Bharatiya Vidya Bhavan Library, Mumbai
Lilawati Bhag-i
Front matter
20351
लोल्लावना
لیلاوتی
राजाडालचंदकी आज्ञानुसार
भाषा हुई
के प्रपौन
राजाशिवप्रसादसितारेहिंदश्की
मानानुसारअत्यन्तशुद्धहोस
स्थानललनमः
-दूसरी चार
मुन्शी नवलकिशोर के यन्त्रालय में मुद्रित
हुई
फरवरी
लीलावती र श्रीगणेशायनमः श्रीसरस्वत्यैनमः। पथगाणिस्तारलिख्यते सोरठाछंद । गजपति के गुजयाइगिरिजापनियचरल सौं नरम नीलिपरवाइ॥ पाटी पदपाटीरचन मण पदोहामनगर मुरीदाबादसुभासुरसरि तीर निवासायदिनाधरि रही गही। महिमा परगवास॥२॥णुनगरलाई ज्ञानगुहा सुंदर सुधरसुदंद। सुखदसुजानससीएन१॥ डालचंदऊलचंद॥२॥ जिनजनगन गहा जना महाजनन-चाह जाहिसाह सब जपातके मानद साहन साहायसन्मानी वानीसुधाादानीलाजजहाजागुनगाहक गंभीरशुनागनीगरीद निवाज॥५॥ निनगो दीनाधीन हिजनागरम्पानमनाथ राय संदपै करि कृपा।कीनौअधिकमनाय॥६॥ पतिआदर सनमानवमुपासलासम्बनताल لیلاوتی कान पनानको सो बजा के शुतवर्धायु के जो ६ अटारह अंक नै न्यूनाधिक नाही रासे नाको तात्पर्य यह है कि नदी संरख्याबमाकेर्दा नोएक ने पर (साय के मनुष्यानरर्वज्ञासुरामकरौपाटीगनन "भापाध. नेवाईस ककी संख्या विलमज्ञ॥जपिहीनमनिनापेउन ही हिरव्यापरवी मनीचन्नानासोरदाय विदितगृह विस्तार न्यास बल्ला झायुपर्पतनि नापति जिती ।कियोग्य र भार ।। १९९२२००० नाव... सहसगान भयुतलक्षपयुतौरुकोटिरू सोराने २००००० स्नीलादी भोल॥७॥पुनिभशहि प्रशादई।एक दिन उन अशापास्योपारगनित सारभाषाकर। य. घा बुद्धिमानुसारगगदोपसक्लयागंयकाली नेगुनकरिमान गिरगूढगंभीरता गुन का गनिनसारलाहि सुगम विक्षिणपंडिनसुघर उदाएपड़त सुनत यायकी गलीनी चूक सुधार। दीन हीनगनिजानिकैगर२साथ शंकयानसंख्या॥दोहा॥ एकरुदय शन द ग्मनुभान पर्वनि खर्य सुठोरु गरग (महापद्मशकरुजलधिाझंनिजमध्यपरार्ध अथसंकलन विक्कननदोहा स्याने पठारहश्के की रख्या एरवी है और कोई डिन वाईसंकनाई की संरख्याकहत हैं नहीं ब्रह्मा होइयाने अधिकारत- संख्यातोपराह्मदला कोद सोनोवनारि खान पनि ब्रह्माशायुप्रमाण बाके दिनभये ३६... एकएरुदिन दोहन पौगीका शोर सहोरानकी चोजगी भट्टी ७३७००००० वाजीममो. पर्पसन तुरा प्रमाण हापर९६४०० कलियुग १४२२६०० ठीकचारोगको को सौगने पाये (मनुष दिनकी संस बाटाहकरे मगुन ७०० पठारह मुक कोसंरव्यागरची है ऐसे Readereroin सिंक दिस कोश लालाचता कोटि०७४00 पद १००००००० खर्व १०००००००००० निखर्व ९०००००००० महाप... शंकुर००००००००००० जलधिरvemen अंगिन....००० मध्य०००6mar गुनक १२ १३५ राए पहिले एकरकोंवारहर से गुन्यो भयोऐसे फिर गुनक सरकायो भयो ऐसे संकथानकमजोरियो कहे संकलन सोइपर्च १९००००००००००००००००/ पुनि रान कहि सरकाद्शेष अंककइकहरी भयो ऐसे २५ो यंकको बारह सौगुन मीत । यथायानधार दूसरीसुगम विधि/ पटिकरियोजोसंक-पिकविवकलनहोइ॥१५ उदाहरन गई शरुदसवत्तीस पुनि सानयाध. शन नीनाजोरिक सवफलकरो।सहस्माधि नैं हीन ॥२६॥न्यास १२॥जोरै तै भये ३३१ याकोहजारमें दिये ते वाकी रहे ३६३ अथगुन विधि सोरठा ॥ गुनौगुनकरिमा गुन्य अंत के अंक को। ५९॥दोहा॥जासौंचुनियेसोगुनकाजो रानिये सोशुन्यो गुन्योअंकसोगुनन फलालहि पिपुरेपुन्यार। उदाहरन पाच तीनङ्क रिजोरिपुनिालेहरानन विधिनीतान्यास, गुल्य २५ गुनक९२ ऐसे धरिके यथाधान जारने पायौर गुन्नु फल घटाय ५ ६६ फिरतोन वारह नौ गुन्यो भयो में फिर गुनक सरायो सवरांच५ कोचारह 'सगुन्योभयेप्से जहां गनक और '१३५ गन्य होय नहीं एक चनुस क्षेत्र ऐसे लिखिये है तस्यहोर जाते एक एककोठानि तिरछी रेखाकीजिये, नाकोठानि में डह किनैकोटा कीनिये निएकहोइनामोर और
लाभकी नीचे के देख्य में
फेरएकएकपकह र लिभाग निसंक॥२१॥उदाहरनाचौपाई।
कि पापुस मे गुनि के दुका भाज्य अंकसोरहसै वीसा भाजकवारह के।
और दोनो तिरछी
लीलावती
अषभाग हारविधि दोहा गुन्यगुनका
को गुन्यौफ भाज्यभक सोजानि गइक
भाजफकभागफलागुनक गुन्य दोउ मानि
१२९॥भाज्य अंकमैंघटिरकै जैगुनभाजक
अंकगनिहिगुनकाहि लिखिप्रथनफलानि
धरिसीस हि विधिभागलायोबुधिई
पायोसोऊपर पैनीस न्यास १६२०
१ प्रथमभागफल एकानो भान्यस
घद्योसो लिख्यो
३ दिनीयभागफल निगुनौ
पोलियो
५ नीजौभागपचनौ
घटो पायोफत ५
रेरवाफे बीच टोक दीजिये
फल पाये
४
१३ ५सोलियो
यथाधान धरि जोरेने पायो भागफरः २३५
संघातरहिये गुनियोग एकरूपले समाजमा वर्गकहत हें औरहनह कहन समककौवर्गलहावेजानि विशंकानिरसापुर में गनिये नाके पातौ/ जून मूल अतिके अंकको, कृति सिरलाकेयारिकेवर्गको सियासत्र / वह मकयुनिदुगुनका सपशंकसबनारिविधिसी से नवनी) इसमेंटिकवह तिको पुनिराशाहिसरका करिनसभासवगनाई ति। नीति ॥२॥२६७ केपर्ग कीन्यास् जैसेाि की मिटाइ २ अयमूल विधिसूचावल बनौ प्रहा टीक चहूदी चंति वियस चिन्हावरीचा पाच घटसुवर्गघटान गतासु/नाडू फोयरी सिरपरष-/ लीलावती अथवर्गमूललच्नदोहानिदोड, समगुन्यो मूलनाहि पहिचानिसीवर्गविधि तिजसको फलसीसहियथायान चिवला इ॥२९॥जो शंकजुभवभयो, मंतिकको मीन तासौंफरिपूरक्रिया लेहवर्ग विधि कहोनसें पायोवर्ग ८२९६ २१ पलिकेकसब शादिति प्रस्टोफ विपमहसमनि ना७ि वियससमचिन्हकरीयविवेक अवतार सिंहेश्नाको हतनाको मिरची फिरतालोदूनौं ४ नसबनेपनिनकेसीसह भयोऐसे फिरसन्मक हरिगीसर-४ कायो भयोएस- पदपूर किया, कोनीभ्याएसे फिरलोप फिलीद्वारे ८ * एश दाहिये अंक समूह ४६६७ साग को रहो रोपायोवर्गक ऐसे याकी ७८२९६ لاین و تی कर ऐसें निहिफालकीपुनिसमर नेदमागकरिटूनाफत (निपम चिन्हाफ मैदोडकोलमिलताकौवरग, विपमतरेकरिऊन ॥२५॥ लीनीनाको भाग फलपायोमूल विधि,माइगाउदाहरनग८८२० स्तीलायती वर्गमूलको फललहिपृथकलिखाव ॥१४॥ पुनियहफल फलप्रथमसंगयथाथान धार दूना करिपुनिधरिसमसकतर भागले करिन्यून॥२॥ऐरों पंगतिसुदलों, किया करी चितलाइएकवरगट्कम भागकरि लही १८२०४ कोमूल विधि सेंपदिलें विपमरामचिन्हा वर्गचार र घटत है सोया नेवाकीरहे ऐसे पायोमूलको अंकदो कै पडलोपायोताको दूनी कति (समा चिन्हांकनरैधरि भाग ताको पहिलै फलके पासयथाथान धस्वी ऐसे २९ अश्याकीवर्गहिनीय विपनाकनाई घटायो शेष रथी ऐसे ४०८ फिर को टूनो करि तीसरे सम अंकतर परिभारा७ को पायो सुघयय श्कोवर्गनीसरे विपमदिन्ही कनरें पदाइ दीनौ अंक हो भयोपायो मूलांक फल याही संककोवर्गकीनीहो मूलकौन्याहर ८२० पायो मूल अंक वर्गरको प्रथम फल बाकी र सफलदूसरे भागगुनो ४ ४२ फलगीसरे याको ४१ २६७ टीकमूलकी भाग गुनो ४९०१ इतिमूल अथ भिन्न किया विसम छैद विधि दोह्मास्यांशहि तनि प्रतिहारकरिहर अरु शिंशगुनायगछेदनजबसमहोइसब तबस औरभानक में भारापाता भक सोभात्य भानसमें भाव लालेइ केभाज्य भाजक को। लाघव रे मोहे भाजका कहा मैंयही कियाफारस प्रवर्तन होत है ऐलोअंक भादवनोकरिने जैसे यादाहरनमेंसान को आंकहै कहियेपूणी कि सौ लव कहिये अंश सौ हारकहिये भाजकांकको सुमछेद कियाऐसें करिये परिभाइरादा उदाहरन कंपनीनलव/पहिले के हार विलोग 37 सस छेद किये भा/पां सानकरि अपर्ने भए प्रथमभागजा डीसऐसें भई-- भागहरकरिहरगुनिलवुर लवयह सवर्म पुनिता आधे कोई निहाई/ सभाग॥२९॥उदाहरन पद्म दल के हैन /पनि ना निहाई की ची/ सु कोचरन दियोबहिसाच ॥२२॥ न्यास शिको सोरहीं अंग/ गलवपुनि सोरह नानासंग नि ना पांच / नीलादती मवेद कहाव ॥१॥ अथवाकार अंककरिहारन अपवत्तीइ पनि पूर्व विधिभशहरू शनिलाध- यांचयनुल्यहारकरिजोरिगलवत्रेस्ट बौं चौर दहें, लवनै धादिनुहोरि ग२०॥ न्यासजोरि अंशजोरेभये घदाय कोन्यास पेसें करि अवर्ते भये का समछेद काय भयेऐसे 7 नवमेदोईघटाएमये लक्ष नगजहांभाग प्रतिभागको लहियै वह प्र. शराराराराजगगनभुर्य पालाहरगुनभय अपनोस्वांश । छोडिचासो शहरने भयेऐसे ये में स्वाश छोड़ि के पार सब शंकगनेभये ऐसे दमकहिये कहावनर नाके /पन और एकपने की को /बहादनकी कौड़ी ९० ट्रमर पनिटम की प्राचा चौचाई पनि नाकी पां पुनिनासोरही शंशकी चीयाई भई कौड़ी एक ताको रूपऐसेएकदा १९२८ की Kster A लगनुबंध जहां कोशेषाई पसाड्ये नोपहि खए निखियो नीनरूप की चारिहरली गनिएको नांक एकादिको प्रशासरिसपर्ने भये १९४० नाकोमई कौड़ीर यो प्रथा घटायो चाहिजथलंदाजुरंधरुलवाप्रवाह वाई नहीं जोगीन के जाल में यह जहां रूपते वादपटशएककोहोइ ।। रूप घटायेने भयो रूपऐयन॥२४॥उदाहरन॥नीनेएककेचरन पारि ऐसही दो साल चारिदोइ गुनिएक/सफारिसवर्ण यह जोइ॥२५गन्यास तीने भव्यरुपपेनेनदको वीमा भए ऐसेंनी दाइएककेचरनज़ब काये पहिले जोरिव को उदाहरनेकजोगमैं नाकी भारध मिलाय ॥वसुलव । पायई भेनाया हा घटदै हिलत में रिपिल्लवनीनपटाय ॥२६॥ लीगायती सारहरगुनिफरौशाहिधनरिनसोड्॥२३॥ खांशऊन जुनदरहिकार कुरधाराएनिभर एक चरनजुतदोई। कनकरिलव ननुबंध रूपकौं चौरहरलैं गुन्यौ औरएक अंशपटायो भए दूसरोउदाहरलाल विलय यसुलवघटदन में व्हरनवसमांगहिजोरि गगकरितीनीएशकहजुवघटिनिस सु टोरम २३॥ न्याह का चोय ईजोरित को रूपऐसे सवा दो सो पहिले- निहाईएसेंजोरी अपहर नाहकपदररनै गुन्यो- ध्ये फिर हर ने रवाशा जोसोभय श्यामरिकमा कोपनीय गुन्योभरणे परफेर राधहरले दोइनोकरशहर और रोंगों ए धिया उधार गन्योभएऐसा नोकोवार सौभपरपी गरपसें । एव दूसरी 4 घटाको है है निहाई में 'वेनाको पाठो संश घाट मरिजोदाकार ताकौसानो काममा निय नौ पौरपटाइ दैनौ बाकी गुने भये सपपर्ने भयेशदूसरीरपहर २४सागु/ उसोत तिहाई कोलहोभागपोच में भाइ। सीसगउदाहरनूपठाइवे) विलवाहि करिभागोल्लेव कहीभाग फल तोरिवको है सुपहिले / लीलावती अधकरवहरदात कारवाशऊलजुन क्रियाकार के भयोऐसें सिदारा अपर्वत भये २४ाच ॥ अथ भिन्नगुननसून लव करिलव गुनि परसपरहरकारिहरहि गुना इाहरभावकलवभाजकोभागगुननफ्लभाइ ॥२८॥उदाहरन ॥ दो जिन्नव जुन गुनी सप्तमार जुन दोडवहर बिल्लबदलवधकही गुननलास जो होइ । गन्यास उदाहरन शस गुनेभए ने अथ भिन्न भागहार विधि।भाजकोकके अंशहर अदल बदल हरिदेव ॥ मिन गुनन विधि पनि गुन्दुभाज्य संकपलनेह ॥३०॥ भिात भात्या चाईगशान्यास भाजक संशहार वदलैनेभए ५ यापूर्वदन पहिले अधहर/ ताौकरपहर३ सौं 'गुन्योभए२४ फेर साटमें सिस्वाश रघटायोभए. याकरिफधीशन योमरफेरसपहर मोभए फेर मेस स्वी श३घटायोमएध्याकरित ऊपर कौऊपाशगुन्यो भिएऐसेर लाजपवर्तन /५६ने कियोभए करपदरात करिश्रम मानका भाज्य चरप्लेस्वशघटाइ कधीशसौगुनेमा २ सेफेर सधऊरपहर गनिस्वाराजोरिक पारागुन्योमएऐसे टाकोरुपभयोऐसे کی تی - एपवते भए सपनेनेभर शहरवदन भए योग ५ पाठीक राजक भागभानाभन्यपफान ५ का . विट ५ गुनन शुनगुन्या . ८ ७ ८ पारनौपकी टन्यको भा/गनकजौकिहंअंकको होड़ जैसे कोसोरस पिर अकलून्य कौगुनन कोमागचेसठभयेको अंशोभात ॥३६॥ पोरजा पर की गुणक हरि करि कैंजो शांकवचाताको विलोम लीलावती १९ योग पदक भयेऐसें मारेसी शर कीयाहीकीया ३ पायो फल अथ भिन्नवर्गमूल। उननानुनलागुन्यो । फल संशहार के वर्गई पृथक पृथक करिनेखि । फरना यहीरीनिहै मूलको भिन्नगुननविधिदेखि।२२५ उदाहरन "साने अरथको वर्गकरिपुनि सा- की कुरिमूलान्यास "उनचासतरचार कृत रिपिदेलपद जिन मूल ॥३३वर्गमूल । अथशून्य प्रकर्ण निमकेभागरुजीग मैं रदैनंक सोइ जानि शेषभाज्यनमकोनभै गुननवर्गन मानिनममाजकनर्भ- अंकसुजानौलोद्॥३५ उदाहरनावग निजोरि निजदलव्ही करौ तीनकौघाताखें न्यास ।गुनक क्षेपक गुनकर भाग दृश्य शून्य गुनक सोर शून्य भाजक गुनक क . शून्य में एक बार पिक मैन्य जारे ने सोन् पारशून्य को वर्गवर्गमूल सवशून्य व्द नाद- गपत्यायन्यमै पो को /भागमीनियनीभाज्य भा . जिक ज्यो के त्योहै- हिरापाव्हे जाद और अन्य नौशेष हे शून्य शीर भाजक दोनो शून्य दो सो एकज्योंका । पाठ किये। بین و याकोहरानी हो असे याउदाहरनमैं को निजलवघटे जुनथानमैं लवचट जत करिने का अर्थ यह है जोगह नहां विलोम किया समै में पहिले कोजोवा भए रनववीधस्वीऐसे नहोजाक कोलाम हो इनाको मानवौं संशतिगुना जोगस्थानमें घटाएने अंक 'शुद्ध पाने औरजहांएकतीन/ हीनस्थान है ना पहिले हुहरभयोलदवही धरली से महा विलोमड़िया समे ये लाभांके कौदनमारने अंक (मुहपाद काहे नै फि जहां/ पको दलमारने और पूर्णक होइ एसेही जहाँह को काह शनिगुनीघटाइये नवपदोंक २० कोटहीन कलिरहे१२ मूल) धान में वर्ग कानी भए २४४ फेर। 'दीन थानभै ५२ौभएर पनिदर्गथानमें मनुकानोपार/ १२८ फेर होन स्थान ननामा 'क९४ कोटलजास्पोनेपर स्थानमे सौगुन्यो भार जोगस्थान में महेशेपच्गुन । यान में भाग नीनमै घटाएतेश्य निजलवटजत थानने लवघट जुन कार मी बाई चाट कीजिये नहीं) विधिरीत॥३॥ अथ बिलोमविधिउदा कम जोगीजिएनहां सा- तिगुनचरन वयं जोगनिसातभाग दिला दीथाई होनटफेरजो सलमा/ नाकृत वाचन वाट मूलपुनिवसुजतफलदस- जयाग्दाहरनमै दृश्य। लीलाप्ती२९ विधि कारकै पायौफल २४ ॥अथविलोम विधि गुनस्थानमेंभागलेभागस्थान गुनाव वर्गथान मैं मूल करिमूलथानवर्गीवजन थानमैं योगकरियोगस्यानदियोगादाई लदिइहि विधि उलटिगशहिपावतलोग॥३८ तानिहिंदर करिलव वहै धरि पनि दिल्दोम दून न्यास गुन ३स्वाशजोग भा॥७ हीन ३वर्गः हीन५२ मूलजोग दृश२० विलोम विधिकरिपाईएश अधष्टकम प्रच्छक कहै सुकरि किया इष्ट अंक कोदपाइ सलहे लाभ कोभागले इष्टरु दृश्य गुनाद manपच गुन निनलव नीन घटि ना दस को भाग । रारा विलयदल चरन wattsCudae शेभाना शरण لیلاوتی अपनेलाभकोभागलो यते पन्नान गराको ला भदोर जैसे इहा ३ को प्रकइट कल्पना कार पाठक कीस्व कियाताऊपरकीदी। सिनदृष्टांकसौ कार के निीकुछ लाभेट्टोइ ता- नई यही किया काहक का कहनादतरदाहर 4. इहां प्रछक पायालामफेर इष्टऔर दृश्याइसौ गनाएभरे२०४ यादा लाभकोभाला जोई अज्ञातरा२४ दृश्यजात केस अंशममा देदकरिजोरिकै पकन घटावेको तात्पर्य यह है कियेहु सब एक शोकको फिर पछककोहरखए। कसर है याने एकमेव पुनि दृश्य सुनिशान उदाहरन पदम कोष्ट प्रकल्मीनाकेन्यासारसमछेद करिजोरिएकमैने | नाकेदुसलवानी काटकर्मकरिधरा विलोम विधिकरिसमा ससने २ लालवहानरपानकोदृशाहसमभागानुरलङ। भागलीनी पाईरामर हकहिदेहपनिण्शज्ञानसभा ॥४३॥उदाह लीलावती मिलिअरसठशकरलाग॥४॥न्यासंद३ पांच गुन २५ निहाई हीन दसको शार भागामैं इष्टांश कौंसमछेदकरिजौरेभये इटसोरदृश्य ईगुनेभये २०४यामें लाभ कोभागलीयो पायोएश नंक४८॥अथइष्ट कि तरहस्यजान समच्छेद करि जोरि लवएक माहि करिहान फल कोलीजैमाग रबि गिरताहिदैवचे,गुरपदलाग॥ घटायेवचे दृशइटरकरिगनाइएकोमार्ग लिये पाएएशक९२० ॥ साथ शेषजाता नएएको शानदोहे गौरसुगम विधि। लाइ औपनातमेंटकर्स ३६ दीने वचे २८० नाके नबन्नवदोद ४० देके वचे ताको चरतेशदेकेयने । १२ फिर पीरहरपी गनायो पाये शेपनानमे विलोम लाम " जोग रहीन स्थान साई जोग कीनोभए ४७ होनस्थानमें १.५२॥ कोजोगकानी भए२१०४ फेर३ हीनस्थान में मेनोगकीनो भए تن:نی ११. एवाइ हरगुनि - Sanjoria लियाकोनीप हिलेभधहरदोई कौरवहर एक मो गुन्यो और स्यारा एक एककोदोइडरमैने घटाई. शेपरकाश सो उन्योभए रूपऐसे मेरे अधहस्कर 'धस्वागघटाइ शमोगुन्यौभयो ऐसे करनी ऐरोश कोनीपाए जाने सिरेहरसौं यही क्रिया कोनी भयो विरूपऐसे फिर चौधे, रसों सारसाई क्रियाकोन श्ययाकोब४५३६०यामें ४कौभाग लिए भरोह रूपऐते पाईराश५४ लवावाहकारिहश्य इष्टानिलामी ९२ में अपरत कौभागलीयई पायोसकर४०॥ अथ विश्वभयोरुपयाको दृश्य ।। जातशएश बिलवपुमिपंचलदद कियो विहे दुष्टरगनाइको भाग लीलावती नादलके नवनवदोड्दै परेकोदैपावापुनि दसवलोपके दैवेस्ठ हियचावणान्यास लोहरको अंतर আক্কীদ্বীনীgs গী कान को खतरनिगुन्युनिक्योमएक ४५ान्यास शिजलन कोसतररैलिगुन किये अपवर्नेभए समाकोरूपमयोऐसे सफ९५ साक्रीतिहाई सम छेद करिएकमेनै घटायेाये हय घाट ९४ पंचमाए ३ युनाइलाभ कोभागलीचौपायोसंकर शवपर यहइएकमतिर मथसंकमण जो कोई अकदेशतर भदौ दृश्य के धान जोगसुनाइ ॥ अंतरघदवद जोगमैं करि दलास कियाफनकभागली ए बताद ॥४ाउदाहरन जोगदहको नि अज्ञानगएको बोध साट है अंतर दस को मान रिणदोइनकोलसहोद्॥ कै लीनो पाईएश वही ५४ अंतर निगन لینا دی पूर्वरीति राश्यावर महाएक रागभई प्रनिदोउन को अंबर४२ अर्धवयह दूसरी गुनको पाचौकरिकार राजोगा जोग संक्रमीसुनान ॥४७॥न्यास गयोगदुह पुनि नाकीवर्गदशांक में सवालामलनिकरिपूरवरीति।४८उदाहर- लेनोसोदो नोभेयांक कोदाराशकों कादूगुनकगुनाहगार एननोरो होइनो, लीलादनी रस कोई अंतर इनदोनकोनोरिकेसाधौकियोपाई एकराश्३५पनिदोउनकोऑनरकरिसाधौकियों पाईदूसरीराश२५ अथवर्गसंक्रमण राश्यातरकौभागलैवर्गातरमेंमीताराशजोर आंटतरदैराश कौवर्गातर सौचारि॥साहे गशविचारिकै चातुरचारु उचारिटीन्यास वर्गातर४००मैंराण्यांतरष्कौभागलियोपायो एशनोगताकौंपूख विधिकरिकपाश्श अयमूल रोपजान ग नौ पूछे जोरि वाटिकरि पोषवनाइ ४५० ५ गुन दल कृत मैंजोरिडश पुनिताकोकरिमुल्लापुनि गुनिदल करिघाट बढ़क्रम करि ताहि न भूल ॥५२उदाहरशमूलदल सात गुनदै उवरे दोहाकही राशवह कौनसी मछेद अपवर्तन करिनोरिदै । के ताफे मूल में फेरगुनकार जोर दीजियेनी पक ने (घाटकोनो होड्दी और गुन कार्य घटाइ दीनिये जीपक र साई अचान एरहो। रकमकरिघाटवाकरिवेकी पर्य यह है कि नौपदकनेमून। होइनौगुन दन नारनोग 10 लीलापती हरन । मूल नौगुनौ मिलिभये वारहसैचाली गएकी दूलगुनघाट चढ़/ साईभयोराशभकर६॥अथोरिव काउदा विराट को अर्थ यहहै किनो/ पपवर्गदरयहरशपाई अथ मूल लगुनदर जोरदुराईये फेर हुने होइ सुरणसभागघट जुत करि लल/नर मे भाग लिये नै भयो/ एक गुनहरा मैलेभाग॥५४॥दोऊफल एमलगुन और दरपुरया/ भाग के दफगन दहशमानिगइन दोगुनमरुश करि करि/ उदाहरन "मूल दस गुतीय को और वर्ग में शुजारिरी नाही, सिगरेपंडित लोड्॥५२॥च्यासममूलगुन दशगुणावर्गवन्यजोस्वोभएमा नाको गुणा योग अपपर्नेभए४ वर्ग वर्ग अंकलो कौनसोजानतसकल वुधीसा॥ न्यास मूलगुना वर्ग दृशजोर भए ५१४२ मूलगुनार्धन कियेभएर का और भाग कोसून जौघर वढ़ निज लव करि क्रिया फिरिपूरवविधितानि ॥ ५५ ॥ होई और राशको प्रदेशबाट 'बहहोइनौ ताकी क्रिया पस • सैयाउदाहरन मैं लर कोंएकमे घराये के ठबौंभाग दान कियो नब छहबचे कौन सु रिशसभागमपन्यास मूलगुनरूभाग के सोई पुख कियागुन मूल निकासकैफेन दल/ जोर नाको वर्ग पाईए १९५॥
•ive- उनताको दल याको दुर्ग या हरा समझेद कारकै जालो भयो । पाको मूलष्ट यामे मन उगार्ध नारे ने भए भाग लायें नै गाए। १२ साकीवर्गसोई १४४ वैएशक कहिये जामैं मीन राशप्रगट होंहि भारत निवे की इच्छा सोरफल पान प्रमान भाग लिये जपाइये चौघी मनानगर) हरदो सप्तांति गुन सामान होड जैसा जोएनेको ग्वी नांदना भाग लियोपाए यह मूलगुनभयो फेरे। फल सजात है।नाही केन त्रिया किये चार राज्यांक २६ गथचेरा- की चारि बोलाकेसरिघानकी केसरितोलाचारापयेतीनदमुहर की जो मुहरके मांगति कएह॥५६॥उदाहरणामुहरसौनलव निगु को सनांश निगु चासोरजी तोलसमान जानेहोइनौऐसे लिखिन भरनमैप्रमानइच्छास्थान में मुहरसमान जाति लीलादती१६ एक मैं घटायोभणेश्याकरिमूल गुन कौदृश्यमैं भागलियोपारा यह दृश्यनाम भयो अब मूल गुनधु-औरदृश्यःकरिपरख शकहिलमान इच्छापहरिमादिभन सम जात फल संज्ञाहै मध्यकी इच्छाफलकरिघा, न॥७॥ नामैं भागप्रमानकोलेइच्छा फल गफल प्रमानवधरच्छहरव्यस्त निराश 'किती मिलैवजारपन्यास घुमाए फुले इच्छा इला औरफान गुनेनै भए३६प्रमान को भाग लियोतोलापायोकेसरकोमानायाउदार रपाई मुहर चारतोलाकेसरि एनौ नवमुद्रीकेती जीचाराती दोलाकेसर नव रकीपैये नौ चार नेला केले की पैये पायो फलहरे तोला केसरिकोमोरन । निमाना फ्लाइछा नाला मुहर नाना بر وت۔ कौवैसव्यस विएशकहोगबहतमोलला पंचएशकू कहिये नामें मी) गवीसबरसकी जुदतितौ केमोललहाइजानहै ना फल की. भिमान औरपलयासमें ब्लाकेतरैश-/ गुन्योभएपस इच्छा कौभागलियोपाई रुइच्छाकेनर कोहरप्रेमान कीहोइ.पांचपांचकीलर किती न्यास फलकोभाग रेहदारी इथपंचराशक अपंचतानवरशने चाना एकादश गरा/ कल हरवदलाइ पृथक पृथकदइपच्छक की पहोकिया है। पच्छ में अल्पायवधभागालैकार कानहाय लीलावती सोमाला अथ व्यस्त नैराशक मोलजीए फिलजहांदहफललघुमयसोडा उदाह- रन स्थानांसोरहवरसकोवतिसमुहर थिका- २२५३दूसरीउदाहरलामोती।मोती सानपरोइ होइ जुऐसी सौलर तिन मोतिन 'व्यस्तकीयाकरिपाईनरी१४. नि अधऊरध करिचाइ॥३॥बन्दव्यदध फललही बुद्धिवंत दडभागमा पएक मास नौ मूलकोपको हाउल्टीनिया फलफौलामहोइ काही दिज्यों ज्यों देह बढ़नी नाद त्योंन्यों मोलघटती हो॥ यह उदाहरनको किया व्यस्त त्रैएशक करि सिह होगहै का क्रियाको लापमानरूप है बदनमः विवारते मानहोइ॥ चरश्पगटहोहिं और छटीराश अज्ञान होऔर ॥६॥न्यास र कि यामें फलप्रमानही के नरै कि नरैल्याह के दोजपच्छ प्रमान शुरुइच्छाजुद्र जुदेगुनाइकै पल्पशि १० मलमलेकै जोलामहो। सेईमज्ञानराश है पमान के को हरहार लीलावती IN रख किपाकहिएपमा केनरे कोहरददले जदेवरवाजदेगनायेन अल्प राशको भोग नियो भयो रूप देसराव Homयोमा के दरको फल पारसन्यासग १६ फनमारहारमदल | दोडपच्छविकपच्छ जुदे जुदेणुनाइ भएर साराषदले भयो। पसाचे दोपच्छ सारद को रयिमासमैव्याजमहाकह सोह ६५ अथ सज्ञानव्यानलौदाहरण ५ ५ भयो रूपसे २२ ऐ १२००/६० भल्स एशको भागलादपायो ६ और मनात काल को न्याल । विक्रीयाकीने पायोकालमार १२ और मतान मूल में याही क्रियाने पायो मूलधन २६ दूसरे उदाहरनाहंद। सनिलय पर माहमैं सौंको जौफत पंचमांश जन पांच गपंचमांग जुन नीनमारकह साढ़े वासडती फल साख ॥९॥ न्यास फरल औरहरु वदलाइ दो पच्छ बुदे जुदे गुनाद् मिन्न गुनन कीरा पाए गफलदालमान ऐसे ही प्रशन मूल एएपहि . ४८ मसाएराभागऐसे र पायोभागफन ܀ ܐܗ ६ ud ८ २०७eo 1५२००० ८०० ५० -- १० ऑट जय सोफे मानलहिये।साढ़े तीनहाथ फलहरबदल दोक चाहियेपन्यास चना फलचौर नदएशके फलहार लीलावतील ताकोरूपमयोऐसे अल्पराशको भागलियोपाए ३० अयसस राश नदुराशकोउदाहरन । कपित्त ॥ भार हाथ दीरघता तीने विस्तारल्युलोऐसे पट बोरी साथ सोधऐसीएकपटकन्होकेमोल कौं पिसाहिये गनवराशीरयंभनी त्येक विद्या हातून मारह अंगुरि चौरे पिड रवि कहिये मौकोंजो विकाद और नौदह स यंगमाफेनीनी मानचारिचारिबादि कहा हरवदला अल्प लीयो पायो रुपये भाव न आने २४ पाई २०६ गन्यास नवराश लवार प्रय झीया ते पायेत्यैवान अयएकादशनाश उदाहरभाकर नगदोहरा । वीस यंस इक भाव पच्छु एनेनै भए भागलीनोभयो पाएरुपैया स्पिया जाना पाई। १८ प्रति रिश कोमाग बदनिदेऊच्छगनेतेभए) भागरूप लाभ पिटा ناونی वलि दीकपच्छ गुनेभए पि००६ किास ६ . भागस्यापार एकादश रागके मन हरीति भांड प्रतिभांड में मध्य संकवदलायापु- लीलावती कोतको दई मजूरी साठाकहादेहि छह कोस को दूर्जे चौदह कारवान्यास मनार पूर्व क्रीया विधिने पाई मजूरी दाहाल सरन/२६/९ ल कोस्की चौदहवंभ की यम मथभाडात भांड विधि मजा कि नि पूरव विधिकार किया ताफल को फल पाव ६७॥उदाहरनगचौपई सोरह केनुनीन सो आमादकफे नीस शनारसुनाम ॥ दस् सावन के किने अनार ॥ नीकै करि कह बुद्धि विचार न्यास २६ मध्य पंकवदन लिभयोरुपऐस। दोऊपक्ष गुनि अल्पगएको भागस्लीय पायौफल मनार ॥प्रय मित्र विवहार प्रथम सूत्र मानकालधनमालगुनि मिश्रकाल फलधान पृथकप्पथक ये लिखिषयमनोगकरी निभा न॥६॥पृयकहिगनिधन मिश्रमलेहजोग दोमाच्छगनेनै भए पायोश्तअनार ६१ दि (२००/३०/- (१७
Dr.
भएर सोकौंहजार लौंगुनिएकसौसाटबजोग मिश्रधन/
पृचक निहिरखंड लिदिःपुनिताकौकरिजोगविभागलीनोपयोव्यान
लीलावती२१
विभाग।पृथकस्मूल पुनिव्यानकोफलपादेवड़
भागा उदाहरलाएलमासशन मूल मैं च्या
जपाचक नान ॥ सहस मिले जो बरस मैं
मूलव्याज कह जान न्यासमानकालर
धनमान २०० गुनेभयो २००फलप मिश्रकाल९२
दोगुनेभए जुदेधरे जोग कियो
भागलीयौपायोमूल ६२५ फेरसाठको क्रिया
कोनेपायोव्याज ३७५॥औरसूत्र गमानकाल
भस्मानधन पहिले गुनिवड़भागामिश्नकाल
फिल घात कौपुनितामें ले भाग पृथक
कालप्रमानधनगुनित
पल मिश्रकालगनित दो
सो २०० करिगुनिन
एक सौ साठ कौभागली
निोपायोमूलधुन ६५
सिऔर मिश्रधन००६७ सो
गुन्यो ६.०० एकसारादर
मान् ३५
खंड मिश्रधनवधहिनिहरीजोगधनलोग
॥१२॥ नदाहन गरिनलीनी जननीन ते-
नीनमान कौव्यान प्रथमपचोत्तरपुनि दिनु
रवहर चलोतरसानासान मासक
किणाए-दूजे के दसमास । विनिय रिनी की
कानमान ३२ 'मान गनिन नीनो ध्यान सह मिश्रकार पनि टोमाटा र प्रियमभालीन में जीभयो । से हमारा येख- कहा कहा बहोरिमान्यास 919 P१८०५ १०६.. जुदेनदेशदे परन खिनको भोग कोनो सम करि भयो रूपरेस र फेरमिश्रधन की जुद देखंडे करि गुनाये भयो सामना खंडनक जाग र काभाग नीनो पायो मानो रिनोको भागनुदो जुदा को प्रथम पूव मानकाल एन.मानगुनि कार कैरान फान पनमानणनित तीनो। दोर.निकालफल गनिन २४. पाम १३५को भार तीनी पायो पीवीस धन को इन और३५२४को घात वा-५५को भाग पाय२४ कोपान दोनो रुपनको मूल ध्यानपायो . या मूलयमाज निधि निषकाला को असफन्तकाधान प्रम नोगत सभागफन्त सौ गुनाइनाके जोगकोभागलियो। की मिरधन २४ कोंगपाएपडे २४२७ इन खडान में मूल एनव्याजकोनोग४थक फनभाखि ॥६॥उदाहरनगलेकीना। Faरापनकोपयों लोलावती लगिरहीपांचमांसकी शाम ७४ातीनौवीन्द्र मिनधन कालातूरमानधन १००गुनेभएँ २०० सौमैंभारातियोपा सोग कियाभए २१५/फेर मिनधन औरजुदे दे मान मिमितह प्रयमसूत्र करि पथवा पंच एशफरि जुदोक्करिलीजिए।ौरसूत्र पृथक पृथक जन मनाहि नै मित्रद्रय गुनि गरिख गतिनधनजुनको भागले पृथक पृ. चापारनिनि नीनजनेधन जोगिएकोयन ५ कीयोभए । एक ५१ सारमानापमा भीनी मान भर यान मूल यिान राज لبن وتی न एक में भागबलि करितुरत बतादें कालमान दोरजोरियेशीमा बड़भाग उदाहरणचारिफमैं भागनीतिए नव/ लीलादीने अरसट बहरिपंचासी विहि और ॥१७ गभर नील सोनिययन सक्कलमूल समेत ॥ नित तीनों के भागफनजदेजदे करियेत ॥ १६॥ न्यास लूलधनतीनोके ५२ ६८५ निधन करि जुद जुगने भर ऐस २५३८० /२०४०० १२५५०० मूलधन जोग २०४ौभागलीनी पाए /२००२२५ याने मूलधन घटापनाभ नासपायो ५० और स्टन संदल घट्ल करिहारलव-जोरि हौद में चायी चारित्रकार एकभरै दिनएक में नौ दल मैं वारिगापुनि नीजी विजे- यांशमैं चौथौ च भाषा ॥ नासौ फठे जो छुटैं. काल मान कहिला ॥२॥ न्यास हार औरलन अदल बदल कौनगएऐसे रिश এ ঘঁহধৰি ৰীক্ষার संशन को नीचे करिये पार हारनौंकार करि मग कालमानकोलाभको 7. ८ یادون स्यास्यान दिय गोशममहो नौसमकरिजोरेदा नौ समझेदवन्योई है। नानासादास गुन्पोभए या भागजो मिषधन नरहपासवादी भागलेभाइ पृथकपृथक लिखितासुकोंपुनि अरु सावरकेचा माग करि जोगधराद्॥पृथक भागधन मिय २ याममा निभागजोगकोभागलिकरियेमोलफल योभागनीनोतल विएशकलाग ८३ उदाहरनग १७४२नावरकोल इमारमनःपैयेपूरेनोल॥६॥पाधिकएक। IITERAपरे । तोलद नासुको गुदी जुदो समुमार गवेग लीलावती २४ जोरेभए शएक मैंभागलीनेपायोकालमान औरसूत्र गमोलभागकौघातकरिभाव चांवरसाढ़े नीलमन एकरुपैयामोल गमापाग मांगनलग्योनेरहपाईल्पाइ चांवरके है भागदै गएकलवभाइ॥ ५॥ मोल मुंगोमाभागःकार मित्र धनगन्योभए रामा गतोग को भागलानो चारि। पायो गमोनर फेर राशक कारकै बोलाजा प्रमाल फन्लाइच्छा पायो चावर २ गोलापुरु - दद यह रखीचरी.लोगसंग को जाहिं । ॥६न्यासा रूप भागकोधातक्रिया भाग २/३ भरा भावरलिया भए पारस्य फेर इनको जोगकोयोभए हा मिश्रधन औरसावभाग सौं कि तोला अरुजी मंग पाये५६ साठे करि अपयते २४ स्वापर मूंग भावको भाग चावर VV ४ ८ २ लीलावती ५ لیلا دن কান্দেীখামার १ मिश्रधनगनितालय लोनी पायो कपूर को मोल ऐसेही चदनभाव करिगुन्योर क भये मान ६/१६२ युनिराशककरिपायोनीलम भागजोग ३६ को भारा/ सानादो को पैये तितनुहि तोलामाचौकी भाग लानौपायो/ धूप मिलाद सोरन धनलैमोल गजुदीजी/एस कटर वंदन, अगर/ मरुभगरयसु.चंदन सोरह भागयच्याएसौ चमोल तीनोरूप भयो। भाग ३१३पायो / याको करिअपवर्ने पायोक किएर चिंदनाचगर तोलमाल किपर चंदनापगर// फलाट सरुभगर गुनाभांग जोगकोभागलीनी पायोधकमोल न अथ और उदाहरलगनोलाए २४ घरको वत्तिसमुद्रामोल चंदन तोला अगरह है आना व्ययलागारककपूर पनि नासुकौ कहिदैमोलानोलान्यास कटर चंदन मगर/ मोलभागवध विरा भावभाराफल भाग ३६ जोगभयो ६ मिश्रधन २६ पूरव क्रिया करि पायो पृथक मोल फल पवित चंदनकौमोलाचयाही किया करि कै व्यगरह S पव ITA वैराशन कारकै ऐसे बोल जानिए कपूर २ve 'भए यत्तिम रकोतील हा ऐसेही । २४ अथ और सूत्र गदानरु नरगुनि परस्पर रतन मांग 4/ منو ته अपवते ایرانی पसरनिज निजधनतेंवटिगतव सब मिलि दिएभए सोई ३३३ मोदी चारनि कौतुल्यधन भयो। ARRIAC मोरेते भए सोईसकको चहै जोगजोकोइएकजोरि के लीलावती २६ घटाउ॥शेषभागलेष्टमैं पृथकमोलसमझाव ॥६॥उदाहरन गमानिक वसु दस नील भनिनोती सामनि पांच यहधन लीनौचारि जन प्रीतपरस्परसांचाशक के दोनो समधनभए पृयक मोल कद छांदि १६२॥ न्यास मानिकपनीलेरूमोती २००माणि ५ नर४ दान भिन्न इष्टप्रकल्प्योर दान नरगुन्यो भएटरतन मैं घटायेभयेऐसे- पनिष्य मीने मोती भनि इष्ट भागलानौ पायो ६६६/९/प्रत्येकमोल मिनि पानीम प्रमानिकदर २१ केभए १२ यामते नीन मानिक कोमोल दान कोनीप रहे२० या एक नीले को मोलसंधारएक मोती को मेलनथा एक मान को मोलनारि दीनो भयोधन सप ऐसेही नीले रुदर९६ मा भए १०॥४८के तीन घाट (प ९१२ मैंथराजोर के भए तीनपाटा ऐसेझ मणिहूजानिए अथवेदी विवहारसूत्र।एकादिकम राशि मैं राशशरपनि सोदाम उदाहरन एक आदिनवन को कहा संकलन हो इगएकजोरिनवमें वहरिनवदल सौं गुनि مام ईसौं गुन्योपायोनवके संकलनको फल ४५ संकलन कड़िये एक नागद/ हिजो कोई है जत पद संकलनगुनि वीन/ के शंक मैं रजोरिकै भाराले सोइ५॥ऐसजीलोंचाहिये.जोर पदार्थ में गुने पायोनवको एक नोरिकैपदार्य र चीन कोभागल्लीनो/ ६/७/चरसेगुनमीनोइसर पाएरायाह को जोसक/ ईवृत पद संकलनसारिक संकलन सों/ जनगुनिएकोभागाभाजक मे पिरी पंगनिभई सिइदाइ । लीलापती सो ॥६४न्यासगरभैर जोलोभएरल्याको औरस्सनगएक शादिसंकलनको जोग च. जोग फौभाग इक एक लेपक मैं बढ़ौ इक भाजक में लोग पान्यास, एकपादि शंक पिंगति भई संकलन/९३) १४ निश्को भागती सरी पंगविमई सकलन नीन जुन पदसफल See नुनि ४ोभाग शिथीपंगति भई संकलन चारजद पद संकल नोगको जोरा कम अंकका जो वीक सोई, संकलनकहा। " संकलनश्यासंकलनको 'संकलन नान्यो चाहिये तो में है नोरेनेभए श्याकै केसंकलन : सौगुन्यो २ ५ निचाहेनौर मे तीन प्रथम . 22 ४ Ca गिनिचारि कोभागलीने, पायो नीसरोसकलन ४-६५ऐसेही जहां नई से फिलन चाहिये एक एक मैं पढ़ायेनै का 3...
بیاوتی के संक को नाव शंकसोरसूत्र वर्गसंकलन जोच है पदनैदे नितनो नितनोपन दिन ५५ तीन कौभागलीनीपाए२८५ याही चारिसुदापहिले दिन तिवध सखजुतलहिधन अंद॥ पुनि के फिर दूसरे दिन पांचवा मुख जोरिदल-फरिमाधिधनलहि संत नेने नवोधन पहें दिन दिन लोंथों दियो दिमध्यधनमावि कहा लीलावती २९ नोरि सुनिताको संकलनकरि हरकरितीन वहारिपन्यास अपवूनौरू एकर जोरचौरीनवको संकलन४५सौंगुन्योभये किया सौंएक आदिनद दाई के वर्गसंकलन অভি Fetk औरसन्नगदोहा । इक घट पद अरु व- ८॥पद संख्याधन ध्वगुनिःसवधननोग सुनाव ॥ उदाहरन चारि दान करिम- घम दिन बढ़ती पांच गिनायु पंद्रह नास। दहापद कहिये मंति वर्गसंकलनजान्योचाहिये " इहोपदसंवा दिनसंख्या बढ़ती तयावय कहिए दिनबढ़तीदानकीनिए सुखकहिये नेनोधनपरिक लै दिनदान कीजिएतास। रवटाई के नौमुद्रा दीली) तीसरे दिन पांच और वतीकरि दीने याही नमसौं १५ दिनलोदानकी नीताको मति धन का पोरनो पंद्रह दिन मैं निर नौं आठमैं दिन दीजिए। लास मधाचन कहिये सब दिन की टीक सर्वचन ।। भयो पनि सर्वधा भात्यहिकीमाखि२०० न्यास पसाधिन वड़वी ५पद् ९५ - एकहीन पद २४ पड़ती ५सौगुन्यो मुख४ मुख हीन ॥एकरहित पदसरथको वामें ताकी विधिहिन्यास . म जैसे याही उदाहरनजौर दिनगिनिये नोएकहीन द१३ सौवयंपानिनधम यामें मुख जोरचौ७८ दलताको ३४ यह मध्य दिन भाददों दिन / धनके अगिले पिछलेधन के जोगार्थ को भयो फिरयामै मुखजुत/ होइनौमध्य धनको संभव नाहीं तहां मध्य मुख४ जुन मंनिधन/ लामहोड्ताही सी कार्य सिद्ध होइअथ योयह सातवें दिन भा/ न्यौपायेण्याकौं मध्यधनघटा और नौ दिनपमान स्त्रसवधन पदभागफल- नामकर नकी दान मनात होए तर लीलावती २१ जोरपो७४ यह संन दिनको धनभयो फिरि मध्यधनभयौफेर याकौंपद २५ सौ गुन्यौ यायौसर्वधन और जौपदके सैम दिन अज्ञात मुख राश जानिये कौ सूत्र ॥ मुख अज्ञान के ज्ञान कौंसदधन पद कारभा- गिक घट पदवय दल हिगुनि तामै दि वडमाग॥७९॥च्यासारख०वर पद २५ सवधन ५८५यामैं पद को भागलीनी पाए३८ एकहीन पद १४ वयार्थ फरि, पायौ मुखधन४॥सय अन्नात व्य अदलेश्३यहमध्यधन वें दिन फेधनकोसर्थ है। ७दिन दिन २० नाकीदने या पद५/ सौगुन्यौ भयो सर्व धनचौदह दिन कौ५२९ अरु यती भौर्वधन जानिए औरपडिले दिल यको जानिलीजिए।
पायकारनिरिन् ليل وتی वयार्थ पुरुसुख के ताको नान्योचाहिये ना जारितासुकौमूललेतामें मुख करिऊन समशंक है याकोबदतजारभये वय५ को भागली, विपम अंक है. लीलावती भागप्रवीनार०ान्यास ॥ स्वधन मैं- पदके भागको पलीतामैं मुख ही भू मैंएकरहिन पदार्थ कौभागफलपायोवय ॥अथ मनात पद कौसूत्र गवर्यदल मुख अंतरवरग सवधनवयवधदून ॥ नामैयदल जोरिपुनि चय को लीनैभागालामहोइ पदज्ञानको जाने सोवभाग॥१०॥न्यासावयदल मुखश्याकौअंतर ३/वर्गहसवधन वयसौं गुनि कैदूनीकीयोभए५८५०यामें वर्ग: जोस्योभये २४०४ याको मूल यामें मुखऊनकीनोभए सवय नी पाई पद संख्या २५ ॥ अथःकाहू गुनक मैं नित्य गुनाइ नाइ कारिदै वे कोसंत्र विमएक तजिगुनधौसम मिनरदेवरा में सर्वधः नवय गुनितकोगनो नो के गाफौमूल निकाले किमुखघटाय दीजिए शेएर मैंघयूदन नोरि के नाव (यको भाग लिये नैं पदा नछोइ। जोकाष्ट्र अंक की बदन विरका गुनक में प्रति युनि केताको ठीकू नौ कोई पर। यहसूत्रहे जसे चार सुपारी चौगनी सोलहवेरको हि- (साव है औरशनरंजकेचरन । में दूनी दूनी राखिदे को दिसाव याहीसूत्र सौं होन है जैसे कोई पूछे कि दस ९ दिनलाई नौ दूनी दीजिए ती सर्वधन कितनी होइनही फरि कैवर्ग दिन्दधरिये ऐसे पटायकरियनक रिन्ध क रिदूसरोवर्ग -- चौकी तीसरीवर्गरिन्ह परियवि फिरशेयकौएक रोडवताऐसे कियावरगननकीरीन फलेकघटकार/नहीं किया भारभ कीजिए। नदिन निगुना दीन । सात दिना को न चिन्ह है नहीं चारिको) कहै यातेएकघाटि करिकै गनचिन्ह वस्ती नभये २ किरवर्ग सादि उत्तर विगुन पद यह पद बिप.मी./चिन्हमै २६ ईगुनक मैं/ लीलावता३२ . दल करिकन्धारिसैंपदमिनिशुलौंगुन सन चिन्ह विचारि।२०४ाउलटिएकसौं करि तानुमै दक घट गुनहरमीन ॥१०५ गताफल कौंगनि भादिसौं सयकोटीकवानावाचाही विधियह कठिन पनि सुगम करौ करि चाव: २०६॥उदाहरन गदीने पहिले दिना दि सबके नीचेगुनक चिन्ह नडो पहिलेएकको है के गुनक मैं गुनाए नै दोर हो र फेर दूसरे वर्ग चिन्ह है वहां को वर्ग: भयो फिर तीसौह वर्ग, गुनक कही-केतोभयौप्रवीन॥७॥ न्यास ॥ बर्गर भयो ऐसें राफेरशेष समककी भाधी करि वर्ग चिन्न धस्यौऐसैंयफेरशेष विषम अंकने एक ऊन करिगुन चिन्ह गु पुनि रकौं साधो करिवफेररको दूरि करिगन वि. न्ह धवौगु भई चिन्ह बल्ली ५ गु उलटि नीचे कीयाभारंभ कीनीभवे०१५ याने एक घटायो १७२३ गुनक है मैंने एकपटादकैया मेंभागएककोलीनीपाए सोई ०२२ फिर मादि है करि गुन्गौशयोपर्वधन कौप्रमान २०४६॥ ग च लीलावती२३ -- कीनीनी पहिलै गुन चिन्हहै याने एक को पहिलै ३गुनक सौंगुन्यौभए३ फेर नाको कीनोभये फेरतीनसौगुन्यो भये २३ फेरनाकोवर्ग७२८ फेर गुनक मैं गुन्यो भए २२७ ऐसें पदांकशुद्ध भयो यामैं तें एक घटायो २२८६ गुनक हू मैं एफै घाटि करिशे परसौभागलीनौ पाए ०६२ याकों भा दिधन र सौ गुन्यो भयो सर्वधन २९८६ ॥अथ शंकपाश ॥अंक धान मिनि मान लहि एक शादिषयघान सोई संख्याभेद रूपदेखि विख्यात ॥९८॥ अंक जोग सौं भेदगुनिःभागथान मितिलेह ॥ यथा थानधरिजोरिफलभेदजोग कहि देव । ॥६॥ उदाहरन । दोई साँठ के भेद कल भेदजोगपुनिमापि पनि नव वसु त्रयभेदकङ-नासु जोग की सापि ॥ २२०॥ न्यासाचयाके थान २ एक नादि लीलावती A Abla pelle Other Maste VARLIA दभएऐसे ३२१४ २४२१ ३४० ૨૪૨ २३७७६ १० ४२२२ वयांकार इनकौघान२भएसंख्याभेद२, २१४ रिौं २८२ अंकजोग याकौं भेद सौ २३९४ ३९८२ गुन्योभए० थान मिनिर कोभागलीनौ २३४२ पाएकथान दोइ मैं यथाधान धरि जोस्पो २४२० भयोभेद जोग१०॥ दूसरी २८ न्यास्॥१३ थान३ ४१३२ एक आदिवयांक ३ इनकौघात भएसंख्याभेदऐसे रिवारवासाच्यावर संक जोग२० भेन्दसौगुन्योभए १२० थान मितिरको भागनीनी पाएनीन धान मैं भेद२४ की ठीक यथाथानजोसो भयोनेवजीराध८४० अंकजोगाचाको दूसरौउदाहरन ॥गदा संख मेद२४ सै गुन्यौमये चकरु पदस, चारायुधभुज चारि अदल २४. यानमिनिकी वदल जो हरिधरै निहिवपुभे विचारि ॥ भागतीनो पार चारिवान. या २९९॥ पूर्व क्रिया करिकैभये संरण्याभेद थानधरिजोनौऐसे २९ सौरभेद जोग६६६६०॥ त्यातून पनिनथानन में अंकसम.तिनसव के कार दीकसोई६६६६० ४२१२ ४२२ लीलावती२२ कीनीनी, पहिलैगन चिन्हहै याने एके को पहिलें गनक सौंगुन्यौभए३ फेर लाकोच कीनोभये फेरतीन सौ गुन्यो भये २१ फेरताकोवर्ग७२८ फेर गुनक मैं गुन्यो भए २१८७ ऐसे पदांक शुद्ध भयो यामैं तें एक घटायो २१८६ गुनकहू मैं एफे घाटि करिये, घरको भागलीनी पाए ०६२ याकौं आ दिधन र सौ गुन्यो भयो सर्वधन २१८६ मथसंकपाशाशंक थान मिनि मान लहि एक आदिवयघान सोईसंख्याभेद रूपदेखि विख्यात ॥९॥अंक जोग सों भेद गुनि.भागथान मितिलेह ॥ यथा थानधरि जोरिफलभेदजोग कहि देव ॥६॥ उदाहरन ॥ दोई साठ के भेद रुकुम्मेदजोगपुनि भापि ॥ पनि नव वसु वयभेद कह-नासु जोग की सापि ॥ २० ॥ न्यासाचयाके थान २ एक झादि ۳۳ लीलावती३३ ut all paita inteleir see HARYA PRstak भेदभएऐसे ३ ३४२९ ४२१२ ४२२२ वयांक इनकौघात भएसंख्याभेद२ / २२४ ८२ अंक जोग याकौं भेदर सौं, २३९४ गुन्योभए० थाननितिर कोभागस्तीनौ २३४१ पाए० थान दोडू में यथाधान धरि जोस्पो २४२१ भयोभेद जोग१०॥ दूसरी २३७७६ ४२२ १० न्यास् ॥३/थान३ ४१३२ एक आदिवयांक ३ इनकौघात भएसंख्याभेदऐसे रिकारच्याच्यावर संकजोग भेदसौगुन्योभए१२० थान मिति कोमाग स्नीनीपाए ४० नीन थान मैं भेद२४ कोटीक यथा थानजोली भयोनेदजोग४४४०. अंकजोगाथाको दूसरोउदाहर ४० नागदा संख भेदर सौ गुन्योमये चकरु पदस, चारायुधसुजचारिणअदल २४ यानमिति की बदल जो हरिधरै निहि वपुभेद विचारि ॥ भागतीनोपार २९२॥ पूर्व क्रिया करिकै भये संरख्याभेद थानधरिजोन्सौदेसे २६ सौरभेद जोग६६३०॥ सत्पन्न ॥ जिन थानन में संकसम.तिनसव के कार टीकसोई ४३२१ ४४४० चारिधाननै पया amom -
नीलावती
है
+संक जोगभेदह ६
सौगन्योभए३६ थान मिति
की भागलीनीर को
चारिधान में यथायानधा
रिजोस्योभएटर
भेदाप्रथमभेदमै भागले मे विशेष सखेद
१९९२॥ भेदजोग कीरीत पै. पूरब विधिही जा
न कपाशसंक्षेप करि इतनीही लै.
मान ग ११३॥ उदाहरन ॥ दो दोइक
एक मिति निनके किनने भेद ।। भेद जोग
पुनि तासुको हमसौं कही वरखेद गरा
न्यास ॥ २३ २१ पूर्वरीत सौं शंकवादि
के भयेभेद २४निनथानमैं सम अंक यहां
पहिले दो थान मैं सम अंक तिन के भेद
फिर और दोड्थान मैं सम अंक निनदूं-
किमेटर दोनो कीजोग४.पहिली क्रीया
के भेद२४ मैं भाग लीनो पाएमेद्द्द ऐमैं
(२२१ १९२५ २१२२ २३ २१२९ १९१
अरुभेद जोगी। दूसरौजदाहरन
चारि भोट पनि पांच रुपाच पांच मिति
जोड्ग निनके संख्याभेद नर भेद जोग
कद सोड् ॥१५॥न्यास ॥१८५५५ दहां
--
जोगभेद پراق थानमितिएकोमागली नौ पाएपविधा नमै यथा पानधार Pa Nee जोरे भए ३ (५५५४० | ५५५८४ पपच्५४ ५५४५ोन सूचौहोतु है याही/ (५०५५/५४५५/५९७५५ ५४८५५ केवीचा ) भुजमान॥२९॥करन वरगभुज वरण को विभुजदेव चतुरत दूसरे PO लीलावती३५. पूरब विधि करि भेद १२० तामै थान तीन स- म अंक नैं उपजेजे भेद ६ तांकौभाग तीनो पाये संख्या भेद २० ऐसे रूप ५८५५४५४५५०/५५४८५ ५५८४५ ४५५४५५५/४०५५५५५४५ ५५५५५४ ५५५५ ४५५५ इनकी जोग (सन् १८८ ॥ अथ क्षेत्र व्य वहारारंभ ॥ नि जलेव चतुरस्त्र मैं, मन लघुभुज की भुजानाम गमध्यनजा कौं चाल, कोटि कहि दीर्घ कल अभिगम ॥१६॥ कोदिरुभुनकरजोग पद करन मान है जान॥वर्गान्तर अति कोटि को. मूलमानि अंतर को पद कोटि.समुनि गिनी या * चतुरस्तवमैं विभुत कहिले कौतात्पर्य यह है कि जा चतुर्भुननके दोनोक्न बरावर होहिंता चतुर्सन मैं जो त्रिभुन कलिये नाकौर विभूजको इहां कामहै या विसनमै हैरेवा शुरु एक अरुतिरहीरेखा अरु है कोनयाकी के निरले होत विभुन सूचीमूना विमान कोनसी "सुनारुपी, याकानाम शिकार सोहि ऐसेंAN ऐसे विमुजे कोदहांकाम नाहींयाइविभुनभेद एकजाको दीनौ नवरावर होहिंदूसरोभेदनाकी है विराटोहि अरुनी छिटी बट्टीहोइऐसे समभुजविभुन या विभुजौंसमचतुरभून भैकल्पनाकरित कियेन्या नहोइऐसे याहीसा जाके तीनो
करन ।
५
दिभनवरायर है सोश जानि ॥नहीं करन को मान कह- पंडित
लोलादतोस
गिनन को होइनतामै खोटि ॥१९८ गाउदा-
हरनाक
कोटि चारिभुजतीने को,
कही विनु खोदिकोटि
करन मैं भन कही भुजा करन कोटि ।
॥१६॥न्यास भुज३ कोटिनको वर्ग
कोटि
जोग २५ ताफौमूल५सोई करन मान भ.
यो।फेर करन और कोटि कैवरगन की
अंगर याकौमूल ३ सोई भुजमान भयो
॥ फेरमज और करन ५के बरगन को
अंतर १६ ताकौमूल ४ सोई कोटि
भान भयो । अन्य उदाहरन ॥
सवा तीन है कोटि जहं भुजा तिननी
सुघरसुजान ॥२९० ॥ न्यास ॥ इन कौ
बर्गजोग
वोद कर अपवर्ने भए
सयाकेशुद्धमूलको अभाव है नहां
करनी गन विधिौं मूलानु मान पायौ-
त्रिभुज
याविभुनमैसीनो मुज
वरवर कोरुभव नाही
फत्पना फरिए
pi लीलावती । लवहर गुने नै भए ४०. अथ करनीगत विधिसूत्र गलव अरु हरगुनि फिर गुनो यड़े इट- कृत नाह।फेर जुदोकरि लिखिधरी नासु मूल कीछांह ॥१२९॥ दृष्टरहर के धान की उनि यामै लै भागयाकोफलनोइम्यूनलहि करनी गत विधिलागल्यास भुन कोटि वर्गयोग २३५२ वडेइष्ट १०० केवर्ग ९००००करि गुन्यो भए २५२०००० या कौतुह मूल नाही. यानै निकट भूल छाह पाई ३६७७ यामैं हर और दृष्ट १०० केवध८०० को भागलीनौ ऐसें ३६७७ पायोभागफल सोई॥ ४०० यही कर्नमान भयो। अवकसितभुजन अनेक कोटिकन उपजाइवे को स्टून "इष्टभुजा मिनि दूनकार दूजे गुनावगए करहित कृत दृष्ट को तामैंमागलहाव॥१२॥ लाभु नासु कौकोटि कोटि इष्ट दध माह । ८
لینائی
नीलावती
निमुज
सुन
सुनाघाट करिफर्नलहि दिनुकरनीगत लांड
॥२४॥ उदाहरन गारह भुजके खेत में
जैजै कोटिरुकर्न दिनु करनीगतसंभवै ने
है विधि करिवने ॥१९५ान्यास गदृष्टभुज
याकोदूनी २४ दूजेइष्टर सौंगुन्यो भये ४८
इष्ट वर्गएकरहितकोभागलीनी पायो.
कोठिमान १६पुनियाकइट सौंगुन्योभये३२
भुजए घटाये नै पायो कर्नमान २० मार
तीने कौट कल्पना कीने नैनीभुज २४ सी
सुनेच्या दृष्ट वर्गएकरहित कोमागलीने
पायो कोटिमान पुनियाकोष्ट सांगुन्यो
भए भुन१२ घटायेने पायोकर्नमान २५॥
स्मथ हतीय प्रकार । और इष्ट को
भागले इष्ट भुजा रुन माह । इष्ट
ऊन जुनदल लहौ कोटि कर्न की छांह
॥ १२६॥ न्यास ॥ इछ भुजा ९२ को
वर्ग ९६४ में और इष्ट २ कीभागलीनी
पर्ने
भुन
--
लीलावती ون ون पाए७२नामेंट घटाय के दल फोनोपा यो कोटि मान ३५ फिरइट जोरि के द- लक्रीनौ यायो कर्नमान ३१ चारि के इष्ट करि २६१२० छह के इष्ट कार १९५ अथ कल्पित कर्न कोटि शुज उप जावे को खुनु । अनि दूनी कार इ- गुनि-नामै लाजै भाग ॥ इष्टवर्ग इक जोगको मिलै कोटि कौलागालोटि दष्ट बधहीन नि जानौमुजाप्रमानासमित संभव कोटिभुजइहिं विधिसुघरसुजानार अथवा गलेइक जुन कृतद्रष्ट को कर्न दून मै भागफल शुनिमंतर कोटि फन दुष्ट घातमजलाग उदाहरन । कने पास कि कोटिभुज.जिते नित कहि सोइ ॥ विधि अनेकजे सभ३ करनीगनिनहिहोइारा न्यास कर्नरूदूनी ४ दृष्टभ्यग्निच्या इष्ट वर्गएकजुन कौभागलीने पाईनोटिव फोटि 'निस
लीलावनी १०
वर्गएकजुन १० को भाग भुज२ इहां भुज कोटि को नामभेद है
भयोभनमान. या गुन कोटिरुभुतिरुवजोग ॥ भुज
तात्पर्य यह है कियादौर प्रमान जौचाहिये वर्गनकरी वियोगक्षर
औरकोटि २६ इष्ट गुनिन३२ मैं कर्न २० चाटि
किये.पायौधुननान ९२॥ दूसरीन्यास
कर्न रुटूने ४० मेंइष्ट२वर्ग४एक जुत
कौभागली ने फलनैकर्नान्तर भयो
कोदिनानर औरफलच्दष्ट २बघ९६
भुजमानभयो गसौर३ केइष्ट मैं कोटि
स्वरूपभेदनाहीं ॥अथ कोटिभुनकर्न
आनिये कौ सूत्र ॥ इष्ट दो कौ वध
(फर्नस्टूनी ४० में छुट
सीनेने फल मैफर्नान्दुर
भयोकोटिमान
भागफल४६३
ऐसो कल्पना करियेना
निशामिना सिहदोई
न्यास गइट२१३ वधुडगुन स यह को-
टिभई और इटन के वर्गन कौनोग कर्न
सरुवीनरभुन ५॥ अथकोटि
कर्नयोगकौं भिन्न जानिदेकीमत्र
भूमि वर्ग मेवासको मागलाभ सोपाइ॥
वांसमादि करिऊनजुन दल श्रुति कोटि
लीलावती ४२. پروف * २२षांसमान २०फनसंख पताइ १९३२॥ उदाहरण मारू हाय ब- नीसेको टूटि लग्योभुवनम् ॥ सरल खिलजी धरा पाई सोरहस्र । ९३३ लांस खंडे को मानकह गछीलक नगी महारग एक कोटिइककरनसों दोऊ खंड बिचार १३४यान्यास गमुजर वर्ग२५६ वास ३२ कौभागलामच्याको वांस मैं जोग दिल कर्न २० शुरुन्नाभवांसमैं ऊन दल कोटि २२ ॥ अथभुज कर्न जोग और कोटि जाने ते न्यारेन्यारे जा निवे को सूत्र ॥ भीतवर्ग में व्याल की भाग लाभ सोपानगव्याल माहिं करिऊन नुन दलभुज कर्नयत्ताइ ॥ ९३५।। उदाहर ॥ चौपई ॥ न कर की इक उन नभीन ॥ लापर चादर गावन गीन गभी- तमूल नैं निकस्यो सांप ॥ सत्ताइस कर जाको नागवेगवोन धनि सुनिसहि कान 30- लीलावती ४२ उलटि गया वह वेन निदान काहि पाहि कितनी मुइलुइ रह्यो । कितने उलटि सु. दादर गयौ न्यास "भीतर वर्ग सांप कोभागफलव्यालजोगार्ध२५ कर्नभयो अरुलाम ऊनार्धभुजभयो १२ । ॥अथ कोटि कीन्नर और भुजजा नेतै न्यारेन्यारे जानिये कौ सूत्र ॥ सुजन् मैं झुनि कोटि को सतरहरफल लेड पसंतरमैं सोचाट बढ़ करि दल फल रूदिदेव ॥१३६॥ उदाहरनगमोपहाय ऊंची जलज-जलऊपरमनरंज ॥ पवन लगेगुफि यूडिगो हैकर पैसाकंन ॥ ९३७॥ "कोटि कैन की मानकह-सोई जलनले मान चालवून कि कमल की भुज प्रमानसोजान ॥८॥न्यास्॥ भुज दरग४ यामें अंतर को भाग लीनौ- पायो फल या अंतरपाट करि
लीलावती ४३
कोटि के प्रमानजलगहरा
और कर्न केनभान कम
ल नाल है।
उलछनि
कषि
दल कोनी पायोक्रोटिमाना और
अंतर जोगाई कर्न मान पायो ।
अथकछु कोदि औरभुज जाने नै
तीनो अमान जानिये कौ सूत्र ॥
ताइ तालके अंतरहि. ताड़ धान करिले.
फल मैं दूनो नाइहर कपिउछलनि
कहिदेह ॥३८॥ उदाहरन ॥
सौ कर के इक ताड़ नै उतस्यौ इक कमि
बाद गदैसे करपैताललाख. जल हित
पहंच्या जाइ ॥ ९४० गतरूपरताको वान
री. पहिले उड़ी अकास पनि श्रुतिपय
सम चाल है. पहुंची निजपनि पास ॥
२४९ ॥ ताकी उछलनि मोहि कह शेष
कोटि को सोइ । करन मानपुनि बैग कह
निहि मिलि समगति होड् ॥१४॥न्यास
नाहरु नाल को अंतर २०० नाडु मै घात
१०००० हुने ताइ २०० को भागलीयै पाई
ताइमान
२०० भूमिनाइनानके नमकी माला
२५० कर्नपथमान.
Jind लीलाद गालमारिनोग कपिउल्लनियाकी नाए मैं जोडे ते भयो कोटिमान याने शरुभुजनै पायौ कर्नमान २५० समगनभई ३०० अथ कोटिभुजजोगजाने और कर्न जानेने न्यारे प्रमान जानिये कौस्तूच ॥वाहकोटि जुन हनाहि घटि तरून दूने मांह ॥शेप मूल जन घाट जुन सरथ कोदिभुन लाद । १४३ - उदाहरन नेत जहंसुज कोट संबहकरन प्रमान पृथक पृयक नहें कोटि पर भुजके मान यरवान ॥१४॥ न्यास। कर्न वर्ग कोदूनी च्यागेंभुन स्वटि के नोगकीवर्ग५९८ पटाये नैरोप केना मेंभुन कोटि को जोगनको जोगदलभयो कोटिमान ९५ जरुनः भुगकोटिनुनान्तर १६दल भुनमान र सपनंबज्ञानार्यसनकोटिदोड M لیل و जोंगा तहां खेतसंभव कई बड़े अजने लोगाईपदीभुनासौं मिलाइए। लीलावती के पान मैं कोटिजोगको भाग गलाभसुले वप्रमान है कर्नोगभुजलाग॥४५॥कोटिभु जाके घातमैं कोटि जोगकौभागाफलभुन खंडप्रमान कहलंब दुई दिसलाग॥२९॥ दाहरन ट्रेहदस है कोटि जहं इष्टभुजा पर हीड्ग निहिं श्रुत जतथल्लंद कह-अरु भुज खंडे दोन ॥ २४ ॥न्यास ॥दुहूं कोटि को घात१५० तामें कोटि जोग २५ कोभाग फल, सोई लंदप्रमानपायो सस्थाकी इष्टभुजा ५ कौं दोनो कोटि सौंगुन्योभये।७५।५८ यामें कोटि जोग२५ कोभागलीने पाएभुनखडे दो २५३ सौरदृष्टभुजादसाखिये तो खडे. १६॥ अथ क्षेत्रशुद्धाशुहपरीक्षा खेत चतुर्भुज त्रिभुज में असम भुजनि को, १८॥ खेचतुर्भुज भुजाः वारेह-लह, हितीने गजहां असंभवरखेन कौ-विनकरिमापे शुद्ध चतुर्भज चंद्रभुजा और तीनो धुजाको लोग थापमान कारेवाएकरुरि रोहा नवनिरसनहा खेत संभव कैसेहोद यानेयाको प्रद और उत्तर देनहारदेनि Tr:- Jiraiya P दोनो भुनानीसरीभुनाके (वरावर हैं नहाक्षेवसवकै भउद त्रिभुज ऐसेंयात्रि भुनही * औरजी कदाचित्ला खेतमै खोटासममिभुनायौं खेत की. घरि जर्जुन २१पनए सौराशिनलंवसन विहि भूमिबध दल फलस्पष्ट न लीलादनी४६ प्रवीन ॥१४ात्यौहीं जनवतीनपट त्रिभुज लूटो सुखनोट ! १५०५ अर्थ निभुजस्पष्ट फलज्ञान सूत्र पत्रिभुज रखेन में दुसुन जुन तिन अंतरहि गुनाइ ॥ वाह तीसरी भू मि कहि-ताकोभागलही गै१५१॥लाभ भूमि को जोग अरु अंतरदल जो होइ । १सायाधा संभाभई-दहूजाको सोद्।५२। स्वावाधाकृन वाह कृत, अंतरकोजो मूल म भभूमिमै घटि नसतो भूमिकौलाभमे घटा कैद लफीनिर सौरिण पोवाधा होइयाको शानयोउदाहरल तेजानि लेड दोहाग सतरहदसई वाह परु नवधरनी निहि खेत तिहि ज्यादाधालपर से.) नलाभ चिनचेन ॥१५ में भूमिकोभागलामो (२९यामेभूमि नोरिदल की भा-यावाधानएकी १५ मदूसरी पावाधाने लाम) (समिर मेटिनही सके लाभर मे पठाइ दिनकीनीपाई रियावाधा दू। सारी फिरस्वानाधासरुवाह मेयरगनको मनमायो ६४ वा सेमललव पायोभूमिः ७वीभुज पान दल नहारमिर भूल ॥२५३"उदाहरन ॥ तेरह पंदैरद देभुजा-चौदह छिन निहि खेत ॥ निहिया बाधा लवकह फल स्पष्टपुनि चेन ॥ १५४पन्यास दोनोभुजाकोजोगवसंतर करिगुन्यो ५६भूमि ४ कौभागलीनोपायो फल ४ याकी भूमिमैं जोरि कै दलकीनी पाई। आवाधारभुज पंद्रह की अरु फल कौं विभुनरत दोडभुनाके जोग एका मुहकारभूमि नोनयन दृढ़ेसार कोनन रखासीतीर सभुनानाई नाकोनाम लप औरपानीसरी जोकोनासभूमि है सोर के दोनोरडे الیون पाइए नाकीनाम भावाचा शाया- भुजको जोरि के दल करि धारेचल चार महिना विभुन मैं कोटिभुन घा/ मारि॥१५५॥ ताकौमूल निकासि लह/ चापाउपनाएई नै होतु है। उद विभुजफरलत्तोपैयह विधिचोका अरु नीनीभुनको जोरिये न्यास गनीनोभुज के जोग४२कादल २१/खंडे भर सोहेरवडे / १३ पाद कोनी-शेष/याको जोगमवोसोई याको मूल ८४ सोई स्पष्ट फल जी पाहिले जाते को तात्पर्य यही है। HA लीलावती भूमि में अंतरकार दल कानी भई दूसरी आपाधारभुजतेरह की फेम्भुनसरुवावा पाके वर्गन के संतर को मूल पायोलवमान २९ याकौं भूमि मैंगुनि दल कोनी पायोखेत कौसष्टफल ८४ ॥ अन्यविधि ॥ तीनो त्रिभुज नीनटांघाटि करि शेप परस्पर हुमैं नकार अशुद्ध फल सोइ ।।२५६॥ चारिठांवधरिकै तीनी भुजा घाटि कार के शिपांक परस्परगाने फल पायो ७०५६ ऐसे गुने भए७०५६ पात्र कोस्पटलचौर नाविभुनमें कोटिभुजन हो नट्लेसष्ट फल हो यह गम विधि पारलया दुलकरियाह सूत्रकार होत जिसे यात्रिभुजग संबन नकादिरूपी भएनपदो नों विभुजन को कोटि नपात दलपाए३०५४ सब खेत कीपदाला स्वभौरमावाधाप भयो हो अथ चतुर्भुज देत-फल दिलब और भावाधा कोटि सुनरूती हैं।
لین دی
लीलावती ४९
जहांवरावरचारिभुज. अनि दैतुल्य सु
जान ॥ तुल्य चतुर्भुज खेत है. ताका नाम
सुजान ॥१७॥ आयत । है है सन
न्सुरख कोभुना. जहां बराबर हो । युत
हू ताके तुल्स . खेतायत कहि सोग
९॥ इन दोनी विधि खेत मैं करो कोटि
भुजघात लाभलेनको स्पष्ट फल-जालि
लेह विख्यात ॥२५८ ॥ उदाहरन ।
पांच पांच के वारिभुज करन सात कछु
जासु ॥ सायन ॥ छह छह वसु यस
चारिभुज दस श्रुत फलकहि तासु २६९
पन्यास ॥ तुल्य चतुर्भुज मैं कोटि५
भुज५ को बध खेत स्पष्ट फल २५ और
सायत चतुर्भुज मैं कोटिभुन ६ को-
वध सफल ४८॥यय अन्यसूत्र
वाह वरदरवारि अरु. असम करन
निहि खेत ॥ तहनाना फल संभवै. श्रुति
ka
m
4 लीलावनी ३ घट बढ़ मिनिहेत ५१ प्ोकश्रुति ताकी क सिकरिताकीकृत करिहीन गभुजत चौगुन माईिफल मूल हिनिय श्रुति कीन॥२६॥ करन वदललही-फलसपष्टइहि खेन । असम वाह मुनि खेतको सव सुनि फलचित चेत ॥१६३ग स्टूधीभुजकौं भूमि कहि सन्मुख भुजमै जोरि गलबमाहिपुनि घातकरि निहि दल नैफलतारि॥ प्रथमउदाहरन चास्वाभुजपचीस मैं श्रुति कल्प्यो तीस दूजे श्रुनि की मिनि कहो-खेतलाम सुनिई ॥२६५ न्यास भुज२५ के वर्ग ६२५॥के चौगुने २५०० मैंदर्न कौवर्ग पाटि कियेतेशेष १६०० को मूलए दूसरौ कर्नभयोगदोनो कर्न को पान२०५ आईभयो खेतफल ६० ॥ दूसरौ उदाहरन-विषम चतुर्भुज को। वास छिनि ग्यारद् बदन हैभुज तेरह ० دنیای या शायत चतुर्भुज रखेन की कोटिभुजको पानसष्ट फल्न७२ घोर बिड़े निखको कोटि १२ भुज १६कोधात फोटल बड़ी जर सुजयको विप कोदलस्पष्टफल तीनोफ्लश कोजो गाईपरफल यानि फल जानिबेदार और नीनो सुनजोरि कैटल करियास्त्र फल सिद्ध होनु है सेनसीहतरछोटे विभून And अज में यह सुगम विधि सहयह सुहन फलभवी याकी परीक्षा दिल१५ चारटोरधरे ) ॥१५॥१५॥१५ तानाजानी २१३१२५ परस्परघातक लिमूल स्पष्टपल भावारहसपचास हार सूक्ष्मपरि विवाभान सरफत सिह देख है। भागि फललेह रत्तरखेत में शूलमिनि-यूल लीलावती ५५ मुख्यर भूमि हल्द बुधिई ॥६॥न्यास "भूत सुख २१ कोजोग३३ लेयर मैं घानद६ को नई निमित्त खेत के तीनरखडे करि है निमुनाए, कचतुर्भुज के जुदेर फल ल्याइ के इकडे कीये सोई रट फल हेतु है। ॥अथवृत्तवेन कौसूत्र ॥ तीन सहस नवसै बहरर सत्नाइस गुनिव्यास ॥९६ अहव्यासाहि बोईस गुनि सात परिधि कहिदेव ॥१॥ परिधि नान ते जौचही व्यास मान को नान ॥ परिधिहि हर मैं गुनि हरी. गुन करिउ- लटि सुजान ॥११-८॥ उदाहरन। घाटि १ चिमुजकोफलो २५० जीया Atte राम पनि क्षेत्रको सूक्ष्म अमाएपड़े कि नारनदेवी इनाछेवकी परिधि होड्याने या विधि स्टनेसूक्ष्मव्यापार हरको परिधिक नाछेरकोग्यास हो गान्यो नाहियेनोप विधि में गनिके कोमागनीने देमममा नानार्थ ऐसे निक भागनेोपन सिद परिधिनानियेलोया लीलावती ५१ 20337 البارونی न्यामको २५० भाग रनीने नै भयोरूपऐसे अध्यासको सौगुन्योभयो ७ सौरानि२२को भागले TRETTE २२९५ सौ गुने भये रूपऐसे 138) अरुस्यू ललियाने यास५ मतपरि हो।व्यासपरिधिको घातजो गोल पिटीने यासों पुरुसक्षम / विधातामैंछडको भाग। गोल गर्भपन /स्पभयोगसचिस व्यास को होई ।। तहां खेत अरु खेलको आगोलफलज्ञान/ ध्यास सातकीपरिधिकहरसूक्षममूल विचार अपरिधिलाम पुनिफही उलटिव्यास विस्तार ॥१०॥ न्यास ॥सूलन किया नै पाई- परिधिारा अरुथूल २२ पुनि चाईस' परिधिकी सलम व्यास आरु स्थल व्यास १ ॥ अथत खेत फल गोल लिपरिधर पिष्ठ फल गोल मध्यघन फल। व्यास चरन करिथरिधिवध वृत्त रखेत फल फल सोइ १७१॥गोल पिष्ट फल व्यास फल सुफल.नानिलेहवड़भाग २७२॥ (व्यास सहमव्याह खेतको सूक्षमफल ध्यासको सिन्ही सौगुन्यौ पायो फलऐसे वायाको रुस्थूलफल को २२ करिशुन्यौ भयोऐसे नाफोरूप २५ उदाहरन । रत रखेत अरुगोलनो सान फे लिये सूक्षमपरािध হিঃকীও च नलघनफलकह सोइ ॥२७३गन्यास॥ सान व्यास के खेत को सूक्षमफल ३३. स्थल गोल पिटफलस्टक्षम कारेगुने पायोफ्ला भागलिनेभयोसोई अपपत्तभये उरुस्थलगोला कोभाय लियेनेभयेरेस एक भार सकोस्यास सौगनेने भये परहीरगोलधन Jलमानि गीत البارونی जो रेखापरिधि के है नयाजीदारुशाहै सरुभ ईज्यवादे परिधिपर्यत नो व्यासोटूकहै नाकी शर इनसेनानधन है। लोटे बड़े करेभारेलाकाल २५४ / गोल मध्ययन फल पायो ऐसे (रंगाई परुवापरिधि कजोग अरु अंतरवधकौमूल ॥ व्यास) सन्या जयेग१६धन उदाहरन ज्या मिति छहदस च्यास् भमान फेरशरप्यासपा९७६भ्यासणव्यास १० ज्यादा लीलावती ५२ के स्थूला अथव्यासभर ज्यानै शरज्ञान सूत्र गज्यारु व्यास मांहि पटि शेपदल-शरकहिताहिन भूल ॥७४गपुनि शरघट करिष्यासमै-शेपफेर शरघात ॥ नासुमूल कौंदगुन कहि. ज्या परमिनि विख्यात ॥१५॥ पुनिज्यादल के वररा मैं शरहरफलशर जोरि व्यासलाम लहि परस्पर मौनौजानियहोरि ॥७॥ मिति-काशरपरमिति भासु गशरस व्यास ज्याकही ज्याशरते कह व्यार शरर पुनि शरव्यास नैं पाईज्या - व्यास २८ ॥ अथरत्तखेतो भुजादि नवसुजपर्यंत भात/ ज्या t महाउदाहरन काभ्यास प्या। सेगुने भएको लस्याको यास मै घटाये नशेपरपाकोदनुपायो शर) गुन्योपामेश्याको मनको इगुनीपायो च्याप्रमान फिरपादन फोर्गर में पर फोगाएकर ध्यासनान F andi
लीलावती
जानिबे को सूत्रदोइ सहसमिति
व्यास की लत खेत जोहोगसन विभुजा
दिनवांत के भुजमिनि कढ़सर्व सोइ ।
जुद्देन इनके गुनक तिन मैं व्यासंगुनाव
कलप वीस सहस को भागलेइफलपाव
१४॥ वृत्तव्यास २०००
छेनगुनक भाजक एफभुजको
.
अनान
त्रिभुज | ०३२०/ १२००००
पंचास्त्र ७०५३४.२९००००
पदभुज २५.०९२०००
(सप्तासा५२०५५००००
अष्टास्त्रः
नवास्त
10.00
A
घचाप छेत्रफल सूचना
لیلاوتی जीवाद जीवाईएकोलोग जोरि निधनुष खेत फलगाइ ॥२८०) पायो रूपऐसे ३ // अथखांत विवहारतहातीन सी लीलावती ५४ को जोगदल तामैं शरहि गुना संशवीस न्यास गजीवाशर खेतफल दीकेचतुखहौदकीमापसूत्रास्त्र सीदिन को तूलजुन सीहिनि हर फलधा रिशत्यौही विनर पिंड के जुरा हरला भनिकारिगर॥ नीनीफल लैकै बदर आपुस मैं करि घात ॥नाको फल सुइ खातु फल जानि लेड-विस्मात गर॥ उदाहरन गनूल तीन सीढ़ीन की रवि ग्यारहर्दसनान ॥नैसेही विस्तारलहपाचे सात मिनिजान ॥ १८३ ॥ पिंड मानहू तीन टां चारि तीन ई हो ॥ऐसेचौभुज खेत को खात लाभ कहि सोइ॥१८४ान्यास लंबाई जोग३३ चौड़ाईजोगउचराई जोग इनतीनौठांतीनसीदिनकौभाग एसईयाम शगुने पार इयाकोचीसमचौर जोर नभयेभागलीने ते + खान कहिए गहरदिको * तूल औरदीपनाक हिये लंगई की। विस्तार विद्यारसद कहिले बीड़ाई की। औरउंचाई कोनामपि (टनम छठवीं अंश७० ताकी सात खंचाई सोंग होनी परिधिजोग में जोगफल कहिए. लोनी पायोफल १।६।३ पुस मैं लड़ाई के जोग मैं गुने जो/ फलभोग ॥ २९॥उदाहरन ।सुख रवि घनहस्तकहिएजापिंड/ नासुघार घनहरत फल, नीकै करि कह जावृत्तखात की मुख/ सोइ ॥ ९९६॥ न्यास मुखलवाई १२ /न्यास औरपरिधि ४४/ कि हे खांतद्र की याही यिधि करि फल-फलेषए ४ शानिये ॥ अथ सूचा अग्रवात फल/नानी कोसस छेदकार/ लीलावती से पायो खान घन फल ८ ॥ अथ बिन सीदी को चतुर्भुज खात फल सूत्र सुख फल नलफलजोगफल तीनो फल को जोगताकोछठवौं अंशगुनि पिंडमाहिं दसतल पांच छह सान उंचाई होइ । मुख शौरतलकीवाद मोरिकै मुखनलकीची फल पाइए सीलवाईचौडाईगहराई 'नीनी बराबर होहिं चौड़ाई सफल ९२० तलतूल ६ विस्तार फल३० दोनों को दलजोरा १७ विस्तार जोग २५ फन २७० ऐसे भये तीनो फल १२९ ॥३०॥२२० ।याको जोग-४२० याको हो औरतलव्यास अरुपरिधि २२ होरी/ रखेष ना खानको म ख फ्लभयो २५४ और नवफल भयो और INY न्यौ पायो खातघनफल ४० या भांति व्यारजोग याको फल ३४ ऐसें नीनों खातफल जोर भए १७५३ या की स्टनी रेश्व याकी वेध सों ওযীহুৰ لیاری रन सातकदिए सूची दिवजापारको तल सई के परकेप्रमान भैस भूमि में भेख गादि के उपाहिलानिए माकोरसात नेसोहोई वधकाहिए सूधागह पापोमुखफल र गुन्यौ रक्षा फिर चिंत घन फलमैंट केधन फल को ले रके पांचवेधतेपायो २०० ॥अथचित विवहार मीलावनी स्नानुख सम फनको वेधयध-नाकी नीनो भाग चाभुजसूची नगको खान.. लाभ लाहि लाग॥२७उदाहरन । रविभुन चारों वेधनवारखानलाम कह सोई गत्तखांत मुखं.व्यास दस पांचवेंध काई होइ गरगन्यास "प्रयम न्चनुरखवान कौमुरपफल २६४ कोई वेध में गुने भयो घन फल २२१६ को सूची फल्न न्हतियां न्यास रत्तसूचीलेव को व्यास की परिधि को मुखफल व्यास चरन गुनित १२ पांच प्येध गनिन ३० याको टनियांशसूची फल ३ केभागलिये भाग ॥भागलाम सुइट मिति:जानि स्नेह बड़भाग ९८६॥ईट उचाई भारा फल. भीन उंचाई माह लाभ तर मिति को. KO घ्याम् टन सूची खानको यासरः करि पदभए नाकी परिधि कि की माम चरन सोने में पांचकार अप भए ५म पांच फारिसपवर्तभयोरू पऐसायाको विवियोशनीन के भाग लानेने पायो सूचीफल ३ करिअपवते *चित कहिए भीन नगरकाहि लालाना सग१६ अंगुल लहौ.सवैबुद्धिवल छाहग उदाह- रन ॥ ईट लंबाई पौन करचौड़ाईकरसाद ॥उच्च न्याटवौं अंशानिहिं घनफल नाको साध गरी बाटलंवाईजासु चिन-पांच चौड़ईनान । तीनहाथ जिहि उच्च कद- ईट तर प्रमान ॥१२॥न्यास गईट लंबाई ३ चौड़ाई ३ उंचाईचन फल ईट को चिनलंबाई चौड़ाई ५ उंचाई। चनफल २२० यामैं को माना पाई ईद मिति २५६ अरु मैं कौभागपाई तर मिति २६ ॥ साथ ऋकच विहार ॥ अग्र सूलजुसदलगुनी काठस.जोइ पनि चीरनि सौंगुनि हरी, चौविसकृत करिसोई ॥१३॥ उदाहरल "सोरद अग्रवास जड़ सोशंगुल जिहि तूल चारि धार चारचौ सुकह कै कर चिस्यौनमूल गरी न्यास । काठ पिंड अनमूल जोग३६ लवाई९० संगुल मारनपारि
चारनधार
कहिएघाजए दिलसर ।
लीलावती
नौहाईसंगल
दललंवाई २०० को पान १८०० पुनि
चीरनि ४करि गुन्यौ ७२०० चौवीसकौवर्ग
५७६ करिभागरतीनौ पायोकर प्रमान
साढ़े वारदहाथ की चिराई की मजूरी दी
जिएगअन्य सममूलाग्रजु पिंडनिहि
करि चौड़ाईचात ॥पुनिचीरनगुनि हर
उन्चाई सगुल कहेची विस कृत करितात ॥ई उदा-
हरन मासे अंगुल चौड़ई सोई पिंड
जुदारु कैकर आड़ी सो विस्वी. नवे व्यं
कस्तो विदारु गरीन्यास "चौड़ाई
पिंड१६ पान५२ पुनिन्चीरन कोवध
४६०८ याने ५७६ को भाग पाए कर!
अथराश विवहार गएल मध्यअनु
कुन परिधि-दस शिव नवकम हारि ॥
नाहि परिधिपटलववरण सौ गुनि धन
फलधारि ॥९८७॥ उदाहरन ।
ममधरनी पर अन्न की राशपरिविजी
* स्यून अन्नचना मटर
जय गेहूं शादिः अनुकूल
आदिः मडकन कहि
एन्चावर श्रादिजोकन ग)
*परिधि मैहरको भाग
लीयेते मोफल पाइएना
फल की परिधि के छटवें
संशयरग सौंगने घन
पलपाए"
بادی
परिधि
फलन्चावर आदिमध्य धान्न परिधिधिकहिए समभूमि मे
0
लीलादतीपर
साठे। नहां तीन विधि अन्नकेशनफल को
कह पाठमाल्यास स्टूलान्त राश
परिधि नाको दसौं अंशवेधभयो ई
याको परिधि षटलवरूवरग १० मैंगुन्यौ
गायो धन फल ई००ऐसे अनुधान्न परिधि
ईवेध सौ २०० मैं गुन्यौ ६४१० घन
वेगुनितई सौ २०० गुनित ९:१८
घनफल ६६६ ५३ ॥ अन्यसूत्र"
भीतलगी कन राशकी.परिधिटुगेन कार
हिर ॥ भीतर कोन सुचौगुनी दाहिर कौन
सफेर ॥ ९ ॥चारि निलेव गुनि एति-
सवन पूरब विधि फललेह ॥ निज निज
गुन निहि फेलहिहरि, सब घन फल
कहि देन ग२९०।। उदाहरन "भीनानि
तकुन फल कही परिधि जासुकी नौसे
पंद्रह भीतर कोनकी वाहिर पैनालीस।
राश्यारकी उंचाईग
भी लगीएस
لیاری
लीलाप्ती
घोड़ाई वंगुल
जब गेई आदिः अनुकूल पिंड६चान पुनि चीरन कोवध
एनावर श्ादि नोकन पथराश विवहार।चूल मध्य भन/
दललंबाई २०० को घात १८०० पुनि
चीरनि ४ करि गुन्यौ ७२०० चौबीसकौवर्ग
५७६ करिभागस्तीनौपायौकरप्रमान १
साढ़े बारह हाथ की चिराई की मजूरी दी,
जिए अन्य गसममूलाग्जु पिंड निहि,
करि चौड़ाईचान ॥पुनि चीन सुनि हर
उन्चाई गुल को चौविस कृत करितात ॥५॥ उदा
हरन गवतिस अंगुल चौड़ई सो पिंड
जुदारु कैकर आड़ी सो विस्वी. नर्वेठा
कस्वी विदारु ॥१६न्यास गचौड़ाई
४६०८ यामें ५७६ को भाग पाए कर ८॥
वीरनधार
कहिएषाजरा तिलसर
हो सादिः मध्यकन कष्ठि
*परिधि मैंहरको भाग
स्लीये जोफल पाइए ना
फल की परिधि के छटवें
शकेवरग सौ गुने घन
फलपाइए"
किन परिधि दस शिव नवक्रम हार ।
ताहि परिधि पटलवबर। सौं गुनि धन
फलधारि॥७॥ उदाहरन।
ममधरनी पर अन्न की,एपरिधि जो
امارت
परिधि
फल न्वावर आदिमध्य धान्न परिधिवकहिए समभूमिमैः)
लीलावती५६
04
साठेग नहीं नीन विधि चन्नधनफल को
कह पाठशान्यास "स्यूलाग्न राश
परिधिई नाको दसौं अंशबैधभयो ।
याको परिधि षटलवर घरग९००.गुन्यौ
पायोधन फल ई००ऐसे अनुधान्न परिधि
सौ २००३ गुन्यौ ६४० चन
विधगुनितई सौ १०० गुनितु ९००
घनफल्न ६६६ ५३ ॥ अन्यत्र
भीतलगी कन राशकी.परिधिटुगेन फरि
हिर गभीनर कोन सुचागुनी बाहिर कौन
सुफेर । दिपचारि बिलय गुनि पुति-
सपन- पूरब विधि फललेह ॥ निज निज
गुन निहिलिहिहरि, सवचन फल
कहिदैन म२००॥ उदाहरन गभीनानि
एश्यार की उंचाई
,
भीतलगीरश
सोया
नकुन फलकही परिधिजासुको तौर
पंद्रह भीतर कोनकी बाहिर पैतालीस
لیلاوتی * पहिल गुनक दूसरगुनक तीसरा गुनक * भाकदिएछाया एक अगछायाशगू पर्यत सूत्र को नाम नया सुनकरन है जौ कोई दीपकू नोति में है ऐसे रखेकी दीप निकट शंक) ॥ कि छाया की शूयसभागजुलीजियचौविसकृतमै सोइ॥२२॥ लीलावती २०१॥न्यास्त्रादि ३० कोयूनीटूतरी १५फी दोगुनी तीसरी ४५की सुनी तीनौसाठको पूरव विधि कियाफार पायो फल निज निजगुन कौयामैं मागलानो- पायो घन फल ९११५४४४५० अथ छाया बिवहार गभानर अनि संतरवरग निनको अंतरजोड् ॥ ताकरि गफल नैंजुन करिएकपनि मूल चुनांतर घातलाभांतरघाटदल निकट डाय विख्यात ॥ २०३ ॥दूनी हायाङ्करदातर जुन दलहोइ। ॥ वीजगति विवपति- जिन्हें भाउतपति कहै सोइ ॥ २०४॥ उदाहख गणतरनेरह वह छायां तरउन्नी गईशंकुकी भाकही जौतुम गनिताधीर ॥२०५ गन्यास गछायांवर कीवर दोजन के वर्गन कौनंतर अरु दोनों शंकु की छा या तथा नया फरन मा. निकै दोनों छायांतर कीनर काहे देह लाया दोनों को प्रमान ताकी यहदैग प्रदीप নবুলবৎ दूरसंशकोहापा निशकछापा
بيروتي
जाशंकुकी छायाप्रमान
पोच् जानियको सूत्र
गुन्यो २६ नै छायांवर २८ चाटिपणदल औरशंकुधमान और
यह दीप निकट शंकुकीलाया भई और/शक दीपालानर को)
२६ में १८ जोगदलपाई दूसरे शंकको /प्रमान जानिए नहांदी/
लीलापती दर
श्याकरि चौबीस के वरण ५७६ में भाग
फल३ एकजीरो मूलरकीलर १७ सौं
छाया ५ और कर्न मिनि हो शान चहिए
मूलर कौछायांतर रहे मैं गुनि३८ में
किनीतर जुन पद दल पाइछे कर्दमिति *
३५ । ५९ ॥अथ दीपोच्चज्ञानार्थ
स्ट्रेच ग शंकु दीप चल नरे-गुनी शंतु,
फरि जानि "भाकरिहदि पुनिशंकुशुत
दीप उंचाई आनि २०६। उदाहरना
दीप तलांतर शंकसौं, अंगल सत्तर दो
सोरेह भावे राह निहिं, रीपञ्च
कह सोइ ॥२२७ गन्यात् ॥७२संकर
उनिन मैंचाया १६ कौभागफल५४
शंक१२ जुन पाई दीय उंचाई ६॥
ধীৎকহ,
छाया
दीपनलनै रोकनांतर संगल
لیونی . ना है शंकुकी छाया जुदा अथछायाजानिदेको सुन्न ॥ दीप दी होडू सौरहं राह नलांतर शंकु सौ. करिपूरब विधेि घात ॥ हको प्रमान जानिएताव ग२०८॥न्यास।भूशंकु वधच्६४ हांदीप नलांतर पादी दीपोच् शंकुहीन ५४ को भाग फल पाई। दूसरी छाया जोरि नान सूत्र शुकधाटि दीपो करि. भा. प्रथम छाया घटारगनि नरकौभाग दीपशंकु तल बीचको लाया सतर की शानभामिलही वड़भाग॥२०॥च्यासाराक सो प्रथम छाया पटोदै मन्यसूत्र ॥ भोग्न के अंतरै छाया लीलावती गदीपउंचाई शंकु घदि करिहरिनालङ छाया मिनि १६ ॥ अथ दीपालांतर घाटि दीपोच्च ५४ भा९६ शुनिनुच्छ४ शंक २९ को भागफल पायो दीप तलांतर ॥७२॥ करि मुनि नेह सभांतर हरि भा पाटि करि-भू प्रमान कहि देव ॥२०॥ भूमि शक के घात. साया को लेभागलाभ माहिं फरि शंफ जुन दीपउंचाई लाग २९ उदाहरन गदै कर अंतर शंक है दापोवानलांतर वा शकुप्रमान जानेने अशा मायाजानिये कौ सूत्र र अमाननलांतर को सूत्र। भूमि को प्रमान जानिए और दोनो छाया पोजूनानिये को सूब * दुई शंकु के अंतर में। होइ॥ प्रथम छाया सौगुनि के छायांतर कौभागलेहि नहां प्रथमशंकु नलान भूमि को ज्ञान होई और नौखाया अगेतेर कौं दूसरछाया सौंगुनि के लायांतर कोभाग लेन्दि नीदूसरी छाया पटाये नहीं दूसरे शंफ नन् नरको ज्ञान हो ॥ । " "
लीलावती
باروتی
दीपोच२५६
वसुबारह हैछाह दीपनरंतर उच्च पनि
कही सममि मनमाह ॥२२॥ न्यास ॥
दुई शंककी अंतर है करके अंगुल ४८-
दूसरी छाया र जोरे ३० में प्रथम छाया
घटाये नै पायो छाया अशंतर ५३ को
प्रथमभाप्सौं शुनि ४९६ मैंछायांतर४ को
भागफल ०४में छाया घटाये ते शेप
पायो दोपतल नैं प्रथम ऐफ वलांतर भूमि
८६यामें है करके ५८ अंगुलजारने पापी
दूसरी भूमि मान २४४ सथवा छायांतर५२
छाया २२ गुनित ६२४ में भांगर को भग
२५६, ५ लाया घटाये ते वही १४४दोनों
भूम।१४४ । यह शंकु यनित १९५२ ।
१२८ मैं छाया चाकोभागफल २६४।
२४४ शिकु जोरैतै पाईद्द रांकते दी-
पोजूता सुई।९५६मैं २४ को भाग लीये
ते पाये दीपोच करप्रमान
शक्षाल्या
९खाया
निपटार
निकट गंऊदल दीपनलावरह
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یونی लोनावनी मा श्रीमवृपनिण्यडालचंदूस्थाना परिपालक रायचंद नागरेणापिर वित पाटी परिपाट्यानुसारेण- गणितसार गंधे छायाव्यवहार वर्णनं सनमः प्रकाशः॥ शोहराछंद मसुभगापपूरन भयो बहुत ग्रंथ रताल। अनुभव रस सुखसिंधुयह पूरननि ननि जाल॥ २३५ विक्रम सम्पत्र २८ गन जुगल, पसुससिकरवारसांवनसित साते सुखद गनितसार अवतार १२१४॥ संपूरन पोथी लिरपी लिखयह सारिष दीन। पिय मनरुचि कारन रुचिर, चिस लो होस नपान ॥ २९५ ॥ निथ तेरस पुपनदव विव, माघ माह रविवार॥ भयो में सपनायफे गनिन सुधारस सार मानारदरसोहन दास॥