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Sri Shaligramoshdhshabdh Sagar
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दक्षहस्तकृताश्लेषां वामेनालिङ्गय राधिकाम् ।
कृतनाट्यो हरिः कुळे पातु वेणुं विनादयन् ॥१॥
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श्री धन्यवाद। सन्तु परमावधयो धन्यवादास्तस्मै विरचितविविधब्रह्माण्डकोशाय लीलासृष्टमहामृष्टये सक- लसारस्वतसारसर्वस्वजुषे श्रीमते भगवतेऽपरिमितनाम्ने । येन परमकामणिकेन भावुकजना- न्गदातुरान्निरीक्ष्यात्मन आर्तत्राणपरायणतां प्रकटयता धन्वन्तरि-दिवोदासादिलीलाविग्रहान्नि- भ्रता शब्दरत्नाकरावेदपयोनिधेरायुर्वेदो विनिरमीयत । यदनुसारेणाद्यावधि भूयांसो वैद्यक- शास्त्रग्रन्था यतस्ततः पण्डितवरैर्महादिभिर्विरच्य भविकभव्यभावुकभूतये भूतले प्रचारिता: सन्ति । स एष भगवत एव प्रथममार्गोपदेशकस्यैवोपकारानुभावोऽनुभूयतेतराम् । सत्यप्येवं वर्तमानकालीनस्थिति निरीक्ष्य मन: सीदतीव ! यतः संप्रति तत्सद्देशीयभाषावे- चिन्यं सुतरां चित्तोद्वेगकरम्, विशेषतश्च वैद्यजनानामालस्यं च । यतस्तेषामालस्यादौषधपरीक्षण केवलं गान्धिका व्यापारिण एव शरणम् । सत्येवं का नामाशिक्षितानां गान्धिकानामौषधवला- बलपरीक्षा यथोचिता देशकालाद्यपेक्षया ? कानिचिदौषधानि स्वल्पवीर्याणि, कानिचिञ्चिर- वीर्याणि । कथं नामते जानीरन्निदं चिरवीर्यमिदमचिरवीर्यमित्ति । तथापि तेषां तत्तद्देशवा- सिनां गान्धिकानां भूतलनिवासिनां सर्वेषामुपरि भूयानेवोपकारः । यतस्ते यथाकथंचित्प्रयत्नेन जानि तान्यौषधानि यथासमयं संचिन्वत संगृह्णति च । अतस्तेऽपि धन्या एवेति मन्यामहे । अथच ये वैद्यास्ता ओपधीरुपयुखते तानपि धायान्मन्यामहे । अथ च देशवैचित्र्याभाषावैचित्र्यापातस्यावश्यंभाव्यत्वात्तत्तद्देशवासिनां तत्तद्देशे भेषज- नामविपर्यासे तत्तदोषधलाभोऽवश्य दुःशक एव। यथा कश्चनान्यदेशस्थोऽन्यदशे गत्वा रुग्णश्च- दौषधं जानाति परंतु तस्यौषधस्य तद्देशीयं न पर्याय चेद्वेत्ति तदा निरुपायेन तेन किं कर्तव्य- निति निपुणं विचार्य परमकरुणावरुणालयैः श्रीमन्मुरादाबादनगरनिवासिभिः श्रीलालाशालि. ग्रामश्रेष्ठिभिः केवलं परोपकारबुद्ध्या नानाविधान्संस्कृतभाषोपनिबद्धान्छब्दकोशाननेकानायु- वेदशास्त्रग्रन्थांश्च पर्यालोड्यायम् "आयुर्वेदीयशब्दसागर" नामाऽभिनवः संस्कृतभाषा-तत्तद्द- शीयभाषा-प्रचार्यमाणशब्दाभिधानरूपी विनिर्मितः । अयमेतेषामस्मिन्भूतले परमश्लाघनीय उद्योगः कस्य सहृदयम्य मनसे न स्वदेत । स्वदेत सर्वस्यापि मनस इत्यूर्वबाहुरुद्घोषयामि । अनेन स्तुत्यपरिश्रमेणभिर्भूतले तत्तद्देशवासिनां तत्तदोषाधिनामाभिज्ञानेऽनन्यसाधारण: खल्लू- पकारोऽकारीति हेतोर्यावन्तो. धन्यवादा एभ्यो देयास्ते मन्मत्याऽपरिपूर्णा एवेति मत्वा मदात्मना सुप्रसन्नेन शश्वदभिकाइक्ष्यन्तेऽनन्तावधयो धन्यवादाः। अयं च"आयुर्वेदीयौषधिशब्दसागर नामा कोश एभिः केवलं परोपकारबुद्धया निर्लोभेनेवः विनिर्माय मत्सविध प्रेषितः । स व मया वहपकृतिरियमिति मत्वा सबहुमानं स्वीकृत्य स्वकीये "श्रीवेङ्कटेश्वर" मुद्रणालये मुद्र- यित्वा प्रकाशितः । आशंसे च सर्वविद्वत्सु--एतेषां श्रेष्ठिवर्याणां श्रीशालिग्रामवैश्यवाणां वाक्येऽपि भूयान्परिश्रमो निरन्तरपरिशीलनेन सनाथीक्रियतामिति. विद्वद्गणप्रेमाभिलाषी- खेमराज श्रीकृष्णदास "श्रीवेंकटेश्वर" छापाखाना- मुंबई.
आरंभिकश्लोकाः । आयुप्रदातारमनन्तकीर्तिप्रख्यापर्क वैद्यकसहिताया। रोगानशेषान्विनिवर्तितारं धन्वन्तरि ज्ञानकरं नमामि ॥१॥ सिद्धान्तक। गुरवेखिलस्य संकष्टहत्रै चरकाय भत्रे । प्रख्यातवीर्याय च सुश्रुताय ध्वंसाय लोकस्य रुजानमामि२।। विलोक्य कोशान्बहुशोऽतिदुर्लभान्विचिन्त्य शास्त्राणि सुवैद्यकस्य वै ।। विरच्यते शोषधिशब्दसागरः सुसंग्रहो लोकहिताय पुष्कलः ॥ ३ ॥ रामगङ्गातटे पुण्ये मुरादाबादपत्तने । नित्यं निवासिना तब दीनदारपुरे शुभे ॥ शालिग्रामेण वैश्येन नमस्कृत्य गजाननम् । पादपद्मं गुरोर्नत्वाऽगदकोशी विरच्यते ॥ भूमिका। धर्मार्थकाममोक्षाणामारोग्यं मूलमुत्तमम् । इतिहास लिखनेवाले शास्त्रज्ञपण्डिनगण, सम्पूर्ण बातोंको जानते हैं, कि संसारमें जितने प्रकारके उपचार हैं उन सबका मूल सनातन आयुर्वेद है, आयुर्वेदके प्रन्थों को साधारण मनुष्योंने नहीं रचा, वरन् जो महात्माजन ज्ञानके नेत्रोंसे भूत भविष्यत्को वर्तमानके समान जानते थे और अपने योगबलके प्रभावसे सारे संसारके कार्योंको जान लेते थे, उन त्रिकालज्ञ ज्ञानियोंने अत्यन्त परिश्रमसे इन आयुर्वेदके ग्रन्थोंको निर्माण किया है। कोई कहै कि उन मुनियोंका क्या नाम था और इन ग्रन्थोंके रचनेसे उनका क्या प्रयोजन था क्योंकि इन ग्रन्थोंके रचनेसे कुछ भक्ति, वा परमेश्वरका भजन अथवा मुक्तिका साधन नहीं है, फिर इन ग्रन्थाको उन्होंने क्यों रचा ? किन्तु उनका यह विचार था- अहिंसा परमो धर्मः प्राणरक्षा महत्तपः । प्राणदान सदा मोक्षका देनेवाला है, ब्रह्माजीने प्रथम अथर्ववेदका सम्पूर्ण सार लेकर आयुर्वेद प्रकाश किया, और अपने नामसे एक लक्ष श्लोकोंमें "ब्रह्मसंहि- ता" नाम एक ग्रन्थ निर्माण किया, फिर उस आयुर्वेदको बुद्धिनिधान ब्रह्माजीने सब कर्मोंमें दक्ष दक्षप्रजापतिको परम चतुर जानकर आयुर्वेदके आठों अंग अत्यन्त स्नेहसे पढ़ाये; फिर बुद्धिविशारद दक्षप्रजापति ने, देवोत्तम सूर्यके पुत्र, अश्विनीकुमार देव वैद्यको महाविद्वान् जानकर आयुर्वेद पढाया; यह अश्विनीमार वैद्यक विद्यामें अद्वितीय थे, परन्तु देवताओंने इनको जातिसे पतित कर रक्खा था, यज्ञमें भाग नहीं देते थे, जब शिवजीने ब्रह्माका शिर काटा तब इन्हीं अश्विनीकुमारने अपनी विद्या के (२) मायुर्वेदीय औषधिकोषकी- . , बलसे जोडा था, उसी दिनसे फिर यज्ञमें भाग पाने लगे, देवासुरसंग्राम जितने देवताओंको दैत्योंने घायल किया, उन सब देवताओंको अश्विनी कुमारने ही अच्छा किया, इन्द्रको और चन्द्रमाको भी इन्होंने रोगरहित कर परमपुख दिया, पूषादेवता, और भगदेवताका इन्हीं अश्विनीकुमारने उत्तम उपचार किया था; च्यवन ऋषिकोभी वृद्धावस्थामें इन्हीं अश्विनीकुमारने तरुण कर बलवान् और वीर्यवान् कर दिया था; इस प्रकार के अनेक कर्म करके वैद्यशिरोमणि और अग्रिम कहलाये, और सब देव- ताओंमें पूज्यवर और माननीय हुए, जब इन्द्रने आयुर्वेद विद्याका चमत्कार देखा, तो शचीपति इन्द्रने अत्यन्त विनयपूर्वक अश्विनीकुमारसे आयुर्वेदके पढ़नेकी याचना की, तब दयालु अश्विनी कुमारने जिस प्रकार वैद्यकविद्या पढ़ी थी, वह सब विद्या बुद्धिमान् इन्द्रको पढा दी, इस प्रकार देवलोकमें मायुर्वेदका प्रचार हुआ; एक समय श्रीभगवान् मुनियों में श्रेष्ठ महात्मा आत्रेयजी, संसारमें रोगोंसे पीडित और व्याकुल मनुष्यादि ऋषियोंको देख कर अत्यन्त चिन्ता करने लगे, कि क्या करूँ? किस प्रकार यह लोग रोगके कष्टसे छूट निरोग हों ? और आदिरूप अद्वैत भगवान्का ध्यान करें? क्योंकि जब यह प्राणी रोगग्रसित रहे, तब कैसे भगवान् वासुदेवका भजन करेंगे? और विना भजन मोक्ष कहाँ? और रोगोंका समूह ऐसा बढा है कि, उनको अपने नेत्रोंसे देख नहीं सकता, क्योंकि मेरे हृदयमें अत्यन्त दयालुता है, इसलिये मुझको बडा भारी क्लेश है, क्या उपाय करूँ? इन प्राणियोंकी दुर्दशा देखकर मेरा हृदय विदीर्ण होता है, इन दुःखियोंके दुःख दूर करनेका यहाँ कोई उपाय नहीं,मेरा जी चाहता है कि, इन्द्रके पास जाकर आयुर्वेद पढूं, क्योंकि पुरन्दर इस विद्या में महाचतुर और देवताओं का शिरोमणि है, इसलिये सुरपतिसे आयु- वेद पढकर इन प्राणियोंको नैरुज्य करूँ, यह बात मनमें ठान आत्रेयजी महाराज इन्द्रपुरीको गये और वहां जाकर देखा, कि इन्द्र दिव्य सिंहासनपर विराजमान है, चारों ओर देवता खडे हुए चंवर ढोर रहे हैं, किन्नर और गन्धर्व यश बखान रहे हैं, इन्द्रके मुकुटकी मणियोंका दशो दिशाओंमें सूर्यकी किरणों के समान प्रकाश हो रहा है, सुरराज आत्रेयजीको देखतेही सिंहासनको छोड़ हाथ जोड़ मुनिके सन्मुख आया, और अत्यन्त आदर सकारसे आसनदे आत्रेयजीका पूजन किया, फिर कुशल क्षेम पूछकर विनयपूर्वक पूछा, कि स्वामिन् ! आज कैसे इस दासके गृह आपकी कृपादृष्टि हुई? आत्रेयजीने इन्द्रके मधुर वचन सुनकर अपने आनेका कारण कहा, हे देवेन्द्र ! आप केवल स्वर्गलोकके ही राजा नहीं हो, ब्रह्माने आपको त्रिभुवन पति बनाया है, पृथ्वीमें व्याधियोंसे व्यथित और रोगोंसे व्याकुल जिनके चित्त, ऐसे प्राणी घोर सन्तापसे ग्रसित हो रहे हैं, उनका कष्ट निवृत्त करनेके लिये मेरे ऊपर अनुग्रह करके मुझको आयुर्वेदका उपदेश कीजिये, जिससे उन दीनजनोंका दुःख दूर हो और उनको सुख हो, तब इन्द्र ने कहा बहुत अच्छा आप पढिये, यह बात कहकर इन्द्र "आत्रेयजीको आयुर्वेद पढाने लगा, मुनीन्द्र इन्द्रसे वैद्यक विद्या अष्टांग सहित पढ, आशीर्वाद दे; इन्द्रको प्रसन्नकर मर्त्यलोकमें आये और आनकर मुनिवर - . .
भूमिका। (३) , भगवान् करुणानिधान, दयासागर जगत्उजागर, महातेजस्वी आत्रेयमुनिने जाने नामसे ( आत्रेयसंहिता ) रची, और अग्निवेश, भेड, जातू कर्ण, पराशर, क्षीरपाणि और हरीत इन छहों आने शिष्योंको वही संहिता पढाई, इनमें संत्रकर्ता अग्निवेश हुए, फिर इनके पीछे भेडादिकने अपने अपने ग्रन्थ रचे, इस प्रकार आत्रेयजीके छहों शिष्योंने अपने नामको छः संहिता निर्माण करके मुनिवृन्दवन्दित आत्रेयजीको सुनाई उनके किये हुए तंत्रादिक ग्रन्थोंको सुनकर आनेहाजी अत्यन्त प्रसन्न हुए और आशीर्वाद देकर कहा कि तुम्हारी छहों संहिता परमोत्तम हैं, यह सुन सत्र मुनि प्रसन्न हुए और स्वर्गमें देवर्षि और, देवताभी 'इनकी प्रशंसा करने लगे, कि तुम धन्य हो, जो प्राणदान देनेवाली विद्या तुमने अध्ययन की और तुम्हारेही लिये ब्रह्माजीने एक लक्ष श्लोककी संहिता रची है कि जिसमें एक सहस्र अध्याय हैं, और आगेको मनुष्यों के लिये इस आयुर्वेदके आठ अंग पृथक् पृथक् कर दिये, कि कलि- युगके मनुष्य अल्पायु और तुच्छबुद्धि होंगे, और यह बात ब्रह्माजीने ऋषियोंके चित्तमें प्रेरणा की, इनमेंसे एक एक ग्रन्थका अवलम्बन कर, सब महर्षियोंने एक एक सातंत्र ग्रन्थ रचा, किलोने शल्प अर्थात् शस्त्रविद्याका उपचार, किसी ने शालाक्य अर्थात् कण्ठसे ऊपरके रोगोंकी चिकित्सा, नेत्र कानादि, किसीने कायचिकित्सा अर्थात् ज्वर, अतिसार, शोष, अपस्मार, कुष्ठादि; किसीने भूतविद्या अर्थात् देव, असुर, गन्धर्व, यक्ष, राक्षस, पित, पिशाचादि; किसीने कौमारभृत्य अर्थात् बालकों की रक्षा, धायके दूधका शोधन, ग्रहोंसे उत्पन्न जो रोग उनकी शान्ति इत्यादि; किसीने अगद तंत्रका उपाय अर्थात् सर्प, कीडा, लूता, विच्छु, मूंसा इत्यादिके विषका यत्न, किसीने रसायन अर्थात् अवस्था और बल, बुद्धिका बढाना और किसीने वाजीकरण तन्त्र अर्थात् अल्पवीर्यका बढाना और दूषित वीर्य का शुद्ध करना; यह आयुर्वेदके आठ अंग हैं, इन सब रोगोंकी चिकित्सा भली भाँति वर्णन की, और वैद्यकविद्यामें किसी रोगकी चिकित्सा नहीं छोडी, जहाँतक संसारमें मनुष्य, पशु, पक्षी इत्यादि जीव हैं सत्रका यथायोग्य उपाय लिखा है, कि जिसमे संसारमें रोगराधा न रहें, यह विचार कर भरद्वाज, चरक, धन्वन्तरि और सुश्रुतादि ऋषियोंने सब संसारमें वैद्यके विद्याके प्रचार करने का विचार किया, उनही ऋषियोंके द्वारा मनुष्योंको वैद्यकविद्या प्राप्त हुई, आजतक संसारमें वही परम्परा चली आती है, और विद्वान् वैद्योंके बनाये ग्रन्थ भी जगत्में इस समयतक विद्यमान हैं, उसी परम्पराकी रीतिपर और भी अनेक नये नये ग्रन्थ संस्कृत और हिन्दी भाषामें बनाये गये, कि जिनके द्वारा प्राणियोंके सब रोग छूट जॉय, और वैद्यलोगभी उन ग्रन्थोंको पढकर तन मा धनसे प्राणियों का उपचार करने लगे, और अपने चित्तमें यह नि- श्चय कर लिया कि, अपने प्राण जाय तो जायँ परन्तु संसारमें सहस्रो प्राणियों का उपकार हो, यद्यपि उन प्राचीन वैद्याको मरे हुए सहस्रों वर्ष बीत गये, परन्तु जब उनके ग्रंथोंकी औषधीरचना देखने में आती है, और लिखी पढी जाती है, तब नयीही ज्ञात होती है, जैसे अमृत सदैवही गुणदायक होता है जिन ऋषियोंने , - - (१) आयुर्वेदीय औषधिकोषकी- - उन ग्रन्योंको रचा है उनका तो कहना ही क्या है ? परन्तु उन ग्रन्थों में जिनकी चर्चा मात्र भी लिखी हैं, उनकी कीर्ति और उनके नामको अचल कर दिया है, उन विद्वान् वैद्योंके अर्व गुण और महिमाको देख भालकर जिन प्राचीन राजा- ोंने विशेष करके भारतखण्डमें मार्तण्डके समान अपने शुभ समाचारोंमें प्रका- शित किया है, और विनयपूर्वक आदर सम्मानसे उन विद्वान् लोगोंकी शुश्रूषा करते रहे, और उन विद्वान् वैद्योंने भी उनकी सत्कीर्तिको अपने ग्रन्थ रचनाके द्वारा अजर अमर कर मार्तण्डकी नाई खण्ड खण्डमें प्रकाशित कर दिया, और निन राजाओंकी आयुर्वेद में आयुर्वेद में प्रीति नहीं थी, और अपने शरीरको निरोग रखना अच्छा नहीं समझा, उनका नाम मृत्युके होते ही संसारसें समाप्त हो गया, कोई कुलमें हुवा तो जलदान वा श्राद्धके समय अथवा पिण्डदानके देते हुए नाम स्म- रण हुआ तो ले लिया, देखिये ! धन्वन्तरीका अवतार, काशीराजा दिवोदास, नकुल सहदेवादि राजाओंका आयुर्वेदमें कैसा स्नेह था, कि उन राजर्षियों का नाम उन वैद्योंने अपने अपने ग्रन्थोंमें लिखकर प्रसिद्ध किया और उनके नामको सुमेरुके समान अचल कर दिया, और चरक, सुश्रुत, वाग्भट प्रभृति ग्रन्थोंका चमत्कार अत्यन्त ही विलक्षणताके साथ दर्शाया है, देखो ! राजा हर्ष, चक्रदत्त, मदनपाल, विक्रमा. दित्य, भोज का सुयश कैसा फैल रहा है, लनको भेषजरचना, वैद्यमण्डली और प्रजागणोंमें माननीय हैं, उसीका वर्ताव आजतक उसी प्रकार चला आता है, इसका मुख्य कारण यही है कि उन्होंने वैद्याको सर्वोपरि बुद्धिमान् जान कर, और आयुर्वेदको सुखनिधान मानकर, उनका अत्यन्त आदर सन्मान किया, और मुह मांगा द्रव्य उनको दिया, उनकेही प्रभावसे राजनिघण्टु, राजवल्लभ, मदन. पालनिघण्टु, वैद्योंके कंठाग्र हो रहा था, जैसे महाराजाधिराज श्रीमान् राणा प्रतापसिंह सवाई जयपुर निवासी, वैकुण्ठवासीके नामसे वैद्योंने अमृतसागर नाम ग्रन्थ रचकर प्रसिद्ध किया, यह इस देशके पंडितों काही प्रतार था, और यह देश ऐसा उत्तम था कि इसके समान संसारमें दूसरा देश नहीं था, इस भारतखण्डके वैद्य बड़े चतुर थे, इन्होंसे - फारिस, अरव, रूम और युरपवालोंने वैद्यक विद्या सीखी थी, जो आज बातबातमें बालकी खाल निकाल रहे हैं, और इसी भारत- खण्डमें सम्पूर्ण औषधियेंभी उत्पन्न होती थीं, इन भारतवासियोंको कभी किसी औषधि के लिये, अथवा उपचारके लिये किसो और दूसरे देशकी सहायता लेनी नहीं पडती थी, क्योंकि यह देश सञषधियों का भाण्डागार था, यहीसे फारिस, अरब- स्तान, रूम, रूस, काबुल, कन्धार, जरमन, इंग्लेण्ड, एसिया, आफ्रीका, इटाली, पोटुंगाल और फ्रान्स आदि सब देशोंमें औषधिय जाती थी, और आजतक जाती हैं, सनातन आयुर्वेदके प्रसादसेही लोग सम्पूर्ण रोगोंसे अनायास छूटे जाते थे, जहां एक बार प्राणीके शरीरसे रोग छूटा, फिर बहुत दिनतक रोगका मुख देखना नहीं पडता था, सब देशान्तरीय लोग जानते हैं, कि आयुर्वेदीय ग्रंथोंमें बेड बडे कठिन और असाध्य रोगोंका उपचार लिखा है, इस देशको प्रजाके ऊपर इस .
भूमिका। (५) - . देशकी औषधियभी भलीभाँति गुण करती हैं, फिर हमको और देशोंकी औषधि. योसे क्या प्रयोजन ? परन्तु बडे खेदकी बात है, कि हिन्दुओंका राज्य जातेही हमारी परमप्रिय प्रयोजनीय आयुर्वेदीय चिकित्साओंकीभी अवनति होगई, और शनैः शनैः इन ओषधियोंकी ऐसी दुर्दशा हुई कि, संस्कृतवैद्यकके ग्रन्थोंका नाम संसारसे उठ गया, केवल वैद्यमनोत्सव, वैद्यजीवन भाषा, दिल्लगनके चौबेले और अमृतसागरको बडा अन्य समझने लगे, और इन्हींको अमर मूल समझते थे, जिसको एक चूर्णभी स्मरण था, वह अपने आपको पूर्ण वैद्य समझता था, और वैद्योंको इन्हीं छोटे छोटे ग्रन्थोंका बडा अभिमान था, यहांतक आलस्यने दबाया कि पढना लिखना सब छोड दिया, केवल दश पन्द्रह औषधियों के नाम रह गये, जैसे सोंठ ,मिरच, गिलोय,हींग, पीपल, अजवायन, इत्यादि और चरक, सुश्रुत, वाग्भटका तो नामही नाम रह गया, वैद्योंको यहभी सुधि न रही कि,इन ग्रन्थोंका आशय क्या है, और कितने श्लोक हैं, और पठन पाठनका तो कहनाही क्या है, और औषधियों को तो पंसारी लोग ऐसे भूल गये कि उनका नामनकभी उनको स्मरण नहीं रहा, कैसे स्मरण हों? जब कि सत्र औषधि वर्तनाहीमें वर्षों तक रक्खी हैं, और रक्खी ही रक्खी सडजायँ, और कोई उनका ग्राहक न हो, फिर उनका क्या प्रयोजन ? जो नई औषधि और मोळ ले, और हाटमें सैन कर रक्खें इस कारण पंसारी सारी संसारीकी चिकित्साओंको भूल गये, और जो कुछ पढे वे पढे वैद्य रह गये, वहभी ऐसे, जैसे प्रातःकालके तारे कहीं कहीं चमकते रहते हैं, परन्तु वहभी छविक्षीण और यतिहीन, इस प्रकार सब संसार वैद्यविद्यासे शून्य हो गया, डॉक्टर और यूनानी हकीका सम्मान होने लगा, नये नये अंग्रेजी फारसी के औषधालय खुल गये, ठौर ठौर शफाखाने बन गये, कौनेन और सोडा- वाटरका, नाम सबके मुखसे निकलने लगा, नीलोफर, गावजवा, गुलेबनुफशः मा- जून, फलासफाकी सब सराहना करने लगे । धन्य है सर्वशक्तिमान् परेमश्वरकी गतिको, कभी तो वह चर्चा, और कभी यह वेसुधि, क्या था और क्या कर दिखाया, वैद्योंकी वह ब त न रही, आयुर्वेदीय शास्त्रोपचारकी ओरसे लोगोंकी दृष्टिही फिर गई, उसका किञ्चि-मात्रभी विश्वास नहीं रहा, केवल डाक्टरोंही- का स्थान २ पर धन्वन्तरीके समान आदर सन्मान होने लगा, और वैद्य लोग जो कुछ औषधि बनानी जानतेभी थे; उनका बनानाभी उन्होंने छोड दिया, क्योंकि कोई बूझा नहीं रहा, सब रोगोंकी औषधि वैद्योंके पास न रहनेसे साध्य रोगीभी अच्छे होनेसे रह गये, प्रथम तो वैद्य लोगोंको बूझही नहीं थी, और दैव योगसे कभी समय कुंतमय कोई वैद्य किसी रोगीके देखनेको चलाभी जाता, तो कहता अमुक औषधि, वा अमुक रस, अथवा अमुक आसवकी इस रोगीके लिये आवश्यकता है, सो तुम बना लो, वा कहींसे मँगालो, बस ! रस और · आसवके बनानेही बनाने में रोगकी वृद्धि होकर रोगी. परमधामको चला जाता कहीं कहीं औषधियोंकी पहिचानोमें झमेला पडजाता; इसलिये रोगीकी इति श्री हो जाती, (६) आयुर्वेदीय औषधिकोषकी- इस महाकठिन हृदयविदारक अवस्थाको देखकर कलकत्ते और लाहोरमें बहुत से सज्जनोंने मायुर्वेदीय पाठशालायें बनाकर आयुर्वेदका पढाना प्रारम्भ किया, और दूरदूरसे औषधियोंके वृक्ष मँगा मँगाकर अपने अपने बागीमें लगाये, और संसारका यहाँतक उपकार किया कि, जिसका वर्गन लिखने में लेखनीभी असमर्थ है. उसी अवसरमें वैश्यवंश अवतंस मुम्बईपत्तननिवासी श्रेष्ठि खेमराज श्रीकृ. ष्णदास ने अत्यन्त पुरुषार्थके साथ, आयुर्वेदकी नौकाको डूबती देखकर झटपट अपनी भुजाओंके बलसे उबार लिया, और यहाँतक सहायता की कि,अपना तन, मन, धन, उसीके समर्पण कर दिया, और लाखों रुपैया व्यय करके लोप होते हुये आयुर्वेद के अन्योंको दूरदूरसे मँगामँगाकर बहुत धन दे भाषाटीका कराय, अत्यन्त सुगमकर, उनको निजमुद्रालयमें मुद्रित कराय, लोगोंका महान् उपकार किया, और जिस कार्यकी जैसी आवश्यकता समझी उसको वैसाही किया, किसी ग्रन्थको मूल और भाषानुवाद सहित, किसी ग्रन्थको संस्कृतटीका सहित, किसी ग्रन्थको केवल मूलमत्रही छापकर प्रकाशित कर दिया, इन महाशयने चरकका भाषनुवाद बनानेको पं० मेहेरचंदजी को कहा और सुश्रुतका भाषानुवाद करानेको पण्डित मुरलीधरजीसे कहा, वाग्भट, हारीतसंहिता, कालज्ञान, मदनपालनिघण्टु इत्यादि, वेरीनिवासी पण्डित रवि. दत्तजीसे भाषाटीका कराय प्रसिद्ध किया, बृन्निघण्टुरत्नाकर, शार्ङ्गधर, माधवनिदान, वैद्य रहस्य, योगतरंगिणी व योगचिन्तामणि प्रभृति अनेक ग्रन्थ पण्डित दत्तरामचौबे मथुरानिवा- सीसे भाषानुवाद और संग्रहकराकर प्रकाशित किये, इनके अतिरिक्त औरभी अनेक ग्रन्थ और और पंडितोंसे भाषाटीका कराय प्रसिद्ध किये फिर दूसरी बार वाग्भटको पण्डित ज्वालाप्रसाद मुरादाबादनिवासीसे शुद्धकराके छापा. इन महाशयने कुछ वैद्यककेही ग्रंथ नहीं छापे किंतु औरभी वेद, वेदाङ्ग, शास्त्र, पुराण, इतिहास, नाटकादि छापछाप- कर विल्यात किये हैं, इसप्रकार ग्रंथप्रकाश करते करते एकदिन उन महाशयके उदधिरूपी मनमें अभिलाषारूपी सुधाकर प्रगट होकर उदय हुआ कि किसी वैद्यसे एक कोष ऐसा बनवाना चाहिये, कि जिसमें प्रायः सम्पूर्ण औषधियोंके संस्कृत और भाषानाम हों, और अकारादि क्रमभी हो, ऐसा विचारकर उस अभिलापारूपो निशाकर को चतुर्दशी, कुहू प्रतिपदादिक पत्रावरण ( लिफाफः) में बन्दकरके मेरी ओरको प्रेषित किया, इस प्रकारका एक कोष तुम निर्माण करो तो वह संसारके लोगोंको और वैद्योंके लिये परम हितकारी और भारी सुख उपजानेवाला होगा, उस अभिलाषारूपत्रिनेत्रचूडामणि ( चन्द्रमा ) को देखकर, मेरा हृदय समुद्ररूपी उमडा और उमंगरूपी तरंगें उसमें से उठनेलगी, उस समय उत्साहरूपी कलानिधि- ने अपनी किरणोंसे अमृत वरसाना आरम्भ किया, उस अमृतकी तरीसे चित्तरूपी बन और पर्वतोपर सब औषधि हरीभरी होगईं, और मेरो दृष्टिके सामने तद्रूप दिखाई देनेलगीं, उस समय मैंने सेठजीकी आज्ञानुसार कोषरचनेका प्रबन्ध करदिया, और इसकोषकी सहायताकेलिये इतने कोष एकत्र किये, अमरकोष, पर्यायरत्नमाला, शब्द- चन्द्रिका, शब्दार्यचिन्तामणि, उणादिकोष, मेदिनीकोष, हेमकोष, हलायुधकोष, - भूमिका। (७) - धरणीवर, जटाधर, धनञ्जय, विजयरक्षित, अजयपाल. त्रिकाण्डशेष, हारावलि, वैद्यककोष, औषधिकोष, शब्दकल्पद्रुमकोष प्रभृति, और अनेक कोष और चरक, सुश्रुत, भावप्रकाशादि ग्रन्थोंसे, वह द्रव्य जिनका आयुर्वेद चिकित्सामें व्यवहार किया जाता है, शारीरकके यंत्र और रोगादिकोके नाम लिङ्ग और अर्थ लिये गये हैं, सब शब्दोंका लिङ्ग जानने के लिये, पु० स्त्री० क्ली० त्रि. यह चार संकेत चिह्न व्यव- हार किये गये हैं, अर्थात् पुंल्लिङ्गके स्थानमें (पु० ) स्त्रीलिङ्गके स्थानमें (स्त्री० ) नपुं- सकलिङ्गके स्थानमें (न० ) ( क्ली० ) और त्रिलिङ्गके स्थानमें ( त्रि० ) चिह्न लि- ख दिया है, एकार्थबोधक शब्दोंके बीचमें ( 1 ) इसप्रकारका चिह्न है, और संस्कृत भाषा शब्दोंके वी चमें (॥ ) इस चिह्न का व्यवहार नियत कियाहै और जहाँ (17) ऐसा चिह्न ई वहां ऊपरवाले शब्दका अर्थ जान लेना । जब यह ग्रन्थ सम्पूर्ण हुआ, तो सब मित्रों की सम्मतिसे इस कोषका नाम "शालिग्रामौषधशब्दसागर"रक्खा, और सर्वसाधारणके उपकारार्य इस कोषको श्रीयुत-वैश्यवंशावतंससकलगुणागार,परमोदार, गोब्राह्मगहितकारी, सत्यव्रतवारी, सर्वविद्याविभूषित, श्रीमद्रनाकरसन्निकटमुम्बई- पत्तननिवासी, श्रीमान् श्रेष्ठि खेमराज श्रीकृष्णदासजीको पूर्णप्रतापी जानकर मैंने यह कोष समर्थग किया, और उनको कोटिशः धन्यवाद है, कि जिन्होंने अपना धन- व्यय करके इस शालिग्रामौषधशब्दसागरको अपने जगत्प्रसिद्ध "श्रीवेंकटेश्वर" यंत्रालयमें मुद्रित करके मुझको कृतार्थ किया, और जिन वैद्योंको औषधियों के अधिक पर्याय और गुणदोष देखने हों वह वैद्य लोग मेरे निर्माण किये हुए, शालि- ग्रामनिवण्टुभूषग, और भारतभैषज्यभास्करमें देखलें, तो उनकी भली भाँति तृप्ति होजायगी, अब मेरी सब महात्मा पुरुषोंसे यह प्रार्थना है कि,इस कोषको देखकर मेरा परिश्रम सफल करें, और जहाँ कहीं अशुद्धि देखें तो मुझपर कृपा करके एक कृपापत्र भेजदें। आपका कृपाभिलाषी- शालिग्रामवैश्य, दीन्दारपुरा, मुरादाबाद-सिटी। theirdLgAtta MaratERE.BACTEREItatason शालिग्रामौषधशब्दसागरकी वर्गानुकमाणका । वर्ग पृष्ठांक | वर्ग पृष्ठांक १ (अ) (आ) (इ) (ई) (उ) hor chur १२ १५ १६ १६ १९ ७१ ७१ ८१ ९० ९३ १०० १ ९ ( ऋ) (ए) (ऐ) १९ २० २० २० २० (ओ) (ड) (त) (द) (ध) (न) (प) (फ) (ब । व) (भ) (म) (य) (र) (ल) (व) (श) (प) (स) (ह) (क्ष) ११७ ११९ १२२ १२८ १४४ १४६ ४८ (औ) (क) (ख) (ग) (घ) (च) (छ) (ज) (झ) (ट) ५८ १५५ १५८ १७६ १९१ १९१ २१० ६४ ६५ ७० २१२ IRUSHRISHALA AAR त्रैलोक्यपतये नमः। शालिग्रामौषधशब्दसागर अर्थात् आयुर्वेदीय ओषधिकोष. पेड़ । फार्सी भाषा। अ अग्निगर्भा-स्त्री० महाज्योतिष्मती॥बडी मालकांगनी । अ-पु० घासुदेव ।। विष्णु । अग्निज-पु० आमजारवृक्ष ॥ अमिजारका पेड़ । अंशुक-न० पत्र ।। तेजपात । अग्निजात-पु० अग्मिजारवृक्ष ॥ अग्निजारका पेड़। अंशुमत्फला-स्त्री० कदलीवुक्ष ।। केलावृक्ष । अग्निजार-पु. वृक्ष-विशेष ॥ अग्निजारका वृक्ष । अंशुमती-स्त्री. शालपर्णी ।। शालवन, शरिवन । अग्निजाल-पु० अग्मिजारका अङ्घ्रिस्कन्द-पु० गुल्फ ।। पाँव की घुट्टी। अग्निज्वाला-स्त्री० जलपिप्पली ॥ धातकीवृक्ष । अकरा-स्त्री. आमलकी ।। आमला । जलपीपल । पनिसगा। धावईके फूल । अकुप्य-न. स्वर्ण, रौप्य ॥ सोना । रूपा । अग्निजिह्वा-स्त्री० लाङ्गलीवृक्ष ।। कलिहारीवृक्ष । अकोट-पु. गुवाक ।। सुपारी । अग्निदमनी-स्त्री० क्षुप-विशेष ॥ अग्निदमनी । अक्रान्ता-स्त्री० बृहती ।। कटाई । अग्निदीप्ता-स्त्री० महाज्योतिष्मतीवृक्ष ।। बड़ी माल. अक्लिका-स्त्री. नीलीवृक्ष ।। नीलका वृक्ष । कांगनी। अखट्ट-पु० प्रियालवृक्ष ।। चिरौंजीका वृक्ष । अग्निनिर्यास-पु० अग्निजारवृक्ष॥अमिजारका पेड़ । अखर-पु० कार्पासवृक्ष ।। कपासका पेड, वाडी। अग्निभ-न० स्वर्ण ॥ सोना। अगज-न० शिलाजतु ।। शिलाजीत । अग्निमणि-पु० सूर्यकान्तमणि ॥ आसी सीमा अगरी-स्त्री० देवताडवृक्ष ।। देवताडवृक्ष । अगरु-न० पुं० अगुरु ।। अगर । अग्निमन्थ-पु० गणिकारिकावृक्ष । अरणी, अगेथुवृक्षा अगस्ति-पु० मुनिद्रुम ॥ हथियावृक्ष । अग्निमुख-पु० चित्रकवृक्ष । मल्लातक । चीतावृक्ष ।। अगस्तिद्रु-पु०.वङ्गसेन ॥अगस्तियावृक्ष-हथियावृक्ष । अगस्तिय-पु० स्वनामवृक्ष ॥ अगस्तियावृक्ष, हथि. अग्निमुखी-स्त्री० कलिकारीवक्ष ॥ कलिहारीका पेड। अग्निरजाः [स]-पु०इन्द्रगोपनामक रक्तवर्ण कीट! अगुरु-न० शिंशपावृक्ष । कृष्णागुरु । स्वनाम प्रसिद्ध इन्द्रगोपनामवाला लाल रङ्गका कीड़ा। बीरबहूटी। सुगन्धिकाष्ठ-विशेष॥ सीसौंका वृक्ष । काली अगर । अग्निरुहा-स्त्री० मांसरोहिणी ॥ गहिनी, मांसरोहिनी। आग्निवल्लभ-पु० सालवृक्ष । राल ॥ ससुखा,सालवृक्ष । अगुरुशिंशपा-स्त्री० शिंशपावृक्ष ॥ सीसौंका वृक्ष । राल। धूना। अगूढगन्ध-न० हिंगु ॥ हींग । अग्निबीज-न० स्वर्ण ॥ सोना । अग्नि-पु० चित्रकवृक्ष ।। रक्तचित्रकवृक्ष । भल्लातक। अग्निवार्य-न० स्वर्ण ।। सोना । निम्बूक । स्वर्ण । पित्त ।। चीतावृक्ष । लाल चीता वृक्ष । भिलावेका वृक्ष । नीबूका वृक्ष। सोना।पित्ता अग्निशिख-पु० कुसुम्भवृक्ष । कुंकुम ।। कुसुमका अग्निकाष्ठ-न० अगुरु ॥ अगर । अग्निगर्भ-पु० अमिजारवृक्ष ।। सूर्यकान्तमाणि । अग्निशिख-न० स्वण कुंकुम । कुसुम्भपुष्प॥सोना । अग्निजारवृक्ष । आतसी सीसा-फार्सी भाषा । केशर । कुसुमके फूल । भिलावेका वृक्ष । यावृक्ष। अगर । वृक्ष । केशर।
(२) आयुर्वेदीय- जङ्गली कबूतर । । अग्निशिखा-स्त्री० लागली॥ तण्डुलीय शाक। कलि अङ्गारवल्ली-स्त्री० महाकरञ्ज । भाङ्गी॥ बड़ी कर छ । हारी । चौराईका शाक । ब्रह्मनेटि । भारङ्गी। अग्निशेखर-न० कुंकुम ।। केशर । अङ्गारिका-स्त्री० इक्षुकाण्ड । पलाशकलिका ॥ अभिसम्भव-पु० अरण्यकुसुम्भ ।। वनजातकुसुम । एक प्रकारका तृण । ढाक वा पलासकी कली । अग्निसहाय-पु० वनकपोत ।। वनपरेवा, घुग्घू ॥ अत्रि-पु० वृक्षमूल । चतुर्थांश ॥ वृक्षकी जड़ । चौथा भाग। अग्निसार-न० रसाञ्जन ।। रसोत । अत्रिपर्णी-स्त्री० पृश्निपर्णी ॥ पिटवन । अप्रपणीं-स्त्री० अजलोमावृक्ष । शुकशिम्बी ।। किवा- अंत्रिवल्लिका-स्त्री० पृश्नैिपर्णी ॥ पिटवन । चभेद । कौउँ, किवाँच । अच्युतावास-पु० अश्वत्थवृक्ष ॥ पीपलका वृक्ष । अज-पु० छाग । माक्षिक धातु || बकरा । माखी अग्रमांसु-न० हृदय ।। कलेजा-फार्सी भाषा । धातु । सोनामाखी। अग्रलोहिता-स्त्री० चिल्लीशाक || चिल्लीका शाक । अजकर्ण-पु० असनवृक्ष । विजयसार । अग्रिमा-स्त्री. लवणीफल ।। सीताफल । अजकर्णक-पु० सालवृक्ष ॥ सालका पेड़ । अंकलोड्य-पु. चिञ्चोटकतृण ।। जलसमीप-चिञ्चो. अजगन्धा-स्त्री. वनयवानी ॥ अजमोद । टकतृण। अजगन्धिका-स्त्री. वरीवृक्ष ॥ वनतुलसी । अङ्कोट-पु० स्वनामप्रसिद्ध वृक्ष ।। ढेरा, टेरावृक्ष । अजगन्धिनी-स्त्री० अजशृङ्गीवृक्ष ॥ मेढाशिङ्गी । अङ्कोठ-पु०५ अजटा-स्त्री. भूम्यामलंकी || भुईआमला ! अङ्कोल-पु." अजडा-स्त्री. शूकशिम्बी ॥ काँछ। कौंच अङ्कोलक-पु०॥ अजथ्या-स्त्री० स्वर्णयूथिका ॥ पाली जूही । अङ्कोलसार-पु०स्थावर विषभेद ।। अफीम, संखिया अजदण्डी-स्त्री० ब्रह्मदण्डी ॥ ब्रह्मदण्डी औषध । इत्यादि विष । अजमक्ष-पु० बबूरवृक्ष ॥ बबूरवृक्ष । अङ्गक-पु० अगरु ।। अगर । अजमोदा-श्री. वनयवानी। पारसीकयवानः । अङ्गग्रह-पु. गात्रवेदना ।। गात्रपीडा । अंगमें | यवानी ॥अजमोद खरासानीअजमायन । अजमायन पीडा । अंगोंका जकड़ना। अजमोदिका-स्त्री० यवानी ॥ अजमायन । अङ्गनाप्रिय-पु. अशोकवृक्ष ॥ अशोकका वृक्ष । अजया-स्त्री० विजया.॥ भांग, भङ्ग । अङ्गरक्त-पु० वृक्षविशेष || कबीला । कमीला । अजरा-स्त्री०जीर्णफजीलता । घृतकुमारी ॥ भाषलोडय-पु० चिञ्चोटकतृण । चिचोटकतृण । विधाराभेदे । घीग्वार । अङ्गारक-पु० कुरण्टकवृक्ष । भृङ्गराज ।। पीली अजलोमान-पु० वृक्ष-विशेष ।। अजलो- कटसरैया । भङ्गरा। मावृक्षस्थूकशिम्बी ॥ कौछ । कोच । अङ्गारकमणि-पु० प्रवाल ।। मूंगा । अजहा-स्त्री० शूकशिम्बी ॥ कौछ । कौंच । अङ्गारपर्णी-स्त्री. ब्राह्मणवृष्टि ।। माडी। अजशृङ्गी-पु. वृक्ष-विशेष ॥ भेढाशिङ्गी । अङ्गारपुष्प-पु० इंगुदीवृक्ष॥ गौदीवृक्ष । हिंगोरवृक्ष। अजागर-पु. भङ्गराजवृक्ष ।। भाङ्गरावृक्ष । अङ्गारमर्जा-स्त्री० करञ्ज-विशेष ॥ एक प्रकारकी अजाजी-स्त्री कृष्णजीकरक । श्वेतारक । काको- दुम्बेरिका ।। कालाजीरा । सफेद जार।। कठूम्बर ! अङ्गारमचरी-स्त्री." अजादनी-स्त्री० क्षुद्रदुरालभा । छोटा धमामा । अङ्गारवल्ली-स्त्री० करञ्ज-विशेष । ब्राह्मणयष्टी । गुञ्जा ॥ एक प्रकारकी करन । भारङ्गी । धुंयुची, अंजान्त्री-स्त्री० वृक्ष विशेष ।। नीलबोना-बङ्गभगा। चौटली, रत्ती । अजिनपत्रा-स्त्री. चर्मचटिका || चिमगादड़ । १ करख। । एक मरका जबासा।
औषधिकोष । (३) दारवान । नखी। अजीर्ण-न० स्वनामख्यात रोग ।। अजीर्णरोग । अतिचरा-स्त्री० पद्मचारिणी वृक्ष ।। गंदेका वृक्ष । अजुटा-स्त्री० भूम्यामलकी ।। भुईआमला । अतिच्छन्न-पु०भूतृण ।।जलतृण । रक्तवर्णकोकिलाक्ष । अञ्जन-ज. सौवीराञ्जन । रसाञ्जन ।। सुर्मा । शरबाण | जलतृण । लालतालमखाना । रसोंत । अतिच्छत्रक-पु० छत्रवृक्ष । भूतृण ॥ छतरियावृक्ष । अञ्जनकेशी-स्त्री० हविलासिनी नाम गन्धद्रव्य ॥ अतिच्छत्रा-स्त्री. अवाक्पुष्पी ।। सौंफ , वनसौंफ । अञ्जनी-त्री० कटुकावृक्ष । कालाञ्जनी ॥ कुटकी- अतिजागर-पु० नीलकौञ्च ॥ नीलवर्ण बगुलापक्षी । वृक्ष.। काली कपास । अतितीवा-स्त्री० गण्डदूर्वा ॥ गांडरदूव । अञ्जलिकारिका-स्त्री० लज्जालुलता ॥ छुई-मुई- अतिदीप्य-पु० रक्तचित्रकवृक्ष ॥ लाल चीतेका वृक्ष । लाजवन्ती । लज्जावन्ती । अतिपत्र-पु० हस्तिकर्ण ॥ हस्तिकन्द । अञ्जलि-पु० परिमाण-विशेष ॥ ३२ तोले । अतिबला-स्त्री० पीतवर्णबला । नागवला ॥ सहदेई। अधीर-न०स्वनामख्यात फलवृक्ष-विशेष ।।अजीर। कंघई । गुलसकरी । कंघी । अटरूष -पु० वासकवृक्ष ॥ अडूसावृक्ष । बसौंटा। अतिमङ्गल्य-पु० बिल्ववृक्ष ॥ बेलका पेड़ । अतिमुक्त-पु. माधवी लता । तिनिशवृक्ष । माध. अटरूष-पु०" अट्टहासक-पु० कुन्द पुष्पवृक्ष।। कुन्दपुष्पका पेड़ । वीपुष्पलता । तिरिच्छवृक्ष । अणु-पु० बीहि-विशेष । सूक्ष्मधान्य ॥चीनाधान । अतिमुक्तक-पु० तिनिशवृक्ष । तिन्दुकवृक्ष । पुष्प- छोटे धान चैना। वृक्षविशेष ॥ तिस्च्छिवृक्ष । तेंदूवृक्ष । एक प्रकारके पुप्पोंका वृक्ष । अणुरेवती स्त्री० दन्तीवृक्ष ॥ दन्तीवृक्ष । अणुव्रीहि-पु०सूक्ष्म धान्य ।। प्रसातिका । सही अतिमोक्षा-स्त्री० नवमल्लिका ।। नेवारी। इत्यादि छोटी जातिके धान । अतिरसा--स्त्री० यष्टिमधु । मूर्धा । राना ॥ मुल. अण्ड-न० मृगनाभि । डिम्ब ।। कस्तूरी । अण्डा। हठी। चुरनहार । रासना । अतिरोग--पु० क्षयव्याधि । क्षयरोग । अण्डक-पु. अण्डकोष । अण्डकोटरपुष्पी-स्त्री० अजान्त्रीवृक्ष । नलि रास्ना।। अतिरोमश--पु०वनछागल । बृहत्वानर ।। वनको नीलवोना वङ्गभाषा । बकरी, भेड, बड़ा बन्दर । अतिलोमशा. - स्त्री० नीलाव॒ह्ना ॥ नीलवोनो वङ्ग. अण्डकोष-पु. स्वनामख्यात शरीरावयव-विशेष ।। अण्डकोष । अण्डजा-स्त्री० मृगनाभि ।। कस्तूरी । मुश्क फारसी । अतिवर्तुल-पु० कलाय--विशेष ।। मटर । अतिविषा-स्त्री. मस्क इंग्रेजी। • शुक्ल, कृष्ण, अरुण वर्ण कन्द वि- शेष ।। अतीस · अतिविष मराठी भाषा । अण्डाली-स्त्री० भूम्यामलकी ।। भुइआमला। अतिशुपर्णा, अतिशुपण्या-स्त्री० मुद्गपर्णी ॥ अतसी-स्त्री० कृष्णपुष्प क्षुद्रवृक्षभेद ।। अलसीमसी. मुगवत । ना । जवस मराठी भाषा। अतिसाम्या स्त्री० लतायोप्टेमधु।।बेलवाली मुलहटी। अतिकन्दक-पु० हस्तिकण ॥ हस्तिकन्द । अतिसार--पु० स्वनामख्यात रोग ।। आतिसाररोग। अतिकेशर-पु० कुब्जकवृक्ष ।। कुंजावृक्ष । अतीसार--पु." अतिगन्ध-पु. भूतृण । चम्पक । मुद्गरवृक्ष । अतुल-पु. तिलवृक्ष । तिलवृक्षा । गन्धक ।। भूस्तृण ।चम्पा मोगरावृक्ष । गन्धक । अत्यन्तसुकुमार.-पु० कंगुनीवृक्ष ।। कांगुनी वृक्ष । अतिगन्धालु-पु० पुत्रदात्री लता ।। पुत्रदा । अत्यम्ल-न० वृक्षाम्ल ।। विषांबिल, इमली । अतिगुहा-स्त्री० पृश्निपीविशेष ॥ छोटी पिठवन । अत्यम्लपर्णी स्त्री० लता-विशेष ।। एक प्रकारकी कवरावृक्ष । भाषा । बेला (४) आयुर्वेदीय- - । अनिलनक-पु० अत्यम्ला--स्त्री०वनवीजपूर ।। वनजातिबिजोरा नीबू । अनन्त-न० अभ्रक ।। अभ्रक । अत्याल.-पु-रक्तचित्रकवृक्ष ।। लाल चीतेका वक्ष । अनन्त-स्त्री० श्यामालता । अग्निशिखावृक्ष । अत्यूहा--स्त्री. नीलिका । शेफालिका ।। नीलभेद । दूर्वा । पिप्पली ।दुरालभा । हरीतकी । आमलकी। निर्गुण्डीभेद, सिह । गुडूची । श्वेतदूर्वा । नीलदूर्वा । आग्निमन्थवृक्ष । अदल--पु० हिज्जलवृक्ष ।। समुद्रफल । स्वर्णक्षीरी ।। गौरीसर, कालीसर । कलिहारी । अदला--स्त्री० घृतकुमारी । घीग्वार, घीकुआर । दूब । पीपल । धमासा। हरै । आमला । गिलोय। अद्भुतसार--पु. खदिरसार ।। खैरसार । सफेद दूब । नील-हरी दूब। अगेथुवृक्ष । चोक । अद्रिकर्णी-स्त्री० अपराजिता ।। कोइल । कृष्ण-अनल-पु० चित्रक । रक्तचित्रक। भल्लातक । पित्त ।। कान्ता। चीता। लाल चीता । भिलावेका वृक्ष । पित्त । आद्रिका--स्त्री. महानिम्ब ।। बकाइन नीम । अनलप्रभा-स्त्री० ज्योतिष्मती लता ॥ मालकाङ्गनी। अद्रिज-न० शिलाजतु || शिलाजीत । अनलि-पु० अगरन्यवृक्ष ।। हथियावृक्ष । अद्रिजा-स्त्री० सैंहली पीपल, सिंहली पीपला। सिंह- अनाकान्ता-स्त्री० कण्टकारी ।। कटेहरी । लद्वीपकी पीपल । अनार्यक-न० अगरुकाष्ठ ॥ अगर । अद्रिभू-पु० आखुकर्णी लता ।। मूसाकानी । अनार्यज-न० अगुरु ॥ अगर । अद्रिसार-पु. लौह । ताम्र ॥ लोहा । ताँबा । अनार्यतिक्त-पु० भूनिम्ब । चिरायता । अधःपुष्पा-स्त्री० गोजिह्वा । तृण-विशेष । अनिर्मल्या-स्त्री० ० पृक्का ।। असवरग, पुरि। गोभी । एक प्रकारका तृण । गोझिया । विभतिक ॥ बहेड़ा। अधामार्गव-पु० धामार्गववृक्ष । चिरचिरा । अनिला-स्त्री० अपराजिता ॥ कोइल । अधिमांसक-पु० दन्तरोग विशेष ॥ आधिमां- कृष्णकान्ता । सक दन्तरोग। अधोघण्टा-स्त्री० अपामार्ग ।। चिरचिरा। अनिलान्तक-पु०इंगुदीवृक्ष ॥ गोंदीवृक्ष । अधोजिबिका-स्त्री० तालुमूलस्थ क्षुद्रजिह्वा ।। वातरोग-विशेष ॥ वायुरोग । उपजीमा अनिष्टा-स्त्री० नागवला ॥ गंगेरन, गुलसकरी । अधोमुखा-स्त्री० गोजिह्वावृक्ष ॥ गोभी । अनिक्षु-पु० इक्षु-विशेष ॥ ईखभेद । अधोवायु-पु० अपानवायु । अनुकूला-स्त्री. दन्तीवृक्ष ॥ दन्तीवृक्ष। अध्यण्डा-स्त्री० कपिकच्छू । भूम्यामलकी । अनुज-न० प्रपौण्डरीक नाम गन्धद्रव्य।। पुण्डरिया। कौंछ । भुईआमला | अनुजा-स्त्री० त्रायमाणा || त्रायमान । अध्यशन-पु० अजीर्णसत्वे भोजन ॥ अजीर्णके अनुपान-न०औषधाङ्गपेय॥ओपधके पूर्वम वा अंत- ऊपर पुनः पुनः भोजन । में जो पी जाती है। अध्यक्ष -पु० क्षीरिकावृक्ष || खिरनीवृक्ष । अनुपुष्प-पु. शर ।। सरफ्ता । अध्वगभोग्य-पु० आम्रातकवक्ष ॥ अम्बाडा वृक्ष । अनुबन्धी-स्त्री० हिक्का । तृष्णा ।।हुचकी । प्यास । अध्वजा-स्त्री० स्वर्गुलीवृक्ष ॥ सोनूलीवृक्ष । अनुवासन-न. बस्तिक्रिया-विशेष ॥ स्नेह- अध्वशल्य पु० अपामार्ग ॥ चिरचिरा । बस्ति । अध्वान्तशात्रव-पु० श्योनाकवृक्ष ॥ अरलु, टू। अनुशयी-स्त्री० क्षुद्ररोग-वि० ।। पादरोग । अंशुमत्फला-स्त्री० कदली ॥ केला । अनुष्ण-न० उत्पल !! कुमुद । अनककालिक-पु० वृश्चिपत्री ।। वृश्चिकाली। अनुष्णवल्लिका-स्त्री. नीलदूर्वा ।। नीली दव । अनडुजिह्वा-स्त्री० गोजिह्वा ॥ गोभी । अनूप-न० जलबहुल स्थान । अनद्य-पु०गौरसर्षप ।। सफेद सौं । अनूपज-- न. आईक || अदरन्त्र । अनन्त-पु० सिन्दुवारवृक्ष ॥ सम्हालू । अन्तःकुटिल-पु. शंग्य ।। शख । अनिलामय-पु० RADE औषधिकोष। (५) -- अन्तकोटरपुष्पी-स्त्री० नीलबुहावृक्ष ॥ नीलवोना अपूरण -स्त्री० शाल्मलीवक्ष । सेमरका वृक्ष । वङ्गभापा ।। अपेतराक्षसी-स्त्री० तुलसी । वर्वरी ॥ तुलसी । अन्तःसत्त्वा-स्त्री० भल्लातक ।। भिलावेका वृक्ष । वनतुलसी। अन्तिका--स्त्री० शातला ।। सातला । अपोदिका-स्त्री० पूतिकाशाक । पोईका शाक । अन्त्य-पु० मुस्ता || मोथा । अप्पित्त-न० चित्रकवृक्ष ॥ चीता क्ष । अन्त्र-न० पाकाशयांश नाडो ।। पेटकी नाड़ी। अप्रिय-न. वेतस ॥ बेत । अन्त्रवृद्धि- स्त्री० पु० रोग-विशेष ।। अप्रेतराक्षसी-स्त्री० तुलसी || तुलसीका वक्ष । अन्धमूषिका-स्त्री० देवताडवृक्ष ।। देवताडवृक्ष । अफल-पु० साबुकवृक्ष ।। साऊवृक्ष । अन्धुल-पु० शिरीषवृक्ष ।। सिरसका पेड । अफला-स्त्री० भूम्यामलकी। घृतकुमारी । भुईंआमला। अन्नमल-न० मद्य । विष्ठा ।। मदिरा । मल। घीकुमार। अन्येशुष्क-पु० विषमज्वर-विशेष ।। एक प्रकारका अफेन-न० अहिफेन ॥ अफीम । विषमज्वर । अवल-पु० वरुणवृक्ष ॥ वरनावृक्ष । अपतर्पण-न० लंघन ॥ भूखा रहना । अज-न० पद्म । शंख ॥ कमल | शंख । अपत्यदा-स्त्री. गर्भदात्रीवृक्ष ॥ लक्ष्मणा । अब्ज-पु. शंख • हिज्जलवृक्ष ॥ शंख । समुद्रफल । अपथ्य-न० पथ्यभिन्न ।। अपथ्य अहित । अब्जभोग-पु० पद्मकन्द ।। भसींडा । अपरा-स्त्री० जरायु ॥ आंबर । अब्जिनी-स्त्री० पद्मलता । कमलिनी । अपराजित-पु. क्षुद्रक्षुप-विशेष ॥ लशुनियाघात । अब्ज-पु० मुस्ता ।। मोथा । अपराजिता-स्त्री. स्वनामख्यात पुष्पलता-विशेष ॥ अब्दसार-पु० कर्पूरभेद ॥ कपूरभेद । जयन्तीवृक्ष । अशनपर्णी । शेफाली । शमीभेद । अब्धिकफ-पु० समुद्रफेन ॥ समुद्रफेन । शंखिनी । हपुषाभेद ॥ कृष्णकान्ता कोयल । अधिफेन-पु० जैताविक्ष । पटशन | हारसिंगार । छोकर वृक्ष । अब्धिमण्डूकी-स्त्री० शुक्ति । मोतीकी सपि । शंखवेल । हाऊबेर । अभ्र-न- मुस्ता अभ्रक ॥ मोथा अभ्रक । अपरिम्लान-पु० रक्ताम्लानवृक्ष ॥ लाल कटसरैया अभय-न० उशीर ।। खस । अपविषा-स्त्री० निर्विषी तृग ॥ निर्धिर्षीघास । अभया-स्त्री० हरीतकी ।। हरड । अभयाहरड । अपशोक-पु. अशोकवृश्च ॥ अशोकवृक्ष । अभिवार-पु. घृत ॥ थी। अपस्मार-पु० मूर्छाभेद ॥ मृगीरोग । अभिमन्थ-पु. चक्षुरोग || एक प्रकारका नेत्ररोग । अपांपित्त-न० चित्रकवृक्ष ॥ चीतावृक्ष । अभिन्यास-पु० सन्निपातज्वर-विशेष । अपाक-पु० पाकाभाव ।। अजीर्णपना । अभिषव-न० काजिक || काजि । अपाकशाक-न० आईक ।। अदरख । अभिषुत-न." अपाङ्ग-पु० नेत्रान्त || नेत्रका कोना। अभिष्यन्द-पु० नेत्ररोग-विशेष । अपाङ्गक-पु. अपामार्ग वृक्ष ॥ चिरचिरा । अभीरु-स्त्री. शतमूलो ।। शतावर । अपान-न. मलद्वार || मलका द्वार । अभीरुपत्री स्त्रो." अपान-पु० गुह्यवायु ॥ विष्ठाद्वारका वायु।अपानवायु। अभीष्टा-स्त्री. रेणुकानाम।गन्धद्रव्य ॥ रेणुका । अपामार्ग-पु. क्षुप-विशेष ॥ चिरचिरा । अभेद्य-न० हीरक ।। हीरा । अपीनस-न० पानसरोग ॥ पनिसरोग। अभ्यङ्ग-पु० अभ्यञ्जन ॥ तेल मलना । अपुच्छा-स्त्री० शिंशपावृक्ष ॥ ससिाका अभ्यञ्जन-न० अभ्यङ्ग ॥ तेल मलना । अपुष्पफलद-पु० पनस । पुष्पव्यतीत जात फलवृ- अभ्यंक्ष-पु० तिलकल्क ॥ तिलोंकी खल । क्षमात्र || कटहर । पुष्परहित, फलवृक्षमात्र । अभ्युष-पु. अभ्यूष ॥ " वृक्ष।
आयुर्वेदीय- अभ्यूष-पु० पाकावस्थागत कलायादि । आर-अमृतफल-न० पु० स्वनामख्यात मिष्टफल ।। अपाकयवसषपोोद ।। पोलिका, रोटी । नासपाती। पटोल || परवल । अभ्र-न. अभ्रक । मुस्तक । स्वर्ण ॥ अभ्रक ।। अमृतफला-स्त्री० द्राक्षा। आमलकी दास, आमला । मोथा । सोना। अमृतवल्ली-स्त्री० गुडूची ॥ गिलोय । अम्रक-न० स्वनामख्यात धातु ॥. अभ्रक । अमृतरसा-स्त्री० कपिलद्राक्षा ॥ भूरे रंगकी दाख। स्वर्ण ॥ सोना। अमृतसम्भवा-स्त्री० गुडूची। गिलोय । अभ्रपुष्प-पु० वेतसवृक्ष ।। वेत । अमृतसारज-पु. गुड || गुद्ध । अभ्रमांसी-स्त्री. आकाशमांसी ॥ आकाशमांसी । अमृतस्त्रवा-स्त्री० रुदन्ती वृक्ष ॥ रुदन्तीवृक्ष । अभ्ररोह-न० वैदूर्यमणि ॥ वैश्य, लहसुनिया । अमृता-स्त्री० गुडची । मदिरा । ज्योतिष्मती । अभ्रवटिक-पु० आनातक || अम्बाड़ा । अतिविषा । रक्तत्रिवृत् । गोरक्षदुग्धा । दुर्वा । अमङ्गल-पु० एरण्डवृक्ष ।। अण्डका पेड़ । आलकी । हरीतकी । तुलसी । पिप्पली । इन्द्र अमण्ड-पु." वारुणी ॥ गिलोय । सुरा। मालकाङ्गनी । अतीस ! अमर-पु. अस्थिसंहारवृक्ष ॥ हडसंकरी । लाल निसात। अमृतसञ्जीवनी दूब।आमला । हर, अमरज-पु० दुःखदिरवृक्ष ॥ दुर्गन्धखर । हरड़, तुलसी ।। पीपर (ल) इन्द्रायण । अमरदारु-पु. देवदारुवृक्ष ॥देवदारु । अमृताफल-पु. पटोल ।। परवल । अमरपुष्पक-पु. काशतृण || काँश । अमृतासङ्ग--पु० तुत्थ-विशेष खपरितुत्थ । अमरपुष्पिका-स्त्री० अधःपुष्पी। एक प्रकारका तृण । अमृताह्व-न० लघुबिल्वफलाकृति-फल-विशेष ।। अमररत्न- न० स्फटिकमाणि ॥ फटिकमणि । नासपाती। अमरवल्लरी-स्त्री. आकाशवल्ली ॥ आकाशबेल । अमृतोत्पन्न-न० खपरीतुस्थ ।। खपरिका । अमरा- स्त्री० दूवी । गुडूची | इन्द्रवारुणी । वट अमृतोद्भव-न० तुत्थ । खर्परितुत्थ ।। तूतिया । वृक्ष । महानीलीवृक्ष । घृतकुमारी । वृश्चिकाली । खपरिया। वघास । गिलोय । इन्द्रायण । वडका वृक्ष, अमोघा-स्त्री. पाटलावृक्ष । विडङ्ग । हरीतकी ॥ नदीवड । बडा नोलका वृक्ष ।चिग्वारा।वृश्चिकाली पाइर । वायाविडंग । हर । अमल-- पु० समुद्रफेन । समुद्रफेन । अम्बक-न० ताम्र ॥ तावाँ । अमल-न० अभ्र ।। अभ्रक । अम्बर-न० कापीस । गन्धद्रव्य-वि० । अभ्रक ।। अमलकी- स्त्री० भूम्यामलको । भुइआमला । कपास । एक प्रकारका गन्धद्रव्य । अभ्रक । अमला- स्त्री० सातलावृक्ष । भूम्यामलकी ॥ सात-अम्बरीष-पु. आम्रातकवृश्च ।। अम्बाडा । लावृक्ष-थूहरका भेद । भुइआमला । अम्बलपिष्ट-पु० चाङ्गेरी ॥ अम्ललोनिया। अमूला- स्त्रो० अग्निशिखावृक्ष । कलिहारी । अम्बष्ठकी-स्त्री० पाठा पाठ । अमृणाल, न० वारणमूल || खस । अम्बष्ठ-स्त्री० पाठा । चाङ्गेरी क्षुप--विशेषाधिका। अमृत-नक विषमात्र । शृङ्गीविष । वत्सनाभ । मोइयावृक्ष । पाढ़ । अम्लानिया । जुही। पारद । औषध । दुग्ध । घृत । स्वर्ण । जल ॥ अम्बष्ठिका-स्त्री० पाटा यूथिका । पाढा । जुही । विष । शृङ्गीविष । बच्छनाभ-विष। पारा । अम्बष्टी-स्त्री० पाठा ॥ पाढ । औषधि । दूध । घो। जल अम्बा-स्त्री० अम्बष्ठा । पाटा मोईया । पाट। अमृत-पु. वाराहीकन्द । वनमुद्ग । गुडूची ।गेंठी। अम्बालिका--स्त्री." वनमूंग। गिलोय । अम्बिका--स्त्री० कटुका । अम्बष्टा ।। कुटकी । अमृतजटा-स्त्री० जटामांसी ॥ वालछड़ । , मोईया ।
औषधिकोष। (७) ICE अम्बु-न० जल। वालक ॥ पानी ! नेत्रबाला, सुगं- अम्लकाण्ड-न० लवणतृण ।। लवणतृण । घवाला। अम्लकेशर--पु० मातुलुङ्ग बीजपूर ।। बिजोरा अम्बुकेशर-पु. छालानिम्बु ॥ विजोरा नींबू । नीबू । अम्बुचामर-न० शैवाल ॥ शिवार । अम्लचूड-पु० अम्लशाक || चकाशाक। अम्बुज-न० पद्म । कमल || अम्लजम्बीर-पु० अम्लनिम्बूक ।। खट्टानी । अम्बुज-न० हिज्जलवृक्ष ।। समुद्रफल । अम्लनायक-पु० अम्लवेतस !। अम्लबेत । अम्बुताल-पु. शैवाल शिवार । अम्लनिशा-स्त्री० शटी ।। कचूर । अम्बुद-प० मुस्तक ।। मोथा । अम्लपंचफल-न. अम्लरसयुक्त पंचप्रकारफल । अम्बुधित्रया-स्त्री० घृतकुमारी घीग्वार । धीकार । जैसे । बेर १ अनार २ इमली ३ चूका ४ अम्बुप-पु. चक्रमर्दवृक्ष ।। चकवड । पमार । अम्लधेत ५ महान्तरेजम्बीर, जम्भीरी १ नारङ्गी अम्बुपत्रा-स्त्री० उच्चटातृण ।। उच्चटावास । २ आम्लबेत ३ इमली ४ विजोरानीवू ५ । अम्बुप्रसाद-पु० कतकवृक्ष । निर्मलीफलवृक्ष । अम्लपत्र-पु० अश्मन्तकवृक्ष।। आबुटा देशान्तरीय अम्बुभत्-पु० मुस्तक ॥ मोथा । भाषा। अनुमात्रज--पु० शम्बूक । धोवा । अम्लपत्री-स्त्री०पलाशीता । क्षुद्राम लकी ।। पलासी अम्बुरुहा-स्त्री० स्थलपद्मिनी ।। गेंदावृक्ष । लता । अम्ललेोना। अम्बुवासिनी-स्त्री. पाटलावृक्ष ॥ पाडर।पाढल | अम्लपिष्ट-न० शाक-विशेष ।। चाङ्गेरी । अभ्बुवासी-स्त्री." अम्लपूर-न० वृक्षाम्ल || विषाविल, महादा । अभ्बुवाह-पु० मुस्तक ।। मोथा । अम्लफल-पु०आम्रवृक्ष।।आमवृक्ष । न वृक्षाम्ल । अम्बुवेतस-पु० जलवेतस ॥ जलवेत । अम्लभेदन-पु० अम्लवेतस ।। अम्लवेत । अम्बुशिरीपिका-स्त्री जलशिरीषवृक्ष ॥ ढाढोनी। अम्लरुहा-स्त्री० नागवल्लीभेद ॥ पानभेद । अम्बुसर्पिणी-स्त्री० जलाका ॥ जोक । अम्ललोणिका, अम्ललोणी-स्त्री. चगिरी ।। अम्ल अम्भ:-(स्) न० जल । वालक ॥ पानी । अम्लवती-स्त्री०क्षुद्राम्लिका ।। अम्ललोना । सुगन्धवाला। अम्लवर्ण-पु०अम्लगण विशेष । चाङ्गेरी । लकुच। अम्भःसार-न० मुक्ता ।। मोती । अम्लवेतस । जम्बीर । वीजपूर । नागरङ्ग । अम्भोज-न० पद्म || कमल । दाडिम कपित्थ । अम्ल । बीजाम्लक । अम्बष्ठा। अम्भोजिनी-स्त्री० पद्मलता ।। पद्मिनी । करमईक । अम्ललोना । बडहर ।.अम्लबेत | अम्भोद-पु. मुस्तक || मोथा । जम्भीरी नीबू । बिजोरानीबू।नारंगी।अनार।कैथ । अम्भोधर-पु." अम्ल । विवाबिल । मोइया । करोंदा । नीबू । अम्भोधिवल्लभ-पु० प्रवाल ।। मूंगा । अम्लवल्ली-त्री० त्रिपर्णिकानामक कन्द-विशेष । अम्भोमुक-च ) पु. अम्लवाटिका-त्री० नागबली भेद ।। पान भेद । अम्र-पु. आम्रवृक्ष । आमका पेड़ । अम्लवास्तूक-न० शाक-विशेष ।। चूकाशाक । अम्र-न. आम्रफल ।। आम। अम्लबीज-न. वृक्षाम्ल ।। विषाविल । अम्रात-मु० आम्रातक ।। अंबाड़ा। अम्रातक-पु. अम्लवेतस-पु० स्वनामख्यातवृक्ष-विशेष ।। अम्ल. अम्ल-न- तक।। छाछ । महा। अम्ल - पु. अम्लरस | अम्लवेतस । काजिक । अम्लसार-न०कालिक । काँजी। तक ।। खट्टा रस अम्लबैत । काञ्जी । छाछ । अम्लसार-पु० अम्लवतस ।। निम्वक । हिन्ताल । अम्ल-पु. लकुचवृक्ष ।। बड़हर । अम्ल वेत । नीबू । एक प्रकारका छोटा ताड । लोनिया । " अम्लवृक्ष-न" बैंत । AND (८) आयुर्वेदीय- REBEEG प्रसिद्ध । अरिमर्द-पु० वृक्ष । घमासा । अम्लहरिद्रा-स्त्री० शटी ।। अम्बिया हलदी । अरलु-पुःश्योनाकावृक्ष ।। शोनापाटा । अम्लांकुश-पु० अम्लवेतस ।। अम्लबेत । अरविन्द-पु० पद्मरक्तकमल । नीलोत्पल । ताम्र ।। अम्लातक-पु० अम्लानवृक्ष ।। बाणपुष्प । कमल । लाल कमल । नीला कमल । ताँबा । अम्लान-पु० महासहवृक्ष ।। बाणपुष्प गौडादि- अराल-पु० सज्जरस ।। राल 1 अरि-पु. खदिरभेद ॥ तिक्तखैर । अम्लिका-स्त्री० तिन्तिडी । इमली। अरिन्ताल-न. हरिताल || हरताल । अम्लिकावटक-पु० बड़ा-विशेष ॥ अम्ल बड़ा । अरिम-पु. कासमईवृक्ष ॥ कसोंदी । अम्लोटक-पु० अश्मन्तकवृक्ष || आमरोडा । कासमर्द कसोंदी। अयः ( सू)-न लौह ॥ लोहा । अरिभाशत-पु० खदिरवृक्ष ।।खरका वृक्ष । अयस्कान्त-पु०कान्तलोह ॥ चुम्बकपत्थर । अरिमेद-पु० विटखादर ।। दुर्गन्धयुक्त खेर । अयुकछद-पु० सप्तपर्णवृक्ष ॥ छतिवन । अरिष्ट-पु. तक्र । निंब । लशुन । फेनिलवृक्ष । अयुग्मच्छद-पु०" मद्य-विशेष || छाछ । नीम । लशुन । रीठा । एक अयोमल-न०लौहमल । लोहेका मैल | प्रकारकी मदवाली वस्तु । अरक-पु० शैवाल । पर्पट ॥ शिवार । पित्त-अरिष्टक-पु० फेनिलवृक्ष । रीठाकञ्ज ।। रठिा । पापड़ा। राठाकरञ्ज। अरग्वध-पु०आरग्वध ।। अमलतास । अरिष्टा-स्त्री० कटुका ।। कुटकी । अरटु-पु०श्योनाकवृक्ष ।। अरलु, टैटू । अरु:[स् ]-पु. रक्तखदिर ॥ लाल खरका पेड़ । अरणि-पु०गणिकारिकावृक्ष । दुरालभा ।। अरणि । अरुज-पु० आरबंध ।। अमलतास । अरुण-पु० अर्कवृक्ष । पुन्नागवृक्ष । श्योनाकवृक्ष । अरणी-स्त्री० अरणि ।। अगेथु । आकका वृक्ष । पुन्नागका वृक्ष । अरलु,टैटू, टैटी अरणिकेतु-पु० गणिकारिका || अगेथु । अरुण-न० कुंकुम । सिन्दूर ॥ केशर । सिन्दूर । अरण्य-पु०कटफलवृक्ष ।। कायफल । अरुणा-स्त्री० अतिविषा | श्यामलता । मञ्जिष्ठा । अरण्यकदली-स्त्री गिरिकदली ॥ पर्वती केला । अरण्यकासी-स्त्री०वनकासी ॥ वनकपास । रक्तत्रिवृता । इन्द्रवारुणी । गुजा । मुण्डतिका।। अतीस । कालीसर, सालसा, करियासाऊ । अरण्यकुलत्थिका-स्त्री • कुलथी । वनकुल्थी । मजीठालाल निसाथ। इन्द्रायण । धुंधुची। मुण्डा । अरण्यकुसुम्भ-पु०वनकुसुम्भ !! वनकुसुम । अरुष्क-पु. भल्लातकवृक्ष ।। भिलावेका वृक्ष । अरण्यघोली-स्त्री पत्रशाक-विशेष ॥ अरुष्कर-न-भल्लातकफल ।। भिलावेका फल । अरण्यजाद्रका-स्त्री. वनभवार्द्रका पुः भल्लातकवृक्ष ।। भिलावेका फल । अरुहा-स्त्री० भूधात्री ॥ भुईआमला । अदरख । अरोचक-पुरोग-विशेष ।। अमचि । अरण्यजरि-मु० वनभव जीर ।। वनजीरा । अर्क-पु० ताम्र । स्फटिक । अर्कवरं ॥ ताँबा । अरण्यधान्य-ज. नीवार ।। नीवार धान । फटिक । आकका वृक्ष । अरण्यमुद्ग-पु० वनमुद् ।। वनमूग, मोट । अर्ककान्ता-स्त्री. आदित्यभक्ता ।। हुरहुर, हुलहुल । अरण्यवासिनी-स्त्री० अत्यम्लपर्णी लता । अर्कचन्दन-न. रक्तचन्दन ।। लालचन्दन । अरण्यवास्तूक-पु० वनवास्तूक ।। वनवथुआ । अर्कपत्र-पु० आदित्यपत्रवक्ष ।। अर्कपत्र । अरण्यशालि-पु० नीवार ॥ वनधान । अर्कपत्रा-स्त्री • वृक्षविशेष ।। ईशैलमूल वङ्गभाषा । अरण्यशूरण-पु० वनजात शूरण ।। जसकन्दभेद । अर्कपर्ण--पु० अर्कवृन ।। आकका वृक्ष । अरनि-पु० कूपर ॥ जिसमें कनिष्टा फैली हो ऐसा । अर्कपादप- पु० निम्बवृक्ष ।। नमिका पेड़ । बद्धमुष्टि हाथ । अर्कपुष्पिका-त्री. वृक्ष-विशत्र ।। क्षीरवृक्ष । । । ८ वन घोली। 11 वन- औषधिकोष। (९) BHIMATERIES ।। अर्कपुष्पी-स्त्री० कुटुम्बनीवृक्ष ।। अर्कपुष्पी । अशेः स -न० स्वनामख्यात पायुगत रोगविशेष ॥ सूरजमुखी । सूर्यमुखी। बवासीररोग। अप्रिया-स्त्री. जवापुष्पवृक्ष ।। ओडहुल, गुडहर- अर्शोन्न-पु० शूरण । जमीकन्द । गुडहल। अशोन्नी-त्री० तालमूली ।। मुशली । अर्कभक्ता-स्त्री० आदित्यभक्ता ।। हुरहुर, हुलहुल। अशोहित-पु. भल्लातक । भिलावेका वृक्ष । अर्कमूला-स्त्री० अर्कपत्रा।। ईशेलमूल वङ्गभाषा । अल-ज० हरिताल ।। हरताल । अंर्कवल्लभ-पु० बन्धूकवृक्ष ।। दुपहरियाका वृक्ष । अलक-पु० अलर्क ॥श्वत आक वा मन्दारवृक्ष । दुपहरियाके फूल। अलकप्रिय-पु. वृक्ष-विशेष । अक्रबंध-न० तालीसपत्र || तालीसपत्र । अलक्त-अलतक-पु० लाक्षा । लाक्षारस ।। अर्कहिता-स्त्री. आदित्यभक्ता ।। हुरहुर । लाख । महावर । अर्काब-पु० अर्कवृक्ष ।। आकका वृक्ष । अलम्बुषा-स्त्री० लजालुभेद । मुण्डतिकाx अर्घ-न. मधु-विशेष ।। एक प्रकारका मधु । महाभावणिका।।लजालुका भेद । छोटी बड़ी अर्जक-पु. श्वेतपर्णास । शुक्लतुलसी । तेजपत्र । वन- गोरस्त्र मुण्डी। तुलसांभेद । सफेद तुलसी । तेजपात । अलक-पु. श्वतार्क ।। सफेद आक । अर्जुन-न० तृण । चक्षुरोग-विशेष ॥ तृण । नेत्र- अलस-पु० वृक्ष-विशेष ।। पादरोग-विशेष ।। राग-विशेष । एक प्रकारका वृक्ष । पविरोग । अर्जुन-पु०स्वनामख्यात वृक्ष ।। कोह । अलसक-पु. अजीर्णजन्य रोग-विशेष ।। अजी- अर्जुनोपम--पु० वृक्षभेद ।।शाकवृक्ष । नरोगभेद । अर्ण-पु० शाक ।। शाकवृक्ष । अलसा-श्री हंसपदी ।। लाल रङ्गका लजालु । अर्णः (सू )-न. जल ॥ पानी । अलाबू-स्त्री. तुम्बी ।। तिक्ततुम्बी ।। कदद, अर्णवज-पु० न० समुद्रफेन।।समुद्रफेन । समुद्रझाग तोम्बी ।। कडवी तोम्बी। अर्णवोद्भव-पु. अमिजारवृक्ष ।। अमिजारका पेड़। अलिकुलसंकुल-पु० कुब्जकवृक्ष ।। कृजावृक्ष । अर्णोद-पु०मुस्तक ।। मोथा । अलिजिह्वा-त्री अलिीजीका ।। जिह्वापर क्षुद्रजिह्न अणोंभव-पु० शख ।। शंख । तालुके ऊपर एक छोटी जमि होती है । अर्तगत-पु० नीलझिण्टी ।। नीलपुष्पकी कटसैरया। आलिदूर्वा-स्त्री० मालादूर्वा ।। मालदूव । अर्थसिद्धक-पु० सिन्दुवारवृक्ष ।। संभालू । सभालूका अलिपत्रिका-स्त्री० वृश्चिकांक्षुप ।। बिछाघास । अलिपर्णी-स्त्री० वृश्चिकाली ।। वृश्चिकाली । अय-ना शिलाजतु ।। शिलाजीत । अलिप्रिय-पु० रक्तोत्पल ।। लाल कमल | अर्दित-न० वातरोग-विशेष ।। पक्षाघात । अलिप्रिया-स्त्री. पाटलावृक्ष ।। पाडर । पाढल । अर्द्धचन्द्रा-स्त्री० कृष्णा त्रिवत् ॥ काला निसोत । अलिमक-पु० पद्मकेशर । मधूकवृक्ष ।। कमल. अर्द्धचन्द्रिका स्त्री० कर्णस्फोटा लता ।। कनफेोड़ा । केशर । महुआवृक्ष । अर्द्धतिक्त-पु० नेपालनिम्ब । नेपालदेशीय निम्ब अलिमोदा-स्त्री० गणिकारीवृक्ष ।। मदनमादनी । वा चिरायता। आलम्बक-पु० पद्मकेशर ।। कमलकेशर । अर्बुद-पु० न० रोग विशेष ।। अर्बुदरोग । कमलका जीरा। अर्म (न्) न० नेत्ररोग-विशेषं ॥ एक प्रकारका अलिवाहिनी- स्त्री० केविकापुष्पवृक्ष । केवड़ेके नयनरोग। पुष्पवृक्ष । अर्मण-पु. द्रोणपरिमाण ।। ३२ सेर । अलु-स्त्री० आलु ॥ आलु । अर्यमा [म् ]-पु० अर्कवृक्ष ।। आकका वृक्ष । अलोहित न० रक्तपद्म ॥ लाल कमल । पेड।
whe-year- नभेद । जावषा-स्त्री. निर्विधी (१०) आयुर्वेदीय- अल्पक-पु० यवासवृक्ष || जवासा । अशकुम्भी - पानीय पृष्टज ।। जलकुम्नी । अल्पकेशी-स्त्री. भूतकेशी ॥ भूतकेश । अशन-पु. अशनवृक्ष ।। विजयसार । अल्पगन्ध-न. रक्तकैरव ॥ लाल कुमुद । अशनपर्णी--स्त्री. क्ष-विशेष ।। पटशण । अल्पपत्र-क्षुद्रपत्रतुलसी ॥ छोटे पत्तेकी तुलसी । अशाखा-स्त्री० शूली तृण ।। शूली घाम । अल्पपद्म-न० रक्तपद्म लाल कमल अशिर-न हीरक । हींग । अल्पप्रमाणक-पु० अल्पप्रमाण ।। छोया तरबूज, अशोक-नः पारद | पाग । खर्बुजा । अशोक-पु० स्वनामख्यात वृक्ष ।। अशोकवृक्ष । अल्पमारिप-पु० तण्डुलीय ॥ चौलाईशाक । अशोकरोहिणी-स्त्री० कटुरोहिणी ।। कुटकी । अल्पदाह-न० उशीर ।। खस । अशोका-स्त्री० कुटका ।। कुटकी । अल्पदाहेष्ट न. " अशोकारि-पु. कदम्बवृक्ष ।। कदम्बवक्ष । अल्पदाहेष्टकापथ-ज. " अश्मकदली-स्त्री० कदली-विशेप ।। केलाभेद । अवनी-त्री० त्रायमाणा लता ।। त्रायमाण । अश्मकेतु-स्त्री. क्षुद्रपापाणभेदी वृक्ष ।। छोटा पाखा अवम्भिसोम-न ८ काजिक ॥ कांजी। अवरोहिशाखि (न् )-पु. प्लक्षवृक्ष || पाग्यान अश्मन्न-पु० पाषाणभेदनवृक्ष । हत्याजोड़ी। वा पिलखनवृक्ष । अश्मगर्भज-न० मरकत ।। पन्ना । अवरोहिका--स्त्री० अश्वगन्धा ॥ असगन्ध । अश्मज-न० शिलाजतु ।। शिलाजीत । अवरोहि (न् )-पु० वटवृक्ष ॥ बड़का पेड़ । अश्मजतुक-न." अवलेह-पु० लिह्यौषध ॥ लेह औषधी । चाटनेकी अश्मजतु-ना अवल्गुज-पु० सोमराजी ।। बावची । अश्मन्तक-पु० तृणविशेष । वृक्ष-विशेष ।। एव अवाक्पुष्पी-स्त्री० शतपुष्पा । मधुरिका अधःपुष्पी । प्रकारका तृण। आत्रुटा देशान्तरीय भाष । सौंप सोया । एक प्रकारका तृण ! चौरहुली- अश्मन्तक-न० दीपाद्धाराच्छादन ।। दीपाद्धाराच्छा. देशान्तरीय भाषा । अवारिका-स्त्री० धन्याक ॥ धनिया । अश्मपुष्प-न- शैलेय ॥ भूरिहरीला । अविक-न० हारक ।। हीरा । अश्मभाल-न. लोहभाण्ड ।। हाभिलदस्ता । पारस अविगन्धिका-स्त्री० अजगन्धावृक्ष ।। वर्वरी । भाषा । अविग्न-पु० करमई । पानियामलक ।। करोंदा । अश्मभित् [८]पु० पापाणभेदी वृक्ष ।। पाखान भेद पानीआमला । अवित्यज-पु. न. पारद ॥ पारा । अविद्धकर्णा-स्त्री० पाठा । भृङ्गराज ॥ पाठा- अश्मयोनि-पु० मरकतमणि ।। पन्ना । भङ्गरा। अश्मरी-स्त्री० मूत्रकृच्छभेद ।। पथरीरोग । अविद्धकर्णी-स्त्री० पाठा ।। पाढ़ । अश्मरीन-पु० वरुणवृक्ष ।। वरनावृक्ष । अवित्रिय-पु० श्यामाक तृण ।। समाकतृण । अश्मरीहर-पु० धान्य-विशेष ।। पुनरा । अविप्रिया-स्त्री०श्यामालता ।। सारिया, गौरीसर । अश्मसार-पु० न० लौह ।। लोहा । अश्मकन्दिका-स्त्री० अश्वगन्धावृक्ष ।। असगन्ध । अन्द-पु० मुस्ता ॥ मोथा। अश्मोत्थ-न० शिलाजतु ।। शिलाजीत । अव्यण्डा-स्त्री. अव्यण्डा | कोछ । अश्वकर्ण-पु० शालवृक्षविशेष ।। एक प्रकारका अन्यथा-स्त्री० हरीतकी । पद्मचारिणी ॥ हरड । शाल, शालभेद, लताशाल । गेंदावृक्ष । अश्वकर्णक-पु. शालवृक्ष ।। सालवृक्ष । औषध । दनवृक्ष । वृक्ष । - आषधिकोष। (११) SHARESHEEMisrums अश्वखुर-प० नखीनाम गन्धद्रव्य ।। नखी । ऋषभक २ मेदा ३ महामेदा ४ ऋद्धि ५ अश्वखुरा-स्त्री० अपराजिता ।। कोयललता विष्णु. वृद्धि ६ काकोली ७ श्रीरकाकादी ८ यह अष्टवर्ग कान्ता। अश्वखुरी-त्री अपराजिता ।। कोयललता । विष्णु- अष्टापद - पु० न० धुस्तर । सुवर्ण ।। धतूरा सोना। ऋान्ता। अदाम्लवर्ग-पु. जम्बीर १ बीजपूर २ मातुलुङ्ग ३ अश्वगन्धात्री स्वनामख्यात क्षुद्रवृक्ष । असगन्ध । चुक्रक ४ चारी ५ तिन्तिडी ६ बदरी ७ कर अश्वन-पु० करवीरपुष्पवृक्ष ।। कनेरपुष्पवृक्ष । मई, ८ ।। जम्भीरा नींबू १ विजोरानीवू २. बड़ी अश्वत्थ-पु० स्वनामख्यातवृक्ष-विशेष ।। पीपलवृक्ष। जम्भीरी ३ विपंबिल, महादा ४ अम्बिलेना ५ अश्वत्थभेद-पु० स्थाली वृक्ष ।। वेलियापीपलवृक्ष । इमली ६ बेर ७ करोंदा ८॥ अश्वत्थी-स्त्री- पिपलिकावृक्ष ।। पीपल वृक्ष । अष्टीवान् [त् ] पु. न० जानु ।। घुटना । अश्वदंष्ट्रा-स्त्री गोक्षुरवृक्ष ।। गोग्बुरूवृक्ष ! असन-पु० वृक्ष-विशेष ।। विजयसार । अश्वपुच्छी-स्त्री. माषपर्णी ।। मपवन । अखनपर्णी, स्त्री. वृक्ष-विशेष । अपराजिता ।। पट. अश्वपुत्री-स्त्री० शाल्मलीवृश्च ।। सेमरवृक्ष । शण, रसुनियाघास । कोयल । अश्वपुष्ष-ज० शैलेय ।। पत्थरका फूल | असरु-पु० वृक्ष--विशेष ।। कुकरोंदा । अश्ववाल-पु० काश || काँस । असार-पु० अण्डवृक्ष ॥ अरण्डका पेड़ । अश्वमार-पु० करवीरवृक्ष ।। कनेरवृक्ष । असार-न. अगरु ।। अगर । अश्वमारक-पु०" आसता-त्रिी नीलीवृक्ष ।। नीलका पेड़ । अश्वरोधक-पु." असितालु-पु. नीलालु ।। नीलवर्ण आलु । अश्वान्तक-पु० कुलस्थिका ।। कुल्थी । असितोपल, न० नीलोत्पल ।। नीलकमल | अश्वारोहा-स्त्री. अश्वगन्धा ।। असगन्ध । असिपत्र-पु० इक्षु । गुण्डनामक तृण ।। ईख । अश्वावरोहक-पु." अवाह्व-स्त्री" । असिमेद-पु०विट्खादिर ।। दुर्गन्धश्वर । अश्वाक्ष-पु. देवसर्षपवृक्ष ।। सुरसों-निर्जरसों असुरसा-स्त्री० वर्वरी ।। वर्वरी, वनतुलसी। अष्टपादिका-त्री० भद्रवली ।। मदनमाली। अष्टमान-न० कुडवपरिमाण ।। ३२ तोले । असुरी-स्त्री० राजिका ।। राई । अष्टमिका-त्री शुक्ति ।। चार तोल । अमृक [ ]-न• रक्त । कुंकुम || रुधिर । अष्टमी-त्री० क्षीरकाकोली ॥ अष्टवर्गप्रसिद्ध ओपधि । केशर । अष्टमूत्र-ज० छाग, मेप, गो, महिप, घोटक, हस्ती, गईभ, उष्ट्र ।। बकरी, भेड़, गाय, भैंस, टिका-स्त्री. वृक्ष-विशेष ।। एक प्रका- अस्तमती-स्त्री० शालपर्णी ।। शरिवन, शालवन । घोडी, हाथिनी, गधी और ऊंटनी इनके मूत्रको अष्टमूत्र कहत हैं। रका वृक्षा अष्टक्षीर-न० छाग, मेघ, गो, स्त्री, हस्ती, घोटक, अस्थिशृंखला-स्त्री० अस्थिसंहार ।। हडसकरी । उष्ट, महिष ।। वकरी १ भेड़ २ गाय ३ नारी अस्थिसंहार-पु. अस्थिरोखला ।। हड़संघरी ४ घोड़ी ५ ऊँटनी ६ हथिनी ७ भैस ८ यह अस्थिसंहारी-त्री० ग्रन्थिमान् वृक्ष ।। हडसकरो । आठ प्रकारके दूध हैं। हडजुडी। अष्ट लोहक-न० अष्टप्रकार धातु-विशष ॥ यथा । अस्थिसन्धिक-पु० अस्थिसंहारक । हडसंकरी । मुवर्ण १ रजत २ ताम्र ३ रङ्ग ४ ससिक ५ अस्निग्धदारु-न० देवदारुभेद ।। देशी देवदारु । कान्तलोह ६ मुण्डलोह ७ तीक्ष्णलोह ८ । अस्रखदिर-पु० रक्तखदिर ।। लाल खैर । अष्टवर्ग-पु० आषैधाष्टक-विशेष ।। यथा-जीयक १ अलपत्रक-पु० ण्डिावृक्ष । भिण्डीवृक्ष । गुण्डतृण । असुराह-न० कांस्य ।। काँसी। .
(१२) आयुर्वेदीय- अक्षिव--पुर करा। अम्रपा--स्त्री० जलौका ।। जोक । अभिभपज-पु० पट्टिकालोध्र ॥ पठानीलोध । अत्रफला-स्त्री. सल्लकीवृक्ष । सालई वृक्ष ॥ अक्षिव-न० सामुद्रलपण ।। समद्रनोन, पांगा। अस्रबिन्दुच्छदा-स्त्रो० लक्ष्मणानाम कन्द ॥ शोभा जनन ॥ सौजनेका वृक्ष । लक्ष्मणकन्द । अक्षीक-पु० रञ्जनद्रुम || आच्छुकन्न । अस्रयष्टिका-स्त्री० मानिष्ठा । मजीठ । अक्षोव-न० सम द्रलवण ॥ पांगा । अस्ररोधिनी-स्त्री० लजालुलता ॥ छुईमुई, लज्जा-अक्षोव--पु० शोभाञ्जनवृक्ष । सैजिनेका वृक्ष । वन्ती। अक्षोट-पु० अक्षोइन । अग्वरोटवृक्ष । अत्राजक-पु. श्वततुलसी ।। सफेद तुलसी । अक्षाड-पु." अहबान्धव, अहमणि--पु० अर्कवृक्ष।। आकका वृक्ष । अक्षोइक-पु." अहस्कर, अहत्पति-पु." इति श्रीशालिग्रामवैश्यकृतशालिग्रामौषधशब्दसागरे आहि-पु० सीसक । अहिफेन ।। सीसा । अफोम | द्रव्याभिधाने, अकाराक्षेरे प्रथमस्तरंगः ॥ १ ॥ अहिंस्रा-स्त्री कुलिकवृक्ष || काकादनवृिक्ष । (आ) आहिका-स्त्री० शाल्मलीवृक्ष ॥ सेमरका क्ष । आकरसम्भव-ज. साम्भरलवण ॥ सामरनोन । आहच्छत्र-पु० मेषशङ्गीवृक्ष ॥ मेडशिङ्गीका पेड़ । अहिफेन-न० अफेन ॥ अफी । आकारकरभ-पु० वणिक्द्रव्य-विशेष ॥ अकर. आहेभयदा-स्रो० भूम्यामलकी ॥ भुई आमला । अहिभुक् [ ज्-पु० गन्धनाकुली ॥ नाकुली । आकाश-पु० न० अभ्रक || अंभ्रक धातु । नकुलकन्द । नाकुलीकन्द । आकाशमांसी-स्त्री० सूक्ष्म जटामांसी । अहिमनी-स्त्री० गन्धनाकुली ।। नाकुलोकन्द । आकाशमूली-स्त्री० कुम्भिका ।। जलकुम्भी । अहिमार-पु. अरिमेदकक्ष ॥ दुगंधखैर । आकाशवल्ली-त्री० लता-विशेष ।। आकाश बेल । अहिदक-पु०" आकृतिच्छना-त्री० कोशातकीवृक्ष ॥ तोरईभेद अहिलता-स्त्री० गन्धनाकुली । ताम्बूली ॥ नाकु. आखु-पु० उन्दुर । देवताडवृक्ष ।। मूमा । देवताइ लीकन्द । पान । अहेरु-त्री० शतमूली ॥ शतावर । आखुक-स्त्री० लता-विशेष ॥ मूसाकर्णी । अह्वेला-श्री. भल्लातकवृक्ष । भिलावेका वृक्ष । आखुपर्णिका-स्त्री." अक्ष-न० सौवर्चललवण । तुत्थ ॥ चोहारकोडा, आखुपर्णी-स्त्री." काला नोन । तूतिया । आखुविषहा-स्त्री० दवताडवृक्ष । देवदाली लता ॥ अक्ष-पु. बिभातकक्ष । रुद्राक्ष । कर्षपरिमाण ॥ देवताडवृक्ष । ववरवेल, सोंदाल । बहेड़ा वृक्ष । रुद्राक्षके बीज । २ तोले परिमाण। आखुस्कन्द-पु० क्षीरकंचुकीवृक्ष ॥ क्षीरीशवृक्ष । अक्षक-पु० तिनिशवृक्ष । तिरिछवृक्ष । आखोट-पु० फलवृक्ष-विशेष ॥ अखरोट । अक्षत-न० लाजा ॥ खोलें। आगमावता-स्त्री० वृश्चिकालीवृक्ष || वृश्चिकाली । अक्षत-पु. यव । आतपतण्डुल ॥ जौ । मुरमुरे, आग्नेय-न० स्वण ॥ सोना । खीलें, परमल, चौले इत्यादि । आघट्टक-पु० रक्तापामार्ग ॥ लाल चिरचिरा । अक्षता-स्त्री० कर्कटशङ्गी ॥ कांकड़ाशिङ्गी । आघाट-पु० अपामार्ग ॥ चिरचिर।। अक्षधर-पु० शाखोटवृक्ष ॥ सिहोरावृक्ष । आचित-न० दशभारपरिमाण || २५ मन । अक्षपीडा-स्त्री० यवतिक्तालता ॥ शंखिनी । आचारी-स्त्री० हिलमोचिका ॥ हुलहुलशाक । अक्षर-न० अपामार्ग || चिरचिरा । आच्छक-पु० पुप्पवृक्ष-विशेष | रञ्जनद्रु । आक्षिक-पु० रञ्जनद्रुम । आच्छुकवृक्ष । आजस्मसुरभिपत्र-पु० मरुबवृक्ष ॥ मरुआवृक्ष । वृक्ष। ॥ Pun PERHIT औषधिकोष। (१३) SOFTHETIEमय HEETEHSLEEL आज्य-न० घृत । श्रीवास ॥ घो। सरलका गोंद । आमा-स्त्री० बब्बूलवृक्ष॥ बरबरवृक्ष । बबूरका पेड़। आजिनेय--पु० जन्तु-विशेष ॥ आँजनो । कीकर का पेड़। आटि-पु. जलचरपक्षि विशेष || आडी । आम-न अर्णिरोग-विशेष-अपक्क अन्नरस।आम। आडि-स्त्री० स्वनामख्यात मत्स्य | आडी मछली। आमण्ड-पु० एरण्डवृक्ष ॥ अण्डका वृक्ष । आढक-न. पु० चतुःप्रस्थपरिमाण ॥ ८ सेर । आमय-न. कुष्ठ ।। कूठ । कूट। आढकी-स्त्री. शमीधान्य-विशेष ।। अड़हर । आमय-पु० रोग ॥ रोग। आतंक-पु० रोग ॥ रोग। आमलक-पु० वासकवृक्ष।।बाँसा, अडूसा ।बसौंटा । आतप्य-न० फल-विशेष ।। सरीफा । आमलक-न० आमलकी-वि० ॥ कर्करा । आमलकी-स्त्री. स्वनामख्यात फलवृक्ष-विशेष ।। आत्मगुप्ता--त्री० कपिकच्छु ॥ कौंछ । आमला। आत्ममूली-स्त्री० दुरालभावृक्ष || धमासा । आमवात-पु० रोग--वि० | आमवातरोग । आत्मरक्षा-त्री महेन्द्रवारुणी ॥ बड़ी इन्द्रवारुणी। आमातीसार-पु. अतीसार-वि० ॥ आमसहित आत्मशल्पा-त्री० शतमूली ॥ शतावर । . अतिसार । आत्मोद्भवा-त्री० माषपर्णी ।। मषवन । आमाशय-पु० नाभिस्तनमध्यवर्ती स्थान ॥ नाभि आदानी-त्री ० घोषकलता ॥ तोरईभेद । और स्तनों के मध्यका स्थान । आदित्य-पु० अर्कवृक्ष ॥ आकका वृक्ष । भामिपप्रिय-पु. कङ्कपक्षी ।। वाजपक्षी । आदित्यपत्र-पु० क्षुम-विशेष ।। अर्कपत्र । आमिषी-स्त्री. जटामांसा ॥ बालछड, कनुचर । आदित्यपुष्पिका-स्त्री० लोहितार्क ॥ लाल सन्दार- आम्र-पु० स्वनामख्यात फलवृक्ष-विशेष ॥ आम। वृक्षा आम्रगन्धक-पु०. समष्ठिलवृक्ष ॥ कोकुयावृक्ष । आदित्यभक्ता-स्त्री. वृक्ष -विशेष ।। हुरहुर । आम्रपेषी-त्री० शुष्काम्रखण्ड || अमचूर । आद्य-न- धान्य ॥ धान । आम्रात-पु. आम्नातक || अम्बाड़ा। आद्यमापक-पु०मापकपरिमाण ॥ ५ रत्ती । आम्रातक-पु० स्वनामख्यात वृक्ष || अम्बाडा। आध्मान-पु० वायुरोग-विशेष ॥ पेटका फूलना । | आमावर्त्त-पु० शुष्क आम्ररस ॥ आमका सत्व । आध्मानी- स्त्री नलिका नामक गन्धद्रव्य॥ नलिका । आम्लवेतस-पु० अम्लवेतस ।। अम्लवेत । आनन्दा-स्त्री० विजया ॥ माङ्ग । आम्ला-स्त्री० तिन्तिडीवृक्ष || इमली । आनन्दी-स्त्री. वृक्ष-विशेष ।। आम्लिका-स्त्री" आनाह-पु. मूत्रपुरीषरोधक रोग-विशेष।।मलमूत्रका आम्लोका-स्त्री." आयतच्छदा-स्त्री० कद लीवृक्ष ॥ केलावृक्ष । आनूप-पु० अनूपदेशस्थ जन्तुमात्र।। भैंस, सूकरादि । आयस-न० लौह । अगुरु ॥ लोहा । अगर । आपस्तम्भिनी-स्त्री० लिङ्गिनीलता ॥ शिवलिंगी । आयुधधामणी-स्त्री. जयन्तीवृक्ष ॥ जैत । आपालि-पु० केशकीट ॥ बालों के कीडे, ज, लीख, आयुर्द्रव्य-न० औषध । औपाधि । डीङ्गर। आयुर्वेद-पु० चिकित्साशास्त्रवि ० ॥ वैद्यकशास्त्र । आपिञ्जर-न० स्वर्ण ॥ सोना । आयुर्योग-पु० औषध ॥ ओषधि । आपीत-न० माक्षिकधातु ॥ सोनामाखी। आयुष्य-न० आयुतिकर पदार्थ ।। पथ्यादि । आपूष-न० रङ्ग ॥ राङ्ग । आर-न. मुण्डलाह । पित्तल ।। पीतल | आप्य-न कुष्ठ ॥ कूट । कूट । आर-पु० न० पित्तल । वृक्ष-विशेष ।। पीतल । आकूक-न० आहिफेन । अफीम । अरेफलवृक्ष । आबिलकन्द-पु. • मालाकन्द || मालाकन्द । आरकूट-पु. पित्तल || पतिल । रोष ।
(१४) आयुवदाय- आरग्वध-पु० स्वनामख्यात वृक्ष ।। अमलतास । आवत-न० माक्षिकधातु ।। सोनामास्त्री। आरटी-स्त्री० स्थलपद्म । ब्राह्मणयष्टिका। । गेंदा । आवर्तकी-स्त्री० लता-विशेष ॥ भगवतवल्ली. ब्रह्मनेटी। भारंगी । कोकणे प्रसिद्ध । आरण्यमुद्गा-स्त्री० मुद्रणी ।। मुगवन, मुगोन । आवर्तिनी-स्त्री अजशृङ्गीवृक्ष ।। मेदाशिङ्गी । आरनाल-न० काजिक || काजी। आविग्न-पु. करमई । पानियामल क ।। करीदा। आरनालक-." पानीआमला। आरामशीतला-स्त्री०सुगन्धिपत्र-विशेष ।। अरा आवीरचूर्ण-न० फल्गु ।। अधीर,गुलाल । मशीतला । आवेगी-स्त्री. वृद्धदारकवृक्ष ।। विधारा । आरु-पु० वृक्षभेद ।। एक प्रकारका वक्ष । आशन-पु. अशनवृक्ष ।। विजयसार। आरूक-न० हिमाचलप्रीसद्धआषधी विशेष ।। आशय-पु० पनस वृक्ष । कटहरवृक्ष । आडदेशान्तरीय भाषा। आशापुरसम्भव-पु० भूमिजगुग्गुलु ।। भूमिज ओरवत-न० पारेवतवृक्षफल || रैवताख्य कामरुदे. गूगल । शीय भाषा। आशीः [स].-स्त्री० वृद्धिनामक ओषधी ।। वृद्धि । आरवत-पु० आरग्वधवृक्ष ।। अमलतास । आशु--पु० न० प्रावृटकालोद्भव धान्य ।। आशुधान । आरोग्य-न० रोगाभाव ।। रोगका अभाव । आशुपत्री-स्त्री० शल्लकीलता ।। शल्लकी बेल । आरोग्यशाला-स्त्री • चिकित्सालय ।। आषालय । आशुत्रीहि-पु० आशुधान्य ।। आशुधान । आर्वध--पु. आरग्वधवृक्ष ॥ धनवहरा, अमल आश्रयाश-पु० चित्रकवृक्ष ।। चीतावृक्ष । आश्वत्थ-न० आश्वत्थवृक्षफल ।। पीपलका फल । आर्य-न० अर्घमक्षिकात्पन्न मधु ॥ एक प्रकारका आसङ्ग-न० सौराष्ट्रमृत्तिका । सोरटकी मिट्टी। मधु । गोपीचन्दन । आर्तगल-पु० नील झिण्टो ।। नीली कटसरैया । आसन-पु० जीवकवृक्ष । असनवृक्ष ।।जीवक अष्टवर्ग आर्तव-न. स्त्रीरज || स्त्रीरज । ओपधि । विजयसार । आर्द्रक-न० स्वनामख्यात कन्द ।। अदरख । आसव-पु. मद्य-विशेष ।। मैरेयमद्य । आर्द्रमाषा-स्त्री० मापपर्णी ।। मषवन । आसबद्रु-पु० तालवृक्ष ।। ताइभ । आशाक-२० आर्द्रक ।। अदरख । आसुर-न० बिडलवण || विरियासंचरनोन । आईिका-स्त्री. आद्रक ।। अदरख । आसुरफेन-न० अहिफेन ।। अफीम । अपिभी-स्त्री० कपिकच्छूवृक्ष ।। कौंछ । आसुरी-स्त्री. राजिका ॥ राई । आल-न० हरिताल ।। हरताल । आस्फोट-पु० आस्फोतवृक्ष । आकका वृक्ष । अलाबु-स्त्री. • अलाबु ।। कद्दु, तुम्की। आस्फोटक--पु० पर्वतज पालश्च ।। अवराट । आलाबू-स्त्री" आस्फोटा-स्त्री. नवमही ।। नेवारी । आलीनक-न. रङ्ग ।। राङ्ग । आस्फति-० अर्क वृक्ष || कोविदार । भूपन्यासवृक्षा आलु-न० स्वनामख्यात मूल-विशेष ।। आलु । आकका वृक्ष । सफेद । कचनार | विशा। आलु-पु. कासालु ।। कोकण प्रसिद्ध आलु । अस्फोतक-पु० अर्कवृक्ष ।। आकका । आलुक-न० मूल-वि० । एलवालुक ।। आलु । आस्फोता-स्त्री. अपराजिता वनमालका । शारिवा- एलुआ। वृक्ष । वनकापासीवृक्ष वि० कायल || मल्लिकाभेद । आलुकी-स्त्री० दीर्घाकार सूक्ष्म रक्तवर्ण आलू ॥ सरिवन, मालसा । उनकपास । मदनमादी । घुयाँ, अरुई। आस्यपत्र-न- ५ ॥ कमल । ॥
औषधिकोष । (१५) ECT 1 आक्षा -पु.” आहकवर-पु. नालारोग-विशेष || नासिकावर । गिलोय । सोमलता। अजमायन । आहुल्य-न० क्षुप-विशेष ॥ रग । इन्दुलोहक-न० रौप्य ॥ रूपा। आक्षिक-पु० आच्छुकवृक्ष ।। रञ्जनद्रुम । इन्दुवल्ली-स्त्री. सोमवल्ली ।। सोमलता । आक्षिव-पु. आक्षाव ॥ सैजिनेका वृक्ष । इन्द्र-पु० कुटजवृक्ष ।। कूड वृक्ष । आक्षोट-पु० आक्षोटबंश्च ।। अखरोट इन्द्र-न० इन्द्रयव ।। इन्द्रजौ । इन्द्रगोप-न. रक्तवर्णकीट-विशेष ॥ लाल रङ्गका इति श्रीशालिग्रामवश्यकृते शालिग्रामौषधशब्द- इन्द्रगोपनामवाला कीडा अर्थात् वीरबहु टी। सागरे द्रव्याभिधाने आकाराक्षरे द्वितीयस्तरङ्गः॥ २॥ इन्द्रचन्दन-न० हरिचन्दन ॥ हरिचन्दन । (इ) इन्द्रचिभिटी-त्री • लता-विशेष। इक्का--पु० तृण-विशेष ।। बहुमूल तण । इन्द्रदारु-पु. देवदास्वृक्ष ।। देवदारुवृक्ष । इगुद-पु. इङ्गदीवृक्ष ।। गांदीवृक्ष । इन्द्रद्रु-इन्द्रद्रुम-पु. अर्जुनवृक्ष । कुटजवृक्ष ।। इङ्गुदी-त्री स्वनामख्यात वृक्ष-विशष । ज्योति. कोवृक्ष । कुडावृक्ष । धमती ।। हिंगोट, इङ्गुल । मालकाङ्गनी । इन्द्रपुष्प-न० लवङ्ग । इन्द्रयव ।। लोग। इन्द्रजी। इङ्गल-पु० न० इंगुदीवृक्ष ।। गोंदीवृक्ष । इन्द्रपुष्पा-स्त्री० लाङ्गलकीवृक्ष ।। कलिहारी । इच्छुक-धु० बीजपूर ।। विजोरा नवूि । इन्द्रपुष्पिका-स्त्री०,, इज्जल-पु० हिजलवृक्ष ।। समुद्रफल । इन्द्रभेषज-न० शुण्डी ॥ सौंट । इञ्चाक-पु० मत्स्य-विशेष || इञ्चाकमच्छ । इन्द्रयव-पु० न० स्वनामख्यात || तिक्तवीज-विशेष इडा-स्त्री० शरीरस्था वामभागस्था नाडी ।। शर:- इन्द्रजो। रके वामभागकी नाडी। इन्द्रलप-नः केशराग-वि० ॥ एक प्रकारका केश- इदका--स्त्री० दुरालभावृक्ष ।। धमासा । रोग । गंज । बालों का गिर जाना । इनानी-त्री० वटपत्रीवृक्ष || बडपत्री। इन्द्रवारुणिका-बी० इन्द्रवारुणी ॥ इन्द्रायन । इन्दम्बर-न. नीलोत्पल || नीले कमल । इन्द्रवारुणी-त्री० लता-विशेष ॥ इन्द्रायन । इन्दिरालय-न० पद्म ॥ कमल | इन्द्रविषा-स्त्री० अतिविषा ॥ अतीस । इन्दिरावर-न० नीलोत्पल।। नीलकुमुदनीलकमल। इन्द्रवृद्धा-स्त्री. व्रणरोग-विशेष ॥ क्षुद्ररोगविशेष । नीलकमोदनी। इन्द्रवृक्ष-पु. देवदारु ॥ देवदारु । इन्दीवर-न० नीलोत्पल ॥ नीलकमल | इन्द्रसुत-पु० अज्जुनवृक्ष । कोहवृक्ष । इन्दीवर-न० नीलपद्म ॥ नीलकमल । इन्द्रसुरस-पु. सिन्दुवार ।। सम्हालूवृक्ष । इन्दीवरिणी-स्त्री उत्पलिनी।। कुमुदनी किमलिनी । इन्द्रसुरिस-स्त्री." इन्दीवरी-स्त्री० शतमूली ॥ शतावर । इन्द्रसुरी-स्त्री." इन्दीवार-न० इन्दीवर | नीलकमल | इन्द्रा-स्त्री० फणिक । जम्बीरभेद । इन्दु-पु. कपूर• कपूर । इन्द्राणिका-स्त्री० सिन्दुवारवृक्ष ॥ सम्हालू । इन्द्राणी-त्री० सिन्दुवार । नीलसिन्दुवार । इन्दुक-पु० अश्मन्तकवृक्ष ॥ अश्मन्तक । इन्दुकमल-न० सितोत्पल ॥ सफेद कुमुद ! सूक्ष्मला । लस्थूलैला । सम्हालवृक्ष । निर्गुण्डीभेद | इन्दुकलिका-स्त्री० केतकी ॥ केतकी वृक्ष । गुजराती इलायची । स्थूल अर्थात् बड़ी इलायची । इन्दुको-स्त्री० तिन्दुकवृक्ष ॥ तदूवृक्ष । इन्द्राशन-पु० साम्वदावृक्ष । गुञ्जा ॥ भाङ्ग । इन्दुपुष्पिका-स्त्री० कलिकारीवृक्ष ॥ कलिहारीवृक्ष । धुंघुची। इन्दुरत्न-न० मुक्ता ।। मोती। इभ--पु० नागकेशर ॥ नागकेशरवृक्ष । इन्दुलेखा-स्त्री • अमृता । सोमवल्ली । यवानी ॥ इभकणा-स्त्री. गजपिप्पली ॥ गजपीपर ।
(१६) आयुर्वेदीय- कामतृण । इभकर्ण-पु० पलास ॥ ढाक, पलास । इक्षुवालिका-श्री० इक्षुतुल्या । काशतृण || काँस । इभकेसर-पु." इक्षुमूल-न० वृक्ष-विशेष । इभदन्ता-स्त्री० नागदन्तावृक्ष ।। हातीशुण्डवृक्ष । इक्षुयोनि-पु. पुण्डक इक्षु ।। सफेद ईख । धौल | इभषा-त्री० स्वर्णक्षीरीवृक्ष ॥ ऊँटकटरािभेद । इक्षुर-पु० कोकिलाक्षवृक्ष । इक्षु । काशतृण ।गोक्षुर।। इभाख्य-पु. नागकेशरवृक्ष ॥ नागकेशर । तालमखाना । ईख । कांस । गोखरू । इभोषण-न० गजपिप्पली ॥ गजपीपर । इक्षुरक-पु० कोकिलाक्ष । काशतृण।। तालमग्याना। इरावती-स्त्री० वटवृक्ष । पापाणभेदी-वि० ॥ वड- पत्री । पाखानभेदी भद। इक्षुरस-घु० काशतृण ॥ काँस । इरिवेल्लिका-त्री० मस्तकोत्पन्न वणजन्य पीडाविशेष॥ | इंक्षुर सक्काथ-पु० गुड ।। गुड । मस्तकमें जो फोडा उसकी पीडा । इक्षुवल्लरी-स्त्री० क्षीरविदारी ॥ दूधविदारी । इर्वारु-पु० स्त्री० कर्कटी । इन्द्रवारुणी ।। ककड़ी। इक्षुवल्ली-स्त्री." इंद्रायन । इक्षुवाटिका-स्त्री० पुण्ड्रक ।। ईग्वभेद । इवारुशुक्तिका-स्त्री० इार-वि० ।। फूट । इक्षुवाटी-स्त्री." इालु-पु. इालु ।। ककडी । इक्षुविदारी-स्त्री० भूमिकूष्मांड ॥ विदारीकन्द । इलीश-पु. इल्लिशमत्स्य || इलीस मच्छ । इक्षुवेष्टन-पु०.भद्रमुञ्ज ।। रामसर । इषीका-श्री० काशतृण ।। काँश । इक्षुसार-पु० गुड || गुड । इषुकाण्ड-पु० शर ।। सरपता । इक्ष्वाकु-स्त्री० कटुतुम्बी ॥ कडत्री तोम्बी । इषुपुङ्खा-स्त्री० शरपुङ्खा ॥ सरफोका । इक्ष्वारि-पु० काशतृण ॥ काँसतृण । इष्ट-पु० एरण्डवृक्ष । अण्डका पेड । इक्ष्वालिक-पु०" इष्टकापथ-न. वारणमूल ।। खत । इक्ष्वालिका-स्त्री० इक्षुतुल्या । आनिक्षु । इष्टगन्ध-न०वालुका ।। बालू । इति शालिग्रामवैश्यकृतशालिग्रामौषधशब्दसागेर इष्टा-स्त्री० शमीवृक्ष ।। छौंकरावृक्ष । द्रव्याभिधाने इकारस्वरे तृतीयस्तरङ्गः ॥ ३ ॥ इष्टिकापथिक, न० लामजक तृण ।। लामजतृण । इक्षु-पु०स्वनामख्यात तृण । कोकिलाक्ष वृक्ष ।। ईख। ईर्वारु-पु० स्त्री० स्फुटी ॥ फूट । ईर्वारुक-पु० ष्माण्डविशेष ॥ विलायती पेटा, इक्षुकाण्ड-पु० मुञ्जक । काशतृण ||शरमुञ्ज । कास। इक्षुगन्ध-पु० काशतृण । क्षुद्रगोक्षुरक । काँस । ईश-पु० पारद ॥ पारा । छोटा गोखरू वा देशी गोखरू । ईशान-पु० शमीवृक्ष ॥ छोकरवृक्ष । इक्षुगन्धा-स्त्री गोक्षुरी । कोकिलाक्षवृक्ष। काश तृणा ईशानी-स्त्री." शुक्लविदारी। गोखरू । तालमखाना । कांसतृण। ईश्वर-पु० पारद ॥ पारा । सफेद विदारीकन्द । ईश्वरी-स्त्री० लिङ्गिनीवृक्ष । वन्ध्याकर्कोटक । रुद्र- इक्षुगान्धका-स्त्री. भूमिकूष्माण्ड ॥'विलारीकन्द । जटा । नाकुलीकन्द ॥ शिवलिंगी । वांझम्बग्नगा । इक्षुतुल्या-स्त्री० तृण--विशेष ॥ आनाखु देशान्तरीय बनककोड़ा । शंकरजया । नाकुलीकन्द । इति श्रीशालिग्रामवैश्यकृते शालिग्रामौपधशब्दसा- इक्षुदर्भा-स्त्री० तृण-विशेष । इक्षुदर्भ । गरे द्रव्याभिधान ईकारम्वरे चतुर्थस्तरङ्गः ॥४॥ इक्षुनेत्र-न० इक्षुमूल । उ इक्षुपत्र-पु० यावनाल नामक धान्य-विशेष | जुआरा | उखवल-पु० तृण-विशप ! अग्वलतृण । इक्षुप्र-पु० शरतृण ।। रामसार । उग्र--न० वत्सनाभविष || बछनाम विष । ई तालमखाना । कौला। भाषा ।
औषधिकोष । (१७) वासाउँ। पोईका शाक। नेत्रवाला। उग्र-पु० सोमाञ्जनवृक्ष ॥ सजिनेका वृक्ष । उत्पल-न० नालपम । जलपुष्पमात्र । कुष्ठ । पुष्पा उग्रकाण्ड-पु० कारवेल्ल । करेला । नीलवर्ण कमल । कुमुद । कूठ । पुष्प । फूल । उग्रगन्ध-न० हिङ ॥ हीङ्ग । उत्पलगन्धिक-न० चन्दन-विशेष ॥ एक प्रकारका उग्रगन्ध-पु० रसुन। कटफल | अर्जकवृक्ष ।चम्पक चन्दन । लशुन । कायफर । बर्वरीभेद । चम्पावृक्ष । उत्पलशारिवा-स्त्री. श्यामालता॥ सालसा,कारआ. उपगन्धा-स्त्री० अजमोदा । वचा । छिक्कनी । यवा- नी ॥ अजमोद । वच । नाकछिकनी। अजमायन। उत्पलनी-स्त्री० जलजपुष्प-विशेष ।। कुमुदनी । उग्रा-स्त्री० वचा | यवानी । छिक्कनी । धन्याक ॥ उत्पादिका-स्त्री० हिलमोचिका ॥हुरहुर (उपोदिका।। वच । अजमायन । नाकछिकनी । धनिया । उच्चटा-स्त्री० गुञ्जा । भूम्यामलकी । नागरमुस्ता । उत्क्षिप्त-पु० धुत्तरफल ॥ धतूरेका फल । रसोनभेद । निर्विधातृण ॥ धुंधुची चोटली । भुई उदक-न० जल । वालक ॥ जल । सुगंधवाला । आमला । नागरमोथा । लहशनभेद । निर्विघी- घास। उदकीर्ण-पु० महाकरञ्ज । बडीकरञ्ज । उच्चतरु-पु० नारिकेलवृक्ष ॥ नारियलवृक्ष । उदकीयं-पु० करञ्ज-विशेष ॥ अरारी । उच्चार-पु० पुरीष ॥ विष्ठा । उदधिमल-न० समुद्रफेन ॥ समुद्रफेन । उच्छिलीन्ध्र-न० छत्रिका | अइफोड । उदर-न० नाभिस्तनयोर्मध्यभाग ॥ पेट । उज्ज्वल-न० स्वर्ण ॥ सोना । उदरन्थि-पु. गुल्मरोग। उदुम्बर-न० ताम्र । कर्षपरिमाण ।। तावा । २ तोले उदरामय-पु० पेटमें पीडा । उदरपीडा ।। प्रमाण । उदरीच्छदा-स्त्री० हस्तिकोलिवृक्ष ॥ बेरभेद । उडुम्बर-पु० उदुम्बरवृक्ष ।। गूलर । उदर्क-पु. मदनवृक्ष ॥ मैनफलवृक्ष । उडुम्बरपर्णी-स्त्री० दन्तीवृक्ष ।। दन्तीवृक्ष । ० त्वयोग-विशेष एकपकारकात्वचाकारोग। उड़-पु० जवापुष्प ॥ ओडहुल, गुडहर । उदाश्वित्-न० अर्द्धजलयुक्त घोल ॥ आधा जलका उत्कट-पु० शर । रक्तेक्षु ॥ सरपता ॥ लाल ईख । महा। उदान-पु० कण्ठस्थ वायु । उत्कट-न० गुडत्वक् । पत्रज ॥ दालचीनी । तेज-उदावत-पु० रोग-विशेष ।। उदावर्त । पात । उदीच्य-न० वालक ॥ सुगंध बाला नेत्र बाला । उत्कटा-स्त्री० सैंहली । सिंहलीपीपल । उदुम्बर-न० ताम्र ॥ तांवा । उत्कता-स्त्री. गजपिप्पली ॥ गजपीपर । उदुम्बर-पु० स्वनामख्यात वृक्ष ॥ गूलर । उत्खला-त्री० मुरानामक गन्धद्रव्य ।। कपूरकचरी, उदुम्बरदला-स्त्री. दत्तीवृक्ष ॥ दन्तीका पेड़ । एकाङ्गी । उदुम्बरपी-स्त्री." उत्तमफलिनी-स्त्री. दुग्धिकावृक्ष ॥ दूधियावृक्ष । उदूखल-न० गुग्गुलु ॥ गूगल । दुद्धीवृक्ष । उद्दल-पु० बहुवारवृक्ष । वनकोदव । कुष्ठ ।। लिसो. उत्तमा-स्त्री० दग्धिका ॥ दुद्धीवृक्ष । ढावृक्ष । वनकोदों । कूठ । उत्तमारणी-स्त्री० इन्दीवरी ॥ शतावर । उद्दालक-पु० बहुवारवृक्ष ॥ लिह सोडावृक्ष । उत्तरवारुणी-स्त्री० इन्द्रवारुणी ॥ इन्द्रायण । उद्दीप्र-न० गुग्गुलु ।। गूगल । उत्तानक-पु० उच्चटातृण ॥ उच्चटातृण। निर्विषीघास उद्धारा-स्त्री- गुडूची । गिलोया उत्तानपत्रक-पु० रक्तैरण्डवृक्ष ॥ लाल अण्डका वृक्ष । उद्भिद्-न० पांशुलवण ॥ पांशुनो न । जोगियावृक्ष । उद्रेका-स्त्री० महानिम्ब ।। बकाय ननीम | उत्तष-पु० भृष्टधान्य ।। खलि । उद्वेग-न० गुवाकफल || सुपारी । उदई-पु. लाल गन्ने। ॥
(१८) आयुर्वेदीय- NAA उदरकर्णी-त्री० आखुकर्णीलता ॥ मूसाकी । उपोदकी श्री उन्नाह-न० काजिक ॥ कॉजी । उपोदिका-स्त्री." उन्मत्त-पु० धुत्तर । मुचकुन्दवृक्ष ।। धतूरा । मुच-उपोदीका-स्त्री." कुन्द । उमा-स्त्री० अतसी। हरिद्रा || अलसी । हलदी। उन्माद-पु० बुद्धिभ्रंशकर चित्तरोग-विशेष ॥ उरग-पु० सर्प । ससिक ॥ सांप । सीसा । उन्मादरोग। उरणाख्य-पु० दद्रुघ्नवृक्ष ॥ पमार-चकबड़। उन्माद-पु. द्रोणपरिमाण ॥ ३२ सेर । उरणाख्यक-पु." उपकुञ्चि-स्त्री० सूक्ष्मकृष्णजीरक । कृष्णजीरक ॥ उरणाक्ष-पु० " कलौंजी । कालाजीरा । उरणाक्षक-पु० उपकुाञ्चका-स्त्री० कृष्णजीरक । सूक्ष्मैला ॥ काला उरुकाल-पु० लता-विशेष ॥ महाकाल वङ्गभाषा । जीरा । गुजराती इलायची । उरुकालक-पु." उपकुल्या-स्त्री० पिप्पली ॥ पीपल | उरुबुक-पु. एरण्डवृक्ष ॥ अण्डका वृक्ष । उपचक्र-पु० पक्षि-विशेष ॥ चकवाचकवी । उरुवक-पु० एरण्ड । रक्तैरण्ड ॥ अण्ड । लाल उपचित्रा-स्त्री० मूषिकपर्णी । दन्तीवृक्षामूसाकानी। अण्ड । दन्तीवृक्ष । उणा-स्त्री० मेषादिलोम | भेड इत्यादिकोंकी ऊन उपदंश-पु० शिश्नरोग-विशेष । शिवृक्ष । समष्ठि वा बाल । लावृक्ष। गरमीरोग । सैजिनेका वृक्ष कोकुयावृक्ष। उर्वारु-पु० इारु ॥ ककडी । उपदी-स्त्री० बन्दाक ॥ बाँदा । उलप-पु० विस्तीर्णलता । तृणविशेष ॥ दाख-पान उपद्रव-पु० रोगारम्भक दोषकोपजन्य अन्यथान्य इत्यादिकी वेल । खड्गतृण । विकार || उपद्रव। उलुप-पु० उलपतृण ॥ चटाईकी घास । उपधातु-पु० अष्टप्रधानधातुसदृश धातु । यथा- उलूक-पु० माक्षिक । तुत्थक । अभ्रक । नीलाञ्जन । मन:- उलूखड-न० उखल । गुग्गुल । धान, कूटनेकी शिला । हरताल रसाञ्जन । शरीरस्थ धातु. सम्भूत उपधातु । यथा । रससे-दूध । रक्तसे उलूखलक-न० गुग्गुल ॥ गूगल । स्त्रीरजः । मांससे-वसा । मेदसे-धर्म । अस्थिसे उल्ब-नं. जरायु ॥ "माताके पेटमें गर्भ जिसमें दन्त । मजासे-केश । शुक्रसे-ओज | लपेटा रहता है वह चमड़ा" ! उपमेत-पु० शालवृक्ष ॥ साल-सखुआ-सागोन वृक्षा उशीर-पु० न० वरिगमूल || खस । उपल-पु० करीष ।। सूरखा गोबर-उपले । उशीरक-न० उपलभेदी-[ न ]-पु० पाषाणभेदी वृक्षः।। पाखान• उशीरी-स्त्री० लघुकाश ॥ छोटे काँसा । भेद । उष-न० पाशुलवण || रेहका नोन । उपला-स्त्री० शर्करा ॥ चीनी। उष-पु० गुग्गुल । क्षारमृत्तिका ॥ गूगल । खारीमाटी। उपवट--पु. पियाल वृक्ष ॥ चिरोंजीका वृक्ष । उषण-न० मरिच, पिप्पलीमूल || गोल-काली उपवाल्लिका-स्त्री. अमृतसवा लता ॥ अमृतलवा भिरिच । पीपरामूल। उषणा-स्त्री० पिप्पली । शुण्ठी। चविका | पीपल । उपविष-न० कृत्रिम विष । अतिविषा ॥ विष-आ सोंठ । चव्य। कका दूध-सेंहुए डका दूध-कलिहारी, कनेर, उषर्बुध-पु० रक्तचित्रक ।। लाल चीता । धुत्तरा यह पांच : उपविष अतीस उषीर-पु० न० उशीर । खस । उपविषा-स्त्री. अविषा || अतीत । उष्ट्रकाण्डी-स्त्री० पुष्प-विशेष।। ऊटकटारा दक्षिणी। उपोती-त्री० पूतिक । ॥ पोईका शाक । उष्ट्रधूसरपुच्छिका-स्त्री० वृश्चिकाली।। वृश्चिकाल। पेचकपक्षी ॥ उल्लू। ओखली । गूगल। " लता। ॥ ।
औषधिकोष। (१९) अलसी। उष्टपादिका--स्त्री० भद्रवल्ली ॥ मदनमाली । ऋष्यगन्धा-स्त्री० ऋषिजांगलवृक्ष । क्षीराविदारी ॥ उष्ट्रशिरोधर-न० भगन्दररोग-विशेष ॥ उष्ट्रग्रीव ऋषिजांगलिकीवृक्ष । दूधविदसि । भगन्दररोग। ऋष्यप्रोक्ता-स्त्री० शतमूली । शूकाशम्बी । अति- उष्ट्रिका-स्त्री० वृश्चिकालीवृक्ष॥ कञ्चुरि तामिलभाषा। बला ॥शतावर । कौंछ । कंघई कंघी। उण-पु० पलापड ॥ प्याज । ऋक्ष-पु० स्योनाकवृक्ष ॥ आरलु । टैटू। उष्णरश्मि-पु० अर्कवृक्ष ॥ आकका वृक्ष । ऋक्षगन्धा-स्त्री० वृक्ष-विशेष । वृद्धदारक । क्षीर- उष्णा-स्त्री० क्षयव्याधि ॥ क्षयरोग । विदारी || ऋषिजांगलवृक्ष । विधारवृक्ष । उष्णिका-स्त्री० यवागू ॥ लपसी इत्यादि । दूधविदारी । उष्णोदक-न० तप्तजल ॥ उष्ण पानी । ऋक्षगान्धका-स्त्री० क्षीरविदारी ॥ दूधविदारी । उस्त्र-स्त्री० उपचित्रा । मूसाकानी । इति श्रीशालिग्रामवैश्यकृतशालिग्रामौषधशब्द- इति श्रीशालिग्रामवैश्यकृते शालिग्रामौषधशब्द सागरे द्रव्याभिधाने ऋकारस्वरे सप्तमस्तरंगः ॥ ७ ॥ सागरे द्रव्याभिघाने उकारस्वरे पञ्चमस्तरङ्गः ॥ ५ ॥ ए एकपत्रिका-स्त्री० गन्धपत्रीवृक्ष । वनकचर । अरुस्तम्भ-पु० जंघोपरि बृहत्स्फोटक-विशेष ॥ वनसटी। गठिया । एकमूला-स्त्री० शालपर्णी । अतसी ॥ शालवन । ऊरुस्तम्भा-स्त्री. कदलीवृक्ष ॥ केलावृक्ष । ऊर्वफण्टी-स्त्री० महाशतावरी ॥ बड़ी शतावर । एकरज-पु० भृङ्गराज ॥ भगरा । ऊर्ध्वसित-पु० कारवेल्ल । करेला । एकवीर-पु० वृक्ष-भेद ॥ एकलकंटो गु० भा० । अय॑ङ्ग-पु. शिलीधक । गोमयच्छत्रिक ॥भुईफोड़। एकाग-न. चन्दन ॥ चन्दन । ऊर्षा-स्त्री० देवताडकतृण । एकाष्ठील-पु० अगस्तिद्रुम ॥ हथियावृक्ष । ऊष-पु० क्षारमृत्तिका ॥ खारी मिट्टी । एकाष्ठीला-स्त्री० अगस्तिद्रुम ॥ पाठा॥हथियावृक्ष। ऊषण-न. मरिच || मिरच । पाठ। ऊषणा-स्त्री० पिप्पली ॥ पीपल । ऊपर-पु० क्षारभूमि ॥ ऊपरभूमि वा-खारी मिट्टी । एकोशिका-स्त्री० पाठा ॥ पाठ । इति श्रीशालिग्रामवैश्यकृते शालिग्रामौषधशब्द- | एडगज-पु० चक्रमई ॥ चकवड़ । पमार । सागरे द्रव्याभिधाने ऊकारस्वरे षष्ठस्तरङ्गः ॥ ६ ॥ एण-पु० स्त्री० मृग-विशेष ।। हरिण-काला हरिण । ऋ एरका-स्त्री० तृण-विशेष ॥ मोथातृण । ऋतु-पु० स्त्रीरज ॥ स्त्रीका रज । एरण्ड-पु० स्वनामख्यात वृक्ष ॥ अण्डका ऋद्धि-स्त्री० स्वनामख्यात अष्टवर्गान्तर्गत प्रसिद्ध एरण्डक-पु० औषाधि || ऋद्धि । एरण्डपत्रिका-स्त्री० दन्तीवृक्ष ॥ दन्तीवृक्ष । ऋषभ-पु० अष्टवर्गान्तर्गत प्रसिद्ध औषधि । कर्कट एरण्डफल-स्त्री." शृङ्गी ॥ ऋषभ औषधी । ककडासिंगी। एरण्डा-स्त्री० पिप्पली ।। पीपल । ऋषभी-स्त्री० कपिकच्छु । काँछ । एवारु-पु० कर्कटीभेद ॥ बड़ी ककड़ी । ऋषा-त्री० नागबला ॥ गुलसकरी, गंगरेन । एलबालु-न० एलवालुक ॥ एलुआ। ऋषिजांगलिकी-स्त्री० ऋक्षगन्धावृक्ष ॥ ऋषि- एलवालुक-न० सुगन्धिवणिक्द्रव्यभेद ॥ एलुआ । जांगल । एला-स्त्री० फलवृक्ष-विशेष ॥ एलायची,इलायची । ऋषिप्रोक्ता-स्त्री० माषपणी ॥ मषवन । एलापर्णी-स्त्री. रास्ता ॥ रायसन । ऋष्यगता-स्त्री० माषपर्णी । शतमूली ॥ मषवन । एलीका-स्त्री० सूक्ष्मैला ॥ छोटी इलायची । शतावर। एषणिका-स्त्री. तुला ॥ स्वर्ण तोलनका कांटा ।
(२०) आयुर्वेदीय- HTTLE ऐ महा। एवणी-स्त्रो० शस्त्रभेद व्रणमार्गानुसारिणी । प्रोव ओषधि-त्र.. फलपाकान्त वृक्षादि ।। फल पकनेपर इंग्रजी भाषा । तुला || कांटा तोलनका । जिस वृक्षका नाश हो जाय वह वृक्ष । जैसे धान, इति श्रीशालिग्रामवैश्वकृते शालिग्रामौषधशब्द- केला इत्यादि। सागरे द्रव्यामिधाने एकारस्वरे एकादशस्तरंगः॥११॥ ओषधी-स्त्री. " ओषधीश-पु० कपूर ॥ कपूर । ऐकाहिकज्वर-पु० एकदिनान्तर्गत ज्वर ॥ एक ओष्ठपुष्प-पु० बन्धूकपुष्पवृक्ष ॥ दुपहरियाका वृक्ष । दिनके अन्तर जो ज्वर आता है । ओष्ठी-त्री० बिम्बफिल ॥ कन्दूरी । ऐंगुद-न० इंगुदीफल ॥ गोंदनीका फल । ओष्ठोपमफला-स्त्री." ऐन्दवी-स्त्री० सोमराजी || बायची । इति श्रीशालिग्रामवैश्यकृते शालिग्रामोपधशब्द सा. ऐन्द्र-पु० मूल-विशेष । वन अदरख । गरे द्रव्याभिधाने बोकारस्वरे त्रयोदशस्तरङ्गः॥१३॥ ऐन्द्री-स्त्री० इन्द्रवारुणी । एला ॥ इन्द्रायण । औ इलायची। औदुम्बर-न० महाकुष्ठ रोगान्तर्गत राग-विशेष । ऐभी-स्त्री० हस्तिघोषा ।। बड़ी तोरई । ताम्र ॥ एक प्रकारका कुष्ठरोग । तावा । ऐरावत-पु० लकुचवृक्ष । नागरंगवृक्ष ॥ बड़हर- औदश्चित-न० अर्द्धजलयुक्त घोल || आधे जलका वृक्ष । नारंगीवक्ष । औदश्चितक-न" ऐरावती-स्त्री० वटपत्रीवृक्ष ॥ बडपत्री । औद्दालक-न. मधु-विशेष ।। एक प्रकारका मधु । एरिण-न. पांसुलवण ।। रेहगमानोन । औद्भिज-न० पांशुलवण ।। रेहका नोन । ऐलवालुक-न० एलवालुक नाम गन्धद्रव्य । एलुआ। औद्भिद-न० साम्भरलवण ॥ सांमरनोन । ऐलय-न." औपसपिक-पु० सन्निपातरोग-विशेष । संक्रामक ऐक्षव-न० इक्षुभव || गुड इत्यादि । रोग। इति श्रीशालिग्रामवैश्यकृते शालिग्रामौषधशब्द- औषरक-न० मृत्तिकालवण ॥ खारी नोन । सागरे द्रव्याभिधाने ऐकारस्वरे द्वादशस्तरंगः॥१२॥ और्व-न० पांशुलवण ।। रेहका नोन । आ औषध न० रोगनाशक द्रव्य । औषधी । ओजः-[ सू], न० रसादिसप्तधातुसारांशसम्भूत- औषर-न० मृत्तिकालयण ।। ग्वारी नोन । धातु--विशेष | ओज । इति श्रीशालिग्रामवैश्यकृते शालिग्रामौषधशाब्दसागरे ओडिका-स्त्री० धान्य-विशेष | नीवार । द्रव्याभिधाने औकारस्वरे चतुर्दशस्तरङ्गः ॥ १४ ॥ ओडि-स्त्री." (क) ओडू-पुजपापुष्पवृक्ष ॥ औंडहुल, गुडहर । कंस-न. पु० आढकपरिमाण || ताम्ररङ्गमिश्रित ओडाख्या-स्त्री० ॥ धातु ॥ ८ सेर । कासा । आदनाहा-स्त्रो० महासमङ्गा ॥ कगहिया । कंसक-न० नेत्रौपध । धातु-विशेष ।। पुष्पकसीस । आदनिका-स्त्री० महासमझा । बला !! कगहिया । कंसास्थि-न० कांस्य ॥ कांसी । कंसोद्भवा-त्री० सुगन्धिमृत्तिका-विशेष || सोरद- ओदनी-स्त्री० बला | खिरैटी । की माटी, गोपीचन्दन । ओल-पु० मूलविशेष ॥ जमीकन्द । ककन्द-पु० स्वर्ण ।। सोना । ओल्ल-पु० मूल विशेष ॥ जमकिन्द । ककुझान् [त्]-पु. बापभोपध ॥ भक ओषण-पु० कढरस || चरपरारस । ओषणी-त्री शाक-विशेष ।। ककुम पु. अजुनवृक्ष ।। कोवृक्ष । । खिरैटी । औषधी । - औषधिकोष। (२१) गन्धद्रव्य कच्छु-स्त्री रोग-विशेष । चित् । ककुभादना-स्त्री. नलीनामक ॥ कच्छरुहा-स्त्री. दूर्वा ॥ दूब । नलिका। कक्कोल-पु० न० सुगन्धिद्रव्य-विशेष ॥ शीतल- कच्छन्नी-स्त्री० पटोल्ट । पुपाभेद ॥ परवल । चीनी । हाऊबेर । कक्कोलक-न" कच्छुरा-स्त्री० शूकशिंवी. । शठी । दुरालभा । कक्खटपत्रक-पु० वनस्पति-विशेष || पाट । यवास ॥ कौंछ । कचूर । धमासा । जवासा । कक्खटी-स्त्री० खटी ।। खडिया माटी। कच्छू-स्त्री० रोग-विशेष ॥ कोढ-ओंदी खुजली कङ्कर-नक तक || छाछ । कच्छूमती-स्त्री० शकशिवी ॥ किंवांच । कङ्कराल-पु० निकोचकवृक्ष । फललता-विशेष ॥ कच्छोर-न० शठी ॥ कचूर । ढेरावृक्ष । काँकरोल-वङ्गभाषा । कच्ची-स्त्री० कन्द-विशेष ।। अरुई। कङ्कलोभ्य-न० अङ्कलोड्य । चिञ्चोटकमूल । कञ्चट-न० जलज शाक-विशेष । जलचौलाई - कङ्कशत्रु-पु० पृश्निपणी ॥ पिठवन । कञ्चट । कङ्काल-पु० त्वङमासरहित स्वस्थानावस्थित देहा- कञ्चटु-पु० कञ्चटभेद॥ छोटे पत्तोंका कञ्चटशाक। स्थिसमूह ॥ पिञ्जर । कञ्चुक-न० पु० सर्पत्वक् ।। साँपकी काचली। कंकु-पु. कंगुतृण । कंगु । कञ्चुकी-(न् )-पु. यव । चणक । जोङ्गक कंकुष्ठ-न० हरितालवत् पापाणभेद ।। मुरदासंग के. द्रुम ।। जौ । चने । अगर । कञ्चुकी-स्त्री० शीरीषवृक्ष ।। क्षीरकञ्चुकी । ककेलि-पु. अशोकवृक्ष ।। अशोकवृक्ष । कज-न. पभ । कमल । कंकेल्ल-पु० वास्तूकशाक ।। बथुआशाक । कञ्जिका-स्त्री० ब्राह्मणयष्टिका ॥ भारंगीवृक्ष । कंकेल्लि-पु० अशोकवृक्ष ।। अशोकवृक्ष । कटक-पु० न० सामुद्रलवण ॥ समुद्र नोन । कंग-स्त्री० पीततण्डुला । कांगनीधान । कटङ्कटेरी-त्री हरिद्रा । दारुहरिद्रा ॥ हलदी । कंगुका-स्त्री० प्रियंगु । कंगु ।। फूलभियगु । कागु दारलदी। नीधान । कटभी-त्री० ज्योतिष्मतीलता । अपराजिता । वृक्ष- कंगुनी-स्त्री० ज्योर्तिप्मती । कंगुधान्य ॥ मालकां. विशेष ॥ मालकांगनी । कोयललता । कटभी । गनी । कंगुनी। कटम्बरा-स्त्री० कटम्भरा ॥ कुटका । कंगुनीपत्रा-स्त्री० पण्यान्धातृण ॥ पण्यन्धतृण । कच-पु. वालक || सुगंधवाला । नेत्रबाला । कटम्भर-पु० स्योनाकवृक्ष । कटभी । अरलु । कचरिपुफला-स्त्री. शमीवृक्ष ॥ छोंकरवृक्ष । करभीवृक्ष । कचामोद-स्त्री० बालक ।। नेत्रबाला । कटम्भरा-स्त्री० कटुका । वर्षाभू । मूर्वा । राज. कचु-स्त्री० कच्ची ॥ अरुई। वला । सहदेवी। कुटकी । पुनर्नवा । विषखपरा। कञ्चट-न० जलपिप्पली । जलपीपर । चुरनहार । पसरन । सहदेई । कञ्चर-न० तक॥ महा। कटशर्करा-स्त्री० गाङ्गेठीलता ॥ नाटा-वङ्गभाषा । कच्छ-पु० तुनवृक्ष ॥ तुनवृक्ष । कटा-स्त्री० कटुका ॥ कुटकी । कच्छप-पु० स्वनामख्यात जलजन्तु-विशेष । नन्दीवृक्ष | कछुआजन्तु । तुनवृक्ष । कटायन-न. वीरण ॥ खस । कच्छपिका-स्त्री० क्षुद्ररोग-विशेष ।प्रमेहपिडिका । कटि पु० स्त्री • शरीरावयव-विशेष || कमर । कच्छपी-स्त्री० कुर्मी । क्षुद्ररोग-विशेष ॥ कछु- कटिल्लक-पु. कारवेल्ल ॥ करेला । आकी स्त्री । क्षुद्ररोग। कटी-स्त्री. पिप्पली ।। पीपल । ॥
(२२) आयुर्वेदीय- कटु-पु० रस-विशेष । चम्पकवृक्ष । चीनकर्पूर । कटुपत्रिक-स्त्री० कारोवृक्ष ॥ कण्टकारी वङ्ग- पटोल । कटी लता ॥चरपरा रस । चम्पावृक्ष । भाषा। चिनियाकपूर । परवल । कट्टी लता । कटुफल-पु० पटोल । परवल। कटु-स्त्री० कटुकी । प्रियंगुवृक्ष । राजिका ।। कटुभङ्ग-पु. शुण्ठी ॥ शोंठ । कुटकी । फूलप्रियंगु वृक्ष । राई । कटुभद्र-न० शुण्ठी । आर्द्रक || शोट । अदरख । कटुक-न० त्रिकटु ॥ सोंठ, मिरच, पीपल । कटुमंजरिका-त्री० अपामार्ग ॥ चिरचिरा । कटुक-पु० पटोल । सुगन्धितृण-विशेष । कुटज कटुमोद-न० सुगन्धिद्रव्य-विशेष ॥ जवादि । वृक्ष । अर्कवृक्ष । राजिका ॥ परवल एक प्रका- कटुम्बरा-त्री० कटुका । राजबला ।। कुटकी । रके सुगन्धितृण । कुडावृक्ष । आकका वृक्षाराई। प्रसारणी। कटुकन्द-पु० शिवक्ष । आईक । रसोन-सैजिन- कटुर-न० तक्र घोल । का वृक्ष । अदरख । लहान । कटुरोहिणी-स्त्री० कटुकी । कुटकी । कटुकफल-न० ककोलक ॥ शीतलचीनी । कटुवार्ताकी-स्त्री० श्वेत कण्टकारी ॥ सफेद कटुकरोहिणी-स्त्री• कटुकी ॥ कुटकी । कटुका-स्त्री० कटुकी । क्षुद्रचञ्चुवृक्ष । ताम्बूली। कटुबीजा-स्त्री० पिप्पली ।। पीपल । कटुतुम्बी । लताकस्तूरी ॥ कुटकी । छोटा चञ्चु कटुशृगाल-न० गौरसुवर्णशाक || चित्रकूटदेशप्र- वृक्ष । पान । कड़वी तोम्बी । मुष्कदाना-लता- सिद्ध शाक । कस्तूरी । कटुस्नेह-पु० सर्षप । श्वेतसर्षप ॥ सौं । सफेद. कटुकपाणि-पु० काकमाची ।। मकोय । कटुकालावु-पु० कटुतुम्बी ॥ कडवी तोम्बी । कटूत्कट-न० आर्द्रक ॥ अदरख । कटुकी-त्री० कटका ॥ कुटकी । कटूत्कटक-न० शुण्ठी ॥ साठ । कटुग्रंथि-ज० पिप्पलीमूल । शुण्ठी ॥ पीपरामूल । कट्फल-पु० स्वनामख्यात फलवृक्ष-विशेष ॥ काय- कटेरी। ससाँ। साठ। • • कटुचातुतिक-न० एला १ तेजपत्र २ गुडत्वक् कटफल-न० कङ्कोलक ॥ शातल चीनी । ३ मरिच ४ ॥ इलायची १ तेजपात : २ दाल कटफला-स्त्रीगम्भारीवृक्ष । बृहती । काकमाची । चीनी ३ भिरच ४। दवदाली । वार्ताकी । मृगेर्वारु ॥ कम्मारी, कटुच्छद-पु० तगरवृक्ष ॥ तगरपुष्प वृक्ष । खुमरे । कटाई । मकोय । घघरवेल, वंदाल । कटुतिक्तक-पु० शणवृक्ष । भूनिम्ब ॥ सनवृक्ष । कटेरी । सेसधिनी । चिरायता। कटङ्ग-पु० श्योनाकवृक्ष ॥ अरलु । टेढूँ। कटुतिक्तिका-स्त्री० कटुतुम्बी ॥ कड़वी तोम्बी । कटर-न० दधिसर । तक्र ॥ दहीकी मलाई ।छाछ। कटुतुण्डी-स्त्री० लता-विशेष ॥ कड़वी तोरई। कट्टी-स्त्री० कटुका ॥ कुटकी । कटुतुम्बी-स्त्री० तिक्तफललता-विशेष ॥ कड़वी कठिञ्जर-पु० तुलसीवृक्ष ॥ तुलसीका पेड़ । तोम्बी, तितलौकी। कठिना-स्त्री० गुडशर्करा ॥ चीनी । कटुत्रय-न० त्रिकटु ॥ सौंठ १ मिरच २ पीपल ३। कठिनिका-स्त्री० खड़ी॥खड़िया माटी वा सेलखड़ी कटुदला-स्त्री० कर्कटी ॥ ककड़ीभेद । कठिनी-स्त्री." कटुनिष्पाव-पु० नदीनिष्पाव धान्य ॥ निष्पाव कठिल्ल-पु० कारवेल्ल ॥ करेली। कठिल्लक-पु० कारवेल । रक्तपुनर्नवा । तुलसी ॥ कटुपत्र-पु० पर्पट । सितार्जक ॥ दवनपापरा । करेला । गदहपूर्ना, साँठ । तुलसीवृक्ष । पित्तपापरा । सफेद तुलसी। कडक-न० सामुद्रलवण ।। समुद्रनोन । धानभेद ।
॥ ॥ ॥ औषधी। गोखुरू । कडङ्ग-न० सुरा-विशेष ॥ एक प्रकारको मदिरा । कण्टकी-स्त्री० वार्ताकी-विशेष ।। कटेरीभेद । कडङ्गी-स्त्री० कलम्बिशाक ॥ कलम्बी, कलमी. कण्टकीद्रुम-पु० खदिरवृक्ष ॥ खैरका पेड़ । शाक। कण्टकीफल-पु० पनसवृक्ष । कठैलवृक्ष । कण-पु० वनजीरक ॥ वनजीरा । काला जीरा । कण्टकुरण्ट-पु० झिण्टी ॥ कटसरैयावृक्ष । कणगुग्गुल-पु० गुग्गुलुभेद ॥ कणगूगल। कण्टतनु-स्त्री बृहती ।। कटाई । कणजीर-पु० श्वेतजीरक ॥ सफेद जीरा । कण्टदला-स्त्री. केतकी ॥ केतकीवृक्ष । कणजीरक-न० क्षुद्रजीरक ॥ छोटा जीरा । कण्टपत्र-पु० विकङ्कतवृक्ष ॥ कण्टाई । कणा-स्त्री. जीरक । पिप्पली । श्वेतजीरक ॥जीरा । कण्टपत्रफला-स्त्री. ब्रह्मदण्डावृक्ष ॥ ब्रह्मदण्डी पीपल । सफेद जीरा । कणिक-पु० शुष्कगोधूमचर्ण ।। सूजी-दाना । कण्टपाल-पु० विकङ्कतवृक्ष । कण्टाई । कणिका-स्त्री० अनिमन्थवृक्ष | अरणी। कण्टफल-पु० क्षुद्रगोक्षुर । पनस । धत्तूर ।लताक. कणेर-पु. कर्णिकारवृक्ष ॥ कनेर । रञ्ज । तेजःफल। एरण्ड । छोटा गोखुरु। कटहर। कणेरु-पु.॥ धत्तुरा । लताकरञ्ज । तेजबला। अण्डका वृक्ष । कण्टकद्रुम-पु० शाल्मालवृक्ष ॥ सेमरका वृक्ष । कण्टफला-स्त्री० देवदालीलता ।। सोनैया, बंदाल । कण्टकप्रावृता-स्त्री० घृतकुमारी ॥ चिकुवार । कण्टल-पु० तीक्ष्णकण्टकयुक्तवृक्ष-विशेष ।। बबूर । कण्टकफल-पु० पनसवृक्ष । गोक्षुरवृक्ष ॥ कटहर । कण्टवल्ली-स्त्री० शिववल्ली ॥ श्रीवल्लीवृक्ष । कण्टवृक्ष-पु० तेजःफलवृक्ष ॥ तेजवल । कण्टकवृन्ताकी-स्त्रीव्वा की ॥ कटाई । कण्टाफल-पु. पनसवृक्ष ॥ कटहर । कण्टकश्रेणी-स्त्री० कण्टकारी ॥ कटेरी । कण्टागला-स्त्री० नीलझिण्टी ॥ नीलकटसरैया । कण्टकाठ्य-पु० कुब्जकवृक्ष ॥ फँजावृक्ष । कण्टालु-पु० वंश । बृहती । वार्ताकी । बबूर ॥ कण्टकारका-स्त्री० कण्टकारी ॥ कटेरी । बांस । बरहण्टा । भटकटैया । बबूर । कण्टकारी-स्त्री० क्षुद्रवृक्ष-विशेष । शाल्मलिवृक्ष । कण्टाह्वय-न० पद्मकन्द ॥ कमलकन्द । विकंकतवृक्ष ॥ कटेरी । सेमर का वृक्षाकण्टाई- कण्टी [न]-पु० कलाप ! अपामार्ग । खदिर।गो- विकङ्कतवृक्ष। क्षुर ॥ मटर । चिरचिरा । खैर । गोखुरू । कण्टकाल-पु० पनसवृक्ष। कटहर । कठैल । कण्ठ-पु० मदनवृक्ष ॥ मैनफलवृक्ष । कण्टकालुक-पु. यवासवृक्ष ॥ जवासावृक्ष । कण्ठील-पु० शूरण ।। जमीकन्द । कण्टकाष्ठ-पु० शाल्मलिवृक्ष ॥ सेमरका वृक्ष । कण्टकिनी-स्त्री० वार्ताकी । शोणझिण्टी। मधुख. कण्ठीरवी-स्त्री०वासकवृक्ष ॥ अडूसा-बाँसा । कण्डरा-स्त्री० जूरी।।कटेरी। पीले फूलकी कटसरैया । मीठी ख. ० महास्नायु । महानाडी । कण्डु-स्त्री० कण्डू ॥ सुखी खुजली । कण्टकिफल-पु० पनसवृक्ष । समष्ठीलवृक्ष ॥कटहर। कण्डुर-पु० कारवेल्ललता ॥ करेला । कोकुआवृक्ष । यम्लपर्णी लता । कपिकच्छू ॥ कण्टकिल-पु० न० वंशविशेष | बाँसभेद । अत्यम्लपर्णी । कोछ। कण्टकीलता-स्त्री० त्रपुषी ॥ क्षीरा-खीरा-बालम- कण्डू -स्त्री. रोग-विशेष ॥ सूखी-खुजली ॥ कण्डूकरी-स्त्री० शूकाशम्बी ॥ काछ-किवाँच । कण्टकी (न)-पु. खदिरवृक्ष । बदरवृक्ष । मद• कण्डन-पु० आरग्वध । गौरसर्षपः ॥ अमलतास । नवृक्ष । गोक्षुरवृक्ष॥ खैरका पेड़। बेरीका पेड । सफेद सौं । मैनफलवृक्ष । गोखुर वृक्ष । कण्डरा-स्त्री० शकशिम्बी ॥ कौंछ । । खीरा।
(२४) आयुषदीय- JA 0 केशर । । कण्डूल-पु० शूरण ।। जमीकन्द । कनकरम्भा-स्त्री० स्वर्णकदली ।। पीला केला । कत-पु० कतकवृक्ष ॥ निर्मली । कनकरस-पु० हरिताल || हरताल । कतक-पु० वृक्ष-विशेष | निर्मली । कनकलोद्भव-पु० राल || राल । कतकफल-पु. कृतकवृक्ष । निर्मली । कनकक्षार-पु० कंकण ॥ सुहागा । कत्तूण-न० सुगन्धितृण-विशेष । पृश्निपर्णी ।। कनकारक-पु. कोविदारवृक्ष ।। लाल कचनारवृक्ष । रोहिस सोधिया । पिठवन । कनकाह्व-न० नागकेशर पुष्पवृक्ष ॥ नागकेशर । कत्तोय-न० मद्य ।। मदिरा । कनकाय-पु० धुस्तूरवृक्ष ॥ धतुरेका वृक्ष । नाग. कदम्ब-पु० कदम्बवृक्ष । देवताडकतृण । सर्पप ।। कदमका वृक्ष । देवताडकतृण । साँ कनिष्टक-न० शकर्तृण || शुकडितृण । कदम्बक-पु० हरिद्रु । सर्षप । कदम्ब ॥ हलदुआ कनीच-स्त्री० गुञ्जा ॥ बुबुची, चोटली । वृक्ष । सस । कदम्बवृक्ष । कनीयस-न० ताम्र ।। ताँवा । कदम्बद-पु० सर्पप ।। ससौं । कन्यारी-स्त्री. वृक्ष-विशेष ॥ कन्थारी । कदम्बपुष्पा-स्त्री० मुण्डितिका || गोरखमुण्डा । कन्द-पु० न० शूरण । पिण्डमूल । पद्मकन्द ॥ कदम्बपुष्पी-स्त्री० महाश्रावणिका वृक्ष ॥ बड़ी गोरख जमीकन्द । सलाम । भसीडा, कमलकन्द । मुण्डी ॥ कन्द-पु० योनिरोग-विशेष ॥ योनिकन्द । कदम्बी-स्त्री० देवदालेलता ॥ घघरवेल,सौंदाल । कन्दगुडूची-स्त्री०गुडूची-विशेष । कन्दगिलोय । कदर-पु० श्वेतखदिर । क्षुद्ररोग-विशेष ॥ पपरिया-कन्दट-न० श्वेतोत्पल ॥ सफेद कुमुद । कत्था-सफेद खैर । कदर रोग । कन्दफला-स्त्री० क्षुद्रकारवेल्लि ॥ करेलाभेद । कदल-पु० कदलीवृक्ष । पृश्निपों ॥ फेलावृक्ष । कन्दमूला-न० मूलक ॥ मूली । पिठवन। कन्दर-त. आर्द्रक ॥ अदरख । कदलक-पु. कदलीवृक्ष ॥ केलावृक्ष । कन्दराल-पु० गर्दभाण्डवृवृक्ष । प्लक्षवृक्ष । आखोट कदला-स्त्री० शाल्मलिवृक्ष । पृश्निपर्णी ॥ सेमरका वृक्ष ॥ पारिसपीपल । पाखरका वृक्ष । अखरो. वृक्ष । पिठवन। टका वृक्ष । कदली-स्त्री० स्वनाम प्रसिद्ध. औषधविक्ष-विशेष ॥ कन्दरालक-पु० प्लक्षवृक्ष ॥ पाकुरवृक्ष । केलावृक्ष । कन्दरोद्भवा-स्त्री० क्षुद्रपाषाणभेद ॥ छोटा पाखान. कदाख्य-न० कुष्ठनामौषध ॥ कूठ । भेद वृक्ष । कनक-न• सुवर्ण || सोना । कन्दपजीव-पु. कामवृद्धि क्षुप ॥ कामज कर्णाटक कनक-पु० पलाशवृक्ष । नागकेसरवृक्ष । धुस्तूरवृक्ष। देशीय भाषा। काञ्चनालवृक्ष । कालीयवृक्ष । चम्पकवृक्ष । का. कन्दलता-स्त्री० मालाकन्द ॥ मालाकन्द । समवृक्ष । कणगुग्गुलवृक्ष । लक्षातरु ॥ ढाक कन्दली-स्त्री. कदली। पद्मवीज || केला । कमल. वृक्ष । नागकेशरवृक्षा धतूरेका वृक्ष । लालकच. गट्टा। नारवृक्ष । कलम्बक। पीलाचन्दन । चम्पावृक्ष । कन्दलीकुसुम-न० कदलीपुष्प ॥ केलेका फूल । कसौंदीवृक्ष । कणगूगल | पलासभेद । कन्दवर्द्धन-पु० शूरण ॥ जभीकन्द । कनकफल-न. जयपाल । स्तूरफल।। जमालगोटा कन्दवल्ली-स्त्री० वन्ध्याकर्कोटकी ॥ बांझग्यबसा । धतूरेके फल । कनकप्रभा-स्त्री. महाज्योतिष्मती ।। बड़ी मालका- कन्दबहुला-स्त्री त्रिपर्णिका || त्रिपाकन्दः । ङ्गनी । कन्दभरण-पु . ओल || जमीकन्द । कनकप्रसवा-स्त्री स्वर्ण केतकी । केतकी । कन्दसंज्ञ-पु. योन्यर्श ॥ योनिरोग। वनककोड़ा ।
औषधिकोष। (२५) कैथ । कन्दाह-पु० शूरण ।। शूरन । कपिप्रभा-स्त्री० कपिकच्छू । कोछ । कन्दाल-पु. कासालु । घरणीकन्द । विपर्णिका । कपिप्रिय-पु० आम्रातक । कपित्थ ॥ अम्बाडा । कन्दिरी-त्री ८ लज्जालुवृक्ष || लज्जायन्ती-छुईमुई कन्दी [ ]-पु० शूरण ।। जभीकन्द । कपिल-पु० सिल्हक । शिलारस । कन्दोट-नः नीलोत्पल || नीलकमल । कपिलद्राक्षा-स्त्री० द्राक्षा-विशेष ।। किसमिस । कन्दोत-पु. शुक्लोत्पल ।। सफेद कमल । वा अगर भूरे रंगकी दाख, मुनक्का फार्सी । कन्दोत-पु. कुमुद । कमोदनी । कपिलद्रुम-पु० काक्षानामक सुगन्धिकाष्ठ !काक्षी । कन्धर-पु० मारिषवृक्ष ।। मरसावृक्ष । कपिलशिंशपा-स्त्री. शिंशपावृक्ष-विशेष | कपि कन्वरा--स्त्री० ग्रीवा ॥ गरदन । लवर्ण सीसोंका वृक्ष । कन्या-स्त्री० घृतकुमारी । स्यूलला । वाराही कन्द । कपिला-स्त्री. भस्मगर्भा शिंशपा । रेणुकानाम वन्ध्याकर्कोटकी ।। चिकुवार ! बडी इलायची । गन्धद्रव्य । घृतकुमारी । शिंशपा । राजरीति ॥ गेटीवृक्ष । वाँझखखसा । भूरे रंगका सासोका वृक्ष । रेणुका । विकुवार । कपटिनी-स्त्री० चीडानामगन्धद्रव्य ॥ चीट । सीसावृक्ष । पीतलभेद । कपटेश्वरी-स्त्री० श्वेतकण्टकारी ॥ सफेद कटेरी । कपिलाक्षी-ख. मृगेधारू । कपिलशिंशपा || कपई-पु० वराटक || कौडी । सेधनी । सीसीका वृक्ष । कपर्दक-पु. " कपिलोमफला-स्त्री० कपिकच्छु ॥ कोछ । कपाल-पु० न० शिरोअस्थि । कुष्ठरोग-विशेष ॥ कपिलोमा-स्त्री० रेणुका ॥ रेणुक, रेणुका । सिरकी खोपडी। एक प्रकारका कोढ । कपिलोह न. पित्तल ॥ पीतल । कपि-पु० करअ-विशेष । सिलक || एक प्रकारकी कमिल्लिका-स्त्री. गजपिप्पली ॥ गजापपर । करज । शिलारस । कपिवल्ली-स्त्री." कपिक-पु० सिह्लक ।। शिलारस । कपिश-पु. सिल्हक । आम्रातक ॥ शिलारस । कपिकच्छु-स्त्री० शूकशिम्बी ॥ कौंछ । अम्बाडा। कपिकछुफलोपमा-स्त्री० जतुकलिता ॥ पद्मावती । कपिशीर्षक-पु० हिंगुल ॥ हिंगुलु-सिंगरफफार्सी । कपिकच्छुरा-स्त्री. कपिकच्छु ॥ कौंछ । कपिहस्तक-पु. कपिकच्छु ।। किवांच । कपिका-त्री नीलसिन्दुवारवृक्ष ॥ निर्गुण्डी । कपीकच्छ-स्त्री० कपिकच्छु ॥ कौंछ । कपिकोलि-पु० कोलि-विशेष ।। वेरभेद । कपीज्य-पु. क्षीरिकावृक्ष || खिरनीका पेड' । कपिचूडा-स्त्री० आम्रातकवृक्ष ।। अम्बाढावृक्ष । कपीत-पु० श्वेतबुलावृक्ष ॥ श्वेतवोना व० भा० । कपीतन-पु. शिरीषवृक्ष । आम्रातकवृक्ष । बित्व कपिज-पु० शिलक ।। शिलारस । वृक्ष । अश्वत्थवृक्ष । गुवाकवृक्ष । गर्दभाण्डवृक्षा। कपिजल-पु० चातकपक्षी । तित्तिरि पक्षी।। पपिहा। सिरसका पेड । अम्बाडावृक्ष । बेलवृक्ष । पीपल- का वृक्ष । सुपारीका वृक्ष । पारिक्षपीपल । कपितैल-न० तुरुष्कनाम गन्धद्रव्य ।। शिलारस । कपोष्ट-पु. राजादनीवृक्ष । कपित्थ ।। खिरनी- कपित्थ-पु० वृक्ष-विशेष ॥ कैथ । वृश्च । कैथवृक्ष । कपित्थत्वक्-न० एलवालुक । एलुआ। कयोत-पु० पारावत । परेवा-कबूतर। कपित्थपर्णी-स्त्री० वृक्षविशेष । कपोतक-न० सौवीराजन ॥ सफेद शुर्मा। कपिनामा[]-पु० सिहक ॥ शिलारस । कपोतचरणा-स्त्री० नलिका ।। नली । कपिपिप्पली-स्त्री. रक्ताम यामार्ग । सूर्यावतवृक्ष ॥ कपोतका-स्त्री० ब्राह्मी || ब्रह्मीघास । लाल चिरचरा । हुरहुज | कपोतवां-स्त्री० सूक्ष्मला ।। गुजराती इलायची । ॥ कपिचूत-पु. तीतर।
(२६) आयुर्वेदीय- नी। ~ " कपोतचाणा-श्री नलिका नाम गन्धद्रव्य-विशेष || करक-पु० दाडिमवृक्ष ! करञ्जवृक्ष । पलामवृक्ष । कोविदारवृक्ष । वकुलवृक्ष । नारिकेल्यस्थि । कपोतसार-पु. स्त्रोतोजन ।। शुमा । करीवृक्ष।अनारवृक्ष । करंजुआ, कञ्जा । पल्ला- कपाताघ्रि-स्त्री० नालिका | पवारी । डाक । लाल कचनारवृक्ष । नारियलों की माला । कपोल-पु० गण्ड ॥ गाल । करीलवृक्ष । कफ-पु. शरीरस्थधातु-विशेष । अधिकफ ॥ करकाम्भा: [सू), पु. नारीकेलवृक्ष ॥ नारि- कफ । समुद्रफेन । यलवृक्ष। कफनी-त्री हपुपाभेद ॥ हाऊबेर । करङ्कशालि-पु० करक नामक इक्षु ॥ पुण्ड्कई । कफाणि-पु० कोण.॥ कोना । करच्छद-पु० शाखोटवृक्ष ।। सहोरावृक्ष । कफवर्द्धन-पु० पिण्डितगर, ॥ कोकणदेशकीतगर । करच्छदा-स्त्री० सिन्दूरपुप्पीवृक्ष | सिन्दूरियावृक्ष कफरोधि [-]-न० मरिच ॥ मिरच । करज-न० व्याघ्रनखनामक गन्धद्रव्य । नखी । कमान्तक-पु० व—वृक्ष || बबूरका वृक्ष । करज-पु० करञ्जवृक्ष || ऋञ्जावृक्ष। कफारि-पु० शुण्ठी ॥ सोंठ । करजाख्य-पु० नखी नाम गन्धद्रव्य ॥ नखी । कफोणि-पु. भुजमध्यग्रन्थि ॥ कोनी । करज्योडि-पु. हस्तजाडिवृक्ष ॥ हातजोडी । कवित्थ-पु० कवित्थवृक्ष ॥ कैथंका वृक्ष । हत्थाजोडी । हत्थाजडी। कमण्डलु-पु० न० प्लक्षवृक्ष || पाखरवृक्ष करज-पु० वृक्ष-विशेष ॥ करजुआ, कञ्जा । कमण्डलुतरु-पु० करजक-पु० कर जवृक्ष । भृगराजवृक्ष । कना- कमन-पु० अशोकवृक्ष ।। अशोकवृक्ष । वृक्ष । भेगरावृक्ष । कमल-न० पद्म । जल। ताम्र। औषध । क्लोम ।। कर लफलक-पु. कपित्थवृक्ष ॥ कैथका वृक्ष । कमलपुष्प । जल । तामा । औषधी । फुप्फुस करट-पु० कुसुम्भवृक्ष ॥ कसूमका वृक्ष । करण्ड-पु० मधुकोष । मुहाल, सहतकी मक्खि. कमला-स्त्री० मिष्टजम्बीर ॥ मीठानीबु-हिन्दी । कमलालेबु वङ्ग भाषा ! करद्रुम-पु. • कारस्करवृक्ष ॥ कुचलावृक्ष । कमलोत्तर-न० कुसुम्भपुष्प ।। कसूमके फूल | करपत्रवान् [त् ], पु० तालवृक्ष ॥ ताडका वृक्ष । कम्प-पु० गात्रादिचलन ॥ कंप--कंपना कांपना । करपर्ण-पु० भिण्डावृक्ष रक्तैरण्ड ॥ भिण्डीकावृक्ष । कम्पिल, कम्पिल्ल-पु० गुण्डारोचनी ।। कवीला । लालअण्डका पेड कम्पिलक-पु० वृक्ष-विशेष । गुंडारोचनी । एक करभ-पु० नखनामकगन्धद्रव्य । मृवित्त !! प्रकारका वृक्ष । कंबीला औषधी । नख । हुरहुरवृक्ष । कम्बु-पु० न० शंख ।। शंख । करभकाण्डिका-स्त्री. उष्टकाण्डी ॥ ऊँटका. कम्बुका-स्त्री० अश्वगन्धावृक्ष ॥ असगन्ध । ण्डवृक्ष। कम्बुकाक्षा-स्त्री० " करभप्रिया-स्त्री. क्षुद्रदुरालभा ॥ छोटा धमामा ! कम्बुपुष्पी-स्त्री. शंखपुष्पी ॥ शंखाहुली । करभवल्लभ-पु. कपित्थवृक्ष । पीलुगृक्ष । थका कम्बुमालिनी, स्त्री " वृक्ष । पीलुका पेड। कम्भारी-स्त्री, स्वनामख्यात वृक्ष ॥ कम्भारी, करभादनी-त्री० शुद्रदुरालभा ॥ छोटा थमासा । करमद-पु. गुवाकवृक्ष || सुपारीकाक्ष । कम्भु-न० उशीर ।। खस । करमर्द-पु. करमईक ॥ करांदा । कयस्था-स्त्री० काकोली ॥ काकोली अष्टवर्गमकी करमर्दक-पु० करमर्दी-स्त्री. करमर्दकवृक्ष । करादा-दी। योका घर । । खुमेर । ओषधि ।
औषधिकोष। (२७) ॥ J करम्भा-त्री० शतावरी । प्रियंगुवृक्ष ॥ शतावर । कर्कटीवा-स्त्री० कर्कटशृङ्गी ॥ काकराशिङ्गी । फूलाप्रियंगु । कर्कटि-स्त्री० कर्कटी । सपुरिया कूष्माण्ड । ककड़ी करवी-स्त्री. हिंगुपत्री ॥ हांगपत्री । बिलायती पेटा-कौल ॥ करवीर-पु० स्वनामख्यात वृक्ष-विशेष ॥ कनेर । कर्कटिनी-स्त्री० दारुहरिद्रा ॥ दारहलदी । करवीरक-पु० अर्जुनवृक्ष । करवीरमूल ।। कोह. कर्कटी-स्त्री. शाल्मलफल । देवदालीलता । कर्कट- वृक्ष । कनेरको जड । हानी । एर्वारु । घोटिकावृक्ष । फललताविशेष। करवीरभुजा-स्त्री० आढकीवृक्ष ॥ अडह वृक्ष । तेजःफल । घघरवेल सानैया । काकडाशिङ्गो। कररी-स्त्री० बबरी ।। वनतुलसी । बड़ी ककडी। बोटिकालक्ष । ककडी। करहाट-पु० पद्ममूल । मदनवृक्ष । महापिण्डी- कर्कन्धु-पु० स्त्री० कोलिवृक्ष॥ वेरीका वृक्ष । छोटा तरु ।। मैनफलवृक्ष । मैनफलभेद । बरीका वृक्ष । करहाटक-पु. मदनवृक्ष || मैनफल । कर्कन्धू-पु० स्त्री० बदरीवृक्ष । बेरीका वृक्ष । करामई-पु० करमवृक्ष ॥ करौंदा । कर्कश-पु० कम्पिल्लवृक्ष ।।कासमई इक्षु । वृश्चिका- कराम्बुक-पु. कृष्णपाकफल || पानीआमला। लावृक्ष ॥ कबीला ओषधि । कसौदी । ईख । कराम्लक-पु० करमवृक्ष । करोंदा । वृश्चिकाली । कराल-न० कृष्णकुठेरक । काली तुलसी । कर्कशच्छद-पु० पटोल । शाखोटवृक्ष | परवल । करालक-पु. कृष्णतुलसी || कालो तुलसी । सहोरावृक्ष । कराला-त्री० शारिवा ॥ करियावा साऊँ।कालीसर । कर्कशच्छदा-त्री० कोषातकी ॥ तोरई । करिकणा-स्त्रीगजपिप्पली ॥ गजपीपल । कर्कशदल-पु० पटोलं ।। परवल । करिकणावल्ली-स्त्री० चविकावृक्ष ॥ चव्य । कर्कशदला-स्त्री. दग्धावृक्ष । कुरुई देशान्तरथिन करिपत्र-न• तालीसपत्र ॥ तालीसपत्र । करिपिप्पलो-स्त्री. गजपिप्पली ॥ गजपीपल । कर्कशा-स्त्री० वृश्चिकालीवृक्ष || वृश्चिकाली । करिर--पु० न० करीर ॥ करील । ककशिका-स्त्री. बनबदरी ॥ वनजातबेर । करीर-पु० न० वंशांकुर || बाँसका छडका । कोरु-पु. कूष्माण्ड || कोहडा । करीर--पु. कण्टकयुक्तवृक्ष-विशेष ।। करील | कारुक-पु० कालिङ्गवृक्ष। भिल्याकटू पीतकूष्मा- करीष-पु० न० शुष्कगोमय ॥ सूखा गोबर । ण्ड || तखूज । करुण-पु० वृक्ष-विशेष ॥ कन्ना नामू । कर्कोटक-पु० विल्ववृक्ष । फललता-विशेष । इक्षु। करुणमल्ली-स्त्री० नवमल्लिका | नेवारी। बेलका पेड़ । छकोडा । ईख । करुणी-स्त्री० पुष्पवृक्ष-विशेष "ककरखिरुणी कर्कोटकी-स्त्री० पतिघोपावृक्ष । फलशाक-विशेष ।। कोकणीभापा । नेनुआतोरई । ककोडा। करेणु-पु. कर्णिकारवृक्ष ॥ कनरे । कर्कोटिका-स्त्री० कर्कोटक कूष्माण्डी । . करेन्दुक-पु० भूस्तृण || शरवान । कर्कोटी-स्त्री. कर्कोटकी ॥ ककोडा । करेवर-पु० तुरुष्क || शिलारस । कचूर-न० स्वर्ण ।। सोना। करोटि-स्त्री० शिरोअस्थि ॥ शिरकी खोपड़ी। कचेर-पु. वृक्ष-विशेष ॥ कचूर । कर्क, कर्कट-पु. वृक्ष-विशेष ।। काकडाशिङ्गी । कच्छ्रेरक-पु० कबूंरक ॥ आमियाहलदी । कर्कशृतिकात्री० कर्कटशृङ्गी ॥ काकडाशिङ्गी । कर्णकण्डु-पु० कर्णरोग-विशेष ॥कानकी खुजली । कर्कशृङ्गी-स्त्री० कर्णगूथ-न० कर्णमल ।। कानका मैल । कर्कटाख्या-स्त्री." कर्णगूथक-पु० कर्णरोग-विशेष ॥ कर्णगृथक । कर्कटाह्व-पु० बिल्ववृक्ष ॥ बेलका वृक्ष । कर्णपुष्प-पु० मोरट ॥ मोरटलता । भाषा । कार- ॥ ॥ .
(२८) आयुर्वेदीय- कर्णपूर-पु० शिरीषवृक्ष । नीलोत्पल। अशोकवृक्षा कवर-न० स्वर्ण हरिताल || सोना । हरताल । सिरसका वृक्ष । नीलकमल । अशोकका वृक्ष । कबूर-पु० शटी । द्राविडक ॥ अमियाहलदी। का. कर्णपूरक-पु० कदम्बवृक्ष || कदमका वृक्ष । च हरिद्रा वङ्गभाषा । कर्णप्रतिनाह-पु० कर्णरोग-विशेष ॥ कर्णरोग । कबूरक-पु० हरिद्राभक्ष । कृष्णहरिद्रा । कपरहरिद्रा कर्णशुल-पु. कर्णरोग-विशेष ॥ कर्णशूल । काँची हलदी । काली हलदी । कपूरहलदी । कणसंस्राव-पु० कर्णरोग-विशेष ·॥ एक प्रकारका कर्मज-पु० वटवृक्ष ॥ वडवृक्ष । कानका रोग। कर्मफल-पु० कर्मरङ्ग । कमरख । कर्णस्फोटा-स्त्री. लता-विशेष || कनफोडविला कर्मशूल-न० कुशतृण ॥ कुशाघास ।। कर्णवेड-पु० कर्णरोग-विशेष !! कनछेडरोग । कर्मरङ्ग-पु० न० फलवृक्ष-विशेष ॥ कमरख । कर्णाटी-स्त्री० हंसपदीवृक्ष ।। लाल रङ्गका लज्जालु। कर्मरी-स्त्री० वंशलोचना । वंशलोचन । कर्णाभरणक-पु० आरग्वधवृक्ष ।। अमलतास । कार-पु. वंश । कमरङ्ग ॥ बाँस । कमरख । कर्णारि-पु० नदीस वृक्ष ।। कोह । कर्ष-पु० न० तोलकद्वय ।। २ तोले परिमाण । कर्णिका-स्त्री० पद्मवीजकोष । आग्निमन्थवृक्ष अज- कर्ष-पु० विभीतकवृक्ष ॥ बहेडावृक्ष । शृङ्गीवृक्ष ॥ कमलगट्टे का घर । अगेथुवृशा मेढा-कर्षिणो-स्त्री० क्षारेणीवृक्ष । काञ्चनारी । शिङ्गी । कर्षफल-पु० विभीतकवृक्ष ॥ बहेडावृक्ष । कर्णिकार-पु. वृक्ष-विशेष ।स्थलपद्म । आरग्वधवि. कर्षफला-स्त्री. आमलकी । हरीतकी ॥ आमला । शेष ॥ कनेर । गेंदेका वृक्ष । अमलतासभेद । कर्दमी-स्त्री० मुद्गवृक्ष ॥ मोगरावृक्ष । कार्षणो-स्त्री० क्षीरिणीवृक्ष ॥ काञ्चनक्षीरी । कपराल-पु० कन्दराल ॥ अखरोट । कल-न० शुक्र । कोलिवृक्ष ॥ वीर्य्य । बेरीका वृक्ष। कपरिकातुत्थ-न तुत्थ-विशेष ॥ एक प्रकारका कल-पु० सालवृक्ष । संखुआवृक्ष, सागानवृक्ष । तूतिया । कलकल-पु० शालनिर्यास कपरी-स्त्री० काथोद्भव तुत्थ दारुहलदीके काथका कला-पु. तान्नकट ।। तमाग्बूका वृक्ष । तूतिया । रसोत । कलधूत-न० रूप्य रूपा । कपास-पु० न० कार्पास ॥ कपास । कलधौत-न० स्वर्ण । रजत । सोना । चाँदी । कर्पसी-स्त्री० कापस ॥ कपास । कलन-पु० वेतसवृक्ष ॥ बेतका वृक्ष । कपूर-पु० न० स्वनामख्यात सुगन्धिद्रव्य ॥ कपूर कलन्धु-स्त्री०घोलीशाक। बोलीका शाक नोनियोभेद। कर्पूर । कलम-पु० धुस्तर वृक्ष ॥ वत्तरेका वृक्ष । कर्पूरतैल-न० कर्पूरस्नेह ॥ कपूरका तेल । कलभवल्लभ-पु. पीलवृक्ष ॥ पीलवृक्ष । व बुदार-पु० कोविदार । श्वेतकाञ्चन ।नीलझिण्टी। कलभी-स्त्री० चञ्चु । चेवुनाशाक । लाल कचनार । सफेद कचनार । नाली कटस कलम-पु. स्वनामख्यात शालिधान्य विदोष ॥ क- रैया । लमधिान । कदारक-पु० श्लेष्मान्तकवृक्ष ।। लिहसोडा । कलमोत्तम-पु० गन्धशालि ।। गन्धयुक्त शालिधान। कर्बुर-न० स्वर्ण धुरतूरवृक्ष । जल ॥ सोना धतूरेका कलम्ब-पु० शाकनाडिका । कदम्ब । शर ॥ शा- कका इंठा । कदम्बवृक्ष । रामसर । • शटी । नदीनिष्पावधान्य ॥ कचर । न-कलम्बक-पु० धाराकदम्ब । काबीशाक ।। धारा- दीनिष्पावधान । कदमवृक्ष । कलंबाशाक। कवरफल-पु० साकुरुण्डवृक्ष ।। सकुरुण्डर । कलम्बिका-स्त्री. कलम्बीशाक । ग्रीवापश्चान्नाटी ।। करा-स्त्री० वर्वरी । कृष्णवृन्ता । वनतुलसी पाडर कलम्बीशाक । गरदनके पीछेकी नाही। || राल । वृक्ष । जल। कङ्घर-पु० औषधिकोष । (२९) कलम्बी-स्त्री० जलजशाक विशेष ॥ कलमीशाक ॥ कल्कफल-पु० दाडिमवृक्ष ।। अनारका वृक्ष । कलम्युट-पु० नवनीत ।। नैनीघी। कल्पक-पु. कचेर ॥ कचूर । कलम्बू-स्त्री० कलम्बीशाक ॥ कलमीशाक । कल्पनी-स्त्री० कर्तनी ॥ कैची कपडा कतरनेकी । कलल-पु. न. जरायु । गर्भवेष्टनचर्म । कल्माष- पु० गन्धशालि || सुगंधशालिधान हंसराज कललज-पु० राल ॥ राल । बाँसमती इत्यादि। कललजोद्भव०पु० शालवृक्ष ॥ सालवृक्ष । कल्य-न० मधु ।। उहत । कलविङ्क-पु० चटकपची ॥ गौरापक्षी । जल्या-स्त्री. मद्य । हरतिकी || मदिरा । हरडे । कलाश-स्त्री० पृश्निपर्णी ॥ पिठवन । कल्याण-न. स्वर्ण | सोना । कलशी-स्त्री० कल्याणबीज-पु० मसूर ।। मसूर धान । कलस-पु. द्रोणपरिमाण || ३२ सेर । कल्याणिका स्त्री० मनःशिला || मनशिल । कलास-स्त्री० पृश्निपणी | पिठवन । कल्याणिनी-स्त्री० बला ॥ खिरैटी। कलसी-स्त्री० ॥ कल्याणी-स्त्री० माषपर्णी ।। मप्रवन । कलहनाशन-पु० पूतिकरञ्ज । दुर्गंधवाली करञ्ज । कवचपत्र-न० भूर्जपत्र ।। भोजपत्र । कलाकूल-न० विध ॥ विप । कवड-कवडग्रह, पु० कर्षपरिमाण ।। २ तोले । कलापिनी-स्त्री. नागरमुस्ता ॥ नागरमोथा । कवयी-स्त्री० मत्स्य-विशेष ।। कई मच्छ । कलापी-(न् ) पु० प्लक्षवक्ष ।। पिलचनका वृक्ष । कवर-पु० न० लवण । अम्ल ।। नून । खट्टा । कलामक-पु. कलमधान्य || कलमधिान । कवरा-स्त्री. खरपुष्पा ॥ वनतुलसी । कलाय-पु० शमीधान्य-विशेष ॥ मटर । कवरी-स्त्री० वर्वरी । हिगुपत्री ।। बनतुलसी कलाया-स्त्री० गण्डदूर्वा । मञ्जिष्ठा ।। गाँडरदूव । हीगपत्री। कवल-न० पद्म ।। कमल । पु० कुल्लि । ग्रास । कलि-पु० विभीतकवृक्ष ।। बहेडावृक्ष । कवाटवक्र-न० वृक्ष-विशेष । किवाडबेटु देशान्त. कलिका-स्त्री० अस्फाटतपुष्प ।। पुष्पकी कली । रीयभाषा। कलिकारक-पु. पूतिकरञ्ज ॥ दुगंववाली करञ्ज । कवार-न० पद्म ।। कमल । कलिकारी-स्त्री. उपविषभेद । कलिझारी । कविका-स्त्री० केविकापुष्प । कवयीमत्स्य । कलिङ्ग-न० इंद्रयव ।। इन्द्रजो । केवडा । कर्वईमच्छली । कलिङ्ग-पु० पूतिकरञ्ज । कुटजवृक्ष । शिशिषवृक्ष । प्लक्षवृक्ष ॥ दुर्गंधवाली करञ्ज । कुडावृक्ष । सिरस- कवेल-पु० कुवलय । उत्पल ।। कमोदनी कुमुदनी। कवाष्ण-न० ईषदुष्ण ।। थोडा गरम । का वृक्ष । पाखरवृक्ष । कशा-स्त्री. मांसरोहिणी ।। रोहिणी-मांसरोहिनी । कलिंगक-पु० इन्द्रथव ॥ इन्द्रजो । कशेरु-पु० न० पृष्ठास्थ ।। पाठके मध्यको हड्डी. कलिंगा-स्त्री० त्रिवृत् ।। निसात । का डंडा। कलिद्रुम-पु० विभातकवृक्ष ।। बहेढावृक्ष । कशेरु-न० स्वनामख्यात तृणकन्दविशेष ॥ कसेरु । कालिन्द-पु. कशेरुका-स्त्री० पृष्ठास्थि । कशेरु । पीटकी हड्डी. कलिफल-न." का दंडा । कशेरु । कलिमाल्य-पु० पूतिकरञ्ज ।। दुर्गंधकरञ्ज । कशेरू-स्त्री. कशेरुक || कशेरुकन्द । कलिवृक्ष-पु० विभीतकवृक्ष ॥ बहेडावृक्ष । कषाय-० न० रस-विशेष ।। कषायरस । कल्क-पु० न० विभतिकवक्ष । तुरुष्क । वृततैला- कषाय-त्रि० धववृक्ष || बोवृक्ष । विशेष । शिलापिष्टद्रव्य ॥ बहेडावृक्ष । शिलारस। कषाय-पु० श्योनाकवक्ष । सोनापाठा-अरलुटे । घी, तेलसे रहित । शिलाकी पिली ओषधि । कषायकृत-पु. रक्त लोन ॥ लाल लोधः। मजीठ । , (३०) आयुर्वेदीय- "MATA HIROENIELIANCHI कसेरु-पु. भाषा । कषाया-स्त्री० क्षुद्रदुरालभा || छोटा मासा । काकतुण्ड-पु. कालागुरु ॥ कालो अगर । कपायी-[न् ]-पु.शालवृक्ष । लकुचवृक्ष । खज़र- काकतुण्डिका-स्त्री० काकचिचा ।। चोटली । वृक्ष ॥ सालका वृक्ष । बडहरवृक्ष । खजूरका वृक्षा काकतुण्डी-स्त्री० वृक्षविशेष । राजरीति । काका. कषेरुका-त्री० पृष्ठास्थि ॥ पोटकी बीचकी हड्डी- दनी।। कौआठोडी । राजीतपीतल । काकादनी। का डंडा । काकनामा [ न् ]-पु० अगस्ल्यवृक्ष ॥ हथियावृक्ष । कसतोत्पाटन-पु० वासकवृक्ष !| अडूसा । काकनास-पु० विकण्टकवृक्ष || गर्जाफाल । . कशेरुक || कशेरुकन्द । काकनासा-स्त्री० काकजङ्घावृक्ष ।। मसी-काकजङ्घा। कसेरुका-स्त्री० पृष्ठास्थि ॥ पीठकी हड्डीका डंडा। काकनासिका-स्त्री० काकजङ्घावृक्ष । रक्तत्रिवृत् ।। करतीर-न० रन ॥राग। मसी । लाल निसोत । कस्तुरिका-स्त्री० कस्तूरी ! मृगमद, मुश्क फारसी- काकपर्णी-स्त्री० मुद्रपर्णी ।। मुगवन । काकपीलु-पु. काकतिन्दुक । काकंतुण्डी। कस्तूरिका-स्त्री. " श्वत गुञ्जा ॥ मकरतेंदुआ । कौआठोडी । कस्तूरी-स्त्रो० मृगनाभि ॥ कस्तूरी । सफेद घुघुची । कस्तूरीमल्लिका-स्त्री० मृगमद् वासा । कस्तूरीके काकपीलुक-पु० काकतिन्दुकवृक्ष । कुचिला । रहनेका स्थान । काकपुष्प-पु० प्रन्थिवर्ण ।। गठिवन । काकफल-पु० निम्बवृक्ष ।। नीमकावृक्ष । कल्हार-न० श्वेतोत्पल || कमोदनी । काकभाण्डी-त्री • महाकरञ्ज || बडीकरञ्ज । कक्ष-पु० बाहुमूल || कोख बगल । काकमई-पु. महाकाललता । महाकाललता इन्द्रा. कक्षरुहा-स्त्री० नागरमुस्ता ॥ नागरमोथा । यणभेद । कक्षोत्था-स्त्री० भद्रमुस्ता ॥ भद्रमोथा ! कक्ष्या-स्त्री. गुञ्जा ॥ घुघुची । काकमर्दक-पु० काकमाचि-स्त्री. काकमाची ।। मकोय केवैया । कांसीय-न० कांस्य || काँसी । कांस्य-न० काँस्य ॥ काँसी, काँसा । काकमाची-त्री काँस्यनील-पु० नीलतुत्थ || नीलाथोथा । काकमाता-स्त्री० काककंगु-स्त्री० चीनक ॥ चीनाधान। काकमुद्रा-स्त्री० मुद्रपर्णीवृक्ष ॥ मुगवन । काककला-स्त्री० काकजङ्घावृक्ष ॥ मंसी। काकयव-पुतण्डुलशून्य धान्य । चावलराहित धान- काकटनी-स्त्री० महाकरा !! बडी करञ्ज । भूसी इत्यादि । काकाञ्चा-स्त्री० गुञ्जा ।। धुंधुची। काकहा-स्त्री० वन्दावृक्ष । बाँदावृक्ष । काकचिञ्चि-स्त्री० काकलीद्राक्षा-स्त्री. निवीज द्राक्षा ॥ बीजरहित काकचिची-स्त्री० दाख अर्थात् किसमिस । काकवल्लरी-स्त्री. स्वर्णवल्ली ।। स्वर्णवाली। काकजंघा-स्त्री० स्वनामख्यात वृक्ष । गुञ्जा ॥ म. काकशीर्ष-पु० बकपुष्पवृक्ष ।। हथियावृक्ष । काकस्फूर्ज-पु. काकतिन्दुकवृक्ष ।। मकरतदा । काकजम्बु-काकजम्बू, स्त्री. भूमिजम्बू ॥ क्षुद्र • काका-स्त्री. काकनासालना । काकोलीवृक्ष । जम्बू ॥ भुईजामुनः। छोटी जामुन । काकजंघावृक्ष । रक्ति का । काकमाचीवृक्ष । काकण-न० कुष्ठविशेषः।। एक प्रकारका कोट । काकणन्तिका-त्री० गुञ्जा घुघुची । मलपुवृक्ष ।। कौआठोडी । काकोलीवृक्ष । मसी। काकतिका-स्त्री० गुञ्जा । काकजङ्घा ॥ध्रुघुची । धुंबुची-चिरमिटी । सकोय । काकोदुम्बरिका, कढम्बर । काकाङ्गा-स्त्री० काकाली | मसी । काकतिन्दुक-पु० वृक्ष-विशेष ॥ मकरतेंदुआ । काकाङ्गी-त्री० काकजंया । मसी । सी । घुघुची। ॥ मसी। M me- औषधिकोष। (३१) CALER Acim । लोन। कचलान । । काकाजालुक-पु० काव-न० काचलवण । सिक्यक ।। कचियानोन काकाची-स्त्री. कचलौन । मोम। काकाण्ड-पु० महानिम्ब । काकतिन्दु ॥ बकायन- काच-पु. मृत्तिका-विशेष । नेत्ररोग-विशेष। काँच । नीम । मकरतेंदुआ-कुचला । एक प्रकारको नेत्ररोग। काकाण्डा-त्री० कोलशिम्बी ॥ सुअरासेम । काचमल-न० काचलवण ।। कचियानोन । कच- काकाण्डी-स्त्री. महाज्योतिष्मती लता ॥ बड़ी माल. कांगुनी। काचलवण-न० लवण-विशेष ।। कचियानोन- काकाण्डोला-स्त्री. कोलशिम्बी ॥ सुअरासेम | कचलैन। काकादनी-त्री० काकतुण्डी । गुञ्जा । श्वेत । काचसम्भव-न० काचलवण ॥ कचियानोन । गुञ्जा । वृक्ष-विशेष ॥ कौआठोडी । बुशुची । सफेद धुंघुची । काकादनीवृक्ष । काचसौंवर्चल, न." काकायु-पु० स्वर्णवल्ली ।। स्वर्णवली । काचस्थाली-त्री पाटलवृक्ष पाडर । पाइल | काकिणी-काकिनी, स्त्री काकमाची । गुञ्जा ।। शाचिम-पु० देवकुलोद्भव वृक्ष ।। भञ्जरु । मकोय । धुंधुची । काञ्चन-न० स्वर्ण । पद्मकेशर । नागकेशर ॥ सोना कमलकेशर । काकेन्दु-पु० कुलकवृक्ष ।। कुचिला । काकेष्ट-पु. निम्बवृक्ष ।। नीमका वृक्ष । काञ्चन-पु० स्वनामख्यात पुष्पवृक्ष-विशेष । नाग- केशर । धुस्तूर । चम्मक । उदुम्बर | लाल का केक्षु-पु० काश । खण्ड । कोकिलाक्षवृक्ष ॥ काँश एक प्रकारको तृण । तालमखाना । कचनार, सफेद कचनार । नागकेशर धत्तुरा । चम्पावृक्ष । गूलर । काकोडुम्बर-पु. काकोदुम्बरिका ।। कमरे । काञ्चनक-न० हरिताल || हरताल । काकोडुम्बरिका-स्त्री० ॥ काञ्चनक-पु० कोविदारवृक्ष || लाल कचनार । काकोदुम्बरिका-स्त्री० काञ्चनकदली स्त्री सुवर्णकदली ॥ चम्प केला, काकोल-पु० न० कृष्णवर्णत्थावर-विषविशेष ॥ पीला केला। काकाल-पु. काकोली । काकोली । काञ्चनकारिणी-स्त्री० शतमूली ॥ शतावर । काकोली-स्त्री.अष्टवर्गान्तर्गत स्वनामख्यात औषधी।। काञ्चनपुष्पक, न० आहुल्यपुष्पवृक्ष॥ "तखट" काश्मीर देशकी भाषा। काकोल्यादिगण-पु. द्रव्यसमूह-विशेष ।। यथा काञ्चनपुष्पी-स्त्री० गणिकारी । मदनमादनी । "काकोली क्षीरकाकोली जीवकर्षभकस्तथा । काञ्चनमाक्षिक-न० वर्णमाक्षिक ।। सोनामाखी । ऋद्धि वृद्धिस्तथा मेदा महामेदा गुडचिका । मुद्ग- काञ्चनक्षीरी-स्त्री क्षीरिणीलता || काञ्चनक्षीरी । पर्णी माषपर्णी पद्मकं वंशलोचना । शृङ्गी प्रपौण्ड काञ्चनार-पु० कोविदारवृक्ष ॥ सफेद कचनार । रीकञ्च जीवन्ती मधुयष्टिका । द्राक्षा चेति गणो. काञ्चनाल-पु० नाम्ना काकोल्यादिरुदीरितः ।" काञ्चनाह्वय-पु० नागकेशरपुष्प ॥ नागकेशर । (काकोली, क्षीरकाकोली, जीवक,ऋषभक,ऋद्धि, काञ्चनी-स्त्रीहरिद्रा । स्वर्णक्षीरी । गोरोचना || वृद्धि, मेदा, महामेदा, गिलोय, मुगवन, मघवन, हल्दी। ऊँटकटीरा । गौलोचना । पद्माख, वंशलोचन,काकडाशिङ्गी,पुंडरिया, जीवन्ती, काञ्चनीया-स्त्री गोरोचना || गोलोचना । वा डोडी, मुलहठी, दाख । · यह काकोल्यादि काञ्चिक, न० काञ्जिक || कांजी । वर्ग है।) काञ्ची, स्त्री० गुञ्जा ।। धुंघुची चिरमिठी । त्तरी काङ्गा-स्त्री० वचा ।। वच । " %D काकोली । " " चौंटली।
(३२) आयुर्वेदीय- " काजिक-न० वारिपर्युपितानाम्लजल || काँजी । कादम्बर-न. कदयपुप्पोद्भव मध । दविस्तार । काजिकवटक-पु० वटक--विशेष || कांजि बड़ा । शाधु ।। कदमके फूलौकी मदिरा । दहीकी कालिका-त्री जीवन्तीलता । पलाशीलता । मलाई । एक प्रकारको ईखसे बनाई हुई मदिरा। काजी-स्त्री. महाद्रोणा । कालिक || वडी द्रोण- कादम्ब-पु० दधिसर ॥ दधिकी मलाई । कादम्बरी-स्त्री० मदिरा ॥ सुरा-दारु । शराब पुष्पी, बड़ा गूमा । काँजी। फारसी भाषा। काठिन्यफल-पु० कपित्थवृक्ष ॥ कैंथका वृक्ष । कदम्बरीवजि-न० सुराबीज || मदिरा बीज । गुड । काण्ड-न० सन्धिविच्छिनक खण्डास्थि । सन्धि कादम्बर्य-पु० कदम्बवृक्ष । कदमका वृक्ष ।। विच्छिन्न एकखण्ड अस्थि । कादम्बा-स्त्री० कदम्बपुष्पवृक्ष ॥ गोरखमुण्डीवृक्ष । काण्ड-पु० न० तरुस्कंध । तृणादिगुच्छ । जल || कानक-न० जयपालबाजि ।। जमालगोटेका बीज । वृक्षों का कन्धा । तिनकोंका गुच्छा । जल । कानकफल-न. जयपाल || जमालगोटा । काण्डकटुक-पु. कारवेल्ल ॥ करेला । काननहर-पु० शमीवृक्ष छोंकरवृक्ष । काण्ड काण्डक-पु. काशतृण || काँस । काननारि-पु० शमीवृक्ष ।। छौंकरवृक्ष । काण्डकार-पु० गुवाक ॥ सुपारी । कान्त-न० कुंकुम । लोहविशेष । केशर । कान्ति- काण्डकोलक-पु० लोध्र ॥ लोधे । कान्त-पु० हिजलवृक्ष ॥ समुद्रफल । काण्डगुण्ड-पु० गुण्डनामक तृण । काण्डनी-स्त्री० सूक्ष्मपर्णी लता॥ रामदती तुलसी । कान्तपुष्प-पु० कोविदारवृक्ष ॥ लाल कचनार । कान्तलक-पु० नन्दवृिक्ष ।। तुनका पेड । काण्डतिक्त-पु. भूनिम्ब ॥ चिरायता । कान्तलाह-पु० न० अयस्कान्त । लोहभेद । काण्डतिक्तक-पु० कान्ता-स्त्री० प्रियंगुवृक्ष । बृहदेला । रेणुका । नागर- काण्डनल-पु. लोध्र । लोध । मुस्ता ॥ फूलनियंगु । बडी इलायची । काण्डपुजा-स्त्री. शरपुंखा ॥ सरफोका । रेणुका । नागरमोथा । काण्डपुष्प-न० क्षुद्रसुगान्धपुष्प-विशेष ॥ दोनापुष्प कान्तावदोहद-पु० अशोकवृक्ष ॥ अशोकवृक्ष । काण्डरुहा-स्त्री० कटुका ॥ कुटकी । कान्ताचरणदोहद-पु०" काण्डहीन-न० भद्रमुस्तक ॥ भद्रमोथा । नागर-कान्तायस-न० अयस्कान्त । कान्तलोह । कान्तार-न० पद्म-विशेष ।। एक प्रकारके कमला काण्डिका-स्त्री० लङ्काधान्य । बालुकी ककटी ॥ ऊख । वास । लंकाधानं । वालुकी ककडी। कान्तार-पु० इक्षु विशेष । कोविदार । वंश ॥ काण्डिर-पु० अपामार्ग । लता-विशेष | चिर. काली ईख । लाल कचनार । बांस । चिटा। काण्डवेल । कान्तारक-पु. कृष्णेक्षु ।। काली ईख || काला कांडिरी-स्त्री० मञ्जिष्ठा ॥ सजीठ । गन्ना । काला पौडा । काण्डेरी-स्त्री० नागदन्तीवृक्ष । हाथीशुण्डवृक्ष । कान्तारी-स्त्री." कांडेरुहा-स्त्री० कटुका ॥ कुटकी । कान्तिद-न. पित्त ॥ पित्तरोग । कांडेक्षु-पु० कोकिलाक्षवृक्ष ॥ तालमखाना । कान्तिदा-स्त्री० सोमराजी ॥ बावची। कातर कातल-पु. कातलमत्स्य ॥ कातर मछली । कान्तीदायक-न० कालीकवृक्ष ।। कलम्वकवृक्ष । कातृण-न० रोहिषतृण ॥ गंधेज घास । कान्यजा-स्त्री० नलीनाम गन्धद्रव्य || नलिका । कादम्ब-पु०कलहंस । कदम्बवृक्ष ॥ करवा। कदमका कापाल-न० अष्टादशकुष्ठान्र्तगत वातज कुछ ।। कपालकोढ । मोथा । वृक्ष।
औषधिकोष। (३३) COM , लता । कबीला। सुनहरी काम्पिल्लक , स्त्री " । वावची। कापाल-पु० ककटा ! एक प्रकारका पेड । कामील-पु. रागगुवाक || रामसुपारी । कापाली-स्त्री० विडङ्गा ।। वायबिडङ्ग । कामुक-पु० अशोकवृक्ष । अतिमुक्तकलता । कापिश, कापिशायन-न० मद्य ।।मदिरा, दारु । चटक पंक्षी ॥ अशोकवृक्ष । माधवीलता । कापोत- न० सौवीराजन ।। सफेद शुमा । या पक्षी। कापोत--पु० सर्जिकाक्षार ।। सज्जीखार । कामुककान्ता-स्त्री. अतिमुक्तक लता ॥ मल्लिनी. कापोताजन-न. सौवीराञ्जन । स्रोतोञ्जन ।। सफेदशर्मा । काला शुम्मा। काम्पिल्लय-पु० गुण्डारोचनीनाम गन्धद्रव्य ।। काफल-पु. कटफल || कायफल । एक प्रकारका काम्पल-पु०" कामखगदला-स्त्री० स्वर्णकेतकी ॥ केतकी । पीली केतकी। काम्पील, काम्पीलक-पु. कामदूतिका-श्री. नागदन्तीवृक्ष ।। हस्ती गुण्डा काम्बुका-स्त्री० अश्वगन्धा ।। असगन्ध । काम्बोज, पु० सामवल्क । पुन्नागवृक्ष ॥ पपरिया- वृक्ष । कामदूती-स्त्री० पाटलावृक्ष ।। पाडर । पाढल । कत्था । नागकेशरका पेड। काम्बोजी-स्त्री० माषपर्णी । खदिरभेद । गुञ्जा । कामफल-पु. महाराजाम्रवृक्ष ।। मालदये आम. वाकुची ॥ मषवन । पपरिया कत्था । घुघुची । का वृक्ष । कामरूपिणी-स्त्री० अश्वगन्धा वृक्ष ॥ असगन्ध । कायस्था-श्री. हरीतकी । धात्रीवृक्ष । एलाद्वय । कामल, कामला-पु. स्त्री० रोग-विशेष ।। तुलसी । काकोली ॥ हर्ड । आमला वृक्ष । बडी कामला रागे। कामवती-स्त्री० दारुहरिद्रा ।। दारुहलदी । इलायची । गुजराती इलायची । तुलंसी। काकोली कामवल्लभ-पु. आम्रवृक्ष || आमका पेड । कामवृद्धि-पु० क्षुप-विशेष ॥ "कामज, कर्णाटे कारम्भा-स्त्री० प्रियंगु वृक्ष ॥ फूलप्रियंगु । कारवल्ली-स्त्री० कारवेल्ल ॥ करेला । प्रसिद्ध । कारवा-स्त्री. मधुरा । शतपुष्पा । मयूरशिखा । कामवृन्ता-स्त्री. पाटलावृक्ष ।। पाडर । पाढल । कृष्णजीरक । क्षेत्रयवानी । हिङ्गपत्री। क्षुद्रकार- कामवृक्ष-पु० बन्दाक ।। बांदा । बेल्ली ॥ सोया । सौंफ । मोराशखा। कालाजीरा कामशर-पु० आम्र ॥ आम । अजवायन । हङ्गिपत्री । छोटी करेली (ला)। कामाग-पु. आम्रवृक्ष । आमका वृक्ष । कारवल्ल-न० पु. कठिल्लक । करेला । कामान्धा-स्त्री० कस्तूरी ॥ कस्तुरी । मुश्क फारसी कारवेल्लक-पु. कारवेल्ली-स्त्री० क्षुद्रकारवल्ल ॥ करेली । कामायुध-पु० महाराजचूत ॥ मालदये आम । कामारि-पु० विट्माक्षिकधातु ॥ विट्माखी धातु । कारमिहिका-स्त्री० कर्पूर ॥ कपूर । कामालु-पु० रक्तकाञ्चन वृक्ष ॥ लाल कचनारका | कारलक-पु. कृष्णतुलसी ॥ काली तुलसी । काकरकर-पु० वृक्ष-विशेष ॥ कुचिला। कामिनी-स्त्री० दारुहरिद्रा । वन्दा । मदिरा ॥ कारी-स्त्री०वृक्ष-विशेष ।। आकर्षकारी। दारुहलदी । वाँदा । दारु । कारुज-पु. नागकेशर । गैरिक ॥ नागकेशर गेरू । कामिनीश-पु० शोभाञ्जनवृक्ष ॥ जिनेका वृक्ष । कारुणा-स्त्री० पुनर्नवा ॥ विषखपरा । कामी [ न् ] पु० ऋषभौषधी । चक्रवाक । पारा- कार्तस्वर-न० स्वर्ण । धुस्तूर ।। सोना । धत्तूरा । वत । चटक । सारस ॥ ऋषभ औषधी । चक- कार्पट- कार्पट-पु० जतु ।। लाख। वा । कबूतर । चिडा पक्षी। गैरेया। सारसपक्षी कासिका-त्रो० कापासी ।। कपास । औषधी। " भाषा । वृक्ष।
(३४) आयुर्वेदीय- SEASESSISTAR चन्दन । कापीसी-स्त्री० वृक्ष-विशेष ॥ कपास । कालमेषिका-स्त्री० कालमेषिका || मजीट । काला निसोत । कार्मुक-पु. वंश । श्वेत खदिर । हिज्जल । महा. निम्ब ।। बांस । पपरिया कत्था । समुद्रफल | कालमषी-स्त्री०" वक्रायन नाभ। कालमेषिका-त्री० मञ्जिष्ठा । कृष्णात्रिवृता ॥ मजीठ । श्यामपनिलर । काऱ्यां-स्त्री कारवृिक्ष । कण्टकारी वङ्गभाषा । कार्य-पु० शालवृश्च । कर्चुर । लकुच ॥ सालका कालमेषी-स्त्री० सोमराजी । इयामालता। मञ्जिष्ठा । वृक्ष । कचर। बडहर । त्रिवृत् ॥ वायची । करिआवा साऊँ। मजीट । निसोत । काइमरी-स्त्री. गाम्भारी वृक्ष ।। कम्भारी-खुमरं । कुम्मेर वृक्ष । काललवण-न० विडलवण || विरिया संचरनान । काललौह-पु० कालायंस ॥ इस्पात । एक प्रकारका काणी-त्री० शतावरी ।। शतावर । कार्य-पु० शालवृक्ष ।। सालवृक्ष । लोहा। कार-न० लेह । कालायक । कक्कोलक ॥ लोहा । कालवन्त-पु० कुलत्थवृक्ष ॥ कुल्थी । कलम्बक । शीतलचीनी कालवृन्ती-स्त्री० पाटलावृक्ष || पाडरवृक्ष । कालशाक-न० शाकविशेष ॥ नाडीकाशाक । काल-पु. कासमई । रक्तचित्रक । राल ।। कसौंदी। लालचीता । राल । कालशालि-पु. कृष्णशालि || काले धान । कालक-ज० कालशाक । यकृत् ।। नाडीका शाक। कालशेय-न० तक ॥ छाछ । महा । कालसार-न० पातचन्दन ॥ कलम्बक, पीला यकृत् रोग। कालक-पु. जतुक ।। जडुर-देहका तिल । कालसार-पुरु स्वनामख्यात हरिण ॥ कालमार कालकुष्ठ-न० कंकुष्ठ ।। मुरदासंग। कालकूट-न० विषं । कृष्णसर्पविष । का-विष विशेष ।। बोल। कालसेय-ज० तक । छाछ । घोल । कालकूट-पु. स्थावर विवभेद ।। कालकूट विष । कालस्कन्ध-पु० जीवकद्रुम । दुध्वदिर । उदुम्बर कालकूटक-पु. कारस्कर वृक्ष ॥ कुचिला । तमालवृक्ष । तिन्दुकवृक्ष ।। जीवकवृक्ष । दुगंध- कालखखन कालखण्ड-ज० यकृत् ॥ यकृत् कले- खैर । गूलर । स्यामतमाल । तेंदुवक्ष । जके नीचे बाई कोख । कालक्षत--पु. कासमई ॥ कसोंदी वृक्ष । कालङ्कत-गु० कासमई ।। कसौंदीवृक्ष । काला-स्त्री० नीलिनी । कृष्णत्रिवृता । मजिठा । कु. कालताल-पु० तमाल वृक्ष ।। श्यामतमाल । लिकवृक्ष । अश्वगन्धा । पाटला वृक्ष । नीलका कालनिर्यास-पु० गुग्गुलु ।। गूगल | काला निसोत । मजीठ । काकादनवृिक्षाअसगन्ध कालपर्ण-पु० तगरवृक्ष ।। तारका पेड । कालागुरु-पु० कृष्णागर ।। काली अगर । कालपालक-न० कंकुष्ठ मृत्तिका ।। मुरदासंग । कालाजनी-स्त्री० नीलाञ्जनी ॥ काली कपास । कालपीलुक-पु० कुपीलुं । मकरतेंदुआ । कालानुशारिवा-स्त्री० तगरपादिक । शीतली जटा। कालपेषी-स्त्री. श्यामलता । पाटलावृक्ष ।। काली- तगर । शीतली लता । सर । पाडरवृक्ष । कालानुसारक-न० तगर । पात चन्दन । पीला कालभाण्डिका-स्त्री० मजिष्ठा ॥ मजीठ । चन्दन । कालमान-पु० कृष्णार्जक ॥ काली बनतुलसी । कालानुसारि-पु० शैलेय नामक गन्धद्रव्य ॥ भूरि- कालमुष्कक-पु० घण्टापाटलिवृक्ष ॥ कठपाडर । कालमूल-पु. रक्तचित्रक वृक्ष । लालचीतेका वृक्ष । कालानुसारिका-स्त्री० तगरपादिका || तगर । हरिण । छरीला ।
औषधिकोष। (३५) केशर । सार गन्धक। कालानुसार्य-नशैलेय । कालीयक । शिशपावृक्षा काशाल्माल-स्त्री० कूटशाल्मलि ॥ काला सेमर । तगर ॥ पस्थरका फूल । कलम्बक । सीसोका काशशि-न० उपधातु-विशेष ॥ कीस ! वृक्ष । तगर। काश्मरी-स्त्री० गम्भारी || कामारी । कालानुसायंक-न० शैलय ।। पत्थरका फूल | काश्मर्य-पु० न." कालायस-न. लौह ॥ लोहा । काश्मीर-न. पुष्करमूल | कुंकुम । पुहकरमूल । कालिक-न० कृष्णचन्दन || काला चन्दन काली अगर । काश्मीरज-न० कुकुम । पुष्करमूल । कुष्ठ ।। कालिङ्ग-न० फल-विशेष ॥ तरबूज । केशर । पुहकरमूल । कूठ। कालिङ्ग-पु० भूमिककारु । कूटज ॥ विलायती काश्मीरजन्म [न् ] न० कुंकुम || केशर । कुम्हड़ा । कुछ। काश्मीरसम्भवगन्धक-पु० गत्वक-विशेष!।अमला. कालिङ्गिका-श्री० त्रिवृत ॥ निसोत । कालिङ्गी--स्त्री. राजकर्कटी ।। चीना ककडी । काश्मीरा-स्त्री. अतिविषा । कपिलद्राक्षा ॥ अतीस कालिन्दक-न० कालिङ्ग ।। तरबूज | अंगूरी किमिस। कालिन्दी-स्त्री० रक्तत्रिवृत् ॥ लालनिसोत । काश्मीरी-स्त्री० गम्भारी ।। खुमेर । कुम्भेरका पेड। काली-स्त्री० कालाजनी । तुवरी । त्रिवृत् । अनि काश्वरी-स्त्री. " शिखाभेद । वृश्चिकाली || काली कपास । गोपी काष्ठक-न० अगुरु ।। अगर । चन्दन । निसोत । कलिहारीभेद । वृश्चिकाली । काष्ठकदली-स्त्री० वनकदली ।। काठकेला । कालीय-न. कृष्णचन्दन ।। काला चन्दन । काष्टजम्बु-स्त्री० भूमिजम्बु ॥ भुईंजामुन । कालीयक-न० कालीय नामक पीतवर्ण सुगन्धिकाष्ट । काष्ठदारु-पु० देवकाष्ठ ॥ देवदारु । कृष्णागुरु । कृष्णचन्दन । दारुहरिद्रा ॥ कल-काष्ठधात्रीफल-न० आमलक || कठआमला । म्बक । पीला चन्दन । कालो अगर । काल-काष्ठपाटला-स्त्री० सितपाटलिका ।। कठपाडर । चन्दन । दारुहलदी। काष्ठवल्लिका-त्री० कटुका ।। कुटकी । कालीयक-पु० दारुहरिद्रा ॥ दारुहलदो । काष्ठशारिवा-स्त्री० शारिवा ॥ सरिवन । कालायलता-स्त्री० लता-विशेष ॥ काष्ठा-स्त्री० दारुहरिद्रा ।। दारुहलदी। कालेय-न० कालीयक नामक पीतवर्ण सुगन्धिकाष्ठ। काष्ठील-पु. राजार्क । सफेद आक । यकृत् ॥ पीला चन्दन । यकृत्-कलेजेसे बाई काष्ठीला-स्त्री. कदलोवृक्ष ॥ केलाका वृक्ष । ओरकी कोख । कास-पु. रोगविशेष | कासतृण । शोभाञ्जनवृक्ष । कालेयक-न० कालीयक || कलम्बक | काँसी । खाँसी । कांश । सैजिनेका वृक्ष । कालेयक-पु० दारहरिद्रा ॥ दारुहलदी। कासकन्द-पु० कासालु ।। कोंकणे प्रसिद्ध आलु । काल्प-पु० हरिद्रा-विशेष ।। एक प्रकारको हलदी। कासनी-स्त्री० कण्टकारी ।। कटेरी। काल्पक-पु० कासजित्-स्त्री० भाङ्गीं ॥ वम्हनोट । कावार-न० शैवाल ॥ शिवार । कासनाशिनी-स्त्री० कर्कटसृङ्गी ॥ काकडाशिङ्गी । कावेर-न० कुंकुम ।। केशर । कासमई-पु० क्षुद्रबृक्ष-विशेष ।। पटोल ॥ कसौंदी। कावेरी-स्त्री० हरिद्रा ॥ हलदी । परवल। काश-पु० न० तृण-विशेष । कॉस । कासमर्दन-पु० पटोल । परवल । कासारि-पु० कासमर्द ॥ कसोंदीवृक्ष । काशमई-पु. कासमवृक्ष ॥ कसोंदीवृक्ष । कासालु-पु० आलु-विशेष | कोंकणे प्रसिद्ध आलु काशा-स्त्री० काशतृण ॥ कांस । काससि-न० काशीश ॥ कसीस । ॥ काशक-पु."
(३६) आयुर्वेदीय- FORIPM HANNELSEANILA किकि-पु० कासीसत्रितय-न० धातुकासीस, पुष्पकासीस, का- किरिटि-न० हिन्ताल || हिन्तालका फल । सीस ॥ धातुकसस, पुष्पकसीस, कसीस । किमीर-पु० नागरगवृक्ष ।। नारङ्गीका वृक्ष । काहलापुष्प-पु.धुस्तूर ।। धतूरा । किम्मरित्वक् [च् ] स्त्री " काही- स्त्री० कुटजवृक्ष । कुडावृक्ष । किलाट-पु० क्षीरविकृति ॥ खोहा, मावा । काक्षी-स्त्री० तुतारका । सौराष्मृत्तिका ॥ अडहर । किलाटी[]-पु० बंश ।। वास । गोपीचन्दन । किलास-न० रोग--विशेष ।। सहुवा रोग । काक्षीव-पु. शोभाञ्जनवृक्ष ।। सैजिनेका वृक्ष । किलासन-पु० वृक्ष-विशेष ।। कर्कोटक, ककोड़ा । काक्षीवक--पु. किलिम-न० देवदारु ।। देवदारु । किंशुक-पु० पलाशवृक्ष ।। नन्दीवृक्ष । ढाकवृक्ष । किशल-पु० न० पल्लव ।। पत्ते । तुनवृक्ष। किशलय-पु० न०" किंशुलुक-पु० पल शवृक्ष-विशेष ॥ हस्तिकणं- किशोर-पु० तैलपर्णी औषधी। किष्कुपा- न् ] पु० इक्षु । वेणु । पोटगल ।। पासवृक्ष । नारिकेल ।। नारियल। ईख । वास । नरसल । किङ्किणी-स्त्री० विकङ्कतवृक्ष ।। कण्टाई, विकंकत । किसल, किसलय-पु० न० पल्लव ॥ पत्ते । किङ्किरात--पु.अशोकवृक्ष । रक्तझिण्टी । पुष्पवृक्ष- कीचक-पु० वंश-विशेष । नल ॥ छिद्रयुक्त बाँस, विशेष ।।अशोकवृक्ष । लाल कटसरैया । कोङ्करात नरसला पुष्पवृक्ष यह भी कटसरैयाका ही भेद है। कीटन्न-पु० गन्धक ॥ गन्धक । किङ्किराल-पु० बरवृक्ष ।। बबूरका पेड़ । कीटजा-स्त्री० लाक्षा । मज्जफल || लाख | माजू. किकिरी [न् ]-पु० विङ्कितवृक्ष ।। कण्टाई । किञ्चन--पु० पलाशवृक्ष-विशष ।। हस्तिकर्णपलास । कीटपादिका-स्त्री० हंसपदवृिक्ष । लाल रङ्गका किञ्चिलक, किचुलुक-पु० महीलता ।। केचुवा । लज्जालु । किजल्क-न० नागकेशरपुष्प ।। नागकेशर । कीटमाता-स्त्री." किज्वल्क-पु. केशर, पद्मकेशर ।। केशर । कम• कटिमारी-स्त्री० कीटहारी-[ ] पु० न० विडङ्ग। वायविडङ्ग । किट्ट-न० मण्डूर । लोहेका मैल । कीडेर-पु० तण्डुलीयशाक || चौलाईका शाक । किणि-स्त्रा० अपामार्ग। चिराचरा । कीरक-पु. वृक्षभेद ॥ किणिहि-स्त्री." कीरवर्णक-न० स्थौनेयक नामक सुगन्धिद्रव्य ।। किण्व-पु० न० मदिरावीज ।। मुराबीज । गुड़ । थुनेर । कितव-पु० धुस्तूर ।। चोरनामक गन्धद्रव्य । कीरेष्ट-पु० आम्रवृक्ष । आखोटवृक्ष । जलमधूक- धत्तरा । भटर । वृक्ष ॥ आमका वृक्ष । अखरोटका वृक्ष । जल किम्पाक-पु० महाकाललता ।। महाकाल । महुआवृक्ष । किम्भरा-स्त्री० नलीगन्धद्रव्य ।। नलिका । कालसंस्पर्श-पु० वृक्ष-विशेष । किरात-पु० भूनिम्ब ।। चिरायत्ता । कीलाल-न० जल । अमृत । मधु । रक्त ॥ पानी। किरातक-पु." अ त । सहत । रुधिर । किराततिक्त-पु०" कांशपर्ण, पु० अपामार्ग ॥ चिराचिरा । किरातादिगण-पु० "किराततिक्तको मुस्तं गुडूची कीशपर्णी, स्त्री० विश्वभेषजम्" चिरायता, मोथा, गिलोय, सोंठ। कुकभ-न० मद्य ॥ मदिरा । किरातिनी-स्त्री. जटामांसी ।। कनुचर, बालछड़। कुकाञ्चन-न० पित्तल ॥ पतिल । लकेदार। .
औषधिकोष। (३७) PERTENSE ॥ ॥ कुकुट-पु० सितावर ॥ शिरिआरीशाक । कुञ्जरालुक-ज० आलुकविशेष ॥ हस्तिआलु । कुकुन्दर-न. नितम्बस्थकूपकद्वय ॥ पृष्ठवंशादधो. कुजराशन-पु० अश्वत्थवृक्ष ॥ पीपलवृक्ष । गतद्वय । कुजल-न० काजिक || काञ्जी। कुकुन्दर-पु० कुक्कुरद्रुम ॥ करौंदा, कुकरवंदा । कुजवल्लरी-स्त्री. निकुञ्चाम्लवृक्ष ।। कुकूटि-पु. शाल्मलिवृक्ष || सेमरका वृक्ष । कुञ्जिका-स्त्री० कृष्णजीरक । निकुञ्चिकाम्लवृक्ष ।। कुकूणक-पु० कुतूणक बालरोग || कुकूणक बाल. कुटच-पु० कुटजवृक्ष | कुडावृक्ष । कमेत्ररोग । कुदज-पु० स्वनामख्यातवृक्ष ।। कुडा। कुकोल-न० कोलिवृक्ष ॥ वेरीवृक्ष । कुटजफल-न० इन्द्रयव ।। इन्द्रजौ । कुक्कुट-पु० स्त्री० पाक्षि-विशेष ॥ मुरगा। कुटन्नट-न० कैवती मुस्तक । कशेरू ॥ केवटीमोथा। कशेरू । कुक्कुटमस्तक-न. चव्य ॥ चव्य । कुक्कुटशिख-पु० कुसुम्भवृक्ष । कसूमका वृक्ष । कुटन्नट-पु० श्योनाकवृक्ष ।। अरलचक्ष । कुक्कुटपुट-ज० औषधपाकार्थ पुटपाक-विशेष ।। कुटरुणा-स्त्री० त्रिवृता ॥ निसोत । कुक्कुटपुट । कुटिल-न० तगरपुष्प । तगरके फूल । कुक्कुटी-स्त्री० शालसलीवृक्ष । सेमरका वृक्ष । कुटिला-त्री० स्पृक्कानामक गन्धद्रव्य ॥ असवरग। कुक्कुर-न० प्रन्थिपर्ण ॥ गठिवन । कुटी-स्त्री० मुरानामक गन्धद्रव्य ।। कपूरकचरी, एकाङ्गी। कुक्कुरद्रु-पु० वृक्ष-विशेष ॥ कुकरौंदा । कुंकुस-न० स्वनामख्यात गन्धद्रव्य । केशर- कुट्टिम-पु० न० दाडिमवृक्ष ॥ अनारका वृक्ष । कुठिक-पु० कुष्ठ ॥ कूठ । हिन्दी । जाफरान पारसी भाषा । कुठेर-पु० तुलसी । वर्वरी ॥ तुलसी । वनतुलसी । कुङ्गनी-स्त्री० महाज्योतिष्मते ।। बडी मालकाङ्गनी । कुठेरक-पु० नन्दीवृक्ष । तुलसी, । वर्वरी ॥ तुन- कुच-पु० स्तन ॥ स्तन । वृक्ष । तुलसी । सफेदवनतुलसी । कुचाण्डका-स्त्री० मूर्खालता । चुरनहार । कुठरेज-पु० श्वेततुलसी ॥ सफेद तुलती । कुचन्दन-न० रक्तचन्दन । पतङ्ग । कुंकुम ।। कुडप-पु० कुडवपरिमाण ॥ ३२ तोलेका । हाल चन्दन । पतङ्गकी लकड़ी। कशर । कुडव : पु० द्विप्रमृत परिमाण ।। ३२ तोलेका । कुचफल-पु० दाडिमवृक्ष || अनारका वृक्ष । कुडहुश्ची-स्त्री० क्षुद्रकारवेल्ली ॥ करेली । कुचाङ्गेरी-स्त्री० चुक्रिका ॥ चकाशाक । कुणजर-पु० शाक-विशेष | बनबथुआ । कुचेला-स्त्री० कुपीलु । विद्धकर्णी॥ कुचिला । पाठ। कुणप-पु० शव । त्रि० पूतिगन्ध ॥ मृतदेह । कुचेली-स्त्री० अम्बष्ठा ॥ पाठ । दुर्गध । कुच्छ-न० कुमुद ॥ कमोदनी । कुणि-पु० तुन्नवृक्ष । नदीवृक्ष ॥ तुनका वृक्ष । कुञ्चन-न० नेत्ररोग-विशव । वेलिया पीपल । कुञ्चफला-स्त्री० कूष्माण्डी । कुमडा । कुण्डगोलक - न० काञ्जिक || काँजी । कुञ्चका-स्त्री० गुञ्जा । कृष्णजीरक । मेथिका । कुण्डलिनी-स्त्री० गुडूची । मिष्टान्न-विशेष ।। वंशशाखा ।। घुघुची । काला जीरा । मेथी। गिलाय । जलेबी । - वंशकी शाखै, कंधी। कुण्डली-स्त्री० मिष्टान्न-विशेष । गुडूची। काञ्च- कुञ्चित-न० तगरपुष्प ॥ तगरके फूल । नक पुष्पवृश्च । कपिकच्छु । सर्पिणावृक्ष।। जलेबी- कुजरापिप्पली-स्त्री० गजपिाली ॥ गजपीरल ! मिठाई । गिलोय । कचनारपुष्पवृक्ष । किंवाँच । कुञ्जरक्षारमूल-न० मूलक ॥ मूला । सर्पिणावृक्ष । कुञ्जरा-स्त्री० धातकी । पाटलावृक्ष ।। धायके फूल। कुतप-पु० न० कुशतृण ॥ कुशा घास । पाडरवृक्ष। कुतूणक-पु० बालनत्ररोग-विशेष ॥ कणक । .
(३८) आयुर्वेदीय- E रोग। कमोदनी । कपूर । कुतृण-न• कुम्भी ॥ जलकुम्भी । कुब्जकण्टक-पु० श्वत खदिर ।। पपरिया कत्था, कुत्सला-स्त्री० नीलोवृक्ष || नीलका वृक्ष । सफेद खैर । कुत्सित-न० कुष्ठ ।। कूठ । कुमार-पु० वरुणवृक्ष । बरनावृक्ष। कुथ-पु० कुशतृण || कुशा। कुमारक-पु०" कुद्दाल-पु० कोविदारवृक्ष । वृक्ष-विशेष । कोद्रव || कुमारजीव-पु० पुत्रजीववृक्ष ।। जियापिता, जिया- कचनारवृक्ष । बोहरीका वृक्ष सकि । कोदोधान पोता, पिताजिया । कुद्रव-पु० कोद्रव ।। काँदो। कुमारिका-स्त्री० नवमल्लिका । बृहदेला । घृता कुनख-पु० क्षुद्ररोग-विशेष ॥ एक प्रकारका नख. कुमारी ।। नेवारी । बड़ी इलायची । घोकुआर । कुमारी-स्त्री० नवमल्लिका । घृतकुमारी । अपरा. कुध्यानिनी-त्री० मुदर्शना ॥ मुदर्शन । जिता । वन्ध्याकोटको । स्थूलला । मोदिनी- कुनट-पु० श्योनाकप्रभेद । सोनापाठा । पुष्प । तरुणीपुष्प । नेवारी । घीकुआर, कोय- कुनटी-श्री. मनःशिला । धान्याक ॥ मनाशल । ललता । बाँझखखसा; बाँझककोडा । बडो धनियां। इलायची। मलिकाभेद । सेवती । कुनली [ ] पु० अगास्तियावृक्ष ॥ हथियावृक्ष । कुमुत् [दू-न० चन्द्रकान्त । रक्तोत्पल।। कमो- कुनाशक-पु. ० यवास || जवासा । दनी । लालकमल । कुन्त-पु. गवेधुका ॥ गरहेडुआ । कुन्तल-पु० केश । वालक । यव ।। बाल । सुगंध. कुमुद-न० श्वेतोत्पल । रक्तपद्म । रूप्य ।। कमो. वाला । जो। दनी । लाल कमल | चाँदी । कुन्तलवर्द्धन-पु. भृङ्गराजवृक्ष ।। भङ्गरावृक्ष । कुमुद-पु. श्वेतोत्पल । कपूर ।। सफेद कमल । कुन्तलोशीर-न० होबेर । सुगन्धवाला । कुन्ती-स्त्री० गुग्गुलवृक्ष ॥ गूगलका वृक्ष । कुमुदवान्धव-पु० कपूर ।। कपूर । कुन्द-पु० न० स्वनामख्यात पुष्पवृक्ष-विशेष । कुमुदा-त्री० धातको वृक्ष । कुम्भिका । कटकट कुन्दवृक्ष । वृक्षः। गम्भारीवृक्ष । शालपर्णी ।। धायके फूल । कुन्द-पु० कुन्दुरुनामक गन्धद्रव्य । करवीरवृक्ष ।। जलकुम्भी । कायफल । कम्भारी । नुमेर । शरि . कुन्दुरू-लोवान फार्सी । कनेरका वृक्ष । वन । कुन्दक-पु० कुन्दुक । कुन्दुरू-लोबान फार्सी । कुमुदिका-स्त्री० कट्फलवृश्च ।। कायफर (ल)बृक्ष । कुन्दर-पु० तृण-विशेष ।। कुन्दरतृण । कुम्भ-न० गुग्गुल । त्रिवृत् ।। गूगल । निसोत । कुन्दु-स्त्री० कुन्दुरुनामक गन्धद्रव्य ।। कुन्दुरू । कुम्भ-पु० द्रोणद्वय परिमाण ।। ६४ सेर । कुन्दुर-पु०" कुम्भकारिका-स्त्री० कुलस्था । वनकुल्थी । कुम्भाकारी-स्त्री० ० मनःशिला । कुलस्थिका ·। कुल. कुन्दुरुक-पु० त्थाञ्जन || मनशिल । कुल्थी । एक प्रकारकी कुन्दुरुकी-स्त्री० शल्लकोवृक्ष ।। शालईवृक्ष । नेत्रमें लगानेकी औषधी। कुपीलु-पु० कारस्करवृक्ष ।तिन्दुक-विशेष।।कुचला । कुम्भतुम्बी-स्त्री० अलाबुभेद ।। गोलतोम्बी । मकरतेंदुआ । कुम्भयोनि-पु० द्रोणयोनिपुष्पवृक्ष ।। गूमा, गोमा- कुप्य-न सुवर्णरजतभिन्नधातु ।। सोना चांदीसे अन्य वृक्ष। धातु-ताँबा-जस्त । कुम्भला--स्त्री० मुण्डतिका ।। गोरखमुण्डी । कुब्ज-त्रि०वायुनोन्नतहृदय ।। कुबड़ा, कूजा । कुम्भबीजक-पु० रीठा करा ॥ रीठा करन । कुब्ज-पु० अपामार्ग ।। चिरचिरा । कुम्भाण्ड-पु० कूष्माण्ड ॥ कुम्हडा । पेठा । कुब्जक-पु० पुष्पवृक्ष-विशेष ।। कूजावृक्ष । कुम्भाडी-स्त्री० कूष्माण्डी । कुम्हड़ा । कुन्दुरु-पु० स्त्री . स्त्री" .
औषधिकोष । (३९) कुम्भिका-स्त्री० वारिपर्णी । पाटलावृक्ष ! द्रोण. कुरुबिल्वक-पु. वनकुलस्थिका ।। वनकुल्थी । पुष्पी । नेत्ररोग-विशेष ।। जलकुम्भी पांडरक्षा कुरुप्य-न० रङ्ग ।। राङ्ग । गूमा, गोमावृक्ष । कुम्भिका ।नेत्ररोग । कुर्णज-पु० कुलञ्जनवृक्ष । कुलञ्जनवृक्ष । कुम्भिनीबीज-न० जयपाल ॥ जगालगोटा । कुपर-पु. कफोन ।। कोनी । कुम्भिवाकी-स्त्री० कटफलवृक्ष ॥ कायफरवृक्ष । कुलक-न० पटोललता ।। परवेलकी वेल । कुम्भी [न् ]-पु० गुग्गुलु ॥ गूगल । कुलक-पु० काकतिन्दुक । मरुबकपुष्पवृक्ष । कुपाल। कुम्भी-स्त्री० पाटलावृक्ष । वारिपर्णी । कट्फल वृक्ष. पटोल । तिलपुष्प || कुचिला । मरुआ वृक्ष । दन्तीवृक्ष । वृक्ष--विशेष ॥ पाडरका वृक्ष । मकरतेंदुआ । परवल । तिलपुष्प । जलकुम्भी । कायफर । दन्तीवृक्ष । कुम्भी कों- कुलकर्कटी-सी. चीनाकर्कटी ।।चीनाककडी चित्र- कणे प्रसिद्ध । कटे प्रसिद्ध । कुम्भीक-ए० पुन्नागवृक्ष । कुम्भिको ।।पुन्नाग वृक्ष। नागकेशरका वृक्ष । जलकुम्भी । कुलज-पु०कुलञ्जनवृक्ष । कुम्भाबीज-न० जयपाल || जमालगोटा । कुल जन-पु० स्वनामख्यात वृक्षविशेष ।। कुलञ्जन । कुरका-स्त्रीशल्लकीवृक्ष ॥ शालईवृक्ष । कुल्टी-त्री० मनःशिला ।। मनशिल । कुरङ्गनाभि-पु० कस्तूरी ॥ कस्तूरी । कुलत्थ-पु० सस्यभेद ।। कुल्थी । कुरंभिका-स्त्री० मुद्गपर्णी ।। मुगवन । कुलत्था-स्त्री० वनकुलत्थ ।। वनकुलथी । कुरण्टक-पु० पीताम्लानवृक्ष । पीली कटसरैया । कुलस्थिका-स्त्री० '• कुलथाकाराञ्जन प्रस्तर-विशेष ।। कुरण्ड-पु० मुष्कवृद्धिरोग । साकुण्डवृक्ष । अण्ड. कुल्ल्याञ्जन नीली शुआ। कोषवृद्धिरोग । सकुण्डर गुजरातदेशकी भाषा । कुलपत्र-पु० दमनकवृक्ष ।। दवनावृक्ष । कुरण्डक-पु० कुरण्टकवृक्ष ॥ पाली कटसरैया । कुलपालक-न० कुरुम्ब ।। मीठा नीबू । कुरराव-पु. देवसर्घष । निर्जरसों । कुलवर्णा-स्त्री० रक्तात्रवृत् ।। लाल निसोत । कुरव-पु० श्वेतमन्दार । रक्तझिण्टी ॥ पीतझिण्टी। कुलसौरभ-न० मरुबकवृश्च ।। मरुआवृक्ष । सफेद मन्दार । लालकटसरैया 1 पीली कटसरैया । कुलक्षया-स्त्री० शुकशिम्बी ॥ कौंछ । कुरबक-पु० रक्तझिण्टी ॥ लाल कटसरैया। कुलाशक-पु० दुरालभा ।। धमासा । कुरसा-स्त्री० गोजिह्वालता ।। गोभी। कुलाहक-पु. रक्तकोकिलाक्षवृक्ष ।। लाल तालम- कुरी-स्त्री० तृणधान्यभेद । खाना। कुरु-पु. कण्टकारिका ॥ कटेरी । कुलाहल-पु० क्षुद्रवृक्ष-विशेष । कुरुकन्दक-न० मूलक । मूली । कुलि-स्त्री० कण्टकारी ।। कटेरी। कुरुट-पु० सितावरशाक ॥ शिरिआरीशाक। कुलिक-पु० काकादनीवृक्ष । कोकिलाक्षवृक्ष ।। कुरुण्ट-पु० पातझिण्टी ।। पाली कटसरैया । काकादनी । तालमखाना । कुरुण्टक-पु०" कुलिङ्गाक्षी-स्त्री० पेटिकावृक्ष ।। पिटारी । कुरुम्ब-न० कुलपालक ।। मीठा नीबू । कुलिङ्गी-स्त्री० कर्कटशृङ्गी ।। काकडाशिंगी । कुरुम्बा-स्त्री. द्रोणपुष्पी । गमा, गोमा । कुलिश-न० अस्थिसंहार ।। हडशंकरी । कुरुम्बिका-स्त्री." कुलिशक-पु० मधुकवृक्ष ।। मौआवृक्ष । कुरुम्बी-स्त्री० सैंहलीवृक्ष ॥ सिंहलीपीपल । कुली-स्त्री० कण्टकारी । बृहती ॥ कटेरी ।कटाई । कुरुषक-पु० रक्तझिण्टी । पीतझिण्टी ॥ लाल कट- कुलीनक-पु० वनमुद्ग ॥ वनमूग, मोट सैरया। पीली कटसरैया। कुलीरशुङ्गी-स्त्री० कर्कटशृङ्गी ॥ काकडाशिङ्गी । कुरुविन्द-न० काचलवण ॥ कचियानोन । कुलीश-पु० न० ० न० कुलिश ।। हाडसंघारी । कुरुविन्द-पु० मुस्तक । मात्र ।। मोथा । उडद । कुल्माष-न० काञ्जिक कॉजी । ।
(४०) आयुर्वेदीय- . कुष्माण्डी-त्री" कुल्माष-पु० यावक । वारेव धान्य । कुल्थ । वन- कुष्टगन्धि-न० एलवालुक ॥एलुआ । कुल्थ । राजमा । अर्द्धस्विन्नगोधूम चणकादि।। कुष्ठर-पु० औषध-विशेष || हितावली । यायू-वोरधान । कुल्थी। बन कुल्थी । लोबिया । कुष्ठन्नी-स्त्री० काकोदुम्बरिका || कठूमर । घुघुनी। कुष्ठनाशनी-स्त्री० सोमराजी ।। वायची। कुल्माषाभियुत-न० काजिक ।। काँजी । कुष्ठसूदन-पु० आरग्वध ॥ अमलतास । कुल्या-त्री० जोवान्तकौषधी । स्थलवार्ताकू ॥ कुष्ठहन्ता-स्त्री० हास्तिकन्द ॥ हास्ते कन्द । जविान्तक औषधी । बडे वेगन ! कुष्ठन्त्री-स्त्री० वाकुची ॥ वायची । कुव-न० उत्पल । जलजपुष्पमात्र। कुमुद जलपुष्ता कुष्ठहृत्-पु० खदिरवृक्ष। खरका वृक्ष । कुवकालुका-श्री. घोलीशाक ॥ घोशाक । कुछारि पु० आदित्यपत्र । खदिर । गन्धक । विट कुरङ्ग-न० सीसक ।। सीसा । बदिर । पटोल ॥ अर्कपत्र । वर । गन्धक । कुवनक-न० वैक्रान्त ॥ वैक्रान्तमणि । दुगंधखर । पलवल । कुबल-न० उत्पल । बदरफिल | मुक्ताफल ।।कुमुद्। कुष्माण्ड-पु० स्त्री० स्वनामख्यात बृहत् लताफल- बेर । माती। विशेष ।। कुम्हडा, कोहडा, पेठा-हिन्दी । कुवलय-न० उत्पल । नीलोत्पल || कमोदनी । कुमड वङ्गभाषा । पानीकखारू उडे भाषा । नीलकमल-नीलकुमुद । पदकोला गुर्जरभाषा । कुवली-स्त्री. कोलिवृक्ष ॥ वेरीका वृक्ष । कुष्मांडक-पु." कुवृत्तिकृत्-पु० पूतिकरञ्ज ।। दुधवाली करञ्ज । कुबेर, कुबेरक-पु० नन्दीवृक्ष ।। तुनवृक्ष । कुसिम्बी, श्री. शिम्यी || सेम ! कुबेराक्षी-त्री०पाटलावृक्ष । लताकरञ्ज । श्वेत पाट. लिकावृक्ष ॥ पाडरवृश। लताकरञ्ज । सफेद (कठ) कुसुम-न० पुष्प । फल । स्त्रीरज ॥ फूल । फल । स्त्रीकार ज अर्थात् मासिक धर्म । पाडरवृक्ष । कुवेल-न. -न० कुवलय ।। कमोदनी, नीलकमोदनी । कुसुममध्य-न० उम्लफल वृक्ष-विशेष । कुश-न० पु० स्वनामख्यात तण ।। कुशा । कुसुमरस-पु० मधु ।। सहत । कुशपुष्प-न० ग्रन्थिपर्ण ।। गठिर्वन । कुसुमांजन-न० कुसुमाकार पित्तल सम्भूत अञ्जन ॥ कुशली-स्त्री०.अश्मन्तकवृक्ष । क्षुद्राम्लिका ॥ आबु- उष्णीकये पीतलसे जो मल निकलता है उससे टा इति देशान्तरीय भाषा आवती । बनाया हुआ सुर्मा । कुशा-स्त्री. मधुकर्कटिका ।। चकोतरा नीबू । कुसुमात्मक-न० कुंकुम ।। केशर । कुशाल्माल-पु० रोहितकवृक्ष ।। रोहेडावृक्ष । कुसुमाधिप-पु० चम्पकवृक्ष ।। चम्पावृक्ष । कुशिंशपा-स्त्री० कपिलशिंशपा ।। कपिल ( भूरे) कुसुमाधिराट् [ज]--पु.' रङ्गका सीसका वृक्ष । कुसुमासव-न० मधु ।। सहत । कुशिक-पु० सर्जवृक्ष । विभीतकवृक्षाअश्वकर्णवृक्ष कुसुम्भ-न० स्वर्ण । कुसुम्भपुष्प ।। सोना । कसू. सालवृक्ष । बहेडावृक्ष । सालभेद । मके ल जिसके रंगसे वस्त्र रङ्गा जाता है । कुशोद-न० रक्तचन्दन । लालचन्दन । कुसुम्भ-पु० महारजनवृक्ष ।। कसूमका वृक्ष । कुशेशय -न० पद्म ॥ कमल । कुसू-पु० किञ्चुलुक ।। केंचुवा । कुशेशय-पु. कर्णिकारवृक्ष ।। कनवृक्ष । कुस्तुम्बरी-स्त्री० धान्याक ।। धनिया । कुष्ठ-न० स्वनामख्यात रोग । औषध-विशेष विष- कुन्तुम्बरु-न." कोढ li विषभेद कुहलि-पु० पूगपुष्पिका ।। पान । कुष्ठकेतु-पु० भूम्याहुल्य ।। भुञ्जितखड देशान्त- कुहा-स्त्री० कटुका ।। कुटकी । क्रूच-पु० स्तन ॥ थन-त्रा स्त्रीके स्तन । भेद। ।। कुछ रीय भाषा ।
औषधिकोष। (४१) ओषधि । विडंग । कूटक-पु० मुरा ।। एकाङ्गी, कपूर कचरी । कृतिच्छत्रा-स्त्री० वृक्ष-विशेष । कूटज-पु० कुटजवृक्ष ॥ कुडावृक्ष । कृतरादनी-स्त्री० घोषकलता ॥ तोरईभेद । कूटपालक-पु. पित्तज्वर ॥ पित्तज्वर । कृत्रिम-न० विड्लवण । काचलवण । जवादि । कूट शाल्मलि-पु. शाल्मलि-विशेष || कालासेमर । रसाञ्जन ॥ बिरिया संचरनोन । कचियानोन । कूटस्थ-न० व्याघ्रनख नामक गधद्रव्य ।। नख । जवादिगन्धद्रव्य। रसोत । कूदाल-पु० कुदालवृक्ष ।। लाल कचनार वृक्ष । कृत्रिम-पु. सिलक || शिला रस । कूर्च, कूर्चक-न. मलापकर्षणार्थ केशादिमुष्टि । कृत्रिमक-पु०॥ कूच-पु० न० भ्रद्वयमध्यवर्ती स्थान ।३मश्रु । अंगु. कृमि--पु० क्रिमि । लाक्षा । कीडा । लाख । छतर्जनीस्थान । कृमिकण्टक-न० विडङ्ग । उदुम्बर । वायविडंग । कूर्चशिरः[स् ]-न • अनिस्कन्ध। पांवकी गांठ ॥ गूलर । घुटना। कृमिकोष-पु० न० फल-विशेष ॥ माजूफल । कूर्चशीर्ष-पु० अष्टवान्तर्गत जावकवृक्ष ।। जविक ऋमित्र-पु० विङग । पलाण्डु । कोलकन्द। पारिभद्र। भल्लातक ॥ वायविडङ्ग । प्याज | कोलकन्द । कूर्चशेखर-पु० नारिकेलवृक्ष । नारियलवृक्ष । फरहद । भिलावां। कूर्चिका-स्त्री० क्षीरविकृति ।। फटादूध । कृमिन्ना-स्त्री. हरिद्रा || हलदी। कूप-न० भ्रूद्वयमध्यस्थल ।। भौंहके बीच का स्थान । कमिन्नी-स्त्री- धूम्रपत्रा । विडंग ॥ तमाखु। बाय- कूर्म-पु० कच्छप ।। कछुआ। कूर्मपृष्ठ-पु० अम्लानवृक्ष ।। अम्लान, बाणपुष । कमिज-न० अगुरु ।। अगर | कूष्मांड-पु. कूष्माण्ड || पेठा । कृमिजग्ध-न० " कृकर-पु० चव्यक । करवीरवृक्ष ।। चव्य । कनेर । कृमिजा-स्त्री० लाक्षा । मजफल ॥ लाख । माजू कृकला-स्त्री० पिप्पली ।। पीपल । कृकाटिक'-स्त्री० ग्रीवापश्चद्भाग ॥ गरदनके कृमिरिपु-पु० विडंग ।। वायविडंग ! पोछेका भाग । कृमिवृक्ष-पु० कोषाम्र ॥ कोशम । कृच्छ्-न० मूत्रकृच्छ्ररोग ।। सुजाकरोग, इसमें मूत्र कमिशंख-पु० जीवशङ्ख ॥ जीव सहित शंख । चिनकसे आता है। कृमिशत्रु-पु० विडंग ॥ वायविडंग । कृच्छारि-पु० विल्यान्तरवृक्ष ।। बेलन्तर, वरवेल । कमिशक्ति-स्त्री० जलशुक्ति || सीप । कृतक-न० वड्लवण । यष्टिमधु । बिरिया संचर कमीलक-पु. वनमुद्र ॥ मोठ । नोन । मुलहठी । कृशरा-स्त्री० तिलौदन । द्विदलमिश्रितान्न | तिलो- कृतीच्छद्रां-स्त्री० कोषांत कोलता । तोरई । णी। खिचडी। कृतत्रा-स्त्री० त्रायमाणा लता ।। त्रायमान । कृशशंख-पु० पर्पट ॥ पित्तपापडा । कृतफल-न० ककोल ॥ शीतलचीनी । कृशाङ्गी-त्री प्रियंगु वृक्ष ॥ फूलप्रियंगु । कृतफला-स्त्री० कोलशिम्बी ।। सुआरासैम । कृशानु-पु० चित्रक वृक्ष ॥ चीतावृक्ष । कृतमाल-पु. आरग्वधवृक्ष । कर्णिकार वृक्ष ॥ अम• कृशिका-स्त्री० आखुकर्णी लता ॥ मसानी । तास । अमलतासभेद । कृषीवल-पु. काकजंघावृक्ष ॥ मसी । कृतवधेक-पु० घोषातकी ॥ घिया तोरई । कृष्ण-न० मरिच । लौह । कृष्णागुरु । सौवर्चल) कृतवेधना-स्त्री० कोषातकी ॥ तोरई । कृष्णजीरक। नीलाञ्जन ॥ काली मिरच । लोहा। कृताञ्जलि-पु० लजालुवृक्ष । लजावन्ती । काली अगर । काला नोन । कालाजीरा। शुमा । कृतान्ता-स्त्री० रेणुका ॥ रेणुका । कृष्ण-पु० करमईक । पिप्पली ॥ करौंदा । पीपल (४२) आयुर्वेदीय- कलोजी । कृष्णकंद-न. रत्तोत्पल || लाल कमोदनी । कृष्णमुद्ग-पु० कृष्णवर्ण मुद्ग ।। कालीमूंग । कृष्णकलि,कृष्णकेलि-श्री. स्वनामख्यात पुष्पवृक्ष- कृष्णमूली-स्त्री० शारिवा-विशेष ।। करिआवासाऊ । विशेष | सन्ध्यामाणि कुत्रचित भाषा । कृष्णमृत्-[ ]न० कृष्णमृत्तिका ।। काली मिट्टी । कृष्णकाष्ठ-न० कृष्णागुरु ॥ काली अगर । कृष्णरुहा-स्त्री० जतुकालता ।। पद्मावती । कृष्णगन्धा-स्त्री० शोभाञ्जन || सैजिनका वृक्ष । कृष्णालक-पु० गुञ्जा ।। धुंधुची । कृष्णगर्भ-पु० कटफल ॥ कायफल । कृष्णलवण-न० सौवर्चललवण ।। काला नोन । कृष्णचञ्चुक-पु० चणक ॥ चने । कृष्गला-त्री० गुंजा । शिशपावृक्ष ।। रत्ती । सीसों- कृष्णचूडा-स्त्री० स्वनामख्यात सकण्टक पुष्पवृक्ष । का वृक्ष । कृष्णवडिका-स्त्री० • गुञ्जा ॥ धुंधुची । कृष्णलौह-न० अयस्कान्त ।। अयस्कान्त लोहा । कृष्णचूर्ण-न० लौहमल ॥ लोहका मैल । कृष्णवमा [ ], पु० चित्रकवृक्ष । चीतावृक्ष । कृष्णजटा-स्त्री. जटामांसी ।। बालछड़ । कृष्णवल्ली-स्त्री. कृष्णार्जक । सरिवा-विशेष ।। कृष्णजीरक-पु० जीरक-विशेष ॥ काला जीरा. काली वनतुलसी । श्यामलता ।। कालीसर । कृष्णवल्लिका-स्त्री. जतुकालता-पर्पटी । कृष्णवर्वरक-पु० वर्वरकवृक्ष ।। काली वनतुलसी । कृष्णतण्डुला-स्त्री० कर्णस्फोटा लता | कानफोडावले । कृष्णबीज-न० कालिङ्ग ।। तरबूज | कृष्णताम्र-न. चन्दन-विशेष ॥ गोशीर्षचन्दन । कृष्णत्रिवृता-स्त्री कृष्णवर्ण निवृत् ।। काला निसोत कृष्णबीज-पु०रक्तशिवृक्ष ।। लाल सैंजनेका वृक्ष । कृष्णवृन्ता-स्त्री० पाटलावृक्ष । माषपर्णी ॥ पाडर. श्याम पनिलर । वृक्ष | मघवन । कृष्णदन्ता-स्त्री० काश्मरी वृक्ष ।। गम्भारि । कृष्णवृन्तिका-स्त्री० गम्भारीवृक्ष । पेटिकावृक्ष. कम्भारी । कुम्भेर । माषपर्णी ॥ कुम्मेर, खमेर । पिटारीवृक्ष । कृष्णधुस्तूरक-पु० कृष्णवर्ण धुस्तूर ।। काला धत्तरा । मषवन । कृष्णपर्णी-स्त्री. कृष्णतुलसी || श्यामतुलसी । कृष्णशालि-पु० धान्य-विशेष ॥ काले धान । कृष्णपाक-पु० करमई ।। करोंदा । कृष्णशालि-पु० शोभाञ्जनवृक्ष । सैजिनेका वृक्ष । कृष्णपाकफल-पु. कृष्णशिम्बिका-स्त्री. कृष्णशिम्बी ॥ काली सेम । कृष्णपाकला-स्त्री. प्राचीन आमलक || पानी. कृष्णशैरिक-पु. सहाचर ॥ कटसरैय ॥ आमला। कृष्णसखी-स्त्री० जीरक || जीरा । कृष्णपिण्डीतक-पु. वृक्ष-विशेष ।। मैनफलभेद । कृष्णसर्वप-पु. राजसप ॥ राई । कृष्णपिण्डरि-पु० कृष्णपिण्डीतक वृक्ष ।। मैनफल. कृष्णसार--पु० स्नुहीवृक्ष । शिशपावृक्ष । खदिर- वृक्ष । मृग-विशेष । सेहुण्डवृक्ष । सीमोंका वृक्षा कृष्णपुष्प-पु० कृष्णधुस्तूरक ।। काला धतूरा । कृष्णसारमृग-हिरन । कृष्णपुष्पी-स्त्री. प्रियंगुवृक्ष ।। फूलप्रियंगु । कृष्णस्कन्ध-पु० तमालवृक्ष || श्याम तमाल | कृष्णप्रतिफला-स्त्री० सोमराजी ।। बायची ।। कृष्णा-स्त्री० नीलीवृक्ष । पिप्पली । सोमराजी । कृष्णफल-पु. करमहक ।। करोंदा । कृष्णजीरक । पर्पटी । द्राक्षा । नीलपुनर्नवा । कृष्णफलपाक पु." गम्भारी । कटुका । सारिवा-विशेष । राजसर्षप। कृष्णफला-स्त्री.सोमराजी । हस्व जम्बु ।। बायची। काकोली ॥ नीलका वृक्ष । पीपल । बायची । कालाजीरा। पद्मावती ।दाख (नीली, सोंठ । क- कृष्णभूमिजा- स्त्री० गोमूत्रिकतृण ।। गोमूत्रकतृण । म्भारी । कुटकी । श्यामलता, कालीसर । राई । कृष्णभेदा-स्त्री. 1. ० कटुका ।। कुटकी । कृष्णभेदा-स्त्री." कृष्णागुरु-पु० कृष्णअगुरु ॥ काली अगर । भेद। छोटी जाति की जामुन । काकोली।
औषधिकोष । (४३) कृष्णाजनी-स्त्री० कालाञ्जनीवृक्ष । काली कपास । केशर---पु० नागकेशरवृक्ष ॥ बकुलवृक्ष । पुन्नाग- कृष्णाभा-स्त्री" वृक्ष । हिङ्गवृक्ष । नागकेशर । मौलासरीवृक्ष । कृष्णामिष-न० कृष्णायस - काला लोहा । पुन्नागवृक्ष । हिङ्गका वृक्ष । कृष्णायस-न० कृष्णवर्ण लौह ॥ काला लोहा । केशरखन-पु० भृङ्गराजवृक्ष ॥ भङ्गराः कृष्णार्जक-पु० कृष्णवर्ण तुलसी । काली तुलसी । केशराज-पु. भृङ्गराज ॥ भङ्गर । कृष्णालु-पु० नीलालु ॥ नील आलू। केशराम्ल-पु० मातुलुङ्गकवृक्ष ॥ बिजोरानींबू । कृष्णवास-पु० अश्वत्थवृक्ष ॥ पीपलका वृक्ष । केशरी-[न् ] पु० पुन्नागवृक्ष । नागकेशरवृक्ष । कृष्णिका-स्त्री. राजिका ॥ राई । बीजपूरक वृक्ष ॥ पुन्नागवृक्ष । नागकेशरवृक्ष । कृष्णेक्षु पु० कृष्णवर्ण इक्षु ॥ काली ईख । बिजोरानीबू । कृष्णोदुम्बरिका-स्त्री० काकोदुम्बरिका ।। कटूमर । कशरुहा-स्त्रो० भद्रदन्तिका ।। भद्रदन्ती । क्लुप्तधूप-पु० सिह्नक ॥ शिलारस । केशरूपा-स्त्री. वन्दाकवृक्ष ॥ वादावृक्ष । केचुक-न० नाडीशाक || नाडीका शाक । केशव-पु० पुन्नागवृक्ष । पुन्नागवृक्ष । केतक-पु. केतकीवृक्ष ॥ केतकवृिक्ष । केशबर्द्धिनी-स्त्री० सहदेवीलता ॥ सहदेवी । केतकी-स्त्री० स्वनामख्यात पुष्पवृक्ष । खजूरी ॥ केशवायुध-पु० आम्रवृक्ष ॥ आमवृक्ष । केतकीवृक्ष । खजूर । केशवालय-पु० अश्वत्थवृक्ष । पपिलका वृक्ष । केतिसा-स्त्री० कम्पिल्लक || कबीला औषधी ! केशवावास-पु० कचेर-पु० वृक्षविशेष । केशहन्त्री-स्त्री. शमवृक्ष ॥ छोंकरावृक्ष । | केदारकटुका-स्त्री० कटुका || कुटकी । केशारुहा-स्त्री० सहदेवी ॥ सहदेवी । केदारज-न० पद्मक ॥ पद्माख । केशाहा-स्त्री० महानलिी । बडानीलवृक्ष । | केन्दु-पु० तिन्दुकवृक्ष ॥ तेंदुवृक्ष । केशिका-स्त्री. शतावरी ॥ शतावर । केन्दुक-पु. केशिनी-स्त्री. जटामांसी | चोरपुष्पी ॥ बालछड । केमुक-पु. स्वनामख्यातवृक्ष ।। केमुआ । चोरहूली । केलिक-पु० अशोकवृक्ष || अशे कवृक्ष । केशी-स्त्री० भूतकेशीवृक्ष | अज़लोमावृक्ष । नीली । केलीवृक्ष-पु० माचिका ॥ भूतकेशवृक्ष । अजलोमावृक्ष। नीलका कलिवृक्ष-पु० कदम्ब-विशेष ॥ कदमभेद । वृक्ष । मोइयावृक्ष । केवलद्रव्य-न० मरिच ॥ मिरच । केश्य-न० कृष्णागुरु । पु० भृङ्गराज। काली अगर । केविका-स्त्री० पुष्प-विशेष ॥ केवडा । भाङ्गरा केबुक-न. केमुक ॥ केउँआवृक्ष । केसर-न. हिंगु । नागकेशरपुष्पवृक्ष । स्वर्ण । | केश-पु० हीवेर ॥ सुगन्धवाला । नेत्रवाला । कासीस ॥ हिङ्ग। नागकेशर । सोना। कसीस । केशकार-पु० इक्षुभेद ॥ एक प्रकारको ईख । केसर-पु० नागकेशरवृक्ष । बकुलवृक्ष । किचल्क । केशट-पु. शोणकवृक्ष । अरलु । पुन्नागवृक्ष || नागकेशर । मौलसिरीवृक्ष । फूलका केशनाम], न० वालक ।। नेत्रवाला । जीरा । पुन्नागवृक्ष । नागकेशर । केशपर्णी-स्त्री० अपामार्ग ॥ चिरचिटा। केसर-पु० न० किंजल्क || फूलकी कशर वाजीरा। केशमयनी-स्त्री० शमीवृक्ष ॥ छोकरवृक्ष । केसर-पु० स्त्री० हिंगु.॥ हींग । केशमुषि-पु० विषमुष्टिवृक्ष । महानिम्ब ॥ डोडी। केसरवर-न० कुंकुम ॥ केशर | बकायनीम। केसराम्ल-पु० बीजपूर ॥ बिजोरा नींबू । केशर-पु० न० किञ्जल्क ॥ पुष्पकी केशर चा जीरा। केसरिका-स्त्री० सहदेवीलता ॥ सहदेई । " ॥ SILPrataane (४४) आयुर्वेदीय- Augu केदार-पु. दकमल। • . केसरी-[सू]-पु. नागकेशर । रक्तशिग्रु । पुन्नाग- कोकिलेष्टा-स्त्री०. मज्जाजम्बू ॥ बडी जामुन, राज- वृक्ष -]] नागकेशर । लाल सैजिनेका वृक्ष । जामुन । पुन्नागक्ष। कोकिलेक्षु-पु०कृष्णेक्षु ॥ काला गन्ना । कोकिलोत्सव-पु. आम्रवृक्ष । आमका वृक्ष । कैटज-पु. कुटजवृक्ष । कुडावृक्ष । कैटयं-पु. क फल । निम्ब' । महानिम्ब ! मदन: कोटि-स्त्री० स्पृका ॥ असबरग । कोटिवर्षा-स्त्री." वृक्ष ॥ कायफल । नीम ! बकायन नीम । मैन- कोटि-स्त्री." फलवृक्ष । कोटीवर्षा-स्त्री. कैटlपार्थत-पु० महानिम्ब ॥ वकायन । नीम । कोठ-पु. चक्राकार कुष्टरोग । कैडर्य-पु० काट्फल | पूतिकरञ्ज । कटवृक्ष । कायफल । दुर्गंधवाली खैर । कटभवृिक्ष । कोठर-पु० अंकोटवृक्ष । ढेरावृक्ष । कोठरपुष्पो-त्री • वृद्धदारक || विधारावृक्ष । कैतक-न० केतका पुष्प ॥ केतकी । कोथ-पु नेत्ररोग ।। एक प्रकारका नेत्ररोग । कैदर्य-पु० महानिः:च ॥ बक्रायननीम | कोद्रव-पु० स्वनामख्यात तणधान्य ॥ कोदोधान । शालिघान्य ॥ शालिवान । कोयनक-पु. चोरक ।। भटेउर । कैरव-न० कुमुद । श्वेतोत्पल || कुमोदनी। सफे. कोयलता-श्री० कर्णरफोटालता ॥ कनफोडावल । कोमलक-न० मृणाल || कमलकी डंडी। कैरवी-स्त्री० मेथिका ॥ मेथी। कोमला-स्त्री. क्षीरिकावृक्ष ॥ खिरनी । कैराटक-पु० स्थावरविषभेद । अफीम, कनेर । कोरक-पु० न० कक्कोलक । मृणाल । चोरकः । सखिया, इत्यादि। शीतलचीनी । भसीडा। भटेउर । कैरात-न० भूनिम्ब ! शम्बरचन्दन ॥ चिरायता। कोरङ्गी-स्त्री० सूक्ष्मैला । पिप्पली ॥ छोटीइलायची शम्बरचन्दन। पीपल । कैराल-न० विडङ्ग || वायविडङ्ग । कोरदूष-यु० कोरद्रव ॥ कादोधान । कैराली-स्त्री० विडङ्ग || वायविडङ्ग । बिडङ्ग । कोल--पु० तोलकपरिमाण || एक तोला । कैवत्तमुस्त-न० कैवर्तमुस्तक ॥ केवटी मोथा । कोल-पु० न० वदरीफल । तोलकपरिमाण । मरिच कैबर्तमुस्तक-न० कैवर्तिमुस्तक ॥ केवटी मोथा । कक्कोलक । चव्य ॥ वेर । एक तोला । मिरच कैवत्तिका-स्त्री० मालवे प्रसिद्ध लताविशेष ॥ शीतलचीनी । चन्य। कैवत्तीलता। कोलक-नककोलक । मरिच ॥ शीतलचीनी । कैवत्तिमुस्तक, कैवर्तीमुस्तक-न० मुस्ता प्रभेद ॥ केवटी मोथा ॥ कोलक-पु० अंकोटवृक्ष बहुवारवृक्ष ॥ देरावृक्ष । कैतल-न० विडङ्ग ॥ वायविडङ्ग । लिसोडावृक्ष। कोक-पु. खजूरवृक्ष ॥ खजूरका कोलकन्द-पु० महाकन्द-विशेष ।। सूकरकन्द । कोकनद-न० रक्तकुमुद । रक्तपद्म ॥ लालक्रमाद कोलकर्कटिका-स्त्री. मधुखरिका ॥ मठिी वा नी। लाल कमल । मधुखजूर । कोकाग्र-पु० समष्ठीलवृक्ष ॥ कोकुआवृक्ष । कोलदल-न० नखानाम । गन्धद्रव्य ॥ नखी । कोकिलनयन-पु० कोकिलाक्षवृक्ष ॥ तालमखाना । कोलनासिका-स्त्री० वकिणीवृक्ष । कोकिलावास-पु० आम्रवृक्ष || आमका पेड । कोलमूल-न० पिप्पलीमूल ॥ पपिलामूल । कोकिलाक्ष-पु०स्वनामल्यात वृक्ष ॥ तालमखाना । कालवल्ली-स्त्री. गजपिपली । चविका ॥ गजपी- कोकिलाक्षक-पु. पला चव्य.। मिरच। ।
औषधिकोष । (४५) जूफल । कोलशिम्बी-स्त्री० लता-विशेष ॥ सुअरोसम । क्रकचच्छद-पु. केतकीवृक्ष ।। केतकीवृक्ष । कोला, स्त्री कोलिवृक्ष.। पिप्पली । चव्य ॥ बेरीका. कचपत्र-पु० शाकवृक्ष । वृक्ष । पीपल । चव्य । ककचा-स्त्री. केतकी । कोल-पु० स्त्री. कोलवृक्ष ।। वेरीका वृक्ष । क्रकर---पु० करीरवृक्ष ॥ करीलका पेड़ । कोली-स्त्री क्रथनक-न० श्वेतअगुरु ॥ सफेद अगर । कोल्या-स्त्री. पिप्पली ।। पीपल । क्रमपूरक-पु. अगस्तियावृक्ष ॥ हथियावृक्ष । कोविदार-पु० स्वनामख्यातवृक्ष ।। लाल कचनार । क्रमिकण्टक-नः विडंग । उदुम्बरवृक्ष । वायवि. कचनारवृक्ष । डंग । गूलरवृक्ष । कोशकार-पु. इक्षु ।। ईख । क्रमिन्नान० विडंग ॥ यायविडंग । कोशफल--न० कक्कोलक ।। ककोल, शीतलचीनी। क्रमिज-न० अगरु । अगर । कोशफला-स्त्री. महाकोशातकी । त्रपुषी ।। नेनु- क्रामजा-स्त्री० लाक्षा । मज्जफल ॥ लाख । मा. आतोरई। खीरा । कोशातकी-स्त्री. घोषालता । ज्यातस्निका ॥ क्रमिशत्र-पु० विडंग ॥ वायभृङ्ग । विडंग । झिमनीलता, गलका तोरई । तोरई । क्रम-पु० गुवाकवृक्ष ॥ सुपारीका वृक्ष । कोषाम्र-न० फलविशेष ।। कोशम । क्रमुक-पु० गुवाकवृक्ष । ब्रह्मदारुवृक्ष । भद्रमुस्तक । कापासिकाफल । पहिकालोध्र ।। सुपारीका वृक्ष । कोषी-[न् ] पु० आम्रवृक्ष ।। आमकावृक्ष । कोष्ठ-पु० आमाशय, अन्यायय, पक्काशय, मूत्राशय, सहतूतका वृक्ष । भद्रमोथा। कपासका फल पठा- नीलोध । रक्ताधार,हृदय, उण्डुक, फुप्फुस । काहेल-पु० मद्य-विशेष ।। मदिराभेद । क्रमुकफल-न० गुवाक || सुपारी । कौचिला-स्त्री० मर्कटतन्दु ।। कुचिला । क्रमको-स्त्री० गुवाकवृक्ष ॥ सुपारीका वृक्ष । कौट-पु० कुटजवृक्ष ।। कुडावृक्ष । क्रान्ता-स्त्री० बृहत्ती ॥ कटाई, बरहंटा । कौटज-पु." क्रिमि-पु० कोट । रोगविशेष।। कीडा ।.क्रिमिरोग। कौटिल्य-न० चाणक्यमूल !। छोटी मूलो । क्रिमिकण्टक-न विडंग । उदुम्बर || वायविडंग । कौद्रविक-न. सौवर्चललवण ।। कालानोन । कौन्ती-स्त्री. रेणुका || रेणुकागन्धद्रव्य । क्रिमिन--पु० विडंग । पलाण्डु । कोलकन्द।। बाय- कौन्तेय -पु० अर्जुनवृक्ष । कोहवृक्ष । विइंग । प्याज । सकरकन्द । कौमारी-स्त्री. वाराहकिन्द ।। वाराहीगेंठी । क्रिमिझी-स्त्री. सोमराजी । बायची। कौलीरा-स्त्री० कर्कटशृङ्गी ।। काकडाशिङ्गी । किमिज-न० अगरु || अगर । कौवल-न० कुचल । कोलिफल ।। कमोदनी । क्रिमिजा-स्त्री० लाक्षा । मज्जफल । लाख । माजू. फल । क्रिमिरिपु-पु० विडंग ॥ वायभंग । विडंग । कौशिक-पु० गुग्गुलु । अश्वकर्णवृक्षं !। गूगल । क्रिमिशत्रु-पु० रक्तपुष्पक ।। फरहद । शालभेद। क्रिमिशात्रव-पु० विट्खदिर ॥ दुर्गंधवाली खैर । कौशिकफल-पु० नारिकेलवृक्षः ॥ नारियलवृक्ष । क्रिया-स्त्री० चिकित्सा || ओषधि । कौशिक्योज-पु० शाखोटवृक्ष ॥ सिहोरावृक्ष । . क्रूर-पु० भूताङ्कुशवृक्ष । रक्तकरवीरवृक्ष॥ भूतराज कौसुम-न० कुसुमाञ्जन ।। एक प्रकारका अञ्जन । केचित् भाषा । लाल कनेर । कौमुम्भ-पु० अरण्यकुसुम्भ ॥ वनकसम । क्रूरका (न्)-पु० कुटुम्बिनीवृक्ष॥अर्कपुष्पी--सूर- क्रकच० पु-न० प्रन्थिलवृक्ष ।।. विकङ्कतवृक्ष । जमुखी । . - गूलर। बेर। कौबेर-न० कुछ ।। कूट (४६) आयुर्वेदीय- भद । क्रूरगन्ध -पु० गन्धक ॥ गन्धक । खगशत्रु-पु० पृश्निपर्णी ।। पिठवन । क्रूरगन्धा- स्त्री०कन्थारीवृक्ष । कन्यारीवृक्ष । खगगड-पु० तृण-विशेष । क्रूरधूत्त-पु० कृष्ण धुस्तूरक ।। काला धत्तुरा । खजप-न० घृत ॥ घो। क्रूरा-स्त्रो० रक्तपुनर्नवा ॥ सोंठ, गदहपूर्ना । खजल-न० नीहार । आकाशवारि । क्रोड-पु. वाराहीकन्द । वाराही वा गेंठी । खनकारि-पु० सुस्ना ॥ खिसारी । क्रोडचूडा-स्त्री० महाश्रावणिका||बडी गोरखमुण्डी खट-पु. कत्तण ॥ गन्धेजघास । कोडपर्णी-स्त्री० कटकारिका || कटेहरी । खटिका-स्त्री० खडी ॥ खडियामाटी । क्रोडी-स्त्री. वाराहीकन्द || गेंठी । खटिनी-स्त्री० खटी ॥ खाडियामाटी। कोडेष्टा-स्त्री. मुस्ता ॥ मोथा । खटी-स्त्री." क्रोधमूच्छित-पु. चारनामक गन्धद्रव्य ॥ भटेउर खट्टास-पु० वनजन्तु ॥ वनमार्जार । नेपालदेशकी भाषा । खटास, पु० क्रोष्टुकपुच्छिका-स्त्री० पृश्निपर्णी ॥ पिठवन । खङ-न० लघुतृण । क्रोधूसरपुच्छिका-स्त्री० वृश्चिकाली ॥ बिछवा खडिका-त्री० काठिनी || सेलवरी खडी-त्री० खटी। सेलखरी वा खडियामाटी । क्रोष्टुपुच्छिका-स्त्री० पृश्निपर्णी ।। पिठवन । खड्ग-न० लौह ॥ लोहा । क्रोष्टुपुच्छी-स्त्री खड्ग-पु. चोरनामक गन्धद्रव्य ॥ भटेउर । कोष्टुफल-पु० इंगुदीवृक्ष ॥ गोंदिनीवृक्ष । क्रोष्टुविन्ना-त्री० पृश्निपर्णी ॥ पिठचन ।। खड्ग-पु० बृहत्काश ॥ बड़े कांश । खङ्गपत्र-खङ्गीमार--पु० खङ्गकोष ।। खगलता । क्रोष्टेषु-पु० श्वेतेक्षु ॥ सफेद ईख । धौल । क्रोष्टी-स्त्री० शुक्ल विदारी ॥ कृष्ण विदारी ।। सफेद खण्ड-न० विडलवण । इक्षु विशेष ॥ बिरियास- अरनोन । खाँड । विदारी । काली विदारी । क्रौञ्चादन-न० मृणाल । पिप्पली । चिञ्चोटेक ॥ खण्ड-पु० इक्षुविकार || खाँड । कमलकन्द । पीपल | चिञ्चोटकतृण । खण्डक-पु० सिताखण्ड॥ मधुरचीनी श्वेतचीनी । क्रौञ्चादनी-स्त्री० पद्मबीज ।। कमलगट्टा । खण्डकर्ण-पु. आल-विशेष ॥ शकरकन्द (न्दी) क्लोतक-न० याष्टिमधु ।। मुलेठी, जेठमिधु । आलु। क्लीतकिका-त्री नीलीवृक्ष ॥ नीलका वृक्ष । खण्डकालु-पु. आलु-विशेष ॥ गोलआल । क्लेदन-पु० कफ । पञ्चविध श्लेष्मान्तर्गत श्लेष्म वि. खण्डज-पु० गुड । यवासशर्करा ।। गुड । शीरग्विस्त दोष || कफ । एक प्रकारका श्लेष्म । फारसी भाषा। कोम(न्)-न० फुप्फुस । फेफडा । खण्डमोदक-पु० यवासशर्करा ॥ शरािस्विस्त । कंगु-पु० कंगु ।। कंगुनीधान का चीनाधान । खण्डलवण-न० विडलवण ॥ विरियासञ्चरनोन । काथ-पु० नियूंह ।। काढा। खण्डशाखा-श्री. महिषवल्ली ॥ काथोद्भव-पु० अञ्जन-विशेष ।। रसोत । खण्डशर, खण्डसर-पु० यवासशकरा ॥ शीर. इति श्रीशालिग्रामवैश्यकृते शालिग्रामौषधशब्दसागरे द्रव्याभिधाने ककाराक्षरो नाम प्रथमस्तरंगः ॥ १।। खण्डिक-पु० कलाय ॥ मटर । ख. खण्डी-(न्) पु० वनमुद् ॥ मोट । ख-न० अभ्रक ।। अभ्रक। खण्डरि, पु० पतिमुद्ग ॥ पालीमूंग । खग-पु. स्वर्णमाक्षिक ।। सोनामाखी । खदिका-स्त्री० लाजा ॥ खीलैं । खगवक्त्र-० लकुचवृक्ष ।। बडहर। . खदिर-पु० स्वनामख्यात वृक्ष ॥ खर+कत्था। ॥ । खिस्त।
औषधिकोष। (४७) । खदिरपत्रिका-स्त्री० अरिमेदवृक्ष । लज्जालुलता ॥ खरमरी-स्त्री० अपामार्ग ॥ चिरचिरा। दुर्गन्धखैर । लज्जावन्ती। खरवल्लिका-स्त्री. नागबला ॥ गंगरन। खदिरपत्री-स्त्री० लज्जालुवृक्ष ।। छुईमुई । खरशाक-पु० भांर्गी ॥ भारङ्गी। खदिरा-स्त्री." खरस्कन्ध-पु. प्रियालवृक्ष ॥ चिरोंजीका वृक्ष । खदिरिका-स्त्री० लाक्षा ॥ लाख । खरस्कन्धा-त्री. खजूरविक्ष ।। खजूरका वृक्ष । खदिरी-स्त्री० खदिरी क्षुप । लज्जालु। वराहकान्ता ॥ खरस्वरा-स्त्री. वनमल्लिका ॥ नेवारी। ग्वैरीशाक-बङ्गभाषा । लज्जावन्ती, लजालु हि- खरा--स्त्री० देवताडवृक्ष ॥ देवताडवृक्ष । न्दोभाषा । वराहक्रान्ता । साधारणभाषा । खरागरी-स्त्री" खदिरोपम-न. कदर ॥ पपरिया कत्था । खराश्वा-त्री० मयूरशिखा। वनयवानी ॥ भोर. खपुर-पु. गुवाका । भद्रमुस्तक ।। सुपारी । भद्र शिखा । अजमोद । क्षेत्रअजमायन । मोथा । खराह्वा-स्त्री० अजमोदा ॥ अजमोद । खमूलि-स्त्री० कुम्भिका || जलकुम्भी । खरिका-त्री० कस्तूरीभेद ।। कस्तूरीभेद । खमूलिका-स्त्री... खर्जु-पु. खजूरी । कण्डू ॥ खजूर । कण्डू (बु. खर-पु. कण्टकीवृक्ष-विशेष । एक प्रकारका कण्ट- जली ) रोग। कयुक्त वृक्ष। खर्जुर-न० रोप्य ॥ चाँदी। खरकाष्टिका-स्त्री० बला || खिरैटी । खर्जू-स्त्री • कण्ड ।। कण्डूरोग । खरगद्रि-पु० देवताडवृक्ष ॥ देवताडवृक्ष । खर्जून-पु० चक्रमई । धुस्तुर । अर्कवृक्ष ॥ चक. खरगन्धनिभा-स्त्री. नागबला ॥ गंगेरन । वड़ । धत्तरावृक्ष । आकका वृक्ष । खरगन्धा-स्त्री." खजूर-न० खजूफल । रौप्य । हरिताल।। खजूर । खरघातन-पु० नागकेशर || नागकेशर । रूपा । हरताल । खरच्छद-पु. भूमिसह । शाखोटवृक्ष । कुन्दुरूढ- तृण ॥ भुईसह । सहोरावृक्ष। कुन्दराइति कलिंग- खजूर-पु० स्त्री० खर्जुरीवृक्ष ।। खजूरका वृक्ष । खजूरी-स्त्री. वनखर्जर । खजूर ॥ वनखजूर खजूर । छुहारा। खरत्वक्-स्त्री. अलम्बुपा || लजालुभेद । खर्पर-पु० न० उपधातु-विशेष ।। खपरिया । खरदण्ड-न. पद्म ॥ कमल | खपरी-स्त्री० न० वपरीतुत्थ ।। एक प्रकार की ऑ- खरदला-श्री. क्षेमाफला ॥ गूलर । खकी औषधि । खरदूषण-पु. धुस्तूर ॥ धत्तुरा । खरधन्ततिका-स्त्री० नागवला ॥ गगेरेन ! खरनादिनी-स्त्री रेणुका ॥ रेणुकागन्धद्रव्य । खर्व-पु० कुब्जकवृक्ष ।। कूजावृक्ष । खवूर-स्त्री० तरदीवृक्ष ॥ खरपत्र-पु० क्षुद्रपत्र तुलसी । शाकवृक्ष । थावना- लशर । हरित दर्भ । मरुवक ॥ छोटे पत्तेकी तु. खब्बूंज-न० स्वनामल्यात फल ।। खबूजा । लसी । शाकवृक्ष। एक प्रकारका शर माआवृक्ष। खल-पु० तमालवृक्ष । धुस्तूरवृक्ष ।। श्यामतमाल । सेगुन वङ्गभाषा । हरितवर्ण कुशा। धत्तुरावृक्ष । खरपत्रक-पु. तिलकवृक्ष | तिलकवृक्ष । खल-न० कुंकुम ॥ केशर । खरपत्री-स्त्री. गोजिह्वावृक्ष । काकोदुम्बरिका ॥ खलति-पु० इन्द्रलुप्तरोग । गोभी। कठूमर । खलमूर्ति-पु. पारद ।। पारा । खरपादाव्य-पु० कपित्थवृक्ष ॥ कैथवृक्ष । तैलकिट ॥ तेलकी कीट । खरपुष्प-पु० मरवकवृक्ष ॥ मरुआवृक्ष । खलिनी-स्त्री० तालमूषी ।। मूषली । खरपुष्पा-स्त्री० बर्बरीवृक्ष ॥ वन्तुलसी । खल्ली-स्त्री हस्तपादावमईनरोग । देशीय भाषा । खपरी तुत्थ-न खालि-पु० Stage (४८) आयुर्वेदीय- - ॥ पोस्तके दाने, खवल्ली-स्त्री. आकाशवल्ली-अमरबेल अर्थात् आ-गजदन्तफला-स्त्री० डंगरीलतां ॥ एक प्रकारकी काशवेल । ककडी। खशा-स्त्री. मुरानामक गन्धद्रव्य ।। एकांगी, कपूर · गजपादप-पु० स्थालीवृक्ष ॥ बेलियापीपल | कचरी । गजपिप्पली-त्री० पिप्पली भेद ॥ गजपीपल । खस-पु० खसखस । खसखस, पोस्तेके दाने । गजपुट-पु० औषधपाकार्थगर्त ॥ गजपुट । पामारोग। गजप्रिया-स्त्री० शल्लकीवृक्ष ॥ शालईवृक्ष । खसकन्द-पु. क्षीरीशवृक्ष । क्षीरकञ्चुकी । गजभक्षक-पु० अश्वत्थवृक्ष । पीपलका पेड। खसतिल-पु. खाखस । पोस्तके दाने । गजभक्षा-स्त्री० शल्लकीवृक्ष ॥ शालईवृक्ष । खसम्भवा-स्त्री० आकाशमांसी ।। छोटी जटामांसी-गजभक्ष्या-स्त्री." गजवल्लभा-स्त्री० गिरिकदली । शल्लकी ॥ पर्वती खसखस-पु० वृक्षविशेष ॥ पोस्तके दाने । केल, पहाडी केलः । शालइका पेड़ । खसखसरस-पु० अहिफेन ॥ अफीम । बीजविशेष गजाख्य-पु० चक्रमवृक्ष ॥ पमारका वृक्ष । खाखस-पुल खसखस । खाजिक-पु० गजाण्ड-न पिण्डमूल || सलाम । ८ लाजा || खोलें। गजारि-पु० वृक्ष-विशेष ।। खदिरलार-पुं० खदिरवृक्षनिर्यास ॥ कत्था,खैरसार। खानोदक-पु. नारिकेल ॥ नारियल । गजाशन-पु० अश्वत्थवृक्ष ।। पीपलका पेड़। खारी-स्त्री० परिमाण-विशेष ।। ५१२ सेर । गजाशना-स्त्री० भंगा। शल्लकीवृक्ष । पद्ममूल । शाल्मलिवृक्ष ॥ भांग । शालईका पेड़ । कमलक खिखिर-पु० गन्धद्रव्य-विशेष ॥ वारिवालक | खिरहिट्ठी-स्त्री० महासमझा ॥ कगहिया । न्द । सेमरका पेड। गजाह्वा-स्त्री. गजपिप्पली ॥ गजपीपल । खुजक-पु० देवताडवृक्ष । देवताडवृक्ष । गजेष्टा-स्त्री० विदारी । गजपिप्पली । विदारकिन्द खुर-पु० नखीनामगन्धद्रव्य ॥ नखी । गजपीपल । खुरक-पु० सिलवृक्ष ॥ तिलवृक्षका पेड़ । गजोपकुल्या-स्त्री० गजपिप्पली ।। गजपीपल । खुल्लन० नखी नाम गन्धद्रव्य ॥ नखी । गजोषणा-स्त्री." खेचर-पु० पारद ॥ पारा। खेदिनी-स्त्री० अशनपर्णी वृक्ष ॥ पटशण । गडलवण-नसम्बरदेशोद्भव लवण || सामरलघण खोटी-स्त्री. पालकीवृक्ष || पालकका शाक । गजदेशज-न." इति श्रीशालिग्रामवैश्यकृते शालिग्रामविधशब्दसागरे गडु-पु० गलगण्ड । पृष्टगुष्ठ । कुब्ज ॥ गलगण्ड. द्रव्याभिधाने खकाराक्षरे द्वितीयस्तरङ्गः ॥ २॥ रोग । एक प्रकारका फोड़ा ॥ कुबड़ा । गडोत्थ-न गडलवण ॥ सामरनोन । गडयालक-न० चतुष्पष्टिगुञ्जापारमाण । परिमाण गगन-न० अभ्रक || अभ्रक । विशेष ।।६४ रत्तीपरिमाण । ४८ रत्तीपरिमाण । गंगापत्री-स्त्री० वृक्ष-विशेष ॥ गंगापत्री । गणणिका-स्त्री० इन्द्रवारुणी ।। इन्द्रायण । गज-पु० परिमाण-विशेष ।औषधपाकार्थ गर्तविशेष। गणरूप-पु० अर्कवृक्ष ।। आकका पेड । दो हाथपरिमाण औषधबनानेका गर्त अर्थात् दो गणरूपक-पु० राजाके । राजअवृक्ष । हाथ गहरा गढ़ा। गणरूपी-[न] पु० श्वेतार्क ।। सफेद आकका पेड़। गजकन्द-पु० हस्तिकन्द ॥ हात्तिकन्द । गणहास-पु. धनहर नामक गन्धद्रव्य || भटेउर. गजकुसुम-न० नागकेशर ॥ नागकेशर । नेपालदेशीय भाषा । गजचिभिटा-स्त्री० इन्द्रवारुणी ॥ इन्द्रायण । गणहासक-पु० गजचिआिंट-पु० डोडुम्बा ॥एक प्रकारकी कंकड़ी । गाणिका-स्त्री० यूथिका । गणिकारिवृक्ष।। जूहीवृक्ष । गजचिभिंटा-स्त्री० महेन्द्रवारुणी ॥ बड़ी इन्द्रायण। ग. " गणियारीका वृक्ष ।
औषधिकोष। (४९) किला। गाणकारिका-स्त्री० अग्निमन्थ । क्षुद्राग्निमन्थ ।। गन्धकाष्ठ-न० अगुरुकाष्ठ । शम्बर चन्दन ।। अरणी वा अगेथुवृक्ष । छोटी अरणी । अगर । शम्वरचन्दन । गणिकारी-त्री० पुष्पवृक्ष-विशेष ।। मदन मादनी। गन्धकुटी-स्त्री० मुरानामक गन्धद्रव्य ।। एकाङ्गी । गणेरु -पु० कर्णिकार वृक्ष || कनेर । गन्धकुसुमा-स्त्री गणिकारीवृक्ष :।। मदनमादनी. गणेशकुसुम-पु० रक्तकरवीर ।। लाल कनेर । मोतियाभेद । गणेशभूषण-न० सिन्दुर ।। इंगुर । गन्धकेलिका-स्त्री० कस्तूरी ॥ कस्तूरी । गण्डकारी-स्त्री० लज्जालुलता। वराहक्रान्ता ।। गन्धकोकिला-स्त्री० • गन्धद्रव्य-विशेष ॥ गन्धको- लज्जावन्ती । वराहक्रान्ता । गण्डकाली-श्री० लज्जालुवृक्ष। खैरशिाक वङ्गभाषा। गन्धखेड-न० गन्धवीरण || एक प्रकारकी सुगन्ध गण्डगाव-न० पलविशेप ।। सरीफा । घास । गण्डदूर्वा-स्त्री० दूर्वा-विशेष ।। गांडरव । गन्धवेडक-न० गन्धतृण ।। रोहिसतृण । गण्डमाला-स्त्री. स्वनामख्यात गलरोग ।। गण्ड-गन्धचन्दन-श्वतचन्दन ॥ सफेद चन्दन । मालारोग अर्थात् कण्ठमाला । गन्धचेलिका-स्त्री. कस्तूरी ॥ कस्तूरी । गण्डमालका-स्त्री० लज्जालुवृक्ष ।।छुई मुई। गंधजात-न० पत्रज॥ तेजपात । गण्डारि-पु० कोविदारवृक्ष । कचनारवृक्ष । गंधतृण-न० मुगन्धितृण-विशेष ॥ शखान । गण्डाली-स्त्री. श्वेतदूर्वा । साक्षी । गण्डदूर्वी ॥ गंधत्वक्-न- एलपालुक । एलुआ । सफेद दूब । सरहटी गंडनी । गाडरदुव । गंधदला-स्त्री. अजमोदा ॥ अजमोद । गण्डीर-पु० समाष्ठलावृक्ष ॥ शुण्डिग्नाशाक केचित् गंधधूमज-पु० स्वादुनाम गन्धद्रव्य ॥ स्वादु । भापा । गंधधूलि-स्त्री० कस्तूरी || कस्तूरी । गण्डीरी-स्त्री० सेहुण्डवृक्ष ॥ सैंहुडका वृक्ष । गंधनाकुलो-स्त्री नाकुली । नाकुलीकन्द ॥ गण्डूपद-पु० किञ्चलुक ।। केंचुवाकोडा । नाई । नकुलकन्द। गण्डूपद्भव-न० सीसक ॥ सीसा । गंधनामा [ ]-पु० रक्ततुलसी ।। लाल तुलसी गण्डरी-स्त्री० माञ्जिष्ठा ।। मजीठ । गंधनानी-स्त्री० शुद्ररोग-विशेष ॥ एक प्रकारका गण्डोल-पु० गुड ।। गुड । कच्ची मिठाई रोग। गद-न विष ।। जहर । गन्धनिलया-स्त्री० नवमल्लिकापुष्प ॥ नेवारी । गद-पु० रोग । कुष्ठोषध ।। रोग । कुठ औषधी । गन्धनिशा-स्त्री० गन्धपत्रा ॥ वनशटी, वनका गदा-स्त्री० पाटलावृक्ष ॥ पाडरका पेड । गदाख्य-न० कुठौषध ॥ कूठ। गन्धपत्र-पु० तेजपत्र || तेजपात । गदारात-पु. औषध ॥ दुवा । गन्धपत्र-पु० श्वेततुलसी । मरुबवृक्ष । बर्बर । गदाह-न० कुष्टौषध ।। कठ । नारंग । विल्व || सफेद तुलसी । मरआवृक्ष । गद्यानक-न० गद्यालक । चतुष्पष्टिगुञ्जापरिमाण ॥ काली वनतुलसी नारंगवृिक्ष । बेल का वृक्ष । ४८ रत्ति । ६४ रत्ति । गन्धपत्रा-स्त्री- शठीभेद || वनशटी, वनकचूर । गन्ध-न० कृष्णागुरु ।। काली अगर । गन्धपत्रिका-स्त्री० गन्धपत्रा। अजमोदा ॥ वनशटी। गन्ध-पु० शोभाञ्जनवृक्ष। गन्धक ॥ सैजि नेका वृक्ष। गन्धक। गन्धपत्री-स्त्री. अम्बष्ठा । अश्वगन्धा । अजमोदा । गन्धक-पु० स्वनामख्यात उपधातु-विशेष । शोभा मोइया पोदीना । असगन्ध । अजमोद,बनअज. अनवृक्ष । गन्धक । सैजिनका वृक्ष । गन्धकन्दक-पु० कशेरु ।। कशेरुकन्द । गन्धपलाशिका-स्त्री० हरिद्रा ॥ हलदी । कचूर । अजमोद । मायन ।
(५०) आयुर्वेदीय- रोजा । गन्धपलाशी-त्री० शठी ॥ छोटा कचू । गन्धरसाङ्गक-पु० श्रीघष्टनामक गन्धद्रव्य ॥ वि- गन्धपाषाण-पु० गन्धक ॥ गन्धक । गन्धपीता-स्त्री० गन्धपत्रा || वनशठी । गंधराज-न० चन्दन । जवादिनामक गन्धद्रव्य । गन्धपुष्प-पु० वेतसवृक्ष । अझोटवृक्ष। बहुवारवृक्ष॥ स्वनामख्यात शुक्लवर्णपुष । वेतका वृक्ष । ढेरावृक्ष । लिसोडावृक्ष। गन्धराज-पु. मुद्गरवृक्ष । कणगुग्गुलु स्वनामख्यात गन्धषुष्मास्त्री० नीलवृिक्ष । केतकीवृक्ष। गणिकारी. शुक्लवर्णपुष्प ॥ मोगारावृक्ष.। कणगूगल । गन्ध- वृक्ष ।। नीलका पेड । केतकीका पेड । मदनमादनी। राजपुष्पवृक्ष । मोतियाभेद । गन्धराजी-त्री० नखो।। नखीनाम गन्धद्रव्य । गन्धफणिजक-पु० रक्ततुलसी ॥ लाल तुलसी । गन्धर्वतैल-ज० एरण्डतैल ॥ अण्डका तेल । गन्धफल-पु. कपित्थ । बिल्ल । तेजफलवृक्ष ॥ गन्धर्वहस्त-पु० एरण्डवृक्ष ॥ अण्डका पेड । कैथवृक्ष । बेलाका वृक्ष । तेजबलवृक्ष । गन्धर्वहस्तक-पु. " गन्धफला-स्त्री प्रियंगुवृक्ष । मेथिका । विदारी । गन्धवती-स्त्री० घनमल्लिका । सु। ।। वनजातिम- शल्लकी ॥ फूलप्रियंगु । मेथी। विदारीकन्द । ल्लिका । काठमल्लिका। कपूरकचरी । शालईवृक्ष । गन्धवधू-स्त्री० चीडा । शटी ॥ चीढ । छोटा गन्धफली-स्त्री. चम्पककालका । प्रियंगुवृक्ष ॥ कचर। चम्पाकी कली। फूलाप्रियंगु । गन्धवल्कल-न• त्वच ॥ दालचीनी । गन्धबन्धु-पु. आम्रवृक्ष ॥ आमका पेड । गन्धवलरी-स्त्री. सहदेवी ॥ सहदेई । गन्वभद्रा-स्त्री० लता-विशेष ॥ प्रसारणी। पसरन । गन्धवल्ली-स्त्री० दण्डोत्पलभेद || पीले फूलका द- गन्धभाण्ड-पु० गद्दभाण्डवृक्ष ॥ गजहंदुवृक्ष । ण्डोत्पल । गन्धमांसी-स्त्री. जटामांसीभेद ॥ बालछडभेद । गन्धवहल-पु० सिताज॥ सफेद तुलसी । गन्धमातुक-न० पु० गन्धमात्रा ॥ एक प्रकारका सुगंधिद्रव्य । गन्धबहुला-त्री० क्षुद्रक्षुप-विशेष ।। गोरक्षी । गन्धविह्वल-पु० गोधूम गेहूँ । गन्धमादन- ० गन्धक|| गन्धक । गन्धबीजा-स्त्री० मेथिका । मेथी। गन्धमादनी-स्त्री० मदिरा । वन्दाक । चीडा नामक गन्धवृक्षक-पु० शालवृक्ष ॥ सालका वृक्ष । गन्धद्रव्य ॥ सुरा, दारु । बाँदा । च.ढ । गन्धमादिनी--स्त्री० लाक्षा । पुरा ॥ लाख । कपूर- गन्धव्याकुल-न० कक्कोल ।। शीतलचीनी। गन्धशटी-स्त्री० शटी-विशेष ॥ गंधपलाशी । गन्धमालती-स्त्री० गन्धद्रव्य-विशेष ॥गन्धमालती। गन्धशाक-न० गौरसुवर्णशाक ॥ यह शाक चित्र- गन्धमालिनी-स्त्री. मुरा ॥ कपूरकचरी । कटदेशमें प्रसिद्ध है। गन्धमुण्ड-पु० ० प्रसारणी ॥ पसरन । गन्धशालि-पु० शालिधान्य-विशेष ॥ हंसराज, गन्धमूल-पु० कुलञ्जनवृक्ष । कुलञ्जनवृक्ष । वासमती इत्यादि। गन्धमूलक-पु० शठी ॥ अमियाहलदी। गन्धशेखर-पु. कस्तूरी ॥ कस्तूरी । गन्धमूला-स्त्री० शल्लकी शठी ।। शालईका पेड। गन्धसार-पु० चन्दनवृक्ष । मुद्गरवृक्ष ॥ चन्दनक कचर। पेड । मोगरावृक्ष । गन्धमूलिका-स्त्री० शटीविशेष ॥ गंधपलासी वा गन्धसारण-पु. बृहन्नखी । बडी नखी । जेटा कचर । गन्धसोम-न० कुमुद ।। कमोदनी । गन्धमूली-स्त्री० गन्धमूलिका || छोटा कचूर । न्धा-स्त्री० शटी। शालपर्णी | चम्पक कलिका ॥ गन्धमोदन-पु० गन्धक ॥ गन्धक | गन्धपलासी । शालवन । चम्पाकी कली । गन्धरस-पु० वणिन्द्रव्य-विशेष । वोर गन्धांशुमती-स्त्री. शालपर्णी ॥ शालवन । कचरी औषधिकोष। ॥ . छड, शिलारस । गन्धाढय-न० चन्दन । जवादिनामक गन्धद्रव्य ॥ गरागरी-स्त्री० देवताडवृक्ष ।। देवताडवृक्ष । चन्दन । जवादिनामक कस्त्री। रात्मक ज. शोभाजनबीज || सजिनका बीज । गन्धाढय-पु० नारङ्गवृक्ष । नारङ्गीवृक्ष । गराजिका स्त्री० लाक्षा । लाख । गन्धाढथा--स्त्रीक गन्धपत्रा स्वर्णयूथी । गन्चाली । गरी-स्त्री० देवताडवृक्ष ॥ देवताड । आरामशीतला ।घृतकुमारी बनसटी । सोना- गरुत्मान् [त् ]-पुं० स्वर्गमाक्षिक । सोनामाखी । जुही । प्रसारिणी । आरामशीतला ॥ घीकुभार । गजर-पु० मूल-विशेष ।। गाजर । गन्धाधिक-न० तुणकुंकुम ॥ तृणकेशर । गर्जाफल-पु. विकण्टकवृक्ष । विकण्टकक्ष । गन्धाम्ला-स्त्री. वनबीजपूरक ॥ वनजात विजोरा । गर्दभ-न० श्वेतकुमुद । विडङ्ग ॥ सफेद कमोदनी। नींबू । वायभृङ्ग । विडग । गन्धाला-त्री० वृक्ष वैशेष । गर्दभगढ़-पु० जालगभरोग || जालम भरोग । गन्धाली-स्त्री० प्रसारणी लता ॥ पसरन । ब्रह्मयष्टि ।। भारंगी। गर्दभशाक-पु. गन्धालीगर्भ-पु० सूक्ष्मेला ॥ छोटी इलायची । गर्दभशाका-स्त्री." गन्धाश्मा (न् ) पु० गन्धक ॥ गन्धक । गर्दभशास्त्री-बी० गन्धाष्टक-न० चन्दन, अगरु, कपूर, चोरक, गर्दभाण्ड-- ० वृक्ष-विशेष । प्लक्षवृक्ष ॥ पारसपी- कुंकुम, रोचना, जटामांसी, शिलक ॥ चन्दन, पल, गजहन्दु। पाखरवृक्ष । अगर, कपूर, भटे उर, केशर, गोलोचन, बाल- गईभाय-पु. कुमुद ॥ कमोदनी । गईभिका--त्री० क्षुद्ररोग-विशेष । गईभी स्त्री० अपराजिता । श्वेतकण्टकारी । कटभी । गन्धि-न० तृणकुंकुम ॥ तृणकेशर । ज्योतिष्मती। क्षुद्ररोग-विशेष ।। कोयललता, गन्धिक-पु. गन्धक । विष्णुक्रान्ता । सफेद कटेहरी । कटभी। माल. गन्धिनी-स्त्री. मुरा ॥ कपूरकचरी । कांगुनी । गर्दभिका रोग। गन्धिपर्ण-पु. सप्तच्छदवृक्ष ॥ सतिवन । गर्द्ध-पु० गईभाण्डवृक्ष ॥ पारिसपपिल । गन्धोत्कटा-त्री० दमनकवृक्ष || दवनावृक्ष । गर्भकर-पु० पुन्नजीववृक्ष । जियापोतावृक्ष ।। गन्धोतमा-स्त्री० मदिरा ॥ दारु । गर्भवातिनी--त्री० लाङ्गालकावृक्ष ॥ कलिहारीवृक्ष । गन्धोलि-स्त्री० शटी ।। छोटा कचूर । गर्भद-पु० पुत्रजीववृक्ष ॥ जियापोता । गन्धोली-त्री." गर्भदात्री-स्त्री. क्षुप-विशेष ॥ पुत्रदा । गभोलिक-पु० मसूर ॥ मसुरधान | गर्भनुत्सद् ]- पु० कालिकारीवृक्षाकलिहारीवृक्ष । गम्भारिका-स्त्री० गम्भारी || कम्भारी | गर्भपातक-पु० रक्तशोभाञ्जनवृक्ष ॥ लालसैजिनेका गन्भारी-स्त्री० काश्मरी ॥ गम्भारी, कुम्भेर । वृक्ष । गम्भीर-पु. जम्बीर । पंकज। जमिरिनींबु |कमला गर्भपातन- ६० अरिष्टकवृक्ष ॥ रीठा । गर-न० विष । वत्सनाभाविष | विष । वच्छनाभ- गर्भपातनी स्त्री० कलिकारीवृक्ष कलिहारीवृक्ष । विष । गर्भपातिनी स्त्री० विशल्यावृक्ष ॥ अग्निशिखांवृक्ष । गर-पु. विष । उपविष । गर्भशय्या-त्री० गत्पित्तिस्थान || गर्मकी उत्पत्तिका गरन-पु० कृष्णार्जकं । बर्बर ।। काली बर्बरी तुल. सी। वनतुलप्ती। गर्भस्रार्वा-न् ]-पु० हिन्तालवृक्ष ॥ एक प्रका- गरद-न० विष || जहर । रका ताड़ ॥ गरल-नक विष । सर्पविष । कृष्णसर्पविष ।। विष । गर्भागार-न. गर्भाशय ॥ गर्भस्थान । साँपका विष । काले सापका विष।. गर्भाशय-पु० गभांगार ॥ गर्भस्थान । गरा-स्त्री. देवदालीलता ॥ घघरवेल,सोन्नया ।' गर्भिणी-स्त्री० क्षीरीवृक्ष ॥ क्षीरवृक्ष । स्थान। . .
(५२) आयुर्वेदीय- . रोग। ॥ गला-स्त्री गर्मत-स्त्री० तृणधान्य--विशेष ॥ एक प्रकारके तृण• गान्धारी-स्त्री० यवास । सम्विदामञ्जरी ॥ जयासा । गाँजा। धान्य। गर्मुटिका-त्री बीहिभेद ॥ एक प्रकारके ब्रीहि. गाम्भारी-स्त्री० वृक्ष-विशेष || कम्भारी, खुमेर । धान। गायत्री [ ]-पु० खदिरवृक्ष ॥ खैरका वृक्ष । गम्मोटिका-स्त्री - जरडीतृण || जरडीतृण । गायत्री-स्त्री० खदिरवृक्ष । विट्खादिर ॥ खैर । गल-पुः कण्ठः । सर्जरस । गला । रल । दुर्गन्धखैर । गलगण्ड-पु. स्वनामख्यात गलरोग ॥ गलगण्ड. गारुड-न० स्वर्ण ॥ सोना । गारुडी-त्री० पातालगारुडी लता ॥ छिरहिटा । गलशुण्डिका श्री० तालूद्धजिह्वा ॥ तालूके ऊपर गारुत्मतपत्रिका-त्री० पाचीलता ॥ पञ्चेवेल । एक छोटी जीम । गालव-पु. लोध्रवृक्ष । श्वेतलोध्र । केन्दुकवृक्ष । • अलम्बुषा ॥ लज्जालुभेद । लोध । पठानी वा सफेद लोध । तैन्दुवृक्ष । गलाङ्कुर-पु० गलरोग विशेष। एक प्रकारका गल- गालोडय-न० पद्मवीज ॥ कमलगट्टा । रोग ! गिरि-पु० चक्षुरोग-विशेष । नेत्ररोग । गिरिकदम्ब-पु० बाराकदम्बवृक्ष ॥ कदमभेद । गवादनी स्त्री इन्द्रवारुणी | नीलापराजिता ॥ कदमवृक्ष । इन्द्रायण निलीकोयललता। कृष्णकान्ता । गिरिकदली-स्त्री० पर्वतीय कदली पहाडी केला । गवापिका-श्री-लाक्षा || लाख । गिरिकर्णिका-स्त्री. शेवत किाणहीवृक्ष । अपराजि. गवाक्षी-स्त्री गोडुम्बा । इन्द्रवारुणी । शाखौटवृक्ष। ता ॥ सफेद किणहीवृक्षाकोयललता।विष्णुक्रान्ता। अपराजिता ॥ एक प्रकारकी ककड़ी। इन्द्रा. गिरिकर्णी-स्त्री. अपराजिता । यवाम || कोयल । यण । सहोरावृक्ष । कोयललता, विष्णुकान्ता । गवडु-पु० धास्य-विशेष ॥ गरहेडुआ। गिरिज-न. अभ्रक | शिलाजतु । लोह गरिक । गवेधु-पु० शैलय ॥ अभ्रक । शिलाजीत । लोहा । गेरू । गवेधुक-न० गैरिक | गेरु । भूरिछरीला । गवेधुका-स्त्री • तृणाधान्य-विशेष । नागबला ॥ गिरिज-पु० मधूकवृक्षविशेष । पर्वती महुआवृक्ष । गरहेडुवा । गंगेरन। गुलसकरी । गिरिजा-स्त्री० मातुलुंगा । क्षुद्रपाषाणभेदा । वाय गवेरुक-न० गैरिक | गेरू । माणा । कारीवृक्ष । मल्लिका । गिरिकदली गवेशका-स्त्री. नागबला ॥ गुलसकरी । श्वतवुहा ।। चकोतरा.। छोटापाखानभेद । त्राय गव्या-त्री गोरोचना गोरोचन, गौलोचन । मान । आकधकारी । मल्लिका पुष्पवृक्ष । पहाडी. गांगेय-न० स्वर्ण धुस्तूर कशेरु । मुस्तक ॥ केला। सफेद वोना। सोना धत्तुंरा । कशेरु मोथा । गिरिजामल-न० अभ्रक ॥ अभ्रक । गांगेय-पु० भद्रमुस्ता । नागरमुस्ता ॥ भद्र मोथा । गिरिजाबीज-न० गन्धक ॥ गन्धक । नागरमोथा । गिरिधातु-पु० गैरिक | गेरू । गांगेरुकी-स्त्री० नागबला ॥ गुलसकरी, गङ्गरन । गिरीिनिम्ब-पु० महारिष्टनिम्ब ॥ बकायनाम । गांगेष्ठी-स्त्री० कटशर्करालता एक प्रकारको वनस्पति। गिरिपीलु-पु० पुरुषकवृक्ष ॥ फालसा । गाण्डीवी-[ ]-पु० अर्जुनवृक्षः। कोहवृक्ष । गिरिपुष्पक-न० शैलय ॥ पत्थरकाफूल । गात्रभंगा-स्त्री० शूकाशम्बी ॥ कौंछ । गिरिभित् [ द् पाषाणभेदकवृक्ष || पारखान- गानिली-स्त्री. वचा ॥ वच । भेद। गान्धार-न० गन्धरस ॥ वोर । गिरिभू-स्त्री० क्षुद्रपाषाणभेदा ॥ छोटा पाग्वानभेद । गान्धार-पु० सिन्दूर ॥ सिन्दूर। गिरिमल्लिका-स्त्री० कुटजवृक्ष ।। कुडावृक्ष । जवासा । -- 0 औषधिकोष। (५३) गिरिमेद-पु० ॥ चीनी । करञ्ज। गिरिमृद्- [ द्-स्त्री० गैरिक ॥ गेरू । |गुञ्जाकिनी-स्त्री. गुञ्जा || चोटलो । गिरिमृद्भव-न." गुन्जिका-स्त्री० गुञ्जः । त्रियाबपरिमाण ॥ धुंधुची । विटखदिर ॥ दुर्गन्धखैर । ३ जोकी बराबर अर्थात् १ रत्ति । गिरिवासा-[न् ] पु० हस्तिकन्द | हास्त कन्द । गुड-पु० स्वनामख्यातमिष्टद्रव्य, इक्षुपाक खजूर गिरिशालिनी-स्त्री० अपराजिता || कोयललता । रस क्वाथ । कापीसी ॥ गुड । खजूंरके रसका विष्णुक्रान्ता। बनाया हुवा गुड । कपास । गिरिसार-पु० लौह । रंग ॥ लोहा । रांग । गुडक-पु० गुडद्वारा पौषध विशेष ।। गुड से बनाई गिल-पु० जम्बीर ॥ जम्भीरी नींबू । हुई पकी औषधी । गीलता-स्त्री. महाज्योतिष्मती॥बड़ी मालकांगनी। गुड़ची-स्त्री गुडूची । गिलोय । गीर्वाणकुमम-न -न० लवंग ॥ लोग। गुडतृण-पु. इक्षु ॥ ॥ ईख । गुग्गुल-पु. शिलाजतु ॥ शिलाजीत । गुडत्रिण-न० " गुग्गुल-पु० रक्तशोभाञ्जनवृक्ष । स्वनामख्यात वृक्ष । गुडत्वक् ( च )-न० स्वनामख्यात गन्धद्रव्य।।दाल. अस्यनिर्व्यास सुगन्धिद्रव्य॥ लालसैजिनेका पेड । गुग्गुलका पेड । इसका गोंद गूगल है । गुडत्वच-न० गुडत्वक् । जातीपत्री॥ दालचीनी । गुच्छेक-न० ग्रन्थिपर्ण || गठिवन । जावित्री। गुच्छक-पु० रीठा करञ्ज ॥ रीठा करञ्ज । गुडदारु-न० इक्षु ।। इख । गुच्छकरज-पु० करञ्ज-विशेष ॥ एक प्रकारको गुडपुष्प-पु० मधुकवृक्ष ।। महुआवृक्ष । गुडफल-पु० पीलवृक्ष | पलिका पड़े । गुच्छदन्तिका-स्त्री० कदली ॥ केला । गुडभा-स्त्री० यावनालशर्करा ॥ शरािखिस्त । गुच्छपत्र-पु. तालवृक्ष ॥ तावृक्ष । गुडमूल-पु. अल्पमारिषशाक || चौलाईका शाक। गुच्छपुष्प-पु० सप्तच्छदवृक्ष । अशोकवृक्ष ॥ सति. वन । अशोकका पेड । गुडल-न० गौडी मदिरा ॥ गुडकी मदिरा, गुड़- गुच्छपुष्पक-पु० रीठाकरञ्ज । राजादनी वृक्ष । गुच्छकरञ्ज ।। रीठाकरञ्ज । खिरनीवृक्ष । गुच्छ. गुडबीज-पु० मसूर ।। मसूर अन्न । करज । करञ्जभेद । गुडशिग्रु-पु० रक्तशोभाञ्जनवृक्ष। लालसौजनेका वृक्ष। गुच्छपुष्पी-त्री० धातकी ।। धायके फूल । गुडा-स्त्री० स्नुहीवृक्ष । उशीरो ।। सेहुण्डवृक्ष । गुच्छकल-० रीठाकरञ्ज । राजादनी । कतक । छोटे कांस | छोटे झंड। रीठाकरञ्ज । खिरनीवृक्ष । निर्मलीफल । गुडाशय-पु० आखोटवृक्ष ।। अखरोटका पेड़ । गुच्छफला-स्त्री० काकमाची । निष्पावी । द्राक्षा । गुड़िका-स्त्री० गुटिका । बृहवाटिका !! गोली । कदली। आमिदमनी ।। मकोय । हरीनिष्ावी। बड़ी गोली। दाख । केला । अग्निदमनी । गुडुची-स्त्री० गुडूची ॥ गिलोय । गुच्छवधा-स्त्री ० क्षुद्रक्षुप-विशेष ॥ गुण्डालावृक्ष । गुडूची-स्त्री० स्वनामख्यातलता ।। गिलोय । गुच्छमूलिका-त्री० गुण्डासिनीतृण || गृण्डासिनी गुडोद्भवा-स्त्री० शर्करा ॥चीनी । गुणा-स्त्री० दूर्वा । मांसरोहिणी ॥ दूबरोहिनी मांस. गुच्छाल-पु. तृण-विशेष ॥ भूतृण । रोहिनी। गुच्छाहकन्द-पु. गुलञ्चकन्द ॥ कुली। वंगभाषा । गुण्ड-पु० स्वनामख्यात तृण ॥ गुंडतृण । इसका गुच्छी-त्री० करञ्ज-विशेष । गुच्छकरञ्ज । कन्द कशेरु है । गुज -त्री० लता विशेष । त्रियवपरिमाण॥ धुंधुची, गुणक द-पु. कशेरु ॥ कशेरुकन्द । चोटली, चिरामटी, [ज इत्यादि । श्रात्तपरिमाण गण्डा-स्त्री० कम्पिल्लक ॥ कवीला । की शराब। । घास । .
(५४) आयुर्वेदीय- गुण्डाला-स्त्री० तृण-विशेष गुत्स-पु० ॥ लनेका स्थान। ॥ " गुण्डारोचनिका-स्त्री० गुवाक-पु० वृक्ष-विशेष ।। सुपारीका वृक्ष । ० क्षुद्रक्षुप-विशेष || गुण्डालावृक्ष । गुहा-स्त्री० सिंहपुच्छीलता । शालपर्णी ॥ पिदवन गुण्डासिनी-स्त्री. || गुण्डासिनीतृण। शारिवन । शालवन । गुण्डिकेरी-स्त्री. बिम्बफिल ॥ कन्दूरी । गुहाबदरी-स्त्री० वृश्च-विशेष । शालपणी | रुमी गुत्थ-पु१ गवेधुका || गरहेडुआ । मस्तगीका वृक्ष । शालवन । गुत्थक-न० ग्रन्थिपर्ण ।। गठिवन । गुह्यपुष्प-पु० अश्वत्थवृक्ष ।। पीपल का पेड़ । गुह्यबीज-पु० भूतृग ॥ शरबाण । गुत्सपुष्प-पु० सप्तच्छदवृक्ष ।। सतिवन । गूढपत्र-पु० कररिवृक्ष । अंकोटवृक्ष ॥ बलका गुद-न० अपान । मलद्वार ! गुह्यदेश ॥ विष्ठा निक- पेड़ । ढेरावृक्ष । गूढपुष्पक-पु. बकुलवृक्ष ॥ मौलसिरीका वृक्ष । गुदकील-पु. अ#रोग ।। बवासीर । गूढफल-पु० (बदर ।) बेर । गुदभ्रंश-पु० मलद्वारनिगमरोग || एक प्रकारका गूढवाल्लिका-स्त्री० अकोठवृक्ष ।। ढेरावृक्ष । गुदरोग । गूवाक-पु० गुवाक || सुपारी । गुदांकुर-पु० अशेरोग || बवासीर ।। गृञ्जन-न • मूल--विशेष ! सलगम । गुन्द्र-पु० शर । वृक्ष -विशेष | सरपता । पटेर । गृजन-पु० र सोन । रक्तलशुन ।। लहशन। लाल गुन्द्रक-पु. लहशन। गुन्द्रमूला-स्त्री० एरका तृण ॥ मोथीतृण । कोई गृध्रनखी-स्त्री० कुलिकवृक्ष । कोलिकवक्ष ॥ काका- ग्रन्थकार पटेरीको भी लिखते हैं । दनी वृक्ष । वेरीका पेड । गुन्द्रा-स्त्री० भद्रमुस्तक । प्रियंगुवृक्ष । गवेधुका । गृध्रपत्रा-स्त्री० धुम्रपत्रावृक्ष ॥ तमारवूका पेड । एरका ।। भद्रमोथा ।फूलप्रियंगु। गरहेडुआ । मो. गृध्रसी-स्त्री० वातरोग विशेष ।। वायुरोगभेद । थीतृण। गृध्राणी-स्त्री० धूम्रपत्रावृक्ष ॥ तमाखूका वृक्ष । गुप्तस्नेह-पु० अंकोठवृक्ष ॥ ढेरावृक्ष । गृष्टि-स्त्री० वराहक्रान्ता । बदरीवृक्ष । काश्मरी ॥ गुप्ता-स्त्री० कपिकच्छु ।। कोछ । वराहक्रान्तावृक्ष । बेरीका पेड । कम्भारी, खुमेर- गुरु-पु० का पेड । वाराहीकन्द । गुरुत्र-पु० गौरसर्पप ।। सफेद सों। गृह-न० शैलेय ।। पत्थरका फूल । गुरुपत्र-पु० रङ्ग । राङ्ग । घृतकुमारी ॥ घीकुआर । गुरुपत्रा-स्त्री० तिन्तिडीवृक्ष ।। इमलीका वृक्ष । गृहद्म-पु० मे दशङ्गिवृक्ष ।। मेढाशिंगी। गुरुवच्चॉन-पु० लिम्पाक । नींबू । कागजी नींबू । गृहणी-स्त्री० काञ्जिक ॥ कांजी । गुलञ्चकन्द-पु० कन्द-विशेष ।। कुली वंगभाषा । गृहपुत्रिका-स्त्री० घृतकुमारी ।। घीकुआर । गुला-स्त्री० स्नुहीवृक्ष ।। थूहरका पेड गृहाम्ल-ज० काञ्जिक । कांजी। गुली-स्त्री० स्नुहीवृक्ष । गुठिका । रोगभेद ॥ सहुँड. गृहाशया-स्त्री. ताम्बली ॥ पान । का पेड़ । गोली । वसन्तरोग । गैरिक-न० स्वर्ण । रक्तवर्णधातु विशेष || सोना । गुल्फ-पु० वादग्रन्थि ॥ पाँवकी गाँठ । गेरूमाटी। गुल्मकतु-पु० अम्लवैतस । अम्लवेत । गैरिकाक्ष-पु. जलमधूकवृक्ष । जलभहुआ वृक्ष । गुल्ममूल-न० आर्द्रक || अदरख । गैरी-स्त्री- लांगलिकी वृक्ष || कलिहारीका पेड़ । गुल्मवल्ली-स्त्री० सोमवल्ली ॥ सोमलता । गैरेय-न० शिलाजतु ।। शिलाजीत । गुल्मशूल-पु० रोगविशेष ॥ गुल्मशूलरोग । गोकण्ट-पु. गोक्षुरवृक्ष ।। गोखुरूका पेड । गुल्मी-स्त्री० एला । आमलकी । गृध्रनखीवृक्ष ॥ गोकटक-पु० गोक्षुरकवृक्ष । विकण्टकवृक्ष ।। गो. इलायची । आमला। खुरुका पेड । गर्जाफल। । गृहकन्या-स्त्री. ॥ v4 PM HP - P औषधिकोष । (५५) की भाषा ॥ गोकर्णी-स्त्री० मूवीलता । चुरनहार । गोवूममण्डव-न० सौवीरा ॥ एक प्रकारकी कांजी। गाकेत-न० गोमय ।। गोबर । गोधूमी-त्री० गोलीमका | पाथरी पश्चिमदेशीय- गोखुर-पु. गोक्षुरवृक्ष ।। गोखुरूवृक्ष । भाषा। गाखुर-पु. गोनई-न० कैवर्ती मुस्तक ।। केवटीमोथा । गोच्छाल-पु. भूकदम्ब ।। कुला हलवृक्ष । गोनिष्यन्द-पु० गोमूत्र ॥ गायका पिसाब । गोजल-न० गोमूत्र || गायका सूत । गोप,गोपक-पु० गन्धरस ॥ बोल । गोजा-स्त्री० गोलोमका वृक्ष ।। पाथरी श्चिमदेश- गोपकन्या-त्री. शारिवा औषधी ।। गौरसार ॥ गोपघोण्टा स्त्री. हस्तिकोलि । विकङ्कतवृक्ष ॥पौंडा. गोजागरिक-पु. कष्टकारिका ।। कटेहरी ।। वेर । कण्टाई। गोजापर्णी-त्री० पय:फेनीवृक्ष ।। दूधफेनीवृक्ष । गोपीत-पु० ऋषभनामकोपधी ॥ ऋषभऔषधि । गोजिड्डा-स्त्री. क्षुप-विशेष । गवेधुका ॥ गोभी गोपदल-पु० गुवाक ॥ सुपारी । वनस्पती । गरहेडुआ । गोपन-न० तमालपत्र ॥ तेजपात । गोजिटिका-त्री गोजिह्वालता ।। गोभी । कोई गोपभद्र-न० कुमुद कन्द || कमोदनीकी जड । वैद्य गावजवां को भी कहते हैं । गोपभद्र-पु० पद्मकन्द, भसीडा, कमलकन्द । गोडुम्ब-पु० शीणोवृन्त ।। तरबूज । गोपभद्रा-स्त्री० काश्मरीवृक्ष ॥ कम्भरीका पेड । गोडुम्बा-स्त्री० गवादनी ॥ गोमाककडी । गोपभद्रिका-स्त्री० गम्भारीवृक्षाकम्भारी कुम्मेर । गोडुम्विका-त्री० गोडुम्बा ।। गोमाककड़ी । गोपरस-पु. गन्धरस || बोल । गोणा-स्त्री० द्रोणीपरिमाण ।। १२८ सेरपरिमाण । गोपवधु-स्त्री० शारिवा ॥ गौरीसर । गोत्रवृक्ष-पु० धन्वनवृक्ष । धामिनवृक्ष । गोपवल्ली-स्त्री० मूर्वा। शारिवा । श्यामलता ॥ चुर- गोत्थ-पु० गोमय ।। गोबर । नहार । गौरीसर । कालीसर । गोदन्त-न० स्वनामख्यात श्वेतवर्णहरितालभेद हरि. गोपा-स्त्री० ० श्यामलता ॥ कालीसर । ताल ।। गोदन्ती । हरताल । गोपाल-१० गोदन्तिका-स्त्री० गोदन्त ।। गोदन्ती गापाककटी-स्त्री० कर्कटीभेद । गोपालकाकडी । गोदुग्धदा-त्री० चाणकातृण ।।चणिका घास । गोपाली-स्त्री० गोपालकर्कटी ॥ गोरक्षी ॥ गोपाल गोद्रव-पु० गोमूत्र ।। गायका पिसाव । गोधा-स्त्री० स्वनामख्यात चतुष्पद नकुलसदृश जंतु- काकड़ी । गोरक्षी । विशेष ।। गोयसाप । गोपवित्त-न० गोरोचना ॥ गौलोचन | गोधापदिका-त्री ० गोधापदालता ।। हंसपदी । गोपी-स्त्री० श्यामालता ॥ गौरिआवासाऊं । गोधापदी-स्त्री० हंसपदी ।। लज्जालुभेद । ताल- गोपुटा-स्त्री० स्थूलेला ॥ बड़ी इलायची । मूली ।। मूसली । गोपुर-न० कैवर्ती मुस्तक ॥ केवटीमोथा । गोधवती-स्त्री० गोपुरक-पु० कुन्दुरुक । कुन्दुरु । लोवान फार्सी। गोधास्कम्ब-पु० विट्खदिर ।। दुर्गंधखैर । गोमय-न० पु० स्वनामख्यातद्रव्य ॥ गोबर । गोधि-पु. गोधिका ।। गोय । गोमयच्छत्र-न० करक ॥ भूमिछाता । गोधिनी-स्त्री० क्षबिकावृक्ष ॥ एक प्रकारकी कटेहरी । गोमयच्छत्रिका-स्त्री. गोधूम-पु० गोधूम ।। गेहूँ। गोमयप्रिय-ज० भूतृण ॥ शरवान । गोधूम-पु० ब्रीहिभेद । नागरङ्ग । ओषधी-विशेष । गोमयोद्भव-पु. आरग्वध ॥ अमलतास । गेहूका । नारङ्गीका वृक्ष । एक औषधी । गामरी-स्त्री० वार्ताकुभेद ॥ रामवैगन ।रक्तवैगन । गोधूमचूर्ण-न० चीकृत गोधूम ॥ मयदा, चून, गोमूत्र-न० गोमय ॥ गयका पिसाव । सूजी इत्यादि । गोमूत्रिका-स्त्री० तृण-विशेष ॥ गोमूत्रतृण । " " (५६) आयुर्वेदीय- । पेड । पेड। " गोमेदक-न० गोमेदमणि । काकोल । पत्रक ॥ गोशकृत्-न० " गोमेदमाण । काकालविष । तेजपात । गोशीर्ष-न० चन्दन । दारचन्दन । गाशर्षिक-पु० द्रोणपुष्पी वृक्ष ॥ गोमा, गुमेका गामेदक-पु० स्वनामख्यातमणि ॥ गोमेदमाण । गोरट-पु० दुःखदिर || दुर्गंधरीर । गोरस-दुग्ध । दाध । तक्र ॥ दूध । दही। छाछ। गोशृङ्ग-पु० बर्बरवृक्ष ॥ बबुरका घोल | महा। गास-पु० बोल ॥ बोल । गारेसजन तक ।। छाछ । गोसम्भवा-स्त्री० श्वेतवा ।। सफेद दूव । गोरक्ष-पु० ऋषभनामक ओपधि ।। ऋषभक । गोसशश-पु० गोरक्षकर्कटी-स्त्री० चिर्भिटा ।। गुरुभाई । गोस्तना-स्त्री. द्राक्ष ॥ दाख । गोरक्षजम्बु-त्री० गोधूम । गोरक्षतण्डुला । घोण्टा गोस्तनी-स्त्री० द्राक्ष । कपिला द्राक्षा ॥ दाख । फल ।। गेहूं । गुलसकरी । बड़ा बेर । भूरे रङ्गकी दाख । गोरक्षतण्डुला-त्री० क्षुद्रलता-विशेष ।। गंगरेन । गोहन्न-ज० गोमय || गोबर । गुलसकरी । गोहरीतकी-स्त्री. विल्ववृक्ष ।। बेलका वृक्ष । गोरक्षतुम्बी-स्त्री० कुम्भतुम्बी ।। गोलतुम्बी । गोहालिया-स्त्री० लताविशेष ॥ गोयालेलता । गोरक्षदुग्धा-स्त्री० क्षुद्रक्षुप-विशेष ॥ अमृतसञ्जी. वङ्गभापा। वनी। गोहित-पु० घोषालता । विल्व ॥ तोरई भेद । गोरक्षी-स्त्री० क्षुद्रक्षुप-विशेष । गोरक्षदुग्धा । कुम्भ बेल । तुम्बी ॥ गोरक्षीवृक्ष । अमृतसञ्जविनी। गोल, गोक्षुर-पु० गोक्षुरक | गोखरू । कद, गोलतोम्बी। चिल्लीशाक ॥ चिल्लीका. [.शाक । गोराच-न. हरिताल ॥ हरताल । गौडिक-न० मद्य-विशेष ॥ एक प्रकारकी मद्य। गोरोचना-स्त्री० स्वनामख्यात पतिवर्ण द्रव्य ॥ मदिरा । गोई-न० मस्तिष्क ॥ मस्तकका घृत । गौडी-स्त्री० गुडादिकृता मदिरा गुडसे बनाई हुई गोल-पु० गोल । मदनवृक्ष ॥ बोर । मैनफल वृक्ष। गोलक-ए० गन्धरसनामक वणिग्द्रव्य । कलाय ॥ गौतमी-स्त्री० गोरोचना ॥ गौलोचन । बोल । मटर। गौसम-पु० स्थावर-विषभेद । गोला-स्त्री० कुनटी ॥ मनशिल । गौर-न० पद्मकेशर । कुंकुम । स्वर्ण ॥ कमल. गोलास-पु० गोमयच्छत्रिका ॥ केसर । केशर । सोता। गोलिह-पु० घण्टापाटलि ॥ कठपाडर । गौर-पु० श्वतसर्षप । धववृक्ष !! सफेद सौ । धों. वृक्ष। गोलोमिका-स्त्री० क्षुद्रक्षुप । गारै जारक-पु० शुक्लजीरक ॥ सफेदजीरा । पश्चिमदेशकी भाषा । गौरत्वक्-पु० इंगुदी वृक्ष ॥ गोंदिनीका वृक्ष । गोलोमी-स्त्री० श्वेतदूर्वा । वचा । स्वनामख्यात. गौरशाक-पु० मधूकवृक्ष-विशेष-महुआभेद । वृक्ष ॥ सफेद दूब । वच । मुँइकेश बङ्गभाषा । गौरसर्षप-पु० श्वेतसषप ॥ सफेद सर्यो । गोवन्दनी-स्त्री० प्रियंगुवृक्ष । पपीतदण्डोत्पल ।। गौरसुवर्ण-न० पत्रशाक-विशेष । यह इसी नामसे फूलप्रियंगु । पीला दण्डोत्पल । चित्रकूट देशमें प्रसिद्ध है। गोवर-न० गोक्षुरक्षुण्ण गोष्ठस्थ शुष्क गोमयचूर्ण ॥ गौराद्रक-पु० स्थावर-विषभेद ।। सखिया अफी- गायके खुरोंसे चरन किया हुआ गोवर । म, कनेर इत्यादि। गोविट्, [] पु० गोमय ॥ गोबर । गौरा-स्त्री० हरिद्रा ॥ हलदी । गौडवास्तूक-पु० गौलोचना। शराव । गोलीढ-पु० विशेष ॥ गोधूमापाथरी औषधिकोष। (५७) , चीड । . गौरिल-पु० श्वतसर्पप । लौहचूर्ण ॥ सफेद सौ । शाक । गजीफल पक्ष । पिडाल । धनहर नेपाल. लोहेका चूर्ण । देशकी भाषा । गौरी-स्त्री. हरिद्रा । दारुहरिद्रा । गोरोचना । प्रन्थिला-स्त्री • भद्रमुस्ता । गण्डदूर्वा । माल दूर्वा ॥ प्रियंगुवृक्ष । मञ्जिष्ठा । ३जदूर्वा । मल्लिका । भद्रमाथा । गाँडरदूव । मालाइव । तुलसी । सुवर्णकदली। आकाशमांसी ॥ हलदी। प्रथिवहीं ( 1 )-पु० ग्रन्थिवर्ण वृक्ष ॥ गठिवन । दारुहलदी । गोराचन । फूलप्रेयंगु । मजीठ । ग्रन्थीक-न० ग्रन्थिक || पपिलामूल । सफेद दूव । माल्लका पुष्पवृक्ष । तुलती। पीला ग्रहाण-त्री० ग्रहण रोग ॥ संग्रहणीरोग । केला । आकाशमांसी, सूक्ष्मजटामांसी । ग्रहणी-स्त्री० अग्न्यविष्ठाननाडी । स्वनामख्यातरोग। गौरीज-न० अभ्रक ।। अभ्रक । ग्रहणीहर-न० लङ्ग ।। लौङ्ग । गौरीपुष्प-पु० प्रियंगुवृक्ष ॥ फूलप्रियंगु । ग्रहद्रुम-पु० शाकवृक्ष । कर्कटशृङ्गी । अजशृङ्गी ॥ गौरीललित-२० हरिताल || हरताल । सागका वृक्ष । काकडा सिंगी, । मेढासिंगी । गौलिक-पु. मुष्ककवृक्ष ।। मात्रा वृक्ष । ग्रह नाश-पु. वृक्ष-विशेष ॥ सतिवन । ग्रन्थि-पु० रोग-विशेष । भद्रमुत्ता । पिण्डालु । ग्रहनाशन-पु." ग्रन्थिपर्णवृक्ष ॥ ग्रन्थिरोग । भद्रमोथा । विण्डा-ग्रहपति-पु० अर्कवृक्ष ॥ आक का वृक्ष । लवा ।पिडालु अर्थात् गोलआलु । गठिवन वृक्ष । ग्रहभीतिजी- द्] पु० चीडानामक गन्धद्रव्य। प्रन्थिक-ज० पिप्लीमूल । ग्रन्थिपर्ण । गुग्गुलु । पीपरामूल । गठिवन । गूगल । ग्रहासी (न् )-पु० ग्रहनाशवृक्ष । सतिवन । प्रन्थिक-पु. करीरवृक्ष || करोलवृक्ष । ग्रहाह्वय-पु० भूताङ्कुशवृक्ष॥ भूतराज के चित्भाषा। अन्यिदला-श्री. मालाकन्द ।। मालाकन्द । ग्रामजनिष्पाव-स्त्री० नखनिष्पावी ॥ निष्पावीभेद। प्रन्धिदूर्वा-स्त्री० दूर्वा-विशेष ।। मालादूब । गांड- ग्रामणी-स्त्री० नीलिका ॥ नीलकावृक्ष । ग्रामिणी-स्त्री." ग्रन्थिपर्ण-न० वृक्ष-विशप ॥ गठिवन । ग्रामीणा-स्त्री० नीलीवृक्ष । पाल चशाक ॥ नीलका ग्रन्थिपर्ण-पु० धनहर नामक सुगन्धद्रव्य ॥ भटे. पेड। पालकका शाक। उर नेपालदेशीय भाषा । ग्राम्यकन्द-पु० ग्रामजातओल ।। देशी जमीकन्द । ग्रन्थिपर्णा-स्त्री. जतुकालता ॥ पपरी, पद्मावती । ग्राम्यककटी-स्त्री. • कष्माण्ड || पेठा । ग्रन्थिपर्णी-स्त्री० गण्डदूर्वा ।। गांडरदूब । ग्राम्यकुङ्कुम-न० कुसुम्भ ॥ कसूमका वृक्ष । ग्रन्थिफल-पु. साकुरुण्डवृक्ष । कपित्थवृक्ष । मदन- ग्राम्यवल्लभा-स्त्री० पालंकय शाक ॥ पालगकाशाक। वृक्ष ॥ सकुरुण्डर गुजराती भाषा । कैथकावृक्ष । ग्राम्या-स्त्री० नीली । नखनिष्पावी ।। नीलका वृक्ष। मैनफलवृक्ष । निष्यावी। ग्रन्थिमफल-पु. लकुचवृक्ष ॥ बडहर । ग्राहक-पु० सितावरशाक ॥ शिरिआरीवा, चौपति- ग्रन्थिमान् (त्)-पु० अस्थिसंहारवृक्ष ॥ हड. आशाक। ग्राहिणी-स्त्री० क्षुद्रदुरालभा । ताम्रमू लावृक्ष । ग्रान्थमूल-न० गुञ्जन || सलगम, गाजर । छोट धमासा । क्षीरवृक्ष । ग्रन्थिमूला-स्त्री. मालादूर्वा || मालादूब । ग्राहिफल-पु० कपित्थवृक्ष ॥ कैथका वृक्ष । ग्रन्थिल-न० पिप्पलीमूल । आर्द्रक, ॥ पीपलामूल। ग्राही-(न् ) पु० अदरख । ग्राही-(न्) स्त्री० मलबन्धक ॥ साठे, जीरा, ग्रन्थिल-पु०विकंकतवृक्ष । तण्डुलीयशाक । विकण्ट, गजपपिल इत्यादि। कवृक्ष । पिण्डालु । चोरक ॥ कण्टाइचौलाईका ग्रीष्मजा-स्त्री० लवणी ॥ लोनाफल । रब । सन्धारी।
(५८) आयुर्वेदीय- घ. घुनवल्लभा-स्त्री." ग्रीष्मपुष्पी-त्री० करुणी पुष्पवृक्ष ॥ ककर विरुणी घनस्कन्ध-पु० कोशाम्रवृक्ष ॥ कोशामवृक्ष । कोकणेदश की भाषा । घनस्वन-पु० तण्डुलीयशाक ॥ चौलाईका शाक । ग्रीष्मभवा-त्री० नवमल्लिका ।। नेवारी । घना-स्त्री. माषपर्णी । रुद्रजटा । मषधन । शंकर- ग्रीष्मसुन्दरक-पु० भद्रशाक-विशेष ॥ गूपाशाक । जटा। ग्रीष्मी-स्त्री० नवमल्लिका | नेवारी। घनामय-पु. खर्जूरवृक्ष ।। खजूरका वृक्ष । ग्रीष्मोवा-स्त्री० घनामल-पु० वास्तूकशाक ॥ बथुआशाक । प्मी-स्त्री." धर्म-पु० रौद्र ॥ घाम, धूप, सूर्यका तेज वर्मविचार्चका-स्त्री. धर्मविचर्ची ॥ घर्मच. ग्लो--पु० कपूर ॥ कपूर । इति श्रीशालिग्रामवैश्यकृते शालिग्रामौषधशब्द र्चिका, चचिका । सागरे द्रव्याभिधाने गकाराक्षरे तृतीयस्तरंगः ॥ ३ ॥ घसणी-त्री • हरिद्रा । हलदी। घन्त्र--न० कुंकुम ॥ केशर । घाटा--त्री० ग्रीवापश्चाद्भाग ॥ गलेके पीछेका भाग। घट-पु० द्रोणपरिमाण । ३२ सेर । पाण्टिका-त्री० धुस्तूरवृक्ष । धत्तरेका वृक्ष । घटालावु-स्त्री. कुम्भनुम्बी || गोलतोम्बी । घास-पु० स्वनामतृण ॥ घास जिसको गाय, घण्टक-पु० क्षुप-विशेष | घण्टावृक्ष । घोडे, घण्टकर्ण-पु. पाटलावृक्ष ॥ पाडरवृक्ष । बकरी इत्यादि खाते है। घण्टकर्णक-पु. कृष्णचित्रक || काले चीताकावृक्ष । घुटि-स्त्री० गुल्क ॥ पावकी गाँट । घण्टा-स्त्री० घण्टापाटलीवृक्ष ।अतिबला। नागवला ॥ घुनप्रिया-स्त्री० अतिविषा । अतीस । कठपाडर, मोखावृक्ष । ककाहया । गंगेरन । घण्टार्क-पु० घण्टापाटलिवृक्ष ।। कठपाडर,मोखावृक्ष। वुग्ट-पु० गुल्फ ॥ घटना । घण्टाकर्ण-पु० घण्टकक्षुप ।। घण्टावृक्ष । घुण्टिक-न० वनकरीप ॥ अन्ने उपले । घण्टापाटली-स्त्री० पाटलि-विशेष ॥ मोखावृक्ष । घुलञ्च-पु० गवेधुका || गरहेडुआ। घण्टारवा-स्त्री० शणपुष्पी विशेष ॥ वनशन, गुन- मृण-न० कुङ्कुम ।। केशर । झुनिया। घूकावास-पु०शाखोटवृक्ष ॥ सिहोरावृक्ष । घण्टाली-स्त्री कोषातकी तोरई । घूर्ण-पु० ग्रीष्मसुन्दरक ॥ गूमाशाक । घण्टाबजि-न० जयपाल || जमालगोटा । वृगावास-पु० कूष्माण्ड || पेठा । घण्टिनीबीज-न." घृत-पु० न० स्वनामख्यातद्रव्य ॥ घो। घन-ज. लौह । त्वच ॥ लोहा । दालचीनी । घृतकरज-पु० करतभेद ॥ धोकरञ्ज । घन-पु० मुस्ता । अभ्रक । कर्पूरमोथा । अभ्रक। घृतकुमारिका-स्त्री० घृतकुमारी, घीकुवार । कपूर । घृतकुमारी-त्री० स्वनामख्यातगुल्म ॥ धिकुवार । धनद्रुम-पु० विकण्टकवृक्ष ॥ गीफल । घृतपर्णक-पु० घृतकरञ्ज ॥ धीकरज । घनपत्र-पु० पुनर्नवा ॥ विषखपरा । वृतपूर-पु० पिष्टक-विशेष ॥ घेवर । घनफल-पु० विकण्टकवृक्ष ॥ गर्जाफलवृक्ष । घृतपूर्णक-पु० करजवृक्ष ॥ कञ्जाका वृक्ष । घनमूल-पु० मारेट ॥ क्षीरमारटवेल | वृतमण्डालका-स्त्री० हंसपदवृिक्ष ॥ लाल रङ्गका घनरस-पु० मोरट । जल । कर्पूर । पालुपर्णी || लज्जालु । क्षीरमोरट । जल । कपूर । चुरनरहार । घृतमण्डा-स्त्री० वायसोली || माकडहाता वङ्गभाषा घनवल्ली-स्त्री अमृतत्रवालता ॥ अमृतवल्ली । धनवास-पु० कूष्माण्ड ॥ पेठा । घृताचीगर्भसम्भवा-स्त्री० स्थूलैला ॥ बडी घनसार-पु० कर्पूर । वृक्षभेद । जल ॥ कपूर। घृताह-पु० सरलद्रव ॥ सरलका गोंद । - घृता-स्त्री" %3D इलायची। वृक्षभेद । जल।
औषधिकोष । (५९) वत आTETTE घोषक-पु० घृष्टि-स्त्री, वाराही । अपराजिता ॥ वाराहीकन्द । चक्रमक-पु. चर्मकारालुक । कोयलपुष्पलता । चक्रलताम्र-पु० बद्धरसाल वृक्ष ।। मालदये आमः । घृष्टिला-स्त्री. चित्रपर्णिका | पृश्निपणी ॥ पिटवन चक्रलक्षण-स्त्री० गुडूची ॥ गिलोय । भद । पिठवनं । चक्रला-स्त्री० उञ्चा।। निविषाघास । घोटिका-श्री. वृक्षभेद ॥ घोटिकावृक्ष । चक्रवर्तिनी-त्री० जनीनामक गन्धद्रव्य । रजनी. घोण्टा-त्री० शृगालकोलि ॥ एक प्रकारका वेर । गन्धा । अलक्तक । जटामांसी । पर्पटी ॥ चक्र. घोर-न० विप । गुवाकवृक्ष | विष । सुपारीका. औषधी । रजनीगन्धा पुष्पवृक्ष । लाखका वृक्ष । रङ्ग । बालछड, कनुचर । पद्मावती, 'पपरी । घोरपुष्प-न. कांस्य || कांसी । चक्रवर्ती-(न्) पु० वास्तूक ॥ वथुआ । घोर-स्त्री देवदालीलता ॥ घबरवेल । सोनैया । चक्रशल्या-स्त्री० काकतुण्डी। श्वेतगुञ्जा।। फौआ- घोलन तक || एक प्रकारका महा । टोडी । सफेद धुंधुची। घोली-त्री० पत्रशाक-विशेष | घोलीशाक । चक्रश्रेणी-त्री० अजशृङ्गीवृक्ष । मेढाशिंगी । घोप-न. काँस्य ॥ काँसा । चक्रसंज्ञ-न. वन ॥ रांग। घोष-पु० घोषकलता । काँस्य॥ तोरईभेदा । काँसा । चक्रा-स्त्री. नागरमुस्ता । ककटगी ॥ नागर. तिक्तरसफललता-विशेष | बड़ी मोथा । काकडशिंगी। तोरई । तोरई। चक्राहा-स्त्री • सुदर्शना ।। सुदर्शनलता । घोषा-स्त्री. मधुरिका । कर्कटशृङ्गी ।। सौंफ, सो. चक्राङ्गो-स्त्री० कटुरोहिणी । हिलमोचिका । या। काकडाशिङ्गी। मञ्जिष्ठा । कर्कशृङ्गी । सुदर्शना ।। कुटकी । घोपातको-स्त्री. श्वेतपोषक ॥ घियातोरई । हुरहुरशाक । मजीट । काकडाशिंगी । सुदर्शन। इति श्रीशालिग्रामवैश्यकृते शालिग्रामौषधशब्द- चक्रांधिवासी (न् )-पु. नागरंग वृक्ष । नारं. सागरे द्रव्याभिधाने प्रकाराक्षरे चतुर्थस्तरङ्गः ॥ ४ ॥ गीका वृक्ष । च चक्राह्व-पु० चक्रमद्द । पमाड । चक्र-ना तगरपुष्प || तगर । चक्रिका-स्त्री० जानु ।। पांवका घुटना । चक्रकारक-न०व्याघनखनामक गन्धद्रव्य ॥ चक्री-(न् )-पु० चक्रमई । तिनिश व्यालनख।। व्याघनख । चकवड, पमार । तिरिच्छ वृक्ष । वावनुह । चक्रकुल्या-स्त्रो० चित्रपर्णी लता ॥ पिठवन । चचेण्डा-स्त्री० फललताविशेष। चिचैंडा-चचेंडा । चक्राज-पु. चक्रमवृक्ष | चकवड, पभार । चञ्चला-स्त्री० पिप्पली ।। पीपर । चक्रगुच्छ-पु० अशोकवृक्ष ॥ अशोकका पेट । चञ्चु-पु० क्षुद्रचञ्चुवृक्ष । एरण्डवृक्षारक्तैरण्डवृक्ष । चक्रदन्ती-स्त्री० दन्तीवृक्ष ॥ दन्तीवृक्ष । नाडोचशाक ।। छोटा चञ्चुका वृक्ष । अरण्डका चक्रदन्तीबीज-न० जयपाल | जमालगोटा । पेड । लालअरण्डका वृक्ष । नाडीका शाक । चक्रनख-पु० व्याघ्रनखनामक गन्धद्रव्य ॥ वाचनुहा | चञ्चु-स्त्री० पत्रशाक-विशेष ।। चेवुनाशाक । चक्रनामा-(न्) पु० माक्षिकधातु ।। सोनामावी । चञ्चुपत्र-पु० चचुशाक ॥ चेउना शाक । चक्रनायक-पु० व्याघनख ।। वाचनु । चञ्चुर-पु" चक्रपद्माट-पु. चक्रमक वृक्ष ।। चकवड, पमार। चटका-स्त्री० पिप्पलीमूल ।। पाप। मूल । चक्रपरिव्याध-पु० आरग्वध वृक्ष ।। अमलतास । चटकाशिर ( सू)न." चक्रपर्णी-त्री० चक्रकुल्या लता ।। पिठवन । चटिका-स्त्री" चक्रमई-पु० स्वनामख्यात वृक्ष ॥ चकवडापमार । चणक-पु. क्षुद्रपत्रशस्य-विशेष || चना अन्न । स्वनामख्यातवृक्ष ।। चकवड । पमार । चणकाम्लक-न. चणकलवण || चनाखार । . " (६०) आयुर्वेदीय- चणद्रुम-पु० क्षुद्रगोक्षुर ।। छोटे गोखुरु । चतुःसम-न. मिलितचन्दनागरुकस्तूरीकुंकुम- चणपत्री-त्री रुदन्तीवृक्ष || रुदन्ती । रूपम् । मिली हुई चन्दन, अगर, कस्तूरी,केशर चणिका-त्री• तृण-विशेष ।। चाणका घारा । इनको चतु:सम कहते है। चणाद्रम-पु० क्षुद्रगोक्षुर ॥ छोटा गोखरू । चदिर-पु० कपूर ॥ कपूर । चण्ड-पु० तिन्तिडीवृक्ष । वृक्का ।। इमलीका वृक्ष । चन्दन-न. स्वनामख्यात सुगन्धलहित वृक्ष ॥ असवरग । चन्दनका पेड। चण्डा-स्त्री० शंखपुष्पी । लिङ्गिनालता । कपिकच्छु। चन्दगोपी-स्त्री० सारिवा-विशेष ।। कालीसर । आखुकर्णी । श्वेतदुर्वा । धनहरगन्धद्रव्य ॥ * ॥ चन्दनपुष्प-न० लवङ्ग ।। लेग । शंखाहूली । पञ्चगरिया । कौंछ । मूसाकानी । चन्दनशक-वजक्षार वनखार । सफेद दूब । चोरनाम गन्धद्रव्य, भेटेउर नेपा- चन्दना--स्त्री० शारिवा-विशेष ।। गौरीसर । लकी भाषा चन्दनापा-स्त्री० गोरोचना ।। गौलाचन । चण्डात-पु० करवीर पुष्पवृक्ष ॥ कनरेका वृक्ष । चन्द्र-न०वण । चुक्र । कामिल ।। सोना ।चूक। चण्डालकन्द-पु० कन्द-विशेष । चण्डालकन्द । कवीलाओपधी। चण्डालिका-स्त्री० औषधी-विशेष ।। चण्डाल. चन्द्र-पु० कर्पूर । स्वर्ण । जल । रौप्य । कम्पिल । वृक्ष । सोना । जल । रूपा । कबीला । चण्डिल--पु. वास्तूक ।। बथुआशाक । चन्द्रक-न. श्वतपारच || सकेद मिरच । वण्डीकुसुम-पु. रक्तकरवीरवृक्ष ।। लाल कनेरका चन्द्रक-पु० मयूरपुच्छ गोलाकारचन्द्र ।। मोरकी वृक्ष । पूछका गोल कार चांद । चतुप्पत्री-स्त्री० क्षुद्रपाषाणभेदी ॥ छोटा पाखान- चन्द्रकान्त-ज० श्रीखण्ड चन्दन । शुक्लोत्पल ।। भेद । मलयांगीर चन्दन ।। सफेद कुमुद । चतुप्पी-स्त्री० क्षुद्राम्लिका । आवातेशाक । चन्द्रकान्त-पु० करव । स्वनामख्यात माणि ।। चतुप्पला-स्त्री. नागबला ॥गङ्गेरन । सफेद कुमुद । चन्द्रकान्तमाण । चतुप्पुण्ड-पु० मिण्डावृक्ष, ॥ भिण्डकिा वृक्ष । चतुरङ्गा-स्त्री० घोटिकावृक्ष ॥ धोटका वा घोडी. चन्द्रपुप्पा स्त्री. श्वेतकण्टक.रो ।। सफेद कटेहरी । वृक्ष। चन्द्रप्रभा-स्त्री० वाकुची । बाब वी । चतुरङ्गुलं,-पु० आरग्वधवृक्ष ॥अमलतास का वृक्ष । चन्द्रभूति-न० रौप्य ॥ चाँदी। चतुरम्ल-न० अम्ल वेतसवृक्षाम्लहजम्बीर-चन्द्ररेखा-स्त्री० बाकुची ।। वायची। निम्बुकैः ॥ अम्लबैत १ विषविल, २ बडी ज. | चन्द्रलेखा-स्त्री. म्बरि ३ नीबू ४ यह चतुरम्ल चन्द्रलोहक-नरौप्य ॥ रूपा । चतुरूषण-न० पिप्पलीमूलसंयुक्त त्रिकुटा । सौट १ चन्द्रवल्लरी-स्त्री० सोमवल्लरी । ब्राह्मी ॥ सोम- मिरच २ पीपल ३ पापला मूल ४ यह चतुरू. लता । ब्रह्मीघास । षण है। चन्द्रवल्ली-स्त्री. प्रसारणी । माधवीलता । सोम- चतुर्थिका-स्त्री० पलारिमाण ८ तोले । वल्ली ॥ पसरन । माधवी पुष्पलता । सोमलता । चतुर्लवण-न० सैन्धव १ सौवर्चल २ विड ३ सामु- | चन्द्रवाला-स्त्री० बृहदेला - बडी इलायची । द्रलवण ४ ॥ सैंधानान १ चोहारकोडा २ विरि- | चन्द्रशूर-न० फल-विशेष ॥ हालों । यासंचरनान ३ समुद्रनान ४ । चन्द्रसंज्ञ-पु० कर्पूर ॥ कपूर । चतुर्बीज-न० मोथकाचन्द्रशूरञ्च कालाजाजीयवा- चन्द्रसम्भावा-स्त्री. सूक्ष्मैला ।। गुजराती इलायची। निका |मेथी १ हालाँ २ कालाजीरा ३ अज छोटी इलायची । मायन '४ यह चतुर्बीज हैं। चन्द्रहास-न० रोप्य || चांदी रूपा । है १ 1 TY SALAIMEROurmerandmadhadine UPER STARMOHANGA औषधिकोप। (६१) भेद । चम्प-पु०॥ चन्द्रहासा-स्त्री० गुडूची ॥ गिलोय। चर्मद्रुम-पु. भूजवृक्ष ।। भोजपत्रका वृक्ष । चन्द्रा-स्त्री० एला । गुडूची । इलायची, गिलोय । चमरंगा-स्त्रीआवर्तकीलता ।।भगवतवल्ली कोक- चन्द्रिका-स्थूलैला । कर्णकोय । मल्लिका । श्वेत णदेशीय भाषा । कण्टकारी । मेथिका । सूक्ष्मैला । चन्द्रशूर ॥ चर्मसम्भवा-स्त्री० एला । इलायची । बडी इलायची । कनफोडावेलामल्लिकापुष्पलता। चर्मी (न्)-पु० भूर्जवृक्ष कदलीवृक्ष ॥ भोजपत्र- सफेदकटेहरी । मेथी। छोटी वा सफेद इलायची वृक्ष । केलावृक्ष । हालें । चलदल-पु० अश्वत्थवृक्ष ॥ पीपलका वृक्ष । चन्द्रिकाम्बुज-न० सितोत्पल ॥ सफेद कमल । चलपत्र-पु०॥ चन्द्रिल-पु. वास्तूक || बथुआशाक । चला-स्त्री० पिप्पली । सिह्नक || पीपल । शिला. चन्द्रा-स्त्री० बाकुची ॥ बावची। चन्द्रष्टा-त्री० उत्पलनी । कुमुदनी । चलातंक-पु० वातरोग ॥ वायुरोग। चपल-पु० पारद । प्रस्तर-विशेष ॥ पारा पत्थर - चवि-स्त्री० चीवका ॥ चव्य । चविक-न" चपला-स्त्री० पिप्पली । मदिरा । विजया ॥ पीपला चधिका-त्री" सुरा। भाङ्ग । भङ्ग। चवी-स्त्री." चमत्कार-पु० अपामार्ग ॥ चिरचिटा। चव्य-पु." चमरिक-पु० कोविदारवृक्ष ॥ कचनारका वृक्ष । चव्यक-न." चव्यजा-स्त्री० गजपिप्पली || गजपीपल । चम्पक-न० कदलीविशेष । चम्पकपुष्य ॥ सुवर्ण |चव्यफल-न" चव्या-स्त्री० चविका । वचा । कार्यासी ॥ चव्य । चम्पक-न० स्वनामख्यात पीतपुष्पवृक्षविशेष॥चम्पा धच । कास। वृक्ष । चशेरुका-स्त्री० अजशृङ्गी ॥ मेढाशिङ्गी । चम्पकरम्भा-त्री० सुवर्णकदली ॥ पाला केला । चषक-पु० न० मद्यभेद । मधु । एक प्रकारको चम्पकालु-पु० पनस ॥ कटल, कटहर । मादरा। सहत । चम्पकोष-पु० " चक्षु(स )-न० मेषशंगीवृक्ष ।। मेंढाशिडी । चम्पाल-पु" चक्षुर्वहन-न." चर-पु० कपईक ॥ कौडी। चक्षुप्य-न० प्रपौण्डरीक । सौवाराञ्जन । खपरी चरणग्रन्थि-० गुल्फ ॥ पावकी गाँट । तुत्थ ।। पुण्डरिया । श्वेतसुर्मा । खपरियातुत्थ । चरणायुध-पु० कुक्कुटः॥ मुरगा । चक्षुप्य-पु० कतकवृक्ष । पुण्डरीकवृक्ष । सोभाञ्जन. चरित्रा-स्त्री० तिन्तिडीवृक्ष ॥ तेतुल वंगभाषा । वृश्च । रसाञ्जन ॥ निर्मली फल । पुण्डरिया । चर्मकषा-स्त्री० • गन्धद्रव्य-विशेष ॥सातला, थूह सेंजिनेका वृक्ष । रसोत । रका भेद । चक्षुष्या-त्री० कुलत्थिका । अजशङ्गी । अरण्य. चर्मकसा-स्त्री कुलस्थिका।।कुन्थीपत्थर । मेढाशिङ्गी।वनकुल्थीं । चर्मकारी-स्त्री." चाकचिच्चा-स्त्री० श्वेतमुद्दा ॥ सफेद वोना । चर्मकील-पु० अर्श ॥ बघासीर । चाङ्ग-पु० चाङ्गेरी । अम्ललोना । चर्मचित्रक-न० श्वतकुष्ठ ॥ सफेद कोढ । चाङ्गेरी-स्त्री० अम्ललोणिका अम्लिलोना । चभण्वती-स्त्री० कदला ॥ केला । चाणक्यमूलक-न० मूलक-विशेष ॥ छोटी मूली । चर्मदूषिका-स्त्रा• दगुरोग । दादरोग । चाण्डाली-स्त्री. लिङ्गिनी ॥ पञ्चगुरिया । केला । चम्पाके फूल । .
(६२) आयुर्वेदीय- चून । चातुर्जातक-न• गुडत्वक् १ एला २ तेजपत्र ३ चिक्कण-धु० पुगवृक्ष ॥ सुपारीका वृक्ष । नागकेशर ४ ॥ दालचीनी १ इलायची २ तेज- चिक्कणा-स्त्री० पूगफल ।। सुपारी । पात ३ नागकेशर ४। चिक्कणी-स्त्री चातुर्थकन्वर-पु० प्रतिचतुर्थदिनभव ज्वर ॥४ चौ. चिक्कस-पु० यवचूंग ॥ जौका थिया अर्थात् चार दिन पीछे जो ज्वर आवै । चिक्का-स्त्री० पूगफल || मुपारी । चातुर्भद्र-न० नागरादिद्रव्यचतुष्टयम् ॥ सोंठ १ चिचिण्ड-पु० फल-विशेष ॥ चचैंडा । अतीस २ नागरमोथा ३ गिलोय ४। चिञ्चा-स्त्री० तिन्तिडीवृक्ष ॥ इमलीका वृक्ष | चिञ्चाटक-पु० चिञ्चोटक ।। चिञ्चोटकतृण । चान्द्रक-न० शुण्ठी ।। सोंठ । चान्द्राख्य-न. आईक ।। अदरख । चिञ्चा-स्त्री० • गुञ्जा ।। धुंधुची। चान्द्री-स्त्री. श्वेतकण्टकारी ।। सफेद कटेहरी । चिञ्चाम्ल-न० अम्लशाक ॥ चूका । चिञ्चासार-पु." चायपट-पु. प्रियाल वृक्ष ॥ चिरोंजीका वृक्ष । चामरपुष्प-पु० गुवाक । आम्र । काश । केतक॥ चिञ्चोटक-पु० तृण विशेष ।। चिञ्चोटकतृण । सुपारी । आम । काँस । केवरा । चित्र-न० कुष्ठरोग विशेष । एक प्रकारका कोट चिक्र-पु. एरण्डवृक्ष । अशोकवृक्ष । चित्रक बंद चामरपुप्पक-पु० चामकिर-न० स्वर्ण । धुस्तूर ॥ सोना । धनरा । अण्डका पेड़ । अशोकका वृक्ष । चीतेका वृक्ष चाम्पेय-पु. चम्पक । नागकेशर ॥ चम्पावृक्ष । चित्रक-पु० स्वनामख्यातवृक्ष । एरण्डवृक्ष ।। नागकेशर। चीतावृक्ष । अण्डका पेड़ । चाम्पेयक-न० किजल्क । नागकेशरपुष्प ॥ चित्रकर्मा (न् )-पु. तिनिशवृक्ष।तिरिच्छवृक्ष। कमल केशर । नागकेशर । चित्रकृत-पु. तिनिशवृक्ष । तिरिच्छवृक्ष । चित्रगन्ध-न० हरिताल || हरताल । चार-न० कृत्रिमावष || कृत्रिमविष । चार-पु० प्रियालवृक्ष ॥ चिरौंजीका वृक्ष । चित्रतण्डुल-न० विडङ्ग ॥ वायविडङ्ग । चित्रतण्डुला-स्त्री." चारक-पु." चारटिका स्त्री० नलनिामगन्धद्रव्य ।। नलिका । चित्रत्वक्-( च )-पु० भूजवृक्ष ॥ भोजपत्रवृक्ष चारटी-स्त्री० पद्मचारणीवृक्ष । भूम्यामलकी ॥ चित्रदण्डक-पु० ओल्लवृक्ष ॥ शूरन, जमीकन्द गैंदेकावृक्ष । भुइआमला। चित्रदेवी-त्री महेन्द्रवारुणी ॥ बड़ी इन्द्रायण । चारिणी-स्त्री० करुणीवृक्ष ।। ककराविरुणी ।कोक- चित्रपत्रिका-स्त्री० कापिस्थपर्णी । द्रोणपुष्पी ।। कपित्थपर्णी । गूमावृक्ष । णदेशकी भाषा । चित्रपत्री-स्त्री० जलपिप्पली ।। जलपपिल । चारित्रा-स्त्री० तिन्तिडीवृक्ष ।। इमलीका वृक्ष । चित्रपदा-स्त्री. गोधापदीलता || हंसपदी, लज्जालु चारुक-पु० शरबीज ।। सरपतेके बीज । लाल रंगका। चारकेशरा-स्त्री० भद्रमुस्ता । तरुणीपुष्प ।। नागर चित्रपार्णका-स्त्री० पृश्निपर्णी भेद ॥ पिठवनभेद । मोथा। सेवतीके फूल । चित्रपर्णी-त्री० पश्निपर्णी । कर्णस्फोटा जल- चारुनालक-न० रक्तपद्म ।।लालकमल। पिप्पली । द्रोणपुष्पी । माझेष्ठा ॥ पिटवन । चाहपर्णी-स्त्री० प्रसारणी ।। पसरन । कनफोडालता । जलपीपल, पनिसगा | गुमा । चारुफला-स्त्रो० द्राक्षा ।। दाख । मुनका, फारसी मजीठ । भाषा । चित्रपुष्प-पु० शर ।। रामशर । चिकित्सा-स्त्रो० रोगप्रतिकार।। रोगका नाशकरना। चित्रपुष्पी-स्त्री० अम्बष्ठा ।। पाठ । चिकुर-पु० वृक्ष-विशेष । चित्रफला-स्त्री० चिभिंटा । मृगवीरु । लिर्गिनी। .
औषधिकोष। (६३) शाक । ॥ । ककडी । महेन्द्रवारुणी । वातीकी । कण्टकारी।। गुरुभीहूं। चिल्ली-स्त्री० लोध्र । पत्रशाकभेद ॥ लोध । चिल्ली सबिनी। पञ्चगुरिया । बडा इन्द्रफल । वैगुना कटेहरी । कटेदी । चिबुक-पु० मुचकुन्दवृक्ष | मुचुकुन्द पुष्पवृक्ष । चित्रभानु-पु० चित्रकवृक्ष । अकवृक्ष । चीतावृक्ष। चिल्लधारिणी-स्त्री० श्यामालता || कालीसर । आकका वश्च । चीडा-स्त्री० गन्धद्रव्य-विशेष ॥ चीट। चित्रवीर्य-पु० रक्तैरण्ड || लल अण्ड । चीत-न० ससक || सीसा । चित्रा-स्त्री० मूषिकपर्णी । गोडुम्बा । सुभद्रा । चीन-पु० ब्रीहिभेद ॥ चीना । दन्तिका । मृगारु । गण्डौं । मञ्जिष्ठा ॥ मू- चीनक-पु० धान्य-विशेष कंगुनी । चीनकर्पूर ॥ साकानी । गोडुम्बाककडी गम्भारी । दन्तीवृक्ष । चनाशन । केगुनीधान । चिनिपाकपूर । धिनी । गांडरव । मजीट । चीनकर्पूर-पु० कर्पूर-विशेष ॥ चीनीयाकपूर । चित्रांग--न० हिंगुल । हरिताल || सिंगरफ। हरि- चीनज-न० लौह । तीक्ष्ण लौह ॥ लेहा । इस्पात्। ताल। चीनापिष्ट-न० सिन्दूर । सांसक || सिन्दूर सीसा । चित्रांग-पु० चित्रका । रक्ताचित्रक ॥ चीतेका पेड। चीनककपूर-पु० कर्पूर-विशेष ॥ चीनिया कपूर । लाल चीतेका पेड। चीनवङ्ग-न० सीसक सीसा । चित्रांगी-स्त्री० मञ्जिष्टा ।। मजीठ । चीनाकर्कटी-स्त्री. चित्रकूटदेशजकर्कटी ॥ चीना. चित्रापस-न० तीक्ष्ण लौह ।। इसपातलोहा । चित्राक्षुप-पु० द्रोणपुष्पी ।। गूमा चीर-न० सीसक । सासा। चिन्तिडी-स्त्री० तिन्तिडी ।। ईमलीका वृक्ष । चीरपत्रिका-स्त्री० चञ्चुशाक । चिन्न-पु. शस्य- विशेष ।। चना । चीरपणं-पु. शालवृक्ष ॥ सालवृक्ष । चिपिट-पु० धान्यावकारज भक्षद्रव्य-विशेष ।। चीरितच्छदा-स्त्री. पालङ्कयशाक ॥ पालकका चौला चिउर। चिपिटक-पु० " चीरुक-न० फल-विशेष ॥ उर बङ्गभाषा । चिपिटा-स्त्री० गुण्डसिन तृण ।। गुण्डासिनी घास । चीणपर्ण-पु० निम्बवृक्ष । ख वृक्ष नीमका चिप्प-पु० नखरोग-विशेष ॥ नखरोग । पेड । खजूरका पेड। चिमी-पु० पट्टवृक्ष ॥ पटुआशाक । चुक्र-न• अम्लद्रव्य-विशेष । पत्रशाक-विशेष । चिरजीवक-पु० जीवकवृक्ष || जीवक औषधी । कालिक विशेष । सन्धान-विशेष ॥ विषविला। चिरजीवी (न् )-पु० जीवकवृक्ष । शाल्मलिवृक्ष। चूकाशाक । काञ्जिभेद । चूक । जीवक औषधी । सेमरका वृक्ष । चुक्र--पु. अम्ल ।अम्लवेतस ॥ खट्टा रस । अम्ल- चिरञ्जीवी (न् )-पु० " वंत । नीबू । चिरतिक्त-पु. भूनिम्ब ।। चिरायता । चुक्रक-न० शाक-विशेष ॥ चकाका शाक । चिरबिल्व-पु० करञ्जवृक्ष ।। कञ्जाका वृक्ष । चुक्रफल-न० वृक्षाम्ल ।। इमली । चिरपाकी (न् )-पु० कपित्थ ॥ कैथका वृक्ष । चुक्रा-स्त्री० चगिरी । तिन्तिडी ॥ अम्बिलोनशाक । चिरपुष्प-पु. बकुलवृक्ष ।। मौलसिरीका इमलीका वृक्ष । चिराटिका-स्त्री. श्वेतपुनर्नवा ॥ विषखपरा । चुक्राम्ल-न० वृक्षाम्ल || विषाविल। चिरातिक्त-पु. भूनिम्ब ।। चिरायता । चुक्राम्ला-त्री० अम्ललोणिका । चिञ्चा ॥ अम्ल- चिरिबिल्व-पु० करञ्जवृक्ष ।। कञ्जाका पेड। लोणिगाशाक । इमली। चिर्मिटा-स्त्री० कर्कटीभेद || गुरुभहू मुकुर । चुक्रिका-स्त्री० अम्ललेणिका । कुचाङ्गेरी॥चाङ्गेरी। चिर्भटी-स्त्री० कर्कटी ॥ ककडी । चूकाशाक। चिल्लभक्ष्या-स्त्री० हटविलासिनी ॥ छोटीनखी । चुचु-पु. सुनिष । रणकशाक ॥ शिरिआरीशाक । शाक । । वृक्ष । EMARRIAL (६४) आयुर्वेदीय- PERSNEHALEEPAL " " - छ. चुचुक-न. स्तनाग्र ॥ स्तनका अग्रभाग । चारपुष्पिका-स्त्री० चुम्बक-पु. कान्तलाहभेद । चुम्बकपत्थर । चोरपुष्पी-स्त्री चुल्लि-चुल्ली--स्त्री० पाकाथ आग्नस्थान ॥ चल्हा । चोरस्नाय-पु. काकनासालता | कौआठोडी । चूडामाण-पु० गुञ्जा ॥ धुंधुची । चोरा-स्त्री० चोरपुष्पी ॥ चोरहुली । चूडाम्ल-न० वृक्षाम्ल ॥ विषाविल । चोराख्य-पु० स्त्री० चूडाला- स्त्री० उच्चटातृण । श्वेतगुञ्जा । नागरमुस्ता॥ चोलकी-[ न ]-पु० करीरं । नारङ्ग । करील । निर्विषीघास । सफेद धुची ॥ नागरमोथा । नारङ्गीका वृक्ष । चत-पु० आम्रवृक्ष ।। आमकावृक्ष । चोरचिनी-श्री बचा-विशेष ॥ चोपचीनी । चतक-पु० चौर-पु० स्त्री० चोरपुष्पी ॥ चोरहूली । चर्ण-न० सम्पेषणजातरज ॥ चूरन, चन, चुन । चौष-पु. पार्श्वज्वाला। चर्णक-पु० सक्तु ॥ सत्तू । इति श्रीशालिग्रामवैश्यकृते शालिग्रामौषधशब्दला. चर्णखण्ड-न० कर्कर ।। काफर । गरे द्रव्याभिधाने चकाराक्षरे घष्ठस्तरङ्गः।। ६ । चर्णपारद-पु० हिंगुल || सिङ्गरफ। चूर्णशाकाङ्क-पु० गौरसुवर्णशाक । चित्रकूटदेश- छग-पु. स्त्री० छागल ॥ बकारा । प्रसिद्ध। चूर्णि-स्त्री० कपईक ।। कौड़ी। छगण-पु. न० करीष ॥ सूखा गोवर, छगल, छगलक-पु. स्त्री० छाग ॥ बकरा । चूर्णिका-स्त्री • सक्तु ।। सत्तू। छगला-त्री० वृद्धदारक वृक्ष ॥ विधारावृक्ष । चूर्णी-स्त्री० कपईक ।। कौड़ी। चूलिक-न० तभृष्ट गाधूमर्चेण ।। लचैई । छगलायंत्री-स्त्री." छगलाण्डी-स्त्री० चलिका-स्त्री० हस्तिकणमल||हाथीके कानका मैल चेतकी-स्त्री. हरीतकी । हिमाचलभवा त्रिशिरा छगलान्त्रिका-स्त्री" हरीतकी । जातीपुष्प ॥ हड । हिमाचलमें छगलान्त्री-बी." पैदा होनेवाली 'चेतकी नामवाली हड़" छगली-स्त्री० चमेलीका वृक्ष। छटाफल-पु० गुवाकवृक्ष ॥ सुपारी । चेतनकी-स्त्री० हरीतकी ।। हड़ । छत्र-पु० मूलेन पत्रेण वचाकारवृक्ष ॥ छात्रियावृक्ष । चेतनीया-स्त्री० ऋद्धि नाम औषधी ॥ ऋद्धि । छत्रक-पु. रक्तवर्ण कोकिलाक्षवृक्ष ॥ लाल ताल- चेलान-पु० फललता-विशेष ।। तरबूज । मखाना। चेलाल-पु० फललता-विशेष । लतापनस । छत्रगुच्छ--पु० गुण्डतृण ॥ गुण्डयास | चैत्य-पु० विल्ववृक्ष ।। बेलका पेड़ । छत्रपत्र-न० स्थलपद्म ॥ गैंदेका वृक्ष । चैत्यद्रु-पु० अश्वत्थवृक्ष ।। पीपलका वृक्ष । छत्रपत्र-पु० भूजवृक्ष । सप्तपर्ण ॥ भोजपत्र । चैत्यवृक्ष-पु० छतिवन । चोक-न० कटुपर्णीमूल ॥ चोक । छत्रा-स्त्री० मधुरिका । शतपुष्पा । धन्याक । मञ्जि- चोच-न० गुडत्वक् । तेजपत्र तालफल । कदली. ष्ठा ॥ सोआ। सौंफ । धनिया । मजीठ । फल । नारियल । दालचीनी। तेजपात । छत्राक-पु० जालबबूंरवृक्ष ॥ जालबबूरका वृक्ष । ताडकाफल । केलेकी फली । नारियल । छत्राकी-स्त्री. रास्ता ।। रायसन । चोर-स्त्री० कृष्णाशटी ॥ शटीभेद । छत्रातिच्छत्र-पु० जलोद्भूत छत्राकार सुगंधतृण ।। चोरक-पु० स्पृक्का । धनहर ॥ असवण । भटेवर जलमें, उत्पन्न होनेवाले छत्रके आकार सुगंधी नेपालदेशकी भाषा । तृण । चोरपुष्प-न० चोपुष्पी ॥ चोरहुली छत्राधान्य-न० धन्याक ॥ धनिया। । " " औषधिकोष। (६५) ॥ अ. कै करना। छत्रिका-स्त्री० शिलन्त्रि । भुईकोड । छेलु-पु० सोमराजी ॥ बायची। छद-पु० ग्रन्थिपर्णीवृक्ष । तमाल !! गांईवना । छालङ्ग-पु० मातुलुङ्ग ॥ बिजोरा नीबू । श्यामतमाल । इति श्रीशालिग्रामवैश्यकृते शालिग्रामौषधशब्दसागरे छदन-न० तमालपत्र ॥ तेजपात । द्रव्याभिधाने छकाराक्षरे सप्तमस्तरङ्गः ॥ ७ ॥ छदपत्र-पु० भूर्जपत्रवृक्ष ।। भोजपत्रवृक्ष । छमिका-त्री० गुडूची । गिलोय । जकुट-न० वार्ताकुपुष्य ॥ बैंगनके फूल । छन्द-पु० विष ॥ ज र । जगत्-न० सौराष्ट्रमृत्तिका ॥ सोरटकी मिट्टी अर्थात् छई,छईन-न० वमन ॥ उल्टी करना, गोपीचन्दन । छईन-पु० निम्बवृक्ष । मदनवृक्ष ।। नीमका वृक्ष । जगल-पु० सुराकल्क । मनफलका वृक्ष । जघन-न- कटि॥ कमर । छर्दापनिका-स्त्री० कर्कटी ॥ ककडी । जघनकूपक-पु० कुकुन्दर । छर्दि-स्त्री० वमिरोग ॥ कै करना, उल्टी करना । जघनेफला-स्त्री० काकोदुम्बरिका । कठमर । छर्दिका-स्त्री. विष्णुक्रान्ता ॥ कोयललताभेद । जंघल-न० विष || जहर । छर्दिकारिपु-पु० क्षुद्रैला || छोटी इलायची । जंघा-स्त्री० गुल्फोर्बु जान्वधोभाग ।। जाङ्ग, जाँघ । छर्दिन-पु० निम्बवृक्ष ।। नीमका वृक्ष । जंघाशूल-न. जंघावेदना ॥ जाँधको पीडा । छल्लि-स्त्री० त्वक् ।। छाल । जटा-स्त्री० जटामांसी। रुद्रजटा। शताबरी। कपि. छाग, छागल-पु. स्त्री स्वनामख्यात पशु ॥ कन्छु । वृक्षमूल।। जटामांसी, बालछड । शंकर- बकरा। जटा । शतावर । कौंछ । वृक्षकी जड । छागलान्त्रिका-स्त्री. वृद्धदारक ॥ विधारावृक्ष । जटामांसी-स्त्री० स्वनामल्यातसुगन्धिद्रव्य-विशेष } छात्र-न. मधुविशेष ॥ एक प्रकारका-मधु । जटमांसी, कतुचर, बालछड । छात्रदर्शन-न० हैयङ्गवीन । एक दिनका घी । जटायु-पु० गुग्गुलु ।। गूगल । छादन-पुं० नीलाम्रातकवृक्ष ॥ नीली कटसरैया । जटाल-पु० कर्पूर । वट । मुष्कक । गुग्गुलु ॥ छिकनी-स्त्री. वृक्ष-विशेष ॥ नाकछिकनी । कचर । वडका वृक्ष। मोखावृक्ष। गूगल औषधी । छित्ति-पु. करंजुवृक्ष || करंजुआका पेड । जटाला-स्त्री० जटामांसी ॥ बालछड, जटामांसी। छिद्रवैदेही-स्त्री. गजपिप्पली ॥ गजपीपल । जटावती-स्त्री० जटामांसी ॥ वालछड । छिद्रान्त [र -पु० नल || नरसल । जटावल्ली-स्त्री० रुद्रजटा । गन्धमांसी ।। शंकरजटा। छिद्राफल-पु. मायाफल || मायफल वङ्गमाषा । जटामांसीभेद । छिन्नग्रन्थिका-स्त्री० त्रिपार्णका ॥ त्रिपर्णिकानाम. जटि-स्त्री० प्लक्षवृक्ष ॥ पाखरका वृक्ष । कन्द । जटिल-पु." छिन्नपत्री-स्त्री० अम्बष्ठा ।। भोईया वृक्ष । जटिला-स्त्री. जटामांसी । पिप्पली । उच्चटा । छिन्नरूह-पु० तिलकवृक्ष । तिलकपुष्पवृक्ष । दमनकवृक्ष । वचा || जटामांसी, बालछड । पी- छिन्नरुहा-स्त्री० गुडूची । स्वर्ण केतकी । शल्लकी ॥ पल । उच्चटाघास । दवना, दोनी वृक्ष । वच । गिलोय । केतकीका वृक्ष । शालईवृक्ष । जटी-स्त्री० पर्कटवृिक्ष जटामांसी ॥ पिलखन- छिन्नवोशकी-स्त्री० ० पाठा ॥ पाठ। वृक्ष, पाखरवृक्ष । जटामांसी। छिन्ना-स्त्री० गुडूची । गिलोय । जटी []-पु० प्लक्षवृक्ष ।। पाखरवृक्ष । छिन्नोद्भवा-स्त्री." जठरनुत्-पु० आरग्वधवृक्ष ॥ अमलतास ।' छिलहिण्ड-पु० पातालगरुडवृक्ष ॥ छिरहिटा । जठरामय-पु० जलोदररोग ॥ जलोदररोग । छेदनीय-पु० कतकवृक्ष ॥ निर्मली फलका वृक्ष । जड-न० ससिक । जल || सीसा । पानी । FRANE (६६) आयुर्वेदीय- . जड़ा-स्त्री० यूकशिम्बी । भूम्यामलकी ।। कौछ । | जन्तुन्न-न० विडङ्ग । हिंगु ॥ वायविडङ्ग । हीङ्ग । भुईआमला । जन्तुन-पु० वाजपूर | विजोरा नीबू । जतु-न० वृक्षानास-विशेष ॥ लाख । जन्तुम्नी-स्त्री० विडङ्ग ।। वायविडङ्ग । जतुक-न० हिंगु । लाक्षा ॥ हींग। लाख । जन्तुनाशन-न० हिंगु ॥ हीङ्ग । जतुका-त्री० ग्रन्धद्रव्य-विशेष ॥ पर्पटी, पद्मावती, जन्तुपादप-पु० कोषाम्रवृक्ष ॥ कोशामवृक्ष । पपरी। जन्तुफल-पु० उदुम्बर । गूलर । जतुकारी--स्त्री० लता-विशेष ॥ जतुकारी । जन्तुमारी-स्त्री निम्बुक ॥ नीबू । जतुकृत्-त्री० जनीनामक गन्धद्रव्य || पनडी, जन्तुला-स्त्री० काशतॄण || काँस । पद्मावती। जन्तुहन्त्री-स्त्री० विडङ्ग ! बायविडङ्ग । जतुकृष्णा-स्त्री० पर्पटी । पपरी । जया-स्त्री० स्वनामख्यात पुष्पवृक्ष ॥ ओडहुल, गु. जतुमणि-पु० क्षुद्ररोग विशेष ।। एकप्रकारका क्षुद्र उहर । रोग । जस्वाल-पु. शैवाल । केतकपुष्पवृक्ष ॥ सिवार । जतुरस-पुल अलक्तकः|| लाखका रङ्ग । कवरावृक्ष । जतका-स्त्री. जनीनामक गन्धद्रव्य || पपरी । जम्बिर-पु० जम्बीर ॥ जम्भीरी नीवू । जत्रुजत्रुक-न० स्कन्धसन्धि ॥ कंधे और बगलका जम्वीर-पु० स्वनामख्यात निम्युका वृक्ष। अर्जक । जोड़। सितार्जक । मरुबक || जम्भीरानीबूका वृक्ष । जत्वश्मक-न. शिलाजतु ॥ शिलाजीत । छोटी तुलसी । सफेद बनतुलसी । मरुआवृक्ष । जनकारी [:]-पु० अलक्तक ।। लाखका रंग, जम्बु-स्त्री • जम्बु ॥ जामुनका वृक्ष । महावर । जम्बु-न० जम्वुफल || जामन । जननि-त्री० जनीनामकगन्धद्रव्य-विशेष । पनडी, जम्बुक-पु० जम्बुवृक्षभेद । वरुणवृक्षाश्योनाकभेद।। एक प्रकारकी जामनका वृक्ष । वरनावृक्ष अरल, जननी-स्त्री० जनीनामकगन्धद्रव्य । यूथिका । क- टु, शोनापाठा । टुका । मञ्जिष्ठा । जटामांसी ॥ अलक्तक पपरी । जम्वुल-पु० जम्बूवृक्ष । केतकवृक्ष ।। जामनका पद्मावती । जुहीपुष्पवृक्ष । कुटकी । मजीठ।जटा. वृक्ष । केवरावृक्ष । जम्बू वनज-न० श्वेतजपापुष्प || साँझीपुष्पवृक्ष । जनप्रिय--पु० धन्याक । शोभाञ्जन || धनिया जम्बु-स्त्री० नागदभनी । स्वनामख्यात वृक्ष ॥ ना. गदौन । जामुनका वृक्ष । जनवल्लम-पु० श्वेतरोहितवृक्ष ।। सफेद रोहेडावृक्ष । जम्बूका-त्री० काकोलीद्राक्षा ।। किसमिस । जनि-स्त्री० जनी || पपरी । जम्बूल-पु. जम्बवृक्ष । केतकावृक्ष :॥ जामुनक जनिनीलिका-स्त्री० महांनीली ॥ बडानीलका वृक्ष वृक्ष । केवरावृक्ष । जनी-स्त्री. गन्धद्रव्य-विशेष ॥ पर्पटी, पनडी, जम्भक-पु. जम्भ-पु० ! जम्बीर | जम्बीरी नीबू || पद्मावती । जम्भर-पु. जनेष्ट-पु० मुद्गरवृक्ष ॥ मोगरावृक्ष । जम्भल-पु० जनेष्टा-स्त्री० जतुका,वृद्धिनासकोपधी । जातीपुष्प । जम्भा-त्री० जम्भा ॥ जम्भाई । हरिद्रा ॥पपरी । वृद्धि। चमेलीका वृक्ष । हलदी। जम्मी [न् ] पु० जम्बीर ।। जम्भीरी नींबू । जन्तुकम्वु-पु० कृमिशङ्ख ॥ शंखघोंघा । जम्भीर-पु० मरुवकवृक्ष । जम्बीर ।। मरुआ। जन्तुका-स्त्री० नाडीहिंगु । लाक्षा । नाडीहिंग । जयन्तिका-स्त्री. हरिद्रा ।। हलदी । पद्मावती। मांसी । महावर । सैजिनेका पेड । " " जम्भीरी नींबू । लाख ।
औषधिकोष। (६७) । ॥ ऐड । तिरिच्छ वृक्ष । जयन्ती-स्त्री० तिन्तिडीपत्रसदृशवृक्ष-विशेष । अग्नि- जलकुन्तल-पु. शैवाल ॥ शिवार । मन्यवृक्ष ॥ जयन्तीपुष्पवृक्ष, जैतपुष्पवृक्ष । जलकेश-पु." अगेथु, अरणीवृक्ष । जलङ्ग-पु० महाकाललता || महाकालवेल । जयपाल-पु० वृक्ष विशेष || जमालगोटा । जलजन. पद्म। शंख || कमल । शंख। जया-स्त्री० जिया । शान्तावृक्ष । नीलदूर्वा । हरि. जलज-गु० हिजलवृक्ष । शैवाल । वानीरवृक्ष । तकी । आनिमन्यवृक्ष । जयन्तीवृक्ष || भङ्ग । कुपीलु | शत्रः समुद्रफल । शिवार। जलवैत । छौंकराभेद । हरीदूध ।हरड । अगेयु । गणियारी मकर तेंदुआ शाख । वृक्ष । जैतवृक्ष । जलजन्तुका-स्त्री० जलौका | जोक । जयावहा-स्त्री० भद्रदन्तवृिक्ष ॥ भद्रदन्तीवृक्ष । जलजन्म [ ]-न० पन । कमल जयाश्रया-त्री० जरडी तृण ।। जाडीघास । जलजम्बूका-त्री० क्षुद्रजम्बू ।। छोटी जामुन । जयाह्वा-स्त्री० भद्रदान्तका वृक्ष ॥ भद्रदन्तीका जलडिम्ब-पु० शम्बूक ॥ घोंघा, छोटा शख । जलतिक्तिका-स्त्री. शल्लकीवृक्ष ॥ शालई 'वृक्ष । जलद-पु० मुस्ता॥ मोथा । जरडी-स्त्री० स्वनामख्यात तृण ॥ जरडी तृण । जरण-न० हिंगु । कुष्ठौषधी ॥ हीङ्ग कूठ । जलदाशन-पु० सालवृक्ष ॥ शालका पेड़ । जरण-पु० जीरक । कृष्णजीरक । सौवर्चल लषण । जलधर-पु० नुस्तक । तिनिश वृक्ष मोथा । कासमई ।। जीरा । काला जीरा । काला नोन । जलनोला-स्त्री. शैवाल || काई । कसौदीका वृक्ष । जलपिप्पली- स्त्री० पिप्पलो-विशेष । पनिसगा । जरणा-स्त्री. कृष्णजीरक || काला जीरा । जलपपिल । जरणद्रुम-पु० अश्वकर्ण वृक्ष ।। शालभेद । जलपृष्ठजा-स्त्री वाल ॥ काई। जरा-स्त्री० वय:कृत श्लथमांसादि अवस्थाभेद ।। जलफल-न० शृङ्गाटका ॥ सिंघाड़े । बुढापा । जलब्रह्मी-स्त्री० हिलमोचिकाशाक॥ हुरहुरका शाक। जरायु-पु० गर्भवेष्टनचर्म, अग्निजार- वृक्ष । गर्भ जिसमें लिपटा रहता है वह चमड़ा। जलभू-पु. कञ्चट ।। कञ्चट तृण । जलमधूक-पु. मधूकवृक्षभेद ।। जलमहुआ । अग्निजार वृक्ष । जलमोद-न० उशीर ।। खस । जर्जर-पु० शैलयनामक गन्धद्रव्य ॥ भूरिछरीला । जलरस-पु० लवण ॥ नोन । जतिल-पु० वनोद्भवतिल ॥ वनतिल । जलरु- (ह)-पु० पद्म || कमल । जहिल-पु०" जल--न० ह्रीबेर । पानीय ॥ सुगन्धवाला, नेत्रवाला, जलवल्कल-पु० कुम्भिका ॥ जलकुम्भी । जलवल्ली-स्त्री० ० शङ्गाटक ॥ सिङ्गाडे । जलकण्ट, जलकण्टक- पु० शृङ्गाट ॥ शिंगाडा । जलवास-न० उशीर || खस । जलकरङ्क-पु० नारिकेलफल । पद्म । शंख । जल. जलवास-पु० विष्णुकन्द ॥ विष्णुकन्द । लता ।। नारियलफल । कमल | शंख । एक जलबिन्दुजा-स्त्री० यावनालशर्करा ।। शीरविस्त । प्रकारकी जलकी बेल । जलवेतस-पु० वानीरवृक्ष ।। जल बैंत । जलकर्ण-पु० वृक्ष-विशेष ॥ कर्णमोरट । जलशुक्ति-स्त्री० शम्बूक घाँधा । जलकर्णा-स्त्री." जलशुक-न० शैवाल || सिवार । जलकल्क-पु० जम्बाल । काई। जलसर्पिणी-स्त्री. जलौका || जोक । जलकामुक-पु० कुदुम्बनिवृक्ष | सूरजमुखी । अर्क- जलस्था-स्त्री० गण्डदूर्वा ॥ गांडर दुव । पुष्पी । जलहास-पु० समुद्रकफ ।। समुद्रफेन । गर्भाशय । जलरुह-न." जल। ॥
pal (६८) आयुर्वेदीय- , जलाञ्चल-पु० शैवाल || शिवार । काम्पिल्ल । जातिपुष्पवृक्ष ।। आमला । जायफल जलायुका-स्त्री० जलौका ॥ जोंक । मालतीपुष्पलता । कबीला । चमैलोवृक्ष । जलालु-पु० पानीयालु || पानीआलु । जातिकोश-न० जातीफल ।। जायफल | जलालुक-न० पद्मकन्द ।। मसीडा, कमलकन्द । जातिकोष-न०" जलाशय-न० उशीर । लामज्जकतृण ॥ खस । जातिकोषी-स्त्री० जातीपत्री ।। जावित्री । जातिफल-न० जातीफल ।। जायफल । लमज्जक तृण । जातिसार-न० जलाशय-पु० शृङ्गाटक ॥ सिंघाडे । जलाशया-स्त्री० गुण्डालावृक्ष ।। गुण्डाला पेड । जाती-स्त्री. जातीपुष्प । जातीफल ॥ चमेलीका पेड । जायफल । जलाश्रध-पु० वृत्तगुण्ड तृण । गुण्डाघासभेद । जातीकोश-न० जातफिल || जायफल | जलाश्रया-स्त्री० शूलतृण ॥ शूलीघास । जातीकोष-न. " जलाह्वया-न० उत्पल || कुमुद । जलाक्षी--स्त्री० जलपिप्पली । जलपीपल । जातीपत्री-स्त्री. जातीफलत्वक् ।। जायफलकोछल । जलेच्छया-स्त्री० हस्तिशुण्डावृक्ष | हाथीशूण्डवृक्ष । अर्थात् जावित्रीं । जलेजात-न० पद्म || कमल | जातीपूग-पु. जातीफल || जायफल । जलेल्हा-श्री. कुटुम्बनीवृक्ष ॥ सूरजमुखी । जातीफल-न. स्वनामख्यातगन्धफल || जायफल । जातीरस-न० बोलनामकगन्धद्रव्य ।। बोल । जलोदर-न० जठरामय ॥ जलोदररोग । जलोद्भवा-बी० लघुब्राह्मी ॥ छोटीब्रह्मीघास । जातुक-न. हिंगुं ।। हङ्गि। जानु-न० ऊरुजंघयोर्मध्यभाग ।। पावका घुटना । जलोद्भता-ली० गुण्डालावृक्ष । गुण्डालापेड । जामाता-[ ऋ] पु० सूर्य्यवर्त्तवृक्ष ।। हुरहुर, हुला. जलौका, (स् ) जलौका, स्त्री. जलजन्तु-विशेष ॥ हुलका वृक्ष । जाम्बव-न. जम्बूफल । सुवर्ण ।। जामन । सोना। जवताल-ज० फल-विशेष ॥ जवताल फल । जाम्बवती-स्त्री. नागदमनी ।। नागदौन । जवनी-स्त्री० औषधी-विशेष ॥ एक प्रकारका जाम्बूनद-न० स्वर्ण । धुस्तूर ।। साना । धत्तूरा । जवस-त. घास घास। जायक, न० कालीयक ।। कलम्बक, पीलाचन्दन । जवा-स्त्री० पुष्प वृक्ष-विशेष |गुडहल। औड्रहुल,गुडहर जायु-पु. औषध । औषधी । जवादि-स्रो० सुगन्धिद्रव्य-विशेष ।। जवादिकस्तूरी। जारणी-स्त्री० स्थलजारक ।। बडाजीरा । जवापुष्प-पु० जरापुष्प ।। ओडहुल । जारी-स्त्री. औषध-विशेष ।। जहा-स्त्री० मुण्डतिका ॥ गोरखमुण्डी । जाल-न० अस्फुटकलिका । कुष्माण्डादिक्षुद्रफल । जागुड-न० कुंकुम ॥ केशर । नईकली । जांगुल-स्त्री० हरिणादिपशु ॥ हरिण वाघः इत्यादि जाल-पु० कदम्बवृक्ष ।। कदमका पेड़ । पशु। जालगईभ-रोग-विशेष । जाङ्गलो-स्त्री० शुकाशम्बी ॥ किंवाच । जालबब्बूरक-पु० बब्बूरवृक्ष-विशेष ।। जालबबूर । जांगुल- न० विष । जालिनफिल ॥ विष । तोरई । जालिनी-स्त्री० कोषातकी । घोपातकी ।। तोरई । जाटलि-पु०स्त्री० वृक्ष-विशेष ॥ एक प्रकारका पेड। नेनुआतोरई। जाडधारि-पु० जम्बीर ।। जम्बरीिनबुि । जालिनीफल-न० घोपातकीजि ।। झिमनी तोर. जातवेद-(स) पु० चित्रकवृक्ष ।। चीतेका पेड । ईक बीज। जातरूप-न० स्वर्ण । धुस्तूर ।। सोना । धत्तूरा । जाली-स्त्री० पटोलिका'। पटोल ।। तोरई । परवल। जाति-स्त्री. आमलकी । जातफिल । मालती । जाषक-न० कालायक ।। कलम्बक । जोक। एक प्रकारकी जाम्बवी-स्त्री. औषधी।
औषधिकोष । (६९) - . औषधी । ॥ जिङ्गिनी-स्त्री० वृक्ष-विशेष ।। जिंगनीया, जिगनी । जीवनीयगण-पु० औषध समूह-विशेष ॥ जीवक, जिगी-स्त्री० मञ्जिष्ठा ।। मजीठ । ऋषभक,मेदा, महामेदा,काकोली, क्षीरकाकोली, जितेन्द्रियाह्व-पु. कामवृद्धिवृक्ष ॥कामज कणा मुगवन, मपवन, जीवन्ती, मुलहटी, । औरभी टकदेशकी भाषा । |'४॥ जविक, ऋषभक, मेदा,महामेदा, ऋद्धि, जिह्म-ना तगरवृक्ष ।। तगरका पेड । वृद्धि, काकोली, क्षीरकाकोली, मुगवन, मषवन, जिह्मशल्य-पुख्खदिर ॥ वरका पेड़ । जीवन्ती, मुलहठी यह जीवनीय गण है । जिह्व-न० तगरमूल ॥ तगर । जीवनीया-त्री जीवन्ती ॥ डोडी । जिह्वा-स्त्री०रसेन्द्रिय ॥ रसनाइन्द्री अर्थात् जाम । जीवनेत्री-स्त्री० सैंहली ॥ सिंहली पीपल | जिह्वानिलेखन-न० जिह्वामार्जनद्रव्य ॥ जीभके जीवन्त-पु० जीवशाक । औषध ॥ जीवशाक । मेलनेकी वस्तु । जिह्वाशल्य-पु० खदिरवृक्ष ॥ खरका वृक्ष । जीवन्तिका-स्त्री० वन्दा । वृक्षोपरिजात वृक्ष । जीमूत-पु० मुस्तक । देवताडवृक्ष देवदालीलता । गुडूची । जीवाख्यशाक । जीवन्ती । हरीतकी ॥ घोपकलता ॥ मोथा । देवताडवृक्ष । घघरवेल । बांदा । वृक्षके ऊपर वृक्ष जो उत्पन्न हो जाते हैं। सौनया । तोरईभेद । गिलोय । एक प्रकारका शाक । डोडी । हर, जीमूतक-पु. देवदालीलता । देवताडवृक्ष || सोनैया हर्ड, हरै। दवताड वृक्ष । जीवन्ती-स्त्री० सौराष्ट्रदेशजा स्वर्णवर्णाहरीतकी । जीमूतमूल-न० शटी ।। कचर, अम्बिया हलदी। गुडूची। वन्दा।शमीक्षा हरीतकी । लता-विशेष।। जोर-पु० जारक || जीरा । सोरठदेशमें उत्पन्न होनेवाली स्वर्णवर्णकी हर्ड । जोरक-पु०"। गिलोय । बाँदा । छौंकरावृक्ष । हरड । डोडी. जीरण-पु०॥ वृक्ष, जोरिका-स्त्री० वंशपत्रातृण ॥ वंशपत्रीघाप्त । जीवपुत्रक-पु० इंगुदीवृक्ष । पुत्रजीववृक्ष ॥ गों. जर्णि-न० शैलेय ॥ भूरि छरीला । दीका वृक्ष । जियापोतावृक्ष । जाण-पु० जीरक || जीरा । जीवपुष्पा-स्त्री ७ बृहजीवन्ती । बडीजीवन्ती । जीर्णज्वर-पु० पुरातन ज्वर ॥ पुराना ज्वर । जीवप्रिया-स्त्री. हरीतकी ।। इड, हरै । जीर्णदारु-पु० वृद्धदारकभेद ॥ विधाराभेदः । जीवभद्रा-स्त्री० जीवन्तीलता । वृद्धिनामकौषधी ।। जोर्णपत्रिका-त्रो० वंशपत्री तृण ॥ वंशपत्री घास । डोडो । वृद्धि। जोणपर्ण-पु० कदम्ब || कदमका वृक्ष । जीवला-स्त्री० सैंहली ॥ सिंहलीपापल । जोर्णवन-न० वज्र-विशेष ॥ वक्रान्तमणि । जोक्वल्ली-स्त्री० क्षीरकाकोली ॥ क्षीरकाकोली । जोणबुन-पु० पट्टिका लेन ॥ पठानी लोध । जीवशाक-पु० मालवेप्रसिद्धशाक ॥ जीवशाक । जोणबुध्नक-न० परियेल ॥ केवटी मोथा । जीवशुक्ला-स्त्री० क्षीरकाकोली ॥ क्षीरकाकोली । जीगा-स्त्री० स्थल जीरक ॥ बडा जीरा । जीवश्रेष्ठा-स्त्री० वृद्धि नामकौषध । ऋद्धिऔषधि । जीव-पु०वृक्ष-विशेष | बकायन वृक्ष । जीवसंग-पु० कामवृद्धिवृक्ष।। कामज कर्णाटक देश- अष्टवर्गान्तर्गत औषधि-विशेष ॥ की भाषा। जीवक औपधी। जीवसाधन-ज. धान्य || अन्न । जीवन-न० जल। हय्यंगवीन।।जल। एक दिनका घी। जविस्थान-पु० मर्मस्थान ॥ कण्ठादिक । जीवन-पु० जीवकोषध । क्षुद्रफलवृक्ष ॥ जीवक जीवा-स्त्री० वचा । जीवन्तीवृक्ष ॥ वच । जी. औषध । छोटे फलका वृक्ष । जीवनी-स्त्री० जीवन्ती । काकोली । डोडी । मेदा । जीवाला-स्त्री० सैंहली ॥ सिंहलीपीपल । महामेदा ॥ यूजुही । जीविका-स्त्री० जीवन्ती || डोंडी। जीवन्ती । ॥ जोवक-पु. वन्ती। ।
(७०) आयुर्वेदीय- ॥ जीव्या-त्री गोरक्षदुग्धा । जीवन्ती । हरीतकी ॥ चरापहा-त्री विल्वपत्री ॥ बेलपत्री । अमृतसञ्जीवनी । जीवन्ती । हर्ड । ज्वलन-पु० चित्रकवृक्ष ॥ चीतावृक्ष । जुङ्ग-पु. वृद्धदारकवृक्ष || विधारावृक्ष । ज्वालनी-त्रा० मूलता ॥ चरनहार । जुङ्गक-पु." ज्वालागर्दभक-पु० रोग विशेष || जालाईभरोग । जुंगा-स्त्री." ज्वालामुख्या-स्त्री. .अग्निशिखा ॥ कलिहारी । जूतिका--स्त्री० कर्पूरभेद ॥ एक प्रकारका कपूर । इति श्रीशालिग्रामवैश्यकृते शालिग्रामौषधशब्द- जूर्णाख्य-पु० तृण-विशेष । उलपतृण । सागरे द्रव्याभिधाने जकाराक्षरे अष्टमस्तरङ्गः।। ८ ।। जूर्णाह्वय-पु० देवधान्य । जुआर । झ. जूषण-पु०वृक्ष-विशेष || धायके फूल | झटा-स्त्री० भूम्यामलकी ॥ भुई आमला । जृम्भ-पु० जम्भण, जम्भा, जम्मिका ॥ जम्भाई । झषा-स्त्री० नागवला ॥ गुलसकरी। जृम्भिणी-त्री- एलापर्णी ॥ इलायचीतरहके पत्ते झाटल-पु० घण्टापाटलीवृक्ष ।। मोखावृक्ष । जिसके ऐसी औषधी। झाटा-स्त्री० भूम्यामलकी । यूथीवृक्ष।। भुईमामला। जैत्र-ज. औषध ॥ औषधी । जुहीवृक्ष । अत्र-पु० पारद ॥ पारा। झटिका-स्त्री." जैत्री-स्त्री. जयन्तीवृक्ष ।। जैतवृक्ष । झावु-पु० स्वनामख्यातवृक्ष ॥ झाऊका पेड । जैपाल-पु०जयपालवृक्ष ॥ जमालगोटा । झावुक--पु० जैवातृक-पु० कर्पूर । औषध ॥ कपूर । ओषधी। झिङ्गाक-न० फल-विशेष ॥ तोरई । जोगक-न० अगुरु ॥ अगर । झिङ्गिनी-स्त्री० जिङ्गिनीवृक्ष ॥ जिङ्गनिया, जियल । जोन्ताला-स्त्री. देवधान्य ॥ पुनेरा । झिङ्गी-स्त्री." ज्येष्ठवला-स्त्री० सहदेवी ॥ सहदेई । झिंझिारेष्टा-स्त्री. क्षुप-विशेष | झिंझिरीठा । ज्येष्ठाम्बु-न० तण्डुलाम्बु ॥ चावलोंका जल । झिण्टी-स्त्री० पुष्पवृक्ष-विशेष । कटनरयावृक्ष । ज्योतिः [स]-पु० मेथिका ॥ मेथी । ज्योतिष्क-पु० चित्रक वृक्षा मेथिका। बजि गणिकारि- झोड-पु० गुवाकवृक्ष || सुपारीका वृक्ष ।। झूणि-पु० क्रमुकभेद । का वृक्ष ॥ चीतेका वृक्ष । मेथिका बीज । अरणी, इति श्रीशालिग्रामवैश्यकृते शालिग्रामौषधशब्दसागरे द्रव्याभिधाने झकाराक्षर नवमत्तरङ्गः ॥ ९ ॥ ज्योतिष्का-स्त्री० ज्योतिष्मती लता || मालकांगनी । ज्योतिष्मती-स्त्री० स्वनामख्यात लता ॥ माल- काङ्गनी। टक्कदेशीय-पु. वास्तूकशाक ।। बथुआका शाक । जोत्ना-ज्योत्लिका स्त्री० पटोलिका ॥ सफेद फूल-टगर-पु० टंकणक्षार || सुहागा । की तोरई। टङ्क-पु० नील कपित्थ । चतुर्मायकपरिमाण || राज ज्योत्स्नी-स्त्री० पटोलिका । रेणुकानाम गन्धद्रव्य । आमवृक्ष । चार मामे। पटोल || सफेद फूलकी तोरई । रेणुका । परवल। टंकण-पु० क्षार-विशेष ।। सुहागा । ज्योत्स्नी-त्री० ज्योत्स्नी ॥ सफेद फूलकी तोरई टंकानक-पु० ब्रह्मदावृक्ष ॥ सहतूतका पेट । ज्वर-पु० स्वनामख्यात रोग ॥ ज्वरराग। टंकारी-स्त्री० क्षुप-विशेष ।। टंकारी । ज्वरघ्न-पु० गुडूचा । वास्तृक ।। गिलोय । बथुआ। टङ्ग-पु० टङ्गण ॥ सुहागा । धरहन्त्री-स्त्री० मञ्जिष्ठा ॥ मजीठ । टंगण-पु० न." ज्वराङ्गी-स्त्री० भद्रदन्तिका ॥ भद्रदन्ती । टंगिनी--स्त्री० वृक्ष-विशेष || पाट । ज्वरान्तक-पु० नेपालनिम्ब । आरग्वध ॥ नेपा. टिण्टिका-स्त्री० अम्बुशिरीपिका . ॥. जलसिरस लदेशका नीम | अमलतास । अर्थात् ढाढोन । अगेथु । ट. ॥ " औषधिकोय । (७१) ईका शाक। हू-स्त्री." तण्डुलु-स्त्री." टिण्डिश-पु० वृक्ष-विशेष ॥ लैंडस, टिण्डे । निकर ।। वायविडङ्ग । चौलाईका शाकाचावला टुण्टुक-पु. श्योनाकवृक्ष । कृष्णग्वादिग्वृक्ष । श्यो- तण्डुला-स्त्री० बिडङ्ग । महासमङ्गा । वायविडङ्ग। नाकभेद ।। टेंटुकवृक्ष । काली खैर । श्योनापा- कगहिया । ठाभेद । तण्डुलाम्बु-न० तण्डुलादेक ॥ चावलोंका जल । टुण्टुका--त्री० टनिवृक्ष ॥ पाठ । तण्डुली-स्त्री. यवतिक्तालता । शशाण्डुलीकर्कटी । टुनाका-स्त्री० तालमूली ।। मुसली । तण्डुलयिशाक ।। यवेची देशान्तराय भाषा । इति श्रीशालिग्रामवैश्यकृते शालिग्रामोषधशब्दसागरे शशाण्डुली, एक प्रकारकी ककडी । चौला. द्रव्याभिधाने टकराक्षरे दशमस्तरङ्गः ।। १० ॥ ड. तण्डुलीक--पु० तण्डुलीयशाक ।। चौराईका शाक । डगारी-त्री ० लताफल-विशेष ॥ एक प्रकारकी तण्डुल य-पु० स्वनामख्यात पत्रशाक-वि० ।। चौ ककडी । लाई, अल्पमरसा । डंगारी-स्त्री. डझरीफल ।। तण्डुलीयक-पु. तण्डुलीयशाक । विडङ्ग ।। चौ- डहु-पु. वृक्ष-विशेष ॥ बइहर । लाईका शाक । वायविडङ्ग । तण्डुलीयका-स्त्री० विडङ्गा ।। वायविडङ्ग । डागरी-श्री. डकरीफल ।। डालिम-पु० दाडिम || अनार । तण्डुलेर-पु० तण्डुलीयशाक ।। चौलाईका शाक ! डिण्डिम-पु. कृष्णापाकफल ।। करौंदा । तण्डुलोत्थ-न० तण्डुलाम्बु, चावलोंका जल । डिीण्डर-पु० समुद्रफेन ।। समुद्रफेन । तण्डुलोदक-न." डिण्डिरमोदक-पु० गृञ्जन ॥ लहान । तण्डुलध-पु० वेष्टवंश ।। एक प्रकारका बास । डिण्डिश-पु० टिण्टिश ।। हैंडश । ततपत्री-श्री. कदलवृिक्ष ।। केलेका पेड । डिम्ब-न० कलल । फुप्फुल्ल ।। जरायु । फेफड़ा । तत्फल-पु० कुवलय । कुष्ठौषध । चौरनामक डिम्ब-पु० अण्ड । फुप्फुस । प्लीहा । अण्ड । गन्धद्रव्य।। बेरीका फल, वेर। औषधी। भटे. फेफडा । प्लोहारोग। उर, नेपालेदेशकी भाषा। डिम्बिका-स्त्री० श्योनाकवृक्ष || शोनापाठा । तनया-स्त्री. चक्रकुल्यालता ।। पिटवन । डुली-स्त्री. चिल्लीशाक । चिल्लोशाक । तनुच्छाय-पु० जालबरवृक्ष ।।जालबवूलुका वृक्ष । डोडी-स्त्री० क्षुप-विशेष ।। डॉडी। तनुत्वचा-स्त्री० क्षुद्राग्निमन्थ ।। छोटी अरणी । डोरडी-स्त्री० बृहती ॥ बैंगुनाकटेहरी । तनुपत्र-पु० इंगुदीवृक्ष ।। गोंदनीवृक्ष । इति श्रीशालिग्रामवैश्यकृते शालिग्रामौषधशब्दसा- तनुबीज-पु० राजबदर ।। राजबेर । गरे द्रव्याभिधाने डकाराक्षरे-त्रयोदशस्तरङ्गः ॥ १३॥ तनुक्षीर-पु० आम्रातक ।। अम्बाडावृक्ष । तनुब्रण-पु० वल्मीकरोगें ॥ त. तनूनप-न० घृत ॥ घी। तक्र.-न. पादाम्बुसंयुक्त दधि । छाछ । तनूनपात् (द् )-पु० चित्रकवृक्ष।। चीतेका पेड । तक्रकूर्चिका-स्त्री० ऑमिक्षा। तन्तुक-पु० सर्षप ।। ससे। तगर-न० वृक्ष-विशेष ॥ तगरका वृक्ष । तन्तुकी-स्त्री. नाडी ।। माडी । तगरपार्दिक-न० तगरवृक्ष ॥ तगरका पेड़ । तन्तुनिर्व्यास-पु. तालवृक्ष । ताडवृक्ष । तजी-स्त्री० हिंगुपत्री ॥ हङ्गिपत्री । तन्तुभ-पु० सर्षप ।। ससौं। तडित्वान् [त् ], पु० मुस्तक || मोथाघास । तन्तुर-न. मृणाल || नाल, भसाडा । तण्डुरीण-पु० तण्डुलोदक ।। चावलोंका पानी । तण्डुल-पु० विडङ्ग । तण्डुलीयशाक । धान्यादितान्तुविग्रहा-स्त्री० कदली ।। केला । वेरा कुट तन्तुल-न."
(७२) आयुर्वेदीय- " कांटेवाला वृक्ष । तन्तुसार-पु० गुवाकवृक्ष । सुपारीका पेड़ । तमालक-पु० न० तमालवृक्ष । वंशत्वक् ।। श्याम. तन्त्रिका-स्त्री० गुडूची ।। गिलोय । तमाल । बांसकी त्वचा । तन्त्री-त्री" तमालपत्र-जतमालवृक्ष । तेजपत्र ।। श्यामत- तन्द्रा-स्त्री० निद्रावक्लान्ति ।। तन्द्रा, आलस्य । माल । तेजपात । तान-त्री० पृश्निपर्णी ।। पिठवन । तमालिका-स्त्री० ताम्रवली। भूम्यामलकी ।ताम्रवल्ली तन्वी-त्री० शालपर्णी ।। शालवन, सरिवन । चित्रकूट देशे प्रसिद्ध भुई आमला । तपन-पु. भल्लातकवृक्ष । अवृक्ष । ताम्र । क्षुद्रा- तमालिनी-स्त्री० भूम्यामलकी । भुई आमला । ग्निमन्थवृक्ष । सूर्यकान्तमणि ।। भिलोषका पंड । तमाली-स्त्री० वरुणवृक्ष । ताम्रवल्ला ।। वरना- आकका वृक्ष । तावा । छोटभिरणी । आतसी वृक्ष । ताम्रवल्ली। चित्रकूटदेशमें प्रसिद्ध । सीसा फासी भाषा । तमी-स्त्री० हरिद्रा । हलदर्दा । तपनच्छद-पु. आदित्यपत्रवृक्ष ।। अपवृक्ष । तराणि-स्त्री० घृतकुमारी || घीकुवार ! तपनतनया-त्री० शमीवृक्ष ।। छोकरवृक्ष । तरणि-पु० अर्कवृक्ष ॥ आकका पेड। पनमाण-पु० सूर्ययकान्तमणि ॥ आतलीसीसा तरणी-स्त्री० पद्मचारिणी । घृतकुमारी॥गेंदेका वृक्ष । फासी भाषा। धीकुवार । तपनीय-न० स्वर्ण ।। सोना । तरदी-त्री० कण्टको वृक्ष-विशेष एक प्रकारका तपनीयक-न० तपनेष्ट-ना ताम्र ।। तांबा । तरम्बुज-न० फललता-विशेष । तरबुज । तपस्य-न० कुन्दपुष्प ।। कुन्दके फूल । तरला-स्त्री० यवागू । सुरा । मधुमक्षिका ॥ यवागू तपस्विनी-त्री० जटामांसी । कटुरेहिणी । महाश्रा अर्थात् जौके आटेका बनता है । मदिरा। वणिका ।। बालछड़, जटामांसी। कुटकी । मधुमक्खी। वडी गोरखमुण्डी। तरिता-स्त्री० गञ्जन ॥ गांजा । तपस्विपत्र-पु० दमनकवृक्ष ।। दौना, दवनावृक्ष । तरुण-न० कुञ्जपुष्प ।। कूजेके फूल । तपस्वी (न्)-पु० घृतकरञ्जवृक्ष । घृतकञ्जावृक्ष । तरुण-पु० स्थल जीरक । एरण्ड || काला जीरा । तपोधन-पु. दमनकवृक्ष ।। दवनावृक्ष । अण्डका पेड। तपोधना-स्त्री० मुण्डितिका ।। गोरखमुण्डी । तरुणज्वर-पु० सप्ताहावधिज्वर ॥ सात दिनके उप, ततरूपक-न० रोप्य ।। चांदी। रान्त जो ज्वर आता है। तम-पु० तमालवृक्ष ।। श्यामतमाल । तरुणदधि-न० पञ्चदिनातीतदधि ॥ पांच दिनका तमर-न० वंग ।। रांगकी भस्म । तमराज-पु. शर्करा-विशेष।। एक प्रकारकी खांड। तरुणी-स्त्री० घृतकुमारी । दन्तीवृक्ष । चौडा नामक तमस्विनी-खी० हरिद्रा ।। हलदी । गन्धद्रव्य । स्वनामख्यातपुष्पवृक्ष-विशेष ॥ तमा-स्त्री० तमालवृक्ष ।। श्यामतमाल । घीकुवार। दन्त का पेड । चीढ । सेवतीका पेड। तमाल-न. पत्रक ।। तेजपात । तरुणकिटाक्षमाल-पु० तिलकवृक्ष॥ तिलकका पेडा तमाल-पु० स्वनामख्यात वृक्ष। वरुणवृक्ष । कृष्ण- तरुभुक् [ज् ]-पु० वन्दाक || वादा । खदिर ।। श्यामतमाल । वरनावृक्ष । काली खर तरुराज-पु० तालवृक्ष ।। ताडका पेड़ तमाल-पु० न० वृक्ष-विशेष । वंशत्वक् ।। एक तरुरुहा-स्त्री० बन्दाक ॥ बांदा । वृक्ष । बांसकी छाल। तरुहिणी-स्त्री. वन्दाक ।। बाँदा । तमालक-न. सुनिषण्णकशाक । तेजपत्र ।। तरुवल्ली-स्त्री. जतुकालता ॥ मालवेमें प्रसिद्ध शिराआरीवा चौमातियाशाक । तेजपात । जतुका। दही।
औषधिकोष। (७३) तांबा । रोग । तरुसार-पु० कर्पूर ।। कपूर । तापसप्रिय-पु. प्रियालवृक्ष इंगुदीवृक्ष ।। चिरों तरुस्था-स्त्री- वन्दाक || बाँदा । जीका पेड़ | गोंदीवृक्ष । तरूट-पु० उत्पलकन्द ।। भसींडा । तापसप्रिया-स्त्री० द्राक्षा ।।दाख । तारी-स्त्री० गणिकारिका वृक्ष । जयन्ती वृक्ष ।। तापिञ्च-न० माक्षिकधातु ।। सोनामाखी । अगेथु वृक्ष । जयन्ती, जैत वृक्ष । तापिज-पु० तमालवृक्ष ॥ श्यामतमाल । तर्कारु-पु. कूष्माण्ड ।। पेठा । ताप्य-न० स्वर्णमाक्षिक । धातुमाक्षिक ।। सोना- तर्किण-पु. चक्रमई वृक्ष ।। चकवड, पमार (ड)। माखी । धातुमाखी । तर्किल-पु." ताप्यक-न० धातुमाक्षिक ।। धातुमाखी । तर्जनी-स्त्री० अंगुष्ठसमीपांगुली ।। अंगूठेके सभी. ताप्युत्थसझंक-न०" पकी उंगली। तामर-न० जल । घत ।। पानी। धी। तर्पणी-स्त्री० गुरुकन्ध वृक्ष । खिरनीका पेड । तामरस-न० पद्म । स्वर्ण । ताम्राकमल । सोना। तर्पिणी-स्त्री० पद्मचारिणी वृक्ष ॥ गेंदा वृक्ष । गुलाब वृक्ष । तामलकी-त्री० भूम्यामलकी ।। भुई आमला । तर्बट-पु. चक्रमर्द वृक्ष ॥ चक्रवड़ । तामसी-स्त्री० जटामांसी ।। बालछड, जटामांसी। तयं-पु० यवक्षार ॥ जवाखार । ताम्न-न० स्वनामख्यात धातु ॥ तांबा । तल-पु० तालवृक्ष | ताडका पेड तान-पु० कुष्ठरोग-विशेष ।। एक प्रकारका कोढ- तलित-ज० भृष्टमांस ॥ भुना मांस । तवराज-पु० यवास शर्करा ॥ शीरखिस्त । ताम्रक-न० ताम्र ।। तांबा । तवराजोद्भव खण्ड-पु० यवासशर्करासम्भूत खण्ड । ताम्रकूट-पु० क्षुप-विशेष ।। तमाखु । शीरखिस्तका कंद । ताम्रगर्भ-न० तुत्थ ।। तूतिया । तवक्षीर-न० क्षीरजल || तवावीर । ताम्रचूड-पु० कुक्कुरद्रु ।। कुकरोंदा वृक्ष । तवक्षारी-स्त्री० गन्धपत्रा ॥ वनशटी । ताम्रदुग्धा-स्त्री० गोरक्षदुग्धा ।। अमृतसञ्जीवनी तवीष-पु० स्वर्ण ॥ सोना। ताम्रपत्र-पु० जीवशाक || जीवशाक । तत्कर-पु. स्पृक्का । मदनवेश । चारनामक गन्ध- ताम्रपर्णी-स्त्री० मञ्जिष्ठा ।। मजीठ । द्रव्य ॥ असवरग, पुरी । मैनफलवृक्ष । ताम्रपल्लव-पुरु अशोकवृक्ष ।। अशोकका पेड । नेपालदेशकी भाषा । ताम्रपाकी [ ]-पु० गईभाण्डवृक्ष ॥ पारिस- तस्करस्नायु-पु० काकनासालता ॥ कौआठोड़ी । तानपादी-त्री० हंसपदी ।। लालरङ्गका लजालु । ताड़क-पु. देवदालीलता ॥ घघरवेल, सोनैया । ताड़काफल-न० बृहदेला ।। बडी इलायची । ताम्रपुष्प-पु. रक्तकाञ्चनपुष्पवृक्ष ।। लालकचनारका वृक्ष। ताड़कीफल-न०" ताड़ि-पु० पत्रद्रुम ।। ताड़ी। ताम्रपुष्पिका-स्त्री० रक्तत्रिवृत् ।। लाल निसात । ताड़ी-स्त्री." ताम्रपुष्पी-स्त्री० धातकीपुष्प | पाटलावृक्ष ।। धा- तापस-न• तमालपत्र || तेजपात । यके फूल । पाडरवृक्ष । तापस-पु. दमनकवृक्ष ॥ दवनावृक्ष । ताम्रफल-पु० अङ्कोठवृक्ष ॥ ढेरा, टेरावृक्ष । तापसतरु-पु० इंगुदीवृक्ष ॥ हिङ्गोटवृक्ष, गोंदी ताम्रमूला-स्त्री० दुरालभा । लक्षालु । कच्छुरा ॥ वृक्ष। धमासा । लज्जावन्ती । क्षीराईवृक्ष । तापसद्रुम-पु० ताम्रवर्ण-पु० पल्लिवाहतृण ॥ पलिवाहतृण । तापसद्रुमसन्निभा-स्त्री० गर्भदात्रीवृक्ष ।। पुत्रदा । ताम्रवर्णा-स्त्री० ओड्रपुष्पवृक्ष ॥ ओडहुल, गुडहल भटेउर, पापल। " (७) आयुर्वेदीय- ताम्रबाल्लि-श्री० मञ्जिष्ठा || मजीठ । चित्रकूटदेशमें ताक्ष्यंज-न० रसाञ्जन ॥ रसोत । प्रसिद्ध ताम्नवल्लीनामवाली लता-विशेष । ताक्ष्यप्रसव-पु० अश्वकर्णवृक्ष ॥ एक प्रकारका ताम्रवीज-पु० कुलत्थ ।। कुल्थी। साल। ताम्रवृन्त-पु०" तार्यशैल-न. रसाजन रसोत । ताम्रवृन्ता-स्त्री० कुलस्थिका॥ एक प्रकारका शुर्मा। ता--स्त्री० वनलता-विशेष ॥ ताम्रवृक्ष-पु० रक्तचन्दन ।कुलस्थ ॥लाल चन्दन । ताल-न० हरिताल । तालीसपत्र । तालफल ॥ कुलथी । हरताल । तालीसपत्र । ताडका फल । ताम्रसार-न० रक्तचन्दन ॥ लालचन्दन । ताल-पु. स्वनामख्यात वृक्ष || ताडका पेड । ताम्रसारक-न." तालक-न० हरिताल । तुवरिका ॥ हरताल । गोपी. ताम्रसारक-पु. रक्तखदिर ॥ लालखैर । चन्दन। ताम्रा-स्त्री० सेंहली ।। सिंहलीपीपल । ताटकी-स्त्री. तालरस || ताडी। ताम्राभ-पु० रक्तचन्दन ॥ लालचन्दन । तालपत्रिका-स्त्री० मुसली । मूसली । ताम्नर्द्ध न० कांस्य || कांसी । तालपत्री-स्त्री० मूषिकपर्णी ॥ मूसाकानी । ताम्रिका-स्त्री० गुञ्जा ।। धुंधुची । तालपर्ण-न० स्त्री० मुरानामक गन्धद्रव्य ॥ कपूर ताम्बूल-न० पर्ण । क्रमुक || पान'। सुपारी । कचरी । ताम्बूलपत्र-पिण्डालु ॥ पिडालु । तालपर्णी-स्त्री० मधुरिका । मुरा । तालमूली । ताम्बूलराग-पु० मसूर ।। मसूरअन्न । निश्रेया ।। सौंफ । कपूरकचरी । मुसली सोआ । ताम्बूलवल्लिका-स्त्री. ताम्बूलः ॥ पानोंकी वेल । तालपुष्पक-न० प्रपौण्डरीक ॥ पुण्डरिया । ताम्बूलवल्ली-स्त्री. ताम्बूललता ॥ पानोंकावेल । तालप्रलम्ब-न० तालजटा || ताडकी जटा । ताम्बूली-स्त्री." तालमूलिका-स्त्री तालमूली ॥ मुसली। तार-40 रूप्य । मुक्ता । चादी मोती । तालमूली-स्त्री० स्वनामख्यात वृक्ष॥ मुसली, ताल- तार-पु० शुद्धमौक्तिक ।। शुद्ध मोती । मूली । तारक-न० स्त्री० कनीनिका ॥ आंखका तारा । तालवृन्त-न० व्यजन || ताडका पंखा । तारका-स्त्री० तालक्षीरक-न० तालसम्भूत। तवक्षीर ।। तवाखीर। तारका-स्त्री० इन्द्रबारुणी ॥ इन्द्रायण । तालाख्या-स्त्री. मुरानामक गन्धद्रव्य ॥ कपूरक • तारतण्डुल-पु० धवलयावनाल ॥ सफेद ज्वार । तारदी-स्त्री. तरदीवृक्ष । तरदीवृक्ष । तालाङ्क-पु. शाकभेद । तारपुष्प-पु० कन्दपुष्पवृक्ष ।। कुन्देका वृक्ष । तालांकुर-पु० ननशिला ।। मैनशिल, मनशिल । तारविगला-स्त्री० धातुविशेष ॥ सीसा । तालि-स्त्री०भूम्यामलकी । तालमूली ॥ भुई आ- तारशुद्धिकर-न० मला । मुषली। तारा-स्त्री० पु० चक्षुमध्यस्थान ।। आँत्रका तारा । तालिका स्त्री. तालमूली । ताम्नवल्ली ॥ मुबली । तारा-स्त्री० चीडा । मुक्ता ॥ चीढ । मोती । ताम्रवल्लीलता। ताराभ्र-पु० कर्पूर ॥ कपूर। ताली-स्त्री० ताडी । भूम्यामलकी । तुवरिका ।ताल तारारि-पु. विड्माक्षिकवातु । मूली । ताम्रवल्ली ॥ सुराभेद । खजूर । ताली. तारिका-स्त्री. तालरस || ताडी। शपत्र ॥ ताडी । भुईआमला | गोपीचन्दन । ताक्षी-स्त्री० पातालगरुडी लता ॥ छिरहिटा । मुसली । ताम्रवल्लीनामवाली चित्रकूटमें प्रसिद्ध- ताक्ष्य-न० रसाञ्जन ।। रसोत । लता । ताडी । खजूर तालीशपत्र । तार्य-पु० शालवृक्ष । अश्वकर्णवृक्ष । स्वर्ण ॥शा-तालपित्र--न० तालीशपत्र ॥ तालीशपत्र । लका वृक्ष । सालकाभेद । सोना। तालीश-ल." चरी। ॥
औषधिकोष । (७५) तालीशपत्र-न० स्वनामख्यात वृक्ष ।भूभ्यामलकी।। तिकसार-न० दीर्घरोहिषकतृण । वडे रोहिसतृण । तालीशपत्र । भुईआमला । तिक्तसार-पु० खदिरवृक्ष । लरका पेड । तालु तालुक-म० जिह्वेन्द्रियाधिष्ठान ॥ तालु तिक्ता-स्त्री कटुरोहिणी । पाठा । यवतिक्तालता । तावीष-पु० स्वर्ण ॥ सोना । षड्भुजा । छिकनी । ललाकस्तूरी ।। कुटकी । तिक्त-न पर्पट ॥ पित्तपापडा । पाठ । यवेची देशान्तरीयभाषा । वरन्यूजा । ना. तिक्त-पु० रस-विशेष । कुटजवृक्ष । वरुणवृक्ष ॥ कछिकनी । मुशकदाना। तिक्तरस । कुडेका पेड । वरनावृक्ष । तिकाख्या स्त्री कटुतुम्बी || कडवी तोम्बी ।. तिक्तक-पु. पटोल । चिरतिक्त । कृष्णखदिर । तिक्तिङ्गा-स्त्री • पातालगरुडलता || छिरहिटा । इंगुदीवृक्ष ॥ परवल । चिरायता । कृष्णखैर । तिक्तिका-स्त्री० कटुतुम्बी || कडवीटोम्बी। हिङ्गोटवृक्ष, गोंदनीवृक्ष । तिराटी-स्त्री० त्रिवृत् ॥ निसोत । तिक्तकन्दिका-स्त्री० गन्धपत्रा || वनशटी । तितिर तित्तिरि-पु० पक्षि--विशेष । तीतर । तिक्तका-स्त्री० कटुतुम्बी ॥ कडवी तोम्बी । तिनाशक-पु०तिनिशवृक्ष ।। तिरिच्छवृक्ष । तिक्तगन्धिका-स्त्री० वराहक्रान्ता ॥ वराहकान्ता. तिनिश-पु. वनामख्यातवृक्ष । तिरिच्छवृक्ष ।। वृक्ष । तिन्तिड-पु० चिच्चा ।। इमलीका पेड़ । तिक्तगुजा-स्त्री० करञ्ज ।। कञ्जा । तिन्तिडिका-स्त्री० तिन्तिडी ।। तिक्ततण्डुला-स्त्री० पिप्पली । पीपल । तिन्तिडी-स्त्री० वृक्ष-विशेष । वृक्षाम्ल ।। इमलीका तिक्ततुण्डी-स्त्री० करतुण्डीलता ॥ कडवी तोरई । पेड विषाविल। तिक्ततुम्बी- स्त्री कटुतुम्बी ॥ कडवी तोम्बी । तिन्तिडीक-न० वृक्षाम्ल ।। विनाविल तिकदुग्धा-त्री० क्षीरिणीवृक्ष ॥ एक प्रकार की तिन्तिडीका-स्त्री० तिन्तिडी । इमलीका वृक्ष । कटेरी । अजशृंगी | मेढाशिंगी । तिन्तिलिका-स्त्री तिक्तधातु-पु० पित्त ।। पित्त । तिन्तिली-स्त्री." तितपत्र-पु० कर्कोटक || ककोडा । तिन्तलीका-स्त्री०" तिक्तपर्वा [न् ]-पु० दूर्वा । हिलमोचिका। गुड. तिन्दिश-पु० टिण्डिश वृक्ष ॥ लैंडशका पेड । ची। यष्ठिमधु ॥बंधास । हुलहुलशाक गिलोय । तिन्दु-पु० तिन्दुकवृक्ष ॥ तेंदुका पेड़ । मृलहटी। तन्दुका-न० कर्षपरिभाग || २ तोले । तिक्तपुष्पा-स्त्री० पाठा । पाठ । तिन्दुक-पु० स्त्री० वृक्ष-विशेष ।। तेंदुका पेड । तिक्तफल-पु० कतकवृक्ष । निर्मलफिल । तिन्दुकि-स्त्री" तिक्तफला-स्त्रीव्यवतिक्तालता । वाताकी । पड़ तिन्दुकिनी-स्त्री० आवर्तकी ॥ भगवतवल्ली कोंकणी- भुजा॥यवेची देशान्तरीयभाषा । वैगुना कटेहरी । खरबूजा । तिन्दुकी-स्त्री० तिन्दुक ।। तदैका पेड़ । तिक्तभद्रक-पु० पटोल ।। परवल । तिन्दुल-पु० ॥ तिक्तमरिच-पु. कतकवृक्ष । निर्मलीफल । तिमिर-न० पु. नेत्ररोग-विशेष ।। मन्दष्टि । तिक्तरोहिणका०स्त्री० कटुका ॥ कुटकी। तिमिष-पु० ग्राम्यकर्कटी ॥ पेठा । तिक्तरोहिणी-स्त्री० ए तिरिम-पु. शालिभेद । एक प्रकारके शालिधान । तिक्तवल्लो-स्त्री० मूलिता ॥ चुरनहार । तिरिय-पु. शालिविशेष ॥ एक प्रकारके धान । तिक्तबाजा-स्त्री० कटुतुम्बी ॥ कडबी तोम्बो । तिरीट-पु. लोन || लोध । तिक्तशाक-पु० खदिरवृक्ष । वरुणवृक्ष । पत्रसुन्दर- तिल-पु० स्वनामख्यातशत्य || तिल । शाक । खैरका पेड । वरनाकावृक्ष । पत्रसुन्दर तिलक-न. क्लोम । कृष्णवर्णसौवर्चल । सौवर्चल ॥ शाक, गिमा वंगभाषा। पेटमें जलर हनेका स्थान।चोहारकोडा,कालानोन। भाषा। ॥
(७६) आयुर्वेदीय- - लरोग । तिल । तिलक-पु० पुष्पवृक्ष-विशेष । मरुवक । क्षुद्ररेग- | तीक्ष्णक-पु० मुष्कक । गौरसर्षप ॥ मोखावृक्ष । विशेष । तिलकपुष्पवृक्ष । मरुआवृक्ष । कालाति. सफेद सौं । तीक्ष्णकण्टका-पु० धुस्तूर । बर्बर । इंगुदी । तिलकालक-पु० क्षुद्ररोग-विशेष । शरीरमें काला करीर ॥ धतूरेका पेड । बबूरका पेड़ । हिङ्गो वृक्ष करील । तिलचित्रपत्रक-पु० तैलकन्द ॥ तैलकन्द । तीक्ष्णकण्टक-स्त्री० कन्थारी वृक्ष ॥ कन्थारी । तिलतल-न. तिलस्नेह ॥ तिलोंका तेल । तीक्ष्णकन्द-पु० पलाण्डु ॥ प्याज । तिलपर्ण-न -न० चन्दन । तिलवृक्षपत्र ॥ चन्दन । तीक्ष्णकल्क-पु०. तुम्बुरुवृक्ष ॥ तुम्बरू वृक्ष । तिलके पत्ते । तीक्ष्णग्रन्थक-पु-शोभाञ्जन । रक्ततुलसी । कुन्दः तिलपर्ण-पु. श्रीवेष्ट ॥ सरलका गोंद । नामक गन्धद्रव्य ॥ सैजिनेका पेड । तिलपणिका-श्री. रक्तचन्दन ॥ ललचन्दन । तुलसी । लोवान-फार्सी भाषा । तिलपर्णी-त्री" तीक्ष्णगन्धक-पु० शोभाञ्जनवृक्ष ॥ सैजिनेकावृक्ष तिलपिञ्चट-न० तिलपिष्टक ॥ तिलकुटा । तीक्ष्णगन्धा-त्री० श्वेतवचा । कन्थारी । राजिका तिलपित-पु. निष्फलतिलक्ष ॥ तिलरहित तिल वचा । जीवन्ती । सूक्ष्मैला सफेद वच । का पेड। कन्थारी वृक्ष । राई । बच । जीवन्ती। छोटी तिलरस-पु० तिलतल ॥ तिलका तेल । इलायची । तिलाङ्कितदल-पु० तैलकन्द ॥ तैलकन्द । तक्षिणतण्डुला-स्त्री० पिप्पलो ॥ पीपल । तिलातप्या-स्त्री कृष्णजीरक ॥ कालाजीरा । तीक्ष्णतेल-न० सर्जरस । स्तुही क्षीर । सुरा तिलौदन-न० कृयर । तिलोंकी खिचड़ी । कटुतैल ॥ राल । सेहुण्डका दूध । मदिरा तिल्व-पु० लोध्र । श्वतलोध्र । रक्तलोध्र ॥ लोध । कडवा तेल। सफद, पठानी लोध । लाल लोध । तीक्ष्णपत्र-पु. तुम्बुरुवृक्ष ॥ तुम्बरू वृक्ष । तिल्वक-पु. लोध ॥ लोध । तीक्ष्णपुष्प-न० लवङ्ग | लौंग । तिष्य पुष्पा-त्री० आमलकी । आमूला । तीक्ष्णपुष्पा--स्त्री० केतकी । केतकीका पड । तिष्यफला-स्त्री." तीक्ष्णफल-पु. तुम्बुरुवृक्ष ।। तुम्बरुका पेड़ । तिष्या-स्त्री." तीक्ष्णमूल-पु० शिग्रु । कुलञ्जन ।। सैजिनेका वृक्ष तोर्णपदा-त्री० तालमूली ॥ मूषलो । कुलञ्जन वृक्ष। तीन-न. लौह ।। लोहा । तीक्ष्णरस-पु. यवक्षार ॥ जवाखार । सोरा । तीनकण्ठ-पु. सूरण ॥ जमीकन्द । वङ्गभाषा । तीव्रगन्धा-स्त्री. यवानी ॥ अजवायन । तीक्ष्णशूक-पु० यव ॥ जौ । तत्रिज्वाला स्त्री० धातकी ॥ घायके फूल। तीक्ष्णसारा-स्त्री० शिशपा ॥ सीसोंका वृक्ष । तत्रिा-स्त्री० कटुरोहिणी । गण्ड दूर्वा । राजिका । तीक्ष्णा-स्त्री. वचा । सर्पकङ्कालिका वृक्ष । कपिक- महाज्योतिष्मती । तरादीवृक्ष । तुलसी ॥ कुट. च्छू । महाज्योतिष्मता । अत्यम्लपर्णी ॥ वच । की । गांडरदूब । राई बडी मालकाङ्गनी । वच । सर्पकङ्कालावृक्ष । कौंछ । बडी मालकां. तरदीवृक्ष । तुलसी । गनी । अत्यम्लपणी लता । क्ष्ण-न० विष । लौह । सामुद्रलवण । मुष्कक । तीक्ष्णायस-न० लौह-विशेष ॥ तीक्ष्ण ईसपात । चविका ॥ वि । लोहा । समुद्रनाने । मोखावृक्ष तीक्षणक्षीरी-स्त्री० बशलोचना ॥ वंशलोचन । ॥ नव्या तुगा-स्त्री." ताक्ष्ण-पु० यवक्षार । श्वेतकुश । कुन्दुरुक ॥ तुगाक्षीरी-स्त्री० वंशलोचना । वंशलोचन-विशेष ॥ जवाखार । सफेदकुशा । लोवान-फार्सीभाषा । वंशलोचन । एक प्रकारका वंशलोचन । । .
औषधिकोष। (७७) MADE पेड । पेड। तुङ्ग-न किचल्क || फूलकी केसर । तुम्बीपुष्प-न० लताम्बुज । अलावुपुष्प ॥ तरबूज तुङ्ग-पु. पुन्नागवृक्ष । नारिकेल|| नागकेशरका पेड । कद्दूके फूल । नारियल । तुम्बुक-न० अलाबुफल || तोम्बी । तुङ्गक-पु. पुन्नागवृक्ष || पुन्नागका तुम्बुक-पु. अलाबु ।। कद्, तोम्बीकी बेल । तुङ्गा-स्त्री वंशलोचना | शमी ॥ वंशलोचन । तुम्बुरी-स्त्री० धन्याक ॥ धनियां । छोकर वृक्ष। तुम्बरु-ज. धन्याक || धानियां । तुंगिनी-स्त्री० महाशतावरी || बडी शतावर । तुम्बुरु-पु० न० फलवृक्ष-विशष ॥ तुम्बुरुकापड ।. तुगी-स्त्री० हरिद्रा । बर्बरा ॥ हलदी। वनतुलसी । तुम्बुरु-न. तुम्बुरुफल ।। तुम्बुरुका फल । यह. तुच्छद्रु-पु. एरण्डवृक्ष || अरण्डका पेड । काली मिरचके समान फटे मुखका होता है । तुच्छधान्यक-न पुलाकधान्य ॥ पुलाकधान । तुरगगन्धा-स्त्री० अश्वगन्धाक्षुप ॥ असगन्धका तुच्छा-स्त्री नीलीवृक्ष ॥ नीलका पेड । तुणि-पु० तुन्नवृक्ष ॥ तुनका पेड । तुरगी-त्रा० तुण्डकेरिका-त्री० कार्पासी ॥ कपास । तुरङ्ग-पु. सैन्धव ॥ सेंधानान । तुण्डरी-स्त्री० बिम्विका ॥ कन्दूरी । तुरङ्गक-पु. हरितप्योषा ।। बडी दोरई ॥ तुण्डिका-स्त्री० तुरंगप्रिय-पु० यव ।। जौ। तुण्डिकेरी-सी० कापासी । विम्बिका।। कपासकन्दूरी। तुरङ्गारि-पु० करवीर ॥ कनेरका पेड । तुण्डकेशी-स्त्री० बिम्बिका ।। कन्दूरी । तुरंगिका-स्त्री० देवदालीलता ।। घघरवेल | तुत्थ-न, खपरी तुत्थ । अञ्जनभेद । उपधातु- तुरंगी-स्त्री० अश्वगन्धा । घोटिकावृक्ष ।। असग. विशेष ॥ खपरी तुत्थ । रसोत । तूतिया । न्ध । घोटिकावृक्ष। तुत्थक-न० तुत्थ ।। तूतिया। तरुष्क-पु० गन्धद्रव्यभेद श्रीवास ॥ शिलारस । तुत्था-स्त्री० नीलीवृक्ष । क्षुद्रला । महानीली वृक्ष ॥ सरलका गोंद । नीलका पेड़ । छोटी इलायची । बड़ी नीलका तुलसी-स्त्री० स्वनामख्यातवृक्ष ।। तुलसीका पेड । तुलसद्विषा-स्त्री० वर्वरी ।। वनतुलसी । तुत्थाजन-न० उपधातु-विशेष । तुत्थ ।। तूतिया। तुला-स्त्री० पलशत परिमाण ।। ८०० तोले अर्थात् तुन्दिलफला-स्त्री० त्रपुषी ॥ खीरा । दश १० सेर । तुन्न-पृ० नन्दीवृक्ष ॥ तुनका पेड । तुलाबीज-न० गुञ्जा ॥ घुघुची । तुमुल-पु. कलिवृक्ष ।। बहेडेका पेड । तुलिनी-त्री० शाल्मली ॥ सेमरका पेड । तुम्ब-पु. स्त्री० ० अलावु । तोम्बी । तुलिफला-स्त्री० तुम्बक-पु० अलाबु । राजालावु ॥ तोम्बी । मीठी तुवर-पु० कषायरस ॥ कसेलारस । तुवरयावनाल-पु० धान्य-विशेष ॥ लालज्वार । तुम्बा-स्त्री० अलावु ॥ तोम्बी, कद् । तुवारका-स्त्री० सौराष्ट्रमृत्तिका । आढकी ॥ सोरट. तुम्बि-स्त्री० की मिट्टी । गोपीचन्दन । अड़हर । तुम्विका-स्त्री० अलाबु । कटुतुम्बी ॥ तोम्बी । तुवरी-स्त्री० कडवी तोम्बी। तुवरीशिम्ब-पु० चक्रमर्दकवृक्ष -॥ 'चकवड, प. तुम्बिनी-स्त्रीक कटुतुम्बी ॥ कडवी तोम्वा । तुम्बी-स्त्री० अलाबु । कुलिकवृक्ष । कटुतुम्बी । तुवि-स्त्री. तुम्बी ॥ तोम्बी । बिम्बिका ॥ तोम्बी । काकादनीवृक्ष । कडवी | तुष-पु०' धान्यत्वक् । विभीतकवृक्ष ।। धानोंकी तोम्बी । कादूरी। भूसी । बहेडाका पेड़े। पेड़। तोम्बी । कद्। " मार।
(७८) आयुर्वेदीय- भाषा। - गॅधेलघास । वृक्ष । तुषार---पु. कपूर-विशेष । हिमभेद ॥ चीनियाका तृणपत्रिका-स्त्री० इक्षुदभीतृण ॥ इक्षदर्भतृण । पूर । बरफ । तृणपुष्प-न० तृणकुंकुम । ग्रन्थिपर्ण ॥ तृणकेश तुषोत्थ, तुषोदक-न० काञ्जिक । काञ्जिकभेद ॥ र । गठिबन । कॉजी । कॉजिभेद । तृणपुष्पी-स्त्री० सिन्दूरपुष्पी ।। सिन्दूरिया । तुहिनाशुतैल-न० कर्पूरतैल कपूरका तेल । तृणवल्वजा-स्त्री० बल्वजा ॥ सावेवागे, केचित् तूणी-[ -पु० नन्दीवृक्ष !! तुनका रोड । तूणीक-पु० तृणराज तृणराजक-पु० तालवृक्ष । नारिकेल तूतक-न. तुत्य || तूतिया । ताडका पेड । नारियलका पेड । तूद-पु० तूलवृक्ष ॥ सहतूत । तृणबोज-पु० श्यामाक ॥ समाक । तूरी-स्त्री० धुस्तूरवृक्ष ।। धत्तरका पेड़ । तृणबीजोत्तम-पु. तूल-न० अश्वत्थाकारवृक्ष-विशेष ।। सहतूतका पेड़। तृणशीत-न० कत्तण ।। गन्धतृण । रोहिषसोधियाँ । तूलवृक्ष-पु० . शाल्मली ।। सेमरका पेड । तूलशकरा-स्त्री० कापसिीबीज | कपासके बीज । तृणशोता-स्त्री० जलापप्पली ॥ जलपपिल । अर्थात् विनोले । तृणशून्य-न० मल्लिका । केतकीफल । नागरङ्ग ॥ तूला-स्त्री० कार्पासी ॥ कपास । मल्लिका पुष्पवृक्ष । केतकीकाफल । नारङ्गीका तूलिनी-स्त्री. लक्ष्मणकन्द । शाल्मलिवृक्ष लक्ष्मणा. कन्द । सेमरका पेड़। तृणसारा-स्त्री. कदली ॥ केला । तूलिफला-स्त्री० शाल्मलि ॥ सेमरका पेड । तृणांत्रिप-पु० मन्थाकतृण ॥ मन्थानकतृण । तूली-स्त्री० नीलीवृक्ष ॥ नीलका पेड । तृणाढय-न० पर्वततृण ॥ तृणाख्य । तूपरिका-स्त्री. तुवरिका ॥ गोपीचन्दन । अडहर। तृणाम्ल-न० लवणतृण ॥ लवणतृण । तूवरी-स्त्री० सौराष्टमृत्तिका || सोरटकी माटी । तृणामृक्-पु. तुणकुंकुम ॥ तृणकेशर । तृख-न० जातफिल || जायफल । तृणेक्षु-पु० बल्वजा ॥ सावेवा कोचत् भाषा । तृण-न० सामान्यतृण । गन्धतृण ॥ साधारणतृण । तणोत्तम-पु० उखवलतृण ॥ उखर्बलतृण । सुगन्धितृण । तृणोद्भव-पु. नविार | नीवार धान । तृणकुंकुम-न• सुगन्धिद्रव्यभेद ॥ तृणकेसर । तृणौषध-न० एलयालुकानाम गन्धद्रव्य ।। एलुआ। तृणकूर्म-पु. तुम्बी । तोम्बी । तृपला-स्त्री० त्रिफला । हड, बहेडा, आमला । तृणकेतु-पु. वंश ।। बाँस । तप्र-पु० घृत ॥धी। तृणकेतुक-पु." तृणग्रन्थि-पु० स्वर्ण जीवन्ती ॥ सोनाजीवन्ती । तृफला-स्त्री० त्रिफला ॥ हरडा, बहेडा आमला । तृषा-स्त्री० लाङ्गलिकावृक्ष ॥ कलिहारीका पेड । तृणद्रुम-पु० ताल । गुवाक । ताली । केतकी । तृषाभू-स्त्री० क्लोम ॥ पेटमें जलरहनेका स्थान । खजूर । नारिकेल । हिन्ताल || ताडका पेड़ । तृषाहा-स्त्री० मधुरिका ॥ सौंफ । सुपारीका पेड । ताडीका पेड । केतकीका पेड । तृषितोत्तरा-स्त्री० असनपर्णी ॥ घटशन | खजूरका पेड । नारियलका पेड । एक प्रकारका तृष्णा-त्री० स्वनामख्यातरोग-विशेष ॥ तृष्णा । तृष्णारि-पु० पर्पट ॥ पित्तपापडा । तृणधान्य-न० धान्य विशेष । । समा,धान इत्यादि। तेजः [स]-न. रेतः॥नवनीत। स्वर्णक। मज्जा । तृणध्वज-पु० वंश ॥ बास । पित्त । शुक्र । नौनीधी । सुवर्ण । सोना।मज्जा। तृणनिम्ब-पु. नेपालनिम्ब ॥ नेपालदेशका चि, धातु । पित्तं । तेजःफल-पु० वृक्ष-विशेष ॥ तेजफल । - । छोटा ताड । रायता।
औषधिकोष । ओला । पीपल । . ककडी। तेजन-पु. वंश । मुञ्ज । भद्रमुञ्ज । शर ॥ बाँस । तोद-पु. वेदना ।। वेदना । पीडा । मूज । रामसर । सरपता । तोमरिका-स्त्री० तुवरिका ।। गोपीचन्दन । तेजनक-पु. शर ॥ कोंडातृण । सरदरीतृण । तोय-न जल || पानी। तेजनी-स्त्री० मूळ । ज्योतिष्मती । चव्य ॥ चुर- तोयकाम-पु० जलवेतस || जलवेत । नहार । बडी मालकांगनी । चव्य । तोयडिम्व-पु. धनोपल करका, मेघसम्भूत शिला। तेजपत्र-न० वृक्ष-विशेष ॥ तेजपात । तेजस्विनी-स्त्री० ज्योतिष्मती । महाज्योतिष्मती । तोयद-पु० मुस्तक ।। मोथा। मालकांगनी । बडी मालकांगनी । तोयधर-पु० मुस्तक सुनिषण्णशाक ॥ मोथा । शि- रिआराशाक। तीजका-स्त्री. ज्योतिष्मती ॥ मालकांगनी। तोयविप्रिय-न० लवङ्ग ॥ लौंग। तेजोमन्थ-पु० गणिकारिका ॥ अरणीवृक्ष । तोयाधिपिप्पली-स्त्री० जलजशाक-विशेष ॥जल तेजोवती-स्त्री. गजपिप्पली । चविका । महा ज्योति ष्मती । स्वनामख्यात वृक्ष ॥ गजपीपल, चव्य । तोयपुष्पी-स्त्री० पाटलावृक्ष ॥ पाढर (ल) का बडीमालकांगनी । तेजबल। तेजबल्कल । तेजोवृक्ष-पु० क्षुद्राग्मिन्थ ॥ छोटी अरणी । तोयप्रसादन-न० कतक । निर्मली। तेजोहा-पु. तेजोवती । चावका तेजबल । चव्य । तोयप्रसादनफल-न० कतकफल ॥ निर्मलीफल। तेजस-न. धातुद्रव्य || घी । धातुद्रव्य । तोयफला-स्त्री० फललता-विशेष इरु ||तरबूज। तैजसावर्तनी-स्त्री० मूपा ॥ सुवर्ण इत्यादि धातु- गलाने की घडिया । तोयवल्ली-स्त्री० कारवेल्ल || करेला । तैरणी-स्त्री० क्षुपविशेष ॥ तैरणी । तोयशुक्तिका-स्त्री० जलशुक्ति ॥ जलकी सीप । तैल-न० तिलादिस्नेह ॥ शिहक ॥ तिल, अली, तोयादिवासिनी-त्री० पाटला वृक्ष सों इत्यादिका तेल । शिलारस । वृक्ष। तैलकन्द-पु० कन्दविशेष ॥ तेलकन्द । तोयाधिबासिनी-स्त्री." तैलकिट्ट-न० तैलमल || तेलकी कीट । तोल तोलक-न० पु० तोलकपरिमाण । शाणद्वय तैलद्रोणी-स्त्री० कण्ठपर्यन्तमज्जनार्थ तैलपूर्ण काष्ठा. परिमाण । अष्णवातरात्तपारमाण ॥ एक तोला दिनिम्मित पात्र-विशेष ॥ तेलका वरतन जिसमें एक. परिमाण ८० रत्तीका परिमाण । ९६ रत्तीका सौअठाईस सेर तेल आता है। तैलपर्णक-न० ग्रन्थिपर्ण वृक्ष ।। गठिवन । तौतिक-न० मुक्ता ॥ मोती। तैलपणिक-न० हरिचन्दन । चन्दन-विशेष ॥ह-तौतिक-पु० शुक्ति ॥ सीप । रिचन्दन । एकप्रकारक' चन्दन ॥ तोषार-न० तुषारजल ॥ तुषारका जल अर्थात् तैलपर्णी-त्री० श्रीबास । चन्दन । शिहक ।। सर- लकागोंद । चन्दन । शिलारस । त्रपु-न० सीसक । रंग || सीसा । रांग । तैलफल-पु० इंगुदी । विभीतक ॥ हिंगोट । ब- पुः[स]-न० रंग || रांग । वपुककटी-स्त्री० पुषी ॥ खीरा । तैलभाविनी-स्त्री० जातीपुष्पवृक्ष ॥ चमेलीका पेड। त्रपुटी-स्त्री० सूक्ष्मैला ॥ छोटी इलायची । तैलवल्ली-स्त्री० शतमूली ॥ शतावर । त्रपुल-न० रंग ॥ रांग । तैलसाधन-न० गन्धद्रव्य-विशेष ॥ शीतलचीनी । त्रपुष-न० रंग । त्रपुषीफल || रांग । खीरा । तेलागरु-न -न० दाहागरुनामसुगन्धद्रव्य ॥ दाहअगर। त्रपुषी-स्त्री. कर्कटी । फललता-विशेष ॥ ककडी । तोक्ल-पु० हरिद्यव । अपक्कयव ॥ हरे जो कच्चे जो खीरा । पाडरका परिमाण । ओस । हेडावृक्ष ।
(८०) आयुवदीय- त्राणा-स्त्री." KED पुस-न० रंग || रांग । त्रिदशमञ्जरी-स्त्री० तुलसी ।। तुलसी । पुसी-स्त्री० महेन्द्रवारुणी। कर्कटी । लता-विशेष। त्रिदिवोद्भवा-स्त्री० स्थूलैला ।।वडी इलायची । बडी इन्द्रफला । ककड़ी । खीरा । त्रिदोष-न० वातपित्तकफरूप दोषत्रय ।। वात पित्त त्रयी-स्त्री सोभराजी ।। वायची वृक्ष । त्राण-न-त्रायमाणालता ॥ त्रायमान । त्रिधारक-पु० गुण्डतृण ।। कशेर । गुण्डतृण । त्रिधारस्नुही-स्त्री० स्नुही-विशेष । तिधारा थूहर । त्रायन्ती-स्त्री." त्रिनेत्र-न० स्वर्ण ।। सोना । त्रायमाणा-स्त्री० स्त्रनामख्यात लता ॥ त्रायमान । त्रिनेत्रा-स्त्री. वाराहीकन्द ।। गेंठी, चर्मकारालुक । त्रिंशत्पत्र-न० कुमुद ॥ कमोदिनी । त्रिपत्र-पु० बिल्ववृक्ष ।। बेलका पेड़ । त्रिक-पु० पष्ठवंशाधर । त्रिफला । त्रिकटु त्रिमद । त्रिपत्रक-पु० पलाशवृक्ष ।। ढाककावृक्ष । पीठके वांसके नीचेका वह जोड जहां तीन हाड त्रिपदा-स्त्री० हंसपदीवृक्ष ।। लालरंगका लज्जालु । मिले हैं । हरड, बहेडा, आमला ॥ साठ, त्रिपदी-स्त्री० गोधापलिता ।। हंसपदी । भिरच, पीपल । माथा, चीता, वायविडंग । त्रिर्पणा-पु. ० पलाशवृक्ष ।। ढाकका पेड। त्रिकट-पु० गोक्षुरक ॥ गोखुरू । त्रिपणिका-स्त्री० कन्द-विशेष || त्रिीकन्द । त्रिकटु-न० मिश्रितशुण्ठीमार चापप्पल्य: ।। सोंठ, त्रिपर्णी-स्त्री० शालपर्णी । वनकपासी । पृश्निपीभेद। मिरच, पीपल । शालबन । बनकपास । पिठवनभेद । त्रिकण्ट-न० मिालतबृहत्याग्नदमनादुत्पर्शात्रयरूपम्॥ त्रिपादिका-स्त्री० हंसपदी लता ।। लालरंगका बृहती, अमिदमनी, जवासा । लज्जालु। त्रिकण्ट-पु०, गोक्षुरक पत्रगुप्त वृक्ष ॥ गोखुरू। त्रिपुट-पु० गोक्षुरवृक्ष । सतीलक । निण्डिका ।। गोखरूका पेड । मटर । खसारी। त्रिकण्टक-पु० गोक्षुरक वृक्ष ।। गोखुरूका पेड । त्रिपुटा-स्त्री० मल्लिका । सूक्ष्मैला । त्रिवृत् । कर्ण- त्रिकत्रय-न० त्रिकटु, त्रिफला, त्रिमेद सौंठ १ स्पोटा । स्थूलला । रक्तत्रिवत् । मालिकापुष्पवृक्ष। मिरच २ पीपल ३, हरड १ बहेड़२ आमला३ वेलाका पेड । छोटी इलायची। निसोद। कन. मोथा १ चीता २ वायाडंग ३ । फोडा वेल । बड़ी इलायची । लाल निप्सोत । त्रिकार्षिक-न० शुण्ठी, अतिविषा, मुस्ता ॥ सोंठ, त्रिपुटी [-]-पु० एरण्डवृक्ष ।। अण्डका पेड । अतीस, मोथा । त्रिपुटी-स्त्री० त्रिवृता ।। निसोत । त्रिकूट-न० सिन्धुलवर्ण । सामुद्रलवण ॥ सैंधानाने । त्रिपुटीफल-पु. एरण्डवृक्ष-अण्डका पेड़ । समुद्रनोन । त्रिपुरमलिक-स्त्री० पुष्पवृक्ष-विशेष ।। त्रिपुर- त्रिकूटलवण-न० द्रोणीलवण ॥ द्रोणालपण । माली। नोन त्रिपुष–पु० फललता-विशेष । गोधूम । कर्कटी । त्रिकोणफल-न० शृंगाटक ॥ सिंघाडा । खीरा । गेंहू । ककड़ी। त्रिख-न० पुष । खीरा । त्रिपुषा-स्त्री० कृष्णात्रिवृत् ।। श्यामपनिलर, काला त्रिजटा-स्त्री० बिल्ववृक्ष ।। बेलका पेड । त्रिजातक-न० मिलिततुल्यत्वगेलापत्राणि ।। त्रिफला-स्त्री० मिलितहरीतकीविभतिक्यामलकी- दारचीनी, इलायची, तेजपात । फलानि ।। हरड़, बहेड़ा, आमला । त्रिदला-स्त्री. गोधापदीलता ॥ हंसपदी । त्रिफली-स्त्री." त्रिदलिका-स्त्री. चर्मकपा ।। सातला | त्रिवलीक-न० वायु । मलद्वार । त्रिदशपुष्प-न० लवंग ।। लोग। त्रिभिण्डा-स्त्री० त्रिवृता ।। निसाते । तिघारा थूहर। वरतनका निसोत । .
औषधिकोष। (८१), مرت سنين . चीनी। " त्र्यूषण-न० भापा । , तावा । . पीपल । - त्रिमद-पु० मुस्तचित्रकविडंगानि ।। माथा, चीता, बोटि-स्त्री० कटफल ॥ कायफल । वायविंडग। व्यञ्जन-न० अंञ्जनत्रय ॥ कालाञ्जन,काला शुम्मा। त्रिमधु-न० घृत, मधु, शर्करा ।। घी, सहत, पुष्पाञ्जन, कुसुमाञ्जन । रसाञ्जन, रसोत । त्र्युषण-न० त्रिकटु ॥ सौंठ, मिरच, पीपल । त्रिमृत्-स्त्री० त्रिवृत् ।। निसोत । त्रिमृता-स्त्री." स्वक-न० गुडत्वक् । वल्कल । चभ ॥ दालची त्रियष्टि-पु० क्षेत्रपप्पटी ।। पित्तपापडा, दवनपापडा। नी । बल्कल, छाल । तज | चमडा । त्रियामा-स्त्री०. हरिद्रा । नाली । कृष्णात्रिवृत् ॥ त्वञ्छद-पु० क्षीरिकावृक्ष ॥ क्षीरकञ्चुकी वङ्ग- हलदी । नीलकापेड । कालानिसोत । त्रिरेख-पु० शंख ।। शस्त्र । त्वकपत्र-न० तत्कट ॥ तज । त्रिलवण-न० सैन्धव, बिड़, सौवर्चल ।। सैंधानो त्वकूपत्री-स्त्री० हिंगुपत्री ॥ हींगपत्री । न, चोहारकाडा, विरियासञ्चरनोन ! त्वपुप्प-न० रोमाञ्च । किलास ॥ सैंहुवारोग । त्रिलोक-न० स्वर्ण, रजत, ताम्र ।। सोना, चांदी, त्वक्पुष्पिका-स्त्री० किलास ॥ सहुवारोग । वक्युप्पी-त्री" निवर्ग-पु० त्रिफला । त्रिकटु ।। हड, बहेडा, त्वक्सार-पु० वंश । गुडत्वक् । गणवृक्ष ॥ बाँस । आमला ।। सोंठ, मिरच, पापल । दालचीनी । सनका वृक्ष । त्रिवर्णक-न० गोक्षुरक । त्रिफला।त्रिकटु ॥ गोखुरू- त्वक्सारा-स्त्री० वंशलोचना ॥ वंशलोचन । का पड । हड, बहेडा, आमला । सौंठ, मिरच, त्वक्सारभेदिनी-स्त्री० क्षुद्रचञ्चुवृक्ष ॥ छोटा चञ्चुका पेड़ त्रिबीज-पु० श्यामाक || समाक । त्वक्सुगन्ध-पु. नारङ्ग ॥ नारङ्गीका पेड ! त्रिवृत्-स्त्री० लता-विशेष ॥ पनिलर, निसोथ । त्वक्सुगन्ध-पु. लवङ्ग || लौंग । त्रिवृत्पर्णी--स्त्री० हिलमोचिका ॥ हुरहुर । '० एलवालुका ॥ एलुआ । त्रिवृता-स्त्री० त्रिवृत् ॥ निसोथ । त्वक्क्षीरा-स्त्री. वंशलोचना ॥ वंशलोचन । त्रिवेला-स्त्री." त्वकक्षीरी-स्त्री०" निशाकपत्र-पुं० बिल्व ।। बेलका पेड़ । त्वगाक्षारी-स्त्री." त्रिशिख-पु." त्वगन्ध-पु० नागरङ्ग ॥ नारङ्गीका पेड़ । त्रिशिखिदला-स्त्री. मालाकन्द ॥ मालाकन्द- त्वदोष-पु० कोढरोग ॥ दाद् । नामक मूल । त्वग्दोषावहा-स्त्री० वाकुची । वायची । त्रिसन्धि-पु० पुष्प-विशेष ।। त्रिसन्धिपुष्प । त्वग्दाषारि-पु० हस्तिकन्दः॥ हस्तिकाद । त्रिसम-न० हरीतकी, शुण्ठी, गुड ॥ हड, सोंठ । त्वच-न० वृक्ष-विशेष ॥ तज । दालचीनी । त्वचापत्र-न० त्वकपत्र ॥ तज । त्रिसुगन्धि-न० त्रिजातक ॥ इलायची, दालचीनी, त्वाचेसार-पु० वंश ॥ बांस । तेजपात । त्वचिसुगन्धा-स्त्री० क्षुद्रेला || छोटी इलायची । विक्षार-न० क्षारत्रय || जवाखार, इति श्रीशालिग्रामवैश्यकृतेशालिग्रामौषधशब्दसागरे द्रव्याभिधाने तकाराक्षरे षोडशस्तरङ्गः ॥ १६ ॥ सुहागा। त्रिक्षुर-पु० कोकिलाक्ष वृक्ष ॥ तालमखाना । द. त्रुटि-स्त्री० क्षुद्रेला ॥ छोटी इलायंची। दंशमूल-पु० शिग्रु ॥ सैजिनका पेड । त्रुटिबीज-पु० कचु ॥ अरुई। दग्ध-न०कत्तण ॥ गन्धलघास । त्रैलोक्यविजया-स्त्री. विजया । भङ्ग । दग्धरुह-पु० तिलकवृक्ष ॥ तिलकपुष्पवृक्ष । त्वक्सुगन्धा-स्त्री. गुड। सज्जीखार, (८२) आयुर्वेदीय- दरवरहा-स्त्री० दग्धावृक्ष ॥ दग्धावृक्ष । दन्तच्छद-पु० ओष्ठ ॥ होट ! दग्धा-स्त्री० वृक्ष-विशेष || कुरुई देशान्तरयिभाषा। दन्तच्छदोपमा-त्री बिम्बी ।। कन्दूरी । दग्धिका-स्त्री० ॥ दन्तधावन-पु० खदिरवृक्ष ।गुच्छकरञ्ज । बकुल ।। दण्डकन्दक-पु० धरणीकन्द ।। धरणीकन्द । खैरका पेड़ । गुच्छकरञ्ज । मौलसिरीका पेड़ । दण्डरी-स्त्री. डङ्गरीफल || डङ्गरी । दन्तपत्रक-न० कुन्दपुष्प || कुन्दके फूल । दण्डवृक्षक-पु. स्नुहीं ॥ थूहरका पेड़ । दन्तपुष्प-न० कतकफल || निर्मली। दण्डहस्त-न० तगरपुष्प ॥ तगरके फूल । दन्तफल-न० कतक || निर्मली । दण्डाहत-न. घोल || छाछ, महा । दन्तफल-पु. कपित्थ | कैथवृक्ष । दण्डिनी-स्त्री० दण्डोत्पला ॥ दण्डोत्पल । दन्तफली-स्त्री० पिपले ।। पीपल । दण्डानि-पु० दमनवृक्ष ।। दवनावृक्ष । दन्तमा लिका-स्त्री. दन्तीवृक्ष ।। दन्तीवृक्ष । दण्डोत्पल-न० वृक्ष-विशेष ॥ डानिकुनिशाक दन्तरोग-पु० रदनामय ।। दन्तरोग । वङ्गभाषा । दन्तबीजक-पु० दाडिम अनार । दण्डोत्पला-स्त्री० श्वेत दण्डोत्यै। सफेद दण्डोत्पल। दन्तशट, दन्तशठ-पु० जम्बीर । कपित्थ । दद्रु-पु० रोग-विशेष || दाद । कर्मरंग । नागरङ्ग । अम्ल ।। जम्बीरी नीबू॥ दुद्रुन्न-पु० चक्रमवृक्ष ॥ चकवड, पभाड । कैथका वृक्ष । कमरख । नारङ्गीका पड। अम्ल । दद्-पु० दुद्रु ॥ दाद । खट्टा । दद्रु-पु० दद्रुघ्न ॥ पमाड । दन्तशठा-स्त्री० चाङ्गेरी ॥ चाङ्गरी । दधि-न० क्षीरावकार-विशेष ॥ दहीं। दन्तशर्करा-स्त्री० दन्तरोग-विशेष ।।दांतोंका किरना। दधिचिंका-स्त्री० आमिक्षा । दन्तशुल-पु० दशनवेदना ॥ दांतोकी वेदना । दाधज-न० नवनीत ॥ नैनीघी मक्खन । दन्तहर्षे-पु० दन्तरोग-विशेष ॥ दन्तहर्ष रोग दांत दधित्थ-पु. कपित्थ ॥ कैथका पेड । दधित्थाख्य-पु० सरलद्रव ॥ लोवान-कुत्रचित् दन्तहर्षक-पु० जम्बरि । जम्भारी नीबू । दन्तहर्षण-पु. " दधिनामा [ ]-पु. कपित्थवृक्ष॥ कथाका पेड । दन्तघात-पु. निम्बूक ॥ नीबू । दधिपुष्पिका-श्री. अपराजिता ।। कोयल । दन्तार्बुद-न० पु० दन्तरोग-विशेष । जिसके मसू- दधिपुष्पी-स्त्री. कोलशिम्बी ॥ सुअरासेम । दौमैं गांठसी हो और चेप निकलता रहे । दाधिफल-पु. कपित्थवृक्ष ॥ कैथका पेड । दन्तिका-स्त्री० दन्तीवृक्ष । दन्तीवृक्ष । दन्तिजा-त्री." दधिसार-१० नवनीत ॥ नैनीघी, मक्खन । दन्तिनी-स्त्री. दधिस्नेह-पु० दसिर ।। दहीकी मलाई । दन्ती-स्त्री० स्वनामख्यात वृक्ष।। दन्तीवृक्ष । दधिस्वेद-पु० घोल || घोल । दन्तीबीज-न. जयपाल || जमालगोटा । दधीच्यसिंध-न हीरक ॥ हीरा । दन्तुरच्छद-पु० बीजपूर || विजोरा नीबू । दध्यानी-स्त्री० सुदर्शना ।। सुदर्शन । दमन-पु० पुष्प-विशेष । कुन्दपुष्प ॥ दोनावृक्ष । दध्युत्तर,दध्युत्तरम-न० दधिस्नेह ॥दहीकी मलाई । कुम्दके फूल । दन्तकर्षण-पु० जम्बीर ।। जम्बीरी नीबू । दमनकपु० रवनामख्यात पुष्पवृक्ष ॥ दवनावृक्ष । दन्तकाष्ट-न० विकङ्कतवृक्षः। दन्तधावन काष्ठिका ।। दमनी-स्त्री० अमिदमनीवृक्ष । अनिदमनी । कण्टाई। दतोन करने योग्य काठ, लकड़ी । दमयन्तिका-स्त्री० भद्रमल्लिका ॥ मदनबाण. पुष्प- दन्तकाष्टक-न आहुहुल्यवृक्ष ।।: तरवट काश्मीर. वृक्ष । दमयन्ती-त्री० खड़े रहे। भाषा । दधिमण्ड-पु० मस्तु । . देशीय भाषा ।
औषधिकोष। (८३) दर-न. शंख || शंख । दशांगुल-न० खर्बुज !! खवूज । दरकण्टिका-स्त्री० शतावरी ।। शतावर । दशानिक-पु० दन्तावृक्ष ।। इसीवृक्ष । दरद--न हिंगुल ॥ सिङ्गरमा । दशारहा-स्त्री० कैवत्तिका ॥ मालवे प्रसिद्ध । दर्द,दद्रु,ददू-पु० दद्रुरोग ॥ दाद । दहन-पु० चित्रक । भल्दातक ॥ चीता भिल्लावा । दन-पु० "वक्रमवृक्ष ॥ चकवङ । दहनागरुन दाहागरु । दाहअगर । दप--पु० कस्तूरी ॥ कस्तुरी, मृगमद । दक्ष-पु. कुक्कुटपक्षी । मुरगा । दर्पण न० चक्षु ॥ नत्र । दक्षिणावत्तकी स्त्री० वृश्चिकाली । वृश्चिकालो । दर्भ-पु. कुश । काश । उलपतृण || कुशा |कांस। दाडिम-पु० स्वनामप्रसिद्ध फलवृक्ष । एला ||अनार दाभ, डाम। बा दाडिसका पेड । इलायची । दर्भाहय-पु० मुज ॥ मूज । दाडिमपुष्पक-पु० रोहितकवृक्ष ॥ रोहेडावृक्ष । दर्भपत्र-पु० काश || कोस । दाडिमांसार-पु० दाडिम || अनार । दल-न. तमालपत्र || तेजपात । दाडिम्ब-पु. दलकोष-पु. कुन्दपुष्पवृक्ष ॥ कुन्दपुष्पवृक्ष । दान्त-पु० दमनकवृक्ष ।। दवनावृक्ष । दलनिम्नॊक-पु० भूर्जवृक्ष || भोजपत्रवृक्ष । दारुण-न० कतक || निम्मली। दलप-पु० स्वर्ण ॥ सोना । दारद-पु० पारद । हिंगुल | विषभेद ॥ पारा । दलपुष्पा-स्त्री० केतकी | केतकी । सिंगरफ । दारद विष । दलसारिनी-स्त्री० केमुक || केओंआ । दारी-स्त्री० क्षुद्ररोग-विशेष । विवाई । दलसूचि-पु. कण्टक ॥ काँटा । दारु- देवदारु । पित्तल !! देवदार । पीतल । दलाढक-पु० स्वयंजातातल । पृश्नी । गैरिक । दारुक-न० देवदारु ॥ देवदार। फैन । नागकेशर । कुन्द । करिकर्ण । शिरीष|| अपने आपही उत्पन्न हुआ तिलका पेड ।जलकु. दारुकदली-स्त्री. वनकदली ॥ वनकेला । म्भी । गेरू । झाग । नागकेशर। कुन्दपुष्पवृक्ष। दारुगन्धा-स्त्री. चीडागन्धद्रव्य ।। चीढ । हस्तकणेपलासवृक्ष । सिरतका पेड । दारुण-पु० चित्रक || चीता । दारुणक-न० मस्तकजातक्षुद्ररोग-विश्लेष।। रुङ्गी । दलामल-न० मरुबक । दमनकक्ष । मदनवृक्ष । दारूनिशा-स्त्री० दारुहरिद्रा ॥ दारहलदी । भरुआवृक्ष || दवनावृक्ष । मैनकलवृक्ष । दलाम्ल-न. चुक्र || चूका । दारुपत्री-स्त्री० हिंगुपत्री ।। हीमपत्री । दलगन्धि-पु० सप्तपणवृक्ष । तिवन । दारूपीता-स्त्री० दारहरिद्रा । दारहलदी। दवथु--पु. परिताप || नेत्रादिदाद । दारुसिता-स्त्री० गुडत्वक् ।। दालचीनी । दशनाच्या स्त्री० चुक्रिका ॥ चकाशाक । दारुमुच-न० स्थावर विषभेद ।। दारुमुचाविष । दशपुर-न० कैवर्ती मुस्तक ॥ केवटीमोथा । दारुहारिद्रा-स्त्री० स्वनामख्यातद्रव्य । दारुहलदी । दशमूत्रक-न० हस्ती, महिष, उष्ट, गो, छाग, मेप, दाचि-पत्रिका, स्त्री० गोजिह्वा ।। गोभी । अश्व, गद्दभ, मानुप, मानुषी ॥ हाथी १भैंस २ दाविज्ञा-स्त्री० क्वाथोद्भवतुत्थ । गोजिह्वा ॥ एक ऊंट ३ गाय ४ बकरा ५ मेंढा ६ घोडा ७ गधा प्रकारका नेत्रका अञ्जन । गोभी । ८ मनुष्य ९ स्त्री १० दश मूत्र दावा-स्त्री० दारुहरिद्रा । गोजिह्वा। देवदार । ह. दशमल-न० बिल्व, श्योनाक गम्भारी,पाटला, गणि रिद्रा ।। दारुहलदी। गोभी देवेदारु । हलदी। कारिका, शालपर्णी, पृश्मिपणी, बृहती, कण्टकारी, दार्विकाथोद्रव-न० रसाञ्जन । कृत्रिमरसाचन ॥ गोक्षुर ॥ बेल १ शोनापाठा २ कम्भारी ३ रसोत । कृत्रिम रसात । पाढल ४ अरणी ५ शरिवन ६ पिठवन ७ छोटी दाल-न० वन्य मधु ।। एक प्रकारका मधु । कटेरी ८ बडी कटेरो ९ गोस्वरु १० । दाल-पु० कोद्रव ॥ कोदें।। ।
(८४) आयुर्वेदीय- । केशर । दालव-पु० स्थावर-विषभेद ॥ शंखिआ, अफीम | दिव्यलता-स्त्री० मूर्धरलता ॥ चुरनाहार । इत्यादि। दिव्यसार-पु० शालवृक्ष || सालवृक्ष । दाला-स्त्री० महाकाललता। दिव्या-स्त्री० धात्री । बन्ध्याकर्कोटकी । महामेदा दालिका-स्त्री. ब्राह्मी । स्थूलजरिक । श्वेतदूर्वा । हरीतकी । पुरा । शतावरी || आमला । बाँझखखसा महा दालिम-पु० दाडिम || अनार । मेदा । ब्रह्मी घास । बड़ा जीरा । सफेद दूब दाली-स्त्री. देवदालीलता ॥ घबरवे , सोनैया, हरहरड । कपूर कचरी । शतावर । वंदाल । दासपूर-न० कैवर्तीमुसतक ॥ केवटीमोथा । दिष्ट-पु० दारुहरिद्रा ॥ दारहलदी । दासी-स्त्री० काकजङ्गा वृक्ष । नीलाम्लानपुष्पवृक्ष दीन-न० तगर ॥ तगर । पीताम्लानवृक्षः॥ मी, काकजंघा । नीली कट- दीपक-न० कुंकुम ॥ केशर । सरया । पाली कटारैयावृक्ष । दपिक-पु० यवानी ।। अजमायन । मोरशिखा । दीपन-त० तगरमूल । कुंकुम ।। तगरमूला । दाह-पु० रोग-विशेष ॥ ज्वालारोग । दाहक-पु. चित्रक । रक्तचित्रक ॥ चीता । लाल चीता। दीपन--पु० मयूरशिखाः। शालिञ्चशाक । काममई । दाहज्वर-पु० गात्र ।। गात्र । ज्वालायुक्त ज्वर । पलाण्डु ॥ मोरशिखा । शान्तिशाक । कसौदी। प्याज । दाहहरण-न० वरिणमूल ॥ खस । दाहागुरु-न० सुगन्विद्रव्य-विशेष ॥ दार अगर । दीपनी-स्त्री. मोथका । पाहा यवानी ।। मेथी। दाक्षायणी-स्त्री० दन्तीवृक्ष ।। दन्तीवृक्ष । पाठ । अजमायन । दाक्षिणात्य-पु० नारिकेल | नारियल | दीपनीय-पु० यवानी । औषधवर्ग-विशेष ॥ अज. दिलीर-न० शिलीधूक ॥ भुईफोड । वायन । पीपल, पपिलामूल, चव्य, चीता, सोट । दिवाकर-पु० अर्कवृक्ष । पुष्पविशेष ॥ आकका | दीपपुष्प-पु० चम्पकवृक्ष | चम्पाका पेड़। पड़ । दिवाकरपुष्प । दीप्त न० स्वर्ण । हिंगु ॥ सोना । हींग । दिवोद्भवा-स्त्री० एला । इलायची ।। दीप्त-पु० निम्बक ॥ नीबु । दिव्य-न० लवंग । हरिचन्दन॥लोंग । हरिचन्दन। दीप्तक-न० स्वर्ण ।। सोना । दिव्य-पु० यव । गुग्गुल || जौ गूगल । दीप्तरस-पु० किंचुलुक ॥ केंचुवा । दिव्यगन्ध-ज० लवंग ॥ लोंग । दीप्तलोह-न० कांस्य ॥ कां । दिव्यगन्ध-चु० गन्धक | गन्धक । दीप्ता-स्त्री० लाङ्गालिकावृक्ष ॥ ज्योतिष्मती ॥ कलि. दिव्यगन्धा-स्त्री० स्थूलैला । महाचाचुशाक ||बडी हारी । मालकांगुनी । इलायची । बडाचवुताशाक । दीप्ति-स्त्री० लाक्षा । कांस्य । सातला || लाख । दिव्यचक्षु [स् )-न० उपचक्षु ॥ चसमा अर्थात् काँसा । सातला, सेहुण्डभेद । दीप्तिक-पु० दुग्धपाषाणवृक्ष । शिरगोला धङ्ग- दिव्यतज[स]-स्त्री ब्राह्मी ॥ ब्राह्मीघास । भाषा। दिव्यपुष्प-पु० करवीर ॥ कनेर । दीप्य-पु० यवानी । जीरका । मयूरशिखा ॥ अजमा. दिव्यपुष्पा-त्री० महाद्रोण ॥ बडोद्रोणपुष्पी ॥ यन । जीरा ! माराशखा । बडागूमा । दीप्यक-न० अजमोदा । यवानी ॥ अजमोद । दिव्यपुषिएका-स्त्री० लोहितार्क ॥ लोहितवर्ण ॥ अजमायन । आककावृक्ष। दाप्यक-पु. यवानी । लोचमस्तकवृक्ष । दिव्यरस-पु. पारद ।। पारा । मायन । रुद्रजटा। ऐनक । . अज- PEACERE औषधिकोष। (८५) दीर्घ-पु० शालभेद। इत्कट ।। सालभेद । रामसर । दीर्घपत्रिका --स्त्री० श्वेतवचा । घृतकुमारी । शाल- दीघकणा-स्त्री. गोरजोरक ॥ सफेद जीरा । पर्णी । सफेदे वच । घकुिवार । शरिवन । दीर्घकण्टक-पु० बब्यूर । बङ्घरका बृक्ष । दीर्घपत्री-स्त्री० पलाशीलता । महाचञ्चुशाक ॥ दीर्घकन्दक-न ० मूलका ।। मूली । पलाशीलता। बडाचेवुनाशाक। दीर्वकन्दिका-त्री० मूबली ।। मुषली । दधिपर्णी-स्त्री० पृश्निपर्णी ।। पिदवन । दीर्घकाण्ड-पु० गुण्डतृग ॥ गुण्डतृण-कसेर । दीर्घल्लव-पु. शणवृक्ष ॥ सनका पेड़। दीर्घकाण्डा-स्त्री० पातालगरुड । चिरहिटा । दधिपादप-पु० ताल । पूग ॥ ताड । सुपारी। दीर्घकील-पु० अङ्कोटवृक्ष ॥ ढेरा, ढेरा । दीर्घफल-पु. आरग्वधवृक्ष || अमलतास । दीर्घकीलक-पु." दीधफलक-पु० अगस्त्यवृक्ष ।। हथियावृक्ष । दोघकोशिका-दीर्थ कोषिका, स्त्री० शुक्ति ॥ सीप, दीर्घफला-स्त्री. अतुका । कपिलद्राक्ष ॥ जतुका. वा जलजन्तु । लता मालवे प्रसिद्धा । अंगुर-भूरेरङ्गकी दाख । दधिग्रन्थि-पु० गजपिप्पली ।। गजपीपल । दीर्घमूल-न० लामज्जक । लामम्जकतृण । दीर्घतरु-पु. ताल || ताइ । दीर्घमूल-पु० मोरटलता । बिल्वान्तरवृक्ष ॥ क्षीर- दीपातमिपा-स्त्री० कर्कटी ॥ ककडी । नोरट । बिल्वान्तरवृक्ष। दीघतृण-पु० पलिवाह || पलिवाहतृग । दोघभूलक -न० मूलक ।। मूली । दीर्घदण्ड-पु. एरण्डवृक्ष ।। अण्डका पेड । दीर्घमूला-स्त्री० श्यामालता । शालपर्णी ॥ काली- दीर्थदण्डक-पु." सर, सालमा । सरिवन । दर्षदण्डी-त्री० गोरक्षी ।। गोरक्षी । दीघमली-स्त्री० दुरालभा ॥ धमासा । दीर्घद्र-पु० तालवृक्ष ॥ ताडका पेड । दीर्घरागा-स्त्री० हरिद्रा ।। हलदी. दीपद्रुम-पु० शाल्मली || सेमर । दीघरोहिष-न० सुगन्धितृण-विशेष ।। बडेरोहिस । दीर्घनाद-पु. शंख ॥ शंख । दीर्घवंश-पु० नल ।। नरसल । दीर्घनाल न० दीर्घरोहिवक || बडेरोहिस । दीर्घवली-स्त्री. महेन्द्रवारुणी। पातालगरुडापलाशी।। दीर्घनाल-पु० वृत्तगुण्ड । यावनाल ॥ वृत्तगुण्ड- बली इंद्रायण । छिरहिटा । पलाशीलता। तृण । जुआर। दीर्घवाला-त्री० चमरीगवी ।। सुरहगाय । दीघतिखन-न० कांस्य || काँसी । दीर्घवृन्त-पु० श्योनाकवृक्ष ।। शोनापाठा । दीघपटोलिका-स्त्री. लताफल-विशेष ॥ गलका दीर्घन्तक-पु० " दीर्घन्ता-स्त्री इन्द्रचिर्भिटा ।। इन्द्रचिर्भिटी । दीर्घपत्र-पु० राजपलाण्डु । विष्णुकन्द । हरिदर्भ । दीघन्तिका-स्त्री० एलापर्णी ।। कांटा आमरली- कुन्दर । ताल । कुपीलु ॥ राजपाण्डु, लाल. गाछ वंगभापा। प्याज । विष्णुक-द । एक प्रकारका कुशा । दर्षिशर-पु० यावनाल ।। जुआर । कुन्दरतृण । ताडका पेड । कुचिला । दीघशाख-पु० शणवृक्ष । शालवृक्ष ।। सनका पेड। दीर्घपत्रक-पु. रक्तलान । एरण्ड । वेतस । सालका पेड । हिजल । करीरवृक्ष । जलजमधूक । लशुन ॥ दीर्घशिम्बिक-पु० क्षवा । राईभेद । लाललहशन । अण्डका पेड़ । बेत । समुद्रफल । दीर्घस्कन्ध-पु० तालवृक्ष ।। ताडका पेड । करीलवृक्ष । जलमहुआवृक्ष । लशुन । दीर्घा-स्त्री० पृश्निपर्णी । पिटवन । दधिपत्रा-स्त्री० चित्रपर्णिका । इस्वजम्बु । गन्ध- दीर्घायु (स् )-पु० शाल्मलीवृक्ष । जीवकवृक्ष । पत्रा। केतकी । डोडक्षुिप । शालपर्णी ॥ पिठव सेमरका पेड | जीवक औषधी । नभेद । छोटीजासन । वनशटी, वनकचूर । के- दीर्घालर्क-पु० श्वतमन्दारकवृक्ष ॥ सफेद मन्दा- तकी । डोडक्षुिप । शालवन । रवृक्ष । तोरई। .
- (८६) आयुर्वेदीय- भाषा । प्याज । जवासा । भाषा। दीर्घिका-त्री हिंगुपत्री ॥ हङ्गिपची। दुग-पु० गुग्गुल ।। गूगल । दीवार-पु. डाङ्गरी ।। चिचियाहोंगा · वङ्गभाषा । दुगकारक-न० वृक्ष-विशेष । दुष्कुल-पु० चोरनाम गन्धद्रव्य ॥ भटेउर नेपालको दुर्गन्ध-न० सौवर्चललवण ॥ चोहारकोडा, का- ला नमक। दुःसहा-त्री० नागदमनी || नागदौन । दुर्गन्ध-पु० आम्रवृक्ष । पाण्डु ॥ आमक पडे । दुपर्श -- दुरालभा ।। धमासा । दुस्पर्शा--स्त्री० कापिकच्छू । आकाशवल्ली । कण्ट- दुर्गपुष्पी-स्त्री० -विशे । कारी । बवास ।। कौंछ । अमरवेल । कटेरी । दुर्गा-त्री नीलीवृक्ष । अपराजिता ॥ नीलका पंड कोयल। दुग्व-न० स्वनामख्यातश्वेतवर्णसरलद्रव्य ।। दूध । दुर्गाह्व-पु० भूमिजगुग्गुलु ।। भूमिगूगल । दुग्धपाषाण-पु० वृक्ष-विशेष ।। शिरगोला वङ्ग दुर्जरा-स्त्री. ज्योतिष्मती लता ।। मालकांगुनी । दुर्द्रिता-स्त्री० लता-विशेष । दुग्धपुच्छी-त्री २ वृक्ष विशेष ।। दुर्दुम-पु. हरित्पलाण्डु । हरी प्याज । दुग्धफेनी-स्त्रीक्षुद्रक्षुप-विशेष ।। धफेनवृक्ष दुर्धर-पु० ऋषभौपधी ॥ पारद । भल्लातक ।। ऋ. दुग्धाश्मा [न् ], पु० दुग्धपापाण ।। शिरगाला पभक औषधी । पारा । भिलावेका पड़ । वङ्गभाषा। दुर्धषा-त्री० नागदनी । कन्या विश्व ॥ नाग. दुग्धिका-स्त्री० वृक्ष-विशेष ।। दुद्धी, दूधीया, दु दोन । क्रन्थारीवृक्ष । ग्धिका, दूधी । दुर्नाम [ ]-न० अर्शोरोग ॥ बवासीर । दुग्धिनिका-स्त्री० रक्तापामार्ग ॥ लाल चिरचिरा । दुर्नामक-न. दुग्धा-स्त्री० क्षीरावी । दुग्धपापाणवृक्ष ॥ दृधी । दुर्नामा [ न् ]-पु० स्त्री० दीर्घकोषिका ॥ एक- शिरगोला वङ्गभाषा। दुच्छक-पु० मुरानामक गन्धद्रव्य ।। कपूरकचरी । दुर्नामारि-पु० शूरण ॥ सूरन, जमीकन्द । दुद्रुम-पु० हरितवर्णपलाण्डु । हरी प्याज । दुर्बला-स्त्री० , अम्बुशिरीपिका ॥ जलसिरसा दुरभिग्रह-पु० अपामार्ग ।। चिरचिरा । ढाढोने । दुभित्रहा- ० कपिकच्छू। दुरालभा ॥ कौंछ । दुर्मनाः [ सू]-स्त्री० शतमूली ॥ सतावर । दुर्मरा-स्त्री. दूर्वा । श्वतदूर्वा दूब । सफेददूव । दुराधर्ष-पु० गरिसर्पः ॥ सफेद सौं । दुम्मोह-पु. काकतुण्डी ॥ कौआंटोडी । दुराधर्षा-स्त्री० कुटुम्बुनीवृक्ष । 'अर्कपुष्पी । दुर्लभ-पु० कर्चुर ।। कचूर । दुरारुह-पु० बिल्ववृक्ष । नारिकेलवृक्ष ।। बेलका दुर्लभा-स्त्री० दुरालभी । श्वेतकण्टकारी ॥ जवास।। पेट । नारियलका वृक्ष । सफेदकटेरी। दुरारुहा-स्त्रो० खजूरी । खजूरका पेड । दुर्वर्ण-न० रजत । एलवालुक ॥ चाँदी । एलुआ। दुरारोहा-स्त्री० शाल्मलवृिक्ष । भूमिखर्जूरी ॥ से- दुर्वर्णक-न० रजत ।। रूपा । मरकापेड़ । देशी-छोटीखनूर । दुप्कुलीन-पु. चोरनामकगन्धद्रव्य ॥ भटेउर ने. दुरालभा-स्त्री० स्वनामख्यात कण्टकयुक्त क्षुद्रवृक्ष. पालकी भाषा । विशेष । कार्पासी । स्पृक्का ॥ दुरालभा,हिंगुया । दुषखदिर-पु० खदिरवृक्षभेद ॥ दुप्खैर । जवासा, धमामा । कपास | असवरग। दुष्ट-न० कुष्ठ ॥ कोढ । दुरस्पत्र-पु. चोरनामक गन्धद्रव्य । भटेर नेपाल. दुरितदमनी-स्त्री० शमवृिक्ष ।। छौंकरा वृक्ष । की भाषा । जलजन्तु । ॥ धमासा। दुरालम्भा-स्त्री."
औषधिकोष । (८७) । भाषा । दुष्पर्श-पु० यवास ।। जवासा । हढरङ्गा-स्त्री. स्फटी ॥ फटकरी । दुष्प्रधर्षा-स्त्री० • दुरालभा । खर्जरवृिक्ष ॥ धमासा, ढलता-स्त्री० पातालगरुडी ॥ छिरहिटा । हिगुया । खजूर का पेड । दृढवल्कल-पु. लकुच । पूग ॥ बड़र । सुपारी । दुष्प्रधर्षणी-स्त्री० वार्ताकी ।। बैगुनाकटेहरी । दृढवल्का-स्त्री० अम्बष्ठा ।। भोईयावृक्ष । दुप्प्रर्षिणी-स्त्री० वार्ताकी ॥ कण्टकारी । वृहती।। दृढबीज-पु० चक्रमई । बदर । बबूर । चकवड, वैगुनाकटेहरी कटेहरी । कटाई। पमाड । बेरीका वृक्ष । वबूरका दुष्प्रवेशा-स्त्री० कन्थारीवृक्ष ॥ मन्थारीवृक्ष । दृढसूत्रिका-स्त्री० मूर्वा || चुरनहार । दूतघ्नी-स्त्री० कदम्बपुष्पी ॥ गोरखमुण्डी । दृढस्कन्ध-पु. क्षीरिका वृक्ष || खिरनीका वृक्ष । दूरमूल-पु० मुञ्जतृण भूज । बढ़क्षुरा-स्त्री० बल्वजा ।। सावेवागे कुत्रचित्भपा । दूर्य-ज. शटी ॥ छोटा कचूर । बढ़ाग-न० हरिक ॥ हराि । दूर्वा-स्त्री० स्वनामख्याततृण ॥ घास । हता-स्त्री० जीरक । जीरा । दूलिका-दुलो-बी० नीलीवृक्ष ।। नीलका पेड । हतिधारक-पु० वृक्ष-विशेष || आकन पाता बङ्ग- दूषिका-स्त्री० नेत्रमल || नेत्रका मेल । दूषविष-न० औषधादिद्वारा की र्यहीन विष । दृशाकांक्ष्य-न० पद्मपुष्प ॥ कमल । हकप्रसादा-स्त्री० कुलस्था । कुलस्थाञ्जन ॥ वन-शोपम-न. श्वेतपद्म ॥ सफेदकमल । कुल्थी । एक प्रकारका शुम्मी । हषत्सार-न० मुण्डायस || एक प्रकारका लोहा । दृढ-न० लोह ॥ लोहा । दृष्टिकृत-न० स्थलपद्म ॥ स्थलकमल । दृढकण्टक • पु० क्षुद्रफलवृक्ष ॥ ढेरावृक्ष । दृष्टिकृत-न०५ दृढकाण्ड-न० दरोहिषक || बडे रोहिततृण । देव-पु० पारदः ॥ पारा । ० पातालगरुडलता ॥ छिरहिटा । देवकर्दम-पु० सुगन्धिद्रव्य विशेष ॥४। यथा । दृढ़गात्रिका-स्त्री० मत्स्यण्डी ॥ मिश्री। चन्दनागरुकुंकुमक'रामिश्रितरदार्थः ॥ एकत्र दृढ़ग्रन्थि-पु०वंश ॥ वास । मिले हुए-चन्दन, अगर, कपूर, केशर । दृढ़च्छद-नः दीर्घरोहिषक ॥ बडे रोहिषतृण । देवकाष्ठ-न० देवदारु ॥ देवदार । देवदारुभेद । दृढ़तरु-पु. धववृक्ष ।। धौंवृक्ष । देवकुरुम्बा-स्त्री. महाद्रोणा ॥ बड़ी द्रोणपुष्पी दृढ़तृण-पु. मुञ्जतृण ।। मूज । अर्थात् बडा गूमा, गोमा । दृढ़तृणा-स्त्री० बल्वजा ॥ साये धागे कुत्राचेत् देवकुसुम-न० लवङ्ग ॥ लौंग । देवगन्धा-स्त्री० महामेदा || महामेदा । अष्टवर्गकी दृढ़त्वक् [च]-पु. यावनालशर | जौहरली देशान्तरीय भाषा । दृढ़नीर-पु० नारिकेलवृक्ष ॥ नारियलका वृक्ष । देवजग्ध-न० कत्तॄण ॥ रोहिस, पिः । वंश || बांस । देवजग्धक-ना दृढ़पत्र-पु० दृढ़पत्री-स्त्री० बल्बजः ॥ सावेवागे कुत्रचित्भाषा । देवतरु-पु० मन्दारवृक्ष । पारिजातवृक्ष । सन्तान- दृढपादा-स्त्री० यवातिक्ता ॥ थवेची केचित्भापा । वृक्ष । कल्पवृक्ष । हरिचन्दन । चैत्यवृक्ष । दृढपादी-स्त्री. भूम्यामलकी ॥ भुई आमला । देवताड-पु. वृक्ष-विशेष | घोषकलता। देवदाली- दृढपरोह-पु० प्लक्षवृक्ष ॥ पाखरवृक्ष । लता ॥ देवताडवृक्ष । एक प्रकारकी तोरई । दृढफल-पु० नारिकेलवृक्ष ।। नारियलका पेड । घघरवेल, सौनया बन्दाल । दृढ़बन्धिनी-स्त्री. श्यामालता ॥ कालीसर, सालसा । देवताडक-पु० देवताडवृक्ष ॥ देवताडवृक्ष । दृढमूल-पु० मन्थाकतृण । नारिकेल | मुञ्जतृण ॥ देवदण्डा-स्त्री० नागबला । गुलसकरी, गंगेरन । मन्थानकतृण । नारियलवृक्ष । पूँजतृण । देवदानी-स्त्री० हस्तिघोषा ॥ बड़ी तोरई । दृढ़काण्डा-स्त्री० भापा । औषध । " (८८) आयुर्वेदीय- .SAL. पटसण। । . गेरु.। देवदारु-न० पु० स्वनामख्यातवृक्ष । देवदारु. देवा-स्त्री० पद्मचारिणी । अशनपर्णी ॥ गैंदावृक्ष । देवदारवृक्ष । देवदालिका-त्री० लता-विशेष ॥ महाकाललता। देवात्म (न् )-पु० अश्वत्थ ।। पापलकापेड । देवदाली-स्त्री स्वनामख्यातलता-विशेष ॥ देव. देवाष्टिा-स्त्री. ताम्बूली ॥ पान । दाली, घघरवेल, सौनया, बिन्दाल । देवाह-पु० सुवर्ण ॥ सोना ! देवदासी-स्त्री०बनवाजपूर ।। वनजाति विजोरानवूि। देवाहीं-स्त्री. सहदेवीलता ।। सहदेई । देवदुन्दुभी-पु० गन्धपणास ॥ लाल तुलसी । देवावास-पु० अश्वत्थवृक्ष ।। पीपलका पेड । देवदूती-स्त्री० बीजपूरक । मथुकुक्कुटिका ।। वि. देवाह्व-न० देवदारु ॥ देवदार । जोरानीबू । चकोतरा। देविका-स्त्री० धुस्तूर ।। धतूरा । देवधूप-पु० गुग्गुल !! गूगल । देवी-स्त्री० सूर्वा । स्पृक्का । अतसी । आदित्यभ- देवधान्य-न० धान्य विशेष || पुनरा । का । लिङ्गिनी । वन्ध्याकर्कोटकी । शालपर्णी देवन-न० पद्म ॥ कमल । महाद्राणी । पाठा । नागरमुस्ता। मृगेवारु । सौ. देवनल-न० नलभेद ॥ बडा नरसल । राष्ट्मृत्तिका । हरीतकी । गैरिक ॥ चुरनदार । देवनाल-पु०॥ असवण, पुरी । अलसी, मसीना । हुलहुल, हु. देवपत्नी-स्त्री० मध्वालुक ॥ एक प्रकारका कन्द । रहुरवृक्ष । पञ्चगुरिया देशान्तरीय भाषा । बाँझ- देवपर्ण-न० सुरपर्ण || माचीपत्र । खखसा, वनकोडा । शरिवन, सालवन । बडी देवपुत्रिका-स्त्री. स्पृक्का ॥ असवण । द्रोणपुष्पी, बड़ा गूमा । पाट । नागरमोथा । सैं. | देवपुत्री-स्त्री." धिनी । सोरठकी मिट्टी, गोपीचन्दन । हरड । देवपुष्प-न० लवंग ॥ लौंग । देवप्रिय-पु० पीतभृगराज । अगस्त्यवृक्ष | पीला. देवीवीज-न० गन्धक ॥ गन्धक । भंगरा । अगस्तिया, हथियावृक्ष । देवेष्ट-पु० गुग्गुलु । महामेदा ।। गूगल [महामेदा। देवबला-स्त्री० सहदेवी । वायमाणा ॥ सहदेई । देवेष्टा-स्त्री० वनवीजपूरक || वनजाति विजोरा नीबू । देवबल्लभ-० पुन्नागवृक्ष । पुनर्नवा ॥ पुन्नागवृक्ष । देहद-पु० पारद ॥ पारा । गदहपूर्ना । देहला-स्त्री० मदिरा ॥ मद्य । देवभवन-न० अश्वत्थ ॥ पीपलका वृक्ष । दैत्य-पु. लोह ।। लोहा । देवमणि-पु० महामदा ॥ अष्टवर्गकी औषधी । दैत्यमेदज-पु० भूमिजगुग्गुल ।। भूमिगूगल | देवलता-स्त्री० नवमालिका | नेवारी । देत्या स्त्री० मुरानामकगन्धद्रव्य । मद्य । चण्डौ- देवलाङ्गालिका-स्त्री० वृश्चिकाली । विछुटी वंगभाषा। षधी ।। कपूरकचरी। मदिरा, दारु, सराव । च. देववृक्ष-पु. सप्तपर्णवृक्ष । मन्दारवृक्ष । गुग्गुलु ।। ण्डाऔषधी। सतिवन । करहदवृक्ष । गूगल । दैत्येन्द्र-पु. गन्धक । गन्धक । देवशेखर-पु० दमनक ॥ दवनावृक्ष । दोला-स्त्री० नीलिनीवृक्ष ।। नीलका पेड । देवश्रेणी-स्त्री० मूर्वा । चुरनहार । दोलापत्र-न० यन्त्र-विशेष ॥ दोलायन्त्र । देवसर्षप-पु० सर्वपवृक्षप्रभेद ।। एक प्रकारको निर्ज दोष-पु० वातपित्तकफ ।। वायु, पित्त, कफ । रससा। दोषाक्लेशी-स्त्री. वनवर्धरिका ॥ वनतुलसी । देवसहा-स्त्री० दण्डोत्पला ॥ सफेद फूलका दण्डो. दोहज-न० दुग्ध ॥ दूध । दोहद-पु. न० गर्भलक्षण ।। गर्भके चिह्न । देवसृष्ट -त्री० मदिरा ॥ मद्य । दोहली-पु. अशोकवृक्ष ॥ आकका पड़ त्रायमान । त्पल ।
औषधिकोष। (८९) भाषा । REET ॥ घुमणि-पु- अर्कवृक्ष ॥ आकका पेड ! द्रघण-पु० भूमिचम्पक || एक प्रकारका चम्पा । द्यूतबीज-न० कपईक || कौड़ी। द्रेका-स्त्री० महानिम्ब || बकायननीम । द्र ङ्क्षण, न० पु० तोलकपरिमाण ॥ एक तोला । द्रोण-पु० न० परिमाण-विशेष ॥ बत्तीस ३२ सेरका होता है । द्रव-पु० रस ॥ रत। द्रोण-पु० श्वेतवर्ण क्षुद्रपुष्पाप-विशेष ॥ गूमा । द्रवज-पु० गुड ॥ गुड । द्रवपत्री-स्त्री० शिमृडीवृक्ष ॥ चङ्गानि-देशान्तरीय. द्रोणगान्धिका-स्त्री० रास्ना ।। रायसन । द्रोणपुष्पी-स्त्री० गोशीर्षकवृक्ष ॥ गूमा, गोमा । द्रवन्ती-स्त्री० मूषिकपर्णी ।। मूसाकानी । द्रोणा-स्त्री." द्रवरसा-स्त्री० लाक्षा || लाख । द्रोणिका-स्त्री० नीलीवृक्ष ॥ नीलका पेड । द्रविन-न० काञ्चन || सोना। द्रोणी-स्त्री. गवादनी नीलीवृक्ष । इन्द्राचर्भिटा । द्रविननाशन-पु० शोभाञ्जनवृक्ष ॥:सजिनेका पेड । द्रोणीलवण । परिमाण-विशेष । इन्द्रायण । इन्द्र- द्रव्य-न० औषध । पित्तल ॥ औषधी । पीतल । चिर्भिटी । द्रोणलवण । एकसौ अट्ठाईस, १२८ द्रावक-न०शिक्थक । औषधविशेष॥ मोम ।प्लीहा- सेर तोल। रोगकी औषधी। द्राणीदल-पु. केतकीपुष्प ॥ केतकीका फूल ! श्वेतटंकण ॥ सफेद सुहागा । द्रावकर-पु० द्रोणीलवण-न० उपकणांटदेशप्रसिद्ध लवण ॥ द्रावन-न० कतकफल || निर्मली । रेहगमा नोन। द्राविड-पु० कर्चुर ॥ कचूर, आमियाहलदी। द्वन्द्व-पु० रोग-विशेष ॥दो दोषका रोग, कफपित्त. द्राविडक-न० विडलवण ॥ विरिया संचरनोन । का मिलाहुआ रोग । द्राविडक-पु. काल्य ॥कचिया हलदी । द्वन्द्वज-पु० द्विदोषज रोग ॥ वातापित्तका मिलाहुआ द्राविडी-स्त्री० एला ॥ इलायची । द्राक्षा-त्री० स्वनामख्यात फलविशेष | दाख । द्वयानि-मु० रक्तचित्रक || लाल चीता । द्रुकिलिम-न० देवदारुवृक्ष ॥ देवदारवृक्ष । द्वादशात्मा [ ]-पु० अर्कवृक्ष । आकका वृक्षा द्रुघन-पु. भूमिचम्पक ॥ एक प्रकारका चम्पा- द्वारदातु-पु० भूमिसहवृक्ष।। भुईं सहवृक्ष । वृक्ष । द्विकटुक-न० शुण्ठी, पिप्पली ॥ सौंठ, पीपल । द्विज-पु. तुम्बुरुवृक्ष ।। तुम्बरुवृक्ष । द्रुम-पु० वृक्ष । पारंजात ॥ पेड । फरहद कहप- द्विजकुत्सित-पु० श्लेष्मातकवृक्ष ।। ल्हसोडावृक्ष ! द्विजप्रिया-स्त्री० सोमलता । द्रुमकण्टका-त्री० शाल्मलीवृक्ष ॥ सेमरका पेड । द्विजराज-पु० कर्पूर ।। कपूर । द्विजव्रण-पु० दन्तार्बुद ।। दांतोंकी जड़ें सूज जाय द्रुमनख-पु० कण्टक ॥ काँटा । द्रुमव्याधि-पु० लाक्षा ॥ लाख । और राद निकले। द्रुमर-पु० कण्टक । कॉटा । द्विजसप्त-पु० राजमाष || लोविया । द्रुमश्रेष्ठ-पु० तालवृक्ष ।। ताडका पेड । द्विजा-स्त्री रेणुकानाम गन्धद्रव्य।भारंगी पालंकी- द्रुमामय-पु० लाक्षा ॥ लाख । शाक ।। रेणुका । भारंगी। पालककाशाक । द्रुमेश्वर-पु० तालवृक्ष ॥ ताडका पेड़ । द्विजांगी-स्त्री० कटुका ।। कुटकी । द्रुमात्पल-पु० कर्णिकारवृक्ष ! स्थलपद्म ॥कनेरवृक्ष । द्वितीयाभा-स्त्री० दारुहरिद्रा ॥ दारुहलदी । स्थलकमल। द्विधात्मक-ज. जातीकोष ।। जावित्री । द्रुसन्नक-पु० प्रियालवृक्षः॥ चिरोंजीका पेड । द्विधालेख्य-पु० हिन्तालवृक्ष ।। एक प्रकारका ताड । द्र-पु. स्वर्ण ॥ सोना । द्विप-पु० नागकेशर ।। नागकेशर । राग । द्रुघण-पु० " तक ।
(९०) आयुर्वेदीय- . द्विपी-त्री० वनकोलिवृक्ष ।। एकप्रकारके वन. बेर । द्विलवण-न० सैन्धव, सौवचल ।। सैंघा, काला धनुःश्रेणी-स्त्री० मूळ । महेन्द्रवारुणी ।। चुरनहार । बडी इन्द्रायण । धनुगुणी-स्त्री० मूर्वा ॥ चुरनहार । नोन। धनुद्रुम-पु० वंश ॥ बांस्न । " द्विष्ट-न० ताम्र ।। साँवा। धनुमाला-त्री० मूर्वा ॥ चुरनहार । द्विहरिद्रा-स्त्री. हरिद्रा । दारुहरिद्रा ।। हलदी। धनुर्यास-पु० धन्वयास ॥ जवासा । दारुहलदी। धनुलता-स्त्री० सोमवल्ली ॥ सोमलता । द्विक्षार-न० यवक्षार, स्वार्जकाक्षार ॥ सोरा,सजी । धनुर्वृक्ष-पु० धन्वनवृक्ष । वंश । अश्वत्थ। भल्ला. द्वीपकर्पूरज-पु० चीनकपूर ।। चीनियाकपूर । तक ।। धामिनवृक्ष । बाँश । पीपलका पेड । पीपलका वृक्ष । भिलावेका वृक्ष । द्वीपखजूर-न० महापारेवत || वडा पारेवतवृक्ष । द्वीपज--न." धनुष्पट-पु. प्रियालवृक्ष || चिरोंजीका पेड । द्वीपशत्रु-पु० शतावरी ॥ सतावर । धनेयक-न. धन्याक || धनिया । द्वीपिका-स्त्री." धन्य-पु० अश्वकर्णवृक्ष || सालभेद । द्वीपिशत्रु-पु. धन्या-स्त्री० आमलकी । धन्याक ॥ धनिया । द्वीपी-[ ]-पु० चित्रकवृक्ष ॥ चीतेका वृक्ष । आमला। द्वैषणीया-त्री० नागवल्लीभेद ॥ एक प्रकारके धन्याक-न० स्वनामख्यात क्षुद्रक्षुप-विशेष ॥ नागरपान । धनिया । द्वयष्ट-ना ताम्र || तांबा । धन्वग-पु० धन्वनवृक्ष ॥ धामिनवृक्ष । इति श्रीशालिग्रामवैश्यकृते शालिग्रामोषधशब्दसागरे धन्वङ्ग-पु० द्रव्याभिधाने दकाराक्षरे अष्टादशस्तरङ्गः॥ १८ ॥ धन्वन-पु० स्वनामख्यातवृक्ष ॥ वामिनवृक्ष । धन्वन्तरिग्रस्ता-स्त्री० कटुका ॥ कुटक' । धन्वयवास-पु० यवास ॥ जवासा । धत्तर-पु० धुस्तूर ॥ धत्तुरा । धन्वयवासक-पु० धनञ्जय-पु० चित्रकवृक्ष । अर्जुन वृक्ष ॥ चीता । धन्वयास-पु० " कोहवृक्ष । धन्वी[न् ]-पु० यवास।अर्जुनवृक्ष । वकुलवृक्षा। धनद-पु० हिज्ज्वलवृक्ष ॥ समुद्रफल । जवासा । कोहवृक्ष । मौलसिरीका पेड । धनदाक्षी-स्त्री० लताकरञ्ज । लताकरञ्ज । धमन-पु० नलवृक्ष ।। नरसल । धनप्रिया-स्त्री० काकजम्बू ॥ एक प्रकारकी छोटी । धमनि-पु० धमनी । जामन । धमनी-स्त्री० महतीशिरा । हरिद्रा । पृश्निपर्णी । धनस्यक- पु० गोक्षुर ॥ गोखुरू नलिका । हट्टविलासिनी ॥ धमनीनाऊ । हलदी। धनहारि-स्त्री. चोरनामक गन्धद्रव्य ॥ भटेउर । पिठकम । नली । नखी । नेपालकी भाषा । धरण-न० पलदशमांश || २४ रत्तिप्रमाण । धनिक-पु० धान्याक । धववृक्ष ॥ धनिया। धोवृक्ष । धरण-पु. चतुर्विशतिरक्तिका । धान्य ॥ २४ रत्ति. धनिका-स्त्री० प्रियंगुवृक्ष ॥ फूलाप्रियंगु । प्रमाण । घान । धनायक-न० धन्वाक || धनिया । धरणी-स्त्री० शाल्मलिवृक्षः। कन्द-विशेष । नाडी। थनु-पु० प्रियालवृक्ष ॥ चिरोंजीका पेड़। सेमरका पेड | नाडी । घरणीकन्द । धनु-[सू]-पु. धरणकन्द-पु० धरणीकन्द ॥ धरणीकन्द । धनुष्पट-पु. धराकदम्ब-पु०धाराकदम्ब || धाराकदम्ब, कदम धनु:शाखा-स्त्री० मूर्व ।। चुरनहार । च. । भेद ।
औषधिकोष । (९१) खीलैं । सत्तू । हुए जौ। कपूर । जा धर्मण-पु० वृक्ष-विशेष | धामिनिया देशान्तरीय धाना-स्त्री० धन्याक । भृष्टयव । सक्तु ॥ धनिया । भाषा। धर्मपत्तन न. मरिच ॥ गोल, काली मिरच । धाना-पु० भूमिनिस्तुषभृष्टयव ॥ बहुरी । भुने- धर्मपत्र-न० यज्ञोदुम्बर ।। गूलर । धर्मिणी-स्त्री. रेणुका ॥ रेणुका । धानी-स्त्री० पीलुवृक्ष ॥ पालुका पेड। घलण्ड--पु० दृढकण्टकवृक्ष | ढेरावृक्ष । धानुष्का-स्त्री० अपामार्ग ॥ चिरचिरा । धन-गु० स्वनामख्यातवृक्ष || घोवृक्ष । धानुष्य-पु. वंश || बाँस । धवल-पु० श्वेतमरिच ॥ सफेदामिरच । धानय-न. धन्याक ।। धनिया । धवल-पु० धववृक्ष । चीनकर्पूर || धोवृक्ष । चीनिया धानेयक-न." धान्या-स्त्री० पृथ्वीका ॥ इलायची । धवलपाटला-स्त्री० सितपाटलिका।। सफेद पाढला । धान्य-न० धन्याक । कैवर्ती मुस्तक । सतुन तपडु- धवलमृत्तिका-स्त्री. खडी ॥ खडियामाटी। लादि । चतुस्तिलपरिमाण :॥ धनिया । केवकी धवलयावनाल-पु. यावनाल-विशेष ॥ सफेद मोथा । धान । चारतिलपरिमाण । जुआर। धान्यक-न० धायाक ॥ धनिया । धवलोत्पल-न० कुमुद ॥ कमोदनी । धान्यतुषोद-० काजिक ॥ काँजी । धातकी-स्त्री० पुष्पविशेष ॥ धायके फूल । धान्यथूष-पु० काजिक ॥ काँजी । धातु-पु० शरीरधराकवस्तु । जैसे । रस, रक्त, मांस, धान्यराज-पु० यव ॥ जौ । मेद, अस्थि, मजा, शुक्र, वात, पित्त और कफ। धान्यबीज-न. धन्याक ॥ धनिया । स्वर्ण रौप्यादि सोनाचाँदी इत्यादि धातु । धान्यवीर-मु० माष ॥ उरद । धातुकाशीस-न० कासीस ॥ कसीस । धान्याक-न० धन्याक । धनिया । धातुन-न० काञ्जिक ।। काँजी । धान्याम्ल-न० काञ्जिक ॥ काँजी । धातुनाशन-न० धान्योत्तम-पु० शालवान्य ॥ शालिधान । धातुप-पु० शरीरस्थ प्रथमधातु रस ॥ धामक-पु. माषकपरिमाण || १ माषा । धातुपुष्पिका-स्त्री० धातकीपुष्प ।। धईकेफूल । धामनी-स्त्री० घमनी ॥ धमनी नाडी। धातुपुष्पी-स्त्री० धामार्गव-पु० अपामार्ग । घोषकलता ।। चिरचिरा । धातुमाक्षिक-न०माक्षिक || सोनामाखी । तोरई । घियातोरई। धातुमारिणी-स्त्री० टङ्कण ।। सुहागा । धारणाया-स्त्री. धरणीकन्द ॥ धरणीकन्द । धातुवल्लभ-न० धाराकदम्ब-पु० कदम्बवृक्षभेद ॥ कदमभेद । धातुवेरी (न् )-पु० गन्धक ॥ गन्धक । धाराकम्बक-पुल धातुशेखर-न० कासीस ।। कसीस । धाराफल-पु० मदनवृक्ष ॥ मैनफलवृक्ष । धातूपल-पु. खटी ।। खडियामाटी । धारास्नुही-स्त्री० त्रिधारस्नुही ।। तिधाराथूहर । धात्पुष्पिका-त्री० धातकी ।। धायके फूल । धारिणः-स्त्री० शाल्मलीवृक्ष ।। सेमरका पेड । धारी [न् ]-पु० पालुवृक्ष ॥ पोलूकापेड । धात्रिका-स्त्री० आमलकी || आमला । धारोष्ण-न० दोहनेनोष्णधारया पतितं दुग्धम् ॥दु. धात्री-स्त्री." हनेके समय धारोंसे गिरताहुवा गर्म दूध । धात्रीपत्र-न० तालीशपत्र । आमलकीपत्रः॥ ताली- धार्तराष्ट्रपदी-स्त्री० हंसपदी । लालरङ्गका लजालु। शपत्र । आमलके पत्ते। धावनि-स्त्री० पृश्निपीलता ।। विठवन । धात्रीफल-न. आमलकी || आमला । धावनिका-स्त्री० कण्टकारिका । पृश्निवर्णी ॥ धानक-न० धन्याक || धनिया । कटेरो । पिठवन। " धातृपुष्पी-बी० (९२) आयुर्वेदीय- कन्द । है धूपवृक्षक-पु." धावनी-स्त्री० पृश्निपर्णी । कण्टकारी । धातकी ॥ धूलक-न० विष ॥ जहर । पिठवन । कटेहरी । धवईके फूल । धूलिपुष्पिका-स्त्री० केतकी ॥ केतकीपुष्पवृक्ष । धीर-न, कुंकुम । जाफराम फार्सी भाषा । धूलिकदम्ब-पु० नाप । तिनिश । वरुणवृक्ष । धारा धीर--पु० ऋषभौषधः ॥ ऋषभ औषधी । कदमवृक्ष । तिरच्छवृक्ष । वरनावृक्ष । धीरपत्री-त्री० धरणीकन्द ॥ धरणीकन्द' जिमी- धूलिकदम्बक-पु० नीप ॥ धाराकदम । धूसरच्छदा-स्त्री० श्वतवुह्ना ॥ सफेदवोना । धीरा-स्त्री. काकोली । महाज्योतिष्मती ॥काकोली /धूसरपत्रिका-स्त्री० हस्तिशुण्डीक्षुप | हाथीशुण्डवृक्ष । औषधी । बडीमालकगुनी । धूसरा-स्त्री० पाण्डुरफलीपुर ॥ पाण्डूफली । धुन्धुमार-पु० गृहधूम ॥ घरकाधुआँ । धूस्तूर-पु० धत्तूरवृक्ष ॥ धत्तरेकापेड । धेनिका-स्त्री० धन्याक ॥ धनिया । धुरन्धर-पु. धववृक्ष || घावृक्ष । धुर्य-पु० ऋषभ ॥ ऋषभौषधी । धेनुदुग्ध-न० भिटा ॥ गुरुभीहु, चिभडा । धुस्तुर-पु० धुत्तूर ॥ धत्तरेका पेड । धेनुदुग्धकर--पु० गजर ॥ गाजर । धौत-नक रौप्य ॥ रूपा । धुस्तूर-पु० स्वनामख्यात वृक्ष ॥ धत्तरेका पेड। धूनक-पु० वल्लिवल्लभ । राल । चौतशिल-नक स्फटिक !! फटिकमणि । धूपन-पु. धौर-पु० धववृक्ष ॥ धौवृक्ष । धूपवृक्ष-पुछ सरलवृक्ष ॥ धूपसरल । ध्मांक्षजंघा-स्त्री० काकजङ्घा ॥ मसी । ध्मांक्षजम्बू-स्त्री० काकजम्बू ॥ जामुनभेद । धूपागुरु-न० दाहागुरु ॥ दाहअगर । धमाक्षतुण्डी-स्त्री० काकनासा ॥ कौआठोडी । धूपाङ्ग-पु० श्रीवेष्ट ।। सरलका गाद। धमांझदन्ती-स्त्री. काकतुण्डी || काकादनी । धूपाह-न० कृष्णागुरु ॥ काली अगर । ध्मांक्षनखी-स्त्री० धूमगन्धिक-ज० रोहिषतृण ॥ रोहिषसोधिया । ध्मांक्षनाम्नी-स्त्री- काकोदुम्बरिका ॥ कटूम्बर । धूमजाङ्गज-न० वनक्षार ॥ नौसागर । ध्माक्षनाशिनी-स्त्री० पुषा ॥ हाऊबेर । धूमयोनि-पु० मुस्तक ॥ मोथा । ध्मांक्षनासा, ध्माबेनासिका-स्त्री० काकनास ॥ धूमरज [स् ]-न गृहधूम || घरकाधुआँ । ध्मांक्षमाची-स्त्री. काकमाची ॥ मकोय । धूमसार-पु० ध्मांक्षवल्ली-स्त्री० काकनासा || कौआटोडी। धूमोत्थ-न० वज्रक्षार ।। वज्रवार । ध्मांक्षादनी-स्त्री० काकतुण्डी ॥ काकादनी । धूम्र-पु० तुरुष्क | शिलारस । धमांझी-स्त्री० कक्कोलिका ॥ धूम्रपत्रा-स्त्री० क्षुप-विशेष ॥ तमाखूकावृक्ष । ध्मांक्षोली-त्री० काकोली ॥ धूम्रमूलिका-त्री० शूलीतृण ॥ शूलीघास । ध्याम-न० दमनकवृक्ष । गन्धतृण || दवनावृक्ष । धूम्रवर्ण-पु० 'तुरुष्क ।। शिलारस । धूम्रा-स्त्री० शशाण्डुली ॥ एकप्रकारकीककडी । ध्यामक-न० रोहिषतृण ॥ रोहिससोधिया । धूम्रिका-स्त्री० शिशपावृक्ष ॥ सीसीकापेड । ध्रुवा-स्त्री० मूर्वा । शालपर्णी .॥ चुरनहार । साल. धूर्त-न० बिडलवण । लौहकिट्ट । कचलान । मण्डूरलोहा । ध्वंसी (न् )-पु. पर्वोत्पन्नपीलुवृक्ष ॥ धूर्त-पु० धत्तूरवृक्ष । चोरक ॥ धत्तूरा । भटेउर ध्वंसी-स्त्री० त्रसरेणुपरिमाण ॥ नेपालकी भाषा । ध्वज-पु. मेढ़ ॥ पुरुषाङ्ग । धूनकृत्-पु० धत्तूर । धत्तूरेकापेड । ध्वजद्रुम-पु० तालवृक्ष । माडवृक्ष ॥ ताडकावृक्ष । धूर्नमानुषा-स्त्री ० रास्ता || रायसन। माडविनौ, कोकणीभाषा। गधेजघास । वन ।
औषधिकोष। (९३) , ध्वजभङ्ग-पु० क्लीबत्वजनकरोग-विशेष॥ एकप्रकार-नटभूषण-न० हरिताल ।। हरताल । का नपुंसक । नटमण्डल-न. ध्वान्तशात्रव-पु० श्योनाकवृक्ष ॥ शोनापाठा । नटसंज्ञक-पु० गोदन्ताख्यविष ॥ गौदन्ती । इतिश्रीशालिग्रामवैश्यकृतशालिग्रामौषधशब्दसागरे नटी-स्त्री. नखानामगन्धद्रव्य ।। नवी । द्रव्याभिधानेधकाराक्षरेएकोनविंशतिस्तरङ्गः ॥ १९ ॥ नड-पु० नल ।। नरसल । नत-न० तगरमूल || तगर । न. नतद्रुम-पु. लताशालवृक्ष ।। सालभेद । नकुलाढया-त्री० गन्धनाकुली ।। नकुलकन्द । नदीकदम्ब-पु. महाश्रावणिका ॥ बडीगोरख- नकुली-स्त्री० मांसी ।। शंखिनी । कुंकुम ।। जदार मुण्डी। मांसी। शखिनी । केशर । नदीकान्त-पु० हिज्जलवृक्ष । मिन्दुवारवृक्ष ।। स- नकुलष्टा-स्त्री. रास्ना ।। रायसन । मुद्रफल समालवृक्ष । नक्तंचर-पु० गुग्गुलु ।। गूगल । नदीकान्ता-स्त्री० जम्बूवृक्ष । काकजङ्घा ॥ जा. नक्तमाल-पु० ० करञ्जवृक्ष ।। कजावृक्ष। नक्ता-स्त्री० कलिकारी ॥ कलिहारी । मुनकापेड । :मसी काकजवावृक्ष । नदीकूलप्रिय-पु० जलवेतस । जलवैत । नक्ताह-पु० करञ्जवृक्ष । कक्षावृक्ष । नख-न० स्त्री० नखीनामगन्धद्रव्य ॥ नखी, नख । नदीज-न० स्रोताञ्जन ॥ कालाशुम्मा । नखनिष्पाव-पु. निष्पावभेद ॥ अंगुली फला । नदीज-पु० अर्जुनवृक्ष । हिज्जलवृक्ष । यावनाल. नखपर्णी-त्र' ० वृश्चिकाक्षुप ।। विछुवाघास । सर ।। कोवृक्ष । 'समुद्रफल. । जोहुरली केचित्- नखपुङ्खी-स्त्री० स्पृक्का ॥ असलरगः। भाषा । नखराह्व-पुं० करवीरपुष्पवृक्ष ॥ कनेरकापेड । नदीजा-स्त्री० आग्निमन्यवृक्ष ॥ अरणी । नखरी-स्त्री० नखी । क्षुद्रनखी ॥ नख नखी । नदीनिष्पाव-पु० धान्यभेद ॥ नखवृक्ष-पु० नीलवृक्ष ।। नीलकापडे । नदीवट-पु० बटीवृक्ष ।। नदीवड । नखशंख-पु० क्षुद्रशङ्ख ।। छोटाशंख । नदीसज-पु० अर्जुनवृक्ष ।। कोहवृक्ष । नखाङ्कनव्याघनखी ॥ व्याघ्रनख । नदेयी-स्त्री० भूमिजम्बु ।। छोटीजामुन । नखाङ्ग-न. नलिका | नली । नद्याम्र-पु० समष्ठीलवृक्ष ।। काकुआवृक्ष । नखालि-पु० क्षुद्रशंख ॥ छोटाशंख । नन्दकी-स्त्री० पिप्पली पीपल । नखालु-पु० नीलक्ष ।। नलिकापड । नन्दगोपिता-स्त्री० रास्ना ।। रायसन । नखा-त्री० स्वनामख्यातगन्धद्रव्य ।। नखी । नन्दनज-न० हरिचन्दन ॥ हरिचन्दन । नगजा-स्त्री० क्षुद्रपाषाणभेदवृक्ष ॥छोटापाखानेभद । नन्दिक-पु० नन्दीवृक्ष ॥ तुनवृक्ष । नगणा-स्त्री० लता-विशेष ।। मालकांगुनी । नन्दितरु-पु० धवंवृक्ष ॥ धोवृक्ष । नगभित्-पु० पाषाणभेदन ।। पाखानभेदवृक्ष । नन्दिनी-स्त्री. रेणुका जटामांसी. ॥ रेणुकासुग. नगभू-पु० क्षुद्रपाषाणभेद ।। छोटापाखानभेद । न्धिद्रव्य । वालछडजटामांसी । . नगरोत्था-स्त्री. नागरमुस्ता ॥ नागरमोथा । नान्दवृक्ष-पु० नन्दीवृक्ष ।। तुनवृक्ष ।। नागरीषधि-स्त्री० कदली ।। केला । नन्दी [ ] पु०, गर्दभाण्डवृक्ष । वटवृक्ष । नगाश्रय-पु० हस्तिकन्द ।। हस्तिकन्द । पारसपपिल । बड़कापेड । ननहू-पु० न० नानाद्रव्यकृतसुराबीज ।। वाखर नन्दीवृक्ष-पु. सुगान्धवृक्ष-विशेष । अश्वत्थसदृश वंगभाषा। स्वनामख्यात क्षीरविक्ष । मेषशृंगीवृक्ष ॥ तून । नट-पु० श्योनाकवृक्ष । अशोकवृक्ष । किष्कुपर्वा ।। तुनवृक्ष । बेलियापीपरवृक्ष । मेढाशिंगी। शोनापाठा । अशोकवृक्ष । नरसल । नन्द्यावर्त-पु० तगरद्रुम ॥ तगरकापेड ।
(९४) आयुर्वेदीय- . नभ (सू) न० अभ्रक || अभ्रक । नलोत्तम, पु० देवनल ।। बडानरसल । नमस्कार-पु० विषभद ॥ एकप्रकारका हालहल, नल्वण, पु० द्रोणपरिमाण ।। ३२ सेर । वा जहर । नत्ववमंगा, स्त्री. काकांगी ।। काकजनावृक्ष । नमस्कारी-स्त्री० खदिरिका । लज्जालु । वराह नव-पु० रक्तपुनर्नवा।।साठ, गदहयूना । गददसट क्रान्ता । खैरीशाक वङ्गभाषा । छुई । हिंदी । नवदल, न० पद्मस्यकेशरसमीपस्यदल ।। कमला मुईवराहक्रान्ता साधारणभाषा । केनवीनपत्ते । नभेरु-पु० रुद्राक्ष । सुरपुन्नाग !! रुद्राक्षका पेड । नवनी-स्त्री० नवनीत ।। नीघी । पुन्नागभेद । नवनीत-न० दुग्धभवद्रव्य ।। नैधी । मक्खन नम्रक-पु० वेतस ॥ वैत । नवनीतक-न० घृत ।। घी। नयनौषध-न० पुष्पकासीस ॥ पालाकससि । नवमलिका-स्त्री० नवमालिका ॥ नेवारी । नर-न० सौगांधकतृण ॥ गंधेलघास । नवमालिका-स्त्री० म्वनामख्यातपुष्पा ।। नेवारी । नरङ्ग-पु० नागरंगवृक्ष । नारंगीका पेड । नवरत्न-न. नवप्रकाररत्न-विशेष । मुक्ता । नरप्रिय-पु. नीलवृक्ष ॥ नीलका पेड । माणिक्य २ वैयं ३ गोभेद४ हीरक५विद्रुम ६ नरसार-पु० श्वेतवर्ण वणिग्द्रव्यविशेष ॥ नौसादर । पद्मराग७ मरकत८नीलकान्त ९ यह नवरत्न हैं। नरेन्द्रद्रुम-पु० श्योनाकवृक्ष || सोनापाठा । नववल्लभ-पु० दाहागुरु ॥ दाहअगर । नर्तक-पु० पोटगल ॥ नरसल । नवागा-स्त्री० कर्कटशृंगी ।। काकडाशिंगी । नत्तकी-त्री० नलिकानामकसुगन्धद्रव्यविशेष|नली। नवोद्धृत-न० नवनीत । नैनीधी । नम्मदी-त्री० • स्पृक्का ।। असवरग। नव्य-पु० रक्तपुनर्नवा ।। गदहपूनः । नल-न० पद्म ॥ कमल । नस्य-न० नासिकादेयचूर्णादि।। नास लेना । नल-पु० स्वनामख्यात तृणविशेष॥ नरसल । नल । नहुषाख्य-न० तगरपुष्प ।। तगर । नलक-न० नलकास्थि। शाखास्थि ॥ नलेकीहडी । नक्षत्र-न० मुक्ता ॥ मोती । नलकिनी-पु. जंघा ।। जांधा। नक्षत्रकान्तिविस्तार-पु० धवलयावनाल ।। सफेद नलकी-पु० जानु || पांवकाघुटना । जुआर।' नलद-न० उशीरामांसी। पुष्परस । लामजकतृण ॥ नक्षत्रेश-पु० कर्पूर ।। कपूर । खस । जटामांसी । फूलकामधु । लामजकघास । नाकु-पु०वल्मांक ।। कीडोंकी बनाई हुई मिट्टी वा नलदम्बु-पु. निम्बवृक्ष ॥ नामका पेड । दीमक। नलदा-स्त्री० जटामांसी ॥ वालछड, जटामांसी । नाकुलो-स्त्री०कुक्कुटिकन्द।रासना।चविका।यवतिक्ता नलिका-स्त्री० प्रवालाकृति सुगंधिद्रव्यभेद । नली । श्वेतकण्टकारी । नाकुलीकन्द । कन्द-विशेष । नलित-पु. शाकविशेष । नाडीकाशाक । सेमरकामूसली । रायसन । चव्य । यबेची। नलिन-न. पद्म । नीलिका । जल ॥ कमल । सफेदक हरी । नकुलकन्द । नाई । नीम । जल। नाग-पु० न० रङ्ग । सोसक ।। रांग । सोसा । नलिन-पु. पानीयामलकी ॥ पानीआमला । नाग-पु. नागकेशर | पुन्नाग । मुस्तक ।ताम्बूली ।। नलिनी-स्त्री० • पद्मलता । पद्म । नलिका । नारिके | नागकेशर । पुन्नागका वृक्ष । मोथा औषधी । पान। लसुरा ।। पद्मसमूह, कमलनी । कमल । नली । नागकन्द-पु० हस्तिकन्द ॥ हस्तिकन्द । नारियलकीमादिरा। नागकणं-पु. रक्तैरण्डवृक्ष । लाल अण्डका पेड़। नलिनीरह-त. मृणाल || कमलकोनाल । इसको योगिया अण्ड भी कहते हैं। नलो-स्त्री० मनःशिला । नलिका ।। मनशिल, नागकिज्वल्क-न० नागकेशरपुष । ॥ नाग मैनशिल । नली। , . केशर । --- औषधिकोष। (९५) " शिल । नागकुमारिका-स्त्रीगुडूची । मेञ्जिष्ठा ॥ गिलोय । नागर-पु. नागरंग || नारंगी । मजीट। नागरक्त-न० सिन्दूर । सिन्दूर । नागकेशर-पु. नागकेशरपुष्पवृक्ष ॥ नागकेशर-नागरधन-पु० नागरमुस्ता ॥ नागरमोथा । का पेड। नागरंग- पु० वृक्ष-विशेष|नारगी, नवरंगीका.पेड। नागकेसर-पु० पुष्पवृक्ष-विशेष ।। नागकेशर । नागरमुस्ता-स्त्री० मुस्ताप्रभदे ॥ नागरमोथा । नागगन्धा-स्त्री० नाकुलीकन्द ॥ नकुलकन्द नाई। नागरात-न० शुण्ठी ।। सोंट। नागगर्भ- न० सिन्दूर ।। सिन्दूर । नागरी-स्त्री० स्नुही ।। थूहरकापड । नागच्छत्रा-स्त्री०नागदन्ती ।। हाथोशुण्डावृक्ष । नागरुक-पु० नागरंग ।। नारंगीवृक्ष । नागज-न० सिन्दूर । रङ्ग ॥ सिन्दूर । राङ्ग । नागरेणु-पु० सिन्दूर ।। सिन्दूर । नागजिह्वा-त्री० शारिवा ।। सरिवन, सालसा । नागवल्लरी-स्त्री० नागवल्ली ॥ पान । नागजिह्वीका-स्त्री. मनःशिला ॥ मनशिल, भैन- नागवल्लिका-त्री० नागवल्ली-स्त्री० नागजीवन-न० रंग ॥ रांग । नागशुण्डी-स्त्री० डंगरीफल ॥ डंगरी । नागदन्तिका-स्त्री. वृश्चिकाली । रामदूती ॥ नागसम्भव-न० सिन्दूर ।। सिन्दूर । वृश्चिकाली । रामदूती । तुलसी । नागसुगन्धा-स्त्री० सर्पसुगन्धा । रासना, रायसन। नागदन्ती-स्त्री० श्रीहस्तिनीक्षुप ।। हाथीशुण्डावृक्ष । नगरोता-स्त्री० दन्ती । नागदन्तीवृक्ष ।। दन्ती- नागस्तोकक-न० वत्सनाभ ॥ वच्छनाभविष । नागदमनी-स्त्री० क्षुद्रक्षुप-विशेष ॥ नागदौन । नागदलापेम-न० परूषफल || फालसा । कावृक्ष । नागदन्ता अर्थात् हाथीगुंड वृक्ष । नागहनु-पु० नखनामकगन्धद्रव्य ॥ नखी । नागद्रु-पु० स्नुहीवृक्ष । सेहुण्डवृक्ष । नागपत्रा-स्त्री. नागदमनीपर्ण ॥ नागदौन । नागहन्त्री-स्त्री० बन्ध्याककोंटकी ॥ वाँझखखमा, वनककोडा। नागकेशर ॥ मागकेशर । नागपत्री-स्त्री. लक्ष्मणानामकन्द ॥ लक्ष्मणा. नागाराति-पु० वन्ध्याककोटकी ॥ वनककोडा । नागपर्णी-स्त्री. पर्ण ।। पान । नागालावू-स्त्री० कुम्भतुम्बी ॥ गोलतुम्बी । नागाहा-स्त्री. लक्ष्मणाकन्द ॥ लक्ष्मणाकन्द । नागपुष्प-पु० पुन्नागवृक्ष । नागकेशर | चम्पक।। नाटाम्र--पु० चेलान । तरबूज । पुन्नीगकापेड़। नागकेशरफूल । चम्पावृक्ष । नाडिक-न० कालशाक || नाडीकाशाक । नागपुष्पफला-स्त्री० कुष्माण्डी ॥ पेठा । नाविकेल-पु० नारिकेल || नारियल । नागपुष्पिका-स्त्री०.स्वर्णयूथी ॥ पालाजुही । नाडिपत्र-न० नाडिच ।। नाडीकाशाक | नागपुष्पी-स्त्री० नागदमनी वृक्ष-विशेष ।।नागदौन। नाड़ी-स्त्री० धमनी । गंडदूर्वा । वंशपत्री ॥ नाडी । नागपुष्पी । गांडरदूब । वंशपत्री ॥ नागफल-न० पटोल ॥ परवल । नाडीक-पु० शाक-विशेष पट्टशाक ॥ नाडीका नागफेन-न० अहिफेन । अफीम | शाक, नरिचाशाका, कालशाक | पटु आशाक । नागबन्धु-पु० अश्वत्थवृक्षः।। पीपलकापेड़ । नाडीकलापक-न० साक्षीवृक्ष ।। सर्पाक्षी, सरहटी, नागबला- स्त्री० बलाभेद ।। गुलसकरी, गंगेरन । गंडिनी, सरफोंका। नांगमाता-(ऋ) स्त्री० मन:शिला || मौनशिला, नाड़ाकेल-पु. नारिकेल ॥ नारियल । नाडीच-पु० शाकविशेष ॥ नाडीकाशाक। नागमार-पु. केशराज ॥ कुकरभांगर।। नाडीतिक्त-पु० नेपालनिम्बा ॥ नेपालदशकानीम नागर-न० शुण्ठी । मुस्ता ॥ सोंठ । मोथा । वा चिरायता। । पान । नागाख्य-० कन्द। ॥ मनधिल।
(९६) आयुर्वेदीय- जलवैतं । नाडीव्रण-पु० क्षत-विशेष । नासूरं । नालिक-न पन || कमल। नाड़ीशाक-पु. नाडीकशाक || पटुआशाक । नालिका-नालिताशाक ! चर्मकपा ||नाडीकाशाक। नाडीहिंगु-न० हिंगुभेद ॥ कलः, पतिहीङ्ग, देशा सातला । न्तरीयभाषा। नालिकेर-पु० नारिकेल ॥ नारियलका वृक्ष । नादेय-न० सैन्धवलवण । सौवीराजन ॥ सैंधा- नालिता-स्त्री० तिक्तपट्टशाक ॥ नाडीका शाक । नोन । श्वेतशुमा । नाली-स्त्री० पद्म ॥ कमल । नादेय-पु. काशतृण । वानीरवृक्ष ॥ कांस । नालीवण-पु. नाडीव्रण ॥ नासूररांग । नासा-स्त्री. नसिका । वासकवृक्ष॥नाक अडूसा । नादयी-स्त्री० अम्बुवेतस । भूमिजम्बुका । वैजय- नासारोग-पु० नासिकाव्याधि ॥ नाकरोग । न्तिका । नागरङ्ग । जवापुष्पवृक्ष) आग्नमन्थवृक्ष । नासालु-पु० कट्फलवृक्ष ॥ कायफल । काकजम्बू || जलवैत। छोटीजामुन। जयन्तीवृक्ष । नासासंवेदन-पु० कांडीरलता ॥ काण्डवेल । नारङ्गीकापेड । ओडहुल, गुढहर । अगेथुवा । नास्तिद-पु० आम्रवृक्ष ॥ आमका पेड । अरणीवृक्ष । एक प्रकारकी जामुन । निःशल्या-स्त्री० दन्तीवृक्ष ।। दन्तीवृक्ष । नानाकन्द-पु० पिण्डालु ॥ पिडालु । निःशूक-पु० मुण्डशालि || मूडे शालिधान । नाभि-पु० स्त्री० प्राण्यङ्ग-विशेष ॥ नाभि, टुंडी । निःश्रोणी-स्त्री० खजूरीवृक्ष !| खजरका पेड़ । नाभि-स्त्री. भृगनामि ॥ करतूरी ! निःश्रेणिका-स्त्री० कोकणदेशे नि: णीनामख्यात नाभिकण्टक-पु० आवर्त ॥ स्फीतनामि । तृण विशेष ॥ निश्रेणीतृण । नाभिका-स्त्री० कटभीवृक्ष || कटनीवृक्ष । निःसार-पु० शाखाटवृक्ष । श्योनाकवृक्षभेद ॥ स. नाभिगुडक-नाभिगोलक-पु. स्फीतनामि ॥ होरावृक्ष । सोनापाठा । नाभिनाला-स्त्री० नाभिसम्बन्धिनी नाडी। निःसारा-स्त्री० कदलीवृक्ष ॥ केलेका पेड़ । नारङ्ग-न. गर्जर ॥ गाजर । निःस्नेहा-स्त्री० अतसी ॥ अलसी। नारङ्ग-पु० पिप्पलीरस । स्वनामख्यातफलवृक्ष-विश- निकुञ्चक-पु० वानीरवृक्ष || जलवैत । १ पलप- ष ॥ पीपलका रस । नारङ्गीका पेड । नाराची-स्त्री० एषणी !! एक प्रकारकी तराजु । निकुञ्जिकाम्ला-स्त्री० कुञ्जिकावृक्षप्रभेद ॥कुञ्जिक । नारायणी-स्त्री० शतमूली ॥ शतावर । निकुम्भ-पु० दन्तीवृक्ष ॥ दन्तीवृक्ष । नारिकेर-पु० नारिकेल ॥ नारियलका पेड । निकुम्भाख्यबीज-न. जयपाल ॥ जमालगोटा । नारिकेल-पु० स्वनामख्यातफलवृक्ष ॥ नारियलका निकुम्भी-स्त्री० दन्तीवृक्ष ॥ दन्तीवृक्ष । वृक्ष । निकेतन-पु. पलाण्डु ॥ प्याज । नारिकेल-पु. " निकोचक-पु० अङ्कोठवृक्ष ॥ ढेरावृक्ष । नारिकेली-स्त्री." निकोठक-पु० ॥ नारीच-न० शाक-विशेष ॥ नाडीका शाक । निगूढ-पु० वनमुद्ग ॥ मोट । नारीष्टा-स्त्री० मलिका ॥ बेलाका वृक्ष । निग्रह-पु० चिकित्सा ॥ रोगदमन । नार्यङ्ग-पु० नागरङ्ग । नारङ्गीका वृक्ष । निघण्टिका-स्त्री० गुलञ्चकन्द ॥ एक प्रकारक नाय॑तिक्त-पु. चिरतिक्त ॥ चिरायता । कन्द। नाल-न० उत्पलादिदण्ड । हरिताल । कमल इत्या- निचुल-पु० हिजलवृक्ष । वेतसवृक्ष। समुद्रफल।वेत। दिकोंकी नाल । हरताल । निण्डिका-स्त्री० कलाय-विशेष ॥ मटर | नाल-पु० नल || नरसल । नितम्ब-पु० कटिपश्चाद्भाग ॥ नितम्ब, चतड़ । नालवंश-पु० नल ॥ नल, नरसल । निद-न० विष ॥ हालाहल । रिमाण ।
औषधिकोष। (९७) मारमा निदान-ज० रोगकारण ॥ रोगका निर्णय । निर्यास-पु० कषाय । काथ । वृक्षादिक्षीर ॥ निीदग्धा-स्त्री० ० एला || इलायची । कषायरस । काढा । गोंद । निदिग्धिका-स्त्री० कण्टकारिका । एला ॥ कटेरी । नियूंस-पु० नियास ॥ गोंद । इलायची । निर्वृह-पु० निर्यास ॥ गोंद । निद्रालु-स्त्री० वार्ताकी । वनवरिका । नलिका । निर्वृह-पु० काथ ॥ काढा । बैंगन । वनतुलसी । नली निर्विषा-स्त्री० तृण-विशेष ।। निर्विी धाप्त । निद्रासंजनन-न० लष्मा, कफ । निर्बीजा-स्त्री० काकोलीद्राक्षा ॥ किसभित । निधि-पु० नलिकानामक गन्धद्रव्य । जीवकोषधी। निशा-स्त्री. हरिद्रा।दारुहरिद्रा॥हलदी दारुहल्दी । नली । जीवक । निशाख्या-स्त्री० हरिद्रा ॥ हलदी । निप.-पु. कदम्बवृक्ष ॥ कदमका पेड। निशाचर-पु० चोरक ॥ मटेउर नेपालकी भाषा । निफला-स्त्री० ज्योतिष्मता ॥ यामकाङ्गनी । निशाचरी-स्त्री० केशिनाम गन्धद्रव्य । केशिनी । निफेन-न० अहिफेन ।। अफीम । निशाजल-न० हिम ॥ वरक । ओस । निबन्ध-पुं० निम्बवृक्ष । आनाहरोग नामका पेड़। निशाटक-गुग्गुलु ॥ गूगल । अनाहरोग । निशान्धा-स्त्री. जतुकालता ॥ मालवमें प्रसिद्ध निम्ब-पु० स्वनामख्यातवृक्ष ।। नीमका पेड़ । जनीनामवाली लता। निम्बक-पु." निशापति-पु० कर्पूर ॥ कपूर । निम्बतरु-पु० मन्दारतरु ।। मन्दारवृक्ष । निशापुष्प-न० उत्पल ॥ कमोदनी । निम्बबीज-पु. राजादनीवृक्ष ।। खिरनीवृक्ष । निशाहस-पु० ॥ निम्बूक-पु० वृक्ष-विशेष ।। नीबू, कागजीनीबू । निशाह्वा-स्त्री० हरिद्रा ।। हलदी । निरसा-स्त्री. नि:श्रेणिकातृण ॥ निश्रेणीतृण । निशित-न० लौह ।। लोहा। निरामालु-पु० कपित्थ ।। कैथका वृक्ष । निशिपुष्पा-स्त्री० शेफालिका । निर्गुण्डीभेद । निरालम्ब-न० आकाशमांसी ।। जटामांसाभेद। निशिपुष्पिका-स्त्री." निरुद्धप्रकाश-पु० मेट्रजात क्षुद्ररोग-विशेष ।।एक निशिपुष्पा-स्त्री." प्रकारका क्षुद्ररोग। निश्चला-स्त्री० शालपी ।। शालवन । निगन्धपुष्पी-स्त्री० शाल्मलीवृक्ष ।। सेमरका पेड । निश्चारक-पु. पुरीषक्षय ।। प्रवाहिकारोग । निर्गुण्डी-स्त्री० निर्गुण्डी ।। निर्गुण्डी, मेउडी । निषण्णक-न० सुनिषण्णकशाक ॥ शिरिआशिाक निर्गुण्डी-स्त्री० नीलसिन्दुवारवृक्ष । शेफालिकापुष्प निष्क-पु० न० माषकचतुष्टय ॥ चार ४ मासे वृक्ष ।। समालू, निर्गुण्डी, सेदुआरि । पारमाण । निर्जरसर्षप-पु० देवसर्षपवृक्ष ।। निर्जरसरसों। निष्कण्ट-पु० वरुणवृक्ष ।। वरना वृक्ष । निर्जरा-स्त्री० गुडची । तालपर्णी ॥ गिलोय । निष्क्रुटि-त्री० एला ।। इलायची । तालपर्णी। निष्कुम्भ-पु० दन्तीवृक्ष ।। दन्तीवृक्ष । निर्दहन-पु० भल्लातक । भिलावेका वृक्ष । निष्ठीवन० मुखद्वारा श्लेष्मादिवमन ।। थूकना । निर्दही-स्त्री० मूलता ॥ चुरनहार । निष्पत्रिका-स्त्री० करीवृक्ष ।। करीलवृक्ष । निमध्या-स्त्री० नलिका ॥ नली । निष्पाव-पु. राजमाष । शिम्बी । श्वतशिम्बी। निर्मल-न० अभ्रक ॥ अभ्रक । राजशिम्बीज ।। लोविया । सेम । सफेद सेम निर्मलोपम-पु० स्फटिक ॥ फटिकमाणे । भटवासु, राजशिम्बीके बीज हैं। निर्मल्या-स्त्री० स्पृका ॥ असवरगं । निष्पावक-पु० श्वेतशिम्बी ।। सफेद शेम निर्मोक-पु० सर्पकञ्चुक । विष ॥सापकी कैचली। निष्पावी-स्त्री० शिम्बी-विशेष । वोरा, वरवटी वजभाषा। विष ।
( ९८ ) आयुर्वदीय- HL.... कटसरया। भेद । मोती। निसिन्धु-पु० वृक्ष विशेष ।। सम्हालुवृक्ष । नीलक्रान्ता-स्त्री विष्णुकान्ता ।। नाली कोयल । निस्मृता-स्त्री० त्रिवृता ।। निसोथ । नीलचर्म(न् )-न० परूषक ।। फालसा । निस्तुषक्षीर-पु० गोधूम ॥ गेहूं । नालज-न० वर्तलोह ॥ एक प्रकारका लोहा । निस्तुषरत्न-न० स्फटिक ।। फटिकमाण। नीलझिण्टी-स्त्री० नीलवर्ण झिण्टीपुष्पवृक्ष ।। नीली निस्त्रिंशपत्रिका-स्त्री० स्नुहीवृक्ष ।। सेंडका पेड । निस्त्रैणपुष्पिक-पु० राजघत्तूरवृक्ष ।। राजधत्तूरा- नीलतरु-पु० नारिकेल ।। नारियलका पेड़ । वृक्ष। नीलताल-पु० हिन्ताल। तमाल ।। एक प्रकारका निस्नेहफला-स्त्री० श्वेतकण्टकारी ॥ कटेहरी । ताड । श्यामतमाल । निस्पृहा-स्त्री० आमेशिखावृक्ष ।। कलिहारीवृक्ष । नीलदूर्वा-स्त्री० हरितदूर्वा ॥ हरी दूब । नीक-पु. वृक्ष-विशेष । नीलध्वज-पु० तमालवृक्ष ।। श्यामतमाल | नीच-पु० चोरनामकगन्धद्रव्य ।। मटेउर । नीलनिर्गुण्डी-स्त्री. नालासन्धुवारवृक्ष ।। नीलवर्ण- नीचभोय-पु० पलाण्डु ।। प्याज । समालू। नीचवज्र-न० वैक्रान्तमणि ।। चक्रान्तमणि । नीलनियासक-पु० नालासनवृक्ष । विजयसार- नीप-पु० कदम्बवृक्ष । पराकदम्ब । बन्धूकवृक्ष । नलिाशोक कदमका पेड।धाराकदमवृक्ष । क्षुप नीलपत्र-न० इन्दीवर ।। नाले कमल । हरियाका वृक्ष । नीलवण अशोक वृक्ष । नीलपत्र-पु० गुण्डतृण । अश्मन्तकवृक्ष । नीला- नीर-न० वालनामौषध ।। सुगन्धवाला । सनवृक्ष । दाडिम ॥ गुण्डतृण-इनका कन्द नीरज-न० कुष्ठौंषधि । पद्म । मुक्ता ।। कूठ।कमल। कशेरू है। आपटा पश्चिमदेशीय भाषा । विजय- सारभद। अनार । नीरज-पु० उशीरी ।। छोटेकांस । नीलपत्रिका-स्त्री० नालीवृक्ष ॥ नालका पेड । नीरद-पु० मुस्तक ॥ मोथा । नीलपद्म-न० नीलकमल ॥ नीलवर्ण कमल । दाडिम || अनार। नीलपुनर्नवा-स्त्री० कृष्णवर्ण पुनर्नवा ॥ नीली । नीरिन्दु-पु० अश्वशाखोटवृक्ष ।। एक प्रकार सिहोरा साठ । वृक्ष। नीलपुष्प-न० प्रन्थिपर्ण ।। गठिवन । नीरुज-पु० कुष्ठौषधी ।। कूठ । नीलपुष्प-पु० नीलवर्ण भङ्गराज | नीलाम्लान || नील-न. नीली। काचलवण । तालीशपत्र । विष। नीला भगरा ।। कालाकोराठा मराठीभाषा । सौवीराजन।तुत्थ ।। नीलका पेड । कचियानोन । नीलपुष्पा-स्त्री. विष्णुक्रान्ता ॥ नीलवर्णकोयल । तालीशपत्र । विष । सफेदशा । तूतिया । नीलपुष्पिका-स्त्री. अतसी नीली ॥ अलसीका पेड नील-पु० इन्द्रनीलमणि । नीलवृक्ष । वटवृक्ष ।। नीलका पेड' । पन्ना । नीलम् फार्सी भापा । नीलका पेड। नीलपुष्पी-त्री० नलियुक्ता । नीलापराजिता । का- वडका पेड । ला बौमा । नीली कोयल । नीलक-न० काचलवण ।। कचियानाने । नीलफाला-श्री. जम्बू । वार्ताकु ॥ जामुन । नीलक-पु० असनवृक्ष ।। विजयसार । नीलकण्ठ-न० मूलक ॥ मूली । नीलकण्ठशिखा-स्त्री० मयूरशिखा ।। मोराशेखा। नीलभंगराज-पुनीलवर्णभृङ्गराज ॥ नीला भङ्गरा नलिकण्ठाक्ष-न. रुद्राक्ष ॥ रुद्राक्ष । नीलमाण-पु. स्वनामख्यातमणि ॥ नीलम् पारस्य नीलकन्द-पु० महिषकन्दभेद ।। भैसाकन्दभेद । भाषा। नीलकमल-न० नीलवर्ण पद्म ।। नीले कमल । नीलमाष-पु० राजमाष । लोविया । नालकुरण्टक-पु० नीलझिण्टी ।। नीलीकटसरैया । नीलमृत्तिका-स्त्री पुष्पकासीस । कृष्णवर्णमृत्तिका । नीरस-पु० बैंगन ।
औषधिकोष। (९९) छोटी जामुन । भाषा । हलाख । पुष्पकससि । काली मट्टी। वर्णसमालुवृक्ष । नीलका वृक्ष । निर्गुण्डी भेद । नीललोह-न. वर्तलोह ॥ एक प्रकारका लोहा । एक प्रकारका नेत्ररोग । क्षुद्ररोग । नीललोहिता-स्त्री. भूमिजम्बू ॥ एक प्रकारको नीलिनी-स्त्री० नीलीवृक्ष ॥ नीलका पेड.। नीली-स्त्री. वृक्षभेद ॥ नीलका पेड़ । नीलका पेड। नीलवर्णन. रसाञ्जन ॥ रसोत । नीलोत्पल-न. नीलवर्णउत्पल ॥ नीलकमल । नौलवल्ली-स्त्री० ॥ वन्दा || बाँदा । नीवार-पु० तृणधान्य || नीवारधान । नीलवर्षाभू-त्री नीलपुनर्नवा ।। नीली साठ । नीहार-न० तुषार ॥ पाला, बरफ । नीलवुह्ना-स्त्री० नालवृध्ना || नीलवर्ण वोना वङ्ग-नूद-पु. ब्रह्मदारुवृक्ष ॥ सहतूतका पेड नृपकन्द-पु० राजपलाण्डु || लाल प्याज । नीलवृन्तक-न. तूल। रूई । नपद्रुम-पु० आरग्वधवृक्ष । राजाद नीवृक्ष ॥ अग्ल. नीलवृषा-स्त्री. वार्ताकी ॥ बैंगन । तास । खिरनीवृक्ष । नीलवृक्ष-पु० वृक्षभेद । नीलवृक्ष । नृपप्रिय-पु. वेष्टवंश । राजपलाण्डु । रामशर । नीलशिग्रु-पु० शोभाञ्जनवृक्ष ।। सैंजिनका पेड । शालिधान्य । आन ॥ बेडवाँस । राजपलाण्डु । नोलसार-न० तिन्दुकवृक्ष ॥ तेंदुवृक्ष । लाल प्याज । रामशर, रामबाण । शालिधान । नीलसिन्दुवार-पु० कृष्णवर्ण सिन्दुवार ॥ नील आमा निर्गुण्डी। नृपप्रियफला-स्त्री० वार्ताकी ।। गुन । नीला-स्त्री० नालपुनर्नवा । कुब्जकवृक्ष । नीली । नृपप्रिया-स्त्री० केतकी । राजवर्जूरी । केतकी. लाक्षा ॥ नालासोंठ । कूजावृक्ष । नीलका पेड । पुष्पवृक्ष । पिण्डखजूर । नृपबदर-पु० राजबदरवृक्ष ॥ राजबरे। नीलाञ्जन-न० सावरिञ्जन । तुत्थ ॥ शुक्लशर्मा। नृपमाङ्गल्यक-न० आहुल्यवृक्ष ॥ तरवटकाश्मीर तूतिया। देशीयभाषा । नीलाञ्जनी-स्त्री० कालाञ्जनीक्षुप ॥ कालीकपास । नृपवल्लभ-पु० राजान ॥ राजआमवृक्ष । नीलापराजिता-स्रो० नीलवर्ण अपराजितालता ॥ नृपवल्लभा-स्त्री० कविकापुष्प । केववाफूल । नीलाकोयल। नपात्मजा-स्त्री० कटुतुम्बी ॥ कडवीतोम्बी । नालाज-नानीलोत्पल ॥ नीलकमल । नीलकुमुद। नपान्न-न० राजाननामकधान्य ॥ राजभोगधान । नीलोफर यवनिका भाषा । नपामय-पु० राजयक्ष्मा ।। राजयक्ष्मरोग । नीलाम्बर-न० तालीसपत्र ।। तालीयपत्र । नृपाह्वय-पु० राजपलाण्डु ।। लाल प्याज । नीलाम्बुजन्म (न् )-न० नीलोत्पल ॥ नील नृपोचित-पु० राजमाष ॥ लोविया । कमला नेता [ ऋ]-पु. निम्बवृक्ष । नीमका पेड़ । नीलाम्लान-पु० पुष्पवृक्ष-विशेष ॥ काला कोराठा नेत्र-न० बस्तिशलाका । पिसाब बाहिर करनेकी मराठीभाषा । नीलाम्ली-स्त्री० क्षुप-विशेष ॥ नलबुडगुड देशा- नेत्रपुष्करा-त्री० रुद्रजटा ।। शंकरजटा । न्तरीय भाषा । नेत्रमीला-स्त्री. यवतिक्तालता ॥ यवेची। नीलालु-पु० कन्द-विशेष ॥ कृष्णवर्ण आलु । नेत्ररोग-पु. नेत्रोत्पन्न विविधरोग ॥ चक्षुमें उत्पन्न नीलाइमा (न् )-पु. नीलमणि ॥ नीलम् पारस्य. भये अनेक प्रकारके राग । नेत्ररोगहा-(न्) पु० वृश्चिकालीवृक्ष ॥ विछुटी नीलासन-पु० असनवृक्ष-विशष॥ विजयसारभेद । वङ्गभाषा। नीलिका-स्त्री० नीलसिन्दुवारवृक्ष । नीलिनी । शेफा- नेत्रारि-पु० सेहुण्डवृक्ष || थूहरका लिका । नेत्ररोग-वि०.। क्षुद्ररोग-वि० ॥नोल- नेत्रोपफल-पु० वातादवृक्ष ॥ बादाम । ॥ सलाई। भाषा। पेड।
(१००) आयुर्वेदीय- नेत्रौषध-ज. पुष्पक्रातरि ॥ पुष्पकसीस । पककृत्-पु० निम्बवृक्ष ।। नीमका पेड । नेत्रौषधी-स्त्री० अजशृङ्गी ॥ मेढाशिङ्गी । पकरस-पु. मद्य || मादिरा । नेदिष्ट-पु० अङ्कोटवृक्ष । ढेरावृक्ष । पकवारि-न० काञ्जिक ॥ काँजी। नेपालनिम्ब-पु० नेपालदेशोद्भव निम्ब ॥ नेपाल पक्काशय-पु० नाभिअधःस्थ अन्तर्भाग ॥ पक्वाशय। देशका नाम । पङ्कज- नेपालिका-स्त्री. मनःशिला ॥ मनशिल ! पंकजन्म [] न. पन॥ कमल । नेमि-पु० तिनिशवृक्ष । तिरिच्छवृक्ष । पंकरुट् [हु पकरह नेमी (न्)-पु० नेपाल-पु० नेपालनिभ्व || नेपालदेशका नीम । पंकशुक्ति-स्त्री. दुर्नामा ॥ शुक्ति, सीप । नेपालिक-न० ताम्र ॥ तांबा । पंकशूरण-पु० शालूक ।। भसीड, कमलकन्द । नेपाली-स्त्री० नवमल्लिका, । मनःशिला । शेफा- |पंकार-पु० शेवाल । जलकुञ्जक ॥ सिवार । काई । लिका । नीली । नेवारी । मैनशिल, मनशिल। पंकज-न० पद्म ॥ कमल । निर्गुण्डीभेद । नीलका पेड पंकेरुह-न. नयग्रोध-न. न्यग्रोधफल || वडका फल । पंक्तिबीज-पु० बबूरवृक्ष ॥ बबूर का पेड । न्यग्रोध-पु० वटवृक्ष । शमीवृक्ष । विषपर्णी ।। वडका | पंगुल्यहारिणी-श्री शिमृडीक्षुप ॥ चङ्गोनी । पेड़ । छोंकरवृक्ष । मोहनाख्यओषधी । पचत्पुट-पु० सूर्यमणिवृक्ष ॥ सूचमीणपुष्पवृक्ष । न्यग्रोधा-स्त्री० न्यग्रोधी ।। मूसाकानी । पचनी-त्री० वनबीजपूरक ॥ वनबिजोरा अर्थात् न्यग्रोधादिगण-पु. द्रव्यसमूह विशेष । यथा विहारी नीबू । "न्ययोधोदुम्बराश्वत्थप्लक्षमधूककपीतनककुभान- पचम्पचा-स्त्री० दारुहरिद्रा ॥ दारहलदी। कोषानचोरकपत्रजम्बूद्वयपियालमधूकरोहिणवि- पञ्चकर्म (न्)-न० पञ्चविध शारीरिकचिकित्सा ।। जुलकदम्बबदरीतिन्दुकीशल्लकीरोध्र सावररोध्रभ- जैसे-बमन, विरचन, नस्य, निरूह और • अनु- ल्लातकपलाशानन्दीवृक्षश्चीत" वड, गलर, पीपल, वासन । पाखर, महूआ, पारिसपीपल, अर्जुनवृक्ष, आमका वृक्ष, कोशम, दोजामुन, चिरोंजीका वृक्ष, मधूक, पञ्चकृत्य-पु० पक्तपौडवृक्ष ॥ पखौंडावृक्ष । मांसरोहिणी, बैत, कदम, बेर, तेंदू, शालई, पञ्चकोल-न० "पिप्पलापिप्पलामूलचव्यचित्रकना- लोध, सावरलोध, भिलावेका पेड, पलाश, ढाक, गरैः -पीपल १ पापलामूल २ चव्य ३ चीता नन्दी-बेलियापीपल ४ सोंठ ५। न्यग्रोधी-स्त्री. उपचित्रा ॥ मूसाकानी । पञ्चगणयोग-पु० मिलितशालपर्णी, पृश्निपर्णी, न्यकुभूरुह-पु० श्योनाकवृक्ष ॥ अरलु, टेंट, शोना- बृहती, कण्टकारी, गाक्षुर ॥ शालवन, पिठवन, भटकटैया, कटेरी, गोखुरू। न्यच्छ-नक क्षुद्ररोग-विशेष ॥ पञ्चगव्य-न० दधि, दुग्ध, घृत, गोमूत्र, गोमय ॥ न्युब्ज-न० कम्मर्रङ्गफल ।। कमरख । दही, दूध, घी, गोमूत्र, गोबर । न्युज-पु० कुश । कुशा । पञ्चगुप्तरसा-स्त्री० स्पृक्वा ॥ असवरग । इति श्रीशालिग्रामवैश्यकृत शालिग्रामौषधशब्दसा- पञ्चतिक्त-न० निम्ब, गुडूची, वासक, वासक, पटोल, गरे द्रव्याभिधाने नकाराक्षरे विंशस्तरङ्गः ॥ २० ॥ कण्टकारी ॥ नीम, गिलोय, अडूसा, परवल, प पक्तपौड-पु. वृक्ष-विशेष ॥ पखौंडा । पञ्चतृण-न० कुश, काश, शर, कृष्णेक्षु, शाली ॥ पतिशूल-न० परिणामशूल । कुशा, काँस, रामसर, कालाईख, धान । - पाठा। . कटेहरी । ।
औषधिकोष। (१०१) - , - - पञ्चनिम्ब-न० "निम्बवृक्षत्यत्वकूपत्रपुष्पफलमू पञ्चशूरण-पु० पञ्चप्रकारशूरण ॥ "अत्यम्लपर्णी- लानि" ॥ नीमकी छाल १ नीमके पत्ते नीमके काण्डीरमालाकन्दद्विसूरणौ" ॥ अयम्लपर्णी, फूल ३ नीमफल, निंबोली ४ नीमकी जड ॥५॥ कांडवल, मालाकन्द, सूरन, सफेद सूरन । पञ्चपर्णिका-स्त्री० गोरक्षीक्षुप ॥ मालवे प्रसिद्धा । पञ्चशैरीषक-न० "शिरीषवृक्षस्य पुष्पमूलफलपत्र पञ्चपल्लव-न० आम्रादिपत्रपञ्चकम्। जैसे । “आम्न त्वच" शिरसवृक्षके फूल,जड, फल, पत्ते, छाल जम्बूकपित्थानां बीजपूरकबिल्वयोः ॥ आमके यह पाँच सिरस हैं । पत्ते, जामनके पत्ते, कैथके पत्ते, बिजोरेके पत्ते, पञ्चसिद्धौषधि-पु० पञ्चप्रकार औषधि-विशेष बेलके पत्ते । जैसे | पञ्चपित्त-न० वराहच्छागमहिषमत्स्यमायू रपित्तकम्' ''तैलकन्दसुधाकन्द- सूकर १ बकरा २ भैसा ३ मच्छ ४ मोर ५ इन क्रोडकन्दरुदन्तिकाः । पाँच जीवोंक पित्त । सर्पनेत्रयुताः पञ्च पञ्चमुखी-स्त्री० वासक । जवापुष्ष-विशेष ॥ सिद्धौषधिकसंज्ञका" वाँसा । साँझो वृक्ष। तैलकन्द-सालममिश्री, वाराहीकन्द, रुदन्ती,साक्षी, पञ्चमूत्र-न० गो, छागी, मेषी, महिषी, गईभी ॥ सरहटी । यह पांच सिद्धौषधि हैं । गाय १ बकरी २ भैंस ३ भेड ४ गधी ५ इनके यह पंचमूत्र हैं। पञ्चसुगन्धक-न. पञ्चप्रकार सुगन्धिद्रव्य । यथा पञ्चमूल-न० पाचन-विशेष ॥ इयोनाक, बिल्व, जातीफलानि, कर्पूरमेतत्पञ्चसुगन्धकम्"अपिच. गम्भारी, पाटला, गणिकारिका, शोनापाठा,वेल, "कर्पूरकक्काललवङ्गपुष्प- कम्भारी, पाडर, अरणी, यहांतक बृहत्पंचक है । शालपर्णी, पृश्निपर्णी, बृहती, कण्टकारी, गुबाकजातीफलपञ्चकन" लोंग १ शीतलचीनी २ अगर ३ जायफल ४ गोक्षुर ॥ सालवन, पिठवन, छोटी कटेरी, बडी- कटेरी और गोखुरू यह लघु पंचमूलक है । कुछ, कपूर । अथवा । कपूर १ शीतलचीनी रलौंग३ काश, शर, दर्भ, इक्षु ।। कुशा, कांस, रामशर, सुपारी ४जायफल ऐसे भी पञ्च सुगन्ध द्रव्य हैं । पञ्चाङ्ग-न० एकवृक्षस्य त्वक्पत्रपुष्पमूलफलानि ।। पञ्चमूली-स्त्री० स्वल्पपञ्चमूल लघुपञ्चमल । एक वृक्षकी छाल, पत्ते, फूल, जड, फल इसको पञ्चरत्न-न."कनकं हीरक नील पद्मरागञ्च मौक्ति पञ्चांग कहते हैं। कम्" सुवर्ण १ हीरा २ नीलकान्तमाणि ३ पद्म- पञ्चांगुल-पु० एरण्डवृक्ष || अण्डका पेड । राग ४ मोती ५ । पञ्चांगुली-स्त्री० तक्राह्वाक्षुप ।। पञ्चरसा-स्त्री० आमलकी ॥ आमला । पञ्चामृतयोग-पु. पञ्चप्रकारद्रव्य-विशेष ॥ यथा पञ्चरक्षक-पु० पक्तपौडवृक्ष ॥ पखौंडावृक्ष । "गुडूचीगोक्षुरं चैव, पञ्चलवण-न० लवणपञ्चक ।" काचसैन्धवसामुद्र. मुशली मुण्डिका तथा । विट्सौवर्चललवणम्" कचियानोन, सैंधानोन, शतावरीति पञ्चानां समुद्रनोन, बिरियासंचरनोन, कालानोन । योगः पञ्चामृताभिधः ॥" पञ्चलोह-न० सौराष्ट्रकलोह ॥ ताँबा १ पीतल २ गिलोय, गोखरू, मुसली, गोरखमुण्डी शतावर ५ राङ्ग ३ सीसा ४ और लोह ५ । यह मिले हुवे पञ्चामृतयोग कहे जाते हैं। पञ्चलोहक-न० सुवर्ण, रजत, ताम्र, रंग,सीतक ॥ पञ्चाम्ल-न० पञ्चप्रकाराम्लद्रव्य । यथा- सोना, रूपा, तांबा, राग, सीसा । कोलदाडिमवृक्षाम्लै- पञ्चवल्कल-न० "न्यग्रोधोदुम्बराश्वत्थप्लक्षवतेस. रम्लवेतसंसंयुतैः। वल्कलैः" वड, गूलर, चतुरग्लं च पञ्चाम्ल की छालको पञ्चवल्कल कहते हैं। मातुलुकसमन्वितम् ॥ डाभ, ईख । पीपल, पाखर, बैंत इन (१०२) आयुवदीय- , वृक्ष। पत्तर-न.." बेर, अनार, विषाविल, अम्लवैत, यह चार अम्ल पाहिलाघ्र द्रव्य कहलाते हैं और इनमें विजारको मिलानस पाट्टलाधे } --पु० पट्टिकालोध्र ॥ पठानीलेध पञ्चाम्ल कहलाते हैं। पट्टी-स्त्री पञ्चोपविष-न० पञ्चप्रकार उपविष । यथा- पट्टी (न्)-पु. " "स्नुह्यर्ककरवीराणि लाङ्गली विषमुष्टिका" सेहुण्ड, पडाशी-स्त्री० पलाश ॥ ढाकका पेड । आकका पेड, कनेर, कलिहारी और कुचिला पणास्थि-न० कपईक || कौडी । यह पांच उपविष हैं। पणास्थिक-पु० पञ्जर-न० पु० कायास्थिवृन्द ॥ शरीरके सब हाड पाण्डित-पु० सिहक ॥ शिलारस । पण्या-स्त्री० ज्योतिष्मती ॥ मालकंगुनी । अर्थात् कङ्काल । पण्यान्धा-स्त्री. तृण-विशेष । पण्यान्धातृण । कोलकन्द ॥ सूकरकन्द । पश्चल-पु० पतंग-न० पारद । चन्दनभेद ॥ पारा । पतङ्गका पट-पु० पियाल वृक्ष ॥ चिरोंजीका पेड । पटरक-पु० गुन्द्र वृक्ष ॥ पेटर । पटल-न. नेत्ररोग विशेष । दृष्टरावरक ॥ एक पतंग-पु० जलमधूकवृक्ष । शानिधान्यभेद ।। जल. प्रकारका नेत्ररोग । आँखका पर्दा । महुआवृक्ष । शालिधानभेद । पटि-स्त्री० कुम्भिकाद्रुम ॥ जलकुम्भी। पतिवरा-स्त्री० कृष्णजीरक ॥ काला जीरा । पटीर-न० मूलक। चन्दन । खदिर ॥ मूली। चन्दन। पतंग, पत्तरंग-नरक्तचन्दन । वृक्ष-विशेष ॥ लाल खरका पंड । चन्दन । पतङ्गका वृक्ष । पटु-न० लवण | पांशु लवण || नोन। पांशु नान। पटु-पु० पटोल । पटोलपत्र । काण्डरिलता । कार- पत्तूर-पु. शालिञ्चशाक ॥ शान्तिशाक । वेल्ल चोरक ॥ परवल । परवलके पत्ते । काण्ड. पत्र-न० तेजपत्र ॥ तेजपात पत्रक-न." बेला । करेला । भटेउर। पत्रक-पु. शालिञ्चशाक ॥ शान्तिशाक । पटुक-पु० पटोल || परवल । पत्रगुप्त-पु० त्रिकण्टवृक्ष ॥ तिधारा थूहर । पटुतणक-न० लवण तृण ।। लवण तृण । पत्रघना-स्त्री. सातलावृक्ष ॥ सातलावृक्ष । पटुपत्रिका-स्त्री० क्षुद्रचञ्चुक्षुर ॥ छोटा चञ्चुवृक्षा पत्रंग-न० पत्राङ्ग । रक्तचन्दन ॥ पतङ्गका पेड । पटुपार्णका-स्त्री० क्षीरिणी वृक्ष ॥. एक प्रकारकी लालचन्दन । कटेहरी। पत्रतण्डुली-स्त्री० यवतिक्ता ॥ यवेची । पटुपर्णी-स्त्री० स्वर्णक्षारी ॥ सत्यानाशी कटेहरी । पत्रतरु-पु. दुष्खदिर॥ दुर्गंधखैर । पटोल-पु० स्वनामख्यात लताफल-विशेष ॥ पर- पत्रपुष्प-पु० रक्ततुलसी ॥ लाल तुलसी। वल । पत्रपुष्पक-पु० भूर्जपत्र ॥ भोजपत्र । पटोलिका-स्त्री० फल-विशेष ॥ तोरई । पत्रपुष्पा-स्त्री० तुलसी । क्षुद्रपत्रतुलसी ॥ तुलसी। पटोली-स्त्री. ज्योत्स्नी ॥ सफेद फूलकी तोरई। छोटे पत्तकी तुलसी। पट्टरंग-न० पतङ्ग ॥ पतङ्गकी लकडी । पत्रवल्ली-स्त्री० रुद्रजटा । पर्णलता । पलाशलिता ॥ पट्टर जनक-न." शङ्करजटा । पान । पलाशीलता । पट्टशाक-ज० पु० नाडीक ॥ पटुआशाक । पत्रशाक-पु० षड्विधशाकान्तर्गतपत्रान्तकशाक । पट्टिका-स्त्री० पट्टिकाख्य लोध्र ॥ पठानलोध । पट्टिकाख्य-पु० रक्तलो ॥ पठानीलाध । पत्रात्मक-पु० शाक || शाक । पट्टिकालोध्र-पु०. ". पत्रश्रेणी-स्त्री० द्रवन्ती ॥ मूसाकानी । पट्टिल-पु० पूतिकरञ्ज ॥ दुगंधकरञ्ज । पत्रश्रेष्ठ-पु० बिल्व || बेल । पत्रशाक।
औषधिकोष। ( १०३) AMAND.tit: पत्रसुन्दर-पु० ग्रीष्मसुन्दरशाक ॥ गिमाशाक । पद्मकाह्वय-न० पमकाष्ट || पशाख । पत्राख्य-न० तेजपत्र । तालीशपत्र ॥ तेजपात । पद्मकिजल्क-न० पद्मकेशर ॥ कमलकेशर । तालीशपत्र । पद्मकी (न् )-पु. भूर्जपत्रवृक्ष ।। भोजपत्रवृक्ष'। पत्राङ्ग-न० रक्तचन्दन । पतङ्ग । भूर्जपत्र । पद्म पद्मकेशर-पु० किजल्क ॥ कमलकेशर । काष्ठ ।। लाल चन्दन । पतङ्गका वृक्ष । भोजश्त्र। पद्मगन्धि-पु० पद्मकाष्ठ ॥ पद्माख । पन्नाख । पद्मचारिणी-स्त्री. उत्तरापथेभव स्वनामख्यातवृक्ष- पत्राढय-न० पिप्पलामूल । पर्वततृष्ण ॥ पीपल'- विशेष ॥ गैंदेका वृक्ष । मूल । तणाख्य। पद्मदर्शन-पु० श्रीवास ॥ लोवान । पत्रान्य-न० पतङ्ग ॥ पतङ्ग । पद्मतन्तु-पु. मृणाल || कमलकी नाल । पत्रालु-पु० इक्षुदर्भा । कासालु ॥ इक्षुदर्भतृण । पद्मनाल-न." कोकणे प्रसिद्ध चुबडीआलु । पद्मपत्र-त. पुष्करमूल ।। पोहकरमूल । पत्रावलि-श्री. गैरिक | गेरू । पद्मपण-न." पत्रिकाख्य-पु० कर्पूर विशेष ॥ कपूरभेद । पद्मपुष्प-पु० कर्णिकारवृक्ष ॥ कनेरको पेड | पत्री, (न् )-पु० तालवृक्ष । दमनवृश्च । गङ्गापत्री पद्ममुखी-स्त्री० दुरालभा ॥ धमासा । श्वेतकिणिही ॥ ताडका पेड़ । दवनावृक्ष । गङ्गा- पद्मराग-पु० रक्तवर्ण मणिविशेष | पद्मरागमणि। पत्री । सफेद किाणहीवृक्ष । पद्मवर्णक-न० पुष्करमूल || पाहेकरमूल । पत्रोपस्कर-पु० कासमई ॥ कसौंदी । पद्मबीज-न० कमलबीज || कमलगट्टा । पद्मबीजाभ-ज. मखान्न ॥ मखाना । पत्रोर्ण-पु० श्योनाकवृक्ष ॥ शोनापाठा । पथिका-स्त्री. कपिलद्राक्षा ॥ भूरीदाख । अर्थात् पद्मा-स्त्री. पद्मचारिणी । फञ्जिका । कुसुम्भपुष्प ॥ गेंदेका वृक्ष । भारङ्ग ॥ कसूमका फूल । अगुरी मुनक्का । पथिद्रुम-पु० खदिरवृक्ष ॥श्वतस्त्रदिर ॥ खैरका | पद्माट-पु० चक्रमर्द || चकवड़, पमार । पेड । पपडियाकत्था। पद्मालया-त्री० लवङ्ग ॥ लौंग । पद्मावती-स्त्री० पद्मचारिणी ॥ गेंदेका वृक्ष । पथ्य-न० सन्धव ॥ सैंधानोन । पथ्य-स्त्री०चिकित्सादौ हितकारक ॥ पथ्य । पथ्य-पु० हरीतकीवृक्ष ॥ हडका पेड । पद्माक्ष-न० पद्मबीज ॥ कमलाहा । पथ्यशाक-पु० तण्डुलीयशाक ॥ चौलाईका शाक। पद्मिनी-स्त्री० पद्मलता । पद्म । मृणाल ॥ कम. पथ्या-स्त्री. हरीतकी । मृगेवार । चिर्भिटा । लिनी, पद्मसमह । कमल । कमलकी नाल । वन्ध्याकर्कोटकी ॥ हरड । सैघिनी । गुरुभाई पद्मिनीकण्टक-पु० क्षुद्ररोग विशेष ।।. क्षुद्ररोग । वनककोडा। पद्मोत्तर०पु० कुसुम्भ ।। कसूम । पदन्यास-पु० गोक्षुर ॥ गोखुरू । पनस-पु० फल पक्ष-विशेष ।। कटेल, कटहर । पदाङ्गी-स्त्री० हंसपदी ॥ लालरङ्गका लज्जालु । पनसतालिका-स्त्री० कण्टकिफल ॥ कटहर । पद्म-न० पु० त्वनामख्यात जलज पुष्प । पुष्कर- पनसिका-स्त्री० कर्णाभ्यन्तरजातव्रण-विशेष ।। मूल । ससिक । पद्मकाष्ठ॥कमलपुष्प । पोहकर क्षुद्ररोग-विशेष । मूल । सीमा । पद्माख । पन्नग-पु० पद्मकाष्ठं । औषधि-विशेष ॥ पद्माख । पद्मक-न० पद्मकाष्ठ । कुष्ठौषधि ॥ पद्माख । कूठ पन्नग औषधि । पन्नगकेशर-पु. नागकेशरपुष्य ॥ नागकेशर । पन्नगी-स्त्री० सर्पिणीक्षुप ॥ सर्पिणीऔषधी-फणि- पद्मकन्द-पु० शालूक || कमलकन्द । भसीडा । पद्मकाष्ठ-न. काष्ठ-विशेष पद्माख । लता चन्द्रनाथ देशीय भाषा । पद्माह्वा-स्त्री." औषधी । XNTANT (१०४) आयुर्वेदीय- भाषा। पमरा-स्त्री० गन्धद्रव्य-विशेष ।। शल्लुकी केचित् परावत-न० परुषक।। फालसा । परावेदी-स्त्री० बृहती ॥ कटाई । पयः (स् )-न० जल । दुग्ध ॥ पानी । दूध । पराश्रया-स्त्री० वृक्षोपरिजातलता-विशेष ॥ बाँदा, पयःकन्दा-स्त्री० क्षीरविदारी || दूध विदारी। वन्दा । पयःपेटी-स्त्री० नारिकेलफल ॥ नारियल । परिणामशूल-पु० शूलरोगविशेष । पयःफेनी-स्त्री० दुग्धफेनक्षुिप ॥ दूधफेनी । परिपाकिनी-स्त्री. निवृता || निसोथ । पयस्या-स्त्री० दुग्धिका । क्षीरकाकोली । स्वर्णक्षीरी- पारीपिष्टक-न० सीसक ॥ सीसा । अर्कपुष्पिका । कुडम्बुनीक्षुप। आमिक्षा ॥ दुद्धी। परिपुष्करा-स्त्री० गोडुम्बा ॥ गोडुम्बककडी !! क्षीरकाकाली । काञ्चनक्षीरी । क्षीरवृक्ष । अर्क- परिपेल-न. कैवर्तीमुस्तक ॥ केवटीमोया । पुष्पी । दधिकार्चिका । परिपलव-न." पयस्विनी-स्त्री० काकोली । क्षीरकाकोली । दुग्ध परिप्लुता-स्त्री० मदिरा । योनिरोग-विशेष॥ मछ। फेनी । क्षीरविदारी । जीवन्ती ॥ काकोली । मैथुनसमये वेदनावती योनि । श्रीरकाकोली। दूधफेना । दूधविदारी । जीवन्ती । परिवर्तिका-स्त्री० मेढ़जात क्षुद्ररोग-विशेष । पयोगत-पयोधन-पु० घनोपल ॥ मेघसम्भूतशिला, परिव्याध-पु० अम्बुबतेस । द्रुमोत्पल । जलवेत । औला । कनेरवृक्ष । रैया। फालसा । वन्दा। पयोधर-पु० नारिकेल । कशेरु ॥ नारियल। कशे-पीरबाजी-स्त्री० श्रावणी ॥ गोरखमुण्डी । रुकन्द । परिसुत, परिस्रता-स्त्री० मदिरा ॥ मद्य । पयोधिक-न. समुद्रफेन । समुद्रफेन । परुष-ज. नीलझिण्टी । परुषफल ॥ नीलकिटस. पयोर-पु. खदिर ।। खैरका पेड । पयोलता-स्त्री० क्षीरलता ॥ दूधविदारी । परूष-न० फलवृक्षभेद ॥ परुषा, फालसा । परपुष्टमहोत्सव-पु० आम्र आम । परूषक-ना परपुष्टा-स्त्री० वृक्षोपरिजातलता-विशेष ॥ बाँदा, |पर्कटि,। -स्त्री. प्लक्ष वृक्ष। पाखरका पेड। पर्कटी, परमा-स्त्री. चविका ॥ चव्य । पर्कटी-पु०" परमायुः(स)-न• आयुः जीवितकाल । पर्जनी -स्त्री० दारुहरिद्रा ॥ दारुहलदी । परमायुष-पु० असनवृक्ष ॥ विजयसार। पर्जन्या) परमेष्टिनी-स्त्री. ब्राह्मी । ब्राह्मयष्टि ।। ब्रह्मीघास । पर्ण-न० ताम्बूल ॥ पान । ब्रह्मनेटी। पर्ण-पु० पलाशवृक्ष ॥ ढाकवृक्ष । पररु-पु० केशराज ॥ कुकुरभाङ्गरा ! पर्णचारक-पु० चोरेकनाम गन्धद्रव्य ॥ भटे उर । परवासिका, स्त्री० ० वन्दा ॥ वादा, वन्दा । प्रणभेदनी-स्त्री० प्रियंगु ॥ फूलप्रियंगे । परवासिनी, वर्णमाचाल-पु० कर्मरङ्गवृक्ष ।। कमरखका पेड । परश-न. रत्न-विशेष ॥ पारसपत्थर । पर्णलता-स्त्री० नागवल्ली । पानकी वेल । परा-स्त्री. वन्ध्याकोटकी ।। वनककोडा । पर्णवल्ली-स्त्री० पलाशीलता ।। पलाशीलता । पराक्पुष्पी-स्त्री० अपामार्ग || चिरचिरा । पर्णसि-पु० पद्म । शाक ।। कमल । शाक । पराग-पु. पुष्परेणु । चन्दन ॥ पुष्पधूलि |चन्दन। पर्णास-पु० तुलसी ।। तुलसी । परात्प्रिय-पु० तृण-विशेष ।। उलपतृण । पर्णिनी-स्त्री० माषपर्णी ।। मघवन । परापर-न० परुषक || फालसा । पणिनीद्वय-न० मुद्गपर्णी, माषपर्णी ॥ मुगवन । परारु-पु० कारवेल्ल ॥ करेला । मषवन । - HMM औषधिकोष। (१०५) - . ॥ शीलता । --- मांस । वा पर्णीचतुष्टय-न० शालपर्णी, पृश्निपर्णी, मुद्गपर्णी। पलाण्डु-पु० यवनाप्रियमूलविशेष ।। प्याज । माषपर्णी ।। शालबन,पिठवन, मुगवन, मपवन, पलान-न० मांसादियुक्त सिद्धान्न ॥ पोलाव । पीर-न० वालक ।। सुगंधवाला । पलालदोहद-पु. आम्रवृक्ष ।। आमका पेड । पर्पट-पु० क्षुप-विशेर ।। पित्तपापडा,दवनपापडा। पलाश-पु० स्वनामख्यात वृक्ष ।।. ढाक, पलास- पर्पद्रुम-पु० कुम्भीपुष्पवृक्ष ॥ जलकुम्भी । वृक्ष। पती-स्त्री० सौराष्ट्रमृत्तिका । उत्तरदेशीयसुगन्धि- पलाशक-न० शठी । पलाशवृक्ष ।। छोटा कचूर । द्रव्य-विशेष|सोरठीकी मिट्टी, गोपीचन्दन।पपरी। ढाकका पेड। पद्मावती, पन।। पलाशपर्णी-स्त्री० अश्वगन्धा । असगन्ध । पर्यपादिका-स्त्री० कोलशिम्बी ॥ सुअरासेम । पलाशाख्य-पु० नाडी-हिंगु । नाडी हींग। पर्यणी-स्त्री० दारुहरिद्रा ॥ दारलदी। पलाशान्ता-स्त्री० गन्धपत्रा ॥ वनसटी । वनकचर। पर्व ( 1 )-न० ग्रन्थि ॥ गाँठ । पर्वक-न० ऊरुपर्व ।। पैरका घुटना । पलाशिका-त्री० भूमिकूष्माण्ड ॥ विदारीकन्द । पलाशी-[ ]-पु० क्षोरिको वृक्ष ॥ खिरनी वृक्ष। पर्वततृण-न० तृणभेद ॥ पर्वततृण । पलाशी-स्त्री० लाक्षा । लता-विशेष ॥ लाख । पला. पर्वतमोचा-स्त्री० गिरिकदल।। पहाडी केला । पर्वतवासिनी-स्त्री० अकाशमांती ॥ सूक्ष्म जटा-पलित-न० जराहेतुकेशादिशुक्लता । शैलेय ॥ वालों. का सफेद होजाना । भूरिछरीला । पर्वपुष्पी-स्त्री ० रामदूतीवृक्ष । नागदन्ती ॥ रामदूती पल्लव-पु० नवपत्रादियुक्त शाखाग्रपर्व ।। नवीन पत्ते- तुलसी । हाथीशुण्डवृक्ष । शाखाका अगला भाग, नवीनपत्ते । पर्वमूल!-स्त्री० श्वेता ।। कन्ने, केना च वेगभापा । पल्लवट्ठ-पु० अशोकपुष्पवृक्ष ॥ अशोकका पेड । पर्वयोनि-पु० इक्ष्वादि । इक्षुप्रभृति । पल्लिवाह-पु० तृण-विशेष । पल्लिवाहतृण । पर्वष्ट्र (ह)-पु० दाडिम || अनार । पव-न० गामय ॥ गोबर । पर्ववल्ली-स्त्री० मालादूर्वा ॥ मालादूव । पवनाल-पु० धान्य-विशेष ।। पुनेरा । पशुका-स्त्री० पाश्वास्थि । पांजर । पल-ज० कर्षचतुष्टय । तोलकचतुष्टय ॥आठ तोले । पवनेष्ट-पु० महानिम्ब । बकायननीम । पवनोम्बुज-न० परूष ।। फालसा । चार तोले । पवति-न. मारच ॥ मिरच । पलक्या-स्त्री. पालंकशाक || पालगका शाक । पलंकर-पु. पित्त ।। पित्त । पवित्र-न० कुश । तान । घृत । मधु ॥ कुशा । पलंकष-पु. कणगुग्गुलु ।। कणगूगल । तांबा । सहत । धी। पलंकषा-स्त्री० गोक्षुरक । 'रास्ना । गुग्गुलु।किंशुक । तिलवृक्ष । पुत्रजीवक्ष ॥ तिलवृक्ष जि. मुण्डितिका । लाक्षा । क्षुद्रगोक्षुरकामहाश्रावणी।। यापोतावृक्ष । गोखुरू । रायसन । गूगल । ढाकका वृक्ष । पवित्रक-पु. कुश । दमनक ।अश्वत्थ । उदुम्बर।। गोरखमुण्डी । लाख।छोटा गोखुरू । बडी गोरख कुशा । दवनावृक्ष । पीपलका पेड । गूलरका मुण्डी । वृक्ष । पलल-न० मांस । पंक । तिलचूर्ण ।। मांस । पवित्रधान्य-न० यव ।। जौ । कीचड । तिलकुट। पवित्रा-स्त्री० तुलसी । हरिद्रा । अश्वत्थीवृक्ष ॥ पललज्वर-पु. पित्त ।। पित्त । तुलसी । हलदी । पापलीवृक्ष । पललाशय-पु. गण्डरोग ॥ कोडा। पशुपल्वल-न० कैवर्तीमुस्तक ॥ केवटीमो था । पित्त || पित्त । पशुमेहनकारिका-स्त्री० चन्द्रशूर ॥ हालौं । लांग-पु० शिशुमारजन्तु । पशुमोहनिका-स्त्री० कटीलता ॥ कटीला । पवित्र-पु० पलाग्नि-पु० १४ १०६ ) आयुर्वेदीय- आमडा । ॥ " पेड। पशुहरीतकी-स्त्री० आम्रातकाल ॥ अम्बाडा, पाटल-न०पाटलीपुष्प । शतपुष्पी ॥ पाडलके फूल | गुलावके फूल। पह्निका-स्त्री० वारिपर्णी | जलकुम्भी। पाटल-पु० आशुधान्य ॥ आशुधान । पक्षघात, पक्षाघात-पु० स्वनामख्यात वातरोग-वि. पाटलद्रुम-पु. पुन्नागवृक्ष ॥ पुन्नागवृक्ष । शेष !! पक्षघातरोग । लकवा अर्थात् फालिश। पाटला-स्त्री. रक्तलोध्र । पुष्पवृक्ष-विशेष । पिच्छि- पक्षसुन्दर-पु० लोध्र ॥ लोध । लबीज-विशेष ॥ लाल लोध । पाडरका वृक्ष । पांशव-पु. लवण-विशेष ॥ रेहका नोन । वीदाना । पांशु-पु० पप्पट । क'रविशेष ।। पित्तपापडा। एक पाटलापुष्पसन्निभ-न० पद्मकाष्ठ ॥ पद्माख । प्रकारका कपूर । पाटील-पु० स्त्री० पाटलापुष्पवृक्ष ।। पाढरवृक्ष । पांशुकासीस-न० कातीस ।। कसीस । पाटली-त्री० कटभीवृक्ष । मुष्ककवृक्ष पाटला वृक्ष पांशुचत्वर-पु० घनोपल ।। ओला । कटभी । मोखा:। पाडल । पांशुज-न० न० पाशवलवण । यवक्षार।। रेहका नोन । पाटहिका-स्त्री० गुञ्जा ॥ धुंधुची । जवाखार । पाटी-स्त्री० वला ॥ खिरैटी पांशुपत्र-न० वास्तूक || बथुआशाक । पाट्य-न० पट्टशाक || पटुआशाक । पांशुरागिनी-स्त्री० महाभेदा || महामेदा । पाठा-स्त्री० लता विशेष ।। पाठ । पांशुल-पु० पूर्तिक ।। पूतिकरञ्ज । पाठिका-स्त्री." पांशुला-स्त्री० केतकी ॥ केतकीपुष्पवृक्ष । पाठी[न् ]-पु० चित्रकवृक्ष । चीतावृक्ष । पाककृष्णा-पु. कृष्णफलपाक । करौंदा । पाठीकुट-पु० " पाककृष्णाफल-पु. पाठीन-पु० गुग्गुलुद्रुम || गूगलका पाकज-न० काचलवण || कचियानोन । पाणि-पु० कुलिकवृक्ष । कर्षपरिमाग || काका. पाकफल-पु. कृष्णपाकफल ॥ करौंदा । दनीवृक्ष । दो तोले। पाकर श्लन-न० तेजपत्र ॥ तेजपात । पाणितल-न० कर्पपरिमाण ॥ दो तोले । पाकल-न० कुष्टौषधि ॥ कुठ। पाणिभुक्-[ ज्]-पु० उदुम्बरवृक्ष ॥ गूलरवृक्ष । पाकलि-स्त्री. वृक्ष-विशेष । पाणिमई-पु० करमई ॥ करादों । पाकली-स्त्री. कर्कटी || ककडी। पाणीतल-न० कर्षपरिमाण ॥ २ तोले परिमाण । पाकशुक्ला-स्त्री० खटि ।। खटिया माटी। पाण्डर-न० कुन्दपुष्प । गैरिक ॥ कुन्दके फूल । पाकारि-पु०श्वतकाञ्चनपुष्पवृक्ष ।। सफेदकचनारका वृक्ष । पाण्डर-पु० मरुवकवृक्ष || मरुआवृक्ष । पाक्य-न० विट्लवण । पांशुलवण ॥ विरियासच. पाण्डरपुष्पिका-स्त्री० शीतली ॥ शीतलावृक्ष । रनोन । रेहगमानोन। पाण्डु-पु० स्वनामख्यात रोग । पाण्डुरफलाक्षुप । पाक्य-पु० यवाक्षार || जवाखार, सारा धंगभाषा । पटोल || पाण्डुरोग । पाण्डुफली । परवल । पाचक-न० पञ्चविध पित्तान्तर्गत पित्त-विशेष । पाण्डुकण्टक-पु. अपामार्ग ॥ चिरचिरा । पाचन-न० दोषपाचक वाथौषध ॥ पाचन । पाण्डुतरु-पु० धववृक्ष ॥ धोवृक्ष । पाचन--पु० रक्तैरण्ड । अम्लरस ॥ लाल अरंड । पाण्डुनाग-पु० पुन्नागवृक्ष ।। पुन्नागवृक्ष । खट्टा रस। |पाण्डुपत्री-स्त्री० रेणुका । रेणुका । पाचनक--पु० टंकण || सुहागा । पाण्डुपत्नी-स्त्री." पाण्डुफल-पु० पटोल ।। परवल । पाची-स्त्री० लता-विशेष ॥ पञ्चेलता, पाचीलता । पाण्डुफला-स्त्री० चिर्भटा ॥ गुरुभाहुं । पाटद-पु.कार्पास ॥ कपास । पाण्डुमृत-स्त्री० खटी ।। खडिया। गेरू। पाचनी--ब्री० हरीतकी ॥ हरड़।
औषधिकोष । (१०७) पाण्डुमृत्तिका-स्त्री." पापरोग-पु० मसूरिका ।। ममूरिकारोग । पाण्डुर-न श्वित्ररोग ॥ श्वित्ररोग । पापशमनी-त्री० शमीवृक्ष ।। छौंकरावृक्ष । पाण्डर-पु० धववृक्ष । धवलयावनाल । कामला पाप (न्)-न० विचिकारोग ॥ एक प्रकारकी रोग ।। धोवृक्ष । सफेद जुआर । कामलारोग । खुजली । पाण्डुरङ्ग-पु० फलशाक-विशेष || पाण्डुरङ्ग-सं । पामध्न-पु० गन्धक || गन्धक । पाण्डुरदुम-पुः कुटजवृक्ष ॥ कुडावृक्ष । पामध्नी-स्त्री० कठुका ॥ कुटको । पाण्डुरफला-त्री० क्षुद्रक्षुर विशेष || पाण्डफली । पामरोद्धारा-स्त्री० गुडूची । गिलोय । पाण्डुरा-स्त्री ० माषपणी || मषवन । पामा (न् )-पु० कच्छुरोग । पाण्डुराग-पु० दमनकवृक्ष ॥ दवनावृक्ष । पामारि-पु० गन्धक || गन्धक । पाण्डरेक्षु-पु० श्वेतक्षु ॥ सफेदईख । पायस-पु० न. श्रीवास । परमान्न ॥ सरलका पाण्डुलामशा-स्त्री० माषपणी ॥ मपवन । गोंद । जर। पाण्डुलोमा-स्त्री. पायु-पु० मलद्वार || मलका द्वार । पाण्डुशर्करा-स्त्री रोग विशेष ॥ मूत्ररोधरोगभेद । पार-पु. पारद ॥ पारा । पाताल-पु० औषधपाकार्थ यन्त्र विशेष ॥ पाता- पारक् (ज)-पु० सुवर्ण ।। सोना । लयन्त्र। पारत-पु० परद ।। पारा । पातालगरुड-पुर पातालगरुडीलता ॥ छिराहटा । पारद-पु. स्वनामख्यात शुभ्रर्ण धातु-विशेष|पारा। पातालगरुडी-स्त्री" पारावतपदी-स्त्री. ज्योतिष्मती । काकजङ्घा ।। पातालनृपति-पु० ० सीसक ॥ सीसा। मालकांगुनी । मसी। पात्र-ज० आढक || आठसेर । पारावतावि-पु. पाथोज-न पद्म || कमल | पारावती-बी० लवनीफल ! लोनाफल । पाद-पु० चतुर्थभाग ॥ चौथा भाग । पारिजात-पु० पारिभद्रवृक्ष || फरहद । पादगाण्डिर-पु० श्लीपदरोग ॥ श्लीपदरोग । पारिजातक-पु०" पादपरहा-स्त्री० वन्दाक || वांदा । पारिभद्र-पु० पारिजात । निम्बवृक्ष । देवदारु । पादरोहण-पु० वटवृक्ष ॥ वडका पेड । सरलवृक्ष ॥ फरहद । नीमकापड । देवदार । पादवल्मीक-पु० श्लीपदरोग ।। श्लीपदरोग। धूपसरल। पादस्फोट-पु. एकादशकुष्ठान्तर्गत तृतीय कुष्ठ ॥ पारिभद्रक-न० कुष्ठौषधि ।। कूठ । विपादिका । पारिभद्रक-न० देवदारुवृक्ष । निम्बवृक्ष । पारि. पानस--न० पनसभव मद्य ॥ कटहरसे बनाई हुई जातवृक्ष।।देवदारका पेड। नीमकापड। फरहदवुक्ष। मदिरा । पारिभाव्य-न० कुष्टौषध ॥ कूठ । पानीय-न० पानाई द्रव्य-विशेष ।। पन्ना, सरबत । पारिश-पु० वृक्ष विशेष ॥ पारसपापल । पानीयपृष्टज-पु० कुम्भी ।। जलकुम्भी । पारुष्य-न० अगुरु ।। अगर । पानीयफल-न० मखान्न ।। मखाना । पार्थ-पु० अर्जुनवृक्ष ॥ कोहवृक्ष । पानीयमूलक-न० सोमराजी ॥ वाबची । पार्थिव-न. तगरपुष्प ॥ तगरपुष्प । पामीयामलक-न० प्राचीनामलक ॥ पानीआमला। पार्वत-पु० महानिम्ब ॥ वकायननीम । पानीयालु-पु० कन्द-विशेष ॥ पानीआलु । पार्वती-त्री० सौराष्ट्रमृत्तिका । क्षुद्रपाषाणभेद ॥ पानीयाश्ना-स्त्री. बल्वजा ॥ तृणभेद । धातकी । सैंहली । अतसी ॥ गोपीचन्दन । पापन्न--पु० तिल ॥ तिल । छोटा पाखानभेद । धायके फूल । सिंहली । पापचेलिका-स्त्री० पाठा ॥ पाढ । पपिल । अलसी। पापचेली-स्त्री० पार्वतय-न० सौवाराञ्जन ॥ सफेद शुम्मी । .
(१०८) आयुर्वेदीय- पार्वतय-पु० मर्यावर्तवृक्ष ॥ हुरहुरवृक्ष । पिकराग-पु. पावीपप्पल-न. हरीतकी-विशेष ॥ गजहड । पिकवल्लभ-पु." पाश्वशुल-पु० न० शूलरोग-विशेष ॥ पिकाक्ष-पु० काकिलाक्षक्षुप ॥ तालमखाना । पास्थि-न० पञ्जरास्थि || पञ्जरा । पिकक्षणा-त्री." पाणि-पु० पादग्रन्थ्यधर ।। एडी। पिङ्ग-न० हारेताल ॥ हरताल । पालक-पु० चित्रवृक्ष | चीतावृक्ष । पिङ्गल-न० पित्तल ॥ पीतल । पालङ्क-पु० शाकभेद ॥ पालगका शाक । पिङ्गल-पु. स्थावरविषभेद । पालङ्की-त्री० कुन्दुरु । पालंक्यका शाक ||कन्दुरू। पिंगललोह-न० पित्तल ॥ पीतल । सुगन्धिद्रव्य । पालगका शाक । पिङ्गला-त्री० शिंशपावृक्ष । राजति ॥ सासोंका- पालंक्य-न० शाक-विशेष ॥ पालगका शाक । वृक्ष । पीतलभेद। पालंकया-स्त्री० कुन्दुरुः पालंकशाक ।। कुन्दुरूसुग- पिङ्गसार-पु. हरिताल ॥ हरताल । न्धिद्रव्य । पालगका शाक । पिंगा-स्त्री० गोरोचना ! हिंगु । हरिद्रा । वंशरो. पालाश-न० तमालपत्र ॥ तेजपात । चना । गोलोचन । हीङ्ग । हलदी वंशलोचन। पालिन्द-पु० कुन्दुरु ॥ कुन्दुरूसुगन्धिद्रव्य । पिङ्गाशी-स्त्री० नीलिका ॥ नीलका पेंड । पालिन्दा-स्त्री० श्यामालता । कृष्णत्रिवृता । त्रिवृता। पिंगी-त्री० शमीवृक्ष ॥ छोंकरवृक्ष । सरिवन, सालसा । काला निसोथ । निमोथ । पिचु-पु० कापीसतूल । कुष्ठभेद । कर्षपरिमाण ॥ पालिन्धी-त्री० कृष्णानिवृता || काला निसोथ । रुई । कोढभेद । दो तोले परिमाण । पावक-पु० चित्रक । भल्लातक । विडङ्ग । रक्त- पिचुक-पु० मदनवृक्ष ॥ मैनफलवृक्ष । चित्रक । अग्निमन्थ वृक्ष । कुसुम्भपुष्पवृक्ष ॥ पिचुमन्द-पु० निम्बवृक्ष ॥ नीमका पेड । चीतावृक्ष । मिलोवका वृक्ष । बायविडङ्ग । पिचुमई-पु० लालचीतावृक्ष । अरणी । कसूमका पेड पिचुल-पु० झाबुक । हिज्जल । झाऊवृक्ष । समु. पावकारणि-पु० अग्निमन्थवृक्ष ॥ अरणी । द्रफल । पावन-न० रुद्राक्ष । कुष्ठौषध । चित्रक || रुद्राक्ष। पिञ्चट-न० सीसक । रंग ॥ सीसा। रांग । कूठ । चीता। पिच्चट-पु० नेत्ररोग विशेष । पावन-पु० तिलक ।। पतिभृङ्गराज ॥ शिलारस, पिच्छलदला-स्त्री० बदरीवृक्ष ।। वरीका पेड । पीला भङ्गरा। पिच्छा-स्त्री० शाल्मलिवेष्ट ॥ पूग । शिशपाक्ष । पावनध्वनि-पु० शख ॥ शख । भक्तसम्भूत मण्ड' ॥ मोचरस । सुपारी । पावनी-स्त्री० हरीतकी तुलसी । हरड । तुलसी। सांसोंका पेड । माडसहित भात । पाशुपत-पु० अगस्त्यपुष्पवृक्ष ॥ हथियावृक्ष । पिच्छतिका-स्त्री० शिंशपा ॥ सीसोंका पेड । पाश्चात्त्याकरसम्भव-न० गडलवण॥साम्भारनौन। पिच्छल-पु० श्लष्भान्तकवृक्ष ॥ सिसोडावृक्ष पाषाणगईभ-पु. क्षुद्ररोगान्तर्गतरोग विशेष ॥ पिच्छिलक-पु० धन्वनवृक्ष ॥ धामिनवृक्ष । हनुसन्धिजरोग। पिछिलच्छदा-त्री० उपादकी ॥ पाइका शाक । पाषाणजतु-न० शिलाजतु ॥ शिलाजीत । पिच्छिलत्वक् (च)-पु० नागरंगवृक्ष । धन्वनवृक्ष। पाषाणभेदन-पुं० वृक्ष-विशेष ॥ पाखानभेद । नारंगीवृक्ष । धामिनवृक्ष । पाषणभेदी (न् -पु० वृक्ष-विशेष ॥ पाखानभेद। पिच्छिलसार-पु० शाल्मलीवेष्ट ॥ मोचरस । पाहात-पु० ब्रह्मदारुवृक्ष ॥ सहतूतका पेड । पिच्छिला-स्त्री० पोतिका । शिशपा । शाल्मली । पिकाप्रिया-स्त्री० महाजम्बू ॥ बड़ी जामुन । कोकिलाक्ष । वृश्चिकालीक्षुप । शूलीतृण- अगरु- पिकबन्धु-पु० आम्रवृक्ष ॥ आमका पेड । अतसी। कच्ची ॥ पोईका शाक। सीसोंका पेड। PEN औषधिकोष। (१०९) सेमलका पेड । तालमखाना ! वृश्चिकाली ।शूली- पिण्डात-न० सिहक । शिलारस । घास । अगर । अलसी । अरुइ । पिण्डायस-न० तक्षिणायस || इसपात । पिन-पु० कर्पूरभेद ।। एक प्रकारका कपूर । पिण्डार-न० फलशाक-विशेष ॥ पिण्डार । पिञ्जट-पु० नेत्रमल ।। आँखोंका मैल, कीचड । पिण्डालु-पु० कन्दगुडूची ॥ आलु-विशेष ।। पिञ्जर-प० हारताल । स्वर्ण । नागकेशर ।। हर, पेडालू । ताल । सोना । नागकेशर । पिण्डालुक-न." पिञ्जरक-न. हरिताल || हरताल । पिण्डाह्वा-स्त्री. नाडीहिङ्ग। नाडाहीङ्ग । पिञ्जर--न० कुशपत्र । हरिताल | कुशाके पत्ते । पिण्डिला-स्त्री० गोडुम्बा ॥ गोडुभ्य, ककडी । हरताल । पिण्डी-स्त्री० पिण्डीतगर । अलाबु । खजूरी विशेष।। पिता-स्त्री० तूला । हरिद्रा ।। तूल । हलदी । कोकण देशीय तगर । कहु । पिण्डखजूर । पिजान-ज० स्वण || सोना । पिण्डीतक-पु. मदनवृक्ष । तगर । फणिन्जक वृक्ष पिंजूष-पु० कर्णमल ॥ कानकामैल । विशेष ।। मैनफलवृक्ष । तगर ।तुलसीभेद पिण्डी. पिजेट-पु. नेत्रमल ॥ नेत्रकामैल । तकवृक्ष । पिटकोकी-स्त्री० इन्द्रवारुणी ॥ इन्द्रायण । पिण्डीतगर-पु० तगर-विशेष ॥ कोकण देशीय पिठर-न० मुस्तक || मोथा। तगर। पिडका-स्त्री. स्फोटक विशेष ।। पिण्डतिगरक-पु० तगर ॥ तगर । पिण्ड-पु० बोल । सिहक । ऑड्रपुष्प । मदनवृक्ष॥ पिण्डीतरु-पु० महापिण्डीतरु ।। पेडिरावृक्ष । बोल । शिलारस । ओड़हुल । मैनफलका वृक्ष । पिण्डीपुष्प-पु० अशोकवृक्ष ॥ अशोकवृक्ष । पिण्डक-न० पिण्डमूलक । बोल ॥ पिण्डमूल, पिण्डीर-पु० दाडिमवृक्ष ॥ हिण्डीर । अनारका गोलमूली । बोल । पेड । समुद्रफेन । पिण्डक-पु. सिकनाम गन्धद्रव्य । पिण्डाल ॥ पिण्या-स्त्री. ज्योतिष्मती ।। मालकांगुनी । शिलारस । पिडालु। पिण्याक-पु० न० तिलखलि । सर्वपखलि । हिंगु । पिण्डकन्द-पु० पिण्डालु ॥ पिडालु । शिलाजतु । सिहक । कुंकुम ॥ तिलकी खाल । पिण्डकर्कटी-स्त्री. मधुकूष्माण्डी ।। विलायती पेठा। सौंकोखल। हीङ्ग । शिलाजीत । शिलारस । पिण्डखजूर-पु० स्वनामख्यात खजूर ।। पिण्डखजूर। पिण्डखजूरी-स्त्री० ॥ पित्तप्रिय-पु. भृङ्गराज ॥ भाङ्गरा । पिण्डगोस-पु० गन्धरस || फूलसत्व वङ्गभाषा । पितृभोजन-पु० माष ।। अरद । पिण्डतैलक-पु० तुरुष्क | शिलारस । पित्त-न० शरीरस्थधातु-विशेष ॥ पित्त । पिण्डयुष्प-न० अशोकपुष्प । जवापुष्प । तगर- पित्तघ्नी-स्त्री० गुडूची । गिलोय । पुष्प । पन्नपुष्प ॥ अशोकपुष्प । मोडहुलपुर । पित्तद्रावी (न्)-पु० मधुरजम्बीर | मीठा नीबू। तगरपुष्प । कमल। पिचरक्त-न० रक्तापित्तरोग ।। रक्तापत्त । पिण्डपुप्पक-पु. वास्तूक ॥ वथुआ। पित्तल-न० धातु विशेष । भूर्जपत्र ॥ पीतल। भोज- पिण्डफल-न० तुम्बी || कद् । पत्र । पिण्डफला-स्त्री० कटुतुम्बी ॥ कड़वी तोम्बी। पित्तला-स्त्री. तोयपिप्पल । जलपीपल । पिण्डमुस्ता-स्त्री० नागरमुस्ता: ॥ नागरमोथा । पित्तारि-पु० पर्यट । लाक्षा । बर्बरक ॥ पित्तपाप- पिण्डमूल-न० गजर ।। गाजर, सलगम । डा । लाख । चन्दनभेद । पिण्डबीजक-पु० कर्णिकारवृक्ष ॥ कणेरवृक्ष । पित्र्य-न० मधु ।। सहत । पिण्डा-स्त्री. पिण्डायस । कस्तूरीभेद । वंशपत्री ।। पित्र्य-पु० माष ॥ ऊडद । इसंपात । एकप्रकाकी कस्तूरी । वंशपत्री। पिन्यास-न० हिंगु ॥ हङ्गि । केशर ।
(११०) आयुर्वेदीय- " पिप्पल-पु० अश्वत्थवृक्ष ।। पीपलका पेड । हरताल | केशर | अगर । पद्माख सोनामाखी। पिप्पलक-न. स्तनवृन्त ॥ स्तनमुख । तून । विजयसार । शोनापाठा । हलदुआवृक्ष । पिप्पलि-श्री पिप्पली ॥ पीपल किंकिरात पुष्पवृक्ष । पतिल । पीलाचन्दन । पिप्पली-स्त्री० पीतकदली-स्त्री० स्वर्णकद ली ।। सुवर्णकेला । पिप्पलीका-स्त्री. अश्वत्थीवृक्ष | पीपली वृक्ष । पोतकद्रुम-पु० हरिद्रुवृक्ष ॥ हलदुआवृक्ष । पिप्पलीमूल-न० कणामूल || पीपरामूल । पीतकन्द-न. गर्जर ।। गाजर । पिप्पिका-स्त्री० दन्तमल ॥ दाँतोंका भेल । पीतकरवीरक-पु० पतिवर्ण करवीरपुष्पवृक्ष । पियाल-पु० स्वनामख्यात वृक्ष ।। इसके बीजको पाली कनेर । चिरोंजी कहते हैं। पीतका-स्त्री० झिण्टी । हरिद्रा ॥ कटसरैया हलदी। पिलुक-पु० पालुवृक्ष । पीलुवृक्ष । पीतकावेर-न० कुंकुम । पित्तल ।। केशर । पीपल। पिलुपी-स्त्री० मोरटलता ॥ मोरटा । पतिकाष्ठ-न० पीत चन्दन || कलम्बक, पीला चन्दन। पिशाचक्र-पु० शाखोटवृक्ष || सहोरावृक्ष । पीतकीला-स्त्री० आवर्तकीलता ॥ भगवतवल्ली को.. पिशाचवृक्ष-पु० कणदेश की भाषा । पिशाची-स्त्री० गन्धमांसी ॥ जटामांसीभेद । पतिकुरुण्ट-पु० पीतझिण्टी ॥ पीली कटसरैया । पिशित-न० मांस || मांस । पीतघोषा-स्त्री० पीतपुष्पधोषकलता ॥ तोरईभेद । पिशिता-स्त्री० जटामांसी । बालछड, जटामांसी। पीतचन्दन-न० द्राविडदेशीय पीतवर्णचन्दन पीला पिशी-स्त्री." चन्दन X कलम्बक । पिशुन-न० कुंकुम ॥ केशर । पीतचम्पक-पु. पतिवणं चम्पकपुष्पवृक्ष ॥ पी. ली चम्पा । पिशुना-स्त्री० स्पृक्का ॥ असवरग । पिष्ट-न० सीसक । पिष्टक ॥ सीसा । एक प्रकारकी पीततण्डुल-पु० कंगुनीधान्य ॥ कङ्गनीधान । पूरी। पीततण्डुला-स्त्री० श्वविकावृक्ष ॥ वृहतीभेद । पीततैला-स्त्री. ज्योतिष्मतीलता। महाज्योतिष्मतो।। पिष्टक-पु० खाद्य-विशेष । नेत्ररोग-विशेष ॥ एक प्रकारकी पूरी। नेत्ररोगभेद । मालकांगुनी । बड़ी मालकांगुनी । पिष्टसौरभ-न पतिदारु-न० देवदारु । सरल । हरिद्रु ॥ देवदारु- -न० चन्दन || चन्दन । पिष्टालिका-स्त्री." कापेड़ । धूपसरल । हलदुआवृक्ष । पिष्टालिका-स्त्री० वृक्ष-विशेष । पीतद्रु-पु० सरलवृक्ष । दारुहरिद्रा ॥ धूपसरल । दारहलदी। पिष्टात-पु० पटवासचूर्ण ॥ अबरिगुलाल । पिष्टिक-न० तण्डुलोद्भव तवक्षीर ॥ चावलोंसे बनाई |पीतन-न० कुंकुम । हरिताल । सरलद्रु ॥ केशर । हुई तबाखीर । हरताल । धूपसरल । देवदारु । पीतन-पु० आम्रातक । प्लक्षवृक्ष ॥ अम्बाड़ा । पिष्टोडी-स्त्री० श्वेताम्ली ।। पिष्टोडीवृक्ष । पाखरवृक्ष। पीडा-स्त्री रोग । सरल ॥ रोग । धूमसरल । पतिनक-पु० आम्रातक । अम्बाडा । पीत-न० हरिताल || हरताल । पीतपर्णी-स्त्री० श्वित्रन्नी ॥ वृश्चिकाली । पीत-पु० कुसुम्भपुष्पवृक्ष । अङ्कोटवृक्ष । शाखोट- पतिपुष्प-न० आहुल्यवृक्ष । कूष्माण्ड ॥ तरवट वृक्ष ।सरलद्रु ॥ कसमके फूलवृक्ष । ढेरावृक्ष ।स. काश्मीरदेशीयभाषा । पेठा । होरावृक्ष । धूपसरल। पीतपुष्प-पु० कर्णिकारवृक्ष । कोषातकाभेद । पतिक-न० हरिताल । कंकुम । अगरु । पद्मक । पीतपुष्पझिण्टक्षुिप । चम्पकपुष्पवृक्ष ॥ कणेर. माक्षिक । नन्दीवृक्ष । पतिशालवृक्ष । श्योनाक वृक्ष । तोरई । पीले फूलकी कटसरैया। चम्पायुप- प्रभेद । हरिद्रु। किकिरात । रीति । कालीयक।। वृक्ष ।
औषधिकोष । (१६१) ॥ शतावर । मोम । पीतपुप्पा-त्री० इन्द्रवारुणी । झिञ्झिरिष्टाक्षुप । सुवर्णकदली ॥ हलदी । दारहलदी। बडीमालको पातवला । आढकी । इन्द्रायण।झिझिरीठा(सह गुनी । भूरे रङ्गका सीसोका वृक्ष । फूलप्रियंगु । देवी । अजहर । गौलोचन । अतीस । पीला केला । पतिपुष्पी-स्त्री. शंखपुष्पी । सहदेवी । महाकोषा- पाताङ्ग-पु० श्योनाकप्रभेद || शोनापाठा । तकी । त्रपुषी ॥ शंखाहूली । सहदेई । बड़ी | पीतिका-स्त्री. हरिद्रा । दारुहरिद्रा । स्वर्णयूथी ॥ तोरई । खीरा । हलदी । दारहलदी । सुनहरीजुही । पतिफल-पु० शाखोटवृक्ष । कारवृक्ष ॥ सहो-पीनस-पु० मासिकारोग-विशेष ॥ पानसरोग । रावृक्ष । कमरख । पीनसा-स्त्री० कर्कटी || ककडी । पतिफलक-पु० शाखोटवृक्ष ।। सहारावृक्ष । पीपरि-पु० हस्वप्लक्ष ॥ छोटा पाखर । पीतवालुका-स्त्री० हरिद्रा । हलदी । पीयूष-न० अमृत। दुग्ध ।। अमृत । दूध । पीतभृङ्गराज--पु. पीतवर्णभृङ्गराज ॥ पाला पीलु-पु. स्वनामख्यात फलवृक्ष-विशेष ॥पालुवृक्षा भङ्गरा। पीलुनी-स्त्री मूर्वा || चुरनहार | पीतमाक्षिक-न० माक्षिक ॥ सोनामाखी । पीलुपत्र-पु० मोरटलता ॥ क्षीरमोरट । पतिमुद्ग-पु० मुद्ग-विशेष ॥ पालीमूग । पालुपी-स्त्री० मूर्वा । बिम्बिका | चुरनहार । पं.तकमूलक-न० गर्जर ।। गाजर । कन्दूरी। पीतयूथी-स्त्री० स्वर्णयूथी । मुनहरी जुही । पीवरा-स्त्री० अश्वगन्धा । शतावरी ॥ असगन्ध । पीतराग-न० किञ्जल्क । सिक्थक ॥ फूलका जीरा. पीवरी-स्त्री० शतमूली । शालपर्णी ॥ शतावर । पीतरोहिणी-स्त्री० काश्मरी ॥ गम्भारी, कुम्भेर । सालवन । पीतफल-न-पित्तल ॥ पतिल । पुंसवन-न० दुग्ध ॥ दूध । पीतलोह-न० पित्तलभेद ॥ पीतलभेद । पीतबीजा-स्त्री० मेथिका || मेथी। पुंस्त्व-न • शुक्र ॥ तेज वङ्गभाषा । पुंस्त्वावग्रह-पु० भूतृण ॥ शरबाण । पीतवृक्ष-पु० श्योनाकवृक्षभेद । सरलवृक्ष ॥ शोना- पुक्कसी स्त्री० नीला ।। नीलका पेड । पाठा । धूपसरल। पुंगव-पु० औषधभेद । ऋवभौषध ॥ ऋषभ- पीतशाल-पु. असनेवृक्ष ।। विजयसार । पीतसार-न० पीतवर्णचन्दन । हरिचन्दन ॥ कल. म्बक । हरिचन्दन । पुंच्छदा-स्त्री. लक्ष्मणकन्द॥ लक्ष्मणाकन्द । पीतसार-पु० मलयज । अंकोटवृक्ष । तुरुष्क । पुच्छी-(न् ) पु० अर्कवृक्ष ।। आकका पेड । बीजक । चन्दन । टेरावृक्ष । शिलारस । विज- पुट-न० जातीफल । औषधपाकपात्र ॥ जायफल । पुट-गुट । इत्यादि। यसार । पीतसारक-पु० निम्बवृक्ष । अंकोटवृक्ष ॥ नीमका पुटक-न० पद्म ॥ कमल । पेड । टेरावृक्ष । पुटकन्द-पु० कोलकन्द ॥ सूकरकन्द । पीतसारि-न० स्रोतोञ्जन || काला शुमा । पुटकिनी-स्त्री० पद्मिनी ॥ कमलिनी । पीतसाल, पुटपाक-पु०.औषधपाक-विशेष । पुटालु-पु० कोलकन्द ॥ पुटालु काश्मीर देशीय हिन्दी भाषा । पेयसासल वङ्गभाषा । भाषा। पीता-स्त्री० हरिद्रा। दामहरिद्रा। महाज्योतिष्मती । पुटिका-स्त्री० एला || इलायची । कपिलशिंशपा । प्रियंगु । गोरोचना। अतिविषा । पुटोदक-पु. नारिकेल | नारियल । औषधी । । पातसालक, } -पु० पीतशालवृक्ष ॥ विजयासार (११२) आयुर्वेदीय- ) कमल । पुण्डरी (न् ) पु० शालपणीपत्रतुल्यपत्रावशिष्टवृक्ष. पुन्नाट-पुनाड-पु० चक्रमई ॥ चक्रवड़, पमार । विशेष ।। पुण्डरिया । सुप्फुस-पु० वक्षोभ्यन्तररथ कोष्ठ-विशेष।। फुफ्फुस्- पुण्डरीक-न० शुक्लपद्म । पनमात्र ।। सफ़ेदकमल । फेफड़ा। पुर-न० नागरमुस्ता ॥ नागरमोथा । पुण्डरीक-पु० सहकार । दमनकवृक्ष । कुष्ठरोगे-पुर-पु० गुग्गुलु । पतिझिण्टी ।। गूगल । पीले फूल. विशेष ।। एक प्रकारके आम । दवनावृक्ष । एक की कढमरया। प्रकारका कोढ । पुरट-न० सुवर्ण ॥ सोना । पुण्डरीकाक्ष-न० पुण्डर्य || पुण्डरिया । पुरन्दर-न०.चविक ॥ चव्य । पुण्डयिक-न० स्थलपद्म । प्रपौण्डरीक ।। स्थल- पुरश्छद-पु० तृण-विशेष ॥ कमल । पुण्डरिया । पुरा-स्त्री० सुगन्धिद्रव्य-विशेष ॥ कपूरकचरी । पुण्डर्थ-न० प्रपौण्डरीक ।। पुण्डरीया । पुरासिनी-स्त्री० सहदेवी लता ॥ सहदेई । पुण्ड-पु० इक्षुभेद । अतिमुक्तक। पुण्डरीक । हस्व- पुरीमोह-पु० धुस्तूर ॥ धतरा । प्लक्ष । तिलकवृक्ष ।। एक प्रकारकी ईख । पुरीष-न० विष्ठाः। विष्ठा, गू । अतिमुक्तक पुष्पवृक्ष । पुण्डरकि । छोटापाखर । पुरीषम-पु० माष ॥ उडद । तिलकपुष्पवृक्ष । पुरुष-पु० पुन्नागवृक्ष । स्वर्ण || पुन्नागवृक्ष । सोना। पुण्ड्रक-पु० माधवीलता । तिलकवृक्ष । इक्षुभेद ॥ पुरुषदन्तिका-स्त्री० मेदा ॥ भेदा । साधवीलता । तिलकपुष्प । एक प्रकारकी ईख। पुरोद्भवा-स्त्री० महामेदा ॥ महामेदा। पुण्यगन्ध-पु० चम्पक || चम्पावृक्ष । पुलक-न० ककुष्ठ । पु० हरिताल ॥ मुरदासिङ्ग । पुण्यतृण-पु० श्वेतकुश ।। सफेदकुशा । हरताला पुण्या-स्त्री० तुलसी ।। तुलसी । पुलकी (न् )-पु० धाराकदम्बवृक्ष ॥ धाराकदम पुत्रक-पु० वृक्ष-विशेष ।। पुत्रक । वृक्ष । पुत्रकन्दा-स्त्री० लक्ष्मणाकन्द ।। लक्ष्मणाकन्द । पुषा-स्त्री० लाङ्गीलकी वृक्ष । करिहारीवृक्ष । पुत्रजीव-पु. वृक्ष-विशेष ।। जियापाता । पुष्कर-न० पद्म । कुष्ठौषध || कमल । कूठ । पुत्रजीवक-पु." पुष्कर-पु० रोग-विशेष ॥ रोग विशेष । पुत्रदा-स्त्री० वन्ध्याकर्कोटकी।लक्ष्मणाकन्द। गर्भदा- पुष्करकार्णका, पुष्करनाडी-स्त्री० स्थलपद्मिनी ।। त्रीक्षुप ।। वांझखखसा । लक्ष्मणाकन्द । गर्भदात्री। स्थलकमल-स्थलपन,वेटतामर देशान्तरीय भाषा। पुत्रदात्री-स्त्री० मालवप्रसिद्धलता-विशेष ॥ पुत्र-पुष्करमूल-न० पुष्कर देशीय औषधि-विशेष ।। दात्री। पोहकरमूल । पुत्रप्रदा-स्त्री० क्षविका ।। बृहतीभेद । पुष्करमूलक-न." पुत्रमद्रा-स्त्री० बृहज्जविन्ती ॥ बड़ी जीवन्ती । पुष्करशिफा-स्त्री. पुत्रशङ्गी-स्त्री० अजशृङ्गी || मेढाशिङ्गी । पुष्करबीज-न० पद्मवाज || कमलगट्टा । पुत्रश्रेणी-स्त्री० मूषिकपर्णी ॥ मूसाकानी । पुष्कराह्वय-न० पुष्करमल ॥ पोहकरमूल । पुत्री-स्त्री० वृक्ष-विशेष । पुष्करिणी-स्त्री० स्थलपद्मिनी । पुष्करमूल || स्थल. पुनर्नवा-स्त्री० स्वनामख्यातशाक-विशेष ॥ विष पद्म । पोहकरमूल। पुष्टि-स्त्री० अश्वगन्धा ॥ असगन्ध । पुनर्नव-पु० रक्तपुनर्नवा ॥ गदहपूर्ना, सौंठ । पुष्टिका-स्त्री० जलशुक्ति ।। जलकी सीप । पुन्नाग-पु. स्वनामख्यातबृहत्पुष्पवृक्ष-विशेष| पुन्ना- पुष्टिदा-स्त्री० अश्वगन्धा ॥ असगन्ध । गवृक्ष । पुष्प-न० स्त्रीरजः । नेत्ररोग-विशेष । कुसुम ।ना- . खपरा। , औषधिकोष। (११३) PRESH नागकेशर । . कांसी। कासस । केवरावृक्ष । " " कुमडा, पेठा । कानरोग। गकेशर ॥ स्त्रीका रज । नेत्ररोगभेद । फूल । पूतद्र-पु० पलाशवृक्ष ।। ढाककावृक्ष । पूतधान्य-न. तिल॥ तिले । पुष्पक-न० नेत्ररोग-विशेष । साञ्जन । लोह । पूतना-स्त्री० हरीतकी । हरीतकीभेद । गन्धमांसी । काँस्य ॥ कासीस । नेत्ररोगभेद । रसोत लोहा । बालरोग--विशेष ।। हरड, हरडभेद, पूतनाहड । जटामांसभिद । बालग्रहभेद । पुष्पकासीस-न० पीतवर्णका सीस ॥ पुष्पकसीस । पूतफल-पु० पनस ।। कटहर । पुष्पचामर-पु० दमनकवृक्ष । केतकवृक्ष ॥ दना। पूता-स्त्री० दूर्वा । दूव । पूति-न० रोहिषतृण ।। रोहिषसोधिया । पुष्पपथ-पु० योनि ।। भग । पूतिक-पु० पूतिकरञ्ज :॥ पूतिकरञ्ज, दुर्गंधकरञ्जन पुष्पप्रियक-पु० पीतशालवृक्ष ॥ विजयसार । कांटाकरज। पुष्पफल-पु० कपित्थ । कूष्माण्ड || कैथ । कोहडा | पूतिकरज-पु० पूतिकररु-पु० पुष्परक्त-पु० सूर्यमणिपुष्पवृक्ष । सूर्यमणिवृक्ष । पूतिकर्ण-पु० कर्णरोग-विशेष ! एक प्रकारका पुष्परस-पृ० मधु ॥ सहत । पूर्तिकर्णक-पु० पुष्परसाह्वय-न." पुष्पराज, पूर्तिका-स्त्री० उपोद की । मधुमक्षिका-विशेष ॥ पु० पीतवर्णमणि-विशेष ॥ पुखराज । पुष्पराग, पोईका शाक । एक प्रकारको सहतकी मक्खी । पूतिकाष्ठ-न० देवदारु । सरलवृक्ष ॥ देवदारु । पुष्परोचन-पु० नागकेशर ॥ नागकेशर । सरलका पेड। पुष्पशून्य-पु. उदुम्बर ॥ गूलर । पूतिकाष्ठक-न० सरलवृक्ष ।। धूपनरल । पुष्पश्रेणी-स्त्री० इन्दुकर्णी ॥ मूसाकानी । पूतिगन्ध-न० रङ्ग ॥ राङ्ग । पुप्पसौरभा-स्त्री० कलिकारीवृक्ष ।। कलिहारी वृक्षा पूतिगन्ध-पु० गन्धक । इंगुवृक्ष ॥ गंधक (गोंदी पुष्पहीना-स्त्री० उदुम्बरवृक्ष ।। गूलरका पेड। वृक्ष । पुष्पाञ्जन-न० अञ्जनभेद ॥ कुसुमाञ्जन । पूतिगन्धिका-स्त्री० बाकुची ॥ वावची । पुष्पासवन० मधु ॥ सहत । पूतितला-स्त्री० ज्योतिष्मती ॥ मालकांगुनी । पुष्पाहा-स्त्री० शतपुष्पा ॥ सैफ । पूतिनस्य-पु० नासारोग-विशेष । पुप्पिका-स्त्री०दन्तमल । लिङ्गमल ॥ दातका मैल। पूर्तिपत्र-पु० श्योनाकभेद ।। सोनापाठा । लिङ्गका मैल। पूतिपत्रिका-स्त्री० प्रसारणीलता । पसरन । पूग-न० गुवाकफल ॥ सुपारी । पूतिपर्ण, पूतिपर्णक-पु० पूतिकरञ्ज । पूतिकरञ्ज । पूग-पु० गुवाकवृक्ष॥ सुपारीका पेड। तूल॥ सहतूत- पूतिपुष्प-पु० इंगुदवृिक्ष ॥ गोंदविक्ष । का पेड । पूतिपुष्पिका-त्री० मातुलुङ्गा । चकोतरा । पूगफल-न० गुवाकफल ॥ सुपारी । पूतिफला-स्त्री० सोमराजी ॥ बावची। पूगरोट-पु० हिन्तालवृक्ष ॥ हिन्ताल, एक प्रकारका पूतिफली-स्त्री० " पूतिमयूरिका-स्त्री. अजगन्धा ।। बर्बरी । पूत-पु० शंख । श्वेतकुश । विकंकतवृक्ष ॥ शंख । पूतिमेद-पु० अरिमेद ॥ दुर्गधखैर । सफेदकुशा । विकंकतवृक्ष, कराटाईवृक्ष । पूतिवात-पु० बिल्ववृक्ष ।। बेलका पेड । पूतगन्ध-पु० बर्बर ॥ काली बर्बरी तुलसी । पूतिवृक्ष-पु० श्योनाक ॥ शोनापाठा । पूततृण-पु० श्वेतकुश सफेदकुशा । पूतीक-पु० पूतिकरञ्ज, ॥ पूतिकरञ्ज' कांटाकरञ्ज ताड । ।।
(११४) आयुर्वेदीय- रक्त। लक्षण । पूर्ताकरज-पु० ॥ पूतिकरञ्ज ।। पूतिकरञ्ज । स्थूलैला ॥ हीङ्गपत्री । कालाजीरा । सोंठ । बडी पूतीका-स्त्री० पूतिका ॥ पोईका शाक । इलायची । पूय-न० पक्वत्रणादिसम्भूत घनीभूत शुक्लवर्ण विकृत पृथ्वीका-स्त्री० वृहदेला । सूक्ष्मैला । कृष्णजीरक । हिंगुपत्री ॥ बड़ी इलायची। छोटी इलायची !काला पूयरक्त-पु० नासारोग-विशेष ॥ जीरा । हङ्गपत्री। पूयारि-पु. निम्बवृक्ष ।। नीमका पेड । पृथ्वीकुरबक-पु० श्वतमन्दारकपुष्पवृक्ष ॥ सफेद पूयालस-पु० सन्धिगतरोग विशेष । मन्दार। पूर-न० दाहागुरु ॥ दाहअगर । पृथ्वीज-न० गडलवण ॥ सामरनोन वङ्गभाषा । पूरक-पु० वीजपूर ।। बिजोरानीव॑ । पृश्निका-स्त्री० कुम्भिका ॥ जलकुम्भी । पूरण-न० कुटन्नट ॥ केवटीमोथा । पृश्निपर्णी-स्त्री० लता-विशेष ॥ पिठवन । पूरणी-स्त्री. शाल्मलीबृक्ष ।। सेमरका पेड । पृश्नी-स्त्री० वारिपर्णी ॥ जलकुम्भी । पूराम्ल-न. वृक्षाम्ल ।। विषाविल । पृष्ठ-न० शरीरपश्चाभाग ।। पीठ । पूरिका-स्त्री० पिष्टकभेद ।। पूरी, कचोरी । पृष्ठवंश-पु० पृष्टास्थि ॥ पाटका डंडा । पूर्णकोष्ठा-त्री० नागरमुस्ता ॥ नागरमोथा । पेचुलो-स्त्री० शाकभेद ॥ एक प्रकारका शाक । पूर्णबीज-पु० बीजपूर ॥ विजोरानी । पेटिका-स्त्री. वृक्ष-विशेष ।। पेटारीवृक्ष । पूर्वरूप-न० भाविव्याधिबोधक चिह्न ॥ पूर्व- पय-न० जल । दुग्ध ॥ जल । दूध । पेया-त्री शिक्थकयुक्त पेयद्रव्य ।। मोमसहित एक प्रकारकी खानेकी वस्तु । पूष, पूषक-यु० ब्रह्मदारवृक्ष ।। सहतूतका पेड । पृक्का-स्त्री० शाक-विशेष ।। असवरग, पुरी । पेशी-स्त्री० जटामांसी ॥ जटामांसी,वालछड । मांस- पृथक्चक्षु-स् -पु. ? पृथक्त्वचा-स्त्री० मूर्ती ।। चुरनहार । पेषण-न० पञ्चगुप्तावृक्ष । तिधारा थूहर । पृथक्पर्णी-स्त्री० पृश्निपर्णी ॥ पिटवन । पैष्टिक-न. विविधधान्यविकारज मद्य । पृथग्बीज-पु. भल्लातक || भिलावेकापेड' । पैष्टी-स्त्री." पृथाज-पु० अर्जुनवृक्ष । कोहवृक्ष । पोटगल-पु० नलतृण । काशतृण ॥ नर्सल काँस । पार्थिवीपति-पु० ऋषभक ॥ ऋषभौषधी । पोतकी-स्त्री० पूतिका ॥ पोईका शाक । पृथु-स्त्री कृष्णजीरक । हिंगुपत्री । अहिफ़न पोतास-पु० कर्पूर-विशेष ॥ एक प्रकारका कपूर । कालाजीरा । हीङ्गपत्री । अफीम । पोतिका-स्त्री० पूतिका । शतपुष्पा । मूलपोति ॥ पोईका शाक । सौंफ । वनपोई। पृथुक-पु० न० चिपिटक ॥ चिउरा, चौला । पृथुका-स्त्री० हिंगुपत्री । हीङ्गपत्री। पोष्टा-स्त्री० पूतीक । करञ्जभेद । पृथुकोल-पु० राजबदर ।। राजबेर । पौण्डरीक-न० प्रपोण्डरीक ॥ पुण्डरिया । पौण्डर्य-न० पुण्डर्म्य ॥ पुण्डरिया । पृथुच्छद-पु० हरिदर्भ ॥ एक प्रकारका ढाम । पौण्ड-पु० इक्षु विशेष ।। सफेद पौंडे । पृथुपत्र-पु. रक्तलशुन । लालं लहशन । पौण्डक-पु. " पृथुपलाशिका-स्त्री० शठी ॥ गंधपलाशी, छोटाक-पौण्डिक-पु० चूर । कचर। पौतिक-न० मधु-विशेष ॥ एक प्रकारका मधु । पृथुला-स्त्री० हिंगुपत्री ॥ हींगपत्री । पौर-न० रोहिषतृण ।। रोहित-सोधिया । '-'पु० श्योनाकभेद ॥ सोनापाटा। पौष्कर-न० पुष्करमूल ।। पोहकरमूल । पृथ्वी-स्त्री हिंगुपी । कृष्णजीरक । पुनर्नवा । पौष्करसूल-न. पिण्डी। ॥ पृथुशिम्ब-१० " औषधिकोष । (११५) अग । निकटकी अंगुली । पौष्पक-म० कुसुमाञ्जन ।। पुष्पाञ्जन ।। प्रत्यक्पर्णी-स्त्री० अपामार्ग । द्रवन्ती ॥ चिरचिरा । प्रकर-न० अगुरु ।। अगर । मूसाकानी । प्रकाश-न काँस्य || काँसी । प्रत्यक्पुष्पी-स्त्री० अपागार्ग || चिरचिरा । प्रकीर्ण-पु० पूतिकरञ्ज ।। दुर्गंधवाली करञ्ज । प्रत्यक्छेणी-स्त्री० दन्तीवृक्ष । मूषिकपर्णी ॥ दन्ती- वृक्ष । मूसाकानी । प्रकीर्य-पु. पूतिकरज । फेनिल ॥ दुर्गधवाली करन । रीठाकरञ्ज। प्रत्यङ्ग-न० अवयव-विशेष ॥ कर्ण, नासिकादि प्रकुञ्च-पु० पलपरिमाण || आठ तोले । प्रकोष्ठ-पु०कफोण्यवधि मणिवत्वपर्यन्त हस्त भाग! प्रत्याङ्गिरा-स्त्री. शिरीषवृक्ष । श्वेतपुनर्नवा ॥ सिरसा कोनांके नीचेका भाग। का पेड । विषखपरा । प्रगन्ध-पु० पर्पट ॥ दबनपापड़ा । प्रत्यश्म [ ]-न • गैरिक ॥ गेरू । प्रग्रह-पु. कर्णिकावृक्ष ॥ अमलतासभेद । प्रत्याध्मान-पु० वातव्याधि-विशेष | प्रचण्डा-पु० श्वेतकरवीर ॥ सफेदकनेर । प्रदर-पु० स्त्रीरोग-विशेष ॥ प्रदररोग । प्रचण्डमूर्ति-स्त्री०वरुणवृक्ष ।। वरनावृक्ष । प्रदीपन-पु० स्थावर-विषभेद । प्रचण्ड-स्त्री०श्वेतदूर्वा ॥ सफेदब । प्रदेशनी, प्रदेशिनी-स्त्री० तर्जनीअंगुलिः ॥ अंगूठेके प्रचेतसी-स्त्री० कटुफला । कायफल । प्रचलन० पीतचन्दन ।। पीलाचन्दन । प्रदेह-पु० प्रलेप ।। लेप । प्रचोदनी--स्त्री० कण्टकारी ।। कटेहरी । प्रपथ्या-स्त्री. हरीतकी ॥ हरड । प्रच्छर्दिका- स्त्री० वाम ।। कै करना । प्रपन्नाड-पु. चक्रमवृक्ष ॥ चकवड़ । प्रजादा-त्री गर्भदात्रीक्षुप ॥ गर्भदा । प्रपुनाड़, प्रपुन्नड-पुर प्रपुनाट-पु० प्रजादान-न० रजत ॥ चांदी । कर्णनादरोग । प्रणाद-पु. प्रपुनाड-पु० " प्रपुन्नाल-पु. प्रतान-पु० अपतानक नामक वायुरोग विशेष । प्रपूरिका-स्त्री० कण्टकारी ॥ कटेरी । प्रतापस-गु० शुक्लार्कवृक्ष ॥ सफेद आकका वृक्ष । प्रपौण्डरीक-न० शालपर्णी पत्रतुल्यपत्र विशिष्ट वृक्ष. प्रतिजिह्वा-स्त्री० आलिजिह्वा ॥ तालूकी जडमें छोटी विशेष ।। पुण्डेरि, पुण्डरिया । प्रबला-स्त्री० प्रसारणी ।। पसरन, प्रसारणी । प्रतिपत्रफला-स्त्री० क्षुद्रकारवेली ॥ करलो । प्रवाल-पु० स्वनामख्यात रत्न ॥ मूंगा । प्रतिपर्णशिफा-त्री द्रवन्ती ।। मूसाकानी । प्रवालिक-पु. जीवशाक ॥ मालवेप्रसिद्ध । प्रतिफला-स्त्री. सोमराजी ॥ बावची । प्रवालफल-न० रक्तचन्दन || लालचन्दन । प्रतिवात-पु० बिल्ववृक्ष ।। बेलका पेड । प्रबोधनी-स्त्री० दुरालभा ॥ धमासा । प्रतिविषा-श्री. अतिविषा ॥ अतीस । प्रबोधिनी-स्त्री० " प्रतिविष्णुक-पु० मुचकुन्दपुष्पवृक्ष। मुचकुन्द पुष्प-प्रभद्र-पु. निम्ब ॥ नीम । वृक्ष । प्रभद्रा-स्त्री. प्रसारणी ॥ पसरन । प्रतिश्याय-पु. पानसरोग । नासारोग-विशेष ॥ प्रभाकर-पु० अर्कवृक्ष ॥ आकका पेड । पीनस, साईं। प्रभाजन-पु० शोभाञ्जन ॥ सैजिनका पेड़ । प्रतिसोमा-स्त्री० महिषवल्ली ॥ छिरहिहो। प्रभु-पु० पारद ॥ पारा । प्रतिहास-पु० करवीर ॥ कनेर । प्रमथा-स्त्री० हरीतकी ॥ हरड । प्रतीहास-पु.॥ प्रमथित-न. निजलता ॥ जलरहिततक्र । जीभ । .."
D हिणी। ( ११६ ) आयुर्वेदीय- प्रमद-पु० धत्तूरफल । धतूरेके फल । प्रसृत-न० पु० पलट्यपरिमाण ॥ १६ तोले । प्रमुख-पु. पुन्नागवृक्ष || पुन्नागका पेड । प्रस्तरिणी-स्त्री० गोलोमिका ॥ पाथरी दक्षिणदेशी. प्रमेह-पु० स्वनामाप्रसिद्धरोग ॥ प्रमेहरोग । यभाषा। प्रमोचनी-स्त्री० गवाक्षी ।। गोडुम्बा । प्रस्तार्यम, [ ]-न० नेत्ररोग-विशेष । प्रमोदिनी-स्त्री० जिङ्गनिया । प्रस्थ-पु० परिमाण-विशेष ॥ २ सेर । प्रलम्ब-पु० शाखा त्रिपुष ॥ डाला। खीरा । प्रस्थपुष्प-पु० मरुवक । स्वल्पपत्रतुलसी । जम्बी- प्रलम्बा-स्त्री० दीर्घालावु ॥ लम्बी तोम्बी । रभेद । जम्बोरीमात्र । मइआवृक्ष । छोटेपत्तेकी प्रलाप-पु० प्रलापकसन्निपातरोग। वातव्याधि-विशेष। तुलसी । जम्भीरीभेद । जम्भीरी नींबु । प्रलापक-पु० त्रयोदशसन्निपातान्तर्गत सन्निपात-वि०॥ प्रस्थिका-स्त्री० अम्बष्ठा ॥ मोईया । प्रलापहा[ ]-पु० कुलत्थाञ्जन ॥ एक प्रकारका प्रस्वेद-पु० अतिशयधर्म । अञ्जना प्रहरकुटवी-स्त्री० कुटुम्बिनीक्षुप ॥ अर्कपुष्पी । प्रवर-न० अगरु ॥ अगर । प्रहर्षणी-स्त्री० हरिद्रा ॥ हलदी। प्रवाहिका--स्त्री० उदरामय-विशेष । प्रहसन्ती-स्त्री० यूथी । वासन्ती ॥ जुही । वासन्ती। प्रविर-पु० न० पीतकाष्ठ ॥ पालाकाट । प्रहारवल्ली-स्त्री० मांसरोहिणी ॥ रोहिणी, मांसरो- प्रविषा-स्त्री० अतिविषा ॥ अतीस । प्रवेट-पु. यव ।। जी। प्रवेल-पु० पीतमृग ॥ पालीमूग । प्रक्षेप-पु० औषधादिषु देयद्रव्य । प्रबजिता-स्त्री. मांसी ॥ मुण्डि। । प्राक्फल-पु. पनस || कटहर । प्रश्नी-स्त्री० कुम्भिका ॥ जलकुम्भी । प्राग्राट-न० अधनदद्धि । प्रसङ्ग-पु० मैथुन ॥ त्रीसंसर्ग । प्राचीनपनस-पु० बिल्व ॥ बेल । प्रसन्ना-स्त्री० सुरा । मदिरा-विशेष ॥ एक प्रका. प्राचीना-स्त्री० पाठा । रास्ना ॥ पाठ । रायसन । प्राचीनामलक-ज० पानीयामलक पानीआमला । प्रसन्नेरा-स्त्री० मदिरा ॥ मद्य-शराब, दारु । प्राणक-पु० जीवकद्रुम । जीवकवृक्ष । प्रसरा-स्त्री प्रसारणी ॥ पसरन । प्राणद-न० जल । रक्त ॥ जल । रुधिर । प्रसव-पु. गर्भमोचन ॥ जनना । सन्तान होना । प्राणद-पु० जावकवृक्ष ।। जीवकवृक्ष । प्रसवक-पु० पियालवृक्ष ।। चिरौंजीका पेड । प्राणदा-स्त्री० ऋद्धि-वृद्धि । हरीतकी ॥ ऋद्धि प्रसह-पु० आरेवतवृक्ष ॥ अमलतासका पेड। ओषधी । वृद्धिओषधी । हरड । प्रसहा-स्त्री० बृहती ॥ कटाई । प्राणन्त-पु० रसाञ्जन || रसोत । प्रसातिका-स्त्री. अणुव्रीहि ॥ एक प्रकारके धान । प्राणप्रदा-स्त्री० ऋद्धिनामौषधी ॥ ऋद्धि । प्रसादन-न० अन्न || अन्न । प्राणहारक-न० वत्सनाभ ॥ बच्छनाभविष । प्रसाधिका-स्त्री० नोवार || नीवारधान । प्राणिमाता-स्त्री० गर्भदात्रीक्षुप | गर्भदा कोचतू प्रसारणी-स्त्री० दुर्गन्धपत्र स्वनामख्यातलता-विशेष भाषा। लजालु ॥ पसरन, प्रसारनी, कुञ्जप्रसारनी। प्रातिका-स्त्री० जवा ॥ ओडहुलपुष्पवृक्ष । छुईमुई। प्रावट-यव ॥ जौ प्रसारिणी-स्त्री. प्रसारणी । लजालुलता । पस- प्रावृषायणी-स्त्री० कपिकच्छू । पुनर्नवा || कौंछ । रन । लज्जावन्ती, छुईमुई, लज्जालु । विषखपरा। प्रसू-स्त्रो० कदली ॥ केला । प्रावृषेण्य-पु० कदम्बवृक्ष । कुटजवृक्ष । धाराक. प्रसूका-स्त्री० अश्वगन्धा ॥ असगन्ध । दम्ब ।। कदमका पेड। कुडाका पेड । धाराकदम रकी मद्य ।
औषधिकोष। ( १९७) प्रावृषेण्या-स्त्री० कपिकच्छु । रक्तपुनर्नवा || कौंछ । प्लक्ष-पु० वृक्ष-विशेष । कन्दरालवृक्ष । अश्वत्थवृक्ष॥ गदहपूर्ना । पाखरका पेड । परिसपीपल । पीपलका पेड । प्रावृष्य-पु० कुटज । धाराकदम्ब । विकण्टक ॥प्ताक्ष-न० प्लक्षवृक्षस्य फल। पाखरके फल । कुडा | धाराकदम । गज्जार्फल । प्लीहा (न्)-पु० प्लीहा । प्लीहारोग । प्रिय-पु० ऋद्धि । जीवकमुद्रवृक्ष ॥ऋद्धि ओ- प्लहिध्न-पु० रोहितक वृक्ष ।। रोहेडावृक्ष । षधी। जविकवृक्ष । मोगरावृक्ष । प्लीहशत्र-पु० प्रियक-पु० नीप । पीतशाल । प्रियंगु । कुंकुम । प्लीहा-स्त्री० प्लीहा (न् )-पु० कुक्षिवामपाश्वस्थ मां- सखण्ड || पलैया, प्लीहा, तापतिली । धाराकदम्ब ॥ कदमकावृक्ष । विजयसार । फूल-प्लीहारि-पु० अश्वत्थवृक्ष ।। पीपलका पेड़ । प्रियंगु । केशर । धारा कदम्बवृक्ष । प्लीहाशत्रु-पु० रोहितक ॥ रोहेडा । प्रियंकरी-स्त्री० श्वेतकण्टकारा । बृहज्जीवन्ती । इति श्रीशालिग्रामवैश्यकृते शालिग्रामौषधशब्दसागरे अश्वगन्धा ॥ सफेदकटेरी । बडीजीवन्ती । द्रव्याभिधाने एकाराक्षरे एकविंशस्तरङ्गः॥ २१ ॥ असगन्ध । फ. प्रियंगु-स्त्री- स्वनामख्यातवृक्ष । राजिका । पिप्प. फजिका स्त्री० ब्राह्मणयष्टिका । देवताड वृक्ष ।दुरा. ली । कंगु । कटुका फूलप्रियंगु । राइ । लभा ॥ भारंगी । देवताडवृक्ष । धमामा । पीपल । कंगुनीधान । कुटकी। फजिपत्रिका-स्त्री० आखुकर्णी ॥ मूसाकानी । प्रियजीव-पु० श्योनाकवृक्ष ॥ सोनापाठा । फजी-स्त्री० भाङ्गी ॥ भारंगी । प्रियतम-पु. मयूरशिखावृक्ष । मोरशिखावृक्ष । फणिकेशर-पु० नागकेशर || नागकेशर । प्रियदर्शन-पु० क्षरिकावृक्ष ॥ खिरनीकापेड । फणिजिह्वा-स्त्री० महाशतावरी । महासमंगा ॥ बडी प्रियव-स्त्री. प्रियंगु ।। फूलप्रियंगु । शतावर । कगहिया । प्रियवल्ली-स्त्री" फणिज प्रियसख-पु. खदिर ।। खैरका पेड । फणिन्जक पु० क्षुद्रपत्रतुलसी । जम्बीरभेद । ज. प्रियसंदेश-पु० चम्पकवृक्ष ।। चम्पाका पेड । म्बीरमात्र ।। छोटे पत्तेको तुलसी । जम्भीरभेद । प्रियसालक-पु० असनवृक्ष ।। विजयसार । जम्भीरी। प्रिया-त्री० एला | माल्लका । मदिरा । प्रियंगु ।। फाण फेन-पु० अहिफेन ।। अफीम । इलायची । मल्लिका वा वेला पुष्पवृक्ष । दारु । फणिवल्ली-स्त्री० नागवल्ली ॥ पानभदे । फूलप्रियंगु । फणिन्त्री-स्त्री० गन्धनाकुलीनामकन्द ॥ नकुल. प्रियाम्बु-पु० आम्रवृक्ष ॥ आमका पेड । कन्द । प्रियाल-पु० वृक्षभेद ॥ चिरोंजीका पेड़ । फणिहृत्-स्त्री० क्षुद्रदुरालभा || लघुधमासा । प्रियाला-स्त्री० ० द्राक्षा || दाख। फाण []-पु० सर्पिर्णी ॥ सर्पिणी औषधी । प्रेतराक्षसी-स्त्री० तुलसी ॥ तुलसी । फल-न० जातीफल । त्रिफला । ककोल। मदनफल। प्रोत्फल-पु० वृक्ष-विशेष ॥ सस्य । 'मुष्क |॥ जायफल। हरड,बहेडा,आमला। प्लव-न० कैवर्तीमुस्तक । गन्धतृण ॥ केवटी शीतलचीनी । मैनफल | फल | अण्डकोष । मोथा । सुगन्धतृण । फल-पु० कुटजवृक्ष । मदनवृक्ष ।। कुडावृक्ष । मैन. प्लव-पु० पर्कटीवृक्ष ।। पाखरका पडे । फलवृक्ष। प्लवक-पु." फलक-न० जातीफल || जायफल । प्लवग-पु० शिरीषवृक्ष | सिरसका पेड़ । फलक-पु० नार्गकशर ॥ नागकेशर ॥ प्लवङ्क-पु. प्लक्षवृक्ष । पाखरका पेड़ । फलकर्कशा-स्त्री. वनकोलि ॥ वनबेर ।
(११८) आयुर्वेदीय- दाख । अबीर । । फलकृष्ण-पु० करमवृक्ष ॥ करौंदा । फालिका-स्त्री. हरित् वर्ण निष्पावी॥निष्पावीभेद । फलकेशर-पु० नारिकेलवृक्ष । नारियलका पेड । फलिन-पु. पनस ॥ कटहर । फलकोश-पुर अण्डकोष ॥ अण्डकोष । फलिनी-स्त्री. अग्निशिखावृक्ष । प्रियंगु ॥ कलिहारी। फलकोषक-पु० फूलप्रियंगु । फलचोरक-पु० चौरकनामगन्धद्रव्य ॥ भटेउर । फली-स्त्री० प्रियंगुवृक्ष ॥ फूलप्रियंगु । फलत्रय-न-त्रिफला परुषफल । काश्मर्य। द्राक्ष ।। फलूप- ० लता-विशेष । हरड, बहेडा, आमला । फालसा। कम्भारी । फलेन्द्र-पु० बृहजम्बू ।। बडीजामुन । फलेपुष्पा-स्त्री० क्षुद्रक्षुप-विशेष ।। गूमा । फलत्रिक-न० त्रिफला । त्रिकटु ॥ हरड, बहेडा, फलेकहा-स्त्री० पाटलिवृक्ष ॥ पाडरकापेड । फलोत्तमा-स्त्री० काकलीद्राक्षा ।। किसमिस । आमला । साठे, मिरच, पीपल । फलोत्पत्ति-पु. आम्रवृक्ष ॥ आमकापेड । फलपाक-पु० करमईक । पानीयामलक ॥ करोंदा । फल्गु-स्त्री० काकोदुम्बरिका । रेणुभेद ॥ कठमर । पानी आमला ॥ फलपाकी (न्)-पु० गई भाण्ड || पारिसपीपल, फरगुपी-स्त्री. काकोदुम्बरिका ।। कटूमर । गजहंदु । फल्गुवाटिका-स्त्री." फलपुच्छ-पु० एरण्डवृक्ष । अरण्डकापड । फल्गुवृन्ताक-पु० इयोनाकभेद ॥ शोनापाठा । फलपुष्पा-स्त्री. पिण्डखर्जूरी ।। पिण्डखजूर । फाटकी-त्री० स्फटी ॥ फटकरी । फलपूर-पु० बीजपूर ॥ विजोरानींबु । फाणित-न० अर्द्धावर्तितेक्षुरस ।। राब । फलपूरक-पु०" फाण्ट-पु० न० कषाय-विशेष ॥ एक प्रकारका । फलप्रिया-स्त्री० प्रियंगु ।। फूलप्रियंगु । काढा। फलमुख्या-स्त्री. अजमादा ॥ अजमाद । फालिनी-स्त्री० अग्निशिखावृक्ष ॥ कलिहारी । फलमुद्गरिका-त्री० पिण्डखजूर ॥ पिण्डखजूर । फाल्गुन-पु० अर्जुनवृक्ष ॥ कोहवृक्ष । फलवतुल-न० कालिंग ॥ तरबूज । फिरङ्गरोग-पु० मेदगेग-विशे ॥ आतशक । फलवृक्षक-पु. पनस | कटहर । फिरङ्गरोटी-स्त्री० रोटीका-विशेष ।। एकप्रकार की फलशाक-न० षड्विधशाकान्तर्गत फलरूप शाक ।। रोटी। पेठा, तोम्बी, तोरई, बैंगुन, करेला इत्यादि । फुप्फुस-पु. वक्षोभ्यन्तरस्थकोष्टविशेष ॥ फेफ डा। फलशाडष-पु० दाडिम ! अनार । फेन-पु० डिण्डीर || समुद्रफेन । फलशैशिर-पु० बदरवृक्ष ॥ बेरीकापेड । फेण-पु. " फलश्रेष्ठ-पु० आम्रवृक्ष ॥ आमका पेङ । फलस-पु० पनसवृक्ष || कटहरवृक्ष । फेनदुग्धा-स्त्री० दुग्धफेनी क्षु ॥ दूधफेनीक्षुप । फलस्नेह-पु० आखोडवृक्ष ॥ अखरोट वृक्ष । फेना-स्त्री० सातलावृक्ष ॥ सातलावृक्ष । फला-स्त्री० झिंझिरिष्टाक्षुप । प्रियंगु.।। झिझिरीटा । फेनाश्मभस्म (न् )-न० शंख विशेष । फूलप्रियंगु । फेनिका-स्त्री० पक्वान्न-विशेष ॥ फेनी । खजला । फलाढया-स्त्री० काष्ठकदली ॥ काठकेला । फेनिल-न० कोलिफल । मदनफल ॥ बेर । मैन. फलाध्यक्ष-न० राजादनवृक्ष ॥ खिरनीका पड । फल । रीठा करज। फलान्त-पु० ० वंश।। वांस । फेनिल-पु० अरिष्टवृक्ष । बदरवृक्ष ॥ रीठाके पेड । फलाम्बु-न० त्रिफलाम्बु ॥ त्रिफलेका जल | बेरीका पेड । फलाम्ल-न० वृक्षाम्ल ॥ विषाविल । इति श्रीशालिग्रामवैश्यकृते शालिग्रामौषधशब्दसागरे फलाम्ल-पु० अम्लवैतस ॥ अम्लबैत । द्रव्याभिधाने फकाराक्षरे द्वाविंशस्तरंगः ॥ २६ ॥ , फनक-पु० औषधिकोष। (११९) an YAMMAR I । बिनोले । काबेर । व-ब वन्धूक-पु० पीतशाल । स्वनामख्यात पुष्पवृक्ष ॥ वणिग्बन्धु-पु० नीलोवृक्ष ।। नीलका पेड । विजयसार । दुपहरियाका वृक्ष, गेजुनियाका वृक्षा बदर-न० सेविफल । कासिफल । कोलपरिमाण । वन्धूकपुष्प-पु० पीतशाल ।। विजयसार । कोलिविशेष । कोलिमात्र ॥ सेव । कपासका फल। वन्धूलि-पु० बन्धूकवृक्ष ।। दुपहरियाका वृक्ष । २ तोले । एक प्रकारका वेर । बेर । वन्ध्या-स्त्री० योनिरोग विशेष । वन्ध्याकर्कोटकी ॥ वालाख्यगन्धद्रव्य ।। एक प्रकारका योनिराग । बदर-पु. कोलिवृक्ष । देवसर्षपवृक्ष । कासवीज।। बेरीका पेड । निर्जरसी । कपास के वीज अर्थात् बाँझखखसा, । एक प्रकारका सुगन्धद्रव्य । वन्ध्याकोटकी-स्त्री० तिक्तककोटकी ॥ बाँझख. खसा, वनककोडा । बदरफली, बदरवल्ली-त्री० भूबदरी ॥ झडबेर । वभ्र-पु० सितावरशाक ॥ चौपतियाशाक । वदरा-त्री० वराहक्रान्ता । कासी । एल.पणे । विष्णुक्रान्ता । वराहक्रान्तावृक्ष । कपास । एला- बभ्रुधातु-पु० सुवर्णगैरिक ॥ पालामाटी, गजनी। पर्णी औषधी । कोयल। वर-न० कुंकुम । गुडत्वक् । वालक । आईक ॥ केशर । दालचीनी । सुगंधवाला। अदरख । बदामलक-न. प्राचीनामलक || पानीआमला । वरा-त्री० त्रिफला। गुडूची। मेदा । ब्राही । विडंग। वदरि-स्त्री०कोलिवृक्ष || बेरीका पेड । पाठा । हरिद्रा ।। हड, बहेडा, आमला| गिलोय । वदरी-स्त्री. कोलिवृक्ष । कार्पासी । कपिकच्छु ॥ मेदा । ब्रह्मघास । वायविडंग । पाठ । हलदी । बेरीका पेड । कास । कौंछ । वरी-स्त्री० शतावरी ।। शतावर । वदरीच्छदा-त्री० हस्तिकोलिवृक्ष ॥ एक प्रकार. वर्वट-पु० राजमाष ।। लोबिया ।। वर्वटी-स्त्री." वदरपित्र-पु० नखी ।। नखी गन्धद्रव्य । बर्ह-न० मयूरपिच्छ ॥ मोरकी पूंछका चाँद । वदीपत्रक-पु० वल-न० गन्धरस । शुक्र । पल्लव । रक्त ॥ बोल । वदरीफला-स्त्री० नीलशेफालिका ।।नील सम्हालवृक्ष। वीर्य । पल्लव । पत्र । रूधिर । बद्धगुद-न० उदररोग-विशेष । वल-पु० वरुणवृक्ष । वरनावृक्ष । वद्धफल-पु. करञ्जवृक्ष ॥ कञ्जाका पेड । वलजा-त्री० यूथी ॥ जुही। वद्धरसाल-पु० त्रिविधराजाम्रान्तर्गत श्रेष्ठ. आम्र ॥ वलद-न० जीवक । जीवकोषधी । एक प्रकारके उत्तम आम । वलदा-त्री० अश्वगन्धा ॥ असगन्ध । वधू-स्त्री० पृक्का । शारिवा । शटी ।। असवरग । वलदेवा-स्त्री० त्रायमाणा ॥ त्रायमान । गौरीसर । कचर। वलभद्र-पु. लोध ॥ लोध । वलभद्रा-स्त्री० त्रायमाणा । घृतकुमारी ॥ त्राय मान। वध्र-10 सीसक ।। सीसा । वध्रक-न० चिकुवार । वन्धुक-पु० बन्धकवृक्ष ॥ दुपहारयाका वृक्ष । बलभद्रिका-स्त्री० त्रायमाणा ॥ त्रायमान । बन्धुजीव-पु० " बलवर्द्धिनी-त्रो० जीवक || जीवकऔषधी । बन्धुजीवक-पु. बलहा-(न् ) पु० श्लष्मा ॥ कफ। धन्धुर-पु० स्त्रीचिह्न । तिलकल्क । बन्धूक । बला -स्त्री० विडंग । ऋषभक ॥ स्त्रीका चिह्न, योनि। बलाट-पु० मुद्ग || मूंग । तिलकुट । दुपहरियावृक्ष । वायविडंग । ऋष· बलात्मिका-स्त्री० हस्तिशुण्डीवृक्ष ।। हाथीशुण्डवृक्ष। बलाद्या-स्त्री. वला ॥ खिरैटी। वन्धुल-पु० बन्धूकपुष्पवृक्ष ॥ दुपहरियाका वृक्ष । वलामोटा-स्त्री० नागदमनी ॥ नागदौन । " क्षुप-विशेष ॥ खिरैटी । भौषधी।
(१२०) आयुर्वेदीय- । लोबिया । वलाय-पु. वरुणवृक्ष ॥ वरनावृक्ष। बहुधार-न० वज्र ।। हीरा । बलायक-पु० पानीयामल ॥ पानीआमला । बहुनाद-पु० शंख ॥ शंख । बलास-पु० लेप्मा ॥ कफ। वहुपत्र-न० अभ्रक ॥ अभ्रक । बलाहक-पु० मुस्तक ।। मोथा। बहुपत्र-न० पलाण्ड ।। प्याज । बलाहकन्द-पु० गुलञ्चकन्द ॥ गुलश्चकन्द । बहुपत्रा-स्त्री० तरुणीपुष्प ।। सेवतीका फूल । वलि-पु० गन्धक || गन्धक । बहुपत्रिका-स्त्री० भूम्यामलकी। मेथिका । महाश-जा- बलि-स्त्री० गुदांकुर । अशोवलि ।। जराहेतु चर्म वरी ॥ भुइआमला । मेथी। बडी शतावर । श्लथता । बहुपत्री-स्त्री० लिङ्गिनीलता । घृतकुमारी । तुलसी । बलिका-स्त्री. अतिबला ॥ कंगई। कंघी । जतुका । बृहती । गोरक्षदुग्धा ॥ पञ्चगुरिया कुत्र बलिनी-स्त्री० वाटयालक ॥ खिरैटी । चित्भाषा । घीकुवार तुलसी । जतुका । मालवमें बलिपोदकी-स्त्री० उपोदकी ॥ पोईका शाक । प्रसिद्ध लता । कटाई । अमृतसञ्जीवनी । वलिाप्रय-पु० लोध्रवृक्ष ॥ लोधका पेड । बहुपर्ण-पु० सप्तच्छदवृक्ष ॥ सतोना । वली [न् ]-कुन्दवृक्ष । माष ।। कुन्दका पेड ।। बहुपर्णिका-स्त्री. आखुकर्णी ।। मूसाकानी । वहुपर्णी-स्त्री०मेथिका ॥ मेथी । बल्य-न०प्रधानधातु ॥ शुक्र । बहुपात्()-पु० वटवृक्ष ।। वडका पेड । बल्या-स्त्री० अतिबला । अश्वगन्धा । शिम्रीडीक्षुप । बहुपाद-पु." प्रसारणी ॥ कंघी । असगन्ध । चङ्गोनि देशा-बहुपुत्र-पु० सप्तपर्णवृक्ष ॥ सतिवन । न्तरीय भाषा । पसरन । बहुपुत्री-स्त्री० शतमूली ॥ शतावर । बहुकण्टक-पु० क्षुद्रगोक्षुर । यवास । हिन्ताल ॥ बहुपुष्प-पु. पारिभद्रवृक्ष ॥ फरहद ।। छोटा गोखरू । जवासा । एक प्रकारका ताड़ । बहुपुष्पिका-स्त्री० धातकी ।। धायके फूल । बहुकण्टका-स्त्री० अग्निदमनी ॥ क्षग्निदमनी । बहुप्रज-पु० मुञ्जतृण ॥ मूंज । बहुकण्टा-स्त्री० कण्टकारी ॥ कटेरी। बहुफल-पु० कदम्बका वृक्ष। विकंकत । तेज: बहुकन्द-पु. शूरण || जमीकन्द । कदमका पेड । कण्टाई विकत । तेजबल | बहुकन्दा-स्त्री० कर्कटी ॥ ककडी । बहुफला-स्त्री० क्षविका । माषपर्णी । काकमाची । बहुकर्णिका-त्री० आखुकर्णी ।। मूसाकानी । त्रपुसी । शशाण्डुली ।: क्षुद्रकारवेल्ली । भूम्या- बहुकूर्च-पु० मधुनारिकेल !! मधुनारेयल । मलकी । बृहतीभेद । मषवन । मकोय । खीरा। बहुगन्ध-न० गुडत्यक् ।। दालचीनी । शशाण्डुली, एकप्रकारकी ककडी। छोटा करेला । बहुगन्ध० पु. कुन्दरुक ।। कुन्दुरु । भुईआमला। बहुगन्धा-पु. कस्तूरी ॥ कस्तूरी । बहुफलिका-स्त्री० भूबदरी ।। झडवेर । बहुगन्धा-स्त्री० यूथिका । कृष्णजीरक । जुही । बहुफली-स्त्री० मृगेरुि । आमलकी ॥ सेधि. कालाजीरा । नी। आमला। बहुप्रन्थि-पु० झावुक ।। झाऊ । बहुफेना-स्त्री० सातला ॥ सातला । बहुच्छिन्ना-स्त्री० कन्दगुडूची ॥ कन्दगिलोय । बहुमञ्जरी-स्त्री० तुलसी ॥ तुलसी । बहुतरकणिश-पु० रागीधान्य ॥ रागीधान । बहुमल-पु० ससिक ॥ सीसा । बहुतिक्ता-स्त्री० काकमाची ॥ मकोय । कवैया । बहुमूर्ति-स्त्री० वनकापसि ॥ वनकपास । बहुत्वक् (च)--पु० भूर्जवृक्ष ॥ भोजपत्रवृक्ष । बहुमूल-पु० शिग्रु । स्थूलशर ॥ सैंजिनेका पेड । बहुत्वक-पु० एक प्रकारकी शर। बहुदुग्ध-पु० गोधूम ।। गेहूं । बहुमूलक-न० उशीर ॥ खस । बहुदुग्धिका-स्त्री० स्नुही वृक्ष ।। सैंडका पेड । बहुमूला-स्त्री० शतावरी ॥ शतावर ।
औषधिकोष (१२१) " चईकाँठा वङ्गभाषा । बहुमूली-स्त्री० माकन्दी ॥ माद्राणी । बाल-न० पु. गन्धद्रव्याविशेष ॥नेत्रवाला, सुगन्धः बहुरान्धिका-स्त्री० मेदा ॥ मेदा । वाला। बहुरसा -स्त्री० महाज्योतिष्मती ।। बड़ी मालकांगनी। बाल-पु. नारिकेल । केश || नारियल । वाल । बहुरुहा-स्त्री० कन्दगुडूची ॥ कन्दगिलोय । बालक-न. पु० हीबेर ॥ सुगन्धवाल । बहुरूप-पु० सर्जरस || राल । बालकप्रिया-स्त्री० इन्द्रवारुणी । कदली ॥ इन्द्रा- बहुल-न० श्वेतमरिच ॥ सफेद मिरच । यण । केला। बहुलगन्धा-स्त्री० एला ॥ इलायची । बालटानय-पु. खदिरवृक्ष ॥ खैरका पडे । बहुलच्छद-पु० रक्तशिग्रु ।। लाल सैंजिनेका पेड। वालदलक-पु. बहुलवण-न० औषरक ॥ खारी नोन । बालपत्र-पु. खदिवृक्ष । यवास । खरका पडे । बहुला-स्त्री० नालिका । एला ।। नीलका पेड । जवासा । इलायची । बालपत्रक-पु० खदिर वृक्ष । खरका पेड । बहुवल्क-पु० पियाल । चिरौंजीका पेड़ । बालपुष्पिका-स्त्री० यूथी । जुही । बहुवल्ली-स्त्री. डोडिक्षुप ॥ डोडिरुखडी। बालपुष्पी-स्त्री." वहुवार-पु० फलवृक्ष-विशेष ॥ लिसोडा वालभद्रक-पु० विषभेद ॥ शाम्भव । वहुवारक-पु० वालभैषज्य-न० रसाञ्जन ॥ रसोत । बहुविस्तीर्णा-स्त्री० कुचिका, रिपुघातिनी ॥ कु. बालभोज्य-पु० चणक ॥ चने । बालरोग-पु० बालकस्यरोग ॥ बालरोग । बहुबोज-न० गण्डगात्र ॥ सरीफा । बाला-स्त्री० नारिकेल । हरिद्रा । मालकाभेद । बहुबीजा-स्त्री गिरिकदली ।। पर्वतीकेला । घृतकुमारी । ह्रीबेर । अम्बष्ठा । नीलाझण्टी । बहुवीर्य-पु० विभीतक । तण्डुलीयशाक । शाल्म एला। चीनाककटी ।। नारियल । हलदी । लीवृक्ष । मरुबकवृक्ष ।। बहेडेका पेड । चौला मोतियापुष्पवृक्ष । घीकुवार। सुगन्धवाला । चित्र. ईका शाक । सेमर का पेड । मरुआवृक्ष । कूट देशकी ककडी । मोईया । नीलीकटसरैया । बहुवी--स्त्री० भूम्यामलकी ।। भुई आमला । बालाक्षी-त्री० केशपुष्टावृक्ष । बहुशल्य -पु० रक्तखदिर ।। लालखैर । बालिका-स्त्री० एला ।। इलायची । वहुशाल-पु० स्नुही ॥ सैंडका पेड। बालीश-पु० मूत्रकृच्छरोगे ।। सुजाक । बहुशिखा-स्त्री० जलपिप्पली ॥ जलपीपर । बालु-स्त्री० एलावालक नाम गन्धद्रव्य ।। एलुआ । बहुसन्तति-पु० ब्रह्मयष्टि ।। भारंगी । बालुक-पु० पानीयालु ।। पानीआलु । बहुसम्पुट-पु० विष्णुकन्द ।। विष्णुकन्द । बालुक-न० एलवालुक ।। एलुआ। बहुसार--पु० खदिर ।। खैर । बालुका-स्त्री. रेणु-विशेष ॥ कपूर-विशेष । ककटी।। बहुसुता-स्त्री० शतमूली ।। शतावर । वालु । रेता । कपूरभद । ककडी। बहुसुवा-स्त्री० सल्लकी ।। सालईका पेड । बालुकात्मिका-स्त्री० शर्करा ॥ चीनी। वाडिङ्गन-पु० वार्ताकु ।। गुन । बालुकायन्त्र-न० औषधपाकार्थ यन्त्र-विशेष ॥ बाणा-स्त्री० पु० नीलझिण्टी ।। नीली कटसरया । वालुकायन्त्र । बादर-पु० कापासवृक्ष ।। कपासका पेड । बालुकास्वेद-पु० तप्तवालुकाद्वारा स्वेदक्रिया । बादरा-स्त्री०" वालुकी-स्त्री० कर्कटीभेद ॥ वालुकी ककडी । बग्धक-पु० स्त्रीरोग-विशेष ।। ऋतुदोष । बालुङ्गी-स्त्री० कर्कटी ।। ककडी । बाधिय-न० बधिरता । बहरापन । बालुङ्गिका-स्त्री०" बाव्वंटीर-पु० आम्रास्थि । त्रपु ॥ आमकी बालुङ्गी-स्त्री० गुठली । सीसा । बालुक-पु. विषभेद। " (१२२) आयुर्वेदीयar-and HANI पट लभद । " भारंगी। वालेय-पु० अङ्गारवल्लरी । चाणक्यमूलक ॥ चाणक्यमूलक ॥ ब्रह्मपुत्री-स्त्री. वाराहीकन्द ॥ गेठी, चर्मकारा. भारङ्गी । छोटी मूली । लुक । बालेयशाक-पु० ब्राह्मणयष्टिका ।। ब्रह्मनेटि । ब्रह्मभूमिजा-स्त्री० सैंहली ॥सिंहलीपीपल । बालेष्ट-पु० बदर ।। बेर । ब्रह्ममखल-पु० मुञ्ज ।। मूज । ब्रह्मयष्टी-स्त्री० भार्गी । भारंगी। बाहु-पु० कक्षादगुलाग्रमय॑न्तावयव-विशेष॥बाहु ब्रह्मरीति-स्त्री० पित्तलभेद ।। पातलभेद । वाहुमूल-न० कक्ष ॥ वगल, काँख । बुक्क-त्रि० वक्षोऽभ्यन्तरमांस-विशेष ॥ कलेजा । ब्रह्मवर्द्धन-न० आनं ।। आम । ब्रह्मबीज-न० पलाशबीज ॥ ढाकके बीज । बुक्कायमांस-न० हृदय ॥ हृद्य । वुधा-स्त्री० जटामांसी ।। जटामांसी, बालछड । ब्रह्मवृक्ष-पु० पलाशवृक्ष । उदुम्बर ।। पलास । बोधनी-स्त्री० पिप्पली ।। पीपल । ढाक । गूलर । बोध-पु० अश्वत्थवृक्ष । पीपलका पेड । ब्रह्मशल्य-पु. सोमवल्कवृक्ष ॥ पपडिया कत्था । बोधितरु-पु० ब्रह्माणी-स्त्री. रेणुको । राजरीति ॥ रेणुक । पीत- बोधिद्रुम-पु बोधिवृक्ष-पु० ब्रह्मादनी-स्त्री० हंसपदी ।। लाल रंगका लज्जालु । ब्रह्मी-स्त्री० फञ्जिका । ब्राह्मी ॥ भारंगी । ब्रह्मी । अध्न-पु० अकंवृक्ष । अध्ननामक राग ॥ आकका पेड । एक प्रकारका रोग। ब्रह्मोपनेता-(ऋ ) पु० पलाशवृक्ष॥ढाकका पेड । ब्राह्मणयष्टिका-स्त्री. ब्राह्मणयष्टी ।। ब्रह्मनेटि । ब्रह्मकन्यका-स्त्री. ब्राह्मी ।। ब्रह्मी। ब्रह्मकोशी-स्त्री० अजमोद ॥ अजमोद । ब्राह्मणयष्टी-स्त्री० " ब्रह्मगर्भा-स्त्री० आदित्यभक्ता ॥ हुरहुर । ब्राह्मणी-स्त्री० फञ्जिका । पृक्का ।। ब्रह्मनेटि । ब्रह्मनी-स्त्री. घृतकुमारी ।। घीकुवार । असवरग। ब्रह्मचारणी-स्त्री. भाङ्गी ॥ भारंगी ।। ब्रालिका-स्त्री० भाङ्गीं ।। भारङ्गी । ब्रह्मचारिणी-स्त्री० ब्राह्मी । करुणीवृक्ष ।। ब्रह्मी ब्राह्मी-स्त्री० जलसमीपस्थ तिक्तरस क्षुद्रपत्रशाक. घास । ककुर विरुणी कोकणदेशीय भाषा । विशेष । ब्राह्मणयष्टिका ।। सोमवल्ली । महाज्यो- ब्रह्मजटा-स्त्री. दमनक वृक्ष । वनावृक्ष । तिष्मती। मत्स्याक्षी । वाराही । हिलमेचिका || ब्रह्मण्य-पु. ब्रह्मदारवृक्ष । सहतूतका पेड । ब्रह्मी । भारंगी । सोमलता । बडी मालकांगनी ब्रह्मतीर्थ-न० पुष्करमूल ॥ पोहकरमूल । मछेछी। वाराहीकन्द । हुलहुलशाक । ब्रह्मदण्ड-पु० ब्रह्मणयष्ठिका ॥ ब्रह्मनेटि । ब्राह्मीकन्द-पु० वाराहीकन्द ।। गठी। वाराहीकन्द ब्रह्मदण्डी-स्त्री० स्वनामख्यात क्षुद्रक्षुप-विशेष ।। इति श्रीशालिग्रामवैश्यकृते शालिग्रामौषधशब्दसागरे ब्रह्मदण्डी औषधी। द्रव्याभिघाने बकाराक्षरे त्रयोबिंशस्तरंगः ।। २३ ।। ब्रह्मदर्भा-स्त्री० यवानी ॥ अजवायन । ब्रह्मदार-न० स्वनामव्याताश्वत्थाकार वृक्ष ॥ सह भक्त-न० पञ्चगुणजलस्यासद्धतण्डुल | भात । तूतका मक्कमण्ड-पु० न० अन्नमण्ड || भातका माड । ब्रह्मपत्र-पु० पलाशपत्र ।। ढाकके पत्ते । सग-न. पु० स्त्रीचिह्न ।। योनि । ब्रह्मपर्णी-स्त्री० पृश्नूिपर्णी ॥ पिठवन । भगन्दर-पु० अपानदेशज व्रणरोग विशेष ॥ भग- ब्रह्मपवित्र-पु कुश ।। कुशा । न्दररोग। ब्रह्मपादप-पु० पलाशवृक्ष । ढाकका पेड भन्न-न. रोग-विशेष ॥ चोट लगनेसे हड्डीका टूट ब्रह्मपुत्र-पु० विषमेद ।। ब्रह्मपुत्रविध । जाना । पेड ।
औषधिकोप। (१२३) . भन्नसन्धि-पु० रोग-विशेष ॥ टूटी हुई हड्डीका | भद्रज-पु० इन्द्रयव ॥ इन्द्रजी । जोडना । भद्रतरुणी-स्त्री. कुब्जकवृक्ष ॥ कूजावृक्ष । भङ्ग-पु० रोग-विशेष || रोग। भद्रतिक्ता-श्री. महातिक्ताक्षुप | मिसमितिता देशा- भङ्गवासा-स्त्री० हरिद्रा ।। हलदी। तरीय भाषा । भङ्गा-स्त्री वृक्षविशेष । त्रिवृता । लाक्यविजया || भद्रदन्तिका-स्त्री० दन्तीवृक्षभेद ॥ भद्रपाली । मातुलानी | निसोत । भंग । भद्दार-नपु. देवदारवृक्ष । सरलवृक्षः । देवदा. भगुरा--स्त्री० अतिविषा । प्रियंगु | धूनराज || अ. स्वृक्ष । धूपसरल। तीस । फूलप्रियंगु । मस्तगी। भद्रदादिक-पु० औषधगण-विशेष ॥ देवदारु, भजनक-पु० मुखरोग-विशेष । कूठ, हलदी, वरना, मेढाशिङ्गी, खिरैटी, गुलस. भटा-स्त्री० इन्द्रवारुणी ।। इन्द्रायण । करी, नालीकटसरैया, कौंछ, सालई, पाढल, कोह भटित्र-न. शूलपक्कमांसादि । कबाब,फारसी भाषा। पियावाँसा, अरणी, गिलोय, अण्ड, पाखानभेद, भण्टाकी-स्त्री० वार्ताकी । बृहती । तालमूली । सफेदआक, आक, शतावर, विषखपरा, गदह- कण्टकारी ॥ वेंगुन । कटाई । मुसली कटेहरी । पूर्ना, वथुआ,गजपीपर, कचनार,भारङ्गी,कपास, भण्डुक-पु० श्योनाकवृक्ष ॥ टैंटु । वृश्चिकाली, शालिञ्चाशाक, वेर, जौ, कुल्थी, भाण्डिका-स्त्री० माञ्जिष्ठा ॥ मजीठ । छोटा बेर,।यह सर्व द्रव्य भद्रदादि गण नामसे भण्डिर-पु० शिरीषवृक्ष || सिरसका पेड । प्रसिद्ध हैं। भण्डिल-पु० " भद्रनामिका-स्त्री० बायन्तीवृक्ष ॥ त्रायमान । भण्डी-स्त्री० मञ्जिष्ठा । शिरीषवृक्ष ॥ मजीठ । भद्रपर्णी-स्त्री० कटम्भरावृक्ष ॥ पसरन । सिरसका पेड। भद्रपर्णी-स्त्री० गम्भारी । प्रसारणी ॥ कुम्भर पस भण्डीतकी-स्त्री० मञ्जिष्ठा ॥ मजीठ । रन। भण्डीर-पु० समष्ठालवृक्ष । तण्डुलीयशाक । शिरीष- भद्रमल्लिका-त्री • गवाक्षी । मल्लिकाविशेष ॥ एक वृक्ष ॥ कोकुयावृक्ष । चौलाईका शाक । सिर. प्रकारकी ककडी वेलाका वृक्ष । सका पेड़। भद्रमुख-पु. मुञ्जभेद ॥ रामसर, सरयता । भण्डीरलतिका स्त्री मनिष्ठा ॥ मजीठ । भद्रमुस्तक-पु० नागरमुस्तक ॥ नागरमोथा । भद्र- भण्डीरी-स्त्री." भण्डील-पु० ॥ भण्डुक, श्योनाकवृक्ष ॥ शोनापाठा । भद्रयव-नं० इन्द्रयव ॥ इन्द्रजौ । भद्रवत्-न० देवदारु ॥ देवदारु । भद्र-न• मुस्त । काञ्चन ॥ मोथा । सोना । भद्रवती-स्त्री० भद्रपर्णी ॥ पसरन । भद्र--पु० कदम्ब । स्नुही ॥ कदमका पेड । सैंडका | मद्रवर्मा [ ]-पु० नवमल्लिका ।। नेवारी । पेड । भद्रबला-स्त्री० लताविशेष. । बला ॥ प्रसारणी । भद्रक-न० भद्रमुस्तक ॥ नागरमोथा भेद । भद्रक-पु. देवदारु ॥ देवदार । भद्रवल्लिका-स्त्री. गोपवल्ली ॥ गौरीसर, गौरीमा. भद्रकण्ट-पु० गोक्षुर || गोखरू । भद्रकाली-स्त्री. प्रसारणी ॥ प्रसारनी । पसरन । भद्रवल्ली-स्त्री० मल्लिका | माधवी लता । अष्टपा- भद्रकाशी-स्त्री० भद्रमुस्ता ॥ नागरमोथाभेद । दिका । वेलावृक्ष । माधवीवेल । मदनमाली । भद्रगन्धिका-स्त्री. मुस्तक मोथा । भद्रश्रिय-न० चन्दन ॥ चन्दन । भद्रचूड-पु. लंकास्थायी ॥ लंकासिज वङ्गभाषा । भद्रश्री-पु. चन्दनवृक्ष ॥ चन्दनका पेड । माथा । भद्रमुस्ता-स्त्री." - भण्डूक, खिरैटी । साऊ।
(१२४॥ आयुर्वेदीय- NATA ॥ - भद्रालपत्री, } -स्रो० " भद्रा-स्त्री. रास्ता । पिप्पली । प्रसारणी । कटफल । भव्य-न० फल-विशेष ॥ भव्यफल । अपराजिता । अनन्ता । जीवन्ती नीली हरिद्र। भव्य-पु० कमरङ्गवृक्ष ॥ कमरखका पेड । श्वतदूर्वा । काश्मरी । शारिवा-विशेष । काकोदु. भव्या-स्त्री० गजपिप्पली ॥ गजपीपल । म्बरिका । बला । शमी। वंचा। दन्ती । रायसन। भाषा-स्त्री० स्वर्णक्षीरी ॥ एक प्रकारकी कटेहरी । पीपल । पसरन । कायफल । कोयल । गौरीसर। भस्म [ ]-त. शिवाङ्गभूषण ॥ भस्म । क्षार । जीवन्ती । नीलका पेड । हलदी । सफेद दूब । भस्मक-न० रोग-विशेष । विडङ्ग । स्वर्ण । रौप्य ।। गम्भारी । कुम्भेर । इयामालता । कठूम्बर । भस्मकीट रोग । वायविडङ्ग । सोना । चाँदी । खरैटी। छोकरवृक्ष। वच । दंती । भस्मगन्धा-स्त्री० रेणुका || रेणुका सुगन्धि। द्रव्य । भस्मगन्धिका-स्त्री० ॥ भद्रालपत्रिका-स्त्री० गन्धाली ।। पसरन । भस्मगन्धिनी-स्त्री० भस्मगर्भ-पु० तिनिशवृक्ष ॥ तिरच्छवृक्ष । भस्मगर्भा-स्त्री० कपिलशिंशपा । रेणुका ॥ कपिल. भद्रावती-स्त्री. कालवृक्ष | कायफल । रंगका सीसा । रेणुकागन्धद्रव्य । भद्राश्रय-पु० चन्दन ॥ चन्दन । सन्दल। फारसी भस्मरोहा-स्त्री० '. दग्धवृक्ष ।। कुरुह मर ठीभाषा । भाषा । भस्मवेधक-पु० कर्पूर ॥ कपूर । भद्रला-स्त्री० स्थूलेला। बडी इलायची । भस्माह्वय-पु० भद्रोत्कट-पु० प्रसारणी ।। पसरन । भक्षटक-पु० क्षुद्रगोक्षुर ॥ छोटे गोखुरू । भद्रोदनी-स्त्री० बला । नागबला ॥ खरैटो । गुल• भक्ष्यपत्रा-स्त्री० नागवल्ली ॥ पान । सकरी। भक्ष्यालाबु-स्त्री. राजालाबु ॥ मीठी तोम्बी । भय-न• कुब्जकवृक्ष ॥ कूजावृक्ष । भाजन-न आढकपरिमाण ॥ आठसेर । भयनाशिनी-स्त्री० त्रायमाण ॥ त्रायमान । भाण्ड-पु० गईभाण्दवृक्ष ॥ गजहंदु । भरणी-स्त्री० घोषकलता । तोरई। भाण्डरि-पु० वटवृक्ष ॥ वडका पेड । भरण्याबा-स्त्री० रामदूती || तुलसीभेद । भानु-पु० अर्कवृक्ष ॥ आकका पेडे । भरु-पु० स्वर्ण || सोना। भानुफला-स्त्री०.कदली ॥ केला । भसंपत्रिका-स्त्री. महानोली ॥ बड़ा नलिका पेड ! भार-पु० विंशतितुलापरिमाण । दोसे २०० तोले । भर्म-न० स्वर्ण ।। सोना । भारती-स्त्री० ब्राह्मी ॥ ब्रह्मी । भर्म [ 1 ]-न० स्वर्ण । धत्तुर ।। सोना । धतूरा। भारद्वाजी-स्त्री० वनकासि ॥ वनकपास । भलता-स्त्री० राजबला || प्रसारणी । भारवाही-स्त्री० नीली ॥ नीलका पेड । भल्लपुच्छी-स्त्री० गवेशका ॥ नागवलाभेद । भारवृक्ष-पु. काक्षीनामक गन्धद्रव्य ॥ काक्षी । भल्लात-पु. भल्लातकवृक्ष ॥ भिलावेका पेड़ । भार्गवप्रिय-पु० हीरक ॥ हीरा । भल्लातक-पु० भार्गवी-स्त्री० दूवी । नालदूर्वा । श्वेतदूर्वा । दूब । भल्लातकी-स्त्री." नीली दूब । सफेद दूब । भलिका-स्त्री० भाीं-स्त्री० क्षुप-विशेष ॥ भारङ्गी, ब्रह्मनेटि । भल्लीका-स्त्री० भाजी-स्त्री. वनकासा ॥ वनकपास । मल्लूक-पु० श्योनाकप्रभेद ॥ सोनापाठा । भा-वृक्ष-पु० पतङ्गवृक्ष । पतङ्गका पेड । भव-न० भव्यफल || भव्यफल । भाल-न० भ्रूद्वयोद्धभाग॥दोनों भौंहके ऊपरकाभाग। भवदारु-न० देवदारु ॥ देवदारु । भालदर्शन-न० सिंदूर ॥ सिंदूर । भवबीज-न० पारद ।। पारा । भालाङ्क-पु० शाकभेद । एक प्रकारका शाक । भवाभीष्ट-न० गुग्गुलु ।। गूगल । भावन्-न० भव्य ॥ भव्यफल । " औषधिकोप । स्पति । भिण्डक-पु. भासुर-न० कुठौपध ॥ कूठ । भुजङ्गघातिनी-स्त्री० वृक्ष विशेष ॥ कंकालिका वन- भासुर-पु० स्फटिक ॥ फटिक । भासुरपुष्पा-स्त्री. वृश्चिकाली ।। वृश्चिकाली । मुजङ्गाजिह्वा-स्त्री. ० महासमङ्गा ।। काहिया । भास्कर-न० स्वर्ण ॥ सोना । भुजङ्गम-न० ससिक ॥ सीसा । भास्कर-पु० अर्कवृक्ष ॥ आकका पेड । भुजंगलता-स्त्री० नागवल्ली ॥ पान । भास्करेष्टा-स्त्री० आदित्यभक्ता || हुरहुर । मुजंङ्गवल्ली-स्त्री. " भास्वर-न० कुष्ठौषध ।। कूट। सुजङ्गाख्य-पु० नागकेशर ॥ नागकेशर । भास्वान् त् ]-पु० अर्कवृक्ष ॥ आकका पेड। भुजङ्गाक्षी-स्त्री भुजङ्गाक्षी-स्त्री. रास्ना । साक्षी ॥ रायसन । भिण्ड-पु० भिण्डाक्षुप || भिण्डीका पेड । सरहटी । मंडनी। भूकदम्ब-पु० कुलाहलवृक्ष ।। कोसिम- वङ्गभाषा। भिण्डा-स्त्री० भूकदम्बक-पु० यवानी ॥ अजमान । भिण्डीतक-पु० : भकदम्बिका-स्त्री० महाश्रावणिका ॥ बडी गौरख- मिदा-स्त्री. धन्याक ॥ घनिया । मुण्डी:। भिदुर-पु० प्लक्षवृक्ष ।। पाखरकापेड । भूकन्द-पु० महाश्रावाणका । वासक । अलम्बुष ॥ भिन्न-न० क्षतरोग-विशेष । बडी गोरखमुण्डी । अडूसा । वनमूलवङ्गभाषा । भिन्नगात्रिका-स्त्री० कर्कटी ॥ ककडी । भूकर्बुदारक-पु० वृक्ष-विशेष ॥ छोटा लिसोडा । भिन्नभिन्नात्मा (न् )-पु. चणक ॥ चने । अर्थात् लभेरा। भिन्नयोजनी-स्त्री० पाषाणभेदकवृक्ष ॥ पाखानभेद. भूकुम्भी-त्री० भूपाटली ।। भुई पाडर । वृक्ष। भूकूष्माण्डी-स्त्री० विदारी ॥ विदारीकन्द । भिारण्टिका-स्त्री० श्वेतगुञ्जा ॥ सफेद घुथुची। भूकेश-पु० शैवाल । वट ॥ सिवार । बडका पेड । भिल्लतरु-पु० लोध्र ॥ लोध। भूकेशी-स्त्री० सोमराजी ॥ बावची । भिल्ला-स्त्री० भूखजूरी-स्त्री० क्षुद्रखर्जूरी॥ छोटी वा देशी खजूर । भिपक्प्रिया-स्त्री गुडुची ॥ गिलोय । भूगर-न० विष || जहर। भिषग्जित-न. औषध ।। औषधी । भूजम्बु-स्त्री० गोधूम | विकङ्कतफल । भूमिजम्बु ॥ भिषग्भद्रा-स्त्री० भद्रदन्तिका ॥ भद्रदन्ती । गेहूं । विकङ्कतका फल।भुई जामुन,छोटीजामुन। भिषग्माता, (ऋ)-स्त्री. वासक ।। वांसा । भूतकेश-पु० स्वनामख्याततृण ॥ भूतकेशतृण । भिक्षु-पु० श्रावणोक्षुप । कोकिलाक्ष ॥ गोरखमु. भूतकेशी-स्त्री० भूतकेश । शेफालिका । नालसि- ण्डी । तालमखाना। न्दुवार ।। भूतकेशतृण । निर्गुण्डीभेद । नीलस- भीमा-स्त्री० रोचनाख्यगन्धद्रव्य । झालु। भीरु-स्त्री. शतावरी । कण्टकारी ॥ शतावर । क. भूतगन्धा-स्त्री० मुरा ॥ कपूरकचरी । भूतन-पु० लशुन । भूर्जपत्रवृक्ष ॥ लशन । भोजपत्रवृक्ष । भीरु-पु० इक्षु-विशेष ॥ एक प्रकारके पौंडे । भूतनी-स्त्री० तुलसी । मुण्डतिका ॥ तुलसी । गो. भीरुक-पुं० इक्षुभेद ।। भौरवी रखमुण्डी। भीरपत्री-स्त्री० शतमूली । शतावर । भूतजटा-स्त्री० जटामांसी । गन्धमांसी ॥ भीरुभूषण-स्त्री० गुञ्जा ॥ धुंधु वी । बालछड । जटामांसी । जटामांसीभेद । भीषण-पु० कुन्दुरुक । हिन्ताल शल्लकी ।कुन्दुरु। भूतद्रावी- (न्)-पु. भूतांकुशवृक्ष । रक्तकरवीर । एक प्रकारका ताड़ । शालई वृक्ष । भूतराज । देशान्तरीय भाषा । लाल कनेर । भुक्तिप्रद-पु० मुद्ग ॥ मूग । भूतद्रुम-पु० श्लष्मान्तकवृक्ष | लिसोडावृक्ष । . TEEH.. टेहरी। - (१२६) आयुर्वेदीय- ॥ कन्द। || भूतनाशन-न० रुद्राक्ष || रुद्राक्ष । भूनिम्बादिगण-पु० "शुण्टीगुडूचीचिरतिक्त भूतनाशन-पु. भल्लातक । सर्षप।। भिलावेंका पेड। मुस्ता"॥ सोंठ, गिलाय, चिरायता, मोथा यह सों। भूनिम्बादिगण है । भूतपत्री-स्त्री ० तुलसी तुलसी । भूपति-पु० ऋषभ ॥ऋषभक औषेध । भूतपुष्प-पु० श्योनाकल ।। शोनापाटा । भूपदि-स्त्री० मल्लिका ॥ मल्लिका । भूतमाणि-स्त्री० चौडा नामक गन्धद्रव्य ।। चीठ । भूपलाश-पु० वृक्षेभद ॥ विशाली । भूतलिका-बी० पृक्का ।। असवरग । भूपाटली-त्री० वृक्ष-विशेष।। भूपातली। लेनवादरी। भुतवास-पु० कालद्रुम ।। बहेडावृक्ष । भुईपाढल दक्षिणदेशीयभाषा। भूतविक्रिया-स्त्री० अपस्माररोग ।। मृगीरोग । भूयेष्ट-पु. राजादनीवृक्ष | खिरनीका पड ! भूतवृक्ष-पु० शाखोटवृक्ष । श्योनाकवृक्ष ।। सहोरा- भूमिकदम्ब-पु० कदम्ब-विशेष ॥ भुईंकदम । वृक्ष । शोनापावा। भूमिकूष्माण्ड-पु० भूमिजातकूष्माण्ड ॥ विदारी- भूतवेशी-स्त्री० श्वतशेफालिका ।। कतरीनिर्गुण्डी । भूतसञ्चार-पु० भूतोन्मादरोग । भूमिखजूीरका-स्त्री० क्षुद्रखजूरी ॥ देशी खजूर । भूतसार-पु. श्योनाकभेद ।। शोनापाठा । भाभखजूरी-स्त्री० " भूतहन्त्री-स्त्री. नीली । वन्ध्या कर्कोटकी ।। भूमिचम्पक-पु० पुष्पवृक्ष-विशेष ॥ भुई चम्पा । नीली दूब । बांझखखसा। भूमिज-न० गौरसुवर्ण ।। यह चित्रकूटदेशमें प्रसिद्ध भूतहर-पु० गुग्गुलु ।। गूगल । भूतहारि-(न्)-न० देवदारु ।। देवदारु । भूमिज--पु० भूमिकदम्ब ।। भुइकदम । भूतांकुश-पु० स्वनामख्यातवृक्ष ।। भूतांकुश । भूमिजगुग्गुलु-पु० गुग्गुलु-विशेष ।। भूमिजगूगल । भूतारि-न० हिंगु ।। हीङ्ग । भूमिजम्बु-स्त्री. क्षुद्रजम्बु । भुई जामुन । छोटी भूताली-स्त्री. भूपाटली । मुसली । भुई पाडर । जामुन। मुसली। भूमिजम्बु-स्त्री० भूतावास-पु० विभीतकवृक्ष । बहेडावृक्ष । भामजम्बूका-स्त्री. भूति-त्री० वृद्धिऔषध । रोहिषतृण । भूतृण ।। भूमिपिशाच-पु. तालवृक्ष ।। ताडका पेड । वृद्धि । रोहिससोधिया । शरवाण । भमिमण्ड-पु० अष्टपादिकां ।। मदलमाली । भूतिक-न० भूनिम्ब । कत्तण कट्फल । यवानी । भूमिमण्डपभूषणां-स्त्री. माधवीलता ॥ माधवी कर्पूर || चिरायता । गधेज घास । कायफर । पुष्पलता । अजवायन । कपूर। ममीसह-पु० वृक्ष विशेष । भुईसह । भूतिक-पु० यवानी । अजमायन । भम्यामलकी-स्त्री० क्षुप-विशेष ।। भुई आमला । भतीक-न० भूनिम्ब । यमाना । भूस्तृण । कत्तृण।। भूम्यामली-स्त्री. " चिरायता । अजवायन । शरवाण । गंधेज घास । भूम्याहुल्य-न० क्षुप-विशेष ॥ भुञ्जितरवड पश्चिम भतृण-न० गन्धतृण ।। सुगंधतृणा गंधेज घास । भूतृण-पु. भूस्तृण । रोहिष तृण ! शरवान । रोहिस भयुक्ता-स्त्री० भामखजूरी ॥ देशी खजूर । सोधिया । भूरि-न० स्वर्ण ॥ सोना । भूत्तम-न० सुवर्ण । सोना । भूरिंगन्धा-स्त्री० पुरानामक गन्धद्रव्य ॥ एकाङ्गी । भदरीभवा-स्त्री० आखुकर्णी ।। मूसाकानी । भारदुग्धा-स्त्री० वृश्चिकाली ॥ वृश्चिकाली । भूधात्री-स्त्री० भूम्यामलकी ।। भुई आमला । भरिपत्र-पु० उखवलतृण ॥ उखलतृण । भूनिम्ब-पु० किराततिक्त ॥ चिरायता । भरिपलितदा-स्त्री० पाण्डुरफली ॥ पाण्डुफली वृक्ष । देशीय भाषा। hy औषधिकोष । ( १२७) THANI HAR रकी जामुन । पु०" ॥ भारफेना-त्रा० सप्तला वृक्ष ।। सातलाश्च । भगष्टा-स्त्री० घृतकुमारी । भाी । तरणी । काक- भूरिमल्ली०स्त्री० अम्बष्ठा । मोइया । जम्बु ॥ घिकुवार । भारंगी । सेवती । एक प्रका- भृरिबला-त्री० आतिवला ॥ कंघी । भूरुण्डो-स्त्री० श्रीहस्तिनीवृक्ष ॥ हाथीशुण्डवृक्ष । भेकपर्णी-स्त्री० मण्डूकपर्णी ॥ मण्डुकपानी-ब्रह्मम भूर्ज-पु. स्वनामख्यात वृक्ष ॥ भोजपत्रवृक्ष । ण्डकी। भूर्जपत्र, भेकी-स्त्री." भूर्जपत्रक, भेदक-त्रि. विरेचक औषधादि ॥ भेदन-न० हिंगु ॥ हङ्गि । भूलना-स्त्री. शंखपुष्वी ॥ शंखाहूली । भेदन-पु. अम्लतस || अम्लवते । भूबदरी-स्त्री० क्षुद्रकोलि ॥ झडवेर । भेदी (न्)-पु० " भशेलु-पु० भूकर्बुदारक ॥ लभेरा । भेषज-न० औषध ॥ औषधी । भस्तृण-न० भूतृण ।। शरवाण । भैषज्य-न." भृङ्ग-न० त्वच । अभ्रक ॥ दालचीनी । अभ्रक । भोगिवल्लभ-न० चन्दन ॥ चन्दन । भृग-पु० भृङ्गराज ॥ भङ्गरा । भोज्यसम्भव-पु. शरीरस्थ रस धातु ॥ शरीरमें भृगज-न० अगरु !। अगर । रसधातु । भंगजा-स्त्री भाी ।। भारङ्गी । भौतिक-न० मुक्ता || मोती । भंगपार्णका-स्त्री. सूक्ष्मैला ॥ छोटी इलायची । भौम-पु० रक्त पुनर्नवा || गदहपूर्ना । भुंगप्रिया-स्त्री० माधवीलता ॥ माधवी लता । भौमरत्न-न० प्रवाल ॥ मूंगा। मुंगमणि-स्त्री० भ्रमरमाणि ।। भ्रमरमणि पुष्पवृक्ष । भ्रमरच्छल्ली-स्त्री ० लता-विशेष ॥ भ्रमरकछल्ली । गमूलिका-स्त्री० भ्रमरच्छल्ली ॥ भ्रमरच्छल्ली ॥ भ्रमरप्रिय-पु० धाराकदभ्य ॥ धाराकदम । भंगरज-पु० भृङ्गराज | भाङ्गरा । भ्रमरमरी-स्त्री० मालवदेशप्रसिद्ध पुष्पवृक्ष-विशेष॥ भूगरजा (स्)-पु० भ्रमरमारी। भृगराज-पु. स्वनामख्यात क्षुप | भाङ्गरा । भ्रमरा-स्त्री० भ्रमरच्छल्ली || भ्रमरच्छल्ली । भृगवल्लभ-पु० धाराकदन्त्र । भूमिकदम्ब | धारा। भ्रमरातिथि-पु० चम्यक ॥ चम्पा । कदम । भुईकदम । भ्रमरानन्द-पु० बकुल । रक्ताम्लान || मौलसि. भृङ्गवल्लभा-स्त्री० भूमिजम्बू । तरुणीपुष्प ॥ छोटी रीका पेड । रक्तकोराटा मराठी भाषा । जामुन । सेवतीके फूल । भ्रमरानन्दा-स्त्री० आतिमुक्तक पुष्पवृक्ष ॥ अति. श्रृंगसोदर-पु. केशराज ॥ कुकरभाङ्गरा । मुक्तका भृगानन्दा-स्त्री० यूथिका ॥ जुही । भ्रमरी-स्त्री० जतुकालता ॥ पुत्रदात्री । भृगाभीष्ट-पु० आम्रवृक्ष ॥ भामका पेड । भ्रमरेष्ट-पु. श्योनाकभेद ॥ शोनापाठा । भृगार-न० लवङ्ग ॥ लौंग । भ्रमरेष्टा-स्त्री० भाी। भूमिजम्बू ॥ भारङ्गी । भंगार-पु. भृङ्गराज ॥ भङ्गरा । जामुन। भृगारि-स्त्री० केतकीपुष्प ।। केवडेका फूल । भ्रमरोत्सवा-स्त्री. माधवी लता | माधवी बेल । भगाह्व-पु० जीवक । भृङ्गराज ॥ जीवक भंगरा । भ्राज क-न. पित्तविशेष । भुंगाहा-स्त्री० भ्रमरच्छल्ली !! भ्रमरच्छल्ली । भ्रान्त-पु० राजधुस्तूर ॥ राजधुतरा । भूगिणी-स्त्री० वटीवृक्ष ॥ नदीवड । भ्रामक-पु. अयस्कान्तभेद ॥ चुम्बकपत्थर । भंगी-स्त्री. अतिविषा ॥ अतीस । भ्रामर-न० भ्रमरजातमधु ।। भौंराका 'भूगी [ ]-स्त्री० पु० वटवृक्ष ।। वडका पेड । इति श्रीशालिग्रामवैश्यकृते शालिग्रामौषधशब्दसागरे भगीफल-पु० आम्रातकवृक्ष | अम्बाडेका वृक्ष । द्रव्याभिधाने भकाराक्षरे चतुर्विशस्तरङ्गः।। २४ ॥ छोटी मधु।
( १२८) आयुर्वेदीय- मोठ। मकोल्ल-पु. कीसी सुगमवाली अगराछोकरावृक्षअथ पुष्पीतृण। म सौंफ । सफेदबच । गौलोचन । फूलायगु । म-पु. विष ॥ जहर । शंखाहूली । मषवन । जीवन्ती। डोडीकाशाग । मकरन्द-पु० पुष्परस । कुन्दपुष्पवृक्ष ॥ मधु । मा औषधी । वच । हलदी। चीढ । दूव । कुन्देका वृक्ष । मकरन्दवती-स्त्री० पाटलापुष्प।।पाडरका फूल । मज्जफल-न० फल-विशेष ॥ मातुकल । मकराकार-पु० षड्यन्थ ॥ एक प्रकारकी करञ्ज । मजसमुद्भव-न० शुक्र ॥ वीर्य । मकुर-पु० बकुल ॥ मोलसिरीका पेड़ । मज्जा [न् -पु० अस्थिभध्यस्थस्नेह-विशेष ॥ मकुष्ठ-पु० धान्यभेद + वनमुद्ग ।। वनमूग अर्थात् मज्जा अर्थात् हड्डीके भीतरकी चिकनै । मज्जा-स्त्री." मकुष्ठक-पु. मज्जाज-पु० भूमिजगुग्गुलु ॥ भूमिजगूगल । मकूलक-पु० दन्तीवृक्ष ।। दन्तीका पेड । मज्जासार-पु० जातीफल || जायफल । मक्कुल-न. शिलाजतु || शिलाजीत । मञ्जर-न० मुक्ता । तिलक वृक्ष ॥ मोती । तिलक, ० खटिका । पुष्पवृक्ष । मखान-न. खाधबीजभेद ।। मखाना। मजरी-स्त्री. मुक्ता । तिलकवृक्ष । तुलस!॥ मोती। मगधा-स्त्री पिप्पली ॥ वापर । तिलकवृक्ष । तुलसी । मगधोद्भवा-स्त्री० पिप्पली । पीपल । मञ्जरीनम्र-पु० वेतसवृक्ष || वैतका पेड । मघी-स्त्री० धान्यभद ।। मञ्जिफला-त्री० कदली ॥ केला । मंगलच्छाय-पु. प्लक्षवृक्ष ।। पाखरका पेड । मनिष्ठा-स्त्री० स्वनामख्यात रक्तवर्ण लता।मजीट। मंगलप्रदा-स्त्री० हरिद्रा ॥ हलदी । मंगला-स्त्री० शुक्लदूर्वा । करञ्जभेद । हरिद्रा । नील मड़क-पु० शस्यभेद ॥ मडुआ । दूर्वा॥ सफेदब एक प्रकारका करञ्ज । हलदी । मणि- ० स्त्रीमुक्तादि । मेदाय । योन्यग्रभाग। मणिबन्ध ॥ मोती, रत्न इत्यादि ॥ लिङ्गका अ. मंगलागुरु-न० अगुरु-विशेष ॥ मंगलागर । गला भाग। योनिका अगला भाग। हाथका गट्टा मंगल्य-न० दधि । चन्दन । मंगल्यागुरु । स्वर्ण। तथा कबजा। सिन्दूर ।। दही । चन्दन । मंगल्यागर । सोना । मणिच्छिद्रा-स्त्री० मेदानामकौषधी !ऋषभौषधि ॥ सिन्दूर । मेदा औषधी । ऋषभक औषधी । मंगल्य-पु० त्रायमाणा । अश्वत्थ । बिल्ल । मसूरक। मणिबन्ध-पु. "प्रकोष्ठपाण्योः सन्धिस्थान हाथका जीवक । नारिंकले । कपित्थ । रीठाकरञ्ज ।। गट्टा । त्रायमान || पीपलका पेड । बेलका पेड । मसूर मणिमन्थ-न० सैन्धवलवण ॥ संधानोन । अन्न । जीवक । नारियलका पेड। कैथलका पेड! मणिराग-न० हिंगुल ॥ सिङ्गरफ। रीठाकरञ्ज। मणिवीज-पु० दाडिमवृक्ष ।। अनारका पेड । मंगल्यक-पु० मसूर ॥मसूर । मणीचक-न० चन्द्रवर्णरूप्य ॥ चन्द्रवर्णचांदी । मंगल्यकुसुमा-स्त्री० शंखपुष्पी ॥ शंखाहूली । मण्टपी-स्त्री० क्षुद्रोपादकी ॥ छोटा पोईका शाक । मंगल्यनामधेया-स्त्री० जीवंत।डोडीका शाक । मण्ड-न० पु. अन्नादिना मन्नरस || माड । मंगल्या-स्त्री० मल्लिकागन्धयुक्तागुरु । शमीवृक्ष । मण्ड-पु० एरण्डवृक्ष । शाकभेद ॥ भक्तादिभव रस। अधःपुष्पी,। मिसी । शुक्लबचा । गोरोचना । प्रि.अण्डका पेड । एक प्रकारका शाक । भातका माड । यंगु | शंखपुष्पी । माषपर्णी । जीवन्ती । ऋद्धि । मण्डया-स्त्री. निष्पावी ॥ सेम । वचा । हरिद्रा । चीडा दूर्वा ॥ मल्लिकाके फूलों मण्डलक-न० कुष्टरोगभेद ॥ मण्डुलेकोढ मंजूषा-स्त्री० " -पु० नीली दूब ।
औषधिकोष। (१२९) अलसी । शीय भाषा । । मण्डलपत्रिका-स्त्री० रक्त पुनर्नवा गदहपुर्ना । मदान्ध-पु० सप्तच्छदवृक्ष ॥ छतिवन, सतोना। मण्डली (न् )-पु० वटवृक्ष ।। वडका पेड । मदगन्धा-स्त्री० मदिरा । अतसी ॥ मदिरा । मण्डली-स्त्री० दवा ।। दूवघास । मण्डा-स्त्री० मदिरा । आमलंकी ।। सुरा ! आमला। मदनी-त्री० पूतिका ॥ पोईका शाक । मण्डक-पु० श्येनाक ।। शोनापाठा । मदन, पु० धुस्तूर । खदिरवृक्ष । अंकोटवृक्ष । मण्डूकपर्ण-पु० श्योनाकवृक्ष । श्योनाकभेद॥शोना- मदनक. बकुलवृक्ष । सिक्यकं । स्वनामख्यात पाठा । दूसरा शोनापाठा । वृक्ष ॥ धतूरा । खैरका वृक्ष । ढेरावृक्ष मौलसि- मण्डूकपर्णी-त्री० मञ्जिष्टा । आदित्यभक्ता। ओषधि रीका पेड । मोम । भैनफलवृक्ष । विशेष ।। मजीठ । हुरहुर, हुलहुल । मण्ड• मदना-स्त्री० मुरा ॥ मदिरा । कपानी, ब्रह्ममण्डकी । मदनायक-पु० कोद्रव || कोदोधान । मण्डूक माता ( ऋ)-त्री० ब्राह्मी ॥ ब्रह्मीवास। मदनांकुश-पु० लिंग || लिंग । मण्डूका-स्त्री. मञ्जिष्ठा । मजीठ । मदनायुध-पु० योनि || भग । मण्डूकी-स्त्री० मण्डकपर्णी । आदित्यभक्ता । मदनायुष-पु. कामवृद्धिक्षुप ॥ कामज कणीटदे. ब्राह्मी ॥ मण्डूकनानी, ब्रह्ममण्डूकी। हुलहुल. वृक्ष । ब्रह्मोवास । मदनालय-पु० योनि ॥ भग । मण्डूर-पु० न० लोहमल ॥ लोहेका भैल मदनी-स्त्री० कस्तूरी । अतिमुक्तकपुष्पवृक्ष । मदिरा॥ मति-न० शाकभेद । कस्तूरी । अतिमुक्तकपुष्पवृक्ष । सुरा । मतिदा-स्त्री. ज्योतिष्मती । शिमृडीक्षुप || माल मदनेच्छाफल-पु. बद्धरसाल ॥ कलमी आम । कांगुनी । चङ्गोनि, चौणी देशभिन्नभाषा । मञ्जिनी-स्त्री. शतमूली || शतावर । मत्कुणारि-पु. इन्द्राशन ॥ भङ्ग । मदयन्तिका-स्त्री० मल्लिका ।। मल्लिका । मत्त-पु० धुस्तूर ।। धत्तरा । मदयन्ती-स्त्री० माल्लका । मलिकाभेद ॥ मोतिया। मत्ता-स्त्री० मदिरा ॥ सुरा, दारु, शराप । मत्स्यगन्धा-स्त्री० लाङ्गली । हपुषा। मत्स्याक्षी ॥ मदयित्नु-न० मद्य ॥ मदिरा । जलपीपर । हाऊबेर । मछेछी। मदशाक-पु. उपोदकी ।' पोईका शाक । मत्स्यण्डिका-स्त्री० शर्करा-विशेष ॥ मिश्री। मदसार-पु. तूलवृक्ष ॥ सहतूत' पेड ।। मत्स्यण्डी-स्त्री ० खण्ड-विकार । मत्स्याण्डका ॥राब। मदहस्तिनी-स्त्री० महाकरञ्ज ॥ बड़ी करञ्ज । मदहेतु-पु० धातकी ॥ धायके फूल । मत्स्यपित्ता-स्त्री० कटुरोहिणी ॥ कुटकी । |मदाढय-पु० तालवृक्ष | ताडका पेड़ । मत्स्यविन्ना-स्त्री." मदाढया-स्त्री० लोहितझिण्टी ॥ लोहितकटसैरया॥ मत्स्याङ्गी-स्त्री० हिलमोचिका ॥ हुरहुरशाक । मदातङ्क-पु. मद्यपानजनितरोग ॥ मदिराक पीने- मत्स्यादनी--स्त्री० जलपिप्पली ।। जलपीपर । से जो रोग उत्पन्न होता है। मत्स्याक्षी-स्त्री० स्वनामख्यात शाक । सोमलता । मदात्यय-पु० ब्राह्मी । गण्डदूवी । हिलमोचिका ॥ मछेछी- मदाह्व-पु० कस्तूरी || कस्तूरी । ओषधी । सोमलता । ब्रह्मी घास । गाँडरदूब । मदिर-पु० रक्तखदिर वृक्ष ।। लाल खैरका पेड । हुलहुलशाक । मदिरा-स्त्री० मादकद्रव्य-विशेष ॥ मद्य, सुरा, मर्थन-पु० गणकारिकावृक्ष । अरणी। शराब । मथित-न० निर्जलघोल॥विना जलका महा,छाछ। मदिरासख-पु० आम्रवृक्ष ॥ आम्रका पेड । मद-धु० कस्तूरी । मद्य ॥ कस्तूरी.। मदिरा । मदिष्ठा-स्त्री० मदिरां ॥ मद्य । वेला । मिश्री । " ( १३०) आयुर्वेदीय- भाषा । । । o मदोत्कटा-स्त्री." पु. नारिकेल–विशेष ॥ मधुनारिकेरिकः मद्य-न० मदिरा ॥ सुरा। एरनारिकेल कोंकणदेशकी मधुनारिकेलः भाषा । मौआनारियल कुत्र. मद्यद्रुम-पु० माडवृक्ष ॥ माडीवन कोकणदेशीय मधुनालिकेरिक चित् भापा। मधुनी-स्त्री० क्षुप-विशेष ॥धृतमण्डा । मद्यपंक-पु० सुराकल्क ॥ जगल । मद्यपुष्पा-स्त्री० धातकी ॥ धायके फूल । मधुणिका-स्त्री० गम्भारी । नीलीवृक्ष । वराह . मद्यवासिनी-स्त्री. धातकी ।। धायके फूल । क्रान्ता । गुडूची । सुदर्शना ॥ कम्भारी । नीलका मद्यबीज-न किण्व ॥ वाखरवणभाष । पेड । वराहक्रान्ता । गिलोय । सुर्दशना । मद्यामोद-पु० बकुलवृक्ष ॥ मोलसिरीका पेड । मधुपर्णी-स्त्री० गुडूची । गम्भारी । नीली । मधु. मधु-न० स्वनामख्यात द्रव्य । मद्य॥ सहत ।मदिरा। बीजपूर । गिलोय । गम्भारी । खुमेर । नीम मधु-पु. मधुद्रुम । अशोकवृक्ष । यष्टिम धु ॥ मौआ का पेड । चकोतरी। वृक्ष । अशोकवृक्ष । मूलहटी । मधुपाका-त्री षड्भुजा । खरभुजा । मधु-त्री० जीवन्तीवृक्ष ॥ जीवन्तीवृक्ष । मधुपालिका-स्त्री० गम्भारी ॥ खमेर ! मधुक-न० यष्टिमधु। त्रपु।। मुलहटी। राङ्ग। मधुपालु-पु. महापीलु ॥ बडापीलु । मधुक-पु० यष्टयाह्न । मुलहटी। मधुपुष्प-पु० मधुद्रुम । शिरीषवृक्ष । अशोकवृक्ष । मधुकर-पु० भृङ्गराजवृक्ष || भाङ्गरावृक्ष । बकुलवृक्ष ।। महुवेका पेड । सिरसका पेड। अशोक- मधु जम्बीर-विशेष । मधु- मधुकर्कटिका-स्त्री का पड । मौलसिरीका वृक्ष । मधुकर्कटी-स्त्री० खरिका। चकोतरा । मीठी खजर। मधुपुप्पा-स्त्री० दन्तीवृक्ष । नागदन्तवृिक्ष ॥ दन्ती. का पेड । हाथीशुण्डावृक्ष । मधुका-स्त्री० यष्टिमधु । कृष्णवर्ण कंगुनी ॥ मुल. हटी । काली कंगुनी । मधुप्रिय-पु० भूमिजम्बु ॥ भूईजामुन । मधुकुक्कुटिका, मधुकुक्कुटी-स्त्री० जम्बीर विशेष॥ मधुफल-पु० मधुनारिकेल । विकंकतवृक्ष॥ मधुजात एक प्रकारका नींबू । नारियल । कण्टाई-विकंकतवृक्ष । मधुकूष्माण्डी-स्त्री. पिण्डकर्कटी ॥ विलायती पेठा। मधुफला--स्त्री०. षड्भुजा । कपिलद्राक्षा ॥ खजर. मधुखर्ज़रिका-स्त्री. मधुखज्जरी, खजूर-विशेषः।। भूजा । किसमिस । एक प्रकारकी मघुफलिका-स्त्री. मधुखर्जरिका ॥ मोटी खजूर । मधुगृञ्जन-पु० शोभाञ्जन ॥ सैजिनेका पेड । मधुवहुला-स्त्री० वासन्तीलता ॥ वसंतीलता । मधुज-न० सिक्थक ॥ मोम । मधुमजा (न् )-पु० आखोटवृक्ष ॥ अखरोटका मधुजम्बीर-पु० मधुजम्बीर ।। मीठा नींबू । पेड। मधुजा-स्त्री० मधुजात शर्करा ॥ मधुर चीनी । मधुमती-स्त्री. काश्मरीवृक्ष । महाकरञ्ज ।। कुम्मेर । मधुतृण-न० पु० इक्षु ॥ ईख । मधुत्रय-पु० मधुरत्रय ।। चीनी, मधु, घृत । मधुमल्ली-स्त्री० मालतीपुष्पलता ॥ मालतीपुष्पलता । मधुदूत-पु० आम्रवृक्ष ।। आमका पेड । मधुमूल-न. आलुक-विशेष ।। मधुआलु । मधुदूती-स्त्री० पाटलावृक्ष ॥ पाडरका पेड । मधुमाध्वीक-न० मद्य ॥ मदिरा । मधुद्रव-पु. रक्तशिग्रु ।। लाल सैजिन । मधुयष्टि-स्त्री० इक्षु ॥ ईख मधुद्रुम-पु० 'मधूकवृक्ष ।। महुआका पेड । मधुयष्टिका-स्त्री० यष्टिमधु ॥ मुलहठी । मधुधातु-पु० माक्षिक | सोनमाखी । मधुयष्टी-स्त्री." मधुधूलि-स्त्री० खण्ड ।। खांड । मधुर-न० रङ्ग । विष || राङ्ग । विष । खजर। बडी करञ्ज।
औषधिकोष। ( १३१) मधुर--पु० मिष्टरस । जीवक । रक्ताशत्रु । राजान । मधुशाख-पु० मधुष्ठील ॥ मौआवृक्ष । रक्तेक्षु । गुड । शालिधान्य || मीठा रस । जीव. मधुशिगू-पु. रक्तशोभाञ्जन वृक्ष ॥ लालसँजिने. कौषधी । लाल सैंजिनेका पेड । राज आम । का पेड़ । लाल ईख । गुड । शालिधान । मधुशेप-न० सिक्थक || मोम | मधुरक-पु. जीवकवृक्ष ॥ जीवक ओषधी । मधुश्रेणी-त्री० मूळ ॥ चुरनहार । मधुरजम्बीर-पु० मधुजम्बीर ॥ मीठा नींबू । मधुश्वासा-स्त्री० जीवन्तीवृक्ष || जीवरती । मधुरत्वच-पु० धववृक्ष ॥ धोवृक्ष । मधुष्ठील-पु० मधूकवृक्ष ॥ महुवैका पेड । मधुरत्रय-न० सितामाक्षिकसपीषि ॥ खांड चीनी १ मधुसिक्थक-पु० स्थावरविषभेद । मधु सहत २ वृत-घी ३ । मधुसूदनी-स्त्री० पालयशाक ॥ पालगका शाक । मधुरत्रिफला-स्त्री० द्राक्षा, गम्भारीफल, खजरी ॥ मधुम्रव-पु० मधूकवृक्ष । मोरटलता ॥ महुवेका पेड। क्षीरमोरट । दाख । कुम्भेरका फल । खजूर । मधुस्रवा-स्त्री० मधुयष्टिका । जीवन्ती । मूर्वा । मधुरफल-पु० राजबदर ॥ राजबेर, पोंडावर । हंसपदी । मुलहठी । जीवन्ती । चुरनहार । ला. मधुरवल्लो-स्त्री० मधूबीजपूर ॥ नीटा बिजोरा । ल रंगका लज्जालु। मधुरस-पु. इक्षु । ताल ।। ईख । ताडका पेड़ । मधुरसा-स्त्री० मूळ । द्राक्षा । दुग्धिका । गम्भारी॥ मधुरवाः (स ) पु० मधूकवृक्ष ।। मौआवृक्ष । मधुक्षीर-पु. खजूंर वृक्ष ॥ खजूरका पेड । चुरनहार । दाख । दूधिया । कुम्भर । मधुरस्रवा-स्त्री० पिण्डखजूरी ॥ पिण्डखजूर । मधूक-न० यष्टीमधु ॥ मुलहटी । मधुरा-स्त्री० शतपुष्पा । मधुकर्कटिका । मेदा । मधु मधूच्छिष्ट-न० सिक्थक | मोम । मधूक-पु० स्वनामख्यात वृक्ष ।। महुआवृक्ष । यष्टिका । काकोली । शतावरी ।। बृहजविन्ती । पालयशाक । मधुरिका । कपिलद्राक्षा ॥ सौंफा मधूत्थ-न. मधु ककाडी, चकोतरा। मेदा औषधि।मुलहठी । मधुत्थित- न. काकोली । शतावर । बडी जीवन्ती । पालकका • जलजातमधूक । पर्वतजात मधूकवृक्ष । मधूल-पु० जलमहुआ । पहाडी महुआ । शाक । सोआ भरे रङ्गकी किसमिस । मधूलक-पु० जलजमधूक !/ जलमहुआ । मधुराम्लक-पु० आम्रातक. ॥ अम्बाडा । मधूलिका-स्त्री० मूर्वा | चुरनहार मधुराम्लफल-पु० रेफल ॥ आलू बुखारा । मधूली-स्त्री. मधुकर्कटी । आम्र । यष्टिमधु । गो- मधुरालाबुनी-स्त्री० राजालाबु ॥ मीठी तोम्बी । धूम-विशेष ॥ मधकाकडी । आम । मुलहठी । मधुरिका-स्त्री० मिश्रया । शतपुष्पा ॥ सोआ ।सौंफ। एक प्रकारके गेहूँ। मधुरेणु-पु० कटभीवृक्ष । कटभीवृक्ष । मध्यगन्ध-पु. आम्रवृक्ष ॥ आमका पेड । मधुल-न० मद्य ॥ मदिरा । मध्यन्दिन-पु. बन्धूकवृक्ष || दुपहरियाका वृक्ष । मधुलग्न-पु० रक्तशोभाञ्जन ॥ लाल सैजिनका पेड़ । मध्यपञ्चमूलक-न० मध्यमपञ्चमूल ॥ खिरैटी, मधुलता-स्त्री० शूलीतृण ॥ शूली घास । साँठ, अण्ड, मुगवना, मषवन । मधुलिका-स्त्री० राजिका ॥ राई । मध्ययव-पु० षट् श्वेतसर्षपपरिमाण ॥ ६ सफेद स. मधुवल्लो-स्त्री० यष्टीमधु ॥ मुलहठी । रस परिमाण । मधुबीज-पु० दाडिम ॥ अनार । मध्वालु-न. आलुविशष ॥ महुआलु । मधुबीजपूर-पु० मधुकर्कटिका || मीठा बिजोरा । मध्वालुक-न० चकोतरा । मध्वासव-पु० मधूकपुष्पकृत मद्य ।। महुवेक फूलों- मधुशर्करा-स्त्री० मधुजातशर्करा ॥ सहतकी वनी- से बनाया हुआ मधु। हुई चीनी । मध्विजा-स्त्री० मदिरा ॥ सराव ।
(१३२) आयुर्वेदीय- ॥ शिस्त्रा। मन-पु. जटामांसी ।। बालछड, जटामांसी । मयष्टक-पु० भनःशिला-पु. मनःशिला || मनशिल, मैनशिल । मयुष्टक-पु. " मनःशिला-स्त्री० रक्तवर्ण धातु-विशेष ॥ मनशिला मयूर-पु. मयूरशिखाक्षप ।अपामार्ग । अजमोदा ।। मोरशिखा । चिरचिरा । अजमोद । मनाकर-न० मङ्गल्या ॥ मंगल्यागर। मनु-त्री० पक्का ।। असवरग । मयूरक-न०-अञ्जन-विशेष । तूतिया । मनोगुप्ता-स्त्री. मनःशिला ॥ मैनशिल मयूरक-पु० अपामार्ग । तुत्थक । मयूरशिखा ।। मनोजत्रा-स्त्री. अग्निजिह्वावृक्ष ॥ करियारीवृक्ष। चिरचिटा । तूतिया । मोरशिग्वा । मोजवृद्धि-त्री० कामवृद्धिक्षुप ॥ कामज कर्णाट मधूरग्रीवक-न ० तुत्य । ततिया । देशकी भाषा । मयूरचूड-न० स्थौणयक ॥ थुनेर । मनोज्ञ-न० सरल || धूपसरला । मयूरचडा-स्त्री० मयूरशिखा ॥ मोराशिखा । मनोज्ञा-स्त्री. मनःशिला । आवर्तकी । बन्ध्याक- मचूरजङ्घ-पु० श्योनक ॥ सोनापाटा । कोटकी । स्थूलजीरक । मदिरा । जाती ॥मनः- मयूरजटा-स्त्री० अपामार्ग ॥ चिरचिटा । शिल । भगवतवल्ली कोकणे प्रतिद्धा बनककोडा। मयूरतुत्थ-न• तुत्थ ॥ तातया । बडाजीरा । सुरा । चमेली । मयूराविदला-त्री० • अम्बष्ठा ।। मोइया । मनोरमा-श्री गोरोचना ॥ गौलोचन: मयूरशिखा-श्री स्वनामख्यातक्षुप-वशेष ॥ मोरे. मनोहर-न० सुवर्ण ॥ सोना। मनोहर-पु० कुन्दपुष्पवृक्ष ॥ कुंदवृक्ष । मयूरिका-स्त्री० अम्बष्ठा ॥ मोइयावृक्ष । मनोहरा-स्त्री०जाती । स्वर्णयूथी ॥ चनेली । सुन- मरकत-न० हारत्वर्णमणि-विशेष॥मरकतमणि । ही जुही। पन्ना। मनोहा-स्त्री० मनःशिला ॥ मनशिल । मरकतपत्री-स्त्री० पाचीलता ॥ पाची । मन्थज-न. नवनीत ।। नौनी, मक्खन । मरण-न० वत्सनाभ ॥ वच्छनाम विष । मन्था-स्त्री० मेयिका ॥ मेथी। मराकाली-त्री० वृश्चिकाली ॥ वृश्चिकाली । मन्थान-पु० आरग्वध, ॥ अमलतास । मरिच-न० स्वनामख्यात । कटुद्रव्य । ककोलक ॥ माथानक-पु. तृण-विशेष ॥ मन्थानक तृण । गालामरच । कालीमिरच । शतिलचीनी । मन्दट-पु०पारिभद्र वृक्ष ॥ फरहद । मरिच-पु० मरुवकवृक्ष || मरुआवृक्ष । मन्दर-पु." मरिचपत्रक-पु० सरलवृक्ष ।। सरलका पेड । मन्दाग्नि पु० कफद्वारा स्वल्प जठामि ॥ अग्नि- मरचि-न० मरिच, ॥ कालिमिरच । मन्द रोग । मर-पु० मरुवकवृक्ष, ।। मरुआवृक्ष । मन्दार-वृ० पारिभद्र वृक्ष । अर्कवृक्ष । श्वेतार्क वृक्ष। मरुज-पु० नखांनामक गन्धद्रव्य ।। नखी । स्वनामख्यातवृक्ष ।। फ. हद । आककापेड । स. मरजा-स्त्री० मृगरु ॥ संधी । फदआक । मन्दारवृक्ष । नरुत्-पु० घण्टापाटली वृक्ष ॥ सोखावृक्ष । मन्मथ-पु० कपित्थवृक्ष ॥ कैथका पेड । मरुत्-न० ग्रन्थिपर्ण । गटिवन । मन्मथफला-स्त्री० सुरभिफल ॥ खोवानी वंग- मरुत्-स्त्री० पृक्का । असवरग । भाषा। मरुत-पु० मरुवक ॥ मरुआवृक्ष । मन्मथानन्द-पु. महाराजाम्र ॥ उत्तम आम । मरुस्कर-पु०राजमाष ॥ लोविया। मन्मथालय-पु० आम्र ॥ आम । मरुग्रक-पु०मरुवक ॥ अरुआ। मन्युभाग-मण्डूकपर्णी ॥ ब्रह्ममण्डकी । मरुदिष्ट-पु० गुग्गुलु ॥ गूगल । मयष्ठ-पु०वनमुद्र ॥ मोठ । मरुद्भवा- स्त्री ताम्रमूलाक्षुप | खिराई । ॥
औषधिकोष। (१३३) छोटी मूली । मरुद्रुम-पु० विट्खदिर ॥ दुर्गंध युक्त खैर । मलयोद्भव-न. चन्दन । मरुन्माला-स्त्री० पृका ॥ असवरग । मलविनाशिनी-स्त्री० शंखपुष्पी ।। शंखा हुली । मरुभूरुह-पु० करीरवृक्ष ॥ करलिवृक्ष । मलहन्ता [ ऋ]-पु. शाल्मलीकन्द ॥ सेमरकी मरुव-पु० वृक्ष-विशेष । मदनवृक्ष । झिण्टी । स्व. मूली । ल्पपत्रतुलसी ॥ मरुआवृक्ष । मैनफलवृक्ष । पिया- मलहर-न. जयपालवीज ॥ जमालगोटा । वासां । छोटे पत्तेकी तुलसी । मला-स्त्री० भूम्यामल की || मुहं आमला । मरुवक पु०" मलारि-पु० सर्वक्षार ॥ साबुन । मरुसम्भव-न० चाणक्यमूलक ॥ एक प्रकारकी मालिन-न० टङ्कग । घोल ॥ सुहागा । धोल । मलोमस-न० लौह । पुष्पकातीस ॥ लोहा । पु- मरुसम्भव-स्त्री० महेन्द्रवारुणी । क्षुद्रदुरालभा ॥ घरकीस । बडीइन्द्रायण । छोटाधमासा । मल्लज-न० मरिच ॥ काली मिरच । मरुस्था-स्त्री० क्षुद्रदुरालभा ॥ छोटा धमासा । मल्ला-स्त्री० पत्रवल्ली । माल्लका ॥ पत्रवल्ली,पलासी मरुक-पु० शठी ॥ कचुर । मद्रजटा, पान | मल्लिकापुष्पवृक्ष । मरूद्भवा-स्त्री० कापाती । यवास । दुष्खदिर ।। मल्लि कपास । जबासा । दुर्गधखैर । मल्लिका- स्त्री० स्वनामख्यात पुष्पवृक्ष । मोति. मर्कट-पु. स्थावर-विशेष । मर्कटतिन्दुक-पु० कुपीलु ।। मकरतेंदुआ। याभेद । मर्कटपिप्पली-स्त्री. अपामार्ग ॥ चिरचिरा । मल्लिकाख्या-स्त्री० त्रिपुरमालीपुष्प ॥ त्रिपुरमाली मर्कटप्रिय -पु. क्षीरिका ।। खिरनीका पेड । पुष्पवृक्ष । मटशीर्ष-न. हिंगुल ॥ हिंगुल । मल्लिकागन्ध-न० मंगलागुरु ॥ मंगलागर । मर्कटास्य-न० ताम्र | ताँबा । मल्लिकापुष्प-पु० कुटजवृक्ष । करुणवृक्ष । स्वनाम. मर्कटी-स्त्री० कपिकच्छु । अपामार्ग । अजमोदा । ख्यात पुष्प ॥ कुडाका वृक्ष ! कन्नानींबू । बेलाके करञ्जभेद ॥ कौंछ । चिरचिरा। अजमोद। एक प्रकारको करञ्ज । मल्लिगन्धि-न० अगुरु ।। अगर । मर्कटेन्दु-पु० काकतिन्दुकवृक्ष । मकरतेंदुआ । मल्लिनी-स्त्री. अतिमुक्तक || अतिमुक्तकपुष्पलता । मर्कर-पु० भृङ्गराज ॥ भङ्गरा । मल्ली-त्री० मल्लिका || मल्लिका । मर्त्यवासिनी-स्त्री. धातकीपुष्प ।। धायके फूल । मशक-पु० क्षुद्ररोग-विशेष !॥ मसाररोग । -न० सन्धिस्थान || जीवस्थान । मशकी- (न्)-पु० उदुम्बरवृक्ष ॥ गूलरका मर्मरी-स्त्री. दारुहरिद्रा ।। दारहलदी । मषीलेख्यदल-पु० श्रीतालवृक्ष । तिाडवृक्ष । मल-पु० न० विष्ठा । किट्ट । कर्पूर । वातपित्तक मसक-पु० क्षुद्ररोग-विशेष ॥ मशकरोग । फ | विष्ठा । कीट । कपूर । वातपितकफ । मसन-न० सोमराजी ॥ बावची । मलन-पु० शाल्मलोकन्द ।। सेमरकी मूली । मसरा-त्री० मसूर ।। मसूरअन्न । मलत्री-स्त्री. नागदमनी ॥ नागदौन । मासिका-स्त्री० शेफालिका || निर्गुण्डीभेद । मलद्रावी (न् )-पु० जयपाल | जमालगोटा । मसीना-स्त्री. अतसी ॥ अलसी । मलपू-स्त्री० काकोदुम्बरिका ॥ कटमर । मसूर-पु० स्वनामख्यात धान्य ॥ मसूरअन्न । मल मेदिनी-स्त्री० कटुकां ।। कुटकी । मसुर-पु० मलयज-पु० न० चन्दन ॥ चन्दन । मलया-स्त्री० त्रिवृता ।। निसोथ । मसूरविदला-स्त्री • कृष्णत्रिवृत् । श्यामालता ॥ मलयू-स्त्री. मलयू ॥ कठूमर । काला निसोथ । कालोसर, करिआवासाऊ । मर्म (न् पेड। मसुरा-स्त्री."
आयुर्वेदीय- घी! मन्तुलुङ्ग । फरेद । मसूरा-स्त्रीय मसूर ॥ मसूर । महागन्ध-पु० कुटजवृक्ष । जलवेतस ॥ कुडाका मसूरिका-स्त्री. स्वनामख्यात रोग ॥ माता, वसन्त पेड । जलवत । रोग। महागन्धा-स्त्री० नागवला । केविकापुष्प ॥ गं. मसूरी-स्त्री० त्रिवृत् । रक्तत्रिवृत् । मसूरिकारोग ॥ गेरन । केवरेका फूल । पनिलर । स्यामपनिलर । मातारोग । महागुल्मा-स्त्री० सोमवल्लो ॥ सोमलता । मसणा-स्त्री. उमा || अलसी,मसीना । महागुहा -स्त्रो० पृश्निपर्णी ॥ पिठवन । मस्क-लेह-पु० मस्तिष्क ॥ माथेमें एक प्रकारका महागाधूम-पु० बृहत्गोधूम ॥ बडे गेहूं । महाधूणा-स्त्री० मदिरा ।। तुरा । मन्तको-स्त्री० गुहाबदरी फलशस्य ।। रूमीमस्तकी । महाघो पा-स्त्री० कर्कटशृङ्गी ॥ काकडा शिङ्गी । मस्तदारु-न. देवदारु ॥ देवदारु । महाङ्ग-पु० गोक्षुरक । रक्तचित्रक . ॥ गोग्गुरू । मस्तिष्क-न० मस्तकस्थ घृतवत् स्नेहद्रव्य ॥ माथे लाल चीता। का घी, मगज । महाचञ्चु-पु० शाक-विशेष · । बडा चञ्चुशाक । मातु-न० दधिभवमण्ड ॥ दहीका पानी । महाच्छद-पु० देवताडवृक्ष । देवताड । महाच्छाय-पु० वटवृक्ष ॥ वडका पेड । पु० मस्तिष्क ॥ मगज । मत्तुलुङ्गका महाच्छिद्रा-स्त्री. महामेदा ॥ महामेदा औषधी । महाजटा-स्त्री० रुद्रजटा ॥ शंकरजटा । महती-स्त्री० बृहती । वार्ताकी ॥ कटाई बैगन । महाजम्बू-स्त्री० बृहज्जम्बू ॥ वडी जामुनका वृक्ष, महर्षभी-स्त्री० कपिकच्छु ।। कौंछ । महा-स्त्री० नागबला ॥ गुलसकरी । महाजम्बू-स्त्री." महाकण्टकिनी-स्त्री. विदरवृक्ष ॥ विश्वसारक । महाजाति-त्री० वासन्तीलता ॥ वसन्तीपुष्पलता । महाकन्द-पु० रसोन । मूलक । चाणक्यमूलक । महाजाली-स्त्री० पीतवर्णघोषा । राजकोशातकी । रक्तलशुन । राजपलाण्डु । लहशन। मूली। छोटी पीले फूलकी तोरई । वियातोरई । मूली । लाललहशन । लालप्याज । महाज्योतिष्मती-स्त्री० लताविशेष ॥बडी मालकां- महाकपित्थ-पु० बिल्ववृक्ष ॥ वेलकापेड । गुनी। महाकरञ्ज-पु० करञ्ज-विशेष । बडीकरज। महाढय-पु०कदम्ब ॥ कदम । महाकर्णिकार-पु० आरग्वध ॥ अमलतास । महातरु-पु० स्नुहोवृक्ष ॥ थूहरका पेड । महाकाल-पुं० लता-विशेष ॥ महाकाललता । महाताली-स्त्री० आवर्तकी लता।भगवतवल्ली कोका णीभाषा । महाकुमुदा, स्त्री० काश्मरी ॥ कुम्भेर । महातिक्त-पु०महानिम्ब ॥ बडा नीम अर्थात् बका. महाकुमुदिका- यननीम। मह कुम्भी-स्त्री०कटफल || कायफर । महातिका-स्त्री० पाठा। यवतिका॥ पाठ। यवेची । महाकुष्ठ-न० बृहत्कुष्ठरोग ॥ सात प्रकारका बडा महातीक्षणा-स्त्री० भल्लातकवृक्ष ॥ भिलावेका पेड। महातुम्बी-स्त्री. राजालाबू ।। मीठी तोम्बी । महाकोशफला-स्त्री० देवदाली लता ॥ सौनया । महातेजः ( स्)-क्की ० पारद ॥ पारा । महाकोशातकी-स्त्री० हस्तिघोषा ॥ बडी तोरई। महादारु-क्लो० देवदास्वृक्ष । देवदारु । नेनुआ तारेई। महादूषक-पु. शालिधान्यभेद ॥ एक प्रकारक महागद-पु० ज्वर ।। ज्वर, बुखार । शालिधान । महागन्ध-नव्हरिचन्दन । गन्धबोल ॥ हरिचन्दन। महाद्रावक-पु० प्लीहन्न औषध-विशेष ।। प्लीहाको बोल। नाश करनेवाली औषधी । कोट ।
औषधिकोष। (१३५) मेदा। सोना । , महाद्रुम-पु. अश्वत्थवृक्ष ।। पीपलेका पेड। महाभीता-स्त्री० लज्जालुवृक्ष || छुईमुई । महाद्रेका-स्त्री० महानिम्बवृक्ष ॥ बकायननीम । महाभृङ्ग-पु. नीलभंगराज ।। नील भंगरा। महाद्रोणा-स्त्री० वृक्ष-विशेष ॥ बडी द्रोणपुष्पी, महामाष-पु० राजमाष ॥ लोविया । बडा गोमा। महामुनि-न० धान्याक ॥ धनिया । महाद्रोणी-स्त्री० महामूल-पु० राजपण्लाण्डु ॥ राजप्याज । महाधन-क्ली० स्वर्ण । सिहक ॥ सोनाशिलारस । महामेद-पु. अष्टवर्गप्रसिद्ध औषधी-विशेष ॥ महा. महाधातु-पु० सुवर्ण ।। सोना । महानन्दा-स्त्री० सुरा । आरामशीतला ।। मद्य । महामेदा-स्त्री. " आरामशीतला। महाम्ल-न० तिन्तिडीक ॥ विषाविल । महानल-पु. देवनल ।। बडा नरसल ! महारजत-न० सुवर्ण । धत्तूर ॥ सोना । धत्तूरा । महानाडी-स्त्री० कण्डरा ॥ कण्डरा । महारजन-न० कुसुम्भपुष्प । स्वर्ण ॥कसूमके फूल। महानिम्ब-पु० निम्बवृक्ष-विशेष ।। बकायननोम । महानील-पु. भृङ्गराज ।। भङ्गरा । महारम्भ-न० गढलवण ॥ सामरनोन | महानीला-स्त्री० महाजम्बू ।। बडी जामुन । महारस-न० काञ्जिका ॥ कांजी । महानीली-स्त्री० नीलापराजिता । वृहन्नीली ॥ नीली महारस-पु० खजूरवृक्ष । कशेरु । कोषकारनामे- कोयल । बडा नीलका पेड । । क्षु । इक्षु । पारद । खजूरका पड । 'कशेरु । महापञ्चमूल-न० वृहत्पञ्चमूल । "बिल्योऽनिमन्थः सागरी गन्ने । ईख । पारा। इयोनाकः काश्मयः पाटला तथा' बेल, अरणी, महाराजचूत--पु० उत्तम आम्र ॥ मालदये आम | शोनापाटा, कम्भेर, पाढल यह महापञ्चमूल हैं। महाराजद्रुम-पु० आरग्वधवृक्ष। अमलतासका पेड। महापञ्चविष-न० बृहद्विषपञ्चक || शृङ्गी, काल. | महाराजफल-पु० महाराजचूत ।।मालदये आम | कूट, मुस्तक, वत्सनाभ और शंखकर्णी । महाराजाम्रक-पु." महापत्रा-स्त्री० महाजम्बू ।। बडी जामुन । महाराष्ट्री-स्त्री० जलपिप्पली । शाक-विशेष ॥ जल. महापद्म-न० शुक्लपद्म ।। सफेद कमल । पीपर । मण्टी शाक। महापारेवत-न० फलवृक्ष-विशेष ।। बडा पारेवत, महारिष्ट-पु० महानिम्बवृक्ष ।। बकायननीम । द्वापखजूर । महारोग-पु० पापरोग । सो आठ प्रकारका है। जैसे महापिण्डीतक-पु० कृष्णवर्ण महामदनवृक्ष ।। उन्माद १ त्वग्दोष राजयक्ष्मा ३ श्वास ४ मधु- कृष्णवर्ण बैंडा मैनफल। मेह ५ भगन्दर ६ उदर ७ अश्मरी ८ । महापिण्डीतरु-पु० वृक्ष-विशेष । पेडिरा । महार्द्ध-पु. वृक्ष-विशेष ॥ माहाजावृक्ष, महापीलु-पु० पीलुवृक्ष-विशेष ।। बडा पाल । महाक-न. वनाईक ।। वनअदरख । महापुरुषदन्ता-स्त्री० शतावरी ॥ शतावर । महाई-न० श्वतचन्दन । सफेद चन्दन । महापुरुषदन्तिका-स्त्री० महाशतावरी ॥ बडी शता- | महालिकटभी-स्त्री. श्वेतकिणिहीवृक्ष ॥ सफेद किणिहीवृक्ष । महापुष्पा-स्त्री० अपराजिता ॥ कोयल । लोध्र-विशेष ।। पठानीलोध । महाफल-पु० बिल्ववृक्षः॥ बेलका पेड महालोह-न० अयस्कान्त ॥ कान्तलोह । महाफला-स्त्री० इन्द्रवारुणी ॥ इन्द्रायण । महावरा-स्त्री० दूर्वा ॥ दूवघास । महाफेना-स्त्री० डिण्डीर ॥ समुद्रफेन । महावरोह-पु० ह्रस्वप्लक्ष ॥ छोटापाखर । महाबल-न० सीसक ॥ सीसा। महावल्ली-स्त्री० माधवीलता । कढीलता ॥ महाबला-स्त्री० बलाभेद ॥ सहदेई । महावरि-पु० एकवीरवृक्ष ॥ एकवीर । महाभद्रा-स्त्री० काश्मरी । कुम्भेर । महावीरा-स्त्री० क्षीरकाकोली ॥ क्षीरकाकोली । वर । महालोध्र-पु० (१३६) आयुर्वेदीय- Aihar RESENA । पेड। साकन्द । महावीर्य-पु. वाराहीकन्द ॥ गैठी। महासहा-स्त्री० माषपी। अम्लानवृक्ष । कुब्ज. महावी--स्त्री. वनकासी । महाशतावरी ॥ कवृक्ष ।। मपवन । बाणपुष्प । कूजा वृक्ष । वनकपास । बडी शतावर । महासार-पु. दुष्खदिर ॥ दुर्गंधखैर । महाबृहती-स्त्री० वार्ताकी ।। बैंगुन । महासिता-स्त्री० महाशणपुषिका ।। वडी शन- महावृक्ष-पु. स्नुहवृिक्ष । महापीलुवृक्ष । प्लक्षवृक्ष । पुष्धी। बृहद्वृक्ष ॥ थूहरका पेड । बडा पालवृक्ष । पाख - महासुगन्धा-स्त्री० गन्धनानुलीनाम कन्द ।। न रका पेड । बडा पेड कुलकन्द । महान्याधि-पु० महारोग ॥ कोढादिक । महास्कन्धा-स्त्री० जम्बूवृक्ष ।। जामुनका महाव्रण-न० दुष्टव्रण ॥ महास्नायु-पु० कण्डा ।। महानाडी। महाशठ-पु० राजधत्तर ।। राजवत्तरा । महाहिगन्धा-स्त्री० गन्धनाकुली ॥ नाकुलीकन्द । महाशणेपुष्पिका-स्त्री० वृहच्छणपुरी !! बडी | महाह्रस्वा-स्त्री० कपिकच्छु ।। कौंछ । शनपुष्पी । महिला-स्त्री० प्रियंगु । रेणुका ॥ फूलप्रियंगु । महाशतावरी-स्त्री० बृहच्छतावरी ॥ बड़ी शतावर । रेणुका। महाशर-पु० स्थूलशर ॥ मोटा शर। माहकाह्वया-स्त्री प्रियंग ।। फूलप्रियंगु । महाशाक-न० बृहच्छाक-विशेष ॥ महिषकन्द-पु० महाकन्द विशेष ।। शुभालु, मैं महाशाखा-स्त्री० नागबला ।। गंगेरन । महाशालि-पु० स्थूलशालि ॥ बडेधान । महिषवल्ली-स्त्री० लता-विशेष ।। छिरहिहो । महाशीता-स्त्री० शतमूली ॥ शतावर । महिषासुरसम्भव-पु. भूमिजगुग्गुलु ।। भूमिज महाशुक्ति-स्त्री० मुक्तामाता ॥ मोतीकी सीप । गूगल । महाशुभ्र-न० ० रजत ॥ चांदी। महिषाक्ष-पु० गुग्गुलु ।। गूगल । महाशौण्डी-स्त्री० श्वेतकिणिहीवृक्ष ।। सफेद किणही महिषाक्षक-पु. " वृक्ष । महिषी-स्त्री० औषधिभेद । महाशौषिर-पु० मुखरोगान्तर्गत दन्तवेष्टरोग-विशेष। महिषीप्रिया-त्री० शूलीतृण ॥ शूलीघास । महाशौषिरसंज्ञक-पु० " मही-स्त्री० हिलमोचिका ॥ हुलहुलशाक । महाश्यामा-स्त्री० श्यामलता । शिशपाक्ष ॥ का- महीज-न० आर्द्रक || अदरख । लीसर । सीसोका पेड। महीरुह-पु. शाकतरु ॥ शेगुनवृक्ष । महाश्रावणिका-स्त्री० क्षुप-विशेष ॥ बडी गोरख. महेन्द्रकदली-स्त्री० कदलीभेद ॥ एक प्रकारका मुण्डी । महाश्वास-पु० श्वासरोग । बहुतहाँपना । महेन्द्रवारुणी-स्त्री० लता-विशेष ।। बड़ी इन्द्रफला। महाश्वेतघण्टी-स्त्री०महाशणपुष्पिका ।वडीशणपुष्पी। | महरेणा महेरुणा-स्त्री० शल्लकीवृक्ष ॥ शालई वृक्ष। महाश्वेता-स्त्री० महाशणपुष्पिका। श्वेताकिणिहीवृक्ष । महेशबन्धु-पु० श्रीफलवृक्ष ।। बेलका पेड़ । श्वेतापराजिता । मधुजा । क्षीरविदारी ॥ चीनी । महेश्वर-न० स्वर्ण || सोना । बडीशणपुष्पी । सफेदकिणिहीवृक्ष । सफेदकोयल महेश्वरी-स्त्री० अपराजिता । काँस्य । राजरीति।। विदारी। कोयल । कांस । पीतलभेद । महासमङ्गा-स्त्री. वृक्ष-विशेष || कगहिया । महरैण्ड-पु० स्थलैरण्ड । बडा अण्ड । महासर्ज-पु० पनस, । असनवृक्ष :॥ कटहर । महेला-स्त्री० स्थूलैला ॥ बडी इलायची । विजयसर। महोटिका-स्त्री० बृहती ॥ कटाई। महासह पु० कुब्जकवृक्ष ॥ कूजावृक्ष ] महोटी-स्त्री० " .. केला । ॥
औषधिकोष। (१३७) अन्ती। प महोत्पल-न० पद्म ॥ कमल । माचीपत्र-न० सुरपर्ण ॥ माचीपत्री । महोदया-स्त्री० नागबला ॥ गुलसकरी । गंगेरन । माटाम्रक-पु. वृक्ष विशेष । महोदरी-स्त्री० महाशतावरी ॥ वडी शतावर । माटीक-न० देवदारु ॥ देवदार । महोन्नत-पु० तालवृक्ष ॥ ताडका पेड । माड-पु० वृक्ष-विशेष ॥ माडविन । कोकणदेशी. महोरग-न. तगरमूल ॥ तगर । घभाषा। महौषध-न० भूम्याहुल्य । शुण्टी । लशुन । वारा-माढी-स्त्री० दन्तशिरा । हीकन्द । वत्सनाभ । पिप्पली । अतिविषा || माणक-न. कन्द-विशेष || मानकन्द । भुञ्जितरवड़ । सोंठ । लहशन । गेंठी । बच्छ. माणिका-स्त्री. अष्टपलपरिमाण ॥ ६४ तोले । नाभ वित्र पीपला । अतीस । माणिबन्ध-न० सैन्धवलवण ॥ सैंघानोन । महौषधि-स्त्री० दूर्वा । लजालुक्षुप ॥ दूब । लक्षा- माणिमन्थ-न० " माण्डूक-न० अहिफेन ॥ अफीम | महौषधी-स्त्री० श्वेतकण्टकारी ॥ ब्राह्मी । कटुका । मातह-पु० अश्वत्थवृक्ष । पलाशवृक्ष । हस्तिशुण्डा अतिविषा । हिलमौचिका ।। सफेदकटेरी । ब्रह्मी. वृक्ष ।। पीपलका पेड । ढाकका पेड। हाथीशु- घास । कुटकी । अतीस । हुलहुल । ण्डावृक्ष। मक्षवीर्य-पु० प्रियालवृक्ष । चिरोंजीका पेड । मातुल-पु० धत्तूर । ब्रीहिभेद । मदनवृक्ष ॥धतूरा। मांसच्छदा-स्त्री० मांसरोहिणीविशेष ॥ मांसच्छदा । व्रीहिभेद । भैनफलवृक्ष । मांसज मांसतेजः-[स्]-न० मेद: ॥ भेद । माता-(ऋ)-स्त्री० आखुकर्णी । इन्द्रवारुणी । मांसदलन-पु. प्लहिन वृक्ष ॥ रोहेडावृक्ष । जटामांसी । मूसाकानी । इन्द्रायण । वालछड । मांसद्रावी ( 1 )-पु. अम्लवेतस ॥ अम्लत । जटामांसी। मांसपेशी-श्री देहस्थमांसखण्डसमुदाय । मातुलक-पु० धत्तूरवृक्ष ॥ धत्तरेका पेड । मांसफला-स्त्री० वार्ताकी ।। बैंगन । मातुलपुत्रक-पु० धत्तूरफल ॥ धतूरेका फल | मांसमाला-स्त्री. माषपर्णी । मषवन । मातुलानी-स्त्री० कलाय । शण । प्रियंगु । भगा । मांसरोहिणी-स्त्री. सुगन्धिद्रव्य-विशेष ॥ मांस- मटरअन्न । शनका पेड । फूलप्रियंगु । भाङ्ग । रोहिणी । रोहिनी । मातुलुङ्ग-पु. वीजपूर । विजोरानींबु । मांसरोही-त्री० " मातुलुङ्गक-पु० निम्बूक-विशेष ॥ छोलङ्गलेवुवङ्ग- मांसलफला-स्त्री० वृत्ताकी ॥ बैंगुन । भाषा। मांसिनी-स्त्री० जटमांसी ॥ बालछड । मातुलुङ्गा-स्त्री. मधुकुक्कुटी ॥ चकोतरा । मांसी-स्त्री० जटामांसी । कक्कोली । मांसच्छदा ॥ मातुलगिका-स्त्री० वनबीजपूर ॥ विहारीनींबु । जटामांसी । काकोली मांसच्छदा । मातुसिंही-स्त्री० वासक ॥ वासा । माकन्द-पु० आम्रवृक्ष || आमका पेड । |मादन-न० लवङ्ग ॥ लोग । माकन्दी-स्त्री० आमलकी । पीतचन्दन ॥ वृक्ष- मादन-पु० मदनवृक्ष । धत्तुरवृक्ष ।। मैनफलवृक्ष । विशेष । आमला। पीलाचन्दन । माद्राणी। धतूरेका वृक्ष । मागध-पु० शुक्लजीरक ॥ सफेद जीरा । मादनी-स्त्री. विजया । माकन्दी। सम्बिदामञ्जरी।। मागधी-स्त्री० यूथिका । पिप्पली । सूक्ष्मैला।शर्करा॥ भङ्ग । भाद्राणी । गाँजा । जूही । पीपल । छोटी इलायची । चीनी । माद्री-स्त्री. अतिविषा || अतसि । माध्य-न० कुन्दपुष्प ॥ कुन्दके फूल । माधव-पु० मधूकवृश्च । कृष्णमुद्र । महुआवृक्ष । माङ्गल्याहा-स्त्री० त्रायमाणा लता । त्रायमान । कालीमूंग माचिका-स्त्री. अम्बष्ठा ॥ मोइया । माधविका-स्त्री. माधवीलता ॥ माधषीलता । १८ UAE iman 4U मदिरा। पेड। ( १३८) आयुर्वेदीय- माधी-स्त्री० स्वनामख्यातपुष्पलता ! मिसि । मधु. मार्जार-पु० रक्त चित्रक ॥ लाल चीता । शर्करा । मदिर। । तुलसी ॥ माधवीलता ।सोफा मार्जारगन्धा-स्त्री. मुद्गपर्णी ॥ मुगवन । सोआ । मधुसे बनाई हुई चीनीमाद्य । तुलसी मा रगन्धिका-स्त्री." माधवेष्टा-स्त्री०. वाराहकिन्द गेठी । माजरी-स्त्री. मृगनाभि कस्तूरी ॥ माधवोचित-न० कक्कोलक || शीतलचीनी । मार्तण्ड-पु० अर्कवृक्ष ॥ आकका पेड । माधवोद्भव-पु. राजादनी || खिरनी । मार्तण्डवल्लभा-स्त्री० आदित्यभक्ता ॥ हुरहुरवृक्ष । माधुर-न० मल्लिका ।। मल्लिकापुष्पवृक्ष । मार्ष-पु० मारिषशाक ॥ मरसा । माधुरा-स्त्री. मद्य ।। मदिरा । मार्षिक-पु.॥ माध्वक-न० माध्वीक ॥ महुवेके फूलोसे बनाई हुई माल-पु० मालती ॥ मालती । मालक-न स्थलपन ॥ पुण्डारीया । माध्वी-स्त्री ० मद्य । मध्वादिकृतसुरा || मदिरा । मालक-पु. निम्बवृक्ष | नीमका पेड । मदिराभेद । मालती-स्त्री. वनामख्यात पुष्पलता । जाती ज्यो- माध्वीक-न० मधूकपुष्पकृत मद्य । मधु महुवेके स्ना ॥ मालतीपुष्पलता । चमेली । चांदनीका फूलोसे वनाई हुई मदिरा | सहत । माध्वीक फल-पु० मधुनारिकेल || महुवेनारियल । मालतीतीरज-पु० टंकग ।। सुहागा । माध्वीमधुरा-स्त्री० मधुरखपॅरिक । मीठाखजूर । मालतीतीरसम्भव-न० श्वेतटंकण ॥ सफेद मानक-न० पु० माणक ॥ मानकन्द । सुहागा । मानधानिका-स्त्री-कर्कटी | ककडी । मालतीपत्रिका-स्त्री. जातीयत्री।। जावित्री। मानिका-स्त्री० शरावपरिमाण । मद्य ॥ एकसेर । मालतीफल-न० जातीफल ।। जायफलं । मदिरा । मालय-पु० चन्दनवृक्ष || चन्दनका पेड । मानिनी-स्त्री. फलीवृक्ष ॥ फूलाप्रियंगु । मालविका-स्त्री० त्रिवृत् ॥ निसोथ । मायाफल-ज. फलविशेष ।। मायफल || मालसी-स्त्री० केशपुष्टवृक्ष ॥ केशपुष्टावृक्ष । मायिक-न." माला-स्त्री० पृका ।। असवरग । मायु-पु. पित्त ॥ पित्त । मालाकण्ट-पु० अगमार्ग ॥ चिरचिरा । मायूरी-स्त्री० अजमोदा ।। अजमोद । मालाकन्द-पु० मूल-विशेष || मालाकन्द । मार-पु० धत्तूर ॥ धत्तरा । मालाग्रन्थि-पु० मालादूर्वा ।। मालादूव । मारिष-पु० तण्डुलीयशाक-विशेष ॥ मरसशाक । मालातृण-न० भूस्तृण ॥ सुगन्धरौहिस आन्ध्रदेशी- मारुतापह-पु० वरुणवृक्ष ॥ वरनावृक्ष । मार्क-पु० भंगराज || भंगरा। मालातृणक-न० " मार्कण्डिका-स्त्री० लता-विशेष || भुईखखसा ॥ मालादूळ-स्त्री० दूळ-विशष ॥ गठीली दुव । मार्कण्डी-स्त्री० भांर्गी। मार्कण्डिका ॥ भारंगी । मालाब । भुईखखसा । मालारिष्टा-स्त्री० पाचीलता॥पञ्चे देशभिन्न भाषा । मार्कण्डीय-न० भूम्याहुल्य ॥ भुजितरवड देशा- मालालिका-स्त्री० पक्का ॥ असवरग ।। न्तरीयभाषा। मालाली-स्त्री." मार्कर-पु. भृगराज ॥ भंगरा । मार्कव-पु. केशराज ॥ कुकुरभाङ्गरा । मालिका-स्त्री० क्षुमा । सुरा ।। अलसी । मदिरा । मालिनी-स्त्री. अमिशिखावृक्ष । दुरालभा ॥ कलि. मार्ग-पु० कस्तूरी । अपामार्ग कस्तरी। चिरचिर।। हारी । घमासा । मार्जन-पु० लोध्रवृक्ष । श्वेत लोध्र । रक्त लोध ॥ मालुधानी-स्त्री० लताविशेष ॥ लोधका पेड । सफेद लोध । लाल लोध्र । मालूक-पु० कृष्णार्जक ॥ काली तुलसी। यभापा । het Anre ..17.
औषधिकोष। ( १३९) । । मालूर-पु० बिल्ववृक्ष । कपित्थवृक्ष | बेलका पेड । | मिष्टपाक-पु० शर्करारसप कफलादि ॥ मुरब्बा । कैथका पेड। मिष्टानम्बू-स्त्री० निम्बु विशेष ।। मीठा नींबू । मालेया-स्त्री० स्थूलैला || बडी इलायची । मिसि-स्त्री. मधुरिका । जटामांसी । शतपुष्पा । माल्यपुप्प-पु. शणवृक्ष ।। सनका पेड । अजमोदा । उशीरी।सोआ। जटामांसी । सौंफ । माल्यपुष्पिका-स्त्री. शणपुष्पी । इणपुष्पी। अजमोद । छोट काँस । माष-पुक बोहेभेद । परिमाण । विशेष ॥ उडद । मिसी स्त्री." एक माषा परिमाण यह बहुत प्रकारका है ॥ मिहिर-पु० अकंवृक्ष ।। आकका पेड । मागध और सुश्रुत के मतसे पांचरत्तीका है। चरकके मीननेत्रा-स्त्री० गण्डव्या || गाँडरदूब । म तसे ६, ८ रत्तीका है । कालिंग प्रमाणसे ५। मीनाण्डी-स्त्री. शर्करा ॥ चीनी । ७ । ८ रत्तीका है । वैद्यकके मतस १० रत्तीका मीनाक्षा-स्त्री० मस्याक्षी । गण्डदूर्वा ॥ मछेछी। | ज्योतिष स्मृतिके मतसे १२ रत्तीका है। सोमलता । गॉडरदूब । मशकनाम क्षुद्ररोग || मशकरोग । माषक-पु० माषकपरिमाण ॥ १ मासा । मुकन्दक-पु० पलाण्डु:।। प्याज । मुकुन्द-पु. कुन्दुरु । पारद ।। कुन्दुरु लोपान । माषकलाय-पु० माष ।। उडद अन्न । फासी । पारा । मापपर्णी-स्त्री० वनमाष ।। मशवन । मास-पु. माषपरिमाण ॥ १ मासा । मुकुन्दक--पु० पलाण्ड । यष्टिकतीहि ।। प्याज । साठी । मासक-पु. मासन-न० सोमराजी ।। बावची। मुकुन्दु-पु० कुन्दुरु ॥ कुन्दुरु । माहेश्वरी-स्त्री० यवतिक्ता । यबेची। मुकुर-पु० बकुलवृक्ष । मल्लिकापुष्पवृक्ष ॥ मौलसिर रीका पेड । बलका वृक्ष । माक्षिक-न० मधु । धातु--विशेष ॥ सहत । सोना- माखी। रूपामाखी। मुकुष्ट-पु० घनमुद्ग ।। मोठ । माक्षिकज-न शिक्थक॥ मामे । मुकुष्ठक-पु. " मुकूलक-पु० दन्तीवृक्ष ॥ दन्तीवृक्ष । माक्षिकफल-पु० मधुनारिकेल ॥ महुवेनारियल । माक्षीक-न० मधु ।। सहत । मुक्तरसा-स्त्री. राना ॥ रायसन । माक्षाकशकरा-स्त्री. शिताखण्ड ॥ मधुरचीनी । मुक्ता-स्त्री० रास्ता स्वनामप्रसिद्ध शक्तिसम्भूत रत्न। मिन्मिन-त्रि. सानुनासिकवाक्यविशिष्ट । रायसन । सीपका मोती । मिशि-स्त्री० मधुरिका । शतपुष्पा । जटामांसी ॥ मुक्तागार-न० शुक्ति ॥ सपि । सोआ। सौंफ । जटामांसी । बालछड । मिशी-स्त्री० जटामांसी । मधुरिका || जटामांसी। मुक्तापुष्प -पु० कुन्दपुष्पवृक्ष । कुन्दवृक्ष । बालछड । सोआ । मुक्ताप्रसू-स्त्री० शुक्ति ॥ सीप । मिश्र-न० चाणक्यमूलक ॥ छोटी मूली । मुक्ताफल-न० कपूर । लवलीफल । मौक्तिक ॥ मिश्रक-न० औषरलवण ॥ खारी नोन । कपूर । हरपारेवडी । मोती। मिश्रपुष्पिका-स्त्री० भेथिका । मेथी । मुक्तास्फोट-पु० शुक्ति ॥ सीप । मिश्रवर्ण-न० कृष्णागरु ॥ कालअगर । मुक्तास्फोटा-स्त्री० " मिश्रवर्णफला-स्त्री० वार्ताकी । बैंगन । मुक्तिमुक्त-पु० सिहक ॥ शिलारस । मिश्रेया-स्त्री. मधुरिका । शतपुष्पा । सोआसोंफा । मुख-न० शरीरावयव-विशेष ॥ मुख । मिषि-स्त्री. जटामांसी । मधुरिका । शतपुष्पा || मुख-पु. लकुच ॥ बडहर । जटामांसी । सोआ । सौंफ । मुखगन्धक-पु० पलाण्डु ॥ प्याज । मिषिका-स्त्री० जटामांसी ॥ बालछड । जटामांसी मुखदूषण-पु० मुक्तागृह-न." Etaset.it EVEAT SHED (१४०) आयुर्वेदीय- Adic ० मुखदूषिका-स्त्री० मुखजात क्षुद्ररोग-विशेष ॥ मुद्गमोदक-पु० मिष्टान्न-विशेष।।मोतीचूरके लड्डू मुहासे। मुद्र-न० मल्लिकामद || मोगरावृक्ष । मुखधाता-स्त्री. ब्राह्मणयाष्टिका ॥ भारंगी । मुद्गर-पु० कम्मारवृक्ष । पुष्पवृक्ष विशेष ॥ कमर ख मोगरावृक्ष । मुखपूरण-न० गण्डूष ॥ कुल्ला। मुखप्रिय-पु० नारंग || नारंगीका पेड । मुद्दरक-पु० कम्मार ॥ कमरख । मुखभूषण-न० ताम्बूल ॥ पान । मुद्गल-न. रोहिषतृण || रोहिससोधिया । मुखमण्डनक-पु० तिलकवृक्ष | तिलकवृक्ष । मुद्दष्ट-पु. वनमुद्न ॥ मोठ । मुखमोद-पु० शोभाञ्जन ॥ सौजनेका पेड । मुद्गष्टक-पु० " मुखरोग-पु० ओष्ठदन्तमूलदन्तवेष्टादिअंगसप्तकसम्भू- मुनि-पु० प्रियाल वृक्ष । पलाशवृक्ष । दमनकवृक्ष । तरोग-विशेष ॥ मुखरोग ६७ प्रकार । अगस्त्यवृक्ष ॥ चिरोंजीका पेड ॥ ढाकका पह मुखवल्लभ-पु० दाडिमवृक्ष ॥ अनारका पेड । दवनावृक्ष । अगस्तियावृक्ष । मुखवाचिका-स्त्री० अम्बष्ठा ॥ मोईया । मुनिखजूरिका-स्त्री० खजूवृिक्ष भेद् ॥ मुनिख- जूर। मुखवास-पु० गन्धतृण ॥ गंधेजघास ।। मुखशोधन-न० त्वच || दालचीनी । मुनिच्छद-पु० सप्तच्छदवृक्ष । सतिवन । मुखशोधी-(न् )पु. जम्बीर || जम्भीरी नींबू । मुनितरु-पु० मुनिद्रुम || हथियावृक्ष । मुनिद्रुम-पु० श्योनाकवृक्ष । अगस्त्यवृक्ष॥ शोना- मुखमुर-न० तालसुरा ॥ ताडी। पाठा । हाथियावृक्ष । मुखस्राव-पु. लाला || थक, लार, श्लेष्म । मुखार्जक-पु० अर्जक ॥ बरीभेद । मुनिनिम्मित-पु० डिण्डिशवृक्ष || ढेडसवृक्ष । मुनिपित्तल-न० ताम्र ॥ ताबाँ । मुचकुन्द-पु० पुष्पवृक्ष-विशेष ॥ मुचकुन्द । मुनिपुत्र-पु० दमनकवृक्ष ॥ दवनावृक्ष । मुश्चक-पु० मुष्कका वृक्ष ॥ मोखावृक्ष । मुज-पु० तृणावशेष ॥ मूज । मुनिपुष्प-न० अगस्त्यवृक्ष ॥ अगस्तियावृक्ष । मुनिपूग- पु० गुवाकविशेष-चिकनी सुगरी । मुजर-न० शालक ॥ शालूक । भसीडा । राममुपारी। मुजावक-पु० षुष्पशाकभेद । मुनिफल-न० हरिद्वीज ॥ पिस्ता । मुण्ड--न. बोल | लोह बोल । लोहा । मुनिभेषज-न० अगस्त्य । हरीतकी । लंघन ॥ मुण्डचणक-पु० कलाया ॥ मटर । हथियावृक्ष । हरड । लघन । मुण्डफल-पु. नारिकेलवृश्च ॥ नारियलका पेड । मुण्डशालि-पु० शालिविशेष | निःशूकशालि । मुरजफल-पु० पनसवृक्ष । कटहर । मुण्डा-स्त्री० मुणडातका ॥ गोरखमुण्डी । मुरा-स्त्री० स्वनामख्यातगन्धद्रव्य ।। कपूरक चरी । एकांगी। मुण्डाख्या -स्त्री. महाश्रावणिका ॥ बडी गोरख- मुशटी-स्त्री० श्वेतकंगु ॥ सफेद कंगुनी । मुण्डी। मुशली-स्त्री० तालमूली ॥ मुसली । मुण्डायस-न० लौह । तीक्ष्णायस || लोहा । ईस- मुसली-स्त्री." मुष्क-पु० मोक्षक वृक्ष । अण्डकोष ।। मोखावृक्ष । मुण्डत-न० अण्डकोश। मुण्डिातिका-स्त्री. ॥ गोरखमुण्डी। मुष्कक-पु० वृक्ष-विशेष || कठपाडर । मोखावृक्ष । मुण्डीरिका-स्त्री० मुष्टि-पु० स्त्री० पलपरिमाण ॥ आठ तोले । मुत्-स्त्री० वृद्धिनामौषध ॥ वृद्धि औषधी । मुष्टक-पु० राजसर्षप ॥ राई। मुद्ग-पु० शमीधान्यभेद ॥ मूंग । मुष्टिप्रमाण-न० सेवीफल || सेव । मुद्रपर्णी-स्त्री० वनमुद्न ॥ भुगौन । मूगवन । मुसली-स्त्री० तालमूली ॥ मुसला । पात । वृक्ष-विशेष औषधिकोप। (१४१) ७ ककडी । मुस्त-पु० मुस्तक || मोथा। मूषाकर्णी-स्त्री० आखुकर्णी ॥ मूसाकानी । मुस्तक-पु० न० " मूषातुत्थ-न० नीलतुत्थ || नीलाथोथा । मुस्तक-पु० स्थावरविषभेद । मूषिकपर्णी-स्त्री० आग्बुकर्णी ।। मसाकानी । मुस्ता-स्त्री० मुस्तक ॥ मोथा । मूषिका-स्त्री मुस्ताभ-न० मुस्तक-विशेष ॥ नागरमोथा । मूषिकाह्वय-पु. मूत्रकृच्छ-न० मूत्ररोधरोग-विशेष ॥ मूत्रकृच्छ्ररोग। मुषिपर्णिका-त्री० मूत्रपुट-पु. मूत्राशय ।। मूत्राशय । धीककर्णी-स्त्री." मूत्रफला-स्त्री० कर्कटी । त्रपुची ।। ककडी । बीरा । मृग-पु० मृगनाभि ।। कस्तूरी । मूत्रल-न० पुष ॥ खीरा । मृगगामिनी-स्त्री० विडङ्गा ॥ वायविडंग। मूत्रला-स्त्री० कर्कटी । वालुकी ॥ ककडी । वालुकी मृगधभज-न० जवादिनामक गन्धद्रध्य ॥ जवा. दिकस्तूरी । मूत्राघात-पु० मूत्रावरोधकरोग-विशेष ॥ मृगनाभि-पु० कस्तूरी ॥ कस्तूरो । पिसाब बन्द होना । मृगनाभिजा-स्त्री० करतूरी ॥ कस्तूरी । मूत्राशय-वृ० मूत्रपुट ॥ मूत्राशय । मृगप्रिय-न० पर्वततृण ॥ तृणाख्य । मूर्ख-पु० माष । उडद । मृगभक्षा-स्त्री० जटामांसी ॥ जटामांसी। मूच्छी-स्त्री० संज्ञानाशक रोगविशेष ॥ मूर्छारोग । मृगमद- कस्तूरी ॥ कस्तुरी । मूर्द्धपुष्प-पु० शिरीषवृक्ष || सिरसका पेड । मृगमदवासा-स्त्री. कस्तूरीमल्लिका ॥ मूर्खा-स्त्री० स्वनामख्यात लता॥ चुरनहार । मरो- मृगरसा-स्त्री० सहदेवी ॥ सहदेई । रफली । मृगराटिका-स्त्री० जीवन्ती ।। डोडीशाक । मूल-न० शिफा । पिप्पलामूल । पुष्करमूल । शूरण मृगवल्लभ-पु० कुन्दरतृण । कुन्दरा कालिङ्गदेशीय. जड । पीपरामूल । पोहकरमूल । जभीकन्द । मूलक-न० पु. कन्द-विशेष । मूली । मगा-स्त्री. सहदेवी लता ॥ सहदेई । मूलक-पु. स्थावरविषभेद । मगाङ्क-पु० कर्पूर ॥ कपूर। मूलकपर्णी-स्त्री० शोभाञ्जन ।। सैंजिनेका पेड । मृगांडजा-स्त्री० मृगनाभि । कस्तूरी । मूलकमूला-स्त्री० औरककी || क्षीरकाचुकी वृक्ष। मृगादनः-स्त्री० इन्द्रवारुणी । सहदेवी । मृगेर्वास ॥ मूलज-न० आर्द्रक || अदरख । इन्द्रायण । सहदेई । संधिनी । मूलज-पु० उत्पलादि । कमल इत्यादि । मृगारि-पु० रक्तशिग्रु॥ लाल सैंजिनेका पेड़ । मलपर्णी-स्त्री० मण्डूकपर्णी ॥ मण्डूकपानी । मृगाक्षी-स्त्री० विशाला । मृगेर्वारु ॥ इन्द्रायण । मूलपुष्कर-न० पुष्करमूल || पोहकरमूल । सेधिनी । मूलपोती-स्त्री० पोतिकाशाकभेद ।। पोईशाकभेद । मृगेन्द्राणी-स्त्री० वासक ॥ अडूसा । मूलफलद-पु० पनसवृक्ष ।। कटहरवृक्ष । मगारु-स्त्री. श्वेतइन्द्रवारणी ॥ सफेद इन्द्रायण मलरस-पु० मोरटलता ।। क्षीरमोरट । अर्थात् सँधिनी । मूला-स्त्री० शतावरी ।। शतावर । मृगेष्ट-पु० मुद्गरवृक्ष ।। मोगरावृश्च । मूलाधर-पु० गुह्यलिङ्गयोमध्ये अंगुलीद्वयमितस्थान । मृगेक्षणा-स्त्री० मूगेर्नारु ।। सेंधिनी । मूलाह्व-न० मूलक ।। मूली । मृणाल-न० पु. पद्ममूल ॥ कमलकी नाल । मूषककर्णी-स्त्री० आखुकर्णी ॥ मूसाकानी । मृगाल-न० वरिणभूल । खस । मूषकमारी-स्त्री० सुतश्रेणी ॥ मूसाकन्नी । मणालो-स्त्री. मृणाल || कमलकानाल । मूषा-स्त्री० सैंजसावत्र्तनी ॥ धातु गलानको घरिया। मणाली [न -पु० पद्म ॥ कमल | भाषा । । PMINS -- (१४२) आयुर्वेदीय- गर्जाफल ।। भाषा । मृत् (द् )-ही. तुबरी || सोरठकी मिट्टी । गोपी- मृदुपुष्प-पु० शिरीषवृक्ष । सिरसका पेड । चन्दन । मृदुफल-पु० विकंकत । मधुनारिकेल । विकष्टक- मृतजीव-पु० तिलकवृक्ष | तिलकवृक्ष । वृक्ष||कण्टाई।विकंकत । महुवेनारियल। गजाफल। मृतसञ्जीवनी-० गोरक्षदुग्धा ॥ अमृतस- मृदुत्पल-न० नीलपद्म || नीलकमल । जीवनी । मृदङ्ग-न. वङ्ग ॥ राङ्ग । मृतामद-न • तुस्थ ॥ नूतिया । मृद्वी-स्त्री० कपिलद्राक्षा ॥ भूरी दाख । मृतालक-न. आडकी || अडहर । मृद्वीका-स्त्री० द्राक्षा । कपिलद्राक्षः ॥ दाख । किस. मृतख लिनी-स्त्री० चमकता ॥ सातला । मिस । अंगूरी दाख । मृत्ताल-न० 'आढकी ।। अडहर । मृषालक-पु० आम्रवृक्ष । आमका पंड । मृत्तालक-न० तुरिका । सौराष्ट्रमृत्तिका।अडहर । मृष्ट-न० मरिच || काली मिरच । गापीचन्दन । मेखला-स्त्री० पृश्निपर्णी ॥ पिटवन । मृत्तिका-त्रो० तुवरी ॥ सोरटकी माटी । गोपी. मेघ-पु० मुस्तक || मोथा । चन्दन। मेघनाद-पु० पलाशवृक्ष । तण्डुलीय शाक ॥ ढाक. मृत्फली-स्त्री० कुष्ठौषध ॥ कूठ ।। का पेड । चौलाईका शाक । मृक्षार-न. मूलक || मूली । मेघनामा-(न्)-पु० मुस्तक || मोथा । मृत्युनाशक-पु० पारद || पारा । मधेपुष्प-न० पिण्डाभ्र ।। ओला । मृस्युपुष्प-पु० इक्षु ॥ ईख । मेघवर्णा-स्त्री० नीलीवृक्ष ॥ नीलका पेड । मृत्युफल-पु० महाकालफल ||माकालफल बङ्ग. मेघसार-पु० चीनकर्पूर ॥ चीनिया कपूर । मेघस्तनितोद्भव-पु० विकण्टक वृक्ष। मेवाख्य-न० मुस्तक || मोथा । मृत्युफला-स्त्री. कदली । केला । मेचक-न० स्रोतोञ्जन । नीलाञ्जन || शुम्मा । नील मृत्युव्यजन-पु० बिल्यवृक्ष || वेलका पेड । मृत्युबीज-पु० वंश || बाँस । मेचक-पु० शोभाञ्जन ॥ सैंजिने का पेड । मृत्स्ना-स्त्री० काक्षी || गोपीचन्दन । मेचकाभिधा-स्त्री. पातालगरुडलता ॥ छिरहिटा । मृदंगफल-पु० पनसवृक्ष कटहर । मृदंगफलिनी-स्त्री० कोशात्तकी ॥ तोरई । मेटुला-स्त्री० आमलकी ॥ आमला । मृदंगी-स्त्री० घोषातकी || तोरईभेद । मेढ़-पु० शिश्न ॥ लिंग। मदुकृष्णायस-न० सीसक ॥ सीसा । मेढशृङ्गो-स्त्री० मेषशृंगी ॥ मेढाशिंगी । मृदुचर्मी [ ] पु० भूजवृक्ष ॥ भोजपत्रवृक्ष । मथिका-स्त्री० क्षुप-विशेष ॥ मेथिकाशाक । मेथिनी-स्त्री." मृदुच्छद-पु. भूजवृक्ष । गिरिजपालुवृक्ष । कु कु- मेथी-स्त्री. रद्रु । श्रीताल ॥ भाजपयवृक्ष । पर्वतपिालुपक्ष। मेदः (हु)-न० मांससम्भूत धातुविशेष । रागे. ककरोदा ॥ श्वीताडवृक्ष । विशेष ॥ चरबी । मेदरोग-शरीरका मोटा हो मृटुताल-पु० श्रीतालवृक्ष ॥ श्रीताडवृक्ष । मृदुत्वक् च् ] पु० भूर्शवृक्ष ॥ भोजपत्रवृक्ष । मेद-पु० अलम्बुषा । भेदः ।। लज्जालुभेद । चरबी। मृदुत्वच-पु०" मेदक-पु० जगल ।। मृदुन्नक-न० सुवर्ण ॥ सोना । मेदज-पु. भूमिज गुग्गुलु ।। भूमिज गूगल । मृदुपत्र-पु० नल ॥ नरसल। मेदःसारा-स्त्री० मेदा ॥ मेदा औषधि । मृदुपत्री-स्त्री. चिल्लाशाक ॥ चिल्लाका क्षाक। |मेदा-स्त्री० अष्टवर्गान्तर्गत औषधी-विशेष ॥ मेदा मृदुपर्वक-पु० क्षेत्र ॥ वैत । शुर्मा। ॥ ॥ जाना । औषधी । touTunes: HOM औषधिकोष । (१४३) औषधी। । मेदिनी-स्त्री० काश्मरी । मेदा ।। कम्भारी । मेद मोच-न० कदलीफल || केलकी फली । मोच-पु. शोभाञ्जनवृक्ष । शाल्मलोवेष्ट ॥ सैजि. भेदुरा-स्त्री० काकोली || काकोली । नेका पेड । मोचरस । भेदोद्भवा-स्त्री. मेदा । मेदाऔंषधी। मोचक-पु. कदली । शिग्रु । मुडककवृक्ष ॥ केला। भेदोवती-स्त्री. भेदा ॥ भेदाऔषधी । सैंजिना । कठपाडर। मेधाकृत्-न० सितावर शाक || शिरिआरी शाक । मोचनी-स्त्री० कण्टकारी ॥ कटेरी। मेधावती-स्त्री० महाज्योतिष्मती बड़ी मालकांगनी । मोचरस-पु० शाल्मलीनिर्यास । सेमलका गोंद मेधावी-[ न ]-पु. मदिरा ॥ मछ। अर्थातू मोचरस । भध्य-पु० खदिर । यत्र ॥ खैर । जो । मोक्षा-स्त्री० शाल्मलीवृक्ष । कदलीवृक्ष । नालीवृक्षा मेध्या-स्त्री० रक्तवचा | गोरोचना । केतकी । ज्यो. सेमरका पेड। केलाका पेड । नीलका पेड । तिष्मती । शंखपुष्पी । ब्राह्मी।। श्वेतवचा । शमी मोचाट-पु० कृष्णजीरक || काला जीरा । मण्डूकी।। लालबच । गोलोचन | केतकी । माल. मोची-स्त्री० इिलमाचिका ॥ हुलटुलशाक । कांगनी । शखाली । ब्रह्मीघास |: सफेद वच । मोटा-स्त्री. बला ॥ खिरैटी । छोकरावृक्ष । माण्डुकपानी । मोदक-पु० न० खाद्य विशेष । गुड। यवानशर्करा। मेन्धिका-स्त्री० क्षुप-विशेष ॥ मेहदीका पड़ । शर्करादिद्वारा पक्कौषध-विशेष ।। मिष्टान्नभेद । मेन्धी-स्त्री." गुड । सौराखिस्ता । लड्डू। मेरुक-पु० यक्षधूप ॥ राल । मोदन-न० सिक्थक ।। मोम | मेलकलवण-न० औपर लवण | खारी नोन ! मोद, मोदिनी-स्त्री० जम्बु ॥ जामुन । मेला-स्त्री० महानीली || वडा नलिका पेड । मोदयन्ती-स्त्री० वनमल्लिका ॥ मल्लिकाभेद । मेषक-पु. जीवशाक । मालवे प्रसिद्ध । मोदा-स्त्री० अजमोदा ॥ अजमाद । मेषलोचन-पु. चक्रमर्द ॥ चकवड । मोदाख्य-पु० आम्रवृक्ष ॥ आमका पेड । मेषवल्ली-स्त्री० अजशङ्गी ॥ मेढासिङ्गी । मोदाढया-स्त्री० अजमोदा ॥ अजमोद । मेषविषाणिका-स्त्री० ॥ मोदिनी-स्त्री. अजमोदा । मल्लिका । यूथिका । मेषशृङ्ग-न. स्थावर विषभेद ।। अमृत विष वङ्ग. कस्तूरी । मादरा । मल्लिकापुष्पवृक्ष विशेष ।। अजमोद । वेलका पेड । जुही । कस्तूरी । मेषशृङ्गी-स्त्री० अजशृङ्गी ॥ मेढाशिङ्गी । मदिरासुरा । मदनबाणभेद । मेषा- स्त्री त्रुटि ॥ गुजराती इलायची । मोरट-न० इक्षुमूल । अङ्कोटपुष्प || ईखकी जड । भेषान्त्री-स्त्री. वस्त्रान्त्रीवृक्ष ॥ विधाराभेद । मेषालु-पु० वर्बरावृक्ष ॥ बर्रवृक्ष । मोरट-पु. लताभेद ॥ क्षीरमोरट । मेषाह्वय-पु० चक्रमई ॥ चक्रवड । मारेटक-न० इक्षुमूल ॥ ईखकी जड । मेषाक्षिकुसुम-पु० मोरटा-स्त्री० मूर्वा ॥ चुरनहार । मेषिका, मेषी-स्त्री० जटामांसी । तिनिशवृक्ष ॥ मोह-पु० मूर्छा ॥ अज्ञान । बालछड । जटामांसी । तिरिच्छवृक्ष । मोहन-पु० धत्तूरवृक्ष ॥ धत्तूरेका पेड । मेह-पु० प्रमेह ॥ प्रमेहरोग । मोहना-स्त्री० त्रिपुरमालीपुष्प ।। त्रिपुरमालीपुष्प । मेहन्नी-स्त्री० हरिद्रा ॥ हलदी। मोदनी-स्त्री० उपोदकी। वटपत्रा | पोईका शाका मेहन-पु० मुष्ककवृक्ष ॥ कठपाडर । त्रिपुरमाली । भैरेय-न० मद्य-विशेष ॥ मोहिनी-त्रिपुरमाली पुष्प ॥ त्रिपुरमाली । मोधा-स्त्री० पाटलावृक्ष । विडङ्गा ।। पाडर । वाय- मोक्ष-पु० पाटलिवृक्ष । पाटलि-विशेष ॥ पाडरका विडङ्ग । वृक्ष । मोखावृक्ष । भाषा । ढेराके फूल ।
(१४४) आयुर्वेदीय- मोक्षक-पु० मुष्ककवृक्ष । घण्टापाटलि ॥ मोखा- यज्ञीय-पु. उदम्बरवृक्ष ॥ गूलरका पेड । यज्ञीयब्रह्मपादप-पु० विकङ्कतवृक्ष ॥ कण्टाई- वृक्ष । कठपाडर । मौक्तिक-न० मुक्ता ॥ मोती । विकङ्कतवृक्ष । मातिकतण्डुल-पु. धवलयावनाल । सफेद ज्वार । यज्ञेष्ट-पु० दीर्घशोहपतृण || बडे रोहिस । यज्ञोदुम्बर-पु० उदुम्बरवृक्ष ॥ गूलरका पेड । मका। मौक्तिकप्रसवा-त्री० मुक्ताशुत ॥ मोतीकी सीप । यतुका, यतूका-स्त्री० वृक्ष-विशेष । मौजीतृणाख्य-पु० मुञ्ज ॥ मूज । यन्त्रगोल-पु. कपाल विशेष ॥ मटर । मौजपित्रा-स्त्री० बल्बजा ॥ सावे बागे कुत्रचित् यमदूतिका-त्री० तिन्तिडीवृक्ष ॥ इमलीका पेड । भाषा । यमद्रुम-पु० शाल्मलि वृक्ष । सेमरका पेड । मौर्वी-स्त्री. अजशृङ्गी ॥ मेढाशिङ्गी । यमप्रिय-पु० वटवृक्ष ॥ वडका पेड मौलि-पु० अशोकवृक्ष ॥ अशोकका पेड । यमलपत्रक-पु० अश्मन्तकवृक्ष । कोविदारवृक्ष आ. म्रक्षण-न० तैल || तेल । पटा पश्चिमदेशीयभाषा । कचनारवृक्ष । म्रातन-न० कैवर्ती स्तक ।। केवटीमोथा । यमानिका-स्त्री. यवानी ।। अजमाय । म्लेच्छ-न० हिंगुल । तान ।। तिङ्गरफ। तांवा । यमनी-स्त्री." म्लच्छकन्द-पु० लशन || लहान । यव-पु. स्वनामख्यात शूकधान्य । इन्द्रयव । यव म्लेच्छभोजन-पु० गोधूम ।। गेहूं । क्षार। षट्सर्षपपरिगाण ।। जौ । इन्द्रजौ । जवा- म्लेच्छफल-न० फल विशेष || काफी । खार । ६ सरसेपरिमाण । म्लेच्छमुख-न० ताम्र ॥ तांबा । यवक-पु० यव ॥ जौ म्लेच्छाख्य-न० ताम्र ॥ तांबा । यवकल्क-न० यवस्य कल्क ॥ जौकी भूसी । म्लेच्छाश-पु० गोधूम गेहूं। यवज-पु० यवक्षार । यवानी ॥ जवाखार । अजमा इति, श्रीशालिग्रामवैश्यकृतशालिग्रामौषधशब्दसागर मकारादिद्व्यवर्णनं नाम पञ्चविंशस्तरङ्गः ॥ २५ ॥ यवज-न० तवक्षीर ॥ तवाखार । यवतिक्तक-न. महातिक्तक || कालमेघ वङ्गभाषा। य यवतिक्ता-स्त्री० लताप्रभेद ॥ शंखिनी । यवेची । यकृत्-न. कुक्षेदक्षिणभागस्थस्वनामख्यातमांसख- दक्षिणदेशीयभाषा। ण्ड || कलेजेके सामनेका एक मांसका पिण्ड यवन-पु० गोधूम । गर्जरतृण । तुरुष्क ॥गेहूँ ।गर्ज- हृदयके दाहिनी ओर। रतृण । शिलारस। यकृद्वैरी-( 1 )-रोहितकवृश्च ॥ रोहेडा वृक्ष । यवनदिष्ट-पु० गुग्गुलु ॥ गूगल । यकृन्मई-पु० यवनप्रिय-न० मरिच।। कालीमिरच । लालमिरच । यज्ञभूषण-पु० श्वतगर्भ ।। सफेद कुशा । कुशा । यवनाल-पु० धान्य-विशेष | देवधान्य । यज्ञयोग्य-पु० उदुम्बरवृक्ष ॥ गूलरका पेड यवनालज-पु० यवक्षार ॥ जवाखार-हिन्दी । सोर यज्ञवल्ली-सोमवल्ली ।। सोमवेल । वंगभात्रा। यज्ञवृक्ष-पु० वटीवृक्ष ॥ नदीवड । यवनी-स्त्री० यवानी ॥ अजवायन । यज्ञश्रेष्ठा-स्त्री० सोमवल्ली । सोमवेल । यवनेष्ट-न० सीसक | मरिच । गृञ्जन || सीसा । यज्ञसार-पु० यज्ञोदुम्बरवृक्ष | गूलरका पेड । मिरच । सलगम । यज्ञाङ्ग-पु. उदुम्बर । खादरवृक्षा । ब्राह्मणयष्टिका ॥ यवनेष्ट-पु० लशुन । राजपलाण्डु । निम्ब । पला- गूलरका पेड । खरका पेड़ । ब्रह्मनेटि । ण्डु ॥ लहशन । लालप्याज। नीमका पेड । यज्ञाङ्गा-स्त्री. मोमवल्ली ॥ सोमवेल। प्याज । यज्ञिक-पु० पलाशवृक्ष !! ढाकका पेड । यवनेष्टा-स्त्री० खजूरी ॥ खजूर । यन ।
औषधिकोष। (१४५) . " यष्टथाहका-स्त्री . ॥ गूगल। यवप्रख्या-स्त्री० क्षुद्ररोग-विशेष । यष्टिमधुका-स्त्री यवफल-पु० वंश । जटामांसी । कुटज प्लक्षवृक्ष || यष्टी-स्त्री० बांस । जटामांसी ॥ कुडाका पेड । पाखरवृक्ष । यष्टीक-न. " यवलास-पु. यवक्षार || जवाखार । यष्टीपुष्प-पु० पुत्रजीवका ॥ जिआपोतावृक्ष । यवशूक-पु० ॥ यष्टीमधु-न० याष्टिमधु ॥ मुलहटी । यवशकज-पु. यष्टीमधुक-न० यवसूर-न० यवजातसुरा ।। जौकी सराब जो बनाई यष्टीमधुका-स्त्री. " जाती है । रम, अंग्रेजी भाषा । यष्टयाह-न. यवक्षार-पु० यवतृणभस्मजातक्षार-विशेष ॥ अवा- यष्टयाह-स्त्री० " खार-हिन्दी । सोरा बंगभाषा । यवक्षोद-पु० ववचर्ण ।। जौका चून । यष्टचाह्विका-स्त्री यवागू-स्त्री० षड्गुणजलपक्क तण्डुलादि । यवाग। यक्षकईम-पु० कुंकुम, अगुरु, कस्तूरी, कपूर, ग्रवाग्रज-पु० यवक्षार । यवानी.।। जवाखार |अज- श्वेतचन्दन ॥ केशर, अगर, कस्तूरी, कपूर, सफेदचन्दन इन सर्वद्रव्योंका बनाया हुआ एक वायन । यवानिका-स्त्री० यवानी ।। अजवायन | प्रकारका सुगन्धचूर्ण । यवानी-स्त्री० ॥ यक्षतरु-पु० वटवृक्ष ।। वडका पेड । यक्षद्रु-पु० वृक्ष-विशेष।।इस वृक्षका गोंद विरोजाहै | यवापत्य-न यवक्षार || जवाखार । यवाम्लज-न० सौवीरक ।। जीसे बनाई.हुई कांजी। यक्षधूप-पु० सर्जरस । श्रीवास । राल ।गूगरी । यवास-पु. क्षुप-विशेष ।। जवासा । यक्षफल-पु. फल-विशेष | चिलगोजा । यवासक-पु० यवासशर्करा-स्त्री० यवासरसघटितशर्करा ।। शीर- यक्षरस-पु. पुष्पमद्य ।। महुवेके फूलोकी मदिरा । यक्षामलक-न० पिण्डखजूरीफल ।। पिण्डखजूर । यक्षावास-पु० वटवृक्ष ।। वडका पेड । यवासा-स्त्री० गुण्डासिनीतृण ।। गुण्डालातृण। यक्षोदुम्बरक-न० अश्वत्थफल ॥ पीपलके फल । यवाह्व-पु० यवक्षार ॥ जवाखार । यक्ष्मनी-स्त्री. द्राक्षा-।। दाख । यवोत्थ-न० सौवीरक ।। जौकी कॉजि । यक्ष्मा (न्)-पु. स्वनामख्यात रोग ॥ क्षयरोग । यशद-न० धातु-विशेष ॥ जस्त । याज-पु० अन्न || अन्न | भात बंगभाषा । यशस्या-स्त्री० जीवन्ती । ऋद्धि । डोडीका शाक । याज्ञिक-पु० दर्भ-विशेष । रक्तखदिरवृक्ष। पलाश- ऋद्धि औषधी। वृक्ष । अश्वत्थवृक्ष ॥ एक प्रकारकी डाभ | लाल यशस्विनी-स्त्री. वनकापासी । यवतिक्ता । महा- खरवृक्ष । ढाकका वृक्ष । पीपलका पेड । ज्योतिष्मती ॥:वनकपास । यवेची । बड़ी माल. यातुन-पु० गुग्गुलु ॥ गूगल । यामिनी-स्त्री. हरिद्रा ।। हलदी । यशोद-पु. पारद ॥ पारा । यामिनीपति-पु० कपूर ॥ कपूर । यष्टि-पु० स्त्री० यष्टिमधु । भाङ्गी ॥ मुलहटी । भा- यामुन-न० स्रोतोञ्जन || काला शुमा । यामुनेष्टक-न०सीसक ॥ सीसा । यष्टिका-स्त्री याम्य-पु. चन्दनवृक्ष ॥ चन्दनका पेड़ यष्टिमधु-न० स्वनामख्यात मिटस्वादवाणिग्द्रव्य- याम्योद्भूत-पु० श्रीतालवृक्ष ॥ श्रीताड । विशेष ॥ मुलहटी हिन्दी-जेठी मधु दक्षिणदेशी-यावक-पु० वोरोधान्य । कुलत्थ । अलक्तक ।। यभाषा। वोरोधान । कुल्थी । लाखका रङ्ग । खिस्त । . कांगनी । रङ्गी । १४/Pwer -- 1414 ImaNATALENDER १९ (१४६) आयुर्वेदीय- । यावन-पु० तुरुष्क ।। शिलारस । योगारंग-पु० नारंग । नारंगीका पेड । यावनाल० पु० धान्य-विशेष || जुआर | योगेश्वरी-स्त्री. वन्ध्याकर्कोटकी ।। वाँझस्वखसा । यावनालशर-पु. शरभेद || जोहुरली-देशान्त- योगेष्ट-न० सीसक || सीसा । रीयभाषा। योग्य-न० ऋद्धि । वृद्धि ॥ ऋद्धि अष्टवर्गमें वृद्धि यावनाली-स्त्री० यावनालशर्करा ।। भेना केचित् अष्टवर्गकी ओषधी । वङ्गभाषा | तुंरजीवन यवनभाषा । योजनगन्धा-स्त्री० कस्तूरी ।। कस्तूरी । यावशूक-पु. नार || जवाखार । योजनगन्धिका-त्री यास-पु. यवोस || जवासा । योजनपों-स्त्री० मञ्जिष्ठा ।। मजीड । युक्तरसा-स्त्री० रास्ना ॥ रासना । योजनमल्लिका-स्त्री० वृक्ष-विशेष ।। मदनमाली । युक्ता-स्त्री० वृक्ष-विशेष ॥ एलापर्णी । योजनवलिका-स्त्री० मजिष्ठा ।। मजीठ । युग-न० वृद्धिनामकौषधि ॥ वृद्धि औषधी । योजनवल्ली-स्त्री० ॥ युगपत्र० पु० कोविदारवृक्ष ।। कचनारका पेड । योनल-पु० सस्य-विशेष । पुनरा । युगपत्रक-पु. " योनि-पु० स्त्री० स्त्रीचिह्न ।। भग, योनि । युगपत्रिका-श्री. शिंशपावृक्ष ॥ सीसीका वृक्ष । योनिकन्द-पु० योनिरोग-विशेष ॥ योनिकन्द । युगलाख्य-पु० बबूंवृक्ष ॥ बवूरका पेड । योनिरोग-पु० योनिसम्बन्धीय विंशतिप्रकार रोग ।। युग्मपत्र-पु० रक्तकाञ्चनवृक्ष । कचनारका पेड । २० बीस प्रकारके योनिरोग । युग्मपत्रिका-स्त्री० शिशपावृक्ष ।। सीसोंका वृक्ष । योन्यर्श- [स् ] न० योनिजातरोग-विशेष । युग्मपर्ण-पु० कोविदारवृक्षा सप्तपर्णवृक्ष ॥ कचना- योषित्प्रिया-स्त्री. हरिद्रा ।। हलदी। वृक्ष । सतिवन । यौवनापिडका-न्त्री० यौवनसमयेमुखजातक्षुद्रस्फोटक। युग्मफला-स्त्री० इन्द्राचभिंटा 11 वृश्चिकाली । जवानीके समय मुखपर मुहासे निकलते हैं। युजातक-न० फल-विशेष । इति श्रीशालिग्रामवैश्यकृते शालिग्रामौषधशब्दसागरे युवति-स्त्री० हरिद्रा ॥ हलदी। यकारादिद्रव्याभिधाने षड्विंशस्तरङ्गः ॥२६ ॥ युवती-स्त्री.” युवतष्टिा-स्त्री० स्वर्णयूथिका ।। पाली जुहीं । र. यूक-पु० केशकीट ॥ लखि, डीङ्गर । रक्त-न० शरीरस्थ सप्तधात्वन्तर्गतस्वनामख्यातमातु. यूका-स्त्री विशेष । कुंकुम । ताम्र । प्राचीनामलक । एद्मक । यूयिका-स्त्री. पाटा । स्वनामख्यातपुष्प-विशेष ।। सिन्दूर । हिंगुल || रुधिर, लोहू । केशर तया । पाठा। जडीका वृक्ष । पानीआमला । पद्माख । सिन्दूर । सिङ्गरक । यूथी-स्त्री. रक्त-पु० कुसुम्भ । हिजल । रक्तचन्दनभेद। कसूम. यूपद्रु-पु० खदिरवृक्ष ॥ खरका पेड । का पेड़ । समुद्रफल | लालचन्दन । यूपटुम-पु. खदिरवृक्ष । रक्तखदिर। खैरका पेड । रक्तक-पु० अम्लानवृक्ष । बन्धूकवृक्ष । रक्तशिग्रु । लाल खर। रक्तैरण्ड । बाणपुष्प । दुपहरिया वृक्ष । लाल सैनि- यूष-पु० न० मुद्गादिकाय रस ।। मूग इत्यादिके नेका पेड । लाल अरण्डका पेड । रक्तकन्द-पु० विद्रुम । राजपलाण्ड । रक्तालु ॥ मूंगा । लाल प्याज । रतालु । योगरंग-पु० नागरंग || नारंगीका पेड । रक्तकदल-पु० प्रवाल || मूंगा । योगवाही-त्री० स्वर्जिकाक्षार । पारद ।। सज्जी-रक्तकमल-न० रक्तोत्पल । लाल कमल । रक्तकम्वल-न० काढेका रस । योगज-न० अगर । अगर खार। पारा | MINEenattee औषधिकोष । (१४७) सोंठ। कुमुद । पेड । रक्तकरवरि-पु० लोहितवर्णपुष्प करवीरवृक्ष ॥ रक्तपल्लव-पु. अशोकवृक्ष ।। अशोक वृक्ष । लाल कनेरका पेड। रक्तपा-स्त्री जलौका ॥ जोंक । रक्तकरवीरक-पु० रक्तपाकी-त्री० बृहती ।। कटाई । रक्तकाञ्चन-पु० कोविदारवृक्ष ॥ लाल कचनारः। रक्तपादी-स्त्री० लजालु । हंसपदी || लज्जावन्ती। लाल लज्जालु । रक्तकाण्ड-स्त्री० रक्तपुनर्नवा ।। गदहपूर्ना । रक्तकाष्ठ-न० पतन ॥ पतङ्गकी लकडी । रक्तपारद-न० हिंगुल ।। सिङ्गरफ। रक्तकुमुद -न० रक्तकैरव ।। लाल कमोदनी । रक्तपिण्ड-न० जपापुष्प ।। ऑडहुलपुष्प । रक्तपिण्डक-पु० रक्तालु ।। रतालु । रक्तकुसुम-पु० पारिभद्र | धन्वनवृक्ष ॥ फरहद वृक्षा रक्तपित्त-न स्वनामख्यातरोग ।। यह रोग वात, धामिनवृक्ष । पित्त, कफ, तीनों दोषोंसे होता है । रक्तकेशर-पु० पारेभद्रवृक्षा पुन्नागवृक्ष ।। फरहद। रक्तपित्तहा-स्त्री. रक्तघ्नी । गँठीली दूब । पुन्नागवृक्ष । रक्तपुनर्नवा-स्त्री० रक्तवर्ण पुजनवा ॥ गदहपूर्ना । रक्तकैरव-न० जलजपुष्प विशेष ॥ लालकुमुद । रक्तकोकनद-न. रक्तोत्पल ॥ लालकमल । लाल रक्तपुष्प-पु. करवीर ! रोहितकवृक्ष । कोविदार वृश्च । दाडिमवृक्ष । अगस्त्यवृक्ष । बन्धू कवृक्ष । रक्तखदिर-पु. रक्तवर्णखदिरवृक्ष ॥ लाल खैरका पुन्नागवृक्ष ।। कनेरका वृक्ष । रोहेडावृक्ष । लाल कचनार | अनारका पेड । आस्तका वृक्ष । रक्तगन्धक-न० बोल ॥ बोल । दुपहरियावृक्ष । पुन्नागवृक्ष । रक्तगुल्म-पु० रक्तज गुल्मरोग ॥ यह रोग स्त्रियोंके. रक्तपुष्पक-पु० पलाशवृक्ष । रोहितकवृक्ष ॥ शाल्म- होता है, प्रसव, गर्भपात, रजस्वला होनेके समय लिवृक्ष । पर्पट ॥ ढाक-पलास-टेस कावृक्ष । अपथ्थ भोजनसे वायुके कोपसे रक्तगुल्म रोग रोहेडावृक्ष । सेमरकापेड । पित्तपापा । दवन-- होता है। पापरा रक्तध्न-पु० रोहितकवृक्ष ॥ रोहेडावृक्ष रक्तपुष्पा-स्त्री० शाल्मलिवृक्ष ॥ सेमर का पेड रक्तघ्नी-स्त्री० दूर्वा-विशेष ।। गठीली दूब । रक्तपुष्पिका-स्त्री० लज्जालु । रक्तपुनर्नवा । भूपा. रक्तचन्दन-न० रक्तवर्ण चन्दन ॥ लाल चन्दन । टलिवृक्ष । छुईमुई, लजाल, रक्तचित्रक-पु० क्षुप विशेष ॥ लाल चीतेका पेड । पूनी । भूपातली । रक्तचूर्ण-न० सिन्दर । सिन्दूर । रक्तपुष्पी-स्त्री० पाटलिवृक्ष । जवा । आवर्तकी रक्तझिण्टी-स्त्री० रक्तवर्ण झिण्टी पुष्पवृक्ष । लाल लता । नागदमनी । करुणी । उष्ट्रकाण्डो।। पाढ- रवृक्ष । गुडहर । भगवतवल्ली कोंकणे प्रसिद्ध । रक्ततृणा-स्त्री० गोमूत्रिका ॥ गोमूत्रीतृण । नागदौन । ककरतिरुणी कोंकणदेशीय भाषा । रक्तत्रिवृत्-स्त्री० रक्तवर्ण त्रिवृता ॥ लालनिसोथ । ऊंटाटी। रक्तदला-स्त्री० नलिका । चिविल्लिका ।। प्रवाली रक्तपूरक-न० वृक्षाम्ल ॥ विषाविल । उत्तर देशकी भाषा । चिविल्लिका। रक्तप्रसव-पु. रक्तकरवीर । रक्ताम्लान || लाल- रक्तधातु-पु० गिरिमृत्तिका । तान ॥ गेरू । ताबाँ। कनेर । रक्तअम्लान । रक्तनाल-पु० जीवशाक || जीवशाक । रक्तमूत्रफल-पु० वटवृक्ष ॥ वडका पेड । रक्तपत्रिका-स्त्री. नाकुली । रक्तपुनर्नवा ॥ नाई। रक्तफला-स्त्री० बिम्बिका । स्वर्णवल्ली । वार्ताकु ।। गदहपूर्ना भर्थात् गदहसट्ट । साँठ । कन्दूरी । सोनवेल । बैंगन । रक्तपदी-स्त्रो० क्षुद्रवृक्ष-विशेष ॥ लज्जावन्ती । रक्तवालुक-न० सिन्दूर ॥ सिन्दूर । रक्तपद्म-पु० न० रक्तवर्णपद्म !! लाल कमल । रक्तमञ्जर-पु० हिज्जलवृक्ष ।। समुद्रफल । लज्जावन्ती । गदह- कटसरैया ।
(१४८) आयुर्वेदीय- - arti ॥ कली। मजीठ । रक्तमूलक-न० देवसर्षपवृक्ष ॥ नि रसरसों । रक्तसरोरुह-न० रक्तपद्म ॥ लालकमल । रक्तमूला-स्त्री० लज्जालुवृक्ष ॥ लज्जावन्ती । रक्तसर्षप-पु० राजिका ॥ राई । रक्तमेह-पु. प्रमेहराग-विशेष । रक्तसहा-स्त्री० रक्तप्रसव ॥ रक्ताम्लानवृक्ष । रक्तयष्टि-स्त्री० मञ्जिष्ठा || मजीठ । रक्तसार-न. रक्तचन्दन । पत्तङ्ग । लालचन्दन । रक्तयष्टिका-स्त्री." पतङ्ग । काठ। रक्तयावनाल-पु० तुवरयावनाल || लालजुआर । रक्तसार-पु०अम्लवेतस । रक्तखेदिर ॥ अग्लबैत । रक्तरेणु-पु० सिन्दूर । पलाशकालिका । पुन्नाग ।। लाल खैर । सिन्दूर । ढाककी कली । पुन्नागवृक्ष । रक्तसौगन्धिक-न० रक्तसन्ध्यक ।। लालकद्वार ! रक्तरेणुका-स्त्री० पलाशकलिका ॥ टेसूके फूलकी रक्तस्राव-पु० वेतसाम्ल ॥ अम्लवैत । रक्ता-स्त्री० गुञ्जा । लाक्षा । मञ्जिष्ठा । उष्ट्रकाण्डी ॥ रक्तरैवतक-न. महापारेवत ॥ बडा पारेवत । धुंधुची । लाख । मजीठ । उडांटी। रक्तलशुन-पु. रक्तवर्ण मूल-विशेष ॥ सलगमx रक्तकार-पु० प्रवाल ।। मूंगा । रक्ताक्त-न० रक्तचन्दन ॥ लाल चन्दन । गाजर। रक्तांग-न० कुंकुम । विद्रुम ॥ केशर । मूंगा । रक्तला-स्त्री० काकतुण्डी ॥ कौआठोडी। रक्ताङ्ग-पु. कम्पिल्ल । प्रवाल ।। कबीला । रक्तवटी, रक्तवरटी-स्त्री० मसूरिका॥ मातारोग । रक्तवर्ग-पु० दाडिम । किंशुक । लाक्षा । हरिद्रा । मूंगा। दारुहरिद्रा । बन्धूक । कुसुम्भपुष्प । मञ्जिष्ठा॥ रक्ताङ्गी-स्त्री० जीवन्ती । मञ्जिष्ठा ॥ जीवन्ती । अनार का वृक्ष । ढाकका वृक्ष । लाख । हलदी। द्वारहलदी । दुपहरिआका पेड । कसूमपुष्प । रक्तातिसार-पु० अतिसार रोग विशेष ॥ रक्ताति- मजीठ। सार पित्तातिसारमें गर्म वस्तु खानेसे हो जाता है, रक्तवर्द्धन-यु वातीकु ॥ वैगन । और लाल, काले, पाले दस्त होने लगते हैं ! रक्तवर्षाभू–० रक्तपुनर्नवा ॥ गदहपूर्ना । रक्तापह-न० बोलनामकगन्धद्रव्य ॥ बोल रक्तवात-पु० रोग विशेष ॥ वातरक्त । रक्तापामार्ग-पु० रक्तवर्ण अपामार्ग॥ लालीचरचिटा। रक्तवालुका-त्री० सिन्दूर ॥ सिन्दूर । रक्ताम्र-पु० कोशाम्र ॥ कोशम । रक्तबीज-पु० दाडिम || अनार । रक्ताम्लान-पु० रक्तवर्णपुष्पवृक्ष || लाल अम्लान । रक्तबीजका स्त्री० तरदीवृक्ष ॥ तारदी कण्टक रक्ताम-(न् )-न० नेत्ररोग विशेष युक्तवृक्ष। रक्तार्बुद-पु० अर्बुदरोग-विशेष । रक्तबीजा- स्त्री० सिन्दूरपुष्पी ॥ सिन्दूरिया । रक्तार्श- (स् )-न० अर्शरोग-विशेष ।। रक्तवृन्ता-स्त्री० शेफालिका | निर्गुण्डीभेद। रक्तालु-पु० रक्तवर्णआलु विशेष ॥ रतालु । शकर रक्तशालि-पु. रक्तवर्ण शालिधान्य-विशेष ॥ दल कन्द आलु। बादल इत्यादि। रक्तिका-स्त्री० गुञ्जा । राजिका । गुञ्जापरिमाण ॥ रक्तशासन-न० सिन्दूर ॥ सिन्दूर । घुघुची । राई । १ रति परिमाण । रक्तशिग्रु-पु० रक्तशोभाञ्जनवृक्ष ॥ लाल सैजिनेका रक्तक्षु-पु० रक्तवर्ण इक्षु ।। लाल ईख । रक्तैरण्ड-पु० रक्तवर्ण एरण्डवृक्ष ।। लाल अण्डका रक्तशीर्षक-पु. सरलद्रव ॥ सरलका गोंद । रक्तशृङ्गिक-न० विष ॥ विष । रक्तर्वारु-पु० इन्द्रवारुणी ।। इन्द्रायण । रक्तसंज्ञ-न०कुङ्कम ॥ जाफरान यवनिका भाषा। रक्तोत्पल-न० रक्तोत्पल ॥ लाल कमल । रक्तसन्ध्यक-न० हलक ।। लाल कहार । रक्तात्पल-पु. शाल्मलीवृक्ष. ।। सेमलका पेड । पेड। पेड।
औषधिकोष। ( १४९) " रङ्ग-न० धातु-विशेष । शङ्ग । वृक्ष । मजाठ । निगुण्डीभेद । हलदी । पपरी ! रङ्ग-पु० टङ्कण । खदिरसार ।। सुहागा । खैरसार । पद्मावती । रङ्गकाष्ठ-न० पतङ्ग ।। पत्तङ्गकी लकडी। रणप्रिय-न० उशीर । खस । रङ्गज-न० सिन्दूर ।। सिन्दूर । रणमुष्टि-पु० विषमुष्टिक्षुप । डोडीक्षुप । रंगद-पु० टंकण । खादिरसार || सुहागा । खरसार । रण्डा-स्त्री० मूषिकपर्णी ॥ मूसाकानी । रङ्गदा-स्त्री० स्फटी ।। फटकिरी । रतिसत्वरा-स्त्री० चिंरजीया ॥ असवरग । रंगदायक-न० कंकुष्ठ ।। मुरदासंग । रत्न-न० अश्मजाति । मुक्ता ॥ रत्न-मोती हीरा. रङ्गदा-स्त्री० स्फटी ।। फटकिरी। मणि इत्यादि । रंगपत्री-स्त्री० नीलीवृक्ष ।। नीलका पेड । रत्नकन्दल-न० प्रवाल ॥ मूंगा । रंगपुष्पी-स्त्री. रत्नमुख्य-न• हीरक ॥ हीरा । रंगमाता-क)-स्त्री० लाक्षा ॥ लाख । रथ-पु० वेतसवृक्ष । तिनिशवृक्ष ॥ वैतवृक्ष । तिरि. रंगमातृका-स्त्री च्छवृक्ष । रंगलासिनी-स्त्री० शेफालिका ।। निर्गुण्डाभेद । रथद्रु-पु० तिनिशवृक्ष ॥ तिरिच्छवृक्ष। रंगबीज-न० रूप्य ।। रूपा । रथपर्याय-पु० वेतसवृक्ष ।। वैतवृक्ष । रंगक्षार-पु० टंकण ।। मुहागा । रथाङ्गी-स्त्री. ऋद्धि ॥ ऋद्धिनामौषधी । रंगाङ्गा-स्त्री० स्फटी ।। फटकिरी। रथाभ्र-पु० वेतसवृक्ष ॥ वैतवृक्ष । रंगारि-पु. करवीर ।। कनेर । रथाभ्रपुष्प-पु० " रथिक-न० तिनिशवृक्ष । तिरिच्छवृक्ष । रोगनी-स्त्री० शतमूली । कैवर्तिका ।। सतावर । माल वदेशे प्रसिद्ध, कैवत्तिका ।। रम-पु० रक्ताशोकवृक्ष ॥ रक्तवर्ण अशोकवृक्ष । रमठ-न० हिंगु ॥ हीङ्ग। रजः (स)-न. आर्तव ।। स्त्रीका रज | रमठध्वनि-पु० रजत-न० रूप्य । स्वर्ण ॥ चांदी । सोना । रजनी-स्त्री. हरिद्रा । नीलिनी । यतुका ।। हलदी। रमण-न० पटोलमूल ॥ नीलका पेड । जतुका । रमण-पु० महारष्ट ॥ मीठा नीम । रमणी-स्त्री० बालकनामौषधी ॥ सुगंधवाला । रजनीगन्धा-स्त्री. स्वनामख्यात श्वेतवर्ण पुष्प । रमाप्रिय-न. पन ॥ कमलिनी । रजनीजल-न० हिम ।। वाला, ओस । रमावेष्ट-पु० श्रीवास || सरलका रस, गूगल । रजनीपुष्प-पु० पूतिकरञ्ज ॥ दुर्गंधकरञ्ज । रम्भा-स्त्री. कदली ॥ केला । रजनीहासा-स्त्री० शेफालिका पुष्पवृक्ष ॥ निगुण्डी- रम्य-न० पटोलमूल ॥ भेद । रम्यपुष्प-पु० शाल्मलिवृक्ष ॥ सेमरका पेड़ । रजस्वला स्त्री० ऋतुमती ।। रजोयुक्त नारी । रम्यफल-पु० कारस्करवृक्ष ॥ कुचला । रजक-न० हिंगुल || सिङ्गरफ । रम्या-स्त्री० स्थलपद्मिनी :॥ वेटतामर दक्षिणदेशीय रञ्जक-पु. कम्पिल्ल || कवीला। रजन-न० रक्तचन्दन । हिंगुल । पतङ्ग ॥ लाल रवण-न० कांस्य ॥ कांसी। चन्दन । सिंगरफ । पतंगकाठ । रवि-पु० अर्कवृक्ष । तान || आकका पेड । ताबाँ । रजन-पु० मुञ्जतृण ॥ मूंज । रविनाथ-न. पद्म ॥ कमल । रञ्जनक-पु० कटफल ॥ कायफल । रविनाथ-पु० बन्धूक ॥ दुपहरियावृक्ष । रजनद्रु-पु० आच्छुकवृक्ष ॥ आँचगाछ वंगभाषा । रविपत्र-पु० आदित्यपत्रक्षुप ॥ अर्कपत्र । रजनी-स्त्री० गुण्डारोचानका । नीली । मञ्जिष्ठा । रविप्रिय-न. रक्तकमल । तान ॥ लालकमल । शेफालिका । हरिद्रा। पर्पटी ॥ कबीला। नीलका ताबा । " भाषा। Magar HORTAN Halna AAI MAR IRE 'humarera (१५०) आयुर्वेदीय- MP4, HD SHETECTEISHA REL रविप्रिय-पु. आदित्यपत्र । रक्तकरवीर । लकुच॥ रसाग्रज-न० रसाञ्जन ।। रसोत । अर्कपत्रक्षुप । लालकनेर । बडहर । रसाजन-ज० रसजात अञ्जन-विशेष ॥ रसोत । रविलोह-न० ताम्र ॥ ताबा । रसाढय-पु० आम्रातक । अम्बाडा। रविसंज्ञक-पु० रसाधिक-पु० टंकण ॥ सुहागा । रवीन्द-न० पद्म || कमल । रसाधिका-स्त्री० काकोलीद्राक्षा । किसमिस । रदिमपति-पु० आदित्यपत्रक्षुन ॥ सूर्यफूल मराठी रसापवासा-स्त्री० पलाशीलता । पलाशी । रसाम्ल--न० वृक्षाम्ला । चुक्र । विषाबिल । चूक भाषा। रस-न० बोल || वोल। रसाम्ल-पु० अम्लवेतस || अम्लत ! रस-पु० स्वनामख्यात शरीरस्थधातु । विष । गन्धरसायक-पु० तृण बिशेष । रस । पारद । शरीरका रस । विष । बोल । रसायन-न० तक्र । विष । जराव्याधिनाशकोपधी। रसायन-पु० विडङ्ग । वायविडङ्ग । पारा। रसायनफला--स्त्री० हरीतकी ।। हरड । रसक-न० खपर ॥ खपरिया । रसायनश्रेष्ठ-पु. पारद ॥ पारा । रसकर्पूर-पु० कर्पूररस ॥ रसकपूर ! रसकेशर-न० कपूर ॥ कपूर! रसायनी-स्त्री० गुडूची । काकमाची । महाकरञ्ज । रसगन्ध-न० बोल ॥ वो । गोरक्षदुग्धा । मांसच्छदा ! मञ्जिष्ठा ।। गिलोय । मकोय । बडीकरञ्ज । अमृतसञ्जीवनी। मांस- रसंगन्ध-पु० गन्धक ॥ गन्धक । रसगर्भ-न० रसाजन | हिंगुलारसोत । सिङ्गरफ। च्छदा। मजीठ। रसन्न-पु० टङ्कण ॥ सुहागा। रसाल-न० सिहक । बोल || शिलारस । बोल । रसज-न० रसाञ्जन ॥ रसोत । रसाल-पु० इक्षु । आम्र । पनस। कुन्दरतृण। गो- धूम । पुण्डकइक्षु ॥ ईख । आम । कटहर । रसज-पु० गुड ।। गुड । रसदालिका-स्त्री० पुण्डकेक्षु ॥ सफेदईख । कुन्दरतृण । गेहूँ । सागरी गन्ने । रसद्रावी-[ ]-पु० मधुरजम्बीर ॥ मीठानींबु । रसालय-पु० आम्र ॥ आम । रसधातु-पु. पारद ।। पारा । रसाला-स्त्री० दूर्वा । विदारी । द्राक्षा । शिखरणी।। रसना-स्त्री० जिह्वा । रास्ना ।। जीव । रासना । दूब । विदारीकंद । दाख । शिखरन । रसनाथ-पु० पारद ॥ पारा। रसालिहा-स्त्री० पृश्निपर्णी ।। पिठवन । रसनेत्रिका-स्त्री. मनःशिला . || मनशिल, मेन- रसाली-स्त्री० पुण्डकेक्षु ।। सफेद-सागरी गन्ने । रसाह्र-पु० सरलद्रव ॥ सरलका गोंद । रसपाकज-पु० गुड || गुड । रसिका-स्त्री० रसाला । इक्षुरस | शिखरन :। ई. रसपूर्तिका-स्त्री. ज्योतिष्मती । शतावरी ॥ माल. खका रस । कांगुनी । शतावर । रसुन-पु० लशुन । ल्हशन । रसफल-पु० नारिकेल । नारियल। रसेन्द्र-पु० पारद ।। पारा । रसराज-पु० पारद । रसाजन !! पारा । रसोत । रसोत्तम-पु० मुद्ग ॥ मूंग । रसलेह-पु० पारद ।। पारा । रसोद्भव-न० हिंगुल ।। सिङ्गरफ । रसशोधन-न० टंकण ॥ सुहागा । रसोन-पु० पलाण्डुसदृश श्वेतवर्ण कन्द ॥ लहशन। रसस्थान-न. हिंगुल ।। सिङ्गरफ । रसोनक-पु." रसा-स्त्री० पाठा । शल्लकी । कंगु । द्राक्षा। का- रसोपल-न० मौक्तिक | मोती । कोली ।। पाढ । शालईवृक्ष । कंगुनो । दाख । रस्या-स्त्री० राना । पाठा ॥ रासना । पाठा । काकोली। शिल । रहस्या-स्त्री. " औषधिकोष। (१५१) अम्लान । आम । रक्षणारक-पु० मूत्रकृच्छरोग ।। सुजाक ! राजतरु-पु० कर्णिकारवृक्ष । आरग्वधवृक्ष । कणेर रक्षा-स्त्री० लाक्षा || लास्त्र । वृक्ष। अमलतासवृक्ष । रक्षापत्र-पु० भूर्जपत्रवृक्ष ॥ भोजनपत्रवृक्ष । राजतरुणी-स्त्री पुष्प-विशेष ।। राजसेवती । रक्षोन-न० कांजिक । हिंगु ।। कांजी । हींग। रक्षोध्न-पु० भल्लातकवृक्ष । श्वेतसर्पप ॥ भिलावेका राजताल-पु० गुवाकवृक्ष ।। सुपारी का पेड । पेड । सफेद सरसों। राजद्रुम-पु० आरवधवृक्ष ॥ अमलतासवृक्ष । रक्षोनी-स्त्री० वचा ।। वच । राजधत्तरक-पु० बृहत्तर ।। राजधतूरा । रक्षोहान् ]पु० गुग्गुलु ।। गूगल ! राजधान्य-पु० श्यामाक ॥ श्यामाक। रा-स्त्री० पु० स्वर्ण सोना । राजधुस्तूरक-पु० बृहद्धत्तूर ॥ राजधतूरा । रागखांडव-पु० दाडिमद्राक्षायुक्त मुद्यूष ॥ अनार | राजधूर्त-पु." दाखयुक्त मंगका यूष । राजनामा [न् ] पु० पटोल ।। परवल । रागचूर्ण-पु० खदिरवृक्ष । फल्गुचूर्ण । लाक्षारस ॥ राजन्य-पु०क्षीरिकावृक्ष ॥ खिरनीका पेड ! खरकापेड । अबीर । लाखका रस, महावर । राजपटोल-पु० पटोल ।। परवल । राजपटोली-स्त्री. मधुरपटोली ॥ मीठी पटोली । रागद-पु० तैरणीक्षुप ॥ तैरणी । राजप-स्त्री० प्रसारणालता ॥ पसरन । रागदालि-पु० मसूर ।। मसूर । राजपलाण्डु-पु. रक्तवर्ण पलाण्डु ।। लालप्याज । रागपुष्प-पु० बन्धूक । रक्ताम्लान ॥ दुपहरियाका वृक्ष । लाल.अम्लानवृक्ष । राजपाल-पु० महापीलुवृक्ष ॥ बडा पीलुवृक्ष । रागपुष्पी-स्त्री० जवापुष्प ॥ ओडहुल पुष्प । गुड राजपुत्र-पु० महाराजचूत ॥ राजाम्र, कलमी हर। राजपुत्री-स्त्री० कटुतुम्बी । रेणुका । जाती । मा. रागप्रसव-पु० बन्धूक । रक्ताम्लान ।। गेजुनिया । लती । राजरीति ।। कडवीतोम्बी । रेणुका । दुपहरियावृक्ष । लालअम्लान, रक्त कोरठा मरा. चमेली । मालती । पीतलभेद । ठीभाषा। राजपुष्प-पु० नागकेशरपुष्प । रोहितकक्ष | रागाङ्गी,रागाढया-स्त्री० मञ्जिष्ठा ॥ मजीठ । नागकेशर । रोहेडावृक्ष । रागी- (न्)पु० तृणधान्य-विशेष ॥ रागीधान । राजपुष्पी-स्त्री० करुणीवृक्ष । ककराखिक्षणी कोक, राङ्कण-न० स्वनामख्यात पुष्पवृक्ष-विशेष ॥राङ्गण। णदेशकी भाषा। राजकदम्ब-पु० कदम्ब विशेष ।। राजकदम । राजप्रिया-स्त्री." राजकन्या-स्त्री. केविकापुष्प ॥ केवरापुष्य । राजफणिज्जक-पु० नागरंगवृक्ष । नारङ्गीका पेड । राजकर्कटी-स्त्री. चीनाकर्कटी ।। चित्रकूटदेशे प्र. राजफल-पु. पटोल ।। परवल । सिद्ध । चीनानामवाली ककडी । राजफला-स्त्री० जम्बू ।। जामुन । राजकशेरु-पु० भद्रमुस्ता ।। भद्रमोथा ! राजफल्गु -स्त्री. उदुम्बर विशेष ।। अंजीर । राजकूष्माण्ड-पु० राजबदर-पु० उत्तमकोलिं ।। राजबेर । राजकोषातकी-स्त्री. धामार्गवफल-विशेष || घिया- राजभद्रक-पु० कुष्ठ । निम्ब । पारिभद्रक ।। कूठ। तोरई। नीमका पेड । फरवृक्ष । राजखर्जूरी-स्त्री० श्रेष्ट खजूरी । पिण्डखजूरी ॥ राजभोग्य-न० जातीपत्री | जावित्री । छुहारा । पिण्डखजूर । राजभोग्य-पु० प्रियालवृक्ष ॥ चिरोंजीका वृक्ष । राजगिरि-पु० शाकभेद ॥ एक प्रकारका शाक । राजमाष-पु. नृपमाष । लोबिया, बोरा,वखटा, राजजम्बू-स्त्री० पिण्डखजूर । महाजम्बू ॥ पिण्ड. खज़र । बडी जामुन, राजजामुन, करेन्द्र । राजमुद्र-पु० मुकुष्ठक ॥ मोठ । वात्ताकी ॥ वैगुन । ॥ रमास ।
(१५२) आयुर्वेदीय- राजरंग-न राजयक्ष्मा [ न् ] पु० रोग विशेष ॥ क्षयरोग । राजोद्वेजन-पु. भतांकुशवृक्ष ।। भूतराज देशान्त- ० रजत ।। चांदी। रीयभाषा । राजरीति-पु. पित्तलभेद ॥ पतिलभेद । राज्ञी-स्त्री० नाली । कांस्य ॥ नीलका वृक्ष । कांसी। राजबला-स्त्री० भद्रवला || पसरन । राज्यक्ता-स्त्री० पिष्टराजिकादधिलवणमिश्रितसूक्ष्मै- राजवल्लभ पु० राजादनी। राजाम्र। राजबदर ।। लालाबुखण्डादि ॥ राईता, रायता । खिरनीका पेड । उत्तम आंम । राजबेर । रात्रि-स्त्री० हरिद्रा ॥ हलदी । राजवल्ली-स्त्री० तोयवल्ली ॥ करेला । रात्रिनामिका-स्त्री." राजवृक्ष-पु. आरग्वधवृक्ष । प्रियालवृक्ष । लंका- रात्रिपुष्प-न० उत्पल ॥ कमोदनी । स्थायीवृक्ष ।। अमलतासवृक्ष । चिरोंजीका पेड । रात्रिहास-पु० श्वतोत्पल ॥ सफेद कमोदनी । भद्रचूडवृक्ष । राधा-स्त्री. आमलकी । विष्णुक्रान्ता ।। आमला । राजशण-पु० पट्टशाक ।। पटुआशाक । कोयंलें । राजशाक-पु. वास्तूक ॥ बथुआ । राजसषप-पु० संघप-विशेष ॥ राजसरसों-लाई, राम-३० वास्तूक । कुंछ । तमालपत्र || बथुआशा- के। कूठ । तेजपात लाही । रामकर्पूर, रामकर्पूरक-पु० तृण-विशेष ।। रोहि- राजस्वर्ण-पु० राजधत्तूरक || राजधतुरा । ससोधिया-हिन्दी । रामकर्पूर बंगभाषा । राजहर्षण-न० तगरपुष्प || तगरपुष्प । रामच्छर्दनक-पु० मदनवृक्ष । मैनफलका वृक्ष । राजक्षवक-पु. सर्षप ।। सौं। रामजननी-स्त्री. रेणुकागन्धद्रव्य ! रेणुका । राजातन-पु० प्रियालवृक्ष ।। चिरौंजीका पेड । रामठ-न० हिंगु । हींग ।। राजादन-न० क्षारिका । प्रियालवृक्ष । पलाशवृक्ष । रामठ-पु० अङ्कोटवृक्ष ॥ ढेरावृक्ष । आरग्वधवृक्ष ।। खिरनीभेद । चिरोंजीका पेड। रामठी-स्त्री. नाडीहिंगु ॥ हीङ्गभेद कलपतिहीङ्गा ढाकका वृक्ष । अमलतास । रामण-पु० गिरिनिम्ब । तिन्दुक ॥ बकायननमि । राजादनी-स्त्री. वृक्ष-विशेष | खिरनीका पेड । राजान्न-न० राजधान्य || आन्ध्रदेशीय शालिधान । रामतरुणी-स्त्री. तरुणीपुष्प ।। सेवती । राजाम्र-पु० आम्र-विशेष ॥ राजआम । रामदूती-स्त्री. तुलसी विशेष ।। रामतुलसी । राजाम्ल-पु० अम्लवतस । अम्लयते । रामपूग-पु० गुवाक-विशेष ।। रामसुपारी। राजार्क-पु० श्वेतार्कवृक्ष ॥ सफेदआकका वृक्ष । रामलवण-न- साम्भरिलवण ।। साभरनान । राजाह-न० अगुरु ॥ अगर । रामवल्लभ-पु० त्वच ॥ दालचीनी । राजा -स्त्री० जम्बू ॥ जामुन । रामशर-पु० शरभेद ॥ शरवाण । राजालाबु-स्त्री० अलाबु-विशेष ॥ मीठी ताम्बी। रामशीतला-स्त्री० आरामशतिला ॥ आरामशी- राजालुक-पु० मूलक ॥ मूली । राजिका-स्त्री० राजसप । रक्तवर्ण संर्षप । सर्षप- रामसनेक-पु० भूनिम्ब । कटफल ।। चिरायता । परिमाण | कृष्णवर्ण सर्षप ।। राजसौं लाई । सौंपरिमाण । राई । रामा-स्त्री० हिंगु । हिंगुल । श्वेतकण्टकारी । - राजिकाफल-पु० गौरसर्षप ॥ सफेदसौं । तकुमारी । आरामशीतला । अशोक । गोरोच- राजिफला-स्त्री. चीनादी ॥ चीना ककडी। ना। बालक । गैरिक ॥ हीङ्ग । सिङ्गरफ। धी. राजी-स्त्री० राजिका ॥ राई । कुआर । सफेद कटेहरी । आरामशीतला । अशो. राजोपटोल-पु. पटोल ॥ परवल | कपुष्पवृक्ष । गोलोचन । नेत्रवाला । गेरू । राजीव-न० पद्म ॥ कमल । रामाटरूष-पु. रामवासक ॥ पिठवन । तदुका पड़े। कायफल । BLAama औपाधिकोष । (१५३) कटाई । रहसनी। राक्ष्या-स्त्री० रामालिङ्गनकाम-पु. रक्ताम्लान ॥ रक्तकारोटा । रुग्म-२० स्वर्ण || सोना । मराठी भाषा । रुचक-न० स्वर्जिकाक्षार सौवंचल। रोचना । राल-पु० शालवृक्षनिर्व्यास ।। सालेका गादै अर्थात् बीजपूरक । विडंग । लवण । श्वतएरण्ड ।। राल । सज्जीखार । चोहारकोडा । गोरोचन, गोलोचन । रालकार्य-पु विजोरानींबू । बायविडंग । नोन । सफेद अण्ड। ० शालवृक्ष ॥ सालका पेड । राशि--पु० द्रोणपरिमाण ॥ बत्तिस ३२ सेर । रुचक-पु० वीजपूर ।। बिजोरा नींबू । राष्टिका-स्त्री० कण्टकारी ।। वृहती । कटेहरी । रुचि-त्री० गोरोचना । गौलोचन । सचिर-न० कुंकुम । मूलक । लवंग ।। केशर । रासभवन्दिनी स्त्री० मल्लिका ।। मल्लिका पुष्प । मूली । लौंग । रास्ना-स्त्री० स्वनामख्यात औषधी । नागदवनी । रुचिरा-स्त्री० गोरोचना । गोलोचन । कण्टकारी । रासना, रायसन, रास्ना, रुचिराखन-पु० शोभाञ्जन ।। सैंजिनेका पेड । नागदान । कटेहरी। रुच्य-न० सौवर्चल ॥ चोहारकोडा। राहुच्छत्र-न० आईक ॥ अदरख । रुच्यकन्द-पु० सूरण ।। जमीकन्द । राहूच्छिष्ट-पु० लशुन ॥ लहशन । रुजा-स्त्री रोग । कुष्ठौषध । वेदना ।। रोग । कूठ औषधी । पीडा । राहूत्सृष्ट-पु० राक्षसी-स्त्री. चोरनामक गन्धद्रव्य ।। भटेउर । रुजासह-पु० धन्वनवृक्ष ।। धामिनवृक्ष । रुदान्तका-स्त्री० रुद्रदन्ती ।। एक प्रकारका क्षुप राक्षा-स्त्री० लाक्षा ।। लाख । चणेके पत्रके समान हैं पत्ते जिसके । रिंगिनी-स्त्री० मुद्रपर्णी ।। मुगवन । रुदन्ती-स्त्री० रिपु-पु. चोरनामक गन्धद्रव्य ।। भटेउर । रुद्र-पु० आदित्यपत्रक्षुप ।। अर्कपत्र । रिपुघातिनी-स्त्री० चुईकाँठा' वङ्गभाषा । रुद्रजटा-स्त्री० लता-विशेष || शंकरजटा । रुद्रपत्नी-स्त्री० अतसी || अलसी । रिमेद-पु० विट्खदिर । दुर्गधखैर । रुद्रप्रिया-स्त्री० हरीतकी । हरड । रिरी-स्त्री० पित्तल ।। पीतल । रुद्राणी-स्त्री० रुद्रजटा ॥ शंकरजटा । रिष्ट-पु० रक्तशिग्रु ! फेनिल ।। लाल सैजिनेका वृक्ष । रुद्राक्ष-न० स्वनामख्यात वृक्षस्य वीज ॥ रुद्राक्षके दाने । रिष्टक-पु० रक्तशिग्रु ।। लाल सैजिनेका पेड । रुद्राक्ष-पु० स्वनामख्यातवृक्ष || रुद्राक्षका पेड । रीठा-स्त्री- रीठाकरञ्ज ।। रीठाकरञ्ज । रुधिर-न० शरीरस्थधातु-विशेष ! कुंकुम । गैरिक । रीति-स्त्री. पित्तल । लोहकिट्ट । दग्धस्वर्णादिमल ।। रुधिर, लोहूँ । केशर । गेरू । पीतल । लोहेका मैल । जले हुवे सोनेका मैल । रुवु-पु० एरण्डवृक्ष । रक्तैरण्ड || अरण्ड । लाल रीतक-न० पुष्पाञ्जन ॥ कुसुमाञ्जन-एक प्रकार- का अञ्जन। रुवक-पु. रीतिका-स्त्री. रुवुक-पु. रीतिपुष्प-न० " रुवूक-पु० रुक्-(ज) स्त्री० रोग ।। रोग । रुहा-स्त्री० दुर्वा । महासमङ्गा ॥ दुवं । कगहिया । रुक्प्रतिक्रिया-स्त्री० चिकित्सा ॥ रोगप्रतिकार । रूपिका-स्त्री० श्वेतार्क ॥ सफेद आकका वृक्ष । रुम-न० काञ्चन । धत्तूर । लौह । नागकेशर ॥ रूप्य-न० श्वेतवर्णधातु-विशेष | रूपा । चांदी । सोना । धतूरा । लोहा । नागकेशर । रूप्यक-न० * कण्टकयुक्तलता-विशेष ।। "कु. रुन्द्रज-५० पारद ॥ पारा । रीठाकरज। - अरण्ड ।
१५४) आयुर्वेदीय- MY ॥ रोगशिला-स्त्री. मनशिला ॥ मनीशल । रूबुक-गु० एरण्ड || अरण्डका पेड । रूपक-पु. वासक ॥ अडसा । रोगशिल्पा ( न )-पु० वृक्ष-विशेष ।। शरालु । रूक्ष-पु० बरकतृण ।। चीनातृण । रोगश्रेष्ट--पु० ज्वररोग ।। ज्वर । रूझगन्धक-पु० गुग्गुलु ।। गूगल । रोगितरु-पु० अशोकवृक्ष ॥ अशोकवृक्ष । रूक्षणात्मिका-त्री० धान्य-विशेष । लङ्काधान । रोचक-पु० कदली । राजपलाण्डु ॥ केला । ल ल रूक्षदर्भ-पु० हरिदर्भ । हरेरंगका कुशा । प्याज । रूझपत्र-पु० शाखोटवृक्ष | सिहोरावृक्ष । रोचन-पु० कूटशाल्मली । श्वतशिग्रु। पलाण्डु । रूक्षत्रिय-पु० ऋषभौषधि ।। ऋपभक । आरग्वध । करञ्जा। अंकोट । दाडिम|| कालासेमर। रूझस्वादुफल-पु० धन्वनवृक्ष ॥ धामिनवृक्ष । सफेद संजिनेका वृक्ष । प्याज । अमलतास । रूशा-स्त्री. दन्तीवृक्ष ॥ दन्ती । कञ्जावृक्ष । ढेरावृक्ष । अनार । रेकण:-( स ) न० वर्ण ।। सोना । रोचनक-पु० जम्बीर ।। जम्बीररी नाबू । रेचक-न० कंकुष्ठमृत्तिका. ।। मुरदासंघ । रोचनफल-पु० बीजपूरक ।। बीजोरा नींबू । रेचक-पु० यवक्षार । जयपालवृक्ष । तिलकवृक्ष । रोचनफला-स्त्री०चिभिटा ।। कचरिया । जवाखार । जमालगोटा । तिलकपुष्पवृक्ष । रोचना-श्री. रक्तकहार । गोपित्त || लाल कमल | रेचनक-पु० कम्पिल्ल ।। कवीला । गोलोचन । रेचना-न० स्त्री० कम्पिल ॥ कवीला । पतलादस्त रोचनिका-स्त्री. वंशलोचन । गुण्डारोचनी । वश- लानेवाली औषधि । लोचन । कवीला । रेचनी-स्त्री० काम्पिल्ल । कालाञ्जनी ।. दन्तीवृक्ष । रोचनी-स्त्री. आमलकी । गोरोचना । मनःशिला। श्वेतत्रिवृता ॥ कवीला । काली कपास ।दन्तीवृक्षा श्वतत्रधारा श्वेतत्रिवृता।काम्पिल्ल ।चुक्रिका शाक । सफेद निसोय । शाक-विशेष ॥ आमला । गौलोचन । मनशिल | रेची-त्री० कम्पिल्लक । अकोट ॥ कवीला । ढेरा सफेद निसोथ । कबीला। चूका शाक । पोदीना । हक्ष। रोची-स्त्री० हिलमेचिका ॥ हुलहुलशाक । रेगु-स्त्री० पर्पट । रेणुका ॥ रित्तपापडा । रेणुका । रोटिका स्त्री० पिष्टक-विशेष ॥ रोटी । रेणुका-स्त्री० मरिचाकृतिसुगान्धवाणिग्द्रव्य विशेष ॥ रोदनिका-स्त्री० यवास ॥ जवासा । रेणुका। रोचनी-स्त्री० दुरालभा ।। धमासा । रेगुक-पु० मटर ॥ एक प्रकारका अन्न । रोध-पु० लोध ॥ लोध । रेणुसार,रेगुसारक-० कर्पूर ॥ कपूर । रोध्रपुष्प-पु० मधूकवृक्ष । महुवेका पेड । रेतः-(स ) न० शुक्र । पारद || वीर्य । पारा । रोधपुष्पिणी-स्त्री. धातकी ॥ धायके फूल । रेत्य-न. पित्तल ॥ पीतल । रोमक-न० पांशुलवण | साम्भारलवण । अयस्का- रेवत-पु. जम्बीर । आरग्वधवृक्ष । जम्मारी नींबू । न्त--विशेष ।। रेहगमा नोन । सामर नोन । अमलतासका पेड। चुम्बक पत्थर । रेवतक-न० पारेवतः ॥ वैताख्य कामरूपदेशीयभापा। रामेकन्द-पु० पिण्डालु ॥ पिडालु । रैवत-पु० स्वर्णालवृक्ष ।। सोनालु वंगदेशीय भाषा । रोपलवण-न साम्भारलवण || सामरनोन। रैवतक-न० पारेवत ।। रैवताख्य कामरूप देशीय रोमवल्ली-स्त्री. शूकशिम्बी ।। कौंच । भाषा। रोमशपत्रिका-स्त्री. देवदाली ॥ घघरवेल । रोग-पु० कुष्ठौषधि । पीडा || कूट औषध । रोग- रोमशफल-पु० डिण्डिश ।। द्वैडस । रामशक-न० स्थौणेयक ॥ थुनेर । रोगन-पु. औषध ।। ओषध । रोमसा-स्त्री० रोगराज-पु० राजयक्षमा ॥ क्षयरोग । रोमहर्षण-ज० विभीतकवृक्ष ॥ बहेडावृक्ष । व्याधि ।
औषधिकोष। (१५५) ॥ रोमाञ्चिका-स्त्री. रुदन्तीवृक्ष ।। रुदन्तीवृक्ष । लक्तक-पु० अलक || महावर । रोमालु-पु० पिण्डालु ॥ पिडालु । लक्तका-(न् ) पु० रक्तवर्ण लोध ॥ लाल रंग- रोमालविटपी-(न)-पु० कुम्भीनाम पुष्पवृक्ष । कालोध । कुम्भीपुष्पवृक्ष कोकणे प्रसिद्ध । लघुन. कृष्णागुरु । लामज्जक || काली अगर । रोमाश्रयफला-स्त्री० झिंझिरिष्टाक्षुर ।। झिझिरीटा । लामजकतण। रोल-पु० पानीयामलक ॥ पानीआमला। लघु-पु० पृका ॥ असवरग । राषण-पु. पारद ।। पारा । लघुकाश्मर्य-पु० कट्फलवृक्ष ॥ कायफर । रोहण-न० शुक्र ।। वीर्य । लघुचिभिटा-स्त्री० मृगे रु ॥ संधिनी । रोहन्त-पु० वृक्षभेद । लघुदन्ती-स्त्री. क्षुद्रदन्तीवृक्ष ॥ छोटी दन्ती । रोहन्ती-स्त्री० लताभेद । लघुद्राक्षा-त्री० काकोलीद्राक्ष । किसमिस । रोहिण-पु० भूस्तृण । वटवृक्ष । रोहितकवृक्ष॥ शर. लघुनाम (न् )-न० अगरु ।। अगर । बाण । बडका पेड । रोहेडावृक्ष । लघुपञ्चमूल-न० क्षुद्रपञ्चमूल, लघुपञ्चमूल अर्थात् रोहिणी-स्त्री० कटुम्भरा । सोमवल्क । लोहिता । शालवन, पिठवन, कटाई, कटेहरी, गोखुरू । काइमरी । हरीतकी । मञ्जिष्ठा । हरीतकी विशेष लघुपत्रक-पु. रोचनी ।। कबीला । मांसरोहिणी । गलरोगविशेष ॥ कुटुकी । काय लघुपत्री-त्री ० अश्वत्थीवृक्ष ॥ पापली का पेड । फर । वराहक्रान्ता । कुम्भेर । हरड । मजीठ । लघुपिच्छल-पु. भूकबुंदारक ।। लभेरा । एक प्रकारको हरड । मांसरोहिणी। गले का रोग लघुपुष्प-पु. भूकदम्ब ॥ भुईकदम । रोहित्-न० लताभेद। लवुबदर-पु० क्षुद्रकोलि । छोटा वेर । रोहित-न० कुंकुम । रक्त ॥ केशर । रुधिर । लघुबदरी-स्त्री० भूवदरी ॥ झडयेरी । रोहित-पु० रोहितकवृक्ष ॥ रोहेडावृक्ष । लघुब्राह्मो-स्त्री० क्षुद्रजातीय ब्राही । छोटी ब्राही । रोहितक-पु० वृक्ष-विशेष ॥ रोहेडावृक्ष । लघुमन्थ-पु. क्षुद्राग्निमन्थ ॥ छोटी अरणी । रोहितेय-पु. रोहितक ॥ रोहेडावृक्ष । लधुमांसी-स्त्री० गंधमांसी || जटामांसीभेद । रोही-(न् ) पु० रोहितक । वटवृक्ष । रोहेडावृक्ष । लघुलय-ल. वीरणमूल ॥ खस । वडका पेड । लघुसदाफला-त्री० लवदुम्बरिका ॥ छोटा गूलर । रोहीतक-पु० रोहितकवृक्ष ॥ रोहेडावृक्ष । लघुमदुग्धा-श्री. रौद्री-स्त्री ० रुद्रजटा ॥ शंकरजटा। लघूदुम्वरिका-स्त्री." रौप्य-न -न० रूप्य ।। रूपा। लध्वी-स्त्री० पक्का ॥ असवरग। रौम-न० साम्भारलवण ॥ सरसामर.। लंकापिका-स्त्री० ॥ रोमक-न." लंकायिका-स्त्री." रोमलवण-न लंकारिका-स्त्री ० चन्दनवृक्ष ।। चन्दनका पेड । लंकास्थायी-(न् ) पु० वृक्ष-विशेष ॥ भद्रचूड । रोहिष-न० कत्तॄण ॥ रोहिषसोधिया । लंकोपिका-स्त्री० पृक्का ।। असवरग । रौहिषी-स्त्री. दूर्वा ।। दूब । लङ्कायिका-स्त्री." इति श्रीशालिग्रामवैश्यकृतौ शालिग्रामाषेधशब्दसा. लङ्कारिका-स्त्री० गरे रकारादि द्रव्याभिधाने सप्तावंशस्तरङ्गः ॥२७॥ लजकारिका-स्त्री० लज्जालुलता || लज्जावती । लज्जा-स्त्री." लकच-पु० लकुचवृक्ष || वडहर । लज्जालु-पु० स्त्री० क्षुप-विशेष | लता विशेष। खै. लकुच-पु. स्वनामख्यात अम्लफलवृक्ष-विशेष । रीशाक वङ्गभाषा । लज्जावन्ती, लज्जावती, ल. बडहर । ज्जाल, छुईमुई। रौहिण-पु. ) (१५६) आयुर्वेदीय- ALL " लजिरी-स्त्री० ललाट-न. अवयव-विशेष ॥ ललाट, कपाल. लट्वा-बी० करञ्जभेद । कुसुंभपुष्प ॥ एक प्रकार. इत्यादि अङ्ग । को करञ्ज । कसूमके फूल । ललिता-स्त्री० कस्तूरी ।। कस्तूरी, मृगमद । लता-स्त्री. प्रियंगु । पक्का । अशनपर्णी । ज्योति. लव-न० जातीफल । लवङ्ग । लामज्जक || जाय- छमती । लता । कस्तुरी । माधवी । दूर्वा । कैव. फल । लौङ्ग । लामजकतृग । तिका । शारिवा || फूलप्रियंगु । असवरग । लवंग-न० स्वनामख्यात वणिन्द्रव्य ॥ लोग लौंग । पटशन । मालकांगुनी। मुश्कदाना, लताकस्तूरी। लवङ्गक-न.' माधवी लता । दूब । कैवर्तिका लता । श्यामा लवङ्गकलिका-स्त्री." लना। लवङ्गलता-स्त्री० पुष्प-विशेष । लताकरज-पु० करञ्ज-विशेष ॥ लताकरञ्ज । लवण-न० क्षाररसयुक्तद्रव्य ॥ नोन । सो पांच लताकस्तूरिका-स्त्री० लक्षाकस्तूरी ॥. लताकस्तूरी प्रकारका है । सैंधानोन सौंचरनोन, समुद्रनोन । मुष्कमाना । खारीनोन, बिडलोन अर्थात् कच लोन । लताकस्तूरी-स्त्री." लवण-पु० स्वनामख्यात रस ॥ नमक, नोन । लतातरु-पु० नारङ्गवृक्ष । तालवृक्ष । शालवृक्ष ॥ लवणकिंशुका-स्त्री० महाज्योतिष्मती ॥ बडीमाल- नारङ्गीका पेड़ । ताडका पेड । सालवृक्ष । कांगनी । लतादुम-पु० लताशाल || सालभेद । लवणखोटि-पु० सुगंधद्रव्य-विशेष ॥ लोबान लतापलस-पु० फललता-विशेष | तरबूज । फार्सीभाषा । लतापक्का-स्त्री० पृक्का !॥ असवरग । लवणतृण-न० तृण-विशेष ॥ लवणतृण । लताफल-न० पटोल || परवल । लवणत्रय-नः सैन्धव, विटरुचक ॥ सेंधानोन, लताभद्रा-स्त्री० भद्राली || पसरन । विरिया संचरनोन, कालानोन । लतामणि-पु० प्रवाल | मूंगा। लवणमद-पु० लवणक्षार ॥ लोणारक्षार वङ्गभाषा । लतामरुत्-स्त्री० पुका ॥ असवरग । खारीनोन हिन्दीभाषा। लतामाधी-स्त्री. माधवीलता || माधवीलता । लवणाधिज-न० सामुद्रलवण ।। समुद्र नोन । लतायष्टि-स्त्री० मञ्जिष्ठा || मजीठ । लवणारज-न० लवणक्षार || लवणखारी। लतायावक-न० प्रवाल ॥ मूंगा। लवणोत्तम-पु० सैन्धव ॥ सैंधा । लतार्क-पु० हरित् पलाण्डु ।। हरा प्याज । लवोत्थ-न० लवणक्षार ।। लोणार । खारी। लताशंख-पु० शालवृक्ष ।। सालवृक्ष । लवणी-स्त्री० फल--विशेष ॥ सतिाफल । लम्बकर्ण-पु० अंकोठवृक्ष ।। ढेरावृक्ष । लवली-स्त्री. फल-विशेष ॥ हरपारेवडी। लम्बदन्ता-स्त्री० सैंहली || सिंहली पीपल । लशुन न० रसेन ।। ल्हशन । यशफल | चिलगोजा। लशून-पु०" लम्बबीजा-स्त्री." लसा-स्त्री० हरिद्रा ।। हलदी। लम्बा-स्त्री० तिक्ततुम्बी ।। कडवी तोम्बी । लसिका-स्त्री. लाला ।। मुखकी लार । लम्बिका-स्त्री० तालुद्धस्थ सूक्ष्माजिह्वा ।। अलिजिह्वा, लसीका-स्त्री० इक्षुरस ।। ईखका रस । तालूके ऊपर एक छोटी जीभ । लक्षपुष्पा-स्त्री० तरुणी ।। सेवती। ललदम्बु-पु० लिम्पाक || एक प्रकारका नींबू । लक्षसुतमातृका-स्त्री० शतमूली ।। शतावर । ललन-पु. शालवृक्ष । प्रियाल || सालका पेड । लक्ष्मणा-स्त्री० श्वेतकण्टकारी । स्वनामख्यात चिरोंजीका पेड । औषध ।। सफेद कटेहरी । लक्ष्मणाकन्द । ललनाप्रिय-न० हीबेर || सुंगंधवाला । लक्ष्मी-स्त्री० ऋद्धि । वृद्धि । फलिनीवृक्ष । स्थल. ललनाप्रिय-पु. कदम्ब || कदम-i. पद्मिनी । हरिद्रा। शमी। मुक्ता ।। ऋद्धि ओ. लम्बबीज-पु.
औषधिकोष । (१५७) . षधी । वृद्धिओषधी । कलिहारीवृक्ष गेंदेकावृक्ष । लिख्यास्त्री० परिमाण-विशेष ।। सोंके छै भागों में पद्मचारिणी । हलदी। छौंकरावृक्ष । मोती। से एक भाग । सझेका छठा हिस्सा । लक्ष्मीग्रह-न० रत्तोत्पल ।। लालकमल । लिंग-न० मेटू ।। पुरुषका चिह्न । लक्ष्मीताल-पु० श्रीतालवृक्ष ।। श्रोताडवृक्ष । लिंगक-पु. कपित्थवृक्ष ॥ कैथका वृक्ष । लक्ष्मीपति-पु० लवङ्ग । पूग । लौंग । सुपारी । लिंगवर्द्ध-पु. लक्ष्मीफल-पु० बिल्ववृक्ष ।। वेलका पेड । लिंगवर्द्धिनी-स्त्री० अपामार्ग ।। चिरचिटा । लक्ष्मीवान् (त् )-पु. पनस । श्वेतरोहितकवृक्ष ।। लिङ्गिनी-स्त्री० लता-विशेष ॥ लिङ्गिनी लता । कटहरका वृक्ष । सफेदरोहेडावृक्ष । पञ्चगुरिया देशान्तरीय भाषा । लागल-न० तालवृक्ष । पुधा-विशेष ।।ताडका पेड। लिम्पाक-न. निम्बूक-विशेष ॥ नींबू भेद । एक प्रकारके फूल । लिम्पाक-पु० जम्बीर ॥ जम्भीरी नींबू । लाङ्गीलक-पु० स्थावर-विषभेद । लिक्षा-स्त्री लिख्या ।। सर्सेका छठा भाग । लाङ्गलिका-स्त्री. लागलीवृक्ष ।। कलिहारी । लीन-न० तगर ।। तगर । लाङ्गलिकी-स्त्री." लुबुष-यु० बीजपूर ॥ विजोरा नींबू । लागली (न् )-पु. नारिकेले । नारियल । लुण्टुक-पु० शाक विशेष ।। लांगली-स्त्री० लांगलाकार पुष्पविशिष्ट जलजशाक- लुलायकन्द-पु० महिषकन्द ॥ भैंसाकन्द । विशेष । पृश्निपर्णी । कलिकारी । कपिकच्छु ।। लूतारि-स्त्री० पय:फेनीक्षुप ॥ दूधफेनी । जलपीपर, गङ्गतिरिया । पिठवन । कलिहारी। लेखन-न० भूजत्वक् ॥ भोजपत्र । कौंछ, किवांच। लेखन-पु. काश || काँस । लांगुलिका-स्त्री० पश्निपर्णी ॥ पिठवन । लेखाट-पु० श्रीतालवृक्ष ।। श्रीताडवृक्ष । लांगूली(न् )-पु० ऋषभक ॥ ऋषभकऔषधी । लेख्यपत्र-पु० तालवृक्ष ।। ताडवृक्ष । लाज-न० उशीर ।। वीरनमूल, खश । लेप-पु० तुधा । प्रलेप ॥ चन । लेप । लाज-पु. लाजा ।। खालें । लेपन-पु० तुरुष्कनामक गन्धद्रव्य ॥ शिलारस । लाज-पु० भूम्नि । भृष्टधान ।। खीलें । लेहिन-पु० टंकण ॥ सुहागा । लाञ्छ-पु० रागाधान्य ।। तृणधानभेद । लैङ्गी-स्त्री. लिङ्गिनी ॥ शिवलिझी मराठीभाषा । लामन्जक-न० वीरणमूल। उशीरवत् पातच्छवितृण. लोककान्ता-स्त्री० ऋद्धि ।। ऋद्धिनामक ओषधी। विशेष ॥ खस । लामजकतृण । लोकतुषार-पु० कर्पूर ॥ कपूर । लाला-स्त्री० मुखभव जल ॥ मुखको लार, थक । लोकेश-पु० पारद ।। पारा । लालामेह- . प्रमेहरोग-विशेष । लोचक-पु० कदली ॥ केला । लावण-न. नस्य ।। नास । लोचनहिता-स्त्री. तुत्थाञ्जन | तूतियेकाअञ्जन । लाबु-स्त्री, अलाबू ।। तोम्बी । लाचनी-स्त्री. महाश्रावणिका ||. बड़ीगोरखमुण्डी । लाबू-स्त्री० लोचमर्कट-पु. लोचमस्तक || मोरशिखा । लाक्षा-स्त्री० रक्तवर्णवृक्षनिर्यास-विशेष ॥ लाख । लोचमस्तक-पु. " लाक्षातरु-पु० पलाशवृक्ष ॥ ढाकवृक्ष । लोणतृण-पु. लवणतृण ॥ लवणतृण । लाक्षाप्रसाद-पु० पट्टिकालोध्र ॥ पठानी लोध । लोण-स्त्री० क्षुद्राम्लिका ॥ चाङ्गेरी, अम्बिलोना, लाक्षाप्रसादन-पु० रक्त लोध्र ।। लाल लोध । आवन्ती। लाक्षावृक्ष-पु० कोशाम्र । पलाशवृक्ष ॥ कोशम । लोणा-न० क्षार-विशेष ॥ लवणखार । ढाक वृक्ष । लोणाम्ला-स्त्री० क्षुद्राम्लिका ।। अम्बिलोना । लिकुच-न० चुक्र ॥ चकाशाक । लोत-पु०न० लवण || नोन । लिकुच-पु० लकुच ॥ बडहर । लोध-पु० स्वनामख्यात वृक्ष । लोध ।
( १५८) आयुस्दीय- लोध्र-पु० लोहित-पु. मसूर । रक्तालु । रक्तशालि । रोहित. लोधकवृक्ष-० कवृक्ष । रक्तक्षु । मसूरअन्न । रतालू । लालधान । लोमकरणी-स्त्री. मांसच्छदा।। मांसरोहिणी विशेष । रोहेडावृक्ष । लाल ईख । लोमफल-पु. • भव्यफल || नीम्ब मराठीभाषा । लोहितचन्दन-न० कुंकुम । रक्तचन्दन ।। केशर । लोमशकाण्डा-स्त्री. कर्कटी || ककडी । लाल चन्दन । लोमशपर्णिनी-स्त्री० माषपर्णी ।। मघवन । लोहितपुष्पक-पु. दाडिमवृक्ष ॥ अनारका पेड । लोमशपुष्पक-पु. शिरीषवृक्ष ।। सिरसका पेड । लोहितमृत्तिका-स्त्री० गैरिक ॥ गैरू मिट्टी । लोमशा-स्त्री० काकजङ्घा । मांसी । वचा । शूक. लोहितयाष्ट-स्त्री० मञ्जिष्टा ।। मजीठ । शिम्बी । महामेदा । कासीस । अतिबला । शण लहितलता-स्त्री." । एरुि । गंधमांसी ॥ मसी, काकजङ्घा। लोहिता-स्त्री० वराहक्रान्ता । रक्तपुनर्नवा ।। वरा. जटामांसी, बालछड । वच । काँछ, किंवाँच । हक्रान्ता । गदहपूर्ना । महामेदा औषधी । कसीस । कंगई । शणुहुली । बडी ककडी । जटामांसभिद । लोहितांग-पु. काम्पल्लक || कबीला । लोहितायः (स् ) न० ताम्र ॥ तांबा । लोमहृत्-पु० हरिताल ॥ हरताल | लहितोत्तम-न० स्वर्ण | सोना । लोलिका-त्री० चाङ्गेरी ।। अम्बिलोना । लौह-ज० स्वनामख्यात धातु ॥ लोहा । लोष्ट-न० लौहमल || लोहेका भैंल । लौहकिट्ट-न० मण्डूर ॥ लोहकीट । लोह-न० अगुरुचन्दन ।। अगर । चन्दन । लौहज-न० लोह-पु० न० लौह । रुधिर । अष्टधातु ॥ लोहा । लौहमल-न० रक्त । आठ.धातु, सोना, चादी, ताँबा, जस्त इति श्रीशालिग्रामवैश्यकृतौ शालिग्रामौषधशब्द- पतिल, रांग, शीशा, लोही । सागरे लकाराक्षरेऽष्टाविंशस्तरङ्गः ॥ २८ ॥ लोहकण्टक-पु० मदनवृक्ष ॥ मैनफलका वृक्ष । व लोहकान्त-पु० अयस्कान्त ।। चुम्बक पत्थर । लोहकिट्ट-न० लोहमल, मण्डर ॥ लोहेका मैल । व-पु० शालूक ॥ कमलकन्द, भसीडा । लोहकीट । वंश-पु० इक्षु । शालवृक्ष । पृष्टावयवविशेष । तृण- लोहचूर्ण-न० जाति-विशेष|| ईख । सालवृक्ष । पीठका दण्डा। लोहज-न० लोहकिट्ट । कांस्य ॥ लोहकीट । कांसी। लोहद्रावी (न्)-पु० टङ्कण ॥ सुहागा। वंशक-न० अगुरु ॥ अगर । लोहमारक-पु० शालिञ्चशाक । शान्तिशाक । वंशक-पु० इक्षु-विशेष। एक प्रकारको ईख जिसमें लोहवर-न० स्वर्ण ॥ सोना । वासके समान बडे गन्ने होते हैं। लोहश्लेषण- पु० टंकण ।। सुहागा । वंशकर्पूररोचना-स्त्री० वंशलोचना ॥ वंशलोचन । लोहशंकर-न० वर्तलोह । विद्रि वंगभाषा । वंशज-पु. वेणुयव || बांसके चावल । लोहाख्य-न० अगरु ।। अगर । | वंशजा-स्त्री. वंशरोचना ॥ वंशलोचन ! • लोहि-न० श्वतटंकण ॥ सफेद सुहागा । वंशतण्डुल-पु० वेणुयव ॥ बाँसके चावल । लोहित-न० रक्तगोशीर्ष । कुंकुम । रक्तचन्दन । वंशधान्य-न० पतंग। हरिचन्दन । तृणकुंकुन । रुधिर । वंशनत्र-न० इक्षुमूल || ईखकी जड । पलाण्डु ॥ लालगोशीर्ष चन्दन । केशर । लाल. वंशपत्र-पु० नल ॥ नरसल | चन्दन | पतंगकाठ । हरिचन्दन । तृणकेशर । वंशपत्रक-न० हरिताल || हरताल । रुधिर-लोहू । प्याज । वंशपत्रक-पु० श्वेतक्षु ॥ सफेद ईख । - वांस । - औषधिकोप। ११५९) 4.CPM ENTRIES विशेष । " पेड । वंशपत्री-स्त्री. नाडहिंगु । तृग-विशेष ॥ नाडी-विंगसेनक-पु० हीङ्ग । वंशपत्रीतृण । बंगारि-पु. हरिताल || हरताल । वंशपात-पु० कण गुग्गुलु ॥ कणगूगल । वंक्षण-पु० ऊरुसन्धि ।। जांघोंका जोड । वंशपुप्पा-स्त्री. सहदेवीलता ॥ सहदेई । वचन-न० शुण्ठी ।। सौंठ । वंशपूरक-न० इक्षुमूल ।। ईखकी जड । वचा-श्री ओपधी-विशेष |॥ वच । वंशरोचना-स्त्री० स्वनामख्यात वंशपर्वस्थित श्वत बचाकार-पु० चित्र-विशेष । वर्ण औषध-विशेष ॥ वन-पु० न० हीरक ।। हीरा । वंशरोचन-वंशलोचन ॥ तवाशीर, फारसीभाषा।। वन-न० काजिक । वज्रपुष । लेोहविशेष||अभ्र- वंशलोचना-स्त्री." वंशशर्करा-स्त्री. वन-पु. कोकिलाम । श्वेतकुश ! स्नुहावृक्ष ॥ ताल. वंशक्षीरी-स्त्री० " मखाना । सफेद कुशा । सेहुण्डवृक्ष । वंशाकुर-पु० वंशाग्र ॥ वासके छडका । वजक-नर वक्षार || वज्रखार । वंशिक-न० अगुरु ॥ अगर । वनकण्टक-पु० स्नुहावृक्ष । कोकिलाक्षवृक्ष । सेहु- वंशिका-स्त्री." ण्डवृक्ष । तालमखाना । वक-पु०.पुष्पवृक्ष-विशेष ॥ अगस्तका वृक्ष । वज्रकन्द-पु० कन्द-विशेष ॥ शकरकन्द । वकपुप्प-पु. " वज्रद्रु-पु० स्नुहावृक्ष ॥ सेहुण्डवृक्ष । वकुल-पु० स्वनामख्यात पुष्पवृक्ष ॥ मौलसिरीका वज्रद्रुम-पु० वज्रपुष्प-न तिलपुष्प ॥ तिलका फूल । वकुला-स्त्री० कटुका || कुटकी। वज्रपुष्पा-स्त्री० शतपुष्पा || सौंफ । वकुली-स्त्री० काकोली ॥ काकोली औषधि । वज्रमूली-स्त्री० माषपर्णी ॥ मपवन । वकूल-पु० वकुलवृक्ष ॥ मौलसिरीका पेड । वज्रवल्ली-स्त्री. अस्थिसंहारलता ॥ हडसंघारी, हड. वक्त-न० तगरमूल ।। तगरकी जड । वक्त्रवास-पु० नारंग नारंगीका पेड । वज्रबीजक-पु० लताकरञ्ज ॥ लताकरञ्ज । वक्त्रशोधन-न. भव्य || भव्यफल । वज्रवृक्ष-पु० सेहुण्डवृक्ष ॥ थूहडका वृक्ष । वक्त्रशोधी( न -पु० जम्बीर ॥ जम्भीरी नीबू । वज्रक्षार-न० क्षार-विशेष ॥ वज्रवार । नवसादर । वक्र-पु० पर्पट ॥ पित्तपापडा। वज्रा-स्त्री० स्नुहीवृक्ष । गुडूची ॥ थूहरवृक्ष । वक्रकण्ट-पु. बदरवृक्ष | बेरीका पेड । गिलोय । वक्रकण्टक-पु० खदिरवृक्ष ॥ खरका पेड । वांगी-स्त्री० गवेधुका । अस्थिसंहारी ॥गरहे. वक्रपुष्प-पु० बकपुष्पवृक्ष । पलाशवृक्ष ।। अगस्तका डुआ। हडसंहारी। वृक्ष । दाकवृक्ष । वज्रास्थिगृखला-स्त्री० कोकिलाक्षवृक्ष ॥ तालम. वक्रशल्या-त्री० कुटुम्बिनीक्षुप ॥ अर्कपुष्पी । वक्राग-पु० कवाटवक्रवृक्ष ॥ कपाटवेगु वङ्गभाषा । वज्री-स्त्री० स्नुहीभेद। अस्थिसंहारी॥थहरका भेद । वंग-न० धातु-विशेष ॥ रांग । हडशंकरी। वग-पु० वार्ताक । कापीस ॥ बैंगन । कपास । वजुल-पु० तिनिशवृक्ष । अशोकवृक्ष । वतेवृक्ष । वंगज-न० सिन्दूर ।। सिन्दुर । स्थलपद्मवृक्ष ॥ तिरिच्छवृक्ष । अशोकवृक्ष ॥ वगण-वंगम-पु० वार्ताकु ।। बैंगन । वैतवृक्ष । स्थलकमल | वंगशुल्बज-न० कांस्य ।। कांसी । वजुलद्रुम-पु० अशोकवृक्ष ॥ अशोकवृक्ष । वंगसेन-पु० बकवृक्ष ॥ हथियावृक्ष । वजुलप्रिय पु० वेतसवृक्ष ॥ धैतवृक्ष । संकरी। HEAK खाना।
(१६०) आयुर्वेदीय- इन्द्रजौ। । वट-पु. स्वनामख्यातवृक्ष ।। वडका पंड । वनतिक्तिका-स्त्री० वटक-पु० अष्टमाषकपरिमाण ॥ एक तोला । वनदान-पु० अरण्यदममवृक्ष | वनदोना । वटपत्र-पु० सितार्जक ॥ सफेद वनतुलसी । वनदीप-पु. वनचम्पक ॥ वनचम्पा । वटपत्रा-स्त्री० त्रिपुरमालपुिष्पवृक्ष-वटपत्राकृति वननिम्ब-पु० महानिम्ब ॥ बकायननीम । पत्रपुष्प-विशेष॥ वटमोगरा मराठी भाषा । वनपल्लव-पु. शोभाञ्जनवृक्ष ॥ सैजिनेका पेड । वटपत्री-स्त्री. पाषाणभेदी-विशेष ॥ वटपत्री। वनपिप्पली-स्त्री० वनोद्भव पिप्पली ॥ वनपीपल । वटी-स्त्री० वृक्ष-विशेष ॥ नदीवड । वनपुष्पा-स्त्री० शतपुष्पा ॥ सौंफ । वटु-० कुटन्नटवृक्ष । शोनापाठा । वनपूरक-पु० वनवीजपूरक ॥ वनविजोरा नीबू । वत्सक-न० पुष्पकासीस || पुष्पकसीस । वनप्रिय-पु० त्वच ॥ दालचिनी । वत्सक० पु० कुटज । इन्द्रयव ॥ कुडाका वृक्ष । वनभुक् ( ज )-पु० ऋषभक ॥ ऋषभौषधी । वनमल्लिका-स्त्री. वनोद्भवमल्लिका । मोदयन्ती, वत्सकबीज-न. इन्द्रयव ॥ इन्द्रजौ । वनमलिका । वत्सनाभ-पु० विषवृक्ष विशेष ॥ वच्छनाभ । वनमल्ली-स्त्री." वत्सादनी-स्त्री० गुडूची ।। गिलोय । वनमालिनी-स्त्री० वाराही ॥ चर्मकारालुक । वत्साह्व-पु० कुटजवृक्ष । कुडाका पेड वनमुद्ग-पु. मुकुष्ठक || मोठ । वत्साक्षी-स्त्री० गोडुम्बा।। एक प्रकारकी ककडी। वनमुद्गा-स्त्री० मुद्रपर्णी ॥ मुगवन । वदाम-न० फलविशेष ।। बादाम ! वनमूर्द्धजा-स्त्री० कर्कटशृङ्गी ॥ काकडाशिङ्गी । वधू-स्त्री० शारिवा । शठी । पक्का ॥ गौरीसर । ॥ गौरीसर । वनमोचा-स्त्री० काष्टकदली ॥ वनकेला । कचूर । असवरग । वनयमानिका-स्त्री० अजमोदा ॥ अजमोद । वनकदली-स्त्री० काष्ठकदली । काठकेला । वनलक्ष्मी-स्त्री० कदली ॥ केला । वनकन्द-पु० वनशूरण । धरणीकन्द ॥ वनजमी- वनबर्बर-पु० कृष्णार्जक ॥ काली धनतुलसी । कन्द | धरणकिन्द । वनबर्बरिका-स्त्री० अरण्यज बर्बरी ॥ वनवबरी । वनकणिका-स्त्री० शल्लकीवृक्ष ॥ शालईवृक्ष । वनवल्लरी-स्त्री. नि:श्रेणिकातृण ॥ निःश्रेणीतृण । वनकासी-स्त्री. वनोद्भव कार्पास ॥ वनकपास । वनवासी न् ) पु० ऋषभौषध । मुष्ककवृक्ष । वनकोलि-स्त्री. वनजात बदरी ॥ वनवरी । वाराहीकन्द । शाल्मलीकन्द । नीलमहिषकन्द ॥ वनचन्दन-न० अगरु । देवदारु ॥ अगर । देव ऋषभक औषधी । मोखावृक्ष । गेंठी । सेमरकी मूली । नीलवर्ण भैंसाकन्द । वनचन्द्रिका-स्त्री० मल्लिका ॥ मल्लिकापुष्प । वनवीज-पु० वनजात बीजपूरक ॥ वनविजोरानींन्यू | वनचम्पक-पु० वनजातचम्पकपुष्पवृक्ष॥ वनचम्पा। वनबीजक-पु. वनज-न० पद्म ॥ कमल । वनबीजपूरक-पु. वनज-पु० मुस्तक । वनशूरण ॥ मोथा । वनसूरन । वनवृन्ताकी- स्त्री० बृहती ॥ कटाई । वनजा-स्त्री० मुद्गपर्णी । वनकार्पासी । वन्योपोदकी। वनव्रीहि-पु० नीवार ॥ नीवारधान । अश्वगन्धा । गन्धपत्रा । मधुरिका । ऐन्द्र ॥ मुग. वनशूकरी-स्त्री० कपिकच्छु ।। कौंछ । वन । वनकपास । वनपोईशाक । असगन्ध । वनशरण-पु० वनजात शूरण || वनजमीकन्द । वनसती । सोआ । वनअदरख । वनशृंगाट-पु० गोक्षुर ।। गोखुरू । वनजीर-पु. वनोद्भव जीरक ।। वनजीरा । वनशृंगाटक-पु." वनातक्त-पु० हरीतकी ॥ हरड़। वनशाभन-न० पद्म ॥ कमल । वनतिक्ता-स्त्री. पाठा ॥ पाट । वनसंकट-पु० मसूर ॥ मसूर । ॥ दारु। " औषधिकोष। (१६१) वनसरोजिनी-स्त्री० वनकासी ॥ वनकपास । वग्रा-स्त्री० मञ्जिष्ठा ॥ मजीठ । वनस्था-स्त्री. अश्वत्थीवृक्ष ।। पीपलीवृक्ष । वमन-पु. शण || सन । वनस्पति-पु० स्थालीवृक्ष ॥ बेलिया पीपल वमनेष्ट-पु० महानिम्ब ॥ बकायननीम | वनहरिद्रा-स्त्री० अरण्यज हरिद्रा ।। वनलदी। वमि-स्त्री० स्वनामख्यात रोग॥छर्दि, उल्टी करना। वनहास-यु० काशतृण । कुन्दपुष्पवृक्ष ।। कांस । वयस्था-स्त्री० आमलकी । हरीतकी । सोमलता। कुन्दवृक्ष । गुडूची । सूक्ष्मैला । काकोली । शाल्मली । क्षीर- वनहासक-पु० काशतृण || काँस । काकोली । अत्यम्लपर्णी मस्त्याक्षी ॥ आमला । वनाखुग-पु० मुद्ग ।। मूंग । हरड । सोमलता । गिलोय । गुजराती इलायची। वनामल-पु० कृष्णपाकफल || पानी आमला ! सेमलवृक्ष । क्षीरकाकोली । कण्डरा । मछछी। वनाम्र-पु० कोशाम्र ।। कोशम । वयोरङ्ग-न० सीतक । सीसा । वनारिष्टा-स्त्री. वनहरिद्रा ।। वनहलदी। वर-न० कुंकुम ॥ केशर । वनाका-स्त्री० ऐन्द्र ॥ वन अदरख । वर-पु. गुग्गुलु ।। गूगल । वनालक-पु० करमईक । करोंदा । वरक-पु. वनमुद्ग । पर्पट । तृणधान्य भेद ॥ वन- वनालिका-स्त्री० हस्तीशुण्डी ।। हाथीशुण्डा। मूंग, माँठ । पित्तपापडा। चीनाधान । वनिता-स्त्री प्रियंगु ।। फूलप्रियगु । वरचन्दन-न० कालीय । देवदारु ।। पीलाचन्दन । वनज्य-पु० बद्धरसाल ।। उत्तम आम । देवदार। वनेसर्ज-पु० अशनवृक्ष । बिजयसार, असनवृक्ष । वरट-न० कुन्दपुष्प ॥ कुन्दके फूल । वनेक्षुद्रा-स्त्री० करञ्ज ।। करंजुआ। वरटा-स्त्री० कुसुम्भबीज ॥ कसूमके बीज, कर । वनोद्भवा-स्त्री० वनकासी ॥ वनकपास । वरट्टिका-स्त्री." वन्दका-स्त्री० वन्दा || बाँदा । वरण-पु० वरुणवृक्ष । बरनावृक्ष । वन्दनीय-पु० पीतभृगराज । पीलाभांगरा । वरण्डालु-पु० एरण्डवृक्ष । अण्डका पेड । वन्दनीया-स्त्री. गोरोचना ।। गौलोचन । वरतिक्त-पु० कुटजवृक्ष ।। कुडेका पेड । वन्दा-स्त्री० वृक्षोपरिजात वृक्ष ।। बाँदा, बन्दा वरतिक्ता-स्त्री० पाठा ।। पाढ । वरतिक्तिका-स्त्री." वन्दाक-पु० वरत्करी-स्त्री० रेणुकानामक गन्धद्रव्य -॥ रेणुका । वरत्वच-पु० निम्बवृक्ष ॥ नीमका पेड़ । वन्दाकी-स्त्री० वरदा-स्त्री० अश्वगन्धा । आदित्यभक्ता । असगन्धा वन्द्या-स्त्री० वन्दा | गोरोचना ।। बांदा।गौलोचन । वन्य-न० त्वच ॥ दालचिनी । वरदातु-पु० वृक्ष-विशेष ॥ भुईसह । वन्य-पु० वनशूरण । वाराहीकन्द । देवनल ।।वन- वरवर्णाख्य-पु० क्षीरकञ्चुकीवृक्ष ॥ क्षीरीशवृक्ष । सूरन । गेठी ।। बडा नरसल । वरफल-पु० नारिकेलवृक्ष ।। नारियालका पेड । वन्या-स्त्री० मुद्गपर्णी । गोपालकर्कटी । गुञ्जा। मधु. वरमुखी-स्त्री० रेणुकानामक गन्धद्रव्य ॥ रेणुका । रिका । भद्रमुस्ता । गन्धपत्रा । अश्वगन्धा ।। वरम्बरा-स्त्री० चक्रपर्णी ॥ पिठवन । मुगवन । गोपालं ककडी,-गरुभादेशान्तरीयभाषा वरलब्ध-पु० चम्पकवृक्ष || चम्पावृक्ष । धुंधुची । सोआ। भद्रमोथा । वनसटी । असगन्ध । वरवर्णिनी-स्त्री० हरिद्रा । लाक्षा । रोचना । कालि. वन्यापदको-स्त्री० वनजातोपोदकी ॥ वनपोई । नी॥ हलदी । लाख । गौलोचन । फूलप्रियंगु । वपुषा-स्त्री० हपुषा ॥ हाऊबेर । वरबाह्रकि-न० कुंकुम !! केशर । वपुष्टमा-स्त्री० पद्मचारिणी ॥ गैंदावृक्ष । वरा-स्त्री० त्रिफला । रेणुका । गुडूची । शतमूली । वप्र-न० ससिक || सीसा । भेदा । ब्राह्मी । विडङ्गा । पाठा। हरिद्रा हर- " वन्दाका-स्त्री."
(१६२) आयुर्वेदीय- जपात । ड १ बहेडा २ आमला ३ रेणुको । गिलोय । वरेण्य-न० कुंकुम ।। केशर । शतावर। मेदा औषधी । ब्रह्मी घास । वायविडङ्ग। वरेन्द्रपत्र-न० सुगन्धिद्रव्य-विशेष । पाठ। हलदी। वरोट-न० मरुबकपुष्प ।। मरुजा । वराङ्ग-न० गुडत्वक् । तेजपत्र ॥ दालचीनी ।ते. वर्चः (स् )-न० पुरीष ।। विष्ठा । वर्ण-न० कुंकुम ।। केशर । वराङ्गक-न० गुडत्वक् ॥ दालचीनी । वर्णक-न० हरिताल । चन्दन ॥ हरताल | चन्दन। वराङ्गी-स्त्री. हरिद्रा । हलदी। वर्णक-पु० न० चन्दन ।। चन्दन । वराङ्गी [ ]-पु० अम्वेतस ॥ अम्लवेत । वर्णद-न० कालीयक ।। कलम्बक । वराट--पु० कपर्दक :। पद्मबीज । पद्मबीजकोष ।। |वर्णदात्री-स्त्री. हरिद्रा || हलदी । कौंडी । कमलगट्टा । कमल गट्टे का घर । वर्णपुष्पक-पु० राजतरुणीपुष्पवृक्ष ॥ अम्लान, राज. वराटक-पु० स्त्री० कपईक || कौंडी। तरुपी । वराटक-पु० पद्मवीज || कमलगट्टा ! वर्णपुष्पी-त्री० उष्ट्रकाण्डी ॥ उटाटी वङ्गभाषा । वराटकरजाः( स् )-पु. नागकेशर || नागकेशर । वर्णप्रसादन-न० अगुरु ॥ अगर । वराटिका-स्त्री० कपर्दक ।। कौडी । वर्णरेखा-ली० कठिनी ॥ खडियामाटी । वराण-पु० वरुणवृक्ष । वरनावृक्ष । वर्णलेखा-स्त्री." वरादन-पु. राजादनवृक्ष | खिरनीका पेड । वर्णलेखिका-स्त्री वराभिध-पु० अम्लवैतस || अम्लवेत । वर्णवती-स्त्री० हरिद्रा ॥ हलदी । वराम्ल-न० काजिक || कांजी । वर्णा- स्त्री० आढकी ।। अडहर । वराम्ल-पु० प्राचीनामलक । अम्लवैतस ॥ पानी- वर्णाह-पु० मुद्ग ॥ मूंग । आमला । अम्लवेत । वर्णि-न० स्वर्ण ॥ सोना । वरारक-न० हीरक || हीरा । वर्णिका-स्त्री० कठिनी । खडियामाटी। वरासन-न० ऑड्पुष्प ॥ गुडहरके फूल । वर्णिनी-स्त्री० हरिद्रा ॥ हलदी । वराह-पु० मुस्ता । वाराहीकन्द ॥ मो या। गैठी। वर्णोज्ज्वल-न० हरिताल || हरताल । वराहकन्द-पु. वाराहीकन्द || गैठी। वर्तक-न० वर्तलौह ॥ नीललोह । वराहकान्ता-स्त्री० वाराही ॥ चर्मकारालुक । वर्ति-स्त्री. भेषज-निम्माण । वराहकाली (न् )-पु. सूर्यमणिपुष्पवृक्ष ।। वर्तुल-न० गृञ्जन । टंकण || गाजर । सुहागा । सूर्यफूल मराठी भाषा । वर्तुल-पु० कलाय-विशेष ॥ मटर । वराहक्रान्ता-स्त्री० स्वनामख्यात क्षुप ॥ वराह-वर्तुली-स्त्री० गजपिप्पली ॥ गजपीपर । क्रान्ता। वर्द्ध-न० सीसक ॥ सीसा । बराहनाम(न् )-पु. वाराहकिन्द ॥ गेंठी । वर्द्ध-पु. ब्राह्मणयष्टिका || ब्रह्मनेटि । वराहिका-स्त्री० कपिकच्छु ॥ कौंछ । वराही-स्त्री० भद्रमुस्ता । शूकरकन्द ॥ भद्रमोथा । वर्द्धमान-पु० एरण्डवृक्ष ॥ अण्डका पेड । वर्द्धमानक-पु० " वरिष्ठ-न. ताम्र । मरिच ॥ ताँवा । मिरच । वर्मकण्टक-पु० पप्पर्ट ॥ पित्तपापडा । वरिष्ठ-पु. नारङ्गवृक्ष ॥ नारङ्गीका पेड । वर्मकषा-स्त्री० चर्मकथा ॥ शातला । वरिष्ठा-स्त्री. आदित्यभक्ताः ॥ हुरहुर । वर्वर-न० पीतचन्दन । हिंगुल । बोल || पीला वरी-स्त्री. शतावरी ||शतावर । चन्दन । सिङ्गरफ । बोल । वरुण-पु. स्वनामख्यातवृक्ष ॥ चरनावृक्ष । वर्वर-पु० पञ्जिका । क्षुप विशेष ॥ भारङ्गी । वा- वरुणात्मजा-स्त्री० मदिरा ॥ मद्य । वुई तुलसीभेद । वर्द्धक-पु० चर्मकारालु ।
औषधिकोव। (१६३) . वर्वरक-न. चन्दनभेद । वल्ल-पु० त्रिगुञ्जापरिमाण | द्विगुजापरिमाण । सा ववरी-स्त्री० वर्वरा-बी० पुष्पभदे ।। शाकभेद । धंगुञ्जा ॥ ३ रत्तीपरिमाण ।। २ रत्तीपारमाण तुलसी । विशेष बनतुलसी । १॥ रत्तीपारमाण। वर्व,वरीक-पु० ब्राह्मणयष्टिका ॥' अजगन्धिका बल्लकी-स्त्री- शल्लकीवृश्च । शाल वृक्ष । भारङ्गी । वनतुलसी। वल्लर--न० कृष्णागरु || काली अगर । वर्वर-पु० वृक्ष-विशेष ॥ बबूरका पेड । बल्लरि-स्त्री० मेथिका || मेथी । वर्षकेतु-पु० रक्तपुनर्नवा ।। गदहपूर्ना, सोंठ । वल्लिकण्टकारिका-स्त्री० अग्निदमनी ॥ अग्नि- वर्षपाक-पु० आम्रातक || अम्बाडावृक्ष । दमनी । वषपाकी-न् ] पु० वल्लिा-स्त्री० मालादूर्वा ॥ मालादूव । वल्लिवरा-स्त्री० शारिवा ॥ गौरीसर । वर्षपुष्पा-स्त्री० सहदेवीलता ॥ सहदेई । वर्षाङ्गी-स्त्री० पुनर्नवा ॥ साट विषखपरा । वलिशाक-पोतिका-जोर मूलपोती ॥ पाई. वर्षाभव-पु. रक्तपुर्नवा ॥ गदहपूर्ना , साँठ । शाकभेद । वर्षाभू-स्त्री० पु० पुनर्नवा ॥ विषखपरा-सांठ ! वल्भिरण-पु. अत्यम्कपर्णी ।। कण्डूरा । वाम्वी-स्त्री" वल्लो-स्त्री. अजमोदा । कैवर्तिका । चविका ॥ अजमोद । कैवर्तिकालता | चव्य । वर्षालकायिका-स्त्री० पृक्का ॥ असवरग । वल्लीज--न० मरिच ॥ मिरच । वह-न० ग्रन्थिपर्ण ।। गठिवन । वल्लीबदरी-स्त्री० भूबदरी || झडवेरी। वर्हि [स् ]-पु० न० कुश ॥ कुशा । वल्लीमुद्ग-पु० मकुष्ठक || मोठ । वर्हि [स] न० ग्रन्थिपर्ण ॥ गठिवन । वल्लीवृक्ष-पु० शालवृक्ष ।। सालका वृक्ष । वर्हिपुष्प-न" वल्या-स्त्री. धात्रीवृक्ष ॥ आमलेका पेड़ । वहिष्ठ-न० होवेर । आम्र ॥ सुगंधवाला । आम। वल्बज-पु० तृण-विशेष । वार्हकुसुम-न० ग्रन्थिपर्ण ॥ गठिवन । वल्वजा-स्त्री० तृण-विशेष ॥ सावेवागे। वर्हिपुष्प-न." वव्वूल-पु० वरवृक्ष ॥ बबूरका पेड़ । वहिष्ट-न० होवेर || नेत्रवाला, सुगंधवाला । वव्वूलनिर्यास-पु०वव्वूलवृक्षस्य निर्यासः ॥ बवू. वलय-पुर गलरोग विशेष । रका गोंद । बला-स्त्री. स्वनामख्यात औषधि-विशेष ॥ ख-वशिका-स्त्री. अगरु ॥ अगर। वशिनी-स्त्री. शमीवृक्ष । वन्दा ॥ छौंकरावृक्ष । वलाहक-पु० मुस्तक ॥ मोथा । वशिर-न० सामुद्रलवण ॥ समुद्रनोन । वलूक-न० पद्ममूल || कमलकन्द । वल्क-पु० पट्टिकालोन ॥ पठानीलोध । वशिर-पु० गजपिप्पली । चव्य । अपामार्ग। वचा ॥ गजपीपल | चव्य । चिरचिटा । वच । वल्कतरु-पु० पूगवृक्ष ॥ सुपारीका पेड । वल्कद्रुम-पु० भूर्जवृक्ष ॥ भोजपत्रका वृक्ष । वशीर-पु. गजपिप्पली ॥ गजपीपल । वल्कल-न. त्वच ।।दाल चीनी । वश्य-न० लवङ्ग ।। लौंग । वल्कलोध-पु० पट्टिकालोध ।। पठानीलोघ । वसन्तक-पु. श्योनाकभेद ॥ शोनापाठा । वल्गुक-न० चन्दन ।। चन्दन । वसन्तजा-स्त्री. वासन्तीलता || वासन्ती । वल्गुपत्र-पु० वनमुद्ग ॥ मोठ वसन्तदूत-पु० आम्रवृक्ष ॥ आमका पेड़। वल्गुला-स्त्री० बाकुची ॥ वायची । वसन्तदूती-स्त्री० पाटलीवृक्ष । माधवीलता । ग. वल्मीक-पु० रोग-विशेष ॥ णिकारीपुष्पवृक्ष ॥ पाडरवृक्ष । माधवी लता । ग. वल्मीकशीर्ष-न०लोतोञ्जन । शर्मा। णिकारी, मदनमादिनी । ॥ रंटी। बाँदा। .
(१६४) आयुर्वेदीय- वसन्तद्रु-पु० आम्रवृक्ष ॥ आमका पेड़ । वस्त्ररञ्जन-पु० कुसुम्भ ॥ कसूम । वसा-स्त्री०मांससम्भूत धातु--विशेष । मांसरोहिणी॥ वस्नसा-स्त्री० स्नायु ॥ एक प्रकारकी नस । चर्वी । मांसरोहिणी। वहलगन्ध-न० शम्वरचन्दन ॥ शबरचन्दन । वसिर-न० सामुद्रलवण । गजपिप्पली ॥ समुद्र- वहलचक्षुः[स् ]-पु० मेषशृङ्गी ॥ भेढाशिङ्गी । नोन । गजपीपल । वहलत्वच-पु. श्वतलोध्र ॥ सफेद लोध । वसु-न० वृद्धिनामौषधि । स्वर्ण ।। वृद्धि । सोना । वहला-स्त्री० शतपुष्पा । स्थूलैला ॥ सोंफ । बडी वसु-पु. शिवमली । शिवमल्लिका । पीतमुद्ग । पु इलायची। ष्पवृक्ष-विशेष ।। बृहत् मौलसिरी । वसुपुष्पवृक्ष। वहेडुक-न० बिभीतकवृक्ष । बहेडा । पाली मूंग । एक प्रकारका वृक्ष । वह्नि-पु० चित्रक । भल्लातक । निम्बूक ॥ चीतेका वसु- -स्त्री० वृद्धिनामावधि ॥ वृद्धिओषधी । पेड । भिलावेका पेड । नींबू । वसुक-न० साम्भारिलवण । पांशुलवण । वास्तू- वहिकरी-स्त्री० धातकी ॥ धायके फूल । कशाक । कृष्णागरु ।। सांभरनोन । रेहगमा नो वह्निकाष्ठ-न० दाहागरु ॥ दाहअगर । न । बथुआ शाक। काली अगर । वाहिगन्ध-पु० यक्षधूप ।। राल । वसुद्ध-पु० अर्कवृक्ष । क्षारलवण । श्वेताकवृक्ष । वह्निगर्भ-पु० वंश ।। वांस । स्वनामख्यात पुष्पवृक्ष ॥ आकका पेड़। खारी । वह्निगर्भा-स्त्री० शभीवृक्ष ॥ छौंकररावृक्ष । सफेद मन्दारवृक्ष । वसुपुष्पवृक्ष । वह्निचक्रा-स्त्री० कलिकारीवृक्ष ॥ कलिहारीवृक्ष । वसुच्छिद्रा--स्त्री. महामेदा ॥ महामेदाओषधी । वह्निज्वाला-स्त्री० धातकीवृक्ष । धायके फूल । वसुधाख रिका-श्री. भूखजूरिका । देशी खजूर। वन्हिदमनी-स्त्री० अमिदमनी क्षुप ॥ अभिदमनी । वसुश्रेष्ठ-न० रूप्य ॥ रूपा । वन्हिदीपक-पु० कुसुम्भ ॥ कसूम । वसुहट्ट-पु० अगस्त्यवृक्षः॥ अगस्तिका वृक्ष । वह्निदीपिका-स्त्री. अजमोदा ॥ अजमोद । वसुहट्टक-पु० वह्निनाम (न् )-पु. चित्रक । भलातक ॥ ची- वसूक-न० साम्भारलवण||अगस्त्यवृक्षासांभरनोन । तावृक्ष । भिलावेका पेड। हथियावृक्ष । वह्निनी-स्त्री- जटामांसी ॥ जटामांसी, वालछड़ । वस्तक-न० कृत्रिमलवण | सलम्बानोन । वह्निपुष्पी-स्त्री० धातकी ।। धायके फूल, वस्तकर्ण-पु. शालवृक्ष ॥ सालका वृक्ष । वह्निभोग्य-न० घृत ॥ धी। वस्तगन्धा-स्त्री० वृक्ष-विशेष । वह्निमन्थ-पु० अग्निमन्थ ॥ अरणी, अगेथुवृक्ष । वस्तमोद-स्त्री." वहिलोहक- न० कांस्य || काँसी । वस्त्रांत्री-स्त्री. छगलान्त्री ॥ अजान्त्री क्षुप । वलिवर्ण-न० रक्तोत्पल || लाल कमल । वस्ति-पु० स्त्री० नाभिअधोभागक्रिया विशेष । वास्तवन्हिवल्लभ- पु० सर्जरस | राल । कर्म, दस्त कराने की विधि । वन्हिबीज-न० निम्बूक । स्वर्ण ॥ नीम्बू । सोना। वस्तिकाव्य-पु० अरिष्टवृक्ष || रीठा । वन्हिशिख-न० कुमुम्भ । कुकुम ।। कसूम। वस्तिमल-न० मूत्र ॥ मूत । पेशाब । वन्हिाशखर-पु. लोचमस्तक ॥ मोरशिस्त्रा। वस्तुक-न. वास्तूक || बथुआ । वन्हिशिखा-स्त्री० फलिनी । कलिकारी । धातकी ॥ वस्तुको-स्त्री. श्वेतचिल्लीशाक ॥ सफेद चिल्लीका फूलप्रियङ्गु । कलिहारी । धायके फूल । वन्हिसंज्ञक- पु० चित्रक ॥ चीतावृक्ष । वस्त्रपजल-पु० कोलकन्द ॥ सूकरकन्द । वन्हिसख-पु० जीवक ।। जीवकवृक्ष । वस्त्रभूषण-पु० सकुरुण्डवृक्ष ।। सकुरुण्डर गुजराती वांशी-स्त्री. वंशरोचना ॥ वंशलोचन । भाषा...... वाकुची-स्त्री० सोमराजी ॥ वायची । वस्त्रभूषा-स्त्री० मञ्जिष्ठा । मजीठ है, वागुजी-स्त्री - केशर शाक । 2200 - Pusta औषधिकोष। (१५६) वैगुन । वागुण-न० कर्मरङ्ग ॥ कमरख । वातवैरि (न्)-पु. वाताद ॥ बादाम । वाज-न० घत । अन्न ॥ वी । अन्न । वातव्याधि-पु० वातरोग ॥ हड्डी और संधियों में वाजिकर्ण-पु० पतिशालवृक्ष ॥ विजयसार । पीडा, रोमांच, वृथाबकवाद, हाथ, पांव और वाजिगन्धा-स्त्री० अश्वगन्धा । असगन्ध । मुखका जकडना । वाजिदन्त-पु० ० वासक ।। अडूसा । वातशोणित-पु० वातरक्त रोग ॥ अंगुलियोंकी वाजिदन्तक-पु०॥ गांठ-गांठमें पीडा, शरीरका कालारंग, सधिरके वाजिनी-स्त्री० अश्वगन्धा ॥ असगन्ध । चकत्ते देहमें पडजाते हैं। वाजिपाद-पु० गोक्षुर ।। गोखुरू । वाताण्ड-पु० मुष्करोग-विशेष ॥ वाजिपृष्ठ--पु० अम्लातवृक्ष || बाणपुष्प | वाताद-पु. फलवृक्ष-विशेष ॥ वादाम । वाजिभक्ष-पु० चणक || चने । वातामोदा-स्त्री० कस्तूरी ॥ कस्तूरी । वाजिभोजन-पु० मुद्ग ॥ मूंग । वातारि-पु० एरण्डवृक्ष । शतमूली । पुत्रदात्री। वाजिमान (त् )-पु० पटोल ।। परवल । शेफालिका । यवानी। भाीं। स्नुही । विडंग. वाजीकरण-न० वीर्यवर्द्धक औषधादि। शूरण । भल्लातक । जतुका ॥ अरण्डका पडे । वाटिका-स्त्री० वाटयालक । हिंगुपत्री ॥ खरैटी । शतावर । पुत्रदा । निगुण्डीभेद । अजमायन । हीङ्गपत्री । भारंगी । सेहुण्डवृक्ष । वायविडंग । जमीकन्द । वाटीदाघ-पु० इत्कट || ओकडा देशभिन्नभाषा । भिलावेका पेड । जतुकालता । वाटथक-न० भृष्टयव ॥ भुने जौ। वातिग-पु० भण्टाकी । वार्ताकु । वेगुना। कटहरी । वाट्यपुष्पी-स्त्री • बला || खिरैटी। वाट्या-स्त्री." वातिगम-पु० वार्ताकु ॥ वैगन । वाटयाल-पु० वातिगन-पु० वाटयाली- स्त्री० वातीय-न० कालिक ॥ कांजि । वाण-पु० भद्रमुञ्ज ॥ सरपता । वाताना-स्त्री० गोजिह्वाक्षुप ॥ गोभी । वाणदहन-पु० शरपुंखा || सरफोंका । वादरंग-पुं० अश्वत्थवृक्ष ॥ पीपलकापेड, गोझिया । वाणपुखा-स्त्री. वादरा-स्त्री० कापासी ॥ कपास । वाणा-स्त्री० पु. नीलझिटी ॥ नीलीकटसरया । वादल-न० मधुयाष्टिका । मुलहटी। वाणांवि-पु० शरपुंखा ।। सरफोंका । वादाम-पु० रखनामख्यातफल | बादाम । वातक-पु० अशनपर्णी ।। पटशरा । वादिर-न० वदरिसदृश सूस्मफलवृक्ष ॥ वातन्त्री-स्त्री० शालपर्णो । अश्वगन्धा । शिमृडी. वानप्रस्थ-पु० मधूकवृक्ष । पलाशवृक्ष ॥ महुआवृक्ष । क्षुप ।। शालधण । असगन्ध । चगोनि । ढाकका पेड । वातपोथ-पु० पलाशवृक्ष ॥ ढाकका पेड । वानरप्रिय-पु० क्षीरणीवृक्ष ॥ खिरनीका पेठ । वातफुलान्त्र-न० फुप्फुस ॥ फेंफढा । वानराघात-पु. लोध्रवृक्ष | लोधवृक्ष । वातरक्त-पु० स्वनामख्यातरोग । वातरक्त। वानरी-स्त्री० शूकशिम्बी ॥ कौंछ । वातरक्तन-पु० कुकुरवृक्ष ॥ कुकरोंदा । वानल-पु. वावयवृक्ष । कालविनतुलसी। वातरक्तारि-पु० पित्तन्नीलता || गिलोय । वानीर-पु. वेतसवृक्ष । वञ्जुलवृक्ष ॥ वेतवृक्ष । वातरङ्ग-पु० अश्वत्थ ॥ पीपल । वातरायण-पु० सरलद्रुम ॥ धूपसरल । वानीरक-पु० मुञ्जतॄण ॥. मूंज । वातरोग-पु० स्वनामख्यातरोग ॥ वातरोग । कांप वानीरज-न० कुष्ठोषध ।। कूठ । ना,कंठ, होठे, मुखका सूखना । वानेय-न० कैवर्तिमुस्तक ॥ केवटीमोथा । वातल-पु. चणक ॥चने । वान्तिकृत्-पु. लौइकष्टकवृक्ष ॥ मैनफलवृक्ष । जलवैत । . , (१६६) आयुर्वेदीय- । आमला। वान्तिदा-स्त्री. कटुकी । कुटकी । वारिज-न० पद्म । लवंग । द्रोणी लवण । गौरस वाप्य-न० कुष्ठौपव ॥ कूठ । वर्णशाक || कमल । लौंग । वरतनका निमक वाम-न० बास्तुक || वथुआशाक। गौरसुवर्णशाक । वामन-पु० अङ्कोटवृक्ष || देरावृक्ष । वारिज-पु० शंख । शम्बूक ।। शंख । घोंघा । वामापीडन-पु. पीलवृक्ष । पालुका वृक्ष । वारिद-न० वालक ॥ सुगन्धवाला, नेत्रवाला । वायस-पु० अगुर । श्रीवास || अगर । गूगल । वारिद-पु० मुस्तक मोथा। वायसजंघा-स्त्री० काकजंध ॥ मसी, काकजंघा । वारिप-स्त्री० कुम्भिका ॥ जलकुंभी । वायसादनी-स्त्री. महाज्योतिष्मती । काकतुण्डी ।। वारिवदरा-स्त्री० न० प्राचीनामलक ॥ पानी बड़ीमालकाडनी। काकादनी । वायसाह्वा-स्त्री० काकमाची । मकोय । वारिवालक-न० वालक || सुगन्धवाला । वायसी-स्त्री० काकोदुम्बरिका । महाज्योतिष्मती । वारिभव-न० स्रोतोञ्जन ॥ काला शुा । काकतुंडी । काकमाची ॥ कटूमर । बडीमाल. वारिमूली-न० वारिपर्णी । जलकुम्भी । कांगनी । कौआटोडी । मकोय । वारिरुह-न. पद्म || कमल | वायसेक्षु-पु. काश || कांस । वारिवदन-न. प्राचीनामलक || पानी आमला । वायसोलिका-स्त्री० काकोली || काकाली। वारिवर-न० करमईकवृक्ष ।। करौंदावृक्ष । वायसोली-स्त्री." वारिवल्लभा-स्त्री० विदारी ।। विदारकिन्द । वार-पु० कुब्जवृक्ष ।। कूजावृक्ष । वारिवाह-पु० मुस्ता मोथा । बारक-न होबेर । सुगन्धवाला । वारिशिराषिका-स्त्री. अम्बुशिरीषिका ॥ ढा. वारणपिप्परी-स्त्री० गजपिप्पली ।। गजपपिल । दोन। वारणपुषा-स्त्री. कदली । केला। वारिसम्भव-न० लवङ्ग । उशीर । सौवीराञ्जन॥ वारणवल्लभा-स्त्री." लौंग । खस । सफेद शुा । वारिसम्भव-पु० यावनालशर ॥ जुहुरलीशर कु. त्रचित् भाषा । वारलीक-पु. बल्बजावृक्ष ॥ वाउई तुलसी वङ्ग- वारुणी-स्त्री० सुरा । दूव्वी । गण्डदूर्वा । इन्द्रवा- भाषा । रुणी। सुराभेद ॥ मदिरा । द्व । गाँडरदूव । वाराह-पु० महापिण्डीतकवृक्ष ॥ बड़ा मैनफल इन्द्रायण । मद्यभेद-वारुणी सुरा । वारेन्द्र-पु० सिन्दुवारवृक्ष ॥ समालुवृक्ष । वार्ता-स्त्री०वात्तीकु बैगन। वाराहकर्णी-स्त्री० अश्वगन्धा || असगन्ध । वाराहपत्री-स्त्री." वार्ताकी (न् )-पु० " वाराहाङ्गी-स्त्री० दन्तवृिक्ष ॥ दन्तीवृक्ष । वातीकी-स्त्री० बृहती । वार्ताकु ।। कटाई । बैंगुन । वाराही-स्त्री० गृष्टि ।। गेंठी । वार्ताकु-पु० स्त्री स्वनामख्यात फलवृक्ष ।। बैंगन, वारि-न० बालक || सगन्धवाला । वारिकण्टक-पु. शृङ्गाटक !| सिङ्घाडे । वार्ताकु- पु." वारिणिका-स्त्री. खमूली ॥ जलकुम्भी । वार्तिक-पु०॥ वारिकुब्ज, वारिकुब्जक-पु० शृङ्गाटक || सि- वाईर-न० काकचिञ्चा । आम्रबाज ॥ धुंधुची । आमकी गुठली । वारिचत्वर- • कुम्भिका ॥ जलकुम्भी । वार्द्धिभव-न० द्रोणीलवण ॥ वरतनका नमक । वारिचामर-न० शैवाल || शिवार । . वाद्धेय-न. वारवुषा-स्त्री०॥ वारवृषा-स्त्री." वृक्ष। वार्ताक-पु० भंटा। झाडे ।
औषधिकाष। ( १६७) होग। . विसौंटा। " वायुद्भव-न० पद्म ॥ कमल। वाह्निका-त्री० मत्स्याक्षी ।। मछछी । वार्षिक-न० त्रायमाणा ॥ त्रायमान । वाह्निक, वाह्नीक-न. कुंकुम । हिंगु ॥ केशर । वार्षिकी-स्त्री. त्रायमाणा लता । पुष्पवृक्ष-विशेष ॥ त्रायमान । रायवेल, वेल। विकङ्कट-पु० गोक्षुर || गोखरू । वाहत-न० बृहतीफल ॥ बृहतीका फल । विकंकत-पु० वृक्ष-विशेष ॥ कण्टाई, विकंकत । वाल्कली-स्त्री० मदिरा ॥ मदिरा। विकता-स्त्री० अतिबला ॥ कंगई, कंघी । वायव-पु० तुलसी-विशेष ॥ काली वननुलसी । विकचा-स्त्री० महाश्रावणिका॥बडी गोरखमुण्डी । वाशा-स्त्री. वासक ॥ वांसा । विकट-पु० विस्फोट । साकुरुण्डवृक्ष ॥ फोडा । सकु. वाशिका-त्री० रुण्डर गुजराती भाषा। वाष्पक-पु० मारिषशाक||सफेद मरसा, लाल मरसा। विकण्टक-पु० यवास । वृक्ष विशेष || जवासा । वाष्पका-स्त्री० हिंगुपत्री ॥ हीङ्गपत्री। विकण्टकवृक्ष । वाष्पिका-स्त्री विकर्त्तन-पु० अर्कवृक्ष || आकका पेड । वाष्पी-स्त्री० ॥ विकषा-स्त्री० मञ्जिष्ठा । मांसरोहिणी ॥ मजीठ । वाष्पीका-स्त्री०" रोहिणी । वासः स्]-न० तेजपत्र ॥ तेजपात । वासक-पु० स्वनामख्यात वृक्ष ॥ वांसा, अडूसा, विकस्वरा-स्त्री. रक्तपुनर्नवा ॥ गदहपूः । सोंठ । विकसा-स्त्री० मञ्जिष्ठा ॥ मजीठ । विकीर्ण-पु० अर्कवृक्ष ॥ आमका पेड । वासका-स्त्री." विकीर्णरोम ( न )-न० स्थौणेय ॥ थुनेर । वासन्त-पु० मुद्न । कृष्णमुद्र । मदनवृक्ष ।। मूंग । काली मूंग। मैनफलवृक्ष । विकीर्णसंज्ञ-नः वासन्ती-स्त्री० माधवी । यूथी । पाटला । नवम- विगन्धक-पु० इंगुदीवृक्ष ॥ हिङ्गोटवृक्ष । ल्लिका । गणिकारी। पुष्पलता-विशेष ॥ माधवी। विगन्धिका-स्त्री० हपुषा ॥ हाऊबेर । पुष्पलता । जुहीपुष्प । पाडर । नेवारी गणिकारी विघस-न० शिक्थ ।। मोम । पुष्पवृक्ष । वासन्ती। विघ्न-पु० कृष्णपाकफल ॥ करोंदावृक्ष । वासा वासिका-स्त्री० वासक ॥ अडूसा । विघ्नेशानकान्ता-स्त्री० श्वेतदूर्वा ॥ सफेद दूव । वासिनी-स्त्री. शुक्लझिण्टी ॥ सफेद कटसरैया । विचकिल-पु० मदनवृक्ष ॥ मैनफलवृक्ष । वासिष्ठ-न० रुधिर || रुधिर । विचच्चिका-स्त्री० स्वल्पकुष्ठरोग-विशेष ॥. एक वासुदेवप्रियंकरी-स्त्री० शतावरी ॥ शतावर । प्रकारका छोटा कोढ। वास्तु-न० वास्तूकशाक ॥ वथुआशाक विचक्षणा-स्त्री० नागदन्ती ॥ हाथीशुण्डवृक्ष । वास्तुक-न." विचित्रक-पु० भूर्जवृक्ष ॥ भोजपत्रकवृक्ष । वास्तुकाकारा-स्त्री० पालंकयशाक ॥ पालराका विचित्रा-स्त्री० मृगेवार ॥ सैधिनी । विजया-स्त्री० क्षुद्राग्रिमन्थ । जयन्तीवृक्ष । वचा । वास्तुकी-स्त्री० चिल्लीशाक|| चिल्ली,चिलारीशाक । हरीतकी । शेफालिका । मञ्जिष्ठा । शमीभेद । वास्तूक-न० पत्रशाक-विशेष ॥ वथुआशाक । अग्निमन्थ । मादकद्रव्य-विशेष ॥ छोटी अरणी। वास्येय-पु० नागकेशर ॥ नागकेशर । जयन्तीवृक्ष, जैत् । वच । हरड । निर्गुण्डीभेद । वाह-पु० परिमाण-विशेष ॥ १२८ सेर परिमाण । मजीठ । छोकराभेद । अरणी । भंग,भांग,-सि- वाहस-पु० सुनिषण्णक॥ चौपतिया शिरीआरी शाक द्धि वंगभाषा। वाहुमूल-न० कक्ष ॥ कोख, वगल । विजुल-पु० शाल्मलीकन्द ॥ सैमलकी मूल । वाहुवार-पु० श्लेष्मान्तकवृक्ष ॥ लिसोडा, निसोरे । विज्जुल-न० त्वच ॥ दालचीनी । शाक।
( १६८) आयुर्वेदीय- डी नोन। विडंग। विज्जुलिका-त्री० जतुकानाम्नी मालवदेशीयलता॥ विथ्या स्त्री० गोजिह्वा ।। गायकी जीभ । विदर-न० विश्वसारक ।। फणिमनसा बंगभाषा। जवुका। विज्ञबुद्धि-त्री० जटामांसी ॥ वालछड, जटामांसी। विदल-न० द्विधःकृत कलायादि । दाडिमकल्क ।। विट-पु० लवण-विशेष । खदिर-विशेष । नारंगवृक्ष। हाल । अनारकी छाल । विरियासौंचरनोन । दुर्गंधखैर । नारंगीका पेड । विदल-पु० रक्तकाञ्चनपुष्पवृक्ष ।। लाल कचनारका विटप-पु. आदित्यपत्र ॥ अर्कपत्र-सूर्यफूल मरा पेड़। भाषा । विदला-स्त्री० त्रिवृता ।। निसोत । विटपी (न् )-पु० वटवृक्ष ॥ वडका पेड । विदारक-न० वज्रक्षार ॥ वज्रखार । विटप्रिय-पु. मुद्गरवृक्ष ·|| मोगरावृक्ष । विदारण-पुं० कर्णिकारवृक्ष || कनेरका पेड । विटमाक्षिक-पु०. धातु-विशेष ।। विदारिका-स्त्री० शालवणी ।। शालवन । विटलवण-न० बिड नाम लवण ॥ विरियासौंचर- विदारिणी-त्री० काश्मरी ॥ खुमेर, कुम्भेर । विदारी-स्त्री० भूभिकूष्माण्ड । शालपर्णी । कंठरोग- विटि-स्त्री० पीतचन्दन ॥ पाला चन्दन । विशेष ॥ विदारकन्द । शालवन । एक प्रकारका विट ( श)-स्त्री० विष्ठा ।। विष्ठा, मल । कण्टरोग । विट्खदिर-पु० खदिर-विशेष ॥ दुगंधखैर । विदारीगन्धा-त्री० शालपर्णी ।। सरिवन । विड-न० विटलपण || विरिया सौंचरनान । विदुल-पु० वेतस । अम्बुवेतस । गन्धरस ॥ त । विडंग-न० पु. स्वनामख्यात वणिग्द्रव्य || वाय जलवेत । बोल। विद्धकर्ण-पु० पाठा ।। पाठ । विडंगा-स्त्री.विडंग || बायविडंग। विद्धकर्णा-त्री." विडालक-न० हरिताल ।। हरताल । विद्धकर्णिका-स्त्री० ॥ विडालपद-पु० कर्षपरिमाण ।। २ तोले । विद्धकर्णी-स्त्री." विडालपदक-न." विद्या-स्त्री० गणिकारिका वृक्ष ॥ अरणी, अगेथुवृक्ष । विडाली-स्त्री० बिदारी ॥ बिलारीकन्द विदारी विद्यादल-पु० भूर्जपत्रवृक्ष || भोजपत्रवृक्ष । कन्द । विद्युज्वाला-स्त्री० कलिकारीवृक्ष ।। कलिहारीवृक्ष । विडुल-पु० वेतसवृक्ष ॥ वैतवृक्ष । विधुत्प्रिय-न० कांस्य ।। कांसा । विड् [श -स्त्री० पुरष ।। विष्ठा । विद्रधि-पु. रोग-विशेष ।। एक प्रकारका फोडा । विगन्ध-ज० बिटलवण || बिरिया सौं चरनोन विद्रधिनाशन-पु. शोभाञ्जनवृक्ष ॥ सैंजिनका पेड! विडलवण-न० विद्रुम-पु० न० प्रवाल । किसलय ॥; मूंगा नवीन वितण्डा-त्री० कच्ची । शिलाहय ।। अरुई । मन. विद्रुमलता-स्त्री० नीलका नाम गन्धद्रव्य !! नली । वितानक-पु० माडवृक्ष । माडविन कोकण देशीय विद्रुमलतिका-स्त्री. " यभाषा । विधाता ( ऋ)-पु० मदिरा ।। सुरा, मद्य । वितानमूलक-म० उशीर ।। खस । विधात्री-स्त्री० पिप्पली ॥ पीपल । वितुन्न-न० सुनिषण्णक । शैवाल ॥ शिरिआरीशाक। विधु-पु० कर्पूर ।। कपूर । विनद-पु० सप्तपर्णवृक्ष ।। सतोना । वितुनक-न. धान्यक । तुत्थ ॥ धनिया । तुतिया। विनम्रक-न० तगर । पिण्डी तगर कोकणदेशीय वितुनक-न० आमलकी ॥ आमला । वितुन्ना-स्त्री० भूम्यामलकी ॥ भुईआमला । विनम्रा-स्त्री० वाटयालक ।। खरैटी, वरियाला । वितुन्निका-स्त्री, विनारुहा-स्त्री० त्रिपर्णिका ॥ विपर्णिका कन्द । । पत्ते । शिल। शिवार । भाषा ।
औषधिकोष। ( १६९) HTTARA इलायची। कोट। विन्दुपत्र-पु० भूर्जवृक्ष || भोजपत्रवृक्ष । विम्बा-स्त्री० विम्बी ॥ कन्दूरी । विन्धपत्री-स्त्री० घरापहा ।।बिल्वपत्री । बेलपत्री। विम्बिका-स्त्री. विन्ध्या-स्त्री० लबले वृक्ष । एला ।। हरपारेवडी । विम्बी-त्री० विम्बु-स्त्री० गुवाकः ॥ सुपारी। विन्याक-पु. सप्तवर्णवृक्ष ॥ सतिवन । विरङ्ग-न० कंकुट || मुरदासिंग । विपर्णक-पु० पलाशवृक्ष ।। ढाकका वृक्ष । विरजा-स्त्री. दूर्वा । कपित्थपर्णी ।। दूव । कवि- विपाक-पु. जठराग्नियोगे अम्ललवणादिरसररिणाम स्थानी। विपादिका-स्त्री. कुरोग-विशेष ।। एक प्रकारका विरण-न. वारणतृण ॥ धीरन, खस । विरल-न० दधि ॥ दही। विपिनतृप-पु० स्वर्णाश ॥ सोनाल, रैवतवृक्ष । विरलद्रवा-नी पलक्ष्मयवागू ।। उत्तमयवान् । विपुलरस-पु० इक्षु ॥ ईख । विरूप-न. पिम्पलीमूल || पीपलामूल । विपुलास्रवा-त्री० गृहकन्या । घीकुधार । विरूप-पु. सर्जरस ।। राल । वियूय--पु० मुञ्ज । पूँज । विरूपा-स्त्री० दुरालभा । अतिविया ॥ धमासा । विप्र-पु० अश्वत्थवृक्ष । ब्रह्मयष्टि | पीपलका पेड। अतीस । बह्मनेटि । भारङ्गी । विरेचक-त्रि० मलभेदक औषधादि ।। जुलाब । विप्रकाष्ठ-न० तूलवृक्ष ॥ सहतूतवृक्ष । अरबी भाषा । विप्रप्रिय-पु० पलाशवृक्ष ॥ ढाकका पेड़ । विरेचन-पु० पीलुवृक्ष ॥ पालवृक्ष । विप्रलोभी [ ]-पु० किकिरातवृक्ष।किकिरातवृक्ष! विरोचन-पु० अर्कवृक्ष । रोहितकवृक्ष । श्योनाक विफला-स्त्री० केतकी | केतकी । प्रभेद । घृतकरच ॥ आकका पेड । रोहेडावृक्ष। विवन्ध-पु० आनाहरोग । आमके विगडनेसे होता है। शोनापाठा । घृतकरञ्ज। विभाकर-पु० अर्कवृक्ष । चित्रकवृक्ष | आकका विल-पु. वेतस ॥ वैत । पेड । चीतावृक्ष । विलला-स्त्री० श्वेतबला ॥ खरैटी । विभाण्डी-स्त्री० आवर्तकी लता॥भगवतवल्ली कोक- लिपी-स्त्री० यवागू विशेष ॥ चतुर्गुण जलमें सिद्ध णदेशीयभाषा । अन्न। विभावरी-स्त्री० हरिद्रा । भेदा ॥ हलदी। मेदा। विलोमी-स्त्री० आमलकी ॥ आमला । विभावसु-पु. अर्कवृक्ष । चित्रकवृक्ष ।। आकका विल्ल-न० हिंगु॥ हींग। पेड । चीतेका पेड़ । विल्लमूला-स्त्री० वाराहीकन्द ॥ गेंठी । विभीत त्रि. वृक्ष-विशेष। विल्व-न० बिल्वफल । पलपरिमाण ॥ वेलफल । विभीतक विभीतकी बहेडावृश्च । आठ ८ तोले। विभीषण-पु० नलतूण ॥ नरसल । बिल्व-पु० फलवृक्ष-विशेष | वेलका पेड़ । विमई-पु० कालङ्कत ॥ कसौदीवृक्ष । विल्वपषिका-स्त्री० शुष्कबिल्वखण्ड || बेलका सूखा विमईक-पु० चक्रमई ॥ पमाड, चकवड । गूदा। विमल-न० उपरस-विशेष । स्वच्छ धातु॥निर्मला विल्वा-स्त्री • हिंगुश्त्री ॥ होगपत्री । विमला-स्त्री० सप्तला । तारमाक्षिक॥ मातलावृक्ष । विवस्वान -पु० अर्कवृक्ष ॥ आकका पेड । सोनामाखी भेद। विवृता-स्त्री० क्षुद्ररोग-विशेष । विम्ब-विम्बक, न० विम्बिकाफल || कन्दूरी । विम्बजा-स्त्री. विश-न० मृणाल ॥ कमलकी नाल । विम्बट-पु० सर्षप ॥ सों। विशल्यकरणी-स्त्री० पुष्पवृक्ष-विशेष । SHANTERAT विवृत्ता-स्त्री." Tesrote (१७०) आयुर्वेदीयd श्रीताड । ॥ विशल्यकृत्-पु० विशालीवृक्ष ॥ हापरमालीरगाछ विश्वरूपक-न० कृष्णागरु || काली अगर । वङ्गभाषा । विरोचन-पु. नाडीचशाक ।। नाडीका शाक । विशल्या-स्त्रीगुडूची । कलिकारी । दन्तीवृक्ष । विश्वसारक-न० विदरवृक्ष॥ फणिमनसा वङ्गभाषा। अजमोदा ॥ गिलोय । कलियारी । दन्तीश्च । विश्वस्था-स्त्री. शतावरी ।। शतावर । अजमोद । विश्वा-स्त्री. अतिविषा । पिप्पली । शतावरी ॥ विशाकर-पु० भद्रचड || लकास्थायी वृक्ष । अतील । पीपल । शताघर । विशाख-पु. पुनर्नवा ॥ सांठ । विश्वामित्रकलाय-न० नारिकलफल || नारी विशाखेजें-पु. नारङ्ग ॥ नारङ्गीका पेड । विश्वामित्रप्रिय-पु. नारिकेलवृक्ष ॥ नारियलका विशारद-पु० बकुलवृक्ष ॥ मौलसिरीका पेड । पेड । विशारदा-स्त्री. क्षुद्रदुरालभा ॥ छोटा धमासा । विश्वौषध-न० शुण्टी ॥ साठ । विशाल-पुं० वृक्ष-विशेष । नौसठवृक्ष ।। विष-न० पु. विषमात्र । पद्मकेशर । बाल । व.स. विशालतैलगर्भ-पु० अंकोठवृक्ष ॥ ढेरावृक्ष । नाम ॥ विष । कमलकेशर । बोल गन्धद्रव्य । विशालत्वक् ( च )-पु० सप्तपर्णवृक्ष ॥ सतिवन । वत्सनाम विष। विशालपत्र-पु. कासालु । श्रीताल ॥ कासआलु । विषकण्टकिनी-स्त्री० बन्ध्याककोंटी ।। बाँझखखसा। वनककोडा । विशालफलिका-स्त्री. हरितवर्णनिष्यावी ॥ निष्पावी विपकन्द-पु० नीलकन्द || भैंसाकन्द । भेद । विषधा-स्त्री० गुडुची । गिलोय । विशाला-स्त्री. इन्द्रवारुणी । महेन्द्रवारुणी । उपो. विषघाती ( न )-पु. शिरीषवृक्ष ।। सिरसका वृक्षा दकी । इन्द्रायण बडी । इन्द्रफला । पोई । विषन्न-पु. शिरीषवृक्ष । योस । विभीतक ।चम्म- विशालाक्षी-स्त्री० नागदन्ती ॥ हाथीशुण्ड । कवृक्ष । तण्डलीय ।। सिरसका पंड । जवासा : विशाली-स्त्री० अजमोदा ॥ अजमोद । बहेडावृक्ष । चम्पावृक्ष । चौलाईका शांक । विशिख-पु० शरतृण ।। रामशर । विपन्नी-स्त्री० हिलमोचिका । इन्द्रवारुणी । वनव- विशीर्णपर्ण-पु. निम्ववृक्ष । नीमका पेड। धिका । स्वल्पफला । भूम्यामलकी । रक्तपुनर्न- विशेषक-पु० तिलकवृक्ष । तिलकवृक्ष । वा । हरिद्रा ! वृश्चिकाली । महाकरञ्ज । हुलहु. विशोक-पु० अशोकवृक्ष ॥ अशोकवृक्ष । लशाक । इन्द्रायण । वनतुलसीभेदं । हाऊबेर । विशोधिनी-स्त्री० दन्तीवृक्षः ।। दन्तीवृक्ष । भुईआमला । हाँठ । हलदी । वृश्चिकाली । ब- विशोधिनी-स्त्री. नागदन्ती ॥ हाथीशुण्डावृक्ष ! डी करञ्ज । विशोधिनीबीज-न० जयपाल ॥ जमालगोटा । विषजिह्व-पु० देवताङवृक्ष ॥ देवतावृक्ष । विश्व-न. शुण्ठी । वोल ।। सौंठ । बोल । विषण्ड-न० मृणाल || कमलकी नाल । विश्व-पु० शुण्ठी । पारमाण-विशेष । सोंठ। २०० विषतरु-पु० फलवृक्ष-विशेष ॥ कुचिलावृक्षं । तोले। विषतिन्दु-पु० कारस्करवृक्ष । कुपीलु ॥ कुचि- विश्वक्सेना-स्त्री प्रियंगुवृक्ष ॥ फूलप्रियंगु । लाका वृक्ष । मकरतेंदुआ । विश्वगन्ध-न० बोल || बोल । विषद-न० पुष्पकासीस ।। पुष्पकसीस । विश्वगन्ध-पु० पलाण्डु ॥ प्रयाज । विषदष्ट्रा-स्त्री० सर्पकंकालिका ॥ सर्पकंकाली । विश्वग्रन्थि त्री० हंसपदी ।। लाल रङ्गकी लज्जालु । विषद्रुम-पु० कारस्करवृक्ष || कुचिलावृक्ष । विश्वदेवा-स्त्री० द्वस्वगयेधु का।अरुणपुष्पदण्डोत्पल ॥ विषधर्मा-स्त्री. कुलक्षया ॥ किंवाँच । गगरन । लाल फूलका इण्डोत्पल । विषनाशन-पु० शिरीषवृक्ष । सिरसकापड । विश्वपर्णी--स्त्री० भुई आमला । विषनाशिनी-स्त्री० सर्पकंकाली ॥ सर्पककाली विश्वभेषज-न० शुण्ठी || सोंठ । वृक्ष । गन्धनाकुली। नाई।।।। 14 ALAN RaconazaMERamiseDSLATLASTHAN औषधिकोष । (१७१) " आते हैं। कान्ता । विषनुत्-पु० श्योनाकवृक्ष ॥ शोनापाठा । विपारि-पु० महाचंचुशाक । घृतकरञ्जा || बड़ा वियपुष्प-न० नीलपद्म ।। नीलकमल । चेवुना शाक । वृत्तकरञ्ज । वियपुप्प-पु० मदनवृक्ष ॥ मैनफलल । विषास्या-स्त्री. भल्लातक || भिलावेका पेड। विषपुप्पक--पु० विपौषधी-त्री० नागदन्ती ॥ नागदन्ती, हाथी- विपमच्छद-पु० सप्तच्छदवृक्ष ॥ सतिवन । शुण्डवृक्ष । विषमज्वर-पु० ज्वररोग-विशेष ।। विषमज्वर । विष्टम्भ-पु० आनाहरोग । आमके दस्त दर्दसे विषमनिका-स्त्री० गन्धनाकुली !! नाकुलीकन्द । विषमईनी-स्त्री." विष्टरा-स्त्री० गुण्डासिनी ।। गुंडासिनी । तृण । विषमुष्टि-पु० क्षुप-विशेष ।। डोडी । विष्टरुहा-स्त्री० स्वर्णकेतकी ॥ पाली केतकी। विषरूपा-स्त्री० अतिविषा ॥ अतीस । विष्णुकन्द-पु० मूलविशेष ॥ विशाल कद । विषल-न०विष | विष । जहर फारसीभाषा । विष्णुक्रान्ता-स्त्री० अपराजिता चल, विष्णु- विषलता-स्त्री० इन्द्रवारुणी ॥ इन्द्रायण । विषवैरिणी-स्त्री. निविषा || निविषीघास । विष्णुगुप्त-पु० विष्णुकन्द ॥ विष्णुकन्द विषशालूक-पु० पद्मकन्द ॥ कमलकन्द । विष्णुगुप्तक-न० चाणक्यमूलक ॥ छोटी विषहन्त्री-स्त्री० अपराजिता । निधिपा । कोपल, विष्णुपद-न० पद्म ॥ कमल | निविषीघास। विष्णुवल्लभा-स्त्री. तुलसी । अग्निशिखा वृक्ष विषहा-स्त्री० देवदालीलता । निविषा ।।धवरवेल तुलली । अग्निशिखा वृक्ष । बंदाल । निविधीघास । विष्वक्सेनप्रिया-स्त्री० वाराही || बाराहीकन्द विषा-स्त्री० अतिविषा ॥ अतीस । विष्वक्सेना-स्त्री प्रियंगु ॥ फूलप्रियंगु । विषाख्या-स्त्री विस-न. मृणाल || कमलकी नाल । विषाण-न० कुष्ठौपध । पशुशृंग ।। कुछ औषधी । विसकुसुम-न० पद्म ॥ कमल । पशुके शींग । मेंढासींगी। विसङ्कट-पु. इंगुदीवृक्ष | हिनोट वृक्ष । विसज-न० पद्म ।। कमल । विपाणिका-त्री० मेषशृङ्गी । सातला । कर्कट- विसप्रसून-ज. " भेद । काकडासिङ्गी । भगवतवल्ली । कोकणदेश विसर्प-पु० रोग-विशेष ॥ विसर्प रोग । यह सात प्रकारका होता है। कीभाषा । विसपिर्ण-स्त्री० यवतिक्ता लता ! यवेची । विषाणी-स्त्री० क्षीरकाकोली । अजशृङ्गी । वृश्चि. विसारिणी-स्त्री० माषपर्णी ।। मषवन । काली । तिन्तिडी ॥ क्षरिकाकोली । मेढाशिंगी। विसिनी-श्री. मृणाल ॥ कमलकी डंडी। वृश्चिकाली औषधी । इमली । विसूचिका-स्त्री. अजीर्ण रोग-विशेष । हैजा फा- विषाणी [न् ]-पु. ऋषभक ॥ शृङ्गाटक ॥ ऋप. रसीभाषा । भक औषधी । सिङ्गाडे । विसूची-स्त्रीय विषदानी-स्त्री० पलाशीलता ॥ पलाशीलता । विस्तीर्णपण-न० माणक ॥ मानकन्द । विषापह-पु० मुष्ककवृक्ष ॥ मोखावृक्ष । विस्फुलिङ्ग-पु० विषभेद । विपापहा-त्री० इन्द्रवारुणी । निर्विषा । नागदमनी। विस्फोटक-पु० विरुद्ध स्फोटक ॥ फोडा, पिरकी । अर्कपत्रा । सर्पकङ्कालिका |॥ इन्द्रायण । निविधी जिसको लोग माता कहते हैं। घास । नागदौन । अर्कमूला । सर्पकंकाली । विनगन्धा-स्त्री० हपुषा ॥ हाऊवर । विषाभावा-स्त्री० निर्विषा ॥ निर्विषी वास । विस्रगंधी-पु० हरिताल ॥ हरताल । विषाराति-स्त्री० कृष्णधत्तूर ॥ काला धतूरा । वित्रा-स्त्री० हपुषा ॥ हाऊवर । प ॥ ॥
( १७२) आयुर्वेदीय- Becomes विहङ्ग-पु० स्वर्णमाक्षिक ॥ सोनामाखी । वीरतक-पु० अर्जुन वृश्च । कोकिलाक्ष वृश्च ! विक्षीर-पु० अर्कवृक्ष ॥ आकका पेड़। बिल्वान्तर वृक्ष । भल्लातक वृक्ष || कोवृक्ष । वाडवा-स्त्री. शूकशिम्बी ॥ काँछ तालमखाना । वेलन्तर वृक्ष-वरवेल । भिलीवका वीज-न० शुक्र ।। वीर्य । पेड। वीजक-पु० मातुलुङ्गक । वृक्ष-विशेष ॥ विजय. वरिपत्रा-श्री. विजया । भङ्ग । सार । विजोरा नीवु। वीरपर्ण-न० सुरपर्ण ॥ माचपित्र । वीजकोश (ब)-पु० एमबीजाधार चक्रिका । वीरपुष्पी-स्त्री० सिन्दूरपुष्पी ॥ सिन्दूरिया । शृङ्गाटक || कमल गटेका घर, सिङ्गाडे । वीरभद्र-पु० वीरण ।। वीरन । वीज गर्भ-पु० पटोल ॥ परवल । वीरभद्रक-न." वोजगुप्ति-स्त्री. शिम्बी ॥ सेम । वीररजः [स् ]-न० सिन्दूर ।। सिन्दूर । बीजधान्य-न. धन्याक ॥ धनिया। वीरवती-स्त्री० मांसरोहिणी ॥ मांसरोहिणी । वीजपादप-पु० भल्लातक || भिलवेज पेड । वीरवृक्ष-पु. भल्लातक । अर्जुनवृक्ष । विल्वान्तर वीजपुष्प-न० मरुवक । मदन वृश्च ॥ मरुआ- वृक्ष । देवघान्य वृक्ष | भिलावेका पेड वृक्ष । भैनकल । कोहवृक्ष । सांबा, समा, समेके चावल | वीजपुष्प-पु. यावनाल ।। पुनेरा । वीरसेन-न. आरूक वृक्ष | आरूवृक्ष यह वीजपूर-पु० फलपूर वृक्ष ॥ विजोरा नींबू । हिमालयमें होता है । वजिशिका-स्त्री. अण्डकोश । अण्डकोश । वीजफलक-पु० वीजपूर ।। विजोरा नींबू । वीरा-स्त्री० मुरा नामक गन्धद्रव्य । क्षीरकाकोली। वीजमातृका-स्त्री. पद्मबीज || कमलगट्टा । तामलको । एलबालुक । कदली । विदारी । वीजरत्न-पु० माष ।। उड़द । दुग्धिका । मलयू । क्षीविदसि । काकोली । वीजरेचन-न. जयपाल ॥ जमालगोटा । महाशतावरी । घृतकुमारी । ब्राह्मी । अतिविष वीजवृक्ष-पु० अशन वृक्ष ॥ आसन वृक्ष । मदिरा । शिशपा वृक्ष । गम्भारी । पृश्नि पर्णी ॥ वोजसार-न. बिडङ्ग ॥ बायबिडङ्ग । कपूरकचरी, एकाङ्गी । क्षीरकाकोली औषधी । वीजाम्ल-न. वृक्षाम्ल । विषाविल । भुई आमला । एलुआ। केला । विदारीकन्द । वीतशोक-पु० अशोक वृक्ष ।। अशोक वृक्ष । दुधिया । कठूमर । दूधविदारी। काकाली। बडी वीर-न० शृङ्गी । मरिच । पुष्करमूल । काजिक । शतावर । घीकुवार । ब्रह्मी घास । अतीस । मद्य। उशोर । आरूक ॥ सीङ्गी । मिरिच। पोहकरमूल। सीसीका पेड । कम्भारी, कुम्भर । पिटवन । काजि । खस | आरूक वृक्ष । वीराम्ल-पु० अम्लवेतस ॥ अम्लवेत । वीर-त्रि० पीताझण्टी । तण्डुलीय. । वाराहीकन्द । वरितक- न. आरूक वृक्ष ॥ आरूक वृक्ष । लताकरञ्ज । करवीर वृक्ष । अर्जुन वृक्ष । पि वोरास्त्राव-पु० महासार ॥ कुमारीसार । लोकटसरैया । चौलाईका शाक । वारहीकन्द । वीर्य-न. चर्मवातु+शुक्र । वीर्य बीज । लताकरञ्ज । कनर वृश्च । कहिवृक्ष ॥ वृकधूप-पु० नाना सुगन्धि द्रयकृत दशाङ्गादि वीर-पु० पीतझिण्टी । काकेली ॥ पीले फूल. धूर । सरल वृक्षरस । तुरुष्क ॥ अनेक प्रकारके की कटसरैया। काकोली औषध । सुगन्ध पदार्थोसे बनाई हुइ दशाङ्गादि धूप । सर- वीरक-पु. करवीर ॥ कनेरका पंड । लका गोंद । शिलरस । वीरकन्द-पु० न० सुधामूली ॥ सालब मिश्री । वृक्षा-स्त्री. अम्वष्ठा ॥ पाढ । वोरण-न० वरतर ॥ वीरमूल, भाँडर । खस | वृकाक्षा-स्त्री० त्रिवृत् ॥ निसोत । वारतर-न." वृकी-स्त्री. पाठा || पोठ। चरितर-पु. शर ॥ रामसर । वतपत्रा-स्त्री० पुत्रदात्रीलता ॥ पुत्रदात्रीलता । ।
औषधिकोप । ( १७३ ) ण्टाई। की सेम । कौषधी । है वृत्तिङ्कर-पु० विकङ्कत वृक्ष ॥ विकङ्कत क वृन्ताक-पु० वार्ताको । बैंगन । वृन्ताको-स्त्री. " वृत्तकर्कटी-स्त्री० पड्भुजा || खरबूजा । वृन्तित्वा-स्त्रो० कटुका ।। कुटकी । वृत्तगुण्ड-पुं० तृण-विशेष ॥ दीर्घनाल वृन्दा-स्त्री० तुलसी || तुलसी। वृत्ततण्डुल-पु० यावनाल || जुआर। वृश-पु० वासक ।। अडूसा । वसौंटा । वृत्तनिष्पाविका-स्त्री० नखनिष्पाती ।। एक प्रकार. वृशा-स्त्री. औषधी विशेष । वृश्चिक-पु० औषधिभेद । मदनवृशामैनफल वृक्ष । वृत्तपर्णी-स्त्री० महाशणपुष्पिका । पाठा ॥ बर्ड वृश्चिकप्रिया-स्त्री० पूर्तिका । पोईका शाक ! शणपुष्पी । पाठ। वृश्चिकणीं-स्त्री. आखुकर्णी, ॥ मूसाकानी । वृत्तपुष्प-पु० शिरीष । कदम्ब । वानीर । कुब्जका वृश्चिका-स्त्री० क्षुद्र क्षुप- विशेष ।। विछुवा घाट । मुद्गर ।। शिरसका पेड | कदमका पेड । जल वृश्चिकालो-स्त्री० क्षुप-विशेष ॥ वृश्चिकाली । वेंत कुंजावृक्ष । मोगरावृक्ष । वृश्चिपत्री-स्त्री० ॥ वृत्तफल-न० मरिच ।। मिरच । वृश्चीर-पु० श्वतपुर्नर्नवा ॥ विषखपरा । वृत्तफल-पु० दाडिम । बदर ॥ अनार । वेर । वृष-पु. वासक । ऋषभक ॥ अडूसा । ऋषभ. वृत्तफला-स्त्री० वार्ताकी । शशाण्डुली । आमलकी। बैंगन । एक प्रकारकी ककडी । आमला । वृषकर्णी-स्त्री० सुदर्शना ॥ सुदर्शन । वृत्तमाल्लिका-स्त्री० श्वेतार्क । मोदिनी ।। सफेद आक वृषगन्धा-स्त्री० वस्त्रान्त्री ॥ छगलान्त्री । वृक्ष । मोदिनी पुष्प वृक्ष, वह एक प्रकारको वृषण-पु० अण्डकोश ॥ अण्डकोष । वृषणकच्छु-पु० क्षुद्ररोग-विशेष । भिण्डा || भिण्डी। वृषध्वांक्षी-स्त्री० नागरमुस्ता ॥ नागरमोथा । वृत्तबीजका-स्त्री० पाण्डुरफली ॥ पाण्डफली । वृषनाशन-पु० विडङ्ग ॥ वायबिडङ्ग । वृत्तबजिा-स्त्री० आढकी ।। अडहर । वृषपत्रिका-स्त्री. वस्त्रान्त्री ।। छगलान्त्री। वृत्ता-स्त्री० झिञ्झिरिष्टा । रेणुका । प्रियंगु । वृषपर्णी-स्त्री. आखुकर्णी ॥ मूसाकर्णी । मांसरोहिणी । झिझिरीठा। रेणुका । फूलप्रियंगु । वृषपर्वा ( )-पु० कशेरु ।। कशरू । मांसरोहिणी ॥ वृषभ-पु० ऋषभक । कर्कटकशृंगी ॥ ऋषभक वृत्तेर्वारु-पु० षड्भुजा । खरबूजा । औषधी । काकडाशिंगी। वृद्ध-न. शैलेयनामक गन्ध द्रव्य ॥ भूरि छरीला । वृषभाक्षी-त्रो० इन्द्रवारुणी ।। इन्द्रायण । वृद्ध-पु० वृद्धदारक || विधारा । वृषाल-पु. गृञ्जन | गाजर । वृद्धदारक-पु. वृक्ष विशेष ॥ विधारा वृक्ष । वृक्षा-स्त्री० मूषिकपर्णी । कार्पिकच्छु ॥ मूसाकानी । वृद्धदारु-न." वृद्धवला-स्त्री० महासमङ्गा || कगहिया । अम्लवंतस || अम्लवैत । वृषाकपायो-स्त्री० जीवन्ती । शतावरी ॥ जीव. वृद्धराज-पु० वृद्धवाहन-पु० आम्रवृक्ष ।। आमका पड । वृद्धविभोतक-पु. आम्रातक । अम्बाडा । वृषाकर-पु० माष ।। उड़द । वृद्धा-स्त्री. महाश्रावणिका || बडी गोरखमुण्डी । वृषाङ्क-पु० भल्लातक । भिलावा । वृद्धि-स्त्री० अष्टवर्गान्तर्गत औषधी विशेष ॥ वृद्धि कृष्टिनी-त्री० भंगपार्णका छोटी इलायची। वृष्य-न० वाज कर औषधाई ।। शुक्र बढानेवाली वृद्धिका-स्त्री." वृद्धिद-पु० जीवक । शूकर कन्द ॥ जीवक और वृष्य-पु० माष ॥ उड़द । षधी । वाराहीकन्द । वृष्यकन्दा-स्त्री० विदारी ॥ विदारीकन्द । वृत्तबीज-पु० कौंछ। न्ती । शतावर । औषधी। - औषधी। May (१७४) आयुर्वेदीय- वृक्षभक्षा-स्त्री. तनवा । वृष्यगन्धा-स्त्री० ० वृद्धदारक ।। विधारा । बृहद्वारुणी-स्त्री० महेन्द्रवारुणी ॥ बडी इन्द्रफला । वृष्यगन्धिका-त्री० अतिबला ।। कंघई ! बृहद्रीज-पु० आम्रातक ॥ आम्बाडा । वृप्यवल्लिका-स्त्री. विदारी ॥ विदारीकन्द । वृहन्नल-पु. महापोटगल ॥ बडा नरसल । वृध्या-स्त्री० ऋद्धिनामकौषधि । शतावरी । आम- वृक्ष-पु० स्थावर योनि-विशेष ॥ पेड । टकी । कपिकच्छु । तामलकी ।। ऋद्धिऔषधी । वृक्षक-पु० कुटजवृक्ष ॥ कुडाका पेड । शतावर । आमला । कौछ । भुई आमला । वृक्षधूप-पु० श्रीवेष्ट ।। सरलका गोंद । बृहचञ्चु- पु. महाचञ्चुलाक ।। बडाचञ्चुशाक । वृक्षनाथ-पु० वटवृक्ष ॥ बडका पेड । बृहचित-पु० फलपूर ।। अनार । वृक्षपाक-पु० बृहज्जीवन्ती-स्त्री० बृहत् जातीय जीवन्तीलता ।। ० वन्दाक ॥ वादा । बड़ी जीवन्ती । वृक्षमृद्भू-पु० जलवेतस ॥ जलधैत । वृहत्तिका,बृहती-स्त्री० क्षुद्रवातीकी । कण्टकारी ॥ वृक्षरुहा-स्त्री० वन्दा । अमृतस्त्रया ।।दा । अमृ. कण्टाई ४ वरद्दण्टा । कटेहरी । बृहत्कन्द-पु० गृञ्जन । विष्णुकन्द || गाजर ! वि. वृक्षादन-पु० अश्वत्थ वृक्ष । पीपल वृक्ष ॥ पीपलका छणुकन्द । पेड । चिरोंजीका पेड। बृहत्ताल-पु० हिन्ताल || एक प्रकारका ताड । वृक्षादनी-स्त्री० वन्दा । विदारी ॥ वादा । विदारी- बृहातक्ता-स्त्री २ पाठा ० पाठ । बृहत्तण- पु० वंश ॥ बॉस । वृक्षाम्ल-न० महाम्ल । चुक्रिका । अम्लवेतस । बहत्वक् च )-पु० ग्रहनाशन वृक्ष ॥ सतिवन । तिन्तिडी ॥ विषाविल । चूकाशाक । अम्लवैत वृहत्पत्र-पु. हस्तिकन्द ॥ हस्तिकन्द । इमली । बृहत्पत्रिका-स्त्री. त्रिपर्णिका || त्रिपर्णिका । वृक्षाम्ल-पु० आम्रातक || अम्बाडा । आमा । बृहत्पाटलि--पु० धत्तूर ।। धत्तुरा । वृक्षाही-स्त्री० महामेदा ॥ महामेदा । बृहत्पाद-पु० वटवृक्ष || बडका पेड । वृक्षोत्पल-पु. कर्णिकार वृक्ष ।। कनेर वृक्ष । बृहत्पारेवत-पु० महापारेवत || बडा पारेवत । वेजाती--स्त्री० सोमराजी ॥ वापची। बृहत्पाली [ ].पु. वनजीरक ।। वनजीरा । वेणी-स्त्री० देवताड । देवदालीलता ॥ देवताडवृक्ष। बृहत्पालु-पु० महापीलु ।। बडा पी- वृक्ष । सोनया वंदाल । बृहत्पुष्पा-स्त्री० घंटारवा ॥ शणहुली, शणई, वेणीर-पु० अरिष्ट वृक्ष ।। रीठा । चणई, झनझनिया । वेणु-पु० वंश ॥ · वांस । बृहत्फल-पु० चचेण्डा। पनस। चिचैंडा । कठैल । वेणुकर्कर-पु० करीर वृक्ष ॥ करील वृक्ष । बृहत्फला-स्त्री० कटुतुम्बी । महेन्द्रवारुणी ॥ कूष्मा वेणुज-पु० वेणुयव ।। बांसके चावल । ण्डी । महाजम्बू ।। कडवी तोम्बी । बडी इन्द्र. वेणुन-न० मरिच ।। मिरच । फला । पेठा । राजजामुन । वेणुपत्री-स्त्री० वंशपत्री वृक्ष ।। वंशपत्री । बृहदम्ल-पु० रुजाकर ॥ कमरख । वेणुयव-पु० वंशफल ।। वांसके चावल । बृहदेला-स्त्री० स्थूलला ।। बडी इलायची । वेणुबीज-न. बृहद्गोल-न० शीर्णवृन्त ॥ तरबूज । वेत-पु० वेत्र ।। बैंत वृक्ष बृहद्दल-पु० पट्टिका लोध । हिन्ताल ॥ पठानी वेतस-पु. लता-विशेष ।। बैंतकी वेल । लोध । एक प्रकारका ताड । वेतसाम्ल-पु. अम्लवेतस ।। अम्लबैत । बृहद्भानु-पु० चित्रक वृक्ष ॥ चीतेका पेड । वेतसी-स्त्री० वेतस ॥ वैत। बहल्क-पु० पट्टिकालोध्र ॥ पठानी लोध । वेत्र-पु० स्वनामख्याव वृक्ष ।। वैतवृक्ष । बृहद्वात-पु० अश्मरीहर । वोद-न० अम्बष्ठा ॥ मोईया । INE औषधिकोष। (१७५) पीपल । भाषा। वेधक-न० धन्याक ।। धनिया । वैकुण्ठ-पु० सितार्जक ।। सफेद तुलसी । वेधक-पु. कर्पुर ।। अम्लवेतम । कपूर ।अम्लत। वक्रान्त-न० स्वनामख्यतामणि ।। वैक्रान्तमणि । वधिनी-स्त्री. मेथिका ।। मेथी । वैजयन्तिका-स्त्री. जयन्ती वृक्ष । अग्निमन्थ ।। वेधमुख्य-पु० कर्चुर । कचूर ।। जयन्ती, जैतवृक्ष । अरणीका वृक्ष । वेधमुख्यक-पु० हरिद्रा वृक्ष ।। कांचाहलुद बङ्ग वैजयन्ती-स्त्री." भाषा । अम्बाहलदी हिन्दीभाषा । वैजिक-न० शितल ॥ सैंजिनेका तेल | वेधमुख्या-स्त्री० कस्तूरी ।। कस्तूरी ! वणव-नवेणुफल ।। वांसके चावल । वेधा [स् ]-पु० श्वेतार्क वृक्ष ।। सफेद आक । वैणवी-स्त्री. वंश । लोचन । वैधिनी-स्त्री० मथिका ।। मेथी । बैतस-पु. अम्लवेतस ॥ अम्मवैत । वेधी (न् )-पु० अम्लवेतस ।। अम्लत । वैदल-पु. पिष्टक ।। पिही। वेर-न० वाती कु । कुंकुम ।। बैंगन । केशर । वैदूर्य-न० मणि-विशेष ।। वैदूर्यमणि । लहसुनिया । वेरक-न० कर्पूर ।। कपूर । वैदही-स्त्री० रोचना । पिप्पली ॥ गोलोचन । वेल्ल-न० पु० विडङ्ग ।। वायविडङ्ग । वेल्लज-न० मरिच ।। मिरच । वैद्य-पु० वासक वृक्ष ।। चिकित्सक ।। अडूसा, वेल्लनी-स्त्री० माला दूर्वा ।। मालादूब । वांसा । चिकित्सा करनेवाला । कविराज, वङ्ग- वेल्लन्तर-पु. वीरतरु ।। वरवेल । भाषा । हकीम, फारसी भाषा, डाक्टर, अंग्रेजी बेल्लिकाख्या-त्री० वृक्ष-विशेष ।। बिल्वपत्री । वेशवार-पु. वेसवार ।। सैन्यानिमक, धनिया, विद्यवन्धु--पु. आरवध वृक्ष ॥ अमलतास । साट, मिरच, पपिल इत्यादिका चूर्णकर पीसना । वैद्यमाता, ऋ)-स्त्री० वासक ॥ वाँसा । वेशीजाता-स्त्री० पुदानलिता ।। पुत्रदात्री । विद्यासही-स्त्री० वेश्मकूल-पु० चचेंडा ।। चिचैंडा । वैद्या-स्त्री० काकाली ॥ काकोली। वेश्या-स्त्री० पाठा ।। पाठ । वैधात्री-स्त्री० ब्राह्मी ॥ ब्राह्मीघास । वेसण-पु० कासमई ।। कसौन्दी। वैपतिलज्जालु-स्त्री० पु. बृहत्कल विशिष्ट क्षुद्र' वेषणा-स्त्री. वितुन्नक वृक्ष ।। धनिया । क्षुप-विशेष ॥ लज्जालु प्रभेद । वेषवार-पु० वेसवार ।। पसिना । वैरातङ्क-पु० अर्जुन वृक्ष ॥ कोवृक्ष । वेष्ट-पु० श्रीवेष्ट । नियास ।। सरल का गोंद ॥ गोंद । वैल-न० बिल्वफल ॥ बेल | वेष्टक-न०॥ वैशाखी-स्त्री. रक्तपुनर्नवा ॥ गदहपूर्ना । वेष्टक-पु० कूष्मांड । श्रीवेष्ट ।। कुमडा पेठा . वैश्रवणालय-पु० वटवृक्ष ।। वडका पेड ! सरलका गोंद। वैश्रवणावास-पु." वेष्टन-न० कर्णशंकुली । गुग्गुलु ॥ कानका छिद्र । वैश्रवणोदय-पु० वैश्वानर-पु० चित्रक वृक्ष || चीत का पेड । वेष्टवंश-पु० कंटकिन् ।। वेष्टवांस । वैष्णवी-स्त्री० अपराजिता । शतावरी । तुलसी ॥ वेष्टसार-पु० श्रीवेष्ट ।। सरलका गोंद । कोयल । शतावर । तुलसी । वेसैन-न० द्विदलचूर्ण ॥ चनेकी दालका चन वोड-पु० गुवाक ।। सुपारीका पेड । अर्थात् वशन् । वोरट-पु० कुन्दपुष्प | कुन्दफूल । वेसवार-पु० पिष्टधान्याकसंघपादि । पीसाहु. बोरव-पु० धान्य विशेष ॥ वोरवधान । • वा धनिया, सों, सैन्धानोन इत्यादि । बोल-न० स्वनामख्यात वणिक द्रव्य ॥ बोन्छ । वैकंकत-पु०. विकंकत वृक्ष ।। कण्टाई, विक्रकत । व्यङ्ग-पु० मुखजात क्षुद्ररोग विशेष वृक्ष। व्यडम्बक-पु० एरण्डवृक्ष ॥ अण्डका पडे । " गूगल ।
(१७६) आयुर्वेदीय- व्यवहारिका-स्त्री० इंगुवृिक्ष ॥ हिङ्गोटवृक्ष,गौदी। ब्रीहिपर्णी-स्त्री० शालपर्णी ॥ शालवान । व्याघ-पु० रक्तैरण्ड । करञ्ज ॥ लाल अण्ड।का।। ब्रीहि भेद-पु० धान्य-विशेष । चीनाधान । करजुआ। बीहिराजिक-पु० कंगुधान्य । चीनकधान्य ॥ कंगु- व्याघ्रतल-पु० रक्तरण्ड || ललअंड। नीधान । चीनाधान । व्यावदल-पु० श्रीहिश्रेष्ठ-मु० शालेधान्य ।। शालिबान । व्याघनख-न० नखी नाम गन्धद्रव्य । कन्द--विशे. इति श्री शालिग्रामवश्यकृतश लिग्रामविधशब्दमा. ष ॥ नखगन्ध द्रव्य । गरे वकाराक्षर एकोनशिस्तरङ्गः ॥ २९॥ व्याघ्रनख-पु. लुही वृक्ष ।। तेहुण्ड वृक्ष । (श) व्याघ्रपात् (द)-पु. विकंकत वृक्ष । विकंटक शकर-पु० तिनिश वृक्ष । तिरिच्छ वृक्ष । वृक्ष ॥ कंटाई, विकंकत वृक्ष । गर्जाफल । शकरकन्द-पु० रक्तालु ॥ शकरकन्द । आलु। व्याघ्रपाद-पु." शकुरादनी-स्त्री० वटुका । जलविली । कञ्चट। व्याघ्रपुच्छ-पु० एरंड वृक्ष ।। अण्डका पेड । कटफल । गजपिप्पली ॥ कुटकी । जलपीचर । व्याघ्रादनी-स्त्री० त्रिवृता ।। निसोथ । कञ्चटशाक । कायफल । गजपीपर । व्याघ्री-स्त्री० कण्टकारी ॥ कटेहरी । शकुलाक्षक-न० श्वेतदूर्वा । गंडदूर्वा । सफेद दूब। व्याडायुध-न० व्याघ्रनखाख्य गन्धद्रव्य ।। व्याघ्र गांडरर । नख गन्धद्रव्य। शकृत्-न० विष्ठा ॥ गू। व्याधिघात-पु. आरग्वध वृक्ष ।। अमलतास । शकृद्रस-पु० गोमय ॥ गोबर । व्याधिहन्ता ( ऋ)-पु० वाराही कन्द ।। गेंठी । शतिपर्ण-पु० सप्तपर्णवृक्ष । सत्तिवन । च्याधिखङ्ग-पु० गन्धद्रव्य-विशेष !! वाघनख । शक्तु-पु० न० भर्जित यवादि चूर्ण ॥ भुने हुवे जौ व्यालपत्रा-स्त्री० एारु । ककडी। इत्यादिका चून अर्थात् सत्त् । व्यालवल-पु० व्यालनख ॥ वाघनख । शक्तक-पु० विषभेद । व्यालम्ब-पु० रक्तरंड ॥ लाल अंड । शक्त फला-स्त्री० शमीवृक्ष ॥ छौंकरा वृक्ष । व्यालायुध-न० नखी नाम गन्धद्रव्य ।। नख । शक्तफलिका-स्त्री." व्यावर्तक-पु० चक्रमर्द क्षुप | चकवड । शक्तफली-स्त्री० व्याम (न्)-न० अभ्रक ।। अभ्रक । शक्र-पु० कुटजवृक्ष । अर्जुन वृक्ष | कुडेका पेड । व्योष-न० त्रिकटु ॥ सोंठ, मिरच, पीपल । ब्रजभू-पु० कलिकदम्ब वृक्ष ॥ कदम भेद । शक्रद्रुम-पु. देवदारु वृक्ष ॥ देवदारु । व्रण-पु. न. क्षतरोग || घाउ । शक्रपर्याय-पु० कुटजवृक्ष । कुडेका पेड । व्रणकृत्-पु. भल्लातक । मिलावा । शक्रपादप-पु० कुटजवृक्ष । देवदारुवृक्ष ॥ कुडा व्रणकेतुनी-स्त्री० दुग्धफेनी क्षुप || दूधफेनी । वृक्ष । देवदारु वृक्ष । व्रणाद्विट्( प )-पु० ब्राह्मणयष्टिका ॥ भारङ्गी । शक्रपुष्पिका-स्त्री० अग्निशिखावृक्ष ॥ कलिहारीवृक्ष। व्रणह-पु० एरंड वृक्ष || अडका पेड़ । शक्रपुप्पी-स्त्री० " व्रणहा-स्त्री० गुडूची ॥ गिलोय । शक्रभूभवा-स्त्री० इन्द्रवारुणीलता ॥ इन्द्रायण । व्रणहृत्-पु. कलिकारी वृक्ष || कलिहारी वृक्ष । शक्रमाता (ऋ)-स्त्री० भार्गी ।। भारङ्गी । व्रणार-पु० बोल । अगस्त्यवृक्ष ॥ बोल । हथिया शक्रयव-पु० इन्द्रयव ॥ इन्द्रजौ । वृक्षा शकवल्ली-स्त्री० इन्द्रवारुणी ॥ इन्द्रायण । ब्रीहि-पु. धान्यमात्र । आशुधान्य ॥ धान । आशु शक्रबीज-न० इन्द्रयव ॥ इन्द्रजौ । धान । ब्रीहिधान । शक्रशाखी (न्)-पु० कुटजवृक्ष ॥ कुडावृक्ष । ब्रीहिकाञ्चन-पु० मसूर ॥ मसूर अन्न । शक्रसुधा-स्त्री. पालंकी ।। लोबान फार्सी। केह वृक्ष । DREAM औषधिकोष। ( १७७) पेड । शंख। ॥ शक्रसृष्टा-स्त्री० हरीतकी ।। हरड । शठ-पु० धतूर ।। धत्तूरा । शक्राणी-स्त्री० निगुडी ॥ निगुडी । सिम्हालू । शठाम्बा-स्त्री० अम्बष्टा ।। भोइया । शक्राशन-न. विजया ॥ भङ्ग । शठी-स्त्री० शठी । कचूर । शक्राशन-पु. कुटजवृक्ष ॥ कुडावृक्ष । शण-न०क्षुप-विशेष ॥ भङ्गा, मातुलानी । शक्राह्व-पु. इन्द्रयव ॥ इन्द्रजौ। शप-पु० स्वनामख्यात क्षुप || सनका पेड । जिस. शक्र वय-पु. कुटजवृक्ष ॥ कुडावृक्ष । की रस्सी बनती है। शंकरशुक्र-न० पारद ॥ पारा । शणघण्टिका-स्त्री० शणपुष्पी ॥ शणहुली । शंकरावास-पु० कर्पूर भेद । शणपर्णी-त्री० अशणपर्णी । पटशण । शंकरी-स्त्री. मञ्जिष्ठा । शमी ॥ मजीठ । छौंकरा शणपुष्पिका-स्त्री० घण्टारवा ।। शणहुली । सन. वृक्ष। झनिया वंगभाषा । शकु-पु० नखीनाम गन्धद्रव्य ।। नखगन्धद्रव्य । शणपुप्पी- स्त्री० क्षुप-विशेष ॥ आणई । चणई । शंकुतरु-पु. शालवृक्ष ॥ सालवृक्ष । शणहुली । शंखवृक्ष-पु. शणालुक- पु० आरेवत वृक्ष ॥ अमलतासका शंख-पु० न० स्वनाम प्रसिद्ध समुद्रोद्भव जन्तु ॥ शणिका-स्त्री. शणपुष्पी ॥ शणई । शंख-पु. ललाटास्थि । नखीनाम गन्धद्रव्य ॥ लला-शतकुन्द-पु० करवीर वृक्ष ॥ कनेरका पेड । टकी हड्डी । कपाल । नखीगन्ध द्रव्य । शतखण्ड-न० सुवर्ण ॥ सोना । शंखक-पु० शिरोरोग-विशेष । शतप्रथि-स्त्री० दूव्वा || दूव । शंखद्राबी (न् )-पु० अम्लवेतस ॥ अम्लबैत । शतन्त्री-स्त्री. वृश्चिकाली । करञ्ज । गलरोग विशेष॥ शंखधरा-स्त्री० हिलमोचिका | हुलहुल शाक । वृश्चिकाली औषधी। कञ्जावृक्ष । एक प्रकारका शंखनख-पु० नखीनामक गन्धद्रव्य । बृहन्नखी। क्षुद्रशंख ॥ छोटा शंख । शतच्छद-पु० शतदलपद्म॥ १०० पत्तोंका कमल। शंखनखा-स्त्री. शंखनखी । शतदन्तिका-स्त्री० नागदन्ती ॥ हाथीशुण्डवृक्ष । शंखनाभि-पु० स्त्री० नाभिशंख ॥ नाभिशंख । शतदला-स्त्री० शतपत्री ॥ सेवती । शंखपुष्पी-स्त्री० वृक्ष-विशेष ॥ शंखाहुली । शतधा-स्त्री० | ॥ दूब। शंखमूल-न० मूलक ॥ मूली । शतपत्र-न० पभ । कमल । शंखाख्य-पु० बृहन्नखी । शतपत्री-स्त्री० पुष्पवृक्ष-विशेष ॥ सेवती गुलाब । शंखाता-स्त्री. शंखपुष्पी ॥ शंखाहुली। शतपत्रिका-स्त्री." शंखिका-स्त्री. तृण-विशेष । चोरहुली । शतपदी-स्त्री. शतमूली ॥ शतावर । शंखिनी-स्त्री० चौरपुष्पी । श्वतपुन्नाग । यतिक्ता॥ शतपद्म-न० श्वेतपद्म । सफेद कमल । चोरहुली । सफेद पुन्नागवृक्ष । यवेची । शतपा- (न् ) पु० वंश । इक्षुमेद । वास । शंखिनीफल-पु० शिरीष वृक्ष । शिरेसका पेड । एक प्रकारकी ईख । शंखिनीवास-पु० शास्त्रोट वृक्ष ।। सिहोरावृक्ष । शतपर्वा-स्त्री० दूर्वा । वचा । कटुका ॥ दूव । शटि-स्त्री० शटी ॥ कचूर । वच । कुटकी। शटी-स्त्री० स्वनामख्यात औषधि । पलाशीशटी ॥ शतपर्विका-स्त्री० दूर्वा । वचा । यव ॥ दूब । कचूर-आमियाहलदी । गंधपलाशी, छोटाकचूर । घच । जो शठ-न० तगर । कुंकुम । लोह ॥ तगर । केशर । शतपादिका-स्त्री० काकोली ॥ काकोली । शतपुत्री-स्त्री० शतमूली ॥ शतावर । गलरोग । लोहा ।
( १७८) आयुर्वेदीय- LA-PRASTANCE-CHAMPA एकशेर। शतपुष्पा-स्त्री० शाक-विशेष । क्षुप-विशेष ॥ शम्भु-पु० श्वेतार्क पारद ।। सफेद आकापारा । साफ । सोआ । शम्भुप्रिया-स्त्री० आमलकी ।। आमला । शतपुष्पिका-स्त्री शम्भुवल्लभ-श्वेतपद्म ।। सफेद कमल । शर-पु० भद्रमुञ्ज । दुग्धसर । दध्यग्रभाग ।। राम- शतप्रसूना-स्त्री." सर ।सरपता । दूध मलाई । दहीकी मलाई । शतप्रास-पु. करवीरवृक्ष ॥ कनेरका पेड। शतभरि-स्त्री. मालिका | मालकापुष्पवृक्ष । शरज-न० हैयङ्गवीन । नवनीत । एक दिनका घी। नौनीधी। मक्खन। शतमूली-स्त्री. दूर्वा । वचा । शतमूली ॥ दूर्व । वच । शतावर । शरट-पु. कुसुम्भशाक ॥ कसूम । शरणा-स्त्री० प्रसारणीलता ॥ पसरन । शतमूलिका-स्त्री. द्रवन्ती ॥ मसाकानी । शतमूली-स्त्री० शतावरी ।। शतावर । शरणी-स्त्री. प्रसारणी । जयन्तीवृक्ष ॥ पसरन । शतवीर्या-स्त्री० श्वतर्वा । शतावरी । कपिल जैन । जयन्तीवृक्ष । द्राक्षा ॥ सफेद दूव शिवावर । भूरे रङ्गकी दाख शरत्पद्म-न० श्वतेपद्म || सफेद कमल । अर्थात् अंगूरी मुनक्का । शरत्पुष्प-न० आहुल्य!। तरवटा काश्मीरदेशीयभाषा। शतवेधिनी-स्त्री० चुक्रिकाशाक ॥ चका शाक । शरपुंखा-स्त्री० नीलीवृक्ष-विशेष ॥ शरफोंका। शतवेधी [ न ]-पु० अम्लवेतस । अम्लबैत । झोझरू । झुझरू । शताङ्ग-पु० तिनिशवृक्ष । तिरिच्छवृक्ष । शरल-पु० सरलवृक्ष ॥ धूपंसरल । शतारु (सू)-न० कुष्ठभेद ॥ एक प्रकारका शराव-पु० न० चतुःषष्टितोलक परिमाण ।। छोटा कोट । शतारुषी-स्त्री." शरावार्द्ध-न द्वात्रिंशत्तोलक ||आध सेर । शतावरी-स्त्री० शतमूली । शटी ।। शतावर । कचर। शरी-स्त्री० एरकातृण । मोथी तृण । शताबा-स्त्री० शतपुष्पा। शतावरी|सौफ । सतावर । शरिष्ट-पु० आम्र ॥ आमका पेड । शताक्षी-स्त्री० शतपुप्पा ॥ सौफ । शर्करक-पु. मधुरजम्बीर ॥ मीठा नींबू । शनकावलि-पु. गजपिप्पली || गजपीपल । शर्करजा-स्त्री०सिताखण्ड मधुकी बनाई हुई चीनी। शनपर्णी-स्त्री० कटुका ॥ कुटकी । शर्करा-स्त्री० खण्डविकृति । रोग-विशेष ॥ शत-पु० तृण-विशेष । चीनी । एक प्रकारका प्रमेहरोग । शमिर-पु० वाकुची। शर्मरा-स्त्री० दारुहरिद्रा ॥ दारुहलदी । शमी-श्री वृक्ष-विशेष ॥ छौंकरा वृक्ष । शर्वरी-स्त्री. हरिद्रा ॥ हलदी। शमीधान्य-पु० मात्रादि । मूंग । उडद इत्यादि । शलंग-पु० लंबण-विशेष । शमीपत्रा-स्त्री० लजालु ॥ लजावन्ती। शलाका-स्त्री० मदनवृक्षाशल्य||मैनफलवृक्ष । सलाई। शमीर-पु० क्षुद्रशमी ॥ छोटा छोकरावृक्ष । शलाटु-त्रि० अपक्कफल कच्चे फल । शम्याक-पु. आरग्वधवृक्ष ।। अमलतास । शलाटु-पु० मूल-विशेष । बिल्ववृक्ष।। बेलका पड़े। शम्पात-पु० आरग्वधवृक्ष ॥ अमलतासभेद । शलालु-न० सुगीन्धद्रव्य-विशेष । शम्बर-पु. चित्रकवृक्ष । लोध्र । अर्जुनवृक्ष ॥ चीतावृक्ष । लोध । कोहवृक्ष । शल्यदा- स्त्री० मेदा || भेदा औषधी। शम्बरकन्द-पु. वाराहीकन्द ।। गैठी। शल्याणका-स्त्री." शम्वरचन्दन-न० चन्दन-विशेष | शंवरचन्दन । शल्मली-पु० शाल्मलीवृक्ष ।। सेमलका पेड़ । शम्बरी-स्त्री. आनुपर्णी ।। मूसाकानी । शल्य-पु० मदनवृक्ष ॥ मैनफलवृक्ष । शम्बूक-पु० स्त्री० जलजन्तुविशेष। घोघा । छोटीसपि शल्यक-पु० - ।
औषधिकोष। (१७९) " । शल्लक-पु० शोणवृक्ष ॥ शोनापाठा । शाकयोग्य-पु. 'वन्याक || धनिया । शल्लकी-स्त्रो० वृक्ष-विशप ।। शालईवृक्ष । शाकराज-पु० वास्तूक ।। बथुआशाक । शल्लकाद्रव-पु. सिलक ।। शिलारस । शाकबिल्व-पु. वात्तोक ॥ बैंगन । शल्लकीरस-पु० शाकविल्वक-पु० शबरलोध्र-पु० श्वेतलोध्र ।। सफेद लोध । शाकवीर-पु० वास्तूकशाक । जविशाक ॥ बथुआ- शश-पु. लोध्र । बोल ।। लोध । बोल । शाक । जीवशाक। शशक-पु० शाकवृक्ष-पु० तम्-विशेष ॥ सेगुनवृक्ष । शशधर-पु० कर्पूर ।। कपूर । शाकश्रेष्ठ-पुक वास्तूकशाक ।। बथुआशाक । शशाशम्बिका-स्त्री०जीवन्ती ॥ जीवन्ती । डोडा।शकश्रेष्ठा-स्त्री० जीवन्ती । वार्ताकु ॥ जीवन्ती शशांक-१० कर्पूर || कपूर । बैंगन । डोडी । डोडीक्षुप । शशाण्डुली-स्त्री० ककंटीभेद।। एक प्रकारकी ककडी शाका-स्त्री० हरीतकी । हरड | शशिकांत-न० कुमुद ।। कमोदनी । शाकाख्य-पु० शाकवृक्ष ॥ सेगुनवृक्ष । शशिप्रभ-न० कुमुद । मुक्ता ॥ कमोदनी । मोती । शाकाङ्ग-न० मिरच ।। मरिच । शशिरेखा-स्त्री० सोमराजी ।। वायची। शाकाम्ल-न० वृक्षाम्ल ॥ विषाबिल । इमली । शशिलेखा-स्त्री० गुडूची ।। गिलोय । शाकाम्लभेदन-न० चुकशाक ॥ चूकाशाक । शाशिवाटिका-स्त्री० पुनर्नवा ।। साँट, विपखपरा । शाकालाबु-स्त्री. राजालाबु ॥ मीठाकद् । शष्कुल-पु० धिति । करञ्ज ।। करंजुआ। शाखाकण्ट-पु० स्नुहीवृक्ष ॥ सेहुण्डवृक्ष । शप्कुली-स्त्री० पिष्टकविशष । मैदाकी पूरी । शाखाम्ल-पु० वानीरवृक्ष | जलवैत । शस्त्र, शस्त्रक-न० लौह ॥ लोहा । शस्त्रकोशतरु-पु० महापिण्डीतरु | पेंडारी देशा- शाखोट-पु० क्ष-विशेष ।। सहोरावृक्ष । शाखाम्ला-स्त्री० वृक्षाम्ला ॥ विषाविल । न्तरीय भाषा । शांगुष्ठा-स्त्री० गुञ्जा ॥ धुंधुची, । चोटली । शस्त्रायस-न० लौह लोहा । शाटिका-स्त्री० शटी ।। कचूर । शस्यनि-स्त्री० चीरपुष्पी ।। चोरहुली । शाण-पु० माषचतुष्टय || मासे । शस्यध्वंसी (न)-पु० तुन्नवृक्ष ॥ वुन वृक्ष । शाणि-पु० पट्टवृक्ष ॥ पाटुवृक्ष । शस्यशंवर-पु० शालवृक्ष ।। सालवृक्ष ।। शाण्डिल्य-पु० बिल्ववृक्ष ॥ वेलका पेड । शस्यारु-पु. क्षुद्रशमवृिक्ष ॥ छोटा छोकरावृक्ष । शात-त्रि० धत्तूर || घत्तरा । शाक-पु० वृक्ष विशेष ।। शेगुनवृक्ष । शातकुम्भ-न० काञ्चनपुष्प । धत्तूरवृक्ष ॥ कच- शाक-न० पु० पत्रपुष्पादि ॥ पत्ते, फूल, नाल, नारके फूल । धनरावृक्ष । इत्यादि । साग भाजी । शाकचुक्रिका- स्त्री० तिन्तिडी ।। इमली । शातकुम्भ-पु. करवीरवृक्ष ॥ कनेरका पेड शातकौम्भ-न० स्वर्ण ॥ सोना । शाकट-पु. लष्मान्तकवृक्ष । लिहसोडावृक्ष । शातभीरु-पु० मालिकाभेद ॥ वेलाभेद । शाकटाख्य-पु. धववृक्ष ॥ धोवृक्ष । शातला-स्त्री० शातलावृक्ष ॥ सातलावृक्ष । थहर- शाकतरु-पु० शाकवृक्ष । सेगुनवृक्ष । का भेद । शाकपत्र-पु० शिवृक्ष ।। सैजिनका पेड । शाकवालेय-पु. ब्रह्मयाष्ट ।। भारङ्गी । शान-पु. शाणपरिमाण ॥ मासे । शाकंभरीय न० अजमेराख्यदेशान्तर्गत शाम्भ- शाना-स्त्री० इन्द्रवारुणी || इन्द्रायण । रनागरीय जलाशयविशेषोद्भव लवण ।। अजमेर शान्ता-स्त्री० शमीभेद ॥ आमलकी । नीलदूर्वा । देशके अन्तर शामरनामवाले ग्रामके सरोवरमें रेणुका । शर्मावृक्ष ॥ छोंकरावृक्षभेद । आमला। उत्पन्न हुआ नोन अर्थात् सामरनोन । हरीदूव । रेणुका । छोंकरावृक्ष । ।
(१८०) आयुर्वेदीय- । शान्त्वति-स्त्री० ब्राह्मणयष्टिका || भारङ्गी। शाली-स्त्री कृष्णजीरक ॥ काला जीरा । शाम्भव-न० देवदारु ॥ देवदारुवृक्ष । शालीना-स्त्री० मिश्रेया ॥ साआ। शाम्भव-पु० कर्पूर । शिवमल्लिका । गुग्गुलु । वि. शालु-न० कुमुदादिमूल |कुमुद अथवा कमलकन्द। पभेद !! कपूर । वसु । गूगल । विषभेद । शालु-पु० चीरकाख्यौषधी ॥ शाम्भुवी-सी० नीलदूर्वा ॥ हरी दूव । शालुक-न. कुमुदादिमूल || कमलकन्द इत्यादि । शारद-न० श्वेतपद्म ।। सफेद कमल । शालुक-न० कमुदादिमूल । जातीफल ॥ कमलक. शारद-पु० पिकुलवृक्ष काशतृण । सप्तपर्णवृक्ष । न्द । भसीडा । कमोदनीकी जड । जायफल । हान्मुिद् । पीतमुद् ॥ मोलसिरीका पेड । काँस । शालूक-पु० कमलकन्दादि ॥ कमलकन्द । भसाडा साविनवृक्ष । हरीमृग । पालीमूग ! इत्यादि। शारदा-स्त्री० ब्राझी । शारिवा ॥ ब्रह्मीघास । स- शालेय-पु० मधुरिका ॥ माफ । खिन । सालक्षा। शालेया-स्त्री." शारदी-स्त्री० तोयपिपली। सप्तपर्ण ॥ जलपीपर । शाल्मल-पु० शाल्मलिवृक्षा शाल्मलिनियास॥सेमल सतिवन । वृक्ष । मोचरस। शारिवा-स्त्री० अनन्ता । श्यामालता ॥ कालासर शाल्मलि-पु० स्त्री० वृक्ष-विशेष ॥ सेमलका पेड। गौरीसर । शाल्मालक-पु. रोहितकवृक्ष || रोहेडा वृक्ष । शार्क-पु० शर्करा ॥ चीनी । शाल्मालपत्रक-पु० सप्तच्छदवृक्ष ॥ सतिवन । शार्ङ्ग-न० आर्द्रकः ॥ अदरख । शाल्मली-स्त्री. वृक्ष-विशेष | सेमलका पेड । शाईष्ठा-स्त्री. महाकरञ्ज । बडी करज । शाल्मलीकन्द-पु. शाल्मलीवृक्षस्य भूल || सेमर- शाङ्गोप्ठा-स्त्री." की मूली । शार्दुल-पु-चित्रक॥ चीतावृक्ष । शाल्मलीफल-पु० तेज:फलवृक्ष ॥ तेजबलवृक्ष । शार्दूलकन्द-पु० अरण्यपलाण्डु ॥ वनप्याज । शाल्मलीवेष्ट-पु० शाल्मलीनिर्यास ॥ सेमलका शालु-पु० स्वनामख्यात वृक्ष ॥ साल | सागौन।।स, गोंद । मोचरस । खुआवृक्ष। शाल्मलीवष्टक-पु. शालिनिर्यास-पु० सज्जरस || राल । शावर-पु. लोध्रवृक्ष ॥ लोधका वृक्ष । शालपर्णी-स्त्री० रुप-विशेष ॥ शालवन । सरिवन। शावरभेदाख्य-न० ताम्र ॥ तांबा । शालपत्रसमा-स्त्री." शावरी-स्त्री० शूकशिम्बी ।। कौंछ । शालव-पु. लोध्र ॥ लोध । शिंशपा-स्त्री० वृक्ष-विशेष ॥ सीसम । समिवृक्ष । शालवेष्ट-पु० शालानियास ॥ राल । शिक्थ-न० मधूत्थ || मोम । शालयुग्म-न० शाल । पतिशाल || सालवृक्ष । विज, 'शिक्थक-न." यसार । शिखण्डिनी-स्त्री० यूथिका । गुञ्जा ॥जुही । धुंबुची। सालसास-पु. हिंगु । सज्जरस । हींग । राल । शिखण्डी (न् )-पु० गुञ्जा । स्वर्णयूथिका ॥ शालाश्चि-स्त्री. शाकभेद || शान्तिशाक । धुंधुची। सुनहरी जुही । शालाना-स्त्री० विदारी ॥ सालवन । शिखरा-स्त्री० मूर्वा ॥ चुरनहार । शालि-पु. धान्य विशेष ॥ शालिधान । शिखरिणी-स्त्री० मल्लिका । नवमालिका । द्राक्षार- शालिका-स्त्री० विदारिका || शालवन । विशेष । मूर्वा । रसाला ॥ मल्लिका । नेवारी । शालिन्चु-पु० शाक विशेष ॥ शान्तिशाक । किसमिस । चुरनहार । शिखरन । शालिट्री-स्त्री." शिखरी(न् )-पु० अपामार्ग । वन्दाक । कर्कट. शालिपर्णी--स्त्री. माषपर्णी || मषवन । . शृङ्गी । कुन्दुरुक । यावनाल || चिराचिस " . N LuliN hi औषधिकोष । (१८१) वांदा । काकडाशिङ्गी । कुन्दुरू। सुगन्धिद्रव्य । शिफारुह-पु० वटवृक्ष || वडका पेड जुआर अन्न। शिमृडी-स्त्री. क्षुप-विशेष ।। चङ्गोनि | कुत्रचित् शिखलोहित-पु० वृक्ष-विशेष।। कुकरोंदा । भापा। शिखा-स्त्री० लाङ्गलिकी ॥ कलिहारी । शिम्ब-पु० चक्रमईक । चकवड वृक्ष । शिखाकन्दन गृञ्जन || सलगम । शिम्बि-स्त्री • एरका || मोथीतृण । शिखामूल-पु० शिन्विक-पु. कृष्णमुटू ।। काली मूंग । शिखावती-स्त्री० मूर्वा ॥ चुरनहार । शिम्बिपर्णिका-स्त्री. मुद्गपर्णी ।। मुगवन ! शिखालु-पु. मयूरशिखा । भोरशिखा । शिम्बपी-स्त्री." शिखावर-पू. पनसवृक्ष । कटहरवृक्ष । शिम्बी-स्त्री० मुद्गपर्णी । कपिकच्छु । बीजगुप्ति ।। शिखावला-स्त्री० मयूरशिखा । मोरशिखा । मुगवन । कौंछ। सेम। शिखावान् [ त् ]-पु० चित्रकवृक्ष ॥ चीतावृक्ष । शिर-पु० पिप्पलीमूल ।। पीपरामूल । शिखिकण्ट-न० तुत्थ ।। तूतिया । शिरःफल-पु० नारिकेल ।। नारियल । शिखिग्रीव-न." शिरःशूल-पु. शिरोरोग-विशेष । शिखिनी-स्त्री० मयूरशिखा ।। मोरशिखा । शिरा-स्त्री. नाडी । धमनी । शिखिपर्णिका-स्त्री. मुद्गपर्णी || मुगवन । शिरापत्र-पु. हिन्तालवृक्ष । कपित्थवृक्ष।। एक प्रकार शिखिप्रिय-० लघुबदर ।। छोटा बेर। रका ताड । कैथवृक्ष । शिखिमण्डल-पु. वरुणवृक्ष ॥ वरनावृक्ष । शिराफल-न० अञ्जीर ।। अस्तर। शिखमोदा-स्त्री० अजमोदा ।। अजमोद । शिराल-न० कर्मरंग ।। कमरख । शिखिवर्द्धक-पु० कूष्माण्ड । पेठा । शिरालक-पु० आस्थभंगवृक्ष ।। हडसंधारी। शिखा (न्)-पु० चित्रकवृक्ष । मेथिका । सितावर। शिरावृत-न० सासक ॥ सीसा । अजलोमा। चीतावृक्ष । मेथी। शिरिआरी ।चौव- शिरीष-पु० स्वनामुख्यातवृक्ष ।। सिरसका पेड । तियाशाक । शुयाशिम्बी वङ्गभाषा । शिरीषपत्रिका-स्त्री. श्वेतकिणिही ।।सफेद किणिही शिग्रु-पु. शोभाञ्जनवृक्ष ॥ सैजिनेका पेड। . वृक्ष । शिग्रुज-न० शोभांजनवृक्ष ॥ सैजिनका पेड । शिरोधरा, शिरोधि-स्त्री० ग्रीवा ॥ गरदन । शिग्रुबीज-नः " शिरोरुजा-स्त्री० सप्तपर्णवृक्ष ॥ सतिवन । शिंधाण-न० लौहमल । नासिकामल ॥ लोहेका शिरोराग-पु० मत्तकपडिा ॥ शिरमें पीडा । मैल । नाकका मैल । शिरोवृत्त-न. मरिच ॥ मिरच लाल । शिवाणक-पु० श्लेष्मा । कफ । शिरोवृत्तफल-पु० रक्तापामार्ग || चिरचिटा । शिवाणक-पु० न० नासिकामल ।। नाकका मैल । शिरोस्थि-न० मस्तकास्थि ॥ शिरका हड्डी । शिनशूक-पु० यव । गोधूम ॥ जौ । गेहूं । शिलगभर्ज-पु० पाषाणभेदन ॥ पाखानभेद । शिति-पु. भूर्जवृक्ष ॥ भोजपत्रवृक्ष । शिला-स्त्री. मनःशिला । कर्पूर ।। मनशिल । शितिचार-पु० शाक-विशेष ॥ चौपतियाशाक । शितिसारक-पु० तिन्दुकवृक्ष ।। तेंदूवृक्ष । शिलाकर्णी-स्त्री. शल्लकीवृक्ष ॥ शालईवृक्ष । शिफा-स्त्री. वृक्षाणां जटाकारमूलम्शतपुष्पाहरिद्रा । शिलाज-न० शैलय । लोह ॥ पत्थरका फूल । पद्मकंद । जटामांसी ।। वृक्षकी जड । जटाकेसी। लोहा । होती है। सौंफ । हलदी | कमलकन्द जटामां-शिलाजतु-न० स्वनमाख्यात उपधातु ।। शिलाजीत। सी। बालछड। शिलाजनी-स्त्री. कालाञ्जनीवृक्ष ॥ कालकिपास । शिफाक-पु० पद्ममूल ॥ कमलकन्द । शिलात्मज-न० लौह ॥ लोहा । शिफाकन्द-पु. शिलाद्रु-पु० चैलेय।। पत्थरका फूल । भूरिछरीला । कपूर ।
(१८२) आयुर्वेदीय- - शिलाधातु-पु० सितोपल । पीतगरिक ।। वडिया. शिववल्लिका-स्त्री० लिङ्गिनी ॥ लिङ्गिनीलता । माटी । पलिागरे। शिववल्ली-स्त्री० लिङ्गिनी। श्रीवल्ली पञ्जगुरिया। शिलापुष्प-न० शैलय । पत्थरका फूल । ईश्वरी केचित् भाषा श्रीवल्लीवृक्ष । शिलाभव-न." शिवबीज-न० पारद ॥ पारा । शिलाभेद-पु० पाषाणभेदी वृक्ष ॥ पाखान भेद । शिवशेखर-पु० वसुकवृक्ष । धत्तूरवृक्ष ।। वसुवृक्ष । शिलारम्भा-स्त्री० काष्ठकदली ।। काठकेला । धतूरावृक्ष । शिलावल्का-स्त्री. औषधद्रव्य-विशेष ॥ शिला- शिवा-त्री० शमीवृक्ष । हरीतकी । भूम्यामलकी । आमलकी । हरिद्रा । दुर्वा । गोरोचना ॥ वाक् । छौंकररावृक्ष । हरडा । भुई आमला । आमला । शिलाव्याधि-पु० शिलाजतु ।। शिलाजीत । हलदी । दूव । गौलोचन । शिलासन-न० शैलेय ॥ पत्थरका फूल । शिवाटिका-स्त्री० वंशपत्री । श्वतपुनर्नवा ।। शिलासार-न० लोहै ॥ लोहा । वंशपत्री । विषखपरा । शिलाह-न० शिलाजतु || शिलाजीत । शिवात्मक-न० सैन्धव ॥ सेंधानान । शिली-पु. भूर्जपत्रवृक्ष ।। भोजपत्रवृक्ष । शिवानी-स्त्री०जयन्तीवृक्ष ॥ जैत । जयन्तीवृक्ष । शिलींध्र-न. कदलीपुष्प ॥ केलेका फूल । शिवापाड-पु. वकवृक्ष ।। इथियावृक्ष । शिलीन्ध्र-पु० वृक्ष-विशेष । शिवाफला-स्त्री. शमवृिक्ष ।। छौंकररावृक्ष । शिलीन्ध्रक-न० गोमयच्छत्रिका । शिवालय-पु० रक्ततुलसी ॥ लाल तुलती । शिलपिद-पु० श्लीपदरोग । शिवास्मृति-स्त्री जयन्तीवृक्ष ॥ जयन्तीवृक्ष । शिलेय-न. शैलेय ॥ पत्थरका फूल । शिवाहाद-पु. वकवृक्ष ॥ अगस्तियावृक्ष । शिलोत्थ-न." शिवाहा-स्त्री. रुद्रजटा ॥ शंकरजटा । शिलोद्भव-न० शैलेय । चन्दन-विशेष ।। पत्थरका शिवाक्ष-न० वद्राक्ष ।। रुद्राक्ष । फूल । भूरिछरीला | एक प्रकारका चन्दन । शिवि-पु. भूर्जवृक्ष ॥ भोजपत्रवृक्ष । शिलोद्भेद-पु० पाषाणभेदी ॥ पाखानभेद । शिवष्ट-पु० वकवृक्ष ।। अगस्तिवृक्ष । शिल्पिका-स्त्री० तृण-विशेष || शिल्पीतृण । शिवष्टा-स्त्री० दूर्वा ॥ दूब । शिव-न० सैन्धव । श्वतटङ्कण । सामुद्रलवण।। संधा शिशुक-पु० शिशुवृक्ष । शिशुवृक्ष । नोन । सफेद सुहागा । समुद्रनोन । शिशुगन्धा-स्त्री० मालका-विशेष ॥ एक प्रकारका शिव-पु० गुग्गुलु । कृष्णधत्तुर । पारद । पुण्डरीक - मोतिया। द्रुम ॥ गूगल । काला धतूरा । पारा । पुडरिया। शिशुपालक-पु० कदम्ब विशेष | केलिकदम । शिवदारु-न० देवदारुवृक्ष ॥ देवदारवृक्ष । शिश्न-पु. मेढ़ । लिङ्ग । शिवद्रुम-पु० विल्ववृक्ष ॥ वेलका पेड़ । शिल्ल-पु. शिंह्वक । शिलारस । शिवद्विष्टा-स्त्री० केतकी ॥ केतकी । शिक-पु० गन्धद्रव्य-विशेष ॥ शिल रस । शिवधातु-पु. पारद ।। पारा। शिल्ला-स्त्री० श्योनाकवृक्ष॥ शोनापाठा । शिवप्रिय-न० रुद्राक्ष ॥ रुद्राक्ष । शकिर-ज० सरलद्रव ॥ सरलका गोंद । शिवप्रिय-पु० अगस्त्यवृक्ष । स्फाटक । धत्तूर ॥ शीघ्र-न० लामजक || लामजज कतृण । अगस्तवृक्ष । फटिकमणि । धत्तूरा । शीघ्रजन्मा (न्)-पु० करज-विशेष ॥ एक शिवमलक-पु० अर्जुनवृक्ष ॥ कोहवृक्ष.। शिवमल्लिका-स्त्री वसुक ॥ वसुवृक्ष । शीघ्रपुष्प-पु० अगस्त्यवृक्ष ॥ अगस्तवृक्ष । शिवमल्ली-स्त्री० पाशुपति ॥ वृहत् मौलसिरी । शीघ्रा-स्त्री० दन्तीवृक्ष ।। दन्तीवृक्ष । शिववल्लभा-स्त्री०. शतपत्री ॥ सेवती । शीत-न० गुडत्वक् ॥ दालचीनी । प्रकारकी करञ्ज । - औषधिकोष। ( १८३) रोग। छौंकरावृक्ष । शीत-पु० वेतसवृक्ष । अशनपर्णी । बहुवारवृक्ष । शीतलच्छेद-पु० चम्पक ।। चम्पावृक्ष । पर्पट । निम्बवृक्ष । कर्पूर ॥ वैतवृक्ष । पटसन। शीतलजल-न० उत्पल ॥ कुमुदिनी । लिसोडावृश्च । पित्तपापडा । नीमका वृक्षा कपूर। शीतलप्रद-पु० चन्दन ॥ चन्दन । शीतक-पु० अशनपर्णी ।। पटसन । शीतलवातक-पु० अशनपर्णी ॥ पटशन । शीतकुम्भ-पु० करवीरवृक्ष ॥ कनेरवृक्ष । शीतला-त्री० शीतलीलता । कुटुम्बनि । आराम- शीतकुम्भी-स्त्री. जलजलताविशेष ॥ शिवली छोप शीतला । मसूरिकाभेद। शिउलीछोप वङ्ग भाषा। वङ्गभाषा । अर्कपुष्पी । आरामशतिला । शीतला- शतिगन्ध-न० श्वेतचन्दन ॥ सफेद चन्दन । शीतपर्णी-स्त्री० अर्कपुष्पिका ॥ अर्कहुली । दधि- शीतली-त्री० शीतलीलता ॥ "शिउलीछोप"। यार । क्षीरवृक्ष । शीतवल्क-पु० उदुम्बर ।। गूलर । शीतपल्लवा-स्त्री० भूमिजम्बू ।। छोटी जामुन । शीतवीर्यक-पु० प्लक्षवृक्ष ॥ पाखरका पेड । शीतपाकिनी-स्त्री० काकोली । महासमंगा ।। का- शीतशिव-न० सैन्धवलवण। शैलेयनामगन्ध द्रव्य ।। कोली औषधी । कगहिया । सैंधानोन । पत्थरका फूल । शीतपाकी-त्री० वाट्यालक । काकोली । गुञ्जा । शीतशिव-पु० मधुरिका । सक्तुफलावृक्ष ।। सौआ । खिरैटी। काकोली औषधी । धुषुची । शीतपुष्प-न० कैवर्तमुत्तक ॥ केवटी मोथा । शतिशीवा-स्त्री० शमीवृक्ष । मिश्रेया ॥ छौंकार शीतपुष्प-पु० शिरीषवृक्ष ॥ सिरसका पेड । वृक्ष । सोआ; वनसौंफ। शीतपुष्पक-न० शैलेय | पत्थरका फूल । शतिशूक-० यव ।। जौ । शीतपुष्पक-पु० अर्कवृक्ष ॥ आकका पेड । शीतसह-पु० पीलुवृक्ष ।। पालुवृक्ष । शीतपुष्पा-स्त्री. अतिबला ।। कंबई शीतसहा-स्त्री० नीलसिन्दुवार । वासन्तीपुष्प लता । शीतप्रभ-पु० कर्पूर ।। कपूर । नीलसरालु । वासन्ती पुष्पलता । शीतप्रिय-पु. पर्पट ॥ पित्तपापडा । शीतक्षार-न० श्वेतटङ्कण ।। सफेद सुहागा। शीतफल-पु० उदुम्बर ।। गूलर । शीता-स्त्री० अतिबला । कटुम्बनि । दूर्वा । शिल्पि- शीतबला-स्त्री० महासमंगा || कगहिया । कातृण । कंबई । अर्कपुष्पी। दूव । शिल्पा तृण। शीतभारु-स्त्री० मालका || मल्लिका । शीतांशु-पु० कर्पूर ॥ कपूर । शीतमञ्जरी-स्त्री० शेफालिका ।। निर्गुण्डीभेद । शीतांशवेल-न० करतैल ॥ कपूर । शीतभचूख-पु० कर्पूर ।। कपूर । शीताङ्गी-स्त्री० हंसपदी ।। लाल रङ्गका लज्जालु । शोतमरोचि-पु० शीताद-पु० दन्तरोग-विशेष । शोतमूलक-न० -न- उशीर || खस ।। शीतावला-स्त्री० महासमङ्गा ।। कगहिया । शीतरश्मि-पु० कर्पूर ॥ कपूर । शीधु-पु० न० मद्यविशेष ।। ईखके रससे बनाई शीतल-न० पुष्पकासीस ! शैलय । श्वेतचन्दन । हुई मदिरा। पद्मक । मौक्तिक । वीरणमूल ॥ पुष्पकससि । शीधुगन्ध-बकुलवृक्ष ।। मौलसिरी का पेड । पत्थरका फूल । सफेद चन्दन । पद्माख। मोती। शीफालिका-५०स्त्री० शेफालिका ।। निर्गुण्डीभेद । शीरी [ ]-पु० हरीदर्भ ।। हरे रङ्गका. कुशा । शीतल-पु० अशनपर्णी । बहुवार वृक्ष । चम्पक । शीर्ण-न० स्थौणेयक ।। थुनेर । : कर्पूरभेद । राल || पटशन । लिसोडावृक्ष । शीणमाला-स्त्री - पृश्निपर्णी ।। पिठवन । चम्बावृक्ष । कपूरभेद । राल । शीर्णपत्र-पु० कर्णिकारवृक्ष । पट्टिकालोव । शीतलक-न० सितोत्पल ॥ कमोदनी । निम्बवृक्ष ॥ कणेरवृक्ष । पठानी लोध । नाम- शीतलक-पु० मरुबक || मरुआ वृक्ष । का पेड । । " खस। . FIR ( १८४) आयुर्वेदीय- शिवार । शोनापाठा। शार्णवर्ण-पु. निम्बवृश्च ।। नीमका पेड़ । द्रव्य ।। चार ४ तोले । सीप । शंख । बबासीर। शीणपुष्पिका-स्त्री० अवाक्पुष्पी ।। सौंफ । एक प्रकारका नेत्ररोग । नखनाम पन्धद्रव्य । शीणवन्त-न० वृहद्गोल i। तरबूज । शुक्तिका-स्त्री० मुक्तास्फोट । चुक्रिका ।। सीप । चू: शीष-न० कृष्णागरु ॥ काली अगर । काशाक। शीवल-न शैलेय । शैवाल || पत्थरका फूल । शुक्तिज-नमुक्ता॥ मोती । शुक्तिबीज-न." शुक-न० अन्धिपर्ण । श्योनाकवृक्ष ॥ गठिवन । शुक्र- न . मज्जासम्भूतधातु । नेत्ररोग-विशेष ।। वीर्य । एक प्रकारका नेत्ररोग अर्थात् फूला । शुक-पु. शिरीषवृक्ष | सिरसका पेड । शुक्र-पु. चित्रकवृक्ष ॥ चीतावृक्ष । शुकछद- न० ग्रन्थिपर्ण ॥ गाठवन । शुक्ल-न० रजत । । नवनीत । नेत्ररोग-विशेष ।। शुकाजह्वा-स्त्री. वृक्ष-विशेष । शुयाठोडी । चांदी। नैनी । एक प्रकारका नेत्ररोग । शुकतरु-पु. शिरोषवृक्ष । सिरसका पेड । शुक्लकन्द-पु० महिषकन्द ॥ भैसाकन्द । शुकद्रुम-पु० शुक्ल कन्दा-स्त्री० अतिविषा ॥ अतीस । शुनामा-स्त्री० शुकजिता ॥ शुआठोडी। शुक्लकुष्ठ-न० श्वेतवर्णकुष्ठरोग || सफेद कोट । शुकनाशन-पु० दद्रुघ्न ॥ चकवड । शुक्लदुग्ध-पु० शगाटक || सिवाडा । शुकनास-पु. श्यानाकवृक्ष ।। शोनापाठा । शुक्लधातु-पु० कठिनी ।। सेलखडी । खडिया । शुकनासिका-स्त्री." शुक्लपुष्प-पु. छत्रकवृक्ष । कुन्दपुष्पवृक्ष । मरुवक. शुकपिण्डी-स्त्री० शूकशिम्बी ॥ कौंछ । वृक्ष । श्वेतवर्णकोकिलाक्षवृक्ष।।छातारिया । कुन्द- शुकपुच्छ-पु० गन्धक ॥ गन्धक । पुष्पवृक्ष । मरुआवृक्ष । सफेद तालमखाना । शुक्रपुच्छक-न० स्थौणेयक ॥ थुनेर । शुक्लपुष्पा-स्त्री० नागदन्ती । शीतकुम्भी ॥ हाथीशु. शुकपुष्प-पु. शिरीषवृक्ष | सिरसका पेड । ण्डवृक्ष । “शिउली छोप"। शुकप्रिय- पु. " शुक्लपुप्पी-स्त्री० नागदन्ती ॥ हाथाशुण्डावृक्ष । शुकोप्रया-स्त्री० जम्बु ॥ जामुन । शुक्लपृष्ठक-पु० सि-धूकवृक्ष । सिहालवृक्ष । शुकफल-पु० अर्कवृश्च ॥ आकका पेड़ । शुक्लमण्डल-न० नेत्रे श्वतांश । आखोंका सफेद शुकबह-न० ग्रन्थिपर्ण ॥ गठिवन । भाग। शुकवल्लभ-पु० दाडिम ॥ अनार । शुक्लरोहित-पु० श्वेतगोहतकवृक्ष ॥ सफेद रोहे आ शुकाशम्बा, शुकशिम्बि-स्त्री० कपिकच्छु । कौंछ। वृक्ष । शुक्लला-स्त्री. उच्चटा । निर्वाषी धास । शुकाख्या-स्त्री० वृक्ष-विशेष || शुयाठोडी। शुक्लशाल-पु० गिरिनिम्बवृक्ष । श्वेतवर्णशाल ॥ पर्व शुकादन-पु० दाडिम ॥ अनार । तानीमवृक्ष । सफेद सालवृक्ष । शुकानना-स्त्री० शुकाख्यावृक्ष ॥ शुयाठोड। शुक्लक्षीरा-स्त्री० काकोली ॥ काकोली । शुकोदर-न० तालीशपत्र ॥ ताश पत्र । शुक्ला-स्त्री० शर्करा । काकोली । विदारी । स्नुहीवृक्ष शुक्त-न० मांस । काञ्जिक । द्रवद्रव्य-विशेष चीनी। काकोली औषधी । विदारीकन्द । सेहु. मांस । कांजि । सिरका । ण्डवृक्ष । शुक्त-त्रि० अम्ल । खट्टा। शुक्लाख्य-न नेत्ररोगान्तर्गत शुक्लगत-रोगविशेष । शुक्ता-स्त्री० चुक्रिका ॥ चूकाशाक । शुक्लार्म- (न् ) न० शुक्लनाम नेत्ररोग । शुक्ति-कर्षद्वयपरिमाण | जलजन्तु-विशेष । शङ्ख। शुक्लोत्पल-न० श्वेत उत्पल ।। सफेद कुमुद । अशेरोग । नेत्ररोग-विशेष । नखीनामक गन्ध- शुक्लापला-स्त्री० शर्करा || चीनी । शुकपुष्प-न." किवाच ।
औषधिकोष। ( १८५) सफेद आलु। कालीमिर्च । शुग-पु० वटवृक्ष । आम्रातक।। वडका पेड । अम्बा शुभ्रांश-पु० कर्पूर ॥ कपूर । डावृक्ष । शुभ्रालु-पु० महिषकन्द । श्वेतालु ॥ भैंसाकन्द । शुंगा-स्त्री पर्कटीवृक्ष ॥ पिलखनवृक्ष । शुगी (न् ) प्लक्षवृक्ष । वटवृक्ष । गर्दभाण्डवृक्ष ॥ शुल्ल-न० ताम्र ॥ तांबा । पाखरका पेड । वडका पेड । पारिस पीपल । शुल्व-पु." शुचि-पु० चित्रकवृक्ष ॥ चीतावृक्ष । शुल्बक-न० ताम्र ।। तांबा । शुचिदुम-पु० अश्वत्थवृक्ष|| पीपलका पेड । शुल्वारि-पु० गन्धक ॥ गन्धक । शुचिमल्लिका-स्त्री० नवमालिका । नेवारी । शुषवी-स्त्री० कारवल्ललता । करेला । शुटीय-न० वीर्य । शुक्र । शुषिरा-स्त्री० नलीनाम गन्धद्रव्य ॥ नलिका । शुण्ठि-स्त्री० शुष्कार्द्रक ॥ सोंट । शुषिराख्य-पु. रंध्रवंश ॥ बांसका भेद । शुण्ठी-स्त्री०" शुष्कपत्र-न. आतपादिद्वारा शोपित पशाक || शुण्ठ्य-न० धूपसे सुखाये हुए नाडीके पत्ते । चाहाके पत्ते । शुण्डरोह-पु० भूतृण ॥ शरवाण । शुष्कमूलादिगण-पु० शुष्कमूलक । पुनर्नवा । देव- शुण्डा-स्त्री० मदिरा ।। मद्य । दारु । रास्ना । शुण्ठि । मञ्जिष्टा। मरिच । कुष्ट ।। शुण्डिका-स्त्री. अलिजिबिका ।। तालूक ऊपर एक सूखीमूली । सांठ । देवदारु । रायमन । छोटी जीभ सोंठ। मजीठ । मिरच । कट । शुण्डी-स्त्री० हस्तिशुण्डी ।। हाथीशंडावृक्ष.। शुप्कवृक्ष-पु० धववृक्ष ॥ धौवृक्ष । शुद्ध-न० सैंधवलवण । मरिच ॥ सैंधानोन । शुष्काङ्ग-पु० शुष्कार्द्र-न० शुण्ठी ॥ सोंठ । शुद्धवल्लिका-स्त्री० गुडूची ।। गिलोय । शुष्मा-[ ] पु० चित्रकवृक्ष ॥ चीतावृक्ष । शुनकंचुका-स्त्री० क्षुद्रचञ्चुक्षुप ।। छोटा चञ्चु । शूकतृण-न० तृण-विशेष ।। शूकडि तृण । शूकधान्य-न० शुकयुक्तसस्यमात्र ॥ जी इत्यादि । शुनकचिल्ली-स्त्री० श्वचिल्लीनाम शाक । शूकपिण्डि-स्त्री० शूकशिन्त्रि ॥ कौंछ । शुभ-न० पद्मक || पद्माख । शूकपिण्डी-स्त्री." शुभकरी-स्त्री. शमीवृक्ष ॥ छौंकरावृक्ष । शूकरकन्द-पु. वाराहीकन्द ॥ वाराही गेंठी । शुभग-पु० टंकण || सुहागा । शूकरदंष्ट्र--पु० क्षुद्ररोग-विशेष ॥ बालकोंको यह शुभगन्धक-न० बोलनाम गन्धद्रव्य ।। बोल । रोग होजाता है। शुभद-० अश्वत्थवृक्ष ।। पीपलका पेड । शूकरपादिका-स्त्री. कोलशिम्बी ॥ सुअरासम । शुभपत्रिका-स्त्री० शालपणी ॥ शालवन । शूकरकान्ता-स्त्री० वराहक्रान्ता ॥ खैरीशाक । शुभा-स्त्री० वंशलोचना | गोरोचना। शमीवृक्ष । शूकरी-श्री० वराहक्रान्ता । वाराहीकन्दः ।। वराक्रान्ता। प्रियंगु । श्वेतदूर्वा ।। वंशलोचन। गौलोचन। छोकै गेंटी। रावृक्ष। फूलाप्रियंगु। खफद दूब । शूकरेष्ट-पु० कशेरु ॥ कशेरू। शुभाजन-सु० शोभाञ्जनवृक्ष ॥ सैंजिनेका पेड । शूकवता-स्त्री० कपिकन्छु । कौंछ शुभ्र-न० अभ्रक । गडलवण । रौप्य । कासीस ॥ शूकशिम्बा-स्त्री० " अभ्रक । सामरनौन । रूपा । कसीस । शूकशिम्बि-स्त्री." शुभ्र-पु. चन्दनवृक्ष । चन्दनका शूकशिम्बिका-स्त्री." शुभ्रपुंखा-स्त्री० श्वेतवर्ण शरपुंखा। सफेद सरफोंका। शूकशिम्बी-त्री०" शुभ्रा-स्त्री० वंशरोचना । स्फटी ॥ वंशलोचन । शूका-त्री०" शूतिपर्ण-पु० आरग्वधवृक्ष ॥ अमलतासवृक्ष। . ॥ ॥ पेड फटीकरी। ad ३४ ke ( १८६) आयुर्वेदीय- तोले। शृखंली-स्त्री० कोकिलाक्ष ॥ तालमखाना । शूद्रप्रिय-पु० पलाण्डु ।। प्याज । शृंग-न. पद्म ॥ कमल । शूद्रा"-त्री प्रियंगुवृक्ष ॥ फूल प्रियंगु । शून्यगर्भ-पु० सूर्यपत्र । पैपियागाछ वङ्गभाषा । शृंगक-पु० जीवकवृक्ष ॥ जीवकवृक्ष । श्रृंगकन्द-शनाटक ॥ सिवाडे । शून्यमध्य-पु. नल ॥ नल । नरसल । शून्या-स्त्री० नली । महा कण्टकिनी · । कणिमनसा शृंगज-न० अगुरु । अगर । वङ्गभाषा। शृंगमूल-पु० शृङ्गाटक ॥ सिङ्घाडे । शूर-पु० चित्रकवृक्ष । शालवृक्ष । लकुच । मसूर ॥ शृंगमोही ( न् ) पु० चम्पकवृक्ष ॥ चम्पावृक्ष । चीतावृक्ष । सालवृक्ष । वडहरवृक्ष । मसूरअन्न । शृंगला-स्त्री० अजशृंगी । मेढाशिंगी। शूरण-पु० मूल-विशेष । श्योनाकवृक्ष ॥ शूरन, शृंगवेर-न०आर्द्रक । शुण्ठी ।। अदरक । सोट । जमीकन्द । शोनापाठा । श्रृंगवेरक-न" शूर्प-पु० न० द्रोणद्वयपरिमाण ।। चौंसठ ६५ तेर- शृंगवेराभमूलक-पु० एरक ॥ मोतॄिण । पटेर । शृंगाट-पु० जलकण्टक ॥ सिवाडे । शृंगाटक-न० पु. कण्कटयुक्त जलजात फललता-वि. शूर्पपर्णी-स्त्री० मुद्गपर्णी ।। मुगवन । शेष | सिंघाडे । शूर्पपर्णीद्वय-न० मुद्गपर्णी।माषी।मुगवन । मपवन। शृंगार-न० लबंग । सिन्दूर । आर्द्रक । कृष्णागरु।। शूल-पु० न० स्वनामख्यात रोग ॥ शूलरोग । लोंग । सिन्दूर । अदरक । काली अगर । शूलग्रन्थि-स्त्री • मालादूर्वा || मालादूब । शृंगारक-न० सिन्दूर | सिन्दूर ! शूलघातन-न० मण्डर ।। मण्डर । शृंगारभूषण-न." शूलधन-गु० तुम्बुरुवृक्ष । तुम्बुरु । शृंगारी (न्)-स्त्री० पूग ॥ सुरीि । शूलाद्विदनम् ] पु० हिंगु || हाँग । शृंगिक-नाविषभेद ।। एक प्रकारका जहर । शूलनाशन-न० सौवर्चललवण ॥ चौहार कोडा । श्रृंगिका-स्त्री० प्रतिविषा ॥ अतीस । शूलपत्री-स्रो० शूलीतृण ।। शूलीघास । शृंगिनी-स्त्री० श्लोमन्नावृक्ष । मल्लिका वृक्ष ।। शूलशत्रु-पु. एरण्डवृक्ष ॥ अण्डका पेड । मालकांगुनी । मल्किका वृक्ष । शूलहन्ती-स्त्री. यवानी ॥ अजवायन । शृंगी-स्त्री० अतिविषा । कर्कटशृङ्गा । ऋषभक । शूलहृत्-पु० हिंगु ॥ हङ्गि । प्लक्ष । विष । स्वनामख्यात विष ।। अतीस । शूलिन-पु० भाण्डीरवृक्ष ॥ भाण्डरिवृक्ष । काकडाशिंगी । ऋषभौषधि । पाखरका पेड । शूली-स्त्री० तृण-विशेष | शूलीघास । विष । शृंगी विष । शूलोखा-स्त्री० सोमराजी ।। वायची । शृत-त्रि० कथित ।। सिद्ध । शूल्यपाक-पु० शूलविद्ध अङ्गारपक्क मांसादि । कवाव शेखर-न० लवंग। शिग्रुमूल। ।लौंग सैजिनेकी मूली। शेखरी-स्त्री० वन्दा ॥ वादा । शृगालकण्टक-पु० कण्टकयुक्त क्षुप-विशेषः। शेपाल-पु. शैवाल || शिवार । शृगालकाल-पु०क्षुद्रकोलि ।। एकप्रकारका छोटा शेफ: [ स् ]-न० शिश्न । लिङ्ग । शेफालि- स्त्री० शेफालिका ॥ निर्गुण्डी । शृगालघण्टी-स्त्री. कोकिलाक्ष ॥ तालमखाना । शेफालिका-स्त्री पुष्पवृक्ष-विशेष । निर्गुण्डी । शृगालजम्बु-स्त्री. शीर्णवृन्त ॥ तरबूज । शेफाली-स्त्री० शेफालिका । नीलसिन्दुवार || शृगालविना-स्त्री. पृश्निपर्णी ॥ पिठवन । निर्गुण्डी । नीलसिम्हाल । शृगालिका-त्री भूमिकूष्माण्ड || विदारीकन्द । शेलु-पु० बहुवारवृक्ष । लिसोडावृक्ष । शृगाली-स्त्री०कोकिलाक्ष । विदारी || तालमखाना शेवल-न० शैवाल ॥ सिवार । विदारिकन्द । शेवाल- न." ॥ फारसी भाषा । बेर ।
औषधिकोष। (१८७) . मूल-विशेष । शेवाली-स्त्री. आकाशमांसी ॥ सूक्ष्मजटामांसी । शोण-न० सिन्दूर | सिन्दूर । शैखरिक- • अपामार्ग ॥ चिरीचटा । शोण-पु० श्योनाकवृक्ष । रक्तक्षु । श्योनाक प्रभेद।। शैखरेय-पु." शोनापाठा । लाल ईख । दूसरा शोनापाठा । शैत्यबीज-न० शीतबीज ॥ ईसबगोल । शोणक-पु० श्योनाकवृक्ष । ध्यानाकप्रभेद ॥ शैरीधर-पु० नीलझिण्टी । नीली कटसरैया । शोनापाठा । दूसरा शोनापाठा । शैरेयक-पु." शोणझिण्टिका-स्त्री० कुरुबकवृक्ष || पीले फूल- शैल-न० शैलेय । रसाञ्जन | शिलाजतु ॥ पत्थर- कटसरैया । का फूल । रसोत । शिलाजीत । शोणपत्र-पु. रक्तपुनर्नवा ।। गदहपूर्ना साँठ । शैलक-न. शैलज || पत्थरका फूल । शोणपद्मक-न० रक्तपद्म ॥ लाल कमल । शैलगन्ध-न० शम्बर चन्दन ॥ शम्बर चन्दन । शोणपुष्पक-पु. कोविदारवृक्ष || लाल कचनार शैलगर्भावा-स्त्री शिलावल्का ॥ शिलावाक । शोणपुष्पी-स्त्री० सिन्दूरपुष्पा । सिन्दूरिया । शैलज-न० शैलेय ॥ पत्थरका फूल, भूरिछरीला। शोणाक-पु० इयोनाकवृक्ष ॥ शोनापाठा । शैलजा-स्त्री० सैंहली। गजपिप्पली ॥ सिंहलीपीपल। शोणित-न० कुंकम । हिंगुल । तान्न । रक्त ॥ गजपीपल । केशर । सिङ्गरफ। तांबा । रुधिर । शैलनिर्यास-न० शैलेय ॥ भूरिछरीला । शोणतचन्दन-न० (क्तचन्दन || लाल चन्दन । शैलपत्र-पु० बिल्ववृक्ष । बलका पेड । शोणिताभय-न० कुंकम ॥ केशर । शैलमूली-स्त्री० हिमालयप्रदेशोत्पन्न मूलकवत् मूलकवत् | शोणितोत्पल-न० रक्तोत्पल ॥ लाल कमल । शोथ-पु० स्वनामख्यात रोग ॥ सूजनराग अर्थात् शैलवल्कला-स्त्री. शिलावल्कला | शिलावाक् । भांभर रोग । शैलबीज-पु. भल्लातकवृक्ष || भिलावेका पेड | शोथनी-स्त्री० पुनर्नवा ॥ शालपर्णी ॥ साँठ । शैलसुता-स्त्री. ज्योतिष्मती ॥ मालकांगुनी । शैलाख्य-न. शैलेय || भूरिछरीला । शोथजित्-पु० भल्लातक । भिलावे । शैलाज-न." शोधक-म० ककुष्ठ ।। मुरदासंग । शैलूष-पु० बिल्ववृक्ष ॥ बेलका पेड । शोधन-न. कासीस || कासीस । शैलेन्द्रस्थ-पु० भू वृक्ष ॥ भोजपत्रवृक्ष । शोधन-पु० निम्बूक ॥ नीबू । शैलेय-न० गन्धद्रव्य-विशेष । तालपर्णी । सैन्धव । शोधनी-स्त्री. तानवल्ली । नीली ।। ताम्रवल्लीलता। शिलाजतु ॥ भूरिछरीला । मुसली । सैंधानोन । नलिका पेड। शिलाजीत। शोधनाबीज-न० जयपाल || जमालगोटा । शेलयक-न." शोफ-पु. शोथ ॥ सूजन रोगे । शैलोद्भवा-स्त्री० क्षुद्रपाषाणभेदी॥छोटा पाखानभेद। शोफन्नी-स्त्री०. शालपर्णी । रक्तपुनर्नवा । पुनर्नवा।। शैव-न. शैवाल | शिवार । शालवन । गदहपूर्ना । विषखपरा । शैव-पु० वसुक । धत्तूर ॥ वसुवृक्ष । धतूरा । शोफनाशन-पु० नीलवृक्ष ॥ नलिका पेड । शैवल-न० पद्मक ॥ पद्माख । शोफहृत्-पु. भल्लातक || भिलावेका पेड़ । शेवल-पु. शैवाल ॥ शिवार । शोभन-न० पद्म ॥ कमल । शैवाल-न० जलजद्रव्य-विशेष ॥ शिवार काई। शोभनक-पु. शोभाञ्जनवृक्ष ॥ सैंजिनेका पेड । शोकनाश-पु० अशोकवृक्ष ॥ अशोकवृक्ष । शोभना-स्त्री० हरिद्रा । गोरोचना ॥ हलदी । शोकहारी-स्त्री० वनबर्बरिका । वनबंबरी । गोलोचन। शाकारि-पु. कदम्बवृक्ष ॥ कदमवृक्ष । शोभा-स्त्री. चिकेश-पु० चित्रकवृक्ष ॥ चतिावृक्ष । शोभाञ्जन-पु० वृक्ष-विशेष ॥ सैजिनेका पेड। सालवन । 841 Ft (२८८) आयुर्वेदीय- सैंधानोन । शोला-स्त्री. धनहरिद्रा ॥ वनहलदी । वृक्ष । गूगल। सोमलता। भद्रमोथा। मातृण । शोष-पु. यक्ष्मरोग। गिलोय । वांदा। कस्तूरी । वडपत्री । पीपला हल. शोषण-न० शुण्टी ।। सोंठ । दी। नीली । दूब । तुलसी । कमलगट्टा।विधारा। शोषसम्भव-न० पिप्पलीमूल ॥ पपिरामूल । कालीसार | सीसीका वृक्ष अर्थात् लाही । शेषापहा-स्त्री० क्लीतनक || मुलहटी । श्यामाक-पु० तृणधान्यभेद ॥ समाअन्न । श्यामाम्ली-स्त्री० नीलाम्ली ॥ "नल्ल बुनगुड शौक्तिकेय,शोक्तेय-न० मुक्ता ॥ मोती । शौण्डी-स्त्री० पिप्पली । चव्य ।। पीपल । चव्य । श्येनघण्टा-स्त्री० दन्तीवृक्ष || दन्तीवृक्ष । श्योनाक-पु० वृक्ष-विशेष । शोनापाटा, अरलु । शौधिका-स्त्री० रक्तगु ।। लालकांगुनी । शाभ-पु० गुवाक ।। सुपारी । टॅटू । श्रपिता-स्त्री० काञ्जिक || कांजी । शौभाजन-पु. शाभाञ्जनंवृक्ष ।। सैजिनका पेड । शौकिकेय-पु. विषभेद । एक प्रकारका वित्र । श्रमणा-स्त्री० सुदर्शना । मांसी । मुण्डिरी । सुद. शन । जटामांसी । गोरखमुण्डी । शोल्क-न० शतपुष्पा ।। साँफै । श्रवणशोर्षिका-स्त्री० श्रावणी ॥ बडी गोरख श्याम-न० मरिच । सिन्धुलवण || मिरच । मुंडी। श्रावणा-स्त्री० मुंडितिका ।। गोरखमुंडी । श्याम-पु० वृद्धदारक । धत्तरवृक्ष । पीलवृक्ष । श्राद्धशाक-न० कालशाक ।। नाडीका शाक । दमनकवृक्ष । गन्धतृण । श्यामाक || विधारा- श्रावणा-स्त्री० दध्यानी ॥ दीधयू वृक्ष । वृक्ष । धतरावृक्ष । पीलुवृक्ष । दुवनावृक्ष । श्रावणी-स्त्री० मंडितिका ॥ मुंडी । सुगन्धघास । श्यामाकधास । श्री-स्त्री० लवङ्ग । सरलवृक्ष । पद्म । बिल्ववृक्ष । श्यामक-न० रोहिषतण ॥ गन्धेजघास । वृद्धिनामौषधि ॥ लौंग । धूपसरल । कमल । श्यामक-पु० श्यामाक ॥ शामाकघास । बेलका पेड । श्यामकन्दा-श्री. अतिविषा || अतीस । श्रीकन्दा-स्त्री० पन्ध्याकाँटकी ॥ बनककोडा । श्यामकान्डा-बी० गण्डदूर्वा ॥ गांडरव । श्रीकर-न० रक्तोत्पल ॥ लाल कमल । श्यामग्रन्थि-स्त्री" श्रीखण्ड- पु० न० चन्दन ॥ चन्दन । श्यामपत्र-पु० तमालवृक्ष ॥ श्यामतमाल । श्रीताल-पु० तालवृक्षसदृश वृक्षविशेष ॥ श्रीताड । श्यामल-पु० अश्वस्थवृक्ष | पीपलका पेड । श्रीवर्ण-न० अग्निमन्थवृक्ष ॥ अरणी। श्यामचूडा-स्त्री० गुञ्जा ॥ घुघुची । श्रीपर्णिका-स्त्री० कटफलवृक्ष ॥ कावफल । श्यामलता-स्त्री० इयामालता ।। कालीसर-सरिवन । श्रीपर्णी-स्त्री० गम्भावृिक्ष। कटकल वृक्ष। शाल्मली. श्यामलबीज-न० कृष्णबजि || कालादाना । वृक्ष । हटवृक्ष । अग्निमंथवृक्ष ॥ कम्भारी, श्यामला-स्त्री० अश्वगन्धा । कटभी । जम्बू । कुंमेर । कायफल । .समलवृक्ष । हट. कस्तूरी ॥ वृक्ष । अरणीवृक्ष । श्यामालिका-स्त्री० नीली ॥ नलिका पेड । श्रीपिष्ट-पु० सरलवृक्षरस । तानतेल वङ्गभाषा । श्यामलक्षु-पु० कृष्णक्षु । कालीईख । श्रीपुष्प-न० लवङ्ग। पद्मक ॥ लौंग। पद्माख । श्यामा-स्त्री० श्यामालता । प्रियंगु । वाकुचि । श्रीफल-पु० बिल्ववृक्ष । राजादन वृक्ष ॥ बेलका कृष्णाकृता । नीलिका । गुग्गुल । सोमलता । पेड । खिरनीका पेड । गुन्द्रा । गुडूची । वन्दा । कस्तूरी । वटपत्री। श्रीफला-स्त्री० नीली । क्षुद्रकारवेल्ली ॥ नीलका पिप्पली । हरिद्रा । नीला । तुलसी । पद्मबीज। पेड । छोटा करेला वृद्धदारक । कृष्णसारिवा । शिशपा ।। शारिवा। श्रीफली-स्त्री० आमलकी । नीली||आमला। नीलका फूलप्रियंगु । बावची । स्यामपनिलर । नीलक पड। -Timrapwin-HTRARY औषधिकोष । ( १८९) श्रीमस्तक-पु० रसोन || ल्हशन । । . श्रीवेष्ट-पु. Mad- श्रीभद्रा-स्त्री० भद्रमुस्तक ॥ भद्रमोथा । श्क्ष्णक-न० पूगफल ॥ सुपारी । श्रीमलापहा-स्त्री० धूम्रपत्रा ।। तमाखु । श्लक्ष्णत्वक (च)-पु. अश्मन्तकवृक्ष ॥ आवुटा पश्चिमदेदाकी भाषा । श्रीमान् [ त् )-तिलकवृक्ष । अश्वत्थवृक्ष । तिलक श्लीपद-न० पादरोग-विशेष । वृक्ष । पीपलका पेड । श्लोपदप्रभव-पु० आम्रवृक्ष । आमका पेड । श्रीरस-पु० श्रीवेष्ट ॥ सरलका रस । श्लीपदापह-पु० पुत्रजीववृक्ष । जियापोता । श्रीलता-स्त्री. महाज्योतिष्मती ।। बडी मालकाङ्गनी श्लीपदारि-पु० काफिवृक्ष || काफिवृक्ष । नवनीतखोटी.वंगभाषा । श्लप्मना-स्त्री० मल्लिंका । केतकी ॥ मल्लिका । श्रीवल्ली-स्त्री० कण्टकवृक्षभेद ॥ श्रीवल्लावृक्ष । केतकी । श्रीवाटी-स्त्री० नागवल्लोभेद ॥ एक प्रकारके पान । श्लेष्मनी-स्त्री. ज्योतिष्मती । मल्लिका । त्रिकटु ॥ श्रीवारक-पु० सितावरशाक || शिरिआरीशाक । मालकांगुनी । मल्लिका । सौंठ, मिरच, पीपल । श्रीवास-पु० श्वेतचन्दन । पद्मपुष्प । सरलवृक्षरस॥ श्लेप्मणा-स्त्री० वृक्ष-विशेष ॥ श्लेष्मणावृक्ष । सफेदचन्दन । कमल । सरलका गोद । श्लेष्मल-पु० वृक्ष-विशप ॥ लिसोडावृक्ष । श्रीवासच्छद-पु० सरलवृक्ष । श्वतचन्दन । पद्मक॥ श्लेष्मह-पु० कटकलवृक्ष । वृक्ष विशेष ॥ कायफल। सरलवृक्ष, धूपसरल। सफेदचन्दन । पद्माख । चा। श्रीवासा (स् )-पु० सरलद्रव ॥ सरलका गोंद । श्लेष्मात-पु० बहुवारवृक्ष !! लिसोडावृक्ष । श्लेष्मातक-पु० श्रीवेष्टक-पु० सरलवृक्ष । कुन्दुरु ॥ धूपसरल । श्लेष्मान्तक-पु० लोवान-फार्सी भाषा । श्लेष्मारि -पु० • वृक्ष-विशेष | चा। श्रीसंज्ञ-न० लवङ्ग ॥ लौंग । श्रीहस्तिनी-स्त्री० वृक्ष-विशेष ॥ हाथीशुण्डा । श्वदंष्ट्रक-पु० गोक्षुर ॥ गोखुरू। श्रुग्वारु-पु० विकङ्कतवृक्ष ॥ कण्टाई, किङ्कतवृक्ष । श्वदंष्ट्रा-स्त्री० श्रुधिनका-स्त्री० स्वर्जिकाक्षार ॥ सज.खार । श्वफल-पु० बजिपूर ॥ विजोरा नीबू । श्रुतश्रोणि-पु० द्रवन्ती ॥ मूसाकानी । श्वयथु-पु० श्रुतिस्फोटा-स्त्री० कर्णस्फोटा लता। कनफोडा लता। श्वसन-पु० मदनवृक्ष ॥ मैनफलका वृक्ष । श्वसनेश्वर-पु० अर्जुनवृक्ष ॥ कोवृक्ष । श्रुवा-स्त्री० मूळ । शाल्मलोवृक्ष । चुरनहार । सेम. लका पेड । श्वसुन-पु० क्षतन्न वृक्ष ॥ ककरोंदा । श्वानचिल्लिका-स्त्री० शाक-विशेष ॥ शुनकचिल्ली। श्रुवावृक्ष-पु० विकंकावृक्ष || कण्टाई । श्वान्नति-स्त्री० ब्राह्मणयष्टिका ॥ भारंगी । श्रेयसी-स्त्री० हरीतकी । पाठा । गजपिप्पली । रास्ना ॥ हरड । पाठ । गजपीपल । रायसन । श्वास-पु० स्वनामख्यातरोग ।। श्वासरोग । श्रेष्ठ-ज० गोदुग्ध || गायका दूध ! श्वासारि-पु० पुष्करमूल | पोहकरमूल । श्रेष्ठकाष्ठ-पु० शाकवृक्ष ॥ शेगुन वृक्ष । श्वित्र-न ० श्वेतकुष्ठ । सफेदकोढ । श्रेष्ठा-स्त्री. स्थलपद्मिनी ।मेदा।। स्थलकामल । मेदा वित्रघ्नी-स्त्री० पीतपर्णी ।। चोकता" औषधी। श्वेत-ज० रूप्य ।। रूमा । श्रेष्ठाम्ल-न० वृक्षाम्ल || विषाविल । श्वेत-पु. कपर्दक । श्वेताभ्र । शङ्ख । जविक ।। श्रोणा-स्त्री० काञ्जिक || कांजी। कौंडो । सफेद अभ्रक | शंख । जीवक औषधी। श्रोणि-स्त्री० कटि ।। कमर । चतक-न० रूप्य ।। रूपा । पु० वराटक । कौडी। श्रोणी-स्त्री०" श्वेतकण्टकारी-स्त्री० शुक्लकण्टकारी।। सफेद कटेहरी श्वेतकन्दा-स्त्री. आतविषा ।। अतीस । श्रयाह्व-नः पद्म ॥ कमल | " शोथ ।। सूजन । YOUCccccc
( १९०)
आयुर्वेदीय-
श्वेताकणिही-स्त्री गिरिकर्णिकावृक्ष ।। सफेद कि- श्वेतरञ्जन-न० सीसक ।। सीसा ।
णिहीवृक्ष ।
श्वेतराजी-स्त्री० चचेण्डा ।। चिचैंडा ।
श्वेतकुश-पु० तृण-विशेष ।। सफेद कुशा । श्वेतरोहित-पु. वृक्ष-विशेष ।। सफेद रोहेडा ।
श्वेतकेश-पु० रक्तशित्रु ।। लाल सैजिनेका पेड | श्वेतलोध्र-पु० पट्टिकालोध्र ॥ पठानीलोध ।
श्वतखोदर-पु० शुक्लखदिर ।। सफेद खैर, पपडिया श्वेतवचा-स्त्री० अतिविषा शुक्लपचा ॥ अतीस ।
सफेद वच ।
कत्था ।
जौ
खैरवृक्ष ।
।
श्वेतगुजा-त्री० शुक्लवर्णगुञ्जा ।। सफेद धुंधुची । श्वेतवल्कल-पु० उदुम्बरवृक्ष ॥ गूलरवृक्ष ।
श्वेतचन्दन-न० श्वेतचन्दन ।। सफेद चन्दन । श्वेतवुहा-स्त्री. वनतिक्ता ।। सफेदवोना ।
श्वेतचिल्ली-स्त्री. शाकभेद || चिलारी । श्वतबृहती-स्त्री० शुक्लवर्ण क्षुद्रवातकी ॥ सफेद
श्वेतच्छद-पु० गन्धपत्र ।। वनतुलसी ।
फूलकी वृहती।
श्वेतजीरक-पु० गौरजीरक ।। सफेद जीरा ।
श्वेतवृक्ष-पु० वरुणवृक्ष । वरना वृक्ष ।
श्वेतटकक-नः श्वेतटंकण ।। सफेद सुहागा ।
श्वेतशरपुंखा-स्त्री० क्षुप-विशेष ।। सफेद सरपोंका ।
श्वेतटंकण-न० क्षार-विशेष ।। सफेद सुहागा । श्वेतशिव-पु. शुक्लशोभाञ्जन ।। सफेद सैंजिना ।
श्वेतदूर्वा-स्त्री० शुक्लदूर्वा ।। सफेद दूब ।
श्वतशिंशपा-स्त्री० शुक्लशिंशपावृक्ष ।सफेद सामोंका
श्वतधातु-पु० खटिका ।। स्वडिया।
वृक्ष ।
श्वेतधामा (न् )-पु० कर्पूर । समुद्रफेन ।। कपूर ।
श्वेतशुङ्ग-पु० यव ॥
श्वेतशूरण-पु० वनसूरण ॥ बनजभीकन्द ।
समुद्रफेन ।
श्वेतसर्प-पु० वरुणवृक्ष ॥ वरनावृक्ष ।
श्वेतवर्ण-न• शुक्लवर्णपद्म ।। सफेद कमल
श्वेतसार-पु० खदिर ॥ श्वतखदिरखैरवृक्ष । सफेद
श्वेतपा-स्त्री० वारिपर्णी ।। जलकुम्भी ।
श्वेतपर्णास-पु० श्वेततुलसी ।। सफेद तुलसी ।।
श्वेतसुरसा-स्त्री० श्वतशेफालिका । सफेद नेवारी
श्वेतपलाण्डु-पु० शार्दूलकन्द ॥ वनप्याज ।
श्वेतस्पन्दा-त्री अपराजिता ॥ कोयल ।
श्वेतपाटला-स्त्री०
• शुक्लपाटलावृक्ष ।। सफेद पाढर ।
श्वेता-स्त्री० वराटिका । काष्ठपाटला । शंखिनी ।
श्वेतपिण्डीतक-पु० महापिण्डोतरु ।। पेडिरावृक्ष ।
अतिविषा । अपराजिता । श्वेतबहती । श्वेतकण्ट-
श्वेतपुष्प-पु० सिन्दुवारवृक्ष ।। सिमालवृक्ष ।
कारी । श्वेतदूर्वा । पाषाणभेदी । वंशलोचन ।
श्वतपुष्पक-पु० करवीरवृक्ष || कनेरका पेड़ ।
पुनर्नवा । श्वेतापराजिता । शिलावल्कला स्पर्ट।
श्वेतपुष्पा-स्त्री. श्वेतघोषा १ नागदन्ती । मृगेवारू ।
शर्करा । वृक्ष-विशेष ॥ कौडी । कठपाडर ।
नागपुष्पी ॥ तोरई । हाथीशुण्डावृक्ष । सँधिनी ।
शङ्गिनी । अतीस । कोयल । सफेद कटाई ।
नागपुष्पी।
सफेद कटेहरी । सफेद दूब । पाखानभेद । बंश.
श्वेतपुष्पिका-स्त्री० महाशनपुष्पिका । पुत्रदात्री ।। लोचन । सौंठ । सफेद कोयल । शिलावाक् ।
बडी शनपुष्पी । पुत्रदात्रीलता ।
फटकिरी। चीनी । केनावृक्ष ।
श्वेतप्रसूनक-पु० शाकवृक्ष ।। सगुणवृक्ष । श्वेतात्रिवृत्-स्त्री० शुक्ल त्रिवृता ॥ सफेद निसोथ ।
श्वेतफल-पु० वृक्ष-विशेष ! | पेयारा वंगभाषा। श्वेताम्लि-स्त्री० क्षुप-विशेष ।। अम्लिका ।
श्वेतभण्डा-स्त्री० श्वेतापराजिता ।। सकेर कोयल। वर्ताक-पु० शुक्लार्कवृक्ष ।। सफेद आकवृक्ष ।
श्वेतमन्दारक-पु. वृक्ष-विशेष ।। सफेद आक, श्वेतावर-पु० सितावर शाक ॥ शिरिआरीशाक ।
सफेद मन्दारवृक्ष ।
श्वेताह्वा-स्त्री० सितपाटलिका || सफेद पाढर ।
खेतमरिच-न० शोभाञ्जनंबीज | शुक्लवर्णमरिच ।। श्वेतेक्षु-पु० शुक्लवर्ण इक्षु । सफेद ईख ।
सैं जिनके बीज । सफेद मिरच ।
श्वेतैला-स्त्री० सूक्ष्मैला || गुजराती इलायची ।
श्वेतमूला-स्त्री० श्वेतपुनर्नवा । विषखपरा। इति श्रीशालिग्रामवश्यकृतशालिग्रामौषधशन्दसी.
श्वेतमूलो-स्त्री० मूल विशेष ।
गरे शकाराक्षर त्रिंशस्तरङ्गः ॥ ३०॥
औषधिकोष। (१९१) सकण्टक-पु. शैवाल। करंज-विशेष ॥ शिवार । षट्पदप्रिय-पु. नागकेशरवृक्ष । नागकेशरवृक्ष । एक प्रकारकी करञ्ज। षट्पदातिथि-पु० आम्रवृक्ष । चम्पकवृक्ष । आमका सकुरुण्ड-पु० साकुंडवृक्ष ॥ सकुरुंडर गुजराती भपत । पेड । चम्पावृक्ष । सकृत्फला-स्त्री० कदली.॥ केला । षट्पदानन्दवर्द्धन-पु० किंकिरातवृक्ष ॥ किंकिरात सकृार -पु० एकवीरवृक्ष । सक्तु-पु० भृष्टयवादिचूर्ण ॥ सत्तु । वृक्ष । षट्पदामोद-न० पुष्पवृक्ष-विशेष । सक्तुक-पु. विषभेद । षट्पदेष्ट-पु० कदम्बवृक्ष ॥ कदमका पेड । सक्तफला-स्त्री० शमीवृक्ष ।। छौंकरावृक्ष । सक्तफली-स्त्री." षडङ्ग-पु० क्षुद्रगोक्षुर ॥ छोटे गोखरू । संकटाक्ष-पु. धववृक्ष । धौवृक्ष । षडूषण-न० द्रव्यसमूह -विशेष ॥ सौंठ, पीपल, मिरच. पीपलामूल, चीता, चव्य यह मिले सङ्कोच न० कुंकुम ।। केशर । संकोचनी-स्त्री० लज्जालु । लज्जावन्ती । हुए षषण कहे जाते हैं। संकोचपिशुन-न० कुंकुम ॥ केशर । षड्यन्था-स्त्री० वचा । श्वेतवचा । शठी । महा. संगनियास-पु० विरेचक निर्यास-विशेष । करञ्ज । वच । सफद वच । छोटा कचूर । गंधप. सकर-न० शमवृिक्षस्य फल ॥ छौंकराका फल । लाशी । बडी कर च । संकर-पु० विष ।। विष । षड्यान्थि-नः पिप्पलीमूल ।। पीपल:मूल । संग्रहणी-स्त्री० ग्रहणीराग ।। संग्रहणी । षड्मान्थिका-स्त्री० शटी ॥ कचूर । संग्राही (न्) पु० कुटजवृक्ष ॥ कुडाका पेड । षड्ग्रन्थी-त्री० वचा ॥ वच । संघपुष्पी-स्त्री० धातकी ॥ धायके फूल । षड्भुजा-स्त्री० फललताविशेष ॥ खरभूजा । संघाटिका-स्त्री० जलकण्टक || सिङ्घाडे । संघातपत्रिका-स्त्री० शतपुष्पा ।। साफ । षण्मुखा- -स्त्री" सचिव-पु. कृष्णधुस्तूर ।। काला धत्तुरा । षष्टिक पु० धान्य-विशेष ॥ षाटी । साठीधान्य। सचेष्ट-पु० आम्र || आम | षष्टिका-स्त्री." सचारा-स्त्री० हरिद्रा ॥ हलदी । षष्टिलता-स्त्री० भ्रमरमारी || भ्रमरमारी । सञ्चारिणी-स्त्री० हंसपदी ॥ लाल रंगका लजालु । षोडशावर्त्त-पु० शङ्ख ॥ शंख । सञ्चाली-स्त्री० गुञ्जा ॥ धुंधुची । षोडशिकाम्र-न० पलपरिमाण ॥ आठ तोले । सञ्चित्रा-स्त्री० मूषिकपर्णी ।। मूसाकानी । इति श्रीशालिग्रामवैश्यकृते शालिग्रामौषध- सटि-स्त्री० शठी ।। कचूर । शब्दसागरे षकाराक्षरे एकत्रिंशस्तरङ्गः॥३१!! सटिका-स्त्री० गन्धपत्रा। सटी ॥ वनसटी कचुर । स. सटी-स्त्री० शटी ॥ कचूर । आंबाहलदी । संग्राही-[ न् ] पु० कुटजवृक्ष । कुडावृक्ष । सठी-स्त्री." संज्ञ-न० पीतकाष्ठ ॥ पीला चन्दन । सती-स्त्री० सौराष्ट्रमृत्तिकां ।। गापेचिन्दन । संन्यास-पु० मूर्छारोग-विशेष। सतीनक-पु० सतीलक || मटर । सर्वर्त- पु० विभीतकवृक्ष ॥ बहेडा वृक्ष । सतील-पु. वंश । कलाय ।। बांस । मटर । सवाटिका-स्त्री० शृंगाटक || सिंघाडे । सतीलक-पु. कलाय ॥ मटर । संविषा-स्त्री. अतिविषा || अंतीस । सतीला-स्त्री० कलाय-विशेष ॥ विष्णुकान्ता ! संस्पर्शा-स्त्री० जनीनाम गन्धद्रव्य । सत्कदम्ब-पु. केलिकदम्ब || केलिकदम्म । सहितपुष्पिका-स्त्री० मिश्रेया ॥ सोआ । सत्काञ्चनार-पु० रक्तकाञ्चन ।। लाल कचनार। सकट-पु० शाखाटेवृक्ष ॥ सहोरावृक्ष । सत्फल-पु० दाडिमवृक्ष ।। अनारका पेड । " षड़ेखा-स्त्री. 111 ( १९२) आयुर्वेदीय- FDMRTA - छतिवन । सत्यफल-पु० बिल्ववृक्ष | वेलका पेड । ( वात पित्त कफ) से मिलकर ज्वर होता है । सत्यमार-पु० वृक्ष विशेष । एक प्रकारका वृक्ष । सन्निपातनुत्-पु. नेपालनिम्ब || नेपालका नमि । सजन-न० कुसुमाञ्जन ॥ पुष्पाजन । सन्निरुद्धगुद-पु० गुह्यद्वारोद्भव रोग विशेष ।। निरु-- सदातोया-स्त्री० एलापर्णी ।। एलानी वेगभाषा । द्धगुदरोग । सदापुष्प-पु. नारिकेलवृक्ष ॥ नारियलका पेड । सन्न्यास- पु० जटामांसी । सन्यासरोग । सदापुष्प-स्त्री० रक्तार्कवृक्ष।। लाल आकरवृक्ष । सपत्नारि-पु. वंश-विशेष || वेष्टवांस । सदाप्रसून-पु० रोहितक । अर्कवृक्ष। कुन्दपुष्प वृक्ष॥ |सपीतक-पु० राजकोषातकी ॥ घियातोरई । रोहेडावृक्ष । आकका पेड । कुन्दकपुष्पका वृक्ष। सपीतिका–स्रो० हस्तिघोषा । बडी तोरई । सदाफल-पु० नारिकेल । उदुम्बर । विल्ववृक्ष । सप्तच्छद-पु. सप्तपर्णवृक्ष ।। सतौनावृक्ष । नारियलका पेड । गूलरवृक्ष । वेलका पेड । सप्तदल-पु०" सदाफला-स्त्री० त्रिसन्धिपुष्प । वात्ताकु विशेष ॥ सप्तधातु-पु० शरीरस्थ सप्तप्रकार धातु ॥ रस, रक्त, त्रिसन्धिपुष्पवृक्ष । एक प्रकारके बैंगन । मांस, मेदा, अस्थि, मज्जा, शुक्र । सदाभद्रा-स्त्री० गम्भारीवृक्ष । कुम्भेर । सप्तनामा-स्त्री० आदित्यभक्ता ॥ हुलहुलवृक्ष । सद्यःशोथा-स्त्री० कपिकच्छु । कौंछ । सप्तपत्र-पु. मदरवृक्ष ॥ मोगरावृक्ष । सन-पु० घण्टापाटलिवृक्ष ।। मोखावृक्ष । सप्तपर्ण-पु० सप्तच्छदवृक्ष ॥ सतिवन । सतौना । सनपर्णी-स्त्री०अशनपणी ।। पटसन । सनामक-पु० शोभाञ्जन ।। सैंजिनेका पेड । सप्तपर्णाख्य-पु. सन्तर्पण-न० द्राक्षा, दाडिम, खजूरी, शर्करा, सप्तपणी-स्त्री. लज्जालु ॥ लज्जावन्ती । कदली, लाजाचूर्ण, मधु, घृतसंमिश्रित पानी सप्तभद्र-पु० शिरपिवृक्ष | सिरसका पेड।। आदि ॥ दाख, अनार, खजूर, चीनी, केला, सप्तला-स्त्री० नवमल्लिका । चर्मकपा । पाटला । खीलोंका चूण, मधु, घीसंयुक्त पानी आदि । गुंजा ॥ नेवारी । सातला । पाढर । धुंधुची । इनको सन्तर्पण कहते हैं। सप्तशिरा-स्त्री० नागवल्ली ॥ पान । सन्तान-पु० वंश ॥ बांस । सप्ताचिः [स् ]-पु० . चित्रकवृक्ष ॥ चीतावृक्ष । सन्तानिका-स्त्री० क्षीरसर ॥ दूधकी मलाई । सप्ताश्व-पु० अर्कवृक्ष । आकका पेड़ । सन्दानिका-स्त्री० अरिखदिरवृक्ष ॥ एक प्रकारका | सप्ताह्व-पु० सप्तपर्णवृक्ष ॥ सतिवन । समगन्धिक-न. उशीर ।। खस । सन्दीप्य-पु० मयूरशिखावृक्ष ॥ मोरशिखा । समङ्गा-स्त्री० मञ्जिष्ठा । लज्जालुलता । बला । सन्धान-न० मद्यसज्जीकरण । काञ्जिक॥मदिराका वराहक्रान्ता ।। मजीट । लज्जावन्ती। छुई मुई। बनाना चुआना कांजी। सन्धानिका-स्त्री० अम्लरस खाद्यद्रव्य विशेष ॥ समत्रय-न० मिलित समभाग हरीतकीशुंठोगुड ।। वराबर मिले हुए हरड, सोंठ, गुड । आचार। सन्धिबन्ध-पु० भूमिचम्पक ॥ भुई चम्या । समन्तदुग्धा-स्त्री० स्नुहीवृक्ष ।। थहरका पेड । सन्ध्यापुष्पी-स्त्री० जाती ॥ चमेली । समष्टिल-पु० क्षुप-विशेष | कोकुआवृक्ष । सन्ध्याभ्र-न० सुवर्णगैरिक ॥ पीला गेरू। समाष्टिला, समष्ठीला-स्त्री०गंडीर ॥ गंडीरशाक । सन्ध्याराग-न० सिन्दूर ॥ सिन्दूर । समालम्बी (न् )पु० भूतृण ॥ शरवाण । सन्न-पु० प्रियालवृक्ष ॥ चिरौंजीका पेड। समाचान् (त् )-पु० तुन्नवृक्ष ॥ तुनका पेड । सन्नकद्रु-पु०" समाह्वा-स्त्री० गोजिह्वा । गोभी। सन्निपातज्वर-पु० त्रिदोषज ज्वर ॥ तीन दोषों समित्ता-स्त्री गोधूमचूर्ण ॥ गहूंका चून, मैदा । , खेर । खिरैटी । वराहक्रान्ता ।
औषधिकोष। फेन । सालका पेड समीर-पु० शमीवृक्ष ॥ छोकरावृक्ष । सरिका-स्त्री० हिंगुपत्री ॥ हङ्गिपत्री । समरिण-पु० मम्बक || मरुआवृक्ष । सरिषप-पु० सर्पप ॥ सरसों । समुद्रकफ-पु० समुद्रफेन ॥ समुद्रफेन । सरोज-न० पद्म ।। कमल । समुद्रकान्ता-स्त्री० पृक्का ।। असवरग । सरोजन्म (न् )-न." समुद्रफेन-पु० न० स्वनामख्यात द्रव्य समुद्र सरोजिनी-स्त्री० पद्मिनी ॥ कमलनी। सरोरुट् (ह)-न. " समुद्रलवण-न० समुद्रजात लवण ॥ समुद्र-सरोरुह-न. नोंन । पांगा। सज-पु. शालवक्ष । सर्जरस । पीतशाल ॥ साल. समुद्रशोष-पु० हिज्जलबीज ॥ समुद्रशोष । वृक्ष । राल । "पियासाल। समुद्रा-सटी । शमी ॥ कचूर । छोकरा । सर्जक-पु. पतिशाल । शाल || "पियासाल। समुद्रान्त न० जातिफल || जायफल | समुद्रान्ता-स्त्री० दुरालभा । कार्पासी । पृक्का । सर्जगन्धा-स्त्री० रास्ना ॥ रायसन । यवासा ॥ जवासा । कपास । असवरग। जवासा। सञ्जनिय्यास-पु. राल ॥ राल । सम्पाक-पु. आरग्वधवृक्ष ।। अमलतासवृक्ष सर्जमाणि-पु." सम्पुट-पु. कुरुबक ॥ रक्ताम्लानवृक्ष । सज्जरस-पु०॥ सम्वरी-स्त्री० शतावरी । मूषिकपर्णी ॥ शतावर । सजि-स्त्री० स्वार्जकाक्षार ॥ सज्जी। मूषाकानी। सज्जिका-स्त्री." संविदा-स्त्री. विजया ॥ भङ्ग ! सर्जिकाक्षार-पु." सीवदामञ्जरी-स्त्री० ० गञ्जा || गाँजा । गाँझा । सार्जक्षार-पु.॥ सीवदासार-पु०सविदानास ॥ चरस । सी-स्त्री." सज्य-पु० सर्जरस ॥ राल || सम्भव्य-पु० कपित्थ ॥ कैथका पेड । सरज-न० नवनीत । हैयङ्गवीन ॥ एक दिनका घी। सर्प-पु० नागकेशर ॥ नागकेशर । सरण-न० लोहमल ॥ लोहेका मैल | सर्पकङ्कालिका-स्त्री० वृक्ष-विशेष ॥ सर्पकंकाली । सरणा-स्त्री० प्रसारणी। त्रिवृत् ।। पसरन । निसोत सर्पककाली-स्त्री." सराण, सरणी-स्त्री० प्रसारणी ।। पसरन । सर्पगन्धा-स्त्री० वृक्ष-विशेष ॥ नाकुलीकन्द । सरपत्रिका-स्त्री० पद्मपत्र ॥ कमलके पत्ते । सर्पघातिनी-स्त्री० नाकुलीभेद ।। सर्पकंकालीभेद । सरल-पु० स्वनामख्यात वृक्ष । धूपसरल । सर्पदंष्ट्री-पु० दन्तवृिक्ष ॥ दन्तीवृक्ष । सरलद्रव-पु० सरलवृक्षरस || सरलका गोंद । सर्पदंष्ट्रा-स्त्री० वृश्चिकाली। सरला-स्त्री० त्रिपुटा ॥ त्रिधारा । सर्पदीष्ट्रका-स्त्री० अजशृङ्गी ॥ मेंढाशिङ्गी । सरलाङ्ग-पु० श्रीवेष्ट ।। सरलका गोंद । सर्पदण्डा-स्त्री० सैंहली ॥ सिंहली पीपल । सरसम्प्रत-न त्रिकण्टवृक्ष ॥ तिधारा । थूहर । सर्पदण्डी-स्त्री० गोरक्षीनाम क्षुद्रक्षुप ॥ गोरक्षी । सरसा-स्त्री० श्वेतत्रिवृता ।। सफेद पनिलर । सर्पदन्ती-स्त्री. नागदन्ती ॥ हाथीशुण्डा वृक्ष । सरसिज-न. पद्म ॥ कमल । सर्पदमनी-स्त्री. वन्ध्याकोटकी ।। बाँझखखसा । सरसीरुह-न०" सर्पनामा-स्त्री. सर्पकंकालिकाभेद । सरस्वती-स्त्री० ज्योतिष्मती । ब्राह्मी । सोमलता ॥ सर्पपुष्पी-स्त्री. नागदन्तीक्षुप ॥ हाथीशुण्डा । मालकांगनी । ब्रह्मीघास । सोमलता । सर्पमाला-स्त्री० सर्पकंकालीभेद । सरा-स्त्री० प्रसारणी ॥ पसरन । सर्पलता-स्त्री. नागवल्ली ॥ पान । सराव-पु. सराव ॥ एक मेरे। सर्पसहा-स्त्री० सर्पककालिका भेद ।
( १९४) आयुर्वेदीय- पीपल। ७ सपाख्य-पु० नागकेशर । महिषकन्दभेद ॥ नाग- सर्वानुभूति-स्त्री० श्वेतत्रिता ॥ सफेद निसोस । केशर । भैसाकन्दभेद । सावधि-पु० औषधिवर्ग-विशेष ॥ कूठ, जया- सङ्गिी-स्त्री० सर्पककालीभेद । सैंहली-सिंहली. मांसी, हलदी, वच, भूरिछरीला, चन्दन, कपूर कचरी, लालचन्दन, कपूर और मोथा । सदनी-स्त्री. नाकुलीकन्द ॥ नकुलकन्द । सर्वोषधिगण-पु. मुरादिऔषधसमूह ॥ कपूर- सर्पावास-न -न. चन्दन ॥ चंदन । कचरी, जटामांसी, वच, कूठ, भूरिछरीला, हल- साक्ष-० ज० रुद्राक्ष ॥ द्राक्ष । दी, दारुहलदी, कचर, चम्पा, और मोथा । सर्पाक्षी-गन्धनाकुली । भुजङ्गचातिनी । सर्षप-पु० स्वनामख्यात सत्य ॥ सरसों । वृक्ष-विशेष ॥ नाकुलीकन्द । ककालिका बैग सलिलकुन्तल-पु. शैवाल || शिवार । भाषा | सरहटी गंडनी। सलिलज-ज० पद्म ॥ कमल | सर्पिः [स्]-न० घृत ॥ घी । सल्लकी-स्त्री. शल्लकीवृक्ष | शालईवृक्ष । सर्पिणी-स्त्री० क्षुद्रक्षुप-विशेष ।। सर्पिणी औषधी । सवहा-स्त्री० त्रिवृती ।। निमोत । फणिलता चन्द्रनाथदेशीयभाषा । सविता ( ऋ)-पु० अर्कवृक्ष ॥ आकका पेड । सपष्टि-न० श्रीखण्डचन्दन ॥ चन्दन । सशस्या-त्री. नागदन्ती ।। हाथीशुण्डा। सर्पष्ट-न." सत्यसंवर-पु० शालवृक्ष ॥ सालवृक्ष । सर्व-पु. पारद ॥ पारा । सस्यसंबरण-पु० अश्वकर्णवृक्ष ॥ सालभेद । सर्वगन्ध-न० गुडत्वक्, एला, तेजपत्र, नागकेशर, सह-पु० पांशुलपण | रेहगमानोन । कक्कोल, लवङ्ग, अगुरु, शिक्षक ॥ दालचीनी, सहकार-पु० अतिशय सौरभयुक्त आम् ॥ अति- इलायची, तेजपात, नागकेशर, शीतलचीनी, सुगन्धयुक्त आम । लौंग, अगर, शिलारस । सहचर-पु० स्त्री० पीतझिण्टी । नीलशिण्टी । शुक्ल सर्वगा-स्त्री० प्रियंगुवृक्ष ॥ फूलप्रियंगु । छिण्टी ।। पीली कटसरैया । नीली कटसरैया । सर्वग्रन्थि-पु० पिप्पलीमूल ॥ पीपरामूल । सफेद कटप्सरैया । सर्वग्रन्थिक-न." सहचर-पु० झिटी ॥ पियावांसा । कटसरैया । सर्वतःशुभा-स्त्री प्रियंगुवृक्ष ॥ फूलप्रयंगु । सहचरी-स्त्री० पीतझिण्टी ॥ पाली कटसरैया । सर्वतिका-स्त्री० काकमाची ॥ मकोय । सहदेव-पु० वला ॥ खरैटी। सर्वतोभद्र-पु० निम्ब । गम्भारी ॥ नीमका पेड । सहदेवा-धी० बला । दण्डोत्पल । शारिवौषधि ।। कुम्मेर । खिरैटी । दण्डोत्पल । सरिवन । सर्वतोभद्रा-स्त्री० गम्भारीवृक्ष | कुम्भेर । सहदेवी-स्त्री० साशी । पीत दण्डोत्पल । बला- सर्वमूल्य-न० कपर्दक ॥ कौडी । प्रभेद ॥ सरहट्टी । गण्डनी। पीले फूलका दण्डो. सर्वरस-पु० धूनक । लवणरस ॥ राल । नौन । त्पला सहदेई। सर्वरसोत्तम-पु० लवणरस ॥ नमक । नोन । सहरसा-स्त्री० मुद्गपर्णी ।। मुगवन । सर्ववर्णिका-स्त्री० गम्भारीवृक्ष ।। कुम्भेरवृक्ष । सहस्रकाण्डा-स्त्री० श्वेतदूर्वा ॥ सफेद सर्वसङ्गत-गु० षष्टिकधान्य || साठीधान । सहस्रपत्र-न० पञ॥ कमल । सर्वसंसर्गलवण-न. औषरक ॥ खारी नौन । सहस्त्रमूली-स्त्री० द्रवन्ती ॥ मूमाकानी । सहस्रवी--स्त्री० दूर्वा । महाशतावरी । दूब | सर्वसिद्धि-पु० श्रीफल | बेलका पेड । बडी शतावर। सर्वहित-न० मरिच ॥ मिरच ॥ मिरच । सहस्रवेध-न० चुक्र । काजिक विशेष ॥चक । एक प्रकारकी कॉजी । सर्वानुकारिणी-र श्री• शालपर्णी ।। शालवन । सहस्रवधि-स्त्री. हिंगु ॥ हीन । दूर्व । सर्वसह-पु० गुग्गुलु ॥ गूगल । सर्वक्षार-पु० क्षा रभेद ।। सावुन ।
औषधिकोष। ( १९५) सहस्रवेधी [ ]-पु० :अम्लवेदस । कस्तूरी ॥ सांवर-न० गडलवण ।। सामरनोन । अम्लबैत । कस्तूरी। सांभरी-स्त्री० रक्तलोध्रवृक्ष || लाल लोध । सहस्रा-स्त्री० अम्बष्ठा ॥ मोईया। साम्राणिकदम-न० जवादिनाम गन्धद्रव्य ।। जवा- सहा-स्त्री० घृतकुमारी । मुद्गपर्णी । दण्डोत्पल । दिकस्तूरो । शुक्लझिण्टी । वला । सर्पकङ्कालिका । राना । साम्राणिज-न० महापारेवत ।। बडापारेवत । स्वर्णक्षीरी पोतदण्डोत्सल । तरुणी पुष्प || पी. सारकपुङ्गखा-स्त्री शरपुङ्खा ॥ सरफोंका । कुवार । मुगवन । दण्डोत्पल । सफेद फुलकी सार-न० नवनीत । लौह ॥ नैनी धी। लोहा । कटसरैया । सपेकङ्काली ककहिया रासना । सार-पु० वज्रक्षार ॥ मजा ॥ वज्रवार । मज्जा । पील दूधकी कटेहरी । पीले फूलका दण्डोत्तल । सारक-पु० जयपाल || जमालगोटा । सेबतीफूल । सारखदिर-पु० दुष्खदिर ॥ दुर्गंघखैर। सारगन्ध-पु० चन्दन ॥ चन्दन । सहाचर-पु० पातझिण्डी पाली कटसरैया । सारध-न० मधु ॥ सहत । सहार-पु० आम्रवृक्ष || आमका पेड़ । सारङ्ग-पु० स्वर्ण । पद्म । शंख । चन्दन ॥सोना। सहास्त्रार-पु० वीरास्त्राव । कमला शंख । चन्दन। साकुण्ड-पु० वृक्ष-विशेष ॥ सकुरुण्डर गुजराती सारज-न० नवनीत ॥ नैनी घी । भाषा । सारण-पु०भद्रबला । आनातक । अतीसार रोग ।। साक्तुक-पु० यव ॥ जौ। प्रसारणी। आम्बाडा । अतिसार रोग । सागरगामिनी-स्त्री. सूक्ष्मैला॥ छोटी इलायची। सारणि, सारणी-स्त्री. प्रसारणी ॥ पसरन । सागरोत्थ-न० समुद्रलवण ॥ समुद्रनोन । पांगा। सारतरु-पु. कदलीवृक्ष ॥ केलावृक्ष । साचिवाटिका-स्त्री श्वेतपुनना ।। विषखपरा । सारद्रुम-पु० खदिरवृक्ष ॥ खैरका पेड । सातला-त्री० वृक्ष विशेष ॥ सातलावृक्ष । थूहरका सारपादप-पु० साराम्लवृक्ष ॥ धामनिवृक्ष । सारमूषिका-स्त्री. देवदाली ॥ धधरवेल । सोनैया । सादनी-स्त्री० कटुकी ।। कुटकी । साधुपुष्प-न० स्थलपा ।। स्थल कमल । सारलौह-न० लोहसार ॥ इस्पात् । साधुवृक्ष-पु० कदम्बवृक्ष । वरुणवृक्ष ।। कदमका सारस-ने० पद्म ॥ कमल पेड । वरनाश । सारा-स्त्री० कृष्णनिवृता । दूर्वा ॥ काला निहोत । साध्वी-स्त्री० मेदा मेदा औषधी । दूब। सानन्द-पु० गुच्छकरञ्ज ।। करजभेद । साराल-पु० तिल ॥ तिल । सानुज-न० प्रपौण्डरीक । पुण्डरिया । सारिणी-स्त्री० सहदेवी। कापीसी । दुरालभा । सानुज-पु० तुम्बुरुवृक्ष ।। तुम्बुरु । कपिला शंशपाप्रसारिणी । रक्तपुनर्नवा ।। सहदेई। सान्द्रपुष्प-पु० विभीवकवृक्ष ॥ बहेडावृक्ष । कपास । धमामा । कपिलवर्ण । सरसों वृक्ष । सान्ध्यकुसुमा-स्त्री० त्रिसन्धिपुष्पवृश्च।। कान्तापुष्प पसरन । सांठ । गदहपूर्ना । वृक्ष । सारिवा-स्त्री० लता-विशेष । कृष्णसारिवा ॥ गौरी. सानाय्य-न० घृत ।। घो। आमाऊं । सरिबन । कलासर । सालसा । करिया सान्निपातिक-न० सन्निपातज्वररोगातीनों दोषोंका वासाऊं। मिला हुभा । ज्वर। सारी-स्त्री० सप्तला ॥ सातला ॥ साब्दी-स्त्री. द्राक्षा-विशेष ॥ एक प्रकारकी दाख । सारोष्टिक-पु० विषभेद । सामुद्र-(क) नै० समुद्रलवण । समुद्रफेन॥ पांगा। साल-पु. स्वनामख्यातवृक्ष । राल | सखुआ वृक्ष । समुद्रफेन । रालवृक्ष । राल। भेद । वंदाल। RRIERRAZZ ( १९६) आयुर्वेदीय- 4 सेनी कपूर। मषवन। सालन-पु० सर्जरस ॥ राल । सितकण्टा, सितकण्टकारिका-स्त्री० श्वेत कण्ट. सालनिर्यास-पु." कारी ॥ सफेद कटहरी। सालपर्णी-स्त्री० शालपर्णी ।। सालवन । सारवन । सितकर-पु० कर्पूर । कर्पूरविशेष ।। कपूर । भीभ सालपुष्प-न० स्थलपद्म ॥ पुण्डरिया । सालरस, सालरेष्ट-पु० सर्जरस ॥ राल । सितकर्णी-स्त्री० वासकवृक्ष ॥ अडूसा । सालेय-पु. मधुरिका ॥ सोआ । सितगुञ्जा-स्त्री० श्वेतगुञ्जा सफेद घुघुची । सावर-पु० लोध ॥ लोध्र। सितच्छत्रा-स्त्री० शतपुष्पा । सोफ । सिंह-पु० रक्तशिग्रु॥ लाल सँजनेका पेड । सितच्छदा-स्त्री. श्वेतदूर्वा ।। सफेद दूब । सिंहकेशर-पु० बकुल ॥ मौलसिरीका पेड । सितदर्भ पु० श्वेत कुश ॥ सफेदकुशा । सिंहतुण्ड-पु० सेहुण्डवृक्ष ॥ सैंड । थूहरवृक्ष । सितदीप्य-श्वेतजरिक ॥ सफेद जीरा । सिंहनादिका--स्त्री० दुरालभा. धमासा । सितदूर्वा-स्त्री० श्वेतदूर्वा सफेददूब । सिंहपर्णी-स्त्री० वासक ॥ अडूसा वांसा । सितद्रु-पु० मोरट-विशेष ॥ क्षीरमोरट । सिंहपुच्छिका-स्त्री. चित्रपर्णिका ॥ पिटवनभेद । सितधातु-पु० कठिनी ॥ खडियामिट्टी । सिंहपुच्छी-स्त्री. चित्रपर्णिका । पृश्निपर्णी । सितपर्णी-स्त्री० अर्कपुष्पिका ॥ दधियार !. माषपर्ण ॥ पिठवनभेद । पिठबन ॥ मषवन । सितपाटलिका-स्त्री० शुक्लवर्णपुष्पपाटलावृक्ष ॥ सिंहपुप्पी-स्त्री० पृश्निपर्णी । मासपर्णी ॥ पिटवन । सफेद पाटर । सितपुंखा-स्त्री० श्वेतशरपुंखा । सफेद सरफोका । सिंहमुखी-स्त्री० वासकवृक्ष । वासा । सितपुष्प-न० कैवर्तिमुस्तक ॥ केवटी मोथा । सिंहल-न० रङ्ग । त्वच । पित्तल ॥ राङ्ग । दाल• सितपुष्प-पु० तगरपुष्पवृक्ष । श्वेतरोहित । काश। चीनी । पीतल । तगरपुष्पवृक्ष ।। सफेद रोहेडावृक्ष । कांस । सिंहलस्था-स्त्री. सैहलीवृक्ष ॥ सिंहलीपीपल । सितपुष्पा-स्त्री० मल्लिका ॥ बेलावृक्ष । सिंहलींगुली-स्त्री. पृश्निपर्णी । पिठवन । सितपुष्पी-स्त्री० श्वेतापराजिता ॥ सफेद कोयला । सिंहलास्थान-पु० तालसदृश वृक्ष-बिशेष । सितमरिच-न० श्वेत मरिच ॥ सफेद मिरच । सिंहविन्ना-स्त्री० माषपर्णी ॥ मषवन । सितमाष-पु० राजमाष || लोबिया । चोरा। सिंहाण-न० लोहमल || लोहेका मैल सिंहान-न० लोहमल । नासिकामल || लोहेका सितवर्षाभू-स्त्री० श्वेतपुनर्नवा ॥ विषखपरा । मैल । नाकका मैल। सितशायका-स्त्री० श्वेतशरपुंखा सफेद सर- सिंहास्य-पु. वासक ॥ अडूसा । सिंही-स्त्री० वातीकी । कण्टकारी । वासक । सितशिम्बिक-पु० गोधूम । गेहूं । वृहती। मुद्रपर्णी ॥ बैगन । कटेरी । अडूसा । सितशिव-न० सैन्धवलवण ।। सैंधानोन । सितशिंशपा-स्त्री० श्वेतशिशपावृक्ष ॥ सफेद- सिंहीलता-श्री० बृहती ॥ कटाई । सिक्थक-न० मधूच्छिष्ट । नीलीवृक्ष ॥ मोम । सितशूक-पु० यव ॥ जौ । नीलका पेड। सितशूरन-पु० वनशूरन ॥ वनशूरन । सिंघण, सिघाण, सिंघाणक-न. नासिका मल ॥ सितसर्षप-पु. गौरसयप ॥ सफेद सरसों। नाकका मैल । सितसार-पु० शालिञ्चशाक ॥ शान्तिशाक । सिञ्चिता-स्त्री.पिप्पली ॥ पीपल | सितसारक-पु. " सित-न० रौप्यः । मूलक । चन्दन॥ रूपा । मूली। सितसिंही-स्त्री० श्वेकण्टकारी ॥ सफेद कटेरी ॥ चन्दन । सिता-स्त्री. शर्करा । मल्लिका । श्वेतकण्ठकारी । बरटा। फोंका। कटाई । मुगवन । सांसोंका वृक्ष । JAK.
औषधिकोष । (१९७ ) -- चीनी। वाकुची । विदारी । श्वेतदूर्वा । मद्य । बायमाणा। सिद्धक-पु० सिन्दुवार । मालवृक्ष ।। सिम्हाल वृक्षा कुटुम्बिनी । पर्वतजात । अपराजिता ॥ चीनी । सालका पेड। माल्लकापुष्पवृक्ष । सफेद । कटेहरी । बावची। सिद्धजल-न० काञ्जिक ॥ कांजी । विदारीकन्द । सफेद दूब मदिरा । त्रायमान- सिद्धधातु-पु० पारद ॥ पारा । अर्कपुष्पा । पार्वती कोयल । सिद्धपुष्प-पु. करवीरवृक्ष ।। कनेरका पेड । सितांशु-पु० कर्पूर || कपूर । सिद्धप्रयोजन-पु० गौरसर्पप ॥ सफेद सरौं । सितांशुतैल-न० कर्पूरतैल ॥ कपूरका तेल सिद्धरस-पु० पारद ।। पारा । सिताखण्ड-पु० मधुजातशर्करा मधुकी सिद्धसीलल-न० कालिका ।। कांजी । सिद्धसाधन-पु. गौरसर्षप ।। सफेद ससौं । सिताङ्ग-पु. श्वेतरोहितवृक्ष ॥ सफेद रोहेडा- सिद्धा-स्त्री० ऋद्धि ।। ऋद्धिऔषधी । वृक्ष । सिद्धार्थ-पु० श्वेतर्पप । वटीवृक्ष ।। सफेद सरसों। सिताजाजी-स्त्री. श्वेतजीरक । सफेद जीरा । नदीवड। सितादि-पु० गुड ॥ गुड । सिद्धि-स्त्री. ऋद्धि । वृद्धि ।। ऋद्धिऔषधी । सिताब्ज-न० श्वेतपद्म ।। सफेद कमल । वृद्धिऔषधी। सिताभ-पु० कर्पूर ॥ कपूर । सिध्म(न् )-न० किलासरोग ।। सेहुवां । सिताभा-स्त्री० तक्राहा ।। पचांगुलीक्षुप । सिध्मा-स्त्री." सिताभ्र-पु० कर्पूर ।। कपूर। सिघ्रका-स्त्री. वृक्ष-विशेप । सिताभ्रक-न. " सिन्दूक-पु० सिन्दुवारवृक्ष ।। सिमालवृक्ष । सिताम्भोज-न० श्वेतपद्म || सफेद कमल | सिन्दुवार-पु० वृक्ष-विशेष ॥ सम्हालू । सितार्जक-पु० श्वततुलसी ।। सफेद तुलसी । सिन्दुवारक-पु० निर्गुण्डी । मेउडी। सितार्क-पु. श्वेतमन्दारकवृक्ष । सफेद मन्दार । सिन्दुवारिका-स्त्री सितालता-स्त्री० श्वतदूर्वा ।। सफेद दूब । सिन्दूर-पु० वृक्ष-विशेष । सितालिकटभी-स्त्री० श्वेतकिणिहीवृक्ष ॥ शुक्लाक-सिन्दूर-न. रक्तवर्ण चूर्णद्रव्य-विशेष ॥ सिन्दूर । 'सन्दूरकारण- न० सीसक ॥ सीसा । सितावर-पु० शाक-विशेष ॥ शिरिआरी। चौपतिया सिन्दूरपुष्पी-स्त्री० पुष्पवृक्ष-विशेष ॥ सिन्दूरिया । शाक। सिन्दरी-स्त्री० धायकी । सिन्दूरपुष्पी ॥ धायके फूल। सितावरी-स्त्री० वाकुची ॥ वावची । तिन्दरिया । सिताह्वय-पु० श्वेताशवृक्ष, श्वेतरोहितवृक्ष ।।सफेद सिन्धु-पु० सिन्धुवारवृक्ष । श्वेतटंकण ॥ सिम्हालू- सैं जिनका पेड । सफेद रोहेडावृक्ष । वृक्ष । सफेद मुहागा। सितिवार-पु. सुनिषण्णकशाक ॥ चौपतियाशाक । सिन्धुक-पु० सिन्धुवारवृक्ष ॥ सिम्हालवृक्ष । सितेतर-पु० श्यामशालि ।। कुलत्थ ।। काली शाली सिन्धुकफ-पु० समुद्रफेन ।। समुद्रफेन । धान । कुल्थी। सिन्धुकर-न० श्वेतटकण ॥ सफेद सुहागा । सिता-पु. श्वतेक्षु ॥ सफेद ईख । सिन्धुज-न० सैन्धवलवण ॥ सैंधानोन । सितोद्भव न० श्वतचन्दन ।। सफेद चन्दन । सिन्धुजन्म- ( ) न." सितोपल-न० काठनी । पु० स्फटिक ।। खडिया । सिन्धुपुष्प-पु. शंख ॥ शंख । स्फटिकमाण। सिन्धुमन्थज-न० सैन्धवलवण ॥ सैंधानोन । सितोपला-स्त्री. शर्करा ॥ चीनी । सिन्धुलवण-न०. " सिद्ध-न० सैन्धवलवण ॥ सैंधानोन । सिन्धुवार-पु. सिन्दुवार ॥ सिम्हालु । सेदुआरी। सिद्ध-पु० कृष्णधुस्तूर गुड ।। काला धत्तूरा । गुड निर्गुण्डी। - णिही। ॥ AAN RADIA (१९८) आयुर्वेदीय- इत्यादि। • सिन्धुवारक-पु. सुकन्दी (न )-पु० शूरण || जमकिन्द । सिन्धुवारित-पु. " सुकर्णक-पु० हस्तिकन्द ॥ हस्तिकन्द । सिन्धुवेषण-पु० गम्भीरवृक्ष ॥ कुम्भेर । सुर्णिका-स्त्री० मूषिकपर्णी ॥ मूसाकानी । सिन्धूद्भव-न० सैन्धवलवण | सेंधानोन । सुकर्णी-स्त्री० इन्द्रवारुणी ॥ इन्द्रायण । सिन्धूपल-न." सुकाण्ड-पु० कारवल्ल ॥ करेला। सिम्बि-स्त्री० नतीनाम गन्धद्रव्य ॥ नखगन्धद्रव्या सुकाण्डिका-स्त्री० काण्डीरलता ॥ काण्डवेल । सिम्बिजा-स्त्री० शमीधान्य ॥ भूग, उडद, मोंठ सुकामा-स्त्री० त्रायमाणा ।। त्रायमाण । सुकालुका-स्त्री० डाडीक्षुप । डोंडी। सिम्बी-स्त्री निमावी । सेम । सुकाष्ठक-न० देवकाष्ठ ॥ देवदारु । सिर-पु. पिप्पलीमूल || पीपलामूल । सुकाप्ठा-स्त्री० काष्टकदली ॥ वनकेला । सिल्लकी-स्त्री. शल्लकीश || शालईवृक्ष । सुकुन्दुक-पु० पलाण्डु ।। प्याज । सिहुण्ड-पु० स्नुहीवृक्ष ॥ सेहुण्डवृश्च । सुकुन्दन-पु० बर्बर ॥ काली बर्बरी तुलसी। सिह-पु० गन्धद्रव्य-विशेष ॥ शिलारस । सुकुमार-पु० पुण्डेक्षु । वनचम्पक । क्षव । श्या. सिलक-पु." माक ।। एक प्रकारकी ईख । वनचम्पा । लाही। सिहकी-स्त्री० शल्कोवृक्ष ॥ शालईवृश्च । समाघास। सिहभूमिका-स्त्री." सुकुमारक-न० पत्र ॥ तेजपात । सीता-स्त्री० मदिरा ।। मद्य । सुकुमारक-पु० शालिधान्य ॥ शालिधान । सीतीलक-पु. सतीलक ॥ मटर । सुकुमारा-स्त्री. जाती । नवमालिका । एक्का । सीत्य-न० धान्य ॥ धान । मालती । कदली ॥चमेली । नेवारी । असवरगा। सीधु-पु. मद्य । मबभेद ॥ मदिरा । ईखके रससे मालती । केला। बनाया हुआ-विर्का। सुकुमारी-स्त्री० नवमालिका | नेवारी । सीधुगन्ध-पु० बकुलगुष्पवृक्ष ॥ मौल.सरीका पेड । शुकेशर-पु० बीजपूर ॥ बिजोरा नींबू । संधुिपुष्प-पुं० कदम्ब । बकुल ।। कदमका पेड । सुकोली-स्त्री० क्षीरकाकोली ।। क्षीरकाकोली औषधी। मौलसिरीका पेड । सुकोशक-पु. कौशाम्र । कोशम । सीधुपुष्गी-स्त्री. धातकी ॥ धायके फूल । सुख-न० वृद्धि ॥ वृद्धि औषधी । सीधुरस-पु० आम्रवृक्ष || आमका पेड । सुखङ्करी-स्त्री. जीवन्ती ॥ जीवन्ती । सीधुसंज्ञ-पु० बकुलवृक्ष ।। मौलसिरीका पेड । सुखदर्शन-पु० वृक्ष विशेष ॥ एक प्रकारका वृश्च । सीमन्तक-न० सिन्दूर ।। सिन्दूर । सुखदा-स्त्री० शमवृिक्ष ॥ छौंकरावृक्ष । सीमिक, सीमीक-पु. वृक्ष विशेष । सुखमोदा-स्त्री० शल्लकीवृक्ष ॥ शालईवृक्ष । सीर-पु० अर्कवृक्ष ।। आकका पेड । सुखवर्चक-~-पु० सार्जकाक्षार ।। सज्जखिार । सीस-न० सीसक ।। सीसा । सुखवर्च: (स् )-पु. " सीसक-न० स्वनामख्यात धातु ।। सीसा । सुखवास-पु० फल - विशेष ।। तरबूज । सीसपत्रक-न." सुखाशक-पु० राजतिनिश | तरबूज । सीसोद्भव-त० ॥ सुखोर्जिक-पु० सजिकाक्षार । सज्जीखार । सीहुण्ड-पु० सेहुण्डवृक्ष ॥ थूहरवृक्ष । सुगन्ध-न० क्षुद्रजीरक । गन्धतृण । नीलोत्पल । सुकण्टका-स्त्री० घृतकुमारी ॥ घी कुवार । चन्दन । ग्रन्थिपण ॥ छोटाजीरा-जीरा । गंधेज सुकन्द-पु. कशेरु | कशेरु । घास । नीलकमल | चन्दन । गठिवन ।. सुकन्दक-पु० पल.ण्डु। वाराहीकन्द । घरणी. कन्द॥ सुगन्ध-पु. रक्तशिग्रु । गन्धक । चणक । भूतृण । प्याज । गेंठी । धरणीकन्द ।। लाल सैजिना । गंधक । चने । शरवण । .
औषधिकोष। ( १९९) शाक । दुरालभा ॥ धमासा । सुगन्धक-पु० रक्ततुलसी । गन्धक । नागरगोकको सुग्रन्थि-पुं० चोरक ॥ भटेउर । टक । लाल तुलसी। गन्धक । नारङ्गी । एक सुचन्चुका-त्री० महाचञ्चुशाक । बडा चेवना- प्रकारका ककोडा। सुगन्धतैलनियास-ज० जवादिनाम गन्धद्रव्य ॥ सुचा-[ न ] पु० भूर्जवृक्ष || भोजपत्रवृक्ष । जवादिकस्तूरी। सुचक्षुः (स्-पु० उदुम्बर | गूलर । सुगन्धपत्रा-स्त्री० रुद्रजटा ॥ शंकरजटा । सुचित्रबीजा-स्त्री. विडङ्गा ।। बायबिडङ्ग । सुगन्धभूतग-न० गन्धतृण ॥ सुगंधघास । सुचित्रा-स्त्री० चिभिटा ॥ कचरिया । गुरुभीहु । सुगन्धमूला-स्त्री० स्थलपद्मिनी । रास्ता । शटी। सुजल-न. पन ॥ कमल । लवलीकल || स्थलकमल । रायसन । छोटा सुजाता-स्त्री. तुवरी ॥ गोपीचन्दन । कचर । हरपारेवडी । सुजीवन्ती-स्त्री० स्वर्णजीवन्ती ॥ पतिवर्ण जीवन्ती । सुगन्धा-स्त्री० रास्ता । शठी । वध्याककोटकी । सुजीवक-पु० पुत्रजीववृक्ष ॥ जियापोता,पिताजिया । रुद्रजटा । शतपुष्पा । नाकुली । नवमालिका । सुतपाईका-स्त्री० हंसपदी ॥ लाल वर्ण लज्जालु । स्वर्णयूधिका । पृक्का । गंगापत्री । सल्लकी। मा- गोधापदी। धवी । अनन्ता । मातुलुङ्गा । तुलसी ॥ रायसन सुतारी-स्त्री० देवदालीलता || घबरवेल । वंदाला कचूरभेद । कचूर । वांझखखसा । शंकरजटा । सुतश्रेणी-स्त्री० मूषिकपर्णी ।। मूलाकानी । सौंफ । नकुलकन्द। नेवारी । पीली जूही असवरगा सुता-स्त्री. गंगापत्री । शालई वृक्ष । माधवीलता। गौरआवा सुतिक्त-पुपर्पट ।। पित्तपापडा । दवनपापरा । सांऊ-करियावासांऊ । चकोतरा नींबू । तुलसी । सुतिक्तक-पु० पारिभद्र । भनिम्ब || फरहदवृक्ष । चिरायता । सुगन्धामलक-न० सर्वोषधिगण । शुष्कामलकी । सुगन्धि-स्त्री० एलवालुक । मुस्ता । कशेरु सुतिक्ता-स्त्री० कोशातकी । तोरई । गन्धतृण । धन्याक । विष्पलीमूल ॥ एलुआ । सुतीक्ष्ण-पु. शोभाञ्जन । श्वेतशित्रु ॥ सैजिनेका पेड । सफेद सैंजिनेका पेड। मोथा। कशेरू | गन्धेजबास । धनिया । परि- सुतीक्ष्णक-पु० मुष्ककवृक्ष ।। मोखावृक्ष । लामूल । सुगन्धि-पु० सहकारवृक्ष । तुम्बुरुंवृक्ष । वन. सुतुंग-पु० नारिकेलवृक्ष || नारिवलका पेड । वर्बरिका ॥ सुगन्धयुक्त आम । तुम्बुरूका पेड । सुतेजन-पु० धन्वनवृक्ष ।। धाभिनवृक्ष । सुतेजा (सू)-पु० आदित्यभक्ता ।। हुरहुरवृश्च । सुगन्धिक-न० कहार । पुष्करमूल । गौरसुवर्ण । सुतेला-स्त्री० महाज्योतिष्मती ॥ बडी मालकांगनी। सुरपर्ण । उशीर ॥ सफेद कमोदिनी । पोहकरमूल । सुदग्धिका-स्त्री० दग्धानामकवृक्ष ।। दग्धावृक्ष । गौरसुवर्ण चित्रकूटदेशे प्रसिद्ध शाक । माचीपत्र । सुदण्ड-पु० वेत्र ।। बैत । सुदण्डिका-स्त्री० गोरक्षी ।। सर्पदण्डी। सुदर्भा-स्त्री० इक्षुदर्भा ।। इक्षुदर्भतृण । सुगन्धिक-पु० महाशालि । तुरुष्क । गन्धक ॥ सुदर्शन-पु०-जम्बूवृक्ष ॥ जामुनका पेड । बडे धान | शिलारस । गन्धक । सुदर्शना-श्री. सुदर्शन वृक्ष ।। सुदर्शन । सुगान्धकुसुम-पु० पीत करवीर ।। पालीकनेर । सुदल-पु. मोरटलता ।। क्षीरमारेट ! सुगन्धिकुसुमा-स्त्री० पृक्का ।। असवरग । सुदला-स्त्री० सालपर्णी । तरुणी ।। सरिवन । नाल. सुगन्धित्रिफला-स्त्री० जातीफल १ पूगफल २ वन । सकती। लवङ्ग ।। जायफल, सुपारी, लौङ्ग । सुदीर्घधर्मा-त्री० अशनपर्णी ॥ पटशन । सुगन्धिनी-स्त्री० आरामशीतला ॥ आरामशीतला । सुदीर्षफलिका-स्त्री. वार्ताकु-विशेष ।। एक प्रका. सुगन्धिमूल-न० उशीर ॥ खस । रके बैंगन । वनवर्बरी तुलसी । खस।
( २००) आयुर्वेदीय- गिलोय । ॥ ॥ दूव । पीपल । सुदीर्घा-स्त्री० चीनाकर्कटी ।। चीना ककडी-। सुपत्रिका-स्त्री० ०जतुकालता ॥ जतुका । सुधा-स्त्री० अमत । मूर्वी । स्नुही। हरतिकी। आम- सुपथ्या-स्त्री० श्वेतचिल्ली ॥ सफेद चिल्लीशाक । लकी । मधु । शालपर्णी । गुडूची ।। चुरनहार । सुपद्मा-स्त्री० बचा ।। वच । सेहुण्डवृक्ष । हरड । आमला । सहत । शालवना सुपर्ण-न० कृतमालकवृक्ष ॥ छोटी जातकाः अमल- तासवृक्ष । सुधांशुतैल-न० कर्पूर तैल ॥ कर्पूरका तेल । सुपणक-पु० आरग्वधवृक्ष । सप्तच्छदवृक्ष सुधांशुरत्न-न० मौक्तिक ॥ मोती। अमलतास । सतिवन । सुधापय:(सू )-पुं० स्नुहीक्षार ।। सेहुंडका दूध । सुपर्णाख्य-पु० नागकेशर ॥ नागकेशर | सुधामूली-स्त्री० कन्द विशेष ।। सालवमिश्री । सुपर्णिका-स्त्री० स्वर्णजीवन्ती। शालपर्णी । सुधामोदक-न० यवासशर्करा ।। शीरखित्त । पलाशी । रेणुका । वाकुची। पीली जीवन्ती. सुधामोदकज-पु. नवराजोद्भव खण्ड ॥ शीरखि. शरिवन । पलाशीलता । बायची। स्तकी खांड। सुपर्वा [-]-पु० वंश ॥ बांस | मुधावासा-स्त्री० पुषी ॥ खीरा । सुपा-स्त्री० श्वेतदुर्वा ॥ सफेद दूर्वा ॥ सफेद सुधासूति-पु० पद्म ।। कमल । सुधाश्रवा-स्त्री० रुदन्तीवृक्षा अलिजिबिका ॥ रुदन्ती वृक्ष । तालके ऊपरकी एक छोटी जीव । सुपाक्य-न० विड्लवण ॥ विरियासंचरनोन । सुपार्श्व-पु० प्लक्षवृक्ष । पाखर का पेड़ । सुधूम्य-पु० स्वादुनाम गन्धद्रव्य ।। अगरुसार । सुपार्श्वक-पु० गर्दभांडवृक्ष ॥ गजहदु । पारिस- सुधोद्भवा-स्त्री० हरीतकी ।। हरड । सुनन्दा-स्त्री० अर्कपत्रीवृक्ष। गोरोचना ।। गोरोचन। सुपिंगला-स्त्री० जीवन्ती । ज्योतिष्मती ॥ डोडी। सुनालक-पु० बकपुष्पवृक्ष ॥ अगस्तवृक्ष । मालकाङ्गनी । सुनासिका-स्त्री काकनासा ॥ कौआठोडी । सुनिय्यांसा-स्त्री० जिङ्गनीवृक्ष ॥ जिङ्गनिया। सुपीत-न० गर्जर ।। गाजर । सुनिषण्ण, सुनिषण्णक-न० पु० शाक-विशेष ॥ सुपुट-पु० कोलकन्द । विष्णुकन्द ॥ सूकरकन्द । चौपतियाशाक । शिरिआरीशाक | विष्णुकन्द । सुनील-न० लामज्जकतृण ॥ लामज्जकतृण । सुपुत्रिका-त्री० जतुका ।। जतुकालता । सुनील-पु० दाडिम || अनारका पेड । सुपुष्करा-स्त्री० स्थलपद्मिनी ॥ स्थलकमल । सुनीलक-पु० नील भृङ्गराज ॥ नीला भगरा । सुपुष्प-न० लवङ्ग । प्रपौंडरीक । आहुल्य । तूल । सुनीला-श्री. अतसी । विष्णुक्रान्ता । जरडी लोंग । पुंडरिया । तरवट काश्मीर देश की भाषा तृण ॥ अतसी । नीली कोयल । जरडी तृण । सहतूत । सुन्दर-पु० वृक्ष-विशेष ॥ सुन्दरी । सुन्दरी-स्त्री० हरिद्रा । तविशेष ।। हलदी । सुपुष्प-पु० पारिभद्रवृक्ष । शिरीष । हरिद्रु । राज एक प्रकारका वृक्ष । मकोय । तरुणी ॥ फरहदवृक्ष । सिरसका पेड । हलदिय सुपक-पु० सुगन्धान ॥ सुगन्धयुक्त आम । वृक्ष । हलदुआ । राजसेवती । सुपत्र-न. तेजपत्र ॥ तेजपात । सुपुष्पिका-स्त्री० पाटला || पाढरवृक्ष । सुपत्र-पु० आदित्यपत्रवृक्ष । पलिवाहतृण ।। सुपुष्पी-स्त्री० श्वेतापराजिता । जीर्णकञ्जी । शत. अर्कपत्र । पल्लिवाहतृण । पुष्पा । मिश्रेया । द्रोणपुष्पी । कदली ।। सफेद सुपत्रक-पु० शिग्रु ॥ सैजिनेका वृक्ष । कोयल । विधारा । सौंफ । साआ। गूमा । सुपत्रा-स्त्री० रुद्रजटा । शतावरी । शमी । शाल- पर्णी । पालंकय ॥ शङ्करजटा । शतावर।छोंक- सुपूर-पु० बजिपूर | बिजोरा नींबू । रावृक्ष । शालवन । पालगका शाक। सुप्रतिभा-स्त्री० मदिरा ॥ मद्य । केला। -TiMarnar RANSIZEtHCHD औषधिकोष। (२०१) सुभग-न० सुपूरक-पु० वकपुष्पवृक्ष ।। अगास्तियावृक्ष । सुमनःफल-न० जातीफल || जायफल । सुप्रतिष्ठित-पु० उदुम्बरवृक्ष ।। गूलरका पेड । सुमनःफल-पु. कपित्थवृक्ष ।। कैथवृक्ष ! सुप्रभा-स्त्री०वाकुची ।। वापची। सुमनाः-स्त्री. जातीपुष्पवृक्ष ॥ चभेलीका वृक्ष । सुप्रसन्नक-पु० कृष्णार्जक ॥ काली तुलसी । सुमनाः [सू ] स्त्री० मालती । जाती । शत सुप्रसरा-स्त्री० प्रसारणीलता । पसरन । पत्री ॥ मालतीपुष्पलता । चमेलीपुष्पवृक्ष । सेव- सुफल-न० बादाम ।। बादाम । तीपुष्पवृक्ष । सुफल-पु. कर्णिकार । दाडिम । बदर । मुद्दा । सुमना (सू )-पु. पूर्तिकरञ्ज । निम्बवृक्ष । मन कपित्थ । जम्बीर ॥ कणेर अमलतास भेद । हाकरञ्ज । गोधूम ॥ दुगंधकरंज । नीमका पेड। अनार । बेर । मूंग । कैथ । जम्भीरी। वडी करंज ! गेहूं। सुफला-स्त्री० इन्द्रवारुणी । कूष्माण्डी । काश्मरी। सुमुख-पु. शाकभेदे । सिताज्जक । वनवबरिका ।। कदली । कपिलद्राक्ष ॥ इन्द्रायण । पेठा । कु एक प्रकारका शाक | सफेद तुलसी । वनतुलसी। म्हडा । कुम्भेर । केला । अंगर पारसीभाषा । सुमुष्टि-पु० विषमुष्टिक्षुप ॥ कुचला । सुफन-न० समुद्रफेन । समुद्रफेन । सुमूल-पु० श्वेतशिग्रु ।। सफेद सैजिना । सुबन्ध-पु० तिल ॥ तिल । सुमूलक-न० गर्जर ॥ गाजर । सुभग-पु० टंकण । चम्पकपुष्पवृक्ष ॥ रक्ताम्लान । सुमूला-स्त्री० शालपर्णी । पश्चिपर्णी ॥ सरिवन । अशोकवृक्ष ॥ सुहागा चम्पापुष्प । लाल अम्ला- पिठवन। नवृक्ष । अशोकपुष्पवृक्ष । सुमेखल-पु० मुज ॥ मूंज। शैलेय ॥ भूरिछरीला । सुमेधाः[सन० ज्योतिष्मती॥मालकांगनी । सुभगा-स्त्री० कैवर्तिका । शालपर्णी । हरिद्रा । सुरकृता-स्त्री० गुडूची ॥ गिलोय । नीलदूर्वा । तुलसी । प्रियंगु । कस्तूरी । सुवर्ण सुरक्तक-पु० कोषाम्र । स्वर्णगैरिक ॥ कोशनाम | कदली । वनमल्ली ॥ कैवर्तिका मालवे प्रसिद्ध । पीला गेरू । शालवन । सरिवन । हलदी। हरी दूब। तुलसी। सुरङ्ग-न० पतङ्ग । हिंगुल ॥ पतङ्गकी लकडी फूलप्रियंगु । कस्तूरी । पीला केला । मोदयन्ती । सिङ्गरफ। सुभगाह्वया-स्त्री. हरिद्रा ॥ हलदी । सुरङ्ग-पु० नागरगवृक्ष ॥ नारङ्गीका पेड । सुभङ्ग-पु० नारिकेलवृक्ष ॥ नारियलका पेड । सुरङ्गद-न० पतन ॥ पतङ्गकाठ । सुभद्रक-पु० विल्वृक्ष | वेलका पेड । सुरङ्गधातु-पु० गैरिक ॥ गरु । सुभद्रा-स्त्री. श्यामलता । घृतमंडा । काश्मरी- सुरङ्गा-स्त्री० कैवर्तिका ॥ कैवार्तका । मालवे. वृक्ष ॥ सरिवन । कालीसर । बायसोली खुमेर । प्रसिद्धलता । मुभद्राणी-स्त्री० त्रायन्ती ।। त्रायमान । सुरङ्गिका-स्त्री० मूर्वा चुरनहार। सुभाञ्जन-पु. शोभांजनवृक्ष ॥ सैजिनेका पेड। सुरङ्गी-स्त्री० काकनासा । रक्तशोभाञ्जन || कौआ- सुभिक्षा-स्त्री. धातुपुष्पिका ॥ धायके फूल । ठोडी। लाल सैजिनेका पेड । सुभीरक-पु० पलाशवृक्ष ॥ ढाकवृक्ष सुरजःफल-पु० पनसवृक्ष ।। कटहर । सुभीतिक-पु० बिल्ववृक्ष ॥ बेलका पेड । सुरजम्बीर-पु० मधुकर्कटी ॥ चकोतरानींबू । सुमंगला-स्त्री० वायसोली || माकडहाता वङ्ग- सुरजन-पु० गुवाकवृक्ष ॥ सुपारीका पेड । भाषा। सुरदार-न० देवदारु ॥ देवदारु । सुमदन-पु० आम्रवृक्ष || आमका पेड। सुरदुन्दुभि-स्त्री० तुलसी ॥ तुलसी । सुमधुर-पु० जीवशाक || जीवशाक। सुरद्रुम-पु० देवनल । देवदारु ॥ बडा नरसल । सुमन-पु० गोधूम । धुस्तूर ॥ गेहूं धत्तुरा । देवदारु। सुमनपत्रिका-स्त्री० जातीपत्री ॥ जावित्री । सुरधूप-पु. राल ॥राल। LOSSARHET २६ (२०२) आयुर्वेदीय- शनी । भाषा । केला । मोचरस । सुरनाल-पु० देवनल || बडा नरसल । सुरभिवल्कल-न० गुडत्वक् ॥ दालचिनी । सुरनिर्गन्ध-न० पत्रक ॥ तेजपात । सुरभिस्रवा-स्त्री० शल्लकीवृक्ष । शालईवृक्ष । सुरपर्ण-न० औषधि-विशेष | माचीपत्र । सुरभी-स्त्री." सुरपणिक-पु. सुरपुन्नाग || पुन्नागवृक्षभेद छवि- सुरभीरसा-स्त्री." यानाफूल बङ्गभाषा ॥ सुरभूरुह-पु० देवदारु ॥ देवदारु । सुरपर्णिका-स्त्री. पुन्नागवृक्ष । सुरमृत्तिका-स्त्री० तुवरी ॥ गोपीचन्दन । सुरपर्णी-स्त्री० पलाशीलता || पलाशीलता । सुरमेदा-स्त्री० महामेन्दा ॥ महामेदा औषधी । सुरपुन्नाग-पु० पुन्नागवृक्ष विशेष ॥ छवियानाफूल-सुरलता-स्त्री. महाज्योतिष्पती ॥ बड़ी मालका- वनभाषा। सुरप्रिय-न० वृक्ष विशेष ॥ कबाबचीनी देशान्तरीय सुरवल्लभा-स्त्री० श्वेतदुर्वा ॥ सफेद दूब । मुरवल्ली-स्त्री० तुलसी ॥ तुलसी । सुरप्रिय-पु० अगस्त्यपुष्पवृक्ष ॥ अगस्तियावृक्ष । सुरशाक-पु० शाकविशेष ॥ पोदीना । हथियावृक्ष । सुरश्रेष्ठा-स्त्री० ब्राह्मी । ब्रह्मी घास । सुरप्रिया स्त्री० जाती । स्वर्णरम्भा । चमेली । पलिा सुरस-न० बोल । त्वच । गन्धतृण । तुलसी || वोल गन्धद्रव्य दालचिनी । सुगंधवास ।तुलसी। सुराभि-न० सुवर्ण । गन्धक । सोना । गन्धक । सुरस-पु. सिन्धुवारवृक्ष । मोचरस ।। समालुवृक्ष । सुरभि-पु० चम्पकपुष्पवृक्ष। जातीफलवृक्ष शमीवृक्ष । गन्धतृण । वकुलवृक्ष । कणगुगुलु । कदम्वृक्ष ।। सुरसम्भवा-स्त्री आदित्यभक्ताहुरहुर । गन्धफल । राल । रास्ना । कुन्दुरु || चम्पावृक्ष । सुरसर्षप-पु० देवसर्षप ॥ निर्जरसरसों। जायफलका पेड । छोकरावृक्ष । सुगन्धतृण । सुरस -स्त्री. तुलसी । कृष्णातुलप्ती। रान्ना। मिश्रेया मौलसिरीका पेड । कणगूगल । कदमवृक्ष । बेल ब्राह्मी । महाशतावरी । निर्गुण्डी ॥ तुलसी । कैथ । राल । रासना कुन्दुरुसुगधिद्रव्य लोवान काली तुलसी । रासना । सोआ । ब्राह्मीघास । फारसी। बडी शतावर । निर्गुण्डी। सम्हाल । सुरभि-स्त्री० शल्लकीवृक्ष । मुरा । रुद्रजटा । नव. सुरसी-स्त्री० वृक्ष-विशेष । मालिका । तुलसी । बर्वरतुलसी । पाचीलता ॥ सुरा-स्त्री० मदिरा । मद्य । शालई वृक्ष कपूरकचरी । शंकरजटा । नेवारी । सुराकर-पु. नारिकेलवृक्ष ।। नारियलका पेड । तुलसी । बनतुलसी ।" पच्चे" सुराजक-पु० भृङ्गराज || भंगरा । सुराभिका-स्त्री० स्वर्णकदली ।। चम्पैकेला । सुराह-न० हरिचन्दन। स्वर्ण ।। हरिचन्दन ।सोना। सुराभिकुसुप्र-न० शतपत्री । सेवती । सुराष्ट्रज-न० तुवरिका ॥ गोपीचन्दन । सुरभिगन्ध-न० चातुर्जातक ॥ दालचीनी । इला-सुराष्ट्रज-पु० कृष्णमुद्ग । विषभेद ॥ कालीमूंग । यची । नागकेशर । तेजपात । विषभेद । सुरभित्रिफला-स्त्री० सुगन्धत्रिफला ॥ जायफल । सुराष्ट्रजा-स्त्री. तुबरी ।। गोपीचन्दन । सुपारि । लोंग । सुरात-पु. देवदारु । हरिद्रुवृक्ष । मरुवकवृक्ष ।। सुरभित्वक.[च ]-न० वृहदेला || बडीईलायची। देवदारू । हलदुआवृक्ष । मरुआवृक्ष । सुरभिदारु-पु० सरलवृक्ष ॥ धूपसरल । सुरुङ्ग-पु० शोभाञ्जनवृक्ष ॥ संजिनेका पंड । सुरभिपत्रा-स्त्री० जम्बूवृक्ष । राजजम्बु ॥ जामुन- सुरुङ्गी-स्त्री. रक्तशोभालन।। लाल सैजिनेका पेड। का पेड् । राजजामुन । सुरूपा-स्त्री० शालपर्णी । भाङ्गी ॥ शालवन । सुरभिफल-पु० फलवृक्ष-विशेष । भारङ्गी। Sana औषधिकोष। (२०३) GORAR DA-- --- सुवर्णाख्य-पु. सुरेज्या-स्त्री० तुलसी । तुलसी । सुवर्णप्रसव-पु० एलवालुक ।। एलुआ । सुरेभ-न० रंग || रांग। सुवर्णयूथी-स्त्री० पीतवर्ण यूथिका ॥ पीली नहीं । सुरेवर-पु रामवृक्ष ॥ राममुपारी । सुवर्णवर्णा-स्त्री० हरिद्रा ॥ हलदी । सुरेष्ट-न० फल-विशेष || आलू बुखारा । सुवणी-स्त्री० कृष्णागरू । वाटयालक । स्वर्णक्षीरी । सुरेष्ट-पु० शिवमल्लिका । सुरपुन्नाग । शालवृक्ष ॥ हरिद्रा ॥ काली अगर । बरियाला । घीले दुधको वसुवृक्ष । सुरपुन्नागवृक्ष । सालवृक्ष । कटेरी । हलदी। सुरेष्टक-पु० शालवृक्ष ।। सालवृक्ष । नागकेशर । धुस्तूरवृक्ष । नागके - सुरेष्टा-त्री० ब्राह्मी ॥ ब्रह्मीधास । शर धत्तरेका पंड। सुरोत्तर-पु० चन्दन ॥ चन्दन । सुवर्णी-स्त्री० आखुकर्णी ॥ मूसाकानी । सुलभा-त्री० माषपर्णी । धूम्रपत्रा !! मघवन । सुवाल्लि, सुवल्ली-स्त्री० सोमराजी ।। वायची । तमाखु। सुवन्तक-पु० वासन्ती ।। वासन्तीपुष्पलता । सुलोमशा-त्री० काकजंवा ॥ मसी । सुवहा-स्त्री० शेफालिका । पुष्पवृक्ष। राना । गोधा- सुलोमा-स्त्री. ताम्रवल्ली । मांसच्छदा । पंदीलता । एलापणी । तुलसी । घृतकुमारी । सुलोहक-न० पित्तल ॥ पातल । साक्षी । शल्लकीवृक्ष । त्रिवृता। रुद्रजटा । गन्ध सुवक्र-पु. वनबर्बरिका ॥ वनबर्बरी । नाकुलीनामकन्द । तालमूली । सिन्दुवारवृक्ष । सुवर्चक-पु. ० स्वजिकाक्षार || सज्जीखार । श्वेतवर्णत्रिवृत् ।। निर्गुण्डीभेद । रासना हंसपदी। सुवर्चला-स्त्री० अतसी । सूर्यमुखीपुष्प । आदित्य. कांटाअमरुल वंगभाषा । तुलसी । घिगुवार । भक्ता । स्वजिकाक्षार | अश्वगन्धा ।। अलती। सरह्टी । शालईवृक्ष । निसोत । शंकरजटा । सूरजमुखीके फूल । हुलहुलवृक्ष । सब्जीखार अ. नाकुलीकन्द । मुसली । सम्हालुवृक्ष । सफेद । श्वगन्ध । निसोत । । सुचिका-त्री० वर्जिकाक्षार । यवक्षार 1 जतुका । सुवीज-पु० खस्त्रत ॥ खसखस, पोस्तके दाने । सज्जीखार || जवाखार। जतुकालता । सुवीरक-न० सौवीराञ्जन || श्वतशुमा । सुवञ्चिक-पु. स्वर्जिकाक्षार || सज्जीखार । सुवीराम्ल-न० काञ्जिक ।। कांजी । सुवर्ची (स् )-स्वर्जिकाक्षार॥सज्जीखार। सुवर्ण। सुवीर्य-न० बदरीफल ।। बेर । सुवर्ण-न० धातु-विशेष । हरिचन्दन । स्वर्णगरिका। सुवी--स्त्री० वनकापीसी ।। वनकपास । नागकेशर ।। सोना । हरिचन्दन । पाला गेरू । सुवृत्त-पु० सूरण || ,जमीकन्द । नागकेशर । सुवृत्ता-स्त्री० शतपत्री । काकलीद्राक्षा । गुलाब । सुवर्ण-पु० न० कर्षपरिमाण || दो तोले । किसमिस । सुवर्ण-पु० धुस्तूरवृक्ष । कणगुग्गुलु॥ धत्तूरका पेड। सुवेगा-स्त्री. महाज्योतिष्मती॥ बडी मालकांगनी । कणगूगल । सुवेश-पु० श्वेतेक्षु ॥ सफेद ईख । सुवर्णक-न. पित्तल ॥ पीतल ! सुशल्य-पु. खदिर ॥ खैरका पड़ । सुवर्णक-पु० आरग्वघवृक्ष ।। आमलतास वृक्ष । सुशवी-स्त्री० कारवेल्ल । कृष्णजीरक ॥ करेला । सुवर्णकदली-स्त्री० कदली-विशेष ॥ पाला केला । कालाजीरा । चम्न केला । सुशाक-न० आर्द्रक ।। अदरख । सुवर्णगैरिक-न० गैरिक-विशेष ॥ पीला गेरू । सुशाक-पु० तण्डुलयि । चंचुशाक । भिण्डा ।। सुवर्णनाकुली-स्त्री० महाज्योतिष्मती । बडीमालकां चौलाईका शाक । चेवुना चञ्चुशाक । भिण्डी। सुशिखा-स्त्री० मयूरशिखाक्षुप ॥ मोरसिखा । सुवर्णपुष्प-पु० राजतरुणी ॥ सेवतीभेद । कूजाका सुशित-न० पीतचन्दन । पीलाचन्दन । सुशीत-पु० हत्वप्लक्षवृक्ष || छोटा पाखरवृक्ष । ॥ गनी । . कला।
( २०४) आयुवेदाय- रालुक। सुशीतल-न० गन्धतृण । श्वेतचन्दन । त्रपुष ।। सूद-पु० लोध्रवृक्ष । लोधवृक्ष । सुगंधघास । सफेद चन्दन । खीरा । सूनु-पु०अर्कवृक्ष ॥ आकका पेड । सुशीता-स्त्री० शतपत्री ॥ गलाब । सेवती । सूप-पु० व्यञ्जन-विशेष ॥ दाल ! यूष । सुशीविका-स्त्री. वाराहीकन्द ॥ गेंटी। चर्मका- सूपधूपन-न० हिंगु ॥ हारी। सूपपर्णी-स्त्री० मुद्गपर्णी ॥ मुगवन । सुश्रीका-स्त्री० शल्लकीवृक्षं ॥ शाल वृक्ष । सूतश्रेष्ठ पु० मुद्ग।। मूंग! सुषवी--स्त्री कारवेल्ल । कृष्णजीरक । क्षुद्रकार घेल्ल सूपाङ्ग-न० हिंगु ॥ हींग। जिरक । करेला । काला जराि । छोटा करेला- सूम-न० चार ॥ दूध । करेली । जीरा । सूर-पु० अर्कवृक्ष ।। आकका पेड़ । सुषुम्ना-स्त्री० नाडी-विशेष । सूरण-पु० शूरण ।। जमीकन्द । सुषेण-पु० करमईकवृक्ष । बैतसवृक्ष ॥ करोंदा- सूरी-स्त्री० राजसर्षप ॥ राई । सूर्प-पु० कुम्भपरिमाण ॥ ६४ सेर । वृक्ष । बैंतवृक्ष । सूर्पपत्र-पु० वृक्ष-विशेष । सुवेणिका-स्त्री० कृष्णत्रिकृता ।। श्याम पनिलर । सूर्य-पु० अर्कपर्ण। अर्कवृक्ष ॥ लाल आकका वृक्षा सुषेणी-स्त्री० त्रिवृत् ।। निसोत । आकका वृक्ष । सुसवी-स्त्री. सुसवी ।। करेला । सूर्यकान्त-पु • स्फटिक । स्वनामख्यात मणि । सुसार-पु० रक्तखदिर ।। लाल खैर । पुष्पवृक्ष-विशेष । सूर्यावर्त्तवृक्ष || फटिकमाण । सुसिकता-स्त्री- शर्करा ।। चीनी । सूर्यकान्तमाण । अतसी सीसाफास । सूर्यम- सुस्ना-स्त्री० शमीधान्यभेद ।। खिसारी । णिपुष्पवृक्ष । हुलहुलवृक्ष । सूक-पु० उत्पल ॥ कमल । सूर्यकान्ति-स्त्री० पुष्प-विशेष । सूकरी-स्त्री० वराहक्रान्ता ।। वराहक्रान्ताक्षुप । सूचिकामुख-न० शङ्ख ।। शंख । सूर्यपत्र-पु० आदित्यपत्र ।। अर्कपत्रवृक्ष । सूर्यभक्त-पु०बन्धूकपुष्पवृक्ष ॥ दुपहरियाका वृक्ष । सूचिपत्रक-पु०. सितावरशाक || शिरिआरीशाक । सूर्यभक्तक-पु० सूचिपुष्प-पु. केतकपुष्पवृक्ष ॥ केवरापुष्पवृक्ष । सूर्यभक्ता-स्त्री० आदित्यभक्ताक्षुप ॥ हुलहुल । सूचिशाली-पु० सुक्ष्मशालि ।। धान्यभेद । सूर्यमाण-पु० सूर्यकान्तमणि । स्वनामख्यातपुष्प सूचीदल-पु० सितावर ।। शिरिआरीशाक । सूचीपत्रा-स्त्री० गण्डदूर्वा ।। गाँडरदूव । वृक्ष ॥ आतशी सीसा फा० । सूर्यमणि पुष्पवृक्ष। सूचीपुष्प-पु. केतकीपुष्पवृक्ष ।। केतकी । सूर्यलता-आदित्यभक्ता हुरहुर । हुलहुल। सूचीमुख-न० हरिक ।। हीरा । सूर्यवल्ली-स्त्री० अर्कपुष्पिकावृक्ष ॥ दधियारदेशा. सूचीमुख-पु० श्वेतकुश ।। सफेद कुशा । सूर्य्यसंज्ञ-न० कुंकुम ॥ केशर । सूच्यग्रस्थूलक-पु० तृण-विशेष । कुशतृण ।। सूर्या-स्त्री० इन्द्रवारुणी । इंद्रायण । एक प्रकारके तृण । कुशा । सूर्यावर्त-पु० क्षुप विशेष । शाकविशेष । सूच्याह-पु० सितावर ॥ सिरिआरोशाक । सूर्यावर्त्ता-स्त्री० आदित्यभक्ता ॥ हुलहुलं । सूत-पु० न० पारद ।। पारा । सूर्य्याह्व-न० ताम्रा ॥ तांबा । सूतक-पु. न. सूर्य्याह्व-पु० अर्कवृक्ष । आकका वृक्ष । सूतराट् (ज)-पु. सूर्य-पु० माघ ।। उडदअन्न । सूतिकरोग-पु० नवप्रसूता । स्त्रीरोग-विशेष । सूक्ष्म-पु० कतकवृश्च ।। निर्मली । सूतकट-न० गुडत्वक् ॥ दालचीनी । सुक्ष्मकृष्णफला-स्त्री० मध्यम जम्बूवृक्ष ॥ जामुन- सूतपुष्प-पु० कासि ।। कपास । भेद । " - न्तरीय भाषा । - *- P-Rane औषधिकोष । ( २०५) सूक्ष्मतण्डुल-पु० खसखस ॥ पोस्तके दाने । सकिम- न० मूलक । मूलक । मूली । सूक्ष्मतण्डुला-स्त्री • पिप्पली ॥ पपिल । सेटु-पु० फल-विशेष । तरवूज । सूक्ष्मपत्र-पु० धन्याक । वनजरिक । देवसर्षप । सेतु,सेतुक-पु० वरुणवृक्ष ॥ वरनावृक्ष । लघुबदर । सुरपर्ण । वनबर्बरी । लोहितेक्षु । सेतुभेदी (न् )-पु० दन्तीवृक्ष ॥ दन्तीवृक्ष । कुक्कुरद्रु । कण्टलवृक्ष ॥ धनिया । वनजीरा । सेतुवृक्ष-पु० वरुणवृक्ष ॥ वरनावृक्ष । निजरमों । छोटा बेर । माचीपत्र ! वनवर्वरी। सेमन्ती-स्त्री पुष्प-विशेष | सेवती। तुलसी । लोहितवर्ण ईख ।ककरोंदा । बबूरवृक्ष । सेलु-पु० शेलुवृक्ष । लिसोडावृक्ष । सूक्ष्मपत्रिका-स्त्री. शतपुष्पा । शतावरी । लघु सेव-न० सेविफल ॥ सेव। ब्राह्मी ।क्षुद्रोपोदको । दुरालभा । आकाशमांसी! | सेवकालु-पु०निशाभक्षावृक्ष ॥ दुग्धपेया बङ्गः । सौंफ । शतावर छोटी ब्रह्मा घास । छोटा पाई. सेवती-स्त्री० पुष्पवृक्ष- विशेष ॥ सेवती । लेवि-न. फल-विशेष ॥ सेव। का शाक | धमासा । सूक्ष्म जटामांसी । सूक्ष्मपर्ण-स्त्री० जीर्णफंजी । डोडी । विधारा. सेवित-न. " भेद । डोडीक्षुप । सेव्य-न० वीरणमूल ॥ खस । सूक्ष्मपर्णी-स्त्री. रामदूतवृिक्ष ॥ रामतुलसी । सेव्य-पु० अश्वत्थवृक्ष । हिज्जलवृश्च ॥ पीपलका पेड । समुद्रफल। सूक्ष्मपिप्पली-स्त्री० वनपिप्पली ॥ वनपीपर । सूक्ष्मपुष्पी-स्त्री० यवतिक्ता ॥ यवेची । शंखिनी । सेव्या-स्त्री०वन्दावृक्ष ॥ वन्दा । बांदा । देशान्तरीय भाषा। सेहुण्ड-पु. स्नुहीवृक्ष ॥ सैंड थूहर । सैहली-स्त्री० सिहीपप्पली ॥ सिंहली पीपल । सूक्ष्मफल-पु० भूकर्बुदारक । लभेरावृक्ष । सैकतेष्ट-न०- आर्द्रक अदरख । सूक्ष्मफला-स्त्री० भम्यामलकी ॥ भुईआमला । सैन्धव-न० पु० स्वनामख्यात लवण ।। सेंधानोन । सूक्ष्मबदरी-स्त्री० भूबदरी ॥ झडबेर । सैन्धी-स्त्री. तालादिरसनिऱ्यांस || ताडी। सूक्ष्ममूला-स्त्री. जयन्तीवृक्ष जैतवृक्ष । बला- सैमन्तिक-न० सिन्दूर ॥ सिन्दूर । सैराय-पु. झिण्टी ।। कटसरैया। सूक्ष्मवल्ली-स्त्री० ताम्रवल्ली । जतुका || ताम्रवल्ली सरयिक-पु० यह चित्रकूटदेशमें होती है । जतुकालता यह सैरेय-पु. मालवेमें होती है। सैरेयक-पु. सूक्ष्मवीज-पु० खसखस || पोस्तके दाने । सेवाल-न० शैवाल ॥ शिवार । सूक्ष्मशाख-पु० जालबबूरवृक्ष ॥ जालबबूर सोनह-पु० लशुन ॥ लहशन । वृक्ष । सोभाजन-पु. शोभांजनवृक्ष ॥ सैंजिनेका पेड । सूक्ष्मशालि-पु० धान्य-विशेष ॥ एक प्रकारका सोम-न० कांजिक ॥ कांजी । सोम-पु० कर्पूर । सोमवल्ली॥ कपूर । सोमलता । सूक्ष्मा-स्त्री० यूथिका । क्षुद्रला । करुणी ॥ जूही। सोमज-न० दुग्ध ॥ दूध । गुजराती इलायची । ककर खिरुणी-को० सामपत्र-पु० तृण-विशेष। सूक्ष्मैला-स्त्री० श्वेतैला ॥ सफेद इलायची । सोमबन्धु-पु० कुमुद ॥ कमोदनी । सक-पु. । पद्म ॥ कुमुद । कमल । सोमयानि-न० चन्दन विशेष ॥शीतलचन्दनादि । सृक्कनी-स्त्री० ओष्ठयोः प्रान्तभाग । सोमराजिका- स्त्री०सोमराजी ।। बायची। सृजिकाक्षार-पु. स्वर्जिकाक्षार ॥ सन्जीखार । सोमराजी (न)-पु. " सृणिका-स्त्री. लाला ॥ लार ! थूक । सोमराजी-स्त्री." सृष्टिप्रदा-स्त्री. गर्भदात्री क्षुप । गर्भदा । सोमराट् ( ज् )-पु० ॥ मोटा-दे. शेवरी म० । घान। । कैरव (२०६) आयुर्वेदीय- ॥ ॥ सोमरोग-पु० स्त्रीरोग-विशेष। सौम्य-पु. उदुम्बर वृक्ष ।। गूलर । सोमलता-स्त्री. स्वनामख्यात लता ॥ सोमलता । सौम्यगन्धी-स्त्री० शतपत्री ॥ सेवती । गुलाब । सोमलतिका-स्त्री. सौम्यधातु-० कफ ।। कफ! सोमवल्क-पु० श्वेतखदिर । कट्फल । करज । सौम्या-स्त्री. महेन्द्रवारुणी । रुद्रजटा । महाज्यो- रीठा करञ्ज । पपरियाकत्था । कायफर | कंजुआ। तिष्मती। महिषवल्ली ।गुञ्जा । शीलपी ब्राह्मी। रीठाकरञ्ज । शटी। मलिका | बडी इन्द्रकला । शंकरजटा। सामवल्लरी-स्त्री. सामलता । ब्राह्मी ॥ सोमलता। बडीमालकांगनी । छिरहिही । धुंधुची । शाल- ब्राझीघास । वन । ब्रह्मी घास । कचूर मल्लिकापुष्प । सोमवल्लिका-स्त्री० सोमराजी ॥ वावची । सौर-पु.तुम्बुरुवृक्ष ॥ तुम्बुरुवृक्ष । सोमवल्ली-स्त्री० गुडूची । सोमलता | सोमराजी । सौरज-पु. " पातालगरुडी । ब्राह्मी । सुदर्शना ॥ गिलोय । सौरभ-न० कुंकुम । बोल ॥ केशर । बोल । सोमलता । बावची । छिहिटा । ब्रह्मी धास । सौराष्ट्र-न० कांस्य ॥कांसी । सुदर्शन । सौराष्ट्रक-पु० कुन्दुरु ।। कुन्दुरु सुगन्धद्रव्य । सोमवृक्ष-पु० कटूफलवृक्ष । श्वेतखदिरवृक्ष ॥ काय- सौराष्ट्रा-स्त्री० तुवरी ॥ गोपीचन्दन । फर । सफेद खैर, पापाडयाकत्था । सौराष्ट्रिक-न० विषभेद ॥ एक प्रकारका विष । सोमशकला-स्त्री० शशाण्डुली । एक प्रकारको सौराष्टिका-स्त्री० सौराष्ट्री ॥ गोपीचन्दन । ककडी । सौराष्ट्री-स्त्री० सौराष्ट्रदेशीय सुगन्धिमृत्तिका।सोर. सोमसंज्ञ-न० कर्पूर॥ कपूर । टकी मिट्टी अर्थात् गोपीचन्दन । सोमसार-पु० श्वेतखदिर । सफेद खैर । सौर-पु० असनवृक्ष । आदित्यभक्ता ॥विजयसार। सोमाख्य-न० रक्तकैरव ॥ लालकुमुद । हुलहुला सौगन्ध-न० कत्तृण ॥ रोहिससोधिया।गंधेजघास। सौरेय-पु० शुक्लझिण्टीक्षुप॥सफेद फूलकी कटसरैया। सौगंधिक-न० कत्तृण । कहार । नीलोत्पल । सौरेयक-पु." गंधेजघास । श्वेतकुमुद । नीलकमल । सौवर्चल-न० सुवर्चलदेशसभ्भूत लवण । स्व- सौंगधिका-स्त्री० कमलभेद । जिकाचार ॥ चोहारकोड़ा। काला नोन । सज्जी- सौण्डी-स्त्री० विप्पली ।। पीपल | सौध-पु० न० रौप्य ।। रूरा । सौवर्णभेदिनी-स्त्री० प्रियंगु ॥ फूलप्रियंगु । सौध-पु० दुग्धपाषाण ॥ शिरगोला वङ्ग तथा सौवीर-न० बदर । काञ्जिकास्रोतोञ्जन।सौवीराञ्जन! मराठी भाया। सन्धान-विशेष ॥ बेर । कांजी । काला शुा । सौपण-न. मरकत । शुण्डी । मरकतमणि वा सफेद शर्मा । सौवीर कांजी । पन्ना । सोंठ। सौवरिक-न० काजिक-विशेष ॥ सौवीर । कांजी । सौपी-स्त्री० पातालगरुडी ॥ छिरहिटा । सौरिक-पु० बदरवृक्ष ॥ बेरीका पेड । सौभद्रय-पु० विभतिक बहेडा । सौवीरसार-न० स्रोतोञ्जन ॥ काला शुमा । सौभाग्य-न० सिन्दूर । टंकण | सिन्दुर सु- सौवीराजन-न० अञ्जनप्रभेद ॥ सफेद शर्मा । स्कम्द-पु. पारद ।। पारा । सौभाजन-पु० शोभाञ्जनवृक्ष ॥ सैंजिनेका. पेड । स्कन्दांशक-पु. सौमनसा-स्त्री० जातीपत्री ॥ जावित्री । स्कन्धतरु-पु० नारिकेलवृक्ष || नारियलका पेड । सौमनस्यायनी-स्त्री० मालतीपुष्पकलिका | माल- स्कन्धफल-पुं० नारिकेलवृक्ष। उदुम्वरवृक्ष ॥ नारि तीके फूलको कली। यलका पेड / गूलरका पेड़ । सौमेरुक-न० सुवर्णक ॥ सोना। स्कन्धबन्धना-स्त्री. मधुरिका । सोआ । खार। TWISTING औषधिकोप । ( २०७ ) । पेड । स्कन्धरुह-पु० वटवृक्ष । बडका पेड स्थिरपुप्पी [न् ] -पु० तिलकवृक्ष ॥ तिलकवृक्ष स्तनयित्नु-पु० मुस्तक || मोथा । स्थिरफला-त्री० • कूष्माण्डी ।। पेठा । कोहडा । स्तनितफल--पु० विकण्टकवृक्ष ॥ गर्जाफल । स्थिर गा-स्त्री० नीलीवृक्ष ॥ नीलका पेड । स्तन्य-न. दुग्ध ॥ दूध । स्थिररागा-स्त्री. दारुहरिद्रा ॥ दारुहलदी। स्तम्भकरि-पु० धान्य ॥ धान । स्थिरसाधनक-पु० सिन्धुवारवृक्ष | सिझालवृक्ष । स्त्रीचित्तहारी (न)-पु० शोभाञ्जनवृक्षसैजिनका स्थिरसार-पु० शाकवृक्ष । शेगुनवृक्ष । स्थिरा-स्त्री० शालपर्णी । काकोली । शाल्मली वृक्ष। स्त्रीप्रिय-पु० आम्रवृक्ष । आमका पेड । शालवन । काकोलावृक्षं । सेमलका पेड । स्नोरञ्जन-न० ताम्बल || पान । स्थिरांध्रिप-पु० हिन्तालवृक्ष । एक प्रकारका ताड । स्त्रीरोग-पु० स्त्रीजातीयरोग-विशेष ॥ प्रदरादि । स्थिरायु [स् ]-पु०शाल्मलीवृक्ष ।। सेमलका पेड। स्थलकन्द-पु. वनोद्गव ओल्ल ॥ वनशूरन । स्थूल-पु० पनस || कटहर । स्थलकमल-न० स्थलपद्म ॥ गेंदेका वृक्ष । स्थूलक पु० तृण-विशेष । स्थलकुमुद-पु. करवीरवृक्ष ॥ कनेरका पेड स्थूलकंगु-पु० वरकधान्य । चीनाधान । स्थलपद्म-न० स्वनामख्यातपुष्प । प्रपौण्डरीक ॥ स्थूलकणा-स्त्री० स्थूलजीरक ।। कलौंजी । स्थलकमल, गैंदा, गुलाब, सेवती, गुलदावदी, स्थूलकण्टक-पु० जालबबूर ।। जालबबूर । मौलसिरी इत्यादि । पुण्डारिया । स्थूलकण्टकिका-त्री० शाल्मलीवृक्ष ॥ सेमल- स्थलपद्म-पु० माणक | मानकन्द । का पेड । स्थलपद्मिनी-स्त्री० स्थलपद्म॥ वेटतामर देशान्तरी- स्थूलकण्टा-स्त्री० वृहती कटाई। यभाषा। स्थूलकन्द-पु० रक्तलशुन । शूरण । हस्तिकन्द । स्थलमञ्जरी-त्री० अपामार्ग ॥ चिरचिरा ! माणकन्द ॥ लालल्हशन । जमीकन्द । हस्ति । स्थलश्रृङ्गाट-पु० गोक्षुरक ।। गोखुरू । कन्द । मानकन्द । स्थलशृङ्गाटक-पु०॥ स्थूलचंचु-पु० महाचंचुशाक । बडाचेबुना । स्थलेरुहा-स्त्री० घृतकुमारी || धीकुवार । स्थूलजीरक-पु० जीरकभेद ॥ कलौजी । स्थविर-न० शैलेय ।। पत्थरका फूल । भूरिछरीला। स्थूलताल-पु० हिन्ताल ।। एक प्रकारका ताड । स्थविरा-स्त्री. महाश्रावणिका ॥ बड़ी गोरखमुण्डी। स्थूलत्वचा-स्त्री० काश्मरी ॥ कुम्भेर । स्थानचञ्चला-स्त्री० बर्बरीवृक्ष | वनतुलसी। स्थूलदण्ड-पु० देवनल || बडा नरसल । स्थापनी-स्त्री० ० पाठा ॥ पाढ । स्थूलदर्भ-पु० मुञ्ज ।। मूज । स्थाली-स्त्री. पाटलावृक्ष ।। पाडर । स्थूलदला-स्त्री० घृतकुमारी ।। धीकुवार । स्थालीवृक्ष-पु. तरुप्रभेद ।। बेलियापपिल । स्थूलनाल-पु० देवनल । बडा नरसल | स्थावरादि-स्त्री० वत्सनाभविष ॥ वत्सनाभवित्र । स्थूलपट्ट-पु० कार्पास ॥ कपास । स्थिर-पु० धववृक्ष ।। धौवृक्ष । स्थूलपुष्प-पु० अगस्त्यवृक्ष ॥ हथियावृक्ष । स्थिरगन्ध-पु० चम्पकवृक्ष ॥ चम्मवृक्ष । स्थूलपुप्पा-स्त्री० पर्वतजात अपराजिता ।। पहाडी स्थिरगन्धा-स्त्री. पाटला । केतकी ॥ पाडर । अपराजिता अर्थात् कोइल। स्थूलपुष्पी-स्त्री० यवातक्ता ॥ "शंखिनी । स्थिरच्छद-पु. भूजपत्रवृक्ष ।। भोजपत्रवृक्ष । स्थूलफल-पु० शाल्मलीवृक्ष ॥ सेमलका पेड । स्थिरजीविता-स्त्री० शाल्मलीवृक्ष i सेमलका पेड। स्थूलफला-स्त्री० शणपुष्पी ॥ शपहुली। वनसन । स्थिरपत्र-पु० हिन्ताल । एक प्रकारका ताड । स्थूलमरिच-न० कक्कोल ॥ कंकोल । स्थिरपुष्प-पु०चम्पकवृक्ष । बकुलवृक्ष ॥ चम्पावृक्षा स्थूलमञ्जरी-स्त्री० अपामार्ग ॥ चिरचिटा। मौलसिरीका पेड। स्थूलमूल-न० चाणक्यमूल ॥ छोटी मूली । केतकी। ॥
(२०८) आयुर्वेदीय- ॥ स्थूलवाकृत-पु० ब्राह्मणयष्टिका || भारङ्गी । स्थूलवल्कल-पु० रक्तलोध्र ॥ लाल लोध । थूलवृक्षफल-पु० स्निग्धापण्डीतक । बडा स्नुक (ह) स्नुहीवृक्ष ॥ सेहुण्डवृक्ष । स्नुक्छद-पु० क्षीरकंचुकीवृक्ष ॥ क्षीरीशवृक्ष । स्नुपा-स्त्री० स्नुहीवृक्ष ।। सेहुण्डवृक्ष ! मैनफल भेद । स्नुहा-स्त्री० " स्नुहि-स्त्री० ॥ आम । स्थूलवैदेहीं-स्त्री० गजपिप्पली ॥ गजपीपर । स्थूलसर-पु. शर-विशेष ॥स्थूलशर । स्नुही-स्त्री० सेहुण्डवृक्ष ॥ थूहर । सेहुण्डवृक्ष । स्थूलशालि-पु० शालिधान्यभेद ॥ मोटे धान । स्नेहफल-पु० तिल ॥ तिल । स्नेहरंग-पु० ॥ स्थूलस्कन्ध-पु. लकुच ॥ वडहर । स्नेहवती-स्त्री • मेदा ॥ मेदा औषधी। स्थूला-स्त्री. गजपिप्पली । एरवारु । वृदेला ॥ग- स्नेहबस्ति-स्त्री० अनुवासनबस्ति ॥ तैलपिचकारी । जपीपर । बडी ककडी । बडी इलायची। स्नेह विद्ध-न० देवदारु ॥ देवदारु । स्थलांशा-स्त्री • गन्धपत्रा ॥ वनमें होनेवाली शटी। स्थूलाम्र-पु० महाराजचत ॥ बडे । आम मालदमे स्नेहबीज-पु० प्रियालवृक्ष । चिरोंजीका पेड । स्नेहक्षार-पु० क्षारविशेष । साबुन । स्थूलैरण्ड-पु० वृहतू-एरंडवृक्ष ॥ बडा अंडका स्पर्शमणिप्रभव-न० स्वर्ण | सोना । स्पर्शलज्जा-स्त्री० लज्जालु ।। लज्जावन्ती।छुईमुई। स्थूलला-स्त्री० वृहदेला ।। बडी इलायची । स्पर्शशुद्धा-स्त्री० शतमूली । शतावर । स्थोणेय, स्थौणेयक-न० ग्रेथिपर्ण । ग्रन्थिपर्णा- स्पृक्का-स्त्री० पृका ॥ असवरग । भेद ॥ गठिवनं । गठिबनभेद अर्थात् थुनेर स्पृशा-स्त्री० भुजंगघातिनी ॥ कंकाली वंगदेशीयभाषा थुनियार । स्पृशी-स्त्री० कण्टकारी ।। कटेहरी । स्मृह्य-पु० मातुलुगक ॥ बिजौरानींबू । स्नानतण-न० कुश। कुशा । स्नायु०स्त्री० वायुवाहिनी नाडी ॥ जिससे अङ्ग स्फटिक-पु० सूर्यकान्तमणि । स्वनामख्यात मणि । प्रत्यङ्गके जोड बंधे रहते हैं, वह नाडी अथवा स्फटिकारि ।। आतसी शीसा-फारसीभाषा । फटि. कमणि । फटकिरी । स्नायुर्म [ न् ] नेत्ररोग-विशेष । स्फटिका-स्त्री० स्फटिकारि ॥ फटकरी । स्निग्ध-पु०. रक्तरंडवृक्ष । सरलक्ष । स्फटिकाद्रिभिद-पु० कर्पूर ॥ कपूर । अण्डका पेड । धूपसरल। सरलवृक्ष । स्फटिकाम्र-पु. " स्निग्धतण्डुल-पु० पष्टिशालि || साटीधान । स्फटिकारि-स्त्री. श्रेतवर्ण वाणकद्रव्य-विशेष ॥ स्निग्धदारु-पु० सरलवृक्ष ! देवदारु ।। सरल. फटकिरी । वृक्ष । देवदार । स्फटी-स्त्री० ॥ स्निग्धपत्रक-पु० मज्जरतृण । वृतकरच ।गुच्छक- स्फाटक-न० स्फटिक ॥ फटिक । स्फाटिक-न० " स्निग्धपत्रा-स्त्री० पु० यदरी। पालङ्कय । काश्मरी॥ स्फाटिकोपल-पु० बेरी । पालगका शाक । खम्मारी। खुमेर । स्फाटीक-न०" स्निग्धापण्डतिक-पु. मदनवृक्ष-विशेष ॥ मैनफल स्फिक् (चू )-स्त्री० ऋटिप्रोथ ।। कमरके मांसक वेक्ष भद । स्निग्धफला-स्त्री. वालुकी ॥ वालुकी नामवाली स्फिग्घातक-यु० कटफल ।। कायफल । स्निग्धा-स्त्री. मेदा ॥ भेदाऔषधी । स्फुटबन्धनी-स्त्री० पारावतपदी ॥ मालकांगनी । स्फुटी-स्त्री० कर्कटीफल || फूट । नस । रञ्ज। " पिण्ड। ककही।
औषधिकोष। (२०९) जवाखार। स्वजिकाक्षार-पु० स्वी (न् )-पु० ॥ म्फूर्जक-पु० तिन्दुकवृक्ष ॥ तेंदूवृक्ष । स्वयंगुप्ता-स्त्री० शूकशिम्बी ॥ किवाँच । स्फोटक-पु० रोग-विशेष ॥ फोडा । स्वयंभुवा-स्त्री • धूम्रपत्रा ।। तमाखु । स्फोटबीजक-पु. भल्लातक ॥ भिलावेका वृक्ष । स्वयम्भू-स्त्री० माषपर्णीलता । लिंगिनीलता ॥ स्मरवृद्धिसंज्ञ-पु. कामवृद्धिक्षुप ।। कामजकर्णाटक मघवन । पञ्चगुरिया । देशीय भाषा । स्वरभंग, स्वरभेद-पु० स्वनामख्यातरोग ।। कण्ठमें स्मराम्र-पु० रांजाम्र । श्रेष्ठ आम | एक प्रकारका होता है। स्मरासव-पु. मद्यभेद । स्वरस-पु. शिलापिष्टद्रव्यरस ॥ स्यन्दनदुम-पु० तिनिशवृक्ष । तिरिच्छवृक्ष । स्वरालु-पु. वचा ॥ वच । स्यन्दनि-स्त्री." स्वर्जिक-पु० स्वजिकाक्षार । यवक्षार ॥ सज्जीखार। स्यमीका-स्त्री० नीलिका । स्योनाक-पु० श्योनाक ॥ अरलु । टू । सर्जिकाक्षार || सज्जाखार। संसिनीफल-पु० शिरीषवृक्षः॥ सिरसका पेड । स्वजिक्षार-पु." संसी (न्)-पु. पीलुवृक्ष ॥ पलुिवृक्ष । स्रवन्ती-स्त्री. औषधि भेद ॥ स्वर्ण-न० सुर्वण ! धुस्तूर । गौरसुवर्णशाक । स्रवा-स्त्री. मूर्वा ॥ चुरनहार । नागकेशर ॥ सोना । धत्तूरा । गौरसुवर्णशाक । स्रावक-न० मरिच ॥ मिरच । नागकेशर । स्रावनी-स्त्री. ऋद्धि ॥ ऋद्धिऔषधी। स्वर्णकण-पु० कणगुग्गुल ।। कणगूगल । साविका-स्त्री० सर्वपिका । स्वर्णकतकी-स्त्री. हरिद्रावर्णकेतकीपुष्प। पीले फूल. सुगदारु-न० व्याघ्रपादवृक्ष ॥ विक्रतवृक्ष । की केतकी। सुन्नी-स्त्री० स्वर्जिकाक्षार ॥ सज्जीखार । स्वर्णगैरिक-न० सुवर्णगैरिक ॥ पीला गेरू । सुता-स्त्री० हिंगुपत्री ॥ हीङ्गपत्री । स्वर्णज-न. रंग ॥राँग । स्ववा-स्त्री० शल्लकीवृक्ष । मूलता ॥ शालईवृक्ष । स्वर्णजीवन्ती-स्त्री० वृक्ष विशेष ॥ स्वर्णजीवन्ती । चुरनहार । स्वर्णदी-स्त्री. वृश्चिकाली ॥ वृश्चिकाली । मुवावृक्ष-पु० विकंकतवृक्ष ॥ कण्टाई। स्वर्णदु-पु० आरग्वधवृक्ष ॥ अमलतासका पेड । स्रोतोञ्जन-न० यमुनानदीस्रोतोभवकृष्णवर्णाञ्जन ॥ स्वर्णपत्रिका-स्त्री० हेमपत्री ॥ सनाप । काला शुमा। स्वर्णपाचक-पु. टङ्कण || सुहागा । स्वगुप्ता-स्त्री० शूकशिम्बी । लज्जालु ॥ कौंछ । स्वर्णपारेवत-न० महापारेवत ।। बडा पारेवत । लज्जावती । स्वर्णपुष्प-पु० आरग्वधवृक्ष । चम्पकवृक्ष । स्वच्छ-न० मुक्ता । विमलानामक उपरस ॥ बब्बुलवृक्ष । अमलतासका पेड । चम्पावृक्ष । मोती । निर्मलरस। स्वर्णपुष्पा-स्त्री०कलिकारी । स्वर्गुली । सातला ॥ स्वच्छपत्र-न. अभ्रक । अभ्रक । स्वच्छमणि-पु० स्फटिक ॥ फटिकमणि । कलिहारीवृक्ष । हेमपुष्पी , सातलावृक्ष । स्वच्छा-स्त्री श्वेतदूर्वा ॥ सफेद ब । स्वर्णपुष्पी-स्त्री० आरग्वध । स्वर्णकेतकी ॥ अम- स्वधाप्रिय-न० कृष्णतिल ॥ काले तिल । लतासका पेड ( पीले फूलकी केतकी । स्वनिताह्वय-पु० तांडुलीयशाक ॥ चौलाईका स्वर्णफला-स्त्री० पीतरम्भा ॥ पीला केला । स्वर्णभृङ्गार-पु० स्वर्णशृंगराज ॥ पीला भगरा । स्वपिंडा-स्त्री० पिण्डखज्जरी ।। पिण्डखज़र । स्वर्णमाक्षिक-न. स्वनामख्यात उपधातु ॥ स्वप्नकृत्-न० सुनिषण्णक ॥ शिरीआरी शाक । सोनामाखी। बब्बूर । कीकरवृक्ष । शाक। Nanwr.aar. + ledAPRILamsaudesy २७ (२१०) आयुर्वेदीय- स्वर्णयूथी-स्त्री० प्रतिवर्ण यूथिका ॥ पीली जूही । स्वादुपिण्डा-स्त्री० पिण्डखज्ररी [i पिण्डखजूर । स्वर्णलता-स्त्री. ज्योतिष्मती || मालकांगनी । स्वादुपुष्प-पु० कटमी ॥ कटभी। स्वर्णवणा-स्त्री. हरिद्रा ॥ हलदी । स्वादुफल-न० वदरीफल ॥ वेर । स्वर्णवल्कल-पु. श्योनाकवृक्ष ।। शोनापाठा । स्वादुफला-स्त्री० कोलिद्राक्षा ॥ बेर । दाख । अरलु । टू। स्वादुमज्जा (न्)-पु. पवतज पालवृक्ष ॥ अ. स्वर्णवल्ली-स्त्री. लता-विशेष | स्वर्णवल्ही । खरोटवृक्ष । स्वर्णशेफालिका-त्री० आरग्वधवृक्ष । पतिशेफा स्वादुमांसी-स्त्री० काकोली ॥ काकोली औरधी । लिका ॥ अमलतासवृक्ष । पीली शेफालिका । स्वादुमूल-न० गजर ।। गाजर । स्वर्णक्षारी श्री. औषधि विशेष ॥ एक प्रकारको स्वादुरसा-स्त्री. काकोली । आम्रतिकफल। कटेहरी। मदिरा । शतावरी । द्राक्षा || काकोली औषधी। स्वर्णांग-पु. आरग्वधवृक्ष । अमलतास । अम्बाडा । मदिरा । शतावर । दाख | स्वर्णानी-स्त्री. महीशूगदिदेशे प्रसिद्ध वृक्षविशेष । स्वादुलता-स्त्री० विदारी ॥ विलारीकन्द । स्वर्णारि-न० गन्धक ।। गन्धक । स्वादुशुद्ध-न० सैन्धवलवण । समुद्रलवण ।। स्वर्गुली-स्त्री० क्षुप-विशेष । हेमपुष्पी ।। स्वर्गुली । सैंधानोन। पांगा। स्वल्पकेशरी [ ] पु० कोविदारवृक्ष :॥ कच- स्वाद्वम्ल--पु० दाडिमवृक्ष ।। अनारका पेड | नारवृक्ष । स्वाद्वी-स्त्रीय ० द्राक्षा ।।दाख । स्वल्पकरी (न् ) पु. भूतकेशतृण । स्वायम्भुवी-स्त्री० ब्राह्मी ॥ ब्रह्मीघास । स्वल्पपत्रक-पु. गौरशाक ।। मौवाभेद । स्वेद--पु० धर्मकारकक्रिया-विशेष । स्वल्पपत्रनिशा-श्री० क्षुद्रपत्रविशिष्ट हरिद्रावत् स्वेदपर्णी (न् )-पु० पूतिद्रुम । वृक्ष-विशेष। इति श्रीशालिग्रामवश्यकृतशालिग्रामौषधशब्दसा. स्वल्पफला-स्त्री० पुषाभेद । हाऊबेरभेद । गरे सकाराक्षरे द्वात्रिंशस्ततरङ्गः ॥ स्वस्तिक-पु० न• सितावरशाक ॥ शिरिआरशिाक। है. स्वस्तिक-पु. लशुन ॥ ल्हशन । हसदाहन-न० अगुरु ॥ अगर । स्वादु-पु• मधुररस । गुड । जीवक । सुगन्धि- हंसपदी-स्त्री० गोधापी । गोधापी विशेष ।। द्रव्य-विशेषामठिारस । गुड । जीवक औषधी । लालरङ्गका लज्जालु। अगुरुसार। हंसपाद-न० हिंगुल । सिङ्गरफ । स्वादु-स्त्री० द्राक्षा ॥ दाख । हंसपादिका-स्त्री० हंसपदी | लाल रङ्गकालज्जालु । स्वादुकण्टक-पु० विकङ्कतवृक्ष । गोक्षुर । विक-सपादी-स्त्री० हंसपदी विशेष ।। ण्टकवृक्ष ॥कण्टाई। विकङ्कतवृक्ष । गोखुरू । विक- समाषा-स्त्री० माषपर्णी ॥ मषवन । एटक, गीफल। हंसलोमश-न० कासीस ॥ कसीस । स्वादुकन्दा-स्त्री० विदारी ।। विदारीकन्द । हंग्लोहक-न० पित्तल || पीतल । स्वादुका-स्त्री० नागदन्ती ॥ हायीशुण्डवृक्ष । हंसवती-स्त्री. हंसपदी । लाल रंगका लज्जालु । स्वादुखण्ड -पु० गुड ॥ गुड । हसबीज-न० हंसडिम्ब ।। इसका अण्डा । स्वादुगन्धा-स्त्री भूमिकूष्मांड । रक्तशोभाजन ॥ हंसानि-न० हिंगुल ।। सिङ्गरफ । विदारीकन्द । लालसजिनका पेड। हंसाभिख्य-न० रूप्य ॥ रूपा । स्वादुजम्बीर-पु०श्रीहट्टदेशीयजम्बार॥ एक प्रका• हञ्जिका-स्त्री० भाङ्गी ॥ भारंगी । रका जम्भरीि-मीठा नींबू । हटपर्णी-न० शैवाल || शिवार । स्वादुपर्णी-स्त्री० दुग्धिका । दूधिया । हट्टाविलासिनी-स्त्री० गन्धद्रव्य-विशेष । हरिद्रा .॥ स्वादुपादिका-त्री • काकमाची ।। मकोय .. नखीगन्धद्रव्यः । हलदी। 3 औषधिकोष । (२११ ) हबुषा-श्री." " हठपर्णी-स्त्री. शैवाल !! शिवार । हरित्-पु. मुद्ग । मूंग । हठालु-स्त्री० कुम्मिका । जलकुम्भी । हरित्-न० हरिद्रा ॥ हलदी । हठी-स्त्री." हरित-न० स्थोणेयक ॥ थुनेर । हनील-पु. केतकी ।। केतकी। हरित-पु० मन्थाकतृण || मन्थाकतृण । हनु-स्त्री० हृट्टविलासिनी ॥ नखी । हरितपत्रिका-स्त्री. पाची ॥ पादीलता । हपुषा-स्त्री० वाणिग्द्रव्य-विशेषः । हावेर । हरितशाक-पु० शिग्रु ॥ सैंजिनेका पेड । हरिता-स्त्री. दूर्वा । जयन्ती । हरिद्रा। कपिलद्राक्षा । हयकातरा-स्त्री० अश्वकातरावृक्षाघोडाका नरावृक्ष। पाची । नालदूर्वा ॥ दूब । जैतवृक्ष । हलदी । हयकातरिका-स्त्री कपिलरङ्गकी दाख । पाचौलता । हरीदूब । ह्यगन्ध-न० काचलवण । कचिया नोन । हरिताल-न० स्वनामख्यातपीतवर्णधातु ॥ हरताल । हयगन्धा-स्त्री० अश्वगन्धा । अजमोदा | अस. हरितालक-न० " गन्ध । अजमोद । हरितालिका स्त्री० : ।। दुव । हयपुन्छी-त्री० माषपणी ॥ मघवन । हरिताली-स्त्री. " हयप्रिय-पु० यव ॥ जो। हरिताश्म(न् )-न० तुत्थ ।। तूतिया । हयप्रिया-स्त्री० अश्वगन्धा । खजूरी ॥ असगन्ध । हरित्पर्ण-न० मूलक ॥ मूली । खजर। हरिदश्व-पु० अर्कवृक्ष || आकका पेड । हयमार-पु० करवीरवृक्ष ॥ कनेरका पेइ । हरिदर्भ-पु० हरिद्वर्णकुश ॥ हरिकुशा । हयमारक-पु० हरिदगर्भ-पु. हयमारण-पु० अश्वत्थवृक्ष | पीपलका पेड़ । हरिद्रव-पु. नागकेशरचूर्ण ॥ नागकेशरका चूरन । हयवाहनशंकर-पु० रक्तकाञ्चनपुष्पवृक्षा। कचनार हरिद्रा-स्त्री० स्वनामख्यात औषधि । हलदी। वृक्ष। हरिद्राद्वय-न० हरिद्रा, दारुहरिद्रा ॥ दलदी, हया-स्त्री० अश्वगन्धा ॥ असगन्ध । दारुहलदी । हयानन्द-पु० मुद्ग ॥ मूंग । हरिद्राभ-पु. पीतशाल | पियाखालबादेशीयभाषा। हयारि-पु० करवीरवृक्ष ।। कनेरवृक्ष । हरिद्रु-पु० दारुहरिद्रा । वृक्ष-विशेष !! दारहलदी । हयाशना-स्त्री० शल्लकोवृक्ष ॥ शालईवृक्ष । हलहुआ वृक्ष। हयेष्ट-पु. यव || जौ। हारद्वाज-न० मुनिफल ॥ पिस्ता । हरण-न० स्वर्ण । शुक्र ।। कपर्दक । उष्णोदक । हरिन्नाम (न् )-पु० मुद्ग ।। मूंग । सोना । वीर्य । कोडी । गरम जल । हरिन्नेत्र-न. श्वेतपद्म । सफेदकमल । हरतेजः (सू)-न. पारद ॥ पारा । हरिन्माण-पु० मरकतमणि ॥ पन्नाः । हरबीज-न. " हरिन्मुद्द-पु० शारदमुद्ग ॥ हरीमूंग । हरहरा-स्त्री. द्राक्षा ॥ दाख । हरिपर्ण-न० मूलक ।। मूली । हरिक्रान्ता-स्त्री. विष्णुकान्ता ॥ कोइल । हरिप्रिय-न० कृष्णचन्दन । अगुरु । उशीर ।। हरिचन्दन-पु० न० चन्दन विशेष ॥ हरिचन्दन । कलम्बक। अगर खस । हरिचन्दन-न० कुंकुम । पद्मकेशर केशर ।कमल. हरिप्रिय-पु० कदम्बवृक्ष । पतिभृङ्गराज । विष्णु. केशर । कन्द। करवीरवृक्ष । बन्धकवृक्ष । शंख ।। कद. हरिणाक्षी स्त्री हटविलासिनीनाम' गन्धद्रव्यानखी। मका पेड । पीला भागरा । विष्णुकन्द । हरिणी-स्त्री० मञ्जिष्ठा । स्वर्णयूथी ॥ मजीठ । पीली कनेरवृक्ष । दुपहरियाका पेड । शंख । जूही। होरीप्रया-स्त्री० तुलसी । तुलसी ।
(२१२) आयुर्वेदीय- ॥ हरिवालुक-ज० एलवालुक ॥ एलुआ । हास्तकरल-पु० महाकरञ्ज ॥ बड़ी करन। हरिभद्र-न" हस्तिकणक-पु० किंशुकभेद ॥ हस्तिकर्णपलास । हरिमन्थ-पु०. गणकारिका । चणक ॥ अरुणी। हस्तिकर्णदल-पु०" चने। हस्तिकोलि-पु० बदरीभेद ॥ पाँडा बेर । हरिमन्थक-पु० चणक ॥ चने । हस्तिघोषा-स्त्री. बृहद्घोषा ॥ बड़ी तोरई । हरिमन्थज-पु. चणक । कृष्णमुद् ॥ चने । हस्तिघोषातकी-स्त्री० कालीमूंग । हस्तिचारिणी-स्त्री० ० महाकरञ्ज ।। बड़ी करञ्ज । हस्तिदन्त-न० मूलक ।। मूली । हरिवल्लभा--स्त्री. जया । तुलसी ॥ हरिबीज-न० हरिताल ॥ हरताल । हस्तिदन्त-पु०" हतिकी-स्त्री० स्वनामख्यातवृक्ष ।। हरड,हर, हड। हस्तिदन्तक-पु० हस्तिफला-स्त्री० एवीरु ॥ ग्रीष्मकालकी ककडी । हरेणु-स्त्री. रणुकानामक गन्धद्रव्य ॥ रेणुका ! हस्तिनी-स्त्री० हट्टविलासिनी ॥ नखी । हरणु, हरेणुक-पु० सतील ॥ मटर । हस्तिपत्र-पु० हस्तिकन्द ।। इस्तिकन्द । हयित्नु-२० स्वर्ण ।। सोना । हर्षणी-स्त्री. सोमलताभेद ॥ सालता वंगदेशीय हस्तिपर्णिका-स्त्री. राजकोषातकी॥वियातोरई । हस्तिपर्णी-स्त्री० कर्कटी ॥ कडी । भाषा । हर्षिणी-स्त्रो० विजया। संविदामञ्जरी ॥ भंग,गांजा, हस्तिलोध्रक-पु० लो ॥ लोध । हस्तिरोहणक-पु० महाकरञ्ज | बडी करञ्ज । गांझा। हस्तिविषाणी-स्त्री० कदली ॥ केला। हलदी-श्री. हरिदा ॥ हलदी । हस्तिशुण्डा, हस्तिशुण्डी-स्त्री० क्षुप-विशेष ॥ हलराक्ष-९ आहुल्य || "तरवट, काश्मीर- हाथीशुण्डा । देशीय भाषा । हस्तिश्यामाक-पु. सस्य विशेष ॥ हथियासमा । हलाहल-पु० विषभेद ॥ एक प्रकारका विष । हहल-न. हालाहल || हालाहल विष । हलिनी-स्त्री. लांगलिकीवृक्ष || कलिहारी । हाटक-न० स्वर्ण । धुस्तूर || सोना । धत्तूरा । हलिप्रिय-पु० कदम्बवृक्ष ।। कदमका पेड । हायन-पु० शालिधान्यभेद । अग्निशिखावृक्ष ॥ हलिप्रिया-स्त्री० मदिरा ॥ मद्य । एक प्रकारके धान । कलिहारी । हली-स्त्री० कलिकारीवृक्ष । कलिहारीवृक्ष । हारक-पु० शाखोटवृक्ष ॥ सहोरावृक्ष । हलीन-पु० शाकवृक्ष ॥ शेगुनवृक्ष । हारहारा-स्त्री• कपिलद्राक्षा। अंगूर यवनिकाभाषा । हलीमक-पु. राग-विशेष । हारहूर-न० मद्य ॥ मदिरा । हल्लक-न० रक्तकहार ।। लाल कुमुद । हारहूरा-स्त्री० द्राक्ष ॥ दाख । हविः (सू)-न० घृत ॥ घी। हारिद्र-पु० कदम्बवृक्ष । विषभदे ॥ कदमका पेड हविगन्धा-स्त्री. शमीवृक्ष ॥ छौंकरावृक्ष । हारिद्रविष । हविर्मन्थ-पु. गणिकारिकावृक्ष ॥ अरणी । हारिद्रफल-न० फल-विशेष । हविष्य-न० घृत ॥ घी। हारिद्रमूला-स्त्री० कलिङ्गशुण्टी ॥ कलिंगसाठ हसन्ती-स्त्री० मल्लिका-विशेष ॥ एक प्रकारका हार्य-पु. विभीतकवृक्ष ॥ बहेडा वृक्ष । मोतिया। हालहल, हालहाल-न० विषभेद । एक प्रकारका हस्तिकण-पु० एरण्ड | पलाशभेद । हस्तिकन्द । रक्तैरण्ड । अण्डका पेड़ । हस्तिकर्ण-पलाशभेद। हाला-स्त्री० मद्य । तालादिनिर्यास ॥ मदिरा ताड़ी हस्तिकन्द । लाल अण्ड । हालहल-न० पु० विषभेद । मद्य ॥. हालाहल हास्तकन्द-पु० बृहत्कन्द विशेष ॥ हस्तिकन्द । विष । मदिरा। P विष ।
औषधिकोष। (२१३६ तेला भाषा । पत्री। हालाहली-स्त्री० मदिरा || मद्य । शराब, फारसी हिमतैल-न० कर्पूरतैल ।। कपूरका हिमदुग्धा-स्त्री० क्षीरिणी ॥ कांचनक्षीरी। हाहल-न. हालाहलविष | विष । हिमद्रुम-पु०महानिम्ब ।। बकायननीम । हालहाल-न० विष । एकभाँतिका जहर । हिमवालुक-पु. कर्पूर ॥ कपूर हिंस्रा-स्त्री० काकादनी । जटामांसी । गवेषुका ॥ हिमवालुका-स्त्री. काकादनीवृक्ष । बालछड, जटामांसी।गरहेडुआ। हिमशर्करा-स्त्री० यावनालशर्करा ॥ शीरोखस्त । हिक्का-स्त्री रोग-विशेष || हुचकी । हिमहासक-पु० हिन्तालवृक्षाएक प्रकारका ताड । हिंगु-न० निर्यास-विशेष । वंशपत्री ॥ होग। वंश- हिमा-त्री० सूक्ष्मैला । रेणुका । भद्रमुस्ता ! नाग- रमुस्ता । पृक्का । चणिका ॥ छोटी इलायची । हिंगुनाडिका-स्त्री० नाडीहिंगु ॥ नाडीहींग । रेणुका गन्धद्रव्य । भद्रमोथा । नागरमोथा । हिंगुनि-स-पु० निम्बवृक्ष । हिंगुरम् ॥ नीमका असवरग । चणिकातृण । पेड । हांगका रस । हिमांशु-पु० कर्पूर ॥ कपूर । हिंगुपत्र-पु० इंगुदीवृक्ष | हिंगोट । हिमांशुभिख्य-न० रौप्य || रूपा । हिंगुपत्री-स्त्री. बाष्पीका ॥ होगपत्री। हिमाद्रिजा-स्त्री० क्षीरिणी ॥ पीलेदूधको कटेरी । हिंगुपत्री-स्त्री० वंशपत्री || वंशपत्री । काञ्चनक्षरी। हिंगुल-पु० न० स्वनामख्यात रागद्रव्य-विशेष ॥ हिमानी-स्त्री. हिमसहति । यवनालशर्करा ॥ तु. हिंगुल, इंगुल्लू-सिंगरफ। पार । शीरखिहा । हिंगुलि-पु." हिमारांति-पु० चित्रकवृक्ष । अर्कवृक्ष ॥ चीता. हिंगुलिका-स्त्री० कण्टकारी ।। कटेहरी । वृक्ष। आकवृक्ष । हिंगुली-स्त्री. वार्ताकी । वृहती ॥ बैंगन ! भटक- हिमालय-पु०शुक्लखदिर ॥ पपरियाकत्था । हिमालया स्त्री० भूम्यामलकी ॥ भुईंआमला । हिंगुल-पु० न० हिंगुल ।। सिंगरफ । हिमाज-न० उत्पल ।। कुमुद । हिंगुशिराटिका-स्त्री. वंशपत्री ॥ वंशपत्री । हिमावती-स्त्री० स्वर्णक्षीरी। कटुपर्णी ॥ काञ्च. हिंगूल-न० मधुमूल || महुआलु । नंक्षीरी । चोक-ऊंटकटीरा भेद । हिज,हिज्जल-पु० जलसमीपस्थेवृक्ष-विशेष ॥ तालके हिमाल, हिमाय-पु० कर्पूर ॥ कपूर । किनारका तरुवर । समुद्रफल । हिमाश्रया-स्त्री० स्वर्णजीवन्ती । हिण्डीर-पु० समुद्रफेन । वार्ताकु ॥ समुद्रफेन । हिमोत्तरा-स्त्री० कपिद्राक्षा ॥ भूरे रंगको दाख । बैंगन । हिमोत्पन्ना-स्त्री० यावनाली ॥ शीरखिस्तभेद । हितावली स्त्री० औषधि-विशेष । हिमोद्भवा-स्त्री. शटी ॥ अंबियाहलदी । हिन्ताल-पु० स्वनामख्यात वृक्ष । एक प्रकारका | हिरण-न० स्वर्ण । वराटक ।। सोना। कौडी । ताडं । हिरण्य-न० स्वर्ण । धुस्तूर । रौप्य ॥ सोना । हिम-न० चन्दन । पद्मक । रंग। मुक्ता नवनीत॥ घसूरा । रूपा। चन्दन ! पद्माख । रांग । मोती। नैनी । हिरण्यद्रु-द्रव्य-विशेष ॥ रेवतचीनी कुत्र- हम-पु०चन्दनवृक्ष । कर्पूर॥ चन्दनवृक्ष । कपूर । चितभाषा । हिमक-पु०विकंकतवृक्ष || कण्टाई । विकंकतवृक्ष । हिरण्यरेता (स.)-पु० चित्रकवृक्ष ॥ चीता- हिमकर-पु. कर्पूर ॥ कपूर । वृक्ष । हिमजा-स्त्री० शटी । क्षीरिणी ॥ कचूर । काञ्चः हिलमोचि-स्त्री हिलमोचिका ॥ हुलहुलशाक । नक्षीरी । हिलमोचिका-स्त्री. टैया । CTEM (२१४) मायुर्वेदीय- लोध । कटेहरी । हिलमोची-स्त्रा." हेमन्तनाथ-पु० कपित्थवृक्ष । कैथवृक्ष । हिन्ताल-पु० हिन्तालवृक्ष । एक प्रकारका ताड । हेमपत्री-स्त्री० स्वर्णपत्री ।। सनाय । होर-पु० न० हीरक ॥ हीरा । हेमपुष्प-न० अशोकपुष्प । जवापुष्प ।।अशोकवृक्ष । हीरा-स्त्री० काश्मरी ॥ कुम्भेर । गुडहल । हीरक-पु० स्वनामख्यात रत्न ॥ हीरा । हेमपुष्प-पु० चम्पकवृक्ष ॥ चम्पावृक्ष । होलुक-न० गोडी मद्य ।। गुडकी मदिरा । हेमपुष्पक-पु० चम्पकवृक्ष । लोध्र ।। चम्पावृक्ष । हुतभुक् (ज)-चित्रकवृक्ष । चौतावृक्ष । हृच्छ्लन० हृदयजात शूलरोग । हेमपुष्पिका-स्त्री० स्वर्णयूथिका ॥ पीली जुही । हृत्पाषाण-न. मनःशिला ॥ मनसिल । हेमपुष्पी-स्त्री० मञ्जिष्ठा । स्वर्णजीवन्ती । इन्द्रवा- हृद्ग्रन्थ-पु. हृवण । रुणी । स्वर्गुली । मुघली । कण्टकारी।। मजीट। हृद्य-न. गुडत्वक् ।। दालचीनी । पाली जीवन्ती ।। इन्द्रायण । मोनालीवृक्ष ।मुसलो। हृद्यगन्ध-न. क्षुद्रजीरक । सौवर्चल || छोटाजीरा। चोहारकोडा । हेमफला-स्त्री० स्वर्णकदली ।। पीला केला । हृद्यगन्ध-पु० बिल्ववृक्ष | बेलका पेड । हेमयूथिका-स्त्री० स्वर्णयूयिका ॥ पीली जूही । हृद्यगन्धा-स्त्री० जाती ।। चमेली । हेमरागिणी-स्त्री. हरिद्रा ॥ हलदी । हृद्यगन्धि-स्त्री० क्षुद्रजीरक ॥ छोटा जीरा । हेमलता-स्त्री० स्वर्णजीवन्ती ॥ स्वर्णजीवन्ती । हृद्या-स्त्री० वृद्धिनामौषधि ॥ वृद्धि । हेमबल-न० मौक्तिक ॥ मोती । हृद्रोग-पु० हृदयस्थरोग-विशेष । हृद्रोगवैरी (न)-पु० अर्जुनवृक्ष ॥ कोवृक्ष । हेमबीज-न० बीज-विशेष ।। विहदाना फारसीभाषा। हेमशिखा-स्त्री. स्वर्णक्षीरी। ऊँटकटीलाभेद । हृल्लास-पु० हिका । उपस्थितवमनत्व ।। हुचकी । हेमसार-न. तुत्थ । स्वर्ण ॥ ततिया । सोना । हेम-न० सुवर्ण ।। सोना। हेमक्षीरी-स्त्री० स्वर्णक्षोरी ॥ पीले दूधकी कटेहरी । हेमांग-पु० चम्पकवृक्ष || चम्पावृक्ष । माषकपरिमाण || एकमाषा । हेमाद्रिजरण-पु० स्वर्णक्षीरी ।। काञ्चनक्षरी । हेम ( 1 )-न० स्वण । धुस्तूर । नागकेशर ॥ हेमाह्व-पु० वनचम्पक । धुस्तुर वनचम्पाधित्तरा। सोना । धतूरा । नागकेशर । हेमाह्वा-स्त्री० स्वर्णजीवन्ती ।। स्वर्णजीवन्ती । हेमकन्दल-पु० प्रवाल ।। मूंगा । हलाञ्ची-स्त्री० हिलमोचिका ।। हुलहुलशाक । हेमकान्ति-स्त्री० दारुहरिद्रा ।। दारहलदी । हेमाके खल्क-नं० नागकेशर || नागकेशर । हेम-पु० भूनिम्ब ॥ चिरायता । हेमकेतकी-स्त्री० स्वर्णकतकी ॥ पाली केतकी'। हैमन्तिक-न० शालिधान्य ॥ शालिधान, हंसराज । हेमगन्धिनी-स्त्री० रेणुकाल्य गन्धद्रव्य ॥ रेणुका । हैमवत-पु० बिषभेद । एक प्रकारका विष । हेमगौर-पु० किंकिरातवृक्ष । हैमवती-स्त्री० हरीतकी । स्वर्णक्षीरी । श्वेतवचा । हेमतार-न० तुत्थ ।। तूतिया । रेणुका । कपिलद्राक्षा । अतसी । कटुपर्णी ।। हेमदुग्ध, हेमदुग्धक-पु० उदुम्बरवृक्ष ।। गूलरका हरड। पीले दूधकी कटेहरी। सफेद वचारेणुका । पेड । किसमिसभेद । अलसी । चोक-सत्यानासी कटे हेमदुग्धा-स्त्री० स्वर्णक्षीरी ॥ पाले दूधकी कटेहरी। हेमदुग्धी ( न. :-पु० यशोदुम्बरवृक्ष ॥ गूलरका हमा-स्त्री० पीतयूथिका || पाली. जुहीं । हेमी-स्त्री." हेमदुग्धी-स्त्री स्वर्णक्षरीि ।। काञ्चनक्षीरी । .... हैयंगवीन-न० सद्योजात घृत । नवनीत ।। एक हेमद्युति-स्त्री० धुस्तूरबीज ।। धत्तरेके बीज ! दिनका घी । नैनी मक्खन । उबाह । हेम-पु० हरी। पेड।
औषधिकोष। (२१५) क्षपापति-पु० क्षवथु-स्त्री. क्षत, रोग । । होमधान्य-नातिल ।। तिल । क्षवादर-पु०उदररोग-विशेष । होम्य-न० घृत ।। पी। क्षत्र-न० तगर ॥ तगर । होम्यधान्य-न० तिल ।। तिल । क्षत्रवृक्ष-पु. मुचकुन्दवृक्ष ॥ मुचकुन्द । हूस्व-न० गौरसुवर्णशाक। पुष्पकासीस।।चित्रकूटदेशे क्षपा-त्री० हरिद्रा ।। हलदी । प्रसिद्धशाक । पुष्पकसीस । क्षपाकर-पु०कर्पूर ॥ कपूर । हस्वकुश-पु. श्वेतकुश ।। सफेद कुशा । हस्वगर्भ-पु. कुश ! कुशा । क्षमादंश-पु० शिशु ॥ सैजिनेका पड । हस्वगवधुका-स्त्री० गांगेरुकी।। गुलसकरी,गंगेरन । क्षय-पु० यक्ष्मरोग ।। क्षयरोग । हस्वजम्बु-पु० क्षुद्रजम्बू ।। छोटी जामुन । क्षयतरु-पु० स्थालीवृक्ष ।। बोलियापीपल । हूस्वतण्डुल-पु० राजान्न । आन्ध्रदेशमें पैदा होने क्षयथु-पु०कासरोग ॥ खांसीरोग । वाले शालिधान । क्षयनाशिनी-स्त्री. जीवन्ती ॥ डोडी। हस्वदर्भ-पु० श्वेतकुश ॥ सफेद कुशा । क्षव-पु० राजिकाभेदः। । राजिका ॥ राईभेद । हस्वदा-स्त्री० शल्लकी ॥ शालईवृक्ष । हस्वपत्रक-पु० गिरिजमधूकवृक्ष पहाडी मौआ। क्षवक-पु० अपामार्ग । राजिका || चिरचिरा। हस्वप्लक्ष-पु. क्षुद्रप्लक्ष । ॥ छोटा पाखर । राई। हस्वफला-स्त्री० काकजम्बू ॥ भुईजामुन । श्रवकृत्-न० छिकना ॥ नाकछिकनी । छोटीजामुन । हस्वमूल-पु. रक्तेक्षु ॥लाल ईख । भवपत्री-स्त्री० द्रोणपुष्पी ॥ गोमा, गूमा । हूस्वा-स्त्री० काकजम्बू । नागबला । मुद्रपर्णी ॥ क्षविका-स्त्री. बृहतीभेद ॥ एक प्रकारकी कटाई । भुईजामुन । गुलसकरी । मुगवन । क्षार-न० विड्लवण । यवक्षार ॥ विरिया सञ्चर, हस्वाग्नि-पु० अर्कवृक्ष ॥ आकका वृक्ष । हूस्वाङ्ग-पुजीवक ॥ जीपक औषधि । झार-पु० रस-विशेष । लवण । कांच । भस्म । हादिनी-स्त्री. शल्लकी ॥ शालईवृक्ष । गुड । टङ्कण । त्वर्जिकाक्षार । यवक्षार || क्षार. हिबेर-न० हीबेर ॥ सुगन्धवाला, नेत्रवाला । रस | नौन । कांच । छाई । गुड । सुहागा । हीकु-पु० जतुक । त्रपु। सज्जीखार । जवाखार । हीवेर-न० वालक || सुगन्धवाला । नेत्रवाला । क्षारत्रय-न० यवक्षार, स्वर्जिकाक्षार । टंकण ।। हीबेल होबेलक-न." जवाखार ( सोरा ), सञ्जीखार | सुहागा । हादिनी-स्त्री. शल्लकवृक्ष ॥ शालईवृक्ष । क्षारद्वयन. यवक्षार-स्थर्जिकाक्षार ॥ जवाखार- हीकु-पु० जतु त्रपु ।। इति श्रीशालिग्रामवैश्यकृतशालिग्रामषिधशब्दसा. क्षारदला-स्त्री० चिल्लीशाक ॥ चिल्लीशाक । गरे हकाराक्षेर त्रयस्त्रिंशस्तरङ्गः ॥ ३३ ॥ क्षारदशक-न० दशविध क्षार ॥ सैंजिन १ मूली २ ढाक ३ चूक ४ चीता ५ अदरखनीम७ ईख ८ चिरीचटा ९ केला १० । क्षणदा-स्त्री. हरिद्रा ।। हलदी । भारद्रु-पु० घण्टापाटलिवृक्ष ॥ मोखावृक्ष । क्षतकास-पु. कासरोग-विशेष ॥ खाँसी । क्षारपत्र-पु० वास्तूंक || बथुआशाक । क्षतन-पु०क्षुप-विक्षेष ।। कुकरौंदा । क्षारपत्रक-पु." क्षतन्त्री-स्त्री. लाक्षा || लाख । क्षारमध्य-पु० अपामार्ग ॥ चिरचिटा । क्षतविध्वंसी (न् )-पु. वृद्धदारकवृक्ष।विधारा । भारमृत्तिका-स्त्री खारी मिट्टी । झतहर-न० अगुरु ।। अगर । नोन । जवाखार । सजी। .
(२१६) आयुर्वेदीय- ८ पपिल । मोती। क्षारलवण-न० लवण-विशेष ॥ खारी नोंन । क्षरिविदारिका-स्त्री क्षारवृक्ष-पु० मुष्ककवृक्ष ॥ मोखावृक्ष । क्षीरविदारी-स्त्री० महाश्वेता ।। दूधविदारी । क्षारवृक्षगण-पु० अपामार्ग । कदली । पलाश । क्षीरविषाणिका-स्त्री वृश्चिकाला । क्षीरक शिग्रु । मुष्कक । मूलक । आईक । चित्रक ॥ कोली ।। वृश्चिकाली । क्षीरकाकोली । चिरचिटा । केला । ढाक । सैजिना । मोखा । क्षीरवृक्ष-पु० उडुम्बरवृक्ष । राजादनीवृक्षः मूली । अदरख । चीता। गूलरका पेड । खिरनीका पेड । क्षारश्रेष्ठ-पु. पलाशवृक्ष । मुष्ककवृक्ष ॥ ढाक. क्षीरशर्करा-स्त्री० दुग्धोत्पन्ना शर्करा ॥ वृक्ष । मोखावृक्ष। क्षीरशीर्ष-पु० श्रीवास ॥ सरलका गोंद । क्षारमेलक-पु० सर्वक्षार ॥ साबुन । क्षीरशुक्ता-स्त्री० क्षीरविदारी । क्षीरकाकोली क्षाराच्छ-न० समुद्रलवण ॥ पांगा । दूधविदारी । क्षीरकाकोली । क्षाराष्टक-न. अष्टप्रकारक्षार || पलास-ढाक १ क्षीरशुक्ल-पु० जलकण्टक । राजादनी ॥ सि सैजिना २ चिरचिटा ३ जौ ४ इमली ५ आक६ घाडे । खिरणविक्ष । तिलौकी नाल ७ सज्जी खार८ । क्षीरशुक्ला-स्त्री० भूमिकूष्माण्ड || विदारीकन्द । क्षिति-स्त्री० रोचनानाम गन्धद्रव्य। गोरोचन । क्षीररस-पु. क्षीरसार ॥ मलाई-विशेष । क्षितिबदरी-स्त्री० भूबदरी ।। झडबेर । क्षारसन्तानिक-स्त्री० दुग्धीवकारविशेष । क्षितिक्षम-पु. खदिरवृक्ष ॥ खैरवृक्ष । क्षीरक्षव-पु० दुग्धपाषाण ॥ " शिरगोला " क्षिप्रपाकी ( 1 )-पु० गईभाण्डवृक्ष ॥ पारस. श्रीरा-स्त्री०काकोली ॥ काकोली औषधि । क्षीराब्धिज-न० समुद्र लवण । मुक्ता ॥ पांगा क्षीर-न० दुग्ध । सरलद्रव ॥ दूध । सरलका गोंदै । क्षीरक-पु० क्षीरमोरटलता ॥ “गोरटा । क्षीराविका-स्त्री० क्षीरावी ॥ दूधियाऔषधि । क्षारकञ्चुकी-स्त्री० क्षरिशवृक्ष ॥ क्षीरकञ्चुकी । क्षीरावी-स्त्री० क्षीरकाकोली । दुग्धिका ॥ क्षीर क्षीरकन्द-पु. क्षीरविदारी:॥ दूधविदारी । काकोली । दुद्धि औषधि । क्षीरकन्दा-स्त्री. क्षीरवल्ली ॥ विदारीकन्द । क्षीराह्व-पु० सरलवृक्ष ॥ धूपसरल । ज्ञीरकाकालिका-स्त्री. क्षीरकाकोली ॥ क्षीरका- कोली औषधी । क्षीरिका-स्त्री. क्षीरवृक्ष। खिरनी-हिन्दी । क्षीर खजा वङ्गभाषा । पिण्डखजूर को चित् भाषा। क्षीरकाकोली-स्त्री० अष्टवर्गप्रसिद्ध स्वनामख्यात भीरिणी-स्त्री० काञ्चनक्षीरी । वराहक्रान्ता । का औषध ॥ क्षीरविदारी । क्षीरकाण्डक-पु. स्नुहीवृक्ष । अर्कवृक्ष ॥ थूहर इमरी । दुग्धिका । कुटुम्बिनी ॥ ऊंटकटीला | वृक्ष । आकवृक्ष। वराहक्रान्ता । कुम्भेर । दूधियावृक्ष । अर्कपुष्पी। क्षारिवृक्ष-पु० क्षारयुक्त पञ्चप्रकारवृक्ष ॥ बड १ क्षीरकाष्ठा-स्त्री० वाटवृक्ष ॥ नदीवट । गूलर २ पीपल ३ पारिसपीपल ४ पाखर । ५ क्षीरज-न० दधि ॥ दही । क्षीरी [न पु० क्षीरिकावृक्ष । स्नुहीवृक्ष। दुन्धिः क्षीरदल-पु० अर्कवृक्ष ॥ आकवृक्ष । का । अर्कवृक्ष । राजादनी । दुग्धपाषाणवृक्ष । क्षीरद्रुम-पु. अश्वत्थवृक्ष ।। पीपलका पेड । सोमलता । वटवृक्ष । प्लक्षवृक्ष । स्यालीवृक्ष ॥ क्षीरनाश-पु. शाखोटवृक्ष । सिहोडावृक्ष । खिरनीवृक्ष । सेहुण्डवृक्ष । दुद्धिवृक्ष । ' आक. क्षारपर्णी ( 1 )-पु० अर्कवृक्ष ॥ आकवृक्ष । का वृक्ष । राजादनावृक्ष । शिरगोला मराठी क्षीरमोरट-पु० लताभेद ।। मोरटालता । भाषा । सोमलता । बडवृक्ष । पाखरवृक्ष । क्षरिवल्ली-स्त्री० क्षीरविदारी । विदारी ॥ दूधः वेलिया पपिल । विदारी । विदारीकन्द । क्षीरी-स्त्री. क्षीरिवृक्ष | बड, गूलर, पपिल, पारखर । Sing-opHTNyen. Catewww- भौषधिको । (२१७) क्षुत-न० ॥ चन । शख। पारिसपीपल। क्षुद्रपिप्पली-स्त्री० वनपिप्पली ।। वनपीपल । क्षारीश-पु० क्षीरकञ्चुकी ॥ क्षीरसागर उडीमा-- क्षुद्रपोतिका-त्री० मूलपोती ॥ वनपोई। भाषा । क्षुद्रफलक-पु० जीवनवृक्ष ॥ जीवनवृक्ष । क्षुण-पु० अरिष्टवृक्ष ।। रीठा। क्षुद्रफला-स्त्री०. भूमिजम्बू । इन्द्रवारुणी । गोपी. क्षुत-स्त्री० क्षुत ।। छींक। लकर्कटी । कण्टकारी । अग्निदमनी ।। छोटी- जामुन । इन्द्रायण । गोपालकाकडी । कटेरी । क्षुतक-पु० राजिका || राई। अग्निदमनी । क्षुनाभिजनन-70 कृष्णसर्षप | काली सौ । राई। क्षुद्रमुस्ता-स्त्री० कशरु ।। कशेरू । क्षुतकरी-स्त्री० भुजङ्गघातिनी।। कंकालिका वङ्गभाषा। क्षुद्ररोग-पु. अजगल्लिकादिरोगसमूह । क्षुद-पु० तण्डुलादिचूर्ण ।। चावलोंका क्षुद्रवंशा-स्त्री० वराहकान्ता ।। वराहक्रान्ता । क्षुद्र-पु० डहु ।। बडहर । क्षवल्ली-स्त्री० मालपोती । पोईभेद । क्षुद्रकंटकारिका-श्री. अनिदमनी ॥ अग्नि-क्षद्रवार्ताकी स्त्री० बृहती ।। कटाई। दमनी । क्षुद्रशंख-पु. स्वल्प जाती शंख छोटी जातकी क्षुद्रकण्टको-स्त्री० बृहती || कटाई । क्षुद्रकारवेल्ली-स्त्री० कारवेल-विशेष ॥ करेली । क्षुद्रशर्करा-स्त्री० यावनालशर्करा ॥ शीरीखस्त । क्षुद्रकारालिका-स्त्री० क्षुद्रकारवेल्ली ॥ करेली । क्षुद्रशीर्ष-पु० मयूरशिखावृक्ष ॥ मोरशिखा । क्षुद्रकुलिश-पु० वैक्रान्तमणि ॥ वैक्रान्तमणि । क्षुद्रशुक्ति-स्त्रा० जलशुक्ति ।। जलकी सीप । क्षुद्रकुष्ठ-न० स्वल्पकुष्ठरोग || छोटा कोढ क्षुद्रश्यामा-स्त्री० कटभी ।। कटभीवृक्ष । क्षुद्रगोक्षुरक-पु० गोक्षुरभेद ॥ छोटे गोखुरू । क्षुद्रश्लेष्मान्तक-पु. भूकर्बुदारक । लभेडा । क्षुद्रघोली-स्त्री०चिविल्लिकाक्षुप ॥ चिविल्लिका । क्षुद्रशेता-स्त्री० भूमिकूष्माण्ड ।। विदारीकन्द । क्षुद्रचञ्चु-स्त्री० क्षुप-विशेष ॥ चञ्चुशाक । इसहा-स्त्री. मुद्गपर्णी ।। मुगवन । क्षुद्रचन्दन-न० रक्तचन्दन ॥ लाल चन्दन । क्षुसुवर्ण-न० पित्तल ।। पतिल । क्षुद्रचिभिटा-स्त्री. गोपालकर्कटी ॥ गोपाल क्षुद्रहिंगुलिका-स्त्री० कण्ठकारी ।। कटहरी । काकडी। क्षुद्रहिंगुलो-स्त्री." क्षुद्रजातफिल-न० आमलक ।। आमला । क्षुद्रा-स्त्री० कण्टकारिका | चांगेरिका | गवेधुका । क्षुद्रतीरक -पु. स्वल्पजीरक || छोटा जीरा । क्षुद्रचञ्चुशाक ॥ कटेरी । आम्बेलोना । क्षुद्रजीवा-स्त्री० जीवन्ती । जीवन्ती । गरहेडुआ । छटा चन्चुशाक । क्षुद्रतुलसी स्त्री० अर्जक ।। वनतुलसीभेद । क्षुद्रदुरालभा-स्त्री. स्वल्पदुरालभा ॥ छोटा ध- क्षुद्राग्निमन्थ-पु० दशमूलप्रासिद्धवृक्ष-विशेष ॥ छोटी अरणी । . भासा। क्षुद्रदुस्पर्शा-स्त्री. अमिदमनी ॥ अमिदमनी । क्षुदान्त्र-न० उदरस्थिलनाडी विशेषः। क्षुद्रधात्री-स्त्री० ककटवृक्ष ॥ काठ आमला- क्षुद्रापामार्ग-पु० अपामार्ग ।। लाल चिरचियाः । देशान्तरीय भाषा । क्षुद्रामलक-न० आमलक || काठआमलां । क्षुद्रपत्रा-स्त्री० चांगेरी ॥ आम्बिलोना । क्षुद्रामलकसंज्ञ-पु० कर्कवृक्ष ।। कर्कफल । क्षुद्रपत्री-स्त्री० वचा ॥ बच । क्षुद्रपनस-पु. लकुच ॥ बडहर । क्षुद्राम्लपनख-पुं० लकुच ।। वडहर । क्षुद्रपर्ण-पु. अर्जक ।। वनतुलसीभेद । क्षुद्राम्ला-स्त्री० अम्ललोणिका । शशाण्डुली ॥ क्षुद्रपाषाणभेदा-स्त्री० क्षुद्रपाषणभेदी ।। छोटा अम्बिलोना । एक प्रकारकी ककडी । पाखान भेद । क्षुद्रेगुदी-स्त्री० यवास || जवासा । । का क्षुद्रान-पु० कोषाम्र ।। कोशम ।
(९१८) आयुर्वेदीय औषधिकोष। भिंडी। शाक । । काण्ड । सरपता । क्षुद्रेर्वार-पु० गोपालकर्कटी ॥ गोपालकाकडी । क्षेत्रदूती-स्त्री० श्वेत कंटकारी ॥ सफेद कटेरी। क्षुद्रोदुम्बरिका-स्त्री. काकोदुम्बरिका || कठूमर । क्षेत्ररुहा-स्ना० वालुकी ।। एक प्रकारकी ककडी । क्षुद्रोपोदकनाम्नी-स्त्री० मूलपोती ॥ पोईशाकभेद । क्षेत्रसम्भव-पु० चंचुक्षुप । भिंडाक्षुप ।। चेउना । क्षुद्रोपोदकी-स्त्री. स्वल्पपूतिका ॥ छोटा पोईका क्षेत्रसम्भूत-पु. कुन्दरतृण ।। कुन्दरा । क्षुधाकुशल-पु० बिल्वान्तरवृक्ष ॥ बेलन्तर क्षेत्रामलकी-स्त्री. भूभ्यामलकी ।। भुई आमला । क्षुधाभिजनन-पु० राजिका ॥ गई । क्षेत्रक्षु-पु. यावनाल ॥ जुआर । मक्का । क्षुपालु-पु० पानीयाल । पानीआलु । क्षेम-पु० चोरनामक गन्धद्रव्य । चण्डानामौषधि ॥ क्षुपडोडमुष्टि-पु० विषमुष्टिक्षुप । डोडीक्षुप । भटेउर । चण्डा। क्षुमा-स्त्री० अतसी । शण । नीलिका । लताभेद ॥ क्षेमक-पु० चोरनामक गन्धद्रव्य ॥ भटेउर । अलसी । सन | नीलिका वृक्ष । एक वेल । क्षेमफला,क्षेमाफला-स्त्री. उदुम्बवृक्ष । क्षुर-पु० कोकिलाक्ष गोक्षुर । महापिण्डीतक। शर॥ गूलरका पेड। तालमखाना । गोखुरू । पेडिरावृक्ष । रामसर । क्षोणीध्वज-न० पु० शैलेय ॥ पत्थरका फूल । भूरिछराला । क्षुरक-पु० तिलकवृक्ष । कोकिलाक्षवृक्ष । गोक्षुर । चौद्र-न० मधु ।। सहत । भूतांकुश | तिलकपुष्पवृक्ष । तालमखाना । क्षौद्र-पु० चम्पकवृक्ष ।। चम्पावृक्ष । गोखुरु । भूतराज कुत्रचित् भाषा । क्षौद्रज-न० शिक्थक ॥ मोम | क्षुरपत्र-पु० शर ॥ रामसर । क्षौद्रधातु-पु० माक्षिक । सोनामाखी । रूपामाखी । क्षुरपत्रिका-त्री० पालकथशाक ॥ पालगका शाक । क्षौद्रप्रीय-पु० जलमधूकवृक्ष ।। जमलहुआवृक्ष । क्षुरांग-पु० गोक्षुर ॥ गोखुरू । प्रमेहरोग विशेष। क्षुरिका-स्त्री० पालंक्यशाक । पालगका शाक। सोमक-पु. चोरनामक गन्धद्रव्य ।। भटेउर । क्षुरिकापत्र-पु० शर ॥ रामसर । क्षौभद्रु-पु० ब्रह्मदारु ।। सहतूत । क्षुरिणी-स्त्री० वराहक्रान्ता ॥ वराहक्रान्ता । क्षौमा-स्त्रा० अतसी । अलसी । क्षुल्लक-पु. क्षुद्रशंख ॥ छोटा शंख । क्षामान-पु. वृक्ष विशेष ॥ सुराभिफल । क्षेत्रकर्कटी-स्त्री. वालुकी ॥ एक प्रकारकी श्वेड-न० घोषापुष्प ॥ तोरईके फूल । वेड-पु० कर्णरोग-विशेष । विष । पतिघोषालता॥ क्षेत्राचार्भेटा-स्त्री० चिर्भिटा । कर्कटी ॥ कच. एक प्रकारका कानका रोग । विष । पीले फूलकी रिया । ककडी। तोरई। क्षेत्रजा-स्त्री० श्वेतकण्टकारी । शशाण्डुली । गोमू. देवडा-स्त्री० कोषातका ॥ तोरई। त्रिका | शिल्पिका । चणिका ॥ सफेद कटेरी । इति श्रीमाथुरवश्यवशाद्भवकविकुलकुमुदकलानिधि एक प्रकारकी ककडी। गामूत्रतृण । शिल्पका "शालिग्राम" वैद्यकृते "शालग्रामाषधशब्द तृण । चणिका। सागर "हिन्दा भाषानुवाद विभीषत क्षकारा- क्षेत्रपर्पटी-स्त्री० पर्पट ॥ दवनपापरा । क्षरे चतुस्त्रिंशस्ततरंग: सम्पूर्णः ॥३४॥ इति आयुर्वेदीय औषधि काष समाप्त । क्षौद्रमेह-पु० ककडी।
क्रय्य पुस्तकें-वैद्यक ग्रन्थ । 4 " नाम की०रु.आ. त्रिशती-५० वैद्यवल्लभभट्टाविराचित संस्कृतटीका तथा भाषाटीकासहित । इसमें सब रोगों में प्रधान, ज्वर और सन्निपातको उत्तम २ अनेक प्रकारकी चिकित्सा लिखी हैं और वैद्यक ग्रन्थ होनेपरभी ग्रन्थकर्ता शार्ङ्गधरने इसमें अपनी कविताशक्तिका पूर्ण परिचय दिया है । दोनों टीकाएँ एकसे एक बढकर सरलता व प्रमाणोंसे विभूषित हैं... १-८ द्रव्यगुण-बडा । श्रीयुत पं० ज्वालाप्रसादमिश्रकृत भाषाटीकासहित... नपुंसकामृतार्णव-भाषाटीकासभेत । इसमें-नपुंसकोंको नानाप्रकारके तैल, लेप, घृत, बाजी करण, औषधि सर्वोत्तम लिखी गई है वृहान्नघण्टुरत्नाकर-मूल पं० दत्तराम चौवेकृत संकलित और भाषार्टीकासमेत । इसमें- शारीराध्याय, यन्त्राध्याय, शस्त्रविचारणाध्याय, योगसूत्राध्याय, अष्टांधशस्त्रकर्माध्याय, तथा दूसरा भाग-शारपाकाविधि, अग्निकर्म, दोषधातुमल वृद्धिदोषवर्णन, ऋतु. चर्या, दिनचर्या, रात्रिचर्या, तथा नाडीदर्पण्यादिवर्णन भलीभांति किया गया प्रथम भाग. ... .. .. ६-० .. ... वृहन्निघण्टुरत्नाकर-द्वितीय भाग वृहन्निघण्टुरत्नाकर-तृतीय भाग । (विविध रोगोंकी चिकित्साका संग्रह) वृहनिघण्टुरत्नाकर-चौथा भाग । (चिकित्साखण्ड) वृहन्निवग्टुरत्नाकर-पञ्चम भाग । ( रोगोंका कर्मविपाक ) वृहन्निघण्टुरत्नाकर-षष्ठभाग । ( रोगोंका चिकित्साभाग ) वृहन्निघण्टुरत्नाकर-सप्तम अष्टम भाग । लाला शालग्राम संकलित अर्थान् “ शालग्राम निघण्टुभूषण" अनेक देशदेशान्तरीय संस्कृत, हिन्दी, बँगला, मराठी, गौरी, द्राविडी, तैलंगी, ओकलो, इंग्लिश, लैटिन, फारसी, अरबी आदि भाषाओंमें सर्व औषधियों के नाम और गुणों का वर्णन औषधियों के वित्रोतमेत वृहन्निवण्टुरत्नाकर-संपूर्ण आंठों भाग, योगशतक-भाषाटीकासमेत । इसमें सौ शोकोंमें रोगोंपर औरोंका काथादि वर्णन किया गयाहै योगमहोदधि-वैद्यकरत्नभण्डार-हिन्दीभाषामें । इसमें लोकोपकारार्थ-सुश्रुत, चरक, बाग्भट, भावप्रकाश, शांगधर, हारीतादिक ग्रन्थोंते संग्रह कियागयाहै रसरत्नसमुच्चय-मूलमात्र.... ... रसरत्नसमुच्चय-गुर्जरभाषाटीकासमेत । इसके अक्षर देवनागरी और भाषा मात्र गुज. राती है। यह रसभस्म आदि सिद्धिका अद्वितीय ग्रन्थ है... रसेन्द्रभास्कर-० श्रीलक्ष्मीनारायणात्मज पं० शिवप्रसाद शर्मकृत प्रभा नाम टीकासमेत रसरत्नाकर-सिद्धिनाथप्रणीत । समस्त रसग्रन्थोंका शिरोभूषण लालाबालिग्रामकृत भाषाटीका सहित । इस ग्रन्थ, पारा, गन्धक, हरताल, तांबा, रूपा, हीरा, वैक्रांत, सफेद - भाषा (२२०) जाहिरात। नाम की. २० आ० ... अभ्रक, मनशील, खपरिया, नालाथोथा तथा शिलाजीतादि रसोंकी शोचनविधि तथा उनके गुण और प्रत्येक रोगोंकी चिकित्साका वर्णन है । वैद्योपयोगी यह ग्रन्थ निहायत उमदा और हमेसा पास रखने योग्य है. वैयरहस्य--पं० दत्तराम चौबेकृत भाषाटीका समेत ! इसमें संपूर्ण रोगोंकी चिकित्सा भली प्रकार वार्णत है, वैद्यकपरिभाषाप्रदोप-भाषाटीका समेत वैद्योपयोगी औषधियों को योजना तोल, माप और बदला अर्थात् प्रतिनिधि तथा वर्ग चूर्ण आदिकोंको योजनाका वर्णन भली प्रकार है वैद्यरत्न-पं० ज्वालाप्रसादजी मिश्रकृत भाषाटीका समत इसमें सर्व रोगोंकी चिकित्सा उत्तम प्रकारसे वर्णन कांगई है. १-८ वैषवल्लभ-हास्तरुचिकृत भाषाटीका समेत इसमें अनुभवी सर्वोतम चिकित्सा वागत है वैद्यसर्वस्व-भाषाटोकासमेत. रसायनविधि-भाषा-वैद्यशास्त्री पण्डित गौरीशंकरजी त्रियाठीद्वारा संग्रहीत ०-१२ राजवल्लभानिघण्टु-पटियालाराज्यान्तर्गत टकसालप्रामनिवासी आयुर्वेदोद्धारक वैद्यपंचानन • पं० रामप्रसाद बैंद्योपाध्याय विरचित भाषादीपिका नामकी भाषाटीकासहित रामविनोद-हिन्दीभाषामें-संपूर्ण रोगोंकी औषधि प्राचीन ग्रंथोंके अनुसार निदान, लक्षण और उत्पत्ति लिखी है... १-८ बङ्गसेन-भिषकाशिरोमणि-लालशालग्रामजीकृत भाषाटीका समेत । (चिकित्सा वंगसेने च) वैद्यक सम्बन्धी समस्त विषयों के सिवाय यह ग्रन्थ चिकित्सा प्रधानहै इससे क्ढकर दूसरा ग्रन्थ नहीं है । इस एकही ग्रन्थो पढनेस वैद्यराज होसक्ताहै। इसका बाह्यांग भी याने जिल्हपर सोनेके अश्वर चकाचैंध कर देतेहैं । इस बृहद्न्यका दाम भी थोडा रक्खादे वरिसिंहावलोकन-ज्योतिःशास्त्रादि कर्मविपाक चिकित्सा ऐसी उत्तम प्रकारसे कीगई है कि, भिषग्लोग इस देखतेही प्रसन्न होंगे... वैद्यकसार-भाषाटोकासमेत यह छोटासा ग्रंथ वैयों के लिये परम लाभदायक है वैद्यमनोत्सव-भाषा (नैनसुकवैद्यक) वयांवतसं-(लधुनिघंटु) हकमतप्रकाश- हसराजनिदान-भाषाटीकासमेत । इसमें रोगोंको पहिचान, नाडीपरीक्षा, मध्य अगाध्यका ज्ञान इत्यादि अनेक विषय वर्णित है, ज्ञानभैषज्यमंजरी-भाषाटीकासमेत । इसमें प्रत्येक रोगोपर एक २ औषधिका वेदान्तमतानु. सार वर्णन कियागया है । ग्रंथ छोटा है किंतु भिषग्वरोंके देखने. योग्य है, रे- : पुस्तकें मिलनेका ठिकाना- खेमराज श्रीकृष्णदास, गंगाविष्णु श्रीकृष्णदास, "श्रीवेङ्कटेश्वर"स्टीम् प्रेस-बम्बई. "लक्ष्मीवेइटवर स्टीम् प्रेस कल्याण-बम्बई. ०- an
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