Shri Abhaya Jain Granthalaya, Bikaner
Shree Bhihad Dharna Yantra
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SHRI CHARITRAVIJAYJI MEMORIAL BOOK SERIES
Vol No 19
مدمرة بطلعة جوية للمعهد شده به
SHREE
BRIHAD DHARNA YANTRA.
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DOSHI NAGARDAS PREMJEE
C/O HARKISHANDAS NAGARDAS
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SECOND EDDITION 500
B1
MUNI SHRI DARSHANVIJAYAJI
Published by
MAPATLAL MANEKCHAND
Hony Secretary
SCDS
Viramgam
Printed by
AS PATEL
at
The Bombay Fine Art Printing Works
66 1, Canning Street,
CALCUTTA
श्री चारित्र स्मारक ग्रथमाला पु० न० १६
श्रीवृहद् धारणायंत्र ।
सपादक
मुनि ज्ञानविजय ।
प्रकाशक
श्री चारित्र स्मारक ग्रंथमाला ।
मु. वीरमगाम (गुजरात
मूल्य ८माणका
पीरनिर्वाणाब्द २८५७
विषमायद १९८७
कमलयारित्राव्द १३
यिष्यब्द १९३१
. . किंचिद्वतव्यं Tम श्रीयशोषिजयवाचम्पादे हदि जयतिजनशासन प्यारण ग्याप साहित्यनिदास ज्य प्रमुख विषयापीण रददनममपेरागमेध। नतालि पावित तथापि जिनशासन गोवाय भिपद्धये शुमे यथाशक्ति यानी धीसधचरणेषु समुपदा नियने धारणागतिदेशयोपमपि पोथ। ननु पावित् फावित् काली सरम्यतो-परिशेगर श्रा, प्रमुखाचार्य विरचिता परस्परविरध्या गहा freोगम्या धारणागति प्राप्यते। तया निधयाऽऽरम भदातिगाम भयति पाऽनैनाचार्यणाय जिन प्रतिष्ठाप्य ति"। ततोपाधि धारपर निद्रष्टारोल पायति त मिल पा। तपिमहताज्यारोनाधिपमालक्षेपे॥ परमेतत्सप प्रयत्नसाध्य शिचिन्त्य तेषामेवरिपू गयाना पचना कृपया मुग्धयोधपर सो स.यो पदप्यारमा यस्समर्थितो। मुनिदर्शन रिजयेन ॥ प्रथेस्मिन्कि फिमस्ति सत्तुप्रथादेवारलोपनीये विवादित अनेनसर्षोलोक सुर्ष धारणागतिमाप्य स्यामोष्टपूर जिन र घानियमास्यति। तदेयमुक्तप्रथेपि-पृष्ट ५ प्रथात् शान रिविवाद प्रतिष्टाचासुदर्शनमा भारश्वरण नेजर्य, प्रमशो भरतु मणाम् ॥ ११७ ॥ भयं गुर्जरत्रायो (गुजरात) पौरमप्रामे धोचारित्रस्मारयप्र थमाला प्रमेण मुदित एकोनशतितमो १६ प्रधिर नदतात्। तिनोतु कल्या महागीर निर्माणतो २४५७ पति निवेदपति, तमेवर्षे धारणशुक्ल प्रतिपरिशुभवारे थीयशोविजयजमगुरुपुरमा महानगरी श्रीचारित्रपिजय-च मुसी भानविजय
अंजलि ।
धीसिद्धाचरतीर्थगज तिलके, श्रीपादलीप्ते पुरे,
विध्योपातिक यशोविजयजी मामाकित येन सत्,
श्रीमद्नानारिमधन गुरुकुल, कैन पर स्थापितम्,
स श्रीसयत गयो विजयता, चारिनराजेश्वर ।
तेपाम्
श्री सिद्धक्षेत्र यशोविजय जैन गुरुकुल
सम्यापकाना मुनिपूगवाना
शासनोद्धारसेवाहेबाफीना
मम
दर्शन शान-चारित्र जीवा दातृणा
आजम ब्रह्मचारिणा
श्रीमद चारित्रविजय गुरुपादानां
चरण सरोजेपु
श्रीबृहद्धारणायंत्र-पुप्पाणि
सप्रेम सादर
समर्पयामि
4
প্ৰাৱা
इनि
शिष्य लेशो
दर्शन विजय
--
वृहधाणायन भ० ५ देखनेकी गतियां । -...- अगुण गाप य आधार प गृहस्थको फोन शोनार्थ परक प्रतिष्ठा (पूजा) परना चाहिये, सो मध्याय ५ (पृट २६ से १.) पोठ से देखना। सोनि प्रकार- जिनके बीए देखना हुये उसि पानांप भारिपाले पटकामा जिसमें सापकाक्षरीवा है, गी में तापापसापास नारा निगेपद का शुभाग मतदीपा है, दिमे सराम नारा, योरिवर-पुणे पगरेर देनेशारिशोपप, पशुभगण गप येर गशुम गराि, रानु राशि, ममता राशि नाडौध और जापादयेप अशुग है। मार रणनि मैशापात, या, वर्ग होपारिशोपर स्यगण, शुभ राशि, प्रीगि, स्वराशि, भ्रष्ट राशि, प्रसार पासावध अस्पत शुभ है अदि उत्तम य मध्यम योगगले ती पोपोनिधा घरमा गहिये। इसि से जिाति प्रमायशाली याद में मधिष्टा होती है चिरफार तप पूजाती है। प्रतिष्ठापरपा मो या प्रशर र दोते। यद्यपि तोर्य परपी धारणा तारापट महोयम् देणना ठीक है, जितु যাল মিয়া না যা হব না নায়ি, িী ৪লি বা মা नाइविध हो उदिको प्रतिष्ठा हरगोजगहो परना। पारण सारा योनि पर्ग विश्वा गण राशि और सा काय अधिक मशिन विशेष है। साजिश योग ज्यादा ययान दो ४ि प्रतिमा को प्रतिष्ठा (पूजा) राना शुभ है। जैसा कि पृष्ट ३२ फ महापार, ताग, नागे या येर (4गुम) २ शिका, देश, मध्यम गण धेटनर राशि भो पेघ । सिसे पपसामागार शुरद इस मुनापिर प्रत्येप फोटे या प्रिचार पर जिन मुनिको भालता या निर्णय परना। पृष्ट फे नवे सीया दुरवाते दिवा-सादा में उपयोगी है कि जिन प्रतिमा उपयोगा ही है। इति शाति । - वृहद्घारणायंत्र-अ० ५, समजवानी रीति .०८- अमुक गाम ( सघ) स्थापक सरि अथवा धारकने प्रतिष्ठा माटे (पूजा माटे) क्या तीर्थ कर अनुकुळ छे ते पृ० २६ थो १० ना कोप्टकथी तपास। ते आ प्रमाणे- जेना माटे जोवु होय तेना नामनो आदिनो अक्षरला ते अक्षर वाळु पानु जोयु, तेमा उपर साधकाक्षर लग्येल छे ओ नीचे २४ तीर्थ करना नामो आपी तारा यो विगेरे ८ यानामा शुभ अशुभना सकेतो फरेल छे, जे पैकीना अशुभतारा योनि- पैर कुर वर्गर देणानाविधा अशुभगण गणवैर अशुभराशि शत्रुराशि अशुभतर राशि नाहीरेध तथा नाडी पादवेध अशुभ छे समानविश्वा मध्यमगण मन्यगराशि तथा राशि मेदयी धयेल भोर मध्यम छे अने रसायोनि मैत्री योनि, योनि, 'घर्ग, लेगाविश्वा स्वगण शुभराशि प्रीति स्वराशि श्रेष्ठराशि श्रेष्ठतर तथा वेध शिनो नाडी ए अत्यत शुम छ। प्रतिष्ठामा अशुभ तीर्थ करो यज्य के मध्यम सकेनराळा मध्यम छे अने अत्यंत शुभ तोध करो सर्वथा अकुळ छे तो उत्तम अने मध्यम योगगाळा तीर्थ करोनो प्रतिष्ठा परवी जेथी जिा प्रतिमा प्रमानशाळी यने छे देवाधिष्ठोत रहे चिरफाळ पूजाय छे भने प्रतिष्ठापकने पण अनेकविध लाभ थाय छ। अहीं याद राखयु के मादे भागे तार्थ करो माटे तारामळ जोगाना जर नथी पटले नारा बल कावज जोगाय छे ज्यारे गण राशि अने नाटी तो अवश्य जोपाल जोइए। राशिणी प्रतिकुलता अथना नाडी वेध होयतो प्रतिष्ठापने ते तार्थ फरना प्रतिष्ठा कोइ रोते करपी नहीं केम के तारा-योग-वर्ग-विश्वा-गण- राशियोनाडी ए पापछीना योगो पधारे वगारे यळमान छ । जे प्रतिमाना योगो बनारे बलवान होय ते प्रतिमानी प्रतिष्ठा करावी शुभ छे। आ राते दरेक यारतनो रिचार परीने तीर्थ करनी अनुकुळतानो निर्णय परयो। * पानानी नीवे खेल यायतो दिक्षा-रिवाह मारे उपयोगी छे पण तीर्थकर माटे उपयोगी नथी इति शाति ।
अनुक्रम । -०- गणनाध्य ४ ह २८ १२ मित्तरम् अध्याय १, राशाद्या अध्याय ४, अउमोक विषय पाणिपिय पत्राणि मगढ़-उदेशादि १ अकडम् - अरमोरम् २. नियास क्षणं नक्षत्राक्षर-योनि- -तारा- नाम जम भेद २६ १ साध्यादिश्यले ६ नक्षत्रादि-न्यत्रा अमर अमोष साध्यादि या द्वादशार पेध यत्र ५ युजि-शि-फूट-दूरना अध्याय ५, पूर्णभग বিয়ে বন্ধ ७ मगर प्रश्नो न्यास २८ जातिवर्णो प्रहर १५३६ भगा यले घर्ग-विशोपक्यत्रा • जिा-या या पर घों पिशोपका ग्राम राशि मयत्र १२ प्रशस्ति पाकीणी सयत्रा प्रधफर इत्यादि पायल परिशिष्टाणि अध्याय २, १ विपरीक्षाप्रकरणम् (प्रा.) १२ जिन-नाम-चिहभानि १४॥ (सस्तम्) ४ जिन नामादि यंत्र प्रतिमा पाषाण परीक्षा राशि जिन नाम यंत्र जिन-राशि-पाद-मादी--- २ मप्तदश मुद्रा गण-तारा-ये-यात्रा १७।३ दहभाति विचार जिन-राशिफ्ट यंत्रा २० घनसप्रह जिन पिशोपक यत्र शयनयत्र फूट पर ५. स्थापारिप (गद्य) अध्याय ३, अक्षरा समुहो न्यासोक्षरा २३.६ मणि परीक्षा २३/७ विशेष सूचन तीर्थ करा ४ " (पथ) साक्षर घट यत्र धीसिद्धयनाय नम ॥ श्रीवृहद् धारणायंत्र । मंगलाचरण श्रेयस्कर महावीर लोक चक्षु पूर्ण पूर्ण स्तनीमि भारती ब्राह्मी गौतम ज्ञानधातार श्रीमच्चारित्र विजय प्रणमामि निशुध्याई वदेजगत्पितामहे फेवल धुति भास्कर जगद्विक्षानमातर ईडे श्रोगणनायक ૨ गुरुकुल पितामह शानादि स्यात्म दायब ३ प्रथनाम प्रणम्येत्य महत्पूज्यान् गुरुन्म प्रमादत क्रोमि जिनमचित श्रीवृध्द धारणायन ४ अध्याय १ उद्देश - साधसाध्ययोप- पत्योम्यापर निययो शिष्यगुगंश्च दपत्यो सुसरघ सर्मयते जन्मक्षयो ममयो न जन्मभनामक्षयो नामाद्याक्षरयो जर्जातो योगो योगेन शु यति देशे प्रामगृहन्दर व्यवहति धुनेषु दाने मनो सेवाकाकोणी वर्ग सगरपुनर्मूमेल्फे मामम अन्मलं परतो पधुपुरुपयोर्जन्मर्भ मेक्स्यचेत् हाल शुद्धमितो विलोक्पवतपोनमिक्षयोहक । मा नाम्निविशेष w श्रीपद धारणापत्र। ४ ५ मायोनि तारागण माहियेधा पजिस्तु राणे युतिमध्यदूरो ८ ६ मयसारिण ८ वश्व पण पतिजेक्यमे यो प्राया यो धर्ग पिशोपकाश्व मश्विनी भरणी चैव कृतिका रोहिणी मृग भाद्री पूनर्वसू पुष्य स्ततोऽन्लेषा ततो मया पूर्वा फाल्गुनी तस्मान्चे-घोसराफाल्गुनी पर चित्रा स्वाति विशालानु-राधा ज्येष्ठा मूल तथा पूर्वापाढोत्तगपादा ऽमिच्चरणं धनिष्ठिका शत पूर्वोत्तरामाद्री पती भगण स्मृत अश्विनाचुचेयोलास्यात् लीलुटेरो भरण्यय पृतिकास्याइ थाइउप रोहिणी भोयपिघु च मृगाशिर्प घेगोकाफि आद्रा घडळ मता पूनर्वसू कोहाही हुहे हो डायपुष्यम भलेपाहिडुडेखोस्यात् ममिमुमे मघा मधेत् भवेत् पु. फा० मोटस्ट् िउ० फा० टेटोपपि तथा हस्तमस्यात् पुषणंठ चिश पेपोररि भवत् स्याति दररोस प्रोक्त नितुतेवो निशासम १४ अनुराधा ननिनो ज्येष्ठा नोययियु भयेत् पूर्वापाढा भूधफर अन्याऽऽपाटा मेमोजाजि जुजेजोखा तथाभिजीत् श्रवणविखुखेखोस्यात् घनिष्ठास्याद् गगिगुगे शततारा गोससीसु मान लेसोददि सरह अन्यमाद दुषम देदोचवि घरेवती एफस्यरेदशमाहा मौदता नही लुफौ जइयो कक्षपो रिरो ऐषयं स्यात् इस्वदीर्मयो येयोममि मूलमुक्त श्रीकृष्न धारणायंत्र। ३ योनिः अभ्यगजो मेपाही आखुधाऽऽखुर्गानी मृगोमृग भ्यानानर सिंहो गौश्च गजश्व हस्ति सिंह मश्वमहिप गौन्याघ्र चापोतु सर्पः श्वा ओतुमेषमाजारा महिपन्यानो महिषव्याघौच १९ नकुलो नकुल फपिच सिंहावी नक्षमाणाहियोनिस्थानानि २० भ्वाहरिणं फपिमेप महिनकुलं घेर फेधिन्मत वृथेति तत् २१ तारा - २२ स्वमात् तारा नव प्रोका त्रिवार जन्म नामत तृतिया पंचमी त्याज्या सप्तमी साधकात् खलु राशीपनिमेव्यामेक नाथेश्ये शुमेपिता तारास्त्याज्या वरादिभ्यो गतुस्थापकीययो २३ - २४ देवे ऽश्विनीमृगपुष्य अनुगधाचश्रवण भरणी रोहिणी आदा राक्षसेन्यानिमानि स्यु स्वगणेप्रीतिचामर देवराक्षसयोधैर सतिराशिकुटे शस्ते मनुष्यगणसाश्यत् स्वातिम च पुार्यसू हस्तरेती स्याद् गणे श्रीपूर्वाभ्युत्तरा रे कृतिकादीनि वा नव नरयोर्मध्यमा मता मनुष्यरक्षसोमृति सद्योनौ ग्रहमैत्रके साधरक्षोनदोषत् २६ नादो- २८ कमोत्ममेण अभियन्या सर्यस्मिनशुम प्रोका राश्यादिशस्तमैदाना फितुशिष्येगु वैध प्रभुपण्यांगता मित्र एपलासीगतामन्या नितास्या गतम छयो शुमंतुगुरुशिष्ययो नाटीयेधस्तुनाशर दुर्योनिबल्नाशक देशोग्रामंपूर गृह अमव्या वैधार्जिता २६ भोसूख्य धारणायत्र। ननत्रयन भक योनिः योनिरपरा गप्प पाटी पुणे १ ૨ देस मनुप्प ४ पोगी मनुष्य देव मनु'प ७ पुनर्पण बार रारा १ मान्य भाप धिनी अपनीमा २ भरणी निलु ले मास्ति f ३ जतिया पानर ४ | राहिया माया पियु नयम ५ মূহৰ व पोक कि कुर रिहानादर 5 पुष्प पा भरलगा Gara उदित মথ্য | ममि मुमे Prve मा यदि उरि frem १२ उपा टेन गो यम 'पुपए म १४ चित्रा ।पार गी १५/स्वाति करेरावा १६ विता वितु तो प्याम १७ मनुराधा ननि नुने हरिया भान १८मेन्टा यमि यु हरिया पया में मि वारा हरिय २० पूर्वाषाला पार भेभा जति मुर्प २२ अभिजित जे जाया २१ श्रवण खि पुरोगा २४ निन्दा सिद इस्ति २६ शतभिषा गोम सिमु २६ । पूभा । से छोददि सिद हस्ति २७ उभा गमथ व्याम २८ रेक्ता मम्मयपोगो श्याम ४ ६ - ७ . रावस दूप द है २ मध्य 1 ३ विद्याभर . पभिप्रपागी ४ गगि में माथ ७ माय मनुष्य । मध्य मस्थ श्रीधृक्ष धारणायन गणमेलक यंत्र साधक साध्यदेव माध्यमनुष्य साध्या राक्षस देव अम पुपुह स्वाभभरे मनुभ्य भरोमा पूर्वा०३ उत्तरा०३ सम्ले म चि वि ज्ये मूधश अतिप्रीति मध्यमप्रीति मध्यममोति अतिमीति बैर वैर मृत्यु (शुम) भतिप्रीति द्वादशारपाट वेधयंत्र. नक्षत अ उ ह ज्ये मू पू० पु य मु सि को प यो सो २ भाष नाटी चो घ य म स ह हि टो है ठ नो मि नक्षत चि में गे by hey he to पो घ मध्य नादी ट नि प गि मो रि न द ग ह म नि तो मे खो खे भो दो. अत्य नाटी घ रो ए प्रो म त ति जि खि चि १२ श्रीपाद धारणायंत्र परेपानीतिरत्तमा राशिभेदे नदोषरत एक नक्षत्रजाताना दंपत्योस्तुभवेद हानि दुष्टो येषु नाडीयेयो द्वादशनाडीवो तु राशिभेदे तुमध्यम पादवेधोऽधमाऽयम ३२ युनि पवादशनयभाना लग्ने चाउरेवतीना योग प्राग्मध्यपश्चिमश्चरे घरेफनीमिद्विवश्वप्रेमभर ३३ राशय मेपो घृषभो मिथुन पर्क सिंहश्व पन्यका तुला कुभो मीनश्य राशयो शेया ३४ घृश्चिको धनमकरी राशिस्थापना अश्विनी मघा मूलेभ्य मेषसिंहधनाचा स्यु प्रारभ्य राशयो फमात् सपाइद्विभयो पलु भवरा मेरे स्यु थुठा वेश्यमता: युग्मेवघड छहा पर्फेहोश हरोमटा पनिपुर्व टोगपणठ मता तोलोरात मलीनतोय धनुर येमाधम मता भोजाखागमृगे घटेगुसद वै मीन मौन दिशाझयचा ३६ भारयुति राशिकूर -सस्मात् द्विादशय मेष्टनमपंचम पष्टमेविषमादाशे मृत्यु समात्तथाप्टमे मकरसकेसरी मेप युत्या तुलहरमोन कुलिर घटाया धनवृपवृश्चिकम मथयोगे घेरकरच पडष्टकमेतत् (ना.) विसमामेपीई समाउ अहमेरिऊ सत्तुछ इस नाम रासीहि परिवज्जऐ (दिनशुद्धि) शत्रुपडारके मृत्युः पल्हो नरपचमे विवादशमेशारिथ शेशेषुप्रीतिस्तमा १८ राशिरता - दूरस्थाशनिराशि घातोनयमीपीटा शुभाषराद्धनिकान्वप्रतिमाया: मातृपिदमृतेचपैकस्मिन् २६ धीहद धारणायंत्र। राशि यंत्र. राशि এরি नक्षतपादा अक्षरा १ मेष मोम भर मा ३०१ कृ.३मृ०४ मा २ २ दृपम ३। मिथुन ५ सिंह है। कन्या तुला ८दृश्चिक मोम रवि बुध शुक्र भोम पु चोखा शिलु ले सोम इ उ ए मोवि वेपो फ कि कु के को पह छह बिहेहोश विदुहेगे ममि मु मे मो टटि टुटे टोप पि पु पे पो पण र रिस रे रो त ति दुवे तो न नि नु ने नो य यि यु ये यो भ मि मुघट मे मोज जि जु जे जो ख०५ ग गि गुगे गो ससि मु से सो द ददि दु दे दो श म य च चि मू०२ भा०४ पु०३ पु.१ पु०४ म०४ म४ पूउ१ उ०३ १.४ चि.२ उ०३ चिर स्वार वि०३ वि०१०४ न्ये०४ मू.४ पु०४ उ०१ उ०३०४ घ०२ घर ४ पू०३ . है धन मकर शनि शनि १२ / मीन गुरु पू०१ उ०४ २०४ २-१२ जावि वश्य राशि वर्ष १. वृमी सिंघ कम २/मि में ཚོ ཡྻོ g यूम ३ क ४] सिमि क्ष्मी ध में म कु मि मी क मे सिं के यू मेघ मनुष्य विनानु विनासिंहसर्वे कीट ममो विनाधन विनाचिसर्व मे मनुष्य विनानु विनासिंहसवें मी यू मनुष्य पशुकीटजन्मजा विनासिंह मे मि कोट सिंह मनु (मि.) सर्वे मिसिं पशु (मि.) एक मीन क मनुष्य पशु कीट जक्षमाः विनासिंह ७ के ८ घतु है म मितु क ना ८ आपदा पारणापत्र ग्रह चकम् स्वराशि मिन मध्यस्य १. मेनो सन्यास . सो मोगु । बुध सो मोग सोम में गुशुध मोगु मेगा । मेव रणे रोग सो शुश रा ५ | गुरु धामी । र सोमा रामो रसो बुशरा र सोमो गुरा what व २-२-१२-११-१ स्थानस्य महायतित्वासमेसी २ बैं राशिकूटचकम् संकेशिन्दा ----श्रेष्ठतर, भे-श्रेष्ठ, शुशुभ, म-मध्यम, प्र--भराम, नेर पशुमवर, शयन प्री-प्रोति, .-एम, १-स्व GIG ० १२१११ UIr मि वि क ५ भी . -- - - श्रीवृहद धारणायत्र। है नातिवश्य अजघृषहरिमफरास्तु जलजोमीन शेषा धनुर्हरिकनि मनुज- मकरचकमीनी पशर कीटो फर्कवृश्चिको मनुजा राशेजातयोशेया ४० शेपेषु स्युरुसरासवे घृषममेपो हरिरलिंपश्या ४१ वर्ण वैश्य शूद्रश्चनाह्मण राशिपर्णा क्षत्रियश्च श्रेष्ठवर्णा यदिफन्या पतिपुनमृतियेत् ४२ पविग्रहा क्रमाद्राशे कुज शुक्र बुधश्च द्रो रनिबंध शनिजीपश्चस्वामिन शुक फुजोरुम दो मित-रानु अर्कस्यजीवेन्दु - चद्रस्य रविसोम्यो भोमस्यजीवेन्दु- सोम्यस्य रविशुक्रौ जीरस्येन्दुकुजार्का शुक्रस्पबुधमदौ मदस्यबुधशुक्री सपामध्यस्था फुजाश्चमित्रा शुकशनीरिपू मिनो शत्रुनहोनकोप्यस्ति ४४ सुराक्षमित्रारिपुस्तुचद्रसुत मित्रौ शत्रुपदे सदाचद्र ४५ मित्रा युधशुक्रौचशत्रुस्त मित्रौशभूसदार्फचगौच ४६ मित्रोअरिणोसूर्यकुजचढ़ा शेषाप्रोक्का:प्रवीणशानधन ४७ 4 परस्परमेती रवींदुगुरुकुजाच स्वस्मिनमित्राणिसर्वाणि सौम्यशुक्रार्किराहव परस्मिन् शत्रन स्मृता तत्कालमेती जन्मनिस्वस्मादाग- तत्कालिनमित्र स्यात् पृष्टगत्रिविगृहस्थित खेट मित्रग्रहस्तुभवेदधिमित्र ४६ मैलीपक्षम् - चाशुभे नषपचके अशुभेटिदिशके चिन्तयेद्ग्रहमैत्री सा एकनाथे मित्रनाथे मेष्टशत्मध्यमनाथे नान्यस्मिन् शुममेलके एकमध्यमके शुम घेकशी रिपुपतो 2 श्रीवृहद् धारणायत्र। राशिकूट - यदा सानाडी-सत्तारा-- सधौनि-सद्गणा सलु तदाराशिकृट श्रेष्ठ मध्यममयोरपि त्यघटषयावर्क मीनानापंच सद मध्यम शेषराशीना शुभत नवपंचमम् (म यमपंचमैरय राशीनातुशुमायई) वर्गवैरयत्र वर्ग वेर पति मग पति + । सर्प गण्ड विहान सिंह अउ ए यो पराग चछनमम टठहरण । उंदिर + (त) त थ द ध न । (क) + (प) परब मम (य) यरलय (श) | श पसर लभ्यदेययन हरिण मेष वान + दाता ग्राहक दाता वर्ग ४ १ म २ क ३ च ४ 2 धौक प य श त २ २॥ ३॥ . १ ५ क प ३ १ २ २॥ ३|| ૨ च य १ २ ३ ट १॥ २ ३॥ . ४ २३ लभ्यदेय ६ वाकयत्र वगे भ क च 2 प य शा २ १ २ . उत्तर o10 ३ ३॥ মুযাক विशिष्टीक १ १॥ २ २॥ ३ ध्रुवोको एफोरत्य चतुर्मि निभाज्या विशिष्टा । पर्व परस्पर गणनीय ॥ इति ।
श्रीवृहद धारणायत्र। सिंहस्यसमराशीना सप्तमराशिफुटाद्या द्विद्वादशमपि शुभ ग्रहमै यात्वतिशुभा ५४ साधक साध्य विशोपकयंत्र साधक म क च ट त प य . = म . . १ १ २ . . क . दे० ३॥ ले.२॥ %3D च . दे० ०॥ १ २॥ . . . ट ले०२॥ द.१ . दे. ०१॥ ૨ २॥ ३ ३॥ ले०॥ २॥ ३॥ ले०॥ ले०१ | दे० २॥ दे. २ ले. २॥ ले०३ दै० ०॥ | दे०२॥ ३ १॥ २ ३ ३ १ | दे० ०॥ | दे.. दे० ३॥ ले०१ ले० ॥ ले०२ दे० १॥ दे. १ 011 १॥ २ २॥ ३ २॥ १॥ (दे. १ ले० ३॥ ले०॥ ले०१ ले० दे० २ | दे. १॥ २ २॥ ३ ३॥ ले. .३ २ ३ १ २ दे० ॥ ले००॥ दे. ३ दे. ल. २ २ २॥ ३ ३॥ ०|| १ ले. २॥ ३॥ १०२ | दे. १॥ दे०१ दे .॥ ले.॥ले०१ ले० ॥ २॥ ३ १॥ ले. १ २ ३ दे. २॥ दे०२ दे. ॥ ले.३ दे०॥ लेले.१ 0॥ १॥ २ २॥ ३ ले..॥ २॥ ३॥ २॥ दे० ३ ले | ले०२ /ले. २॥ दे. १ | दे. ०॥ ले०॥ २ २॥ ३॥ ले० २ ३ २ ३ ले०॥ ले.१ ले || दे० २ . दे. १॥ दे० १ दे. ०॥ २॥ त ८ . २ ३ . प . . य . . . .
१२ धीवृहद धारणायन। । ५७ राशेरेफाधिपत्य या स्वामिनो मिनतातदा पडप्टफोपिदंपत्योः नारचद्रे शुमायह परमार्थवतम् - एचश्रेष्ठतरं श्रेष्ठ शुभ मध्यमज रिपु भशुभप्रीनिनष्टचै- क्यमशुमतरसम गरुड ओतु सिंहश्च कुक्कुर सर्प उदर. मृगो मेयोऽप्टयर्गेशा प्रमेण अफवादीनाम् पगाणा पंचमेवर पज्यं प्रसिद्ध नामयो यलिप्ठे साधरे वर्गे वर्ग पैर न दोपरत् ५८ विशोप प्रसिद्धनामाक्षर वर्गपाको फमोत्यमेणाट निमकशेपो कृताधको साधरसिद्धयोस्तौ विशोपक स्यात् प्रथमेन देय ५६ प्रथम हामतो रभ्यो द्वितीयेन विशोपक परस्परेणशोध्योती फेनार्धक्कापथा ग्राम धारपायातु ~जममात्मामविताया राशियोगो मतोन्यथा फेचित्तोकीणी प्रोषु ग्रामस्यधारणागती माम राशि स्वराशे दुपदो ग्राम एकत्रिषष्ठ सप्तम तुर्योऽष्टमोद्वादशमो जमराशिस्थितो ग्राम विषप्ठ सप्तमोपिना स्वक्यिोद्रव्याशाय आपदाच पदेपदे ॥१॥ पंचमो नयमो ग्रामो द्वितीयो यदिवा भवेत् (मा० ३१२३, टीका)-दशामकादशश्चैव शुभ ससफलताप्रद ॥३॥ ग्राम राशियन - मध्यमोऽन्यता शुभ ग्रामराशि १३६०/२५६१.११ ४६१२ ध्यनाश शुभ भर्थव्यय पमम् श्रीवृहद धारणायंत्र। चतुर्याप्टमकोग्रामो यत्रउत्पद्यते अर्थ द्वादशो यदिना भयेत् तत्रैवार्यों विलीयते ॥२॥ कांकीपी । । . द्विरूत प्रथम अन्यधर्माण पूरित अप्टमक्तेन शेपाका याचते फाकीणी परात ६३ एव परस्पर हत्या शोधनीया ही काकीणी स्वनामाक्षर घर्गाच्च ग्रामाधाक्षर बर्गता कांकीणीयंत्रः साधक क च ट प य म . क ले०२ ० ट . दे०१ दे०. ले०५ । ले०४ ले०३ ले०१ दे०१ । ले०६ दे०३ दे०४ दे०५ ले०२ । ले.१ दे०२ ले०४ | ले०३ दे०५ । दे०६ ले०१ ले०५ ले। ले.ले०२ ले१ ले०७ दे०३ दे०३ ले०४ ले ले०२ (दे०७ दे०१ दे.२ ले०६ । ले०५ दे०४ दे०५ ले०२ ले.१ दे०२ ले०३ (ले०२ (ले०१ . प य वर्णोवश्यचताराव নগ্ন মিকুম্নে योने राशिवश्यमधिक श्रीमद्यारित्रविजय- राश्यादि धारणाय योनिश्चमेलक नाढीचैते गुणाधिका ६५ इति कस्यचिन्मते शिष्य दर्शन गुफित अध्याय प्रथम इति म 1M श्रीवृहद धारणायन । अध्याय २ चतुर्षी शती तीर्थेशान् प्रणिपत्य गिर गुरु जिनाना नामचिन्हानि धारणागति कथ्यते जिननाम पभश्वाजितस्वामी सुमतिः पासुपाची २ श्रेयांसो घासुपूज्य धर्म शातिश्च कुथुध समनश्चाभिनदन चंद्र सुवीधिशीतली निमलस्वाम्यन तराद अरोमल्लिजिनस्तथा नमिर्ने मिश्च पायराट वर्तमान जिनेश्वरा ३ मुनिसुव्रतस्वामा च महावीरेति सभूताः ४ मानानि घृषोगजोश्व प्लग क्रौचोज स्वस्तिक शशि मकर धोरत्सपडगी महिप शुकरस्तथा ५ श्येनो धज मृगश्छागो मद्यावता घटोपिच कर्मो नीलोत्पल शख फणीसिहोऽहताध्यजा ६ • एतेचदक्षिणांगविनिवेशिनो लाछनभेदाइति, अमिधान-- चिंतामणो कलिकालसर्पश श्री हेमचंद्र सूरि प्रमाणम् भन्यान्याम्नाय --दिगयरानायनथे तु सुमति-शीतल-~अनत-भर जिनाना लांछन भेदो प्यते, तद्यथा-फोक द्रुम ऋक्षो मेप इति सिद्धात रसायन कल्ये (मुपद सग्रह), कोक श्रीयुतो वृक्ष शेधो पाठिन इति घसुनन्दीरतप्रतिष्ठापाठे, कोक (घेटो) श्रीयुतीवृक्ष शन्यो मत्स्याति पूजासार समुच्चये, हसोबाचातफ श्रीवृक्ष सेही मत्स्य इति भोला- नाथमुस्तार लिखित हिंदी तीर्थ फर चिन्हरहस्ये ( अनेकात वर्ष १ फिरण २) सुधिस्तु लाउन पटुक इति सिद्धात रसायनकल्पे । नवनायि - जिनानामुत्तराषाढा रोहिणी मृगशिर्षभ विशाखा चानुराधिका पूनवसू मघा चित्रा श्रीवृहद् धारणायंत्र ८ मूलः पूर्वजापाढा उत्तराभाद्रभचान्त्य रेजत्यश्विनी धरणे उत्तराफाल्गुनीमानि श्रवण शततारक पुष्यमश्विनी कृतिका आद्य विधानिशासिका मेयानि जन्ममानिवे ६ जिनराश्यादियंत्र. प्रक नाम साउन नक्षत्र योनि वर्ग | गण नाटी मनुष्य भत्य भूषमनाथ २ अजितनाथ ३ / संभवनाथ ४[ अभिनदन ५। मुमतिनाथ ६. पद्मप्रभु ७ । सुपार्श्वनाथ ८ चंद्रप्रभु है। मुविधिनाय १. (शीतलनाथ ११ श्रेयांसनाथ १२ यासुपूज्य १३ विमलनाथ १४ अनंतनाथ १५१ धर्मनाय १६ शांतिनाथ नकुल सर्प सर्प विडास उदर म्याम व्याम हरिण श्वान मनुष्य अत्य भ मध्य देव माध श राक्षस भत्य प राक्षस मध्य राक्षस प्रत्य च देव मध्य राक्षस भाद्य मनुष्य मध्य देव मत्य य राक्षस भाग य मनुष्य मध्य प्रदेव मत्य मध्य रा देव भाद्य राक्षष्ठभत्य म पत्य वानर वानर वृषम उपा इस्ति रोहिणी प्रश्व मृगशर धानर पुनर्वसू प्रोच मघा पद्म चिवा स्वस्तिक विशाखा चंद्र अनुराधा मकर वत्स पू. पा. खडगी (गेंदो) भवण महिप शतभिषा चराह उ.भा. स्पेन (सिंचापो) सती वन पुष्य हरिण গশ্বিনী अज कृतिका नद्यावर्त रेवती अश्विनी कच्छप (सोन) भवण अश्विनी शख चित्रा विशासा सिंह प्रश्व गो इस्ति भज भश्व १७ कुथुनाय १८ भरनाथ इस्ति भव वानर भश्व देव पाद्य देव अत्य प १६ मल्लिनाय २० मुनिसुव्रत २१/ नमिनाथ २२ नेमिनाथ २३ / पार्श्वनाथ २४ | महापीरस्वामी कमल त सर्प (साप) प ध्यान गौ राममध्य राक्षस भत्य मनुष्य माघ श्रीवृहद धारणायंत्र। धनुगौमिधुनयुग्म धनु धनुधमकरो क्र्कोमेपश्चगामान मेषोकन्यातुलाकन्या सिंह कन्या तुलामति घटो मीन मीन तथा मेपश्चमकरस्तथा तीर्थहजमराशय जिनराश्यादियत्र राशि पण तारा नाम ईस अशुभ राशि वृषभ ७ पलिय १ आलिया १ क्षसीय ३ भग्नि वेश्य भूमि शुद्र ५ पायु वायु अग्नि वैश्य ५ भूमि षासु सानिया ८ भग्नि भग्नि चलियां २ भग्नि अग्नि वायु बादाद जला जहर १ भृषभनाथ २। भजिवनाथ ३। समवनाथ ४.अभिनंदन ५ सुमतिनाथ पभप्रभु ७ | सुपार्श्वनाथ चंद्रप्रभु सुविधिनाथ १.शीतलनाथ ११ श्रेयांसनाथ १२ मामुपूज्य १३ | विमलनाथ १४ भन्तनाथ १५/ धर्मनाथ १६ / शांतिनाथ १७ मुयुनाय १६ भरनाथ १९ मल्लिनाथ २. मुनिसुत स्वामी २१ मिनाथ २२ । नेमिनाय २३ पार्श्वनाथ महावीरस्वामी क्षत्रिय ४ धन वृष, म, मे, ध मिथुन । कर्क वृ कु, मिथुन / कर्क, , कु, सिंह म, पन्या तुझा १, मी, वृश्रिक (मि, कर्क, तु, धन वृष, म, धन वृष, म, मकर सिं, कन्या, घ, मि, कर्फ, मी मीन मौन मि, वृ, कु, मी, मेष वृष, कन्या, मे, ध, मान मेष वृष, कन्या, मकर सिं, पन्या, ध, मेष वृष, कन्या, कन्या | मे, म, तुक्षा ह, मी, कन्या । मे, म, कर्क, तु, फ वाझया पलिया। विश्य | ३ बाझयह प्रतिय वैश्य भग्नि भूमि जन भग्नि भूमि भग्नि भूमि वायु भूमि पत्तिय १ वैश्य ५ वैश्य। ३ श्रो धारणायत्र। साधक तीर्थंकर ननत्रयोनि राशि यंत्र । +. ५+0 . पाद स्वयोनि साध्या साध्यजिना राशि योनि वैरं भश्विनी १६.१६,२१+१२ •+. मेष भरपो o+१४, १८ ०+0 इतिया २-४) १७+१५ १.+९१,२० वृषम रोहिणी २+३ १+. वृषभ मूगशोप |३४/३+२ मिथुन भाद्रा •+8 5+0 पुनर्वसू १-३४+ मिथुन पुष्य १५+१७ १०+११, २० अभ्क्षषा .+४ ५+. मया ५१० सिंह पू० फा. +५ ४+० उफा.२-४] २४+१३ ६, २२१७, २३ कन्या १६,१६,२१११२ चिता १-२६, २२+७, २३ २४+१३ कन्या स्वाति १६ १६,२१+१२ विशाखा | १-३ | ७, २३+६, २२ २४+१३ तुला भनुराधा •+६ वृश्चिक ज्येष्ठा .+८ •+8 .+5 धन पूर्वापादा १.+११, २० १५+१७ धन उ०पा. . ३+२ धन भभिजित ३+२ श्रवण ११, २०+१. १५११७ मकर যনিষ্ঠা +१४, १८ शतभिषा १२११६,१६,२१/+ पू. मा. ०+. •+१४,१८ उ०भा० ६, २२१७, २३ मीन रेवती १४,१८+० मीन . . . . ० 3 तीर्थ कर नाडी-गण यत्र । साधना सायकगण वाध्या साध्यापकर ना भाव मध्य प्रत्य देर मनुध्यराना १ वेध १ ४ वेध ध वेध 1 " ७ अध यघ 8 थप येध ༧ ༈ ལ ༧ བྷྱཱ ༈ ཟླ ༧ ལྤ ཛ # # ལྤ ༧ स्वगभशुम . पेष १२ वेय मध्यम मशुम भूपभनाम मध्यम भनिनाम मध्यमर संमवाप अभिनंदनस्वामी भशुभ मुमविनाथ वर पत्रमा गुगर्वनाम । मभ्यम और चंद्रमा भशुभस्व मुषिधिताप मध्यम शतप्तनाथ मध्यम पर प्रयासराय बापूज्यस्यामी मध्यम स्वगण मशुम रिमननाय मध्यम ] बेर अनंताय धर्माय शांतिनाथ वर स्वगण | युनाय स्व मध्यम भरनाथ । मरिखनाथ मुनिमुमत स्वामी नमिनाथ अशुभ स्यगय नेमिनाथ पानाय मध्यम भशुभ | महावीरस्वामी । अशुभ १३ वघ - धध घष " . वेध " । वेध देष पष 1 " वेध " " " . वेध २१ वेध २२ २३ २४ वेध येध - श्रीवृहद् धारणायंत्र। साधक-तीर्थकर तारा यत्र विद्वक्षुभ्यो हिताय सदभितोय यन वस्तुतस्त्वनावश्यक एव मू पूषा उपा उषा रा ह श्र मृ घ १, ३, ४, ६, ७, १०, २२, २३, २४ २,८, ११, १२, १३, १५ २० ३,४,६,७,१४, १८, २२ २३ ५,८,९, १२, १३, १५, १६, १६, २१ ८,७,१०,१४, १५, २३ १,५,६, ६, १३, १५, १६, १७, १६, २१, २४, २, १०, ११, १४, १८, २० १, ३, ५, ६,६, १६, १७, १६, २१, २२, २४ २,१, ११, १२, २० आ व 1 वि पूमा पु अनु ज्ये म - द्वादशार-तीर्थ कर वेध यत्र साधकपादाक्षर जिन नाही वेध मध पाद वेध ४-कु गो टे 3 दिनो मिला हि ६, १२, १६, १६, २१ ४,२४ ७-८गगि मटटयन नि फये ८,१, १३, १५ ३, ६, २२ यो मोर रिलेसा वे पो हो ह-भ खो हि तो दे भे मेर २,५,११,१४,१८,२०७,१७,२३ १०-११-१२६ उ ए भो खि खु से च चिज जि डु डे हो त ति तु वे दो २, ५, ७, ११, १४, १७ व विभो म मि मुरे रोय वि १९,२१,२३ २० श्रीवृहद् धारणार्यत्र। तीथ कर राशि कूट यत्र स्वजिन भेष्टवरम् भेष्ठ प्रीति शुभ मेष सिंह ५ सिंह ५ १ १६,१६,२१ | मि ३, ४, १२ १३,१४१६८ सिंध,६,१० २ दृषम २,१७ कु.१२ मि ३, ४ तु ७,२३ क १५, के १,२२,२४ २ म ११,२०,१३,१४,१६ ३, मिथुन वृष २, १७ म११,२० मे १६ १६, २१ २२, २४|१३,१४,१८ सिं ५.तु ७,२३ मे १६, धन, ५२,१७ १६,२१७,२३ ६१. क ६, २२, २४ ५. सिंह दृश्चिक ८ १२,१७मी १३ में २६ १६, २१ १४,१८.मि ३,४,६,२२, २४ तु ७,२३८१६१. ६,२२,२४ मिथुन ३,४ ७, २३ / १२२, १७ षर्क १५ घ १,६१० सिं ५, पृश्चिक तुला म ११,२०पर्क १५ मि ३, ४ सिं ५ ६,२२,२४ २ १७ घ १५६१०, १२ वृश्रित घ १६,१. मे १६ कन्या ६, २२, २४ कु १२ १६,२१ । म ११.२. मी १३, १४,१८ १,६,१० मीन १३, १६,१६,२१, सिं ५ १४, १६ २४६१५ तु ७,२३, कु १२ मकर तु७, २३ मे १६.१६ | मि २१ कु. १२/३,४, मी १३, १४, १८ ११ । कुम १२ वृष २,१७, १८ म ११,२०) २२,२४७,२३ धन १,६,१. १२ मीन १३,१४१८ध, १५,१६,२१ सिं ५ तृ २, १७ १८ म ११,२. ७ सिह ५ १० 4 धोवृहद धारणायंत्र २१ तीर्थ कर राशि कूट यंत्र राशि सम मध्यम अशुभ भशुमतर मे वृष २, १७ कन्या ६ १ तु ७,२३ ८ | २२, २४ घन १ tos २ १६, २१ ३८ ३ क म ११,२० | १८ मी १३,१४,१५ कु १२ मि ३,४ सिं म ११, २० म ११,२. मी १३ १४,१६ मे १६ १६, २१ मी १३ वृ८ ७ २६, २१ वृष कर्क १५ -- तु ७, २३ 'मि ३, ४ 5 २,१७ म ११,२० दृष२, १७ म कन्या ६ २२, २४, घ १,९.१० | सिं ५ १. सिं५ मी १३ १४,१८ । तु,२७ मी 4६,२२,२४ कर्क १५ १२ .-- २२. श्रीहट्ट धारणापत्र। तीर्थ कर विशोपक यंत्रम् साध्य यम सीर्थ कर नाम साधक भ -- ट -- य वर्ग . थ . ले ॥ - क . te - . २१२,४ १७ १४, २१६१६२०९१२,१५ १४,१६ २२ २३, २४ (२४) ले ले। दा दे दे ॥ ले। ले ३॥ ले ॥ | ले। ले०॥ दे ३ । दे २२ ले २ दे २ द ॥ ले ३०॥ ले ले२ लेश ने ले ले ले १॥ दे २ -- ८ ले त से ॥ प . य . श धारया कुटप के ন মিয়া शाचाफूट तथाक्षर कर्तव्या स्थापकाचार्य तीपा धारणागति १२ योनिश्चलभ्यच गणेययं राशिफ्टता नादीति पर यलानीति ध्यपिये विलोषयते १३ योनिगणराशिमेदा लभ्यरगंश्च नाडोध पड्यियमेतहिरोपई ॥१॥ श्रीमद् चारित्रविजय शिष्य दर्शन गुफिन नीर्थद्धारणायंत्रे अध्यायो द्वितीय इति उक्तच - नूतन विपरिधान ७ श्रीवृहद् धारणायन। भगक्ष अध्याय ३ प्रणम्य परमेष्ठित शिघ्योधाय तन्यते साक्षरभेद विन्यास साध्य साधक मेलक स्परा सस्थरफायानि भवन्ति नामनि तत राशिम वर्ग पैक्येन समूह मियते पृथप समूह -- २ न्यास - अक्षरा एवं भवेत्तु पप्ठी मिन राशिभवर्गत अक्षराणा च सपा तन्यास क्रियते क्रमात् ३ प्रत्यक्षर प्रतिपित स्थाप्यते स्यक मादिक यथाई योनि वर्णादि यथास्यात् सुफरास्वद् ४ अब मोका फुके खात्री गगुगोधा चचु छजा जुझाटाटे टोठडाडी ढणता तितोथा ददि दुदेधान तोपपुपे फरावे भाभुभेमोम मोययेरा लालीवा पेशवाससेहाहिए चतु पष्ठ्यक्षराम्चेति अनुक्ता पूर्वगामिन हस्वदीर्घपय भाजन्ते सर्व नाम्नि व्यवस्थिता साधक साध्ययोोंगे दिदृक्षाभवति यदा ( यदायोगस्तु माध्यस्य साधकेन दिक्ष्यते) तदाऽऽशु जायते ज्ञान सुलभ यत्रदर्शनात् सर्वाचन कूट यत्र. (६४) मनुसंधान यवपतम् ८ भतर म ३ नक्षत यानि | तारा गण नाही युनि राशि स्वामी वर्ण वर्ग कृतिका मेष पू मेष भौमा क्ष कृतिका मेष रा वृष शु वर रोहियो सर्प सर्प मिथुन बुध शु . म भो काकी " व म क ओवृद् धारणायत्र। सर्वाचर कूट यत्र (६४) पर योनि | तारा | गण नाडी युजि राशि स्वामी वर्ण वर्ग पा म श्वान रिटाच के को Batma विद्या वानर " गगी गुगे सिह म b " चाची A24 44294 मकुछ ABHA गो 4444 20 4 4 4 4 492EANINS24 म " बानर महिष " A " उ . " " मा श्रीवृहद धारणायन । योनि तारा गय नाही मुजि राशि स्वामी, वर्ण वर्ग नक्षत पू मीन था to मा " . गौ # # # # * * * * * 4 * * , म " " " " " म म " मकर ये " दे दो रेवती हस्ति है घ१० पानर २ गु ननान्ने | अनु हरिण 5 म वृशिष में नो ज्येष्ठा | हरिण प पापी उपा मा म कन्या पू महिप भा पन्या पे पो चिता व्याघ ५ कन्या प पूषा यानर २ म प धन वापीयू रोहिणी सर्प ४ म पू वृष ये दो मृग सर्प ५ म पू वृष मा भी मूळ श्वान प धन भू वानर २ म प घन मे उपा नकुल प धन भो नकुल ३ मामीमूमे | मघा उदिर म मो उदर २ म म यायो यु ज्येष्ठा हरिण E प वृधिक में धान प धन र गरि चिना वानर ५ म तुला परेरो स्वाति महिप भश्विनी अश्व मा पू मेष लीलूलेलो मरणी | हस्ति २ पू मेष यावी वू रोहिणी | सर्प पू वृष ये वो सर्प म वृष उमा गौ मीन ५१० महिष भा भव भा प कुम से सो पभा सिंह पुनर्वसू । विहान दे मिथुन ही पुनर्वसू रिहात पर्क मेष ६ कई च श्रीमदचारित्रविजय शिष्यदर्शन गुफित प्राऽक्षरोधारणायंने मध्यायस्तृतीय इति ये यो था " . म to sto म " ब . " , . श पन्या ससीए शत " ७ . म " ७ हु हे हो । पुष्य " . म . shor श भीड्दु धारणायंत्र। अध्याय ४ मग - प्रणिपत्य परेशाय परस्पराक्षरेश्चम साधक साध्य सिद्धये भाउमो सदुध्यते सर्वेदिशधान्यस्त तदेव लाघवेने अहमूवामिप्यते विक्मपत निधियते २ विन्यास विना आधा स्थरास्तुद्वादश प्रमात चतुष्कोप्ठेपु सन्यसेत् ३ काधानि ध्यजनानिच ऋग्रस्थरौ तथात्रय अपिललस्वरो रिश रफार प्राह्यतेवुध स्कार साध्यते सदा ४ द्वादश यक्षरा पर्व अउमोकादिमि कार्यों प्रतिकोष्ठं विनिष्ठिता योगो साधक साध्ययो ५ देशे दुर्गे पुरे मामे स्यामीभृत्येषुभूमिपु औपचे मत्रदेवयो रिपी चैतनिरिक्षयेत् - विदे शुभवार्येषु लाभादी प्रहगोचरे प्रसिधं नाम नेक्षयेत् जमनास्न प्रधानत्य . प्रसिद्धनाम गृहे प्रामे पले क्षेचे प्रसिद्धनाम्न श्रेष्ठत्य याणिज्ये राजदर्शने जन्मराशिम चितयेत् ८ विज्यादय साघकात् मथमे साध्ये तृतायेतु सुसिद्ध स्यात् सिद्धि साध्य द्वितीय रिपुस्तूर्ये यथामम् ६ खतपक्ष सिद्धि सिध्यतिकालेन सुसिद्धिस्तत्क्षणादेव साध्य सिध्यतिमानवा रिपु मूल निश तति श्रीवृहद् धारणायंत्र अ क ह म यत्र। १ २ भाखदय भभश ११ भोट २ भ कम ३ दगार पत्र १० और पळ इघत । भोफ ५ उरथय पह ऐजनस ऊचदशा ८ ६ अउ ओक यत्र। सिध्याटि यंत्र। अउ भोक मा जोस चमदद पयश सिद्धि साध्य पमवह ईऐप घ जठतन भक्षसज्ञ हए मग छटाघ वेर पक्ष सुसिध्धि श्री चारित्र जियान्ते- उमओ धारणा ग्रे पासि दर्शना फित अध्यायम्सूर्यम ईति ૧૮ श्रीदद् धारणायंत्र। अध्याय ५ -- प्रणम्य परयामपत्या पूर्णशानं हेमचन्द्र सयेश परमेश्वर सर्वश सस्तुये क्रौ धीमद् चारित्रविजय तोथर धारणान्यास नवा प्रेग्णाऽनघ गुरु पूर्णभगो विधीयते प्रभ - - शापयस्य सुरे साधो जिन श्रेष्ठ इति मन्ने श्राद्धस्याऽस्य पुरस्थ के उत्तरोऽस्मात्प्रदीयते ३ अपोजिन श्रेष्ठ निवियत्वात होरप्रश्ने, सघस्य, ति नपिलोपनीय रतिफेचित चतु पथ्यथरा सति मिनराशिभ योगा साधक्स्यासन्यसेत् तत्तद्योन्यादिक घटक ४ तत प्रत्यक्षर पत्रे चतुर्विंशतयो जिना स्वम्बयोन्यादिके पटक- ख्यासाध्या समासत . भंगा १५३६ -एयलेश्याग्निसमीति साधा जिनयो योगः चदमीवास्तुमगय सस्मात्साध्यो निवेकिना ६ षड्यन योनि र्गश्च लभ्याग नभ्यर्थिवे बिलोझ्यशै गणो राशिश्च नाडिका पोढायल गुणाधिक पथविदेवादतातारा भ-धो मध्यम प्रोक्त कुपर सथलरिपो पादयधोऽधमाधम उत्तरोउत्तरशुमै~ स्तद्योगो नैव शस्यते मस्मानशस्तोरियासौ स्वपरोपति-पर F श्रीवृहद धारणायंत्र। साधक अक्षर-अ,आ। योनि साध्यनिन तारा स्वकीय ३ বি ५७,६ मेष -साध्य नाम वानर त " वर्ग विशोपक गम राशि नाही भ सभ्य राक्ष मेष अत्य देय दे म कन्या भत्योध भशुभ । शुभ पादवेध भशुभ वेध .! ! घर शुभ शुभ स्व शुभ शा शनु सम भवेध १ वैर प्रीति शुभ • भशुभ | शुभ • (चर येष शुभ भशुभ श्रेष्ठ पैर श्रेष्ठ घेध २ श्रेष्ठतर स्वराशि . स्वगण ! भशुभ एकभ वैर श्रेष्ठ वैध स्थराशि २ वेध २ स्वराशि २ स्वगण शन २॥ सम भषेध प्रशुभ १ | ऋषभनाथ २ अजितनाथ ३] संभवनाथ अशुभ ४ भभिनदन ! अशुभ ५ सुमतिनाथ ६. पद्मप्रभु भशुभ ७. सुपार्श्वनाथ भशुभ ८) चंद्रप्रभु ६ सुनिधिनाथ १.शोतलनाथ कुवेर ११ श्रेयांसनाय कुवैर १२ वासुपूज्य १३ विमलनाथ १४ भनतनाथ भशुम १५ / धर्मनाथ मेली १६ शांतिनाथ कुमुनाय १६ भरनाथ স্ময়ম १६ मल्सिनाथ २. मुनिसुमत २१ नमिनाथ २२ नेमिनाथ अशुभ २३ पावनाय अशुभ २४ वर्धमान महावीर पति मेष मग धिक पलिय श्रेष्ठ वर " - देर " " एकनाथ वर्ण वाय नवलं युजि कृतिका पूर्व *" .
धोघद्ध धारणायंत्र। साधक अक्षर-इ ई, उ. ऊ, ए, ऐ। योनि यगे विशोपर गण রয়ি नाही साध्यजिन स्वकीर्य ३, मेष राम देष विरुध्ध ५७६ वानर त देय वृषभ अंत्य धन मत्यवेध गय भवेध स्वराशि वेध मशुम चर वेष २॥ " " - १. भूषभनाथ २.भजितनाय ३) संभवनाथ । भशुभ भभिनंदनभशुभ ५] मुमतिनाय ६ पमप्रभु भशुम ७ मुपानाप अशुभ चंद्रप्रभु सुनिधिनाय १. शीतसनाय कुर ११ श्रेयांसनाप कुवेर १२ वासुपूज्य २३ विमलनाथ १४मनतनाथ भशुम १५ धर्मनाय १६ / शांतिनाथ १७ / कुंथुनाथ स्या १८मरनाथ भशुभ १६ मल्सिनाथ २० मुनिसुव्रत २१ नमिनाय कुवर २२ नेमिनाथ २३ | पारसाय अशुभ २४ वर्धमान महावीर राशि पति एकनाय वर्ण । वैश्य शुम प्रीति वध येर 1 सम .0 शा ०॥ अशुभ रा शुभ बंध श्रेष्ठतर भशुभ शुभ वैर शुभ वेष शुभ अशुभ स्वगणस्यराशि एकर्म वैर शुम वेध ময়ম शुम वेध २ भशुभ २ मेरो " t २॥ २॥ " भशुभ । धेर स्वगण शुम २॥ ३ शा अशुभ शुभ वृषभ वश्य मेष युजि कृतिका श्रीवृहद धारणायंत्र। साधक अक्षर-ओ, औ। तारा राशि नाडी न०/ साध्यनिन स्वकीय विरुध्य K साध्य नाम योनि वर्ग विशोपक गा सर्प सम्य मनुष्य नकुल । ते देय । राक्षस वृषभ भत्य धन प्रत्य शसु भवेध स्वराशि एक्भ . मैली मध्यम •॥ अशुभ येध २॥ , भूषभनाथ २ मनितनाथ ३ समषनाथ ४ अभिनंदन ५ सुमतिनाथ | भशुम ६] पद्मप्रभु ७ मुपार्श्वनाथ ८चंद्रप्रभु अशुभ ह सुविधिनाय | अशुभ १. शीतलनाथ ११ श्रेयांसनाथ १२ यासुपूज्य अशुभ वेध शुभ प्रीति मध्यम सम ॥भशुभ j शत्रु 01 | स्वगण ०|| वेध मध्यम शुम भशुम श्रेष्ठतर १३ | विमलनाथ | अशुभ स्वगण | शुभ मध्यम वेध ૨ " . मध्यम । शुभ १४ । अनंतनाय १५ / धर्मनाय अशुभ १६ | शोविनाय अशुभ १० कुथुनाथ १६ भरनाथ १६ मल्लिनाथ अशुभ २. मुनिसुव्रत २१ ममिनाथ भशुभ २२ । नेमिनाय २३ / पार्श्वनाथ २४ वर्धमान महावीर राशि पति एकनाय वर्ण वृषम तुला | वैश्य २॥ ] (11) भशुम अशुम स्वराशि वेध वेध भशुम शुभ वेध भशुभ अशुभ शुभ प्रीति वेष शुभ वैर धेर २ २ " M २॥ " " वश्य मेष युजी For नवलं रोहियो .
श्रीपाद भारणा साधक अचर-क, का, कि, की क्ष। . विशोपक तारा योनि पर्ग साम्पनिन स्वकीय क रागि नाही देव मिथुन हमध्यवेध ५ साभ्य नाम: प देय विष्य मध्यम दुधर स्था " बेर रेष्ठ स्वराशि एक स्वराथि शुम भटवर वेष शुम देष १ । २ १ भूपमनाय १ मजितनाथ ३ संभवनाथ ममिनदन अशुभ ५ सुमतिनाय पप्रभु ७१ मुपाश्र्वनाथ मशुम 5) चंद्रम ६ मुविधिनाय १० भेयांसनाथ १२ वासुपूज्य १३ विमानाय १४ मनतनाथ १ बेर मन्यम शीवक्षनाथ अशुभ सम प्रीति मध्यम धेर मध्यम वेध 011 धष्ठ भशुमतर वेष १५ धर्मनाय १६ शांतिनाय १ शुभ भशुम " धेर २ वेर २ १॥ शा प्रीति शुभ " बर भेटतर वेष १७१च्युताय १६ भरनाथ १६ मस्मिनाय २ मुनिसुव्रत २१ नमिनाय २२) नेमिनाथ पार्श्वनाथ २४ वर्धमान महावीर राशि पति मिथुन भशुम २ शुभ मध्यम अष्ठवर' धेर २ " 1 एकनाथ वश्य पिना सिंहं धन सवें युजी मृगशिर्ष। पूर्व श्रीवृहद धारणाय साधक अचर-कु, कू। साध्य तारा योनि स्वकीय श्वान साध्य नाम वर्ग | विशोपक । गण राशि नाडी मनुष्य । मिथुन पाधि दय राक्षस घ. काद्यवेध प । | सम " मध्यम १ स्वराशि " " । भवेध भशुम । शुभ श्रेष्टतर। २ " वेध 1 " १ विरुध्य ८१३, इरिण १ भूषमनाथ अशुभ अजितनाथ ३ संभवनाथ ४ अभिनदन ५ सुमतिनाथ अशुभ ६ पद्मप्रभु ७. सुपार्श्वनाथ ६ चंद्रप्रभु भशुभ वैर है | सुविधिनाय | अशुभ मेवी १. शीतलनाथ ११/ श्रेयांसनाय १२ वासुपूज्य १३ / विमलनाथ १४ मनंतनाथ भशुम १६ शांतिनाथ अशुभ १७. कुयाय अशुभ १६मरनाथ १६ मलिक्षनाथ भशुभ २. मुनिमुन्नत २१ मिनाथ भशुभ २२ नेमिनाथ २३ पार्यनाथ २४ वर्धमान भशुभ महावीर राशि पति एपनाथ वर्ण मिपुन बुध मध्यम शल भशुम | सम स्वगण मध्यम प्राति भशुभ मध्यम स्यगण श्रेष्ठ मध्यम वध भशुभ १॥ ०॥ धर्मनाथ " " भशुमतर शुभ । " वध । भशुभ मध्यम " वैर (१) " " शुभ वध प्राति शुम अशुभ । श्रेष्ठतर बेध शुभ श्रेष्ठतर भवेध वैर २ २॥ " वैर २ " " फन्या | शुद्ध वश्य दिनासिंह धनं युजी क * श्रोवृहद धारणायंत्र। माधक अन्नर-के, के, को, को ७ . १ " न माध्य तारा योनि वर्ग विशोपक ঘ राशि नाही म्बकीय बिहान कम्य देव मिथुन भाग विरुध्ध ६२४ उंदिर देयं राक्षस प 2.भाद्यवध १ भूपमनाथ ०॥ । मध्यम सम २ अजितनाथ | अशुभ श्रेष्ठ ३ समवनाथ स्व स्वराशि ४ अभिनदन स्या एवम ५ मुमतिनाथ वैर যুগ ६. पद्मप्रभु २ श्रेष्ठतर ७|सुपारपनाथ १ शुभ ८ चंद्रप्रभु ३॥ सुविधिनिाथ १ घर सम घेध शीतलनाय भशुभ १ । मध्यम। १ श्रेयांसनाय अशुभ प्रीति १२ वासुपूज्य मध्यम घध १३ | विमलनाथ मध्यम | धन्ठ १४ भनतनाथ भशुभ | धर्मनाथ अशुभतर १६ / शाविनाय १ वेध १७ | कुधुनाथ श्रेष्ठ १६ भरनाथ अशुभ स्व १६ मल्लिनाथ शुभ वैध २० मुनिमुन्नत | प्राति नमिनाय २॥ शुभ यध २२ / नेमिनाय भ्रष्ठतर २३ पाश्वनाथ वैर | २ २४ वर्धमान शुभ मध्यम श्रेष्ठतर ! वेध महाबोर राशि पति एकनाथ वय यश्य मिथुन नक्षल युजि बुध मन्या विनासिंह धन पुनर्वसु मध्यम - ३. A.AN - १॥ D वैर " भशुभ (१ ) " वैर " " श्रीवृहद धारणायत्र। साधक अक्षर-ख-१० (खो, खौ, १-पाट ७-१३-२३ भवेध ) अशुभ | भवेध " स्य . " " १ " अशुभ १ . साध्यजिन तारा योनि वर्ग / विशोपक राशी नाही स्वकीय वानर लभ्य देव मकर भत्य विषय ६,६,१. मेष प देय राक्षस सिह अंत्यवेध १/पभदेव ०॥ मध्यम २/भजिवनाथ ०॥ शुभ वेध ३ सभवनाथ १ प्राति ४ भभिनदन प्रीति ५ सुमतिनाथ | अशुभ १ वैर शतु पंघ २ मध्यम ७ मुपार्श्वनाथ श्रेष्ठतर | वेध ८. चंद्रप्रभु शुभ ६ सुरिधिनाय अशुभ बैर अशुभ १. शीतलनाथ मेली मध्यम ११ यासनाथ स्वा स्व स्वराशि | एकर्म १२ वासुपूज्य अशुभ श्रठ १३ विमानाथ मशुभ मध्यम शुभ १४ अनंतनाथ शुभ धर्मनाथ अशुभ वैर १६ / यांतिनाथ अशुभ १ श्रेष्ठ १७ थुनाय | वैर वैर | शुभ वेध १८ भरनाथ ०॥ शुभ वेध १६ मलिमनाथ अशुभ । वैर श्रेष्ठ २० मुनिसुव्रत स वर २ स्वराशि एकम २१ नमिनाय भशुभ २२ नेमनाथ १॥ देर मध्यम २३ पार्श्वनाथ वैर २ भेटतर वध २४ वर्धमान मध्यम मध्यम महावीर राशि पनि एकनाथ वर्ण वश्य नदव युजी मकर गनि कुभ वैश्य पश्चिम *ख वा योनि नकुल, स्या-५-२, मेघी-१०, वैर सपे-१५-१७॥ | १२॥ वेर वघ* - स्व " N । " (१) पि " " वर " २ " " । कई मीन 1 श्रवण धायद धारणायत्री साधक अक्षर-ग, गा, गि, नी। - an यानि यग বিয়াম राशि नारी साध्यजिन स्सको ५ सिह क क्षम्य राक्ष साध्य नाम प देय सिंह मध्यरेष ឱរ ७,६२ १ अपभनाथ | २/भजितनाथ ३ भरनाथ •ll । भशुभ । अशुभ शुभ मोति " भवेश ४ अभिनन अशुभ " "" - वेर २ श मध्यम भेष्ठतर भवध " बंध । शुभ । अशुभ १ १ मशुभ थेष " অ্যায়ি १॥ भशुभ शुभ येथ १ ॥ पंध " ५ सुमति माय ६ पद्मप्रभु मुपार्वनाथ । माशुभ ८द्रप्रभु ६ मुविधिनाय शांतानसाथ शुभ ११ श्रेयांसनाथ १२ | वासुपूज्य १३ रिमननाथ १४ अनेतनाथ भशुभ र १५ | धर्मनाथ १६ शांतिनाथ १७ कुथुनाथ १५ मरनाथ १६ मल्लिनाथ २. मुनिसुमत २१ मिनाथ २२ । नेमिनाथ पाश्वनाथ २४ वर्धमान महावीर राशि पति एकनाथ वर्ण शनि वैश्य १ वर सम श्रेष्ठ स्थगण । शुभ घेर भशुम मेर . बेर थैर २ " - २ (१) বায়ি। " वैर श्रेष्ठ स्यगण मध्यम । मषेध श्रेष्ठतर १॥ अशुम । मध्यम ૨ " - , २ पर्य वश्य कक मीन नदान धनिष्टा' पभिम
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श्रीकृष्द धारणायंत्रा साधक अक्षर-गो, गौ। वर्ग पिशोपक गया राशि नाडी क माच Hite baie प प्राद्यवध कुम देयं दे.न. •अशुभ शुभ अष्टतर १ मध्यम ३ साध्यजिन तारा योनि स्वकीय भव विरूध 5,१,३ महिप १ऋषभनाथ अशुभ २] अजितनाथ सभवनाथ ४ भभिनंदन ५ | मुमतिनाय अशुभ १/पाप्रभु मुपारसनाथ ८चंद्रप्रभु भशुभ है मुविधिनाय | अशुभ शीतलनाथ बंध " 1 २ " ७ १ स्व उम प्राति शुभ शावर १ | शुभ १ अशुभ येध " ११ श्रेयांसनाथ -- स्व २॥ १॥ अशुभ स्वराशि एक भशुम ०॥ पैर " १५ धर्मनाथ २॥ - १ वध . १२ | वासुपूज्य स्वा १३ | रिमतनाथ भशुभ मनतनाथ । अशुभ १६ / शांतिनाथ अशुभ | मैत्री १७] कुथनाथ अशुभ १६ भरनाथ १६ | मनिनसाय अशुभ | मैत्री २ मुनिसुव्रत २१ मिनाय अशुभ २२ | नेमिनाथ २३] पार्सनाथ २४ वर्धमान महावार राशि पति एकनाथ वर्ण शक्ष शुभ स्वगया श्रेष्ठतर अशुभ शुभ श्रेष्ठ शुभ स्वगण प्राति १ वध " २ १) मेवा वेध और २ "" शुम |भशुभ भशुभ प्रीति घेध और ૨ " । , शनि मकर पश्ये विना सिंह मनुष्य च नक्षत युजा शतभिषा पभिम श्रीवृहद धारणायंत्रा साधक अक्षर-घ-१० सर्वस्वर सहित. ड-१० स्वर सहित । वर्ग विशोपक गण नाही क । मनुष्य मिथुन भाध साध्य नाम प देय राक्षस वृक माद्यवेध १ सम भेष्ठ मध्यम | स्वराशि " १ वेध साध्यजिन योनि स्वकीर्य धान विरुध्य हरिण भूपभनाथ अशुभ २ अजितनाथ ३ सभवनाथ ४ अभिनंदन ५ मुमतिनाथ | अशुभ ६. पद्मप्रभु सुपाश्वनाथ ८) चंद्रप्रमु भशुम | वैर है। मुविधिनाय | भशुभ | मैत्री शीतलनाथ श्रयांसनाथ १२ वासुपूज्य । अशुभ शुभ वैर २ १ ३॥ मध्यम १ । भशुभ श्रेष्ठवर शुभ शबु । वेध १ स्वगय १३ | विमननाथ | अशुभ मध्यम / वेध ॥ - मनतनाथ " १५ / धर्मनाय " मध्यम प्रीति अशुभ स्वगण श्रेष्ठ मध्यम अशुभतर, शुम बेध अशुभ । श्रेष्ठ मध्यम शुभ देष प्रीति शुम वेष २ और धेर अशुभ १६ शांतिनाथ भशुम १७ मुथुनाथ अशुभ १८ भरनाथ १९ मल्लिनाथ अशुभ २० मुनिसुव्रत । अशुभ २२ | नेमिनाथ २३ / पार्श्वनाथ २४ वर्धमान महावीर पति एकनाथ | वर्ण मिथुन बुध कन्या शुद्र २ २१ / नमिनाथ । वेर भशुभ श्रेष्ठतर २ भशुभ शुभ श्रेष्ठतर | वेध १॥ " २ , पर्य नासिंह धनं युजी नक्षत भाद्र श्रो धारणायंत्र। साधक अक्षर-च, चा, चि ची। वर्ग विशोपक गय राशि नाही साध्यजिन स्वकीय तारा योनि ६. हस्ति २४६ सिंह पन्य। देव मीन मत्य साध्य नाम विध य देय तुला प्रत्ययो - १ मध्यम २ मृषभनाय भजिवनाथ समवनाथ भशुभ १ श्रेष्ठतर माघ शुभ वेध श्रेष्ठ " २ ४ अभिनंदन सुमतिनाथ शा पैर वैध । पभमभु " सुपाश्वनाथ प्राति सम शन शुभ श्रेष्ठतर वेष चंद्रप्रभु स्व १॥ ॥ येर १॥ मध्यम " अशुभ भशुम भशुभ बंध ६ सुविधिनाय १. शीतलनाथ श्रेयांसनाय १२ वासुपूज्य १३ विमक्षनाथ अनंतनाथ धमनाप १६ খানিনাধ धुनाथ वैर चेर पैर मध्यम शुभ भशुभ स्वराशि २ " एफर्म मध्यम " १६/भरनाय १६ मल्सिनाय शावर १ शुभ वेध स्वराशि एक श्रेष्ठ शुभ बेध भेष्ठ मशुभ ॥ (२) " १ वैर मुनिसुमत २१ । नमिनाथ २२ | नेमिनाथ २३ । पाश्वनाथ २४ वधमान महावीर राशि पति मीन येध वेर আৰু सम २ मध्यम " , एकनाथ पन वर्ण माझा पश्य नक्षले रेती युजि पूर्व श्रीवृहद धारणायंत्र) साधक अवर-चु, चू चे, चे, चो चौ। तारा योनि । वर्ग विशोषक । गए . नं. साध्यजिन स्वकीय विराध्य मध च साध्य नाम - द दय सदन 'ता। माद १॥ भूपमनाय अशुभ मध्यर sar २. अजिवनाथ ३ समरनाथ 1 मशुभ अशुभ M ४ भभिनंदन अशुम क ५] सुमतिनाय ६ पद्मप्रभु भशुम -- मुपानाय भशुम 2 १५ " wwar ८ चंद्रप्रमु ६ सुविधिनाय १. शीतलनाय ११ श्रेयांसनाय १२ वासुपूज्य शुभ व मेसी LA मष्ठ ३ वर शुभ वघ न १३ / विमलनाय १४ अनंतनाय १५ / धर्मनाय १६ शांतिनाय " भेष्ठतर स्वराशि वेध " स्वराशि वेध १७ युनाथ मराम १६ मरनाथ १६ मल्सिनाय २. मुनिसुमत २१/नमिनाय २२ नेमनाय भगुम २३/ पार्वनाथ অাস २४ वर्धमान भगुम महावीरस्वामी राशि पति मेष स्वराशि येध शनु ( मन Bi एफ्नाय वर्ष म मंगल " ज 6 "- नक्षत ली ४२ श्रीबृहद् धारणायंत्रा साधक असर छ १०। न साध्य तारा योनि वग विशोपक गण राशि नाडी स्वकीय साध्य नाम च ।जय मिथुन विरुष्ध ८,१,३ हरिण मनुष्य देयं राक्षस व.क. स्व वेभ . -...- - १ सम १ " भेष्ठ १॥ मध्यम स्वराशि १ १॥ भशुम शुभ श्रेष्ठतर शुभ मध्यम | २॥ भशुभ १॥ स्वगया मध्यम प्रीति २ भशुभ। मध्यम ૨ स्वगण श्रेष्ठ मध्यम मशुभतर शुभ भशुभ १ मध्यम -2 वर वैर १ भृषभनाथ भशुम अजितनाथ ३ | संभवनाथ ४ अभिनदन ५ सुमतिनाथ भशुम ६ | पद्मप्रभु ७ | सुपार्श्वनाथ चंद्रप्रभु भशुम । वैर ह सुविधिनाथ | भशुभ मेवी १. शीतलनाथ ११ श्रेयांसनाय १२ | वासुपूज्य १३ | विमलनाथ अशुभ १४ | अनंतनाथ भशुभ १६ | शांतिनाथ भशुभ १७ कथुनाथ अशुभ १८भरनाथ १६ मल्लिनाथ भशुभ मुनिसुव्रत २१ नमिनाथ भशुभ २२ नेमनाथ २३ | पार्श्वनाथ २४ पर्वमान भशुभ महावीरस्वामी राशि पति एकनाथ वर्ष बुध बंध १५ | धर्मनाथ " " षध " " वेध २॥ (I) प्रीति १ बंध १ भशुम श्रेष्ठतर (वैर) (२) स्व भेष्ठतर वेष मिथुन वन्या शुद्ध वश्य विनासिंह धन सूत्रे नक्षत भाना युबी मध्य धोवृहद धारणापत्र। साधक अक्षर-ज-१०(जुजूजेजेजोजो अभिजित्)(जजि १ भवेध छ) साय तारा योनि । वर्ग राशि । नाडी स्वकीय ३ नकुल च विशोपक गण सभ्य मनुष्य देय | राक्षस मकर अत्य साध्य विरुध्य य अत्य स्व १ भूषमनाय २ मजितनाय ३ सभवनाथ स्या वैर भशुभएकर्म * १ वध शुभ प्रीति अशुभ। पैर मध्यम ४ अमिनदन अशुभ | १॥ १ " १॥ " " ५ सुमतिनाथ ६. पद्मप्रभु अशुभ ७. सुपार्यनाथ अशुभ ८) चंद्रप्रभु सुविधिनिाथ १. शीतलनाथ ११ श्रेयासनाथ १२॥ वासुपूज्य १३ विमलनाथ १४ भनतनाथ भशुभ अशुभ श वेध मध्यम श्रेष्ठतर वध मध्यम १॥ अशुभ भशुभ स्वगण मध्यम स्वराशि यध २ अशुभ २ मध्यम १॥ वैर स्वगण | शुभ १५ धर्मनाथ १६ शांतिनाय १॥ " १ " अशुभ शुभ मध्यम येध श्रेष्ठ स्वराशिध " १ १७ कुथुनाय १९धरनाय अशुभ १९ मल्सिनाय २.मुनिसुव्रत २१ नमिनाथ २२ नेमनाथ मशुभ २३ / पार्श्वनाथ २४ वर्धमान महावीरस्वामी राशि पति एकनाथ शनि अशुभ अशुभ मध्यम श्रेष्ठतर / वेध मध्यम (वर) २) स्व १॥ " " वश्य वा वैश्य कर्द मौन नक्षत्र युजि [उ.पा. पश्रिम ४४ श्रीददु धारणायन। साधक अक्षर-झ-१० नसाध्यनिन तारा योनि वर्ग विशोषक गया नादी स्वकीय गो च साध्य नाम । मनुष्य मीन दय मध्य १ १ स्व " विरुध्ध १,३,५ अपमनाथ भशुभ २मनिताथ ३ संभवनाथ अशुभ ४ भभिनंदन ५ सुमतिनाथ अशुभ पभ्रम अशुभ नुवर ७ मुपार्श्वनाथ कुर भष्ठतर शुभ । भेष्ठ भवध मध्यम २॥ , मशुभ प्रीति सम मवेध । ८चंद्रप्रमु मुविधिनाय अशुभ १॥ . । 1 शीतलनाथ ११ श्रेयांसनाप १२ यामुपूज्य १३ | विमलनाथ १४ भन्तनाथ १५ धमेनाथ १६ शांतिनाथ कुथुनाथ स्वा वैर मध्यम शुम बध १|| अशुभ भेष्ठतर स्वगा। मध्यम शुभ २ मशुम मशुभ २ । स्वगण स्वराशि एक मध्यम । मध्यम थप भेष्ठ भशुम । शुम मध्यम श्रेष्ठ १॥ (१) " १ अशुभ अशुभ ॥ १८ मरनाथ १ स्वराशि, - १६ | मल्सिनाथ भशुभ २. मुनिमुमत २१ नमिनाथ अशुभ २२ नेमनाय भशुभ सुवर २३ पार्वनाथ २४ वर्धमान अशुभ मैत्री महावीरस्वामी राशि पति एकनाथ वर्ण मोन गुरु बाझप्प भशुभ सम १॥ (२)/स्व . " " वश्य नक्षत युद्धी 30मा. पश्चिम .
श्रीवृहद् धारणायंत्र। ४५ साधक अक्षर-ट, टा, टि, टी, टु, टू । (ट ३, ६, २२ भवेध छ) तारा / योनि वर्ग पिशोपक नाडी साध्यजिन स्वकीयं विरुध गण राशि मनुष्य । सिंह २ उदिर साध्य नाम ट मध्य ४६.5 विष्ठान देय राक्षस मकर मध्य स्व - २॥ २॥ शुभ श्रेष्ठ शुभ - वैर २ मध्यम वध* २॥ " वैर २ 1 अशुभ स्वराशि शुभ ३ वध* वैर २ । " मध्यम श्रेष्ठतर वध २ अशुभ । शुभ घर वैर वैर २ स्वगण शुभ | वेध - २ वध १ घमनाथ २ भजितनाथ । भशुभ ३ | समवनाथ ४भभिनंदन | कुपैर ५ मुमतिनाथ मैसी ६ पाप्रभु ७ | सुपार्श्वनाथ ८ चंद्रप्रभु अशुभ ६) सुविधिनाय १० शीतलनाथ ११ श्रेयांसनाथ ! अशुभ १२] वामपूज्य अशुभ १३ विमलनाथ अशुभ अनतनाथ १५ / धर्मनाथ अशुभ १६ शांतिनाथ १७ | कुथुनाथ १८ भरनाथ १६ मल्लिनाथ २. मुनिसुनत अशुभ २१ नमिनाथ २२ नेमनाथ २३/ पार्श्वनाथ २४ वर्धमान "महावीरस्यामी राशि पति एकनाथ वर्ण सिंह मलिय । २॥ " " वध चेर २ । मध्यम २॥ अशुभ २॥ स्वगण । प्रीति मध्यम । श्रेष्ठ शुभ १ भशुभ श्रेष्ठ मध्यम प्रीति शुभ | शत्रु । शुभ । अशुभ शुभ ३ (२)। स्व । २॥ " (घेर) (२)३ " ॥ वेध 1 " " वश्य पिना धन वृधिक सर्व . नक्षत्र पू.पा. युजी मध्य श्रीवृहद् धारणापत्र साधक अनर-टे, टे। तारा यानि वर्ग विसापक साध्य नाम या न । साध्य जिन स्वकीय विरुध मार्ग HFN ३ गौ गप्प राशि मनुष्य । सिंह पाव ध्याम देयं राक्षस मकर भाव । २॥ । २॥ राम " भृषभनाथ २ अजितनाथ ३। सभवनाथ ४ अभिनदन ५ सुमतिनाथ ६ पद्मप्रभु सुपाश्वनाथ অযুদ अशुभ मध्यम २॥ २ . भव वर मशुभ भशुम पर अशुभ | कुवर स्थराशि गुम ३ वर ८चद्रप्रभु |२ " on भेष्ठतर शुभ वैर २ चेर । २ २ बष मध्यम भशुभ स्चगण मध्यम भशुभ स्वगण मध्यम बंध २॥ २॥ मीति । २॥ " श्रेष्ठ " शुभ मुविधिनाथ १.शीतलनाथ ११ श्रयांसनाथ १२ पासुपूज्य १३ रिमामनाथ मली १४ अनंतनाथ अशुभ २५ धर्मनाथ १६ शांतिनाथ १७ कुयुनाय १८। भरनाथ अशुभ १६ मलिमनाथ २. मुनिमुन्नत २१ नमिनाथ २२ नेमनाथ मगुभ सुवर २३ पार्श्वनाथ अशुभ कुबेर २४ वर्धमान रस्वामी पति एकनाथ सूर्य प्रत्रिय २॥ भशुभ मध्यम ar " प्रीति शुभ शन गुम भशुभ " " " . (२)/स्य " व " बश्य दिना धन दृधिक सब . नक्षत उ.पा. मध्य युजि श्रीपाद धारणायत्र। साधक अचर-टो, टो। स्य . । शुभ वर । भशुभ | और । ३ শায়ি -- बेर साध्यजिन तारा योनि । वर्ग विशापक गण राशि नाडी | स्वकीय ३ गौ ट मनुष्य पन्या आद्य विध व्याघ्र देय राक्षम मेष पाच १भूपमनाथ शा भजितनाथ २॥ ३ समवनाथ वैर मध्यम श्रेष्ठत्तर ४ अभिनदन भशुभ २॥ वेष सुमतिनाथ २ भशुम शुभ पद्मप्रभु ७) मुपारवनाथ भशुभ । क्येर पैर श्रेष्ठ 5/चंद्रप्रमु मध्यम शुभ ६। मुविधिनाथ अशुभ । वेष १.शीतसनाथ स्वगण " ११ श्रेयांसनाथ मध्यम मध्यम १२ वासुपूज्य अशुभ प्रीति ३ | विमलनाथ मेली २॥ स्वगण १४ भनेतनाथ भगुम |शा मध्यम १५ | धर्मनाथ शुभ २६ शांतिनाथ और शनु वेध १७ थुनाथ भशुभ शुभ १६ भरनाथ भशुभ २॥ मध्यम सम २६ मलिक्षनाथ ३ रानु वेष २. मुनिसुमत मध्यम २१ मिनाप शत वेष २२ नेमिनाथ २३ पारवनाथ श्रेष्ठ २४ वर्षमान स्वराशि एकम "महापीरस्वामी राशि पति एकनाथ वश्य नपन्न पुजि कन्या उप विनासिंह पनं सर्वे उ.५० वेध " " " भशुभ युवर भशुभ कुबेर भशुभ स्वराशि " पर्ण . M ४८ श्रीवृहद् धारणायंत्र । साधक अचर-ठ-१० । गण राशी नाडी वर्ग ! विशोपक है लय देव पन्या भाद्य tale श देयं मनुष्य मेप भाय मध्यम श्रष्ठ -- साध्यजिन तारा योनि स्वकीय ४ महिष विरुध्ध ६८,१ भव १ | ऋषभदेव २' अजितनाथ ३ समवनाथ ४ अभिनंदन ५। सुमतिनाथ मशुभ ६ पप्रभु ७ सुपार्श्वनाथ ८. चंद्रप्रभु अशुभ २|| शुभ " स्व भष्ठतर २॥ २ मवेध पैर - ३ " वैर २ शुभ स्वराशि श्रेष्ठ शुभ है मुविधिनाय | अशुभ ॥ " स्य वैर मध्यम बेघ " २ और मध्यम प्रीति वेध ॥ २॥ पर मध्यम सम २॥ वर पर बेध " १.शीतलनाथ ११ श्रेयांसनाथ १२ यामुपूज्य भशुम १३ विमलनाथ अशुभ १४ भनतनाथ १५ पमनाथ भशुभ १६ शांतिनाथ अशुभ १७ कुयुनाथ १८ भरनाथ १६ मरिक्षनाथ भशुभ २० मुनिमुक्त २१ नमिनाय अशुभ २२ नमनाथ २३/ पार्श्वनाथ २४ वर्धमान महातीरस्वामी राशि पति एकनाथ वर्ण कन्या १ वर २॥ शुभ शत शुभ सम शल मध्यम स्व ३ वष (पेर) (२)३ " 01 १ शन्न वैर स्वराशि श्रेष्ठ " " (२॥) मध्यम ३ स्वराशि भवेष मिथुन वैश्य वश्य नसल विनासिंह धनं युजी मध्य श्रीवृहद धारणापत्र साधक अक्षर-ड, डा। योनि । वर्ग मेष ८ सम्म वानर AN वैर ॥ २ . पर २ न. साध्यजिन तारा E स्वकीर्य विरुध्ध १,२,५ १ ऋषभनाय | अशुभ २ भजितनाथ ३सभवनाथ प्रशुभ ४ अभिनंदन ५ सुमतिनाथ अशुभ ६ पमप्रभु भशुभ ७. सुपार्श्वनाथ ८चद्रप्रभु १] सुविधिनाय भशुभ १. शीतलनाथ ११|श्रेयांसनाथ १२ वासुपूज्य १३ विमझनाय १४ अनंतनाथ ३ २ २ कुवेर कुवर वैर। १५ / धर्मनाथ १६ | शांतिनाथ P भशुभ वैर २ २७ कुथुनाथ १६ भरनाथ भशुभ | मैत्री १ १६ मल्लिनाथ अशुभ २४ कुवर (वर) (२) २० मुनिसुव्रत २१ नमिनाथ भशुभ २२ | नेमिनाथ भशुभ २३ | पार्वनाम २४ वर्धमान भशुभ "महावीरस्वामी राशि पति एकनाथ वर्ण ब्राझण 6 " धीवृहद् धारणायंत्र। साधकबर-डि डीडुडू डेडैडोडौं (डि डी१पाद७-१७-२३भवेध) गण राशि नाडी ट ths.in साध्य योनि वर्ग स्वकीय ६ पिडाम विरुध्ध २,४,६ | उदिर १) कृषभनाथ २ अजितनाथ अशुभ ।। २॥ ३ सेमवनाथ वैर २ ४ भभिनंदन मैती २॥ ५ मुमतिनाथ युचर | वैर २ ६ पद्मप्रभु ७ सुपार्श्वनाथ वैर देय द.म.मि.कु. अत्य भशुभ प्रीति भवेध शुभ वेष और भशुभतर " " वेध " २ वेष " || वैर शुभ भेष्ठ मध्यम प्रीति वैर २ वैर । २ वर १ " सम वेध ६ सुविधिनाथ १० गीतमनाथ भशुभ ११ श्रेयांसनाथ भशुभ १२ वासुपूज्य १३ विमझनाथ १४पनतनाप २५ धर्मनाय १६ शांतिनाथ भशुभ वैर २॥ २॥ अशुभ धेर शत्रु मध्यम २॥ वेध " स्वराशि श्रेष्ठतर वर २ १ १ स्वाण शुभ वेध वैर वेष मध्यम श्रेष्टतर ३ (वेर) (२)३ सम " धष्ठतर . १६ भरनाथ १६ मल्सिनाथ २. मुनिसुमत भशुम २१ नमिनाथ २२ नेमनाथ २३ / पार्श्वनाथ २४ वर्धमान महावीरस्वामी राशि पति एकनाथ वर्थ पर्क 11 स्वगण शुभ घेष (२) अशुभ शुभ " ३ " " वाय प्रादाप नक्षत युजी भालेषा मध्य साधक अक्षर-ढ १०॥ योनि बानर सायं नाम मेष साध्य तारा स्वकीय २ विरुध्ध ४,६६ १ऋषभनाथ २ अजितनाथ अशुभ ३ समवनाथ ४ अभिनंदन ५ सुमतिनाथ ६ परमभु ७ सुपार्श्वनाथ ८चंद्रप्रभु भशुभ १/सुविधिनाय १. शीतलनाय ११ श्रेयांसनाय भशुभ १२ (वासुपून्य अशुभ अशुभ स्वा मेली १३ / विमलनाथ १४ अनंतनाथ १५ धर्मनाथ १६ / शांतिनाथ अशुभ वैर A १७) कुयुनाथ १६ भरनाथ १६ मल्लिनाथ २. मुनिसुव्रत अशुभ २११नमिनाथ २२ नेमनाथ २३ / पार्श्वनाथ २४ वर्धमान "महावीरस्वामी राशि पति एकनाथ धन । मीन, वो बलिय श्रीवृहद् धारणायंत्र। साधक अक्षर-ए-१०। न साध्य वर्ग विशोपक गण राशी नारी स्वकीर्य तारा योनि महिप ६.८,१ मश्व ४ साध्य नाम ट देव कन्या विरुध्ध देयं मनुष्य मेष माघ मध्यम १ भृषभदेव २ अजितनाथ ३ | संभवनाथ Y अभिनंदन ५ सुमतिनाथ बेर २॥ २ २॥ शुभ भष्ठतर वेध भशुभ पर २ शुभ स्वराशि घेष्ठ शुभ श्रेष्ठ •|| बेध वेर मध्यम ૨ . २ मध्यम वैर प्रीति घेष ७ मुपार्श्वनाथ 5 चंद्रप्रभु भशुभ ६) सुविधिनाथ अशुभ १. शीतलनाय ११ श्रेयांसनाथ १२ वासुपूज्य भशुभ १३ चिमनाथ भशुम मनतनाथ १५/ धर्मनाय भशुम १६ शांतिनाथ अशुभ १७ थुनाथ १५मरनाथ १६ मल्लिनाथ अशुभ २. मुनिमुक्त भशुभ २॥ २॥ पर मध्यम सम २॥ ॥ स्व " वर शुभ बेष " २॥ शुम सम वर ३ वेध ((वर) (२)३ वेर " मध्यम वेष २१ | नामिनाथ २२ नेमनाथ २३ / पार्श्वनाथ २४ ] वर्धमान स्वराशि श्रेष्ठ " (२) मध्यम ३ स्वराणि वेध महावीरस्वामी যায়ি पति एकनाथ वर्ण कन्या मिथुन " " वैश्य वश्य विनासिंह धर्न नक्षत युजी मध्य ..
श्रोहद थारणायंत्र। साधक अक्षर-तता साध्य तारा राशि । नाडी साध्य नाम 3. योनि महिष तुला प्रत्य अश्व वर्ग विशोपक गण तलभ्य देव घ । देय राक्षस कुवर २ मध्यम कुवर २ मीन अत्यवेष शुम भवेध प्रीति वेध शुभ कुवैर| २ । वेध " . वर और वर श्रेष्ठ स्वराशि | वेध अशुभ शुभ वैर मध्यम " श्रेष्ठतर वेध वेर स्वकीय ६ विरुध्ध ८,६३ १ ऋषमनाथ अशुभ २ अजितनाथ ३|संभवनाथ ४ भमिनंदन ५ सुमतिनाय अशुभ १. पद्मप्रभु ७ सुपार्श्वनाथ ८चंद्रप्रभु अशुभ ६ सुविधिनिाय अशुभ १. शीतलनाथ ११ भेयांसनाथ १२ वासुपूज्य १३ विमलनाय | अशुभ १४ मनतनाथ अशुभ अशुभ २७ कुथुनाथ अशुभ १८मरनाथ १६ मल्लिनाथ अशुभ २० मुनिमुक्त २१ नमिनाथ २२ नमनाय २३ पारवनाथ २४ वर्धमान भशुभ महावीरस्वामी যষি पति एकनाथ तुमा शुक्र वृषम स्व घर मध्यम शुभ शन कुर २ बेध . १५ / धर्मनाथ २६ शांतिनाथ वैर १॥ वैर सम प्रीति येध वेध | कुवेर) २ 011 वैर " सम श्रेष्ठतर सम वध अशुभ पैर " वैर " स्वराशि वेध श्रेष्ठ मध्यम " वण वश्य शुद्र - विनासिह मनुष्यच नक्षत युजि स्वाति मध्य श्रीवृहद् धारणायत्र। साधक अक्षर-ति ती तु तू ते ते। साध्य तारा योनि वर्ग विशोपक गप राशि नारी स्वकीय 2 ध्यान त सम्य राक्षस साध्य नाम भत्य विरुध गौ देयं | दे. म० मान अंत्यय | कुवेर २ कुवेर २ अशुभ शुभ प्रीति भवेध वेध . बेर कुवर २ " मैत्री " वेर " वर १ | भूषमनाथ २ भजितनाथ अशुभ ३ संभवनाथ ४ मभिनदन ५/मुमतिनाथ ६ पद्मप्रभु ७ सुपार्श्वनाथ ८ चंद्रप्रभु ६ | सुनिधिनाय १० शीतलनाथ अशुभ श्रेयासनाथ अशुभ १२ पासुपूज्य १३/ विमझनाथ १४ मनतनाथ भशुभ १५ / धर्मनाथ १६ शांतिनाथ १७ | कुयुनाथ १६ अरनाथ भशुभ २६ मलिक्षनाथ २. | मुनिसुव्रत भशुभ २१ नमिनाथ २२ | नेमनाथ २३ पावनाय २४/वर्धमान महावारस्वामी राशि पति एकनाथ तुन्ना | कुवर , पेष धेष्ठ स्वराशि एक मशुभ शुम भशुभ धेर श्रेष्ठतर वेध शुभ अशुभ वैर वध भेष्ठ सम स्यगण मोति बघ वैर घेध सम भेष्ठतर वध सम " स्वगा श्रेष्ठ स्वराशि एक्भ भशुभ भेष्ठ . " २॥ E कुवर २ 13 ०|| " . मैली स्वा धेर " on वया वश्य विना सिह मनुष्यच युजि मध्य विशाखा श्रोवृहद् धारणायंत्र। साधक अचर-तो तो। न. साध्य तारा योनि वर्ग विशोपक व्याम त लम्य स्वकीय विरुध्ध १,२,४ य देय गण राशि नाही राव वृश्चिक प्रत्य दे०म० मिथुन अत्यवेध पादवेध सम वेष वैर शत कुर २ कुवेर) २ अशुभ ष्ट भशुम " भूषमनाथ २ अजितनाय ३ संभवनाथ ४ अभिनंदन ५ सुमतिनाथ कुरैर| २ " " य मैत्री 0|| १॥ स्वा १॥ ७. सुपार्श्वनाथ ८ चंद्रप्रभु ६ मुविधिनाथ १. शीतलनाथ ११/श्रेयांसनाथ १२ वासुपूज्य १३ विमलनाथ १४ अनननाथ १५/ धर्मनाय १६ / शांतिनाम अशुभ भशुम वैर अशुभ कुवेर) २ थेष्टतर| वेध शुभ अशुभ । एक वेर स्वराशि श्रेष्ठ अशुभ वैर शुभ वेध श्रेष्ठ अशुभ ! शुभ वैर वेष मध्यम प्रीति स्वगण | सम भवेध वैर शुभ वेष प्रीति शुभ वेध प्रीति स्वगण शुभ भशुभएकर्म भशुभ | शुभ " " २॥ *** * * * * * १७ कुथुनाथ १६मरनाथ V संगम कुवेर २ 011 011 " अशुभ १६ मल्सिनाथ २० मुनिमुनत भशुम २१ मिनाय २२ नेमनाथ २३ | पार्वनाम २४ वर्धमान महावीरस्वामी राशि पति एकनाथ वृभिक मंगल मेष मैती स्वा वैर ब " ' " 01 " एकनाथ वर्ण बाझप वश्य नक्षत विशाखा युजि मध्य न श्रीबृहद् धारणायन। साधक अक्षर-थ-१०। साध्य तारा । विशोपक गयः योनि । वर्ग गौ माडी राशि मीन 5 त स्वकीय विषय सभ्य मनुष्य मध्य • -साध्य नाम देय राक्षस कुवर | २ स्व कुवेर २ तुझा मध्यवेध श्रेष्टतर शुभ श्रेष्ठ भवेष मध्यम कुवैर| २ ऋषभनाथ अशुभ २. अनितनाथ ३ संभवनाथ अशुभ ४ अभिनदन ५ सुमतिनाथ | अशुभ ६ पमप्रभु भशुभ कुवेर सुपाश्वनाथ कुवर ८चंद्रप्रभु ६ सुविधिनाथ अशुभ शीतलनाथ ११ श्रेयांसनाथ भशुभ प्रीति 10 ' ७ " १॥ . १२ | वामपूज्य कुर २ " सम भवेध शनु मध्यम शुभ वेध अशुभ श्रेष्ठतर स्वगण वेध मध्यम शुभ अशुभ अशुभ स्वगण | स्वराशि एकम मध्यम मध्यम धेध श्रेष्ठ ॥ भशुभ शुभ मध्यम स्वराशि श्रेष्ठ शुम श्रेष्ठ अशुभ सम भवेध शा सम A और २ १३ विमलनाथ स्वा १४ मनतनाथ १५/ धर्मनाथ १६ यातिनाथ अशुभ १. कुथुनाथ अशुभ १६ भरनाथ १६ मदिलनाथ अशुभ २. मुनिमुक्त २१नमिनाथ २२ / नेमनाथ अशुभ | कुवर २३ / पार्श्वनाथ कुवेर २४ वर्धमान भशुभ | मैत्री महावीरस्वामी राशि पति एकनाथ | वर्ष मोन नाहाय ०॥ " अशुभ || " " " .॥ " वश्य धन नक्षने मुजी | उ०भापधिम .
श्रीवृहद धारणायत्र। साधक अक्षर-द, दा। तारा योनि वर्ग विशोपक गण राशि नाडी साध्यजिन स्वकीय विरुष्य सिह त लम्य साध्य नाम मनुष्य कुम माद्य ६२,४ हस्ति देयं राक्षस कम प्राद्यवेध १ऋषभनाथ कुर २ स्व २. अजितनाथ अशुभ कुवैर | २ १|| कुर २ " ३ समरनाथ ४ अभिनंदन सुमविनाथ ६. पद्मप्रभु ७ | सुपार्श्वनाथ ०॥ २॥ " सचद्रप्रभु १ अशुभ १॥ " है। सुविधिनाथ १. शीतलनाथ ११ श्रेयांसनाय १२ वासुपूज्य १३ विमलनाथ ক্ষয় श्रेष्ठतर मध्यम मध्यम वेध अशुभ प्रीति शुभ मध्यम श्रेष्ठ अशुभ शुभ वघ स्वगया मध्यम श्रेष्ठ अशुभ | स्वराशि वेध स्वगण अशुभ मध्यम शत शुभ वेध २॥भशुम श्रेष्ठतर मध्यम अशुभ शुभ श्रेष्ठ शुभ वेष १४ अनंतनाथ | भशुभ | वैर कुवेर २ " . . १॥ कुवेर २ " वेष " १५ / धर्मनाथ २६ / शांतिनाथ १० कुथुनाथ १८ अरनाथ अशुभ वैर १६ मल्लिनाथ २. | मुनिसुव्रत अशुभ २१ नमिनाथ २२. नेमिनाय २३ | पार्वनाथ २४ वर्धमान महावीरस्वामी राशि पति एकनाय | वर्ण कुम शनि शुद्र *8 .. " अशुम प्राति 00 शुम प्रीति वेध " वश्य विनासिह मनुष्यच युजि पत्रिम पु. मा.
श्रीवृहद् धारणायंत्र। साधक अक्षर-दि दी। साध्य तारा योनि वर्ग स्वकीय विशापक गण साध्य नाम त विरुध्ध ९२,४ हस्ति मनुष्य देय । राक्षस राशि नाडी मीन भाब तुझा माद्यवेध भ - १. मृषभनाथ - २ मजितनाप अशुभ कुवेर २ कुवेर २ श्रष्ठतर ----- " २॥ शुभ मध्यम श्रेष्ठ कुवर २ " , भवध अशुभ / प्रीति on - १ - ३/ समवनाथ ४/ अभिनंदन ५ सुमतिनाथ ६ पद्मप्रभु मुपाश्वनाथ ८चंद्रप्रभु है सुनिधिनाय शीतलनाथ अशुभ ११/प्रयांसनाथ १२ वासुपूज्य १३ / विमलनाथ १४ अनंतनाय १५ / धर्मनाथ १६ / शातिनाथ १७कुसुनाय । १६ भरनाथ अशुभ वेर १६ मल्सिनाथ २. मुनिसुव्रत अशुभ २१ नमिनाय २२ नमनाथ २३ पारवनाथ १ अशुभ शनु मध्यम शुभ अशुभ श्रेष्टतर वेध स्वगण मध्यम शुभ भशुभ अशुभ पंध स्वगा स्वराशि मध्यम मध्यम भष्ठ १॥ अशुभ शुभ मध्यम स्वराशि श्रष्ठ वेध २ " वघ बुचर २ 011 . श्रेष्ठ वेध २४ वर्धमान भशुभ " (१) महावीरस्वामी पति एकनाथ पापा धन सम भवेष न " नक्षत युजी पू०भा० पधिम श्रीवृहद धारणायंत्र! साधक अक्षर-दु दू। न साध्य तारा योनि वर्ग विशोपक गया राशि नाही गौ सम्य मनुष्य मीन मध्य स्वकीय विरुध्ध व्यान भ देयं राक्षस तुम्मा मध्य स्व कुर २ कुवैर २ উত্তম शुभ , मध्यम वेध कुवेर २ " अशुम कुवर कुवर " भशुभ प्रीति बेध शनु मध्यम शुभ बंध भशुभ ঈৎবং स्वगया वेध मध्यम शुम अशुभ अशुभ स्वगण | स्वराशि एकम मध्यम मध्यम बेध १ १ ऋषभनाथ अशुभ २ अजितनाथ ३ समवनाथ अशुभ ४अभिनदन ५ सुमतिनाय अशुभ ६ पद्मप्रभु ७ सुपार्चनाय ८/चंद्रप्रमु सुविधिनाय | अशुभ १. शीतलनाथ ११ । श्रेयांसनाथ १२ वासुपूज्य । १३ विमलनाथ १४ अनतनाथ १५ धर्मनाथ १६ शांतिनाथ अशुभ १७ । युनाय अशुभ १८ अरनाथ १६ मल्सिनाथ । भशुभ २. मुनिसुव्रत २१ नमिनाथ भशुभ २२/नेमनाथ २३ । पार्वनाथ २४ वर्धमान भशुभ महावीरस्वामी राशि पति एकनाथ मीन स्वा कुवेर)२ . " ॥ कुवर २ २॥ अशुभ शुभ मध्यम स्वराशि ਐਚ शुभ " " अशुभ और ० भशुम सम वेध कुर मेसी व " वर्ण नक्षत युजि उ.मा. पमिम ब्राझा .
श्रीगृहद् धारणायंत्र। साधकअक्षर-दे दै दो दो (दे दे १पाद७-१७-२३भवेध) राशि नाही - साध्य नाम: अत्य वर्ग विशोपक गया त सभ्य देव देय राक्षस कुवेर २ मध्यम कुवेर २ तुझा अत्यवेध श्रेष्ठतर भवेध वघ श्रेष्ठ " " " चैर प्रीति वेघ १॥ वेध " साध्य योनि स्वकीय ६ हस्ति विध २,४,६। सिंह भूपमनाथ २ अजितनाथ भशुभ ३ संभवनाथ ४ ममिनंदन ५ सुमतिनाथ ६ पध्मम सुपार्शनाप ८चंद्रप्रमु मुरिधिनाय १०शीवमनाथ | अशुभ ११ श्रेयांसनाथ अशुम १२ | बासुपूज्य भशुम १३ सिमनाय १४भनंतनाग १५/ धर्मनाय १६ शांतिनाथ १७ कुंथुनाथ १८] भरनाथ १६ मनिझनाथ २. मुनिसुनत भशुम २१ नमिनाथ ममनाथ २५ पार्श्वनाथ २४/मान महावीरस्वाम पति एकनाथ शुम श्रेष्ठतर मध्यम शुभ वेष वर भशुभ मध्यम स्वराशि एकम मध्यम श्रेष्ठ शुम वेध स्वराशि एक कुबेर " . " २॥ धेर - कोर २ वेध " वर श्रेष्ठ सम श सम वेध " मध्यम " " पश्ये नवर्स रेवती युजी श्रीवृहद धारणायन। साधक अनर-ध १०॥ न साध्य तारा योनि वर्ग विशोपक ग राशि नाही स्वकीय २ यानर त मनुष्य धनु path मध्य मध्यवेध पिरुध्ध मेप म देय राक्षस स्व वृषम स्वराशि शन्नु कुरैर और२ ॥ अशुभ " येध कुवेर २ " १ ऋषभनाथ २ | अजितनाथ ३ समवनाय ४ भिभिनदन ५ सुमतिनाथ ২ বগম ७ सुपार्श्वनाथ ८ चंद्रप्रमु सुविधिनाथ १. शीतक्षनाथ ११ श्रेयांसनाथ १२ वासुपूज्य भशुभ . मेवी १॥ १॥ अशुभ प्रशुम मशुभ १ | कुवर/२ १३ / विमलनाथ १४ अनंतनाय १५ /धर्मनाय १६ शांतिनाय अशुभ शुभ वेध शुम मध्यम श्रेष्ठ वेध अशुम | स्वराशि स्वगा एकम मध्यम अशुभ अशुभ शुभ स्यगण श्रेष्ठतर वेध मध्यम प्रीति ! वेध शुभ || अशुभ | शत्रु मध्यम श्रेष्ठतर शुम अशुभ शुभ अशुभ भेष्ठ २२ वेध " अशुभ वैर . " पेर कुवेर | २ मैली 011 0|| " १७ / कुथुनाथ १८ अरनाथ १६ मरिजनाथ २. मुनिसुव्रत मशुभ २१ नमिनाथ २२ नेमनाथ २३ पार्श्वनाय २४ वर्धमान " महावीरस्वामी राशि पति एकनाथ धन " शुभ २३ श्रेष्ठ ॥ " वर्ण धतिय वाय सर्वे নন্ত युजी (पु.षा. पश्चिम श्रोहद धारणायंत्रा साधक अक्षर-न ना नि नी नु न ने ने ( न नि ३-६-२२ भवेध) राशि नाडी " - साध्य नाम वृधिष मध्य मिथुन / मध्यवध श्वान कुर २ | दुबैर २ राम शा वेध साध्य तारा योनि वर्ग विशोपक गया स्वकीय 1रिया त दव विरुध्ध १,२,५ देखें। राक्षस १ भृषभनाथ अशुभ मध्यम २ भजितनाथ ३ समवनाथ भशुभ ४] भभिनंदन कुङ्कुर २ ५ सुमतिनाय । अशुभ ६. पचप्रभु भशुभ ७ सुपार्श्वनाथ ८ चंद्रप्रभु ६ सुविधिनिाथ अशुभ । कुरेर १.शीतलनाथ मध्यम ११ श्रेयांसनाथ १२ यामुपूज्य चर १३ विमलनाथ १ मध्यम १४ अनंतनाथ देवर २ - " স্বর্য शुभ वेध* भशुभ स्वराशि एकम श्रेष्ठ वेध शुभ । " १ भेट बध १५ धर्मनाय . वध अशुभ मध्यम प्रीति १॥ । वैर सम कुवर २ १ 010 १६ । शातिनाथ १७ | कुथुनाथ भशुभ १८[भरनाथ १६ मल्सिनाय अशुभ २. | मुनिसुबत २१ नमिनाथ अशुभ २२ नेमनाथ अशुभ २३ पार्वनाथ २४ वर्धमान ખમ महावीरस्वामी राशि पति वृश्रिक मंगक्ष शुभ प्रीति शुभ प्रीति " वेध- .॥ अशुभ " मध्यम शुभ " " एकनाथ ६या वश्य नवन मनुराधा युजि मध्य श्रोहइ धारणायंत्र। साधक अक्षर-नो नौ। वर्ग नाडी साध्य । तारा स्वकीय विरुध्ध योनि हरिण त विशोपक गण মহি सम्य। राक्षस वृश्चिक देय दे०म० मिथुन माद्य भ्वान म माद्यवेध <d -साध्य नाम कुवर २ कुवर २ अशुम श्रेष्ठ " सम वैर रात कुवैर २ १॥ भवेष " -- स्व " " श्रेष्ठतर शुभ अशुभ स्वराशि श्रेष्ठ वैर मेली कुवेर वेध १॥ २॥ भशुभ धेर " शुभ or वेध ऋषभनाथ २। भजितनाथ अशुभ ३] संभवनाथ ४ अभिनंदन ५ सुमतिनाथ ६। पद्मप्रभु ७ सुपार्श्वनाथ ८ चद्रप्रभु सुविधिनाथ शीतलनाथ अशुभ श्रेयांसनाथ अशुभ १२ वासुपूज्य গষপ १३ विमलनाय १४ । मनतनाथ २५ / धर्मनाथ १६ शांतिनाथ १७ कथुनाय १६ भरनाथ मल्सिनाथ २० मुनिसुव्रत अशुभ २१ नमिनाथ ૨૨ नेमनाथ २३ पार्श्वनाथ २४ वर्धमान महावीरस्वामी दुबैर २ अशुभ शुभ वैर " . मध्यम प्रीति " वेध स्वगण सम स्वगण कुवेर २ " वेष " शुभ प्रीति शुभ प्रीति स्वगण | शुभ अशुभ भशुम , शुभ वेष " भवेष " " " पति राशि वृधिक एकनाथ मेष एकनाथ वर्ण बाझय मगश वश्य सिह नक्षल युजि न्येष्ठा पश्मि भी धारणापत्र। साधक अक्षर-पपा पि पी। न साध्य विशापक गण राशी नाडी स्वकीय तारा । योनि ३ गो ५,७,६ व्याम प मनुष्य देर्य राक्ष मेप मायवेध १ भूषभदेव अजितनाथ २|| २॥ " मध्यम शुभ भेष्ठतर ३ | संभवनाय | अशुभ ४ अभिनंदन मशुभ |२|| " वेष अशुभ | शुम स्यराशि ५ मुमतिनाथ रापमप्रभु भशुम | कुवर सुपार्श्वनाथ अशुभ कुवर ८(चंद्रप्रभु ६ सुविधिनाय शीतमनाय २९ । श्रेयांसनाथ १२ वासुपूज्य विमलनाथ मैली १४ अनंतनाथ अशुभ १५) धर्मनाय १९ शांतिनाथ १७ थुनाथ १६मरनाथ मशुम ११ मल्सिनाम २० (मुनिमुद्रत २१ नमिनाथ २२ / नेमनाथ पशुम | देवर २१ पाभ्यनाथ पशुमा स्वर २॥ , " मध्यम शुभ भशुम श्रेष्ठ स्वगा मध्यम मध्यम भशुभ प्रीति वेष स्यगण सम मध्यम शुभ शन्नु अशुभ शुभ मध्यम सम शत्रु वघ मध्यम पेघ भशुभ | स्वराशि श्रेष्ठ स्वराशि एकर्म द कवर (१ ) " || ० " २४ वर्षमान " " - राशि महावीरस्वामी पति एकनाथ वर्ण मिथुन वैश्य नक्षत घय विनासिंह धन युजी मध्य उ०पा.
श्रीवृहद धारणायन। साधक अनर-पु, पू। साध्य तारा राशि नाडी योनि वर्ग महिष ४ प कन्या माद्य स्वकीय विरुध्ध भश्व पिशोपक ग सभ्य देव देय राक्षस गा मध्यम क मेप बाद्यवेध KA.साध्य नाम श्रेष्ठ शुभ श्रेष्ठतर १ २॥ वेध " . १ स्वराशि श्रष्ठ शुभ श्रेष्ठ वैर वेष मध्यम " मध्यम प्रीति अशुम पैर वेध पैर मध्यम सम भूपभनाथ २ मजितनाथ सभवनाथ ४. अभिनंदन ५ मुमतिनाथ | अशुभ ६ पद्मप्रभु ७ सुपार्श्वनाथ ८ चद्रप्रभु अशुभ है/ सुविधिनाथ अशुभ १० शीतलनाथ ११ श्रेयांसनाय १२ वासुपूज्य १३/ विमलनाथ अशुभ १४ अनतनाथ अशुभ १६ शातिनाय | अशुभ वर १७ कुयनाथ १६. मरनाथ १६ मलिप्तनाय | अशुभ वैर २० मुनिसुव्रत २१ । नमिनाथ २२ / नेमिनाय २३ / पार्श्वनाथ २४ वर्धमान "महावीरस्वामी राशि पति एकनाथ कन्या बुध मिथुन वैश्य स्व १५ / धर्मनाथ " १ वेघ कुरेर M २ २॥ स्व शुभ शतु शुभ सम श मध्यम शन्नु स्वराशि वेध . अशुभ वैर वेध ०॥ ॥ वैर ० मध्यम स्वराशि वेघ . " वर्ण NE 21 +वश्य विनानि धन गर्ने नक्षत 9 umbnainen प्रोवृहत धारणायंत्रा साधक अक्षर-पे, पे, पो, पो। राशि याध्यजिा नारा स्यकीय विषब्ध ७६२, । यानि या । विगापर गप व्याम प म्य गौ क देय द.म. bate " 1 १ २॥ भशुम श्रेष्ठ २॥ शुभ । देर प्टर प शा शुम स्वराशि एकम । . - १ . २॥ शुभ प १ । १ मशुभ यथ १ मध्यम 1 प्रीति शुभ यम धंध - १ ऋषभनाथ २. अजितनाथ ३ संभवनाथ ४ मभिनदन अशुभ ५ मुमतिनाथ ६] पमप्रभु स्या ७ गुपार्शनाय | अशुभ मैत्री 5 चंद्रप्रभु ६ मुविधिनाय १. शीतन्नाय मशुभ ११ धारनाथ १२ | धागुपूज्य १३ | पिमहनाय १४ मतिनाथ | भशुम १५ | धर्मनाथ १६ । शातिनाय १७ बुथुनाथ १८ भरनाप अशुभ । २६ मल्लिनाथ २.मुनिमुक्त २१ | मिनाय २२ मेमिनाथ २३ पार्सनाय अशुभ मनी २४ वर्धमान पेर "महानोरस्वामी राशि एकनाथ कन्या बुध मिथुन वैश्य " 10 यघ - १ २ २॥ गणशुभ देर शन मध्यम " (१) " 011 स्यगण स्वराशिएपमें भेष्ट भशुभ स्वराशि " पति वश्य विनासिघन सर्व युजि माल चिसा - श्रीवृहद् धारणायत्र। साधक अक्षर-फ१०॥ साध्य तारा योनि वर्ग पिशोपक राशि नाही २ वानर प तम्य मनुष्य स्वकीय विष्य क देखें राक्षस Kumसाध्य नाम २॥ २॥ घनु' मध्य वृषम मध्यवेध स्वराशि शत् सम भवेघ मध्यम २॥ "" . मवेध " अशुभ ! शुभ श्रेष्ठ शुभ " मध्यम वेध १ भशुम / स्वराशि १ " 011 मृषभनाथ २ अजितनाथ अशुम समवनाथ ४ अभिनंदन ५ सुमतिनाथ ६. पद्मप्रभु ७ मुपार्श्वनाथ चंद्रप्रमु अशुभ सुविपिनाप १. शीतलनाथ स्वा ११ | श्रेयांसनाय | अशुभ मैत्री १२ वासुपूच्य अशुभ १३ । विमलनाथ अशुभ १४ अनंतनाथ अशुभ र १६ | शातिनाथ १० कुथुनाय और १८ मरनाथ २६ । मल्लिनाथ २. मुनिमुक्त अशुभ मैत्री २१ । नमिनाथ २२/ नेमिनाथ २३ | पार्श्वनाय २४ वर्धमान महावीरस्यामा যখি पति एकनाय वर्ण धन गुरु मीन शसिय १५ / धर्मनाथ , कुवर स्वगण एकम मध्यम अशुभ अशुम | शुभ स्वगण ! श्रेष्ठवर वेध २॥ मध्यम भीति वेध " शुभ २ | अशुम शनु २॥ मध्यम श्रेष्टतर शुभ अशुभ शुभ भवेध शुभ श्रेष्ठ . " (१) " " अशुभ येष्ट . " . " वश्य सर्व राशय नक्षत्र युजि पु० पा० पनि hoidlat aditza श्रीवृहद धारणायत्र। ४ प स्य " " ॥ " साधक अक्षर-च, वा, वि, वी, बु, बू (घु यू १ पाद ७ १७-२३ भवेध ) साध्य तारा योनि घग विशोपक गण राशि नाडी स्वकीय सर्प मनुष्य वृषभ भाद्य धि ६,८,१ नकुश म देय राक्षस भाथ १ मृपभनाथ कुवर २॥ शनु भवेध. २. अनितनाथ स्था स्वराशि ३ | संभवनाथ मैनी मध्यम घेष्ठ ४अभिनंदा २॥ ५ सुमतिनाथ अशुभ अशुम यंध ६ | पाप्रमु शुभ सुपासाथ मीति घेध ८ चद्रप्रमु अशुभ मध्यम सम सुविधिनाथ अशुभ मशुभ १. शीतग्ननाथ १ । स्वगया ११ श्रेयांसनाथ मध्यम शुभ येध १२ | वासुपूज्य সংযুল भशुम येष्ठतर १३ विमलनाथ अशुभ स्वगण शुम १४ [ बनतनाथ २॥ मध्यम वेध अशुभ १६ | शातिनाय अशुभ अशुभ १७ कुथुगाथ | कुवर, २ । भशुम स्वराशि वैध १६मरनाथ २॥ मध्यम शुभ घेघ अशुभ २. मुनिसुव्रत शुभ वेध २१) नमिनाथ अशुभ of] भशुम २२ नेमिनाय 010 अशुभ शुभ पारसनाथ प्रीति पंध २४ वधमान स्व शुभ महावीरस्वामी राशि पति एकनाय वर्ण पश्य नक्षत सुजी नप शुत्र मेष रोहियो। पश्रिम " १५ धर्मनाथ " १६ मल्लिनाथ अशुभ " " (१३) " वैश्य Samantha श्रीवृहद् धारणायंत्र। साधक अक्षर-चे, चे, चो, वो , नं. । साध्य तारा विशोपक गया राशि नाडी योनि वर्ग सर्प प स्वकीय ४, वृपम भाद्य विकध्ध ६१ देय घन माद्य मध्यम नकुल ! क कुवर मैत्री स्वा गा २॥ शन स्वराशि श्रेष्ठ १ एकभ २॥ " वैर . भवेध १ पमनाप २] अजितनाय ३ संभवनाथ ४ अमिादन । अशुभ ५ | मुमतिनाथ ६ पक्षप्रमु ७ सुपार्थनाय अशुभ चंद्रप्रमु ६ | सुविधिनाय २. शीतलनाय भशुभ ११/श्रेयांसनाथ १२ | यामुपूज्य १३ | विमलनाथ १४ अनंतनाथ શુભ धर्मनाथ शुम प्रीति सम " १॥ वेध बैर मध्यम वेध व घेर मध्यम शुभ श्रेष्ठत्र शुभ बेध " २॥ ०॥ वेध १ कुवैर १६ शांतिनाथ १७ कुथुनाथ १६ मरनाथ १६ मल्लिनाथ २० ! मुनिसुव्रत २ २॥ अशुभ . " . नमिनाय नेमिनाय अशुभ स्वराशि शुम मशुम शुम अशुभ शुभ प्रीति शुभ ૨૨ वैर भवेध २३ / पार्वनाय २४ वर्धमान मशुभ " मध्यम महावीरस्वामी - राशि पति वश्य एफनाय। पर्य तुप्ता नक्षन । युजि.... मृगशिर्ष श्रीवृहद धाणायंत्र। साधक अक्षर-भ, भा, भि, भी (भि, भी ४-२४-भवेध ) साध्य तारा योनि वर्ग विशोपक गय राशि नाही स्वकीय श्वान सम्प साध्य नाम रावस धनु ३,५७) हरिण क देयं दे.म. वृषम पायय भशुम २॥ अशुभ स्वराशि " वर सम अशुभ अशुभ २॥ अशुभ भशुभ वैर स्वा स्व विध १ | मृषभनाथ २भजितनाथ ३ | संभवनाथ ४ अभिनंदन ५ | सुमतिनाथ ६ पद्मामु ७ मुपार्श्वनाथ ८/चंद्रप्रभु सुनिधिनाथ १. शांतलनाथ ११ श्रेयांसनाथ १२ मामुपूज्य १३ | विमलनाथ १४ अनंतनाय १५ धर्मनाथ १६ शातिवाय १७ [फूथुनाथ १८ भरनाथ १६ / मलिानाथ २० | मुनिसुव्रत २१ नमिनाथ २२ १ च अशुभ શુમ श्रेष्ठ शुभ १।। । वैर श्रेष्ठ स्वराशि एकम अशुभ वैर अशुभ शुभ पंध श्रष्टतर २॥ पर प्रीति शुम वेध २ स्वगण शनु २॥ | र श्रेष्ठतर वघ शुभ भशुम ०॥ शुभ घध श्रष्ठ शुभ श्रेष्ठ वेध " " अशुभ कुवर " . स्वगया नेमिनाथ भशुम २३ पार्श्वनाथ अशुभ अशुभ महावीरस्वामी . २४ | वर्धमान " (II) भशुभ , " राशि पति " एकनाथ मीन वर्ण धतिय वश्य नसले सर्वे राशय युजि पश्रिम मून श्रीवृहद् धारणायत्र। साधक अक्षर-भु, भू। तारा योनि । वर्ग । विशोपक गण राशि नाडी मानर प मनुध्य । धनु मध्य -साध्य नाम स्वकीय २ विरुध्ध ४,६६ मेष क १ भृषभनाथ स्व वृषभ । मध्यवेध स्वराशि शन्नु सम वेष २॥ २॥ २ अजितनाथ | अशुभ मध्यम २॥ " ३/ संभवनाथ ४/ अभिनंदन ५ ६ पप्रमु सुमतिनाथ अशुभ शुभ वेध . " " १॥ " २॥ 01 २॥ प्राति मुपार्श्वनाथ ८ चंद्रप्रभु अशुभ ६/ मुविधिनाथ १. शीतलनाथ स्वा ११ श्रेयांसनाय अशुभ मैत्री १२ वासुपू-य' अशुभ १३ | विमलनाथ अशुभ अनवनाथ १५ / धर्मनाथ अशुभ | वैर १६ । शांतिनाम १० कुथुनाथ पैर १६ अरनाथ १६ मल्लिनाय २. मुनिमुक्त अशुभ | मैती २१ | नमिनाय २२ नमिनाथ २३ / पार्श्वनाथ २४ वर्धमान महावीरस्वामी राशि पति एकनाथ वर्ण गुरु मीन चलिय शुभ मध्यम श्रेष्ठ वेध अशुभ स्वराशि स्वगया एक्में मध्यम अशुभ अशुभ शुभ स्यगण श्रेष्टवर | वेध मध्यम वेध शुभ अशुभ | शनु मध्यम श्रेष्ठतर शुम अशुभ शुभ अशुभ वेध शुभ श्रेष्ठ कुवैर २ २॥ (१) . " " २॥ . 37 " वश्य घन सर्वे राशय नक्षत युजी पू.पा. पश्रिम है श्रीवृद्ध धारणायंत्र। साधक अचर-भे, भै। साध्य तारा योनि पर्ग। विगापक गण नारी स्वकीय नज प सभ्य! मनुष्य विध राप क दय भरव स्या धेर २॥ २॥ भूपमनाय २। भजितनाय ३। संभवनाथ ४ भभिनंदन ५ मुमतिनाथ ६. परप्रमु स्वराशि " । राम मध्यम बेध भशुभ भशुभ २॥ " १ " मराम शुम पंथ - भशुभ मुपार्श्वनाथ माशुभ । " १ भयप चंद्रप्रभु 6 मुविधिनाय " मध्यम शुम भेष्ठ - मशुम 'स्वराशि १ । " भगुम पेष . शीतलनाय भेयासाथ १२ पासुपूज्य विमलनाथ १४ मनवनाथ धर्मनाय शांतिनाथ १७ फुयुनाथ १६ भरनाप मरिक्षनाथ भशुभ २॥ EE FELEMEEEEEEEEEEEX TEE स्यगण मध्यम भशुम शुभ सगण भेष्टतर मध्यम बष प्रीति शुभ मवध मध्यम भेष्टतर वेध शुभ " " कुर २ अशुभ २. मुनिमुमत " (१) मशुम वेध on मशुभ २१ नमिनाए २२ नेमिनाथ भशुम पार्श्वनाथ २३ भशुभ वर्धमान महावीरस्वामी, राशि पति एकनाय वर्ण गुरु मन । क्षत्रिय शुभ भवेध (२) " वश्य सब राशय नक्षत्र युमी उ.पा. पश्रिम प्रोटन धारणायंत्र। ७३ साधक अक्षर-भो भो। तारा योनि वर्ग विशोपक गण राशि नाही माध्यजिन स्वकीय विरुध्ध ३ मनुष्य मकर साध्य नाम नकुत सर्प देयं । राक्षस सिंह अत्यवेष 22 भशुम । एक भृषमनाथ २ मजितनाथ ३सेभवनाथ स्वा र अशुभ वैर ४ ममिनंदन भशुभ " . २॥ | २॥ शुभ वेध मध्यम प्रीति २|| भशुभ शन येध मध्यम भेष्टतर भवेष १ मध्यम शुभ भशुम मशुम स्वगण मध्यम स्वराशि वेष भशुभ मशुभ " ५ सुमतिनाथ ६ पापमु ७मुपार्श्वनाथ चंद्रप्रभु ह सुनिधिनिाय १० शीतलनाय ११|श्रेयांसनाथ " " १२ वासुपूज्य भशुम श्रेष्ठ १३ रिमसनाय १४/पनंतनाथ भशुम " १५ / धर्मनाथ " | स्वगण | शुभ | मध्यम वेध सम श्रेष्ठ २ भशुम शुभ वैध २॥ मध्यम बंध श्रेष्ठ स्वराशि | वेध " कुवर " . " (१) . " १६ शांतिनाय १० फुधुनाथ १ ९भरनाथ भशुम १६ मस्तिनाय २० मुनिमुमत २१ नमिनाथ २२ नेमनाथ अशुभ २३ पार्श्वनाथ प्रशुम २४ वर्धमान महावीरस्वामी राशि पति एकनाथ • अशुभ मध्यम भेष्ठतर वेष मध्यम (D व पर्ण “वाय नर्स युजि- पैश्य उ.पा. 10 ०४ प्रोवृहद् धारपायंत्र साधक अक्षर-म मा मि मी मुमूमे मै (म मे। पाद ७ १०-२३-मर योनि व वियोग सम्म गया । गरिमा गमय खाध्यन सारा स्वकीय उदर विरुध २,५७, पित मृषभनाथ अशुभ २ मजिवनाप ३। संभवनाप ४ मिनदन । पशुम बुर ५ सुमतिनाथ ६ एपप्रमु अशुभ मारसा - २॥ भगुमशुम अशुभ २॥ . और २॥ १ । १ मुपारनाप शुम स्थराशि शुभ " स धेर रसर शुम भशुम येर N अशुभ पैर PREEEEEEEEEEEEEEEEEEE + : : " ८. चंद्रप्रभु ६ मुविधिनाय शीतनाप भेयांसनाप १२ यामुपूज्य १३ | विमानाय १४ भनेवनाय १५/धर्मनाप १६ शादिनाप १७ थुनाथ भराम १६ भरनाथ १६ मल्सिनाथ मुनिसुव्रत २१/नमिनाय २२ / नेमिनाथ २३ पार्वनाथ भशुभ २४ वर्धमान भशुभ महावीरस्वामी राशि पति एकनाथ सूर्य " २ २॥ शुम स्वगण भेष्ठ पर बंध o " शुभ रास " भशुम स्वगण " " येष " भशुभ " , ५ . याय विनापन दृधिक पुजि मघा श्रीवृहद् धारणायत्र। ७५ साधक अक्षर-मो मौ। - घर्ग विशोपक गण नाडी राशि सिंह प मनुष्य मध्य साध्य नाम: देयं राक्षस मकर मध्यवेध स्व शुभ श्रेष्ठ २॥ " मध्यम मवेध શી न साध्यजिन तारा योनि E स्वकीय २ उदर विरुधं ४,६९ विडाल १ अपभनाथ २ अजितनाथ भशुभ ३ संभवनाथ ४ ममिनदन कुपैर ५ मुमतिनाथ मैसी ६ पद्मप्रभु ७ सुपार्सनाथ ८ चंद्रप्रभु अशुभ सुविधिनाय १. शीतलनाथ भशुभ १२ । वामपूज्य अशुभ अशुभ १ अशुम । स्वराशि . शुभ भवेध १ " " ११ भेयांसनाथ १ १३ / विमलनाथ १४ अनंतनाथ १५ धर्मनाथ २६शातिनाय अशुभ १॥ मध्यम श्रेष्ठतर वेध अशुभ शुभ स्वगण वेध मध्यम भशुभ स्वगण प्रीति बंध २॥ मध्यम श्रेष्ठ पंध शुभ ૨ अशुभ श्रेष्ठ मध्यम प्रीति शुभ शबु शुम o|| अशुभ भषेध ० " कुवेर " १) . " " १७ धुनाथ १६भरनाथ १६ मविक्षनाथ २. मुनिमुमत অম २१ नमिनाथ २२ नेमनाथ २३ पार्सनाथ २४ वर्धमान " महावीरस्वाम राशि पति एक्नाय सिंह सूर्य , " वर्ष धनियम नक्षत पू. पान ७६ धीन धारणायंत्र। साधक अक्षर-य या यि यी यु यू। न सारा यात वर्ग विशाप साभ्यजिन स्वपीय ६ परिण यक्षम्य गा राशि । नाडी भिक भाव द.म.मिन भाषेध kata विराध्य दय १$षमनाम भशुम श्रेष्ठ २ मजितनाय भशुभ राम " ।पेर ३ सभवनाथ ४अभिनंदन ५ गुमतिनाथ घेध " 011 " श्रेष्ठतर সুম मयुभ स्थराशि भेष्ट " देर पेध भशुम पैर शुभ * • * *: : : : - 14 : 1 स्व गच भशुभ शुभ " मध्यम मीति वेध ७ मुगनाय ८चंद्रम भेती और २ १ सुविधिनाथ युद्धर ॥ १. शीतशनाथ अशुभ ॥ ११ श्रेयांसनाय मशुभ .11 १२ पासुपूज्य भशुभ १३ विमानाथ १४ अनंतनाथ १५ धर्मनाथ ११मति राय १७कुपुनाथ १८ भरनाय ३ १६ मलिनाथ २. मुनिसुनत अशुभ २१ । नमिनाय २२ नेमिनाय २३ पानाथ २४ वर्धमान महावीरस्वामी राशि पति एकनायवर्ण वश्य मंगल मेष सिंह स्वगण बेर प्रीति वेध येथ " स्वगण प्रीति शुभ भशुभ शुभ (0) अशुभ वेध " " युजि पभिम
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श्रीवृहद् धारणायंत्र। साधक अक्षर-श र रा रि री (र, वेधे चित्य)। वारा यानि न०1 साध्यजिन स्वकीय वर्ग : विशोपक गा नाही ५ घानर साध्य नाम य क्षय तुला विरुध ७,६२ मेष देय दे. म. मान मध्यवध ३ १! मृषभनाथ २ भजितनाय ३ समवनाय ४ भभिनंदन ५ मुमतिनाथ ६ । पद्मप्रभु भशुभ शुम प्रीति शुभ 011 भवेध भशुभ on " ਐਚ स्वराशि ७ मुपावनाय भशुभ | मैत्री चंद्रप्रभु ६ सुविधिनाथ १. शीतलनाथ अशुभ ११ श्रेयांसनाथ कुवैर, २ बेर भशुभ वेध शुभ 04 भशुभ बघ १२ पासुपूज्य धेर श्रेष्ठतर शुभ भशुम शशु वेध १३ | विमलनाथ भनतमाय १५ धर्मनाथ १६ शांतिनाथ अशुभ वध १. कुथुनाथ १६भरनाथ सम स्वगण / प्रीति वैर शबु ३ " " " प्रशुम १६ मल्सिनाथ २. मुनिमुदत २१ | नमिनाथ २२ | नेमनाथ २३ / पार्श्वनाथ वधमान महातीरस्वामी राशि पति एकनाथ वर्ण स्वगण मशुभ मैत्री ন सम श्रेष्ठ स्वराशि श्रेष्ट एकम वैर " " (0) अशुभ .॥ " वाय विनासिंह मनुष्यच नक्ष चिता युजी मध्य श्रीवृहद् धारणायंत्र! साधक अक्षर-रुरू रेरै रोरौ (रु रू १ पाद ७-१७-२३ भवेध.छ) राशी नाडी तुला अत्य -साध्य नाम मीन मत्यवेध शुभ भवेध वेष " प्रीति शुभ " ५ सुमतिनाथ | अशुभ " " वेध श्रेष्ठ स्यराशि वेध भशुभ शुम सुविधिनाय | अशुभ " साध्यजिन तारा योनि । वर्ग विशोपक स्वकीर्य ६ महिप य सम्य देव विरुध्ध ८,१,३। अश्व देयं राक्षस १ ऋषमदेव भशुभ ३ मध्यम २ अजितनाथ ३ ३] संभवनाथ ४] अभिनंदन ३ पैर ६ पद्मप्रभु ७ सुपार्श्वनाथ ॥ ८/चंद्रप्रभु भशुम कुवर २ वैर १० शीतक्षनाय मध्यम श्रेयांसनाथ १२ वासुपूज्य वैर वैर अशुभ मध्यम ३ १५ धर्मनाथ शांतिनाथ अशुभ वैर १७ युनाथ अशुभ वैर १६ अरनाथ ३ १६ मल्सिनाथ भशुम वैर २. मुनिसुव्रत २१ नमिनाथ १ २२ नेमनाय वैर २३ | पार्श्वनाथ 0॥ २४ | वर्धमान अशुभ (6) मध्यम महावीरस्वामी राशि पति एकनाथ वर्ण वश्य तुप्ता शुक्र वृषम शुद्र व श्रेष्ठतर! वेष शुभ १३ / विमलनाथ १४ अनंतनाथ वेध अशुभ श्रेष्ठ " " वेध सम प्रीति वेष शनु सम श्रेष्ठतर वेध सम " अशुम / वैर , स्वराशि येघ श्रेष्ठ विनासिंह मनुष्यच नक्षत स्वाति युजी मध्य ८० श्रीवृहद धारणायंत्र। साधक अक्षर-ल ला। साध्यजिन तारा । योनि स्वकीय १ साध्य नाम भश्च पर्ग } विशोपक गण लम्या । देय राक्षस दय विरुध महिप च ३ मध्यम राशि नाही मेप माद्य कन्या भाद्यवेध शुभ भशुम शुभ मवेध १ भृषभनाथ अशुभ २ अजितनाथ ३ संभवनाथ भशुभ ४ अभिनंदन अशुभ ५ मुमतिनाथ ६ पद्मप्रभु मशुभ ७ सुपार्श्वनाथ अशुभ ८/ चंद्रप्रमु ६. सुविधिनाय 01 || ०|| सम कुवैर २ वैर मध्यम १० शीतक्षनाथ १५ श्रेयांसनाथ वेध मैनी १२ वासुपूज्य विमलनाथ भनंतनाथ वैर मध्यम ध शुभ श्रेष्ठ १५ / धर्मनाथ १६/ शांतिनाथ ... श्रेष्ठतर स्वराशि एकम भशुभ श्रेष्ठ स्वराशि एकम " २२ नेमनाय स्वा १७ थुनाथ अशुम १६भरनाथ १९/ मशिनाथ २. मुनिसुयत मिनाथ स्वा भशुम २३ पार्जनाथ भशुभ भशुभ महावीरस्वामा राशि पति एकनाथ, वर्ण मग वृधिक झविय स्वराशि एक २४ वर्धमान सम " () मध्यम 01 शन्नु मवघ " " वश्य नक्षत अश्विनी युजी पूर्व धोवृहद धारणायंत्र। साधक अन्नर-लि ली लु लू ले ले लोलो (ले ले लो लौ ३-६ २० भवेध .) न पिशोपक गण नाडी माध्यगिन स्वकीय वारा योनि वर्ग २ हस्ति ४६. सिंद च যয়ি मेष मनुष्य मध्य विरुध्य देय ! राक्षस कन्या मध्यवेष ३ भशुम ३ शुभ अशुभ शुम मध्यम भवेघ भूपमनाथ २ अनितनाय ३ समवनाय ४ भमिनंदन ५ मुमतिनाथ पभप्रमु ७ मुपासनाय ३ " " " অশুদ कुर २ 04 ६ सुविधिनिाय १० शीतलनाथ यांसनाय | अशुभ अशुम •|| शगु भवेश सम मध्यम प्रीति वेध भशुम शुभ स्वगण वेध मध्यम अशुम शुभ स्थगण श्रेष्ठ वैध मध्यम श्रेष्टतर वेष स्वराशि अशुभ अशुभ ३ मध्यम भेट स्वराशि श्रेष्ठ १ स्वराशि अम शबु भवध सम (.) स्व शन " " १२ पासुपूज्य पशुभ विमलनाथ અશુભ १४ मतनाप मेली धर्मनाथ भशुम १६ शांविनाय १० भुनाथ १६ भरनाय १९ / मत्तिनाथ २. (मनिमा भगुम २५/नमिनाथ २.मनाय २३ पानाय २४ वर्धमान ॥ सदापारम्वामी राशि एकनाथ वर्ष मंगल मित पमिय १॥ " " याय युजि भरणी ८२ श्रीवृहद् धारणायंत्रा साधक अनर-व वा वि वी वु वू (युधू १ पाद ७ १७ २३-भवेध *) वग विशोपक गगा राशि नाडी ४ य मनुष्य -सायं नाम वृपम च अत्य भत्यवेध राक्षस धन स्य ३ ३ शनु भवेध स्वराशि एक श्रेष्ठ " 011 मध्यम ३ " ०|| वेध " •॥ " " ॥ कुवेर २ वेध + अशुभ शुभ प्रीति मध्यम अशुभ शनु स्वगण मध्यम शुभ अशुभ श्रेष्ठतर 0|1 साध्यजिन तारा योनि स्वकीय सर्प विरुध्ध ६,८,१ नकुल १ भृषभनाथ कुर २ अजितनाथ स्चा ३ संभवनाथ ४ अभिनंदन ५ सुमतिनाथ अशुभ ६. पद्मप्रभु ७ सुपार्श्वनाथ ८चंद्रप्रमु अशुम हैसुविधिनाथ अशुभ शीतलनाथ ११ श्रेयांसनाथ १२ । वासुपूज्य अशुभ अशुभ १४ अनंतनाथ अशुभ भशुभ १७ / कुथुनाय १८ मरनाथ २६ मल्सिनाथ अशुभ २. मुनिमुषत २१ नमिनाथ अशुभ २२ नेमनाय २३ पार्ननाथ २४ वर्धमान महावीरस्वामो राशि पति एकनाथ वयो " वेध १३ | विमलनाथ . स्वगण शुभ ३ मध्यम बंध १५ / धर्मनाथ १६ / शांतिनाथ " " ३ अशुभ अशुभ स्वराशि वेध मध्यम शुभ वेष अशुभ शुभ वेष अशुभ " १ " अशुभ शुभ ०|| घर प्रीति शुभ " 1 वैश्य वश्य मेष नातं रोहिया युजी पूर्व THA धोवृहद् धारणायंत्र। साधक अचर-वेव वो वौ। निशोषक गण । राशि नाही देय वृपम लम्ब । मध्यवेध न. सान्यनिन तारा योनि | वर्ग E} स्वकीय सर य सिध्ध ७,६२/ नश च भूपमनाय पुर २ मजिवनाथ ३१ संभवनाथ स्वा भभिनंदन ! अशुभ ५ मुमजिनाम देय । राक्षस । धन मध्यम शन स्वराशि भेष्ठ ३ " भवेध খুম प्रीति सम " घेघ ७१ मुशानाय भशुम ८/चंद्रप्रभु मुविधिनाय १० शीतलनाथ भशुम कुवर २ 011 वैर मध्यम - वेध - ११ श्रेयांसनाम शुम . १२. वासुपूज्य १३ पिमलनाय १४ मनंतनाय | भशुभ वैरभेष्ठतर शुभ मध्यम वेध मेष " १६ गातिनाय १॥ १८भरनाथ भशुम २६ मरिमनाय २. मुनिमुमत २१ मिनाथ २२ । नेमिनाय २३पासनाय भसुम २४ वर्षमान "महारस्लामा मम स्वराशि शुम भगुम शुभ मशुम १ मवेष , (मध्यम प्रीति गुम वा यनी प 1 मृगगि श्रीवृहद धारणायन। 011 " वेध स्व साधक अक्षर-स सा सि सी सु सू। साध्यजिन तारा योनि । वर्ग नियोपक गण राशि नाही # स्वकीय अश्व फुभ भाद्य विरुध्धं 5,१,३ महिष ट देय दे०म० कर्क श्रावध १ अषमनाथ अशुभ भशुम शुभ २/भरितनाथ श्रेष्ठवर ३ संभवनाथ वैर मध्यम ४भभिनंदन ५ सुमतिनाथ मशुभ ६ पद्मप्रभु प्रीति ७ सुपार्श्वनाथ शुभ चंद्रप्रभु अशुभ मुविधिनाय भशुभ वेध शीतलनाथ ११ श्रेयांसनाथ अशुभ वेर १२ वासुपूज्य स्वराशि एक १३] विमलनाथ अशुभ ०॥ अशुभ अशुभ मनतनाथ वैर १५ धर्मनाथ १६ शांतिनाय अशुभ मैत्री शुभ अशुभ स्वगण श्रेष्ठतर १६ मल्सिनाय मैली भशुम १ २. मुनिसुवत शुभ वेध श्रेष्ठ २१ नमिनाथ २२ नेमनाय शुभ बध २३ पार्श्वनाथ स्वगण प्रीति १ २४ वर्धमान शुभ भशुभ महावीरस्वामी (II) अशुभ प्रीति वेध राशि पति एकनाथ वर्ण वश्य शनि नशन युजी मकर शतभिषा परिश्रम . - भशुभ * : *18 " १७ थुनाथ १६ भरनाथ . वध स्वगण प्रशुम " अशुभ | मैत्री " " विनासिंह मनुष्यच श्रीवृहद् धारणायंत्र साधक अक्षर-से से सो सौ वर्ग पिशोपक गण राशि नाडी क्षम्य मनुष्य साध्य नामा कुम भाद्य कर्क माद्यवेध ट देय राक्षस " . ०॥ " " अशुभ अशुभ न. साध्यजिन तारा योनि स्वकीय ७, सिंह विरुध्ध ६,२,४ | हस्ति अपमनाथ २ अजितनाथ अशुभ ३ संभवनाथ ४ अभिनंदन ५ सुमतिनाथ ६) पद्मप्रभु ७/मुपास्रनाम ८चंद्रप्रमु ६ सुविधिनाथ १. शीतलनाथ श्रेयांसनाथ १२ वासुपूज्य १३ / विमलनाथ १४ अनतनाथ १५ / धर्मनाय १६ शांतिनाथ १७ कुथुनाथ १८ भरनाथ अशुभ | वैर १६ / मल्लिनाथ २० मुनिसुमत भशुभ २१ नमिनाय २२ / नेमिनाथ २३ पानाथ २४ वर्षमान महावीरस्वामी राशि पति एकनाथ पर्ण कुम शनि मकरण शुभ श्रेष्ठतर मध्यम मध्यम वेध " अशुभ स प्रीति शुभ मध्यम श्रेष्ठ अशुभ | शुभ वेष स्वगण मध्यम श्रेष्ठ ०॥ अशुभ | स्वराशि वेध ०॥ मध्यम शतु शुभ वेध अशुभ उतर मध्यम भशुभ १ शुभ १ श्रेष्ठ शुभ वेष भशुभ प्रीति १ शुभ (11) | स्य वेष स्वगण अशुभ भशुम । र " . " " वेष FREEEEEEEEEE " प्रीति . १ " " पाय विनासिंह मनुष्यच नक्षत्र युजि पू• मा पश्चिम ६ श्रीवृहद् धारणायय। साधक अक्षर-हु हु हे है हो हो (हो हौ ३-६-२२-भवेध ७) नसाव्यजिन तारा योनि धर्म विशोपक गण नाटी साध्य नामा राशि कर्क स्वको मेष श जन्य देव मध्य নিংস यानर ट देयं राक्षम कुमध्यवेष मध्यम मीवि शुम स्व अशुभतर पर १ अपमनाथ अशुभ २/ अजितनाथ ३ | समननाथ अशुभ ४] पभिनंदन ५ सुमतिनाथ मशुम अशुभ ७ सुपार्श्वनाथ ८चद्रप्रभु " " . श्रेष्ठ शुम १ घेघ ० " २॥ मध्यम वेध है मुविधिनाथ अशुभ प्रीति वर मध्यम वध . सम o0 मध्यम मध्यम | मेष 011 स्व " स्वराथि एकम . श्रेष्ठतर . " घर १. शीतलनाथ कुवर ११ । श्रेयांसनाथ कुवर १२ वासुपूज्य १३ | विमलनाथ १४ अनंतनाप १५ धर्मनाथ स्वा २६ शांतिनाथ अशुभ १७ | कुथुनाथ पशुभ | मैत्री १६] भरनाथ १६ मरिक्षनाथ अशुभ २. | मुनिसुव्रत दुवैर २१ नमिनाथ अशुभ २२ मेमनाथ अशुभ २३ | पार्सनाय २४ वर्धमान अशुम महावीरस्यामा राशि पति | एकनाथ | वर्ण ब्राह्मण " शुभ मध्यम श्रेष्ठतर सम श्रेष्ठतर शुम " " वेध " (1) मध्यम शुभ " १. " वश्य नक्षले युनि . .
श्रीवृहद धारणायत्र। कारण भारवर्धन सर्वतीर्धकरा श्रेष्ठा तथापि सन्निमित्तेन धीमच्चारित विजय महति धारणायने भवेत्कार्य गुणाधिक शिष्य दर्शन सत्रत अध्याय पंचम इति प्रशस्ति मंगल - ૧૨ परि दत्त चारित्रपोल्प दृदगुरु वीर घोरेति वीरेति विराजतु ममाशये महारोरेति वीरति वीरता भरतु यरा गुणमणिगणपूर्ण स्वच्छगच्छे तपारये विजय कमल्सूरि पूण्यसंघप्रतेजा भरिक मधुप पनो समजनि जनमान्य शात मुद्राभिराम विजय केशर.सूरि स्पत्पभूत् मुनिपति तल्लघु धुनियो पिजय शान्तभूषण निनय निजय शिष्यो ब्रह्मचारिमुनीद्र प्रपर गुरुकुलम्य शानराशेर्विधाता विजयद जियान्त रव्यात चारित्रनामा सदमरपदमावस्तात् पूज्य पूज्य प्रसन तत्पादपद्मशमनामृत पान भृग शानेरतो निजयदर्शननाममिथु सभ्लोक कोप्ठ सरल गुख्यनमाध्य यत्रं चकार स वृहद्गति धारणार्या प्रथाज्ञानविधिपाद प्रतिष्ठाऽर्चासुदर्शनम् भावश्चरणनेजर्य फमशोभरतुणाम् घर्षे राफासु चैत्रके सम्मेतशिखरे बने पतृनाम -- विधान प्रथफ्त - सपत्काल प्र १२ श्रीबृहद् धारणायंत्र। शास्त्रमुनि हान-न्याय- यायमेरुमहीचढ़ा विश्वप्रमा-विश्वरवन- सशतींशति भ्लोये भ्लोकमाने सहाय्यात्सफलीहत मदतावानीना मुदे २६ काक्षरी सामुद्र-पूनादे पश्चाद्रचितो धारणा यत्र २० फल्याणमस्तुसघस्य भद्रज्ञानस्य नथस्य इति वृहधारणा यंत्र जैनधर्मस्य मगलम् सर्वपाभरतुशिवं शास्त्रं समाप्तम् २१ -.००- परिशिष्ट-१ श्रीविवपरीक्षा प्रकरणम्- २ इय गिहलक्पणय भणाविय बियपरिमार्ण गुण दोस लक्षणाइ सुहासुहजेण नज्नेइ ॥१॥ (१३१) उत्तत्तयं उत्तार भालकनोलामो सवणनासामो सुहये जिणवरणग्गे नवगहा जक्ख जक्सिणीया (१३२) विपरियारमाझे सेलस्स पन्नसंकर नसुह (भा• वि०) सममगुलपमाण नसुदर होइ कश्यानी (१३३) अनुन्न जानुलधे तिरि फेसंत-अचलते अ सुत्नेगं चउरस पज्जफासण मुह विष ३ (१२५) नवताल हमारूवं रुवस्स य पारसगुलोतालो (१३६) अगुल अहिअसय उड घाऽऽसीणछप्पन (१३७) भालं नासा घयण गीव हीअय नाहि गुग्म जघार जाणुअ पीहिम चरणा कारसहाण नायध्या (१३८) घउ पच घेप रामा ३ रवि १२ दिणयर सूर जिण घेमाअ जिण अमा म सखा कमेणम उड्डरुषेण (उर्ध्वपाप) ६ ४ श्रीवृहद् धारणायंत्र। ६३ यी (१५६) माल नासारयणं ८ । पर्थे नी पा गीन हिमय नाहि गुज्झ जाणुम आसीण पिच माण पूचरिहि अक्सखाइ (८ स्थान) मुहकमल चउदसगुल फन्नतरि पिच्चरे दहग्गिवा छत्तिसमुरपपसे सोलहकडि सोरतणुपांड कन्नुदयसोल()वित्थरि- चउ उवरे तिनिठिोलिरमण नध्धु तिरित्यरि दुदपसि सिरियाच्छो दुदुइत्तिय पिहुओ . सिरियच्छ सिरिण कपख- तरमि तहअस पणसयपण फम्मा मुणि चउ रनिहा घे कुहणी मणियध जंघ जाणु पय १० अगुह सहिय फरयल 56 सतगुलस्स पित्यारे चरणं सोलस दिहे तयध्य विच्छि भाउ रुदगे ११ छन्माय महरदीहे चक्खुपण दोहध्वपिगुरते तिमिसिहिणं चउनाही नासा-उर-नाहि मुत्तेग सितसिहा ५ गदिम८ पष्ट फम्मेण अगुला जाए पउमुट्टरेहवक्फ फरवरणानिहुसिय निच परिस सयाओ उड्ड जयिय उत्तमेहिं सठविभ त विव निष्फल न जओ (श्रा०वि०) मुह नका नयण नाही आहरण पच्छ परिगर (१४१) घातुनोले)हाविय विअलंग पुणवि कोरिपसउझ कहरयण सीलमय (१४५) AT १२ पा विअलंगुवि पुरजा रा १४ का कडिमगे मूलनायग चयह विधाऽऽउह भगी पूजा ट १७ पाहाणलेक दतमया अपरिगर माणाऽहिमा १५ (१४) इक्कगुलाइ परिमा (श्रा. वि.) उड़ पासा पुणो (१४२) नह यगुलिभ पाहा फलंसत्तुभय देसभग (१४१) पय पौढ चिन्ह परिगर नपुणो सम्झ काआरि(सस्कार )१६ चितलिहिल जा पडिमा न सुदा पुअमाण गिहे इक्कारसजार गेहि पुज्झा इअभणिभ पूव्वसूरिहि नासा पयमंगिऽणुक्रमेण बधणं कुल्नास दवसय १६ भगेजाण मिच्चहाणिफम्मे १८ ग १८ श्रीपद धारणार्यमा ४४ एक दस्तेतु प्रासादे दः पादोन मगुल धुर्यादागुद्धि टिपंचाशदस्तक ४२ सुधा सारदारच प्रचि फोटर पर्जित पभिविषमे यार्य समनधि सुपारद दिपमा प्रयोकणानि प्रथमापदो(बोलामा परि मायामटरघ ददेय पहुंपोना। मर्यटयऽर्धेन पिस्तूता १३ अर्धचदारति पायें घटो फरशस्तथा ध्वजादडप्रमाणे- दीघाप्टाशे शिम्तरा शिपर युक्ततु- द कार्यस्तुनीयाश शिगता गएशावधे मध्योऽप्टाशेर हीनोसो ज्येष्ठात्पादोनयन्यश ४१ भाचादिरे- विधयाशिवर. प्रमाणमामो ध्यजस्य पेड+ (विनाकठ)- डस्तृतीयाशोनो ध्यापटोमानितथा पृथु + घेदिफा-गमारामाभागे उंची परपी, दृष्टिद्वारन! ३१ भागे रागनी ३ थारागीची घेरिका उपरलघुबैठक उपरमूर्ति, शिमष्टि पारना ५१ मागे ४५ -- । परिशिष्ट-१, सुधारसपचनसग्रहमाधी--- भगवाननी बेठी अथवा उभी घले प्रकारको प्रतिमा यौग्न अवस्था होती जोए तेमा पहेली (बेठी) प्रतिमा पर्य कासा पाळी होयी जोइए । प्रथम जमणी जाय अने जमणा सापळ उपर डायो पग तथा हायो हाथ स्यापा फरवो पछी डायी बाय भने डाया साथळ उपर जमणो पग भने जमणो हाथ भूकयो पने पडित पुरुषो पय फासा माने छ । भगवाननो प्रतिमा भी होयतो ते वेभुज ढवण सुधी लाया जोरए यन्ने प्रतिमाओ श्री वत्स, उणीप, प्रण छत्र इत्यादि परिवार युक्त जोइए । सिकागा अग्रभाग उपर अण छत्रना अग्रभागनी समरेपा आये तो ते प्रण छत्र सामाणमा नेमज मासिका मोकपाळ एना मध्य भागमा माठी रेषाथी फपोळनो पेध थवो जोइए। । ।
श्रीवृहद धारणायन। ६६ वे दीवणनी बच्चे आदु सूत्र देवु अने सूत्रथी नाभि सुधी एक कविका रामवी ए रोने परता नामिथी सुत्र सुधी अढार मागळनु प्रमाण जोइए। प्रतिमानु ऊचाइनु प्रमाण नर ताल जाणयु यार आगुळनो एफ ताळ थाय छे भही आगळा कशानलेता प्रतिमाना लेवा। पूजा वगर घणो काळ एमने पम पडेली प्रतिमा ज्या त्याथी प्रहण करवी नहीं। प्रासाटना चोथा भाग जेटली प्रतिमा फरखी पण उत्तम लाभ प्राप्तिने अर्थे ते चोथा भागमा एक आगुल ओछी अथरा बधारे करयो । प्रसादना चोथा भागमा दश भाग फरया भने ते दशिमो एक भाग प्रासादना चोथा भागमा मोछो फरी, अथवा तेमा एक दशिमो भाग उमेरी, तेटला प्रमाणनी प्रतिमा कारिगरोए करपी। सर्व धातुगोनी, रत्ननी, स्कटिफनी अथवा प्रनाळनी प्रतिमा होय तो त्या प्रतिमाता प्रमाण उपर प्रसादनु प्रमाण न लेता इच्छा माफक लेषु । गभाराना मर्मभागना पाव भाग भित्तिथा करपा तेमा प्रथम भागमा यक्षादिकानी स्थापना परवी, पीजा भागमा सर्ने देवीमोनी स्थापना करवी श्रीजा मागमा जिन, सूर्य, कार्तिकेय तथा कृष्ण एमनी प्रतिमा स्थापन करची, चोथा भागमा ग्रहानी प्रतिमा अने पाचमा भागमा शिवलिंगनी प्रतिमा गती। सामाद्वारनी शाखाना निचेथी माठ भाग करपा, तेमा जे माठमो भाग वधा फरता उपर आवेलो ते मूकी देवो भने तेना निचेनो जे सातमो भाग तेना पाछा निचेथी सात भाग परवा तथा ते सातमा छ भाग मूको देवा उपरनो जे सातमो भाग रह्यो तेमा गजाश (अप्टमारा ) सभने छे ते गजाशने विषे कारीगरोए प्रासादनी अदर रहेला प्रतिमा नीष्टि राखवी। स्पष्ट दिशा शान करवातारो, अ-गोळ, चोखही, प्रण दिवसमा धान्य उगावनारी तथा पूर्व उत्तर-इशान दिशामा उतरनी भूमि मदिर माटे श्रेष्ठ छे। राफडा-पोल-फाट के शन्यपाळी भूमि भशुम । यानी फाची माटीना कोडीयामा चार दिया परना जे दिशानो दिवो धणी घार प्रकाशे ते दिशानी से भूमि सारी। भुमि मापना दोरीत्रुटे तो धणीनु मृत्यु, ठोकता खोलो घळी जाय तो रोग घटो पड़े श्रुटे तो स्मृतिमा ।
ઘરક થા [ 2 ] જ્યા ભાન અવારા 1 અયો છે ત્યા વૃસિવાયના અને સમજવા, જશ, કક્ષ, ૨ અને દખ્ય દીઘ અલગ અલગ નથી, તે એકજ સમજવા (૮થી ૧૮ નથ ન અનુક્રમે–ડ, હાથી અજ (બક), ૫, સ, શ્વાન (કુર), ગિડાલ, રાજ, શિયલ Cદર, ઉંદર, ગાય, મહિલ(પાડી, વાઘ, મહિલ, વા, હ ણ, હરગ પાન વાર, નકુવ (બીએ) નકુલ, વાદર, સિહ, અશ્વ, મિ હ, ગાય અને અમિત છે તેમાં પાણી–સિહ શ્વાન–હરિ અશ્વ–મહિલ, અજ–વાદર, નકુવ-સપ, ગાય-વાઘ તથા બિડાલ- ઉંદરને પરસ્પર વિર છે કેટલાક આચાર્યો આ કપનાને નિવક માને છે (૧૯૨૧) જન્મ નક્ષત તથા નામ નક્ષતથી અનુકર્મ નવ નવ તારા એ છે જે નણાર ગણવી માધચ્છી માધ્યની ૭૫૭ મી તારા અશુભ છે વિગેરે મા તારા જેવી કિ તુ પ્રતિકાપક પ્રતિમામા તારા જેવી નહી રાશિ પતિ- ગ્રડની મેની હાય એકતા હોય કે શુભવશ્યતા હોય તે પણ નષ્ટ તારા વધી (૨૨ 23) અશ્વિની, મૃગશર, પુનર્વસુ, પુષ્ય, હસ્ત, વાતિ, અનુરાધા, શ્રવણ અને રેવતીને દેવ ગણુ છે ભ ણી, હિળી, આદ્રા, રણવી, ત્રણઉત્તરાને મનુષ્ય ગણ છે (અજિતને વિદ્યાધર ગણ છે) બકિની નવ નક્ષને રાક્ષસ ગણુ છે સ્વગણમાં પ્રીતિ, દેવ નુષ્યમાં મધ્યમતા, દેવ રામમા પૈર અને મનુષ્ય ૨ ક્ષમમાં મૃત્યુ થાય છે રાશિફટ યોનિ તથા ગ્રામની શુભ હોય સામા મનુષ્ય ગણ હોય તે સાધકને રાક્ષસ ગણ પણ અશુભ નથી (૨૪ ર૭) અશ્વિનીથી ક્રમે અને ઉક્રમે સ્થાપવા ત્રણ ત્રણ નક્ષત્રની નાડી થાય સાધક સાધ્યને નક્ષત્રે એક નાડીમાં આવે તે એકદમ અશુભ ગુરૂશિષના નક્ષને એક નાડીમાં આવે તે શુભ છે આ રીતે થયેલ નાડીધા સારામાં સારા બળે પણ નાશ કરે છે જ્યારે ગુરૂ શિવને નાડીપ કઇ નિના બળને નાશ કરે છે સ્વામી, પપ્પા, મિન, દેશ ગામ, પુર તથા ઘર એક નાડીમા હેય તે શુભ છે વેધ રહિત હોય તે અશુભ છે (૨૮૩૦) એક નક્ષમા જમેવ બીજાઓમાં ભારે પ્રેમ રહે છે મામ વર કન્યાને હાનિ વર કન્યાને રાશિદ હેય તે એક જ નથી (૩૧) અન્યમા નાડી અશુ છે, રાશિ ભેદ છે બાર પતિવાળા નાડીચક્રમ- થા કિતીથી પ્રારંભીને અનુક* પશ્ચિમ રેગ થાય છે જે વિવા થાય છે - છે. પણ
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[ ૬ ] - અધ્યાય ૩, અક્ષર પ્રકરણ પરમેષ્ઠીને નમસ્કાર કરીને શિધ્રોધ માટે માધ સામ સબ ધી અક્ષર થાપના કરૂ છુ. (૧) નામનિ શરૂઆતમાં સવા કે બારાક્ષરી વ્ય જને હોય છે જેને રાશિ નક્ષત્ર અને વર્ગનામેળ પ્રમાણે જુદે જ કરવા આવી રીતે અવગ શશિ નક્ષત વર્ગના યોગથી જે સમડ થાય તેને સ્થાપી તેના દરેક અક્ષરની પતિએ તેનાજ નક્ષત્ર વિગેરે સમજી શકાય તેમ લખવા (૨૩) આ રીતે આ ઈ એક કુકે આ ખ ગ ગુગ ઘ ચ ચુ છ જ ઝ ટ કે ટ ઠ ડાડી ધ ણ તાતિ ત થ દદિ દુદે ધા ન ન પ , પ ફ બ બે ભા ભુ ભે એ ય ય રા રૂ લા લા લાવે શ ષ સ સે હા હિ હુએ ૬૪ બારે થાય છે અહીં નહીં કહેલ અક્ષર પૂર્વના (કથિત) અક્ષરો સાથે જાણવા દવ દઈ એકજ છે જે દરેકના નામમાં રહેવા છે (૫૭) સાધક સાધને યોગ જવાની ઇરછા થતા આ કંઠાથી જલદી જ્ઞાન થાય છે (૮) અધ્યાય ૩ જે સમાસ (૯) અધ્યાય ૪, અ ઉ એ કે ચક પ્રકરણ પરેશને નમીને સાધક સાધ્યની સિદ્ધિ માટે માત્ર અક્ષરનું અ ઉ એ કે (૧) દરેકે બાર કોઠા અકડ મ ચક્ર માન્યું છે તે જ મણે ભાગે નાનું કરી આ ચક બનાવુ છુ (૨) ચાર કેઠામાં અનુક્રમે સિવાયના સ્વર અને મૂળ વ્યાજનો લખવા છે , ને રમા અને ૧ લને લમા લેવા (૩૪) આ રીતે પ્રત્યેક કેડામાં બાર અક્ષરે આવશે, તેથી સાધક સાધ્યને વેગ કર આ ચક ખાસ કરીને દેશ કિલે પુર ગામ દવા મ દેવ શેઠ નોકર જન અને શતુ માટે જવું (૫૬) વિવાહ શુભકાર્ય લાભકાર્ય અને પ્રહ ગેચરમાં જન્મનું નામ જેવુ અને ઘર ગામ ખ ખેતર વ્યાપાર તથા ? રાજ દર્શનમાં હુતાપનનું નામ જેવું (૭૮) સાધકને ૧ ૨ ૩ ૪ કઠાના અક્ષરે સાથે અનુક્રમે બદ્ધિ સાધ્ય સિદ્ધિ અને શત્રુ ગ છે જેના ફળ અનુક્રમે દીર્ધકાળે સિદ્ધિ સશય શિપ્રસિદ્ધિ અને કાર્ય વિનાશ છે . (૯૧ ) અધ્યાય ૪થે સમાપ્ત (૧૧) } ' T [ s ] અધ્યાય ૫, પૃષ્ણભગ પ્રકરણ મસ પરમેશ્વરને શુદ્ધ પ્રેમવો નમુ ૭ પૂજ્ઞાની કલિકાલ સર્વન શ્રી હેમચઢ સરિને સ્તવુ છુ પરમ પવિત્ર ગુરૂ શ્રીમદ ચારિત્રવિજયજીને પ્રેમથી નમીને મ પૂર્ણ ભાગવાળ તીર્થ કરને ધારણ યંત્ર કેહે કરુ છુ (૧૨) આ સ્થાપક આચાર્ય મુનિ, શ્રાવક કે નગરને યા તીર્થ કર શ્રેષ્ઠ છે ? એ પ્રશ્નને ઉત્તર પ્રસ્તુત કે હાથી દેવ અમુક મઘને કયા તીર્થકર શુભ છે એ જેવુ નહીં (૩, હીર પ્રશ્ન) ભિન્ન ભિન્ન રાશિ નક્ષત્ર અને વર્ગથી તારવેલા સાધકના ૬૪ અક્ષરે તથા નિ વિગેરે એકેક પત્રમાં લખવા પછી દરેક પત્રમા ર૪ તીર્થકર અને તેના ગોનિ વિગેરે ગોઠવવા આ રાતે ૧૫૩ કેઠા થાય છે તેથી વિકિએ સાધક જિનને યોગ સાધ (૪૬) નવીન જિન બિ બ જોવામાં ઉત્તરોત્તર બલા વાળી નિ વર્ગ લેણદેણ ગણ રાશિ અને નાડી એ છ બાબતો તપાસવી તારા જોવાની ખાસ જરૂર નથી વૈરમા કુર બળવાન છે, ભ( નક્ષત)મેધ મધ્યમ છે. પાદવેધ અતિ દુષ્ટ છે પછી પછીના ખરાબ હેય તે પેગ વર્ષ માટે પોપકારી પુરૂ એ શતગ લે (૯) દરેક તીર્થ કરે છે કે ભાવ વૃદ્ધિના હેતુ રૂપ છે તે પણ એક નિમિત્તેવી ઇષ્ટ કર્યું અધિક ગુણ વાળુ બને છે (૧૦) અધ્યાય ૫ મે મામાપ્ત (૧૧) પ્રાપ્તિ વિ મારા હૃદયમાં વીર હે મહાવીર હે વીતા ડે (૧૨) ગુણની ખાણ૩૫ તપગચ્છના આચાર્ય પરમપવિત્ર ચારિતદેશક લોકમાન્ય શાત મૂર્તિ શ્રી વિજયમલસૂરિ હતા (૧૩) તેની પાટપર શ્રી વિજયકેશર- ચૂરિ છે જેના લઘુ ગુરૂ બધુ શાતમૂતિ શ્રી વિનયવિજયજી મહારાજ છે (૧) શ્રી વિનયવિજયજી મહારાજના શિષ્ય શ્રી વિજયજી જૈન ગુરૂકુલના સસ્થાપક બાલ બ્રહ્મચારી સ્વર્ગસ્થ પૂજ્ય મુનીશ્વર શ્રીમદ ચાર્ષાિવજયજી મહારાજ થયા (૧૫) તેમના પદકમલમાં શામૃતને પીનાર ભમર સ જ્ઞાન રક્ત ભિમુ દશનવિજયે સરલ બનાવી ક અને
વાગે આ મૃત ગતિધાણુ બનાવ્યા છે (૬) મનુષ્યોને આ ન થી
અનુક્રમ નધિવાદ જિન પ્રતિષ્ઠા જિન પુન સમયની ભાવના ચારિત
અને નિર્જ પ્રાપ્ત થાઓ (૭) વી નિવાણ સ ૦ ૨૮૫૬ ૧ ની પુનમે
અમેખતીર્થમાં આ નથ પર કર્યો છે આ શાસ્ત્ર મુનિ જ્ઞાન વિજય
મુનિ ન્યાય જિયના મડકારથી સરળ બન્યા છે તે નાનઓના આનદ માટે
જ્યાં સુધી એક પ્રી અને નય છે ત્યા સુધી ચિકવ ર (૧૮૧૯)
દિનશુદ્ધિ દીપિકાની વિશ્વપ્રભા વિશ્વરચનાખધ એકાક્ષરવ વિનયમમુદ્રિ
કદ અને પૂજા એ પછી આ રાક પ્રમાણ વારણાલ એ છે (°
ઘનું કરણ જૈન ધર્મનું મગળ હે નાનનું ગ્રથનું ભદ્ર કે દરેક
શિવ હે (૨૬) ઈતિ બૃહદ્ધારણ ન થામ સમાપ્ત
છે.
તાવ ર
૬૩૧
શરદ પુનમ
ક, કેનીંગ સ્ટ્રીટ કવકત્તા
છે
લી
મુનિ દર્શન કર્યા
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