Shree Jubilee Naagari Bhandar Bikaner

Ginee Pig

Mohit Chatarji · 2011/03

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गिनीपिग
मोहित चटर्जी
अनुवाद
सान्त्वना निगम
राधाकृष्ण प्रकाशन

१६७५
हिन्दी अनुवाद : सान्त्वना निगम
नई दिल्ली
इस हिन्दी अनुवाद एवं इस नाटक के प्रदर्शन के सर्वाधिकार
अनुवादिका सान्त्वना निगम के पास सुरक्षित है, और अनुवाद का
किसी भी प्रकार का उपयोग अथवा नाटक करने के लिए उनकी
अनुमति लेना आवश्यक है। पत्र-व्यवहार का पता : सान्त्वना
निगम, एच ३०२ न्यू राजेन्द्र नगर, नई दिल्ली-११०००६
मूल्य: ५ रुपये
प्रकाशक
राधाकृष्ण प्रकाशन
२ अंसारी रोड, दरियागंज
दिल्ली-११०००६
मुद्रक
भारती प्रिंटस
म-१६, नवीन शाहदरा
दिल्ली-११००३२

पात्र
पहला
दूसरा
तीसरा
लड़की

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क्रम
निदेशक का वक्तव्य:
राजिन्दर नाय
पहला दृश्य
: १३
दूसरा दृश्य : ३४

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निदेशक का वक्तव्य राजिन्दर नाथ १६७१ का वर्ष । पूजा के दिन । कालीबाड़ी में एक नाटक 'राजरक्त' थियेटर वर्कशाप (कलकत्ता) द्वारा खेला जाने वाला। उससे कई दिन पहले इस नाटक को देखने का आग्रह, कलकत्ता के कुछ मित्रों द्वारा। हजारों दर्शको मे मैं भी एक । स्थान ऐसा मिला जहां से कभी-कभी कोई पान नज़र आता और अकसर लाल रोशनी। कुछ ही क्षण देख पाया । दूसरे दिन शाम को नाटक के अभिनेता-निदेशक विभास चक्रवर्ती और दूसरे अभिनेताओं से लम्बी बातचीत हुई और उसी बातचीत के दौरान मन-ही-मन नाटक को खेलने का निश्चय किया। जब बंगला का आलेख मिला तो पहली बार यह मालूम हुआ कि नाटक 'राजरक्त' के नाम से नही बल्कि 'गिनीपिग' के नाम से छपा है। 'गिनीपिग' और 'राजरक्त' का आलेख एक होते हुए भी बाद मे जोड़े गये कुछ अंशों के कारण नाटक के दृश्य में आमूल परिवर्तन हो गया। गिनीपिग के मूल आलेख के प्रारम्भ और अंत मे कुछ पंक्तियां और जोड़ी गयी । आरंभ की पंक्तियों मे 'दूसरा' व 'तीसरा' अखवार की सुखियां पढने की तरह राजा साहब के राज्य में व्याप रहे हिंसा, भ्रष्टाचार, दमन का उल्लेख करते है। अंत मे जोड़ी गयी पंक्तियो मे 'पहला', 'तीसरा' और 'लड़की' विद्रोह की भाषा और स्वर में राजा साहब को मारने की तैयारी करते है। जिस खूबी और काव्यात्मक ढंग से नाटककार ने इस नाटक में सत्ता के दमन के बंदलते-बिगडते रूपों को दर्शाया है वह अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। मेरे विचार मे वाद में जोड़े गये अंश नाटक की पूरी शैली के बिलकुल विपरीत हैं। शायद कलकत्ते में ये इसलिए जोड़े गये ताकि नाटक को वहां के दर्शकों की रुचि के अनुकूल बनाया जा सके। मैंने यह निश्चय किया कि मूल आलेख यानी 'गिनीपिंग' का ही उपयोग करना उचित होगा। पहले प्रदर्शन से कुछ दिन पहले आलेख में दिये गये अंत को बदल देने की बात 8 मन मे जोर पकड़ती गयी और प्रदर्शन से दो दिन पहले अंत बदल दिया । वह अंत था: "लूसी खून तेरा भी पीछा कर रहा है। भाग मेरे साथ आ-~ -बहुत आहिस्ते-छुप कर" 'दूसरा' यह संवाद बोलता हुआ मंच से चला जाता है। उसके बाद मंच पर जब रोशनी आती है तो नाटक के शुरू के एक दृश्य को बिना संवादों और एक 'बड़ी तबदीली के साथ दोहराया जाता है । राजा की कुर्सी पर अव 'दूसरे की जगह 'पहला' बैठा है । 'तीसरा अपनी जगह हाथ बांधे खड़ा है और 'पहले' की जगह 'चौथा' (यह पान आलेख में नहीं है) हाथ में जूता लिये 'नील डाउन' हुआ खड़ा है। इसी के साथ परदा गिरता है। इससे मेरा मकसद यह था—आप इसे मेरीनिजी टिप्पणी भी कह सकते हैं- कल के क्रांतिकारी आज के अधिनायक बनते हैं और वे अपने खिलाफ़ नये क्रांति- कारियों को जन्म देते है इतिहास इस बात का साक्षी है। इस परिवर्तन से एक बहुत बड़ा विवाद उठ खड़ा हुआ। दो प्रश्न जो मुख्य रूप से उठे, वे थे : (१) क्या निदेशक को नाटक को बदलने का अधिकार है ? (२) क्या यह अंत नाटक की आत्मा के विपरीत नही है ? पहला प्रश्न बहुत पेचीदा है और इसका उत्तर हो या ना में नही दिया जा सकता। दूसरे प्रश्न के कथन मे, बाद में कुछ सच्चाई नज़र आयो । इस अंत से जो मैं कहना चाहता था वह अपने आप में एक सच्चाई होते हुए भी उसके बिलकुल विपरीत है जो यह नाटक कहना चाहता है। बहरहाल प्रदर्शन हो चुके थे और नाटक को फ़ौरन दुबारा खेलने की कोई योजना नहीं थी। इसलिए उस मौके का इंतजार करना ही मुनासिब समझा जब कि नाटककार से मिल कर ही इस बारे में कोई निर्णय लिया जाय, क्योंकि जो अंत आलेख में है वह मुझे पसंद नहीं। (मालेख ज्यों का त्यों छापा जा रहा है, वह तमाम संवाद भी जो प्रस्तुति में काट दिए गये थे1) जब नाटककार से भेंट हुई तो यह निर्णय हुआ- नाटककार को मेरा दिया गया अंत बिलकुल मान्य नही था, आलेख में दिया गया अंत मुझे पसंद नहीं था इसलिए मैंने एक और सुझाव दिया कि नाटक का अंत कुछ ऐसे हो : 'दूसरा' उस दृश्य में जब खून उसका पीछा कर रहा है मंच से बाहर नहीं जाता और अपनी कुर्सी के इर्द-गिर्द तेजी के साथ चक्कर लगाता रहता है, और इसी के साथ पर्दा गिर जाता है। इसके लिए नाटककार ने अपनी अनुमति दी और उसके बाद जब भी नाटक खेला गया, इसी अंत के साथ। दो शब्द मंचसज्जा के बारे में जिसकी बहुत चर्चा रही। बहुत सादा होते हुए १० भी बिलकुल अनोखी। मंच-मध्य मे एक बहुत ही आलीशान कुर्सी जिसको पूरे नाटक मे सिर्फ 'दूसरा' यानी राजा इस्तेमाल करता है और सिर्फ एक बार पहला' जब वह यह समझता है कि उसने राजा को मार दिया। इसके अलावा एक-एक 'क्यूब मंच के चार भागों मे और सारे मंच पर पोलिथीन की चादरें लटकी हुई जिनसे नाटक के 'मूड' के अनुकूल वातावरण वनता था। दिल्ली साहित्य कला परिषद द्वारा 'गिनीपिग' को उस वर्ष का सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति का पुरस्कार मिला और इसमें भाग लेने वाले दो अभिनेताओं-कुलभूषण खरबंदा और कीमती आनन्द को अभिनय के पुरस्कार भी मिले । एक स्मृति जो इस नाटक के प्रस्तुतिकरण के साथ जुड़ी हुई है वह है लगभग खाली प्रेक्षागृह । ऐसे नाटक बहुत कम होते हैं जिनके हो जाने के बाद एक गहरी संतुष्टि का अनुभव हो । 'गिनीपिग' मेरे लिए उन बहुत कम नाटकों में से एक है । ११

मोहित चटर्जी द्वारा लिखित तथा सान्त्वना निगम द्वारा
हिन्दी में अनूदित इस नाटक का हिन्दी में सर्वप्रथम
प्रदर्शन 'अभियान' दिल्ली द्वारा फाइन आर्टस थियेटर,
नयी दिल्ली में ६ मई, १६७२ को हुआ।
निदेशक
राजिन्दर नाय
दृश्यबंध
अशोक भट्टाचार्य
आलोक
सिताशु मुकर्जी
..
पाम
अनिल राहगल
पहला
दूसरा
तीसरा
साकी
युलभूपण परवंदा
श्रीमती आनन्द
घेतना तियारी
१२

पहला दृश्य एक कमरा। पीछे की दीवार के बीचोंबीच एक ढाल टंगी है और उसके दोनों तरफ़ दो बंदूकें आड़ी रखी हुई हैं। एक तरफ़ एक बहुत बड़ा कंकाल लटक रहा है। दूसरी तरफ़ एक हैंगर पर दो-एक पेंट, फमोज, टोपी, कोट लटकाये हुए हैं जिन पर खून के धब्बे हैं। कुल मिला कर पूरा कमरा सन्नाटे से भरा कुछ रहस्यमय-सा दीखता है। बिलकुल ही वास्तविक रूप की आवश्यकता नहीं है। एक मेज, दो-तीन फसी कुसियां । एक फैलेंडर । मेज के एक कोने पर रखी एक अच्छी-सी छड़ी। दर्शकों की ओर पीठ किये हुए दूसरा और तीसरा। दोनों निःशब्द, दबे पांव चीजों को झाड़-पोंछ कर ठोक जगह रख रहे हैं। दोनों एक ही तरह से चीजों को रखने के बारे में काफ़ी सावधानी बरत रहे हैं। पहला व्यक्ति मेज पर ठोढ़ी टिका कर दर्शकों की ओर टकटकी लगाये डरा हुआ-सा देख रहा है। उसने दोनों बाँहों से मेज के दोनों किनारों को कस कर पकड़ रखा है । पर्दा उठने के बाद कुछ देर तक ऐसा ही रहता है। फिर अचानक घड़ी का अलार्म तीखी आवाज करता हुआ बज उठता है। पहला अपने दायें हाथ में पकड़ी एक काल्पनिक -छुरी धीरे-धीरे ऊपर उठाता हुआ आंखों के आगे से ले जाता है। खड़ा हो जाता है । वेहरा उत्तेजित है। अलार्म रुक जाताहै। पहला : खून, खून! छुरे से अभी तक खून की बूंदें टपक रही है। राजा साहब का खून 1 जैसे लाल सिंदूरी बादत पिघल-पिघल कर चू रहा हो। दरवाजा बंद कर दो, राजा साहब का संतरी आयेगा। दरवाजा बंद कर दो ! (फिर अलार्म बज उठता है । सब चुप हैं।) आ ऽ आऽ मुझे पकड़कर ले जायेंगे। गिनीपिग : १३ बेहोश-सा मेज पर अपना सिर टिका देता है। तीसरा : (यहुत शांत । बंदूक झाड़ते-पोंछते हुए) फिर शुरू हो गया। दूसरा : (शांत हंटर पोंछते हुए) शुरू हो गया। तीसरा : इस अलार्म वाली घड़ी को हटा कर रखना बेहतर था। दूसरा : राजा साहब की कोठी में से कोई चीज हटाने की इजाजत नहीं है। तीसरा : आज उसकी आंखें और भी लाल हो गयी हैं। दुसरा : देखते ही राजा साहब दस हंटर लगाने का हुक्म देंगे। तीसरा : अब भी आँखों की कद्र करना न सीखा। मेरी आँखें देखो। (उसके पास भा कर अपनी आंखों को खोल कर दिखाता है।) सफेद, जरा भी लाल नही हैं । (दूसरे की आँखों में भय मलकता है। ) क्या हुआ? क्या हुआ, बताओ न ? दूसरा : मेरी आँखें देखो । ( दिखाते हुए।) बिलकुल सफेद, जरा भी लाल नहीं हैं । नहीं न? तीसरे की आँखों में भी डर पलकता है। फिर दोनों एक साथ हंस उठते हैं और अपने काम में लग जाते हैं। तीसरा : दस हंटर खाने से आंखों में पानी भर जायेगा । धुल-पुंछ कर आँखें जरूर सफ़ेद हो जायेंगी । है न, भई ? दूसरा : यह सब राजा साहब के हंटर की करामात है। तीसरा : (तारीफ़ करते हुए) जैसे जादू जानता हो। दूसरा : क्या बढिया आवाज है ! चटाख-पटाल...! तीसरा : इसके अलावा खाल पर पड़े निशान कैसे अपने आप मिट जाते हैं ! दूसरा : जल्दी-जल्दी सब संवार लो । राजा साहब अभी आते ही होंगे। तीसरा : जहाँ जो चीज़ थी, वही रख दी है। राजा साहब आज बख्शीश देंगे। दोनों बच्चों की तरह ताली बजा-बजा कर अपनी खुशी जाहिर करते हैं । पहला धीरे से सिर उठाता है। पहला : (चीख कर) स्टाप, स्टाप...! में दोनों ताली बजाना बंद कर देते हैं और अपने-अपने कामों में लग जाते हैं। पहला : (चीख कर) स्टाप...स्टाप...! व मा कर देखते हैं अचानक घुप्पी घिर आती है। दूसरा : फिर शुरू हो गया। तीसरा : मुझसे नही होगा। आज मैं इस खेल में शामिल नही हूँगा। पहला : कमरे का सब कुछ उलट पलट दूंगा। कलेंडर खींच कर उतारता है और मेज पर पटक देता है। १४ : गिनीपिंग घड़ी जमीन पर रख देता है । कंकाल को छूने लगता है... वे उसे रोकते हैं। पहला : मुझे हाथ न लगाओ। मैं आजाद हूँ। किसका डर है ? राजा साहब को मैंने मार दिया है, अब किसका डर है ? दूसरा : जहाँ को जो चीज है, वहीं रहने दो। राजा साहब आने वाले हैं । वह बेहद नाराज होगे। तीसरा : हंटर नहीं । अबको बार बंदूक । बुलंट। पहला : बुलट ? (हंस उठता है ।) कसी बुलैट ? उस छुरे पर किसका खून है ? (दूसरा घड़ी मेज पर रखने की कोशिश करता है।) हाथ मत लगाओ। घड़ी वहीं रहेगी। अब से मेरा हुक्म चलेगा। दूसरा : राजा साहब का अपने हाथों से सजाया कमरा । कोई इसका कुछ नहीं बदल सकता...यह कमरा कभी नही बदल सकता। पहला : इस बुड्ढे को मैं जान से मार डालूंगा। राजा साहब का कुत्ता कुत्ता! तीसरा : फिर उसी खेल को शुरूआत । (कैलेंडर उठाने लगता है।) इसे उठा- कर रखता हूँ। राजा साहब आ पहुंचे तो अच्छा नहीं होगा। पहला : खवरदार, हाय लगाया तो! (मपट कर गर्दन पकड़ लेता है।) स्पाई। मेरी सब बातें तू राजा साहब तक पहुँचाता है, क्या मुझे नही मालूम ? क्या मैं यह समझ नहीं सकता? (धक्का मार कर गिरा देता है।) शरीर से राजा साहब के कुत्ते की बू आ रही है । (चिल्ला कर) मेरा हुक्म है, कमरा बिलकुल उलट-पलट कर दो। सब चीजें बिखेर कर तहस-नहस कर दो। तोड़ो। सब कुछ तोड़ डालो। फिर कमरे को अपनी मर्जी से सजायेंगे । बिखेर दो सब कुछ...! दूसरा : हुक्म नहीं है। पहला : मेरा हुक्म है। तीसरा : यह कमरा बदला नही जा सकता। पहला : मेरा हुक्म है। दूसरा : जो चीज़ जहाँ है, वही रहेगी। पहला : (बहुत जोर से चीख कर) मेरा हुक्म है। दूसरा : तुम हो कौन? पहला : मैं ? मैंने राजा साहब को मार डाला है। अब इस कमरे का हुलिया बदल दूंगा। मैं कोई बेकार का आदमी नहीं हूँ। मुझमें घृणा है, रोष है, इच्छा है-मैं हूँ कौन ! तुम लोगों को काटने पर खून तक न निकलेगा-मिट्टी चाटने वाले केंचुए ! मैं कौन हूँ? मैं राजा साहब का हत्यारा हूँ। तीसरा : (दूसरे से बिलकुल कल रात को तरह । माज मैं इस खेल में शामिल नहीं होऊंगा। दूसरा : पर अब रोकना मुश्किल है । इसने तो शुरू कर दिया। तीसरा : मुझसे नहीं होगा। अब और अच्छा नहीं लगता यह सब । दूसरा : पर इसने तो शुरू कर दिया है। तीसरा : फितना भयंकर सेल है ! दूसरा : उसकी आँखें कल ही की तरह लाल हैं। वह अभी बगल वाले कमरे मे से उसे बुलवा लेगा। तीसरा : लड़पी थकी हुई है। आज के इस खेल से उसको और भी तकलीफ होगी। रोज-रोज और कितना सहेगी? दूसरा : वह ज़रूर अभी उसे बुला लेगा। कल भी ठीक इसी समय बुलाया था। तीसरा : (पागलों की भांति) ए, मुनो ! मैं इस खेल मे नही हूँ। रोज-रोज मुझसे नहीं होता। मेरी उम्न वढनी जा रही है, और कितने दिन ? जब तक हो सके इस कमरे की चौकसी करता रहूँगा। जहां पर जो कुछ है, बिलकुल उसी तरह छोड़ कर चला जाऊँगा। (पहला उसकी ओर देखता है। तीसरा कुछ अटपटा-सा महसूस करता है।) यही मेरा आखिरी फैसला है। मैं अब इस तरह के खेल में नहीं शामिल होऊँगा। मैं जा रहा हूँ। पहला . कहाँ ? तीसरा : अपने काम पर और कहाँ ? कमरे की सब चीजे झाड़-पोंछ कर नही रखनी हैं ? पहला : (काल्पनिक छुरा उठाता है।) इमे झाड़-पोंछ कर नही रयोगे? तीसरा : ए, इसे हटाओ ! मैं कहता हूँ, हटाओ इसे । दूसरा : राजा साहब देखेंगे तो शामत आ जायेगी। इस बार हंटर नही, बुलट । पहला : (हंस उठता है।) बुलैट । राजा साहब कहाँ है ? (हसता है ।) वुलेट, ऐं? टू लेट भैया, टू लेट । तीसरा : आज तुमने कोई भी काम नहीं किया। (एक बहुत बड़ा जूता लाते हुए) जूता पालिश तक नही किया। पहला : (डर कर) हटा दो-~मैं कहता हूँ छुपा कर रखो । मैं इसे नही देखना चाहता । राजा साहब नहीं है । मरे हुए आदमी का जूता । मुझे डर लगता है। तीसरा : (हाय में पकड़ा जूता दूर से ही हिलाते हए) विलकुल पालिश नहीं है इस पर । कितने दिन से इस पर पालिश नहीं की। धूल जम गयी है। . १६ : गिनीपिग पहला : (आंखों पर हाथ रख कर) छुपा कर रखो इसे छुपा कर रखो, मरे हुए आदमी का जूता! मुझे डर लगता है। दूसरा : देखो, तुमने ही खेल शुरू किया है । (हंगर से उतार कर एक टोपी सिर पर रख कर जल्दी से एक कोमती कोट पहनते हए)हाँ, तुम्ही ने रोल शुरू किया है। तीसरा : तुम तो इस भी पहने ले रहे हो। ऐं, ड्रेस भी पहन ली! (हंस कर) ऐसी-वंसी नहीं, युद राजा साहब की ड्रेस है इस खेल को खेलने का लोभ तुम्हें भी कुछ कम नहीं है । विलकुल राजा साहब की तरह दीख रहे हो। दूसरा : अभी वह लड़की को बुलायेगा । तीसरा : तो सचमुच सेल शुरू हो ही गया। दूसरा : बिना सेले कोई चारा नहीं है। तीसरा : मर जाता तो छुट्टी मिलती। दूसरा : स्टार्ट ! तीसरा : स्टार्ट! दूसरा : (पहले की ओर इशारा करके) वह छुरे को अपनी कमर में खोंस कर रखेगा। चेहरा शांत । मौका मिलते ही राजा साहब के पीछे से छुरा उठा कर...बस...! पहला उपरोक्त संवाद का अभिनटन करता है। तीसरा : ठीक है । शाबाश! वढ़िया कर रहा है । है न? अब शुरू करना चाहिए। सव रेडी? दूसरा : लड़की? तीसरा : वह तैयार है। दूसरा : (चिल्ला कर) रेडी? बाहर से एक लड़की की आवाज : रेडी। दूसरा : स्टार्ट ! दूसरा एक सीटी बजाता है । फमरे की रोशनी बदल जाती है । दूसरा मंच से बाहर निकल कर तुरंत ही लौट कर धीरे से प्रवेश करता है । अब वह राजा साहब है । यहाँ आलेख में राजा साहब न लिख कर 'दूसरा' लिखा जा रहा है। राजा साहब को बातें स्नेहभरी आवाज में कही जायेंगी। जरा भी रोप या तेजी नहीं झलकेगी। संवादों को बोलने का अंदाज तथाकथित खलनायक की तरह नहीं होना चाहिए। चरित्र के मूल उद्देश्य के साथ-साथ अभिनय में .. गिनीपिग १७ कंट्रास्ट दिखाना पड़ेगा। बुढगं अभिभावक का स्नेहपूर्ण भाव लक्षित होगा। इसी बीच पहला अनिच्छा के बावजूद जूता पालिश करना शुरू कर देता है। जोर-जोर से बुश मार रहा है। दूसरा : कैसा चल रहा है सब? तीसरा : आपके आशीर्वाद से सब ठीक ही चल रहा है। दूसरा : यह तो अब तक पालिश-एक्सपर्ट नहीं हुआ। आदत पड़ जाने से इतना जोर नहीं लगाना पड़ता । काम करने के साथ ताल मिला कर थोड़ा- थोडा झूमने से ही ठीक हो जाता है। (पहले से) यू स्टैंड अप ! पहला 'नील डाउन' हुआ रहता है । दोनों हाथों में दो बड़े- बड़े जूते। दूसरा . नही, एकदम बुद्धि भ्रष्ट नहीं हुई। खड़ा होना सीख लिया है। बड़ा अच्छा लग रहा है। तीसरा : थोड़े दिन यहां रहने के बाद और भी स्मार्ट दिखेगा। हमारी तरह बूढा थोड़े ही है। इन सब मामलों में वॉडी का फिट होना जरूरी है। दूसरा : क्या तुम उसकी तरफ से बोल रहे हो ? तीसरा : नहीं, सर! दूसरा : (पहले से) काम-काज कैसा लग रहा है ? पहला : आपके आशीर्वाद से अच्छा ही लग रहा है, सर ! दूसरा : घड़ी मेज़ पर क्यों नहीं रखी है ? पहला : ठीक से रख रहा हूँ, सर! घड़ी उठा कर पहले वाली जगह पर रख देता है। दूसरा : कैलेंडर? पहले वाली जगह पर रखता है। फिर 'नील डाउन' हो जाता है। दूसरा : (तीसरे से) जो चीज़ जहाँ को है वहीं पर है न ? तीसरा : हाँ, सर ! अब सब ठीक है। दूसरा : (निलिप्त भाव से) ये सब गलतियां क्यो हो रही हैं ? किसको गतती तीसरा : ठीक से लगा ही रहे थे कि बीच मे आप आ गये, सर ! जल्दी मे पूरा नहीं कर सके। दूसरा : मेरे आने के बहुत पहले से ही मेरे कदमों की आहट नहीं सुन पाते? पहता : बाहर शोर हो रहा था। सुनाई नही दिया, सर! दूसरा : शोर तो हर समय होता रहता है। पर वह शोर ही तुमको फ्यादा १८ : गिनीपिग क्यों सुनायी देता है ? यह धरती तेज आवाज करती हुई धूम रही है पर उसके चलने में कोई भूल तो नहीं हो रही है न ? इस धरती से हमें वहुत कुछ सीखना है। तीसरा : उन्होंने एक पत्थर भी मारा है, हुजूर! एक शीशा टूट गया है। दूसरा : धरती की उम्र कितनी हुई होगी? पहला . बहुत साल, हुजूर! दूसरा : उस पहले ही दिन से वे पत्थर मारना चाह रहे हैं...सानों बाद एक पत्थर आ गिरा-वेचारे ! थोड़ी सान्त्वना तो उन्हें चाहिए न । वह ठीक हो जायेगा। मन लगा कर काम करो । सब ठीक हो जायेगा। (पहले से) अरे! यह क्या? लगता है आंखें लाल-सी हो रही हैं। (प्यार से) क्या हुआ? लाड़ में आकर पहले का चेहरामान से भर जाता है और नर्म हो जाता है । दोनों हथेलियों से आंखों को पोंछता रहता है। दूसरा : (तीसरे से) देखो तो! रो रहा है क्या? तीसरा : रो रहे हो? पहला सिर हिला कर हामी भरता है। दूसरा : वाह, बहुत अच्छे ! होगा, तुम से होगा । अब बताओ, तुम सुखी हो ? पहला सिर हिलाता है। दूसरा : शब्दों से स्वीकार किया जाता है, ऐसे नही। स्वीकार कर रहे हो कि तुम सुखी हो? पहला : हाँ, सुखी हूँ। दूसरा : तुमने स्वीकार किया है कि तुम सुखी हो? पहला : याद नहीं है, मालिक ! दूसरा : याद करने की कोशिश करो। पहला : याद नहीं आ रहा, सर! दूसरा : (डॉट कर) स्वीकार करो, तुम सुखी हो। पहला : मैं सुखी हूँ। दूसरा : स्वीकार कर लेने के बाद अच्छा-सा नहीं लग रहा, क्यों ? पहला : कुछ समझ में नहीं आ रहा है, सर! दूसरा : स्वीकार करो। पहला : स्वीकार कर रहा हूं कि बहुत अच्छा लग रहा है। दूसरा : बहुत अच्छे ! (तीसरे से) क्या सोच रहे हो? तीसरा : स्वीकार करता हूं. मैं सुखी हूँ। दूसरा : तो ठीक हो हो । मन को बड़ी शांति मिली । अच्छा बताना जरा...! गिनीपिग : १६ : दोनों : स्वीकार करते हैं, हम सुखी है। दूसरा : में कह रहा था अगर तुम लोग.... दोनों : स्वीकार करते है, हम सुषी हैं । दूसरा : अरे, में जो कहना चाहता हूँ पहले सुन तो लो। मैं कह रहा था कि...। दोनों : स्वीकार करते है कि हम सुखी हैं। दूसरा : (दोनों को पीठ ठोक कर) शाबाश ! जोते रहो, बेटा! बिलकुल तयार । जीते रहो! एक लड़की दौड़ती हुई कमरे में घुस आती है। धवरायी हुई है। सब उसकी तरफ देखते हैं। लड़की : राजा साहब ! राजा साहब ! दूसरा : क्या हुआ? लड़की : पत्थर पड़ रहे है । कमरे में पत्थर पड़ रहे है। बाहर से वे लोग फेंक रहे है । खिड़की से झांक कर देखिये। दूसरा · अच्छा? वह वाली कविता वोलोतो। बोलो! उन लोगों को सुना- सुना कर बोलो । खिडकी के पास जाकर वोलो। लड़की : (खिड़की के पास खड़ी होकर) बुलट वंदना, रचयिता राजा साहब । (नमस्कार करके विज्ञापन पढ़ने की आवाज में।) बुलैट ! बुलट ! बुलट ! हर प्रकार की अशाति का रामबाण बुलैट ! बुलैट ! धुलैट ! करो इस्तेमाल एक बार ही तुरत मिलेगा इससे लाभ जल्दी और सदा के लिए सारे रोग जायेंगे भाग। बुलैट ! बुलंट! बुलेट! अच्छी कितनी, सस्ती कितनी नकली माल नहीं है भाई ट्रेडमार्क परखना चाहो तो है कोई नही मनाही। बुलंट ! वुलट ! बुलंट! दूसरा : वाह ! वाह ! (लड़को को हाय के इशारे से अता कर) प्यारी लड़की, अच्छी लड़की, आओ, आकर मेरे पास पड़ी हो जाओ। (लड़की के पास आने पर उसकी कमर में हाथ डालते हुए ) क्यों मई, सड़क के लोगों ने कविता सुनी ? २० : गिनीपिग पहला और तीसरा खिड़की से देखते हुए ताली बजाते हैं। तीसरा : जरूर सुनी है । कैसे नही सुनेंगे? क्या कविता है ! पहला : काफी दूर हटते जा रहे हैं । तीसरा : बिलकुल रेंज के बाहर। दूसरा : तो नजरों से ओझल नही हुए अभी? तीसरा : नही, हुजूर! दूसरा : हो जायेगे-वह भी हो जायेंगे । इसे कहते हैं शब्दग्रह्म । (लड़की के सिर पर उंगली से थपथपा कर ) है न, विटिया? (लड़की सिर हिलाती है।) अरे, उंगलियों तो वड़ो नर्म गुदगुदी हैं । जरा सिर तो । सहला दो। सड़की सिर पर हाय फेरती है। पहले का चेहरा तमतमाया दीखता है पर कोध छुपा लेता है । अचानक पहला जोर से चिल्ला कर सिर पर हाथ रखें बैठ जाता है। दूसरा : क्या हुआ? पहला : (फराहता हुआ-सा) सिर पर पत्थर लगा है---खून निकल रहा है। (लड़की की ओर देखता है। वह वैसे ही निर्विकार भाव से सिर सहला रही है।) देखती हो! खून ! दूसरा जोर से बुलाने की घंटी बजाता है। तीसरा पीछे जा कर जल्दी से एक पुलिस को टोपी हैंगर से उतार कर पहन लेता है। पेटी कस लेता है। फिर दौड़ कर आ कर राजा साहब को सलाम करता है। दूसरा : बाहर क्या हो रहा है? प्रशासन के नाम पर कुछ भी नही कर पा रहे हो। तीसरा : रोके दे रहा हूँ, सर! दूसरा : इतने पत्थर इन्हे मिल कहां से रहे है ? तीसरा : वे सारे के सारे पत्थर नहीं है, सर! दूसरा : यह सव मुझको समझाने की ज़रूरत नहीं। उन चीजो को पत्थर जैसा ही समझो । दुश्मन के हथियार को जितना तुच्छ मान सकोगे, उतनी ही तो तुम्हारी मानसिक शक्ति यानी कि अस्त्र-शक्ति बढ़ेगी । बोलो, वे क्या मार रहे हैं ? तीसरा : सिर्फ कंकड़ मार रहे है, सर ! दूसरा : वाह ! देखा न कसे ठीक बोलने लगे! बोलो, सात बार बोलो, विलकुल याद हो जायेगा। बोलो न, शर्म कैसी ? नफरत, डर और शर्म, ये तीन विगाड़ें कर्म। हाँ, यह बात हमेशा याद रखना । बोलो : गिनीपिग : २१ सात बार। तीसरा : (ताल से साल मिला कर) कंकड़ मार रहे हैं, कंकड़ मार रहे... हैं.... (सात बार बोलता है।) दूसरा : बहुत अच्छे ! मगर क्या कहना भूल गये बता सकते हो ? (लड़की से) तुम बताओ, यह क्या भूल गया? लड़की सिर खुजाती है और सोचती है। दूसरा : कुछ लिखाई-पढ़ाई नहीं कर रही हो। (पहले से) यू, वह क्या कहना भूल गया ? (पहला सोचता है पर पता नहीं पाता।) सब एक से- कैसे पास होगे, पता नहीं। तीसरा : याद आ गया, सिर्फ़ 'कंकड़ मार रहे हैं' कहा है। उसके साथ 'सर' शब्द नही जोडा। सर, ऐभोप्रिमट प्रोजिशन के इस्तेमाल में बड़ी गलती कर बैठता हूँ, सर! दूसरा : खर, चलो याद तो आया । सात दफा 'सर' कहो सुर मे । इससे याद हो जायेगा। तीसरा : (सारे ग म गाने की तरह सुर में आरोह) सर, सर... (अवरोह) सर, सर... दूसरा · वाह ! बहुत बढ़िया याद किया है। जाओ अब कंट्रोल रूम में बैठ कर जराप्रैक्टिस कर लो। और हाँ, रानी बेटी, ओ रानी विटिया ! लडकी ; कहिये। दूसरा : उसको तुम अपनी कविता को ट्र, कापी दे दो, बैठे-बैठे याद कर लेगा। पूरी याद करनी है। एक पंकवुयेशन को भी गलती होने पर नंबर काटे जायेंगे। पूरे नंबर लेने हैं तुमको । तुम पर मेरी संस्था को बड़ा भरोसा है। तीसरा आकर माजाकारी छात्र की तरह राजा साहब के पैर छूता है। दूसरा उसकी हड्डी छू कर अपनी उंगलियों को घूमता है । फिर जाने क्या सोच कर अपनी उँगलियों को संघता है। दूसरा : मीठी-मीठी गंध आ रही है । ठोढ़ी पर इन लगाया है क्या? तीसरा : (शर्मा कर) नहीं, सर, अंगूर का रस है, सर ! दूसरा : अच्छा, तो दारू की गंध है । एकदम सोडी भिगो कर पायी है। राजा बेटे ! लगता है गुह कंडक्ट का मंडल जवर्दस्ती ही हथिया लोगे। होगा, तुमसे होगा। मन लगा कर काम करो, जरूर होगा। तुमसे बहुत उम्मीद है। तो बच्चे, अंगूर तो बड़े महगे वाले लगते हैं। (सोसरा सिर हिलाता है।) हो, नजर ऊँची रषा करो। टेस्ट केपारघा फरो। २२ : गिनीपिग - - . तभी तो रिजल्ट भी अच्छा होगा न | अच्छा जाओ। ठोढ़ी को गंध तो बड़ी मीठी है, भाई ! मन उदास किये दे रही है जी। तीसरा : एक दिन आपके घर आऊंगा, सर! दूसरा : आना, जरूर आना। पर अकेले ही आना। सब के सामने तो सब बातें नहीं हो सकती न । अच्छा फिर आना...! तीसरा : चलूं, सर? दूसरा : चलूं, नही कहते । फिर मिलेंगे। तीसरा चला जाता है। नयो पोशाक उतार कर पहली पोशाक में आ जाता है। इधर-उधर की चीजें माइता- पोंछता रहता है। पहला भी वही करता है। दूसरा : देखा लड़के को ? आदर्श लड़का है । लिखाई-पढ़ाई के सिवाय कुछ नही जानता। (पहले से) पढ़ाई-लिखाई कसी चल रही है ? पहला : चला रहा हूँ, सर ! दूसरा : (लड़की सें) तुम? लड़की : रात-दिन पढ़ तो रही हूँ। पर सब-कुछ याद नहीं रहता। दूसरा : दरअसल पढाई-लिखाई क्या है, जानते हो? यह एक तरह का ऐसे- स्मैट है। जो कुछ मैं सिखा रहा हूँ उसे कहाँ तक ग्रहण कर सके हो, यही असली बात है। तुम पूछ सकते हो आप क्या सिखा रहे हैं ? तो जवाब है जो कुछ मैंने सीखा है, वही सिखा रहा हूँ। इसका मतलब हुआ-सबसे पहले किसी ने कुछ न कुछ सीखा था उसी का ऐक्सटेंशन है एजुकेशन । समझे? पहला : हाँ, सर, एजुकेशन है ऐक्सटेंशन ऑफ़ लाइफ । दूसरा : अरे रे रे, यही पर तो ग़लती करते हो । एजुकेशन है ऐक्सटेंशन ऑफ़ एजुकेशन, जिसका मतलब है रिपिटिशन ऑफ रिपिटिशन । यानी कि एक ही चीज को दुहराते-दुहराते चलते जाना। नहीं समझे ? लड़की : अव समझी, सर ! दूसरा : बिलकुल पानी की तरह साफ हो गया है न ? लड़की : सर, हमारा रिजल्ट कव निकलेगा? दूसरा : जल्दी ही निकलेगा। लिखा तो बहुत है। मैंने देखा, बहुत सारे शीट लिये है तुमने । स्पीड अच्छी है तुम्हारी...! लड़की : सर, तीसरा प्रश्न ठीक याद नहीं था, सर, इसलिए.... दूसरा : हां, देखा है। बस रटा करो अच्छी तरह । तुम्हारा यही डिफेक्ट है, कि बीच-बीच मे ओरिजिनल कुछ लिखना चाहती हो । अरे, अगर ओरिजिनल ही लिखना है तो फिर मैंने क्या सिखाया--और मेरी गिनीपिग : २३ किता वगैरह भी किस काम को ? तीसरा : मैंने, सर, ओरिजिनल और रटा हुआ दोनों को ही एवायड किया - दूसरा : राइट ! बुद्धिमान लड़के हमेशा ऐसा ही करते हैं। जहां तक मुझे याद है तुम्ही को हाइएस्ट नंवर मिले है। तीसरा खुशी से पुलकित है। लड़की का मुंह उतर जाता है। वह सिर नीचा करती है। पहला एक बार उनको देखता है । अपनी कमर पर हाय फेर कर कुछ महसूस करता है । काम करता रहता है। दूसरा : अरे, क्या हुआ रानी विटिया को ? मुंह क्यों लटक गया? आओ, पास आओ ! (खुद हो पास चला जाता है। पीठ पर हाथ फेरता है।) तुम कर लोगी। प्रोग्रेस कर रही हो। (अपना बायां हाय लड़को को कमर में डाल देता है।) बहुत जबर्दस्त प्रोग्रेस कर रही हो। (लड़की अपने को छुड़ाने की कोशिश करती है।) पर हाँ, शरारत बिलकुल नहीं करोगी। जितनी आज्ञाकारी बनोगी, देखना, उतनी ही उन्नति होगी। इस देश से यह गुण ही तो गायव होता जा रहा है । (दूसरा हाथ लड़की की गर्दन के पास फेरता जाता है। लड़को सिटपिटाती है।) प्यारी मुनिया...(गहरे आवेग से) प्यारी...! लड़की : (डरी हुई) कहिये। पहला उन दोनों को देखता है । चेहरा क्रोध से भर जाता है। तीसरा काम में मन लगाता है। दूसरा : मेरी मीठी मुनिया ! गला विलकुल खाली है.--जेवर विना यह गला बिल्कुल नही सोहता...। लड़की : (छुड़ाने की कोशिश करते हुए) मुझे जाना है। दूसरा : जाना, जरूर जाना पर उससे पहले...सुन रही हो ? लडकी : क्या सुनूं ? दूसरा : जो कह रहा हूँ। लड़की : क्या कह रहे हैं, कुछ कहें तब न ! दूसरा : तुम्हे मुनायी नहीं दे रहा ? ये मेरो उँगलियां तुम्हारी गर्दन पर खेल रही हैं। ये उँगलियां बोलती है। उनकी बातें तुम्हे सुनायी नहीं दे रही? उँगलियाँ फुसफुसा कर क्या कह रही हैं ? लड़की : मुझे छोड़ दीजिये। पहला काल्पनिक एरा कमर से निकालता है। राजा साहब के बिना जाने उनके पीछे आकर खड़ा होता है । २४ : गिनोपिग उत्तेजित है। दूसरा : डर लगता है ? मेरी उंगलियों को छूकर देखो। जितनी सख्त है, उतनी ही कोमल । प्यार से छू सकती हैं और गला भी घोंट सकती है। लड़की : (रुआंसी होकर) छोड़िये, छोड़िये ! पहला छुरा उठाता है। और दूसरा तुरंत ही पीछे बिना देखें, अपना एक हाय पहले की ओर बढ़ाता है। पहला अचानक रुक जाता है। दूसरा : (पहले से) मेरा हंटर देना! पहला धीरे-धीरे पीछे हट जाता है। डरा हुआ-सा चाबुक ला कर दूसरे को देता है। दूसरा उसकी ओर देखता है। पहला धीरे-धीरे जाकर 'नील डाउन' हो जाता है। दूसरा : (पहले से) नॉटी ब्वॉय। (उसके पास जाकर खड़ा हो जाता है। पहला धीरे-धीरे उसको जूते पहनाता है।) नॉटी ब्वॉय ! अचानक दूसरा जैसे ही चाबुक उठा कर मारने जाता है वैसे ही एक तीखा यांत्रिक शब्द गूंज उठता है और बत्तियां बुझ कर फिर जल उठती हैं । अब दूसरा व्यक्ति राजा साहब की पोशाक में नहीं है। शुरू जैसी ही पोशाक है। दूसरा : (हँसते-हँसते)क्यो, भाई ! कमर मे खोंसा छुरा कमर मे ही रह गया। खून, खून, राजा साहब का खून ! किसी काम के नहीं हो । राजा साहब का खून या तुम्हारा सिर! तीसरा : लो, काम मे लग जाओ। अगर राजा साहब आ गये तो बहुत बुरा होगा। लड़की : (फाम करती हुई सुर के साथ) बुलट ! बुलेट! बु-ले-ट! पहला : (क्रोध से) चुप रहो---मैं कहता हूँ, चुप हो जाओ! लड़की : (भौहें नचाकर) अच्छा ! चुप हो जायेंगे। पहला : हाँ, जायेंगे लड़की : जायेंगे, जायेंगे, मामा के घर जायेंगे। दूसरा : (मजाक करता हुआ) मामा देगे दूध मलाई। तीसरा : पेट भर कर खायेंगे। लड़की : जायेंगे, जायेंगे ! पहला : फिर सब बोलोगे तो मैं गला दबा दूंगा। देख लेना, मैं कहता हूं मुझे तंग न करो। लडकी : गला दबाओगे? दवाओ न, जो ! (पास जाकर उसको पीठ से अपनी पीठ टिका कर खड़े होते हुए।)तुम आजकल मुझे जरा भी नहीं छूते हो। गिनीपिग : २५ पहला : हट जाओ, अच्छा नहीं लगता । हटो, मैं कहता हूँ, हटो! लड़की : (लाइ से) नही हटूंगी। कर लो क्या करोगे। मुझसे ज़रा अच्छी तरह से बोलते तक नहीं हो। पहला चुप रहता है। लड़की : (पहले की ठोढ़ी पर हाय रख कर) गूंगा कहीं का, बोलता नहीं है, जंगली कही का! वोलता नहीं है। प्यार भी नही करता गूंगा... जंगली...मेरा गूंगा.. मेरा जंगली...! (दूसरे को तरफ़ देख कर) बोल नहीं रहा। दूसरा : (पहले से) चुप क्यों हो? इस समय तुम्हें बोलना है। तीसरा : बहुत सारे डायलॉग हैं। दूसरा : खेल भूलते जा रहे हो क्या ? तीसरा : ए.. बोलो न तो फिर हम भी नहीं खेलेंगे। हमे क्या पड़ी है ! दूसरा : स्टार्ट डायलॉग ! तीसरा : (पहले सें) ए...डायलॉग ! स्टार्ट योर डायलॉग, बोलो! लड़की के चेहरे पर नाराजगी है। दूसरा : स्टार्ट! लड़की : (स्वाभाविक आवाज में) इस तरह से नहीं खेलूंगी। मैं अलग ही सब-कुछ बोलती रहूंगी क्या ? तीसरा : अभी बोलेगा। लड़को फिर से अपना डायलॉग बड़बड़ा कर बोलना शुरू फरती है। दूसरा : बोलो न, जी ! खड़े-खड़े समाधि लगा ली है क्या ? लड़की : (खुश हो कर)दरअसल मुझे न उसके कंधे पर अपना चेहरा रख कर इस तरह डायलॉग बोलते जाना बहुत बुरा नही लगता । चाहे जो भी हो, है तो वह पुरुष ही और मैं स्त्री...जाने क्या होने लगता है ! तीसरा : चुप, चुप ! अरे, यह भी गलत-सलत डायलॉग बोलने लगी है। लड़की : सच, कुछ होता है । असल में यह न मस्ती मे है, इसीलिए कुछ नहीं बोल रहा है। पहला : (चिल्ला कर) गलत ! (लड़की के पास से हट जाता है।) कौन तुम्हे बार-बार मेरे पास आने को कहता है ? लड़की : (तेज आवाज में) क्या कह रहे हो तुम दूसरा और तीसरा, जैसे खेल शुरू हो गया हो, दवे पांव चले जाते हैं। पहला : क्या कह रहा हूँ? गलत नही कह रहा। ? २६ : गिनीपिग लड़की : तुमने मुझे नही बुलाया। पहला : इस दुनिया मे मैंने तुम्हें नही बुलाया। लड़की : नही बुलाया तो अच्छा किया। फिर भी हम एक-दूसरे से मिलेंगे, साथ रहेगे, प्यार करेंगे, जो मर्जी होगी वही करेंगे। देखो, ये सब फिलासफी अलग रखो...बहुत सुन लिया.. तुमने चाहा नही था फिर भी तुम्हारा जन्म हुआ,...तुमने चाहा नहीं फिर भी मरना होगा...इन सब बातों पर बहस करना छोड़ कर...हम है...बहुत दिन जियेंगे...कोशिश करके अच्छी तरह से जियेंगे.. यही बहुत बड़ा सत्य है...समझे ? पहला : अच्छी तरह से जियेंगे ! कौन दे रहा है जीने ? लड़की : कौन नहीं दे रहा है ? पहला : कौन नही दे रहा, यह तुम भी जानती हो, मैं भी जानता हूँ...ढोंग रचने की कोई जरूरत नही । लड़की : तुमसे मैंने हजार वार कहा है कि इस शब्द का इस्तेमाल न किया करो। अच्छी भापा बोलने में क्या पैसे लगते हैं ? पहला : बहुत दिन पैसे नहीं होते तो अच्छी भाषा का टेस्ट भी नहीं रहता। लड़की : पंसा तो मेरे पास भी नहीं है। पहला : कहीं न कही तुम्हारा भी टेस्ट बिगड़ा ही है। लड़की : क्या तुम सीरियसली विश्वास के साथ यह कह रहे हो ? पहला : तुम कौन दुनिया से अलग हो जो तुम्हारे लिए ऐसा नही सोचूंगा? लड़की : प्रमाण दे सकते हो? पहला : हाँ दे सकता हूँ, पर रहने दो यह सब । लड़की : नही, रहने नहीं दिया जायेगा। पहला : फिर मैं नही कहूँगा। लड़की : तुमको कहना ही पड़ेगा। पहला : पड़ेगा? क्यों? लड़की : कुछ बातें ही ऐसी होती हैं जिनको शुरू करके खत्म न करना बद- तमीजी मानी जाती है। मैंने क्या बुरे टेस्ट का काम किया है, तुम्हें बताना ही पड़ेगा। पहला : तुम राजा साहब को देख कर मोहित हो गयी थी। लड़की : तुम नही हुए थे? पहला : हुआ था, पर उसके साथ-साथ एक और इच्छा थी, एक और संकल्प जाग उठा था मन में । पर तुम्हारी तरह अपने को लुटा नही दिया था। सड़की हँसती है। लड़की : लुटाया नही? पिछले कुछ वर्षों से जाने कहां से एक छुरा ले आये गिनीपिग : २७ हो और लगातार उसको मारने की कोशिश कर रहे हो। पर क्या किसी दिन यह खयाल किया है कि तुम्हारा छुरा तेड भी है या नहीं, या कि यह सिर्फ एक खिलौना ही है ? दरअसल तुम्हारे हाथ में कोई छुरा है भी या नहीं, क्या यह जांच कर कभी देखा है ? तुम्हारे सिवा और किसने देखा है यह छुरा? कोन डरा है इससे ? राजा साहब के इतने बड़े राज्य मे तुम्हारा यह मामूली-सा छुरा किस काम का ? पहला : (असहाय-सा) तुमने तो देखा है, मेरे हाथ मे छुरा था। लडकी : मेरे देखने से ही तो सब ठीक नहीं हो जाता। पहला : तुम्ही बताओ, बहुत तेज नहीं है मेरा छुरा ? बताओ न । लड़की : पता नहीं। पहला : देखना, मैं राजा साहब को जरूर मार डालूंगा। एक न एक दिन जरूर मार सकूँगा। लडकी : राजा साहब को तुम पहचानते नहीं हो। पहला : पहचानता नहीं ? जिसको में मारना चाहता हूँ, घायल करना चाहता हूँ, जिससे मैं बदला लेना चाहता हूँ, जिसके लिए मेरे मन मे जन्म से गुस्सा है, उसको नहीं पहचानूंगा? लडकी : राजा साहब ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है ? पहला : वह मेरी पसलियों को हटा कर मेरे दिल को चुराना चाहता है। उँगलियों के पोरो पर ताले डाल देता है। मैं मुट्ठी बद नहीं कर पाता, कोई चीज़ पकड़ नहीं पाता। जानती हो ? दीवार पे लात मारने पर उससे निकलने वाली आवाज़ आजकल मुझे सुनायी नहीं देती। लड़की : तुमको राजा साहब इनाम देंगे। पहला : मजाक कर रही हो ? लड़की : मजाक क्यों करूँगी? इस देश में तुम्हारी तरह खूबसूरती से और दूसरा कोई रो नहीं सकता । जो खूबसूरती से रोता है, राजा साहब हर साल उसे इनाम देते हैं। पहला : तुम मेरी तरफ देखो। सचमुच क्या मैं रो रहा हूँ ?गुस्से से मेरी आँखें लाल नहीं हो रही है ? लड़की : आंखें लाल होने से राजा साह्य का हंटर । याद है ? पहला : मैं भी हंटर बनाऊँगा। लड़की : बनाओगे, पर मार सकोगे? रहने दो यह सब । अब उठो । बहुत देर तक बातें की है, रोधे हो, गुस्सा किया है ..तुम्हारे आज के टाइम- टेवल मे जो कुछ था, सब पूरा हो गया...अब उठो! पहला : मेरा इतना मज़ाक न उड़ा कर अगर मेरे लिए थोड़ी-सी हमदर्दी २८ : गिनीपिग तुम्हारे मन में होती। लड़की : क्या कहा, हमदर्दी नहीं है ? आखिर तक तुम्हारा साथ किसने दिया? राजा साहव के यहाँ से किसने तुम्हें चले आने को कहा ? किसके कहने से तुम चले आये? पहला : दरअसल, मैं गुस्से से इतना भरा हुआ हूं कि गलत वातें करने लगता हूँ । गलत काम करता हूँ। जानती हो राजा साहब के यहाँ से चले आने पर भी लगता है जैसे उनको छाया हमारी पीछा कर रही है... हम लोगों को ढूंढ रही है...जैसे उनके चंगुल से हम कभी छूट कर नहीं निकल सकते। लड़की : हम राजा साहब से बहुत दूर, और भी दूर चले जायेंगे...वह हमे ढूंढ़ नही पायेंगे। पहला : राजा साहब जरूर ढूंढ निकालते है। एक मोटर का हानं सुनायी देता है। लड़की : राजा साहब की मोटर का हार्न नही है ? पहला : ताज्जुब है ! देखा? कैसे ढूंढते-ढूंढते आ पहुँचे ? अब मैं भी नही छोड़े गा। जिसके चंगुल से छुटकारा नहीं है...उसके साथ आखिरी हिसाब-किताव हो जाना ही ठीक है। लड़की : ठहरो, पहले देख तो लू कौन है । (बाहर देख कर) मोटर से उतर रहे हैं । नहीं जी, देखने मे राजा साहब की तरह तो नहीं लगते। हाँ ! राजा साहब नही हैं, समझे। लेकिन काफ़ी बड़े आदमी लगते है। शानदार पहनावा...साथ दूसरा एक आदमी...इधर ही आ रहे है। पहला : राजा साहब क्या देखते ही पहचाने जा सकते हैं ? वह आदमी अन- गिनत वेश बदलता है । जाओ, हम पहले छिप जाते हैं। बाद मे आयेंगे। यह आदमी चाहता क्या है, पहले यह पता लगाते है। लडकी : चलो! उन लोगों के बाहर जाने से पहले ही दूसरा एक दूरबीन आंखों में लगाये प्रवेश करता है । कोमती राजसी वस्त्र। उसके पीछे तीसरा संकरी पैट और बड़े प्रिटों वाली बुशर्ट पहने, गले में रूमाल बांधे, हाय में एक चमड़े का बैग लिये आता है। दूसरा : (आँखों में दूरबीन लगाये) कौन जा रहा है ? हाल्ट, हाल्ट ! वे रुक जाते हैं। दूसरा कागज से एक हवाई जहाज बना कर उड़ाता है। स्टेज के एक कोने पर उसके गिरते ही तीसरा दौड़कर यहां एक झंडा गाड़ देता है। गिनीपिग : २६ दूसरा : रुस्तम ! तीसरा : जी हुजूर! दूसरा : झंडा लहरा रहा है । नहीं ? हमारा राज्य थोड़ा-सा और बढ़ गया है . तीसरा : बढ़ा तो है, हुजूर! दूसरा : धीरे-धीरे बढने में बड़ा समय लगता है न ? र, लगने दो। धीरज ही सफलता को कुजी है । (दूरबीन आंखों में लगा कर) कुछ दूर दो- दो आदमियों को रुकने के लिए कहा था न ? हां, वे, वही आदमी तो लग रहे है । (मुट्ठी में कुछ लालीपाप भर कर, हाथ बढ़ा कर मुंह से ज्च्-च्च् को आवाज करते हुए) अरे, इधर आओ, आओ न, बहुत मीठा है । जितना चूसोगे मुंह उतना ही रस से भर जायेगा। (ये चुप हैं। दूसरा देखता रहता है।) कैसे लोग है ये, रुस्तम ? आ ही नही रहे हैं । वह कविता सुनाओ जरा ! तीसरा लालीपाप, लालीपाप, लालीपाप खाने मे है मज़ेदार खाओ भाई टपाटप सारी दुनिया का सबसे बढिया खाजा जिद्दी मत वन खाले, नहीं तो पछतायेगा राजा। जो खाये इक बार, उसका होवे बेड़ा पार साथ मिले उपहार शहद का एक बड़ा-सा छत्ता । तीसरा : (फेरी वाले की तरह हाँक लगाते हुए)लालीपाप चाहिए, लालीपाप ! एक पंकिट खरीदने पर साथ में शुद्ध स्वादिष्ट शहद की एक बोतल... छोटे-बड़े हर साइज के पैकिट मिलेंगे। अपने लिए और अपने बच्चों के लिए ले जाइये । लालीपाप, लालीपाप, लालीपाप...इसके अलावा और भी मिलेंगी सोहराब एंड रुस्तम कंपनी की मोमवत्तियां । अंधेरे में रहने वाले मनुष्य का एक मात्र सहारा। हर जगह आपने इस मोमबत्ती की प्रशंसा सुनी होगी। दूसरा : क्यों भाई, रुस्तम, आ तो नहीं रहे हैं ! भाषण दो। तीसरा : (काल्पनिक माइक पकड़ कर) हैलो, माइक टेस्टिंग वन-टू-भी-फोर । हैलो, दोस्तो, क्या आप लोग मुसीबत में नहीं हैं, गरीव नहीं हैं, दुखी नही हैं ? थोड़ा-सा सहारा, थोड़ा-सा सुख, थोडा-सा आराम । इन सब चीजों की मांग इंसान की तरह नहीं करेंगे? हम आपको बुला रहे हैं । सोहराब एंड रुस्तम केंडल कंपनी में आइये, अंधेरे में रोशनी - ३० : गिनीपिग जगाइये। दूसरा : जोश ! शब्दों में जोश भर दो! तीसरा : आइये, आगे आइये, भाइयो, आपका हक़ आपसे कोन छीन सकता है ? इसका मतलब यह नही कि आप भूख को बढ़ने दें...भूख...विवेकहीन, बुद्धिहीन भूख...पागलपन है । बेमतलव गर्मागर्मी से भूख नही मिटती' 'अराजकता आती है। संयम रखिये। सभ्यता की पहली जरूरत है संयम । घर मे सब संयम का अभ्यास कीजिये...भूख आसानी से मिट जायेगी। दूसरा : उनके कान में जूं तक नही रेंग रही...भाषा में कवित्व लाओ। तीसरा · (सुरीली आवाज में)अस्त होते मेघों का सोना पिघल कर विखर रहा है सारे आसमान मे । विदा ले रहा है सूर्य...अंधकार...गहरा अंधकार बढ़ा आ रहा है ऊंची लहरों के साथ। कौन रक्षा करेगा? कौन जगायेगा? कौन सुनावेगा आशा का संदेश ? सोहराब एंड रुस्तम केडिल मैन्यूफैक्चरिंग वस मे आइये । हम हर प्रकार की मोमबत्तियां वेचते है, मोटी, मॅझोली, पतली। इस दुनिया से बिजली लुप्त हो जाने पर...शरीर से बिजली लुप्त हो जाने पर...हृदय में बिजली की शक्ति कम होने पर...कमजोर पडते हुए मनुष्य को हम बुला लेते हैं। आइये, मोमबत्ती खरीदिये या फिर हमारे कारखाने में भर्ती हो जाइये । बेकारी के युग में बुला-बुला कर नौकरी देना...नही मिलेगा...मार्केट में कही नहीं मिलेगा। मोमबत्ती खरीदिये या फिर हमारे कारखाने मे भर्ती हो जाइये, मोमबत्ती के उत्पादन में हाथ बॅटाइये । मासिक वेतन पचास लालीपाप और दो शीशी छत्ते से निकाला हुआ ताज़ा शहद । जय भी मुंह कड़वा लगे, एक चम्मच शहद चाट लीजिये...शांति- शांति-शाति...! पहला और लड़को आगे बढ़ते हैं। दूसरा : आ रहे हैं । आ रहे हैं। पहला : आप लोग बुला-बुला कर नौकरी दे रहे है ? दूसरा : हाँ भाई, नौकरी चाहिए? लड़की : क्यों नहीं चाहिए? मिल ही कहाँ रही ? दूसरा : सबको थोड़े ही देते हैं...तुम लोगों को देख कर लगा, बहुत नीडो हो। तो फिर चले आओ। सभी कुछ तो सुन लिया। पहला : जाने क्यों कुछ शक हो रहा है । इतनी आसानी से नौकरी पाना...! दूसरा : नौकरी तो तुम्हें करनी ही पड़ेगी। एक बार धुस पड़ो, आराम से रहोगे। आराम न मिले तो छोड़ने से कौन रोकता है ? (तीसरे से) गिनीपिग : ३१ : मिटिया अकेली रह गयी है, देखो न, पया चाहती है ? शीशा, चूडी, स्नो, कोम...क्या चाहिए इसे, देयो! तीसरा : (मुर से गाते हुए) शोशा, चूड़ी क्रीम हिमानी मन ही मन चाहो तुम रानी! जितनी मर्जी ले लो हम से दाम नही लेंगे कुछ तुम से इन लाल रसीले होंठों को मुस्कान ही काफी है रानी! दूसरा : घूम-घूम के बोलो, भई, घूम-घूम के ! तीसरा अव नाच कर गाता है। उन दोनों को अच्छा लगता है। लड़की हंसती है। तीसरा : (छंद बोलता हुआ लड़की के पास आ कर) हाय यह हंसो, लाये उदासी अपने ही हाथों डालूंगा अपने ही गले में फांसी। मर के मैं बन जाऊँ सोना घर सुनार के जाऊँ सोने की नथ बन कर रानी तेरी नाक सजाऊँ। लड़की : (हंसते-हंसते) बड़े मजे मे है ये लोग । है न ? हम लोगों को कहीं-न- कहीं तो जाना ही पड़ता ..इन्हीं लोगों के यहां चलें। दूसरा : वही तो । यही तो आओगे...इमलिए ही तो इधर आना हुआ, भाई ! देख लेना, विटिया...नाच, गान, रस, सुख से भरपूर । तुम भी पांवों में घुघरू बांधे नाचने लगोगी। देख लेना, बिटिया ! पहला : इतनी मौज है । फिर भी आप लोगों को क्यों ढूंढ़ रहे हैं ? लोगों की तो भीड़ इकट्टी हो जानी चाहिए आपके दरवाजे पर। दूसरा : क्या करें, लोग बेवकूफ जो ठहरे। नौकरी मेरी करेंगे और नियम अपना चलाना चाहेगे...यह बात क्या ठोक है, भाई ? लडकी : आपके नियम-कानून बहुत सस्त हैं क्या? दूमरा : बिलकुल नहीं । जो चीज़ जहां पड़ी है, वही पड़ी रहेगी, जरा भी हिलाना-डुलाना नही है । दस लोग तुम्हारे कान भरेंगे, यह हटाओ, वह हटाओ...तुम चुपचाप बैठे रहोगी। फिर तुम्हारी नौकरी कौन हड़प सकता है...कौन सुख छोन सकता है ? ३२ : गिनीपिग

पहला : आप कौन हैं?
दूसरा : क्यों, भाई ? यह प्रश्न क्यों ? अरे ओ, रुस्तम ! यह पूछता है, मैं
कोन हूँ ? (हंसता है) तो फिर तैयार हो जाओ।
पहला : आपको पहचान गया हूँ।
लड़की : आप, आप राजा साहब है।
पहला : अब हम दोनों एक बार फिर आमने-सामने आये हैं।
कमर में खोंसा हुआ काल्पनिक छुरा निकाल कर पार करने
लगता है । रुस्तम उसे पकड़ लेता है।
दूसरा : यह क्या कर रहे हो ? युद्ध लड़के ! रुस्तम, रेडी ।
बत्ती बन जाती है। फिर जलती है तो पहला एक अपराधी
के कठघरे में खड़ा दिखायी देता है । कठघरा बहुत-सी बंदूकों
को नलियों से तैयार है। चारों तरफ से संगीने उठी हुई हैं।
कोने में डरी हुई लड़की खड़ी है। और कोई नहीं है।
पहला : मी लाई ! इस बार भी मैं खून नहीं कर सका। मुझे सजा दीजिये।
पर्दा गिरता है।
गिनीपिग : ३३

दूसग दृश्य
मंच पहले की ही तरह है। सिर्फ दो फ़ोते मंच के पीछे की ओर से
सामने की ओर दो स्टंड के सहारे बचे हैं जिससे मंच तीन हिस्सों में
बंट गया है। बीच के हिस्से में कंघे पर बंदूक लिये एक संतरी है।
दोनों तरफ़ के दो हिस्सों में से पहला और लड़की बातें कर रहे हैं ।
तीसरा संतरी की भूमिका में है।
लड़की : ए...
...सुनते हो? क्या हम लोगों को छोड़ेंगे नहीं ?
पहला : मुझसे पूछने से क्या फायदा?
लड़की : मुझे अच्छा नहीं लग रहा।
पहला : अच्छा!
लड़की : मैं दीवार पर सिर दे मारूंगी, कहे देती हूँ।
पहला : थोडी देर पहले मैंने भी मारा था...ऐसा मत करना। बड़ी ज़ोर से
ठक्-ठक आवाज़ होती है और माथे मे दर्द भी होता है।
लड़की : फिर क्या करूँ, बताओ न?
पहला : मैं क्या कर रहा हूँ?
लड़की : तुम ? तुम आँखे बंद किये बैठे हो ।
पहला : तुम भी यही करो।
लड़की : अच्छा नहीं लगता। मैं तुम्हारे पास आना चाहती हूँ।
पहला : आंखें मूंदे रहो। कुछ नही दिखायी देगा। साथ ही थोड़ी-थोड़ा
डोलती रहो-योड़ी देर बाद नीद आ जायेगी।
लड़की : मैं तुम्हारे पास आऊँगी।
पहला : वस, ज्यादा जिद न करो।
लड़की : जहर पी लूंगी, हाँ।
पहला : मैंने पी कर देखा है । पीते ही जीने की इच्छा होने लगती है।
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..
३४ : गिनीपिग

१८ सड़की : भाग जाऊंगी। पहला : अब तक कितनी बार कोशिश की? लड़की : सिपाही जी को जरा कहो न । पहला : उसे सुनायी नहीं देता। लड़की : देता है। जानते हो, मेरे साथ उस वक्त बातें कर रहा था। पहला : कैसी बातें? लड़की : पूछ रहा था, रात कितनी बीती? मैंने कहा, अभी तो दोपहर है। उसने कहा, तो फिर सूरज क्यों निकला है ? मैंने कहा, सूरज तो निकलेगा ही। वह ठठा कर हंसा और बोला, ऐसा दिमाग़ पाया है तभी तो कैद भुगत रही हो। पहला : क्या समझी? लड़की : समझी कि अब से सब उल्टा कहूँगी। दिन को रात और रात को दिन । पहला : अच्छा है। सड़की : सुनो, सिपाही जी को ज़रा प्यार से कह कर देखू ? पहला : देखो। लड़की : तुम कुछ दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हो । खुद भी तो परा कोशिश करनी चाहिए। पहला : सिर्फ दीवार तोड़ना ही बचा है, बाकी सब कुछ आजमा लिया है। लड़की : जरा प्यार से बोल कर देखो न । जैसे मैं पिक्चर जाने से पहले पापा से बोलती थी। किसी तरह छोड़ेंगे ही नहीं, बस । पिक्चर के बहाने तुमसे मिलने जाती। ठीक ऐसे मौके पर रोक लेते। तब फिर बड़ी चालाकी से परमिशन ले ही लेती थी। पहला : परमिशन तुम्हें मिलती नही थी। लड़की : क्या कहते हो? नहीं मिलती थी? तो फिर तुमसे मुलाकात कैसे होती थी? पहला : मुझसे मिलने की परमिशन तुम्हें नहीं मिलती थी । वे तुम पर विश्वास करके तुमको जाने देते थे-~-और धोखा खाते थे। तुम धोखा देती थी, और क्या? लड़की : मजबूरी में धोखा देती थी। इससे पाप नहीं होता। पहला : पाप-पुण्य की बात नहीं। वह मुझको पसंद नहीं करते थे। पर फिर भी तुम आती थीं। कैसा दुख का समय था वह ! तुम्हें उन दिनों कितनी परेशानी हुई, मुझे अब भी सोच-सोच कर तकलीफ़ होती है । लड़की : पापा न, जरा कड़े स्वभाव के बादमी है । पर असल में...! गिनीपिग : ३५ पहला : तुम्हारे पापा बहुत अच्छे हैं तभी तक जब तक तुम उनके नियमो के के दायरे के अंदर हो लड़की : तुमने फिर बहस शुरू कर दी। यहां से भागने की कोशिश के बजाय मेरे पापा के पीछे पड़े हो। पहला : ठीक है। मैं आंखे बंद कर रहा हूँ। तुम पापा से जैसे कहती थी, उसी तरह सिपाही जी से भी कह देखो। वात बन जाये तो मुझे भी छुड़ा - लेना। लड़की : सच ? कहूँ? पहला : कहो। पर बिलकुल'पापा' ही मत कह डालना । जैसे पापा से बातें कर रही हो वैसे-लाड़ली विटिया के-से हाव-भाव से। कही सिपाही जो मजाक समझ कर विगड़ने न लगे? लो, मैंने आंखें बंद कर ली। स्टार्ट ! लड़की : (चेहरे पर लाड़ली विटिया के-से भाव से सिपाही जी को ओर बढ़ते हुए) सो रहे है ? (कोई उत्तर नहीं मिलता) पता नही, क्यों दोपहर को भी सोते रहते हैं, हाँ। तीसरा : (पिता की-सी भारी आवाज़ में) कौन मुन्नी? कुछ कहा तूने मुझसे ? लड़की : इस कमरे मे तुम्हारे अलावा और है कौन? और किसके साथ बोल सकती हूँ? तीसरा : क्या कह रही है ? लड़की : जरा बाहर जाऊँगी। तीसरा : बाहर क्या है ? लड़की : होगा क्या? काम है मुझे। इसलिए जाना चाहती हूँ। तीसरा : परमिशन लेने आयी है ? पर क्या खाम काम है, वह तो नहीं बताया तूने । एनि थिंग प्राइवेट ? (लड़की साड़ी का छोर अपनी उँगली पर लपेटती है।) बोलो! आई हेट साइलेंस ।' पहला : एक दिन तुम हिम्मत करके सच बोली थी। वही दिन याद करो और तडाक से सच बोल दो। लडकी : मैं उससे मिलने जा रही हूँ । अपाइंटमेंट है। तीसरा : आई सी। जा सकती हो, पर मैंने तुम्हें मना किया था। मेरी इजाजत के बिना भी तुम जा सकती हो। लड़की : क्यो? तुम इजाजत दोगे क्यों नही ? तीसरा : (चिढ़कर) बहस मत करो। लड़की : बहस कहां कर रही हूँ। मैं तो तुमसे पूछ रही हूँ। पहला : राइट ! तीसरा : पूछने का एक नरम तरीका भी होता है। तुम्हारी आवाज में इतना ३६ : गिनीपिग । गुस्सा क्यों है ? एक नाकारा लड़के से वक्त पर मिलना नहीं होगा, ऐसी छोटी-सी बात के लिए सारी तमीज़ को ताक पर रखने में तुम्हें कोई संकोच नहीं हो रहा? क्या तुम इसी घर की लड़की हो? मुझे शक होता है। लड़की : तुम्हारा शक बहुत बढ़ गया है, इसीलिए आज इतनी बातें करनी पड़ रही हैं। तीसरा : किसी की इतनी भी बातें मैंने कभी नहीं सुनी। तुम जा सकती हो । लड़की : जिंदगी-भर तुम्हारी मर्जी के मुताबिक चली हूँ ! मैं भी तो इंसान हूँ, मेरा अपना कुछ भी नहीं ? तीसरा : यह तुम्हारा प्रश्न है या रेवोल्यूशन का फैशन ? इस घर मे जो कुछ जहां है वैसा ही रहेगा। ऐसे ही चलता आ रहा है । उससे हमारी मर्यादा कुछ घटी नहीं । तुम्हारा इम्तहान पास है, बेकार उत्तेजित होकर अपना नुकसान मत करो। और सुनो, अब तक इस नियम से ही पली-बढ़ी हो, आज अचानक नियम को तोड़ कर धूल में नही मिलाया जा सकता---यह तो कृतघ्नता होगी। तुम बड़ी हो गयी हो। अब सब कुछ समझना सीखो। लड़की : ठीक । मैं जा रही हूँ। तीसरा : कहाँ ? लड़की : इसी घर में। तीसरा : इस घर में एक रसोई है, वहाँ जाकर दो कप चाय बनाओ। इस मेज पर लाकर रखो । दोनों गप्प करेंगे। ठीक ? (लड़की चुप है।) चुप क्यों हो? बोलो, ठीक है ? लड़की : लाती हूँ। लड़को सिपाही के पास से हट जाती है। संतरी पहले को तरह चलने लगता है, निर्विकार है। पहला : दो कप चाय ही लायी थी तुम । उसके बाद बातें। बातों के बाद हँसी। फिर पापा का सिर दबाना । वाह, क्या खूब ! लड़की : इसके सिवाय और करती ही क्या ? पहला : खून करती। सिर दवाते-दबाते एकदम खून । लड़की : पापा का? पहला : नहीं। अपने पापा के उदंड, अड़ियल स्वभाव का । घर में किसी चीज़ को जरा-सा भी इधर से उधर नहीं रखने देंगे। तुम यह सब क्यों मानती रही। तुम्हे चाहिए था उनका खून करती। एक संगीन उठाये वह सज्जन तुम्हारा पहरा दे रहे हैं और तुम गरमागरम चाय पी रह - गिनीपिग : ३७ हो । खून करना नहीं आता तुम्हें ? लड़की : तुम्हारी तरह ? हाथ में एक अदृश्य छुरा लेकर उछल-कूद करते रहो। पहला : आखिरी दृश्य में छुरा अदृश्य नहीं रहेगा । मैं जीत कर रहूंगा। लड़की : ऊँह, जीतोगे ! जेल के सीखचों में बंद सड़ते रहोगे। जीतोगे ! जिसे जीतना होता है वह इन दीवारों को लातों से चकनाचूर कर देना चाहता है । उसकी दोनों आंखें जलती हैं, हाथों की दोनों मुट्टियां भिच जाती हैं। वह तुम्हारी तरह बड़बोला बन कर, आँखें मूंद कर ऊँचता नहीं रहता। पहला : सुनो, हम एक काम कर सकते हैं । अखबार के दफ्तर फ़ोन करें। यह खबर वे जरूर छाप देंगे। कोई न कोई हमें छुड़ाने जरूर आयेगा। लड़की : तुम ठीक कहते हो । कम से कम लोगों को पता तो लगे कि दो इंसान इस तरह कैद में पड़े सट रहे हैं। पहला एक काल्पनिक फोन पर नंबर मिलाता है। लड़की दूसरी तरफ उत्सुक खड़ो है। संतरी कंधे पर बंदूक रखें शांत भाव से चहलकदमी कर रहा है। पहला : (फोन उठा फर) हैलो, हैलो ! कोई उठा नही रहा। (जोर से) हैलो, हैलो! संतरी, यानी तीसरा बंदूक टेबल पर रख देता है। एक फाइल खोल कर टेबल पर बैठता है । आँखों पर एफ मोटा चश्मा चढ़ाता है। काल्पनिक रिसीवर कान के पास ले जाता है। तीसरा : (भारी गंभीर आवाज में) हैलो! पहला : ये अखबारका दफ्तर है ? मैं जरा मालिक के साथ बात करना चाहता तीसरा : बोल रहा हूँ। पहला : (सड़की से) मिल गया। लडकी : सब समझा कर कह डालो। पहला : आप लोगों को एक सबर देना चाहता हूँ। तीसरा : कहिये। पहला : हम दो लोग कंद हैं । इस तरफ के कमरे में मैं और उस तरफ के कमरे में एक महिला। तीमरा : बातचीत होती है ? पहला : दूर ही से। तीसरा : आँखें मिलाने में कोई रोक-टोक तो नही है ? ३६ : गिनीपिग पहला : जी, नहीं। तीसरा : इस तरह की कैद की जिंदगी तो अच्छी ही है। पहला : हम बहुत दिनों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। तीसरा : क्या जरूरत है? पहला : क्या मतलब? क्या जरूरत? क्या इसी तरह बंद रहेंगे? यह खबर मेहरबानी करके छापिये न। लड़की : बोलो न, यह जरूरी है कि सब यह खबर जान जायें ? पहला : अगर ये खबर छप जाये तो सब लोगों को पता चल जायेगा। कोई न कोई तो हमारी सहायता कर ही सकता है। तीसरा : आप किसके आदमी हैं ? पहला : किसका आदमी हूँ ? मतलव ? इस देश का आदमी हूँ। तीसरा : इन बड़ी-बड़ी बातों से कुछ काम नहीं बनता। मैं इस दुनिया का भादमी हूँ। इससे दुनिया का क्या बनता-विगड़ता है ? आप अपना अखबार पहले चुन लीजिये। पहला : पर क्या यह खबर नहीं है ? आप तो खबरें ही छापते हैं। यह एक महत्वपूर्ण खबर है। तीसरा : देखिये, १ टैल यू फेकली हमारा अखबार बड़े-बड़े विज्ञापन देने वालों की कृपा से ही चलता है। उनकी जरूरत के बाहर की खबरें छाप कर अपने अखबार को चौपट तो नहीं कर सकतान । मेरी राय का मतलब ही है उनकी राय । आपका अपराध क्या है ? पहला : अटेम्टेड मर्डर। तीसरा : मर्डर ! किसका खून करना चाहा था आपने ? पहला : राजा साहब का । आप पहचानते है उन्हें ? तीसरा : बहुत अच्छी तरह से पहचानता हूँ। मैं उन्ही की तरफ़ से बोल रहा हूँ। पहला : क्या कहा? तीसरा : मैं उन्ही की तरफ से बोल रहा हूँ। फोन रख देता है और चश्मा उतार कर बंदूक उठा लेता है और चुपचाप चहलकदमी करने लगता है। पहला : मारे गये! लड़की : क्या हुआ? पहला : जिसको फ़ोन किया था, वह राजा साहब का ही आदमी था। लड़की : राजा साहब का आदमी ? पहला : हमारी क्या हालत होगी, सोचा है ? सिर्फ कंद ही नहीं, इससे भी बड़ी सजा मिलेगी। गिनीपिग : ३६ . ! लड़की : जैसे भी हो हमें भागना ही होगा। दूसरा प्रवेश करता है। संकरी पंट। सर के बाल काफ़ी सफेद हैं । हमाल से चेहरा पॉछ रहा है। दूसरा : अहा हा ! कहाँ गये मेरे बच्चे? और कितने दिन की है यह जिंदगी? फूटी आयो से यह भी देखना पड़ा! कहाँ हो, बच्चो? पहला : हमे ढूंढ रहे है ? लड़की : (आकुलता से भरी आवाज में) ये रहे हम । दूसरा : (जैसे बहत दूर की कोई चीज देख रहा हो इस तरह माय पर हाय रख कर) कहाँ, कहाँ हो, जी? पहला : (उत्सुकता से) ये रहे, इधर देखिये। लडकी : आपके पास ही तो खड़े हैं, आपको दिखायी नहीं दे रहा? दूसरा : दिखायी क्यों नही देगा? पर देखा नहीं जा रहा। यह तो आँखों से देखा नहीं जाता, वेटे ! मेरे बच्चे कैद भुगत रहे हैं और मैं हूँ कि देशो- द्धार के लिए भाषण दे रहा हूँ। देश की युवाशक्ति ही अगर जेल मे सड़ेगी-तब तो पूरे देश को ही जेल में बंद समझना चाहिए।(संतरी से) कहाँ हो, जी...जरा आंखें घोल कर देखो न, मैं आ गया हूँ। (संतरी सलाम करता है।) सलाम-वलाम बाद में करना। पहले बच्चों को रिहा कर दो। कहाँ हो, बच्चो? (दोनों को इशारे से बुलाता है।) आओ, आओ, दौड़ कर बाहर चले आओ। पहला : दरवाजा खोलते ही हम बाहर आ जायेंगे। बाहर निकलने के लिए तो पागल हो रहे हैं। लड़की : इस दुनिया मे माप जैसा अपना हमारा कोई नहीं है। संतरी दोनों तरफ़ को डोरी खोल देता है। ये दोनों तेजी से निकल आते हैं। संतरी चला जाता है। लडकी : आपने हमें बचा लिया। किसी देवदूत की तरह आप आ पहुँचे है। पहला : आप न आते तो शायद हम इस जेलखाने मे ही सड़ते रहते। लड़की : इनके पैर छुओ ! दोनों पैर छूते है। दूसरा : अहा-हा । लगता है जैसे मेरे पैरों पर दो फूल गिरे हैं । उठो, उठो, मुक्ति तुम्हे नही...यहाँ...(अपनी छाती दिखा कर)जो सांस अटकी हुई थी, अब उसे मुक्ति मिली है । आह.. .! पहला : अगर बुरा न माने तो एक बात पूर्वी ? दूसरा : पूछो। पहला : विना मांगे ही इतनी दया दिखा रहे हैं। यह अयाचित करुणा...आप ४० : गिनीपिग 1 कौन है ? दूसरा : मैं कौन हूँ ? (उदास आवाज़ में) इसी प्रश्न का उत्तर तो मैं भी ढूंढ रहा हूँ। इस छोटी-सी दुनिया में इसका उत्तर नहीं है । और भी दूर जाना होगा। चांद-सूरज की सीमाओ से परे, और ..और भी दूर... वह उत्तर क्या मुझे मिलेगा? मैं कौन हूँ, यह जानने की कोशिश मत करो। वस, तुम मेरी बाहों में आ जाओ...ये खाली हृदय...मेरा...भर जाये। मुझे और कुछ नहीं चाहिए। (दोनों को बाहों में भर-सा लेता है।) तुम्ही मेरे सब कुछ हो...मुझ जैसे संतानहीन के लिए यही स्वर्ग-सुख है। (लड़को सोने में मुंह छुपा के आँखें पोंछती है।) बिटिया ! तुम्हारा अंग कितना कोमल है ! उन लोगों ने किसी तरह का दुख तो नहीं दिया? पहला : उन्होंने हमे तरह-तरह से सताया है । आप सुनेंगे तो सह नहीं पायेंगे। दूसरा : (पहले को छोड़ कर लड़की को और करीब खींचते हुए) छोड़ो, मुझे मत सुनाओ। कितना कोमल है तुम्हारा शरीर ! चेवर डुलाने से भी जिस शरीर को चोट लगे, उसे दुख पहुंचाना! मैं नहीं सुनूंगा। आओ, बिटिया, आओ मेरे साथ। दूसरा लड़की को लेकर आगे बढ़ता है। पहला पोछे रह जाता है । थोड़ी देर टकटकी लगाये देखता रहता है। लड़की अचानक पीछे मुड़ कर देखती है। लड़की : अरे ! खड़े क्यों रह गये ? आओ न । दूसरा : (पोछे मुड़ कर देखते हुए) क्यों रे, रूठ गया है ? तुझे नहीं बुलाया इसी से ? नटखट कही का! देखो, कैसे मुंह फुलाये खडा है । आ, जल्दी आ। पहला : कहां जाना है ? दूसरा : बातें सुनो इसकी ! कहाँ जाना है ! तब फिर जेलखाने में ही सड़ते रहो । अभी तक बाहर निकलने के लिए तड़प रहा था। निकल कर जाता कहाँ? पहला : पता नही। दूसरा : पता नहीं? सुनो, बिटिया ! बगुला भगत की बातें सुनो जरा। (दूसरे की भाषा पर दोनों चौंकते हैं।) तब तो तेरे लिए जेलखाना ही ठीक था। लड़की : आपने हमारा उद्धार किया है। आप जो ठीक समझेंगे हम वही करेंगे। जेलखाने के कप्टो से यह जाने कैसा हो गया है। दूसरा : चल फिर। गिनीपिग : ४१ पहला : मैं नहीं जाऊँगा। दूसरा : देखा? भगत जी अड़ियल भी है। लड़की : अरे, तुम्हें हो क्या गया है ? हमें जाना नहीं है ? पहला : यही सोच रहा हूँ...कहाँ जायें ? सीखचों के बाहर निकल कर लग रहा है जैसे एक और भी बड़े जेलखाने में बंद हो रहे हैं । जरा सोचो, कितनी इच्छाएँ हैं हमारी। लेकिन जिधर भी कदम बढ़ाते है, लगता है जैसे कोई रास्ता रोके खड़ा है--सारे रास्ते बंद हो जाने का नाम हो तो जेलखाना है। जानती हो? दरअसल हम अभी कैद से नहीं छूटे है। लड़की : ये सब बाद की बातें हैं, फिलहाल यहाँ से तो निकलें। दूसरा : कुछ निश्चय किया, विटिया? इस गँवार को समझा सकी? बंदर कहीं का! चलो। लडकी : चलिये। यह चलेगा। मेरी बात मानो । चलो। तीसरा संतरी के वेश में प्रवेश करता है। दूसरे को एक कागरा पकड़ाता है और फिर चला जाता है। दूसरा जेब से चश्मा निकाल कर पढ़ता है। दूसरा : ठीक से दीखता भी नही है। लड़की : मैं पढ़ दूं? दूसरा : केशमीमो क्या पढोगी, प्रिटिया? पहला : आपने कुछ खरीदा है ? दूसरा : कुछ सारीदे विना कैशमीमो कहाँ से मिलेगा, भाई ? इतनी उम्र हो गयी, पर अपने-आप खरीदफरोख्त का शौक मुझे अब भी बहुत है। इस बुढक का शौक देख कर तुम जरूर मन ही मन हंस रही होगी। मेरे साथ शापिंग करने चलो। फिर देखना कितना मॉर्डन है मेरा टेस्ट । यह ब्लाउज पहना है तुमने तो। गला बिलकुल बंद है ---अरे, जरा बदन पर हवा-रोशनी तो लगे । अप-टू-डेट बनो। मेरा तो सोचने का तरीका ही अलग है। लड़की : हाँ, आपका पहनावा देख कर ही इसका पता लग जाता है। दूसरा : लग जाता है ? ऐं ? (हंसते हुए) पहनावे के अंदर जो जवानी छुपी हुई है, उसका भी पता लगता है क्या? बोलो! लड़की : मन आपका बड़ा फैश है। दूसरा : (ोर से हंस फर) अरे, देखो-देखो, इस बुद्ध ने फिर मुंह बना लिया। अब मैं डालूंगा। कहे देता हूँ। पहला : हॉटेंगे? डोटिये। वह भी बाकी क्यों रहे? ४२: गिनीपिग . दूसरा : क्यों रे, बूढे बाप को जरा-सा डांटने का भी हक नहीं ? पहला . आपको बाप मानने की बिलकुल इच्छा नही हो रही है। लड़की : मैंने तुम्हें बोलने को मना किया है न ? दूसरा (फरुण स्वर में ) संतानहीन बूढ़े ने तुम लोगों को प्यार से अपने खाली हृदय से लगा लिया है। तुम लोगों को अपने बच्चों की तरह न मार्ने तो मैं ही झूठा पड़ जाऊंगा। तुम इतने पत्थर-दिल कैसे बन सकते हो? छि.! और देखो, तुम लोगों की वजह से मेरा कितना खर्च हो गया! पहला : सार्च, कैसा? दूसरा : ये कैशमीमो पढ़ कर देख...फिर समझेगा कैसा और कितना । लड़की : किस चीज़ का कैशमीमो है ? दूसरा : तुम लोगों को खरीदा है, उसी का कैशमीमो है। पहला : हम लोगों को खरीदा है ? दूसरा : केशभीमो पढ कर देखो न, बच्चे ! कैश ट्रांजेक्शन । नकद रुपये देकर खरीदा है.. कैशमीमो ले लिया है । नकद लेन-देन किया है, हो । लड़की : हमे खरीदा है और हमी को नहीं पता। दूसरा : अब तो पता लग गया? पहला : किससे खरीदा? दूसरा हँसता है। पहला नाराज होता है। पहला : किससे सारीदा ? (डांट कर) किससे खरीदा? दूसरा : (तीखी,डांटती हुई आवाज में ) चुप्प ! उदंड लड़के, चुप ! फिर बोला तो 'नील डाउन' कराऊंगा। पहला चुप हो जाता है। दूसरा : किससे खरीदा है ! तुमको खरीदा और तुम ही को नही पता ? बनना बहुत आता है । बगुलाभगत ! उस पर मुंहजोरी। वजात, उल्लू कही पहला : आपको खबरदार किये दे रहा हूँ। इस तरह की नीच भाषा का इस्तेमाल न कीजिये। दूसरा : सुनो, सुनो, बिटिया ! यह वित्त-भर का लड़का मुझे खबरदार कर रहा है! लड़की : वह ठीक ही कह रहा है । आप बुजुग्गं है । लेकिन कभी-कभी ऐसी वे- सिरसर की वातें करते हैं। दूसरा : लगता है, दोनों फन उठा रहे हो। न, न, ऐसा न करना। जहर के दांत तोड़ने का पत्थर मेरे पास है । छि:-छिः ! ऐसा न करना । नकद गिनीपिग : ४३ पैसे दिये, मगर यह कैसा माल मुझे दे दिया ! देखने मे दो मन दूध, पर मक्खन कितना निकलेगा, कौन जाने ? पर मक्खन निकालने का तरीका मुझे आता है, जी! खर, अब चला जाये । पहला : आपकी जहाँ मर्जी हो जाइये । हम नहीं जायेंगे। दूसरा : तुम, रानी विटिया? लड़की : अगर यह न जाये तो मैं अकेले कहाँ जाऊंगी ? दूमरा : अकेले कहाँ ? मैं क्या इंसान नही हूँ? मैं क्या इतना बूढा हो गया हूँ, जी? इसके अलावा, अगर मैं तुम्हें पसंद नहीं, तो बहुत-से जवान लडकों से तुम्हे मिला दूंगा। सवको इकट्ठा कर रखा है। ये अंग-अंग से छलकती जवानी ! इसकी एक-एक लहर दसियों सीनों पे पछाड़ खा कर गिरे, तब न ! यौवन नटखट न हो तो मजा ही क्या? आओ, देखो न, मिनटों मे पंख फैलाये नाचती सुनहरी चिड़िया बना दूंगा। लडको : आप चुप हो जाइये । पहला : आप अभी चले जाइये । नही तो...! दूसरा : नही तो? पहला : मेरे पास एक छुरा रहता है। बताये देता हूँ। दूसरा · वह क्या मुझे नहीं मालूम ? इसीलिए तो तुम्हे खरीदा है। आजकल के लड़के छुरा हाथ में लिये बड़े तड़पते हैं। जरा-सा इलाज हो जाये तो सब ठीक हो जायेगे। तुम्हारा इलाज करवाने के लिए ही तो तुम्हें खरीदा है, जी। पहला : आपसे आखिरी बार कह रहा हूँ-चले जाइये ! दूसरा : एक बार आ जाने के बाद तो जाता नही हूँ, भाई ! लडकी . फिर हम चले जायेंगे। पहला : हाँ, चलो। दूसरा : चले जाओगे? रास्ता कहाँ है ? ये सब रास्ते तो मेरे हैं--सव खरीद लिये है मैंने। जब कोई इन रास्तो पर चलता है, तो उसके कदमो की आहट को टेप-रिकार्ड कर लेते है । कैसी आवाज है ? उसका मतलब क्या है ? कदमो की आवाज़ कहां जाती है ? किससे मिलना चाहती है ? किन लोगो के साथ ताल मिला कर चलती है ? सव नोट करके रख लिया जाता है। हमारा यह कारखाना बहुत पुराना है, और तुम अभी कल के छोकरे हो। पहला : आपके खरीदे हुए रास्तों के अलावा भी और रास्ते हैं। उन्ही रास्तों पर चलेंगे। आपकी आँखों के सामने से हो जायेंगे। दूसरा : ठीक है। आगे चलो। जो रास्ता मैंने नहीं खरीदा है, वहाँ मेरा संतरी : गिनीपिग है। वह चिल्ला कर पूछेगा-कौन जाता है। पहला : कहूंगा-मैं, हम लोग। दूसरा : हम लोग? हम लोग माने कितने लोग? लड़की : दो लोग हम दोनों। दूसरा : दोनों ! (हंसता है।) ठीक है, आगे बढ़ो । उस रास्ते पर हजारो आदमी मुंह के बल गिरे हैं, और तुम दोनों! बढ़ो...आगे बढो... देखू रा...खेल तो देखू । क्या हुआ? बढ़ो? पहला : ज़रूर आगे बढ़ेगे। चलो। पहला लड़की का हाथ पकड़ता है। दूसरा ताली बजाता है। दो बार । तीसरा बंदूक संभाले प्रवेश करता ही चिल्लाता है --कौन जाता है ! वे दोनों ठिठक कर खड़े हो जाते है। दूसरा : (तीसरे से) जाओ, डाक्टर को भेज दो। इन दो रोगियों को देखेगा। - जाओ। तीसरा चला जाता है। दूसरा : बैठो, जी। तुम लोग बैठो। बात समझ में आ गयी ? प्राणों का मोह छोड़ना बहुत मुश्किल है, भाई ! सबसे पहली बात है जिंदा रहना। और मैं तो तुम्हें मारना नही चाहता । अच्छी तरह जिंदा रहने का बन्दोबस्त कर दूंगा। पैसे खर्च के खरीदा है-रुपये-पैसे देकर सुख से भरा पूरा घर बनवा दूंगा। उसके बदले में तुम मेरा थोडा-सा भी काम नही करोगे? ऐसे नाशुक्रे होने से काम नहीं चलेगा, भाई ! पहला : इस तरह कब तक जीतेंगे आप? दूसरा : हमेशा जीतना ही तो आ रहा हूँ, भाई ! पहला : सच कह रहे हैं ? दूसरा : झूठ भी नही है। रानी बिटिया, तुम इतनी उदास होकर क्यों बैठी हो? यह तो फिर भी कुछ ची-चपड़ कर रहा है। लड़की : (अचनाक चेहरा उठा कर) अपना छुरा मुझे दोगे? पहला : क्यों ? तुम क्या करोगी? लड़की : कम से कम हम दोनों अपने सीने में यह छुरा तो भोंक ही सकते है। दूसरा : यह जरा नाटकीय नहीं हो जायेगा? इतनी जल्दी भी क्या है ? नाटक के आखिरी दृश्य के लिए बचा कर रखो-नही तो दर्शक लोग ऊपने लगेंगेन। पहला : आप हमे ले जाकर क्या करना चाहते हैं ? लगातार हंसी-मजाक या और कुछ ? गिनीपिग : ४५ तरा भी तो इलाज होगा। समतो उसके बाद? दुसरा : उसके बाद अपने काम में लगाऊँगा। पहला : किस काम में? साकी : सोना चुगने का काम? दूसरा : हाँ, चारों तरफ सोना विखरा हुआ है, बटोर कर लाना है। उसके लिए लोग तो चाहिएन। पहला : इसका मतलब ? हम आपके सोने की खानों के मजदूर बनेंगे? दूसरा : सिर्फ मजदूरों से कैसे काम चलेगा? सोने का पहरा देने के लिए पहरेदार नहीं चाहिए? सड़की : तब? तव क्या पहरेदारी का काम है ? दूसरा : पहरेदार तो चाहिए ही उसके साथ पूरी योजना चलाने के लिए भी तो आदमियों की जरूरत है ? पहला : फिर? दूसरा : फिर और देशों में ऐसी जो संस्थाएं हैं, उनके साथ संबंध रखना-~-दो- एक जनो का काम है क्या? यह तो, भाई, बड़ी भारी योजना है। दुनिया भर में फैली है हमारी मित्रता। यह तो भाईचारे का सम्बन्ध है, दोस्ती का। बहुत अच्छा...! मेरे बदन पर सुई चभे तो उसके बदन से खून टपकेगा। सात समुंदर पार उसके सिर पर लाठी मारो तो में अपनी खोपड़ी की मरहम-पट्टी करवाऊँगा। यह दोस्ती बहुत- बहुत ही अच्छी है, भाई ..सीखने लायक है। तुम दोनों सिर्फ एक- दूसरे से चिपटे हुए हो । इस बंधन को महिमा तुम क्या समझोगे? तीसरा प्रवेश करता है। तीसरा : अरे वाह, गुरु जी ! छात्र-छात्रा को लेकर बिलकुल आश्रम खोले बैठे हो । गुरु, ये तो बताओ सबसे अच्छा आश्रम कौन-सा है ? दूसरा : किसी जवान छोकरी के गालों के गड्ढे । हैं न यार? तीसरा : अरे वाह! क्या कहा है ! तभी तो तुम्हे गुरु कहता हूँ। चरणों को धूल दो, गुरु! चरणों को धूल ! दूसरा : मिलेगी, मिलेगी, धूल भी मिलेगी। पर पहले इलाज तो शुरू करो। तीसरा : कसी बीमारी है? दूसरा : पुरानी। दोनों को बीच में और जल्दी-जल्दी नीचे साकेसड़की के ता जायेंगे। ४६ : गिनीपिंग पड़ेगी। तीसरा : क्या बीमारी है ? दूसरा : पारी का बुखार। तीसरा : बीच-बीच मे गर्म हो उठते हैं ? दूसरा : गलत-सलत बकते हैं। तीसरा : दांत पीसते हैं ? दूसरा : हाथ-पैर पटकते है। तीसरा : पसीना आता है ? दूसरा : ज़ोर-जोर से सांस लेते है। तीसरा : सिर मारते है ? दूसरा : सजे-सजाये घर मे सिर मारते हैं। तीसरा : सीग हैं ? दूसरा : अभी निकले नहीं। तीसरा : कितना ऊँचा कूद सकते है ? दूसरा : गुस्से से रोने तक। तीसरा : आंखें लाल होती है ? दूसरा : लाल होती हैं। तीसरा : नाखून है ? दूसरा : दांतों से कुतर डालते हैं। तीसरा : गुट बनाते है ? दूसरा : लड़की बाल बनाती है। तीसरा : लडका गुट बनाता है ? दूसरा : हिचकिचाता है। तीसरा. : भूखा है ? दूसरा : उल्टी-सीधी भूख है। तीसरा : चिल्लाता है ? दूसरा : चिल्लाता है। तीसरा : क्या चाहता है ? दूसरा : खून करना चाहता है। तीसरा : खून करना चाहता है ? दूसरा : छुरा है! तीसरा : (पहले से) छुरा दो ! ए जी, वह वाला छुरा दे दो! गोल-गोल चलना बंद कर देते हैं । पहला : साथ नही लाया हूँ। . गिनीपिग ::४७ : दूसरा : निकालो, में कहता हूँ। पहला : नही है । मैंने निगल लिया है। तीसरा : निगल लिया है ? देखू, मुंह खोलो! पहला मुंह खोल देता है। तीसरा टाचं से अंदर देखता है। तीसरा : हूँ,नोक तो दीख रही है । ठीक है। कोई घबराने की बात नहीं है। वह डिजाल्व हो जायेगा। ऐसिड डाल कर पिघला दिया जायेगा। (लड़को से) तुम्हारे पास छुरा है ? लड़की : हो, है। तीसरा : निकालो, निकालो ! टप्प से निगल तो नहीं लिया? लड़की : नहीं। दूसरा : तो फिर निकाल दो, विटिया ! लड़की : अभी नहीं है। पसंद करके दुकान पर ही छोड़ आयी हूँ। कभी खरीदूंगी। दूसरा : खरीद चुको ! सीधी मेरे क्लीनिक में जाओगी, वहां इलाज होगा-~- बस सब झंझट खत्म । शात मीठी अल्हड़ लडकी बन जाओगी। कितने खिलौने है मेरे--उनसे खेतोगी। पहला : बड़ा अच्छा खेल है ! और खिलौने हमें नही चाहिए। जाने कब ये सेल खत्म होगा। दूसरा : खत्म होगा, जरूर खत्म होगा-डाक्टर आया है। दिमाग ठीक होने पर ही सब कुछ फिर से अच्छा लगेगा।हैन, डाक्टर ? तीसरा : दिमाग की सफाई की जरूरत है। बहुत कूड़ा-करकट इकट्ठा हो रहा है । दिमाग को घो-पोंछ कर उसमे नये वीज धोने पडेंगे। बस फिर शाति । देखना, जलन नही, दर्द नही। असल में क्या चाहते हो, वताओ। मन की शांति ही न ? ला दूंगा। कुछ टोना करूंगा दोनों पर, जिससे धीरे-धीरे असंतोप के बादल छंट जायेंगे । बड़ा आराम महसूस होगा। और क्या चाहिए? दूसरा : जरा भी तकलीफ नही होगी। यह तो विजली का शॉक नहीं है न! नसों में जो गर्मी है, उसे धीरे-धीरे आइसक्रीम की तरह मीठा और ठंडा कर दिया जायेगा । इतनी लडाई क्यों चल रही है ? इसी आराम के लिए न । वह मिलेगा। हाथ-पैर पटकने से क्या फायदा ? मैं हाय बढ़ा कर दे रहा हूँ, कोई लड़ कर लेना चाहते हैं, किमी को छप्पर फाड़ कर मिलता है। यह सीधा-सादा हिसाब तुम्हारी समझ में क्यों नहीं आता,जी? तीसरा : दरअसल थोड़े-मे नाराज हो, यही न? टैबलेट दूंगा, सब ठीक हो ४८ : गिनीपिग

'अभियान' द्वारा प्रदर्शित 'गिनोपिग' में
1
अनिल सहगत, कीमती आनन्द और चेतना तिवारी।
कुलभूषण खरबंदा और चेतना तिवारी।

'अभियान' द्वारा माचत 'गिनोपिग में ...:
अनिल सहगल और चेतेन। तिवारी
Mo
दूसरे' के रूप मे कुलभूषण खरबंदा

जायेगा। नवंसटेन्शन है, समझे न .. इसरा : असल में थोड़ी लड़ने की इच्छा होती है। है न ? वाक्सिग? वाक्सिग करना चाहते हो ? (याक्सिम की मुद्रा में कूदते हुए) हां, हो लड़ोगे, लड़ते रहोगे हमेशा। अच्छे दस्ताने खरीद-दूंगा।-रिंग के बाहर से ताली सुनना चाहते हो न? ताली बजाने वाले मेरे पास बहुत-से लोग हैं। रेडियो, टेलीविजन, अखवार, सिनेमा, थिएटर, भाषण, पोस्टर... सव एक साथ ताली बजायेंगे। और क्या चाहते हो? मेरे पास सब है। यस सिर्फ दिमाग को जरा ठंडा करो...और काम में मन लगाओ। चारों तरफ सब संभाला-मजोपा हुआ है-उसे उलट-पुलट मत करो। किसी भी चीज़ को तहस-नहस नहीं करना चाहिए-समझे न ? जैसा है वैसा ही रखो । अच्छा? पहला : यह बार-बार अच्छा-अच्छा कह कर हमारी राय जानने की बनावटी नम्रता अब छोड़िये । हमारी राय का मूल्य ही क्या है आपके पास ? दूसरा : ठीक है। तुम्हारी आखिरी इच्छा क्या है ? बताओ ज़रूर पूरी करूंगा। पहला : ओ ! फांसी पर लटकाने से ठीक एक मिनट पहले का डायलाग । नही, वैसा डर अब और नहीं लगता। दूसरा : अरे-रे-रे ! ऐसी अशुभ बातें नहीं करते। (पहले की ठोढ़ी छूने लगता है, यह झटके से उसका हाथ हटा देता है।) जियो, जुग जुग जियो ! लहको : मेरी एक इच्छा पूरी करें? दूसरा : बोलो, विटिया रानी, बोलो ! इस बुद्ध की तरह तुम ज्यादा ची-चपड़ नहीं करती~~-मुझे बहुत अच्छा लगता है। इसके साथ तुम्हारा मेल कैसे हुआ ? बोलो, क्या इच्छा है, बोलो ! पहला : तुम कुछ नहीं मांगोगी उससे । लड़की : (लाइभरे स्वर में) जरा अपना ऐलबम मुझे देखने देंगे ? हमरा : ऐलवम ? मेरा? क्या करोगी? लड़की : क्लीनिक मे काम तो कुछ होगा नहीं, बस बैठी-बैठी देखती रहूँगी। दूसरा : तसवीरें देखोगी? लड़की : (मजाक करती हुई-सी) हाँ, तसवीरें ! आपके कितने चेहरे है, कितने चेहरे हैं, कितने वेश ! पन्ने पलट-पलट कर देखूगी। दूसरा : अरे, बाबा ! लड़की मेरी टेढ़ी-मेढी बातें कर रही है । लडकी : सोतो कभी-कभी करती हूँ, राजा साहब इमरा : (सहसा ऊँची आवाज में) डाक्टर ! स्टार्ट योर ट्रीटमेंट ! स्टार्ट । एक तीखी यांत्रिक आवाज़ होती है और उसके साथ ही गिनीपिग : ४६ दूसरा : चुप, बुद्ध ! .. -- यत्तियां वृक्ष जाती हैं। कुछ पलों के बाद ही मंच में विचित्र रंग को रोशनियाँ घूमती लगती हैं। साथ ही एक कर्कश सी आवाज लगातार होती रहती है। पहला और तहको दोनों सरफ दो कुसियों पर बेहोश-से मंठे हैं। यह सब धुंपली- पुंथली, रंग-बिरंगी रोशनी में दीखता रहता है। लड़की के पास तोसरा खड़ा है। आवाज एक जाती है और स्वामा- विक रोशनी से मंच आलोकित होता है । तीसरा : गुरु, इलाज हो गया। इन दोनों को अलग कर दिया है। दसरा : मगर दोनों को अलग करने से तो काम नहीं चलेगा। वाहर जो लोग दिन-रात चीखते-चिल्लाते रहते हैं, उनसे इनको अलग करना है। तीसरा : धीरे-धीरे सब होगा। बाहर के लोगों को अब पसन्द ही नहीं करेंगे। दूसरा : कब जागेंगे? तीसरा : जगे ही हुए हैं। सिर्फ आराम के कारण आँखें बन्द है। नसों का वह तनाव अब खत्म हो गया न । दूसरा : तब इनको पारा आराम करने का मौका दिया जाये। तीसरा : हां दिया जाये। दूसरा : तुम चलो। मैं इनके साथ दो-चार बातें करके आता हूँ। तीसरा चला जाता है। दूसरा लड़के की तरफ झुक कर तरह-तरह से उसको देखता है, लड़की को भी देखता है। दूसरा : ए, भगत जी अरे, ओ भगत जी! जरा आंखें तो खोलो। रानी विटिया, सुन रही हो? (आगे बड फर लड़की के मार्य और चेहरे पर लोमी की तरह हाय फेरते हए) गोवन तो कानों से नहीं सुनता, मुनिया ! यौवन बहरा जो है-अंधा भो, स्पर्श से बोलता है और स्पर्श से ही सुनता है। क्या कह रहा हूँ, सुन रही हो? (लड़की आंखें बंद किये ही कनमुनाती है और उसको एक उँगली हल्के मे काट लेती है।) तो मछली फंस गयी? पानी से निकाल कर कहाँ रक्खू ? जमीन पर? या पानी मे ही सेल खिलाऊँ ? लड़की अलसायी-सी आंखें खोलती है। चेहरे पर मस्त हंसी। दूसरे की हथेली पकड़ लेती है। दूसरा : अरे, ओ-भगत ! देख, आँखें खोल कर देख, मेरा इलाज फलने लगा है। पहला मुश्किल से आंखें खोलता है। उनको देख कर धुपचाप बतीसी निकाले हसता है, और फिर देखता ही ५० : गिनौपिग दूसरा : अरे, बुद्ध की तो लगता है जवान ही बंद हो गयी ! इसी को कहते हैं इलाज ! कैसा असर हो रहा है ! नुमाइश में भेजना चाहिए इन्हे । क्या मुस्कान है, वाह ! (चिल्ला कर) ए, बातें करनी है, जरा होश में तो आओ। दोनों आंखें मलते हुए साफ़ देखने की कोशिश करते हैं। लड़की : (धीमी आवाज) मैं कहाँ हूँ? दूसरा : मेरे बिलकुल पास। लड़की : वह कहाँ है? दूसरा : वह रहा। जबान बंद हो गयी है। चांद का टुकड़ा चांदनी बिखेर रहा है। लड़की : (लाड़ में आ फर) मुझे नीद आ रही है। दूसरा : आयेगी नहीं ? नसों का तनाव खत्म हो गया न ! अब तो लंगी नीद मे ही डूयोगी-उतराभोगी । एक शांत, ठंडी-सी नींद से घिरी हुई चलोगी, फिरोगी। घर के काम-काज करोगी। अपनी आंखों से यह सब देखे जा रहा हूँ-बड़ा चैन मिल रहा है मुझको। लड़की : (रूठ कर) आप कहाँ जायेंगे? दूसरा : बस, मेरा काम तो खत्म हुआ...अव कोई और आयेंगे। उन्ही के पास रहोगे तुम लोग। उन्ही का काम-काज करोगे। लड़की : क्या काम ? दूसरा : अच्छा काम है। तुम लोगो का प्रोमोशन जो हो गया है । इलाज का असर अच्छा होने पर ही प्रोमोशन मिलता है । वे आयेगे...आकर इंटरव्यू लेंगे। तुम जरूर पास हो जाओगे। लड़की : आप मत जाइये। मेरे पास रहिये। दूसरा : उनका रहना मेरा ही रहना है। धवराने कोई बात नहीं। पहला : (लाड़ से) नही, आप मत जाइये। दूसरा : देखा, कैसे हिल गये है मुझसे ! अरे, मेरे न रहने से क्या विलकुल अनाथ हो जाओगे? मेरा सर्टिफिकेट है, इसका मतलब ही है मैं हूँ तुम लोगों के पास। लड़की : जाने कैसा खाली-खाली लगेगा। पहला : सिर पर आपकी छन छाया थी--अब यह बरगद की छाया जैसे हट गयी। दूसरा : जाते वक्त ऐसे नहीं करते । मोह नहीं बढ़ाओ, भई, नहीं तो मैं रो दूंगा। उससे क्या फायदा ? तुम्ही तो मेरे सब-कुछ हो। तुम्हे मैं आशीर्वाद देता हूँ। गिनीपिन : ५१ लड़की : हम आप को कुछ भी नहीं दे सकते। दूसरा : (फुसफुसा कर) ठीक है । एक मन-माफिक भेंट देना मुझको । (अयं- पूर्ण ढंग से मुरकराते हुए) सुगंध से मरा अंग...दो फूल ही दे जाना बूढ़ा हो गया, पर मन फिर भी कहता है...मुगंध लेने से बढ़ कर कोई सुख नही है, भाई। पहला : (मजाक करता हुआ-सा) क्या बातें हो रही हैं ? सब सुनायी दे रहा है मुझको। लड़की : (बनावटी गुस्से से) हमारी बातें क्यों मुन रहे हो ? सब बातें कान लगा कर सुनने की आदत पड़ गयी है। दूसरा : नहीं, जी नहीं, उसने कुछ नही सुना। यूं ही तुम्हे डरा रहा है । लड़की : केह, सुनने भी दो। कौन डरता है ? यह क्या कोई कम है ! सब बता दूंगी, हाँ। पहला : बस, डराना-धमकाना शुरू हो गया ? मैंने ऐसा क्या कहा है ? दूसरा : देखो, फिर झगड़ने लगे तुम लोग । चुप हो जाओ। कोई किसी को पोल नहीं खोलेगा। और न ही कोई किसी पर रोक-टोक लगायेगा। यौवन तो सागर है रे, चाहे जितनी लहरें चुरा लो, कौन देखता है ? न झगड़ा न फसाद । अच्छा फिर आऊँगा। अब तुम्हारे नये बॉस आयेंगे। ठीक मे इंटरव्यू देना तुम लोग । चलूं, तो फिर । जाओ, रानी बिटिया, मैं आंगन धो-पोछ कर रपूंगा। बस आकर दो फूल बिसेर जाना। दोनों की ठोढ़ी अपनी उंगलियों से छू कर उन्हें चूमता है और चला जाता है। वे दोनों हाथ हिला कर उसे विदा करते हैं । लड़की अब खिलखिला कर हंस पड़ती है। पहला : इतनी जोर से मत हँसो। बुड्ढा अभी तक दफा नहीं हुआ। मुन लेगा। लड़की : (हसो रोक कर) बुढ्ढा कितना रसिया है, देखा? बिलकुल रमीली रसभरी! पहला : अरे पटा कर रखना है। यह भी तो एक आर्ट है। कैसा बस मे किया है, देखा? तुम्हे मुझसे कुछ सीखना चाहिए। लड़की : तुमसे ? मुझे सिखाने की जरूरत नहीं तुम्हे। पहला : (हंस कर) हाँ, यह कहो कि तुम ही मुझे सिखा सकती हो । है न ? लड़की : ए, बुड्ढे ने कहा था न, कोई आयेगा। पहला : आने दो। लड़की : बुढ्ढे का भी वॉस । कमरा जरा ठीक-ठाक नही करोगे? ५२ : गिनीपिग पहला : अरे, सब गड़बड़ कर दिया था अभी। कमरा जैसा है वैसा ही रखने से तो सर्टिफिकेट मिलेगा। कैसी भुलक्कड़ होती जा रही हो ! सारे नबर कट जाते। इंटरव्यू में बिलकुल फ़ेल । कुछ नहीं हटाना है । इन लोगो के कायदे-कानून सब भूल गयो क्या? लड़की : अरे रे रे ! शुक्र है, याद दिला दिया। (कुछ सोचते हुए) फूलदान को पहली वाली जगह पर रख दूं। पता नहीं कब तुमने हटा कर रख दिया। खुद ही तो ग़लती करते हो और हर समय मेरी बातो मे मीन- मेख निकालते हो। पहला : घड़ी? देखो ! कहाँ उठा कर रखी है ? (ठीक जगह रखता है।) अब ठीक है। लड़की : कैलेंडर ठीक है? पहला : (देख कर) ठीक है। लड़की : (अपनी तरफ़ देखती हुई) मैं ? मैं ठीक हूँ न? पहला : (लाड़ भरी आवाज में) तुम? तुम बहुत ठीक हो। लेकिन तुम्हे देख कर मेरा दिमाग ठिकाने नहीं रहता। (उसे पकड़ने के लिए आगे बढ़ता है। लड़की हंस कर भागने लगती है । इतने में दरवाजे की कुंजी खड़कती है। वे ठिठक कर रुक जाते हैं।)आ गये शायद । खोलता हूँ। लड़की : ठहरो। (एक अदृश्य शीशे में अपना चेहरा देख कर अपने को संवारते हुए) आई-यो पेंसिल कहां चली गयी, बताना ? पहला : उसकी कोई जरूरत नही। (कुंडी फिर खटकती है।) लड़की : जरूरत नहीं ? क्या मतलब? पहला : अरे, मेरी टाई? लड़की : कौन-सी चीज़ कहाँ रखते हैं, पता ही नहीं चलता। अब ढूंढने का समय ही कहाँ है ? पाउडर भी नहीं मिल रहा। पहला : चश्मा ? चश्मा जाने कहाँ रख दिया जोर से कुंडी खटकती है। लड़की : कोई भी चीज़ अगर ठीक जगह रहती हो! मेरी लिपस्टिक ? पहला : बाद में ढूंढना। खोल रहा हूँ। इतनी देर इंतजार कराना कितनी बदतमीजी है! लड़की : ज़रूर कोई कमरे में घुसा था। इस तरह सोते हो तुम । जरूर किसी ने चुरा ली है मेरी चीजे । पता नहीं क्या-क्या चीजें उठा ले गया है। जरा दराज खोल कर देखो न...क्या पता, मेरी घड़ी भी चुरा ली हो। पहला : न, नही है। वह तो तुमने हाथ में बांध रखी है। गिनीपिग .. लड़की : यह नहीं। कल तो खरीदी थी, वह वाली। कुंडी खटकती है। पहला : इतनी देर तक दरवाजा बंद रखना कहां की तमीज़ है ? लड़की : मैंने मना किया है खोलने को? हर वक्त मुझे ही डांटते रहोगे । पहला : मारा गया ! मेरे जूते जूते की कीमत जानती हो कितनी है ? लड़की : विना जूते पहने क्या दरवाजा नहीं खोलोगे? (गले को हाय से सहला कर) अरे, मेरी जड़ाऊ नेकलेस? (कानों को छू कर) मेरे टाप्स ? (रुआंसी हो कर) देखा! हीरे के टाप्स कहां गये ? पहला : तुम तो जैसे किसी पार्टी में जा रही हो ! इन सब चीजों से अब फ़ायदा ही क्या है ? अरे, मेरे हीरे के बटन ? लड़की : अहा, तुम तो जैसे बाहर घूमने जा रहे हो! घर ही में तो रहना है। (वाहर देख कर) हमारी कार? पहला : हमारा फोन! लड़की : और सोफा सेट? पहला : फर्श का लिनोलियम? लड़की : रेडियोग्राम? पहला : टेलीविज़न सेट? लड़की : (बुलाते हुए) बौय ! बरा ! पहला : (जोर से) चोय ! बैरा! लड़की : (हताश हो कर) कहाँ चले गये सव? पहला : (हताश हो कर) कोई नही बोलता। किसी की आवाज नहीं आ रही। लड़की : कितना खाली-खाली महसूस होता है । मुझे डर लग रहा है। पहला : ये कैसा खालीपन है ? लडकी : मुझे डर लग रहा है, जी। पहला : हमारे अंदर भी ऐसा ही खालीपन है। जैसे-जैसे कोई सब कुछ उठा कर ले गया हो। कुंडी खटकती है। लड़की : दरवाजा नहीं खोलोगे? पहता : देखो, विलकुल भूल गया। लड़की : आजकल तुम बहुत भूलने लगे हो...कितनी बार कहा है, किसी अच्छे- • से डॉक्टर को दिखाओ। पहला : बस, मुझे ही डांटती रहो। तुम भी तो डॉक्टर के पास नहीं जा रही हो ...सारी रात मोती नही हो । जरा डॉक्टर के पास चली ही जाओ तो क्या बिगड़ जायेगा: ." ५४ : गिनीपिग लड़की : क्या होगा? पहला : ठीक कहा तुमने, क्या होगा? शायद लोग अपने लिए ही जीना नहीं चाहते...उब जाते हैं । सब कुछ जैसे एकदम रट जाता है। हम लोगों का और कोई नहीं हैं, है न? कुंडी खटकती रहती है। लड़की : अरे ! देखा, अंदर की कुडी खटक रही है। हम अब तक सोच रहे थे, वाहर की कुंडी है । मामला क्या है ? पहला : अरे, हो । अदर के कमरे में कौन घुस बैठा है ? लड़की : चोर-डकैत के सिवा और कौन हो सकता है ? हाय राम...अव ? अब क्या करोगे? पहला : इसका मतलब सुबह से घुसा बैठा है, समझी। क्योंकि हम अभी तो लौटे है। लड़की : सुबह हम लोगों के घर से निकलने के पहले कोई आया था न? पहला : कोन आया था, याद है ? लड़की : तुम्ही तो बातचीत कर रहे थे, मैं तो तब सो रही थी। पहला : लो, तुम्ही ने तो मुझे जगाया और जाने किसका नाम लेकर कहने लगी कि फलां तुम्हे बुला रहा है । पता नहीं क्या नाम था...याद नहीं आ लड़की : मैंने नाम लिया था? कैसी उल्टी-सीधी बातें कर रहे हो? सच वताओ, कहा था मैंने? पहला : तुम्हें याद नही आ रहा ? लड़की : नहीं तो । उस आदमी के साथ तो तुम्ही बात करते रहे थे, तुम्हें नाम नही याद आ रहा ? बिल्कुल नही ? पहला : नही। लड़की : तुम जोर-जोर से बातें कर रहे थे। मुझे याद है...उस कमरे का दरवाजा खोलने आवाज आयी थी। अब याद आ रहा है। पहला : (अचानक जैसे कुछ याद-सा आ जाता है।) हो, मैंने शायद । किसी का हाथ मजबूती से पकड़ रखा था और उसका मुंह बांधने की कोशिश कर रहा था। तुम्हें मैंने एक रस्सी लाने को कहा था...तुम्हें मिली नही रस्सी। लड़की : मैं तो सो रही थी। पहला : मैं भी तो वश कर रहा था। दांत साफ़ कर रहा था, शायद। फिर? लड़की : पर कोई आया ज़रूर था। पहला : जरूर आया होगा, नही तो फिर उस कमरे मे कौन है ? ठहरो, योलता . गिनीपिग हूँ। उसे देखने पर शायद याद आ जाये। लड़की : नहीं, अकेले हो । मत खोलना । उसके पास हथियार होते हैं। खाली हाथ कोई नही आता पहला : (चिल्ला कर) अजी जनाव, कुडी कौन घटखटा रहे हैं ? बाहर से आवाज़ : मैं ! पहला : मैं कौन? आवाज: मैं हूँ जी, मैं। पहला . ऐं.. ऐसे बोल रहे हैं जैसे जनम-जनम के परिचित हो । नाम बताइये। आवाज : कह तो रहा हूँ.. अरे, मैं हूँ ? लडकी : सुनो, 'मैं' नाम भी तो हो सकता है । (चिल्ला कर) क्या आपका नाम आवाज़ . (नकल उतारते हुए) क्या आपका नाम मैं है ? बात करने का ढंग देखो ? मैं क्या किसी का नाम होता है ? खोलिये न, अकेले-अकेले दम घुटा जा रहा है । तब से दोनों चहक रहे हैं, और मैं एक शब्द भी नहीं बोल पा रहा हूँ। खोलिये न । पहला : आपके हाथों में कुछ है तो नहीं ? आवाज़ : है क्यों नही ? दस उँगलियां है। दरवाजा खोलेंगे या तोड़ डालूं ? देखिये, मैं लात मार रहा हूँ। हाँ। दरवाजे पर लात मारने की आवाज । लड़की : लात मार रहा है। पहला : तो मैं क्या करूं? वह लात मार रहा है, या मैं ? इसमें भी मेरा ही कसूर है क्या! बड़की : बहुत गुस्से में है। पहला : तो गुस्सा दिलाती ही क्यों हो? लड़की : मैंने गुस्सा दिलाया? पहला : मैं तो दरवाजा खोल देना चाहता हूँ। लड़की : तो खोल दो! पहला : लो, खोल रहा हूँ। पायजामे-करते में तीसरा प्रवेश करता है। रूमाल से माये का पसीना पोंछता है। अपने पैर की उंगली की तरफ देखता है। तीसरा : लात मारने से घर के अंगूठे में इतनी चोट लग गयी। ऐसे हैं न आप लोग! ५६ : गिनीपिग लड़की : हमने आपको लात मारने के लिए कहा था? टांगों का जोर आजमाने से यही होता है। पहला : क्यों जनाब, जान न पहचान, मेरे कमरे मे घुसे बैठे हैं ? तीसरा : कौन किसके कमरे मे घुसा बैठा है यही तो प्रश्न है। लड़की : कौन किसके कमरे में ! मतलब ? क्या यह आपका कमरा है ? तीसरा : इसमे क्या शक है ? पहला : आपका दिमाग तो ठिकाने है ? तीसरा : मेरा भी यही मवाल है । आप लोगों का दिमाग ठीक है ? पहला : बनना छोड़िये । इस कमरे मे आप घुसे कैसे ? तीसरा : अपने कमरे में घुसा हूँ...तो क्यों घुसा हूँ, कैसे घुसा हूँ, इसका भी लंबा-चौड़ा वयान देना पड़ेगा क्या? लड़की : किस मतलव से घुसे हैं, वताइये? तीसरा : किस मतलब से आपने मुझे कुंडी लगा कर कमरे में बद करके रखा था. पहले यह तो बताइये? लड़की : क्या कह रहे हैं ? तीसरा : बिलकुल ठीक कह रहा हूँ ..सुवह धकेलते-धकेलते उस कमरे में मुझे बद नही कर दिया था आपने ? कैसी पुअर मेमरी है, रे बाबा ! पहला : सुबह-सुबह लगता है शायद कुछ हुआ था। तीसरा : हां, कोई भूचाल-चूचाल नही आया था...मैं जो कह रहा हूँ वही हुआ था। लड़की : हमारी सब चीजें कहां गयीं, वताइये? तीसरा : मेरी चीजें कहाँ गयो, पहले यह वताइये.. मैं क्या खाली कमरे में लेटे-लेटे सुख के सपने देखता था? माल-असबाब से कमरा भरा हुआ था.. क्या किया है आप लोगों ने उस सबका? पहला : इस कमरे मे आपकी चीजें थी? तीसरा : सोफासेट, लिनोलियम, टेलीविजन...सब कुछ । यहाँ तक कि आपकी श्रीमतीजी की ही तरह लड़की भी थी। पहला : वह कहाँ है ? उस कमरे में सो रही है क्या? कहाँ है वह ? तीसरा : (लड़की की ओर इशारा करके) यह जहाँ जायेंगी, वहाँ पहले से ही जा बैठी है। लड़की : कहाँ ? तीसरा : स्वगंधाम! और कहाँ ? जहाँ मैं भी जाऊँगा । (पहले की ओर इशारा फरफे) आप भी जायेंगे...आज या कल । लड़की : (हमदर्दी के साय) आपकी पत्नी की मृत्यु हो गयी है ? गिनीपिग : ५७

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: लड़की : जाने कौन हम लोगों को धीरे-धीरे खदेड़ कर लाया है। तीसरा : खदेड़ कर तो मुझे भी लाया गया है। तब भी समझा था, अब भो समझ रहा हूँ... पर क्या कर सका? पहला : हम अपनी मर्जी से नहीं आये हुए हैं...लाचार हो कर आना पड़ा है। हमने विरोध किया है ..मैंने...मैंने खून तक करने की कोशिश की है। तीसरा : अकेले-अकेले लड़ाई नही हो सकती। धीरे-धीरे मर जाना पड़ता है या फिर यहां आ पहुँचना पड़ता है। लड़की : यकीन कीजिये, हम लोग मानना नहीं चाहते थे। तीसरा : (स्वगत) अकेले-अकेले लड़ाई नही लडी जाती, धीरे-धीरे मर जाना पड़ता है या फिर यहां आ पहुँचना होता है। पहला . हम यहां कहां आ गये है ? तीसरा : उन लोगों की लेबोरेटरी में। लड़की : क्यों? तीसरा : एक्सपेरिमेट। पहला : कैसा एक्सपेरिमेंट ? तीसरा : लास्ट एक्सपेरिमेट । लड़की : वे लोग हमे लेकर करेंगे क्या ? तीसरा : (उदास) पता नहीं। इस दरवाजे की कुंडी खटकने लगेगी.. आदमी आयेगा। पहला : (डरा हुआ) हां, यह हमें मालूम है। तीसरा : मुझे भी सिर्फ इतना ही मालूम है। लड़की : पर मैंने सुना है, वह इंटरव्यू लेने आयेगा? तीसरी : पहले इंटरव्यू ही होता है । ठीक है । मैं उस कमरे में जाता हूँ। आप लोगों के बाद मेरा नंबर है। इन कमरों में शायद हम जैसे और भी बहुत लोग है । चलूं। घोरे सधे फ़दमों से तीसरा चला जाता है। लड़की : अगर कोई आया तो हम दरवाजा नहीं खोलेंगे। पहला : वे खुद ही दरवाजा खोलना जानते है। लड़की : फिर हम क्या करें? पहला : इंटरव्यू देंगे? लड़की : नहीं। पहला : और कोई रास्ता नहीं है। लड़की : तुम्हारा वह छुरा कहां है ? गिनीपिग : ५६ तीसरा : जिंदा नहीं है, यही है असली वात...मर गयी या नहीं यह सब कौन जानता है? लड़की : इतनी पहेलियाँ क्यों बुझा रहे हैं ? तीसरा : अभी पहेलियां क्या, अभी तो शुरुआत ही है। दो छोटे-छोटे दीयों की तरह टिमटिमा रहे हैं। पर कर तक? एक फूंक मे छू-मंतर । (चारों तरफ देख फर)बेहद खाली-खाली लग रहा है। भगवान जाने कब तक पर लौटूंगा। पहला : अभी तो आपने कहा, ये बापका घर है ? तीसरा : कहने से ही हो जाता है ? अभी जो आप कह रहे थे, माल-असबाब से आपका कमरा भरा हुआ था। सचमुच था क्या? लड़की : था ही तो। तीसरा : (डांटते हुए) बस, बस, कुछ भी नहीं था ।(आवाज़ बदल कर गंभीर हो जाता है।) कुछ भी नहीं था। पहला : डॉटिये मत, हमारी बहुत-सी चीजें थों। तीसरा : (कठोर स्वर में) झूठ है। कुछ भी नहीं था। (आवाज और भी सस्त हो जाती है।) सच कहिये, था? या आपके मन में इन चीजो की चाह थी? शृंगार की चीजें, फर्नीचर, बोय, बरा...कम्फर्ट, आराम ...और आराम...आप चाहते थे। मन ही मन ये सब चाहते थे। लड़की : आराम कौन नहीं चाहता? तीसरा : मैं भी चाहता हूँ, सच चाहते हैं । सिर्फ पाने का तरीका यह बताता है कि कौन-सा पाप है, कौन-सा पुण्य । ये सब चीजें जहाँ से आती हैं, वहाँ का लेवल बता देता है, कौन-सा असली है, कोन-सा नकली । और जो भोगता है, वही जानता है किस मे तृप्ति है और किस मे विष । मैं जानता हूँ आप लोगों की जुबान पर विष लगा हुआ है... थोड़ा-थोड़ा करके अंदर जा रहा है स्लो पोयजन । हो, इसी तरह, ठीक इसी तरह, इस पर एक और लडकी जो आज जिंदा नहीं है। मोर को तरह कही उड़ रही होगी और सोने से मढे कुछ लोभी दांत एक-एक करके उसके पंप नोच कर फेंकते जा रहे होगे। लिपस्टिक के साथ सून मिल गया है, जड़ाऊ कंगन के साथ हाथों को जंजीरें मिल गयी है। (चारों तरफ देख कर) यह न मेरा घर है, न आप लोगो का । हम लोग आ जाते हैं, या इससे भी सच यह है कि हम लोगो को घसीट कर लाया जाता है। पहला : कोन घसीट कर लाता है, शायद मुझे पता है। तीसरा : (तेव स्वर में) कौन है ? : ५८ : मिनीपिग सड़की : जाने कौन हम लोगों को धीरे-धीरे खदेड़ कर लाया है। तीसरा : खदेड़ कर तो मुझे भी लाया गया है। तब भी समझा था, अब भो समझ रहा हूं... पर क्या कर सका? पहला : हम अपनी मर्जी से नहीं आये हुए हैं...लाचार हो कर आना पड़ा है। हमने विरोध किया है...मैंने...मैंने खून तक करने की कोशिश की है। तीसरा : अकेले-अकेले लड़ाई नही हो सकती। धीरे-धीरे मर जाना पड़ता है या फिर यहां आ पहुंचना पड़ता है। लड़की : यकीन कीजिये, हम लोग मानना नही चाहते थे। तीसरा : (स्वगत) अकेले-अकेले लड़ाई नही लड़ी जाती, धीरे-धीरे मर जाना पड़ता है या फिर यहाँ आ पहुंचना होता है। पहला . हम यहां कहां आ गये है ? तीसरा : उन लोगों की लेबोरेटरी में। लड़की : क्यों? तीसरा : एक्सपेरिमेट । पहला : कैसा एक्सपेरिमेट? तीसरा : लास्ट एक्सपेरिमेंट । लड़की : वे लोग हमे लेकर करेंगे क्या? तीसरा : (उदास) पता नहीं। इस दरवाजे की कुंडी खटकने लगेगी.. एक आदमी आयेगा। पहला : (डरा हुआ) हां, यह हमे मालूम है । तीसरा : मुझे भी सिर्फ इतना ही मालूम है। लडकी : पर मैंने सुना है, वह इंटरव्यू लेने आयेगा? तीसरा : पहले इंटरव्यू ही होता है । ठीक है । मैं उस कमरे में जाता हूँ। आप लोगों के बाद मेरा नंबर है। इन कमरों मे शायद हम जैसे और भी बहुत लोग है । चलूं । धीरे सधे क़दमों से तीसरा चला जाता है। लड़की : अगर कोई आया तो हम दरवाजा नहीं खोलेंगे। पहला : वे खुद ही दरवाजा खोलना जानते है। लड़की : फिर हम क्या करें? पहला : इंटरव्यू देंगे? लड़की : नहीं। पहला : और कोई रास्ता नहीं है। लड़की : तुम्हारा वह छुरा कहां है ? : गिनीपिग : ५६ पहला : (उदास-सा हँस कर) ढूंढना पड़ेगा। लड़की : चलो न, ढुंढते हैं। पहला : अकेले-अकेले लड़ाई नहीं होती। कोई फायदा नही है। याद है ? एक आदमी कभी-कभी अचानक आ जाता था, घड़ी की तरफ देख कर कहता था, समय नहीं है, अभी चले आओ। हमने उसकी बातों पर ध्यान नहीं दिया। अब छुरा मिल भी जाये तो क्या, न मिले तो भी क्या! .. .. अचानक बाहर से पुकारने की आवाज़ आती है...लूसी- लूसी ! वे चौकन्ने हो जाते हैं । सूट पहने अभिजात वेश- भूपा में दूसरा प्रवेश करता है। हाय में एक छोटी चांदी की जंज़ोर है दूसरा (चारों तरफ देख कर) लूसी-लूसी ! पहला : किसको ढूंढ रहे हैं ? दूसरा : लूसी...माई हनी स्वीट हनी . आई मीन माई स्वीट डोग। लूसी को इधर कही देखा है ? लडकी : नहीं, कोई भी कुत्ता इधर नही आया। दूसरा पर मैंने उसे इधर आते देखा। लूसी इस कदर नटखट हो गयी है न, माई नौटी प्रिटी लूसी! पहला : आप उसे बहुत प्यार करते हैं क्या? दूसरा : हां, मेरे साथ ही सोती है । वड़ी तेज है। शी कंन ईवन स्मल एनी- बडीज फुटस्टेप्स। पहला : आपको...ठीक पहचान नही पा रहा...यही रहते हैं ? दूसरा : किसी एक जगह पर रहना मुझे भाता नही। आई लव ऐक्सपेंशन । स्प्रंड अप ब्रदर, स्प्रेड अप ! दिस इज माइ मोटो। यह धरती बहुत छोटी है । लगता है अगर करवट बदल कर लेदूं तो शरीर दीवार से टकरा जायेगा। आई लव ऐक्सपेंशन। दिल करता है सब प्लेनेट्स मे रस्सी डाल कर झूला वनाऊँ और झूलता रहूँ। बट व्हेयर इज माइ लूसी? पहला: मैं ढूंदू ? दूसरा : नही, कोई जरूरत नही। मेरी आवाज सुन कर वह जरूर आ जायेगी। बैठ सकता हूँ? लड़की : बैठिये न। दूसरा : (बैठ कर) माइ मिशन इज टु बैपटाइज । मुझको कई लोग मजाक मै कहते हैं जीसस द सकेंड । देट ओल्ड जीसस ने लेकिन एक अच्छी धात . गिनीपिग - । कही थी-लव दाई नेवर, अपने पड़ोसियों से प्यार करो। बट दैट जीसस वाज लैस प्रक्टीकल । वुढऊ नही जानते थे कि सब पडोसी नही होते। पड़ोसियों को भी पहचानना पड़ता है...बनाना पड़ता है । योर नेक्स्ट डोर नेवर मे बी योर नेक्स्ट डोर एनेमि। तो फिर अपने रिलिजन से मैं किसको प्रोटेक्ट करूं? अपने पड़ोसियों को? यही न? यह एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है...और जिम्मेदारी ही धर्म है--रिलिजन । और इसी जिम्मेदारी को निभाने के लिए मॉर्डन साइंस मुझे ऐसिस्ट कर रही है, टाप रेन्स मुझे एडवाइस दे रहे है और मेरी मशीनरी हजारों आदमियों का जाल फैलाये बैठी है । आइ मस्ट लव माइ सिलेक्टेड नेबर्स। प्रोक्टेक्शन के लिए है गन, बुलैट, प्लेन, बम, वार एंड व्हाट नौट । (हँसता है) लूसी ! हैलो लूमी! अरे, हाँ, यहाँ पर जाने कौन-सा अपाइंटमेंट था न मेरा? पहला : आप क्या हमारा इंटरव्यू लेने आये है ? दूसरा ओ हाँ, लूंगा । पर उससे पहले लूसी चाहिए। कोई उसको मार न डाले। कासपिरेसी । देयर इज़ ए जूडास वकिंग ऑन अस समव्हेयर । अचानक तीसरा बाहर के दरवारो से प्रवेश करता है। संतरी की वेशभूषा में है। तीसरा : सर ! दूसरा : क्या खबर है ? तीसरा : सर, लूसी फिर बच्चों के पार्क मे घुस पड़ी थी। दूसरा : घुसेगी नही ? बच्चों को प्यार जो करती है। तीसरा : सारे बच्चों को काटा है। राडकी : काटा है ? आप उसे बांधकर क्यों नही रखते ? दूसरा : देख नही रही हो, जंजीर मेरे हाथों में लटक रही है ? बाँधना चाहता हूँ इसीलिए ही तो ढूंढ रहा हूँ। पर बड़ा तरस आता है उसकी गर्दन दुखती है न। पहला : ऐसा खूखार कुत्ता ! आपको कभी उसे खोल कर नहीं रखना चाहिए। दूसरा : सभी कुछ समझता हूँ, भाई...पर वह भी तो एक जीव है...उसे भी तो भूख-प्यास लगती है । नहीं ? लड़की : इसका मतलब यह तो नही कि इतने सारे बच्चों को काटती फिरे। तीसरा : सब गुस्से से पागल हो गये है, सर ! हमारा कोर्डन तोड़ कर इधर घुस पडना चाहते हैं। दूसरा : घुस पड़ना चाहते हैं ? वे तो चाहेगे ही...यह तो रात-दिन हो रहा है। चाहते रहना उनकी आदत बन गयी है । इसका यह मतलब नहीं गिनीपिग : ६१ कि तुम निकम्मे वन जाओ। यू मस्ट डू योर ड्यूटी-जामो : तीसरा सेल्यूट करके चला जाता है। लडकी : यह कुतिया शायद रोज ही ऐसा करती है। दूसरा : नहीं, कभी-कभी। पहला : इसको गोली क्यों नहीं मार देते ? दूसरा : क्या कह रहे हो ? जानते हो किस नस्ल को कुतिया है ? इसके अलावा ट्रैडिशन? इसके दादा, परदादा-और भी पीछे चलते जाओ-इसके पुरखे हमेशा हमारी फैमिली को जेनरेशन आफ्टर जेन- रेशन सर्व करते आये हैं। और मैं इसको गोली मार दूं? लूसी के पिल्लों की देख-भाल करने के लिए कितनी मेहनत और कितना खर्चा होता है, तुम सोच भी नहीं सकते। इसके अलावा सिर्फ उसको दोप देने से ही तो नहीं चलेगा। मेरे ग्रेट-नेडफ़ादर के समय से ही एक प्रैक्टिस चली आ रही है-कुत्तो को एक-दो चम्मच ब्लड, ड्रिंक की तरह दिया जाता था। अब इनको इसको आदत पड़ गयी है। अब तो ये चाहेगे ही। लड़की . खून! दूसरा : हां ह्य मन ब्लड । उतना कॉस्टली भी नहीं है। लेकिन वेरी टेस्ट- फुल-एंड दे लाइक इट वेरी मच । अब तो मेरी लूमी कटोरा-भर खून एक सांस मे गटक जाती है । खून, अगर बच्चों का हो तो और भी ज्यादा खुश होती है। लूसी आयेगी तो देखना। अभी वह मेरी गोद में चढ कर सारे बदन पर अपना चेहरा रगड़ती रहेगी। चाटती रहेगी और गले से घर-घरं मीठी-मीठी-सी आवाज़ निकालेगी। माई प्रिटी नोटी लूसी ! शी इज ए जैम ऑफ ए विच, माई हनी, माई सोल । कब से उसे नहीं देखा, जानती हो? (बुलाता है ।) लूसी... लूसी...! पहला : उसे यहां मत बुलाइये। दूसरा : (सहज स्वर में) क्यों? पहला ; उसका जैसा वर्णन सुना उससे तो जितनी दूर रहा जाये उतना ही अच्छा है। दूसरा : (हंसते हुए) बड़ेडिरपोक हो! अरे, वह क्या सवको काटती-फिरती है ? अगर लूसी को मालूम हो जाये कि तुम मेरे बहुत ओविहियेंट हो तब तो तुम्हें कुछ भी नही कहेगी। तुम्हारे पैरों तले लोट कर दुम हिला-हिला कर तुम्हे प्यार करेगी। और अगर तुम डिमोविडियेट होओ, कमरे की चीजें इधर हटाओ, उपर रखो, यह तोड़ो, वह फेंको, ६२: गिनोपिग तब लूसी तुम्हारी गर्दन दबोच लेगी। अगर जैसे हो वैसे ही रहो... तो फिर लूसी से अच्छा और कोई नही। पहला : (सन्देह से) आप कौन है, जरा बताइये तो सही? दूसरा : क्यों? . लड़की : विलकुल ऐसी ही बातें हमने पहले बहुत बार सुनी हैं। दूसरा : सुनी क्यों न होंगी? जो सच है, वह सुनना ही पड़ता है। सिर्फ सुनने से ही कुछ नही बनता—याद रखना पड़ता है-उसे कर्म का रूप देना पड़ता है। पहला : आप राजा साहब है ? दूसरा : कौन राजा साहब, तुम किसकी बात कर रहे हो ? लड़की : आप...आपकी बात कर रहे हैं। आपको हम पहचानते है...बहुत दिनों से पहचानते हैं। पहला : (उत्तेजित होकर) बहुत दिनों से हम आपका खेल देख रहे है। आपकी उस लूसी ने कितनी ही बार हमारी छाती को अपने पंजों से जख्मी किया है। चांद की रोशनी तक हमें नसीव नही हुई। अपने पंजों को फैला कर उसने हमसे सब छीन लिया है...उसकी भयंकर चीखो के मारे सोना भी मुश्किल और जागना भी। लडकी : अब आर क्या चाहते हैं हमसे? हम लोगों के पास अब और कुछ नहीं है। विश्वास कीजिये, कुछ भी नहीं बचा है। दूसग : है...अभी भी कुछ तो जरूर है । पहला : (उत्तेजित होकर) था-मेरे पास एक छुरा था और उस छुरे के निशाने थे आप। दूसरा : फिर उस छुरे का क्या हुआ पहला : (असहाय स्वर में) आप भाग्यवान हैं, अब वह छुरा उठाने से कोई फायदा नही...क्योकि मैं अब अकेला हूं और आप कभी भी अकेले नहीं होते । आप भाग्यवान हैं-आपका हमला करने का तरीका बड़ी देर में जान पाये। दूसरा : फिर भी जान तो लिया। यह ही मेरे लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण समाचार है। पर जान कर तुम्हे फायदा क्या होगा? लड़की : यह जानना ही बहुत है। दूसरा : कितना? पहला : म अब अकेले नही रहेंगे...बस इतना। दूसरा : यही आखिरी बात है ? पहला : आखिरी बात है। ? गिनीपिग : ६३ दूसरा : (हसता है जैसे कुछ भी नहीं हुमा इस सरह) पर, जाने दो। क्या याओगे, योलो? एनी ट्रिपरा ? फ़्टुरा? और एनीपिंग? सड़की : हमारा मजाक उड़ा रहे हैं ? दूसरा : रत्ती भर भी नहीं। जब तुम लोग आखिरी बातें करते हो तो में भी आसिरी निश्चय पर पहुंच जाता हूँ। आसिरी सस छीन लेने से पहले आपिरी इच्छा पूरी करने की पुरानी रस्म है न एक । इसीलिये पूछ रहा हूँ-पया याओगे? पहला : मैं जानता हूँ, आपसे छुटकारा नहीं है...पर अब और डर नहीं सगता। दूसरा : बहुत अच्छा । फिर अब उस पास वाले कमरे में चले जाओ। पहला : क्यों पारा वाले कमरे में क्यो जायें ? दूसरा : जाना है क्योकि ऐसा ही बंदोबस्त मैंने किया है। लड़की : कैसा बंदोबस्त? दूसरा : नो यी...जान लेने का कोई बंदोबस्त नही है...डरती क्यों हो? तुम लोगों की तरह बहुत-से लोग ऐसा फुफकारते हैं ...सबको थोड़े ही मारता हूँ। कितने ही ऐसे है जो हमें छोड़कर चले जा रहे हैं...क्या इसका मतलब यह है कि उनको मार डालने से समस्या हल हो जायेगी? मुझे सोचना पडता है कि क्यो चले जाते हैं क्यों तुम लोग फुफकारते हो? इसका कारण क्या है ? क्या रहता है तुम लोगो के खून मे? मैं तुम लोगो को उस कमरे में ले जाकर यही पता लगाऊंगा। पहला : आपकी किसी भी चीज़ पर हमे विश्वास नहीं है। अगर हम उस कमरे में न जायें ? दूसरा : यह ताकत अभी भी मुझ मे है,भाई ..अभी भी मैं तुम लोगों को वहाँ ले जा सकता हूँ। ताली बजाता है। तीसरा कंधे पर बंदूक लिये संतरी की वेश-भूषा में चुपचाप आकर खड़ा हो जाता है। दूसरा उसे इशारा करता है। तीसरा उन दोनो के पीछे आकर खड़ा हो जाता है। दूसरा : क्या हुआ, चल रहे हो न? ठीक थे हम लोग 1 पर तुम लोगों ने ऐसी मुसीबत खडी कर दी कि एक और आदमी को बुलाना पड़ा। क्या हुआ, आगे बढो! वे कठोर परंतु शांत चेहरे से मंच से बाहर जाने के दरवाजे की ओर बढ़ते हैं। पीछे संतरी है। ६४ : गिनीपिग दूसरा : अरे, ठहरो, ठहरो! मुझे छोड़ कर ही आगे बढ़े जा रहे हो ? एक बार उस कमरे में चले जाने पर और बातचीत तो नहीं हो सकती न... उसी वक्त ऐक्सपेरिमेंट स्टार्ट करना पड़ेगा। पहले से ही सावधान किये दे रहा हूँ, थोड़ी तकलीफ़ जरूर होगी, लेकिन इसी से शोर मचा कर रोना-धोना न शुरू कर देना। जितना भी खून तुम्हारे शरीर में है, सिरिंज से निकाल कर कटोरी में रखूगा । फिर खून को टटोल कर देगा, क्यों बार-बार तुम लोग फन उठाते हो, फुफकारते हो। अगर तुम्हारे खून में से वह बीजाणु ढूंढ कर उसका संहार न कर सका तो फिर आखिरी लड़ाई में मुसीबत में फंस जाऊँगा। लो, अव चलो। मेरे पास और जरा भी समय नहीं है, चलो। वे तीनों चले जाते हैं। उनके जाते ही मंच अंधकार से भर जाता है। उन दोनों की चीख को और तूफ़ान की-सी आवाज़ आती है। बीच के दरवाजे पर सिर्फ एक लाल रोशनी पड़ती है। दरवारो को ठेलकर लाल रंग की कटोरी हाथ में लिये दूसरा प्रवेश करता है। मंच के बीच में से सहमा हुआ, डरा हुआ-सा चेहरा आगे बढ़ता है। लाल स्पाट सिर्फ उसी के इर्द-गिर्द है बाकी चारों तरफ अंधेरा है। एक हाथ से कटोरी पकड़े दूसरा हाय निःशब्द दर्शकों की ओर बढ़ाता है। दूसरा : ब्लड़ ! बहुत कम था खून । दो पूरे शरीर, पर इतना थोडा-सा खून ! लूसी का पेट नहीं भरेगा। आप लोग ब्लड रिपोर्ट का ही इंतज़ार कर रहे है न? पर इस बार भी मैं आपको खुश न कर सका। समूचे खून को टटोल कर भी यह पता नहीं लगा पाया कि उनके क्रोध के बीजाणु कहाँ छिपे हैं...उनका खून इतना चालाक, इतना धूर्त है, इतनी फिसलन है उसमें । मेरी उँगलियो की पकड़ में नही आता, माइक्रो- स्कोप मे परछायी तक नहीं पड़ती। जरा-सा हिलाने पर यह खून कटोरी में जैसे भयानक हँसी हँसने लगता है । मेरी आखिरी लड़ाई है न इन भयंकर रक्त-कणो से। मुझे जीतना ही है। (हँसता है।) जीतना ही होगा। कटोरी के खून मे मेरा प्रतिबिंब झलक रहा है कितना सुंदर मुकुट है ! (कटोरी में परछायों की तरफ एकटक देखता हुआ जोर से चीखउठता है।) यह क्या ? मेरे मुकुट पर असंख्य कीड़े ! खून मे से उछल-उछल कर आ रहे है। मेरा मुकुट ! मेरा मुकुट ! (दोनों हाथों से अपने मुकुट को पकड़ कर रखना चाहता है, साथ ही हाथ की कटोरी जोर से जमीन पर गिर पड़ती है। वह हायों गिनीपिन : ६५ से सिर पकड़े डरा हुआ-सा उस तरफ देखता रहता है और उछल कर एक ओर हट जाता है।) यह वहता हुआ पुन मेरा पीछा कर रहा है ! (रुआँसा होकर अपने सर को हायों से पकड़ कर अपने शरीर को टेढ़ा करके एक ओर से दूसरी ओर ले जाता है।) खून बहता हुआ आ रहा है। मेरा पीछा कर रहा है। लूसी! लूसी! सेव भी, लूसी (अचानक जैसे काल्पनिक लूसी को देख पाता है। आश्वस्त हो कर, परंतु थकी हुई आवाज़ में) माई लूसी! ड्रिक लूसी, डिक ! (बैठ कर लसी को प्यार करता है।) लूसी माई हनी, हां, सारा पीना पड़ेगा तुझे सारा। (अचानक उठ खड़ा होता है ।) लूसी, गैट अप। रन औन, लूसी, रन औन । ये खून तुझे भी चेज़ कर रहा है। भाग ! तूसी, खून तेरा भी पीछा कर रहा है। भाग, मेरे साथ आ-बहुत आहिस्ता-छुप कर। बेहद डरा हुआ-सा पीछे हटता रहता है। फिर बीच के दरवाजे से अदृश्य हो लाता है । मंच पर अंधेरा है। रोशनी होते ही पहले दृश्य के आरंभ की तरह दूसरा और तीसरा चीजें झाड़-पोंछ कर रख रहे हैं। पहला मेज पर सिर टिकाये बैठा है। लड़की खिड़की से बाहर देख रही है। लड़की : (सबकी तरफ देख कर) हमारी सवर जरूर मिल गयी होगी। इस कमरे की तरफ आ रहे है। रास्तो मे भीड के रेले की तरह गुजरने- वाले लोग...सब इधर ही आ रहे हैं। हम अब अकेले नहीं हैं। तीसरा अगर राजा साहव आ जायें तो? आने भी दो, अब हम अकेले नहीं, बहुत से है। पहला : वे लोग आ जायें तो हम अकेले नहीं रहेगे। उनके आने के पहले ही जिससे राजा साहब अंदर न आ सके, इसलिए दरवाजे को अच्छी तरह से बंद करता हूँ। लड़की : अगर ये दरवाजा धकेल कर घुस आयें तो? पहला : इस कमरे की सब चीजें लाकर दरवाजे पर ढेर लगाकर रखते हैं। वो । कुइक! सब मेज-यासों और जो भी कुछ यसबाव है, ला कर बीच के दरवाजे पर देर लगाते जाते है । यहुत जल्दी यह सब काम करना है। साथ-साप नीचे लिखे संवाद योले जायेंगे। पहला : हमे दूसरे मेल के लिए कमरे को विलकुल बदल डालना है। दूसरा : जहाँ पर जो चीज़ रखनी है, हम युद रयेंगे। तीमरा : अब जो नाटक होगा उसमे मैं दो रोल करूँगा। हां, सीधा, गाफ़-मा .. ६६ : गिनीपिग

एक, और...।
लड़की : मेरे रोल की लड़की बहुत जबरदस्त होगी...उसके पास बहुत-से काम
होंगे और उसका पार्ट भी बहुत लंबा होगा।
पहला : अब की बार राजा साहब का खून दर्शकों को दिखाना ही है । अब के
हमे जीतना ही होगा।
दूसरा : मैं राजा साहब का रोल और नहीं करूंगा। मुझे नफ़रत होती है।
(पास के दरवाजे की ओर देख कर) वह देखो, वे लोग आ गये हैं।
आइये, आइये!
सब प्रसन्नता से उस ओर देखते हैं । पर्दा गिरता है।
गिनीपिंग : ६७

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Ginee Pig

Author
Mohit Chatarji
Title
Ginee Pig
File name
Ginee Pig
Text
OCR done
Citation
1975
Published
2011/03
Publisher
Radhakrishan Prakashan Ansari Road Dariyaganj New Dehli
Language
Sanskrit
Pages
72
Library
Shree Jubilee Naagari Bhandar Bikaner
Classification
Literature
DLI number
550932
Barcode
4990010031723.00
Scanning centre
C-DAK, Kolkata
Digital publisher
Digital Library Of India
VMLT id
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