Natya Sodh Sansthan, Kolkata

Bhaado Kaa Nakal

Shaayar, Marakande · 2005/01/12

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UN * उस्ताद बेचन * भाड़ोंका नकल Dow |JAN VO ऐयार डाकू -लेखक- ॥ मारकडे शोयर ॥ - पकाशक- HISHNAAAAAAA... Dad गुल्लु प्रसाद केदारनाथ बुक्सेलर, कचौड़ी गली बनारस सीटी। मुद्रक- पंचान प्रेस, Dow सप्तसागर, बनारस सीटी। ॥ सर्वाधिकार श्वरक्षित ॥

[ १० ]
दूसरा दृश्य ।
(जंगल में डाकुओं का गाना)
॥ गाना॥
में मस्ताना नाहर डाकू र मस्त पी जाम् ॥
मालदार गर बन में मिलेतोकरू कत्ल हमारा काम
अगर लट में पड़े जंग तो बाधु जंग से लाम ।।
श्री बड़े २ से डरू नहीं गर चलै खुव समसान ।।
माल० ॥ मैं चाहू जो शहर लूटल नाहर मेरानाम
अरे मालदार श्रावे बन में तो मारू यही कलाम ।।
औलुट गरकर छने बरंडी और मचे खूब फान ।।
माल० ॥ गरज अगर मुह से अपने दूंजदेगिरसम
सीर । जाउं घूम डाकुओं को लेकेपाऊ जहांपैगाम
माल० ॥ बनमें रहूं यही काम हमारा यही फिकर
दिन गत । लडंपिडु लेऊ माल छिन खर बार का
मेरा जात। सदा कुशल से रहताहूं मयफिल को मेरा
सलाम ॥ माल० ॥

[ ११]
( एक डाकू का चिल्लाते हुर आना )
शकू-अरे बापरेवापतू लोगन हिंश्रवाहउवा अउर
पउर कुछोखबर नाहीं बाटे गवना करत हउवन।
हर-अरे मग्दूद कुछ भीकह कोई मालदारायाहै
कि वोही नीद से जागा यहां बेकार आया है।
डाकू-वेकार सेकार नाहीं उका देखा वोही
जात हौ और हां हां हां एक बात हो कि एकठे
बाटी सी लड़की भी वोकरे पास हउवे ।
नाहर-(का उधर ताकना ) खैर गर माल नहीं
गा तो लड़की हाथ आयेगी । (नाहरकाजाना)
तीसरा दृश्य ।
अफयुनका लड़की गंजीनाको साथ लियेहुये जाना)
प्रफयून-या खुदा जल्दीसे ये जंगल का रास्ताकाटदे
आगेइस्टेशन पड़ेगा औ बता सब बाटदे ।।
न्यारी गंजीनाप्यारीगंजीना तेरीभीकिस्मतपटहोगई
के संगमें ठोकर खारही तकदीर अटपट हो गई ।।

[ १२ ]
( डाकुओं का गोली मारना अफयून का गिरना
नाहर का गजीना का छीन लेना
सब डाकुत्रो का--धरोमारोरपकड़ो मालदार
[एक का गोली मारना अफयून का लगना ]
अफयून--हायहाय मौत बोगई (गिरकरमरजा.
नाहर को:-
अहह कुछ माल ना पाया तो एक लड़की तो मैं पाई
नहीं फरजन्द था कोई अहह बंटी तो कर आई
इसे घर ले चलू बीबी को भी ले चल दिखाउग
करेगी बीबी इसकी प्यार ौ अब्बा कहाउगा.
[ लेके जाना बीबी के पास]
चौथा दृश्य ।
(नाहर के बीबी का बिना फरजन्द के गना बीबी का नाम गहमर
गाना: दादरा
गहमर का
मोती जवाहिर घर में भरी। फरजन्द नहीं।
सोहर हमारो बांका लूटेरा।
मालिक है सौहर लसकरी ॥ फरजन्द० ।।

[ १३ ] नहीं फरजन्द माल सब वृथा। श्राजार मेरे जिगर पै परी॥ फरजन्द० ॥ यह सब माल पीछे को भोगो मोती जवाहिर भरी टोकरी। फरजन्द० ॥ अरे मारकंडे वृथो सारो है। छिछिली है नैयादरियागहरी॥ फरजन्द० ॥ (नाहर का गंजीना को लेकर बीबी के पास पाना) ना नाहर-ले बीबी ये मुराद तेरी खोजके लाये। लाये में छिन लड़की डाका से ले आये ॥ गोली से किया वार इसका बाप मरगया। ही हाथ लगा मोल ले आये जो मैं पाये॥१॥ जेवर सभी उतार लो लड़की के गले से । फरजन्द मान इसको खाना दे जो खाये॥ फरजन्द काथा मौक जो फरजन्दना मिला। लड़की ये है तुम्हारीग्रो उसकी तू हैमाये॥ २ ॥ जिसकी जहाँमें कुदरत सब कुछ भी दे दिया। खासा किया तयार मारकंडे में गाये ।।

[ १४ ]
( नाहर की बोधों का गंजीना की गर लगाकर गाना)
गाना--हां मेरे प्यारे सैंया लागु में वारी परे
सैंयालायो मुराद मैका जाय । चुनमुन सी छोक
लाये। हासिल अरा करवाये । जुड़ाये दिखा
लिनाये २ मोरे सइया लायो मुराद मैका जाय
वारी में तुझपर जोऊ बलिहारी तुझपर जाऊ मेवार
ये प्यारी गवारी गवारी मोरे सैया लायोमुराद मैक
जाय ॥ लागु पइया करजरे, लायो मुराद पि
मोरे जाकारे । पीमोरे दिलोरे दिलोरे मोरे सौर
लायो मुरादमैका जाय ॥ कि मारकंडे कविताई
आली२ कथनाई सोगाई मैभाई सुनाई सुनाई मो
सैया लाया मुराद मैका जाय ॥
पांचवां दृश्य।
[माबूद बादशाह का दरबार माध्द बादशाह का दरबार में भाना
बादशाह का गाना:-
हू बांदशाह में चैन नगर का जने जहां।

हे जानते को नाम नहीं दुनिये में इन्मास
शोहरत है सभी देश में सिरताज का बड़ा।
हे कौन मुल्क भाई जो डरसे नहीं रहा ।।
श्रावेजो कोई सामने भी टेढ़ी किये हो ।
सुली दऊ चढ़ाय उसे जो है खार ख्वा
शाहजादी मेरी जायना इन्दर की है परी।
देखेनो कोई उसको बसर गिरजा गस्त खां ।
ऐ मोरकंडे तुजपै बड़ी हुक्में खुदाई ।
लाखो किया तयोर तू गाने बना बना ॥
बुद का-ऐ वजीर तकदीर बयो कासो सुनाऊ ।
आया चोर रात महल हाले बताऊ ।।
वजीर-जापनाह २ क्या हाल है, क्या कोई
मरदूद् का हाल है। क्या अहेवाल है ।।
मावृद शाह-यही अहेवाल।
पार्ट सोतेथे रात रंगे महल चोर यां पाया।
नवलखा वो हार मेरे गर से चुराया ।।

वाह वाह वाह ऐ चौरखुब सफाई तू करी
साफहुया मालुम नहीं खुब चुराई त करी ।
वजीर-जा पनाह आपके महल के चारो तरफ
सिपाही रहते हैं पर इतने खबरदारी से हार चुरायो
बादशाह-हाँ हाँ मरदूद बड़ा चालाक है, आज
भी खबरदार रहना उसका काम ये पाक है।
वजीर-अच्छा खैर मरद आया तो जरूर है कि
पकड़ा जायगा।
छठवां दृश्य।
(रात का होना नाहर डाकू का चोरी करने चलना)
गाना नाहर का दोदरा।
चलो यडू डाका जाय भाइयो महलनमें। कलतो
चोराया हार नवलखा । अाज का हाथ लगजाय
भाइयों महलन में | जो कोई आवे मार गिराऊ
घड़से दऊ सर उड़ाय भाइयों महलन में। बिछुआ

[ १७ ॥
ला संग सभी है। मारुगा सामने जो श्राय
इयो महलन में।मारकंडे वाका हूं नाहर । रानी
लाऊ उठाय भाइयों महलन में।
नाहर का-चलो भाइयों रात आधी हो गई।
माबृद सोया है महलनमें वक्त पूरी होगई ।
: जाना डाकुओं का माबूद शाह क किल पर )
--
सातवां दृश्य।
घर माबूदशाह का सोना और सिपाहियों का पहरे में सोना)
( डाकूत्रो का घुस कर माल असबाब वारी करना और
शाहजादी के हीरे का कंगन चोराना, शाहजादी का
जागना, और बादशाह का चिल्लाना )
माबूद-(जोर से ) धरोऐ पहरेदारोचोर२ भागा
पहरेदारो-अरे किधर भाग किधर भागा किधर
गा।( सब लोग का नाहरको गिरफ्तार करना
चोर का भाग जाना, सवेरे का होना, दरबार
बादशाह के सामने नाहर को हाजिर करना)

[८]
( बादशा का दरबार नाहर को हाजिर करना
माबूद-ऐ वजीर हाजिर कर मरदूद कहाँ है।
वजीग्जा पनाह वो मरदूद ये क्या टड़ा है ।
माबूद-( देख कर ) वाह वाह ऐ नाहर डाकूध
का सरदार हमारे जाल में पड़ा है । कर कैद दं
सारे जनम को शेर जो बड़ा है ॥
आठवां दृश्य
(नाहर डाकू का गिरफ्तार सुन कर नाहर की बीबी का रोना
( गंजाना का समझाना, गंशीना की उमर १६ वर्ष की है।
नाहर की बीवी-( रोती हुई ) हाय हाय अफ
सोस किया बेहोश सौहर गिरफ्तार हुअा। नई
तनमन की सुध है जो ये सर पर बाजार हुआ
हाय अफसोस बादल फट न गया।
गंजीना का समझाना-अम्मा अम्मा किस ग
लत की नींद में सोई ऐ क्या बकती है ॥तू कर
समझती ये तो डाकयो का काम है गर सुली

[]
जाय तो अवल जहां में नाम है। खैर खैर ऐनो
कूनो का धराना है। अगर में भी डाकू खान
न है । तो मेरी भी यही वाना है ॥ धबड़ाओ
। जी दुखाओ मत जिगर में धीर धरो॥
र्टि-अगर डाकू कीवेटी हूंतो उसे जाकर बचाऊगा।
करूगा केद सहजादी को श्री स्वाद चखाऊगा।।
सी घबरानो अम्माजान बदल सूरत में जाऊगा
गा चूर उसका कैद अन्ना को छुड़ाऊगा। बना
नाम का एक खत बादशाह ठर पठाऊगा।
गी काम ऐ यारी उसे गीदड़ बनाऊगा ।।
(गंजीना का खत डाक में भेजना )
नववा
दृश्श्य।
(बादशाह का घर से निकलना दोना नजीग के माध बाग
महवा खान के लिय जाना, परद से निकलना)
वादशाहको गाना-
रित सुहावन मगरिब की बागे वहार । बोग भी
ले. फुल निगले ॥ फुलों को देखू निहार ॥

॥ भाड़ो का नकल
® उर्फ
॥ ऐयार डाकू॥
भाड़ो का घोड़ा-
घोड़े हैं बछेड़े दिनो में चार साल
न पूछिये मेरे घोड़े का हाल ॥
घोड़ा क्या हमारा काला है सब घोड़ियों
तुर्किस्तानका पाला है, घोड़साल तो घाट
। अामद भाड़ो का ॥
गोना थियेटर।
तेरी कुदरत न्यारी मौला कुदरत पै जांज
जितने हैं मर्दुम जहांमें सब बालम के सि
चौदो पलक धरा बोगे हा
खाली नहीं जरा. मान

[ २० ]
॥रित ॥ मोटर मगाऊ सबको विठाऊ सज ब
चले संग यार। मस्त बयारे डोलत न्यारे। फुल
की लागे व प्यार॥ जन्टोल बनके । पहुंचूगा ध
से। देखूगा बागे सिंगार ॥ मारकडे क्या रि
निगली ॥ फूलों की लागी कतार ॥
( डाकिया का खत लेकर जाना)
डाकवाला-राजे जनाब बंदा अदाब खत ये ए
आयाहै। कदमोंके गुजारिसमें ये डाकबाला लायाहै
बाद०-देख२ वजीर ये खत कैसा कहांसेपाया
पढ़ मनायो मुझको ऐ ढाकवाला लाया
वजीर-जी हाजिर जनाब मुनियेजो खत प्राय
पढ़ना-जनावेबाली जहांपनाह के वाद अदा
हाल मालूम हो कि मैं नाहर डाकू खे खानद
एक ऐयार डाकू हूँ जिसमें गुजारिश फरमाते
कि में अाज अापके पास चोरी करने आऊँग
जिससे जहाँपनाह को मालूम हो कि अपने

[ २१ ]
र होशियार हो जाय । दः ऐयार डाकू ।
दि०-हाय अफसोस ! यह कैसी अहेवाल आया
तो नाम हे मालूम कौन पठाया ॥ खेर वजीर
शियार रहना आयेगा तो पकड़ही जायेगा
र चलो बाग में चले।
( बादशाह काबाग में पहुँचना )
( गाना बादशाह बगैरः का बाग में । )
बागे बहार गुलसने कैसे हरे भरे । कैसे ये
ल वील रहे पते हरे हरे । चापे की कली बेला
कदे रहा वहार क्या रङ्गदार फूल हैं छाटे जरे२।।
लदावदी भी केतकी भी महक दे रही है खिल
हे जमीपे भी फूले झरे झरे । क्या सूर्यमुखी कून
वली महक से बसो। जाता नहीं जवां से कही
पांचे के ढरे ॥ ये
ममत
बयारे भी डालती है
ग में । रखी है मारकण्डे कुरसी दरे दरे ।
( एक बुढ़िया का भीखप गी के शकन गंजीना यानी ऐयार
डाकू का श्राना, एक लडका डाकू संग फकीर बना )
गाना डाकू यानी बुढ़ि रा का-

मैं
चुनवा फकीर ।
= दो अल्ला के राह
मिरजात वादशाह में चुनवा फकीर ।।
पाव भर आटे की है मेरी सवाल ।
आता हू हर माह में चुनवा • फकीर ॥
डाकू-खुदावन करीमकी मुबारक हो कुछ अल्ल
के राह में ये अन्धे मौताज को मिले।
बाद-ऐ वजीर ये कहां से रङ्ग में भङ्ग कर
वाली फीरिन आई इसे दो पैसा देकर बाग
बाहर करो।
वजीर-(बुढ़िया से ) ले दो पैसे बाजार से स
ले लेना और जल्द बाग से निकल जा फौरन
बुढ़िया-मुबारक हो मुबारक हो जहांपनाहर्क
(डाकू यानी युढ़ियाका ढंग करना, चारो तरफ घुमना गिरना)
( बादशाह बजोर का दौड़ पाना, बादशाह का अपने गोद में सु
लेना और मर थाम लेना. पेट से मुंह दबाना मबका कहना,
अरे घरो घरो वजीर नहीं तो यह मर जाय।
(सब प्रादमियों का बुढ़िया को पकड़ लेना और बुद्धिया
यानी ऐशार डाकू है । सो बुढ़िया का ढंग किए
हुए बादशाहक गरकामातीकामाला

[ २३ ]
और हीर का तकमा धार
सनिकालकर अपने
पाकेटमधर
लेना,
और एक ग्वत बादशह क पाट डाल देना।)
बुढ़िया-( होमदार बनके ) सरकार अब छोड़
जिय मैं होश में हो गई।
बोद०-(बुढ़िया और लड़के मे) अच्छा होशमें
गई तो जल्द हमारे वागसे निकलजा नहीं तो
शहोनेपर खूब पिटाऊगाकि आइन्दा मिर्गीनावे
बुढ़िया याने डाकू का अच्छा जहांपनाह में
भी चली जाती हूं खफा न हों।
या और भिखमंगे लड़कंका जर भागना और प्रानेघर जाना)
वजीर-बादशाह मे जहांपनाह वक्त तो होचुका
यो पांच का टैम होगा चलना चाहिए।
( इतना कह कर बादशाह के माथे हाथ करना )
हाय ! अफसोस हमारा तकमा क्या हुआ।
घर उधर चकपकाना।
जीर-अरे सरकार मोती की होरभी गरमें नहीं है

[ २४ ]
बाद०-प्रांय, प्रांय बांय, (गलाटटोल कर
अररररर वही चोर
चुरा
ले गया ( पाकेट में हा
डालना एक खत का पाना ) अरे अरे अरे
कैसा खत पाकेट में आगया । हाय ? अफसो
जबरदस्त डाकू (वजीर से) लो वजीर पढो तो
वजीरका पदना-जनावग्राली जहांपनाह के व
प्रादाब के मालूम हो कि मैं पहले खत में लिर
था कि अाज चोरी करूगा सो चोरी किया
श्राप अगर ५००) दें तो मैं कल आपके दरव
खुद आकर मोती-हार और हीरे का तकमा
दः ऐयार डाकू।
बाद०-आय प्राय प्राय ओ मोतीहार त
मो देने अायगा तब क्या शालं को गिरिफ
करांऊगा और सुली चढ़ाउगा ।
बादशाह वओर यह कहते हुये मकानको चल अच्छा वेटा श्रान
**-
में

[ २५ ]
दसवाँ दृश्य ।
शाहका फिलेमें पाना अोर शाहजादी बिमारी का हाल सुन्ना)
बादशाह को वजीर से-वजार ये कैसी महलन
घबड़ाहट पड़ी हुई है।
वजीर-बहुत अच्छा जहापनाह महल में जाता
पता लगाता हूँ।
(इतने में एक नौकर का घबड़ाहट के साथ प्राना)
नौकर-वादे श्रादाब झुककर सलाम कर जहा
नाह बेगम साहब की बहुत बुरी दशा है । अरे
हा तक है कि जान की नौबत आगई।
बाद०-( दहलकर ) प्राह अफसोस ये कहाँ
गजब टूटा कोई हकीम भी नजर नहीं आता
शाहजादी की दवा करवाते । हाय, अफसोस
जरा महल में देखें तो सही।
( बादशाह का महल में जाना )
*-:-

[ २ ]
ग्यरहवाँ दृश्य।
( ऐगार डाकू यानी गंजीना का परदे से निकलना)
गंजीना-वाह २ खूब बादशाह छका होगा,
अबतो श्राज मोतीहार फेरेने चलना होगा अच्छ।
मैंने सुना है कि देगम की हाल बुरी है यानी बीमार है
तो बंद का शक्ल बनकर चलू औरमोती फेर क
५००) ले पाऊँ । गंजीना का जाना
बारहवां दृश्य ।
( बादशाह का दरबार-बादशाह, वीर वगैरह का पाना )
बाद०-या खुदा कोई बंद हकीम भी नजर
नहीं बातो जो बेगमको दिखाते । अफसोस क्या
कर कोई भी तरकीब नही सूझती।
( ऐयार डाक का बैद बन कर पाना
डाकू का चिलाना-बैद २ सिंघी का बेद फो
का वेद कान का बेद पेटके विमारी का बैद २
बाद०-या खुदाये बेदको कहां से भेजा ! खे

[२७]
हजादी को दिखाउँ (बैद से कहना ) श्रो
द, बेद जरा इधर तो त्रा।
बैद-जी सरकार का हौ कौन बिमारी हो सब
जड़ी बूटी पास हो।
बाद०-श्रो बैद २ तू किस २ चीजका बैद है।
बैद-जी सरकार फिर सुनो। गाना--
है बन्दा हर चीज के रोगमारी का बैंद ।
जंगल २ बूटी टूटू सारी बिमारी के बैद ।।
फोड़ा माड़ा दात वाई पोजिस्म नारीके बैद ।
जड़ी बुटी का सौदागर हूं और रोग सारी के वेद
माकंडे हर मुल्क में घमौका जारीके बैद ।।
बाद.-अच्छा ऐ चैद हमारी शाहजादी के
पेट में रोग है चल देख कि क्या बाजार है।
बैद-सरकार मलामत चलिये सबका जाना)
( सबका घन कर फिर परदे के आगे आना )
बैद-सरकार ईस कमरे में वेगम साहब को
उठा मँगवाइये यह जगह ठीक है।

mr
[ २८ ]
बाद-अच्छा खैर यही सही ( नौकरों से
नौकरो शाहजादी को यहाँ उठा लायो ।
नौकर-बहुत अच्छा जहाँपनाह ।
( नौकरों का उठा लाना )
बैद-यहां वेगम को सुला दो और जरा जर
ट कर खड़ा हो जावो (बैद को नारी देखना )
द-ओफ ३ (पेट छूकर) सब पेट में खड़बड़
ड़बड़ भग या खुदा अच्छा सरकार एक बात
००) अगर मिले तो दवा बनाकर इसी जगह
यार करूँ। (मैद का खड़ा होना )।
बाद०-अरे भाई अच्छा तो करो लो ५००)
द-रु. लेकर सरकार एक घण्टा में न अच्छ।
सकी तो अाज रातभरंमें अच्छाकर देव या चार
कर हर वक्त वेगम के पास रहने को हुक्म दो
जो हम नौकरोंसे कहें नौकर लोग वही करें
बाद०-अच्छा (नौकरोंसे) अच्छा ऐ भाई तुम

.
--
[ २६ ]
लोग दो आदमी चौविस घण्टे शाहजादी के पास
हो और जो बैद कहे सो किया करना ।
( इतना नौकरों से कह कर बादशाह का राना )
पैद-सरकार जहाँपनाह रोई मत आप सब
लोग यहां से जाइये नहीं वेगम घबड़ा जावेगी।
(बैद का बादशाह को ढकन समझाते हुए वहाँ से हटाना और
चालाकी के साथ मोताहार तकमा खत बादशाह के पाकेट में
रख देना बादशाह वगैरह का आना, कुछ देर तक
नारी देखना रात का होना, बैर का गम को
बेहोशी शीशी का सुघाना । )
पैद-अच्छा ऐ नौकरो रोत का वक्त होगयो
और तुम लोग यहीं श्रीराम करो।
(शीशी का सुघाना बेगमका बेहोश होना नोकरी का वहीं लेटना )
मैद-या खुदो अफसोस वेगम तो मर गई।
(नौकरी का उठ कर खड़ा होना )
नौकर-तो ऐ बैद बादशाह को खबर दे।
मैद-नाहीं नाहीं ( रोकर ) अरे बाप रे बाप
५००) के गठरी लिहले बाटो जिग्राइब तौ न
पाइन अरे मोरे अल्ला हो ! मोरे अल्ला !!

पहिला दृश्य।
(अफयून सौदागर के बेटे का अफसास करते
परद स निकलना बेटे का नाम ओर है)
जेर- का कहना )
या खुदा अफसोस की डाली इधर क्यो कर झुकी ।।
बाजार अब्बाको लगानी शक्ल भी जातीसुखी ।।
परदेश में आये हुये हैं पर नहीं करते सुखी ॥
माल घर का खा रहे हैं यो सदा रहते दुखी ।।
हाय अफमोस क्या जले को जलाना था, यानरेही
को मारना था खैर अगर किस्मत फिरातो क्या फिग
जबको सदा दुख भोगली । (अफयून का आना )
अफयून-अरे फरजन्द ।
जेर-हां हां अब्बाजान क्या है।
अफयून-अरे क्या चकता है।
किस्मत का लिखा।
-क्या किस्मत में लिखा है।

[ २८ ]
वाद०-अच्छा खैर यही सही ( नौकरों से
नौकरो शाहजादी को यहाँ उठा लायो ।
नौकर-बहुत अच्छा जहांपनाह ।
( नौकरों का उठा लाना)
बैद-यहां वेगम को सुला दो और जरा जर
ट कर खड़ा हो जावो (मैदको नारी देखना )
वेद-प्रोफ ३ (पेट छूकर) सब पेट में खड़बड़
बड़ भग या खुदा अच्छः सरकार एक बात
००) अगर मिले तो दवा बनाकर इसी जगह
यार करूँ । (मैद का खड़ा होना )।
बाद०-अरे भाई अच्छा तो करे। लो ५००)
द-रु. लेकर सरकार एक घण्टा में न अच्छा
सकी तो बाज रातभरं में अच्छाकर देव या चार
कर हर वक्त वेगम के पास रहने को हुक्म दो
और जो हम नौकरोंसे कहैं नौकर लोग वही करें
बाद०-अच्छा (नौकरोंसे) अच्छा ऐ भाई तुम

[ २६ ]
जोग दो आदमी चौविस घण्टे शाहजादी के पास
हो और जो बैद कहे सो किया करना।
( इतना नौकरों से कह कर बादशाह का राना )
पैद-सरकार जहांपनाह रोई मत आप सब
लोग यहां से जाइये नहीं वेगम घबड़ा जावेगी।
बैद का बादशाह को ढकेल समझाते हुए वहाँ से हटाना और
चोलाकी के साथ मोताहार तकमा खत बादशाह के पाकेट में
रख देना बादशाह वगैरह का आना, कुछ देर तक
नारी देखना रात का होना, बैद का चंगम को
बेहोशी शीशी का सुघाना । )
पैद-अच्छा ऐ नौकरो रोत का वक्त होगयो
और तुम लोग यहीं आराम करो।
शीशी का सुघाना बंगमका बेहोश होना नोकरी का वहीं लेटना )
मैद-या खुदो अफसोस वेगम तो मर गई।
( नौकरी का उठ कर खड़ा होना )
नौकर-तो ऐ मैद बादशाह को खबर दे।
मैद-नाहीं नाहीं (रोकर ) अरे बाप रे बाप
५००) के गठरी लिहले बाटो जिग्राइब तबीन
पाइन अरे मोरे अल्ला हो ! मोरे अल्ला !!

[ ३० ]
नौकर-(घबड़ाके) तो साहब हमें कुछ वतामा
लोग क्या करें
गेद-तुल लोग किले के बाहर ले चलो मैदान
सुतायो में मंत्र से उसे जिलाऊँगा तगै न
३०) पाउँगा । उठायो ले चलो।
( सब नोकरी का उठा कर किले के बाहर ले जाना,
यानी घरदा सं घुमाकर सुना देना)
पैद-अच्छा तुम लोग जोव अपने २ कमरे में
राम करो। में सवेरा होते ही जिला कर किले
लोऊगा। (नौकरो का जाना)
पैद-अबका सब काम बनल ५००) रु० भी
ली और वेगम के भी चोरवलि अबका वेगम के
ने घर ले चले के चाही।
( बैद यानी डाकूका शाहजादी को उठा कर ले जाना )

तेरहवाँ दृश्य ।
(बादशाह का दरबार बादशाह वजीर वगैरह का प्राना )
बादशाह (घबड़ाया ) ऐ खुदा गजब अफसोस
डाकू मरदूद पाकर और शाहजादी को भी चुराले
भागा मैं कैमा अन्धा आदमी हूं कि चोर दांव
पार लेगया और मैं उसके ऐयारी में भुला गया।
(पाकट में हाथ डाले खत पायं सु उकर)
थो खुदा खर ये कैसी खत पाकेट में आई जो मेरी
बड़ाइ । बजीर२ पढ़ा पढ़ो तो अफसोस हैं ।
वजीर-( पढ़ना ) जनावे अाली जहां पनाह वादे
प्रादाब के मालुम होकि में नाहर खानदान के
ऐयार डाकू हु सोआप मोती तमका पाया सो
जानना और में आप का ५००) रु. पाया और
में कल चोरी करने पाऊंगा होशियार रहना।
(दः ऐयार डाकू)
बादशाह-( उछलकर ) अरे बाप रे बाप

[ ३२ ]
भी फिर चेरी करेगा वडीर शहर में ढढोर
रदे कि अगर कोई ऐयार डॉकू को पकड़े उसे
या राज पाट मिलेगा।
वजीर-नौकरसे ऐ भाई तुम जाव शहरमेंदिदोरा
रदी कि वादशाह सलामत की हुक्म है कि जो
पार डाकू को पकड़ेगा उसे प्राधा रोज मिलेगा।
नौकर जी सरकार मैं पीट पाता हूं।
वहींसे नौकरका दिढोरा पीटना और यह कहते
परदेमें घुस जाना भाईरे जो ऐयार डाकू को
डेगा सो हमारे जहाँपनाह का हुक्म है कि
धा राजपाट उस श्रादमीको मिलेगा वो आदमी
बार में हाजिर हो। (बादशाह को भी जाना)
॥ चौदहवा दृश्य
(ऐगर डाकू यानो गंजीना का पर, म निकलना )
जना-बाह वाह रे बादशाह खुब चतुराई करी
ने ढिढोरा पीटवाइ यो बला में जान फमाइ

[ ३३ ]
खैर जाता हूँ किसी सौदागर का शाल बदल कर
बादशाह के दरबार में पहुंचता हूँ और बादशाह
को भी गिरफ्तार करता हूँ ( जाना गंजानां का)
चौदहवा दृश्य।
(परदे से बादशाह वजीर का निकलना।)
बादशाह-या खुदा कोई मरद ऐयार डाकू
को पकड़ेवाला दिखाता है और मरदूद नही ऐयार
कू भी चोरी करने के लिये आता होगा।
(आना डाकू का सौदागर को शक्ल बनकर)
सौदागर का बादशाह से-पार्ट-सुना है जहां
पनाह ने दिदोरा शहर में मिटवाया तभो बन्दा
पकड़ने को सरे दरबार में पाया।
बादशाहः क्यो कहा २ तू ऐयार डाकू को
पकड़ सकता है।
सौदागर-जी हां से पकड़ सकता है।
वादशा:-क्या तुमारा यही काम है।
२

[ ३४ ]
मौदागरः-जी हां मेरा यहो काम ।
वादशा:-किस तरह पकड़ सकते हो।
सौदागर- ऐयारी नजुम के जोर से ।
बादशाह-वाह शावस असलहो शेर जोहिम्मत
ज्या भारी निकालो भव तरीका शेर अपना
म कर जारी॥
सौदारस-हजुर जा पनाह-सोचकर-मेरो नजुम
ताता है कि चोर भागया में नजुम के जोर से
स डाकू से शक्ल बनाकर मिलुगा और उसे
गरिफतार कराऊगा मगर मेरी ये सला है किऐयार
कू बढ़ा चतुर हैं उसलिये ऐ तरीका है कि भाप
हर में दिदोरा करवा दिजियेकि हमारे वादशाहि
स्त,पर ये सौदागर का लड़का बैठकर दरवारकरेगा
बादशाह:-बहुत अच्छा वजीर से ऐ वजीरशहर
दिदोरा पिटवा दे कि सौदागर का बेटा भ
ख्त पर बैठेगा दरबार करेगा सो सब शहर
जा लोग सौदागर कोही बादशाह मान ॥

[ ३५ ]
वजीर-नोकरसे ए नौकर जा शहर में दिढोरा
करदे कि सौदागर एक बादशाह के तख्न पर
वादशही करेगासो सब प्रजा इसो को बादशा-माने
नौकर-बहुत अच्छा हुजुरे सलामत अभी जाता है
नौकर का ढिढोरा पिटाना वहां से कहते हुये परदे से जाना)
सौदागर-अगर हुजुर सलामत से एक अज है
कि चाप बाज महल में बादशाही पोशक और
मोती जवाहर का जेवर बहन पर पहिरे सोइयेगा
और जब डाकू भावे तो सब नौकर ढङ्ग करके सो
जाये और हुजुर में डाकू के साथ आउंगा। और
भाप जानते भी रहना तो सो जाना और मैं डाकू
को इसारा से कहूगां कि बादशाहके बदन पर सार
जवाहिर का रकम है बादशाचो उठाले चला तब
डाकू पापको उठाकर चाहे जहांले जायगा मगरमाप
जागना मत जबमें आपको कहूँ ऐयारडाकू उठोतब
उठनेही डाकूकोपकडलेना बस गिरफ्तार होजायगा।

[ ३६ ]
बादशाः-(हँसकर) कहा शाबस क्या तरखीव है
हर पकड़ा जायगा अच्छारोतकाभी समयहोचला
वानेखास मेंसोताहूँ और तुजा ऐयारको बहकाला
दागर-मगर बादशाह सलामत भगर प्रापजाग
इगातोमरद अापको गौर हमको मारकर भागेगा
बादशाहः-नहो नही में नहीं जाग सकता क्योंकि
रर डाकू चालाक है [ सब लोग का जाना]
पदरहवा दृश्य।
(गजीना का घर यानी ऐयार डाकू) गंजीना का डाकू के शक्ल
पाना और बादशाःका सोना डाकुका बादशाःको उठाले जाना।
सोलहवा दृश्य।
सबेरे दरबामें अपने बाप को कैदसे निकाल संगमें लेकर जाना)
गंजीना-अधा जान राहोशियार हो जावो। ये राज तुमारा
माल पर तैयार होजा ॥ बाददशाः को गिरफतार किया।
(नाहर का झटक परदे में जामा) ॥ समाप्तः ।
पुस्तक मिलने का पता-
गुल्लूप्रसाद केदारनाथ बुक्सेलर,
कचौड़ी गली बनारस सिटी।
जाम प्रिंटिंग वक्र्स, कालभैरव काशी में मुद्रित ।

THI

जेर-वही वही (छाती पीटकर) जो ओप और
में भोग रहा हूं।
अफयून-तो क्या इरादा है।
जेर-इधर फरजन्द सादा है।
अफयून-खेर तो मेरी यही सलां है कि में
और बेटी गंजीना घर जाता है और तुम इम
महीने का तनख्वाह लेकर दस बीस रोज के बाद
तुम भी घर चले आना।
जेर-हां हां मन्जूर है। फरजन्दे दस्तुर है।।
पार्ट-पड़े ये फायदा परदेस में कुछना नफा हुथा।
लेबाये माल घरसे वो दौलत भी सफाहुा ।।
अफयून-अच्छा फरजन्द बेटी को तो बुलाव ।
जेर-नहीं अव्वा जान हमरे बड़ी चिढ़ती है
मैं हरगिज नहीं बुला सकता।
अफयून-('का बुलाना ) अरे बेटी गंजोना।
गंजीना का-हां अब्वा जान क्या है।
अफयून-अरे बेटी बाहर तो श्रा।

40) 1) भारतभूषण पंचांग आइये परीक्षा कीजिये सन १६३० की डायरी छपगई धातु रूपावली कानूनी डायरी 1) शब्दरूपावला डायरी नागसहित नं ॥) श्रवणकुमार नाटक डायरी नं०२ 11) बीर अभिमन्यु 1) डायरीनं बिना नांग!) महाराणा प्रताप डायरी नं०२ महाभारत 1) सं१९८७नयापंचांगऋपीके 1) भक्त सरदास 10) असली गणेशदत पंचांग 10) शकुन्तला नाटक विश्व पंचांग रामलीला नाटक मात्रा सत्यवान गणेशआपा पंचांग बड़ा 1) नन्द्रावली नाटक प्रहष्टी 116) धनुषगज्ञ पंचाग सुपरायल 4) आस्व का नशा मझोला नलदमयन्ती छोटा ) नारदा चौकड़ी .) द्वापद' चीरहरण जनऊ बढ़ियाँ माटा सूत ६६ भक्त घिदुर नाटक चौवा का कोड़ी) भारत दुर्दमा नाटक जनेऊ महीन मून ६६ चौवा मुहूर्त चिन्तामणि काडी ) लेज कागज वृहत्जोनिष १॥) लघुकौमुदी 11) ग्लेज कागज पर 1) स्तोत्र रत्नाकर शीघ्र बांध a) तर्क संग्रह विशेष हाल जानने के लिये मार। बड़ा सूचीपत्र मुफ्तमगाइये। लाल पंचांग 10) . प्रकाशक-गुल्लू प्रसाद केदारनाथ बुक्सेलर, कचौड़ी गली बनारस सिटी।

गजीना-(अदा से ) में ना श्राऊगी अब्बा में
ना भाऊीगी में श्राऊगी।
जेर-देखोरबड़ी दुलार पर चढ़गई है बात दुहरानी है
गंजीना-का पाक ) देखो हमसे तुम मत लगा
करो नहीं तो मारदगी नालायक पाजी।
जेर-देखोर अब्बा जान मना करदो छोटीसी
लवंडी मारदेगी।
( गंजीना का गैना)
श्रा आँ आँ आँ अब्बा हमें लवंडी कहते हैं।
अफयून-अरे बड़ा भाई न है।
गंजीना [ाँ आँाँ आँ ऐसाभाई भरसाईमें जाय
अफयून-अररर चुप चुबर ऐसा न कह ऐसान कह
जेर-अब्बा जान सिनवा के संग खेलती है सोख
हो जा रही है।
गंजीना-श्राँ श्रीँ श्रीँ श्रीँ हमारे संगी को सिनवा
(भाई से लड़ जाना)
जेरका-हटोर नहींतो मारदेगे और रोने लगोगी
कहता है

(सिनवा का अाना मिनवा को देय पार गंजीना का
गले पर हाथ धर के)
गंजीना-अहह हमारे मित्र सिना आये चलो२
ग में खेलने चले।
( नानी का जाना अफयून का टकना)
अफयून-अरे बेटी कहा जा रही है।
[गजीना का गना]
प्रां प्रां श्रां प्रां हमे क्या टोके हमे क्यो टोके
फयून-अरेकहां जारहीहेबस रोनाही शुरुकरदेतीहै
गंजीना-अहह पूछतेहो कहाजाती है तोअछासुनो
(गंजीना का गाना में सनझाना)
थियेटर।
रे अन्या जाती गुलसने बहार लागी फुलवारी
ल मिल करके खेलुगी पाया है मेरा यार ॥
ता चमेली प्यारी लागी सर सर की क्यारी ॥
पुगी बारी २ हमारे अब्धा देखुगी मबको निहार
या है बाका सीना, सावन का है महीना । में भी

[ ७ ]
हगंजीना॥हमारे अब्बा खेलुगी हाथ गरडार॥
हेलमिल के नाचो कूदो, घर २ के पाखे मदो।
पाकेजो मुझको दो। हमारेअब्वा मारकडे तयार
( इतना कह कर फिर गजीना का जाना फिर बाप का घर लेना)
अफयून- अरे बेटी सुन तो फिर कहां जाती है।
जीना-अव्वा फिर टोके प्रांयांग्रांयां क्या कहतेहो
फयून-चलगा देशको अपने चलो तैयार होजायें।
दा किस्मत में जो लिखा चलेफिर लौटके जाये।
जीना-अरेअरेअरे क्यार बकते हो देशकोक्या
सनवाका संग छु: जायगा क्या खेलमिट जायेगा।
अफयून-हां किस्मत में लिख जायगा।
गंजीना-तो में नहीं जाऊगीतो में नहीं जाऊगी।
जेर-क्यों ना जाऊगी काहे ना जावोगी।
जीना-देखो देखो अब्बाजान मनोकरदो फिरवोले
अफयूय-अरे बेटी गंजीना छोड़ संग सीना
दस महीना।
ये

[८]
गंजीना-अच्छाअव्वाजान अगसिना कहतोचले
अफयून-अच्छा सीना हुक्मदो लड़कपन कीदोस्ती
सीना-जावर ऐगंजीना जावो फिरतो प्रायोगी।
गजीना-नहीं मित्र मुसकिल है जानेकोन कहिये।
सीना-तो क्या तोहमत लगाये याछिन ले जाये।
गजीना-अच्छा अव्वाजान सिना के बाप कहे
कि जावोतो मे चलुगी नहीतो मै नहीं जोऊगी।
अफयून-अच्छी चल ।
( अाना सबका मीना के बाप के यहां सीमा का बाप खिर्जन )।
अफयून-खीजन सलाम पहुच जाता हूं देश को
दो हुक्म कहती वेटी करू बात सेस को ॥
खिर्जन-अहाहादेखोखुदाऐदोनोकोलकपन मेंदोस्ती
होजाती क्या प्रबल येवड़पन में दोस्ती ॥
अफयून-क्या खिर्जन क्या खिर्जन क्या कहा
बच्चों की दोस्ती छुट जायगी। कदापि नहीं में ये
करार करता हूं कि ऐ गंजीना आप की है करू

Bhaado Kaa Nakal

Author
Shaayar, Marakande
Title
Bhaado Kaa Nakal
File name
Bhaado Kaa Nakal
Text
OCR done
Published
2005/01/12
Publisher
Gullu Prasad Kedar Nath Bookseller, Benaras
Language
Sanskrit
Pages
39
Library
Natya Sodh Sansthan, Kolkata
Classification
Drama. Plays
Keywords
Folk Forum Popular In UP
DLI number
292673
Barcode
4990010202563.00
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C-DAK, Kolkata
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