Charan Sahitya Shodh Sansthan, Ajmer

Pandavyashendruchndrika

Hariprasad Bhagirath · 2010/06

PDF Proofread

Front matter

No text on this page.

यह
-
रसालंकार बोधिनी
डिवयशेन्दुचंद्रिका.
श्रीस्वामी स्वरूपदासजीकृत
इसपर
कवि रमणविहारीकृत
छंद रसालंकार प्रकाशिका
टीका सहित
भागीरथात्मज हरिप्रसाद
गौड ब्राह्मणनें
मुंबईमें
जगदीश्चर छापरवाने में छपवाया
संवत् १९५४.
पुस्तक सन १८४७ के आस्ट २० तथा सन१८६७ के
आक्ट२५ वमोजिन रजिष्टर किया है.
परि, ०२२५

(२)
적
सूचनिका यह रसालंकारबोधिनी पांडवयशेंदुचंद्रिव
श्री स्वामिजी स्वरूपदासजीने संवत् १८९२ के साल में ,
अशद ११ के दिन रचिके तयार करी फिर यह ग्रंथ संब
न १९०६ सन १८५२ के सालमें इंदोरछापरवाने में छापा
यो अब संवत् १९३७ मार्गशीर्ष शक ९ भृगुवारके ।
न कवि रमणविहारीने भागीरथात्मज हरिप्रसाद गौड
ब्राह्मणकी प्रार्थनासे इसपर छंद रसालंकार प्रकाशिव
नाम टीका रचिके तयार करीहै.
E
नर
नारायण
पांडव
श्रीकृष्ण.

BI
गरुड
मारुती
लक्ष्मी
भगवान्
I
KK

चर्नुन.
श्रीकृष्ण
..
C
श्रीहा
अर्जुन
रुक्मिणी
द्रौपदी.
समाः
+

पृष्ठ पंक्ति ७ ११ १२८ पांडव यशेंदुचंद्रिकाया सूचीपत्र. ५) पृष्ठ पंक्ति ग्रंथप्रारंभ. १७ | ६ सर्वअध्याय १२ औश्लो.सं मंगलाचरण. १७.१० अष्टादशभक्षौहिणीसंरच्या ९ ५ अर्जुनके चीसनाम. १७ | " पांडवसेनासंरच्या. १०.१ पांडचयशेंदुचंद्रिकाकी१६ १७ १६ कौरवसेनासंरच्या. १० ७ १८ परीके नाम. १८/१ . सर्वसेनसंरच्या. ११ ५.५८ प की सूचनिका. १८:१० भारत प्रारंभः आदिपर्वसूचनिका. १९ ९ ग्रंथजन्मसंवतादिक. ११ १३ सभापर्वसूचनिका. १९/११ प्रथममयूखः ११ /२१ वनपर्व सूचनिका. १९ १३ द्वितीयमयूरव प्रारंभः विराटपर्वसूचनिका. १९१६ छंदसूचनिका. १२ १५ उद्योगपर्वसूचनिका. १९ /१८ उक्तादिछंदसंरच्या. १३ १ भीष्मपर्वसूचनिका. २०८ छंदजातिसंव्या. १३ ९ द्रोणपर्वसूचनिका. २१ /१० वर्णप्रस्तार. १३ १७ कर्णपर्वसूचनिका. २३ १ उद्दिष्ट. १४२ शल्यपर्वसूचनिका. २३/४ नष्ट १४९ सुषौप्तिकपर्वसूचनिका. २४५ मेरू. १४ १७ स्वीपर्व सूचनिका. १५५ शांति औ अनुशासन) २६/१ मर्कटी. पर्वसूचनिका. २६ २ छंदका लिंगपुरुषादिक. १५ १४ अश्वमेधपर्चसूचनिका. २६/११ गणस्वरूप. १६/१ व्यासाश्रमपर्वसूचनिका- २७.३ छंदलक्षण. १६/९ मुसलपर्वसूचनिका ३१ ९ हादशरसवर्णन. १६/१६ महाप्रस्थानपर्वसूचनिका ३४/१० मात्राछंदस्त्रीलिंग. १६/२० स्वर्गारोहणपर्वसूचनि. ३४ १४ वर्णमात्रामिश्रितनपुंसकछंद २५. १ / पताका.

(६) पांउचयशेंदु चंद्रिकायासूचीपत्र. ३४/१३ वतीयमयूख. ८४. चित्र (विराटपर्व), ३४ २४ अलंकारसूचनिका. ८६/१ सप्तममयूखप्रारंभः ३५/३ उपमासू. ९६/ चित्र (उद्योगपर्व) वर्णधर्मोदाहरण. ९०/१ अष्टममयूखप्रारंभः ३६.१० श्वेतोदाहरण. १०६/० विराटपर्व (चित्र) ३६१६ कृष्णोदाहरण. १०७/१ नवममयूरव प्रारंभाउ ३५३ रक्तोदाहरण. उद्योगपर्व. ३७८ पीतोदाहरण. ११४ चित्र(भीष्मपर्व) ३७ १४ आरुति. १९५/१ दशममयूरवप्रारंभः ३८३ अथगुण. १२३) • चित्र (द्रोणपर्वः ३८ २२ आकृतिउदाहरण. १२३/१ एकादशमयूरवप्रारंभः १३९५ गुणोदाहरण. १३३/.चित्र. ५६.३ तृतीयमयूरपसमाप्त. १३४१ | द्रोणपर्व उत्तरभाग १२) चित्र. मयूरचः १ चतुर्थमयूख प्रारंभः १४७१ चित्र कर्णपर्वपूर्वाथ. ५२ " श्रीवेदव्यासोत्पत्तिः ५२/२३ अष्टादशपुराणसंख्या. मारंभः ५३/५ वेदसंख्या. चित्र. ५३/६ जन्मेजय सर्पयज्ञ. १५० ५४/१३/ऋषिसरव्या. प्रारंभः चित्र. चित्रशल्यपर्व. ६०१ समापर्व पंचममयूरवप्रा० १६०१ शल्यपर्व १५मयूरचप्रारं० ६८९ राजसूय यज्ञप्रारंभः १७८/० १७८) चित्र. ४६चित्र (बनेपर्च) १७९१ १६मयूरव प्रारंभः षष्ठमयूर्वप्रारंभ कथा. १४७७ कर्णपर्व १३ मयूरव १५७ कर्णपर्व १४ मयूरव १६५/०

"
...
श्री
)
अथ रसालंकारबोधिनी पांडव यशेंदु-
चंद्रिका प्रारंभः
":
श्रीगणेशायनमः ॥श्लोक॥ गुणालंकारिणीवीरौधनुस्तो-
अविधारिणौ ॥ भूभारहारिणीचंदेनरनारायणावुभौ ॥१॥
॥दोहा॥ ॥ध्यानकीरतनबंदना विविधमंगलाचन ॥ प्रथम
नुष्टुपनीचसोई भयेत्रिधासुभकर्न॥२॥नमोअनंतब्रह्मांडके
सुरभूपनके भूप॥पांडवयशेंदुचंद्रिका बरनतदासस्वरूप ॥३॥
ग्रंथकर्ता ग्रंथके निर्विघ्नताके वास्ते ग्रंथादि देवताके ध्यान कीर्तनश्री वं.
दनरूप मंगलाचरण करते हैं गुणालंकारिणौ इस श्लोककरिके गुणजोध-
नुषकीपणच औ अलंकारकरिके युक्तअथवा गुणौकोनी अलंकृत करने
चाले औधनुष तथा तोत्रको धारण करेहुये जैसेकि धनुषको अर्जुनौनोत्र
कहते हैं घोडाके हांकनेका कोडा याने चाबुकउसकोश्रीकृष्ण धारण किये हैं.
श्री भूभार याने पृथिवीके भारके हरनेवाले ऐसे श्रीकृष्णीअर्जुनरूप नरना
रायणकी मै चंदना करता है ।।१।। ध्यान कीर्तनश्री वंदनातीन प्रकारका मंगल
चरणहै सोपथमके अनुष्टुप् छंदमें तीनौ प्रकार कहे जैसेकी रूपवर्णनसें ध्यान
औ पृथ्वीके भारहरणमें कीर्तनौ वंदे ऐसा कहनेमें बंदना ।।२।।अब परमा-
साको फिर प्रणाम करिके ग्रंथकानामप्रगट करते हैं कि अनेक ब्रह्मांडके नायकोंक
नायकउनको नमस्कार करिके मैं स्वरूपदास पांडवयशेंदुचंद्रिका नामग्रथच-
र्णन करताहौं तहां पांडवनकी विजयरूपजोयश सोती चंद्र भयो श्री चं-
द्रिका याने प्रकाशइसमें यह है कि स्वामीने सेवकको बडाईदी स्वामी श्रीक-
ष्णौ सेवक अर्जुन सो अर्जुनका सारथीपना करिके उनकी जीति कराई
यही प्रकाश है ।।३।।
॥५॥
1॥५॥
..
॥५॥

पांडचयशेंदुचंद्रिका. त्वामीकपीछेरहैं आदिहोयउच्चार ।। नरनारायणशब्दळू दा- सस्वरूप विचार॥४॥ ॥घनाक्षरी॥ ॥गरलते भीमकै सुज्या लाहुते पांचहूकै द्रौपदीकैसभात्रौ विराटबनतीनवार ।। फिरोटि किरकै श्रापतें युधिष्ठिरकुंमारवेकू मरिबेकौ उदै भयैअसि धार ।।दुरवासा श्रापर्वकू आयौताळू आदेदेकै श्रूपदास केते क है एक छंदो प्रकार ॥ तैई मेरे ग्रंथोदि मंगलउदय करोएतेठां अमंगलकूमंगल करनहार॥५॥ ॥ कविता॥ ॥पोलैंप रिजंक परके सब किरीटीजूकीजंघापरहेकैपाय द्रौपदीकी गोदमै ॥ ट्यूहीपदअर्जुनकेसत्यभामा रुक्मिणीके अंकबीचधरेतीनूप- लोटे विनोदी अंतहपुरचारिनके देवत्तनिममभयैराजसूमैने- नमीनानंदकैहोदयै।ज्योंनिरंतराईदास स्वामीकीस्वरूपदा- साहोप्यासमेरीचारौपायध्यानमोदमै॥६॥गुणिगुएरा ५ अंशीअंश बिकारी विकारभाव३ कारएअरुंफाज ४ जा तिव्यक्ति ५ वषारोहैं। सेवक योसेव्य ६ उपचार स्तुति सादृशता ९ उपमापरायरा ऐतीनपदवाने हैं। नोपिकल्पता कोजीबईसमें अद्वैतवादीकर है अभाव तत्ववेतालोकजाने है ।। वासदेचार्जुनमै घटै है रुघटै नांहि ऐसोज्ञानभक्तिलीयेशू पदासमान ॥७॥ दंपतिपरिहास मंगलोचन॥ कवित्त॥ ॥ विष्णु कहैरमातेरेपिताकी थियाजोगंगा शिव ने छिनायलीनी नाकी बैरकालयो॥रमा कहजारत त्रिलोक सोदीनोचिरयापते छिप्यो हैका पिरण्यात विश्वमै भयौ। mantimorea स्वरूपदासजी इस पांचमेकवितमें यह प्रार्थना करते हैं कि जैसे भीम को विते औअग्निते पांचौको इत्यादिक ठौर रक्षाकरिके मंगल करतेभा यतई भगवान् मेरे या ग्रंथके आदिमें मंगल प्रकास करौ ।। ५।।

। पांडवयशंदुचंद्रिका. आपकोजरायो पुत्र कामसौंअनंगनामताकोचिडहाथाली येपूजतनयोनयो॥ऐसोपरिहासकियोदंपतिस्वरूपदासमं गलकीरासिध्यानहदैचित्रलैगयौ॥८॥ ॥दोहा॥ हरि- हरसत्तमगुएरामई चहियगौररुस्याम॥अन्योअन्यकेध्यान नै भयेविलोमनमाम॥९॥ कचित्त॥ १ विजय २ श्वेतवाहन किरीटी ४ जिष्णु ५ अर्जुन ६ बि भत्सु सव्यसाची नामगहियै। फालगुन ९ कृष्णा १० कृष्णसरवा ११ नर १२ गुडाकेश १३ वासी १४ संगीतवे त्ता १५विश्वजेला १६ कहिये। कौंतेय १७ गांडीवधारी १० कपिध्वज १९ अभकारी और कालरवंजारी२० उच्चारकियाच हियै॥ छत्रीको जरूर और कोऊकौस्वरूपदासवीसनामजप तेत्रिचर्गसघलहियै॥१०॥ ॥धनंजय विष्णु सत्वगुणमय गौरवर्ण चाहिये श्री शिव तमोगुणमय श्याम चाहिये. परंतु परस्पर ध्यान करिके विष्णु श्याम श्री शिव गोरे होने भयेउनको मैंनमस्कार करताहीं॥९॥ ये२० नाम अर्जुनको तौ प्र- भाससमये स्मरणसे फलजरूरही देइंगे परंतु हरकेई वक्तेभी अ- र्थ धर्म कामके देनेवाले हैं।। १० ।। :

पांडवयशेदुचंद्रिका. कीर्ति लज्जा २ शांति ३ बुद्धि ४ प्रज्ञा ५ भ्रतीक्ष्यास्ति कता समता असदमतातैतमता विनाशी है।सध राई १० गिरा ११ क्षमा १२वीरता १३ उदारताई १४ विद्या १५उपकारताई १६ विश्वमै विकासी है। व्यासमुखपाचीदि सासज्जनकुमुदचंदधृपदासबुद्धिसोचकोरनीहलासीहै। भीमानुजनफुलाग्रजतोसमैउदैइंदुषोडसकलाकीताकीचंद्रि काप्रकासी ॥११॥ मंगलाचनकिमर्थ।। आदि सभामा रन्य३ विराट ४ श्री उद्योग ५पर्व भीस्म ६ औद्रोगक एशिल्य ९ पर्चकहिये। सपौप्तिक १० त्रिया शांति १२ अनुशिष्या १५ अश्वमेध १४ व्यासाचम१५ मुस्ल १६ विचारकरिंगहिौं। महामस्थ १७ लेकै स्वर्गारोह: १८ आदिदेकै अनुक्रमहीने पर्यअष्टादशलहिये। तिनकोसंक्षेपचहें वरन्योस्वरूपदास किरीटीकेसारथीस हायने करहियै।॥१२॥ ॥ किंप्रयोजनं॥सवैय्या॥ ॥ पांचछतेकरिगोनहरी दिसफेरऐपांचचलैनचले।जीपछ तंगुनियेहरिकोजसफेरयेजीमहलैनहलै ।नेनछतेलरिवरूप विराटदो फेरयेनैनरिवलनखिलें। श्रोतछतेहरिकीरतिक्त सुनिफेरयेथोनमिलेनमिलै॥१३॥ ॥दोहा॥ लाभजीचकारुजसको पुनिपरमारथसांच॥ विघ्नसांत- इस ग्रंथका नाम पांडवयशेंदुचंद्रिका धरयो तहां पांडवके यशको चं द्रल्प कयो तामेसोरहकलाचाहियेतहांय कीर्ति लज्जा आदिक सोरहकला वर्णन करीं ॥११॥ मंगलाचरण किसवास्तेकरते है सो का हने है कि श्रादिपर्व इत्यादि अठारहपर्व भारतकी इसग्रंथसंक्षेपत्तासे वर्णन करने वाहताही तहांजैसे अर्जुनके सारथी हैके उनकी सहायकरी थी वही मेरी करौ॥१२॥ ॥

पांडवयशेंदुचंद्रिका- परलोककी सिद्धप्रयोजनपांच॥१४॥ मेरे पांचहुंहै मेरीजी वकाहरिहरिदास कीर्तन ग्रंथकियेजसभीहै पढ़ेगे जिनको बुद्धिसुकर्मप्रातिप्रमार्थ ग्रंथविषे विघ्नसांति पोकसिद्धिहै। ही श्रीहरिको हरिदासनकों मिश्रितयससाकलोनसरकंजान साचंद्रन्यायेन॥१५॥ ॥अष्टादसपूर्वशुचिपत्र प्रथम- श्रादिपर्वशचि॥ ॥कवित्त॥ ॥जन्मेजयससित्रययाती भरतजन्मांसाम्भवतनसस्यसिक्षाअनुमानिये। लारवाय हेबहलोहिडेबोधकासुरको द्रौपदीस्वयंवर ओराधाचेध जानिये ॥राज्यअर्धलाभचानासवर्षदादसको अर्जुनसुभद्रा दतियालाभगानिय पांडुइहित लूनपानुभाडाम आदिपर्वरिपननीकैकेपिछानिय॥१६॥ ॥दोहा॥ "म नियन ट्रंग वामगति अंकलिरबहुअध्याय ॥वेर्दै बर्स ग्रह फिरवसु श्लोकानुष्ठपन्याय॥१७॥ ॥सभाशुचि ॥ कवित्त॥ ॥नारद देवनकीसभाबहधासीकही पांउकोसी देसमुनिराजसूयकरिवौ।। बारोदिगविजेचारी भातनत माग धौं भीमते विनाशशिभुपालहकीमारियो । सभावीचवीच्या पमानत्यूंसुयोधनकौमच्छरतालियपितामातुलतैलरिवार योधूतारबच्चोचीरससुरनैदीनीवरफेरबूतराअब्दवनकोषि चरिया ॥१०॥ ॥दोहा॥ ॥सु मुंनिअध्याय है सभाप- चमैजान॥चंद्रमही सरे अयन लरिव श्लोक प्रमान हिमा न॥१९॥ ॥वनशचि॥ ॥कविता ॥ भास्करते १ इहां अष्टादशपर्वकी धूचनिका लिखते हैं नहां आदिपर्व में २२७ अध्याय औ९८४ श्लोक है. २ सभापर्वमें ७८ अध्यायी २५११ श्लोक है.

पांडचयशेंदुचंद्रिका. अरपात्रमापत्तप्रथमभयोकृष्णफौमिलापइतिहासपनल कौ॥जिष्णुतपअश्यलाभकपटनिखांदजुधनाकगीमरंभाश्रा पनासदैत्यदलको घोषयात्रामोरवबंधुद्रौपदीहरनता जन्म भ्रष्टव्हैयौदुष्टजेंद्रथविकलको ॥रामकथातीर्थाटनकाजन्म अरनीतै चारुबंधुमृत्युयक्षज़ोगपानजलकौ॥२०॥ दोहा॥ ॥ रत्नउमींद्रेग वनपरब कहीव्यास अध्याय ॥वेर्दै राग रितु बिधुमेही संरच्या श्लोक जिताय॥२१॥ ॥ विरा टशचि॥ ॥कचित्त॥ ॥कंकभटबल्लभजी बृहन्नटायथा कारतंत्रीपालसैरंधी आकृती छिपाइको ।। द्विजके मोहोत्स चमैहतनजीमृतमहट्रोपदीके काजचंस कीचकरचपाययो । दक्षणगोयहणबई मुंडनसुस फोदगीग्रहणकुरुसेन्यमु रायचौपासेकोप्रहार भूपमच्छतेयुधिष्ठिरकेउतराते सौभद्रे यच्याइकोरचाइची ॥२२॥ ॥दोहा॥ ॥ वारराग बैरांटमै कहे अध्यायचरवानी॥ध्यौमांवर शेरकर सहित लोकसमूह । उद्योगसुचि॥ ॥कविता। आदिमंत्रनागपुरगौनसीपुरोहितकौदजोगौनसंजयकौनीतीहै - विदुरकी॥तीजे भौश्रीकृष्णगौनमुनिइतिहासकथाधारन विराट रुपदेरियसभाधरकी॥दसहदिसाकेभूपागमनिमंत्ररातैसा तग्याराक्षोहएगीमिलीहै घरेघरकी॥आगमउलूकदोनूसेन्या गोनकुरुक्षेत्ररथीसंरच्याअंबाकथानारी भयेनरकी॥२३॥ ॥दोहा॥ ॥रागसिडिअरुचंद्रमा पर्वअध्यायउद्योग।यस पिछानी॥ २३॥ + ६ वनपर्वमें २६९ अध्याय औ ११६६४ श्लोक है. + २ विराटपर्वमें ६७ अध्याय औ२५११ श्लोक है. * ३ उद्योगपर्व में १८६ अध्याय श्री ६६९८ श्लोक हैं . पांउचयशंदु-चंद्रिका. (१३) रनउर्मी रितू श्लोकनकोसहजोग॥२४॥ ॥भीष्मरूचि कबित्त॥ ॥रवंडनिरमानउत्यातकोप्रमानहानिभीष्मप्रति सेचनप्रणेतासैन्यसारीको॥अर्जुनविषादगीताअष्टादसध्याय जानितीनवरदानधर्मपुत्रधर्मचारीको ।। इरावानुउत्तरीसंरच हैविरादपुत्रसतरासुयोधनबंधुआपकारीकौ ॥ भयोपर लोफबाणसज्यागंगा पुत्रपोटें बाणगुंगादीनौजसअवैतून धारीको॥२५॥ ॥दोहा॥ ।। चार इंदुगनपति रदन भी स्पपर्चअध्याय ।।दवस सिद्धिचानली श्लोकहिदीये जिता य॥२६॥ ॥द्रोणसुचि॥ ॥कबित॥ ॥ द्रोणकी मनिज्ञाजुधसंसप्तकअर्जुनकौचक्रव्यूहचेबद्धसभाके नंदको । नरकीप्रतिज्ञाजुद्धविनारथबधभयोभूरिश्रवाजेंद्र यश्रीविंदअनुपिंदकौ॥रात्रिजुडचासचीअमोघसक्तिहीते- भयोपातहैडबेयगनशत्रुनिहर्कंदकी।पैतालीसश्चातादुर्योध नके द्रोणपातद्रोणीअस्यनारायनप्रेस्यौपूजफंदकौ ॥२७॥ ॥ दोहा॥ ॥ व्योम दीअरु चंद्रमा द्रोपर्वअध्याय ॥यह अंबर निधिसिदिजुत गिनतीश्लोक गिनाई॥२८॥ कर्नसुचि॥ ॥कबित्त॥ ॥कर्नअभिषेचन औइंद्यु इएकद्यौसरात्रिसमैमंत्रसल्यसार्थी विचास्योहै। दूजेदि नसारथीमहरथी विवादतामै मरुदेससेनानीको माजनीति गास्योहै। अच्यौचीरतेईभुजऐंचदोसैन्यबीचपीयोश्रोन भीमसेनदुसासनमास्यौहै। युधिष्ठिरअर्जुनकीस्वःमृत्युटा- रीकृष्णपुषसेनजूंनूंकनमारिडास्यौ है ।।२९।। - ॥ १ भीष्मपर्वमें ११७ अध्यायो ५८८४ श्लोक है. २ द्रोणपर्वमें १७० अध्यायौ -९०९ श्लोक हैं.

॥ द्रोणी (१४ पांडचयशेंदुचंद्रिका. ॥ ॥दोहा॥ ॥रत्न रितू अध्यायहै कैनपर्वमैसोध। चंदॉग निधि पविधि गिन्यौश्लोककीबोध॥३०॥ ॥स ल्यसुचि॥ ॥कचित्त॥ ॥सल्यस्नानससमउिलूक सकुनी कोबंधधर्मपुत्रहीतेंन्याससल्यअर्धदिनमैं।सुयोधनेनीरस- ज्यादृत्तनःसौंधपायधर्मकटुबांदतेजगायोएकछिनमें कृष्णा ग्रजतीर्थपाशफुरुक्षेत्रसरस्वतीदोनूकीप्रशंसापांचौधोनकुंड तिनमें॥द्रौपदीसभावीचदिखाईजीवामृजंघातातैसोईतोरि भी ममारिलियारनैमें ॥३१॥ ॥दोहा॥ ॥रनबॉणअध्यायहै सत्या गाजतपत्र च्योमनैनकर अग्निगनि श्लोकभयेमिलिस ॥३२॥ ॥सुषोत्तिकसुचि॥ | कविता अभिषेचनउल्क उपदेशनिसारखड़गहीतेद्रौपदीकेचातापु बमारेहै।अठारोहजारसुस्वभस्वतबिनासकियो पांचूंबंधुसे नाबाह्यकेशवउचारेहै॥द्रौपदीविलापसुनिपातनरकीनौनेमस अकोरापफोडैब्रह्मअस्त्रटार है। बांधिलायेशिरवाछेदि विप्र- जानिछोडिदियौ उत्तराकौगर्भरारव्यौ कृष्णकामसारेहै ॥ ३३॥ ॥ ॥दोहा॥ ॥ सर्व पुरानअध्याय, पर्वहँघोप्तिक- मानि ॥व्योमचारबरू श्लोक है यह अनुक्रमजानि॥३४॥ ॥ स्वीपर्वसुचि॥ ॥कचित्त। ॥संजययुयु- सुलेकेआयेराजलोकनकों गंधारीकोपजुक्तच्यासतसि रायवों ॥ तोहुकोपतिज्यालानेत्रपाटीबंधीअधोभागकरत प्रनामधर्मनरपकौंजरायचौ ।। मरेनकेनामलैलैकहत्तजुधि +1 कर्णपर्वमें ६९ अध्याय औ ४९६४ श्लोक है. +२ शल्यपर्वमें ५९ अध्याय श्री ३२२० श्लोक है। + ३ सुपुप्तिपर्वमें १८ अध्याय औ-७० श्लोक है. ॥ ॥

॥ पांडवयशेंदुचंद्रिका. (१५) ष्ठिरसंसयोधनमाताको विलापत्तापगावी॥ लोहमैबनाय बौमिलायवौअचक्षुःसीचुरन दिवायवोरुभीमकौवचायची ॥३५॥ ॥दोहा॥ ॥दीपनैनस्त्रीपर्वमें गिनिअध्याय अनूप।बाराबार मुनिश्लोक हैं कहेव्यासकचिभूप॥३६॥ ॥सांतिअनुसासनशुचि॥ कबित्त॥ ॥राज धर्मदानधर्मापतिकयोधर्ममोक्षकोजोधर्मसरसज्याके सयनमैं। औरहुअनेक इतिहासदोनपर्वनमैपांचरत्नगीता विनभीष्ममोक्षनमै ।। युधिष्ठिर नातापुत्रपितामहगुरुचिपई नकोपिनासदेरिखतापधोरतनमें कृष्णउपदसतैनाच्यासउपदेस तैनाभीष्मउपदेसहीतैसीतलभौमनमैं॥३७॥ ॥दोहा॥रत्न कालसंध्यासहित सांतिपर्वअध्याय॥दीपव्योमपुनिवेदविधु श्लोकअनुक्रमगाय॥३८॥रागवेदविधुअध्यायहै अनुशास नमैंजोयाँनिभअंबर वरूदीपजुत श्लोकअनुक्रमहोई।।३९ ॥ ॥अश्वमेधसुचि॥ ॥ कवित्त॥ ॥मरुजज्ञकथाओं रचामिकरकौशलाभपरीक्षतजन्मअस्थतेजतैबचायोसौ। अश्वमोक्षरक्षाजुक्तदीक्षायूंयुधिष्ठिरकोसुदर्शनकथाधर्मवै ष्णवबतायोसौ॥चित्रांगदापुत्रवधूवाहनको अनुसौविक्र मसुनतलोगविस्मयउपजायौसौमिषेकीसमाप्तभयेदक्षणा अनकद्रव्यपायोमनवांछित्तजोजाचवेकौयायोसौ॥४०॥ ॥ दोहा॥ ॥हरचरखसंध्याचंद्रमा अश्वमेधैंअध्याय॥व्योम . १ स्त्रीपर्वमें २७ अध्याय श्री ७७५ श्लोक हैं. २ शांतिपर्वमें ३३९ अध्याय औ १४७०७ श्लोक है. ३ अनुशासनपर्वमें १४६ अध्याय औ ७८०० श्लोक है. ४ अश्वमेधपर्वमें १३३ अध्याय औ ३३२० श्लोक है.

।सबै (१६ पांडवयशेंदुचंद्रिका. अयन पुरस्करगनिदीन्हैश्लोकगिनाय॥४१॥ व्यासा श्रमशचि॥ ॥कवित्त॥ ॥भयोनिदभूपत्रचक्षाविप नगोनप्रथासाससुसराज्योसेवाकाजैकियोसाथ।। युधिष्ठिर पिताभक्तिपूर्वअद्भूतकीन्हीतीजैअब्दभेटिबेकुंगयॉलीयैरा जकांथ।। क्षत्तापरलोकव्यासकृपासवैक्षोहनीकेमारेवीरमिले जातैसारेहीभयेसनाथदौतेप्रथायुक्तविनासंजयसुन्यौहेदा हनारदःपूछ्यौहविलापकैकैजोरीहाय॥४२॥ ॥दोहा ।। अयनवेदअध्यायहे व्यासाश्रममैंदेखि ॥ रागच्योमसरचंद्रमा गिनतीश्लोकविसेषि॥४३॥ ॥मुसलशुचि॥ भूसरश्रापकेव्याजतैकृष्णकियोजदुवंसकोनास विचारकै ।। सीरवलीकृष्णकीवीरधनंजयकीनोझ्यानयदुत्रि यलारकै ॥ लूटिगडुजीयूआपमस्यौचहैच्यासकीसीरवतेप्रान इंधारिकै॥ भ्रातयजाईसनाईविरागभोवर्वछत्तीसकौराज चिसारिकै॥४४॥ ॥दोहा॥ ॥वसुअध्यौयमुसलपरब गि नतश्लोकपुनिधारी॥व्योमअयनसंध्यासहित लिरिवविपरी तिचिचारी॥४५॥ ॥ महाप्रस्थानसचि॥ ॥दोहा॥ ॥ वजनाभिकीमधुपुरी अभिमनसुतपुरनाग॥दैकोटिननिधि हिजनळू चलेतुहिनवनभाग॥४६॥सर्वतीनअध्यायहै पर्व महाप्रस्थान।।श्लोफत्तीनसत्तवीसहै जाहरकहेउंसुजान॥४७॥ ॥ ॥सुर्गारोहणसुचिपत्र॥ ॥कवित्त॥ ॥चारीभ्वात- द्रौपदीकीयानमै पतनभयोयुधिष्ठिरव्योमगंगान्हायतनत्या या।। १ व्यासाश्रमपर्वमें ४२ अध्याय और १५०६ श्लोक है. २. मुसलपर्वमें ८ अध्याय और ३२० श्लोक है: 3 महाप्रस्थानपर्वमें ३ अध्याय और ३२० श्लोक है. ३ (१७) पांडवयशेंदुचंद्रिकाः ग्योहै॥श्वानकथासयोधनादिदेकनाकविषैदेवदूतगेल बंधुदेरयवेकूराग्योहै।अर्जुनकुंआदिदेकैनरफनिवासदेरयेक रतचिलापरुनिअद्भूतसौलाग्योहैं। बिचारयौंतहांनिवासइंद्रा दिकायपासबतायौविलासनुपसोबतसोजाग्योहै।॥४८॥ ॥दोहा॥ ॥पूरीपांचअध्यायस्वर्गारोहणमाहि॥श्लोकदो यसत२००हैसबै घटतीबढतीनांहि॥४९॥ सध्यिाय सर्वत्रलो कसंरच्या॥ कालरागगृहचंद्रमा सर्वपर्वअध्याय॥छंदा रसरधरबाणवस विनहरिवंसगिनाय॥५०॥अष्टादसमक्षा | हिणी अष्टादसहिपर्व।।अष्टादसदिनमेंकटे द्वादशचिनुनर ॥ कबित्त॥ ॥पविराटराजमागधेश सहदेवधष्टकेतूचैद्यपतिनीकै निरधारियै ।। युयुधानयदुवंसी पांड्यकौशलाधिपतीऐकएक अक्षोहनीस्वामीऐषिचारियै ॥कुंतीभोजकेकयकेपाचश्चातभासीपुत्रइनकीयुधिष्ठिर कीएफकेसंभारियै। सातहीअक्षोहनी एंपांडवकीमहासैन्य अष्टवीरविनाकुटियुद्धबिचारि ।। ५२॥ ॥छंदघनाक्षरी।। ॥ ॥भगदत्तदैत्यबसभूरिश्रवाकुरुवंसीसत्यमद्रयति विंद- अनुविंदंजूट्रेनानि ।। सिंधुपुतीवहीनेऊजेंद्रथुसुयोधनकोस दक्षकांबोजी यानकीसैन्यमानी॥अक्षौहिनीएककृतप माकीयेआठभईतीनघरहीकीछोटेमोटे भूपतौचरवानिाग्या रहप्रकारनदीगांजिवकीधारबीचडूबगईच्योरवीरविनासब- सर्व॥५१॥ १ स्वर्गारोहणमे ५ अध्याय औ २०० श्लोक है. २ अच सर्व अध्याय औ सर्वश्लोकोंकी संख्या कहते हैं सर्व श्री मन्महाभारतमे १९६३ अध्याय औ-५१५२ श्लोक है एक लक्षमें जोश्लोक बाकी रहे उसमे हरिवंश कियो.

पांडचयशेंदुचंद्रिका. हीकी हानि॥५३॥ ॥दोहा॥ ॥नभनिधिग्रहासका लवसु रितुविधुकुरुतुरंग॥व्योमकालरित्तुमहिमुनी नभविधु पांडवसंग।।५४ामवेदवतरितुमुनीदीपनयनकुरुवीर। नभवसुनभमुनिरितु मुनिविधुपांडचरनधीर॥५५॥ नभद्रग ग्रहसंध्याचरणबाणददोउसैन॥सारथीआदिकबीरसब मरणहारगनिऐन॥५६॥नभमुनिसरनभवर्णद्गगजकु रुवंसनकर। नभग्रह व्योमरु कालसर चंद्र पांडु गंजहे रि॥५७।। व्योमांचर द्रग कालग्रह राग मुनि मिलि हो इवीर अश्व गज जोडि करि दोनू दुलके जोय॥५८ ॥ योदशी कार्तिककी पांडराप्रभातसमैप्रारंभभयोहमहाद स्तरसंग्रामको । सोहीमांसकृष्णपक्षसप्तमीदिनास्तसमें याणसुज्यासोचन भोगूगापुत्रनामको॥ हादशीअसुरसंध्या द्रौनकौपतनभयोचतुर्दशीकर्णपंथलीनोनिजधामका ॥ मावस्यासल्यौसुयोधनपिनास भयेरात्रिसमैनीचकामद्री णपुत्रधामकौ।। ५९॥ ॥दोहा॥ ॥कवितामै सुधीकरी प्रक टअर्थकेकाज।। मंडनषद्अनुप्रासचिन छिमाकरहुकविरा ज॥६०॥ मोहोराविगरनदीनपै अरथनविगरनदीना तातैषट् अनुप्रासविनलमिजहुदोषप्रवीन॥६१॥ संस्कृतजेविगरेसबदे कौरवनके घोडे १६८३ ९९० औ पांडचनके १० ७१ ६३० घोडे थे कोरवनके शूरवीर २७ ७६८४० औ पांडवनके शूरवीर १७ ६७ ०८० थे ऐसे सब दोनौ तरफले मिलायके ४५४३९२० भये २ कौरवनके हायी २४० ५७० औ पांडवनके १५३०९० दोनौ सेनौके ७६९३२०० घोडा हाथी औ शूर वीर सब मिलके भये.

॥ पांडवयशेंदुचंद्रिका. (१९ ताकीभाषाहोत॥ममकृतपदभ्रष्टहिनिररिव छमहुसकवि बुधिपोत ॥६२॥नामश्रूपहीदासको स्वरूपदासज्यूहोई।। पार्थपाथसब्दहिसबद भाषाफेमतसोई।। ६३॥ वाल्मीकरवि व्यासससिमाधादिकउडुजोत॥भाषाकविजिंगुनकहूं कहुँक हुँकरतउद्योत॥६॥विधिबुधविधुबुधिबंधुबध बाधवेधज्यूंचौध मात्रविगिरिविगरैअरथ श्रूपदासपढिसाधि॥६५॥ कारजप- खुरिऐकविनवारिजसोहोइजाय॥ बुधिजनलेरयक दोषको सोध हुचित्तलगाय॥६६॥ लगैपटांबरपषुरियां होतफटांबरसोई॥ मावबरनविपरीततैअर्थविपर्जयहोइ ॥६॥द्रगग्रहचसुत्र रुचंद्रमासंमतअंकगतिबाम॥शक्लचैत्रएकादशियंथजन्म सरपधाम॥६॥ ॥इतिश्रीपांडवयशेंदुचंद्रिकायांस्वरूप दासकृतमंगलाचरनअष्टादशपर्यसचिपत्रथममयूरवः।।१।। ।। ॥दोहा॥ ॥नांगायौजगमीत• साहितजुतसांगीत॥ श्रूपदासजिनकेनहे पूंछरुश्रृंगपुनीत॥१॥छंदअलंकृतरस- नको करूंसूचिनिकापत्र ।। बहुच्यापकसामान्यपषादिहिया ननअत्र॥२॥ ॥प्रथमछंद सुचि॥ ॥ एकबरनकुंआद ले छाईसवर्णप्रजंत॥षविसहतभेदके प्रथमहिनामकहत ॥ छंदपद्धरी। ॥उक्ता१प्रत्युक्ता२यह प्रमा न॥ मध्या३रूप्रतिष्ठा ४ कहिंसुजान ॥सप्रतिष्ठा ५रूगा यत्रि ६कीन उष्णिक अनुष्टुप्८ कहप्रवीन । हत्ती अरुपंक्ती १० मानलेहु ॥ त्रिष्टुप जगती १२ अतिजगति १३ वेहु ॥ सकरी १४ अतिसकरी १५ होत॥ अष्टी १६ त्यष्टी १७ धति १८ उद्योत॥ प्रतिध्रती १९ क्रती २० कृत्ती २१ अरह॥आकृति २२ अरुविकृति २३जनियेह॥ सत्क्रति २४ प्रतिकृती २५ चचतसेप॥ उतरुति २६विंस- .

पांडवयशेंदुचंद्रिका. घट्नामलेरव ॥२७॥ ॥दोहा॥ ॥छंदवरणप्रस्तारके तेरहकोंटिफनीस।व्यालीसलरवसतरहसहससातसत अठाईस । वरणछंदफुलछंदमें भेदकछूनलखाय॥ताने वरणहिककरम आठौकहीवनाइ॥६॥ ॥अथवधिक क्रम ॥ ॥दोहा॥ ॥ संस्था अरुप्रस्तार२ हैशुचि दिरअरुनष्ट ५ ।। मेरु ६ पताका ७ मर्कटी- येईक्रम हैं अष्ट॥॥ कोई पूंछे एनेवर्णके रूपकेने संरच्या करै ।। ॥दोहा॥ ॥प्रथमवरणपरदोइको मेलहुअंक विचारि॥ संरच्यादुगुन हितेदुगुन मस्तारहिलौधारि॥८॥ ॥ १ २ 2 ४ 3 १ १६ ५३२ १० १०२४ ११ । २०४८ १२ ! ४०९६ १३८१९२ १४ १६३८४ १५/३२७६८ १६६५५३६ १७ १२१०७२ १८२६२११४ १९५२४२८८ २०१०४८ ५७६ २१ । २०९७१५२ २२ ४१९४३०४ २३८३८८५०८ २४ १६७७७२१६ २५/३३५५४४३२ २६६७१०८८६४ २७.१३४२१७७२८ १२८ २५६ ३ अब वर्णाष्टकक्रम कहे हैं संरच्या१प्रस्तार २ रुचि ३ उद्दिष्ट नष्ट ५ मेरु ६ पताका ७ मर्कटी ८ चैाठ॥७॥ कोई पूछ एते वर्णके रूप केते जैसे फितीनवर्णके छंदके रूप केतने है संरख्याकरिके कहै जैसे कि एफव फैछंदके दोपदीयवर्णवालेके चार तीनबालेके आठ ऐसेही छाईस वरणके प्रस्तारलौं उत्तरोत्तर दूनी होतीजायगी इसरीतसे तीनवर्णवाले उंदकेस भये संख्या कोष्टक ऊपर लिरवाहै ॥८॥ ॥

पांडययशेंदुनंद्रिका (२१ ॥पूछे रूप केते प्रस्तार करै॥ ॥दोहा॥ ॥ लधुकी सूधीरेरखकर गुरुकीवाकी रेव ।। आदि गुरु सबलधुतला यूंप्रस्तारहिलेच ॥८॥आदि गुरुतरधरिलधूअयसुआगे टेला घटे वरनमस्तारते शुरुकरिपाले मेलो ९॥ । लघुकी सूधीरेषजैसे। जैसे गुरुकीवांकीजैसेऽ प्रस्तारके श्रादि- में सब गुरु लिरिबके फिरि प्रथम गुरुके नीचे लघुलिरिखके अगाडीके वकि नीचे जैसेहों वैसेही लिरवे औजो आदि गुरुके लिखनेसे पीछे रहैं ऊन सबलघुनके नीचे गुरुही लिया ।। अथ प्रस्तार स्वरूप इसी माफक कसब करै।।९।। अथ चारिबरणके प्रस्तारका स्वरूप. S S S S S S S S us S S S S S S S M S S 5. S 3 S u S S S S S S %D (२२ ) पांडच यशेंदुचंद्रिका. । मूल॥ ॥ पूछे गुरु आदिक कितने औ लघुत्रादिकरू पकितने तथा गुरु लध्यायंत कितने नौगुधित कितने तव शुचिकरै॥ ॥दोहा॥ ॥ संरच्याकेपूर्णाकते प्रथम कोम्वंत ॥ तेगुरुत्रादिअंत है तेलघु आदि अंत ॥ १० ॥ पूर्ण अंक ते तीसरे होवै अंक जितेक ॥ गुरु आयंत तिते कहै लघु आयंत तितेक ॥११॥ कोईने पूछा कि अतरे अक्षरके छंदमें गुरु आदिक लघु आदिक गुरु आयंतौलघुश्राद्यंत कितने कितने हैं उदाहरणजैसे फि चारि वर्णके छंदमें पूछा कि इसमेसे जिनके गुरुवर्णआदिमे है वे कितनेत्री जिनके आदिमें लघुहैयैकितने श्री जिनके गुरुवर्ण आदिौअंतमे है पै फितने औ जिनके लघु आद्यतमे है वै कितने तो शुचि करिके कहै। शचियाने संरच्याके पूर्णाकको देर जितने अंक होये उनमेंसे आधेक रे श्राधे छंदमें दीमे गुरु आदिकौश्राधे लघु आदिक होयगे ऐसेही जोपूर्णांक है उससे तीसरा अंक जितनेका होयगा वत नहीं आदिअंत में गुरुवाले औवत नहीं लघुवाले होते है. उदाहरणजैसे कि चारिवर्णके छं दमे सोरह पूर्णाक है उनमेसे आठ गुरु अादिक औ आठ लघु आदिक होते हैं. औसौरह से तीसरा याने सोरहसे दूसरापाठीतीसराचार भये तौचारिके आदिअंतमें गुरु औचारिहीके लघुहोते हैं गुरु आदि जैसे5555 15155 255 15 ३७||७ ४७७७।५७।७। ६३७॥७111८ लघु आदिकजैसे 1555 ११७७२१७१७३ ।।। 5 ४ लघ्वाग्रंतजैसे । 551१।।७।२ 15॥३॥१९ इसीतरह सर्वत्र जानना।।११।। m

॥
पांडवयशेंदुचंद्रिका. (२३)
॥ रुप लिरिव पूंछै ये रूप कितरमी है तब उद्दिष्ट करै
॥दोहा॥ ॥ चरनन पर अंक आदिते यक तैदुगुन
धरिष्ट॥ लघुऊपरके अंकमे यक धुरि दिव उदिष्ट ।।१२।।
॥ ॥ पूछ अतरमो रूप किसो छै नष्ट कीजै॥ ॥दोहा
॥ ॥बेफिव्हैतो लघु लिरचौ एकी गुरुलरिचलेछ । एकीमे
येकमेलिये बहुरि अरध करिदेहु ॥१३॥ यूंहीसमअरु
विषमको लघु गुरु लिरवत्तेजाहु । प्रस्ताहिके वरणलो
अरधकरत ठहराहु॥१४॥
॥
॥
॥
॥
१२
S
कोई प्रस्तारका रुप लिरिचके कहै कि यह रूपके तरवों है तब उस
छंदके वरनौपर अंकऐसे लिरवै कि एक लिरिपके फिरि एकसे एकप
र दूने लिवतोज़ाय-फिरि लघु वरनौं परके अंकजोरिके एक मिलाये
जितने होय वतरचों रूपजाएगनो उदाहरण जैसे आठ वएकि छंदफा
रूप यह लिखते
१६ ३२ ६४ १२८ इसमें लघु वर्गों
के अंक ७४ भये इनमें एक मिलायो तो ७५ भये यासो यह पच
हत्तरवों रूपह ऐसी कहनी ।। १२ ।।
जैसे कोईने पूछा कि आठ वरशके छंदमे पचहत्तरमों रूप
कैसो है तब ७५ यह एकी है इसका गुरु ऽफिरी इसमे १ मिलायो.
७६ इसके आधे ३८ यह बेकी इसका लघु। इसका आधा १९ इस-
का गुरु७१ मि० २० आधे १० बेकी लघु। आधे५ एकी गुरु ७१
मि०६ बेकी ल। आधे एकी गुरु: १मि० ४ आधे२ चेकी लघु
। २ को आधा५ गुरु ऐसे।।७। 55 1 5 रूपये भयो॥१३॥१४॥

(२४ । पांडवयशेदुचंद्रिका. ॥ पूंछै अत्तरागुरुका कत्तरा अतरा लघुका रूपकत रातच मेरु कीजै॥ ॥चौपाई।। ।आदिहोय त्रय-चतुरपी चाथिर ।। चरण संरच्य कोठा क्रमते कर ।। मेरु प्रमाण फोठा कीजै।आयंत एककोअंकभरीजै ॥ऊपरके श्री कं मिलाची ॥दोयकोधन तर कोष्ट भरावी ।। वर्ण मैस ऐसे भरभाई॥ जोते पिंगलकी मति पाई॥१५॥ - १ wh उदाहरन जैसे कि कोईने पूछा कि आठ वरनके प्रस्तारमें २५६ भेद है- इनमे केलने एकलघुके रुप हैं औ केतने दो लघुके औ केतने चार लघुके केतने पांचलघुके केतने छके केतने सत्तके श्री केतने आठ के ऐसे ही गुरुसंरच्याके रूप पूछे तो मेरुफरिके कहै मेरुकीरीति प्रथम एक कोष्ट कार उसे १ का अंक लिरचे फिरि उसके दो कोठीमें एकएककाअं कभरे यह एकाक्षर छंदका मेरु इसमें एक लघु एकदीर्घ फिरिदोके नी चेतीन कोटक तिनमे बाजूके कोठौमैं एकएकका लिरचे श्री उपरके दोनों काजोड देक बीचकोष्टकमेंकाअंकालिखै इसमें दोगुरुका एक दोलघुका एक बौदो एक एक गुरुके है यह दोवर्णका मेरु फिरितीनिके नीचे चार कोहका जिनके बाज कोठी में एकएको उपरके एक प्रौदोजोडीकेनौ दोएककाजोडीके लिये इसमें एक तीन गुरु एकतीनौलघुका श्री तीन दोलयुकनीनटो गुरुके यह नीन वर्णका मेरु ऐसेही सत्ताइसपर्यंत करना परंतुडहां यह मेरुवा वर्णपर्यतका लिया है औबुद्धिसे समुझना॥१५|| ५ १ +Marnar H १ ५ १ मी 3 40 41 ११ २५५ 7 mers- पांडव यशेदुचंद्रिका. (२५ ॥ पूंछ कतरमाकतरमारूपौंमा कतरमा कतरमा गुरुतौ पताका कीजै॥ ॥चौपाई॥ ॥वरननतेयेक अधिक कोष्टकरि॥यकतेंदुगुनेप्रथमताहिभरि॥श्रादिश्र तकेअंकदेहतर ।।पंकतिछोडिऔर उलटीभर।।पूर्थिक नेपिछिले अक॥घटतब.सोभरहनिसंक॥लिविंगयो अंकफेरिमतिलेरवहु ॥ ऐसेवरणपताकादेरवहु ।। १६॥ ॥ जैसे किसीने पूछा कि छ वर्णके प्रस्तरमे ६४ भेद हैं उनमें कौन कौ नसे भेदमे केतने केतने गुरु है तब पताका करे सोजैसे कि जितने वर्ण के छंदकी पताका करनी होय उसकी संरच्याके कोष्टकोसे एक अधि कोष्टक करे जैसे छ चरनके प्रस्तारमें सात कोष्टक जैसे इसपताका लिरवे है इसीतरहसे एकसे एक दुगनजैसे एक दो चार आठ इत्या दिक सिरियके फिरि उसके अंक भरना सो पंकति छोडिके उलटा भरना सो पूर्णअंक ने पिछिले अंकममें घटायके वचैं सो भरना श्रीअंक लिरवेगए होयउनको फिरिन लिरचना एसे परन पताका करना ॥१६॥ or A ६६ ४ SSSSSS 55555 ३३/१७/९/५/३ Ssss.४९/११/३७३५/३४/२५/२१/१९/१८/१३/११/१०/७ S५७/५३/५१/५०/४५४३९४२३३/३०/३६/२९/२७/२६/२३/२२/२०/१५/१६/१२/२ 33.६१/५९/५०/५५/५४/५३/४७/४६४४/४०/३१३०२८/२४/१६ ડધરી ૬૪૨૨ ..

(२६) पांडव यशेंदुचंद्रिका. ॥ ॥पूंछैअत्तरमीप्रत्ययके भेदमात्रावरणलघुदीर्घकिता नतवमर्कटीकीजै॥ ॥चौपाई॥ ॥वृत्तभेदमात्रा रुधरणा। गुरुलघुऊभाकोठाभरना।फिरप्रस्तारवरणके- माफक! आडेकोठेकरहुषरहितक॥प्रथमहिवृत्तपंक्तिकोभ रिये।कनेअंककमहितेधरिये॥दूजीपंक्तिभेदसंरच्याधरि दोगुनिचोयीपंगतिभरि चौथीपंगतिअरधअरधकरि॥पंग तिलघुगुरुपंचकठीभरी॥चौथीपंचमिअंकमिलाचौ ।तीजीमात्रा पंक्तिभरावी !!१७॥ ॥ इतिवर्णाष्टकसंपूर्णभया॥ ॥ थछंदजातिभेदलिप्यते॥ ॥दोहा।। ॥ पुरुषत्रिया रुपंड है तीनजातिकेछंदवर्ण मात्र मात्रावरण३ कम नैगि दुकचिंद॥१८॥ ॥प्रथम पुरुषछंदसुचि॥ ॥भगैन जगनरुसगनमादिमध्यगुरुअंति॥यगनरगनपुनितग नक्रमःलघुहिकहत॥१९॥ मगननगनकैतीनहिगुरुलघुक रिजानि॥गन सुछिमछंदगति कहतस्वरूपवरदान॥२०॥ गैलल २. ४ M ५ ३२ ८ १६ 3 भेट मात्रा पण लप २ १ २१६४ १६०/३०४ ३२ १९२ १२. १९२ cor ४ ' १ पुरुप स्त्री नपुंसक चे तीन प्रकारके छंद है जैसे कि वर्णछं रुपमात्रा छंद स्त्रीमिश्रित नपुंसक सो कमसे कहते है तहां मथम पुरुप छंट कहते हैं। २ गण न्यप में. 3157015 स०॥ यः । २०१६ त.

(२७ .१ niu पांडवयशेंदुचंद्रिका... गेकूकरतगुरुनिजलघुरहतनिदान। वरणसंजोगीदेत है आप डाईबान॥२१॥सुषमुरखोचारणार्थ गुरुरेवलघुत्व मानोति॥ ॥ एकमगनतैनारीछंद।गोपीसं॥जैईसं॥ श्रीसेसा विश्वसं एक नगतेकमलछंद।।निरत॥करत ॥सरित।फिरत ॥एकभगनतेम दराछंद। माधव ॥जादच मारत॥तारताएकयगनतेससिछंद।। सुघोषंप्रदोष।। निवासी।विलासी।एकसगनतेरसनछंद।।जमुन गमनं॥नचोरियो॥ एकतगनतेपचालिकाछंद।। राधेस॥जोगेस ॥आराधि।।गौसाधि॥एकजगनतैगजेंद्रछंद॥अरुप॥अपा नाथाश्रमाय॥ एकरगनतैभियाउंदास्यामतारामते एकहनाम वेदोयमगनःसेवाछंद।राधैजीगाहै।।प्यारेकुंभावहै। वसीमेवो लेहै।तानूकुंतीलहै।दोयनगनतेमदनकउंदा मदनबदन ।।दनुजक दन॥रुचिरदन।।सुर न॥दोयभगनत अमंद छंद॥श्रीधर पाचन॥घोषबचावना। फोरखधातन ॥ कंसनिपातन॥दोययगन तसंरचनारीछंद विधाताफीसं| घरपायसीसंगरदैलोकतीन। सुगोपीअधीन।दोयसगनतिलकाछंद|जननीजमना। अघ कीसमना॥हरिप्रीतिप्रदा।।सुरवरूपसदा॥दोयतगनतमंथालाई दएकापतीजोत॥वंसीरबहोत चालीसवैचाम।।सोहेजितस्याम दोयजगनतेमालतीउंदा त्रिलोकनरेंद।।गुपालगोविंदानिकंदन कंस।विभाकरवंसादोयरगनते विजोहाछंद।।दासधीदायकंस धिकानायक।गोपगोपालन ।।दासभौटालनाचारमगनतैमोट- संजोगी याने जिसमे दूसर अक्षरको मिलाप होच सो संयो, गी आपके गेलके वरणको दीर्घ करता है परंचु अाप लघुही र- हता है. २ इहांसे अगाडी अबकुछ थोडे उंद स्वरूप देवाते है 1:- M (२८) पांउचयशेंदुचंद्रिका. करंद॥गोपालांकीसाथेरवेल्यो।राधाप्यारोजाळूगावो मेटो साधोनारोथारो॥गीताजीम भारव्यौ सोहीनीकौतत्वं ॥भ तीजो गंग्यानानंदं मुक्तीमत्वं ॥चारनगनते रतलनयनछं दाहरिविन सब अघट रतन बरतन मिलकरनरतन।भजि तजिभ्रमक्रम सुनि मन।। दिलसुध सुरवप्रददिन दिन॥चार भगनतै मोदकछेद ।। केसब जादव माधव श्रीधर ॥ गोक लमैनच नारचनाकर ॥जे दुरवहा सुरवदा अरिघातक॥ नामरटै कटि है सब पातक॥चारे यगनः भुजंगी छंद । भजो भक्तिदाता मुकुंदं मुरारी॥जरासंधकंसादिकेनास कारीअभैदानदातानहीं कोग्र ऐसो॥जगन्नाथस्वामीचि दानंदजैसो॥चारसगनते तोटक छंद ॥ जगदीसहरी मनती जजरे। त्रिसनामुरवमें पसिनातजरे। जब दास स्वरूप मि- लेहरिजी। हमसाच कही फिरजो मरजी ॥ २२ ॥ चार तग राने अद्रष्टीछंद ॥रामारमानाथ राजा त्रिहूंलोक॥संसार- कीत्रासहताजुतंसोक।मायापती मोक्षदातासदानंद॥धा तापितारामानंदकेकंद॥चारजगनते छंदमोतीदाम।। कामअवाध्यअनादिअनृप।।सवैजगव्यापकएकस्वरूप ।। भैपददायकदेवउदार। विभूअनरवंडपिनास विकार ।।चा रगणतछंद स्वरगवेणी।। देहदप्राणदं सत्वदं मुक्तिदं । मा नदंयोधदंलोकयमुक्तिदं । सेवकंपोषदाकंदआनंदके ।। चंदराकाजथानंदहॅनंदके॥२३॥ ॥दोहा॥ प्रष्ट मगन अरुनगनते छंदन पावतरूप॥ तातै परनननाकिया समफिलेहु कपिभूप॥२४॥ आठभगनते किरीटी छंद ।।- १ हरीका पूजन कर जजका संस्कृत यज होता है.

.
पाडवयशदुचद्रिका
(२९)
आजप्रभानटनागरकी रषभानसुताटकएकनिहारतः ।।
मोरपरवाके चमेचकै कीरतकुंडलक दिगनैननारत॥गुंज
नकीवहमालगरेपटपीतकोध्यानननेकविसारत॥चातुरता
मतिआतुरनाजुतवालसंजोगउद्योगविचारत॥आठयगएरा
तैमाधूर्यछंद॥जदुनाथगोविंदविश्वसधाता चिदानंदरूपी
सदानंदेकारी॥ कस्यौनासकंसादिकोसहसंविभूश्याम
दावनभूषिहारी ॥ तजैकामक्रोधं भुजैलाइबोधहरेतापत्ती
करैनायजैसो॥ कहैश्रूपदासंकटैकालपासतिहलोकवा
सीनकों पूज्यतेसो ॥२६॥ ॥ अष्टसगनतेंदुर्मिलाछंद
॥ ॥सवैय्या॥ ॥ मनको मिलचोजब होतेभयो भ
योतीक्षकटाक्षनकोघलचो॥सषसागरजानिसनेहाकि
योनटनागरागिविनाजलवो॥तनकोमिलवोसुरह्यौत्र
तिदूररह्योकुलमारगकोचलवो ॥रह्यौवैननकामिलयो
नवनैनबनै बनेननकोमिलवो॥२७॥ ॥दोहा॥॥
॥ अंतरंग सरिवते कह्यौ जाय सुनावो गाय।।नी
कैरागमलारमें मास्टकाल लरवाय ।। २८ ॥ || या
संवैयाकोटीका परलोकसाधनोपदेशक॥षशास्त्र।।
रव्य न्याय२ पातांजल ३ वैषेसिक ४ मीमांसो ५ वेदांत
६ इहलोकसाधक ॥षट् उपशास्त्र । व्याकरन १ को
स २ तर्क ३ साहित्य संगीत ५ नाटक ६ जिनमै नै
साहित्यहै या सवैय्याविषैसाहित्यके षट्अंग॥ प्रथम छं
द॥वृत्तमें मै ईसधा॥ द्वितीयनायकाचतुर्धा। वित्तीय अ
१ केश. २ श्यामत्ता. ३ छाईस प्रकारके .. ५. चतुर्धा चा-
रिप्रकारके..
।
- .
.

(३० पांडव यशंदुचंद्रिका. लंकार ॥ एफंसोपाठ धा॥ चतुर्थरस हादशधा।पंचमरी तिचतुर्धा॥छठीध्वन्यादि। विधा ॥ एषहीअंगयासवैच्यावि पिंजाहरकीयाजाइगा॥वाणीदोया।देववाणी॥संरकृतलोक पाणी॥भाषासंस्कृतविधै सातविभक्तिजाहरहोतहै।समासांत भीहोय॥भाषामविभक्तिसमासतेहोय॥संस्कृत विषेएकवचन दिवचन बहुवचन है॥ठेसीप छैते२ छैजे३ प्रथमा।तिने त्याने निनने द्वितीया॥तीकर १ त्याकर तिनूकर३वत्तीया तीके अर्थ पत्याकअर्थश्तिनूके अर्थश्चतुर्थी तिनत त्यांनेतिनूतें ३पंच मी तीकूप त्याळू २तिकुंषष्टी तिनविर्षे१त्याविषैतिनूविषेत्र सप्तमी। भाषाम एकवचन बहुच्चन ।। हिचचननहीं।संस्कनुचि पेस्त्रीलिंग पुलिंगनपुंसकलिंगहै। भाषाविषे पीलिंगपुल्लिंग है नपुंसफलिंगनहीं।भूतभविष्यवर्तमान परोक्षप्रत्यक्षसंस्कृत भाषादोनौविषैहोयसंस्कृतविधे५ अनुप्रासहोय अंत्यानुप्रास होयनहीं।भाषामैहोयजाकोतकांतमोहरौ भटिकहत है।।फार सीमै काफियाकहत है. संस्कृतविलघुफौगुरुतीनठौर होइ सं. जोगीकी आदिकोविसर्गादितुकांतः॥ भाषामैसंजोगादिगुरुहोड़ विसर्गतुकारांततैनहीं- संस्कृतविष संधीसरते विसर्गत-हस्वत अनुस्वारनै भाषाकीसंधि भाचको भोजवकोजो॥विभव- कौविभो॥भयको भै लयकोलै ॥ विजयकौविजै ॥ ऐसो होयसर्व शब्दळू सव सर्व सरयभीहोय॥ऐसै पार्थको पाथ पारथहोय॥संस्कृतविषैक्षकार ॥एकार॥यकारको भान पामै छकार नकारजकार है । संस्कृत विषै दंनी तालवी मूर्ती ५ एकलोबाट प्रकारक. ३ चाराइ प्रकारके ऐसेही जहांगराती अंतगंधायाचे उहां यत नहीं प्रकार समुझना. ३ PaPANKAN .. पांडव यशेंदुचंद्रिकाः (३१) सष होय॥भाषामैसकारदंती होय यकारकोजकारभी होय॥ सं० लघुदीर्घ पुलत हस्वचार भेद भाषामै लघुदीर्घ होय जा मै भाषाको छंद छंद दो प्रकारके मात्रा वर्ण जामै उक्तादि व रणछंदकी छाईस रत्ति जाम चोवीस वर्णकी संस्कृती हात्ति जामै पस्तारकेप्रमाणते एकक्रोड सडसटलाख सत्योत्तरहजार होयसेंसोलाछंद होय तामै इकोतरलारव असीहजार दोयसै छत्तीसमास्थानको रूप अष्ट सगणते दुर्मिला छंद है।कहूं कलघुकीठा हर गुरुहोइ उच्चारमै लघु बोले तोदोष नही॥से रचमुरवोच्चार रस१२ जामै गोन ५ अचल बालंबन विभा वाविषे रौद्र करूणा विभत्स ३ वीर ४ हास्य५ भयानक ६ अद्भुत ७ इन सातनमैं अंतरविकारस्थाई संचारी यादिय गविकार सांतिक अनुभावादिकस्थिरीभूतनाहीं श्रृंगार १सां तिवात्सल्य दास्य४ सरवत्व ५ इन पांचनमै मनविकार सं चारी ३३स्वनिमित्तेनपरनिमित्तेनद्दिगुणे६६ प्रकार भये सब्दस्प शरूपरसगंधेभ्यःपंचगुनित तीनसेतीस३३० भये ऐसेही ति नविकारसांतिकदसधा गुणे कियेसतदाभये सांतिकादिनी रअनेकभावसौ तो स्थिर होतहीनाही परंतुअंतरविकार स्थाईरीतिनिर्वेद १ ममत्व २ विनय ३ रहस्य ४ए स्थाई और बाद्यविकार विधाविभाव वालंबन और उदीपन इन पांच में जाहर स्थिरीभूतदरसैहै इन पांच मुख्य रसनमैं श्रृंगाररसे है यादुरमिलाविषे रतिस्थाई तौहै ई विभावालंबन तो नाय १ रस १२ लिरचते हैं औबहुधा नच हैं तहां कारण है कि इहां वात्स ल्य सरच्यत्व औदास्य यजादा है और कवियोने इनको उनन बरस- सेअंतर्गत मानैहै. - - १ (३२) पांडव यशेंदुचंद्रिकाः कनायकाउदीपनपंचधाशब्द स्पर्शरूप रस गंधजिनमैरू पतिकादाछ स्मरण अंतरंग सरवी आदि विवरणसांतिक सोईअनुभव है आगविनाजलयो या शब्दतैजान्यौंजात है व चन भीअनुभव है चिंतादैन्यादिक संचारी है ही इन पांचभा चतेरस पुष्टहैं श्रृंगार द्विधासंजोग रुचिजोगजामै वियोग सा टधा प्रथमप्रवासद्दिधा भूतभविष्यतादुजोमनचतुर्धालघु मध्यश्गुरु३प्रराय चीजोकरुणानिधादहिकदैविक भूतक. चौथेपूरयानुरागविधालोक मृजादावेदमृजादाकुलमृजादा, पांचौ स्त्रियांजन्यविद्यादेवमनुष्य छटोप्रयोजन्यद्भवत्रिधादे सप काल२ वस्तु३ ऐसेसर्ववियोगसप्तदसुधाभ्येजिनमेपूर्वानु रागहेसंजोगमें १० हायकोईकवि कहत है वियोगमै १० दासों भिलाषा चिंतागुनकथन ३स्मरण ४ उद्देग५प्रलयजड ता उन्माद च्याधि९मरण १० जिनमै उद्देगसुरवद वस्तु दुखद होय ध्वनित अभिलाषाभीहै अंतरंगसरवीनायकानेकधीम लारमै गाइकै सनाइयो अलंकार हे प्रकारले सामान्यजाकेतौ नेकधा भेदपिसिष्टसो एकसोयाधापसिष्टके अंगविषैविष पाव्याघात शब्दालंकारविषैषद्अनुप्रासवृत्यापछेकारलादा ३जमका ४ श्रुति५ अंत्या ६ जिनमै कालाराअंत्यानुप्रास है नाइका चार प्रकारकी प्रथम अंगभेदचतुर्धादजी प्रकृति भेद त्रि धातीजीचड़ीक्रमभेदषटधाचौथीकालभेद पंचदसधाजी-प्र. प्रतिभेद विधास्वकिया१ परकीया२ सामान्या३ जिसमें १ यह नायका भेद बहुत विस्तृत है सो संस्कृतमें रसम- जरी औ भाषामें कचित्रिया रसराज इत्यादिक ग्रंथोमै रिस्ता रहै.

है . ३ २ १ । पांडवयशेंदुचंद्रिका. (३३) परकियाछे प्रकारकी विदग्धा विधा२लरिचता प्रकार ३ अनुसमानाचतुर्धा गुप्तात्रिधा५ मुदिता एक प्रकारकी ६ कु लटा येकजिनमे सुधपरकीया तथालरिखता दरसणचतुर्धाध वण१ स्वप्न चित्र सारव्यात ४ जिनमै सारख्यात प्रकृतिवि धासातकी १ राजुसी २ तामसी ३ जि-राजसी पांचहु कौषधि अभिव्यापकव्है कै वचन निकस्यो है १ अन्नमय २ प्राण मय३मनोमय ४ विज्ञानमय ५ आनंदमय ६ ध्वनितै का कौलिअलंकार का ध्यानभीहोतहै मेघकी भायमल्ला रागनीमें गवे हैं संपूर्ण याकीजात है. अरोही अवरोही विषै सं१रि २ गं३ म ४ पं ५ धै ६ नी ७ सातही सुर बोले जाते ताल जलद ने तालो मल्लाररागनी ने काल ध्वनीतै बरषा रितु जिताई बरषाकी सामग्री सोभी सुरवदाई है. परंतु दु रवदाई हैकै विरह अत्यंत बढाये है मयूरविधूत चातकादिई तना प्रसन्वोतर साहित्यकै कवित छंद श्लोक दोहा सर्वविषैथि चारचो कोइसाहि कुसल होयनाको पूछना कोड्पूंछे जाको उतर करनासोई कवी है आगूके कवितेनमें ऐसोही विचार बोजू एक कणः सर्वअन्नकी पक्वता जाणिये।।२७॥आठत गनत करेड छंद ॥बाधाहरौनाथराधापती दासकीस्याम का मारिके इष्ट अाधार॥एकाग्रतामोरतोपावके ध्यानकारारिचय देवदेवाधिदातार॥बोले सबै वेद पावै नहीं भेद तो अोरका जीव जाने महाराज।। गावै काहा पीव पावै कहा तो गती श्राप कीजोरमाया मिल्योवाज।।२८ ॥ आठ जगन .. १ षनं १ रिषभ २ गंधार ३ मध्यम ४ पंचम ५ धैवत ६नि षाद ७ ये सात स्वर है.

(३४) ॥ पांडग्यशेंदुचंद्रिका. तंजीवकछंद ।। अपार अज्ञान मिल्यौ इहजीवकरी सुदया नवपावत पार॥ अनाथ कुजीव सनाथकरौ इल धारनपा लन देव उदार ॥क्रपानिधिकानके तुम कारन वेदउधारन पापविदार ।। सदा करजोर पुकारत श्रीवर बोधमिलेजु तभक्ति विचार ।।२९॥ ॥पाठरगनतेबोधकछं। ।। रामराजीव नाभीधस्यौ इंडकूप्यंड वैराटसारे।।रचे एकदाब हाकुंदै प्रजाधीस ऐसो पद सेससाई रहे अापन्यारे॥ सदा अंसे कुंडारकै विश्वको धारिकै दुष्टळू मारिकै दारिताप हरी ।।दासतारिकै कीर्ति विस्तारिकै पारिकीने तंग्रा हितज्यूकरी २९ मात्राउंद३० तीस मात्रा एकदलकी १८ अटरापेर विश्राम चौपइया छंद मात्रा २६ छापीस चौ दापर विश्राम बेताल छंद इत्यादिक त्रियाछंद जा- नीये जामें गुरु लघु वर्णको प्रमाण नाहीं।। ॥अथ नपुंसक छंद।। ॥दोहा॥ ॥ तेरह ग्यारह मात्र फिर तेरह ग्यारह जोय ॥ सो दोहा विपरीत नै हो इसोरठा सोई ।। मोहरापर जगणके तगण होय विना माहरा कौतुकांत नगनर्गन सगनते होय नाते संढ । सोले मात्रा अंतजगनसोपाधरी सोले मात्रा अंताक्षरगु रु मनहर छंद जावू पिंगलमैं कवित्व कहत है पदधिषे ३२ बत्तीस अक्षर होई. सोला अरु सोलापर विश्राम होय श्री त्यअक्षर लघु होई सो घनाक्षरी . छंदयनमै गुरु लघु वर्णको नेम होय अरु नही है जाते नपुंसक कहिये ऐसे हिथोडे कडेचो होत समज लेनो॥ इतिश्रीपांडवयशेंदुचंद्रि काहितीयमयूरयः ।।२।। ॥अथ अलंकार सूचि॥ । यन्स् अयन विधुसर्वहै भेदगिनेबहुहोय ।। ॥ ॥ दोहा।।

(३९) .. पांडव यशेंदुचंद्रिका. अतिच्याप्तीकेदोषते च्यौराशीमुरवजोय।।१।।जानेजात जुशब्दुतै कामपरैबहुठोर ।।अलंकारमुखिकहतही ग्रंथुन विधऔर ॥२॥ अयउपमासुचिनका॥धर्मऔरउपमेयहै उ |पमावाचकानु।कोमलहरिपदकंजसे कमतै उपमाजानि ।।३।। अष्टलुप्तोपमा॥चंद्रवदनसीतलसदा लखहुमीन सेनेन॥राधाजीकै पदकमल सछिमहरिकटिऐन॥ ४ ॥ रमासद्रसलावण्यहै पिफसी मीठीवानी॥ हेहरिदाडिमसे दसनहंसगमनिकरिजानी ।।५।। पद आदिकउपमेयहै कं जादिकउपमान॥ द्विविधधर्मसामान्यअरु कहतविसे षबरवान॥६॥सीसेसौंज्यूलूइवै समतुल्यसद्रससमान मनौआदिवाचिकजहां श्रौतीउपमाजानि॥७॥ भंवर धनुष्यबाणपत्रुव वर्णाक्रतगुणमानि॥ धर्मसतीनप कारये समुसहुसबैलजान॥८॥सित १ मेचकर पीरे ३ हरित ४ धूसर ५ अनाकार ६॥लोहित मिश्रित आदियें धर्मवर्णकरिधार।। ९॥ लघु१दीरघ २सुछिम ३ पुसट ४ वक५ अवक६ परदांन ।संपूरनपावर्त पुनि सुब्रत ९ त्रिकोण १० सजान ।।१०॥ गुरु ११ तीक्ष्ण १२ मं --- - ९ १ जिस उपमा अलंकारमे उपमा उपमेय वाचकौ धर्मये चारोम सिद्ध दी उसको पूर्ण उपमा अलंकार कहते हैं जैसे कि कोमल ह रिपद कंजसे इहां कोमल धर्म हरिपद उपमेय कंज उपमासे बा- चक यह पूरण उपमालंकार है औजहां इनमेसे एकौनदीर व- हलुप्त उपमासो अाठ प्रकारका है उसको नीचे रघुला लिरवते हैं १ वाचकलुप्त ३ धर्मलुप्त ४ धर्मी याचकलुप्त ऐसेही श्री रभी जानना.

(३६) पांडव यशेंदुचंद्रिका. डल सहित प्रारुतधर्मसुआहि ।कोइकोइगुनारुतद हुंअस्थनवीचसराहि ।।११।। मृदु १ कठोरश्चचलं ३ अच ल४सुरवद् ५ दुरवद गतिमंद|अबल- बली९ सत्य १० असत्य ११मति १२ अगति १३ सदागति १४ कंद १५।। हरि वो १६भारि१७ –रस्वर १८ सुस्वर १९ मधुर २० दंत २१रू प२२॥सीत२३तपत १४ जुकहत है गुणसधर्मकविभूप १० उदाहरनइनसबनकों कॉनौकैसवदास ॥कछ्यकमैहकर- तहूं समझडबुद्दिनिवास ॥११॥ ॥ वर्णधेर्मोदाहरण , दोहो॥ ॥श्वतकृषाअरुअरुणजुत पीतहिरंगविचारि।। चारहुकौअबकरतहौं उदाहरन उच्चार।।१२॥श्वेतोदाहरन ॥ ॥घनाक्षरीछंद॥ ॥क्लबकहीराकुंद पुंडरीककांस भस्मकांचुअहिरवांडहाडकरिकाकपासगनिचदनचबरहंसा स्त्यजुगदूधसंखउडगनफटिकसीपचूनोससिसेसभनि ।। गं गोदकशकैसधाशारदासरदसिंधुसतौगुनसंकररूदर्शनफ- टिकमनि।सांनीहांस्यउच्चीश्रवानारदपारदःउजरेलाधि कमनऐसेहरिदासधनि । कृष्णोदाहरन ॥ कलीकाकको किलकचकीचकाचककीक्रोधकरीकालीकत्याकोलकज्ज लकलंकमानि। कृष्णकामकलहकुसंगकालकूटसराकु जसकरवालतमपापपुंजलौंबरवानि ।। बध्याचलेतालप्र- १ केशवदासजीने कविप्रिया औरसिकप्रिया दोनौ ग्रंथौमे इनके उदा हरन अच्छीतरह किये है जिसको विशेष देषना समुझना होय सोउन ग्रंथोमैदेरवना. स्वरूपदासजी कहते हैं कि थोडेस मैं भी कहताहींसोबु- दिनानलोग समुहलेना. २ प्रथम कहाकि धर्म तीन प्रकारका है.एक व र्ण दूतावाकृति तीसरा गुणधर्म तीनमे प्रथम वर्णधर्मको देवाते है.

॥ पांडव यशेंदुचंद्रिका. (३७) छच्यासवनव्यालवोमद्रौपदीजलदजांबूजमनाअनृतवा नि । मुस्कभंगाररसनिरयनीलतेलहुतैकारेअधिकहरिवि- मुखनकैदैजानि॥१४॥ ॥ रक्तोदाहरन॥ रसनाम धरपलकिदुरीपकीद्रगंततक्षकसिंदूरऔरहिंगरूबरवान है।दा उमपलासकासमीरओजसूल फूलेसारसरुकुरकुट केसीस अनुमानिहै।मानकुषद्योतइंद्रगोपकुजपावकहै किसलेमजी ठरक्तचंदनपिछान है।।रौद्ररसमहावरगेरुरुधिरसं गुनीविषयनकौऐसोमनजानि ।।१५॥ ॥पीतोदाहरन ॥ वैनतेयवानरविधाताऔर वासवजेहरदहरतालरंग हाटिकसहायोसो॥चक्रवाकचंपकहैचपलाचमेलीसोनगो- रोचनगायमूत्रद्दापुरवत्तायोसो॥पीतरपरागमेरुगंधककमल कौसकेसरकौरंगसोकवीसरन गायोसौ॥वासदेवपीतवास कंसकाजकटिकस्यौइनविसेषरून्योवीररसछायोसो।। ॥१६॥ ॥ इतिवर्णोदाहरन॥ ॥चौपाई॥ ॥त्रियके नीदरकोपअहार॥द्रगपुतरीअणुलघुउच्चार।वामनदंड मे रुदातामन॥आतमवितद्रष्टीदीरघगन॥वियचीताकहर कटिकेस सछिममायाब्रह्मविसेस।त्रियनितंबकुचकरिकुंभ स्थल॥पुष्टकीयेवरनतजेकविभल॥१७॥भूहकटाक्षअल- कधनुअहिगति॥कोलदातवनकुटिलनकीमति॥तोमरवा णदीपस्थिरनासा॥सरलमतीजेहरिकेदासा। आननअंबु जप्रेमप्रकास ॥संपूरए आदरसअकास॥ चकरीचक्रमाला तचक्रगनि।। फिरआवुतकुलालचक्रभनि । कुचर्किंदुकची लादिकइंडा। सुबतौरकाहियेब्रह्मांडा॥ महिंत्रिकोण । १ इहांसें प्राकृति धर्मके रूप देखावते है १ (३८) पांडनयशेंदुचंद्रिका. रुवज्जसिंधारे॥पांचतत्वलज्जागुरुधारे॥नैनबाननरवतोम रतीछन॥ मंडल मुद्रिकाकुंडलफंकन॥१८॥ ॥इतिश्राम तिः॥ ॥ किसलयकुसमहरिजनकोमन।। वालककविवा- नीमृदुतागनि।उपलअस्तिकूरमकीपीठ ।। चत्रकठिनपुनि दुरजनंदीठ॥मीनमधुपमरकेटमनमाया॥छलसुपनौजी बनघनछाया|विद्युतमारुनचलदलकेदल॥ ध्वजपटतिया वषादिकचंचलअचलमेरुध्रुवसंतनकोचित॥सुथल सपूतरूतीयसुरपदमत। कुश्नतकुवामकुबुधिकुस्वामी ॥ पाप्रवासादिकदुरगामी । कुलत्रियहासमदहसत्रिय गत अवलपंगुअगुंगरोगजुत। अंधबुधातुरत्रिय रुवालक॥बधिरत्रनाथातिनहिहरिपालका बली भीमहनु पवनकालजम ।। सत्यब्रह्मसबजगताठनमाजीवहिरव गिराविधिकीमति ॥ वनभयावर सबहिअनगति ॥ जलप्रवाहमनमरुतसदागति। फूलचूलतृनफेरफरे अति । हारकपारदसीसीपरबत।। इनकूकविभारीकरबरनत । काकउलूककोलमहिषीरचर ।। शिवाकरभग्राहियादि क्रूरस्पर ।। कौकिलशिवीवीणसुकसारौ।। सुस्वरमिष्टउषा दिकधारी गोरिगनैसगिरीसगिराको ॥रविदौऊरामदान कहिताको॥नलदमयंतीसीताराम॥रूपअश्विसुतरतिया रुकाम।।चंदनचंदकपूरसाधुसंग।तुहिनपवनको हैसीत लअंग। दिनमणिचित्रभानुपरोगाऔरतपत्तप्रियतम- ॥ इतिगुन॥ ।।याक्रतोदारन। इहांसे गुणधर्मके रूप दरसाते हैं. कोसांग।।१८॥ १

पांडव यशेंदुचंद्रिका. (३९)
॥ ॥संचैया॥ ॥लघुक्रौधअणूमनदीरघ मेरुहरीकरिकुं
भकरीकुचहैतन।जुगभूहधनस्थिरदीपकनासिकाकंचमुरवी
चकरीहरिकोमन।कुचकंचनकिंदुकलालस्यंधारेमहागुरु
लागहैवाणसेलोयन। करकंकणमुद्रिकाकुंडलराधेकमंडलो
पमात्राकृतएगनि॥१९॥ ॥ गुणोदाहरण॥ ॥पंकैजसेप
दहीरकनीरदमीनसेनैनहैसंतनसोचित॥ पीवपतिव्रताधिन
व्याधिनहंसगतीअबलानमैभूषित॥ कालहूपैवलब्रह्ममनोत्र
तमायाकोफैलविरंचहपैमति ॥व्यामेचिनागतिस्त्रष्टसदागति
फूलतेफोरीहभारीगिरीगति ॥२०॥ काकसौनासुरकौफिला
सौफ़रदारखसीबानिमहेश्वर सोदत,गौरिसस्पहसीततुही
नसीतापदिनेससोराधिकाराजत जाक्रमदोहनबीच ताक्रम
बीचसवैय्यानसोधिमहामति दासस्वरूपविचारकैदेवियोमा
क्रतऔरसुभावहुकीगति॥२१॥उपमेयळूउपमानहींहोयत
हांअनन्वयअलंकार॥ दोहा॥ ॥ काउपमादैापळू भोक
श्यपसुतभान॥उपमालगेसुआपकी आपसद्रसकौयान।
॥२२॥दोषकुंगुनमानलेनोसोअनुज्ञाअलंकार।एकभावळू
दबावत दूजीभावप्रगटेसोभावसात्यकहियेदौडकोउदाहरन
॥दोहा॥ ॥मीचदुरबदजानोमति महागुरू हैमीच।।श्रूपदा
।।
२
१ इस सबैयामे आकति धर्मके उदाहरन हैं जैसे कि राधेका क्रोध
णूसरीरया लघु है औ मन मेरुसरीरचा बड़ा है इहां अणु श्री मेस यै श्रा
कृत हैं. २ गुणके उदाहरणदेरयाते हैं तहां पंकजसे पद इस वाक्यमे धर्म
लुप्तोपमलंकार सिद्ध होता है इसमे कोमलता धर्म है पंकजसे कोमल
पद. ३ जहांउपमेयको उपमेयहीकी उपमा दीजाय उसको अनन्व
यअलंकार कहते हैं जैसे आपसे आपही हो

(४०) पांडवयशेंदुचंद्रिका. ससासमरतां नरहरिसमरैनीच॥२३॥ एकठोरएकवस्तु मैगुनौगुनमानेसोलेरवालंकार हरष विषादविरुभाष कीसंघिदोउकोउदाहरन॥ ॥दोहा॥ ॥छिनछिनउमरघ दतलरिख भयोहरषअरुसोक॥धुनितबकताअवस्थालरिख हैबुधजनलोक॥२४॥ ॥श्राकृतवरननजातिअलंकारचे टावरननस्वभावोक्तिश्रादिकौपदआदिअंतकौअंतयथा जोग्यउदाहरन। तैतथासंरज्यअलंकारविषादभावोदयः चा रहुकोएकत्रउदाहरन॥ ॥दोहा॥ ॥क्यूंसिंघारसोंधीपहरि कियतियरागउचार॥अंधरोपीसनजुतबधिर हैपियपरषण हार ।।२५।। निंद्यामैस्तुतिसीव्याजस्तुति अलंकारचिंताभाव सांति॥ ॥दोहा॥ हरिकठोरदासनिकरत निरधनश्र रुनिहकाम॥दासधूपबकसतदुयनि धर्म्यनदुरलभबाम।।२६ ॥ ॥स्तुतिमै निंदाहोइसोच्याजनिंदाअलंकार॥ ॥गेहप- धारौसासकहअहोबहूजीआप॥हारदेहरीक्यूंरवरी ऐरीसु कुलअपाप॥२७॥ याफौविपरीतलछनाभीकहत है बहुवाची अतिस्वारथकारणकेलिये पदफेरफेरग्रहण होइ सोएका वलीअलंकार ॥ पदपदनूतननूतनतरू तरुतरुकोकि लरचंड ।। षंडषंडप्रति मधुरसर सरसरमदनप्रचंड ॥२८ यामैपदमुक्तग्रहण मुक्तग्रहणहोइ पदफेरफेरग्रहणतो वीपसामैपणहोत, कारणमालामै भी होय।। ॥दोहा।।। १ इहां जो कहा कि हरि अपने भक्तको निर्द्धनौनिहकाम करते हैं और धर्म धामये दो पदार्थ नहीं देते है इसते कठोर हैं इसमें निंदामें स्तुति है अर्थात् सर्व श्रेष्ठ मुक्ति देते है कोमल हैं. २ इस जगह सक लकहर्नमें स्तुतिमें निंदाहै अर्थात् दुष्कुल.

पांडवयशेंदुचंद्रिका. (४१) श्रादर ओरविषादमें देन्यक्रोधविचमानि॥एकहिपद हैन यबरवत यदेवीपसाजानि॥२९॥धन्यधन्यतुमधन्यतुम रघु वरदसरथनंद।तिष्ठतिष्ठनिसचरसमर कहिसबकियनिक द॥३०॥ करतासाधक औरभोक्तासिद्ध औरतेसुसिधश्र लंकार। रागवागत्रियपटअतरषसनंचरससोय।। कर- तासाधकष्टकरि भोक्ताऔरहिहोइ॥३१॥गुणदोषको करताएकभोक्ता अनेकसोप्रसिद्धाअलंकार ॥सतहरिचंद राजानके पुरकियस्वर्गप्रयान॥ तसकरतारावनकरीगयेकुटुंब केप्रान॥३२॥ ॥अर्थापत्तिअलंकार॥ ॥बहेजात्तगंज राजजित कित्तचीटीकुंथाह॥दरसैअघहरगंगजल परसैअन द्भुतराह॥३३॥ मिथ्याधिवसतीअलंकार॥ ॥निरज लॅथलवोएअरफ अंबचढेजोहाथ। ज्ञानभक्तिवैरागचिन त बहरिमूिलैसुथान॥३४॥ ॥जापदार्थकेजतनळूहूंढतेसो- ईपदार्थमिलतीसरोमहर्षणालंकार॥ ॥दोहा॥ ढूंढतजा कारनगुरू पायेहरिमहराज॥चारपदार्थादिहै भयैसक लसिधकाज॥३५॥ ॥प्रभउत्तर होइत्तेप्रश्नोत्तरअलंकार। ॥ हेगुरुकबपावस हरिदासनकुंकलिकाल। भक्तिसदयू वैरागमन ज्ञाननिरापरवचाल ॥३६॥ ॥ विरुद्ध कारणले कारजकीप्रकटतापंचमीविभावनांअलंकार। नईलगन लखिजीरचषगई अंगुष्टबताय॥मुद्राजोन्टवेमई भईयाने भाष॥३७॥ ॥साटेमेंथोरोदेके बहुत सोपरव्रतअलंकार दैकटाउहरितनकसीलीनेमनधनप्रान॥ बुधविचारसरख १ हे गुरु कप पावै हरि यह प्रश्न भक्ति इत्यादिक पद उत्तर भये यासे प्रश्नोत्तर अलंकार भया. + (४२) पांडवयशेंदुचंद्रिका. दैचुकी सबकुलमानसयान॥३८॥निजगुनतजिगुनसंगकी गहरूलदगुनजानि ॥संगतितैगुननालगै ताहिअतद्गुनमा- नि॥३९॥दुष्टसाधव्हसाधकी संगतिकरिपलाध ॥दुष्टसंगक रिसदयदिल होत्तनसाधअसाध॥४०॥ ॥संगततै पूर्वगुन वृद्धिपाचे सोअनुगुनाअलंकार॥ ॥आगेहिहअगाधन ल पायरामसिरदार। छिनमैं कुलनिसचारकोफ्यूंनकरसंहा ४१॥ उत्प्रेच्छामनुजनुसबदबस्तुहेतुफलहोइ ।औरेनौ रसबदजहँ भेदकातिहसोय॥४॥ हरिपदमानोकंजहे सियमुरवहैजनुचंद ।। कविमुरपकीबानीनळू औरेपटता- नंद॥४३॥यहनहियहसोअनुती दूज्यूरूपकजानिए किधी शब्दकिंसब्दतहां संसयकइतबरवानि ॥४४॥ बदरानहियों कामफे तनेवितानविसाल।। बालकि—हाटकलता किधूकै तकीमाल॥४५॥ हैउलेरवसोईएकळू बहुसमूबहुभाय ॥त्रियनिकामहरिसंतहित कंसहिकाललखाई।।४६॥ ॥ काहुफोगुनदोषकाहुपैपरैसोविधकरणोक्ति तामैअंतर तप्रथमकोअसंगति कारण कारजाहूद्रष्टांतत्तीनूकाएक उदाहरन्॥ दोहा।। दूतपणोलीयनकरै मनपावत हैताच॥षोडभई पदउंटकै दीजैरवरकैडाच ॥४६॥ एकत्रि यापदफूतयादेहरीदींपवतपदकंबहुबेरअर्थकरतांग्रह णकरैसोएकानेकोअलंकार॥ ॥हरिसदयानहिबिसर हीअदयात्रीयासदैव ।। साधुजगतपतिस्यामफौजीवकाही । इहां साधुके संगसे दुघडू साधु होता है इसमें यह पायाकी साधुके गुणग्रहण किया इसने तद्गुन भया औ दुष्टके संगतसे सा धुअसाधुन भया यह अत्तद्भुत भया.

पांडवयशेंदुचंद्रिका. (४३) कोजीच॥४७॥ककार नास्ति,ककारनकारतेंधास्तीअर्थी धुनितआवेत्तोकाफोक्तिअलंकार॥ ॥अग्निकीतृपतीकाष्ट त सिंधुकीसरितापाय॥कालकीभक्षराभूतकै नरतत्रियन घाय॥४८॥एकभागग्रहैतैसेषभागजाएयौजायसोसेषभाग ज्ञापकालंकार। एकभावकेग्रहणते अन्यभावव्दैत्याग होया कीयहचोत्यागते एकग्रहैबहभाग॥४९॥यापरिषदमैएक- हीयहै विदुषकरिजानि॥वापरिषदकैबीचमै मोडिअज्ञतुमा नि॥५०॥सुरतरुत्रादिकवनस्पति वागसुनंदनमाहिरा बिनय श्रादिसुभगुणसकल होयअधममेंनाहि ।।१।।एकोन्येकशे षभाग़ज्ञापक येदोनूअलंकारनवीनहै ऐसहीनवीनभूतभ- विष्यवर्तमानपरोक्षप्रतक्षउत्तममध्यमकनिष्ठकारणकारजा धारमाधेयलोमविलोमभेदते बोहोतभेदहोत हैवहनाकिं ।। ॥ ॥दोहा॥ ॥द्रव्य और गुण२४ कर्महे ५ पुनिसामान्य बिसेस॥हैसमवाय१ अभावली सप्तपदार्थअसेस॥५॥भू ओप२ तेजै३ रुवाय ४ मनं५दिसा६काल ७ अकासा मादि९ नवद्रव्यहै गुणकोआश्रयभास ॥५२॥ कवि०॥रूप रसगंधस्पर्श ४संरच्या५ परिमाए ६आपृथक ७ संजो गोविभाग ९गुनगाइये। परत्व १०अपर्व११ बुद्धि१२सु ख १३दुख १४इच्छा१५ देष१६प्रयत्न१७ गुरुत्व१८ औद्रय त्वरिमानिये।।सनेहव २० संस्कार २१धर्म २२ अधर्म२३श १ इहां यह अर्थ है कि अग्निकी तृप्ति क्या कापसे होती है अर्था- तु नही होती है सिंधुजो समुद्र सोसरिता याने नदी पायके क्या तृ- स होता है अर्थात् नही इसको काकोक्ति कहते है: २ आपजल.३ ग्नि. ४ कालसमय. .........

(४४)
..
पांडवयशेंदुचंद्रिका.
ब्द २४ चतुर्विंशसंरच्यामतन्यायतेवरचानिये पांचकर्मवैसा
मान्यविशेषअनंतविधचारहै अभावताहिटीकातैपिछानिये
॥५४॥ वाताउत्क्षेपण अपक्षेपण याकुंचन प्रसारणगमन
एतानि पंचकर्माणिसत्तारूपंपरसामान्यजातिरूपंअपरसा-
मान्यंप्रारभावप्रध्वंसाभाव अन्योअन्याभाव अत्यंताभाव
सप्तपदार्थनविषेद्रव्यगुणकर्मकेसमवायएकत्ताभयेजातीभ
यीसामान्यत्वततामविक्तिभई पिसेसत्यजातीगोतजानेनाम
रूपजान्यौजायशंगपुछकंबलईहरूपगायनाम विक्तिविसेसज्ञा
नकालीपीलीधौलीरवांडीबांडीभीडीइत्यादिसर्वपरजातीनाम
रूपलग्योहै. तातैशब्दब्रतिपहचानियेप्राप्तवाक्यंशब्दासजा
थार्थवक्ताको वचनवाबस्यपदनकोसमूहयथागामानयशुक्लादंडे
नेतिशक्तंपदंअस्मात पदादयमोंबोधव्यंइतिईश्वरशक्तिःघ
टकहेतेघरजान्यौजायपटनहींजान्यौजायडहैईश्वरशक्तिः ४९
आकांक्षायोग्यतासंनिधिवाक्यार्थज्ञानहेतुःपदस्य पदांतर
व्यतिरेकप्रयुक्तान्वयाननुभावकत्वमाकांक्षाअर्थाबाधौयो-
ग्यतापदानामबिलंबनोचरणसन्निधिमाकांक्षादिरहितवा
पयनप्रमाणंयथागोरस्वपुरुषोअस्तीतिनप्रमाणाकांक्षाचि
रहात अग्निनासिंचेदितिनप्रमाणंयोग्यताविरहात् प्रहारे २स
होचारितानिगामानयेत्यादिपदानिनप्रमाणंसान्निध्या भावांत
म्॥५६॥ ॥दोहा॥निकक्षिासअयोग्यताअसान्निध्यतात्या-
१ ये प्रकरण न्यायशास्त्रका है जहांसे सप्तपदार्थ निर्णय किय हैं उ.
हाहीले सो प्रयमती इसका इहां बडा प्रयोजन नहीं परंतु ग्रंथकर्ताने
आपकी नैयायकता देखानेके वासेलिरवाहैजो व्याख्या करें तो विस्ता
र ग्रंथसे दुना होचगा इसपास्ते नहीं किया.

पांडवयशेंदुचंद्रिका. (४५) गि॥होवेसबदसमूहने प्राप्तवाक्यसुनित्यागि।।५७॥अव्या प्तिप्रतिव्याप्तिपनिदोषअसंभवहोय॥इनतिनहूंसममिकरस ब्दवत्तिकौजोय॥५६॥गोपहियरसींचहअग्निकरिश्महरांत रउंचार ४ गोकपिलागोशृंगते ५गोइकरचुरतैधारि॥५९॥ पद १पदांस२ वाक्यार्थ३जेरस ४दूषनविधिपच॥ इनकेअंतरभू तहै समहुबहुरूनिरंच॥६०॥ वार्ता इनदोषनरहित शब्दवे तविचार बाँसब्दव्रती ३ रूढियोगरूढीयोग्यककुढ्याब छकोढूंटजाळूदिष्ट कहियेअर्थरहितवाहिठूठेमवरतेसोरु- ढीपंकजकमलेपयांदमेघपंकसूंप्रकट होय।।औरहते पंकज नहिंकहाय जलकेदेनहार और पयोदनहींकहायविनामेध सोजागरूढजलजकमलभीकहिये इंदुमुक्तादिककुंभीक हीये औरन विषैहअर्थवरःजातयोग्यकमुरण्यार्थछोड़े तथा मुरच्यार्थलग्यौरहै उपरतेंहुआवेसोलछनागंगायांघोष गं गाशब्दःअभिधानविसेअर्थछोडतीरकौअर्थग्रहणकरेसो लछना तटकेविषेसीतलत्तापावनताप्रादिध्वनि अथचतुर्वि धिरीतिसब्दालंकार॥ ॥दोहा॥ ॥ध्वनीआमाकाव्यकों क हतभरतमतग्रंथ।कहतामारीतको वामनमतकीपंथा।।६१॥ कायकोग्रामारसहै इतिसिद्धांत।गोडीके चिचचोजगुनलाटीगु नपरसाद॥वैदर्भीपांचालिविच गुनमाधूर्यसवाद।।६२॥ ॥ अथगोडी वर्णसंजोगिटबर्गमयरचनाबंधनछंद।।अर्थी जुबहुतसमासते गोडीकहतकविंद॥६३॥ समासलछन ।। सौता नै करि३ औअरथ ४ ते ५ कौ६ मै नसमात ॥वाह १ जिस छंदमे टचर्ग याने ट ठ ड ढ ण ये वर्ण बहुत संयोगी होयी अर्थ बहुत समासते होय उसको गोडी कहते हैं.

पांडवयशेंदुचंद्रिका.
रिसातविभक्तिको अर्थसमासलिरवात॥६४॥ भाषामैइकबा
हुवचन नहिं दिवचनकहाई॥हैस्त्रिलिंगपुलिंगहै नपुंसकनाहीं
ठरवाय॥६५॥ ॥गोडीकोउदाहरन। तेडीऐंठतंभू
हटिंग दिलहीअमैठनदीठ ॥डूगइछबिमोइद्रग करतढिठा
ईटी॥६॥ ॥अथवैदी। ॥ विनसमासकिसमा
सकूम सानुस्वार बहुवन ।। नहींवर्गसंजोगनहि वैदर्भीड
बन॥६॥ ॥उदाहरन॥ ॥फंदगयंदनिकंदकर जग
तबंदचंदु ॥ मंदमंदमुसकतमधुर नंदनंदरूरचकंद॥
६८॥गोडीद मिले पांचालीसौजानि॥वर्नसजुगनु
सारजुत समतकरनबरवान॥६॥चिंतर्मितअंतरलग्यो
रंदरदब्रजवाल । मंजतअटतन विसरत गंजनकंसगुपाल
॥७०॥ ॥अथलाटि॥ ॥जामेकोमलपदभरे लगतस
वादपढंत ॥ लाटीरीतिसुकहतहै विदुषमहागुनवंत।।७१॥
||उदाहरन॥ ॥गिरिगिरितरुत्तरुसुधरहरि बजतमधुरसर
वैन।ललतलाललोयनलरवत ललचत्तललकतनैन। ॥
७२॥ ॥अथसष्टानुपास एकवरणकी किंचा बहुतवरनकीब
हुवेरसमताहोईसोरत्यानुप्रासः।। बहुवरनकीबडुवेरसमता
दोहा॥ ॥ जनमदगॅजनकर अजनमंजनन ॥रयंजन
शिवभंजनरवतम नितहरिरंजननेन॥७३॥ ॥एकवरनकी
बहुचेरसमता।। ॥दोहा॥ ॥गुनगनअरपनकरिदिये तन
मनधनअरुमान॥जनसरवधनप्रदामजी सनिमुनिभयेस
यान।।७४||अथसहितपदपलटै भावभिन्नहोइसोलाटानु
१ जहांलमासनहोय अथवासमास थोडे होय श्रीजहां अनुस्वारयु-
वर्णबहुत होयौटयर्ग संयोगाभन होय उसको वैदर्भी कहते हैं।

(४७) पांडवयशेंदुचंद्रिका. पास॥ ॥दोहा॥ ॥तीरथवतसाधनकहाजोनिसदिनहरिगा- न॥तीरथव्रतसाधनकहा बिननिसदिनहरिगान।।७५॥ अनेकवरनकीएकएकवेरसमताहोयसोडेकानुप्रास॥ ॥राग वागरचनारुचिर पूर्णचंदसुरसकंद॥ वामकामप्रदविभो एह मेचहतअनंद॥७६॥ ॥सबदएकहीवारवारावे अर्थऔर होयतेजमकानुप्रास॥ ॥सोरठा॥ ॥अच्छरपदविचहोय नहिताकोअव्ययेतगन।।सव्ययेतेहैसोय अच्छरतेपदभिन्नता ॥७॥पूर्वाई॥ ॥अव्ययतैउत्तराईसव्ययेतेउदाहरन।। ।। दोहा॥ ॥समरिसमरिदनुकुलतपन गायगायहिजपाल॥ ताकेपाइउपाइसजि करतसअकरतचाल॥७॥अत्यानु प्रासतुकातकुंकहैसबुछंद होतहै श्रुतिअनुप्रासएकवर्गकेचा रनछंदचरनमैवहोतसधैजाकौसाधारनॅलछनहुकहतहै॥ ॥ दोहा॥ ॥भानुभीमभगवतभवा भारथिपुत्रभवेस॥भगत कालत्रयवयभवन बकसहुमंगलवेस॥८॥ ॥ अथरसन कीसुचिनका॥ ॥अथसत्रुमित्रस्थाईवामीरंग॥ ॥ दोहा ॥ ॥सत्रुविभत्ससंगारको करुणासत्रुविचार॥भयससांति हुस है हासिसुमंत्रनिहार ॥८१।। मित्रविभत्ससहासिको भा यरससत्रुसमान ॥मित्ररौद्र करुणकोहासिमहारिपुजानि॥ ॥२॥भयरसहरिपुरौद्रको वीरमंत्रकरिजानिसांतिकरुन रिपुवीरकै अदभुतमंत्रवरवानि ॥८३॥ उदैहोतुनिर्वेदजल दस रसथाईलोन ॥ तातेरिपुसवरसनको सांतमुख्यसबगोन। भ १ इहां रसौंकी शत्रु मित्रताजो कहि है इसका प्रियोजन यह है कि अपरे शत्रु रसन आना चाहिये इनके भेद रसतरंगिणीमे है लो इहां लिरे तो ग्रंथबढेगा इस वास्तें नहिं लिरचते हैं.

- (१८॥ पांडव यशेंदुचंद्रिका. ॥८४॥ एकादसरसदासकीस्थाईविगरैसोई॥भक्तिजुक्तानि दिवि ज्ञाननिर्वेदविर्षे विनयहुकौनासहै वेदांतमतते ।। ॥८५॥ ॥ अहंब्रह्मास्मीति॥ ॥दोहा॥ ॥रतितेपुष्ट सिंगारहै हांसीहास्यविचार॥करुणापुष्टहैसोकतै रौद्रक्रोध नैधारि।।८६॥ वीरपुष्टउच्छाहते भीतित भयजानि॥निया सहतविभत्सहै विसमेअद्भुतमान॥८॥सांतिपुष्टिनिर्वेद- ते दासत्वरूपअनूप॥ सनस्थाईभावविन भनतसबैकषि भूप॥८॥दासऔर सरव्यवहै वात्सल्यरसकरजोय।वि। नपरहास्यममत्वहै स्थाईहादसहोई॥८९॥स्यामसिंगार रूकामपति वामनपतिसितहास॥करुणाधूसरजमयती रौद्रलाल सिचदास॥९०॥ चीरहेमरंगइंद्रपति भयकालोप- तिकाल। हत्यौविभत्समहाकालपति सांतिस्वेतहरिपाल ॥ ९१ ॥अदभुतपीतवीर्यपति नवरसस्वरूप॥चारषानिधि चिसनिलिरचै कहैप्रगटकविभूप॥१२॥सबदसपरसरूपर सगंधपंचविषयानि॥सांतिकथाईऔररस इनविचप्रग टतानि ।। ९३।। हैविभावअनुभोवजे सांतिकसंचारीन स्थाईयादिकसमझियो रसनचीचपरवीन॥९४॥ ॥अथ सात्विका ॥ अशा प्रलय२ चैवरनता३ स्थंभ ४ कंप ५सु रभंग ६॥ स्वेद पुलिक ८ जंमा ९गिनो १ तंद्रित १० जुत १ अहंब्रह्मास्मि इसवाक्यको अर्थ यह है कि मैब्रह्मात्मक हौंअर्थात् ब्रह्ममे- राअंतर्यामि है मैउसका शरीरभूत हों जैसे प्रकृति मेराशरीरहै तैसे मैं हाकाशरीरहौं शरीरवाची शब्दोंकाअंतशरीरीहीमे होताहै जैसे यह मनुष्य अयम देव भया या पुण्यक्षीण होनेसें मनुष्य भयातौ देव आत्मासे था कुछ इनीशरीरसे तथापरंतुअंगुसीइसी शरीरके सामनेकरी ऐसेहीइहांभीजानौ.

॥ पांडव यशेंदुचंद्रिका. (४९) दसअंग॥९५॥ ॥अथसंचारिछप्प ॥हैनिर्वेद रुग्लानर संका३ ग्रब ४चिंता ५ कहिये।मोहविषाद ७स दैन्य असूया ९मालस१० लाहिये।मंद११संभ्रती१२ उ नमा १३ हरष१४ श्रम १५ लाज१६चपल १७ ध्रति १॥ज- डता १९भय२० मावेस सुभ२२निद्रा२३ औत्सुक्य२४ म ति२५॥अवाहित्था२६बोध२७ नरुज्यता२८ व्याधी२९विषा द३०वितर्क ३१ मृत्यु॥३२ हैअपस्मार ३३ कुंआदेिसंचारीते तीसहितु॥९॥ ॥ नवरसानुभाव॥ ॥दोहा॥ मनरुचदनप्रसन्नता मंदहास्यमधुवैन। ऐशृंगारअनु भावहै मोदजुक्तचलिनैन॥९॥श्रादिरूपुतजियोरहोय वचनरुअंगविकार॥स्वरभंगादिकप्रगरव्है रसहांस्यप्रका २॥९॥दीर्घनिसासरुरुदनते मूर्छादन्यविलाप ॥ करु- नाके अनुभावहै भूमिपतनसंताप।।९।।करतेचेकोमल न अधरडसनअरूकंप॥शस्त्रतौलवीरौद्र मुरपचरचघरन विलूंप॥१०॥सौर्यधैर्यपगलभवचन साविकरामांचा- दिपिरनप्रसनवीरको प्रगटकहतकविआदि ॥१०१ ।। पचरनकर अंगसिर चषचकितथिरकाय॥सस्कअधरक ठतालुभय रसयहजान्योजाय॥१०२॥ नानाआननसंकु रित चषमुरवछादनहोय ॥ वारवारथूकतरहै विभउम गटताजोय।।१०३॥वाहवाहहाहातथा गदगदवचनप्रभा च॥अहौचरननको फूलवो अद्भुतरसअनुभाव।।१०।। धोद्रष्टउनमतवाजगतैव्रतउदास।निजमुरवनिंदाअापकी A १ अब इहांनचौरसौंके अनुभाव कहते हैं अनुभावउसको कहते हैं जि समें रसकारूप दिरवनेलगै अर्थात् रूपका अनुभव होनेलगै.

(५. पांडवयशेंदुचंद्रिका. हैरससांतप्रकासं॥५॥ शब्द भंगाररस॥ ॥तीनकान्ह केगानकी परीकानमैआय।जबहीतैषभानजा भईचित्र केभाया॥ ॥सप्रसतैशृंगाररसा। ॥दोहा।। दुलहनिको पहरायदी मोहनतोमरमाल|स्वेदकंपस्थंभनपुलँकलरच्यो ताहिछिनलाल।।१०७॥ ॥रूपतेश्रृंगाररस॥ ॥जबदेखिर पभानजा हियविचऊठीहक॥ वंसीअोठनपरही फेरलगीनहि फरुका॥ ॥रसतै श्रृंगाररेस॥ ॥वाप्यारीकेहोटको पानकीयौर सपीव।।कहैसुनैनहलैंडगै जबकौउमक्यौजीव।।९॥ ॥गंधते श्रृंगाररस॥ ॥प्यारीकेअंगरागकी गंधलपटभोज्ञान॥ध्या नलगेलोयनटपेकवकेठाकेकान्ह॥११०॥ ऐसेहीपंचौदीपनसबर समैजानिये नवरसएकत्र॥छप्पै ॥ गिरजांअंकसिंगारकीर्तिम रवकाजकरुणमय विभत्सरंडकीमाल भूतनाभरनउरग भयअसंभावअदभूतज्वलनचरवपंचसीसजल॥रौद्रदक्ष- ऋतुनासभूततनसांतिरुपाल॥गनवीरभद्रजुतवीरमयहास नगनतनविमलजसउरस्वरूपदासधरध्यानबराजतशि वतननवहिरस ॥१११॥ ॥अथरंगहीनथाई॥ ॥कवि त॥ ॥भीलनीमैपीतिहिजकैदसिंहपैउछाहमोतीमीतगयेपा यविस्मयनमानतू॥पीकलीकअंगनाकेअंगपैगिलाननाहि सारिइंजितेकस्यालक्रोधनावरवानतूं।मिक्षाकाजैगावतव्य रागनिरवेदनाहिकदलीमरोरेगजकरुनानजानतूं। याहिविधिस्व रूपदासऔरेरसजितेाहिअंगहीनगिनलैंस्थाईजोसयान १ गानकी नान यहीशब्द इसीमें शृंगार देरवायाहै. २ माला पहिराते में छातीये हायलगा जिसने कंपादिकभये यह शृंगाररस. ३ इहांश्री. शंकरजीके अगमेनचौरस एकटेकाने देरवाते है.

पांडवयशेंदुचंद्रिका. (५१० तू॥१३॥ ॥अथरसाभास॥ ॥अथरसाभास॥ ॥दोहा॥ ॥जुपि तापूतको अनुचितसोरसभास॥रमणअगम्यानारित गुरु जनसेतीहास॥११४॥ ॥ इतिश्रीपांडवयशेंदुचंद्रिकातृती यमयूरवः॥३॥ || ॥ भीमसेन हम लापाग्रह द्रौपदीस्वयंवर - जन्मेजय वैशंपायन यज्ञ. SARKA IALA अर्जुन दोपा सत्यवती चार्व व्यासावतार. - Fils पांडवयशेंदुचंद्रिका. श्रीगणेशायनमः॥ ॥अथवैचित्रवीर्यवंसकारकभारथग्रंथ कारकबीवेदच्यासोसत्तिः॥ ॥छंदपद्धरि॥ ॥ोमद्रकेतगं धर्वराज॥अधिकात्रियसोभासमाज तिहिरिषसरापलषजोनपा या।उद्धारऋषहिदीनौबताय॥ कोउमनुजवीर्य भजिपुत्रिहोय ॥ दंपत्ति निजगतितुमलहहुदोय॥वसुनामकवरारपेटक जापितुवचनलागिगोजुतसमाज॥तिहवामनामगिरकासुता हि॥रतपतिपठयेशककवरपाहि। धरिनलकावीरजसकहिदी नजमुनापनिकस्यौसोप्रवीन सिंचानकपटभारिसता- हि। बहुचीर्यगिस्यौरपितनयमांहि ॥सोमीननिगलजाताहि सभाव।गर्भस्थित भोताहीप्रभाव।सोजालपरीकहकर्मजोग ॥विधयाहिआपकोंभौषियोग॥विदारणउदइकपुनिपाया।सो करिकारसेवासुभाय॥पुनभयोअंगयोचनप्रवेस ।। विधाविधहि चढतसोभाविससमिछगंधाइकदिनसरततीर॥ एकाकीभइ अंतरअधीर । हिजपरासर्यकहतातकाल॥ मोहिपारकरह मत्तिनरहुबाल ॥भयजुक्तिनावप्रेरीसभाम॥कन्यालरिवरिप भोपियसकाम।।रचिजाचीतापहरिषअधी।रसमन्मथछेद्या जिहसरीर।कन्यातवाधिनतीकरीताहि ।।इकदिवसबहुरिकन्य वाहि॥धूम्रतेकयोरिरिषअंधकार॥पुनिकटामोहिम जिसह प्यारे॥जीनटेश्रापदैहंजरूर॥कन्याननरिरिरिचल रिखकरूरविणमात्रनावविचुसंगवाय॥ बत्तुभंगभयोरिचय रलजाय॥कहकन्यादूषणलग्यौमोहि॥ताकोप्रयत्नश्रबजुक्त तोहि॥वीर्यतिहउपजिजदवेदव्यास॥अवतारयंससजगतु जास। ॥दोहा॥ ॥अष्टादसजिनउक्तिते पूरनरचे पुरान।। एकलक्षभारतकियौ वेदहुकियच्यारव्यान॥ २॥ ॥ इक्ति। ॥ ब्रह्म १०००० पद्म५५००० विष्णु२३००० . 4 Akamayapur पांडवयशेदुचंद्रिका. शिव२४००० श्रीमत १८००० भविष्योत्तर १४५०० नारद २५००० वाराह २४००० लिंग ११००० ब्रह्मवैवर्त १८००० जानिये। फर म १७००० मच्छ १४००० वामन १०००० कंद८११०० मा दु९००० कहिगरुड १९००० ब्रह्मांड १२००० अग्नि १५४०० विधसूपिछानिये ॥ सामवेद २५००० ऋग्वेद २५००० जजु र्वेद २५००० अथर्वणवेद २५००० च्यारहु केसूनवेदअंत कुंवरवानिये॥ भारत निर्माणकीनोसंहिताअनेकछायाप रूपदासताहिकूविचारैगतिमानिये॥३॥ ॥दोहा॥ ॥ जन्मेजयनृपकरतहौं सरपसन्नतिहिकाल॥वेदव्याससबसि रखनजुत आयमुनिवर चाल॥४॥पूछैनृपरिवराजप्रतानि जपुरुषनकीबात।कैसेबंधुविरोधी कैसेजुधभोतात ॥५॥ वैशंपायनशिष्यको दीआज्ञारिषिराय।।कुरुकुलकीपूरवक- थासबैकहतसमुशाय।।६।। कब्रह्मात्रीश्चंद३बुध और हैपुरूरवा५त्यूआयुधपुनिनहुष७ ययाती पुरूजानिये।। रोधाश्च १० रुचेपु११ अनाष्टि१२मतिनार १३ तत्सु१४ ईल न१५दुकंत१६भत१७ चमन्यु१८ वरवानिये।भौसुहाँत्र१९ हे स्ती२०अनमीट२१ अक्ष२२सबरण२३ कुरु२४जन्मजय२५५ तराष्ट्रगुनगानिये। ताकै भोप्रतीपजाके तीनपुत्रदेवापी१रू शांत२ यूंबालिहकऐचंद्रवंसमानिये॥७॥ ॥दोहा।। देवापीतनकुष्टते वनसेवनतपकीन॥कथनापुरदेसांतनु हिरा लिहकदीना ॥देवव्रतसांतनुरूवन गंगातैरनधीर विचि बचीयचित्रांगदस मच्छगंधातैवीर॥९॥मत्त्वौजुद्धगांधर्वते स्वयंप्रयजभात ॥भोतवधी विचत्रनृप हतनापुरविरच्या । x १ जनमेजयकीपरंपराः पांडचयशेंदुचंद्रिका. त॥१०|| कासीराजकीकन्यका भीष्महरनकियेतीन॥येक सिरपंडीचरभोईलघुपत्रातहिदीन॥१॥नरोगतेबंधुसौं ईमस्यौनशोसंतान ॥जाचेमातापुत्रमिली वेदव्यासभगवान ॥ १२॥नष्टतंतु कुरुवंसलरिच सुनिनिजजननिपुकार ॥तीनपु उत्तपतकिये विश्वविव्यातउदार ॥ १३॥पंडुपुत्रअंबालिका अंपिकासत्तपत्तराष्ट्र ॥ धर्मअंसदासीतनय विदुरमहामति शिष्ट॥१४॥ज्येष्टभ्रातअंगहीनकौनहिभयोछ–अधिकार पंडुतप्योसबभूमिपर गुरुजनकोंसिरधार॥१५॥ सबभूपनप रपंडुकीआज्ञारहीअरवंड।तापैअग्रजअग्रज. बाहिक भी समप्रचंड॥१६॥ मृगस्वरूपरिरिचयापते पंडुजुक्तवैराग॥उभ यत्रियाजुतवनवस्यौ रागभोग़कियेत्याग।।१७॥नारायणव सदेवयह पंडुरोहनररूप॥भूमिभारकेनासहित भयेव- तारअनूप॥१८॥सरअंसनतैौरभयेजादवपांडवजानि ॥असुरअंसव्रजगजपुरी प्रकटेसकलप्रधान॥१९॥ बाल्हिक केसुतसोमदत ताकेत्रयसतजान॥भयेज्येष्ठभूरिश्रवा भू रिशलदोआन ॥२०॥गंधारीके पुत्रसत सत्तासीलाएक॥ सिंधुनृपतजयद्रथहीकू दीनीसहितविवेक॥२१॥वैसीफ़त धृतराष्ट्रत भयोयुयुत्सफेर। महारथीरुतधर्मत मिल्योजु डकीवर ॥२२॥ ॥ कवित्तः॥ ॥वसभीष्मजीवद्रोणक- लूत सयोधनकौऔरबंधुदैत्यनकेअंसतें बतायेहै। धर्म- धर्म भीमवात इंद्रनर कर्नरवी अश्विनीकुचारदौउमाद्रीपुत्र गाएहै |जातवेदधष्टद्युम्भसौभद्रेयचंद्रग्रंस ऐसेहीअनुक्रम सेऔरजितायेहै। नीसितेजदेरियदेवअंसनमें दैत्यअसएक १ हस्तिनापुरमें.

(५५) पांडचयशेंदुचंद्रिका. तारुचैनते विरोधतेअघाये है।।२३॥ ॥दोहा॥ ॥कोडका रनतेस्रवलितभो भरद्वाजमुनिरेत॥धस्यौदोनविचपुत्र भी द्रोननामतिहहेत॥२४॥प्रसतनृपतिपांचालको भरद्वाजति हग्राम ॥वसतअभयसुतद्रोनजुत सकलगुननधाम।।२५ ॥सतकनिष्ठनृपप्रसतको जेज्ञसेनगुनास॥सरवाचार करद्रोनते रहतरिषिनकेपास॥२६॥उभयवेदसिष्यौकरै उ भयधनुषाचार ।। कयौकरै द्विजद्रोनतेजज्ञसैनजुनप्यार ॥२७॥मकदाचिन्नृपहोउंतो देहुअईतुहिराजगिंगातेदाछ नदिसा मैउत्तरदिसभाज॥२८॥ कालपायजमस्यौ मस्यौ। प्रसतफिरबाप॥जज्ञसेनपांचालको भयौनृपतितबाप।। २९॥गोमतसिषकेसुक्रते कृपरुकृपीइकसाथ।। भयेप्रगटबि चमुंजके सांतनुकीयेसनाय॥३०॥क्रपकौतोकुलगुरुकि यो कपीद्रोनकुंदीन॥ तिनःसतद्रौनीभयो वेदधनुषपरवी न॥३१॥जथाअयोनीमातुपितु तथापुत्रदुतिराश।।दुग्धपि वतलरिचशिरुनकुं हठतमातुपितुपास ॥३२॥द्रव्यहीन हिज द्रौनते जग्नसेनपैजाइ॥ दुग्धपानाहितपुत्रके जाचीएकहि गाय॥३३॥ कियोसरवामनप्रगटसब सिसताकोविरतंत।। तू भिक्षकमैंछत्रधर कीनोहांसकुमंत॥३४॥तांदुलधोयरुस्वेत्तजल गुडपिचदैहुमिलाइ।सतपावहुपयसमुनिहै मैंनहीदेउंगाय॥ ३५॥ सभाँबीचअपमानलखि भोदिजळूनिद। कस्यौत्याग जलपानविन ताकोदेससरचेद॥३६॥आयनागपुरभीष्मतै क घोपूर्वविवहार॥सूप्योभीसमद्रोननं राजभारकरिप्यार ॥३७॥ सौंपत्यूहीद्रौनकू सबकुरुवंसकुमार॥सस्त्रअस्त्रविधिलैनवं . १ हस्तिनापुर.

१५६) पांडवयशेंदुचंद्रिका मादिक्षत्राचार॥३॥सैसवतैसुतपंडुरत विद्याक्सिनवि सेस।।पंचयंधुक्रीडारहित विनयधर्मउपदेस ॥३९॥विद्यारं भकुंकमतिलक अक्षतजुतद्युतिकुंज॥अर्जुनगुनअनुरागषि च सचगुनाश्रतपुंज॥४०॥ ॥उप्पै॥ ॥ककरौहि- जदोनदेब्रह्मास्त्रमोहिन्भब द्रोनकझोबिनक्षत्रिविप्रविनु मिलतुमहिकच ॥कर्नगयोकरिझौधजहादिजरामतपत्तय॥क सोधिप्रहुनाथदेहुमोहिअस्त्रब्रह्मजय॥इकदिवसत्ताहिधरिगो दसिरजामदग्निसोवतभयेउ॥ इकदैत्यभापजुतकीटतनकर्न जंधछेदनगयेउ॥४१॥ ॥दोहा॥ ॥गुरुनिद्रागतिजानि कै करननसरफ्यौरंच ॥जागिउठेशिष्यप्रतिको इहधूफ वनप्रपंच॥४२॥ करनकोयेहरुधिरमम कीटजंघपलमो- हि।।मैसमीगुरुजागिये तातेसरक्यौनाहि॥४३॥ दिज कोइइधीरजनही तूंकोउक्षत्रीआहि।।अस्त्रजुलीनेकरिक पट सफलगिनहुजिनताहि॥४४॥जज्ञधेनुरिषकीकोड सरलगिमरीन्यज्ञात ॥ दुत्तीयभापताको भयो होहितोहि अरिधान ॥४५॥ तेरेरथकेचक्रको भूमिनिगलिहेजब। रत्तसपरधाजाहिते सोइअरिमारहितत्र॥४६॥सबिद्याद्देश्रा पलै करनहिंआयेगेह। इतनेसबशिष्यद्रोनके पढिगयेनि रसंदेह॥४७॥ सस्त्रअस्त्रजुतासिरवनकी दईपररबइकयो सनिरकी विद्यारुजसलारिष भयोसयोधनरोस॥४८॥ ॥ ॥कविता॥ ॥ अग्निअस्त्रहीतैव्योमबीचकीनीज्वाल मालमेघअस्त्रहीतेंनाइज्वालडूंबुझाइकै॥वायुअस्त्रहीत मे घगिरिअत्यहीतेवायुचनअस्त्रहीत गिरिलंदळूमिटायकै॥ फवीभूमिअंतरिक्षश्चगजपीठ कवीकवीस्थूलसूकम द्रष्टतादिरवाकै।। धन्यप्रथाळूषजायौअर्जुन त्रिलोकजेतापां

(५७ )
।
.
पांडव यशेंदुचंद्रिका.
डुनंदठाठौयूंअनेकसोभापायकै॥४९॥ ॥दोहा ।।
कहतकरननरतेकर इंद्दयुद्दयहवार।सनिउमग्यौधतरा
एसत लयोहृदयनैधारि ।।५॥ नृपसत्तनृपतततैलरै यह
श्रुतिआगमरीतिलरैशूतनरतैसकप कहैयहैजुअनीत॥
५१॥कसयोधनसनहकप विधानृपतिताहोत निजबलने
पुनसैन्यतै जन्मनृपनगोत ॥५२॥ बलतकर्नप्रसाध्यहँ अंग
देसअवदेत॥ छत्रचमरयूकहिदिये कियअभिसेकसहैत ।।
॥५३॥देखिसपरधाहुनकी भीष्मविसर्जनकीन ॥ अस्त्रप
रिक्षाव्हेचुकी मतिहाँकोधअधीन ॥५४॥कयौदोनतैसिरप
नमिलि दौाग्यागुरुनाथ। कस्यौतोरअपमाननुप द्रुपदह
तहिजुतसाथ॥५५॥तथाअस्तुसुनिद्रोनतें कीनौसैन्यप्रया
न।कस्यौजुड़नृपद्रुपदक्कू पकोजुक्तप्रधान ॥५६॥सिषन
कौतूंछत्रधर यहँभिक्षकद्विजद्रोन ।यामिक्षकचिनाप
को कहिअवरक्षककोन ॥५०॥ दोहा।। नृपतिसरवा
पनतोरमम बन्यानहीविनुराज॥तबहीअर्धभूलैनकू कस्यौज
तनमै आज ॥५८॥द्रुपदगा कृपासरवापनरारियो अबहुअ
धुभूलेहु । श्रेष्ठहारिवौआपतै मोहिछोरतुमदेऊ॥५६॥ दिजा
कौआधौराज्यदे नृपायोनिजभौन।कोउऐसोममपुत्रजी
माहिजद्रोन॥६॥नासकरैकुरुवंसको ऐसोकरतविचार।
कस्यौजज्ञमिलिरिषिनते वांटयोद्रव्यपारा॥१॥इकइकहि
जकोलक्षगो ऐसेदईअनेक ॥होनहारफेजोरसे वहांनदीनी,
क॥२॥ अग्निकुंडतप्रगटभो इष्टद्युम्नअरिकाल । वैदीत
कृष्णाभई सातवर्षकीबाल ॥६३॥ कहेव्योमचानीवचन स
तकरिहैदुजधान ॥ सुतातोरकुरुवंसको करिहै भूपनिपात ।।
॥६४॥ ॥सवैया।। ॥संगसिसूनकेद्रोनीसिसूत्रनलावती
L

(५८)
पांडवयशेंदुचंद्रिका.
रकवाछरेचारत ॥ तेमनुहारिकैयाहिदूधयोपितुमातुते
रोयपुकारत॥ मोहिकोगाइमगाइदोयुंसुनिदोनपांचाल को
जाचवोधारत॥दासस्वरूपनत्यौट पहासिकभीयहरितबना
न भारत॥६५॥ ॥कवित्त॥ ॥कंबरपर्दैमैनृपअईराज्यदै
नकयौराजपायगायनट्यौहासिअातिकीनीहै।याहीकाजको
प्यौद्रोनसस्त्रअस्त्रविद्यासवैभार्गस्तैलीनीकुरुपंसनकोदीनी
॥ कौरवद्रपदहीकोबांधिराजवाढ्यौतातेप्रष्टद्युम्नद्रौपदीकी
उत्पतनचीनी है ।।दोस्वसाभ्राततेभयो पातक्षेत्रीनकाएंसेग
तिभारतकीवनकेअधीनीहै।॥६६॥ ॥दोहा॥ ॥जमुनाज़:
लक्रीडतहुतै मिलिकुरुवंसकुमार ॥दीयोसुयोधन भीमळू मो
दुककै विचमार॥६॥बांधिलिकेतंतुतै डॉस्यौयमुनानीर
लगयेअहिपातालमै निरविषकियोसरीर॥६॥अमृतपान
करायके हिगुनप्रबलकरिताहि ॥ मातादिगदिनअष्टमैं पठ्योग
जपुरचाहि।।६९।। भीमवचनसुनिगुपतही कीनोविदरप्रबोध
॥अवनहिसमयविरोधको करौकोधकौरोध॥७॥ चिदुरादिक
मन समझ कोउतैप्रगटनकीन॥यतनैपदन्पपांडको पिताध
मफोदीन्ह।। ७१।।जत्यौसुयोधनागिविन पितुत करतनिरा
सा॥राजयुधिष्टिरकौंदिया हमकोनरकनिवास।।७२॥याके
पितुकीनोग्रथम अवयेकरिहैराज॥याकेपुत्ररुपौत्रनै करिहैराज
सुकाज॥७३॥जवहमकोसबजानिहै ग्यातहीनभुवपाल॥दुष्ट
कर्मतजीवका करहिपरहिटुरखजाल॥७॥नीचहीसगपनजी
बका उभयराजविनुपायालुस पिंडोदकपित्रसब बसहिनर्क
मैंजाइ॥७५||अंगहीनतैापती लयौननृपअधिकार ।।मे
रेअवयवहीनना क्यूंनदियोभुवभार।।७६॥ धृतराष्ट्र।।
पांडुसासनामेंग्यौ भयोमोहिसुरपराजायूंआज्ञाआधीन है

५९, पांडव यशंदुचंद्रिका. पांचपांडुसतान॥७७॥तिनकोकैसेंत्यागमैं करुनकरौषि रोध।।दुहुधाफटहिप्रधानकोउ बदहिपरस्परक्रोध।।७८॥ ॥ सुयोधन॥ ॥विदुरविनाभीसमअरु द्रोनादिकपरधान ॥फोड नफटहितजिमोहि जानहपितानिदान॥७९॥चारणारव्यपु रपउहुतुम मातसहितसुत्तधर्म।मैयतनइतराजुका कर हाथ सबमम।।८०॥ ॥धत्तराष्ट्र॥ ॥रुद्रमहोछावहोतहै वारणास्यपुर पुत्रः।।जाहुजुधिष्ठिरबंधुजुत करियौरक्षातच ।। १।। विदुरगुप्तउप देसकिया आवतजबनभधान॥रचहिपुरोचनलाखगृह मंत्रसु योधनमान ॥३॥पठबहुगुप्तमजूरतित रारिवहेगुप्तसुरंग। अग्निलगनिसनिकरियौ मातभ्नातलैत्रांग॥शानदेसछिपि विचरियो पोररचसमयनाज॥कालपायफिरकरहिगो बंधुन जुतनृपराजा॥४॥ ॥कवित्त॥ ॥नीतिधर्मपुत्रकीतेउयध वीअर्जुनलैंबलीजानिभीमअंधपुत्रअकुलायकै। वारणा- रव्यपुरीलारवाग्रहकीनोजारिवैकोजचनपुरोचनप्रधानकूप गयकै॥जरीएकभीलनी भीलनीकेपांचौपुत्रपचेएतोविदुर प्रबोधपंथपायकैदीयकंधदोयगोदएकपीठमाताबंधुलैक भी मचल्यौताहिजबनजरायके॥१५॥बनमें हिडंबमारी हिंडंबाकू धारिभीमपुत्रउपजायएकचक्रामेंपधारे हैं। ब्राह्मणकेभेषाभि क्षाअन्नतेंजीवकाहोत विप्रनकेसंगदेसद्रुपदसिधारेहै ।।गां- धर्चअंगारपाजोतिश्चस्वविद्यालीनीभूपपुरीनगुसालाया सनाविचारेहै ।। व्यासन्नास्वासदेकैद्रौपदपैगोनकीनोअर्जु- नभूपनकेमानमलिद्धार है।॥८६॥ ॥दोहा॥ ॥चारदिसा केनृपतसब मिलेद्रुपदपुर श्रानि॥कियोभूपसनमानअति --- १ विदुरने पांडवोंको गुप्त उपदेश किया (६. पांडर यशेदुचंद्रिका- सुत्तास्वयंवरजानि॥७॥रंगभूमिदिनसोधसममंचनबैठेभूप ॥धृष्टद्युम्नसवतैकहत भगनीसंगअनूप।।८८॥याधनु यहच काप करैबेधततकाल ॥ हरैसोइजसनृपनको समभगनीय रमाल॥८९॥ ॥कवित्त॥ ॥सोडसवरसकी हैगतीथके दं सकीसीकटीभूषेसिंहकी हैबानीरिविबीनकी॥इंदिरासीमा भाजाकीमूनाईकिसलेकीसीलताभवानीकीसीनेनदुत्तीमी नकी ।सुरभीवसंतकीसीजोजनप्रमानचलै विद्यासरस्वतीकी सीआगमअधीनकी द्रोपदकीकन्याधन्यारंगभूपचेसकी नौऐसीनाहि अन्यावानीभईलांकनीनकी॥९०॥ ॥राजलो कपरसपरवचन॥ ॥स्वयंभूकुमारी श्रोतस्वयंभूकुंअग्रकी ये अनन्यस्वरूपलिये रंगभूमैउतरी।। तेजव्यंबहीत सबैभूप चकचौधभयेचलीमानूमोहनीकूमोहिबेकीपूतरी काकेत्री भतीजेपितापुत्रमामेभागनेयापसमैवकेवानीभईजाततूत री|मेरीकन्यामेरीकन्याभयेनिरलाजचोलेसरस्वतीऔरत्र र्थकीनोअदभूतरी।।९१॥ ॥दोहा॥ ॥भयेनिरुद्यमसकलनृप धनुषचढायनकाजा कहांवधवौचक्रमक सोचनद्रुपदसमाज ।।९२॥भीमानुजरढोभयो करसमेटिसिरकेस।महादीनाहि जबूंदमें वाढीप्रभाविसेस।।९३।। ।कवित्तः। ॥ धनुषपै गौनमहाबलीपांडुनंदनकौमत्तगजराजपेज्यूंके हरलसतुहै। दीन हिजभेषअग्निभसमावछन्नशेषदेरखवालदृहयुवाबा मणहसतुहै।सुयोधनादिवडेसूरदेसदेसनकेभूपने के तेजराधावैधत्तेनसतुहै। नानाजेपटाबरकीकमररवुलतजात देखोएफरांवरकीकंबरकसतुहै।।९४॥ ॥दोहा॥ ॥दासि द्रुपदी. २ शृश्युम्न. ३ सरस्वनीने यह अद्भुत अर्थफियाकि सबने अपनी -- कन्यासमक. dirimur- ६१) पांडवयशेंदुचंद्रिका. नकेजरबसनज्यों फटेवसनबरनार ।।त्योअंतरनर नृपनमें पिबुधउचरितिहिवार ॥९५॥बयतैकुल विभवतै विद्यातेन हिंहात ॥अतिपौरुषअतिबुद्धिबल पूर्वकर्मउद्योत ॥९॥ ॥ कवित्त॥ ॥बोलेतपरयरंद्ध विद्यारद्धाविप्रऐसे जिन कहोहिजविनमापीरासिंहै। कहीनुमविप्रनकीहांसीही करागीएक्षत्रीनकी इहांकहांनहीभईहासीहै।पानकीनी सिंधुकोअगस्तिगिरिदाविदीनोअर्बुदकोब्रह्मगर्तथाप्यौकोन काशीहै।वालहैअवस्थायाकीकशाहशरीरजाकोजानेजोलक्ष वेधयसकोप्रकाशीहै॥९७॥कौनसस्त्रअस्त्रकीबरोबरीकरैया यातैपारथकीमैयाएकजायोवीरपाथही।सुयोधनष्टकेतुज- रासंधभूरिश्रवाऔरहषिसानैनैकछुयेधनुहाथही॥गुनौचढा नपंचवानकौसंधानऐचिछोरिवोरुबैधचोलरव्यौनूहलनाथही पर्सनधनुकोभूमिदर्सननिसानेहुकोदेवपुष्पवर्षन दिवानोए कसाथही ॥९॥नमावतधनूसीसनमादियभूपनके मूर्षीचढी त्यूंचटीतेजीस्वसरीरपै।।साधल्हीइषुभयोसंगपनसंधानताहि ऐचतहींऐंच्यौकन्याचेतमहावीरपै।। छूटैमूठिछूटियौरसाकोभा रजान्यौगयौवारैमएीदेषवंधुअर्जुनकीधीरपै।। मछकागीरा नौगजबगिरानौभयेएकठे भुवालकेमनोरथकी भीरपै।। ९९ ।। जरैतरैागतापैतेलफोकटाहभरोताखड्ड़पैनीधारपायुरौ पितरह वो।तालसातऊंचोचक्रन्चमैतामैमीननताकौव्यंबनैल्प बीचअधोद्रष्टचाहियो।दुसहकौदंडकौचढानपंचबानतानिउर्ध . १ अर्जुनने धनुषके नमावत्त ही सब सजोंके मस्तक नमाइ दिये औ धनुषकी पनचके चढतेही अर्जुनके शरीरमे तेज चढता भया.

(६२) - पांडवयशेदु-चंद्रिका.. प्रहारमुष्टच्योगकोसोगहियो॥बोलेलोकविनावीरवासवीके कैसोचने ऐसोलक्षवेधकन्याकीरतिफलिहियौ । १००१ ॥ दोहा॥ ॥मानहुभुवंदधिमेरचला धरिछलेरूपकुमारित्र जुनकुंवरकरलयो गरचरमालाडारि।। १०१ ॥द्रुपददुल्हारीक रनते धारिनरवरमाल॥राजश्रियासतधर्मकी सबदुष्टनको- काल।।१२।। कहिसहदेवसुजननितें लायेकछुजुतराग ।। पृथा कयौतमपंचहु भक्तहुजुक्तविभाग॥३॥कोजुधिष्टिरव चनसुनि लायनृपतिकुमारि॥ एकत्रियाहमपंचपति इहकै सोआचार॥ ४ ॥गुरुजनाज्ञा जलौं हमनहींत्यागीमात ॥पृथाकहैजोभवस्यहै ऐसेहिकहतातं ।।१०५।। करीद्रुपद तेंभगट्सब भयोनृपतिकोसोच॥ करैयुधिष्ठिरअनपयूं इह धूकसोपोच ॥६॥कह्यौदिखायौव्यासने पूरबशापसरूप॥ द्रुपदसीषसुनिच्यासकी कीनोच्याहअनूप ॥७॥सनतसुयो धनादिन्द्रप पांडवजीवतमान।।दुरजन विषसजनअमृत पानकरतगयेथान॥८॥ कृष्णगुपददोंनौदये गजहयरथम रुदास ॥ कछुदिनपांडवद्रुपदपुर हरिजुतकियोनिवास ।। ॥१९॥ ॥उँदपधरी॥ ॥ इहरूनिवातश्तराष्ट्र प्राप पांडुसतजीयतबढतोप्रताप॥करिहर्ष घोषटुंदुभिदिवाय।। इहसनतरुयोधननिकराय। करिहरप कियोक्यूसोक- थान।।समसबढतसनिअपमान ।। नृपकह्यौविदुरकीसं ककाज।सोकहिछिपायकियहरषाज॥कियमंत्रकर नसकुनीबुलाय॥अबकरौसत्रुनासकउपाय॥ कोइपउदै १ विदुर एसो न जाने कि पांडवनको औ इनको बैर है याते मोबन बजवाई. 7 (६३ पांडवयशेंदुचंद्रिका विजअपनेअधीन॥दैविषाहमारडारैारीन ।।अथवानृप द्रोपदकूफटाय। फिरमारिगेरिहुं विनुसहाय॥अथपाकछु छलके भीमनास ॥ भीमबिनसुलभसवजुक्तत्रास ।।यूंकहैस योधनमत्तानेक॥इतसुनतनमानीकरनएक॥ एकियेजत नतुमनूपतिआदि। पिनुसिद्धभयेतेसकलवादिदाज्ञा माकहिसैन्यकोस॥ विनुसैनकोसअरिहनिरोस।जोप्रबलही हितेहतहिमोहि ।।मैप्रबलविनारिकरितोहि॥१०॥ ॥ दोहा॥ ॥निकट विनापरववालयय मिटेनसगमउपाइ ॥दूर सपक्षकिसोरतन यूंकससकहिमिटाई ॥११॥ कटौभीष्मत्र रुद्राराक्रप नृपजीयहुजियनीक॥ तुछबुधिनकेफहनते न हिंविरोधयहठीक॥१२॥इनकैअनुमततै विदुर ज्येष्ठबंधुसम साय॥ कयौअरधभूदीजिये सबदूषनामिटिजाय॥१३॥ ।। छंदपधरी॥ ॥धृतराष्ट्रभूपगुरुपचनधारी॥सोडनीति जानकुलर सारी।विदुरेकूपठयतिनलैनकाज॥दीयअधी भूमिसबराजसाज॥दियइंद्रप्रस्थबैठकविसाल ।कियराज युधिष्टिरकछुककाल ॥ इकदिवसआयनारदरिषीस॥इन पूजाकियउन दियअसीस॥सुंदोपसुंदमाष्पानसुद्ध॥सममा यकद्यौबंधव विरुह ।।सोत्रातृतिलोत्तमत्रियाव्याज।। कटपरे सुरनकोभयोकाज॥तुमहूँजुतप्रीतिनियमलीन॥इकत्रिया- पंचरहियोअधीन।तथास्तुकडोमिलपंचवात॥तुमकद्यौनि यमहमकरहिंतात॥११४॥ ॥दोहा॥ ॥द्रुपदसताढिगयेक पति हुयत्तहादुतियनजाय॥जाइतुद्दादसवर्षबन जुतब्रह्मच १ बालकथे नौ पासमेथे औकोई पक्षवालोभी न था जवती मारिही न सके औ अबतो ये किसोर हैं तापरभी राजा द्रुपदपक्षपर है .

- (६४ पांडवयशेंदुचंद्रिका. यविहाय॥१५॥ ॥छंदपधरी।। ॥ कोउदिवसगयेइकवि प्राथ॥परिपंथिलेगयेप्रबलसाथ।अर्जुनसमीपकिय हिना पुकार ।।तुममहाछत्रिहमनिराधार॥ममवित्तछुडाबहुप्रथा नंद॥ करियेसबद्रुष्टनकोनिकंद॥ ॥अर्जुन॥ ॥अंतहप्प रमेरेसस्वाहितहांभूपत्रयनजुतसमयनाहिं ।। कछुजेज फरहुलावहुंछुडाय॥भयांविषसुनतव्याकुलतभाय।अर्जु नदिजातुलरिचअभीति।लेसस्त्रसमरकरिस जीति ।। हिजकूवितदैनिज़ग्रहपठाय॥वियअरजयुधिष्ठिरनिकट- आय॥कीजियेहुकमवनवासकाजु।।वहकियोनियमरूधक रहुअाज॥१॥ ॥जुधिष्ठिर॥ ॥मैकरतहुतोनितनियमता ताकछुदोषनहींतुमनचजनात॥तेरोविजोगमुहिअसहमान अत्राहिकछुकरियेपुन्यदान॥नरकरीअरजवाधीनहोय॥ छलधर्मनसाधैमहतलोय।।आचरनवडनकोलविविरुद्द। चहु वरनहोइविपरीतबुद्ध ॥यहिकहिरूविजयवनगमनकीन कोटें कस्वर्णरिषिसंगलीन॥जमुनानटसंध्याकरतर॥उलूपीनाग कन्यासहेर।।रतिकाजनरहिज्याच्यौसनारिब्रह्मचर्यको अरजुनाविचार॥उलूपीकयौऐसोनकार॥करिहौतभूराह- त्याउदार ।।इकनिसारह्यौनरअहनीकेत भोइरावानरुततास हेत।कोउकालप्राचीदिसगमनकीन।तीर्थाटनदक्षणपंथलीन विकटपथजानिनरजुतानंद॥ विसरजन क्रियेसबविप्रटंद॥ मणिपूरनयकीनोप्रवेशगनरलरवीतहांपुत्रीनरेस॥जाचीनृपपी नृपसत्ताजाय॥नृपकहत्तनरहिकारनसनाय॥११६॥ ॥ । १ इहां परम उत्तम यह धर्म देरवाया है कि जहां स्त्री पुरुष दो नौ होय नहांजाना अति पाप है.

(६५)
पांडग्यशेंदुचंद्रिका.
दोहा॥ ॥शिवचरतेममवंसमहि एकहिसंततहोइ.। मेरेइ
हपुत्रीभई तुमहिसमरपौंसोइ॥१७॥याकेजोकोउपुत्रव्द
देहुराजममकाज॥ तथाअस्तुअर्जुनकटौ कियोच्याहजुत
साज॥१८॥ववाहूतोकभयो तीनवर्षगयेबीति ॥तजिसुत
जुतचित्रांगदा अर्जुनचल्यौनचीत॥१९॥अच्छरपंचइंद्रलो
ककी रिवीश्रापकौपाय॥पंचतीर्थी भईग्राहनी नरपिचरतत
हांपाय॥१२॥ करिउनकोउद्दारपुनि कियेबानर्तपवेस॥
रेवतगिरिउच्छावतहां मिलजदुर्वस असेस॥१२१॥ ॥ छंदा
पधरी॥ ॥कृष्णादिमिलेअतितकीन॥नितहोततहांउछच
नवीन॥यकदिवसगिरिहिपरिक्रमतिआय।लरिवनरहिसुभ
द्राातिलुभाई॥परसपरदेखिनरभगिनिप्रीत। मुसक्यायको
हरिजगतमीत ॥५कहांलरपतनरनियांधार॥चितकयौनरजु
ममलियोचोरि॥श्रीकृष्णकोममभगिनिसोय।हरणकरिजा
हुजोषीतिहोय ॥बल्भद्रसहोदरजुतविधान॥दुरयोधनकोकि
यचहतदान अपनोर्थदारुफजुतउदार ॥ दियकृष्णकियोलर
हननारि॥सुनिकोपेजदुकुलसफलशर ॥ तनकसैकवचरत्र
बजेतूर॥ इहसुनतबोलिहलधरअहेत।करिहौंनरकौरवपू
निकेत ॥१२२॥ ॥श्रीकृष्णवा०॥ ॥दोहा॥ ॥छत्रिनकी
कन्याअयन लईहरनकरलाल॥अर्जुनलेगयोआपनी याम
कहाविचार ।। २३।। विगरजुडजदुवंसके हरनभयोजसरीत
[जुधतैलेजैहैअजसहे अरजुनजगजीति ।। १२४॥
छंदपधरी। ॥अवनोदत्तकारनदासिदास ॥ हयगजरथ
लेचलियेहुलास ॥बलिभद्रकटौतुमचहतसोय॥करियेविचा
रक्यूंबिलमहोय॥सबचलेसाजचतुरंगसेन ॥दायजोसुभद्राका
जर्दैन।आभरणवसनहयगजअनेक।। कुरुजदुनपरसप

R
पांडचयोंदुचंद्रिकाः
रदियेकेफ॥प्रतिरहेकेउकदिनइंद्रप्रस्थ ॥सीरवलेचलेजदु.
यंसस्वस्थ॥श्रीकृष्णरहेअर्जुनहिसंग ॥ इकदिवसग्रीष्मरितु
धरिउमंग ॥ पांडवढिगजमुनाजलविहार ।तिनकाजभयेन
रहरितयार ।।लैसीषयुधिष्ठिरउभयवीर ॥ तरुनीनजुक्तरचि
सुतानीर|जुतरखानपाननाटकविधान। कोउकालरहेकी
डासमान।बिहुबैठेपुनिएकांतचीर॥समयनिहअग्निधरिद्धि
जसरीर।काहिचनपांडुचनदगधकाज।ममभयोअजीरण
मिटहियाज॥कहिअर्जुनहरिजुतपणतकीन।यहवनसरेंद्रर
क्षाअधीन।। ऐसेहुयहवाहनअस्त्रमीत ॥ तबतप्तकरैसुरासु
रजीत। लैदयोब्रह्मरथ अग्निपात॥गांडीवधनुषदैअक्षयभा
थ॥ कृष्णकोसदर्शनदयोतत्र ॥जाखेरवांडवनलग्योजत्रास
निइंद्रखांडुरक्षकपुकार ॥ त्रिभुवनाधीसकियजुधतियार ।।
इकौर,अहिदनुअपार ॥इकोरपृथानंदनउदार कछु
कालभयौसंग्रामकुछ ॥बटिपढ्यौपित्तापुबहुविरुधादिये-
अाजाउनकूदेवदेव ।। यतरच्यौसरापंजरअजेव॥हादसघन
अहुटहीनदर्प॥मयदैत्यवच्यौपुनिएकसर्प।।च्यारचगरिचि
पुत्रनविहीन ॥वनभोदैतनजुत्तभस्मलीन॥ नहिंभयोमेघदुता
वनबचाव ॥गोइंदूस्वर्गसातिकसुभाव ॥मयकुंचक्रमारतयेमुरा
र॥सरनागतअर्जुनलियेउबार।तिनदईसभाविपरीततत्राजि
लथलहित्रांतअधउर्ध्वजत्र॥इकगदा भीमकारनअनूप॥सं
पदेवदत्तसंदरसुरूप ।। इतनेपदार्थलैंग्रेहाय॥सवकहैजु-
धिष्ठिरःसुनाय॥ कोउदिवसरहैहरिनृपतभौन।कीयभोग
सीरवनिजपुरीगौन।पांचहुपतिनसँपांचपूत॥द्रौपदीप्रगट
कीनेअभूत।प्रतिबंधजुधिष्टिरसोप्रधान॥श्रुतिसोमभीमसेन
हिसमान॥श्रुतिकीर्तिदुतयअर्जुनस्वरूप।। नाकुलीसतानीक

3 . पांडवयशेंदुचंद्रिका (६७) सअनूप।।श्रुतिकीर्निसहदेवहिसमान॥अनुक्रमहिभयेवलप मान।।सुभद्रानंदअभिमन्यसूर ।। कुरुवंशवीजविधिअंसफर ।। इतिश्रीपांडवयशेंदुचंद्रिकाप्रादिपर्वणिचतुर्थी ॥ श्रीगोपाल कृष्णार्पणमस्तु॥ ॥ ॥ अंथाग्रेसभापर्वप्रारंभः नारदोपदेश जरासंधपति युद्दजाचन. श्रीकृष्ण अर्जुन भीमसेन हिजरूप. ॥१२५॥ मयूरचः।।४॥ द्रौपदीवस्त्रहरण- दुसा को-पां यून शिशुपा: भीम जरासंध I राजरासंध नारदजी मीम अर्जुन श्रीरुपए कौरवपांड समा (६८) पांडवयशेंदुचंद्रिका. श्रीगणेशायनमः॥ ॥दोहा॥ ॥मयदानवनृपधर्मको नीकेआयसपाय॥सभाचतुरदसमासमैं चिकैदईबताय ।।१।। तारक्षकअंतरिक्षचर राकसनष्टहजार ॥दसहजारकर मध्यते चारौतरफप्रचार॥२॥ ॥छंदपधरी॥ नानात्वज लाशयपिटपतत्र ॥ चहरवानजीवसाक्षातचित्र ॥अनेकरत्न. दीरघनिवास ॥आभासुमेधचुंबत्तप्रकास॥रत्नके कंजअनेक रंग।एकतैएकध्वजद्रुमउत्तंगाजलहीयतहांथलसोजनात॥ द्वारकिठोर भीतिहिदियात॥जबनिकागोषआदिकवितान। अज्ञातपरतविपरीतजान।। इकदिवसत्र्याइनारदमचिंतन बलोफिसभाहितजुतअनंत ॥तितकयौपंडुसंदेहताहि ॥ उतइंद्रसभाविचसुरिक्तअहि॥राजसूकरनतुहिकटीपुत्र तिहसभाविजोगनहोइतब। तथास्तुकयौनृपधरमताहि॥ चहुदिसाविजयविचहृदयचाहि॥चहुवातपायायुसनरेस ॥ दिसजीतचारनृपदेसदेस॥प्राचीसुभीमअरजुनउदीची॥प्र तीचीनकुलसहदेवईच ॥करद्रव्यपन ग्रहनकीन। सबई द्रप्रस्थपठवायदीन।जिनदयोदंडनहिकियौजुद्द।सोपायप राजयभयेसहयूंकीयोविजयचटुंबाताया।लीनेसुयुधि घिरउरलगाय|कृष्णकुंनिमंत्रणतिहीकाल।कीनोसायक लजुतकृपाल ॥३॥ ॥दोहा॥ ॥कयौजुधिष्ठिरकृष्ण सवन्नृपजीतेसूर॥जरासंधगिरिव्रजपती रौअजयवहङ्क २॥४॥दोयअयुत्तअरुआठसत नृपतितेकाराग्रह ।भोगे तनेछटेविगर मरवनसिद्धममयेह॥५॥ ॥छंदपधरी॥ ॥ कृष्णनर भीमजुतगमनकीन।लेविषरूपजुधजाचलीन राजु स्यौनृपभीमतेंद्वयुद्ध॥क्रीडादिनअष्टावींसध॥चीतेसु मगधपतिमस्यौवीरा तहांलगेनृपतिदुरचसिंधुतीर ॥सहदै 11 i. पांडवयशेदु-चंद्रिका. (६९) बमगधसत्तराजपाय॥श्रीकृष्ण भगतअपनेरुभाय।। देचपनसीरवअपापभोन इंद्रप्रस्थकियोकृष्णादिगोन।। सबभईक्रतुसंभारसिद्ध॥सबदेसपतीमायसनद्ध ॥रुयोध नादिकुरुवंससूर कोउऔरहुसिसपालादिकूर॥६॥ छप्पे॥ ॥भीमअनअधिकारसुदृदसेवानर धेरिय।।दुरो धनहिभंडारदानअधिकारकरनदिय॥नकुलसोजसहदेव अरिचलभूपत्तनाराधन कृष्णचरणदिशौचलियोन धिकारमहतगतिनृपस्त्रियासश्रूषाद्रुपदंजा॥करतजग्य विचअनुक्रमहि। जुजुधानादिभूरिश्रवाजथाजोग्यश्री धिकारलहि॥७॥ दोहा॥ ॥भयोसंपूरनजज्ञतब अवभृतकियोसनान॥जथाजोग्यसबन्नृपतिपुनि परषदबै ठेवानि॥॥प्रथमहिपूजाकौनकी कोजेकरतविचार ॥ जहमिलिसहदेवकाह यहेश्रीकृष्णउदार।।९।। करतहिपूजा कृष्णकी कोप्यौनृपसिसुपाल।सबनपरिषदकोछांडिक पूना तप्रथमगुवाल॥१०॥ कहेएकसतकदुबचन प्रेस्यौचक्रमुरा री॥छेद्यासिरनादुष्टको जयजयसुरनउचारि॥११॥ ॥छं दपधरी॥ ॥करिपूजासबकौबिदाकीन। उत्तरहेजितेस नमंधअधीन ॥ मयसभाद्वतियदिनभूपाय।।रहिभातन जुतपरिररदरचाय ॥ वहसमयसयोधनसमाथानायो संश्चातमदअंभमान।जिलजानिवसनसंकुरतकीनाथलजा नसभयछटकायदीन ॥ जलभीजभयोलज्जितअपार।हा सिपरीसभापुनिसकलनार॥ निजवसनयुधिष्ठिरताहिकाज ॥पउयेरूदेषिकोप्यौअकाज॥पुनिहारजानिप्रविसितनची त॥भालतैभईभटभैरभीत॥१२॥ ॥नकुल०॥ ॥दोहा॥ ॥जहांवनमणिहंसहै नीलमनिनकोमार।गस्त्तमानमणि

.
पांडवयशेंदुचंद्रिका.
मयलला इहमचेसकीठोर ।।१३॥ इहसनिपुनिकाष्यौअधिक
लरिचट्रपनधिनधान॥द्रुपदसताकोहासिसुनि गयोनागपुर
थान ॥१४॥ पितारुमातुलकरनते कहीमरमकीबातादेखि
जुधिष्ठिरको विभव अतहिचितअकुलात ।।१५।६ ।। कवि
त्त॥ ॥क्रव्यादा पारदार सिवा कास्मीरा ४ बाल्लिका ५
शका ६अंबष्ठ ७ कोकरा पांड्या ९ ताम्रलिप्ता १० अंगा
११जे॥सागरा १२ द्रावडा १३ मद्रा १४ कैकया १५ भिगर्ता
मत्स्या१७ मागधा १८ मालवा १९क्षदा २० बोडकल्पा२१वं
गा२२जे||स्यंघला२३ केरला २४ रचसा२५शेशवा२६हंसका
२७ गोपा२८ वस्त्रया२९ पल्हवा ३० ताक्षी ३१ दरदा ३२क
लिंगा३३ जे॥वसांतये ३४ पौंड्रका ३५समरढिंगवासी
आदिोके द्वारधर्मके निहारवालसंगजे॥१६॥ सर्वश्चंग
रोमाजाअरीमातीननेबानर,गवान एकपात्रुवानकेतन्या
येते। भक्ष १ वस्त्र२ सय ३ वाद्य अलंकार ५ अंगराग
६ थान त्रिया भोगअष्टांगपोदलायेते॥मित्राईतैयाद
वसंबंधतेद्वंपदराजन्योतद्रव्यलाऐकरदातानांकहायते॥
औरसनानारत्नकरकै निजरकरिअर्जुनकीमाज्ञातैभये
सनेकपायेते॥१७॥ ॥दोहा॥ ॥नराज्ञायूंपन
परि मैदेरपीमहिपाल|सरभीआदरसिरजथा पुषसंकट
कमाल॥१॥मेरोव्हैयहविभवसब ऐसोकरहउपाय।जो
करिहोमतिविदुरफी तौमूरिहूंविषरपाई।।१९।।
लॉकविलेकीर्तपरलोकविधर्मपूंजदेहविषै-
तेजयहदिपेद्रव्यछीजना। चारकुंबचायाद्रीभोजनकाज
पूपनफेसाई यांचौपत्रातसथैलाते भकीर्जना रहीविभी
अंनंतऔरफांधरैक्यूंचितमिताकहै पूतसेतीऐरोकोपती
॥
।।क
चिन्ता

॥
पांडवयशेंदुचंद्रिका. ( ७५
जैना। कीजेनाकुटुंबद्रोहपीजैनाहलाहलकूलीजेना-
तोलभारमोकौंदुरवदीजेना ॥ २०॥ दारजानु करनप्रवेसमो
रोफूटोसीसहसैनरनारीतासमैतैपछिताऊमैं । भीजीगये
वस्त्रमैरेजुधिष्ठिरनेभेजेऔरऐसेदुरवपेटबीचकवलौ पचाउ
मैं ।। माद्रीपुत्रदोनौरत्नचित्रकदिरवावेदारइतेव्हे प्रवेसक
रौंक्यूनअकुलावूमैं ।। कैसेधीरला—कैतीपाउमनवांछित
कुंनातीजारजाविषरचाऊमरिजावूमै।।२१।। ।।दोहा।।
॥ ॥ कहिसकुनीअबकाकरै मरेज्येष्ठममपूत ॥पांडुन
कीसबराज श्रीहरिलैडरचिबूतः ।। २२ ।। वचननरवंडहिया
पको धर्मपुत्रजुतवात।इतबुलाइचोपडरमहु इहसनाव
हुवात।।२३।। विदुरकहेटत्तराष्ट्रते वसनास वीज॥ बोव
तत्पपछितायहै कहतउठायेधीज ॥२४॥ ॥ छंदपंध
।। विदुरकोचचनरुतवचनत्रास । लोप्योसुभूप
आगमविनास ॥जुधिष्ठिरनिमंत्रणपूठयदूत ॥ इतरच्यो-
द्यूतमंदिरअभूत् ।।२५।।जुधिष्ठिरधर्मरक्षकेअभंग॥गुर
जनादेसक्यूंकरभंग॥द्रपदाजुतायोनागथानामिल
कस्यौकपटतेंडन हिमान । दिनदुतीयद्यूतक्रीडाहिकाज
॥ धृतराष्ट्रकटौराजाधिराजा युधिष्ठिर इतउतसुबलपुत्र।
मिलकर हरिअरुजीतिमिबा। मायाजुतसकुनीकपटकार ।
सबराजअंगजीतेसंभारी॥सहदेवनकुलनर भीमसूर॥करि
अनुक्रमहास्योकर्मक्रूर। फिररम्याभूपापोलगाय॥स
कुनीसुबहरिजीत्यौसभाय। कहिसकुनायकतवरहीनारी
सोउलगाइन्पगयोहारिदरिअंशुविदुरगयनिकरिद्वार।स
बकहत्तजुधिष्ठिरकौधिकार|किकरनरुयोधनहकमकीन
॥इतल्याहुद्रुपदजाकरिअाधीन॥२५॥ ॥दाँहा।।
री॥
.
%3D

(७२ पांडवयशेंदुचंद्रिका. द्रुपदसताढिगजायतब कहिप्रतीपजुतहासी॥हास्यौतुहि पतिचलिसभा होहुसुयोधनदासी ॥२६॥ ॥द्रौपदी ॥ ॥ यहप्राकृतनरनाकर मोहिहास्यौनृपवाजाऔरराजसच साजपर परीकहागजगाज॥२७॥ ॥प्रतीप॥ ॥राज हारिवहबंधुपुनि आपोहारिभूचाल॥ तुहिहास्यौवतकाक रत सीप्रसभाउठिचाल।।२८॥ ॥द्रौपदी॥ ॥सभा सदनु पूछितूं मेरौन्यायअनूप॥प्रथममोहिहास्यौकिउन आपौहास्यौभूप॥२९॥ ॥छंदपधरी॥ ॥कहसबपतीप द्रुपदाकहाच ॥भयोसनतसयोधनकुपितभाव॥अनुजकों दईआज्ञाअधीर॥ तूल्याहुनींचयहडरतवीर।।दुसासनकाहि चालिसी दासी॥पूंछहुसंदेहनिजपतिनपासि ॥ द्रौपदी । इकवस्बरजस्वलामलिनाज॥मोहिसंभाप्रवेशनकवनका ज॥दुष्टसनिकेसपरहाथडारि॥गईभाजिगंधारीसरननारि। लैचल्योग्औरतपकरिबाहि॥गंधारिकहौसोजसन्यौनाहि । गजतज्यूंकदलीविकलअंग। उनसभावीचल्यायोउमंगाद्री पदीप्रसंगपूंछौसदीन । नाहिकरैउतरसबभीतलीन। दोहा॥ ॥ कुहि विकरनटत्तराष्ट्रसत कोउतोबोलहुन्याव।। नहिबोलततोमैकहत जैसीमोहिलरवाइ ॥३०॥ नृपकेहारे श्रनुजसब जायन्याययहरीत द्रुपदाहारी एकतैजाइसुपर मअनीत॥३१॥ फिरन्नृपहास्यौॉपर्नू पीछेमुपदुकुमारी॥ फितहपतिसामर्थ्यता देवहुनै कचिचार॥३॥ कोपजुक्तति हांकरनकहि फरतलरकचात॥तोषिनएतेरसर बोलत कोउनलरवात ॥ ३३॥ धरीत्राग्रजकीसबै तूअवदेत विगा- रिसर्वसहास्योधर्मसत तामइद्रुपदकुमार॥३१॥ छंदपधरी॥ ॥वताईफयोधनजधवाम।।इतबैठेद्रुपद्जा (७३) पांडवयशेंदुचंद्रिका. सहितकाम॥ द्रौपदीकयोयहजंघवीच॥बैठिहैभीमकीगदा नीचे ।।अतिकहतकटुववकरनौर। पतिकरहुनहारैतुहिब होर॥कियेसैनवसननृपहरनकाज॥सबबंधुपंचताजेदियेसाज सिरजघावेष्टनचिनासूर। तजिचर्मोटव्हेहैरहैदर॥द्रौपदी चीरऐच्योसदुष्ट। करिथन्यौदुसासनअधिकफष्टालिसकैदुपद जाकौनलाज॥बैटेहरिनिहातनिवनिवजाज॥३५॥ ॥ कवित्त गहोपुरुषप्रहलादहूपुरुषहतौजहांभयेातुरसोकहा नीकहातहै ।। याहीकीसुबेरदुर्योधनदुसासनकूरवंडरवंड किये होनेऐसीरिसातहै।।पांचदिपालजैसेभरतानिबल भयेस्व रूपदासजाकेहोजोविनापक्षपातहै॥द्रौपदीकी श्रापतेपुकार- क्यूंनलगीनाथसधिोयेमेरोतोकरेजोफट्योजातहै।॥३६॥ उरही मैंबठेइसउतरउचारकीनाएसीहीवासमैबीचमोकौरिस आइहै। सबहीरसांकोभारदरकर तव्यहौतातैछिमायाचक कीपुरीलैपचाईहै।"द्रौपदीकेकोपहीकीदारुमईआगिताकोच तुर्दशसंमतकीदाटदैदबाईहै।ताहीछिनमारतीतोचंडालचा करीहीकौवाहीबीचसेतीकेतीलोहनीक्षपाईहै।।३७ ।।खुलेकेस रजस्वलासभावीच्दुसासनलायोसौपुकाररहीसोरेसभाचारी को।।श्रादिमोकौंहास्यौकिधौआदिआपोहास्यौनृपकर्नवि- गारीबातविकरनसुधारीकौं॥भीमकहेऐच्योचीरतेईभुजऐचे जे दिखायहेजंघासोंदेरबहुतोरडारीको॥द्रौपदुलारीखुली लटेकरिदेहूसारीएकनृपनारीनाअनेकनृपनारीको॥३८॥ ॥दोहा।। ।। गंधारीसत्तररूबनबिच जोएकहुबचिजाय।।मोर गदातैमोहितौ होहिनरकगतिन्याय॥३९।।सनीप्रतिज्ञाभीम की कुरुकुलब्याकुलरूप ।। गांधारीवहसमयलरची समुझाव तपतिभूप॥४०॥ ॥सवैया।। ॥मातसयोधनकीभरताएं पांडवयशेंदुचंद्रिका. द्रौपदीकष्टलरव्यौसमुझावै॥क्यूपरजायेलराइकै छोकरपा पिणचोथेमेपडितपावै ।। कौतिकहारिव्दैतीजेतीहातज्यूहाय क्यूंजीवंतलोकहंसाचै॥याजगवातनीसाचकरीतुमरोहजरै निजमंगलगावै॥४१॥ ॥कवित्त॥ ॥गंधारीकहैरीतभ रतारक्यूंनसोचैमनसुयोधनकरीभीमसेनस्यंधरूपहै।म रेहतैस्यहकौस्वभाववैरभावनाहीजातयविरब्यातंचातउप- माँअनूप है।। मृत्युगजमासकीबयारतेंव्हेबायद्धीमृत्युसिं हतेलताबायको विलूप है।भूपनकोभूपहैलूंव्हे हैंदीनहूं दीनपूतकौनिवारे नाहिपस्यौमोहकूप है॥४२॥ ॥दोहा॥ ॥ ॥ कुहिधुत्तराष्ट्ररुद्रपदजा तुमममप्राणसमान॥पुत्रच धुनमैं श्रेष्ट्र है लेमीपवरदान॥४३॥ ॥द्रौप०॥ ॥ मे रोपांचोपतिनजुत दासभाछुटिजाई ॥ मेरेपतिस्थशस्यजुत ममग्रहदेहु पठाई । बहुरिलेहुँवरएकवर लाइकतूंनलरगई ॥कयौद्रपदजाएकवर मेरेसतवरपाय॥४४॥ छत्रीएकडेवे श्या विप्रनकाजअनेक॥लैनेदेनेवरससर तातैलेहूऐक ॥४५॥ तथाऽस्तुकहिकियेविदा भूपपांचहुवात कही दुसासनसकुनिदाउ रुनिरुयोधनबात॥४६॥ कारेअहि पितुतेकहीं छिचापदियेछोरि ॥ भीमार्जुनदोऊभ्रातमम वंसकिररचहिबहोरी॥४७॥ पिताकहीअबकाकरौ सतक हियेकउपाय ।। कोलसहादसवर्षकरि यकफिररच्यालरिव लाइ ॥ ४८ ॥जोहारैसाइराजतजि हादशाब्दवनजाई । गु परहेइकबरषपुनि कोउतैकदालरवाई॥४९॥ पुनिभुगते हादसवर्ष वनीवास दुवयुक्तभूपबुलायोधर्मसत समी पुत्रकीउक्ति॥५०॥ धर्मराजफिरिधर्मजुत उतरदियोनजाय चोहोरिपिताश्रादेसते रचेस्यौराजलगाय।।५१॥जीत्यौ पांडवयशेंदुचंद्रिका. (७५२ संकुनीकपटजुत कियौधर्मवनगौन।। पंचभ्रातजुतद्रौपदी रहीमातगुरभौन।।५२ ।। पांडुपुत्रबनकौगये कछुदीनवीते आय॥विदुरप्रबोधतातात्रय विधिविधिचिपतबढाय॥ ॥५३॥भाचीलरिवसुनियैप्रया ब्रथासोकअबमात।। करहि राजसबभूमिको तबसुतसत्रुश्यजात॥५४॥ ।।कुंतीक ॥ ॥कवित्त॥ ॥स्तुतिबंदीजनकीर्तगानगाइकनकेनेजाग तसोजिन्हैशिवाजंबुकजगायहै। मिष १ कडूतिक्त ३ लौन रघाटे ५ ओषाई ६ लारबूजीमते ७ जिमाइकोचेपाङफलरवा इहै।पहरतजिन्हकेंदासनोनापटांबरजेकाषांबरचर्मावर अंग लपटाइहै।क्षुधावानवालसहदेवकूरववाइहै किनिंद्रासमैसे उताबिछाईकोसुबाइहै॥५५॥ जिहुंके मुरचारचिंदछत्रछाहर हतैसोभातपअपारहीतकुमलानैहोय है। पांच पांचसंडके अचासहिंगलाडूबीचसोदततेतेकंकरनबीचकैसेसोयहै ।।कुं तीकहैधन्यपांडुमाद्रीपरलोकवासी मोहिदुरपभोगनीकृविप दावियोगहै ।। ताहीमैवडोईसोचमेरेजोलडैतौवालसहदेव क्षुधासमैकाकोमुरक्जोडहै।। ५६॥ ॥दोहा॥ ॥कैसस हह वन विपति दुपदसतासकुमार॥ ममदुरवजानतमोरमा न किनटिककरौपुकार॥५७॥ ॥ इतिपांडवयशेंदुचं- द्रिकासभापर्वणिपंचममयूरवःसमाप्तः॥५॥ श्रीकृष्णार्पणमस्त.

(७६) पांडवयोंदुचंद्रिका. युधिष्टिर- श्रीकृष्ण. दो. राजरनलम. सूर्य पात्र- दान 16 - अर्जुनना अपशस्त्र अर्जुन स्वर्गगमन यक्षमम पाठवा. द्रौपदी ह जयद्र *4 (७७) पांडवयशेंदुचंद्रिका श्रीगणेशायनमः |जनमेजय॥दोहा॥ कैसेवनकौंगमनकिये धर्मराजजुतश्चात।। कैसेनिकरेविपतदिन गुपतरहेकसतात 1१॥ ॥संपायनः॥ ॥पद्धरि॥ ॥कुरुराजाविपन दि सगमनकीन।उटचलैगेलपुरजनअधीन।सबकोकरिपरमज समाधान।। बोहोरायदियैकहि विविधचानी॥ रिछरहगलछाडै मसंग॥नृपभयोसचिंतादुरखीतअग॥क्यूंव सबनळूभरनकाज ॥रहिबोवनधनाविननष्टराज॥परोहितधौम्यदियसूर्यमंत्र॥त्र यदिवसभूपसाध्यौरुतंत्र । उरस्थलमानविचनीराप। इकपा अरबौठायौअपाप।दियेदिनमणिस्थालीअक्षयदेव ॥सवहिन कीयालेबनहिसेव॥२॥ ॥दोहा॥ ॥जोलौद्रुपदकुमारिनहि भोजनकरैरूआय॥तौलोइकयहपात्र लाखनदेहजमाई॥३ ॥अरवैपानवरदानलै चल्यौईतवनभूप॥ दिनदिननूतनहीत है वासविहारअनूप॥४॥विनुअनुचरअनुचरसद्रस चहुधातरु हरिधाम।सामाश्रितरवगराचमिस पटतनृपतउतराम॥५॥ छदपधरी॥ ॥ नृपाश्रमरिषनके रहतरन्द।। अतिहोतकथागा इकअनंद॥चहुचानसविचरत दिसाचर ॥ द्विजषोषकाजा रचेटकार।लरिचदुष्टजंतुकोदंडदेत॥भक्षिजोगिमारिरथडारि लेत॥कियेभीमउफराकसबीनास॥सूरहतविपनवासीउदा सं॥पचिआमिषतंडुलअरचैपात्र॥रिरिचपतिजिमायपंचालि रात्र।पुनिकरिश्रापभोजनसुप्रीत॥रहिविपनकछुकदिनयहरी तासुनिकुरुधूतक्रीडासुभाय॥ वह पिपनबीचश्रीकृष्णाय । विश्वासदेविपताबढाय॥पुनिचलेधर्मादेसपाय।।दुर वासाप्रेस्यौश्रापदेन॥ लरिखसमयसुयोधनधर्मलैन॥अट्यासी सहस्त्रारषिजुक्ताई। भोजनविनजास्यौदैसभाई॥द्रौप दीकीयै भोजनसुदेस ।। वहपात्र धस्यौसाहित्यअसेस । कि पांडवयशेंदुचंद्रिका. योसमरनद्रौपदीकृष्णकेर॥ हरिआयेसंकटसमयहेरि॥ फसाकपत्रतिहपात्रलीन।। करिभक्षकृष्णउडकारकीन॥तिहु लोकत्रप्तभयेसमवेत्ताहि॥चकिरहेपरसपर विप्रचाहि॥६॥ ॥ ॥दोहा॥ ॥ नकुलबुलाबहुविप्रसब कहिहरिभौजन काजनिटेविप्रयासीसद प्रकटकियोसबव्याज॥७॥ धर मपुत्रत्तेरोधरम सदाअरखंडस्वरूप॥ रदंडनकियेचाहत्तजु रवल ताकौघटिहैभूप॥८॥कहिरिषिपीछोगमनकिय हरिभ येअंतर्धान ॥रद्योभूपनिजरिषिनजुत सुरवमयबंधुसमान ॥९॥ ॥छंदपधरी॥ ॥षट्वर्षभये वनवितीत विजया तैयुधिष्ठिरकहिरुप्रीत॥करहुतपपुत्रअबअस्त्रकाज।बि नयुद्धदुष्टनहिदैहिराज।कहितथाअस्तुनरगमनकीन॥इ कपाइवर्षरहितपअधीन॥इंद्रादिदेववरदनआइ। सवतेनु अस्त्रलीनसभाइ॥इंद्रादिअस्त्रदैगयेथान॥नररह्यौगंध मादनसज्ञान॥इकदिवसरुद्रधरिसंबररूप॥त्रियरंदजुक्त आयअनूप॥ शिवकियोएकघाइलवराह ।।चलायोबाणनर निकटचाहि। तिहकपटभिल्लबरज्योसतंत्र॥ इहिप्रथमयास समक्रोडअत्र॥ कयौनाहगन्यौनरसहितध॥ बटिपस्यौप रसपरजुधविरुध॥स्वयभयेउभयेप्रक्षयानपंग।असिधारि चल्यौसियपैउमंग।। तिलतलंहिछेदिहरवडगताहि॥चकुरघोषि रीटीबदनचाहि॥जुरपस्योभुजनतैइंदन्नुछ।कछुच्यप्यौहरउर धरअक्रुद्ध ॥ मूर्छितसुगियोतबभूमिमाहि नरकस्यौसुउद्यम फुस्यौनाहि ।। चितभयागईमूच्छसिचेत॥हरमूरतिरेतमयक- रिसहेत॥चढाचैपुष्पनरतोरितोरि॥ वहाभिल्लसीसदरसेवहीं रि पहिचानिरुद्रतवपस्यौपाय॥लीनोकपर्दिनिहिउरलगा य।पाशपतिअस्वदीनोसप्रीत॥भयेअक्षयतूनपुनिसत्रु (७९) पांडवयशेंदुचंद्रिका जीत॥पठवायइंद्रनरलेनकाज॥ मातुलीजुक्तरथहरितबाज॥ परिक्रमनजुक्तकरिरथप्रवेस॥सुरलोकजाइभेट्यौसुरेस। अर्धासनलेबैठचौसुइंद्र।मनविसमयभोलोमसमुनींद्र॥ ॥ ॥ इंद्रउवाच॥ ॥नर हजानिनरभ्रमहुनाहि।।ममधेस विष्णुअवतारमाहि ॥ मृतलोकधर्मरुतयेमहंत॥ विजय- केकुसलकहियोवृत्तंत ॥बंधुनजुतचिंतातुरविसेस॥अर्जुन चियोगव्है हैअदेस।कहिइंद्रइतीरिवविदाकीन ।उत्तरद्यौ किरीटीपितुअधीन ॥ निजमुरवसरेसचित्रकेतुनाम॥गंधर्व हिप्रेस्यौसुगुनग्राम ।।अर्जुनहिसिरवावहुजुतअनंद।।विधिगा ननृत्यजुतवाद्यांद॥कहित्तथास्तुरहि विजयपास॥हितबढ्यो सरवापनजुहुलास।सीरवतजुतअस्त्रविद्यासंगीत्॥प्रतिदि। वसबढतरूतपिताप्रीत ॥ इकदिवसदुईअज्ञासदेस।विच सिंधुवसतसुररिपुविसेस ॥विधिवरतैरते अजिताहि।। चूमनुजरूपकरिनासत्ताहि ।। मातुलीजुतव्हेममरथारूढ॥नि रसत्रुकरहुसुरलोकगूढ ॥१०॥ ॥दोहा॥ ॥ लैब्याज्ञास रराजकी चल्यौविजयसरनाय॥ कवचनिबातरुकालरचंज इकदिनदीये मिटाय॥११॥ कियेनिष्कंटकअमरपुर करतहि रनपुरंनास ॥नरभुजपूजेइंद्रात्रिय पुरत्रिहुरूजसप्रकास ॥१२॥रतनजडितनिजसीसको दियो किरीटसरेस ॥नामकि रीटीताहिने भयोविरव्यातबिसेस||१३|| नरहिअस्त्रवरदा नजब देनेगयोसरभूप ॥गंधमादनकररमनको नाटिकभ योअनूप॥१४॥देखीथीजबइंद्रनै अर्जुनकीउत्तमेरव ॥द्राष्टि उरबसीरूपमें जानीप्रीतिविसेष ॥ १५॥ कियाज्ञाचित्रके- तुकू अर्जुनके पियकाज॥अतिश्रृंगारजुतउरवसी वापर बहुअाज ॥१६॥ कह्योइंद्रनैसैहिकियो सबउरबसी, । पांडवयशेंदुचंद्रिका. गार।। चलीदेवमाहितभई नरकहासरपुरनारि ।।१७।।सु सताहागमउरबसी नरसनमुरनियराय॥ कयौहुकम कीजेंकछु ममकुंताधिकमाय॥१८॥ ॥उरबसी०॥ ॥ देरच्यौतूं मेरीतरफ लोभद्रष्टगिरप्रष्ट ।। इंद्रप्रेन्याइइहा देव भावकनिष्ट ।।१९॥ नरकीहमसेवेकहा दिव्यरूपसरदेह।। किहीकारनमाताकही नटैतोश्रापहीलह॥२०॥ ॥अर्जुन उ०॥ रहीपुरवाग्रेहतू कियोप्रगटममस ।फिरपारेचार याइंद्रकी करतसमतिहिअंस॥२१॥ तानै मैतुहिलखत हो औरभावनहिकोय॥ इतनेहश्रापदे सिरधरिलेहूं सोय।।२२।। ।।उरबसीवाक्य॥ ॥ तेजस्वीकोदोषकछ लगतनसुरपुरबीच ॥मानभंगकीनोजुतुम होहुनपुंसकनी च ।।२३।। ।। कवित्त॥ ॥ पठाईसुरेंद्रउरबसीकोनरेंद्रपा सकीनोसत्कारदीनौज्वाबबडीरीतुसौं ।। इंद्रवितात मैंयावं सकीकरैयामेरे कृतातेअधिकबातेंदौनौकीप्रतीतसौ॥जा केकाजभूपतिपुरुरवाभयोनिलाजवरूपत्याजकौनज्ञानदोस्यै गैलप्रीतसौ। ताहितेहस्यौनमनअर्जुनकस्यौनसंगवतट स्यौनत्यूटस्यौनश्रापभीतसौं॥२४॥ ॥दोहा॥ चित्रके तुकहैइंद्रनै निसवीतीज्यौंबात। उरलगायनरकौकह्यौ भ लीभईयहवात॥२५।। वर्षएकजौलोगुपत भोगहुश्राफ्स- धीरतिबदुरावयहस्वांगविन वनतो मुसकलवीर ॥२६॥ अग्निधौत्रभूरपनवसन दिये कुटुंबकेकाज॥ पहुंचायोरथ जुक्तनर जहाँधर्मकुरुराज ॥२७॥ पांचदिवसनरसरनके रघाइंद्राधीन।पांचवरषजोलौधरम सर्वतीर्थाटनकीन ॥२८॥देरिचअनुजअस्त्रनजुकत बहुहररच्याकुरुवीर ।।भूप |फिरीटीतैकयौ अस्त्रदियाबहुधीर।।२९॥अस्त्रयादकीने (८१) पांडवयशेंदुचंद्रिका. विजय होनलगेउतपात॥ धराधूजिउलकापरत नभसुनपान दिखात ॥३०॥नभवानीभईसुरनकी इहमतकरहुउपाव ।।वनि है जुधतबदेवहै तूंसवअस्त्रप्रभाव ।।३१।। कोदिनवीतेकुबु- धिकार नृपतसुयोधननीच ॥मंत्रकियोचहुदुष्पमिल चलोविप नकेबीच ॥३२॥ करिमिसजावाघोसको लैपितुतैआदेस॥च त्यौत्रियनजुतकुटिलमति सेन्यालीयविसेस ॥३३॥ पांचवा तळूमारिकै करैनिकंटकराज॥नातोदेरिवदिवाइहै। इहे कप मनसाज॥३४॥पेस्यौइंद्रसिषाडूकै चित्रकेनगंधर्च । करहु क्षेमसतधर्मके हरहरूयोधनगर्भ ॥३५॥ ॥कचित्त॥ घोषजात्राच्याजतेंचंडॉलचोकरीकोदलआयोहै युधिष्ठिरकृति भवदिरवावेको ॥दावलगोपांचौमारिनिस्कंटकराजकरैनातो चलोजरैपरलोनसौलगावैको॥इंद्रकोपटायोचित्रकेतूना भडू भेटकर्नजैसेसूरमतोकीनोभागजाचेको। भुजापिटिवाधिदैसुयो धनकोलेकैचल्योश्चाताज़ानिकिरीटीकोइंद्रतमिलावेको॥३६॥ ॥ ॥दोहा॥ ॥भगेदूतकुरुसैन्यके कहीजुधिष्ठिरपास॥ बांधिलियोत्रियजुतसुरन रुतश्तराष्ट्रनिरास॥३७॥ ॥ कबित्त॥ ॥युधिष्टिरकहैचारोधातनतेदारोबेगसुयोधनबंध्यौ देविदेवत्रियहसैहींगी॥चित्रकेतूछोरेताहि विधितै छरायलावा तुझैदेरिवदेवनकीवाहनीत्रसेहेगी॥त्यूहीकोद्रौपदीदुरानी श्रोजिठानीकाजजन्हतैछुरायलायेकुंतालिसेहीगी॥ौगु नपैंगुनकुंरुयोधनमानैतोहुरूरपांडुनंदनकीकीर्तीनानसेही गी॥३८॥ ॥दोहा॥ ॥तथाँजुधिष्ठिरकीछिमा तथाविनोलारे त॥ताळूसवदुरवदेतहै सोसबळूसरवदेत॥३९॥ ॥भीमः ॥ ॥कवित्त॥ ॥चहेभुजबुधमणीजटितअमोलजहांतही रसरीकेबंधदेरेवेहोरनहारको ॥चढनसुगंधतैलतहालंपटानी ॥ HA .८२) पांडवयशेंदुचंद्रिका. धृरिराजकोअधारदेरचौभयोनिराधारको ॥ फहै भीमसहैल्यू रुयोधनअसहदुःरनगहैकैसेकंजफूलभूधरकेभारको ।।दुह दगांधर्वनाकैमहानीतवानराजाकीनोवसिऐसीजोग्यनाहींक रतारकौ॥४०॥ ॥दोहा॥ ॥बंछछोरिछुटकायदिय प्रायो करनसमीप॥कर्नकहैगांधर्चत जीत्यौप्रबलमहीप॥४१॥ ॥ सयोधन ॥ ॥जोमोमैबीतीचिपत तुमनहिजानतनात। औरकहैत्यौपाणल्यूं जाणतसनयहवात ॥४२॥ जिनकुंदेखि दिरवाड्चै आयोविपनविहार ॥ तिनहिछुरायोजीचदै क्यूस- हिहुउपगार॥४३॥दुसासनकूराज्यदै गजपुरकरहुनिवास ॥ तजिहींप्रानयूंफहिलियौ अनसनरतसन्यास॥४४॥दैतन मेल्योकर्नविच नरकासुरकोजोर ॥ देवरीतसमुतिन प्रेस्योग जपुरऔर॥४५॥ भीमादिकचहुंचातनै जीति दिसाजुचार ॥ कर्नअकेलैजीतिसोइ कियोग्यप्रस्तार॥४६॥काविचि त्रसुतअंधकै सुभहोयकरनसहाई॥फरतअन्यपयलूनते अर्कफटतरहिजाई॥४७॥पठयदूतजुनपनपैं करतरूयो धनजग्य ।।अावहुछत्री विप्रसब कहाअग्यकहातग्य। ४८॥पठयदुसासुन भीमतें दूसकहैसमाइ । जग्यकरतफु रजित तुमकौपठयबुलाइ ॥४९॥ भीम०॥ कुंडहोइकुरुरचेतजच व्हैहैं पतवभ्रात सरवाव्है है ममगदा तवयाचेंगेत्तात ॥५०॥ कियोसयोधनजग्यबहु दिये विविध विधदान॥नीतिजुधिष्ठिरतेअधिक हादसाब्दभड्जानि॥५१ ॥बडेलोकधर्मज्ञतै विरुधभयेसबरीति ।। होनजुधिष्ठिरते धिक धरीरुयोधननीत ॥५२।। छंदपधरी।। गर्यबंधुपंचकहुंबिपनचीच ॥ नृपसिंधुआयतिहसमयनीच।। द्रौपदीहरनकीनोजुदुए।पांचहुवीरसुनिलगेप्रष्ट ।। नरहत्ता ॥

पांडवयशेंदुचंद्रिका. (८३) स्वरथदूरजात॥ भनिचलौपयादोषिमदगात लिंयपकरिभी मदियपरबंध॥मास्यौनदुसीलाकेसमंध॥करिअर्धमुंडनछुट काइदीन। हरहेतभयोतपउग्रलीन। भवकयौमागवरदान भूपा जयद्रथजुकहतकारनअनूप॥५३॥ ॥दोहा॥ ॥ पांचहिपांडवएकॅमैं जीतूंयहवरदेहु॥ ॥शिव०॥ ॥अर्जुन देवनःअजयजारिजीतिजसलेहु ।। ५४ ।।अर्जुनविनइकदिवस तूं जीतहिगोचहुलात॥तथा प्रस्तुसहिग्रहगयो करिऐसौउ- त्पात॥५५॥ ॥छंदपधरी॥ ॥एकदिवसजुधिष्ठिरबनवि हार।कोई करीविषयातुरपुकार। मृगगरनीहरनजुकल्यासो हि॥नाकोफिरल्यावनजुक्तताइ॥गयटकिपूजावत शृगबीच ॥निजातसहितमृगहतहुनीच।। पांचहुबंधुकीनोभयान।। मृगषोजनपायोपचमतमान।भयेअमितत्रषातुरपंचभ्रात। जलकाजभयेयकएकजात।पीछेनफिरेनृपगयोआप।।चई मृतदेखिउपजोसंतापायफलरव्योजक्षठाडौअनूप।तिनको पानजलनकरिभूप॥ममजसनउत्तरबिनकरिहिपान।।सुनिव्हहै। चहुँबंधुनसमान।।नृपकयौकरहुकछुप्रष्ाआप। प्रतिउत्तरकरि हुगुरुप्रताप॥ ॥दोहा॥ जिक्ष। । कोनमोदनुतज मैं कोआचर्जलरवाइ ।।कोनपंथयातीसुकाकहिपनिबंधुनि वाय॥५६॥ ॥युधिष्ठिर॥ ॥ पंचमादिनअथवाछटे सा कपचतनिजह ॥विनप्रवास विकरजजग मोदजुक्तनरंदेह ॥५॥दिनदिनपानीमात्र जमकेश्रालयजात ॥थिरता चाहतपाछले फिरकामचरजतात॥५८॥वेबिधाशटधा स्मृती मुनिशतभयेभनेक॥ धर्मतत्वप्रतिगुप्तहै पथसतपुरुष विवेक॥५९॥ मोहकटाहरुअग्निरवि भिसदिनइंधनजानि।का. लपचावतभूतसब यहवारतामानि॥६॥ ॥छंदपधरी।

(६४ ॥. पांडवयशेंदुचंद्रिका. तैदयेउतरसबजुक्ततात ॥ तूंकहैइकसोइजियैश्वात॥युधिष्ठि रफरौनकुल हि जिवाय॥ज्यामाद्रिवंसनहिनिष्टजाय॥कहिन सभीमअर्जुनविसारी॥ नकुलकुजिवावतकुमतिधारी।जिन कोप्रभावतिहपुरप्रसिद्ध॥जुरिकॉरहिपराजयसत्रुजुध। इनदो उनषिषेकोजाचिएक।कुरिहजुराजहतिसत्रुकेक॥६१॥ दोहा॥ ॥पृथाबंसमैहूप्रकट चहियेमाद्रीवंस॥ धर्मविरोध कवातकहतनमहतप्रसंग ॥६२॥जक्षकद्यौमैतवपिता धर्मराजमोहिजानि॥होयहिरनअरनीहरी पररयकाजतीहिमा नि।।६।।पुत्रलेहुचरदानअब तूंप्रतिधर्मसधीर ।।अरनीलैच हुमानजुन गमनकरहबरवीर॥६४॥ दीजैपितुवरदानमोहि ॥ कठिनबरषयहअाहि॥प्रगटनव्हेत्रियबंधुजुत तथाअस्तक हिताहि॥६५॥ ॥इतिश्रीपांडव्यशेंदुचंद्रिकावनपर्वणी षष्ठममयूरवः ।।६॥ ॥श्रीकृष्णार्पणमस्त। ॥अथविराटपर्वप्रारंभः॥ ॥ विराट राजा वृ. चोपदार कंकट SHRAM पांडवयशेंदुचंद्रिका. (८५) वि.रा. चौपट कंका पासाकाम. उत्तराच यंवर 00 अभि द्रौपदीरुधिर HOP मान भीमसेनः Kav कीचकधिवभार. । कुबाघव भीन -- Re- मल्लजीमूत May - पांडवयशेंदुचंद्रिका. [अथविराटइंद्रसेनकृपापात्रते॥ ॥युधिष्ठिर॥ ॥दोहा॥ जित्नपूलैतितकहहूतुम गयेथेविपनविहार। पांचहुद्रुपदकमारि तुज बहुस्नपाईसार॥१॥ ॥छंदपधरी॥ ॥करविदाइंद्रसे नादिनाथ।।चश्चातद्रौपदीजुक्तपाथ ॥धौम्यकौंसीपिनिजन ग्निहोत्र।।गम कियेभूपछिपवायगोत्र।मच्छदेशप्राइवैराटती रद्रुपदाहिनिभावतचलेवीर। विन्चसमीसबनकेसस्त्रबांधि। तदेहजुक्तधरिरज्जुसांधि॥भीमबनीसूदभटकंकभूप॥ श्रापतेथि जयबहनटायूप।।साल्होभिनफुलसहदेवगोप।।सैरंध्रीद्रौपदीर हितकोप॥अनुक्रमहिकियो-पप्रवेस॥वित्तादरजुत्तरारगि संस॥सोपीअर्जुनकोनृत्यसाल॥बहुदासिनजुतनिजसुताचाल॥ उत्तराहिसियावत्तनितसंगीत॥वादिरगानजुतनाटयरीत॥कछु दिवसगयेएकविमरोह !। उपवीतमहोत्सवभाअछेहातहंपाच्य कारमल्लादिकेक।।अनिदेसनःआयेअनेक॥सवजीतेयकजी- मूतमलायतभीमजुस्यौतिनतेंअन्चल्ल।सोइभीमपटकिमास्यौ सकुधाजगईंभोविरमयदेरिवजुध॥२॥ ॥दोहा॥ ॥साल भन्नुपमच्छकी कीचकमुख्यप्रधान॥सैरंध्रीकोरूपलरिख भो कामांधअयान॥रतिजाचीकेउचारतिहि कह्यौद्रौपदीताहि मैगरीबविपदासहित करतदुष्टताकाहि॥४॥फिरिमेरेभ रतार है पांच प्रवलगंधर्व ॥ गुप्तरहेतेजानि हतहिवंस तवसर्च॥५॥ ॥कीचक०॥ ॥दसहजारगजबलसहित तेकहाकरि?मोर ।। पूर्वत्रियामेरीसकल करिहौदासीतौर ॥६॥कियोअनादरौपदी गयोसुदेष्णागेह। भगिनीप्रत तिनीचमति कारनप्रगट्योयेह।।४ा कोईकारनसैरंभिकुं पठ बहुमेरेपास॥वाकेविनमापतभये॥ममतनव्हेहेनीस॥८॥ फहसुदेष्णा नाततें करहुगीठतुमपात ।।मदिालेवेमेलिहूं से ।

(८७) पांडचयशेंदुचंद्रिका. रंध्रीकोत्तात॥९॥तथाअस्तुकहिगीठकी कियोशीघ्रसामा न॥पातभयेसैरंध्रिप्रत राज्ञीकहतबरवान।।१०॥ममाहितम दिरालेनईं जाहलातममगेह॥ द्रौपदीवाक्य॥ ॥ बहु दासीपठवडुअचर मोहिउपजतसंदेह॥११॥ तोरवातप्रति दुष्टुमति कॅरहिमोरअपमान ।। करतसमझिकुलकोकदन य हधोकवनसयान॥१२॥ ॥छंदपधरी॥ ॥नहिंकरहि तोरअपमानपत्रात ॥ मैपठईयहफारनविरज्यात ॥द्रौपदीच लीलेसरापात्र॥करिन्धर्जसुर्जतें ध्यानमात्र विभाकरदीयो राकसपठाय॥रह्योगुप्तद्रौपदीहितसहाय ।। कीचकजाची सराजाय। वहकयौदेखियहबीचबाया। तबकाजरतनधि धविधतयार ॥मोहिदासजानिकरिअंगिकार॥धरिसुरापात्र फिरिचलीवाम।।कुटिलभोगैलचितविकलकाम।।वस्त्रकोहा थडास्यौउचारसोफट्यौगिस्योभजिचलीनार । भटकंकजुक्त जहांमच्छभूष॥ करिरहेअक्षक्षक्रीडाअनूप तिनलरपत- लातकोकरिमहार॥चाल्यौफिरघरकुंदुराचार॥भीमछ्लरव्योष लयाग्निरूप अग्रजअंगुष्ठचाप्यौअनूप।। बरहीमोसड्कम वधिोरथिररहहपराक्रमनहिनठोपमच्छतेद्पदाक हत्तनेष्ट।तबराजबीचतियराज श्रेष्ठ॥ बिपत्तादिनजितबत्तनिरप राधा तुहिलरवतलातमारीअसाध॥ममरक्षकपांचाहिपतीमू ढ॥गंधर्वरहेक्यूंहोईगूढ ।। भटकंककयोकर अक्षडारि ।। त्रियकरतअंतह पुरपुकारि॥ रक्षकनकहत्तदुरबादल्याय।। करिहैतचरक्षासमयपाय॥विनरवानपानसोइदिनविहाय॥पु निऊठिनधनिसबरवतपाय॥रसोईयानचसिढरतनैन । कुरबक रनप्रगटढिगभीमसेन॥१३॥ ॥दोहा॥ ॥बीचमहानि सनीदविन भीमसेनजुतक्रोध॥ मनहुगुफालयसिंहळू सिं (८८ ॥क पांउचयशेंदुचंद्रिका. हनफरतप्रचोध ॥१४॥ ॥छंदपधरी॥ ॥कहभीमअधी निसकवनकाज॥आईतूंनिंद्रासमयाज॥कहित्रियाजुधि ष्ठिरपतियपाय॥क्यूंसभहोइनिरसोचकाय॥सबराजतज्यों तिहकुमतिचाल। मदमस्तकरीज्यूंफूलमाल॥१५॥ चित्त॥ ॥सहस्त्रअठ्यांसीस्वर्णपात्रमैजिमावतसोयुधिष्ठिर औरकेअधीनअन्नपावैहै।अर्जुनत्रिलोककोजीतैयाबेरचबनि ताकेनाटिकसदनबीचबनितानचाचेहे ॥राजातूंबकासूरहिडं बकौकरैयावधपाचिकविराटकोव्है रसोईपचावेहै।। माद्रीकेसु जसकारदीनुहीस्वरूपमाणएकत्र्यश्वचीचएकगोधनमै धावेहे ||१६||जाकेसीससोचतहोइंद्रकोकिरीटतापेगुट्टीवैनीजारही पचाऊंदुरवकोनसो॥गांजीवकीमुरवीतैअंकितजेपूंचेभयेचूरि नतेंढकितळूभातैभानुभौनसो॥जुधरंगभूमिचीचदेतहीअरीन शिक्षानृत्यरंगभूमिमेसिखावेदासीजोनसो॥श्रासमुद्रपृथ्वीस कीपाटरानीदासीईमेतापेंदुषकीचककोदांधेपरलोनसो॥१७॥ कवचकीठाहरपैकचुकीकसीहे देवित्तलबानटाहरूपैचूरिनकेचंदा है।क्रपाकोपपुंजकेनिवासदोउनैननमैकजराभरानौऐसोमहासो कफंदहै। सिरबानतुहांसीसफूलदोनहाथनतेंगांजीवकीघोषना मृदंगनकेछंदहै। कौनदेसकौनकालकोनदुरवकापैकुहुँकैसेनि द्रालगेमोडूंकौनसोअनंदहै॥१॥ऐसीरॉजराणीमेरीचाहती रुपाकीदीठताकीक्रपादीठकाजसादीहैरह्यौकरौं ॥चंदन सितफालेफूट केकठोरकरभयेऐसेदेरिखदुरबमनमैदह्योकरौं। एतेहीपैकीचकलग्यौहै मेरीगैलताकीलातकोप्रहारसभादेव तसयोकरौं।रोयलपटायगरेद्रौपदीपुकारकरेकष्ट भीमक ष्णविनाकोनेपंकयोकरौं ॥१९॥ ॥दोहा॥ ॥निजप टद्रौपदीअंशमलि निजअंशुनरोकि।त्रियहिकोदरला .

(८९ पांडवयशेंदुचंद्रिका. यउर करतनियमजितसोक॥२०॥ ॥सवैय्या॥ ॥ मेरोतो कोपसमुद्रअसाध्यअगस्तयुधिष्ठिरकोपमेपीगयो॥वाडवको पमेंभ्रातकीनेमसरस्वतीकुंडलतातेंदबिगयो।दाहविराटमें कोपमेंकोलगुपालतेज्वालकॉपुंजपचीगयो।काहितप्रातली- जीहैसबांधवजाहितेप्राजिलोंकीचकजीगयो।।२१॥ ॥दोहा॥ ॥ ॥कहहुप्रातवादुष्टसूं करिनतसालसंकेत॥मैबैठहंताभव नमैं प्रथमहिमारनहेत ॥२२॥ कयौभीमत्यूहीकयौँ प्रातद्री पदीताही निसऐईनृतग्रहरापन देवतथीतवचाहि॥२३॥ सुनिहुलस्यौनृपमच्छकी कीचकदुष्टप्रधान।नवनवपटभूरचन धरत दिनभोबररवसमान॥२४॥ सैरंध्रीके लोभानस नृत ग्रहगयोसहेट॥पूरचकर्मप्रभावः भईभीमतेंभेट॥२५॥ सवैय्या॥ ॥भूवनअंबरतेंभयोभूषित सांतिकीवेरज्यूंदी प्ककीदूति॥चाहतहानिजअंगनतेंजुअलिंगनतेंवपुभारिदि येप्रति माजलीथंबनबीचअधोमुरव भीमकीभेटतेंऐसीब नीरति ॥चीरकीबामकूदुष्ट कटाछतेदेखियोदेरसकेकीचककी गति॥ ॥दोहा॥ ॥भीमउठाइपछारिभुव कियोगांउभचकाय । कीचककेलागाकठिन भूषनदूषनभाय ॥२६॥इंद्रदसानन बालिग्रह भयोकछूनहिक्षेम॥ सद्यफल्योकीचकसदन पर दाराकोप्रेम॥२७॥ ॥छंदपधरी॥ ॥भयोप्रातएकस तपांचोरकीचककेबंधवअतिकठोर। मृतधातदेरिवंद्रो पदकुमार॥लइपकरिजरावहिभ्रातलार॥द्रौपदाकरीकरुना पुकार।।सुनिभीमरसोईकेअगार।।प्राकारदहावतचल्योध रविनुपथगुप्तकाजकेवीर॥सबकीचककोकरिकुलसंहार पद्रुपदाछुडायप्रायोउदार॥ इहवातनजानिपुरुषार|गंधर्व हिजोनप्रबलधोर॥द्रोपदीकहूंजोपरैदीद॥प्रगटदेरहेजेपुरुषपी पांडवयशेंदुचंद्रिका. ठ॥ ॥दोहा॥ ॥प्रेरिसयोधनदूतकेउ प्रगटकर्नसुतधर्म। दसदिसतेंपीछेफिरे कहूनपायोमम॥२८॥सभावीचभयेएकठे सुनिदूतनकेवुन॥गंगारुतकहिसबनने तर्कबांधियहसैन॥ ॥२९॥ ॥छप्पै॥ ॥जहांयुधिष्ठिरहोइतहांदुर्भिक्षनपावै।। जहांयुधिष्ठिरहोइ सप्तईतीनलरवाय॥जहायुधिष्ठिरहोईवर नहुपरमधर्मपर।जहाँयुधिष्ठिरहोयसतरवरितुफूल- फराजितहोययुधिष्ठिरनृपत्ततितजग्यमहोत्सवहोता नितक- हिभीष्मलछबरततसकलमछदेसवैराटिजित॥३०॥ ॥दोहा॥ दसंसहसगजबलप्रबल कीचक मच्छप्रधान॥मलजीमूतादिक, हतक भीमविनाकोभान।।३१।। ।।कर्न।। ।देससुसर्माको लियो कीचकछीनविचगर्न।चलहुकरेमोग्रहपतित सजहुसै- न्यअवत्त ।।३२॥ अर्जुनसुनिगोयहनकू पोररवकरहि प्रकास। मानिसुयोधनकमत्त चालियोसहितउलास ॥३३॥ ॥ छंदपध री॥ सप्तमीप्रथमसैन्यक्रूर॥सुसाकियेगोग्रहणसूर॥सु निकूकचढ्यौयरादभूप॥जुधिष्ठिरातत्रयंजुतअनूप भोउँ भयसैन्युसंग्रामघोर जीत्योजुसुसरमाप्रबलजोरं॥मच्छकोप करिचल्यौमूढ़ भीमतैजुधिष्ठिरकटोगूढानिकारी विपतिजाके निवास॥ताडूंछुडाहुकरिसत्रुनास॥जोभईप्रथमनृपमच्छरीत। जूकरीभीमजामातुरीती॥सिरकाटनलागोभीमसेना निवास्यों जुधिष्ठरसयनैन । लरिवजीवदानकौसुजसलेहु॥दासोस्मिक हतछुटकायदेहु ।। चितकुरुकुलकोजामातुचाहि नजिजियकिय मुंडनअर्धताहिकरिविजयकियोउतहिमुकाम।।अतिदईमच्छ भीमहिइनामाअष्टमीसुयोधनभूपाय॥पुनिकीयोउतरगोय हणपायापुरचीचफरीग्वालनपुकार।कुटुवचनकहेउत्तरकुमार। मोकूकाअर्जुनगिन्यौगूर।सुयाधनहरेघनरयासूद कारूसा ... ... पांडवयशेंदुचंद्रिका. (९१) रथीमोरनाहि॥मरिगयोप्रथमसोइजुमाहि।यहवचनद्रौपदीसु निकाज॥कुंवरतेकडोरहनटाकाज॥यहहोयसारथीतोरा ज॥निरकुरुकहाजीतहिदेवराजयउसारथितार्जुनउदार ॥इंद्रादिसमरजीतेअपार॥३४॥ दोहा।। ॥ कुंवरकहे। सुनसहन्नटा सूरयहांकहिमोहि॥ ऐहसबुनजीतअब देहंबह धनतोहि॥३५॥रथारूढम्हैकेकटे कबचकसेदोऊवीर॥सभी जायभाथाअषय धनुगांडीवलियधीर॥३६॥लखिशावतसा मीपस्थ कहतपरस्परचाहि॥माजसुयोधनसैन्यपै एकरथी- कोआहि॥३७॥ ॥सुयो॥ ॥कालिलुसमधिनहत्यो अप नहत्योधनाज॥भयसंजुतमछभूपनै कन्याइपकाज। ॥३८॥ ॥दोन॥ ॥कवित्त॥ ॥मामातेरोकहकन्या भेजीहै विराटभेटताविवाहहूकेगारीगीतजेसुनोहीगे॥रीयंत्र- स्वध्वजागिरेसजेविसलपरैधोयेबीजताकैफलमिलकेलुनोही गे॥त्रियानाकिरीटीव्हैहेधूजतनिहारोधराकपिकीगरजसुनेंसिरसू धुनोहीगे।मानतनबातचीसदिसाउतपातहोतजानवेगाजिवत गातकुंभुनोहीगे॥३९॥ कहेद्रोनावतहिदेखकेअकेलोरथऊ- वजदंडताकोतेजअद्भूतु है। निकरतवाहनचलाकीचुतचूर भईचारूभटचारुसुतअपनेकुसूतहै।।धूकतहे धरनीऔर धुंध रोदिखावतनभहोतअनमित्तधारत्यागेरिनधूत हैं। गांजीचसरास नधस्यौहै सत्रुनासनकौत्रासनतनकपाकसासनकोपूतहै।॥४०॥ कर्ना ॥सवैया॥ ॥काउतपातबत्तावतहैहमएकवात नजीवानंत॥ोन कनक हैकरकोपज्यूंबीदकोजीमतँचीरच खानत॥ एककहाकपिकेतअनेकपितामहसेनहूकानपिछानत। जोहमतेंदुरजोधनतेंनहिषोडसभागपराक्रमजानत॥४१॥का- कुसमांडकोबालकहेफलतर्जनीदेवतहीगिरिजेहे ॥ज्यूंजुजुषा 1.

पांडवयशेंदुचंद्रिका. कुदिरवायडरावत्तवालकूयूं कहासैनबसेहै|नामसुनाइकैपा रथकोतुमदेनहोलीबताकोउनपेहै ।।दोनवाएककिरीटीकेगोन नकोनजोपीटवतायपलेहै।। ४२॥द्रोनकोपुत्रकहेसनसूतकापा वनगालवजाएबडाई। एफगाजीवतइंद्रकोरुद्रकोतीसिलियेज बफरतिगाई। कालरवंजादिकवर्मनिबातरुगंधर्वजापेअजैतुम पाई द्रौपदीप्रापत्तदेरियहैआपनेएफलेकोनविजेउपजाई।।४३ 1 याहुतेक्षत्रियसूरसवे हिजवाक्यतेसूरसदैवलरवावत॥भीम महाचलनै धनुतैकषिकेतकीशरतादेवहुगावत ।। छलसूरयहे सकुनीरुसुयोधनळूहठम्भूरबत्तावत नीततेसूरयुधिष्टिरहैतु मकर्नमनोरथपुरकहावत ॥४४॥ ॥कवित्त॥ उत्तरगोन हणपुकारसुनिग्वालनतैउत्तरकवरवोल्योकोपबेसुमारमें।मेहं काफिरीटीराजरचोसिकेनिकारदीनोसारथीजोहोयत्तोदिखाउंगी प्रहारमे।।देवियोमचुंबितध्वजाहुकुरुवंसनकीरवेदकंपअंशुते भयेहैताहीवारमें ।।सबकौंदिरखानौतहांपदजोनिपूंसककोस्वांगमा अर्जुन लछतेकुमारमें॥४५॥देविचमूभाग्यीबालपकरयों विलोमदोरिकहाराजपुत्रमेरोप्रानउडिजावेगी।जानदेहुतोकूर थबाजकरीद्रव्यदेहुंजुद्धनोंकरेगोमेरोजीवप्रकुलायेगो॥पार्थक योअर्जुनढुंगायेरहिभाजेमतिअद्भुतबगोजुड्सीघ्रविजेपावेगो अर्जुनहीं अापतोसुनावोदसनामअर्थयथायोगसनेते विस्वास दृढावेगो । ४६।।सन्जीनवेतैपिजैशक्लकृत्यअर्जुनमेंइंद्रियो कीटताककिरीटीकहायोहूं। फालगुनउत्राअरुपुरुवाकेमध्या जन्मकृष्णा पंडपाजिष्णुवासकोजायोहूं।।जुद्धमैगिलानका मकरुनाविभत्सुतातेस्वेतअस्वहीतेस्पेतचापदपायोहूं।स व्यसाचिवामपानिहैसहायत्तानेंजानिधनंजयरसाकोद्रव्येस- बनीतिलायोहूं।। ४७॥ उत्तर ॥ ॥दोहा।। ॥अर्जु .

पांडच यशेंदुचंद्रिका- (९३) नहोतोनातचहु कितहैद्रुपदकुमार॥ ॥अर्जुन॥ ॥भूप जुधिष्टिरकंकभट बल्लव भीमविचारि॥४८॥ ग्रंथिकारयह विनकुल तंत्रिपालसहदेव ॥सैरंध्रीद्रौपदी तजिविषादल हिभेव॥४९॥ होहुकवरममसारथी जुधसमयकोलेरिव ।।जा निप्रतिरथीब्रहनटावीरनाट्यअबदे खि॥५०॥जानिवायतल बानमम पनचकरहिपुनिगान॥ नृत्यकरहिममउभयकर लैहि रीगिरिपुपान॥५१॥ ॥छंदपधरी।। ।करीसमीपरिक मग्रहणकीन। तेइधनुसबानकरउभयलीन । गोध्वजासींघ लछनविलाय॥ भोचितितवानरचिकटभाय॥ गंधर्वस्वपि द्याप्रभाव।।स्वेतास्वभयोरथमनस्वभाव । करिकोपधनुषटंका रकीन।भोशब्दभूमिआकाशलीन। बहुरिदियदेवदत्तहिब जाय॥कियेहाकध्वजाकपिमहाकाय।।त्यूंधडधडाटरथने मिघोर॥चकिरहेसत्रुनहिंसुनतोर॥यहरूपसैन्यपरिक्रमा दीन।कहिसब्दभीषमप्रतिनयमकीन॥५२॥ ॥दोहा॥ ।। क्षत्रधर्मप्रतिकूल तुमसानुकूलमैतात।। मैंछुडातेगोग्रहत्ततुम अकरमतेनलजात॥५३॥ तोतेव्हहै विजयमम व्हैहे अजयतु मार॥मैंअर्जुनमुरवकाकहूं सकुनहिंकहतपुकार।। ५४॥ ॥ छंदपधरी॥ ॥कहियतोजुधप्रारंभकीन॥मिलिअमरब्योमदे खतअधीन॥गांजीवबानधनअनछाय॥पचनजनवीचनहिंग वनपाय।। इतिप्रथमभूपरितुनपअभीत॥पुनिकर्नअनुजसंग्रा मजीत॥द्रोनीकोकाट्योध्वजादंड॥पुनिधनुषकवच कियरचंड स्वंड ।।गुरुपुत्रजानिनहिकरीघात॥करनहिंभगाय वेरतात। भीसमकेभालविचमारिवान।। मूर्छितकरीदीनोअसहमान।त्रि हुलोकविजेतातरुनअंग॥गांडीवधनुषअक्षयनिषंग।अर्जु नसोईरोक्यौरिनअजेय ॥द्रोनकेकरतवघानदेव । सोइद्रौ (९४) पांउवयशेंदुचंद्रिका. नरूपाचारयसधीर। दोऊजीतिछुडाईगायवीर।।दुजोधन कोएकबानमारि॥ दियेछत्ररुउष्णिषभूमिडारि॥ कृपद्रोनकन अरुभीष्मवान ।।पाथकैलगेकैउभेदिवान॥इकचल्यौपाथकोभो- हअस्त्र॥सबगिरेवीरगिरपरेसस्य॥ भीस्मकीध्वजाचित्वरुधिर अंकानिरआयहाथलेषेनिसंकालेजातसबनकीछीनलाज करितजेजियतमृतदयाकाज॥पुरपठयदूतगउवनबुडा य॥सबक वरविजयकहियोसुनाय।। नृपहुनिजपुरतिहु दिया साय॥सुनिपुत्रविजयचासरस्चाय॥ कंकभटताहिप्रतिषेध कीन॥नलभयोदुरिवत्यहविसनलीन ।कुरुभूपजुधिष्ठिरद्यूत काज| कितगयाँनजानैनष्टराज। मंगलकेसमयनरमओप गर्विष्टभूपदहुजयप्रताप। नहिगन्योवचनरवेल्यौनिसंक क्रिीडतहिकयोक्षटसुनुहुकंक॥५६॥ ॥दोहा॥ कहै विराट भटकंकते अहोउत्तरसमराथ॥जीत्यौदेवनते जय कुरुवंसनकोसाथ॥५५॥ कंककहेनृपबहनटा जाकैसा रथीसाय॥सोजीतैसुरराजको तोउकाअचरजहोय॥५८॥ सुनतस्तुतीममपुत्रकी रोधत हैहठठानि॥ करतस्तुतीवासं- उकी हिजतूंअज्ञान॥५९॥ ॥ कबित्त॥ ॥भीस्मद्रो नकर्नट्रौनीकुरुगजेदसासनजिनको विसेसतेजदेवनतमान्यो है।उनहीके प्रतापहातपाडवविलायगयेइंद्राद्रिक अंसनत जनमुबरवान्योहै।तेउजीतिएकरयीगायजेछुरायलायोउन रकोपौरसमैाजिदिनजान्योहै।। धन्यमातापितादेंसबंसजो सपुत्रऐसीवालवयहूमैअदभूतजसान्योहै॥६॥ कंकउवाच॥ ॥ दोहा।। |जाके ऐसेसारथी सोफ्यू वालकमित्र ।। तीनलाककूजीतिलै तोपुनिकहाविचित्र॥६॥ सुनतरीसकरीसीस4 पासाकियामहार। चंलिजुधिष्ठिर ॥ ॥ .

पांडवयशेंदुचंट्रिका. (९५) भालते सीघ्ररुधिरकीधार॥६२॥स्वर्णपात्रमैद्रौपदी पेलि लियोरतसोई । मतिभीमार्जुनरिवलै निजतेंवचैनकोई॥ ॥६३॥ ॥छंदपधरी॥ ॥नृपकन्यासैन्यवेस्यापठाय।।- लायेसुउतरकुंवरहिबधाय॥कहिप्रथमहिनरतिहिकवरकाज ॥पांडचनगरमतकरहुअाज। प्रतिहारेकह्यौआवतकुमा र।भटफंकगुप्तबरज्यासभारि।।६४॥ ॥दोहा।। जुकुंवरकुंशानदै ब्रहुन्नटहिमतिआनि लरवैरुधिरममभाल- की करेंसंबनकीहानि ।। ६५॥ मिल्यौायपितुतैकवर लरच्यौ जधिष्टिरभाल॥ कयौमच्छतै किनकन्यौ ऐसॉकरमचंडाल ॥६६॥ ॥मच्छ०॥ ॥ करतप्रसंसातोरसुत षंढप्रसंसतमू ढ॥ तातेप्रक्षपहारमै कियोसीघ्रहठसूढ ॥६७॥ ॥उतर० ॥ ॥हिजपैघातअनर्थयह क्षमाकरावयाहि ।।देवदूतजी त्यौसमर प्रातदियौहूं ताहि॥६॥ प्रातसभाकीनीकबरे पा उवभूषितायु॥श्रेष्ठोसनधर्मरूस प्रथमहिबेच्योजाय। ॥६९॥देरिचदूर मच्छनृप कयौकंकभटमूढ॥ मुहलाग्यौताभ यो ममासनारूढ॥७॥ ॥जन।। ॥पाकेअनु चरहैसदा इंद्रासनअनुरूप॥ तेरोतुछासनकहा येहैयुधि- प्तिरभूप॥१॥कहीसकलउतरकवर निजपितुःसमझाय।। गुष्ठरहेजबतेकथा जुधपरिजंतजिताय॥७२॥ ॥मच्छ० ॥ ॥ ॥मोरसुत्ताअतिगुननजुत करैग्रहनसुतइद्र।। तबउरनहो हूंकछुक तुमतेधर्मनरेंद्र॥७३॥ ॥अर्जुन ॥ ॥ मेरेतोवह मुत्रिसम गुरुकरिजानतमोहि ॥कलंकरहेमिश्रितकहे जोऐसी गतहोहि॥७॥कयौजुधिष्ठिरविजयकौं पुत्रसादानद ।। भिमनकूदीजैसता करहुवाहसरचकंद ।।७५॥ तथाअस्तुक दिन्यूत दूतन दियेपठाय। संबंधिदोऊनृपनके मिलेकृष्ण ९६ पांडवयशंदुचंद्रिका. ढूंबाय॥७६|| भयोच्याहानंदते कीयेकरिरथवाज॥पठये सबोधनदूत्तयत कियेप्रगटतिहकाज॥७७॥ ॥जुधिष्ठिर० ॥ ॥गयेसप्तदिसअधिकदिन अधिकमासतेाज।त्यूंही भीसमद्रोनकहि नामानीकुरुराज॥७॥ ॥इतिश्रीपीडय यशेंदुचंद्रिका विराटपर्वशिसप्तममयूरवः॥७॥ ॥ ५ ॥ इतनापूर.. विराट पुरोहित सभाग uru कौरवसेना. पांडवसेना

पांडवयशेंदुचंद्रिका. (९७)
श्रीगणेशायनमः॥ ॥छंदपधरी।। चैराटसुताउत्तराविवा-
ह॥अभिमनकियकरग्रहजतउत्साह॥पातविचसभासबनृपप
धारि॥वसदेवत्तमयकोसुनिविचारि॥ शिष्टासनबैठेनृपसधी
र॥वैराटद्रुपदवपुव्रद्धवीर।तिनअग्रजुधिष्ठिरवासदेच ॥भीमा
दिकतिनकैअभेच॥श्रीकृष्णकहतभूपनसुनाय॥लघुद्धसु
नहुसबचितलगाय।।संपूर्णनीतविद्यासुजाण।।सबकहहुमैत्र
बुधिबलसमान॥कीनोदुरयोधननृपञ्चकाज॥रचिकपटातह
रिलयोराज॥नृपधर्मधर्मपथसावधान॥पनकियोजथाकोनो
प्रमान॥त्रयोदसवर्षवनगुप्तवास।तिनमैसहिलीनीविविधत्रा-
स॥अबचहतपतअपनोविभाग।तथापथधर्मविनभयैत्याग
॥सगपनअपनेंइतउनसमान।।दोउऔरकुसलचाहत्तनिदाना
यहसुनितबोलिसेसावतार॥सतकारिअनुजवचबहुप्रकार।।
पाहदूतकालेबुधिपुनीत॥राजाअचक्षुपतिविनयरोत।सब
कहैबातविनंतीसुनाय।।सुयोधनादिसबकौसुहाय॥युधिष्ठि
रातचिचप्रथमहाय॥साहिलयोाजलौकष्टसोय॥अबपिता-
आयेचहपुत्राहिताकौंविभागदीजैसुताहि ।। नहिंदोषापर्व
हेपालचिलभयोयुधिष्ठिरघूतचाल॥यूजोरबतायेविनअराध
अन्यथासुयोधन,असाध्यायहसुनतबचनयुयुधानाप॥प
रजस्यौहत्तासनतप्रताप॥बलिभद्रसुनहुममसत्यबात। तुम
कहेबचनानिंदतनतात॥ वचनएवलीजसननवीर॥उनकूमैनि
दत अधीर॥ यकजछसारवत्ताकीचनेकायकवांसमेनफ
लजुक्तएक॥ बसियेकउदयेकसूरवीर॥यकमहाकुमतिका
तरअधीर॥ऐसोनयुधिष्ठिर बीचमाहि।। तुनमनपलछन
कहैताहि ॥अपलछनसुयोधनकेअपार।बैठेसभापविनर
बिसारि॥यनकोजोदूपनकहताप॥पापिष्टसरचाताको

(९८
पांडवयशेंदुचंद्रिका.
ताप।। नमावतधर्मकोकोननीत॥पगपरहिसुयोधनसहित
धीत॥नहिनमैदुष्टमदअंधनीच॥ लोबसाबहसीघ्रजमलोक
वीच॥धनजयसात्तिकीधनुषधारि।महिकनिकंटकदुष्टमा
रितिहलोकजीतियोसुलभतात॥बपुरोदुरयोधनकितिकबा
लापरिहेकियुधिष्ठिरपतिपाय।।कभक्षागृधश्रृंगालकाय
यहसुनतबोलिनृपद्रुपदयेहा।सानकीकहत्तुमानिःसंदेह॥न
मनताकियमदअंधनीच॥बलगिनहिनाधिकनिजसैन्यबीच ॥
जडकाष्टत्तवैचिननमतनाहि ।। महासारदंडपसरदमाहि॥करि
चोतथापिसामादिकाजा रहे प्रष्णजथाविधधर्मराज।निज
बंसपुरोहितळूनुलाया।सनकहीरीतताकूसुनाय॥जगचतुर
खानिचतुरासिलक्ष तिनमबरजंगमहेप्रतक्षाबुधिजीविति
नहिमअतिविसेष।नरदेहरतिनहिमअधिकदेरिख। तिनमैहि
जजन्महे श्रेष्ठतातावेिदाध्ययनीतिनसे विख्यातातिनबरक
हियतकरमकाररातिनमैतवादीविचारातिनमैश्नध्ययनी-
आपनात॥वेताकुरुपांडचकरिबात॥विद्यातपकुलबयचतुरन
छ॥सबनातिनिपुणअरुमंत्रसिद्ध॥ पधारहुशीघ्रकुरुवृद्धपा
स॥सुनावहुमिएअरुकटुकभास॥जदुबस्टऋतुमतनदो
प।फिरदूतजानिकारहेनरोष।पुनिभीष्मदोन विदुरहिषधा
नमिलकरहियाप्तकेचचनमान॥ दुसासनसकुनीकर्नदुष्ट।।
सुनिवचनअनादरकरहिसुष्प ।। इत्त,हमपठपाहिदूतो।।नि
मंत्रणकाजनृपठोरटोर। सुयोधनकरहिटैसंधान ॥जुध
साजकरहिहमसमयजानि।करताजुधसैन्यासानकूल।। महा
कोपसस्यसाहित्यमूला तीनहुवातजाकैतयार।महिराजकर
हिसोडसत्रुमार॥श्रीकृष्णकहैतुमगुरुसमान।।अाज्ञावहिह
मसपसिष्याान॥करहोविचारजोडापकाज।सबकरहि
॥

पांडवयशेंदुचंद्रिका. (९९) मानहमजुतसमाज॥हमहूंबहारापुरीजात॥पुरोहितनागपु रकोप्रभात॥मानैनसुयोधनसंधिमूढ॥हमळूबुलाइपउचहुअ गूढ ।। कहिष्णहारिफागमनकीनाद्रपदनिमंत्रणभारदीन। पुरोहितकियोगजपुरप्रदेसासतकारकियोबुधिचरवचिसेस॥ चित्रवीर्यपरिषदवनाय।।विप्रकौलीयोसादरबुलाय॥यतकुसल पूछिउतकीसुनाय॥पूसकुलबसममालपाय॥कहनपुनिबच नप्रारंभकीन।।द्रुपदापिनसंदेसदीनः॥ भीमकोदियोतुमबिष अभीतलाषयहरच्योअतिसयननीत॥रचिकपटयूतमह - स्वीराज|लीनीत्रयकीबिचसभालाज।अपराधसबनिकोटकनए हु।।दुइलोकसधैअधराजदेहु ।।इनपरलोभवसिनरहुअाप। पुनिल विहींगांजीवकोप्रताप॥ऍसादेवनरहैअनेक॥ अर्जुनतेजीतेस मरएक॥अर्जुनरुभीमतेजुस्योपान कोऊबच्यासुन्यौप्रबलौ नकान॥जिनसुनतकरनकहिचचनजोर॥वनद्वादशअब्दनिवस बहोर।परिहेदुर्योधन पनपाय॥लेहेसुतिन्हैछतियनलगाय ॥ कियप्रगटत्रयोदशवर्षमाहि॥न्यायविनग्रामयकमिलैनाहि चोलतभीमार्जुनभयन्ताहि॥ऐसेनफूकतैगिरउड़ायगांगेय कहत्तपज्ञागंभीर विसरेबह दिनकीवातवीर द्रौपदीस्वयंवरघों षजात॥तुमकरोयामंतिकरोत्तात। मांजनौरवोयबांधवमरा- य॥जुनसैन्यविजयतेंअजयपाया।वैराट-अबाहिनीती विसारि।। महिपनपिंचबोलतगालमारि॥ऐसेकोसिखावतसुनिअसाधा विहुलोककरततवपुत्रवाधाकरेजोइपुत्रगुंगिनतकाजा रहिहै धृतराष्ट्रनवंसराजा पितामहवचनकरिप्रमान॥ नृपहटकि- करननिजमुरचनिदान॥१॥ ॥सुयोधनः॥ ॥दोहा॥ ॥ तुमबहुस्यौजीहौबोहोत द्रोणादिकगांगेय॥भूमिनदेही पैडभ र ठाडौकरनअजेय॥२॥ ॥भीष्मः॥ कवित्त॥ ॥ । - (१००) पांडवयशेंदुचंद्रिका. मेरोत्तोहचांछित्तसोचौथोपनकुरुक्षेत्रसस्वतीर्थमृत्युगुनीकीर निवंगुनिहै।तेरेलोभमोहमानमत्सरकपटाईताकेबीजबहैफल नीकी विधिलुमिहै। यादफरिमेरेद्रोन विदुरादिकहकेबोलगांजीवा कौतेजदेखिपीछेसीसधुनी है। मेरेबैननीतकेनिवासनाहिस निहतोफरनादिकवीरकोविनासवेगुिरुनिहै।॥३॥ ॥कर्न। ॥ दोहा॥ ॥जोलीसेनापतिरहै यहे भीष्मदुरबाद । तोलौंसस्यनकरयहु कर्नजुक्तअल्हाद ॥४॥जादिनगंगास तमरहि टरहिपरस्परबाद। तादिनपांडुनमारिनृप हरिहूंती रविवाद ॥५॥ ।। छंदपधरी॥ ॥पुरोहितबिदाकीनी सप्रीत॥राजनतेंजाविधबनतरीत ।। तुमपीछेइपठवहुसीघ्र तातविधिसुनिहसंजयकहहिवात ॥उपप्लव्यूआयपके अगार ॥ सबकहे पुरोहितसमाचार॥गयोअर्जुननूतनवास देवा।उत्तदुरयोधुनायीअजेव।।पुरिबिचकियोदौउसंगप्रवे स।कुरुराज्यउत्तैइत्तगुडाकेस॥पोढततहांरुकमणिकांतपाय ॥वहसमयवीरदोउनिकठाय॥यकअर्वचठयकअधोभाग ॥अभिमानीयकयकसहितराग॥बंदीजनबोले विमलबानि ।। गायकमिलिभैरवकियोगान॥ वहसमयजागश्रीकृष्णा प॥मिसभयोपथमपारथमिलाप ॥सुयोधनकहतहमप्रथम आयानिमंत्रणकाजव्हैसहाय॥संबंधसयाधनहसमान।। दोउत्तरफापजानतनिदान!॥६॥ ॥श्रीकृष्ण ॥ ॥इकले हुमोहिरिनुसस्त्रएक॥यकलेहशस्त्रजुतबूलअनेक॥लियेरथ- सुयोधनातलाय।।सस्यविनकृष्णअर्जुनसहाय॥सप्तमिलि अक्षोहिनिइतसुभाय॥एकादशगजपुरॅमिलिअाय॥संजय नृपस्यौसावधान॥जुधिष्टिरकीयोहितपूज्यजान।करिकु शलप्रश्ननृपकीसुनाय।पुनिकहनलगेसतकारपाय।।आप --- । पांडवयशेंदुचंद्रिका. (१०१) कुयुद्धकरवानाज।शिक्षान्नश्रेष्ठनहिश्रेष्ठराज।।गुरुजनको कुलकोकरिसँघार॥तुमसेनहिवांछितराजभार।सबगुरुजन करिवोचहत्तसंधिमानतनसुयोधननृपमदंधा।यहुसुनतकृष्ण करिकोपाप॥पुनिकहतदूतसोजुतप्रताप॥ नहिंदैतमामयक सहितनीत।फिर भीष्मगावतकोनरीत॥कहिनितमंगावतयि नहिभीष।सुयोधनदुष्टकौक्यूनसीष॥देतहोभयेअसमर्थदी ननिहिकाराग्रहबिचकरतलीन।दिनपांचसाततितरह्योदूत॥ सबकहिसंदेसक्रियविदासूत॥६॥ ॥दोहा॥ ॥उत्तविराटेसों आयके संजयपरमसयान।मतिअचानपतमिल्यौ लिया यसपतिथान॥७॥श्रमजुतपथरथरवेदने अवनिजग्रहजात पांडुनकेसंदेससब कहहुँसभाविचप्रात्त ॥८॥धिकनृपत्तेरीबु धिर्फे त्यागेविनअपराधपांडुपुत्रनिजपुत्रकी गिनतअसाध हिसोध॥९॥गोसंजयस्वस्थाननिशि नृपबुलायलघुनात ॥ कह्यौसुनावहुनीत• निद्रालगतनतात ॥१०॥दैअबलंबनमोहि • गोसजयाँनजगह।।कहिहैसंदेसोकहा उपजतभयसंदेह॥ ॥११॥ विदुर । परवियरतपरद्रव्यहर तिनहिप्रजागरहीय ॥आपअबलरिपुप्रबलतै करैबैरपुनिसोय॥१२ ।। इतेकहा चितदोषते बंधनहोमहाराज॥निद्रालागतनापको इहै कौनगतिआज ॥१३॥ इकतेंदोयबिचारकरि जीतिचारते तीन।पांचरोकिषटजानिकरि साततजैसुरवलीन।।१४।। ॥ ॥कबित्त॥ ॥एकबुधिवतहितकारजअकारजको नीकेकैविचारसत्रमित्रउदासीनकौ।। कोप्याशामलीभ्यांदाम- भीतभेदहीनेदंडचारतैयारीतजीतै पूर्वकहैतीनकौ।।पापड़ द्रीवेगरोकिसंधिविग्रहादिषटजानसप्तविष्णतजैनौरसंगही नकौ।। दूत १ सुरा२ मृगया३त्री.४ तंद्रा ५डल ६क्रूरताई की पांडवयवोंदुचंद्रिका ७ दोनलोकपत्रष्टजानिसातकेअधीनकों॥१५॥ ॥दोहा ! |जादिनविद्याधर्मको यसलोकापमानहोइ ।विदुरकहैंध तराष्ट्रः व्यंधकालहैसोय ॥१६॥उत्तपात विद्यान्यायधन कर हुअमरतनमान॥षरचहुअातुरहोयमनु कालग्रहेकचानि ॥१७॥मनसावाचाकमना राजनीतिकिरीति।विदुरकहेध तराष्ट्रतें सुनहुलायपरतीत॥१८॥ मनसोदाहरन॥ ॥ कचित्त। केतिकउपत्त मेरेवरच कित्तोकाहिलेतो पुन्यदानकेतोकीरतकोदान है। केत्तीचहीप्यादीसैनकैतेस बुफेते मित्रकैसे सकेसोकालवैभवविधान है। कोनस्था मरचोरकोहरामरचोरमेरेपासकौनकृपापापकौनसाधोरन स्थानहै।जहांतहांजवैतबैनृपतिविचास्याकविदुरवरवाने राजनीतिको विधान है।।१९॥ ॥दोहा॥ । तीनहुरा द्रष्टमें तीनन दिगरनदेत तीनपिछानेचिमलमति सब कोचसकरिलेत॥२०॥ ॥वाचाउदाहरन॥ ॥सत्यओरउपा गारमय मिष्टवचनअविरुद्ध॥ श्रूपदासहरिभक्तिजुत सोइ वागीहरुद्ध ॥२१॥ ।। करमनाग॥ ॥सत्यसोचसमद मदया विद्यासकुलतादान ॥जगवल्लभुतासूरता पाचत दसपुन्यवान् ।।२२।। छिमामानुषीविपत्तिमें दैवापदिसंतोष। श्रोगुनतिनमैएकनृप गिनतअसूक्तसदोष।।२३॥धुनितैयु धिष्टिरमैं दोनदृष्टांत घटाचेहै सर्वचर्मयाछन्नभुच जाकेपदा पवान ।।यातपत्रनिहिंसीसपर नमाछिन्नवितान॥ ॥ कवित्त॥ ॥पुत्रत्रियाकाजधनरक्षानीकैकीजतु है पुत्रिया रक्षासोहियात्माकेकाजहै।पुत्रत्रियानासतहीआपकौंबचा यलीजपुत्रादिककरहेनअंगकोइलाजहै ।।द्रव्यजातांरारवेफुल फुलजातांरारचेजीवजीचजातांरारिचलीजेजाकौनामलाजहै Mado tem पांडवयशेंदुचंद्रिका. (१.३) लाजगयेगईकीर्तिरगयैगयोमानमानगर्यजीवतहीमृत्युको समाजहै॥२३॥सोनसभाजामैकोउबधकोप्रवेसनाहिसौनव्र धहोयसमैपायनीतिबोलेना॥सोननीतजामेंकुललोकबेद- कीनरीतसोनरीतजामैसाचटनीकैतोलैना॥सोनतोलियो हेजामपक्षपातबोलेछुलस्वारथविचारजैसीहोइतैसीरवोलेना ॥सोईभूमिपालएतेदोषविनवानीसुनिताकौअंगीकारकरे तैउतेंडोलना।॥२४॥ ॥दोहा॥ ॥कारागृहदेपुत्रको धर्मपुत्रकोराज॥टरैप्रजागरआपको कुलकोव्हेनकाज। ॥२५॥त्यागएकहितग्रामके ग्रामत्यागहितदेस॥देसत्यागी हितमानके बानीविदुषविसेस॥२६॥ विदुरकहततूंसत्य ब सहदरीतसमगाय जथाभविष्यव्हे तथा पुत्रनेत्याग्यो जाय॥२७॥भीष्मद्रोणकर्नादिसब सतपुत्रनजुलभूप।मिले सभाबिचमातभये बाल्हिकादिअनूप॥२८॥बोलपठायों दूतसोई संजयतिनढिगाई। भीमकिरीटीकेवचन सुबकू कहतसुनाय॥२९॥ ॥ कवित्त। ॥ कवित्त॥ ॥भीमसेनकहौसू तकहिौसुयोधनतेजेतेशत्रुत्तोसेतेतेकेतेमारिडारेहै। द्रोप- दीकेकेससभावनके विराटहकैकैसेसहेजातधर्मराजकाजधा रेहै।।युधिष्ठिरसामहुनैमागैधिनाजुद्ध कियेदैन्यकानपंचया महमनाविचार है।। मानलेनवारेनहिनिलेनवारेहमदानले नवारेनहिंपानलैनवारे ॥३०॥ ॥दोहा॥ हिंडंबदा रबकअसुर जरासंधपुनिजान।। कीचकादिबलकुबुधित स बभयेतोरसमान।।३१।। कवित्त। ।। द्यूतक्रीडाहीम कालक्रीडासीदिरवायदेतोअग्रजकोधर्मराषकानाहिमा रेहै। लारवाग्रहबनके विराद्रौपदीकेकेसऐसेदुख भीमनि सद्यौसनाांचेसारे है॥ करियेचिलोमांस तिहारोजुधिष्टि || (१०४) पांडवयशेंदुचंद्रिका. रकोप्रानररचेचहेतोनिदानतोकोप्यारेहै।कीबलेनचारेहैसदै चदानभिक्षाहमसीवलेनवारेनाहीजीवलेनवारे है।। ३२॥ कुटु मत्रियाकीलीनीलाजऔरराजसाजपाजीहैस्वभावताकेएही यातताजीहै।हमतोचंडालतोको कैदःछरायलीनोअग्रजकी आज्ञाक्षधहितराजीहै । तोळूतभयौत्रिदोषराजसैन्यवैभ वकोऐसोरोगकाटिचकुंकिरीटीइलोजीहै।।स्थाननछुड़ावैसबका ननपठावैनाहिंवाननकैपासवाननकीबाजीहै।॥३३॥ ॥दो हा॥ ॥देटंकारगांजीवनूं कहेबचनफिरपाथ।।इंद्रअंसनि रचैदसहु भोपूरितइकसीत॥३४॥ ॥कवित्त॥ ॥तेरोबंधु तुहित मातुलत्यौसूतपुत्रचंडालचोकरीज्यूहीऔरमिलेसारेहै। धर्मराजलोकबीचधर्मराजयादकीनेधर्मराजकोपभरेलोचनउ- घारेहै।।ब्रह्महकेरुद्रहूकेसरनबचौगैनाहिगांजिवकुंधारिकैकि- रीटीयूंबकारे हैं ।।ढालकर्नवारेहमरव्यालकर्नवारे नाहिंसालक नवारहमकालकर्नवारे ॥३५॥ ॥ छप्पै॥ ॥जबहिभीम रनजुरहिमानतिहबंधुनहरता ॥जवहिभीमरनजुरहिकरीसेना क्षयकरता ।।जयहिभीमरनजुरहित्रसहिबलभजहि जितहितित जबहिभीमरनजुरहिकहहिसवसरनलहहिकितरिनजुरहि भीमदुरजयदुसहसमझकष्टपरिहैसबहि॥मदभ्रष्टदुष्टतरा सुततपिहटुरयोधनतबहि॥३६॥जबहिसातकीजुहिकठिन गतसत्रुनिकंदन।जवहिअभिमनूजरहिपाइसुभद्राकुलनंदन।। जवहिसिरवंडीजरहिभीष्मकेममविदोरहि॥धृष्टद्युम्भरिनजुर हिपबलभद्रोनप्रहारहि॥सुसमसिकुनीकैवानहरजुरहिमाद्री कसुतजबहि ।। मतिभ्रष्टदुष्ट्धतराष्ट्रसतवपिहेटुरेजोंधनेतब हि|३७॥स्वेतअस्वस्थजुरहिध्वजावातात्मजगहिदेवदत्त जीवघोसगनसन्युनतरजहि ॥वातवेगविहिस्थहिकृष्णसंगरचित्र . 7 - . पांडवयशेंदुचंद्रिका. (१०५) प्रेरहि॥कहांजाइकाकरहिसरमिलिइतउतहेरहि ।।गनबानछुटा हिगांजीवतजीवनमितहरिहैजबहि।।मतिभ्रष्टदुष्टतराष्ट्रतत तपिहैदुरजोधनतबहि॥३८॥ ॥दोहा॥ ॥कहतसयोधन मोरते देवहुसमर्थनाहि॥जुर्नजुधविचन्नतें कहुंडरउ पजेकांहि ॥३९॥जौलौंसिरधरपैरहै नौलौमिलेनक्याजिर हीशिरधरथेरहै तबसबलैहिसभार॥४०॥ ॥धृतराष्ट्र। ॥भीगांधारीतौरसुत करतभरतकुलनास ॥गुरुजनकोसी रचनगिनत हैनितकुमतिहुलास॥४१॥गांडिवजुतप्रतिकूल व्हे खांडवदियोजराय॥सानुकूल पांडवसकल सुरअरिदि येमिटाय॥४२॥सहस्रार्जुनपाचसत छोरतइकछुनवान ॥सोड्भुजतेंपांडुरूत कौतिहपुरुषसमान॥४३॥ गांधारी॥ ॥धअंधमातापिता भोसतहमकुंदेरव ॥ त्रसोककोदुसहदुख जीवमात्रविचलेरव॥४४॥ ॥सुयोधन ॥ ॥कबित॥ ॥अहोमहाकृष्टयतराष्ट्रहूंकहतऐसेव्ह है। चंसनपयासुमर्थताकानष्टहै।प्रष्ट हैसदैवरोधापुत्रतैग रिष्टहू मैजातकोऊसूरवीरज्येष्टनाकुनिष्टहै।कनमामादुः सासनेइष्ट हैहमारेतेऊसचनकीमारिकैअभीतभयेतिष्ठहै। औरनकीवानीकदुनेकनसुहानिमोहिवानीतीनुहुकीतीनकाल ही मैमिष्टहै॥४५॥ ॥नैकर्षमानीनाहिनृप संजयजुत्तयसी रच॥ भावीनासकलनृपनकी परीसबनवंदीरव ॥४६॥ इतिश्रीपांडवयशेंदुचंद्रिकाउद्योगपर्वणीअष्टममयूरवः ।।८।। श्रीकृष्णार्पणमस्त. श्रीरस्तु अथ उद्योगपर्चगि उत्तरार्ध नवममयूरवप्रारंभः

(१०६)
पांडव्यशेंदुचंद्रिका
विराटरूप.
मह
लो
इंद्रादिदेदों
कोस्थान
'आकाश
स्वनी
भूलैकि
...
अर्जुन
लातलो

(१०७) पांडवयशेंदुचंद्रिका. श्रीगणेशायनमः॥ ॥दोहा॥ ॥सत्तगयेबहुदिनभये पीछेनाहिंसंदेस ॥ तृत्तियवसीठीकृष्णतुम गजपुरकरहुप्रवे स॥१॥मातपिताब्रधधर्मम सोइमोहिसोकप्रसाध्य । तीजेउमानेनाहिती कामेरोअपराध॥२॥कहैयुधिष्ठरकृष्ण तें करियोसामउपाय।।फुलविनासकोदासकै अंकलगैनहि आय॥३॥त्यूहिटकोदर कयौ यूंमृदुबोलहुआय।संधिक रैमदअधन्दप लगैनकुलबधपाए॥असे अर्जुननकुलं- के वचनसुनेयदुवीर। कहिसहदेवरुसातकी जुस्य)पहुरनधी र॥५॥ढरतजुगलपासतै जुगलकुचनपरनौर।कहतद्रौप दीकृष्णते धिकपांडुनकीधीर।।६।। ॥कबिता ॥ चकमृदललंबेचारकाँसुगंधसीच्यौवामपानलै कैजुराकृष्णको बतायोहै।।यानजिनहाथ न ऐच्योतेछिदेनजोलोतोलौद्रौप दीकोकोपनैकन सिरायोहै।पुत्रवधूभीषमअचक्षकीकहा नाहीं जिनकैसमीपसभाबीजदरखपायोहै।।गांजीवकेगदाके धरैयाळूधिकारजोएतेहीपेसधिकोउपायमनभायोहै॥७॥ बंधुधृष्टद्युम्मपिताद्रौपदस्वयंभुवीमैरेयसुराभोपांडुपांडुपुत्रभा रतारहै। ताकोभयोहालसभावीचजूकंगालकोव्हेता भीम सेनहुकैसंधिकोषिचारहै ।।रहोपांचौगंगापुत्रद्रोन कैकाल- रूपौरकुरुवंसिनकैकरतासंधार है।। मेरोपितामेरौबंधुमेरे पुत्रमहावीरसभद्राकोनंदएतेजुवकूतयार है।।८॥ दोहा ॥ अतिसीतलतनइंदुकी होतग्रहेनबहवेर॥उग्रतेजरवि कोउसमय होतनतदपिनंधेर॥९॥निजपीतांबरपौछिकरि अंशद्रौपदीकर॥कहतकृष्णतिहबरपुनि अंशजुक्तमुरबहे रि॥१०॥ज्यूतचुसोकन मिटतहै सनिनृपद्रुपदकुमारि। यूं निमग्नमणीतलौ है हैकेउपनारि ।।११॥योकहिकीनोग-

पांडचयशेंदुचंद्रिका.
मनपुनि कृष्णनागपुरओर ॥ प्रश्नभयोधृतराष्ट्रसुनि विदुरहि-
कहत्वहोर ॥१२॥ करिहीअातिथकृष्णको चिदुरसन्हममदा
त॥ विनाप्रसवसतदासिका करीअष्टरथसात॥१३॥देहूंअष्टा
दससहस उत्तमअजिनदुसाल ॥चीनदेसकेउएपिट सहस्त्र
निहकाल ॥१४॥दुःसासनकेमहलजे पटरितुरूरवदस्वरूपात
हंडेरापुनिअवरहूँ दैहूंरतनअनूप।। १५|| अष्टगुनौसबसाथको
रवानपानसरवदेन । पिनदुरयोधनजायहै सनमुररत्तिनकौलेन
॥१६॥ ॥विदुर ॥ ॥आपबुद्धिवयवद्धन्द करतलरकई
बात ॥अर्जुनप्यारोप्रानते तजैकृष्णक्यौंतात ॥१७॥सर्वराजके
लोभते होयनतेरैकृष्ण॥अर्धराज्यदियेधर्मकौं क्षत्रिहरिकु
लप्रश्न॥१८॥पापधुवायैअर्धविन विनजलकुंभनआन। यह
नकस्सतकारनहि कृष्णभक्षसमान ॥१९॥ विदुरकयौत्यू
हीकृष्ण पूजामहणनकीन।। रातविदुरहुकैरहे तोकें भोजनली
न॥२०॥विदुरकहैचहियेनइत तबआगॅमब्रजराज।दृष्टरुयो
धननाडरत करतसकाजअकाज ॥२१॥अपनौकहैतुमकही
जथापिदुरधीमंत।। इनतैमोकूनैकभय समरहुअतिमतिसंत।।२२
प्रातसभाविचनृपतसब आयेपुनिऋषिराय ।। त्यूंआगमभी
कृष्णकू सवतैआदपाय।।२३।। कृष्णकहेधृतराष्ट्रसुनि नक
रिभूपकुलनष्ट ।। दृष्टमतिसोइहोत है गिनैदिननमैनष्ट ॥२४
दुरिचयुधितिरकीछमा तवसतकोअपराध । विगरिसुधरैध
मको अबहुराजदैआध ॥२५॥ ॥सुयोधन।॥ ॥विद्याध
नकुलविभवको दानन्यूरताजोर। मेरेसोउनकेकहां छमतत
यहिंदुखघोर ।।२६॥
॥ कृष्णा॥ ॥सवैया॥ विंस
नैनाहिंमहानताताहैनुमहानतालारवनयंथपदेते।उमरतेनम
हानताहनमहानताकौटिकद्रव्यबढेते॥दाननैनाहिमहानता

. पांडवयशेंदुचंद्रिका. (१०९) हैनमहानतासूरताजुत्वचढेते॥जोमगधर्मधनंजयकोसुम हानतातामगबीचकते॥२७॥ ॥कवित्त॥ ॥ सुयोध नकहपिताऔरहसभासदकुंचातयोगुवालकीभुवालकैसेमानो हो। एहोस्यामद्रोणादिकंसवहिभ्रमाएआय इनके भरोसेक- हाएहुचित्तानोहो॥रूचीअग्रदवेंजेतीभूमिकौनदेनकहेक नार्दिकचारहुकौमतनापिछानीहो॥गोरसकीजानोकृष्णतोके सेंबसीठीकरोगोरसकीजानोहोकैगोरसकीजानोहो॥२॥ ष्णकहैसुयोधनमानतनमेरीता भईपरतीत भीमवांछित्तको पाचेगोअजसतिहारोत्यूहीसुजसलुधिष्ठिरकीरहिअरवंडरने उपेडमैकहाचेगो॥आयरंगभूमेमोकूनाहिंदिषायऐसोजाकि ओटजायनिजमानतूंबचावेगोजागोसमूलवर्गभीमकीगदा सँधुनिपिजैधारिमारिविजैविनयबजावेगो॥२९॥ ॥दोहा।। ॥अहोसुयोधनप्रहरनिस सेवतहउहिसदीच॥ तजिरनकूज हैतथा जैहैभूमिरुजीच॥३०॥ ॥कचित्त॥ ॥जादौनको मानमारिकिरीटीसुभद्रालैगोलुमनैनिहोस्यौतैसेमेतोनानि होरिहौं।रबांधिकरैपीतराजनातकीनरीतसत्रुसैन्यनाव सिंधुआहवमैचोरिहों । मेरीयागदातेंजमराजली वृद्धिपैहै। भीमादिकसूरनकेकंधनकौंतोरिहों॥छोरिहोंनटेकएककहि) येअनेकमेरोनामरनछोरनाहिकेसेरनछोरीही॥३१॥ कृष्णा ॥आनथानहाटककोकोमलसभावसदाअग्नि नीरफेटतहाकठिनमहानहै।आनधातुआनथानकठिनम हानहैपैनीरसोरयंत्रतहांसबहीकीहानी है। साचवानुधर्म त्रानपांडुपुत्रकोमलहयुद्धके प्रयानइंद्ररुद्रकेप्रमान है ।। त्रानधातुकेसमानजानितेरेबंधुत्यूहीपाननव्हैहे मानि विनानदान है।। ३२ ।। कहैकुरुवीरप्रष्णीवीर कहौहोतुम .. L (११७ ) पांडवयशेंदुचंद्रिका. देवअंसपांडुनतेंजीनियेकोलागना ॥ धर्मराजवायुइंद्र- श्विनीकुमार पांचुहोतअवतारततोहोतोराजत्यागना।व्है है। होनहारराजकरिहैं भरतवसीजीवकोरुजीवकाकोमेरेअनु. रागना॥नरकेसंधारहै हैनरकेजुरेनेतीघरके विभाग घरकेविभागना ॥३३॥जीवजीवकानैमानप्यारोमोकुंवासु देवजेतेदेहधारीतेतेकालकोप्रहार है । भीष्मकरनद्रौनीद्रा नमद्रपतिदूसासनसबैसत्रुसैन्यकोसंघारकरतारहै। हारिहै तोआपतेंनव्हैहेउपहास मेरोयाहीतैनऔरकछचितकौवि- चार है |योतीहैजस्यौपाहारलोकपरलोकहीकेगदाके प्रहार हीतैसरवकेविहार है॥३४॥ ॥धृतरागा ॥भीमभीम वात धनंजयसौगांजीवअषयतोनइंधनकौटार है। कर्नादि कजरिहैउरचरिहैदुसासनादियुधिष्ठिरछमासीलमहींदावि मारिहै ।। जलहैनऊलसहदेवच्याममंडलहनावपंथकौनतोकु पारिजोउतारिहै। पांचमहातत्वजैसेपांचौलाततेजपुंजर्छ टेचासुदेवमेरोमूलछेदिडारिहै॥३५॥ फेरिजदुराजकुरुराज समजावेकाजकहतसमाजबीचहितकीसवानी है। मेरेक हिवेकोसनिलीजेनीके श्रोत्रदेवपांडुनकोदेवीभागनीत कौनिसानी है। नातोसबछिन हूके छात्रनकोव्हेहैनासहोन हारहोनीसोतोजाहरहीजानी है। एकघरहानीटुजीधनहुकी हानिजानिमहाप्रानहानिएकहानिकीन हानि ।। ३६||सभा सभीष्मसेंद्रीनकृपाचार्यजसे भूपधृतराष्ट्रजसे विदुरनिहा रिये॥पांतीदारसीतलसुभावहैयुधिष्ठिरसापांचग्रामभांगे संतोषकौविचारिये ॥मौसोहैवसीठीसमझायवेकुंकृष्णक हैचाहतहूंजेसेतैसे भूसंधारटारिये।एतेहिपेमेरोकटीवायु केवधरैवेटो है है भावीचद्यौताहिकैसे केनिवारिये॥३७॥ ॥

(१११)
पांडवयशेंदुचंद्रिका.
॥ ॥दोहा॥ ॥कैदकोच कृष्णको धस्यौचंडाल
नधार ॥डस्यौसयोधूनदेरियहरि धस्योरूपवैराट ॥३८॥
कयौसुयोधनकृष्णाको गन्योनागममर्न ।कृष्णचलेप
सीरवलें गोपहचावनकर्न॥३९॥ ॥कृष्णः॥ ॥सूक्षेत्रज
गुरुपाडुसत होहुदिरदपुरनायू।परैजुधिष्ठिरतोरपग तज
इसुयोधनसाथ।। ४०॥ ॥कर्नव०।। । कहोआपजैसेहि
करों निरलोभीसुतधर्म ।। तजुसुयोधननसमय कहाबनै
एहकर्म ॥४१॥ खुल्यौमिल्यौक्षत्रीनको दुर्लभस्वर्गकोदार
॥ फिरंहारसधिकपाटदै मतरोकड्यहवार॥४२॥ कहिई
तनीपीछोफिस्यो करतसदननित म॥ प्रथाअायताहीसमा
य दियेअसीसजुतक्षेम॥४३॥कुंताजाच्यौकनको तूंमम
पुत्रप्रधान ॥पांचननुजजुतकरसुत राजनागपुरथान॥४३
॥मातकरनइकछत्रविन कियोमाजलौराज॥कियेजज्ञदा
नादिपुनि व्याहमहौछवराज़॥४५॥नृपतसुयोधनप्रीतते)
ताहितीयूंआज।मातागांधारीपिता धृतराष्ट्रमहाराज
॥४६॥ तजैसुयोधनकूनतो पांचपुत्रदैमोहि ॥ तैनतूंतबबसि
परे तिनहितजाचतत्तोहि॥४७॥ हतूंविजयाचसिपरै नबसु
तवनहीबहोर। हत्तकिरीरीकरन• तोउरहे पांचहुओर॥४०
। हतनापुरतैआयकै कृष्णकहत्तजुतरोस।तीनवसीठीव्हचु
की प्रचतुमकोनहिदोष॥४॥धपुत्रमतिअंधनृप दैन
हिपेंडप्रमान ।।जुरहिभीमअर्जुनजुबहि देहिभूमिअप्रान
। कबित्त॥ ॥कृष्णकौकहावदुष्टमान्योनास
योधन क्षत्रीकुलनासकाजग्रहकेअदिनकू।किरीटीकोजे
टीएसेबोलिउठ्यौठोकि भुजाकारेहुगदातैसीध्रुअरिकेकद
नळू । बडेभूपनकेहियेहहरायदेउँमालमहरायदैहुपंचहिव-
॥५०॥

(११२) पांडचयशेंदुचंद्रिका.
दनळू।। महास्यंहासनपैयजविठायदै हूंकौरवपठायदे
हुकमकेसदनकू ।। ५१॥ ॥दोहा॥ ॥ इतनेचोथोदूत
करिमातुलपुत्रसिपाय॥ पठयसुयोधनधर्मप्रत कहिकटुयूत
सनाय॥ ५२।। तूंतपसीमांजारगति कुलकुठारमतिनी।।
तर्कपटीधर्मसत बन्योसाधुजगबीच॥५३॥जौनच्यावराट
विच वेणीसीसगुहाय।।सोअरजुनकादिकू बोलतभीतब
नाय॥५४॥ दुर्योधनके सिरसदाधिबंधीभूमइहर॥डर
दिरचायकोउवौसिलै ऐसोकहाअंधेर।।५५॥ ॥युधिष्ठिर
उवाच॥ ॥प्रत्यूत्तर॥ ॥स०।। ॥नितप्यासदुसासन
श्रोनितकी चित्तभीमको अकुलावत है। छिनजामलौबीतत
जामजेद्यौसलौद्यौसनेमासलौजाबतहै।फिर्मातुलपूत
ल्कळूमेलिफैक्यूंकछुवादसनाचत है ।। नृपतेरीअनीतको
नाकलौनीरबढ्यो अबसासनश्रावतं ॥५६॥ ॥दोहा
॥ ॥पुत्रहीन हैहै पिता मातअंधममसोक॥मरतोमारे
बधत आवडूसीसअलोक ।।५७॥ ॥अर्जुन॥ ॥नचिछोड़े
वैराटमै कनादिकके प्रान।। गांजिवजुतनाचिरीरमै अवहरिले
हुनिदान॥५८।। इतैसातग्यारहउत मिलिअक्षोहणान॥
कुरुक्षेत्रडेराकिया लरिवनिरदूषनथान॥५९॥ रथीमहारथी
अतिरथीसंरच्या ॥ ॥रथीस्थीतजुद्धकरी रारवीपरिकरसोया
बडजोइबलपुरनितै ताहीकीजयहोय॥६०॥ महारथी
॥ एकलरैदससहस्त्रने रारिवलेतरथसाज॥सारथि
हयउपसारी चक्ररक्षनिजकाज॥६॥रारचेलेत निजरथ
हिईं करिअगनिततैजुद्द॥ कहतताहिकोअतिरथी जैहैबुद्धि
विसुद्ध।। ६२॥ डिंगल। ॥ दोहा॥ लारवाईलस
फरलार धरमपूछजिसडोधणी॥भारयवालोभार भीमा-

पांउचयोंदुचंद्रिका. (११३) अर्जुनरैभुजा॥६३॥हैमहारथीहजार जुजुधानं सिखंडीजि सा॥भारतवालीभार भीमार्जुनरेभुजां॥६॥धृष्टद्युम्नध नुधार श्रुतिकीर्तिश्रुतिचरमसा। भारयवालोंभार भीमात्र र्जुनरेभुजा॥६५॥उत्तरकुरुवरउदार द्रौपदनकुलविराटदृढ ॥भारथवालोभार भीमाअस्जुनरेवजां॥६६॥अभिमन तेजअपार सुभद्रानंदन विजयसत॥भारतवालीभार भीमा अरजुनरेभुजां ॥६॥श्रुतिसोमहुहुसियार प्रतिबिंधसहदेवसु प्रगढ़। भारतवालोभार भीमान्अरजुनरेभुजां ॥८॥सतानी कगहेसार धृष्टकेतचिकितानत।भारतबालोभार भीमात्र स्जुनरेभुजां ॥६६॥जुधसहदेवजुझार जरासंधसुतजोमरद।। भारतवोलोभार भीमाआरजुनरेभुजां॥७॥केकयनृपत्ता वार कुंतिभोजपूजितकहर। भारतवालोभार भीमाअरजुन रेभुजा॥७॥सलभूरिअनसार दुरयोधनसल्यसोमदत्त॥भा रतबालोभार करणद्रोणभीसमकरां॥७२॥ कृपाचार्ययुध- कार जयद्रयभटद्रोणी जसा भारत करणद्रोण ॥७३॥नृप बाल्हिकनिरधार कृतवर्माभगदत्तविकट ।भारत करणद्रोण. १७४॥अलंमासुराधार दुःसासनविकरणासह ॥भारत. करणद्रो०॥७५॥यलासुधीईकतार व्रतकेतूकांबोजविंद॥भार तकरणद्रो ॥५६॥कतंदुरसुजयकार चित्रसेनअनुविंद विचित्रभारतवालो करणद्रो० ॥७७॥सुदक्षिणग्रहीयासार चित्रकेतजसडाअचल॥भारतबान्करणा ॥७॥सकुनी जुधसाधार ससर्मासररवासुभट। भारतवा- फरणद्रो ।। ॥७९॥ दुरध्रचीतउदार कुलभूषणलछमनकुंघर॥ भारत वा करणाद्रो० ॥८॥जेवाकाजुसार सलिसुतदुःसासनसु तनं भारतवा करणद्रोए॥८१॥धषकुरुपांडयधार॥

पांडवयशेंदुचंद्रिका. आह्मासामाउलीया॥भडसनादोयभार भीष्मद्रोण- अरजुनभुजां ॥२॥ ॥ इतिश्रीपांडवयशेंदचंद्रिकापुनःउ योगपरवागनयममयूरचः॥९॥ ॥श्रीकृष्णार्पणमस्त ॥ श्रीरस्त अथभीष्मपर्वप्रारंभः IAL गीताप्रसंग. Imumm अर्जुन. कृष्ण LumulIIIIIIImuTITIगा भीजी. गंगाजी. IIIIMIIIIIMIIII0111111111Tih -------- प

पांडवयशेदुचंद्रिका.
(११५)
भीष्म अभिपेदन
सेनाप.
3
श्रीगणेशायनमः॥ ॥दोहा॥ ॥ईपायनरिखनागपुर सुत
समगावनमाय ॥ कहतसभाविचिसांतिहित उतपातलरवा
यु॥१॥ ॥कचित्त ॥ ॥द्यौसचारिकूकै निसानिसाचारीकू
कैद्योसबनचारीनयनाचारीबनधावेहे ॥आप्रबीचफूलैकज
कंजमैलंगैहेकेरीकालदेसबस्तुकोचिरोधसोलरपाहे ।। विनापी
नतूटै ध्वजाजलैनाआहुतीहोमग्रधनकेझंडकुरुक्षेत्रहीपेंजावैहै
होतउत्तपातक्षत्रिवसकोअदनकाजकुलकोकदनपुत्रकूनसम
गावै ।।२॥ ॥दोहा॥ ॥धृतराष्ट्र॥ ॥भवतव्यऊपरजतन
कछु मेरौफुरैनतात ॥करियेश्रापउपायकछु सुनौजुधकीबान्
||३॥ ॥व्यास०॥ ॥गुप्तप्रगटजुधकीकथा कहिहसंजयतो
हि॥ देवादिकहपेप्रबळजो भवतव्यसुहोइ॥४॥दसदिनचीते
जुड़के संजयनृपदिगाय।। पूंछीनृपजेंसीभई तैसीकहतसु
नॉड्॥५॥ ॥संजय०॥ ॥छधिनकीगुरुछत्रधर छत्रिधर्म
नररूप। सांतनुगंगातेमभव गिस्यापितातचभूप॥६॥सुनिपि
तुबधमूर्छितभयो हैसचेतक्रियप्रभा फैसे छलफरिममपिता
कहहुगिरायोकृष्णाणाकार्तिक शुक्लत्रयोदसीजुधारंभसहे-

(११६ पांडचयशेंदुचंद्रिका. त॥मछच्यूहभीषमरचीअर्धचंद्रकपिकेतु॥८॥पछिमपांडव पूरफुल जुरीसैन्युयहभाय॥मानहलोपमृजादूईं सिंधुमि लेआय।।९।। कस्यौयुयुत्सुतिहिसमय अग्रजकोउपदेस । जाकेंचलगरजतनृपति सैन्यनरहिहैसेस।।१०।।भूपजुधिष्ठिर धर्मनिधि उपदिष्टाजगदीस॥भीमधनंजयभटजहां हैजय विसवाचीस॥११॥कहेसुयोधनबचनकटु मिल्योधर्मतेजाइ अधक्षिोहगीसैन्यले लियोपार्थ उरलाय॥१२॥ कहिअ ी नदोडसैन्यविच रथथापहुयदुवीर।।जोलौंजुधकरतापुरस लरचौमोरसमधीर॥१शारथथापतअर्जुनलरव्यौ दोउअनी ककरध्यान॥बांधवसंबंधीसमुसि डारिदियेधनुबान॥१४॥ अर्जुन। कवित्त। काकेऔर भतीजेमामेभागनेय श्यालेबंधुचहिनेऊपितामहगुरुद्दिजमारियो॥रुधिरकेभीनेभोग कोनऐसौरजचईयातेश्रेयमानतहंभिक्षाअन्नधारियौ।पुल कितभयेहैरोमकंपितसरीरमेरोचिफलहदयसाईंकैसेकलपारि चो।कोउकहोसूरकौऊकायरअसाधुकही ऐसेजीवितेतीसंदे भलोहारिची।।१५||अर्जुनअरपंडात्माकौनासमानैमत्तपौना तसुसतनाहींागिनजरियो॥जलत्तैगलतनाहिरिदैनाहिश- स्त्रनत्तैव्यापकअद्वैतव्योमकोसोचितपरिवो।जीतवतेराजमरेही तैलाभस्वर्गसाजछत्रीकौअनन्यधर्मउच्छवतैलरिखो।वारियो नचरियोनांगरिवीनगरिचीत्यूंहारिवोनहरिसोनामारिवोनमरिवी ॥ १६॥ ॥दोहा॥ ॥अग्निदत्तविषदत्तनर क्षेत्रदारधनहा रविहुरबफारतसस्वगहि अबधवध्यषट्कार॥१७॥ विता ॥प्रथमहलाहलदियोहो भीमसेनजूकूदुजैलारवाये हचाच अग्निमैंजरायेहै। तीजौद्रौपदीकोअभिमनवैवारकी नोचौथेसबवैभवकेअंगहीछिनाये है।।पंचमरसाफ़रयोसियनफूं (११७) . पांडवयशेदुचंद्रिका. पठाइदियेछठेहाथसस्त्रबंधुमारिवेकौआयेहे।एकअंगहीने वधदोषनहींहष्णाकहेकुरुषट्-अंगातताईत अधायेहैं।॥१७॥ ग्यारमीअध्यायदिव्यचक्षुदै दिपायोरूपकेउसीसनेत्रपायकेउ भुजाधारीहै।सूर्यन्द्रअग्निजैसेसलऔर भूरवनहैदांतनकीरेख बीचमरीसैन्यसारीहै।रत्नादिककोट्यावधिकरीहेप्रसंसातादे खिकैकिरीटीदेहदसाकी विसारीहै॥ दूजियेप्रसन्नसांतिरूपत दिरवैयेदेवमेरोह निमित्तसबैरचनातिहारीहै॥ ॥दोहा॥ ॥ अर्जुनगहिगांजीवको कियोऐचिटंकार।तोलीपदचारीनृपति कियपरदलसंचार॥१९॥भीमादिकबांधचकहत ऐनभरतकु लरीत॥अधिकदेरिपरिपुसैन्यकुंआतुरहोनअनीत॥२०॥क ष्णकहैनपक्कूचना काउसुभकारनजात॥भीष्मद्रोनइंपरिक मन करिनृपंबूझतबात॥२१॥ ॥सचैया॥ ॥तितविष्णपदी सुततेविनतीइकभूपयुधिष्ठिरऍगुदरावै।।अचजीतिरुहारद्वैरा बरैहाथमेंजारूपालसपासोइपाचे॥धरतैकरप्रीतिकिधौरनत विविधामैंअहोनिसजीअकुलावै॥ कुरुभूषनभीषमएककहोह मघोररचुदावेंकीकाठमंगाये ॥२२॥ ॥दोहा॥ ॥जोयहांआ ज्ञामांग नहिंावतकुरुराज॥हुमप्रसन्नहोयतनहीं होवत्ततो रमकाज॥२३॥अबतेरीजयहोइहै गुरुजनदेतअसीस॥हमतो कारनजीवका भयेअन्यायअनीस ॥२४॥ नृपः॥ ॥जोलौं भीषमद्रोणदीउ सहस्रधरैजुधन्याय॥तोलौइंद्रादिकनजुत मेरी जेयनलरवाय।।२५।। भीष्पकहे पूरबधिया तिनकोदेहंप्रष्ट ।।मा रवानगांजीवधर बातफरहिममनष्ट॥२६॥द्रोनकहैअप्रियवचन करिहैसत्युपुकार ॥ताहिंसुनतथनुवानसब दैहॅकरतेंडारि॥२७ ॥ ॥सवैया॥ ॥कबडूनलरचीनसुनीकहैसंजयदानकथा दभूतनचीनी॥सुरराजकैजाचवेदानीधीचभोवततेजीतचेकी .

(११८) ।क पांडवयशेंदुचंद्रिका. विधचीनी।कुरुपांडवसैन्यजुरीतिहीबेरमेंभूपयुधिष्ठिरविनती कीनी। जिनतेलरिचोतिन्है भीसमद्रोननैजीवादियोजयन्यासि रवादीनी॥२८॥ ॥दोहा॥ ॥ गुरुजनवरदानले गयोजुधिष्टि रतात ॥धौरभयो दिवसजुध तीजेदिनकीवात ॥२९॥ वित्त॥ ॥संजयकहतएकगांजीच महावीरपांडवमजास्यौतहां सुने हैवरवानमें ॥देवदैत्यनागकोट्यावधीतैलराईउतैइतैमेघ वृंदनरुकाईच्योमथानमै ॥ ऐसीचपलाईतापैछाईचपलाईदेखि तोरुन्ययैबधगंगापुत्रकीनीदानमैं ।नैनपिताध्यानमेंज्यूंसारी अज्ञानमेंझूवानरहैम्यानमैपखौवाकटेपानमैं॥३०॥ ॥ दोहा ॥ ॥कोईफहैअज्ञानक्यौं स्वयंब्रह्मकूहोय॥तोक्यूंसंदनचक्र कर धस्यौप्रतज्ञारचोइ।।३१॥ ॥कवित्त॥ ॥ती द्योसकरुन इशत्रुसैन्यकोहटायकिरीटीकौआपकोपराक्रमदिरवायो।सा रथीमहारयीजेदोनौकृष्णचक्रतहै प्रेरकुंअस्वसस्त्रछिंद्रनहि पायोहै।आरोपीछेसव्यअपसव्यजोनिहारताळूरथनालरपोचेस रापंजरयौछायोहै।।यानबीरबान बचावेप्रानवासवीकेगंगापुर अचानकोचितानसोवनायोहै।॥३२॥ पित्तामहपारथकोप्रबल प्रहा रपेखिपार्थिवअनेकएकएकनाअरोरहो।।अर्जुनउदारबलअ- साकी विसारिबैठोवामपानस्थिरीभूतिगांजीवधरोरहो।पैजको- निचारभक्तपैजप्रतिपापेकोरथअंगधारिरासिचावकडरोरहो।।ता छिनविसभरवासमरकौकीनोकोपकम्मर छटिपीतअंबरपरोरहो ॥३३॥ करीही प्रतिज्ञाअश्वप्रेरकप्रतोदविनीलोहुळूछबूनयुध आदिकीयेचानी है।ताहीकूविसास्तिकस्यंदनकोधारिचले भीष मपैताहीबाररसाअकुलानीहै। नाहिसमझाइबेकूकटितवुलौ हेपदधृजेमतिदासकीमतज्ञाउरानीहै॥पटकौतथाभिप्राय चडेलोफस्टपरैताफौंसंगछांडिदैनौनीतिकीनिसानी है।।३४॥

पांडवयशेंदुचंद्रिका. (११९ ॥दोहा॥ ॥श्रातुरनररथःउतरि पकरेहरिकेपाय ॥यहअन्यायकाकरतहो दोरतसस्वउठाय॥३५॥हरिआ तुरलविभीष्महसि डारिदियेधनुबान ॥मैसमीपअबमारिय तजियेकोपविधान॥३६॥आपकहीमैसस्त्रविन भूमिहरहुस बभार॥हमैत्रिकानागिने बोलहुवचनविचार॥३७॥डारिच कहरिहसिदयो कियउत्तरब्रजराज।।तजीप्रतिज्ञामोरमैं तोरम तज्ञाकाज॥३८॥जुद्दभयोनवदिवसपुनि घोरपरसपरघात ।। कहत पितातेतोरसुत नवमदिवसकारात॥३९॥ पिताभरो सेआपकै मेंधास्यौसंयाम॥चाहतपांडवविजयतुम करत अक्रतसेकाम॥४०॥ ॥छंदपधरी॥ ॥अर्जुनकेसरत- नकटेभाल॥तूंकहतवचनसतनाटसाल॥सुयोधनसुनहुपू रववृत्तांत॥एकभयोभूपजुतमदासांत॥रिवन कहत्तदीजे बताय॥ मोतैसंग्रामकोउजुरैनाय॥बरनारायणबद्रीनिकेत। तिनरिरचनबताएजुद्धहेत।तिनपैंजुधजाच्यौनृपमदंध।सीत लतोडबोलेकृपासिंध। हरिरिचतपस्याकरतले रिव॥जुधकाज औरकोउक्षत्रिदेखि।मान्यौनवचनफिरजुड़नाच॥नारायणनर तकह्यौवाच॥यक अस्त्रउचारनकरहुगूढ । मदानष्टहोययहदुष्ट मूढ ॥नरसुनतहकास्यौभूमिपाला। व्हेसावधानसजिसजाल ॥मंत्र्यौअभल्लसरकणसमुंज।पेस्यौसुरुफेसबसस्त्रपुंज।मुख रुफेनेनअसश्रवनमान॥ सरकणतेसंबकेरुकेप्राएग।निजसैन्य दुवित्तलरिवप्रणतकीन॥दयाजुत्तनृपहिरिविअभयदीन॥भुव भारहरनअवतारधारि॥विधिप्रारथनानीकैविचारिलेश्वजय सुरासुरअनूपावसुदेवत्तनयअर्जुनसरूपा पुनकौनजीतूं तोउपात॥तजिहूरनतीरयमानतान।।सुनिगयोसुयोधनाप- थान॥सुतधर्मायचंधुनसमान॥भीष्मतमिल्योहरिजुक्तभूपा।

(५२०) पांडवयशेंदुचंद्रिका. श्रादसहिपायासनअनूप। पिता कहत्तपुनिजोरिहाथ॥सब परतजातनिजमोरगाथ।वहकोनत्रियाजिनतेजुदीत॥जोस्यौआ परीनफरीपीटकहिभीष्मसिरवंडीकुंचरकाज रिनभातसंमुखम मकरहुराजातातैनहिंसनमुरबहोहुतात्तातासमयकिरीटीकरहि धातज्यूंकद्यौपित्तात्यूंकियोव्याजागांगेयमहाबलहत्तनकाजे ॥इकएकदिवसदसदसहेजार॥असवारपयादेकरसंहार॥४१॥ ॥ ॥दोहा॥ ॥राजपुत्रकसहसपुनि नवसहस्त्रमातंग॥ एसहसमारेरथी दस दिनबीचअभंग॥४२॥ इरावानअरजुनत नय उत्तरसरवस्तरवेत॥तीनपुत्रौराटके मरेमुदसदिनहेत॥४३ सतरासुततेरेसुनृप भीमसैनके हाथ।। मरेगयेबैवारमैं भी मजुद्धकैसाथ॥४४॥अयसिरवंडीहू कियो रह्योकिरीटीपीठ।। पूर्णत्रयाअंचासमकि भीस्मबचाईदीउ॥४५॥दीउबचाईदेखि नर मेलिदियेधनुषान॥ भयेपरामुखपिनको हत्तवोपापपिछा न।॥४६॥ ॥ कृष्णाचा ॥ भीष्मद्रोणनाकर्नको बह रिसुयोधनकर।।मुसकलछलपिनमारियो करिनहारहियहरि ॥४७॥लगेबानगांजीवके इंद्रवज के रूप ।।गिस्वौपितानर भूमि मैं सरसज्यासनरभूपू॥१८॥ छंदपधरी॥ लखिगि न्यौभीस्मकुरुहीनगई। पांडवनादिरहेघेरिसव।कीयेाज्ञा भीसमनीरकाज।सबलियेकमंडलु कुरुसमाज॥अविलोक्यो भीसमविजयोरकियेप्रगटगंगतिहबानघोर आचमनकि योजलपानाप॥पुनिकीकरन जुत्तप्रताप॥सुयोधनतोरा धीनवीर। मैमस्योअवहुकरिसंधिधीर॥तुमलरच्यौतेजगांजीव ताताफियेचाणमारिगंगाविरख्यात॥ ॥कर्नः॥ ॥आधीन पममसत्यवात।ततकालसंधिजबकरंतात इकदैहमोहियर दानाप॥सस्त्रनमरुताकेमतापः।। मृतलोफकिरीटीचिनाधीर ।।

पांडवयोंदुचंद्रिका. (१२१) ॥ वधकरतातेरोकोऊनवीर।सीअभिलाषारहततौर ।। ताकेरहजुधनृपकरमघोर॥ भीसमढिगजामिकनरपठाय॥ अबहारसैन्यदोउसिवराय॥४९॥ ॥दोहा॥ ॥करनहिसे नापतिकियौ चाहतहोतवपूत॥करनकद्यौदिजद्रोनछत यह नहिहोयअभूत॥५॥भयोद्रोनसेनापतीजुद्धबनेगोप्रात ॥आज्ञाव्हेजुधदेखिकै फेरफहूंगोतात॥५१॥ तेरीनवन- क्षोहनी पांचधर्मसुतपास॥रहीसुमततेरेनृपत व्हैहेवेगही- नास॥५३॥ ॥धृतरा०॥ ॥कबित्त॥ ॥जानेअस्वतीसअश्व मिधनकेवोधिरारजोनिजरथनाछुरायेगयेकाहुये॥रामडु- कईसबारनिछत्रीकरैयाभूमिजुधकौसिरक्याजुधजीतिलीनी जाहुपै।। कासीराजहकीकन्यातीनहीपकरल्यायोस्वयंवरजीतिके नात्योगयोताहुपैं। ऐसोपिताकोभलहीजुकेमिपातभयोस योधनमूढविजेचाहतहैयाहुपैं।॥ ५३॥ ॥दोहा॥ ॥ जाहूसूतकु रुक्षेत्रमें पूतनमानतरंच ॥जोभवस्यासोइहोयहै कीजैकहांम पंच॥५४॥ ॥ इतिश्रीपांडवयंशेंदुचंद्रिकाभीषमपरवणी दसममयूरवः॥१०॥ ॥श्रीगोपालकृष्णार्पणमस्त।। . - .

(१२२)
पांडवयोंदुचंद्रिका.
SE
:
L
मत
।

(१२३ )
पांडवयशेंदुचंद्रिका.
श्रीगणेशायनमः॥ ॥अथद्रोणपर्वप्रारंभः॥ ॥दोहा॥ ॥
पांचदिवसलरिवद्रोनजुध हत्तनापुर में प्राय॥दोनपतनपांड
विविजय संजयकहतसँनाय॥१॥ ॥श्लोक। गेहेयस्य-
श्रुतिपटत्तिनितरांनानास्वरैब्राह्मणाः चीराणांहिभृणोमिघोषमु
दितंजाकर्षिताधन्विनां ।।उच्चैणुरवादिवाद्यविविधैर्नृत्यंतिवा
रांगनाः हाहाद्रोणकुत्तोसितस्यसदनेवायंसमुद्दीयतां ॥२॥
॥ ॥ धृतराष्ट्रवचन श्लोककोप्रासय॥ ॥सवैयाँ जितना
द्विजराजकेगेहविषेहिजघोषश्रुतिसमृतीकरते॥फिरसोयधनु
मुरवीसुनिकैकुरुराजकेसत्रुसबैडरते ॥ चजिवायअनेकहिगाया
कंगानतहिसबश्रौतनकौहरते॥तितहाकित्तद्रोनविडारिगयो
बहुसब्दअसंभवसेवरते॥३॥ ॥सोरठा॥ ॥महाअसेभ
वभीत द्रोनपतनसंजयदुसह ॥भारवहुजथाअभीत जुधकि
योदुजराजने। ॥संजय॥ ॥सया॥ ॥जीतिसकैनि
नतैनरकोजयदाइजोहैगुपालसोनाहीं । वादिजराजकेचान
समानकरेउपमानकालसोनाहीं॥हाथनमैचलचालानोपम
हैचितमैचलचालसोनाही॥द्रोनबराहकीडादन परिकेकादिची
कछुरखालसोनाहीं॥५॥ ॥कवित्त॥ ॥ोनकेप्रहारेबानमा
रेज्यूविचारेबुछभये मतवारेमेर उकैमुकेगवानकोसधा
नुसत्रुनानको प्रयानसाथ विकेजहांकेतहालस्वतसकेरुके।
नैनडिराने ऐन.नुतुतरानेससैनथहराने मुखअधरू
सके।बावरेसेव्हेरहैउतावरेजितेतितेजाचरेकैघालेरहैडाचरे
लुकेलुके॥६॥द्रोनकयौमागसुयोधन नृपमाग्यौवरजीवत्तही
धर्मराजमोहिपकराइये।।अर्जुनछतेंयहैकठिनादिगयालनको
दोनकहेदोऊकोवियोगकैसेपाइये ॥ त्रिगाधिपतियोसुसाने
ममरकोकीनोकहीसेनकोद्यांअरजुनचुलाइये।नेमनरकैच्य
IL
॥४॥

(१२४)
पांडवयशेंदुचंद्रिका.
दैन्यायुआसागिनेनाहिशत्रुजुत्वजाचैतासन्मुषसिधाइये
॥७॥ ॥दोहा॥ ॥नहींदीननादलीच्यता अर्जुनके दोयनेम
आयुअन्नदैहैअवसि आयुरारिवहक्षेम॥साइतेएफगांजी
पधर उतैपचासहजार।।बहुतरथीइकपहरमें कीनेविजयसंहार
॥९॥मोहअस्त्रतेसारथी रथीकृष्णारूपालरपरतभरिप
रसपर हततजाननिजसाथ।।१०।। (कवित्त संसप्तके
युद्धकुंकिरीटीकेगयेतैकरिप्रेस्यौभगदत्तभीमहकोअंतलैरह्यो
॥स्ववल विचलनिष्ठुसब्दसुनितिष्ठतिष्ठायोयूंउचारतहिगांजि
चछैरह्यौ।मास्यौवानएफहीप्रचारिढिगावतसौपरचौवामू
उपैलेरखावैतुंडच्चैरयो॥धर्मजकपिजैकेवित्तानसेतनेंगेतातैमह
रत्न्याट्रिकीलरोपीवेकौव्हेरद्यौ ।।११॥भगदत्तुनें वैष्णवनस्त्र
चौअर्जुनपँनारायनचीचमेल्यौनरकूबचायकै॥पटकावरदान
कोहोद्रष्टकाजसत्रुसीसकृष्णनेकटायगेस्यौकथासमुमायके।
चहैगजमारिसीसडारीभूपें भूपहुकौविजयउचारिनिजबलकोसु
नायकै॥भिरहेजेजेअायकैकेायुधउठायकवातेजहकूपायके
तेपरेमूरछायकै॥१२॥ ॥सुयोधन ॥ दोहा॥ ॥इदिनअर
जुनविनरह्यौं धर्मनपकस्यौआप॥बरब्रथाकिअथवाव्रथा भ-
येतोरसरचाप ॥१३॥ ॥दोन०॥ ॥ चक्रव्यूहअवरचतहूं आ
जपफरिहंभूप॥ नातोहतिहौंसूरकोऊ ताहीकोअनुरूप॥१४॥
अर्जुनौजुधकोगये संसप्तकेसंग॥तापीछैहिजद्रोन की-
नोच्यूहअभंग॥१५॥ ॥युधिष्ठिर।।
॥घ्यूह भेदपैहारजया
लगीपुत्रविरव्यात॥वेधत प्रद्युम्नहरि तूंअथवातवतात॥
||१६|| तोपिनअप्तिमनतीनहू चतोनहिंयहकाल॥तूंवैधहूंतव
प्रष्टपै रहिहैहमसबलाल॥१७॥चक्रव्यूहकेवेधसें अभिमनेक
वउदार ॥धर्मराजादेसते चल्योकवचधनुधार॥१८॥ ॥

.. पांडवयशेंदुचंद्रिका. कवित्त॥ ॥जयद्रथको मृत्युनौअजयसुयोधनकोछहुवीरधी रनकोअजसलरवागयो॥विजयजुधिष्ठिरकोरूजसकिरीटीजूको द्रोनकोपतननाहिजतनररवागयो।सुभद्राकोसोकअहवातनास उत्तराकोकेउन्नुपपुन्ननकोकालज्यूशिषागयो॥इननेपदारथकोच- क्रव्यूहरंगभूमेअर्जुनकेागमतैनागमदिखागयो।।१९॥द्रोनकों दृहायोदलदुसहदियातदीर्घदारुनदुसासनसेचक्रव्यूहचनायो ॥जाकोभीर भेदतेको भर्तवसभूषनयोंपायपितुअाज्ञाभुजभा रभीमभायोहै।पारअवनीसनकेसीसअमिसेसकीन्हेकेलेइकु मारमारेतोउनभधायो।सुभद्राकीकूरवकीबलैयालीजेबारवार जाकेबीचचीरधीरश्राभिमन्युजायो । २०॥बैरीबरयानतहैसुयो धनकीसैन्यबारेअर्जुनतेंजाकौतेजलखतसवायो।।वडिचाको भोरजैसोचक्रव्यूहत्तापैवेगदक्षजग्यकाजवीरभद्रदरसायोहै। बापहूकौआकारजौरसबक्षत्रिनकोताकेमुरवबापजैसोआपप दपायाहै।सुभद्राकीकूरवकीबलैयालीबेवारवारजाकेबीचवीर- धीरअभिमन्युजाया ॥२१॥ ॥दोहा॥ ॥काकाऔर भती जके भयोजुल्पद्भूत।।दुःसासनमूर्छितभयो ताहिभागोले सूत॥२२॥ ॥सवेया॥ मातापितासमुद्रारुधनंजय हैपचतेजकदीविसरेना ज्येष्ठत्तौकष्टमैद्रष्ट परैनकनिष्ठकीक टमैप्रष्टफिरैना। तातकोश्चातडरेबहुसत्रुमेंभ्रातकोतातसदैव डरैना॥काकेकीहोडभतीजकरैनहिकाकोभतीजकीहोडकरैना ॥२३॥ ॥कवित्त॥ ॥सुयोधनकोपकियेसुभद्रानंदपैचल्यो ताडूंदेखिसेनापतिद्रौनअकुलायो । बारबारबरजूंमैचरजोन- मानसठमरीद्रष्टचालप्रलयकालसोलरचायोहै।अकलेकुमारला रवीलोकत्तरीवाहनीकौमारिकैअवारजमलोकळूपठायोहै।। आसपीकौछवयोज्यूअसावधानजातकितैआगैदरिखमहा . " L

(१२६)
पांडवयशेंदुचंद्रिका.
वीरवासवीकोजायोहै।॥२४॥ ॥ छंद॥ ॥दवावैत ॥
अर्जुनकेपीछेकुरु दलकेउमगायेते॥बंधनचक्रव्यूहहिंयमसु
तके फरमायेते॥अभिमनकेत्रिहाइनधीरेरथलागतहीवगतरत
नधारतरवसंखनकेवागतही।रुगोसहितइतवायुदिनरवो
सो॥ भैचकसोकालहिनूपपुत्रनकोभूषोसो। दिनमणीकीरस्मी
निरतेजहीदरसावैत्यूं॥कंपतभूभूधुरअहिकोलहिकसकावैत्यूं।
कायरमुरयसूतुतरानेकरकंपते है ।।सूरनकेजसकीपरलोकेहि
कीसंपतहै।व्यूहकरिबंधनगोकचरनककुंडनमैं॥ छत्रनकीछा
यातकमारतसुरमुंडनमछाईसुधराईदलअर्जुनकेछानेकी॥
लाघवताकरकीसुघराई मुरचलौनेकी॥निररवौआचारजछविस
भद्रानंदनकी। करकीचलचालनगनुसत्रुननिस्कंदनूकी।
पंचनतंबोलतचबअद्भुततापेरचूहुं ॥अर्जुनऐसीभईश्रष्टीकुं
देरहं ॥दाहेअरुवायैधनुमंडलसरसंजुतहैं।।रस्मीजुतसूरज
परीबरवहिमैरजतहै। कालहिकेवालहिसेवाननवरसाजे।
सालननटसालनदरसाल हीदसावने। अभिमनकेसनमुख
अजरायलजेअडतेहै॥जमपुरकेभलकेउघायलतड्फतेहै।
चीरनकेजुट्नविचचालनतिहबेरुकी सेंधेमुहवालनकेभाल
नसमसेरूकी।वीरानृत्तनचिकै भटजूटैरचिरचिकैयूं॥मचकैल
गिवाहनषचिपचिकै धरलचकैयूं गडगडतेतूरनवडचडकेते
उलड़तेहै।। भिडतेफेऊमुडतेकैऊडतेकेऊपडते है।किलके
मिलमिलकेदलवलकैअगवारी।चलिकेछलबलकेअनजल
कैइकतारी।लेकेउडोलेकेउनौलेतरवारनळू ॥रचीले निसान
केचोलेअरिमारनळू।। भूमेकेउघूमैकेउवाहनरेथनागूपैं। मै
केउमैभडअछेहयाप्पै । क्षेत्रन सबुनकीसेनामरिपर
नाईजोगनीलतन पवनकुंभरतीहै ।। कोकादुसासनकूमू-

१२७ (१२७) पांडवयशेंदुचंद्रिका. रछत्तकरिडास्यौही।देसत्तनृपपुत्रनजुतलछमनळूमात्योही। भानुसत १ द्रोनी २ कृप३ भूरिश्रव ४ आचारिज ५ सल्य ६ जुतमिल विरथीसोकीनोजवमारनकज॥दीनोसिरसंकरकों पलरतपलचारीको॥पितुकीजयमृत्युभयजयद्रथअपकारीको लारवनकौदेकै विधवापनअरिप्यारीकौं।उत्तराकोदीनोधि- धवापननिजनारीको॥२५॥ ॥दोहा॥ ॥मस्यौकंवरसं- ध्यासमय भयौसैन्यबहार।सोकसिंधुविचधर्मसुत कर करियूठतपुकार॥२६॥ ॥कबित्त॥ ॥नृपतगांधारजूकीत नयाउछाहकरौकुंतिभोजतनयाकेउछचमिटायेते॥ वासुदेव र्जुनकुंबदनबत्ताउँकैसे युयुत्सुकूि कितैसीरवदेहोविचलायतें॥ युधिष्ठिरकहतमोकूचनकोगमनश्रेयमनकोमनोरथसोमनमें बिलायते॥ भलेमनभायेपायेराजपदअंधपूतसभद्राकेजा येचीरस्वररासिधायेते॥२७॥ ॥सवैया॥ मधुभोजनमैम निभूषनमें मृदसेननमेंजहांपानिपिया। सिरगोनन में सुधभोन नमेंथिरवाहनसुतदेरिपनिया।।करियजिनकोइनटाहरअग्रसो हायप्रवेअकुलातहिया॥धिकमोधिकक्षत्रनजुधबीचकहाक हुचालकुंअग्रकिया॥२०॥ ॥दोहा॥ ॥अर्जुनदेवेश्राइकै सांगसिपिरहरिसंग।नहिवादित्रमदीपनहि नहीरागनहिरंग। ॥२९॥ ॥कवित्त॥ ॥आयोवीरसमसप्तकगनकौंसंभारि जबसूनेसेसिबिरदेखिसोकबेसुमारहै। पूछतडैदुसहसानात- नामात्यनसूफेसबकेसुंगयोंकिरीटीवेकरार है। भर्तबंसभूसन जोदुसनदूसहगनकुंताकोलडेतोमेरेभानकोआधारहै। बलभा गनेयकहाँसुभद्राकोछावाकहांकहांपांडुनंदनअभिमन्युकुमार है।।२९॥ नानासूरसेनतेरीमाताकुंतीवीरसुयापितामहशांतनु त्यूपितानृपपंडुहै। कीनोसुरलोकअभेलीनीनरलोकजीतिवासी (१२८) पांडवयशेंदुचंद्रिका. नागलोकहुकेमानतबलचंडहै।केसवकिरीटीजूसूंकहैंअभिन्यु- कहांसत्रुजीतिवेकौतेरेबिरदअरखंडहै।देषिध्वजदंडतजिपंडअ रिठंडतानतेरेभुजदंडहतेअभयब्रीडहै॥३०॥ अर्जुन ॥दोहा॥ ॥क्यूंधारतहौसस्थतुम महावीरबहुभांत तुमटिगसिसकैसेमस्यौ यातचितअकुलात॥३१॥ ॥यु धिष्ठिर॥ ॥कवित्त॥ ॥तेरेगयेपीछेद्रोनचक्रव्यूहरच्या ताकौवेधवेकोकीनोपनप्रेस्योमैकुमार ॥बेधिहौमेव्यूहपीछो आयवेकोसंसयहचारुभ्राततेरीपीठरहेंगेनिकारकू॥सिंधुरा जवरकेप्रभावचारोंजीतिरोकेरुद्रकेप्रतापमैलरव्योनहोनहारकू ऐसेजीपिरायबैठेसत्रुकोसिरायबैठेलारतभिरायकेमराय बैठेचारकू॥३२॥सल्यछेद्योसूतसूतपुत्रधनुद्रोनीअश्वभूरि श्रवानानेद्रोनदालकरचालकूदुःसासनपुत्रभयेविरथगदाते जुस्योमूर्छित्तभयेकौंदेखि हास्यौपिहालक्॥ दत्तीकेपछारिवीर मारिमत्यौलारवनकूलछनकुमारलूचिदारव्यूहजालकू।।मंगल निचारिबैठे विषयविसारिबैठेयूंअलोकधारिबैठेमारिबैठेबाल इं॥३३॥ बार बार वारिद्रगधारवहैसभद्राकेक हैपाथनाथजू सिरानोपलरावरो।। भीमश्रादिभूषनकोधारतरूसाभरति नकौनरेभूपभयोमतिचावरो।कुररीलौंकूकैहूके उठतकरे जेबीचदेवाप्यारोपूतकहाजुधौउत्तावरौ ॥ होतोसुबछबी मेरेजानतोनिछत्रीदलद्रोनच्यूहदारुनविदानकंडावरौ॥३४॥ मातभयेअग्रजतिहारौसोसंचारिरथसारथीव्हेसैन्यवीचअभ यविहारीहै।कपिकीगरजघोषदेवदत्तगांजीवकीरिपुरिपुनारि नकेगरवप्रहारीहै। नामांकितवानमेरेपानकोसंजोगपायाछे अाछेचीरनकेपानकौप्रहारहै।जैसेअत्ररोवेतेरेपुत्रकीकलित्र- प्यारीतेसेपुत्रसत्रुकीकलिंबतूंनिहारीहै॥३५॥ ॥अरजुन

पांडवयशेंदुचंद्रिका. (१२)
॥ ॥दोहा॥ ॥प्रातअस्तलोनारहै जयद्रथचाममप्रान ॥ दो
उरहोतोहोडमल मोकोनरकनिदान॥३६॥सरनयुधिष्ठिरक
ष्णकी अथवाभजिनहिंजाय॥ तोइंद्रादिसाह्मतोऊ पितृनदै हुं
मिलाय ॥३७॥ सुनीप्रतिज्ञापार्थकी दूतनततिहिबेर ।।जयद्रथन
पभगिजानकू मातकियोहियहेर ॥३०॥कहेसुयोधनद्रोन जय
थरारबहुअाप॥पातअस्तमितभानुलौं ममजयतोरप्रताप ।।३।।
द्रोनक मगराजको करित्रापराधअमीत ॥जंबुककीमतिसिंधुनृप
यहतोपरमअनीत॥ ४०॥विधाप्रातरचिहूंचमू सकटपद्मशुचि
व्यूह। तावेधनसमरथनहीं सरइंद्रादिसमूह ॥४१॥ एतेही-
में भवसिवास होइसिंधुनपनास ॥अवयसुरखनकौंभोगिहीं नि
धिके स्वर्गनिवास ॥४॥भूमिसयनरचिपाथकै आपहाथवजना
थ॥ताहिसवायरुस्वभमैं शिवपुरंदरसयसाय ।। ४३।। शिवहि
रिझायरुपायतहां एकवानअहिरूप॥जयद्रथवधहितपारूप
ति दूजोअस्त्रअनूप ॥४४॥अस्त्रसिखायोस्वनमें हरिनिजडेर
निआय ॥ कहतकोमनाअर्धनिस दारकतैसमझाय॥४५॥ ।।
॥कवित्त॥ ॥सुनोमिनदारुकजयजयद्रयवचावेकाजद्रोनसेत्र
साधमिलिब्यूहकी विचारीहै।प्रातनहिंछोरंइंद्रादिकसहाय
जा–अर्जुनकोसत्रुसोहमारोसत्रुभारीहै।अर्जुनहैमेरोमानमें
हूंपानअर्जुनकोअर्जुनकीजीवनसोजीवनहमारीहै। अर्जुनवि
नानछिनदेवसकूविश्वहूकूकहैगिरधारीमैंसदैवऐसीधारीहै।।
४६॥ ॥दोहा॥ ॥ समरथसज्जीभूतकरि रारबहुमोरसमीप॥
अर्जुन नमरेतऊ मारिहौसिंधुमहीप ॥४७॥ रातप्रतिज्ञाया
दकार चट्योपातकुरुवीर ॥ महिजयद्रथअकुलातदोउ धरधरा
ततनिधीर ॥४८॥ ॥कवित्त॥ ॥कोपकीकटाक्षतैनि-
हारतहीरिपुऔरकामकीकटाक्षबामतिनकीपितातहै। मू
।
....-ma...

(१३०
॥
।
पांडचयशेदुचंद्रिका.
चींगांजीयताकौसपरसकरतअरीनारनके कज्जलकोपरसमिः
रातहै।।दसतहैओठापपीरकोसहतवीरसत्रुबंधुऔटनकीपा
रसोचिलातहै। धारिउसकारनहीअर्जुनकेसत्रुनकी स्त्रियनकी
चूरनकोचूरनदियातहै॥४॥ द्रोन ।। ॥ दोहा ॥
॥ ॥रिनविनजीतैसत्रुके तूंअर्जुननहिजात॥जोमोहिजैहै
जीतिअव तवपनसांचौतात ॥५०॥ ॥ अर्जुन ॥
तुममेरेनाहिसत्रुहो श्राचारजद्दिजवंस॥ जिनतहारनजीतसमा
छत्रिनकहतमसंस॥५१॥दैगुरुफौसमदछिना अपसव्यच्दप
राथ॥जयलछनदैद्रोनक चल्योनाइकैमाथ।॥५२॥ ॥कषि
त॥ ॥ कहते किरीटीजूस्कारहेकलहक्रूरमहासूरबीरनकी
मनमैमनीरही॥वाहनकेवेगवासुदेवप्रेरीवैतेवाजिवाहतोभईना
चिनचाहत्तोधनीरही।दोयकोसागसत्रुनासकरेऐसेवानदोयकोस
पीछेपरचक्रत्तअनीरही।पायेहैनृपतिपतिअछरत्रपति पैपाथ
सस्त्रसंपतिनैविपतिबनीरही।। ५३।। चारचारकोसविस्तारदिसा
चारहीमेंकपीचिन्हलीयैव्योममंडलमैजूटिवौ ॥ ऐसोध्वजदंडरथ
वेगहेअरचंडसोजारवप्रचंडब्रह्मांडकैसो फूटियो। अर्जुनकी-
सीघ्रताकोकौनपेवरवानबनेएकसारथदूरपाथसआयुटूटिची
॥पांचसतबाननकोछिनमैनजान्योजायतौननिकारिवासघा
नचिटियो ।।५४॥ सुचि १ हासि२ करुगा३ औ रौद्र ४ ची-
५हैविभत्स ६ भयानक ७ अद्भुत प्रोसात ९ लौ चिरण्यात
है।रति हांसी २ सोक३ कोप ४ उत्सव ५ गिलान ६ भीति
विस्मै निर्वेद ९ थाई कारनकहते है ।। सरी १ रिषीरस
त्रुषिमै ३ राजा ४ सूरे ५ सकुनी ६ मैकायर ७ दिरवैये यु
धिर ९ मै सुहातहै। दोनूअरभातनतैअर्जुनकैहायननै
काटेप्रथीनाथनतैनौरसदिवातहै ।। ५५।। उनैवेनिकारबर
६

(१३१ )
पांडवयरोंदुचंद्रिका.
मालाद्रप्यसंपुट तैइतैअरचेतूननिकारतहीवनके । उनैदेव
वधूमालग्रंशिकौसंधानकरेगांजीवकीमुवीपैहोनहीसंधानके
।। इतजापेकोपकीकटाक्षभरेनैनपैउतैभरकामकीकराक्षप्रेमप
नके॥मारिचेकुंमरचेकूदोनएकसाथचले इतैपाथहाथउतैहाथ
छरानके॥५६॥जाहीपैसंधानबानगांजीव अर्जुनकोताही
अच्छरचरवचंचलचलातहै।। रूपरंगभूषनजेबसननिहारत्नही
छिनहीमोरहीके औरसेदिवातहै। मेरोहिबस्यो हैकैधोऔर
कोवस्यौहेऐसीअस्यविनसत्रहीमविस्मैविरच्यातहै।याहीरच्या
लबीचहैविहालसुरवालडारैस्चेतफूलमाललाललालभईजात
१६५७ ॥ गंगागतिगांजीवविराजितसहितघोसरवितनयाजूके
रूपइषुधारपैनीहै। सरस्वतीरूपजाकीपनचउदारसोहैलोकली
कबीदअदभूतजसलेनी है।नारायनढिगलैंचलीहैकुरुषेतबीचमहा
सूरबीरनजोत्तमैमिलेनी है।। हैतोगतिऊयदेनीचतुर्वर्गवेनीपर
होयन्त्रबैनीसुरलोककीनीसैनीहै।५८॥ कौनसमेतौननिकारै
द्रोनसैन्यकहेकरतसंधानछोरिभानकुंगहत है। दोयदोयकोसा
गेपीछैपायदइंदिसादसदसञ्जरकेपिजरदहतहै। जाकेताकेज
उत्तबजहांतहानबैतबैएकत्रानलगेफेरज्ञानेनरहतहै। अर्जुनके
बानकोप्रमानदेवसत्रुनके प्रानकौप्रयाननिजप्राननचहत है ।।५९
॥ ॥छंदपधरी॥ ॥करिप्रथमद्रोनतेजुद्धवीर।। जयलक्षनदै
पुनिचल्यौधीर॥दंतिनकीसेनासबबिदारिजबनाधिपतीअंब
ष्टमारि॥अवंतीपत्तीव्यंदानुष्यंद।कीनेदोपुत्रनजुतनिकंद॥ न
हिंसुतभूपहरिकीयोरखंड।निजअस्त्राहितेपायोसुदंड ॥मूहि
रिअर्जुनकीमिटाय॥हतिसत्रुसैन्यपरचेसपाय॥केउरथीओरहा
यगजारोहणकीनचिनासम्बर्जुनसकोह। वहसमयकृष्णनरनै
उचारि॥बहुअमिततृषातुरहयविचारिततकालअस्त्रतरचहुता

(१३२ । पांडवयशेंदुचंद्रिका. ल॥समझहुइघुमइपुनिअस्वसाल । निरसल्यकरंअस्वनपि वायू ।। करिअभययुद्धतूंसथिरकाय ।।ज्यूंकद्यौकृष्णत्यूंकियो पार्थ ॥सरबरहयसालाएकसाथ॥हयपायकियौहरिग्रहप्रवेस सोरह्यौपयादोविजयसेस॥६॥ ॥दोहा॥ ॥विधिरथह रिसारथिविगर पार्थभूमिगतपेरिख । उमगेअरिफानूसविनु दीपसलभगदरिख॥६॥ बिनस्थअर्जुनबहुरथी रोफिलियेजुत छोभ ॥ अगिनतगुनगननरनके ज्यूरोधतड्कलोभ॥६२ ।। ॥ ॥कवित्त॥ ॥ मूरखकेवैनमें नकुलटाकेनैनमें नमीनगति लेनमेनचपलाईऐसी है। ताररयगोनमेनयूंहिपुंजपोनमैं नविद्युतकेहोनमैनकोनजानेकैसी है॥सव्यापसव्यहकीफु रनीनजानीजायकिरीटीके हाथनमैजैसीहोइतैसीहै। जितेजित जेतिजेतिसत्रुसैन्यजुरेजबतिनैतिनैनेतिनैतिसीघ्रताअनैसीहै।। ॥६३॥ ॥दोहा॥ ॥श्रेष्ठयहीकोअतिथज्यूं कबहुनचेमुरवजा य॥ त्यौअर्जुनतेभिरिसमर बिनछतकोउनलेरवाय।।६४॥ ॥ कवित्त॥ ॥केप्रतिकूलजानैरवांड्यनजारंदीनोसानकूल- हैकेसत्रुइंद्रके कियेनिपान॥ भोजनकीबेरऔरपुत्रत्रियासप रसफूसवहीकोदक्षनकरचढतलरयावैतात॥आहवमेंअर्जुनके उभैवाहुएकसेहैलखेताकूगांजीपालातचक्रसोलरवात ।। बॉमा गूदक्षनदानकेागूबामवामनभूमापवेकेपैंडसेबढतजात ॥६५॥पार्थकप्रहारपरलोकप्रथीनाथनकोपेषिदुर्योधनपछि तातपानपीसेत्यौं।दुसहदुरापदीर्घकपीध्वजदंडदेखिदूसासन आदिदुतिहीनभवेदीसेत्यौं।सोहत हैसस्त्रतसराहतसरबची गावातकिरीटीबागदसहूदिसासेत्यौ ।वरकेबरीसेंरूपसरस सीसेइतकीटंडकसीसेउत्तेवेच्छरअसीसेत्यूं॥६६॥ ॥सवैया ॥ ॥सिंधुनरेसकेमारचेकाजलयोपनवासवीसधगयोचल ॥

(१३३)
पांडवयशेंदुचंद्रिका.
जाकेप्रचेसकेपीछेडिजेसनेमारविदारकटारदियेरवल ।।चिद्दहेऊमा
रसुडुपराक्रमताहिकेजुधमेनाहिकछूछल॥पौनमृगेंद्रनैहोतग
जेंद्र दोनकेपोनतेपांडुनौदल॥६७॥ ॥इतिश्रीपांडचयशेंदु
चंद्रिकाद्रोणपर्वशिएकादशमयूरवः॥११॥ श्रीकृष्णार्पणमस्त।
अथद्रोगपर्वउत्तरभागप्रारंभः
Ka
.
11

(१३४) ॥ जाय॥३॥ पांडवयशंदुचंद्रिका. श्रीगणेशायनमः॥ ॥ युधिष्ठिरउवाच॥ ॥कवित्त॥ ॥ते रिकाजवनही कहतीकिरीटीमोसुसातकीके जोरहीतेंसत्रुनकोमा रिहो।कृष्णबलदेवजोपैहोयनसहायत्तोहएकसैन्ययहतेसवैका- जसारिहौं ।सोहीकाजाजकोसहादसलाद्रीनव्यूहत्तोविनतरैया कोहताहितेपुकारिहौं।देवदत्तगांजीवकीघोसनसूनुहूंतेरे गुरुचिन प्रथामैकामुरबुदिरवारिहूं॥१॥ ॥सात्यकी॥ ॥दोहा॥ ॥ ॥जवनसैनदससहसगज अर्जुनलायोजीत । तेउजुध सनमुरचरपरे लरबहकालविपरीत॥२॥ इनाहिद्रोनजुतलोपि के कर्नसैन्यकूधाय॥दुसासनजलसिंधुहनि मिलहविजयते । कवित्त ॥व्यूहकउलंघिळूसाँचमोक्ने- कनाहि आपकोहैसोचमेंभरोंसेछोरूकौनके।हमेयाहीकाज दोऊकृष्णयहांरारिवगयेजीवितग्रहनतेरोसन्योनेमद्रोनके॥जु धिष्ठिरकहै मैकाक्षत्रीनाहुभीमादिकमेरेहेसहायक्यौनजाहुउत गोनके।। एतीसुनीमौनकैदिवायदानविप्रनकूच्यूहदीनचल्यो रथीचेगपौनके॥४॥ ॥दोहा॥ ॥सकटच्यूहधुरद्रोनतें म थमहिभयोमिलाप ।। द्रोनकहतदुरधर्षसों लरियसैनेयप्रताप ॥ ॥५॥ जामगव्हैतबगुरुकट्यौ रेसात्वत्तमदअंध॥त्यूंअपसच्यहै। निकरितूं कैतुहितूटहिकंध ॥६॥ ॥सात्यकी। जामगन्याचारजक, कुटतनसिरवकूसोच॥तिनकुंजोदूषित्तक है तिनकीबुधिमहिपोच॥७॥आडैफिरफिरहटगयो तीनवे रहिजद्रोन ॥ तिनसात्वतजुद्दकुसलते कहिजयपावतकौन। ॥८॥ मारिसारथीद्रीनको कतवरमाकौजीत॥ समझाईदुसा सनहि कपटद्यूतकीरीत ॥९॥ सातकिचानन विकल रन- त्याग्यौजुवराज। दूसासनचितचकित्तसो गयोद्रोनपैभाज ॥सवैया । सीसके भूषनभूमिपरेकटिसात ॥

(१३५) पांडवयशेंदुचंद्रिका. कीचीरकेबानकेमारे॥द्रोनकहेहसिकै कुरुराजआयेभले करमुंडउघारे ॥ बीजकोबोवतपूतदुसासनजान्यौनहींफल लागिहेरवारे ॥जोप्रियहोइसोजाहरकीजियेपागमंगावैकीचू रीप्यारे ॥१॥ द्रोनकहे भ्रकुटीकरिबेक भयैरूतकायरमंगले गावै ।। राजसभाबिचनाहररूपरुकामपरैपरस्यालकहावै । क्यूंतुमसेनृपतनदुसासनगालवजायकैवीरतापावै॥सात्यकी तैबचैजन्मभयौनयोसूपबजावे किथालबजावे॥१२॥ छंदघनाक्षरी॥ ॥ करैनासंधानसरकोपजुतवानीदुजक हतदुसासन भाग्योलविवारवार ॥सातकीकेबाननतेत्रास तहीमेरोपूतकिरीटीकेबाननसहोगेकैसे प्रकार ।।बरजतर- च्यौद्यूतकाननपिताकीकीन्हीद्रौपदीको ऐच्योचीरसंधियूंनली नीधारे।।जाननक्यूंरबेले अजाननलोपासनकेबाननके थ व्है हैप्राननकेलेनहार॥१३॥ टेढीत्रकुटीद्रोनदुसासननिकटदे षिबोलैप्रगटयाक्यकुसलजुतायेधाय।। रचातसुयोधनकी- सातकीक़दीनीजयपूर्वतजिरायसाजुबनकेनकीनेजाय। कुरुद लबीचनरसिंघापवीरबजीधिकहैहजारजाकौंअरितविमु- रखकाय॥वायूबीजहाथनत्यूंपायजुबराजपदपायधाईपीठदीट लाजहुनाईहाय॥१४॥ ॥ कृष्णार्जुनउभयोक्तक॥ ॥ ।। द्रोनंदलफारिकैविदारव्यूहदंतिनकीमास्यौसदर्सनजलसंध हुकौगिलगो।जवनपछारिपुनिद्रोनसारथीप्रहारिजादवउदा रेफेरदूसासद्रोनदलिगो। विक्रमचरचानेसबैवीरभर्तिवंसिनके रुसैन्यसिंधुनरदेखि{विचलिगो। सात्यकीमदोन्मत्तकुंजरकरा लकृषणबाल्हिकनृपालपौत्रकीचवीचकलिगो॥१५॥ ॥ दोहा । युयुधानभूरिश्रवा यदुपुंगचकुरुवीर ॥जुटेपिरथपिन कवचभये तोउदोउत्तजीनधीर ।। १६॥ इंद्दयुद्धकरिपटकफुरु (१३६) पांडवयशेंदुचंद्रिका. सातकीकोतहांसीस ॥ छातीचढिकाटनलगो यादव भयो- अनीस॥१७॥ ॥६॥ ॥कचित्त॥ कृष्णजैसोसार थीअनासरथत्यूंहीअस्पारवेभातागांजीवकीगुनहुकटैनही ॥ फिरीटीसीरथीताकीसमताकरयाचीरद्रोनरच्यौव्यूहता केलोनटेनहीं।सकटकेबीचपद्मपद्मबीच सुचिच्यूहदीयदस- कोसत्ताहीदेवहूअटैनहीं॥अटनकियोहतातऐसेसोतकीकोसी सछातीचभूरिश्रवाकापेकदैनहीं॥१०॥ ॥दोहा॥ युधमन्युउत्तमौज? द्रुपदपुत्रभयद्रोन॥नररथांगरक्षकतोऊ न्यूहबाह्यकियगोन॥१९॥ ॥ संजय॥ ॥सोमदत्तताकोस नी काटनलागोसीस ।। करीयाजीवततज्यौ उनभजिज्या- च्यौईस ॥२०॥ याकेसुतकौमोरसुत मृतकप्राययुधमाहि॥क विनयसुनिधुरजटी तथाअस्तुकहिताहि॥२१॥बन्योजोगता तेइहै धाकटोनरदेरिव ॥ श्रायोकुरुदलसिंधुतर गोपदडूबत ॥ अर्जुन०॥ प्रेस्यौममहितसातकी कीनोनृपतकाज॥ इतयाकीरक्षाउचित इतजयद्रथवध आज ।। २३।। यूंक हिवामहिपानिनै प्रष्टप्रदृष्टहिबान ।।मोरच्यो भुजभूरिश्रवा षडगजुक्तकियहानि ॥२४॥ त्यागिसस्त्रसंन्य सले कही किरीटीदेख ॥ तोकूऐसीउचितम्यूं पुनिसंगतिफल पेरिख ।। २५॥ लरतानतेप्रमतमैं ममभुजछेद्योसोइ ॥ - गमित्रपिनक्षत्रतें यहअधर्मनहिंहोय ॥२६॥ ॥अर्जु ॥ ॥राजपुत्रनिजसैन्यकू रारिवलेतभयचेर॥ बनीनरच्छा अंगकी कृष्णहिनिंदतफेरे ॥२०॥ ममहितायोसातकी तजियासानिजमान ॥नाको मृत्युसंकष्टमैं क्यूंनहोउतनआन ॥२८॥इन सातकिभूमि सोईचड्उठाई। कृष्णादिकचरज पर दूरफिसिरकाया।।२९॥ ॥ कृषंग। लेरिव ॥२२॥ ॥ दारु- ( १३७ ) पांडवयशेंदुचंद्रिका. कसातिकिळूकरहु ममरथपरासूढ ॥जौलीगांजिववान म रैसिंधुनृपमूढ।।२९॥ युधिष्ठिर॥ ॥पांचजन्यकीघोषसु नि कह्यौभीमकूदोराादेवदत्तधुनिविनुसुने मनअकुलाचन मोर ॥३०॥नहींकपिध्वजकीकुसल कृष्णलरतममकाज॥द्रो नव्यूहबिचगोनळू श्रीरकोनतूंपाज ॥३१॥ काहिहै सबाहित अनुजके नजीसातिकीदूरी करहुधनंजयःअधिक जाको जतनजरूर॥३२॥ कबित्त॥ । सानिकीजूंभीमहूं को पठायोकिरीटीकाजद्रोनःसनाएकबादचीररसमै ।मै नाकिरीटीसिष्यतसात्यकीपसिस्यनाहींहारिकढोंकेसेज्यूंकटैहै तेरेबसमैं ॥ररेदिजनीचअवमानतहूंसत्रुतीकुंजीविनसेकैसे जेहुनानिकसिमें॥धनुमुरपीकरथनेमिउरवीकें घोसगदागुरुबीके त्यूसनाएदसदिसमै॥३३॥ ॥दोहा॥ ॥एकगदाहतकरदि यो अस्वसहितरथचूर ।। नांतरजमपुरभेटतें द्रोनकुंदिगयेदूर ॥३४॥एकतीसएकदिवसमें चवदानिसाबिचपूत ॥ नेरेजमेष रकौगये हतेभीमरनधूत ॥३५॥ ॥कबित्त॥ ।। पांच चरभीमतें भोपराजैदिनसपुत्रएकवेरसोईजीत्यौ भीमकौंबकारि- के जैसोशस्त्रलीनोतैसोकाटके विधासोकीनोमृत्युगजत्रानाही छेद्योवानमारिकै ॥धनूकेअएगीतेद्यौदादेकेकटुबादकहेरवाचौंक रौबीहोतउठायोफरोहारिकै ।। भाजपीछेजुद्धकौपिचारकैपधा- योफरौतुल्यसत्रुधारिकैमैंकहतपुकारिकै॥३६॥ ॥ मरनपायकरिभीमको नामाचौयहहेत ॥ कुंताकौंचहु- पुनको दियोबचनकरचेरत ॥३७॥ ।। अर्जुन।। नपांचधाभीमतें क्योंनपराजययाद । एकवरतूंकरिविरथ यो लतहैदुवाद॥३८॥ धूकअसूयस्सनकी दृष्टिबुद्धिकभाय ॥तमपरश्चौगुनमें फुरे दिनपरगुननलरवाय॥३६॥ निजकुचत्रिन ॥ दोहा ॥

का॥४२॥
पांडवयशेंदुचंद्रिका.
यनिजपानिनै मर्दतटूकअलाद ॥ होयतहोयस्वमुवहित ज-
सक्रतकोअपवाद ॥४॥ ॥ छंदपधरी॥ ॥हुइसैन्यबार
मिलिद्रुपदपुत्रअरु मिलेसातकीभीमअत्र । इनबिनहिएकअर्जु
नउदार॥कियेसत्रुविकलसुरअभयकार ।। मूर्छित्तकियेक्रपत
एफवान ॥सुतद्रौनभग्यौलम्नतकजानि।। मद्रदेसस्त्रकियरचंड
रचंड ।। पुनिहत्तेदुसासनयहप्रचंड ॥रथभगेंअस्वलैमरेसूत।। अष
सेनकरनदोऊपितापूत।भूरिश्रवसातिफीकियोनास ।।दुरोध
नभजिगोद्रोनपास॥उतदेवनरिनअरिसिरउठाय॥चितक्षुभित
कियहरसरचलाय॥४५॥ ॥दोहा॥ ॥बहुतनामिलिकीनोपि
कल अभिमनदलविनएक ॥धन्यएकगांजीवधर कीने विकलअने
कवित्त॥ ॥अस्त्रहीतैकीनोहैसरोवरअनूप
पकीनेनिरसल्यअस्वनीरहूपिवायोहै ।। भूरिश्रवाभुजाछेदिसाति-
कीबचायलीयौतासोपुनिभासनभीसबकौसुहायोहै। सिंधुनृपर-
क्षाकाजअष्टधनुधारीगढतिनकौंदबायकीयोआपमनभाया है
सीसछेदिताकोदसजोजनउडायताकेपितायदडारिसिरताहीकों
॥ छंदपधरी॥ ॥जयद्रथहिमारिपु-
निफिरेजोध ॥ रिनकवनतिनहिकरिसकेरोध ॥श्रीकृष्णकहतरि
नभूसभाव।पार्थलरवीयहगांजिवप्रभाव।। केउपरेचीरसिररघुले
केस। बोलहिजनुफाटेनरवचिसेस॥गजपरेइतरंथपंथरूध॥जा
जुल्यकियोजहांजचूनजुछ । केउपरेधनुषशक्तीनिषंग। कहु
अधोभागकहुअर्थअंग। कहुचमचमभूषनकिनेक।। कहु
स्वरथनके अंगकेक । इत्तहत्तास्मजोधाअपारसातिकी कि
योअरिदलसंहार। यूंकहत्तयुधिष्ठिरनिकटबाय। लरिदविज
यविजयजुतकंठलाये ॥षरहुतैमिल्यौकरिहदयलीन ।। नृपमा
निजनमजिनकोनवीन । भगिनीपतिमास्यौसन्यौभूप॥सव
गिरायोहै॥४३॥

ब
॥
पांडवयशेंदुचंद्रिका. (१३६)
पुत्रपत्स्यौदुपदीर्घकूप॥वहसमयगयोदिजद्रीनपास ॥ नहिसि
थरस्वासडारितनिसास॥ वहश्रमितराहिजअप्रमाद।। बोल्यौ
फिरतिनसँकटुकवाद॥ तुमविजयविजयकीचहीतत्र॥ अजय
ममनहतगमपरीअत्र॥जानिकरिपार्थतुमादियोजान॥ साति-
कीटकोदसथसमान॥जयद्रथहिजियतरविअस्तजोत॥ तो
जरत्नपार्थममविजयहोत॥मैंआपभरोंसेकस्याजुद्द॥ करत
ममसैन्यअरिनासक्रुद्ध ॥यहसुनतकह्यौद्दिजद्रोनाप॥निस
रचहुजुद्दममलरिवप्रताप। ममरघुलहिकवचकै मृतककाय॥
थवाकिरघुलहिसत्रुनमिटाइ॥ १४॥ ॥कवित्त॥
द्रोनद्रगदुसहदिरचायकैसुयोधनकौकहैदाघेबेनतबैसरताकितै
गई।अष्टधुनुधारीबीचजयद्रथवच्यौनहायजीयकीअरुजयकीउर
प्रासतौरितगई। पहलेङजतनकस्यौनप्रानरारचबैकोअबत्तो
सबसैन्यहकी आयुसइतगई।जादिनतइभीसमसरसेजपोठे
तादिनबडेबडेबीरनकीवीरतावितैगई ।। ४५॥सुनकैफटुक
चादनृपतसुयोधनकेद्रोनकहै काहेनृपउच्छवकरैनहीं।अष्टम-
हारीतुमरक्षकनिरर्थभयेहत्यौसिंधुराजतातैभवस्यटरैनहीं ।।
हादसहीकोसपरयंतमेरोस्च्यौव्यूहत्तामएकमहारथीसातकीडरैनही
जबतैनद्रष्टपरैध्वजादंडभीसमकोनबहीनै विजेतेरोद्रष्टहीपर
॥धृतराष्ट्र॥ ॥दोहा॥ । संजयममजा
मात्तुको बड़भयोसनिकोन ।। आचारजकाकरतभयो कह
हुबरचानिसुजान ॥४७॥
॥संजय०॥
॥ पठयदूतसत्त
धर्म. व्हेहेनिसिजुधघोर।। देहुपयादीसैन्यको हातदीपदाहु
ओर।।४८॥रथदिगपांचरुहिरददिग चारतीनहयपास॥य
हुअनुक्रमदोउसैन्यबिच भई मुसालप्रकास ॥४९॥सुगंध
तैलमयरतनमय भयेव्योमसुरदीप॥देखनजुधकौतिकमिल
नही॥४६॥

(१४.) पांडवयशेंदुचंद्रिका. अछरबरनअवनीप।।५।। सवैया।। ।जबसिंधु नरेसहत्यौनिहक्षोभते पुत्रपिताअतिदुर्धरसे। नृपताछिनबा बलबीचदिरखापरेनासविराटकेहेहरसे॥ मनुहाटिककस्यपहा रनको विषखंभकेजाहरनाहरसे। दिजद्रोनरुद्रोनियछविन मेदोउदोयभृगूपतिसेदरसे ॥५१॥दलपांडुनुबीचविहाररैदूज जाफौनिरोधकीकोनफरतथ॥जामगद्रोनकटैरनक्रीडतभोनृपसो हुकठोरमहापथ। पित्रनहीने मिलायदियेके ऊोरबचे तिनकीस नियेकया। श्रीनतुरंगहसारथीश्रीनहीधौनध्वजाअतिश्रोनरी रत॥५२॥ ॥कवित्त॥ ॥अलैहुकीअंचकेसमानबनिठगे द्रोनत्ताधतरूपबैननृपतसुनावेहै।मारिबोहीधारिकेसंधार- बौविचारिसत्रुवीरतापारतनत्रानमैनमावेहैं।। पलित केसकर ललितचलाकिंचित्र फिरीटीजवानतीहूउपामानपावेहै। जाहीनो रलरेचैताकीआयुसविरंचिहरितीनपचादिसामंचस्वालींदरसावे ।। ।। ५३ ।। स्थविनरथीकेऊसारथीविना रथमावतविनाहीगजदस हीदिसापत्रमायधिोरेविनजोरेकेउजोरेविनधूमकेउमरेभूमेकटे कहै विलुलायहाय॥तनविनत्रानकेतेत्रानबिनकेतनम्यानपि नसस्त्रकैतेसस्त्रचिनगोनेरचाय।।जनजबगीनहौतद्रौनकौसुत्त तत्रतत्रसत्रुसैन्यछिनमेविचित्रचित्रजानीजाय॥५४॥डोलत पुहमिदसौं दिसहूके दिग्गजतेधूजनधरतपांबधीरजधरैनहीं। जोगनकेजूथचितचक्रतचहौंधाचीत फिरतअत्रप्ततत्रपत्रतोभरे नहीं ॥वीरभद्रादिनको मुंडमालकियेमानि विथकविलोके विदाशंकर धरेनहीं॥देषियअमोघबलकौरवदलदाचानल पांड्दलयोधनकौनच्छरबरैनहीं॥१६॥ मेरैजानेजमदग्निक रहीनिछत्रीभूमिएकवीसवारकोपतोहुनासिरायोहै। पिता केनिदारिवैतै सांतवृत्तलीनोहै पैद्रोनव्याजही तेजबानदर --

(१४१०
पांडवयशेंदुचंद्रिका.
सायोहै ।। एकनिसायोसवीचक्षोहनीवपाईसातताकीविद्या
घोरहीतैदीनूदलघायोहै। पिताकधन्यपूतपूनकहैधन्यपि
तापितापूतदीनूरूपप्रलैकोदिरवायोहै।।५६॥ ॥सवैया॥
नपरेद्रगगोचरआनकछूगमिसबकीजनुबुद्धिगई । अरुअय
रथीगजसारथीतेउध्वजाध्वजदंडनादलई। रनव्योमपत्ताल
दिसाविदिसासमनीवरुथा हिजरूपभई । जितहीतितपांडव
सैन्यतितेसबहीसदलव्हेरघौद्रीनभई॥५७।। ॥दोहा॥
॥ ॥करनकयौनपद्रोनको गिनहुनकछुअपराध॥जुद्दअमि
तअरुरद्धवय नकरुबचन बोधा॥१८॥ देवहुमेरोजुडअब
करिहूंसत्रुनिकंद ॥ देहूंतोकूविजयजस हतिकोउपांडव
नंद।।५९॥ ॥ छंदपधरी॥ ॥सजिचल्यौकरन
जहांमहासूर ।। कियनासपांडवीसैन्यक्रूर ॥निजसैन्यकूक
सुनिकपीकेतु ॥ हरिकियविनतीजुक्तहेतु।अचप्रेरकुममेर
थकरनओर।। करिरयोसैन्यकोकदनघोर।। मारिहौताहिनि
हूंपुत्रमारि॥पुत्रकोसोकले है विचारि। यहसमयुकृष्णकही
गूढअर्थ करनत्तै निरननहिसरसमर्थ॥ इरिकयौहिडंबारकत
हकारि॥निसजुद्दतोहिलायकनिहारि॥६॥ ॥घटोत्क
॥राक्षसीअक्षोहगीसैन्यओर।।ममहतीद्रोएरासत
अवाहिघोर ।। तोउकारहुँमायासहितजुद्द ॥ करनळूरोफिराय
हुसकुछ ॥ यूंफहीरुगमनकीनोअकास ॥परबतनकरीबिर
स्वापकास निजसैन्यसुयोधनहोतनास।लखिकयौकरन
प्रतजुतानितास॥ममसैन्यप्रलयसबहोताज॥ फिरसक्ति
वारुवीकवनकाज॥ मोरचीसुकरनयहसुनतदैन।। इकचीर
घातनीसक्तिऐन॥घटोत्कचमारिगईइंद्रधाम ।। सनिहर
पकियोदिगविजयस्याम॥ ॥अर्जुन॥ ॥ कियह

(१४२ पांडवयशेंदुचंद्रिका. रषसोकठांकचनकाज।। - ॥कृष्णः॥ ।यहमरतबच्यो नूंपार्थाज॥६॥ ॥धृ॥ ॥दोहा॥ ॥ संजस्थानी बराहकी स्वपचफरावतरारी॥ दोऊबिचएफके वाकोहि नहिविचारी ॥६२॥ त्यूहीकृष्णाकेकरनवा मरै भीमसतप्री त॥ नरकोवचवोभूमिको भारनहारनदोउरीत ।। ६३॥ कट तसैन्यदोउसरचरी तीनजामगइवीत ॥ हटतनकौउपरसप र सकतनकौंऊजीत॥६४॥ ॥छंदपधरी॥ ॥ पहर निसरहीफिरकह्यौपाथ।।सयनअबकरहुकछुउभयसाथ ।यहसुनतसबनदीनीअसीस॥विजयतबहाइनरविसावी स॥सबहयगजरथपरसयनसेन । निद्रागतकीनी मिलतनै न।पुनिवजेचीरवादिनप्रातलरतेअरुमरतेनुपएललरवा त॥ प्रथमदिनपांचपांचालपुत्र॥जमपुरहिपठायेद्रोनजत्र ॥ सोइक्षोप्पलियनृपजिज्ञसेन ॥ द्रोन भिस्यौदुषसहददे न॥ द्रुपदकेद्रोनकेलगेबान॥ परवसहिषिथातुरभयेप्रान॥ जिहिसमयजस्वौद्दिजकीपज्वाल ॥ फियरुद्ररूपमनुप्रलय- कालं ॥ द्रुपदकोकाटिसिरभूमिडारि ॥चौपाटपतीपुनिलि- यौमारि। वहसमयदृष्टद्युम्नसुअभीत ॥पैसटहजाररथजु तप्रतीत।। बदलोपितुलैवैकाजवीर ॥आयोसुभिस्यौहिजतें अधीर ।। जूटेदोउसेनापतीजुद्ध ॥ कियेसत्रुनासहिजसहित क्रुद्ध॥हतद्रौनरथीपैसटहजार ॥बचायोस कारनबिचार ।। करिविस्थापकौहतकजानि।। मोष्यौसष्टद्युम्साहिपिछा नि॥ ॥दोहा॥ ॥धृष्टकेतुशियुपालसुत मगधपतीसह देच ॥ भिरेबहुरिरिनभूमिमे मास्यौद्रौनअजेय ॥६५॥ ॥ । दिनदैनिसएफजुरीनहिद्रोनकी संधिउपास नयंजुलिका ॥ बहुचीरनपांडुनकेबरवैउतरीकेउअच्छरा सवैया॥

पांडवयशेंदुचंद्रिका. (१४३) बलिका ।। वरमालके कारनहेरतही फिरतेपरेपायनमैफलिका ॥सुरराजकेचारासुनंदन कहांपुष्पजहांनमिलेकलिका॥६६॥ सोमकसंजयनाकषिजेपरबासरवगेंद्रसीमानतताकी। सांध नछोरतसत्रुप्रहारतेचीन्हपरैनहिशस्यचलाकी। चारकयोसनि साइकबिरलेतहांबीरबचे फिरवाकी॥सातप्रक्षोहनीपांडवसैन्य कौएकहिद्रोराडकारगोड़ाकी॥६७।। कबित्तं॥ ॥जेंद्र थकीरक्षाकाजटाढोभयोजबहीतेएतेबीरमारेगिनेपाचकविपार कौ ।हादसपहरबीचभईषटसंध्यातामैनाहीबन्योकर्मकछुद्धि जकेपिचारको ।। केतोदेवत्तरपनमेंकेत्तेपितृतर्पनमें अनिकिये ज्यूंसकरिहैउदारको । तीनअक्षौहिनीकौसंधारकियेए- कादेशी द्वादशीमैपारनाभोसटहजारकौ ॥६॥ ॥सवै- या॥ ॥सलभानसमाजजेद्रोनकेबानप्रयानतेभाननभा नपरे। कितनेअसमानसमान कितेकबुवाननपाननपांचटरे ॥कटपानकितेसुरथानचलेसुविमाननबैठिकेबाटडरे॥तितग्या रसप्राततेहादसीसांगलौरातिप्रभातिनजानिपरे॥६॥ दो हा॥ ॥रिरचनकयौमिलिट्रोनते करहुसस्त्रप्रवत्याग॥ य हअपनीनहिधर्म, करिहरिनेअनुराग ॥७०॥ कयौकृष्ण सतधर्मत ताहीसमायसिरवाय॥ इत्यौअश्वत्थामाइति द्रो- नाहिकहहुसुनाय॥७१।।दूरद्रोनतेकोसुइक लरतहुतौनिजपू त॥प्रेसौनृपळूतिहसमय जयकारनहरिधूत।।२।। जुधिष्ठिर॥ ॥बोल्यौठनाजलूं सहजहिमेंजदुराय॥ के सोबोलूंपूज्यहिज ट्रोनबद्धकेकाज॥ ५३॥ ॥ श्रीकृष्ण ॥छंदपधरी॥ ॥ छलबल कीजेशत्रुनास ॥ यहा कहत्तराजनीतिहिप्रकास ।। निजसैन्यदिरदअवस्थामना- स॥वकोदरहत्यौसुनिकृष्णकाम ॥सबहिनिमिलिप्रेस्योधर्म । ॥. । ।

(१४४) पांडचयशेंदुचंद्रिका. राज। वहकस्यौपचनाहिजतेकाज।वधपुत्रअप्रियअतिसु नेबोल ॥तजिसस्यभूमिश्रासनअडोल॥ करिदियोस्वासमाकु दीचढाय ॥ वहसमयद्रुपदखुतनिकटबाय॥ छेद्योसुरवड़ लेद्रोनसीस ॥ दोउसैन्यकयौधिकाधिक अनीस॥७३॥ ॥ ॥दोहा॥ ॥कुपटवादसुतधर्मके सुनकरप्राणायाम॥ धृष्टद्युम्नकौनिमतदै गयोवीरसुरधाम ।।७४॥ सहसराज- सतगंजअयुत तीनसहसरथवंद ॥ भयेपयादेदोनकर चवदालावनिकंद॥७५॥ ॥कबिता ॥द्रोनकांप तनदेखिसैन्यदुर्योधनकीअष्टविधसाविककोसेवनकरतहै।। पावनपयादेभगेबाहनविकलदेरिवकेतेसूरधीरनकेआयुधगि रतहै।। केउमरेकुंजरकेप्यंजरप्रवेसकरतेउपलचारनके मुरवतेम रतहै।अपजसअजैसोकभयकेभयंकरसेदुस्तरसमुद्रचारु सहजेतरतहै॥७६॥उमरतोबरषपंचासीबीचमहाबाहुभ्यो रकोजवानहूकीउपमाघ नहीं ॥ विचरतरह्मौजालोंउभयसं ग्रामविषेशत्रुकीबलैनजाकेसस्त्रहुनहटैलहीं। मारेद्रोनकहां दोनइहैद्रोनहत्तौद्रोनऐसेहिवकतरोगमानसीकटेनहीं॥आखि न हदेहुत्ते पांडुसैन्यवीरनकेंद्रोनतोमिटोपैचित्रद्रोनकोमिटै नहीं।७७॥प्रकटपिताकोपरलोकपेरिचपानन में पैनेवानपका रिपिनाकीसोलरचापरो॥नारायनप्रस्युनिरमुक्तकीनोसत्रुना सअर्जुन आदिनाहिओरतेसिरवापरो॥पायनपयादेपुंजसु स्वधरेपरोक्षपारथलोंपांडुसैन्यपीरवनषापरो॥दीहभद्रौ नीदलदोवनकेबीचटूटद्रोनतोपरोपेदसद्रोनसोदिखापरो॥७८ ॥ ॥दोहा।। कृष्णकयौयहअरूपकी औरनसांति उपाय॥तजिचाहनसबरबत्तजि परियेमनक्रमपाय॥९ ॥सवैया॥ ॥ द्रोनकेपुत्रकेअस्त्रकेनेजतेत्यागि- । ॥

tr. पांडवयशेदुचंद्रिका. (१४५) मरोरकैगैरमजे॥वाहनसस्यतेदूरधरेसबकृष्णकीसीरवन बेरसजै॥भारतजैहिसूरउदैन हिमातपृथापयपानलजै।। नीमपयारलूंपावअचालकूक्षत्रत्वसीमको भीमतजै॥४०॥ ॥ दोहा॥ ॥भयोसस्त्रमयअग्निमय भीमसेनपरव्यूह॥क षणविजयसबसस्त्रनिह छिनहीमिट्यौसमूह ॥८॥व्रथा भयो सुतद्रीनको वहनारायनअस्त्र विकल भइत्तवसैन्यनृप गहे पांडवनसस्त्र॥२॥ ॥ कबित्त॥ ॥ मैहकयौताहिस मयसकुनीदुसासन मानीनावसीठीतबेकहाहियसूनोहो॥पा चद्योसनिसाएकशत्रुकेमिटाईमिटयोसोतो द्विजराजदेखोसबही तेजूनोहो।ताहिविनकुरुसैन्यभ्यासतअलूनोंअबमामा भाग नेयबीजबोनहारदूनोहो ।गांजिवकीभारबीचक्यानअंगभूनों होजूद्रौनबौयुलू जैसेक्यूनबोयलूनोहो॥३॥ ॥धतरा ष्ट॥ ॥सवैयो। ॥ भीममहाभुजदीपप्रकासमैमोसुतसं धेपतंगज्यूंनासत॥बाडवकोपबेलालचीवस्यजूंनावप्रवेसनै- कनबासत ॥ भीमभुजानकेचीचसदाजमराजकोराजसमाजमा कासत ॥संजयमासुतकंजकोक्यारण्यारतुषारज्यूंभीमचिना सत्त॥८४॥ विचदीपकजोतपतंगगिरेकोउनासहेकोउडिजावत है। ॥जमराजकेलोकगयेहुजियेतिनकीजगबातसुनावतहै। बड़वा- नलचीचपडे हुबचे करतूतमुकुंददिवाचत है ।सुनिसंनयमोस तकालयसोभुरभीमतैकोऊनआवत्त है ।।८५॥ ॥ कवित्त ॥ ॥जलहूतैागवडवागहतैसेजलकेसरीनैजैसीविधकुं जरानिबल है।वाजतेकपोतजैसेताररव उरगतैसेपोनसेप्रचंड गोनअभंजूबिचल है ।। इंदुहुतैइंदीवररुद्रुतत्रिपुरक्षुद्रइंद्रहु तँदैत्येंद्रजाविधिविकल है।पाछलेसबुजैसे संजयसबमेरे पू तप्रथमकेसत्रुजैसेमारुतप्रबलहै॥८६॥ सवैया। ॥

(१४६ पांडवघशेंदुचंद्रिका. कोपछिपीचडवानलबाहितिमंगलग्राहगदाधत्तधारी॥धान महाउरगादिक उरमीसुमनोरथच्योमविहारी ॥नावकोदाबक- छुनलगे हिजद्रोनसीकर्नसीफारपछारी ।।मोसुतनैकनपैरिसकै जभीमभयंफरसागरभारी॥८॥रनमेंभिरकेहिरंधासुरसोरूब कासुरसोनविटहियो।फिरकीचकसोरुजरासंधसोकुलदोष नासिरकूटहिंगोजगमैनहिंसत्रुबच्यौजिनतेतिनलेसुतजी बनतूदहिगोभिरभीममहाभुजपाहनपायसुयोधनसोघर फूटहिंगो।।८॥ । कवित॥ ॥गांजीवधनुषजहांअरब यनिरपंगदोयवन्हिदतवाहनयहमारुतकेमीतहै।सारथीहैकृष्ण भीमसातकीसिखंडिओरघष्टद्युम् आदिवीरजगतेअजीतहै। देवाद्विजदीनब्धसेवानृपसावधानबेदकुललोककीम्रजाबीच प्रीतहै।रविकोउदयकोज्यूंनिश्चयप्रतीतजैसेयुधिष्ठिरविजैहु कीविजयेप्रतीतहै॥४९॥ ॥ सवैया॥ ॥होबलबंडज रासंधीसोतिन गयेभूपनकेगनकेदटौरकीकाजगदी- सभगेसोई भीमपछारिकमारिलियोऊट॥जीतिसुरेससहा ईसुरेसफीकीनीकपिध्वजलोककहैरट॥कोतिनजीतसके. सुनिसंजयहैजहांभीमधनंजयसे भट।। ९०॥ । कवित्त। ॥ ॥कीरतननारदसो? सोनकसौसुनिचोहे २ पूजनप्र) सो ३ पदसेवरमारानीसो १ ॥ दासत्वहनूसो ५ सदाब दनअक्रूरजैसो ६ आत्मानिवेदलिदैत्यराज्यदानीसो ७ ।। सरचापनउधवसो समरनसेसकोसोमनूसीतपस्या ज्ञानदत्तात्रययज्ञानीसो । नारायनजुक्तनरऐसोताको जीत्त्वौचहेहेहेकोन मूढमेरे पूतअभिमानीसो॥९॥ संजय॥ ॥दोहा॥ । सेनापुतिसुत्तद्रोनको चाह तहोतचपुत्र ।। करनछतेद्रीनीकयौ यहैउचितनहिअत्र २ ३ (१४७) पांडवयशेंदुचंद्रिका. ॥९॥करनहिसेनापतिकियो सोपिअक्षोहिनीपंच ॥ तीनर हीसतधर्मके नेउनहिरहिहैरंच ॥९३॥ लेाज्ञाकुरुक्षेत्रप्रति चल्योसूतसिरनाई। फिरजैसोजुधदेखा तैसोकहिंडं आई। ॥९४|| ॥ इतिश्रीपांडवयशेदुचंद्रिकाद्रीनपचरिद्वादसम यूरवः॥१२॥ ॥श्रीगोपालकृष्णार्पणमस्त॥ ॥ श्रीरस्तु। अथकर्नपर्वपूर्वार्धप्रारंभः: ५ श्रीगणेशायनमः॥ ॥अथकर्नपर्चसूचि ॥ ॥दोहा।। चैशंपायन॥ ॥ लरिव वैदिनकोजुद्ध पुनि संजय ॥

(१४८) पांडचयशेंदुचंद्रिका. परमसयान॥कहिनृप तवपुत्रको काट्यौकन्तनत्रान॥ ॥ ॥कवित्त॥ ॥ भीमबडवाधुिजाकौनेकहुनकीनोभ- यसानिकीतिमंगलकोत्रासहनमान्यौराज॥ नॉलसहदेवध प्रद्युम्नसिरवंडीजैसेमहाचलग्राहनकौचित्यौनाकछुइलाज। किरीटीकेकोपचायुचुंडरवंडरचंडकीनीगांजीवलहरचलीलोपि कैप्रमानयाज ॥ जातैनृपचाहतहोआवहसमुद्रपारसुयोध नवारकर्ननवकाड़वानी आज ॥२॥ पंकजुक्तभयोद्यूतुक्रि- डातैयुधिष्ठिरकेयसकोसरोवरसोनिककनिषरिगी। पोनपु अकोपकोप्रचंडपोनगोनतातेचौकरीचंडाल मेघमंडलविरवरि- गो।।पानकियेदिरिचयोन भीमकोदुसासनको महलताकौटूटि भूसिरिगो॥ कर्ननदीगांजीवकीफेटतेसुयोधनके विज यमनोरथनछमूलहिउरवरिगो॥३॥ मेरुकाँचलनइंदुरथको पत्तन भूमिउदयप्रभाकरकोपत्तीचीमैकहैकाहि ॥ सिंधुकौसी सोरवराअदाहनेजअगनीकोफटिबोभूगोलकीसौसंजयविचा रोजाहि॥च्यापांडुपुत्रादिसाजीतिकाजियायेकन्यायते कोग्राहवमेंदेवदैत्यजीतेताहि॥कोउनिरसंसेएतिबातैसुनिमा नैनोपेतोउनिरसंसेमेरेकर्नकोपतननाहिं।।४।। ॥सवैया। ॥ ॥मारुतिकौविषदीनोजवैदससाहलदंतिनकोअसुलायो ॥जारतहोसोजस्यौपरधानउतैनृपद्रौपदनैबलपायो॥थापन काजगयोद्विजराजसोयासिषदैहमहीतरुसायो॥ अंधकहैम मपूतहैअंधतेजीतकेकोजूधब्यूँतबनायो॥५॥ ॥ ॥करनमरनसुनिकानुहियने फटतकहावन है। कितसु तविजयविधान प्रानहानिजानीपरी ॥६॥ ॥दोहा॥ ॥ कस्यौजुधकैसैकरन मस्यौकनकिमतात ॥डयोमोरचि तपुत्रहित कहहुजथारथवात॥७॥ ॥ ॥सोरठा ॥संजयः॥

(१४९ THAN पांडवयशेंदुचंद्रिका. मच्छव्यूहकीनीकरन धृष्टद्युम्नशशिभश्राध॥ भिरीपरसप रसैन्यदोउ होनलगेनृपबाध ॥४॥ ॥ कवित्त॥ ॥भी मद्रोनीदोबनकेयुधकोसमाजभयोलागेनरदेवधराव्योमचीच- ध्यानसे ॥दोचनककेसस्त्रदोऊयहैऔर औरदोवनकैटू ध्वज- मानअप्रमानसे ॥दोवनककवचकटेहै फटेवस्त्रजैसैदीवनके. अंगहैफलारूबीनपानसे । दोउनकेबानलगेदोउनकेयानिभ गेदौवनके ज्ञानटगेदोवनकेपानसे॥९॥ ॥ छंदपधरी॥ ॥ ॥यहरीतिभयोमिलिइंदजुध॥कुरुपांडवजूरतसहित क्रुध ॥ कुलविरदनामनिजसबुचंस।। परसपरसुभटेबोलतप्रसं स॥नृपतौरमंत्रकौयहविलास।निजवंसहोतदोउऔरनास ॥ पांडवीसैन्यविचगतीपाय॥ हजारनकरनदिसेमिटाय । दरस भिरेभीमतेंतोरपुत्र जमलोकगयदिनप्रथमजब।लरिवाल यरूपनिजदलबिदार॥करनपतिनकुलचोल्यौहकार ॥धनिआ जदिवसरिनबीचधून ॥सबकलहमूलतूंमिल्यौसूत्॥ तैबये बीजुकुरुकुलअन्याय ॥ दैईसजमनीपुरपटाय॥जोवहिभा गिजै हननीच। मिलिहैनकुटुंबसीरचढीमीच ॥ द्रुपदाकेकदि हैबचनसाल।सुरवसयनकरहिधरमजभुवाल॥ यहसनतक रनबौल्यौञ्चभीत।नहिंबहुनबोलिवोरूभटरीत॥पौरसहि दिरचावतकरसंग्राम ॥ ऐसेनसभटबोलतकाम॥यूंक हत्तचलेमार्गअपार ॥यतउत्तहिभयोबाणांधकार ॥ सरभर दोयघटिकाभयोजुद्ध ॥ कर्नफौभयोपनिविसमक्रुद्ध । नकुल के प्रथमचहुअस्वमारि ।। सारधीएकबानाहिसंहारि। धनुषनि- एंगपुनिध्वजादंड॥ हतिवानकियेसबरवंडरचंड ॥ लेरवडचर्म पुनिसमुरवदोरि ॥तेउबानमारिदियेफरनतोरि ।। मास्यान प्रथाचायकसभारि ॥ कटुवचनकहैगरधनुषडारि ॥ ऐसीन (१५. ) ॥ ॥ ॥कर्न॥ पांडवयशेंदुचंद्रिका. कहहुमुरचकबहुवात ।। समभटहिनिमंत्रण करहुतात ॥ नुजरथ भयोमारूढाप ॥ विनुरदूकरंडगतयथासाप॥ध निधनिनृपमानतहुंसधीर ।।जयगतपतीकेअनुगचीर ।। ज्यू ज्यूंसमसप्तकमरतजात ॥ यूंनरभिरतनसुरततात॥अर्जुन तवसेनासांझवेर॥अतिकरी विकल नृपधेरिघरि ।। भोकरनथकि तथिरटेरिटेरि ।। सबभगतकपिध्वजहेरिहेरि॥ काटिपरेवीर केउसमरघोर ॥ अबहारभयोदोउसैन्य और ॥११॥ ॥दोहा॥ ॥कयौतोररूत्तकरनप्रति डेरनहृदयविचा र॥ मानतहोतवभुजनपर सरबजुद्धकौभार॥१२॥ सो इत्तवदेरचनसैन्यमम करीकिरीटीनास जीवेकोजयकोव हुर रारबहुकसविसवास॥१३ ॥स्थहया सूतनियंगधनु नरसममेरेनांहि ।। तिहिसमानजुधकरततो उ कहतन्यूनममकाहि ॥१४॥ सल्यकरममसारथी लेहुवि जयधनुहाथ । रारचहुढिगवाननसकट कहाविचारोपाथ ॥१५॥ परसरामदत्तविजयधनु बहुदिनपूजतवान॥ र्जुनहितरारवेउभय ग्रहिहूंचजसमान ॥१६॥ ॥छंदप- ॥ तवपुत्रमद्रभूपतिबुलाय॥सबकद्यौकर्नवांछि तसुनाय॥ममविजयतोराधीनाज॥हांकियेकर्नरथ मोरकाज॥तुमअस्वकुसलकृषगहिप्रमाण॥हैकर्नरथीअर्जी नसमानं कर्नधनुजियपुनिपूज्यवान।।तुमजुक्तहराहिक पिकेतुप्रान ।। कपिकेतुविनाभीमादियो। ततकालपटेदापि अठोर तिजिभागनेयममकियसहाय॥ यहपूर्नसुजसतोहिमिल हिन्याय॥१७॥ ॥संजयः॥ ॥दोहा।। ॥दोहा॥ गयोयुधिष्टि रतमिलन सल्यप्रथमवैराट ।। मातुलतज्याच्यौनृपत समझा विस्यत्तघाट ॥१८॥तुम्हैसुयोधनजाचहै करनसारथीकाज धरी॥ ॥ ॥

(१५१ ) - .. पांडवयशेंदुचंद्रिका. ॥अकरनहुकरियोअवसि मेरेहितमहाराज॥१९॥ करनस्तु निके अधिकबल निंद्यानेबलछीन ।। व्हेसारथीनिंद्याकर हु होहिटुष्टमदहीन ।।२०॥ तथाअस्तुबोल्यौतोउ नय्योस ल्यतिहिकाल॥ करनप्रानरचंडनकरन कहेबचनाजिनुसाल। ॥२१॥ सूतपुत्रकोसारथी करतनपतळूनाज॥ भगनासु नायुयह भलेनजेतचुकाज ।।२२।। ऎसेकहिनृपउठिन्चल्यों करटुंजुडडूकंत ।कौनरहैतबढिगजहां सरभरसंतासंत। ॥३३॥ कनगिनतहीपराक्रमी औरक्षत्रिकानाहिं ॥ देवादि ककीसैन्यकुं मैरोकूरनमाहि॥२४॥ फैटपकरिबैठायटिंग विनतीकरीबहोर ।। मानतईश्रीकृष्ण अधिकपराक्रमः तोर ॥२५॥ आहिकरनपैकअब अर्जुनहंतकबानता नैचाहतहूंनृपति सारथितोरसमान॥२६॥ करिसार्थिता रुद्रकी विधिभिपुरासुवार ॥नरस्थप्रेरकरुष्पालरिव य हेप्रतक्षव्यूहार ॥२७॥ संजयः॥ कयौकृष्णते अधिकमुहि भयोप्रश्नगुनग्राम॥हरिहूतोरविषादुनृप करिहूंनीचहुकाम ॥२८॥ करैकोलजीसूतसुत सहैवचन ममसूल ॥ कँटुवीअर्धविभागको भोक्तामअनुकूल ॥२९॥ ॥ ॥कर्ना ॥ रथीसार्थिकूहोतहै सरवदुरपभोगस मान ।। उभयपरसपरबनताहि कष्टपरैतनन्नान ॥ ३०॥ ला तेहितकिग्रहितंकी कहिहैमगनरेस ।। मैसहिहौरन- भूमिमें करिहौक्रोधनलेस ॥३१ ।। ॥छंदपधरी ।। ॥ भयोप्रातदुंदुभीवजेघोर ।। कहिव्यूहसैन्यचढि उभय- ओर।।रथएककरनअरुमद्रराज॥गिरएकजधारविहवन भाज॥तहाभयेसकुनविपरीतरूप ॥ भयबासित भईतव सैन्यभूप॥गिरिपरयौकरनकोध्वजादंड ।। पुनिकियोसकु .. .

(१५२ ) ॥ पांडवयशेंदुचंद्रिका- शुठाडोप्रचंड ।उलकानिपात भोचारओर ॥धरधूजिमि ट्यौरविप्रभाजीर॥तितकयौकरननृपसुनुहुमुद्र ॥ रवि व्येवलरवायत्तसहितछिद्र॥उतजरीसमुरवदोउसैन्याय ।। सवन्प्रतिकरनबोलतसुनाय ॥३२॥ ॥ कबित्त॥ ॥ ॥ देहुअस्वकरीअाजकिरीटीदिरखावेताहिदैहुवाअमो लवसभूषनअपारमें ।। देहसातपांचत्रियासमादेसमाग धकीयेहुनाच तोऔरदेकूउदारमै ।।देहूंनिजदारापुत्र ओरमनवांछितजेकपिध्वजादेखतहीक निरधारमै॥पा डवकोविभोऔरवासुदेवहुकोरिभोविस्वमै चिरल्यातकर्ना टोदेनहारमैं ॥३३॥ ॥सल्या ॥गरुडकीसमता- कौंमच्छरउडानउडेनिमंगलसभत्ताकूकिंगाबधाजातहै। के हरकीसमताजंबूककरतजोररविकी समानतारपद्यौत्तक वैपातहै।। शेषकीसमानताज्यूंडिंडमकियोहीच हैहंसकी- समानताकुंकाकचकुलातहै।सल्यकहै कुंजरकोसमतांच हज्यूंचीटीअर्जुनकीसपतातूंकरनदिवातहै॥३४॥ कहां साचटकहांकाचकहांहीरकनीकहांराइमेरुकहांमहीव्यो मथानहै ।। कहांनिसाद्योसकहांदीपकहांराकाचंद्रकहांक्षीर सिंधुकहांकूपकोप्रमानहै। कहांदेवतरुकहांविकलबंबूलर छकहां है कथीर कहांकंचनकीरवानी है॥अचलताधूकीक- हांकहांपानपीएसको कहांकनअर्जुनकीसीलतासमान ।। ३५।। एकस्यामकाजदूजेसारथीबन्यौतूंभूपतिजैवं ध्योकोलसूनमारोतीनव्यंगते ।। कनक सल्यमरुत्रियाते हैजन्मजाकौचित्रकहाऐसोकटुबोलेसोउमंगतें ।मांसमदा हारिणीउचारिणीतेकामंगीलधारिणीकुसंगअंगच्याकुल अनंगते॥पनिकौतजैघिसारिपूनकौंतजैनिकारजारिकृतजै (१५३॥ |सल्य० ॥ ॥दोहा॥ पांडवयशेंदुनंद्रिका. नन्यारीप्यारकेप्रसंगतै॥३६॥ प्राकृतधनुषमरैगांजीवधनु- अनासमरैवाएगषीएवाकेअक्षयनिषंगहै।बाकेकृष्णसा रथीसदैवअनुकूलमतीमेरेप्रतिकूलतेरेसोसार्थीकुसंग है। मोकूापदीयगुरु रिषीके महानहानचाको वरदान द्रइंद्रकोअभंगहै । अस्वथबैसेनांबरोबरी करूंहूंजुधऐसो क्यूँनबोलेतीको कोटिकोटिरंगहै ।। ३७ ।। ॥ ॥श्लोक ॥ ॥ग्राहपत्रीशसिंहेश्वकज्योमवनचारि- भिः ॥षंकृत्वावगंतासि बकत्वं स्वास्थ्यमिच्छया ॥३८ ।। ॥ ग्राहरवगेंद्रमृगेंद्रनै जलनभवनचारीना ॥ बककित्तजेहैबैरकरि चहे थिरवासप्रवीन ॥३९॥ ॥ ॥ ॥श्लोक॥ ॥गिरिसानुपादपायेत्वं तिष्ठस्युपदेस्न कृत् ॥प्रमत्तःसंभवानबउच्छ्रित्तान्मापत्तिष्यसि ॥ ४० ॥ ॥ दोहा।। ॥चढेअग्रागिरासरवरतरु अन्यबचावन- काज॥सावधानमतिआपहु गिरजाबहुमहाराज ॥ ४१ ॥ ॥श्लोक। ॥ भ्रष्टाचार सारमेयोराज्ञासत्कृतवा नथ ।। दुईरेणैवसिंहेन समतांगतुमिच्छति ॥४२॥ ॥ भूपतितेसत्तकारलहि श्वनीपुत्रहठरूढ ॥ करीप्रहारकस्यहेते समताचाहतमूद ॥ ४३॥ सूतपुत्रसं ध्यासमय घूरबहुकरतगलार ॥ अर्जुनरविहैहैउदय जै हैतेजतुम्हार ।। ४४॥ कबित्त॥ ॥ आदिशापभ योमोकूँगुरुजामदग्न्यजूको दूजहिजश्रापरथायध रनके ॥तीजेसक्तिवासचीनिसाकेजुधमोघभईसुनेसमा रहैडंबेयकेलरनके ॥ राधापुत्र मद्रदेसमूढदेरियहै तूं दापिहैअकासबानकंचनपरनके ।रुद्रहूकेसन्नरमरनवा चात्तोकैसेहोतेजोनहर्नबानकुंडल कनके॥४५॥ ॥ दोहा।। %3D (१५४० पांडचयशेंदुचंद्रिका. ॥संजयः॥ ॥दोहा॥ ॥ समसप्तकेसाथ • कोटि कोटिहैरंग ॥ लीनौतहांफटायके अर्जुनसमर अभंग ॥ ४६॥नरकोआवाहनकियो सुसरमाजुद्धसाजू जापीछैजूटतभये कुरुपांडवजयकाज ॥४७॥इतकन रक्षकउते भीमसेनरनधीर ॥कटतमिटतनाहिनहटत उ भयसैन्यबरबीर ॥४॥ ॥ छं मोतिदास॥ ॥ भट कतक्रोधजुरेतिहकाल ॥अटक्कतएकनएकअचाल॥चट कत्तबोलतवानकमान । हटक्कतअस्त्रनन्यस्त्रसमान ॥ रटकतमानहस्यंहवराह ।। कटकतायुधदंतसनाह॥ पटक्कतजासिरधायप्रहार लटकनसोतनुज्ञानचिसारि ॥अटकतनाहिनअंगप्रहार ॥सटकतबोलकढतनपार ।। ठठक्कतकायरकेकहिहाय ॥छटक्कतसस्त्रनहाथरहाय।। बटक्कतस्वापदादिअनेक ॥ गटकतकंकरुगिड़कितेक॥म टक्कत्तभैरवबीरअपार॥मटकततेल उठायप्रहार ॥ सरक तनाहिनमीचाविहाय ॥ ढरकतमंचन सिरकाय॥ पर- कत्तत्रानरूम्यानअनेक ।। फरकतबानबरमनछेक ॥ कर कत्तमानहूंबीजप्रकास ॥धरकत्तनैकनदेवविनास॥भ रकतवाहनेभाजत्तदूर ॥ फरकत हैध्वजदंडसमूर।। मुरक ताचताबबीचबरपतवानमचावतकीच ॥ करष्यतको दंडकानप्रमान ।।जरकतत्रानत्वचाअरुपान॥जितेतित नाचतकेककबंध ॥ जितेतितफूटततूटतकंध। जितेतित जोगनिपत्रभरंत ॥ जितेतितअछरवीर वरंत ॥ जितेजित जूटतसस्त्रविहीन ॥ जितेतितकुंजरपिंजरनवीन जिते नितहोतप्रहारप्रचार ॥ जितेतितनाडिनमानतहार॥ जिते तितरचालियमंचलरयाय ।। जितेतितधायलकेकबकाय ।जि पांडवयशंदुचंद्रिका. (१५५० तेतितश्रोननदीउषकात॥जितेतितदेखतवीरवहात ॥ जिते तितकेसग्रहाग्रहीहोय॥ जितेतितमलजुजूटतदोय ॥- जिनैतितहाथनलातनजुद्ध ॥ जितैतितदातनधातनक्रुद्ध। हकारतवीरनकौतिहऔर ॥प्रहारतायपरेसिरजोर। कहांच तापमहारनसूर ॥ नावतआजबजायकैतूर ।। नपाचतपू ठरहेभटनाम।नभावतईसहिकोयहकाम॥नभावतबोल तवीरसुचान ।। नसावतप्राननरवोवतमान ।। सहोतनबान- नकेसुप्रहार ।। रहोथितुमीचहिकौसिरधार ॥ कहोमुरवबोलस भाविचक्रुद्ध ॥जुरौनमुरौलविदारुनजुद्ध ॥४९॥ ॥दोहा।। करयोचिरथसुतधर्मकी बानविकलकरिअंग ।।कहेक रनदुरबचनप्रति हत्यौननियमप्रसंग॥५०॥ कर्न। ॥ ॥आपनिपुनरिरवधर्ममैं क्षत्रधर्मअतिक्रूर ॥ अग्निहो संध्याकरहु लरबहुजुद्धरहिदूर ॥५१॥ बाननतेंदुरबचन ते भयोदुषितसतधर्म ॥ गयाशिवरविचद्रुपदजा संपरस तेभोसर्म ॥५२॥ हतित्रिगर्तकीसैन्यकू कृष्णसहितकौंतेय ॥ भीमकरन भिररह्यौ आयोतहांअजेय ।। ५३ ।। छंदपधरी॥ ॥तितपस्योदुसासन भीमद्रष्ट ॥ त्रियादुषस मरिभोसोकनष्ट ।। ध्वजकाटिप्रथमपुनिधनुषछेदि।रथच तुरअश्वहतिवर्मभेदि।। पुनिकेसजूटग्रहिमहिपचारि॥फर नादिलरवत्ततवपुत्रमारि॥उरफारिकत्यौरतउष्णपान ॥ विक रालरूपराकसविधान॥ ॥श्रीकृष्ण ॥ ॥ विधिजु अंसभवकहतसोय॥ पीवीरतबांधवकूरहोय॥ ॥भीमन ॥ मांसादिभरव्रतलगेअस्तघात ॥निजतारुरुधिरस बनिगलिजात ॥ निजक्तातरतकहाभेद् । यातैनकृष्णक छुकरहुरवेद ॥ पुनिउभयसैन्यप्रतिबदतिवैन ।जुतकृष्णसु ॥

(१५६२ पांडवयशेंदुचंद्रिका. नहुयूंभीमसेन ॥५४॥ ॥कबित्त॥ ॥ द्रौपदीके चकैसतादिनाउठिविसालज्वालकीकरालमालरोमरोमदा ग्यौहै ।। भीमसेनकहनाथसुनियैहमारीबातयाजलौं भयो नचैनमहाकोधजाग्योहै ।। दुसासनमारियाळू पुहमीपछारि फारिवक्षस्थलरक्तपीयोतातेंदुषभाग्योहै ।। दुष्टनकेलोहुको कुहीगेकोहुस्वादकेसोनागुलोकसुधापियोतातेंज्यादालाग्यो ५५ ॥ उपकौपीयुषकौनचंदकीमयूषकोत्यूंचायौं भषभू पफोनचाहतहौजिनकूँ॥पृथामातदुग्धहुतैजादासत्रुओनपा नौरकावत्ताउस्चादयादमोरमनकू ॥करनादिकवीरकुंबका रफयोरक्षाकीजैरुधिरनिकारपियोपूरनपरकनकू॥भारेगयो द्रौपदीतेउरनअवारभयो कह्योयूंपुकारकेडकारदुसासनकू ।। ॥५॥ ॥दोहा॥ ॥श्रोनपियतरनसत्रुको दरसतभामंत्र नृप। कहिराकससुचरबढकत लरच्योनजाइस्वरूप ।। ५८ दुसासनकेहृदयनै सबैकुटलनासोधि । वायुतनयकुटि लानकुं मनहुदिरयावतबोध ।।५९॥ भिरेचतुरदसपुत्रतब अग्रजवधलरिवोर॥ भीमगदा छिनकमें गयेदुसासन ।। इतिश्रीपांडवयशेदुचंद्रिका कपिणि त्रयोदशमयूरयः ॥१३॥ ॥ श्रीगोपालकृष्णार्पणमस्तु ॥ शुभं भवतु ।। ॥ श्रीरस्तु॥ ठोर॥६॥ ""Asaram

पांडचयशेंदुचंद्रिका.
(१५७).
"
.
।
th

॥ पांडवयशेंदुचंद्रिका. श्रीगणेशायनमः॥ ॥दोहा॥ ।। अर्जुनकेद्रष्टनपस्यो धर्मपुत्रध्वजदंड ॥ कयोभीमतेंसोधकरि कित्तहैनृपबलवं ॥ भीमः॥ । मोअरिभरगलमानिहे तुम हीसोधहुत्तात ॥अायोडेरनवीचरथ लरिवनृपतिहहररवात। ॥२॥ ॥जुधिष्ठिः॥ ॥कवित्त। ॥जाकेडरहीतेंमोकुंती नदससमंतसरनीके निद्रानाईनहींताईंमारियायौतूं । जाकेागेचारदिकपालनकी पिजैनाहीताहीसूतपुत्रौमिटा यविजेंपायोतूं। तीनलोकविचत्तीनकालमेंनऐसोकोऊतैसो धनुधारीलोकलोकमैकहायोतूं । युधिष्टिरकहेधन्यभागहै| बधाईयाजसारथीसमेतअदभूतजसलायोतूं॥३॥ अर्जुन॥ ॥आपकीध्वजाकोदंडनिजन पस्यौनभीमनट्या सत्रुनिंदातेनिहारिचेकोबायोमै । अवलोहैकर्नविद्यमान- मोरेसो मकानअचीदेखिायोभीमसेनकोपठायोमै॥श्रा पळूकुसलदेरिवराबरोहकमपायपायहुविजयमारिकेउधि पायोमैं । इंद्रकौजरायोबनरुद्रकौरिमायोऐसेनानायुध जीतिदेवदत्तवजायोंमें ॥ ४॥ ॥युधिष्ठिर॥ कैप्रसूततेरोभयोसातद्यौसपीछेभईच्यामबानीयौ अनायना फंपारि ॥जीतिहीत्रिलोकअभैकरिहैअमरोकवातेकोनजी भूमिभारकोउतारिहै। देचवानीमिथ्याभईनूंनकन्या भई हेजुधछोरियायोसदेखिकाउचारिहै।कृष्णादिकुऔरकू महाराधनुसोपिदेहुयहाँबैठोदेरिपराधापुत्रकीतैमारिहै॥५॥ ॥दोहा॥ ॥यूसुनिफियोविकीसअसि ज्येष्ठबंधुवधकाज। कृष्णकहेसवुननिकट यह कौनगतिाज॥६॥ अर्जन॥ । कोउमाकूसनमुरयकह डारिदेहुधनुबान ।। मेरानमध्यरचंडहै सद्यहरौतिहमान॥७॥ कहेआपकेस ॥ ॥प्रथा . पांडवयशेंदुचंद्रिका. (१५९ । नतसोइ धर्मपुत्रदुरवाद ॥ जियकोजयकोराज्यको मिठ्यो- मोरअहलाद ॥८॥ धर्मराजकूमारहू रखनप्रतज्ञामोर ।। फिरमेरोजीवनकहां तजिहोप्रानबहोर।।९।। ॥ श्रीकृष्ण ॥ कहेधर्मदुर्वादत्तोहि क्रोधवढावनकाज ॥कोप्योअर्जु नकर्नकू अवसिमारिहओज ।। १० ।। कहेसमुरवदुरवादरे तूंसंबोधननीच ।।गुरुजनकोविनुसातें बद्धकहतऋतिवी- च॥११॥ ॥कबित॥ । जुधिस्थीयतेतिताकुंकहतयु धिष्ठिरसोआपयूंपधारेयुधधीरताकहारही ।। अापते कनिष्ट क्षत्रधर्मागरिष्ट भीमाकोंजोकहैतोकहौवाहूऐसीनाकही आपकेअभागबोयो पिताकोविभागकीनीत्यागबंधुच्या- रुजीतीदिसाचारकीमही॥रावरीयेभूलहोतवंसनिरमूलफही आपकीकबूलरावीसूलाजलीसही॥ ॥दोहा॥ |यूंक हिऐच्यौरवडगपुनि समझिपितावधपाप। आपधातकुंकृष्ण कहे बहुरकरतकहाअाप ।।१२॥ भोमोहिअग्रजभातको बिनासँस्यबधपाप ॥ कैसेरारबूंदेह• आगेप्रेरकाप । ॥१३॥ ॥श्रीकृष्ण०॥ योपकरेजसापको आ पघातसमसाच ॥जीवनमृतगनिअपजसी स्वायंभूमनु ॥अर्जुन-॥ ॥ उप्पै॥ ॥ एकधनुष गांजीवविजयकीयइंद्रसुरासुर॥ एकधनुषगाजीचप्रगटकि यअभयअमरपुर । एकधनुषगांजीवकरीदिगविजयहते उरवल ॥ एकधनुषगांजीवदलिउदुरजीधनकोट्ल ॥ चिनुसै न्यएकगांजीवधनुफेउससुरवंडनकरिय॥करिकोपसौपिध || नुऔरळूआपकहाँइहउच्चरिय॥१५॥दोहा॥ सुनिदुरवचअनुजके कियेनृपबनदिसगोन। ताकेपदगहि कृष्णकहि कहिनृपहयगतिकोन।॥१६॥ ॥युधि ॥ ॥ बाच॥१४॥ ॥ A (१६.) ॥ पांडवयशेंदुचंद्रिका. मैदुरव्यसनीभाग्यहत दुरबदायफक्कुलकेर । यैपहोमैतप करह भ्रातफहत्तसतिटेर ॥१७॥ ॥श्रीकृष्णा॥ तेरे तेरेबंधुकी मृत्युबचावनाज॥ रचनप्रतज्ञाविजयकी कियेमोरगनिकाज॥१८॥ कंठलगावहअनुजकू ममजुता ज्ञादेहु ॥निसकंटकसबभूमिको राजविजयजसलेहु ॥ १९ ॥ धर्मपुत्रकहेआपसे जिनकेनाथरूपाल॥ तिनके बिन- छनफमें क्यूंनविधनकेजाल॥२०॥ मिले परसपरहरसरिस इतअश्रुदौउभात ॥ कहतजुधिष्ठिर छमहुमम विजय- होहुतवतात ॥२५॥ कहुअर्जुन मेरी छिमहु मातपितागु रुनाथ ।।असेदुरवचआप अचलूकहेनपाथ ।। २२॥ के दुरजोधनआपकी विजयासमिटिजाहु॥केराधाकुंतात था पुत्रसौकविललाहु॥२३॥ फैसुभद्राअहवातअब मिट जैहैततकाल ॥तयाकनकी त्रियन भूषनव्हहै साल ॥२४॥ ॥ धारसुदरसनकहतहरि नरतैमरनैनाज ॥ तोउमै हति हूंनयमतजि करनहिकोतवकाज ।। २५ ।। यूंकाहिरथा रुद्ध भय भयेसकुनसुरवमूल ।। अनिमतउलकोपातजैक हिप्रतिकूल ॥२६॥ भीमकहेयासम्यजो चीरकपिध्वज होच ।। मरेदुष्टराधातनय डरेसुयोधनरोय ॥२७॥ मोरजुद्ध तेंथमितयह भिरेविगतश्रमपाथ ॥दुरयोधनकीसैन्यसब अं वहींहोयअनाय॥२८॥ ॥फवित्त। ॥ कहे है पिसोक नामसारथी महारयीतेस्यंदनकीनेमितै भूधूजतधुकातहै देवदत्तपांचजन्यगांजीवकीघोसहीतेसैन्यकार वीकेपानपंछी उडेजात ।। परसनकीयोसस्याजलोंमुकुंदबकर्नप्रान सनसुदर्सनसुहातहै।महामेरुकंदरसीदेरिपध्वजअंदर मंदागिरीसाभीमबंदरदिरवातहै।॥२९॥ ॥दोहा॥ ॥ Pre POPMEIN पांडचयशेंदुचंद्रिका. (१६१० कयौसारथीतेरथी देहुचतुरदसग्राम ॥यहेबधाईबीचही औरंगजादिइनाम॥३०॥जुरेअर्जुन कर्नजबहि कुटिल. द्रष्टजुतकुछ॥ ढाक्योव्योमविमानते सुर्ननिहारतजुड़ ॥३१॥ ॥सल्य॥ ॥जो है कपिकेतुते करनमरनवि- धिकोय।।तोहतिहूंकपिकेतुको मैसेनापतिहोय ॥३५॥ ॥ कृष्ण ॥ ॥जोकदोचकरकरनके होयधनंजयपात ॥ क रिस प्रजातिकु सीघ्राहिसत्रुग्रजात॥३३॥ हत्याविजय ब्रषसेनकु पितुसमीपकरिक्रोध ॥ करनकरनइंप्रथमही पुत्रसोकबोबोधि॥३४॥ ॥छप्पै।। ॥ यतकृष्णसारथी उत्तमरुदेसनरेश्वर ॥ इत्तगांजीवटंकारउतै धनुविजयसब्द कर ॥ इतध्वजकपिकीगरज उत्तेगजकक्षभयंकर ।। इतउत स्वेतहुअस्वइतैइंद्रादिसकलसुर ॥उतभानुपादितमयो- निसबंडूच्छतविजयविचादरत॥इनचीच अंस.भवजयउभ- य कित्येकलरिचऐसेकहत॥३५॥इतअभिमनदुरचदुसहर तैषसेनदुसहदुरच॥ इतुद्रुपदादुरवाद उतैबधबंधुनकी सरव ॥ करिसमरनजुतकाँधचलेंगनबानभयंकर॥नभ अच्छादितभयोकटतदोउसैन्यबीरबर ॥ यमहारथीदोग सारथीभयेबसंतपलाससम ॥ कहेदेवकिरीटीपुरनधनिक रनधन्यकोऊकहतयम ॥३६॥ : ॥दोहा।। ॥ नाभूतो भविष्यती ऐसोअदभुतजुइ ।। यतैइंद्रसुत्तबढतज्यूं बंद तभानुसुतकुध ॥३५॥दूजैदिनरनकरनका तीजैदिनस तगंग॥चौथैदिनदिजद्रोनको अदभुतजुद्दतिहुंअंग॥३८॥ जुरेकरनअरजुनजहां दोनोसैन्यपिहाल होयजयादोयगज भिरत कदलीकोक्षयकाल ॥३९॥ कचित्त॥ कोसमूहघरघरकौमिल्यौहै सैन्यताकेचीचडरकौनलेसजाके ॥ ॥ अरि

(१६२)
पांडवयशंदुचंद्रिका.
परको ।। चरकोप्रभावहै फिनरकोप्रभावहै किसरकोप्रभावकेप्र
भारउभैकरको जेतेअवनीसदीपुपरैतेनदीसपरेचीसवीस
पेंडलोविजोगसीसधरको कैसोयाकोव्हेसोपोनगोनतैअनैसो
होतऐसोरनजैसोबनतारिनारियरको ॥४०॥ गांजिवकोपोस
देवदत्तरथनेमिनकी श्रवेगुदामेंढ्यसुनेचाहनतितेतिने ॥रचिसो
उदैसोनरागमत्तेतारागनभिरयेसूरबीरभासतकितै कि
नै॥पानदोनूहाथकोप्रयानयदुनाथफौत्युभजेकरुसायतेज
पाथकोचित्तचित्त । ज्ञानभूलिजावेलाभहानि भूलिजावेकेतेप्रा
नभूलजावेवानलागतजितेजिते॥४१॥ कौरवीहमारीसैन्य
पांडुचीमिटायदेहे कायरकूमारेनाहिंसूर पैंक्रुद्धहै। बालकाल
हितैदु धनकूचाहेहमवालकालहीतेयापनतेविरुधहै।
आगे बढेगेपासुजसपढेगेकवितेव्हैकटेगेभूमिजूधः-
निरुद्धाफिरीटीभिरहै ।। पिस्वभकीसीषुलीजातक्रुधदैविरुद्धहै
निरुद्दहैन जुद्धहै ।। ४२॥ कमलकेदलहुतेकोमलजु
वरभवलकठोरताविचित्र है। अर्जुन, एकत्तथाअर्जुनअने
सेजुरेसत्रुजेतेफूलरचाईंजनजनहै ।। भायनतैंस नमेंसत्रुनतेभा
थनमेंहाथ शिशुमारचक्रइपुजूंनषत्र है। पवनकै मेरवतेसव्य
अपसव्यदोनोसत्रुपतीपित्रलोकप्रेरके पत्र है।। ४३॥ नावनिज
सैन्यलाभ भूमिरवलैनप्रेरीसत्रुसैन्यासिंधुमैप्रवेसनैकपाये
॥ युधिष्ठिरसाहवासुदेवसेनलाहायतिनकी सलाहविघ्नबंद
मिटायहै ।। त्रयोदसयोसचीचत्तरेसिंधुतीजोभागपांचयो-
सबीचदोयभागळूनधायेहै।पुत्रकेमरेतैकोपपोनभोप्रचंडता
तेसव्यअपसव्यवर्धमानसेलरवायेहै।। ४४॥
॥छंदपधरी
॥ ॥करिक्रोधजुस्यौरिनसूतपुत्र॥ असिसैन्यपांडवीजजंत्र
कनप्रतिलरनहितत्तिरतकेक।। उनमूनसरनविनमरनएफ

। पांडचयशेंदुचंद्रिका. (१६३० ॥सरचरनवरनकरछुनतसोय।।जुनपरनधरनविचमगनहोय॥ तरनजुधलरवतथितधरनिओर।सुतअरनउतैनरभिरनघोर ।।ल रिखकरनचपलत्ताअरिनमध्य॥ तवपुत्रविजयमानीप्रसिद्ध ।। परिकरनवानतेकरिनत्रास।चिकरतभजतकेउहोतनास। यूंभीमसेनतबगजअनेक॥ सिशुमारचीचप्रेरेफिनेक ।। दुरव हरनसर्वाजदुपतिदयाल ॥ केउवारबचायोनक्रपाल॥ ४५ ॥ ॥ ॥दोहा॥ ॥ रवांडुजरतअहिबचिगयो निगलिउडीति हमात ॥ एकजानिइकबातकी धातभईभपात ॥ १६ ॥ ॥ कबित।। ॥सोईवैरयादकियैकर्नबानव्यापकभी- आगेथोअमोघयाकैतेजतषिसेसभो॥ कर्नचिनजानेताकोकि योहेसंधानदेखिहाहाकार भूमिअंतरिक्षदेसदेसभो ॥जोस्यो कंठदेसकृष्णमचकलगाईअवगिरे भूमिबीचनरसीसपैप्रवेसा भो॥गिस्यौहै फिरीटीकटिरतनजस्यौहैताके विषतेजस्यौहै मै किरीटीकोनलेसभो॥१७॥ ।।दोहा।। । पुनितूनी रप्रवेसकरि बोल्योकर्नसंभारि॥संधहुतवममसत्रुमैं लैहुमान ननिकारि ।। ४८ ।। कर्नकहेतुमकोनसोइ कहतसर्पमाँहिजा नि॥ लैनवैरमममातुको आयौसमयपिछानि ॥४९॥ कर्न॥ ॥ कर्नजोरलेन्नौरको जुधनकरैअहिराज॥ कपटवा नजोरेनहीं सतअरजुनबधकाज॥५०॥जगविचप्यारेदार सुत तिन प्यारेप्रान॥ प्राननतेजसमोहिप्रिय स्वामिहिध मसमान ।। ५१॥जयजियरक्षाकवचअरु कुंडलजसकेकाज ॥दीयेताहिहिजरूपधरी जाचतभोसुरराज॥५२॥ इहसु, निअहिसररूप करिलेनकपिध्वजपान॥चल्योसुहरिउपदे सते नरछेद्यौषटवान ।। ५३॥ कर्नगुरुद्दिजापते ब्रह्म स्त्ररथनष्ट।। उत्तस्यौचक्रनिकारक कृष्णकयौकरिनिष्ट ॥

(१६४) पांडवयशेंदुचंद्रिका. ॥श्लोक॥ ॥निमग्नेरथचक्रेतुकास्यप्रथ- वीपते । केचिदागतेकालेतेप्रोचुस्मकिरीटिनं॥१॥माकूर्णात धनुर्पकिर्षयंकर्णनाटिकैः ॥ कुरुगांकुलकर्तासित्वंकर्णः क रुपाकुरु॥५५॥ ॥ श्लोकोकीटीका॥ ॥दोहा॥ ॥ करियांगनिमग्नते भोप्रज्ञाचषभूप ।। कितने पुरुषकिरीटि कहतभयेयहरूप॥५६॥मतिधनुजाकतिलौ ऐचहुंघोर संचान ।। कर्नविषैकुरुनाकरहु तूंकुरुभूषनभान॥५७ ॥ब हकरनअकरनसमाज तजेपाथधनुबान ॥ कृष्णकहतहत संत्रुको देयतकहाअज्ञान ॥५॥ ॥कर्न॥ ॥सुन्यौ बेदनैबडनते धर्मकष्टतनत्रान ॥ सोहमसाध्योाजलौं जथाशुक्रसुनिकान ॥५९॥ धर्मभक्तधिकधर्मको जेहमछी- जतजात्त ॥ पांडवगुरुपितुकपटपथ मारिबढतादिनरात । ॥ ६ ॥सरनागतहूविप्रहू इतिचदतनरनमाहि॥ कनधनंज यतैकहत तुमसेहततननाहि ॥६१॥ विषरेकचरुविकवच पुनि विधनुचिरथरिचाहि ॥बालवड मुर्छत श्रमित तुम सहत्ततनत्ताहि ॥६३॥ मेरेतो कृष्णनै नेकत्रासमतिमान ॥ छनकछिमोकरभूमिते चक्रउधारतजानि॥६३।। श्रीकृष्णा॥ ॥ विपतपरेपरनीचनर बनतधर्मवरजोर ॥ धिधिकनिंदतधर्मळू कुकरमलरवेनकोरि।।६४ ॥ ॥ छप्पै॥ ॥जदिनधर्मसुधकरिय भीमकौदियौविषमविष । जदिनधर्मसुधकुरिय लापगृहजारिसुचतलिरख । जदिना धर्मसुधकरिय युवतरजकूकतरानी॥ जदिनधर्मसुधकरि व कपरकरलीजधानी। कहकृष्णनहांसधनाकारय पदसुताचन विचहरिय॥ अहोभाग्यबधाई धन्यदिन कर्नध मंदिमनुधकरिय ॥६५॥जदिनधर्मसुधकरिय श्रापकोधि ( १६५ ॥ पांडवयशेंदुचंदिका. प्रपठायो॥जदिनधर्मसुधकरिय घोषयात्राचढिायो ।। जदिनधर्मसुधकरियं त्यागिरनबिचनृपभजेउ। जदिनधर्म सुधकरिय गाइघेरतनहिलजेउ ।। कहकृष्णतथासुधना करिय मिलेबहोतअभिमनमस्यौ । बधाइयआजिदिनधन्य तुम करनधर्मसमुरनकस्यौ॥६॥ ॥दोहा॥ शवचनसुनिपार्थक क्रोधानलकीज्वाल|श्रीनननासाचषन ते बढासघूमविसाल ।। ६६ ।। कोपज्यलितचषविजयतें कीयो धनुषटंकार।। सोळंकारगुरजनसुरवद् दुरजनहृद्यविदार ॥कवित॥ ॥ सूरके आवाहनकोकायरवि सरजनकोबंधुनकीरक्षाहीकोजत्रतत्रजान्यो में ।। इंद्रकेउ- छाहहूंकोरवीउदाहहू कौअच्छरविवाहहूको कारनपिछा न्योमें। गांधारीकेआपदाकोप्रथाजूकेसपैदाकोजुधिष्ठिर विजयप्रतापउरान्यो में।।गांजीचकोप्रतिच्याटकारको मोघघोसयत पदारथकोवीजमंत्रमान्योमैं॥६॥ ॥ षवाहहत्यौनरएकबान॥ सोमहावीरअभि मनसमान ॥पुनिहत्यौकरनकोदुनियपुत्र ॥ जुतकुंडलमस्तक गिरयोजन ॥ दृषवाहरुवृषपर्वापछारिपुनिकयोसुयोधन तेंपुकारि ॥ौकियविरुधयहदुष्टहेत॥तिहहततबहिकिन राषिलेत॥यूंकाहिरूफियोगांजीवसंधान। बचके रूपसोड रुद्रयान ॥६॥ ॥दोहा॥ ॥ऐचिपनचकनसिपुनि ते जवानकति ॥मोख्योसिरहरिकरनको फियोदीपसमसांना ॥७॥ दुर्योधन केहविच ताबिनभयोअंधार तजनि- कसिरबाँचीचभी सबरवत्तसंसार॥१॥ देवदत्तअहिज- क्षगिर सिंधुनदीधरिदेह ।।आयेजुधलखिचकित भये गये विजयलरिवगह ॥७२॥ करनमरतभजिवलडरत गिरतरुक द्वरी॥

|| राम (१६६२ पांडचयशेंदुचंद्रिका. स्तगुहार ।। दुस्जोधनदुरपसिंधुकौ तरतनपावतपार ।। ७३ ।। ॥ ॥सुयोधन०॥ ॥ कवित्त॥ क्षित्रिधर्मछोरिके प्रहा रिपित्ताभीसमकूवैसहतेद्रोनळूनईश्वरकोभाचेगी॥त्यूंहीभूरिश्र वाराधापुत्रहुअसावधानमार प्रथानंदकीकाकीरतरहावेगी। योहीछलहीने भीमसेनतेहमारोबधहैभवस्यमृत्युदेहधारीकूतो आवेगी। कर्नहकेमहीनेसवौदिरवानी मैंहूप्रानहानिमा नियेकहानीतो जावेगी॥७॥ ॥संजयः॥ अवतारहीतेकरिहैविलोमरीतलघुसेसअंसइहांअग्रजकहा- योहै ।। वहाअनुकूलरहेसदाएकपत्नीव्रतदछनव्हेइहाविभचा रपदपायोहै। वहांनित्यपथकूउलंघपांवधस्यौनाहियहां ऐसी रीतहीनै कामबनायोहैं।वहांइंद्रपुत्रकोसंधारिरारच्योभानु नंदयहांचासवीकोराविरविजमिटायोहै।।७५।। ॥ दोहा । राजपुत्रहनिपंचशन उभयसहसरथचार ।। हतेकरना गजबेसहस एफलक्षपदचार ।।७६॥कीयोसल्यसेनापती जय आसांसुततोर ॥ फिरकहिहुंलपिहूंजथा जुद्धबनैगोघोर ॥४७॥ मरेभीष्मद्रोनहुमरे कट्योकैरनबलवान ॥ पांडुनजी तहिसल्यअब आसानृपबलंबान ॥ ७० ॥ उतै एकअक्षौहि नी तेरेसुतकीतीन ॥ रहीसल्यकेजुङमें सोसबव्हैहैलीन ॥७९॥ मिलेराजसूजज्ञमे धर्मपुत्रकेपास ॥ तितेदेसकेतो रमत भयेरुहैहैनास॥८॥ ।। इतिश्रीपांडवयशेंदु चंद्रिकाकपिर्वणिचतुर्दशमयूरवः॥१४॥ ॥ ५॥ ॥ श्रीगोपाल कृष्णार्पणमस्त॥ । ।

(१६७) पांडवयशेंदुचंद्रिका. अथशल्यपर्वप्रारंभः -- बलदेव भीमसेन कृष्ण पांडव 'दुर्योधन वध शल्याभिषेचन. भीमसेन दुर्योधन- HAVA

।।दोहा
॥ कवि
पांडचयशेंदुचंद्रिका.
श्रीगणेशायनमः ॥अथसल्यपर्वप्रारंभः॥
॥ संजयओरयुयुत्सुदीउ आयेनृपळूलेन ॥ नियनजुक्त
कुरुवेतहित बड़ीबधाईदैन ।।१।। सजया॥
॥ भीमकौदियोहोचिषतादिनवयोहोबीजलावग्रह भ
येत्ताकोअंकुरलरचायो है ।।द्यूतक्रीडाकाल दिसतारपायबडौंभ
चांद्रोपदीहरनभयेयंजरीतेंछायोहै। मछगायधेरीजबै पुष्पफ
लभारभस्योतेनेहीकुमंत्रजलसिंचिकै बटायोहै। विदुरबचन
कुठारतेंनकट्यौरक्षवाकौफलपाको भूपतेरीभेटायोह।।२॥
॥ ॥दोहा॥ ॥यूंसुनिन्नृपमूर्छितभयो रचाईदृदयदरार ।।
हायहायरणवाससब कहिकरिउठीपुकार॥३॥ मूर्छाजागीनृप
तकी ठरतअंशुदोउनेत्र॥सीघ्रगमनरथचढिसकल चलैतन
हांकुरुक्षेत्र॥४॥ संजयअरुधृतराष्ट्रभये एकहिरथारोह
पूछत्तपथविजुड़की वातनृपतंजुत्तमोह॥५॥ ॥पहरी
॥ ॥ज्यूंभईकयाजुधविषमभाय । सबकहततथासंजयंस
नाय ॥मद्रेसभयोसेनपमहीप ॥सबव्यूहजुक्ततवसुतसमीप
फिरहोनलगोसंग्रामभूप ॥अरिरहेसूरजितुतितअनूप ।।सुस
रमावधभोनकुलहाय॥ पुनिहत्तीताहिसवसैन्यपाथ ॥ हादस
सुततेरेसलसमीप॥ मारेसुभीमरनविच महीप॥सहदेवहत्यो
तवसालभद्र॥क्षयचीजपवर्तकसकुनिक्रुद्ध ।। मुहपकरिलियो
सातिफीसहास ।। करिक्रपाछुडायोवेदव्यांस ॥जुधिष्ठिरशक्ति
१ संजय धृतराष्ट्रसे कहते है कि यह तुम्हारे वंशनाशके वृक्षबीज
बढेजो नीमको विष दियो ौ लास्याग्रह उसका अंकुर द्यूतक्रीडावि
कार दुपहरण कली मञ्चगाय घेरी सो फूल फल तुह्मारा कुमंत्र
जम्मेवता इसवास्ते इसका फल तुमको मिला.
LAIME

॥ पांडवयशेदुचंद्रिका. (१६९२ लीहृदयबीच ॥ मद्रेसगिस्योबसिदुसहमीच ।। करपदपसारि अधवदनहोय।। कामीबियलपटेजथाकोय॥६॥ नरतेअष्टादससहस धर्मसेनबिचोर ।। क्रतवर्माद्रोणय कप तीनमहारथतोर॥ ७॥ सल्यमरेते तोरसुत निद्राने कुलाय॥जलस्तंभनकेमंबतें जलविचसोयोजायभीम सेनकेवधिकजे गयोसिकारहिलेन॥तुजे तकनगकुंडपें दई| बधाईऐन॥९॥सोसुनसैन्यतयारन्द गईजहांकुरुभूप । धर्मराजकटुवादकहिं छेड्योकालस्वरूप॥१०॥धिकदुर- योधनतो त् अपजसकोडरनाहीं। करिसारेकुलको न मिलिसोयोजलमाही॥११॥ कृष्ण ॥ मैकै सोरनछोर हूं कहतोतूंकुराज॥भजिजलबिचभयभीमके आयछिप्यों क्यूंबाज॥१२॥ ॥सुयोधनः॥ ॥सोरठो।। तुमकपटनिवास दुरयोधननिरकपटादिल॥ सबकहसी स्यावास अपजसहरहरसीश्रापरो ॥१३॥ ॥ भीमः ॥ ॥ ॥ कवित्त॥ ॥कुलकोविनासूकरिजलको निवासकी नोभीमकोनत्रासोरलाजनेकयाईना भीसमसेद्रोनसेक नसेंमरायबैटोदसासनदसादे खितौहग्लानपाईना ।।भीमकहे। कहतोतूंअकेलोमिटायदेहपौरसत्ताँकहांगईकबहूदिरचाईना ॥ करीलपराईततोसबेचिसराईमैतोद्रौपदीपिराईताकोअब लोसिराईना ॥१४॥ ।।दोहा॥ ॥ कोपिद्रुपदकुमारते ऊ रनहोऊआज ॥ लैजीयतोसेंदुष्टको दैअग्रजकुंराज ॥१५॥ सुयोधनः॥ ॥कबित्त॥ ॥द्रोनकर्नसोकहीतैमोकोनींद- लागीनाहीतीनद्यौसभयहोनहारयूंविचारेगी। एकजामसो ऊतौनश्रमतेनिवर्तहोऊंसुयोधनतातैनीरसज्याचितधारे- गो॥कुसमेजगाचोसदाऐसईअधर्मकारित्रकेलाहैतोउनेकतु ॥ निता 1 - (१७० ....का पांडवयशेंदुचंद्रिका. मतेनहारिगो ॥चूफजैहैकसेभयेएकठेसे भाडेनपैठूकभयोल द्वतोउभूककरिडारेगो॥१६॥ ॥जु॥ ॥दोहा॥ ॥कयो जुधिष्ठिरनृपतसुनि अबहुअर्धभूलेहु ॥ अंधमातपितुदुरिचत संततिकोसुरवदेहु॥१७॥ ॥ कबित्त॥ ॥ गॅदाधार कंधपैवकारतमदांधंनृपभीमश्रादिसुनियेविचारकहूपनमें ।। कैतोमुहिमारकेअजातसत्रुराजकरोकैसंधारतुमकूनिवास कस्वनमें। मेरीनोअरचंडाज्ञारहीछत्रधारीनपैदीननरना- रिनपैभावेनाहींमुनमें ।त्यूंहीजुधजूटपस्योफूटपस्योजंघदेस नाहीहटछूटपस्यौतूटपस्यौरनमें॥१८॥ ॥दोहा॥ ॥ भीमसिरचार्यकृष्णक वामहिजंघप्रहार । कस्योगदाकोतहप स्यो कुरुकुलभूषनभारता१९॥ ॥कबित॥ लीकोसोचक्रकेफनालीकोसोफूतकारलोयनकपालीकेकपा लफेसोहैउदीनि । आयुधसुरेसकेसोमानहालैकोभानुकोष कोउफान किधोमीचहुकीमानुसोति ॥सुयोधनदुसासनदुर्मुखी दुसहगनदेखोदोगदापीयेदूनिहूतेदूनिहोति ॥जेठज्यालकाला हकाजीहजमराजकीसीजहारहेलाहलकभीमकीगदाकीजोति ॥२०॥दोहा॥ ॥ऐसीगदाप्रहारते भयोतोरसुत्तनास॥भीम नतोसुतःमत्यौ रक्षककृष्णप्रकास ॥२१॥ ॥कबित्त॥ ॥ चामीकरकोससस्त्रचस्वनकेकोसोररत्ननके कोसएकएकतेन चीनेहै।देसदेससंभवतुरंगरंगकेजपतीही विहंगसंगप्रेरकअधी नेहोरहूंअनेकराजवैभवसराष्ट्रजेतेकाजधतराष्ट्रफर्नशत्रु नतेंछीन । महाबलीअर्जुनकोअग्रजविपणकोरगदाकोप कारएफदेसभारीलीने ॥२१॥ निमुचीकोइंद्रजैसेत्रिपुरकूरुद्र नमधुकौउपेंद्रनीके मूलहीमिटायकै ।नागफूरयगेंद्रजैसे गेज- की गद्रतसेकुंभरामचंद्रजुतरावनपचायके ।।मेघळूफणींद्र (१७१७ . पांडवयशेदुचंद्रिका. महाकालीदैत्येंद्रकुंज्यूइंदकोंकपीद्रत्यौहिपौरसदवायके को रद्धायकेउठायकेमहानगदाप्रथानंदठाढोयोनरेंद्रविजेपायके ॥२२॥अरनीद्वपदजाइकोपभीमकोसुआगजजतयुधिष्ठिरस- भारस्वांगलीनेह होताहैकिरीटीधनुसस्त्रबोज्यासब्दस्वाहा- साकल्यहैबीराज्यचीररसभीनेहै ।। सुयोधनयज्ञपसुक्कुरुक्षे अग्निकुंडपूरणाहुतिमैं गदाहीतेंअंगछीनेहै ।।वारीप्रथाकूष- कीसुऐसजग्यकारीपुत्रकेतेभुवचारीसुरलोकचारीकीनेहै ।। २३॥ अग्नीधअभिमनहैवायुतनयउदगाथाकपिकीध्वजाकोजहांयु पकरिरारव्योहै ॥धृष्टद्युम्नचतुराननअध्वर्युसातकीहैगाथाहै सिरवडीवेरलेनअभिलाख्योहैं।। आहुतीचदीकेबीचकन्द्रीन- भीसमऔरजयद्रथसेहोमे बिलोकसभारव्योहै।जज्ञरूप देहधरेहोताकेसमीपबैठोसेनासोमवल्लीधोटिविजैसुधाचारच्यो है।॥२४॥गदाभंगहोयकैपरेवूधर्मराजकहैवानै सत्रुताईकीउठाई छानिछानी। मातापिताभीष्मद्रोनकृष्णचिदुरादिकुनैनीफेसम पायोतामैंएकहनमानीते।मेरीहीअनीताज्ञासबपेरहैगीबनी कोनऐसोमोहिकोमिटावेऐसीजानीत ।कुरुराजधानीकूनसोच तसुयोधनमेंकैतीराजधानीहायकीनीधूरधानीः ॥२५॥ दोहा॥ ॥दुरयोधनके सिरसब करिअाज्ञाआधीन । उत्तरैरथतैविजयहरि सीघ्रभयोरथक्षीन॥२६॥ प्रथमउतास्यो पार्थ पुनिहरिउतरेआप॥भयोभस्मरथअस्यतें भीसमद्रोन ॥ छंदपधरी॥ ॥ गोसिरवरबीचउ- ठिधर्मराज ।। सुतद्रीनायसुततोरकाज ।। लविभूपदूसा चितचिकलक्षिमा कियसत्रुहतनसंकल्पविषाकृतवर्मामातु लजुक्तजाय ॥ बिहुछोरेरथनिग्रोधपाय॥कछुफरेसयनजोल- गैनैन॥श्रमसमरॉमटेतनहोयचैन ।। यकायधूकतहांनिसा- प्रताप ॥२७॥ ..

(१७२ ॥ ||३111 पांडवयशेंदुचंद्रिका. चार॥सत्रकाकनकोकीनीसंहार ।।गुरगन्यौताहिअरिनासका जामातुलप्रतिवाल्योविप्रराज ॥ पितुचयरऔरनृपवयरदोय॥ सिरधरेमरतमभारसोय। निद्रानलगतआवतनिसास।तु मचलहुकरहुनिससत्रुनास॥२८॥ ॥कृष्ण ।। ॥ दो- हा।। । करिवोजुक्तनविप्रळू हाथसस्त्रगहिजुद्ध ॥ जो जुधकरिवोहोयतोउँ स्वामीढिंगअविरुद्द॥२९॥ विनस्वान मौजोकियचये सावधानअरिपाय ॥ करहप्रातजुधहोयहै। हमदोऊतोरसहाय॥३०॥ तूंद्विजनृपरिनकटिपस्यौ नि- ब्रागतिअरिवंद । तोहिअधर्मनाघटै करिवोसत्रुनिकंद॥ ॥अवस्थामा ।। भीष्मद्रोनअरुकननृप छलिक रिमारेचार ।। तेअधर्मतैनाडरै वरजतकौनप्रकार ।। ३२ ।। ॥संजयः॥ ॥पांचपांडुरुतसातकी कृष्णगयेलेदूर देचीपूजाच्याजकरी जानिद्रानरूतक्रूर।।३३।। सत्रुहर्तन द्रौपीचल्यों निसनिसीथसुनि भूप॥विहिप्रतिरोधनहरिध रयों विस्वाचिराटस्वरूप ॥३४॥ धरेरूपवैराटहरि रचरेस- उग्सबीच तिनपैकरेप्रहारसो उरैकदालरिवमीच ॥३५॥ ट्रोनीयायुधसफल भयेबिरादतनलीन॥कस्यौहोमनिज मासको रुद्रनिमनदीन॥३६॥ दियोरवड़हरिमिटगयो यह विराटस्वरूप। हत्याजायपितुकौहतक पसूबद्धज्यूभूप ॥३७॥ पांचद्रौपदीकेसुवन नानाआयुधधारि। भिरसुमा न्यत विप्रबकारिबकारि ।।३८॥ौपदपुत्रदुहित्रसव मा न्यसहेत॥ बचेसुक्रनयहिते अरुमातुलकारचेत॥३९ ।। । कवित॥ ॥ मातुल सिर्यापनकुद्रौनीनाहिकीनो- कानकीनांसल्यवास्यपूर्वपिताकेउचारेको ।उएपिनोपिता- कोनभीष्मको मुयोधनकोकीनोसोदिरखानोनीकेवाइऔरबारे 11 dauNutar PRIAL ॥ पांडवयशेंदुचंद्रिका. (१७३७ कोजाकोदेरिवकिरीटीइविकलभयो हैवीरताकोयोप्रहार है चि राटरूपधारेको ॥जमकीजमातजैसीजिमाईजटीससैन्यद्रोन कौंतीसराकीनोहाथमारेको ॥ ४ ॥सारइतकहेभोजवंसअव संसदेखिपितापितासत्रुकेमिटानहारछेटाको॥द्रीनीके प्रहारते नसोमकसुनैगेबचेलावाज्यूनबच्योसुन्योवाजतेपेटाको ॥ नि सावीचजाकोतेजप्रलेभोनकेसमानउबाहेविकीसषडहाटक कलपेटाको।मारतचपेटामेटाचहैवंसद्रौपदिकोरवेटाकरघंटा ठाडोबेदावमनेटाको ।। ४१।। मातुलकीकानकूनमानीमनमा न्योकीयोकरउरनेत्रबीचचीरसछायो।ताहीछिनजोतिभ स्वायुधसंभारिबैठोसांभकौरिकायसांभरूपदरसायोहै।वा हीनिसावीचनासकीनोचतुरंगनीकोधन्यरूपीकूरवजाकेबीच- चीरजायाहै।।द्रोनापकारकै विषेस्योकुलद्रोपदकोद्रोनीउपका रकेविजोगळूमिटायोहे ।।४२॥ ॥श्लोक॥ ॥पांचालास्तु गताः स्वर्गद्रोरोनबाहुशालिना ॥अवशेषाहतेराज्ञीद्रोणिना- योजितापुनः॥४३॥ ॥कवित्त॥ ॥रुस्योमनपापमेन द्रोपदीबिलापमेनमातुलकीसीरबसुनैघोरनर्कतापमें।।सत्रुमा रिसातसेससुनायेसुयोधनको दिरवायोसवायोफेरबापमैरुत्रा पमै| ऐसीरीससांपमैनालैके प्रतापमैनजैसीरीसद्रोनीकीवास त्रुकेमिलापमै ।आधिरातिसोयेयेमिटायदिये पिछिलीमैया- योचुपचापमै गयोचुपचापमैं ॥४४॥ ॥ दोहा।। वृद्धकहत्रियनविन सब हिनडारेमारि ॥रयौनअष्टादससह साबित कोइउठेपुकार॥४५॥ ॥सवैया॥ संज यबोलतभूपप्रचक्षु होयसुतौसबदेवअधीनो)। कोनको- कोनकोसोचकरेसबछत्रिनौगनजुद्ध छीनो ॥द्रोनसेद्रोनी सेहोतेदसेकनौहोननतोसुतकौबलहीनो॥बोयकैलूनिगोषेन |बाला ॥कबिता || ॥दोहा॥ (५७४० पांडवयशेंदुचंद्रिका. पित्तात्यूंहिपूतनिसामेसलाभलकीनी ।। ४६।। ॥ पितुकेमरकोसोकनाहिनअलोकसोफस्वामीहूंम स्तैचामिधर्मइकतारी।।भारद्वाजसअवतंसबसद्रोपदको छेदकैचढाईध्वजाजुधकथासारी॥जनोहोतोऐसोजनोजोब नपृथानयोतिरोपुत्रदेरिरकेपुकारिकहूंनारी ॥गांधारीकहत रुपीमेरोसतपुत्रधारीवारिचारिडारूकूरचएकपुत्रवारीपैं॥४५ ॥ संजयः॥ ॥द्रीणीमुखरिपुबसु नि गयेसुयोधनपान । विप्रसस्त्रपरित्यागकरि गोव्यासाश्री मथान॥४८॥हरिलैआऐपांडवनसिवर नसमयप्रभात॥द्र पदाकरत चिलापजुन हायपुत्रहाभ्रात॥४९॥ सबनिसिबीती वातसुनि विजयपतज्ञाकीन।लादेहूंशिरसत्रुको मतिरोवे अतिदीन ॥ ५० ॥ वाके सिरधरपांवत्म सूतक करियोस्नान। फिरचंधुनळूसुत्तनळू देहूंजलांजुलिदान ॥५१॥ ॥छ दपधरी॥ ॥यूकहिरुकियोरथजुक्तगोन।। प्रतव्यासान- मनरगतिसुपोन॥स्पंदनलिरिवद्रोनीविगतसस्त्र ॥उत्तप्रेस्यौन रपरब्रह्मास्त्र । लरिषअस्यबंसपांडवनिकंद॥ गर्भकीकरीर- क्षागोविंद॥प्रतिरोधकरनसोइअस्त्रपाथ ॥प्रेस्यौसुभिरेदो उएकसाथ॥५२॥ ।। व्या०॥ ॥पार्थविधिप्रपाक पिपुत्र ॥ अथचाकिहोयजगप्रलययत्र । प्रेस्योयहद्रोनी जुतप्रमाद् । आकर्षरायाळूनाहीयाद ॥ लरिवउभयास्त्र जगप्रलयकार ।। सुनिव्यासंवचनकीनेसंहार।। सुतद्रोनप फरिरथचिठाय।।जुधिष्ठिरअग्रले कियोजाय॥५३॥ दोहा॥ ।। कृष्णभीमदोङ्घकहत आतताइनहिविप्र ।। करतचादेखतकहा हतहुदक्षिण।। ५४॥ कयौजुधि टिरद्रौपदी यहहमतेंनाहीय।हिजवधममसुतनामि- m ॥ पांडचयशेंदुचंद्रिका.. (१७५ लै कहेकृपीकारोय ॥५५॥ चूडामणिजुतहरिसरवा विज यदेहुछुटकाइ । विनासस्त्रयहविप्रवध निगमकहतविधि न्याय।। ५६।। कयौजुधिष्ठिरत्यूंकियो शिरवाछेदि वडा री॥यापैपगधरीनरकहत करहुस्नानअबनारी ॥ ५७॥ ॥ इतिधृतराष्ट्रसजयसंचाँद।। ॥ वैशंपायन ॥जुद्धभूमिचिचनृपतजब आयोत्रियनसमेत।।गां धारीप्रतिकहतमिल कृष्णब्यासजुतहेन।।५८ ॥ तूंजानत काकहहिहम नहींजुधिष्ठिरदोस । कस्यौवंसकुरुकोकदा न एकसुयोधनरोस॥५६॥अवताहेतचपुत्रये भूलिनदेऊ सराप ।। परतजुधिष्ठिरपांवतव हृदयलगावहुअाप।।६० ।। पायपरत करनरवनपर परीमातुकीदृष्ट ॥चरवधपटअध छिद्रतें भयेकरजदसभ्रष्ट ॥६॥ ॥ गांधारी॥ कृष्णाप्रति॥ ॥ कठिनजंघममपुत्रकी छलहिडराईतोरि ॥ईश्वरतादरसातफिर स्यालसिंघपरछोरि।। ६२ ।।जाकेपद तररहतथे छत्रधारिनकेसीस॥पलचारीपदतैमलत ताकीसी सअनीस॥६३॥ ॥जुधिष्ठिरप्रति॥ ॥कवित्त॥. ॥ सनमेंजीवकामिदानीसइरधिनकीचूरिगरबापुरेनिकारहैक्यूं टोटेनूं॥गंधीरंगरेजयेविचारेकांपैक हैदुरवसुन्योग्रामग्राममैं संग्रामकामरचोटेकू ॥वारवारदीनतापुकारीत्रियाडबीचगां धारीकहतमरेदेरिवछोटेमोटेषं ॥जुधिष्ठिरएतीभर्तवासिनकी पुत्रवधूकरतेछुवेगीनाहीफेरकजेरौटेकूँ ॥६४॥ ॥दोहा॥ ॥ धनुषक्रतश्रमपाथको दोउहातकहिदेत॥यूंकुरुक्षेत्रवत्तात हैहतेनृपनकौहेतु॥धअंधतेरोपिताचरवबंधनममटेकाति नअंधनकैलकुटिया भीमनरारवीएक॥६५॥हुतीप्रतज्ञाभी मके सतसुतदियेमिटाय॥एकसुताममसोउहँती अर्जुनकु (१७६ पांडव्यशेदुचंद्रिका. मतिअधाय॥६६॥ ॥अर्जुन॥ ॥प्रथमहरनकिय- द्रौपदी दुनियहत्यौसुतमोर ॥तातेंभगनीपतिहतन कियोसं कलपार ।। ६७॥ ॥गांधारी॥ ॥पतिसिरधारेगो दमें लरियस्तमच्छकुमार ॥रक्तलिप्तमुरवकंचनळू पौंछनि कहनपुकारि॥६॥ क्यूंत्यागीअपराधका कितजैहूंकछुचो लि|मैकांतापारोसतूं अंतरंगतिकिरवोल॥६९॥ ॥युधि हिगा ।मातामैरावाछिमा कुलहिचचावनकाज॥दुर- जोधनकलिरूपतें अधमभयौमैं आज॥७॥ ॥धृतरा ॥ अवमेरेसुतपांचए तिनमेंअतिबलप्रीय॥ भीममिलाबहुमोर ने देसीतलममजीय॥५१॥मिलतनकोदर चरजिहरि पुतरा धातुबनाय॥ मिलवायोचूरनकियो नृपहि पयोमुरछाय।।७२ महभीमअतिदुरचतहीं मारेसनसुतसोहि ॥क्षुभितनीचमें कुमतिकरि तिनहितमास्यौतोहि ॥७३॥ ॥संजय।। अचन्नृपमारेभामके मिलेकितवसुताय॥अयमलहरिपुत गरा भीमहि लियौरचाय ।।७४ ।। ॥धृतराष्ट्र॥ ॥ पाकरीममदुरिवत ईस्वरसुमतिअगाध॥ रारव्योछलकरिभी मको टायोमोहिअपराध ॥५॥ कियोसबनकोदाक्रम ध मपुत्रजुतभात ॥प्रथाकयौअबकर्नफू देहुजलांललितात ।। ७६॥क्षेत्रजअग्रजपांडसत तेरोबंधवसाय।। मातवचनसनि विपसन्द गियोजुधिष्ठिररोय॥७७॥प्रथमसोकभूल्योसवे सोफनयोसुनिसुद्ध ।। पहलेमोकूकहततो भूलिनकरतोजुद्ध। छिंदबोटक॥ ॥ लरिवकैनृपवंसविनासक नयो । जलयंजुलिदेतविहालभयो। हरियासदुहूंसमझाय कयो । सुनिज्ञानहनहिनेकगयौ ।।समझायनमाययुहैह मन मिलिल्यायसवैलिहिभीसमपैं।नृपबोलतभीसमतैबति ।।७८॥

(१७७) पांडवयरोंदुचंद्रिका. यांनिरवेदतेजातफटीछतियां।तुमदेमुवयाससुबोधदिये। तीनपैहमनीचमहाराकिये।जिनद्रौनसिवायदियेनरडूं।अब सेखनासारखेघरकू॥तिनकूरनमैहममारिलियो।जबमाननहूं, धिक्रमोरजियो जिनस्वादकछनलियेजगके।सबबालसरेमत्तमी उगलेगा जिनकीमबलाविधवावरते॥तिनकूननिहारिसकंडरते। चिनजानिरवीसुतमातहन्यो। सवतेनिजसविसेसगिन्यौ। सबहीकुलकोहमनासकियो ।यनवातनतंकुलाताहियौ।कि हिरीतपितामहराजकरं।यहपापलेपारकदाउतकं। इतनीकहा पायनिजी चिगिस्यौ।उतचायके भीसुमअंकभस्यो। सरसेजपैचों धपरसुतकी। मुरब्यथापिवेदांतहिकैमत सचआपकीआगि तंत्रापजरे।किहिरीततुंपुत्राविलापकरें।। कुनमारतकोनमरे कबह ॥सुधरूपअखंडलरब्यौसबहू ।। करताहमभानतमूढ कित जिगबीचबंधेनरजानिजितेकरताभुकतामकृतिकहि यानिजजानिसलेपसदारहिये। पतिअंगम्भलिंगतहप्रमदा निनतेंदुहितादीइभावजुदा ॥ गतिभावहिबंधनमुक्तिगिनी । सबपापरुपुन्यउभैसुपनी । लिंगथूलरुकारनदेहित्रिह। त्रमरूपवनी नहिंसत्यकहूं। तनततेकर्मनसत्यबने।स- नामृगतोरनेकोपगिने ॥सुनिभीसमनप्रज्ञानगयो। मनु भानुउदैतमनासभयो।।७९॥ ॥दोहा॥ ॥दिवसपि जोतरसेजसर रावेभीसमपान॥ माघ शुक्लपक्षअष्टमी सु रपुरकियोप्रयान॥४०॥ दाहकर्मकरिभीष्मको नृपतगयो- पुरनाग॥ सिंहासनबैठोसदय भई प्रजाबहभाग॥१॥ इतिन्भीपांडवयशेंदुचंद्रिकायापंचदशामयूरयः समाप्तः।।१५।। श्रीगोपालकृष्णार्पणमस्तु॥ श्रीरस्तु. .

(१७८)
पांडयमशेदुचंद्रिका.
5
Hain
.
Kuware
PLE
HimanAmarnamstmmeadymamere
rivN Rampance
HAM

पांडवयशेदुचंद्रिका. (१७९) श्रीगणेशायनमः॥ सोरठा॥ ॥धृतराष्ट्रआदेस ध रमपुत्रसिरपर धस्यो॥जथासुयोधनलेस कबहुआंगीकृत कस्या॥५॥ नानदानगजगायमहि भोजनसबनसुहाय॥ थमकहैधृतराष्ट्रजब पीछेनृपतसदाय॥२॥ जोपदार्थहोवे निजर करिधतराष्ट्राविभाग।। विदुरयुयुत्सआदिदे सबळू देतरूभाग॥३॥ जुधिष्टिरकोकियो देउत्तराष्ट्रसुछोरि । केदाफियोतिराष्ट्रको छोरीसकैनहिऔर॥४॥ ॥ यु धिधिर ॥ ॥ समरनपूर्व विरोधकरौ कपितातेंहेष। सोमेरोन्नतिसन्चहै बल्लभतदपि विसेस ॥५॥ भयोपरिक्षा तकोजनम सबकुलकौसरवदान ॥ देकौटिनधनाहिजन- को करयाभूपसनमान॥६॥ कीनी विदुरप्रधानता नृपति पंडुकीचेर ॥सोइयुयुत्सुनैकरी कृपायुधिष्ठिरहेरि ॥७॥ ॥ छंदनाराच॥ ॥वितीतरागीतीनजामभूपमं- जनकरै ।। पितांबरंसधारिफेरिदेवसेवविस्तरे॥जुहापअग्नि होत्रकुंरुगायविप्रपूजिके ॥ बुलायकेलामात्यबंदलाभरपर्च सिके । पितारुमातकुंपणामधारिकेसभाकरे॥प्रतापदेरिय सत्रुायतापतेंजरैडरै|सदेसकेविदेसकेकठीअमात्यायके ॥जधास्थितंसुमानदानजेचलंतपायके॥निहारिअस्वसाल दूरसोइथान याचना ॥सहस्त्रअष्टौअशीरिषीनकुंजिमा चना॥सबंधुफेरजीमिभूपभूपचंदसंजुतं। करैविचारसास्व- कोआरोगिपानअमृतं॥ तृतीयजामपायकेलपंतसैन्यहाज री॥करंतसुस्वअस्पएकएकतेबराबरी॥ प्रदोषसंधिसाधिके करंतरात्रिकोसभा ॥लयातगाननृत्यतैसुरेंद्रलोककीप्रभा । करंतमंत्रधरी कियेसभाविसर्जनं।प्रकासमंत्रहोतना विनासपल्लतर्जनं ।वितीतडेढजामराभिहितीयभोजनं ॥

(१८० ॥ पांडवयशेंदुचंद्रिका. समग्रनप्रदेसकेबचावकोप्रयोजनं। यतेककाजनित्यहनि मत्तकाजौरजे॥अनेकदानहोमजापहोतसांकभीरजे। प्रहारकै धनाढ्यपुकारदीनकी नये॥निबेरनीरषीरहोतराज हारपैंगये॥८॥ ॥दोहा॥ ॥अंधरेकुटीपांगरेजेकोउ पिनु आधार। तिनकुंल्यावनसातसत शिवकाफरतप्रचार॥ ॥जितनितकीनौधर्मसुत पापीकूपतडाग । तथापनाराजा तथा बहुदेवालयचाग ।।१०॥ ॥कविता॥ ॥सबुकोउ थापिपिछोथापिव्रतभंगदीसतजुधिहिरमग्रधनमेकंक ना॥ कैदलोककुलकीयूंवेदकीम्रजादहीमेंस्वैरगुतीमारुत मेचानिकमैरंकता ।। इतिग्रंथपूर्णतामैसंचलिरवैयालिरचे चारिइतहासनमेंहोरीमनिसंकता॥ चंद्रमामेकाहकालराइते ससंकनात्यूदुनियामैवकताहै पून्यूमेंकलंकर्ता॥११॥ दोहा । कस्वाराजयहरीतनृप अस्वमेधकियेतीन ॥अनाथा भोमरचनतिय कौउछचहोतनवीन॥१२॥पांचभ्रातचीकृष्या जुत भोजनकरतप्रभात ॥प्रथाद्रौपदीउभयलिंग चलीपूर्व कीवात ॥ १३॥ धिपतिसमयको भावसब अपनीमतिअनुरूप। कहतस्तुतीकरिकृष्णकी सुनतयुधिष्ठिर भूप॥१४॥ ॥ अवभृथस्नानअस्वमेधभयेकुंतालहेजानती रोकहोय है।गुरजनपुरकीआमात्यअमराचनको त्रियमिलि ऐ मेरीरुपादीठजोयहै। तिनकीकरूंगीसतकारकदाभांति भांतिवस्यसुगंधदासीलियैतोलतोयहै। कृष्णके प्रतापअब नाहियावादरमेंबीततदिवसनिसासोवेकवसोय ॥१५॥ द्रौपदीकहनमेरोवांछित्तसदैवहतोकदानानाभांतिनकैव्यंजन बनाउंगी। उहुरसभक्षभोज्यलेखचोस्यपाकपान रिषीनृप किजुननपानमाउंगी । करिहै प्रसंसामेरीसुनिकेअवनताहि ॥क वित्त॥

, पांडवयशेंदुचंद्रिका. (१८१७ विमनकीआपिषातभनिहिअघाऊंगी॥ कृष्णकेप्रसादअचम हानसोटहलचीचसाचोंनित्यनेमअवकासकबपाउंगी॥१५॥ भीमसेनकहे मेरेहतीअभिलाषाऐसीगांधारीकेपूतकदागदाने महारिहुं। औरहअनेकुताकैहोयहैसहायऋषमसकासमानते उज्जुदेजुदेमारिहुँ । सबैभूमिराजकुरुवासिनकोछत्रताहियुधि ठिराछमासीलताकेसिरधारिहं॥युद्धसिंधुग्राहभौरजुक्तसोत स्यौमेनीकै कृष्णप्रतापताकाजसुंपुकारिहं॥१६॥ अर्जु नकहतमोफूरहत्तीबडीसीचाहिभूपनके पुत्रदेसदेसनतेपाया है।अस्त्रसस्त्रधनुकोपतापमोपैदेषिहेतेआपकोपराक्रमसोहा मकोदिरवायहै ।। धनुविद्याचारभांतिसीरिवहैहमारेपासएसो दिनहै हैकबेसज्जनभायहै। निन्हें शिक्षादेनेमोडूं नित्यकूस मयनाहिकवाकोकहायफरेक्यूनसिद्धिपायहै ।।१४ानकुल कहे विचारापदाकिबारमेरोजाकेदारएकअस्वधन्यछत्रीजातसो पादोयकानचारपावएकपुछऐसोहयमेरेहोयअहाभाग्यमानौब डीबातसो॥जाके अपलउनसुलछनविचास्यौकरोंषानपानसेवा कोविधानसांझमानसोकृष्णकीकृपाप्रसंगलाषूहैतरंगजुदेअंग रंगीन्हतहीन्यायूंकूविनातसौं ॥१८॥ कहैसहदेवअभिप्रायसबै आपदाकोजानतोमधन्यजाळूचिप्रनकोसंगहै।।अपहीनिदानो उपायषटचेतावैद्यराशियोनक्षत्रग्रहज्योतिषकेअंगहै।चारचेद षटशास्त्रकाव्यकोसच्याकरनसाहित्यसंगीतध्वनीलछनारुव्यं गहै।कृष्णप्रसादऐसीविद्याजुलब्रह्मचंदावतअनेकरहेनि साद्यौसरंगहै।।१९॥ ॥छंदपधरी॥ ॥जुधिष्ठिरकहत जदुकुलउद्योत॥हरिस्तुतिकहातुमसद्रसहोत। महिभईभार पीडायमान॥अवतारलियोयदुवंसान।पूतनासकटअस्त्र गवत। केसीरवरचकअजगरकुकत॥वछासुरप्रलंबासुरसं ॥

(१९२० पांडचयशेदुचंद्रिका. चारि॥मघचाविधिकालियमानमारिकंसदंतवकअगजरक कर॥लिकालजयनाफियभारदूर। नर्कासुरभागधश्रादिनी च॥वाकीअष्टादसदिवसवीच सबभूमिभारकीनोसंघार ॥ पुनिसेरचसोइकरहीप्रहार॥ कृष्णाममविघ्नटारेकृपाल । गिनतेनपारपाऊंगुपाल॥ भीमकोदियौविषसत्रुभाव।।वि प्णुकोकरततुमाचिनबचाव ॥चन्हिकेसदनसलजरतवार । कीविदुररूपउपदेसकार ॥महिनृपनजीतिमागधमदंध। सब पासलियोकरजरासंध॥भीष्मतेकरुयतब प्रभाव । तिनवि गरसवनदियोताच ॥अजुतगजपाएगसोईनृपअत्रासान रहरिप्रतापकिय भीमनासा द्रौपदीसभाविचवस्खएकाऐं चतहिथक्यौउलकरिअनेक|दुरचासान्यायोबापदेन ॥ पिकुसमयमेरोधर्मलेन ॥ तवकृपाप्रसन्नईदैअसीस ॥ प्रेर फतेकीनीउलटरीस॥ प्रथमदियकमनकोपप्रेरि॥गनिभी महेपजिनसस्त्रगेरि॥भटकन्द्रोनभीसमअभीत॥एकठे लरतहोतेअजीत ॥ भीष्मकोपतनरनासंभाच ॥पापविन कठिनवनतोउपाय ।। वैषगवसुअषभगदत्तवकारि॥मोरच्यो सुआपल्योमुरारि ।। अर्जुनबचायजयद्रथ असंत॥उनर बिनवीचमास्या अनंत । नाकोंसिरताकेपितुसकास ॥अंजुला गतिकरि कियउभयनास॥ वासवीशक्तिअर्जुनबचाय॥ किया मोघहिईवासुतमराय॥द्रोनकोकोनकरतोनिपात॥गुरुजा जनअर्जुनकरत्तघातायापकरिबाहोनछलअनायास द्रुप दलुतहाथकीनो चिनास॥ोनीनारायनलडारिशममसे न्यजीननोसबनमारियापसेहोयरक्षकउदार॥विस्मयन नासपाचे विकार अर्जुनमोहिमारनमरनधारि॥उनसमयदु हुनलीनेउवारि वहाँजबकरनफोसरपचान ॥ पटकिरथ-

(१३)
पांडवयरोंदुचंद्रिका.
सरवाकेररपान ॥भीमदूंगदाछलकहिसुभाय ।सुयोधनमा
रिकीनोसहाय॥ निसकियोद्रोनसुतकर्मनीच॥पांचहिकोले
गयोविपनबीच ॥सुबलजाताहिनीतिसुनाय॥विषमममश्रा
पतलियेबजाय भीमतमिलनजबपिताभारिख।लोहमयकि-
योतनलियोराचि ॥ब्रह्मास्त्रतेजतेंगर्भबाल॥करचक्रप्रेरिरारच्या
कपाल ॥ पूनिाजिज्ञनिरविघ्नपाय॥श्रीकृष्णायहोतांसहाय
॥दिनप्रतिजिहपूजतअसुरदेव ॥सोईकरतापममअनुजसेव।
दाससुरवरासदीननदयाल ॥ करूनानिधानअघहरकपाल ॥री
रत्नेदेतसुरस्वर्गलोक॥आपत्तोषीजतोहुविष्णुप्रोक। ऐसोतनि
स्वामीचहतानि।सोद्विपदरूपचोपदसमान॥भुगतिदुरवभि
लेअचराजभोग॥जेकहाराचरीस्तुतीजीग।।बहुनियकर्महमजु
तचिकार । कीर्तितंकियेजगपचित्रकारि॥ निजदोसकृष्णकी-
स्तुतिनिहोरि ॥ बंधुनतेबोलतनृपबहोरि ॥२०॥ ॥कवित्त॥
॥ ॥दादोकानीनपितागोलकहमकुंडहैपांचपतीएकत्रिया
एहविपरीतहै। पितामहबंधुचित्रमारेतुछुलोभलागि
त्युलोकराजकाजअतिसेअनीतहै। हमकौनपंक्तिदैत्रीऐ
सेकर्मकारीतिनकोसजससुन्यो मिटेनर्क भीतहै। भयेराज
भागीदुरबभागीतेकास्तुतिकरौंक नृपकृष्णकीकृपालताकी
प्रीत ॥२१॥ ॥दोहा॥ ॥करीस्तुतीनृपधर्मकी करैपाठजो
कोय॥सबभारथकेपादेको फलपाचनरसोय॥२२॥ ॥श्री
कृष्णा कचित्त॥ ॥दानकोनमानजाकौंमाननसचा-
नहकौवंसकौनमानजाळूदेचत्तथकातहूं।दारापुत्रातमादि
रेकरियरवेकहाताकोउपकारकरीमनमैसैकातई।जीवमात्रमेरो
रूपजानिसदायूजन हैताकेपापहीयस्यूंजोहोयेतोधकातहूं ।।
कृष्णचंद्रकहतीसोंहोयजोअनन्यभक्तमेरोनेमताफेहाथवेचे

(१८४ पांचयशंटुचंद्रिका संपिकातहं॥२३॥ ॥दोहा॥ ॥सीरवमागिद्दारावती ग येकृष्णनिजगह ॥ दूरिनिकटिहरिरहततोउ नृपधनबढनसने है॥२४॥ कबुकभीमदुरबचनते कछुकविदुरसुनिज्ञान॥भो धृतराष्ट्रविरागमय चाह्योविपिनप्रयॉन॥२५॥ माग्योनृपसुत धर्मने आतुरन्डैआदेस।कहतजुधिष्ठिरदीनद विस्मयजुक्त विसेस॥२६॥सीरबलहितेन्नापते आपसीरंवकिहिपास लेत पिताफ्यूंकरतही हामकोपरमनिरास ॥२७॥सुनिलपट्योगां धारिगर मूर्छितजयानरेस ॥ तबहीपितुकीधर्मसुत जान्यो दुरयतथिसेस ॥२८॥ ॥व्यासः॥ चौथेआश्रमतपक र सपैविपनसप्रीत ॥ हठनकरहरूतजानदे यहराजनकीरीन ॥२९॥ धर्मपितामहसीरवसुनि नथाअस्तुकहिबैन । कुलजु तपहुंचावेचल्यो टरतअंशदाउनैन ॥३०॥ नतीयमजलतेसीस ले भूपचल्योनिजगेह ॥ प्रथासंगगुरजनगयो तजिपुत्रनकोने ॥३१॥ ॥जुधि॥ तेरेसुरवहितवंसको कस्बोदिजन जुतपात ॥मातछांडिसुतराजश्री कहिकारनबनजात॥३२॥ ॥प्रया॥ गांधारीपतराष्ट्रदोउ सासूससुरसमान।। चनकीसेवायनहिते करिहूंअर्धतपध्यान॥३३॥ नृपतत्रिया- जुतचिटुरजुत संजयपृथासमेत ॥ तपहितविपननिवासकिय च्यासाश्रमजुतहोत॥३४॥प्रतियवर्षसुतधर्मतित आयोदर सनलैन ।व्यासक्रपादेखीसबन मरीसैन्यनिजनेन॥३५॥ निफरिचिटुरकीदेहतें धर्मराजकोअंसालीनजुधिष्ठिरमैंभ यो सबदेवतरिवतंस ॥३६॥ गोजुधिष्ठिरदेहपुनी एकच पंउपरांत दागलग्योवनताहिते भयोमातुपितुअंत॥३०॥ दीयाज्ञायतराष्ट्रने संजयचद्रिनिकेतु ॥गयोबहुरितपकरनकू आयुरहीयहहेने ॥३८॥मिलेउष्णतेबहुतदिन भयेपार्थनिया ." पांडवयशेंदुचंद्रिका. (१८५) जानि॥लैत्राज्ञानृपयुकस्यो हारापुरीप्रयान॥३९॥ मिलहरि तेकोउकाल तितकीने विविधविहार ॥लपिनासागमजदुन- को बोलेकृष्णउदार॥४०॥ ॥छंदपधरी॥ ॥नरहे हैसुनिजदुवंसनास। पुनिलोकतजहूंप्रकास ॥ नियनजुतजा हुर्लेवज्जनाभ।मधुपुरीराजदीजहुसेलाभ। दिनदसकबीच मरजादलोपि॥करिहै पुरमज्जनउँदधिकोपि॥मेरीयहइच्छा जानिमीत॥पुरस्वमिलहुमोतेसप्रीत ॥४१॥ अर्जुन ॥ ॥छंदललित॥ ॥अखिलजुक्तकेहेतुरुपही॥नरसरीरविश्वभू पहो॥ निगमगानतेपारतोनर ॥स्तुतिकरूंजथाबुधिमोरना। बुधिचिरंचसे भूलिजातहै।प्रबलतारमायूंदियातहै ।।डरतसा सदातेजनापत रहतकालकुंभीतितापत।।तुमअधीनतेदी, नदासतै॥अनुगमेजियौयाहुलासते। अवनदासकौत्यागिकी जिये। विरहनासहुगैललीजिये।।मिलिरपोसदासेजयानहू । कछुनमैगिन्यौलाभहानहू॥विषमतापुरीजत्रजनही ।।सुलभ ताफरीतत्रतत्रही ॥चरनदासयूंनछरिये।कलिकलंकमेनाहि बोरये॥जदुनकोयहांनासहोयह ॥ रहतजानियावालरोयहै।न यनदेखिकैयामभद्रकुं।कहहुकाकुईकोरपेंद्रकुं। विपतिऔरतो सीसडारिये।चरनसगतैनाहटारिय॥४३॥ ॥दोहा॥ ॥सु निविनतीयहपाथकी कृष्णकहीसमझाया। पांचभ्रातगिरतुहिन पैदेहगारियोजाय॥४३॥भयोतुह्मारोजक्तविच कुलविनासअपवा द॥युहसांतिअपवादकी करहुनऔरविषाद ।।४४॥तूंनोमेरोरूप है। मिलहैमोतेंाय॥लैगेफिरअवतारकछु ऐसोइकारनेपाय ॥४५ ॥ छंदपधरी ।।सुनिचल्यौपाथजदुतियलिवाय॥पथवीचलुटेर मिलेआय॥उद्यमनकिरीटीफुयोरच॥हैगयेसपअनादिप्रपं चलेगयेजदुनकी त्रियालटिंग।परिपंथिबागनसकेछूटि॥सुरन ". (१८५) पांडचयशेंदुचंद्रिका. आसुरंगाजीचअजेय॥तिहेछतेहत्योधनअप्रमेय॥अफुलाय- आपघातहीपिचाराच्यासतेंकहेपूरबप्रकार ।। श्रीव्यासकहे निजघातनिर ।। बडनतेंवडीमायाबलिष्ट ।सोईमायाप्रेरकजुक्त इस ॥उनईसविनासारेअनीस॥हुतनतेऐसीबहुतवेर व्हेजात पुत्ररविधिचगंधेर॥सुनिव्यासचचनकछुत्तजिविषाद ॥आयोह थनापुरअप्रमाद।गिरिपस्योजुधिष्ठिर चरनबीच॥अंशुनतेंदी नीभूमिसीचि॥उठावतजुधिष्ठिरउठत्तनाहिं॥मिलिरद्यौसीस दोउचरनमाहि॥ ॥युधिष्ठिर०॥ ॥इतनोप्रलापफिहिरीतता त॥तूंकहतवातनहींकहीजान॥अनिमितभयेइनहअनेक ।। रौधरीषाआदिकफिनेक॥हैसकुलकृष्णतोकुसलतात॥कछु कहहुभोरहियफटतजात॥ ॥अर्जुन०॥ ॥नहिंसकुल' सरतेहष्णचंद्र ॥ जिनकेप्रतापजीत्योसरेंद्र ॥ जिहिकृपाद्रोन भीषमामिाय । इकछत्रराजतंचकन्योन्याय। जिहविटपछां हिसुरवमिल्योराजालाग्योकुबापुटहिपरयोआज॥४६॥ ॥क वित्त॥ ॥भागोडरिउत्तरसोगयो विपरीतदोरिताडूंचेषहमेंपी उरिबताईना।।अरचयनिरचंगस्चयभयचनबीचशिवकपटनि पादतानतीहूंक्षमाआईना॥नागदेवदैत्यननै विजयकरैयामेरो नामहीविजयकृष्णविनापिजैपाईना।गांजिवअरचयत्तोनजुक्त मांउनहिलूटिजादोरफी रयगईवनंतावचाईना॥१७॥ ॥छंद पधरी। विजयमुश्चसुनतनृपविषमवात॥ भोचिवसजथा यतिसनीपात। कछुकापवीतिसुधिभईभूप॥कियदानमहीया दिकानूप परिक्षततरुनासिरउत्रधारि॥ संप्योयुयुत्सुकूराज भार॥४८॥ ॥टंट कुरंगडाए। राजविराजकैस धुधर्मसाजानीससवर्षकीनएकछत्रराज॥दीनतेमदीनी दुरजीसदंडनायकेपरतपाचदेसरचंडरचंड ॥दैअनेकदानपि " -- (१८७" पांडवयशेदुचंद्रिका. प्रचंदफूउदार॥तीनअश्वमेधकीनारिभूमिभार|नागनामयाम परीक्षते विठाय॥वजनाभिकूपुरीसमथुरापठाय॥पांचधुद्रौपदी समेतछांडिभोन॥हेमाद्रिव्हेंप्रसधारिरवर्गगोन। द्रौपदीसमेतचा रबंधुदेहक्षीन॥भयमृत्युदेहनेसुनाकंगोनकीन।व्योमगंगन्हायके सदिव्यदेहधारि।।वसंतमिल्योनरेंद्रइंद्रपंपधारि॥जोनअंसजोन- कोसुतोनवीचलीन॥व्हैगयोसुधर्मराजगोनकेंअधीन॥४९॥ श्लोक॥ ॥वैष्पापानांयथाशंभुदेवानांगरुडध्वजः॥नदीनांचया थागंगाशास्त्रागांभारतीकथा॥१॥इदंभारतमारव्यानंयापठेच्छृणु यान्नरः ।।अश्वमेधाधिकंपुएयंलभ्यत्तेनानसंशयः॥५१॥ इदंश्रुत्वाया थाशत्स्याब्राह्मपानभोजयेन्नरः॥हित्वासोधसमूहंचातेविष्णुप दंब्रजेत् ॥५२॥ ॥दोहा॥ ॥मोहिजससुनीकिनासुनो जन जससुनौजरूर॥ऐसोश्रीमुरवकोबचन सन्यौनिकट परिदूर।।५३।। फिरचाकरजसहोनते ठाकरको अधिकार दिसतयहविरव्यातहै। मैकाकहूंपुकारि॥ ५४॥ नातैकीनीचंद्रिका मेरीमतिअनुमान।। भक्तसंगरुभक्तको देहुरूपानिधिदान ॥५५॥ पंगुलगुंगोरोगजु तबनिकछुधातुरजीव भयजुतंबालकप्रियंअचस्व सनतअना थसदीय ॥५६॥ ॥कवित्त॥ ॥ज्ञानौचिरागदोऊपायनवि नाइपंगुभक्तिरसनातहीनगुंगहनिहोरोगे। विधातापरोगीकर्मवा नीजबानकहूंमै भूरस्यौदसंधाकोरजन्मकौविचारोगेकालभीत बालबुधिआत्माहैअबलाओअंधतत्वजनाविनाईनेकधारोगे। एकअंगके प्रनाथताकेविकेसुनेहाथ दिन्प्रतमैअनाथनाथक्यों विसारोगे।।५७॥ ॥छंट्डप्य ॥पंगुकुबजासंपातिगुंगलम- लार्जुनगायत ।। रोगीमाधवदासंबनिकातरलोचनध्याचत ।। छुधि लसुदामादिप्रभीतजुतवजकीभामिनि बालेमध्रुवप्रहलाद अबलमुपदादिककामनि ॥ हैअंधस्रलोहमसुनेहाथापिका (१८९) पाडवयशदुचाद्रका केहरी ॥जगकेनिवाससबगुननजुनधूपदासविनातीय ॥ ॥दोहा॥ । रसरुअलंकन्ननथमें लिखेन य। समझहिबुधिजनविनुलिरवे अबुधलरवेमलर ॥ पिंगलडिंगलसंस्कृतसब समझनकेकाजाभित्र धरी छिमाकरहुकाधिराज॥६०॥ ॥सोरठा।। कोवलनीक भूषनधुनिआदिकभयो ।दूषनरचरनज रचाह मेटहिकिभा॥६१॥ ॥दोहा॥ ॥कलिजु कू लिवेपढेसबलोक ॥ तातेश्लोकहजारत्रय सरव क॥६२॥ कविताकीरचनाभई वाचछंदविचलीन । कचित्तानमें कथासंकीरनकीन ॥६३॥ नहिंकरिताक हिंभारकीवात ॥ निकमेचंचलत्ताकरी करहुछिमाका ॥६४॥ हन्नयनाजनमत उक्तिचंद्रिकाथान। व्रतिबोधते श्रूपदासफोमान्॥६५॥ ॥ इतिश्री चंद्रिकास्वरूपदासचिरचितीशमयूरचः।।१६।। । पांडवपशेदुबईकासंपूर्णः॥ |उंदछप्पे ।। गौडबंशकुमुदेंदुविभागीरथतिनके। प्रसाद पुत्र प्रतिमित्रकविन । तिनकरिबिनयमा यहाशयहीका ।। यूहि पांडवयशंदु-चंद्रिकाराचिये लरिपरमपापिहारीमर्दितातहिहरिजनकुमुदविकादि उंदरसालंकारकीटीकार पत्रकाशिका॥१॥ समाप्त.

Pandavyashendruchndrika

Author
Hariprasad Bhagirath
Title
Pandavyashendruchndrika
File name
Pandavyashendruchndrika
Text
OCR done
Citation
1954
Published
2010/06
Publisher
Nirnaya Sagara Printing Press Bombay
Language
Sanskrit
Pages
189
Library
Charan Sahitya Shodh Sansthan, Ajmer
Classification
Literature
Keywords
xxxx
DLI number
539564
Barcode
99999990070307.00
Scanning centre
Banasthali University
Digital publisher
Digital Library of India
Rights
Copyright permitted
VMLT id
GT52sU8QRlz
Download PDF

Pandavyashendruchndrika