायकको पत्रोत्तर न देकर, इंगलैण्ड अपने स्वच्छ नाम कालिमा पोतेगी ? नहीं। नहीं। कदापि नहीं। कोई देश, अपने ऐसे नि स्वार्थ भाको प्रयन्नाकर, उग्रत- गोल नहीं हो सकता। दूसरे दिन मनोवाशित उत्तर भा गया। चरित्रनायकका सब दुख गोक दूर हो गया। पत्र में लिखा था-"पाप बड़े वीर, नि स्वार्थ देशसेवक है, भाप कदापि भय न खायें, सरकार निजा व्ययसे भापको रक्षा अवश्य करेगी।" इस बार नेलसन बहुत प्रसव हुए, परन्तु 'दूसरी बार जम पाप नौकरोक लिये तीन चार बार उद्योग कर विफलमनो- रथ हुए तो पुन प्रापको उहिग्नता बढने लगी। परन्तु अपने अन्तरग मित्र राजकुमार हेनरी तथा हुड साहबको सपासे ३० जनवरीको ( Agmatunon ) एगमेमनन पर जगह मिली। 4
।
-
F
पाँचवाँ परिच्छेद।
नेलसन भूमध्य सागरमें।
.
समय अव समुपस्थित है। देखना है, चरित्र
नायक क्योंकर इसका उपयोग करते है।
६४ तोपवाले 'एगमेमननका सम्पूर्ण भार
चरित्रनायकको ता. ३० जनवरीको मिला। अभी अध्यक्षता
सूचक अभिपेकका तिलक भी नही सूखा था, कि सननमें
आया कि फ्रेच प्रजा सत्तक सेन्यसे हॉलेण्ड और इंगलैण्डकी
सेनाने समर प्रारम्भ कर दिया।
नेलसन तो सर्व प्रिय पहले ही होचुके थे। इस समय
समरमें चरित्रनायक भी जानेवाले है, यह सुसमाचार सुनते हो
नेलसनके खग्रामवासी नाविकोंका टिड्डीदल उमड पडा । जो
पाते वह अपनी इच्छा सदय कप्तान नेलसनके 'एगमेमनन' पर
ही बने रहने को प्रकट करते थे। यह देख और और सहयोगी
कप्तान नेलसन की इम लोकप्रियता पर ईर्षा करने तगे।
चग्विनायकको फ्रान्मदेशवामियोंसे आन्तरिक घणा थी.
है
+4
--
ननमन भूमध्य मागरमें।
पाप अपने महचरोको तीन बातका उपदेश दिया करते थे।
पदलो-उन्ने मटा अपने प्रधानको प्राज्ञा बिना तर्क वितर्क
किये माननी चाहिये। दूसरी-अपने देग तथा राजासे द्रोह
करनेवालेको अपना शत्रु ममझना चाहिये।
तीसरो-
-फ्रान्स
देशवासियोंको राक्षस भी बठकर एप्पास्पद समझना
चाहिये।
इंगलैण्ड में इस समय खलबली फैल गई। लोगोंने सुना
कि फ्रेश सेनाको एक ऐमो युक्ति मालूम है, कि वह गोले
मारकर अपने शत्रुके जहानको जलाकर राग्व कर देती है।
नेलसनके पास जब यह समाचार पहुंचा, आप खुब ठठा-
कर इस उठे और बोले "कुछ पर्वाह नही हम लोग इन भग्नि
बरसानेवाने महागयोंमें इसना भिडकर युद्ध करेगे, कि उनके
गोले बिनकुल येकाम हो जायेंगे।" इसी विचारसे चरित्रनायका
अपने जहालको गधु नौकाके निकट भिडानेका उद्योग करने
सगे।
-
पहले इन लोगोंने "टौलाउन पोर मास लीन" नगर पर
धावा किया, परन्तु यह युद्ध नही हुपा। चरित्रनायक इस समय
घोर समरफै निमित्त उत्सुक थे। आप कहते थे कि इम धेरे
मे हमलोगोंको कीर्ति लाभका उत्तम सुअवसर था।
पांच महीने के बाद चरित्रनायकको कोर्मिका होप में जाने
की मिली
। समर-प्रिय वीर आज बडे भानन्दसे नई
यावाको सैयारी करने लगे।
५४
नेलसन ।
पाठक ! यहाँ पर कोर्सिका होपका कुछ पूर्व इतिहास
पापको सुना देना बहुत उचित है। यह द्वीप इटली देश
का एक भाग समझा जाता है। प्रकृति ईश्वरको इस हीप पर
विशेष कपा है। यद्यपि मलेरिया इटलीके प्रायः सब होमि ,
बहुतायतसे फैला रहता है , परन्तु कोर्सिका दीप इस व्याधिसे
बचा हुआ है। यहाँ को भूमि सुस्वादु फल फ लोंकी ही नहीं,
बल्फि वीर खदेश भक्तोंको भी प्रसवनो है।
जिनोमाके प्रजासत्तक राज्यने इस होपको फ्रान्सदेशवालों
के हाथ वेच दिया। यदि पाठक जिनोपावालोंके अधिकारके
वाग्में पूछे तो यही कहना पलम् होगा, कि जिसकी लाठी
उसीको भंस।
कोर्सिका वासी अपने पडोसीकी इस धृष्टता पर जल उठे
और अपनी समग्र शक्ति एकत्रित कर फ्रान्सवालोंसे जा भिडे ।
परन्तु बाघ बकरोका युद्ध था विचारे कोर्सिकन हार गये।
ब्रिटिश सिह फ्रान्सवालोंका या अन्याय सह नही सके,
ब्रिटन लोग स्वतन्त्रता देवोके एकांग भक्त है। अत: जब कभी
किसोभत्ताको इस देवीको प्रतिमा रक्षा में कटिवद, परन्तु अशक्य,
पाते हैं तो शोघ्र ही अपनी विकट हुँकार करते हुए धर्मरक्षा
पर आ डटते है।
इस समय भी ऐसा ही हुआ । सरकारको पानासे प्रधान
अध्यक्षन वीर चरित्रनायकको इस धर्मयुद्धमें भेजा।
नेन्नसन पर लार्ड हुड, प्रधान अध्यक्ष, का पूरा भरोसा
-
--
-
1
Y
m v-~- शत्रु-मैन्यको नम्नसन भूमध्यसागर में। ५५ था। इसी कारगसे वस्तिमा (BARLM) शहरके धेरैमें प्राप नियुक्त हुए, यह शहर युधका प्रधान स्थल था। चरिवनायक पूरा उद्योग विजय पानेका करने लगे, परन्तु कायं कुछ ऐसा वैसा नहीं था, कि शीघ्र ही सिद्ध हो जाता। सख्या नेलसनकी सेनासे कही अधिक थी। इतनो अधिक सेनासे पराजित होना कुछ अधिक लज्जाको बात नही कही जा सकती, परन्तु इसपर भी वीर ने प्रधान अध्यक्षके यहाँ कभी आतुरता नहीं प्रगट की। नेलसन ऐसी २ कठिनाइयोंसे कब उद्विग्न होनेवाले थे? पापको विश्वास था, कि उनका एक वीर सैनिक तीन शत्रु मैनिकों का सामना कर सकता है। चरित्रनायकने केवल १२०० सेनाके सङ्ग भीम विक्रम तथा रणकौशल दिखलाते हुए ४५०० शत्रू सेनासे शस्त्र रखवा हो लिये । बस्तिया नगर पर पब इंगलैण्डका भय झण्डा फहराने । लगा। बस्तिया (Bastia) विजयका समाचार जिस समय प्रधान अध्यक्षने पाया, विश्वास नहीं किया, परन्तु जब चरित्र नायकका पत्र मिला, पाप पानन्दोम्मत्त हो गये। उन्होंने नेलसनको बुलवाया और उनकी बहुत प्रशसा की। चरित्र- नायक तो केवल सम्मान के भूखे थे, इस सममान पर फूले न समाये। भागना चाहते है। समाचार मिन्ना, कि फ्रान्सवाले बस्तियामें पराजित होकर हुड शीघही नेलसनको सन ले एक
नेलसन।
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समरयान पर सेनिकोंके सन शत्रुओंको टोहमें निकल
पडे।
चरित्रनायकने इस समय एक पत्र अपनो स्त्री को
लिखा.-
.
प्यारी!
मैं इस समय शत्रु-सैन्य की टोहमें जाता है और परमेश्वरसे
विनती करता हूँ, कि किसी प्रकार उन लोगोंको पा जाऊँ।
प्रिये । यदि मै इस युद्ध में काम ही आजाऊँ, तोभी मुझे पूरा
विश्वास है कि तुम राज्य-भादरसे अवश्य ही आहत होगी।
मेरे लिखनेका यह तात्पर्य नही, कि मै मारा हो जाऊँगा बल्कि
अधिक सम्भावना है कि मरनेके बदले में कोर्तिके साथ विजय
प्राप्त कर तुम्हारे पास लौट आऊँ।
मैं दृढ हूँ, कि मेरे हाथसे ऐसा कार्य कभी नहीं हो सकता
जिससे मेरे परिजन वर्ग कभी तिरस्कृत हों।
मैंने अपना सर्वख तुम्हें दे दिया है, जो कुछ मेरा है वह सत्य
की कमाई है।
अन्तमें, मैं ईश्वरमे प्रार्थना करता हूँ कि होनी हो सो मुझपर
होवे, परन्तु तुम अपने पुत्रके भाग्यसे सकुशल रहो।
नेलसन।
शत्रु-नौकाका पता लग गया। अब नेलसन सरचार्लस सः
पर्टके सङ्ग "कालव्ही" के पगमें सहायता देने के निमित्त भेजे
.
प्राणाधिके
.
.
.. v vvv wvuww .. vvvvvv -~~ नेलसन भूमध्यसागरमें। गये। सूअर्ट भी नेलसन ही के ऐसे यौर और सहिष्णु थे। बडी हानि इन वीरोंकी कानव्हीके दूषित जन्नवायुसे होने लगी। दो सहस्र मनुषोमसे अाधेके करीब तो बीमार ही पड गये थे, जो बाको बचे वे भी बिल्कुल स्वस्थ नही रहे। इस यडमें चरित्रनायक भी बीमार हो गये थे। एक दिन युद्ध बडे झोके से शुरू हुआ । नेलसन नोकापृष्ठ पर खडे दृश्य देख रहे थे। इतने ही में सामने एक गोला पाकर फटा। इसमें से अनेक लोहे और बालूके कोने निकल कर आपको आँखोको बिल्कुन्न ढक लिया । एक नेत्र तो ऐसा नखमी हुआ, कि फिर कभी खुला ही नहीं। पाठक। कर्मयजमें वोरोको केवल मनोल्लास, हर्ष, विपा- दको ही आहुति देने से विश्वस्त तथा अक्षय कीर्तिका लाभ नही हो सकता। सुयश देव कठिन तपस्या से मिलते है। चरित्र- नायकने पहिले अपने सुख-सामानको आहुति दी । अब अङ्ग- प्रत्यगो को बारी है। देखे अग-आहुतिसे भी देव प्रसन्न होते है वा प्रागण लेकर ही मन्तुष्ट होते है। वीरवर । तुमने एक नेत्र टेकर देशके कोटि २ नेत्रोको अपनी ओर आकर्षित कर लिया । रम्पपुगव । अपनी जन्मभूमि के लिये तुम अटूट परियम और असह्य दु खोका सामना कर रहे हो ! रणशार्दून । तुम स्वअगोसे लाल धारा बहाकर माता को मुख लालिमा रखना चाहते हो। देव । तुम धन्य हो।
vvvwwvvv ANA na ५८ नेलसन । तुम्हारी वीरता, तुम्हारा माट-प्रेम धन्च है, तुम हम लोगोंक पथ-दर्शक पालोक हो। नेत्र पीडासे विफल रहने पर भी आप अपने स्थानसे न टने और बोले, "प्राण छटने पर ही कर्त्तव्य छ टेगा।" अन्तमें 'कालवहीं' का पतन हुआ, वीरको जीत हुई, इस समय नायकका जहाज एकदम घायलों और अस्वस्थोका मानों कग्नागार हो गया। शतु फ्रेञ्च सेना यद्यपि कोर्सिकामें परास्त हुई, परन्तु और स्थानोंमें विजयी हुई। इस समय ग्रेट ब्रिटन, ऑसि या और हॉलेण्डको सम्मि लित सेना फ्रान्स और वेल्जियमसे निकाल दी गयी थी। पूशिया तथा ऑस्ट्रियावान्नोंने खटेडे जाकर राइन नदीके दक्खिनी किनारे पर पाश्रय लिया। म्येनमें फ्रान्सका झण्डा जचा हो गया। योरपको भविष्य तुला इस ममय जगसे बोझमें नव सकती थी। बोनापार्ट की विजयी सैन्य योरपके दाँतका दर्द हो रही थी, सभी देश इसके भयसे आतुर थे। सभोकी निरनिमेष दृष्टि इस समय इंगलैण्ड और उसकी जलसेना पर अडो थी। एंगलैण्ड पर ही इस समय सब देशोंको एकमात्र पाशा थी भूमध्यसागग्में 'कोर्सिका' होपको विजयने मचमुचही इंग- नेगड़का गौरव बटा दिया था। फ्रेञ्चोंने विचार कर यह देख , - AAMA नेलसन भूमध्यसागर में। ५८ लिया था, कि जबतक हम लोग ब्रिटिश वेडोका समूल नाश कर सकेगे तब तक हमारा विजय स्तम्भ दृट नही हो सकता असु, पन्द्रह बड़े बड़े जहानी और छ छोटे जहाजोक फ्रेच वेडा अँगरेजोसे मामना करनेके लिये ता सन् १७८५ को भेजा गया। एडमिरल होथम जो अब लार्ड हुडके स्थानपर काम करते थे , थोडी सेना लेकर उन लोगोका सामना करने चले। अंगरेजोंके बन्नका ऐसा दबदबा शत्रु-सैन्य पर था, कि खल्प- वल युक रहते भी हौधमका सामना करनेका साहस फ्री चोको न हुआ। शत्रुदन रातभर तीन मीलकी दूरी पर पड़ा रहा। सवेरा होते ही ब्रिटिश जहाज़ोने शत्रुपर धावा किया । समय नेलसनने अपने नियमानुसार एक चिट्टो अपनी अद्धागिनीको लिखी प्यारी सबका जीवन परमेखरके हाथ है। वह पूरा विज्ञ है कि किसकी रक्षा और किसका नाश करना उचित है । जीव- नका वारा न्यारा करना यद्यपि उसके हाथ है तथापि चरित्र और सुयशको रक्षा मेरे ही हाथ है। इत्यलम् ननसन नेलसनका लहान अत्यन्त गोगामी था। शत्रुदलक निकट पहुँच कर उसने "काइरा" जहाजको बन्दो कर लिया। कादरा बडा जहाज था परन्तु बहुत बडा होना
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MAANARAanmanNIRAMN
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नेलसन।
भी भद्दापन है।
इस समय 'ऐगममनन को लाघवता हो
उसके विजयका कारण हुई । नेलसन अपनी तोपोका मुंह तव
तक बन्द किये रहा, जबतक ये शत्रु जहाजके एकदम पास ने
जा पहुँचे , वहाँ पहुंचते ही इसने ऐसी गोलोको बाढ दागी
कि काइराके पतवार इत्यादि नष्टभ्रष्ट हो गये। अब फेव
जहान अपने काइराकी दुर्दशा देख नेलसन पर झपटे । इधर
हौवमने नेलसनको फिर प्रानका सकेत किया, परन्तु इस,
वीरने जब शत्रुके जहाजके छक्के छुडालिये तभी लौटा।
"काइरा" ऐसा नष्ट हुआ, कि अब
इसे दूसरे जहान
'लोसेनसीयूर' को आश्रय के लिये लेना पडा।
दूसरे दिन शत्रुके और जहान तो निकल गये, परन्तु
'कारा' और लौसेनसीयुर पीछे पड गये और नेलसनके हाथ
लग गये। चरित्रनायकने अनेक प्रार्थनाये शत्रुके बचे जहाज़ोका
पोछा करने की की, परन्तु हीथमने एक न सुनी । उन्होने कहा,
"बस अधिक लालच बुरा है, इतने ही पर सन्तोप करो।"
चरित्रनायकको एडमिरलका यह कुसमयका सन्तोष बहुत
बुरा लगा । आपने कहा "महाशय। यदि हम लोग ग्यारह
जहाजों मे दस जहाज पकड़ लेते और यदि बन्दी होनेक
लायक केवल एक जहाज भी छट कर निकल भागता, तो मैं
कदापि सन्तुष्ट होनेवाला नहीं था।"
प्रधान अध्यक्ष हौथम शान्त चित्तके मनुष्य थे। वे चरित्र
नायकको नाई उक्त प्रकातिके नहीं थे। नन्नसन तो अपनी हानि
4 . नेलसन भूमध्यसागर में। पर कदापि ध्यान देते ही नहीं थे। ये सदा आक्रमण करना ही पसन्द करते थे। समर कलकल अब समाप्त हो गया । युद्धका झोका जबतक रहता था नेलसनको अपने तन मनकी सुधि भी नहीं रहती थी, अब नेलसन नेत्र-पोडा से अत्यन्त विकल हो उठे। इस समय लार्ड हुडकी छुट्टी पूरी हो गई थी। चरित्र- नायक उत्सुकतासे इनके वापस आनेको बाट जोहते थे। हुड चरित्रनायक को पुत्रवत् मानते थे। परन्तु अभाग्यवश लॉर्ड हुडके स्थान पर लॉर्ड हज ( Hore) पाये। परन्तु गुणका आदर सब ओर है। हज ने चरित्रनायकको प्रधान कप्तान बना कर ऑस्ट्रिया को सहायता देनेके लिये भेजा। ऑस्ट्रिया इस समय फ्रान्ससे रेवीराम स्थान पर लड रहा था। इस समय चरित्रनायकने नाव्य दक्षता दिखनाते हुए राज- नौतिज्ञता का भी पूरा परिचय दिया । स्मरण रक्खें, कि अभी तक वेलिगटनका समय नही आया था जबकि ब्रिटिश स्थल सेना भी जलसेनाको नाई विख्यात हो गयो थी। इस समय केवल ब्रिटिश बेडीका हो दवदवा चारों ओर था। एक फेञ्च लेखक लिखता है "इस समय देखना है ये समुद्रो मेडिये क्योंकर थल पर अपना विक्रम प्रगट करते है।" कुछ दिनों बाद एडमिरल जर्विसने, जो आगे चल कर * रेविण नो देशका एक भाग है। पाठक
नेलसन।
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लार्ड सेन व्हिन्सेन होगे, अध्यक्षताका कार्य अपने हाधर्म
लिया।
जर्विसने सुरत नेलसनको Captain "कैपटेन" जहाज़पर
जगह दे कर सम्मान बढाया। चरित्रनायक का पुराना "एंगम
मनन" अब छट गया, परन्तु नेनसन सदा कहते रहे, कि ऐगम
मननके वीर युवक नाविकगण तोपके गोलेको मटरके दानेसे
अधिक नही समझते थे।
पाठक । वीरकै प्यारे 'ऐगममनन' जहानने सच्चे मित्रकी
नाई ट्राफलगरको अन्तिम लडाईमें माथ रह कर अपने वीर
अध्यक्ष की सेवा की थी और नेलसनके लोकान्तर होनेके १५
वर्ष बाद साउथ अमेरिकाको लडाईमें अपने भूत अध्यक्षको
नाई विजयोल्लासमें हो समुद्र-मग्न हो गया।
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-- छठा परिच्छेद। सेण्ट व्हिन्सेण्ट का युद्ध। (20m जयी च मेना स्थल युद्ध में सर्वत्र अपनी वि. वि जय पताका फहरा रही है। समार इसके विजय-कोलाहल से कपायमान हो जा उठा है। अब जलयुद्ध में क्योंकर प्रसिद्ध ब्रिटिश नाविकों को धता बता कर चक्रवर्ती ससाराधिप हो -यही मच्चों का दिवस मनन और रात्रि स्वर है। नेलसन से बार बार जनयुद्ध में मार खाकर, फ्रेच लोग अब मारीच म्पन की सहायता लेने चने है। स्पेनवालों ने भी जब और बचने का उपाय न देखा, तब शीघ्रही अपनी जल- सेना एकत्रित कर अपने भयानक पड़ोसियों का साथ दिया। ' देखना है अब यह दुरङ्गो मेना क्या यश पाती है ? टौलाउन का नौकायय, मिथित मेनाओं का अखडा नियस हुआ है। चारों ओर सेहत नीकादल घोर घटा की नाईएक- वित हो रहा है। बीच तोपों की हडसाहट और N नेलसन । . An बारूद का भक से जल उठना, मानो वर्षा ऋतु की पूरी छटा दिखा रहा है। ब्रिटिश वीरो। सावधान ! सावधान ! ! इस भीषण घटा और अपेक्षित अविरल अग्नि वर्षा से तुम्हारा निस्तार तब तक नही दीख पडता , जब तक कि तुम्हारा आराध्यदेव नेलसन गोवर्धन रूप अपने वृहत उत्साह और उद्योग से तुम्हारी रक्षा न करें। दुर्बल हृदय जिनोआ (Genou) ने भी सर्वविजयो फे, से डरकर सन्धि कर ली। इस सन्धि-स्थापन से फेच ऐसे शक्तिशानी हो गये, कि अगरेज लोगो का बस्तिआ बेडा (Bas ta) भूमध्यसागर छोड देने को वाध्य हुआ । एलबा दीप भी कुछ दिनों के बाद छोडही देना पडा, परन्तु इस त्याग के पहले वीर नेलसन, जो उस समय मिनरवा Minerva जहान पर थे, एक बार शत्रु से झोंके से भिड गये और उन्होने उसके दिखला दिया कि ब्रिटिश वीर इतने पर भी अजेय है। इस युद्ध में नायक ने स्पेन जहाज "लासैवीना" (La Sabina) को बन्दी कर लिया। जिस समय ये विजित जहान को लूट रहे थे, सन्मुख से दो स्पेन के जहान आ निकले और उन्होंने मिनरवा का पीछा किया। यद्यपि “मिनरवा" पूर्व युरु में भिन्न भिन्न हो गया था तोभी साफ निकल गया और उसने 'फोरजी' (Ferrar) के नौकायय में प्राश्रय लिया । लामविना (LA Sabine) के कमानस साई जैकोबा सान
एक डोगी उसके बचाने के लिये पानी में लटका टो। डोंगी
सनिक भो सभय नहीं रहा । ऐसौ गडबड में नेलसन के कान
पने दयाहू चित्त का परिचय दिये बिना नहीरदमके। शीतही
सेण्ट व्हिन्मेण्ट का युद्ध ।
इस धावे में (Unerve) मिनरवा पर ही बन्द थे ।
मेलसन ने इन्हें सम्मान पूर्वक शान्ति का झण्डा लगाकर
डॉगी पर स्पेन वापिस कर दिया।
पाठक । यद्यपि यह उदारता युद्ध-नियमो के विरुष
तथापि नेनसनने अपने भूतपूर्व देशनिष्काशित सूअर्ट राज
प्रों के वशधर का सम्मान करना अपने देश के गौरव वर्धन =
धार समझा। सूअर्ट लोग स्वभाव से ही वीर थे, अस्त ड.
जैकोर भी इससे रहित नही थे। स्पेन के कुल सेनापतियों
ये वीर थे । नेलसन ने मुक्त कण्ठ से शत्रु होने पर भी इनक
प्रशसा की।
कुछ दिनों के बाद मिनरवा (Niinerve) को पुन ए
बार ऐसे असम शत्रुदल से सामना करना पड़ा,
परम
प्रत्युत्पन्नमति नेलसनने उनको आँखो में धूल
झोकही दी
एक दिन जिबराल्टर (Gibraltar) से निकलकर, प्रधान
अध्यक्ष के जहाज़के पास जाते समय मिनरवा ( AMIncrva
समग्र शत्रुदल के दृष्टिगोचर हो गया । शत्रुदन्न बाज़ की नाई
बेचारे लवा सदृश मिनरवा पर झपट पडे ।
एक बडा शE
जहान उसके निकट पहुँच गया । घोर युद्ध और नाश में प्रक
म भनक पडो कि एक नाविक जल में गिर पड़ा है। आप अ.
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।
मेलमन।
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के हाग नाविक तो बच गया परन्तु अब डोंगो का जहान है
निकट पाना ही दुःसाध्य हो गया। इधर शत्रु दल एक गोल
के फासले पर डटा था । नरामा विलम्ब बचाव में होने से भ
ग्रेनी वेडे का वारा न्यारा हो जाता है, कठिन समस्या है
नेलसन ने धीर भाव से कहा "ओह । होना हो सो हो, अप
एक नाविक को यो विपत में छोड़ भागना कायरपन है
जहान को आगे बढाकर डोंगो को उठा लो और शत्रु
बचकर निकल चलो।" यह आशा सुनते ही शत्रु मित्रस
इस धीरता पर अवाक् रह गये। नाविक सकुशल जहा
पर चढ गया और मिनरवा भी सकुशल निकल गया।
टूमरी रातिको “मिनरवा" यकायक शत्रु बडे के बो
पड गया, कुहासा अधिक था, भाग्यवश शत्रुओं ने अगर
जहाश को पहचाना नही, ये भी चुपचाप सन एडमिरल
सकेतों का अनुकरण करते हुए चले जाते थे, जिसमें धोखे
शत्रुटल इन्हे अपना हो जहाज ममम ।
पाठक विचार करे, कि यह कैसा नाजुक समय है,
कुहा
यटि एक क्षण के लिये हट जावे, सूर्य यदि अपना विम
मुख इम समय दिखलादे , तो बेचारे चरित्ननायक के जहा
की धज्जियों का पता भी शत्रुदल नही लगने दे।
इस असमजस में एक एक पल एक २ वर्ष सा बीत रहा
कि अरुणोदय की लाली पूर्व में दीख पडी। कुहामा विलीन
चला, परन्तु परमेश्वर ने इस समय अपनी अट रूपा का प
A AN . . मेगह धिन्मेण्ट का युद्ध। चय दिया। शत्रुटन ने पापसे पाप केडीज (Cndir) की ओर अपना मुंह फेर दिया। अव नायक को अवसर मिला और यह निकन्न भागे। प्रधान अध्यक्ष इनको चतुरता पर खूब इंसे। उसी दिन मध्या को नेमन ने अपने जहाज़ कैन पर जा कर विथाम किया। दूसरे दिन प्रात काल शत्रु के २७ जहाज़ों का एक वेडा युह के सामानों से लैस पातामा दीख पडा। उसकी व्यूह रचना सराहनीय थी। छ जहालों का एक बेडा पीछे था और मुख्य इमोस जहाजों के वेडे की रक्षा कर रहा था। इधर ब्रिटिश बेडा पहले तो दो कतारों में जा रहा था परन्तु सम्म ग्व शत्रु का व्य ह देख इन लोगों ने भी छ तीव- गामी जहाज़ शत्रु के बीच व्यूह तोडने को आगे भेजे स्पेनवाले सामानों से लैस होने पर भी युद्ध के लिये बि- लकुल तैयार न थे। कतार दुरुस्त ही कर रहे थे, कि एडमिरल जार्विस के विकट धावे मे उनका व्य इ टूट गया और वे दो भागो में बँट गये। इस प्रकार स्पेन के बड़े ३ जहानो पर गरेनों की विकराल तोपोने गोलाउगलना आरम्भ कर दिया। गल के विलग हुए जहाजो ने अपने विपद में फंसे हुए जहानों की सहायता करनी चाही। परन्तु अंगरेजों को मार के कारण वे जान बचा तितर-बितर हो गये। ने नेलसन को, जो इस समय पशातभागमे रक्षा कार्य पर नियुक्त थे, बढकर लड़ने का मकेत किया, परन्तु गनुदन अब जहान, । प्रधान अध्यन - AnAVAAnn. . छोडा। नेलसन। का पाल वायु की ओर फेरकर या तो अपनी कतार दुरुस्त किया चाहते थे या विना युद्द किये भागा चाहते थे, यह देख कर नेलसन ने अध्यक्ष के सकेत का ध्यान न कर शत्रु दल को रोकना चाहा और अपने वेडे को अविलम्ब चढधाने की आज्ञा देदी। प्रधान अध्यक्ष की प्राज्ञा के प्रतिकूल होते हुए भी नेलसन की युक्तिने म्पेनवालों के उपाय को मिट्टी में मिला करही एक अंगरेजी वेडेने रेनवालो को रोका, दूसरों ने आगे बढकर उनको नाश कर दिया। अब पश्चात् भाग से दक्षिण भाग का, फिर वहाँ से वाम भाग का सैन्यभार "कैप्टेन" (Captain) के अध्यक्ष नेलसन को मिला। वोर ने अकेन्नेही सबसे पहले शत्रु का सामना किया। (Cu lloden Blenhhem) कलौडेन बनहिम जहान तथा कप्तान कौलिङ्गउड (Collingwood) का 'एका लेण्ट' (Excollont) जहाज नायकको, असम शत्रुदल से असीम वीरता प्रगट करने वाले पहले पहल सहायता देने पहुंचे। । जहाज इस समय नष्ट प्राय हो गया था। इसके पार शत्रु के गोले से उड गया। इतिहास वैत्ता- है कि 'कैन' जहाज पर एक रस्सी भी प्रक- इसका चक्का भी गोले की चोट से बिलकुल चूर नेलसन ने अपने जहाज़ को बिल्कुल बर्बाद हुआ सैनिकों को खन्न हाथ में लेकर शत्रु के नौकापृष्ठ . की आजादी।
nurnwww ANAM से गट व्हिन्सेण्ट का युद्ध ।। आज्ञा देकर, निर्भीक कसरी सब से आगे शत्रु-नोका सेन- निकोलस (Sun Nicholes) की पृष्ठ पर अपना लपलपाता रधिर-पिपासु खड्ग हाथ में ले चढ गया, साथ ही साथ समग्र नाविक गण कुनाचे मार २ चदने लगे। गनुदल इन योरी के अचानक धावेसे हका बक्का रह गया और काठ के पुतले को नाई उसने अपने शस्त्र रख दिये। पाठक ' इतनी चपन्नता, इतनी द्रुतता न तो विद्युत् में न वर्षा की नीन निरियों में ही देखी गयी है, जितनी नायक के खन्न चलाने और उनके नाविकों के गव विजय करने में पायी गयी। San Nicholes (सन निकोलस) पर कुछ रक्षकोंको छोड फेर वैसे ही भीमविक्रम देखलात.हुए नायकने चिन्ता कर -"भाइयो। या तोरणको विजय जयन्ति या तिय- पर जाना" बम पन्न खेंच नो, और पुन अपने मायकका नि तथा देशको रक्षाके लिये शत्रु नौका "मैन जोसी- in Josil के पृष्ठ पर चढ़ लामो।"
nAN
NAAMANNA
नेलसन।
का पाल वायु को ओर फेरकर या तो अपनी कृतार दुन
किया चाहते थे या बिना युद्ध किये भागा चाहते थे, यह
कर नेलसन ने अध्यक्ष के सकेत का ध्यान न कर शत्रु दल
रोकना चाहा और अपने वेडे को अविलम्ब चढधान को
दैदी। प्रधान अध्यक्ष की प्राजा के प्रतिकूल होते हुए भी नेल
को युक्तिने म्पेनवालों के उपाय को मिट्टी में मिला क
छोडा। एक अंगरैनी वेडेने स्पेनवालों को रोका, दूसर
भागे बढकर उनको नाम कर दिया।
अब पश्चात् भाग से दक्षिण भाग का, फिर वहाँ से वाम
का सैन्यभार केन" (Captain)के अध्यक्ष नेलसन को मि-
वोर ने अकेलेही सबसे पहले शत्रु का सामना किया। (
lloden Blenhiem) कलौडन बनहिम जहान तथा के
कौलिङ्ग उड (Collingwood) का 'एक्ो लेण्ट (Ercolle
जहान नायकको, असम शत्रुदल से असीम वीरता प्रगट के
वाले युद्धमै, पहले पहल सहायता देने पहुंचे।
नायक का जहान इस समय नष्ट प्राय हो गया था। इन
सम्मुख का पतवार शत्रु के गोले से उड गया। इतिहास व
श्रों का कथन है कि 'कैयन' जहाज पर एक रस्मी भी अब
तो न बची। इसका चक्का भी गोले की चोट से बिलकुल
हो गया। नेनसन ने अपने जहाज को बिल्कुन बर्बाद
देख, अपने सैनिको को खन्न हाथ में लेकर शव के नौका
पर चट जाने की आज्ञा दी
~ RAM यह अत्यन्त हा गुन्दर दृष्यया। मेण्ट रिहन्मेण्ट का युद्ध।। आज्ञा देकर निर्भीक केसरी सब से पागे शत्रु-नौका सैन- निकोलस (Sun Nicholes) की पृष्ठ पर अपना लपलपाता रुधिर-पिपास खन्न हाथ में ले चट गया, साथ ही साथ समग्र नाविक गण कुनाचे मार ३ चढने लगे। गवुदल इन वोरी के अचानक धावेसे हका बक्का रह गया और काठ के पुतले को नाई उसने अपने शस्त्र रख दिये। पाठक ' इतनी चपलता, इतनी दुतता न तो विद्युत् में न वर्षा की लीन निरियों में ही देखी गयी है, जितनी नायक के खट्ट चलाने और उनके नाविकों के शत्रु विजय करने में पायी गयी। San Nrcholes (सन निकोनस) पर कुछ रक्षकोंको छोड कर फिर वैसे ही भीमविक्रम देखलाते हुए नायकने चिल्ला कर कहा-"भाइयो। या तोरणको विजय जयन्ति या तिय- देवोसे वर जाना" बस खन्नखंच लो, ओर पुन अपने नायकका गौरव बढाने तथा देशको रक्षाके लिये शत्रु नौका "सैन जोसी- आई" Sun Jos1 के पृष्ठ पर चढ़ जाभो।" वेरी साहव सहकारी कप्तान इस ममय सबसे अयसर हुए। स्पेन नाविकोंकी तो घिग्गी बँध गई तुरत शस्त्र रख दिये। परिवनायक अब शान्त चित्तमे स्वयम् अपने हाथोंसे विजित सैनिकोंक खन्न लेलेकर अपने एक पुरातन अनुचर के हाधमें देने जाते थे। पाठक
नेलसन।
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प्रधान अध्यक्षको नौका विक्ट्री (Victory ) अब नेलसनको
गौरव भूमि पर पहुंची। पहुँचते ही बादल फाडनेवाली
करतलध्वनिसे इन लोगोने वीर चरित्रनायकका अभिवादन
किया।
प्यारे युवक पाठक। बस जीवन पाज सफल हो गया।
चरित्रनायकका सारा समर कष्ट मानों भूल सा गया। क्या
पापलोगोंके हृदय पर इस दृश्यका प्रभाव नही पडता? क्या
आप अपने जीवनको इस प्रकार सफल नही कर सकते।
क्या “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी" मत्रसे प्रति
दिन अपने हृदयको अभिषिक्त कर आपको ऐसा गौरव पाना
दुर्लभ है?
आप सब कुछ कर सकते है, परन्तु उत्साह और
सहिष्णुताको आवश्यकता है।
चार बजे सन्ध्या समय युछ बन्द हो गया । चरित्रनायक
प्रधान अध्यनसे मिलने गये। जॉन जर्विस बार बार नायकको
प्रालिगनकर कहने लगे "भाई । आज तुम्हारे ही कारण देशका
भेष रहा, तुम्हें किन शब्दोमें धन्यवाद हूँ, मुझे सूझता नहीं।"
कप्तान कालदर ( Calder ) ने परिहाससे कहा "महाशय
इसमें तो समय नही कि कैपेनने सचमुच ही समर विजय
किया है। परन्तु इतना होने पर भी इसने पापको प्राजा
उबहन की।"
प्रधान अध्यक्षने हमकर उत्तर दिया-'काल्दा । यदि
पाठक।
.
LivialiY मेगट रिहन्सेण्ट का युद्ध। LA भी तुम मी आजानुलहन कर समरमें विजय प्राप्त करो तो तुम्हारो अवज्ञा भो मह क्षमा करूंगा।" राजकीय सम्मानों की वर्षा भी, एम विजय पर, विजयी वीरों ( खूब हई। जर्विस सेण्ट 'टिइन्सेण्टके लॉई'को उपाधिसे पित हुए। चरित्रनायक भी बैरन बनाये गये, परन्तु धनाभाव पापने इस पदवीको स्वीकर नहीं किया, अस्तु प्रापKnight : Garter नाइट-घाँव गार्टर ही बनाये गये। जर्विस साहबने पापको एक बहुमूल्य खन्न पारितोषिक 'सतत किया, जिसे चरिवनायक सदा स्पेनयुद्धके यथात् ध्यक्ष जविसका खन्द्र कह कर आदर करते थे। नायकने स पुरस्कार खगको नौरविच शहरमें भेज दिया और लिखा, मैं अपनी जन्म भूमिका प्रधान शहर नाविच छोड और कोई पान इस योग्य पुरस्कारके रखने के योग्य नही समझता जहाँ से रखकर मै अपने परिजन वर्गों को अधिक मुदित कर गा।" मुमुर्घ पिता भी हृदयोहार नहीं रोक सके । पुत्रको लिखा बेटा। तुम्हारे विजयका समाचार सुनकर, तुम्हारी यशका पान आज सामान्य भाटोसे लेकर असामान्य अँगरेजी थियेट- तकमें सुनकर मैं फलानहीं ममाताऔर नअपने आनन्दाथुओं को ही रोक सकता है।" नायकके विजयका साथी "केशन जहाज बिलकुल नष्ट भ्रष्ट होगया था। अब वद्द लडाईके योग्य नहीं रहा था मस्त
৩২
नेलसन।
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चरित्रनायक सर होशियो Real Adnural of the - Bule,
का झण्डा नूतन (Theseeus) थिसियस जहाज पर फहराने
लगा। इस थिसियस जहाज़के नाविक गण अभी इङ्गालैण्ड के
समुद्रगत बलवेक साधी थे, देखना है अब ये अपने भवअध्यक्षसे
कैसा व्यवहार करते है।
सुहृद नेलसन नाव्यससारमें सर्व प्रिय था। इसकी मुख्या-
तियाँ वीरता और उदारता तो शत्रु को भी बलात्कार अपने गुणके
वश कर सकती थी, ये तो भला गुणग्राही अङ्गारेण नाविक
ही थे।
नाव्यपृष्ठ पर धानेके दूसरे ही दिन इनको सब नाविकोका
हस्ताक्षरित एक पत्र मिला जिसमें लिखा था
"देखर एडमिरल नेलसन और कप्तान मिलरको दिग्वि-
जयी करे। हम लोग उन अधिकारियोके अत्यन्त अनुग्रहोत
है जिन्होंने ऐसे वीरोके हाथ हम लोगोंका भाग्य सूत्र
सौंपा है।
हम लोग अपने सेनापतियोको अपनी नसोका रुधिर बहाकर
भी सन्तुष्ट करनेको चेष्टा करेंगे। हमलोग थिसियसको भी
केपन जहाजको नाई' विख्यात करके ही जीवन सुफल
करेगे।"
पाठक । इन वीरोंने अपने भाजके वचनको आगेके दिनो में
पूरी तरह चरितार्थ कर दिखलाया।
अब नेलसनको कैडीज ( Cudis ) पवरोध करनेवाले वेडे
मिली
1
की अध्यक्षता
7V v ver मेण्ट लिइन्सेण्ट का युद्ध । नेलसन ने जितनी वीरता इन हाथो हाथ की लडाइयामि दिखलाई शायट औरम कदापि नही दिखलाई होगी। यह पत्यन्त ही युद्ध प्रिय थे, एक बार उनके जहाज़ पर कुछ स्पेनवाले चढ़ पाये । यति ही खन्नका ऐसा प्रहार नेलसन पर किया कि यदि जॉन सक्स नामक एक कर्णधार इस समय विद्युत् चपलतासे इन्हें पीछे नही खीच लेता तो बस इनके जीवनको समाप्ति ही हो जाती। केडीज अवरोधके बीचहीमे समाचार मिला कि स्पेन के एक कोपयाणने मेक्सिकोसे चलकर गरीबोंक भयसे टेनरिफर हीपमें पाश्रय ले लिया है। नेलसनको टेनरिफपर धावा करनेको चाज्ञा मिली। यद्यपि वीरने पूरी वीरता दिखलाई परन्तु सफल मनोरथ नही हुए। इस युद्ध में चरित्रनायकके दाहिने हाथमे गोली लगी। यदि जोशीचा निसवेट इस समय वडी सफाईसे घाव पर पट्टी बाँध रुधिर न रोक देता तो आज 'अवश्य हो नेलसनकी मृत्य होजाती। पाठक! यह दूसरी अग-बाहुति देशसेवामे हुई। ऐसा भयानक घाव लगनेपर भी किसीका प्राश्य ग्रहण न कर, नेलसन सिंहको तरह उछलकर नौकाकै जपरी पृष्ठ पर चढ गये और सर्जन (Surgeon ) से शान्त भारमे बोले, *डाकर साहय । मैं जानता हूँ अब मेरा दहना हाथ किसी छपा कर जहां तक गोध्र हो निकम्मको काट ही डालिये।" मूर्तिमान माहम हो, वीरने अपनी कामका न रहा। ।
७४
नेलसन।
बाँह कटवा डाली। पाठक।
एक आह भी वीरकै मुखसे :
निकली, न इसने पुन' कभी इसकी चर्चा हो की । धावके शारी
रिक दुःख तथा टेनरिफ युद्धको हारक मानसिक दुख य
बहुत बोमार हो गये।
एक दिन बीमारी हो यह कहने लगे-"बस भाइयो
अब मैं अपने देश और मित्रोका बोझ हो गया है।
दूसरे दिन लाई दिइन्सेण्ट को यों पत्र लिखा
महाशय ।
क्या आप मुझे एक नौका अपनी लोयको देश पहुँचाने
देगे? एक इकहत्था एडमिरल अब देशके किस काम पासक
.
2
।
नेलसन।
एडमिरलने इसके उत्तरमै अत्यन्त टु ख प्रकाश करते हु
इन्हें देश लौट जानेकी अनुमति दी।
स्वदेश पहुँचने पर देशवासियोकै सुस्वागतसे पाप अत्यन
प्रसन्न हुए। यह लण्डन और ब्रिमिलके फ्रोमैन (Preernar
बनाये गये । इङ्गलैण्डाधिपने अपने हाथोंसे इन्हें Order |
Bath को खिल्अत पहराई तथा पन्द्रह हजार रुपयेक
वार्षिक पेन्शन नियत कर इन्हें उत्साह दिया।
कुछ दिनों में दुःखदायी धाव भर गया और ये परमेश्वरक
असख्य कपाओंका धन्यवाद देते हुए पुन, Vanguari
जहानका आधिपत्य ले कैडिज (Cadis) बॅडे से जा मिले
।
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सातवाँ परिच्छेद।
नाइल का युद्ध ।
से
.
ण्टव्हिन्सेण्टका युद्ध समाप्त होगया , फ्रान्स
वाले बार बार धूल फांककर कटकटा रहे थे,
अब क्रोधमें अन्धीभूत नेपोलियन ससारके
PASPORA सब शत्र ओंका अवतार इङ्गलेण्डको हो
मान कर इसके मूलोच्छेद करनेका उपाय करने लगा।
कहावत है, कि कोई मनुष्य कौओंके मारे तन पा गया
था। एक दिन एक कौआ उसके घरमेंसे एक रोटीका टुकडा
ले बाँसकी एक सौदीपर जा बैठा और प्रत्येक डेपर
उठता बैठता हुआ घरके छप्परपर चढ गया। भले मामुपने
समझा बस मौका ठीक है, अगर सीटी इटालें तो दुष्ट कौश्रा
छप्पर परसे उतर न सकेगा और भूख प्याससे मर जायगा।
चट पट विकट बदला उसने ले ही लिया, सौटी हटाकर
निशिन्त हँसता हुअा था बैठा। परन्तु मीठी उतारनेके
ग्वटकैसे कौधा उढ गया और बुद्धिमान महाशय मुंह लटका
कर बैठ रहे।
नाइनका युद्ध। MAHNA - पाठक ! बस ठीक डमी भले मानुपका स्वाँग फास- वालोन किया। इन लोगोने विचारा, यदि हिन्दुस्थान अंगरेनोंके हाथसे निकाल ले तो शत, लोग आपमे आप पराजित हो जायेंगे। फ्रान्सवालोंने अपने चुने चुने जहाजों और सेनाओंका एक वेडा तैयार कर, ईजिप होते हुए, हिन्दुस्थान पानेका विचार कर लिया। पाठक । हयाई घोडेपरको सैर भी खूब ही होती है, कभी तो सुवर्णमयी भारतभूमिपर अकड अकड कर चलनेका और कभी अपने मस्तकपर युरोपका चक्रवर्ती छत्र लगानेका सुख-स्वप्न नेपोलियन देखने लगा। परन्तु वह यह भूल ही. गया था कि "मन्द ख्यालैन फलक दचे ख्याल ।" इस कूटनीति और विकट तैयारीकी खबर इङ्गलैण्डमें पहुँची । वीरवर नेलसन कैडीज (Cndis) से भारी जहाजोंके वेडेके साथ शव का सामना करनेको भेजे गये। प्रभाग्यवश रास्ते में ऐसा भारी तूफान आया, कि नायक- का वनगार्ड जहाज एकदम नष्ट भ्रष्ट हो गया। भागेके पतवार इत्यादि कुल आँधोके झोंकेसे उड गये। बेडेकी महायुद्ध नौकाओंने अध्यक्षको नोकाको दुर्दशा देख विचार किया, कि अब जिबरालर लौट गये बिना यह पुन युद्धके योग्य नहीं हो सकती। अस्तु वे पुन जिवराल्टर लौट गये । नेनसनको महायुद्ध-नौकाओंको जिबरालर लौट जानेका बडा म्वेद हुमा, क्योंकि चार दिन में ही बढइयोंके उद्योगसे J
नेलसन 1.
ww
--
वेनगार्ड युद्धके योग्य बना दिया गया। बेडेको( Fargate )
महायुद्ध नौकाये मानो चक्षु है, इनसे रहित बडा चतु-हीन है।
चरित्रनायक अपने वैडेके साथ अलकनन्द्रिया (Alexandia)
पहुँचे। अँगरेनी बेडेके पहुँचने के तीन ही दिन बाद, फ्रेव
बडा भी पहुंच गया था, परन्तु इन लोगोंको उनका कही
पता नहीं लगा।
हिरास होकर नेलसनने पुन सैराकून (Saracuse )
पाकर लगर डाल दिया। नौसौ कोसका चक्कर लगाकर
भी अंग्रेजी बेडा कुछ पता न लगा सका'
इङ्गलैण्डमें लोग इस समाचारसे कनमन करने लगे। कोई
कहता था, कि प्रधान अध्यनने ऐसे नवयुवकको ऐसा भारी
काम सौंपकर अच्छा नहीं किया। कोई कहता "अजो तुम
क्या जानो, नेलसन ऐसा वैसा नहीं है कि शत्रु उसकी आँखों में
धूल झोक निकल जायेंगे।
पाठक। क्या आप भी सोचते है कि चरित्रनायक चुप
चाप हाथपर हाथ दे बैठरहे । नही, नही, अपने अनोत्तीर्ण
उद्योगसे यह भी धबरा रहे थे । एक दिन वह कहने लगे कि
सैराकूज (Saracuso) आनेसे मेरा दिल बैठा जाता है, कहीं
इसी विफल मनोरथमें, मैं मर न जाऊँ।
अबकी बार फिर भी टोह लगानेवानी नौकाये निकली और
भाग्यवश शत्रु का सुराग पाकर लौटी।
पहली अगस्त १७१८ को अन्वेषकोंने सूचित किया कि
।
1-
नाइलका युद्ध ।
।
~
शत्रु का बेडा, अबूकिर (Ahukar) में, जो अलकज़न्द्रियासे १
मील पूर्व में है, नरडाले हुए है।
अब इतने दिनांक
विफल प्रयास सफल हुआ , नेलसनने, जो कई दिनोमे गोचर
पूरा भोजन नही करते थे, आज बडे श्रानन्दसे सब कप्तानो
साथ भोजन किया श्राज मानों भावी समर-मरणमे चरित्र
नायकका उत्तप्त हृदय शान्त हुथा। पाठक ' युद्धप्रिय-वोरोक
मृतकोकाभयानक चित्कार ही सुमधुर गान बोध होता है
प्रगम्त आकाश ही इनका बितान है, तोपोंका गुड म
धुडम शब्द हो उनका मृदङ्ग शब्द है और समर-विजय ही
सचा व्याह-सुख है।
दोनो ओरकी नौकाप्रोकी सख्या बराबर थी, परन्तु
व्र पाइज (Brueyes) फ्रेच एडमिरलको नौकाये बडी और
अधिक बलशालिनी थीं।
फे व बेडेपर आक्रमण करने के लिये गरेनी नौकाओको
एक ऐसे पिछले पानीके मुहानेसे पार होना था जहाँ बान्नमें
ही अटक जानेको सभावना अधिक थी, पहुँचना तो दूर
व माइनको यह विश्वास था, कि इस पिछले रास्ते में
गढका आना दु माध्य है प्रत वह उधरमे नियिम्समा था। वेडेके
पीछेसे गनु भाक्रमण करते है, यह नियम है । यह विचारकर
फ्रेश एडमिरल उधरसे ही पाक्रम रोकनेका उपाय कर
-
- नेलसन। VA NAHMACHAR परन्तु ब्रूभाइन (Brueyes)को क्या खबर थी, कि नेलसन बास्नुकामयी भूमिपर भो जहाज पार कराने में अद्वितीय इस समय वायु फे च बेडे को ओर ही बह रही थी, अतः नेलसनको आक्रमण करनेको और भी सुविधा मिली। इन्होंने अपनी अाक्रमण-युतियां शीघ्र ही प्रत्येक कमानको सद्भत द्वारा जता दी। उनके अन्य सेनापति जब नेलसनकी नौकापर दूक हुए उन्होने कहा-"वीरो। पहले तुम विजय प्राप्त कर लो, फिर मन- मानो लूट मचायो तुम्हें कोई नही रोकेगा।" यह सुन सुनकर शीघ्र लडाई छेडनेको उत्सुक होने लगे। एकने कहा "महाशय! यदि हम लोग इस समरमें विजय प्राप्त कर लें तो ससार कितनी प्रशसा करेगा ?" नेलसनने हंसकर कहा-"विनय पनि 'यदि जोडनेको । नही है,हमलोग विजयी तो अवश्य होंगे, परन्तु इस ६ बचकर विजय समाचार देने देश जायगा, इसमें ~ पाँच बजे मध्याको समरके लिये पतिवद्ध होने की लिसनने दो। 11.- और फोले (Foley) अपने ले लस' (Coalous) सावधानीसे थाह लेते हुए आगे बढे। अध्यक्षको नगार्ड का ( Vanguard ) पक्तिमें छठा ठा/
नाइलका युद्ध ।
vv
-
vvv
निमित्त रक्खा गया कि यदि आक्रमण युक्तिको रद्द
करनेको आवश्यकता हुई तो वह यहाँसे पोछेवाली नौका
ठोक कर लेंगे।
द्वन गार्ड पर छ झण्डे भिन्न भिन्न स्थानोपर इसलिये प
रहे थे कि कही शत्र गोलेसे कुन्न झण्डै एक ही बार न
जायँ। नेलसनकी चतुरतामे रास्ते को बालुकामयी भूमि
साफ पार करते हुए देख बृपाइनका माथा ठनका
भावी युद्धका भयानक दृश्य अब उसकी आँखोके सामने
गया।
कप्तान फोले (Foloy) को इस समय एक और युलिस
वह सावधानीसे थाह लेता हुआ आगे बढ़कर फेध पा
दूसरो नोका कोंक्य एरेण्ट ( Conquerant ) के सामने
तरफसे जा भिडा। पीछेसे अन्य चार जहाज पहुँचकर
वेडा और समुद्रकूलके बोचर्म जा डटे।
वहन गाई याने अध्यक्ष नौकाने अन्य नौकाओके
दाहिनी पोरसे जा घेरा।
इस प्रकार के च बेडा दोनों ओरसे यह हो ।
पाठक । नेलसन को इस मराहनीय युक्तिसे शव के मा
पांच नौकायोको असहाय हो आठ नौकाओंका सा
पीछेवालो नोकाओंको स्थानाभावसे सह
करना पडा।
नेलसन।
AMAN
KA
.
एक तो अँधेरी रात, दूसरे तोपोसे निकलते हुए अवि-
रल धुएँ में आकाशपटपर मानो एक दूसरे काले पटका
चन्दोवा तन गया था, हाथसे हाथ नहीं सूझता था, जहाँ देखो
वहाँ हो अन्धकारका साम्राज्य था, ऐसे अन्धकारमें एक
गरेनी नौका मैजेसटिक (Majestic) भूलसे अपनेसे कहीं
बडी फेस अध्यनकी नौकासे जा भिडी। जीतोड लडाई
हुई और “मैजसटिक में आग लग गई।
एक घण्टेतक घनघोर लडाई होती रही। गरिन लोग
अपनेर स्थानपर डटे रहे। इसी समय शवदलका एक गोला
नेलसनके सिरमें आ लगा। "मैं मरा” कहता हुआ वीर बेरी
साहबकी गोदमें गिर गये। बडी शीघ्रतासे लोग इन्हें
अस्पताम्नमें लेगये।
डाकर इस समय एक नाविक को मरहम पट्टी कर रहा
था, तुरन्त छोडकर अध्यक्ष को देखनेके लिये आया, परन्तु धीर,
वीर.उदार नेलसन यह कदापि मह न सके। उन्होंने कहा-
"डाकर । तुम मुझसे पहले गिरे हुए हमारे नायिकों की पट्टी
ठीक कर दो, पीछे हमारे पास आना, मैं उनके जीवन को
अपने से कहीं मूल्यवान समझता है।"
पाठक ! दया की चरम सीमा है। अपने प्राणातक दुःख
की वीर को कुछ चिन्ता नहीं है, चिन्ता है अपने नाविक के
सुख को। बलिहारी तेरी उदारता को। देशगौरव वीर! तूने
आल दयालुता और कोमलता को पराकाष्ठा दिखलाटी।।
।
-
2
नाइलका युध। vvvwwww runnANAAN . AMRAAMA NANNAVAMNNNN - धाज भी शत्रुत्रासकागे। श्राज दो सौ वर्ष तुझे देशहित टणवत् प्राणत्यागे हो गये, परन्तु आज भी हम अन्य देशवासियों के हृदय में तुम्हारे चमत्कृत त जीवन का छाया चित्र मानों नवीन खचित चित्रकी नाई चमक रहा है। आज भी तेरे जोवन के साँचे में अपने को ढाल देने की इच्छा होती है। ससार तुझे पूज्यभाव से प्रणाम किये बिना नही रह सकता है। डाकर ने घाव को परीक्षा कर प्राणघातक नही बतलाया। तुरत औषधि को पटियों का प्रयोग किया गया , परन्तु जयोत्सुक चरित्रनायक को ऐसे समय में जब कि विजय देव अपनी जयमाल लिये इधर उधर डोलते फिरते थे कब शाति मिल सकती थी अब अलग खडी हुई अँगरेज़ी नौकाये शीघ्रता से भागे बढकरनृतन बल और उत्साह के द्वारा समर को काया पलटा इन नौकाओं के आगे का कलोदेन ( Callo don) जहाज बालूमें फंस गया । सेनापति वीर ट्रोविन (Troubriigo ) ने अनेक उद्योग उहार के किये परन्तु निष्फल ! तप इन्होंने अन्य पोछे से आती हुई नौकाओं को बचाने के लिये अपनी नौका पर लाल रोशनी कर टी भोर उन्हें मकुशल रणनेत्र में पहुंचा दिया। नये अन्न का पहुंचना था कि वोरों ने हुकार ध्वनि को। लडाई पुन घनघोर होने लगी, तोपा के गोले उगलने से समुद्र भी मानो गर्म हो उठा। अब फ्रान्मवान्नों के कके छूट गए। Mohoile चाहती है।
नेलसन । । एडमिरल ब्रूआईज़ को प्रधान नौका में आग लग गई। इस अग्नि के चट चट, तड, तड, शब्द से दिशा गूंज उठी। अन्ध- कार लोप हो गया। वौर एडमिरल प्राइज़ दो घाव खाकर इसी भयानक अग्नि में जल मरा। पाठक ' भयानक काण्ड मचा । एक धडाके के शब्द के साथ जहाज टुकडे टुकडे हो गया। इतने बड़े जहाज पर से केवल सत्तर मनुष्य अँगरेज़ नाविको के उद्योग से बचाये गये। इन जल करमरेहुए मनुष्यों में एक अत्यन्त होनहार बालक भी था। यह बालक नौकापृष्ठ पर अपने पिता को श्राज्ञा से खडा था, अग्नि लग गई, सब मनुष्य जिधर सीग समाई जा घुसे, परन्तु यह वीर पुन पिता की आज्ञा बिना कैसे हटे। ज्वान्ना ने चारो ओर वृतरेखा को नाई घेर लिया, बालक मृत पिता को पुकार पुकार कर पूछता था "बाबा | आज्ञा दी तो हटजाऊँ।" परन्तु कर्तव्यनिष्ठ। तुझसे पुत्र को बाबा स्वर्ग में भी साथ रखना चाहता है। वीर कैसेविअनका। जानी। जानो। को अप्सराये तेरे सुम्बागत को खडी है, तुझ से पुत्र का पिता भी विच कर स्वर्ग में ना गया है, जाओ जाओ। पिता की शीतल गोद को गर्म करो। जाओ। जागो ! धीर । धनहीन दुखी मामान्य कर्णधार के पुत्र होकर भी तुम सुयश के सुवर्ण सिहासन के अधिकारी हो। जाभो ! हम कवियों से अपना सुयशगान सुन सुन कर नक्षतमय वर्ग झरोखे में ठ मानन्द उठाना । स्वर्ग ममार की
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नेलसन।
M
बात चलानी ही फजूल है। आप कहा "नेलसन ।' तोहिं
अदेय मोहि कछु नाही"
नेलसन ने अपनी ओर से ३० हजार रुपये के पदक
अपने सब नाविकों और कप्तानों को दिये। नेलसन पुन,
देश लौट आये, इस समय वह जहाँ जाते थे वहाँ ही राज्य
तथा जन मान्य से मुदित होते थे।
पाठक । निष्काम देश सेवा के ये मधुर फल हैं।
.
,
आठवाँ परिच्छेद।
नेलसन भूमध्यसागर में तथा पुन स्वदेश में ।
मियों को भी कैसी दशा होती है। प्रिया के
सुख से प्रेमी का जीवन, दुख से बस मरण
।
“अपने मुखों की ओर वह भू क्षेप है करता नही,
उपहास निन्दा ताप दुख से वह कभी डरता नही
उठती नहीं है भूल कर भी कामना उसको कभी,
है दग्ध हो जाती सहज में वासना उसकी सभी"
देश-प्रेमी नेलसन को अपना देश ही पाराध्य था, वह इसके
निये "दिन कही, रात कही, सुबह कहीं, शाम कहीं" रहने
मे तनिक भी सकुचित नहीं होते थे ।
नाइन्न युद्ध में पाठकों
को याद होगा कि नेलसन शत्रु गोले से अत्यन्त पीडित हो
चुके थे, परन्तु घर पर बैठ रहने से देश मेवा पूरे तौर से
नहीं हो सकती है यह विचार कर उन्होंने इटली की पोर
यात्रा की इस यात्रा में मार्ग कष्टों के कारण यह भयानक
ननसन। MAA ज्वर मे पीडित हुए। १८ घटे तक डाकरों ने इन में हाथ धो लिया था , परन्तु भाग्य से पुन जीवन की कुछ आगा हुई। इस बीमारी में इन्होंने एक पत्र अपने प्यार लार्ड सेण्ट दिइन्सैण्ट को लिखा था जिसके प्रत्येक शब्द से नैराश्य टपकता था। उसका साराश नोचे उद्धृत है महाशय । विश्वास होता है कि अब आपसे फिर कभी भेट न होगी। जीवन बोझ बोध होता है, परमेश्वर करे कि अब इस उत्सुक जीवन का, जो मध्य जून से फ्रोच्ची की खोज में बिताने से आरम्भ हुआ है, समाप्ति हो जाय। मैं अपने को अब ईश्वर को समर्पण करता हूँ है ईश "राजी है उसी में जिममें रज़ा है तेरो" दुखी नेलसन । चरित्रनायक परमेश्वर की कृपा से शीघ्र ही धगे हो चले और उन्होंने इटली से नेपल्स ( Naples ) की ओर प्रस्थान किया । नेपल्स में इनका स्वागत बडे धूम धाम से हुआ। इतिहासवेत्ता पाठक १७८८ के फ्रेञ्च प्रजा-विद्रोह की 'बात भूले न होगे, विख्यात लेखक वोल्टायर (Voltaire) तथा रोशियों ( Roussean) को उत्तेजना से उन्मत्त फेच्च प्रजा मनुष्यत्व के नियमों पर हरताल डाल पवित्र मानुषिक- स्वत्व को अपने राजा और राज महिपी के रुधिर से अप- +
ww
नेलसन भूमध्यसागर में तथा पुनः स्वदेश में ।
वित कर ससार भर में अपने पमानुषिक नियमों का प्रच
खत्रपाणि होकर कर रही थी।
नेपल्सको राजमाता,प्रभागिनी मृतक फ्रेच राममहिषो मे
भण्टोयनेट (Marie Antoinetee) को बहन थी। नेपलम
भी फेच्चों के प्राक्रमण का भय था। नेलसन के वहाँ पहुँच
होमानो लोगों को जान में जान आ गयो। नेपल्स को राजमात
मे चरित्रनायक काखागत सी मेम धौर प्रानन्द से किया।
नेलसन को देखतेही वह बड़े शिष्टाचार से बोली-
हमारे उहार करने वाले वीर नेलसन । परमेश्वर तुम्हे आगो
वाद दे और तुम्हारी रक्षा करें । हे वीर ! मैं अपने राज्य, धन
तथा देहके लिये भी तुम्हारीऋपोह। है विजयो। हे घटली के
रक्षक ' समग्र इटली शूल के तुम्हो समयदाता हो।
उदार अंगरेजों की कृपा है जो तुम्हे हम भयात्तों की रक्षा
में नियुक्त किया है।"
नेपल्सयासी पँगरेज़ो को बडो पूज्य दृष्टि से देखी थे ,
परन्तु फेशों के भयसे वे पधिक अष्ट, व्यवहार दिखलाने में
यह
हरते थे।
इस समय फेशों में पोप का शासम-दण्ड छिन कर रोममें
प्रजासत्तक राज्य की नीव डालदी । नेपल्स भी निकट का हो,
राय है, कही यहाँ भी फे.व उपद्रव न करें, इसी सोच से
यहाँके राजा के उदय में भयानक चिम्साग्नि चिता की माई
घधका करती थी।
१२
M AmARAMA* AN . नेलसन। केवल उपद्रव का ही भय उसे नहीं था, बल्कि भय सब से बढ कर इसका था कि कही नेपल्स की प्रजाभी फे श्चों के उदा- हरण की नकल न करने लगे और अपने राजा और राज परिवार के सिर को वधस्थान के रुण्ड मुण्ड में मिला है। नेलसन तथा राजमहिषी के अनुरोध से नेपल्साधिष अपनी सेना इकट्ठी कर फेशों पर रोम नगर में चढधाये। इस । समय नेलसनने प्रतिभाको कि नेपल्स की खाडीमें एक अंगरेनी नोका सदा राजपरिवार की रक्षा के लिये प्रस्तुत रहेगी। नेपन्स को सेनाने, जो उधर रोममे लड़ने गई थी, बडी वीरता से लडकर शत्रु फेश्च सेना को रोम से निकाल दिया, परन्तु यह विजय उनको अन्तिम विजय थी । नेपन्स की सेना यद्यपि वीर थी परन्तु सहिष्णु नही थी। विजित फेञ्च सेना का पीछा करती हुई जब नेपल्स की मेमा जारही थी उस समय फेवसेना इसे थकी हुई देख, सख्यामें इनसे न्य न होने पर भी पलट कर खडी होगयी और जम कर लड़ने लगी । नेपल्स की सेना इस मारको यान्त होने के कारण सह सकी । तुरत पैर उखड गये और विजय माल फे,च्चों के गलेम जा पडी। नेपलस शहर अब एकदम अरक्षित हो गया । राजा और राजपरिवार की अवस्था इस समय बडी ही शोचनीय हो उठी। अब उनकी रक्षा केवल नेलसन के हाथ धो, इसके जिवाए जोना और मारे मरना था। - 4 । -- AINA RAMAN RAMA WARA MAA - A AA नेलमन भूमध्यसागर में तथा पुन स्वदेश में । प्रधान राजपरिचारिका ने राजपरिवार तथा राजधन- कोप को बड़े उद्योग से एक सुर ग के द्वारा समुद्र तट की ब्रिटिश नौका पर सुरक्षित पहुँचा दिया । नेलसन ने बडे उद्योग और कठिनाइयों से राजपरिवार- चालोको वहां से अपनी हैनगार्ड (Vanguard) नौका पर पहुँचाया। दो दिन तक चरित्र नायकने खोज खोज कर शरण चाहनेवाले नेपन्स देशवासियों को अपनी नौका पर स्थान दिया। नेपल्स के कुम्न ब्रिटिश व्यापारी अपने माल मते के साथ अँगरेजी बेड पर सुरक्षित स्थान पा सके। इस प्रकार इतने मनुष्यों की रक्षा कर मैंगरेनी बेडा पेलरमो (Palerino) होप की ओर चला और तीन दिन के कष्टमय मार्ग को पूरा कर ये लोग सकुशल वहाँ पहुँच गये दुखित नेपल्स राजपरिवार को यहाँ उतार कर ओर उनके मम प्रकार के सुख के सामान कर, चरित्रनायका ने संसारमें अपने परोपकार और दयामा धनगर स्तम्भ गाड दिया। इसी कारगप से आज दोसौ वर्ष बाद भी नेलसन का नाम क्रिश्चियन धामावलम्बी देशो का गर्व है। नेलसन अपने पैगम्बर क्राइस सा परोपकारी था। उसने नेपल्सवालो के लिये आंधी तूफान इत्यादि को पर्वाह न की और इनकी रक्षा कर सच्चा क्रिश्चियन कर्म चरितार्थ कर दिखलाया। उहिग्नता के समय मे नेलसन रौढ़ और शान्ति को अपूर्व मिय मूर्ति मन जाता था। वह जैसा ही वीर सिपाही और धीर
nanAR
८२
नेलसन।
नाविक था वैसा ही वादी और विचक्षण राजनीतिन भी था।
लार्ड दिइन्सेण्ट इमको गुणगाथा दोहराते हुए कहते थे “तुम
रण में जैसे वीर हो, गूढमन्त्रणा में वैसेही धीर हो।"
मिण्टोने हॉक कर कहा था, कि संसार केवल यही जानता
है कि नेलसन स्वदेशके लिये लडनेवाला है परन्तु नाव्य-दक्षता,
भोर वीरता के अतिरिक्त नेलसन में योग्यता और सहिष्णुता
के गुण भी पूरे हैं, जिसके द्वारा यह स्वदेश के गौरव और
हित की रक्षा करता है।
भूमध्यसागरमें फ्रेच्चों का बल अब बहुत क्षीण हो चला था,
ब्रिटिश बेडे के बकध्यान के कारण ईजिप्ट चे फच्चों को छट
कने का सुअवसर नहीं मिलता था। इधर माल्टा में भी ये
लोग धताये जारहे थे, उधर पोर्चुगीजों ने ग्रेटबोटन से सन्धि
कर ली और अपना वेडा नेलसन के प्राधीन कर दिया।
इतने पर भी ब्रिटिश एडमिरल को सन्तोप नही था। वह
-शत् ओ का समूल नाश करने को कटिवद थे।
नेलसन परमेश्वर से शवों के नाश के लिये विनती
प्रति करते थे और कहते थे "फेशों का अध पतन
ये शब्द प्रत्येक टेश के राजग्राहों पर अवश्य भद्धित
चाहिये ।"
इस बीच में समाचार मिला कि फेच लोग भोपार्टी के
निकट जिबराल्टर जाने के उद्योग में हैं।
एडमिन नेलसन इम ममय कुछ योमार थे , परन्तु उन्होंने
,
Wwwv -~ . - नेलसन भूमध्यसागर में तथा पुन स्वदेश में । जो यह बात सुनी, रुग्नावस्था को प्रक्षमता मानों दूर भाग ई, शीतल रुधिर में विद्युत् दौड गई. शरीर में तेज और ल का संचार हो पाया, वह शत्रु को रोकने के लिये बलने को प्रस्तुत हो गये। बोले "युद्ध करने में एक क्षण का वलम्ब भी अनुचित है।" तुरत एका पत्र लार्ड व्हिन्सेण्ट प्रधान एडमिरल को শিৱা महाशय, आप विश्वास रखे , ब्रिटिश वेडा मेरो प्राधीनता में, कदा- पि शत्र के हाथ नहीं पड मकता है। हम लोग नाश हो कर भी शत्र, को तो पंख-होन कर बदी हो जाने के योग्य अवश्यही कर देगे। पाठक । तनिक "नाश होकर भी गव को पख-हीन कर देगें' शब्दों पर तो ध्यान दे। ये वीर चरित्रनायक का कैमा आन्तरिक भाव स्वच्छ प्रगट कर रहे है । यह देश प्रणय कसा सराहनीय है कि मै माँ तो मरूं परन्तु टेग गत्रु के पख टूट जाय कि वह पुन कभो देश की भोर भ क्षेप न करे। नेलमन जनश्रुति के अनुमार पेन्नारमो में शव को प्रतीक्षा कर रहे थे। इसी समय अटे मित्र सेएट हिनमेगट के देश का ममाचार मिला । नमन इममे अत्यन्त दुखी हुए। इनके स्थान पर कोथ मारय प्रधान पध्यक्ष होकर पाये ।।
नेलसन ।
A
PANKAnnA
Anh
AAAAAAAARAAAAAA
इस समय इन्हों ने कुल येडे का दो विभाग कर तरह नौकाएँ
चरित्रनायक की अध्यक्षता में सिसली की पोर रखी और
बाकी बोस टाउन्लीन की ओर अपने प्राधीन रखी।
यदि नेलसन का सैन्यबल इस समय अधिक होता तो
शायद यह शत्रु को युद्ध के लिये वाध्य करते , परन्तु इनसे
धृष्ट वीरने भी वाईस शत्रु नौकाओं से केवल तैरह नौकाओं
को साथ ले सामना करना असम्भव समझा।
परन्तु कप्तान मोविज ने फेवों को अनेक स्थानों
के थल युध में परास्त किया, कुछ दिनो मे फ्रेञ्च लोग नेपल्स से
निकाल दिये गये और नेपल्स के राजा पुन: अपने देश लौट
आये राज परिवार ने अँगरेतों को अत्यन्त कृतज्ञता
प्रगट की और अपने रक्षक नेलमन को ब्रोण्ट ( Broute )
बना कर ४५ हजार रुपये की सालाना पेन्शन नियत
कर दी।
कोथ साहब कुछ दिनों के लिये खदेश चले गये, इन के स्थान
पर नेलसन को प्रधान स्थान मिलना चाहिये था, परन्तु ऐसा
नहीं हुआ। प्रधान एडमिरल का स्थान कीथ साहब के आने
तक खाली पड़ा रहा।
नेलसन को यह अपमान सा बोध हुआ, उसने बडे दुख
के माथ लिखा था 'मैं जब भूमध्यसागर मे प्रधान अध्यक्ष के काम
करने योग्य ही नही हूँ तब मेरे लिये ग्रीनविच के कग्नागार
से बढ कर और स्थान कहाँ हो सकता है।"
।
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नेन्नसन भूमध्यमागर में नया पुन बदेश में। ८५
इनके टु.पकी मात्रा उस समय और भी बढ़ गई, जब
पोलियन जो सदा कहा करता था कि एक न एक दिन इम
ग ईजिए से अवश्य सकुशल देश नोट जायेंगे" सचमुचही
पाघर
को अंगांनी पंडे के रहते हुए भी सकुशन फ्रान्स
ट गया।
नेलमन को जो हदय में चाहते थे कि फ्रान्स का एक भी
हाज़ ईजिप से म भाग मके, एम बात की बडी लज्जा हुई।
इस समय नेपोलियन यदि पकडा जाता तो इतिहास का
य ही बदल जाता। नेपोलियन को क्रूरता इस प्रकार जगतमैं
ख्यात हो, योर का नाम पाज मा कालशित न कर सकती,
बह Pest of Human race के नाम से ही पुकारा जाता।
नेलसन कहता था कि यदि मैं माल्टा की रक्षा में नियत न
ता और मेरे पास कुछ भी और अधिक नौकाये होती तो
पोलियन एम प्रकार अकडता हुपा फ्रास नही नौट
कता था।
इस समय कीथ साहब स्वदेश से लौट कर भूमध्यसागर के
डे का भार लेने पुन वापस पागए । नेलसन के हाथ से इस
मय एक ऐसा कार्य हो गया जिससे इनके सन्तप्त हृदय
शान्ति मिली। नाइल युड से भागे हुए दोनो फ्रेच जहाज़
स समय भाग्य से बन्दी कर लिये गये।
नाइल युवका प्रारम्भ नेनसन के हाथ से होकर समाप्ति
इनके हाथों ही हुई।
नेलसन ।
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--
-
।
चरिवनायक प्रव स्वदेश लौट चले। जर्मनी होते हुए
१८०० ई० को ६ ठी नवम्बर को यह यारमौथ (Yarnouth)
सकुशल पहुँच गये।
जहान नौकायय में पहुँचा। नेलसन के देशभूमि पर पैर
रखते ही समग्र इङ्गलैण्डवासी भा जुटे। बडे आवभगत से
एक गाडी पर चरित्रनायक बैठाये गये, नगरनिवासो घोडे की
जगह पापही गाडी खींचकर लन्दन सफ ले गये। अनेक
पदवियाँ, अनेक खिलभते भेट की गई । राषिके समय स्थान
स्थान पर आतशबाज़ियाँ छूटने लगी। मनुष्यों ने जो जो
सत्कार उचित थे सब किये।
पाठक
। चारों ओर आनन्द हो भानन्द हो गया।
चरित्रनायक का भी शम भूल गया, वह प्रसव हो गये।
।
-
--
नवाँ परिच्छेद। ... कोपिनहेगन का युद्ध । नयी प्रकृति भी कैसी स्थिर होती है, एक मा क्षण मे कुछ, दूसरे क्षण में कुछ और ही हो जाती है, अाज यदि मिष्टान हमें अच्छा मालूम होता है तो कल उससे अरुचि हो जाना असम्भव नहीं, पाज यदि जन कलकल से हम प्रसन्न हैं - तो कन एकान्तवामी, राहत्यागी हो जाना अमम्भव नहीं। इस प्रकार को प्रकृति, यद्यपि अनेक बडे २ मनोविज्ञान वेत्ताओ के मत से, दुर्बलता है, परन्तु मनुष्य मात्र में ही एक न एक दुर्बलता विद्यमान है, अत एक दोष से मनुष्य नीच नहीं हो जा सकता। जिस विधाता ने "सागर के जल खार कियो, अरु कण्टक पेड गुलाब के कोनो" उसने ही चरित्व- नायक के उज्ज्वल चरित्र में एक ऐमा काला धब्बा भी लगाया जिसके कारण वीरवर दुर्वल हृदय कहा गया। परन्तु इससे क्या यशस्वी नेलसन का क्या जगत् तिर- 2८ नेनसन। mww ~~ स्कार कर सकता है ? स्कॉट के कथनानुसार चरित्रनायक पर दोषारोपण करने के पहले पाठक गण " " Scaich the land of living men “IVhere toill thou find liis like agen" . फिर जैसा कहते बने कहना। नेलसन स्वदेश में आकर यद्यपि जन-सत्कार से वहुसम्मा नित हो अत्यन्त प्रसन्न हुआ, परन्तु इसका ग्राहस्थ-जीवन अपनी पूर्व प्रेयसी निरपराधिनी स्वो को, एक नेपल्सवासिनी, बीबी हैमिल्टन के प्रेम पाश में फंसकर, त्याग देने से बिलकुल किरकिरा हो गया। नेलसनका अन्त करण यद्यपि हैमिल्टनके प्रेम-चुम्बनके लिये लालायित हो रहा था, परन्तु वह अपनी पूर्व पाणिग्रहीताके मदगुगोंको भूल न सके थे। पाठक। त्यागनेके समयके ये अन्तिम शब्द,-"मै परमेश्वरको शपथ खा कर कह सकता हूँ कि तुममें वा तुम्हारे चरित्वमें एक भी बात दूषणीय नहीं है।" चरित्रनायकको मञ्ची गुणग्राहिता दिग्वला रहे है। एक- मात्र आत्म दुर्बलता हो ऐसे उदार प्रकृति नेलसन से ऐसा कठोर व्यवहार हो जानेका कारगा कही जा सकती है। नेलसनो उचितवता भिवोंने इनकी ऐसी कठोरता पर इनकी खूब ही खबर लीथी। खैर विभ्रम भी मनुथ मातिक नियेही A man of gentous & virtue is
-
कोपिनहेगन का युद्ध।
but a man" अर्थात लाखों गुणोंसे शोभित होता हुआ
मनुष्य भी मनुष्य ही है।
नेलसन स्वदेशमें अधिक दिनो तक न रह सके। पूर्व
दिशामें समर भेरीके शब्दसे शार्दूलके प्रड्न २ फडकने लगे।
पुन देश गौरवको रक्षाके लिये, अविलम्ब वेडा ठीक कर
हुकार ध्वनि करते हुए वह चल पडे।
इस समय ग्रेट ब्रिटेन उदासीन देशोकी नौकाओंकी
जाँच पडताल बडी कडाईसे किया करती थी और जहाँ कोई
वस्तु फ्रान्स देशमें जाने के लिये जहाज़ परपाती पकड़ लेती थी
इस धरा पकडीमें डेनमार्कसे कई बार झगडा हो गया,
जहाज जहानमें भी कभी कभी टटा होहो जाता था, परन्तु
अभीतक युद्ध पूर्ण रूपसे नही छिडा था ।
रशियाके ज़ार इस समय अंगरेजोंके माल्टा नहीं छोडने
के कारण क्रुद्ध थे और बदले में उसने तीन सौव्यापारी अंगरेजी
जहाजोको बन्दी कर लिया था।
इस पर भी सन्तुष्ट न हो कर, रशियाने स्वीडन, डेनमार्क
और घृणियाको भी अपना साथी बनाया और एक "Armed
Neutrality नामक सन्धि स्थापन की, जिसके द्वारा इन
लोगोंने अँगरेनोको जहाज़ोकी तलाशी लेनेसे रोका।
नेपोलियनने जो इन राज्योंको कमर कसते देखा तो खूब
गामाशी दी और उनकी ५० समर-नौकाओं के द्वारा अपने
कदर गनु अंगरेजोके नाशकी भावना मनमें करने लगा।
.
धर
ननसन। AAAAMAA । -- इन लोगोका पहले ग्रेट ब्रिटनने डिनमार्कको ऐसी छेडछाड न करने के लिये बहुत समझाया। फिर रशियन वेडेको उसके अन्य सहायक बेडोसे अलग रखनेका भी उपाय किया और एक बेडाहाइड पारकर तथा नेलसनके अधिकारमें यार- मौथके नौकायसे रवाना किया। (१२ मार्च): इधर डेनमार्क वालीन जो ब्रिटिश सिहके साथ भीषण युद्धको सभावना देखी, तो पहले वे अपनी राजधानी कोपिन- हेगनको रक्षाका पूरा सामान करने लगे। आबाल वृद डेन्स लोगोंने दिन रात कठिन परिश्रम कर टूटे प्रकोष्ठ इत्यादि को दुरुस्त करना प्रारम्भ करदिया। कथन था, कि यातो अपनी राजधानीको रक्षा ही करेगे या प्राणही दे देगे। शुरू अप्रेल में अँगरेजी वेडेने यारमोथसे चलकर डेनमार्क की राजधानी कोपिनहेगनसे पांच मोल पर इलिसनोर (Elisnore) में लङ्गर डाला। पारकर साहब शुरूसे ही बडी सावधानतासे कार्य कर रहे थे । यद्यपि यह नेलसन के स्वभाव के विरुद्ध थे तथापि अपनेते बडे अफ़सरके काममें यह छेडछाड नही कर सकते थे। मार्गका विचार करते हुए, पारकरने डेनमार्क जानके लिये इंगलैण्ड और डेनमार्कके बीचके सकीर्गा मुहानेसे जाना निशित किया। नलिसनको भी विचारको सूचना दी गई, बडी निर्भयता से उमनि कहना भिजवाया कि चन्ननेके मार्गके लिये मना .
कोपिनहेगन का युद्ध । PA . A रगडा क्यो, जब लडना ही है तो किसी मार्गसे पार होकर लडना चाहिये। नेलसनको अपने प्रधानके शकी मिजानसे भय था कि कही वह डेनमार्क वालोंको अजेय मान छोड न दे। परन्तु अब जब उन्होंने देखा, कि युद्ध होने में समय नही तब तो बडे प्रसन्न हुए और निश्चय ही विजय पानेके लिये अब वह तत्पर हो युक्तियाँ सोचने लगे। पाठक । अब तनिक प्रॉखे मूंद, समर-भूमिका ध्यान करे, और अपने चरित्रनायकको अकाट्य युक्ति पर शाबाशी । देवें। कोपिनहेगनके सम्मुख दो मुहाने हैं जिनसे बडे जहाज प्रा जा सकते है। उन दोनों मुहानों के बीच एक बड़ी लम्बी बालुकामयी भूमि है। भीतरी मुहानेके सन्निकट भूमिपर डेन्सोको प्रभावशालिनी और शक्तिशालिनी सेना इटी है। उन्हें यह विश्वाम है, कि गत्-सैन्य अवश्य इसी मुहानसे पायेगी और हम लोगोंसे अवश्य ही पराजित हो जायगी। इधर नेलसनने उनके हवाई किलको अपनी एक युक्षिसे हवामें ही मिला दिया। इन्होंने भीतरी मुहानसे न जाकर, बाहरी मुहानसे घुसकर ही आक्रमण करने का विचार किया। मुहानेसे प्रवेश करनेपर, अंगरेजी वेडाडेन्मोंके पिछन्ने भाग पर भाक्रमण करेगा और नाग करता हुपा भीतरी मुहामिसे निकम्न जायगा।
निलसन।
१०२
अंगरेजी जहाजो पर पानी थाहनेका यन्त्र नही था, अतः
नेलसन दो दिन तक खुली डोगीमें अन्धकारमयी रात्रिम
मुहानेको थाह लेता फिरा। खैर १ एप्रिलको ब्रिटिश बेड़ेने
कोपिनहेगन नगरसे २ मीलको दूरीपर लगर डाला।
नेलसनका अन्तरङ्ग मित्र कप्तान हाडौं इस समय जान
जोखिमका कार्य कर बेठा। बडी चतुरतासे वह अपने जहानसे
उतर, एक डोगीपर चढ कर, डेनिश तोपखाने में घुस गया
और कुहासेके अन्धकारमें यह डेन्म-प्रधान-एडमिरल की
नौकाको भी परिक्रमा कर पाया।
कहीं पानीको छपछपा-
हट पा शत्रु, जाग न जायँ, इस विचारसे साँस रोकता हुआ
और लग्गोसे डेंगी खेता हुआ वीर जा रहा था।
थोडे शब्दसे बनाबनाया खेल मिट्टी हो जायगा। इस
समय सर्वत्र शान्ति है । शान्त समुद्रमें वायु सचालनसे जलके
थपेडेके शब्दके सिवाय और कोई शब्द नहीं है। दिशा शब्द
होन हो गयी है। कहीं २ जहाजो पर जो रोशनियाँ जल
रही है वे भी कुहासके अन्धकार-घटमें विलीन हो जाती हैं।
प्रहरीगण रातके इस मध्यभागमें ऊँघ रहे हैं, उन्हे क्या
खबर थी, कि शत्रु इतनी ढिठाई कर सकते है।
चारो ओर टोह लेता हुआ कप्तान हार्डी अपने जहानको
ओर घूमा। किसीने देखा तक नहीं। सकुशल यह नेलसनसे
जा मिला और पेनसिन्न कागजे ले समूचा नकशा भीतरका
खीच दिया। कहों पर जहाज़ घूम सकता है, कहाँ पर
.
-
कोपिनहेगन का युद्ध।
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~ vvvv
-
४-
बास्नमें अटकनेका भय है इत्यादि सब भेद नेलसनने अपने
धूर्त्त जासूसके युद्धिचातुर्यसे जाम लिये।
नेलसनने तुरन्त प्रधान एडमिरलसे मिल, दश हलके
जहान आक्रमगा करनेको मांगे। पारकर साहबने दो और
अधिक जहाज दु.समय विचार मेलसन को दिये और स्वयम्
बचे वेडेके साथ रशिया और स्वीडिश लोगोंको सहायता देनेये
रोकनेके लिये तैयार हो गये !
दूसरे दिन यायु अँगरेजी वेडे के अनुकूल बहने लगी, मानो
ईखर भी इनको आक्रमणके लिये उत्तेजित करने लगे।
परन्तु इस समय एक कठिन असमजम पैदा हुआ। पाठ
बज गया, परन्तु कोई मार्गदर्शक ब्रिटिश बेडेके लिये आगे
बढता ही नहीं। इसका कारण यह था कि मार्ग दर्शकगण
स्वयम् ही मार्गसे पूरे अवगत नही थे। सन्धि समयमें किसी
किसी
प्रकार टोसे टटोलते, ये अपने व्यापारिक जहाजोंको
पार करनेते थे, परन्तु इस समय लड़ती हुई बडी बडी युद्ध
नौकाओंको रास्ता दिखलाना इन्हें असम्भव बोध होने लगा।
खर, या झमेला अधिक देरतक न रहा । कप्तान मरे
(Murrny) ने अपने एडगार ( Edgu) महान पर
मार्ग दर्शकका कठिन भार अपने अपरम्ने लिया। दस बजे सब
लेस हो गये और क्रामसे चलमेका मकेत दे दिया गया।
एडगार (Edgar, अपना कार्य बडी कुशलतासे कर रहा
था, परन्तु प्रभाग्यवश प्रागेके तीन जहाल, नायकका
.
नेलसन ।
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an
-
पुराना अगमेमनन (Aymiummons, बेलोना (Be llonal) रमे-
(Rusuel) बानुमें फँसकर वेकाम हो गये । इस प्रकार चौथा
आक्रमणकारी जहान रद्दी हो गये।
अबकी नन्नमनः
दिग्विजयो ( Clephant ) की पारी थी। यदि नेलसन इन
समय बुद्धिमानी नहीं करते और हार्डी का नक्शा उन
पास न होता तो वह भी बालूमें फंसजाते परन्तु वे कठिन
उद्योगसे निकल गये बस फिर क्या था पोछे के सब जहा
साफ निकल आये और दो तरफ गोलों की बाढ शत्रु प
दागने लगे।
अब तीन नष्ट जहानों को, अपनी वीरता से, क्षति पूत्ति
करने के लिये, कप्तान रायोक्सने (Rioux) हलके जहानों
साथ आगे बढकर शत्र के तोपखाने पर धावा किया। यह
हलका बैडा ऐसा जो खोल कर लडा, कि शत्रु के छक्के छ टर्न
लगे। मानो इन वोर नाविकों को अपनी हानि का ध्यान तक
नही होता था।
पाठक। यही सच्चे युद्ध का चित्र है, प्राड का कहीं नाम
नहीं, दोनों ओर के तोप के गोले, टोनों ओर की नौकार्य
पर ही टकराते है, गोलियोंसे तो मानो सावन भादी की झर्ड
लग गयी है। वीर नाविकों को इस समय घावों को सुधि भूल
गई है, बेतहाशा गोलियां छोड़ते और खाते है। नेलसन ने
कहा,-आज के युद्ध से स्वर्ग में स्थान बढाने की आवश्यकता है
भाज क्षण माव में न जाने किसने वीर वीरगति को पहुँचे गे:
कोपिनहेगन का युद्ध। परन्तु जो कुछ हो मैं तो ऐसे घनघोर युद्ध के बीच मे वर्ग के राज्य के लिये भी नही हटना चाहता।" इस छोटे स्थान में ऐसे धनघोर युद्ध की भावना मात्र से हो मन घबरा उठता है । युद्ध करते २ दोनों टल अब केवल दो सौ गन की दूगे पर चले पाये थे। डेनिश प्रधान अध्यक्ष को नौका में इस पग्नि वर्षा के कारण अग्नि लग गई। भाग लग जाने पर भी वोर स्वदेश-भक्त डेनिगों ने मारना छोडा नही, परन्तु कब तक १ अग्नि भीषण रूप धर धुधकारने लगी। प्रब विचारा स्वदेश की सेवा करता हुआ, संसार पति- हास में अपना नाम प्रमर करके प्रधान डेनिश पक्षतत्व में मिन्न गया। मुहाने के बाहर खडे हुए अंगरेलों प्रधान अध्यक्ष पारकर साहब तोपो की विकराल गडगडाहट और अग्नि को गगन- चुम्बी नो देखकर तथा अपनी नौकानों को अत्यन्त न्यून सख्या सोच २ कर विफल होनेपर भी, वायु के प्रतिकूल रहने के कारण सहायता नहीं पहुंचा सकते थे। साथही पारकर नेलसन के स्वभाव से अभिज्ञ थे। जानते थे कि नेलसन आमरण समर क्षेत्र से विमुख होने वाले नहीं है, अब क्या किया जाय। एडमिरल को कोई युक्ति नहीं सूझी। घबरा कर न० ३८ का समर रोकने याला साकेतिक भाड़ा खडा कर दिया। इस समय नेलसन नौका पृष्ठ पर धूम धूम कर भीषण ११ निलसन । 10 muvWRAuroram - -- समर-लीला देख रहे थे। इतने में सकैत देखने वाले अफसर ने नेलसन का ध्यान उस ओर आकर्षित किया । नेलसन ने घबराकर पूछा, "यो मेरा न० १६ का जम कर समर करने घाला झण्डा तो लगा हुआ है न ?" प्रधान के हुकारी भरने पर उन्होंने पुन कहा--"ध्यान रखना, हमाग झण्डा नीचे झुके नही। डर कर समर बन्द करने के पहले मैं अपना प्राण निकल जाना कही उत्तम समझता है। अपने चश्मे को दृष्टि-हीन नेत्र पर खीच कर नेलसन ने अपने सहकारी कप्तान फौले साहब से हँसकर कहा-'क्यों जी! ऐसे २ समयों पर मेरा एकाक्षी होना मुझे आज्ञा उन्नदन के कठोर दण्ड से बचा सकता है न ?" सकेतक। पुन कहता है सावधान । मेरा जम कर लड़ने का सकेत नीचे न गिरे । पाठक । सेण्ट व्हिन्सेण्ट के युद्ध में प्रधान अध्यक्ष को आज्ञा उल्लङ्घन से विजय पाना आपको भूला नहीं होगा, वही बात पुन भाज सन्मुख आई। इस बार भी युब विजय हुआ। वीर कप्तान रायोक्स (Rious)ने प्रधान अध्यक्ष की आज्ञा का पूरा प्रतिपालन किया । ज्यों ही संकेत देख कर यह लौट रहा था और कह रहा था 'हाय । नेलसन युद्ध बन्द करने में क्या समझेगा।" इतने में शत्रुदल का गोला कुछ नाविकों को घायल करता हुआ इसे आ लगा। वीर गिर पडा, परन्तु गिरते गिरते मी इसने ऐसी उत्तेजना-अग्नि नाविकों के वृदय में लगाई कि कोपिनहेगन-युद्ध विजय कर के ही वह बुझी। , । ।
AIN . । . कोपिनहेगन का युद्ध "आनो वीरो। बाजाओ। बस हम तुम एक साथ ही वर्ग को चले ।" ये उसके अन्तिम वचन थे। वीरो ने पुन- नूतन बल युक्त हो समर प्रारम्भ किया। दो बजते २ शत्रु लोग ढोले पड गये। शव बैडा श्राधे से अधिक तहस नहस हो गया। उनके तोपखाने जहाँ तहाँ पानी में डूब गये । उनका प्रधान जहान जल भुन कर राख हो गया। अब वीर डेन्सो का बचना कठिन था, क्योंकि वे मरते २ भी पीछे हटने वाले नही। नेलसन इन वीरों को मर मिटते देख न सका, तुरत एक पत्र डेन्मों के पास इस प्रकार लिखा "अंगरेजो के प्यारे भाई डेन्मार्कवासी ' लाई नेलसन को आशा है कि वह डेनमार्कवासियो को शस्त्र रख देने पर जीवन-दान दे देवे। परन्तु यदि शस्त्र रखने में आप लोग आनाकानी करेगे, तो नेलसन आपके कुल जहाली को जना कर राख कर देगा और आप वीर डेन्सों वो बचा न सकेगा।" नेलसन के सिकत्तर ने पत्र को मामूलो लाह से बन्द करना चाहा, परन्तु नेलसन ने ऐसा करने से मने किया और पत्र को ठीक तरह से सील मोहर कर बन्द करने की मात्रा दो क्यो कि यह पत डेनमार्क के राजा के पास जायगा। यदि यह पत्र को ठीक तरह से मोहर किया हुआ नहीं देखेगा तो अवथ समझेगा कि किसी घबरहट को जल्दी में चिट्ठी बन्द नही की गई।
L १०८ नेलसन। AAAAAAAAAAAAA A अस्त। उत्तर में डेनमार्क के राजा ने समर बन्द करके सन्धि करने को लिखा। नेलसन ने बडी योग्यता से कहना दिया, कि प्रधान अध्यक्ष पारकर साहब से इस विषय में राय ली जाती है उत्तर पाने पर सन्धि पत्र लिखा जायगा। तक समर बन्द रहेगा। उधर पत्र प्रधान अध्यक्ष के पास भेजकर नेलसनने विजित शत्रु नौकाओं को शत्रुओं से बहुत दूर अलग लाकर लगर डाल दिया। रात्रि होते होते सन्धिस्थापित हो गई। वाचक ! कोपिन हैगन का प्रसिद्ध युद्ध समाप्त हो गया। यहाँ पर डेनमार्क- वालो को युद्ध रीति का कुछ विवरण कर परिच्छेद समाप्त किया जायगा। डेन्स लोग ठीक बिटन लोग के समान योडा धे, कोपिन- हेगन के युद्ध के पहले हम लोग फ्रान्स और स्पेन वालों को युद्ध-शैली देख चुके है, परन्तु वे लोग वीर डेन्मों के पैर को धूल की समता नही रखते थे। चार घण्टे तक अँगरेजों को भीमकाय तोपो से उगले हुए लहलहाते गोनों को सहने की शति डेन्सों को छोड और भूपृष्ठ पर किसी वीर जाति की नही। ऐसा कार्य, ऐमी समर-धोरता और युद्ध निपुणता अभी तक देखने में नहीं आई। , डेनमार्कवाले कही फिर रशिया से मिल कर उपद्रव न करे, यह मोचकर रगियनो से युद्ध करने का विचार अगरेनों
कोपिनहेनग का युद्ध।
HANA
AAAAAMAN
-
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MAA
।
का था, परन्तु रशिया का जार ४ थी एप्रिल को चल बसा और
गान्ति पूरे तौर से स्थापित हो गई।
नेलसनने सन्धि को गत ऐसो योग्यता से ठोक की
थीं, कि शव मित्र दोनों प्रसन्न हो गये
नेलसन के पुराने प्रशसक ह लार्ड सेण्ट व्हिन्सेण्ट ने इम
समय लिखा, कि महागय । प्रादि से अन्त तक पाप के
प्रत्येक कार्य साध्य है। मुझे आपकी उपमा खोजने की
प्रावश्यकता नहीं,ससार में और सहशता हो सकती है परन्तु
नेलसन जगत् में एकही है।"
-
दसवाँ परिच्छेद। नेपोलियन की इंगलेण्ड पर चढ़ाई की धमकी। न्धि स्थापित हो गई । १७८० के चार शत्रुत्री में से डेनमार्क तो समाप्त ही हो गया, पर- स न्तु रशिया, स्वीडन और प्रशिया ने अभी खुल्लमखमा सिर नहीं नवाया था। फिर बिना इन्हें वशम किये अँगरेन लोग सुख की नोंद कैसे सो सकते है ? अतः एक ब्रिटिश वेडा बाटिक समुद्र में स्वीडनवालो की खोज में निकला। नेलसन को पुन. इस समय पुगने (Flephant) को छोड सेण्ट जॉर्ज (St Gcorge) जहान पर अभाग्यवश सेण्ट जॉर्ज (St George) में इस समय कुछ मरम्मत को दर्कार थी, इस लिये वह बेड़े से पीछे छट गया। नेलसन वेडे के साथ उपस्थित रहने के लिये अस्तव्यस्त हो रहे ये , एक पत्र में इन्होंने बीबी हैमिल्टन को लिखा था, सुनने में पाया है कि स्वीडिश बेला गैलीज़ (Shallors) जाना पडा। . ।
-
नेपोलियन की गर्लगड पर चढाई की धमकी।
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के निकट आ गया है। हमारे जितने नाविक है सब युष में
जान को व्यग्र हो रहे हैं, और मुझे भी यहां रहना विद्या-
र्थियों के में रहने के बराबर है। जिस प्रकार स्कूल में
छुट्टी हो जाने पर विद्यार्थीगण अपने ग्रह पर गद्गद् हृदय से
लौट जाने को व्यग्र रहते है, उसी प्रकार मै भी युद्ध रूपी स्कूल को
शोध समाप्त कर कैसे भी इंगलैण्ड लौट जाने को उत्सुक हूँ।
मेण्ट जॉर्ज (S: Georgo) को युद्ध के लिये पूरी तरह
से तैयार हो जाने के पहले ही, नेलसन को समाचार मिला
कि वीडिश लोग आगे बढे पा रहे हैं।
युद्ध छिड जायगा और मैं समरक्षेत्र से इतनी दूर पडा
रहगा, इस विचारने नेलसन को अपने प्रापिसे बाहर कर दिया
उहोने तत्काल एक डोंगी तैयार करने की प्राज्ञा दी और उसी में
बैठकर अपने जहान को छोड दिया, और वेडे से जा मिलने
लिये रवाना हो गये।
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दसवाँ परिच्छेद। . नेपोलियन की इंगलेण्ड पर चढाई की धमकी । पर- स न्धि स्थापित हो गई। १७८० के चार शत्रुओं में से डेनमार्क तो समाप्त हो हो गया, न्तु रशिया, खोडन और प्रशिया ने भी खुलमखुला सिर नही नवाया था। फिर बिना इन्हे वशमें किये अँगरेज लोग सुख की नींद कैसे सो सकते है ? अत' एक ब्रिटिश वेडा बाल्टिक समुद्र में स्वीडनवालो की खोज में निकला। नेलसन को पुन इस समय पुराने (Elephant) को छोड सेण्ट जॉर्ज (St George),जहाज पर जाना पडा। अभाग्यवश सेगट जॉर्ज (St Georgo) में इस समय कुछ मरम्मत की दर्कार थी, इस लिये वह बड़े से पीछे छट गया। नेन्नसन वेडे के साथ उपस्थित रहने के लिये अस्तव्यस्त हो रहे ये, एक पत्र में इन्होंने बीबी हेमिन्टन को निखा था, कि में आया है कि स्वीडिश वेडा गैलोज़ (Shallows) - - -
नेपोलियन को गलगह पर चटाई की धमकी
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ANNA
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जिस प्रकार स्कूल
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के निकट आ गया है। हमारे जितमे नाविक है सब युद्ध में
जाने को व्यग्र हो रहे है , और मुझे भी यहाँ रहना विद्या.
पियों के स्कूल में रहने के बराबर है
में
छुट्टी हो जाने पर विद्यार्थीगण अपने ग्रह पर गद्गद् हृदय से
लौट जाने को व्यग्र रहते हैं, उसी प्रकार मै भी युद्ध-रूपी स्कूल को
शोघ्र समाप्त कर कैसे भी दंगलैंगड लौट जाने को उत्सुक हूँ ।
मेण्ट जॉर्ज (St George) को युद्ध के लिये पूरी तरह
से तैयार हो जाने के पहले ही, नेलसन को समाचार मिला
कि स्वीडिश लोग आगे बढे पा रहे हैं।
युस छिड जायगा और मैं समरक्षेत्र से इतनी दूर पडा
रहूँगा, इस विचारने नेलसन को अपने पिसे बाहर कर दिया।
उन्होने तत्काल एक डोंगी तैयार करने की आजादी और उसी में
बैठकर अपने जहाज़ को छोड दिया, और वेडे से जा मिलने
के लिये रवाना हो गये।
मार्ग में चरित्रनायक का हदय यह सोच सोच कर, कि
कही बेडे से मै न मिल सका और युद्ध छिड गया तो मैं क्या
करूँगा, उथल पुथल होने लगा। जल्दी के मारे नेलमन ने
अपने गर्म वस्त्र तक म मिये, नाषिकों के ठहर कर कोट ले
लेने के अनुरोध करने पर इन्होंने कहा“भाइयो। मेरे लिये शीत
कहाँ है । स्वदेश-रक्षा करने की व्यग्रताही मेरे शरीर को
गर्म रखती है।" ठीक है। ठीक है। जन्मभूमि का मचा
मान्न ! तू तो-
-
११२
नेलसन।
mamrna
WARNA ANP
nA
"तनाय सदा है मग्न रहता, देश हो के ध्यान में,
निज को मदा है भूल जाता, देश हो के जान में,
कर त्याग सस्रव स्वार्थ का, तू देश में अनुरक्त है,
आदर्थ प्रेमी, पुण्य-भाजन, देश का तू भता है।"
श्रेष्ठ। तुझ सा एक देश-भत भी यदि प्रत्येक देश
प्रत्येक सदी में, जन्म लेता तो कोई भी देश दरिद्रता तथ
परतन्त्रता की वेडी में क्यों जकडा जाता
नेलसन ने पुन अपने नाविकों से उसो व्यग्रता में पूछा
"कया आगे का बेडा बहुत दूर निकल गया होगा ? क्या वा
मुझे मिलने का नहीं । क्या मैं विफल मनोरथ हो धूम पा
ऊँगा ? नही ! नही। कदापि नही। है ईश्वर मुझे सहायत
दी। मेरे शरीर मे देश-विद्रोहियो को नाश करने को विद्यु,
शक्ति दो। मुझमें आत्मबल, शरीर-बल और कष्ट सहने क
चल दो। मुझमें लधिमा शक्ति का संचार कर दो कि मै स्वदेश
रक्षा के लिये एक स्थान से दूसरे स्थान पर पक्षियों को नाई
उड जाया करूँ।
बस अब मै चला, माझी। माझी
भया! आज अपनी सर्व शक्ति नौका खेने में लगादो।
देखना वीरो। यदि मैं ठण्ड से मर भी जाऊ तो मेरा मृतक
शरीर होरख-भूमि में पहुंचा देना, इतनेमे ही मेरे मामा को
शाति होजायगी।"
वाचकहन्द। इस प्रकार विना अन्न दान के छ माझियों
के साथ देशरक्षा व्रत में व्रती योर नेलसन पाधी रात होते २
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नेपोलियन को इंगलैण्ड पर चढाई की धमकी ११२
वेडे के निकट पहुँच गये। Elophant एनोफेण्ट जहाल के
निकट डोगी लगा दी गई, तथा नाविकों ने गीत और भूख से
अधमरे सन्ना-हीन नेलसन को टांग कर जपर चठाया।
दूसरे दिन प्रात कालही स्वीडन-वेडा दीख पडा, परन्तु
शीघही फिर कार्लस्कोना (Chulscronn) के तोपखाने के पीछे
-
अन्तर्ध्यान होगया।
थोडी देर में एक शत्रु-नौका, शान्ति का झण्डा लगाकर,
ब्रिटिश एडमिरल की नौका के निकट पहुंची और एक सन्धि
स्थापन करने का प्रार्थनापत्र, एडमिरल को दिया।पारकर साहब
ने प्रार्थनाखौकार की और युद्ध करने की मनाही कर दी।
अगरेजी वेडा भव फिनलैण्ड (Finland) दीप की भोर
धूमा। ये लोग अभी कुछ ही दूर गये होंगे, कि पीछे से एक
रशियन नोका श्रा पहुँची। उसने जार पौल का मृत्यु-समाचार
तथा उनके उत्तराधिकारी नार को सन्धि स्थापन करने की
इच्छा प्रगट की।
घेडा भव जीनेण्ड की भोर यह समाचार सुन लौट पडा,
और कामोगी की खाडी (Kroge Buy) में उसने लगर डाल
दिया।
सब समाचारहूँगलैण्ड भेजे गये और वहाँ से सन्धि की
मनरी ५ मई को आ गई, माथही पारकर साहब वापिस बुला
लिये गये और नेलसन को प्रधान अध्यक्ष (Commandor.
in chief) को पदवी दी गई।
-
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.
११४
नलमन।
नेलसन सन्धि को मञ्जरी का समाचार देने तथा गत है
करनेके लिये अपनी नौका पर रशियन नौकायय में गय
२०० ब्रिटिश व्यापारी जहान जिन्हें रशियनी ने पकड़ लिया ।
तुरन्त छोड दिये गये, और जो शर्ते नेलसन ने चाहीं दूर
दल ने मजूर कर ली। अब नार ने नेलसन को शिष्ट
से वापस जाने को कहा। शान्ति हो गई। नेलसनने प्रसर
चित्त से १८ जून को बालटिक समुद्र से खदेश को और या
की। तीन सप्ताह के बाद सकुशल वह यारमौथ के नौकायय
जा पहुंचे।
'नार्ड सेण्ट व्हिन्सेण्ट ने इस समय नेलसन को लिख
"महाशय। आपसा योग्य उत्तराधिकारी पाना कुछ क
'सौभाग्य की बात नहीं। मैंने अपने इस व्यवसाय मेश्रा
तक आप तथा कप्तान द्रविन से ऐन्द्रजालिक, 'जो अपने
'हृदय की मची उत्तेजना दूसरे के हृदय मे मत्र-बल से से
चार कर दे, कही देख नही पाये।
यारमौथ पहुंचने पर वहों के अधिवासियों ने जयो नेलसर
'का यथोचित स्वागत और सम्मान किया।
मदय चरित्रनायक वहाँ पर अधिक देर तक नहीं ठहरे
गगन-भेदी करतलध्वनि के वीच वह सौध स्नागार में ज
पहुँचे, जहाँ पर उनके पूर्व युद्ध में के हजारों सङ्गी नाविक
पडे कराह रहे थे।
नेलसन प्रत्येक रुग्न-शय्या के निकट उभर कर प्राइस
--
mannvwr WvMA~~ 4AAMAN . AA "जैक। नेपोलियन को इंगलैण्ड पर चढाई की धमको। ११५ को ढाढ़म बॅधाते थे। एक से पूछा,-क्यो जैक (Jnchi । क्या समाचार है ?" उत्तरमें वह बोला “महामान्य । मेरा तो दाहिना हाथ ही उड गया।" नेलसन यह सुन ठहर गये और धपने कटे हाथ का आस्तीन हिला कर हँस कर बोले तब तो मै और तुम दोनो जने धीवरी के लिये चौपट हो गए (याने धोवरों का जाल जिसमें सूना न फिरे इसलिये हम लोगो ने बाँहें दे दी)। खैर, जाने दो वीर, जो लड़ता है वह घायल होता ही है।' इस प्रकार में वह प्रत्येक रोगी के निकट कुछ देर ठहरते और उत्साहयुक्त वचनी से उन्हें प्रसन्न करते जाते थे । प्रधान डाकर ने कहा "महाशय पापको कृपा ने तो हमारी डाको से भी बढकर उनका उपकार किया है। वे आपके वचन सुनकर अपना दुख भूल जाते है और उनका हृदय प्रानन्द से नाच उठता है।" स्वदेश लोट कर, नेलसन ने नौकरी से इस्तीफा देकर -जीवन अब बिताना चाहा , परन्तु लाई दिइन्सेएने बड़े उद्योग से उन्हें ऐसा करने से रोका और कहा “वीर । क्या पत्र इतने दिनो तक कठिन परियम से सेवित जन्मभूमि को ऐसे समय मे निराधार छोडना चाहते हो जब कि फान्स टेग की उपट्यकारी मेना चारों ओर घोर विश्व मचा रही है, तथा देगको बतन्वता पर भाघात पहुंचने की मभावना प्रति शगा देगासियों के प्रदय में तोन्ना करती है।' शान्त- नेलसन । nirwA warna ऐसे प्रार्त वचनों को सुनने की शक्ति सहदय चरित्रनायक में कहाँ थी, इन्होंने अपना विचार तत्कालही बदल दिया। इस समय जबकि नेपोलियन चारों ओर से घुटैला होकर घिी हुए सिह की नाई केहरी-नाद कर रहा था और अपनी सब सेना इकट्ठी कर , गलैण्ड पर चढाई करने का विचार कर रहा था तब नेलसन से वीर अध्यक्ष के बिना ब्रिटिश-कूल को रक्षा होती नहीं दीख पडती थी। एक सामयिक इति हास लेखक कहता है कि "नेलसन का समरक्षेत्र में विद्यमान रहना ही शत्रु को अपनी विचारित युक्ति को पुनः पुनः विचारने का कारण हो जाता था"। एकमत देशवासियो के अनुरोध से नेलसन ने पुन. उसी उत्साह और उद्योग के साथ देश-रक्षा का बीड़ा उठाया। इंगलैण्ड यद्यपि घर से बाहर समुद्री में विजयी हो चुका था, परन्तु अभी तक अपने घर में बेठकर, बाहर से किये हुए अाक्रमण का पूर्णरूप से प्रतिकार करने के योग्य नहीं हुआ था। नेलसन ने लिखा है कि प्रत्येक कार्य का आदि, मध्य और अन्त होता है। रह-रक्षा करने का अब इंगलैण्ड के लिये श्रीगणेश हुआ। कैले (Calnus), बोलोन (Boulogne) तथा डीपी (Dieppe) के नौकाश्रय यद्यपि इंगलैण्ड के सन्निकट थे, परन्तु नेलसन के मतानुसार प्रधर से आक्रमण होना सम्भव नही था।
नेपोलियन को इंगलैण्ड पर चढाई की धमकी wwwANNvrwww www. www. V Vvvv vtvụ VN " उसका कथन था, कि शवुदल अवश्य हो दूसरी ओर से धावा कर के, कुछ सैन्य के साथ, सौधे लण्डन पर चढ जाने का उत्कट उद्योग करेंगे, इसमें सशय नहीं है। नेलसन की रक्षा-युति यह थी, कि शत्रुओं को इंगलैण्ड के कूल तक पहुँचने ही नहीं देना चाहिये। न्योही वह अपने नौकायय से निकले , त्योही उनको आक्रमण करने देने का अवसर न देकर, स्वयम् हो विकट धावा कर उन्हें उलटे पैर उन्हीं के देश को लोटा देना चाहिये । कदाचित फ्रोच्च लोग, अपने बडे जहाज पर धावा न कर, छोटी डोंगियों पर ही धावा कर बैठे तो उस समय के लिये नेलसन ने यह प्राजा दे रखी थी, कि ब्रिटिश सैन्य भी तत्कालही अँगरेज़ी डोगियों पर ही आगे बढ कर धावा कर दे। नेलसन सदा कहता था, कि “हमें पूरा विश्वास है कि वीर अगरेज़ लोग फ्रेच्चो को दम में दम रहते कदापि आगे बढने न देंगे।" यदि शत्रुदल फ्रान्स से चलते समय इँगलैण्ड को देख पड जाय, तो तत्काल तोपों की बाढ दाग दीजाय पोर उनको पक्ति जहाँ तक हो छिन्न भिन्न कर दी जाय। इस प्रकार से प्रत्येक युक्ति की एक एक काट नेलसन ने सब नाविकों को समझा दी और कह दिया कि 'जिस समय शत्रु दन इंगलैण्ड के कूल पर पहुंचे, उसी समय निर्मोह होकर उसका नाश करदो, जिसमें फिर वह इङ्गलेण्ड की ओर दृष्टिक्षेप न करें"। इस समय पहलेण्ड गान्त देश नही बल्कि एक स- पाठक ११८ नेलसन । , wwAAM NAAR NAA MAR NAWARA - शस्त्र-सैन्य निवास सा बोध होता था। चारों ओर वीरो के पतिवद्ध शिविर ही शिविर देख पड़ते थे। कोई वीर कही पर अपने शस्त्र युद्ध के लिये स्वच्छ करते नजर आता था, कहीं वोरगण जोश में आकर अपना देश-गीत.God save our gracious King और उसका उत्तर Long to reign over us बडे धूम से गा उठते थे। आज इंगलैण्ड पर Buny, जिस्का नाम योरोप के बच्चों को डराकर सुला देने के लिये हौत्रा के समान था चढाई करने वाला है। आज योरोप की तरह इंगलैण्ड को भी पराजय करने को Bony आता है। ऐसे टु'समय मे यदि समस्त इंगलैण्डवासी स्वदेश-रक्षा के लिये सशस्त्र कमर कस कर तैयार न हो जायँगे तो कब होगे? नेलसन ने विद्युत-वेग से शत्रु-निवारण की कुल युक्तियाँ ठीक कर स्वदेश लौटने के केवल तीनही सप्ताह के बाद, आत्म सुख का बलिदान दे पुन. "यूनाइट' ( Unte ) जहाज़ पर झण्डा फहराया। चरिवनायक एक दिन के लिये भी आराम नही लेते थे। आज यदि वे शोरनेस में अपने आधीनको तीस नोकापी का पावेक्षण करते देखे गये है, तो दो दिन के बाद एक नई सेना जो बोनापार्ट मे लडने को तैयार की जा रही है उसकी कवा यद कराते हुए पाये जायेंगे। १५ अगस्त को फ्रान्छों ने बोनोन पर ५७ नौकात्री के माथ । । । - नेपोलियन की इंगलैगह पर चढाई की धमकी । ११८ mmmmmnA Noun AM " wn स्थान पर आक्रमण कर ही दिया। अँगरेजो ने यद्यपि रोकने के बहुससे उपाय किये, परन्तु पछड गये। स्थल पर विजय पाकर भी जन्न युद्ध में फच्चो ने अपने को युद्ध के योग्य नही समझा। कई कारणो से इस समय युध बन्द हो गया और सन्धि हो गई। नेलसन को पुन कुछ दिनो के लिये शान्ति मिली और वह अपने खरीटे हुए नए इलाके मरटन (Meaton) मे इस समय रहने लगे। नेलसन' कहते थे, कि फेच अंगरेनों को सन्धि पानी पर बॉल की दीवार ही समझनी चाहिये । नेन्नसनने इसनिये प्रधान मत्री के पास इस समय लिखा-"महाशय । मैं इस समय शान्ति के लिये लालायित होरहा है, तथापि आवश्यकता पडने पर आप मुझे सदा तय्यार पावेंगे।" जैसा विचारा था वैसाही हुषा। कुछ ही दिनों के बाद, १६ मई को पुन फेवों से युद्ध छिड गया। चार दिनके बाद ही नेलसनने अपना गान्ति गह छोड़ कर अन्तिम वार विकरी (Victors) जहान पर अपना प्रधान अध्यक्ष सवक झण्डा । मागाया। पाठक । अब केवल एक और अन्तिम साफलगर (Traf- Ignr) का युद्ध बाकी है। बस इसके बाद आपसे विदाहगा। -
ग्यारहवाँ परिच्छेद।
मध्यसागर में शत्रुका पीछा तथा ट्राफलगर का युद्ध ।
।
।
"उत्सवे व्यसने चैव दुर्भिक्षे राष्ट्रविप्लवे ।
राजदारे सागाने च यः तिष्ठति स. बान्धव"।
सत्य ही यह पुरानी कहावत मित्री की कसौटी है।
घसक योरोप के राज्यों को यह विश्वास था,
कि के च लोग अंगरेजों से दब जायँगे तथ
तक सो वे अंगरेनों को त्वमेव सर्वम्' इ.
त्यादि बडाइयाँ कर मित्रता का दम भरत
थे , परन्तु ज्यों ही फ्रेञ्चों का दिन कुछ फिरा और स्थलयुध
में
'विजय प्राप्त होने लगी, फिर ये स्वार्थी भैपर कहाँ ठहरते थे ।
पोचंगलने जो एक दिन अंगरेज़ों का सब से बडा सहा-
यक गिना जाता था, इस समय यों आँखें फेर लौं मानों -
कभी को जान पहचान ही नही है। नेलसन का वेडा जब
उसके नौकाश्रयो में पहुँचा, पून लोगोने सभ्यता को लातमार,
रागत अतिथि को प्राश्रय देने से भी इन्कार कर दिया।
।
--
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मध्यसागर में शत्रुका पीछा तथा ट्राफलगर का युद्ध । १२१
पाठक ! ये प्रपश्ची मित्रगण शूकर कुत्ते का झगडा भंग
रेल फ्रेनों में लगा, आप एक किनारे ठुड्डी पर हाथ रख खडे
हो तमाशा देखने लगे। ब्रिटिश लोग इस समय एक दम अकेले
पड गये। फेवो को सहायता करनेवालों की कमी न थी । स्पेन,
पुर्तगाल इत्यादि जिसे देखिये वही सहायता देने को
तय्यार था । कोई मैन्य से, कोई धन से, और कोई बातो से ही
नेपोलियन का उत्साह बढ़ा रहा था, परन्तु समार को पोली
बातों और वीर नेलसन की अध्यक्षता में अँगरेज़ो के सच्चे
उत्साह में क्या मिलान ? ये कभी हतोत्साह होने के नहीं।
इस समय नेलसन को भोजस्विनी बाते,–“यदि फेञ्च
शैतान हार पर खड़ा है तो मै कल सवेरे ही उससे भिड कर
उसे पोछे ढकेल दूंगा। कैसी सच्ची वीरता दिखला रही हैं।
भूमध्यसागर में जहाँ फेच्चो के बेडेके पहुँचने को खबर है,
यहाँ, जहाँ तक जल्द हो, पहुँच जाना चाहिये, इस उत्सुकता में
चरित्रनायक अपने बड़े जहाज़ विकरी को छोड, छोटी
युद्धनौका पर चढ रवाना हो गये। विकरी को लाई
कार्नवालिस को लेने के लिये कुछ दिनों तक अटके रहने
की आज्ञा यो।
फेच वेडा इस ममय भूमध्यसागर के टोलायोन नौकाश्रय में
लबर डाले था। इसलिये चरिवनायक टोलायोन के हार
गनु को प्रतीक्षा करने लगे।
दिन पर दिन बीतने लगे परन्तु, शत्रु-दल नौकायय मे
एक
१२२ नेलसन । wwwmAALAnanAMARC बाहर निकलता ही नहीं। लोग अधीर होने लगे, परन्तु नेलसनने नाविको को ढाढस बंधाया और कहा भाश्यो। मुझे तो घर जाने की इच्छा नहीं होती। मैं तो वर्ष भर भी, यदि शत्रु नौकायय से न निकले तो, यहाँ ही पड़ा रहगा।" इन बातों का असर नाविको पर ऐसा पड़ा कि वे भी धर्य से शत्रु का सामना करने को बैठ गये। युद्ध की नौकाएँ तथा नाविकों को नेलसन ने इस प्रकारसे युद्ध के लिये तैयार रक्खा था, कि कई एक महीनो तक वेकार बैठे रहने पर भी जिस समय ४ हजार माइल तक शत्रु को पीछा करने की आज्ञा दी गई उसी समय वे ऐसी मुस्तैदी से प्रस्तुत हो गये, मानो नौकायें युद्ध- क्षेत्र में लडने के लिये अभी इंगलैण्ड से ताना आई हो । मध्यसागर के प्रत्येक नौकाश्रय में बोनापार्ट का दबदबा ऐसा जमा हुआ था, कि भय से कोई भी अंगरेनों को खाने पीने की चोजें भी देने का साहस नही करता था। स्पेन इससमय यद्यपि उदासीन राज्योमें गिना जाता था, तथापि अँगरेजों को आश्रय न देकर फेञ्चो को ही आश्रय दे, अंगरेजो का नाश करा टेना, वह अपना धम्म समझता - था। । नेलसन बडे शोक के साथ स्पेनवालों को इस नीचता पर कहने लगा कि समय भी केसा परिवर्तनशील है, जो स्पेन एकदिन मसार का मालिक कहा जाता था, अपने पूर्व गोरव को एकाटम विमारए कर, तुच्छ च राजा का चेरा ॥
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मध्यसागर में शव का पोछा तथा ट्राफलगर का युद्ध । १
बना फिरता है। स्पेन को चाहिये था कि अगरन
साध योरप के शत्रु नेपोलियन को नीचा दिखानेका बै
उठालेता और परोपकार ही के द्वारा पुन एकबार अपना
गौरव प्राप्त कर लेता।
स्पेन वालो की इतनी नीचता परभी नेलसन ने उन
उदासीनता का यथोचित सत्कार किया। जो फेस जह
स्पेनवालों के नौकायय से एक गोलीकी दूरी पर पकडे ज
उन्हें चरित्रनायक मध्यस्थ राज्यके नौकाययमें पकडे
जहाज कह कर छोड देते थे।
एकदिन कई अँगरेनी छोटी नौकाये एक बडी शनुनी
से मुठभेड में पछड गई। शव लोग इस विजय पर
प्रसन्न हुए, कि चारो ओर समाचारपत्रो में गप्पे उडादी।
नेलसन का हिकरो (Victors) जहान मय कुल अंगरेर
वेडे के युद्ध क्षेत्रसे मार खाकर भागगया ।
नेलसन को जब यह झूठी खबर मिली, वह जल भुन व
राख होगये। तुरत उस झूठे समाचार का प्रतिवाद छपवार
और लिखा कि यदि ससार इम बातसे अभिन्न नही होत
कि नेलसन प्राण रहते हुए समरक्षेत्र से कभी नही घूमा है,
घूम सकता है तो प्राण शत्रुओं के दोषारोपण में क्या मेर
चरित्र दूषित नही हो जाता? फ्रेख एडमिरल को चिट्ट
मेरे पाम रझवी है। उस झूठे को यदि युद्दमें भाग्यवश पकार
पाया तो पगा.कि किस प्रकार से नैनमन तुम्हारे सामने हैं
१२४ नेलसन। mA भागा था और किस तरह फेञ्चों ने उसका पीछा किया था तथा उसका उत्तर ससार में पुन: प्रकट करूंगा।" नेलसन इससमयमें पूरा उद्योग शव को बाहर खींच कर लड़ने का करने लगे, परन्तु निर्दिष्ट समय के पहले तक सब उद्योग विफल ही हुए। नेलसन को भय था कि कहीं फेलवेडा कुहासे के कारण भाग न जाय। शत्र -वेडा यदि बिना युद्ध किये भागा, उस झठे फ्रोच्च एडमिरल से यदि मैने लड. कर अपना बदला नहीं चुकाया, तो बिना मारे ही मैं अवश्य मर जाऊंगा। चरित्रनायक दो वर्ष तक वहाँ ही पड़े रहे, परन्तु इत- नेपर भी अपने आज्ञाकारी नाविकों और अफसरोंके मध्यम वह उदास नहीं होते थे। एकदिन प्रसन्न होकर वह कहने लगे "मेरे वीर भाइयो । तुमसे धीर सहचर पाकर में फ ला नही समाता है। मैं सानन्द मृत्यु का भी सामना कर - परन्तु दिन बहुत बीत गये। १८ अगस्तको निराश हो, .. विहकरो (Victory) पर वेडेके साथ अपने पोर्ट- बन्दर को लौट आये। वहांसे लन्टन युद्ध मन्त्री में कुछ मन्वया करने गये। इसीसमय गलैण्ड के विख्यात सेनापति वैलिङ्गटन में इनको भेट हुई। दोनों में से कोई भी वोर एक दूसरे को उस समय तक नहीं जानते थे। वैलिङ्गटन ने नेलसन को बातचीतरी एक निरा बकवादी नाविक ही ८ JM vvvv १ मध्यमारमें शत्रुका पीछा तथा ट्राफनगर का युद्ध । १२५ समझा या , परन्तु जब ट्राफलगर [Trifligu] के युद्धको साथ ही माथ इंगलैण्ड के जन्नयुद्ध का दिगविजयी झण्डा वीर ने ब्रिटिश छोपर्म गाड कर, अपने को जगत् से समुद्राधिप सम्बोधन कराके, जल साम्राज्य का पूरा अधिकार ब्रिटन को प्रदान किया, उस समय वेलिङ्गटन के लिये नेलसन बकवादी नाविक नहीं रहा, बल्कि उसके लिये नेलसन अब राज्य- भौतिविशारद, देशरक्षक तथा वोर देवता बन गया । घ क का मानी सिर चरित्रनायक के सम्मुख बार बार झुकने लगा। लण्डन से लौटकर एकदिन पांच बजे नेलसन अपने मरटन ( Merton) इलाकेवाले मकान में बैठा था, कि कप्तान बाकउड (Blackwood)के प्रानको खबर पहुंची। कमान को देखते हो नेलसनने कहा-"उत्सुकता से भाई तुम्हारे इस- समय पानसे मुझे बोध होता है, कि धोका कुछ समाचार लाये हो। ब्बाकउड ने उत्तर दिया, कि फ्रेच लोग कैडोज़ के निकट पा गये हैं। ननसनने यह सुन, प्रसन्न चित्तसे बेडा तय्यार करने को प्राजा तुरत भेज दी और जल्दी जल्दी चलमेकी तय्यारी करने लगा । यहाँ पर पाठकोंके चित्त विनोदार्थ मनमा के इस सम- यके लिखे रोजनामचे का कुछ अश शकवार रात्रि (मेघ०१३)माढे दस . AN ५५ १२६ नेलसन WA . 'मर्टन' ( Murton ) को छोड राजा और देश की सेवा क- रने चला है। परमेश्वर, जिन्हें मैं दिनरात पूजता हूँ मेरी और मेरे देशको आशा पूरी करे । यदि परमात्मा की यह इच्छा हो, कि मैं सकुशल युद्ध क्षेत्र से घर लौट आऊ तब तो मेरी कृतज्ञता का ठिकाना ही नहीं है। मेरा सतत धन्यवाद उसको पहुँचेगा। यदि उसकी इच्छा पृथ्वीपर से मेरा अस्तित्व उठा देने को हो हो, तोभी कुछ पर्वाह नही, मैं इसमें राजी है। मुझे विश्वास है, कि वह दयालु मेरे बाद मेरे प्रिय आत्मीय जनोको रक्षा अवश्य ही करेगा। वैसाही हो, जैसी उसको इच्छा है। तथास्तु! तथास्तु। तथास्तु ! नेलसन आज चलकर विकरी जहाज पर रवाना होनेको है, आज सवेरेसे ही नरनारियोंका जमघट पोर्टसमोथ के नौकाययों हो रहा है। कही स्त्रियाँ, कही बच्चे, कही बूढे फलोको झोलियाँ चरित्रनायक पर बरसानेको भर रहे हैं। पुलिसका विशेष प्रवन्ध रहते हुए भी मनुष्योका टिडडी दल रोक नहीं सकता है। सबको यही उत्कट इच्छा है कि आगे बढ़कर मै ही देश-रक्षकका पट चुम्बन करूँ। नेलसन नौकाथय मैं आपहुंचा। पहुँचते ही जन समुद्रमें मानों भारो भूचाल आ गया। सब कोई वीरका मुख देखने हो को उत्सुक थे । जो बनवान युवक थे वे तो गिरत पड़ते भागेको धस पडे। युवतियां ठोकरें' वाकर भी बिना आगे बढे नही रुकी, परन्तु रहगये विचारे पूड और बालक । - ३ -
गनुका पोक
RAM
Hinr
nhA
Arn
AAAP
প্রধান
तथा ट्राफलगरका युद्ध। १२७
वृद्ध लोग तो खर किसी प्रकार अपने कौतुहलको रोक
कर किनारे से ही घाशीर्वाद देते थे, परन्तु बच्चे जो रास्ता
न पातेधकों से चिल्ला २ कर रोने लगते थे। सब देशभाइयों
' से सत्कृत हो, डोंसे प्राशीर्वाद लेते हुए चरित्रनायक
विकरी जहान पर शत्रुका सामना करने को चल पडे ।
विक्री पोर्चुगल को राजधानी लिस्बन के निकट पहुँच
गया। नेलसन उस दिनसे प्रतिदिन मिश्रित शत्रु व-सैन्यको बाट
जोहने लगे। उन्होंने २७ सितम्बर को अपनी वर्ष गाँठके एक
दिन पहले अपने सब नाविकोको इकट्ठा कर अपनी विख्यात
युद-युक्ति समझा दी।
वह युक्ति यह थो, कि शत्रु जहाज़ ज्योंही सामने पायें,
अपने जहाजोंको उनके साथ सटा कर युद्ध करना चाहिये
जिसमें जय या सय जो होनी हो शीघ्रही निबट जाय ।
'खैर २० अक्टूबरको, शत्रु ओंके नौकायय से बाहर प्रा-
नेका समाचार मिला। अपने मित्रो की मगइली में बैठे हुए
नेलसनने २० अक्टूबर को अपने युवक नायिकों को सम्बोधन
कर कहा 'प्यारे मित्रो । आज या कल का दिन तुम्हारे
जीयनका शुभ दिन होगा। कल में वह कार्य करनेवाला हूँ
जिसका कथोपकथन, मेरे शुभचिन्तको। तुम्हें तुम्हारे जीवन
के अन्त तक आचर्य और विश्वास के साथ करना होगा।"
दूसरा दिन अर्थात् २१ अक्टूबर नेलसन के वशमे अत्यन्त
शुभ माना जाता था। ४८ वष पहले भाज के ही दिन चरित.
१२८ नेलसन। AVM MAN n M . ANPAN nr AAVAAAAAMwAMARA नायक के मामा कप्तान सलिग ने, मुट्ठीभर सेनाके द्वारा शत्रुको बडी सैन्य को परास्त कर, अपना नाम अमर किया था और आज ही के दिन हमारे नायकने भी अपना शुभ मुह जान लड़ाई को दुन्दभी बजा दी। २१ अक्टूबर के प्रात काल में समुद्र पर जो दृष्टि पडी, तो ऐसा बोध हुआ कि भावो सग्राम के भय से समुद्र-जल शान्त होगया है, न कही लहर है और न कही तूफान । संग्रामका पूरा दृश्य देखने को इच्छा करनेवालों को अपने मस्तिष्क में युद्धका मानचित्र खेंच लेना उचित है। पाठक । सयुक्त वेडा दो लम्बी २ कतारों में चल रहा था। नेलसनका चैडा भी दो भागोमें विभक्त था, परन्तु इसकी पति सोधी धो। रिपु-बेडो सा पार्खापार्खि नही। फ्रान्स और स्पेनवालों का वेडा अई चन्द्राकार रूपमें था. नेलसन उनसे मिलनेके लिये समानान्तर लम्बरूप में चला। नेलसन को युद्ध युक्ति शत्रु-टन का एकदम नाश कर देना ही थी। अपनी चाहे जो कुछ भी क्षति हो परन्तु शत्रु दन कर नाश हो, यही उसका प्रधान मन्तश्च था, और यही पाना सेनापत्तियो को नायक ने दे भी रस्सी धी युद्धके पहले लेनसन ने एक समयोपयुक्त सकेत देना निशित किया संकेतदासा को भाजा दी गई कि युद्धका सकेत पुन पदोंमें होगा गलएड पाशा करती है कि प्रत्येक मनुष्य अपने चम्मपर इद रहेंगे और दूसरा मकेत होगा कि "निस्वम हो युद्ध करो" -
मध्यसागर में शत्रुका पोछा तथा ट्राफलगर का युद्ध । १२८
नेलसनके जोवनका प्रधान उद्देश भी इन्हीं दो शब्दोमे था
एक तो 'कम्म' और दूसरा 'हाथोंहाथ युद्ध' ।
नायक का प्रधान जहान हिकरी (Victory) एक पक्ति
के सिरे पर और कोलिगउड ( Collingrood ) का रॉयल
मौहरेन ( Royal sovereign) दूसरी पति के सिरे पर
चलने लगा।
।
दोपहर होते होते युद्ध प्रारम्भ होगया। सयुक्त शत्र-दलने
गोले दागना आरम्भ कर दिया, परन्तु नेलसन को अपने
नायिकों पर बडा भरोसा था । वह चुपचाप बिना शव के गोलो
का जवाब दिये बढता हो गया। हिकरी (Victory इस समय
गोलों को झडी में बढ़ रहा था। एक २ मिनट में पचासों
नाविकों का वारा न्यारा होने लगा। पाठक । इसी से इस
भयानक पग्निकाण्ड को भावना कर लेवे, कि शत्रुके एक
गोलेने एकदम आठ वीरों को उड़ा दिया।
इसो अन्धाधुन्ध में एक गोला कप्तान हार्डी पोर नेलसन
के, जो ऊँचे तख ते पर खडे थे, कानों के पामसे मनमनाता
हुआ निकल गया। ईश्वरने कुशल की नही तो दोनों को वहीं
समाप्ति थी।
आह ! पाठक । कैमा भयानक समय उपस्थित था, वीरों का
धेय
छूटा जाता था। गनु को तोपें तो दनादन गोले उगल कर
कहर मचा रही थी और ये विचार चुपचाप उन्हें सह रहे थे।
मेनापति को प्रान्ना बिना हाथ पैर डुलाते नहीं बनता था।
नेलसन । बडो प्रतीक्षा के बाद अब आजा मिली, कि गोलों का जवाब गोलों से दिया जाय । अब क्या था? बन्धन मुक्ता सिहों की नाई वीर अँगरेज नायिक कुलाचे मार २ बाढ दागने लगे। दिहकरी ( Victory) शत्रु-जहाज़ के एकदम निकट पहुँच गया। बात की बात में कहानो समाप्त हो गई। अंगरेजी जहाज़ शत्रु-वेडों के इतने निकट श्रागया था कि इनके गोलों की लहर से ही शत्रुओं के जहाजों में अग्नि लगने लगी। शत्रुओ ने भी मुँह नहीं मोडा, जीतोड लडाई करने लग। शत्रु जहाज रोडौटेबुल (Redoubtable) पर गोलो की मार बन्द करने की आज्ञा सेनापतिने दो, परन्तु शत्रु जहाल ने अंगरेनों को आधीनता स्वीकार करने के बदले लडते लडते कट मरना ही उचित समझा। यही जहान जिस की रक्षा के लिये नेलसन ने आज्ञा दी थी, नेलसनका घातक हुआ । इतने नाविकों के झमेले में नेलसनको नाक कर गोली मारना सहज नही था , परन्तु नायक के व्याप्त प्राकार प्रकार और पदकों से सुसज्जित वक्षस्थन को इनारों में भी पहचान लेना कठिन नही हुआ । पोच नाविको ने ताक कर गोली दागी और गोली भी कारी जा बैठी। नेलमन को उसके मित्रोंने पदकों को उतार देने का उप- देश दिया था, परन्तु वीर ने गर्वके साथ कहा था "छि. । इन्हें में
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मधमरमें
गतुका
पीता सथाहापनगर का युद्ध। १२८
चतार हूँ। नहीं नहीं मान के माप निको पार किया है और
मान ही के माय इनको मगाये माँगा।"
गोनी नगी हो नायक ने अपने पारग मित्र कमारा
हार्डी में कहा कि बम मित, मेरी ममाप्ति हो गई।
बडे कट मे नायक को मोग नीचे तन में जो पीपधा-
नय का प्रयन्ध था, उठा लेगये। अपने फटों को वीरता और
धेयं के माय दबाते हुए नैनमन ने पाना दी कि पन्य नायिकों
मेमके घायल होने को यात गुप्त रकली जाय, जिससे उनका
माधम नहीं टूटे। यह कह कर नायफ ने अपना नमाम्न
निमन कर अपना चेहरा पार पदकों को टक लिया।
मेनापति को इस प्रयम्या में देव, डाकर नपका शुभा
पहुँचा , परन्तु पोर ने बडे धैर्य के साथ धन्यवाद देते हुए
कहा- 'डाकर। जानी' जापो। हमारे उन प्यारी नायिकों की
रक्षा करो जिनके बचने को पागाई। पाह! मेरे लिये परियम
व्यर्थ है। प्यारे डाफर । विटा; विदा ! और कुछ नहीं । जामो
अपना काम देखो।
पाठक । कलेजा ऐ ठा जाता है। इतने दु ग्य में भी
अपने सहयोगियों का ऐसा ध्यान | धन्य ! धन्य । नेलसन, तुम
मानव-देह में देवता थे।
धादि मे होनायक को विश्वास हो गया था, कि अब उसकी
मानव-न
-लीला का अन्तिम पटाक्षेप हुमा चाहता है, वह अब
फेयन कुछ घरों का पाहुना है। देह से तो वह अत्यन्त दुखित
१३२
नेलसन ।
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था परन्तु उसकी आत्मा इस समय भी लडाई के दृश्य में हो
घूम रही थी। वह बार बार हार्डी (Elardv) को देखने को
इच्छा प्रगट करता था, परन्तु कप्तान को अभी तक युद्ध से
अवकाश नहीं मिला था, कि पाकर अपने मुमघे मित्र को
अवस्था पूछे।
भाग्य से विजय-लक्ष्मी अब अंगरेजों की ओर झुकी। हार्डी
को जब पूरा विश्वास हो गया कि अब विजय में समय नहीं है,
तब वह सुसमाचार अपने सेनापति को सुनाने के लिये झपटा।
हार्डी को देखते ही नायक को डबते हुए सा सहारा मिला।
उन्होने व्याकुल हो पृछा- 'हार्डी ' का समाचार है
हार्डी ने प्रसन्नचित्त से चौदह शत्रु जहाजों के पकडे जाने
का समाचार सुनाया।
नायक -हमलोगो के जहान तो सुरक्षित है न ? किसी अंग.
रेन वीर ने मा को कोख तो कलङ्कित नहीं की?
हार्डी-नही मेरे प्यारे मित्र ' इसका कोई भय नहीं है।
नेलसन ने प्रसन्नचित्त से हार्डी का कर-चुम्बन किया और
डूबते स्वर से कहा “मित्र क्षमा करना । बस मेरी यहीं विदाई है।"
हार्डी रोता हुआ फिर अपर आया और उसने फिर तुरन्त
लौट कर पूर्ण विजय का समाचार नायक को सुनाया।
नेलसन-(धीमेवर से) हार्डी, मै सन्तुष्ट हूँ, मेरो भाजा मानो,
तुम तुरन्त विजित जहाजों को बांध दो, नहीं तो
धोग्वा हो जायगा।
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टम में
मध्यमागरमें गत्का पोछ तथा ट्राफलगरका युद्ध। १३३
पाठक ! मरते मरते भी बुद्धिमान मेनापति की चतुरता
देखिये । नेलसन को मालूम हो गया था,
कि ही
भयानक तूफान पाया चाहता है। इसो विचार से जहानों
का लङ्गर गिराने की आज्ञा दी थी। हार्डी ने उनके कथन पर
विशेष ध्यान नहीं दिया, जिसका फल यह हुभा कि कई एक
जहान लापता हो गये।
नायक का अन्त अब निकट आगया । हिकरी (Victory)
के नाविकों ने विजय पर भयानक करतल ध्वनि की, जिसके
सुनते हो बुझते दीप को शिखा को नाई नायक कामुखमण्डल
सन्तोप से दमक उठा। वह ऊँचे स्वर से बोल उठा "धन्य
परमेश्वर ! मैने अपना कम कर लिया, ईश्वर को धन्यवाद है,
निमको क्रपामे मेरे कर्म सकुशन ममाप्त हो गये।"
सांस चढने लगा आँखे झपने लगी, उजनी पुतन्नी नीचे
उपर होने लगी। मुख भी कुछ एक खुल कर दो एक टूटेशन्द
उच्चारण करने लगा। नायक ने कुछ कहना चाहा, परन्तु केवल
'ईश्वर मेरी जमभूमि 'इतना ही कह पाये और उनका
पवित्र धारमा शरीर पिञ्जर को छोड अनन्त अपरिमेय सुखक
उपभोग में लीन हो गया।
इंगलैण्ड के रत्तक, समार के सबसे बडे नाविक और
योक्षा की मानवलीला का सम्वरण होगया।
बम पारक । लेखनी इतनी दूर तक सुखको कहानी कहती
हुई तेज चन्न रही थी, पर अब इमकाभी टिन टूट गया। मुख मे
१३४
नेलसन ।
काले रुधिर को धारा बहने लगी-अब लेखनी ठहर जाती है।
लेखक भी अधिक कुछ कहना नहीं चाहता । परिच्छेद समाप्त
करने के पहले दो एक प्रविश्यक बातें कह देना उचित है।
शत्रुओं का नाश पूरे तौर से हो गया । अंगरेजों को धीर
की क्षति उनको तुलना में कुछ नहीं हुई। ४४०० शत्रु-मैना
भारी गई और २५०० घायल हुई । अंगरेजों की ओर के ४०२
वीर मारे गये और ११२८ घायल हुए। सत्रह शत्रु-जहान हाथ
आये और एक उड गया।
पाठकों को स्मरण होगा, कि युद्ध के पहले नेलसन ने
ईश्वर से जिस विजय के लिये प्रार्थना की थी वह उसे भरपूर
मिल गई।
अंगरेजों ने अनेक उद्योग से बहुत से डूबते हुए शनुभो
की रक्षा की।
युद्ध के चोदह दिन बाद यह समाचार इंगलैण्ड पहुंचा।
जगह जगह पानन्द के बधावे बजने लगे, नर नारी प्रसन्न-चित्त
हो मृत देश-भक्त को आशीर्वाद देने लगे।
नेलसनका ताबूत बडे समारोह से वेष्टमिनिष्टर में
पहुँचाया गया। समूचा सामान्य महीनों तक शोक-चिह्न
धारण किये रहा।
पाठक । ढीठ बालक नेम्नमन अपनी देशभक्ति और उद्योग
के कारण सार्वजनिक मान्य का विषय हुआ। उसने अपने
देशको, नहीं नही, ममग्र योरप महाप्रदेश की रक्षा की।
मध्यसागर में शत्रु का पीछा तथा ट्राफलगर का युद्ध । १३५
इंगलैण्ड को जल-शक्तिका बीज बो दिया और अपना नाम
अमर कर लिया।
धन्य।
सदी ( Southey ) के शब्दों में, पाठक हमें अब अपने
-नायक से विदा होने दीजिये-
"इसने अपना नाम और उदाहरण सैकडो बालक तथा
हजारों इंगलैण्डवासी युवको को उन्नति करने के लिये ससार
में छोडा है। इसका नाम, इसके देशका गर्व और वर्मा है और
सदा ही उन्हें उत्तेजित करता है और करता रहेगा।"
उपसंहार। पाठक । बस समुज्वल दोपका निर्वाण होगया। गिन्नण्डके वृद्ध, युवा, वालक सभों के हृदय में दुख को अन्धियाली छागई। राजराजेश्वर ने वीर सेवक के लिये, मित्रों ने सहृदय सुद्धदके लिये, जन्मभूमि ने योग्य पुत्र के लिये और लेखक ने अपने नायक के लिये आँसू बहाये। निलमन अब नही रहा । स्वर्ग को असगाने, विस्तृत वाहु से उसका स्वागत करते हुए, उसे वीरोचित स्थान दे सम्मानित किया। पाठवा, नेलसन को अन्तिम इच्छा सदा यही रही, कि उसकी कानों में यह शब्द कोई सुना देता कि तुम्हारी जन्मभूमि तुम्हारे उद्योग से स्वतन्त्र हो गई। ईश्वर ने उसको इन्छा भी पूरी की। नेपोलियन अपना सा मुंह ले देश लौटा ओर दूंग- लैण्ड विजय रूप कडवे फन पर फिर दाँत नही लगा सका। नेन्नमन : वीरवर ' आज तुम नही हो तो क्या, स्वर्ग से ही झाँक कर देखलो, तुम्हारी मेयमी जन्मभूमि आज राजराजेश्वरों के मुकुटो को अपने पैगेसे ठ कराती हुई कहती है, कि मैं
उपहार।
१३
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समार विजयिनी हूँ, मेरा लोहा पार्थिव वस्तुये ही नह
खर्गीय ही नही, ईश्वरीय शक्तियाँ भी मानती हैं। मैं
सुविम्त त राज्य में सूर्यको भी नही चलती, वह भी भयान
हो मेरी प्रजाओं को-सुख देता है और कभी अस्ताचल पर नहीं
जाता, सदा अपने कामपर ही डटा रहता है।
नर-शार्दूल । यह तुम्हारी हो कीर्ति है, कि समुद्र
प्रशस्त वक्षस्थल पर तुम्हारे देश की शक्तिका सामना कर
किसी से नहीं होता।
नन्नमन । तुम अमर हो। तुम्हारा नाम, तुम्हारे देश
वासियों का गर्व और वर्मा है। तुम न रहने पर भी जीते हो
पाठको। नेत्रोम्मीलन कर दो। हृदयको दृढ कर वाहु ।
बल का सञ्चार कर दो। अपने पालस्यमय जीवन से मुंह मोर
उत्साह और उमङ्गरूपी मदिरा का पान कर, कार्यक्षेत्र में पा
डटो। पापके मम्मुख लेखकने एक वीर को, एक देश-प्रेमोन्मत्त
की जीवनी ना सकती है। आप उद्योग करें, ऐसे प्रादर्श पुरुष के
अपना उदाहरण बनावे, उसके कार्यों की पालोचना करे और
अपने जीवन में गुणों का भरपूर समावेश कर टेवें।
थाप में शक्ति की कमी नहीं कमी है इच्छा को । जिम
समय आप देश-भला होने का विचार कर लेंगे, सभी पापके
सानुकूल हो जायेंगे ! नाव विघ्न बाधायें पाप के मार्ग से हट
कर पाप के माफल्य का मार्ग साफ कर देगी। पाप यगवान
धनवान और बुद्धिमान हो जायेंगे। भारतवर्ष को ऐसे ही
नन्लसन। Mum-~ उद्योगगीन नरगार्टूनों की आवश्यकता है, जो अपने उद्योग और उत्कट परियम से सच्चे नागरिक रहते हुए भो देशका उद्धार कर सके। सर्व सचिदानन्द परमेश्वर । हम भारतवामियों को बल दो, एकता और प्रेम का मधार हममें वार दो, जिसमे हमें भी नल- सन की नाई अपने देशवामी और देशये प्रेम हो और उन को उन्नति के उद्योगमें अपना अस्तित्व तक मिटा सकने की भक्ति हो। - इति।
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