Bharatiya Vidya Bhavan Library, Mumbai
Sabdarthprakash
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श्री
शब्दार्थप्रकाश
THESAURUS OF SANSKRIT WORDS.
श्लोक श्रीमच्छिंवांप्रणम्याद्यां सपुत्रांशिवसंयुताम् ॥
वालानांसुखबोधाय शब्दभापांचिनोम्यहम् १
यदनममचापलं तरक्षमध्वमनीपिणः ।।
यथामतिममोद्गता तथाभण्यतेभारती
संस्कृतसे भाषा
(अ)
असल,
अ संस्कृतका प्रथमस्वर थोडा अभाव अहति, दानदेना
श्रीवासुदेव.
अहम पाप धुराकर्म चोरीआदि.
अंश भाग वाटतील.
अकरणि शाप गाली कोसना.
अशु किरणसूर्यादिको की.
अकूपार समुद्र सागर.
अंशुक बन स्वेतवस्त्र रुपट्टा. अकृष्णकर्मन- पुण्यकरनेवाला.
श्रशुमती शरिवन औपधि.. अन बहेर मीठानमक सोरहमासा जुवे
अंशुमत्फला कदली केला
के पांसे जुवा रुद्रात इन्द्राक्ष
अंशुमालिन सूर्य
गाडीकापैहा ।
कंधा भुजा शिर
मोटा बली
A
.
अस
अक्षत जो इट्टा नहोसदि लाई
(अ) शब्दार्थप्रकाश। अक्षदर्शक जुवा बनाने वाला जैसे अगस्ति ? एक पि का नाम जी घटसे अतपूर्त शकुनी हुआ अगस्त्य मिनावरुणके यज्ञमें प्रगट हुये अक्षपाद नैयायिक [ तपस्या. अगाध जिसकीयाहनहो. अक्षर मोक्ष परब्रह्म वर्ण आकाश धर्म अगार घर भवन लेखक लिखनेवाला. अगुरु शीसम सेरसई शिशुपा. अक्षरचण अगुरु अगर. अक्षवती जुवापाशेका.[कील पैहाकी. अगुरुशिशपा शिशुपा सेरसई शीसम. अक्षारकीलक गाहीकीपूरी लोह अनायी स्वाहा श्रमिकीमिया. अक्षांति ईदूसरेकाविभवदेखजलना. अनि श्रागि. अति नेत्र अखि. अग्निकण चिनगी जुकुई. प्रतिकूटक हाथीकीसांखकीगोलाई. अग्निचित् अग्निहोत्र करनेवाला. अतिगत वैरकयोग्य शत्रु अग्निज्वाला धव धोके फूल. अतिर समुद्रलोन. अग्निनय तीन प्रकारकी अग्नि यज्ञकी. अतीव समुद्र लोन सहिजनवृत्त. भग्निभू स्वामिकार्तिक जो शिवके वी अक्षोट यसे प्रकटहुये. अक्षोड अखरोट. अनिमय अरणी इरनी जैति. अक्षौहिणी सेना का प्रमाण निस में अग्निमुखी भेलांचा. हापी २१८७० सय २१८७० घो- अग्निशिख केशरि कुंकुम रोली. अग्निशिसा करिधारी शाग भेद. डोंके सवार ६५६१० पैदल १०६ ३५० हों. अग्न्युत्पात श्रागिलगनाधूमकेतु दि- अखंड संपूर्णसजिसमें कुछमीकमनहो. अग्र भागे अधिक श्रेष्ट. [खाई देना. बड़ा भाई. अखात देवता के द्वारके कुंडादि जैसे | अग्रज अग्रजन्मन् चत्र तीर्थ पुष्करादि. ब्राह्मण विम अग्रतःसर भागे चलने वाला. अखिल संपूर्ण सर. अग्रतस भागे पूर्व दिशा. अग वृत्त पहाड़. अगद औषध जिससे रोग नाराहो. मग्रमांस हृदयकामाम कलेना. अग्रसर भागेचलनेवाला. अगदेकार वैद्य दवाकरनेवाला. अग्निय गम वृत्त पहाड़. अग्रीय वहा भाई श्रेष्ठ श्रीदेवतालवृक्ष अदिधिषु । निसकन्याकी वदी बहिन अग्रेदिधिपू कुमारी हो यार उस का -- श्रेष्ठ मुख्य. r-A [जाय. - शब्दार्थप्रकाश अग्रेसर आगेचलने वाला.[विवाहहो. अंगुलिमुद्रा अँगूठीरामनामादिसहित श्रय अंगुली अंगुरी. अध पाप दुष्कर्म दुःख शिकार जुवा | अंगुलीयक अँगूठी मुंदरी. आदिविपत्ति राग चैर. अंगुष्ठ अँग्ठा. अघमर्षण सूक्त जो संध्योपासनमें अंघ्रि पैर चरण. अन्या .गौ गाय. गौ गाय, [जपा जाताहै. | अंधिनामक बृक्षकीजड़ नीचेकीडार. अंक चिन्ह गोद लक्षण. अंघ्रिपणिका पिठवनि औषधि. शंकुर नवाकिल्ला ॲगुशा. अंनिवाल्लिका अंकुश हांधीहांकनका. अचडी सीधीगी सीधीस्त्री. अंकोट अचल पर्वत जोचलनसके. अंकोल अकोहर पिस्ता. अचला श्रेखोट पृथ्वी धरती [ नहो. अंक्य जोबाजागोदीमधरकेबजाया अचिकण रूखा स्नेहशुन्य जो चिकना अंग देह संवोधनमें दूसरेअर्थमें.. अच्छ निर्मलजल रीछ प्रसन्न अंगण घरकामांगन सभाकामांगन. अच्छभल्ल रीछ. अंगद बिजायठ बजुल्ला एक वानर अच्युत श्रीभगवान. का नाम. [बनेहो. अच्युताग्रज बलदेव कृष्णकेवडेभाई. अंगना स्वीनारी जिसके अंग उत्तम अन बोकर विष्णु महादेव ब्रह्मा. अंगन आंगन. अजकर शिवकाधनुष अङ्गविक्षेप नाचना. अजगंधिका वई. असंस्कार देहकैसरादिलगाना. अजगर मोटासांप. पाहार अंगुलीधुमाकरनाचना. अजगव शम्भु का धनुष. अङ्गार अंगार जरताकाठ. अनन्य उत्तपात विजुलीमादिगिरना. अगारक मालग्रह अजमोदा अजमोद अजवाइन. श्रकारधानिका अँगीठी व्यरीसी. अजशूगी मेढ़ासिंही. प्रकारवल्लरी कंजभेद. अजस्न निरन्तर अतिशय. अहारवल्ली भारतीऔषधि, अजहा केवांच. अङ्गारशकटी अँगीठी व्यरोसी. अना बोकरी माया. अङ्गीकार स्वीकार ग्रहण. अजाजी जीरा. [काकर अङ्गीकृत अहीकारकरना. अजाजीव गड़रिया जोबोकरीसे जीवि अंगुलियान मैंगुलीसेपपाण. अजित विष्णु शंकर महत्तवादि -- -- अंडकोशपोता. - .. M (अ) शब्दार्थप्रकाश। १ अजिन..हिरणादिकोंकाचमढ़ा.. .. अजिनपत्रा चिमगोदर, अंडकोप पाता. अजिन योनि हिरणाकीजाति. अंडज ... ब्राह्मा. मदरी पक्षी सादि. श्रजिर यांगन देश देह वायु." अतट पहाइसेजलगिरनेकास्थान अजिह्म सीधा सरल सूधा. " अकितः अकस्मात साहस. [नहो. अजिह्मग' बांस तीरजोसीपाजाय. अंतलस्पर्श, अगाधजिसजलकीथाह . अज्जुका . नाचनेवालीनटी.... अतसी अरसी. [लांचना. अज्झटा भूमिकाथवरा.. अति बहुत पूजा बड़ाई लांघनाउलटा अज अतिमूर्खजोकुछकहसुननसकै. अतिक्रम वीरोंकीसंग्रामयात्रा., अज्ञान ..-अहंकार जिस्केज्ञाननहो. अतिचरा स्थलकमलिनी. [नष्टहो. पञ्चित पूजाकिया... अतिच्छत्र, खर अँकराजिससेखेत अंजन, पश्चिमदिशाकेहाथीकानाम, अतिच्छता सौंफ. अंजनकेशी नली गंधद्रव्य पारी अतिजव: : बहुतजल्द वेगवान. अंजना अतिथि अपनेयरमेनोकोईब्राह्मणादि अंजनावती दिशागनकी पत्री अतिनिरिन् दूरकीसुगंय. [पावे. अंजलि अंजुरी.. अतिनु .. विनानाव पारनाय. अंजसा अंतिपथिन् सुन्दरराह.. अटनि it अतिपात उल्लंघन यतिक्रम. पटनी धनुमकी कोटि. अतिमसिद्ध प्रकाश बहुतनाम. अटरूपं रुसाह कसा. ... अतिवल पड़ावली येगवान. अटवी वन जंगल अतिमात्र : अतिशय शीघ्रता...: अटना घूमनाःग F... अतिमुक्त सेवतीकाफूल. अट्ट, महल पटरा. . अतिमुक्तक तिनिशवृक्ष. अटया- घूमना: पृथ्वीपर्यटन. अतिरिक्त अधिकाया बहुतंखाली अधम नीच पापी.. अतिवच, बहुतबोलनेवाला..:... अण्व्य जंगल बन.. अतिवाद नितुरचोली कहीवानः अणि गाड़ीकीधूरी.. अतिविपातीस.: अणिमन् महादेवकीसिद्धि. यतिवेल पहुतशीघ्रता. अणीयम् बहुत छोटा अतिशक्तिता पहुनपराक्रम. १; अणु"धानभेदबहुतछोटा... अतिशय, पहुतशीघ्र वहाई. अंडःयंडापतीयादिका.. अतिशस्त अनिमुन्दर. :- तत्त्व शीघ्रता...। -- थाटा - अणक - ५ शब्दार्थप्रकाश । (अ) अतिशोभन -बहुतहीसुन्दर.. अद्वयवादिन् । चौध जैनि. अतिसंस्कृत योग्य सहन, शीलता... अधम कम निंदित नीचं. अतिसर्जन . बहुतदानः अधमर्ण-, कर्जदार ऋणी. अतिसारकिन्। , अतीसारीरोगी. [हो अधर, नीचेका श्रोठ हीन नीचा. अतिसौरभ आमबृक्षजिसमेंबहुतसुगंध अधरेघुस आगेकादिन. अतीक्ष्ण :: कोमल: अधस पाताल नीचेकालोक. अतीत व्यतीत बीतगया. अधामार्गव लटजीरा. अतीतनौका - बिनानावपारजाय. नहो. अधिकद्धि · धनवान धनी. अतींद्रिय - इंद्रियोंसेज्ञानजिसवस्तुका अधिकांग, कमरपट्टा पटुका. अतीव . अत्यंत बहुत.. अधिकार व्यवस्थाकरना प्रजापालेना. अत्तिका - बड़ीवहिनः [कियाकरैः अधिकृत अधिकारी जैसे राज्याधिका- अत्यंतकोपन बहाक्रोधीदिनरातक्रोध रीग्रामाधिकारी.. अत्यंतीन बहुतचलनेवाला......... अधिक्षिप्त किसीकेऐश्वर्यादिकी निंदा अत्यय: नाश-कष्ट, करना दुर्वचनकहना. . अत्यर्थ अतिशय. अधित्यका .पहाड़केऊपरकीयरती. अत्यल्प : बहुतघोड़ा बहुतथोड़ा. ... अधिप प्रभु स्वामी मालिक. अत्याहित. बहुतभय बढीभय. अधिपांग पटुका कमरपट्टा. अत्रि: एकऋषिकानाम. अधिभू प्रभु मालिक. সুখ मंगल अनतर धारंभ मप्नसंपूर्ण. अधिरोहिणी सीढ़ी. अदभ्रं बहुत बहु- -अधिवासन सुगंधमाला धूपादिसंवस्त्र तांबुलादिकोसुगंधितकरना... प्रदर्शन विनाश न देख पईना. [हुये. अधिविन्ना बहुतीसौतियोमपहिली . अदितिनंदन देवतांनोदितिसमगटे अदृश' अंधा विनाअखका. स्त्रीकानाम. [दार्थ बनतेहैं. यदृष्ट अागि पानीसेभयः अधिश्रयणी चुल्हजिसमें. भोजनके 4- अष्टि भोधकी आंख. अधिष्ठान पैदा ग्रामनगर मभाव यासन अद्धा साक्षात् तत्व. अधीन आधीन यश. [स्थान. अद्भुत रस अाश्चर्य. अधीर कायर भीर लेंहार भगोड़ा.' अबर “बहुतभोजनकरनेवाला पैटभरू. अधीश्वर - चक्रवतीराजा सेवपृथ्वीका अद्य । श्राज अभी. मालिक. अद्रि पर्वत बृक्ष सूर्य. अधुना इदानीम् इससमय इस काल. . 7 T - . . (अ) शब्दार्थप्रकाश । ६. अधूर लज्जावान शर्मीला जोबहुत न हो. [या साग भेद.' शर्माय. अनंता पृथवी जबासा सरिवन दूर्व मा. अधोगत मुस'चहा नीचेजानेवाला. अनन्यज काम जोयापहीयापहो. अधोशक नीचेकाकपड़ा लहंगाधोती. अनन्यवृत्ति एकाग्रचित्त एकांतमन. अधोक्षज विप्नुइन्द्रियज्ञानीजनसेनीचेहै. अनय जुवाआदि विपत्ति अनेरीतिः श्रधांभुवन पाताल नाग लोक. अनर्थक विनामयोजनकीवात.. , अधोमुख नीचेकामुख- अनल अग्नि यागि... अधोरण महाउतहाथाहांकनेवाला.. अनवधानता : चित्तकीवराहट किसी अध्यन अधिकारी कामकाजकरने अनवरते. : नित्यकामचित्तनहो घाला प्रत्याखकेसामने. अनवस्कर सोधा निर्णय किया अध्यवस्थय उत्साह उछाह.:.:.1अनवरायः मुख्य श्रेष्ट मंधान अध्यात्म जीवात्मा ठगता थोड़ा. अनस् । गाड़ी शकट [ नहुयाहो अध्यापक पंडित पढ़ानेवाला. ': अनागतातवां जिसस्त्रीकरजस्वला अध्याहार तर्क चतुराई बुद्धिमानी. अनातय छाया सूर्यकीममा परछां- अध्यूढ़ा गिसस्त्रीकेबहुतीसौतीहो. ही कांति [अपमान. प्रध्योपणा गुम्यादिकेलियेद्रव्यादि अनादरं तिरस्कार पादरनकरना मागना. यनामय आरोग्यता रोगनाश. अध्वर्ग राहचलनेवालापरदेसी. अनामिका छगुनियाकेपासकीगुरी. अध्वन् मार्ग राह..' अनायासकृत भिगोयकरकाढावनाना. अवनीन अनारत नित्य अतिशय शीघ्रता. थध्वन्य } विदेसी राही. अनार्यतित्र चिरायता चिरैता.' श्रध्वर यज्ञ राजसूयादि. अनाहत - कोराकपडा नवावस्त्र. [मारते. अध्वर्यु यजुर्वेदी या. अनिमिष देवता मदरी जो पलकनहीं अनतर न कहिने योग्य यात गाली. अनिरुद्ध कृष्णकापात्र. थनंग कामदेव जोविनाअंगसवको अनिल वायु देवगण स्वातीनक्षत्र. वशकरताहै. अनिश नित्य दिनरात. थनच्छ . मैलापानी मला. अनीक सेना संग्राम लराई. (पती.. अनडुइ गाडीलैजानेवालावल. अनीस्थ राजाकरताकरनेवालेसेना- अनध्यक्ष जोइन्द्रियोंसेग्रहणनहो अनीकिनी सेना सेनाकीसंख्या. अनंत याकाश शेषनाग जिसकाअंत श्रनु पाये परावर लक्षण समीप. - 'अ) शब्दार्थप्रकाश। अनुक कामो कामवश. अनुयोग प्रष्ण पूंछना अनुकंपा करुणा दया. अनुरोध अनुकूलता मनकेतुल्क अनुकर्ष रथकेनीचेकाकाठ अनुलाए बार बारबोलना अनुकल्प मुष्यसेअधम जैसेसकरके | अनुलेपन ककुमादिकालेपकरना स्थानगुड़. अनुवर्तन मनके अनुसार कायकरना अनुकामीन जैसीइच्छाहो तैसाचले. अनुकूलता अनुकार बिडम्बना जैसेघोड़ेकीचाल | अनुवाक वेढकाअंग [ आलसी गदहाचले. अनुशय बहुतदिनकावैरपदितावा अनुक्रम परिपाटी सीधीचाल. अनुप्ण ठढा जोगरमनहो अनुक्रोश कृपा दया. अनुहार विडवना जैसे खन २ शदनू अनुग पीछेचलनेवाला पीछे पुरोंकीध्वनिहै अनुग्रह अंगीकार कृपा अनूक शील स्वभाव वंश अनुचर नौकर टहलुवा अतूचान जो शिप्यसांग शिक्षापढचुकै अनुज छोटाभाई अनूनक संपूर्ण सब जोकमनहो अनजीविन् सेवक दास अतूप जिसदेशपानीबटुतहो अनुतर्षण मदिरादिपीना अनूरु गरुड़केवडेभाई अरण सूर्य अनुताप पछिताना शोचकरना कसारथी अनुत्तम मुष्य श्रेष्ट अन्जु कुटिल टेदा अनुत्तर मबसेश्रेष्ट जिसकाजबायनहो | अनृत झूठीबात झूठयोलना सेवा भनुनय समुझाना सूधा करना वृत्ति कुचेकीसीजीविका अनुपद पीछकेपैर एडी पद पश्चात अनेकप हांथी मनुपदीना पौला जोपनहीपैर में अनेडमूक जोकुछकहनसकैमूर्ख, अँया बांधीजाय अनुपमा दिशागजकीपत्नीजिसकीउ अनोकह वृक्ष जिसकीगाड़ीवनसकै अनुप्लव अनुचर नौकर अंत प्रलय नाश मरनाअंत्य अनुबंध दोषपैदाकरना [डाशन अंतःपुर राजावों की स्त्रियोंका घर अनुवोष गई मुगंधमें सुगंधकरना थो अंतक यमराज [ रानी का महल मनुभव साक्षात प्रत्यत्त [नोकीसलाह अंतर अवकाश अवधि परिधान जैसे मनुभाव कटाक्षकरना प्रभाव सज्ज अनुमति पूर्णिमासी जिसमें चंद्रमाकी गाड़ी अंतरमें धरदोअंतर्षिपर्वतके कालकुछकमनहो अंतर मुर्य है भेद जो अंतरसरसी [पमानही अनेहस काल समय . श्र) -- [ टापू अंध अंधाकुवां - शब्दार्थप्रकाश । पहाड़ से है तादर्थे तुम्हारे से ये अंदुक । कर्जह छिद्र आत्मीय विना वाहर | अंदू हायीकांदृर्गहना अवसर मध्य अंतरात्मा सादृश्य अंध अंधा विनाखवा अंधकार तम अंतरा मध्य अंधकरिपु महादेव जिन्होंने अंधका अंतराभवसत्वः मरण जन्मके वीचका सुरकोमारा अंतराय विघ्नः उपद्रव [माणी गंधर्व अंधकार अंधतमस } अंधकार अधेरा अंतराल मे प्राकाशकामध्य अंधस अन्न भात अंतरिक्ष आकाश अंनरीष द्वीप जोस्थलजलसेधिराहो अन्न यवादि मात अन्न भोजन अंतरीय लहंगा नीचेकावस्त्र अन्य अंतरे मध्य वीच भिन्न अलग और अन्यतर अंतरेण मध्य विना वर्जना अन्यतरेयुम} • औरे दिन अंतर्गत भूलनाना वीचपड़जाना अंतर्गल झिटी कालीझिटी अन्धक। अन्वत) अंतर्वा अंतधि नाच्छादन छायजाना }.. 'वंश कुल गोल अन्ववाय अंतर छिपाहुवादरवाजा खिड़की अवहार्य महीना में अमावसको श्राद्ध अंतर्मनस व्याकुलचित्त अन्विष्ट अन्वीक्षण टुंढना खाजलगाना अंतर्वी गर्भिणीस्त्री अन्वंपण अंतर्वाणि शास्त्री शास्त्रपढ़नेवाला अन्वेपणा 'धर्मादिकाखोजकरना अंतवासिन् शिप्य चेला जन्वेपित ढूंदा खोजलगाया अंतर्वेशिक अंतःपुरकेचलनेवालेखोजा श्र धंतायसापिन् ना नाई }जल अंतिक समीप निकट सपकारगी निंदा कलंकलगाना पंतिकतम वहुनसमीप अपक्रम पलायना संग्रामसभागना प्रतिका बडीवहिनि चूल्ह अपयन देयके अंग शिर आदि नातेवासिन् शिप्य चला चांटाल अपचय नाश होनाना हरणहोना प्रत नाश मरना अंन यांत अपचित अदिका चून्ह भोगनयनानेका अपचिति पूजा नाश वृद्धि अनुपुट पिलाड़ी अन्वय जल पानी आप अत्य अपचायिन पूनाकिया पृजित ।
कुमार्ग कुराह 8 शब्दार्थप्रकाश । (अ) .अपटांतर मिलाया एकमेंमिला अपसर्प दूत भेदलानेवाला छिपीचात अपटु रोगी यावीण अपसव्य दाहिनाअग देंहकादहिनाभाग. अपत्य लडका लड़की पर पुत्री अपस्कर रथकीसवलकड़ीयादि. अपत्रमा औरसेलाजकरना अपहार हरजाना हिरायजाना. अपत्रपिप्णु लोकलाजकरनेवाला अपांपति पानीकेमालिक वरुणदेवता. प्रपथ अपांग नेनाककोर कटान अगहीन अपथिन् तिलक.. शपदान कर्मचरित्र दानदेलैलेना अपाची पक्षिमदिशा. [कीजगह. अपदांतर मिलाहुया मिलना अपान वायु गुदाकीवाय गुदा भाई अपदिश विदिशा दिशोंकेकोना कारण प्रामार्ग लटजीरा. [नमानै. अपदेश स्वरूपछिपाना वहानाकरना पपावृत्त स्वेच्छाचारी किसीकाकहा अपध्वस्त धिकारफिया चूर्णकिया अपासन मारण मारडालना.ल्पना. अपभ्रंश अशुद्धपट अशुद्ध अपि निदा दोकाममें प्रष्ण शंफा का अपयान संग्रामसेभागना अपिधान छायामेवादिकी छाही. अपर उत्तरभाग हाथीपीकाभाग | थपिनद्र संग्रामकेलियेकंचुकादिधारण. अपरस्पर नहीपरस्पर अपूर पवा चावलकेपिसानकेभोजन अपराजिता विष्णुकांताफूल शनपर्णी बडाउटके. अपराद्धपक्क जोनिशानेसेचककर अयोगड जिसकेगमच्छेनहा नाकटे- पाणफेंकैनिशानानमारसकै ढीवचिपटी कनाचा टेढमुद्दा ल- अपराध वैर विननाहकको दुखडेना काकीबीमारीह इत्यादि अपरान्द दिनकातीसरापहर अप्पति वरुण जलकेस्वामी. अपरेघुस और दिन अपित्त अग्नि. अपर्णा श्रीपार्वती अप्रकांड गुच्छा भुटा वृक्षांग. अपलाप छिपानेकीवात अमगरण पाऊल व्याकुल अपवर्ग मोक्ष ज्ञान अप्रत्यक्ष इद्रियोंसेभिन्नकाम. अपवर्जन दानदेना समधान जोश्रेष्टनहो सामान्य. अपवाद निंदा आज्ञादेना अमहृत विनाजोताखेत बनकट. अपवारण आच्छादनमेवादिकीलाया. अमान्य श्रेष्टनही सम. अपशब्द अशुद्रपद अशुद्ध. अप्सरस् देवताजाति स्वर्गलोककी अपप्पु उलटा विपरीत. अपसद नीच शूद्रादि. [ जाननाय. अफल जो वृत्तापनेसमयमेंफलनदेय 1 श्याउर्वशी अदि. [वंध्यवृक्ष.
(अ) शब्दार्थप्रकाश । १० अबद्ध जिसवातकाकुलमर्थनही. अभिधान नामकानामहे सीता राम. अवद्धमुष जिसकामुसवंदनहोरातिदि- अभिध्या परायाधनस्त्रीआदिकीइच्छा नवकाकर. करना. [प्रकाशकरना. अव्य फलनेवालावृत्त. अभिनय हांथ अांखग्रादिमनकीवात अवला स्त्री जोवलहीनहोतीहै. अभिनव नूतन नवीन नवारस्वादि. अवाब जिसे कुछवाधानहोनिस्संदेह. अभिनवोद्भिद् नवीनअंगुशा नवाकिल्ला. यान समझाना. अभिनिर्मुक्त जिसमनुप्यादिकोसोतेहुये ग्रज चंद्रमा कमल शंख. सूर्यप्रस्तहो. यजयोनि ब्रया जोकमलसे हुये. अभिनिर्माण गमनकरना यानाकरना. अन्जिनीपति सूर्य. अभिनीत न्यायसेपैदाकियाच्यादि श्रत वर्ष मेघ पहाड मोथा. अपनेपरिश्रमयायोग्यतासेमिलाद- अधि समुद्र नदी देश नद हाथीकामद. च्यादि. [पत्तिमफंसना. अधिकफ समुद्रफेन. [ मानवास्य. यभिपन्न अपराधी शत्रकेवश होना वि. सनह्मएय ब्राह्मणकोदंडमेक यथस- अभिमाय प्राशय मनकीयात. प्रभय तृण नाति सर. अभिभन यहंकारनष्टहोना माननाश. अभया ह. अभिमर । अभापण नबोलना चुपरहना. संग्राम लकाई. यभिमर्द प्रभिना कामीमनुप्य. अभिमान गर्न प्रहंकारद्रव्याल पशु- अभिक्रम धीराकीसंग्रामयाना. गुणादिका शान नम्रता दिंगा. अभिरया शोभा कांति नाम परा. স্বমিদানি बरी. अभिग्रह लहाईकोरलाना. अभियानिन अभिग्रहण चोरी करना डांझाडालना. अभियोग लगाउनाना चाशदना अभियातिन् शठ वैरी. अभिम्प स्वरूप सुंदरना. अभिचर अनुचर नौर. अभिलाव धान्याटिकाटना लानी. 'प्रभिदार हिंसारापर्म उत्सायादिक-यभिलाप यांटा मनांग्य. ग्ना जामूचनाना. [न्यान. अभिनाजुक अभिन्नापकरनेवाला.ला. अभिजन वंश क्ल जन्मभूमि जन्मका अभिराहक नमारमणामादिकग्नवा- अभिजात फुलीन परिडत मुकमी. अभिवादन मरणामादिनग्ना. গমিয় মীর শং, प्रमिथ्याप्ति गरनचादीना. भिनम् समीप निाट दुईगार भी अपिशत निपीनारनिटार. ध्रता सरसन्या अभिगन्ति यांना मांगना. . शत्र प्र शब्दार्थप्रकाश। अभिशाप मिथ्यापाप झटपापलगाना. अभ्यर्ण समीप पासः इसनेमदिरापियाचोरीकियाइत्यादि. अभ्यर्हित . शुभ साधुकापूजन. : 'अभिमुंग गालीदेना कोशना. अभ्यवकर्पण धावसेवाणादिनिकारना अभिपंग निरादर तिरस्कार हारजाना. अभ्यवस्कंदन छलसेंलड़ना. अभिपव . सोमाभिपवयज्ञान मदिराव- अभ्यबहत भोजनकिया. नाना. अभ्याख्यान मिथ्याकहना. अभिपस्ति यांचना मांगना. अभ्यागम संग्राम [लगारहे. अभिपुत कांनी सिरका. [जाना. अभ्यागारिक जोअपनेकुटुंबपालनमे-. अभिपणन शत्रुकेसमीपसेनालंकर- अभ्यादान प्रारंभ प्रारंभ. अभिष्टुत स्तुतिकरना प्रणामादि. अभ्यांत रोगी बीमार. अभिसंपात, संग्राम लड़ाई. अभ्यामर्द संग्राम लदाई. अभिसारिका जोत्रीपतिकेपासजाययु-अभयाश समीप पास अभ्यास लावैपतिको.. [वचादि पहिरना. अभ्यास करना.. अभिहार चोरीकरनाडांकाडालना का अभ्यासादन, छलसेमारनाछापामारना. अभिहित 'कहाहुअा कहीवात. अभ्युत्थान उठिकैसत्कारकरना आ अभीक कामीमनुप्य. सनसेउठकरादरकरना., अभीक्ष्ण वारवार सर्वदा निरंतर. अभ्युदित जिसकोसोतेहुगे सूर्य उद- अभीक्षित प्रिय प्यारा अतिशयवांछित. यहोअर्थात्मात संध्यादिकमनकर- अभीर गोपाल अहीर. उसमहापापीकानाम. अभीरु | अभयुपगम शतावरि छतावरि. अभीरुपत्री अभ्युपपत्ति }अंगीकार ग्रहण अभीपंग गालीदना कोशना. अभ्यूप कमपका यवादि कचापकान- अभीप घोड़ोंकीबागडोर किरण. अभ्र मेघ चादर आकाश. अभीष्ट प्रिय प्यारा यांदित. अभ्रक अवरख अम्रक. अभ्यग्र · समीप निकट. अभ्यंजन तेलवस्वटन. अम्रमतंग इंद्रकाहांथीएरावन. अभ्यंतर आकाशमेयकामध्य मध्य. यंम्रमु दिशागजकीपनी. अभ्यमित रोगी ज्वरादिसेव्याकल. श्रनपुवल्लभ ऐरावतइंद्रकाहांथी. श्रभ्यामीण जोवरकरतेशत्रुकैसा- अभ्रि,काठकानुदारा नायसाफकरनेका. शभ्यमित्रीय मनेसामथसेलडनेको अभ्रिय यादरयाना मेवाना. अभ्यामन्य जाय. अभ्री काटकाकुदार. 1 यभ्रपुष्प वैत.
शब्दार्थप्रकाश। १२ अभ्रेप न्याय नीति सुमार्गचलना अगष्ट वेश्यकासीमेनासणसेली वर्ण अमन पान लोटाबटुईथालीमादि अवष्ठा जूही पाठा अम्लोनिया अमर देवता जोकभीनहीमरत अगा माता महतारी अमरावती देवपुरा स्वर्गलोक जिस | अनिका श्री पार्वती निभुवनजननी फाराजाइद्रह पर जल पानी अमर्त्य देवता गरकरा छिनकी निट्टी शीकर अमर्प शोध कोप प्रवुज कमल स्थल बेत अमर्पण कधी कोपकरनेवाला अनुभूत मेघ वादर अमला भमिकामरा आवेतस पानीकावेत [ वह ग्रमा साथ समीप अमावास्या अवशरण सोता जहाअापनेनापपानी अमास दुर्वल पतरा निर्वल अवकृत घोलतेमेंलारवहना वासकरने अमात्य मनी सलाहदेनेवाला मेयुकाना अमानस्य लडकालड़कीहोनेकाकए| अभस् जल पानी गर्भनिकलनेवादुख प्रभारुह कमल जोपानीमहाताहे ग्रमामासी अम्मय पानीमापिकार फेनाधादि अमावसी अम्रातक अराडाबत अमावस्या अमावसतिथि अम्ल रस यांपइत्यादि अमावसी अम्ललोणिका अमावास्या ) अम्लोनिया सम्मलोनिका अमित्र ग वरी अम्लवेतस प्रमिलत अमुत्र दूसरेजन्भगे अम्लान अपिलोना प्रमृणाल तृणजाति अम्लिका अपिलीकावृक्ष प्रगृत अमृत मोक्ष पानी होमसे बाकी |प्रय शुभविधि मगन्न अन्नकाभोजन विनामागेजोमिल अयन तीनऋतुकाएकअयन उत्तरायन जाय घृत घी जल दक्षिणायन रास्ता मार्ग अमृता गुर्च अवरा [न्नहे अमृताधम देवता जिनकाअमृतहीय अय प्रतिमा लोहकीमूर्ति अमोघा पाडारि बिडग अयाचित विनामागेमिलजाय ग्राकाश वस्त्र अयि समझानेमें कोमलवास्य [हताह अबरीप चनामादिभूजनेकाखपराभु अयोग्र मूसर जिसमें आगेलोहालगार जवाकीखपरी [गरजाति / अयोपन हथियार हलकामागकाभाग १ श्रयस् लोह अरटु श्योनापाढा. अरलु श्योनापाढा. शब्दार्थप्रकाश। (अ) अर तुरत अनिशीघ्र अर्कपर्ण मदार. अरग्वर फिरवारबृत्त. अर्का जैनिभेट शाकमुनि अरघट्ट रइटदारका पंपदारकुवा. अति मदार अरणि जिनकाठीसेमथकरागिनि अर्गल केवारोंकेपीछेकालंगर. कालीजाय. अर्गला लगर जंजीरबांधनेकी अर्घ मोल पूजाकार्य. अरण्य वन जगल. [घ्रादिरहै. अर्य अर्वदेनेयोग्य अरण्यानी भयकरजगलजहांसिंहव्या अर्चा पूजा प्रतिमा. अरान छिगनियाफैलाकरमठीवांधना. अर्चित पूजाकिया पूजित. अरर केवांडा केवारा. अर्चिम,यागिकीलपटज्वालाप्रकाशतेज अर्जक सपेढपास कालपर्वरी. अरविद कमलकाफ़ल. अर्जुन सप्नेद अर्जुनवृत तृण कृप्नके मित्रयुधिष्ठिरकेभाई अराति शत्र वैरी. अराल कुटिल टेढा. [करियानावका अर्जुनी सपेदगो. अरित्र जोनावकाकाठपानीमरहता है | अर्णव समुद्र नद. अरिमेद दुर्गधखैर. अर्णम् पानी. अर्तन निदा पीड़ा. अरिष्ट सूतिकाघर जिसमेस्त्रीकेलडका लड़कीयादिहो रीठी नीववृत्त अति पीडा धनुपकी कोटि लहशुन खरापमठा कौवा शुभके अर्थ द्रव्य कारण प्रयोजन. अशुभमें मदरादि. अर्थना मांगना भिता. अरिष्दष्टमी मरनेकेकारणसेजिमकी अर्थमयोग द्रव्यदेकरब्याजलेना सूत. बुद्धिदुष्टहोजाय. अर्थशास्त्र वृहसलादिमणीत अरुण सूर्य सूर्यकासारथी कालाला अर्थिन्,सेवक नौकर याचक मांगनेवाले. ल सायंकालयाकाशकारग अथ्र्य,शिलाजीतजोपयोजनसेमलगनदी गर्दना भिता यांचा. अनुद सधिभेदनेवाला मर्मभेदी. अनि अग्नि मागि. अरुष्कर भेलांचा. अर्दित पीडाकोपात मर्म प्राधा खंड टुकड़ा. अरोक तेजहीन तेजनाश अर्धचंद्रा कालानिशोथ अर्क सूर्य सटिकमणि मदार तांवा | अनाव प्राधीनाव डॉगी. अरुणा अतीस. नरस घाव तुती तोंगी (अ) शब्दार्थप्रकाश । १४ अर्धरात्र प्राधीरात. अलकीण सरकामकासमर्थ अर्थच प्राधांचा अलकार प्राभूपण गहना अबहार वारालरकाहार अलकृत अाभूपणकियागहनापहिराया अोरुक् लहगा विवाहमेस्रोकेकपड़ा. अलक्रिया प्राभूपणपहिरानेकायन. अद दशकिरोड रूपया मासकीफील अलजर कराही माठ डेरा कठोर अल याभूपणसमाप्ति सामर्थ्यता वा अर्भक वालक लड़का रणरना अर्म अांखका रोग अलर्क,सपेदमदार वैलानकुत्ता देनेवो अर्य वैश्य पनियां प्रभ मालिक अलवाल यहला वृत्तकेयासपासनल अर्यमन सूर्य पितरोंकागण अलस बालस्य श्ररसई अर्या पनियाकीलड़की के अलात जलताकाठ लुमुवाई अर्याणी श्यकुलढाई अलीनू। ग्री पनियाकीस्त्री ग्रला अर्वन् घोड़ा अपम नीच अलि रिन्यू वीच भवरा सग्यापानि श्रीम् नदीकापारतीरहसपार याला माय मस्तक मथ्या थर्शम् पाशीर अलिजर राही माठ डेरा अर्शस याशोररोगराला थलिंद दरवाजवंगाहर मिदिया अशीन मूरन जिमीरन्द अलीक माय भूट दमतीपरागत शोरोगयुत यवाशीरी श्रलिन् भारा अनु झारी गलनीचारलगानेगरेट अहित पूजित पुनाकिया বিবালি अल हरिताल हरताल यन्त्र छोटा थाना थला मट देशल अन्पननु छांदहवामनुप्य यना अलका कुबलीपुरी अन्पमारिप चांगकागाग अल्पमग्म दोगनाल लिया अलक्त लाप महाजरकीगोली अलक्ष्मी नरसतीशांभा दरिद्र अन्रिष्ट । गहुनदोग हुनपारा अन्पीयम्। अलगद } जलसर्प पनिहामाप अलगद सवार बदनीगाहागापरा. মনােবাসনা যনি নিমাননারায় अलकारिप्णु ला अन्तरी धायप मार निरालदिवारमादिमें अल বনাননা चांगिन व निरपननदी नईण पूजा पूजन ।
१५ शब्दार्थप्रकाश । (अ) अवक्रय मोल दाम. अवध्वस्त चूरण चूरणकिया. अवगणित अपमान किया. [जानजाते. अवन तृप्तहोनाभोजनादिसे. अवगत · जाननाजानलिया जानगये | अवनत नीचेकामुख. अवगीत निंदित निंदाकिया मनुष्यों अयनाट चिपटीनाकवाला. की वांत. [कजाना. अवनाय नीचेलेंजाना. अवग्रह हाथीकामाथा वानहोना रु- अवनि अवगाह हांथीकामाथा. } पृथ्वी धरती. अवनी -अवर्णित चूरणकिया पीसाहुवा. अवंतिसोम कांगी सिरका. अवज्ञा अपमान अनादर, अवंध्य जोवृत्तफलदेइ अवज्ञात अपमानकरना. अवभृथ यज्ञसमाप्तिकस्नान ग्रवट अवट चिपटीनाकवाला अवटि गडहा गड्ढा गहिरा. अवम नीच अधम अवटीट चिपटीनाककामनुप्य. अवमत अपमानकिया अवटु घांटी गलेकीउंचाई घंट. अवमर्द उत्तमदेशकोदूसरेराजासेपीड़ा अवतंस कामकागहेना कर्नफूलादि अवमानना अपमान अनादर -शिरकागहेना मुकुटयादि. अवमानित अपमानहोजाना अवतमस थोड़ाअंधकार कुछअंधेरा. अवतोका जिसगीकाअकस्माद्गर्भगिर अवर हाथीकीपिछलीजांधै पिछलाधड़ अवयव अंग देह परै गर्भगिरनेवाली. [ काभक्षण. हाथीका उसपार पिबाड़ी अवदंश मदिरापीनेकोभूजेचनाआदि अवरज छोटाभाई अवदात सपेद गोरा पीला शुद्ध अवरति विश्रांति शांत अवदान कमपूर्व चरित्र शुभकर्म अवदाह तृणजाति अवरीण धिर्कारकिया निंदित अवदारुण खाता कुदारा फरुहा अवरोध । राजावोंकीस्त्रियोंकाघररानि अवदीर्ण पतलाहोना पतलाहोगया अवरोधन नमहल' अवद्य अधम नीच पापी अवरोह वृक्षकीजड़सेजोलताऊपर- अवधारण एक जैमेदूधकाअवधा जायगर्चयादि वरोह रणा रगएकवावाजीकरतेहैं.[समय. अवर्ण निंदा गाली आदि अवधि सीयामर्यादा विल गड़हा काल अवलक्ष सपेद गोरा अवध्य मारनेकोअयोग्य विनामतल-अवलग्न देहकामध्य कमर मांझ वकीवात. अवलेप गर्व ग्रहंकार . अवरवर्ण शूद्र शूद } शब्दार्थप्रकाश। अलवित यासराकिया माश्रित अश्रप राक्षस निश्वर अवल्गुज वचुकी अधात नित्य अववाद आज्ञादेना अधि अत्री कोटि खड्गकाअतभाग पन्जा अववाद निदा गालीग्रादि अवश्यम निश्चय जरूर अथु बासू नेरकाजल अश्लील शिथिलसाणी बुरीवात अवश्याय पाला जाड़ा अनतम समीप आश्रित अश्व घोड़ा अवष्टभ गर्व अहंकार अश्वकर्णक शाखोकावृक्ष अश्वत्थ पीपर अवसर प्रसग समय अवसान यत नाग मरण अवयुम् अश्विनीनता अवसित घर समाप्त प्राप्तहोना अश्वपड़व पाडापाड़ी अवस्कर ग विटा झाड़ा गुदा अश्वा घाडी अरस्था बालादि चाल कुमार युवा अश्वाभरण घोडोंके गहना अश्वाराह घुडसवार सवार बुद्धा मृता अपहार पानीकीगोह मगरा अधिन् घोड़ी अश्विनी नक्षत्र अवहित्या थाकारछिपाना शोकादि [फेय अश्वनीसुत यधिनीरमा रसगलास मुखाछिपाना अधीय घोड़ोंकासह अपहेलन अनादर अपमान अपडताण जिसवातकांतीमरानान अवार नीच गगा अष्टमति महादेव [दारसारी अवायुप्पी सौंफ नष्टापद सारी सुवर्ण सोना कोठा अवाचीन अष्टीवन टॉपर मारवा पसाएक्भाग श्रवान नीचेफामुख असकत् वारमार अवाची दक्षिणदिशा असती व्यभिचारिणी दिनार अवाच्य विनाकहनेकेयोग्यगत थसतीसुन छिनाकालदया अवार नदीकातीर असन वृत्त अवासम् नगा दिगवर असनपण अपराजिता ग्रारधि अपि रजस्वलास्त्री पर्वत मेदा मूर्यस्या | असमीक्ष्यकाग्नि पिनागुरादापरिवार मी मुसा कवल जोकायापक अतिम करवंद करौंदा असार निर्वल निमोचननही अश्र पासवापानी पासू अमि तलपार गद्ग । अवाभा दक्षिण का हुना 1 (आ) शब्दार्थप्रकाश। (आ) श्राख मूसा श्रा स्मरण सुधिकरना ब्रह्मा वाणी.! भानुभुज् बिलार श्राः कोप पीडा पाप निदा. श्राखेट शिकार जीवमारना नां अंगीकार. माखोड पर्वतपील. माकंपित कुचकांपना. [निकलती है. | श्रारख्या कथा वात. प्राकर खानि जहांसेसोनाचांदीग्रादि | आख्यात नाम. [हानी आकर्प पांशा जवां- [सिंगार. याख्यायिका पिचलीपातकहनाकि- आकल्प पवनाना देंहमेवसादिसे | आगंतु अतिथिजोअपनेवर में कोईयाधे. प्राकार,अभिप्राय मनकीवात. [शहोना. आगम वृक्ष शास्त्र' श्राकारगुप्ति शोकादिसेमुखकीशोभाना-प्रागस् अपराध पाप. श्राकारणा, यतशब्दसेउलानागोहराना| आगार घर गेह. [रानेराले. आकाश जहांतारागणदिखाईदेते है आग अंगीकार. पाकीर्ण जहांबहुनमनुप्यादिएकहाहों श्रामीध मविन याजकहोमकहोमका- याकुल व्याकुल वेहोश प्राग्रहायणिक मागशीर्ष अगहन याकृति अभिमाय स्वभाव अाग्रहायणी मृगशिरानक्षत्रपांचवां प्राकंद वडाभयंकरसंग्राम रक्षाकैलिये श्रादकिंचित् सीमा द्वितीयक्रियाम दुःखसेशब्दकर. [चाग. आंगिक जोदेहसेवामहो थानीड राजापोंकेस्थानकेनिकटयागी पांगिरस वृहसति इंद्रके गृह श्राक्रोश बुलाना रोना गालीदेना. पाचमन जलसेजोसंव्यादिकर्ममेंहोता. याक्रोशन गालीना कोशना प्राचाम माद जोचाउरपकाननिका- लते है. भारापाद नैयायिक [स्त्रीपापकोयुलाव श्राचार्य पुरोहित गुरु. श्रातारण व्यभिचारीमनुप्यनोपराई प्राचार्या श्राक्षारित,जिसकीलोकर्मेनिदाहोपजिस यातीर पोच शेगल माचित दराभार भारतीहमारटकाम- आक्षेप,निदा चपार आज्ञादेना चुगुली रकाहांता गाडीभर. मान्छादन घिरजाना धाया करना. याच्हुरितकः दमरे कोपलियाँमी माग्वंडल इंद्रजोनिभुवन कास्वामीनपान्यांटन शिकार हत्या. मरावतीमराज्यकरताहे अामर घोकगोर रामंड. कोपराईग्री के संग को झटाकलकल प्राचार्यानी गराइनि एरहितमी. 1 यासोट पर्वतपील दोंगरियाकोट श्राटि प्राडि एकपक्षी. आटी : शब्दार्थप्रकाश (आ) आजानेय उत्चमजातिकाघोड़ा. आत्मगुसा केवांच कुहिरी, . आजि संग्राम वरावरपृथ्वी. आत्मघोष कार्ग कौवा. श्राजिव जीविका नौकरी. प्रात्मज पुत्र लड़का. प्राजू : 'जोरावरीरकमेंडालना. प्रात्मन् देहके भीतरकामीवात्मा प्रयत्न आजा श्राज्ञादेना.. वीर्य बुद्धि स्वभाव ब्रह्मा देदः प्राज्य पी. प्रात्मभू - ब्रह्मा कामदेवः प्रात्मभरि-पेटभरू अपनापेटभरलेइः आत्रेयी. रजस्वलास्त्री.: मार्डवर तुराकीआवाज हायीकीगर्ज-पाथर्वण वेद. नाचिरचार संग्रामकाशब्द. श्रादर्शी ऐना सीसा. স্মৃতি पाडी पक्षी. आदि पहिले पूर्व. [वनाई... आदिकषि वाल्मीक जिन्होंनेरामायः आदक : अयातौलकाः; पादिकारण पहिलेकीवात.. प्रादकिक · अयाभरवानेकाखेतः श्राढ़की : तुरिका औषधि. आदितेय देवता जोअदितिकपुत्रहुये: श्रादयधनी धनवान्. आदित्य देवता देवतावोंकाइंड सूर्य आदीनवं क्लेश कष्ट दुःख आणकी अधम पापी नीच..... आडत पूजा श्रादरः आणवीन धान्यादिवोनेकाखेत प्राय प्रथम पहिला. आतंक' रोग संताप भय शंका. आतंचनद्धमाटाडारना जावन.. प्राधमापक पांचरत्तीकायासा. .: जिसबहुत क्षुधान्याकुलकर. श्राततायिन्। चील्ह मारडालनेलायकः आगुन, श्रातप घाम सूर्यकामकाश..... आद्योत प्रकाश दर्शन देखपड़ना. आतपत्र दाता तुरी. आधार, खात खाइ. पातर नाबादिकी उतराई......माधि मनकोव्यथा-आपत्ति.. प्रातापिन् चील्हा श्रात कांपना थोड़ा पातिथेयो आधोरण,महाउत्त हाधीकाहांकनेवाला. निमंत्रणकरना नेता. आतिथ्य श्राध्यान, चिन्ता.स्मरणःशुधिकरना. पातुर रोगी बीमार... अानक पंह भेरी नगाड़ा... ‘ातोय. एकाजा. अानकदुटुभि वसुदेव कृष्णकैपिता. भात्तगंधी जिसकाअभिमानंदूटनाय. आनत नीचेकामुख.. प्रात्तंग आनद : मुरवंग शंख घंटा वंशी मृदंग -- - ६ . । . 7 (आ) शब्दार्थप्रकाश। श्रानन मुख. प्राप्त विश्वासिक जोलोकमेमसिद्धहाँ श्रानंद प्राप्य जलकाधिकारकूट कल्याण शुभ मंगल.' आनंदथु) आप्पायन चिन्ह व्यंजन. [नेवालेकी. आनंदन अपनेस्थानपरगावनेवालेकी आमचन्न खातिरकरनाअपनेघरमा । सेवाकरना. आप्रपद जोबस्तपैरतककाहो. श्रानत नाचनेकास्थान द्वारिकापुरी. आमपदीन आनाय जाल मछरीफासनेका. प्राप्लव स्नान नहाना. [करस्नानकर. भानाय्य गार्हपत्यसेलेकरदक्षिणाग्निाप्लवनतिन् जोब्रह्मचारीव्रतसमाप्त मेमातहो. याप्लाव स्नान नहाना नाह मलमूत्रबंदहोनेवालारोग याध जुवामेरांधनेकीरस्सी पानाह लगाई यायुत्त भगिनीपति वहनोई प्रानुपूर्व प्राभरण गहनाजेवर श्रानुपूर्वी परिपाटी सीधाक्रम आभापण परस्परवातकरना शानुपूर्व्य आभीर गोप अहीर, प्रांत्र शांत पेटकेभीतर. श्राभीरपल्ली। धसिक रसोईदार अन्नपकानेवाला. आभीरपल्लि । गोपॉकेग्राम अहीरकापर. श्रान्वीक्षिकी विद्याराजावोंकी. श्रामीरी गोपी बहीरिन ग्वालिनी. श्रापक पोली,पकान्न यव जेघीकेपके. श्राभील : वष्ट दुर श्रापगा नदी भाभोग सपतनासपरिपूर्ण आपण बाजार. यामगंथिन् विनापकेमांसकीदुर्गय । थापणिक वनिया सरीदनेवेंचने आमनस्य पीड़ा ममृतसारष्ट [वाला श्रामंत्रण अतिथिकीसमकारसंत्रा श्रापत्माप्त जोयाफतमेहो श्रापद् • भापति श्राफन यापयानिन् रोगी थापन श्रापत्तिमेमाप्त श्रामलक थापन्नसत्वा भिणी आमलकी) भापपित्सक सवतरफसे प्राप्त यामिता पगरमधमेंदहीदालना थापान मंदिरापीनेकीसभा थामिप मांग उत्तमभाग पदार्थ मापीय जोशिखामेमालापहिर ग्रामिपाशिन् मछरीमांसभोमनकरने पापीन गायन ऐन. इत्यादि. वाला मापूपिक भक्षणकरनेवाला पुवाइ श्रामुक्तः कवचारी है -- - मामय रोग T 1 अंबरा.
1 ११ - . ra आयत - लंबा. +- + Tr- शब्दार्थप्रकाश। (आ) आमोद,आनंद अतिसुगंधकस्तूरीआदि आराव शब्द आवाज. आमोदिन जोअपनेमुखकोतांबूलादिसे आरेवत किरवार. सुगंधयुतकरै आरोग्य रोगनाश. [चढ़ना. आम्नाय वेद संभदाय बापदादेकारीत भारोह 'लंबाई स्त्रीकीकमर हांधीका श्रान आंब आरोहण सोपान महेलेकीसिट्ठी. श्रानातक! अंबाड़ा 1- 1. आर्तगल झिटी. माहित जोपातद्वितीनवारक है। मार्तव सीकामासधर्म, श्राम्लिका अंबिली. आति पीड़ा. आम्लीक आई बोदा भीना । आईक, अदरख. अायतन यज्ञशाला आर्य सज्जन श्रेष्ट अपनधर्मस्थिर आयति मागेकाकाल प्रभाव लंबाई भार्या श्रीदुर्गाजी T- श्रायत्त बाधीन दास - , -,- आर्यावर्त देश जोविण्याचलहिमाच आयाम लंबाई दीर्घता लके मध्यमे. श्रायुध हथियार भार्षभ्य। अंडबैल. आयुधिक । अस्त्रादिकोंसेजीविकाकरने | आल हरिताल. नायुधीय वाला सिपाही आलंभ मारडालना बय. आयुष्मत् आयुर्दाययुत बहुतदिनजिये आयुस जीनेकासमय उमर. श्रालय घर. [पानीदेनेका. आयोधन संग्राम लड़ाई. आलवाल 'यान्हा वृक्षकेचारीतरफे पालस आलस्य भारग्वध: किरवार. आलान बांधनेकाखभाहाथीमादिका. थारनालक' काजी सिरका. पालाप बातकरना. प्रारति विश्रांति शांति शांत. आलाबु श्रारंभ आरंभमात्र मारम. -तुंवी ताबी. बालावू 'भारव. शब्द मावाज. आलि सखी साथिनि पांति सेतु पुल पारा धारामारीचमड़ाकाठकाटनेका. । दीदी..- सारंगीइत्यादि. श्रारात् दूर समीप. प्रालिग्य देहमेलगाकरवजायाजाय पाराधन,साधन सिद्धि लाभ [मागहो. आलिंद दरवाजेकबाहरचोक आराम -घरकेसमीपशोभाकेलिनो पाली सखी पांति. : आरालिक रोटिकरा. आलीट दहिनीजांधपसारवांइकोरोंक -- T - म श्रारकूट पीतर. -- .. १ ani सप M (आ) शब्दार्थप्रकाशः। खड़ाहोना धनुर्धारीका. आशिस्: सपिकादाद :: :: आ } झारी झनीयोई मादिधोने की आशीविप पाशीविप पालोक - देखना बंदीजनोंकाभापण- वाशीस् शुभकहना कल्याणकीइच्छा. अालोकन देखना-दर्शनकरना. पाशु शीघ्र धानी यव.TAT आवपन पात्र भांडा. परतना; आशुग वायु वाण.ri [लाल हो. पावलि पांति. - आशुबीहिधानी जिसकाचाउरसफेद श्रावसित तृणकीराशि, खरही. आशुशुक्षणि अशि. पावाप थहला...... का श्राश्चर्य विस्मय तअज्जुब आवापक हांथकागहेना- पहुंची:- पाश्रम ब्रह्मचारी? गृहस्थ २ वाणाम- आवाल, थहला. स्थ ३ संन्यास प्राशय. प्राविग्न करवंद करौदा-पोय चोटेसपैयदकीशरण श्राशरा आविद कुटिल टेढ़ा प्रेरणा भेजना. श्राविध जिसशस्त्रप्सेछेदही वर्मा. iri दु:ख आविल कीच कँदया चहला. } | श्राश्रुत अंगीकार प्रतिज्ञा अाविष्ट प्रासक्त लगज़ाना. TE Jोच" घोडाका डा. शाविस प्रकाश स्पष्ट अाश्वत्या पीपरकोफल पिपरियां, आबुक . पिता जन्मदेनेवाला 11 | आश्वयुज यहिनीकापति वहनोई. "कुवारकामहीना . [अाश्विन श्रावृत् परिपाटी पुरानीचाल आश्विनेय थग्विनीकुमार देवतावोंके यावृत घिरना लपेटना वैद्य. :.:.; [परजाय. श्रावेगी-वरधारा विधारी '...' श्राचीन : जिसस्थानकोएकदिन घोड़े आवेशन कारीगरोंकास्थान :: आपाद: दंदब्रह्मचारीका महीना. श्रावेशिक अतिथि जोअपनेयहींबाये यासक्त तत्पर लगनाना श्राशंसित श्राशंसु बांयाकरनेवाला- [मनोरय. श्रासन बैठका : पीदावलीसेमित्रता ओशय श्राश्रयं श्राशरा अभिमाय: कमनोरमेवर हांयीकाकंधा. स्थाशराराक्षस: ... श्रासनपणी शनपणी गोकर्णी, प्राशा. दिशा बहुतदिनकीइच्छा पासना मंठना मोसनी भाशितंगीन जहांगीचरचुक आसंदी भासने वकीचटाईभादि यांशिर.. राक्षस, . , .. यासन समीप निकट..." आश्रयाश श्रमिक आश्रव लश । श्रावृत्त - -- - म 1- । 1 २३ शब्दार्थप्रकाश । आसव गाडीमदिरा, आहो विकल्प मनुष्यबादेवता गदहा श्रासादित,माप्त। [धा सेनाकारना व घोडा श्रासार मेघोकीझरबहेजोरसेगुसरा आहोपुमपिका अहंकारसेअपनाकोमा आसुरी। राईकाली- 1: नना इपधनीपण्डितचतुरज्ञानी आसेचनक जिसकेदेखने मेमन न भरै इत्यादि श्रास्कंदन सग्राम [ नदेनसुनै | आईक,बादिक बहुत सस्कृतगोलनेवाला श्रास्तदित जिसचालकीदौरघोड़ा पाहय नाम जैसे श्रापकाक्यानामहे आस्तरण- हाथीकेपीठकागदा विलौना ग्राहा नाम थास्था सभा प्रयत्न आदान बुलाना मोहराना प्रास्थान र सभा बैठक प्रात थास्थानी प्रास्पद प्रतिष्ठाकास्थान - '(ई) प्रास्फोट महारवृत" सूमी छेनी , इ काम महादेव चन्द्रमाकोकिरण श्रास्फोटनी जिससेछेदहोमोतीदिमें इक्षु ऊख गन्ना पोडा [कंद काश श्रास्कोटा यनचमेली रानमोगरी इक्षुगधा "गुरवरू तालमखाना बिलारी श्रास्फोत मदार इक्षुर तालमखाना प्रास्फोता बिष्नुकाताफूलबेलि वनच इक्ष्वाकु कडईतोंवी एकराजाकानाम मेली रानमोगरी' इग जगम चर चलनेवाले मनुप्पादिम पास्य मुख नकेयोग्यकर्म दूसरेकेयाशयकोजा श्रास्या प्रासन नकामकरना आस्रव क्लेश दुःख इगिताकार दूसरेकेमनकीवात आहत अर्थझूठऐसीबाणी गुणाकरना, इगुदी इगुआवृक्ष जैसेचारदुनेमा [हो । इच्छा मनकीवाला,मनोरय थाहतलक्षण जिसकरितादिमसि । इच्छावती जिसस्त्रीकीइच्छाभोगकीहो यादव सग्राम इज्जल स्थलवेंत समुद्रफल- आहवनीय अग्नि यज्ञकर्मकी इज्याशील वारवारयज्ञकरनेवाला आहार भोजन [ सेवनागदा इदचर: स्वेच्छाचारीबैल- अजिससे श्राहाव पौसरा कुवाकेसमीपपत्थरादि F कामनलियाजाय आहितलक्षण प्रसिद्ध जैसेविहान् ध-[इतर नीचजाति भिन्न अलग नवान् बलवान् इतरेएम इसरेदिन आहेय सापकाफन विषकास्थान इति कारण प्रकरण प्रकाश समाप्ति - 13 TI - । । TA ५ 7 (ई) शब्दार्थप्रकाश। इतिह लोम्परपराकेउपदेशमे अव्यय जना कामकरना,मलमूननिकारना इतिहास, पुराण पुरानीपार्चा महाभारथ भोग, सुत्रस्पर्शादि इत्वर शीघ्रता [पकरें इंधन शूखातणकार इत्वरी स्वैरिणी जोदृसरेपुरुषोंसेरम | इन्वक मृगशिरानक्षत्रकेपंचतारा इदानीम् इससमय इभ हाथी इश्म ईधन शुखावृणकाठ इन सूर्य इरण ऊसर जहागासतकनहो इदिरा लक्ष्मी विप्नुपनी इरंमद मेषज्योति वजकीअग्नि इदीर कमल दिरा पृथ्वी पाणी जल इदीपरी शतावरि इर्वारु कर्कटी काकडी इदु चद्रमा [दिशाकामालिक दिग्पाल | इला चुपकौस्त्रीनिससेराजापुरुरवाचंद्र इद्र अमरावतीकामहाराजाधिराजपूत 'पशका कारणमा पृथ्वी धरती इंद्रगु अर्जुनवृत [दारहोती इली छोटीतरवार सांडा गुप्ती इद्रयव इंद्रजव जिसकीनालीलच्छा | इल्वला मृगशिराकेपचतारा इंद्रलुप्तक गजा खल्वाट इस समता जैसे चद्रमुखीत्री इद्रवारुणी इद्रोरनिलता. इप कुमार इपिका ) हांथीवीयोग्यवीगोलाई इद्रसूरिस निर्गुदी ।। इपीका सलाईछेदकरनेवी इद्राणी इद्रकीरानी इद्रायुध इद्रधनुप जोसूर्य की किरणोंसे एधि पनुप रमान मेघमें दिखाईदेता या दान जोइच्दा इद्रारि दैत्यहिरण्यकशिपुग्नादिइन्द्रकं | इष्टकापय वम तृणकीनर गांडरसन्न रद्रावरज विप्नु यामननी नोटेवमातारे इष्टगंध मुगधि प्रगहुये इष्टा-पुक्त यांराकेउपाय,लगना इद्रिप पाख,नाक, कान,जिहा त्वचा, इष्टि पत्र प्रदा ज्ञानेद्रिय पाणिपाद,गुदा, लिंग, इप्पास धनुष वमान त्वचा, कर्मेन्द्रिय वीर्य निमसेसय, की उत्पत्ति | लक्ष्मी वाण सर्प अनुप रचना इद्रियार्थ देखना, मुनना, मुगपतना, ईचण ने भाग्य देखना स्वादजानना, गर्मशीतकामान,च , चिणि गुमागमनाननंबान्नीग्री } १५ वाण तीर [घरी / इष्ट १ वेल ईबाहकटी काकड़ी २५ शब्दार्थप्रकाश। ईडित स्तुतिकरना नमस्कार उथ एकसामकानामवेदमद ईति लोकाचार बहेना लोहकीट उक्षन् ईरण ऊसर उसा स्थाली थाली ईरित मेरनान्भेजना उरय,पक्रहाप्रम परोसापन्न [पदाहो. ईम घार फुरियात्रादिका उग्र, श्रीमहादेव उग्ररस शद्राणीमतनीसे उनगधा अजमोद अजवादनि ईर्वाल ऊचा ईया परायाविभवखनले उच्चटा नागरमोथा मुस्ताविशेष उच्चड शीघता ईलि एकधारा खांडा उच्चार विष्टा झाडा ईलित नमस्कार उच्चावच बहुततरह ईली खाडा छोटीतरवार उच्चैःश्रवस घोड़ाइका ईश महादेवजी ईशान्यदिशाकेपालक | उचैर्युष्ट बहुतजोरशब्द ईशा हलकादडा उच्चैस् वटा भारी ईशान श्रीमहादेव' - उलूय वृक्षादकोंकीचाई पहाड़ों ईशित स्वामी उन्ड्राय कीरचाई ईश्वर श्रीमहादव स्वामी उचित ऊचा बढनेवाला उजासन मारडालना ईपत् थोड़ा 7 ] उज्वल शृगार शोभाकरना स्वेत ईपत्पाडु कुछपीलासपैदूरग। उछ शीलाविनना येनात्मणोंकी ईपा हलकादडा उलशील सत्यजीविका ईपिका हाथीकेाखकांगोलाई सलाई | उटज पर्णशाला पियोंके पर बैदकरनेकी उडु नक्षत्र नखत ईपीका दायीकायाखगोलक उडुप छोटीनाव डोंगी चद्रमा उडुवर ईहा वाचा मनोरथ गूलर उदुवर ईहामृग बृक भेडहा भैडिया उडीन उड़नापतियोंका [कल्पमा (उ) उत तानाताननाकोरियोंका प्रप्नोति उ कोपकीपाणी शकर तनी विप्नु । उताहो विकल्प जैसदेवतागधर्ष गौरी सुन्दरनेत्र - उत्कठा मनलगरदा उक्त कहाहुवा उत्कट दालचीनी तज मतवाला उक्ति वचन बोलना उत्कठा मनलगारहना ईश्वरी श्रीपार्वती - उत्क शब्दार्थप्रकाश। २६ उत्कर राशिधान्यकी ढेरयवादिकोंका उत्स जहांसेजलब? उत्कलिका,पानीकाकल्लोल लहरीउठना | उत्सर्जन दान. [ग्रामको जल्दीमे. उत्कर्प बचाई अधिकता उत्सव खशीनाचरागरंगादि कोपसे सं. उत्कलिका मनमलगजाना उत्सादन उबटनलगाना उत्कार धान्यकाउत्तेपण बसावना उत्साह उछाह शक्तिभेद उत्क्रोश कुररीपती उत्साहन किसीकामकीउदाह उत्त वोदा भीजा उत्साहवर्धन वीररस उत्तंस कानवशिरकागहना उत्सुक उद्योग उपाय उत्तंठा •,' उतप्त शूखामांस उत्सेध उंचाईवृक्षपर्वतादिकोंकी देह उत्तम प्रधान श्रेष्ठ की उंचाई उत्तमर्ण रिणदेनेवाला व्यौहर उत्सृष्ट त्यागकरना छोड़ना उत्तमा जिसस्त्रीगुणशीलादिहों | उदर उत्तरदिशा । उत्तमांग शिर उदक जल पानी उत्तर जवाव दिशा राजाविराटकापुत्र | उदभव उत्तरदिशाकाहुवा उत्तरा दिशा उत्तरासंग उदक्या रजस्वलास्त्री उत्तरीय रुपट्टा स्त्रियोंकालुगरायादि | उदग्र ऊंचा उत्तरेस उसदिन उदन पशुनकोलेचलना व बलाना उत्तान उथल जलकम उदधि समुद्र सागर उत्तानशप दूधपीनेवालाबालक उदत यातकहना उत्यान पुरुषार्थ तंत्र पुस्तक संग्राम | उदन्या पियास कृपा । यांगनमें भावना यानन्द मलरोग | उदयत् समुद्र उत्थित पढ़ना उंचाई उदपान फुलां विहीर पावली उत्पतित उलरनेवाला उदय पूर्वपन नहामृपउदयहीन उत्पत्ति पैदाहोना प्रगट उत्पतिप्नु उलरनेवाला उढर्क अागेकाकाल उत्पन्न पदाहाना बढ़ना उदवामित घर उत्पल कोंकालि वाला फूट उदचिन् श्रापानलकामटा उत्पलशारिवा उपलमरी उदान स्वरकी मंना उत्पात शुभाशुभमुचक विमुनीमआदि | उदान कंठकीरायु उम्पुल फूलनापूनों उदार मघापुरमदानी पड़ा . उदर पंट Im T H २७ शब्दार्थप्रकाश। (उ) उदासीन जोनशत्रुहोनमित्रहो उद्धार द्रव्यउधारदेना चूल्ह उदाहार कहनेलायफ वर्णनकरना उद्धृत कुवांसेजलनिकारना जोकुछ उदित कहाहुवा बघा निकालाजाय. उदीची उत्तर उद्ध्मान चूल्ह उदीचीन उत्तरदिशाकाहुना | उद्भव जन्म पैदा उदीच्य उत्तरकादेश नेत्रवाला. उद्भिज्ज उदुवर तांवा गूलर उद्भिद् वृक्षलताजोपृथ्वीकोभेदकरहो उदुंबरपणी दांती औषधि | उद्भिद उद्खल उलूखल वोखरी उदभ्रम कांपना ब्याकुलहोना उद्गत १ वान्तसेअनगिरना कैकरना उद्यत शस्त्रादिकोंकाउठाना उद्गमनीय धोयेवसकाजोड़ा उद्यम उद्योग वोझाआदिउठाना उद्यान राजावोंके अानंदकेवाग घरसे उद्गाह शीघ्रता निकलना. उद्गार सामवेदीयहमें उद्युक्त अपने कामकायन उद्गार वमन [यत्र उद्गीथ, सापवेदकाशब्द, उद्योग उत्साह किसीकामकाउछाह- उठानाशस्त्रोंका उद्र जलजीव मगराआदि उद्वर्तन 'उबटनदेहकरना उद्ग्राह ऊपरउठाकेपकड़ना उद्वात वमन उद्ध शुभशब्द ! उद्धांत वमन जिसकामदउतरजाय उद्धन काठकाटनेकाधन ठीहा उद्घाटन घटीकायंत्र उद्वासन वध मारना उद्धात प्रारंभमान उद्वाह विवाह उद्वेग सुपारीकाफल ब्याकुलता उडान धन उदाल लसोहरवृत्तवभाकरी मूसा चूहा उदित बंधा उन्नत ऊंचा उद्राव भागना उन्नतानत उंचानीचा उद्धर्ष उछाह खुशी उनद्र चढ़ा गर्वित उद्धव कृप्नकामित्र उदाह खुसी }ऊपरलेजाना इच्छाकरना. उद्धात प्रारंभ उद्धान चूल्ह उन्मत धतूर मतवाला उद्धांत वमन वध मारना उपूर्ण, - - - उंदर . उन्नाय उन्मथ २८ । उपयाम (उ.) शब्दार्थप्रकाश । उन्मदिप्नु मतवालेस्वभाववाला उपनाह । वीणाकेतारवसुंदरी ',' उन्मनस् “उक्तंटा चित्तमेलगना उपनिधि धरोहर उन्माष जालाक्षीमृगोंके फांसनेकाव उपनिषद् एकांत बेदांत वेदकायंग घकरना उपनिष्कर पड़ीसडक जिससेहांधी उन्माद, चित्तकाभ्रमशिडीकासास्वभाव श्रादिसुखसेनिकल उन्मादयन् बैलान शिडी उपन्यास वचनकांमारंभ उपकएट समीप उपपति जार यार उपकारिका उपकार्या राजावोंकेघर उपभृत् श्रुवााभेदयनादिकोंमें , उपइंचिका लोटीइलाची कालाजीरा उपभोग समीप भोगादि उपकुल्या पीपरि उपमा उपमादेना नजीर मिसाल उपक्रम आरंभ मधमारंभ दवाकरना | उपमा,द्धपियानेवालीबालकोंकीदासी उपक्रोश निंदा गाली उपमान उपमादेना उपयम उपगत अंगीकार } विवाद । उपगहन लपटानास्नेहसे उपरक्त किसीयसनसेव्यामुल जैसे- उपग्रह कैढकरना पकड़ना नमेराजजुवारी मूर्यचंद्रमाकंग्रहण उपग्राहा भेंटदेनागुरुमादिको नजर | उपरक्षण - सेनकीरता पहरा गस्त उपघ्न समीपकायासरा शांति विश्राप उपचरित सेवाकरना उपराम उपचाय्य अमिमयोग उपराग ग्रहणपढ़ना उपचित समृद्ध सवसुखसंपूरण उपरि धागे उपचित्रा माकणी उपल पन्धर उपजाप भेद फोरफार | उपलश्चार्धा, अपनेभीएकासिद्ध करना उपझा मथमज्ञान उपनरिख युद्धि यकिन उपतप्त 'रोगविशेष उपन्नम अनुभव मानाचार उपताप रोगमात्र उपन्ना शर्करा कंकड़ी उपत्यका पहाडकेमपीपकीपृथ्वी उपरन याग फलसलसामानन्ददाया. उपदा घेवहार भेट नजर उपरनन देश मेश्रयर उपचा भेद फिर प्रारंभ परामप उपर तकिया जामिग्नीधरामाय उपमान तकिया उमीम गिग्दा परम्न । उपधि ग्रन एकादशीयाटिया उपरम शांति शटना टगना उपवाम . - - T - उपसर्ग उत्पात } २६ शब्दार्थप्रकाश । (उ) उपविषा प्रतीस उपायन वेवहार, उपवीत जनेऊ यज्ञोपवीत उपालंभ निंदामोरवड़ाकरचातकहना उपशल्प गांवकाकिनारा उपावन घोड़ेकालांटना उपशाय शयन सोना उपासग तूणीर तरकस भाया उपश्रुत अंगीकार । उपामन सेवागुरुवादिकनकी वाणके उपसंन्यान नीचेकावख लहगाधोती फेंकनेकायभ्यास व्यजन मीठेखठे आदि उपासित सेवाफियादेवताआदि, उपसंपन्न यत्रकाबलिदान | उपादित संयोगकोमाप्त आगलगना उपसर गर्भधारण उपेंद्र वामनजी विष्णु उपोदिका ? शागभेद उपसर्जन दान उपोदीका उपसा .गौ गर्भधारणकरनेवाली उपोदात किसीकामकाविचार... उपसूर्यक मूर्यकेचागिर्दकभीजोमंडलहो | उसकृष्ट बोयेकेवादजोतना उपस्कार शागादिकलिये हरदीआदि उभपद्यम् उभयेस । दोदिन- उम् कोपकीपाणी प्रश्न उपस्थ योनि लिग उमा श्रीपार्वती अरसी उपस्पर्श छ्ना दानदेना | उमापति श्रीमहादेवजी उपहार भेंटदैना राजाकोकरदेना उम्य थरसीकाखेत उपहूर एकांत समीप उपांशु जपभेद एकात लिपटना उर मनिका मोतीकामाला उपाकरण जनेउहोकरपेटपढ़ना कर्म | उरग सांप उरन्छद कवच वरतर उपाकृत वलिदानयाका उपात्यप उल्लवन अतिक्रम. [ वस्तु उरण मंढा उरपाक्ष उपादान व्यवहार भेट मांस भोगकी उपाग्य उपाधि पुदुरपालनेवाला धर्मकीचिंता उरभ्र मेढ़ा उपाध्याय पढ़ानेबालागुरू उरग यगीकारकरनम उपाध्याया उपा-पायानी पदानेवालीगुगनि | उररीन अंगीकारस्या उपाध्यायी उरम् दानी लय उपानर जूता सराई उगशन्न उपायचतुष्टय साम दान र भेद उरम्नान् का चूर्ण । चौरी.. 1 .
उप्णोपगम गरमी. - उसा गौ . Y शब्दार्थप्रकाश। उरस्य पुरणपनीविवाहितास्त्रीका उरीकृत अंगीकार उपण,ग्रीप्ममृतु वैशाखज्येष्ठ चतुर गरमी उरु चौड़ाई उपयरश्मि सूर्य उरुबुक रेडा रंडीकावृक्ष उष्णिका पतलाभात गोलाथी उर्वरा । सपनाजहोनेवालीपृथ्वी उप्णीप पगड़ी रुपट्टा मट उर्वशी अप्सरा उर्वी पृथिवी उपणक उहि ' कांकडी उस किरणसूर्यकी उलप वड़ीवेलि । उलूक उल्लू खूसट घुयुवा (ऊ) उलू खल वोखरी ऊ रक्षा चंद्रमा राजकुमार गल मंगल उलूग्वलक गुगुल कलश वदे पनियां उपमा राक्षस. उलपित् शिशुमारमत्स्य ऊबरपर्णा । दंती जिसकावीज जमाल उल्का तेजसमूह लपट लवाई जहुवरपर्ण। | गोटा. उन्मुक जलताहुवापाठ ऊत यसविननेकाताना उल्व फलल स्त्रीरक्तपुरपचीप मिलाहु ऊयस् गोफेयन भायन वागर्भाशय. उन निदिस थोड़ा उत्रण दुःसह ऊम् कोपीयाणी उल्हाय निरोग जिसकारांगदै ऊररी भगीर उल्लोच चॅदया ऊपरसखादितानना उशनस् शुक्र करी अंगीकार उनोल घडीलहरनदीयादिकी ऊरीकृन अंगीकारकिया उशीर ससणभेद अरु जाप उपणा पीपरि करुन यग्य पनियां उपर्युध अमि उम्पर्वन मांटी जांचपीलीयानाड उपस् मातःकाल सवेरा. [कन्या. करवुक अंडापद उपा रातिकायत दोयरीरातिरहेवाण ऊन सानिमहीना उसा स्थाली पानमंद अजम्बन पगममी उपापदि अनिन्द्र कनकापौत्र अम्बिन उपित जलना अनाम मागमकरी अरण्य पश्य उपा T -- ऊपण मिर्च ३१ शब्दार्थप्रकाश । ( ऊ ऋ ल तृ.), ऊर्णा मेदादिकोंकेरोमा खेतकेशीलाविनना ऊर्णायु मेड़ा कंबल ऋतीया . निंदा ऊर्धका अव मृदंगविशेष मुखकागजा ऋतुमती मासिकधर्मवालीस्त्री; ऋतु ऋतु ६ वसंत ग्रीष्म वर्षा हेमंत ऊध्वजानु जिसके पैरकीगांठीबैठेपरऊ- ऊर्ध्वज्ञ शरद शिशिर दोमहीनेकीऋतु ऊर्वड परहोजाय ऊंचीगांठीहो. स्वीकामामिक कमि लहरी ... ऋते वर्जना विना ऊर्मिका अंगूठी मुंदरी ऋत्विज होमकरनेवालेयज्ञादिकोंके अभिमत् टेढ़ापन् ऋद्ध तृणकीराशि नाजकीरी ऊप प्रातःकाल रेहू खारीमाटी ऋद्धि औपधिविशेष ऋभु देवता : ऊपण पीपरि- :: ऋभुतिन इंद्र ऊपर ऊसर जहाँयासतकनहो' अश्य . शीघ्रचलनेवालाहिरन ऊपवत् ऋश्यकेतु अनिरुद्ध अप्णागम गर्मीऋतु . . ऋपभ स्त्ररभेद औपघि वैल श्रेष्ठ तर्क चतुराई - ऋपि तपस्वी सत्यवोल: (ऋ.) : ऋष्ठि खई तरवार : ऋ देवमाता बालक वृद्धि हाथी पर्वत ऋय्य हिरनजाति ::::: वेद शत्रु नदी अमृत ऋप्यकेतुः अनिरुद्धः क्थ ऋप्यगंधा विधारापधि न नक्षत्रश्योनापादाभापधिरीय | ऋष्यमोक्ता केवांच शतावरि प्रक्षगंधा विधारा (३) प्रशंगधिका सपेदकुम्हड़ा पेठा ऋ : सर्प मुजा दनुजमाता भूपण जल ऋच ऋग्वेद कमल चीप तथा कड़ाई (लु) ऋ ल्ल देवयोनि पर्वत पवन नागमाता यूज - सूचा अपनीमाता नेत्रकीहड्डी ऋजुरोहित इंद्रधनुप (लू) भूण रिगलना कर्ज तृ देवपत्रीकारण : सत्य बाजारकेदानाचिननावा' •- . धन .
- १ एकधुगपद) एकालकाएरा. (ए ऐ) शब्दार्थप्रकाश। ફેર (ए) एडक मेहा ए विष्णु राति आकाश जल एडगन चौड़ी एक संख्याएक? भिन्नार्थमें श्रेष्ठार्थ एकमृत मूर्स वेवकूफ. [गाये जाय में रामएकहुये एक जिसकेभीतरहहीदों कार जिस एकक एडोक दीवारमेंमजस्ती कोपत्यरादिल एकगुरु गुरुभाई एकगुरस्केचेला एण' हिरणसंदरनेनराला एकतर. भिन्नार्थ जैसघोड़ेसेगाभिन्न | एत कारारंग विचितरंगचुनरीयादि एकतान एकचित्त एकाग्र एता इसीममर अभी एकदंत गणेशजी एष । काठ. एकदृष्टि काँवा जोएकहीतरफदेखना एवम् । एकदा एकहा एकालम एधा समृद्ध बढ़ना एकधुर एधित बहुतपढ़ा एनम् पाप पुगकर्म एकधुरीण एरंड थंडा एकपदी मार्ग रारता. एर्वारु काकडी एफपिंग कुरेर एफयष्ठिा एकलरकी मोतीरामाला एला इलाचीपती एकसर्ग एकाग्र एलापी राम्ना रहमान एकदायनी एकसालवीरलिया एलाराला सुगरदन्य एकाकिन् अकेला एस इगतना इममतार एलान एवम् नुल्य घगर मगार उपमा अं. गीकार यनियर्य परांत अतिशय शीघ्रता अलग्ग एपीपक सोनागेंकातरम गांटा एसद्वा एकरर्पकीगी (ऐ) एजायन ६ महादेवाय पप एकाग्र. ऐसागागिर चार एकावली एमनसाहारमोनीश गुद गुठीकापन एकाष्टील गपा बुक ममदार एकाष्टीला पाठा एड पहिरा ऐतिद्य तौर परंपग-पंदगमें एलगन चकाटी एकाएकचित्तोना सस्थगित. एकापन ऐसय } डिग्गुनानि औमीन, .- और्वदेहिक । मरेकेदशगात्रादिकर्मः ३३ शब्दार्थप्रकाश। (ऐ ओ औ क) ऍद्रियक जोइंद्रियादिकोंसेकामहो. औदनिक रोटिकरा श्राचारी ऐरावण हाथीइन्द्रका औदरिक -पेटभरुः ऐरावत हाथी दिशागन नारंग श्रीदुंबर गूलर ऐरावती विजुली आपगवकै गौइत्यादिकासमूह ऐलविल कुवर औपयिक न्यायसेद्रव्यमाप्तहो ऐलेय बालकनामसुगंधद्रव्य औपवस्त व्रत उपास ऐश्वर्य विभूति सिद्धि द्रव्यादिक औपवस्त्र. अरसीवोनेकाखेत ऐषमस वीतेवप (ओ) औरभ्रक ऊंटोंकाझुंड औरस ओ ब्रह्मा चंद्रमा कीच अपनी विवाहितास्त्रीकापुत्र. औरस्य। ओकस् स्थान. [जलकावहना औलुक्य वैशेपिकशास्त्रपढ़नेवाला ओघ, शीघ्रतासेनाचनाआदि समूह झुंड और्वदेहिक ओंकार प्रणव आदिब्रह्म 'ओजस् तेज वल' और्व वड़वानल मोइपुप्य गुडहर जास्वंद' प्रौशीर चामर दंड शय्या प्रोतु बिलार औपध अपधीहरइत्यादि अोदन भात अन्न औष्ट्रंक 'ऊंटोंका झंड ओम् अंगीकार आज्ञा (क) ओष दाह ओषधी जोदवापागादिकोंकेकामावै क शिर जल सुख- ओपधीश चंद्रमा कंस कटोरा जिससे द्वादिपियाजाय पोष्ट चोट कृप्नके मामाकानाम (औ) कंसाराति श्रीकृप्न-जोकसकेशत्रुहुये औ अनंत गणेश अभिमान ककुद चलकीलाठ राजावोंकेचिन्ह औतक बैलोंकाझंडा ककुद्मती कमरमोटी छत्रचामरादि : : ककुंदर चूतरपरपीठकेतरेकुछगहिरा औचित्य ककुम दिशापूर्वादि वीणाकेतोंवा अ- भौचानपादि धुवजी जोचक्रकेमध्यभृव र्जुनवृक्ष लोकमहें करखट कठिन कड़ा औत्सुक्य उत्कंठता कक्ष वाहुकेतरेकांख शुखातिन वन क वायु ब्रह्मा सूर्य औचिती मैत्री मित्रता -- कंक खंडरैचा यकुला - । से . कंग। कंग कानि. क) शब्दार्थप्रकाश। कक्ष्या हांथीकसनेकी चमड़ाकीरस्सी,काह , कड़ाह खपरा कछुवाकोपीठ। राजाचोंकीडेउढ़ी कंपनी---" - कटि कमर करिहांच फूल कटिमोथ- कमरकामांस.. कंकटक • कवच वख्तर कटिवल्लक करेला कंकण हाथकागहेना, कटी कमर चतर कंकणी घंघरू कंधनी कटु रसभेद कुटकी नकरनलायक कंकतिका कंधीवालसाफकरनेकी कद्वी कईईतायी कंकाल मांजरि शरीरकीहड़ी ' कदुरोहिणी कुटकी कंकोलक कंकोल करावचीनी कटूफल कैफरा कदवंग शोनापाटा कठिंजर पणांस कालवई कच वालशिरके कदिन कड़ा पुष्ट कच्चर मला जोसाफनरई कटिलक करेला कचिन अपने स्वार्थकीप्रप्नमें इच्छामे. कठोर पोदा कम। नदीकेयासपासका देश तुनि | कडंकर भम तृणकाचूर्ण. वयुका अंचल. कच्छप कड़मा ट्रम्पकीसंख्याबरकी रईब देंट शानारीका कन्चपी सरस्वती की पीणा. फडार पतिरंग रण पहुनथोड़ा पान कन कच्छ खाज कन्हर पामारोग पिचर्षिका करणा पीपरि कालाजीरा वरिपरा अनिही दृश्य कन्दरा यासा कंचा सांपकीकॅचलि सन्नाह नोचा- कणिश यवादिकरीयालीधान्यादिली णमोहनलागर्ने वंटर रोमपदहाना डोटाश मुईया फंघकिन द्वारपालक सांप अगादी। कमर हांयीकागंडस्थत पेटार पटक पदाइकामय पहुंचीकरणादि बटारिका भटाया सियोंकिकपरका पिछाड़ी कंटीली नीवनानिमा बटभी मालकांगनी टमपा चंदा मांगता फिटकी चलि. संजीव मिट पटात नागवानकाना [निधि. (कडंगर 1 बंट गन्न वटंग। पटभरा।
R का कंड्या) करा केवांच 7 कथा पानी । ३५ शब्दार्थप्रकाशन (क) कंडरा केवांच. कंया मादीकीभीत फकीरोंकवस्त्र कंडू ! कंद सूरन जिमीकंद कमलमूल खाज. tr"/कंदराल पर्वतपील गेंठी लाखीपिंपरी 1:- कंदर्ष कामदेव कंडोल बांसकापिटारायादि कंटलिन् कराव मतवाला-नंगाहोवुलावै मदिः कंदली, हिरणकीजाति. रादिकाकीट का मदिरापनानेकापात्र भट्टी पतृण ऐहिसनाम तृण कंदुक गेंदखेलनेका कंधरा कांध कंधा कद वन् कुमार्ग पुरीरास्ता : 7|कन्यकजात जोकुमारीमें पैदाहो जमे कटर वृक्ष व्यासकर्णमादि कदवक समूह झूड सेरस कन्या , जिसकेरजस्वलानहुवाहो कदर सपेदकत्या खैर - |--कपट छल डिभ . कदर्य,जोलोभसे स्त्रीपुत्रकोभीपीडादेइ. कपर्द शिवजीकेजटाजूट कदल कपर्दिन श्रीमहादेवजी } केला. कदला कपाट केवॉरा कदालिन् हिरण जानि। कपाल शिम्कीद्दड्डी कदली हिरणजाति केला कपालभृत् महादेव कदाचित् किसीकालमें कदुप्प कुकर्म कनु पीतरंग T ..कपिकच्छ कद रीवातकहनेवाला 17 कपित्थ कैथा कनक सुवर्ण •i. | कपिल पीलारंग. [ गरु रेणुका. कनकाध्यक्ष सोनाकामालिका कपिला दिशागजकीपनीकानाम अ, कनकालुका सोनेकापान झारी कपिवल्ली गजपीपरि,वडीपीपरि.. कनकाहय धतूर कपिश पीत कनिष्ट छोटाभाई ज्यान वालका कपीतन अंबडा गंठी सिरसा कनिष्ठा छोटीअगुली छगुनिया कपूय निंदित कनीनिका आँखकीपुतरी [कास्थानः कनीयस् छोटाभाई कपातपालिका कावुक महलमेकचूनरों- कनीयम् अतिछोटा ज्वान कपि वानर - कपिकच्छ केवांच 7 - - -- कपोत , कवतर. कपोतांनि : मालकांकुनि .
-- कफोणि कमंध घड (क) शब्दार्थप्रकाश। ३६ कपोल गाल करक,पहिलीवपाकेपथरासेबंद मिलारस कफ कफ करकटक गंगटा खेकड़ा कफणि करका बड़ेधुंद हायकोटिहुनी . करज कंज वधनहा कफिन् कफरोगी. करंजक "कंज कबंध जल विनाशिरकापडजोनाचे करट कौवा हाथीकागढ कवरी बबई वालोंकीरचना होगकावृत्त करटु करडापक्षी कवित्य कथा करण शुद्वाणीमेश्यसेहो खेत कम् शिर जल करंट पिटारा कमक कटुवा करतोया नदी कमठी कई करपत्र थारा कमएडल,ब्रह्मचारीयादिकापीनेकापाल करपाल सहग तरवार कमन कामी करपालिका, खांदा.[पीठतकऊंटकाबगा. करभ हांयकापृष्ठ पहुंचासेले गुरिनकी फमल जल हजारपनाकाकमलतांव करभूपण हांधकागहेना कंकणादि कमला लक्ष्मीजी करमर्दक करौंदा कमलासन ब्राह्माजी करंद दहरीमिलेसैनुवा. कमलोद्भव ब्रह्मा | कररह नाखून नह कमित् कामी करपाल बङ्ग कंप कांपना करपालिका सांडा करवीर कनर कंपल कंवल नागराज बख करशामा अंगुली कंबलियापक गाड़ी करशीकर हांधीकी महकेनलकीहिती कवि करहाट कपलपन्न भगीर चमचा कलाल करहाटक मयनफन्न कंबु शंख कंकण गर कराल चंद्रांन भयंकर कंग्रीवा निसकेगमेनीनरेवादों करिगनिन हांधीचिन्धार कम्र कामी करिणी यिनी कर हाथी मूर्पकीकिरण गनदंड परिन थी कमलोत्तर कुसुम कपन कांपनेकास्वभाव कंप m H १ । - M (क) शब्दार्थप्रकाश। कर्मीर विचित्ररग चुनरीआदि कलि संग्राम शूर कर्मेन्द्रिय हाथ,पैर,गुदा,लिंग,खाल कलिका फूलकीकली कर्प सोरहमासेसोना कलिकारक कज कर्पक खेतीकरनेवाला - कलिंग इंद्रयव भुजपलपक्षी कर्पफल रहेर कलिद्रुम बहर कर्प तौलमामान । कलिमारक कंज कल गभीरस्वर कलिल मुसकिल जहांदुरखसेजासकै कलकल बहुतजनोंकाशब्द कोलाहल कलुप पाप मैलापानी कलंक चिन्द निंदा कलेवर देह कलत्र राजावोंकाकिला स्त्री कमर कल्क पापाधिक कीट हाथीदात कलयात चांदी सोना कल्प द्विहजारदेवतागाकयुग मलय कलव घाण देंट धर्मशास्त्र नीति कलम हांथीकारचा कल्पना कथा कलम धानादि कलवी शाकभेद करेंचुरा पोई कल्पात मलय कलर कतर कल्मप पाप पुराकर्म कलल गर्भकाकारण कल्माप,कबरारग चुनरीश्रादिकीयात कलपिक गरगवा कल्य मातःकाल निरोगपुरुप कन्याण कलश जिसमेंजलभराहो कल्या सुदरबोली कलशि] पिठयनि कल्याण मंगल शुभ कलशी कल्लोल बड़ीलहरें कलशी दहीमयनेकापान मेहड़वा कल्हार लालकमल कलश जलभरा कवच पख्तर [ करना पत्री हिंगवृक्ष कलहस बतक पकत पक्षी कवरी यई शिरकैबालमादिरचिशोभा कलह लड़ाई क्वल ग्रास कौर कला सोरहवांभाग वही रचना कवाट केवांग कलाद सोनार कवि गुरु पण्डित राधिका कलाप भूपण मोरपरख फलाय पाटनौलके वदोन बुद्धगर्म | कल्पवृक्ष देवलोक मेह Fou . कलानिधि चद्रमा करिय / लगामयोदेवी 17 ३६० शब्दार्थप्रकाश। कन्या नर्पितरोंकेमर्थप्रमादि काकुद तालू कशा जेरबंद काड़ा काकेंदु • कुचिला. कशाई कोरामारनेलायक .. काकोदुवरिका कावरि: कशिपु : अम यस काकोदर सर्पः कशेरू- हड्डीकानाम तणंजाति...... - काकोल स्थावरविष कालावा- करोरुका पीठकीहडी:: कांना इच्छा वांछा करमला: संग्रामादिमें. | कांती तुवरी कश्य घोड़ोंकामध्य जहाँपरकोहामारा. कांच , कांच शिकहर मणि नेत्ररांग:- नाताहै मदिरा कोडायोग्य: कांचस्थाली. - पारित कपाय रसभेद लेप काढ़ा, कांचित शिकहरजोधराहो. कष्ट -दुःख मुसकिल कांचनः: सोना .... कस्तूरी जोहिरण कीनाभीमें होती है 'कांचनाढय , नागकेशर कल्हार . लालकमल. कांचनी हरदी कह बकुला कांचि,एकलरकीस्त्रीकीकंपनी कमरपट्टा (का). कांजिक, सिरका कांजी कांस्यताल घंटाझांझआदि :... | कांड दंड वाण निंदित वर्ग स्तुति पांव काक 'कौवा काकचिंचा कांडपृष्ट शस्वसेजीविकाकर काचिचि धुंधचिल रत्ती. कार्चिची काकतिदुक कटुर्तिदुर कुचिला Fit कांडा तालमपाना काकनाशिका, कौवाटेढ़ी काकया कातर लैंडार जोसंग्रामसेभाग काकपक्ष बालकों केवाल पट्टा कुनै कात्यायनी श्रीपार्वती गेरुहावस्त्रयूत कोकंपीलुक कुचिला श्रीधी बृद्धस्त्री विषया काकमाची केवइया *:-कादंव बतकपक्षी काकमुद्गा : भगवन कादंवरी मदिरा काकलि योदेशब्दम कादंबिनी मेघोंकेसमूह काकली काद्रव कोदवअन्न: काकांगी कौवा देही काकडया कावेय नागणे काकिणी रत्ती कौड़ी पणकोचतुर्थाश कानन वन काकुः शोकभयकाशन । 'कानीन कन्याकापुत्रः कांडपृष्ट काडवत् । वाणधारी । कांडीर, " जाय •. कांदिशीक : ! शब्दार्थप्रकाश। ४० कांत सुंदर काय देहमछोटीदोगलीकेत्तरेहाथमे । कांतलक तुनिवृत TE TET कायस्था हर .. कांता मनोहरस्त्री - naririn कारण निदान IETH कांतार, महावन दुष्टमार्ग जहाँसिंहादिही कारणा नरकपीमा यमयातना. कांतार्थिनी जोमैथुनकेलियपतिकपास- कारणिकाप्रमाणोंसवतिकोठीकर TET .. कारंडव पक्षी लेतजाति कांति शोभा इच्छा कारची मोरंशिखाओपधि सॉफ की कांदविक भोजनवनानेवाली : लागीरी हिंगुवृक्ष जोभयंसे भागी करवेल्ल करलो काफ्ध, बुरीरास्ता कुराहो ?'- कारा कैदखाना बैंदिस्थान कापिलें सांख्यशासनाननेवालों कारिका- नटी जीविका कापोत कबूतरों को सजीवरि कारी शूपेगोवरकाढेर काप्रोतांजन सुरमा कारु तसवीरवनानेवालाकारीगर काम कागदेव यांचा जोइच्छा. कारुणिक दयावान् कामगामिन् । जैसीइछाहोतेसाचल कामन कामीयुरुप कारोजयः।। कारोत्तर मदिराकामीडवफेना कामपाल "चलदेवजी कृप्लकेवभाई कास्वर सोना कामम् अाज्ञा ईप कामपित कामी. कामिनी जिसखीकेसुंदरनेत्रही वृत्तका कार्तिक-- महीना मोन कार्तिविक कार्तिक कामुका कार्तिकेय. कर्य संपुर्ण- कामुकी जोखीमैथुनकीइच्छाकरें कासी कपासवृक्ष-- कांपिल्य कार्म अपनकाममेंनिपुणही कोपिल्ल } कपिलायोपधि कामरण श्रीपधियोंकाकम कांवल स्थकायत कार्मुक · धनुप कमान कांवविक चुरिहार कचेरी कार्य शांखो कांबोज घोडेकीनाति: - काका किसान बीतजार कांबोजी वनउर्दी कापण काम्पदान तुलादानादि तीर्थ. कार्पिक कासमागिन । कारुण्य दया यांदा | कातिक ज्योतिपोपीन T" कामुक कामीन रुपयाः । 7 - शब्दार्थप्रकाश। (की किं). कार्य शाल शांखो [रंग यम समय काल्या शुभवात उठीगो गर्भकेलिये काल निमेषादिप्रलयतक मृत्यु काला कावचिक बख्तरपहिरेवीरोंकासमूह कालक काला देहमेंदागी 7 | कावेरी नदी कालकरक सपेदकौवा जलकाग काव्य शुक्र- कालकूट स्थावरविष [ला पकृत ! काश कास जोकुवांरमेफूलते है कालखड दहिनीअोरपेटमैमासकागो-कारमरी कालधर्म मरना नाश खंभारि. कारमय कालपृष्ट महाराजकर्णकाधनुप | काश्मीर पुष्करमूल एक प्रदेशकानाम कालमेशिका मजीठ काश्मीरजन्मन् कुकम केशरि कालमेशी वकुची वचुकी काश्यपि सूर्यकासारथी अरुण कालशेष टंडसेमथागोरस मठा काश्यपी पृथ्वी कालमेपिका मजीठ जेठीमा काठदाल । नावसाफकरनेकेकाटके कालमपी बकुची बचुकी काष्ठकूदाल कटारा कालसूत्र नरककानाम काठलक्ष वदई कालस्कष,तेंदः तमालवृक्ष [कालाजीरा. काष्ठा,दिशा अठारापलकमारनेमें काष्ठ काला पाडरि नीली श्यामत्रिधारा काष्ठाचवाहिनी डोंगी नाव कालागुरु अगर काष्ठीला कदली केला कालानुसार्य शिलाजीत जायपत्री कास कास कालाय मटर मोथी कासपर्द देहमेंगल्मरोग कालायस लोह कालिका मेघसमूह श्रीदेवीकानाम कासार तड़ाग ताल कालिंदी यमुना अतिपवित्रधारा कास् वरदी सैती कालिटीभेदन वलदेव जिन्होने हलमे (कि) यमनाको खोंचलिया किंवदति काली श्रीपार्वती किवदती सुनीवात लोकविवादादि कालीयक दारुहरदी जायपत्री किंशारु,नाजकीसीकर मोरपखकावाण कालेयक दारुहरटी किंशुक लूल ढाख काल्पक कचूर किकर सेवक टहलवा काल्य प्रातःकाल किंकिण काल्यक दारुहरदी चिलकीइच्छाकर किंकिणी धरू । कासर भंसा 1 .
and arma -- - , P - । । (कि की कु) शब्दार्थप्रकाशा किकि किरीट "मुकुट पगड़ी - T किकिदिव। किर्मीर विचित्ररङ्ग चुनरीमादि मार किकिदिवि किल निश्चय किकी किकीदिव लीलागणास नीलकंठ | किलास - सेंहुवारोग किकीदिवि किलासिन जिसकेसहुवाहो किकीदिवी किलिंजक वांशकपिटारा कांवरिश्रादि किकीटीवी किल्विप पाप नीचकर्म अपराध किंचित् कुछ किशलय छोटीदार टेहरा । किचिलिका किशोर घोड़ेकावचा पालक किचलक केंचुवा काह । किप्पु हांयभर वित्ताभर. [डार किंचलुक ) किसलय टेहरा नवीनपत्तासहितकोटी किंजल्क केसर कमलकेभीतरहोताहै (की)। फलकीधूलि, किटि शूकर सोर कीकस हाड़ हड्डी किट्ट मंडूर लोहेकाकूट कीचक,यांसपोले विराटकशालेकानाम किण घावकाचिन्द मासकीगाठ कीनाश यमरान खोतहर कृपण नद्र फिणिही 'लटजीरा. [का शब्द कीर शुवा कीर्ति किराव मदिरावनानेकीवस्तु मतवाले कितव धतूर ठग जुवारी कील यागिकीलपट लोहकीकील किन्नर देवजाति कुवेरकीपना कीलफ रखेटा जिसमेंपशुवांधनाय किन्नरेश कुवेर कीलाल पानी लोह किम् प्रश्न निंदा विकल्प कीलित बंधारापश्यादि किमु विकल्प कीश वानर चंदर किपचान अतिलोभी कादर जोलोभ कीशपर्णी लटलीरा सेस्सीपुरकोभीपीडादेड (कु) किएरुप किन्नर कु पृथ्वी पाप निंदा थोडा कुक चराक घरहा किरण सुर्यकीकिरण कुकर जिसमेहायथच्छनहीं किरात वनवासियोंकीजाति रुद्र जांकन्याकोससारसंदान किराततिक चिराइता कुश्दर चूनराकारकेगा। धुकर कुत्ता यश प्रसन्नता विस्तार 1 फिर शूकर किरि शुकर कुकुद मुर्गा - कुंचित टेढा १३ शब्दार्थप्रकाश कुकूल जिसकुवांपादिमेंकीलबहुत कुठर -" मथानीबांधनेकालभा rh [ लगी हाँ. कुठार कुल्हारा कुकुभ तीतर म कुठेरक पर्णासवृत्त --, कुकुर कुकरीधा कुत्ता कुडगक वृक्षादिसेदुस्तरही कुक्षि पेट 17|कुडप कुडप } पावसेर पौवाभर.- कुतिभरि पेटभरू कुकुम केशर कुड्य भीतं दीवार कुच स्त्रियोंकीचाती | कमल कलीफुलकी कुचन्दन लालचन्दन Are कुणप मुर्दा दुर्गंध. 1. मरोग कुचर जोसबकेदोपहीक है। कुणि 'तुनिवृत्त नांदखी जिसकेहांथ कुचाग्र स्वीकीछातीकीनोक कुंठ कामालसी. मंगल कुंड पिताकेजीतेदूसरेपुरुषसेहो जैसेय धिष्ठिरादि थाली हवनकाकुंड कुंज जहाँबहुतलतमिदोंसेअधकारहो कुंडल' - बालाकानकेपहिरनेके कुंडलिन् सांप कुंडी कमंडल ब्रह्मचारीआदिकापान कुंजराशन पीपरबृक्ष कुतप । दिनकाअठवांभाग दोघही हि कुंजल कांजी शिरका अर्कनाना कतुप रनके रोवांकावस्त्र- बृत्त कलश घड़ा कुटक फारहरका कुतुप बोटीकुपिया तैलादिधरनेकी कुतू कुपिया कुप्पा कुटनट श्योनापाटा केवटियामार्थ कुतूहल कौतुक तमासा कुटर जिसमेंमथानीवांधीजार्यदही कत्सा निंदा मथनेको कुत्सित अथम नीच पापी टिल टेढा कुथ कुशा हांथीकागदा झल, कुटी सभास्थान शाला कुदाल कुदारा कचनार कदुवव्यापत । कुटुंवपालक 2: कुनटी नेपालकीमैनशिल अदविनी जिसस्त्रीपतिपुनादिहों कनाशक जवासा कुहिनी जोपरनारीपरपुरुषकोमिला कंत भाला कुहिम पकीजमीन दीवार इतल वाल 27 7 हाथीकाटात 'FRE कुजर . हाथी श्रेष्ठ ? | कुतुक खेल कुटज करा. . . . .
}हिरना हन्ना. । पुरुषक} लालकरसैला (कु) शब्दार्थप्रकाश। कंद फूलबा पालका पलांकी भांटा कभी कायफल It कुंभीनस सांप -पालक कुंभीर मंगरा मगर जलजीव कुदरुकी शालय कुभोलू खलक गुग्गुलवृक्ष कृपय कुराह बुरीरास्ता कुरंग । करंगक कुपिट कोरी वस्त्रविननेवाला कुरंटक पीतकरसैला पीतझिटी- उपय निदित तांबाआदि कुरवक लालकरसैला वर उत्तरदिशाकमालिकथनकेस्वामी करर कुररीपक्षी. कुरेरक', नुनिवृत्त नांदरूखी कुरुंडक पीतकरसला पीझिटी, कुवेराती पांडरि कुन कुवरा करुविद मोथा कुमार स्वामिकार्तिक युवराज जोराजा | कुमविस्त टकाभरसोना.[ह गोत्रदश. कापुरहोराज्यकावन्दोवस्तकर कुल एकजाति जैसेब्राह्मणकुल मृगझं कमारक वरुणवृत्त कुलक कुचिला परवर उत्तमकारीगर कमारी विकुवारि कन्या कुलया जोस्त्रीकलकोंडदे औरपुरुषों कुमुद कोंकाबेलि सपेदवर्याला सेरमणकर कुमुदमाय जिसतहागकोंकालिहो । कुलस्थिका फूलपातु कुमुदपांघर चन्द्रमा कुलपालिका जोस्त्रीमपनेकुलकोपाल कुमुदिका कायफल नकर कुमुदिनी कोंकालिसमेततलैया कुलश्रेष्टित् उत्तमकारीनगर कमदत कोकालिकेतड़ाग कुलसंभव कुलमेंउत्पन्न कुमुदती तलैयाकोकावेलिकी कुलसी उत्तमसी कुचां यज्ञादिकोंकेचारीओरपरदा जिस | कलाय नीड़ घोंसला पतीकायर सम्लेच्छादिन देखें [घड़ा. कुलाल कुम्हार कुंभ गुग्गलवृक्ष हायोकेशिरतोऊचाई | कुलाली कालामुरमा कुभंकार कुम्हार कुलिक कारीगर नागभेट कुभसंभव अगस्त्यमुपि कुलिश पन इन्द्ररायायुर कुंभिका पुस्यनि कुली भटक्या थुभिनी पृथ्वी धरती कुलीन सज्जन प्रदेव लमंटरपन्न १५ शब्दार्थप्रकाश। (कुकू) कुलीर मगर मगरा कहु । अमावस कीरात्रि जिसमेंचंद्रमा कुल्माप । कांजी सिरका अधमीजेयवा | कुहू नदीखे कुल्यास दि घुघरी बरेउर्द कहर छेद विल कुल्मापाभिपत कांजी सिरका (क) कुल्य हाड कूकुद जोकन्याकोसत्कारसेदे कुल्या छोटीनदी कुट पर्वतकाशिखर नाजकीराशिमाया कुवर कषायरस काढकेसमान आकाशादि फंसरी कपट झूठ कुशल बेर मोती कोंकावेलि लोहकापन हलकाागेकाभाग कवलय कोंकावलि कूटक जहांपरफाललगायाजाय कुवाद निढाकहनेवाला कृटयंत्र मृगपक्षीवांधनकाजाल कुविंद कोरी कूटशाल्मलि काली शाल्मलीवृक्ष कुवेणी मछलीवांधनेकापिटारा कूटस्थ जोहमेशःएकसारहै अाकाशादि कुश कुशा जल श्रीरामके पुत्र कूणि,रोगसेदोपसहितहाथ अपरसादि कुशल म राजीग्वशी चतुर सामर्थ्य कूप कुवां वावली कशी फाललोहका कूपक चूहा नदी यातडागमें जलकेलिये खोदै नावकेवीचकाखभा गड्ढा कुशीलव चारणकयाकहनेवाले कूबर जुवावैलजोतनेकारथादिकोंमे कुशेशय सौपत्ताकाकमल कूर्च नाककैऊपरभौंहकाबीच दाढ़ी कूर्चशीर्प जीवकवृक्ष कुष्ट कूट कोढरोग दवा कूचिका दहीमादिधमेदारना जामन कुसीद व्याजलेना कूर्दन बाललीला खेलकूद मुसीदिक,ब्यानलेनेवाला बुगाहीआदि कूपर कॉपर दिहुनी. [का वस्त्र. कुसुम फूल कूर्पासक कंचुकी चोली स्त्रियोंकेछाती कुसुमांजन फूलधातु कृर्म कछुवा. कुसुमेपु कामदेव | कूल नदीकाकिनारा कुसुभ कुसुमरंग कुसुमकाफूल कमंडल कूलंकपा नदी कुसति शठता मूर्खता कूष्मांडक कुम्हड़ा कुस्तुवरी। धनिया. (कृ) कुस्तुरु कृकरण करकडापती कुहना लोभसेपरायाधनादिलनेको कृकलाश ध्यानमौनादिकर्ना गिरगिट गिरदान. कृकलास कुशीद व्याजलेना. कपीद।
" कृपकं हल (कृ)' शब्दार्थप्रकाश । कृरुवाकु मुरगा [ लेउंडी. कृमिघ्न वायविडंग कुमाटिका धीचशिरकापिचलाभाग कृमिज मारु कृकुलास गिरदान कृश दुर्वल पतला थोड़ा कच्छू दुःख कष्ट व्रतभेद कृशानु अग्नि कृत सतयुग पूर्णता कृशानुरेतस् महादेवजी कृतपुंख चाणफेंकने मेंचतुर कृतमाल किरवार कृषि खेती कृतमुख चनुर ज्ञानी बुद्धिमान आदि कपिक खेतीकरनेवाला हल कृतलक्षण प्रसिद्ध पण्डित धनी योगी कृशाश्विन नटवा नट कृतसापत्तका कृतसापलिका प्रथमस्त्रीकईत्रियोंमें । कपीवल किशान कृतहस्त बाणफेंकनेमप्रवीण कृष्ट जोनाहुवा कृतांत यमराज भाग्य पाप कृष्टि पंडित बुद्धिमान कृताभिपेका पटरानी जिसकाराजाके कृष्ण कृष्णपक्ष श्रीविष्णुसृष्टिपालक सायभिपेकहो कालारंग मिर्च कृतिन् चतुर पण्डित कृष्णकर्म पापी दुष्टकर्मफरनेवाला कृत्त खडित टुकड़ा २ कियाहो कृष्णपाकफल करौंदा कृति हिरनकाचमड़ा चमड़ा कृप्यफला पत्की यरुची कृतिवासस् श्रीमहादेवजी कृपएभेदा। कटुकी छत्या क्षुद्रदेवताकरिकदूसरेकोदुःसदे- कृपणला घायचिल रती ना भेदकरना पणलोहित कालालालमिला कृषिमधूपक बहुतवस्तृसेवनीधूप कृष्णवर्मन् अग्नि कृत्स्न संपूर्ण सब कृपण दरिद्री निर्दयी कृष्णवृत्ता पांडरि कृपा दया कृष्णशार। मृगजाति निमहिरनकामी कृष्णसार ठयादिकालीहो कृपाण खा तलवार कृपाणी ट्री कतन्नी कृष्णा पीपरि कृष्णायम लोहा कृपाल दयावान दीनयत्सल, कृपीटयोनि अग्नि कृष्णिा राई कृमि किरवा कृपर विचरी निलभात कृषिकोशोत्य कौशयवख रेशमीकपड़ा कृपराभेटी [ रहताहै कवर्तमुस्तक । कैशिक यालोंकासमूह पट्टाधादि कश्य शब्दार्थप्रकाश। (के के को) (के) केडर्य कायफल केकर काना एकत्र कैंचा कैतव छल ठगना पांशा केका मोरकीचोली केदार केदारक केकिन मोर कैदारिक बहुतखेत चक केतकी खजरभेद कंतकी कदार्य केतन पताका निमरण घर कैरव बाकावेलि केतु ग्रह पताका उ-पातलतण केलास श्रीशिवजीकेमिनरकास्थान केदर व्यवहारयस्त कर्त धीमर गोड़िया केदार खेत केनिपातक जोकाटनावापानी में कतिपुस्तक केटियापोथा केयूर विजायठ वजुल्ला वैवर्तीमुस्तक केलि क्रीड़ा खेल देसी कैवल्य मोनजिप्समेफिरजन्ममरणनहो केल. निश्चय साधारण केश वाल केशन गजा चादहोना (को) केशपर्णी लटजीरा कोक भेदहा भेड़िया चकहा देशपाशी शिसा चोटी झुटिया वृक्ष कोकनद लालकमल केशर कमलकाभीतर वरुणवृक्ष वल कोकनदच्छनि लाल मुर्स लोहसारग केशरिन् सिंह श्रीदेवीकाराहन कोकिल कोइली कोकिला केशव श्रीभगवान् उत्तमरालयुन कोकिलास तालमपाना केशबद उत्तमवालनिसकेहो कोटर वृक्षकीखोद देशमेश वालो कोडचममारसेरचना कोटवी नगीस्त्री [ सरया केशांपनाम नेवाला सुगन्धाला कोटि धनुपकीमत्यचा धारनलगारकी कैगिक कोरियपी पपिंडा अम्पटक वांटिश लोहबाटनेगलागुद्गर धन गिनी गपानी कौटिल्लासविलि | कोरी धनुप सीरम्मी रुगा नलवार रेगर रमनतम य रुपमश्रल पोधार कमग्नि गिट चोटीश पन (के) जोर पटिनग्राम जहांगीगंकास्थान कभनिन,श्रीभगवा बैटभन्य नागर | कोरवी नगीमी पौशिनउत्तमगलदी (को को) शब्दार्थप्रकाश । कोहार किलासहितगांव कोष्ठ पेटकाभीतर नाजभरनेकेकोठादि कोठ कुष्ठरोग [कीधार! कोण कुछगरम. कोण जिससेवीणावजायाजायखड्ग (कौ) कोणप राक्षस कौकटिक मायावी जोविनादेखीसुनी कोदण्ड धनुप कमान कौतेयक खड्ग तलवार [ यातक है. कोद्रव कोदव कोचदारय स्वामिकार्तिक कोप क्रोध ... कौटतक्ष बदई जोकिसी केनौकरन हो कोपना कौटिक मांसवेंचनेवाला कोपनी जिसस्त्रीकक्रोधवनारहे कोणप राक्षस कोपिनी कौतुक कोपिन् क्रोधी रातिदिनक्रोधकरे खेल पाश्चर्य | कौतूहल कोमले सरल हलका मुलायम कौवीण कोदवकाखेत कोयष्टिक रिटिहिरीपक्षी काँति रेणुकायापथि कोरक फूलकीकली कंकोल कौतिक भालेकरी भालालिये कोरंगी छोटीइलाची कॉपीन गुदालिंगमूंदनेकाकपडालगोटी कोरप कोदव कौमोदकी गदाधीभगवानकी कोल छोटीनाव डॉगी र शुभर कौलटिनेय भीपमांगनेवालीकालड़का कोलक कंकोल मिर्चकाली कौलटेय भिक्षुकीपुत्र छिनारका कोलदल नखनामयोपधि लड़का. कोलवक वीणाकासवभागतारछोंद कॉलटर,परपुरुषसेपैदाहो. दिकोंकायुद्ध. कोलवल्ली पड़ीपीपरि कोलीन लोकनिंदा कुलीनता पशुमा- कोला पीपरि वेरीकावृत्त कालयक कता कुकुर कोलाहल,भारीशब्द बहुतदूससुनपई | काशिक गुगुरकावृक्ष इन्द्र उन्लू एयुवा विश्वामित्र सांरपकदनेवाला कौशय रेशमीकपड़ा कोविद पण्डित सर्वशास्त्रज्ञ कोविदार कचनारबृत्त कोपिक विश्वामित्र कोश] अंडा खजाना चांदीसोनाबादि कौस्तुभ मणि भगवान के पटिरनेकी कोप मियाननलवारका कशमकरना. (क) कोशफल कंकोल ककर माराकाटफाइनेका कोशातकी शब्द लटनीरा कर करील करकपत्नी कोलि कोली/री, 7 क्रम । (क्ल) -- } है क्रव्य मांस क्रव्या राक्षसा ।। शब्दार्थप्रकाशा (क्रक्ल के क्ष) ऋतु यज्ञ 17 क्रोध गुस्सा सफ़ा ऋतुध्वंसिन्। महादेव क्रोधन क्रोधी ऋतुभुज देवता जोयज्ञभागपाते। क्रोशयुग दोकोश क्रथन मारडालना. म[ रोना. कोष्ट शियार स्यार क्रंदन. 'वीरोंकोपरस्परसंग्रामसेवलाना क्रोविन कटैया कंदित . रोदनकरना कोष्टी काला विलारीकंद संख्या सीधा क्रौंच कुरकुंचापती क्रमुक लाललोध सुपारीकावृत्त.. क्रौंचदारण । स्वामिकार्तिक क्रमेलक ऊंट: क्रयविक्रयिक खरीदवेंचकरनेवाले क्रयिक वैपारीमोललेनेवाले .. आनंदनाश धकजाना लमथ क्रय - लेनेलायकवस्तु । लिन वोटा लिनाक्ष चिपरा जिसकीखवहाकर क्लिशित क्लेशपहा करपाचै । ऋव्याद् क्रायिक गँहकी सौदालेनेवाले लिष्ट कष्टित दोवातविरोधएकमेमिली क्रिमि किरवा व विनांखदेविनकानसुनै. क्रिया . कारकसहित जैसेतलयारसेशत्रु क्लीतक' जेठीमधु कोमारो प्रारंभ निष्कृति जैसेयहा क्लीतकिका नीलीजिससे लीलरंगवन पापीको मारडालना शिक्षा पूजन विचार उपाय बहुतभेद क्रियावत् कर्मकाउद्योगी क्लेश दुख कष्ट क्रीडा' खेलवालकोंका इसी लीला | क्लोम फेफड़ा मांसपिंड कंच! करण वीणादिकोंकाशब्द शब्दकरना कुरकुंचापती कंच कान चाजाकीधावाज. काप कुष्ट रोना. [निर्दयी. कथित पकाहुवा काढ़ायादि कर औरसे वैर करनेकास्वभाव कठिन तिव्यबाजारकीवस्तु मोललेनेयोग्य क्रेय तण मुहूर्त दोपड़ी उत्सव जोड,शूकर हाथोंकामध्य कनिया गोदी क्षणदा राति . सीव नपुंसक नामर्द कमजोर. T बुध. क्रोध ५ 1 (क्ष) शब्दार्थप्रकाश। चपन मारण लिया हानि तणप्रभा विजुली क्षिप्णु निगकरण नकरना क्षतज रक्त लोहू. [ होजाय. क्षीवन् मतवाला । शतव्रत जिसकाकोईकारणसेव्रतनष्ट खीर जल दूध तत् रथवान् सारथी क्षत्रियाणीमेशूद्र तीरविकृति चिका दहीअादिसेदूर सेपैदाहो द्वारपालक - काविकार जामनदेफादना क्षत्रिय क्षत्री श्रीरविदारि शुक्लविदारीयोपधि सपेद तत्रिया चपियी क्षत्रियवंशकीलड़कीतत्री | तीरशुक्ला भूमिकारम्हड़ा चरियाणी कीस्त्री क्षीरसागरकन्यका लक्ष्मी तीरावी धीवेलि क्षपा राति सीरिका खित्री क्षपाकर चद्रमा क्षम समर्थता कल्याण क्षीरोद समुद्रकाभेद धकासागर भयी तमा पृथ्वी सहनशीलता क्षीरोदतनया लक्ष्मी क्षीरसमुद्रमार तीव मस्त भत्तचाला समित) तमिन् सहनशीलमनुष्य सत् शुत तय नाश बृद्धि मलय रोग हानि घर क्षुताभिननन राई तर छींक राई क्षुद्र यतिलोभसेपुत्रादियांदुपदे प्रति सपथ खांसीरोग शय दरिद्री कृपण निरष्ट अधम नीच सांत शांत तमाकोमाप्त भुदयटिका थुम, तांति सहनशीलता सदशंख दोटेशव तार कांच रास भस्म शुदा वटया हीनअंगकीनारीनटी मेश्या क्षारक नईकलीफ्लोंकी उदारमत्म्यमंघात,छोटेअंडामउगवाहर तारमृत्तिका असर जहाघामतकनहो नव भूग्व तारित जिसकीलोकानदार नुपाभिजनन राई तिति पृथ्वी बसनेवास्थान अधिन भंवा निमा प्रेरणा प्राज्ञहिना मानभंट मुष टीटाग्री टेहग क्षिप्त प्रेरणारियानवाएप सिन नकरनेवाला भुर सुम ग्वर पगुवा नालपपाना निम शीघ्र भनिगय आगनाराहथियार क्षुत्) हक नमा धामी - 1. म क्षेपणि L T 1 - , शब्दार्थप्रकाश । (क्ष ख) तुरक तिलकवृक्ष खरखट कठिन कठोर सरण वाणभेद Fखग पक्षी वाय सूर्य चार नापित नाई नाऊ खगेश्वर गरुड भगवानकावाहन चरिन् । खजाका कलछल कलछी क्षुल्लक नीच थोड़ा छोटा दरिद्री खन लॅगड़ा एकटागका क्षेत्र खेत शरीर मिदान स्त्री खजन क्षेत्रज्ञ , आत्मा पुरुप ईश्वर चतुर । खड़रेचा खंजरीट क्षेत्राजीव, किशान खेतिहर.. -- खट अधाकुवा क्षेपण प्रेरणा भेजना फेंकना खट्वा पलग चारपाई खर्दिया नौकादड बल्ली खडग गैंडा तलवार । क्षेपणी ग्वगिन् गैंडा क्षेपिष्ठ अतिजल्दी, शीघ्रता खंड टुकडा भाग कमलादिकोंकासमूह क्षेम कुशल धनहरी पधि भोणि! खएडपरशु महादेव खण्डविकार शर्करा शक्कर लोद चूर्ण खदिर' कत्था खैर सोदिष्ट , अतिचूर्ण खदिरा लजारू क्षम महलकीअटारी खद्योत जगुनू सूर्य तौद्र सहत खनक मृप्त खता भौम अट्टा पटवरवस्त्र खनि , खानि जहासेरत्नादिनिकले और मुटाना वालवलवाना [ कूआदि खनित्र खता बेलचा क्ष्णुत शानसेपैनकरना तेजकरनाचा खपुर सुपारीवृत खर गदहा अतिगर्म ६मा पृथ्वी माभु राजा खरणस् पशुखुरसीनाक नरस माभृत् पहाड राजा वेड विप वेडा सिंहनाद पिजरा व शुपकेवास खरा वेडित वीरोंकासिहनाद (ख) बरावा मोरशिखा, आकाश निधि शख इद्रियस्वर्ग खजुर चादी रूपा जोणी पृथ्वी . 7 . खरयुप्पा बबई [कीकील खरमनरी लटजीरा सगरी } देवताली ठेवडगरी ख्याति प्रसिद्धता -11: . - (ख ग.) शब्दार्थप्रकाश। ख' खाजु रोग : ख्यात प्रसिद्ध नामी [नले खजूर चांदी खजूरवृत्त ... ख्यातगर्हणा निंदित जिसकानामकोई खरी 'खजुरिया खर्च. यउना छोटदिहका छोटाः ।। (ग) खल भेदिहा जोपरस्परबैरकरावै गगन श्राकाश खलए यहारनेवाला साफकरनेवाला | गंगा शिवजटाजूदसैनिकलगंगासा खलिनी दुष्टोंकासमू खलमंडली. गरमेमिली अतिपवित्र ब्रह्मस्वरूप खलीन लगाम अनन्तफलदा : [रणकियों खलु निश्चयं वाणीकी शोभा गंगाधर महादेव जोगंगाको शिरमेघों खलेदाह, मेद चरही पशुवोंकेखानेकी | गज हाथी खल्या दुष्टोंकासमूह खलमण्डली गनता हाथियोंकाझंड खात : छोटेताल नोखोदेजांय गजबंधनी हायीबांधनेकास्थान: खादित भोजन किया ...' गजभक्षा खार सालई शालय खारिखाराभर मनभर तौलकाममा गजभक्ष्या. खारीय गजानन श्रीगणेशजी खारीक गजारि महादेव जोहाथीमारखालका खारीवाप। खारीभरवोनेकाखेत वनपनाया. खिल बिनाजोताखेत वनजरमादि गंजा मदिरास्थान लवणसमुद्र खारी खुर नखनामगंधद्रव्योपधि'शुक्ति'' गडक एकमदरीकीजाति गड गलगंडरोग गंडमाला कुवरा खुरगस्। जिसकीविकटनाकहो खुरपास गडुर, कंबरा. खुरम पाणभेद गडुल खल्लक गण समूह धनहरीयोपधि सेनाभेद खेट गणक ज्योतिपीपण्डित, खेटक गांव ढाल गणदेवता देवता केसमूह खेय परिसा खांबा खाई गणनीय गनतीकरनेलायक खेला बालकांकीक्रीड़ा गणरांत्र बहुतीरात्री खोड गणरूप पदार खोर लंगड़ा जिसकीचालनबन. गणदासक पनहरीयोपधि खोल गणाधिप श्रीगणेश । . [सांगर. . . } नीच अधम पापी गधवाह वायु हवा. -- m - ३ गधारमगधक. लजारू लाजवती. ५ -- - ५३ शब्दार्थप्रकाश। (ग) गणिका जही वेश्या गधवह गणिकारिका नरवेल गणित गिन्तीकिया गधवहा नाक गणेय गिन्तीकरनेयोग्य मधसार चदन गंड कपोल गाल हाथीकाकपोल मधिक गडक मरीभेद गडा गइकारी गधिनी शालय सालई गडफाली गधोचमा मदिरा गडशैल मोटेपत्थर गधोली बरेया गडाली मोया गभस्ति सूर्यकीकिरण गंडीर कडुवासूरन गभीर गहिरा गंडूपद किंचुवा गम यात्रा चलना गमन गंडूपढी छोटा किचुवा गंदूपा कुल्ला हाथीकीशूड अगुल- गभारी खंभारि गतनासिक नकटा गभीर गहिरा गद रोग बीमारी एककोई कृष्णकभाई । गम्य प्राप्तहोनेयोग्य यातायोग्य गद्य कवियोंकीवाणीसंस्कृतकी . गरण गिरना गवी गाड़ी गरल....विप शखियायादि गध सुगध । गरा गरागरी गवकुटी तालीस देवताली. गरी गंधन उत्साह हिसा आशयगकाश गरिष्ठ बहुतगरू पूज्य वडा सपनाकली, रासनि. गरुड भगवानकावाहन गंधफली कृष्एविधारा चंपाकीकली गरुड़ध्वज श्रीरिप्णुभगवान गधमादन एकपर्वतकानाम गरुडाग्रज अरुण सूर्यकासारथी गंमुखी घट्दरि गरुत् पंख परखना गरमूला। गरुत्मत् गरुड़ पक्षीमात्र गधरस गधरसं. मिपियाई गर्गरी दहीमवनेकापात्र मेहड़वा गर्व देवतानातिहाहाहायादि हिरना गर्जित मेवोंकाशब्द हाधीकाबहनामद जाति घोड़ा गानेवाले गर्त मधर्वहस्तक अडाफाड़ गइहा गड़दा गर्ता - " गधमूली / कचर ५४ .. शब्दार्थप्रकाश। गर्दभ गदहा गवेपणा धर्मादिकोजानना गर्दभांड गैठी लांखीपिपरी गर्वपित ढूंढाहुवा खोजकिया . गर्द्धन चांचाकरनेवाला गव्य गौकादृधदहीघृतमठा. गर्भ - गर्भ वालक कोखि गव्या गौओंकासमूह गर्भक वालोंमेधारणकीमाला गव्यूति दोकोश गर्भागार घरकामध्य मांझघर ' गहन बन जहांदुखसेजाय गर्भाशय निसचमंडासेगर्भलपेटारहताहै | गहर पुरानाखातविलनकिसी कावना गर्भिणी गाभिनि लड़काहोनेवाली या कंदरा दुर्गमवन गर्भोपघातिनी बैलकेसाथसेजोगौगर्भ | गहरी पृथ्वी धरती डारदे स्त्रीआदि गांगेय सुवर्ण कशेरू भीप्मनी.. गर्मुत् तृणधान्य गांगेरुकी वला विशेष ककई गर्व अहंकार गाढ़ अतिशय शीघ्रता गर्वित अहंकारी अभिमानी गाणिक्य वेश्योंकासमूह गईण निंदा गाली गर्दा निंदित निंदाकेयोग्य गयवादिन् निंदाकहनेवाला गान देह हाथीकाागेकांभाग गल गर गात्रानुलेपनी • उवटनकीवर्ती गलकवल गौकेगलेकीलवीखाल गान गीत गाना गलंतिका चावरधानेकीचलनी गाय विश्वामित्र गाघिनंदन गलित गिरपरना गलजाना गांधार स्वरभेद [कीस्त्री गलोदेश - गलेकीन”, गायत्री . खर गायत्रीयादिछंद प्रमा गल्या बकाशोंकासमूह गारुत्मत कालीमणि गवय हिरनजाति गाभिण गर्भिणीकासगृह • गवल , भैंसाकासींग गाईपत्य होमकीयग्नि गवान झरोपा महलकारोशनदान | गालव पटानीलोध गवाती गोलंचा लौकीभेद गिर याणी गरिवर गाँवोंकामालिक गोपाल गिरि पर्वत गिलना निगलनाना गयेधु -मुनियाँकाअन्न गोहुवा गिरिकरणी विष्णुकांना गवेधुका गिरिका छोटीमुसरिया, गवेपण ढूंढना पतालगाना गिरिज शिलाजीत गांडीव } मर्जुनकाधनुप गिरा। गहु [गजरा. गफित) सेमाला शब्दार्थप्रकाश। गिरिजा पार्वती गठित जिसमेंधूलिलगिजाय गिरिजामल अबरख गुत्स वत्तिसलरकीमाला गिरिमल्लिका कुरैआ औषधिविशेष गुत्साई चौविसलरकीमाला गिरिश } महादेवनी गुढ झाडेहोनेकीइद्रिय गुदा गाडि गिरीश गिलित खाचुके भोजनकिया गुद्र नागरमोथा गीत गाना गुद्रा कालाविधारा नागरमोथा गर्णि स्तुतिकरना नमस्कारादि गुप्तवाद मंत्र जोछिपाकरकहाजाय गीणि निगरण निगलना गुप्ति पृथ्वीकाविवर भांडाादिखोद गीर्वाण देवता ना रक्षाकरना गीपति बृहस्पति गुफित ? गुइना जैसे १०८ रुद्राक्षगुहने गुग्गुल गुगुरबृक्ष. गुच्छ हारभेद फूलोंकेगुच्छा माला गुरण उद्यम जैसेगेहलेनेकाउद्यमई गुच्छक जिसडारमेंबहुतकलीहों | गुरु बृहस्पति गर्भाधानादिकर्मकरने गुच्छार्द्ध चौविसलरकीमाला वाला गुजा घुघचिल रत्ती गर्विणी गर्भिणी गुड गुड - मट्टीकागोला | गुल्फ गुंटवा पांवके ऊपरकीगाठि गुडपुप्य महुवा गुल्म,जिसवृक्षगांठिनहो पिलही मांस गुड़फूल पीलुवृत अक्रोड कीगांठि सेनाभेद कशादिगुच्छ गुडा गल्मिनी फैलीवेलि गुडी सेंहुड गुवाक सुपारीवृक्ष गुडुची गुर्व गृह स्वामिकार्तिक गुडुची गुण सतोगुण रजोगुण तमोगुण का गुहा कदरापर्वतो पिठवनि गुण सधिविग्रहगानासनग्मा गुह्य गुप्तवात गुदा श्रय घनुपकाडोरा भोजनपकानेवा गुया देवताजाति ला जोरी द्रव्य रस गन्ध ऐसर्य गुह्यकेश्वर कुरेर चतुराई इद्रियविषय पराम स गूढ छिपाहुचा সাদি [कमायामकर गुणवृत्तक नावाम पकाखम गृहयरुष दूत भेदिहा जोडियकरमालि गुणित गुणना जसेदुइकोपाचगुणा गुय पिष्टा मैला तौदशहुये गून झाडेहोचका - - गृहपाट सप । गोक्टक गुखरू गुंजन लहशुन (ग) शब्दार्थप्रकाश। गृरण उद्यम गुवाफ सुपारीवृक्ष गोकर्ण जिसहिरनकेगाकेसमानकानहीं अंगुठगमनामिकायतगोकर्ण गृन बादाफरनेवाला गोकर्णी मुरहरी साप गृध गीध गावल गौवाकासमूह गृध्रसी वातरोगभेट गोक्षुरक गुखुरु गृष्टि वारहीकद शूफर गोचर प्रकट यह घर स्त्री गोजिता गोभी गृहगाधिका गोडवा श्रीपधिनिशेप मुसरिया चहिया गृहगोलिका गोंड नाभि नीचजाति गृहपति घरकामालिक जोअन्नादिदा गोत्र पर्वत कुल नाम नहमेशाकर गोत्रभिद् इंद्र गृहयाल जोसबसेगृहणकरलेय गोगा पृथ्वी गोगोंकाझंड गृहस्थण घरकाखंभ गोद मस्तककीचरबी गृहागत अभ्यागत जोअपनेयहायायै | गोदारण हल गृहराम घरकेसमीपशोभाकेलियेवना | गोदुइ गोपाल अहीर साल बाग गोदोह गृहावग्रहणी देहली डेहरी गोधन गौवॉकासमूह । ग्रहिन् गृहस्थाश्रमी गिरिस्त गोधा तल धनपके पकदने कोहाथमें गृह्यक जोपक्षीपिजरामराखेजायँतोता चमड़ायादिवांधना श्रादि श्राधीनमान नौकर गोधापदी हसपदी लाललनाम गेंडुक गोधि माथा गेडूक गेंदुक गेंदनालकों सेलनेका गोधिका पानीकीगोह गोधिवात्मन स्थलसीगोह गेह घर मकान | गोधूम गोहू गरिक गेरू सोना गौन केवटियामोथा गैरेय शिलाजीत गोनस जिससर्पगीगांकेसमाननाकही गो घेलगाँस्वर्ग किरण बन चंद्रमा गोप,यहतगांवामालिक अहीर बाल दिशा वाणी पृथ्वीनल दृष्टि गोपनि स्वेच्छाचारीरेन श्रह वारा रोम गोपरस गधरम . - गोस्तनी / दाप- शब्दार्थप्रकाश। ((ग) गोपानसी मकानकाऊपर महल अटरा गोस्तना। गोपायित रक्षाकिया गोपाल अहीर ग्वालिया गोस्थानक मौकास्थान. [कानाम. गोपी सारिवाऔषधि. [ सवदार. गौतम शाक्यमुनि बुद्धभेद, एकऋपि गोपुर नगरकाद्वार केवटियामोथा गौधार गोप्यक दास नौकर चाकर गौधेय गोह. गाँधेर गोमत् गौवोंकामालिक गौर सपेदरग पीतरंग लालरंग गोमय गांवर गौरव उठिकैमादरकरनागुरूआदिका गोमाय सियार गौरिला पृथ्वी धरती गोमिन् गौवोंकास्वामी गौरी पार्वती जिसकेरजस्वलानहुवाहो गोरस दंडसेमथागोरस मठाआदि गोरोचना स्वीजिसके दिनहु गार्द माथेकीचरवी याहो जिसस्त्रीकेदोनौवंशशुद्रों गोल गोलपिंड. [यारसेहो गौष्ठीन प्रथमगौकास्थानजहांपररहाहो गोलक विधवाकापुत्र पतिमरनेवाद ग्रथित गुहनामालादिका गोला नेपालीमैनसिल ग्रंथ पुस्तक शास्त्र धन गोलीढ घंटा पाटलिबृत मोरवावृत्त | ग्रंथि वांसादिकौगांठि गोलोमी बचा सपेदव जटामासी ग्रंथिक पिपरामूढ गोवदनी कालाविधारा ग्रंथित गुहनायालादिका गोविद गोवर. [गोपाल बृहस्पति ग्रंथिपर्ण कुकरौधा गोविद,भगवान् जिन्होंनेनंदकीगौचराई | ग्रंथिल मुवावृत विकंकत. [किया गोशाल गोशाला ग्रस्त ग्रहणकिया अत्तरलप्तहों भोजम गौशीर्प हरिचंदन ग्रह ग्रहणपड़ना सूर्यादिग्रह गोष्ट गौतोंकास्थान ग्रहणीरुज संग्रहणीरोग गोष्ठपति गोप अहीर ग्रहपति सूर्य गोष्ठी सभा ग्रहिणी रोग गोष्ठीन जहांपथमगावरहचकी ग्रहीद सवग्रहणकरले गोप्पद गौकेवरकेसमान ग्राम गांव स्वरग्राम शंद्वग्राप गौसर्ग प्रातःकाल भोर प्रामणी नाऊ श्रेष्ठ गांवकास्वामी गोसंख्य खालिया अहीर ग्रामवत गांवकारहई गोसान चारलरकीमाला गौकेधन प्रामता बहुतसेगाव 15 घर दिन ग्रीवा गल (ग) शब्दार्थप्रकाश। ग्रामाधीन गांवभरकाकारीगर गुण ग्रामांत गांववाहर घनरस जल ग्रामीणा नील लील घनसार कपूर ग्राम्य शिथिलवाणी गंवारूपात घनाघन बहुतघन ग्राम्पधर्म मैथुन स्त्रीपुरुपकासंयोग धर्म पसीना गर्मी ग्रावन् पर्वत पत्थर घस्मर भोजनकरनेवाला ग्रास कवल गिरास ग्राह मगरा ग्रहण घाटा गलेकेपीछेकीनस ग्राहिन कैथावृक्ष घांटिक बदीजन घात वध मारडालना ग्रीष्म गरमीनातु धातुक मारनेवाला परद्रोही देरी अवेयक गलेकागहनाकंठादि घास तृण ग्लस्त भोजन धुटिका धुंदुवा पैरकेऊपरकीगांठि ग्लह जुबांजीतनेकादांव घुण काठकाकिरवा ग्लान धूक घुधुवा उल्तू धर्णित जिसेबहुतनींदहो औधाई ग्लो चंद्रमा (घ) घृणि सूर्य की किरण घट घड़ा कलश घृत घी अमृत घटना हाथियोंकीसग्रामकीतैयारी घृष्टि वारहीकन्द शकर घटा घाटक घोड़ा घटीयंत्र रहट जिमयंप्रमेपानीऊंचेपर घोणा नाक घोणिन् शूकर घाँटा घर सुपारीवृक्ष पोर भयानक घटापथ राजाशोंकीराह घोप गांपालोकेर अटीगकंग्राम घंटारवा शनपुप्पी [जाकांनोधकर, घोपक काई नागला. [राना घटिकार्थक बदीजन जेवंटापनाकररा घोपणा बहुतनारसंशब्दकग्ना गोद घन मेघ घटाझांझयादि मयनाच घ्राण नाक सुगन्धलंना मुद्गर अतिसयन कठिनता मूर्ति प्राणनपण मुन्दरसुगन्य ग्लाप्णु ) दुखीरोगसे घृणा दया करुणा निंदा जाय घाट घटा घटापाटलि ) मोरवानीपधि याना , ५६ शब्दार्थप्रकाश। (च) ध्रात सुगन्धलिया चटु प्रेमसेपरस्पर झूठवातकहना (च) चदुल चलायमान चलतौफिर च पादपूरणमें दोक्रियाफेशब्द चरणक चना लहिला चकोरक,चकोर. चकहा पैहासेनाराज्य चण्ड बड़ाक्रोधी चक्र सुदर्शनचक्रादि भेंबरपानीकी चण्डा धनहरीऔषधि मसापर्णी चक्रकारक व्याघ्रनख औषधि चएडांश सुर्य चक्रपाणि भगवान जिनकेहायमेंचकहै | चण्डात कनैर कडेल चक्रमर्दक चकौंद. [युतसवारी. चण्डातक लगा विवाहकीपेरीपचिया चक्रयान पुष्परथ राजाओंकीयानन्द चंडाल ब्राह्मणीशुदसेहो चांडाल चक्रला माथा चंडालवल्लकी चण्डालोंकीवीणा चि- चक्रवर्तिन् सब पृथ्वीकाराजा चंडालिका कारा बांसुरीआदि चक्रवर्तिनी चकवतोपषि चण्डिका श्रीपारती चक्रवाक चकद्दा चतुःशाल चौकघरकी जिसकेचारी चक्रवाड पृथ्वीकेासपासकापर्वत ओरशालाबनी हों चक्रवाल मेघोंकामंडल पृथ्वीकेचारौं चतुर होशियार योरकापर्वत चतुरंगुल धन बहेडावृत चक्रांग चकदापती चतुरानन ब्रह्मा जिनकेचारपख है चक्रांगी कुटकी चतुर्भद्र धर्म अर्थ काम मोक्षसमेत चक्रिक वंदिजन चतुर्भज विष्णु जिनकेचारवाह चक्रिन् सर्प चतुर्वर्ग धर्म अर्थ काम मोक्ष चक्रीवत् गढहा चतुप्पथ चौरहा चौक चतु:श्रवस् सर्प सांप चतुयिणी चारवरसकांगों चक्षुप् नेत्र आंख चत्वर प्रांगन यज्ञकेलियेसस्कारकि चक्षप्या कालासुरमा यापृथ्वीकाभाग चंचल चपल चालक चन कुछ चचला विजुली चन्दन हरिचन्दन सपेदचन्दन चच अण्डाकावृत्त पत्नीकीचाच चन्द्र चन्द्रमा कपिलाओपधि पर चटक गरगवापती चटका गरमैया चन्द्रक मोरपुच्छ जानेत्राकारहोता चटकाशिरस् । चन्द्रभागा पिपगढ़ चटिकाशिरम नदीकानाम चन्द्रभागी सोना जल (च) शब्दार्थप्रकाश। चन्द्रमस् चन्द्रमा चरिप्णु चलनेवाला चन्दवाला इलाचीपड़ी चरु हवनकाचरु भातक्रियापात्र चन्द्रशाला घरकाशिरा [चंद्रमा है चर्चरी ताली गान चंद्रशेखर श्रीमहादेव जिनकेमाथे में चर्चा प्रमाणोंसेपरीक्षाकरना देहमें चन्द्रसंज्ञ कपूर चन्दनादिलगाना चन्द्रहास खा शिवकाखड्ग जोराव चर्चिका चामुडादेवी एकोशिवनेदियाया चर्मन् हिरनामादिकीचाम ढाल चन्द्रिका चांदनी उजेरिया चर्मकपा थूहर घोहर चपल चालक जोअपने यागेदुसरेको चर्मकार चमार मोची नसमझे शीघ्रता पारा जोविना | चर्मप्रभेदिका चमडासीनकीरापी विचारकाईकामकरै चर्मप्रसेविका? माथी धोकनी जिससेवा चपला विजुली पीपरि चर्ममसेवक गितेजकीजाय चपेट चटकना थप्पड़ लपोटा चर्ममुण्डा चामुण्डा देवी चमर हिरन जिसकीपूंछचमरकेकाम चमिन् भोजपन दाललिपेपुरप पाव चवर रोमोंकागुच्छा चर्या उपासनागुरुयादिकी चर्षित भोजन किया चराया चमस पात्रभेदयज्ञादिकोंको चल चामसी प्रणीता यज्ञकापात्र चलदल पीपरवृक्ष जिसकाशनिवार चमू सेनाभेद सेना कापूजनहीताहै चमूरु हिरनजाति चलाचल चलना चपक चपावृक्ष. चलित कुछकापना सेनाकाचलना चप परिसाकीमाटी खाईकीमेड समूह चविका चर भेडिहा दूत जोछिपकर कामकर चविका चारीपषि चलना चरक वैयककाशास्त्र चपाल यनसभऊपरकापाठ चरण पैर पाव चपक मदिराशावर्तन पियाला चरणायध मुर्गा चारिक पदीजन अन्त नाश चागेरी 'अम्लोनिया चरममाभृत् अम्तपर्वत जहासूर्यमस्तहों चाटार गरगवावारचा चलना स्थावरजगमजीर चाटु परम्परझुठीपात चमरिक कचनारवृक्ष चलना [अड चव्य चव्या चरम चराचर । . ६१ शब्दार्थप्रकाश (च) चांडाल । अषम अतिनील चांडालना चित् सुधि ज्ञान कुछ चांडाल ति ब्राह्मणीमेशुद्रमेहो। चिता । मुर्दाकोजलानेकेलियेलकड़ीया चांडालिका नीचांकांवानी' [चिति दिइकट्ठाकरआगिलगाना, चातक पपीहा TIP चित्त मन चातुर्वर्ण्य ब्राह्मण क्षत्री वैश्य शुद्ध चित्तविभ्रमः उन्माद जिसकाचित्तस्थि चांद्रभागा चित्तसमुन्नति मान औरसेअपनाको चांद्रभागी एक नंदीकानाम 3577: अधिकविचारना.. Fir चाप धनुप कमान चित्तोद्रेक गर्न अभिमान ! चामर । बालन्यजन रोमोंकागुच्छा- चित्ताभोगमनकासुख चामराचबर चित्या चिता [वीर चामीकर सुवर्ण सोना चित्र चुनरीयादिकारंग आश्चर्य तसा चामुडा देवी , --चित्रक अण्डाकाहाचीत माथेकाति- चापेय चंपा नागकेशर लक चार - छिपाहवादत वधन, F.ME चित्रकर चितेर रगरेज चारटी-स्थलकाकमल चिरकृत् तिनिसा - चारण नट,कथकडा चित्रकाय सिह चारु मनोहर सुन्दर चित्रतंडला विडगा। चार्गक, जैनिमतीशरावगी चित्रपर्णी "पिठवान। चार्चिक्य देहमेचदनादिलपकरना [का चित्रभानु सूर्य अग्नि" चालनी , चलनी चालनाधान्यादिको चित्रशिखंडिज । बृहस्पति चित्रशिखंडी चाप चित्रशिखडिन् अगिरातिनकपुन लीलागणासपक्षी चास चित्रा मूसापर्णी गॉडुवा ! चिकित्सक वैद्य वादेरोगीको चिंता स्मरण मनकाविचार चिकित्मा रोगकामतीकार जिनदवाया | चिपिटक भूनेपानकचाउर मूनयत्र दिउपायासेरोगनाशदो चितुक प्रोटकनीचंदाढीऊपर चिर चाल ओरजापिनाविचारकिसी चिरक्रिय थोडीटेरकंकाममेरनरल कोमारटाल दंडदेउसका नाम गार्वउसयालसीकानाम निएर बाल चिरजीषिन् पहुनकालनिए লাি বিনা चिम्टी,विवाहिताचीकुछयोवनकांप्राप्तहो किस पात्रभेट चिरंतन प्राचीन पुराना [रनि चिना अमिती चिरप्रमता यातदिनीवियानिगा ब. ग १ KO -- बहुतदिन बहुतरान बहुत चटक }दास नौकर चिरिबिल्व करनवृत्त लिलिनिमि/ जलथलचलनेवालीमहरी चेतना बुद्धि चीर वस्त्र (च छ) शब्दार्थप्रकाश। चिरविल्व करंजवृक्ष चूष्या जौरीकमरवांधनेकी चिररात्राय विरस्य चिराय चेत् पत्तांतर दुसरीवात चिरिटी विवाहकवादकुछयवास्त्री चेतकी हर चेतन मापी जीव चिलिचिम चेतस् चित्त मन चिन्न चील्ह चिपड़ा जिसकेाखसे चल वस्त्र कपडा अधम नीच पानीवह चत्य यज्ञकाघर चिल्लका झींगुर चैत्र चैतकामहीना चिह्न लक्षण मसा तिलमादि चैत्ररथ कुबेरकाबाग चीन हिरणजाति चैत्रिक चैत्र चैल,वस्त्र कपड़ा अधम नीच तालपल चीरी चोच दालचीनी अधखायाफल चोदिनी यवासा जरासा चीवर पिनकावस्त्र चोय आज्ञा चुक अमिलवेत चूक शाग चोरपुप्पी शखाली वलि कौटिन्ना चुक्रिका अम्लोनिया चोरिका चोरी [ अँगिया चुल्ल चिपड़ा जिसकेगाखमेपानीव है चोल चौलिया स्त्रियांकीछातीकावन्न चुल्लि । चून्ह जिसमें भोजनपदार्थचनाये | चौर चोर चल्ली जात चारिका चौर्य चचुक स्त्रीकीबातीकीनोक चारी चहा मोरकीचोटी चोटी शिखा झोर्ड च्युत गलिजाना गिरपदना पटना चूडामणि शिरमेंपारणकरनेकीमणि (छ) चूहाला मोयाविशेष चूत प्रामकारक्ष चूर्ण मुगधिकांवस्तुकाचूर्ण पीमीवस्तु छगनापी विधासमोपभि बंगला चूर्णकुवल टेदेवान गलाटी चूणि चणिका चुनी गन्नानी एलिका काननीनाम्यान वर गजावाला दाता चीलिका झीगर [लि छगलक चोकग -- शब्दार्थप्रकाश। (ज) छत्रा सौंफ तृण धनिया छत्राकी साक्षी जगत् पृथ्वीतल संसार चर जगम छद पता पखना पर पंच जगच्चक्षुः सूर्य संसारकेनेत्र छदन पत्ता जगती मनुष्यलोकपृथ्वी बदिस छादन शांकर जगत्माण वायु हवा छान् कपट शठता जगर कवच बख्तर बंद अभिप्राय आशय आधीन जगल धतूरबृत्त छंदस्,गायत्रीआदिछंद प्राशय अाधीन | जन्ध भोजन किया खाया बन्न छिपीजगह एकांत श्रोहाना - जग्धि भोजन दना दिपाना जघन स्त्रीकीकपरकाागेकाअंग छल कपट जघनेफला कबरिवृक्ष रवि शोभा प्रभा जघन्य अन्त्य छोटा नीच छाग बोकरा जघन्यज छोटाभाई शुद्ध छागी चोकरी जंगम जोजीवचलते.. [क्षादि बात निर्बल हर खंडित जंगमेतर स्थावर जोचलनहीसक्ते बू बात शिप्य चेना जोगुरुकेदोषनकहे जंधा जांघ पोंडरी [डकिया छादित छिपाना जंघाकरिक जंघाजीव धावन कासिंद हदस वेदपाठी वेदपढनेवाला माया सूर्यकीमिया परछाही बायानाथ मर्य लायाकैपति जटा वृत्तकी जब ब्रह्मचारीआदिकी छित खंडित शिखा बहुतबालएकममिलेहों ज छिद्र छेद फूटा दामासी छिद्रित छदेगये छेदकिया जटाजूट शिवजी केजा ऋषियोंकजटा दिन कटा संहित जटामासी जटामासी छिनरुहा गुर्च. जंघाल। जपित बहुतजन्दचलनेवाला . [आती है. जटि मुटुंदरी छन्दरि जिसकीटेहसे दुर्गध सापकरियाकावृक्ष रिका छरी शुली लेक पिंजराकपक्षी वेदन कता काटना जटिला जटामासी जडुल । लहशुनकाचिन्हकाताग्गकाम जल निप्पडमे जदर पेट कठिन '. जतुका ] जपापुप्प चकवता शब्दार्थप्रकाश जड़ जाड़ा मूर्व जोबातकहसुननसके ग्रामयादि निंदाकीपाती जतु लाख Trir Far जन्यु जीव Ar: जतुक हाग जप नित्यवेदपढ़ना: मंत्रजपना चिमगोदर चकवतः गुड़हरपुप्प जास्वंद जतुकृत जमन भोजन जतका जंपती स्त्रीपुरुप Hri जतुका चिमगोदर जंबाल-कीचा चहला जत्रु कंधालातीकेवीचकी हड्डी. जविरा जंभीरीनिंबून जनक पिता वाप Fi नंबीरः, जंभीरीनिंबू मरुवा, जनंगम, चांडाल... जंबु जामुन फरेंद:im जनता मनुष्योंका झंड- - जंबुक सियार नीच वरुण जनन जन्महाना पैदाहोना कुल:वंश जंबू जामुन फरेंद जननि। जंबूक सियार -माता महतारी जननी जंभ जंभीरीनिंच r[माराः जनपदादेश जिलाता गंभभेदिन् । इन्द्र जिन्होंनेजभदैत्यको. जनयित्री । माता महतारी जंभर जंभल जंभीरीनिं: जनश्रुति : लोकवाद कहावत .... जंभीर जनार्दन भगवान जनाश्रय मंडफटिकनकास्थान जंभीर मावा : [जति. जनि. उत्पत्ति पैदाहोना, यधू चकवत, जय नरवल शत्रुसेनीनना ज़य, जीन पुप्रकीसी नवीनग्नी : जयन जयंत इन्द्रकापुत्र जति योरगण जया जनस जन्मटोना जय जीतनकोसमर्थ जंतु जीव नाण' जीरा जतफल गनीर मरन् वृद्ध बढ़ा गन्मन् नाद्गय दाबल जन्मिन् । सुद्धापा युट्टापा जन्य चिवाक्येवरचमुरमादि सं-जगत् गर्भाशय गर्भकासारण " . जय जीत जनित्री माता ॥ जनी- उत्पत्ति चकवन अधू पुत्रादिको जयंती) नैति. 17 जीय . - । - ३ . m A . N V म शब्दार्थप्रकाशा (ज) • जरायुज मनुप्यायोडाआदिजितने-जागरीजागना: fifty- गर्भसपैदाहोतह hir जागरित जागनेवाला जल पानी जागरूक जलंगम, चांडाल धीवर निपादादि-जागर्या-जागनाताग [ गारूडी जलजतु : मगरा घड़ियालश्रादिर | जांगुलिक विषझाड़नेवालबंधा- जलेघर मे वादर, जांधिक - डांकिया कासिद, जलनिधि समुद्र कार जात जाति उत्पन्न जलनिर्गम भंवरनदीमादिमें । जातरूप सुवर्ण सोना जलनीली,,,शेवार --- जातवेदस अग्नि-5 जलपप्प कमलकोकावेलियादि जातापत्या जोखीपुत्रादिउत्पनकरचुके जलमाय कच्छदेश बहुतनलकादेश जात्ति जाति-जूही संमगोत्र, जलमुक मेघ बादर जातिकोश in जायफर जलव्याल पनिहासांप. [करते है जातिफल जलशायिन् नारायण जोजलमेंशयन जाती जूही चमेली मालती जलशक्त, सीपी सूती जातीकोशी जायफर जलाधार तड़ागादि-~f जातीफल जलाशय तड़ागादि जलकातण :- जातु किसीकालमें 1 जलोच्छ्वास जलवहनेनारामादि जातुधान राक्षस जलौकस् । जलजीव जातुप लापकाविकार चरीआदि। जातोक्ष नयावल एम जन्पाक, बतकहा वहुवातक है, जल्पित 'कहावत | जानु गाठी रनेवाला जब वेग शीघ्रता तुर्तही, जावाल गड़रिया बोकरीसेंजीविका क जवन जल्दचलनेवाला तुर्तही बेग मामात् दमाद-जमाई जवनिका परदा कनात जामि वहिनि कुलकीस्त्री जवापुप्प गुडहरकाफूल जांच जामुन फरेंद जायक पीतचदन केशरियादिससंयुन जनुतनया गंगा जिनकोजनुनामऋ-जाया खी पिनेपीलिया फिरसबकीमार्थनासे जायाजीव सीसेजीविकार नटादि मगरकिया आयारती "स्त्रीपुरुप जागर कवच वख्तर जायु पीपध दवा 1 7 m जलाका r जहा केवाच PM । । (ज) शब्दार्थप्रकाश। ६६ जार दूसरापतिकरना यार.मारनेका. जीवंती औषध जाल,समूह झरोपा जालमछरीआदि जीवा जालक नईकलीफूलकी जीवाजीव मोरकेसमानपक्षी जालिक जोजालसेमृगाकोबांधले जीवातु प्रायु जीवरताकाउपाय जाली पडवली जीवांतक जीवकामारनेवाला जाल्म नीच जोविनाविचारकामकरै जीविका व्यापार जियत्सु |पा जीवितकाल प्रायु जिगी मजीठ जुगुप्सा निंदा जित्वर जीतनेवाला जुग सोमबन्ली जिसकेपत्ताशुक्लपक्षम जिन युद्ध पौष हों कृष्णपक्ष में गिरपद निष्णु इद्र अर्जुन जीतनेवाला जुह सुवाभेद हवनके जिह्म फुटिलदुष्टमालसी जू जिह्मग सर्प जूर्ति निहा जीभ जुम जमुहाई मुंमण जीमूत मेघ वादर देवताही पर्वत जैर जीतनेवाला जीननेकोजाय जीरक जीरा जेमन भोजन जेय जीतनेयोग्य जीर्णवस्त्र, पुरानाकपडा मैत्र जीतनेवाला वातृक चन्द्रमा आयुर्दायवान जीव,माणधारण करना जीवतामाजीव जैमिनीय मीमांशक मीमांशापदनवाला जीक पीतशालक असणा जीवक जॉगक अगर जीवजीव ज्योत्स्नी पालिका परवरील मोरकसमानपत्ती जीवजीव जापम् मग निनीकग्ना जीवन पानी नीपिका जापा गोपिन् । मी नारी जीवनी भापधि जापिता जीवनीया म पएिइन जीवनोपय आयुर्दाय रक्षाकाऊपार नपिन। मममगया मानगया जीवतिक पक्षीकामारनेवाला जीवतिका पाटा गर्न प्रमि शुद्धि जीन वृद्ध बूदा जीर्ण पुराना जीणि पुरानता ॥ -- झिल्लिका ६७ शब्दार्थप्रकाशा (झटठड.) ज्ञातसिद्धांत शाखी शाखपढ़नेवाला' झष मछली ज्ञाति बंधु कुटुंबी। - झपकेतु अनिरुद्ध कृष्णकापौत्र.' झाद जाननेवाला झपा नागवला ककही। ज्ञातेय बंधु कुटुंबी झारलं मोरववृत्त घंटापाटलि। द्वान मोक्षविषयकाबान झाटलि मोखावृत्त ब्रानिन्। ज्योतिषीपण्डित बानी भावुक झाऊ ज्या पृथ्वी धनुषकाडोरा | झिटी 'कुरंटक झिटी पुष्पभेद । ज्याघातवारण तल बाण फेंकनेकों | झिरिका हाथमेचमड़ाबांधना झिरीका झिरुका ज्यानि पुरानता बुढापा झिल्लका ज्यायस् "बहुतबूढ़ा शुभतामें झीगुरु. ज्येष्ठं जेष्ठमहीना बड़ाभाई अवस्था" | झिल्लीका ज्योतिरिंगण जुगनू झिरका ज्योतिषिक ज्योतिषीपण्डित झीरुका ज्योतिप्मती मालकांगुनि (ट) ज्योतिस्,नक्षत्र प्रकाश मांस्वकीपुतली | टंक योकीपत्थरफोरनेकी कालाकैया ज्योत्स्ना चांदनी उजेरिया पटोलिको खंता जंघा अहंकार.क्रोध तरवार परवरकीबेलि कामियान ज्योत्स्नी चांदनीरात ज्वर रोग ज्वर टिभि टीका अर्थ ज्वलन 'अग्नि ज्वाल अमिकीलपट दुंदुक स्योनाकवृक्ष (ठ) ठ,महेश्वर शन्य बहुनशब्द मनलबान झंझावान प्रांधीपानीसहिन टिटिभक टिटिहरी (झ). झया पृथ्वीकावरा झटामला, झटिति शीघ्रता झर . झिरनापहाड़ोंके झझर झल्लरी वाजा डमरूभेद डमर,उपद्रवसेमनुष्यादिकालोटना नाग हमरु वाजा डयन स्त्रियोंकीसवारी | उही बड़हर. - *- T . T/तनू देह " (ड ढ त) शब्दार्थप्रकाशा डालिम दारिचा अनार::::| तथा. समता जैसेटरि-तैसेहर::: डिडिम डमरूभेदः । तथागत जिन बौद्ध डिंडीर समुद्रफेन- 2 तथ्य सत्य सच्चाई डिव दुःखसेलोटना मरना | तद कारण डिभ वचापंक्षीका वालक पाखंडी | तदा तिससमय : हिंमा दूधपीनेवालाबालक मतदात्व: तिसीसमय:वर्तमानकाल डहुंभ :दुमुहासांप जिसकेविपनहो::: तदानीम् तिससमयः, -7: डुलि कछुई मी तनय पुत्र लड़का " (ढ) तनु देह छोटा:विरल खाल: ढका एकवाजाकानाम तनुत्र कवच वख्तर- (त) [छोटाकिया तक्र. मठा. '... तनुकृता छोटाकरना जैसेभारीकाठको ततक सांपकानाम बदर्द ... | तनूनपाद् अग्नि तनन् बढ़ई काठकाटनेवाला तनूरुह रोमा. पंखपत्तियों तंक टांकीपत्थरफ़ोरनेकी तंतु डोरा मृत तट "किनारानंदादिका सरसों ताक तडागताला नंतुलन विडंग, तटिनी नदी तंतुवाय कोरी जोकपडाविनताह मकरी तंत्र श्रेष्ट सिद्धांत - ...... तड़ाग . ताल तालाव तंत्रक नवाकपड़ा तडित् विजुली तहिन्यत् संताप पीड़ा ... प्रवाप कोरी तंडक मेघ यादर तंबवाय कारी मकरी तंत्रिका गर्न नंदुल विडंग चावर तंदवाय कोरि नंदुलीयकं चारा तत वीणादियाना विम्नार नंद्रा सनिपहिलपादकीयालस्य कु. तीद ततम् - कारण... [ काल- तंदी नींदनाना. नत्काल सक्षण तिसीममय वर्तमान तप गौऋनु नपस्या नत्व हायपरसेनाचना पृथ्वीजनयग्नि नपःशमह नपस्यावान जिठिय . वायुधाकाश नपन मृर्य नरककानाम नत्सर निसीकाममलगा तपनीय सुवर्ण माना तंतुम *. . 4 तांवा । it T AN तीतुर TH n + 1 . म ~ (त) शब्दार्थप्रकाशा तामसी अंधेरीरात, - 17 तिकशाकवरणवृता तांकवल्ली तांवली नागवेलि पानकीवेलि विग्म बहुतगरम तिहमवन्तचय, पदसमूह क्रियाकवाणी तानक ताम्रकी दिशागजकीपत्रीकानाम तितका चलनी पिसानचालनेसी तितिक्षा राईचढ़तीदेखिमसनहोना ताम्रकुटक तांवकेकामवाले । र सहनशीलता, ताम्रचूड़ ' मुरगा तार 'अतिउच्चस्वर मोतीकाहार चांदी तितिक्ष 7 सहनशीलताकास्वभावही शिरसेशब्दकरना। तितिडीक 'चूक तित्तिरित तारकजित् स्वामिकार्तिक तित्तिर, तारका नक्षत्र'आँखकीपुतली तिथि परेवाआदि तारा नक्षत तिनिश वृक्षविशेष तारापथ आकाश तारुण्य युवावस्था तितिड़ी--अविली, युवावस्था 'जवानी तितिडीक चूक ताय गाद घोडा तितिली अविली तार्यशैल अंजनविशेष तिदुक ताल कालक्रियाकापरिणाम निपम सिंदकी। तेंवृत्त काकारण तालशब्दताडवृक्ष अंगू तिमि ठावीचअंगुरीकायिस्तार ताल र तिमिगिल मबलीभेद , रिताल विमित चोदा गीला तालपत्र_ कानकागहना कुंडलादि .. तिमिर अन्धकार अंधरा तालपर्णी तालीसपंव निरस् अन्तान तिरदा तालमूलिका मूसली. तिरस्करिणी तालवृतक ताड़कापरखा वेना तालाक बल्देव जिनकेश्वनामेताड़का तिरस्सिया अनादर निगटर चिन्हहै व पत्तादि.तिरीट बतलाघवृक्ष सचिम्पान नगी नाली पृथ्वीकाप्रवरा ताड़कीमदिरा के चारबाश शिरवागना नालु तन्तुवामुहकमीतर तिरोधान याच्छादन यायामेवादिकी नान् तबतक निरोहिन दिपगहना टिपना तिक सीवरम तीपा निशादि तिर्यच तिरछाचनवापूजा तिन निधादिरस पहचल तिलक निलस्पूनकात देवाति । । -- - - + TH . 7 . । तिरस्तारिणी परदा कनात T - ७२ - तेजनक नरक vir शब्दार्थप्रकाशा नुल्यपान र सार्थभोजनकरना तृप्त बहुतानंद परिपूर्ण नुार रस हरेनादिका, TET] प्ति वप्तहोनाकिसीकामसे तुप बहेर धानकेकन भूसी तप वांछा पियांस तुपार पाला हेमंतऋतु तृष्णक वांधारनेवाला Pr तुपित - देवताकागण ३६ तणां चछा पियास मी तुहिन पाला जाड़ा 11. : | तेज द्रव्यदंडसेनासेहोता है प्रभाव प्रताप तृण तेजन -भाथा;तरकस तीरभरनेका नरकुल शंठा तूणी) तृणी नील तेजनी मुरहरीमापधि, तूणीर "तरक्साभाया तेजसू वीर्य प्रभाव प्रकाश बल 7 तूद पापिप्पली दूतदति तेजसाराशि सूर्य तूर्ण तुरत तुरंत शीघ्र तेजित. शानसेचाकूआदितेजकरता । तृल कंदर्ववृक्ष कपास PIEम चोदाहोना भीजनानी, जाना- तृलिका सलाई I तेमन कढी दहीवेसनयादिकी. तूबर रस हर्रआदिका दादोरखाये पु तेजस, सोनाआदिधातु हरिया रूपं विनदाढीकाज्वाननी तेजसावर्तनी, सोनामादिगलानेकी घ- तृवरिका तूर अरहरि ततिर तीतुराकाझुण्ड नूपणींशील तिलपरिक्षक सपैदछंदाचंदन: तपणीक महचुप्पा चुपचाप तैलपायिका तेलमेडूबनेवालेगुजिया, तूप्णीकाम् । } मौनहोना चुप्परहना TO तैलपाता,स्वधाकर्म जिसमेंतिलपातहोतेहैं तृष्णीम् लीनवर तिलोंकावेत तण तिन शुण तिनकावृत्त तप पॉपमहीना ॥ तृणम तृणधान्य 'पसही प्रापियोंकापन्न 'तीक लडकालड़की तृणध्वज वास तोकक पपीहापत्ती . तणराज ताहवृक्ष तोक्म हरेजव तृणशून्य वेला फूलकापड + | नोटक वृत्तभेद्र रूपकभेद तृपया .,तिनकीखरही तृतीयाकृत तीनवारजोताखेत" } चाबुक कोड़ा डंडा औगी तोदन तृतीयमकृति नपुंसक नाम तोमर प्रायुधमयानीसमान इतीयाप्रकृति तोय "गल पानी- - 1 अपु रांगा स त्रस्त। - ७३ शब्दार्थप्रकाश ! (त) तोयपिप्पली जलपीपरि त्रिदिवेश देवता पवित्रकरतीहे तोरण बदनवार द्वारकाबाहर त्रिपथगा गगा जोतीनधारहोत्रिभुवन तौर्य नाचगानवाजामिलकर त्रिपुटा निशोथ छोटीइलाची त्यक्त त्याग जैसेदेहत्याग त्रिपुटी निशोथ [कोमारा त्याग दान देना त्रिपुरांतक महादेव जिन्होंनेत्रिपुरासुर- त्रपा लज्जा शरम त्रिफला अवरा हरं बहेरा त्रिभडी निशोथ त्रयी ऋग्यजुसामवेद वेदकानाम त्रियामा रात यीतनु सूर्य ऋग्यजुसाममूर्ति निलोचन महादेव जिनकेतीननेत्र चलना त्रिवर्ग धर्म अर्थ काम क्षय स्थानबृद्धि सर कोरीकासूतलपटना त्रिविक्रम श्रीभगवान }डरजाना भयभीत त्रिविष्टप स्वर्ग इद्रपुरी वस्तु त्रिबृत् रक्षाकिया रक्षाकरना निशोथ त्रिवृता त्रात निसन्य तापुप रागेकीवस्तु त्रिसन्ची। तीनोसन्ध्या तायती श्रीपधि पिसीत्य तीनवारजोताखेत [नीआदि त्रायमाण निस्रोतस् गगा जिसकीतीनधार मंदाकि त्रास भय डर त्रिक नाचगानबाजारीरहड्डीपीठकी निहल्य दलसजातातीनवार निककुद् त्रिकूटपर्वत विहायणी तीनवर्षकीगी त्रिकटु सोंठि मिर्च पीपरि त्रुटि छोटीइलाची झोटा थोड़ा त्रिका कुवाकीनेवारि कठवारि त्रिकूट पर्वत जहालकापुरी समुद्रलोन त्रेता तीनअग्नियज्ञादिकोंकी निखदन । तीनवटिया पलॅगतीन चार नोटि पत्तीकीचाच त्रिखनी पायीतीन यंत्रक महादेव निगुणाकृत तीनगारजोताखेत त्र्यवकसख कुबेर जिनके मित्रमहादेव त्रितक्ष तीनधारलोयारिया ज्युपण प्रवरा हर्र बहेरा त्रिफला जितनी त्रिदश देवता त्व भिन्नार्थ त्वरत्तीरी यशलांचन त्रिदिव त्वपत्र दालचीनी तन त्रुटी न्यूपण त्रिदशालय । स्वर्गलोक देवलोर 1 - ददुन्न चाँडी (थ द) शब्दार्थप्रकाश। [७४ त्वक्सार बांस दक्षिण्य दक्षिणायोग्य त्वच् बकला खाल दग्ध जला जरगया त्वच दालचीनी तज दग्धिका जराअन [राजाकोकरदना त्वचिसार वांस दड सूर्यकेपास दडदेना डडादढउपाय त्वरा जल्दी वेग दंडधर यमराज जोसवमनाकोकर्मान स्वरित तुरत बहुतजल्द सारदडदेते है त्वरितोदित तुतकहा दडनीति विद्याराजावाकी [जाय त्वष्ट छोटाकरना. . [कारीगर. दंडविष्कम जिसखंभाषेमथानीवारी स्वर वहई लकड़ीकाटनेवाला देवता दंडाहत दंडासमधागोरसमान लिद मभा उजेरा शोभा विषांपत्ति सूर्य दहण सरु तल गारकीमूठी कजा दादुरोगवाला दगुरोगिन् (थ) दद्धन चकोडी थ शब्दार्थ दधित्थ कैथाकावृक्ष (द) दधिफल दंश डांस मच्छह वनकीमच्छी दधिसक्नु दहीसत्त दशन बस्तर करच दनुज दैत्य देवताकशनु अमुर दशित कवचधारी दंशी दोटेढास दन्तक पहाडकनाहरनिकलेविरदपत्थर दष्ट्रिन दन्तधाचन सरवृक्ष दक जल पानी दतभाग हाथीकेागेकाभाग दक्ष चतुर बुद्धिमान दंतशठ कैथा जंभीरी निर दक्षिण उदार सालकलाप्रवीण दनशठा अम्लोनिया दक्षिणस्थ रथकामारथी रथी दंतावल हाथी दक्षिणा दिशा दनिका दांती जिसमापीनजमाल दक्षिणाग्नि हवनसरीमग्नियाम दतिजा गोदाई दक्षिणार हनीपशुमित्राव दीतन् हाथी दक्षिणाई। दंदशुरु सर्प सांप दभ्र दोदा थाहा दक्षिणेमन् जिसहन्नारदहिनीपशुरीम दम दंडना इन्द्रियामोनीतना दन्त दांत शुगर वनरा दक्षिणीय दक्षिणायोग्य [पायहो.
७५.. शब्दार्थप्रकाश। (द) दमय इंद्रियों कीशांति दशनवासस.. ओठ अथर दमित इंद्रीजित - दशपुर केवटियोमोधा दमुनस् : अंनि दशपूर दंपती स्त्रीपुरुष.. दशवल जिन वौद्ध दंभ कपट छल शठता दशमिन् बहुतबृद्धावस्था... दंभोलि बज्रइंद्रकाआयुध दशमीस्थ,बहुतहा जिसकारागनाश हो दम्य नयायलविनाजोता दशा कपड़ाकेदोनोंदोर ग्रहोंकीदशा दया कृपा मेहरवानी वाती अवस्था दशानीकिनी ..अक्षौहिणीममाणसेना: दयाल दयावान' दयित प्यारा प्रिय दस्यु चोर शत्रु वैरी दर भय गड़हा अंधावां, दस अश्विनीकुमार, दरत् म्लेक्षनाति दरिद्र भोजनतककादुख दाक्षायणी,श्रीदेवी अश्विनीआदिनक्षत्र दरी “पहाडोंकीकंदरा दाक्षाय्य गीष दर्दुर मेढ़क मेंझका :- दाक्षिण्य दक्षिणायोग्य दर्प अहंकार गरूर दाडिम अनार दर्पक कामदेव दाडिमपुष्पक रक्तरोहिडा रोही दर्पण शीसा दर्पणी दांडपाता जिसकामदंडपात हो दात काटा खंडित - .', दहन अनि 14 दर्भ , कुश दात्यूह | सपेदकोवा [ काढा. दात्यौह , दर्वि दी । कलबुल घोटना. दविका पाथरी शागभेद दाम्हदीका दार हसिया जिससेवेतकाटेनाते हैं दवाकर सांप दर्श अमावस अमावसकीयज्ञ दर्शक द्वारपाल *दर्शन देखना दर्शन करना 'दल पत्ता दव बनकीअग्नि.. दपिष्ट दान देना दानउपाय हाथीकामद दानर असर, दानवारि देवता दानशौंड,दानशूर बड़ादानी वलियादि दांत नपस्याकरनेवाला जितेन्द्रिय दानि इन्द्रियवशकरना दापित धनादिदेवाइदेना देना दाम चांधनेकीरस्सी दामनी दवीयम् । यहुतदूर दशन दान दिधिए जिसकुमारीस्त्रीकीछोटीवहिनि दिधीपू (काव्याहपहिलेही (द) शब्दार्थप्रकाश। दामोदर भगवान जिनकपेटमेंयशोदा दित काटा खडित नेरस्सीवांधी है दितिसुत दैत्य असुर दाभिक मायानी पाखडी दिधिप दायाद पुन बंधु कटुवी दायित धनादिदेना दारक वालक फोडनेवाला दिन दिपस दारद वच्छनाभविप दिनमणि सूर्य दारा स्त्री जोभाइयोंकोफोरदेती है दिनात साम सांझ दारित भेदागया फोडागया दिव् देवलोक आकाश दारु काठ देवदारु दिव लीलागणासपक्षी दारुक कृष्णकासारथी दिवस दिन दारुण घोर भयकर दिवस्पति इंद्र सूर्य दारुहरिद्रा दारुहर्दी दिवस्पृथिव्यौ आकाशपृ-वी दारुहस्तक डीवा घोटनावड़ा दिवा दिन दार्वापाट कठफोरवापसी दिवाकर सूर्य दार्विका शागभेद दिवाकीर्ति नाऊ चाहाल दारू दारुहर्दी दिवांध घुमुवा उन्लू दालिम अनार दिवाधिका छलदरि दार पनकीअग्नि दिवाभाव घुघुवा उल्लू दाविक देविकानदी हो दिविपद् देवता दाश धीमर दास नौकर दिवाकस देवता पपीहा दिव्यगायन गन्धर्व दागपूर दास नौकर मजदूर सेवक दिश दिशा दासी कालीझिटी सेवकिनि दिश्य दिशामहो दासीसभ दासियोंकीगाला दिष्ट काल भाग्य पूर्व कर्म विष्टात मरण नाश दिगपर नगा महादेव दिया मानद दिग्गज दिशाकेहाथी दीक्षात यज्ञवीसमाप्ति दिग्ध विपकाउझायावाण लगनाना | दीक्षिन मोमयारनेवाला दाशपुर केवटिग्रामोधा दिन्योपपादुक देवता दासेय नौकर चाकर दासेर ३ ७७ शब्दार्थप्रकाशन - (द) दीदिवि अन्न भात :: दुरोदर जुबां दीधिति किरण सूर्यको किरण : -- दुर्ग कटिनस्थानपर्वतादि दीन दरिद्री दुखी--.;- दुर्गत दरिद्री दुखी दीनार निष्कमात्र... | दुर्गति · नरक कुगति ? दीप दिया। ::| दुर्गध वोह वसाना 'दीपक 'जवाइनि अजमोद दुर्गसंचर कठिनमार्ग' जहाँसिंहव्या : दीप्ति तेज दुर्गसंचार) प्रादिदों दीप्य. मोरशिखा दुर्गा श्रीदुर्गात्रिभुवनजननीहिमाचल दी: लंबा कुमारीश्रीसदाशिवकीमाणाधारी दीर्घकोशिका -जोककेसमानजल नीच दुर्जन : खल. दुष्ट . दीर्घतुंडी छछंदरि दुर्दिन बादरसेछायादिन: दीर्घदर्शिन् पंडित-- दुर्नामक ववाशीर दीर्घपृष्ट सांप : 1 दुर्नामन् । दीर्घवृत , श्योनापाढ़ा जॉकसमानजेलजीच दुर्नानी दीर्यसूत्र आलसी कामबहुतदेरकरैः दुर्वल बलहीन निर्वल . दीपिका... बावली , दुर्मनस् . व्याकुलचित्त : दुःख : दुख अशुभ दुर्मुख , जिसकामुखवंदनहो वातकरै दुःप्रधपिणी, भांटा बैंगन :-- दुर्वर्ण चांदी दुःखमम् निंदा । दुर्विध दरिद्री : दुःस्पर्श - यवाशा दुहृद शत्रु बैरी:- दुःस्पर्शा भटकटैया - दुश्च्यवन इन्द्र दुकुल बस कपड़ा दुरेपणा: शाप गाली दुग्ध दुपण ब्रह्मा बुग्यिका दुधवनिवेलि दुप्कृत पाप कुंडभ दुसुहासांप दृद्रुम हरीपियाज दुप्पर धनहरीयोपधि दुंदुभि नगाड़ा बाजा दुहित कन्या लड़की 'दुरव खरावराट् कुमार्ग दत संदेशलेजानेवाला दुरालभा पवासा दुरित पाप इति दृछु निंदा दृती संदेश जानेवाली:
95 दून संतापित शब्दार्थप्रकाश । दूत्स दृतकाकाम | देवदारु लकड़ीदेवदारुकी देवघड् देवतापूजनेवाला दूर बहुतदूर देवन जुबांकपांशा क्रीड़ा दूरदर्शिन पण्डित देवचन्लभ पुनांगवृक्ष दुर्वा व देवभय देवनाकोमाप्तहोना देवता होना दृश्य तंबू कपड़े कामकान देवमातृक जहांपरपीकपानीसेसवना. पिका आंखकामैल कांचर जपैदाहों दपीका देवयज्ञ होमकरना. दृप्य तंबू कपड़े कामकान दृप्या पशुवोंकेकमरंवांचनेकीरस्सी देवयोनि विद्याधर अप्सरायतराक्षस गन्धर्व किनर पिशाच गुयकसिद्ध दृढ अतिशयपोढा कठिन समर्थ मीटा दृढसंधि पोढ़ाजोड़ मजबूतजोड़ देवर पतिकारोटाभाई [भूत इति चमड़ाकीपोट मछरी देवल पण्डवा जोदेवताकीधान्यले देवशिल्पिन, विश्वकर्मादेवतोंकाकानगर हब्ध गुहादुवा जैसेमाला देवसभा देवताकीसभा सुधर्मासभा दृश् आंख नेत्र ज्ञान बुद्धि देवसायुज्य देवताममिलना दृपद् पत्थर दृष्ट राजचोरारराज्यसेभय देवाजीव पण्डा देवतासीद्रव्यलेने देवानीविन् / चाले. [ पिडका शाक. दृष्टरजस्,युवास्त्रीजिसकेरजस्वालाहुवाहो दृष्टांत शाखतकादिउदाहरण देवी रानी मुरहरीथापधि यस्परफ दृष्टि ओख नेव ज्ञाग देखना. [खपड़े. देवृ देवर पतिकारोटाभाई दृष्टंदु अमावास्या जिसमें कुछचन्द्रमादे- .नगर अवधयंगकलिगाटि देव देवता राजा [प्रगटहुये देशरूप नीति उत्तमदेश देवकीनंदन श्रीभगवान जोदेवकी देशिक गुरु देशी थपदेशकामा देवासुम लवंग लौंग देह शरीर देवखानक देवताकेटरपाकातडागादि देहली डेहरी देहरी देवसातपिल गहा पहाडोंकीकंदग देतेय अमर देवच्छंद सोलरकामाला दित्यगर शुक्र भृगुवंशोत्पन्न देवता देवता दितिसुन त्या जातीशपत्ता मरहरी देवताड़ टेक्नालयापधि इत्यारि श्रीभगवान इत्यारेशत्रु देवच देवचनाकोमाप्तहोना देवनाहाना दैन्य दीनता शोक - 7 देश ལམིགས་པ། देवतह कल्पवृत्त r ७६ शब्दार्थप्रकाशन दर्य लवाई - आगहायमेदेवतीर्थ | द्राक् शीघ्र दैव पूर्व कर्म भाग्य देववर्म अगुलीके द्राक्षा दाप मुनका देवन यातिपीपण्डित द्राषिष्ट अतिशय वज्ञा शुभाशुभजाननेवालीस्त्री निरात द्राविडक कचूर दैवत देवता एकवर्षकादवताकाएकदि-दु वृक्ष दोला नील मुला मलवा दृकिलिम देवटारू दोली हिडोला झूला सुचन द्रुपण मुद्गर लोहादिका टोपन पडित टोपा राति राति दृण विच्छू वील टोपेकदृश् टोपभरदेखकहै महादुष्ट द्रुणि डोणी द्रुणी कनशग्या डोंणी दोस् भुजा वाह' द्रुत शीघ्रपतलाहोना घीआदि दोहद वाला गर्भ दोहदवती गर्भकेकारण सेविशेषपदायों गुप वृक्ष कीइच्छाकरनेवाली- ट्ठमोत्पल कठचपा इक्य मान प्रमाण इहिण ब्रह्मा धुः आकाश द्रोण वीर विच्छू तौलकादशसंग धुनि शोभा प्रभा प्रकाश द्रोणाचार्य सग्राम शन्द कौवा घुमणि सूर्य द्रोणकाक कालाकावा धन्न धन द्रव्य द्रोणनीरा) यत जुना द्रोणदुग्धा दगसेरदूषटनेवालीगाँ भैस द्यूतकारक जुगखेलनेवाले द्रोणि डोती कादयापत्थरकी नावको द्यूतक ममानपानीसीचमेवाली यो }देवलोक आकाश द्रोणी नील द्रोहचित्तन पगपारविचारना द्योन प्रकाश जरा ट्राणिक दशमेरमानेकापन इन पतलादही द्वद गीपुम्प लड़ाई द्रव क्रीडा कलि भागनासग्रामाटिस ट्यानिग सर्वकनिष्ट व्यायादि वती नदीआदि दाम्य डविण पराक्रम यन वल माना धन पृथीयादि द्वादगातुन विनाभर वागनागर दोत्य दूतकाकाम TA द्वास्थिन } द्वारपाल दरवाकेनांक ८० ver (द) शब्दार्थप्रकाश। द्वादशात्मन् सूर्य जिनकेवारहभेदहैं वैष्य बैरकरनेकेयोग्य द्वापर संदेह संशय द्वापरयुग वैध,उपायवलवानसेमित्रतानिर्बलसेवेर द्वार दरवाजा थप व्याघ्रकेचमडाकारयवायकेचम डासेमहारथ । द्वारपाल वैपायन व्यास: द्वास्थ दरवाजेकानौकर द्वास्थित डेउडीवान दुवैमातुर गणेश द्वास्थितदर्शक) व्यष्ट तांवा दिवगुणाकृत दुइवारजोताखेत द्यावापृथियौ द्विज पती दांत ब्राह्मण द्यावाभूमी आकाशपृथ्वी दिवजराज चंद्रमा (ध) दिवजा रेणुकाऔपधि घट दिव्य तुलाराशि द्विजाति' ब्राह्मण धतूर धतूर विजिह सांप चगुलखोर धन द्रव्य मोतीहीरापन्नामोहरादि दितीया दूसरीस्त्री धनंजय अग्नि अर्जुनकानाम दिवतीयाकृत दुइवारजोताखेत धनद कुवेर जोधनकमालिक विप हाथी धनहरी औपथि दिवपाद्य दोहरादंड धनाधिप कुवेर । दिवरथ हाथी धनिन् धनवान् तालेवर द्रव्यवान दिवरसन सांप धनिष्ठा नक्षत्र .दिवरेफ भंवरा धनु रामादि विप । धनुःपट धनुर्घर धनुपधारी घनुपांधनेवाले दिवष्ट तांबा धनुर्यास यासा दिवसीय दिवाल्य दुपारनीताखेत धनुष्मान् धनुपधारी धनुस् धनुप कमान दिवायनी,दुइवर्षकीगा [जलसेपिराहो. धन्य भाग्यवान् पुण्यानमा दुवीप,पृथ्वीमण्द्वीपटापूजोभागपृथ्वीका धन्याक धनिया वीपवती पृथ्वी नदी धन्य धनुप कमान दीपिन व्याघ्र धन्वन् मास्थलटेश जहांजलनहीं देवपण शनु वैरी चिरौंजी चार दिवपत् । शत्रु पैरी घन्वयास जनासा धपनी 3 गरण घर पर्वत 1 शब्दार्थप्रकाश। (ध) धन्विन् धनुपधारी धवित्र 'हिरनाकेचमडासेवनायज्ञबेना धमन नरकुल संग अग्निकेतेजकरनेकोमृगचर्मकापंखा धमनि नाही जिसेदेखवैद्यरोगजानते हैं धातकी धौकै कूल वृक्षभेद धातु इंद्रिय पत्थरकाधिकारमैनशिला धमनी नलीगन्धद्रव्य पवारी दि सोनाचांदीआदि भूआदिधातुं धमिल्ल बांधेपाल स्त्रियोंकीपाटीजूरा अलकावली धातुप्पिका धौके फूल धात ब्रह्मा जोसपकोबनाताहै धरणि धात प्पिका धोफेफल धरा पृथ्वी धरती धात्री दूपियानेवाली पृथ्वी अंवरा धरित्री धर्म पुण्य सन्ध्यादिकर्म स्नानादिकि धाना भूजयव या चेदमार्गचलना यमराज न्याय धानुफ पपांधनेवाला। धान्य घानयवादि उत्तमम्वभाव आचार यज्ञागसोम पीनवाला हिसाजीवकीनकर धान्यत्वच् कनकीभूसीरिलका धर्मनिता धर्मकाविचारकरना शास्त्र धान्यक पनिया राणादिदेखना चेदकानित्यपढ़ना धान्यांश कनचावरयादिका धान्याम्ल कांजी सिरका धर्मश्चनिन्- वेषवनाकरदूसरोंकोठगना चामान् घर देह तेज ममात्र माथेमेतिलागलेमेकंठीपहिरमिथ्या धामनिधि सूर्य दिवोलना धर्मपत्तन कालीमिर्च धर्मवाननगर । धामार्गव लटजीरा तोरई [ऋचा धर्मरान बौद्ध यमराज धाय्या मभिधोंड़यग्नितेजकरनेकी धर्ममंहिता स्मृतिग्रन्थ मनुस्मृतियादि | धारणा मर्यादा पुरानीचाल घर्षण धाग घोड़ेकीचालपांचप्रकारकी वहुत धपशी व्यभिचारिणीस्त्री दिनार जोरमेदौडाना चतुरचालनाचना धाषिणी दि दुलकीचाल स्वांवांफांट पर पनि भतार स्वामी वृतभेद मनु ना४ चौकचान ५ नदीआदिकी धारा मेदिकीधारा धाराधार मेय वाटर. [ यांधवरसना. धवला पारामंपात मूमलचारसरमना धारा पवरीगाय गाँ धान धूर्त जुरी दौड़या स्वांगवाला । , , प्य ठग धवल सपेट पवली . [अधर्मी ध) शब्दार्थप्रकाश। ५२ धार्तराष्ट्र इसकेसमानकालेरंगकापती धूत त्यागकरना छोड़ना राजाधृतराष्ट्र दुर्योधनादि धूपायित संतप्तहोना घामअग्निज्वररो धावनि धावनी धूपित तापहाना. [ धूममयीतारा पिठवनिऔषधि धूमकेतु केतुउदयउत्पात नक्षणअग्नि घिस्, निंदाकीबातोंसेभयउत्पन्न कराना धूमयोनि मेघ जोधुवांसेघनताई सेतू परस्त्रीगामीहै धिर्कार निदा धूमल धुवांकासारग कालालालमिला धिकृत निंदाकिया निटाकोप्राप्तहोना | धम्या धुवांकासमूह धुवांकीगुंज धिर्कारकिया धुम्याट भुजयलपक्षी धिपण बृहस्पति इद्रकेगुरु धूम्र धुवां धुवांसारंग कालालाल धिपणा, बुद्धि अकिल चतुरता धर्मटि महादेव जिनकेंशिरमेंजटाका धिप्पय स्थान घर नक्षत्र अग्नि भारसाहै. धी,गुद्धि चतुरता अकिल.[खाल नाक.धून,धतूर जुपारी स्वांगाला ठग डांक धींद्रिय, जानेन्द्रिय मन कान पाख जीभ | धर्वह गाड़ीआदिमेंचलनेवालायल धीमत् पण्डित बुद्धिमान् धूलि। धीमती बुद्धिमानस्त्री पण्डिता चतुरा धीर पण्डित जोधार्यतासे कामकर धूसर कुछपीलापूरकासारग केशर कुकुम. [सियोंकीजाति / धूस्तुर धतुर धीवर धीमर कैवर्त निपाद बनवा. धृति धीर्य धारण प्रसन्नता चोग यह धीशक्ति बुद्धिकीसामर्थ्यता } ढीठ किसीसेनम्रनही धृप्ण धीसचिव राजानोंकामुग्यमंत्री बुद्धि धृणि सूर्यकीकिरण कासहायक कृष्णु ढीठ किमीसेनम्रनहो धुत कुछकांपना धेनु नईवियाईगों तुर्तकीच्याईगाय बुतर धतूर धेनुप्या दूधदनकोकदनवालयहां धुनी नदी नदिया गणीकीगाँ पुर रथकाभग्गा धुरीलोहकी घेनुक च्याईगांवों का एट [नाना पुरधर परिचलनेवालाल गादीका गाना यावादिनदि गझलेजानेवालावल उप धोरण सयवाहन हांधीग्यपान्दामादि धुवित्र हन्नाचमड़ासेपनायजाना घोरिनक योदशीक्दमचाल नीयादि घाँनकाशेय घोयाऊनगारख मुकराधी घस्तर पारिता घांदकीयटमचाल धूर गर्दा धृष्ट - धतुर शब्दार्थप्रकाश । (न) धारय माहीमचलनेवालावल नखी गन्धद्रव्य नखला श्याम रोहिसतण नग पर्वत वृक्ष भुव ध्रुवतारा जोचक्रकेमध्यमेस्थिरहे नगरी शहर अयोध्यामथुराग्रादिपुरी कटाड मोटीडार नित्यजाहमेश: बहुतमनुप्योंकानिवास [ मेरहते? स्थिरह निश्चय महादेव विष्णु वर नौकम् पक्षी चिड़िया जोवृत्तपहाडों गद राजाउत्तानपाटकापुत्र द्रव्य नग्न विनवस्त्रपहिरे नंगा योगभंद नग्नहु मदिराकावीन मतवालानंगा- भुवा शरिवनीपधि यज्ञादिकाभुवा होपुकारै. [दो नंगीखी. पताका झंडी नग्निता जिसस्त्रीकेरजस्वलान हुवा ध्वजिनी सेना जिसमेंपताकाशोभित नट शोनापाढायोपपिनट जोनाचत है। बनि शब्द आवाज. होना. नटन नाचना कलावानीमादिकरना ध्वनित शब्दहुवा अावाजाई शन्द नटी मालकांगनि नलीगन्धद्रव्य ध्वस्त गिरना गिरजाना टूटना नड तृण नरकुल सेंठा घरआदिमेंभी- ध्वांत कौवा बकुला कपासकेवियानि. तरकाछेद कासनेकीचरखी भिखारी घर नड़पाय जिसदेशमेनरकुलबहुतहाँ ध्वान शब्दयावान नड़मीन पानीतृणमेचलनेवालीमचरी ध्वांत अंधकार अधेरा घेगसामचरी (न) नहसंहति नरकुलोंकाढेर गहा प्रभाव निषेध नहीं नाश नडिनी कमलिनी छोटीतलैया जिस नकुलेष्ठा सपातीऔपधि मेनरकुलहों नक्तक पुरानाफटावर लता दुकवा नड्या तरकुलोंकासमूह नक्कर रात जिप्तमंचोरांफरत नक्रमाल करंज कंगा नहवल नक मंगग मारराशि नत टेढा नम्र नरम नपत तारा नतनामिक नकटा चिपठीनाकका नत्रत्रमाला सत्ताइनमातियांकामाला नट भारीनदी सेशोणभद्रनद अश्विनीयादिनक्षत्र २७ नदी घाघरागंटकीचम्मलनर्मदाकावेरी মহা বরমা লঙ্কাবাদা कृपणागोदावरीताशीयादि नम्ब गन्धद्रव्य नागन नह नदीपातक जिसदेशमनदीसेखेतीमा- ननर नावन न टिही नदीबहुतही नहाद जिसदेशबहुतनरकुलहों (न) शव्दार्थप्रकाश। नदीसनं अर्जुनवृक्ष नरकांतक विप्नु जिन्होंने कृपणावतारमें नधी चमडाकीरस्सी बांधी नरकासुरकोमारा ननांद नन्द स्त्रीकोअपनेपतिकीवहिनि नरवाहन कुवेर जोपीनमादिकीम ननु निश्चय प्रश्न अपधारण जैसेननु वारीमेमनुष्योंकोजोतते है येयोगी माज्ञा निपेघ विरोधकी नर्तक पुरुपस्त्रीवेपवनाकरनानै नया वाणी नर्तकी नाचनेवाली नटिनीयादि नदक श्रीभगवानकावड्ग नर्मदा नदी जिसमेशिवलिङ्गबहुत नन्दन इन्द्रकायन स्वर्गलोककावाग पश्चिमकोवहती है नन्दिक नन्दी शिवकेवाइन शिव नर्मन् क्रीडा केलि खेल हसी नन्दिकेश्वर गण नल नरकल तण नन्दिवृक्ष। नलकृवर कुवेरकापुत्र तुनि [ नवना. नन्दीवृक्ष नलद तृपजाति नन्यावर्त- रानावोंकाघर गोलाकेसमा | नलमीन तृणपानीकीमछरी नपुंसक नामर्द हिजरा [नि पोती / नलिन कमल. [क्लद्दा नयी लड़कालड़कीकीलड़की नाति नलिनी कमलिनी नलैया जिसमेनर नली गन्नद्रव्य नभम् आकाश श्रावणमहीना नभसंगम पक्षी जोउड़तेउडतेमाकाश | नल्व चारसौहाथ में मिलते नव नुतन नीन नया नया नमस्य भाद्रपट भादी नवदल कमलादिवनयंपत्तानयाधी ने नमसत् वायु हवा नवनीत न मापन नमस नमस्कार मणाम दडवत् नवमल्लिका सवारी नेवार नमसित नमस्कारकिया पूजाकिया नवमालिका नमस्कारी लजालाजवती नामनिका नव्यागौमादि नमम्या पूजा पूजन नवापर नयावन गोराम्पदा नमस्थित,नमस्कारकिया पूजित. [मारा नवीन नया नया नमुचिमूदन इंद्र जिन्होंनेनमुचित्यो नाचून नानिरानाधीयादि नय नीति धर्ममार्ग नयन नेत्र प्रांव नष्ट नाग मरण गोजाना नर मनुप्य पुरप. [नरकामुर नष्टता मलय नाश मामाना नरर,जोयमपुरीमह पापियोंरेटेड रोलिय नटाग्नि जिमकाग्निहोत्रनाम . T नव्य नया नया - Y नहि } निषेध नहीं अंभाव - ८५ शब्दार्थप्रकाश। (न) नष्टेन्दुकला अमावस जिसमें चन्द्रकला करतेहै तुराधान्यादिकीनाल घडी नाशहोजाती हैं। कमलकीनाल तसा नाक नाडीव्रण घावोहमेशावहाकरनसर नम्तित नाथावल नायवत् पराधीन परवश नस्तोत नाद शब्द आवाज. [जमनी नस्या नाक नादेयी नारंगी पानीकवत जैति भइ नस्योन नथावल नाना बहुन दो विना 'नानारूप बहुतरूप बहुतप्रकार, ना नांदीकर । स्तुतिवहाईसहितवाजाव नाक स्वर्गलोक आकाश 'नांदीवादिन् | जाना नाकु बौर महीकाह नापित नाई नाऊ नाकुनी रहसनि रासनि नाभि क्षत्री पैहाकावीच जिसमेंधुरी नाग नाग भारीसांप हाथी शीश श्रेष्ठ डाराजानी श्रेष्टराजा तोंदी राजा नागकेशर नागपल्ली हस्तिनापुर मेघ वॉकीसभा मोथा लवंग नाभिजन्मन ब्रह्मा जोविणुकीनाभी नागकेशर नागरि सेहुये नागजिहिला मैनशिल नाभी पैहाकेवीचकाकाट- नागरला परियारीमेंट नाम प्रसिद्धता कष्टार्थमे क्रोध उत्तम नागर साठि नागरमोथा चतुरनगर वेप निदामे ज्यानामहै कावासीशहरुवा नामधये नाम नांव यथारामचन्द्रादि नामन् नागरंग नारंगी नारंग नाय नीतिधर्ममार्ग मध्यकारजनवरतनमे नागलोक पाताल सापांकालोक सेनाकोसिखानेकाला मालाकामुमेर नागवल्लो नागवलि पान नायक स्वामी मालिक नागसंभर सेदुर सिगरफ नागसुगन्ध रासनि रहसनि नारक नरक नागातक गरुड़ जोसापकोखाते हैं नारद देवपि नाम्य,नाच कलाबाजीआदिनटोंकीकला नाराच लोडेकामाण नाकिर नारियल जकरतेह नाराची काटापैग सोनारोकीनराजू नादिधम सोनार जोफुकनीसेमागिते नारायण गोमलयकालमेजलमेंसोते नाही नाडी जावैद्यदग्दरोगादिकालान शंपशायी -- .. - नार जल पानी [सावना (न) शब्दार्थप्रकाश। नारायणी शवावरि छतावरि निकर्षण सुन्दररहनेकास्थानकमराको, नारिकर. निकप कसोटीजिसमेरगरनेसेसनिकी नारिकेल नारियर गरीकागोला रंगतसपझमेमानी है। नारिकेलि. निकपा समीप नारी सी मेहरिया औरत. [ नाल. निकपात्मज राक्षस नाल कमलनालंआदि धान्यादिकी निकामम् जैसीवांडा जैसीइच्छा नाला। कमलनालइत्यादि कमलकी निकाय एकधर्मवालीकासमूह नाली। इंडी निकाय्य घरमाकान नारीकेल नारीकेली नारियल निकार निंदा बुराई धान्यादिकाय नालिकेर निकारण मारंडालना वध नाविक मनाह नावपारकरदेनेवाला | निकुंचक मूठाभर एकपोवा नाव्य नावसेपारहोनेयोग्यपानी निकुंज पलिवृक्षोसेमंधेरावन नाश मरण मौत निकुम्भ दांती नासत्य अम्धिनीकुमार निकुरव समूह झुण्ड नासा,दरवाजेके ऊपरकाकाट पटाव नाक निकृत तिरस्कारकिया दुखीकिया क. नासामल नाककामैल दिल अन्तःकरणकाकपटी नासिका नाक निकृति शटता मूढ़ता नास्तिकता मंगीदृष्टि जिसकोबुद्रिस निकृष्ट अधम पापी नीच निकेतन गृह स्थान परलोकादिपुण्यपापकर्मनहींजान निकोचक पड़ते अकोहर पिस्ता निकोटक निःशलांक एकांत जहाँकाईनहो निकण वीणाभादिकाशब्द चालाकी निःशेष सम्पूर्ण मंत्र होजाय निकाण मावाज निःशोध्य शोधा सफा जिसकामलदर निखिल सम्पूर्ण सय निःश्रेणि, निसेनी सीढ़ी निगड़ झंपला हथकड़ी नाक जंजीर निःश्रेयस मोक्ष संसारमैनन्मनहोना | निगद कहना कहा. नि:पमम् निंदा निगम बनियां नगर शहर नियों की निःसरण दरवाजा निकलनेकाहार निगाट कपन कहना निम्न दरिद्री दुखी निगार निगलनाना जमामाग्ना निकट समीप नगीच निगाल गलेकाम्यान नापशुवाकय निकर · समूह झंड गण [टी महल टायादियांधानाना म " . [गह बंद निघस । ८७ शब्दार्थप्रकाश। (न) : निग्रह विरोध वैर निदा गालीआदि कलककहना निव सतनासेवरावर जितनाचौड़ा निप कलश पड़ा उतनाहीमोटा लम्बा निपठ निपाठ पाठ पढना भोजन जैपना खाना निघास। निपातन नीचेगिराना निम्न आधीन गुणना निपान,पौसराकुवांकममीपपानीपनिका निचिकी उत्तमगौ उमदागाय निपुण प्रवीण चतुर. [पेशाववन्दहा निचुल वीणामादमदनेकावत्र पानी निबन्ध पेटफूलनकारोग जिसमेंझाडा निवन्यन वीणाकेतारवांधनेकास्थान वेन वोहार समुद्रफल बांधना निचील मुंदनेकावस वोहार गिलाफ निज अपना नित्य निवद्राभू पक्कीजमीन नितम्ब पर्वतकाप यभाग स्वीकार निवर्हण मारना वध कापिरलाअंग चूनर निभ उपमा वराबर नितम्बिनो स्त्री जिसकेऊनितवहीं निभृत नम्र सहनशील. [हार. नितांत अतिशय अत्यत्त निमय वदला परस्पर लेनदेन व्यत्र निमित्त कारण लक्षण चिह्न शगुन नित्य रातदिन निश्चय निदाघ गर्माऋतु धाम पसीना }निमेप पलकमारनकासमय निटान पहिलेकाकारण निम्न गहिरा खाली निदिग्ध सवतनासपूर्ण समृद्ध निम्नगा नदी निव नीम नीव निदिग्धिका भटकटैया নিহা প্পান্নালা জান্না निवतरु कयिना वकाइनि निद्रा नीट सोना नियति भाग्यपूर्वकार्म निद्राण मोरहा नियत् सारथी रथवान् निद्राल सोरहनकाम्वभाव नियम अगीकार व्रत नेम पट्टीजलादि सेसाध्यकर्म पवित्रता सतोप तप निदिन सोजाना मोगया निम्न मरण नाश कुल ब्रह्मा स्था वेदादिकापाठ ईश्वराराधन निधि कुरेरकीसामान्यलक्ष्मी भाडा नियानन नीचेगिराना [नेवाले नियुवन,मयुन स्त्रीपुरुपकायोग कायना नियामक नावऊपरबैठदुष्जीवकमार नि"यान देखना दर्शन नियुत एलायसन्या निनद । नियुछ वाहुयद्ध कुम्ती शब्दप्राधान निनादा नियोज्य नौकर चार - - ८८ निरीश। (न) शब्दार्थप्रकाश। निर् निश्चय निषेध . निर्धार्य संपन्न सुखी दुखमेभीद्रव्यसे निरन्तर घना सघन मनकाखुसरासै निरय नरक निर्वहण मारना यात वध निरर्गल अराधा पीडानहो निर्भर अतिशय बहुत बलवान् मुंदर निरर्थक बर्थ वेप्रयोजन क्या वितर्क अत्यत निरवग्रह स्वेच्छाचारी निफिकिर निर्मद,चिनामदकाहाथी जिसकामदनष्टही निरसन जबावदेना थूकना निर्मुक्त जिससांपनेचुलिदोंडदीहो निरस्त तुतकहा तुरंतकहना फेंकावाण त्यागी सन्यासी जवायटेना निर्मोक सांपकीखाल केंचुलि निराकरिष्णु जबावदेनेवाला निर्याय हाथी के सांखकांकिनारा निराकृत जबावदेना उत्तरदेना. [देना. मृत्युकाल निराकृति अपनावेटनजानताहो जवार निर्यातन वैरछूटनेमे लड़ाईउपरांत मि. निरामय निरोग आरोग्य लापहोना दान धरोहरकाफेरना निर्यास काढेकारस लेपयादि निर्वपण दान गोदान यादि निति निरककीशोभा। निवर्णन दर्शनकरना देखना निरोध विरोधौर निर्वहण समाशि नाश सहार निधन मारना वध निर्वाण मोक्ष संसारमेजन्मादिनहो निर्गुठी म्पौड़ी गोडी ऋपि जोपापोंसेमुक्तहो शांत अग्नि निर्गुडी म्यौड़ी गोड़ी कालीम्योड़ी हांधी टा. [धिकहो. निर्गथन वध मारना निर्वात वायुदहोना जिससेगर्मीश्र निर्घोप शब्द ग्रावाज निर्वाद निंदा मनुष्योंकीवात वताहाव निर्जर देवता जोपडेनही होते निर्वापण मारना वध घात निर्मितेंद्रियग्राम इन्द्रीजित योगी यती निर्वार्य कार्यकारी जोदुसमेभी अपने जोइंद्रियोंकोजीतत द्रव्यसेमनकोप्रसन्नकियेकामकरता निझर झरनापहाडांक निर्वासन मारडालना वध घात निरिणी नदी निवृत्त सिद्ध सबकासिशांतहोना निर्णय निश्चय ज्ञान निश्चय निर्देश मोल तनसाह समीपवाम उप निर्णित शोधना धोना साफकग्ना भोग मर्छा थकजाना निर्णेगक धोबी वरटा नियंगन बेः विल मप्तामाटिका निर्देश किमीकामकोयानादेना | निर्व्यह दरवाजा माथा काडेसारस घर निरीप.फालहलकेनीलगनाई शब्दार्थप्रकाश। (न) कीदीवारकीकीन निषद्या दुकान बाजारमैवेचनेकास्थान निहार घावमेहथियारनिकालना निषदर चहला कीच निहारिन दूरकीसुगन्ध फूलबादिकी | निपर एकपर्वतकानाम एकदेश निदि शब्द अावाज निपाद स्वरगानका जोहाथीशब्दकर निलय घर माकान तेहैं चांडाल धीमर निवह समूह झुण्ड निपादिन् महाउत हाथीहांकनेवाला निवात वमनेकास्थान घायुवन्द होना | निषूदन मारना वध निवाप पितरों केलियेदान ब्राह्मणभो निष्क एकसौपाठकका एकसौधवा जनादि लिसतोला सुवर्ण हृदयकाप्राभूष- निवीत फैनावस्त्र कपड़ा गलेमेजनेऊ ण माला जंजीरआदि टकाभर उ मालासापहिरना जिससमयमेसन त्तमव्यवहार कादिौंकोतर्पणमे जलदियाजाताहै | निष्कला। जिसस्त्रीकेअवस्थाकेकारणसे निष्कली रजस्वलावन्दहुवाहो निवृत्त शहरपनाहसेघिरा चारों ओर बखनरेटनाइत्यादि निकामित निकाला निकासना नि- निष्कासित । कारना निवेश सेनाकेरहनेकास्थान रास्तामें निष्कट घरकेसमीपत्राग फुलवगिया सेनानिवास निष्कुटि निशा रात्रि रात चदीइलाची निष्कुटी) निशाख्या हरदी हलदी निशात तेजकिया पैनाया कड़ाकिया निष्कुह वृक्षकाछेद सोंधकल निष्क्रम बुद्धिकीसामर्थ्यता निकसना निशांत घर माकान निष्ठा समाप्ति सिद्धि नाश अन्त निशापति चन्द्रमा रातकामालिक निष्ठान,दहीसेवनभोजनपदार्थकडीयादि निशारण मारण मारना निष्ठीवन कफनिकारना थूकना निशित तेज पैना कड़ा निष्ठुर कठोरवचन कड़ीवात कड़ा निशीय माधीरात अधरात नित निशीधिनी रात्रि रात निष्टयूत भेजाहुवा पठउना निश्रय सन्देहनरहना ठीक निष्ठचूति निश्रेणि }निसेनी सीडी निष्ठेव धूकना महसेकफनिकारना निश्रेणी निष्टेवन निषा तरकस भायावाणवरनेका निप्मात चतुर शिखाहुवा होजाना निषझिन् धनुपयारी तरकसवधि निष्पक पाकना चुग्जाना काढामादि [बचौला. नीलिनी } लील नील निस्तान } शब्द श्रायान (न) शब्दार्थप्रकाश। निष्पतिसुता जिसस्त्रीकेपतिपुत्रनहो नील काला कालारंग कृष्णपक्ष निष्पन्न सिद्ध परिपूर्ण. [जलसे. नीलकंट,श्रीमहादेवजी मुरइला मोरपुछार निप्पाच धान्यादिकोंकापवित्रकरना | नीलंगु चीरसहूटी छोटाकिरवा निप्पम तेजहीन प्रकाशहीन नीलझिटी कालीमिटी फूलकापेंड निष्पवाणि नयारस्त्र कोराकपड़ा नीललोहित श्रीमहादेव निसर्ग स्वभाव पाचरण नीला कालीमिटर निसूदन मारडालना वध नीलांगु बीरबहूटी लोटाकीड़ा निसृष्ट फेंकना छोड़ना नीलांवर वलदेवजी जोकालेवस्त्रपहिरते निस्तल गोल गोलाई हैं कालाकपडा. निस्तहण मारडालना | नीलांबुजन्मन् कालीकॉकालि काला निस्त्रिंश खड्ग तलवार नीलिका कालीम्यौडी निस्राव माड़भातका नीवाक धनधान्यमेंबहुतभादरकरना निहनन वधकरना लीजिये २ कहना. [तृणकाअन्न निहाका पानीकीगोह नीवार ऋषियोंकामात पसहीमादि निहिंसन वधकरना नीवि । वस्तुकाटीकरमोल जमाकीजमा निहीन नीच शुद्र खोटा नीवी करिहांवकरांधनेकाटेंट इजा निन्हव छिपीवात छिपानेयोग्यवात रवंद नारा विश्वासनमानना हल शठता नीवृत् भारीदेश नीकाश समान वरावर उपमा नीशार रजाई दुलाई लिहाफ फर्ट नीच क्षुद्र छोटा वरना नीहार पाला जाड़ा हेमंतऋतु नीचिका न प्रप्न ममझाना विकल्प नीचिकी } उत्तमगौ उमदागाय . नति स्तुति प्रणामादि, नीचैम् थोड़ा नीचप्रकार नुत्त प्रेरणा भेजना पठौना गिराना नीड पक्षियोंकायर थलकर झांझ चिड़ियोंकायसरा नूतन नवा नया नवीन नीडोर पक्षीचिडिया नून नीर घरकाबप्पर यानी नद पार्थ पिप्यलीवृक्ष तृवृक्ष नीप रदंव नीर जल पानी नपुर पापान निया नुन्न 4 नृनम् निश्यत मृत्त } नाचना नांच शब्दार्थप्रकाश। नृ मनुष्य नैस्त्रिंशिक. तलवारबांधनेवाला खाधारी नो. नहीं,निषेध नौ नाव नदीपादिउतरनेकी [बांस नृप । राजा मनुष्योंकास्वामी नौकादण्ड , नावकीवल्ली नावखेवनेका नृपलक्ष्मन् राजावोंकावत्र नौतार्य नायकेउतरनेयोग्यपानी. नृपसभ राजावोंकीसभा न्यक्ष संपूर्ण अधम- निकृष्ट परशुराम नृपासन राज्यसिंहासनराजासन न्यग्रोध · बरगद दोनोंहाथोंसेफैलाया नृशंस औरॉकायैरी पापी परद्रोही ... कुण्डल . नृसेन मनुष्यों की सेना न्यग्रोधी मुसिकन मूसाकर्णी नेत, स्वामी मालिक न्यङ् छोटा वजना नेत्र . श्राख मथानीकीरस्ती वस्त्रविशेष न्यंकु मृगा हिरनकीजाति नेत्र रोना यांसू आंखकापानी न्यस्त धरा फेंकना रक्खा नेदिष्ट बहुतसपीप श्रतिनिकट न्याद भोजन खाना जेमना • नेपथ्य वेषवनाना शंगार सिंगार न्याय. नीति धर्ममार्ग न्याय्य . जोद्रव्यन्यायसेमाप्तदो अपनी मेहनतकीद्रव्यं उचित योग्य श्रेष्ठ नेमि : पैहाके नीचेका काठ पुट्ठी कुवां मध्य सुंदर कीनेवार कठवार: न्यास धरोहर धरना नेमी पैहाकी पुट्ठी : न्युंख । सामवेदमेंनिपातकीओंकार सुं- नेकभेद वंहुतभेद बहुतप्रकार न्यूख दरता मनोदरता [ होमुहंपीठ भैगम . वनियां रोजगारी उपनिषद् न्युज कुवरामनुष्य व वृक्ष रोगसेटेदा नागर चतुर, न्यून, कम थोड़ा निंदित तिनिक नैचिकी अच्छी गौ उमदागाय नेपाली नेपालकी मनशिल पकरण भिल्लोकेगांव बनकेचांडाल नमेय पदला व्यवहार पक नाशहोनकयोग्य पंका पकजाना नैयग्रोध "परगदी वरंगदकाफल : चरजाना नैयायिक न्यायपढ़नेवाला पक्ष पंद्रहदिन पंद्रहरातकापक्ष चिड़ि. न त राक्षस दिशाकाकोण पश्चिम ोकपाल पखना वालोंकेसमूहमें दक्षिणकामध्य दिग्पाल बाणकेपंख सहाय साथी अासपास नैतिक चांदीकामालिकनिसकेयहां थोहार वल चूल्हकाछेद घोडा रुपयापहतहों हाथीकीपशरी नमा } तिनिशवृत्त तिवस , (प) शब्दार्थप्रकाश। पक्षक,यासपासकेदार बगलके दरवाजा | पंचास्य सिंह श्रीदुर्गाजीकापादन पतति प्रथमतिथि परेवा पक्षियोंके पंजिका संपूर्णपदकाव्याख्या पंखकीजद पक्षसंज्ञा[रेकादरवाजा | पर चिरौंजी सुंदरयत्र पत्तद्वार वगलकेद्वार पायकेद्वार किना- पश्चर पुरानाकपड़ा चोर पक्षभाग हाथीकीपशुरी पटल छानि छप्पर छपरा पिटारा पनमूल चिड़ियापखकीजड़ पटलमांत घरफेवाहिरी दीवारकीपर- पक्षांत श्रमावस पूर्णमासी पतिन् चिडिया चिरैया पटवासक सुगन्धितचूर्ण घरीला पतिणी रात्रि रातल्कुि डोरादि थोड़ा थषीरादि पक्ष्मन् सकीपलक कमलकाफिज- परइ पाना संग्रामशब्द मारुश्यादि पंक चहला कीच पाप [हुतहो | पट परवर चतुर न्यायशासपदनेवाला पंकिल कीच सहिनदेश जहाँ चहलाय परीण शीमनासकामकरनेवाला पंकेरुद्द पापल चारोग्य बती वलदुवा (4) पतनिन-- 4 1 शब्दार्थप्रकाश। पएयबीथिका बाजार दूकान विक्रीघर पत्रिन् शिकरा बाज पत्ती वाण पण्या मालकागुनी | पत्रोर्ण शोनापादा टू धोयाऊनकावर पतग पक्षोचिड़िया पथिक राही राहचलनेवाला पतंग पक्षी सूर्य पतिंगा: मम पयिन् : मार्ग रास्ता राह ?.... पतंगिका ममाखीजातिः . पथ्या रै' पन पक्षी चिड़िया पद्' । पैर पांव स्थान विभक्त्यंतशब्द पतत्र पसीकेपंख : एकवात रक्षा पैरकाचिन्हें बहाना पत्रिका पक्षी चिड़िया[पिंदादी / पदग पैदल पियादा पल्टन पदवि मार्ग रास्ता पतद्ग्रह पीकदानी बुराग्रह सेनाका पदवी famirira पतयालु गिरनेवाला गिर परे । पदाजि पताका बना झंडी निशान पदाता - पताकिनझंडीवाला निशानवाला" पदाति पदांती, पैदलसेना पियादा- पत्तिः भतार खसम मालिका[पतिकर पदिक पर्तिवरा अपनीराजीसस्वयंवरमेंजोखी पद्ग पतिवत्री स्वहागिलासौभाग्यवती: पद्धति ? पतिव्रता पतिकीसेवामलगीर पद्धतीन मांगे रास्ता चाल पत्तनाशहर नगर : पद्म निधि कमल संख्या पतिः पैदल सेना सेनाकीसंख्या में पद्मक देहविंदुबहुतसेहोना बहुधा जिसमेंस्य हाथी घोर पियादा हाथोकीदेहमेलालरविंदुहोते ! "हाँ बीरभेद पद्मचारिणी स्थलकमलिनी.लिहुवा. पत्तिसंहति पैदल सेना पन्टनं पद्मनाभ भगवान जिनकीनाभिमे कम- पनी स्त्री जिसकावेदविधिसबिवाहों पद्मपत्र पुष्करमूल पत्र पत्ता पंख सवारीबाण पत्तीचिही पद्मराग मणिलालरंगकी पत्रपरशु वमुला छैनी विदाआदि पद्मवर्ण पुष्करमूल पत्रपारया, मायकामहना टीका नापमा लक्ष्मी जिनकेहांथमेकमल है पत्ररथ पक्षी जिनलहीरधई भारंगी स्पलकमलिनी पत्ररेखा ? कस्तुरी केसरिभादिसेकपो. पद्माकर' नालाब जिसमेकमलडाँ पत्रांगुलि लादि अंगमेशोभाकरना.: पद्मान सूर्य कमलसनेव पांग लालचंदन . पद्माट चौड़ी पाप . - । (प) शब्दार्थप्रकाश। ६४ पद्मालया लक्ष्मी जिनकाकमलस्थानहै | परश्वस् दूसरेदिन भोरभे पमिन् हायी परस्वध कुल्हारा । पद्मिनी कमलिनी तलैया। पराक्रम वल बूत जोर ऐश्वर्य उपाय पद्य श्लोक शुद्र कविनकीवाक्य : पराग फूलकीधूरि कुसुमकीमिलीधुरि पद्या मार्ग रास्ता पराड्मुख पीछेकामुख हारजाना पनस कटहर, | पराचित जिसकोदूसरापालनकरै पनायित स्तुतिकरना नमस्कारादि पराचीन विमुख हारना पनित । पराजय लड़ाईकीहार पन्न गिरना गलना पराजित. हारगया दुसरेकापालाहुवा पनग सांप सर्प के पराधीन दूसरेकेबश परवश पन्नगाशन गरुड़ जोसांपखाते हैं परान्न औरकाअन्नखानेवाला पयस् पानी दूध पराभूत हारगये हारजाना पयस्य दही घी नेनू मक्खन महासादि पयोघर,खजांची नारियल स्त्रीकीछाती परायण मिलीहुईवात मिलनामनसे मेघ कशेरू. [उत्तर. परार पीतेवर्पसेबीनावपतेउरुससाल परार्घ्य श्रेष्ठ उत्तम बहुतमोल पर तीरनदीपादिका शत्रु श्रेष्ठ दूर परासन 'मारंना दूसरेकास्थान परःशत सीसेअधिक इत्यादि परजात जिसकोस्वामी केबिनाऔरपा- | परासु मरगयां मरजाना लनकर लड़कावृतादि परास्कंदिन चोर चोहा उठाईगीर परतंन परवंश औरकेाधीन परिकर शय्या गोद कुटुंब देहकीसि- मिटन, विचार आरंभ परपिंडाद दूसरेकापन्नखानेवालेपुरो- परिकर्मन् देहमेचंदनरंगमादिलगाना परिक्रम पैरकी चाल अप्सरोंकीपृथ्वी परभृत- कोकिला कोडली परिक्रिया कुटुंबीभाईयादिकाएकहातांना ‘परमम् अंगीकार श्रेष्ट परिक्षिप्त माइलयादिचारोंयोरहोना परमान्न धसेवनायन खीरादि परिखा पखाँवाँ खॉर्ड परमेष्ठिन ब्रा परिग्रह सेनाकीपिकाही स्त्री यज्ञपशुकावध परिय लोहसंबंधाडांशभरकादंडा परवत् पराधीन सरंकेश । परियातिन् । परशु परिचय पहिचान वृद्धि [ सेनारक्षक फिगर कुल्हार परश्वध परिचर,मनापनिरंमासपामचलनवाना . 1 {, हितनादि . परभृत् कौवा परम्पराक ६५ शब्दार्थप्रकाश। (.प) परिचर्याः । सेवागुरुमादिकी: परिवर्जन मारंडालना परिचाय्य अनिके योग... परिवर्तन व्यवहार लेनदेन बंदला परिचारको दास सेवक टहलवा. परिवाद निंदा गाली दुष्टति .. परिणत पकजाना-माप्त होना परिवादिनी . बीणा जिसमें तारही, परिणय विवाह ब्याह [घड़ाआदि. परिवापिता मुंडन किया शिरघोटाया परिणाम विकार जैसेमाटीकार्विकार परिवित्ति ज़िसस्त्रीयापुरुषकेछोटेवहि- परिणायः काठसेरचायत्रजुवाखेलनेका निभाईकाव्याहप्रथमहो तो :: इधरउधरलेजाना : परिबृढ स्वामी मालिका[ पहिलेहो. परिणाई चौडाई चकलाई । परिवेत जिसपुरुषकाव्याहवरेभाईसे। परितस सवतरफ सवते.. परिवेश सूर्यकेआसपासकभीजामंडल परित्राण मारनेवालेसेबचालेना परिवेपन हो : परिदान बदला व्यवहार परिव्याध पानीकवेत कठचंपा परिदेवन ... शोच शोक :: परिवाज सन्यासी भिखारी : परिधान,नोकावल.लहंगा धोती शारी परिषद् सभा समान चाइते परिधि सूर्य केचारोंमोरकभीधरासाहो परिष्कंद जिसकोसरापालनकर, ल होयबबूक्ष छयूलादिकांडार परिष्कन्न डिकावृतादिः परिधिस्थ सेनारजाकरनेवाला परिपकार आभूषण गहेना- परिपण मूलधन जमा विननफा , परिष्कृत गहनधारणकिया :' परिपंथिन- शत्रु-बैरी? .. :: परिप्वंग लिपटाना लिपटना :: परिपाटि सीधाक्रम परंपराकीचाल परिसर निदीपर्वत केसपीपकीधरती परिपाटी परिसर्प कुटुंबीआदिकाएकवाहोना। 7 परिपूर्णता सवसुखकीवस्तु संपूर्णता प्ररिसर्या चारों ओरफिरनासेनाआदिके परिपेलच.- केवटियागोथा परिसार परिप्लव चंचल जोचलाकरें परिस्कंद। परिवहन राजावाकयोग्यसपैदछत्रादि परिकन दूसरेकाणना जैसेकर्ण परिभव अनादर अपमान, परिस्कार आभूपण गहेना परिभाषण : सहितनिंदाकेवातकहना परिस्कृत गहेनापहिना आभूपधारी परिभूत : अपमानकियां [जानेकीसुगंध परिस्तोम हांधीकीझल गहा परिमल मैथुनादिमेमालाप्रादिमिस परिस्पद रचना शोभाकरना -परिरंभ लपटाना लिपटना परिस्यंद । । । " 1 T (प) शब्दार्थप्रकाश। परिसुत । मदिरा दारू - ~r | मर्यक पलग खटोली परिवार शग्या पर्यटन घूमना फिरना परिहास 'हसी खेल केलि , . पर्यत । नदीपर्ववादिकेचारों ओर परीक्षक परीक्षाकरनेगला निश्चयकारी पर्यय अतिक्रस उलटना लोपना परीभाव अनादर अपमान पर्यवस्था विरोध पैरा परीरम लपटना लिपटाना पर्याप्त जैसीवाचा मनोरय परीवर्त व्यवहार लेनदेन बदला पर्याशि ,मारनेवालेसेवचालेना परीवाद' 'निदा दुष्टत्ति पर्याय सीधाक्रम परिपाटी परंपरा ना परीवाप तयूइत्यादि जलकास्थान | पर्यायशयन पहरेवालोंकोपहरादेसोरह परीवार पचलनेवाले जंगम । पर्युदचन मणाकर्ज उधार परीवाह, जलकाबहना नारानारीमादि पर्येपण श्राद्ध मेंगाह्मणकीसेवा परीष्टिा श्राद्धयवाह्मणकीभक्तिसेवा पर्वत पहाड़ हिमालयादि परीसार , चारौश्रोरफिरना पर्वन वॉसनादिकीगॉठि कृष्णपक्षकी परीहास हँसी खेल केलि 11 १४र३० पूर्णिमा परत चीतासाल परसाल IT सक्राति इत्यादि परप कठोरवचन कड़ीयात पूर्वसधि,पाकीसधिप रेगापूर्णिमादिकी परूस पासआदिकीगांठि पशुमा । पशुरी हड्डी परेत मराहुया मरा पल टिकाभर मांस पल परेतराज यमराजा मरोंकामालिक पलगड लीपनेवालामजदूर वारी आदि परेयपि, दुसरंदिन औरदिन पलकपा, गुरखुर परेप्टका “बहुतवारकीव्याईगौग्राटि पलल मास मास परेधित दूसरेकापालाहुआ पलांद पियाज प्याज परापणी तेलडं पाखी पलाल पयार नई विनाफलपीटी पर्कटि पकरियायत पर्क पलाश पत्ता हाख टूल आपाहरटी हरारग शिरसामादिपनाकारग पर्जनी दामहरदी पलाशिन् वृत्त पेंट पर्जन्य गर्जतेमेघ इद्र पलिनी बूढीवी जिमवालमपेठहों पर्ण पत्ता छल दाख पलित पुढापासे सपेढयालरोया पर्यशाला ऋपियोरेयर की पल्यक पलग बटोली पणांस वालवरी बावरी पल्लव - -- । - - । पर.... . P HTF पाठिन् ६७ "शब्दार्थप्रकाश। पल्चल छोटातालावतालका 7- पाट संबोधन पवित्रकरनाधान्यका धोना पटचर चोर ठग उठाईगीर : पवन वायु हवा शुद्धकरना धोना पाटल, लालसपेदमिलारंग गुलावी धान पर्वनाशन "सर्प जोवायुभोजन करते हैं पाटला पहिरि पहिरिकाफूल परमान वायु हवा" - TET पाटलिपारि मोखबृक्षधान पढ़ना' पबि बज इंद्रकाआयुध Fir| पाठापुराणं वेदादिकोंकीपाठ महाय पवित्र कुश पवित्रहुआ शुद्ध पाग पाड़ाऔषधि पवित्रक सनकसूतकाजाल .चीत सपेदपर्णास पगुपति महादेव पशुओकामालिक पाठीत नाबहुतदानबालीमदरी' पशुप्रेरणों गौमादिकाईकिना चरावना पाणि 'हाथ पशुरज्जु' हरहाबांधनेकी रस्सी गेराव पाणिगृहीती. विवाहकीस्त्री. [आदि, पश्चात् पश्चिमदिशा-अंत पीछे पाणिघ हाथकावाजा करतालझांझ पश्चात्ताप पछिताना पाणिपीडनविवाह व्याह । [ होताहै पाणिवाद हांध केबाजाम परिश्रमा दिशा. पछांह "जहांसूर्य अस्त पांडरनासपेदनriri.' पष्टवाद. गाडीमादिकेजुवाकपास पांडता कुछपीलारंगपिंडोरसा। जोतनेकावल पांडकंवलिन पीलेकवलसेमदारथः पष्ठीही. वासरगोभिनिगी पांडर पिंडोरकासारंग कुंछपीला पातकाविह्महत्यामादिकुकर्म पांशु धूलि गर्दा खाक पाताल नीचेकालोक बलिकायर, पांशुला . खरावती छिनार पातुकागिर२पड़नां गिरजाना बच्चा बालक पाकनामदैत्य रसोई पात्र नदीकामध्य पत्ता रानाकामंत्री पाकल कुट हमारा योग्य लोटाआदि यसपात्र मुवा पाकशासन इंद्र जिन्होंनेपाकंदैत्यको श्रादि नाचकोनकल पाकशासनि इंद्रकापुत्र जयंत. पात्री लोटावदुईभादि स्त्रीलिंगकेशब्द पाकस्थान पकानेकास्थान रसोई पात्रीप - यनकापात पाक्य विडलोन जवाखार [ ठगहाई पायस् पानी पाखंड,सत्रतरहकरुपधारणकरना पूर्तता पाद पर्वतोंकेसमीपरछोटेपर्वत पांव पांचजन्य श्रीभगवानकाशंख या द्रौपदी चौथाभाग किरण पांचालिका कपड़ायादिकी पुतरी गाड़पादकटक विछिया नूपुर नेर पश्चिम "अत्य दिशा घर मकान पाक (1) शब्दार्थप्रकाश। पादग्रहण पैरछूनागुरूआदिके पार नदीमादिकापाराडूसरातीर पादप वृक्ष पेंड T-53| पारत-पारा[सिखाना पादवल्मीका हाथीपांयरोग पीलपांव: पारद: TIRST.. पादबंधन - पशुवोंकेपैरवांधनेकीरस्सी,- पारंपर्योपदेशः पुरोनीलोकपरंपराका पादस्फोटा बवाई जिसमें पैरफटज़ाते हैं। पारशव शूद्राणी ब्राह्मणसेपुत्रहो पादान- पैरकाअगाड़ी पत्रिकामागू| पारश्वधिक कुल्हारावांधनेवाला पादांगुद नूपुर पैजनिया झांझ TTE | पारसीक : फारसकायोड़ा. पादात POEM | पारणेय पराई स्त्रीकालड़का पादाति पैदल पियादा पल्टन र पाराप्तःककृतर: TE प्रादातिक Trjपारायण संपूर्णवात, मिलीबोत... पादातिग पादुको imijirl पारावत कबूतर पादू..., FIR पारावतानि मालकांनि [ पानी पारावतांधी। पाद्कृत चमार जूनाचनानेवाला काल: पाथ पांवधोनेकोजल.i: [ जातिकी पारावार, नदीकाइसपारउस पार बहुत पानगोष्ठिका मदिरापीनेकीसभानीच" पाराशर्य, व्यास पानपात्र मदिरांपीनेकांपियाला गिलास पाराशारिन् संन्यासी पारिकोतिन् ,तपस्वी तपस्याकरनेवाला पानभाजन दूधनांदिपीनेकाकटोरा पानीयर पानी जलगिरिजातक कल्पवृक्ष बकाइनि पकन पानीयशालिका पसरा पानीपीनेकाप पारितथ्या,बालोंकागहेना. वेदी पंद्रिया पांच गराही मार्गचलनेवाली कटिया इत्यादि. पारिपार्श्वक चारों तरफके पाप दृष्टकर्म दूसरे कारीवुरेमार्ग aur पापचेली पाहाऔधिका- पारिप्लव चंचल जोस्थिरनही पारिभद्र बकाइनिकाह पाप्मना पाप गुराकर्मी पामत् खाजुरोग खजुरी... परिभद्रक देवदार परिभाव्य': कूट पामन : जिसकेसाजुरोगहों - पारियात्रक पामर नीच अंधम पापी पर्वतकानाम पारियात्रिक पामा खाज खजुरी [अन्नखीरादि परिपद महादेवकाममयसंगक पायस .एकवृत्तकागाद धूप दूधसेपका परिपद्य मागण. पायु गुदा गांड, पारिहार्य . हायपहुंचाकागइना पहुंनी पाट्य प्रमाण ताल पारी हाथीपांवकारस्सीवनी: . 150 . -- पादि.
m ३ पालाश : ६९ 1 शब्दार्थप्रकाश। (प) पारुष्य, बहुतबतकहाबादलाकड़ीवाते पिंगल पीलारंग सूर्यकेवार्डतरफ पार्थिवाराजा,मनुष्योंकास्वामी पिगला दिग्गजकीपनी हिथिनी पार्वती हिमालयकीपुत्रीश्रीमहादेवकी। पिचढ) पेटें पशुकाअंगमा " • प्राणप्यारी- पिडिला Triap पार्वतीनंदन स्वामिकार्तिक पिचिंडला तांदारा बटा. पार्थ पशुरी पांजर, [ कावगलपर पिचिका पेटामा पार्श्वभाग पगुरीकाभाग हाथीपादिः पिचु कपास रुई FIREE , पार्थास्थि पशुरीकीहड्डी मी पिचुमंदानीव ST Tim पाणि येंडी पैरकापिहाड़ी छोटा पिचुमर्द । पाणिग्राह पीछेचलनेवाला पिचुला झिाऊ एकवृत्तकानाम् ' पालघ्न - तृण धोधवाअकरामादि पिचट वंग नेपालीरांगामा पालंकी • पालक पलांकी कुदुरू- पिच्छ मोरपंख पुछारिकेपखने . .-पत्ताकारंगहरा पिच्छा शिल्मिली औषध भातकामार' पालि : खड्गादिकाकब्जातलवारकी पिच्छिल, साडीसहितदहीपटा चिकना। धार कोन गोद पांति चीन्हा गांव पिच्छिलारियापरकान सेरसई- 'पिंज बघ मारडालना-नाजकीराशि पालिंधी पिंजर हरतार पतीकापिंजरा 11. पाली खगादिकाअंतभाग, पिंजल: बहुतळ्याकुलसेनामादि...। पाल्ला ..मारकाखेलपटामआदि पिंजूष कानकामैल- - पावक आगि भातशे....पांशा पिट पेटारावांशमादिका पाश वालोंकासमूह 'फसरी .जुबांके पिटक फोड़ा फुरिया टरिया पेटार पाशक जुबांकपाशे पिठरं थाली स्थाली मोथामथानी. पाशिन बरुण जोफसरीआयुधरखते हैं पिंड,हायीकाकुंभ गंधरस मिमियाई लोई पाशुपत गमा माटीआदिका बांसआदिकापेटारा पाशुपाल्य ' खेती पशुनाकापालना पिडक लोगन धूप पाश्चात्य अंत प्राबिर" पाग्या बहुतसेपोश पिंडी पापाण पत्थर पिडीतक मैनफलकात गोला पापाणादारण टांकी देनी पिएयाक निलकापीना पिक कोकिला पितरी,मातापिता महतारीवाप.[पिना. पिंग पीतरंग पिनामह,प्रझा वाचावापकायाप पिनाका पालिटी } कालातंदू । -- पिडिका यहाकवीचकोलकती नाह (प): r P शब्दार्थप्रकाशः। १०० पित पिता, वापपिएक पुवा चरा चावलादिकेपिसा- पितदान पितरोंकेलियेदान | पिष्टप पृथ्वीतल भूलोक [नकीवस्तु: : पितृपति यमराज दक्षिणकेस्वामी ना पिष्टपचनः तवा कराही । पितृपित पिताकापिता बाबा- [माता पिष्टात ' चूरणसुगंधित TI पितमसू · समि दिनकाअंत पितरोंकी पीठ. आसन बिछौनाः [आनेसेपीडा पिठ्यक्ष तर्पण पितरोंकाजलदेना पीन पीड़ा दूसरेराजाकोचढ़कर। पितृवन श्मसान मरघटा: vil पीडा दुःख: 1 पितृव्य पिताकाभाई चाचा काका-पीत पीलारंग ' . - Initia पितृसभि पिताकतुल्य 'पीतदारु देवदार पित्त पित्त [अंगुरीकामध्यः पीतदु सरला देवदार पिज्य पितरोंकेलिये पिततीर्थ अंगूठा पीतन याहा कुंकुम केशर हरिताल पित्सत् पतीचिरिया या पीतसारक असना पीतशाल पिधान छिपाना मुंदना Tv पीता हरदी. पीलाकपडा. पिनद्रः कवचादिकात्यांगकरना पीतांवर विपण जोपीतवस्त्रपहिरे है" पिनाक,शिवको धनुप धूलिंकीवत्रिशूल पीति पाड़ा पीनाकिसीवस्तुका पिनाकिन् ' महादेव पीन मोटा पिपासा पियोस तपा पीनस रोग पिपीलिको 'किरवा चाटीयादि पीनोघ्नी जिसंगीआदिकमोटेथनहीं पिप्पल पीपरकावृत्त गान पीयूष अमृत नईवियाईगाकाद्ध पिपलि पीलु. पिनुवाकावृत फूलभेद साधी पिप्पली हड्डीकाटुकड़ा वाणं पिप्पलीमल पिपरामद पीलुएर्ण मुरहरी पोररेण इंदुर । पिप्ल. देहमेलहसुनकाचिन्ह पीवन् मोटा पिपाल चार चिरौंजी पीचर... मोटा प्रकप अधिकता पिल्ल · चिपरा जिसकीखिचहाकर पीवरस्तनी मोटेधनवालीगांयादि पिशंग पीतरंग पुंश्चली दूसरपुम्पोंसे रमणकरनेवाली पिशाच देवनाति छिनार पिशित मांस पुंस् पुरुष मई मनुष्य पिशुन चुगुल लालचंदन दुष्ट पुकस चांडाल महानीच . पिशुना-शागभेद सस्परक. पुंग्य वाणकीफोंक T" .11 पीपरि TE: ST .
NA . ছাত্বাবসায়। पुंगव श्रेष्ठ उत्तम पुर 'गगुरकावृक्ष मकान नगर दुम पूंछ - ... F'पुरःसर · आगेचलनेवाला। पुन नानकी राशि समूह ढेर चेजाताहै पुरतस आगे अगाडू पुटभेद नोनदीआदिमभंवरकापानीनी-पुरद्वार नगरकाद्वारे फाटकशहरका. पुटभेदन नगर शहर पुरंदर इंद्र 'पुटी पत्ताकीदोनई पुटइत्यादि [अग्नि पुरधि । पतिव्रतास्त्री जापतिकीसवा पुएडरीक दिशागज कमल बाप सिंह पुरंधी । रहै . .. पुंडरीकाक्ष विष्णु जिसकेकमलसेनेत्रहों पुरस आगे अधिक ऊपर पुण्डर्य पुण्डरीय स्थलकमल पुरस्कृत . पूजित आगेकिया पुण्ड ऊंखभेद पौंडा गन्नाआदि पुरस्तात पूर्वदिशा प्रथम व्यतीतमें पुण्य शुभकर्म धर्म सुंदर स्नानादिक्रिया ।। बीतेकालमें आगेसे आगे पुण्यक व्रतचांद्रायणादि नियम । परह बहुत अधिकं : ' . [ होनेवाला पुण्यजन राक्षस किनर पुरा वहुतदिनकीबात निकट प्रारंभ पुण्यजनेश्वर कुरेर .चलकामध्य पुराण जिसमें सर्गप्रतिसर्गवंशमन्वंतर पुष्पभूमि आर्यावर्तहिमालयविध्या वंशकाचरित्रवर्णनहो प्राचीन पुराना पुण्यबद् भाग्यवान्जापुण्यकरता है। पुराणपुरुष विष्णु जोपुरानेपुरुषहैं. पुत्तिका ममावीमच्छीकाभेद पुरातन पुरानीवात पुराना भारतादि परावृत्त 'पुर्वकावृत्तांत इतिहास महा- पुत्रःलड़का बेटा पुरी नगर शहर पुत्रिका - गुड़िया लड़की बेटी. परीतत पुत्री लरकालहकी प्रांत देहमंसवनीवॉकहोतीहै परीष विष्टा गू पुद्गल मात्मा सुंदरमूर्ति, पुरु बहुत अधिक [ मनुष्य मर्द पुंजन मूस चूहा पुरुष आत्मा देहकामध्यन पुत्रागवृक्ष पुनः पुनः - बार बार फिर-फिर पुनर पहिलेकउपरांत भेद अलगकरने में पुरुषोत्तम विष्णु जोपुरुषों मेंउत्तमहै. अधिक पुरुद्द - पुनर्नव नावन नह जोवारश्नहोतेहैं [जातेहैं - पुनर्नवा गदापुरनिया दुली पुरुहूत इंद्र जो यज्ञादिमेंप्रथमवलाये पुरोग पुनर्भव , नाखून नह - . [ राज्याहही पुरोगम आगेचले भागेचलने पुन जिसीकाएकन्याहहोकरदूस- पुरोगामिन् वाला पुनाग वृत्तभेद फूलवत. | युरोडाश यकीखीर चंमसीपिसानकी पुमस - पुरुष मर्द मनुप्य पुरोषस पुरोहित उपरहित कुलगुरू . .
विचार . (प) शब्दार्थप्रकाश। १०२ पुरोभागिन् । किसीकामजीदोपही प्रग सुपारीकावृक्ष समूह पूजन पूजाकरना पुरोहित उपरहित-- पूजा : पूजा देवताआदिकोस्नानादि पुलाक -भूसी कनकी इत्यादि पृजित । पूजाकोमाप्तहुवा पुलिन नदीकाकिनारा पूज्य पूजाकरनेकेयोग्याससुर पुलिंद -म्लेक्षजाति-- पूतः पवित्र शुद्ध-घसाईपछोरीधान्या पुलोमजा इंद्राणी इद्रकीपनी 11 साफकरना धोना पुपित पुष्ठ पालामा ।" पूतना हर्र जोराक्षसीपननेमारी पुष्कर प्रकाश जल कमल पुष्करमूल पूतिक काटेवालाकवृक्ष वाजाकामुख खड्गकामध्य पुष्कर- पूतिकरज तीर्थ फूट द्वीप सर्प गरुड हाथीकी पूतिकाष्ठ, देवदारु देवदार, सरला, शंडकायागेकाभाग पूतिगंधि, दुर्गध बोह.वसाना हा पुष्कराह सारसपती पूतिफली बचुकी बकुची, Fr:- पुष्करिणी छोटीतलैया जिनमेंकमलहों, पूतीक .) पुष्कल अतिसुंदर बहुतउत्तम पूतीकरज कांटेवालाकंजावृत्त पुष्ट पोदा, पाला, पूतीकरंज पुष्प फूल स्त्रीकामासिकधर्म [कोशीस ||पूप पूवा बड़ाआदि चाउरकेपिसानकी पुष्पक कुवेरकाविमान जस्ता फूलधातु पुष्पकतु फलधातु जस्ता पूर नगर शहर. [ पूरहोना पुष्पदत दिशागज दिग्गन [धनुपहै| पूर पानीकामराह पानीवड़ना याव युप्पधन्वन् कामदेव जिसकाफूलोंका | पूरणी ग्यामरकावृत्त । पुष्पफल कैथाकावृत्त [गादीमादि.|परित पूर्ण संपूर्ण पुण्यरथ राजादिकोंकाशोभार्थरथ सेज | पृरुप पुरुप मर्द पुष्परस - फूलकारस फलकीमिठाई -- पूर्ण संपूर्ण संव नोभीकमनहीं। पुप्पाला भेवरा जोफूलकास्वादलेताहै | पूर्ण भरॉयडापानीसे पूर्णवटा पुष्पावती रजस्वलास्त्री पूर्णिमा पूर्णमासी पप्पपती एकमेसूर्यचंद्रमाकाउच्चारण : पूर्त बावलीकुवांदेवालयादि। पुप्पसमय बसत'फूल होनेकासमय पूर्वप्रथम आदि पहिले दिशा पूर्ण ब्रह्मा पुष्य नक्षत्र पूरीन पदाभाई पुरिया पहिलङमा पप्परथ राजावोंकेशोभाकेरथ [बनाना पूर्वदेव दैत्य पहिलेठेवता पुस्न माटीकाटनादिकापुतलीआदि पूर्वपर्वन,उदयपर्वत जहांसूर्य उदयहोता वस्नु फैनापानीका । - TA .
पृषदाज्य दहीममिलाघी . ar वर्जना अलग T Th पडा घिरनेका 4 शब्दार्थप्रकाश (प) पूर्वा - दिशा पूर्वेद्यस् । पहिलेदिन मृपातक पूषन् सूर्यदेवताभेद - पृष्ठ, पीटि, पीछे पृका शागभेद - 1-पृष्ठवंशाधर- पीठिकेतीनिहाड- पृक्ति- छूना स्पर्शकरना पृष्ठास्थि पीठकीहड्डी सैर- कासमूह पृच्छा पूंछना प्रन पृष्टय जिसघोडेकीसुंदरपीठहो पीछे पृतना सेना सेनाकासंग्ख्याभेद पृष्णि छोटीदेहकामनुष्य. [ढिप्रत. पृथक पेचक उल्लू घुपवा हाथीकेबकाया पृथपणी पिठवनिप्रोपनि पेटक पेटा झुंड समूह पेटारा कपड़ाआदि पृथगात्मता अलग होनी भिन्न चार प्रात्माईश्वरसेपृथईत्यादि पटी पेटरिया ") : पृधग्जन 'नीच अपम मूर्ख पेयूस अमृत पृथग्विध बहुतरूप बहुतमकार पेलव, वीरर विरला बीडर' प्रथिवी जमीन धरती पेशल 'चतुर बिरला वीर पृथु कालाजीरा हींगकीवृत्त चाहा प्रपशी कर्ष बड़ाई एकराजाकॉनाम।। पैठर बर्डकापकामांसअन्नादि पृथुक बॉलक बच्चों वौधानभृजेचा- पैतृप्वज्ञेय । फूफूकालड़का अपनेवाप' 'बल अँनियाचार पैदवसीय कीबहिनिकोबेटा थरोमन् गहरी पत्र महीनाकापितरोंकादिन अंगुठा पृयुल चौडां फैला Tr पैव्य अगुरीकेमध्यपितृतीर्थ पृथ्वी परनी कालाजी होगीक पोटगल,काश नरकुल किमानचिन्हहाँ पृथ्वीका इलाचीन पोटा जिसस्त्रीकेदाहीमच्छादि पुरुप पोत बच्चा,बालक स्थान वमनेका पृश्नि सूर्यको किरण छोटीदेहका बना पारी. पृश्निरी पिठवनि- पांतरािज् जहाजीरोनिगारी नारका पृषत् पानीकेट बूदी पोतबाह नाबमें बैठदुष्टजीवोंकोजानकर पृषत पानीकेट डिरनकीनाति मारनेवाला पानीकाशिकारी पृपल्क वाण तीर पोताधान छोटे मगअडोकाडेर पृषदश्व बायु हवा पोत्रिन् सुपरवनंग. [काअगाडी पेशिअंडा मामकीवोटी सुंदर 1 1"TI । पृटाकु. सांप स्थान नाव J -- - १० तक मकाण वीणाकाशब्द T शब्दार्थप्रकाश । पोन पत्र सुअरके मुंहकाअगाड़ी हल २ नगर ३ किला ४ खजाना ५ पोष्ट स्वामी पति भतार सेना ६ परस्परउपकारी मित्र ७ पौगंड जिसकाकुअंगकमहो लंगड़ा योनि लिग कानाआदि अवस्था पाँचतेऊपर | मकोष्ट दिडुनीकेनीचैहाय : प्रक्रम प्रथमकायारभ पहिलेपहिल।। पौंडय स्थल कमल पाडर्य प्रक्रिया अधिकार बदोबस्तकरना पौत्री पोती लड़केकीलड़की कायदा पौर तृणभेद रोहिसतृण प्रकण पौरस्त्य पहिलेकाहुवा आगेहुवा पौरुप,मनुष्योंकाममाण पुरुपकाकर्मतेज | मोदन लोहकावाण- पौरोगव रोसईकामालिक रोसईदार गंड टिहुनीके ऊपरहाथ पौर्णमास पूर्णमासीकायज्ञ प्रगतजानुक वातादिरोगसेजिसके पैर पौर्णमासी पूर्णमासी कीगांठीफैलीहों पौलस्त्य,कुबेर विश्वश्रवामुनि रावणादि मगल्भ दीठ उत्तरदेनेशीघबुद्धिही पोलि पकान भूजेनयादि प्रगाह बहुतकरग्रहणकरना पोदा मजवून पौप पूसमहीना मगुण सूधा जोटेदानहो पोपी पुष्यनक्षत्रकीपूर्णिमासी मगे मात:काल सवेरा भोर पौप्यक ...जस्ता फूलधातु मग्रह तराजूकीडांडीकेवीचकीरस्सी प्याट संबोधनार्थ निसेपकड़तौलतई घोडाचलका प्रकंपन बड़ीवायु अांधी वैहरि गिरांव किरण वांह कैद.[झंझरी भकटोदित प्रकटवात प्रग्रीव वृत्तकाशिर ठूनुग झरोखा प्रकर्ष अधिकता अतिशय मयण । दरवाजेकेवाहिरकेश्रोटा प्रकांड शुभ मशंसा पैड़कीजड़सेजोम- | मघाण यममोटीडर प्रचक्र सेनाकाचलना. [आघाना मकामम् जैसीइन्छ यथारचि | पचलायिन जिसकोरहुतनींदलगीही प्रकार भेट वरावरी पर बहुत प्रकारा,उजेरा घाम यहुतमसिद्ध पहुनहंसी | प्रचेतस् वरण जलकंगना प्रकीर्णक चामर चंवरी मचोदनी भटरटया प्रकीर्य वाटचालाकंजकापड़ प्रन्टदपट निसयसरीणापादियां प्रकृति सत्वादिगुणांची तुल्ययस्था धाजाय गांधार चापार स्वभाव गन्य कयंग राजा मंत्री मन्चन दिपादरसामा पिरकी .
शब्दार्थप्रकाश। (प) प्रच्छदिका,बांतकारोग वोकना कैहोना प्रताप,खजानादंडसेनासेहुवातेज प्रभाव प्रजन गर्भधारणहोनास्त्रीआदिके मतापस सपेदमदार मजविन् तु शीघ्रता प्रति मुख्यकामदार नायव व्याप्तिमे : मना संतति पुत्रपौत्रादि रैयत जैमेतीर्थ २ प्रतिजाताहै लसणा मजाता जिसस्त्रीके पुत्रादिपैदाहुआहो जैसेवृक्षकीहारमतिविजुलीप्रकाश प्रजापति ब्रमा जिन्होंनेसंवमजावनाई | प्रतिकर्मन् शोभाकरना गहना आदि प्रजावती भाईकीत्री जिसस्त्रीके पुत्र पहिराना केशरियादिसेलेषकरना पीवादिहों [चुद्धिमान प्रतिकूल उलटा विपरीत प्रज्ञ जिसकीगांठोरैरकोफैलीहाँ पंडित प्रतिकृति ..प्रतिमा मूर्ति प्रज्ञा बुद्धि अकिल बुद्धिमानवी प्रतिकृष्ट प्रथम नीच मज्ञान बुद्धि चिन्ह प्रतिक्षित . किसीकेऐश्वर्यपादिकीविरु- प्रज्जु जिसकीजांफैलीदों द्धतामानना सीकरना पिलाड़ी प्रडीन पक्षियोंकातिरछाउड़ना पतिरुयाति बहुतमसिद्धः [निंदा.] प्रणय प्रेम वेग एकहाहोना स्थान प्रतिग्रह सेनाका पिछाड़ी दानलना [रूपहै। मतिग्राह ग्रहण करना सेनाकापिदादी प्रणव ओंकार डम् ॐ जो परब्रह्मका प्रतिघा ' क्रोध गुस्सा . प्रणाद गुणकेमरागसेउठाशब्द ये प्रतिघानन मारडालना वधकरना बडेउत्तमह इत्यादि प्रतिच्छाया प्रतिमा मुनि प्रणाली जलवनेकेनालीनारा प्रतिजागर पस्तुओंकादेखना प्रणिधान समझाना प्रतिवात भंगीकारकरना प्रतिक्षाकरना प्रणिधि चार भेदिहात छिपकरकामप्रतिज्ञात अंगीकार ग्रहण करनेवाला प्रार्थना पतिदान लेनदेन पदला व्यवहार मणिहित माप्त लाभ घरोहरदैदेना प्रणीत मंत्रादिसेसंस्कृतथग्नि व्यंजन-प्रतिध्वान : शब्दकप्रतिद्मराशब्द जैसे पदार्थमेघृतादिसंयुनकरना रानिमायाजदेवीद्गराशब्दनाः अणुन स्तुति नमस्कारादि लावशिवालयादिसंहोताई मणेय वशमा यरामा प्रनिनिधि पूनि यवनी मननि लना पलि मनिपन् परेवा बुदि सकिल मनन पुराना प्राचीन परिपत्र प्राप्नदाना जानना সার লাখাই যন্ত্রনা मनिपाटन दानकरना देना নানা নানা .
} -रहुतकर संग्रामकाउद्योग (प) शब्दार्थप्रकाशे। १०८ पभात प्रातःकाल सवेरा प्रयाम धन धान्यादिमेंबहुतादर क प्रभाव राजावोंकी शक्ति खजानायादि प्रयुद्धार्थ सेप्रकटतेज प्रताप मयोगार्थ प्रभिन्न होथीकामदवहना पलवघ्न वलदेवजिन्होंनेभलंकासुरमारा पभु स्वापी मालिक प्रलय,कल्पकामंत पसीनाकानाश मृत्यु प्रभूत रहुनअधिक [शिखाकामाला मलाप परस्परवार्ता बतकहाव [ रहा प्रभ्रएक जोमालाचीटीमें लटकताहो प्रवण चढाउतारखालीपृथ्वी नर्मची पूथम मातगण मवयम् वृद्धवृद्धा बढा पूमथन मारडालना वध पवई श्रेष्ठ मुख्य प्रमथाधित महादेव मातृगणकस्वामी अवह जलादिकायाहरजाना पूपर हर्ष यानंद खुसी या रानीवाग मवहण खियोंकीसवारी बद्दलयादि एमदवन राजावोंकेमहलकेभीतरवगि-प्रबल्किा पहेली छिपेयर्थकीबात पूपदा सी आनंदढेनेवाली मवारण तुलादानादि पूपनस पमन्नमन खुशीहोना प्रवाल,वीणाकाटण्डा मूंगा कोमलपना पूमा यथार्थजानना ठीक २जानना प्रवाह जलादिकोंकायहना पूमाण धुवांयादि सीमा हद इतनाही मवासन मारडालना परदेशपदेना प्रवाहिका संग्रहणीरोग पारवारमाड़ा ममाएकरनेवाला नित्य मर्यादा शास्त्र सत्यपालनेवाला मविग्याति पहुतपूमिद्ध. [ होना.] प्रमाद योग्यफर्मस्थिरचित्तनहोना प्रविढारण संग्राम लदाई युद्ध अनिश्शेष बनवियोग बद्रुतदिनमुला- पूमापण। मारणे वध हिंसा पूमापन प्रवीण निपुण चतुर. [वातनहोना] ममिनि यथार्थमान ठीकर जानना प्रवृति टीकरनोककीयानरहना ज प्रमीत यसमें पशुकामारना मरा लादिकी हमेशा की चाल प्रमीला नांगीमिलमिलाना सोनके प्रवृद्ध यदा यदना फैलना पढ़ते चले पहिल औरपीछेश्रमश्रादिसेसयई. थाना ऊंचाहाना ट्रियोंकीशिथिलता पूर्वक मुग्न्य श्रेष्ट. [हाथीवी भन्न. ममग्न मुख्य श्रेष्ठ उत्तम प्ररेणी मर्पगयानरगियानवान ममुदित ममन्नहुया सुशीहोना प्रांट भना यांह प्रमोद मानंद संगी प्रसन्नता प्रत्यक्त म्यूट पर अपन पयिन शुद्ध प्रश्न पश्वरना पना प्रयसा पकान धीमपमान काठग्ना. प्रश्रय प्रेम नम्रना .
शब्दार्थप्रकाश। प्रश्रित नम्र शीलस्वभाव प्रसूतिका लड़केआदिकीमहतारी पृष्ट भागेचलनेवाला. [ कोबंधावेल. प्रसूतिज,कष्ट दुःख जीवकोजोजन्मादिमें पृष्ठवाह गाड़ीआदिकेजुवांकेपासजोतने मसून 'फूल फल पैदाहोना. [ कष्ट.] पुरोही नईगाभिनिगौ कलोरिगाभिनि प्रसूजनयितारौ मातापिता महतारीवाप पूमन निर्मलजल खुस प्रसूत प्रसन्नता प्रसन्नदोना खुसहोना निर्मलता प्रति हाथयेंगसरकरना पसर प्रसन्ना मदिरा जिसेपीकरमनुष्यपूसन्न प्रसूता जांच रान होतेहैं प्रसेव थैलीकपदाकी प्रसभ बलात्कार वेगसेवलकरना प्रसेवक वीणाआदिकातोंवा पृसर प्रेम वेग पाववादिकाफैलना प्रस्तर पत्थर कुशकीमूठी कुशकीशय्या पूसरण सेनाकोसवतरफच्याप्तहोना मस्ताव अवसर प्रसंग मौका प्रमरणि घेरलेना प्रस्थ बरावरपहाड़कीधरतीसेर पहा पूसरणी मस्थपुष्प मरुवा जंबीर.[काअगाडी.] पूसव गर्भसेटना पैदा होना वश होना मस्थमान पसरसेममारण पूसवबंधन बांदा जिसकेहोनसेक्षका प्रस्थान यात्राकरना प्रस्थानधरना फूलनाफलनावंदहोताहै प्रस्फोटन सूपअन्नपदोरनेका पूसव्य उलटा विपरीत प्रश्रावण पहाडमेपानीगिरकरजहांफैले प्रसह्य हठ जिद्दि प्रसाद प्रसनहोना निर्मलहोना[हिरना प्रसार मूत्र पेशाव प्रसाधन शोभाकरना गहेनाप्रादि प प्रहर पहरभर दिनरात,पाठपहर प्रसाधनी हाथीदांतमाटिकीकंघीककई प्रहरण आयुध हथियार [मंत्री प्रहस्त अंगुरीफैलायाहांथ रावणका प्रसाधित सिगारकिया गहनामादि पहिराया महारण महादान तुलादानादि प्रसारिणी गंधपसारिणीओपथि महि कुयाँ कूप प्रसारिन् फैलानेफैलनेकास्वभाव प्रहेलिका पहेली दिपेअर्थकीवात प्रसित अपनेतात्पर्य मयुक्तरहना मत प्रल्हन्न आनंदहुआ खस लवकेकामरहना मांशु उंचापुरुपयादि ममिद शोभित मशहूर मार वीतैसमय पूर्वदिशा प्रम माता महतारी घोड़ी दणभेट प्राकार नगरादिकेआसपास ऑटया प्रसूना - जिसबीरपुत्रादिहुयेहों प्राकृत नीच छद्र. [दिमेराकरना] प्रमूनि गर्भसेपटाहोना गर्भमेळूटना प्रान्दक्षिण मिनादत्रिणकादेश (प) शब्दार्थप्रकाश । प्रभात प्रातःकाल सरेरा | प्रयाम धन धान्यादिमेंबहुनमादर प्रभाव राजावोंकीशक्ति खजानायादि मयुद्धार्थ प्रयागार्थ समाटतेज प्रताप } बहुतकर सग्रामकाउद्योग पभिन्न हाथीकामदरहना प्रलवघ्न वलदेवजिन्होंने लवासुरमारा पूभु स्वामी मालिक मलय,कल्पकाप्रत पसीनाकानाश गृत्यु प्रभूत यहुनअधिक [शिखाकामाला प्रलाप परस्परमाता रता हाव [ रहा प्रधएक जोमालाचोटी लटकताहो प्रवण चढाउतारखालीपृथ्वी नर्मची पथम मातगण भवयम् वृद्ध वृहायड्ढा पूमथन मारडालना वध प्रवाई श्रेष्ठ मुरय पूमथाधित महादेव मातगणकैस्वामी मवह जलादिसायाहरजाना प्पट हर्प शानद खुसी [या रानीवाग प्रवहण खियोंकीसयारी बहलयाटि पूमदवन राजावोंकेमहलकेभीतरवगि प्रवलिहका पहेली दिपेथीयात पूमदा स्त्री ग्रानददेनवाली अवारण तुलादानादि पूमनस प्रसन्नमन खुशी होना प्रालीपाकादएडा मुगा कोमलपना प्रमा यथार्थजानना ठीक जानना प्रवाह जलादिकोंकायहना पूमाण ध्रुवांयादि सीमा हद इतनाही प्रवामन मारडालना परदेशपठदेना प्रमाणकरनेवाला नित्य मर्यादा | प्रवाहिका सग्रहणीरोग वारपारझाडा गास सत्यशोलनेाला प्रविग्गाति यतसिद्ध [ होना ] पूमाद योग्यफर्ममंस्थिरचित्तनहोना प्रविदारण समाम लड़ाई युद्ध प्रविश्लप बहुतवियोग बहुतदिनमुला पूमापण } मारणे वध हिंसा पूमापन प्रवीण निपुण चतुर [वाननहोना] ममिति यथार्थ ज्ञान ठीक जानना प्रवृत्ति टीक लोक्वीयान रहना न प्रमीत यगपशुकामारना मरा नादिकी हमेशारीवाल प्रमीला आजीमितमिलाना सोने के प्रमृद्ध वटा यदना फैलना पदनचले पहिल औरपीश्रमप्रादि सबई थाना ऊचाहाना ट्रियाकी शिथिलता वक मुग्य श्रेष्ट [हाधीकमल अपर मुख्य श्रेष्ठ उत्तम पेगी मपीमपानरनिया गान्न ममदित मसनमा सुशीला पूवंश भुना याह मामाद मानद रागी प्रसन्नता पर पाद पश्वरना पूछना प्रयम्न पकानघीसपकामनपाठ[ग्ना पर प्रेम नम्रता मपन पनि शुद्ध चिरलेना शब्दार्थप्रकाश। (प्र) पश्रित नम्र शीलस्वभाव प्रसूतिका लड़केादिकीमहतारी पूष्ट आगेचलनेवाला. [कोबंधाबैल. प्रसूतिज,कष्ट दुःख जीवकोजोजन्मादिमें पूष्ठवाह गाड़ीआदिकेजुवांकंपासजोतने मसून ‘फूल फल पैदाहोना. [ कष्ट. ] पूपोही नईगाभिनिगौ कलोरिगाभिनि मसूजनयितारौ मातापिता महतारीवाप पूसन्न निर्मलजल खुस मस्त हायमेंपसरकरना पमर प्रसन्नता,प्सनहोना खुसहोना निर्मलता | मसति पूसना मदिरा जिसेपीकरमनुष्यपूसन्न | मस्ता जांच रान होतेहैं मसेव थैलीकपड़ाकी प्रसभ बलात्कार वेगसेवलकरना मसेवक घीणावादिकातोंवा पूसर पेम बेग घावमादिकाफैलना प्रस्तर पत्थर कुशकीमूठी कुशकीशय्या पूसरण सेनाकोसवतरफच्याप्तहोना प्रस्ताव अवसर प्रसग मौका प्रमरणि प्रस्थ बरावरपहाड़कीधरती सेर पहा पूसरणी प्रस्थपुष्प मरुवा जंबीर [डकाअगाडी] पूसव गर्भसेहटना पैदाहोना शहोना प्रस्थमान पसरसेप्रमाण पूसवबंधन बांदा जिसकेहोनेसेक्षका प्रस्थान यात्राकरना प्रस्थानधरना फूलनाफलनावंदहोताहै प्रस्फोटन सूपअन्नपछोरनेका पूसव्य उलटा विपरीत प्रश्रावण पहाइसेपानीगिरकरजहाँफैले प्रसह्य हठ जिदि प्रसाद प्रसन्नहोना निर्मलहोना [हिरनामसाव मूत्र पेशाब प्रसापन शोभाकरना गहेनाआदि प प्रहर पहरभर दिनरातमाठमहर प्रसाधनी हाथीदांतत्रादिकीकंघीककई महरण प्रायुध हथियार [मंत्री प्रसाधित सिगारकिया गहनाआदि महस्त अगुरीफैलायाहांथ रावणका पहिराया महारण महादान तुलादानादि प्रसारिणी गंधपसारिणीऔषधि महि कु कूप प्रसारिन् फैलानेफैलनेकास्वभाव प्रहेलिका पहेली छिपेअर्थकीवात प्रसित अपनेतात्पर्य मेंयुक्तरहना मत-प्रन्हन आनंदहुमा खुस लवककाममेरहना प्रांशु उंचापुरुपयादि प्रसिद्ध शोभित मशहूर प्राक् वीतेसमय पूर्वदिशा प्रस माता महतारी पोड़ी तृपभेद प्राकार नगरादिवासपासकाँटया प्रसूता - जिसस्त्रीके पुत्रादिहुयेहों माकन नीच छद्र. [दिसेराकरना] प्रसूति गर्भसेपैदाहोना गर्भसेछूटना प्राग्दक्षिण पूर्वमिनादक्षिणादेश । 1 (प्र) शब्दार्थप्रकाश । ११० प्राग्वंश होमकेयरसपूर्वहोमकरानेकरने | प्रादुस् नाम प्रगट प्रकाशहोना वालोंकेयर प्रादेश अंगूठाअंगुरीफैलाकरवित्ताभर पाग्भव पूर्वदिशाकाहुआ दशअंगुल माग्रहर } प्रधान श्रेष्ठ मुख्य प्रादेशन दान देना माय प्रबार -धीग्रादिकायहना माध्वम् प्रसन्नताई सुसी. [शून्यमार्ग. माघुगक । अभ्यागत भिखारीया-प्रांतर दरास्ताछायापानीबिना मायाक दिकायाकस्मातग्राना प्राप्त प्राप्त लाभ आजाना प्राचिका वनकीमरखी प्राप्तपंचव मरजाना मरना प्राची पूर्वदिशा पूर्व माप्तम्प पण्डित मनोहर मनजानने प्राचीन शहरयारकेचारोंसोरबांस पर चाला स्वरूप रादिकीटि पूर्वदिशाकाहुया प्राति उत्पत्ति लाभ प्राचीना पाठा पहाड़मूल. [पुराना.] प्राप्य प्रासहोनेयोग्य जानेयोग्य प्राचीनाचीत घामहाथ उठाकरजनेऊ. मामृत वायन नजर भेंट पहिरना अपसव्यहोना [कीटि माप संन्यासीहाभोजनकात्याग प्राचीर शहरयादिकेवाहरयांसादि पहनकर जिससे मरजाय माचेतस वाल्मीक मान्य पूर्वदक्षिणमिलादेश पायस बहुतकर प्रायःनई स्त्रीमुंदरहोती प्राधित मांगा मांगलिया प्राजन भोगी चामुक पालंय सुधालटकना मंगलमेमाला प्रानिपर सारथी रयवान पालबिका सोनेकीनाभिनकवीमाला प्राज पडित बुद्धिमान पालेय पाला जाहा. [नंनी.] मानी पावर माज्य,रहुन अधिर.[ फैमलकरनेवाले. प्राइविधाक न्यायाधीश मुरदिमा पावरण रजाई दलाई लिराफ माण हदयी वाय पगम प्राण गंध | मान नीचेरापन योनीयादि रस मिमिया पाप वा समान प्राणिन् नीर देही मनुष्यादि मापायणी यांच. [ग्नंगानु मानर भोर सवेग प्रासंग गारंगांगद्गगमा नदि मानिहारक मायापी रंद्रनाली मायग्य फेनाल मायकल्पिक पदने नगर्नवानल मापाद देवताचारगनापामदिर प्रयमपढ़नेवाले प्रामिन मालाबांधनवाना 1 प्राजा पण्डिता बुद्धिमानसी प्रागार पटा नियोकानुगरायादि.
1 शब्दार्यप्रकाश। (प्रफ) प्राह पूर्वान्ह दिनकाप्रथमतिहाई । प्रोष्ठी सहरीमबरी मिय पति प्यारा दुलहा प्रोष्ठपद भाद्रपद भाटमहीना प्रियक कदंब असना हिरनकोजाति' भौढ बहुतवदना कालाविधारा प्रौढा चतुरास्त्री प्रियंगु' कालाविधारा कांकनि प्लक्ष पकरिया गैठी लाखीपिपरी प्रियता प्रेम स्नेह प्यार प्लव छोटीनाव डॉगी मेदुक मेंझका के- प्रियंवद प्यारीवातबोलनेवाला वटियामोथा उलरना वानर शब्द प्रियाल चार चिरौंजी कोरडवपक्षी म्लेक्षजाति चांडाल प्रीणन तृप्ति किसीकामसेहप्तहोना प्लवंग वानर मेंझका मीत प्रसनहीना आनंद खुसी प्लवंग वानर प्रीति हर्ष यानंद प्लवंगम' बानर मेंका मेढुक मुष्ट जरा जलगया प्लाक्ष पकरियाकाफल प्रेक्षा बुद्धि अकिल नाचदेखना प्लीहन् बाईतरफपंटमेमांसपिड पिलही पंखा दिडोला झूला डोली प्लीहशनु औषधि रक्तरोहिडा खित कुछकांपना प्लुत घोड़ेकीचौकचाल स्वरभेद प्रेत मरा भूत प्लुष्ट जरा जलना प्रेता नरककेजीव मरीस्त्री प्लोप दाह भस्महोना प्रेत्य दूसराजन्म मरनेकेबाट प्लात भोजन खाना मेमन् मेय स्नेह भीति (फ) प्रेपण मेजना पटवना फंजिका भारंगी ब्राह्मीऔषधि' प्रेप्य नौकर सेवक टहलवा भेष्ठ बहुतप्यारा अतिप्रिय प्रेष क्लेश पीडा उन्माद फणापर सांप प्रैप्य दास नौकर सेवक फरिणजक सपेदमरुवा जंबीर प्रोक्षण यापशुकामारना फणिन् सांप प्रोक्षित यज्ञकेलियेपशुकामारानाना फल डाल जिसकाठमद्दलकाफाललग प्रोथ,कमरकामांसपिड कल घोडेकीनाक तादै फल कैयामादि कारण मोद्यत बढ़नेवाला किया जैसेयज्ञकाफलस्वर्ग प्रोप दाह भस्महोना ढाल प्रोष्ठपदा पूर्वभाद्रपदउत्तरभाद्रपदनक्षत्र फलकपाणि• ढालवांधनेवाला ढलइत फटा फणा ) सांपकरफन (व फ) शब्दार्थप्रकाश । ११२ फलतिक अंबराहर्रवहरा चडिश) फलपांकाता औषधि धानजवादि बडिशा वंशीमरीमारनेकी वडिशी फलपूर विजौरानि फलवत् फलावृक्ष फराड़ वत खेद दया संतोप पाश्चर्य सलाह फलस कटहर कोबुलाना इनपांचअधोमवतकदा फलाध्यक्ष खिन्नीकाड़ जाता फलिन् । सफलवृक्ष फराड़ फललगा वदर र चेरीकाफल फलिन दरख्त. [शागभेद. यदरा कपास बाराहीकंद फलिनी कालाविधारा अमिशिखा | पदरी घेरी फली मियंगु कालाविधारा बद्र रस्सीयाटिसेबंधा फलेग्रहि अपनेसमयमेंफलनेवालावृत्त | वधिर बहिरा जामुननसके फलेरहा पांडरि. [ तीर्थभेद. यंदिन राजावोंकीस्तुनिकरनेवालेभाट फल्गु कवरि निर्वल जिसकेवलनहो | बंदी कैद जेहल फाणित राप पोटरी प्रसादा यंघकी सरावती फाराट मीसलियाकाढ़ा. काकाठफार. वंधन यांधना बंधन फाल कपासकावत्र मूतीकपड़ा इल | बंधनालय कारागृह कैदखाना फाल्गुण चंधनी निसरस्सीमेवहुतपशुपधिगांय फाल्गुणिक फागुनमहीना बंधस्तंभ पांधनकारसमादायीवा फाल्गुनी दडपान दंडपावनफाल्गुनी बंधु गोनभर पुटुची को फागुनकीपूर्णिमामी बंधुक फुल्ल फूलनाफलका }दुपहरीकेफुलकार बंधुनीवक फेन समुद्रफेन पानीवाफना वरना पुटुंगियोवामुंड फेनिल रीठावर यंधर कंपादचलना फेरय फेरु यंधुल मुन्नत्यागकरनेवालीमीरापुत्र सियार बंधक दुपहरीकार फेला फेली भोजनाद्रिोदना चंधून पुष्प अमना वंभर चालना (च) यत्र भागनं उग विष्णु पौनांग अग्नि यानवाल यागर गृपा वर्गव न मदार तुला संवंर भागीदायी परल मौनमिर्गल. पण मानी चक बलिपुष्ट कौवा . बहिण मोरइला पुबार मोर. वहिपुप्प: ... शब्दार्थप्रकाश। (ब) चर्वरा बबई कानफोडी. केपंख पत्ता. वलिन जिसकेबुडापासेखाललटकीहो बई कुकरौंश भटोरा मोरपने पुछारि बलिभ बहपुष्प कुकरौंधा बर्हि अनि बलिभुज -वहिः कुकरौंधा बलिमुख वानरः बलिर' काना कंजा ऐंचाताना कैचा. वहिन् । बलिशा कुकौंधा वलिश वंशीमछरीमारनेकी पलिशी बहिर्मुख देवता जिनकाअमिहीमुख है बलिसझन् पाताल रसातल चर्दिष्ट, सुगंधयाला वलीमुख वानर बल बलदेव सेना फोन पराक्रम सा: बलीवद चैल. [हीर गोपाल. मर्थ्यता मोटाई गंधरस संरूप वली बलर रोटीकरनेवाला रसोईदार अः कौवा वल दैत्य, वल्बज बागलवाकासकेभेद वलदेव | कृष्णकेवभाई जिनकीर्तिके यकयणी । बहुतदिनकीवियाईगामा- बलभद्र । दर्शनकोमथुराजीकोसवजाते हैं वकयिणी दि बकरनि चलभद्रिका रायमाणाऔषधि बलवत् बलवान् बली अतिशय बहुत वस्ति नाभीकेनीचेसूत्रकास्थान बलविन्यास सेनाकोसंग्रायकेलियेस्था वहिर दरवाजे केवाहिर बला. बरियारी [पनकरना] | वहिष्ठ, बहुत अधिक बलाका , लंवीधींचकीवकुलीपती वहिस् बाहर बलात्कार हट बलकर बहादुरीसे वहु बहुत अधिक. [झाइवाला. बलाराति इंद्र बलदैत्यकेमारनेवाले बहुरूर बहारनामादिकामकरनेवाला बलाहक 'मेघ घादरगर्जतेहुये कृष्ण- बहुगळवार,बहुतखरावरवातकहनेवाला कायोड़ा बहुपाद् परगदवृत बलि,वैश्वदेव भूतयज्ञ राजावोंकावसूल वहमद दानशूर बड़ादानी चलिआदि जिमीदारोंकापोत नजर भेंट वलि बहुमूल्य रहुतमोलकावखादि दैत्य देदकी खालसमिटना - बहुरूपं धूप रार बलिध्वंसिन् श्रीवामनजी जिन्होंने ३ बहुल अधिक बहुत अग्नि कालारंग परपृथ्वीमांगलिकोबलपातालप: पहला इलाची कृचिकानक्षत्र गो ठाया विष्णु बहुलीकृत बसाईपलारीधान्य वस्त वोकरा .
(ब) शब्दार्थप्रकाश। बहुबारक लसोहरकाड शलटवृक्ष | बाहुज् क्षत्री जोविराटकीयांहसेहवा बहुविध बहुतमकार अनेकरूप चाहुदा सहसाबाहुकीनदी . बहुवेतस जहापरवहुत-तहाँ वाहुमूल कांख कखरी रहुमुता शतावरि दतावरि वाहयुद्ध पांडकायुद्ध कुस्ती बहुसूति बहुतवारकीवियाईगौमादि वाहल कातिकमहीना बाऊची वचुकी [ देहमॅनहीलगते. वाहुलेय स्वामिकार्तिक वाणवार बख्तर जिसकेपहिरनेसेवाण | वाहक बल्हुदेशकाहुवा सिंपदेशका वाढ अतिशय स्वीकार अंगीकार चाहव) हुवा. [ मीरकयोड़ा वाण तीर वाण वाणामुर वाहिक कंकुम केशर होगकावृत का याणा करसला कालीझिटी बाढीकाम केशर हींग घोड़ेकी नाति सादर करासफावस्त्र सूतीकपड़ा वाघ बाहर वाधा दुःख कष्ट [कापुत्र.विड विदियानमक बांधकिनेय उलत्यागकरनेवालीखी पिडाल बिलारि बांधर युटुंगरी गोत्रभर विडोजर इन वाईत भटकटयाकाफल चिदु पानी केंद्र [पिन्दुस होता वाल सुगरगला पालक मूर्व घोड़ा हांधी की पूंछ पाल. [भिनिकलोरि. सूर्यचद्रमाकारिंग सिंजालक पद्मक दधीरेदहमेंमायः पालगभिणी नईगाभिनिगौमादि गा- दिसिरा कुदुर वालतनय खैर बिल पिल वालवण घास मिलेगय मांप घालमृपिपरा,लाटीमुमकीनानि मुमरिया चिन्न चलपिंड गला कुमारी कन्या विम स्मलीनद भैसार पालिग मूर्य येवरूफ बालक विमा टिसा ययुन्नी शालेयशाक भाग्गी प्रामीयोपधि निममगन कमल पालापन लड़काई रिमिनी समलिनी जिसटेशयाटिम पराप्य माम् प्रांयसापानी निम्न मम्मीग्नीभगोना [नार पापिया। चीन नारा पीननिमगमयटाग तेजपान वाप्पीका चीनकोश वमन्नगहोगाम्यान याही वीना पिनागनि भुना बांह घोरेगानामा पीनाहन चायकानीनना बारक वालेय गदहा [समनहीं चान्य [ग्ना बुका ब्रह्मविह ११५ - शब्दार्थप्रकाश । (व) वीज्य कुल उत्पन्नमान [र्जुनकानाम | ब्रह्मचारिन् आश्रम ब्रह्मचारी बीभत्स रसभेट हँसी भयंकर दूर ब्रह्मण्य पार्थपिप्यली तृतवृक्ष बुक गूमा रुई मटार ब्रह्मत्व ब्राह्मणत्व ब्राह्मणहोना ब्रह्मदर्भा अजवाइनि } हृदयकामांम कलेजा माग्रमांस ब्रह्मदारु पार्थपिप्यली तूत बुद्ध बौद्धप्राप्तहोना जानना ब्रह्मन् ब्रह्मा ब्राह्मण बृद्धि अकिल ब्रह्मपुत्र नद स्थावरविपजडादिक बबुद् पानीकावेकार हल्ला ब्रह्मवादिन् ..वेदांती बुध ग्रह पण्डित बढना उत्तरके ग्रह ब्रह्मवंध,निदाम जैसेतूब्रह्मरंधुदष्टहै.[गिरै. बुधित जानना प्राप्त वेदपाठकरनेमेंमुखसेजोवून बुध्न वृतादिकोंकीजड ब्रह्मभूप ब्राह्मणकाफर्म ब्राह्मणता बभुक्षा सुधा भूख ब्रह्मायन पढावना वेदकीपाठ [भ्यास बुभुक्षित भंवा जैसेकालीशत्रुमारनेको ब्रह्मवर्चस ब्राह्मणकातेज आचाग्वेदा बुपर ब्रह्मसायुज्य ब्राह्मणत्व ब्राह्मणता प्रा. ह्मणहोना चुस्त मँजामांस कटहरादिकासार ब्रह्मस् अनिरुद्ध कृष्णकापौत्र ब्रह्मसूत्र यज्ञोपवीत जनेऊ बृहित हाथियोंकागर्जना ब्रह्मांजली वेदपढनेमेहायजोड़ना व्रतवालोंकामासन कुशा बृसी सनादि ब्रह्मामन ध्यानयोगकरनेकाासन ब्राह्म मनुष्यॊके ८ हजारयुगकारदिन वृहत् फैला चौड़ा बहुत बृहनिका रपट्टा लुमराादि रातव्रह्माका अगृठाकेनीचे ब्राह्मतीय बृहनी भटकटैया द्रवाती नव ब्राह्मण सववों काआदि सबसे श्रेष्ठ अतरकाचन्द भारी ब्राह्मणी भारगं वृहत्कक्षि तोंदारा वदपटा बृहद्भानु अग्नि प्राण्य ब्राह्मणों कासमूह [ महेठी बृहसति इद् के गुम् ईशान्यके ग्रह चाही मागणप्रयममाना औषधि बोधकर रानावोंकोस्तुतिमेजगानेवाले (भ) चौविट्टम पीपरकापेंड ननन तारा राशि वोल गररस मिमियाई अन्न मात जन मूर्य वृक्षादिकीनड भता पानेवाला भोजनकरनेवाला बस भूसा पयार बूका कलेजा बृषी ब्राह्मणायष्टिका भारगी ब्राह्मीऔपधि भ भक्त १ . (भ) शब्दार्थप्रकाश । भक्षकार भोगनपदार्थवनानेवालातैल भद्रपर्णी खंभारिकापेंड पक्कादिकरनेवाला भद्रबला गंधपसारिणियौपधि भक्षित भोजन किया भद्रमुस्तक नागरमोथा भक्ष्यकार ! भोजनवनानेवाला वरा भद्रयव इंद्रयव भक्ष्यकार पकौडामादिकरनेवाला भद्रश्री चंदनसुगंधयुनमलयपहाडका भग योनि स्वीकाचिन्ह शोमा लक्ष्मी भद्राकरण बालबनवाना मुहाना यन सूर्य कामकीइच्छा माहात्म्य भद्रासन राजावोंकासिंहासन मणिसु ऐश्वर्य कीर्ति यश भगवान ज्ञान | भय डर खौफ. [ वर्णादिसेवना चैराग्य धर्म मोक्ष भयंकर भयानक डरावनी रसभेद -भगंदर रोग गुदाकेपासकाफोड़ा भयद्रुत डरसेभागनेवाला भगवत चौद्ध विष्णइत्यादि भयानक रसभेद डरावनी खौफनाक भगिनी बहिनि भर अतिशय बहुत भग जलकीलहरी टुकड़ा भरण भगा भांगनोनशेकोघोटपीते हैं भरण्या भंगी टेढ़ाईकीरचना भरण्यभुज् तनखाहलेनेवालानौकर भग्य भांगकाखेत भरण्या मोल तनखाह भनमान न्यायसेमाप्तद्रव्यादि भरत,मायावी नट श्रीरामकमाई दुष्यंत भट योद्धा चीर राजापुत्र श्रीपमदेवके पुत्र भदिन लोहकेशुलसे पकायामांसादि भरद्वाज पि भरतापती भट्टारक राजा महिनी महारानी कोठोंडौरसयरानी भार्ग पहाटेची भटाकी भांटा कान भई मतार पति राखनवाला पालने भंडिल शिरसाकापेंड वाला मालिक [पुन. भंडी मंजीट भनुदारक युवराज गनायायधिकारी भंडीर भदारिका राजाकीलड़की भंडील भर्मन निंदागाली देकर जमेचार मणित मैथुनकाशब्द तुझसोमारहालगा भद्र कल्याण शुभ सदर बैल भर्मन मुवर्ण सोनाधान ननमाह मोल भद्रम पूर्णकुम भरायड़ा गछ भल्लुक पुम्पगहममान भन्दार देवदार भल्लानकी मिलावा মান বাম নয়ার भग। . } शिरसाका रीब भालू भवित । शब्दार्थप्रकाश । (भ) भन्नुको भामिनी प्यारी स्त्री पत्नी भल्लूका भार वोझा २००० टकाभर भर शिवजी महादेव जन्महोना भारत,जब्दीपका १ खण्ड समुद्रसेउत्तर भवन घरमाकान हिमालयकादक्षिणभरतखण्डनट भवानी श्रीपार्वतीजी भारती भाषा वाली वात सरस्वती भविक कल्याण शुभ अच्छा भारद्वाजी बनकपास मनवाकपास भारयष्टि खुटीयादिटांगनेकी होनेवाला भविष्णु भारवाह पल्लेदार बोझालैजानेवाला भारिक भव्य शुम अच्छा भार्गव शुक्रग्रह परशुराम भपक कुता कुकुर भार्गवी दुर्गा व लक्ष्मी मसित राख भस्म भार्गी भारंगी ब्राह्मी. [रानेवाली. भखा लोहारमादिकीचमढ़ाकीधौंकनी भार्या व्यादीसी भाइयों कोविरोधक- यस्मन् राख भायापती स्त्रीपुरुष मर्द औरत भस्मगधिनी रेणुकागंधद्रव्य भस्मगर्भा शिसवा शिरसई भालक परीक्ष माल्लक भा ममा उजेरा प्रकाश भाव विद्वान् विद्यापढनेवाला पनका भाग बांटातील हिस्सा विकार सत्ता जैसेघड़ाहै स्वभाव भागधेय भाग्य पूर्वजन्मकैकर्म अभिमाय प्रात्मा मैथुनादि जन्म भागिनेय बहिनीकालडका मानना भावदशिन् कामनकरसकनेसेजोनौकर भागीरथी गगा जिनकोभागीरथलाये मालिककोदेखाकर भाग्य दैव पूर्वकेकम भलेबुरेकर्म भावना,विचार. [चकारिकारमगटकर. मांगीन भांगकाखेत भावोधक, रसादिभावकोप्रकाशकरचि भाजन पात्र लोटापादि भावित सगधयस्तुसेवासना चमेली पात्र लोटागिलासप्रादि घोडे चेलाबाटिकामतरत्तेल प्राप्त प्राय कागहना जमाफीनमा खरीदकेदाप जाना भाद्र भावुक कुशल म राजीखुसी भाद्रपद भाषा बोली वात भाद्रपदा,पूर्वभाद्रपदउत्तरभाद्रपदनक्षत्र भाषित वात कहाहुवा भानु सूर्य सूर्यकीकिरण भाप्य पदकामर्थ महाभाष्यादि भानुज शनैश्वरपश्चिमकेग्रह भास् छवि प्रभा उजेरा भाड (भ) शब्दार्थप्रकाश। भास पक्षीभेद एकचिदिया भुक्तसमुज्झित भोजनकरछोंदा जूठा भास्कर सूर्य भुन टेढा कुटिल पीड़ित भास्वत् भुज यांह भुना भिक्षा मांगना भीग्यमांगना सेवातनः भुजग सांप भिनु संन्यासी भिखियारी. [रुवाह.] भुजंग। भित्त खंड टुकड़ा भुजंगभुज् मोर मुरइला पुचार गरुड़ भिनी दीवार भीति भुजंगम सांप भिटा फूटना दोहोजाना भुजगाती सर्पाक्षीमापधि भिदिर भुजशिर कंधा मिदुर बज्र इंद्रकायायुध भुजांतर छाती वाहकाचीच भिदिपाल गोफना जिससेपत्थरमादि भुजिप्य दास नौकर सेवक फेंकजाते? भुवन लोक पानी पृथ्वीतल मित्र पृथक अलग विदारा काटा भू पृथ्वी भूलोक व्याहृति भिया डर खाफ भय भूत देवयोनि प्राप्तहुवा होगया पंच. मिपन् वैध दवादेनेराला भून पृथ्वी जलश्रमि यायुयाकाश गिस्सटा जलानन्न सत्य न्याय भिसा अन भातमादि भूतांश जटामासी भी डर सौफ भय भूतधात्री पृथ्वी भीत टरनेवाला डरपोंक भूतया चलिरवदेव भीति दर पौफ. [ युधिष्ठिरवेभाई. भूतपेशी सपेद म्यारी भीम शिवजी भयानक -रसभेद राजा भूनात्मन् देह ग्रामा भीर डरपोक्सी हरपोंक दरनगला भूताराम पहेगावृक्ष. [ पनि राम. भीक डरनेवाला भयवानेवाला भूनि ऐश्वर्य अणिमादिभूति भस्म सं भृतिक निगहता दरभुनसी हानेपानी भुनेश महोदर भृनॉरमालिक भीतक ढग्नेवाला दरपीक मूदार मुभर भीलू टरपोक्सी भूदेव नागरा पृथ्वी देवता भीपण भयंकर डरारनी रसमंद भूनिर चिगाना भीष्म भरकर गगापुत्र भूप गना भीमम गंगानी निनांपुप्रभीप्पनी भूपढी पोगगना भुक्त भोजन किया गाना .
th- शब्दार्थप्रकाश (भ), भूमन् माया बहुत भेक वर्षातीझका भूमि पृथ्वी धरती भेकी वर्षातीमझुकी छोटीमें झुकी भूमिजंबुका भुंइजयनी नारंगी भेद फ़र्क मिलेकोअलग करना भूमिधर पर्वत पहाड़ भेदित फोडाहुआ भेदकोपारा भूमिस्पृक् वैश्य वनियां भेरि } दुभि नगाडा भूयस् भेरी अधिक बहुन भूयिष्ट भेपन औपध दवा भूरि बहुत सुवर्ण भैच बहुतभीप भरिफेना थूहर भैरव भयंकर डरावनी भरिमाय सियार भपज्य श्रीपध दवा भूरुंडी सिरिहस्तिनी घुइयां भोग सुख स्त्री हाथी घोडा नौकर भूर्य भोजपत्रकाड श्रादि पोललैपालना भपण गहनापहिरना भोगधर साप सापकीदेह भूपित गहनापहिरे शोभाकिये भोगवती सांपोंकीपुरी सांपोंकीनदी. भूष्ण होनेवाला भोगिन् सांप भूस्तण तृणभेद तिन भोगिनी पटरानीकोडोडोरसवरानी भृकुटी भौह [कानाम | भोजन जैमना खाना भृगु पर्वतसेजलगिरनेकास्थान अपि भोम संवोधनार्थ भृग,दालचीनी तज भुजयलपक्षी भंवरा भौम मगलग्रह भृगराज भौरिक सोनेकागालिक भ्रंश अपनेस्वरूपकाविगइना भृगार सोनेकीमारी भ्रकुस हिजरा पुरुपजोखीवन भृगारी झीगुरु भ्रकुटि भौह भृगी नदी शिवगरा भ्राति सदइहोना भंवरपानीकी चाकर मँजुर सेवक भृति तनख्वाह मोल भ्रमरक टेढवालमाथेमलटकतेही भृतिभुन् तनर पाइखानेवाला नौकर प्रसि भ्रांति यथार्थज्ञाननहोना भृत्य दास सेवक भ्रष्ट गिरना गिरजाना भृत्या नौकरी दासी भ्रष्टयव भूजेजव भृशम् अतिशय वारवार भ्राजिष्णु बहुतशोभित भृगराजम् } चमिरा मृतक भ्रमर भौंरा . भातव्य भतीजा मन तुलसीआदिकीमजरी मंजीर नूपुर पैजनिया मनोहर सुन्दर (म) शब्दार्थप्रकाशः। १२० भ्रातरौ भाईनहिनि मन्तु शीघ्र जल्दी भ्रातृज भाईकालड़का भतीजा मगल कल्याण शुम अच्छा ग्रह भ्रातृनाया भाईकीस्त्री भोनाई मगल्यक ममूर भ्रातभगिन्यो भाईबहिनि मगल्या कालागुरु सुगधितअगर मचिका शुभवाचक सुदरवात मज्जा वृक्षादिकोकागाभा चरवी भ्राति झुठासदेह मच पलगचढ़ां मचानाबैठनेका भ्राट चनाआदिभूजनेकापान खपरी । मजरि । ऊस हिजरा स्त्रीवेशकापुरुष भ्रस मजिष्टा मजीट भृकुटी लोधाधिसभोइटेढीकरना मजील. 9 भौंह [ कोपि कटहरकाकाट | मजु भ्रूण गर्भकाजीव स्वीकागर्भ वालक मजुल भ्रप अपनास्वरूपविगहना मजए। पेटारा पेरिया (म) मठ विद्यार्थियोंकास्थान भफर मगर राशि मड्डु यहाडमरू [थादि मकर पज,कामदेव कृष्णकापुत्र | मरिण पत्थरमरक्तहीरायादि मोती मकरद फूलकीमिठाई फुलकारस | मणिक बहापड़ा महकायादि मट मुकुट किरीट [ काडडा | मणित मंथनकीआवाज मगर दर्पण सीसा बकुलवृत कुम्हार मणियध हायकापहुँचा बनाई मष्टक पनमूग | मणी हीराथादिपत्थर मोतीयादि मटक मड अँडाका सरसोऊपरका मफूलक दती दाती पतला [भूषण मक्षिक मादी मन्दी मइन गहनापहिरनेवाला गहनामा मतीका मडप शिवालयादि या राजसूयादि महल मेघोंबामण्डल चन्द्रमााविर मगध राजावाफेरगर इनगाले देश सूर्य कयासपासनौरभीगमाटी मघान् इद्र वर्गकामहागनाधिरान मएडलक युप्रवाह गोलन्दाग मधुर दर्पण सीसा मएटलान पहननमार मडप मर । वाले महुवा १२१ शब्दार्थप्रकाश। (म) मंडलेश्वर बहुतराजावोंकाराजा मदिरा शराव दारू मंडहारक कलार मदिरावंचनेवाला मदिरागृह मदिराबनानेकाघर मंडित गहेनाबादिपहिराया शोभित | मदोत्कट मतवालाहाथी मंडीरी मंजीट मद्गु पानीकाकौवा पक्षीभेद मरी मंडूक मॅझुका मेनुक मद्गुर मगरा गंदुकपर्ण शोनापाड़ा औषधि मद्य मदिरा शराब मंडकपणी मंजीठ मधु चैत्रमहीना सहत महुवाकीमदिरा मंडूर लोहेकाकीद लोहसार दाखकारस दैत्य बसंत ? वृत्तका मतंगज हाथी नामजीवनीप्रीपधि. मतल्लिका शुभवाचक सुंदरवात मधुक जेठीमधु राजाओं के वंशकहने मति बुद्धि शक्लि मत्त जिसहाथी केमदबहताहो मतवाला मधुकर भरा मदिरामादिपीकर श्रीनन्द खुस मधुकम मदिरापीनेकीपरिपार्टी मत्तकासिनी । उत्तमगुणकीस्त्री मतवा- मधुम महुवा मतकाशिनी लीनहोसुखदेनेकोमत- मधुप भंवरा चालीसीदेखपढे | मधुपर्णिका संभारि नील लील मत्सर औरकीसंपतिनसहना ईपी | मधुपर्णी गुर्च गत्स्य मछली मधुमक्षिका ममाखी सहतकीमच्छी मत्स्यडी राम प्रसादा पोटरी मधुयष्ठिका ज्येटीमधु मत्स्यपित्ता कुटकी मधुर पीवापानी मिठाईबादि रस मत्स्यवेधन परीमारनेकीसी स्वादकीवस्तु पियवस्तु मत्म्याक्षी सोमलता मदेबी ब्राह्मी मथरक जीवक औपधि मत्स्यात्खग मचरीखानेवालापक्षी मयुरसा मुरहरी दास मत्स्याधानी मदरीयांधनेकापिटारा मधुरा सौंफ मधित पथादही विनापानीकामाठा मधुरिका बनसौंफ मद हाथीकामदयानंद खुशी अकार मरिषु विष्णु जिन्होंनमधुदत्यकोपारा मदकल मनवालाहाथी. [मद. ] | मधुलि भंवरा मदन कामदेव मैनफलकावृत्त धतूर मधवार मदिरापीने की चाल मदस्थान मदिराकास्थान कलवारवी मधुव्रत भंवरा मधुशिनु लालसहिजनकाद . (म) शब्दार्थप्रकाशः। १२० भ्रातरौ भाईबहिनि मंतु शीघ्र जल्दी भ्रातृज' भाईकालड़का भतीजा मंगल - कल्याण शुम अच्छा ग्रह : भ्रातृजाया भाईकीस्त्री भौजाई मंगल्यक ममूर भ्रातृभगिन्यो भाईवहिनि मंगल्या कालागुरु सुगंधितनगर 'भ्रातृव्य। मचिका शुभवाचक सुंदरवात मज्जा वृतादिकोकागाभा चरबी भ्रांति मंठासंदेह मंच पलंगबड़ा मचानावैठनेका भ्राष्टं चनाबादि जनेकापात्र खपरी मंजरि ? कुंस तुलसीयादिकीमंजरी हिजरा स्त्रीवेशकापुरुप मंजरी भृकुंस मंजिष्ठा मंजीठ भृकुटी मंजीर कोधाधिसेभौहटेढ़ीकरना भृकुटि मंजीत. भ्रातीय / भतीजा नपुर पैजनिया भू भौह. [कोपि कटहरकाकांट. | मंजु । मनोहर सुन्दर भ्रूण गर्भकाजीय स्त्रीकागर्भ वालक मंजुल भ्रंप अपनास्वरूपबिगड़ना मंजूपा पेटारा पेटरिया . (म) मठ विद्यार्थियोंकास्थान भकर मगर राशि मड्डु पहाडमा [यादि. मकरध्वज,कामदेव मद्युम्न कृष्णकापुत्र | मणि पत्थरमरकतहीरायादि मोनी मकरंद फूलकी मिठाई फूलकारस मणिक वडापना मटुकायादि मकुट मुकुट किरीट. [ काडंडा. मणित मैथुनकीआवाज । मकुर दर्पण सीसा पंकुलवृक्ष कुम्हार मणिबंध हथिकापहुँचा कलाई मकुष्टक मणी हीरामादिपत्थर मोतीयादि मटक मंड अँडाकाड सबरसोंकेपरका । मकूलक दंती दाती पत्तला. [भूपग. मक्षिक -मादी मच्छी मंडन गहनापहिरनेवाला महनामा मत्तीका) मंटप मंडफ शिवालयादि यज्ञ रानमूयादि मंडल मेघोंकामएडल चन्द्रमाकावित्र मगध राजावोंकवंशकहनेवाले देश सूर्यकयासपामजीकभीयरामाही मघवन इंद्र स्वर्गकामहाराजाधिराज मएडलक कुट कोढ़ गोलरदाग मंकुर दर्पण सीसा मएडलान पर तलवार यनमग मस्त्र 1 वाले महुवा शब्दार्थप्रकाश। (म) मडलेश्वर बहुतराजावोंकाराना मदिरा शराव दारू महहारक कलार मदिरावेचनेवाला मदिरागृह मदिरापनानेकाघर मडित गहेनाप्रादिपहिराया शोभित , मदोत्कट मतवालाहाथी मडीरी मजीट मद्ग पानीकाकौरा पत्तीभेद मदरी मक मंझुका मेक मद्गुर मगरा मडूकपर्ण शोनापाढा औषधि पय मदिरा शराब महकपणी मजीठ मधु चेत्रमहीना सहत महुवाकीमदिरा मडूर लोहेकाकीट लोहसार दाखकारस दैत्य बसत वृक्षका मतगज हाथी नायजीवनी औपधि मतल्लिका शुभाचक सुदरवात मरक जेठीमधु राजाप्रोके वशकहने मति बुद्धि अकिल मत्त निसहायोगदमहताहो मतवाला| मधुकर भरा मदिरामादिपीकर अानन्द रसुस । मधुकम मदिरापीनेकीपरिपाटी मत्तकामिनी ? उत्तमगुणकीस्वी मतवा मधद्रम महरा पत्ताशिनी लीनहोसखदेनेकोमत मधुप भारा चालीसीदेखपढे मधुपणिश सभारि नील लील मत्सर पारसीसपतिनसहना ईपी मद्यपर्णी गुर्च गस्य महली मधुमक्षिका माखी सहतकीमच्छी मत्स्यडी राव प्रसादा पोटरी मएपष्टिका ज्येठीमधु 'मत्स्यपित्ता कुरकी मधुर मीठापानी मिठाईयादि रस मत्स्यवेधन मरीमारनेकीसी स्वादकीयस्तु प्रियरस्तु मत्स्याती सोमलता पछी वाली मधुरक जीवक आपधि मत्स्यात्यग मछरीखानेवालापक्षी मरसा मुरहरी दास मत्स्यावानी मछरीयाधनकापिटारा मधुरा साफ मधित मयादही मिनापानीकामाठा मधुरिका पनसाफ मद हाथी कामद शानद खुशी अहकार महरिपु विष्णु जिन्होंनमधुदैत्यकोमारा मदरल मतवालाहाथी [मद ] | मधुलि भरा मदन वामदेव मनफलहाल धतर मवार मंदिगपीनेकीचाल पदस्थान मदिराकाम्यान रलवासी मगनत भवरा दुकान मधुशिग्रु लालसहिजनकाद मधल। (म) शब्दार्थप्रकाश । १२२ मधुश्रेणी मुरहरी औपधि मनुष्यधर्मन् कुवेर. [ कोभीखमादि मधष्ठील महुवाकापेड़ | मनुष्ययज्ञ अतिथिकापूजन भिखारी मधखवा जीवंतीमोपधि मनोगता मैनशिल मधूक महुवाकावृक्ष मनोजवस मच्छिष्ट मोम सहतकामैल मनोजर }पिताकेसमान मनोज्ञ मनोहर सुंदर मधूल महवाका पेंड़मौहा मनोभत्र इच्छा काम मालक पहाड़वपानीममहुवाकाड़ मनोरथ यांचा मनकीवात मधुलिका मुरहरी मनोरम मय मांझ कमर करिहॉव योग्य मनोहर } सुन्दर नीक अच्छा मध्यदेश हिमालयविध्याचलकामध्य | मनोहारिन् मनहरणकरनेवालीयांत कुरुक्षेत्रसेपूर्वप्रयागसेपश्चिमइतनेका| मनोहत मनकामाराजाना मनोभंग नामम-यदेश मनोहा मैनशिल. म यम स्वरभेद क्रॉचपक्षीकाशब्द मंतु अपराध विनाप्रयोजनमारनायादि मायदेश कमर करिहॉव मंत्र वात एकांतकेकरने योग्य वेदांग मध्यमा जिसस्त्रीकामथममासधर्महो देवादिसाधन मंत्र. [पढ़नेवाला वीचकीयगुरी मंरव्यारयाकृत् श्राचार्य वेदपढान म याह्न दिनकावीच दुपहर मतिन् मत्री सलाही म वासव महुवा औरदाखकीमदिरा दहीमथनेकीमथानी मधन् मथनी मेहड़वा दहीमथनेकापान मंथर धीराचलनेवाला महर मनम् चित्त मन दिल मनमिज कामदेव जोमनहीसे होताई मंथान मथानी मनस्कार मनकोसुखादिमेतत्परहोना | मंद बालस्य पालसी पूर्व थोदा ये मनाक थोड़ा छोटा चकफ दरिद्री शनिश्वरग्रह कावा मनित प्राप्तहोना जानना मानना मंदगामिन् धीराचलनेवाला महर मनीपा गुद्धि अकिल मंदाकिनी,आकाशगगा चित्रपट में धारा मनीषिन् बुद्धिमान पण्डित मदात मनु सायभुवमादि १४ मंन मंदार वल्पत मदार पकाइनि मनुज मदिर घर मकान नगर } मनई आदमी मनुप्य | मदुरा घोड़शाला अम्नरल मथ मनःशिला } मैनशिल लाज शर्म १२३ मर्कत वानर मर्त्य मनुष्य मय ऊट शब्दार्थप्रकाश। (म) मंदोपण कुछगरम मरुवक मैनफलकाड जंभीर मरवा मंद्र गंभीरशब्द गहिरीयावाज गलेकामध्यशब्द मर्कटक मकरा मकरी मन्मथ कामदेव प्रद्युम्न कथाकापेंड मर्कटी करंजभेद केवांच मन्या गलेकेपीछेकीनसनाडी मन्यु शोक शोच दीनता यज्ञ क्रोध मर्दन देंहमलना पैरचापनाग्राहि मन्चतर दिव्य७ युगकानितनेमें १४ । मर्दल मृदंगकेसमानवाजा मनुराज्यकरतेहै मर्मन् देहकेहड्डियोंकानोड़. [शब्द. मपटक मर्मर कपड़ामोरपत्तोंकाखरभरादि मयटक वन मूंग मर्मस्पृश मर्मभेदनेवाला. [चलना. मयटक मर्यादा सीमा हद्द अपने २ धर्ममार्गमें मल कानयादिकामल विष्टा गूपसीना मयु किनर देवजाति आदिसेमैल मयूप सूर्यको किरण किरण शोभा मलपित मैला जोमाफनहो मयूर पोरशिखाओपधि मोर मुरइला मलपू कटूंबरि पुकार मलयन सुगंधितसपेढचंदन मयूरक लटजीरा तुत्यांजन मोरचूद मलयू कठ्वरि मरकत कालीमणि पाचमणि मलिन मैला साफनहोना मरण मरना नाश मलिनी रजसलास्त्री मरिच मलिग्लन चोर उठाईगीर परीचि सपियोयमयमऋषि किरण । मलीपस मैला गंधा शुदनहीं मरीचिका मृगगल जोमदेशाटिकी मल्ल बांटाकेयुद्धमेचतुर पहलवान वालपानीसा मूर्यकीकिरणोंसे मल्लक कोईफ़लकीलि देयपड़ताई [पर्वत. मल्लिका मोंगरारेला मरु देश जहांपानीनहीं है मरुदेशका मल्लिकाक्ष कुदसाँवलारंगचोंचपरका मल्लिकारय । ऐसेसपेदहस मरुत वायुदेवता मष्टिगंधिन् कालागुरु मरुत् वायु हवा यायच्यकोणकेस्वामी मपि अस्परक्शागभेद पिंड का मपी मस्त्वत् इंद्र देवताकाराना मसि। जटामासी काजर स्याही मरन्माला शागभेद पिंडका मरीच कालीमिर्च ममी ममुर) मसूर - [ वन वनउर्द (म) शब्दार्थप्रकाश। १२१ [त्रिधारा. महारौरव नरककानाम मसूर महाशय उदारचित्त दयावान दयाल मसरविदला कालातेंदुकावृक्ष श्याम महाशद्री गोपालिनि ग्वालिनि मसरा मसूर अहीरिनि ममृण चिकना चीकन महाश्वेता , सपेदकुम्हड़ा मस्कर वांस बल्ली महाविल अाकाश मस्करिन् संन्यासी महासहा आबोली अंबिलोना मप- मस्तक शिर मूड़ महासेन स्वामिकार्तिक पार्वतीनन्दन मस्तिक मुड़ेकीचरवी शिरकागद महि पृथ्वी धरती महिका पाला जाड़ा मस्तु दद्दीके ऊपरकापानी तोर महिर सूर्य मह उत्सव उचाइ महिला सी सुखदेनेवाली महत् भारी चौड़ा फैला महिलाहया . श्यामविधारा मरती. बड़ी नारदजीकीवीणा महिप अरनासा भंसा. [बंटे भैंस. महला. स्त्रीनिससेवाउत्साहरदै महिपी पटरानी जोराजाकेसंगगहीपर महर उत्साह तेज प्रताप मही पृथ्वी धरती महाकंद लहसुन महीक्षित- राजा पृथ्वीकामालिक महाकुल बकुलमेंहुवा कुलीन महीध्र पर्वत पहाड़ महांग ऊंट महीसह वृक्ष पेंड जोपृथ्वीमंदात हैं महाजाली कदुईतोरई. | महीलता केंचुवा महादेव शिवजी महीसुत मंगलग्रह पृथ्वीकायदा महाधन बहुतमोल कायस्त्रादि धनी महीमनु मंगलदक्षिणग्रह महानद महादेव. [ बनानेका. महेच्छ उदार दयाल महानस पाकघर रसोई रोटीयादि महाबात वहरि आंधी मरण महामात्र राजावोंके मुख्यमाथी' . महेला स्त्री जाप्रसंगचित्त होती महायम ब्रह्मदेवमनुष्यपितृभूनये५ यज्ञ | महेश्वर महादेव सबकईश्वर : महारजत मुवर्ण सोना महोत चहाभारील शियनी कायल महारजन कुसुम महोत्पल कमान महारएप घड़ायन विकटजंगल महोत्साह । मुमकिलकामलोमीउन. महारानिक देवतोंकागण महोद्यम मना करना महेरणा शालग वृक्ष -- - . 7 . . . . १२५ शब्दार्थप्रकाश। (म) महीषय अतीस लहसुन सोंठि मातुलुगक विजौरानि मा लक्ष्मी मनेकरना निषेध मार ब्राह्मीमादिमागण माता म. मांस मास गोश्त कलिया हतारी पैदाकरनेवाली गौ ॥ मांसल पट वली मोटा ] मातृप्वोय। महतारीकीवहिनकालड़- मांसात्पशु व्याघ्र बाप मातृप्यत्रीय का मौसीकालड़का, मा मात्र स्वार्थमें संपूर्णतामें द्रव्यका मासिक मांसाचनेवाला प्रमाण थोड़ा कानकागहेना समय मांसी जटामासी में बृत्तांत माक्षिक,सहत. (कीकन्यामेवनियांसेहो. मागध राजाबाकेशकहनेवाले क्षत्री मात्रा थोड़ा बहुतछोटा अक्षरोंममात्रा प्रमाण राजावोंकमुख्यकामदारों में मागधी जूही पीपरि माद यानंद खुसी माघ - महीना माझ्य_कुंदकीवेलि फूलवृक्ष माधव लक्ष्मीकेपतिविष्णु वैशाखमहीना माठर सूर्यकेदाहिनेतरफ़यमराज माधवक महवाकीमदिरा, माहि पशिरा दीनता माधी सेवती वसतीवेलि मा वीक महुवाकीमदिरा दारू माणवक , वालक वीसलरकामाला मान आदर औरसेबड़ाविचारना त माणव्य, वालकोंकाबुद लडकोकाझुड राजूकीतील हायसे गटकर वरा माणिक्य रनभेद.मणिपुरनगरकाहुवा वरीकरना मारिणमथ सेंधर्वनमक मानव मनुष्य मातंग चांडाल, हाथी, मानस चित्त मने मानसरोवर मातरपितरौ , मातापिता महतारीवाए | मानसौकस हंस मानसरोवरकेवासी मातरिश्वन् वायु इवा मानिनी स्त्री जोडूसरीस्त्रीकेस्नेहकोमन मातलिद्रकासारथी mat अपनेप्यारसेकोपकर मातापितरौ मातापिता महतारीवाप मानुप मनुष्य यादमी काण्ड मातामह नाना माताकापिता मानुष्यर्क मनुष्योंकेसमूह आदमियों मातुल, मामा-माताकाभाई-धतूर - माया शायरी इंद्रजाल जिससेसर मातुलपुत्रक, धतूरकाफलमामाकालड़का उत्पन्नहुमाहे मातला माई:मामाकीस्त्री- 19 मायाकर गारुडी नट जालकरनेवाला मातुलानी माई भांग.. मायादेवीसुत शाक्यमुनि बौदभेद मातुलादि चित्रसर्प कौडिल्लाधादि मातुली मांई मामी मायूर मोरगाझंड' ir है - - मायु पित्त 1 २ . (म) शब्दार्थप्रकाश। १२६ मार प्रद्युम्न कामदेव मालूर । बेलकाड मारजित बुद्ध महादेव माल्य फूलआदिकीमाला मारण मारडालना वध घात माल्यवत् माल्यवान पर्वत दक्षिणमेरे मारिप थार्य श्रेष्ठ श्वसुर नाना मापपर्णी वनउर्दी मारुत वायु हवा मापीण मार्कच घमीरा उौंकाखेत उर्दधरनेकास्थान माष्य मार्ग अगहनमहीना रास्ता राह मास महीना मार्गण घाण वस्तुओंकाढूंढना याचक मासर,भावकामाड. [कासूतवतनख्वाह. मांगनेवाला भिपारी | मासिक महीना कीश्राद महीना मार्गशीर्ष अगहनमहीना मास्म मनेकरना निषेध मानित ढूंढा खोजकिया मार्जन लाललोधवृत्त संध्यामादिन माहिष्य } वैश्यकीकन्यामेक्षत्रीसेहो मार्जना पोछनादेड्यादिकासफाकरना माहेयी,गौ गाय जोपूजनेकेयोग्यहोती है मार्जार विलार विलौटा मितपच जोलोभसेंद्रिव्यकेलियेधर्मदेह मार्जिता दहीमधुशकरयादिसेवनाश्री पुत्रस्त्रीकोपीड़ादेताहै खण्ड मूरनि मित्र सूर्य मित्र जोशत्रुसेनमिलादी मार्तड सखा साथी सलाही माताड } सूर्य मिथस् परस्पर जैसेवाशिष्टकोहिल्य मार्दगिक मृदगी मिरदंगवाला मैनापरुणइनगोनोंकापरस्परविया माक दाखकीमदिरा दाखकारस हनही होताइत्यादि.[एकांतकीयात मापर्क आर्य श्रेष्ठपुरिया मिथुन जोड़ा स्त्रीपुरुष मर्दौरत मार्टि देहादिकापोंछनामादि मिथ्या (ठ असत्य मिथ्यादृष्टि नास्तिकता परलोकादि मालक नीमकाड़ नहींइत्यादिकहेना मालती चमेली जाईयाग्देशमें पाला शिरमपहिरनेकोफूलथादिकी मिथ्याभियोग झूटकहेना जैसेहमारे सौरु०चइतेहौइत्यादि.[मदिरापीताद पिंटिकामापधि मालाकार माली फूलमालावाला मिथ्याभिशसन, भूठपापलगाना जैसे मालादणक पानीकात्रण पानीकीपास मिशि धनसीफ जटामासी मिथ्यामति महामान मालिक माली मिशी। मात्नुपान चित्रसांप कोहिल्लायादि | मिश्रेया घनसाफ मिघिर जटामासी मिसि! शब्दार्थप्रकाश। (म) मुंडिन् नाऊ नाई हजाम मिषी मुद् आनंद खुसी हर्ष बनसौफ सौंफ जटामासी मदिरा मेघ चादर कामीपुरुष मिसी मुद्गपी पनमूंग मिहिका पाला जाड़ा मिहिर सूर्य मद्गर मोगदरलोहेवादिका पीढ मूत्रकिया पेसाबक्रिया मुधा वृथा व्यर्थ वेमतलब मीन मलरी राशि पुनि बौद्धभेद शाक्यमुनि थोडाबोलने मीनकेतन कामदेव प्रधुम्न वाला पि मुनीर शाक्यमुनि बशिष्टादि मीमांसक मीमांशापढ़नेवाला मुरज मृदग वाजा मुकुट किरीट मुकुट मुरमर्दन, विष्णु जिन्होंने मुरदत्यकोमारा मुकुंद विष्णु कुँदुर पालक मुरा मुरहरी तालीसपत्र मुकुर ऐना सीसा दर्पणी मुकुल कुलकूलीकलीफूलकी मुशली छपकी युपक मूस चूदा मुकुष्टक बनमूंग मुकूलक,दांती जिसकाबीजजमालगोटा । मुपा सोनारकीपरिया मुक्तकंचुक जिससांपनेकेंचुलिदोडीहो मुपित चोरीहुई चोराया मुपी सोनारकीयरिया मुक्तावली मोतीकामाला मोतीकाहार ! मुक अंडकोश पोता मुक्तास्फोट मोतीनिकलनेवालीसीपी सुप्कक मोखवृत्त मुक्ति,मोक्ष जिससेफिरजन्मनहो आदि. | पृष्टिबंध हायसेपहुतजोरपकड़ना मुख द्वार दरवान डेउदी पुंह भारंभ मुसल मूसर वलदेवनीकाआयुध मुखर बहावतकहा की जिसकेमुख मुसलिन् वलदेवजी कीनिंदाहो मुसली मसरि औषधि आपकी मुखवासन पानइलाचीआदि मुसन्प मसलसेमारनेयोग्य मुरूप भादिविधि श्रेए प्रधान उत्तम मुस्ता पुग्ध मूर्स कफ }नागरमोथा मुस्तक मुंड शिर मामुराना शिरपोटाना मुड बारसार फिरफिर मुंग्न मुहावना मुहुर्मापा बानमोलना शरचीतना मुडि नाज नाई. [बनाना. मुहूर्त १२वणकामुहर्त कशीदोषी मुंडित पूरमुडाये मुहावना शिरकेवाल पक गंगा जोलनमक मुक्ता मोती .
7 - (म). शब्दार्थप्रकाश। • मूह मूर्ख वेवकूफ TEET | मृगदंशक कुकुर कुत्ता मूत बंधा वांधाहुवां Minा मृगद्विप? मूत्र पेसाब सूजाक | मृगदृष्टिSITE: सिंह मूत्रकृच्छ पथरी मूत्रकारुजाना: मृगधूर्तक शियार. मूत्रित मृता पेशावकियारा मृगनाभि कस्तूरी [विकाकरनेवाले, मूर्ख बेवकूफ होजाती है. मृगबधाजीव, बहेलिया हनामार २ जी. मूळ जाफ चकर जोसंग्रामादिमे मृगवंधनी हिरनोंकाजील मूल मूच्छित मूर्खयागई मृगमद कस्तूरी मुर्छित सूचीमाना मोहहोना बढ़ना मृगया शिकारी शिकार जीवहिंसा मूसा बांधा बंधा- " मुगयु पहेलिया पूर्ती मूर्यापाई कठिन मजबूत पोढ़ा - मृगरोमण, हन्नारोवॉकेवलकँवलादि मूर्ति देह कठिनता पोदाई प्रतिमा मृगव्य शिकार मूर्तिमन कठिन कड़ा मजबूत ; : मृगशिरस्' मूर्द्धन शिर मूद खोपरी ! मृगशीर्ष । -मृगशिरानत्तत्र नक्षत्र मुर्धाभिषिक्त क्षत्री राजा श्रेष्ट मृगांक- चंद्रमा जिसमेमृगकाचिन्दई मर्या मूर्ती मृगादन -- नंदुवावाघ मृगाशन सिंह मूल वृत्तमादिकीजद नक्षत्र धन: मृगित दंदा पतालगाया. मूलक हिलसाशागभेदाः [कर्म मृगेंद्र सिंह दुर्गाजीकायाहन मूलकर्मन् , आषधीयादिकोउच्चाटनादि मजाः दंडकोपोंछनायादिसाफकरना मूलधन : जमा २ विनानमा सरीदकी | मृड... महादेवनी मूल्य मोल तनख्वाह खरीद मृदानी.. शिवजीकीमियापार्वनी मपक मिस चूहा मृणाल भसाह कमलनाल मुषा सोनारकीयरिया मृणाली छोटीकमजनाल, मूपिकपर्णी मुसिकनयोपधि भूपिन चोरायजाना चांरी. [ नक्षत्र मन मरा रोनगंगमांगकरवाना मि. मग हिरन हन्ना इंदना पशु मृगशिरा • नागृति भीसयापास्पिटांना मृगणा" हना पोजतगाना मनम्नान मरेकोलियम्नान मृतानहाना मृगवाणा मादेशमादिकीयान नासूर्य मृतालको नुवार पारि कीकिरणोंसेपानीमीदरापहनाई मुनालक , } मुरहरी 3 मृत् - माटी " T TH " T शब्दार्थकाश। मृत्तिका माटी मिट्टी मेदक मदिराकीखली मदिराभेद - मृत्यु मरना मरजाना मेदस् चरवी मासकापी मृत्युजय महादेव मन मेदिनी पृथ्वी धरती मृत्सा उत्तममादी तुवरि अरहरि मेदुर घनाचिकनावाटर ग्रहणकरलेय मृत्स्ना मेधा वृद्धि जिस्सेबहुतजन्दविद्याआदि मृदंग वाजा मेधि र ग पशुवाधनेका मृदु कोमल मुलायम मेय पवित्र शुद्ध मृदुत्वच् भोजपत्रकावृत मेनकात्मजा पार्वती मेनकाकीपुत्री मृदुल कोपल मुलायम मेरु सुमेरपर्वत मृद्दीका दाख मेलक सगम मिलाप मिलना मेला नील लील मृघ संग्राम लडाई मेप राशि लग्न मेढा मृपा भेंट गलत मृपार्थक अँटअर्थकीवात मेएकवल माल मेह ममेहरोगबहुमकारका मृष्ट 'साफकरना धोना मेक्नकन्यका नर्यदानदी जो मेकल मेहन लिग जिससेपुरुपपेशाकरताई मेखल कन्यका ऋपिकीकन्याहै मैनावरुण वाल्मीक मैत्रायणी अगस्त्यपि मेखला, स्त्रीकेव मरकागहेना कमरपट्टा मैत्री कन्वनी कन्जावाधनेकीवी परतला मज्य। मिरकेकाम मेष - वादरं मधुन --भोगकरना स्त्रीकासगवसयोग मघज्योतिस् विजुलीकी योति मैग्य पीके फूल गुडधनिया जलकीमदिरा मेघनादानुलासिन मोर पुंछार मोक्ष जिससेफिरजन्मनही गोखच मनामन् नागरमाथा मोय व्यर्थ वृथा वेमतलब मेघनिर्घोप बादरकागर्जना मोया पारि मेरपुप्प पानी जल कृप्याकाघोडा मोचक सहिजनकावृक्ष मेवमाला बादरोंके झड मोचा स्पावरकापड़ केला मेघवाहन इद्र मोटक लाडू आनद मेरावन् ग्राकाश मोरट जरखकीजर मेचक काला नीला मोरकपूछकाचिन्ह | मोरटा मुरहरी मेंदू लिग पुरुपकाचिन्ह प्रदा पोषक चोर उटाईगीर मेथि खंग पशुवाधनेका मोह मूर्दा जाफ कर यतम् } जिसकारणसे जिससे यतिन्। (म) शब्दार्थप्रकाश। मोकल कौवा यज्वन् जिसनेविधिसेयजकिया मौकुलि मौक्तिक मोती मौद्गीन |गकाखेत यति मौन नबोलना इद्रियोंकोजीतनेवाला मौरजिक मृदंगिक पखावजी यथा घरावरीस यथाकृपणतयाराम मौवी धनुपकाढोरा प्रत्यंचा यथाजात पूर्स जैसाहुयातसाही मौलि शिखा मुझट वांधेवाल यथातथम् सत्य यथार्थ जैसीयानतसेही मौष्ठा गठियोंकीमार घुसहाव यथायथम् यथायोग्य जैसाचाहिय मा हुर्त ज्योतिषी जोशी. यथार्थम् सत्य टीका सही. मौर्तिक ययाईवर्ण चार भेदिदा दिपकरकाम म्लिए,जोगातसाफसमझनमा भरर करनेवाला कीवात. [रुमादि. म्लेच्छदेश श्राचाररहितदंश काम यथास्वम् यथायोग्य जैसाचाहिये यथेप्सित जैसीइच्छा जैसीगंबा म्लेच्छमुग्य तांगा म्लेच्छोंकामुंह यदि दुसरे जो पक्षमे नक्षण उपनतेलयादि यहन्दा अपनी इच्छा किमीकयशनहोना (य) यंद सारथी रथवान् महाउत यकृत् पेटमेदाहिनी तरफमांसकापिंटसा यमगने देहसंसाधनयोग्य पर्म पक्ष देवनादि फुचेरादि फुरजी हिमानररना सत्वगनना पोरी यतकर्दम कपूर भगरु कस्तुरी कंग आदिबुवमनपरना दानादिवा ल पेशरि चंदन सपतुल्प-मिनावरलेप विचारसेलेनादेना संयम योगा पक्षधूप धूप रार पनि पग्दा बनान. [ग] यसरान् यतोरेराजाबर यमरान.मगोदर व उपमनोदिनवाने यक्ष्मन् सपोरांग पमानिता बमवानि यनमान यशादिकरनेवाला यमुना नदी यतुम् यजुर्वेद [दिरामरागमयादि. यमुनाभ्राद यमगन यम निमगदेवनाचारापूजनहोहबनाया अश्वमपोम्योडा यापुस्प विषा याशेप पावासीअन्नयादि यवकर नयापन परमसामान यांग याकामंग गलग्विादच्याटियनार मेलामा पदिय योग्ययनुगाप्यरत पचपन्न वांग बी यम यविष्ट छोटाभाई यष्टिमधुक } ज्येठीमधु शब्दार्थप्रकाश। (य) यवागू पतलाभात गोलाथी यादापति समुद्र यवस पास यादस् जलजीव जलकरहनेवाले यवाग्रज जवाग्वार यादसांपति परुण पानी के स्वामी यवानिका अजवाइनि यान जीतनेवालेकाशत्रुपरजाना राय यबास जबासा सवारीहाथीरथघोड़ामादि यानमुख रयादिकाागेकामाग स्थ यवीयम्। काथग्गा इत्यादि यन्य जवकाखेतघरनेकास्थान याप्य नीच अधम पापी यशःपटह ढकावाजा यशकावाजा याप्ययान पालकी मियाना पीनस यशम् कीर्ति यश । आदि निसनीचमनुष्यलेचले यष्टि लाठी कुवरी यामं पहर दिनरातकाअठवांभाग सं भय देहकाधर्म यष्टिमधूक यामि बहिनि कुलकीस्त्री कुलवधू यष्ट यजमान यज्ञकरनेवाला यापिनी रात रात्रि याग यज्ञ हवनादिकर्म यामुन सुरमा तुत्यांजन याचक } मांगनेवाला जांचक भिखारी यायजूक हमेशःयनकरनेवाला याव लाख महाउरु याचना मांगना भिताआदि याचित नित्यरयांचा रोजरमांगना ..यायक,जवबोदेकरकूटना गुरी.निश्चयमें. याचितक मांगनेसेमिला भिक्षाइत्यादि याचर जबतक संपूर्णता प्रमाण अवधि यावन् लोवान म्लेच्छोंकीचूप याचा भिता यांगना याप्टीक लहबाज डंडावांधनेवाला यानक होकमारनेकालेपाक्षल यातना नरककीपीड़ा नरककादुख यास अवासा यातयाम- भोजनसेवाअन्नमादि युक्त योग्य नोन्यायसेमाप्नद्रव्यादि खरावयनरासीमादि युक्तरसा रासशाग कोलंदण युग जादा दो सतयुगादि रयादि यातु- राक्षम निशाचर यातुधान रयत्रादिकाजवां चारहाय यात परस्परभाइयोंकीखी देवरज्यटयगकीलक जिमसेजुवामेवेलपंदकिये कीस्त्री देवगनीजेटानी जायजमेमम्बल यात्रा चलना जाना देवताकीपूजाका युगंधर जुत्रांवांपनेकारयादिमें जिस उत्माह प्राप्त होना मेयोवलरयादिककाठमेगांधनांय - .. योपा- स्त्री जिसमेवीर्यरुधिरईक हाही - - (य) शब्दार्थप्रकाश। युगपत् एकसाथ TEP योजन कोशका: योग युगपतंक कचनारकापेंड:- योजनपी मंजीट युगपार्श्वग जुबांकेपासबंधाकाठी. योजनबल्ली युगल जोड़ा.दो स्त्रीपुरुप: योत्र जुवांमेवांधने कीरस्सी जोता मा युगायुग- जुबांकेयागेजुवां जूडि योद्धृ] योद्धा वीर .. “युग्म जोड़ा दो स्त्रीपुरुप मर्द औरत :: योध युग्य सवारीरथहांथीयादि जुवाकेलेने योधसराव योदावोंकासंग्राममेशब्द- वालेवैलआदि योनि स्त्रीकाचिन्ह स्वीकाभग- युद्ध संग्राम लड़ाई - युध् योपित गर्भहोताहै. युवति । ज्वानस्त्री जवानारत मध्यन- | योपिता युवती विस्थावाली यौतक कंन्याकेविवाहमेदेना दहेज युवन् ज्वान जवान यांतब तौल घोटांतवर्ण जैसेव युवराज रानाकाज्येष्टपुत्र राजकुमार | यौवत ज्वानीस्त्रियोंकाझंड राज्यपानेकेयोग्य यौवन जवानी युवावस्था यूथ पक्षीपशुपादिकासमूह मँड (र). यूथनाथ बहुतहाधियोंमेयदाहाथी - | रंहर वेग जन्दी. [लगजाना. यूथप यूथिका जूही रक्त लालरंग लोहू कोशरि मिला यूप पार्थपिप्पली तूतकात यजस्तंभ रक्तक दुपहरी काफूल तांबा यूपक पानीकाफेना बंडाादि रक्तचंदन लालचंदन पतंगलकड़ी यूपकंटकं यज्ञस्तंभकऊपरगोलकाठ रक्तपा जोंक जोलोहपोलती है यूपान यजस्तंभकाागेकामाग , रक्तफला कंदुई यूपखंड स्तंभकाटुकड़ा रक्तमाल करंजवृत. [कमल. रक्तसंध्यक सामकेफूलनेवालालाल यूप जूस माड़- रक्तसरोरुह। = योक्त्र जवांवांधनेकीरस्सी रक्तोत्पल लालकमल योग कवच सामादिउपाय ध्यान संगम | रक्तांग कंपिला रोचनी श्रीपधि जिस: अपूर्वकीमाप्ति युक्ति योगकरना कालालअंगहों विष्कुंभादियोग विश्वासघात रतःसम राक्षसोंकीसभा योगेष्ट सीसाधातु जस्ता रनस् . देवजाति रासस योग्य ऋद्धि मृद्धि औपी.योग्य रक्षाकरनाशरणलेनागखभस्म - रक्षा । रजनि। रद दांत १३३ 'शब्दार्थप्रकाश। (र). रचित रताकिया पालाहुआ रथकार बढ़ई कारीगर वर्षशंकरजाति रचिवर्ग राज्यकरताकरनेवाले । रथगुठि रथकीरतालोहामादिसे रक्ष्ण रक्षा शरण रथटु तिनिसवृत्त. [चाक. रंकु चितलाहिरन रथांग रथकासवसामान पैदा कुम्हारका रंग रॉगा रंग स्थांगाइयनामक चक्रवाक चकहा रंगाजीर चितेर रंगरेज रथिक महारथीयादि रथकास्वामी रचना मालाआदिवनाना रथिन। रजक धोबी वरेठा रथिन् स्थपरचढ़केसंग्रामकरनेवाला रजत चॉदी सपेद रथकास्वामी राति चकबंतापधि हरदी स्थ्य रथकेघोड़ा. [कासमूह. रजनी रख्या गांवशहरकेभीतरकीरास्ता रथों रजनीमुख पदोप साम सायंकाल रजस् रजोगुण स्त्रीकारजस्वला धूलि रदनच्छद नीचेऊपरकेओठ रजस्वला मासिकधर्मवालीखी रंध्र देद विल रज्जु जौरी रस्सी रभर सानंद वेग रंजन लालचंदन रंजनी नील लील रण संग्राम लड़ाई शब्दकरना रमा लक्ष्मी रंडा मुसकन औपध रांइस्त्री रंभा केला अप्सरा वास रत: खीपुरुषका भोग चुतहोना रय -वेग जल्दी रतिरुनित मैथनकीभावान रल्ल के कंबल रतिपति कामदेव प्रद्युम्न व शब्द नावाज रन मणि हीरायादिपत्थर अपनीजाति रवण इमेशः शन्टकर मेश्रेष्ठ जसेवीरन पुरुपरन रवि सूर्य पूर्वकाग्रह रजगी पृथ्वी रशना,जीभ स्त्रियों के कमरकागहेना कपर- रनसानु सुमेपर्यत इत्यादि पहा कंपनीजंजीरयादि रमाकर समुद्र साकीखानि रश्मि किरण घोडेकीग रनि मुंडादाय यधामुठीसाहाय रस जिसकानीभाइलेनी नार? रथ वन संग्रामरेलइनेलापारय कपाय २. गपुर लारा नटु रथस्या रयोंकासमह यानरथ निक्तशृंगार? कारणा रमणासी जोसुखसेरमै . रसोनक लहशुन (र) शब्दार्थप्रकाश । १३४ अद्भुतः हास्य५ भयानक६ वी राजराज कुबेर' ! भत्स रौद्ररूपारा विपतेज गानमें राजलिग छत्रचामरादि रसगर्भ सजन [पतलमें ] राजवश्य राजावोंकेवशकामनुष्य रसना जीभ [जनीरादि | राजवत् जिसदेशराजाहो राजधानी रसना जीभ स्त्रियोंके कमरपट्टा कथनी | राजवृक्ष किरवारवृत्त रसवती रसोई राजसदन राजावोंकेमहल रसा पृथ्वी पाठामीपधि शालयोपधि | राजसभा राजावोंकीसभा रसाजन अजन राजसूय यज्ञकानाम जिसमेसवराजा रसातल पृथ्वीतल पाताल जीवनापड़ते है [ सपेदहो रसाल बारकाडऊख राजहस जिसहसकेचोचपैरलालहोंदह रसाला दहीशकरादिसेवनाश्रीखड राजातनी चार चिरौजी खिरनीखिनी रसित वादरकागर्जना [मूरनि ] राजादन | काड़ राजा अगर एकात जहाकोईनहो राजि पाति लकीर रहस् रहस्य एकातकाहुवाकर्म राजिका राई राका पूर्णचन्द्रमाकीपूर्णिमासी राजिल! निर्विपसर्प दुमहासाप राक्षस निशाचर हेतिपहेतिपादि राजील राक्षसी धनहरीयोपधि राजीव मदरीजाति कमल राज्याग राज्यकेअग७राजा मना- राता लाख महाउर राकर हिरनकेरोवाकापस कवल राज्य३ किलाप सनाना सेना परस्परोपकारी मित्र ७ राज राजा राजक राजावोंकासमूह राति गति हरदी राजकशेरु,नागरमोथा [यक्ष इन्द्र क्षत्री | रातिचर? राक्षस राजन् राजा मालिक स्वामी चन्द्रमा रानिचर. राजन्य क्षत्री राद्धात सिद्धात सिद्ध टीहोजाना राजन्यक क्षत्रियोंकासमूह राध शाग्यमहीना राजन्यत् मिसदेशकाराजाधर्मशीलसे राधा पिशाखानत्तन कृष्णसीमिया गोभितहो सुन्दरदेश राम बलदेवनी हिरनकीनाति काला राजवला प्रसारिणीयोपथि मनोहर मुन्टर श्रीमहाराजाधिराज रामनिन् रानानेवशयामनुष्य दशरथनन्दन श्रीरामचन्द्रजिन्होंने } शुराम सपेद । न १३५ शब्दार्थप्रकाश। (र) समुद्रमसेतुबांधरावणादिमारे पर-रुचक अंडाकाड विजौरानिंबू सोंचर नमक संचलखार रामट होगकापेड होग रु प्रभा छवि प्रकाश रामा स्त्री जोरमणमेचतुरहो। रुचि छवि मकाश किरण तेज शोभा रांभ ब्रह्मचारीआदिकासकाडंडा | रुचिर। सुन्दर मनोहर राल धूप रार राशि मेपादि धान्यादिकीराशि ढेर | रुज रोग वीमारी राष्ट्र देश नगर उपद्रव मरणादि रुजा राष्ट्रिका. भटकर्टया शब्द राष्ट्रिय राजाकासाला लिदित रोना. [सेघिरजाना. रासभ गर्दभ गदहा रुद्ध रकना रोकनानगरकीनदीआदि रास्ना रासनि रासशाक रुद्र देवतोंकागण श्रीमहादेव राहु,जोपर्वमैसूर्यचन्द्रमाकोग्रहणकरताहै. रुद्राणी श्रीपार्वती रिक्तक खाली छूछा धिर लोह मंगलग्रह केशरि रिक्थ धन द्रव्य रुमा खारीसमद्र सुग्रीववानरकीस्त्री रिंखण अपनाधर्मटजाना रेंगना या रुरु हिरनकीजाति रिंगणलकाकाहायपरसेंचलना शती बुरीवात दुष्टोंकीवात रिटि ,नंदी शिवजीकावल रुप गोध कोप रिपु शत्रु चैरी रुहा दूध रिष्ट कल्यारा अपगलकानाश रूप जोआखसेजानाजाय [करती है. रूपाजीवा, वेश्या जोअपम्पसेजीविका रिष्टि खड्ग तलवार रूप्य चादी सुन्दरता रहा अनादर अपमान रुप्याध्यक्ष रुपयेकामालिक रीण वहना दरकना [लोहेकाकीट इपित भिलगना गर्दा लागना रीति पीतरिघात लोकाचार बहना रेखा लकीर डांडी रीती पीतल रचनी निशीथ कपिलानीपथि रीतिपप्प जस्ता फूलधातु रचित घोडेकोगोलचवरदेना रुक्मतिक्रिया रोगकीटवाईआदिकरना रुक्म सोना रेणु धूरि गर्दा रेणुक मदरपोथी रुकमकारक सोनार रक्ष स्नेहनहोना रखा [पैरमादि रेणका पिधि रण पीडित व्याकुल टूदाकाठ हाथ | रेतम् धात पुरुपकावीर्य सैरव नरक (र) शब्दार्थप्रकाश। रेप निदित अधम नीच रोहिप हिरनकीजाति रेफ अधम नीच रमतर रौद्र रसभेद भयकर रेवतीरमण रेवतीकेपतिपलदेवजी रामक बिदवनमक वेड़ियालोन " वा नर्मदानदी रौहिणेय बलदेवजी युपग्रह धन सुपर्ण रौहिप तृणभेद हिरनीजाति रोक देद पिल रोग बीमारी [रामकरता है. (ल) रोगहारिन् वैद्य जोरोगकीदवाकरा-लकुच बडहर घोटाकटहर रोचन कालीसांवरीकावृक्ष लक्तक पुरानेस्रकेटुकड़ालता रोचनी निशोथ योपविभेद लक्ष वहानाकरना अपनारूपालपाना निशाना रोचिप्णु बहुतशोभायमान लक्षण रोचिम् छरि प्रकाश चिन्ह कलक देखना रोदन अमूसाना लक्षणा लक्ष्मणा। सारसपक्षीकी स्त्रीसारसी रोदनी जबासा रोदसी लल्पण धनवान शोभायमान श्रीराम चन्द्रकेभाई रोध लक्ष्मन् कलक चिन्ह श्रेष्ठ मुरय नदीमादिककिनारा कगार रोधस् लक्ष्मी,विष्णुकीमिया यापधि संपति धन रोधोवका नदी | लक्ष्मीवत् धनवान् धनी [छिपाना रोप वारा तीर लक्ष्य निशाना नहाना अपना रूप रोमन् सेवा देंहकवाल लगुड़ यांसादिकाडंडालाठी रोमथ पशुपाकापगुराना पागरिमारना | लम मेपादि लगा जामिनीदार नामिनिहा ला तुरत शीघ्र पिंडकायापधि इस रोप क्रोध गुस्सा छोटा मनोहर रोहिणी,सुटकी नमन गो चन्द्रमाकीस्त्री लरलय वणसरीजर रोहित लाल रोहमदरी हिरनकीनाति लंका राक्षमांकीपुरी रोहितक रोहीत लफोषिका पिंडात्रापधि रोहिताच अग्नि लजा शर्म [पाला लनाशील गर्माला लोकलाजररनं । रोदस्यौ पृथ्वीयाकाश रोमहर्पण रोपांख होना रोहिन् वृन 'शब्दार्थप्रकाश । (ल) लजित शर्मायगया लगुना लवा गांवकीगरगया केजभेद फलभेद लशून लद्दशन लता वेलि बाँडनेवालीगुर्चआदि का- लस्तक धनुषकामध्य कमानकावीच लाविधारा सेवतीयसतीलता पिंड-लाता लाख महार का मालकांगुनि लाक्षाप्रसादन लाललोध्र जिसकेमि- लतार्क हरीपियाज लानेसेलाखमेंउत्तमरंगहोजाताहै लपन मुख लांगल इल लपित वचन वात कदाहुवा लांगलदंड हलकाडंडा लब्ध प्राप्त लाभ लांगलपद्धति हलकीलकार वारु लग्यवर्ण पण्डित लांगलिकी करियारी लब्धानुन 'आमालाभहोना लांगलिन् नारियर बलदेवजी हरजोता लभ्य न्यायसेप्राप्तकीद्रव्य लांगली जलपीपर नारियर लंगन नाभितकलंगीमाला लांगुल। पूंछरोमयत पूंछ लंबोदर गणेशजी जिसकालंबापेटहो लांगूल लय,गानानाचवाजाकासमहोना. ताहो. लामा लाई खील गूंजेधान ललना स्त्री निसकापतिबहुतप्यारकर- लांछन कलंक चिन्ह दाग ललंतिका नाभितककोलंबीमाला लावा तोवी लावू ललाट मस्तकमाय . लाभ नफा फायदा ललाटिका मायकागहेना लामञ्जक तणजाति ललाम घोडोंकमाथैकीचित्रता पूंछ लालसा बहुतकृष्णा मांगना उत्कंठा घोडोंकेगहना श्रेष्ठता पताका লালা লা কথা ललामक,जोमालाशिरमेागेकोपडाहो लालाटिक जोनाकरकोपप्रसन्नता ललित त्रियोंकेगंगाररससेक्रिया सब जाननेकोमालिककामुददेखें जोनी- अंगोंकी सन्दरताकरना करकामनकरमकै लब नाजाकाटना बहुतथोड़ा अंश लाव लारापती बटेर लवंग लौंग लासक नाचनेवाला लवण सेंधवनमकयादि लासिका नाचनेवाली. [जाय. लवणकर लवणोद सारीसमुद्र लास्कोटनी मुलाग्नीजिसमेमाणछेदी- लेवन धान्यादिकाटना. [जाते हैं. लास नाचना लचित्र हँसिया जिससेखेतमादिकाटे | लिकच बड़हर घोटाकटहर १ . लिविकर। (ल) शब्दार्थप्रकाश। १३८ लिक्षा जवॉकायंडा लीख लेश बहुतथोडा लिखित लिसाहुवा. [प्रादिकरना. लेष्ट मट्टीकाटुकड़ा ढेल 'लिंगवृत्ति जीविकाकैअर्थजटातिलक | लेड जेंवना भोजनकरना लिपि लिखा लेलिहान सांप लिपिकर लोक, पृथ्वीतलादि मनुष्यादि स्वर्गादि लिपिकार लेखक लिखनेवाला लोकवधु लिपिकर सूर्य लोकांधव लिपी लिखा लोकजननी लक्ष्मीजी लिस लीपना लेपा लोकजित् बुद्ध विष्णमादि लिप्तक विपकावुझायावाण लोकमात लक्ष्मी लिप्सा वांचा लाभफीइच्छा लोकायत हरिताल निर्मतकाशास्त्र लिवि लिखा लोकालोक एकपर्वतकानाम लिविंकर लेखक लिखनेवाला लोकेश ब्रह्मा लोचन नेत्र अॉख लीढ़ भोजन खाना | लोचमर्कट लीला स्त्रियोंकीशृगारचेष्टा हॅसी केलि मोरशिखायोपधि विलासकाखेल खेल. [ लोटना.लोत्र चोरीकामाल यांस लुठित परिथमकैनाशार्थघोडेकोलोटना | लोध्र लाललोध्र लब्ध चांदाकरनेवाला लोभी लोपामुद्रा अगस्त्य ऋषिकीपन्नी लुब्धक चहेलिया थानक्षत्र लोप्त चोरीकामाल तलाप भैसा लोमन् रोवां देहकेगल ललाय लोमशा जटामासी लील चंचल नीस्थिरनर लन काटा खडित लोलप लम पूद्ध दुम लोनुभ बहुतणावाला प्रतिलीभी लेस देवता लोप्ट मट्टीकाटुकड़ा डेल लेग्वक लिम्बनेवामा लोष्टभेदन देलफोरनवामुगदर मोगरा लेपभि इंद्र देवतायैश्रेष्ठ । लाए हल लेमा पांनि रेमा लोह अगर लोहामधासानायादि लोचमस्तक ) मोरशिखाओपनि लता मकरी १३६ शब्दार्थप्रकाश। लोइल जोवातप्रकटनकई वनपुप्प तिलकाफूल लोहाभिसार महानवमीवविजयदशमी वजिन् इंद्र जोवनायुधराग्वते है कोशवस्थापनकरराजावोंकानीरां | वंचक धूर्त ठग सियार जनादिकर्म वंचित ठगागया। लोहित लाल लोह लालरंगकाहिरन | वंचक सियार लोहितक पद्मरागमणि |चंजुल तिनिसवृक्ष त अशोक वृत्त लोहितचंदन लालचंदन वट परगदकापेंड लोहितांग मंगलग्रह वरक वडापिटीबाटिका लोकायतिक चार्वाक निमती वटी रस्सी जोरी वैद्योंकीदवाई कीवटी लौह सोनागादिसबधालु वडया ब्राह्मणी घोड़ी (व) वडवानल जोअग्निकारूपसमुद्रमई व तुल्यता समता वडू चोदा फैला वंश वांम कुल गोत्र समूह पीठि वरिषर बनियाँ मोललेनेदेनेवाला वंशक अगर वणिक्पथ पनियोंकीराह पाजार वंशरोचना वंशलोचन पणिज्या रनियोकाकर्म वनियई वंशिक अगर वंटक तौलकेवांट भाग वक्तव्य निदित हीन कहनेलागक वत खेट दया संतोप विस्मय वलावना वक्त वक्ता कयामादिकहनेवाला वत्स हदय छाती पश्वा पुगादि वर्प वस्त्र मुख वत्सक कुरैया वक टेढा मंगलग्रह वत्सतर नयावल कलोर वक्षस् हदय लाती वत्सनाम विषभंद सिहियामंद चंक्षण जांघोकाजोडगाली वत्सर टोअयनकाएकवर्ष साल बंग रांगा वंगररा वत्सल स्नेहकरनेवाला वचन वातवाणी वत्सादनी गर्व वचनेस्थित वातकामाननेवाला वत्ता कहनंगला वदन पाव वदन्य, दानशुर बडादानी बलिमादि बन्न इंद्रकापायुध सहइकाइत हीरा वदान्य बहादानी मुंदग्याणीयोलने वननियोंप वक्ता कहनेवाला. वाला.] वनकाशन वननिप्प पद वचम् वाणी नचा घटावद मारडालना (क) शब्दार्थप्रकाश। वध्य मारनेयोग्य शिरकाटनेलायक धम चांतहोना कय मुखसेमलगिरना वंध्य जिसवृक्षमेफलनहो वॉझवृत्त वमथु, हाथीकी टकेपानीकेद वंध्या बॉझ जिसस्त्रीआदिकेगर्भभीनहो वमि) वधी चमडाकीयद्वी वाधी -उछार कय वमी) वयू पिडकानीपधि स्त्री पुत्रादिकीस्त्री वयस् वान्यादिअवस्था पक्षी बहू अपनीत्री वयस्थ युवा जवानी. [ काकाली. चन पानी बन जंगल झिरना घर वयस्था हर वरा महेछी सोमलता- वनतिक्तिका पाठाऔषधि वयस्य जवान तुल्यमवस्थाकासाथी वनप्रिय कोकिला वयस्या खसी साथिनि वनमक्षिका वनकीमक्खी डांस वर केशर लपेटना संदरभक्ति दमाद वनमालिन् कृष्ण विष्णु देवताआदिसेवर च्याइमपुरुष श्रेष्ट वन मुद्ग रनमूग | वग्टां हंसिनी वरैया वनशगाट गुवर घरटी हंसिनी वनसमूद,यहाजंगल. [कटहरयादिवृत्त. वरण वरुण शहरपनाह वाँसयादिकी वनस्पति जिसवृक्षमेफनविनाफलहो वेंटि गांवकेचारापास वरुणवृक्ष वन हुताशन वनकीअग्नि सेतु पुल किसीकार्यकावरण चनायु हिरन वगंड मुखकीपीड़ा भीतरकीपीड़ा वनायज,बनायुदेशकेघोड़े. [अनुरागहो. ) वरना चमहाकीरस्मीटांथीयादिकसने- वनिता स्त्री जिसमेग्रपनाथापअधिक वरद घरदेनेवाला. [ कीयाधी.] चनीपक याचक भिखारी वनीयक वरणिनी स्त्री जोपनिकीभक्तहो हरदी वनौकस् वानर वरांग माय मस्तक योनि चंदा वृत्तोंकायांदा परांगक दालचीनी तज यंदारु नमस्कारनित्यरकरनेवाला वराटक रम्मी जारी कौड़ी वन्या घनकासमूह वडाजंगल बरारोहा,मी जिमझापी देवाधरउत्तमही चपा छेद विल चरवी राशि मोटापरा गनीगादायादि वपन मुंडनकगवना यपुस् देह शरीर वराह शुकर यम ग्वॉवॉमादिकीमाटी उंचाई खेनम वरिवसिन मेवाकिया हल नदीकाकिनारा पिता रधुरि बग्विम्या मंत्रा सीसाधानु पग्विपिन मेवाकिया + है A । मुख्य श्रेष्ठ शब्दार्थप्रकाश। (व) वरिष्ट वॉवा वर्धमान अंडाकाड बढना वरिष्ठ श्रेष्ठ अतिश्रेष्ठ।- वर्धमानक माटीकासरचा चरी शतावरि वर्धिष्णु बढ़नेवाला वरीयस् । बहुतश्रेष्ठ. [वरुणवृतवर्मन् कवच बस्तर वरुण पानीमालिक पश्चियकेस्वामी । वर्वरी बबई वरुणात्मजा मदिरा सराव वॉर्मित कवचपहिरं वस्य स्थकीरता वर्य वरुथिनी सेना वर्या स्वयंवरकीखी रेण्य मुख्य श्रेष्ठ चर्वणा माची वर्कर बकरा युवापश. [समूह चर्चरी वई वर्ग जीवचरवजंगमवपिनमाणइनका वर्ष मेपवर्पना भारतर्पयादिदेशसाल वर्चस् रूप तेज विष्टा चंद्रमाकापुत्र चर्पवर बादशाहीखोजा वर्चस्क विटा वपी बरसातकीमतु वर्ण,ब्राह्मण क्षत्री वैश्य शूद्र हाथीकील वर्षायू वीकेका रंग स्तुति अतर यशगुणकीकथा । वर्षाची वर्मातीमझुकी वर्णक,सुगंधितउबटन चन्दनादिकालेप वीयस् बहुतवर्षका अतिवृद्ध वणित स्तुति बड़ाई, वर्षांपल आकस्मात्प्रथममयकवडेबूंद वर्णिन् ब्रह्मचारी वर्मन् देह प्रमाण अतिसुंदर मूरति तक वटईपत्ती पोड़कीटाप बलक्ष सपेट वर्तन जीपिका परताव बलज,खेत शहरकाफाटक अनाज संग्राम वलजा सुंदरी उत्तमती वर्तनी वलभि । चन्द्रशाला घरकामध्य महलके बत्ति मुगंधितउबटन वरी बलभी ऊपर वर्तिका वईपक्षी वाती वलय पहुंचाकागहना पहुंचीयादि वर्तिप्णु परतावकरनेवाला चलयित नगरादिनीवादिसचिरना 'वर्तुल गोल वलीक घरकेवादरलीभीविकीवानी- वमन् रास्ता प्राँसकापुट वलीपख वान.. [यादि. वर्ष सीसायातु वर्धक भारंगी चल्कल वधकि काठबनानेवाला बर्ड वतिगत वोन चाल वर्धन वढनेवाला कतरना वल्गु सुन्दर वर्तनि मार्ग रास्ता बल्क वृक्षाटिकावकला - - T चलरी । तुलसीआदिकीमजरी । 1 शब्दार्थप्रकाश । १४२ चल्मीक वेवारि वाल्मीकऋषि वस्ति नाभिकेनीचेयूत्रकास्थान 2 बल्मिक बाल्मीक वस्त्य घर माकान। चल्मिकि वस्त्र कपड़ा वल्लकी वीणा वखयोनि कपडावननेकेकारण दाल' बल्लभ कुलीनघोड़ा प्यारा मालिक ‘फल २ किरवा ३ रोमा ४ बल्लरि वसवेश्मन् डेरा तबू कपड़ेकाघर वस्न मोल दाम वही चेलि वस्नसा नसैं जिनसेनगसधै वल्लर सूखामास वह बैलकाकांध बन्लूर बहिसशक चीत वश काति इच्छा वह्नि अनि अाग्नेयकेस्वामी शनिया मणिमत्रादिसेचशीकरण वहिशिख कुसुम वशा हथिनी वाझ स्त्री गौ लड़की वा उपमामे विकल्पमे वरावरी निश्चय वशिक खाली छूछा वशिर वहीपीपरि समुद्रकानमक वास्पति उत्तमवार्तामचतुरबृहस्पति वश्य वशमेप्राप्त चाक्य तितमुचतपदसमूह वाणी वपद् देवतोंकेहविदेनेमें यथावपट्हद्राय वागीश उत्तमया मेचतुर बृहस्पति वपटकृत अग्निहोम वागुनी वचुकी वसति राति घर चागुरा हिरन फासनेकाजाल वसन वागुरिक हिरनफासनेवाला वस्त्र कपड़ा चरात प्रातु वाग्मिन् ,पतकहा पातमेचनुर नैयापित वसा चरपी वाङ्मुख वाणीकायारभ चतिर छूछ खाली [अग्नि किरण वार वात वाणी वसु देवगण गूमा रुई मदार द्रव्य रत्न वाचयम मुनि जोमानता वमुक मदार सॉभरनमक वाचक गासवेगन्द यमुत्र कृष्णकपिता वाचस्पति बृहस्पति वसुधा याचाल पहावना हामी यमपरापी वाचाट निदिवर्तिकरनेवाला यमुपनी वारिक मशीयात वमा मदार साँभग्नमा घागोयुनिपटु नयायिक पानीम चतुर वस्तु चीज गोईरस्तु पान वापस बोनपेय: यश . - . नांदा इच्छा वापि वापी शब्दार्थप्रकाश । (व) वान शूखाफल- [स्त्रीदोनोंत्रम्हचारी. वाजिदंतक-रुसाह रूस वानप्रस्थ महुवा आश्रम जिसमेपरुप- वाजिन् पक्षी घोडा वाण वानर वंदर वाजिशाला घोड़शाला चानस्पल जोवृक्षफूलकरफल वानायु हिरन हन्ना वाटी गृह वाटिका कमर वानीर वंत पाट्यालका बरियारी वानेय केवटियामोधा वाढव वडवानलं ब्राह्मण बहुतघोडी वापदंड वस्त्रविननेकादंडा वाडवानल समुद्रकी अग्नि वावली वाडव्य ब्राह्मणोंकासमूह बाणि सूतकाविनना:- वाप्य फूट बाणिज बनियां रोजगारी चाम मनोहर उलटा कामवांया मेय राणिज्य बनियांककर्म बनियापना स्त्री केकुच श्रीमहादेव विगडाशनु पाणिनी नाचनेवालीदती मतवाली- वामदेव महादेव एकपि वाणी,भापा वोली सरस्वती.चतुरस्त्री. वामन दिग्गजकानाम छोटा वरना बात वायु हवा विष्णुकाअवतारवलिछलनेवाला चातक' शनपर्णीऔपधि वामनूर बेंबौरि जिसमेवहुधासपर इतई बातकिन् वादी वातरोगवाला वामलोचना स्त्रीसुंदरनेवाली पातपोथ छूल डांख. [भद. वामा मनहरनेवालीस्त्री वायुकेसमानभागनेवालामृग वामी घोड़ी वायदंड कपड़ाविननेकादडा वातरोगिन वादी वाईकारोगी वातायन झरोखा खिरकी वायसाराति उल्लू उरा वाताय हिरन वायसी काकमाची केवइया वायसोली काकोली वातुल वाईसेवहुतपीडितमनुष्यादि यायु हवा वात्या चातकासमूह बहुतबाई वात्सक पबरोंकासमूह वार पानी समूह अवसर दिन वादित्र वार वारण हाथी पातप्रमी बातमृग वायस कौवा - वाति वायु हवा चानूल वायमख अनि आगि. वाजा वाय केला (व) शब्दार्थप्रकाश। वारणबुपा वालपत्र,खैर कत्था [दियावेनीपानश्रादि वारसा वालपारया वालोंकागहेना कटिया व पारवाण सग्रामवस्त्रवख्तरमादि वालहस्त रोवादारपूछे वारमुख्या,जिसवेश्याकागुणसेादरहो | गलुक मुसधरमोपधि सुगंधद्रव्य वारस्त्री वेश्या चालुका बालू वाराही वाराहीकद देवी वाल्क तौमरख वकलाआदिकवस्त्र वारि जळ पानी वाल्मीक ऋषिकानाम वारिद , मेघ पानीदनेवाले बाबदूक बहुतबोलनेवाला वारिपर्णी जलकुभी पुरइनि वावृत्त बरणकरना वारिप्रवाह,पहाडोंके झरना पानीकाबहना वाशिका रूस रुसाह वारिवाह मेघ वादर वाशित पक्षियोंकाशब्द वारी हाथीधनेकीशाला पीलखाना | वाशिता स्त्री हथिनी वारणी मदिरा पश्चिम गडदूर्वा पास सभाकास्थान निवास वात रोगनाशहोना निर्बलता यथार्थ | वासक रुसाह लोककीवातकहना वासगृह घरकामभ्य माँझपर वार्ता जीविका वृत्तात बतकहाव | वासती कुदभेद सेवती थमतकीवेल वार्ताक वासना विचार भावना -भॉटा बैंगन पासयोग मुगधकरनेकायन छानाचूर्ण यावह कामारधी कॉवरिलियेधान्य चासर दिन यतवारयादि ७ वासव धनिष्टानक्षन इद्र लकरचत्तना वासस पर कपड़ा वार्षिक चुढ़ापा वृद्धोंकासमूह बुढाना पासिका रूम साह वाक्य वृद्धापा वृद्धोंकाझुड वासित सुगधितसेवसाईवस्तु पुप्पादिसे वापि व्याजम्यानेवालेमहाजन गसिता स्त्री हथिनी वाधुपिक वासुकि नागराज वर्मण कवचारासमूह यसतरपीरोंगी| वासुदेव चमुग्वेपुरश्रीरप्पनी वार्षिक पायमाणापिय रामायाम गसू कुमार्ग हसूलपका वास्तु घरवीपृथ्वी वाल गिग्गल लडका वास्तु चालधि रोवाँसहितपूछ ययुग चाम्नूक वार्ताकी [वासित - "4 - . 1 - - T r T शब्दार्थप्रकाश। (व) वास्तोप्पति इंद्रा THI विक्रपिक वचनेवालाr - वास्त्र वखतेओडायास्यादि विक्रांत शुर वीर वाह घोडा बारहपनकावाट विक्रिया विकारण बाइदिपदसा. विक्रेत वचनेवाला वाहन -सबसवारी विरूष शोकादिसेव्याकुल. वाहसः अजगरसांप विताव छोक" वाहित्य .. हाथी कंमस्तककेतरे. विरय) वाहिनी सेना सेनाप्रमाण बहतीनदी, विख्त नकटा जिसकीनाककटीहो, वाहिनीपति सेनापति विखु- वि पक्षी चिरैया विगत तेनकानाश तेजहीन विगतार्तवा जिसस्त्रीकारजस्वलावंददो विशति वीस विकंतक स्वावृक्ष वेहली विन नकटा [लड़ाई चौडाई विरुद्ध विकच फूलाफूल विग्रह शरीर पराईराज्यकोपीडादेना; विकर्तन सूर्य. [महो. विस वैश्वदेवसेवचामन्नकाभोजन विकलांग , जिसकास्वभावसेकोईअग | विघ्न विघ्न अच्छेमेबुराईहोना विकस्वर प्रकटनेवाला विग्नराज गणेशजी जिनकेपूजनसे विका विघ्ननाशहो , विचक्षण पण्डित विकसित फूलकाफूलना विचयन इदना खोजना पतालगाना विकस्वर प्रकटनेवाला विचिका खाजु विकार स्वभावसैउलयाहोना विचारणा प्रमाणोंसेनिश्चयकरना विकासी विचारित विचारमा प्रकटनेवाला विकासिन् विचिकित्सा संशय सदेह विकिर पक्षी विच्छक विकिरण। सुदरघर रानावोंकामाकान विच्छर्दक विकीरण। विच्चाय पत्तियोंकीबाया विकुर्वाण प्रसन्नचित्त खुसीपन विजन एकांत जहाँकोईनहो विकृत वीभत्सरस रोगी बीमारिहा विजय जीतना विकृति विकार छभेट. - [नाम. विजिल) विक्रम रहुतपराक्रम प्राति राजाका विजन चिकना साडीसहितटहीमादि विक्रय बेचना विजल M विकसामंजीठ मदार wa . 21 1 - । (व) शब्दार्थप्रकाश। विज्ञ चतुर प्रवीण विदारी कालापिदारीकद विज्ञात प्रसिद्ध विदारिगंधा सरिवनीपधि विज्ञान मोक्षविनाऔरशाखमेवान विदारीगधा विज्ञानिक चतुर पवीणा विदित प्रसिद्ध अंगीकारकिया प्राप्त विद विद्या बनियाँ विदिश दिशाबोंकामध्य विदिश विट धूर्त नमकभेद मूस खैर [कावुक. चिदु हाथी के कुभकामध्य ' [ भाई विटंक,महलआदियोगपतियोंकेकालकेयर विदुर त जाननेवाला राजाधृतराष्ट्र विटप वृत्तकीफैलाई डार पत्ता धूर्ती- विदुल जलत विटीपन्. वृक्ष पेंड [कामालिक.] | विद्ध छेदना छेदागया विटिका फोदा फुरिया विद्धकर्णी पाठगोपधि विट्खदिर दुर्गधितखैर विद्याधर देवजाति विट्चर गॉवकासूकर विद्युत् विजुली [ममेहकीपिटिका विड लवए विडंग चायविडंग विद्रधि पेटलादिमेफुनसी शिरकर्ण विडाल बिलार खिलौटा विद्रव भागना पलायजाना वितस मृगपतीकेजाल विद्रुत पीआदिकापतलाहोना [ मालकांकुनि वितहा पातोंकामगदा विद्रुम मुगा वितथ झूठयोलना | विद्रुपलता नलीनामगपद्रव्य पारी वितरण दान देना विद्वम् पण्डित आत्मज्ञानी बुद्धिमान वितदि विद्वेष वैर वेदी प्रागनमेबैठनेकास्थान वितर्दी विधवा रांदखी जिसकापतिमरगयाहो वितस्ति वित्ता वारहोंगर विधा मोल तनखाह विधान प्रकार वितान चदोवा यज्ञ शून्य धीरा ऋद्धि हाधीकाथन पितुन पिसखपरियाशाग विधात ब्रह्मा विधान करनेयोग्य पितुनक भूम्यामलको विसम्पपरिया विधि ब्रह्मा पूर्वकैकर्म भाग्य धर्मशास्त्र धनिया आँसकामंजन विधिदर्शिन् यमकर्मकेदेखनेगाले जिस वित्त द्रव्य प्रसिद्ध विचारकिया सेरिगड़नहीं [कपूर राक्षस विदर दुइहोना फटना विधु विष्णु चन्द्रमा वायव्यकाग्रह विदल नॉसकेपत्ताकारनापान विधुत त्यागविया विदारक सूरोनदीतालमेजोगड्ढाकिया विधतुद राहु जोचन्द्रमाणेदुखदेसाहै पिधुर थत्यतवियोग जाय चूहागड्ढा है - - R -. [मलय. . . शब्दार्यप्रकाश। (व) विधुवन विपुल विस्तीर्ण चौडा- कॉपना विधूनन m. 'विपुला पृथ्वी विधेय वातमाननेवाला विम ब्राह्मण चारौवर्णमेप्रथम विनयनाहिन् विमकार अपकीर निदा विना वर्जना मनाकरना नाग विपकृत अपमानकिया विवर्णकिया विनायक श्रीगणेश बुद्ध, गरुड़ : विमकृष्टक दूसा विनाश - नदेखपड़ना,मरना विप्रतीसार - पश्चात्ताप पछिताना : विनाशोन्मुख पका, मरनेकेसमीप... विषयोग : अपनेप्यारेकाअलगहोनार, विनीत जोपोडासुंदरतनेसेचले नम्र विमलब्ध जोठगाजायः। [वियोग.] शिक्षित. विमलभ छलकीवात वियोग विनीतक,परम्पराकीसवारी पीनसश्रादि विप्रलाप परस्परविरोधकीवात विदु बूंद छिटकी विमश्निका शुभाशुभजाननेवालीस्त्री. 'विंध्य विंध्याचलपहाड़ विन्न विचार किया प्राप्त विभुष पानीकेबूंद. विप्लव मनुष्यकालोटनाआदि उपद्रव विन्यस्त धरना मिला मोटा विप्लप पानीबूंद विपन शत्रु वैरी विवुध. देवता विपंची वीणा जिसमेवारहोते है विभव धन द्रव्य विपण वेचना मोलदेना विभाकर सूर्य जोमकाशकरते हैं विपणि । दुकान बाजार वनियोंकीराह विभावरी रात्रि विपणी सराफा वनाजा इत्यादि विभावसु अग्नि सूर्य विपत्ति आफत परेशानी विभीतक वहेर विपय कुराह खरावरास्ता विभूति ऐश्वर्य भस्म विपद् आफत विपर्यय विभूपण गहेना. [ लास भ्रांति शोभा. विपर्याय उलटाहोना विभ्रम नियोंकीशृंगारादिचेष्टा वि. विपर्यास विभ्रांज अतिशोभित विपश्चित् पण्डित विद्वान विमनस् व्याकुलचित्त विपाट् पाशमोचिनीनदीवशिष्ठजीकी विमय बदला व्यवहार विपादिका बेवॉई पैरफटनेकारोग विमर्दन केशरियादिमलना रिपाशा पाशमोचिनीनदी विमला यूहर विपिन यन विमर्श विचार भावना वासना - .
विसत्तर फैलनेवाला 5 1 1 Tm T 1 - . 1 - (७) । शब्दार्थप्रकाश। १५० : वीणा वाजा विसमर || वीणादंड चीणाकादंडा . विस्तर, शब्दकरतेफैलना वीणावाद वीणावजानेवाला न विस्तारा । चौडा फैलावृक्षकीशास्त्रां बीता संग्रामादिके अयोग्यहाथीघोडा पत्तोंकासमूह वीस मृगपक्षियोंकाजाल - विस्तृत' फैला चौड़ा । वीति घोड़ा। विस्फार धनुपकाशब्द" वीतिहोत्राथमि विस्फोट फोड़ा'फुरिया चीथी पॉति मार्ग विस्फोटा। वीधः स्वभावनिर्मल विस्मय, आश्चर्य ताज्जुव, अद्भुतरस' वीनाह, कुयाँकेमोहराकापत्थरयादि विस्मयान्वित परायेधर्मादिमेआश्चर्य वीर रसभेद जिसमेउत्सायदै, शर, प्राप्तहोना वीरण-तृणभेद तृणभेद --- विस्मृत, भूलना वीरतर विस विनापकमांसमादिकीदुर्गंध वीरतरु अर्जुन वृक्ष विसंभ विश्वास वीरपत्नी वीरकीस्त्री विससा जरा बुढ़ापा वीरपाण } संग्राममवीरॉकामयपीना पिसाव भातकामाद पदेना पिहग वीरभार्या धीरकीस्त्री विहग पक्षी चिड़िया वीरमात् वीरपैदाकरनेवाली विहगम) चीरवृक्ष भिलांघॉ [आदिक्टेप३हों विहंगमा ITI वीराशसन जिससंग्रामभूमिमेहाथी' रिहगिका वहिंगा बेटी | वीरसू वीरकीमाता विहसित मध्यसी सहारेमेसना वीरटन् जिसरायग्निहोगनाशाहो'" रिहस्त शोकाटिसेव्याकुलहाना, वीणि सर शुन्यदेश - विहापित त्याग दान | वीरुध् । पैनीहुईवेलि - पिनायस प्रकाश वीर्य बहुतसमर्थतासे उत्साह पुरपका विहायस् अाकाश-पक्षी- वीर्य तेज प्रभाव समता पल विहार परीचाल -- वीपर ध्यानमादि रास्ता यांमा विहल व्याकुलतारोगात्रभग हक मंडहा भैदिरा मूत चा पीमाश पकात प्रकार वृष रूप अनेकपदार्थसीप धूपयर वीचि लहरी वृषण स्टायडिन, 1 - , 1 r है क - शब्दार्थप्रकाश। (क) वृक्ष पेंड़ उद्धाजीव ऋणदेव्याजलेनेवाला वृतमेदिन् कुल्हार वृत फलफूलनहोनापेंडमें। वृतरुहा वादा कोई वृक्षपरकीलि हद समूह झुड वृक्षाटिकामत्री वेश्याघरकेपासकी वृदभेद समूहभेद वाटिका [नाताहे कल्हार दारक देवता रूपवान श्रेष्ट वृत्तादनी वादा जिससेवृत्तखराबा वृदिष्ठ , बहुतवृद वृचाम्ल चक ८ अश्विक कर्कट वृक्षभेद वृषिकराशि वृजिन पाप कुटिल टेडा केश खून खाल ऊनखानेवालाकिरवा विच्छू टत परराकरना । प - राशि-लग्न धर्म सुकृत म्म वृति लपेटना उत्तमभक्ति निससंदेवता रुसाह पभोपधि बैल वली- T प्रसन्नदोवरदेय नगरादिकपास बैल मूस श्रेष्ठ पास वासादिकीबेटि पीटा. पण अण्डकोश पोता --- वृत्त गोल वरण श्लोक चरित्र व्यतीत वृपदशक विलार वृचात वातीलोककी प्रकरण प्रकार पवन श्रीमहादेवनी सपूर्णता रापन इन वृत्ति जीविका आचरण सूत्रकाविवरण | वृषभ बैल वृत्र अधकारनासुर शत्र मैघ उद्र पर्वत वृपल शूद्र [फीदच्छाकर वहन .इद्र जिन्होंनेटना मेरमारा. पपस्पती जोखीयोयलासमानभोग न्यां 'निरर्थक अविधि व्यर्थ वृपा इद्र मुसकनोपरि [पार्वती वृद्ध शिलाजीत ही पडित पाकपापी जीवीं शतापरि लक्ष्मी उद्धव बुढापा सृपाकाप । विष्णु महादेव वृद्धढारक रिपारात्रीपधि , [ नाभि वृपी ब्रह्मचारीआदितपस्सीकाप्रासन इदनाभि, तोदारा बानाटिसपाही दृष्टि मेयरसना वृदयम् इद्र वृष्णि किरण येहा रामद वृद्धमय पढागासह वंग,जार विष्टायादि सेनिालना रहना पृदा पफेयालरीसी युदिया वेगिन् तुतं जल्ली गुढे रद्धि बढना वृद्धि णि नागिनमेलवाल दिजीविका पिपानापाना माही येणी श्रीदेवनालन निरणी नानि वृद्धिमन् इटा उत्पन्न पड़ा नर्मपैश्यान रदोन मुद्धापन वेणु वाम F . । AR- 7 . - वैकक्षक वैकक्षिक } तिरछायातीमेपड़ामाला 1c (व) शब्दार्थप्रकाशः। १५२ वेणुका चावुका कोडा: EEEE ] वेश्मन् घर माकान वेणुध्म वंशीवजानेवाले वेश्मभू घरकीपृथ्वी ज्ञान वेतन तनखाह मोल SE | वेश्योपतुरिया IF ITREE वेतस त | वेश्याजनसमाश्रय । पितुरियाकाटोलाई तस्वत् जहाँबटुंतवते हो। का वेप: भेपवनाना' वेताल भूतबैठाहोनिमुमे वैताली | वेपवार मसाला FIFE वेत्रवती नंदी वेतवानदी - | वेष्टित लपेटा वेद ग यजु सामायण बेप्या - पतुरिया : TE. FiF वेदांतिन : वेदांती ब्रह्मजाननेवाला वेसवार मसाला i; वेदना नुिभव FIRF हत जिसगाकाबलकेचढ़नेसेगर्भ गिरे वेदि यज्ञकेलियेपृथ्वी TE वैपादपुरण निश्वयार्थ अलगकहनेमे चेदिका अांगनमयट का चदी गा वेदी यज्ञकीपृथ्वी वकत वावृत्त वेध वैधना गुसेड़नागोFREE वैकुण्ठ 'विष्णु विष्णुलोक धनिका सुम्मी मरिणादिवंदनेकी | वैकृत चीभत्सरस वेधमुख्यक कचूर FFE 3जनन गर्भसे निकलवालादशवांमहीना वेधंस्ः ब्रह्मा विष्णु पण्डित ...वैजयंत इन्द्रकाघर वेधित- छेदना | जयंतिक निशानवाला पताकादार वेपंयु' कांपना | वैजयंतिका जैतिवृत्त चमन । कपड़ाबिननेकाडंडा (# !!"PT. जयंती वजापताका.. वेला समुद्रकी वाढि समय बिनालेश: वैज्ञानिक चतुर प्रवीण Fमरना रोग सीमा पाणी' Tr|र्णय यांसकाफल चांसकासाठी वेल्ल चायविडंग वणविक वंशीयनानेवाला यांमुरीवाला चेल्लज मिर्च- चणिक वीणायनानेवाला वेल्लि : पेलि वैणक चायक कोड़ा वेलित टेढ़ा कुईकांपना वतंसिक मृगपतीयांधनेफांसनेपाल वंश बेश्योंकामुघल्ला घर भेपवनाना मांसवेचनयाल चिड़ीमार शतं छोटाताला वैतनिक - चाकर मैनर तनखादार पेशवार शागतरकारीमादियनानका वैतरणी नककीनदी. [वर्नशनः मसालाहरतरहकापीसा तालिक . राजावासाम्नुनिकरकंनगाः 0 -- . . ।
t व्यवन / अंडका . उलटा विपरीत 3 व्यय -- खर्च. शब्दार्थप्रकाश। (व) वैदेहक ब्राह्मणीमेवनियांसपैदाहो व्यंजन चिन्ह दाढीआदिपुरुपकी स्त्री बनियाँ रोजगारी केकुचमादि गोद ककारादि भो वैदेही पीपरि श्रीरामकीप्यारीजानकी जनपदार्थ वैद्य दवाकरनवाला व्यक बंधमाद रूस रुसाह वैधात्र सनत्कुमारइत्यादिब्रह्माकेबेटा व्यत्यय वैधेय मूर्स वेवकूफ व्पत्यास चैनतेप, गरुड़नी व्यथा पीड़ा वाधा वैनीतक - परम्पराकीसवारी व्यथ वेषना छेदना चैमात्रेय,वैमानभाई माताकीसौतिकापत्र व्यय कुराह वरीरास्ता वैमेय . बदला व्यवहार लेनदेन [ लक्षण पीड़ा. वैयान बायकेचमडासमढारथ पलीक चुरीगत विनमयोनन वि. वर विरोध दुश्मनी व्यवधा छायजानार चरनिर्यातन । वरनिकारना दुश्मनी व्यवसाय बहुतरल वैरशुद्धि छोड़ना व्यवहार विधाद ऋणलेनेदेनेकीवार्ता वरिन् शत्रु दुश्मन व्यवाय मधुन स्त्रीपुरपकासंयोग वधिक कामारथी कॅचरिहा व्यसन विपत्ति नाशकोईवस्तुका गि- वैवस्वत यमराज रना अमगल किसीकाममेलगना वैशाख महीना मयानीदद्दीमयनेकी मदिरापीनायादियुरेकर्म कड़ीवात वैशेपिक सप्तपदार्यवादी वैश्य बनियां व्यसनात व्यसनसेदुखी वैश्रवण कुबेर व्यस्त व्याकुल जलदा वैश्वानर अनि व्याकुल,शोकादिसेअपने कामकोभूलना वैसारिण मदरी व्याकोश। वापद देवतोंकोहव्यदनमे चार उत्तरपदमेश्रेष्टार्थ जमे प्रकट वद्धिमान व्यक्ति अलग विचारना रामपुरुपच्याम व्यग्र प्राकुल बहुनकाममैचित्त व्यामनर मगधरन्तुरारनाम व्यंगा जिसस्त्रीकाअंगकुछकमहो व्याप्रपाद वृतपिशेष व्यनन पपा ना व्यामन्य अडाकाड व्यना हायसादिमेमनी ताहना व्यापार भरदापनी . अभाग्य पाप . व्याकोप फूलाफूल व्यान व्यक्त १ (व) शब्दार्थप्रकाश। व्याघी भटकटैया. [छिपाना | व्योप सॉठिमिर्चपीपरि व्याज कपट वहाना शउता अपनारूप वूज समूह गोशाला रास्ता च्या साप वाघ पूज्या धर्मना यात्राकरना व्याडायुध वाघनखसुगंधद्रव्य चूण घाव व्याध बहेलिया मृगामारनेवाले बूणकार्य भिलॉवा व्याधि फूट रोग बीमारी व्रत उपवास व्रतकरना व्याधिधात किरवारवृक्ष चूतति लता वलि व्याधित रोगी बीमार तिन,बूत करनेवाला यज्ञकावतावनेवाला व्यान वायु सबदेहमेंचलनेवाली वृश्चन,बसुला वसुली काटनेकाहथियार व्यापाद परायायैरविचारना चात समूह सुड व्याप्य फूट [वावा च्याम तिरछे फैलायेभजाहायोंकाबीच वात्य सस्कारशून्य जिसकीअवस्था अधिकहो जनेऊनहींहुचा व्याल साप शठ दुष्टहाथी सिंह घाघ जीडो लज्जा शर्म व्यालग्राहिन् सापपकरनेवाला च्यालायुध वाघनखनामसुगंधद्रव्य वीहि धान सधान्य जेदुवासावा वीदिभेद सावाँ व्याटत्त बरणकरना बुलावना वहेय सावाँकाखेत व्यास विस्तार एकमपि जिन्होंने पुराणोरमहाभारयरची (श) व्याहार पाणी पात शव इद्रकावज्र व्युत्थान तिरस्कार मनमेश्रावसोकरना | शवर हिरनकीनाति दैत्य व्यष्ट प्रातःकाल सवेरा शकट गाड़ी लढिया व्युष्टि फल सपति साधनेवाली शकल दुकड़ा यूट मिलाहुवा धरदेना मोटाहोना शलिन् मदरी व्यूहरुकट कवचपहिरे वस्नरधारी शकुन पत्ती चिड़िया न्यूति सूतग्निना शमान। न्यूर समूह झड सेनाकायथार्थस्थापना | शत पक्षी भासपक्षी गावकामुर्गा “यद्दपाणि सेनाकापिहाड़ी शति पिडिया व्योकार लोहार शान मांगमछली योमकेश महादेवजी शालाक्षका सपेदव शकुलादनी पुगी जलपीपार योमयान पिमान श्राफाशवीमारी | शालार्भा मचन्नीभेद योमन् आकाश शत • सौ. . शतपुप्पा सौंफ A शब्दार्थप्रकाश। (श) शकत् विष्टा [जोअन्नाफिरें] शककरि वडवा शतकोटि वज इंद्रकाआयुध सौकरोड़ शक्त प्यारीचातकहनेवाला समर्थ शतद्रु सतलजनदी शक्तिनाराजावोंकीशक्तिप्रभावउत्साह शतपत्र कमल मंत्र से पराक्रम सामर्थ्य वरी शतपत्रक कठफोरवापती शक्तिपर स्वामिकार्तिक शतपदी कसरैयाकिरवा शक्तिइंतिक वरदीवांधनेवाला शवपर्णिका दूध शक प्यारीबातकहनेवाला शतपर्वन् यांस शक्र इंद्र कुरैया शतपर्विका दूव वच शनधनुस् इंदकाचनप शक्रपादप देवदारु शतपास करकापेंड शक्रपुप्पिका भग्निशिखाशागभेद शतभीरु बेला शक्त प्यारीचातकहनमाला शतपन्यु इंद्र जिन्होनेसौपतकिय? शंकर श्रीमहादेवजी शतमान सौकेममाण शंक जलजीवशफूनाम कटेयतकाच शतमूली शताचरि मोटीडार वाणकाागेकाभाग शतयष्टिका सौलरकीमाला शंस निधिभेद शंख नखसुगंधिद्रव्य शतवीर्या सपेदव माथेकीहड्डी शतवेधिन् अमिलवंत शतदा विजुलीकीचमक शतांग संग्रामकोतयाररय शंखिनी शंखाली शतावरी,शतावरि. [मिलाराजादूसरा. शंची इंद्राणी राध चरी दुश्मन औरदेशकैरानासे- शचीपति इंद्र शनैश्वर ग्रह सूर्यपुत्र शनम् धीरा सहारसे याश्चर्य राठ जिसकामंतःकरणकपटी हो शपथ । कसम जसेहमशपयारत हरिर शणपणी शागभेद. शपनद्रिोहीनाशाहोंगे शपापुष्णिका यरियारी शफ मुमपुर शणसूत्र रानगवाजाल शफरी सहरी मदरी शंड कमलर मन्नोपोजा शार म्नन्दनानि चांडालमंद शहनामर्द पादगादीपोना सांदयल शारानय मिल्लाचांडालोगांव शंखनक छोटे शंख शंदेवनी शटी कचर (श) शब्दार्थप्रकाश । शबल विचित्ररंग चुनरीयादि कवरारंग | शम्याक किरवारवृत्त शवला शय हाथ }विचित्ररंगकीगौ कवरीगाय शवला शयन सोरहना शय्या शब्द विषय कानका व्याकरणादिमे- शयनीय शय्या सोरहनेकास्थान जोवाचक आवाज नसे विनसूतका शयालु नीदलगना बहुतसोनेवाला वाचकवस्त्र शयित सोगया शब्दग्रह कान जिनसेराब्दजानाजानादे शय अजगरसांप शब्दन शब्दकरनेकास्वभाव शय्या सोरहनेकास्थान रिदानाविद्या शम चित्तकीशांति हांध शर शरपत मुंजसर वाण तीर शमथ शांति शांत होना शरजन्मन् स्वामिकार्तिक शमन यमराज यज्ञपशुकेमारनेमे शरण घर रक्षाकरना मारनेसे बचाना शमनस्वर यमुनानी यमकीवहिनी शरणि रास्ता राह शमल विष्ट शरद् ग्रंतु वर्ष शमित शांतिकोमात शांत शरभ मृगमेद शमी उर्दयादिकीछियां छीकुरिकापेंड शरव्य निशाना शमीधान्य उर्दमूंगादि जिनमेंटियां- शराटि शमीर छोटीची गरि. [ होती है. ] | शराडियाडिपती जलमुर्गा शंपा रिजुन्नीकीचमक शराति शपाक किरवारवृन शराभ्यास यापफेंकनकाथभ्यास शंख बज शरारि माडिपत्ती जलमुगा शंपर पानी हिरनकी नाति शरारु हिंसाकरनेवाला जीवहत्यारा शवरारि मान्न जिन्होंनेशवरदत्यमारा शरालि प्राढिपती मलमुर्गा शसरी मुमकन श्रीपधि शराली शरल रंगभेद विचित्ररंग शराव सेरवापर्ट शपाकृत दुगरासेतनोतना दूमरागाह शरारती नदी शरासन धनुप कमान शक शरीर दे अंग शभली मुटिनी जोपराग्रारतमरे शरीरान्यि देहवीही हातापिनग पुरुपकोमिलान शरीरिन मारणी देहधारी शभु श्रीमहादेव नया | शांग निमदेशगानाहुनही भदंश शम्या जबांकीतील श्वन मार गिटी गंगमंट रहा शाक पानीकीसीपी सूती १५७ शब्दार्थप्रकाशा शर्करावत् मुडदेश बाल अधिकहोगा शस्य वृक्षादिकाफल: its शर्करिल । जिसमें गाना शस्यसंवर,शांखोंकापेंड [लांकीमादिः शर्मन सुख.आनंद नाशाक पत्ताफूलखानेकयोरया,वथुई पर शर्व महादेवजी ने मार शाकट गाडीकेवैल: शर्वरीत रात्रि शाकशार्कदमाशांगकैखेत शर्वाणी श्रीपार्वतीजी, शाकशाकिन् । शल स्याहीरोवां स्याहीकांट TFITS शाकुनिक, चिड़ीमार शलभ पतंग जोदियामेजलताहै लाल शाक्तीकुजविरचीबांधनेवाला; ए शलल स्योहीरोवां स्याहीकांट, शक्यमुनि बौद्धभेदार शलाकचाफल पगार योगा शाक्यसिंह शाखा डीर, कनैया : [ तहसील. शल्क टुकड़ा बकला खाले मा) शाखानगर विनराजाकादेश परगना शल्य मैनफलकांवृक्ष जंगलीजीवाणे शाखामृगं बानर [ वृत, स्याही बाणकाअगोदी जीभ शाखाशिफा, डारके निकलने की जगह- FREE आगे शल्लकी शालय शाखिन् वृक्ष पेंड़. [बनानेवाला. शव मुर्दा विनाजीवकादेह लागे शांखिक. कासार शेखकीचूड़ी आदि- शश मृगभेद गीगां संग शाटक शशधर चन्द्रमानिसमेमृगचिन्हहंगणे शाटी वस्त्रभेद-साड़ी शशलोमन। शशकेरोवां मारी शाठ्य शठता वेवकूफी : शशादन वाजपेक्षी शिकरा मानी शाहवनः जहपिरहरीरघासहो : शशोर्णका शशारोवां प्रप्णमे मंगले शाणाकिसोटीसोनाआदिपरखनेकी शश्वत् निरंतर बारबार सहार्य अंपनी शाणी- शनकावख पाखरीटाट शष्य कोमलतण शांडिल्य वेलवृक्ष ऋपि. : शसन यज्ञपशुकमारनेमें: शात दुवर सुखानंद निर्वल:शान चढ़ाया-पेनाया, !: शस्त. कल्याण:शुभ नमस्कारार्थ--- शातकुंभ, सुवर्ण सोनाधातु . शस्त्रयायुधा लोह, हथियार शातकोंभ शस्त्रक लोही थूहर शस्त्रमा शिकलीगर हथियारसाफ शात्रव शम्राजीव,हथियारसेंजीविकाकरनेवाला शाद 'चहला कीचड़े छोटीरयास सिपाहीसवारआदि शस्त्री दूरी कटारी .. शाद्वल प [करनेवाला शातला वैरी दुश्मन शादहरित जहाहरी यासहो - प " (श) शब्दार्थप्रकाश शांत शांतहोना . : . बार| शाल्मलीचेष्टास्येवरकागोंद मोचरस शांति चित्तकोशांतहोना चार शावक चालक बच्चा कोला शाप गाली शरांप मंगा. | शावर लोध्रवृत्त शावर लोध्रवृक्ष शाश्वत नित्य हमेशः शांबरी इंद्रजाल शंवरदैत्यकीमाया - शाप्कलक मछलीमांसखानेवाला, TI शार कवरारंग हवा } : शाकुलिक, वहुतीपूरी शारंग पपीहा चातक कवराहन्नपा शासन प्राज्ञा हुक्म शारद छतवती नया थोडीचतुरई। शास्तृ बौद्ध गोफोन वर्ष जलपीपरि- शास्त्र आज्ञाव्याकरणादिक ग्रंथ शारदी जलपीपरि छतवती शास्त्रविद् शास्त्रपढ़नेवाला, शास्त्री, शारिफल कोठेदारसाड़ी शिशपा शिसवावृक्षा शारिवा कारीसां गौरीसांउ शिक्य :- शिकहर: बीजा शाकर भूददेश शिक्यित शिकहरमेधरीयस्तु : शाई विष्णुकाधनुप शिक्षा वेदकाभंग Tir शाङ्गिन् "विष्णु. शिक्षित प्रवीण चतुर-11 : शार्दन पांघ उत्तरपद श्रेष्ठार्थ शिखंड पोरकीपूँछ मोरपुच्छ शावर हिंसाकरनेवाला हाथी शिखंडक,योलकोंकझंडोलंगालकीचूदा शावरी राति शिखर पर्वतकागरातुना वृक्षकाशिरा शाल चक्रांकितमछरी वृत्त रामा शिखरिन,पर्वत वृत. [ झोई किरण. शहरपनाह शहरकेचा मोरयांस- शिखा यागिकीलपट मोरकीचोटी. शालपर्णी शरिचन. [यपुरकीटि.]/ शिपांढक - पानकोंकीचोटी .. शाला सभा मोटीहार . शिखायन् अग्नि शालामृक वानर मियार कूकुर शिपायल मार मुरडला पुकार शालि च्याडधानकी धान शिरिग्रीव अंजन अायकंगेगपर शालीन - शमंदार भलामानुम शिग्विन् पोर थनि. [पोर बारना. शालूक पालाकोंकालिकीनर शिम्पिवाहन स्वामिकार्निर जिनका. शालूर मदुक मंझुका शि यह धादिशाग महिननकार शालेय,चनसीफ यहीसौंफ धानकायन शिपुन मंदिननबीन मपदामिर्च शाल्मन । स्वरका इमकीमागु সিমিন নােমান্তর शाल्मलि ६००००वपंकी। शिजिनी,धनुपकीमत्वंचा कमानकाटांग SPHin . 1 १५६ शब्दार्थप्रकाश। (श) शितक जबE | शिल्पिन, चितरातिसवीरादियनाने शिति कालारंग सपेद.गिलाकालाहै. वालावईईकोरी नाऊ योबीचमार शितिकंठ महादेव जिनकाविपपीनेसे शिल्पिशाला सोनारमादिकारीगरों शितिसारक तंदूकावृतमा म कास्थान शिपविष्ट । रोगसेलिसकेशिरमवालनहों शिव श्रीमहादेव)कल्याण मंगल शिपिविष्ट, सफानवाचमड़ा श्रीमहेश्वर शिवक खूटां गौमादियांजनेका शिफा बृतादिकीजर शिवमल्लीमा रुई मदार : शिफाकंद कमलकीजर शिवा श्रीपार्वती छीकृरिकांड हर शिविका .पालकीपीनसडोली शिविर सेनाकास्थान फाजकामुकाम, पृथ्वीकाविलासियार सियारी शिवा "उदादिकीमियां गंगटी ?' अंबरा नहुईखान श्रीमहेश्वर. शिरम् . मस्तक पूड. [घावनहो. शिविषिष्ट शिरमेरोगसेवर्लिनहो सफा- शिरख "टोप. जिससेसंग्रामशिरपर शिवी श्रीपार्वती : शिरस्य सम्बिाल. जानलेते हैं. शिशिर ऋतु नाही शिरा नाही जिसकेदेखनेवैद्यरोग शिशुल बालक बचान शिरीप शिरसे सीसमा शिशुक शिशुमारकेसमानपरेलीमेद शिरोन घृतकीदुनुग-दुभा शिशुमार जिलजीव चक्र विप्नु शिशत्व वालापने लंडकाई, शिरोगृह - घरकाशिरा jarir मशिन लिंग पुरुपकांचिन्द : : शिरोधि गला घीव: शिरोरन चूड़ामणि शिरकीमणि : शिश्विदान पुण्यात्मा पुरयकरनेवाला. शिरोरुह बाल जोशिरमेज़गते हैं: शिष्टि . आशादेना हुक्म शिरोस्थि करोटि शिरकीहडीखोपरी-शिष्य' चेला सागिर्द शिल खेतमें गिराश्रम शीला: शीकर। पानीकी छिटकी दिट्टी शिला देहलीकेतरेकाकार देहलीका-शीघ्र तुर्त नलदी शीत जाड़ा ठंढा त लसोहरकाह शिलाजतु शिलाजीत. [काकाट..शीतक,आलसी नोंदपरहांधफेरनेवाला शिली घोटेर केनुवा देहलीकैनीचे / शीतभीत : वेला नेवारि . शिलीमुख भाग पाण शीतल ठंडा शागभेद.. नोन शिलोचय,पर्वत पत्थरोंकासमूह कार्म. शीतशिव यहीसीफ.शिलाजीत संधी शिल्प गानानाचनानादि यहईमादि शीता हलकीलकीर कंड शिल्पशाला कारीगरोकामकान शील जानाखेत .. " दासा पत्थर - AR । [कड़ा S Min (श) शब्दार्थप्रकाश १६. शीधुः ऊंखशोगनादिसेवतीमदिराण शुनी कुतिया कूकुरि TI शीफालिको सपेदम्याड़ी शून्य खाली छूछा FAFE * शीरागहलोप TT शुमन कल्याण मंगल बोकरा कुशल शीप शिर मूड गुभंयु शुभयुत मंगलसहित ] शीर्पका संग्रामकाटोपशुभदती दिग्गनकी पत्नी जान शीर्पच्छेयमारने लायके मुंडकाटनेयोग्य शुभान्वित माता मंगलसहित कुशलपण माण शीर्पराय साफघाल संग्रामकाटोप ाणे शुभ्र मपेद अभ्रक प्रकाशमान शील सुंदरचाल अच्छास्त्रभावा- शुभ्रदंती. दिग्गजकीपनी शुक शुद्ध शोच" ? शुभ्रांश चन्द्रमा जिसकीसपेदकिरणहै शुरु कुकरौंधा व्यासकेपुत्र शुवा रावण शुल्क राजाकामहमलयादिस्त्रीकाधन "कामंत्रीशिरसैकाड़ी I स्त्रीकामोल शुकनास श्योनापाढा 11. शुल्ब तांबा जारी रस्सी यशककर्म शुकई कुकरौंधा. यावरण जलकासमीप शुक्त चूक तीनरातिकासिरका कठोर-शुल्वा । रस्सी.जौरी- शुक्ति सीपी नवनामगंधद्रव्य शुल्वा शुक्र अग्नि प्रायदिशाकेग्रह शुक्रग्रह शुथूपा उपासना गुरुकीसपा ज्येठमहीना पुरुषकावीर्य 1.12.1 शुपि छंद पिलाको शुक्रल पण अंडकोशू पोता पिर बांसुरीशंखादिवेद विलं शुक्रशिप्य ग्रिसुर दैत्य शुष्कमांस शुखमाम शुरू पक्ष सपेद शुष्म' पराक्रम शुच शुद्ध शोक: :: गाररस पचिनः शुष्मन् अग्नि , शुचि अनि आपादमहीना-सपेदः श्रृंट 'शूक जवकामुलायमशीकर "iir. शुंठि सोंठि | शुक्रकीट लमोहरी'उनकोटांडा शुकधान्य जय गोयादि शुंडापान मदिराकाघर शूकर सुपर शुद्धि नदीभेद शतलन शुद्धांत रानियोंकेमाकान अंतःपुर शुकशिषि मूतकसेशुद्धहोना शुद्ध वर्ण शुद शुनक कुकुर कुत्ता शूद्री शून्य वाली इंसा -- T गुंठी। 17 शकशिवा } केवान --- शुद्रा भद्रकीनी गुनासोर इंद्र शब्दार्थप्रकाशा शून्यवादिन् नास्तिक जैनिमती 17 शेवाल शेवाPिET सूर्योधरि वहादुर लामा शेप शेषनागजिनकेहनारफन, वाकी शुरण जिमीकंदापा IFE | शैक्ष प्रथमवियपिढ़नेवालेबालकर शूर्प सूप धानपछोरनेका | OFF | शैखरिक लटजीरा Fir शुल रोग हथियार मृत्यु. आदिः शैल पर्वत पहारीF ITIFIP गौर शुलाकृत लोहाकालसपकायामसि शैलालिन् IFECThis शुलिन् ,महादव जिनकाविशलआयुध शलूप नट वेलका सार शून्य लोहकीकालसपकायामांसादि शैलेय 'शिलाजीत Fririk भृगालसियार FIIPE_Fiss शवनाशवार : शृंखल पुरुपकी कमरकागहनों करगती शैवलिनी नदी जिसमे शेवारहोगा. जंजीरादि हुँदा शैब्यशाकृष्णकाघोदाriF शृंखलक जिसऊटकेपैरमेकाठवधाहों शबालाशेवा : मुंग पदिककारा जावका औषधि शिव पालापनालईकाई Fire प्राधान्यतापवासीय मालिकी शोक शोच हOP FILA चिन्ह फोहारकामा शोचिप्केश अग्निकाFITS Fr शृंगवेरे अंदरखा शोनिमा प्रभाउजेराप्रकाश मार शृंगाटक चौरहा चौहट्टा FFIs [शोरणागालालकोकालिकेसमानलाल श्रृंगार रसभेदकशी शीs शोभनर्दनाक : शूगिणगौशातील कणी Firsशोणक सोनापदामापधि FILE श्रृंगी नंदीश्वरा शिवकावलं मुद्गुरम- गोणंरनेशपभराग माणितय Im वकीली अतीसापौषधि शीणा सोतापाहायो शृंगीकनके सोनेकागहेनाः शोणित लोहारक्त खून शृणिश्रीगुरागंणी pg गोय : सूजति हमेफूलना शृत पकाद्धादिम Paris | शोयघ्नी गदापुनिया शेखर शिखामेपहेमाला immiशोधनी बहनी बुहारी,झाइ निगापकापिन्हा Fiशोधित अन्नकोसफाकरना माफकरना शेफर शेफालिकासपदम्यादा फूलभेदी शोनक सोनापादानापषिः शमुपी बाद अकिल शोफ मूननि दंडोफूलना PATIEगोभन मुंदर मनोहरा : रोनु लेसोहरकाप शैवधि निधिभेद FITKi शोभा चशेष कांति (श) शब्दार्थप्रकाशा। शोप यक्ष्मारोग क्षयीरोग श्रद्धा वांछां कांक्षा. - [श्रद्धायुत. शौक : तोतोका मुंह बहुतशुवा कार श्रद्धालु गर्भकेकारणत्रीकीविशेषचि. शौक्तिकेया स्थावरविपश्रयण सेवा प्राशरा शौक्ल्य सपेदी irt मे श्रवण काना शौंड मतवाला प्रसिद्ध Fiला श्रवा - LETE PIPy. . . गैरडिक मदिरावेचनेवाला कलारका विष्टधनिष्ठानक्षत्र: लान गोंडी पीपरिल श्राणा: पतलाभात गोलायी गयो शौद्धौदनि बुद्धभेदी श्राद्ध शास्त्रोक्तपित्कर्म का शौरि, विष्णु शनैश्चरग्रहःशूरसेनकावंश श्राद्धदेव यमराज श्रादेवता शौर्य पराक्रम ऐश्वर्य:-. . श्रायः सेवा आशरा" शौल्विक तांवाकाकामबनानवाला. श्रावण सावनमहीना HERE शौप्कुल, मछलीमांसखानेवाली शूखाः श्रावणिक को गं: श्च्योत घीयादिकायद्दनाः- [मांस] श्राप सुननेयोग्यसुंदरबात : श्मशान मरघटा प्रेतभूमि पर श्री लक्ष्मीजी संपति शोभा.पन श्रीकण्ठ महादेवजी जिनका नंगगौर श्मथु दाढ़ीकेवाल..- श्यामकएठसेशोभितः - श्याम कालारंग हरा मेघ प्रयागका. अक्षयवट पिक मिर्च सेंधानमक.. श्रीधन बुदाग 1 श्यामक तृणधान्यभेद श्रीद कुवरं जोधनकमालिकोना श्यामल काला सांवला श्रीपति विष्णु जीलक्ष्मीपति श्यामा कालाविधारा सपेदनिशोय | श्रीपर्ण,भगेयुत जतिवृक्षनरवेलकमल कालीसांउ गोरीसांउ सांवलीस्त्री श्रीपर्णिका कार्यफल कैफरा सोरहवर्पकीस्त्री जिसकैपुत्रादिनहुवा श्रीपर्णी वभारी. [कागोंद. हो मीठीरवातैबोलनेवाली . श्रीपिष्ट धूपसर विशेपचूप किसीवृक्ष- श्यामाक तृणधान्यमेद 1. श्रीफल बेलकावृत.. श्याल शांखोकाड साला स्त्रीकामाई श्रीफली नील लीलो रया धूसरलालरंग श्रीमत् लक्ष्मीवान् धनवान श्येत सपेद श्रीमान् तिलकवृक्ष मनोहर पनी- श्येन शिकरा बाज श्रील लक्ष्मीवान् धनी. स्यैनंपाता शिकार श्रीवत्स विष्णुकेहदयमेचिद श्योनाक सोनापाढाऔपषि श्रीवत्सलांजन विष्णु 17 SAR . I : शब्दार्थप्रकाशन (श प) श्रीवास श्री श्वन् कुत्ता कुकुर श्रीवेष्टा श्वनिश दिनरात शब्दभेदhira श्रीसंजालौंग. E-समानपत्ता. श्वपच चाण्डाल निपादा भीहस्तिनी- घुइँया हाथी केकानकोवपाका : भुत शास्त्र धारणकरना:सुननाला वभ्र गड़हा खंधक छेद-दराज, भुति : कान: वेद-वात सुननेमे जीना वयथुरा सूजनि फूलना, अणि पांति ,एकक्रमसे :- वृत्ति कुत्तेकीसीजीविका नीचसेवा श्रेणी,पांतिकमरएकजातिकाइकहाहोना शुर:-ससुर -स्त्रीका पिता श्रेयस्' मुकृत धर्म मोच अतिसुन्दर श्वशुरौ::.,सासुससुर स्त्रीकमातापिता- श्रेयसी: हर्र पाठगोपधिगजपीपरिश्वशुर्य समुरकापुत्रादि स्त्रीकेदेवरादि भेष्ठ अतिसुन्दर -- -- पुरुपकेसालामादि भोण पँगुवा जिसकीजांपैच्छीनहों वथू सासु खोकीमाता mi मोणि,कमर करिहांव कास्थान कमरः श्वश्वशुरौ,.सामुससुर मोणिफलक कमरमेंघातीप्रादिपहिरने रवम् वनेवालादिन काहि भोतम् ,सोता जहांआपहीभापपानीबई: श्वसन नाय हवा मैनफलकावृतं भोत्र कान श्वस्त भूजामांस प्रोत्रिया वेदपाठी वाविध, स्याही जिसकीदेईमेकाटेहोत. भौषट् देवतोंकोदन्यदेने वित्र सपेददागकाकुएरोग श्वेत सपेद चांदी दीप पर्वत सण थोड़ा सुन्दर श्वेतगरु लापी सरहना प्रेमसे ठीचातें मां }स मानसरोवरकेवासी श्वेतच्छद श्रीपद हांयींपांवरोग श्वेतमरिच सहिजनकेवीज लील लक्ष्मीवान् धनी श्वेतरक्त सपेदलालमिलारंग लेष मिलाए संधि :::: श्वेतमुरसा' सपेदम्यारी लेष्मण कफरोगी .:: (प.): भेप्मन् कफ लेष्मल - कफी पट्कर्मन् ब्राह्मण जोयननादिदाकर्म श्रेप्पातक लसोहरकाऐंड [करताहो.] ओक पद्यअनुप्मादि यशकीर्ति पडभिन्न पुद पाश्रेयस् मारनेराजा शुभ कन्याण पडानन स्वामिकार्तिक जिनकेटामुखों पदग्रंप कंनमंद. पदपद मंदरा. पदंशा गुम्बुक (प स.) शब्दार्थप्रकाशा पग्रंथा वच संविद... बुद्धि, अगीकार सुदरवालना पग्रथिका कचूर आबादी ज्ञान सयम नाम मसनकरना संग्राम पड्ज शब्दभेद मोरकी नावाज Fr IPमका नियमसंकेत याचार प्रतिक पएड कमलोकाढेर अतःपुरचारवाजा | संविदिता जोनलनी नंगीकार करना सडि अन्नवल IFET FP सवीर्ण ढना FIR पढ नपुंसक नामर्द वादशाहीखोजी | सवीत लिपटाहुना जसनदीसंग्राम पष्ठिक, रातपकिनवाला अन्नधानादि सवेग खुसीओदिसेकोममेशीघ्रतामा पष्टिक्य,धानादिकाखेतर्वेधरनेकास्थान संबेदागअनुभव प्रापही ओपन गई पाण्यातुरंग स्वामिकातिक जिनक ६ सर्वेश मानिद्रा सोरहना का कृत्तिकीमाताई पुरा | सव्वानालगरी फरिया पट्टा हम सशप्तक जोवीरकशमखायकर संग्राम संपाक किरवारकावृक्ष for Fic Frकरतेहैंकिहमशटकॉमारंगेवमरजांयी संभली काटना झापरायांखीसरका संशय Fासदेह ]is ETim उजी HIRFTERTA सयत 'मिलावे मा संशयापन्नमानसंगजिसकोसदेहहाजाय सयत रस्सीयादिसेंधा कैदी FROPRA जाक FFEF-संभवनायाकिाम RIPETE Hims | संश्रुत अगीकारकरना FIR Fr सयाम योगकाअगनिरमान ITE सश्लप लपटाना लिमटजीना PFiff संयुग सुनामल्लाह Em ससक्त मिली आHITS मार सयोगित"Ti TT THE rie संयुतहुवा मिला ससद सभा समाज Fi UR संसरणांसदकादशंधनुपमारचाँदीमहा सरांक शब्द आवाज भF सेसेनाउत्तमप्रकारसैनिकरजाणि संलाप परस्परंकीवात मोगा संसिद्ध प्रकृति स्वभाव सवत् TIFFIMIIF सपत्सर यप साल.६०संवत्सर सस्कार,किसीमेमुछमिलावनान्यज्ञोपनीत सरदन | वशकरलेनामणिमंत्रादिसे जन्मसेप्रेतकर्मपर्यंत सबनन । वशीकरण । संस्कारहीन जिसकासस्कारनामा संघर' 'मग जातिभेद - संस्कृत,बनायेघटादि शाम्नलक्षणेत संपत प्रलये कल्पात का संस्तर पत्य यज्ञ सवर्तिका कमलादिकेनयेपत्ता | सस्ता पहिचान मुत्नात संघसय गांव मानागा सस्ता यज्ञमवदपाठियोंकीस्तुति सवाहन देंहमलना चापना | सस्त्याय समूह स्थानमे विस्तार । संग्राम लड़ाई सयम सयोजित FTS1 । . TTIFI शब्दार्थप्रकाशा (स) संस्था मयार्दा सीमाMIT सङ्कारशा कैद कूड़ा संस्थान अगदास्थान रूपे मरनी चौरहा सङ्काशः उपमा बराबर मा सस्थित मरगयामा सङ्कीर्ण वर्णसङ्करजाति मनुष्यांदिको संस्पर्ण चकवत औषधि ! FEAT किंठाहोंना सङ्कट.व्याप्त ' .:: संस्फेट Im|संकुल पूर्वसेविरुद्वदूसरीयात जैसेमिन संस्फोट संग्राम लड़ाई ETTPाखदेव मनुष्यादिकोबहुतइकहा संहत पुष्टसंघानयुत में 7 | संकोच गलालचन्दन सचुकः [होना.. सहतजानुक जिसकीगांठीमिलीहा- संकंदन इंद्र संहतल मिलेदोनोंफैलेहार्य: नमसंक्रय कठिनरास्ता किलेकीराह. संहति समूह झुई संक्षेपण गेल्यविस्तार सूक्ष्म सकिरा: संहनन देंह अंग FIT FEसंख्या संग्राम लड़ाई ATTE संति बहुतमनुप्योकावलावना संख्या मिमाणासैपरीक्षाकरना एकादि सकल पूर्ण संपूर्ण संवर संख्यात गिन्तीकियों सकृत् साथ एकवार" TATE संख्यावन् पण्डित संख्याकरनेवाला सकृत्मनाकावा संख्येय गिन्तीकरनेमें जैसे २१ वस्त्र: सरत्फला FIFA लागंनुष्य वनालाये सक्तुफली छीकरिता सङ्गो मेल मिलाप सविध माटीजाय 1- F_FFIEF सद्गत सुन्दरवातएकता m. सखि मित्र सखा स्नेही साथी सङ्गमा मेल पिलाप संयोग TEE मेखी सापिनि खिपोंकीमित्र 'सद्गर संग्राम लहाई सख्य मैत्री मित्रता संगीणामअंगीकार किया. [पांच. मगर्म्य एकपटकमाई संगूढ दिपावना जुइया जिसेदोतीन मगोत्र एकगोत्रके फटुंबी. जेवनाः- संग्रह संग्रहकियेग्नंथ इकबाकरना . माग्य सायभोजन करना एकपाँतिमे संग्रामवाललाई.... i. [पकड़ना. मदः पोहमार्ग पोलिया... | संग्राइ ढालपकहनेकोमठ मुटसे मजबूत मकर .कर्कट कूदा संघ माणिगीकामह मापण यनंदेवजी - मंचात नरकभेद समूह महालित जोडेहुयेयकमादिः मचित्र मंत्री महायक सलाही मान्य मनकाकर्म मनी इन्द्राणी ..."! .. मामुक तकनि चलनेकासमार (अनंगाल रहाचालाकीनही : :
।" ' [ करताहै. सज्ञ (स) शब्दार्थप्रकाश । १६६ सज,कवचादिपहिरसंग्रामको तैयारहोना | सत्यवतीसुत व्यास. , !! [ करना. सज्जन साधु कुलीन पहरा गस्त सत्याकृति - इसकामकोहम करेंगे सही- सेनारक्षक [तैयारकरना. | सत्यानृत,झूठसांचकारोजिगार यनियई सजना कामदारोंकेचढने कोहाथी- सत्यापन }संहीकरना सच्चाईकरना संचय समूह इकट्ठा सत्यापना संचारिका दूती सदेशपहुंचानेवाली सत्र यज्ञ वस्त्र. सजमन चारोतरफआमनेसामनेदालान | सत्रा साथ जैसेस्त्रीकेसाथसुखभोग- दुरुस्तचौक - सनिन् ,गृहपति जोहमेशायन्नादिदानकर संज्वर अग्निकांचवगर्मी सत्वर शीघ्र जल्दी जिसकेपरकीगांठिएकमेमिलतीहो | सदध्याज्य दहीमिलाघी संज्ञपन मारना प्रसन्न करना जनावना सदन घर माकान संज्ञा चेतना नाम हांथग्रादिसेसंज्ञा | सदर सभा बैठक गायत्री सूर्यकीस्त्री | सदस्य यज्ञकेदेखनेवालेवेदपाठी संजु पैरकीगांठीलगनेवाला : सदा सर्वदा सयकाल सटा ब्रह्मचारीमादिकीजा सदागति वायु जोहमेशःचलती है संडीन पत्तियोंके उड़नेकाभेद. [साधु | सदातन नित्य सनातन हमेशा सत्,पण्डित अच्छा सुन्दर पूजित योग्य | सदानीरा नदीभेद सतत नित्य हमेशः सदानंद ब्रह्मा हमेशाधानंद सती पतिव्रता पतिकीसेवामेतत्पर सहरू सतीनक मटर मोथी सदृश समान वरावर सतीर्थ्य गुरुभाई एकगुरूकेचेला सदेश समीप निकट सत्तम अतिसुंदर समन् घर माकान स्थान सत्य सतोगुण द्रव्य चित्त विचार सधस् तत्काल तिसीसमय स्वभाव पिशाचादि अपनाभाव सामणी पनी स्त्री वल माण जंतु सध्यूञ्च् साथचलवपुजनकर सत्पथ सुन्दररास्ता सनत्कुमार ब्रह्मापुत्र सत्य सच कशम सत्यता सनपी गोकर्णीयापधि सत्यक ब्रह्माजी. [ जहरकरेंगे | सना नित्य जैसेसनातन सत्यंकार सहीकरना इसकामको हम सनातन नित्य हमेशः सदा सत्यवचस् पि सत्सवोलनेवाला सनात्कुमार ब्रह्माकापुन र r । सहत) r - L15 - शब्दार्थप्रकाश। सनाभि सातपुरिखाकेभीतरकेकुटुवी सन्निकृष्ट समीप पास निकट सनि गुरुमादिकेलियेभिक्षामांगना सन्निधि समीपता सनिष्ठीव । लारवहतेवातकरना वातमे सन्निवेश सुन्दररहनेकास्थान सनिलेव Vकाना सपन शत्रु वैरी सनीड समीप निकट पास सपदि शीघ्र तत्काल संततं, नित्य हमेशः सपर्या अन्नादिदेना पूजा संतति गोत्र कुल | सपिंड सातपुरिखाकेभीतरकार्यश संतप्त संतापित गरमाया सपीति साथपीना जलादि संतमस सबतरफअधकार सप्तकी स्त्रियोंकेकमरकागइना कमर- संतान कल्पवृक्ष वश कुल पट्टाकंधनीयादि संताप अग्निसेगर्म सप्तुतंतु यज्ञ राजसूयादि संतापित संतप्त गरमाया सप्तपर्ण इतवतीवृक्ष संदान बांधने कीरस्सी सप्तपि मरीचि ' अनि २ अङ्गिराः संदानित बंधा बाधा पुलस्त्य ४ पुलह ५ क्रतु ६ वशिष्ठ ७ संदाय संग्रामादिसेभागना सप्तला नेवारि थूहर संदित बंधा वांधा गुहा पिरोहा | सप्ताचिस् अग्नि काली? कराली२ सदेशवाच् दूतमादिकेकहेसंदेश मनोजवारसुलोहितासुधूम्रवर्णा। सदेशहर दूत हरकारा स्फुलिंगिनी ६ विश्वदासां अग्नि संदेह संशयहोना कैजिहाँ संदोह समूह झंड सप्ताश्व सूर्य संद्राव भागना पलायना सप्ति घोड़ा Kा प्रतिमा मर्यादा.एकमेमिलाना. चारिन, एकवेदपढ़नेवालेब्रह्मचारी संधान मदिरादिवनानेकीवस्तुवोंको सभहका सोहागिल सौभाग्यवती संधि मिलाप मेल मिलावना सभा सभाकास्थान समाज जवां संधिनी गर्भवती गर्भिणी कास्थान संध्या सायंकाल पितरोंकीमाता सभाजन थापनेवाले ग्वानिरवरना सभासद सन्नता मभिक जुपिन्नावनेवाले मनिष माणु ममानी सभावाने सभा मभास्तार / सभाकग्नेवाले ममानी सन्नादु चार चिगजी. [होना गनरयादिपहिरसमामकोतयार मनप पीदेसीसेनानासमह मानिकर्षण } समीपता निकटता - (स) शब्दार्थप्रकाश। सज्ज,कवचादिपहिरसग्रामको तैयारहोना| सत्यवतीमत व्यास [ करना सज्जन साधु कुलीन पहरा गस्त सत्याकृति - इसकामकोहमकरेंगे सही सेनारतक. [ तैयारकरना | सत्यानृत,झूठसांचकारोजिगार बनियई सजना कामदारॉकेचढनेकाहाथी सत्यापन सहकरना सच्चाईकरना सचय समूह इकट्ठा सत्यापना सचारिका दूती सदेशपहुचानेवाली सर यज्ञ वस्त्र [करताहै सजमन चारोंतरफआमनसामनेदालान | सत्रा साथ जैसेस्त्रीकेसाथसुखभोग दुरुस्तचौक सत्रिन् ,गृहपति मोहमेश यन्नादिदानकर सज्वर अग्निकापाचवगर्मी सत्वर शीघ्र जल्दी सा जिसकेरकीगाडिएकमेमिलतीहो | सदभ्याज्य दही मिलायी सज्ञपन मारना प्रसन्नकरना जनावना | सदन घर माकान सज्ञा चेतना नाम हायनादिसेसज्ञा | सदस् सभा बैठक गायत्री सूर्यकीस्त्री सदस्य यज्ञकेदेखनेवालेवेदपाठी सनु पैरकीगाठीलगनेवाला सदा सर्वदा सवकाल सटा ब्रह्मचारीमादिकीजय सदागति वायु जोहमशःचलती है सडीन पक्षियों के उड़नेकाभेद.[ साधु | सदातन नित्य सनातन हमेश: सत्,पण्डित अच्छा सुन्दर पूजित योग्य | सदानीरा नदीभेद सतत नित्य हमेशः सदानद ब्रह्मा हमेशामानद सती पतिव्रता पतिकीसेवामेतत्पर सहक् सतीनक मटर मोथी सदृश समान घरावर सतीर्य गुरुभाई एकगुरुकेचेला सहत सदेश समीप निकट सत्तम अतिसुंदर सझन् घर माकान स्थान सत्व सतोगुण द्रव्य चित्त विचार सधस् तत्काल तिसीसमय स्वभाव पिशाचादि अपनाभार सर्मिपी पनी स्त्री वल माण जतु सध्यूञ्च् मायचलवपूजनकर सुन्दररास्ता सनत्कुमार ब्रह्माकपुन सत्य सच कशम सत्यता सनपर्णी गोषणापधि सत्यक ब्रह्माजी [जमरकरेंगे सना नित्य जैसेसनातन सत्यकार सहीकरना इसकामको हम | सनातन नित्य हमेशः सटा सत्यवचस् नपि सत्यवोलनेवाला सनाकुमार ब्रह्माकापुत्र सत्पथ - 7 - शब्दार्थप्रकाश। (स) सनाभि सातपुरिखाकेभीतरकेकुटुवी | सन्निकृष्ट समीप पास निकट सनि गुरूआदिकलियेभिक्षामांगना सन्निधि समीपता सनिष्ठीव । लारवहतेवातकरना वातमे | सनिवेश सुन्दररहनेकास्थान सनिष्ठेच धुंकाना सपन्न शत्रु बैरी सनीड समीप निकट पास सपदि शीघ्र तत्काल संततं, नित्य हमेशः सपर्या अन्नादिदेना पूजा संतति गोत्र कुल सपिड सातपुरिखाकेभीतरकाश' संतप्त संतापित गरमाया सपीति साथपीना जलादि संतमस सवतरफअंधकार सप्तकी स्त्रियोंकेकमरकागहना कमर- संतान कल्पवृत्त वंश कुल पट्टाकंधनीआदि संताप अग्निसेगर्म सप्ततंतु यज्ञ राजसूयादि .. संतापित , संतप्त गरमाया सप्तपर्ण छतवतीवृत्त संदान, बांधनेकारस्सी सप्तपि' 'मरीचि १ अत्रि २ अङ्गिरा संदानित बंधा वांधा पुलस्त्य ४ पुलह ५'क्रतु ६ वशिष्ठ संदाव ,संग्रामादिसेभागना सप्तला नेवारि थूहर संदित बंधा बांधा गुहा पिरोहा सप्ताचिस् अनि काली १ करोली २ संदेशवान् दूतादिकेकहेसंदेश मनोजवासुलोहिता४सुधूम्रवर्णा५ संदेशहर दूत हरकारा स्फुलिंगिनी ६ विश्वदासा ७ अग्नि संदेह संशयहोना केजिहाद संदोह समूह झंड सप्तारव सूर्य संद्राव भागना पलायना घोड़ा या प्रतिमा मर्यादा. एकमेमिलाना. मह्मचारिन,एकवेदपढनेवालेब्रह्मचारी संधान मदिरादिवनानेकीवस्तुवोंको सभका सोहागिल सौभाग्यवती संधि मिलाप मेल मिलावना सभा सभाकास्थान समाज जवां संधिनी गर्भवती गाभणी कास्थान संध्या सायंकाल पितरोंकीमाता सभानन पावनेवालेकीखातिरकरना [ होना. सभासद । सभास्तार सन्नय पीछेकीसेनाकासमूह मभिक जुवांखिलावनेवाले মনি सभ्य साधु समाजी सभावाले मप्ति, सभा : सन्नकगु चार चिरौंजी. सन्नद्ध वख्तरादिपहिरसंग्रामकोतयार सन्निकर्षण समीपता निकटता - + समजस .. नीति सुचाल T (स) शब्दार्थप्रकाश। सम बरावर तुल्य सपूर्ण ॥ | समापिन् - दूरवीसुगध , ममक्ष प्रत्यक्ष सामने देसाबादि । समाघात सग्राम लड़ाई, समग्र सब सपर्ण समाज एकजातिवालोंकासमूहसभा- समगा मजीठ लजारू लाजवंती समाज्ञा कीर्ति यश प्रसन्नता TRIF समज पशुवोंके झुड समाधान सिमझाना। [ रहना समज्ञा }कीर्ति यश प्रसन्नता समाधि अगीकार चित्तकोरोंकनामौन. समज्या समान,नाभिकीवायु घरावर पण्डित एक समानोदर्य एकपटकभाई सगेभाई समधिक बहुतहुवा अधिकता समालभ कुकुमादिकालेप समततस् सवतरफ सवते समावृत्त जोब्रह्मचारीगुरूसेवेदपढगृह- समतदुग्धा सेंहुड़ स्थीकोयाज्ञापाचे समतभद्र बुद्ध जनिमतकदेवता समासाद्य प्राप्तहोनेयोग्य प्राप्तहोनी समन्वितलय सुदरगीतनाचकीलय - समासार्या,ममिच्छा जिसेकविपूर्णकरतेहैं समम् साथ परावर समाहार इकठाकरना समय काल वरत कशम अाचार निय | समाहित अंगीकार किया स्थिरचित्त म अवसर प्राज्ञा समाहृति सग्रहग्रंथ [यादिकायुद्ध' समया समीप मय निकटता समाहय प्राणियोंकाजुबा मेढातीनुर समर सनाम लड़ाई. [ अनुकूल | समिति सभा सग्राम संग समर्थ शक्तिमान सुदरवधेपदईत्यादि समित् सग्राम लहाई ।।। समर्थन योग्यययोग्यकीपरीतामें समिथ् शुपारणका समर्धक परदेनेराला वरदाता समीक समर्याद...समीप निकट र्थदण्डदेते है. | समीप निकट पास समातिन् यमराज जोमाणियोंकोयया | समीर वायु हवा समवाय -समूह झूड समीरण रायु मन्या चीर समहिला कदुपामूरन ! समुच्चय महाकरना ढेरलंगाना समसन सक्षेप थोड़ा विस्तारनहो, : | समुन्थ्य र उचाई समस्त सपूर्ण सर [यक समुज्झित त्याग लाइना समस्या समिन्छा अर्थपूर्ण करनेला समुस्पिन बहुलव्यागुल सेनाधादि समाः वर्ष साल [अादि समरक्त निकालना नस सामनल समासमीना माल२ वियानेवानीगौसमुत्य समुह झुड [निकाला ] । ललाई युद्ध - 1 -- । ।
: . शब्दार्थप्रकाश। (स) समुदाय समूह संग्राम' संव- बज इन्द्रकाआयुध समुद्ग । संपुटक चौघडा, इलाचीमा | संवर ,, जल पानी समुद्गक दिधरनेका संवरारि प्रद्युम्न कृष्णकपुत्र समुद्गीर्ण जलपात्रादिकोऊपरनिको- संवाकृत दुवाराजोताखेत वादकिया --रना उखारना संवाघ थोड़ी रास्ता समुद्धत ---गहरी जिसकाकडास्वभावदो संवोधन प्याद पाट् अंग है है भो ये समुद्र- सागर -::.. संभेद नदियोंकामिलाप संगम . समुद्रांत कपास रुईकाद संभ्रम हर्षसेकाममेशीघ्रता जन्दी समुद्रांना जवासा पिंडकाऔपथि संमद, खुसी आनन्द समंदन श्रोदाहोना भीजा संमार्जनी बढ़नी बुहारी समुन्न श्रोदा गीला. - अहंकारी | संमूर्छन सबतरफव्याप्त होना समुन्नर पण्डितअपनाकोमाननेवाला सम्यञ्च् सुन्दरतना समुपजोपम् आनंद खुसी सम्राज् राजसूययज्ञकरनेवालावारह समूह हिरनभेद मण्डलकामालिकजिसकीयाज्ञा समूह झुंड गरोह .. सवराजाकरेंऐसामहाराजाधिराज समूह्य अनिकेपयोग सर मुंजसर सरपत समृद्ध - धनी तालेवर उत्तम समृद्धि बढ़ना.बढ़ती सरक मदिरापीना. समृष्ट 'सफाविना अन्नादि सरया, ममाखीमच्छी सरट गिरदान. [ पत्यारिण. संपति }सोभा लक्ष्मी धन सरणा निशोय सपेदत्रिधारा गंध- संपराय युद्ध भावनेवालासमय सराण मार्ग रास्ता संपरायिक युद्ध संग्राम सरणी गन्धपसारिणी संपिधान छिपना वस्त्रादिसेमूंदना सरनि मुण्डाहायसे बंधीठकादाय संपुटक चौघडा इलाचीश्रादिधरनेका सरमा कुतिया कुकुरि सरला देवदार उदार सुधा संप्रति इससमय इसीकाल संभदाय पुरानीचाल परम्परा सरलद्रव धूपविशेष संधारण विचार सरला निशोथ सपेदात्रिधारा संपारणा योग्यअयोग्यकीपरीक्षा सरस सरसी। संपहार लड़ाई संग्राम संफुल्ल फूलाफूल सरसीरुद कमल संपद् सरल . तालाव ताल । । सर्जरस धूप रार (स) शब्दार्थप्रकाश। सरस्वत् समुद्र नद [ नदीभेद नदी. | सर्वलिगिन् पाखण्डी बौद्धादिशास्त्र सरस्वती ब्रह्माकीस्त्री पाणी वात पढनेवाला सराव सरवा परई सर्ववेदस् जिसनेविश्वजित नामयज्ञमें सरित् नदी सर्वस्वटैदिया जैसेराजारघुनेयाके सरित्पति समुद्र नदियोंकामालिक उपरांतकोत्समृषिकोमट्टीकायर्य सरिल पानी पात्रदियाथासवदेनेकेकारणसे सरीसृप साप सर्वसन्नइन चतुरगिणीसेनाकाजमार सर्ग स्वभाव त्याग निश्चय अध्याय | सर्वानुभूति निशोथ काव्यादिमे विश्रामस्थान सृष्टिकी | सर्वान्नमोजिन् । उत्पत्ति मोह उत्साह सर्वानीन जोसवकाअन्नसाय सर्ज सर्वाभिसार सेनाकाइकट्ठाडोना सर्जक असनाबृक्ष सर्वार्थसिद्ध बौदभेद सर्वाय सेनाकाजमाव सर्जिकासार सज्जीसार सर्पप सेरसा सर्प सांप सर्पराज सापोंकेराजारासुकी सलिल पानी जल सल्लकी शालयीपधि । सर्पिस् धी सर्व महादेवनी संपूर्ण सब सव यज्ञ [सोमामिपर सर्वस हा पृथ्वी जोसबकोसहती है सवन,मोमलताकण्डन यज्ञकमंत,स्नान सर्वज्ञ रद्ध महादेवजी सवयस् वरावरकासायी सनतम सातरफ सबसे सविर मूर्य सर्वतोभद्र घरके ऊपरपर दुमाइला सविध समीप निकट श्रादि नीरकाप सवश सर्वतोभद्रा खभारी सव्य घाईतरफकीदें [परना सर्वतोमुख पानी गोसनतरफरहवारे सव्येष्ट सारथीचोसमाममेवानिरपरय सर्वदा सबकानमे सबसे समन यसपशयाग्ने सर्वधुरावह । जलिसपतनासेयोकले सभ्य वृक्षादिवोंषाफल नाग सर्वधुरीण | चलताहो सस्यमगरी नाजीवाली सर्वमंगला पार्वती जोमंगलाप सम्पशक नाजवानीपुर मस्यमवर शाबाद गानसन सरला गुदाहथियार तोमर सह 1 सर्वरस धूप राल साथ मग : (स) शब्दार्थप्रकाश,। १७२ सांदस्निग्ध चिकनापना गंभीरवादरः सारोष्टिक स्थावरविष" सान्नाय्य हविभेदस्वाहाको । सार्थ माणियोंकासमूह ..: . साप्तपदीन मित्रता जोसातपदसेहो | सार्थवाह बनियां रोजगारी , सावर लोध्रवृत्त । ::| साई चोदा गीला भीजानी, साम सलूक समझाना. [ माना | सार्थम् साथ सहितग्राधा [ राजा सामन् सामवेद वेदकेसाम सतक सम- सार्वभौम, दिग्गनकानाम सबपृथ्वीका सामाजिक समाजी सभाकेरक्षक साल वृत पेंड चक्रांकितमहरी शह- सामान्य जाति सामान्य रपनाहयादि. शांखोकाड सामि माधा निंदित सालपर्णी सरिवनऔषधि सामिधेनी अमिकमज्वलनकीचा सालूर मेडुक मेंझुका सामुद्र समुद्रलवण सास्ना बैलग्रादिकालटकागला सांपरायिक संग्राम युद साहस दंड सजा सांपतम् इसीकाल योग्य साहस्र जिसकेपासहजारोंसेनाहो ह- सायक वाण तलवार जारोंकाझुंड सायम् साम दिनकाअंत सामसीसंध्या सिंह सिंह श्रेष्टार्थमे जैसेयरुपसिंहराम सार, वृक्षादिकागाभा बल न्यायमेप्राप्त सिंहल फैलायेदोनोहांथ श्रेष्ट जल धन हीर सिंहनाद धीरोंकीगर्जना सारंग चातक पपीहा हिरनभेद हाथी | सिंहपुच्छी पिठवनिमोपधि कवरारंग कमल इंस दीपक मेघ सिंहसंहनन सुंदरभंगोकापुरुष वीणा काजर कस्तूरी पिक चंद्रमा सिंहाण लोहेकाकीट मंडूर • स्त्री खंडरैचा सिंहाण सारणी गंधपसारिणीप्रीपधि सिहान नाककामेल सारथि रथकेहांकनेवाला सिंघाण सिंहासन राजावोंकासुवर्णकारान. सारव सरयूनदीकाहुआ गद्दीकाासन सारस कमल.सारसपत्ती सिंहास्य रुसाह रूस सारसन त्रियोंकीकमरकागहेना पीरा सिंही रुसाह रूस भांटा बैंगन का कमरपट्टा सिकना वान भूहकादेश सारिका पत्तीभेद सुईपक्षी सिकतामय बहुनशनहोना सारिवा श्रीपधिभेद मिकतावत् पातला देश . सारमेय कूकुर कुत्ता T १७३ शब्दार्थप्रकाशा (स) सिक्यक । मोम मीतकेसीथ IP सीता हलकीलकीर श्राकाशगगा सिंघाखी लोहेकाकीटा मंडूर कानामा श्रीरामकीस्त्रीFrp ] सित सफेद बंधासिमाप्तीचांदी सीत्य जोताखेत "RT सितछलांसिौंफामा सीपी ऊंखादिकीमदिरा ! सितशिव संघौनमक ra' FU | सीमन् मर्यादा डांडा सिता सपेदी शकर मी FREE | सीमंत वालोंकासिगार मांग TITH सिताभ IITE | सीमतिनी सोहाशिलस्त्री सौभाग्यवती सिताभ्र कपूर मकान सीमा मर्यादा डांड सितांभोज सफेदकमलना -सीर इल सिद्धनदेवगण,सिद्ध- Friसीरपाणि,बलदेवजी जिनकेहाथमेहलहै सिद्धांत सिद्धांत- सिहोनाः नरसीवन सूजीससीवना दरजीकाकॉम सिद्धार्थ सफेदसिरसौ सिद्धमयोजन सीसक सीसाधातु ।' सिदिऔषधिभेद सिद्धि- सीहुण्डी सेंहुड़काडग सिध्मा सेहवारोग सफेदकृष्ट मुश्रतिशय पूजनमे सुंदरता" सिध्मल सेंहुवाकारोगीः सिकंदक पियाज सिध्मला सूखीमछरी सहुँचारोग सुकरा सूधीगौ सिध्या पुप्यनक्षत्रता | सुकल दातान्भोगकरनेवाला ।। सिधकातिभेद जागा देखिपहै; सुकुमार कोमल नर्म मुलायम सिनीवाली जिसअमावसमेचंद्रमाकुछ सुकृत धर्म पुण्य ref सिंदुक, म्यौडीऔषधि | सुकृतिन् भाग्यवाने पुण्यवान सिदवार सिद सदुर वृक्षभेद [ कामद | सुख खुसी पानद कल्याण सिंधु नदी सिंधदेश समुद्र नदं हाथी | सुखवर्चके "सज्जीखार सिंधुक सेंदर सिधुना सेंधानमक - सुखसदीय } सखसेदूधदेनेवालीगी सिंधुवार - सेंदुर F सुगत बुद्ध जैनिमत सुदरमाप्त , सिंधुसगम,नदियोंकामिलाप संगम मेल | सुगधा रासनिश्रीपधि. . [ एलया सिरा नारी नाटिका- सुगधि मुदरसुगर पालुमसुगंधद्रव्य मुग्रीव कृष्णकायोड़ा श्रीरामकामित्र सिल्लकी शालयोपधि निसपासुदरगलाहोगी ! सिडलोपान म्लेन्छोंकीधूप मुचरित्रा पतित्रनास्त्री सीकर पानीकेकिनका छिटकी . । +- (स) शब्दार्थप्रकाशा। १७४ सुचेनक सुंदरवस्त्र उत्तमकपड़ा। सुमलाप सुंदरवोली अच्छीर बाती सुत पुत्र लड़का राजा' "rji सुभगासुतसोहागिलकापुत्र जिसका सुतश्रेणी मुसकनोपधि पिताजीवताहो: Tri सुतात्मजा लेडकालड़कीकीवेटी सुभिक्षा अच्छीभिच्छाधौके फूल नातिनी पोती सुम फूल IPFIE FISIE सुत्रामन् ' इंद्रस्वर्गकाराजा F"सुमन गोहूं IT STF IT सुत्या सोमाभिपय यज्ञकेभंतमेस्नान | सुमनस् देवता FIFI सुत्वन् यज्ञातस्नानकरचुकाः ग सुमनसः फूल मालती सुदर्शन श्रीकृष्णकाचक्र सुमना चमेली मालती AM सुदाय,कन्याकेविवाहमेदेनेयोग्य दायज | सुमनोरजस् फूलकोलि पराग सुदर अतिदूर बहुतदूर पा | सुमेरु सोनेकापहाई- TET सुधर्मा देवतोंकीसभा- | सुर देवता-1 क...] सुधा अमृत जोदेवतावोंनेपिया महलों सुरंगा सुरंगे जिसमेवैठशेत्रुकोजीते मेचूनाआदिकालेप विजुली वरा | सुरज्येष्ट ब्रह्मा सर्वदेवतासेंज्येष्ठ । भोजन सुरत दयावान मैथुन सुधांशु चंद्रमा सुरदीधिकाश्रिाकाशगंगों IFFI सुधी पण्डित बुद्धिमान सुरद्विप दैत्य दानवादि.रनेवाली सुनासीर । इंद्र - सुरनिम्नंगा गंगादेवतापोंकीपवित्रक- सुनिष राणकशागभेद विससपरिया सुरपति ' देवतापोंकामालिकद्र। सुंदर अच्चा नीक उम्दा सुरभि वसंतऋतु सुंदरसुगंधयुत काम- धेनु गौ जायफल चंपा शालय याँपधि सुरभी सुपथिन् सुंदररास्ता जिसमेछाया- सुरभीरसा }शालपोपधि वांआदिहों सुरपि नारदादिदेवताॉमेपि । सुपर्ण गरुड़ सुरलोक स्वर्ग देवतावोंकालोक सुपर्णक किरवारवृत्त मुरवमन् आकाश सुपर्वन् देवता सुरसा रासनिश्रीपधि सुपार्वक गजइंड गेठी सुरा मदिरा सराव सुप्रतीक दिग्गजकानाम मुगवार्य देवोंकेयाचार्यहम्पतिनी सुमयोगविशिख पाणफैकनेमेचतुर | मुरामंट मदिराबाफना 1 - - सुंदरानी जिसके अंगसुंदरहों .
. T । १७५ शब्दार्थप्रकाश ((स) सुरालय सुमेरुपर्वता सूचक कानमेंपराईनिंदाकरनेवाला : सुराजा तुवरि अरहरि ॥ चुगुलखोर [जाहिरकरना सुवचनकासुदरीवात उम्दाबोली- सूचन आशयकामकाश जनावना सुवर्ण सोनापातु अस्सीरत्तीभरसोना सूचि सुई सजि नाचनेकाभेद ।। सुवर्णक किरवारवृक्ष । सूत रथकासारथी पारा ब्राह्मणीमे सुवल्लि बकुची वचुकी 77 तत्रीसपैदाहो' सुवहा म्याडी रासनि हंसपदी शालय सूतकागृह । सोउर जहापरलड़काआदि एलापर्णी शोगदा सूतिकागृह पैदाहो' सुवासिनी नईयुवास्त्रीविवाहकेपीछे-'मृतिमास पैदाहोनेकामहीना पिताकघरमेली सूत्थान चतुर प्रवीण सुव्रता सूर्णगौऑदि उत्तमस्त्री सूत्र सूत व्याकरणादिमे सुशवी करेला ||सूत्रवेष्टन कोरीआदिकासूतलपेटना सुपम मनोहर सुदर | ITF सूद रोटिकरा भोजनवनानेवाला सुपमा शोभा छवि सुंदरना 31 व्यजनपदार्त्य सुपी करेला कालोजीरा । सुषि"छेद बिल TEE सूना, जीभकेनीचे पुत्री मारनेकास्थान सूनु पुत्र लड़का सुषिमा जाड़ा पाला- सूनृत प्यारीसच्चीबात सुपिर। बशीराखादिवाजा छेद दिल मन्माद - उन्मादी बैलाया पागल गड़हा खंधक सूपकार भोजनपदार्यवनानेवाला- सुषिरा मालकागुनि नलीगधद्रव्य मूर सूर्य [आचारी सुपीम जाडा पाला सूरण : जिमीकन्द सुषेण करौंदाकापेंड [लातें सूत दयावान सुपेणिका कालात्रिधारानिशोथ का सूरसूत अरुणसूर्यकासारथी सुष्ट अतिशय प्रशसा उम्दगी - सूरि बुद्धिमान पण्डित सुसस्कृत यनसेघीयादिमेपकाईवस्तु | सूर्प सूपनानपदोरनेका मसवी करेला सुहृद् मित्र सखा साथी मुहदय चित्तकासाफ सुन्दरहृदय मूर्य जिनकेउदयसेदिनहोताई सूकर मूभर [अध्यात्म | सूर्यतनया यमुना मूर्यकीलडकी मूर्यमिया छाया संज्ञा सूक्ष्म थोड़ा बहुतछोटा अतरात्मा सूमौ लोहेकीर्ति मुसी सृकिन्न TA मणि' अशं आंगुश T , IN - MIRIT TFP ((स)) शब्दार्थप्रकाशा. १७६ सूर्येदुसंगम अमावस जिसमेचन्द्रमासूर्य सकत जहापरवहुतवालही मन 1Fएकमेमिल जाताहै मांग संतवाहिनी सहस्रार्जुनकीनदी पर सूकि ITI FTur FIRMसनिक सेनाकेपहरेदार सेनाकेसाय सकिणी ओउकेवायेवदाहिनेकाअत संघवाघाड़ा संघीनमक TIP f 1517 सैन्य सेनाकेसाथ फोज । सृग गोफना जिससेहेलईटफेंकाजाताहै |सैरधी । परायेघरमेसियोकेशृगारकरने सियार Iris IFÍF =B77777|| सेरिधी | वालीनिशकस्त्री- सरिक हलकंवैल जोतनावल मणिका मृणीका लार मुहकापानी FUTE सैरिभ - भैंसा :-F सरयक झिटी करसैला । सृति मार्ग रास्तारमा सोढ समाकोप्राप्त सहनुका- सृपाटी तौलकाभेद सोत्मास हसीकीवात सृमर हिरनकी नाति । सोदर्य सगाभाई "छोड़ना बनाना ! सोन्माद वलान पागला. सृष्टि निश्चय पहुत सधि सोपप्लर ग्रहणकियेसूर्यचन्द्रमा fry सेकपान । चमड़ायादिकीवालटी डौल सेचन सोपान प्रोटा पत्थरयादिकवनमहलमे सेतु पल वरुणवृतामा TEE सोभाजन सहिजनकाह [चदनको सेना फिौज समारपैदलहाथीतोपयादि सोमा चन्द्रमा यज्ञभेद अमृतवल्लीरस सेनागा हाथी' रथ - घोडा ३ पैदल सोमप 111टायसेनायग है सोमपीतिन् सोमयज्ञकरनेवाला रमेश सेनानी सामिकार्तिक सेनापति यज्ञकरनेवाला मोमपीथिन् सेनामग्य सेनाकाममाय जिसमेहाथी३ सोमयीविन् रथसपोहा पैदल १५ हों सोमरानी रची बचुरी सेनारत फाजकेपहरेदार मोमपल्क सटकत्या पियावर सेव सुईसेसीना- सेवक नौकर टहलुवा मामबहरी सेवन मुईसेसीना सेवाकरना सोमबल्लिका मुची रचकी सेवा उनकीसीनीरिका टहल पनूरी सोमपल्ली गुर्च सेव्य तृणकीजर मालिक सोमानवा नर्मदा जा चन्द्रमामेहद सहिकेय राहु मिहिकाराक्षसीकापुन मोल्लुटन हमीकीयांन मसक सोमपात T । T 15 - सोमवहरि । मझेदी सोमलता -- सौदामिनी, विजुलीकीचमक शहदार्थप्रकाशा सौगत शून्यवादी स्तनधयी । सौगंधिक सामकाफूलनेवालासफेदः स्तनपा 'दूधपीनेवालावालक निकल तंणभेदं गंधक स्ननायित्नु मेघवादर : २०, सौचिका सीनेवाली दरेजीमा स्तनित बादरकोगर्जना .. सौदामनी स्तवक गुच्छाफूलादिका स्तब्धरोमन् .. सुअर HT सौध राजावोंकेमहलं. स्तथ वोकरी सौमागिनेयां सोहागिलकालड़काव बिनडारकवृक्ष विनगांठिकवृक्ष सौभांजन सहिजनकांड गोली तृणजवादिकांगुच्छावभुट्टा सौम्य बुधग्रह:मनोहर मूधा जिसका- स्तंवरित धान्य जवादि :: सोमदेवताहो... स्तंवघन.! खुरपी हसिया बासकीटोक- सौरनशनैश्चेरग्रहा..." स्तवघ्नानीसी...' सौरभेयाचिल:- स्तंयेरमा हाथी" सौरभेपी गौ 1 स्तंभ जड़ता यज्ञस्तंभादि सौराष्ट्रिको स्थावरंसिपः स्तव स्तोत्र स्तुति वदाई सौरि शनैश्चरनहा- Pil स्तिमित वोदा भीजा सौरीयक झिटीकरसैला स्तुत स्तुतिकिया बड़ाईकरना सौवर्चल सोंचरुनमक संचलखार-स्तुति निगुणीमगुणकहेना वड़ाई सौविद राजावोंकीस्त्रियोंके पहरेदार वास्तुतिपाठक वदीजन सोविदल्ल स्तुम TF सौवीर-वेरफल कांजी सिरका मुरमाः स्तूप कराआदिभोजनकीवस्तु मुवीरदेशकाअंजन स्तेन' चोर उठाईगीर सौवीर्य वरफल स्तेम चोदाहोना भीनजाना सौदित्य,प्तहोना भोजनादिसेपूर्णहोना स्तय चौरी उठाईगीरी संद स्वामिकार्तिक [राजा सेना | स्तन्य संध वृत्तकीजदसेडारतक कंधा समूह-स्तोक छोटा थोड़ा संघशाखा , मोटीर डार स्तोत्र स्तुति बहाई स्तोम समूह स्तोत्र यक्ष सन गिरना गलजाना स्त्री प्रारत स्खलन गिरना धर्मादिल्टना स्त्रीधमिणी रजस्वलासी स्खलित छल नष्ट चोरीकीलहाई स्त्रीपुरा जोना दोनोंपदारत स्तन कुच जिनकोचालकपीताई चिोकरा -- (स) शब्दार्थप्रकाश। १७८ स्यगार खियोंकेयर राजावोंके अंतःपुर स्थूल मोटा मूर्ख स्थंडिल यज्ञकेलियेपृथ्वी. [वाला. स्थूललक्ष । दानशूर वडादानी जोन- स्थंडिलशायिन् पृथ्वीमेनियमसेसोने- स्थूललक्ष्य । पनादेकरदूसरेसेनमांगनेदे स्थपति जिसनेवृहस्पतियज्ञकी थबई | स्थूलशाटक मोटावन गीगाढ़ायादि कारीगर पेंड़ पर्वत राजा स्थूलोचय हाथीकीमध्यचाल कुछकम- स्थल स्थेयस् बहुतस्थिर. [पत्थरकेटुकड़ा.] ऊसर स्थान सूखीपृथ्वी स्थली स्थौणेय कुकरौधा स्थचिर वृद्ध बूढा स्थौरिन् भारलेनेवालाघोड़ा लदुवा स्थविष्ट बहुतमोटा स्थौल्य चल मोटाई स्थाण महादेवं वृत्तकीकटीमोटीडार स्तव बहना वहिजाना स्तंभादि बैठा स्नातक वेदनात विद्यानात वेदविद्या स्थांडिल नियमसेपृथ्वीपरसोनेवाला स्त्रात व्रतस्त्रात वेदविद्यावतस्तात स्थान, नीतिभेद नित्य अवकाश वरा- वरनिवासस्थान इत्यादि जोब्रह्मचारीवेदपढ़मौं- स्नान नहाना. स्थानीय नगर शहर ग्रामादि [जीकोदार. स्थाने योग्य जानते हैं स्नायु नसें जिनसेदेहसवबंधी है स्निग्ध वरावरकासाथी चिकना पुत्रादि स्थापत्य रानियोंकेपहरेदार मेहकरनेवाला स्थापनी पाठायौपधि. स्नु पहाड़कीवरापरपृथ्वी स्थामन् पराक्रम भीतरीवल स्थायुर एकगांयकामालिक जिमीदार स्नुक सेंहुड़ स्थाल झंडवावर्तन स्नुत पहना वहिगया स्थाली,पांडरियाली तवालया कसहड़ी स्नुपा पुत्रादिकीवी पतोहयादि स्थावर जोचलनसके स्नुहा स्नुहि । सहुड स्थाविर वुढापा स्नही स्थासक देंहमेचंदनादिकालेप उवदनं स्नेह प्यार प्रेम स्थास्नु बहुतस्थिर बहुतवैठनेवाला स्पर्श,इंद्रियकाविपय छूना दान रोगभेट स्थिति आसन वैठना सुमार्गचलना स्पर्शन वायु दान [ उपतापरांग स्थिरतर बहुतयउनेवाला बहुत स्थिर | स्पश भेदिहाछिपनेवालादूत युद्ध स्थिरा पृथ्वी सरिचनापथि स्पष्ट प्रकट खुलासा स्थिरायु स्वरवाड़ स्पष्ट उपतापरांग स्थूणा लोइकीमूर्ति घरकसंभा स्मृका शागमेद पिंडकायापधि १७६ स्पृष्टि छूना स्पृहा बांदा इच्छा स्फाति वढना वृद्धि शब्दार्थप्रकाश। (स) स्पृशी भटकटैया स्पंदनारोह रथपरचढलड़नेवाले स्पंदिनी लार मुंहकापानी स्पन्न वहिजाना स्मष्ट्र रोगभेद स्याल साला स्त्रीकाभाई स्फटा सांपकाफन स्पादादिक मोक्षहैयानहीइसतरहवि- स्फरण फरकना जैसेांखकाफरकना चारनेवाला स्यूत गोनि थैली वस्त्रविनना स्फार वहुत अधिक स्यूति सीना सुईसे स्फारण फरकना स्योन गोनि थैली स्योनाक श्योनापाढाऔपधि संसिन् पिलुवाकाड सज् माला शिरफूलकीपांति सव वहना स्रवद्गर्भा,जिसगौत्रादिकागर्भवहिजाय स्रवती नदी जोहमेशःबहाकरे सवा जीवनी औषधि स्फुलिंग अग्निकोकिनकाचिनगी स्रष्ट ब्रह्मा जोसवकोवनाताहै सस्त गिरपड़ना गिरा स्फूर्नथु वजकीयावान साक शीघ्र जल्दी फष्ठ अतिशयस्थिर मुक् यलमेसुवा फूटना फोड़ना सुत बहेना वहा सुव । सुवाादियज्ञमेपानहोतेहैं स्म पादपूरणमे बीतनेमे सवा । मुरहरीऔपधि स्पय गर्व अहंकार मुवावृत्त वृत्तभेद स्सर प्रद्युम्न कामदेव. [ भस्मकिया. स्रोतस् सोता जहांग्रापसेनापपानीहो इन्द्रियोंकावेग नदीकारहना स्परहर महादेव जिन्होंनेकामको. स्रोतस्वती स्मित,मुसक्याना जिसईसीमेदांतनदेखप सोतस्विनी [अंजन स्मृति धर्मकीसंहिता मनुवादि स्रोतोजन सुरमा यमुनाकेसोतावोंका स्पद वेग जल्दी. [स्मरण सुधि.] स्व स्वगोत्री अपने कुटुंबी यात्मा - पना क्षेत्रज्ञ धन स्पंदन तिनिशव स्थललाईका स्फिच कमरकेमांसपिट कूल स्फिर बहुत अधिक स्फुट फूलकाफूलना मकट फटना स्फुटन फूटना स्फुरण स्फुरणा फरकना स्फुलन स्फूर्जक तेंदुवाका स्फोटन स्फोरण फरकना नदी स्वसेय चित्त मन (स) शब्दार्थप्रकाश। १८० स्वच्छंद अपनी इच्छाचारी अपनेवश | स्वर्वद्य अश्विनीकुमारस्वर्गद्य स्वजन कुटुंबी अपनेगोत्रके | स्वस बहिनि . स्वतंत्र अपनेवश स्वेच्छाचारी | स्वस्ति आशीर्वाद कुशल पुण्य मंगल स्वधा पितृकार्यमेन" | स्वस्तिक राजावोंकेघरकेभेद: स्वधितिः कुठार.फुल्हांदा :- - | स्यत्रीय । भानजा बहिनिकालड़का स्वन शब्द आवाज::: स्वनित शब्नहोना याबाजाना | स्वाति नक्षत्र : स्वम सोरहना सपना स्वादु सवाद मनोहर पीटा स्वम बहुतसोरहनेवाला.. स्वादुकंटक वेरफलःगुरखुरू : स्वभाजन : खातिरकरनी ध्यानंददेना | स्वदुरसा-काकोली.. स्वभाव प्रकृति सुभाषः : स्वादी दाप मुनका स्वभू विष्णुः । [करनेवाली | स्वाध्याय : वेदकामाव गायत्रीजपः- स्वयंवरा अपनीइच्छासेस्वयंवरमेपति | स्वान शब्द आवाज F" स्वयम् अपना पापही स्वांत स्वयंभू 'ब्रह्माः स्वाप स्वम सोरहनाम स्वर स्वर्गलोक परलोक- स्वापतेय धन द्रव्य स्वर उदात्त अनुदान स्वरित गानके स्वामिन् ... राजा मालिक स्वामी:: स्वर अकारादि . . | स्वाराज इंद्र स्वर्गलोककाराजा स्वराज् इंद्र F1 | स्वाहा अग्निकीमिया: देवताओंकेलिये स्वरु, वज्र वज्रकाशब्द लिंग योनि अग्निमेहोम, Ti Ti स्वरूप स्वभाव अपनारूप पण्डित स्वित् मनमेंन्तर्कमे :: मनोहर :: स्वेद पसीना स्वर्ग इंद्रकीराज्य irit. I" | स्वेदन किरयां डांस मसायादि । स्वर्ण सोना सुवर्ण - '' | स्वेदनी,मदिरावनानेकीभाटी कलठुला स्वर्णकार सोनार सोनेकाकामकरनेवाला स्वर : धीरा स्वाधीन स्वर्णतीरी चोप योपधिभेद स्वरिणी जोत्रीपरायेपुरुपसेरम 'स्वर्णदी आकाशगंगा स्वैरिता स्वेच्छा अपनी इच्छा स्वर्भानु राहग्रह. नैत्रत्य काग्रह स्वैरिन् स्वच्दाचारी स्वर्वेश्या, स्वर्गलोककीपतुरिया उर्वशी (ह). रंभायादि ह पादपूरणमें कार्य पार्थ : । ना - 0 ...
ह ---- - । / हरिमंथन) चना,लहिला, AM + हहे नीचस्त्रीकोबुलानेमें। 7 । । शब्दार्थप्रकाश। (ह) इंस सूर्य इस परमहंस राजा विष्णु पर- हरिदय सूर्य मात्मा ईर्षानकरना योगिभेद मंत्रभेदः हरिद्रा हरदी हंसक नूपुर बिछिया । 1) हरिद्राभ, पीला गोरा .. हंसवाहन ब्रह्मा जिनकी सवारी इंसहै। हरिगु, दारुहरदी हजिका भारंगी ब्राह्मीऔपधि हरिमणि नीलक'हरीमणि इंजे सेवकिनिकोबुलानेमे I. हरिप्रिया कदंवकावृतः हट्ट बाजार दुकान 11 TE हरिप्रिया विष्णुकीप्यारीलक्ष्मी इटविलासिनी औषधि हठ जबरदस्ती जोरावरी हरियालक, वालुकसुगन्धिद्रव्य हत 'मारना मनकोमारनाः हरिहय इन्द्र जिनकेहरितथोड़े हैं हनु औषधि दादी. [निश्चयइनमे. हरीतकी.. हर- ईत दानकृपाविषादहर्षवाणीकाप्रारंभ हरेणु रेणुकबीजोपधि मटर मोथी झाडेहोना Firi हH मनवानोंकेमकान महल हयो घोड़ारि इर्यक्ष सिद्द इयपुच्छी । मपवन औषधि'वनउर्दी हर्ष आनंद खुसी हमाण प्रसनचित्त इयमारक कनैरकाडा ) हला सखीकोचलानेमें दरण दायज कन्याकेविवाहमेदेनेकी इलायुध चलदेवजी वस्तु चोरी नाश -i इलाहल स्थावरविष हरि सिंह यम वायु इन्द्र सूर्य विष्णु हलिन् बलदेवजी जिनकाहलायुधहै किरण, घोडा, सुवापती, सांप, हलिपिय कदंबकावृक्ष वाना मेंझुका हरारग वैकुठ चंद्रमा हलिप्रिया मदिरा शरार हरिचन्दन कल्पवृक्ष कपिलवर्णचन्दन हरिण सपेद पीला हिरना हल्या यहुतसेहल इलोकादेर हरिणी सोनेकीहरीमति हन्नी परिन् दिशा सफेद पीला घोड़ा हव बुलायना प्राशा या हरिनक यथुईआदिशागभेद इविम् हरनकीपीर घी इन्य जिसको होमसे देवताममनहो ६व्यपारु सनकी यानि च इन । र महादेव जोसवसंहारकरते हैं, हल हल जिससेखेतजीतेनातेह हल्य जोताखेत हल्लक लाल कमल हरिताल हरिनालक हरितार Tre ह) शब्दार्थप्रकाश। १८२ हव्यवाहन अग्नि IT THEहिंसजीवसारनंबाला ,इत्यारा " हस हंसना 17-||हिका हुचकी; ASEART TRIE हसनी रीसी अंगीठी नक्षत्र हिगु होगवहांगकावृत, • हिगुनिर्यास-निीवकाडा - हस्त हाथ हथिभर वालोंकेसमूहमे हस्त हिगुल रंगनेकोरगभेदार | हस्तयारण} मारनेवालेकोरोंकना हिगुली भांटा बैंगन हिजल पानीकता हस्तिन् ‘हाथी.'' धरती हस्तिनख शहरवगायकेवाहरचढाउतार, हिडीर । हिडीर Birim FIFA समुद्रफन हस्तिपक 1-TETTE हस्त्यारोह महाउत होयीहांकनवाला हिताल ताइभेद बृतritr हद गर्वोमेश्रेष्टगंधर्व हिम जाड़ा,पाला हेमंतऋतुझंढा - हा विपाद शोक पीड़ा निंदा हिमवत् हिमालयपर्वत Tirth हाटक' 'सुवर्ण सोना हिमवालुका-पूरा- हायन वर्ष साल किरण धान्यभेद | हिमसंहति बहुतपालावजाहा । हार मोतीयादिकेहार दिमांशु चंद्रमा जिसकी किरणलंदी. हारित हारीत हरिलपक्षी एक ऋपिकानाम हिमानी - बहुनजाडावपाला । MIT हार्द प्रेम स्नेह प्यार हिमारती श्रीपधिभेद [पन मुवर्ण हिरएय: - बनीवनवनीचांदीवसोना- दाल हल हाला मदिरा शरार, हिरण्यगर्म ब्रह्मा हालिक हलकेवल जोतनिहा- हिरण्यवाह शोभनद ।। हार नियोंकीशूगारचेष्टा... हिरण्यरेतम् । अग्निा हास ईसी हिरक पिना समीप हासक धनहरीपधि हिलमोचिका हिलसायमरी हास्तिक हाथियोंराझंड, ही पिम्मय सिपाद हास्य रस भेद ईसी दीन मनिटा त्याग हाहा गंधर्वोमश्रेष्ट दौर महादेवजी हि कारण निथय पादपूरण हुनभुमिया अमितीप्रियाम्बाहा हिंसा चोरीमाटिकर्ममारडालनाकि हुनभुन अग्नि सीसीनीपिकानाशकरना मनमें तम हिमाकर्मन् जारनामरना गंपर्य Tr ६ - T १८३ हणिया चित्त मन हृदय 44 शब्दार्थप्रकाश । (ह) इति बुलाना गोहराना हेरंव गणेशजी हुहु गंधर्व हेलो स्त्रियोंकीइच्छादिचेष्टा हेपा-- घोड़ोंकाहिनहिनाना घृणां पिन इणीया हैं संवोधनार्थ हृदय छातीमेगहिराई हैम, सुवर्णकीवनीकोईवस्तु. [ सीरी. हृदयंगम् बंधीवाते वातोंकेलच्चे हैमवती 'श्रीपार्वती हर सपेदवच स्वर्ण हृदयालु ... दिलकासाफ सुन्दरदय हैर्यगवीन एकरातिकेंदहीकापी हा प्यारा सुननेलायकप्यारीबात' होट यज्ञऋग्वेदी होम 'दृपीक इंद्रिय आंखकानादि वैश्वदेवादिमे हृषीकेश, विष्णु ::- होरा, लग्नं आधीलम शास्त्ररेखाभेद हट -आनंदी खुसी हुदा जिस जलमयाहनहीं दृष्टमानस. खुसी मन आनंयत्- | इसिष्ठ-बहुत छोटा . संवोधनार्थ हस्व-वना छोटा ह्रस्व । हेति,प्रकाश प्रकाश शस्त्र आगिकीलपट लगवेधुका बरियारीभेद ककही... हेतु कारण दूस्वांग, जीवकोपधि [आँपधि. हेमदुग्ध गूलरकाद हादिनी वन विजुली नदी शालय ही-लाज शर्म हेमन् सुपर्ण सोना ड्रीण लजाया शरमाया हीत हेमपुष्पक चंपा हीवेर सुगंधवाला हावेर हेमपुष्पिका पीलीही हेपा घोड़ोंकाहिनहिनाना हेमादि मुमेरुपदाद डादिनी शालयापधि ह्यम् ' वीतादिन । an हेमकूट एकपहार . - हेमंत ऋतुभेद --- ग्रन्थसमाप्तौग्रन्थरचनाप्रकारमाह ॥ श्लोक ॥ श्रीकान्यकुब्जद्विजवृदमध्ये. आसीद्भरद्वाजकुलप्रसूतः ॥' क्लादिमोनामगुरुप्रसादोविख्यातकीर्तिःश्रुतशीलकर्मा ॥ १॥ श्री मान्महादेवकृपावलोकादानीसदाचाररतोतिधीरः । तस्यात्मजा सुष्टुगुणैरुपेतापुतौपितुःकीर्तिकरौप्रजज्ञे ॥ २ ॥ तयोःकनिष्ठरवकु लावतंसोदुर्गाप्रसादाभिधवाजपेयी ॥ श्रियाप्रयुक्तस्सुविचारदक्षो बभूवमित्रैरतिपूज्यमानः ॥ ३॥ तस्याज्ञामवगम्यविप्रकुलजोजा तोतिसूरेश्शिवा धाराख्याच्छिवशक्तिपूजनरतात्श्रीविश्वनाथस्सु धीः॥ गङ्गावामतटाजुक्रोशयुगकग्रामेवडाराभिधेस्थायीदीक्षितवंश वर्द्धनकरश्रीमच्छिशूनांमुदे ॥४॥ ग्रन्थंअर्थप्रकाशनामकममुंश ब्दादिमंशास्त्रतो मासेभाद्रपदेऽसिंतेगुहतियोवारेभृगोचात्यभे ॥अंके न्दुन्मितसंज्ञकेशततमे पंचाशदेकोनके श्रीमद्विक्रमवत्सरेतुकृतवान् दुग्गाशिवांतोप्यवे ॥ ५ ॥ अतछंदोभंगभयाद्विवचितत्वाद्वाक्कचिन्न संधिः ॥ समाप्तोयं शब्दार्थप्रकाशः शुभम्भवतु ।। +-