Agarchand Bhairondan Sethiya Jain Parmarthik Sanstha, Bikaner

Jain Lak Sanghar-2

Puran Chand Nahar · 2011/07

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जैन लेख संग्रह।
कतिपय चित्र और छान्य नाहिकायों ने गुरु
द्वितीय खंड।

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# J'!!! di Inti Pawàpuri (North view) लाभूमिका आज दड़े हर्ष के साथ "जैनलेख संत्रह का दूसरा खंड पाठकों के सन्मुख उपस्थित करता हूं । इसका प्रथम खंड प्रकाशित होने के पश्चात् द्वितीय खंड शोन ही प्रकाशित करने की इच्छा रहते हुए भी कई अनिवार्य कारणों से विलन्च हुआ है । न तो प्रथम एंड में कोई विस्तृत भूनिशा दी गई हो और न यहां ही लिख सके। जैनियों का सात करके हमारे मूर्तिपूजक तान्बर भाइयों का धर्मप्राण शताब्दियों तक बराबर आचार्यों के उपझेश से देवालर और मूर्तिप्रतिष्टा की ओर कां नकार था लौर वर्तनान समय पर्यंत यहां तक है यह " लेख संग्रह" से अच्छी तरह सान हो सकता है। ऐतिहासिक दृष्टि से जिस प्रकार उपरोगी समझ कर प्रयन खंड प्रकाशित किया था यह खंड भो उनो इच्छा से विद्वानों की सेवा में उपस्थित करता है। सन् १९९८ में प्रया रंड प्रकाशित होने पर प्रसिद्ध ऐतिहासिक श्रद्धेय श्रीमान् राम बहादुर पं. गौरीशंकर ओझा जी ने पुन्नर. भेजने पर उसके उपयोगिता के वियर में जो कुछ अपना वजन्य प्रस्ट क्यि थे उल्का कुछ अंश नीचे उद्धृत বি जता है। उन्होदर अउरले ना--११८ ने पत्र में लिखते है कि "आपके जैन लेख संग्रह को श्रादि से अंत तरु पढ गया हूं। श्रापका यह ग्रन्ध इतिहासवेत्ताओं तथा जैन कार के लिये रत्नाकर के समान है। अंत में दो दुई ताक्षि. कायें भी बड़े काम की बनी हैं उनसे जिन्न ५ गहों के यनेक याचार्यों के निश्चित समय का पता लगता है. यदि इसके पूसरे नाग ही निकलेंगे तो जैन इतिहास के लिये बड़े ही काम के होंगे। प्रय संड में सवार : निटासान धार की हानि-गादि और मावा के गट और. नदीमधीवरनकार रामान्दाराजानों के नाम जोइन लेबों में पारगर है, उनी नादिया भी कमर परमार ने इस खंड में हो गई है। में प्रथम संदीविना शह दुरई शिदेव पनिहातिर दृष्टि से पद मंद प्रकाशित हुमहै। जिन मन्य यह पंड सरत पा संसद धीरजरने में जल दिमन्द में वन छिटकना या याद रेन भारत में नै हो । निरस विश्व में पिर लिने हंगत नहीं है। पल्ट नुरे दहेन्द्र नाथ निम्ना पड़ता है रि. दिगन्रीलंग मुझे में लाल रत्नेमा उननुदा में सर सर जेन्नर पर हर तरह से बैंगन दिये 7 Jalmandıra «t Tutha Pâwâ puri (North view) मिमिका आज बड़े हर्प के साथ "जैनलेख संग्रह का दूसरा खंड पाठकों के सन्मुख उपस्थित करता हूं । इसका प्रथम एंड प्रकाशित होने के पश्चात् द्वितीय खंड शोच ही प्रकाशित करने की इच्छा रहते हुए भी कई अनिवार्य कारणों से विलम्ब हुआ है। न तो प्रथम रंड में कोई विस्तृत भूमिका दी गई थी और न यहां ही लिख सके जैनियों का खास करके हमारे मूर्तिपूजक श्वेताम्बर भाइयो का धर्मप्राण शताब्दियों तक घरापर भाचार्यों के उपदेश से देवालय और मूर्तिप्रतिष्ठा की ओर कहां तक अपलर था और वर्तमान समय पर्यंत कहां तक है यह " लेख संग्रह" से अच्छी तरह सान हो सकता है। ऐतिहासिक दृष्टि से जिस प्रकार उपयोगी समझ कर प्रथम खंड प्रकाशित किया था यह खंड भो उस्रो इच्छा से विद्वानों की सेवा में उपस्थित करना है। सन् १९९८ मे प्रथम खंड प्रकाशित होने पर प्रसिद्ध ऐतिहासिक प्रद्धेय ध्रीमान् राय वहादुर पं० गौरीशंकर ओझा जी ने पुग्नक भेजने पर उस संग्रह के उपयोगिता के विपर में जो कुछ अपना वक्ता प्रकट किये थे उसका कुछ अंश नीचे उस्त पिया जाना है। उक्त महोदय अजमेर से ता०२-०-११८ से पत्र में लिपने हैं कि आपके जैनलेख संग्रह को आदि से अंत तक पढ गया हूं। आपका यह गन्ध इतिहालवेत्ताओं तथा जैन संसार के लिये रत्नाकर के समान है। अंत में दो दुई ताक्षि. कायें जी बड़े काम की बनी हैं उनसे जिन्न ५ गठों के अनक थाचायों के निश्चित समय का पता लगता है, यदि इसके इसरे नाग जी निकलेंगे तो जैन इनिझाम के लिये बड़े ही काम के होंगे। प्रथम पंट में साधारण सूची से रिम रिटालान प्रारक की हानि-प्रदिौर गाना गनगर मा को नदी दी गई थी। इस बार इनके निधार TET महागज्ञानों के नाम न लेागों में पायगर, उनको नाममा मी समरर पर भारत तोमर कस पंड में दी गई है। में प्रथम संरी भूमिका में या शाह गिल, ऐन्दिानिर हाट में मंतिता है। शिम: तथा इसी र श्रीराम नर दिन में स्टिममा पसादर रमा सकिने सचिर हिनायता है। पन्नु न गेट पिटापटr for सोने से परेशान ने मंत्रालय है सूचीपत्र । पत्रांक स्वान पत्रांक २११ २१२ २ " २ ... ... ... ... २५८ २६३ ... ... ... कलकत्ता। कानपुरवालों का मंदिर लाला कालिकादासजी का मंदिर प्रो आदिनाथजी का देरासर (कुमारसिंह हाल) ... १,२५८ श्री चंद्रप्रभुजी का मंदिर होरालाललो गुलाबसिंहजी का देरासर पार्श्वनाथजी का मंदिर लाभचंदजी सेठ का घर-देरासर , सुभसामीजी का मंदिर इंडियन म्युजियन अजिमगंज-मुर्शिदाबाद। श्री पावापुरी तीर्थ। श्रओ नेमिनाथजी का मंदिर श्री गांव मंदिर ३ " जल मंदिर सैंतीया-बीरभूम। समोसरण श्री आदिनाथजी का मंदिर ५ महताय विवि का मंदिर रंगपुर - उत्तर वंग। श्री राजगृह तीर्था । धो वंद्रप्रभस्वामी का मंदिर धो गांव मंदिर श्री सम्मेतशिखर तीर्थ । वैभार गिरि सोन भंडार टोंक पर के चरणों पर मणियार मठ भी जलमंदिर मधुवन । श्री क्षत्रीकुंड तीर्थ । धो जैन मंदिर श्री जैन शेतावर मंदिर जगतलेठजी का मंदिर सवाड़। प्रतापसिंहजी का मंदिर २०१ श्री जैन मंदिर ... २९६ ... :: . . ... ... .. ... :.. .. ...

स्थान पत्रांक | स्थान पटना। शहर मंदिर दिगम्बरी मंदिर म्यजियम ... वनारस। शिखरचंदजी का मंदिर रायसाहल का घर-देरासर २२१ साला खेमचंदजी का घर-देरासर २२१ । हीरालालजी चुनिलालजी का घर-देरासर २२१ श्री श्रीमंदिरस्वामीजी का मंदिर वासुपूज्यजी का मंदिर (सहादतगंज) पार्श्वनाथजो का मंदिर ( " ) २२२ ऋषभदेवजी का मंदिर ( ,, शांतिनाथजी का मंदिर ( , ) १५५ " दादाजी का मंदिर देहली। १४६ लाला हजारीमलजी का देरासर चीरेखाने फा मंदिर चंद्रावती। ) श्री जैन मंदिर अयोध्या ... श्री अजितनाथजी का मंदिर समोसरणजी नवराई। ... श्री जैन मंदिर १५० मथुरा। फैजाबाद। श्री पार्श्वनाथजी का मंदिर श्री शांतिनाथजी का मंदिर १५३ आगरा। लखनन। श्री चिंतामणि पार्श्वनाथजी का.मंदिर ११५ " १२४ भोगांतिनाथजी का मंदिर (योहरनटोला) ... अपनदेवजी का मंदिर (बोहरनटोला) महावीरस्वामी का मंदिर (योहरनटोला) आदिनाथजो का मंदिर (चूड़ीवाली गली) ,, महावीरस्वामी का मंदिर (मुंधीटोला) चिन्तामणि पार्श्वनाथजी का मंदिर ( है ) मनवनाथजी का मंदिर (फूलबाली गली) सामाणिकदजी का घर-देगनर १२७ श्रीमंदिरस्वामोजो का मंदिर ,, सूर्यप्रभस्वामीजी का मंदिर गोडीपार्श्वनाथजी का मंदिर वासुपूज्यजी का मंदिर केशरियानाथजी का मंदिर नेमनाथजी का मंदिर शांतिनाथजी का मंदिर महावीरस्वामी का मंदिर ... १२८ . . २३१ " .. १३८ ...

(३) -- पत्रांक ग्वालियर-लस्कर। श्री पंचायतो मंदिर पानाधजी का मंदिर शांतिनाथजी का मंदिर पत्रांक । स्थान जैन उपासरा चिंतामणि पार्श्वनाथजी का मंदिर ७२ धीमंदिरस्वामीजी का मंदिर मोरखानो-बीकानेर। ८३ श्री देवी मंदिर ... ... ६६ मुरार लस्कर। चुरू-वोकानेर श्री जैन मंदिर ... ग्वालियर पुर्ग। श्री शांतिनाथजो का मंदिर नागौर भोजैन मंदिर सुडानीय - ग्वालियर। श्री ऋषभदेवजी का मंदिर आदिनाथजी का मंदिर सुमतिनाथजो का मंदिर शांतिनाथजी का मंदिर धी जैन मंदिर ... ६ सूरपुस-नागौर। .. ३३. . श्री माताजी का मंदिर उसतरां-नागौर। जयपुर। श्री सुपार्श्वनाथजी का मंदिर सुमतिनाथजो का मंदिर आदिनाथजो का मंदि যাক ম' चंदन चौक। श्री जैन मंदिर छाम्वर । ४१ श्री जैन मदिर - ... ... १ धा चंद्रप्रभखानों का मंदिर ." रत्नपुर-मारवाड़। २६२ श्री जैन मंदिर गांधाणो-मारवाड़। ४३ श्री जैन मंदिर जोधपुर-मारवाड़। ४२ राजवैद्य नट्टारर श्री उदयचंद्रजी का देरासर नगर-मारवाड़। ६३ श्री जैन मंदिर अलवर। ... श्रीमंदिर चौकानेर । घाइतेवर पानायोमदिर ... ...

(४) पत्रांक | स्थान . जसोल-मारवाड़। करेड़ा-मेवाड़। श्री पानाथजी का मंदिर २२६ " बावन जिनालय २२७ ... श्रीन मंदिर नाकोड़ा-मारवाड़। धरिदायी का मंदिर बाड़मेर-मारवाड़। Amitीर मंदिर घाणराव - मारवाड़। HTTोपा मंदिर मारची-मारवाड़। नागदा- मेवाड़। श्री शांतिनाथजी का मंदिर देलवाड़ा-मेवाड़। श्री पार्श्वनाथजो का बड़ा मंदिर २२८ " नया मंदिर १६० ... " • . ... मंदप-मारवाड़। पभदेवजी का मंदिर पार्श्वनाथजी का बसी " तपागच्छ का उपासरा ,, गंडहर उपासरा शिलालेप गुडली-मेवाड़। श्री जैन मंदिर . मांजपवर-मारवाड़ ... १.3rn रोड। नगर - मेहगढ़। • Frari श्री उदयपुर - मेवाड़। याबू श्री आदिनाथजी का मंदिर (धर्माशाला) व्याव तीर्थ । श्रा आदिनाथजी का मंदिर (देलवाडा) गांतिनाथजी का मंदिर (अचलगद) मामदेवानी का मंदिर ( पिंटवादा सिरोह।। श्रीमतीका दिर --- . 27 དྷ མ ལམ ཙ ཚ མཁས* ཨཊྚ་ོཔས S-Tr F- की नयमान-सिंगही। .. raini R श्रीमत रोहेड़ा-सिरोही । १७ जारज-सिरोही। भीजैन मंदिर ... ... गुड़-सिरोही ." शिवरी-सिरोही . श्रीमंदिर (५) पत्रांक सान श्री तारंगा ती। २ श्री लगिननाय स्वामी का मंदिर श्री शत्रुजय तीर्थ । २७८ दिगन्यर मंदिर पासीताना। धो सुमतिनाथजी का मंदिर तलाजा-कानियवाड़। जैन ति पर शिलालेख सिहोर - काठियावाड़। श्री सुनानायजी का मंदिर घोघा - काठियावाड़। धी सुविधिनायजी का मंदिर चोरवाड़-जुनागढ़ । श्री जैन मंदिर सोयाबट-काठियावाड़। १८८ ... पाडव-सिरोही। ३ ममिया-सिरोही। ... श्रीदमदर २७३ ... निवज-सिरोही। ... *दमदिर 8 A.. तुड़वाय-सिरोही। ... ... १४ अंन मंदिर Kra .नादिर ॐजार नायीका दिर खीमत-पासलपुर । ॐदेर हीसा। ... ... जासनगर - काव्यिावाड़ योसोदिनारकामद वरही कामंदिर मांगरोल-काठियावाड़। २८१ श्रीन पर . ... .. ... भंवरजी कादर : नारस कदर १८ (६) ... वेरावख-काठियावाड़। पत्रांकसान घरदेरासर ( गाम देवी) सिरपुर-सी० पी०। १८६ श्री जैन मंदिर शिलालेख .. श्री जैन मंदिर किमलालेमा , ऊना-काठियावाड़। रायपुर-सी० पी। २०० भी जैन मंदिर गाणेसर-गुजरात। गरेर मंदिर प्रत्नासपाटण-गुजरात १९३ बानमार मंदिर संजात-गुजरात। श्री जैन मंदिर (सदर बजार) हैदराबाद-दक्षिण। श्री पार्श्वनाथजी का मंदिर (बेगम यजार) पार्श्वनाथजी का मंदिर (कारवान साहुकारी) पार्श्वनाथजी का मंदिर ( रेसीडेन्सी बजार ) पार्श्वनाथजी का मंदिर (चार फयान) १३५ मखास । श्री चंद्रप्रमस्वामी का मंदिर (शूला बजार) १६ चंद्रप्रभम्वामी का मंदिर ( साहुकार जैन मंदिर २०३ | दादाजो का यंगला " ... sी मात्रा मंदिर पामिना-नरुयल। पेठ) तर ) बम्बई। " ... ... Ans मंदिर प्रतिष्ठा स्थान । मकबराबाद ... अचलगढ़ महादुर्ग १२०० ... यजीमगंज ... २०१० . १४५६ धनुपुर अणहिलपुर (पत्तन) ... ... थमदावाद अयोध्या २०७० १०२८,११०६,१११५,१११६.१८०८ मार्गलपुर पर्युदगिरि लेखांक ... ... १४५५ | इंदलपुर २०२७ इंद्रिय १८११ / उद्राईज १७९० उग्रसेनपुर १७८६,१०८८,१६८०,१६८३ उजयंत १२५४ उयमण १६४७,६६४८,१६४६,१६५१,१६५२, उदयपुर (मेदपाट) १६५४,१६५५,१६५६,१६५०,६६०१ उप्रतपुर १४५४, १४७८,६४६६ उम २०२५ पाई उलि २४६४ प.चर-मांडपो १५९५ परग १८०८ पाटर (परंडा) १०.०१६०८.१४७५,१५४०.१६३५ १९६५१९८० पंधरावी २४४६.२४५२.१४.४ १४६७.१४६१.१५६ १७२० पुर या १५८०,१५८९५१५८५८. भालचर १८१२ ... घलापलपुर मापद ... थादमदाबाद ( गूर्जरदेश) १.१... पावरा सागरा दुर्ग आगोया २०१६ संवारा १५. निरि भा मानपुर rfe १५.१५: २atestetter सदर २८ बम ICC पर सारपुर (७) प्रतिष्ठा सान लेखांक प्रतिष्ठा स्थान ... ११६७ जयनगर कृष्णगढ खत्रीकुण्ड (पत्रोकुएड) खिरहालू खोमसा क्षीमंत १८४७ जयपुर (जयनगर ११६५ १२७८ जावू ... 44. जालोर महादुग . १७२३ ... १००४/ जावर गंधार गाणउलि जीर्णधारा. 4. ... १७८८ M १८०८ जूहाद्ध । जनगर ज्यायपुर ... १४२८ / झाड़उलि गिरनारं गिरिपुर गुंडलि गोपगिरि पोपाचल गोपाचल दुर्ग गोपाचलगढ दुर्ग घनौष चक्रवर्तिनगर (गूर्जरदेश) ... - • . ... टिंवानक १२३२ टौवाची १४२६,१४२७ १४२६ / डूंगरपुर १७७१,१७७३ | तारंगा दुर्ग १७६३ दिल्ली १५४४ । दीववंदिर (दोष) १२०६ | देउलवाड़ा (मेवाड़) १६८१,१६८६ । देकावाड़ा १८१० देलवाड़ा २०५२ | देवकापाटण २०५३ देवकुलपाटक (पुर) १७८६,१६५५देवड़ा १४१६ दौलत्ती याद १७६६ / डीर घन्दिर १४३७ । धवलकका चंदेरा चंद्रावती चंपापुर चारकांण ... ... ... ... न्यारवयांण . चित्रकूट विप्रकट दुर्ग चोरवाटक (तुनागढ़) . १२७३ - धार नगर प्रतिष्टा स्थान लेखांक प्रतिष्ठा स्थान लेखांक नगर (मारवाड़) १.९१३:१७१४, बिहार ... १६६७ १९४६ : भोलुनाम २०७३ जवाछ १३०७ मेव १५०० . नवोननगर १७८६ मकदावाद (मसुदाबाद) २०१८.१७०३.१८१०,१८११, १८१२.६८१३ १८१४,१८२६ नव्यनगर (हल्लार देश) नंदाणि १६६४ ' मद्रास (शूला) १२७३,१६७६ मद्रासस पत्तन (साहूकार पेठ।) २०७० नागपुर नागोर १४१७ मधुमतो ... १७७६ नारनपुरी नासालो नेवोए मनम ... २४८५ १२२७.१५६५ १८६१ । मधुवन ११३३ । मलारणा १३०२ महिसाणा १०२६.१६०२,१३५४.१५२५,१५३६.६६१०६१६६०, ' मंगलपुर १७१३.१७१४.१७६१,१६८८,२०६१.२१०६ मंडप १६०६.१६९३.२०१२ मंडप दुर्ग मंडासा .१४७२ ... पतन नगर पाटण पाटल्मिनगर मंडोवर । ... ... १९६०,१२६१,२०७४ १८०८,२०३६,२०१७ मामुलक मारपीरा १२१२ पालपपुर पावापुरी पूर्वाचलगिरि पारोजपुर पेचाएर १९३२ १६४ मालपुर १३४ मांगलेर १७ मांडल (गुर देग १०८० . १९८९ मांडलि ... दान्टपर २८.७ धोकावर २०१८...८२.१८-१ मांही २१.१ निजामुर 'मारि १. मंदा महरा १८.८..

प्रतिष्ठा स्थान मेड़ता नगर मेहुणा मोरखीयाणा योगिनीपुर रणासण रनपुर रत्नपुर (अयोध्या) रत्नपुर ( मारवाड) रंगपुर (१०) लेतांक । प्रतिष्ठा स्थान ... १६२८ घरमान १२२१ घाडिज २०५४ वाणारसो १४८३ | वाराणसी ११७५. वाराही ११३० । विक्रमनगर. १६६२,१६६३,६६६४,१६६५७१६६६ विक्रमपुर १७०६,१७०८ विद्यापुर १०१७,१.१८. विश्वलनगर १८५८ | योवावेड़ा १०१४,१५१६,१७५०,१८४०,२०४२ / वीरमग्राम २०७७,२०७८. वोरमपुर वीरवाडा १८६६ राजगृह राजनगर सजपुर (सी०. पो. रामगढ दुर्ग: एलज रेवत रेवत' वोबलापुर १२२२ १८११ / वोसनगर १७६३ वीसलनगर लक्षणपुर व्यवहार गिरि लखनऊ १५२६,१५३०,१५३१,१५३३,१५३५ १५२५,१५२६,१५२७,१५२८,१३३२,१५८६. टूद्राड़ा लोद्राद्र १२८२ शाल्मलीयपुर शिखरगिरि शूलाग्राम १०१२ वटपद्र २०८८ श्रागर १७३४ वड़नगर चड़ली घड़ेवा १११६,१८४३ सषवाराही, सखार १८६४. सत्यपुर यणद्र बनरिया. ... ११८८ समेतशल २०६५ सम्मेगिरि १४१२. सम्मेतशिखर ...

(११) मैतिष्ठा स्थान लेखांक प्रतिष्ठा स्पान लेखांक ... १२८३,१३३६,१४६५ सवाई जयनगर (नगर) सहजिगपुर १९७८,९२१६.१४४१ / सोरोहो १७७८ सीहा सहूआला .. १२६६ साचुरा ११६३,१७९३ सुजाउलपुर ११६८ सुद्रोयाणा १९२६ सुरमाणपुर १९९५ / सोजात १४६६ स्तम्भतार्थ (खंभात) ... १७०० .. सारलटन ... . साहात ... १९६६,१२१५,१७५६, १७६३,१७६४.१६४२ ... १४८६ १३३,१४४३ ... स्तम्भतीर्थ बंदिर स्पातरोय नगर (वायरदेश) स्विराद १७६६,२८०० १७५ ... ... ... • . २०६७ ... सातपुर सिद्धक्षेत्र लिद्धपुर सिंहपानोय सिंगड़ा तापुरा सातापुर सीपोर सालंज ... २०६४ १०६१ ... हालावाड़ा हविल ग्राम ... २१०६ ... १८२६, हुगली १७५९ । हैदराबाद (दक्षिण) ... ... राजाओं की सूची। संवत् लेखांक ' संवत् 15 १६३३ लकयर, सुरत्राण २६५२ बकन्दर पानिसाहि २७८२ १३ वर, पानिसाहि १७६६ १५९६ कुंभकणे, राणा २७६४ १४६४ चुनसणे. भूपनि १६२८,१६३ जगन्निंह. रामा ऐया पाटय १६. भरपर, सुरत्रान १००८ १ (११) संवत् 'स्थान लेखांक | संवत् स्वान 'गोपाचल . टिंवान देवकुलपाटक "नवानगर " अणहिल्लपुर बीकानेर १८०१ जगतसिंह, महाराणा उदयपुर १११५ / ११५० महीपाल ३५६६ जगमाल, महाराजाधिराज अचलगढ २०२७ १ १९५० मूलदेव २५४८ जशसिंघ, राजा २०३६ / १९५० मंगलराज २५६७८ जसवंतसिंहजी, जाम, नवानगर १७८१ / १२७२ रणसिंह, मिहरराज १६७१ जहांगीर, पातिसाह आगरा दुर्ग १५८०-८१-८२ १७६८ राघव, राजा २६७१ आगरा १५८३-८४ १६६७ लक्षराज, जाम १६७१ जहांगीर, पातिसाह सवाइ सुरत्राण १५७८-६६१०३४ वज्रदाम, महाराजाधिराज १६७२ उग्रसेनपुर १४५६ ११५० वज्रदाम १६७४ जहांगीर साह, १४६० १२११ वस्तुपाल, महामात्य १४६७ डूंगरसिंह, महाराजाधिराज गोपाचल १४२७ १५६२ वीकाजी, महाराजा राई ५५१० गोपगिरि १४२८ १६३३ शत्रसल्ल, जाम १५१० डूंगरसिंहदेव, राजाधिराज गोपाचल १२३२ १६७६ शत्रुसल्य, जाम, १५२५ डूंगरसिंह, रावधर सायर अर्बुदगिरि २०२५ , १६७१ शाहजहां १६६६ तेजसिजी, राउल वोरमपुर १७१५ १८६३ सहादतअलि, नवार २६५० टोक्लमल १४२६ १६८६ साहजाह, पादशाह १२५० देवपाल 'गोपाचल १४२६ १६८८ साहिजां, पातिसाह सवाइ ११५० पद्मपाल १४२६ / १६६८ साहजाह, पातिसाह १३६२ पृथ्वोचंद्र, महाराजाधिराज चित्रकृट १९५५ १८५६ सुरतसिंह, महाराज १५४६ भीमसिंघ, रावल मएडासा १०१५ १९५० सूर्यपाल ११५० भुवनपाल १४२६ । १५२६ सोमदास, राउल १५५२ मलसिंहदेव, महाराजाधिराज. गोपावल १४२६ । १६६६ हठीसिंहजो, महाराव नवीननगर नवानगर लखनऊ अग्गलपुर घोकानेर डूंगरपुर नगर रामगढ दुर्ग - +

Pirelle WTF! Fleeve Vrc-, HE!!!!! ..!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
Benson Menanandhi's -11 lille til lil,'
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Jemen
METAL IMAGE OF SHRI ADINATH
Dated, V. S. 1077, ( A. D 1020 )
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13644554545

JAIN INSCRIPTIONS.
जैन लेख संग्रह।
इसरा खाम।
श्रीयादिनाथजी का देरासर ।
युम्मारसिंहरात-निरा।
धातु की मूर्तियों पर।
[103:30
(१) पजक सुत अंद
(1) देवेन । सं १८७३
883!
(१)
मखास सत्ता सं
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( ५ ) (२) पंकः श्रिया वे सुन (३) स्तु पुन्नक श्राफः सी (४) लगल सूरि जक्तश्चन्छ कु (५) ले कारयामासः॥ (६) संवतु (७) १०७२ [1002] संवत् १६४५ वर्षे पो सु० १५ सोमे श्रीअजित बिंवं का सा नानू जुदिङकेन प्रण श्रीहीर विजय सूरि । धातुकी चौविशी पर। [1003] * ॥ श्रीमन्निवृतगडे संताने चाम्रदेव सूरीणां । महणं गणि नामाद्या चेली सर्व देवा गणिनी ॥ वित्तं नीतिश्रमायातं वितीर्य शुजवारया। चतुर्विंशति पट्टाकं कारयामास निर्मवं॥ हीरालालजी गुलाबसिंहजी का देरासर-चितपुर रोड । धातु की चौविशी पर। ॥ [1004] संवत् १५०६ वर्षे श्रीश्रीमालझातीय दोसी मगर नार्या म्यापुरि सुत मुंजाकेन जार्या सोही सुत वीका युतेन आप श्रेयसे श्रीसुविधिनाथादि चतुर्विशति पट्टः कारितः आगमगछे श्रीअमरसिंह सूरि पट्टे श्रीहेमरत्नगुरूपदेशेन प्रतिष्ठितः॥गन्धार वास्तव्य ॥ शुनं जवतु ॥श्रीः॥ लानचन्दजी सेठ का घर देरासर-पुलिस हस्पिटैल रोड । पाषाण की मूर्तियों पर। [10051 संवत् १६५३ ज्येष्ठ शुक्ल ५ महोपाध्याय युग प्र० विजयेन"प्रतिष्टितं जं । यु । प्र । न श्रीजिनरंगसूरि राज्ये। ।

( ३ )
[1006]
संवत् १७२७ वर्षे ज्येष्ठ शुक्ल ७ रवौ खरतरगठीय महोपाध्याय रामविनयगणिना प्र०
पार्श्वविम्वं ।
स्फटिक के विम्ब पर ।
[1007]
संवत् १७७७ मा । सु० १३ प्र । ख । श्रीजिनचन्द सूरितिः ।
रौप्य के चरण पर ।
[1008]
जंगम युग प्रधान जहारक श्रीजिनदत्त सूरीश्वराणां पाषुके । श्रीजिनकुशलसूरीश्वराणां
पाउके। वीर संवत् २४१ वि० रएए आषाढ शुक्ल र चन्ले रांका गोत्रीय लालचन्द्र शेन
आत्मकल्याणार्थ श्मे पाडुके निर्मा पिते,श्री वृ० ख ग ज० युग नट्टारक श्रीजिनचन्द्र सूरि
विजयराज्ये श्रीमद्दिङ्मएमलाचार्य श्रीनेमिचन्प्रसूरि अन्तेवासि पं० श्रीहीराचन्ण यतिना
प्रतिष्ठापिते श्री शुनं नूयात् ।
शमियन म्युजियम-चौरङ्गी रोड ।
धातु की मूर्ति पर।
[1008]
संवत् १४५७ वर्षे ज्येष्ठ सुदि १३ श्रीमूलसंघे प्रतिष्टाचार्य श्रोपद्मनन्दि देवोपदेशेन....
श्रीजीमदेव । नार्या महदे । सुत गणपति नार्या फरमू ॥"
'प्राणमति ।
अजिमगञ्ज-मुर्शिदाबाद।
श्रीनेमनाथजीका मन्दिर ।
पञ्चतीर्थियों पर।
[1010]
संवत् १५१७ व ज्येष्ट सुदि २ दिने सोमवारे नका वंश लोढा गोत्र मा बीमाल नायर्या
पर पोलिमीटदां पर हिली

(२)
(२) पंकः श्रिया वे सुन
(३) स्तु पुन्नक श्राद्धः सी
(४) लगल सूरि नक्तश्चन्द्र कु
(५) ले कारयामासः ॥
(६) संवतु
(७) २०७२
[1002]
संवत् १६४२ वर्षे पोण् सु० १५ सोमे श्रीअजित बिंबं का साप नानू जुदिजाकेन प्र०
श्रीहीरविजय सूरि।
धातुकी चौविशी पर।
[1003]
॥ श्रीमनिवृतगछे संताने चाम्रदेव सूरीणां । महणं गणि नामाद्या चेल्ली सर्व देवा
गणिनी ॥ वित्तं नीतिश्रमायातं वितीर्य शुलवारया। चतुर्विंशति पट्टाकं कारयामास निर्मलं ॥
हीरालालजी गुलाबसिंहजी का देरासर-चितपुर रोड ।
धातु की चौविशी पर।
[1004]
संवत् १५०६ वर्षे श्रीश्रीमाखातीय दोसी मूंगर जार्या म्यापुरि सुत मुजाकेन जार्या
सोही सुत वीका युतेन श्राप श्रेयसे श्रीसुविधिनाथादि चतुर्विंशति पट्टः कारितः आगमगछे
श्रीअमरसिंह सूरि पट्टे श्रीहेमरत्नगुरूपदेशेन प्रतिष्टितः॥गन्धार वास्तव्य ॥शुनं नवतु
लानचन्दजी सेव का घर देरासर-पुलिस हस्पिटैल रोड ।
पाषाण की मूर्तियों पर।
[1005]
संवत् १६२३ ज्येष्ठ शुद्ध ५ महोपाध्याय युग प्र० विजयेन'"""प्रतिष्टितं । यु । प्र । ज
श्रीजिनरंगररि राज्ये।
॥
॥
॥श्री

सैंतीया ( वीरभूम) श्री आदिनाथजी का मन्दिर । धातुकी पञ्चतीर्थी पर। [1016] संवत् १५२३ वर्षे वैशाख वदि ४ गुरौ श्रीउएसवंशे दो वरुआ नार्या मेघू पुत्र जईता सुश्रावकेण नाजीवादे चातृ जटा सहितेन खश्रेयसे ॥ श्रीअंचलगन्वेश्वर । श्रीजयकेसरि सूरीणामुपदेशेन श्रीधर्मनाथ विवं कारितं प्रतिष्ठितं श्रीसंघेन श्री पत्तने ॥ ॥ रङ्गपुर ( उत्तर वङ्ग) श्रीचन्द्रप्रनखामी का मन्दिरमाहीगञ्ज । शिला लेख नं १ [1017] (१) अत्यद्भुतं सजन सिद्धिदायकं जव्यां गिना मो (२) करं निरन्तरं जिनालये रङ्गापुरे मनोहरे चन्प्रनं (३) नौमि जिनं सनातनं ॥ १ ॥ संवत् रजए३ मि । माघ यदि १ । र (४) वो श्रीरङ्गपुरे । न । श्रीजिन सोनागा सूरिजी विजयी । (५) राज्ये वा । थानन्दवनगणरुपदेशान् श्रीमनुदावा (६) द वायूचर वास्तव्य । निहालचन्द तत्पुत्र बाबू इन्च (७) खण श्रीचन्जान जिनः प्रासादः कागपिनः प्रनिष्ठापि (७) तश्च । विधिना ॥ सतां कल्याण वृष्यर्थम् ॥ (ए) श्रीरस्तुः ।। १ ।। • पर रे सर पर हा सन्मान (४) जावलदे तत्पुन सा कर्मा तन्नार्या कतिगदे तत्पुत सा सहसमन श्रावका सपरिवारेष आत्मश्रेयोर्थ श्रीचन्प्रन विवं कारितं प्रतिष्टितं श्रीखरतरगचे श्रीजिनराजसूरि पट्टे श्रीजिननमसूरिनिः॥ [1011] संवत् १५१७ वर्षे माघ सुदि ४ सोमे श्रीब्रह्माणगचे श्रीश्रीमालझातीय श्रेष्ठि विरुश्रा नार्या मुक्ति सुत हीरा नार्या हीरादे सुत नावड़ कमान्यां स्वपित्रोः श्रेयोर्थ श्रीधर्मनाथ विवं पञ्चतीर्थी कारापितः प्रतिष्ठितं श्रीवुद्धिसागरसूरि पट्टे श्री विमल सूरिभिः ॥ सीतापुर वास्तव्यः॥ [ 1012] सवत् १५१५ वर्षे वैशाख वदि ११ शुक्रे ० ज्ञातीय विद्याधर गोत्रे। साप सूंमण । ना सूमलदे। पु० वेला ना० वगू नाम्ना पु० सोमा युतयां स्वन्त्रातृ पुण्यार्थं श्रीआदिनाथ बिंबं का प्रण वृहमने घोकमीयावटंके (?) श्रीधर्मचन्प्रसूरि पट्टे श्रीमलयचन्द्र सूरिभिः । लोजाज ग्राम ॥ [1013] ॥ए॥ संवत् १५२५ वर्षे आषाड़ सुदि उकेशिज्ञातीय मवेयता गोत्रे । सा केसराज नार्या 'रतनाकेन श्रेयसे श्रीसुमति बिंब प्रतिष्ठितं धर्मघोषगछे श्रीसाधु ॥ [1014] संवत् १७०६ व । ज्ये। गुरु श्री राजनगरवास्तव्य । प्राग्वाटझातीय वृहद्शाषायां सा शेषनदास नाग का नाम्न्या श्रीन मिनाथ विंबं कारितं प्रतिष्ठितं च तषागछे । ०। श्री ५ श्री विजयानन्दसूरिनिः॥ आचार्य श्री ५ श्री विजयराजसूरि परिकरितैः ॥ श्रीरस्तु। ज॥१॥ पाषाण की मूर्ति पर। [1015] * संवत् १५४५ वर्षे वैशाख सुदि ३ श्रीमूलसंघे नहारक श्रीजिनचन्द्रदेवा सागराज पापड़ीवाल सप्रणमति का श्रीजीमसिंघ रावल । सहर मालासा । धरणेन्द्र पद्मावती सहित श्रीपाश्वनाथजीकी श्वेत पापाणकी २ मूर्तियां पर एकही तरहके २ लेख हैं।

( 9 )
[1021]
सं० १९३६""सौलाग्यसूरिजी विजय राज्ये नाइटा मौजीरामजी तत्पुत्र गुलाबचन्दजी
श्री आदिजिन कारापितं श्री आपन्न |
धातु की मूर्तियों पर।
[ 1022]
सं० १९२० मि फा कृ० ५ बुधे साप प्रतापसिंड्जी उगड़ नार्या मइताव कुँवर श्री
श्रेयांस जिन विंवं कारापितं ।
[10231
सं० १९२० मिः फा कृ ५ बुधे ला प्रतापसिंह नार्य महताब कुँवर श्री अग्निदत्त
२२ जिन विवं का।
वाविनी पर।
[10211
संवत् ११ मिनी ग्रापाट नुदि १३ जन्निं नोवतीया सा० सांवत पगिना
प्रनिष्टिनं उ० श्री कर्पूर प्रिय गतितिः ।
पंचनीधियों पर।
:
सं० १५१८ दि ११ कः T: कानीमा मकान
नेता इंगर मेवान र नेवाः सा श्रीमुनि ािरित प्रा श्रीमंताग श्री
ईवर सुनिभिः
मेर : २ दि १'
::::::
नमन मानन्द ननरभर
F

( न दादाजी का मन्दिर-माहीगञ्ज । पाषाण के चरण पर। [1027] संवत् १७७७ रा वर्षे जेठ मासे शुक्ल पदे १० तिथौ बुधवासरे श्री चन्द्रकुलाधिप । वृहत् श्री खरतरगछे जंगम युगप्रधान नद्यारक । श्री १०७ श्री जिनदत्त सूरिजी श्री १०७ श्री जिनकुशल सूरीणां चरण स्थापितं ।। श्री रत्नसुन्दरजी गणि उपदेशात् साह श्री गड़ बुधसिंहजी तत्पुत्र । बाबू श्री प्रतापसिंहजी कारापितं ॥ श्रीसद्ध हितार्थम् । जगमयुगप्रधान नहारक श्री जिनदर्प सूरिजी विजय राज्ये श्रीरस्तु ॥ श्रीकल्याणमस्तुः ॥ उदयपुर ( मेवाड़) श्री शीतलानाथस्वामी का मन्दिर । [1028] ॥ मंगल १६३ वर्षे कार्तिक वदि ॥ सोमवासरे उदयपुर राणा श्री जगत्सिंह राज्ये गीन मन्दिर श्री शीतल जिन बि पित्तलमय परिकर कारितः पासपुर वास्तव्य का प्राबाट मानीय पं० कान्हा सुत पं० केसर नार्या केसर दे तत्सुत पं० दामोदर र श्री विजयदेव सूरीश्वर तत्पष्टप्रनाकर श्राचार्य श्री विजयसिंह कमाने पनि श्री गनिवन्ध गणिनिः वासदेपः श्री सकवासस्य क " 4 १ www Arrange marke - धातु की घाविझी पर । [1020] कई ३८ ?? प्राग्वाट दा मृग ना पोमी मुत दोत ग्रामांकन ": :: :उट किसान जोगादि कुटुम्बयुनेन मनात गाशा बगुत सारद - निपटारा नवागउनायक नद्या प्रनु श्री सोगमुन्दर कामयः ।। १ , Art mar,

( ए )
पञ्चतीर्थियों पर।
[1030]
सं० १५१७ वर्षे पोष वदि ज रवौ प्राग्वाट झा सा डूंगर ना सुहालिणि पुत्र सपम
सिंहेन नाप सोनाई पुत्र नगराजादि कुटुव युतेन स्वपितुः श्रेयसे श्री शान्तिनाथ बिम्ब
कारितं । प्रतिष्टितं तपागळे श्री रत्नशेखर सूरिनिः अहिमदाबाद वास्तव्यः ।
[1031]
सं० १५५७ वर्षे मार्गशिर सुदि ए शुक्रे श्री नाला वालगडे उस कावू गोत्रे का सोंगा
नाण सोंगलदे पुण् धूलाकेन नार्या पूजी साहितेन पूर्वज पूण्यार्य श्री शीतलनाथ विम्बं का
श्री महेन्द्र सूरिनिः॥
पञ्चतीधी और मूर्तियों पर ।
[1032]x
१ सं० जज ने पमा विनिगो याजा लूगापनि कारितं ।
[1083]
ॐ ॥ संवत् ११ए६ माघ सुदि १५ गुग नदन मत्लान्या श्री प्रपननाय विम्यं कारित
प्रतिष्टितं नामदेव सूरिभिः॥
[ :0643
संवत् १६५ जेठ सुदि १० बो। चादमीन निज कुटुम्ब महिनन पानायः
कास्तिः प्रतिहितः श्री देवनड सुरिधिः ।
.
सं० १९६५ फागुए मुदि १ र प्रदेव मु बीमारदेव अंगाधना प्राश्री
जादेव सुरिन्तिः ।
-
'.

( १० )
[10363
१५"आषाढ़ सुदि उवएस वाधि सीदेण पु० गामा माव्हान्यां पितृ श्रेयोथं विस्वी
कारितं प्रतिष्ठितं श्री सर्वगुप्त सूरिनिः।
[1037]
सं० १३५३ ज्येष्ट सुदि १......"श्री पार्श्वनाथ बिम्बं कारितं प्रतिष्ठितं श्री उद्योतन
सूरिनिः॥
[1038]
सं० १३२५ वर्षे फागुण सुदि ४ शुक्रे। श्रेण धामदेव पुत्र रणदेव धारण ना आससदे
श्रेण राम श्री पार्श्वनाथ बिम्बं कारितं श्री कक्क सूरिनिः ।
[ 1080]
सं० १३२७ वर्षे वैशाष शु० ६ परमेरक गवे श्री यशोना सूरि सन्ताने सा० सढ़ाणव
ना जमदह पुरु झएक श्री श्रास सिंह ना मीहा''काया विम्बं कारितं प्र श्री ज्ञात्य
सूरिजिः।
[1040]
सं० १३२ए वैशाख वदि ए शुक्रे कबु ऊदा नार्या ललतू श्रेयसे कर्मणेन श्री आदिनाथ
विम्वं कारितं प्रतिष्ठित
[1041]
संवत् १३५२ वर्षे फागुण सुदि १० वुधे श्री चैत्र गछिय धर्कट वंशे नाहर गोत्रे सा
हापु सुत सा विजयसीइन नातृ धारसीह श्रेयसे माग्यकेन श्री वासपूज्य विम्ब कारित
प्र० श्री गुणचन्द्र
[1042]
सं० १३७४ माघ व० १० गुरो श्री श्रीमाल झा श्रेण पुन पाल सुत सोमल पितृ पुन
पाल श्रे० श्री पार्श्वनाथ विम्वं कारितं श्री रामं (?) प्रायागछे प्रतिष्टितं श्री शीसजन
सूरिभिः॥

।। । - [1043] सं० १३७५ वर्षे फागुण सुदि"श्री पार्श्वनाथ विम्बं कारिता प्रतिष्ठितं श्री कक्क सूरिनिः॥ [1044]] सं० १३५६ वर्षे ज्येष्ठ सुदि १५ बुधे श्री माल ज्ञातीय पितामह श्रेण वीन्दण पितृ श्रेण सोमा पितृव्य साजण जातृ माहा"श्रेयोर्थ सुत राणा धरणिकान्यां श्री पार्श्वनाथ पञ्च- तीघी का। [1045] संवत् १३जए वर्षे माघ वदि ११ गुरौ श्री दाहड़ वीरम श्री चन्प्रन विम्बं प्रतिष्ठितं । [1046] सं १३५१ मड्डास्मीय ग श्रेण पादा ना जाइल पु० कर्म सीइन पित्रो श्रेयोर्थ श्री महावीरं श्री रत्नाकर सूरि पट्टे श्री सोमतिलक सूरिनिः॥ [1047] संवत् १३एए वै० सुदि १ प्राग्वाड़ श्री अगड़ा नार्या वादहु""विस्वं प्र० श्री मावदेव सूरि। [1048] सं० १४०५ वर्षे वैशाप सुदि ५ सोमे श्री श्रीमास ज्ञातीय पितृ पेता मातृ जगनल देवि तो श्रेयसे श्री शान्तिनाथ विम्ब का रितं प्रतिष्टितं श्री नागेन्द्र गछे श्री रतनागर सूरिनिः॥ [1040] संघ १४०६ वर्षे ज्येष्ट सु० । रवी ला"कुटुम्ब श्रेयोर्थ श्री या दिनाथ विम्यं काग्निं प्रनिष्टितं जीरापढीचैः श्री रामचन्न सूरिनिः ॥ [10501 सं० १४०७ वैशाख वदिवो धीमा ज्ञानीय पितामह उदयमीद पितृ जपानी भ्रेपले सुत पोपान श्री थादिनाथ दिन्वं काग्निं प्रतिघ्निं श्री गुणसागर नृरि शिष्य श्री गुणप्रन सूरिन्तिः ।

( १ ) [1051] सं० १४०ए वर्षे फागुण सुदि २ बुधे हुंवड़ यातीय भ्रातृ पातल श्रेयसे ३० वीरमेन श्री आदिनाथ बिम्बं कारित प्रा श्री सर्वानन्द सूरि सहितः श्री सर्वदेव सूरिभिः । [1052] सं० १४२१ वर्षे माघ वदि ६ दिने नादर गोत्रे सा देवराज ना रुपी पुण् सा खोला जार्या नाव्ही.पौत्रादि सहित आत्मश्रेयसे श्री शांतिनाथ विम्वं कारितं श्री रुपल्लीय ग० न० श्री जिनहंस सूरि पदे श्री जिनराज सूरिभिः ॥ [1053] सं० १५२२ वर्षे वैशाष सु० ११ बुधे प्राग्वाट ज्ञा० करोली वास्तव्य श्रेष्टि तिहुणा जाण वांदणि पितृ श्रेण श्री पार्श्वनाथ बिम्बं कारितं प्र० श्री रत्नप्रन सूरिभिः । [1054] सं० १४५३ फागुण सु० ७ सोमे प्राण व्या हरपाल नार्या श्रादहण दे पु० विजयपाखेन पित्रो श्रेण श्री पार्श्वनाथ बिम्बं का प्र० श्री शालिजा सूरिनिः ॥ [1055] सं० १४२३ फागुण सु० ए सोमे श्रीमाल व्या जोहण ना माव्हण दे सुत आव्हा पाव्हान्यां पितृव्य आसपाल नातृछान्यां श्रेयसे श्री वासुपूज्य बिम्ब कारितं श्री अन्नय चन्द्र सुरिणामुपदेशेन । [10561 सं० १४३६ वर्षे फासु०३ दिने मंत्रि दलीय गोत्रे साप सारङ्ग ना सारू पुण् सीधरण जा सुहवदे पुत्र साण मांज मैस परवतादि युतेन श्री कुन्थुनाथ बिम्बं का प्रण श्री खरतरगछे श्री जिनना सूरि पट्टे श्री जिनचन्छ सूरिनिः ॥ [10571 संवत् १४३७ वर्षे वैशाख वदि १० सोमे। श्री कारंटगडे श्री नन्नाचार्य सन्ताने उपकेश झाप श्रे० सोमा नाप सूमलदे पुत्र सोनाकेन पितृ मातृ श्रेण श्री आदिनाथ विम्ब का प्र० श्री सांवदेव सूरिनिः।

( २३ ) [1058] तंत्र १४५० वर्षे मगलिर बदि ६ सयौ उपकेश ज्ञातीय ला पापण नापीमलिरि त्यो श्रियो जुन आददा जदा देवा श्री वासुपूज्य विन्यं पञ्चती का श्री नागेन्जनले श्री रत्नसंघ सूरि पढे श्री देवगुप्त सूरिन्तिः । जारा सलजा श्रेयोर्थ ॥ श्री ॥ [1050] सं० १५५३ वर्षे वैशाप दि ६ इंच शाप श्रेण देवड़ लाए चामन देवि पुत्र हापाकेन हापा चा हशू पु० सु० पागल सुत जीशा कुंबगही श्री सर्वानन्द सूरि प० श्री सिंहदत्त सृरितिः। [1060] संग १४५५ विणचट गाने लाप नीपल ना निकुणश्री पुण् मोपाटन आत्मपूर्वजनिगि चन्प्रन बिम्ब का प्र० धर्मघोए ग श्री सर्वाणन्द सूरिभिः । [ OCD संप १४५७ यापाट मुदि ५ गुग प्राय व्यवसायी गोको पुननिनवाना केन पित्री श्री पार्थनाप कि सामान जी पनि रि पा : सं० १७६० ८ जोड दिनमा: "ना ना नामिणि पोप भी For of सरितिः॥ Te- सं. १७ या पेचा जा रहा पहनदि श्रीन सदा भी दिनार -- है ! दि: :: मानदिपले तीन ( १४ ) [1065] सं० १४७४ वर्षे माघ सुदि ७ शुक्रे रनघणा गोत्रे हुंवड़ शातीय श्रेण वरजा जा रूनी सु सुप सूरा ॥ पितृश्रेयो) श्री मुनिसुव्रत स्वामी विम्बं का श्री सिंहदत्त ( रत्न ?) सूरिनिः॥ [1066] संवत् १४७ वर्षे प्राग्वाट ज्ञातीय श्रेण नरदेव नार्या गांगी पुत्र श्रेण जावटेन जाए कडू पुत्र पितृव्य चांपा श्रेयोर्थ श्री चन्द्रप्रन विम्बं का रितं प्रतिष्ठितं श्री सूरिनिः॥ [1067] सं० १४ए प्राग्वाट व्या कल्हा ऊमी सुत सूरीकेन ना० नीणू जाण चांपा सुत सादा पेथा पदमादि कुटुम्बयुतेन स्वश्रेयसे श्री कुन्थु विवं का प्रण तपा श्री सोमसुंदर सूरिनिः॥ [1968] सं० १४७० वर्षे फा सु० १० बुधे उप० झा श्रेण कसूयर नार्या कुसमीरदे सुण गेहा केन पित्रो श्रेय श्री नमिनाथ बिंद का प्र० मड्डा० रत्नपुरीय ज श्री धणचन्द्र सूरि प० श्री धर्मचन्द्र सूरिनिः॥ [1069] सर्वत् १४७१ वर्षे वैशाख शुदि ३ शनौ प्राग्वाट झातीय श्रेण काला नार्या कीदहणदे सुत सरवणेन पितृमातृ श्रेयसे श्री चन्द्रप्रन स्वामि पंचतीर्थी विंबं कारितं प्रतिष्ठितं मडाहड़ गळे श्री उदयप्रन सूरिनिः ॥ श्री ॥ [1070] सं० १४७२ वर्षे वैशाप वदि ५ उपकेश ज्ञाराका गोत्रे साप चूणा ना० तेजलदे पु० कानू रूल्हा ना रयणीदे पुण् केव्हा हापा शाहा नेजा सोनीकेन कारापितं नि पुण्यार्थ आत्म श्रेण उपकेश गठे कुकदाचार्य सं० प्र० श्रीसिक सूरिनिः ।

( १५ )
[1071]
सं० १४७३ वर्षे हि वैशाख वदि ५ गुरौ श्री प्राग्वाट ज्ञाण व्य खीमसी ला सारू
पुत्र व्या जेसाकेन पुत्र वीकन आसान्यां सहितेन श्री मुनिसुव्रत स्वामि बिंबं श्री अंचल
गठनायक श्री जयकीर्ति सूरि गुरूणां उपदेशेन कारितं प्रतिष्टिनं श्री संघेन ॥
[1072]
सं० १४७४ वर्षे वैशाख वदि १५ रवी उपकेश ज्ञातीय सा कूता ना कुंवरदे पुत्र
तमा ना नावलदे युग सायर सहित श्री वासुपूज्य बिंवं का प्रण उपकेश गछ सिकाचार्य
सन्ताने मेदरथ श्री देवगुप्त सूरि तिः ॥
[1073]
सं० १४७४ वर्षे ज्येण सु० ५ वुधे श्री नागेन्ड गळे उपकेश शा० सा० सादा जामावदा
पु धांगा ला लागी पितृमान श्रेण श्री संत्तवनाघ विवं का प्र० पद्माणंद मृरिजिः ॥
[1074]
सं० १४१ वर्षे वैशाप नु० ६ गुग २० धगता जात पनादे मुत हीराकेन जा०ीगरे
पुत्र श्री सुमतिनाथ वि श्री सोमसुन्दर प्रा ..
--
सं० १४१ वर्षे लाय सुदि ५ सयम पाका ना ना ना : पर
जमाकन सपरिवारण स्वपुण्यार्य श्री जितना विकास प्रापरवार ग श्री जनगागर
समिनिः ।।
:
सं० १४ार द ० ६० ११ प्रबाट मनी 7 प्राद गगनाला..
जा० घारलदे न नोहा दाहा हदम सामादि देन बरतना अंगार श्रीन
नाच दिवादित प्रनिहित नमुन्दा
1
དེ :''''' ལ༌ ༌
": ईद- : :
पुर सापान TATES : -::-
भी सोया
बल:.

( १६ ) [ toral सं० १४९/६ वर्षे फागुण यदि शुक्र दुबईकानी100 नाय नोइन पु० : राणाकेन मातृपितृ श्रेयसे श्री वासुगतिका प्रिनिलिम भी तृतिभिः । [1070] सं० १५७१ वर्षे फागुण सुदि १३ गुगे सुगणा गोत्र सास सोनपाल जातिकुणी पु घिणराजेन गुणराज दशरथ सहसकिरण समन्वितेन सश्रेगमे श्री सुगतिमान वित्र कारित tu श्री धर्मघोष गछे ना श्री पद्मशेयर तृरि प० ० श्री विजयचन्द सूरि जिः ॥ [ 1080] सं० १५०३ वर्षे ज्येष्ठ सुदि ११ शुके दह्दहड़ा श्री अरुनाथ विंबं का प्रा राम सेनीया वरफे (?) श्री धर्मचन्ड सूरि पढे श्री मलयचन्न सूरितिः । [1081] सं० १५७५ वर्षे वैशाष सु० ६ सोमे श्री संडेरगछे जा ज्ञाण वासुत गोत्रे सा गांगण पु० पेरु पु० बुलाकेन सा गोगी पुत्र बाड़ा कुंचा सहितेन खपुण्या श्री शान्तिनाथ विवं का प्र० श्री [ 1082] सं० १५०६ मा सुदिने श्री उपकेशज्ञातो सिरहा गोत्रे सा० सहदेव जाण पु० सालिगेन पिनो निमित्तं श्री कुंथुनाथ विंचं का प्रति श्री सर्व सूरिभिः ॥ [ 1083] सं० १५०० वर्षे ज्येष्ठ सु० १० उप चिपड़ गोत्रे सा० रावा ना जेठी पुण् मातृपितृ पुण्याप यात्म श्रेण श्री शान्तिनाथ विंबं का० उपकेश गछे प्रति श्री कक्क सूरिनिः। [1084] सं० १५०७ वर्षे ज्येष्ठ शु० १३ बुधे प्राग्वाट ज्ञातीय श्रेण सोमा ना धरमिणि सुत मालाकेन लाला लाए गेलू राजू युतेन स्वश्रेयोर्थं श्री वर्द्धमान विवं कारितं प्रतपा श्री सोम सुन्दर सूरि शिष्य श्री रत्नशेषर सूरिनिः॥ कूलिगिरि वास्तव्य ॥ सुहददे देकाकेन [1085] सं० १५०ए वैण् शु० ३ प्राग्बाट व्य० मेघा नार्या हीरादे पुत्र व्यण आता मोमा ना कैलू आल्हा पुत्र शिखरादि कुटुम्ब युतान्यां स्वयार्थ श्री युगादि वि० का प्र तपा श्री सोमसुन्दर सूरि शिष्य श्री रत्नशेषर सूरिनिः ॥ [1086] सं० १५१० वर्षे वैशाप वदि ५ सोमे गिरिपुर वास्तव्य कुंवड़ ज्ञाति डेमिकल गोयद (?) जा वारू सुण जाला नाहीसू सुछ आसान ना रूपी युतेन स्व० श्री सुविधिनाथ वि का श्री वृ तपापक्षे श्री रत्नसिंह सूरिजिः प्रतिष्ठितं ॥ [1087] संप १५११ वर्षे माह वदि ६ गूर दिने उप ज्ञाण चलद (?) गोत्रे सा बाड़ा ना सहवादे सा0 जाड़ा जाप जसमादे सहितया स्वश्रेयसे श्री धर्मनाथ बिंब का प्रण श्री न रामसेनीया अटकरा श्री मलय चन्द्र सूरिनिः॥ [1088] ॥ सं० १५१३ व चै सुण ६ गुरौ उरकेश वं० ताल गो सा० मदिराज पु० सा काल्हा ना० कलसिरि सुप धना जाप धरण श्री पु चोपा यु० श्री शितलनाथ विवं का प्र धर्मधोप गए श्री साधुरत्न सूरिनिः ॥ [1080] ॥ सं० १५१३ पोप शुदि जकेश वंशे विमल गोत्रे सं० नरसिंहांगज सा जाऊणेन श्री कुंथु विवं का प्रा ब्रह्माणी उदयप्रत्न सूरि ता नद्दारक श्री पूर्णचन्ड सरि पट्टे देम इंस सुरिनिः॥ [1000] ॥ सं० १५१५ वर्षे जे सुदिए उपकेस ज्ञा० जोजा बरा सा बीदा ना वार पुत्र गांगा हुदाकेन पूर्वज निमित्तं श्री कुंचनाय विवं का प्र० श्री नगर्छ न श्री रामदेव सूरिनिः॥ IF

न
Almaanym
14
[10731
सं० २५९/६ वर्षे फागुण बदिर गुफे दुबई ज्ञानी गा.
राणालेन मातृपितृ श्रेयसे श्री वासुसज्य विभारित तिनि:
[HOTO
सं० १५०१ वर्षे फागुण सुदि १३ गुगे सुगणा गोत्र साप से
घिणराजेन गुणराज दशरथ सहसकिरण समन्वितेन सश्रेय
३ श्री.धमघोष गछे ना श्री पद्मशेपर सूरि प० च श्री विजा
[1080]
सं० १५०३ वर्षे ज्येष्ठ सुदि ११ शुके दहदहड़ा श्री.
सेनीया वरफे (?) श्री धर्मचन्द्र सूरि पट्टे श्री मदयचन्द
[1091]
सं० १५७५ वर्षे वैशाष सु० ६ सोमे श्री संडेरगछे छ
पु० पेरु पुबुलाकेन सा० गोगी पुत्र बाड़ा कुंना सहितेन ।
का प्र० श्री
[ 1082]
सं० १५०६ मा सु०७ दिने श्री उपकेशज्ञातौ सिरहा
पु० सालिगेन पित्रो निमित्तं श्री कुंथुनाथ बिंब का प्रति
[1033]
सं० १५७७ वर्षे ज्येष्ठ सु० १० उप चिपड़ गोत्रे लाप
मातृपितृ पुण्या आत्म श्रेण श्री शान्तिनाथ बिंबं का 5
सुरिनिः।
[1084]
सं० १५०७ वर्षे ज्येष्ठ शु १३ बुधे प्राग्वाट ज्ञातीय श्रेण
मालाकेन लाखा जाए गेबू राजू युतेन खश्रेयोर्थं श्री वर्द्धमान विवं
सुन्दर सूरि शिष्य श्री रत्नशेषर सूरिनिः॥ कूलिगिरि वास्तव्य ।
Puru..
।

स्वश्रे लाला ( १ ) [1087] संवत् १५३३ वर्षे माघ सुदि १३ सोमे श्री प्राग्वाट ज्ञातीय सा नाज ना हांसी पुत्र सा ठाकुरसी सा वरसिंघ जातृ सा वीसकेन ना सोनी पुत्र सा० जीणा सहितेन श्री अंचलगोश श्री श्री श्री जयकेसरि सूरीणामुपदेशेन श्री नमिनाथ विंचं कारितं प्र० श्री संघेन मांही ग्रामे ॥ श्री श्री ॥ [1098] ॥ सं० १५३५ वर्षे मार्ग वदि १५ साषुला गोत्रे साह पाहा ना० रहणादे पु० सा० तेजा जाए तेजलदे पु० बलिराज वीसल लोला । माणिकादि युतेन श्री पार्श्वनाथ विवं काए प्रा श्री धर्मघोषगडे श्री पद्मशेषर सूरि पट्टे श्री पद्माणंद सूरिभिः ॥ [1000] सं० १५३६ वर्षे मार्गसिरि सुदि १० बुधवासरे श्री संमेर गछे ऊ तेलहरा गो० सा ध्वना पुण् कादह पूजा ना खातू पुण् टोहा हीरा टोडा ना० वरजू पुण् निमित्तं श्री शीतलनाथ विवं का श्री जण नस (?) सूरि सं० श्री सालि सूरितिः ॥ [1100] सं० १५४२ वर्षे फाप व २ दिने जालजर महामुर्गे प्राग्वाट झातीय सा पोप जा पोमादे पुत्र साजेसाकेन ना० जसमादे जात लापादे कुटुम्ब युतेन स्वयार्थ श्री धर्मनाथ बिंब कारितं प्र तप श्री सोमसुन्दर सन्ताने विजयमान श्री लक्ष्मीसागर सुरिजिः ॥ श्रियोस्तु ॥ [1101] सं० २५५ए वर्षे आपाई सुदि उसवाल ज्ञाती कनोज गोत्रे साप पढा पु० सहममत जाप सुहिलासदे पुरा वाकुरसि उकुर युतेन आत्मश्रेयसे मादण पितृपुण्याचे शीतलनाथ विवं का० ॥ प्र० श्री देवगुप्त सूरिनिः ॥ [ 1102] सं० १५६६ वर्षे वै० २० १३ २० पननवासि प्रादो मानिक नाग्यः सुन पामाकन लाई नाथा सोनगनादि टुन्वयन योर्ष श्री पर्ननाथ विं काग्निं नपान श्री हेमविमस सूनिनिः प्रनिष्टितं ॥ श्री ॥

श्री ( १० ) [1103] सं० १५६६ वर्षे फ व ६ गुरौ प्राण साप तोला ना० रुपमणि पुण गांगाकेन जात पीबू पु० लाला लोला लापादि कुटुम्बयुतेन श्री पार्श्वनाथ विवं कारितं प्र तथा सोमसुन्दर सूरि सन्ताने श्री कमलकप्लस सूरि पट्टे श्री नन्दकल्याण सूरिनिः ॥ श्रीः ॥ श्री चरणसुन्दर सूरिनिः॥ [1104] सं० १५५६ वर्षे ज्येण शु० २ दिने प्राग्वाट ज्ञातीय ज्यायपुर वा० सादापा जा दानी पुण् सुश्रावक सासरवण ना मना त्रासासामन्त ना कम्म पु० सा सूरा सा० सीमा षेता प्रमुख समस्त परिवार युतैः निज पुण्यार्थं श्री श्रेयांस विंबं कारितं प्र० श्रीमत्तपा गठे श्री पूज्य श्री आनन्द विमल सूरि पट्टे सम्प्रति विजयमान राजा श्री विजयदान सूरिनिः॥ [1105] सं० १६६७ वर्षे ज्येष्ठ वदि ४ लोढा गोत्रे प। साता वर्षमदे सु कएउराकेन सुत वार दास प्रमुख कुटुम्ब युतेन श्री नमिनाथ बिंवं कारितं प्र० तपागचे श्री विजयसेन सूरीणां निदेशातू न श्री साय विजय (?) गणिनिः॥ [1106] संवत् १६७६ वैशाष सुदि न उदयपुर वास्तव्य जप्तवास ज्ञातीय वरमिया गोत्रे सा पीथाकेन पुत्र पोषादि सहितेन विमलनाथ बिंब का प्र० ताजहारक श्री विजयदेव सूरिजिः। स्वाचार्य श्री विजयसिंह सूरिनिः॥ [11071 सं० १६एवर्षे ज्येष्ठ सुदि ५ सोमे उकेस वंशे मांगरेचा गोत्रे सा0 गोविन्द नार्या गारवदे पुत्र सा समरथ श्री खरतरगछे श्री जिनकीर्ति सूरि श्री जिनसिंह सूरिभिः प्रतिष्ठितं।

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( १ )
[1108]
सवत् १६ए४ वर्षे वैशाष
श्री अनन्तनाथ विवं का प्र० च तपगछाधिराज
नट्टारक श्री विजयदेव सूरिनिः॥ स्वोपाध्याय श्री लावण्य विजय गणि का न
[1100]
सं० १७३ सा तेजसी कारिता श्री विमलनाथ विवं
.
--
[ 1110 ]
संवत् जीवा पु० सीहड़ नार्या श्रीया देवि पु० राजापाल प्रजापाल श्री श्री श्रादि-
नाथ विंबं का प्र० । श्री वर्धमान सूरिनिः॥
[ 1111 ]*
॥ सं० १४ए३ श्री ज्ञानकीय गछे। साण वादड़ ना प्रमी पुण् पाहा खोलान्यां
श्रद्धप्रा (?) कारिता ॥
श्री वासुपूज्यजी का मन्दिर ।
धातु की पञ्चतीर्थियों पर ।
।
[ 11121
संवत् १५०६ व जकेश सा वठराज सु० सा0 हीरा ला हेमादे हरसद पु० साप
जगा ना० फड श्रेयसे श्री शीतल विवं कारितं प्रतिष्ठितं तपा श्री रत्नशेखर सूरिनिः
। भी देवकुलपाटक नगरे।
[1113 ]
सं० १९४५ वर्षे ज्येष्ठ सु० ५ गुरुवार सुराणा गोत्रे सा० चनन पु० नारायण मुख
सीला
गोकसदास श्री चन्प्रन विवं कारितं ।
...
* यह मूर्ति देती है और पारन घोडा है।

,
( १२ )
श्री गौड़ीपार्श्वनाथजी का मन्दिर ।
धातुकी मूर्तियों पर ।
[1114 ]
सं० १७०५ माघ सु०१३ सोमे राणा श्री
[1115 ]
सं० १७०१ ज्येण सु० ए उदेपुर महागणा श्री जगतसिंहजी वापणा गोत्र साह श्री . ।
[11161
सं० १७०७ वर्षे शाके १६७३ ... जेठ सु० ए बुधे तण श्री विजयदेव सूरि श्री विजय
धर्म सूरि राज्ये उदयपुर वास्तव्य पोरवाड़ नएमारी जीवनदास नार्या मटकू श्री पार्श्व चिं
कारापितं ।
धातु की चौवीशी पर ।
[1117]
ॐ ॥ सं० १५२५ वर्षे पो० व १ गुरौ कर्केग वासि उकेश व्या जेसा ना जसमादे
सुन व्या वस्ता नार्या वीकलदे नाम्न्या पुत्र व्या जीम गोपाल हरदास पौत्र कर्मसी नरसिंग
थावर रूपा प्रमुख कुटुम्बयुतया निजश्रेयसे श्री शान्ति बिंबं का प्र० तपागच श्री साक्ष्मी
सागर सूरि श्री सोमदेव सूरिनिः । श्रेयः ॥
धातु की पञ्चतीर्थयों पर ।
[1118]
ॐ सं० १५११ व वैशाप वदि ५ शनों श्री मोढ़ शातीय मनीमा जार्या मनु सुत
मं० गोगकेन सुत जोला मदिगज युतेन स्वपितुः श्रेयार्थ श्री धर्मनाथ विवं कारितं प्रतिष्टितं
विद्याधरग, श्री विजयपन समितिः॥
[11101
सं० १५४३ वर्षे पोप वदि १० बुधे जा झातीय सा कोला नार्या पीमाई पु० दीना

( ३ )
जा० लाडिकि नाम्न्या देवर साप हेमा नारा फटू पुधरणादि युतया स्वश्रेयसे श्री शान्ति
नाथ विवं का प्र पूर्णिमा पके श्री जयचन्छ सूरि शिष्याण आए श्री जयरत्न सरि उपदेशेन
वमली ग्रामे ।
धातु के यंत्र पर।
[1120 ]
सं० १५३४ श्री मूलसं ना श्री भूवनकीर्ति श्री नण् श्री ज्ञानभूपण हूं० दो लापा
नाए अमरा नातृ दो हीरा ला अरघू सु जूठा
नगिणि
सुण
माणिक
नएमार की धातु की पञ्चतीधियों पर ।
[1121 ]
सं० १३३० वर्षे चैत्र वदि ७ शुक्रे महंग हीग श्रेया महं० सुत देवसिंहेन श्री पार्श्वनाथ
किंवं कारिनं प्रतिष्टितं श्री सृरित्तिः ।।
[1122]
सं० २३६१ ज्येष्ठ सु० ए। दुधे घातपाय मुन समयनिंद सार्या श्री कलमादेवि
तयोः सुत कान्हड़ पूनाच्यां पितृव्य वृण श्रेाने भी शान्तिनाय कास्तिः। प्रा श्री यी
न लूरि शिष्यः श्री विबुधमन सूरिभिः ।।
[ 1:28]
सं० १७३७ व6ि (?) वैशाप २०११ मोने घोडा व्यः नग ना मन्त्री
पुन
सीन
सिंदेन रिनो श्रेच मे भी दिमसनाप विंदा प्रा ब्रह्माणीय श्री कलाकार दिप श्री
देनतिजक सुशिक्षिः ।
:14:
सं १४४५ वर्षे वा हुदिनार ध्रः श्रीन टि :
पोई सुन कामान भी संबनाम विदा नि: श्रीका
रितिः।
--

सं० १५२० वर्षे वैशाष सु०३ सोमे उपकेश झा मह कालू ना० आघू पुत्र ३ जावड़ (२४) [1125] सं० १७७७ ज्येष्ठ व १ प्राग्वाट उनलसीकेन पित्रो उ० पूनसीह ना पूमधदे श्री चन्द्रप्रन बिंब का प्र० मलधारि श्री मुनिशेखर सूरिनिः [1128] सं० १५७१ माघ वदि ५ गुरौ प्राग्वाट व्या धणसी ना० प्रीमलदे सुत व्या सापा जा लाषणदे सुत व्य० पीमाकेन निज श्रेयसे श्री सुमति बिंब कारि० प्र० तपा श्री मुनि सुन्दर सूरिनिः। [1127] सं० १५१६ वर्षे वै वा १५ शुक्र उकेश झाती व्या नारद जाप घरघति पुत्र बाघाकेन ना वब्दादे चा पहिराजादि कुटुम्ब युनेन खपितु श्रेयोथं श्री विमलनाथ विंबं का प्र श्री सूरिनिः ॥ महिसाणो वास्तव्य ॥ [1128] रतना करमसी स्वमातृनिमित्तं श्री चन्द्र प्रज खामि विवं करापित उपकेश गछे श्री कक्क सूरिभिः सत्यपुर वास्तव्यः॥ [11291 सं० १५५४ वर्षे ज्ये० सु० ए श्री श्री वंशे स समधर नार्या जीविणि सुता वाही पि० हेमा युतया पितृ मातृ श्रेयसे श्री अंचल गठ श्री जयकेशरी सूरिणामुपदेशेन श्री सुविधिनाथ बिंबं का प्र० श्री संघेन । [1130- सं० १५५७ वर्षे ज्येष्ठ शुदि १० दिने प्राग्वाट ज्ञातीय श्रे साजण जास मान्द पुत्र डगड़ा देवराज नाग देवलदे स्वपुण्यार्थ श्री श्री विमलनाथ वि का० प्र० मडाह गर्छ रत्नपुरीय ज० गुणचन्छ सूरिनिः। जग आणंदनंद सूरि तेन उपरिकेन ।

( २५ )
[ 1131]
संवत् १५६ वर्षे यापाइ शुदिर मेडतवाल गोत्र साप सा ना मीव्हा पुत्र तान्हा
नार्या तितलिरि स्वपिनश्रेयसे श्री पार्श्वनाथ विवं कारितं प्रतिष्ठितं श्री मलधार गर्छ
श्री लक्ष्मीसागर सुरित्तिः ।
[ 1132 ]
सं० १६५५ माह सुदि १० श्री मृलसंघे न श्री प्रजचन्म देवा तत्पट्टे जय श्री चन्द
की िनदानाय वा गोत्र सं० चाचा पुत्र नेपाल पुत्र केसे। सुरताण श्रीयंत नित्य
प्रणति मालपुर वास्तव्य ।।
जयपुर।
श्री पार्थना कामाची नामनिर।
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कि प्रिनिनि ।
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( २६ )
आचार्य श्री तिहुपकीर्ति गुरूपदेशेन हुंवड़ इातीय व्या बाहड़ जार्या साठी सु० व्यः
षीमा नार्या राजूल देवि श्रेयोर्थ सुण का देवा नार्या राजुल देवि नित्यं प्रणमन्ति ।
[1136]
सं० १४३७ वर्षे वैशाष वदि ११ सोमे प्राग्वाट झातीय श्रेष्टि गोहा नार्या सलतादि
सुत मूजाकेन । पितृत्रातृश्रेयसे श्रीपार्श्वनाथ का प्र० श्री रत्नप्रन सूरीणामुपदेशेन ।
[ 1137 ]
सं० १४३५ वर्षे पौष वदि ए सोमे श्री ब्रह्माण गछे श्री श्री मा पितृ माषसी जा
मोषलदे प्र० सुत सोमलेन श्री शान्तिनाथ विंबं कारितं प्रतिष्टितं श्री बुद्धिसागर
सूरिभिः ॥ श्रीः॥
[ 1138 ]
सं० १४६५ वर्षे आत्मार्थं श्री शान्तिनाथ बिंबं कारितं प्रतिष्ठितं श्री
minस्तव्य।
[ 1139]
सं० १४६ए वर्षे ऊकेशवंशे नवलषा गोत्रे सा० साघर आत्मश्रेयसे श्री आदिनाथ
विंबं कारितं प्रति खरतर ग । जिनचन्डेण
[ 1140]
संवत् १४७ए वर्षे पोस सुदि १५ शुक्रे श्रीं हुंवड़ झातीय द्यावेमा गलनयोः पुत्रेण द्या
हापाकेन खत्रातृ द्यावड़ा मुलासी श्रेयसे श्री शान्तिनाथ विवं कारापितं प्रतिष्ठितं श्री
वृहत्तपागडे श्री रत्नसिंह सुरिनिः ॥ शुनं नवतु ॥ श्री ॥छ ।
[1141]
सं० १४ए माइ सु० ११ गुरौ श्री
10 संवामि गौष्ठिक सा सुरतणे
पु० धर्मा जाग ध.
पु० वीस
पा नाट्दा स० पित्रोः श्रेयसे श्री
श्रेयंस तु० का
न्ति

( ५७ ) [1142] सं० १५०१ वर्षे माइ सुदि १७ सोमे श्री संमेरगछे उपकेश ज्ञा० साह काबू नार्या वादही पुत्र कान्हा नार्या सारू पितृमातृश्रेयोर्थ श्री नमिनाथ विवं कारापितं प्रति प० श्री सांति सूरितिः । [1143] सं० १५०१ माइ सुदि १० सोमे श्री ज्ञानकापगळे उपकेश लोलस गोत्रे साह कान्हा नार्या कर्म सिरि पुत्र आल नार्या जाकु पुत्र धाना रामा काना नार्या अरपू आत्म श्रेयस श्री आदिनाथ विवं कारा प्रति श्री शान्ति सूरिनिः । [1144] सं० १५०१ माद सुदि १० लोमे पिरुत गोत्रे साए माण्हा पु० अरजुण नार्या साएत पुत्र कान्हाकेन ना इंदी पुण् दफस्या श्री पद्मप्रनः को प्र० श्री धर्मवोयग श्री मही तिलक सूरिनिः श्राप विजयप्रत्न सूरि सहितः ॥ [ 1145] संवत् १५०१ व फागुण सुदि १३ शनी जय झा जाजा उटाणा सा का ना सागू पु० पेना जश्तापेण नाप राणी पु० पंचायण जयना ना0 मुंना पित्रोः श्रे० श्री शास्ति- नाथ धि का श्री चैत्रगछे प्र० श्री मुनितिलक मूरिभिः । [12] सं० १५७२ वै० व० प्रा० व्या लापा लामादे पु० सामन्नेन सिंगारदे पुल पान्दा रतना मीमादि युनेन श्री इंदु वियं दा०प्र० नरा रत्नहोबा मिनिः। [:::7 सं० १५.४ पागण शुदि ११ गादिया श्रीमाः ना लामास पनाम: श्री दाना निमा बारिका प्रतिनिधी कान्हा श्रीनिटे श्री सर्शिनः ॥ M ( २६ ) आचार्य श्री तिहुणकीर्ति गुरूपदेशेन हुंवड़ ज्ञातीय व्या वाहड़ नार्या लाठी सु० व्य० बीमा नार्या राजूल देवि श्रेयोर्थ सु का देवा नार्या राजुल देवि नित्यं प्रणमन्ति । [ 1136] सं० १४३७ वर्षे वैशाष वदि ११ सोमे प्राग्वाट झातीय श्रेष्ठि गोहा नार्या खप्ततादि सुत मूजाकेन । पितृत्रातृश्रेयसे श्रीपार्श्वनाथ का० प्र० श्री रत्नप्रन सूरीणामुपदेशेन । [ 1137 ] सं० १५३५ वर्षे पौष वदि ए सोमे श्री ब्रह्माण गछे श्री श्री मा पितृ माषसी जा मोषलदे प्र० सुत सोमलेन श्री शान्तिनाथ विवं कारितं प्रतिष्टितं श्री बुद्धिसागर सूरिनिः ॥ श्रीः॥ [ 1138 ] सं० १४६५ वर्षे आत्मार्थं श्री शान्तिनाथ बिवं कारितं प्रतिष्ठितं श्री ISITION स्तव्य। [ 1139 ] सं० १५६ए वर्षे ऊकेशवंशे नवलषा गोत्रे सा० साघर आत्मश्रेयसे श्री आदिनाथ बिंब कारितं प्रति खरतर ग । जिनचन्डेण [ 1140] संवत् १४७ए वर्षे पोस सुदि १२ शुके श्री ढुंवड़ ज्ञातीय द्यावेमा गलनयोः पुत्रेण द्या हापाकेन खत्रातृ द्यावड़ा मुलासी श्रेयसे श्री शान्तिनाथ विंबं कारापितं प्रतिष्ठित श्री वृहत्तपागचे श्री रत्नसिंह सुरिनिः॥ शुनं जवतु ॥ श्री ॥४॥ [1141] सं० १४ए। माह सु० ११ गुरौ श्री समरंगठे 7 आप संवामि गौष्ठिक सा सुरत पु० धर्मा जा धर्मसिरि पु० वासलेन ज्ञाण कानू पु० नापा नाव्हा स० पित्रोः श्रेयसे श्री श्रेयंस तु० का० प्र० श्री शान्ति सूरिनिः शुनं ।

( २७ ) [1142] सं० १५७१ वर्षे माह सुदि १७ सोमे श्री संमेरगडे उपकेश ज्ञा० साह काबू नार्या वाटही पुत्र कान्हा सार्या सारू पितृमातृश्रेयोर्थ श्री नमिनाथ विवं कारापितं प्रति ५० श्री सांति सूरितिः । [1143 ] सं० १५०१ माह सुदि १० सोमे श्री ज्ञानकापगळे उपकेश लोलस गोत्रे साह कान्हा नार्या कर्म सिरि पुत्र आल नार्या जाकु पुत्र धाना रामा काना नार्या अरपू आत्म श्रेयसे श्री आदिनाथ विवं काराण प्रति श्री शान्ति सूरितिः । [ 1144] सं० १५०१ माद सुदि १० सोमे पिरुत गोत्रे साए माण्हा पु० अग्जुण नार्या साह पुत्र कान्हाकेन ना डूंदी पुण् दफया श्री पद्मप्रनः को० प्र० श्री धर्मघोपगछे श्री मही तिलक सूरिनिः श्राप विजयप्रत्न सूरि सहितः ॥ .. [ 1145] संवत् १५७१ वर्षे फागुण सुदि १३ शनी जा ज्ञा जाजा उटाणा सा का ना० लागू पु० पेना जश्तापेण नाप राणी पु० पंचायण जयता ना० मुंनो पित्रोः श्रेण श्री शान्ति- नाथ विरं का श्री चैत्रगले प्रश्री मुनितिलक सूरिभिः । [1126] संप १५७२ वै० व ५ प्राण व्य लापा लापणदे पुरा नामन्तेन सिंगारदे पु पाल्दा रतना नीम्नादि युनेन श्री कुंधु विदं का० प्र० नपा रत्नशखर सुरिनिः [1147 ] सं० १५.५ फागुण शुदि ११ पंगादिया श्रीमान ना नानागा पुतला माग श्री पानाप प्रनिता कारिता प्रनिहितं श्री नपानहाय श्री चन्द्ररि पर श्री दम रितिः ॥

.
( ख )
[1148 ]
सं० १५०५ आषाढ सुदि ए श्री उप सुचिंतित गोत्रे सा सीहा जा जावटही पु०
सा सोलाकेन पुत्र पौत्र युतेन आत्म पुग श्री चन्द्रप्रन विवं का प्राश्री उपकेशगजे
श्रो कक्क सूरिनिः।
[1148 ]
सं० १५०६ फा० ब० ए श्री न ग श्री ककुदाचा गोग सा० समधर सु०
श्रीपाल ना० परवाई पुण् मुद
नव ससदा रंगाच्यां पितु श्रे० श्री सम्भवनाथ विवं कारित
प्रतिष्ठितं श्री कक्क सूरिभिः ।
[1150 ]
श्रेण
सं० १५७७ वर्षे मार्गशिर सुदि ३ शुक्ने उपकेश झातीय जढम गोत्रे संदणसीह
नार्या दादाह वीसल जाती महिपाल पु० मगराज साधी आत्मपुण्यार्थं श्री विमलनाथ
विंबं का० प्र० श्री वृहमने श्री सागर सूरिभिः ।
[ 1151 ]
सं० १५०७ वर्षे चैत्र वदि ५ शनौ लोढा गोत्रे। श्रेण गुणा नार्या गुणश्री पुत्र
पूजा कचरौच्यां पितृव्य धन्ना पुण्यार्य श्री धर्मनाथ वि० का प्र० खरतर श्री जिनजा
सूरि श्री जिनसागर सूरि ।
[1152 ]
सं० १५१० वर्षे चैत्र वदि तिथौ शनी हिंगड़ गोत्रे गौरन्द पुत्रेण सा० सिंधकेन निज
श्रेयो निमित्तं श्री सुविधिनाथ विवं कारितं प्रति तपा न श्री हेमहंस सूरिनिः ।
[1153 1
सं० १५१५ माघ सुदि ७ बुधे श्री श्रोसबाल हाती आदित्यनाग गोत्रे सा सिंघा पु०
ज्येव्हा ना० देवाही पु० दशरथेन त्रातृपितृश्रेयसे श्री अनन्तनाथ विंबं कारितं श्री उपकेश
गठे श्री कुकदाचार्य सन्ताने प्रतिष्ठितं श्री कक्क सूरिनिः ॥

शए ) .. - -- [1164 ] सं० १५१५ वर्षे फागुण शुदि ४ शुक्रवारे ओसवाल ज्ञातीय वश गोत्रे सा० धीना नाए फाई पुण् देवा पद्मा मना वाला हरपाल धर्मसी आत्मपुण्यार्थ श्री धर्मनाथ विका प्र श्री मनधार गछे " सूरिभिः । [1155] सं० १५१६ वर्षे वैशाख सुदि बुधे श्री श्री मा श्रे० जश्ता ना लालू तयोग पुग माधव निमित्तं लालू आत्मश्रेयोऽथ श्री शान्तिनाथ वित्रं का पिप्पल ग न श्री विजयदेव सूण सुण प्र श्री शालिन्नस सुरितिः । [1158] संप १५५३ वर्षे वैशाख सुदि ४ बुधे जालह राज्ञा मंचूणा नारा देऊ सुत पितृ पांचा मातृ तेजू श्रेयसे सुत गोयंदेन श्री नमिनाथ विंबं का रितं पूनिम गडे श्री साधुसुन्दर सूरि उपदेशेन प्रतिष्ठितं । [1157] । सं० १५२३ वर्षे वैशाख सुदि १३ दिने मंत्रिदलीय ज्ञातीय मुंगोत्रे सा रतनसी नार्या वाकुं पुत्र ताण देवराज नार्या रामाति पुत्र सामेघराज युतेन खपुण्यार्थ श्री विमलनाथ विवं कारितं प्र० श्री खरतरगह श्री जिनहर्प सृरिनिः ॥ [1158] सं० १५२७ वर्षे विदि १ सोम दिन श्रीमाल वंशे जूनीवाल गोत्रे सा० दाना पुत्र सा०पिडराजकेन समस्तं परिवारेण आत्मप्रेयसे श्री श्रेयांसनाय विंचं का० श्री परतर गहे श्री जिनप्रन सूरि अनिप्रतिष्टितं श्री जिननितक सूरिनिः। शुनं नवतु ॥ 7 ॥ [1158] सं० १५२ वर्षे थापाट सु०२खों श्री योमबाप्त झा० चांगाचाच गई पांमनचा गोने सा साइन जार्या मेघादे पुरा नापर नार्या नादखदे पुः मादा दग्ना युनन मात्र मेघ निमित्तं श्री पद्मन विवं कान्ति प्र० श्री वजेवर दादिः । -- W ( ३० ) [1160] सं० १५३० वर्षे माघ वंदि २ शु पालणपुर वास्तव्य प्राग्वाट ज्ञातीय श्रेण नरसिंग ना नामलदे पु कांदा ना सांवल पु० षीमा प्रषू माषी नाणसीचू श्रेयोर्थ श्री नमिनाथ बिंब कारापितं प्रतिष्ठितं तपागचे न श्री लक्ष्मीसागर सूरिभिः । [1161] सं० १५३० वर्षे मा० व० १० बुधे प्राग्वाट सा सिवा जाण् संपूरी पुत्र सा पाहा ना० पाहणदे सुत सारा नाथाकेन ब्रातृ गकुरसी युतेन स्वश्रेयसे श्री मुनिसुव्रत विम्वं का० प्र० तपा श्री लक्ष्मीसागर सूरिनिः धार नगरे । [1162] सं० १५३३ वर्षे वैए सुदि ६ दिने श्रीमाल वंशे स० जईता पुरा सा मामण ना लीलादे पु० षीमा जातड़ युतेन श्री सुपार्श्व बिंब का० प्र० श्री खरतर गळे श्री जिनचन्द्र सूरि पट्टे श्री जिनन सूरिभिः । [1163 ] सं० १५३४ वर्षे कार्तिक शुदि १३ खौ श्री श्रीमाल ज्ञा गोत्रजा अम्बिका श्रेष्ठि चांअसाव ना० ऊमकु सुत वानर ना ताकू सुत जागा जा० नाथी सहितेन स्वपूर्वजश्रेयसे श्री शान्तिनाथ विवं का० प्र० श्री चैत्रगजे श्री मलयचन्छ सूरि पट्टे श्री लक्ष्मीसागर सूरिभिः। [1164 ] सं० १५३४ फा० शु० २ वासावासि प्राग्वाट व्या श्राव्हा ना देसू पुत्र परवतेन जा नरमी प्रमुख कुटुम्बयुतेन स्वश्रेयसे श्री शीतलनाथ विवं कारितं प्रतिष्ठित श्री तपागछे श्री रत्नशेपर पट्टे श्री लक्ष्मीसागर सूरिभिः । [1165 1 ॥ सं० १५३७ फाय व० बुधे जा पाटड़ गो म पूना ना० अचू पु राणाकेन नाग रयणादे पुइरपति गुणवेति तेज । इरपति ना हमीरदे प्रमुख कुटुम्ब सहितेन स्वश्रेयसे ( ३१ ) श्री सुमति विवं का प्रतिष्ठितं जावमइंरा गछे श्री नावदेव सूरिनिः॥ खिरदाबू वास्तव्येन ॥ [1166] संवत् १५४५ वर्षे माघ शु० १३ बु लघुशाखा श्रीमाली वंशे मं घोघ जाप अकाई सुत मंण् जीवा ना रमाई पुण् सहसकिरणेन ना ललनादे वृद्ध ना इसर काका सूरदास सहितेन मातु श्रेयसे श्री अंचलगोश श्री सिद्धान्तसागर सूरीणामुपदेशेन श्री आदिनाथ विवं कारितं प्रतिष्ठितं श्री संघेन श्री स्तम्लतीर्थे । [1167] संण् १५४ए वर्षे वैशाष सुदि ५ रवी उपकेशज अचावल दढागोत्रे साठ साज जाप तेजसर पु० कुंप कोन्हा सहिसा सीधरा अरष युतेन स्वपुण्यार्थ श्री नमिनाथ विंग का प्र श्री मलय चन्द्र सूरि पट्टे श्री मणिचन्ड सूरिभिः । [1168] संवत् १५५७ वर्षे शाके १४२२ वैशाष सुदि ५ गुरौ चएमाल्या गोत्रे तेजा पु० अचला ताण देमी आत्मश्रेयसे श्री धर्मनाथ विवं कारापितं श्री मलयधार गठपति श्री गुणवपान सूरिनिः। [1160] सं० १५६२ व० माघ सु० १५ गुण जावोक० गोत्र साल जेसा नाग जिसमादे पुत्र राणा ना पूणदे पुण् श्रमवाल तेजा आप श्रेण श्रेयांस विंग कारि० बोकड़ी श्री मलयचन्छ पट्टे मुणिचन्द सूरिनिः। [ 1170] संवत् १५६६ वर्षे फागुण सुदि ३ लोमे विश्वलनगरे प्रान्बाट ज्ञानीय श्रे०जीवा नार्या रंगी पुत्र रत्न श्रेण नाहीसा घ्रातृ श्रीवन्त । केन नार्या श्री रत्नाद हि० दानिमद मुन पीमा नामादि कुटुम्वद्युतेन स्वयले श्री छादिनाथ विवं काग्नि प्रनिटिनं श्री नपागल नहारक श्री हेमविमल सूरिभिः ॥ कदाएमस्तु ।। सा ना० रूपी ( ३१ ) [1171 ] संवत् १५७१ वर्षे माघ सुदि ५ रवौ उप० सा० धरमा नाम काज सुण सोता मांडण सुण रूपा सोता ना सुहड़ादे सुण नरसिंघ आव्हा नापा माला मामण नार्या माणिकदे पुत्र गांगा मोका पदम रूपा जार्या हासू सु० सेटा नोमा सुकुटुम्बेन रूपा नापा निमित्तं श्री शान्तिनाथ बिंब का प्रा श्री दैवरत्न सूरिभिः ॥ [ 1172 ] सं० १५७७ वर्वे पोस वदि ६ रवी प्राग्वाट ज्ञातीय प० काका नाग वाक सुत पहिराज नाग वरवागं आत्मश्रेयोर्थ श्री चन्द्रप्रन स्वामी विवं कारितं प्रतिष्ठितं श्री सूरिभिः श्रीरस्तुः ॥ [1173 ] सं० १६०७ वर्षे ज्येष्ठ सु० १ दिने सुजाउलपुर वास्तव्य श्री तिलका श्री सुविधिनाथ विंचं कारितं प्रतिष्ठितं श्री विजयदेव सूरिभिः । धातु की चौवीशी पर। [ 1174 ] सं० १५० वर्षे आषाढ सुदि २ सोमे उसिवाल ज्ञातीय सूराणा गोत्रे सा लपण ना० सषण श्री पु० सा सकर्मण सा सिवराजेन श्री कुन्थुनाथ चतुर्विशति पट्ट कारित प्रतिष्ठितं श्री राजगछे नहारक श्री पद्माणंद सूरिनिः ॥ श्री ॥ [1175] संवत् १५२१ वर्षे ज्येष्ठ सुदि १३ गुरौ रणासण वासि श्री श्रीमाल ज्ञातीय श्रेण धर्मा ना धर्मादे सुत नोजाकेन नानली प्रमुखकुटुम्बयुतेन स्वश्रेयसे श्री शान्तिनाच चतुर्विंशतिः पट्टः कारितः प्रतिष्टितं श्री सुविहित सूरिनिः । श्रीरस्तु ॥

( ३३ )
धातु की मूर्तियों पर।
..
[1178]
संवत् १६०१ वर्षे श्री आदिकरण वोटा वा रंना श्री श्रीमाली न्यात श्री धर्मनाथ
श्री विजयदान सूरि ।
[1177]
संवत् १५४४ वर्षे फागुण सुदि १ तिथौ बुधवासरे तपागठाधिराज जट्टारक श्री विजय
प्रज सूरि निदेशात् श्री पार्श्वनाथ विवं प्रतिष्ठितं वा मुक्तिचन्छ गणिनिः का रितः ।
१
धातु
के यंत्र पर।
[1178]
सं० १७५२ पोल सुदि वृहस्पतिवासरे श्री सिद्धचक यंत्रमिदम् प्रतिष्ठितं वासालचन्द्र
गणिना कारितं सवाई जैनगर वास्तव्य से वपतमल तत् पुत्र सुपलालेन श्रेयोर्थ । ठ ।
[1170]
सं२७५६ माघ माले शुक्लपक्षे तिथौ ५ गुरौ श्री सिद्धचक्र यंत्रं प्र० श्रीमद् बृदत्
खरतरग न श्री जिनचन्द्र सूरिन्तिः जयनगर वास्तव्य श्रीमाक्षान्वय फोफलिया गोत्रीय
अनन्दराप्त न पूववन्द तत् पुत्र बहापुरसिंघ लपारिकोण का रिनं स्वयोर्ष ।
श्री सुमतिनाथजी का मन्दिर ।
पश्चनीधियों पर ।
[110]
ई संवत् :४६ वर्षे ये नुदि १३ मानवाला जावाज पवित्र गोत्र नंवत्री वीकल
पुन त जेजा जि जल पुः अनतिन आत्मवान श्री कादिना विका
प्रतिष्टितं श्री धर्मोपग श्री महानिलक समितिः ।।
.

( ३४ ) .[1181] सं० १४एर आषा बदि श्री श्रीमालवंशे वडली वास्तव्य सं० सांमा नाग कामसदे पुत्र समना नाय रशदे पुत्राभ्यां सं० समधर सं० सालिन बन्यो ना राजू साधू सुत मिघा माणिक रत्ना प्रमुख कुकुम्ब सहिताच्या श्री सुपार्श्वनाथ बिंवं कारितं प्रतिष्ठितं श्री तपागाधिराजैः श्री सोमसुन्दर सूरिभिः शुनं जवतु कल्याणमस्तु । [1182] सं० १४५३ वैशाष सुदि ५ उप झा आदित्यनाग गोत्रे । पूजी पुत्र पीमाकेन श्री श्रेयांसनाथ विवं का० श्री उपकेशगले कुक० प्र० श्री सिद्ध सरिनिः ।। [1183] सं० १५०६ वर्षे माद वदि श्री कोरंटकीयगछे श्री नत्राचार्य सन्ताने । ऊ ती सुचन्ती गोत्रे नाप आचरमुणया पु० हाता नाण हुती पु० मांगण ला माणिक पु श्री वासपूज्य विंव कारापितं प्र० श्री सांधदेव सूरिनिः । सा० पदमा पु षेढा ना : . पेतादि [1184] सं० १५१३ श्रोसवाक्ष मं जारमल लावलदे पुत्र रत्नाकेन जा अपू चा टीव्हा शिवादि कुटुम्पयुतेन श्री सुमतिनाथ विंचं कारित प्रतिष्ठितं तपा श्री सोमसुन्दर सूरि श्री मुनिसुन्दर सूरि श्री जयचन्द सूरि शिष्य श्री रत्नशेषर सूरिनिः। [1186] मंदः १५१७ वर्षे चैत्र शु० १३ गु० प्राग्वाट झा० सा० लपमण जाण साधू पुत्र साह गोद ना गजू युतेन स्वश्रेयसे श्री पाव बिंब का प्र० तपागलेश श्री मुनिसुन्दर सुरि नत् पहे श्री रत्नशेपर सृरिनिः ।। में १५४ए फार मु० ११ नोद श्री मू० त्रिनुवनकीर्ति देवा तन् पट्टान्व सा पत्री। ग. दग्न्दा पुः माद जनु । ना० चादंगदे पु० बढू ना नूपा । त्रिपु० सा नेवा जा दानमिरि दयाजिन ना नना कके (?) विजसी ....। [11881 ।

( ३५ ) [ 1188] सं० १५५ए वर्षे वैशाख सुदि १३ सोमे श्री ब्रह्माण ग श्री श्रीमान ज्ञातीय श्रेडि मईया नार्या माणिक सुत सामक्ष नार्या सारू सु० धर्मण धाराकेन स्वपित्र पूर्विज श्रेयोर्थ श्री धर्मनाथ विवं कारापितं प्र० श्री विमल सूरि पट्टे श्री बुद्धिसागर सूरिनिः वाज वास्तव्यः । [1188] ॐ सं० १एएए वर्षे आपाढ सुदि १० बुधे ओसवाल ज्ञातौ तातहड़ गोत्रे सा० आड नाए गोपाही पु सुललित । नः सांगर दे स्वकुटुंबयुतेन श्री कुन्थुनाथ विवं कारितं प्रति ठितं ककुदाचार्य सन्ताने उपकेश गठे न श्री देवगुप्ति सूरिनिः । [1100] सं० १५६३ माद सु० १५ गुरु श्री संमेर गठे उसवाल पूगलिश गोत्रे स० का ना ना रानू पुरा नरवद ना राणो पुतिहुण करमा कुवाला सइसा प्र० आत्म पु श्री मुनि तु मा. स्वामि बि कारापितं प्रति श्री शान्ति सुरिनिः ।। [ 1121] सं० २५६५ वर्षे वैशाप सुदि ६ दिने सूराणा गोत्रे सं० चांपा सन्नाने । मंमा मुण् सं0 गांडा ना धणपातही पुरा संप सहसमन्त्र व्रातृ याढा पु० सोमदम युनन मात्र पुण्यार्थ श्री शान्तिनाथ वियं का श्री शर्मघोष गठे प्रश्न प्रा नन्दिवईन मूरिनिः॥ [ 1:2] ६० १५०४ वैशाप दि ५ योसवंशे वरनिरा ग.त्रे सां० लापा पुत्र लोग दो नाम हीरा दे पुत्र साप टोमर धारण स्वयले प्रो दा निनाय विवं काग्निं प्रनितिं व प्रया गडे धावकेण योस्तु ॥

(३६ [193] संवत् १५ए वर्षे पोस वदि ५ सकरे सहाला वास्तव्य प्राग्वाट वृक्ष शाखायो दोष वीरा ना नाणा ना जरमा दे तेन स्वश्रेयसे श्रीआदिनाथ विंबं कारितं प्रतिष्ठितं श्री जिन साधु सूरिनिः॥ [1194 ] सं० १६१५ वर्षे फागुण शुदि २ तिथौ श्री ओसवाल वंशे सा आढत जा रेणमा सण सा0 चतुह धर्मते कारापितं श्री बहितेरा गढे ज० श्री ज्ञावसागर सूरि त श्री धर्म मूर्ति सूरिनिः प्रतिष्ठितं श्री अनन्तनाथ । [1195] ॥ संवत् १६२४ वर्षे मादा शुदि ६ सोमे ओसवाल ज्ञातीय दोसी जामा संत दोसी पू । ज । जार्या वाई मेलाई सुत वानरा श्री धर्मनाथ विवं कारापितं ॥ तपागल श्री श्री मारा विजय सूरि प्रति सावलदन नगरे । [1196] सं० १६५३ बपे अलाई संवत् ॥ माघ सुदि १० दिने सोमवारे जकेश वंशे शंख- वाल गौत्रीय साय रायपाल क्षार्या रूपादे पुत्र सा पूना नार्या पूना दे पुत्र मं० पाता मंत्र देहान्यां पुत्र जिणदास म० चांपा मूला दे मू । सामल सपरिकराज्यां श्री शांतिनाथ विवं कारितं प्रतिष्टितं च श्री बृहत् खरतर गठाधीश्वर श्री अकबरसाहिप्रतिबोधक श्री जिन- माणिक्य सूरि पहालङ्कार युगप्रधान भी जिनचन्द सूरिनिः । [1187] सं० १७०३ वर्षे मार्गशिर्षे सित १ दिने मेडता नगरे वास्तव्य शंखवालेचा गोत्रे सा मुंगर पुत्र सा० माईदासकेन श्री मुनिमुव्रत बिंब कारित प्रतिष्ठितं च तपागठाधिराज सुवि- हित नहारक श्री विजयदेव सूरि पट्टे याचार्य श्री विजयसिंह सूरिनिः ॥ कृष्णगढ नगरे मुदपत जयचन्द (?) प्रतिष्टाया।

( ३ ) धातु की चौवीशी पर। [1198] । संवत् १५३२ वर्षे वैशाख वदि २ शुक्र प्राग्वाट झातीय व्यप मामल ना कोई सुरा पाता ना वाऊं सु० देवाकेन ला देवलदे प्रण जात सामंत नाप लामी सु० समधर ना अजी सु० मांरुण नोजा राणा हि त्राण ऊदा लाग बाई पुण् साईआ नारा सहिज्यादि कुटुम्बयुतेन स्वश्रेयसे श्री संजवनाथ चतुर्विंशति पट्टः जीवितस्वामी पूर्णिमापके श्री पुण्यरत्न सूरीणामुपदेशेन का प्रण सुविधिना साकरयामे । धातु की मूर्तियों पर । [1199] संप १६३५ श्री संजवनाथ विवं पास । [1200] सं० १७७४ माघ तिन ३२ वासा गुलालचन्द श्री सुमति विवं कारितं । [1201] सं० १७३१ वर्षे मार्गशिर वदि १ शनौ रोहिणो नत्रे न श्री विजयधर्म सूरीश्वरराज्ये मुनि श्री शद्धि विजय गणि प्रतिष्टितं पं० विद्या विजय गणि श्री वृपत्तनाथ विवं कारापितं स्वधेयसे। [1202] श्री रुपनदेवजी मीतो माग श्री सु०३ सं० ए०६ । [1203] श्री हंसराज श्रेयोधं भी श्रजिनन्दन विवं ।

( ३०
धातु के यंत्र पर।
[1204]
संवत् १४७ आश्विन शुक्ल १५ दिने तपागाधिराज श्री विज जिनेन्ड सूरिभिः
प्रतिष्ठितं सिझचक्र यंत्रमिदं कारापितं पटणी वाहापुरसिंहेंन स्वश्रेयसे पं० पुन्यविजे
गणीनामुपदेशात् ॥
11205]
संवत् १७५२ पोस सुदि ५ दिने वृहस्पति वासरे श्री सिद्धचक्र यंत्रमिदं प्रतिष्ठित
जैनगरमध्ये वाण लालचन्ध गणिना वृहत् खरतरगचे कारितं बीकानेर वास्तव्य जै० मधेन
श्रेयोर्थ ॥ श्री॥
श्री आदिनाथजी का (नया) मन्दिर ।
॥
पञ्चतीर्थियों पर।
[1208]
संवत् १४७६ वर्षे माघ वदि ११ तिथौ श्री मालान्वये ढोर गोत्रे सा तोव्हा तझाया
श्रामाणी तत् पुत्र सा० महराज श्री शान्तिनाथ विंबं कारापितं प्रतिष्ठितं श्री खरतरगने
जा श्री जिनचन्द्र सूरिभिः ॥ शुजं नवतु ॥
[12071
७
सं० १४एए फागुण वदि २ गुरो श्री उपकेश ज्ञाती श्री धरकट गोत्रे सा० हरिराज
प्रसिङनाम सा बगुला पुत्रेण सा० लापर श्रावकेन नार्या गजसीही पुत्र बलिराज युतेन
श्री संजवनाथ विंय का० प्र० श्री वृदन श्री रत्नप्रन सूरिभिः ।
[1208]
।' सं. १५२४ वर्षे ज्येष्ठ शुदि ५ ० मा क्षापा ना लपमादे सा गुणराज धर्म

(३एं ) पुत्री श्रा० धारू नाम्न्या श्री सुविधिनाथ विवं कारितं प्र० तपागबनायक श्री सोमसुन्दर सूरि संताने श्री लक्ष्मीसागर सूरिनिः ॥ सा गुणराज सुत सा कालू सुत सा सदराज ॥ [1200] सं० १५३१ वर्षे चैत्र वदि बुधे चंदेरा वास्तव्य ओसवाल सादापा ना हरपमदे सुत समराकेन जार्या शीतादे सु० वेला मेघराज हंसराज प्रमुख कुटुम्बयुतेन स्वश्रेयले श्री अनंत विंबं का प्र० श्री परतरगळे जण श्री जिनचंद सूरिनिः ॥ [1210] सं० १५३६ ज्येष्ठ शुण ५ रवौ उपत्र सीसोदिया गोत्रे सा देवायत नार्या देवलदे पुत्र घेता नार्या घेतलदे पुत्र नाषर युतेन वपुण्यार्थ श्री नमिनाथ विवं कारापितं प्रति संमेर- वालगन्छे श्री सालि सुरिनिः। [1211 ] ॥ सं० १५४५ वर्षे वैशाष सुदि ए शुके ऊकेश ज्ञाण सिंघामिया गोत्रे संपरेमा संसा कदा नार्या जदतदे पुण् सा मामू श्रीमल जिणदत्त । पारस युनेन आ० पु श्री मुनिसुव्रत विवं का श्री मेस्पन सूरिनिः ॥ श्री ॥ [1212] संवत् १५५ए वर्षे माग्रस (मार्गशीर्ष ) शु० १५ लोमे श्री श्रीमाल न बरसिंग जाण देमी सुण् हेमा सुण् हराज सुण जयता पोमा सु० पांचाकेन आत्मश्रेयसे श्री संजवनाथ विचं कारितं श्री पूर्णिमा पढे श्री मनसिंह सूरितिः प्रतिष्ठित मारवीथा (प्रामे ?)। [1213] ॥ संवत् १५१० वर्षे माघ सुदि १३ भूमे श्री प्रान्बाट सा शेवा जाए सहजलद पुत्र हरपा रूपा हरपा ना सामकि पुत्र मातृपितृघ्रातृ भृ० श्रेयोर्थ श्री श्री श्री श्रादिनाय विवं कारापितं । प्रतिष्टिनं श्री नागेन्गळे नहाए श्री हेनसिय सुरिनिः । ।

४० )
[1214]
। सन् १६२७ ब फागुन शुदि ७ बुधे कुमरगिरि वासि प्राग्वाट झातीया
मागाई गोत्र व्यवहार सीमा ना कनकादि पुत्र व्य० ठाकरसी ना सोजाको
-विन स्वयोर्य श्री धर्मनाय विवं कारित। प्रतिष्ठितं श्री वृहत्तपाना
पिवान स्मृरि पट्टे श्री पूज्य श्री श्री श्री हीरविजय सूरिभिः श्या
[ 1:15]
+
fur
है
-::...: गोमे श्रीस्तम्जती वास्तव्य श्री श्रीमाल ज्ञातीय
STAR HITTी
श्रा श्री शान्तिनाथ वियं कागति
...: निः प्रतिष्ठित गुनं नवतु ॥
नागीशी पर ।
[13]
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मी मारहाणीय म गांगपकना गामति
पण मईया ना लाल गाटुन अंगां भी
... श्री महान गुप्रिनिरित विकिना
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( ४१ )
धातु के यंत्र पर।
[1210]
संवत् १७५२ वर्षे उ पोप सुदि ४ दिने सिहचक यंत्रमिदं प्रतिष्ठित वाए लालचन्न
गणिना कारितं सवाई जयनगरमध्ये समस्त श्रीसंघेन वृहत् घरतरगळे । शुभमस्तु ।।
श्री पार्श्वनाथजी का मन्दिर-श्रीमालोंका महला ।
पञ्चतीधियों पर।
[1220]
सं० १४६५ वर्षे वैशाप सुदि ३ सापुग गोत्रे साप बेला नार्या स वोहणदे पु साधु
पिमराज पेमान्यां पितु मातृ श्रेयले श्री शांतिनाथ विवं कारितं ॥ प्र० श्री धर्मघोपगरे
श्री सोमचन्न सूरि पट्टे श्रीमलचन्द सूरिनिः॥
[1221 ]
सं० १५११ वर्षे माघ शु० ५ गुरू श्री श्रीमाल ज्ञानीय श्रेण मकुणुनी नार्या नाज सुन
• कोचाकेन पितृमातृनिमित्तं श्रात्मधेयोर्य श्री यादिनाय विवं काग्निं प्रण श्रीवमाणगठे
श्री मुनिचन्न सूरिभिः मेहूणा वास्तव्य । श्री।
[1222]
संवत् १५३० वर्षे पोप यदि ६ रवी श्री श्रीमान ज्ञा० मंत्रि समथर ना श्रीयादे मुत
वीकाकेन यात्मश्रेचोर्ष श्री विमलनाय विंचं कारापितं प्रतिष्टिनं श्री विपक्ष श्री गणदेव
सूरि पट्टे श्री चन्प्रभ सूरितिः राजमाने ।
112280
सं० १५३१ व २ शुभ नामे दमदद सोटा गोरे ग माह न देन्द्र .
7
1
*

मंवत् २०५६ वर्षे वशाप मास शुक्त पद तिथौ ३ बुधे श्री सिद्धचक यंत्रं प्रतिष्ठित (४५) नील्हा जा सोनी करमी सु० सा हासकेन त्रातृ सा नाऊ सा उ हासा जार्या रतनी सुण सागकुर सा ईसटला० ऊधादि प्रमुखयुतेन स्वश्रेयसे श्री अजितनाथ विवं का प्रति श्री वृहाल श्री सूरिभिः प्रतिष्ठितं ॥ [1224] ॥ संवत् १५५५ वर्षे फागुण सुदि ए बुधे सीधुम गोत्रे बधरि गमपास जाग गोरादे सुत वस्तुगल त्रातृ पोमदत्त वस्तपाल जाण वब्दादे पुत्र त्रैलोक्यचं श्रेयोर्थ श्री संजवनाच विवं कारितं प्रतिष्ठितं खरतरगळे जण श्री जिनसमुख सूरिनिः । [1225] संवत् १६२४ वर्षे वै० शुदि १ शुक्रवासरे तपगबे नायक नए प्रन श्री हीरविजय सूरि मनराजो श्री पद्मप्रन बिंबं प्रतिष्ठित प्रतिष्ठापितं नागपर गहिखड़ा गोत्र सा अमीपास ना० अमूलकदे पु० कूअरपाल ना कुरादे प्रतिष्ठितं शुनं नवति ॥ धातु की मूर्ति पर। [1226]] सं० १७७७ माघ शुक्ल १३ बुधे श्री पार्श्वनाथ जिन विंबं कारितं । प्रा वृ त ख. श्री जिनचन्छ सूरिनिः। धातु के यंत्र पर । [1227 ] १ ० जिनयक्ष्य सृरि पट्टालङ्कार श्री जिनचन्द सूरिनिः जयनगर वास्तव्य श्रीमाशान्वये सचिन गोत्रीय किसनचन्छ तत्पुत्र उदयचंड सपरिकरेण कारितं स्वश्रेयोर्थ ॥ [1228] में० १०२ वर्षे श्राश्विन मास शुक्त पक्षे पूर्णमास। तियो बुधे जयनगर वास्तव्य (४३) श्रीमालवंशे फोफलिया गोत्रीय चुनीलाल तत् पुत्र हीरालालेन श्री सिद्धचक्र यंत्र कारितं चारित्रउदय उपदेशात् प्रा ना खरतरगठीय श्री जिननन्दीवर्सन सूरिभिः पूजकानां ती नूयात् । आम्वेर।* श्री चन्प्रन स्वामी का मंदिर । पंचतीर्थयों पर। [1220] सं० १३ए वर्षे पोप सुदि १५ सोमे श्री काष्ठासंघे सुमतिनाथ प्रतिष्ठितं । सुत ताहड़ श्रेयोत्र श्री [1230] संप १५२५ वर्षे मार्गसिरि वदि १२ शुक्र उपके बाद गोत्रे सायद पुत्र लोला जार्या सानिमदे .... स्वश्रेयसे पितृमातृपुण्यार्य श्री चंपन्न विवं काग्निं प्रतिष्ठितं श्री गप्तधार गछे श्री गुणसुन्दर सृरितिः । [1231] ॥ संप १५४२ वर्षे फागु ०२ दिने नीनाचा गोद यान ना ग ना० सम्माट पु० परवत ना लहजादे तथा परवत देव नमधर वीजा महान ना पगारद नदिन ना. सहजा पुण्यार्य श्री संजयनाच दि का प्र० श्री नामी श्री धन शामिन ! x उपुर : । .

( ४४ ) अलवर। पाषाण के मूर्ति पर। [1232] (१)॥ सिद्धि ॥ संवत् १५१० वर्षे ज्येष्ठ वदि ११ दिने शुक्रवासरे श्री गोपावस नगरे राजाधिराज श्री मंगर-सिंह-देवराज्ये ऊकेश वि (4) शे। (२) [पं] चखउट गोत्रे नएकारी देवराज नार्या देव्दणदे तत्पुत्र नं० नाथा जार्या रूपाई स्वश्रेयोर्थ श्री संनवनाथ विवं कारितं प्रति- (३) प्टितं श्री परतरगछे श्री जिनचन्द्र सूरि शिष्य श्री जिनसागर सूरिभिः॥ ॥ श्रीरस्तु ॥ ॥ नागौर । श्री शषनदेवजी का बड़ा मंदिर-दीरावाडी। पञ्चतीर्थयों पर। - [1233] १। संवत् सु० १०६६ फाल्गुन विदि । मा मुलक व सतो पाहूरि सा- ३। वकेणं सन्तरसुतेन नित्य- ४। श्रेयोर्थ कारिताः॥ [1234] संवत् १३६१ वर्षे सुदि ५ सोमे श्रेष्ठि धणपाल जार्या पाल्ह पुत्रेण कुमरसिंह श्रावण श्रात्मश्रेयोर्थ श्री महावीर बिंब कारितं प्रतिष्ठितं श्री * यह लेख राय गौरीशङ्करजी बहादुर से मिला है उनके विचार से इस लेख का राजाधिराज डूंगरसिंह देव ग्वालियर का तंवर ( तोमर) वंशी-राजा डूंगरसिंह ही हैं। इस मूर्तिकी मूल प्रतिष्ठा ग्वालिअर महई थी, यहां से किसी प्रकार अलवर पहुंची है ।

%35 ( ४५ ) [1235] संवत् १४३७ वर्षे चैत्र सुदि १५ सोमे रावगणे बोवे (?) नेपाल ना पूरी पुरा सा पेशा स्वपितृमातृश्रेयसे श्री शान्तिनाथ वित्र कारापितं श्री धर्मघोपगडे श्री मलय चन्छ सूरि पट्टे प्रतिष्टितं श्री पद्मशेपर सूरिन्तिः ॥ [1236] संवत् १४७ वर्षे वैशाख वदि बुधे व्यकेश ज्ञातीय केकडिया गोत्र रुदी उजेल ना जलमाद पित्रोः श्रे श्री वन्यप्रनस्वामि वि का रामसेनीय श्री धनदेव सूरि पढे श्री धर्मदेव तृरित्तिः ।। [:237] संवत् २४५७ वर्षे पाया कि उसे नामिरेमात मा पास ला० जना ना श्रीयादे पुरानी समिकिन नी पनि श्री शान्ति सुरिनिः ॥ जात T: E :-HTE. N पालादिनन श्री शामिना सरिभिः ॥ 4 amavar नंबर : दी :: -: --..-..-:.: --- --- ......... 11 -- -- AL १ *- भीम जधरणकेन नार्या देपू सहितेन यात्मश्रेयसे श्री वासुपूज्य विंवं कारितं प्रति वोकमियागो (४६ ) [1241] संवत् १४७५ वर्षे ज्येष्ठ शुक्ल ७ नौमे प्राग्वाट् ज्ञातीय व० साढा श्री लादी पुरा सहसा ला सीतादे पुण् पाव्हा सण आत्मश्रेयसे श्री संजवनाथ विवं कारितं प्रति पूर्णिमा पदे श्री सर्वानन्द सूरिभिः॥ [12421 संवत् १४ए० वर्षे माह सुदि " पदे श्री श्रोसवंशे कग ज्ञातीय सा अजीया सुत साण जेसा जार्या जासू पुत्र पोमासाणादिनिः अञ्चलगवेश श्री जयकीर्ति सूरीणामुपदेशेन श्री चन्प्रन विंब कारितं प्रतिष्ठितं श्री सूरिभिः । [1243] संवत् ११ए३ वर्षे वैशाख सुदी ३ सोमे उपकेश झातीय सा टाहा जा० कर्मादे पुत्र मेघा ना० अणुपमदे सहितेनात्मश्रेयसे श्री वासुपूज्य बिंबं कारितं प्रति श्री अमरचन्द्र सूरिनिः॥ [1244] सवत् १४ए३ वर्षे फाल्गुन विदि १ दिनै श्रीवीर विवं प्रतिष्ठितं श्री जिनजा सरिजिः उपकेशवंशे सा वाहम पुत्र पूजाकेन कारितम् ॥ संवत् १४एए वर्षे ज्येष्ठ सुदि १४ बुध उपकेश वंशे लघुशाखा मामण सा० मन्दष्टिक नार्या फदकू सुत सा मुंगरसी जार्या दहादे पुत्र सा सोना जीवा थानेन मातृपुण्यार्थ श्री मुनिसुव्रत बिंब कारितं प्रति श्री खरतरगडे श्री जिनवऊन सूरि पट्टे श्री जिनचन्द्र सूरि तत् पट्टे श्री जिनसागर सूरिनिः ॥ संवत् १४ए६ वर्षे फाल्गुण सुदि ए युधे उपकेश ज्ञातीय व्यव० शाखा जा चांप्पू पुत्र [1245] [1246] जहा श्री धर्मतिलक सूरिनिः॥

(४७) [1247] संवत् १४ए वर्षे फाल्गुण विदि र फांफटिया गोत्रे सा मोहण नार्या कुमरी पुत्र सा मेहाकाहान्यां खश्रेयसे श्री वासुपूज्यं कारितं प्रतिष्ठितं श्री धर्मघोषगछे श्री पद्मशेखर सूरि पट्टे श्री विजयचन्ड सूरिनिः ॥ [1248] संवत् १५५१ वर्षे थाषाढ सुदि ए दिने उपकेशवंशे करम दिया गोत्रे सा वीव्हा तत् पुत्र साधना पुत्र नाषा वादहा वाना प्रमुख परिवारेण श्री सुविधिनाथ विवं कारितं प्रति श्री खरतरगहे श्रीमत् श्री जिनसागर सूरि शिरोमणिन्निः ॥ शुन्नम् ॥ [12401 संवत् १५०४ व्या (वर्षे ) गवदहो रत्नदे पुत्र लक्ष्मण जाम्हणदे पुत्र नाथू ना दोया बात चीढा युतया सूदही नाम्ना कारितः श्री सुपार्श्वः। प्रति तपा श्री सोमसुन्दर सूरि शिष्य श्री रत्नशेखर सूरिभिः ॥ [1250] संवत् १५०७ वर्षे कार्तिक सुदि ११ शुक्र प्राग्वाट कोग लापा जाप लावणदे पुत्र को जोला माहा नाना हुंगर युतेन श्री संनवनाथ विवं कारितं नएस गळे श्री सिद्धाचार्य सन्ताने प्रति श्री कक्क सूरिनिः ॥ परवत [1251] सं० १५० वर्षे माह सुदि १३ शुक्रे पटवड़ गोत्रे सा० सादा नार्या सोना पुत्र सा कुसमाकेन ना कमलश्री पुत्र धानादियुतेन श्री आदिनाथ विंबं कारितं प्रतिष्टितं श्री धर्मघोपगच्छे पद्माणन्द सूरिनिः श्री हेमचन्द्र नूरीणामुपदेशेन ॥ [1252] संवत् १५०ए व चैत्र सुदि २२ श्री काटालये श्री मखयकीर्ति श्री राब्द नार्या चीन्छ । -- ( ४ ) पुत्र राजा नार्या साब्दी द्वितीय पुत्र पहराणी राजा सुता इमु पउमदरा रतल एतेषां प्रणमति ॥ [1253] संवत् १५०५ वर्षे वैशाख सुदि ३ उपकेश झातीय आईरी गोत्रे सा० लूणा पुत्र सा गिरिराज ना सुगुणादे पु० सोनाकेन ठाकुर देवात् श्री चन्प्रजस्वामि विंबं का उपकेश गळे ककुदा०प्र० श्री कक्क सूरितिः ॥ [1254] संवत् १५० वर्षे वैशाख सुदि ए बुधे श्री ओसर्वशे वृद्धशाखीय सा हता ज्ञात रंगादे पुत्र साप माका श्री सुमतिनाथ विंवं कारापितं श्री साधु सूरितिः प्रतिष्ठितं श्रीरस्तु श्री अमदाबाद वास्तव्य ॥ [1255] संवत् १५० वर्षे मार्गशिर सुदि ७ दिने उपकेशवंशे साधुशाखायां सा लखमण सुत सा महिपाल सा वीव्हाख्यौ तत्र सा महिपाल ज्ञार्या रूपी पुत्र ण तेजा सा वस्ताज्यां पुत्रादि परिवारयुतान्यां खयोर्थ श्री पार्श्वनाथ विवं कारितं श्री खरतर श्री जिनराज सूरि पट्टे श्री जिनजन सूरिनिः प्रतिष्ठितं ॥ श्रीः ॥ [1256] संवत् १५०ए वर्षे माह सुदि ५ सोमे उपकेश ज्ञातौ श्रेष्ठि गोत्रे सा कूरसी पु० पासड़ ला जश्नलदे पुरा पारस ना पाव्हणदे पु० पदा परवतयुतेन पितृश्रेयसे श्री संभवनाथ विवं कारितं ज श्री ककुदाचार्य सन्ताने प्रतिष्ठितं श्री कक्क सूरिनिः । [1257] संवत् १५० वर्षे माघ सुदि १५ शनौ श्रीमान् जाप सुरीया गोत्रे सा० पिपाल सोनाकेन आत्मश्रेयसे श्रादिनाथ विवं कारितं प्रतिष्ठितं श्री खरतरगच्छ श्री जिनतिलक सूरिनिः॥

1 [1258] संवत् १५१० वर्षे चैत्र सुदि १३ गुण प्राग्वाट सा गोगन नार्या सफू पुत्र साजेसाकेन नाग राणी जात जामा ना हीरू प्रमुखकुटुम्बयुतेन स्वश्रेयसे श्री धर्मनाथ विवं कारापितं प्रति तपागल्छेश श्री रत्नसागर सूरिनिः ॥ . [1259] संवत् १५११ वर्षे मार्गशिर सुदि ५ रवौ उपकेश ज्ञातीय शाह आसा ना अहविदे तु० शाह वाकुरसी ना जानू खहिंतन पितृ त्रातृ श्रेयोर्थ श्री आदिनाथ बिंब कारापितं श्री • कोरएटग प्रति श्री सावदेव सूरिनिः॥ [1260] संवत् १५१५ मार्ग शुदि १५ वारे प्राग्वाट श्रेष्टि गोधा ना० फसी सुत नरदे सहसा माटा ला धीराकेन ना तारू सुन खीमादिकुटुम्वयुतेन निजश्रेयसे श्री आदिनाथ बिंब का प्रण तपा श्री सोमसुन्दर सूरि शिष्य श्री रत्नशेखर सूरिभिः । [1261] सवत् १५१५ माघ विदि बुधे उपकेश झातो आदित्यनाग गोत्रे सा तेजा पुत्र सुदमा ना० लोना पु० लादावला हंसा पासादेवादितिः पित्रोः श्रेयसे श्री सुमतिनाथ विवं काग्निं प्रतिष्टितं उपकेश गछे ककुदाचार्य सन्ताने श्रीकक्क सूरिनिः । [1262] संवत् १५१५ वर्षे फाल्गुन सुदि ए शनो श्री श्रीमात हातीय व्य० नग्मी नुन काला सुतवर्धमान लुत दो वासाकेन जाप यरि सुन सा० श्ररण प्रमुग्नकुटुम्बयुनेन म्यवान जयारामा तो श्रेयोर्थ श्री सुमतिनाथ विवं कारिनं प्रनिहित नपान श्री श्री नायर सूरिनिः। x . :: वि श्री नागना गम गात्रmमरा श्री बदामर प श्री गोमादा Hilari (ए) [1283] संवत् १५१५ बर्षे फाल्गुन सुदि १५ श्री उपकेशगछे श्री कक्कुदाचार्य सन्ताने श्री उपमेश झाती श्री आदित्यनाग गोत्रे साप आसा जा नीबू पुत्र बानू जा ढाजसदे पि मातृश्रेयार्य श्री श्रादिनाथ विवं प्रतिष्ठितं श्री कंक्क सूरिभिः ॥ [1264] गगन १५१३ वर्षे वेशाख सुदि ५ शुक्रे गूंदोचा गोत्रे सा धीरा लार्या धारसद पु" नाना महाजन दे पादा जापोमादे० स्खश्रेयोर्थ संजवनाथ बिंबं का० प्र० श्री चित्रा मी मुनिनिसक सरि पट्टे श्री गुणाकर सूरिभिः । 1727 वर्ष प्रापाद सुदि २ गुरु दिने उपकेश झातीये मामलेचा गोत्रे सा " : " पुत्र गणमत नार्या गनादे पु० माहायुतेन श्री श्रात्मश्रेयस श्री सुविधि :: : प्रति श्री वृद्धको जानोगवटके नहा० श्री हेमचन्द्र सूरि पढे श्री 27rifr: 1134 135 दि उपकंडा बंश लोहा गात्रे माग गुणा पुत्रगण सा माटाका विनाय कि काग्निं प्रति ना नहारक श्री पूर्णिचन्द्र ' - 7'; हजगत्मा मदद बाद भी मारक [1205] 4 [12331 *-4 . . m 1124371 +v * M Yw 4

[1268]
संवत् १५१ए व वैशाख विदि ११ टौवाची वासि प्राग्वाट ज्ञातीय ण केसब ना
जोली सुत साग लामणेन जा मरगादे सुत जसवीर प्रमुखकुटुम्बयुतेन निजश्रेयसे श्री
शान्तिनाथ विवं कारितं प्रखपागाधिराज श्री श्री रत्नशेखर सूरि पट्टे श्री लक्ष्मीसागर
सरिनिः ॥ श्री॥
[1280]
संवत् १५१ए वर्षे माघ सुदि ५ सोमे श्री ब्रह्माणगछे श्री श्रीमान ज्ञातीय श्रेछि देवा
ना हरपू सुत चाम्पाकेन नार्या जईती करणकुंजायुतेन पित्रो श्रेयसः श्री धर्मनाय विंचं
कारितं प्रतिष्टितं श्री बुद्धिसागर सूरि पट्टे श्री विमक्ष सूरिनिः ॥ सुडीयाणा वास्तव्य ।
[1270]
संवत् १५१ वर्षे नाघ सुदि १० उपकेशवंशे धुनगाने सा गुजरेण ना० गउटपे पुत्र
पेदा अजाण ना कुसनगदे पाटेनाट ( ? ) सहिनेन श्री श्रादिनाय विंवं कारितं प्र० श्री
खरतरगठे श्री जिनवन्ध सरिनिः ।।
[ICTI]
संवत् १५२० दर्षे मार्गस्तीप वदि ११ उपकदा झाता श्रधि गोत्र वद्य शा० मांगण पर
स सोनाकत का साहसदे पुत्र समस्त न इलपुत्र माननिमितं प्रीत
स्वामिविसं न डायदा गहें वरदाबाई मन्नान श्री कसरी !!
12:
संदल १५६ मा
ATTA
पुत्र नांचा रेना सामने ....
सूरिनिः॥

३
41
॥
ri, "या" श्री नेमिनाथ विकाग्नि प्रतिष्ठितं श्री
नानाय नि कपनं प्रति माह
..याना
- - - श्री निgaanifa fin
( ५ )
[1273]
संवत् १५३४ वर्षे वेशाव सुदि३ सोमे दिने प्राण वंशे सा आका नार्या लतादे तो
भाग नाशं वीजादे श्री पशलगच्छे श्री श्री केशरि सूरीणामुपदेशेन निज में भी
कि कातिं प्रतिष्ठितं श्री सूरिभिः ॥ जयतलकोट वास्तव्यः ॥
[1274]
7121 मार्गनी सुदि ११ शुके उपकेश झाती आदित्यनाग गोत्रे सार
'' .. ... ..........गी पत्र श्रीना शिवरताज्यां गातपुण्यार्थ श्री शीतपना
। .......... ...-, श ग श्री ककराचार्य सन्नान श्रीकक्क सुरिनि: ॥
दिए। पकेश झातीय मावही गोत्रे साद भुगी जा
४. श्री कमल मुनिः शुनम श्रीरस्तु ।
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7 मा साना नागरी पुरु
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[12,75]
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[1278] संवत् १५२७ बर्वे पौष विदि ६ शुक्रे उप० गहिलमा गो सा पेढा ना दामिमदे प्रभृति पुत्रादियुतेन स्वश्रेयसे श्री सुविधिनाथ विवं कारापितं प्रतिष्ठितं श्री सलधारि गच्छे श्री विद्यासागर सूरि पट्टे श्री गुणशेखर सूरिनिः॥ खीमसा वास्तव्य ॥ [1279] संवत् १५२७ वर्षे प्राग्वाट् सारा प्रथमा नाय पाल्हणदे सुत सं० परवत ना० चाम्पू सुत सा नीसलेन ना० नाई श्रेयोर्थ सुत जगपालादि कुटुम्बयुतेन श्री श्रेयांसनाथ बिंयं कारितं प्रति तपा लक्ष्मीसागर सूरि निः । [1280] संवत् १५५ए वर्षे वैशाख विदि ६ चंझे उपकेश ज्ञातौ झूगड़ गोत्रे साप सिखा नाग थली पुत्र धनपालेन ना मारू पु० नागिन सोनपाल प्रमुख सहितेन स्वश्रेयसे श्री शीतल- नाय विवं कारितं प्रति श्री वृद्द जगहें श्री मेपन सूरिभिः । [1281] संवत् १५२ए माघ सुदि ६ सोमे श्रीमाल ज्ञातीय पिण्हवेलापट (?) नामलदे सु ताजा जा राजलदे सुः कर्मस तेजा सा० श्री श्रेयांसनाथ विंबं कारितं श्री पूर्णिमापक्षीय श्री साधुसुन्दर सूरीणामुपदेशेन प्रतिष्टितं । हाल वास्तव्यः ॥ श्री ॥ [1282] संवत् १५३० वर्षे वैशाख सु० ३ उपकेश ज्ञातीय साण रणनिह ना० नेजलटे पुत्र मा० कीताकेन ना कुनिगदे प्रमुख कुटुन्क्युनन स्वयले श्री मुनिनुबन दामि विवं कान्नि प्रतिष्ठितं तपागचनायक श्री सदनीसागर नृरितिः॥ सूझाना वास्तव्य । शुदं नवतु ॥ श्रीः ।।

पुत्र सामरसिंह श्रीरकेण श्री श्रेयांस बिंबं कारितं प्रति श्री परतरगडे [1233] संवत् १५३० वर्षे माघ सुदि ५ ग्रा० झा० रादा लात मार पुत्र मिगेही वासी सा० मांझणेन ना माणिकदे पु० लपमादियुतेन श्री शांतिनाप विंचं का रितं तपा श्री सामसुंदर सूरि सन्ताने श्री लक्ष्मीसागर सूरिभिः ॥ [1284] सं० १५३० वर्षे फाल्गुण सुदि । बुधे श्रीमान इातीय सा० राना जा राजलदे जागेयर स्वश्रेयोर्थ श्री अंचलगछे श्री जयकेसरि सूरीणामुपदेशेन श्री सुमतिनाथ विंबं कारित प्रतिष्ठितं श्री संघेन ॥ [1285] संवत् १५३२ वर्षे वैशाख सुदि १० शुक्रे श्री उएसवंशे चएकालिया गोत्रे सा० नेमा ला० मीमी पुत्र सा सोहिल नार्या माईठी पुत्र सा० पहिराज जार्या पाव्हणदे पुत्र सात रत्नपाल सुश्रावकेण पितृव्य शाह जोपाल प्रमुख कुटुम्ब सहितेन पितुः श्रेयसे श्री सुविधिः नाथ विंबं कारितं प्रतिष्ठितं श्री मलधारि गछे श्री पुण्यनिधान सूरिभिः ॥ पहिराज पुण्यार्थं ॥ संवत् १५३३ वर्षे चैत्र सुदि । शुक्रे ओसवंशे बावेल गोत्रे सा घेव्हा पुत्र शा० खेता लाए खेतश्री पुत्र शा० देदाकेन स्वपिता श्रेयसे श्री अभिनन्दन नाथ विवं कारित प्रतिष्ठितं श्री मनधारि गले श्री गुणसुन्दर सूरि पट्टे श्री गुणान निधान सूरिभिः॥ संवत् १५३४ वर्षे ज्येष्ट शित १० दिने सोमे उपकेशवंशे कटारीय गोत्रे जापचा नार्या पाव्हणदे श्री जिनचन्छ सूरि पट्टे श्री जिनचन्ड सूरिभिः ॥ श्रेयसे ॥ [1286] [1287] [1288] सं० १५३४ वर्षे आषाढ सुदि १ गुरौ उप कयणा गोत्रे सा लषमण नार्या लषमादे पुटिता साना ना कीव्हणदे स्वश्रेयले श्री शीतलनाथ बिंबं कारितं प्रजापमाण गछे श्री कमलचन्द सूरिनिः॥ [1280] सं० १५३४ वर्षे आषाढ सुदि १ गुरौ ऊकेश वंशे जहड गोत्रे सा जगच पुत्र सा खरहकेन नाप नीविणि पुत्र माला वना पासड सहितेन धर्मनाथ विंबं निज श्रेयोथ कारापितं श्री खरतरगछे नहा श्री जिनचन्छ सूरिनिः॥ [1200] संवत् १५३४ वर्षे माद वदि ५ तिथौ सोसे उपकेश ज्ञाती धरावही गोत्रे लठण वीपां मए कान्हा जार्या हीमादे पुत्र सतपाक तिहुअणान्यां पित्रोः पुण्यार्थ श्री शीतलनाथ विनं कारितं श्री कन्हरसा तपागछे श्री पुएयरत्न सूरि पट्टे श्री पुण्यवर्सन सूरिन्निः प्रतिष्टितं ॥ [1291] सं० १५३४ मा शु० १० डा० व्य नरसिंह नार्या नमलदे पुत्र मेलाकेन ना वीराणि सुत रातादि कुटुम्वयुतेन स्वश्रेयसे श्री श्रादिनाय विं कारितं प्र० श्री सदगीसागर सूरिभिः ॥ पालणपुरे ॥ [1292] संवत २५३५ वर्षे आपाट द्वितीया दिने उपकैश ज्ञातीय यायार गोत्रं वृणाचन शाखायां सा कांगा पुण् चउत्पण जाण नपसहदे पुल मृताकन यात्मश्रेय श्री परमान वि कारितं ककुदाचार्य सन्ताने प्रतिहितं श्री देवगुप्त सूरिदिः ।। [1203] संवत १५४६ वर्षे झापाट विदि २ योनगद हाती हि गोत्र वद्य शाग्यायांना संवत् १५५ए व माद सुदि १० दिने शनिवारे उपकेशवंशे सखवाल गोत्रे सा गुणदत्त ५६ सिंघा ना सिंगारदे पुणे वींका बाजू तान्यां पुत्र पौत्र युतान्यां श्री चन्द्रप्रन विवं साग सिंधा पुण्यार्थ कारापितं प्र श्री देवगुप्त सूरिनिः॥ [1204] संवत् १५५५ वर्षे वैशाख सुदि ३ शनौ ओसवाल ज्ञातीय म० साहेजा जाय केव्ही सु० ठाकुरसीकेन नार्या गिरसू सहितेन आत्मश्रेयो) श्री आदिनाथ विंबं कारितं श्री वृद्धतपापदे ना श्री जिनसुन्दर सूरिनिः प्रतिष्ठितं च विधिना ॥ [1295] संवत् १५५५ वर्षे चैत्र सुदि ११ सोमे उपकेश वंशे मेडतावाल गोत्रे शाण पगारसीह सन्ताने शा० सहसा सु० हा श्रवण जाण सालिगसुतेन श्री अजितनाथ विवं कारितं प्र० हर्षपुरीय गछे नहारक श्री गुणसुन्दर सूरि पट्टे ॥ श्री ॥ संवत् १५५६ वैशाख सुदि ३ शनौ श्री सएमेरगछे ऊ० बढाला गोत्रे सा खूसा लीसा पुरा साला हरा लोना नार्या तारू पु० हरालजइ (?) तू पुण् पु० सु० श्रेण श्री शांतिनाथ बिंब कारितं प्र० श्री शान्ति सरि संवत् १५५ए थाषाढ सुदी १० बुधे श्री पहुवम गोत्रे शा० तोला सन्ताने कुँअरपास पुत्र साधू वेत ना० देवल पु० णए रूपचंद युतेनात्मश्रेयसे श्री कुंथुनाथ विवं कारित प्र० वृहाच्छे न० श्री मेस्प्रन सूरि पट्टे श्री मुनिदेव सूरिनिः॥ नार्या अंगादे पुत्र साय धणदत्त नार्या धन श्री पुत्र सा हीरादे परिवारयुतेन श्री शीतल [1296] [1297] [12981 ( ५७ ) नाप विंबं कारितं प्रतिष्ठितं श्री खरतरगच्छे श्री जिनसमुख सूरि पट्टे श्री जिनहंस सूरिनिः॥ कल्याणमस्तु । श्रीः॥ [1299] संवत् १५६३ वर्षे माह सुदि १५ जा नच्छितवालगोत्रे संघवी देवा नाग देवलदे साप वीण्हा नार्या वोहणदे पुत्र तेजा वस्ता धन्ना आत्मपुण्यार्थं श्री सुमतिनाथ विवं कारितं प्र श्री धर्मघोषगच्छे श्री श्री श्रुतसागर सूरि पट्टे श्री लक्ष्मीसागर सूरिनिः॥ [1300] संवत् १५६६ वर्षे फाल्गुन सुदी ३ सोमवासरे उपकेशवंशे रांका गोने शा० श्रीरंग ना देज पु० करमा. नाग रूपादे खश्रेयसे आत्मपुण्यार्थं न मिनाथ विवं कारितं प्रा उपकेश गजे जय श्री लिक सूरिलिः॥ [1301] संत्व १५७२ वर्षे वैशाख सुदि ५ सोमे श्री श्रीवंशे मं० सिंघा ना रहा पु० मं करण लाप रमादे पु० मं० अजा सुश्रावकेण ना आहवदे पुरा राणा तथा पितृव्य पुण् मा गोगद प्रमुखसहितेन मातृ साधुपुण्यार्थ नागेन्गो सुगुरूणामुपदेशेन श्री वासुपूज्य बिंब का रितं प्रतिष्टितं श्री संघेन वीवलापुरे ॥ [1302] संवत् १५७६ वर्षे चैत्र सुदि ५ शनी श्री श्रीमाल ज्ञातीय मंण् राजा ना० रमादे पुत्र खीमाकेन ना हीरादे पुत्र धनादि समस्त कुटुम्बयुत्तेनं स्वश्रेयोर्थ श्री मुनिसुव्रतस्वामी विवं कारितं श्री पूर्णिमा पदे नीमपतीय जण श्री चारित्रचन्ड सूरि पट्टे श्री मुनिचन्द्र सूरीणामुपदेशेन प्रतिष्टितं ॥ नेवीआए मगम वास्तव्य ।। - - [1303] ई संवत् १५७६ वर्षे ज्येष्ट सुदी ए ड सुराणा गोत्रे शाप हेमराज नार्या ममत्री ।

पुत्र साधू ." वेत ना० देवल० पु० णए रूपचंद युतेनात्मश्रेयसे श्री कुंथुनाथ विवं कारित संवत् ?पए वर्ष माद मुदि १८ दिने शनिवार उपकेशवंशे सखवाल गोत्रे सा गुणदन ( ५६ ) सिंघा ना सिंगारदे पु० वींका गजू तान्यां पुत्र पौत्र युतान्यां श्री चन्प्रन विवं सा० सिंधा पुण्यार्थं कारापितं प्र० श्री देवगुप्त सूरिनिः ॥ [1204] संवत् १५५५ वर्षे वैशाख सुदि ३ शनौ ओसवाल ज्ञातीय म० साहेजा जाण केव्ही सुण् गकुरसीकेन नार्या गिरसू सहितेन आत्मश्रेयोर्थं श्री आदिनाथ बिंब कारितं श्री वृद्धतपापदे ना श्री जिनसुन्दर सूरिनिः प्रतिष्ठितं च विधिना ॥ [1205] संवत् १५५५ वर्षे चैत्र सुदि ११ सोमे उपकेश वंशे मेडतावाल गोत्रे शाण पगारसीह सन्ताने शा० सहसा सु० हा श्रवण ज्ञा० सालिगसुतेन श्री अजितनाथ विंब कारित प्र० हर्षपुरीय गछे जहारक श्री गुणसुन्दर सूरि पट्टे ॥ श्री ॥ [1296] संवत् १५५६ वैशाख सुदि ३ शनौ श्री सएमेरगन्छे ऊ बढाला गोत्रे सा लूसा लीला पुण साला हरा लोना नार्या तारू पुरा हरालजइ (?) तू पु० पु सु० श्रेठ श्री शांतिनाथ विं कारितं प्र० श्री शान्ति सूरि [1207] संवत् १५५ए थापाढ सुदी १७ बुधे श्री पढुवम गोत्रे शाप तोला सन्ताने कुँअरपास प्र० वृहाच्छे न० श्री मेरुप्रन सूरि पट्टे श्री मुनिदेव सूरिनिः॥ नार्या नंगादे पुत्र साः धदन नार्या धन श्री पुत्र सा हीरादे परिवारयुतेन श्री शीतम [12981 नाय विवं कारितं प्रतिष्ठितं श्री खरतरगच्छे श्री जिनसमुख सूरि पट्टे श्री जिनहंस सूरिनिः॥ कल्याणमस्तु ॥ श्रीः॥ [1290] संवत् १५६३ वर्षे माह सुदि १५ जा उच्छितवालगोत्रे संघवी देवा. जाण देवलदे साप वीण्हा जार्या वोल्दणदे पुत्र तेजा वस्ता धन्ना आत्मपुण्यार्थं श्री सुमतिनाथ विवं कारितं प्र श्री धर्मघोषगच्चे श्री श्री श्रुतसागर सूरि पट्टे श्री लक्ष्मीसागर सूरिभिः॥ [1300] संवत् १५६६ वर्षे फाल्गुन सुदी ३ सोमवासरे उपकेशवंशे रांका गोत्रे शाप श्रीरंग ना देज पुरा करमा ना रूपादे खश्रेयसे आत्मपुण्यार्थं नमिनाथ विवं कारितं प्रण उपकेश गवे ना श्री सिझ सूरिजिः॥ [1301] संत्व १५७२ वर्षे वैशाख सुदि ५ सोमे श्री श्रीवंशे मं० सिंघा ना रहा पुमं करण नाए रमादे पुत्र मं अजा सुश्रावकेण ना आवदे पुण् राणा तथा पितृव्य पु० मा गोगद प्रमुखसहितेन मातृ साधुपुण्यार्थ नागेन्ग सुगुरूणामुपदेशेन श्री वासुपूज्य बिंब का रितं प्रतिष्ठितं श्री संघेन वीवलापुरे । [1302] संवत् १५७६ वर्षे चैत्र सुदि ५ शनौ श्री श्रीमाल ज्ञातीय मंण् राजा ना० रमादें पुत्र खीमाकेन ना हीरादे पुत्र धनादि समस्त कुटुम्बयुत्तेन खयोर्थ श्री मुनिसुव्रतस्वामी विवं कारितं श्री पूर्णिमा पदे नीमपतीय जय श्री चारित्रचन्द्र सूरि पट्टे श्री मुनिचन्द्र सूरीणामुपदेशेन प्रतिष्टितं ॥ नेवीश्राए मगम वास्तव्य ।। ॥ [1303] संवत् १५७६ वर्षे ज्येष्ट सुदी ए उ सुगणा गोत्र शाप हेमराज नायर्या स० हेमश्री 4 संवत् १६४३ वर्षे फागुन सित ११ अहमदावाद वास्तव्य वाई कोमकीसइया प्राग्वाट ( ५० ) पुत्र शा० देवदत्तेन स्वपितृपुन्यार्थेन कारितं श्री आदिनाथ विवं प्रतिष्ठितं श्री धर्मघोष गछे नहारक श्री पयाणंद सूरि पट्टे श्री नन्दिवर्द्धन सूरिजिः ॥ [1304] सं० १५७६ वर्षे माघ सुदि ५ रवौ उप० झाप टप गोने सदा ना सक्तादे पुरा थिरपाल ना मलदे पु० सहसमस हापा जगा सहितेन पितृ नि० श्री मुनिसुव्रत विवं कारितं प्र श्री सएमेरगल्छे श्री शांतिसुन्दर ॥ [1305] संवत् १५एर वर्षे आषाढ सुदि ए दिने आदित्यनागगोत्रे तेजाणी शाखायां शारा मुहमा पु हासा पुत्र सखारण दा नरपाल सधारण नार्या सूहवदे पुत्र ४ श्री करणरंगा समरथ अमीपाला सखारण स्वपुण्याय कारितं । श्री उपकेश गजहा श्री सिद्ध सूरिभिः श्री अभिनन्दन बिंबं प्रतिष्ठितं स्वपुत्रपौत्रीय श्रेये मातु ॥ [1306] संवत् १एएए वर्षे वैशाख विदि १३ सोमे श्री सएफेरगछे जा नएमारी गोत्रे नए ईसर पु० वीसल ना कोल्हूपत्ते निमित्तं श्री नेमिनाथ विंबं कारितं प्रतिष्ठितं श्री शांति सूरिभिः॥ [1307] संवत् १६१५ वर्षे वैशाख बदि १० जोमे जवान वास्तव्य हुँचम ज्ञातीय मंत्रीश्वर मोत्रे दोसी श्रीपाल नार्या सिरीयादे सुत दोसी रूढाकेन लाए राणी युतै श्री पद्मप्रन बिंब तपा श्री तेजरत्न सुरिनिः प्रति० ॥ [1308] सेठि मूला जा० राजसदे पुत्री श्री यादिनाथ विं प्रतिष्टितं श्री विजयसेन रिजित श्री तपागछे ॥

[1300]
संवत् १६५६ वर्षे मिगसिर सुदि १० रखौ उपकेश ज्ञातीय लघु शाखायां बुरा गौने
फुमण गोत्रे बार गेलमादि पुत्र गकुरसी टासिंघ श्री कुन्युनाथ विवं कारापितं श्री
तपागवे गुरु श्री विजयदेव सूरि तत्पटे विजयशिव सूरिः प्रतिष्ठितं ॥
[1310]
श्री शांतिनाथ वि कारितं
संवत् १६एए व वैशाख शुक्ल ए दिने
प्र० तपागचे श्री विजयसिंह सूरिनिः॥
[1311]
संवत् १६एए वर्षे फाल्गुन विदिर तिघी साप पुम्पाकेन शीतल त्रि कारिनं प्रनिहित
गठे आचार्य श्री विजयलिंद तृरिनिः ।।
118121
संवत् १७१५ श्री श्रीमाल झाना जा माना जायी पापादे पुत्र थिर पान माग
तृणसिंद ... निज नार्या निमितं श्री पशनीधी का प्र श्री नागेन्द्र ग श्री
पनवन्ध सरि पहें श्री रत्नादर समिः !
पाबीनी दा
!:33
संस्तु १५६० औपदि हरे मट पानी ::
समान माई महिनेन
दिन -
पस्तिनिरिकी
विजय नमः
पहिनिः । नम:

( ६० ) [1314 ] संवत् १५५१ वर्षे ज्येष्ठ सुदि ४ मएकपउर्गे प्राग्वाट सं. अजन जाए टवकू सुत संग वस्ता जाए रामा पुत्र सं० चाहाकेन. जाप जीविणि पुत्र संजाग आमादिकुटुम्बयुतेन स्वश्वेयसे श्री चन्द्रप्रन २४ पट्ट का प्रा तपा पके श्री रत्नशेखर सूरि पट्टे श्री लक्ष्मीसागर सूरिभिः । श्री आदिनाथजी का मन्दिर-दफ्तरियों का महल्ला । [ 1315] संवत् १५१३ माघ शुक्ल ७ बुधे श्री उसवाल झातो लोढा गोत्रे सानूचर ला सरू पु० ईमू ना सहमाई पु० जरहूकेन पितृ श्रेयसे श्री विमलनाथ विवं कारितं श्री रुउपल्लीय गच्छे श्री देवसुन्दर सूरि पट्टे प्रतिष्ठितं श्री सोमसुन्दर सूरिनिः ॥ [ 1316.] संवत् १५२७ वर्षे आषाढ सुदी ५ गुरौ उपकेश ज्ञातीय तावअजा जार्या श्राहसवे पुत्र नीवा ना मानू सहितेन आत्मश्रेयोर्थं श्री मुनिसुव्रत विवं कारितं । प्रतिष्ठित श्रञ्चलग श्री जयकेसर सूरिभिः ॥ [1317 ] संवत् १५३४ वर्षे आषाढ सुदिश दिने उपकेशवंशे बोथरागोत्रे शाजेसा पुरा थाहा सुश्रावकेण ना० सुहागदे पुत्र देव्हा मानी वाकि, युतेन माता लखी पुण्यार्थं श्री श्रेयांस विवं कारितं प्रतिष्ठित श्री खरतरगछे श्री जिनचन्द्र सुरि पट्टे श्री जिनचन्द्र सूरिभिः ।। [13181 मंवत् १५३४ वर्षे मिगसिर बदि ५ उपकेश. झातीय नाहर गोत्रे. शा० चाहन. जाया हरखू पुत्र वीज़ाकेन ना वींकलदे पुत्र केशवयुतेन खश्रेयसे श्री विमलनाथ विंव कारित प्रति श्री धर्मयोपगडे श्री धर्मसुन्दर सूरि पट्टे श्री लक्ष्मीसागर सूरिनिः ॥

[1310]
संवत् १५३४ वर्षे प्राग्बाट झाप श्रेण सोमा जाप देजसु नोटाकेन जा वानरि चातृ
नोजा प्रमुखकुटुम्वेन युतेन श्री संनवनाय विवं का प्रण तपापदे श्नी लक्ष्मीसागर सूरिनिः॥
वीसनगरे ॥
[1320]
संवत् १५६० वर्षे वैशाख सुदि ३ दिने सोजात वास्तव्य उपकेश ज्ञातीय शाजाणा
ला लावलदे पुण् आशाकेन जा नीइ सुत वापा बीदा प्रमुखकुटुम्बयुतेन श्रेयोर्थ श्री
वासुपूज्य
विवं कारितं प्रतिष्ठितं तपागच्चनायक श्री हेम विमल सूरित्तिः ॥
[1321 ]
संवत् १५ वर्षे वैशाख सुदि ६ सोमवार पुन्य नदात्रे नाहर गोत्रे सं० पटा तत् पुत्र
लेख पाला नार्या पालनदे तत् पुत्र सं० लाखणाज्येन तद् नार्या नापणने तत् पुत्र सं०
नानिग सं खीमसिंह सहितेनात्मयते विकाग्निं श्री शांतिनाथस्य श्री धर्मायोण
गठे नहारक श्री नन्दिवर्धन सूरितिः प्रतिष्ठितः जई जवनात् ॥
श्री सुमतिनाथजी का मन्दिर ।
पशनीषियों पर!
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संवत् १५५६ व पंप विदि ५ अरे प्राबाद : दगाना एका
मार नाई मुलायमहिनेन वपन भी उन्याय दिदं भी प्रति श्री
गरे सिकाचार्य मन्नानीगन नरोकिए
PAP

चौवीसी पर।
[1323]
संवत् १५३५ वर्षे वैशाख सुदि ३ शनी श्री वायम झानीय मं० मादव जाण हसू सुरु
म(हा)देवदास ना जीवि सु० सिंहराज ज्रातृ हरदास माही श्रासुरा पायण अमीपाव
श्रेयसे श्री पाश्वनाथादि चतुर्विशति पट्टः कारितः आगमगच्छे श्री अमररत्न सूरि गुरूपदेशेन
प्रतिष्ठितश्च विधिना ॥ देकावामा वास्तव्य ॥
श्री शान्तिनाथजी का मन्दिर-(घोमावतों की पोल)
पंचतीर्थयों पर।
[1324]
संवत् १३१६ वर्षे चैत्र विदि ६ नौमे श्री वृद्दलीय श्री उद्योतन सूरि शिष्यैः श्री
हीरता सूरिनिः प्रतिष्ठितं । श्रेण शुभंकर नार्या देवा तयोः पुत्रेण श्रेण सोमदेवेन जार्या
पूनदेवि पुत्र श्रीवछ नागदेवादियुतेन आत्मश्रेयोथं श्री वीरजिन बिंब कारितं ॥
[1325]
संवत् १५०३ वर्षे
माहू गोत्रे सा० नाखर नरमी श्राविकायाः पुण्यार्थ मा खसाकेन
जीवा खीदा जीदा जादा पुत्र युतेन कारितं स्वपुण्यार्थ श्री अजितनाथ बिंबं प्रतिष्ठितं श्री
जिनन सूरिनिः ॥ श्रीखरतरगछे ।
[13261
संवत् १५४५ वर्षे वैशाख विदि ५ श्रोसवाल झाती सुराणा गोत्रे सा सखर सहस
वीरेण नार्या नोजी पुण् मीमा वरता रंगू रत्नू युक्तेन स्वनार्या पुण्यार्थं श्री धर्मनाथ
बिंब कारितः प्रति श्री धर्मघोषगच्छे श्री पद्माणन्द सूरिनिः ।
,
-

[1327]
संवत् १५४५ वर्षे ज्ये० विदि ११ दिने वीरवाडा वाति प्राग् ज्ञाति सा रत्ना ना
साधू पु० सा० जीमाकेन ना० मी कुटुम्बयुतेन स्वश्रेयसे श्री पार्श्वनाथ विंव कारितं श्री
श्री श्री सूरिनिः॥ श्रिये ॥
[1328]
संवत् १५६६ वर्षे फागुण सुदि ३ सोमे श्री नाणावालगन्छे उसन्न गोत्रे को वुइथ ना०
चाहिणदे पुत्र वीवावणा वधा दोहावणी पुण्यार्य श्री विमलनाथ विवं कारितं प्र० श्री शांति
सूरिनिः ॥ मेमता नगरे ॥
चौवीसी पर।
1320]
संवत् १४५० वर्षे फाल्गुन शुक्ल ए जालंबास गोत्रे सा शिखर पुत्रान्यां शाम संग्राम
सिंह धनाच्या निज मातृ सादी श्रेया निमिनं श्री मुविधिनाय पतुर्विशनि पर कारितः
प्रतिष्ठितं ।
तपा नहारक श्री पूर्णचन्छ तृरि पट्टे जहारक श्री देगास गरिभिः ॥
बीकानेर ।
श्री शंखेशर पार्थनापजी का मन्दिर ।
घासानियों का मदहा-दांदियों के पानी के पार ।
पंरनीहिंदों पर।
1:35:
सेट २५६ फादर ददि ६६५ कोटा दी. पु.या भा.

चोवीसी पर । [1323] संवत् १५३५ वर्षे वैशाख सुदि ३ शनी श्री वागम ज्ञातीय मं० माइव जाण हयू सुरु म(हा)देवदास ना जीवि सु० सिंहराज चातृ दरदास मादी यामुग पारण अमीपाव श्रेयसे श्री पाश्वनाथादि चतुर्विशति पहः कारितः श्रागमगन्छे श्री अमररत्न सूरि गुरूपदेशेन प्रतिष्ठितश्च विधिना ॥ देकावामा वास्तव्य ॥ श्री शान्तिनाथजी का मन्दिर-(घोडावतों की पोस) पंचतीर्थयों पर। [1324] संवत् १३१६ वर्षे चैत्र विदि ६ जोमे श्री वृहठीय श्री उद्योतन सूरि शिष्यैः श्री हीरजा सूरिनिः प्रतिष्ठितं । श्रेण शुभंकर नार्या देवा तयोः पुत्रेण श्रे सोमदेवेन जार्या पूनदेवि पुत्र श्रीवठ नागदेवादियुतेन आत्मश्रेयोर्थ श्री वीरजिन बिंध कारितं ॥ [1325] मा खडाकेन संवत् १५०३ वर्षे मादहू गोत्रे सा0 नाखर नरमी श्राविकायाः पुण्यार्थ मा० जीवा खीदा जीदा जादा पुत्र युतेन कारितं स्वपुण्यार्थ श्री अजितनाथ विवं प्रतिष्ठितं श्री जिनन सूरिनिः ॥ श्रीखरतरगछे ॥ [13261 संवत् १५२५ वर्षे वैशाख विदि ५ श्रोसवास झातो सूराणा गोत्रे सा० सखर सहस वीरेण नार्या जोजी पु० भीमा वरता रंगू रत्न युक्तेन स्वनार्या पुण्यार्थ श्री धर्मनाथ बिंब कारितः प्रति श्री धर्मघोषगच्छे श्री पद्माणन्द सूरिनिः ।।

[1827]
संवत् १५४५ वर्षे ज्ये विदि ११ दिने वीरवाडा वासि प्राग ज्ञाति सा रत्ना जा
माघू पु० सा० नीमाकेन जाण् हेमी कुटुम्बयुतेन स्वश्रेयसे श्री पार्श्वनाथ विवं कारितं श्री
श्री श्री सूरिनिः॥ श्रिये ॥
[1328]
संवत् १५६६ वर्षे फागुण सुदि ३ सोमे श्री नाणावालगडे उसन्न गोत्रे को वुध ना
चाहिणदे पुत्र वीवावणा वधा दोहावणी पुण्यार्य श्री विमलनाथ विवं कारितं प्रा श्री शांति
सूरिनिः॥ मेमता नगरे ॥
चौवीसी पर।
[1320]
संवत् १४एक वर्षे फाल्गुन शुक्ल ए जालंबाल गोत्रे साशिखर पुत्राज्यां शा० संग्राम
सिंह धनात्यां निज मातृ साल्ही श्रेयो निमित्तं श्री सुविधिनाथ चतुविशति पटं कारितः
प्रतिष्टितं । तपा नट्टारक श्री पूर्णचन्द्र सूरि पट्टे नहारक श्री हेमहंस सूरिभिः ॥
वीकानेर।
श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथजी का मन्दिर ।
घासानियों का महता-वांठियों के उपासरे के पाम ।
पंचतीधियों पर ।
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से १५९६ फार दि ६ बटा हातीर मा जगमी नार र पुश्या भा०
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[1331] [1332] लार्या सूरिभिः॥ सं० १५०ए वर्षे माघ सु० ७ ऊकेशवंशे मावू शापायां सा पूना सुत सा सहसाकेन सवत् १५१६ वर्षे ज्येष्ठ सु० १० दिने जकेशवंशे दोसी सा नादा पुत्र साग धणदत्त रोहिणी नाम्न्या का जिणंद वासा वनर्तृनिमित्तं श्री शांतिनाथ विवं का प्रतिष्टितं श्री कोरंटगडे श्री कक्क सूरि पट्टे श्री सावदेव सूरिः ॥ सं० १४ए वर्षे ज्येष्ठ सुदि सोमे प्राग्वाट व्या जश्ता नार्या वरजू पु० लुगा स० आत्मश्रेयोर्थ श्री श्रेयांसनाथ चिंबं का रितं प्रतिष्ठितं श्री में ... श्री मुनिप्रन सूरिभिः ॥ सं० १५०७ वर्षे वै० सु० ५ दिने सोमे ओसवाल छातीय सुचिंती गोत्रे सा० धन्ना अमरी पु० तोलूकेन वपूर्वज रीजा पुण्यार्थ श्री वासुपूज्य विवं का० प्र० श्री कक्क पुत्र ईसर महिरावण गिरराज माला पांचा महिपा प्रमुख परिवारेण स्वश्रेयो) श्री कुंथुनाप बिंब कारित श्री खरतरगचे श्री जनराज सूरि पट्टे श्री जिनना सूरिभिः प्रतिष्ठितं ॥श्री। संवत् १५१० वर्षे माघ सुदि ५ दिने श्री उपकेशगछे ककुदाचार्य संताने जागोत्रे साग साधा सा सारंग ना तव्ही पु० षीमधर ला जेठी पुरा घेता मायुतेन आत्मश्रेयसे श्री संजवनाथ विवं का प्रति श्री कक्क सूरिनिः । [13351 [1333] [1334] तथा उकण पुत्र साठ वच्छराज प्रमुखपरिवारयुतेन श्री शीतल विवं मातु अपू पुण्यार्थ कारित प्रखरतर श्री जिनचन्ड सूरिनिः।

( द५ ॥ [1336] आसधर पुत्र श्रे० पूनड़ सं० १५१७ वर्षे माघ सु० ५ बुधे ऊकेश शुन गोत्रे श्रेण नार्या फती पुत्र सा करमणेन नार्या कर्माद धर्म पुत्र सा समरा नार्या सहजलदे सुत तेजादि कुटुम्बयुतेन श्री प्रथम तीर्थकर विवं कारिनं प्रतिष्ठितं श्री सूरिभिः। श्री सिद्धपुर वास्तव्य ॥ [1337] सं० १५३२ फा० सुदि " श्री संनवनाथ विंवं श्री संमेरगछे नहारक श्री [1338] सं० १५३४ वर्षे मा सृदि ५ सोमे श्री उपकेश वांज गोत्रे । सा बहा जाप वोरिणि पुण् सा सच्चू नाण लपमादे मातृपितृ पु० आत्म पु० श्री कुंथुनाथ विंचं कारापितं श्री मलधर ग० प्र० श्री गुण विमल सूरित्तिः ।। [1330] सं० १५३६ वर्षे फागुण सु० २ रवी ओसवाल धामी गोत्रे सा० पदमा नार्या प्रेमलने पु० जोला ना नावलदे पुण् देवगज युनेन स्वपुण्यार्य श्री विमलनाथ वियं कागपिनं प्रा ज्ञानकीच गछे श्री धनेश्वर सूरिलिः ॥ सोरो [1340] संवत् १५३६ व फागुण सु०३ नश्ट गोत्रे ना मीधर पुत्र गुग्पनिना ना गरलंद पुसहसा पुनि जार्या गसारदे पुत्र करमसी पहगल युनेन श्री कुंथुनाथ विंचं निज पुण्यार्थ कारितं प्र० नमदास गरे श्री देवगुप्त सूरितिः । । [:: सं० १५३६ वर्षे फार म०३ दिन नमा ग गोत्र मा इदा पवार्य पुत्र मात्र अपवराज नद दातृ सी . दुतेन प्रो नमिनाय किंवा श्रीमान श्रीन भूरि हे श्री जनचन्ह नतिः !! श्री !!

[1332.] ॥ सूरिभिः सं० १५०ए वर्षे माघ सु० ७ जकेशवंशे मालू शापायां सा० पूना सुत सा० सहसाकेन सवत् १५१६ वर्षे ज्येष्ठ सु० १० दिने जकेशवंशे दोसी सा नादा पुत्र सा धणदत्त रोहिणी नाम्न्या का जिणंद वासा खनर्तृनिमित्तं श्री शांतिनाग किंवं का प्रतिष्टितं श्री कोरंटगने श्री कक्क सूरि पट्टे श्री सावदेव सुमिः ॥ [1:3311 संग १४ए वर्षे ज्येष्ठ सुदि २ सोमे प्राग्वाट व्य० जस्ता जार्या वरजू पुरा बुठा सक आत्मश्रेयोर्थ श्री श्रेयांसनाथ वि कारितं प्रतिष्ठित श्री में ... श्री मुनिप्रन सूरितिः ॥ सं० १५०० वर्षे वे० सु० ५ दिने सोमे श्रोसवाल ज्ञातीय सुचिंती गोत्रे सा० धन्ना जार्या अमरी पु० तोलूकेन वपूर्वज रीजा पुण्यार्थ श्री वासुपूज्य विवं काप्र० श्री कक्क [1333] पुत्र ईसर महिरावण गिरराज माला पांचा महिपा प्रमुख परिवारेण स्वश्रेयोर्थ श्री कुंथुनाथ विवं कारितं श्री खरतरगचे श्री जिनराज सूरि पट्टे श्री जिनना सूरितिः प्रतिष्ठितं ॥श्री॥ संवत् १५१० वर्षे माघ सुदि ५ दिने श्री उपकेशगछे ककुदाचार्य संताने जागोत्रे सा साधा सा सारंग जाए तव्ही पु षीमधर ना जेवी पुरा पता पेमायुतेन आत्मश्रेयसे श्री संजवनाथ बिंबं का प्रति श्री कक्क सूरिनिः । [1335] [1334] तथा उकण पुत्र सा० वच्चराज प्रमुखपरिवारयुतेन श्री शीतल विंब मातु अपू पुण्यार्थ कारित प्र खरतर श्री जिनचन्द्र सूरिनिः ।

( ६५ ) [1336] सं० १५१७ वर्षे माघ सु० ५ बुधे ऊकेश शुन्न गोत्रे श्रेण आसधर पुत्र श्रे० कॅनड़ नार्या फती पुत्र सा करमणेन नार्या कर्माद धर्म पुत्र सा समरा नार्या सहजसदे सुत तेजादि कुटुम्बयुतेन श्री प्रथम तीर्थकर विवं कारित प्रतिष्ठितं श्री सूरिभिः। श्री सिहपुर वास्तव्य ।। [1337] संजवनाथ विवं श्री संझेरगचे नहारक श्री संप १५३२ फा० सुदि ... श्री - [1338] सं० १५३४ वर्षे मा सुदि ५ लोमे श्री उपमेश यांन गोत्रे। सा बछा ना बोरिणि पुण् ला सच्चू ना लपमादे मातृपितृ पु० आत्म पु० श्री कुंथुनाथ विंचं कारापितं श्री मनधर ग० प्र० श्री गुण विमल सूरितिः ।। [1220] सं० १५३६ वर्षे फागु० सु० २ वा श्रोनयास धामी गौने सात पदमा नार्गा प्रेमाने पु० जोला जात नावलदे पुरु देवगज चुनेन म्यपुण्यार्य श्री विमलनाय नि कागतिं प्रा. झानकीय गछे श्री धनेश्वर सूरिभिः ॥ नान । ..... .. [:50 संवत् १५३६ वर्षे फागुण नु०३ नाट गोरे नाः सीधा पुत्र गुगनिना ना ग पुल मरला पुनि जार्या गमाग्दे पुत्र करमनी पछाज युतन श्री चनाय विपि कारितं प्रा नसदास गछे श्री देवगुप्त मनिः 20 १५३६ द फार दिन न 752 . पपराज नद जाट की ... बुलेन सोमना मृति हेकी जिनमः . श्री : ने ... :

[1833] संवत् १५१० वर्षे माघ सुदि ५ दिने श्री उपकेशगळे ककुदाचार्य संताने जागोत्रे साथ साधा सा सारंग ना तब्दी पुरुषीमधर जा जेठी पुल पेता पेमायुतेन आत्मश्रेयसे श्री सवत् १५१६ वर्षे ज्येष्ठ सु० १० दिने ऊकेशवंशे दोसी साल नादा पुत्र साप धणदत्त तथा उकण पुत्र सा बच्छराज प्रमुखपरिवारयुतेन श्री शीतल विंबं मात अप्पू पुण्यार्थ कारित (६४) रोहिणी नाम्न्या का जिणंद वासा खनर्तृ निमित्तं श्री शांतिनाथ विवं का प्रतिष्टितं श्री कोरंटगने श्री. कक्क सूरि पट्टे श्री सावदेव सूरिः ॥ [1331] सं० १४ए वर्षे ज्येष्ठ सुदि २ सोमे प्राग्वाट व्या जश्ता नार्या वरजू पु० बुग सा आत्मश्रेयोर्थ श्री श्रेयांसनाथ विवं कारितं प्रतिष्टितं श्री में ... श्री मुनिप्रन सूरिभिः ॥ [1332] सं० १५०० वर्षे वैसु० ५ दिने सोमे ओसवाल झातीय सुचिंती गोत्रे सा० धन्ना जार्या अमरी पु० तोलूकेन वपूर्वज रीजा पुण्यार्थ श्री वासुपूज्य विवं का० प्र० श्री कक्क सूरिभिः॥ सं० १५० वर्षे माघ सु० ७ ऊकेशवंशे मालू शाषायां सा पूना सुत साण सहसाकेन पुत्र ईसर महिरावण गिरराज माला पांचा महिपा प्रमुख परिवारेण स्वश्रेयो) श्री कुंथुनात्र विवं कारितं श्री खरतरगजे श्री जिनराज सूरि पट्टे श्री जिनन्ना सूरिभिः प्रतिष्ठितं ॥श्री॥ संजवनाथ विवं का प्रति श्री कक्क सूरिनिः । [13351 प्र० खरतर श्री जिनचन्द सूरिनिः। [1334] ( ६५ ) [1836] संघ १५१७ वर्षे माघ सु० ५ बुधे ऊकेश गुज गोत्रे श्रे० आसधर पुत्र श्रे० पूंनड़ नार्या फती पुत्र साण करमणेन जार्या कर्मादे धर्म पुत्र साप समरा नार्या सहजलदे सुत तेजादि कुटुम्वयुनेन श्री प्रथम तीर्थंकर विवं कारितं प्रतिष्टितं श्री सूरिनिः। श्री सिझपुर वास्तव्य ॥ [1337] सं० १५३५ फा0 सुदि ... श्री ..... संनवनाथ विवं श्री संमेरगडे नहारक श्री [1338] संग १५३४ वर्षे मासुदि ५ सोमे श्री उपकेश वांत गोत्रे । सा बहा ताप वारिणि पुण् सा सच्चू ना लषमादे मातृपितृ पुत्र आत्म पु० श्री कुंथुनाथ विवं कारापितं श्री मलधर ग० प्र० श्री गुण विमल सूरिनिः ।। [1330] सं० १५३६ वर्षे फागुण सु० ५ रवौ ओसवाल धामी गोत्रे सा० पदमा नार्या प्रेमलदे पु० जोला ना जावलदे पु० देवगज युनेन स्वपुण्यार्य श्री विमलनाथ विं कारापितं प्र० ज्ञानकीय गठे श्री धनेश्वर सूरितिः ॥ लोरो - [1300] संवत् १५३६ वर्षे फागुण सु०३ तइट गोत्रे सा सीधर पुत्र गुग्पनिना ना० गरलंद पु० महसा पुनि जार्या गसारदे पुत्र करमली पड्गज युनेन श्री कुंथुनाथ विवं निज पुण्यार्थ कान्तिं प्र० नमदास गछे श्री देवगुप्त सूरितिः । [182:] सं० १५३६ वर्षे फार ३ दिने नका ग गोत्र लाः इदा पुयाय पुत्र मा. अपयराज तद् ज्ञान सी ... युनेन प्रो नमिनाय वि का श्रीमान श्री जिन सूरि पढे श्री जिनबन्ध न!ि! श्री !!

संवत् ५६ वर्ष वैशाग्व मुदि ३ मोमवार श्री यादित्यनाग गोत्रे चोरवेड्या शाग्वायां
.......
सु० श्रे० पदमाकेन ना चांपू सु० पाना ना० रषी सुकर्मसी प्रमुखपरिवारपरिवृत्तेन
( ६६ )
[1342]
सं० १५३ए वर्षे वैशाष सुदि ४ शुक्र उ० ज्ञातीय प्राह्मचा गोत्रे व्या चांदा ना
धम्मिणि पु० गांगा जा म्यापुरि सहितन श्री पार्श्वनाथ विंबं का०प्र० जावड़
जावदेव सूरिनिः।
[1343]
संवत् १५४ए वैशाष सु० ५ बुध काष्ठासंघ नहारक श्री तस्याम्नाये
सं० १५५२ वर्षे फाप शु० ६ शनौ श्रोसा ज्ञानीय सा मुंज जाण् मुजादे पु० सार
परवत नाए अमगदे सा पर्वत श्रयार्थ श्री विमलनाथ विं कारितं प्र तपागचे श्री
हेमविमल सूरि।
संवत् १५६१ वर्षे माह सदि ५ दिने शुक्र हुँबड़ झातीय श्रेण विजपान ज्ञाण हीरू
स्वयोर्ष श्री विमान प्रति समीसागर सूरि
तत्पट्टे श्री सुमनिसाधु सूरि तत् ण् साम्प्रत विद्यमान परमगुरु श्री हेमविमल सूरिभिः॥
वीचावमा वास्तव्य ॥
[1344]
-
[1345]
[1846]
सं० १५७ वर्षे वैशाप दि श्री अोमवंशे उजलाणी गोत्रे ।
पीगेजपुर स्थाने ।
मा० धनू नार्या - सुन मा० वीम नया वीरमद सुत दीपचंद उधरणादि कुटुम्वयुतेन
मंत्वनाथ विवं कारितं । प्रतिष्टितं
[18471

( ६७ ) सा पासा पुत्र ऊदा ना पऊमादे पुण् कामा गयमल देवदत्त ऊदा पुण्यार्थं शांतिनाथ विवं कागंपितं उपपल सिद्ध सूरितिः प्रति [1348] संवत् १६ वर्षे पोष वदि ३ दिने साह काजड़ गोत्र साद चापसी नार्या नारंगदे श्री वासपु श्रा वासुपूज्य गपितं प्रतिष्ठितं श्री हीरविजय सूरिभिः । पुण बिंवं काग जैन उपासरा का शिला लेख । [1849] (१) पृथवी नल मांहे प्रगटः वड़ो नगर वीकांण । (२) सुरनसीह महागजजुः राज करै सुविहाण ॥ १॥ (३) गुणी क्षमामाणिक्य गणिः पाठक पुन्य प्रधान । (४) वाचक विद्या हेमगणिः सुप्रत सुख संस्थान ॥२॥ (५) सय अढार गुणसह में महिरवान महाराज । (६) नव्य वनाय उरासरो दियो सदा थित काज ॥ ३ ॥ श्री चिंतामणि पार्श्वनाथजी का मन्दिर बाजार में । शिलालेव । [1350] ॥ संवत् १५६५ वर्षे श्राषाढ़ सुदि ए दिने वार रवि । श्रो चौकानेर मध्ये महागजा राई श्री श्री श्री वीकाजी विजयगये । देहगे कगयों श्री संघ ॥ मंवत् १३७ वर्षे श्री जिनकुशल सूरि प्रतिष्टितः ॥ घी मंगोबर मूलनायक ॥ श्री श्री थादिनाथ चनुर्विशनि

18 | पदमाकन ना० चांपू सु० पाना ना० रपी सु० कर्मसी प्रमुखपरिवारपरिवृत्तन
नरहे श्री मानसाधु मूरि नत ९ माम्प्रन विद्यमान परमगुरु श्री हेमविमस सूतिः ॥
[1342]
सं० १५३५ वर्षे वैशाष सुदि ४ शुक्रे उ० झातीय प्राह्मचा गोत्रे व्य० चांदा बार
धम्मिणि पु० गांगा जा० म्यापुरि महितन श्री पार्श्वनाथ विंबं का प्र० नावड़ गठे में
जावदेव सुरिनिः।
[1343]
संवत् १५४ए वैशाष सु० ५ बुध काष्ठासंघ नट्टारक श्री
तस्यानाये
[1344]
मं० १५५२ वर्षे फा० शु० ६ शनौ श्रोसा ज्ञानीय सा0 मुंज नाग मुजादे पु० सा
पवन ना अमगदे सा० पर्वत श्रयार्थ श्री विमलनाथ बिंबं कारितं प्रण
मविमान मुरि
[1345]
मंवत् ॥६१ वर्ष माह सदि ५ दिने शुके हुँबड़ झातीय श्रेण विजपान जाग
यो माया प्रति श्री लक्ष्मीसागर म।
तपाई श्री
हीर
वीनावमा वास्तव्य ॥
[1248]
में: 1.72 व वडाप बदि 7 श्री श्रीपवंशे उनलाणी गोत्रे । पीगंजपुर स्याने।
हुन माम वीरा नया वीरमद मुन दीपचंद उधगणादि कुटुम्वपुर्नर
डिजितं । प्रनिधि
*
.
AAMAN
[18471
: दो दान मुष्टि मोमवार श्री श्रादित्यनाग गांचे चोग्या शापा र

( ६७ ) सा पासा पुत्र ऊदा जाए पजमादे पुरा कामा गयमल देवदत्त जदा पुण्यार्थ शांतिनाथ विवं कागंपिनं उरपल सिद्ध सूरिनिः प्रति [1348] मंवत् १६२७ वर्षे पोप वदि ३ दिन साह काजड़ गोत्र माइ चापसी नार्या नारंगदे पुण् श्री बासपु श्री वासुपूज्य विंब कागपितं प्रतिष्ठितं श्री हीरविजय सूरिनिः । जैन उपासरा का शिला लेख । [124] (१) पृथवी नल मांहे प्रगटः बड़ो नगर बीकाण । (२) सुग्नतोंद महागजजुः गज करें सुविहाण ॥ १ ॥ (३) गुणी क्षमामाणिक्य गणिः पावक पुन्य प्रधान । (४) वाचक विद्या हेमगतिः नुप्रत नुव संस्थान ॥ २ ॥ (५) सय अढार गुणस में महिग्वान महागज । (६) नव्य बनाय जरामगे दियो मदा थिन काज ॥ ३ ॥ श्री चिंतामणि पानायजी का मन्दिर बाजार में। शिवानम्व। (253] ॥ संवत् १५६६ वर्षे चापाट मुदि दिने वार :दि ! श्री बाबाना मामा गई श्री श्री काजी विस्यमय। देवगे गया श्रीमंद ।। संयत् १३०१ व श्री जिनका प्रिनिष्टिन। छी नंबर नानावर श्री श्री याटिन र पदधिनि

श्री जिन ना सरि
चरण पर ।
मंः १५ वर्षे माग मुदि १२ ककेटा ज्ञानीय बांहटिया गोत्रे सा० ममुबर पुत्र
६० )
पटं । नवलक्षक रासल पुत्र नवल तक राजशल पुत्र श्री नवलक्षक साप नेमिचं सुश्रावकेन
माह वीरम इसाक देवचंड कान्दम महं॥ संवत् १५ वर्षे श्री श्री श्री चनवीस इन्डजी
गे परघो महं वठावते जरायो ।
चौवीस जिनमाता के पट्ट पर ।
[1351]
॥ संवत् १६०६ वर्षे फागुण वदि ७ दिने श्रो वृहत् खरतरगन्छे ।
पन्ताने । श्री जिनचन्द्र सूरि श्री जिनसमुछ सूरि पट्टे॥ श्री जिनइंस सूरि तत् पट्टालंकार
श्री जिनमाणिक्य सूरितिः प्रतिष्टिता श्री चतुर्विंशति श्री जिनमातृणां पट्टिका कारिता ।
श्री विमनगर मंधन १
[1852]
संचन १९७५ वर्षे शाके १७७० प्रमिते माधव मासे शुक्ल पके पोर्णिमास्यां तिथी गुरुवार
दृटन ग्यानर गणाधीश्वर नए । जं० । युग प्र० श्री १०७ श्री हर्ष सूरि जित्पाषुके श्री संयन
कागपितं प्रतिष्टितं च न० 10 । यु । प्र० । श्री ज़िनसोनाग्य सूरित्तिः श्री विक्रमपुर
परे । श्री ॥
प्रोमन्दिा म्वामी का मन्दिर-नांकासर ।
अनेन श्री मान वि काग्नि नपान श्री दिमसमुझ मरि पट्टे श्री
हर मुनि
11251
7. वर्ग : गांगन ना की मन वासिंग नाम श्री नाम्न्या
[13531
* Aancha

( ६ए श्रमा नरसिंह खोलादि कुटुम्बयुतयों श्री संजव बिंब कारित प्रतिष्ठित तपागळे श्री इन्भनन्दि सूरिभिः पत्तने ॥ श्री॥ कुंग और नहर पर की शिलालेख । [1355] ॥ श्री नेमिनाथाय नमः ।। श्री बीकानेर तथा पूरब बंगाला तथा कामरू देस आसाम का श्री संघ के पास प्रेरणा करके रुपया नेला करके कुंड तथा आगोर की नहर बनाया सुश्रावक पुण्य प्रजावक देवगुरुनक्तिकारक गुरुदेव को नक्त चोरडिया गोत्रे सीपानी चुन्निलाल रावतमलाणि सिरदारमल का पोता सिंघिया की गवाड़ में वसता मायसिंघ मेघराज कोगरी चोपड़ा मकसुदाबाद अजिमगंजवाले का गुमास्ता और कुंड के ऊपर दारईकेलाव (?) बकतावर चंद सेठिया बनाया संवत् रए५४ शाके १७ए प्रवर्तमाने मासोत्तममांसे लाजवामासे शुक्ल पक्ष पंचम्यां तिथौ नौमवासरे। मोरखानो-बीकानेर। [1356] * १. ॥ ॥ श्री सुसाणं कुखदेव्यै नमः ॥ मूलाधार निरोधयुझफणिनीकंदादिमंदानिले। (5) नाकम्य ग्राज मंग * यह खान “देशनोक " से दक्षिण-पूर्व कोण १२ मील पर है। यहां के देवी मंदिर में काले पापाण पर यह लेप खुदा हुआ है और टेसिटोरी साहब ने अपने ई० सं० १९९६ की रीपोर्ट में उापी है। See J& P of the A s of wengal' Vol XIII. pp 214-215 - ३. ४. सा सूराणासवंश ६. तस्याध्यायत पादपंकजयुग ७. सूरी रसमयसमयांनोनिधेः पारदृश्वा । विश्वेषां शश्वदाशा सुरतरुसशस्त्या- मानं । गोत्राधिष्ठातृदेव्याः प्रस्मरकिरणं कारयामास जक्त्या ॥ ६ संवत् १५७३ ( 30 ) २. लधिया प्राग्पश्चिमांतं गता। तत्राप्युज्वलचंजमंडलगलत्पीयूषपानो सत्केव त्यानुनव्या सदास्तु जगदानं दाय योगेश्वरी ॥ १ या देवेंजनरेंजवंदितपदा या नसतादायिनी । या देवी किस कल्पवृक्षसमतां नृणां दधा- लौ। या रूपं सुरचित्तहारि नितरां देहे सदा विव्रती। सा सौख्यजननी नूयात्प्रवृझिं क- ५. री ॥ २ तंत्रैः किं किल किं सुमंत्रजपनैः किं नेपजैा वरैः। किं देवेंशनरें - सेवनतया कि साधुनिः किं धनैः। ए. का या नुवि सर्वकारणमयी ज्ञात्वेति तो ईश्वरी । तध्यानलीनाशयाः ॥३॥ श्री भूरिईर्म- जितप्राणिहिंसां। सम्यग्दृष्टि .. मनणु गुणगणां गोत्रदेवी गरिष्ठां । कृत्वा सूराणवंशे जिनमत निरतां यां चका- रात्मशक्त्या ॥४ तद्यात्रां महता महेन विधिवछिको विधायाखिले निर्गे मार्गणचातकपृणगुणः सजारटंकबटः । क्षेत्रफले ग्रहिमरुधरा धारा- धरः ख्यातिमान् संघेशः शिवराज इत्ययमहो चित्रं न गर्जिध्वजः ॥ ५ तत्पुनः सच्चरित्रे वचनरचनया नूमिराजः ११. समाजालंकारः स्फारसारो विहित निजहितो हेमराजो महौजाः। चंगप्रोतुंग शृगं नुवि जवनमिदं देवयानोप- जातः १०. वर्षे ज्येष्ठमासे सितपदे पूर्णिमा- ( १ ) १३. स्यां शुक्रे ऽनुगधायां षीमकर्णे श्री सूराणवंशे संग गोसल तत्पुत्र संग शिवराज तत्पुत्र सं० हेमराज तद्भार्या संप मिश्री त- १४. स्पुत्र संग धजा संकाजा संग नादा सं0 नरदेव संग पूजा नार्या प्रतापदे पुत्र सं० चाहड़ ना पाटमदे पुत्र संग रणधीर १५. सं० नाथू संग देवा संघ रणधीर पुत्र देवीदास सं० काजा नार्या कतिगदे पुत्र संघ सहसम संप रणमल १६. सहसमल पुत्र मांगण । रणमल पुत्र घेता पीमा। सं नाव्हा पुत्र सं० सीहमक्ष पुत्र पीथा सं० नरदेव पुत्र मोकला. १७. दिसहितेन। सं० चाहनेन प्रतिष्ठा कारिता सपरिकरेण श्रीपद्मानंद सूरि तत्पट्टे नए श्री नंदिवर्धन सूरीश्वरेन्यः ॥ चुरू-बीकानेर। श्री शांतिनाथजी का मंदिर । पंचतीर्थियों पर। [1357] कारितं श्री पार्श्वनाथ विवं । ........ सवत् १३०४ गठे [1358] ॥ सं० १३०० ज्येष्ट सु० १४ श्री उएसगळे धेम ला ना० मोपलदे पुण् दंदा कमा पितृ मातृ श्रेयले श्री आदिनाथ विवं कारितं प्र० श्री ककृदाचार्य सं० श्री कक्क सूरिनिः । है (3) [1350] सं० १४६ए वर्षे फा वदि । शनी नागरं झातीय अखियाण गोत्र श्रे कर्मा जाया धाणू सुतं मृगं बातृ सांगा श्रेयसे श्री शांतिनाथ वि का प्रण अंचखगछ ना श्री मेरूतुंग सूरिभिः ॥ [1360] सं० १५०७ वर्षे ज्येष्ठ सुदि १० ओसवंशे नाहरे गोत्रे साण हेमा जान् हेमसिरि पुत्र तेजपालह आत्मश्रेयसे श्री सुविधिनाथ विंबं का प्रण धर्मघोषगछे । [1361] सं० १५३० वर्षे फा0 व० १ रखौ प्राग्वाट ज्ञाण साह करमा नाम् कुनिगदे पु० साल दोला ना देव्हा चोला भ्रातृ मुंणा खश्रेयसे श्री धर्मनाथ विंध का प्रा पूर्णिक कडोली- बालगन्छे जा श्री विद्यासागर सूरीणामुपदेशेन । [1362] ॥ सं० १५४५ वर्षे माह सु ३ गुरौ उपकेश झाo श्रेष्ठि गोत्रे साह आसा जा ईसरदे पुण् जस्ता ना जीवादे पुत्र चाहा युतेन पित्रो श्रेयसे श्री श्रेयांसनाथ विवं कारित प्रतिष्ठित मसाइज गछे जा श्री कमलचं सूरिभिः ।। गवालियर ( लस्कर )। पंचायती मंदिर सराफा बजार । पञ्चतीर्थियों पर। [ 1883] है सं० ११ए। ज्येष्ठ सु० १५ देवम सुतया वीटिकया कारितयं प्रतिमा । !

( ७३ ) [1884] सं० १३४० वै० सुदि २ गुरौ श्रीमाल ज्ञातीय श्री प्रद्युम्न सूरिनिः। .. .. [1865] संवत् १३७६ वर्षे वैशाख सु०३ miumm rrrrrrrrrrn प्रणमंति। [1366] सं० १४ माघ सुदि ६ बुधे उप० वोहड़ वर्धमान गोत्रे सा राणा ना सूहवदे पुर्ण महिपा मोकल श्रेयोधू श्री वासुपूज्य विंबं कारितं खरतरगहे श्री जिनचं सूरि पट्टे श्री जिनसागर सूरि प्रति० ॥ [1367] सं० १४ए फागुण वदि १० चंगेजरिया गोत्रे । सा० धर्मा पुत्रेण जीणाजूणान्या निजपितृनिमित्तं श्रीपद्मप्रन विवं कारितं प्र० तपागछे नहारक श्री हेमदंस सूरिभिः। [1389] संवत् १५०० वर्षे वैशाख सुदि ३ जाज श्रीमास झातीय । श्रे० सादा ना० मनूं मुत माया ना अधू सुत देवराजेन पितानिमिनं श्री शीतलनाथ पंचतीर्थी वि कागनित प्रति श्री ब्रह्माणगळे प्रत श्री विमस सूनिः । [1560] गप्र० संवत् १५०१ वर्षे मा मुल ५ श्री श्रीमान कानीय नं टांपर मुन नमाना जाति पु० सायपरला परनागजिः पित्रो प्रेमन सामि प्रि: श्री वृदन मा भी मंगलचंड सितः । 331 २०. Eि": ....

• प्ररपोध (?) आ० श्रेयसे श्री आदिनाथ विं
( 5 )
[4371]
सं० १५०७ वैशाष सु. ए का बेविकान्यां खश्रेयसे कारिता .... ।
[1372]
सं० १५० वर्षे माघ सु० १० शनौ ककेशवंशे माव्हू गोत्रे मं नोजराज ना० ऊमार
पुत्र संण् देवोकेन जा मं सोनार संग्रामादि सहितेन सू (?) जाण देवलदे श्रेयोर्थं श्री अजित
बिं का प्रण श्री खरतरगळे श्री जिनसागर सूरिनिः ।।
[1373]
सं० १५१५ माघ सु० १ बुधे श्री श्रोसवाल ज्ञातो सुहणाणी सुचिंती गो सा सारण
जा० नयणी पुण् श्रीमालेन जा पीमी पु० श्रीवन युतेन मातृश्रेयसे श्री आदिनाथ विं
कारितं उपकेशगई ककुदाचार्य सं० प्र० श्री कक्क सूरितिः ॥
सं० १५१३ पोष सुकेशवंशे वि क गोत्र सं० नरसिंहांगज साप मार पुत्रेण सा
कोल्हाकेन निजमातृपुण्यार्थं श्री नमि विंबं का० प्र० ब्रह्माण तपागळे उदयप्रज्ञ सूर
जहारक श्री पूर्ण सूरि पढे श्री हेमइंस सूरिभिः ।
[ 1375]
सं १५१३ वर्षे माद सु० ५ जकेश पीथेपरिया गो० साल पिथपाल जार्या पेमथी
पु० नापू सेपू ना० सोम श्री
माथी
का० प्र० श्री वृदने श्री सागरचंड सूरिनिः ।
[1374]
[1376]
संवत् १५१५ वर्षे ज्येप्ट सुदि ५ सोमे गूर्जर ज्ञातीय दो अमरसी जारूपिणि सु

( 3 ) कसाकेन जा बंजीयुतेन पितुरादेशेन आत्मश्रेयसे जीवितस्वामी श्री धर्मनाथ बिंब कारितं पूर्णिमापके जीमपत्रीय नहारक श्री जयचंड सूरीणमुपदेशेन प्रतिष्ठितं ॥ व ॥ [1377] सं० १५२० वर्षे वैशाष सुदि ए सोम श्रीमाल ज्ञातीय नउड़ा (?) गोत्रे सा वनराज पुण् सा जाटा नार्य गउवदे पुरा सा बाजू जार्या दर्पमदे पुण् सा० रत्नपाल सीधर समदा सायरात्यः स्वपितॄणां श्रेयले श्री श्री सुविधिनाथ विंबं का प्र० श्री धर्मघोपगळे श्री विजयचंछ सूरि पट्टे श्री साधुरत्न सूरिभिः ॥ [1378] ॥ संवत् १५२१ वर्षे वैशाप बदि शुक्रे प्राग्वाट ज्ञातीय साण देवसीय जार्या पाव्हणद पुत्र साप जालवेन ना माकू सहितेन आत्मश्रेयोर्थ श्री पनप्रन विवं कारापितं प्रतिष्ठित श्री साधपूर्णिमापक्षे ५। श्रीरामचंत सूरि पट्टे पज्य । श्री पुज्य चंड सूरीणामुपदेशेन विधिना आचष्टे। [1370] सं० १५५६ वर्षे वैशाप ६ नोमवारे प्रामचा गोत्रे ला जाटा नाप जस्तो पुरपी साता जाटी युग नवदास जा उन्लादे सहितेन लावि निमित्त श्री धर्मनाय विनं कारितं खरतरगळे प्रतिष्टितं श्री जिनचंड सूरितिः। गुल्नं भवतु । - [1880] सं० १५३२ वर्षे वैशाप सुदि६ सोमे श्री कोटग श्री मन्तवाय नंताने उपस पाना का गोत्रे ला जगदाल ता जासहदे पु० ला मग ना नारद पुः ना द्रा नरनि सहितेन श्रेयले श्री सुमतिनाय विवं प्राश्री मांबदेव मूनिनिः ।। [ 8-10 - संवत् १५३३ वर्षे नाव सुदि १३ नाकामा कानीय ना ना .

[1382]
[1383]
वासुपूज्य
पुत्र मोकल प्रमुख समस्त
( ६ )
स० बमूथा ना माही "" पुण् स० वता जा मजकू पुत्र मूंगर श्रात्मश्रेयसे श्री विमलनाथ
बिंब का रितं साधुपूर्णिमापके प्रतिष्ठितं श्री जयशेखर सूरिभिः ।
सं० १५३४ वर्षे फागुण सुदि ए बुधवारे प्राण ज्ञा0 साए मोकल ना मोहणदे पुरु
मेहाके जा0 कुंती पुण् रोना लषमण आसर वीसल महितेन था श्री वासुपूज्य विच
का प्रण पूरा हि कछोली वा न श्री विजयप्रन सूरीणामुपदेशेन ।
संवत् १५४ वर्षे ज्येष्ठ सु० ५ सोमे ओसवाल ज्ञातीय सा मूला जामाणिकवे संत
विवं
माणिक ना गंगादे सु० जूनं च नाण् लाठी बिंबं कारितं भूला श्रेयोथं श्री
का प्रतिष्ठितं । श्री संमेगळे श्री सुमति सूरिनिः ॥
सं० १५६३ वर्षे माह सुदि ५ गुगै उपकेश झा नूरि गोत्रे सा चांपा चउदय
जा चांपले पुण् कान्हा ना चंगी पु० देवा शिवा सुकुटम्बयुतेन चउहथ श्रियोर्थं श्री
सुविधिनाथ विवं श्री धर्मघोषगछे न श्री श्रुतसागर सूरिनिः प्रतिष्ठितं । शुनं जवतु ॥
सं० १५६७ वर्षे वैशाप सुदि १७ बुधे गुंदेचा गोत्रे ऊकेशवंशे सा वाकुर जार्या टहन
पु ऊधा सुन कचा वर्जू ना १ जसा गुणा प्रमुख कुटुंबसहितः श्री अंचलगडे जावसागर
सूरीणामुपदेशेन ।
सं० १५७२ वर्षे वैशाष सुदि ५ सोमे ऊ० झा फूलपगर गोत्रे सा० दधीरथ पु० साल
धर्मा जा २ पाचू साब्लो ५ पुरा का ला० पूरी
[1384]
चांग
[1385]
[ 18e6]

. . ( 3 ) कुटुम्बेन स्वश्रेयसे श्री आदिनाथ विवं कारितं प्रा श्री वडगडे श्री श्री चंचपन सूरिनिः ॥ ॥ श्री ॥ जावर वास्तव्य ॥ [1387]] संप १५७ए वर्षे वैशाष सु० ६ सोमे कूकर वाड़ा वा० नागर ज्ञातीय श्रेण कान्हा नाण धनी सु श्रेण हरपतिलदणकेन ना लषमादे प्र० का सुतेन नपा सीपा पदमा श्रेण श्री श्रेयांसनाथ विवं काश्री वृहत्तपा प० श्री धनरत्न सूरि श्री सौनाग्यसागर सूरिनिः प्रतिष्ठितं ॥ [1388] सवत् १६२७ वर्षे वैशाष शुदि ३ शुक्र केशवंशे गोठ १ गोत्रे सोप श्रीवच सोप लोला पुत्र सो उदयकरण नार्या अबबोदे पुत्र सोए जसवीर । सो नका सोए धवजी प्रमुख परिवारयुतैः श्री धर्मनाथ विवं कारितं श्री बृहत्खरतरगठे श्री जिनसिंह सूरिनिः प्रतिष्ठितं ॥श्रीः॥ चौवीसी पर। [1380] सं० १५२१ वर्षे वैशाप सुदि १० श्री उपकेश ज्ञातीय वापणा गोत्रे सा देवड़ पुण् देव्हा ज्ञार्या धाश् पुत्र सा खूला नीमा कान्हा सा जीमाकेन ना० वीराणि पुत्र श्रवणा मासू काकू सहितेन श्री शांतिनाथ मूलनायक प्रभृति चतुर्विशति जिनपदः का० श्री उपकेशगळे ककुदाचार्य संताने प्र० श्रीसिद्ध सूरि पट्टे श्री कक्क सूरिनिः ॥ शुनं ।। [1300] । सं० १५४१ वर्षे आपाड सु०३ शनो उप श्रेष्टि गोत्रे सा रामा ना० रत्न पु० गजा माजा शिवा राजा जा टहळू पु० वना सांगा मांगा गया थाना नदेव नार्या नटी सा सांगाकेन ना करमी वि० ना गमति प्र० सालकुटुम्बसद्दिनन बातृ बना

सं० १३०६ माह वाद २ श्री वृह बाण श्री देवार्य स जकेश ज्ञा० श्रेण आसचं
॥ सं० १४६६ वर्षे वैशाष सुदि ३ सोमे श्री श्रीमाल ज्ञातौ म सादहा सुत पित मण्मूलू
मातृ मूमी सुत उकुरसिंदेन पितृमातृश्रेयसे श्री संजवनाथ बिवं कारितं प्रतिष्ठितं श्री
( 6 )
निमित्तं श्री कुंथुनाथ चतुर्विंशति पट्टकं का० श्री मदड़ गछे रत्नपुरीय न० श्री धर्म
। सूरि पट्टे जा श्री कमलचंड सूरिनिः॥ शाल्मलीयपुरे ।
धातु की मूर्ति पर।
[1301]
सं० १६७५ वर्षे वैए सु० १५ दिने इंदलपुर वास्तव्य प्रा० वाद ( प्राग्वाट ) ज्ञातीय
बाई वज्र का श्री संजव विं० प्र० श्री। विजयदेव सूरिभिः ।
श्री पार्श्वनाथजी का मंदिर ।
पंचतीर्थयों पर।
[1382]
संवत् ११०७ फागुण सुदि ए सालिगदे
लूण
कारिता।
[1303]
सारा श्रेण देदारिसीहेन पितृश्रेयसे श्री वासुपूज्य विं का० प्र० श्री अमरचं सूरि शिष्यै
श्री धर्मघोष सूरिनिः॥
[13041
वति ना
ब्रह्माणगडे श्रीवीर सूरिनिः ॥ श्री॥
[1895]
सं० १४६ए वर्षे माह सुदि६षमेरकीयगछे ऊ० सा० अजा जा कपूर ० तिहुश्रणा

( ए ) जा माहपदे पुर तेजाकेन पितृ घस्तमेवी सहितेन पित्रोः श्रेयले श्रीशांति विंबं का प्रति श्रीसुमति सूरिनिः॥ [1396] संप १४७० वर्षे माघ सु० १२ गुरुवारे आदित्यनाग गोत्रे सा सलपण पुत्र कम्मण जा सांवत दीर तेजाकेन श्री शांतिनाथ विवं कारापितं प्रतिष्टितं श्रीदेव सूरिभिः ॥ ७ ॥ [1397] सं० १४ए माघ सुदि १० शनो श्रीमाल ज्ञातीय सं० पेता संताने मंण् ठाड़ा ना नाज नान्ना पुण् कान्हा सोजा सहितया नर्तु श्रेयले श्री श्रेयांस बिंब का प्र श्री पूर्णिमा पक्ष श्री विद्याशेखर सूरीणामुपदेशेन विधिना श्राः ।। [1388]] संवत् १४एए माइ सुदि ५ गुरों श्री श्रीमाल ज्ञातोय वीटवल व्य पाना सुत बयरसी नार्या नाही .... पितृमातृश्रेयोर्थ सुत मेलाकेन यात्मप्रेयसे श्री सुविधिनाथ वियं कागपिनं श्री नागेन्ड गठे श्री गुणसागर सूरिः शिप्यः प्रतिष्टिनं श्री श्री गुणसमुख सूरिनिः ॥ श्री सांतपुरे पितृव्य देवखवणीली! [ 15001 सं० १५०४ व फागण शु० ११ गुरौ दिन नादर गोत्र मा जादड़ ना नाताटी सारा राजा ताण लादू ... पुरा काज सहि निजपूयार्थ श्री वानुमन्य चित्रं का० प्र० भी धर्म गहे श्री विजयचं सूरितिः । 1:2007 सं० १५० ज्येष्ट दि दिने जकेदावी सानोरनी नायी करदे भाविक्या निज भर्तु जोषतीपुवा श्री चादिनाथ विज्ञानिक प्रनिः शानहाधिगत श्री निगम सूरि पट्टाकार प्रति ली जिनन्द मिः ! 7 संवत् १५१७ वर्षे माद सुदि १० बुधे श्री कोरंटगच्छे उपकेश झा काला पमार शाखायां व्यव० कुरुपालेन नार्या कमलादे सुत व्यव० विद्याधर वीरपाल प्रमुखकुटुम्बयुतेन स्वयोथ ( 1 ) [1401]] ॐ ॥ सं० १५११ वर्षे माघ वदि ए बोहरिया गोत्रे साण दातु पूरेण ... श्री विमलनाथ विंबं कारितं प्रण तपा नट्टारक श्री पूर्णचंड सूरि पट्टे श्री हेमहंस सूरिनिः॥ [1402] सं० १५११ फा शुण ए रवौ प्राग्वाट साण पेषा नार्या राजू सुत वीढाकेन जार्या कमा सुत दरपाल टाहा नरकीता जरमा कगतादि कुटुम्बयुतेन श्री संजवनाथ विवं खश्रेयसे कारितं प्रतिष्ठितं तपागल नायक नट्टारक श्री सोमसुंदर सूरि प्रांषज श्री रत्नशेषर सूरिभिः। [1403] सं १५१३ वर्षे माण व० ५ प्राग्वाट व्या तिहुणा ना कर्मा पुत्र हासा नगिन्या व्यक दमा पठ्या श्राप मनी नाम्न्या श्री वासुपूज्य विवं खश्रेयसे का प्रण तपा श्री रत्नशेषर सूरिनिः॥ सा सोना ना सहजलदे पुण् सादाकेन भ्रातृ चउड़ा जादा नेमा सादा पुण् रणवीर वणवीर सहितेन स्वश्रेयसे श्री चंडप्रन चिंबं कारि० श्री कक्क सूरि पट्टे श्रीपाद संवत् १५१७ वर्षे वैशाप सुदि ३ गुरु श्री श्रीमाल ज्ञातीय बजोला जार्या देमा सुत [1404] [1405] श्री मुनिसुव्रत स्वामी विवं कारितं प्रतिष्टितं तपागच्छनायक हारक श्री सूरसुंदर सूरिभिः । श्रीपत्तन वास्तव्य शुनं नवतु ॥ श्री। [1406] ॥ संवत् १५१७ वर्षे माह सुदि १० दिने श्रीमालवंशे । पदवड़ गोने सा मेया जाये ( 3 ) मेलाही पुण् सा वीरमेन जार्या पीमा पु० साप लमरा सहसू श्रेण श्री शांतिनाथ विंग प्रण श्री बृहले श्री रत्नाकर सूरि प० श्री मुनिनिधान सूरि श्री मेरुप्रज सूरिनिः ॥ [1407] सं० १५५१ वर्षे वैशाप सुण १० सोमे ओसवाल ज्ञा० सा गकुरसी ना वीसलदे सुत सा धनाकेन नार्या सोनाई पुत्र साप हांसादियुतेन सुता बाबू श्रेयसे श्री शीतलनाथ विवं कारितं प्रति श्री वृहत्तपापके श्री उदयवस्न सूरिनिः । [1408] संवत् १५३३ वर्षे वैशाप बदि ५ श्री संडेरगठे ओसवाल ज्ञा० राणु माथेच (?) गोत्रे केलादेन नणा आल्हू पुत्र गोकाला उदेहजयनादर्पदयुतेन आत्मपुण्यार्थ श्री चंप्रन स्वामि विवं का प्र० श्री " सूरि संताने श्री शांति सूरिनिः । [1400] सं० १५३३ माघ सुदि ५ श्री आदिनाय विंचं कास्तिं प्रतिष्टितं श्री जयशेपर मुनिभिः। [1410] सं० २५३६ वर्षे ज्येष्ट सुदि लोमे श्री ५ माल ज्ञा० महाजन । सदा ना० मृदयदे तुत वीका आका महा वीक्षा ना कपूर सुन तात्रा कान्हा जनामहितेन मातृपितृश्रेय श्री विमलनाथ वियं का प्रनि श्री चैत्रगन्ने श्री लक्ष्मीनागर सरित चांदनीया मारि गोयं वासर (?) वा । [1411] ॥ लं० १५३६ ६ माघ नदिए नो प्राः । हानि ना नया नाकार ता० सूरा पान्द सा जोगा जार्या कमी मुन उन प्रमुरदयुनेन बंधेय श्रीधर्मनाथ विवं कारितं प्रतिहितं प्र० दरितिः॥ ॥ श्री।

(र) [14121 सं० १५५४ वर्षे वरडउद वास्तव्य केश झातीय गांधी गोत्रे सा सारंग जार्ग जाही पुत्र सा० फेरू नार्या सूहवेदकेन नाराजयुतेन श्री आदिनाथ विवं कारितं प्रनिधित श्री अंचक्षपदे श्री सिद्धान्तसागर सूरिभिः । [1413] सहदे सं० १५५७ वर्षे वैशाष सुण्६ शुक्रे जकेशवंशे जणसाली गोत्रे जण गुणराज पुजा पु० ना हासा न राजी घु ना वसुपाल ना० लीला पुन लालिग सुश्रावकेण जा जीमी प्रमुखपरिवारयुतेन पितृश्रेयोर्थ स्वपुण्यार्थ श्री सुविधिनाथ विवं का प्रतिष्ठितं श्री। [1414] सं० १५५ए वर्षे वैशाप शु० ७ बुधे उपकेश ज्ञाo श्रेण सालिग सुत श्रेण नरवद जा पेतृ पुत्र राणाकेन पितुः पुण्यार्थं श्री सुमतिनाथ विध कारितं प्र० श्री वृहाच्छे बोकडिया चंटुकेन श्री श्री श्री मलयचं सूरि पट्टे श्री मणिचं सूरिभिः ।। [1415] सं० १५६७ वर्षे माघ सु० ५ दि० श्रीमाल धांधीया गोत्रे साप सारंग पुरा सा दोदा मा0 संपूरी पु० सा मारण सा कदा सा गला सा मालण पु० गोपचंद्र श्रीचं इत्यादिपरिवृतान्यां सा ऊदा० मा टालान्यां श्री सुविधिनाथ वि० का० स्वपितृव्य भदा श्रीनी युवा प्रतिष्टिनं श्री जिनराज सूरि पट्टे श्री जिनचंड लूरिभिः ।। [1418] सं. १८३१, वर्षे पोस सुदि ५ शुभ दिन उ० शीलोचा गोत्र गोत्रजा बायण सा० पना जा चांगू पुः दाना नाय कानमा पुल कमा थयाई लाता पाति स्वयसे श्री अजितनाथ विर्य कार श्री मंगर गाणे कवि श्री ईश्वर मुरिनिः॥ श्री ॥ श्री चित्रकूटर्गे ।

( ३ )
धातु के यंत्र पर।
+
[1417]
॥ संवत् १७५५ वर्षे आश्विन शुक्र १५ दिने सिद्धचक्रं यंत्रमिदं प्रतिष्ठितं वा। लावण्य
कमल गणिना। कारितं श्री नागोर नगर वास्तव्य लोढा गोत्रे ज्ञानचंडेण श्रेयार्थ ॥श्रीरस्तु॥
[1418]
ॐ ॥ श्रीमन्त्रि ' गच्चे संगन (?) व सूरीणां महप्प गणिना न
श्री शान्तिनाथजी का मन्दिर-दादावाड़ी।
पञ्चतीधियों पर।
[1410]
॥ सं० १३१ माघ शुद्ध ५ कुशल पु
श्री शांतिनाय विवं।
[1420]
संवत् १४४३ वर्षे वै० सुण १३ श्री मूलसंघ
[1421]
सं. १४३५ या दिवशीमा दार माना जा
हरपति नान्युन भेट दानिद ना पूराः नुन पर्वतन त्या का निज किमान
श्री मुनिमुना विवं कारिनं श्री बाल ना. श्री श्री श्री गोमगंदर ति
[:--
॥ १४९६ कार - ५ श्री श्रीनार डानीय श्रे मामा नाराबी

मुरार।
वादहणदे सुत करमसी
देवसीहान्यां निज पितृश्रेयोर्थं श्री आदिनाथ बिंबं कारितं प्रतिष्ठितं श्री सूरिनिः ॥ मग
नगरस्थोऽनूत् अधुना च मुरारि ठावण्यां वास्तव्य धाडीवाल गोत्रीय शंजुमल सुजान
( )
युतौ सालगगदा श्री सुविधिनाथ विवं कारापितं श्री मुनिसिंह सूरीणामुपदेशेन प्र० श्री
शीलरत्न सूरिनिः ॥ शुजं ॥
[1428]
॥ सं० १५३६ वर्षे माह सुदि ५ ओसवालान्वय सूराणा गोत्रे स नाव्हा ना नावान
ज० । यग पलषु सनषन कारापित वासुपूज्य वि० धर्मघोष गछे श्री - सूरि प्रतिष्ठितः
पञ्चतीर्थियों पर।
नवतु ॥॥
चरण पर-दादावाड़ी।
सं० १९२१ शा० १७७६ माघ मासे शुक्लपके पष्टयां - ६ पूर्व तु मरुदेशे मेमतेति नान
महान्यां युगप्रधान दादा श्री जिनदत्त सूरीणां श्री जिनकुशल सूरीणां च पादन्यासी
कारापिता प्रतिष्टिता च वृ। न । खरतरगठीय श्री जिनकल्याण सूरिनिः
नहिप्य पं० हुकुमचंझोपदेशात् ।
[14241
[1425]
ज० माणिक्यचंद

( ए ) ग्वालियर (गोपाचल ) दूर्ग। शिलालेख । ७ [1426] + पहला पत्थर। (१) ॐ नमः पद्मनाथाय । हर्षोत्फुसविलोचनैर्दिशि दिशि प्रोजीयमानं जनै दिन्यां विततन्ततो हरिहरब्रह्मास्पदानि क्रमात् । श्वेतीकृत्य यदात्मना परिणतं श्री पद्मन्नूभृद्यशः पायादेष जगन्ति निर्मलवपुः श्वेतानि रुपश्चिरम् ॥ १॥ मौलिन्य- स्तमहानीसशकलः पातु वो हरिः । दर्शयन्निव केशस्थ नवजीमूत कर्णिकाम् ॥२॥ मुक्ताशैखवलेन क्षितिति (१) सफयशो राशिना निर्मतोऽयन्देवः पायामुपायाः पतिरतिधवलखष्ठकान्तिर्जगन्ति । मन्वानः सर्वधैव त्रिभुवन विदितं श्यामता पहवं यः शङ्के खं वर्ष चिहं मुकुटतट- मिवन्नीलकान्त्या विनति ॥३॥ इदं मौलिन्यस्तं न नवति महानीलशकलं न मुकाशैलेन स्फुरति घटितश्चैय (३) भगवान् । उपाकर्णोत्सीकरणलुनगं नीलनखिनं वहत्यद्याप्यस्याश्चिरविरहपाएदू- कृततनुः ॥ ४ ॥ श्रासीधीचलघुकृतेन्प्रतनयो निःशेषनूमीभृतां वन्यः कठपघात. वंशतिखकः क्षोणीपतिर्सदमणः । यः कोदएकधरः प्रजाहितकरश्चके स्वचित्तानु- गाङ्गामेकःपृथुवत्पृधूनपि इगजुत्पाद्यपृथ्वीभृतः ॥ ५॥ तस्माजधरोपमः क्षिति (४) पतिः श्रीवजदामानवारोर्डितवाहुदण्नविजिते गोपानिपुर्गे युवा। नियजिंपरि भूय वैरिनगराधीशप्रतापोदयं यछोरबतसूचकः समनवत् प्रोडोपणानिनिमः ॥ ६ ॥ हाल रिले तेता राजेदवार मित्र परिपन्स में थे। पर पुन्नर पर दुभाय मोक्ष प्राजिरिदेनदे। +12-Jyes 11:

धूली वितानैः सममेव पार्थ कोदएफविद्यया । धर्मराजञ्च सत्येन स युवा विनयाश्रयः ॥ १४॥ सुनुस्तस्य ( ६ ) न तुलितः किल केनचिदप्यन्नूङगति जूमिभृतेति कुतूहलात् । तुलयतिस्म तुझा पुरुषः स्वयं खमिह वर्म विशुद्ध हिरण्मयैः ॥ ॥ ततो रिपुध्वान्तसहस्रधामा नृपोजव- (५) न्मङ्गलराजनामा। यझेश्वरैकप्रणति प्रजावान् महेश्वराणाम्प्रणतः सहस्त्रैः॥४॥ श्री कीर्तिराजो नृपतिस्ततोनूद्यस्य प्रयाणेषु चमूसमुत्थैः । चित्रं मित्रस्य वैवर्ण्यमद् छिचश्च ॥ ५॥ किं मोस्य कथामृतं नरपतेरेतेन शौर्याब्धिना धत्ते मालवनूमिपस्य समरे सङ्ग्रामतीतोर्जित: यस्मिन् रङ्गमुपागते दिशि दिशि त्रासा- (६) कराग्रच्युतैमीणाः स्वगृहाणि कुन्दनिकरैः सञ्चादयाञ्चक्रिरे ॥ १७ ॥ अद्भुतः सिंहपानीयनगरे येन कारितः। कीर्तिस्तम्न इवानाति प्रासादः पार्वतीपतेः ॥ ११ ॥ तस्मादजायत महामतिमूलदेवः पृथ्वीपतिर्जुवनपाल इति प्रसिद्धः । श्री नन्ददएक गदनिन्दितचक्रवर्तिचिढेरलंकृततनुर्मनुतुल्यकीर्तिः ॥ १२॥ यस्य ध्वस्तारि जूषाखां सर्वाम्पालयतः (७) प्रनोः । नुवन् त्रैलोक्यमवस्य निःसपत्नमऊगत् ॥ १३ ॥ पत्नी देवव्रता तस्य हरेर्लक्ष्मीरिवाजवत् । तस्यां श्री देवपालोजूत्तनयस्तस्य नृपतेः । दानेन कर्णमजयत विशुबुद्धिविनव: पुण्यैः प्रजानामतन्मान्धातेव स चक्रवर्तितिलकः श्रीपद्मपाल: प्रतुः यत्स्वास्येपि क- (७) रप्रवृत्तिरपरस्येतीव यश्चिन्तयन्दिग्यात्रासु मुहुः खरांशुमरुणं सान्त्रैश्चमूरेणुभिः॥ १५ ॥ कृत्वान्याः स्ववशे दिशः क्रमवशात्समापतिर्दक्षिणानुखिताचवसन्निज्ञानविरत वाजिबजैः। उद्भूतान् पतत: प : संप्रेक्ष्य रेणूत्करान् जूयोप्युद्भटसेतुबन्धन धिया त्रस्यन्ति ... ॥ ६॥ तस्येन्युतिसुंदरेण यशसा नाके सुराणांगणे सौवर्यत्रमशीलखमन- 2010 .... ॥ เm .. ( 6 ) (ए) जयादप्राप्नुवत्यः प्रियान् । नूनं शक्रपुरः सुरासुरवधूसद्धाः श्रिये साम्प्रतं यंति ये प्रथमत: सर्वा वपुः संश्रिते ॥ कैदृप्ता " पादपां गाव:कामघा कैश्चि- तितार्थप्रदाः। पूर्णाः कस्य मनोरथा श्ह न कैः "मुना पूरिता वीरो यानि तदस्ति तद्गुणवतः कस्य गुमादीन्यपि। श्रुत्वा न पद्मनृपतिं परिरक्षितारं प्राप्तोदयोपि यदसौ वैत नम्रनावः। (१७) योद्यावि तनुर्विपिनेष्यशो ज्रमः कुलासचक्रे च लान: पुण्यार्जनेषु च । काविन्यं कुम्नेषु क "" शासबिमर्दिनीम् ॥ श्रसम्मतो .पीमा साधुर्न निस्त्रिंशपरि .. तोपि बलग्नेन धनुर्न चार्सि तथापि या वैरिंगणं जिगाय । सय (११) पाधिप शिरोमणि नि । लोकानुरागयशसापि प्रतापं विस्तारयां यदसि ॥ वलयानीव नारीणां हिमानीव ननःश्रियः । " स विमृश्य नदीपूरचत्वरे सम्पदायुषः पूर्तधम्में मतिं चक्रे जिघृकुरनयोः फलम् ॥ प्रजा त्वते (१२) न क्षितितिलकनूतं न जवनं -- कारितमदः। मिव गिरा यस्य शिखरं समारूसिंहो मृगमिव तृ- मशितुम् ॥ वर शिखरस्पार्डिनो हिममएम -- त्यावतीचं शशिकरधवला वेजयन्ती पतन्ती। निर्वातं नाति नूतिच्चरितनिज- तनोवदेवस्य शम्जोः खर्गामव पिट्नस्फुटवि- (१३) कटजटाजूटमध्यं विशन्ती ॥ तदेतद्ब्रह्माएमं स द नविता परजजुवः पुनर्वयं बोदालो वयमिद - वियति । तदिदमुररीकृत्य सकलं ध्रुवं संसेवन्त हरिपदन 'तममी ॥ कनकाचसः शुनविद्यावन्तः स्थित:श्रीपतिर्विज्रायोहिजसत्तमानुदधि- जावासो नृसिंहान्वितः। निर्माता खवृतः समस्तविबुधलब्धप्रनिष्टेग्यं प्रातोश्र (१४) धरातले तममहो कर हरेः कस्मताम् । हिजपुरन्चेषु प्रतिष्टितवष्टषु पद्मपाम: युर्वेव देवप्रतियनाश " वसूब ।। तस्य नाता नृपतिर नवत् सूर्यपासस्य मूनुः श्री us .... .. सश्च - . .

. समयावसन्नाः। ........ सम्पालयस्य निश (२०) गदन्ति मधु द्विषोमी श्यामाजिरामतनुरस्य मलप्रवोधः पुण्यं रतमिदं विहितं त्वयेव 10) गोपाः प्रकृतनिलयः श्री महीपालदेवः। यम्प्राप्येव प्रथितयशसन्तावजूतां सनाचे सोयं त्यागो हरिर विसुतानावस्थोऽचिरेण । सृष्टिङ्कुर्वन्नमात्यानां विप्रा. (१५) णां स नृपस्थितिम्। प्रलयं विहिपामासीद् ब्रह्मोपेन्डहरात्मकः यत्र धामनिधौ राशि पालयत्यवनीतलम् ॥ .... मुझहन्ति शिरसःखलु राजहंसाः सृष्टास्त्वया पुनरिमाः नाथ प्रजा सुमनसां प्रथमो सि त्वं सिद्धवीररसता- (१६). मरसोद्भवस्य ॥ लक्ष्मीपतिस्त्वमसि पङ्कजचक्रचिलं पाणिजयं वदसि नूप जुवं विजषि। श्यासं वपुः प्रथयसि स्थितिहेतुरेकस्त्वं कोपि नीतिविजितो मर्थिजनस्य कार्य रामश्रिया त्वमसि नाथ मु ... । सङ्कर्षणस्त्वमसि विछिपदायुधन्तं त्वं कोसि सच्चरितहालहलायुधस्य ॥ " ख्यातारति रूपं तवातिश (१७) यविस्मयकारिदेव । वं मीनसिहपुरुषोत्तमसम्नवोसि कस्त्वं क्षितीशवरशंकर सूदनस्य ॥ नूनृत्सुता पतिरसि द्विषतां पुराणि नेता खमीश --- म्। जूर्ति दधास्य मलचन्झविजूषिताङ्गः कस्त्वं सदम्बुजदिवाकर शङ्करस्य ॥ त्वं तेजसा शिखिन मिझमधः करोषि शक्तिं दधासि । वन्तारकं रिपुबलं (१७) वलानिहंसि कस्त्वं नवीनलनीलमलब्धजन्मा (2) ॥ त्वं वजनृत्वमसि पक्षनिदयः शेषं जूमीभृतां विवुधबन्धगुरुप्रियोसिर्गाचरणोसि कोसि त्वं जीमसाहससहस विलोचनस्य । ख्यातं तवेश बहु पुण्यजनाधिपत्यं कान्तालकावलिनिराप्ततमः सुशुप्ता। त्वामामनन्ति परमेश्वरबहसख्यं त्वं कोसि सद्गुणनिधानधरा- (१५) धिपस्य । तेजोनिधिस्त्वमसि जूमिनृत: समग्राः क्रान्ता: करैः प्रयतमुग्रतरैस्तवेश । प्राप्तोदयः सततमर्थिजनस्य कोसि त्वं कल्पचूधरसरोरुहबान्धवस्य ॥ जनतान नोत्पलानामाप्यायिताखिलजनः करमाईवेन । वं शश्वदीश्वरशिरस्तपदा पादस्त्वं कोसि मयजुवनेश निशाकरस्य ॥ त्वामंशमीश नि- ." आनन्ददोसि 1.1 ( ए ) वं कोसि सत्यधनसत्यवती सुतस्य । ... न्ति सुरसिन्धुरियं समुप्रान्तन्वयो- न्ननियमो गनिनः स्ववंशः। पूर्व पवित्रवनके विहिताश्च कोसि वंशस्थलब्धपरता "लगीग्धस्य ॥ एतत्त्वया कृतमताङ्गमासुधिस्त्वं व्याप्ता महीह (५१) "शश मनोजवेस्ते पुण्यावतारकरणतर्दशास्वस्त्वं कोसि हन्त रिपुलाघव राघवस्त्वम्। धर्मप्रसूस्त्वमसि सत्यधरस्त्वमेकस्त्वं वासुदेवचरणानदत्तचित्तः । त्वं कोसि विप्न- जनले वित्तशेपत्तृति: संग्राम निष्ठुर युधिष्ठिर पार्थिवस्य ॥ वं जूरिकुञ्जरबलो जुवनैक- मस "" जूपित तनुर्नुपपावनोति । प्रच्छन्न इतरा पत्थर । । मामसमा. .... : कस्त्वं कवीन्द्रकृतमाद कादरस्य। पक्वस्वमीश नुवि धर्मभृतां वरः सत्वामिकारिगुणदर्पहरस्त्वमाजी । वं लबराजपृतनाविजयाप्तकीर्तिस्त्वं कोसि सुन्दर पुरन्दरनन्दनस्य । शेधनाविदतत्ववेश यत्नः परार्जनयशः प्रसरे निरोद्धम्। त्वं कोसि जनित - कर्तन किर्तनसम्जयस्य । (२) यस्त्वमसि कर्म गतीरतापान्त्वं पानि पार्यमममिभृतः प्रविष्टान् । शन्तः स्थितस्तव दरिः सततं नरेदा कम विदीहरिपुजागरसागरस्य ।। गनमत्ववृत्तिस्त्वं राजहजारः प्रदिनीपादः । दीना रिजाकार निम्म्म.नि. मिदिकानुः कस्त्वं महीपतिमाहगाधिपन्य। दानं ददाति सिटी बन ग. शोनस्त्वं दन्तपालिकरदा- (३) हतारिदः दोषीभूतो जपनि तुमनमा नरेन्ड द कामिग्विादामा यामाग्य ! सन्न प्रियस्त्वमलि मित्रतप्रमोटर गदंगसमतादमा । ARE एलजमोति जनागिनः बन्द मिलायमुपासना निक सुनिल दवा । . p - जगीरथनृपेणानायि निम्नां महीम् । आश्चर्य केनोपमीयते । केयूरं वलनूपाखनुजदएमे विराजते किरीटमिव निधासि विजय- (९) वतासिकरित्थमजिष्टुतेन संपूजितामर्त्यगुरुहिजेन । विमुक्त कारागृहसंयतेन विदीर्थ- नूताच्यदक्षिणेन । तेनानिपिकमात्रण प्रतिजशेष्य स्वयम् । पद्मनाथस्य सिद्धि ( ए ) (४) समरजैरवकैरवस्य ॥ त्वं पश्यतां हरसि देव मनांसि सश्वन्मङ्गट्यनस्वमसि निर्मलतानिरामः । कोसि प्रसीद बहु सद्गुणरत्नयोनिस्त्वंकञ्चपारिकुलभूषण नूषणस्य ॥ धात्रा परोपकरणाय विसृष्टकायः सहायजन्मसमलंकृततुङ्गगोत्र । ब्रूहि " मवनीश्वरवन्दनीयस्त्वं कोसि सूर्यनृपनन्दन चन्दनस्य ".. ॥ नत्वाशु शुभहृदय प्रथितो. (५) प्रमायस्त्वं जानुना क्षतवृषो न जमीकृताहस्तेनास्तु नाथ हरिणोपमितिः कथं ते। नित्यं सन्निहिते कृपाणतमसा प्रायोनियेत स त्वत्रासाद् जुवनैकनाथ हरिण स्तस्योदरे प्राविशन् । मूर्तिस्ते च कलङ्किता सजमनां धचे ... : शङ्खस्थैर्विदित स्तथापि नृपते राजा त्वद्भुतः विमुखतां पार्थेन नीताः परे व्यसिनस्तुतिरर्जुन (६) स्याविहिते व्यज्ञाथि पूर्व किल तत्सम्यक् प्रतिजाति सम्प्रति पुनः श्रीमन्मही पालवत् त्वामालोक्य सहस्रशो रिपुबलं निघ्नन्तमेकं रणे॥ किं बमोपि - स्वं नीतिपात्रं परं वृत्तान्तं जगतीपतेरनिसृणात्मप्रियाणां शृणु। कीर्तिळम्यति दिक किं चित्रं जुवनैकमल यदि पुनरेतदीश यदि ते निम्नान्मही मंगलापूर्द्ध कीर्तिणीकमललोकं त्वया प्रापिता। सर्वात्मना विद्विषो विशिखैः संमूर्षितस्याहवे । (७) नताश्चर्यकृत् ॥ अत्यंबुधिजवलैमत्यादित्यनवन्महः । श्रियः । .... जुवनगुरोस्तोत्रमकृथास्तदेष यशः शरीरम् ॥ स. मध्ये चित्रं नात्र फल अतिसिंहलवशौर्यमतः कन्यायाः ॥ 6.

( १ ) (१७) प्तर्पिता ब्रह्मपुरी च तेन शेषान् विधायावनिदेवसुख्यान् । प्रवर्ति .. नमतन्धितेन मृष्टान्नपानरतिधार्मिकेण ॥ श्री पद्मनाथस्य सलोकनाथ " नैवेद्यपाका" विला (११) सिनीवा " नादिर्यघाईतः पादकुलस्य मूर्तिम् । स पद्मनाथस्य पुरः समग्राम- कल्पयत्प्रेक्षणकायनूपः ॥ पापाणपल्लीं प्रविनज्य सम्यग् देवाय "" । सम्पाद- यामास तथा विजेन्यः ।। (१२) गतो योगीश्वरांगोद्भवः ख्यातः सूरिसलक्षणः क्षितिपतेः सर्वत्र विश्वासनूः । आधारो विनयस्य शीलनवनं जूमिः श्रुतस्याकरः स्वाध्यायस्य क क वसतिः (१३) हीपाले नटो विप्रास्तस्मिन् ग्रामे प्रतिष्ठिताः । तेषां नामानि लिख्यन्ते दिसूरः शासनोदितः ॥ देवलब्धिः सुधीराख्यस्ततः श्रोधरदीक्षितः ॥ (२४) ." रामेश्वरो हिजवरस्तथा दामोदरो हिजः। अष्टादशैते विप्राश्च ""हिजः । पादोनपदिका .... ऐकौसुरार्चको । हावर्द्धपदिनावेप विप्राणां संग्रहः कृतः। ""दद्धपदं नृपः। विधाय "कायस्य सूरये देवाय दत्तः सौवर्णो राज्ञा दत्तैः समाचितम्। 'हरिएमणिमयं नुप- कं ददौ । रत्नविचित्रं निष्कञ्च निष्क ...: स नृपतिः ॥ प्रा-केयूरयुगलं रत्नैर्बहुचिराचितम् । काणानां चतुष्कञ्च महाईमणिन्नूपितम्। .... द्वितीय मनि स्य सौवर्ण केववं यथा। कणानां चतुप्कञ्च नीलपट्टयं नया । सैः पंचनिर्युता। धारापात्रश्च कां। ॥ ... चतुष्टयम्। सुवर्णएकत्रयं देवपरिवारविहपएम् । पन्मिान्जमानपत्रीनं विनोः ॥ निवेदय तानपट्टे च तन्मयनवम ....। प्रतिमा नित्यं मति ... गजनी प्रतिमा का द्वितीया " युती। राज मयी चान्या नाः प्रयन्नन तिस्रोपि पूज्यते वेश्मनि । तत्र नावनयं देवं दीवार्य मस्टिकानम। . -- --

পালন
। कविता
(१५) 'लङ्केश्वरवान् द्वितीयां विव्रत्सुहृता मणिकएठसूरैः। पञ्चासे चाश्विने मासे
कृष्णपदे नृपाझया। रचिता मणिकर्णेन प्रशस्तिरियमुज्ज्वला ॥ अङ्कतोपि ११५०
" खिलां महीम् । यस्य गीर्वाणमन्त्री च मन्त्री गौरो जव । प्रशस्तिरियमुक्ती
श्री श्रादिनाथाय नमः ॥ संवत् भए वर्षे वैशाख - 9 शुके पुनर्वसुनत्र
श्रीगोपाचलदुर्गे महाराजाधिराज राजा श्रीतुंग संवर्तमानो श्रीकाञ्चीसंघे मायूरान्वयां
पुष्करगएनहारक श्रीगणकीर्तिदेव तत्पदे यत्यः कीर्तिदेवा प्रतिष्ठाचार्य श्रीपंडितरघूते
(ए)
(१७) ....क। ताम्रार्थपात्रहितयं तथा दत्तं महीनुजा। सधूपवहनाः सप्त घण्टाका
दत्ताः शङ्खाश्च सप्तैव ताम्रपात्रीचतुष्टयम् । स कांस्यनाजनं प्रादा
न्नृपतिः .. चामरं दएक" वृहच्चतुष्टयम् ताम्रमयं तास्ता । दत्ताश्च दशतन्मयाः।
..."देवोपकरणंडव्याणां संग्रहः कृतः ।
(१७) .."वापीकूपतडागादि " नानावनेषु च। दशमास तथा विंशत्यू. सर्वत्र मएमः।
ददौराजा नि "यते सर्व प्रवर्तते। अयं देवालयो नाम "स्फटिकामल
मीमांसान्यायसंस्कृतबुकिना । कवीन्डरामपौत्रेण गोबिन्दकं विसूनुना ।
मणिकर्णेनं सुनाषितसरस्वती। प्रशस्ति
॥ आश्विनबहुलपञ्च।
(२०)
वो सही पद्मशिल्पिना ।
मूर्तियों के चरणचौकी पर।
[1427] *
E
* श्री मादिनापी को वही मूर्ति पर पह लेख है।
lado-Aryans, Vol II, P 383.

( ए३ ) आलाय अग्रोतवंशे मोजलगोत्रा सा ॥ धुरात्मा तस्य पुत्रः साधु जोपा तस्य नार्या नाही। पुत्र प्रथम साधुझेमसी द्वितीय साधुमहाराजा तृतीय असराज चतुर्थ धनपाल पञ्चम साधुपाल्का। साधुदेमसी जार्या नोगदेवी पुत्र ज्येष्ठ पुत्र नधायि पतिकौल ॥ जनार्य. च ज्येष्ठ स्त्री सुरसुनी पुत्र मलिदास द्वितीय नार्या साध्वीसरा पुत्र चन्द्रपाल । क्षेमसी पुत्र द्वितीय साधु श्रीजोजराजा नार्या देवस्य पुत्र पूर्णपाल ॥ एतेषां मध्ये श्री॥ त्यादिजिनसंघा- धिपति काला सदा प्रणमति ॥ [1428] * (१) सिद्धि संवत् १५१० वर्षे माघसुदि अष्टम्या श्रीगोपगिरी महाराजाधिराज रा (२) जा श्रीडंगरेन्द्र देवराज्यप्र "" श्रीकाचीसंघे मायूरान्वये जट्टारक श्री। (३) क्षेमकीर्तिदेवस्तत्पदे श्रीहेमकीतीदेवास्तत्पदे श्रीविमलकीर्तिदेवाः .. (४) डिता सदाम्नाये अग्रोतवंशे गर्गगोत्रेसा पुत्राः दशाय श्रीवंद नार्या मालाह। तस्य प्रवसापेपार रा (६) तीयसा हरिवंदनार्या जसोधर हितये " णसी सा० सधा सा० तृती (७) य हेमा चतुर्थ सा रतीपुत्र सा० सह सापं मु सा० धंसा० सदापुत्र एसेवा (७) तेषां मध्ये साधु श्रीचं पुत्र शेषा तथा हरिचंड देवकी नार्या (ए) दीप्रमुखा नित्यं श्रीमहावीर प्रतिमा प्रतिष्टाप्य रितक्त्या प्राणमंनि ॥ (१०) अगुष्ठमात्रां प्रतिमां जिनस्य नक्त्या प्रनिष्टापयतो महत्या। फसं घ राज्य (११) मनन्त सौख्यं नवस्य विचित्तिरयो विमुक्ति ॥ गुनं नवंतु सर्वपां ।। [ 1428] (१) श्रीमतोपाचलगढनें ॥ महाराजाधिराज श्री मल्समिंद देवराज्य प्रवनमान मवंत् १५५२ वर्षे ज्येष्ट मुदि। (५) योः ये जीसा "" .... 1: ..

( ए४ )
(२) सोमवासरे श्रीमूलसंघे बलत्कारगणे सरस्वतीगच्चे कुंदकुंदाचार्यान्वये । जाभीर
नन्दिदेव तत् पट्टालंकार श्री।
(३) शुनचंड देव । तत्पट्ट न० मणिचंड देव । तत्पढे पं मुनि ... गणि कचरदेव तदनको
वाग्इ नेणीवंशे साल जार्या व
(४) युक पु ४ नेपांमध्ये अणंद नार्या उदैसिरि। पुत्र ६ लोहंगराम मुनिसिंघ अरजुन
बधगण मन्द नल्डू। महू नार्या ।
(५) पियोसिरि पुत्र पारसराम नायीं नव । पुनी पुत्र गमसि जायर्या नागसिरी । तृतीय पुर
न। नतुर्थ पुन गेपण ॥ सा प्रस्हु ।
12) नीकर वियं निर्मापिनं प्रणमति प्रीत्यर्थ ॥
4
मुहानीय।
पायाणा की मूर्तियों के चगाचोकी पर।
[14:20
मंत्र :: मदन महिन्द्रचन्डकन कना वादिना ।
[14]
न
- दाम महाराजाधिराज पाव वाट पाचमी **
.

( ए )
[1432] *
६॥ सिद्धि । सन्तु १४ए वर्षे बैशाख सुदि १५ दि - नर्मो मद्यावे वे र " करा
ब्रह्मजूता सर " गत्या र "
आदि अखंड ढा
औस्व
क"सुत
रिता मु वेढ
[1433]
११६० कातिक सुदि १३ गुरू दिने रतन लिषितं राजन ताड तधार दिवसम्मि
पंच चंझाना पसावे आदेसू संवतु १५५२ वर्षे चैत सुदी १० बुधे ।
व
...
मथुरा।
श्रीपार्श्वनाथी का मंदिर-धीयामंडि ।
पंचतीर्थयों पर।
[1434]
॥सं २३७५ । श्र० फूससीह नार्या माजू पुत्री लपमिणि मातापित यस श्री
शांतिनाथ का० प्र० ब्रह्माणत्व श्रीमदनप्रन सूरि पट्टे श्री विजयसेन सूरिनिः ।।
[1435]
सं० १३७० वर्षे माघसुदि ५ उमा सुनिती गोत्रे सा० पीमा पुत्र सा० भृणा जोजा"
श्रीजिनाना सूरि शिप्य श्रीजगत्तिलक सूरिभिः । " श्रीपद्मानंद मरिनिः ।।
[1436]
सं० १४६ वर्षे ज्येष्ट नुदि १० शुक्रे उपका ज्ञा व्य० जना पु० जगराम ना०
पूजपद पु० लोसाकेन पितृमात ध० श्रीशांतिनाथ वियं का प्रा वृद्धनं श्रीरामदेव
सूसिनः।
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तेजपाल पुत्र सा० कुयरपाल नार्या सालिगदे पुत्र रायमन श्रावकेण स्वश्रेयसे श्रीपार्श्वनाथ
सं० १७५२ पोष सुदी ४ दिने। वृहस्पति वासरे श्रीसिद्धचक्र यंत्रमिदं प्रतिष्टितं
सवाई जैनगर मध्ये वाण लालचंद्र गणिना कारित वीकानेर वास्तव्य कोगरी अनोप
( ए६ )
[1437]
सं० १५५३ व वैण् सु० ६ प्राग्वाट श्रेण वस्ता ना फडू सुतश्रेण सारंगेण जाण मरगान
पुत्र श्रेवीकादि कुटुम्बयुतन स्वश्रेयसे श्री कुंथुनाथ बिम्बं का प्रा तपागछे श्री रत्नशेवर
सरि पट्टे श्रीलक्ष्मीसागर सूरिति : ॥ जश्तपुर ।
[1438]
स० १५२७ वर्षे फागुण · · श्रीमालझातीय टामी गोत्रे स नाविनो पुत्र श्रीजागू
श्रावक श्रीआदिनाथ विवं का प्रा श्री खग्तरगछे श्री जिनसागर सूरि तत्पण् श्री सुंदर
सूरि पट्टे श्री हर्ष सूरिनिः ।
[1439]
सं० १५७ए वर्षे माघसुदि ६ शुक्रे वैशाष बदि ५ नसवंशे लापाणी गांधी गोत्रे सा
बिंवं कारित प्रतिष्टितं श्री अंचलग श्रावकेण श्री गुणनिधानसूरि उपदेशात् ।
धातुकी मूर्ति पर
[ 1440]
सं० १६०७ फाग सु० १० देमकीर्ति
धातुके यंत्र पर।
[1441]
चंद तत्पुत्र जेठमझेन श्रेयोथं शुनं नवतु ॥
m
...
-
।
.

( ए )
आगरा।
श्री चिंतामणि पार्श्वनाथजी का मंदिर-रोशन मोहरा ।
पंचतीर्थयों पर
[1442]
॥ संवत् १३७५ वर्षे वैशाख सुदी ६ बुधे श्रीमाल ज्ञातीय श्रेण अरसीह ना पामना-
पुत्र " वाहाकेन श्री पार्श्वनाथ विम्ब कारितं प्रतिष्ठितं श्री सूरि निः ॥
[1443]
॥ संवत् १५२४ वर्षे मार्गशिर बदी ४ रवौ उपकेश ज्ञातीय लिंगा गोत्रे सा पीघा ना
ऊदी 'पुसा चेडन ना सूवादे पु० शेपा सरूजन अरजन अमरास हितेन वपु
श्रीकुन्धुनाथ विम्ब का प्र० श्रीनपकेशगछे ककुदाचार्यसन्ताने श्री सिक सूरि फटे श्री कक्क
सूरि निः॥
[1444]
॥ सं० १५३३ वर्षे पोल सुदि १५ लोमे सिकपुर वास्तव्य योसवाल झानीय साप
नालण ना वानू सु वडाकेन ना० माई मुसूरा प्र० कुटुम्बयुतेन श्री सुमतिनाथ विम्य
कारितं प्रतिष्टितं श्रीवृक्षतपागडे श्री ज्ञानसागर सूरि पट्टे श्री उदयसागर सूनिलिः ॥
[1445]
॥ संवत् १५३६ व० ज्येष्ट वदि ४ नोमे श्रीश्रीमाली दोला रगना नपरिमन प्रायम ना०
इपारा सुत नैरवदालेन स्वश्रेयते श्री पार्श्वनाथ वि का प्रनि वृहनपा श्री उदयसागर
सूरिभिः॥
[1446]
॥ संवत् १५२ ला सीमा नाकार नंगांटर एधी यानि प्रमन्नि
म
1.

एत )
[1447]
॥ संवत् १५एर माघ सुदी ५ बुधवासरे श्री मूलसंघे न श्री जिनचन्म तदाम्ना
जसवाल इव्हा
कुवेसल श्री हेमणे
[1448]
॥ संवत् १६२ वर्षे ज्येष्ठ बदी २..." भी सुपार्श्वनाथ विम्ब कारापितं प्रतिष्ठितं श्री
वृहत् खरतरगबे नए श्री जिनन सूरिनिः ।।
[ 1440]
श्रीनवपद
॥ स १९३१ वर्षे आगरा वास्तव्य लोढा गोत्रे प्रतापसिंहस्य जाण मूल
कारितं प्रतिष्ठितं श्र) (?) विजयसूरी.... ।
धातु की चौविशी पर।
A
।
[1450]
॥ संवत् १५७४ वर्षे वैशाख सुदी दशमी शुक्र ओसवाल ज्ञातीय राका शाखायां बलह
गोने लंग रत्नापुत्र सा राजा पु० सं० नाथू जा बड़ा पुत्र सं० चूहम ना हीसू पु० स०
महाराज जा० संत्रा पुत्र सोहिल लघुत्रात मदपति ना माणिकदे सु० जरहपाल जाप
मलूही पुरा धनपाल स० हेमराज ना उदयराजी पु० संघागोराज भ्रातृ सेन्यरत्न माग
श्रीपासी पु० संघराज समस्तकुटुम्बसहितेन सुश्रावकेन हेमराजेन श्री धर्मनाथ बिम्ब
कारापितं श्रीउपकेश गो ककुदाचार्यसन्ताने प्रतिष्ठितं न० श्री सिद्ध सूरिभिः ॥ श्रीरस्तु ॥
पाषाण की मूर्तियों पर ।
[1451]
.
उ सिद्धिः ॥ संवत् १६६७ ज्येष्ठ सुदि १५ तिथौ गुरुवासरे अनुराधा नक्षत्रे । श्रोस
वाल ज्ञातीय अरडक सोनी गोत्रे साह पूना संताने सा० कान्हड़ नापजामनी बहु पुत्र सा

गांत्र साह ..." (एए) हीरानंदेन बिम्बं कारापितं प्रतिष्ठितं श्री खरतरगडे श्री जिनवर्धन सूरि संताने ... श्री लब्धिवईन शिष्येन । [1452] श्रीमत्संवत १६२१ वर्षे वैशाख सुदी ३ श्री आगरावासी उसवाल ज्ञातीय चोरमिया पुत्र साप हीरानंद नार्या हीरादे पुत्र सा० जेठमल श्रीमदंचलगळे पूज्य श्रीमद्धर्मममूर्ति सूरि तत्पद्वे पाषाण के चौविशी के चरण पर । [1453] संवत रदश ज्येष्ठ शुक्ल १३ गुरुवारः श्री सिंघाड़ो वाई ने बनाया। श्री आगरा वास्तव्य व्य संघपति श्री श्री चंपालेन प्रतिष्ठा कारिता । शिलालेख। [1454] ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ संवत् १६७७ वर्षे आसोज सुदी १५ श्री अर्गलपुरे जला. सूदीन पानिलाइ श्री अकबर सुत जहांगीर सुत लवाई साहिजा विजयराज्ये " राजद्वार शोनक सोनी ... श्री होरानंद ... श्री जहांगोरस्य गृहे कृतं। तत्र तस्य नंदनवनो- शानसमवाटिकायां निज धनत्य नार्या सोना सुत निहालचंद नार्या मृगां खोलंग पुत्र चिरं लहसमव सना श्री गंगाजल वारि पूरपूरित निर्मल कूपः कारापितः ॥ श्राचं. सार्क यावत्तिष्ठतु ॥ [1455]* १॥ श्री सशुरुभ्यो नमः ॥ सत्पट्टोत्तुंग,गोदयं शिग्वरि शिखा जानु विवोपमाना जैनोपज्ञाः स * बड़े मंदिर के बगल में जो उड़ाई काम को नई बेदी और सभामंडप बने हैं उसो दाहिने नरी उपर में यह गिलालेग लगाया ? दुवा है। इसकी लंबाई अंदाज २ क्लि और वोडाई १५ स्टि है और मान्दी पत्थर है। गिलालेग के निचे ४ यंत्र है (१). का (२) १५ फा (३) ३४ ला और (५) १६ का सुदा हुवा है। .... .... ".. we

..
२०। श्रीसंघमरुसशो धर्मे निर्मापय जिननवनं करोति बहुक्तिः वात्सव्यं ६ दिगष्टक
२१। वर्षे माघशुक्र चतुर्दशी बुधवारे च पुप्यर्वे स्थापितोयं जिनेश्वरान् ७ श्रेयः कल्या
सुजन माचे अवाग्म इस यात माह सुदी दस च्यार बुद्ध पुप धरी दहा
( १०४ )
२। मं चञ्चरित चित तपस्तेजसा तप्यमानाः नूनं नंद्या सुरैरेते जुवि यशविमला राग
राजीव इंसा॥
३। श्रेय : श्री हीरनामा विजयपदयुता सूरिवंशावतंसाः १ नहारक श्री विजयेष युक्तः
જી
४। धर्म सूरी जगति प्रसिद्ध ः तत् प्राज्यराज्ये प्रगुणी कृतो यः श्री संघमानन्द विकास
हेतु । श्री
५। हीरवंशे जुवि कीर्तिविश्रुतं यशोत्तरं यस्य समीक्ष्य मानवाः पश्यंति नेत्रैर्न सुधाकर
वरं श्री पा
६। उकश्रेशिपुरन्दरप्रज्जु : ३ श्रीमेघनामा नुवि पाठक प्रनु प्रसह्य पापं दहतेस्म कामदः
महादव
। वन्हिरिव स्फुरद्युतिः ज्वलत्प्रतापावलि कीर्तिममलं ५ तत्पट्टे विबुधार्चितो विजय
मेरुनामा मुनी तधियो मणिसदृशौ शुन्नमति माणिक्य नानू
कृशायधीति कु
शलो जैनागमे यन्मति तहाक्यं श्रवणेन निर्मलधीयां निर्मापितोयं गृहं ५
थकव्यराबाद पुरे
मिने
नयं
18 मया ३१ प्रथम वर्मत सिरी सीनस जू देवहु की प्रतिमा नगन गुन दम
नी हे याग
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जयौ तान्यां शिष्य
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दार
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४॥
( १०५ )
पाल स्वर्णपालौ। धर्मकृत्य परायणौ। खवंशकुजमार्तडौ ।
प्रशस्तिसिख्यते तयोः
।३। श्रीमति हायने रम्ये चर्षि रस
५। नूमिते । १६७१ षट् त्रिंशत्तिथौ शाके। १५३६ । विक्रमादित्यभूपतेः । ४ । राधमासे
वसततॊ शुक्लायां तृतीया तिथौ । युक्ते तु
६। रोहिणी तेन । निर्दोषगुरुवासरे । ५। श्रीमदंचलगवाख्ये सर्वगष्ठावतंसके । सिद्धा
न्ताख्यातमार्गेण । राजिते विश्वविस्तृते । ६ । उग्रसे
७। नपुरे रम्ये। निरातके रमाश्रये प्रासादमंदिराकीर्णे । सद्भातो झुपकेशके ।
सोढागोत्र विवश्वास्त्रिजगति सुयशा ब्रह्मवी
।। र्यादियुक्तः श्री अंगाख्यातनामा गुरुवचनयुतः कामदेवादि तुल्यः। जीवाजीवादि
तत्वे पररुचिरमतिर्लोकवर्गेषु यावज्जोया
। भंडार्कविंबं परिकरभृतकैः सेवितस्त्वं मुदाहि । । लोढा सन्तानविज्ञातो । धन
गजा गुणान्वितः। द्वादशत्रतधारी च ।
१०। कर्माणि नत्परः । ए । तत्पुत्रो बेसराजश्च। दयावान सुजनप्रियः । तुर्यवतधरः श्रीमान्
चातुर्यादिगुणयुनः । १० । नत्पुत्री का।
१.१.१ वहूनां च मुरागार्थिनां सदा । जेठू श्रीरंगगोत्री च । जिनाझा पालनोच्नुको ।।
ना जीए। सीह महाख्यो । जेत्वात्मजो बनूवतु
१२१ : । धर्मविदों नु ददो च । महापूज्यो यशो धनौ। १५ ।
जिनपदार्चन रतः । मनीपी सुमना नव्यो राजपा-
१६ ! व उदारबी: । १३ । थायर्या । धनदो चर्पनदास । पेमाख्यो विविध सोख्य धनयुक्त।।
साम्नां प्राज्ञी ही च । तत्वज्ञो ना तु तत्पु
1४1त्री १४। पानिधस्नयाय॑ष्टः । कल्पद्रुरिव सर्वदः ।
दयात्रुधर्मकम्मनः । १५। रेपश्रीम्नप्रिया
१. रखमा सीमाकाग्धारिणी । पतिव्रता पतो रक्ता। सुखशा रेवती निना। १६
श्री प्रविम्य नवीनम्य जिनाच ।
शुन्न ।
थासीच्छ्रीरंगजो नूनं।
राजमान्यः कुताधारी।

.. .. ( १०३ ) १६। ये । प्रतिष्ठा कारिता येन सत्श्रामगुणशालिना । १७ । सलो तुर्यबूतं यस्तु । श्रुत्वा कल्याणदेशनां। राजश्रीनंदन : १७। श्रेष्ठ । आणंदश्रावकोपम : । १७ । तत् सूनुः कुंरपालः किल विमलमतिः स्वर्ण पालो द्वितीय । श्चातुर्योदार्यधैर्यप्रमुः। २७। खगुणनिधि ग्यसौलाग्यशाली। तो छौ रूपानिरामौ विविधजिनवृषध्यान कृत्यैक- निष्ठौ । त्यागैः कर्णावतारौ निज. रए। कुलतिलको वस्तुपालोपमाहौँ । १५ । श्रीजहांगीरजूपासमान्यौ धर्मधुरंधरौ। भनिनो पुण्यकर्तारौ विख्यातो ब्रा- २०। तरौ झुवि । २० । यान्यामुप्तं नव देत्रे । वित्तवीजमनुत्तरं । तौ धन्यौ कामदौ लोके। लोटा गोत्रावतंसको । १ । अवा १। प्य शासनं चारू । जहांगीरपतेर्ननुः कारयामास तुर्धर्म । कृत्यं सर्व सहोदरौ । २५ । शालापौषधपूर्वावे । यकाच्यां सा श्। विनिर्मिता। अधित्यका त्रिकं यत्र राजते चित्तरंजकं । २३ । समेतशिखरे नव्ये शत्रुजयेदाचले। अन्येष्वपि च तीयेषु । गि ३। रिनारिगिरौ तथा । २४। संघाधिपत्यमासाद्य । तान्यां यात्रा कृता मुदा। महा सवसामय्या । शुद्धसम्यकदेतवे । २५ । तुरंगा २४। णां शतं कांतं । पंचविंशति पूर्वकं । दत्तं तु तीर्थयात्रायां गजानां पंचविंशतिः । २६ । अन्यदपि धनं । वित्तं । प्रत्तं संख्यातिगं खत्रु २५। अर्जयामासतुः कीर्ति। मित्थं तो वसुधातले। २७ । उत्तुंगं गगनातं वि। मचित्रं सध्वजं परं। नेत्रालेचनकं तान्यां। युग्मं चैत्य १६। स्य कारितं । २७ । श्रथ गयं श्रीधेचसग। श्रीवीरादष्टचत्वारिंदान में पटे । श्रीपावक गिरी श्री सीमंधर जिनवचसा । श्रीचके (वरीट ) १७। तवराः। सिद्धांतोक्तमार्गप्ररूपकाः । श्री विधिपक्षगष्टसंन्यापकाः। श्री यार्यरक्षित सूरय । १ । स्तलहे श्री जसिंह सुनिर श्रीधर्मयो । ::

'श्चतुर्जुज " पुत्री युगलमुत्तमं । ३३ । प्रेमनस्य प्रयः पतिप्रिया । ३६। तदंगजास्ति गंजीरा जादो नाम्नी स- ३। मंत्रीमुखपत्रीवा पुर्णश्रीप्रमुखनिजः। वधूजनेर्युतो नातां। रेपश्री नंदनी मदा (१०४) १७ प सूरि ३ श्रीमहेन्प्रसिंह सूरि ४ श्रीसिंहप्रनसूरि ५ श्रीअजितसिंह सूरि ६ श्री देवेंडसिंह सूरि श्रीधर्मप्रन सूरि श्री (सिंहतिलक सू) ए। रि ए श्रीमहेंप्रनसूरि १० श्रीमेरुतुंगसूरि ११ श्रीजयकीर्ति सूरि १५ श्री जयकेशरि सूरि १३ श्री सिद्धांतसागर सूरि १४ ( श्री नावसा) ३०। गर सूरि १५ श्री गुणनिधान सूरि १६ श्रीधर्ममूर्ति सूरय १७स्तत्पट्टे संप्रति विराज मानाः श्रीनहारकपुरंदराः स ३१। णय : श्रीयुगप्रधानाः। पूज्य नहारक श्री ५ श्रीकल्याणसागरसूरय रए स्तेषामुप देशेन श्रीश्रेयांसजिनबिंबादीनां ३२। कुंग्पालसोनपालान्यां प्रतिष्ठा कारापिता। विवं स्थापितमुत्तमं । प्रतिष्ठितं ३३। णामुपदेशतः । एए। चत्वारिंशत् मानानि सार्धान्युपरि तत्क्षणे। प्रतिष्ठितानि विवानि जिनानां सौख्यकारिणां । ३० । ३४। तु सेनाने प्राज्य पुण्यप्रनावतः देवगुर्वोः सदानक्तौ। शश्वतौ नंदतां चिरं । ३१ ॥ श्रय तयोः परिवारः संघराजो पु पु (नाः ३६। पेनसी नया। नेतस। विद्यमानस्तु सहीलेन सुदर्शन । ३।। धीमतः संघराजस्य । जस्विनी यशस्विनः। चत्वारस्तनुजन्मानः 2 झार्या पत्नीतु म दानी महाप्राइो ज्येष्टमझा गुणाश्रयः। ३७ । पुनः श्लोकाः। श्री श्रेयांसजिनेशस्य । ) मताः । ३५ । कुंरपालस्य स 13। मंडलं मनारंगमिहर्कयुक्त संत्र ...।

६ . ( १०५ ) श्री श्रीमंदिर स्वामी जी का मंदिर-रोशन महस्सा। पाषाण की मूर्ति पर। [1457]. (१) ॥ सं० १६६७ ज्येष्ठ सुदि १५ गुरौ॥श्रोसवा (२) स ज्ञाति श्रृंगार । अरडक सोनी गोत्रे (३) सा हीरानंद पुन सा निहालचंदे (४) न श्री पार्श्वनाथ कारितः सर्परूपाकार (५) श्री खरतरगहे श्री जिनसिंह सूरि पट्टे श्री (६) जिनचन्न सूरिणा। श्री आगरा नगरे धातुकी मूर्तियों पर । [1458] ॥ सं० १५३४ वर्षे माघ सुदी ५ श्री मूलसंघे कुन्दकुन्दाचार्यान्वये श्री जिनवरदेवाः तत् शिष्य सुनिरत्नकीर्ति उपदेशात् खएलवालान्वये पहाड्या गोत्रे सा तेजा जार्या रोहिणी पुत्रौ सा पूना पाव्हा नित्यं प्रणमन्ति ॥ [1459] । सं० १६४१ श्री सुपार्श्वनाथ बि० का प्र० श्री हीरविजय सूरिनिः । [1480] ॥संवत् १६७४ वर्षे माघ वदी १ दिने गुरुवारे पुष्यनक्षत्रे साह श्रीजहांगीर विजय मानराज्ये श्रोसवालज्ञातीय नाहर गोत्रे। संग हीरा तत्पुत्र सण अमरसी ला० अन्तरङ्गादे तत्पुत्र सा० साला ना सोनागदे युतेन श्री मुनिसुव्रतस्वामी विवं कारापितं प्रतिष्टितं जहांगीर महातपाविरूद्धधारक नहारक श्री ५ श्री विजयदेवसूरिन्तिः ॥ शुलं नवतु ॥ यह लेख धी पारवनार्य स्वामी की खेत पापाण की कापोत्सर्ग मनोज मूर्ति के बरणचौका पर मुदा हुवा है।

जोगाकेन पुत्रादियुतेन श्रा० श्रमरसहितेन श्री सुविधिनाथ विम्ब कारितं प्र० श्रीखरतरगा
॥ संवत् १५ वर्षे ज्येष्ठ वदी० सोमे श्री अलवर वास्तव्य उपकेश ज्ञातीय वृद्धशाः
रत्नदाम ना० सूरमदे श्रेयोऽथ श्री उकेशगठे कुकदाचार्यसन्ताने श्री सुमतिनाथ कारापित
पंचतीर्थयों पर
[14611
॥ सवत् १५०० बर्षे वै० शु० ५ उपकेशज्ञातीय सा० नानिग ना० महाड सुत सार
लाखा ना० लाखणदे सुत सा चाहडेन मातृ हासा सिधराज ना० चापलदेवी सुत वसुपा-
लादिकुटुम्बयुतेन पितृ श्रेयसे श्रीचन्प्रजबिम्बं का रितं प्रतिष्ठित श्रीतपागठनायक
श्री श्री
मुनिसुन्दर सूरिनिः॥
[1462]
॥ संवत् १५३६ वर्षे आषाढ सुंदी नवम्यां तिथौ उप० वीरोलिया गोत्रे सा मूमा
ना केव्ही पु० दशरथ नाम सा दशरथ ना दत्तसिरी पु० जिणदत्त श्री संजवनाच
विम्बं का प्र० श्री पट्टीवालगच्छेश न० श्री जोश्रण सूरिनिः॥
[1463]
संवत् १५५ए वर्षे महा सुदी १७ श्रीमालवंशे वहकटा गोत्रे सा तेजा पुत्र सा
श्री जिनहंस सूरिनिः॥श्रेयसे ।
[1464]
खायां यायत्रिएयगोत्रे चोरवेडिया शाखायां संसाहणपाल ना
सहलासदे पुत्र संग
वित्रं प्रतिष्टितं श्री सिद्ध सूरिनिः ।
चाविशी पर।
[1485]
" संवत् १९३६ ज्येष्ठ शु० ५ प्रा० झानीय संप पूजा नाय कौदै पुत्र सं० नजम जारी
+

( १०७) नायकदे पुत्र स खीमाकेन ना हरषमदे पुत्र परवंत गुणराज प्रमुखकुटुम्बयुतेन श्री आदिनाथ चतुर्विंशतिपट्टः कारितः प्र लक्ष्मीसागर सूरिभिः सीरोही नगरे धातु के यंत्रों पर। [1466] ॥ सं० १६०४ वर्षे शाके १४० प्रवर्त्तमाने आश्विनमासे वदिपः १४ दिने रविवासरे दीपालिका दिने श्री श्रीमालगोत्रीय साह श्री जयपाल सुत साह सोरंगकेन सुखशांति श्री हर्षरत्न समुपदेशेन श्री पार्श्वनाथ यंत्रं कारापितं प्रतिष्ठितम् शुनं जबतु ॥ श्रीरस्तु ॥३॥ [1467 ] ॥ संवत् १७५ वर्षे माघशुक्ल ५ गुरौ श्री गूर्जरदेशीय पाटण वास्तव्य श्री खरतरगठीय कावमीया गोत्रे सेठ वेलजी पुत्र सेठ हेमचन्डेण खात्मार्थे श्री सिद्धचक्र नवपदगुह्यकर्म क्ष्यार्थ करापितं श्री आगरा नगरमध्ये श्रीतपागलीय पंछ कुशल विजय गणि उपदेशात् ॥जी॥ [1468] ॥ सं० १७०ए वर्षे आश्विन शुक्ल १० जौमे झूगन गोत्रीय सा कपूरचन्ड पुत्र सिताव सिंह गृहे तरसम्रित(?) सुखदे नाम्नी खात्मार्थे श्री सिद्धचक्रयंत्रं कारितं अ तपागीय नहारक श्री विजयदेव सूरीश्वरराज्ये ६० कुशल विजय गणि उपदेशात् कृतम् ॥ श्रीः ॥ [1460] सं० १९३१ वर्षे आगरा वास्तव्य लोढ़ा गोत्रे प्रतापसिंहस्य नार्या मूलो श्री नवपद कारित प्रतिष्टितं श्री धरणेन्द्रविजय सूरिराज्ये तपा । ध:- ॥ श्रेयसे श्री कुन्थुनाथ बिम्बं कारितं प्रतिष्ठितं तपागले श्री सोमसुन्दर सूरिसन्ताने लक्ष्मी हेमाकेन नार्या हीमादे द्वितीया साबि पुत्र देव्हाराणा पासादि कुटुम्बयुतेन स्वश्रेयोऽर्थ श्री. कुन्थुनाथादि चतुर्विशतिपट्टः कारितः श्री अञ्चलगनेश श्री जयकेशरी सूरितिः प्रतिष्ठित (१०) श्री सूर्यप्रनस्वामी जी का मंदिर-मोती कटरा पातीर्थियों पर । [1470] ॥ संवत् १५३३ मार्ग सुदि६ शुक्रे ओसवास ज्ञातीय बड़गोत्रे सा जीमदे जा रूही पुत्र सा जोना ना जेठी नाम्न्या पुत्र सा महीपति मेघादि कुटुम्बयुतथा स्वश्रेयसे श्री शांतिनाथ विम्बं का० प्र० श्रीसूरिभिः ।। [1471] ॥ संवत् १५४६ वर्षे पौष वदी ५ सोमे राजाधिराज श्री श्री श्री नाजिनरेश्वरराज्ञी श्री श्री श्री मरुदेवी तनया पुत्र श्री श्री श्री श्री श्री आदिनाथदेवस्य विम्बं सुप्रतिष्ठितम् ॥ [1472] ॥ सं १५ए वर्षे माघ सु० १३ रवौ श्री मंमपे श्रीमास ज्ञातीय सं ऊदा जा सा खीमा ना पूंजी पु० सा जेगसी ना माज पु० सा गोव्हा नाप सापा पुरु पु० काणी बघुत्रातृ सं० राजा नार्या सागू पु० सं० जावडेन ना धनाई जीवादे सुहागदे सत्तादे धनाई पुत्र संग हीरा ना रमाई सं० लालादिकुटुम्बयुतेन बिम्ब कारापितं निज सागर सूरिपट्टे श्री सुमतिसाधु सूरिनिः । [1473] ॥ सं० १५१३ वर्षे वैशाखमासे जकेश ज्ञातीय से० पेथड जा० प्रथम सिरी पुत्र ॥ शुनं नवतु ॥ श्रीः॥ मेवा चौवीसी पर। सं ० (१००) श्रो गोड़ीपाश्वनाथजी का मंदिर - मोती कटरा । पअतीथियों पर । [1474] ॥ सं. १५१३ वर्षे ज्येष्ठ वदी ११ सूगणा गोत्रे सा धन्ना ना धानी पुत्र सा फलहूकेन । आत्मपुण्यार्य श्री पार्श्वनाथ विम्बं का प्र० श्री धर्मघोष गठे श्री पद्मशेखर सूरि पट्टे श्री पद्माणक सूरिभिः ॥ श्रीः॥ [1475] १ सं० १५२० वर्षे वैशाख शुदी १२ बुधे श्री श्रीमाली ज्ञातीय श्रेण दीरा जाप जीविणि • सु कान्हाकन नाम पदमाई सु रत्नायुतेन ब्रातृ हांसा मना निमित्तं श्री अरनाथ चिम्नं कारितं प्रतिष्टितं श्री सूरिभिः ॥ अहमदावाद वास्तव्य ॥ [1476] । संवत् १५३६ वर्षे कार्तिक शुष १५ गूजर श्रीमाल ज्ञातीय बहरा गोत्रेला धन्ना ना धारलदे युग साप माडा पुत्र देवाराजादि श्री शान्तिनाथ विन्ध्र कारितम् ॥ प्रतिष्ठितम् ।। श्री मितिः ॥ ॥ . [1477] ॥ संवत् १५५४ वर्षे मा व २ सीहा वास्तव्य प्रान्बाट ज्ञातीय व्या अमा जार्या लखमादे पुत्र व्या मादहण ना माव्हणदे सुन नरवद प्रमुखलमन्तकुटुम्बयुतेन त्वयार्थ श्री सुविधिनाथ विम्य कारितं प्रतिष्ठितं तपापः श्री हेमविमल सूरिनिः ।। [1278] ॥ ॥ संप १९४७ वर्षे वेशाबद्री ५ भृगुवारे अर्गलपुरे योनवाल वंशाव जाती वैद.नोता गाने साइप हंसराज चन्द्रगलस्प कारिनं नेलनायस्प विन्वं प्रतिष्टितन ॥ कमला गझे श्री सिद्ध सूनितिः ॥ उपकेश गडे ॥ ॥ श्री ॥ श्रेयम् ॥ ॥ २८ [1478] ॥ संवत् १४५६ वर्षे वैशाख सु० १२ गुरु गहखा गोत्र सं. घेव्हा पुत्र स० दया ( १९०) चौवीसी पर। ॥ संवत् १५०५ वर्षे वैशाख सुदी ६ श्री उपकैश ज्ञातीय मादित्यनाग गोत्रे साप साह पुण् सा० धणसीद ना चणश्री पु० सा साधू नाम मोहणश्री पु० श्रीवंत सोनपात्र लिखू एतैः पित्रोः श्रेयसे श्रीअजितनाथ चतुर्विशतिपट्टः कारापितः । श्री उपकशगष्ठे श्री ककुदाचार्य संताने प्रतिष्ठितः । नहारक श्री सिझ सूरिः तत्राट्टालंकारहार नहारक श्रीक सूरिनिः ॥ ॥ [1480] ॥ संप १५११ वर्षे माघे शुदी ५ गुरू श्री श्रीमाल ज्ञातीय व्यवहीता सुत व्यतः कर्मसीह नार्या कस्मीरदे सुत सायरकेन नार्या मेथूसहितेन पितृमातृयात्मश्रेयसे श्री दुध नाथ चतुर्विंशतिपदः कारितः श्री पूर्णिमापके नहारक श्री राजतिलक सूीणामुपदेशेन प्रतिष्ठितम् ॥ श्री वासुपूज्यजी का मंदिर - माती कटरा । पञ्चतीर्थी पर। डीडा पुत्र सा नादा सादा नार्या रू. डोडानिमित्तं श्री सुविधिनाथ विम्बं कारित प्रतिष्टितम् तपागछे नहा ( रक ) श्री पूर्णचंद सूरि पट्टे श्री हेमहंस सूरिभिः ॥ [1481] चौवीसी पर । [1482] ... ॥ ॥ सं० १५० वर्षे व० ६ बुधे लोढ़ा गोने सारा हरिचन्दसन्ताने । साग पु० सं० गोरा । पुत्र । स० यासपाल तत्पुत्रेण सः० लाखाकेन । त्रातृ स० वस्तुपाल गांगा

( १९१)
पूनपान । पुत्र सोनपाल पासवीर । सं। हंसवीर ब्रात पुत्र । कुनरपाल पर्वतादियुनेन
नजमाता मूणी पुण्यार्थ श्री संनवनाथ विम्बं चतुर्विशति देवपट्टे । का प्रा तपाग
श्री पूर्ण चन्द्र सूरि पढे श्री हेमहंस सूरिनिः ॥
धातु के यन्त्र पर
[1483]
॥ ॥ स्वस्ति संवत् १४ए वर्षे माघ सुदी ५ गुरुवासरे श्रीमत् योगिनीपुरे राज्य
श्री काष्ठासंघ माथुरान्वये पुष्करगणे नहारक श्री श्री दमकीर्तिदेवान्स्तत्पढे नवारक
श्री हेमकीर्तिदेवाँस्तत् शिष्य श्री धर्मचन्मदेवान् श्री महेन्द्रकीर्तिदेवान् श्री- जिनचन्छ
देवान् (जनचन्द शिक्षिणी वाई सहजाई एतेन श्री कलिकुएडयंत्रस्वकर्मक्षया कारापित
॥ शुनं तवतु॥
श्री केशरियानाधनी का मंदिर - मोतीकटरा ।
पञ्चतीची पर।
[1484]
संवत् १५७२ वर्षे सुदी ६ शुक्र उकेशवंशे घांघ गोने साठीतर ना० लखमा पुत्र साः
सांगा श्रासालिया हीरा तन्मध्ये सांगाकेन ना सिंगारदे पु० राजसी रामसी "युनेन श्री
शान्तिनाथ विम्यं कारितं प्रतिष्टितं मलधारि गठे श्री गुणसागर सूरि पट्टे श्री लक्ष्मीनागर
सूरिभिः॥
श्री नगनायजी का मंदिर - दीगमंद।।
पजनीधियों पर।
[:५६
॥ संवत् १५५५ वर्षे मलारणागती नुएल गोने श्रीमान जातीय माः योग ना
देल्हू पुरा मडमपेन ना मान्दी द्रा इन्गिर ना पूरा पुत्र साजन प्रमुग्न्य युनन
खपलेली नुमतिनाप दिन्न : नानोमा नतिः ।।

॥ ४२७ वर व गुरु ३ झनो नपका गच्छे धड ना केली प्रा० सुपणा 73
मी पुजीगन (?) पितृमान श्रेय श्री व्यादिना वि० का० मा श्री श्रीमा
( :१६ )
[1486]
॥ संवत् १ए२१ शा० १७७६ प्र माघ शु गुरुवारे अञ्चलम कच्छ देश कोठारा
वास्तव्य उलवाल शाम गांधी मोहता गोत्र श्री केशवजी नायकेन श्री सिदाने श्री
नमिनाथ जिन विस्वं कारापितं प्रजा श्रीरत्नशेखर सूरितिः ॥
श्री शान्तिनाथजी का मंदिर - नमकमंडी।
पञ्चतीर्थियों पर ।
[1487 ]
॥ सं० १४०५ वर्षे फार सु ए शुके श्री ज्ञानकीय गो उसज गोत्रे न ज्ञातीय सा
शिवा ना० कांऊ पुत्र केव्हा ना कीव्हणदे सन्ततिवृद्ध्यर्थं पितृमातृनिमित्तं श्री कुंथुनाथ
विस्वं कारितं प्रतिष्ठितं । श्री शान्ति सूरिनिः ॥ शुनं नवतु ॥
[1488]
॥ संवत् १४२५ माघ बदि ७ सोमे श्री संडेरगडे श्री जरकेशज्ञाति सा महीपाल जार
महणदे पु० बेला ना सहजादे पु० सरवणनेक (?) नात कसामनस्य श्रेयस श्री आदि
नाय पञ्चती: कारिता । प्र श्री ईश्वर सूरि निः॥
[1420]
॥सं० २४२३ शु०३ शनी श्रीमाल माघल पुरा गोत्रे सा केला पुत्रेण
नापाक्ष श्री पालेत्यादि पुत्र युतेन श्री धर्मनाथ बिम्ब कारित प्रपा श्री पूर्णचन्छ
दुनिष्ट श्री इमन मूर्शिनः
[1400]
भी नंदन नमितिः ॥
साप तोलान
.

(११३ ) [1401] ॥ सं० १४५ वर्षे ज्येष्ठ सुदि १३ उसवाल खांटड गोत्रे सा नाजू ना० श्रवदे पुरा पूना पितृश्रेयसे श्री संजवनाथ बिम्बं का प्र० श्री धर्मघोष गडे श्री मलयचन्छ सूरि पट्टे श्री पग्नशेषर सूरिभिः॥ [1492] ॥ सं० १५०३ मार्ग सुदि ५ उ० झा नरितवाल गोत्र सा० मेघा पुत्र सा खेताकन ना हर्षमद सह पूर्वपुरषमेलानिमित्तं शान्तिनाथ विम्ब का० प्र० श्री धर्मघोषगछे श्री महोतिलक सूरिभिः ॥ [1403] ॥ सं० १५० वर्षे उएश वंशे सापेथड़ ना षीथाही पु० खेला सरवण साजण के श्री अंचलगनेश श्री जयकेशरी सूरि उपदेशेन श्री विमलनाथ विम्बं स्वश्रेयसे का रित प्र०॥ [1484] ॥ सं० १५०ए वर्षे वैशाख सुदि ७ रवी उपकेश सुचिन्ति गोत्रे सा नरपति पुण् सा० सादा पुण् फमण ना केव्हाही पु० सुधारण नाण् संसारदे युतन पित्रोः श्रेयसे श्री श्रादि नाय विम्ब कारापितं उपकेश ककुदाचार्य प्रण श्री कक्क सूरिनिः॥ [1485] ॥ सं० १५२४ वर्षे मागसिर व दि ५ सोमे उपकेश ज्ञातीय मह केव्हा नार्या कीरहण पुत्र सुरजणकेन ना० राणी सहितेन श्री कुन्थुनाथ विम्बं का प्रतिष्टितं श्री ब्रह्माणीयगरे ना श्री उदयप्रन सूरिनिः ॥ श्रीः ॥ [1486] ॥ संवत् १५५४ वर्षे माह यदि ५ गुरो प्राग्वाट ज्ञानीय शृङ्गारसंघवी सिद्धगज मुश्राव केन नार्या उणकू पुत्र तारा दृपा नार्या रन्मदे मुख्यटुम्बसहितेन श्री मुपावनात्र चिम्चं कारितं प्रतिष्ठितं श्री सूरिन्तिः ॥ ..

है
चरणों पर ।
श्री थर्गसपुरे साहगळे प्रथम प्रतिष्ठा संवत् १७३० मिति ज्येष्ठ सुदि १५ खरतरगचे
॥ मंवत् ११४ वर्षे उपट शुद्ध २ दिने गुरुवारे श्री यागरा नगरे सकलसंधन श्री
कारणे भीमा याबार्य संमकरप्पस्य पापुका श्री तपागष्टीय श्रीमद वीरविजा
(११४)
श्री दादावाडी- साहगंज ।
श्री महावीरखामी के वेदी पर ।
[1487]
संवत् १९७५ मिति वैशाख सुदि ३ सोमवारे सुखीचन्द के पुत्र प्यारेमास बोरदिशा
की पहने वेदी वनाई ॥
[1498]
॥ सं० १४४ मिति आषाढ़ सुदि १० भी गोतमस्वामीजी प्रतिष्ठितं । पं० संवेगी श्री
रबधीर विजय कारापितं ।
[1490]
भी १०७ श्री जिनकुशल सूरिजी के पाचुके संवत् १९६४ मिनि जेठ सुदी । गुरुवार
प्रतिष्ठा समय विद्यमान श्री तपागष्ठ उपाध्याय श्री वीरविजयजी ॥
[1500]
॥ सकस भट्टारक पुरन्दर नदारक श्री १०७ श्री हीरविजय सूरीश्वरकस्व मान
प्रविपिनं तपाग।
[1501]
प्रविर काग्निाम
२

( ११५ ) लखनउ। भी शान्तिनाथजी का मंदिर - वोहरन टोला । पंचतीर्थयों पर। [1502] ससिरि पुः गोसाकेन मातृपित सं० १३०६ वर्षे वेशाप सु० १३ सा० करमण नाग भेयोर्य श्री विवं का प्र च धर्मप्रन सूरि । [1503] संवत् १४७५ वर्षे का सु० ३ उकेल वंशीय सा० जेसिंग सुत सामल जार्या सह- जसदे सुत सा जसा ना जालनदे नातृ देवर नार्या श्रा० संगाई सश्रेयाचं श्री अजित नाथ विवं कारितं प्रतिष्टितं श्री खरतर गठे श्री जिनन सूरिनिः ॥ [1504] सं० १५१५ वर्षे वैशाप दि ११ शुक्रे श्रीमाठी झानीय मं यर्जुन ना० सस पर टोइंश्रामाई इदाकेन ना खी लदिन्न निजयम श्री अजितनाग पिगं का उकेशगठे श्री सिकाचार्य संताने श्री कक्क नमितिः प्रतिष्टितमिनि । [:505] संवत् १५१९ वर्षे देशाप सुदि ३ सोमे श्री श्रीमाय हाती नारामी मत अं. मंगाकेन जा टोमी सुः पना बना मिटा गजी युनेन श्रीजीनस नायादि पंचना थी भागमगह श्री हेमरल मूरीलामुरदेवगन कान्दिा निहिता न गटपि वानस्य । .... नं. १५५१ दर्दे माप दरिद वो TET : 7:पम ' : स्तु गुण निरा उदरा निषा हमसे : वि - ( १९६ ) जिरायपलीय गले नहारक श्री सालिना सूरि पट्टे श्री नए श्री उदयचं सूनिः प्रतिष्ठितं श्री॥ ४ ॥ [ 1507 ] संवत् १५५६ वर्षे वैशाष सुदि ६ सोमे सा नचू नार्या सवीराई। पुत्र अका श्री विजयदान सूरिजिः प्रतिष्ठितं । [1508] संवत् १६१६ वर्षे वैशाष शुदि १० खौ श्रीमालो ज्ञातोय सा० सता श्रेयार्थ श्री वासुपूज्य बिंब कारितं प्रतिष्ठितं श्री विजयदान सूरिनिः । [1509] सं० १६१६ वर्षे वै० शु० १० रवी श्रेण ककुश्रेयोर्थ श्री संजवनाथ विवं कारि तंतणा गच्छे प्रतिष्ठितं श्री विजयदान सुरिनिः । [1510] संवत् १६ए व० फागुण सुदि ए मूर्तियों पर । [1511] गोत्रे । ॥ सं १९२४ मा० शु० १३ गुरौ श्री महावीर जिन विंचं कारितं च उम वंशे जाने लाला जीवनदास पुत्रेण उर्गाप्रसादेन कारितं सूरि निः प्रतिष्ठितं विजयगो । नहारक श्री शांतिसागर [1512] ॥ सं० १७१४ मा शु० १३ सुमतिजिन विबं का उस वंश बैद मुदत्ता तन्नार्या महताबो बीवी प्र । विजयगछे श्री शांतिसागर सूरिनिः श्रेयोर्थ ।

( १९७)
[1513]
."
सं० १९२४ मा शु० १३ गुगै मुनिसुत्रत जिन पिंव कारितं स वंशे वाजेड़ गोत्रे
लाला हरप्रसाद तत् पुत्र जीवनदास नार्या नन्ही वीवी यार्थ प्र० श्री शांतिसागर
सुमिनिः प्रतिष्ठित विजय गछे ।
.
[1514]
सं० १९२४ मा शु० १३ गुगै सुमतिनाथ जिन विवं वेद मुदता गोत्रे लाला धर्मचंड
पुत्र शिवरचंद तद् ना० सांदन वोचो श्रेयोर्य । न श्री पूज्य श्री शांतिसागर सूरिनिः
। प्रनि विजय गं
[15:5]
॥ सं० १२४ मा शु० १६ महावीर जिन । वेद धर्मचंदजी विजय ग न शांति.
सागर सूरिभिः।
[15]
नं १२४ मा ० १३ श्री नुमति जिनयिं का नर यंग मा.काम गोत्रीय धर्म
घद नत् पुत्री मंगम योकी प्रा। विजय नः। श्री शांतिसागर मितिः अंगार्ग
प्रतिदिन हीरा दी।
।
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संप १:४ मा शु. १६ मंजर बन। माइकल र मंचंट ना पत्रदीप यादी
He | निनागर समिः पारे।
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1

( १९७)
[1510]
सं १७७३ माघ सुदि १० बुधवारे राजनगरे सवाल ज्ञाति बद शाम सा वीचंद्र
रूपा श्रेयोर्थ शांतिनाथ विं नरावी प्रतिष्ठाया प्रतिछि तपागचे ।
[1520]
शाहजहां विजय राज्ये । श्री विक्रमार्क समयातीत संवत् १६०१ वर्षे शाके १५३६
प्रवर्त्तमाने आगरा वास्तव्य उसबाल ज्ञातीय लोढा गोत्र अपाणी वंशे सं० शपजदास
तत्पुत्र सं० श्री कुंरपाल सोनपाक्ष संवाधिगच्या श्री अनंतनाथ विवं प्रतिष्ठितं श्रीमदचा
गछे पूज्य श्री ५० श्री धर्ममूर्ति सूरि पदाम्बुज हंस श्री श्री कल्याण सामर सूरीणा
मुदेशेन ।
श्याम पापाणके मूर्तियों पर
[1521]
॥ सं० १७७ए फाय सुः ए शनौ उश वंशे लोढा गोत्रे हरपचंद्रस्य ... श्री सुश
विवं
[1522]
॥ सं० १७७ए फा सु० ए शनौ उस वंशे मयाचंदजी तत्पुत्र धनसुख ।
[ 1523]
संप १७ए फा सु ए शनौ श्रीमाल षाड़ड़ मन्तुलाल
[1524]
॥ सं १७ए फाण सुछ ए शनी चोरडिया गोने दयाचंद
श्वेत पापाणके चरणों पर ।
[1525]
सं १७६३ मिण् माघ सु० ५ दिने श्री अतीत चौविसी नगवान जी की सवाल बत्रो
।

( ११) मोहटी गोत्रे राजा बछगज बाबू विशेश्वरदास बाबू जैरुनाथ बाबू वैजनाथ बाबू जगन्नाथ बाबू लछमणदास ने चरण तराया वृहत्खरतर गढे नहारक श्री जिनहर्ष सूरिनिः प्रतिष्ठितं श्रेयोर्थ शासन वो अत्य संदिरस्य रक्षां कुश्तु ॥ श्नी ॥ श्री ॥ श्री लखनउ नगरमध्ये नवाब साहब सहादतपशि विजय राज्ये । 11526] सं० र मि वै० सु०३ दिने वर्तमान चौविशी २४ नगवान जी के जैसवाल वंशे काकरिया गोत्रे खुमानराय। बखतावरसिंह । गोकलचंद । माणकचंद । स्वरुपचंद । रतनचंद । ताराचंद । सपरिवारेण चरण वनवाया श्री वृहत्खरतर गले नहारक श्री जिनहर्ष सूरिनिः प्रतिष्टितं श्री लखनखं नगरे । 1:527] संप १७३४ मि बै० लु ३ दिने अनागतचोक्सिी जैसवाल वंशे नाइदा गाने राजा पराज तत्पुत्र बाबू जगन्नाथस्य नार्या स्वरुपने इदं चरणं काराषितं श्रेयोर्थ श्री वृहत्वरतर गडे नहारक श्री जिनदर्ष दूरि निः प्रतिष्ठितं श्री लखनउ नगरे । [1528] सं० मि वैण् सु० ३ दिने २० विहरमान ४ शास्वतानि नगवानजी के सवाल वंशे कांकरिया गोत्रे जेठमल गुजरमल वहापुरसिंह स्वरुपचंद लपरिवारेण चरण वनवाया श्री वृहत्खरतर गडे न० श्री जिनहर्ष सूरितिः प्रतिष्ठितं श्री लखनउ नगरे । सहलकूट पर। [1529] ॥ सं० ११० वर्षे शाके १७७५ प्रवर्त्तमाने माघ शुक्ल तिथी सोमवासरे सहन्नकट विंशनि प्रनिष्टिनानि वृहत्खरतर हारक गठे श्री जिनदर्प सुरीणां पप्रनाय नहारक श्री जिनम सूरितिः सररिकरैः कान्तिं श्री लक्षणपुर बान्तव्य प्रायन गोए । श्री जस तत्पुत्र कालकादास तत्पुत्र वनदेवदासन धेचोमानंदपुर .

कल्याणक पाउका लदाणपुर वास्तव्य समस्त श्री संघन कारितं प्र० च वृहत्वाता ( १२० ) [1530] ॥ १९१० वर्षे शाके १७७५ प्रवर्तमाने माघशुक्ल र तिश्री सोमवासरे सहस्रकूट विनि प्रतिष्ठितानि बृहत्खरतर नहारक गठे श्री जिनहर्ष सूतीणां पट्टप्रनाकर नहारक नो जि- महेंज सूरिभिः सपरिकरैः कारितं श्री लक्षापुर वास्ता चो। गो। श्री हंसराज तद्भार्या सोना विवि तया श्रेयोर्थमानंदपुरे ॥ पं० । प्र। कनकविजय मुएयुपदेशात् । [1531] ॥ सं १९१० वर्षे शाके १७७५ प्रवर्तमाने माघ शुक्ल तिथी सोमवासरं सहस्रकूट विवानि प्रतिष्ठितानि बृहत्वरतर नद्दारक गछे श्री जिनहर्ष सूरोणां पट्टप्रनाकर जट्टारक श्री जिनमहेंछ सूरिभिः सपरिकरैः कारितं श्री लक्षगपुर वास्तव्य । गोए। सार उमेदचंद तत्पुत्र हरप्रसाद रामप्रसाद तत्पुत्र जीवनदास धनपतराय तधुन पूर्गाप्रसादेन सपरिकरैः श्रयोर्थमानंदपुरे । [1532] ॥ सं० १९१० शाके १७७५ प्रवर्तमाने माघ शुक्ल तिथौ सोमवासरे सहस्रकूट विंबानि प्रतिष्ठितानि बृहत्खरतर नहारक गछे श्री (जनहर्ष सूरीणां पहनाकर जट्टारक जिनमहेश सूरिनिः सपरिकरः कारित श्री लखनउ समस्त श्री संघेन श्रेयोर्थमानंदपुर । श्री [1533] 'संवत् २९५१३ शाके १७७० तियो माघ शुक्ल पंचम्यां परमाईत श्रीमत् शांति जिन मां गन्तीय जं । यु । प्र । श्री जिनचंद सूरि पङ्कजभृत् श्री जिन जयशेखर सूरिभिः । - श्वेतपाषाण के पंचमुष्टिलोच के लाव पर । [1534] मंचन १३ शाके १७ तिथी माघ शुक्ल पंचम्या ... दीक्षा कयणक पादुका, ईन वेशे मन्ना गोत्र ( १५१ ) श्री अपनदेवजी का मंदिर - घोहरनटोला । शिनाले त्र | e [:535] -- ॥ ॥ नमः लि। नरन् १२४ माघ शुक्ल १३ गुरी ॥ श्लोकाः ॥ विजयवाधियो मूहि। बिहान् चन् सहानसं ॥ शांति सूरगति नामन । संप्राप्तो लक्षण पुरे ॥ १ ॥ नगवान् देशमा व्या । जनताका म छिका ॥ कादंबनीय संजाता । नव्यानां बोधहेतवे ॥३॥ ना नामशेज । । संयो त्ततिाच ॥ कारयविस्त निनं चैत्वं । पर खाग्निपंदित ॥ ३॥ सूरिस्तु वित्रन्न्यां । शिप्यं स्थापितं मुदा ॥ धर्मचंझानिधानं च । संस्किति धदाय ॥ ४ ॥ तर धर्म दिलनिसा । (शम्यान पाउयनि सदा ॥ स्वशिष्यं गुणरंजा। गुरुदतगायलं ॥५॥ मंदिरोपरि म्यां च । निधारं नमरिकानुन ॥ मंदिरं कारयेट नंरः । जानः सववस्ततः ॥६॥ माघमाले शुकरो । त्रयोदश्यां गुरो दिने ॥ नहारक शांनि चूरिः। प्रनिड कि मुदा ॥ ॥ तस्मिन् जिनमंदिरे । श्री चतुर्मुख विधानां चतुणी जध्ये । श्रीआदिजनस्य विषं । उतवंशे बरड्या गोत्रे लाला बाटेनान पुत्रेण स्वरू- चंभेश कारितं । तथा द्वितीय श्री वातुज्य जिनवित्रं । तयाणा गोत्री लाला सीताराम तद्भार्या नांडिया गोत्री तया कालिं । तृतीयं श्री शांतिनाथ जिनवि । श्री शांतिसागर सूरि शिया । हरिणा धर्षचंश कारितं । चतुर्थ श्न महावीर स्थापि जिनयिं । सुविना गोत्रे ! लाज्ञा घेरानीमल पुत्रेण गोविंदरायेण रूपचंद पुत्र सहितेन कारितं । श्री विजयगबाधीश्वर साई नौल जंगनयुगप्रधान नरक श्री जिलजला गर सूरि पप्रजानकार श्री पूज्य श्री शांतिसागर सूरिनिः प्रतिधितं । शरिणा चतुर्नुजेनाय । गोकुन बंञण संयुता ॥ श्यं कृति लिपिलान्यां। गुरुजक्तिपरायणौ ॥ १॥ श्रीरस्तुः ।। श्रीः ॥ पानी लयवर प्रसादान् । यो मेदनादाभिर्ति स्वरूपं । राणापदे संस्थित शत्रु सिंह रोगात् प्रनुञ्धेन स शांति सूरिः ॥ २ ॥ * इस खके प्रत्तो चार यंत्र हे दाहिने २० का और बाये १६ का है, उनके निचे दाहिने न्याने का गौर यांये ११ खाने का है. जे जे नित नहीं है। -- + १० २ १० ४ ह ६ 40 ६ ३ ५ ५३ १,१२०,१०० ६४ ५ ७६ २३ १६ २४ २२ २॥ २० 10 ८८ २३ , २१ ८६ ३६ ४४ ४३ ३ ७४ मी पुनार वर्षमान मा० रोडा श्री पाचनाय प्रतिष्ठा कृता श्री साधु वचनान । ( १५५ ) ११ ४० २७ : १४ ५२ । ३६ १३ 2. २२ : २१ २६६७ ३८ २५. १२ १० ११८.१०६ ।। २७ ७६ ३७ १०३। ६० ६२/ ४६३६ ८ ८० ११५/१०२, ८६ ८७ ६१ ४८३५ ३३ | २० । १७ ८६ ५.११३ १०० ६८ ८५ --- ३० ४ ११२ ११० ६७ १६ ३ १११ १०९ ६६ २८ १५ २ १२१ १०८१६, ८२ धातु की मूर्ति पर। [ 1536] मंc । १५73 व ज्येष्ट मुदि १3 माधु साम्यायां नेत्रहिया वंशे मा० वरमा पुत्र गा. पंचनोत्रियों पर। [:537] म: १५:वर्षे मार्गनिर बदि २ बुधे मार लिया गांव मा० नोखा पु० मा जा ४१ -- ६ १ 8 ४७ ३४।३२ । " २ ༤ ७२ ५६ ४६ ४४ ॥ - - 10 १ १८ ५२ - ५० & ४२ : २६ MAT " 29 ११

( १२३ )
बात उसीह .. निः पितुः पु० श्री श्रादिनाथ विंचं का० प्र० हजडे श्री महेश सूरिनिः
॥ श्री शुनं ॥
[1538]
सं० १५२१ वर्षे माघ वदि ५ जैसवाल ज्ञाती जानवाल गोने नोजा पुत्र धडिया
पु० मोहण पुत्र घेताकेन खनार्या श्रेयोर्थ श्री शांतिनाथ विवं श्री धर्मघोष गछे न श्री
. महीतिलक सूरिनिः॥
चौवीशी पर।
[1530]
सं० १५१० माघ शुदि ५ दिने पत्तन वाली श्रीमाली श्रेण गकरसी ना धारी सुत
श्रेण गोधा साका लाणा लगिन्या श्रे० नरसिंग नार्या वैरामति नाम्न्या श्री वासुपूज्य
चतुर्विशति पट्टः का प्र० श्री सोमसुंदर सूरि पट्टे श्री रत्नशेखर सूरिभिः ॥ श्री श्री
तपगन्छे ।
[1540]
सं० । १६१६ वर्षे शाके १४७२ प्रवर्तमाने वैशास्त्र सुदि १० दिने रखा हमदाबाद
वास्तव्य केल वंशोय मा अटा ना० अनरा तत्पुत्र सा० राकर ना० संपू तत्पुत्र मा०
मेलायन ना० मेलादे पुत्र पुत्री परिवाग्युतेन यात्मप्रेयोर्थ श्री अजितना विवं काग्निं
नराग नहारक श्री आनंद विना सूरि तत्प? विजयदान नरिनिः प्रतिष्टितं ।
पाणण के इरए पर।
::5:
सं०१४। नूग वंशे पदसावन गोत्रे वाचनद पुत्र किमनट पनि ।
।

-
[1543]
17:श्री जिनचं मिशिन्यः श्री जिनकुशत मृििनः श्रीपालन
( १२४)
श्री महावीर स्वामी जी का मंदिर - चोहरनटोला ।
मूलनायकजी पर।
[1542]
॥ सं० १५ ... श्री वर्धमान जिन बिंब उसवंशे वहुरा गोत्रे लाक्षा कीर्तिचंद तना
शुलीया विधि तयो पुत्र मोतीचंदेन कारिनं वृहत् विजय गछे नए श्री सार्बनीम श्री
पूज्य श्री जिन चंझनागा सूरि पट्टप्रनाकर जं। यु । प्र। शांनिसागर सूरिभिः
मूर्ति पर ।
नं० १ . श्री पार्श्वजिन विवं उसवंशे बड़डिया गोत्रे लाला दयाचंद तत्पुत्र
मोन मापुत्र सरुपदेन सदिनः का रितं प्रा विजय गछे सूरिभिः।
पंचतीर्थी पर ।
০ ০ ৪ নাম্ব না ট ব ম ফালা কত তা বা কুণা না ,
मन ना माजी मं बसा ना वाटी संग जोगा श्री शानिमाया विवं तपा श्री हंगामा
गी। दक्षिणी प्राम।
श्री पनपन म्वामीजी का मंदिर
चूडिवाली गयी।
पंचनीधियों पर ।
[15451
न
[1544]
6
:- माऋग्वत्र पस्न मात्र जद मुश्रावकेन पुण्यात्र ।

(१२५) [1546] सं० १४५१ वर्षे माह शुदि ५ बुधदिने गादहिया गोत्रे सा सिवराज सुत सा० सहजान माला पदमाहीनिमित्तं श्री पार्श्वनाथ विवं कारितं श्री उपकेस गठे प्र० श्री सिड सूरित्तिः । [1547] सं० १५०३ वर्षे ज्येष्ठ शुक्ल ११ ओमगत ज्ञानीय अजमेरा गोत्रे सा० सुरजन ना० सहजलदे पु० सा० सइजाफेन श्रारम पुण्यार्य श्री आदिनाथ वि० का प्रतिष्ठिसं श्री धर्म- धोष गडे न श्री विजय वंश सुरिनिः । [1548] सं १५० वर्षे वैशाप व६४ शनी श्री संडेर गठे पक्षनेवी गोपीगानान्वये सात करणात पु० धांचा ला वारू पुरा जुगाकेन जा कोडा पुत्र स्वश्रेपसे श्री शिनानानि कारि प्रतिष्ठितं श्री शाति सूरिनिः । [:5] सं० १५१० वर्षे दे० ५० ५ प्रामा ." नागर पुन मा० नम्नान जात नाप पुरे स्वयसे प्रो सुविधि वि का प्राका श्रीमान पर मितिः ॥ श्री ।। ॥ मं० १५११ वर्षे माघ मुक्षि ५ की कोर या दोन गोत्र i gori नरमंड नाम सीत तत्पुत्रेण ला पन गर्य पर गिर । सादिनाप शिवं कारिद्रासीदासरी म सं. १५९६ वार दि १ : भदोई का पारेन की मदद कर निहितं दीको नर्णि हमा मात्र r; मर मी . (१२६) [1552] सं० १५१६ वर्षे वैशाख सु० ५ श्री ज्ञानकीय गछे उप० किलासीया मात्रे श्रेठ रेखण जा माणदे पुत्र कर्मा ना० कर्मादे पु० घडसीसहितेन कर्मा पद्मा द्वाच्या थारम- पुण्यार्थ श्री आदिनाथ बिवं कारितं प्रतिष्ठिनं श्री सिद्धसन सूरि पट्टे श्री धनेश्वर सूरिभिः ॥ श्री॥ [1553] ॥ संवत् १६१७ वर्षे माघ वदि १ गुगे मंण् ाना नार्या अवलादे पु० मंस नींवाकेन प्रातृ मं० कान्हाई सा वस्था आजीवा नार्या जश्चंत तत् पुत्र मं० कर्मसी राजसी ने तया दुटुंचयुतेन स्वश्रेयोर्थ श्री कुंथुनाथ विवं का प्र श्री तपागछे श्री दानविजय सूरिनिश्री हरिविजय सूरि प्रमुखैः परिवारपरिवृतः ॥ [ 1554] सं० १५२७ वर्षे आषाढ़ शुदि ३ शुके सवाल झा सा लेषा ना लषमादे पु० ला राउल केन जा रत्नादे पु० सा काटा जा शाहणदे पुरा सा गांगा सकुटुंबयुतेन स्वपुण्य यं श्री कुंथुनाथ विवं का० प्र० संडेरक गछे श्री शांति सूरिनिः॥ [1555] सं० १५३६ वर्षे वै० ए चंझे " नाईलेवा गात्रे सा० पातल ना वाचा पुरा बींका भार मदना नाथी पु० वाजू स्वपितृ श्रेण श्री चंप्रन विवं कारित प्र० श्री पलीवाल गठे श्री नन्न सूरि पट्टे न उद्योतन सूरिनिः । (15661 संवत् १५६४ वर्षे ज्येष्ट सुदि ५ शुक्रे काकरेचा गो पूर्व सा० बोटा पु० चुंडा घेता ना जाउ तत्पुत्र कान्हा ना कस्मीरदे सकुटुबेन योर्थ श्री पार्श्वनात्र विवं का प्र श्री यशोना सूरि संताने श्री. शांनि नूरिनिः ॥ श्री।

( १२३)
[1557]
सं० १७ वर्षे ज्येष्ट सुदि पूर्णिमा तियौ गुरुवारे मूलनायक श्री पार्श्वनाथ जिन
पंचनीयों जिनैः प्रतिष्ठितं श्री वृहत् परम जहारक श्री जिनसुख सूरि वराणां उपाध्याय
श्री क्षेत्रराम गणिनिः ॥ ओरस्तु ॥ कारितं चैतत् गणधर चौपड़ा गोत्रे शाह श्री लाल
चंदजी पुत्ररत्न श्री कपूरचंदजीकेन स्वपुन्यविवृष्ट्य ॥ शुनं नवतु ॥ श्री आदि जिन
चि ॥ श्री नेमिनाथ जिन विवं ॥ श्री शांति जिन विवं ॥ श्री महावीर स्वामी विवे ॥
श्री पार्श्वनाघजी की प्रतिमा पर
[1558]
संवत् १७२५ शाके १५ए१ वैशाख मुदि५ आदित्यबारे
प्रो थादिनाथजी का मंदिर - चुडीवाली गली।
मूनि पर।
[:::::
सं१।२४ माघ शुदी : पंजन दिवाग्निं । मासकोम गो० परमसुम करगी
नि । विजय गछे नः । श्रीनिमागमति ॥
एंगीति ।
!! १५६४ हर्षे मार्गदर::। ! म
म । दिना । जार ५ सनी
१ नम्बर याना TATE
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*: गोवा हाः इमी पुर सड़माकेन स्त्रपितृमातृश्रेयसे श्री कुंथुनाथ विनाग्नि
हमारे श्री प्राममुन्न मुनामुपदेशेन कारिनं प्रतिष्ठितं च विधिना 45"
श्रेयसे श्री शांतिनाथ बिवं का। प्रा। श्री पार्श्वचा सूरिजिः ॥
वीसस्थानक यंत्र पर ।
[1562]
सं० १७६१ वर्षे आश्विन शुस १५ । गुरौ श्री सिद्धचक्रराज यंत्र प्रतिष्ठापित श्री
श्रीमाल पटणीय बहापुरसिंहजी तत्पुत्र लाला वखतावरसिंहजी श्रेयोर्थ तयागठी
जं
। यु । प्र । न । श्री १०७ श्री श्री विजयजिनें सूरिलिः विजयराज्ये वाणारस्यां ।
श्री महावीर स्वामीजी को मंदिर - सुंधि टोला ।
पंचतीर्थयों पर।
[1563]
सं० १४३ए वर्षे पोप वदिए
[1564]
॥ सं० १४७२ वर्षे चेत्र वदि ५ शुक्रो श्रीमाली ज्ञातीय फोफलिया नरसिंघ ना
नामजद मुन याचा पितामह पितृश्रेयसे माता वईजन्मदे युतेन सुतेन योग केन श्री
नामिनाथ मुख्य पंचनार्थी का पूर्णिमा पके जीमपली श्री पासचं सूरि पढे श्री जय
सुरीलामुपदेदोन प्रतिष्टितं ॥ श्रीः ।।
: मंः १५८१ वर्षे ज्येष्ट बदि ए वो श्री श्रीमालझातीय श्रेण सरवण ना वा
हमर पाटे ॥ श्री
[1565]

(१२0 ) [1566] संप १५७५ वर्षे माघ सुदि १० रवौ श्री श्रीमान संग सामल ना० लाखणदे सुत देवा जाए मेयू नाम्न्या देव्हा कुटुंब सहितया अंचल गछे श्री जयकेशर सूरीणामुप- देशेन रूयोर्थ श्री विमलनाथ विवं कारितं प्रतिष्ठितं श्रीसंघेन ॥ [ 1567] . संघ १५१५ वर्षे वैशाख वदि ११ शुक्र श्री श्रीमाल ज्ञातीय सा जांरा ना जासू तुम ला मानत नार्या काईसु अदाकन भ्रातृ दहा पाशवीर प्रभृतिष्टुंग्युतेन मातृपितृ श्रेयसी यादिना विवं पूर्णिमा । श्री पुण्यरत्न सूरीणासुपदेशेन का० प्र० विधिना । [1563] सं० १५२३ वर्ष म घ सुदि ६ वो उसकेश झानीय सा जेना जार्या पाईनी सुत समान चार्य राजलदे नातृ मार्यदक्षा गार मनुबटुलगेन संयोन श्री श्री श्री नुमति विकास प्रा कनकरत्न सूरिभिः । [1562] लं.० १५२४ वैए सुप १० प्रान्बाद साप धना जागंन मुनला ना जानती मुगलमयर संग्रामाच्या स्वरेचसे श्री शांनिनार यिं काग्नि । न श्रीमती. सागर सूरितिः । जीर्णधारा वासिनः ॥ धीरस्तु !! [:570] नं० १५२५ वर्षे माघ वदि ६ प्रान्बाट व्या देवानी कार्ग पर नि नारदज.नदे पुत्र सांसाविकुटुंबधुतेन श्री मन्न नं निधनं ना श्री तो पर लूरि पट श्री समोसागर कि. ! श्रीमा 17 सं १५.८ वववदि६ दिने। टाडा का गोधः पुः समाः ददे पुः डा र प्रदिनात्री:

- पूर्णिमापो श्री गुणसमुह सूरीणामुपदेशेन कारितं प्रतिष्ठितं च विधिना ॥७॥ (१०) श्रेयसे श्री शांतिनाथ विंबं का। प्र० । श्री पार्श्व वंश सूरिभिः ॥ वीसस्थानक यंत्र पर । [1562] सं० १७६१ वर्षे आश्विन शु० १५। गुरौ श्री सिद्धचक्रराज यंत्र प्रतिष्ठापितं श्री श्रीमाल पटणीय बहापुरसिंहजी तत्पुत्र लाला वखतावरसिंहजी श्रेयोर्थ तरागष्ठीय जं । यु । प्र । न । श्री १०७ श्री श्री विजयजिनें, सूरिनिः विजयराज्ये वाणारस्यां । श्री महावीर स्वामीजी को मंदिर - सुंधि टोला । पंचतीर्थयों पर। [1563] सं० १४३ए वर्षे पोष वदि ए ...। [1564] ॥ सं० १४७२ वर्षे चैत्र वदि ५ शुक्रो श्रीमाली ज्ञातीय फोफलिया नरसिंघ जान नामलदे सुत बाला पितामह पितृश्रेयसे माता वईजन्मदे युतेन सुतेन योगाकेन श्री नमिनाथ मुख्य पंचनीर्थी का पूर्णिमा पो जीमपत्री श्री पासचं सूरि पढे श्री जयचं सूरीणामुपदेशेन प्रतिष्ठितं ॥ श्रीः ॥ ॥ सं० १५०१ वर्षे ज्येष्ठ वदि ए रवौ श्री श्रीमालज्ञातीय श्रेण सरवण नावारूप श्रे० गोवल जा इसी पुण् सहसाकेन स्वपितृमातृश्रेयसे श्री कुंथुनाथ विवं कारित महिसाषा स्थाने ॥ श्री [1565] ( १ ) [1566] सं० १५८५ वर्षे माघ सुदि १० रवौ श्री श्रीमान संग सामल ना लाखणदे सुत देवा लाए मेयू नास्या देव्हा कुटुंबासहितया अंचन गछे श्री जयकेशर सूरीणामुप- देशेन रूयोर्थ श्री विमलनाथ विवं कारितं प्रतिष्ठितं श्रीसंघेन ॥ [ 1567] सं० १५१० वर्ष वैशाख वदि ११ शुके श्री श्रीमाल ज्ञातीय सा जांबा ना जासू सुन सा सानंत नार्या काईसु अदाकेन भ्रातृ वहा पाशवीर प्रभृतिटुंग्युतेन मातृपितृ श्रेय श्री यादिनाम किंवं पूर्णिमा । श्री पुएयरत्न सूरीणामुपदेशन का० प्र० विधिना । [1563] संप १५२३ वर्ष माघ सुदि ६ रवौ उरकेश शातीय ला जेन्ना नार्या पोईगी सुत राजा के मार्श राजलदे घ्रातृ सौर्यद नाय गारू प्रमुखकुटुंग्युतेन लश्रेयोर्ष श्री श्री श्री दुमति वि का प्रण कनकरत्न सूरिभिः । [1560] सं० १५२४ वैव सु१० प्रारबाट सारा धन्ना ना गंन सुन मंग बेला नाराजी विणी नुन संकलनधर संग्रामाच्या स्वयले श्री शांनिनाय श्यिं कारितं । तपान श्री सदगी. सागर सूरिक्तिः । जीर्णधारा शसिनः ।। श्रीरस्तु ॥ [15.0] नं० १५२५ वर्षे माघ वदि ६ प्रान्बाट व्या देवनी जारी देवरे पुत्र विज्ञान ना वीजलदे पुत्र सांडा दिकुटुंग्युतेन श्री सन्नयनाय विरं मनिं प्रनिहितं नमा श्री । तिरोखर सूरि पटे श्री क्षमासागर ननिनि. । श्री नवना ।। 1157 संद १५८८ व वैशाख ३दि ६ नोनदिने । टाटा हाती की गांडे ना. गोवंद पु० साहनाः सन्देन्द्र नाम नामटे पटियन विनीः . संघव सिंघर्गन तस्य पुण्यार्य सं० सिद्धपालेन श्री शांतिनाथ बिंबं कारापितं श्री जगवाण ( १३० ) पुण्यार्थ स्वश्रेयसे च श्री नमिनाथ विंचं का० प्र० जपकेश गठीय श्री ककुदा० संत श्री देवगुप्त सूरिनिः । [1572] सं० १५५ए वर्षे वैशाप सुदि ३ प्राग्वाट ज्ञातीय व्य० नसिंग ना संजू सुन वमूत्रा फेन लार्या रही प्रमुखकुटुंबयुतेन स्वश्रेयसे श्री विमलनाथ विवं कारित प्रतिष्ठिन तपागचनायक श्री रत्नशेषर सूरि पढे श्री सदमीसागर सूरिनिः । मूंडहटा वास्तव्यः ।। [1573] सं० २५५४ वर्षे पोष सुदि १५ सोमे उपकेश झातीय संघ मेहा जा सरूपदे पुत्र सं० रिखमोन सा रत्नादे पु० लापा दासा जिणदास पंचायणकुटुंबयुनेन स्वश्रेयस श्री सुमतिनाथ विवं कारित प्रतिष्टितं श्री अंचल गई श्री सिद्धांतसागर सूरिभिः ॥ [1574] सं० १५७१ वर्षे फागुण शुदि३ शुक्र सबाल झातीय श्रादित्यनाग गोत्रे साइ सहरे पुत्र साह नयणाकेन कलत्रपुत्रादिपरिवाग्युनेन पुण्यार्थ श्री मुनिसुत्रन खामि वि कारितं प्रतिष्ठित श्री उपकेश गछे कदाचार्य संतान जहारक श्री श्री सिंह सूरिभिः ॥ अलावलपुरे ।। श्रीरस्तु । [ 1575] सं० १७०१ वर्षे मार्ग शिर कृष्णेकादश्यां रूढा वाई नाम्ना कारितं श्री नमिनाथ दिन प्रतिष्ठितं तपागडे श्री विजयदेव सूरि पट्टे प्रत्नाकर आचार्य श्री विजयसिंह सूरिभिः । संग .. १२ वर्षे चैत्र वदि ३ बुधे उसवाल ज्ञातोय चोरडिया गोत्रे सं० सोहिल तरपुत्र . [1578] गई श्री सिद्ध सूरि प्रनिष्ठिनं । पूजक श्रेयसे ॥ श्री: ॥

(१३१) चोवीशी पर। [1577] संवत् १५५१ वर्षे चैत्र वदि गुरौ श्री वायड़ ज्ञातीय मंण् नरसिंघ जा चमकू सुत समधर द्वितीया ना हीरू नाम्न्या देकावडा वास्तव्यः सुत मं० धनराज नगराज संधादि स्वकुटुंबयुतया स्वश्रेयसे श्री अजिनंदन स्वाम्यादि चतुर्विशति पट्ट श्री श्रागम गछे श्री अमररत्न सूरि तत्पट्टे सोमरस्न सूरि गुरूपदेशेन कारिता प्रतिष्टिता च विधिना ॥ श्री चिंतामणि पार्श्वनाथजी का मंदिर - सुंघिटोला। मूलनायकजी के चरणचौकी पर । [1578] * (१) ॥श्री विक्रम संमयात् सं० १६७१ वर्षे वैशाप सुदि ३ शनी ॥ श्रीमत्क्षीराब्धि लोसक- (२) बोडिंडीरपिंडप्रसरसरतशारदशशांककिरणयुक्ति मौक्तिकहारनिकरधवलय- (३) शानिः पूरितदिङ्मंडलसकलधर्मकर्मनीतिप्रवृत्तिकरणप्राप्ताशेप वनप्र- (४) सिशिनानाशास्त्रोत्पन्नप्रवसद्धिप्राग्जारजावितांतःकरणाश्वपनिगजपनित्रपति- (५) प्रणतपादारविंददप्रथिततनुभवेन्नव्यनुजादंडचंडप्रचंडकोदंडखंडितानकका- (६) विन्यनमशितारिश्करतरवशीकृनाखिवखननूपाखमालिसंधृत निर्देशाधिशेषधर्म-. (७) शर्माधिकावातलत्कीर्तिनिःशेषलाई नामशालसमन्तमनुजाधिपत्यपदवीपा- निही स्नाट जांगर के समय ये मूर्तियां की प्रतिष्टा दुई थी, उस समर पातमार को कर लोगों का दिशाति पहोंने (जने सोनोने) दिन गाई और हर नामसे अपने दोके (नियों में) पेगें पं. निर्ग गिरि या था। पातिताह मोपा पार न रा! प्री संघने पानिस र बामति दया राजयो नर्सने मराष्टिदा रोग नत्तों (१.६८ - मन्नर पर पाविकार पा नान गुदवा दिया गया है। ।

६) प्राममजीनियां श्री कुंपाल सोनल संघाधिपाच्यां ॥ सुत सं० मंबाज (१३२ ) (G) लोमीपरिरंजमुनाशीरविजयराज्ये । उसबाल ज्ञातीय लोढा गोत्रे यांगाणी मघवी (ए) रेषा तद्भार्या श्रा० रेषश्री तत्पुत्र श्री कुंरपालसोनपालाख्याः। तेषां प्रागुनमामीयुत (१०) प्रतिष्ठाया ॥ स्तन्नाम्ना प्रतिमा इय प्रतिष्ठा गतः संघेशैः स्वपितृणाम् धर्म चिंता (११) पार्श्वनाथ विंबं प्रतिष्ठापितं । अंचलगोश श्री धर्ममूर्ति सूरि पट्टालंकार पूज्य (१२) श्री ५ कल्याणसागर सूरीणामुपदेशेन । ( मस्तकपर ) पातिसाह सवाई श्री जहांगीर सुरत्राण [1579] (१) संवत् १६७१ वर्षे वैशाष सुदि ३ शनौ उसवाल ज्ञाती- (२) य लोढा गोत्रे आंगाणी सं० घनदास तद्भार्या श्राप (३) रेपश्रो तत्पुत्रप्रवरैः श्री क्रुरपाल सोनपाल सं- (४) घाधिपः मुत सं० संघराज रूपचंद चतुर्जुन धन- (५) पालादिगुतैः श्री अंचल गछे पूज्य श्री ५ श्री धर्मसूर्ति (६) सूरि पट्टे श्री कल्याणसागर सूरीणामुपदेशेन (3) विद्यमान श्री अजितनाथ विवं प्रतिष्टापितं ॥ श्रीरस्तु ।। ( मस्तकपर ) पातिसाह श्री जहांगीर विजय राज्ये । [1580] (१) ॥ स्वस्ति श्रीमन्नृपविक्रमादित्य संवरसर समयानीत संवत् १६७१ वर्षे (२) शके १५३६ प्रपत्तेमाने वैशाब सुदि ३ शो श्रीमहागरा पुर्ग वाहनव्योपके (३) ज्ञानीच दोहा गाने गावंशे साह जेठमल तत्पुत्र सा राजपा तनार्या श्रारा { ४ ) जी तत्पुत्र श्री विमलायादि संघकारक सं० शानदास तद्भार्यालयकुमा- • ५) गददामिनी रेपश्री तत्पुत्राच्यां श्री शचंजय समेतगिरि संघ महन्मदग्निा- - कपनंद पात्र (१३३ ) (७) संग धरदास सूरदास सिवदास पदमश्री । प्रपौत्र साधारणादि परिवाग्यु- (G) तान्यां श्री अंचल गछे पूज्य श्री ५ धर्ममूर्ति सूरि पट्ठांनोजनास्वराणां पूज्य श्री ५ (ए) श्री कल्याणसागर सूरीणामुपदेशेन श्री संजवनाथ विवं प्रतिष्ठापितं जव्यः पूज्यमानं चिरं नंद्यादिति श्रेयस्तुः ॥ ( मस्तक पर ) पातिसाद श्री ५ श्री जहांगीर विजयराज्ये [ 1581] (१) ॥ वस्ति श्रीमन्नॅप विक्रमादित्य समयात् संवत् १६७१ वर्षे शा- (१) के १५३६ प्रवर्त्तमाने श्री श्रागर गरापुर्ग वास्तव्य उपकेश झा- (३) तोय लोढा गोत्रे " सा राजपाल तद्भार्या श्राप राजश्री त- (४) पुत्र संघपतिपदोपार्जनक्षम सं० षजदास तना- (५) र्या श्राप रेषश्री तत्पुत्रान्यां श्री कुंरपास सोनपाल संघाधिगच्यां श्री अंचल- (६) गठे पूज्य श्री ५ धर्ममूर्ति सूरि पट्टे श्री ५ कल्याणसागर सूरीणामुपदे- (७) शेन श्री अभिनंदन स्वामि विंचं प्रतिष्ठापितं ॥ पूज्यमानं चिरं नंद्यात् (मस्तकपर ) पातिसाद अकवर जलालुदोन सुरत्राणात्मज पातिसाद श्री जहांगीर विजयराज्ये [1582] (१) ॥ संवत् १६७१ वर्षे वैशाप सुदि ३ शनो उसयास हा- (२) तीय लोढा गोत्रे आंगाणी वंशे संपनदास त- (३) नार्या श्राप रेपनी तत्पुत्राच्या संप श्री कुंरपास सं० सोन- (४) पाल संघाधिः तत्पुत्र सं० संघराज सं० रूपचंद चतुग्नुज (५) धनपानादिसहितैः धीमदंचलगछे पूज्य श्री ५ धर्ममूनि मरिना- (६) हे श्री कल्याणसागर सूनित्पदेशेन विद्यमान श्री अपनानन जिन (3) विवं प्रतिष्ठाप्तिं ॥ श्रीरस्तु ॥ (मरूफपर) पानिलाद श्री जहांगीर विजयगये

[3]
(१) ॥ संवत् १९७१ वर्ष के निशाने पर ना जीश्रा-
(३) मा वाताव्यापी शानी को यो गोवंश संर
(३) चार्या रेषश्नी तत्पुन संघाधिन रात्री झंपाका वंश श्री सालवा-
(४) ल तत्तनुल सं० संघराज संघ र चंद व गुज धनराशालिनी
(५) श्रीचन गछ पूज्य श्री ५ श्री प्रति सूपि नरहे
(६) श्री ५ कयामशागार सूगए।मुपदेशन विरमान श्री र
(७) जिन धियं प्रतिधापितं संत श्रीकान्हा ... ।
(मस्तकपर ) पातिसाद भी जहांगीर विजयाज्ये
[1584]
(१) । श्रीमतत् १६७२ वैशाय दि ३ शनी मोहिनी नक्षले ना.परा बा-
(३) मोलमा ज्ञाती लोढा योजनाबशेसार राजपामा ना सजनी
(३) तत्पुत्र संशवनदाल जाप रेवशी तरतुत लंबावि दुरपाक्ष
(५) श्री सोनपान तत्तुल लंप संघरज संघ रुपन्ड संग चतुर्जुनधन -
(५) पाल पौत्र शुधरवाल जुलैः श्री चंबल गरे
(६) ५ श्री शर्म रि यहाकार भी दशा पर सुशानुशेन
(७) भी पझालन जिन प्रतिवादित श्री॥
(नवसापर ) पानिसाद श्री अर्वाचीन विजयराज्ये
[ 1585]
( १ ) ॥ वलिव शी संवत् १६३ बर्ष ।। शुदि १६ हियो शुरुवात
(५) अनुराधा नहाने उसमाज इसतीश अरोजी पोका कुना
(३) ॥ संलाने या काम मा माननी पुश लापहीन
( ४ ) मा बाणी गोल] पुत्र ला निझालचंद । तेन श्री चंडानन शाह
(५) : विकारितं प्रनिश्चित। श्री राम श्री निर्दक सूरि संताचे

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जिकिर गरनु"
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त उनी बता लिजरितं नरूवंश लिया तो करी
बानी तथा ! करणार ! शी जिनालय र मागे स्वपितृ-
तो जिन सुदितिः कारिजलो वा । बहन नगर !
पंचमीनिशी र
[:557]
१९९५ को नारा ६ मुझे भी कर बोला जिएदार कार सूची बुध सार
करन वापरले दुध सा काला म हाई पुत्र का नया सुझाव एवनी पुत्र
नयाय मि साजा ला ला लासल सन्तलमिला की आंचल
पः गुरु जोशी भूरीयां नशेम मातुः क्षेत्र की नकार विकास निधि
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र १५ गय शिनि होलानी र रोमा
वा. दुजानिज
मालिका
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सं० १७ माघ सुदि ५ सोमे श्री गोड़ी पार्श्वनाथ बिबं का । उस वंशे सखलेचा सं० १० माघ सुदि ५ सोमे श्री चंजानन शास्वतजिन बिंब कारितं स वैशे ( १३६ ) वीरू सुत अर्जुन सहिदे वरदै पुत्री आजु नाम्न्या स्वश्रेयसे श्री कुंथुनाथ चतुर्विशति पा कारितः प्रतिष्ठितो वृक्ष तपापक्षे जहाण् श्री ज्ञानसागर सूरिभिः । 11591] । संवत् १५५२ वर्षे फाल्गुन शुदि तृतीया ३ तिथौ बुधे ॥ श्री पटोलिया गोत्रे । सा पोल । तत्पुत्र घेता। तत्पुत्र रूवा । तत्पुत्र गईपाल । तत्पुत्र मोहण । तरपुत्र एडा पुत्रौ हौ चांपा पाहा। चांपा स्वनिजपुण्यार्थ । स्वयशसे च । श्री चतुर्विंशति पदं कारितवान् प्रतिष्ठितः श्री राजगीय श्री पुण्यवर्धन सूरिनिः ॥श्रेयसे ॥ श्री संजवनाथजी का मंदिर - फूलवाली गली। श्याम पाषाण के मूर्तियों पर। [15921 [15931 गोत्रे महताव महताव "" । । कुचेरा गोत्रे वसंतलालस्य जार्या धातु की मूर्तियों पर। [1584] श्री मूलसंघे बघेरवालान्वये वांका मेला प्रणमति । [1585] सं २०७७ माघ सु० १३ ७ । । वंशे डागा गोत्रे सेटमा तद्भार्या गिलहरी तान्यों 7 पाश्वनाथ जिन विवं का० । वृन । खर । ग । श्री जिनचंड सूरिनिः। ।

( १३७ ) [1586] मंण रएर १ शाके १७७६ । मा। शु । प६ । वुधे श्री महावीरजी जिन वि० प्र श्री शांतिसागर सूनिनिः काण् सुचिंती गोत्रे रुपचंद तत्पुत्र धर्मचं श्रेयार्थ । [1587] संप रए२१ शाके ११७६ । मा। शु० ६ बुधे श्री महावीर जिन विच प्र० श्री शांति- सागर सूरि निः का सुचिंती गोत्रे बाबू रूपचंद तद्भार्या मनि विवि श्रेयोर्थ । [1503] सं० रए४ माघ शुक्क १३ गुरौ श्री अजित जिन विंचं उस वंशे सुचिंती गोत्रे लाला रूपचंद पुत्र धर्मचंद तनी गुनायो विवि श्रेयो न० श्रीशांतिसागर सूरिभिः प्रतिष्ठितं ॥ [1500] सं० १९२४ माघ शुक्ल १३ गुगे श्री महावीर जिन वियं उस वंशे सूगाणा गाने वाला खेरातोमल पुत्र रूपचंद तार्य वोटी विधि या प्र० श्रीगांनिसागर सूरिनिः विजयगरे । [C] सं० १९।२४ माघ शु. १३ गुगै थ्री पानाम जिन वियं जगदी चोरगा गां सा। रमज तत्पुत्र पंजचंडण का प्रभागनिमागर मुनि (य गरें । ::.. स० १२ माघ शु. श्री पाईन नदिन निती गीता करवंद पुत्र धर्मवेदए पानिमान: । पंचक - an-

॥
" श्री नागपुरीय गठे श्री हेमसमुझ सूरि पहावतंसः श्री हेमरत्न सूरिभिः ॥ शुन।
एर मि फा० ऋण २ बुध सा ।प्र।ना मदतान कुंवर श्री अघटायक मन
मंः १३२५ माघ शु १३ गुग श्री ज्ञानदेव जिन वि कारित योस बंदी चोर
( १३७ )
अयार्थ सुत सांगणेन श्री शांतिनाथ विवं कापित ।
[16031
॥ संवत् १५४४ वर्षे यापाड़ वदि गुरौ उपकेश ज्ञातो इंडोयूरा गोत्र संभ गांगा पुल
पदमसी पु० पासा ना मोहणदेव्या पु० पाहा श्रीवतसहितया स्वपुण्यार्थं श्री शादि.
नाथ विंबं का प्रा नपकेश गछे श्री देवगुप्त सूरिनिः ॥
[1604]
संवत् १५५२ वर्षे ज्येष्ठ शु० १३ दिने ऊ ज्ञाण बलदजव ग्रामवासि व्या वेता जान
सारू पुण् व्या येसाकेन ना कीडु सहितेन खश्रेयोर्थ श्री शांतिनाथ विंचं का
प्रतिष्ठितं तपागडे श्री हेम विमल सूर्शिनः ॥ श्रीरस्तु ।
[1605]
संवत् १५५७ वर्षे कार्तिक वदि ५ रवौ श्री श्रीमान ज्ञा० श्रेण मोकल जाए वरः
पु० पांचा ना जासू पु० बछासहितेन स्वपूर्वजश्रेयो) शीतलनाथ विवं काय नाई गई
सारा श्री कमलचंछ सूरि पढे श्री हेमरत्न सूरि प्रतिष्ठितः ।।
[1606]
खाला माणिकचंदजी और राय साहब का देरासर ।
मूर्तियों पर ।
[1607]
विव का ओ अमृत नि:।
[16081
:

१३)
पान जाला प्रतापचंद तत्पुत्र शिखरचंञण । प्रतिष्ठितं । म श्री शांतिसागर सूरिभिः ।
पंचतीर्थयों पर।
[1600]
सं० १५५३ आषाढ़ सुदि १७ बुधे श्री वीर वंशे ॥ सं० पोपा ना करणू पुत्र संप
गरसिंघ सुनायजेण ना लपू भातृ जयसिंघ राजा पुत्र संप वरदे कान्हा पोत्र सं० पदमसी
सहितेन निज श्रेयोर्थ श्री अंचलगछेश श्री जयकेशर सूरीणां उपदेशेन श्री श्रेयांसनाथ
वि कारितं असंवेन पत्तन नगरे ।
[ 1610]
॥ संवत् १५६३ वर्षे आषाढ़ सुदि गुरौ पत्तन वास्तव्य । सोढ ज्ञातीय श्रेण जीवा
जा होरू पुत्र श्रेण अमराकेन चा पुहुति सुत हांसादिकुटुंबयुतेन श्री वासुपूज्य किंवं
कारितं । प्रतिष्ठितं श्री तपागबनायक । श्री निगमार्विजाविका । परमगुरु । श्री श्री श्री
इंजनंदि सूरिभिः॥
साला खेमचंदजी का देरासर ।
[1611 ]
सं १४ माघ शुद्ध ए बुधे ओ । वनजानीय गोत्रे लारोसनलाल नापुत्र
सोजाइग्रेण जान्नति विवि तया श्री पार्श्वनाथ वियं कारितं पांचाल देशे कंपित पुर
प्रन श्रीमद् न्हारक
सूरिनिः।
साजाहीरासाउजी नुनिलाजजी का देगसर ।
सूटनावरून पर।
[C]
संवत् १७५१ में वन दिन दस्तुर जगल श्री सती ... ।

है ( १४० मूर्ति और पंचतीर्थियों पर । [1613] सं० १७४५ व वै० व ५ उबकेश ज्ञा सारा कान्हजी सुत वीरचंद नान विमलनाथ कारि० प्रति तप श्री विजयदेव सूरिनिः । जय । [1614] सं० १७१० व जैण् सु० ६ मि प्राग्बाट लघुशाषायां श्री व्य मंण् मनजीवन मुगा विवं कारितं । प्रतिष्ठितं तपा विजयराज सूरिलिः । [16151 सं० १९२४ माघ शुक्ल १३ गुरौ श्री सुविधिनाथ जिन विवं श्रीमाल जांडिया कन्द गामास तार्या जनु श्रेयोर्थ न० श्री शांतिसागर सूरिनिः प्रति विजय गर्छ । [16] मं १४ माघ शुक्ल १३ गुरो श्री अनंतनाथ जिन विंबं श्रीमान टांक गावे दुम- मनागयजी नपुत्र हजारीमलेन कारितं प्र० श्री विजय गजा श्री शांतिसागर मूतिः [1617] निहालचंदेण कारितं निम्ति मं२४ माघ शुक्क १३ गुगे श्री यादिनाथ विंचं विप गले श्री दांनिग्मागर मूरिनिः श्रेयार्थ । [1818] 25 मा शुदि १३ गुग श्री पार्श्वनाम विवं श्रीमान पााड़ गांचे पट्ट [?] पुत्र श्री कार कारिन । प्र० न० श्री पृय झांतिमागर सूरिनिः। विजय गम् । [18:00 . । म #: ?... त्र : १८ गुग श्री प्रोपर बल मिनटी या मोर जावद न " -

( १५३)
। न0 श्री हीर विजय सूरि पट्टालंकार श्री अकवरबत्रते (?) परिषतप्राप्तवाद
श्री विजयसेन सूरितिः ॥
श्री ज्ञषनदेवजी का मंदिर - सहादतगंज ।
मूर्तियों पर।
[1620]
१८७७ मा । सु । ५। श्री आदि जिन विवं कारितं उस वंशे पहलावत गो।
“पुत्र गुलाबराय नार्या जून्नाख्या का प्र। । ज । खरतर । ग। श्री जिनाकय
1 पंङ्कलझंगैः श्रो जिनचंड सूरितिः ।
[1630]
-- १९१७ फागुण शीन ५ बुधे श्री श्री आदि जिन परिकर कारितं पांचाल देशे कांपि-
तिष्टितं । श्रीमन्नारक वृहत् खरतर गहाधिराज श्री जिनअक्षय सूरि पट्टस्थित
नचं सूरि पदकजन्यमान विनेय श्री जिननंदिवईन सूरिभिः उस वंशे पइलायन
लालाजी श्री तहानंदजी तत्पुत्र लाला श्री सदानंदजी तत्पुत्र लाला गुलाबरायजी
यो जून्नु विवि तेन कारितं नहता प्रमोदेन ।
पंचतीर्थी पर ।
[1031]
सं० १५१७ व माघ वदि दुधे नदेउग ज्ञा० मा कमलसी ना० नेज़ नुन ना
केन जाए वीरणियोर्ष पुत्र गोविंदादियुतन श्री नवनाथ वियं का प्रनिधि
संडेर गले श्री शांति सूजः ॥
श्री शनायजी का मंदिर - सहदनगंज ।
दोकी पर।
[:33.
। संन् १९८३ मिनिजे दि::::
:

सुत जोगा नार्या रूपी जसमादे सुन करमण काढहा करमण नार्या रत्नादेसहितेन श्री गवे शांति सूरि पद्देश सर्वदेव सूरिनिः। कंधरावी संवत् १६७० वर्षे वेशाप शित पंचम्यां तिथौ सोमे मेड़तानगर वास्तव्य समदड़ीया रामसिंह प्रमख कुंवयुनेन श्री शांतिनाथ विवं कारितं प्र० तपा गछे श्री अकबर सुरबार (१४५ ) महिराज जात नागानिमित्तं श्री शांतिनाथ विवं का०प्र० श्री विद्याधर गो ज० श्री हेमप्रन सूरिनिः॥ मोडलि वास्तव्यः ॥ १ ॥ श्री वासुपूज्यजी का मंदिर - सहादतगंज । पंचतीर्थी पर। [1625] सं० १५३६ वर्षे वैशा सुदि ६ सोमे दूगड़ गोत्रे सा वीटहा जा पूना पु० ४ मा मेहा ना रेडाही सा कामी नाजूला सा पूला ना मूलाही साप नदा जा० पीमा सा सधारण श्री सुविधिनाध विंचं कारितं रकुल गछे श्री सूरि प्रतिष्ठितं ।। श्री पार्श्वनाथजी का मंदिर - सहादतगंज । सूलनायकजी पर। -[1626] ॥ संवत् ११३७ पचनीर्थियों पर । [1627] संवत् १५६७ वर्षे वैशाप सुदि ३ दिने श्री श्रीमालझातीय श्रेष्टि राउत जार्या माती शांतिनाथ विवं कारापितं श्री [1628] गोत्रीय । उकेश ज्ञातीय वृद्धशापीय सा माना ना मनरमदे सुत रामसिंह वास्तव्यः॥ नाम्ना प्रानु 1

( १४३ )
दत्तबहुमान न0 श्री हीर विजय सूरि पहालंकार श्री अकवरत्रते (?) परिषतमातवाद
जयकार नए श्री विजयसेन सूरिनिः ।।
श्री ज्ञषनदेवजी का मंदिर - सहादतगंज ।
मूर्तियों पर।
[1620]
सं० १७ मा । सु । ५। श्री आदि जिन विवं कारितं उस वंशे पहलावत गो।
सदानंद पुत्र गुलाबराय नार्या फुन्नाख्या का प्र । । न । खरतर । ग । श्री जिनाक्ष्य
: सूरि तत् पंकजशृंगैः श्री जिनचंड सूरिभिः ।
[1630]
सं १९१७ कागुण शीन ५ बुधे श्री श्री आदि जिन परिकर कारितं पाचाल देशे कांपि-
लपुर प्रतिष्टितं । श्रीमन्नारक वृहत् खरतर गवाधिराज श्री जिनअदाय सूरि पट्टस्थित
श्री जिनचं सूरि पदकजायशीन विनेय श्री जिननंदिवईन सूरिनिः उस वंशे पहलावत
गोत्रे लालाजी श्री तहानंदजी तत्पुत्र लाला श्री सदानंदजी तत्पुत्र लाला गुलाबरायजी
तगायी जून्नु विवि तेन कारितं महता प्रमोदेन ।
पंचतीधी पर ।
[ :631]
सं० १५१७ वर्षे माघ यदि बुधे नदेडरा ज्ञाप मा कमलली ना तेज़ मुत सा०
खेनालेन तारा बीरणियार्थ पुत्र गोविंदादियुतेन श्री संजयनाय वियं का प्रतिष्ठितं
श्री संडेर ग श्री शांति सूरिनिः ॥
श्री शांतिनाथजी का मंदिर - सहादतगंज ।
चौकी पर।
[:6321
|| संन् १९९३ को निनि जेष्ट नदि: म्यांनी वेदना
...

श्रेयार्थं ॥१॥ ( १४१ ) सं० १६१५ वर्षे वैशाष वदि ५ श्रु श्री मूलसंघे सरस्वती गळे वलात्कारगणे श्री ज्ञानदूषण देवास्ता न श्री विजयकोर्ति देवास्त० ज० श्री शुजचं देवास्ता लाला विसन चंद जी तत्पुन काशीनाबजी तसाद न जायधुः नन कु । पंचतीचिंगों पर [ 1633] संवत् १५५३ वर्षे माह सुदि ६ नासाणुली वासि मंण् जसाकेन नार्या जावलदे सुत मांडण ना० जेअरि प्रमुखकुटुंबयुतेन त्रातृ बलराज श्रेयसे श्री शांतिनाथ विंबं कारित प्रतिष्ठितं तपागठेश श्री श्री लक्ष्मसागर सूरिभिः ॥ श्रीः ॥ [1634] सं० १५५७ वर्षे वैशाप सुदि ११ गुरो श्री सवाल हातो कम्नतिया गोत्रे । संघ पदमसी ना पदमलदे पु० पासा ना मोहणदे। पुए पाव्हा श्रोवंत तत्र सा स्वनार्या इंशादेपुण्यार्थ श्री श्रेयांस विंचं कारितं । प्रतिष्टितं । ककुदाचार्य संताने उपकेश गो जहारक श्री देवगुप्त सूरिभिः ॥ सं० १६७२ वर्षे ज्येष्ठ वदि ए गुरौ श्री अहमदावाद वास्तव्य उसवाल ज्ञातीय वृक्ष शाषायां श्री शांतिदास ना बाई रूपाई सुत सा पनजी कारितं श्री शांतिनाथ विव प्रतिष्ठितं श्री तपा गठे जा श्री विजयदेव सूरि वरेक (१) महोपाध्याय श्री श्री । मुनिसागर गणिनिः श्रेयोस्तु । कुंदकुंदाचार्यान्वये ना श्री सकलकीर्ति देवास्ता न0 श्री जुवनकीर्ति देवास्ता जा पाव्हाकेन [1635] चौवासी पर । [1636 ] श्री ( १४५) नहारक श्री सुमतिकीर्ति गुरूपदेशात् हुँबड़ ज्ञातीय वजीयाणा गोत्रे साधारा ना० राणी सु हादा जाए हरबमदे सुत सा जगा नाप जगमादे ना जयवंत ना जीवादे ज्रा जेसा नाय काऊया सुत बच्श्रा युतैः श्री मुनिसुव्रत तीर्थंकरदेव नित्यं प्रणमंति ॥ श्री दादाजी का मंदिर - जौहरीवाग । श्वेत पाषाण के चरणों पर । [1637] संवत् ११३ शालिवाहन शाके १७७७ प्रवर्तमाने तिथौ माघ शुक्ल पंचम्यां ॥५॥ मुक्रवासरे जं। यु ।प्र। नहारक श्री जिनकुशत सूरि पाउका लक्षणपुर वास्तव्य श्रीसंघेन कारितं वृहत् नहारक खरतर गठीय श्री जिननंदिवईन सूरि पट्टालंकृत श्री जिनजय- शेखर सूरिनिः॥ श्रेयोस्तु ॥ श्री ॥ RSSILE.35 अयोध्या। यद बहुत प्राचीन नगरी है। प्रथम तीर्थकर श्री रजदेवजी का कान, TET, और दोहा ये तीन कहाणक यहां हुए । इमरे नायक श्री अजिननायकी का च्यान, जन्म. दीदा और केवलज्ञान पे ४ दशाएर. शोर चटईन का निदान का च्यवन. जन्म. दीक्षा और विज्ञान ये ४६ मनमन. नारजी पायरन जन्म दीवार नामजी का वन जन्न: कहानी दसमी नगर : दा भोगला. ब का -" -- - . : F . . * श्रेयार्थ ॥ १ ॥ स्वनार्या इंघादेपुण्यार्थ श्री श्रेयांस विंवं कारितं । प्रतिष्टितं । ककुदाचार्य संताने उपकेश सं० २६१५ वर्षे वैशाष वदि ५ श्रु० श्री मूलसंघे सरखती गवे वलात्कारगणे श्री शानभूषण देवास्ता न० श्री विजयकोर्ति देवास्त० ज० श्री शुजचंग देवास्तलाई (१५१ ) लाला विसन चंद जी तत्पुत्र काशीनारजी ताः सीमादा जानुः नन । पंचतीर्थगों पर [16:33] संवत् १५२३ वर्षे माह सुदि६ नासागुली वासि मं० लक्षाकेन नार्या ज्ञावलदे सुन मांडण ना० जेअरि प्रमुखकुटुंबयुतेन चातृ चलगज श्रेयसे श्री शांतिनाथ विवं कारित प्रतिष्ठितं तपागछेश श्री श्री लक्ष्म सागर सूरिनिः ॥ श्रीः॥ [1634] सं० १५५७ वर्षे वैशाप सुदि ११ गुरौ श्री सवाल झातो कवतिया गोत्रे । सं. पदमली ना० पदमलदे पु० पासा ना मोहणदे। पुरा पाव्हा श्रोवंत तत्र सा गछे जहारक श्री देवगुप्त सूरिन्तिः ॥ [1635] सं० १६७२ वर्षे ज्येष्ठ वदि ए गुरौ श्री अहमदावाद वास्तव्य सवाल ज्ञातीय पक्ष शाषायां श्री शांतिदास ना वाई रूपाई सुत सा पनजी कारितं श्री शांतिनाथ बिंब प्रतिष्ठित श्री तपा गछे न० श्री विजयदेव सूरि परेक(?) महोपाध्याय श्री श्री श्री मुनिसागर गणिनिः श्रेयोस्तु ॥ [1636] कुंदकुंदाचार्यान्वये जा श्री सकलकीर्ति देवास्ता न0 श्री जुवनकीर्ति देवास्ता जा पाहाकेन चौवीसी पर । श्री

( १४७ )
[1643]
सं० १५७५ वर्षे फा० ॥ ४ दिने प्राण साप आव्हा नार्या पाहणदे पुत्र सा विला.
केन ना० विदणदे पुत्रीपुत्र जयवंतप्रमुखयुतेन श्री संजवनाथ विंबं का प्र तपा गरे
श्री जयकल्याण सूरितिः ।
धातु की मूर्ति पर।
[1644]
सं० १७९६ फा० ५ श्री पार्श्वनाथ विवं प्रतिष्ठितं श्री जिनमहेंज सूरिणा । फो
गो सेवाराम ।
धातु के यंत्र पर।
[1645]
श्री । संवत् १एए श्राप सु०३ श्री सिद्धचक्र यंत्रं का गांधी गुप्तावचंप्रस्य नायी
कली नाम्ना प्रण श्री जिनमहंस सूरिणा श्री वृहत् खरतर गठे ।
[ 16461
सं० १९१० वर्षे शाके १७७५ प्रवर्तमाने माघ शुक्ल द्वितीया तिथो श्री सिरूचक यंत्र
प्रा लण् श्री महेश सूरिनिः काय गो नाट्टा उनवास लठमण दास नद् नार्या मुन्नि
विवि तत्पुत्र हजारीमल श्रेयोर्धमानंदपुरे ।
पापाण के चरण पर ।
[1647]
॥ संट १७७७ रा धराकायां पार. दीग्ध पदोन जयपुर बाम्नव्य ग्रामवाल में
दुकुमचंदजेन उदयचंदेन अयोध्यायां धी मन्देव ! विजया पियार्या मुमंगला।
सुरशा १४ गर्जरत्नानां परमेष्टिनां वरन्यानाः शान्तिःप्रजिनप्तिा।
--

47 मन्द महानंद पादन्यामः काग्निः संग नदयचंद प्रा श्री: ( १४७ ) समवसरणजी के चरणों पर। [1648] ॥ सं १७७७ रा घराकायां वृहत् खरतर जट्टारक गणीय पाठक होरधोगदेशेन जय नगर वासिना ओसवाल ज्ञातो सेठ गोत्रीय हुकुमचंदजेन । उदय वंदेन. अयोध्यायां भी अजिन सर्वज्ञस्य पादन्यासः कारितः । प्र। श्री जिनहर्ष सूरिणा ॥ [1640] ॥ सं० १७७७ रा धमकायां श्री जिनलाल सूरि शिष्योपाध्याय श्री हीरधोपदेशेन अयोध्यायां श्री वृपननाथानां पादन्यासः कारितः ओसवाल । मिरगा जाति सामंतसिंहेन पटेर गोत्रीयन बीकानेरस्थ पदार्थमझेन । प्रतिष्ठितः श्री जिनहर्ष सूरिणा। [1650] ॥ पं० १777 ग धगकायां खरतर गणीय पाठक हीरधर्मोपदेशेन श्रोसवाल जाती गर गोत्रीय हुकुमचंदजेन । उदयचंदेन जयनगरस्थन । अवधी सर्वज्ञानिनंदन पादाः काग्निाः।। जिन सूरिणा। [1851] यामि मं: 2537 ग धगकायां बरनर गणीय पाठक दीरधर्मोपदेशेन जयनगर ? जानो मेन गोत्रीय ढुकुमचंदजेन । उदयचंदेन । अयोध्यायां श्री मुमनि " कारिताः । श्री जिनदर्ष मुक्षिणा । [1852] !. गायों श्री वृहत बस्तर गोडा श्री जिनशान मूरि शिका ( भए ) [1653] ॥ सं० १७७७ रा धराकायां खरतर गणीय पाठक हीरधोपदेशेन अयोध्यायां श्री अजितानिनंदन सुमत्यनंतनाधानां चरणन्यासः कारितः जयनगर वासिना। ओसवाल सेठ गोत्रीय हुकुमचंद सुतेन । उदयचंदन प्रतिष्ठितः खरतर नद्यारक गणेश श्री जिनदर्ष सूरिणा। [1654] ॥ सं० १७७७ रा धराकायां खरतरगणेश श्री जिनलाल सूरि शिष्य पाठक होरधर्मो- पदेशेन । अयोध्यायां श्री नाति र जितशत्रु ५ संवर ४ मेघ ५ सिंहसेन १४ जानामाईतां ऋमन्यातः कारितः जयनगरस्थेन ओलवाल सेठ हुकुमचंद सुतेन । उदयचंदेन प्रतिष्ठितः श्री जिनहर्ष सूरिणा। [1055] ।। सं० १७७७ रा धराकायां श्री जिनलान सूरि शिष्योपाध्याय हीरधोपदेशेन जय- नगरस्थेन ओलवान सेव हुकुमचंद सुनेन । उदयचंदेन । अयोध्यायां ।। ४ । ५ । १४ । जिनादयो गणधरणां श्री सिंहतेन । वजनान । चमरगणि । यशसां पादाः कारिताः । प्रतिष्टिता श्री जिगह सूरिणा । दादाजी के चरण पर । [ 1650] ॥ सं० १७७७ रा धराकायां पितामहानां श्री जिनकुशल नृणामयोध्यायां चन्यायः प्र । श्री जिनदप सुरिणा खरतर जट्टारक श्री जनसान रि गयोपाध्याय श्री जी. धर्मोपदेशेन कारिताः । जयनगर वालिना श्रधुना मिरजापुग्न्धन संन दुमदतन । उदर चंदन अंयो। पक्ष और देवियों के पापार की नियों पर। [:07 ॥ श्री गोमुत्र या भूनिः ॥ १ !! ॥ सं. : कानटोप्रा १८ गांव है। यही प्राचीन तीर्थ 'रत्नपुर)' है । यहाँ १५ वें तीर्थकर श्री धर्मनाथस्वामी का पु पोचा ना जासी पु० लीचा सरवणं लाहू जमालु पोचाकेन । श्री सुविधिनाथ विवं (१०) जं । यु । प्र। वृहत्तरतर जट्टारकेंद्र श्री जिनमुकि गरिजिनामाई गारमंडयानार्य श्री विवेककीर्ति गणिना कारितं । श्री संघस्य श्रेयोपागोव्यायाम ॥ शुनम ॥१॥ नोर- वैसेही लेख श्रोर (१)॥ श्री महायदामूनिः ॥ २॥ (५) ॥ श्री यनावक सूर्तिः ॥ ४ ॥ (३)॥ श्री तुंबुरुयक्षमूर्तिः ॥५॥ (५)॥ श्री पातासयदा मुर्तिः ॥ १४ ॥ (५)॥श्री जितवला देवी ॥२॥(६)॥ श्री कासिदेवीमुचिः ॥ ४ ॥ (3) ॥ अंकुशदेवी मूर्तिः ॥ १४ ये सात मूर्तियों पर हैं। FR- नवराई। नवराई फैजावाद से १० मैल और सोहावल स्टेशन से अंदाज श्मेल पर एक च्यवन, जन्म. दीक्षा और केवसंज्ञान ये ४ कट्याणक हुबे हैं। पंचतीर्थयों पर [1668] संवत् १५१५ वर्षे माह शुदि ५ सोमे वाडिज वास्तव्य जावसार जयसिंह बोटा जा० ମs कारापित श्री विवंदणीक गधे श्री सिद्धाचार्य सनाने प्रतिष्ठितं श्री सिकसूरिभिः । [1650] सं० १५६७ वर्षे वैशाप सु० १० बु० श्री उपकेश ज्ञातौ संसाहिल सु जाए. बाजी नाम्न्या स्वपुण्यार्थं श्री पार्श्वनाथ विवं कारित प्रतिष्टितं श्री उपकेश गर्छ ककुदाचार्य सं० नश्री सिक सुरिनिः सं० हासा ( १५१ ) [1660] संवत् १६१७ वर्षे ज्येष्ठ शुदि ५ सोमे श्री पत्तने उसवाल शातीय सा० अमरसी जुत आणंद । ना० वीरु सुत काहाना सारंगधर विवं श्री पद्मप्रजनाथ । प्रतिष्ठितं । पा गठे श्री विजयदान सूरिभिः ॥श्री ॥ [ 1661] ॥ संवत् १६४४ वर्षे फागुण सुदि श दिने उसवाल ज्ञातीय बंज गोत्रीय साह कटार. नार्या टुलादे सुत सा तारू नार्या जीवादे सुत सा टटना प्री (?) संघनाम चिंतामणि श्री श्रेयांसनाथ विवं तपागवाधिराज श्री हीरविजय सूरिनिः प्रतिष्ठितं ॥ पाषाण के नरणों पर। [1662] संवत् १७७७ रा धराकायां श्री रत्नपुरे श्री धर्मनाथानां पादाः कारिताः वरदीया लचंदज वेणीप्रसाद प्र। वृहद खरतरगणेश श्री जिनलाल सूरि शिष्य पाठक दीर- चोपदेशेन । योसवालेन । काशीस्येन प्रतिष्टिताः श्री जिनहर्ष सूरिणा । [1663] संवत १७५७ रा धराकायां श्री रत्नपुरे श्री धर्माद नागदाः कारिताः वृदन राम्नर णेश श्री जिनसान सूरि शिप्य पाठक दीरधर्मोपदेगेन यदीया बसगंदजवानीप्रसादेन न । श्री जिनदर्प सूरिणा वृहत् खरतरगोन । [:08 सं । १७७५ रा धराकायां हदन खरतर गोटा श्री जनमार मिमिय पाना . पनोपदेशन काशीस्थ दादीपा बादल । प्रमादेन श्री धाष्टिनां पाया कारिताः श्री रत्नपुरे प्राश्री जिन मिराबरता । :: सं रा पानांधीधी भी पदा. नि:

.
सं। १६७५ वैशाष सुदि १३ शुक्रे श्री बृहत् खरतर संघेन कारितं श्री अजितनाथ
( १५५)
वरढ़ीया बूलचंदज वेणीप्रसादेन श्री काशीस्थेन वृन् खरतर गणनाथ श्री जिनका
सूरि शिष्य पाउक हीरधर्मोपदेशेन प्र । श्री जिनदर्ष मूरिणा खरतर गणेश ।
[1000
सं० १७७७ रा धराकायां श्री रत्नपुरे श्री धर्मनाथायः गणधर श्रीमद् अरिष्टास्यान्न
पादाः कारिता: ओसवाल वंशे बर्दीया चूलचंदज वेणीप्रसादेन इत् स्वरतर गणेश भी
जिनलान सूरि शिष्य पावक हीरधर्मोपदेशेन । प्र। श्री जिनहर्ष सूरिणा । वृहत खरतर
गणेशेन ।
[1667]
सं० १९१० वर्षे शाके १७७५ प्रवर्त्तमाने माघ शुक्ल २ तिथौ । श्री गौतम स्वामी जी
पादन्यासौ । प्रानाश्री जिनमहें सूरिनिः । का। गा० श्री अगरमल पुत्र खोटा
लालेन आणंदपुरे ॥ श्री॥
[ 1668]
सं० १९१० वर्षे शाके १७१५ प्रवर्तमाने माघ शुक्ल तिथौ सोमवासरे श्री जिनकुमार
• सूरीणां पादन्यासो प्रतिष्ठितः । श्री जिनमहेंब सूरिनः का। गां । श्री वे प्रा
दांगज बोटणलालेण आणन्दपुरे ।
पाषाण की मूर्तियों पर ।
सं। १६६७ का
अभिनंदन " । जं । यु । प्र । जहारक श्री जिनचं सूरिभिः
[:1670]
[1680]
बिंवं प्रतिष्ठितं श्री जिनराज सूरिनिः युगप्रधान श्री जिनसिंह सूरि शिष्यैः ।
W
.
* किन्नर यक्ष और कंदा देवी मूर्तियो पर भी ऐसे ही लेख हैं।
1

( १५३ ) [1671] ॥ सं। रजए३ शाके १७५७ प्र । माघ सुदि १० बुध वासरे श्री पादलिप्त नयरे श्री धजिनंदन विवं कारितं श्री वृहत् खरतर गठेन । जं! यु । श्रीमहेंज सूरितिः प्रतिष्ठितं ॥ [1672] तं । रजए३ माघ नुदि १७ बुध वासरे श्री सुमतिनाथ विंब कारितं वृहत्खरतर गढे प्रतिष्ठितं जंण् यु० प्र जप श्री जिनमहेंज सूरिनिः। [1673] ॥ संग रए१० वर्षे शाके १७ऽ५ प्रवर्चमाने माघ शुक्ष तिथौ श्री पार्श्वनाथ विवं प्रतिष्ठित ज० श्री जिनमहेंज सूरितिः कारितं वमा (?) गोत्रीय श्री हुकुमचंद तत्पुत्र सगरम तद्भार्या बुध तथा श्रेयोर्यमाणंदपुरे । धातु की मूर्ति पर । [1674] सं० १९२० मि फा कृष्ण १ बुधे झूगड़ प्रतापसिंह नार्या महताब कुंबर का विहर- मान अजित जिन २० वि श्री अमृतचं सूरि राज्ये वा ज्ञानचंज गणिना। । फैजावाद । श्री शांतिनाथजी का मंदिर । महला - पाल्बीबाना । पंचवियों पर। STS १४६१ ३ जे मुदि ? सुन्ने प्राधिकार नः 3: माहार पीचनान्यां सवले श्री पहन वि प्रति विश्री बीमा कि

( १५४ )
[1676]
सं० १४एए वर्षे फागुण वदि गुरौ श्रीमाल झातीय श्री एलहर गोत्रे शा० दया
संताने साग पूनात्मज म० मिच्चाकेन घातृ डोडाप्रभृतिपरिवारयुतेन श्री वासुपूज्य चित्र
कारितं श्री वृहद् गछे श्री मुनीश्वर सूरि पट्टे प्र० रत्नप्रन सूरिनिः ।
धातु की मूर्ति पर।
[1677]
सं० १६६४ वर्षे गय पालक मु० पा० प्र० तप
पट्ट पर।
[1678]
सं १६७२ नाउ सुदि ११ श्री चंअप्रन जिन विवं ॥ वीरदास प्रणमति । उः ॥
पाषाण के चरणों पर ।
[1679]
सं० १७ए फाल्गुण शुदि ४ वार शनि अयोध्या नगरे वंगलावसति वास्तव्य उस वंशे
नखत गोत्रीय जोरामल तत्पुत्र बघतावरसिंघ तत्पुत्र कनईयालालादिसहितेन श्री जिन
कुशल सूरि पापुका कारितं । प्रतिष्ठितं वृहत् जहारक खरतर गीय श्री जिनचंद्र सूरिभिः
कारक पूजकानां भूयसि वृहितगं भूयात् ॥
[16801
सं० ए मि । फा। सु० ५ श्री जिनकुशल पादौ । प्र । श्री जिनचं सूरजः ।
55559

-
:
( १५५ )
चंद्रावती।
यह तीर्घ वनारस से ५ कोस पर गंगा के किनारे अवस्थित है। श्रावें तीर्घकर
चंद्रप्रनस्वामी का इसी चंजावती नगरी में व्यवन, जन्म, दीक्षा और केवज्ञान ये ४
कल्याणक हुए हैं।
पापाण के चरण पर।
[1601]
श्री वाराणसी नगरीस्थित समस्त श्री संघेन श्री चंडावत्यां नगा श्री प्रज
सुनाम म जगनाधानां चरण न्यासः समस्त सर्व सुरितिः प्रतिपितं । संवत् राजा
मिनि थापाड़ मास शुक्ल पढे ११ वार शुक्रवार शुनं ।
पापा की यक मनि पर।
[ :6
संवत् १९१३ फाल्गुण शुद्ध सतम्यां विजय का प्रनिनिं । नारक । गुगप्रधान
श्री जिनमऽ सूरितिः कारिता व काशीन्य श्री तान्या श्री मरेन ।
[CE
सं० । १७७ माघ शुदि ५ सोमेसी जिन गरि चार काम हानि भी
मानान्वये फोप.खिया गोत्रीय पिता पुत्र दिनमाय-बादाम श्री
पंड रिति: श्री मूर्ति पदन्यः ।
Edit
--
--
ट
है
१
प्री दाहाली गराइदिन:
वही कर
।"
--

चानिधानौ श्री चंपन
संवत् ११३५ वैशाख सुदि ३ बुधे तंगकीय सोहि सुत पोत आवकेण स्वश्रेयाध श्री
संवत् १२४२ वैशाख सुदि ४ श्री वापदीय गवे श्री जीवदेव सूरि पितृश्रेया मृषि
( १५६ )
[1685]
श्री संवत् १७५१ शाके १७५७ माघ शुक्ल १५ चौमवार पूष्यनक्षत्रे आयुष्यप्राण पार
चोरडिया गोत्रोत्पन्न लाला भन्नुलालजी बुधसिंहे निर्मिता विनामस्थान ।
[1686]
॥ सं। १७ए४ वर्षे शा १७एए माघ शुक्ला ४ चतुर्था चंद्धवासरे श्रीमालान्वये फोफजिक
गोत्रे सा । श्री घुसवषतरायजी तत्सुतौ दिलसुखराय
कल्याणकचूम्यां चलावती पूर्या धर्मशाला कारापिता संघार्थं ।
श्री सम्मेदशिखर तीर्थ।
मधुवन - जैन श्वेताम्बर मन्दिर ।
पंचतीर्थयों पर।
[1687]
सं० १२१० आषाड़ सुदि ए सोमे श्री षंडेरक गबौ प्रतिमा कारिता वसु
[1688]
पाश्वनाथ प्रतिमा कारिता। श्री पूर्ण न सूरिणा।
[1689]
ar
अयोर्थ श्रीटाणाकेन कारितं ।

(१५७) [1601 ] संवत् १४ए६ वर्षे ज्येष्ठ सुदि १० बुधे श्री श्रीमाल झातीय श्रेण कर्मसी जार्या मटफू सुत गुणीकेन स्वकुलश्रेयसे श्री कुंथुनाथ विंबं कारितं प्रतिष्ठितं । श्री बृहत्तपाप? भो ज्ञानकलश सूरि पट्टे श्री विजय तिलक सूरिनिः । [1692] सं० १५५३ वर्षे वैशाष वदि ११ शुक्र उकेश वंशे साप पनरवद नार्या मानू पुत्र साह वदा सुश्रावकेण नार्या धनाई पुत्र कुंरपाल सोनपाल प्रमुखसहितेन श्री वासुपूज्य विंचं स्वश्रेयोर्थ कारितं । प्रतिष्टितं श्री वृहत् खरतर गबनायक श्री जिनसमुख सूरिनि । [1693] संवत् १५४० वर्षे माइ वदि १३ बुध दिने सुराणा गोत्रे । संग केसव पुत्र सं० समरथ जार्या सं० सोमखदे पु० सं० पृथीमत महाराज कर्मसी धर्मसी युनेन श्री अजितनाथ विवं कारितं मातृपितृपुण्यार्थं आत्मश्रेयसे प्रतिष्ठितम् । श्री धर्मघोप गछे नट्टारक श्री श्री नंदिवर्द्धन सूरिजिः॥ चौवीसी पर। [ 1604] सं० १२७ वैशाख शुस ३ गुरौ नंदाणि ग्रामेन्या भाविकया यात्मीय पुत्र लूणदे श्रेयोथ चतुर्विशति पहः कारिताः । श्री मोढ गछे वप्पनदि संताने जिननाचार्यः प्रतिष्टितः । [1605] सं० १५७७ प्रा० सा पाहणसी ना नोट सुत सारा राजाकेन नाय मंदोयरि सुन सीहा कमुआदिकुटुम्वयुतेन श्री कुन्युनाथ सपरिकर चतुर्विशति पट्टः काग्निः प्रतिष्टिनः श्री सोमसुन्दर सूरि शिष्य श्री रत्नशेखर सूरिजि ॥ ॥ श्री।

(१)॥ए ॥ स्वस्ति श्री संवति १६७ वैशाख सुदि ५ सोमवासरे। पातिसाह श्री
(२) मंगलाधीश्वर विजयिराज्ये ॥ श्री चतुर्विशतितमजिनाधिराज श्री वीरवईमान
(३) निर्वाण कल्याणिक पवित्रित पावापुरी परिसरे श्री वीरजिनचैत्य निवेशः । श्री
(४) झपन जिनराज प्रथम पुत्र चक्रवर्ती श्री नरत महाराज सकलमंत्रिमंडल
(१५)
जलमंदिर।
पंचतीर्थ पर।
[ 1696]
सं० १५११ पोष वदि ६ गुण मंत्रीअर गोत्रे श्री हुंवड़ झाति गारुडिया जा पूजू सुः
समेत ना सहनल दे सु० समधर सोमा श्रेयोर्थ ना पाव्हण नाव्हा एतैः श्री आदिनाथ
विवं कारितं वृक्षतपा न श्री रत्नसिंह सूरितिः प्रतिः ॥
मंदिर प्रशस्ति ।
शिलालेख।
[1697 ]
साहिजांद सकलनूर
स्वामी
मंत्रि श्रीदलसन्तानीय म.
श्री पावापुरी तीर्थ ।

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( १५ए ) (५) इतिआण झातिशृङ्गार चोपड़ा गोत्रीय संघनायक संघवी तुलसीदास नार्या निहा- सो पुत्र संग संग्राम । (६) लघुत्रात गोवर्धन तेजपाल जोजराज । रोहदीय गोत्रीय सं० परमाणंद सपरिवार महधा गोत्रीय विशेष धर्म । (3) कम्मोद्यम विधायक उप पुलीचंद कापड़ा गोत्रीय मं० मदनस्वामीदास मनोहर कुशला सुंदरदास रोड़ दिया। (७) मथुरादास नारायणदासः गिरिधर सन्तादास प्रसादी । वार्ति दिया गोए गूजरमत बूदड़मत मोहनदास । (ए) माणिकचन्द बूदमव जेठमव उस जगन नूरीचन्द । नान्हरा गोप 10 कल्याणमल्ल मलूकचन्द मुना- (२०) चन्द । संघेला गोत्रीय ० सिंजू कीर्त्तिास वाचूराय केसवराय सूरतिसिंघ । काड़ा गो दयाख- (११) दास लोवालदास कृपालदास मीर मुरारीदास किलू । काणा गोत्रीय ० राजपाल रामचन्द ॥ (१५) महधा गो कीर्तिसिंघ रोग व्योचन्द । जाजीयाण गोमंनयमल नंदसाप्त नान्हड़ा गोत्रीय। (१३) ए सुन्दरदास नागरमत कमलदात ॥रो सुन्दर मूरति मुगनि सयस कृती प्रताप पादड़िया। (१४) गो हेमराज भूपति । काया को मदन मुबमा नगदमख जा० सरदाम पर. सोत्तम । मीएवा- ( १५ ) ण गो चिटारीदास विंह । मदनी नगवान गरीबदाम मादगापुरीय जी, पजागरा गोरा (१६) मलूकचन्द उ. गोर मचा दन्दी मंत्री । ची: गो. नर्गमंच ग घाम उनम वर्षमान प्रमुख श्री देशन कृत। ( १६०) (१७) बिहार वास्तव्य मदतीयाण श्री संघेन कारितः तत् प्रतिष्ठा च श्री वृहत् खरतर गठाधीश्वर युगप्रधान श्री। (१७) जिनसिंह सूरि पहनाकर युगप्रधान श्री जिनराज सूरि विजयमान गुरुराजानामा (१५) पूर्वदेश विहारे युगप्रधान श्री जिनचन्द्र सूरि शिष्य श्री समयराजोपाध्याय शिष्य वा अजयसुन्दर ग. (२०)णि विनेय श्री कमललाजोपाध्यायः शिष्य पं० लब्धकीति गणि पं० राजहंस गरि देव विजय गः (१) णि थिरकुमार चरणकुमार मेघकुमार जीवराज सांकर जसवन्त महाजलादि शिष्य सन्ततिः सपरिवाया। श्रीः। स्वामी के च्यवन, जन्म और दीझा ये३ कल्याणक इसी स्थान में मानते हैं। वहां के लोग इसको 'जलम थान' कहकर पुकारते। * 'लछवाड़' ग्रामसे१कोस दक्षिण में छोटे पहाड़ पर यह सान है। श्वेताम्बर सम्प्रदाय वाले २४वें तीर्थकर श्री महा के तलहटी में २ छोटे मन्दिर हैं। उन में श्री वीर प्रभुको श्याम वर्ण के पाषाण की मूर्तियां हैं। पहाड़ पर मन्दिर में भी [1608 ] पहाड़ पाषाण की मूर्ति है और मन्दिर के पास ही एक प्राचीन कुण्ड का विह वर्तमान है। क्षत्रियकुण्ड ! * पंचतीर्थी पर। संवत् १५५३ वर्षे माह सुदि ५ दिने। वारडेचा गोत्रे सा० कोहा जाए सोनी पु० साद सीहा सहजा सीहा ना हीरुश्रेयस श्री कुंथुनाथ विकार श्री कोरंट गछे भी नन्न सूरिभिः॥ - ,

( १६१)
लछवाड़ा
धातु की मूर्ति पर।
[ 1600]
॥ सं० १९२० मि० फाल्गुन कृ ५ बुधे मारू गो० केसरीचंद नार्या किसन विवि
वीर जिन विवं का। जं । यु । न । श्री जिनहंस सूरि गज्ये उ । सं। ग। च । प्रतिः ।
पंचतीर्थयों एर।
[ 17001
सं० १५१३ । वै० सुदि ५ गुरौ श्री हुँबड़ झातीय फडो शिवराज सुन महीया श्रेयसे
जात हीयकेन नातून कुसूया युनेन श्री शांतिनाथ बिवं कारितं प्रति वृहत्तपा पदे
भी श्री रत्नसिंह सूरिनिः॥
[1701]
सं० १९२० फाण कृ० १ बुधे प्रतापसिंह गड़ गोत्रे नार्या महताय कुंवर श्री सुमति
जिन पंचतीर्थी काय ना । सदालान गणिना श्री जिनइंस सूरि राज्ये ।
यंत्र पर।
।
[17027
संप १९३३ ज्येष्ट शुक्ल ११ शनिवासरे श्री नवपद यंत्र कारितं बोल वंशे झूगड गोत्रे
"श्री प्रतापसिंह तत्पुत्र रायवहापुर धनपत्सिंहेन कारितं प्रतिष्ठितं विजयगछे ना श्री शांति-
सागर सूरिनिः ।
[1703]
सं० १९३३ का ज्येष्ठ शुक्ल १२ छादश्यां शनिवासरे नवपद यंत्र........का मकसूदा-
वाद वास्तव्य उस वंशे झूगड गोत्रे घाबू प्रताप सिंह तत्पुत्र राय वहापुर समीपतसिंह
रायवहापुर धनपतसिंह ने कारितं विजय गष्ठे श्री शांतिसागर सूरिनिः प्रतिष्टितं ॥ श्री॥
४१.

(१९) चन्दनचौक। मन्दिर का शिक्षा छन। [17041 १। ॥ संवत् १३४४ वर्षे श्रा- ३ । मिनाथ चैत्ये श्री कल्याण .... ५ । पुत्र श्रेण गांगदेवेन वीस.... । नाथ देवस्य नांटागारे निदि. ए। ....३३ प्रदचं पूजार्थ थाचंड- ५। पाद सुदि पूर्णिमागां देव श्री ने ४ । गस्य पूजार्ग श्रे० लिन्धर । त- ६ । स प्रीयमाणं ( श्री नेमि ७। संवृन्द्र फसा जोगेन सम्बनिक १०। कालं यावत् शुनं जयतु श्री॥ कम. मूर्ति के चरण चौकी पर। [1705] १ । गुणदेव जार्या-जश्तसिरि साहू । पुत्र दशा पूना लूणावी ३ । रेवता हरपति कर्मद राणा क- ४। मैट पुत्र खीमसीह तथा धीर- ५। देव सुत अरसीद तत्पुत्र वस्तु. ६। पाल तेजःपाल प्रभृति सकल. ५ । कुटुंब सामस्त्येन श्रेण गांग- ज। देवेन कारितानि। (5) .

( १६३) रत्नपुर - मारवाड़। जैन मंदिर। शिला लेख । [1706] १। सं० १३४३ वर्षे माई सुदि १० शनौ रत्न पु- । रे श्री पार्श्वनाथ चैत्ये श्री जसिवाल ज्ञातीय व्यवसी- ३। ह ग सुतयाती पुत्राक्षि सरोराज हसिकया व्यव महि- ४। लण जार्यया महणदेव्या खात्म श्रेयसे का रितं श्री आ- ५। दिनाथ विंवत्य नेचक निमित्तं श्री पार्श्वनाथ देव नांडा- ६। गारे क्षिप्त वीसल प्रिय अम्म २० तथा सं० १३४६ माइ सुदि ७। १५ पूर्णिमायां कल्याणिक पंचकनिमित्तं क्षितं 5 १० उ । जयं ३० अमीषां अम्माणां व्याजे शतं मासं प्रति ७ २० एए। विशति अम्मा पूम्बाणां व्याजेन नवकं करणीयं दश अम्मा- १०। ८ व्याजेन कल्याणिकानि करणीयानि शुनं जवतु । मूर्तियों पर। [1707] १ देव श्री शान्तिनाथ २। दीसावाल न्यानी सुरमा ३। णपुर वास्त (व्य ) साधु रतन ४ । मुत सा० दापु जालगे [170s] १।४॥ २०॥ १३२७ फागुए मुदि १० गुगे । येद रत्नपुर श्री पंटर गई श्री ....मदं मदन पुत्रमदं इंगग्मीन ३॥ धे ३ १६४ ) E . ४। द्योतन मूरः" -पहावली में इनके मर्गवास का संयन् ६६४,मित्वना परन्तु उन के पहाधिकारी होनेका मा । योर्थ श्री जिनेन्दर रिकारितं ॥ ५। श्री यशोजन सूरि संतान नी सुमति मितिः ॥ शुज जवतु ॥ गांधाणी ( मारवाड़)। प्राचीन जननंदिर। धातु की मूर्ति पर (1709] (१) ॐ ॥ नवसु शतेष्वद्दानां । सप्तm (त्रिं.) शदधिकेनतीतेषु । श्रीवसांगलीच्या ज्यष्टार्याच्या (२) परमनच्या ॥ नोनय जिनस्यैषा ॥ प्रतिमा पाडाईमास निष्पन्ना श्रीम. (३) तोरण कलिता। मोदार्थ कारिता तात्यां ॥ ज्येष्ठायपदं प्राप्तो । छावधि (४) जिनधर्मवष्ठको ख्याती । उद्योतन सूरेस्तो । शिष्यो श्रीवध पक्षदेवो ॥ (५) सं० ए३७ अपादाः ।। * गांव गांधानी जोधपुर से उत्तर दिशा में है कोस पर है। वहां तालाब पर एक प्राचीन जैन मन्दिर में यह सबंधातु को दिनायजो को है और उसके पृष्ठ पर यह लेख युदा हुआ है। जोधपुर निवासी पण्डित रामकर्णजी की कृपा से मुझे यार का और अक्षरान्नर प्रान हुमा है। उड़ाने इस लेख पर निम्न लिम्पित नोटस् लिम्ये हैं। पति- टार्य" यह पदवो वादा होता है, जोक्तिमयमा पद प्राप्ती" इस.वाक्य मे स्पष्ट है। २। * भाषाढ़ाई " पद से यागढ़ मुदि १ और दि १५ का भी शान हो सकता है, परन्तु यहाँ. प्रतिमा का है यधिक है, मोदि शुभ कार्य में अमावस्मा चर्जित है देखने में नहीं आया । लेन से जाना जाता है उद्योतन मरि संवत् १३० में आचार्य पर पा चुके थे। यंत गश भेद नहीं या इसी लिये लेनमें गम का उल्लेख नहीं है निशामिक दृष्टि से यह लेख वा मायक - १ -- - - ( १६५ ) सूरपुरा - नागौर। माताजी के मंदिर के स्तम्ज पर । शिला लेख। [1710] (१) संवत् १२१५ पोस व- (३) पुत्र्या धाहम ना. (५) दवा निधानया आत्म श्रे- (२) दि १ श्री नेमिनाथ चैत्ये (४) यया देवधरमात्रा सू (६) योर्थ स्तंनजयं दनं ॥ [1711] (१) संवत् १५३ए पोस व- (३) पुञ्या धाहरू ना- (५) इडानिधानया आत्म श्वे- (3) मूल्ये १० ॥ सर्व शु (२) दि १ श्री नेमिनायचेत्ये (४) या देवधरमात्रा मू- (६) योर्थ स्तं जयं दत्तं ॥ (G) उसतरां - नागौर। लिला [::::: (१) सन् १६४७ वरे फागुन दि १५ दाग सानीय माता गोत्र : संबरनाव श्री श्री दीविर, ।

२। तिवाकालवशादतिपुराणं तया च याकस्मिक श्री जयादित्य देवीय महाप्रसाद मत् पत्तन वास्तव्य प्राग्वाट ० श्री चएडपात्मज श्री चण्डप्रसादार' (१६६ ) नगर - मारवाड। मूर्तियों के चरणचाकी पर। दाहिने तर्फ। 1713] * १। ॥ * ॥ संवत् १२ए। वर्षे आषाढ़ सुदि ७ रवौ श्री नारदमुनि विनिवशोते श्री नगर वरमहास्थाने सं० ए० २। २ वर्षे अतिवर्षाकालवशादतिपुराणतया च आकस्मिक श्री जयादित्य देवीय महाप्रसाद विनष्टायां। ३। श्रीराजुलदेवी मूर्ते पश्वात् श्रीमत् पत्तन वास्तव्य प्राग्वाट च० चंडपात्मज व श्रीचं प्रसादांगज 7 श्री सो.। ४। मतनुज 30 श्री आसाराजनन्दनेन श्री कुमारदेवीकुदिसंनूतन महामात्य वस्तुपालेन स्वनार्या म- ५। हं श्री स... पुण्यार्थमिदेव श्री जयानित्य देवपल्या श्री राजलदेव्या मूर्तिरिय कारिता ॥ शुनमस्तु ॥ बायें तर्फ। १। ॥ ३॥ संवत् १२ए वर्ष थापाढ़ सुदि ७ रवी श्री नारद मुनि विनिवेशीते श्री नगर वर महास्थाने सं० ए०७२ वर्य य- पतन विनष्टायां श्री रत्नादेवी मूर्ती ३। पश्चात् श्री श्री सोमतनुज २० श्री यासाराजनन्द. • अंमोद महादेव के मंदिर में सूर्य के मूर्ति के दोनो तर्फ नी मूर्तियों के चरणचौकी पर यह लेना है। श्री [ 1714]

( १६ )
४। नेन उ० श्री कुमारदेवीकुक्षिसम्जूतेन महामात्य श्री वस्तुपालेन वनार्या मय्याः 10
कन्हड पुन्याः व संपू कुक्षिनवा
५। याः महं श्री ललिता देव्या पुण्यार्थमिदेव श्री जयादित्य देवपल्या श्री रत्ना देवी
सूर्तिरियं कारिता ॥ शुन्नमस्तु ॥ व ॥
नगर - खेडगढ़।
श्री शान्तिनाथजी का मन्दिर । 8
[1715]
है। , सं० १६६६ वर्षे । जाउपदे शुक्रके। श्री हिनीया दिने । शुक्रवारे । वीरमपुर वरे
। श्री शान्तिनाथ प्रासाद
२। नूमि यह । श्री खरतर गछे । युगप्रधान श्री जिन चन्द सूरि विजयराज्ये । आचार्य
श्री जिनसिंह सूरि यौवराज्ये । श्री
३। गजल श्री तेजसिजी विजयिराज्ये । कारिनं श्री संघेन ॥ लिखितं वा श्री गुणरत्न
गधिना दिनेयेन रत्नविशाल गणिना
४। सूत्रधार । चांपा पुत्र । रत्ना । पुत्र । जोधा दामा । पुत्र मन्ना । धन्ना । वर योगेन
कृतं । नार्या सोमा किस पाणा । वही। मेघ । श्री रस्तु ।
--
घाणराव मारवाड़।
महावीर स्वामीका मन्दि । -
[1716]
सं० १२१३ नाजपद नुदि ४ महल दिने प्रो दण्डनायक नजल देव गत्ये श्रीयंग
परख मन्रिभूमिनरा है।
परमदिर "बाजेपर"
मेंस पार है।
८

( १६७ ) शातीय राउत महणसिंह नक्तिवतहत बाटमध्यात् । श्री महावीर देव वित्रं प्रति झाम' पालसु, दत्ताः यस्य नूमि तदा फवं ॥ से रायपास मुन राबनिहु महाजन कुरुग [विना लिय सारिवहिं॥ *(STRE अआर। श्री पाश्वनाथजी का मन्दिर । प्रशस्ति। [1717] !! नमः श्री पार्श्वनाथाय । ५ श्री ह पै गणेशष्य २त्री म, मुनीन्छ गुरुच्यो नमः ॥ स्वस्ति श्री पाश्र्वनाथांचं तुष्टि । हेतु स्मृती सना । यो विश्वत्रय विख्याती तारजिष्टप्रदौ मम ॥१॥ ४। श्री मतिमतः मंवत् । मुनिबाजीरसेन्फुके । १६७७ । वर्षे वैशाप मा । । संधिपक नदिने ॥२॥ अक्ष्यायां तृतीयायां रोहिणीस्थे "" वां है। वे एवं मर्व शुनेयम्ने । जीणः प्रसाद उद्धृतः ॥ ३ ॥ श्री मत्पार्श्वजिनेन्द्रम्य का । ए फरह नये । श्रीमन्यात्मज पुयां च धुर्यायां तीर्थ संसदि ॥ ४ ॥ श्री श्री. ८ मासीकमानधि । चान्देग सितकीनिना । दोसी श्री श्री जीवराज व मुत- ..! नाविना ॥ ५ ॥ मन्द्रमचारिणा हर्षांहुन्ननपुग्यासिना । श्रीम .: शाजी नाना पदव्यम्य व्ययन च ॥६॥ सादायही संघम्य देव प्रदानः कार्यम्य समिन्दिः । पुण्यः किं किं न मि. ': '. भीमामाधीश श्री बीरविनय प्रताः । पट्ट श्री विजय ययन ! दिन ! श्री पदा मानायं पुष्पामावर धिनीयात !!! नाद ॥ । -- my, HP HAM ( १६ए ) .: १५ । क्षिा दिग्नागे। सहंगरचनान्विते । स्तू श्री रुपनस्वामी पाउकेऽत्र महाद्भू- १६ । ते ॥१०॥ पूजनीयाः शुजाः ग्लाध्याः । गुरूणां तत्र पादुकाः कारिता मदनाख्येन । दो- १७ । सीना बालयान्विता ॥११॥ धर्मशाला विशाखा च शाजारकेन निर्मिता। साहाय्या- १७ । घरसंघस्य दोसोसंज्ञस्य तुष्टयः ॥ १२ ॥ पमितगणमौखीमणेः । तार्किक सिद्धान्त - १ए । शव्दशास्त्रार्थः । श्रीमत्कल्याणकुशलं । सुगुगेश्वरणप्रसादेन ॥ १३॥ तविष्यस्य सुत्रु. २७ । विदुषः सुयतेर्दयाकुशलनान्नः । महतोद्यमेन कृत्यं । सिद्धं श्री जगवतः कृ- २१ । पया ॥ १४॥ रम्यो जीर्णोद्धारो। श्रीपार्श्वनाथान्वितोऽयमानश्च। श्राचंझार्क राजत् जी- २२ । याज्जनसुग्बकरो नित्यं ॥ १५ ॥ संवत् १६७७ वर्षे वैशाष सुदि ३ शनी श्री अजपु. ३। रे महातीर्थे जीर्णोद्धारो जानः श्रीमत्तपागवेश नहारक प्रजु न श्री ५ २४ । श्री विजयदेव सूरि विजयराज्ये । पं श्री मेहमुनोन्द्र गौण शिष्य पं० श्री २५ । कल्याणकुशल गणि पं० । श्री चाकुशल गणि शिष्येन । प्र- २६ । शस्तिरिय निखिता गति नक्तिकुशक्षेन ॥ श्री रस्तु । श्रीः ।। पापाण की मूर्तियों पर। [1718] १। सं० १३४३ वर्षे माघ वदि र शनो श्रीमाशीय हरिपालेन सूरिनिः। [ 78] १ । सं० १३४६ वर्षे वेग सुदि । बुधे दोशाचाल ज्ञानीय महं० शायण सुन धी. २। रमन सुन । बासज अवार्य श्री पाचन व कारिनं प्रतिष्टितं श्री महेन्द्र गिनः । पंचतार्थियों पर। [1720] सं० १५०० व वैशाप सुदि १५ शनी श्री पदान एंबड हानीय अर्जुन दे रहा है स है। ३॥

'कारापितां परदर्शनाय शुद्धं सज्ज्ञानचरण- सादापिता सहन व विश्वरूपविनायिना। शिदिपना गोपगार्गेन कृतमेत लिन- (13) मारुतयो युत धीधा जुट्टा सुन नेमिनाग प्रगनि। सं० १५१० वर्ष वैशाष सुधि ३ गुणे श्री धीमा हाती in T13 जागा गोमती. यात्मश्रेयसे श्री पद्मप्रन साम्पादि पतीनी श्री माग गरे श्रीदेगल सूरी मानुषः देशेन कारिता प्रतिडिता न विभिना। पिंडवाड़ा-सीरोही। श्री महावीरजीका मन्दिर । शिला लेख [1722] (१) नीरागगन्धादिनावेन सर्वज्ञान विनायक। ज्ञात्वा जगवतां जापं जिनानमिव पावनं । (२) बोएयेयक यशोदेव देव ग्दिं जनं कारितं युग्ममुत्तम (३.) जयशतपरम्पराजित गुरुकर्मराजो .... खानाय ॥ संवत् (s?)४४ । ध्यम् ॥ Mywoc- .

( १७१)
खीमत-पालणपुर ।
जैन मंदिर।
मूर्तिकी चरणचौकी पर।
[1723]
१। ठेग ॥ सं१५१५ वैशाष वदि ४ शुके खीमंत स्थान प्राग्वाट वं.
। शीय श्रेण आसदेव नार्यया दमति श्राविकया स्वपुत्र जसचन्द्र देवय
३ । तत् पुत्र पूना अजयडषद प्रति समस्तमानुषसमेतया था.
४ । त्मश्रेयसे श्री महावीर जिनयुगलं कारितं सूरिनिः प्रतिष्ठितं)।
→भार
श्री तारंगा तीर्थ।
श्रीश्रजितनाथ स्वामीजी का मंदिर ।
के
चरण पर ।
सहस्रकूट
[1724]
श्री शाश्वता परमेश्वर ४ श्री चौबीस तीर्थकर २४ श्री वीत विहरमाण २० श्री
पणघरना १४५५ सर्वमखिने संख्या पनरसो जोड़ावि वई सहि । सं० १७७३ वर्षे माघ
दि ७ शुक्रे श्री तारंगाजी उर्गे। श्री श्री विजय जिनेन्द्र सूरि प्रतिष्ठितं तपा गर्छ ।
सा करमचन्द मोतीचन्द सुत पनाचन्द करापितं । वीसनगर वास्तव्य।
पंचतीधियों पर ।
।
[1725]
सं० १५०० वर्षे माघ सुदि १० शनो ठकेस वंशे सादु गोत्रे साप तुंषा ना० नूपारे

सं० १५७० वर्षे वैशाष सुदि १२ शुक्रे प्राग्वाट ज्ञातीय महं धना सुत महं जीवा जार्या जसमादे सुत गोगा नार्या रूपाई श्रेयोर्थ श्री धर्मनाथ बिंबं कारितं प्र० श्री तपा गठे ( १७२ ) पु० सा० सातबकेन ना० संसारदे पुत्र सा० देगादियुनेन श्री कृयु विवं का प्रावत गळे श्री जिनसागर सूरिभिः । [1726] सं० १५१७ वर्षे ज्येष्ठ शुदि ६ बुधे श्री कोट गरे । उकेश मडाइड घा० सा० श्रवण ना राऊं पु० साहा ना सांपू पु काऊण सहितेन स्वमातृपितृश्रयार्य श्री चंऽप्रज विं कारितं । प्रति श्री सांवदेव सूरिनिः [1727] सं० १५५४ वर्षे वै० । सु०३ विघापुर वासि श्री श्रीमानि ज्ञाण म० लपमीधर जा जासू पु० मं० जूगकेन जा० डीरू Fि० जसमादे प्रमुख पुत्रादि कुटुंबातेन स्वश्रेया श्री धर्मनाथ घिवं कारित प्रतिष्ठितं । श्री विवंदनीय गछे श्री कक्क सूरिभिः । [1728] सं० १५३५ वर्षे मार्गशिर जुदि ५ दिने श्री श्रीमाल ज्ञातीय श्रेण अर्जन ज्ञात इवकू पु० सहिजाकेन ना मानू सु० जूना जावा स्वस्वपुर्व निमित्तं कुटुंब० श्री सुमति नाथ विंबं का प्रण पूणिमापके नाप श्री गुणतिलक सूरि प्रतिष्ठितं ॥ श्री ॥ [1720] ॥ सं० १५७० वर्षे माघ वदि । श्री श्रीमाल ज्ञातीय श्रेण् चुंडा ना चांपलदे सुत वीसा धरणा ची सा जा० माणिकदे पितृमातृश्रेयसे श्री शीतना चिं कारिन पिप्पल गछे न० श्री गुणप्रन सूरि पं० श्री तिलकपन सूरि प्रतिष्ठितं । साचुरा ॥ ॥ [1730] हेमविमल सूरिनिः पेयापुर ।

( १७३ ) चौविशी पर । [1731] सं० १४जए वर्षे आपा शुक्ल ५ दिने प्रग्वाट ज्ञातीय मंत्रि चाहड़ सुत सिंघा ना० पूजल सुत नमुआकेन जाए कप्रीयुतेन निजश्रेयोथं श्री शांतिनाथ मूलनायक चर्तुविंशति पट्टः का० प्रश्रो तपागठाधिप श्री सोमसुन्दर सूरिभिः । [1732] ॥ सं १५०४ वर्षे फागुण सुदि ए सोमे प्राग्वाट ज्ञातीय श्रेष्टि राणा संताने श्रेण रत्ना ना धरण सुत पूर्णसिंहन नार्या देमाई सहितेन तथा भ्रातृ हरिदास स्वपुत्र पासवीर युतन श्री अजितनाथ विवं चतुर्विशति पट्टः कारितः प्र० श्री साधुपूर्णिमापक्षे न श्री रामचन्द्र सूरि पट्टे शिष्य पूज्य श्री श्री पूर्णचन्द्र सूरीणामुपदेशेन विधिना नारु श्रावकैः ।। [17331 संग १५ वर्षे वेशाप वदि ११ दिने जपकेश झा डागलिक गोत्रे। सा० धिना ना वारू पुत्र संघवी पामवीरेण ना० संपूरदे सहिनेन स्वयमे श्री संजवादि तीर्थकृञ्चतुर्वि- शति पट्टः का प्रण श्री कोरंटगठे श्रीनन्नाचार्यसंताने श्री कक्कररि पट्टे श्री सायंदेव सूरिनिः॥श्रीः । नन्दीश्वरछीप की देहरी पर । [1784] सं० १७ नद्दा सुदि ५ शुक्रे श्री विजयजिनेन्ज नजिो नन्दीश्वरामीप सिंचन प्रनिहित श्रीमत्त श्री गाम बड़नगर दो पानचन्द जयचन्द स्यापित ।

पर्यत ब्रात कमि श्रेयाथ जीवितस्वामी श्री न मिनाथ बिंबं कारितं श्री आगमगले श्री
(१७)
सिहोर-काठियावाड़।
श्री सुपार्श्वनाथजी का मंदिर ।
पञ्चतीर्थियों पर।
[1735]
सं० १४७० वर्षे वैशाप सुदि १५ शुके प्राग्बाट ज्ञा० सं० रत्ना जा रजाई पु० सं०
सहस्सकिरण नार्या धरणू सुत तजदे कुटुंधयुतेन श्री कुंथुनाथ विवं कारित प्रतिष्टितं
श्री हेमविमल सूरि निः । बलालर वास्तव्य ॥
[ 1736]
सं० १५१६ वर्षे बैन बदि १ रवी श्री श्रीमाल झातीय व तयरा जाण वाचू सुत
नाणा वड़ीय गोवल जाए हासू सु वीरा मा0 बांजलदे सुत लालु काएहु वानर एने
जिन पितृमातृ श्रेयोर्थ श्री श्रेयांसनाथ विंबं कारितं प्रतिष्ठितं मधुकर गछे जा
सं० १५३६ वर्षे पोष वदि
गुरू श्री श्रीमाल झा श्रेण टोश्या जाम लला सुन
...
[1737]
श्री सिंघदत्त सूरितिः प्रतिष्ठितं विधिना कारितानि ।
থালিনা।
श्री सुमतिनाथजी का मन्दिर-माधोलाबजी की धर्मशाला ।
धातु की मूर्तियों पर ।
[ 1738]
संवत् १५५ वर्षे माघ शुदि १२ शुक्रे गाणंद विमक्ष सूरि या० चन्दा ज्ञाण मावती
श्रीदजदेव (?) ...॥

( १७५ )
[1738]
संश्त् १६०० पोस वदि ५ सोमा श्रीमालज्ञातीय लाप हेला श्रेयसे शाप नायुजी-
केन मनाथ विंचं कारित प्रतिष्ठितं श्री सूरिभिः ॥
[1740]
संवत् १६५६ वर्षे फागुण सुदि सोम लग झाप BRO..श्नी सुमतिनाथ विवं
हीरविजय सूहिः
[ 1741]
संवत् १६ वर्षे माघ सुदिप दिने । इमापीसा (?) श्री श्री आदि विर का
सपागछे श्री विजयसेन सूरिभिः ॥
[1742]
संवत् १६० दे० शुष ५ शुण् .... ।
[1743]
संवत् १७५ वर्षे मार्गशिर मुदि ६ शुझे श्री अंगनगाधिराज पूज्य रक्षारक श्री
जलालागर सूरीश्वराणालुपदेशेन श्री दीव वंदिर वास्तव्य प्राग्याट शातीय नाग गोने मंत्रि
विमल सल्ताने संभ कमसत्ती पुत्र मंजीदा पुत्र मंण् प्रेमजी सं प्रागजी मं० श्रादजी
पुत्र शवजी प्रसुखपरिवारयुत्तेन स्वपितृ संग जीवा श्रेयोऽयं श्री यादिनाथ विकारित
प्रतिष्ठितं चतुर्विध श्रीसंघेन ।
[1744]
संवत् १७१५ दर्षे वैशाख सुदि ७ दिने माय मनजी नायी घाई मनरंगदेशन मुनि-
सुबत विदं का प्राधी विजरलेन सहि ।
[:7451
विप्रा
संप र एज वर्षे ३० शुए सोमc : Fr
विजयहि समि।

गुरू श्री श्रीमाल ज्ञाण श्रे टोश्या जाग लखा सुन
पर्वत ब्रात कमि श्रेधार्थ जीवितस्वामी श्री नमिनाथ बिंबं. कारितं श्री आगमगवे श्री
संवत् १५५ वर्षे माह शुदि १२ शुक्रे भाएंदविमक्ष सूरि या० चन्दा जाप माइजी
(२७४)
लिहोर-काठियावाड़।
श्री उपाश्वनाथजी का मंदिर ।
पञ्चतीर्थियों पर ।
[1735]
सं० १४७० वर्षे वैशाप सुदि १५ शुके प्राग्बाट झा0 मं० रत्ना लाए रजाई पुछ
सहस्सकिरण जार्या धरणू सुत तजदे कुटुंगयुनेन श्री कुंथुनात्र विवं कारित प्रतिदिन
श्री हेमविमल सूरिनिः । घलासर वास्तव्य ॥
[1738]
सं० १५१६ वर्षे चैत्र बदि १ रवी श्री श्रीमाल ज्ञातीय व तयश जाण वायु सुन
नाणा बड़ीश गोवल ना हॉस्तू सु० बोरा ना बांक्षदे सुत लालु काएहु वानर
जिन पितृमातृ श्रेयोर्थ श्री श्रेयांसनाथ दिवं कारितं प्रतिष्ठितं मधुकर गछे जा
[1737]
सं० १५३६ घर्षे पोष वदि
श्री सिंघदत्त सूरितिः प्रतिष्ठितं विधिना कारितानि ।
অলিনি।
श्री सुमतिनाथजी का मन्दिर-माशोलाबजी की धर्मशाला।
धातु की मूर्तियों पर।
[1738]
श्रीवजदेव (?)
।

( १७५ )
[1738]
संवत् १६ पो] स वदि ५ सोमप श्रीमालज्ञातीय साप हेमा श्रेयले शाप नायुजी.
केन धर्मनाथ दिदं कारितं प्रतिष्ठितं श्री सूरिभिः ।।
[1740]
संवत् १६५६ वर्षे फाल्गुण सुदि ७ सोम ला झाव व्य... श्री सुमतिनाथ विवं
हीरविजय सूति
[1741]
संवत् १६७० वर्षे माघ सुदिप हिलेब । इन्जापीता (?) भी श्री आदि विदं का प्रय
तपागहे श्री विजयसेन सूरिभिः ।।
[1742]
संन्द १६७७ दै० शुध ५ शुस .... ।
[1743]
संवत् १० वर्षे मार्गशिर मुदि ६ शुझे श्री अंग्रहगवाधिराज पूज्य स्धारक श्री
कल्याणसागर सूरीश्वराणामुपदेशेन श्री दीद वंदिर वास्तव्य प्राग्वाट जातीय नाग गोने मंत्रि
विमल सन्ताने संत कमलसी पुत्र मंण् जोदा पुत्र मं० प्रेमजी सं० प्रागजी मंश्रापंदजी
पुत्र केशवजी प्रसुलपरिवारयुतेन स्वपितृ संग जीवा श्रेयोऽर्थ श्री आदिनाथ विवं कारितं
प्रतिष्ठितं चतुर्विध श्रीसंऐन ।
[17441
संवत् १९१५ वर्षे वैशाख सुदि दिने शा० मनजी नाग घाई मनरंगदेकेन मुनि-
सरत विदं का प्र० श्री विजयसेल सूरि ।
[ 1745]
२ र एज वर्षे दैशु १ सोम शाल विमचंदानी वि श्री चन्द विकं प्रा.
हा श्री विजयजति सुरि।

-----
( १२४ )
पर्वत जात कमि श्रेधार्थ जीवितस्वामी श्री नभिनाथ बिंब. कारितं श्री आगमगडे श्री
गुरू श्री श्रीमाल ज्ञा श्रेष टोश्या जाग लखा सुन
संवत् १५५५ वर्षे माइ शुनि १२ शुक्के जाणंद विमक्ष सूरि या० चन्दा जाण माइन
लिहोर-काठियावाड़।
श्री सुपाश्वनाथजी का मंदिर ।
पञ्चतीर्थियों पर।
[1735]
संघ १४७० वर्षे वैशाप सुदि १५ शुक्रे प्राग्बाट झा० मं० रत्ना जाए रजाई पुत्र
सहस्सकिरण जार्या धरणू सुत तजदे कुटुंगयुतेन श्री कुंथुनाथ विवं कारितं प्रतिदिन
श्री हेमविमल सूरि निः । पलासर वास्तव्य ॥
[1738]
सं० १५१६ वर्षे वैन बदि १ रवी श्री श्रीमाल झातीय व तयरा जाए वा सुन
नाणा बड़ीश गोवल जा हासू सु० वीरा ना चांगलदे सुत खालु काएहु वानर
जिनपितृमातृ श्रेयोर्थं श्री श्रेयांसनाथ विंचं कारितं प्रतिष्ठितं मधुकर गछे जा ।
[1737]
सं० १५३६ बर्षे पोष वदि
श्री सिंघदत्त सूरितिः प्रतिष्ठितं विधिना कारितानि ।
पालिताना।
श्री सुमतिनाथजी का मन्दिर-माधोलालजी की धर्मशाला।
धातु की मूर्तियों पर ।
[1738]
श्रीवजदेव (?) ..."
+

( १५५)
[1730]
संवत् १६०० पोल वदि ५ सोम श्रीलालज्ञातीय लाप हेमा श्रेयले शाप लाउंजी-
केन धर्मनाथ विंवं कारित प्रतिष्ठितं श्री सूरिभिः ॥
[1740]
संवत् १६५६ करें फाल्गुण सुदि सोम इस झाप या श्री सुमतिनाथ चिंच ....
हीरविजय सुति
[ 1741]
संवत् १६३० वर्षे माघ सुदि दिने न। जापीता (?) श्नी श्री आदि विवं का
पागले श्री विजयलेन सूरितिः ॥
[11742]
संवत् १६० वै० शु० ५ शुस
[1743]
संवत् १७७५ वर्षे मार्गशिर मुदि ६ शुझे श्री अंचलगहाधिराज पूज्य महारक श्री
कमाणसागर सूरीश्वराणामुपदेशेन श्री दीव वंदिर वास्तव्य प्राग्वाट झातीय नाग गोने मंत्रि
विसल सन्ताने संभ कललती पुत्र मंण् जोका पुत्र मंग प्रेमजी सं० नागजी मं आपंदजी
पुत्र लेशरजी प्रमुख परिवारसुतेन स्वपितृ संग जीवा श्रेयोऽर्थ श्री आदिनाथ विवं कारितं
प्रतिष्ठितं चतुर्विध श्रीसंगेन ।
[1744]
संवत् १७१५ वर्षे वैशाख सुदि दिने शाप मनजी चार्ग बाई मनरंगदेकेन मुनि-
सुनत विदं का प्रण श्री विजयसेन सूरि ।
[ 1745]
संप १९एन वर्षे दै० शु १ सोम शाट खिमदत मि श्री घनल विप्रा
हा श्री विजयजति सुरि।

धर्मादे सुता लाली प्रमुखकुटुम्बयुतेन
स्वश्रेयस श्री सुमतिनाथ चतुर्विशति पट्टः कारितः प्रतिष्टितः श्री तपागझे श्री रत्तशेखर
सं० १४३ए (?)::: प्राग्बाट झातीय शा० हाला जायों दानू सुत शागिरेण
( १७६)
[17481
संवत् १७४... ॥ फागुण सुदि २... वासरे बदिने श्री पार्श्वनाथ चिंब प्रवाई से
चरावती॥
[1747]
दो बाघा श्ची जीराजलाउ श्री पार्श्वनाथ ।
[1748]
षा हीराई श्री शान्तिनाथ · · श्री हीरविजयसूरि प्र० ॥
[1749]
संवत् १९०३ वर्षे माघ विदि ५ शुक्रे श्री चन्प्रन विंबं कारापित श्रीमावि वंश
शा अनोपचन्द तस्य नार्या बाई नाथो अंचल गई।
श्री सिझचक्र यन्त्र पर ।
[1750]
संवत् २०५४ ना वर्षे माघ विदि ५ चन् श्री तपागडे वाई पूची तस्या पुत्री वाई
जेवल श्री सिद्धचक करापितं पं० पवाविजैः (?) प्रतिष्ठितं श्री राजनगर मध्ये ।
चौवीसी पर।
[-1751]
संवत् १५३३ वर्षे वैशाख विदि ७ रवी श्री सीरूज वास्तव्य प्राग्वाट झातीय श्रे० प्राप्त
सूरि पट्टे गबनायक श्री लक्ष्मीसागर सूरिनिः।
पञ्चतीर्थियों पर।
[ 1752]

। ( १७७ श्री पार्श्वनाथ विवं कारितं प्रतिष्ठित तपागचे श्री देवचन्द्र सूरिनिः । [1753] सं० १५०३ वर्षे आपाढ़ सुदि १० शुक्ने श्री प्रग्वाट ज्ञातीय श्रेण पींचा नार्या लाखणदे तयोः पुत्रः श्रे वीरम धीटा चीगाख्यैः मातृपितृश्रेयोऽर्थं श्री मुनिसुव्रतस्वामी विवं कारिंत प्र० तपागळे वृद्धशाखायां श्री जिनरत्नसूरिनिः । श्री सहूआता वास्तव्य । [1754] संप १५१२ वर्षे प्राबाट ज्ञातीय श्रे आसपाल ना पचू पुत्र धना ना० चमकू पुत्र माधवेन ना वाव्हो भ्रातृ देवराज ना० रामकी देपासादियुतेन श्री सुमति पिंवं कारित प्र तपागहेश श्री लोमसुंदर सूरि श्री मुनिसुंदर सूरि श्री जय बन्द सूरि शिष्य श्री श्री रत्नशेखर सूरिजि. ॥ श्री॥ [1755] सं० १५१७ वर्षे आशद सुदि १० बुधे नकेश वंशे झुंकड गोत्रे ज्ञा० गुजर पुर गा देव- गज पु० बालः पु० शाप समयरे वनात चांई पुण्यार्थ श्री कुन्शुनाय विवं कारिनं प्रतिम श्री खरतरगश्री विवेकरत्न लूनिः । - [1730] सं० १५१७ वर्षे वैशाख सुदि १३ सवारि वानि प्राय लारा जारड़ ना बात सुन दर. दालन ना गोमनी प्रातृ देवा जाणियुतन श्रेगो भो नुननि विंचं का० प्र० नपा श्री रत्नशे वर सूरि पढे श्री लक्ष्मीलागर सूरिजिः। {17573 सं० १५. वनाम मुदि १५ गुरु श्री श्रीनाज टानीय मराटी चालये ऽर्थ जीतताना श्री जिवनार मुल्य पंचनी मिश्रीमा पक्षेत्री नितिजा निपटे भी नजदिन निष्कि। जान बाजव्य ।

[1750]
सं० १६३७ वर्षे माघ व दि ए शनौ श्री दीव वास्तव्श श्री श्रीमाल ज्ञातीय लघुशाखा
सुत हीरजी नार्या हीरादे श्री आदिनाथ विवं कारितं तपागळे श्री हीरविजयसूरिक्षिः
( १ )
[1758]
सं० १५२१ वर्षे वैशाख सुदि ६ वुधे श्री श्रीमाल ज्ञातीय दो० गोपाश नाण सवी सु
पोमाकेन ना ऊमकू श्रेयोऽर्थ श्रीसुमतिना विंचं कारिनं श्री पूर्णिमापके ज० श्री सागर
तिलक सूरि पट्टे न श्री गुणतिलक सूरीणामुपदेशेन प्रतिष्ठितं ।
सं० १५३१ वर्षे माघ वदि सोमे श्रीमान ज्ञानीय शाराजा चा गजबदे सुत्र
सरा शाह गिळूया नार्या राजाई तया सु० पासा जीवायुतया खश्रेयसे श्री सुविधिनाय
बिंबं श्री आगम गछे श्री जयानन्द सूरि पट्टे श्री देवरत्न सूरि गुरुउपदेशेन कारित
प्रतिष्ठापितं च ॥ शुलं नवतु ॥ श्री स्तम्जतीर्थ ॥ ७ ॥
[1760]
सं० १५४७ वर्षे वैशाख सुदि ३ रबौ श्री श्रीमाल ज्ञातीय मण् देवसी जाण देणदे
पुत्र सहिजाकेन ना० धनी पुन गंगदास सचू हासा त्रातृ कीपा प्रमुखकुटुम्बयुतेन (पितु
निमित्तं स्वश्रेयसे च श्री कुन्थुनाथ विवं श्री पूर्णिमापक्षे श्री तौजाग्यरत्न सूरिणामुपदेशेन
का० प्रण विधिना श्री लीवासी ग्रामे ॥
संग १५५२ वर्षे माघ वदि १५ बुधे प्राग्बाट झातीय प० सधा ना० अमकू सु०
मूलाकेन ना हांसी सु० हर्षा क्षषा सहितेन स्वधेयोऽर्थ श्री सम्नवनाथ विवं कारित
प्रतिष्ठितं श्री वृत्तपाप ज० श्री उदयसागर सूरित्तिः ॥ श्री पत्तने ।
[ 17621
मएडन श्रेण काया ना कामयदे सुत कक्की नार्या हर्षादे सुत सचदीर नार्या सहिजलदे
३
.
[1761 ]
प
.
प्रतिष्ठितं ॥ ॥

( १७ए ) [1763] सं० १६५१ वर्ष मार्गशीर्ष वदि ४ गुरौ दो वेधराजकेन निजश्रेयसे श्री शान्तिनाथ वित्र कारितं प्रतिष्ठितं व तरा रहे श्री हीरविजयसूरिश्वरैः जार्या मोसादे सुत धनजी प्रमुखकुटुम्दयुनेन श्री दीन्दिर वास्तव्येन ॥ श्री रस्तु ॥ [1764] सं८ १६५६ ३ फागुण वदि २ गुरो दीवन्दिर वस्तव्य ओसवाल ज्ञातीय बाई मनाईकया मजयले श्री सन्नवनाथ विं कारितं प्रतिष्ठितं च तपागाधिराज परम- गुरु श्री ६ विजयसेन सूविनिः परिकरसहिनः । अनुजय तीर्थ। EAR.::। श्रीमानना की। , 4 म २६७५ ६ तास भी मी जाणे ही सारे सीकर, श्री. निदेशार पानावरको :::: भी धनदास देवारी -: - को विकासको -:-:::...: दER R - - pya Amt । 3 प

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( १ ) ६। ता लोनी जयपाल जार्या मृगाई ॥ ततः ॥ सोनी सायर नार्या बाई बाकू सुत सोनी मना नार्या बाई । वरज् सुत सोनी श्रीवंत सोनी जयवंतौ । सपरिजनसहितेन ॥ सोनी समरसिंह जार्या वाई पाही- । तहितेन ॥ एतं श्री चारवाड पुरे चर (?) ॥ निजजुजोपार्जितधन हतार्थहेतोः ॥ श्री चिंतामणि पार्श्वना. ए। थ चैत्यं कारापितं ॥ श्री वृतपागळे जट्टारक श्री जयचन्द सूरि पहावतंस ॥ जहाप श्री जिन- १० । सूरि शिष्य महोपाध्याय श्री जयसुन्दर गणि शिष्य महोपाध्याय श्री संवेगसुन्दर गुरूपदेशेन ॥ प्र. ११। तिष्ठितं चेति कल्याणमस्तु ॥ शुभं भवतु ॥ घोघा-काठियावाड़। श्री सुविधिनाथजी का मन्दिर । पंचतीर्थयों पर । [1767] ॥ सं० ११६१ माघ ११ श्री नागेजले श्री विजय तुंगसूरि.... । [1763] संप १५३ धर्मप्रन सूरि त पट्टे श्री धर्मशेखर मूरिनिः शुनं नबनु धाराधकम्य । [1780] सं० १५१७ वर्षे महा सुदि ५ मुले श्रेष्टि नसाल ना कनु नेपां सुना नाम हेमा SHET- नया साया बाई नविन गुन मानी मममी नायी १ १० ) पवित्रीकृत निजांग सप्तक्षेत्रारोपितस्वकीय वित्त सं० लटकणा ना० सं० लतादे सुत (जनकुलकमल विकाशनकसूर्यावतारः दातृगुणेन तृपतिश्रेयांससमः श्री जिन प्रतिष्टातीर्थयात्रादिधर्मकर्मकरणोत्सुकचित्त संघापति श्री रत्लसो ला० सि । हि० ला सं0 मोदणदे तृतीय ना० संघ नवरंगदे द्वितीय सुन संघवी श्री रामजी . सं० केशरदे तयोः सुन संघवी झंगरसी ना० सं० काऊसदे द्वितीय सुत संघवी शुभ ना० सं० मसतादे एतेषां महासिद्धक्षेत्रः श्री सेब्रुजय रत्नगिरी श्री जिनप्रासाद शांतिनाथ वियं कारयित्वा नित्यं प्रणमति । शुज नवतु । चोरवाड़-जुनागढ। जेन सन्दिर । शिला लेख। 1 मुगायत विशाल नगर श्री चौरबाट के सचिरीचंतामणि पार्श्वनाथ विजाय । जय तन गुन व. ३ । नी । गायर ननया । श्रांबाग्व्यरतत्र चादिमा गुणवान् । द्वितीयो मना निभाना ।" १ : कृपयायः ॥ २॥ यां । दासम्म ननुजः मुविवेकः समरसिंह इत्यादः । देवगुरु नक्तिपरमः तन गनु यः । श्री ४. : 2 में वेदान्य सुदि तृतीया गुगे । श्री मंगलपुर वास्तव्य । श्री प्रकार T [1766] mange -- -- मनी माय- स । ( १७१) ६। ता सोनी जयपाल जार्या मृगाई ॥ ततः ॥ सोनी सायर जार्या बाई बाकू सुत सोनी मना नार्या बाई : । वरजू सुत सोनी श्रीवंत सोनी जयवंतौ। सपरिजनसहितेन ॥ सोनी समरसिंह जार्या वाई पाही ७। सहितेन ॥ एने श्री चारवाड पुरे चर (2) ॥ निजजुजोपार्जितधन हतार्थहेतोः ॥ श्री चिंतामणि पार्श्वना- ए। घ चैत्यं कारापितं ॥ श्री वृतपाग जट्टारक श्री जयचन्द सूरि पट्टावतंस ॥ जहाज श्री जिन- १० । सूरि शिष्य महोपाध्याय श्री जयसुन्दर गणि शिष्य महोपाध्याय श्री संवेगसुन्दर गुरूपदेशेन ॥ प्र- ११ । तिष्ठितं चेति कल्याणमस्तु ॥ शुग्नं नवतु ॥ S:- ॥ घोघा-काठियावाड़। श्री सुविधिनाघजी का मन्दिर । पंचतीर्थयों पर। [1767] ॥ सं० ११६१ माघ ११ श्री नागेजस्ले श्री विजय तुंगमूरि.... । [1783] सं० २५८३ धर्मप्रन सूरि त पट्टे श्री धर्मशेयर गिनिः शुन नबनु लागाम्य । [171 तं० १५१७ वर्षे नहा सुदिप जो शिनानुनतः मामला सं० १५५५ वर्षे वैग सुण ३ शनौ श्री श्रीमाल ज्ञाप मनोरद नामांकी सुप वाहान सं० १५५७ वर्षे पोष वदि ६ रवौ घनौध वाली श्री श्रीमाल झा० साप माईया जा सं० १५५३ वर्षे वै० सुप ११ शुक्र श्री श्रीपशे मं० माश्या सुत मंण् मूखा जा रम सुश्राविकया सुत मं० धना मेघा रामा सहितया निजश्रेयार्थ श्री सुमतिनाथ पिवं का। (१७) रोका पीमा स्वनार्या पितृमातृश्रेयोर्थ श्री कुंयुनाथ विंबं का प्र० श्री आगम गठे आनन्दप्रन सूरिभिः आबरणि वास्तव्य । [1870] सं० १५३६ वर्षे आपाढ़ सुदि ६ श्री श्रोसवान झाती सापाला जार्या बनधु सु गोविन्द ज्ञा गंगादे नाना श्रात्मश्रेयले श्री कुंथुनाथ विवं कारित प्र० बृहत्तया पझे ना जिनरल सूरितिः [ 17711 संप १५५५ वर्षे वैशाख सुदि ३ शनी धनौष वास्तव्य श्री सवाल ज्ञाण सा गोगन ना गुरदे सुत हांसाकन ना कस्तुराई सहितेन स्वयसे श्री अजितनाथ त्रिंब का श्री बृहत्तपा गले न श्री धर्मरत्न सूरिनिः । [ 1772] ना जीविनी सु देवदासेन ना दगा सु० पासा करन धर्मदास सूरदास युनेन श्री विमलनाथ विंचं कारित श्री शंलगळे श्री लिझांतसागर सूरि गुरूपदेशात् । [1773] जीवी सुन कानाकेन स्वश्रेयसे श्री नमिनाथ विव का श्री वृत्तपा पक्षे श्री सदनी सागर सूरिनिः । श्रेयो नवतु पूनकस्य । [1774 ] प्रा धर्मवसन सूरिभिः श्री जांबू ग्रामे ।

( १३ चौविशी पर। [1775] सं० १५१५ वर्षे का शुशनो श्री श्रीमान ज्ञानीय मं कहा जार्या राजुन सुत सिंह- • गज मं विवाकेन पिपाच तृप्रेयौर्य श्री कुंघुनाथ चतुर्विंशति जिनपट्टः का० श्री . गुपदर दुरित्तिः। : [1778] संघ १५.५४ वर्षे या बुदि १७ शुक्रे श्री श्रीवंशे मंग सांगन नाप सोहागदे पुत्र मंग रक्ष नाप गुरी पुरा खेतली जन्मनाशा हाजन मंनार्या जयतलेदे घ्रातृ फाजा इत्या तारपुत्र जोजा देवही धीरा प्रमुखसमस्तकुटुम्वत्तहितेन तपितृश्रेयाय श्रीअंयन- गहेयर श्री जयलरी सूरीनामुपदेशेन श्री नमिनाथ चतुर्विशति पहः का प्र० श्री श्री. संबन श्री पिढुंबा ग्रामे। शीयालयेट-काठियावाड़। जैन मंदिर। -- पापार की नलियों पर। i । है संवत् १९६२ व दि ५ वो घोड़ २। किान निराज श्री रनिंद प्रकिनी मन्नन श्री न्यावी. । रविदारितं प्रतिदिनी मीद सूक्ति . श्री । -- -- . । - ( १०४ ) जार्या माविकया स्वश्रेयो) रांकागलोय श्री महीचन्द्र सूरि नि: महाबोर चैत्ये श्री रुपनदेव [1778] ए ॥ सं० १३०० वर्षे वैशाष वदि ११ बुधे श्री सह जिगपुर वास्तव्य पली ज्ञात उ० देदा नार्या करदेवी कुक्षिसचूत परीमहीपाल महीचन्द्र तत् सुन रतनपाक्ष वि.. पालैर्निजपूवज शंकर नायाँ लक्ष्मी कृतिसंजूनस्य संघपति सूधिगदेवस्य निजपा वार सहितस्य योग्यं देवकृषिकासहित श्री मल्लिनाथ विं कारितं प्रतिष्ठितं श्री च" गलीय श्री हरिप्रन सूरि शिष्यैः श्री यशोजन सूरिनिः ॥ । मंगनमस्तु ॥ ७॥ [1779] * सं० १३१५ फाल्गुण वदि ७ शनौ अनुगधा नक्षत्रे अयह श्री मधुमत्यां श्री महावीर देवचैत्ये प्राग्वाट ज्ञातीय श्रेष्ठि आमदेव सुन श्री सपाल सुन गंधि चिवाकेन श्रात्मनः भयोर्थं श्री पार्श्वनाथ देव विवं कारितं चन्द्रगडे श्री यशोजन सूरिनिः प्रतिष्ठितं । सं० १३२० माघ सुदि ...गुरौ प्राग्वाट ज्ञात प्र व्या वीरदत्त सुत व्या जाला [ 1780] * बिंबं कारितं । * वहां के गोरखमण्डी में भोयरे के पास पड़े हुए मूर्तियों पर ये लेख हैं। ) 44) agregTOSSES S

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TU KHAIRATE MOM मोडता जारमा रामावतार हाला कामविश्वालाविना गतगीत मा जागतिक वस्या मोदी जिलामाशागतारामती नाही मागतारदता विनोवावधानतातत विमान महायोलताना लगतिलताशासी मति नहारत हातमाल कालावंत पाटमा गति टोsary हिमाघमा Dinal साहिडित से रिमामासाहतवारी EKHEMBER न्यायल्यम- - दिविजा मसिहावापर મારો मीसिकात्मीद ઘણાવાય गणि माना तामामा कालतिसमतोधिहातमा रिसराटाताधस्विमा मामाता मत ताजटियाणादाला वाशनाmakarससोदिता ពីបឪពុជ TUFANोटनिरपानुनी मादेवालाguaniadan रासायनिकाली कतामा प्रमानामा कालोजanti मसिदामाजमाता-mel गतिमिहिंगामा 1-1-15महानारामाच्या Varantiviritpitalnalisatirangeटो कामकrungral WER का तापमान शाल्मम inEED ययययययययर Patra कार ورم و JAVNAGAR TEMPLE PRASHASTI - Dated, V. S. 1697 (A. D. 1640) TETr-EAR-ग?'

(१५) জন-ক্ষাতত্ব। श्री शांतिनाथजी का मन्दिर-मद्धमान सेवाला। शिक्षा लेख [1781] (शिरोजाग) जाम श्री लक्षगजगज्ये ॥ १। ॥ एज० ॥ श्री सत्यराजिनः प्रमोदकरणः कन्याएकंवांबुदो। वि. २। व्याधिइरः सुरासुग्नरैः संस्तूरमानकनः॥ सप्पांको जधिनां म. ३। नारघतरुव्यूह वसंतोपमः । कारुखावयः कशाधन्मुखो नी. ४। लविः पातु वः ॥ १॥ कीड़ा कोलविरतं । कमलाविज्ञान । स्यानं ५। विचार्य कमनीयसनंतनोनं । श्री उज्जयंतनिकटे विकटाधिता. ६ । धे। हालादेश अनि प्रमदाबलामे ॥ २॥ उत्तुंगतोरणमनोहर- ७। वीतराग । प्रासादपंक्तिरचनासचिरीतोही। नंयान्नवीनग- ७। री क्षिनितुन्दरीणां वक्षःस्पले लन्नति ताहि लतिकेव ॥३॥ सराना- ५। घः प्रणति विवत्ते।काधियो यस्य जयातिनि। यहांतनं यति मावशी १०। जीव्यायशो जितत्वजावतंसः ॥ ४ ॥ श्रीगोपालगनोऽमृत् जाग्या- ११ । धिकः प्रोविजयेंउसूरिः। श्रीधरः शनसाधु नार्गदश्वरोदनयर प्रना- १२ । दः ॥ ५ ॥ लपवनानो हि यसोधनाहो । हडीहती वन् नपछिकोऽपि । १३ । संस्थापित श्रीविधिरक्षाः । सधैचतुर्था पतिव्यमानः ॥ ६५ नही ज. १४ । यतिइति। श्री धनवोऽय मलिंदः । निद्रप्रभाजितसिंह। १५ । देजसिंहः कश्चिक्रवतीं ॥ ७ ॥ वर्मप्रतः सिंविशेषकाहः । श्री मा. २ समगर लेट नारास पारा हानिट की गरपुर : ८- पा, भावा सरर मुनि किसी में 1 - प्राचीन र ६ :: ::::::::: प्ररमिटिम रिर पर - . . m .. २७ । श्रीश्रीपालकुरपाल । रणमहा वरा मे ॥ १५ ॥ श्रीश्रीपालांगजो जीया। नारायणे ३० । यदीपको । सुशीलस्थावराख्यश्च । बाघ जिज्ञाग्यसुन्दरः ॥ १७ ॥ खपरिकरयुताच्याम- ३२। श्री जसवन्तजी विजयिराज्ये श्री अंचलगछेश श्री कल्याण सागर सूरीश्वराणामुपर ३३ । तिनाथप्रासादादिपुण्यकृत्यं श्रीशांतिनाथप्रभृत्येकाधिकपंचशत्प्रतिमाप्रतिष्टायुगं काग- ( १७६ ) १६ । न महेंजप्रनसू रिरायः ॥ श्रीमेरुतुंगोऽमितशक्तिमांश्च । कार्यद्भुतः श्री ज- १७ । यकीर्ति सूरिः ॥ ७ ॥ वादिहिरौघे जयकेसरीशः । सिद्धांतसिंधु वि जा- १७। वसिंधुः। सूरीश्वरश्रीगुणशेवधिश्च । श्री धर्ममूर्तिर्मधुदीपमूर्तिः ॥ ए॥ १ए। यस्यांघ्रिपंकज निरंतरसुप्रसन्नात् । सम्यकतिसमनोरथवृक्षमालाः ॥ श्री. २० । धर्ममूर्तिपदपद्ममनोज्ञहंसः । कल्याणसागरगुरुयतारियां ॥ १० ॥ २१ । पंचाणुव्रतपालकः स करुणः कल्पझुमानः सतां । गंजीरादिगुणोज्वतः शु. २२ । नवतां श्रीजैनधर्मे मतिः । के काव्ये समतादरः क्षितितले श्री उप्तवंशे विनुः २३ । श्रीमहालणगोत्रजो वरतरोऽत् साहि सहा निधः ॥ ११ ॥ तदीय पुत्रो इरप 1. २४। मा देवाच्चनंदोऽथ स पर्वतोऽनृत् । वन्नुस्ततः श्रीअमरातु सिंहो। जाग्याधिकः को २५ । कलाप्रवीणः ॥ १५ ॥ श्रीमतोऽमरसिंहस्य । पुत्रामुक्ताफलोपमाः । वर्षमानचापसिंह २६ । पद्मसिंहा अमीत्रयः ॥ १३ ॥ साहि श्री वर्षमानस्य । नंदनाश्चंदनोपमाः । बीगह २७ । विजपालाख्यो जामो हि जगमूस्तथा ॥ १४ ॥ मंत्रीश पद्मसिंहस्य । ३ . *. स्त्रयः । मनो- २ए । हरः । तदंगजः कामरूमः कृष्णदासो महोदयः ॥ १६ ॥ साहि श्रीकुंरपाक्षस्य ।वर्तन ३१ । शिरोरत्नाच्यां साहि श्रीवईमानरमासंदाच्या हल्लार श्रीश परदेशे नव्यनगरे जाम शख्यात्मज देशेनात्र श्री शां. इन्व- मात्य.

( १७७) ३४ । पितं चाचा सं० १६७६ वैशाख शुक्ल ३ बुधवासरे द्वितीया सं० १६७ वैशाख शुक्ल ५ शुक्रवासरे ३५ । सं० १६ए मार्गशीर्ष शुक्न ३ गुरुवासरे उपाध्याय श्रीविनयसागरगणेः शिष्य सोलाग्यसागरैः (अधो नाग ३६ । रदेखीयं प्रशस्ति. ॥ मनमोहन सागरप्रालाद (बाम नाग) ३७ । मंत्रीश्वर श्रीवर्धमान पद्मसिंहाच्यां सप्तलकरूप्यमुडिकाव्ययीकृतानवक्षेत्रेषु सादि श्रीचापसिंहस्य पुत्रैः नीमियानिधः । तदंगजौ शुद्धमती । रामजीमावुनावपि र७ ॥ श्री आदीश्वरजी का मन्दिर । [1782] १। श्री गौतम स्वामीन लब्धि ॥ न । हारक चक्रवर्ति नहारक श्री ३। हीरविजय सूरीश्वर चरण पाछ ४। कान्यो नमः ॥ सं० १६३३ वर्षे परम ५। गुरु श्रीमत्तपागाधिराज सकल ६ । नहारकपुरंदर नहारक श्री हीरवि- । जय सूरिराज्ये तथा जाम श्री शत्रशत ज। राज्ये पाश्रीरविसागर गणि विशिप्यो ए। पदेशेन नवीननगर सकल संघ मु. १० । खसंघेन स्वश्रेचस्ते नवीन शिख- ११ । रं बध्वा प्रासादः कारितः ॥ ततो अक- १२ । वर सुरत्राण प्रेषित मुग्गलैरुप- १३ । अवकरणान्तरं नहारक श्री श्री १४ । हीरविजय सूरि पहोदयाडिदिन- १५ । कर नहारक श्री ५ श्री विजय से- १६ । न सूरिराज्ये ॥ सं० १६५१ वर्षे १७ । श्री श्रीमाली ज्ञातीय । नणसाली १७ । आणन्द नणसाली अवजीच्या १ए। लणसाली आणन्द सुत जीवरा २०। ज मेघराज प्रमुखसकलकुटुं- ३१ । वयुताच्यामेक त्रिंशत् सहस्र २२ । ३१००० रौप्य मुखाव्ययेन पुनर- २३। पि तथैव कारितं । सांप्रत विज २४ । यमान आचार्य श्री श्री श्री श्री (१७) २५। विजयदेव सूरीश्वर प्रसादात् । २६ । चिरं तितु । शिवमस्तु '५७। घस्य ॥ श्री श्री॥श्री॥ आदिनाथ २७। छावां कृतः । प्रासादनामनि प्रासादः rr4 - - तालाजा-काठियावाडा पाषाण के चरणचौकी पर। " [1783 ] जं सं० १३०५ वैशाख सु३ धवलकमका वास्तव्य उपदमतीह सुत उजा. मदन जयता तेन ॥ व मदन नार्या व लष्मा देवी श्रेयोर्थ सुत व पाहणेन श्री वीर विषं पट्टकं च प्रतिष्ठिनं आचार्य श्री माणिक्य सूरिभिः । [1784] १। सं० १२१ए वर्षे दण्ड श्री धांध प्रभृति पञ्चछेलन श्री मुनिसुव्रतस्वामी देवा .... णि ...पा विशेषपूजाप्रत्ययमएडपिकायां प्रतिवर्षा हो ३। 5 (१) ४ चतुर्विशतिअम्मा: । अण् खवनादेश. । बहुभिर्वसु ४। [धा नुक्ता] राजनिः लगरादिनिः । यस्य यस्य यदा भूमि तस्य तस्य ५। तदा फलं ॥१॥ तथा समस्तप्रमदाकुलाय अ पूर्णिमादि ६। .... (रके) ४ चत्वारि अमाश्च ॥ पञ्चकुलसमक्ष देवद.... ७४ पीजाम- ३४ रक्षपटा. -मनाय XTED , • यह लेख तन्द्राजा से पूर्व में हनुगपीर की कन्वर से मिली हुई मूर्तिसहित पायाण की वरण चौको पर हैं और साथ पारटुन लार्सरी के मुनिया में सुरक्षित है।

A ( १ ) माङ्गरोल-काठियावाड। पाषाण की मूर्ति पर। [1785] * । ॥ सं० १५५३ वर्षे आपाढ़ सुदि ४ शनौ चाविगत महं वनराजे(न आत्म- श्रेयोर्थ श्री मुनिसुव्रतस्वामि प्रतिमा । कारिना प्रतिष्ठिना च श्री देवना सूरि शिष्यैः श्री जिनचन्द सूरिनिः॥ वेरावल-काठियावाड। शिला लेख। 1786], निवन्नानि नित्यमद्यापि वारिधौ ॥ श्रे(?) प्रपा(सा) दनीष्ट संसिझयै मुखं चन्प्रतं स पाटकान्यं पत्तनं तद्विराजते ॥३॥ मन्ये वेधा विधार्यतहिविधित्सुः पुनरीक्ष • दे ३। रन्न्नत्रयमंत्र यंत्रलक्ष्मीः स्थिरीकृता ॥ ५ ॥ तन्निाशेपमहीपालमोली घृष्टांक्षि ५। लौ नृपः। तनोत्खातासुन्मूलो मूटराजः स उच्यते ॥ 9 ॥ एककाधिकनृपाला । ५॥ तत्रजखुराहतं । अतुटलत्युयं पुखेन पर्वत्रममजीजनत् ॥ ए ॥ पापण प्रज्ञापन * यह देख सलीमलोद के पास गुदाई में निरोईन यसवरपर है। पर लेख वहां के जमाने में है। ८ Rom -- • नीजाय ददौ नृपः। विरुदं मएकलाचार्यः सहनं ससुखासनं ॥२३॥ श्रीसुखवसति- 'वासुकि नूपुरशशितिलक (१०) ६ । ....... र न्यून विक्रमः । श्री जीमनूपतिस्तेषां राज्यं प्राज्यं करोत्ययं ॥१ जावाक्षराएयनम्राणि यो वसज्ञम(वनजम) नंदि संघे गणेश्वराः। बबुः कुंदकुंदाख्या साक्षात्कृतजगत्रयाः ॥ १३॥ माकाशगामित्वं त्य। शत(पं)चकमुज्वलं । रमयित्वाथ जन्मांतियेऽन्यनियमपुर्वकं ॥ १४ ॥ ११ स्मिन् जारते क्षेत्रे जाता ए। .... रीणा तत्व वर्मनि तेषां चारित्रिणो वंशे नूरयः सूरयोऽजयन् ॥ १७ ॥ १६६५ पि निषाः सकलापंकः १०। प्रजा यस्या रुरोह तत् । श्रीकीति प्राप्य सत्कीर्ति सूरि जूरिगुणं ततः ॥ १५ ॥ यदी देशनावारिं सम्यग् वि(मो) कश्चित्रकूटाञ्च चालसः श्रीमन्ने मिजिनाधिशः तीर्थयात्रा निमित्ततः ॥ १॥ अण हिमपुरं रभ्यपाजगा काख्यं जिनतवनं तत्र १३॥ संज्ञयैव यतीश्वरः । उच्यतेऽजितचन्दोयस्ततो जूत् स गणीश्वरः ॥ २४ ॥ चात कीर्तियशः कीर्तिश्च युक्तो को रत्नत्रयवानपि । यथावविदितात्मां सानुत् क्षेमकीर्तिस्ततो गति ॥ ७॥ उदेतिस्म लसद्ज्योति लेंपिकासिते हेमसूरिया वस्तू प्रायरणं येन वशे लेयिनं ॥२॥ " १६॥ कीर्तिर्यत्कीर्तिनको व ....। त्रिवनरा निपव्या ॥३१॥ ते १७। ....ति ॥ ३२ । समुद्धृतसमुछन्नश्चीर्णजी जयः। यः कृता रन्न निर्वाहेसमुत्साट शिरोमणि १४॥ १५। Homala रए? ) शयैरवगएयते ॥ ३४ ॥ वादिनो यत्पद इन्धनखचन्डेषु विविताः । कुर्वते विगत श्रीका: कलंक । ... दं तीर्थस्तमनादिकं ॥ ३६॥ सतायाः स्थापना यत्र सामेशः पक्षपातकृत् । प्रनो- स्त्रैलोक्य । ... तमुद्धृततेन जातोद्धारमनेकशः ॥ ३८ ॥ चैत्यमिदं ध्वजमिषतो निज जमुद्धृत्य सक । .... पतो मंडलगणि बक्षितकीर्ति सुकीर्तिः । चतुरधिकविंशति जसध्वजपटपट्टहंसूक॥ मेतदीय सजोष्ठिकानामपि गलकानां ॥४१॥ यस्य स्तानपयोनुलिप्तमखिलं जुष्टं वी चन्द्रप्रतः स प्रस्तीरे पश्चिमसागरस्य जयतादिग्व्यससां शासनं ॥४२॥ जिन ' पतिरह चाणवर्णिवों व्रतविनयसमेतैः शिष्यवगैरुपनैः ॥४३॥ श्रीमधिक्रम नूपस्य - वषां हादशे ।। क कीर्त लघुवंधुः । चके प्रशस्तिः मनघो गणि प्रवरकीतिरिमां ॥ ४५ ॥ संप १२ जैन मंदिर। शिला लेख । " । [1787] १। ॥ ए ए ॥ संवत् १७७६ वर्षे शाके १९४१ प्रवर्त. । माने माघ माले शुक्लपक्षे अष्टमी तिथी शनिवा- ३। सरे श्री देवका पाटण नगरे श्री चन्प्रन जि- ४। न जीणोद्वार समस्त संघेन कारापितं नहार- ५। क श्री श्री विजय जिणेन्ड सूरि उपदेशात् श्री ६। मांगवार वास्तव्य शा नानजी जयकरण ५। सुत मफनजी ॥ ७ ॥ सुन्दरजीकेन जीर्णोडा- ६। पान यात्मनः पुण्यार्थमिद्द गाउति ग्रामे प्रपा श्रीगाणेश्वरदेवमामयः पुरतस्तार ( १९२ G। र प्रतिष्ठा कारापितं नहारकं श्री श्री विजय. ए। जिणेन्ड सूरिनिः प्रतिष्ठितं श्री मत्तपागडे १० । जब खग मेरु अडग है तब लग शशि ओ- ११ । र सूर । जिहां लग ए पट्टक सदा रहजो स्थि. १५ । र जरपूर १ लि । वजीर ज्योति लोकविजयेन । गाणेसर-गुजरात। जैन मन्दिर। शिखा लेल [1788 ] १। ॥ ए॥ स्वस्ति सं० १२११ वर्षे वैशाख सुदि १४ गुरौ श्रीमदणहिलपुर वास्तव्य प्राग्वाट उप श्री चण्डपात्मज ० (चं) २। डप्रसादांगज व श्री सोमतनुज व श्री आशाराज तनुजन्म व श्री कुमारदेवी कुक्षिसमुद्भुत 10 लूणि(ग) ३। महं० श्रीमालदेवयोरनुजमह० श्री तेजःपालाग्रज महामात्य श्री वस्तुपालात्मज मई श्री जयतसिंह (स्तम्न) ४। तीर्थमुआव्यापार सं ३ए वर्ष पूर्व व्यावृण्वति महामात्य श्री वस्तुपास महं० श्री तेजःपालाच्यां समस्तमहातीर्थेपु ५। तथा अन्यसमस्तस्यानेवपि कोटिशोऽनिनवधर्मस्थानानि जीर्णोद्धारश्च कारिताः नया सचिवेश्वर श्री वस्तु- (बोलीहागलं (कृ)

( १९३ )
। त प्राकारश्च कारितः ॥ छ ॥ गांभीर्ये जलधि निर्वितरणे पूषा प्रतापे स्मरः सौन्दर्य
पुरुषबने रघुपति र्वाचस्पतिर्वा ....
। ये । लोकेऽस्मिन्नुपमानतामुपगता: सर्वे पुनः सम्प्रति प्राप्तास्तेऽप्युपमेयतां तदधिके श्री
वस्तुपाले सति ॥ १॥ विद(धति)
ए। विदग्धमतयस्तुल्यौ कौटिव्यवस्तुपालो ये । ते कुर्वते न कस्मात्कूषाकूवारयोः समतां
॥ २ ॥ वदनं वस्तुपाल(स्य)
१० । कमलं को न मन्यते । यत् सूर्यालोकने स्मेरं नवति प्रतिवासरं ॥ ३ ॥ श्री वस्तुपाल
सम्प्रति परं महति कर्म(कुर्व)
११ । ता नवता । निर्वृतिरर्थिजने च प्रत्यर्थिजने च संघटिता ॥ ४ ॥ तस्मै स्वस्ति चिरं
चुबुश्यतिलकामात्याय
१२। क्रान्तकतुकर्म निर्मलमतिः सौवस्तिकः शंसनि । राधे येन विना विना च शिविना
.... य ना
१३ । वासित सम्नटाः स्वसदनं गति सन्तः सदा ॥ ५ ॥ महामात्य श्री वस्तुपालस्य
प्रशस्तिरिय)
.
4
प्रभास पाटण - गुजरात ।
वावन जिनालय मन्दिर।
मूर्तियों पर।
[1789]
१। उप हीरा देवि पितृ बोरदेव मातृ सक्तं संघ पेयन संघः कृगुग संघ० पदमत
महं० वि(कमोती वयजखदेवि गई वायनीद मदं महामीद व्यव० सापम
सो० महिमाल नान लन
।

T 1 सूरिभिः । स्वपट्टप्रतिष्ठिताचार्य श्री ५ श्री विजयसिंह सूरि निः साया(?)स्व शिष्योग- २ । ३० रत्न लगी ॥ ॥ दीपमीद ni Tari avधांच आमुल नागल श्रे० नागपूर राजवरमा नविना जाना ३। फो रिणसीह गहाणा नरम आगो, श्रावमा नाय गणमीह सदशी कमरस) दो लूगा ना पाता श्रीपाती गुदा ना नसीह या सिरी ५। ३० सीहा ॥ मातृ वासिनियर रसीद को भग TE: रानव ॥ ५ वा० तेजी तिहुणा 7 लाजि पो० गूणा नुमपारोवमा कामक्ष T० लपगीधर । चरणौकी पर। [17000 १। ॥ ए ॥ सं० २६एए वर्षे फाल्गुन सित छादशी सोमवास श्री छोप बन्दिर । वृद्धशाखोय उकेश ज्ञातीय सा सुगुणसी जार्गा संगई सुत सा[सवराज ना श्री कुंकुमरोख पार्श्व विं सपरिकरं कारितं प्रतिष्टितं च स्वप्रतिष्ठायां। प्रति- २। ष्टितं च तपागठाधिराज नहारक श्री १ए श्री हीर विजय सूरीश्वर पट्टालंकार श्री रए श्री विजयसेन सूरीश्वरपट्टप्रजाकर नहारक प्रभु श्री रए श्री विजय -- - ध्याय श्री ५ श्री लावण्यगणिप्रसुखपरिकरितैः ॥ शुनं चवतु ॥ श्री॥ [1791] १। सं० २३३७ वैशाख सुदि(२) शनो पल्लीवाल ज्ञातीय ० आसान वा श्रासापड्याच्या जो जादह श्रेयोथ ।। श्री मलिनाथ विवं व शासपालेन कारितं प्रतिष्ठितं श्री पूर्ण नऊ सूरिभिः । [1702] १।। 5 सं० १३५० ज्येष्ठ वदि १० शुम्के पल्लीवाल... चा वीरपाल ना पूर्णसिंह जावय यह लेख जमीन से निकली हुई मूर्ति के चरणवौकी पर है। + मलिनाथ महादेव के मन्दिर के पास पड़ी हुई खण्डित मूर्तियों पर ये लेख ( १ ) .। जक्षवेवि पु कुमरिसिंह केशिसिंह ना० आत्मश्रेयोर्थ ॥ श्री पार्श्वनाथ विवं का- ३। रितं प्रतिष्ठितं श्री कोरंटकीय सूरिनिः शुनं ॥ ॥ HTTTTTTTLE खंभात-गुजरात। श्री आदीश्वर नगवान का मन्दिर । शिला लेख २ [1793] १। ॥ ए ॥ नमः श्री सर्वज्ञाय ॥ धीराः सत्वमुशंति यत्रिजुक्ने ( यन्नेति) नेति श्रुत साहित्योपनिपनि । पएणमनसो यत् प्रतिनं मन्यते सार्वज्ञं च यदा मनंति मुनयस्तत्किंचिदत्यद्भुतं ज्योति- योतितवि- ३। ष्टपं वितनुतां क्षुक्तिं च मुक्तिं च वः ॥ १ ॥ श्री मद्गुर्जरचक्रवर्तिनगरप्राप्त प्रतिष्ठो जिनि प्राग्वाटाहृयर. ४। भ्य वंशविलसन्मुक्कामणिश्चंडपः ॥ यः संप्राप्य ससुखतां किल दधौ राजप्रसादोलसहि- क्कूक्षकप- ५। कीर्तिशुनसहरीः श्रीमंतमंतर्जिनं ॥२॥ अजनिरजनिजानिज्योतिरुद्योतकीर्तिस्त्रिज- गति ततुज- ६। न्मातस्य चएडप्रसादः ॥ नखमणिसख(शार्ड)सुन्दरः पाणिपद्मः कमकृत न कृतार्थ यस्य कल्पद्रुकल्पः । ॥३॥ पत्नी तस्या जायतात्पायताक्षी सूर्तेन्द्र श्री: पुण्यपात्रं जयश्रीः ॥ जताच्यान ग्रिमः सूरसंज्ञः पुत्रः श्री २७ । हलदमी: ॥ विशदतरचित्तवृत्तिः श्री ललितादेवी संझास्ति ॥ ११ ॥ शीतांशुप्रतिवीर रए। पुत्रस्तयो विख्यातः प्रसद्गुणो विजयते श्री जैसिंहः कृती ॥ सदमीर्यकरपंकज ( ९एद G। मान् सोमनामा द्वितीयः ॥ ४ ॥ निर्माप्यादि जिनेन्द्रविमसमं शेषत्रयोविंशति जनप्रतिमा विराजि. ए। तमसावन्यर्चितुं वेश्मनि ॥ पूज्यः श्री हरिनझसूरिसुगुरोः । पार्थात् प्रतिष्ठाप्य खस्यात्मीय कुलस्य चाद- १०। यमयं श्रेयो निधानं व्यधात् ॥ ५ ॥ असावत् सावाशाराज तनुजसमं सोमसचि प्रियायां सीतायां शुचि च ११। रितनत्यामजनयत् ॥ यशोनियस्यै निजगतिविशदे दीरजलधौ निवासकप्रीति मुदस जजदि- १५ । प्रतिपदं ॥ ६ ॥ श्री रैवते निम्मितसत्यपात्रः केनोपमान स्त्विह सोऽश्वराजः ॥ कलंकशंकामुपमान- २३ । मेव पुष्णात्यहो यस्य यशः शशांके ॥ ७ ॥ अनुजोऽस्यापि सुमनुजस्त्रिजुवनपालस्तथा स्वसाकेली १४ । आशा राजस्थाजनि जाया च कुमारदेवीति ॥ ॥ तस्याऽनूत्तनयो जयो प्रथम श्री मनदेवोऽपरश्चं १५ । चञ्चंगमरीचिमण्डलमहाः श्री वस्तुपालस्ततः । तेजःपालइति प्रसिझमहिमा विश्वऽत्र १६ । तुर्यः समजायतायतमतिः पुत्रोऽश्वराजादसौ ॥ ए॥ श्री मद्भदेव पौत्रौ सीबू सुत पुण्यसिंह तनुज- १७। न्मा ॥ श्राब्दणदेव्या जातः पृथ्वीसिंहाख्ययाऽस्ति विख्यातः ॥ १० ॥ श्री वस्तुपात्र सचिवस्य गेदिनी देहिनीव गृ- पीवर यशा विश्वेऽत्र तुर्यः स्फुरञ्चा- प्रणयिनी हीनाश्रयोत्थन (रए ) २० । सा प्रायश्चित्तमिवाचर त्यहरहः सानेन दानंनसा ॥ १५ ॥ अनुपमदेव्यां पल्यां श्री तेजःपाल मचितितकस्या । २१। लावण्यसिंह नामा धाम्नांधामायमात्मजो जज्ञे ॥ १३ ॥ नानूवन्कति नाम संति कनिनो नो वा नविष्यंति के कि. ५५ । तु क्वापि न कापि संघपुरुषः श्री वस्तुगलोपमः ॥ पुण्येषु प्रहग्नहर्निशामहो सर्वा- निसागधुरो यनायं वि. २३। जिनः कलिपिदधता तीर्थेशयात्रोत्सवं ॥ १४॥ खक्ष्मीधर्मानयागेन स्थेयसीतेन न- न्वता ॥ पोषधालयमालायं(लेग्य) २४ । निर्ममेन विनिर्ममे ॥ १५ ॥ श्री नागेन्झमूनीन्सगढतरणिर्जझे महेन्प्रत्तोः पट्टे पूर्वनर्ववाङ्मयनि- २५ । धिः श्री शांति सूरिर्गुरुः ॥ आनन्दामरचन्दसूरियुगलं । तस्मादलूनत्पदे पूज्य श्री हरिजन सूरि गुरवोऽनूवन् जु- २६ । वो नूपणं ॥ १६ ॥ तत्पदे विजयसेन सूरयस्ते जयंति नुवनेकनूपणं ये तपोज्यतन नविनूनिनिस्तेजयंनि २७। निजकीर्तिदर्पणं ॥ १७॥ वकुलगुरुगणिरेपः पोपयशालामिमाममात्येन्डः ॥ पित्री: पवित्रहृदय: पुण्यार्थ २७ । कल्पयामास ॥ १७ ॥ वाग्देवतावदनवारिज (मित्र ) सामराज्यदानकलितोम्या: पताकां चके गुरोविज- २ए। यसेन मुनीश्वरस्य शिष्यः प्रशस्तिमुदयप्रन सरिना ॥ १५ ॥ सं० १२७१ वर्षे मदं श्री वस्तुपाखेन कारित पायध- ३० । शाखाख्य धर्मस्थानेऽस्मिन् श्रेष्ठि गावदेव नुत श्रे० मयधर । ना गाना नान धारा । व्यव० वेशाज विक घेण् पूना १। पुन वीजावड़ी उदयपाल । टयामा । नाम थाहा न गुमाउ नगाधिरा मीनं ॥ पजिगोंरित्व पत्थिानन्य लिख . ( १ ) ३२ । स्तम्नतीर्थे - कायस्थवंशेनाद नकितः सिपा उ० सु० "" सूत्रधार कुमरसिंहनोत्कीर्णा शिला लेख-नोंयरे के द्वार पर । [1794] १। ॥ ए ॥ श्री गुरुच्यो नमः ॥ श्री विक्रम नृपात् संवत् १६६१ वर्षे वैशाख सुदि सोमे श्री ।। स्तंनतीर्थनगर वास्तव्य ॥ ऊकेश ज्ञातीय ॥ आबूहरा गोत्र विषेषण ॥ सौवर्णिक कलासु ३। त ॥ सौवर्णिक ॥ वाघा नार्या रजाई ॥ पुत्र ।। सौवर्णिक वडिया ॥ जार्या सुहासि - ॥ पुत्र । सौव- •. । णिक ॥ तेजपाल नार्या ॥ तेजलदे नाम्न्या ॥ निजपति सौवर्णिक तेजपाल प्रदत्ताश ५। या ॥ प्रजूतव्यव्ययेन सुनूमिगृहश्रीजिनप्रासादः कारितः ॥ कारितं च तत्र मूल : ६ । नायकतया स्थापनकृते श्री विजयचिंतामणि पार्श्वनाथ विवं प्रतिष्ठितं च श्रीमत्त- । पागलाधिराज जट्टारक श्री आणंद विमल सूरि पहालंकार ॥ नहारक श्री विजयदा- ७। न सूरि तत्पदृप्रजावक सुविहितसाधुजनध्येय सुगृहितनामधेय ॥ पात ॥ ए। साइ श्री अकबरप्रदत्तजगजुरूविरुदधारक नहारक श्री हीरविजय सूरि १०। तत्पद्रोदयशलसहस्रपाद ॥ पातसाह । श्री अकबरसनासमक्षविजितवा- ११। दिदसमुद्भूतयशः कर्पूरग्सुरजीकृतदिग्वधूबदनारविंद नहारक श्री विजय १२ । सेन सूरिनिः ॥ क्रीडायातसुपर्वरा शिरुचिरो यावत् सुवर्णाचलो ॥ मेदिन्यां ग्र- १३। हममतं च वियति ब्राँमुख्यंतशत् ॥ तावत्यत्रगताघृसेवितपद श्री पार्श्वना- १४ । घनो ॥ मूर्ति श्री कलितोऽयमत्र जयतु श्रीमझिानेन्सालयः ॥१॥ ॥: ॥ TELETELET nananan ERE - ( एएए ) पोसिना-भरुअछ। शिला लेख [ 1785] * १। प्राग्वाटवंशे श्रेण उहड येन श्री जिन । ना सूरि समुपदेशेन पादपरा प्रामे ३। दिरवसहिका चैत्यं श्रीमहावीर प्रनिमा ४। युतं कारितं । तत्पुत्रौ ब्रह्मदेव शरणदे- ५। वौ। ब्रह्मदेवेन सं० १३७५ अत्रैव श्रीन- ६। मि मंदिर रंगमंडपे दाढाधरः कारितः । श्रीरत्नप्रत्तसूरि समुपदेशेन तदनुज श्रेण । शरणदेव जार्या सूहबदेवि तत्पुत्राः श्रे० ए। वीरचंड पासड । आंवड रावण । यैः श्री पर. १०। मानन्द सूरीणामुण्देशेन सप्ततिशततीर्थ का- ११। रितं ॥ सं० १३१० वर्षे । वीरचंड नार्या सुपमिणि १२ । पुत्र पूना नार्या सोहग पुत्र खूणा फांऊण आं- १३ । वड़ पुत्र वीजा खेता । रावण नार्या हीरू पुत्र वो. १४ । डा नार्या कामल पुत्र कडुआ ॥ [जयता नार्या मूं. १५ । ना पुत्र देवपाल । कुमरपाल । तृ अरिसिंह ना० १६ । गउरदेवि प्रभृतिकुटुम्बसमन्वितः श्री परमा- १७ । नन्द सूरिणामुपदेशन सं० १३३७ श्री वासुपूज्य १७ । देवलिका । सं० १३४५ श्री समेत शिपर- १५ । तीर्थ मुख्यप्रतिष्ठा महातीर्थयात्रां विधाप्या. २०। त्मजन्म एवं पुण्यपरंपरया सफली कृतः १। तदद्यापि पोसिना ग्राम श्री संघेन पृज्यमान- २२ । मस्ति ॥ गुजगस्तु श्री श्रमानंयग्रमादनः ।। ॥ • भरररमादिर Print:

. उना-काठियावाड़ anti..14 1 II ( i ) * १। वस्ति श्री स. १६॥२. लि. या २। येषां जगतां मंगवेगमोनागारिगुणा गण. ३। श्रयणात नमरतने हाराजाधिराज ts ) नि. ४। धानः गृर्जरदेशात दिशामाको समानमा का परिमा ५। कर्णानपूर्वक पुस्तक काशमाण मागनिधानमागोमाला- ६। धनियारणं प्रतिवर्ष बागमासिकामाग्निातनं मा श्री शत्रुजयती मुं. 3। डकानिधानकरनिवर्त्तनं जीजियानिधानकारकर्तनं निजराकदेशे दा. । णमृतं स्वमोचनं सदेव बूंद(?)महमा निवारण सत्यादिधर्माकलानि सक- ए। लोकप्रतीतानि कृतानि प्रवर्त तेषां श्री शत्रु जय सहादेशसंघगुतकृत- १०। यात्राणां नाऽपदमुक्कैकादशीदिने जातनिर्वागणं शीसंस्कारस्थानासन- ११। कलितसहकाराणां श्री हीरविजय सूरीश्वगगां प्रतिदिनं दिव्यनायनाद- १२। श्रवण दीपदर्शनादिकर्जामत्स्वजावाः स्तू सहिताः पापुकाः कारिताः पं० १३ । मेघेन जार्या सामकी प्रमुखकुटुम्बयुतेन प्रतिष्ठिताश्च तपागाधिराज ज- १४। हारक श्री विजयसेन सूरिनिः उ० श्री विमलदर्पगणि ज० श्री कल्याण- १५। विजय गणि ज० श्री सोमविजय गणिनिः प्रणतानव्यजनैः पूज्यमानाश्चि. १६ । रं नंदंतु ॥ लिखिता प्रशस्तिः पद्मानन्दगणिना। श्री जन्नतनगरे शुजं जवतु ॥ Youtüvirastom * 'उना' का प्राचीन नाम 'उन्नत नगर' था। यह शिलालेख मन्दिर के ७ देहरी में पश्चिम तर्फ ले पहली देहरी का है ।

(२०१) [1707] (१) ॥ एं० ॥ स्वस्ति श्री प्रणयाश्रयः शिवमयः श्री वर्धमानायस्तीर्थेशश्चरमो वजूब नुव- (२) ने सौनाग्यनोग्यकन्नूः । नंदीश प्रथमोपि पंचमगतिः ख्यातः सुधर्माग्रणी । जझे पंचमपंचमः शमव. (३) तां निग्रथं १ गोत्रेग्रणी ॥ १॥ श्री कौटिक ए वनशसिक ३ चष्ट्र ४ वृहत ५ सत्तपा ६ करतः । तदा (४) गलानां संज्ञाजातास्तपगवस्तथाऽनूत् ॥ २॥ प्राणक्षितिपालज्ञान विलसत्कोटीर- हीरस्फुरज्यो- (५) तिर्नालजमानिषेकविधिना (जा)तांबुपंकेरुदः ॥ चि'दु)पाव लिहीरहीरविजयाह्वानः प्रधान प्र- (६) जुः श्रामण्येक निकेतनतनुभृताम् कल्याणकल्पमुगः ॥ ३ ॥ तदादेशवाक्थैः सुधा- सारसारै । मुदा (७) कव्वरः पातिसाहिः प्रबुद्धः । खदेशेऽखिले जीवहिंसा न्यवारीदमुंचकरंचा पिशg. जाः ॥४॥ (७) तमध्योदपिशैलमौशिमहिमावसहस्रविपि । जातः श्रीविजयादिसेनसुगुरुः प्रशास- वालारुणः । (ए) येन श्रीमदलव्यक्षितितिः घर्पचनेकहिनान् ॥ निर्जित्येव जयश्रिया सह गहा- धके विवाहो (१०) नवः ॥ ५ ॥ (तोल्हे (ला) रगजमूर्धनि देवराज (स्)बिनूव नगवान् वि(जया- दिदे)वः। (त्या)त्र सत्यवचना- (११) दनले तोहः ताकद्दा हुमतऽस्तरसां वि (ना)शी ॥६॥ मम्ग निगायन यदीय यश.प्रशस्तिमा- (१५) दवतद्गुणगणस्यविदायैव । सूरमदानपनियघिनं दितं श्रीमगिमा हिम्कोप मननाद - कारिता ॥ ततश्च सं० १७१३ वर्षे आषाढ़ शुद्धकादशी तिथौ । जहारकर श्रीवासणात्मजेन वाई पातली जन्मना (२०२ ) (१३) ॥ ७ ॥ यस्याद्याप्युपदेशपेशलरसोणंजगत्सिंहजीः संबुद्धः सरसोर्थिसारबि मारीन्यावारीत्ततः॥ (१४) [स]व्यूढां गुणरागरंगललितैः कीर्तिस्त्रिलोकोनमश्रांतां स्थान विधानतोऽनुर मिमिरपिंडिध्वनात् ॥ (१५) ॥७॥ श्री विद्यापुर पाति[सादि]मुचितर्वाचाप्रपंचैर्यकः । स्वोज्यप्रतिमा को सूरजीरारं नो मोचयन् (१६) तहत श्रीमतुजादिमर्दनपतेः श्री पातिसाहेश्वरः । स्थानऽस्थापयेदग्निपातन धर्म सपदंगतः।। ( १७ ) ॥ ॥ एवं विहव्यनगरानवनीतमस्मिन् राजन्य ..."। श्रीमजिन- (१७) देता चय मूर्तिति मूर्तिः सकलरात्रौध्वजरूपमूच्चैः ॥ १० ॥ पूज मालि कुलोपु- (१ए) रा जरण यो... नामतिनामा। मनाः ॥ ११॥ तस्यांगजोगजइन्छो पवि- (२०) .... श्रीमाक्षि विमलकुलांबुज .... माली। विश्वातिशायियशसाजिनपूर्णचन्छः श्री राजवं- (२१) ... तिस...रि · त् प्रतापं ॥ १५ ॥ श्रथ तेनमंशे किमहाय... पूर्वख व्यस्यसपः लीकरणाय श्री विजया- (२५) दि सूरीश्वराः श्री गूर्जरदेशात्सौराष्ट्र के पादानांसस्याः कारिताः श्री सिद्धानियस्याः पिप्रचूणांमहामसां (२३) विजयदेवसूरी- (२५) श्वराणा व "मुपापाजुकास्तूपोयं श्रीरायचन्द (२५) नाम्ना का रितः प्रतिष्ठापितश्च सं० १७१३ वर्षे साघमास सितपञ्चमी तिथौ महा महोत्सवेन । श्री .. (२०३ , (२६) सूरेः श्री विजयादिदेवसुगुरोः पट्टाब्जसूर्याश्रयः सूरि श्री विजयप्रचाव्यधत श्रेष्टा प्रतिष्ठा- (२७) मिमा श्रीमछाचकरान् विनीतविजयैः शांत्याह्वयैः पाठकैर्युक्ताश्चारुयशोजराः प्रतिम- (२७) या वाचस्पतेः सन्निनाः ॥ १३ ॥ तथा साधु श्री नेमिदासेन तथा साधु वाघजीकेन विनोप्रमेन का (ए) रितः । कृतश्चायं हरजीनाम्ना शिपिना । मुहूर्त्तदातातु अत्र उन्नतपुरवास्तव्य नट्ट- गुलाई (३०) पुत्र नह रणोड़ नामा ॥ श्रीछीपवंदिरवास्तव्यसंघजातिव्याजे जीयतां श्रीदेव- विहारजा (३१) गः स्तूपरूप: ॥ श्रीमत् श्रीविजयादिदेवगणभृत्रहोदयात्मकृतेः । सूरेः श्री विजय- प्रतस्य क. ( ३५ ) रुणाच्या प्रकृष्टोदयः ॥ विदूपमणीकृपादिविजयां तेवासिमेणाह्रयो । स्यदेव- विहार (३३) विदिने स्तूपप्रशस्ति श्रिये ॥१४॥ इति प्रशस्ति संपूर्ण ॥ श्रीरस्तु ॥ ७॥७॥ .... पERSEENESS disias वम्बई। श्री आदिनाथजी का मन्दिर-बालकेश्वर । पञ्चतीर्थी पर। [1798] सं० १४७७ वर्षे श्नी श्रीमाल ज्ञा पं० राणा ना रूपादे मुत यासांकन स्वमातृश्रयन थागमगठे श्री जयानन्दसूरीनामुपदेशेन श्री पार्श्वनाथ पश्चनीयी काग्निं श्री गिनिः। शुनं नवतु ॥

.. (२१) ...तिस ...रि • त् प्रतापं ॥ १२ ॥ अथ तेनमंशे किमहान "पूर्वखाव्यस्यसा (२५) नाम्ना कारितः प्रतिष्ठापितश्च सं० १७१३ वर्षे साघमास सितपञ्चमी तिथी महा ( २०१ ) (१३) ॥ ७ ॥ यस्याद्याप्युपदेशपेशलरसमोणंजगत्सिंहजीः संबुद्धः सरसोथिसार मारीन्यावारीत्ततः॥ (१४) [सं]व्यूढां गुणरागरंगललितः कीर्तिस्त्रिलोकोत्रमतां स्थान विच तनु निमिरपिडिध्वक्षात् ॥ (१५) ॥ ७॥ श्री विद्यापुर पाति[साहि]मुचितैर्वाचाप्रपंचैर्यकः । स्वोज्यप्रतिमः ५ सूरजीरारं नतो मोचयन् (१६) तहत श्रीमनुजादिमर्दनपतेः श्री पातिसाहेश्वरः । स्थानऽस्थापयेदनिय तन धर्म सपदंगतः ॥ (१७) ॥५॥ एवं विहव्यनगरानवनीतमस्मिन् राजन्य .... । श्रीमजिन- (१७) दता ...' चय मूर्तिति ..." मूर्तिः सकलरात्रौध्वजरूपमूचैः ॥ १५ ॥ पूज मालि कुलोपु- (१५) रा जरण यो... नामतिनामा। मनाः ॥ ११॥ तस्यांगजोगजन्यो पर (२७) ....: श्रीमालि विमलकुलांबुज माली। विश्वातिशा थियशसाजिनपूर्णचन्द्रः राजवं- लीकरणाय श्री विजया- (२५) दि सूरीश्वराः श्री गूर्जरदेशात्सौराष्ट्र के पादानांसस्याः कारिताः श्री सिद्धानियस्था पिप्रचूणांमहामहस (१३) कारिता ॥ ततश्च सं० १७१३ वर्षे आषाढ़ शुक्रैकादशी तिथौ । जट्टारक भी विजयदेवसूरी- (२४) श्वराणा स्व "मुषापाकास्तूपोयं श्रीवासणात्मजेन वाई पातली जन्मना श्रीरायचन्द महोत्सवेन । " ( १०३ (२६) सूरेः श्री विजयादिदेवसुगुरोः पट्टाजसूर्याश्रयः सूरि श्री विजयप्रजाव्यधत श्रेष्टा प्रतिष्ठा. (२७) मिमां श्रीमहाचकरान् विनीत विजयैः शात्यायैः पारकर्युक्ताश्चारुयशोजराः प्रतिम- (२७) या वाचस्पतेः सन्निजाः ॥ १३ ॥ तथा साधु श्री ने मिदासेन तथा साधु वाघजीकेन जिन्नोप्रमेन का (श्ण ) (रतः । कृतश्चायं इरजीनाम्ना शिपिना । मुहर्त्तदातातु अत्र उन्नतपुरवास्तव्य नट्ट- गुलाई (३०) पुन न रणतोड़ नामा ॥ श्रीजीपवंदिरवास्तव्यसंघजातिव्याजे जीयतां श्रीदेव- विहारज्ञा (३१) गः स्तूपरूपः ॥ श्रीमत् श्रीविजयादिदेवगणभृतोदयोलकृतेः । सूरेः श्री विजय- प्रत्तस्य क. (३५ ) रुणाहव्या प्रकृष्टोदयः ॥ विदूपमणीकृपादिविजयां तेवासिमेणाहयो । स्यदेव- विहार (२३) विदिने स्तूपप्रशस्ति श्रिये ॥१४॥ इति प्रशस्ति संपूर्ण ॥ श्रीरस्तु ॥ ॥ ५॥ La SSSSSS वम्बई। श्री श्रादिनाघजी का मन्दिर-बालकेश्वर । ५ञ्चतीची पर। [ 170s] सं० १४७७ वर्षे श्री श्रीनाक्ष का पंग ना दे मुनामांकन माग जगमग श्री जयानन्दमुरीनामुपदेशन श्री पार्श्वनाथ पचनीची याग्निं श्री। मुलं जवतु ॥ , - 1 ( २०६ ) [1806] (१) संवत् १४२ का मि । पौष शुक्ल त्रयोदश्यां वर सोमवारे श्री चतुर्विज्ञान जिन संख्या पादुकाः श्री पार्श्व जिन गणधर पाका (२) खरतर गछे महो श्री दानसागरजी गणिः तत् शिव्य गं । हिन बह्म न मु प्रतिष्ठितं गुज्जर देशान्तग्गत मांडल वास्तव्य (३) वीर सोजाग्यवर लक्ष्मीचंदन श्री समत शग्वरि प (४) रि स्थापितं ॥ १। श्री ऋषन १00 साधुसुं अष्टापद उपर । श्री अजित १०० साधु ३। श्री संचव १00 साधुसुं ।। श्री अनिनंदन १७७० साधुसुं ५। . सुमति १000 साधुसुं ६ । श्री पद्मप्रन ३०७ साधुसुं । श्री सुगश्वनाथ साधुसुं । श्री चंद्रप्रन १००० साधुसुं ए। श्री सुविधि १००० साधुसुं १७ श्री शीतल १०० साधुसुं ११ । श्री श्रेयांस १००० साघुसुं १५ । ।सुपूज्य ६०० साधु चंपापुर १३ । श्री विमल ६००० साधुसुं १४ । श्री अनंत sovo सधु १५ । श्री धर्म १०७ साधुसु १६ । श्री शांति ए० साधुसुं १७ । श्री कुंथु १० लाधुसुं १७। श्री अरि १00 साधुसुं रए । श्री मति ५०० साधुसुं २०॥ श्री बुनिसुव्रत १००० साधु २१। श्री नमि १ साधुसु २५ । श्री नेमि ५३६ २३। श्री पर्व ३३ साधुसुं २४। श्री महावीर एकाकी साधुसुं गिरनार पावापुरी ॥ ॥ का०प्र० [1800] ॥ से । रएYए माघ शुक्रवारे श्री समेत शेट्यस्य पर्वतोपरि जव्य जीवस्य दर्शनार्थ श्री आदिनाथस्य चरण पाऊका स्थापिता राय धनपतिलिंद पाहाण * विजयराज सूरि तपागछ । [1810] () तं । रए२५ फा० कृष्ण ५ बुधवासरे श्री चंपापुरे तीर्थे श्री वासपूज्य जी

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५। श्री पार्श्व ३३ साधुसुं २४। श्री महावीर एकाकी (२०६) [1806] (१) संवत् १ए४२ का मि । पौष शुक्ल त्रयोदश्यां वर सोमवार श्री चतुविशान जिन संख्या पापुकाः श्री पार्श्व जिन गणधर पाछुका (२) खरतर गछे महो श्री दानसागरजी गणिः तत् शिष्य पं । हिन बस्न मु। प्रतिष्ठितं गुज्जर देशान्तग्गत मांडज वास्तव्य' (३) वीर सोजाग्यवर लक्ष्मीचंदन श्री संमत शग्वार प (१) रि स्थापितं ॥ १। श्री झपन १०००० साधुसुं श्रष्टापद उपर २। श्री अजित १00 साधु ३। श्री संचव १७७० साधुसु । श्री अनिनंदन १०० साधुसुं सुमति १००० साधुसुं ६। श्री पद्मप्रन ३०७ साधुसुं । श्री सुगवनाथ ॥ साधुसुं । श्री चंद्रप्रन १००० साधुसुं ए। श्री सुविधि १००० साधुसुं १७ श्री शीतल १०० साधुसुं १०p साधुसुं ११ । श्री श्रेयांस १००० साघुसुं १५ । वासुपूत्र ६०० साधु चंपापुर १३ । श्री विमल ६००० साधुसुं १४ । श्री अनंत 50 साधु १५ । श्री धर्म १०७ साधुसुं १६ । श्री शांति ए0 साधुसु १७ । श्री कुंथु १७ लाधुसुं १७। श्री अरि १00 साधुसु २ए। श्री मा ५०० साधुसु २० । श्री जुनिसुव्रत १००० साधु १। श्री नमि १00 साधुसु २५ । श्री नेमि ५३ पावापुरी ॥ [1800] ॥ सं । रएए माघ शुक्रबारे श्री समेत शेयस्य पर्वतोपरि भव्य जीवस्य दर्शनार्थ त् आदिनाथस्य चरण पाऊका स्थापिता राय धनपतिसिंह घाहारेण । विजयराज सूरि तपागछ । [1810] () सं। १ए२५ फा० कृष्ण ५ बुधवासरे श्री चंपापुरे तीर्थे श्री वासपूज्य जी का०प्र०

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। सं। २एए माघ शुक्रवारे श्री समेत शेल्यस्य पर्वतोपरि नव्य जीवस्य दर्शनार्य
( २०६ )
[1806]
(१) संवत् १ए४२ का मि। पौष शुक्ल त्रयोदश्यां वर सोमवारे श्री चतुविशान जिन
संख्या पादुकाः श्री पार्श्व जिन गणधर पाका
(२) खरतर गछे महो श्री दानसागरजी गणिः तत् शिष्य पं । हिन बलन मु
प्रतिष्ठितं गुज्जर देशान्तग्गत मांडल वास्तव्य
(३) वीर सोनाग्यवर लक्ष्मीचंदन श्री समत शग्वार प
(४) रि स्थापितं ॥
१। श्री षन १०७ साधुसुं अष्टापद उपर २। श्री अजित १०० साधु
३। श्री संचव १०० साधुसुं ।। श्री अनिनंदन १00 साधुसुं ५।
सुमति १००० साधुसु ६। श्री पद्मप्रन ३०७ साधुसुं । श्री सुपा श्वनाथ ५०
साधुसुं । श्री चंडअन १००० साधुसुं ए। श्री सुविधि १५०० साधुसुं १०
श्री शीतल १00 साधुसुं ११। श्री श्रेयांस १७०० साघुसु १५ । वासुपूत्र
६०० साधु चंपापुर १३ । श्री विमल ६००० साधुसुं १४ । श्री छानंत Sun साधु
१५ । श्री धर्म १०७ साधुसु १६ । श्री शांति ए साधुसुं १७ । श्री कुंथु १००
लाधुसुं १७। श्री अरि १00 साधुसु २९ । श्री मति ५०० साधुसु २० । श्री
सुनिसुव्रत १००० साधु २१ । श्री नमि १ माधुसु २५ । श्री नेमि ५३६
साधुसुं गिरनार २३।
श्री पार्श्व ३३ साधुसुं
पावापुरी।
[1800]
२४। श्री महावीर एकाकी
का०प्र०
श्री आदिनाथस्य चरण पाऊका स्थापिता राय धनपतिसिंह पाहायूरेण
* विजयराज सूरि तपागच्छे ।।
[1810]
(:) सं। २५ फा० कृष्ण ५ बुधवासरे श्री चंपापुरे तीर्थे श्री वासपूज्य
जी

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१३। श्री पार्श्व ३३ साधुसु २४। श्री महावीर एका
[1806]
(१) संवत् १ए का मि। पौष शुक्ल त्रयोदश्यां वर सोमवारे श्री चतुर्विज्ञान
संख्या पापुकाः श्री पार्श्व जिन गणधर पाका
(२) खरतर गछे महो श्री दानसागरजी गाणः तत् शिष्य । दिन बस न
प्रतिष्ठितं गुज्जर देशान्तरगत मांडल वास्तव्य'
(३) वीर सोजाग्यवर लक्ष्मीचंदेन श्री समेत शवरि प
(४) रि स्थापितं ॥
१। श्री झपन १०००० साधुसु अष्टापद उपर
। श्री अजित १०० स.'
३। श्री संजव १००० साधुसुं । श्री अभिनंदन १००० साधुसुं ५।
सुमति १00 साधुसुं ६। श्री पद्मप्रल ३०७ साधुसुं । श्री सुपाश्वनाथ
माधुसुं । श्री चंद्रप्रन १००० साधुसुं ए। श्री सुविधि १० साधुसुं '
श्री शीतल 100 साधुसुं ११। श्री श्रेयांस १००० साघुसुं १२ । पासुन
६०० साधु चंपापुर १३ । श्री विमल ६००० साधुसुं १४ । श्री अनंत 5000 6.3
२५ । श्री धर्म १०७ साधुसुं १६ । श्री शांति ए० साधुसुं १७ । श्री कुंथु १५०
आधुसुं १७ । श्री अरि १००० साधुसुं १७ । श्री मसि ५०० साधुसु २०
जुनिसुव्रत १००० साधु १। श्री नमि १00 साधुसुं
पावापुरी ॥
[18001
से । १४ए माघ शुक्रवार श्री समेत शेट्यस्य पर्वतोपरि नव्य जीवस्य
। आदिनाघस्य चरण पाका स्थापिता गय धनपतिसिंह घाहारेण
निमगज सूरि तपागळे ॥
२२ । श्री नेमि ५३
दर्शना
:
[1810]
१मा कृष्णा ५ बुधवासरे श्री चंपापुरे तीयं श्री
जी
वासप्पूज्य

( २०७ ) (२) पंच कल्याणक चरण न्याप भकसुदावाद वास्तव्य सुगम माः प्रतापसिंह (३) ताजी महताब कुमर ज्येष्ट सुन लक्ष्मीपनस्थ कनिष्ट जान धनपत सिंह (५) कागरितं प्रतिष्ठिनं जः श्र। जिनईम सूनि: वृहत्खरत गर्छ । [ ] (१) ॥ संवत् १९३४ माघ वदि ५ बुधवार श्री नमनाथ जिन नीन कल्यानक रेवत (२) जवत। तस्य चरण न्यामः ममत शिबरे स्पः पिना मकसूदाबाद अजीमगंज (३) वास्तव्य सुगड प्रताडि नाजो बहताव कुमर सुन लक्ष्मीपत कनिष्ट नाता (४) धनपत सिंह कारापितं प्रतिष्ठित श्री पूज्यजी न. श्री जनहंस सूर्गतः खरतर गछे (५) वृहत् खरतर गव ।। [ 1812] (१) ॥ संरए४ श्री फाल्गुण वदि ५ श्री वीर वर्धमानजी का चरण पाउका मकसुदा (२) वाद वासी राय धनपति सिंह उगड़न स्थापित किया था सो उसको स्त्री बिजली (३) उपव सु गिग्ग उसपर सं १ए६५ के फाल्गुण सुदी ६ को कल मांडवी पासी (४) साः जगजीवन वासजी ने जीरण उवार कग। जस मंदिर। पाषाण की मूर्तियोंपर । [1813] (१) ॥ संवत् १७५२ वर्षे वैशाख सुदि १३ गुरौ श्री मगसुदावाद वास्तव्य सामुग्या गोत्रीय आसवंस ज्ञानी (४) व वृद्धशाखायाम् ॥ सालचंद मृत सुगावचेदेन श्री मद्गुरुणा उपदेगान ग्राम श्रेयार्थ च श्री समेत शैख (३) श्री जैन विहारे श्री सहल फणा पार्श्वजिन दिवं कागतिं प्रतिदिन विहि. तामणी निः सकस सूरिकरः ॥ मंगझं ॥

TIRTHA SAMMET SIKHAR-Jalmandıra
事业单A4AA N/A
经
g
--

{ १०७ )
(२) पंच याक चरण न्याय प्रकलुदावाद वास्तव्य जुगल माः प्रतापसिंह
(३) तार्ना महनाब कुनर डोष्ट तुम हमीपतस्य कनिष्ट ब्रान धनपत सिंह
(४) कागतिं प्रतिष्ठिनं नः श्री जिनहंग्य सूता नः वृह्त्वरतगडे ।।
[ ]
(१) ॥ लंबा १ए३४ माघ बदि ५ बुधवार श्रा नमनाथ जिन तीन कल्यानक रेवत ।
(२) नवन तस्य चरण न्यायः नमन शिबिरे स्ध पिना मकसूदाबाद अजीमगंज
(३) वास्तव्य सुगड प्रतामिह ताजा मदनाव कमर सुन लयमापन कनिष्ट नाना
(४) धनयन सिंह कारापितं प्रतिष्ठित श्री पूजी ज. श्री जिनम सूरीतः खरतर गडे
(५) वृड्न बरनर गई ।
[:-12]
(१) ॥ स १४ श्री फाल्गुण वदि ५ श्री चार वर्धमानजी का चरण पापुका गयासुदा
२) वाद वाली राय धन न सिंह अगदन स्थापित किया था तो उसकी वत्री विजयी
(३) उजव सु शिरग उस पर सं १६५ . पाना मुबी ६ को कर मांटी नाम
(५) लाः जगजीवन दास जी ने जीररा उता ग३।
जस मदिर।
पापाए की मृर्निगर।
[18:
(१) ॥ संवत् र वर्षे देशाब सुदि १६ मुग श्री मादावाद वारा
गोत्रीय प्रामवंस शादी
१) पहरूसारखापान ॥ हादसुन मान श्रीमहा।"
धेचार
श्री जैन विदारे हमदम :
.
नाम:
Tr:
--

( २ )
[1814]
(१) ॥ सं १७२२ वर्षे वैशाख सुदि १३ गुग श्री मगसुदाबाद वास्तव्य साउंमुखा ।
आसवंस ज्ञातीय
(२) बृद्धशाखायां सा सुगालचंद नार्यया केसर कया यात्म संश्रयाथ श्री समेत
श्री जैन विहारे श्री सं-
(३) नवनाथ विवं कारापितं प्रतिष्ठितं च सुविहिताग्रणीतिः । सकम्न सूरिभिः ॥
मंगलं ॥
-2005-03-
मधुवन।
जगतसेचजी का मंदिर ।
मूर्तियों पर ।
1815]
॥ मं १७२२ वर्ष वैशाख सुदि १३ गुगे सा सुगाक्षचंदेन श्रीपार्थ विचं कारापितं ।
मास समनः।
[1816]
'. !) संवत् १.७२२ वर्ष वेशाब सुदि १३ गुग मग
पचंदजी मुन रुवातीचंदजी
२) मुकारुचंदजी माता मद कहरचंदजी
श्रीजन वि
हरेश्रो विवं कारापितं . .
[1217]
t मंदन् १८३२ र १३ मे श्री स्वरतर गय श्राचार्थीय सा नीमजी र
जानंदा ६ . . . काला ॥
शातीय र शाखा
दन स्वयार्थ श्री सम्मत

[1818]
॥ सं १७२७ शाके १६ए३ । प्रवर्तमाने वैसाख सुदि छादशी तिघौ। भृगु बारे
ओसवाल ज्ञाती वृक्षशाखायां ॥ आदि गोत्रे। सावनदास तडायर्या गुलाबकुअर सहितेन
श्रेयोर्थ । कायोत्सर्ग मुसास्थित सहस्त्रकणालंकृत श्री पार्श्वनाथ विवं कारितं ॥
[ 1818 ]
॥ सं० १२२ [ ! ] वैशाख सु० १३ गुरौ श्री गहिलडा गोत्रीय साह कस्तुरचंद ॥
धरणेन्द्र पद्मावती की मूर्ति पर ।
• [1820]
॥ संगत् १७२५ माहा सुदि३ सा । सुगालचंदेन श्री धरणेन्द्र पद्मावत्या कारापिता प्रय
तपागच्छे ।
प्रतारसिंहजी का मंदिर।
शिलालेख।
[1821]
१) ॥ संवत् रजए मिति माघ शुक्ल १० दशम्यां तिघी श्री गो.
(२) डी पार्श्वनाथत्य छिन्नूमि युक्त चैत्यं । श्री बालूचर वास्त.
(३) व्य उगम गोत्रीय । श्री प्रतापसिंघेन कारित । प्रतिष्टि-
(४) तं च श्री खरतर गोशाः । यु । न । श्री जिन ईय सूरी-
(५) णामुपदेशात् । उ । श्री क्षमालाण गणीनां शिप्यो नि
पाषाण की मूर्तियांपर।
-
।
[1822]
(१) ॥ सं० र माघ नदिए नाम श्री गवती पानामा वि.

नाथ जी ११॥ श्री विमल नाथ जी १३॥ श्री अनंत नाथ जी १४॥ श्री धर्म चंप्रचजी G॥ श्री सुविधिनाथ जो ए॥ श्री शीतल नाथ जी १५ ॥ श्री श्रेयां.. २१० ) (२) वं कारितं ओसवंशे उगड गो। प्रतापसिंहन । प्र । । न । खरतर ग. (३) छाधिराज श्री जिनचं सूरि . . . . . . . . स्वितेः । [ 1823] ॥ श्री गोडी पार्श्व जिन विधं ॥ (3)॥ संवत् १९३२ बर्षे ज्येष्ठ शुक्क २१ । जीणोंझाररूपा। विजय गछे। नहारक श्री गूज्य श्री जिन शांनिसागर सूति प्रतिष्ठितं स्थापितं च ॥ पायाण के चरणों पर । [1624 ] (१) संवत् १७७ए मिति माघ शुक्ल १० दशम्यां तिथो श्री गोडी पार्श्वनाथ चैत्ये रि जिनेश्वराणां चरण न्यासाः श्री वाखूचर नगर वास्त (२) व्य फुगड गोत्रीय साह श्री प्रताप सिंघन कारिताः प्रतिष्ठिताश्च। श्री म" गोशाः जंग- (३) म युग प्रधान नहारकाः श्री जिन हर्ष सूरीश्वराणामुपदेशातू उपाध्याय पद निता। श्री क्षमाकल्याण गणीनां शि- (४) प्य प्राज्ञ ज्ञानानंदन पं। थानंद विमल पं। सुमति शेखर सहितेनेति । सम्यक्त वृद्ध्यर्थ च ॥ ॥ श्री अजितनाथजी २ ॥ श्री संजवनाथजी ३ ॥ श्री अभिनंदन नाथ जी श्री सुमति नाथ जी ५॥ श्री पद्मन जी ६॥ श्री सुपार्श्वनाथ जी ॥ श्रेयार्थ श्री नाथ जी १५ ॥ श्री शांति नाथ जी १६ ॥ श्री कुंथुनाथ जी १७ ॥ श्री अरनाथ जी १७ ॥ श्री मलिनाथ जी १ए ॥ श्री मुनिसुव्रतनाथ जी २० ॥ श्री नमिनाथ जी १॥ श्री पार्श्वनाथ जी २३ ॥ --

(६१)
पाषाण के चरणों पर ।
[1825]
(१) ॥ संवत् १ए३! ॥ माघे ॥ शुक्ला ए। चंझे। गौतम स्वामी ॥
(२) चरण पापुका कारापिता ॥
(३) मुनि गोकल चंडेण
(४) नटारक श्री जिन शांति सागर सूरि निः । प्रतिष्ठितं ॥ श्री विजय गच्छे ॥
[1826]
(१) ॥ संवत् १९३३ मिति माघ शुल्क ११ अभिनंदन जिन पाकामिदं मक्
(२) चूदाबाद वास्तव्य ओशवंशीय बुंपक गणोपाना मुगड गोत्रीय वायु
(३) प्रवाहित्य नार्या महताब कुनारिकस्य वृक्ष पुत्र राय वहापुर
(४) लवनीपत सिंघस्य लधु घातृ रा । धनपत सिंघेन करा पितं प्रतिटितं सर्व सूरिणा ॥
कानपुरवालों का मंदिर।
शिलालेख।
[1827]
॥ सं १९४३ का वर्षे शाके १७०७ प्रवर्तमाने माघ मासे कृष्ण पक्ष एकादश्यां बुधे
श्रृष्टी श्री सिखरूप मल तादात्मज भंडारी श्री रघुनाथ प्रसाद तद्भार्या श्री बदामी बीवी
नया कारिनं श्री पार्श्व जिन मंदिरं महोत्तवेन स्थापना कारापिता श्री शिवर गिरि म.गु.
बने
वृहिजयगच्छे सार्व नौम जहारक श्री जं. यु. ३. श्री पूज्य श्री जिन शांति मागर
सूनिनिः प्रतिष्टितं श्रेयते । (इसके वाई चोर एक पंक्ति में) श्री मानहाधिगज नहारक
श्री १०७ श्री विजयराज सूरि राज्ये शुनं जवतु ।
मूर्तियों पर।
[1C20]
॥ सं० १२४ वर्षे माघ वदि ६७ भी
मन श्री जिनंटर

( २१५ )
सूरीश्वर राज्ये ओसवंस वृद्ध शाखायां सा पानाचंद श्री पार्वजिन वि . . . . . . .
प्रति
.
.
-
[1820]
-
॥ सं. १७०५ शाके १७६७ वदि ५ भृगौ सीपोर वास्तव्य सा. र (त) न चंद
जीजा बाइ तत्पुत्री बेन नवल स्वयार्थ श्री चंद्रप्रन पिवं ॥ कारापितं तपागछे।
श्री शांतिसागर सूरिनिः प्रतिष्टितं ॥
लाला कालीकादासजी का मंदिर ।
मूर्तियों पर।
[1830]
॥ १५१७ वर्षे शाके १७७५ माघ शुक्ल २ तिथौ श्री मुपार्श्वनाथ जिन विवं प्रतिष्ठि
खरतर ग श्री जिनहर्ष सूरीणां पट्ट प्रनावक
[1631]
॥ सं. १ए१८ वर्षे शाके १७७५ माघ शुक्ल द्वितीयायां श्री वासुपूज्य जि विवं प्रतिष्ठित
ज। श्री जिन महेन्द्र सूरिनिः कारितं च श्री
[1832]
॥ सं० १९१० वर्षे शाके १७७५ माघ शुक्ल २ तिथौ श्री धर्मनाथ विवं प्रतिष्ठितं खरतर
गर्छ श्री जिन हर्ष सूरीणां पट्ट प्रत्नावक
पाषाण की पंचतीर्थी पर ।
.
.
[1833]
॥ सं० १९३१ वर्षे माघ मासे युक्त पदे १५ बुधे श्री पंचतीर्थाय जिन विवं वेलुयुनो
गाने लाला कालीकादास तद्भार्या चत्री वीवो तया कारित मलधार पूर्णिमा श्री महिन्जय
गछे न । श्री पूज्य श्री शांति सागर सूरिनिः प्रतिष्ठिनं ॥

-
( १३ ॥
चंप्रजुजी का मंदिर
मूर्तियों पर।
[1834]
॥ सं १७०७ माघ सुदि ५ सोमे श्री चंद्रप्रन जिन विं कारित ओसवंसे नवलखा
गोत्र मोटामल पुत्र यश रूपेन प्र । वृहत् खरतर ग। श्री जिनादे सूरि चरणकन चंचरीक
श्री जिनचं सूरितिः ॥
पाश्वनाथ जी का मंदिर ।
मूर्तियों पर।
[1835]
॥ सं. १६७६ मिति फालगुण शुक्ल १३
[1836]
॥ सं. १७७७ वै । शु । १५ श्री पार्श्व विवं प्रश्री जिनदर्ष सूरीणा गोलबद्या मदना
घोजानी मूलचंदेन धर्मचंदेन कारितं कास्यां बृहत् खरतर गण
[1837]
॥ सं. र वै । शु । १५ श्री चंधन विवं प्र । श्री जिन दर्प सूीणा काग्तिं ...
[1638]
॥ सं. १७७७ । वै। शु । १५ श्री चंप्रन वियं प्र । श्री जिनहर्ष मणि कारिनं माय.
वत्स चेन्सुखज कुंदन सालेन श्री
.
.
[1838]
॥ सं. १७७५ मि । फासगुण सुदि १३ खा लिबा गिगे श्री मिमिदं प्रति

(२१४)
ज। श्री जिनहर्ष सूरिभिः श्री बृहत् खरतर गछे कारित पु० पुरणचंदेन सजा
पुत्रेण श्रेयोर्थ।
[1840]
॥ संवत् १९५४ वैशाख शुक्ल पक्ष चतुर्थी चंडवासरे अमृत सिद्धि योगे रा
निवासि वायचाणा शा
जेचंदेन श्री तपागल सूरीश्वर विजयसिंह सूरीणा
सुन स्वामीजी का मंदिर।
चरणों पर।
[1841]
(१) सं. २०७५ मि । मार्गशीर्ष ए तिथौ रविवासरे
(१) श्रीमच्छी जिनदत्त सूरीणां चरणपंकजानि
(३) वृ । ख । जं । यु । प्र। न। जिनहर्ष । सू । प्रतिष्ठितानि ॥
[1842]
(१) ॥ सं. १७७५ । मिति मार्गशीर्ष शुक्ल ए तिथौ रविवासरे
(२) श्री सरुणां पादो बृहत् खरतर ग
(३) छे। जं। यु । प्र। न। श्री जिनहर्ष सूरिनिः प्रतिष्ठितं ॥ श्री ॥
(५)॥ दादाजी श्री जिनकुशल सूरिः

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1
METAL IMAGE OF SHRI SUMATINATH.
Jain Swetambara Temple-Tutha Rajgriha
Dated V. S. 1512 (A D. 1455)
V

( २१५ )
श्री राजगृह।
गांद मंदिर।
पंचतीथी पर ।
[1843]
संवत् १५१५ वर्षे वैशाप सुदि १३ उकेश सा जादा जार्या जरमादे पुत्र सा नायक
गर्या नायक दे फदेकू पुत्र साप अदाकन ना सोनाई जातृ सा जोगादि कुटुंबयुतेन श्री
मति नाय विवं कारितं प्रतिष्ठितं श्री सूरिभिः ॥ वडली वास्तव्यः॥ श्री॥
धातु की मूर्ति पर।
[1844]
सं० १९३० । म । का । कृत र बुधे उगड प्रतापसिंह नायर्या मदनाव कंवर श्री संती
नाथ जिन विवं का ॥
सफण मूर्ति पर।
[1845]
संवत् १६२७ श्रापाड वदिश मित्रवास वंशी पी (वी) सरवार गोत्रीय मं गनपनि
एसप तारात पुत्र हेमराज पाश्र्वनाथ विवं कारापितं प्रतिष्टिनं स्वरतर गर्छ जिन नs
रितिः ॥ शुन्नमस्तु ।
श्याम पापाए की मूर्ति पर
.
[:846]
(१) ॥ संवत् १५८४ वर्षे फागण नदिए मदतीयाद बंदी व देवन! पुत्र मनु
बद्दनी सनाई नार्या वेती। श्रीशांति

sa
000
va
Papa
METAL IMAGE OF SHRI SUMATINATH.
Jain Swetambara Temple-Tirtha Rajgriha
Dated V. S 1512 (A D. 1455)

(२१७)
[1840]
। १) संवत् १९३७ वर्षे शाके १७०३ प्रवर्तमाने मासोत्तममा
(२) शुन्ने ज्येष्टमासे शुरूपदे द्वादश्यां तिथौ गुरूवासरे व्य
(३) वहार गिरिशिखरे श्री आद देवे चरण न्या-
(४) सः प्रतिष्ठित वृक्षविज [य] गयी राय लमिरत
(५) सिंह धनपतमिइ जीरणाझा-
(६) र करापितं श्रीरस्तु
[1850]
(१) संवत् १९३० वर्षे शाके १७०३ प्रवर्तमाने
(१) मासोत्तम मासे ज्येष्टमासे शुक्लपक्ष
(३) छादशम्यां गुरुवासरे श्रीव्यवहारगिरि शिखरे
(४) श्री शांति जिन चरणप्रतिष्टा । प्रथम
(५) भी जिनहर्प सूरिजः वृक्ष विजय प्रतिष्ठा
(६) राय लमिपत धनपन वा-
(७) हादर जिरणोछार करापितं श्री
(G) रस्तु
[ HESI ]
(१) संवत् १९३७ वर्षे शाके १७०३ प्रारीमाने
(२) मासोत्तममाले ज्येष्टमाले
१३) शुक्तपदो छादशम्यां गुरवासरे
(४) श्री व्यवहार गिरिशिखरे श्री नेमिजिन
(५) चरणन्यास प्रतिष्ट (वृद्ध विजमशिगद In
( ६ ) धनपत संग जिरलेला कापितं प्रोन्तु ।

(२१६ ) (५) नाथ विंबं कारित प्रतिष्ठितं श्री जिनसागर सूरीणां निदेशेन वा शु गणिजिः चरण पर । [1847] ॥ ॐ नमः ॥ संवत् १७रए वर्षे माघमासे शुक्रपके ६ तिथो श्री चंप्रन चरणकमले शुने स्थापिते ॥ हुगली वास्तव्य ओसवंशे गांधी गोत्रे बुला किदास साह माणिक चंदेन पत्रीकुंडे कुंडघाटे जीर्णोद्धार करापितं ॥१॥ वैजार गिरि। चौथ मंदिर में। चरणों पर। [1848] (१) संवत् १९३७ वर्षे शाके १७०३ प्रवर्तमाने मासोत्तममासे (२) शुने ज्येष्ठमासे शुक्लपदे छादशी गुरूवासरे . ' ' श्री व्यवहार (३) गिरि शिखरे श्री जिनचैत्यालये मूलनायक श्री (४) महावीर जिन चरणन्यासः प्रतिष्ठितं श्री तपागले ववि (५) जय थापीतं (५)साद बादादरसंह प्रताप- (६) सिंह तत् पुत्र राय सबमीपत धनपतसिंग (७) बाहाद (र) जिरणोद्धार करापितं श्री रस्तु (७)॥ प्रथम प्रतिष्ठा संवत १७४ शा० १७३ए मासो (ए) तमासे शुन्ने ज्येष्टमासे कृष्णपक्ष पं- (१०) चम्यां तिथौ सोमवासरे श्री जिनचन्छ (११) सूरिजी महाराज का श्री।

(शए)
खंडहर।
पाषाण की मूर्तियों पर
[1855]
॥ों सवत् १५५ वर्षे कारण सुदि ए दिने महतीयाण वंशे जाटड गोत्रे सं० देवराज
पुत्र सं० पीमराज पुत्र संग जिणदासेन श्री महावीर विवं कारितं प्रतिष्ठितं श्री खरतर गछे
श्रीजिनचंजसूरि पट्टे श्री जिनसागर सूरीणां निदेशेन वाचनाचार्य शुनशोज गणिनिः॥
[1856]
(१) संवत् १५०४ फागुण सुदि ए दिने महतोयाण वंशे वातिदिया (?) गोत्रे वारिपा
(३) मेन ज्ञार्या लाडो पु वा हरिसि । श्री पार्श्वनाथ विंचं कारिनं प्रनिधितं । श्री
(३) खरतर गई श्री जिनमागर सूरीणां निदेशेन वाच
(५) नाचार्य शुनशील गणिनिः॥
सोन नंडार।
[185710
निर्वाणलानाय तपस्वियोग्ये. शुन्ने गृहे ईत् प्रतिमा प्रनिष्टे ।
श्राचार्यरत्नं मुनि वैरदेवः. विमुकचे कारणहीनेजः ।।
मणिचार मत।
चरण पर
[:58]-
नं. १७३ वर्षे माते माह सुद५ तदिन श्रीयोसका दो दिगानी गोदाम
मानुसाकस्य नार्या बीवी लताबो गजबड़े नागस्य दाक्षिीदन्य चार मस्ति ।
नि-:.-:: ६
-

..श्री जिनसागरमूरीणां निदेशेन श्री शुनशील गुणिनिः॥ (२१७) [1e52] (१) संवत् १९३७ वर्षे शाके १७०३ प्रवर्तमाने मासोत्तममासे (२) ज्येष्टमासे शुक्लपदे हादशम्यां तिथौ गुरूवासरे (३) श्री व्यवहार गिरिशिखरे (४) श्री पार्श्वनाथ चरणयनसः प्रतिष्ठित वृद्धविज. (५) य गणि राय लमिपत सिंह धन- (६) पत संग जिरणोछार करापीतं बके मंदिर में। चरण पर [ 1853] (1) संवत् १९३७ वर्ष ज्येष्ठमासे शुक्लपदे (२) छादशम्यां तिथि गुरूवासरे आदिनाथ जिन चरण- (३) न्यास प्रतिष्टितं वृद्ध विजय गण प्रथ. (४) म जीरणोछार चूला किचंद तत् पुत्र माणिक (५) चंद जिरणोद्धार करापीतं पुति- (६) य जिरणाझार राय समिपति सं. (७) घ धनपतसंघ करापितं । श्रीरस्तु । व्यवहार गिरी बड़ी मूर्ति पर [1854] ॥ संवत् १५०४ वर्षे फागुण मुदि ए दिने मइतियाणा..........श्री पार्श्वनाथ विंध

(१ए )
खंडहर ।
पाषाण की मूर्तियों पर
[1855]
॥याँ सक्त् १५८५ वर्षे कारण सुदि ए दिने महतीयाण वंशे जाटड गोत्रे सं० देवराज
पुन संग पीमराज पुत्र सं० जिणदातेन श्री महावीर विवं कारितं प्रतिष्ठितं श्री खरतर गछे
प्रोजिनचंधसूरि पट्टे श्री जिनसागर सूरीणां निदेशेन वाचनाचार्य शुजशीन गणिनिः॥
[1856]
(१) संवत् १५०४ फागुण सुदि ए दिने महतोयाण वंशे वातिदिया (?) गोत्रे उनिया
(२) लेन सार्या लाडो पु० व हरिलि । श्री पार्श्वनाथ विं कारिनं प्रतिष्ठितं । श्री
३) खरतर गडे श्री जिनसागर सूरीणां निदेशेन वाच
(५) नाचार्य शुशील गणिनिः॥
सोन नंडार ।
[1857 ].
निर्वाणलालाय तपस्वियोग्ये. शुन्ने गृहेऽहत् प्रतिमा प्रतिष्टे ।
श्राचार्यरत्नं मुनि वैरदेवः, विमुक्तये कारयही वजः ।।
मणियार मत।
[1858]-
सं. १७३७ वर्षे माले माद सुदी ५ तदिन श्रीयोगवादको विगाली गोकगीदार न
नोनुक्षावकर नार्या बीवी सताबो राजदई नागस्य शादिजीम्या सानिन ।
सो-स्मिोरिस -.- ८
"

,
(२२० )
[242]
'खुस्यानचंदस्य पत्नी के स्थान में 'खुस्यालचंदस्य पीपामा गोत्रस्य पत्नी
चाहिये । यह लेख विपुक्ष गिरि के मंदिर में है ।
[244]
'सा श्री दकु-' के स्थान में ‘सा ।
के स्थान में 'सा । श्री हकुमतराय --- होना चाहिये।
[256]
'देवराज सं० षीमराज' के स्थानमें 'देवराज पुत्र सं० पीमराज' होना चा
संशोधित पाठ।
।
[257]
॥ आँ सं० १५५४ आषाढ सुदि १३ खरतर गणेश श्री जिनचं सूरि विजय
तदादेशे ....श्री कमलसंयमोपाध्यायैः स्वगुरु श्री जिनना सूरि पाषुके प्रका० अं'.
वं नीषू पुत्र 3 बीतमल श्रावकेण श्री वैनार गिरो मुनि मेरुणा लिए ।
यह चरण गांव के मंदिरमें है।
[258]
॥ सं० १५२४ श्राषाढ सुदि १३ श्री जिनचंड सूरीणामादेशेन श्री कमलसंय. या
धनाशालिनममूर्ति ॥ प्र० का उबीतमल श्रावकेण ।
[268]
"पत्नी महाकुमा-तस्या” के स्थान में “पत्नी महाकुमार्या तस्या" होना चाहिये ।

(२२१)
पटना।
शहर मंदिर।
.
.
.
संशोधित पाठ।
[323]
॥ संवत १५४७ वर्षे वेलाप शुद ३ सुखसंवे नहारक जो श्री जिन चन्द्र देवा साह जीव
राज पापडिबाप्त नित्य प्रणमान सर मनाला श्री राजा सिबलिंब जी रावल.... ।
[324]
संवत १५४ वर्षे वैताप सुदि ३ मुत्रसंधै नहारक श्री जिन नंछ देवा सा० जिवराज
पापडिवाल सदर मंमासा श्री राजा सिवसंघजी रावल
दिगंबरी मंदिर-घीया तमोली गली, सिटी।
श्वेत पापाण की मूर्ति पर ।
[1850]
॥ संप १४पए वर्षे फाल्गुण वदि २ श्री संडेर गठे 30 माह केव्हा नाया कस्तुरी पुत्र
भी देपाल ना देवल दे पुत्र मोकन्न सकिनेन श्री शीतल बियं का प्र० श्री शांनि मणिनः ।।
पटना-म्युजियम ।
संशोधित रा।
[355]
सम्बत् । १७७४ । वर्षे शाले. २० । प्रवनमाने । शुन नाम हार मा
चिों । सोमदिने श्री व्यहार निशिवेन नन सामान्यनिधि र श्रा
(इनप नरिन ।

॥ संप १५२४ श्राषाढ सुदि १३ श्री जिनचंड सूरीणामादेशेन श्री कमलसंघमोपाध्या
(२२० )
[242]
'खुस्यालचंदस्य पत्नी' के स्थान में 'खुस्यालचंदस्य पीपामा गोत्रस्य पत्नं
चाहिये । यह लेख विपुल गिरि के मंदिर में है।
[244]
'सा श्री इकु-' के स्थान में ‘सा । श्री हकुरातराय -' होना चाहिये ।
[256]
'देवराज सं० षीमराज' के स्थानमें 'देवराज पुत्र सं० वीमराज' होना चाहि
संशोधित पाठ।
[257 ]
॥ आँ सं० १५२४ आषाढ सुदि १३ खरतर गणेश श्री जिनचं सूरि विजया
तदादेशे ....श्री कमलसंयमोपाध्यायः स्वगुरु श्री जिजा सूरि पामुक प्रण का श्री
वं जीपू पुत्र ३० बीतमल श्रावकेण श्री वैज्ञार गिरो मुनि मेरुणा लिए ।
यह चरण गांव के मंदिरमें है।
[258]
श्री
धनाशालिनममूर्ति ॥ प्र० का उपबीतमल श्रावकेण ।
[268]
"पत्नी महाकुमा-तस्या” के स्थान में “पत्नी महाकुमार्या तस्या” होना चाहिये।

(२१)
पटना।
शहर मंदिर ।
संशोधित पाठ।
[323]
॥ संवत १५४ वर्षे वेताप शुद ३ मुत्रसंये नहारक जो श्री जिन चन्छ देवा साह जीव
राज पापडिवात नित्य प्रणमति सर मनाला श्री राजा लिरसिंघ जी रावत....।
[324]
संवत १५४ वर्षे वैताप सुदि ३ मुलसंधै नहारक श्री जिन चंद्र देवा साप जिवराज
मंमासा श्री राजा तिवसंघजी रावल .... ।
पापडिवाल
दिगंवरी मंदिर-घीया तमोशी गती, लिटी।
वेत पापाण की मूर्ति पर ।
[1350]
॥ सं० १४ए। वर्षे फागुण वदि २ श्री संडेर गठे नु० माद केटा नाया कम्नु 77
भी देपाल नाग देवस दे पुत्र मोरुन तहितेन श्री शीतल वियं का प्र० श्री शांनि मितिः ।।
पटना-म्युजियम ।
मंशोधित राम।
135
सम्बत् । २०५४ । वर्षे सारे ।। प्रवगने । मुल नाम पर
नि । लोमदिन श्री व्यवहार निशि= शार,
--
FEE

॥ सं० १५२४ थाषाढ सुदि १३ श्री जिनचंड सूरीणामादेशेन श्री कमलसंघमोपाध्या
(२२० )
[242]
'लुस्यालचंदस्य पत्नी के स्थान में 'खुस्यालचंदस्य पीपामा गोत्रस्य पत्नं
चाहिये । यह लेख विपुल गिरि के मंदिर में है।
[244]
'सा श्री इकु-' के स्थान में ‘सा । श्री हनुमतराय --' होना चाहिये।
[256]
'देवराज सं० षीमराज' के स्थानमें 'देवराज पुत्र सं० षीमराज' होना चाहि
संशोधित पाठ।
[257]
॥ आँ सं० १५५४ आषाढ सुदि १३ खरतर गणेश श्री जिन सूरि विजय
तदादेशे ....श्री कमलसंयमोपाध्यायैः स्वगुरु श्री जिनन सूरि पाउके प्र० का
वं जीपू पुत्र 30 बीतमल श्रावकेण श्री वैनार गिरो मुनि मेरुणा लि ॥
यह चरण गांव के मंदिरमें है।
[258]
श्री
धनाशालिनमूर्ति ॥ प्र० का बीतमल श्रावकेण ।
[268]
“पत्नी महाकुमा-तस्या" के स्थान में “पत्नी महाकुमार्या तस्या” होना चाहिये ।

(२२)
.
पटना।
शहर मंदिर।
संशोधित पाठ।
[323]
॥ संवत १५४७ वर्षे वेलाप शुद ३ मुझसंवे नहारक जो श्री जिन चन्श देवा साह जीव
राज पापडिवान नित्य प्रणमत सर ममाता श्री राजा लिपसिंघ जी रावल....।
[324]
संवत १५४ वर्षे वैताप सुदि ३ मुनसंधै नहारक श्री जिन वंश देवा सा० जिवराज
पापडिवाल सहर मंमासा श्री राजा सिवसंघजी रावल . . . . ।
दिगंवरी मंदिर-घीया तमोती गली. सिटी।
श्वेत पापाण की मूर्ति पर ।
[1850]
॥ सं० १४एए वर्षे फाल्गुण वदि २ श्री संडेर गठे न माह केन्दा नाया कम्नु पुत्र
भी देपाल नाग देवत्र दे पुत्र मोकन सहितन श्री शीतल बियं का प्र० श्री शांति समितिः ॥
पटना-म्युजियम ।
मंशोधिन ।
1335
सम्बत् । १७७४ । वर्षे सारे । प्रचनमाने । गुन माम पर प्रकार
न । लोमदिने श्री व्यवहार निशिव श्री वनानिधि प्रा
जिन्य रितः

(२२२)
[734]
॥ सं.। १९११ व । सा । १७७५....शुचिः । शु। १० ति । श्री शांति जिन पादन्यासो
खरतर गछ नहारक श्री महेन्द्र सूरिनिः का। से। श्री उदचंद नार्या माहा कुमार्य
(३) पुत्र.
बनारस।
पाषाण की मूर्तियों पर ।
[1860] *
(१) आँ संवत् १५११ वर्षे ज्येष्ठ सु०३ गुरौ (२) श्रीमाल वंशे [ ढोर ] गोत्रे व
(३) सं० उढरव अजीतमल जाया
(५) श्री सुमति नाथ बिंचं का० (६) प्रति श्री जिनचं सरि...
(७) श्री जिनतिलक सूरिभिः प्रतिष्ठितं ॥
[1861] **
(१) आँ स्वस्ति संवत् १५११ वर्षे ज्येष्ठ सुदि ३ पुष्यनक्षत्रे गुरौ श्रीमालवंशे दोर
गोत्रे सोवनपाल नार्या......
(२)
यादिनाथ....
(३) खरतर ग० श्री जिनहर्षसूरि संताने श्री जिनतिलक सूरि प्रतिष्ठित
[1862] .
(१) [नर ] पाल नार्या । महुरी पुत्र 30 जरतपाल.
(२) सं० उडरव अजितम....
श्याम पाषाण की गेटी मूर्ति पर।
[1863 ]
सं० २३७२ वैसाख वाद......

( २२३ )
काले पाषाण की टूटी परकर के वांये तर्फ
[1864 ]..
(१)... ज्येष्ठ सुदि १३ शुक्र वासरे । ब० के...
(२)
.। विवं कारितं ।
[1865] *
(१)॥आँ॥ सं०१५०३ वर्षे माघ वदि ६ दिने श्रीमाल वंशे नांदी गोत्रे सं० नरपाल
नार्या
महुः
(२) री कारितं श्रीमहावीर विवं । श्री खरतर गहे प्रतिष्ठितं श्रीजिन जागर सूरिभिः ॥
मूलनायकजी पर।
1866]
सं० १९१७ शाके १७०३ मिती आषाढ कृष्ण श्री गौड़ी पार्श्वनाथ जिन विचं प्रति-
ठिता कृता वृहत् खरतर जट्टारक गणेश जङ्गम यु० प्रधान नहारक श्री जिनमुक्ति सूरिभिः
कारिता च नाहटा गोत्रीय लक्ष्मीचन्डात्मज दीपचन्न स्वश्रेयोर्थ सोम वासरे ॥
पाषाण की मूर्तियों पर।
[1867]
सं० १९१७ शाके १७३ मिती आषाह कृष्ण २ सामे श्रीवर्धमान जिन विवं प्रनिया
इता यहत् खरतर नहारक गणेश जंण् युग प्रधान श्री जिनमुक्ति सूरिनिः कारित च नाहटा
गोत्रीय लक्ष्मीचन्द पौत्र मनोरथचन्द्र श्रेयोर्थ मिति ।
[1863]
सं० १९१७ शाके १३ मिती यापाढ कृष्ण २ सोमे श्रीपन देव जिन वियं प्रतिष्ठा
। ये मतियां हाल में जौनपुर से डेट कोस पर गमनो के. विनारे खेत मे गिरें । याइ तिलारीमा
म मारस के मंदिर में रखी है।

(२)
[734]
॥ सं.। १९११ व । सा । १७७५....शुचिः। शु। १० ति । श्री शांति जिन पादन्यासो
खरतर गछ जट्टारक श्री महेन्द्र सूरिनिः का । से। श्री उदचंद नार्या माहा कुमार्य श्रे
(४) पुत्र.
बनारस।
पाषाण की मूर्तियों पर।
[ 1860] *
(१) आँ संवत् १५११ वर्षे ज्येष्ठ सु०३ गुरौ (२) श्रीमाल वंशे [ ढोर ] गोत्रे व
(३) संछ उढरव अजीतमल जाया
(५) श्री सुमति नाथ विंबं का
(६) प्रति श्री जिनचंड सूरि...
(७) श्री जिनतिलक सूरि निः प्रतिष्ठितं ॥
[1861 ] *
(१) याँ स्वस्ति संवत् १५११ वर्षे ज्येष्ठ सुदि ३ पुष्यनक्षत्रे गुरौ श्रीमालवंशे ढोर
गोत्रे सोवनपाल नार्या......
(२)....... ......आदिनाथ..
(३) खरतर ग० श्री जिनहर्षसूरि संताने श्री जिनतिलक सूरि प्रतिष्ठितं
[1862] *
(१) [नर] पाल नार्या । महुरो पुत्र जरतपाल..
(२) सं० उडरव अजितमल....
श्याम पाषाण की गोटी मूर्ति पर ।
[1863 ] *
सं० १३७२ वैसाख वाद......

( १२५ )
देहली।
लाला इजारीमलजी का घरदरासर ।
देवी की मूत्तिं पर।
[ 1873]
(१) संवत् ११५५ श्री (२) पचासरीय । :) गरे
(३) श्रीमववादि संतान ( ४ ) चंदकेन विरोध्याकारिता
चीरखान का मंदिर।
धातु की मूर्तियों पर।
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सं० ११.
।
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कामदार श्री पूर्ण नमः !
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(१२४)
कृता बृहत् खरतर जट्टारक गणेश जं० यु० प्रधान श्री जिनमुक्ति सूरिनिः कारिता व
गलीय लक्ष्मीचन्झात्मज फूलचन्द्र श्रेयोर्थ मिति ।
धातु की प्रतिमा पर ।
[1860]
सं० १७ए फा सु० ५ श्री पार्श्वनाथ विवं प्र श्री जिनमहेन्द्रसूरिणा कारिता ना
लक्ष्मीचन्छ तत् जार्या लक्ष्मी बीबी विधत्ते ।
[1870]
सं० २७ फा० सुन ५ श्री सुपार्श्व बिंब प्रा श्री जिनमहेन्द्र सूरिना का वास
चन्द्र पुत्री नानको नाम्ना बुद्धोत्तम श्री कुशक्षचन्छ गएयुपदेशतो वृहत् खरतर गर्छ ।
[1871]
सं २०२० फा० सु० २ बुधे प्रतापसिंहजी नार्या महताब कुंवर कारितं श्री चन्द्र
श्री सागरचन्डणि प्रतिष्ठितं ।
सिद्धचक्र पर।
[1872]
सं० १९१७ आषाढ कृष्ण ५ सोमे श्री सिद्धचक्र प्रतिष्ठितं ज० युत प्रा नए श्री जि
मुक्ति सूरिभिः कारितं च नाहटा गोत्रीय लक्ष्मी वन्मात्मज दीपचन्देन स्वहितार्थ ।

( )
देहली।
लाला हजारीमलजी का घरदेरासर ।
देवी की मूर्ति पर।
[ 1873] *
(१) संवत् ११२५ श्री (२) पचासरीय (!) गछे
(३) श्रीमलवादि संताने ( ४ ) चेनकेन विरोट्या कारिता ॥
चीरेखाने का मंदिर।
धातु की मूर्तियों पर।
[1874]
सं० ११एए........।
[ 1875]
संग १२३४ आप्पलू वदि २ सनो नातृ लीवूदेव श्रेपार्थ नागदेवेन प्रतिमा मारिता
निष्टिता मलबादि श्री पूर्णचंद्र सूरिनिः ।
[1876]
सं० १४३१ वर्षे माघ सुदि ? नाहर वंशे सा० पेना पु० मा नोक्षा नार्या मिश्र
० हेमा धनियां पितृव्य श्रेयसे श्री शांतिनाथ विवं कारिनं प्रनि श्री धम्प गये
श्री मनवचंड सूरिभिः ॥ गिर.... ग ।
[16777
संवत् १७०३ वर्षे ज्येष्ट सु०३ ३.....
:877
नं १७७५....दि श्री अपजानन ....
पर ख १३ पी सिायीक
2:::
पन रापपातीमान है।

(१६)
.
चौवीशी पर।
[18791
संवत् १५५३ वर्षे वैशाष सु० ३ बुधे श्री हुंबड ज्ञातीय सा० देवा जाण रामति सुरु
आकेन ना माणिकदे सु० डाहीयानाथ पु० स्वश्वेयसे श्री मुनिसुव्रत स्वामि विवं
प्र श्री बृहत्तपा पके ज० श्री उदयसागर सूरिजिः ॥ गिर... ग ।
धर
जोधपुर
राजवैद्य न श्री उदयचं जी का देरासर ।
पंचतीर्थी पर।
[1880]
संवत् १५१६ वैण् सु० ५ प्राग्वाट ज्ञातीय व्यण मोषसी टमकू पु० जाणा हरतु पुरु
रणसा० पाहु प० जिनदत्त युतेन श्री संजव विं कारितं प्र० श्री तपा रत्नशेखर सूरिचिः
जसोल (मारवाड़)।
पीले पाषाण की मूर्ति पर।
[1881]
॥ सं० १५३३ वर्षे ज्येष्ठ मु० १०.. श्री महावीर विवं.....खरतर श्री जिनबंध
सूरिभिः ।
-
-

1.
4
साव
परः ॥ नरसाहके संसदाचा गोमा !
7:52............
टान पुनसाकेन पादित नं. १
(२७)
पंचतीर्थयों पर।
[1882]
संवत् १४७६ वैशाष वदि श्री उकेशवंशे वाजहड़ गोत्रे सा० पेता पुण् ासधर पुणे
बरमा नाग कूरमादे घु० जारमलेन ना जरमादे पु सहणा सादा यु० श्री आदिनाथ विवं
कारितं यात्मश्रेचसे प्रति श्री पलीवाल गळे श्री यशोदेव सूरि (निः)।
[1883]
॥ संवत् १५१७ वर्षे माघ बदि ५ दिने श्री उकेश गठे श्री कदाचार्थ संताने श्री र
कश जातो विवट गोत्रे सं० दादू पुण् सं० श्रीवत्स पुण् सुखक्षित ना ललतादे पु० साह
कन
संसार दे युतेन पितरो श्रेयसे श्री अजितनाथ विवं कारित प्रतिधितं श्री कारः
मरिनिः॥
[1884]
सं० १५१९ माघ सु० शुक्र प्रा० व्या मीचत जा नासा दे पुत्र सूचान नात पार
माही पु० मेरा तोलादि युतेन स्वयसे श्री कुंथुनाथ वियं कागि प्र० नग श्री र
नाकोड़ा।
धीशांविनायजामंदिर।
पीले पापा.वार पर
1:.::
सन् १५:५ ३ वैशाप ददि ५ दिने श्रीना, ... ,
:: -
मागर सूरिनिः॥
.

(५५६ )
पोवीशी पर।
[1878]
संवत् १५५३ वर्षे वैशाप सु० ३ बुधे श्री तुंबड झातीय सा देवा जाण रामति सुरु
आन ना माणिकदे सु० डाहीयानाथ पु० स्वश्वेयसे श्री मुनिसुत्रत स्वामि विवं.
प्र श्री वृहत्तपा पके ज० श्री उदयसागर सूरिनिः॥ गिर... ग ।
पर
जोधपुर
राजवैद्य न० श्री उदयचंडजी का देरासर ।
पंचतीर्थी पर।
[1880]
संवत् १५१६ बैण् सु० ५ प्राग्वाट ज्ञातीय व्यत मोपसी टमकू पु० जाणा हरनु पुरु
रणसा पाहु प० जिनदत्त युतेन श्री संचव विंग कारितं प्र० श्री तपा रत्नशेखर सूरिचिः
जसोल (मारवाड़)।
पीले पाषाण की मूर्ति पर।
[1881]
॥ सं० १५३३ वर्षे ज्येष्ठ सु० १०.....श्री महावीर विवं
श्री महावीर बिंबं..... खरतर श्री जिनचंड
'सूरिनिः।

(ए)
[1891]
॥ संवत् १६६० वर्षे वैशाप सुदि ११ बुधे नारदपुरी वास्तव्य प्राग्वाट ज्ञातीय सा टीला
सुन सा० चूमाख्येन नार्या वाई पातु सुत लाधा हीता प्रभृति कुटुंबयुतेन स्वश्रेयसे श्री
धर्मनाय विं कारितं प्रतिष्ठितं तपागाधिराज नहारक श्री हीरविजय सुरिनिश्चिरं
नन्दतात् ॥
श्री झपनवेजी का मंदिर-हाथीपोल ।
पंचतीधी पर ।
[1892]
॥ सं० १३वर ज्येष्ठ शु ए गुरौ गेपुत्रौवाल(?) ज्ञातीय व्यव० पुनाकेन जायर्या .. श्रेयसे
भी पद्मनज विवं का प्र श्री सुमति सूरिनिः ॥
श्री झपनदेवजी का मंदिर-कसरी गली।
पंचतीर्थयों पर।
[1803]
॥ संघ १५२१ वर्षे आपाढ सुदि ५ उरकेश झातीय ....श्री यादिनाय वियं काल....
[1684]
। संघ १५३३ वर्षे वेशाप सु० ५ शुक्रे श्रीमाल ज्ञाव्य मेला ना कर. मुन मुभा.
केनपिनमातृवाद श्रेयो प्रात्मश्रेयस श्री मुमति नाथ विवं कार प्रा श्री नागर गर श्री
देद निभिः ॥ बडेचा सपवाराही ग्रामे दास्तव्य ।
{1865
१ नंवर २५५वर्षे श्रापाट सुदिन दिन इगड़ ग ना
यो एच। धरनाई पुत्र पामपाल नरपास नरपति नाव श्रेयने श्री निका
भी वृद्द ना श्री श्री सन रिमिः ।
नि
.

--
()
पंचतीर्थियों पर।
[1886]
सं० १४०५ वैशाप सुदि ३ ऊएस ज्ञातीय जहड़ गोत्रे सा० गणधर नार्या बल
मोहण जयताकेन पित्रो श्रेयसे श्री आदिनाथः कारितं प्रति श्री यजयदेव सूरिजिः
[1887]
सं० १५१३ वर्षे माघ मासे ऊकेश वंशे सा बदहा ना० सूव्ही पुत्र सा बाहड़ जा
सुत डूंगर रणधीर सुरजनैः रणधीर श्रेयसे श्री कुंथुनाथ विवं कारितं प्रमष्ठितं श्री य
सूरिनिः ॥ बजद्दड़ गोत्रे ॥
[1888]
आँ संवत् १५३६ वर्षे श्री कीर्तिरत्न सूरि गुरुभ्यो नमः सा जेग पुत्र रोहिनी प्रणम
-
..
।
बाड़मेर-मारवाड।
पार्श्वनाथजी का मंदिर ।
[1889]
सं० १६६५ वर्षे उकेश वंशे सागकुरसी कु० प्र० क .
विद्यासागर गणि शिष्येण श्री विद्याशील गणि शिष्य वा श्री शिवकमा गणि शिष्य
श्री मुनिशील गणि नित्यं प्रणमति । श्री अंचल गछे ।
.
प्रमुख श्री संघन उ०
उदयपुर।
श्री पार्श्वनाथजी का मंदिर-सेनों को वाड़ी में ।
पचतीर्थियों पर।
[ 1890]
॥ सं० १५०६ वर्षे मा वदि ५ दिने श्री संडर गठे उप० झा साप आसा पुण् सा
साय पेची पुरा षितमा ना० धारू पु० लापर जा लाडी पु० पामा स्वयसे श्री सुविधिना
बिंचं का प्रण श्री यशोना सूरि संताने गडेशैः श्री शांति सूरिजिः ॥

श्री माहण (२३१) (३) यां घांघ गोत्रे तत्जार्या सरूप दे साह तत्पुत्र संघधि श्री कान्ह जि तस्य वृद्धि नार्या दीपां लघु नार्या सूषम दे पुत्र चिरंजिवी पुन्यपाल सहितेन श्री प्रासाद विं (५) वं ॥ श्री कृषनदेव चिंबं स्थापितं प्रतिष्ठित मलधार गछे नहारिक श्री महिमा सागर सूरी तत्पट्टे श्री कल्याणसागर सूरिनिः प्रतिष्ठितं धर्माचार्य विजामति श्री उदय सागर सूरिः । शुनं । पंवतीर्थियों पर। ॥ । । मेहाकेन [1000] ॥ओ ॥ सं१४एए वर्षे फा सुदि २ दिने ओसवाल ज्ञातीय सा फाऊण पु० सा० नुदा सुश्रावक नार्या रतनु तत्सुतेन सा० सोमाकेन पुत्र देवदत्त जगमालादि सहितन श्री कुंथुनाथ विवं का प्रतिष्ठितं खरतर गडे श्री जिनन सूरिनिः ॥ श्री ॥ [1001] ॥ सं० १४ माद सुदि ६ सोमे ज० ज्ञा० गूंदोवा गोत्रे सा० लापा ना० साषण दे पुन ना० मयणल दे पुषित्रपाल रणपालादि सह नाई पेता नाण पतल दे निमित्तं सुमतिनाथ का प्रा चैत्र गठे श्री मुनितिलक सूरि गुणाकर सूरिभिः । [1002] ॥ संवत् १५३ए बर्षे वैव०४ शुक्रे प्राण ज्ञातीय प० चांपसी ना पोमादे मु० सांगा. केन ना दई सुत करण ना सहसादि कुटुंवयुतेन त्वमानृपितृश्रेयस कुंथुनाय विवं काग्नि प्रतिष्टितं तपा श्र! लक्ष्मीसागर सूरिभिः । काउलि ग्राम वास्तव्यः । चौवोशी पर। [1903] ॥ सं० १५२१ व याषा व०७ श० नपकेश झातो यादित्यनाग गोत्र याचा सार

(२३०)
[1896]
॥ सं० १५७२ वर्षे चैत्र वदि ३ बुधे ऊकशे वंशे वर्शताला गोत्र सा० तोला ना डी
सा आसान ना राना दे पु० जीवा द्वितीय नाण् अचला दे पुत्र गोव्हा पदमा
वार युतेन स्वपुण्यार्थ श्री धर्मनाथ विंव का प्र० श्री खरतर गठे श्री जिनहर्ष
श्री जिनचं सूरिभिः ॥ पं० कुशल....सुप....।
श्री गौतमस्वामी की धातु की मूर्ति पर ।
[1887]
॥ सं० १६२ए व० का सु७३ गुरुवारे...सरताण...श्री गौतमस्वामि विवं का
धातु के यंत्र पर।
[1898]
॥ सं० १९१५ वर्षे मिती आसोज सुदि १५ शुक्रे मेदपाट देशे उदयपुर ओशवंशे
शाखायां गोत्र बोल्यां साहाजी श्री एकलिंग दासजी तत्पुत्र साहाजी श्री भगवान दा
श्री सिद्धचक यंत्र कारापितं नहारक श्री आनन्द सागर
कारापितं बृहत्तपा गर्छ।
श्री शषनदेवजी का मंदिर - सेरों की हवेली के पास ।
मूलनायकजी पर।
[1899]
(१)॥ो ॥ स्वस्ति श्री ज्ञभिवृद्धि जयौ । मंगलाच्युदय श्री ॥ अथ संवछरे।
श्री मन्नृपति विक्रमार्क समयातित संवत् १६एए वर्षे श्री शालिवाइन
शाके १५६४
(२) ॥ प्रवर्तमाने उत्तरगोले माघ मासे शुक्लपक्ष दशम्यां तिथौ गुस्वासरे श्री रा
दुर्गे महाराजाधिराज महाराव श्री हनीसिंघ जी विजयराज्ये ऊपकेश वंशे व
शाखा
तत्पुत्र कुंवरजी श्री
॥

(२३१) (३) यां घांघ गोत्रे साइ श्री माइण तत्नार्या सरूप दे तत्पुत्र संघषि श्री कान्ज तस्य वृद्धि नार्या दीपां लघु नार्या सूषम दे पुत्र चिरंजिवी पुन्यपाल सहितेन श्री प्रामाद विं (५) वं॥ श्री कृषनदेव विवं स्थापितं प्रतिष्ठित मलधार गछे जहारिक श्री महिमा सागर सूरी तत्पढे श्री कल्याणसागर सूरिनिः प्रतिष्ठितं धर्माचार्य विजामति श्री उदय सागर सूरिः। शुनं । पंचतीर्थयों पर। [1000] ॥श्रो ॥ सं० १४एए वर्षे फा सुदि दिने ओसवाल ज्ञातीय सा जाऊण पु० सा० जुदा सुश्रावक नार्या रतनु तत्सुतेन सा सोमाकेन पुत्र देवदत्त जगमालादि सहितेन श्री कुंथुनाथ विवं का प्रतिष्ठितं खरतर गले श्री जिनन सूरिजिः ॥धी ॥ [1001] ॥ सं० १४ए माद सुदि ६ सोमे ज० शा गूंदोवा गोत्रे साग लापा नाग लापण दे पु० मेहाकेन ना मयणल दे पु० पित्रपाल रणपालादि सह नाई पेता ना पतल दे निमित्तं सुमतिनाथ का प्र० चैत्र गठे श्री मुनितिलक सूरि गुणाकर सूरिभिः ॥ [1002] ॥ संवत् १५श्ए बर्षे वैव०४ शुके प्राण ज्ञातीय प० चांपप्ती जा पोमादे मु० सांगा. केन ना दई सुत करण ना सहसादि कुटुंवयुतेन स्वमातृपितृश्रेयसे कुंथुनाथ विवं काग्नि प्रतिष्टितं तपा श्री लक्ष्मीसागर सूरिनिः । फाइनलि ग्राम वास्तव्यः ॥ चौवोशी पर। [1003] ॥ सं० १५११ २० बापा० २०७० उपकेटा हानो यादिन्यनाम गोत्र का7 IIEI (३५) जोषा नाग कांब श्री पुण् सुवर्णपाल जार्या सोमश्री पुत्र सा० लापा कन जा अध सदरथ सूरचंड हरिचंड युतन स्वश्रेयसे श्री कुंथुनाथ विवं कारित उपकेश गए ककु. संताने प्रतिष्ठितं श्री कक्क सूरिति ॥ श्रीः ॥ प्रतिमा पर । [1904] ॥ सं एएएए रो मिगसर सु० १० उसवाल मागा गोत्रे साप लिषमीदास जी न अनरुप दे पुत्र नाथजी अनरुप देजी पंच पर....प्रतिष्टितं । Bir- करेडा-मेवाड। श्री पार्श्वनाथजी का मंदिर । धातु को प्रतिमा परं । [1005] * (११ श्री देव धम्मौयं सुमति गुरोः मध्यम शाखस्य (२) वसति का देवसूरि संवतु .... (३) निः [1806] सं० १६०४ व ज्येष्ठ व... वा कहानी (?) श्री कुंथुनाथ व जि... दान संरपत्र ग्बत सानी सीदकरण { 10071 ॥ संवत् १६१ए वैशाख सुदि ६ श्री श्रादिनाथ......श्री विजयदान सूरि प्रण बा पु नाम सुंदर......। * संत के अंकों का मान टूट गया है, परन्तु लेन के अन्य अक्षरों से स्पष्ट है कि प्रतिमा बहुत प्राचीन है।

(२३३ )
[ 1008]
॥ सं० १६५२ व० वैशाख सुदि १५ वो श्री शीतलनाथ विवं गुरू श्री विजय सूरिनिः ॥
[ 1009 ]
॥ सं० १६४६ अलग मुदि ६ वाजता श्री धर्म......
[ 1910]
॥ संवत् १७१० वर्षे ज्येष्ठ सित ६ गुरौ श्री सुविधि विवं श्रेयोर्थ का प्रण न श्री
विजयराज सूरिनिः श्राप कनका न श्री विजय सेन सूरिचिः ॥
पंचतीर्थी पर।
[ 1911 ]
॥ सं० १५०ए वर्षे माघ सुदि ५ शुके प्राग्वाट वंशे संग कर्मट ना माजू पु० उधरणेन
नार्या सोहिणि पुत्र श्रादा बोसा नीला सहितेन श्री अंचल गढेश श्री जयकेसरि सूरि
उपदेशेन स्वश्रेयसे श्री वासुपूज्य स्वामी विवं कारित प्रा श्रीसंघेन ॥
[ 1912]]
॥ सं० १५१६ वीरम ग्रामे श्रेण वीना सोनल पुत्र श्रे० जुडसिकेन ना संपूटी पुत्र धन्ना
बाघा नार्या फांक प्रमुख कुटुवयुतेन श्री नमिनाथ विवं कारितं प्रतिष्टितं श्री तपागठ
नायक श्री रत्नशेखर सूरिभिः ॥
[ 1913]
॥ संवत् १५२ वर्षे फागुण सुदि २ शुक्र श्री श्री (?) यो रगोश्या गोत्रं श्रे० मुद्रा
नार्या रंगाई पुत्र श्रेण देवर सुश्रावकेण ना कुंवरि घ्रातृ सीधा युनेन श्री अंचलग धार श्री
जयकसरि सूरीणामुपदेशेन स्वश्रेयोर्थ श्री शांति नाथ विधं काग्निं प्रतिष्टिनं श्रीमंचन ॥
श्री पत्तन नगरे ॥
-

(५३४)
[1014]
॥ संवत् १५४१ वर्षे वैशाख मासे नागर ज्ञाती श्रे० केव्हा ना मानूं सुत
माझ्याकेन सुत दरखा नांगा वाला सहितेन श्रात्मश्रेयोर्थ श्री संजवनाथ विंच काय
वृक्ष तपापदे न० श्री जिनरत्न सूरितिः ॥
[19151
॥ संवत् १५७५ वर्षे माघ सुदि गुरौ उपकेश झा सा हापा पुल विजा जा
जल दे पु० ठाकुर रीडा वगकुर ना० अगवा दे पुत्र कुंरपाल युतेन श्रात्मश्रेण पित्रोः पु०
शीतखनाथ विंबं का० प्र० श्री वृ० वो श्री मलयहंस सूरिभिः ॥ कईनलि वास्तव्य है
रंगमंडप के वांये तर्फ आले के नीचे का शिलालेख।
[1916]
(१) ॥ो। संवत् १३३४ वर्षे वैशाख सुदि ११ शुक्र श्री श्रांचल गछ । प्राग्वाट हाती
महं साजण मई तेजा
सा कांफणेन निज मातृ
(१)...... कपूर देवी श्रेयोर्थ रखनक (?) श्री शांतिनाथ विंबं कारापित ॥ संताने
मंडलिक महं माला महं देवसीद मदं प्रमत्तसीद .
सनामंम्प में दरवाजे के दाहिने स्तंन पर।
[1917]
॥श्रो ॥ संवत् १४६६ वर्षे चेत्र सुदि १३ सुविहित शिरोरत्न शेखर श्री रत्नशेखर सरि
पहांबुधि पूर्णचंड श्रीपूर्णचंप्रसूरि गुरुकम कमलहंसाः श्री हेम इंससूरयः सपरिकरा करः.
सनामंगप के ३ मजले के स्तंन पर ।
[1918]
श्री जनसागर सूरि उदयशील गणि श्राशासागर गणि केमसुंदर गणि मेस्प्रन
॥
मुनि श्री..

( २३५ ) बावन जिनायलमें पंचतीर्थीयों पर । [1910] ॥ सं० १२४ए......सषमिणी श्रेयोर्थ पुत्र उधरणेन नात्रि श्रासधर श्रेयो भी पार्श्व- नाच बिवं कारितं ॥ [1920] थो संवत् १५६५ ज्येष्ठ सुदि १० शनौ वायट झातीय स्वसुर नायक श्रासन श्रेयोर्थ ......श्री श्रेयांस बिंब कारितं । श्री नागेन्द्र गछे श्री वर्धमान सूरिनिः प्रतिष्ठितं । [ 1921] संवत् १३२१ वर्षे फागुण सु० ना घाटी पुण् ऊदा ना रुपिणि सुत आसपालेण माता पिता पूर्वज श्रेयोर्थ चतुर्विंशति पट्टः कारितः श्री चैत्रगलीय श्री बामदेव सूरिनिः .... श्री शांतिनाथ । [1922] सं० १३५५ श्री ब्रह्माण गछे श्रीमाल झातीय रिज पूर्वज श्रेयसे सुत मालाकेन श्री आदि नाथ विवं प्र० श्री विमल सूरिनिः । [ 1923] सं० १३५६ श्री शांतिनाथ विवं कारितं श्री कक्क सूरिनिः प्रतिठितं । [1924] सं० १३१ वर्षे ज्येष्ट वदि प्राग्वाट झातीय सा० धीना नार्या देवलं पुत्र चमूजा केन मातृ पितृ श्रेयोर्थ श्री पार्श्वनाथ विवं श्री पूर्णिमा गछे श्री सोमतितक सूरि उपदेशेन वियं का प्रतिष्टितं श्री सूरिनिः ॥ [1025] सं० १३०३ वैशाख वदि ११ श्रेण सिरकुंथार ना सींगार देव्या प्र० सा न्ट भी महावीर कारितं । 4

२
"
(२३६ )
[1926]
संवत् १३५१ मा० सु० १५ खरतर गघीय श्री जिन कुशल सूरि शिष्यैः श्री ।
सूरिनिः श्री पार्श्वनाथ प्रतिमा प्रतिष्टिता कारिता च मव बादि सुतेन रह्मा
आल्हादि परिवृतेन स्वपितृ सर्व पितृव्य पुन्यार्थ ।
[1927]
सं० १५०७ सु० ५ प्रा० रोस्तरा पदम । साहम साकल श्रेण देवसीइन का
सिकान्तिक श्री माणचन्द्र सूरि ।
[1928]
सं० १४२२ व ज्येठ सु० ११ बुधे......मंडलिक ना मान्दण दे सुत
व्या पानाकेन श्री संभवनाथ बिंबं का... तपा गडे श्री रत्नशेखर सूरीणामुपदेशेन .
[1920]
संप १५३ए माह वदि श्रीमाल झा व्यव० राणासीह जाण लखती पुत्र वयरा
श्री सुमतिनाथ बिंबं का० श्री विजयसेन सूरि पटे....
[1930]
सं० २४७१ वर्षे माघ सुदि . . . . . . श्री मुनिसुव्रत विवं का प्रण कबोलीवास
श्री संघतिलक सूरि....
I 1931]
सं० १४२ वर्षे .... साहलेचा गोत्रे सा हापा .... ना गयणल दे पुत्र सा०
नाग वीरणी पुत्र परहयेन पितृ मातृ श्रेयसे श्री श्रेयांस विवं का० प्र० श्री पलीकीय
श्री यशोदेव सूरिनिः।
[1932]
ओ सं० १४१ वर्षे माघ सुदि ५ बुधे श्रीमांस वंशे वहगटा गोत्रे सा ऊदा पुत्र
जगकेन श्रासा जूसा सहसादि पुत्रयुतेन पुन्यार्थ श्री न मिनाथ विवं कारिने प्रनिष्टिनं
खरतर गडे श्री जिनसागर सूरिनिः ।

( २३७ )
[1933]
सं० १४५३ व० वैए सु० ५ श्री संझेर गजे पीपलउडेचा गोत्रे श्रे० जाण सा० कान्हा
aio वोमणि पुण् रतनाकेन पित्रो निमित्तं श्री शांतिनाथ विंचं काश्री जशोजन सूरि
संताने श्री शालि .....।
[1934]
संग १५०३ ३० ज्येण सु० ११ शु० श्री उप० ग ककुदाचार्य सं० विपड गो सा जीऊप
पुरु रामा ना जीवदही पु० निलाकेन पत्नो पुत्रस्वश्रेण श्री श्रेयांस विंग का ...... ।
[1935]
सं० २५०७ माघ १० १३ उकेश सं० मारंग सुत संना ना हेमा दाणा डंगर नापा संप
गवाना पोलू सुत साहस जहाए ना लदम्या श्री संजव विवं काप्र० श्री उदयनंदि
सरिनिः ।
[1936]
संवत् १५१३ वर्षे वैशाख सुदि २ सोले जाकेश ज्ञा० स्याट गोत्रे । सा० धाना ना
ससमादे पुत्र सा चडसीडाकेन पितर बालु निमित्त श्री सुमतिनाय वियं का० प्र० उपकेश
a
इस धारक
.
[1937]
सं० १५१७ वर्षे चेत्र वदि १ शुक्र श्रीश्रीमाप्त झा०
सु० वडयास पुत्र पात्र
महितेन धी अजितनाथ मु० जिक्तिस्वामि प्रा श्री पूर्णिमा पक्षे श्री राजतिलक सूरिणा.
मुपदेशेन !
[1933]
सं० १५२५ वर्षे मार्ग: सुपए धागर वासि प्राग्बाट सा वाया ना गाक एन गा.
मासकेन जा आल्हू पुत्र पर्वत नाप नाई प्रमुख टुंग्युगेन स्वयम श्री मानिनाय विक
१० २० तपा श्री मोमसुंदर सुरिशिष्य भी सलीलागर रिदिः ।

(२३०)
110301
सं० १५३.::.। व० वैशाख सुदि ३ शनी श्री संडेर गले उ० टप गोत्रे
दहण दे गोरा ना मल्हा दे पु० आम्हा ना करा ना बानूण दे पु० तोला श्रे
पुन्यार्थ वासुपूज्य बिंध का ...।
[ 1940]
॥ संवत् १५३५ वर्षे वैशाख सुदि६ सोमे जकेश वंशे जाजा गोत्रे सा० धर्मा पा०
दे पुत्र सात काजा सुश्रावकेण नाप जोजा प्रमुख परिवार सहितेन श्री श्रेयांस विवं
प्र० खरतर गछे श्री जिनन सूरि पढे श्री जिनचं सूरिभिः ॥
[1941]
संवत् १५३० वर्षे ज्येष्ठ सु.
सुत
केम्हा जाल सिवा
पोचकेन स्वश्रेयसे श्री पद्मप्रन विवं कारितं प्र० तपा श्री सोमसुंदर शिष्य श्री.
सूरि शिष्य श्री रत्नशेखर सूरिनिः ॥ श्री ॥
[1042]
संवत् १६३७ वर्षे वैशाख सुदि १३ रवी श्री स्तम्नतीर्थ वास्तव्य श्री नागर ज्ञाती
सा पना नार्या कींसादे सुत सा होता जार्या वा । हांसलदे नाम्ना श्री श्रादिनाप
तीर्थी करापितं । श्रीमत्तपा गछे नहारक प्रनु श्री हीर विजय सूरिजिः प्रतिष्ठितं ।
माला ना माला
दे
नवतु॥
[1943]
॥ संवत् १६७५ वर्षे वैशाख सुदि ७ गुरुवासरे ...... वास्तव्य उकेश ज्ञातीय द०
साह यांदसा ना० प्रना सुता नोआ......सुत हेमा कुटुंवयुतेन स्वश्रेयसे श्रीमुनि....
तपागना श्री हीरविजय सूरि न० श्री विजयदेव सूरिश्वर.......।
[1044]
संवत् १७ माघ सु० ५ गुरुदिने श्राचार्य श्री क्षेमकीतीः तत्पद्दे श्री हेमकीर्ति देवाः

(२३ए) थप्रोतकान्वये साधु माना नाव झीनाही तयोः पुत्राः साधु कौला चुला कोसा नार्या सुनुना तपो पुत्र कीम्हा नार्या वंदो पुत्र दासू वस्तुपाल नित्यं प्रणमति ॥ चौवोशी पर । [1945] (१) ॐ संवत् १९४२ मार्ग सु० सोमे श्री सांवदेवा धमके (?) ... जासख श्रावक पुत्रि (२) कया भीमसिंकया श्रेयोपं चतुर्विशति पट्टकः कात्तिः॥ (३) (विवं) शं० वि०.... चालू । का प्र० तपा गछे ।। चौबीसी पर। [1946] ॥ सं० १५६५ वै० शु शनौ श्री नटोप वास्तव्य श्रीश्रीमाल ज्ञातीय सा कान्हा नार्या फुर्तिगदे सुता सा० मेघा ना वारधाई सुत रूपा षीमादि सकुटुंव युतया सा राजा नार्या वीमाई सुता राकू नाम्न्या श्री अनंतनाथ विवं कारितं प्रतिष्ठितं तरा गछे श्री सोन सुंदरसूरि संताने श्री हेमविमस सूरिनिः ।। हीकार यंत्र पर। [1947] ॥ संवत् १६०ए वर्षे पोत माले १० दिने श्री वृहन् खरतर मछे श्री जिनराज सूरि विजय राज्ये चंदा पूम्यां ओसवाल झातीय नाहटा गोने सा सहसराज पुत्र साप सिंघ- राज तत्पुत्राः सा श्री चंद संवतु १ सा सधारण सा श्री हंस सा करसण हासा सधा. रथ नार्या सहयदे सुत तत्पुत्रा सहसकरण सुमति सहोदर शुनकर प्रतिष्टितं श्रीमवू भो परानयन सुहगुरुणा ॥ हितं कारापितं ॥ -- १ ( स० ) un पावन जिनालय की देह रियों के पाट पर । [1048] (१) संवत् १०३। (व) श्री संमेरक गये श्री यशोना सूरि संगाने श्री स्गामा चार्या .... (२) .... प्र० न० श्री यशोनऽ सूमिभिः श्री पार्श्वनाय विवं प्रतिष्ठित ॥ न ॥ चंद्रेण कारितं .. [1940] (१) ॐ संवत् १३०३ वर्षे चैत्र वदि ४ सोमदिने श्री चित्र गवे श्री जलेश्वर . राटजरीय वंशे (२) श्रेण जीम अर्जुन कमवट श्रेण चूमा पुत्र श्रे० घयजा धांधल पासम ऊदादि कुटुंव समेतैः (३) थ प्रतिमा कारिता । प्रति श्री जिनेश्वर सूरि शिष्यैः श्री जिनदेव सूरिजिः [1950] (१)ॐ संवत् १३१७ वर्षे ज्येष्ठ वदि २१ बुधे श्री कोरंटक गछे श्री नन्नाचार्य संताने. (२) सा जीमा पुत्र जिसदेव रतन अरयमदन कुंता महणराव मातृ लाबी विंबं ( कारि) (३) (ता)। प्रतिष्ठितं । श्री सर्व देव सूरिभिः । [1951] (१)॥ संवत् १३१७) ज्येष्ठ वदि ११ बुधे श्री पंरक गले प्रतिबा चैत्यालये श्री यशो ना सूरि संताने श्रे० साढ देव पुत्र मह सामंत मह आप्तपालेन पु० धांधल सा.. (२)....(श्रे) योर्थ श्री संभवनाथ विवं देवकुलिका सहिनं कारितं प्रतिष्ठितं श्री शांति सूरि शिष्यैः ईश्वर सूरिनिः ॥॥॥८॥ ..

(२४१ ) [1052] (१)॥ॐ ॥ संवत् १३३० वर्षे फागुण सुदि शनौ नां देवान्वये साधु पउमदेव सुन संघपति साधु श्री पासदेव नार्या पेढी पुत्राश्चत्वारः सा देवड स्ला काजल रउड (३) बाइड पौत्र जिणदेव दिवधर प्रभृतितिः देवकुत्रिका सहित श्री सुमति नाथ वित्र का प्र वादी श्री धर्मघोष सूरि गठे श्री मुनिचंद्र सूरि शिष्यैः श्री गुणचंड सूरि निः ॥ ॥ [1853] (१) ॥ ॐ नमः ॥ संवत् १३३ए फागुण सुदि शनों श्री राज गडे साधु नेमा सुन धार तत तनुज साधु नाहड तत्पुत्रास्त्रयो यथा सा काकद नार्या नान्ही पुत्र पाहा ।। (२) मा धर्मसिरि देपाल नार्या देवश्री तथा साप नरपति पत्नी लक्षतू 6ि0 पनी नायक देवी पुत्राः सा सहदेव सा हरिपारख जार्या हीरा देवी हि० हरिसिदि पुत्र महोपाल (३) देव तृण हिमश्री सा कुमरसिद तथा सा तेजा लायर्या तीन पुत्र धणिंग पून सीद एतस्मिन्ननुक्रमे पितृ साप नरपति श्रेयले मा रिपासेन श्री पंगें ॥ (४) र गछे प्रतिवर श्री पार्श्वनाथ पत्य देवकुतिका सहितं श्री शांतिनाथ प्रिंय का: प्रा वादी श्री धर्मघोष सूरि पट्टकमे श्री थानंद हि शिष्यः श्री श्यामरमर सुरिनिः॥ [1254 (?)॥ * ॥ संघ २३३ए वर्षे फा सुदि शनो श्री राज गोमा सुन र पार सन सुत सा नाहड़ तत्पुत्रास्त्रयो यथा ताकाकर जायी नान्! पुत्र पाल्दा THE !! (१) धमसिरि देपास मार्या देवश्री पुत्र तथा सा नरपनि जाया नमार पुत्राः सा० सददेव सा हरिपाठ पत्नी होगदेवो किमि (३? ए देव ना हेम्धी कमारसीद तपा ताजा सा काम -

(५१० )
बावन जिनालय की देवरियों के पाट पर ।
[10-12}]
(१) संवत् १८३ (व) श्री संमेरक गले श्री गशीनगरि संतान भी गामा (?)
चार्या.....
(२) .... प्र० न० श्री यशोन सूरिजिः श्री पावनाग सिंध प्रविधि ॥ न ॥ पूर्व
चंडण कारितं . . ..
[1010]
(१) ॐ संवत् १३०३ वर्षे चैत्र वदि ४ सोमदिने श्री चित्र गवे श्री जजेश्वर संताने
राटजरीय वंशे
(२) श्रेण नीम अर्जुन कमबट श्रे० धूमा पुत्र श्रे० घयजा धांस पालन कदादिभिः
कुटुंव समेतैः..
(३) थ प्रतिमा कारिता । प्रति श्री जिनेश्वर सूरि शिप्यः श्रीजिनदेव सूरिभिः ॥
[1950]
(१) ॐ संवत् १३१७ वर्षे ज्येष्ठ वदि ११ बुधे श्री कोरंटक गछे श्री नन्नाचार्य संताने...
(५) सानीमा पुत्र जिसदेव रतन धरयमदन कुंता महणराव मात लाबी श्रेयो)
विंबं ( कारि)
) (ता)। प्रतिष्ठितं । श्री सर्व देव सूरिचिः ॥
[1951]
(१)॥ संवत् १३१७) ज्येष्ठ वदि ११ बुधे श्री पंरक गप्रतिकात्याये श्री यशो
चज सूरि संताने श्रेण साढ देव पुत्र मह सामंत मह आप्तपालेन पु० धांधल सा..
(२)....'() योर्थ श्री संभवनाथ विंचं देवकुलिका सहिन कारितं प्रतिष्ठितं श्री
शांति सूरि शिष्यैः ईश्वर सूरिनिः ॥ ॥ ॥

(२४१) [1052] (१) ॐ ॥ संवत् १३३ए वर्षे फागुण सुदि न शनौ नां देवान्वये साधु पउमदेव सुन संघपनि साधु श्री पासदेव नार्या पेढी पुत्राश्चत्वारः सा देड्ड साए काजल रउद (२) बाहड पौत्र जिणदेव दिवधर प्रभृतिानः देवकुलिका सहितं श्री सुमति नाथ विंचं का प्र० वादी श्री धर्मघोष सूरि गवे श्री मुनिचं सूरि शिष्यैः श्री गुणचं सूरिनिः ॥ ॥ [1853] १)॥ ॐ नमः ॥ संवत् १३३ए फागुण सुदि ७ शनों श्री राज गडे साधु नेमा सुत धार सत तनुज साधु नाइड तत्पुत्रास्त्रयो यथा सा काकद नार्या नान्ही पुत्र पाहा ।। (२) ना धर्मसिरि देपाल नार्या देवश्री तथा साप नरपति पत्नी वक्षतू वि० पत्नी नायक देवी पुत्राः सा सहदेव सा हरिपाल नार्या हीरा देवी वि० हरिसिष्टि पुत्र महोपाल (३) देव तृ दिमश्री साप कुमरसिह तथा सा तेजा नाया लीलू पुत्र धरणिंग पून सीह एतस्मिन्ननुझसे पितृ साप नरपति श्रेयसे सारा हरिपालेन श्री पंमे ।। (४) र गछे प्रतिवद्ध श्री पार्श्वनाथ चैत्य देवकुलिका सहित श्री शांतिनाथ विं का प्र० वादी श्री धर्मघोष सूरि पट्टझमे श्री थानंद सूरि शिप्यः श्री अमरन सूरिनिः॥ [1254] (१) ॥ ॐ ॥ संच १३३ए वर्षे फा० सुदि ७ शनी श्री राज न लामा सुन साव धार सन सुत सा नाहड़ तत्पुत्रास्त्रयो यथा सा काकर जायर्या नान्दी पुत्र पाटा ना॥ (२) धर्मतिरि देपाल जायो देवश्री पुत्र तथा सा नरपनि तायर्या सविनायर दंग पुत्राः सा० सददेव साहरिपाल पत्नी होगदेवो ६० मिति पत्र महीना (३) ह देव तु हेमली कुमारसीह तथा ताजा जारी की पुत्र का नमीद क (२४२) पुत्रादि धर्म कुटुंब समुदये पितु सा० काकढ श्रेयसे सा० पाहाकेन श्री (४) षंडेर गढे श्री पार्श्वनाथ चैत्ये देवकुलिका श्री श्रादिनाथश्च कारितं प्र० वादी श्री धर्मघोष सूरि पट्टक्रमे श्री आनंद सूरि शिष्य अमलप्रत्न सूचिनिः ।। [ 1955] (१) ॥ संवत् १३एर वर्षे पीप सुदि वो श्री चित्रकूट स्थाने महाराजाधिराज पृथ्वी चंड. (२) श्री मालदेव पुत्र श्री वणवीर सत्कं लिखड्दार महमद देव सुहड सींह चमरा सत्कं पुत्र . (३) दिवं गतं तस्य सत्कं गोमट्ट कारापितं : ॥ [1956] (१)॥ ॐ ॥ स्वस्ति ॥ संवत् १४५१ वर्षे ॥ माघ मासे शुक्ल पक्ष पंचम्यां तिथौ बुध- वारे श्रीमाल झातीय मडग्यिा गोत्रे सा गहन सा धाना ना हा पुत्र संग हेमराज सं० थिरराज सं० लालू सं० गशाल कु (२). . . दे पुत्र सा हेमराज पुत्र समुपपास नार्या . . . . श्रेयसे श्री पार्श्वनाथ विवं काराफ्तिं प्रतिष्ठितं श्री खरतर गछे श्री जिनप्रन सूरि अन्वये । श्री जिनसर्व सूरि पट्टे श्री जनचं सूरिनिः ॥ [ 1957] (१) ॥ॐ ॥ सं० १४ए६ वर्षे ज्येष्ठ सुदि ३ बुधवारे श्री ऊकेश वंशे नाइट शाखायां । सा० माजण पुत्र सात व (२) णवीर पुत्र सा० नोमा । वीस रणपाल. प्रमुख पौत्रादि परिवार सहितेन श्री करइटक स्थाने श्री पार्श्व (३) नाथ जुषने श्री विमलनाथ देवस्य देवकुलिका कारापिता ॥ प्रतिष्ठिता श्री स्वरतर गळे श्री जिनवर्द्धन सू-

( २४३)
(४) रोणासनुक्रम श्री जिनचं सूरि पटकमलमार्तडमंडलिः श्री मनिसागर सूरिनिः
॥ शिवमस्तु ॥
(५) वरसंग देवराज पुन्यार्थः ।
->
-
नागदा-मेवाड़।
श्री शांतिनाथ जी का मंदिर।
मूलनायक की श्वेत पषाण की विशाल मूर्ति की चरण चौकी पर ।
[ 1958 ] *
(१) संवत् १४९४ वर्षे माघ सुदि ११ गुरुवारे श्री
(२) मेदपाट देशे श्री देवकुल पाटक पुरवरे नरेश्वर श्री मोकल पुत्र
(३) श्री कुंनकर्ण नूपति विजयराज्ये श्री उससे श्री नदलक्ष शाप मंडन सा सभी
( ४ ) धर सुत सा साधू तत्पुत्र साधु श्री रामदेव तद्भार्या प्रथमा मेला दे हिनीया
माइण दे । मेला दे कुदि संतृत
(५) सारा श्री सहणपाल । मादहण दे कुक्षिसरोजहंसोपम श्री जिनधर्मकरवानसा
धीनुक सा सारंग तदंगना हीमा दे लखमा दे
(६) प्रमुख परिवार सहितेन सा सारंगेन निजनुजापार्जित लक्ष्मी सफली कमाई
निरूपममद्भुतं श्रीमहत् श्री शांति जिनबर वियं सपरिकर कारितं
(७) प्रतिष्ठितं श्री वर्धमानस्वाम्यन्वये श्री मत्रखरतर ग श्री जिनराज रिप श्री
जिनवर्धन सूरि त (स्त) पट्टे श्री जिनचंड सरिन (न्न) पदृपदाचा शिकार
यह लेख “भावनगरपति "पृ.१२-१३- र 'टा 2:11. Tari

। im (२४४) हस्रकरावतारैः श्री मशिनसागर सुरितिः ॥ (0) सदा वन्दते श्रीमद् धर्ममूर्ति उपाध्यायाः घटित सूत्रधार मदन पुत्र धरणा सोम- पुराध सूत्रधारः रोमी जुरो रुयोवीकाच्या ॥ श्राचंदाक्क नंद्यात् ॥ श्रोः ॥ ७ ॥ सनामंडप के बायें तर्फ स्तम्न पर । [1959] (१) संवत् १०७ वर्षे वैशाष सुदि ११ सोमे सादाजी श्री जेठमल जी ताराचंद जी कोगरी जात श्री.... साहजी श्री उदेचंदजी पाषाण की टूटी चौवीसी पर । [ 1080] (१) ॐ सं० १३२५ वर्षे ज्येष्ठ सुदि १४ बुधवारे ऊकेश वंशे नवमक्षा गोत्रे साधु भी रामदेव पुत्रेण मादण देवि पुत्र (२) कारण निज नार्या । जिनशासन प्रनाविकाया हेमा दे श्राविकाया पुण्यार्य श्री सप्ततिशत जिनानां कारितं. (३) तत्पट्टे श्री जिनसागर सूरिभिः । . -*-*- देलवाड़ा-मेवाड़।* श्री पार्श्वनाथजी का बड़ा मंदिर । मृतनायकजी पर। [1881] सं० १४ाद श्री पार्श्वनाथ विवं सा सहणा यह सान प्राचीन है। " देव फुटपाटका" नामकी पुस्तक में लेसों के साथ यहां का धन है।

( २४५)
पुंडरिकजी के मूर्ति पर।
[1962]
संवत् १६०ए वर्षे आषाढ बहुल ४ शनौ देलवाड़ा वास्तव्य ज्ञवर गोत्र उकेश ज्ञातीय
इशाखीय सा मानाकेन ना हीरा रामा पुत्र माया रांगा फया युतेन स्वश्रेयसे श्री
पंढरीक मूर्तिः कारापितं प्रतिष्ठितं संकेर गठे जा श्री मानाजी केसजी प्र॥
आचार्यों के मूर्ति पर।
[10633
.
जिनरतन सूरिगुरु मूर्तिः कारिता प्रतिष्ठिता .
.
[1264]
संवत् १४७६ वर्षे ज्येष्ठ वदि ५ दिने नवक्षद शाम्बोय सा रामदेव नार्या श्रीमा
या श्री जिनवईन सूरि मूर्तिः कारिता प्र० श्री जिनचं मूरिनिः ।
[ 10653
नंवन् १४७६ वर्षे ज्येष्ठ वहि ५ मा रामदेव जामिना देवा श्री
श्री खरतर गछे श्री जिन रिमिः ।
रिना
अंत पापा को बारीमा निवर।
} ॥ ९ ॥ संवत १४ व दि..
मातीवर मांस,
म
एR: #7

. (२४६ ) (२)लानि पुत्र दंपा जार्या देवल दे पुत्र ७ व्यक कुंरपात सिरिपति नर दे धीणा पंडित लषमसी आ. (३) त्मश्रेयोर्थ श्री पार्श्वनाथ जिनयुगल कारापितः प्रतिष्ठितः कोलीवाल गछे पूर्णिमा पदे हतीय शाखा- (५) यां नहारक श्रीजडेश्वर सूरि संताने तस्यान्वये ज० श्री रत्नप्रज सूरि तत्पद जट्टारक श्री सवाण- (५) द सूरीणा शिष्य सषमसीहेन यात्मश्रेयोर्थ कारापितः प्रतिष्ठितः न श्री सर्वा. पद सूरी (६) णामुपदेशेन ॥ मंगलाज्युदयं । 81967] (१)॥ ॐ ॥ स्वस्ति श्री नृप विक्रमादित्य संवत् १५०० वर्षे वैशाष शुदि ३ श्रीमाल. ज्ञातौ मांथलपुग गोत्रे सा० (२) देहड़ संताने सा काला तत्पुत्र साप मेला केला मेला पुत्र साप सोमा सण सा- यरकेन पुत्र हुंफण पुत्र (३) सोला सोमा पुत्र महिपति डुंगर जापर सायर पुत्र बाला पासा हुंफण पुत्र दस्त- पालत (४) स रत्नपाल कुमरपाल तोला पुत्र नरपाल नरपति प्रभृति पुत्र पौत्रादि सहितण पट्टों पर । [1968] सं० १४ए४ वर्षे फाल्गुन वदि ५ प्राग्वाट सा देपाल पुत्र सा० सुहडसी जार्या सुड्डा दे पुत्र पीठनलिआ सा करणा नार्या चनू पुत्र सा0 धांधा हेमा धर्मा कर्मा हीरा काला ब्रातृ साहीसाकेन नार्या साखू पुत्र आमदत्तादि कुटुंबयुतेन श्री दासप्तति जिनपदिका कारिता प्रतिष्टिता श्री तपागठनायक श्री सोमसुंदर सूरिनिः॥ श्रीः ॥

(२४)
[186]]
सं० १५०३ वर्षे आषाण शु०७ प्राग्वाट सा० देपाल पु० सा सुइडसी ना सुहडा दे
नुन पीउलिया सा करणा नार्या वनू पुत्र साप धांधा हेमा धर्मा कर्मा हीरा होसा काला
मा० धर्माकेन ना धर्माणि सुत महसा साकिन सहजा सोना साजणादि कुटुंबयुतेन ए३
जिनपट्टिका कारिता ॥ प्रतिष्टिता श्री तपागलाधिराज श्री सोम सुंदर सूरि शिष्य श्री जय
वंश सूरिनिः॥
[ 1870]
सं० १५०६ फाण शुदि ए श सा० सोमा नाप रूडी सुत सा समधरेण जात फाफा
लीधर तिहुणा गोविंदादि कुटुंबयुतेन तीर्थ श्री शत्रुजयगिरिनारावतार पहिका का प्रण
श्री सोम सुंदर सूरि शिष्य श्री रत्नशेखर सूरिभिः ।।
भोयरे में।
मूलनायकजी पर।
[ 1071]
१४ए। लकेश सा वाष्ठा राणी पुत्र वीसस खीमाई पुत्र धीग परली ना० मा रत्ना
दे पुत्री मादहण देव का आदि विवं प्र० तपा प्री मोम मुंदर नतिः ॥
पद पर
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:02
सं० १४५ ० ०३ जावेश वंश तार :
TETTE
सा रामदेव जार्या मेला दे. पुना
संसारम: :::::::::
मुनया श्री नन्दो पर पE: हारित प्रनिती. ८ कट'
दर निजि त्यारिता काही
7.
।

(२७)
[1873]
सं० १५०३ वर्षे आषा० शु० प्राग्वाट सा आका ना० जसल दे चांपू पुत्र सा०
देव्हा जूग सोना षीमायः चतुर्विशति जिन विवं पट्टः कारितः प्रतिष्ठितः श्री सोमसुंदर
सूरि शिष्यैः श्री जयचंद सूरिभिः ॥
देहरी में।
मूलनायकजी पर।
[ 1074]
सं० १४एए ज्येष्ठ सुदि १४ बुधे श्री विमलनाथ विंवं कारितं ज्ञानतिरि श्राविकया।
प्र। श्री जिनसागर सूरि निः । श्रीमान झातीय जामिया गोत्रे ।
प
पट्टों पर ।
नार्या
[1875]
सं० १४५ वर्षे ज्येष्ठ सु० १४ बुधे श्री ऊकेश वंशे नवलदा शाषायां सा राम
नारिंग दे पुण्यार्थं श्री श्री सिजिशिलाकायां श्री जिनवर्द्धन सूरि पट्टे श्री जिनचं सूरि
पट्टे श्री जिनसागर सुरिनिः ।
[ 1876]
(१) ॥ संवत् १४६ए वर्ष माघ सुदि ६ रवौ ॥ केशवंशशृंगारो जुवन पास इत्यजत् ।
जुवनं पालयत् यः स्व॒नामनिन्ये (?) यथार्थतः ॥ १ ॥ तदन्वये ततो जात
तक
(२) त्यः पृथु प्रतापी ननु गेप तापी। जिनांविरक्तो गुरुपादलक्षो । गुणानुरागी हृदय
विरागी ॥४॥ युगलकं ॥ तस्यांगना ग कुरंगनेत्रा सीतेव ..
१३) धार महितेन मा० सहला सुश्रावकोण जिनमातृ पुण्यार्य श्री वासुपूज्य वित्रं चतुः
विशनि पटक विंशति विहरमानादि......

-- (वए) [1977] (१) संवत् १४ए१ वर्षे माघ सुदि ५ बुधे नवलक्ष गोत्रे सा रामदेव जार्या मेघा (२) दे पुत्र सहणपाल नार्या नारिगं देव्या श्री. . . . जिन मूर्ति विवानि प्र. (३) तिष्ठितं श्री खरतर गहे श्री जिनचं सूरि पेट श्री जिनसागर सूरिनिः ।। दरवाजों पर। [1978] (१) संवत् १४७ वर्षे ज्येष्ठ सुदि ४ गुरुवासरे . (२). [1079] १) श्री ॥ संप १४३ नागपुरे ऊकेश वंशे सा हीरा ना० धर्मिणि पुन्या सरस्वती पत्तनवासि सा होरा सुत सा संग्राम सिंह नार्यया सम्पपत्यदेशयिरत्यादि गुण (२) युक्तया श्राप देज नाम्न्या न्यायोरा(र्जि)तं निजवित्त व्ययेन तपापदं श्रोसा दिद- वप्रासादे श्रीपार्श्वनाथ देवकृतिका कारिता प्रगहनायक प्रोसामसुंदर मूरिभिः । . [1080] ( १ ) सं० १४४ वर्षे श्री अणहिलपुरदाति श्री श्रीमानहानि मा समर्म! पु : सोमाकेन संप्रनि अहमदाबादपुरवासी सदायी . . . १२) सुत मो० वाघादि कुटुंग्युनन प्रो तापक्ष प्रासादिना प्रामाद धो पति देवकुक्षिका करिता प्रनिहिताश्री नपाप धो मोनदा सरर . :::: (१)॥ॐ॥ संवत् १४७६ दर्षे पोइदिए न्दः सा रामदेव का मंदिर E: E - (३)

॥
.
( २५० )
(४) श्री स्वरतर गछे श्री जिनवर्द्धन सूरि पट्टे श्री जिनचंड सूरिनिः ।।
[1982]
(१) संवत् १४७६ वर्षे कार्तिक सुदि ११ सोमे ॥ ऊकेश झातीय सा गहड़ भार्या
सुषुव दे पु० राना साना सलषाके(न) निज मातृपितृ श्रेयसे श्री आदिनाथ प्रासा
दे श्री सुमतिनाथ देव प्रतिमा
(१) कारिता ॥ ऊकेश गछे श्री सिकाचार्य संताने प्रतिष्टितं । श्री देवगुप्त सूरिभिः ॥
॥ श्री ॥ मलधारीयकैः ।।
[1983]
(१) सं० १४ फा०
सुश्रीमाख ज्ञा० सा०
(२) देवकुलिका का रिता प्रतिष्ठिता तपागबनायक नी सोमसुंदर सूरि श्री मुनि
सूरिजिः ॥ श्री हिलपुरपत्तन वास्तव्य
[19841
(१) ॐ ॥ संवत् २४ए१ वर्षे माघ सुदि ५ बुधवार जकेश वंशे श्री नवलखा
गोत्र
श्री रामदेव नार्या श्राविका मेला दे पुत्र साधु श्री सहणपास नार्यया नारिंग दे
श्राविकया पुत्र सा रणमल सा० रणधीर रणन्त्रम सा० कर्मसी पौत्रादि सहितया
निज पुण्यार्थ जिनानां
(२).
श्री जिनराज सूरि पट्टे श्री जिनवर्धन सूरि तत्पट्टे श्री जिनचं सूरि तत्पपूर्वा-
चस श्रीयुत श्री जिनसागर सूरिभिः ॥ शुनं भवतु ॥॥॥॥॥॥
नये मंदिर में।
मूखनायकजी पर ।
[1985]
॥ सं० १४५२ वर्षे वैशाख मुदिर भी पार्श्वनाथ विवं ।। सा ससुदय वष्ठस्य ।।

( २५१) कायोत्सर्ग मूर्तियों पर [1986] १) ॥ ॐ ॥ संप १४६४ वर्षे थाषा शु० १३ दिने गूर्जर झानीय ज. १२) सालो साषण सुत मंजयतल सुत मं सादा नार्या सूमल (३) दे सुत मं दरसिंह बात मं० जेसाकेन नार्या श्रृंगार दे पुत्र (४) हरिचंड प्रमुख सकल कुटुंबसहितेन स्वश्रेयसे प्रच (५) श्री पार्श्वनाथ प्रतिमा कारिता प्रतिष्ठिता श्री सूरितिः ।। [ 1987] ॥ ॐ ॥ संवत् १४७५ वर्षे ज्येष्ठ सुदि गुरुवारे श्रीमान ज्ञातीय मंत्रि... , ए प्रा सुत नंदिगेत । सुत पुत्र साप आसा सुश्रावकेण श्री पाश्वनाथ विंच स्वपुण्यार्थे कारित श्री खरतर गहे धो जिनवर्धन सूरिनिः प्रतिष्टितं ॥ आचार्यों के मूर्तियों पर। [ 1088] ॥ ॐ॥ संघ १३७१ वैशाप वदि ५ श्रीपत्तने श्री शांतिनाथ विधि चैत्ये श्रीजिनचंड सूरि शिप्यः श्री जिनकुशत सूरित्तिः श्री जिनप्रबोध सूरि मृतिः प्रतिष्ठिता ॥ कारिता च सा० कुंमरपाल रत्नेः सा महणसिंह तारा देपाल सा० जगसिंह सा० मेदा नुश्रावकः सप. रिवारः स्वश्नेयोर्थ ॥ ॥ [18] संवत् १४५१ वर्षे माह सुदि ५ बुधे नवखद गाने सा० नपाए स्वपुण्याचे श्री जिनवर्सन सूरि पट्टे धी जिनचं सूरीए नर्नि र श्री (जनसागर मर्शिनः ॥

( २५२ )
ऋषभदेवजी का मंदिर।
पंचतीर्थयों पर।
[1080]
सं० १५१० पौष वदि १० घांघ गोत्रे सा० सारंग ना० सुहानिणि सु० सा कालू सा.
चाहड़ नामाच्या पुण्यार्थ श्री सुमतिनाथ विवं का०प्र० श्री मलधारि गई श्री विद्यासागर
सूरि पट्टे श्री गुणसुंदर सूरिनिः॥
[1091]
॥ संवत् १५१५ वर्षे माह वदि ए शुक्र श्री संडेर गछे ऊ काश्यप गोत्रे साषेता पु
पीमा जा षीमसिरि पु० चुडा नाण जरमी पु० पूजा नयमा वीढा रंगा साइतेन श्री नेमि-
नाथ बिंग कारितं प्रति० श्री ईश्वर सूरिजिः॥
-
--
-
.
[1992]
॥ सं० १५७५ वर्षे वैशाष सुदि पंचमी सोमे । ज० झा काउड़ गोत्रे । दो ऊदा जार्या
जमा दे पु० दो रूपा दो देपा अमर नाथा। रंगा देवा नार्या दाडिम दे पु। पहिराज
सादा रायमल युतन सुपुण्यार्थ श्री शांतिनाथ बिंचं कारितं श्री संडेर गडे श्री शांति
सूरिनिःप्रतिष्ठितं।
मूलनायकजी पर।
[ 1993 ]
ॐ॥ स्वस्ति सं० १४६ए वर्षे माघ ६ रवी श्रीमाल वंशे नावर गोत्रे ० ऊहड़
संताने श्री पुत्र मंत्रि करम अयोर्थ लघुज्रातृ उपदेपावेन ब्रातृव्य 10 जोजराज
० नयणसिंह जार्या माझ्द दे सहितेन श्री आदिनाथ बिंव कारितं प्रतिष्टितं श्री खरतर
गई श्री जिनचंड सूरिभिः देवकुलपाटके ।
.

( २५३ ) श्याम पाषाण की पाजुका पर । [1994] संवत् १४५१ वर्षे माघ वदि ५ दिने बुधे उकेश वंशे नवलखा गोत्रे साधु श्री रामदेवे भार्या मला दे तत्पुत्र साधु श्री सहणपालेन नायर्या नारिंग दे पुत्र रणमसादि सहितेन देवकुलपाटके पूर्वाचलगिरा श्री शत्रुञ्जयावतार मोरनाग कुटिका सहिता प्रति श्री खरतर गल्छे श्री जिनवर्धन सूरि पट्टे श्री जिनचंत सूरि तत्पट्टे श्री जिनसागर सूरिनिः। पट्ट पर। [ 1995 1 ॥ॐ ॥ संवत् १४७३ वर्षे ज्येष्ठ सुदि ४ गुरुवारे साप आंवा पुत्र सा वोराकेन स्वमातृ आंवा श्राविका स्वपुण्यार्थ ॥ श्री चतुर्विशति जिन पट्टकः कारितः श्री खरतर गळे प्रति: ष्टितं श्री जिनवर्द्धन सूरिनिः ॥ आचार्यों के मूर्तियों पर। [ 1006] संवत् १४६ए वर्षे माघ शुदि ६ दिने जकेश वंशे सा सोपा संताने सा० मुद्दटा पुत्रान सा नान्दाकेन पुत्र वीरमादि परिवारयुतेन श्री जिनराज सूरि मृतिः कारिता प्रतिष्टिता भी खरतर गछे श्री जिनवर्धन सूर निः । [1097 ] सं० १४६ए वर्षे सा रामदेव जार्यया मेला दे प्राविकया स्वद्रानुनदृष्टया श्री जिन- देव सूरि शिष्याणां श्री मेरुनंदनोगध्यायानां मृतिः काग्निा प्रतिष्टिता श्री जिनवर्द्धन सुरिनिः॥

( २५४ )
श्री पार्श्वनाथजी की बसी।
पंचतीर्थी पर।
[ 1998]
॥ सं० १२०१ वर्षे आषाढ सुदि १० रवी श्री देवानिदित गठे श्री शील सूरि संताने
आमण पुत्रेण कनुदेवेन भ्रातृ सुंजदेव श्रेयोर्थ आत्मश्रेयोर्थ च प्रतिमा का रिता ।
तपागच का उपासरा।
पंचतीर्थियों पर।
[1909]]
सं० १२७३ । गोसा चातृ जेजा चार्या हेमा ....श्रेयोर्थ प्रतिमा कारिता ॥
[2000]
सं० १४७४ वर्षे वैशाख सुदि ३ शनी उपकेश वंशे नोसतिकि (?) शालायां सा-
वाल ना माल्हण दे लापाकेन व्रातृ पुंजा नाप मेला दे .... पितृ श्रेण शांतिनाथ विव
कारितं प्र० श्री जयप्रन सूरिनिः ।
[2001]
ॐ सं० १४ए। वैशाप वदि ७ बुधे ......विवं कारितं श्री
[2002]
.
॥ ॐ सं० १५२० वर्षे ज्येष्ठ सु० ५ शुक्रे ज० गूगलिया गोत्रे सा० सूरा जा० सुहमा दे
पु० धणपास ना० सावल दे ....
हा निमित्तं श्री शीतलनाथ विवं कारितं प्रतिष्टितं
श्री संडेर गछे श्री यशोजन सूरि संताने प्रतिष्ठितं श्री शालिना सुरिनिः॥
धातु की मूर्ति पर।
[2003]
से० १७०२ यापाड़ सुदि १७ श्री पननाथ विवं का हरपा लोत .

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DELL US WIKERBISCUTEILE
DEVALVARHA ( MEWAR) INSCRIPTION
Dated, V. S. 1491 (A D. 1434 )
4000
१५

( ) पाषाण की मूर्तियों पर। [2004] सं० १४ए१ वर्षे माह सुदि ५ बुधे खरतर गवे नाग मुनिचंड शिष्य जव्यराज मणि पार्श्वनाथ विवं. [2005] सं० १३एए वर्षे माद सु० १३ श्री प्र कुंथुनाथ. खू नाण . शिलालेख [2006] (१)॥ ॥ श्रेयः श्रेणि विशुक्रसिद्धलहरी विस्तारहर्षप्रदः श्री मत्साधुमरालकेलिरणिनिः (२) प्रस्तूयमानक्रमः । पुण्यागण्यवरेण्यकीर्तिकमलव्यालोललीलाधरः सोयं मानतसत्सरो (३) वरसमः पार्श्वप्रक्षुः पातु के ॥ १ ॥ गंजीरध्व निसुंदरः क्षितिधरणिजिरासेवितः सारस्तोत्रप- (४) विननिर्जरसरिझद्धिप्णुसजीवनः । चंचज्ज्ञान वितानज्ञासुरमणिप्रस्तारमुक्तालय: सोयं (५) नीरधिव ... नाति नियतं श्री धर्मचिंतामणिः ॥ ५ ॥ रंगझांगतरंगनिर्मखयशः कपर प्रोद्धरा. (६) मोददोदसुवासितत्रिनुवनः कृत्तप्रमादोदयः । नास्वन्मेचककङामा तिजरः शेषादि. (७) राजांकितः श्री वामेय जिनेश्वरो विजयते श्री धर्मचिंतामणिः ॥३॥ टार्यसंपादन. कल्पवृक्षः (७) प्रत्यूहपांशुप्रशमे पयोदः । श्री धर्मचिंतामणिपार्श्वनायः समननंघन्य दटानु न । ४ ॥ संवत्

(२५६)
(ए) १४५१ वर्षे कार्तिक सुदि १ सोमे राणा श्री कुंशर्कण विजयराज्ये उपकेश झातीय
साद सहः
(१०) णा साह सारंगेन मांडवी उत्परे लागू कीधु । सेलदथि साजणि कीधु अंके टंका
चऊद १४ जको
(११) मांमवी लेस्य सु देस्यई। चिहु जणे बसी ए रीति कीधी । श्री धर्मचिंतामणि
पूजानिमित्ति । सा
(१२) रणमल मई मंगर से हाला साह साडा साह चांप बश्सी विडीति कीधी एह
बोस
११३) लोपवा को न लहई। टंका ५ देउलवाडानी मांडबी अपरि टंका ५ देउखवामाना
।
मापा जप
(१४) रि । टंका २ देउखवाडाना मण हंड वटा उपरि । टंका ५ देउखवाडाना पारी बटां
ऊपरी।
(१५) टंकान १ देउलवामाना पटसूत्रीय ऊपरी ॥ एवं कारई टंका २५ श्री धर्मचिंतामणि
पूजा
(१६) निमित्ति सा० सारंगि समस्त संघि लागु कीधन ॥ शुनं नक्तु ॥ मंगलाज्युद्रयं ।
श्रीः॥
(१७) ए ग्रासु जिको लोप तहेदि राणा श्री हमीर राणा श्री घेता राणा श्री सापा राग
मोकल
(१७) राणा श्रीकुंनकर्णनी आणत:श्रीसंघनी आण। श्रीजीराजला श्रीशत्रुजयतणा सम #
देवी मूर्ति पर।
[2007] *
॥ सं० १४७६ वर्षे मार्ग शु० २० दिने मोढ झातीय सा वनहत्य जार्या साजणि सुन
मं० मानाकेन थंबिका मूर्तिः कारिता प्रतिष्टिता श्री .... रिनिः॥
महात्मा श्रीलालजी नापावाल के यहां मूर्ति है।

( २५७) खंडहर उपासरा। शिलालेख [ 2008 ] सूर्य C परमात्मने नमः (२॥ ॐ ॥ प्रणम्य श्री सूर्यदेवाय सर्वसुखंकर प्रनो । सर्वलब्धिनिधानस्य तं (३) सत्यं प्रणमाम्यहं ॥ १॥ मेदपाटे गिरो देसे गिरजागिरस्थानयो तां नगरो उ. (४)त्तमा झेया देवको प्रमपट्टणौ ५ तत्र राझा श्रेयो ज्ञेयाः राघवा राज्य मा- (५)नयोः षट्दर्शनसदामान्यः श्वेतांवरा अनिश्रियो ३ श्रीमदचत ग- ( ६ ) छेस्था श्री उदयसागर सूरिणा । तस्य आज्ञा कारेण चारित्र रत्न (3) गुर प्रत्नौ ४ शिष्य लक्ष्मीरत्नस्य साधुमुझा सदा सुखी । राजधर्म र. (G) नेहादि जिनमंदिर करापितं ५ कोटिवर्ष चिरंजीवो बहुपुत्र. (ए) गजवाजिना अचसं मेरुकोंयं राज्यं पालति राघवः ६ जे (१०) अन्य राजा स्वचः लोपतो परदत्तयो नरकं ते नरा जाति ज. (११) स्य धर्मस्य अवृथा । सं० १ एज वर्षे माघ सुदि ५ तिथी गुर- (१५) श्री चतुराजी शिप्य कुशवरतन लक्ष्मीरतन उपासरो करा ( १३ ) यो श्री पुण्यार्थे । श्री राज श्री राघव देवजी वारके देख वाटा ( १४ ) नगरे श्रीसंघ समस्तां साध अर्थे पं शिवमोग्लन चेसा हेमरा- ( १५ ) ज कपालरो करायो वीजो को रहे जी गाय (१६) मान्यारो पार है जनी यांचया टाक्ष नदेवा पात्र नहीं

(२५)
दरवाजे की बतरी पर कः लेख ।
[2009]
श्री गणेश... रतन चेला हेम कारापितं ॥ साह अषा साह नाराण साह गकुरसी
साह हेमा साह हमीर साह खुना साह सिवा साह हर ... साह फवेख साह मेघा साह
जोपा साह विरधा कटाय चतुरा जीथा सगता समसथ श्रावका ... लषाणा श्री राघ.
वदेवजी बारको मंदिर कारा... लक्ष्मीरतन सं० १७०५ माघ सुदि १३ शुक्र प्रतिष्ठा करावो
लहमीरतन
FFFFFER
॥
कलकत्ता।
श्री थादिनाथजी का देरासर - कुमारसिंह दाल ।
पंचतीर्थयों पर ।
[ 2010
सं० १४६० वर्षे मागसिर बदि ११ शुक्र श्रीश्रीमाल झातीय संघ गोवल जार्या मान्दण
दे तयोः सुनः महमाश्याकेन श्री सुमतिनाथ स्वामी विवं कारापितं श्री जिनहंस गणि
श्रेयोर्थ प्रतिष्टितं श्री सूरिनिः घईज वास्तव्यः ।
[2011]
संवत् १५२७ वर्षे थापाढ मुदि १० बुध श्रीश्री (माल) वंशे ॥ संप कर्मा नार्या जास्
पुत्र सं० पीमा नार्या चमकू धाविकया पुत्री कर्माई पुण्यार्थ श्री थंचल गछे श्री जय केसरि
सरिपामुपदेशेन चंप्रन स्वामी विवं कारितं प्रतिष्टितं श्री संघेन ॥ श्री पत्तन नगरे ।

青

( २५७ )
दरवाजे की उतरी पर का लेख ।
[2009]
श्री गणेश... रतन चेला देम ... कारापितं ॥ साह अषा साह नाराण साह गकुरसी
साद हेमा साह हमीर साह सुना साह सिवा साद हर ... साह फवेक्ष साह मेघा साह
नोपा साह विरधा कटाय चतुरा जीथा सगता समसथ श्रावका ... लपाणा श्री राघ.
यदेवजी चारको मंदिर कारा... लक्ष्मीरतन सं० १७०५ माघ सुदि १३ शुक्र प्रतिष्ठा करावो
धनीरतन ..
॥
Type<
कलकत्ता।
श्री थादिनाथजी का देरासर - कुमारसिंह हाल ।
पंचतीर्थयों पर ।
[ 2010]
मं० १४६७ वर्ष मागसिर वदि ११ शुक्र श्री श्रीमाल हातीय संघ गोवल जार्या मादण
दे नया: मुत: मनमायाकन श्री मुमनिनाय स्वामी विवं कारापितं श्री जिनदंस गणि
अंपा प्रतिष्टितं श्री मुरिनिः नबज वास्तव्यः ।
2011]
संवन् १५२७ वर्षे थापाट मुदि १० बुध श्री श्री (मास) वंशे ॥ सं० कर्मा नायर्या जाम
पुत्र मं बीमा दाबा चमकृ श्राविकया पुत्री कर्माई पुण्यायं भी थंचल गई श्री जयकसरि
मुष्टिमुपदेन चंमत म्बामो विवं काग्निं प्रतिष्टिनं श्री संघेन ॥ श्री पत्तन नगरे ।
--

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( २५ए )
आबू-रोड।
श्री आदिनाथ जी का मंदिर-धर्मशाला ।
पंचतीर्थी पर।
[2012]
सं० १५०ए वै० व ११ शुके श्री कोरंट गडे श्री नन्नाचार्य संताने। उवएस वंशे ।
शंखवालेचा गोत्रे श्रेण लषमसी ना सांसल दे पु रामा ना० राम दे पुण् तेजा नाम्ना
स्वमातापित्रोः श्रेयसे श्री वासुपूज्य विंग का० प्र० श्री सांवदेव सूरिनिः ।
चौवीशी पर।
[2013]
॥ सं० १५२० वर्षे माघ सुदि १३ गुरौ श्री उदयसागरगुरूपदेशेन श्रीमाल ज्ञातीय श्रे०
मेघा ना माणिकदे सुत श्रेण नाईयाकेन ना वादहा सु० गहिगा राघव गश्या तथा
द्वि० ना नामल दे प्रमुख कुंटुवयुतेन श्री संजवनाथ चतुर्विंशति पट्ट कारिताः प्र० श्री
बृहत्तपा गढे ज्ञानसागर सूरिनिः ।
(75
आबू-तीर्थ ।
भी थादिनाथजी का मंजिर-देखवाड़ा।
पाषाणकी कायोत्सर्ग मूर्ति पर ।
[2014]
(१) संवत् १४०ए वर्षे वैशाप माले शुक पक्षे ५ पंचम्यां निधों.

" ( २६० ) (१) रुदिने श्री कोरंट गछे श्री नन्नाचार्य संताने महं करा (३) नार्या महं Qरदे पुत्र महं मदन नर पूर्णसिंह नाव पूर्णसि- (४) रि सुत महं उहा मं० धांधल मूल मं0 जसपाल गेदा रुदा प्रभृति स- (५) मस्त कुंटुवं श्रेयसे श्री युगांदि देव प्रसाद महं धांधुकेन श्री जिन- (६) युगलयं कारितं प्रतिष्ठितं श्री नन्न सूरि पट्टे श्री कक्क सूरिभिः । धातु की मूर्ति पर। [2015] सं० १५१ वर्षे वैशाष सुदि १० रवी संप रत्ना सं० पन्नाच्यां श्रीशातिनाथ विवं का पंचतीर्थी पर। [ 2018 ] सं० १३१ वर्षे माघ सुदि १३ बुधे प्राण व्य० लषमण ना रूजी पु० जीवाकेन पित्रो यात्मश्रेयो) श्री पार्श्वनाथ विंबं कारितं प्रति ब्रह्माणीय गछे जा श्री उदयाणंद सूरिनिः । चौवीशी पर। [2017] सं० १४७५ प्राग्वाट व्य० मूंगर जार्या उमदे पुत्र व्य माव्हाकेन जा० माव्हण दे पुत्र कीना जीनादि युतेन श्री सुपार्श्व चतुर्विंशतिका पट्टः कारिताः प्रतिष्ठितस्तपा गछे श्री सोमसुंदर सूरिभिः । श्री शांतिनाथजी का मंदिर-अचलगढ़ । पाषाण की मूर्तियों पर। [2018 ] ॐ सं० १३०२ वर्षे ज्येष्ठ सु० ए शुक्र . .

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(२६१)
[2010]
सारा धन्ना श्रावकेण श्री आदिनाथ विवं कारितं ।
[2020]]
पं० मांजू श्राविकया श्री सुमतिनाथ कारितं . . . . .
[2021]
श्री खरतर गळे श्री पार्श्वदेवहितीयनुमौ पार्श्वनाथ साप माला ना मांजू श्राविका
कारितः।
देवी की मूर्ति पर।
[20221
संघ १५१५ वर्षे आषाढ वदि र शुक्र श्री उकेश वंशे दरडा गोने साथ आसा ना० सोखु
पुत्रेण संप मंडलिकेन ना हीराई सु० साजण हि नाप रोहिणि प्र ब्रा सा पाव्हादि
परिवार संयुतेन श्री चतुर्मुख प्रासादे श्री अंधिका मूर्ति का श्री जिनचंड सूरिभिः ।
श्री पनदेव जी का मंदिर-अचलगढ़ ।
पाषाण की कायोत्सर्ग मूर्ति पर ।
[2023]]
सं० १३०२ वर्षे . . . . शमरचं सूरि जयदेव सूरिनिः ।
पंचतीर्थी पर।
[2024]
सं० १५२० वर्षे यातु०२प्रारबाट ज्ञातीय व्यण् सा .
বিবি मुन
सोमा दे ना वाकमादि कुटुंवयुतेन धी मुनिनुबननाथ विवं कारितं प्रश्रो नपागष्ठनायक
श्री लक्ष्मोसायर सूरितिः।
.
नार

(२६२ ) धातु की मूर्तियों पर। [2025] सं० १५२५ फा सु०७ शनि रोहिण्यां श्री अर्बुद गिगै देवड़ा श्री रावधर सायर मंगर- . सिंह विजय राज्ये साता जीमचैत्ये गूर्जर श्रीमाल राजमान्य मं० मंडन नार्या जोखी पुत्र मंण् शूज पु० मं० गदाच्यां नार्या हासी पद्माई मं० गदा ना श्रासू पुत्र श्रीरंग वाघादि कुटुंवयुताच्या १०७ मन प्रमाण सपरिकर प्रथम जिन विवं कारितं तपागठनायक श्री सोम. सुंदर सूरि पट्टे श्री मुनिसुंदर सूरि श्री जयचंड सूरि पट्टे श्री रत्नशेखर सूरि पट्ट प्रनाकर श्री लक्ष्मीसागर सूरिभिः प्रतिष्ठितं श्री सुधानंदन सूरि श्री सोमजय सूरि महोपाध्याय श्री जिनसामगणि प्रमुख । विज्ञानं सूत्रधार देवाकस्य श्री रस्तु । कृतं मेवाड़ ज्ञातीय सूत्र धार मिहीपा ना नागल सुन सूत्रधार देवा नार्या करमी सुत सू० हला गदा हांपा नाला हाना कसाः सहित व्यापाद्यताः। [2026] संवत् २५श्ए वर्षे वैशाख वदि ४ शुके मूंगरपुर नगरे राउल श्री सोमदास वि राण तत्प्रधान प्रनावक पुरंदर सा साना प्रमुख श्री संघोपक्रमेन श्री आदिनाथ सिंबं प्र० तपागबनायक श्री सोमसुंदर सूरि पद्दे मुनिसुंदर सूरि श्री जयचंग सूरि पट्टे श्री रत्नशेखर सूरि तत्पद्धे श्री लक्ष्मीसागर सूरि श्री सोमजय सूरि महोपाध्याय जिनहंसगणि प्रमुख सुदरादि शिष्य परिवार परिवृतः [2027] संवत् १५६६ वर्षे फाल्गुन सुदि १० सोमे श्री अचलगढ़ महादूर्गे महाराजाधिराज श्री जगमाल विजयराज्ये सं० सालिग सुत सं० सहसा कारित श्री चतुर्मुखविहारे जन- प्रासादे श्री सुपार्श्व विंबं श्री संघेन कारित प्रण तपागल श्री सोमसुंदर सूरि संताने श्री कमल कलस सूरि शिष्य श्री जयकल्याण सूरिनिः न श्री चरणसुंदर सूरि प्रमुख परि वार परिवृतैः श्रीरस्तु श्री संघस्य सूत्रधार हरदास ॥

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(Front View)

( २६३ ) [2028] संवत् १५६६ वर्षे फागुन सुदि १० सोमे श्री अचलगढ़ महादूर्गे महाराजाधिराज श्रो जगसाल विजयराज्ये संग सालिग सुत संग सहसा कारित श्री चतुर्मुख विहारे नन- प्रासादे श्री आदिनाथ विवं श्री संघेन कारित प्र तपागल श्री सोमसुंदर सुरि संताने श्री कमल कलस सूरि शिष्य श्री जयकल्याण सूरिनिः न श्री चरणसुंदर सूरि प्रमुख परिवार परिवृतैः श्री रस्तु श्री संघस्य । सूत्रधार हरदास ॥ श्री पावापुरी तीर्थ । जल मंदिर। पंचतीर्थी पर । [2028] संवत् १५६० ज्येष्ठ सुदि र रेनुमा(?) पु० चोराकेनात्मश्रेयोर्थ श्री महावीर विध कारितं प्रतिष्ठितं च श्री अजयदेव सूरिनिः मूलवेदी के दाहिने तर्फ का सेरु । [2030] (१) संप एएए मिः आसिन सुदि । (२) श्री मंदिरजी के बीच के फेरी में वः नी (३) चे के फेरी में पत्थर वैगया नानकचं. (१) द जीवनदास जैन श्वेतान्तरी तर (५) फ से साः कलकत्ता शुनं

(२६५)
सोने के चरण पर।
[2031]
सं० १९२३ शूगड़ धनपतसिंह कागपितं सर्व सूरि प्रतिष्ठित (श्री)संघस्य श्रेयसे जवतु ।
दादाजी के चरण पर।
[2032]
१९५७ साल मिति घन वदि १५ सोमवार निहालचंद इंजचंद फुगड़ तस्य परिवार
प्रतिष्ठा कारापितं मुर्शिदावाद ॥ श्री जिन कु(शाल सरि महाराज का चरन ॥ शुनं जवतु ।
समोसरन ।
मंदिर का शिलालेख।
[2033]
(१) श्री शुज संवत् १९५३ मिती कातिक वदी
(२) त्रयोदशी मंगलवार श्री महावीर स्वामी जी के समोस
(३) रनजी में मंदिर कराया श्री संघ ने श्वेताम्बरी थामनाये
(४) वः मनिजर गोविन्द चंद सचेती विहारवाले के
(४) हस्ते वना । इदं प्रतिष्ठितं गंगारीखी जति
महताब बिबि का मंदिर ।
शिलालेख।
120341
(१) संवत् १९३२ का मिति माघ शुक्ल १० तिथी
(१) चंजवारे श्री मन्महावीर स्वामी मंदिर श्री वंगदे.

(१६५) (३) शे । मकसुदावादाजीमगंज वासिनी उधेडिया (५) गोत्रे श्री नेमिचं तस्य नार्या महताब कुमारि- (५) पा कारापितं च श्री हर्षचंदजी तत् पुत्र वुधसीद (६) विसनचंडेण प्रतिष्ठा कारापिता । श्री वृहलोपक ७) गोर्जराधिपति श्री अखयराज सूरि तत्पट्टाखंकृ (b ) त् श्री यजयराज सुरिणा प्रतिष्ठितं श्री शुनं नूयात् । (ए) ॥ श्लोकः ॥ नवारएएगोपालक त्रैशलेयं । नवांबोधि- (१०) संस्तारणे यानतुल्यं ॥ मुक्तिस्त्रिनायं मयायं जिनें (११) प्रसंस्तौमि श्री वर्धमानं वितुं च ॥१॥ गांव मंदिर। दक्षिण तर्फ के दिवार पर का लेख । [2035] ११) श्री गांव मंदिर जि मे दद (२) ण पश्चिम उत्तर दासान (३) तथा चारो कोने मे पत्थल (४) जैन श्वेताम्बर भंडार के तर (५) फ से मेनेनर गोविंदचंद सुचं (६) ति विद्दारवालो ने वैवाया नुन (3) संरए४ आसिन वदि ५ सत्ता मनप के दाहिने तर्फ के थाने का लेख । [2036] (१) श्रीमदविर जोनें प्रणम्य श्री पावापुपी नगरी मधे या श्री जिन ५)बीच स्थानापन करोती खेतांबर यामनाय धारक झा नपचंद "

(२६६)
(३) रंगीलदास देवचंद सा पाटन वाला हाल मुकाम येवला तथा मुंबई
(४) वालाये श्रागो खनार तथा सजा मंझपमा जमतो सहीत पारस कराव्यो
(५) संवत् १९६० लंण् सेवक उत्तमचंद वालचंद मंत्री नगरवाला।
सना मंडप के बांये तर्फ के श्राले का लेख।
[2037]
(१) श्रीमद विर जिनें प्रणम्य श्री पावापुरी नगरी मधे था श्री जि
(२) न वींब स्थापन्नं शा० रूपचंद रंगीलदास सा पाटन वा
(३) ला हाल मुकाम येवला तथा मुंबई स्वेतांबर आमना धारक वा
(४) ला से कराव्या ले संवत् १ए६०
( ५ ) मीत्री नाईचंद जगजीवन सलाट पालीताणा वाला।
हैदराबाद-दक्षिण ।
श्री पार्श्वनाथ जी का मंदिर-वेगम बजार ।
मूलनायक जी पर।
[2038]
सं० १५५७ वर्षे ॥ महा सुदि ५ सोमे श्री पार्श्वजिन बिंब कारितं . . . . .
पाषाण की मूर्ति पर।
[2039]
संवत् १५४७ वैशाख सुदि ३ श्री संघे जहारक जी श्री जिन तपापति वाक जी प्रति
* यहां के लेख स्वर्गीय पं० घालचंद्रजी यति से प्राप्त हुवे थे।

।
.
(१६७)
श्री राजा जशसिंघ राजे . . .
[2040]
संवत् १५४७ वर्षे वैशाख सुदि १ श्री चंडप्रनु विवं कारापितं ।
धातु की प्रतिमाओं पर।
[2041]
संवत् १६६७ फागुण सुदि १३ साह मनोरथ सदापगामे प्रा.
[2042]
संवत् ११०० वर्षे मार्ग सुदि । शुक्रे राजनगर वास्तव्य ओसवंस झा सा० वर्कमान
तरपुत्र साप रायसिंघ केन स्वयोर्थ श्री पद्मावती विवं कारित प्रतिष्टितं तपा पं० श्री किर्ति
रत्नगणिचिः॥
[20431
सं० ११०७ व फासु सोमे श्रीमाती ज्ञासा कुंवरजा जा रतनबाई नाम्न्या
उ० श्री विवेकहर्पजी श्री शांतिनाथ विंग का प्र० श्री तपा० न० श्री विजयदेव सूरिनिः ॥
पंचतीधियों पर।
[204८]
तं० १५१५ माघ बदि . . . सोमे नागर झातीय श्रेः कर्मसी ना फट्ट नुन जोगी
नाम्ना ना नटि सुत समयादि कुटुंदयुतेन श्री धर्मनाथ दियं का प्रवृतनपा श्री गन
सिंह सूरिति ॥
[2:45
सं० १५३० वर्षे वैशाख वदि १५ इथे वडाडागांचे छोर वटा मटा माटी
नुत ला० धर्मा ना मद पुत्र नापा वादा हीनदि इन्दन श्रीनिमात्र
वित्र का प्र० श्री संडेर गली पहाड नर्सि श्री :
,
५

( २६७ ) [2046] संवत् १५६५ वर्षे माघ सुदि १५ दिने ऊकेश वंश घोरवाड गोत्रे सा वाचा जाण वादिण दे पुत्र सा रंगाकेन जा रत्ना दे पुत्र सा माहा षेता वेता प्रमुख परिवारयुतेन श्री सुमतिनाथ विवं का प्रण श्री खरतरगळे श्री जिनहंस सूरिनिः ॥ श्री पार्श्वनाथजी का मंदिर-कारबान साहुकारी। धातु की प्रतिमाओं पर । [2047] संवत् १३२२ वर्षे वैशाख सुदि ११ गुरौ श्री श्रीमाल झातीय जाण जयतेन निजमा- तामह उस सोढ जा0 30 श्रियादेवी श्रेयसे श्री शांतिनाथ विवं कारित प्रश्रो पृथीचंड सूरि शिप्यः श्री जयचंग सूरिनिः ।। [2048] संवत् १४५७ वर्षे फा मुदि १ नौमे प्राग्वाट झातीय श्रेण धरणि सुत सिंघा श्रेयोथं तद् बात श्रे० कान्हदेन श्री पार्श्वनाथ विवं कारितं प्रतिष्ठितं श्री तपागलीयं नहारक श्री देव- मुंदर सुरिनिः॥ [2040] संवत् १४७१ वर्षे वैशाख मुदि ३ शनौ प्राग्वाट झातीय श्रेण सामत ना० सामस नु धर्माकन नातु हीरा सिवा सहदे सहितन पितृ मातृ श्रेयसे श्री अनिनदंन विवं का० व मडाइड गठे श्री उदयप्रत सूरिनिः॥ [20501 सं. १६७७ वा फासु सोमे योग झा० सा० शिव सा ना० सुजारादि पुत्र सा० समान दार रतनबाई प्रमुख कुटुंबयुतेन श्री मुविधिनाथ विवं कारितं प्र० तपा गछे ववेकदार्पगतितिः ahri

(२६ए)
श्री पार्श्वनाथजी का मंदिर-रेसोडेन्सी बजार ।
पंचतीधियों पर।
[2051]
संवत् १४ए४ मा० सु० ११ ओस वंशे काहणतीह साइणि सुन कोवापाकेन श्री अंचलगः
श्री जयकोर्ति सूरिणामुण् श्री नमिनाय विवं कारितं प्रतिष्ठितं श्री सूरिभिः ॥ श्रीः ॥
[20521
सं० १५३४ वर्षे आपाढ सुदि १ गुरौ उकेश ज्ञाती श्रेष्ठी गोत्रे म कमज्ञा मा सिंगा
ना० खखमा दे पुल-साजण-युत्तेन स्वश्रेयसे धो पदप्रन विवं कारितं श्री ककदानार्य संगाने
प्रतिष्टितं श्री देवगुप्त सूरिनिः ॥
[20581
संवत् १५३७ वर्षे महावदि १३ शुक्रबार मृगतः गाने मा० नाय पुत्र विग नायी
मुडादे पुत्र सा० धेना नार्या हिमा दे पुण्याई घोमिनार विकाग्निं श्री मयोप
गठे प्रतिष्टितं नहारक श्री मानदेव सुतिः ॥
[::::
सं० १५४१ साप सुदि १९ प्राडाटा : राम .
जा लखी सुत एरदास सूरदासादि हमदमस पायदान पनि
[तं तरा गोद सदनासागर मुक्षित: दारं.
पाना :
--
स
* पता

(५०)
[2056]
सं० १४०र 40 मार्ग सुई ५ वा चतुर नाम्ना श्री संखेश्वरपार्श्व विवं का प्रा तपा
श्री विजयदर्ष सूरिनिः॥
[2057]
सं० १६६७ वर्षे फागुण सुदि सोमे श्रीमाल झातीय सा सूरज कुटुंवयुतेन श्री शांनिए
बि० कारितं प्रतिष्टितं श्री तपा गछे जहारक श्री विजयदेव सूरिनिः॥
[2058]
सं० १६ए व० फा सु०५ गुरौ दौलत्तीवाद न० का सा श्रीमंत नाप षमावाई नाम
श्री शांतिनाथ बिंबं का० प्र० तपा गवे,
[2059]
सं० १६ए फा० सु० ५ वृ० उकेश वा० धीरा नास्नी श्री शांति बिंग का प्र० श्री
तपा गछे विजयदेव सूरितिः॥
[2060]
सं० १७०१ (१) व मा० सु द० ५ वा वृ० प्रा० वा कानृ नाम्ना श्री पार्थ.
नाथ विंग का प्र तपा श्री विजयदेव सूरि निः ॥
.
दादाजी के चरणों पर ।
[2061]
॥ संवत् १ए६१ का वर्षे मिति माघ सुदि ५ गुरूवासरे श्री जं युगं प्रधान जगद्
चूडामणि दादा साहिव १००० श्री जिनंदत्त सूरि गुरूराज चरणपाएका श्री चारकवाण
का श्रीसंघेन कारापितं । पं० चारित्रसुखेन प्रतिष्ठापितम् श्रीसंघस्य कल्याण खेम कुशलम
समुपस्थिता ॥ हैदरावाद ॥

(११)
[2062]
॥ सं० १९६१ वर्षे मि । माघ सु।५ दिने । जं । युग प्र० १०० दादा साहेव श्री जिन
कुशल सूरि पाऊका । च्यारकवाण ।
[2063]
श्री जिनकुशल सूरि चरणकमल पाउकेन्यो नमः ॥ शुन संवत् १ए६४ वैशाख धवल
१० गुरुवासरे प्रतिष्ठितम् ।।
.
కనన ననన కనక్క
मद्रास । *
चं प्रजस्वामी का मंदिर -शूखा वजार ।
मूख मंदिर का लेख।
12064]
(१) ॥ संवत् १९५२ रा शाके १७१७ मासोत्तममाले ज्येष्ट मासे शुष्क पक्षे निधि दशन्या
रविवारे झूलाग्रामस्थः मालू गोत्रे साप । काबू.
(२) राम रतनचंद खरतरगणोपासकेन कारापित जिन नवन चंपट विवं स्थापितं खर.
तर गछे क्षेमकीर्ति शाखायां विद्यमामचं गणि
(३) तठिष्य पं प्र । उदयचंजगणिः तच्चरणांतेवाली उपाध्याय नमिचंड प्रनिनि
जिनलवनं स्थापितं विवंद पं० । श्यामसार साकम्
मूसनायक. जी पर।
[2335
॥ संवत् १७६० वैशाप सुटि ६ .
काग्निं श्री नंदन.
-
परा के लेल रूमोद पारी पनि

(२७२ ) मूर्तियों पर। [2068] ।सं। १ए२१ माद सुदि ७ गुरु । श्री चंजिन विवं कारितं । श्री वृहत्खरतरगवीय जा श्री जिनहंस सूरिनिः प्रति . . [2087]] ॥ संरए१ माह ॥ सु।७। गु । श्री सुमतिजिन विवं कारितं । श्री बृहत्खरतरगलीय जए श्री जिनहंस सूरि निः प्रति . धातु की पंचतीर्थी पर । [2068] ॥ सं० १५०५ वर्षे पोस सुदि १५ श्राविणवट गोत्र पा० स्तदा ना मूदल दे पु । सहसा जाण् सुइड़ दे पितृमातृ पुरा श्री चंझपनो बिवं कारितं प्रा श्री धर्मघोष गजे पूर्ण सूरि पट्टे श्री महेंज सूरिनिः॥ श्री॥ । ताम्रपट्ट पर। [2069 ] ॥ संवत् १एso रा शाके १७३५ रा ज्येष्ट मासे कृष्ण पळे तिथो त्रयोदश्यायां चंद्र- वासरे ॥ जहारक श्री जिनफत्तेंड सूरि प्रतिष्ठितं श्री मडास शूलामध्ये ॥ चंऽप्रचस्वामी का मंदिर - साहूकार पेठ। शिलालेख.। . [2070] (२. ) ॥ नमः श्री वीतरागायः॥ (३.)-1 श्लोकः ॥ श्रासीत्सू रिपदप्रतिष्ठितरणेः श्री हेमसूरिप्रजुस्तत्वी प्रतिवादिवृन्द- (२७३) ( ४ ) जयदो विद्याकलानां निधिः ॥ श्री सूरीश्वरमूवन्दितपदः श्री सिझसूरिगुरुर्ध- ( ५ ) मांजोदयत्तारकत्येतिनिपुणो ववर्ति सर्वोपरि ॥१॥ प्रासादस्य कृतास्य तेन ( ६ ) विपुषा माघस्थ शुक्ले बुधौ योदश्यां श्रुतिसप्तनन्दकुमिते श्री विक्रमाव्देऽधुना। (७) सौजन्यातमृतसागरण जगतां धम्मोपकाराय वै श्रीमौनधुरंधरेण कृतिना नूनं (G) प्रतिष्टानघाः ॥२॥श्री विक्रम संवत् १९७२ माघ शुक्ल १३ बुधवारके दि- (ए) न श्री मदरास पत्तन शाहूकार पेठमें श्री चन्द्रप्रनस्वामी विम्ब प्रतिष्ठा श्री. (१०) मौनाचार्य वृहत्खरतरगलोय जं। यु । नहार्क श्री जिनसिक सूरिजी। (११) महाराज के करकमलों से समस्त संघ सहित जैरुंवकसजी सुखवालजी। (१२) समदमिया ने बड़े महोत्सव से कराई । हरषचंद रूपचंदजी ने विम्ब स्थाप- (१३) न किया वादरमसजी ने कलश चढ़ाया और हंसराजजी सागरमलजी (१४) ने ध्वजा आरोपण करी यह मंगल कार्य श्री संघको सर्वदा श्रेयकारी हो ॥ (१५) ॥ हस्ताक्षराणि यति किशोरचन्जो तविष्य मनसाचन्मस्य । श्री दादाजी के बंगले में। [2071] ॐ नमः दत्तसूरिजी ॐ नमः कुशलरिजी मिति माह सुदि ५ संवत् १९३६ का। जैन मंदिर-साहुकार पेठ । पंचतीर्थयों पर। [2072] संवत् १४ए वर्षे माघ सुदि ५ बु( श्रीमाल झातीय नान्दी गोत्रे मा० प्रन्हा पुत्र शा प्रेताक्षेन पुत्र हरेराज सहित तत् पिता पुण्यार्य श्री यजिननाय विवं काग्निं प्रनि. टितं श्री खरतर गढे श्री जिनसागर सूनिधिः ।।

(२) [2073] संवत् १५१७ वर्षे पौष वदि ५ गुरू श्री श्रीमाल छातीय मदं वित्रा ना जासी सुत सोना नाम हीरू यात्मश्रेयोऽर्थ जीवितस्वामी श्री श्री श्री आदिनाथ विवं कारितं प्रति- प्टितं पिप्पल गछे त्रितविया श्री धर्मसागर सूरि निः। जीबुटग्रामे । [2074] संवत् १५१ए वर्षे माघ इ.क्ल १३ पालण पुर जकेश झातीच साप पर्वत ना० जीविषी पुत्र शा0 गेहाकेन नावारू पुत्र वस्त्रा जावड प्रमुख कुटुंबयुतेन स्वश्रेयसे पार्श्वविवं कारित प्रतिष्टितं तपा श्री रत्नशेखर सूरि पट्टे श्री लक्ष्मीसागर सूरित्तिः ।। चौवीसी पर । -- [2075] संवत् ११३ वर्षे माघ दि ... वाश्मा ज्ञातीय श्रेण खीमा नाम लहिकू सुन भाथा ना हीसु पुत्र हाण गोपा जीरादि कुटुंचयुतेन श्रेयोर्थ श्री श्रेयांसनाथ चतुर्विशति पहकारितः प्रतिष्टितं तपागाधिराज ना थी सोमसुंदर सूरितिः ॥ श्रीशुनं जवतु ॥ [2076] संवत् १५१ वर्षे ज्येष्ठ शुक्ल प्राग्वाट ज्ञातीय सं अर्जुन ना० टवकु सुत सं0 वस्ता ना रामी सुत संग चान्दा ना जीविणि सुत लींवा आका प्रमुख कुटुंबयुतेन १२ चतुर्विंशति- पट्टान कारयितश्च श्रेयसे श्री पद्मप्रनः चतुविशतिपट्टः कारितः प्रतिष्ठितः। श्री तपा पदे श्री सोमसुंदर सूरि संताने श्री रत्नशेखर सूरि तत् पट्टे श्री लक्ष्मीसागर सूरिभिः ॥ SEE TIES ( ११५ ) रायपुर-सी० पी० । जैन मंदिर-सदर बजार । शिलालेख । [2077] (१) ॥ श्री मदिष्ठदेवेन्यो नमः ॥ श्रीमच्छ्रीवीरविक्रमादित्य राज्यात् नन्नवर्ण- (२)निधिसन्द (रएएस) शाके इंजिसिद्धि नत्रेश प्रमिते मासोत्तममासे हि (३) तीच आसाइ माले शुक्लपके अष्टम्यां तिथौ नार्गववासरे स्वाति नद- (४) त्रे साध्ययोगे बुधमार्गे एवं पंचांग शुद्धावत्र समये कर्कार्क गते रवी शेपे. (५) पूजनिरिक्षित वेलायां श्री महाजपुरवरे माबु गोत्रे साइ तनसुखदा (६) स(दास) तत्पुत्र साह आसकरणेनासी श्री मञ्चअप्रन जिन्प्रनो प्रासा (७) द कारितं स्वश्रेयोर्थ श्री वृहत्खरतर नहारक गठाधिपं नहारक श्री (७) जिनचंद सूरीश्वर प्रतिष्टितश्चेति पं० सिवलाल मुनिरुपदेशात् । त्तानपत्र पर । [2076] (१) श्री जिनायनमः । श्रीमान् वीर सं २१ विक्र (२) म संग । रएर शाके १७१६ प्रवर्तमाने मालोनम मा. (३) ले छापाड शुद्धपद तृतिय नियों गुरुवार पु. (४) प्यनक्षत्रे मिथुना गने रची शेप शुन्न निक्ष- (५) त वेवायां श्री रामज) बरे नाबू गोत्रे माह धन- ६) रूपजी कसुत्र लादजी पन्या नायी r- -

(६)
(७) हीरादेवी तया श्री अनिनंदनजिनप्रजो प्रासाद
(७) कारित स्वश्रेयं श्रीवृहत् खरतर गछे श्री जिनचंद सूरीश्वर
(ए) जी आदेशात् श्री शिवलाल मुनि प्रतिष्ठितम् ॥ श्री शुजम् ॥
55555555554554654545454545454545454545
उथमण-सिरोही।
जैन मंदिर।
पब्बासण के नीचे का लेख ।
[2079]
॥ सं० १२५३ वर्षे माहा सुदि १० बुधदिने नाणकीय गठे उथमण चैत्ये धणेसर ना०
धारमती पुण् देवधर जेसड बाल्दा पाल्हादि कुटुंब संयुते मातृ निमित्तं जलवटु करापितं ॥
465564 FiiLLLL 7457557655
7
रोहेड़ा-सिरोही।
जैन मंदिर।
पंचतीर्थयों पर।
[2080]
सं० १५५३ वर्षे फागण सुदि कोरंट गठे . . . जोखा
नोखा.धर्मनाथ विंवं कारित
प्रतिष्ठितं कक्क सूरिनिः॥
[2081 1
सं० १३४१ वर्षे नापकिय गछे
चतुर्विशतिपट कारित प्रतिष्टितं जहारक
महेन्द्र सूरिनिः॥

(१७)
[2082]
संग १४ए१ फागण सुदि १५ गुरौ कोरंटवाल गडे उपकेश झातीय संखवालेचा गोत्रे
नपसी पुरा जाणाकेन श्रेयले श्री धर्मनाथ विंब कारितं प्रतिष्ठितं सांवदेव सूरिनिः ॥
[2083]
संप १४५३ वर्षे माघ सुदि १३ उपकेश ज्ञातीय म मांडण ना सिरियांदे पु काजा.
कन नार्या नसो सहितेन आत्मश्रेयसे श्री नमिनाश बिंवं कारितं प्रतिष्ठितं जट्टारक श्री
धनप्रन सूरिनिः ॥
[20841
संवत् १५२३ वर्षे फागुण वदि ११ नागें गठे उपकेश झातीय कोगरी ... ना लक्ष्मी
'पुरा मेघा जा हीरु पु० नेरा मुंगर तोल्हा युनेन श्री आत्मपुण्यार्थे श्री वासुपूजन घि
कारितं प्रतिष्टितं विनयप्रन सूरिनिः ।।
[2085]
संप १५१७ वर्षे वैशाप वदि ७ शुक्रे श्री श्रीमान श्रेष्टी नामा नाण सादी पुछ गोददा
ना आसि पुरा पहिराज कुटुंबयुतेन स्वश्रेयसे श्री पार्श्वनाथ बिं का रितं पूर्णिमापदो पुण्य.
रत्न सूरीणां प्रतिष्ठितं बारादी ग्रामे ॥
[2086]
सं० २५१७ वर्षे माघ वदि र प्रान्बाट ज्ञातोय व्यव० कोदाकन नार्या कामात दे ५०
नाव्हा हीदा युतेन धर्मनाप वियं का रिनं कटोप्सीबाप्त गई पूर्णिमापदो गुणासागर स्मृरिनिः ।।
[2057]
सं० १५७६ यासाट नुदि यो उपनाहानीय नाग गोत्र माह होगा ना नाम:
जेसा सदिनेन माइए नामाकद पुट रंगा वंदन या
मांडण झाल्दा
पुण
संजनाथ विदं वारि प्रनि नावाद हार भी
दे
---
.

( १७०)
भारज-सिरोही।
जैन मंदिर ।
पंचतीर्थी पर।
[2088]
सं १५२४ वर्षे वैशाख सुदि १ शनौ श्रीमाल ज्ञातीय पितृ धरकण ना० धरणा सुत
कालु ना कुंथि करमी सुत सहिता युतेन श्री नमिनाथ विं कारितं बृह्मणिया गवे प्रति
ष्ठितं श्री विमल सूरिनिः बटप वास्तव्य ॥
---
गुडा-सिरोही।
जैन मंदिर ।
पंचतीर्थी पर।
[2089]
सं० १५३३ वर्षे वैशाख सुदि ३ गुरौ नसवाल वृहद सजने गकुर गोत्रे साह पोमादे
पु० जावड़ नावड़ गीदा सा माणाकेन ना० मणिक दे पुण् मेघराज हांसावि कुटुंवयुतेन
स्वश्रेयोर्थं श्री सुमतिनाथ चतुर्विंशति पट्ट कारापितं । नाणावाल गढे श्री धनेश्वर सूरिनिः
प्रतिष्टितं तपा श्री सोमसुंदर सूरिभिः सं
.
.
.
तिवरी-सिरोही।
जैन मंदिर।
काउसग्ग प्रतिमा पर ।
[2090]
सं० १३३४ वर्षे वैशाख सुदि ५ गुरौ प्राण ज्ञाण श्रे० सवा नौदा ना रुपल दे पुणे
श्री नयगल कारितं प्रतिष्ठितं चित्रगडीय श्री देवना सूरि संतानीय राण पंछ सोमचंझेण ॥
.
.

( २३ए )
पाडीव-सिरोही।
जैन मंदिर।
पंचतीर्थी पर ।
[2091]
सं० १५३६ वर्षे वैशाख सुदि ३ गुरौ श्रीमाली ज्ञातीय राउत ना वाला पु० देवा ना०
सालयता सुत तेजा श्री विमलनाथ विवं कारितं प्रतिष्ठितं आगम गछे अमरत्न सूरि गुरू-
पदेशेन करापितं प्राविधिना पत्तन वास्तव्य ।।
मडिया-सिरोही।
जैन मंदिर ।
पंचतीर्थी पर ।
[2002]
सं० १४७० वर्षे माघ सुदि २ गुरौ वाफणा गोत्रे साद बुंना सुन देपाल जा० मेला दे
पुण् जोगराज ना जसमादे श्री पार्श्वनाथ विवं कारितं प्रतिष्टितं नपकेश गते श्री ककुदा-
चार्यानिधान प्रा देवगुप्त सूरिनि ॥
निवज-सिरोही।
जैन मंदिर ।
पंचनीची पर।
[2303
सं० १५०९ व वैशाख मुदि गरी श्री नारदडा न: श्री काहिकाचा मनात .
केश झातीय खांटेड गोने साद खान जा दु. सामंत मा ट्रांगा दरार

( २ )
भारज-सिरोही।
जैन मंदिर।
पंचतीर्थी पर।
[2088]
सं० १५२४ वर्षे वैशाख सुदि १ शनौ श्रीमाल ज्ञातीय पितृ धरकण ना धरणा सुत
कालु ना कुंथि करमी सुत सहिता युतेन श्री नमिनाथ विवं कारितं बृह्मणिया गळे प्रति
ष्ठतं श्री (धमल सूरिनिः वटपर वास्तव्य ॥
-*-
गुडा-सिरोही।
जैन मंदिर।
पंचतीर्थी पर।
[2089]
सं १५३५ वर्ष वैशाख सुदि ३ गुरौ जसवाल बृहद सजने गकुर गोत्रे साद पोमादे
पु० जावड़ नावड़ गीदा साय माणाकेन ना मणिक दे पु० मेघराज हांसादि कुटुंवयुतेन
स्वश्रेयोर्थ श्री सुमतिनाथ चतुर्विंशति पट्ट कारापितं । नाणावाल गडे श्री धनेश्वर सूरिनिः
प्रतिष्टितं तपा श्री सोमसुंदर सूरिभिः सं
.
.
तिवरी-सिरोही।
जैन मंदिर ।
काजसग्ग प्रतिमा पर ।
[2090]
सं० १३३४ वर्षे वैशाख सुदि ५ गुरौ प्राण झा श्रेजवा नौदा न रुपल दे पु
श्री नयगल कारितं प्रतिष्ठितं चित्रगलीय श्री देवजा सूरि संतानीय राग पं० सोमचंझेण ॥
.
.

(२७)
पाडीव-सिरोही।
जैन मंदिर।
पंचतीर्थी पर।
[2091]
सं० १५३६ वर्षे वैशाख सुदि ३ गुरौ श्रीमाली ज्ञातीय राउल ना वाला पु० देवा ना०
सालयता सुत तेजा श्री विमलनाथ विवं कारितं प्रतिष्ठितं आगम गळे अमरत्न सूरि गुरू-
पदेशेन करापितं प्रः विधिना पत्तन वास्तव्य ॥
मडिया-सिरोही।
जैन मंदिर ।
पंचतीर्थी पर ।
[2002]
सं० १४७० वर्षे माघ सुदि २ गुरौ वाफणा गोत्रे साद ढुंना सुत देपाल ना मला हे
पु० जोगराज ना जसमादे श्री पार्थनाय किंवं कारितं प्रतिष्टितं नपकेा गर्ने श्री काटा
चार्यानिधान प्रा देवगुप्त सूरि नि ॥
निवज-सिरोही।
जैन मंदिर ।
पंवतीघी पर।
[27:
तो २५ वर्षे शादिवर्ग भी जारदेड़ा गरे श्रीशियाना मन
केश ज्ञातीय खांटेड गोने तादमा ८ माद : हांला पार

(२०)
उदा नोपाल ना० नतु दे पुनाव्हा सीवा उदा ना० उमा दे पु० रतना समरथ कुटुंबेन
सह स्वश्रेयसे श्री शांतिनाथ विंबं कारितं श्री विजयसिंह सूरि पट्टे प्रतिष्ठित वीर सूरिजः॥
छुड़वाल-सिरोही।
जैन मंदिर ।
पाषाण की प्रतिमा पर ।
[2004]
सं० १६४४ वर्षे फागण वदि १३ बुधे हालीवामा वास्तव्य श्री संघेन कारितं श्री शांति.
नाथ प्रिंवं प्रतिष्टितं तपागठाधिराज श्री हीरविजय सूरिनिः ।
जधा
क)
डीसा ।
श्री श्रादीश्वरजी का मंदिर ।
पंचतीर्थयों पर।
[2095]
सं० १५२४ वर्षे का० व २ शुक्र श्री नावडार गछे श्रीमाल ज्ञातीय मधिरणल ना
ब्रह्मादेवि पु० मना ना० माल्हण दे पुण् सिंघा मेघा मेहा साणा जुग सहितेन जोवि.
तस्वामी श्री पद्मप्रनु प्रमुख चतुर्विशति पट्ट का० प्र० कालिकाचार्य संताने श्री जावदेव
सुरिनिः श्री वनरिया ग्रामे ॥
[2088]
म १५६३ वर्ष माघ मुदि १५ गुग उरकेश झातीय गा० कनुज सोग करणा ना
साघु : विमाल पितृव्य नयापा निमित्त श्री विमलनाय वियं काग्निं प्र० निन्नमाल ना
श्री कम्मानिन मुर्शिनः ॥

(शर )
[2007]
संघ १६६३ वर्षे वैशाख वदि ११ दिने श्री श्रीमाल ज्ञातीय व्या टाहापान जा वो
निमित्तं सुत लिंबा राणा जाजण सहितेन आत्मश्रेयोर्थ श्री श्री आदिनाथ विवं कारित
प्रतिष्टितं ब्रह्माण गवे ना जाजोग सूरिजिः स्थिराम वास्तव्यः ॥
श्री महावीर स्वामी का मंदिर ।
पंचतीर्थयों पर
[2028]
सै२३५० वर्षे फागण सुदि शुक्ने ब्रह्माण गर्छ श्री जकक सूरि गुरो श्रीमार जागो
पणनातक वास्तव्य आता सुत देवधर श्रेयोर्थे प्रासधर सुन जाणेन पिता या
श्री महावीर विवं कारितं प्र० श्री वयरसेणोपाध्याय गति ॥
[2008
संग १३४४ वर्षे जे० व ४ शुक्रे शोतवाप्त झा श्रेयोग्मन्य मन बीनन निमार
या देवि योर्थ श्री पार्श्वनाथ विवं कारित 4 माहवारी सादर
[2:02
सं० १४७६ वर्षे चैत्र ददि १ शनो एकदा का कटारिया -
::
सन नीमा ना सनरतशा पोई भी हादिनार -::-
-
।
श्री
श्री विद्यासागर सूरिभिः ॥
.
सं० १५०३ ८ पे दिए ::::
सन सपन श्री::-:-:
MAN
है

(. २७२)
1
[2102]
सं० १४७४ वर्षे वैशाख सुदि १० रवौ श्री कोरंटकीय गछे श्री नन्नाचार्य संताने उपकेश
ज्ञातीय मं मलयसिंह जाप मालण देवि स० मा मदनेन पुण् खुणा. सहितेन ना हेमा
श्रेयोर्थ श्री संजवनाथ बिवं कारितं प्रतिष्टितं. कक्क सूरिनिः॥
[2103]
सं० १५२० वर्षे वैशाप वदि ५ शुक्र श्री श्रीमाल झातीय सदा ना० सहजू पु० धीरा
केन ना० काली सहितेन पितृमातृ श्रेयोर्थ श्री शांतिनाथ विंवं कारितं प्र० श्री नागेंड गछे
श्री गुणसमुड सूरिनिः प्र० सर्व सुरिनिः॥
[2104]
सं० १५२२ वर्षे कार्तिक बदि ५ गुरौ पाहात गोत्रे सा० शिवाराज जा० कर्मणि
तत्पुत्र मेघा नार्या युतेन पुण् सालिग मातृ श्रेयार्थ श्री आदिनाथ विवं कारितं प्रतिष्ठित
मलधारि गछे श्री गुणसुंदर सूरिनिः॥
[21051
सं० १५३७ वर्षे वैशाख सुद ३ उपकेश गवे श्री ककुदाचार्य संताने उपकेश झातीय
वाफला गोत्र सा वम ना० जसमा दे पु० सोहडा दे पु० वस्ता आत्मश्रेयोर्थ श्री
अजितनाथ विवं कारितं प्र० श्री देवगुप्त सूरिभिः ॥
[2106]
सं० १५४७ वर्षे वैशाख सुदि ५ गुरौ वायमा झातीय व० साह नारिंग सुत वा राजा.
केन ना० रई पु० रीड़ा मेघा रोड़ा ना० इंऽ प्रमुखकुटुंबयुतेन स्वश्रेयसे श्री वासुपूज्यादि
पंचतीर्थी श्रागम गठे श्री अमररत्न सूरिनिः गुरूपदेशेन कारितं प्रण विधिना पत्तन
.
.
.
.
वास्तव्यः ॥
THESE SECREEEEEEES ELS

(२३) गुडली-मेवाड़। जैन मंदिर। पंचतीर्थियों पर.। [2107] सं० १५४५ वर्षे वैशाख वदि ४ उपकेश ज्ञातीय सा करमा ना० साहु पुत्र पीदा ना० सतमा दे पुण् गोदा उजल ना वडी पु जेसा मेघा केमा हरमा सहितेन जिदम निमित्तं श्री वासुपूज्य विवं कारित प्रतिष्ठितं वृहमने जट्टारक श्री धनप्रन सूरिभिः ॥ [2108] सं० १५५ वर्षे वैशाख सुदि १५ शनौ उपकेश ज्ञातीय मानींग ना नंदि पु० देपा. केन पितृयुतेन श्री वासुपूज्य विवं कारितं प्रतिष्ठितं ब्रह्माण गळे द्रुमतिलक सूरि पट्टे श्री उयाणंद सूरिन्तिः ॥ *HEL) खारची-मारवाड़। जैन मंदिर । पंचतीर्थी पर। [2102] धर्मनाय विवं काग्दि प्रनिधि र गरी सं० १५३७ वर्षे ज्येष्ट दि . . श्री शांति सूरिनिः दाविस प्रामे ।।

( ४ ) खंडप-मारवाड। धातु की प्रतिमा पर । [2110] सं० १५२७ वर्षे वैशाखु सुदि ३ आँसवाल ज्ञातीय साह इंसा पु० उधरण देदा वेला जा वाहनु मोदरेचा गोत्रे साह लाधु ना नामल दे पुत्रिका नानुं आत्मपुण्यार्थे श्री चंद्र प्रजु विवं कारित श्री नाणकीय गजे धनेश्वर सूरिनिः ॥ [2111] संग १५२ वर्षे . उपकेश झातीय गजेड़ गोत्रे पना जा सुहवि दे पु० नरसिंग विनणा सहितेन श्री मुनिसुव्रत विवं कारिदं प्रतिष्ठितं पलीवाल गवे श्री यशोदेव सूरि पट्टे श्रीश्री नन्न सूरिनिः ॥ प. POP९.00P.. . .. मांकलेश्वर-मारवाड। जैन मंदिर। धातु की प्रतिमा पर। [1187] सं० १५३० वर्षे फागुण सुदी १० श्री ज्ञानकीय गछे उ जसन गोत्रे सं० जांमा नाण साहा पीथा स्था प्रतिष्ठितं श्री शांतिनाथ विंचं कारितं प्रसिद्धसेन सूरि सूरिनिः ॥ . - A. enden ॥ श्री जैन लेख संग्रह द्वितीय खण्ड समाप्तः ॥ PERGUEUEUEUSVETS Erannananan! tasyyyy Navanaru NCUR . भ 5a . -

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(२) लेखांक संवत् संवत् नाम नाम लेखांक ११२८१०७२ . १५४७ अमररत्न सूरि १५३६ सिंघदत्त सूरि १५६६ सोमरत्न सूरि " ... २१०६ । १५२० १७३७ । १५२१ १२१६ । १५:४ १५७७ १५२८ देवगुप्त सूरि " ... १२७४ १४ १९७१ ... उपकेश गह। . १५३५ ... १२६२ १३(२,५६ कक सूर्ति १६२३ .. " ... ... १०३८ ... . १६.३ ." . . ... १५४४ १५४६ १३८० ... १२६३ १०४३ | १५५८ ... " ខ १४६० " १४५७ रामदेव सरि १४६८ देवगुप्त सूरि ११०१.१९८६ १५५६ १५६६ सिद्ध सूरि १५६७ ... १४७० २०६२ ... १९८४ २०७२ १५९४ R . . १९८२ १५७२ १५०६ ... १४८६ ( मल्लयारोयक) १४८२ सिद्ध सरि १०७० ... १५७४ . ... १४५० १४६४ १३०५ . ... १३४७ ... . १०२४ १५८८ १४६३ सिद्ध सरि १९८२ १५६२ १४६५ सर्व त्रि १६४१ १५०३ यकुदाचार्य (कक सूरि ) १६३४ १५२७(?) सिद्ध सरि १५०५ पाक सरि ११४८,१५७६ १९८१ कर्परप्रियगणि ११४६ १९४० सिद्धसूरि ( कमलांगच्छ) १०८३. १२५० कोलीवाल गठ। १५०८ १२५६ । १४७१ संघतिलक सूरि १९५३.१२१, १२६३, १३७३, १५०४ १४६३ १४६३ सर्वाणंद सरि (पूर्णिमापक्ष) १८८३ १४६३ लपमसोह , ) १४५ ... " + ... ११६ ( ...

(३) लेखाक , संवत् लेखांक नाम संवत् नाम १९२६ १५०३ २०८६ . १३६२ जिनपद्म मूरि १३६१ / १४८२ जिनभद्र सूरि १३८२ । १४६३ ... १२४४ १५१८ गुणसागर सूरि ( पूर्णिमापक्ष ) १५३० विद्यासागर सरि १५३४ विजयप्रभ सूरि ... " , ... १६०० १४६६ १३२५ कोरंट गछ। १५०३ ११५१, १४०० २०८० १५०७ १२५५,१३३३ १५०६ १५५० १७६२ १५११ १०१० ... " २००४ १२९३ क्क सूरि १३१७ सर्वदेव सूरि सरि १४०६ कक सरि १४३७ सांवदेव सूरि १४८४ कक सरि १४६१ सांवदेव सूरि ... २०१४ । १५१७ १०५७ १४६१ भव्यराज गणि २१०२ १५०६ जिनतिलक सूरि १२५० १८६०-६१ २०८२ १५११ .. ... २०२२ १५२८ १९८३ १५१५ जिवचंद्र सरि १७३३ । १५१६ ... १५०६ ... १२०० १५०८ २०१२, १५१६ १२७३ १५०६ " ... धीपाद .. १५२७ १५९८ सांवदेव सूरि " १४०४ १७२६ १५२६ १२०६ . . १ १५३१ . " १५५३ नल सरि १५६७ नन्न सूरि १६९८ १५३२ १६४२ १५३३ ... १२८० १३८६,१२.० १५३४ १४. खरतर गछ । १५.७ विवेकरन्न गरि ... पारित गरि १८८ १५२५ ..... वर्तमान सरि १६८१ जिन कुशल सरि १५२८ मिन्टन मरि १. जिनमद गरि .

(४) लेखाक संवत संवत् नाम नाम लेखांक ... ५५५ जिनसमुद्र सूरि २५५६ जिनहंस सूरि કદ્દર २६०६ जिनमाणिक्य सूरि २६२८ जिनभद्र सरि २६५३ जिनचंद्र सूरि २६२०(?) जिनसिंह सूरि ... १२२४ १८५२ लालचंद्र गणि १२०५ १२१६ १२६८, १४६३ | १८५४ जिनदेव सूचि १८२८ २०४६ / १८६३ जिनहर्ष सूरि १५२५ १३५१, १८६४ १५२६-२८ १८४८, १८४५ । १८७१ १६३८ ११६६ १८७३ १०१६ १३८८ १८७५ १८७२४२ १७१५ १८७७ १०२७, १६४७ ५६,१६६२,१६,१८३६-३८ १८८५ " ... " ... ... " " 2 . " १८८६ १८२१, १८२४ " ... १४५७ १६३८ . ... " गुणरत्न गणि रतविशाल गणि १६६८ जिनचंद्र सूरि १६६८ १६६८ लब्धिवर्द्धन १६७५ जिनराज सूरि १६८६ " १८७७ उ० रनसुन्दर गणि १८७७ होरधर्म (पाठक) १८६३ जिन महेन्द्र सूरि १६६७ १८६६ ... १६६७ " ... १८६७ " १०२७ १६४७-५६, १६६२.६६ १६७१-०२ • . ... १८५० १६४५ १५२६--३२, १६४६,१६६७-६८, १६७३,१८३०-३२ १६८२ १६२२ १६०६ 2 ... १६६७ १६१० २ ... । १६८६ परानयन (3) १६९८ समयराज उपध्याय अभयसुन्दर गणि (वाचनाचार्य) कमललाम उपाध्याय लयकीर्ति गणि पं० राजहंस गणि पं० देवविजय गणि १६० जिनकीति हरि जिनसिंह सरि म. राम विनय गणि ८४९ जिनचंद्र सरि १०१७,१०२०-२१ १८६३ जिन सौभाग्य सूरि १६०५ १८६३ आनन्द वल्लभ गणि M ... ११०७ १०१७ . १०२०.२१ ... प्र ... १८९७ कुशलचंद्र गणि १८०७ । १६१८ जिन मुक्ति मुरि १८०० १८६६-६८, १८७२ म ... ...

(५) लेखांक : संवत् संवत नाम लेखांक जिनक नरि १६६६, १७०१ १४६४ २०६६-६७ , १४६५ २२४५१३७३.१९७५ १८१० १४६६ ." १०९८ १४६७ २०७२ ... . . १५०१ १२४८ . ." १९२० स्कालागि १७०१ १५०३ १८६५ . . . १. . १९३२ मतकनिधान मुनि सर विवेकशीर्ति गणि १९४२ निवल्म मुनि २५. निवद्र सरि " " १०१८' १५०७ १६५७ । १५०६ १३७२, १७२५ १८०८ १५१० રરર २०७७ : १५०४ शुभशील गणि १८३६.१८५४-५ २०७४ । १५२३ जिन्हर्ष सरि ६३३६-४० १५२८ २०६४ १५७ मिनचंद्र सरि २०६९ १५७२ २०७० १६६८ लधिवईन १००८ : रंगविजय शाखा। ... १९५२ नमिद्र PES जिन फत्तेन्द्र सुरि १६४५ जिन लिख सरि २0 होराचंद यति . १६२३ (१) जिनरंग सरि १८५६ जिनचंद्र हरि खरतर गल। . जिनवर्द्धन सूरि शाखा । १६ जिनदईन सरि ११०६,१०० १८७ १८६७ १२३८.१९९५ १.94 १६-८. . १८६ १९८७ ... १८८८ पर जिनचंद्र सूरि १२०६ १६८२ शिन नंदिवर्जन मी ... .. १६६४-६५.१९८३ ... १११ जिनसागर सूरि १०९, १३६६, १६९८.१९६२ १६६०,१९८४, १९६४ निरर Pा नि !

(६) लेखांक संवत् - संवत् नाम नाम चंड गठ। हितेग गछ। ३८६ १६१२ धम्ममूर्ति सूरि १६८८ भावसागर सूरि ... २०७२ सोलगल सूरि १२२, पूर्णभद्र एरि १२.८ देवनद्र मरि १२७२ परिप्रभ गरि १:०८ यशोभद्र मूरि १०३४ । जापडाण गन। १७७७ १५३४ कमलनंद्र सरि ... १८७८ १७७६ जीरापक्षीय गन । चाणांचाल गछ। १४०६ रामचंद्र सूरि १५०७ उदयचंद्र सरि -- . १. परमरि तप गन। चित्रवाल (चंत्र) गछ। . १६ २. विसर ११. देव गरि १९. मेमचंद्र हिरदेव मार १४०१ विजयहर्ष राशि १६४६ १४२२ रतावर गरि १९२१ । १४३(१) देवचंद्र मरि २०६० १४३ महंम सरि ११३४ । १४ . .. १४ ... १६7 MA ... ... १९७५ १२ ११ मरिमर १९०१ १४१० १४८ । M M - १६१ गुमरमर १४८ - . . २६१५०० " . १.६९ रन १०१० १५०४ . ३ -- . ... ... 18 १.११ " ६.१ मा *.. . १.३ १४१. , १४९८ देवगंदर गरि संवत् नाम १५४२ सोमन्सुंदर सरि १२४२ (३) संवत् लेखांक नाम लेखांक १४२१ * ... १९८० १५१६ १९८४,१४०३ १८८०, १९१२ ... 1223 १८७२, २०१७ १०३०, १९८५ ... १६४२ ... ... १७५३ ... ... . .. ... - १६६६, १६७३ मुनिसुंदर सरि २०७५ १५३८ १९८३ १५०३ जिनरत्न सूरि १०२६, १०६०, १७३१ | १५३६ १०७४, १९८१ १५४१ १०७६ : १५०३ जयचंद्र सरि १८८,१६७१ १५०५ १९८३. १५०८ उदयनंदि सूरि १४६१ । १५१० रत्नसागर सूरि ११२६ १५१७ कमलवन सरि लक्ष्मोसागर सूरि १०८६ ६६६६ १५१६ १३७० . ... .. ... २३ रनहि मरि ... ... १२४० १०१० ... . " .. .. १२६८, १८.३ २०१४ २०४४ १५२० .. २०२१ १५२१ २. विजयतिलक सरि २२ रखशेखर सरि १०००,१:18...' १९४६ : १५२३ 10:11.1 ... १२४६ १ . ६९१२,१६७० . १०.. 3 है . , 3 .. . .

सर्वत् नाम लेखांक संवत् नाम लेखांक १५४१ लक्ष्मीसागर सूरि ... ... ... ... १२६४ ... ... " ग ... १७७१ ... १५१८ हेमविमल सूरि ... ... . . ... " १४७७ | १५६६ ... ११.३, २०२७-२८ ... २५५७ " ११०३ ... २०२७-२८ ... १५६२ " १६४३ " ... ... २०५४ १५४८ भ० वाकजो ११०० १५५२ जिनसुंदर सूचि ... १७७३ | १५५५ धर्मरत्न सूरि १५४४ | १५६३ द्रनिदि सूरि १३४४,१६०४ १५७६ चरणसुंदर सरि १०२६ | १५६६ नन्दकल्याण सूरि १३२० १५६६ जयकल्याण सूरि १३४५ १५७५ १६४६ | १५७६ सौभाग्यसागर सूरि ११०२,११७० १५६५ आणंद विमल सरि १७३०, १७३५ | १५९६ विजयदान सूरि १४०५ १६०१ १४०७ १६१६ १११७ १६१७ २०२५ १६१६ १६२२ १५६७ सुमनिसाधु सूरि १०३३ १६१५ तेजरत सूरि १५९०, २०१३ | १६१७ हीरविजय सूरि ३७६६१२४ १३८७ १७३८ १५८० " " ११०४, १५०७ ... ११७ " ... ... १५५८ सुरमुंदर सरि १५२१ उदयवटम सरि १५२२ सोमदेव मरि १५२५ सोमजय मरि सुधान्दन सरि # বিনম সতি सालसागर मरि १५०८, १५०६, १५४ १५५३, १६६० १९०७ ... " ... प १६०८ १४७२ ... ६ ... १३०७ ... ११६५,१२२५ ... ... ... १५६ संवेगमुंदर १५१३ उदयसागर गरि १७४२ ... .. १२१४, १८:१ ... ... . ... १७६११६२८ १८७६ : १६३ २६.७ १३५२', १२,१३४ १.२४ पुन मरि १.१३ दरमर " ... ...

(ए) संवत नाम लेखांक संवत नाम लेखांक पर हीरविजय सरि १४५६ १७०५ १६१३ " ૨૦૦૨ २०४३ .. १७०७ १९५२ सोमविजय गणि १६६१, १७१२, २०६४ :: १७६६ १७६३ १६६७ " ... ... ... :: १९४३ १६५२ विमलहर्ष गणि १७४८ कल्याणविजय गणि १५०० पद्मानंद गणि १७८२ १६७७ विवेक हर्ष गणि . " ... रविसागरमणि २०५० . . মান विजयसेन सूरि कल्याण कुशल २ " " दया कुशल ... १३०८ भक्ति कुशल २ " २ . . ... १६८२ म. मुनि सागर गणि १६८६ विजय सिंह सूरि १९०६ ... " १७६ १०२८ .. .. " २ १६२८, ९७४१ १७०१ .. १६५. विजयदेव सरि १७८२ १७०३ २०५७ ; १६६३ भतिचंद्र गपि १४६. १६६४ १६६४ लापापिय गणि १००८ ११३८ ह " १ ... १ " १३६१, १६४३ पंतागति १९०६ १६.६ रिसदमार .. . १६८ . . . .. 1510 - " १९९० . " fe- A (१०) संवत् नाम लेखांक | संवत् नाम लेखां ११७७ १४३८ पद्मशेखर सरि ... १२ ... ... " ... १२ ... १७४४ विजयप्रभ सरि मुक्तिचंद्र गणि १७६४ ज्ञानविमल सूरि १८०५ पं० कुशलविजय गणि २८०६ २८२८ २.८०८ विजयधर्म सूरि १८४८ विजयजिनेंद्र सूरि १८७३ १४७४ १७६६ १४८५ १४६७ १४५५ सर्वाणंद सहि १४६८ | १४६१ मलयचंद्र सूरि ... ... १०५ " " ... १४५५ १४६५ . : १२२ १११६ १२०४ ... ... १०६ ... " ... ११८ १७२४ ... ... ११४: १४१५ " १७३४ १२०४ " . ... " ... १८२६ १८६८ १४६६ १८४८-५३ " ... १८४८ पं० पुण्यविजय गणि १०५ शांतिसागर सूरि २६१२ आनन्दसागर सरि ६३१ धरणेन्द्रविजय सूरि १९३८ वृद्धविजय गणि ६४३ विजयराज सरि ६४ ६५४ ५० पवा विजे (१) विजयसिंह सरि ६४ उ. वीर विजय ... १४७३ पद्मसिंह सरि १४८६ महीतिलक सूरि १५०१ १५०३ १५११ १४६५ विजयचंद्र सूरि १४६८ १५०१ १५०३ १५०४ १५०१ विजयप्रभ सूरि १५०५ महेन्द्र सूरि १५०७ १५०७ पद्माणंद सूरि १५२६ १५३५ १५१३ साधुरत सूरि १५२० १५.३ पमापक सूरि १५३० १०७७ १२४७ १०७६ १५४७ १३६६ ११४४ २०६८ " . ... १८४० १४६६, १५०१ ... १२५१ १३२६ १०६८ " कृष्णार्प गठ-(तपगठ शाखा)। ५२५ कमलचंद्र सरि देवाजिदित गठ। १०८८ १३७० ... १९७४ २१ कनुदेव ... १०१३ १९६८ । १५२२ साधु धर्मघोष गठ। २५३४ लक्ष्मीसागर सूरि १३२८ ... ... १२६३ २३६ गुमर १६५२ । १५३३ मानदेव सूरि १९ गुप्तन्द्र लरि (११) लेखांक संवत् नाम लेखांक संवत् नाम १५६३ श्रुतप्तागर सूरि ११ नंदिवर्द्धन सरि ... . १३८४ १७१५ रत्नाकर सूरि १३.२ ११६१ नापकीय(ज्ञानकीय, नाणावाल) गठ । १६२०.१६६३ १२४३ २०७४ १३२१ १३४१ महेन्द्र सरि २००२ १३४६ १४०५ शांति सूरि २५८० १३४० १४६३ १५०१ शांति सूरि १५६४ नमदाल गह। १५३६ देवगुप्त सरि नागपुरीय गन्छ । ... . " १६०६ । १५६६ . R .. ... . हेमरत स्ि नागेन्छ गह। १ विजयतुंग स्ि २ पईमान हरि १२८३ उज्यान त्रि १६९५ रतनागर ति ११२२ रतनम स्ि १५७६ १५१६ धनेश्वर सरि १५२७ । (पृ.२.३).." १६२० । १७६३ १०४८ . १०५३ १५३६ १९२९ १५.३ महेन्द्र मर . निहनि गठ। १६६६ पव सरि १४. देवगुप्त सरि ३.६५ सिंहदत्त सरि १५८६ पद्मानंद सरि १६६६ र १७३ १२६८ २२३ निवृन गठ। , पंचानीय गढ़। ... सर्वसरि २१३ गुपदेव हि १३.८ मरत ११. हेमसिंघ रवि नहीबार गह। है (१२) लेखांक संवत् नाम लेखांक संवत् नाम १४७६ यशोदेव सूरि १४८२ ... " ... . . . १५२८ नन्न सूरि १५३६ उद्योतन सरि १८८२, १५३२ १६३१ १५२३ साधुसुंदर सूरि १८८७ १५२६ २१११ १५४७ जयरत्न सूरि १४६२ १५५५ १५४८ सौभाग्यरत्न सूरि १५५६ मनसिंह सूरि पूर्णिमा गठ। १५६१ जीमपल्लीय शाखा। १७२८ १९५६ १२८२ १११६ १७६० १२१२ : पार्श्वचन्छ गह। १५७७ पार्शचन्द्र सूरि पिप्पल गछ। १५६४ १३७६ १३०२ " १०४२ १४६१ वीरप्रभ सृरि १५१६ शालिभद्र सूरि १५१७ धर्मसागर सूरि १५३० चंद्रप्रम सरि १५७० तिलकप्रभ सूरि गुणप्रभ सरि पूर्णिमा(पक्ष) गह। १३८१ सोमतिलक सूरि धीसूरि १४८५ सर्वानन्द मुरि १४८६ विद्याशेखर सरि २५०१ गुणसमुद्र सरि १५११ राजतिलक सरि १६७५ १४८२ जयचंद सूरि ११५५ १५१५ २०७३ | १५७६ मुनिचंद्र सूरि ૨૨૨૨ प्राया गब। १७२६ १३७४ शीलभद्र सूरि बापदीय गठ। १२४२ जीवदेव सूरि १६२४ घोकड़िया गठ । १२४१ / १४५७ धर्मतिलक सूरि १३९७ १४६६ १५६५ | १५४६ मणिचंद्र सूरि १४८० १६३७ १६८६ ... " " १०६१ १२४६ १४१४ ... " . . . २७१७ १५८७ मटयहंस सूरि १५.७ पुरन मरि २०८५ . ११३८ ब्रह्माए गठ। १३२० घयरसेण उपाध्याय जझक पूरि २०६८ १.२६ गुणतिलक र .

... ... ... ... २७८३ " : ... .. (१३) संवत नाम लेखांक संवत् नाम लेखक र विमल सरि ૬૨૨ मध्यम शाखा। २११ विजयसेन सूरि १४३४ देव सूरि १६०५ १९३३ हेमतिलक सरि ११२३ १८३६ बुद्धिसागर सरि ममाहम(मड्डारुडिय,महड़) गछ । ११३७ १४६६ वीर स्त्रि १३६४ १३५१ सोमतिलक सूरि १०४६ २१०१ १४८० धर्मचंद्र सूरि १५५१ / १४८१ उदयप्रभ सूरि १०६६, २०४६ २४ उदयानंद सूरि १२७६ २०१६ / १५२७ नयचंद्र सूरि १५०० विमल सूरि १३६८ १५४१ कमलचंद्र सूरि १३६० १०११ । १५४५ १२६६ / १५५७ गुणचंद्र सूरि १९३० २०८८ उ०माणंदनंद सूरि १२२१ मधुकर गठ। १०८६, १३७४ १५१६ १४६५ मसधारि(मल्लवादि) गठ। १३७४ १९८८ | १२३४ पूर्णचंद्र सरि २१०८ १३४४ रतदेव सरि २०६७ १४७६ विद्यासागर सरि २६०० १४७७ मुनिशेखर सरि नावडार(नावड़,नावहेड़ा) गठ । १५१० गुणातुंदर सरि 10 १५१२ २०६५ ... ." ... " ... १५२२ मुनिचंद्र त्रि १५.३ उदयप्रम सरि २०२४ " ... २५३ हेमहंस सरि २५५६ बुद्धिसागर सूरि उदयाणंद सरि १६६. जाजीग हि . . ... ... • . २०६३ १५६ वीर सि १५२४ भावदेव सरि १९६५ २१.४ १५३३ .. , १३४२ ... ... ... - ... जिन्नमाल गठ। २५६३ कातिक सूरि १५.७ गुमसर मरि १५.२ पुनियानमार .. ...

लेखांक संवत् नाम १५३४ गुणविमल सरि १५५७ गुणवपान सूरि १५६६ लक्ष्मीसागर सूरि ... १६२१ .. (१४) लेखांक । संवत नाम १३३८ | १५३८ देवसुंदर सरि १९६८ ११३१ १६३२ अजयराज सरि १४८४ १९५३ गंगारिखी यति १८६६ वड गठ। १५७२ चंद्रप्रभ सूरि लौंपक गछ। ... .. २०३४ १६९६ कल्याणसागर सूरि उदयसागर सुरि २०३३ . मोढ गह। १३८६ १२२७ जिनमद्राचार्य १११४ विजय गह। रल गछ। १५७६ श्रीसूरि १६२५ रांका गल। १९२१ शांतिसागर सूरि १५६६-१७ १६२४ १५११-१८,१५३५.१५४२-४३,१५५६, १५६८,१६१०-११,१६०८, १६१५,१६२१ १६३१ १८०६, १८२५, १८३३ १६३२ १८२३ ... १३२० महीचंद्र सूरि १७८० " ... १७०२-०३ २ १६४३ राज गह। १३३६ अमरप्रभ सरि १५०६ पद्माणंद सरि १५५२ पुण्यवर्द्धन सरि " १८२७ ... ... ... रामसेनीय गठ। २०८४ ... १४. धर्मदेव सरि चंसरि ... १६२४ ... ११७४ विद्याधर गठ। १५६१ १४११ विजयप्रभ सूरि १४१३ विनयप्रभ सूरि १५१८ हेमप्रभ सूरि १२३६ १५२० १०८० १०८७ विवंदणीक गछ। १५१२ सिद्ध सूरि २०२६ १५२४ कक सरि. ... ... १३.३ ... ... रुजपलीय गठ। अमरदेव मूरि जिनराज मूरि १३ मोमसुंदर मुनि ... ... वृहा। १०५२ १३१५ १३१६ हीरभद्र सूरि १२६७, १३३४ . ::

(१५) लेखांक संवत् संवत् नाम नाम लेखांक ... २००२ ... १४३६ १३. धर्मघोष सरि र रामदेव सरि १. स्तनम सरि १३ मल्यचंद्र हरि २४६३ शालिभद्र सरि १५२० १४६४ शांति सरि १४६६ १९४१ ... १२०७,२६७६ ... . . १०१२ ... ११४२ १८६० १५५८ . १५०८ ... ... ... ... ... १२.७ सागर त्रि २. महेन्द्र सुरि ११.३ मत्प्रभ सरि सागरचंद्रसरि १०८ लिन सरि १२६५ ... २५३३ .. ... .. . ... २२ ... १०८ ... १३. श्री सरि १५.३ बरसरि .. २१०७ २१५ ... . १५.६ मुनिदेव हरि १५३. परागंद्र सरि मन्चिंद्र रवि. ॥ ... १४४ . वहन नि ... . व्यक्तीह गह। १०२६ सातिर १५१६ एमएर १६ र . पं(सं)डेर(क) गह। पसन्द हरि : रमी ... भर रहरि १३.८ शाल १३३८ मतही पाय ... ... - - ... F- १४२५ कर एमीर प (१६) लेखांक | संवत् संवत् नाम नाम लेखाका सिद्धान्तिक गछ । २४३५ ... " ... १५०२ १०४७ १४०८ माणचंद्र सूरि हर्षपुरीय गछ। १५५५ गुणसुंदर सूरि हुंबड़ गह। १४५३ सिंहदत्त सूरि १८८६ १०५० ... १०५१ .. ... जिनमें गलों के नाम नहीं हैं। १०५४ १०५५ उद्योतन सूरि १६२६ २०१० ... १३६६ २००० १३८० पमानंद सूरि जगतिलक सूरि १४२७ १३८६ धर्मप्रभ सूरि १३६६ भावदेव सूरि १२६५ / १४०५ अभयदेव सुरि १४०७ गुणप्रभ सरि १०५६ | १४०६ सर्वानंद सरि सर्वदेव सरि १४२३ शालिभद्र सूरि अभयचंद्र सूरि १७०६ १४३६ १०३३ १४६८ श्री सूरि १७८५ | १४७८ , १०३५ । १४७० देव सुरि १०३६ | १४८४ जयप्रभ सरि १७८३ जिनरतन सूरि २०२३ | १४९३ अमरचन्द्र सूरि १७६५ धनप्रभ सूरि १४६६ शीलरत्न सूरि २०४७ १४६७ मुनिप्रभ सूरि १०३७ १५०१ मंगलचंद्र सूरि ११२१ १५०३ धर्मशेखर सूरि १७६१ | १५०६ सर्व सूरि १३६४ | १५०६ साधु सूरि ११२२ । १५१६ श्री सूरि १७६५ १५३३ १७६५ १५२१ सुविहित सूरि १०५३, १५२३ कनकरत सूरि ... ... १९६३ ... ... वच्छवल देव ११६६ श्रामदेव सूरि १२५३ जिनचंद्र सूरि १२६२ भावदेव सूरि १२.. सर्वगुप्त सूरि १३०२ माणिक्य सूरि जयदेव सूरि १३१० परमानंद सूरि १३३८ २२ जयचंद्र सूरि २ उद्योतन सूरि २३८ श्री सूरि पूर्णभद्र सूरि १२४३ ... ... २०८३ " १४२२ . १३३१ ४. • • १३६६ १७६८ १०८२ प्रद्युम्न सूरि १२५४ विबुधप्रभ सूरि जिनभद्र सूरि रतप्रभ सरि १४७० ... ... .. १५६८ .. .

(१७) लेखांक नाम लेखांक संवत् ... १३४६ १०७ १६७४ १८९१ .. १५४३ १४९८ १७७४ १८५६ हेमगणि १६२७ / १९२० अमृतचंद्र सूरि १९७१ सागरचंद्र गणि १३५६ १६३१ १९७२ १६४४ सं० रणधीरविजय १९६३ १९६१ विजय त्रि चारित्र सुख २१८ ... संवत् नाम १९६३ धर्मवल्लभ सूरि ११. सर्वदेव सूरि २. देवरत्न सूरि १.३ नंदिवईन सूरि 1. श्री सूरि १:२३ जिनसाधु सूरि 17 हर्षरत सरि र विजय सरि 1 रनविशाल गणि १३ मतिचं गणि Pers उस क्षेत्रराम गणि १९३८ विमटि सरि र विद्याजिर गणि भविस्य गणि १८५२ लालचंद्रगति १८५९ लार कालगणि :: जिनमें सम्बत् नही है देव सूरि महप्प गणि १०२८ १५५७ :: :: जिनसागर सरि ... १७४५ उदयशील गणि নামান গণি क्षेमसुंदर गनि " १२७८१४४१ मेरसम मुनि १४१७ KEEM How Ravina (१७) दिगम्बर संघ। संवत् नाम लेखांक | संवत् नाम लेखक काष्ठा संघ। १४५७ पद्मनंदि २००६ २३६० रिहुण कीर्ति १२३५ १४७२ १०६३ ... ... ... १९२० १४१७ जिनवंद्र १५०६ मलयकीर्ति ... ... १२२६ | १५३४ मा ज्ञानभूपण १४८३ भ० भूवनकात्ति १२५२ रत्नकीर्ति १३४३ | १५४६ जिनई'द्र १५६२ ... १०१५ काची संघ। १४४७ १४६७ कोर्निया "१५० विमलकीर्ति १४२७ १४२६ ... ૪૨૮ १५५२ १६१६ सुमतिकीर्ति १६५२ चंद्रकीर्ति १६८६ पद्मनंदि नंदि संघ। ११३२ अमोनि ma १७८६ मृत संघ। जिनमें संघ के नाम नहीं है। -- १४२० १६०८ क्षेमकीर्ति

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(२०) लेखांक | झाति - गोत्र लेखांक झाति-गोत्र १५११, १५१३, १५३१. १८८२. १८८६-८७, २०११ १४८५ कावू १४०१ काश्यप .. ".. १०३१ छाजहड़(छाजेड़) १९६१ छाहखा १५५२ छोहरिया १५६३ १२३६ जबड़ (जहड़) जाइलवाल २०२५. १३५५, १४४१,२०८४ जाजा १९६५, १४६१, २०६३ जोजाउरा ... १९५०, १२८६ ६१८०, १३२६, १५३८ १९४० ... . १०६० . १३०४, १६३६ २०८६ टप १०१३ १७३३ ... ... किलासीया कुचेरा केकड़िया कोठारी खां(वा)टड़ सांमलेवा सोथेपरिया गहिलड़ा सादहिया गांधी गुगलिया गूंदोचा गोठ गोलबछा घांघ घोरवाड़ . ... १५६५, १६०४ ११०७ १९८६ ... ... १३७५ ठाकुर १२२५, १२७८, १८१६ डवेयता १०६२, १५४६ डागलिक १४१२, १४३६, १४८६, १६४५, १८४७ डागा ૨૦૦૨ डांगरेचा १०६४, १२६४, १३८५, १६०१ तातहड़ १९८८ ताल २८३६ ताहि १४८४, १८६६, १६६० तेलहरा २०४६ धुंभ ... १५६० दढा (दरडा) '. १०८८ १०६५ १०६६ ... ... ... .. १२३२ दूगड़ १२७१ १९६७, २०२२, २०३१ १०१७-१८, १०२२, १०२७, १२६७, १२८०, १४६८. १६२५, १६७४, १७०१-०३, १८१९ -१२, १८२१-२२, १८२४, १८२६, १८३१, १८४४, १८९५, २०३२ २०३४ चलस्ट १०८७ चल्द (3) १०८३ ... ... विपड़ चोपड़ा १३३५,१५५० ... . १२०० चोरट्रिया (चोरडिया) १२६० ... १३५५ १५५७ दूधेड़िया १०२४,१३५५, १४५२, १४१७, दोसी १५२४, १५३०, १५७६, १५८६. १६००, १६०८, १६८५ ११६८, १२८५ घरावही १३४६ । घाहीवाल ... चंडालिया ... ... ..

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लेखांक (२३) लेखांक | ज्ञाति-गोत्र गोत्र। १९८६ ... गेपुत्रौवाल। १८६२ १२७२-७३. १२७६, १२८३, १३०८, १३१४, १३१६, १३२२, १३२७, १३३२, १३५४. १३६१, १३७८ १३८१-८२,१३६१ १४०२-०३, १४१२. १४३७, १४६५ १४७७, १४९६, १५५६ १५६२, १५६६.७०, १५७२, १६०२. १६४३, १६५ १७१३..१४, १७२३, १७३०-३२.१७३५, २७११ -५४, १७५६ १७६१. १७७६-८०, १७८८,१७६३, १७६५, १७६६, १८८०, १८८४.१८६२, १६०२, १९११, १६१६, १६२४, १९२७ १९३८ १, १९६८-६६, १६७३, २०१६-१७ २०२५, २०१८ -४६, २०५१, २०५४, २०६०, २०७६ २०८, २०६० जसवाल। १४४७ । ... दीसावाल । गोत्र। १७०७ १७१६ १०१५ नागर । १३८७, १६१४ १६४२, २०४४ संवाई कोठा कोड़की गोत्र । १३५६ नाग भंडारी । प्राग्वाट [लघुशाग्वा] । पल्लीवाल । २०६८ १९९१-९२ बघेवास। . पापड़ीवाल। १०२५ वायड़ा [वायट] । .' . प्राग्वाट [पोरवाड़]। देवा। ११४१०२६ १०२८-३० १०२७१५-१. १०६. १०६६-६७ १०६६. १ .. १०८४-८५१०६१-६२ ११७ ११००-४ ११२५.२६ १९१०. १३.. ११६ ११. -..१९६५, १९७७ ६१२ ए. १९९८ १२१३. १५...

लेखांक मेवाड़। - (२४) हाति-गोत्र लेखांक हाति-गोत्र नेखड़िया वंश[साधुशाखा] । १५३६ जेणी वंश। १४२६ महतियाण [मंत्रिदलीय] । १०५६, १८४६, १८५४ २०२५ ... मोढ । - -- ... १११८, १३१३, १६१०, १६२४, १८००, २००७ राटउरीय। -- - गोत्र। १६९७ वीर वंश। ... ... ... . ... श्रीमाल । .. - हाट .. A १६७ ... ३ पार ... १००४, १०११, १०४२, १०४४, १०४८, १०५०, २०५५, ११२४, ११३७, १९५५ ११६२, १९७५-७६, १९८१, ११.८८. १२१२, १२१५, १२२१-२२, १२६२, १२६६, १२८१, १२८४, १३०२, १३१२ १३६४, १३६८-६६,१३६४,१३६७-६८, १४०५, १४१०, १४२१-२२, १४४२, १४४१, १४६६, १४७२, १४७, १४८०, १४६०. १५०४-०५, १५०८, १५३६ १५:५१, १५६५-६७, १५६०, १६०० १६२७, १६६१, १७१७-१८, १७". २०२७ २८,१७३६-३७,१७३९,२७५३, १७.७-६०, २०७२-७३. १२११७." ~६८,१८.४, १६२२, ११२, १९३० १९४१, १९८०, १९८३, १९८१, 2017 .. ११ -- R मित्रवान। गोत्रा 2038001,2044,२०११,२१, २०६७.८ २१.१,२९०५ लेखक (१५) लेखाक | ज्ञाति-गोत्र श्रीमाल [वधुशाखा]। शाति-गोत्र ... गोत्र। गोत्र। मंसिका ... १५२३, १६१८ ११५८, प्सखाना श्रीवंश । १४३८ ११२६, १३० १० १० खा(पारस जुनोवाल इंगटिया साड़ो शंक - ... गोत्र। १६१६, १६३८ । १९७७ . १२०६, १८६०-६१ १४१५ सउडा होर डूंचढ़। घाधीया नांदी पटको 13.01.. " ... १८६५ २०७२ १२०४, १५६२ १२८७, १४०६ ११७६, १२२८, १५.., १६४४, १६८३, १६८ गोत्र। परवड़ फोफलिया . १५.५ १६१५ १९ भपशाली माडिया मरठिया मांचलपुरा :: १४८१ १ - पदबाटा (घगएटा) -हिट- ही . सीमास[पूनर]। गोत्र।

(२६) गोत्र लेखाक गोत्र लेखांक .. चंडजरिया चंदवाड़ १०० .. १३६७ / वज्रजातोय ११३२ / विणवट १४८१ विण्ड १३४० / वेलुयुतो छाहखा ... १३४ घटाड़ १२५१ .. ... १२२० दहदहड़ा फाफरिया भाईलेवा मुठिया १०८० १२४७ लापुठा १५५५ / सामलिया १२५७ हिंगड़ ... .. ... शुद्धि पत्र। पृत ले यशुद्ध शुद्ध पृ० ले० अशुद्ध शुद्ध १२ १०५६ १९७७ १०५७ कोरंट २१३ १८०८ १८८८ ११०३ ११६२ १४३६ कारंट नंदकल्याण जिनचंद्र जिनभद्र द्राराविजय जिनचंद्र (१) १९२० १३० १३५ १५३६ | १५१ १६६५ १८३४ जयकल्याण २२४ १८७१ जिनभद्र २३५ १६२३ जिनचंद्र २४४ १६६० २०३६ जिनभद्र प्रतिष्ठा स्थान ( उथमण) (चारकयांण) जिनहर्ष (च्यारकांण) २६२४ ( दौलत्तीवाद) १४२५ पावापुर्ण हीरविजय | २६५ १४६५ पावापुरी ११६५ १२८७ २०७० २०७६ ७ २०६२ २०६३ ८२ १४१५ जिनराज १८२४ २०५३ २०४८

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Jain Lak Sanghar-2

Author
Puran Chand Nahar
Title
Jain Lak Sanghar-2
File name
Jain Lak Sanghar-2
Text
OCR done
Citation
1927
Published
2011/07
Publisher
Mumbay.nirnaya Press
Language
Sanskrit
Pages
394
Library
Agarchand Bhairondan Sethiya Jain Parmarthik Sanstha, Bikaner
DLI number
311650
Barcode
99999990310958.00
Scanning centre
Banasthali University
Digital publisher
Digital Library Of India
VMLT id
ELcG1dN3pAC
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