Shree Jubilee Naagari Bhandar Bikaner
Chanda Handi Rate
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S
चंदा हंदी रात
( राजस्थानी कहारिगया )
सूर्यशकर पारीक
विकास प्रकासन
१
बीकानेर
गत
भार साहित्य स्वसम्पृश
रहाणे
राजस्थानी भापा, साहित्य एव सस्कृति अकादमी,
बीकानेर रै पाथिक संयोग
सू
प्रकाशित
@ लेखक
प्रकाशक-विकास प्रकाशन, ४ चौधरो क्वाटर,
म्टेडियम रोड, बीकानेर (राजस्थान)
छापोसानो-प्रदीप प्रिंटिंग प्रेस, बीकानेर
सस्वरण पलो-१६६०
मोल - फकत चालीस रिपिया
Chanda Handi Rate (Storie)SS Pareek Rs-401
थोडीसी'क वात "चदा हदी रात" मे म्हारी एक दरजण का'ण्या पखडीजी है । ग्रा छाडा और पण कापण्यां हैं, व प्रागैसा भळं कणाई पाठका रे समू डे करीजली। अ काण्या' किस अल तलै री हैं इण रो निरवाळ मैं खुदाखद नी कर र इण री तात तो खरी मीट प्राळा वै कु ताळू होज करेला अर जणा ही प्रा वात प्रोपती लागली। म्हारै मन मे या वात ठेट सू होज रैयी है क मैं देख जिसो काणीकार नी हू, म सू जिसी लिखणी तावै आई, लिख गळी है, तोहीपण अ इतरी फोरी-पतळी नी है । बाचरण पाळं रो टेम अव्यरथो पकायत ही नी नावला । कई न कई पल्लै ही पडला । शहरी का'णीकरा रो जिरण दिस ध्यान नी गयो है, मैं उण विषयवस्तु नै अचेडी है । किस तक खखेरीजी है, इण रो फसलो पण आप माथै होज है। लखू मानसं रा अलेखू रूप हैं, कितासी'क रूप स्यात पा कापण्या मे उकेरीज्या है। तापच्छै हयोटी-हथौटी रो फरक हुवै। मा मे प्रो फरक बिलजरूर लाभलो। म्हारो इण बात माय स्यात घणो जोर ग्यो है के राजस्थानी भापा प्रापरं सर सिंगगार में सज्ज बज्ज। मा लिखार री बडाई नी हुय'र उण रो यो कतव्य बाध बोल अर जद हीज राजस्थानी भाषा सारू उण र सही उणियार मुजब लिखण री खेछळ करीणी है। आज राजस्थानी भाषा वेई इण री धणी चित्या है के वा आपरै मानण जोग रूप मे प्रगट-पोळ पिचौळ रूप मे नी। पा का पया मायकर राजस्थानी भापान जे चिनसोक पण लाभ हुयो तो म्हारो लेखण जोग रूप जाणीला । म्हारै इण वात रो अणूती हो पीडा है के प्रस भूता री म्हार प्रफ सशोधन धर देखतारी पारया चु दीजी हैं जिकी पणनी हुवरणी चाहिज ही। राजस्थानी रा जारणीकार तो के ठा क निग राख'र पढ लेवेला पण नू वा नायदा सारू प्रो फोडो ही है। इस जमीन धकल सस्करण मे सुधारी जावैली। हैण तो मनै माफी ही मागणी पडला । इण पोथी रै छपण मे राजस्थानी भाषा साहित्य एव सस्कृति अकादमी, बीकानेर सू जिकी विताऊ सहायता मिली है उरण रो म्हार घणो गुण किरियावर हैं । पो पोयो में म्हारै म गतू वेली सुरगावामी श्री अद्भुत शास्त्री ने लख कोडा समरपो है जिका ऐल दिना मे राजस्थानी भाषा रा लूठा समय घणग्या हा । राजस्थानी पाठवा सू मे प्रो भरोसो बाधा'र, चालू के वै इपन लाडेकोटे प्रगेजला । वात, इण सू वती'नी । विनतगर- सूर्यशकर पारीक समर्पण- प्रा पोथी- जिका राजस्थानी पत्रकारिता में दो पग प्राधा लता थका राजस्थानी भाषा रो 'कुरजा' जैडी पत्रिका Tढी, राजस्थानोनै बलोबली सवेग धर्क टुरण सारू र उगार वधेपै वेई सम्मेलन तेवडया पर जिका राजस्थानीरो भलप मे जिया मरघा उणी हिय रे ताल सुरगावासी श्री अद्भुत शास्त्रीजी री चितार मे वणं मान सू समरपू । सूर्यशंकर पारीक पाण्या री पडत- - १६॥ १७-२२ २३-२६ २६---४२ ४३----५२ १- सूटो २- निमयो सुभाव ३- तैलवानो ४- गायव्या रो मेल ५-सपादक ६- रामूधायलो.. ७- भाल ८- लाखीणी, E- लकडया रो लादो १०- वेटै सूदो वहू ११- फगडल १२- सपादक री पूछडी ६७-७१ ७२-७५ ८७--६४ खूटो " गुवाड रे बीचोबीच, पर्छ जावक पगार मे किसी री कुजरवो सूटो पाखै गाव री प्रास्या मे रड हो । प्राख मे रेत रोनावसो सवडियो पण रक्तो दोरो लागे तापछ पोतो खू टो, होयर रडक हो । खूब हो। रजक कोई मामूली नी हो । गाव में अाज किरण रो मकदूर के इण खू टन कोई उपाड र अळगो नाखे । इण खू टन उपाड र नाखणे री उरमा किरणो मे हीज नी ही। गाव मे एक होज इसो आदमी हो जिको जे धार लेवतो तो इण खू टनै उपाडार कडखे बगाय सके हो पण मिजोरी री बात क वो मुसाफिरी माथ आसाम कानी गयोडो हो । उणनै मुसाफिरी माथै गया न दो बरस हुवणनै लागा है पर अाही दो बरसा मे गावर दाने मिनख जिकै रो नाव "डागो" हो, प्रो नाव 'यथानाम तथा गुरण' पाळो हो । डागी रो अथ है जिरणरे हाथ में लोह जडी पर पोला बाधी गगारामो' हुत्र का 'मिरजापुरी' हुवे, प्रो बेजोगतो अर कालो खू टो गाव री गुवाड मे अघ विचाळे रोप राळयो । डागी र जद खू डको भैस हो जगा वो उणने इण खूट सू पैखडतो हो । अब तो खैर, डागी रो भस ही गई गुवाई, माग रै भाडे । -- दा डागीरे देखादेखी गावरे बीज लोगा पण पाप-प्राप राखू रोपणा चाया गुवाड मे परा डागो प्रापर खूटे रे बरोबर हीज ना! अळगै-प्रातरै भी विणीने यू टा को रोपण दिया नी। जे किणो 'च्यार लाठी चौधरी अर पाच लाठी पच'रवैम मे अठखू टो रोपणा तेवडियो तो डागी प्रापरी डागपटेली रे पाण उणनै आपरी खू डका भस आळो पोठो घालार अंडो धमकायो के ता पछ उणरो खू टा| तो रोपणो क्डखे रैयो जे क्ठे हो उणरो डोको पण रोप्योडो हा तो उणनै भो उण 'उपाड प्रोळातर नाख्यो पर भळे खू टो रोपण रो सूस खाली। पैली कैयोनी के डागो रे सू टन उपाडनै रो बात तो पाचो यो किणी आपरो पण खू टो गुवाड मे को रोप सक्योनो। डागो रो पाखं गाव मे दावो जमग्यो । मिले जिको ही थरका करतो डागी रे इण काम रो सरायना कर पर अहो भाव दरसाव के 'भाईजो, आप ज्यू करा वो साय याय वाळो है । अंडो मूड मार्थ बडाया सुरणार डागी फुरळीजण न लागग्यो। बो 'चाल ए छाया घडीक ने पाऊ', गाव मे अँडै सजोरा प्रादम्यारी ताई कमी नी हा के डागी रे खू टन उपाह र परिया नी नास सब पण आदमी कन खाली डोल र हाग सू हो तो सगळाकामनो नोठे कई तो वीजो जोर पण प्रादमी कनै हु वणो चाहिजे । कई बारलो तो, कई मायलो जोर । खाली इकतरफै जार सू आजरा दुनिया में काम नी चाल । डोल रो जार । 10 ] आज घरयो मतलव नी रामै । प्राज जोर रा मायना बदलग्या है। जियो पण जोर किणी कने बाट-तोल्योडो' हो नी । पर उण विना नीतो ग्वू टो उपडतो हो पर नी ही आपरो खू टो रुपतो हो। डागी जिकै दिन प्रोसूटो गुवाड मे रोप्यो हो उरण दिन पास गाव मे डागी अर इण खूटे रो भरपूर जिकरो हुयो हो । लोगा इण सारु भोत ही जीभ लपराई अर दाता घिसाई करी हो । लोगी छान छलकै डागी री निन्दरा माये उतरी ही । बूढा-बडेरा आपरै माथ ने गोडा विचे देयर अपसोच पर हा परण खुलर सामने प्रावणरी हिम्मत किणी मे नी ही घणो के डागी रे खुदाखुद घर में भी उण दिन तंतसो तळतळोज्यो हो । पण बात घर आळार पण हाथ बाथै को रयी नी। मा-बाप तो वापडा बूढा जरडा हुयर रैग्या हा । मा-बाप री वरजना डागी भाप लवे ही नी लागणे दो छैकड डागी सागोडो ठरका र गुवाड मे खू टो रोप होन दियो। अठीनै गुवाड मे खू टो रोपण सारु सडको उपडती हो भर उठोन डागी रैमागणे में खाडो पडतो जावै हो। खू टो रोपण पाळी बातनै लेयर आंखो गाव काना बाती कर हो : डागोरो बाप पण रोळा करै हो । डागी रो बाप क्व हो क "डागी । यो सू टो के रोप्यो है, म्हारो जमारो विगाडयो हे म्हारा घोडा भाडीजणा है मन तो मानख मे धूड पडतो लाग है" बाप नी जाण , और काई काई कैवतो हो। डागोरी मा च्यार-च्यार चोसरा नासै ही। झरर-करर रोवै हो । उण रो जोडायत तो पाप गे । प्रोढणियो ऊधो नाख र प्रोढ लियो हो । पावात से जाणे क इए तक ओढणियो प्रोडणा सुहागण भागण सारु वसूण हुवे । पण जिके री उपाय के। डागो र बाप रे मन मे रेय रयर घिराळा मारता हा क "घर मे जोमण सारु पोतळ सो बाजरी है। समै सारु घर मे घोळ धार है बावरान चावड-धावड मोटी आवडी रो खेत है । वसण ने लू ठो गुवाडो है गुवाडे लारै बाडो है । वाड में एक नी दस भैस्या परवडी जाय सक, वार्ड मे एकनी दस खूटा रोपो, वरजण प्राळो कुण पछे डागो बेसुरो काम क्यू करै । पिणी रो आगळी सीध मे क्यू ग्रावे बाप बोलतो जावै हो 'घर है, घर मे दरगाह सो माटो दर- वाजो है । गुवाडी रे मीजान रो होज मोटो फलमो है जिके न जडया पछ हरे किसना भजो सुई नै सचरणनै जागा " | डागी रो बाप पागली-पाछली सोचतो, विचार कर हो व 'आज तो हाथ फोरयो फुरै जिसो सरतर है"। बापरो सोचणो हो " डागी गुवाट मे खू टो गेपसी अर घर आळो खू टो एक न एक दिन पकायत सुमी । क्वत मे कयो है क 'वुरो है गाव रोराडो' । पापरो अोखू टो रोपणो साव पाच्छो नी परण उपोय के कोई किणरी माने जदनी"। पाखं गाव मे खू ट री बात चाल खडी रयो ही जावतो कोई न कोई इण बूट मे प्रावडर पडसी। रात विरात इण सू टकरा र विणरा न किणोरा दात भागोजसी । अठसू टा मावता- 12] रुपण पाळी वात बडी कुजरवी है। डांगी सारू इण नर केवणो-सुणनो अव्यरथो हो, उरणारा मा-बाप तो बूढा जराड हुयग्या है जद पर गाव पाळा रो के 'हाथो र लार इयो ही गडक भूस्या करें'। इया सोचर डागी विणी ने धले सत पण धारतो नी हो। पाखर दागी खू टो रोपर हीज रयो । एक दिन इणीज टू टाळी जागा पचायत आळो अर रावळियो मैसो आपस मे जुट पडया। पैला तो रावळिय भस हुडी दी जरणा पचायत प्राळो भसो खूट में पेट सुवारणी पडयो जिकै सू उण रो कैई कई भा मे पेट चीरीज्यो पण जद बार वायर पचायत आळो भमो च्यारू पगा स् ऊभो हुयर दै खूट मे इस तक निराताळ रा खू ट रे माय पडणे सू रावळिय भसे री लारली पासळया भाजगी जिव सू वो जावक वेकामो हुयर रयग्यो । जिया आजादी मिल्या पछै राजावा रा गढ कोट । आतो हुई भसारी बात पण एक दिन बात-पर वात चाल पडी पर दो जगा फोटपर स्याबासीरी भारपी भणता आपस मे चुटपडया पर टिप्पा हिप्पी मे एक जणो खा टिपो -र जा पडयो खूटे मे जद बापडै रा अागला दात गिटीजग्या । लाग रय-रय करता यग्या । जिया जवानी गया पर्छ मिनख । जा बाद गुवाड में हथाई-बताई हुवणी ही बन्द हुयगी । लोग प्रा सोचर गुवाड मे वठणो वद कर दियो के नी जाणे कुण क्या आपस री खीचातारण मे जा टकराव खूटै सू । खू टै सू टकरावण [ 13 1 रो मतलब है आपरो नुकसान करणो। अब तो खू टो सगळा री आख्या मे होज नी हिय मे चुवण नै लागग्यो पण वा ही सागण री सागण वात पण कदेन कदे सेर न सवा-मेर मिल ज्याया करै। सामले घर रो छोरो, मोटियार जुवान, छाया कान देखर चालै पण साव पाळो, जावक जाँडो बिना बाही काढयोडो। वापरो क्सेि ढब चाल, इण सू साव अजाण । ऊमै काना घर खायोडो जणा पण शरीर सू सभोरो मल्ल जिसो लाग । डील मे हागो इत- रो के भसे रा सीग उपाड नाखै। वापरा सगळा लछ । इण रो बाप भी नो विगन की नी समझतो हो पण बिरा मिनखा पाळ गुणारी गुमानी । सो छारो एक दिन जा ग्व् टै सू खस्यो। लोगा समझायो के थारो इण खू टै सू खनणो ठीक नी, थारो बाप ग्रठ हुवतो तो पो खू टो ही नी रुपतो पण वो आपरै धन्ये सू प्रासाम गयोडो है जद तू इण सू ना खम । छोरेर दूधी चढगी जणा उप विणी री मानी नी । जा खस्यो डागी र स्टै सू । ग्बू टो कई दिना पली सू रू योडो हो, स टै री नीचली गुळी गळगी हा । छोरे र थोडी धधू णी देवणे सू होज सू टोजी जाय पडयो प्राग्यो । डागी न जद ठा लाग्यो जगा वो पग जूती घाल जितरी ताळ मे सू ट क्न मायो अर खू टन ऊपडयो देव र घणो फू फायो अर वेगार-कार कयो के जिका म्हार वूट मू खस्यो है पर ऊपाडर प्रळगो नास्यो हैं उण न चापर ही ठा पडसी के खू टो ऊपाडया के 14] हवाल हुया करै । म्हारै खू टन उपाणिय काळनाग ने धूळियो वायो है। दूजे दिन छोरै रौ मा आपरै पळी डे मे पाणी पौवरण नै गई तो एक जण पोटळतो भीतलो ऊपराकर कयो-"ल्यो थारी चिट्ठी' चिठ्ठी (मरयोडै री गावा मे चिठ्ठी नाज) रो नाव सुणता ही घारै री मा माथ जाण बजराक पडयो हुवै । वा हाकी-दाकी रैयगी काई गजव हुवरण रै अ देसै सू वा “चिट्ठो-चिट्ठी" करती रेयगी। चिट्ठी लावणियो चिट्ठी भला र वो जाहै-वो। छोरै री मा हिम्मत बाध र एक पढसरी कनै गई। चिट्ठी मे समाचार उघडया के "छार रो बाप दिन तीन पैली समाइजग्यो है' छोर बारै माथ आपरै मूडै री राख झाडण सारु खरच तेवडियो। पचा र दूहै मुजव वास पळिये रो मूडो अठावण सार चावलिय रा दारणा राध्या। यास पळियो पर आयोडा भाई गनायत जीमण न क्या, इतरै में उगूणो दिशा सू खेह उपडती निजरा चढी । लोगा रा म् डा काळा पडग्या क्यू के उरण दिना मरयोड रो खरच करणो सार बद हो । थाणदार छोरै सामै वैत ताणते पूछया - "साची साची वता लाडू कठ लकार राख्या है ?" छोरो विरगरावता बोल्या "वाप रो सू स मे तो प्रा चावला छाडा की नी बपरायो है ! आपने जिकै लाड़ बरणावण री शिका- यत करा है नो वा साव कूडो है। प्रै चावळ ही मै नेम परवारकर नी राघ्या है । वासर टावरा भर भाई गनायतन जीमा र रोतरो रायता करयो है।" [ 15
मुनाकात हो
याणदार सगोन तपतीस करण सारू पचान पर छोरै मचकाव है
इतर मैं अचाचूक रो पार छोर र बाप थाणेदार जीन ज रामज
री करीअर सगो भेद खोलर बतायो। छोरै रो नाप पैलाथकं
सरपच रयोदो हो अर थाणेदारजी आपसी
'अब तो थारा वाजे के म्हारा। थाणेदार री पाहो बत डागो
माय उवकोज ही। डागी रो सगळो पलमो चौडे पायग्यो हो
कानून लह पडती धारा मे डागी रे हाथो मे बड़े राज रोगणं
परयोडो हो । यो ऊठ र लारै नाश हो । अजे थाणो रो हड मुकाम
कोस तीन प्राघो हो।
छोर रे मूडे री राख तो के ठा क बाप आसाम सू आयर
धो नावी पण डागी र मूड माथै जियो का स थेथडिज्या वो
नी जाणे किता बाडा खेडा खायग्यो । लोग एक दिन खू ट री
चर्चा करो ही व ही प्राज डागी र घर रो तलपट बाचे हा।
काल री रात अर माज रो दिन डागी रो सू टों उपडयो जको
तो ऊपडयो हो पण अाज अाख गुवाड मे नू वा नूवा खू टा रुपग्या
हा पर लोग अाप आपरै खू ट र पारण नाच हा । जद ही क्यो है
टोगडियो सूट रे पाण नाचे ।
16 ]
निमधो सुभाव
छोटूलाल जद देई आपर गाव सू सहर आवतो तो
वो सीघो म्हारै घरै आय जावतो । पा सगळा जाणे के सहर
मेवात-बात रो पइसो लागे । मकान लेवे तो मकान रो भाडो
लागे। छोटी मोटी कोटडती लेव तो उपर डोळ सार भाडो
लागे । जे कोटडीरे जडन सारू ताळो लेवै तो उणरो भी भाडो
लागे । रात नै सोवण सारू माचो लेव तो मार्च रो भाडो लागे
लागो लूगो, पण जे साल छै महीना मे कदेई-सी काम पड तो के
ठा छोटूलाल जैडो मिनख भी भाडो तोडो भोग लेव, पण महीने
में दो दो, तीन-तीन सू घणी हेला जद रेवणो पडे जरणा पण भाडो
भोगण मू तालर सो कूटीज जावै ।
प्रा ही क्यू , होटल मे चाय पीवै अर जै बास मे रोटी जीम
तो उणरा सैत-सा पइसा लाग, अ पइसा लागै जिका तो लाग ही
इण रे परवारकर निरी जिन्सा रा दाम लागे । सहर मे
कुण किरणरो सोरो-भीरी कुण-किणी रे बदले फोडो
भोगे । सहर मै तो वन-वनरो काठ भेळो हुयोडो हैं । सहर रा
गाव माळनै भोदू समझ पर गाव माळा सहर पाळाने काचा ।
मतलव नौ के सहर माळा दिखणादा तो गाव आळा उतरादा ।
छठ अमावस रो मेळ हुवै तो गाव-सहर पाळा रो भेल ।
[ 17
माथ
पण उपाय ये। छोटूलाल सहर रो पडो रसियो क उणन
सतवाडिय सहर मे भावणो ही ज पड । मुभाव पडियोडा घटणा
कर छोटू नाल यणई वीमारी रो बोनो लय र बणाई निस
पतर-लेवण न पावणो रो यांनो लेम पर करणाई हाकम साहब
बुलायो है वानो लय र सहर पाव । पण पिणी न पिणी बाने मू
उणन संहर रो काळी-काळी सडया पर खल्ला घसणा ही ज पडे ।
छोटलाल प्रापर गाव सू प्राय र, आपरोकोई जरुरी काम
सळटाय र सीधो म्हार घरै प्राय र दो माचा
कमर खोल । खाल क्यू कोयनी, सावण न माचो बिछावरण
नै पथरगो, सिराधिय देवणन गोडवो मर मोढणन दूध सी धौली
चादर मिल ज्याव ! चौमासो हुवे तो माछरदानी तकायत मिल
परी । पीवणन म्हारली धोळी रो धार, जीमणन पीतळ सी
चदासीरी बाजरी, तीवण पर वो काचरियो दही । एकर तो देख
तो देवतावा रो पण मन जीमण सारु ललचावरणने लाग ज्यावे
छोटूलाल तो पाखर चीज ही ज कोडी'क? इतर सू सर तो
ही जाणा, पण धू वो काढणने उगने पाच सो पताळीस रो
बीडिया चाहिजे, सिगरेट पावै जणा स कवणा ही काई
सहर मे निमटण रो सगळा सू धणो फोडो, पण म्हार इण
मकान मे तळझाड जाजरु अर हावण-धोवणन टकी पाळी टू टी
जकी बगीहा करती चाल । अडी सगली सुविधावा, भळ
वीजो काई चाहिज ।
छोटूलाल कनै सू में और-ौर वाता रो सरावणा कोनी सुणो
पण तळमाड जाजर पर हावण-धोवणने पाणी री मोकलायत
18 ]
रो बडाई वो म्हार साम करतो धाप ही कोयनी। बात-बात मे
वो मनै केवतो 2-"हू थारै घरै खाली हावरण-निमटणरी सुविधा
खातर फकत पावू, नातर सहर मे रातवासो तो हू दाय आवै
जलै ही लेय सकू । लोग आपरै घरै राग्वरण खातर म्हारै वास्तै
पिऊ-पिऊ कर, मनै देखे जठई दोळा फिर जावै अर "म्हार घरै
चालो-म्हारे घरै चालो री पण भारणी उगेर देव । हू पण थो
सू भळ कदेई आसा' वैष-कैपर केई हाता निठासी पिंड छुडाऊ
पर पाधरो थारै घर ग्राऊ । न्हावरण-निमटण री बडी मौज।"
समै जोग री बात के मने पला आळो घर वदळनो पडयो।
पैला पाळे मकान मे जिको सुभीतो हो पर उण मे जिकी सुवि-
धावा ठावी ठिकाणे ही, व पण इण मकान मे ताई ही कोयनी।
औ मकान सो साली सिर घसोवणने एक अहो हो। छोटूलाल
सातवै दिन इण मकान मे भी कुत्ता घु सावतो प्रायो रैयो।
पैला माळ मकान मे जठे कमरे-कमर मे विलायती टाल्या
विडयोडी हो, उठ इण मकान रो हैलो प्रागणो गधा री गौर
हुवै जिस तक रो हु योडो हो। उण मकान मे जठ ठाव-ठाव
च्यार-च्यार फुटा ऊची वारया खुलती उठे इण ढमढेर मे अंडो
अधारो, जडो उमर फेदयारी काळ कोटडिया मे रया करै । उण
मकान मे जठ प्राज रे चल री पाणी, बिजली, पखा अर दूजी
सगळी सोराया ही इण पण नू वोडे मकान मे फुटयोडी भीना,
जिका रा लेवडा उवस तबस र आप ही ऊतर, ऊदरा रा विल
जिका में ऊदरा री लगाटर बडै अर नीसर पर छिपकल्यारी क्ला-
रथा, जिकाने देख'र मिनस रा 'जी' मिळावण नै लाग ज्या ।
[ 19
।
पण के रो। बो तो दूज फर भी म्हारे पठाय धमक्यो।
क्यू प्रायग्यो? जद के उपर अठ निरी ही जागवा सोवण
कठई कसारया पर कठई छिलोड्या, जिकाने पण देख'र आदमी
ने घड घडी प्रावणने लाग ज्यादै ।
छोटू लाल इण मकान मे भी पूछतो-पूछतो आयो रेया । खेर
सला, पायग्यो तो पायग्यो । जिसी म्हारै कनं सुख सुविधा हो मैं
उणने दी परी। रात वासै वो रैयो परो । पण पैला पाळा मावा
कठं? माछर खाया,
कीड्या लडी, अवक अखोरड हो पडयो रणा
पडयो, अधार में ढमढेका मारणा ण्डया, सुवारी वेळा ऊठ न
फेरवाडी मे जगळ जावणो पडयो पर उठे सरम नाखर, नोचा
ढू ढ घातर ढू गै सू टू गो अडा र बैठणो पडयो । जोर के कर
पैला पाळी-सी वाता अठ पण रयो कोयनी । जाण सुविधान
लारळी गळया मई परी हुव ।
पकायत हो ज अवकाळे छोटू अठे दुख पायो।
रोटी वेळा छोटूलाल रोटी जीम लियो अर प्रापरं पाप पुन
मैं जाण्यो, छोटूलाल पैला आळ घर रै भरोस अब के अठ
पायग्यो पण प्राग सारू स्यात ही ज अठ दुख पावणन आवै । वो,
आप कैवतो ही ज हो के उण र अ रवण-सवण री ताई भो
कोयनो' बापडो भळे पण अठ क्यू प्रासी ।
मैं उण नै देख र मन मे विचार करयो क छोटू अठ दुख पाबणन
उठणन है । एकर तो अंडो विवार म्हारै आयो, छोटून कय
सुणावा पण पाछो बेगो हो मोळो पडग्यो।
लाग्यो ।
20 ]
ता पछ एक दिन री बात । मू , अघारी रात। झिरमिर मेह
रस । रात रो एक बज्यारी-सी टेम । गळी मे कुत्ता लू-लू पड ।
रणे काळ डाकी उणन खावणन उणर लार नासतो हुवै । अडा
ता, धरणो करनै हिडकिय कुत्तै न देख र भृस्या कर का कोई
टळ-प्रोपर प्रादमी न देखर मै आ ऊपर लो दो वाता मे सू एक
त बिल जरूर हुवैली । मै म्हार बडोड डावडक कैयो-'भाइया!
जाडो खोल र देख तो खरी रे | लट इया क्यू कर भुस-भुस
भाइयो उठियो पर प्राडो खोल र देखै तो एक आदमी
जळी माळ खम्वै कन धोळी-धोळी भूखे वैद री खरळ हुवै जिसी
पी प्रोढया अधवावा रो मीजियो पैरचा जगल जाय र
प्रायोडे मिनस जिसी खुली लागरी धोतो पैरया अर हाया मे कई
लियोडो सो ऊभो है । कुता उणन देख'र सागोडा कुपाळी
खाव है।"
भाइये रो पण उरण कन एक्ल जावरणरी हिम्मत को पडी नी,
जणा उण सारल पडोसी नै हलो पाड र जगायो पर एक-दो पाडोसी
इस तक रो बोलाळो सुरण र जागग्या अर बार खडा आदम्या कनै
प्राय ऊभा हुया । तुरत-फुरत मे गळी पाळा सगळा जणा माळोच
फरयो क "खम्बै कनै जाय र देख्यो जावै, प्रो कुण है, कोई स्या-
नियो मिनख है अथवा कोई चोर चकार है अर इण कुवेळा अठ
पण क्यू आयो है।"
-मंडी घार-विचार, गळी प्राळा हाथा मे सागोडा रेरू लेय र
ग्वम्ब कन गया।
कुत्ता भी गळी माळा री सं पा र और घणो भुसणो चालू
राख्यो।
[ 21
प्रागै जाय र देखे तो छोटूलाल आपर कुडियोड मोड़ा ।
बोद-सो पूर री पोटली मेल्या अर लावरया कन मू प्रापरी ज्य
बचावरण खातर एक हाथ में प्रापरी सेटर पर बीज हाय
इ टोडी लिया ऊभो है।
माइये दुर-दुर कर र कुत्ता नै हट कारया पर छार
पूछयो 'अरे वावा थे"
छोटू बोल्यो 'हा, भाई ! है ।",
भाइयो छोटूलाल ने प्रापर घरै लायो।
मन छैटू लाल रो इण तर आधी ढळया घर पावणो जाब
वेजोगतो लाग्या पण हूँ कई बोल्यो कोयनो। परण में उण
पाठी की प्रा पूछी के "क्यू कर, व्याळू वीजी ?
छोटूलाल दात तिडकावतो बोल्यो- 'ध्याळ
तो कर
दिनूगै रो साव निरणों हू अातडा भागोज रेया है, है जिसो ला
दो, भाळो-माळो करर सूय रसू ।
म पूथ्यो• 'प्रातडा क्यू भाग्यो ढाब में जीम लवणो है
अर धरमशाला मे मचली लेयर सू य जावरणो हो, तरी दूर राब
रा गह भुसावण न क्यू प्रायो। ' म्हारो बात सुण र छोटूला
तो मून माधलो पण एक गैवी अवाज आई । आपआवाज के
कठे सू आई पण पाई जरूर - हावालो बाप थोड
हो ,लागता हो जिको अडै कूडत अर बडायल निमधं प्रादर्म
न रोटया जोमावतो अर न माची पाको मासो लागतो हो, जिक
इण गोधं क्न सू आपरो मचली तुडवातो। प्रौ तो था गाव
प्राद या ने मोदा वणावतो फिर है। थान पण इणरो क्दैन--
क्दै ठा लाग जासी।" अर एक दिन एक मोट सहर री एक
गळी मै मन इण रो प्रतख ठा लागग्यो के छोटूलाल खाली गोगर्न
गाय दोस ही है सीय इणर दीसत में माथे पर पकायत कोयनी
पण किरणो ने मारण खातर नौ प्रापर पेट मायला सीग तीख
पर नुकरदार बार वाढ सके ।
22 ]
तैल बानो सुदरी प्रापरं धणी सावत री बाता सुणार कयो-"थे खालो क विलोवो होज करसो का कदेई उणरो टापरो पण प्रात्या [ दिखाळमो?" सुदरी हाल किनी, वा तो वापडी सदा ही तनै साथै लेय र प्रावरण रा न्योरा करती न्यूता दिया कर सावत कैयो। तो आज ही चाला, थाने “योरा करतो न्यूतो देवण पाळीरे घरै । छुट्टी तो थारं माज है ही ज । थारी सिणगारो भी धरै ठावी लाध जासी का कठई कूदडका मारणनै आप रो जीभने दाता सू किचरती-सी बोली। सावन कयो-"वा ता बापडो घर सू बार पग ही को मेल नी, उणरे तो घर भलो अर का दफतर भलो।" सावत बातु ने चालू राखत प्राप रो जोडायतन क्यो।" "हालो तो भलाही, पण की डोळसर हुय'र तो हालो का प्रोही गिवारणो सो भेख- राखसो।" सु दरो बोली-"डोळडाळ रो मने पतो कोयनी, धोती पर कोट'स मे सानपान पैर लैमू बाको पदमणी वणन सूरयी।" तो पैर पार वेगो सो" सावत ताकीद करतो बोल्यो-"इतर मे .
"थप
पप
म्हारले चोळियै रै थोडी-सो उस्तरी रगड ल्यू जिक मू
पाधरी हुय ज्यावै ।"
"ठीक"- कैयर सुदरी आप रो साल में साडी बीजो ..
गई परो अर सावत ताकड करतो चोल मार्थ उस्तरी करण
ढकग्यो। थोडी ताल मे दोनू जणा प्रोढ-पर'र त्यार हुयम
पर सिणगारी रे घर कानी चाल बहीर हुया ।
थप, कुवाडाने बजार" "सिणगारीब
प्रो सिणगारी बाई कु वाड खोल्या।" भले कडी खडखडा'
'सिंणगारी बाई, प्रो सिणगारी बाई ।" हेला पाडियो।
हेलो नी सुणन सू सु दरी आपर गाभा मे लाज-सी मर
ने लागगो।
सावत भल ओपर प्रादमी दाई हेलो पाडियो जाणे कुकर
ज बाडो खोल ही ज 'प्रो सिंणगारी बाई", पण पाछो कीपड़
तर नो आयो जाण'र भले मघराई सू कुवाडा री कडी खडखडा
अर सोचण लाग्यो क बात काई है ? इतरा हेला पाडलिया पण का
सन गुमान नी । सावत सोचे-'घर तो पो ही है पर व कठई प्राय
जाया पण नी कर । है तो घर मे ही नातर कु वाहा र तालो लगा
योडी हो तो।"
सावत कु वाड नी खुलणं सू किणताव अर सुदरी बार ऊर्भ
साजा सी मरे । गली मे ऊभा ऊभा पर हेल माथ हेलो मारता.
मारता छेवट प्राखता हुय'र पाछो जावणरी बेई क इतर मे बर•
साली मे पग वाजता सुणोज्या। पग बाजता मुण'र व दोन हा
जठे हो ऊभा रया। पर मन मे राजी हुया क छेवट पठ ताई प्रावण
।
24 ]
| वेगार अळी तो को गईनी।" बारणो खुल्यो। साद सुणीज्या - "अरे, भाईसा प्राप" सावत साद सुणा'र धक देख्यो तो साम एक लुगाई ऊभी है। -जिकी जाबक डोकरी दाई, रग री काळीफुट । पाख्या मायनै गुडि- योडी, पर काळी कळ स छायोडी, मूडै मे हाड रो के लाड, 'जावक पोखी । चामडी सळा पडियोडी, माथे राकेश घोळाधप नाण मीणियो ऊ चाय राख्यो हुदै। जावक कोमी -सी लुगाई जकी एक बोदी सी धोती डील माथ पळे राखी है । इण लुगाई देखकर सावत रे की समझ मे कोनी बैठी के प्रा कुरण हुय पके । जद मावत समै जणावतो पूछयो ~ "क्यू प्रो मकान सिण- पारी बाई आळो कोयनी ?" 'कानी क्यू , पण इया जाणता-बूभता कूकर करो हो।" कारण नै सबहक खोलतो उण लुगाई कयो। इरा लुगाई आदरमान करती कयो~"मावो पावो मायने प्रावो आज कठीन सूरज उगग्या के भोजाईने साथ लेयर पधारिया हो।" या आगे बोली- "वार ही ऊभा रसो काई', मायने पधारो, इतरा कैयर वा सुदरी रो हाथ झालर कोडायती घर रे मायी लेगी पण सावत दोगड चिती मे बार ही खडा रंयो। पा छवट सावत मायन प्रायर बैठक में जठं सुदरी बैठी ही वा भी बठग्यो। सावत सुदरी कानी पर सुदरी सावत कानी जोयो। सावत नै सुदरी कने बैठक मे बैठ्यो देख र सिणगारी नाव माळी वा डोकरी जिको कुवाड खोल्या हा प्रागण मे मू बोलर [ 25
कैयो-“भाईसा भौजाई सू वाता करो इतर मे मै या? साह चाय
वरणा र लाऊ ।"
उणरी "चाय लाऊ' वात सुरण'र सावत सुदरोन क्या
"तू मायने जायर उगने वोल दे के चाय तो म्ह सिणगारी बाई र
पाया मू हीज पीवाता।
सुदरी शक्ती-2 मायन गई पर सामली साळ मे बडघोडी
उए लुगाईन कयो कान है कं चाय म्हे सिणगारी बाई
प्राया हीज पीपाला सा आप चाय चढावरण री हैण मेछळ नाग
परया।"
इण यात माय उण सुदरी नै पाछो क्या पं- “चाय वसा
जितरे में थारी सिणगारी पण पाय जासी।"
सुदरी पायी चंठन म मायर बटगी।
मावन ममै बाटण साम्ब वायर हो वात पलाय "मासान
पाय गे परमो सगळसे पालम्या है । जठ भी जायोपर पाये
साई मिती माया, पाय तो त्यार है।"
"प्रमाणे 'पपर गुदगे गायन री या मारी।
मुपरी TI पना- 'येतो मगाम मि गारी
रोग रेप का प्राण"
गात माया- गई बागृTIK RIT TET या:
सामना Tril मागपती
गुनी-पापा भी 7 बाई
17 TAITI
सावत कयो- 'अबक पाच दिना से छुट्टी पडण सू कठैई गई परो हुवला अर इणनै पण कठे ही सू बुलायली हुवला, मिनखा शरीर है कदे बदास काम पण पड ही जावै।" सुदरी बोली-- "हो, या तो बान साची है । मिनख शरीर है, कदेई कोई काम धन्धो भी हुहि ज्याया करें?' इया लोT लुगाई पडी सुरता मे बतळावै हा। इतरै मे सु दरो वोली-"डेपी चाय वणावण मे ताळ घणो लगाईनी।" "थारो नमो उतरग्यो दोस ।" सावत बात पीवतो बोल्यो। 'नसो तो काई उतरग्यो पण ताळ छणो लगावै जठ की खावण- पीवण रा सराजाम ।" सु दरी मन सू अटकळ लगावतो -- m क्यो। "ता तू काई जाण है इण वेळा चाय कोई लूखी थोडी हीज पावली ?" सावत आप री या बात पूरी पण नी कर सक्यो हो के जितर में सिणगारी वाई चाय पाळी ट्रे लिया बैठक मे पग रारयो। इया अचाचूक रो सिणकारी बाईन आई देस'र सावत अचक वचकाईजग्यो, दो बाई ने देख'र बोल्यो- "वाई थां प्रोफाई पियो, आज थे पठ गया परा हा २ थे घर मे कठाकर पाया, घरी मोर्ड मायकर तो थे पकायत ही नो प्राया, म्हे सामै ही तो वठा हा ।" सावत भळे आग बोल्यो- 'म्ह तो यान उडीक्ता उडाक्ता भासता हुयग्या पण वापडी थारै या पुण आयोडी है, म्हारो तो घणो ही ध्यान रारयो प्रापार सार्थ चाय पीवण सारु उणन पण वुनावातो सरो। म्हार या तो थार । 27
बिना प्रोदरगी, मनै सैलग मोळवा दे दे अखता लियो के इतर
दिना सू तो कठ आया पार पडया तापाछे थे मिल्या नी, हा
प्रा डोकरी थारी बैन है काई, थारी अर इण री बोली ए|
जिसी है।"
सिणगारी वाई बोली "बोरा, नी तो अठ कोई डोकरी है अर]
न मे कठई गई, म्हार घर मे तो डोकरी गिणों भावे नोसलो, म]
एक हीज हूँ पण वीरा ये प्राथर नै पोळसो हो खुद मिनख न ना
पण अाज मिनखरी नी आथर री ओळखाण है।"
28 ]
गायब्यां रो मेळ नागौर परगन र आथूण गावा री बात है। उठे लोग लाप प्रापर खेता मे पक्की ढाण्या वाघर बस । आ ढाण्या मे बाम करने सियाळ री राता मे, लोग बडे ही कोड सू 'सगत' परवावे। चोखळे र गायव्यान बुलावे पर तदूरर उपरा निर- गुण रा सवद अर अणभं री वाण्या गवावै । केहडली गाव मे किसनाराम री ढाणी, किसनाराम रो सगत रो तेवडणो। म्हारी चरणोटी रा पण ब हीज गाव । मैं भी वा गावां सू रामतोराम उठीने जाय नीसरयो। म्हारा आसण वाली री वाडी मे हो। कालडी और केहडलो मे फ्कत तोन कोस रो प्रातरो। किसनाराम न म्हारी ठा लागी के मैं प्राथूणी ढाण्या में रमतो-रमता अव कालडी प्रायोडो हू । वो म्हार कन प्रायो पर लुळताई सू हाथ जोड'र पगा लाग्यो । मै अतस सू आसीस दीवि अर उणरी सुख साता पूछी। किसनाराम बत्तीसी मायकर हेत छाणतो वोल्यो-"प्रापरी मरवानगी सू धणो पण खुसी हूँ। किसनाराम घणी वीणती करतो मनै सगत मे आवण रो सदेसो दियो पर ऊपर सू घणे मान थको भळे आवरणरो कयो [ 29
किसनाराम म्हारो प्राधमान करते कयो के-“जे थे नी प्रावा
तो म्हार डाढो विचार हुवला ।"
मैं पाछो क्यो-" पकायत आउला, भला । थारै कया पर
नी आऊ आ कदे हुवै "
किसनागम म्हागे अकीदो मान'र बाग-बाग राजी हुन
पालो परो गयो।
मैं पण म्हारे चेला-चाट्याने माथे लेयर दिसनाराम र
ढाणी सागी अंड माथ पूगग्यो।
किसनाराम रै म्हार प्रावणरी मेह री ज्यू उडीकना लाग रयी
हो । वो मन भायो देख'र हरनो हुयग्यो ।
दण कैयो-"छेने पाछा करियो महाराज । पाप पधारन्या ।
म्हार माय मोटी किरपा करी। आपरै प्रावण स म्हारी घणा
सोभा वधसो।"
म मीठास सू पाछो उयलो दियो-“यारी सोभा हुया म्हारी
घणो जीसोरो हुवे।"
गढ साळ रोवारलो मोटो भू पो जिणमे पच्चास मिनस सोरा-
सोरा मा ज्या इतरो बटो। मनं क्तिसाराम इणो भपट मे एक
पखवाडे बाजोटर मार्य तेवडो वामळ विद्या'र बैठाय दियो।
सगत मे प्रासला पासला गावा सू प्रायोडा मिनख तीसक
अगर ।
गायनी चौसळ रा वाजीदा। सासरा साज बाज लिपाडा ।
गायव्यारी न्यारी-यारो जूट । पलो जट म मुदामुपी हम
301
स कामड, हेमदाम छोरलो सो, पच्चीस-नीस बरसारो मोटियार
बोजवतो सो। सागोनाळ चेतन, कोई चाळीसेक वरसार
ग वग।
दूनी जूट रो मेढी जेठादासजी र धोरे गे गोयददास, हेमदास
जोड तोडे । साग सावतोपर गरगो गे ढाणो रा ऊदानाथजी
सघ। ऊदानाथजोन तो घोरै मू पावतो वेळा गोयददास पर
नावत साग ले लिया हा, बाको धोरै सू तो अ ही दो जणा वुवा हा
तीजाड गायव्या री मडळी लाब्दासजी री। लाधूदासजी
कालडी र रामदेवजी रे मिदर रा टिकायत पिंडत । ऊमर मे दूजा
करता कई पाका । गाभ-लतै सू सागोडा सज्या वज्या, डील मे
डीगा पण चैर सू साव गरीविया ।
छुटकर गायव्या मे जाखारिणय रा हाडसिंघ, भू डल रा
देवादास, खुद केहडली रा सुरजोजो सुथार अर चित्ताण रा वसी
महाराज | अ मगळा इसा गायधी के इणार तोल मे दूज गायव्या
रो मोल विक जाय । औ से एक सू एक आगळा पर एक वीजै सू
सिरायत।
सगळा होज जूट आळं गायब्या कन आजरी चलगत रा
न वा-पुराणा समचा साज-बाज अर वै सगळा गाभं चीर सू टाटिय
भात बण्या ठण्या । अोपता अर देगा-दिस्टो मे घणा फूठरा लागता
केई जणा ता पाप रे गळे मे माटोडै बोरियै तुल मू गै रा कठा
घाल रारया एक जण काळी मिच सतूल मिणिया री रुद्राक्ष री
माळा पैर राखी हो।
सियाळं रो रात हुवणे सू संग जरणा प'सी वामळा मोढवाडा
[ 31
झपैर पाल रे सारै जम्योडा बैठा हा । झू पडे मे दीये रा उग हो। सगत मे ज्यू -ज्यू दुजा मिनख पावता गया, व सगळा हा भीड साकड मे वैठता गया । कैबत में के'यो है के "सैण तो सर ही भला।" नागौर रै आथूणे गावा रोप्रो सुम्प के अठ र मिनखा चिलम तम्बाखू रो चरसो जाबक कमतो। अठ र विश्नोई, ति: रामस्नेही अर जसनथी जाट तमाखू न बस पडता साकडे हीज आवरण देवै । कामड वीजा भी अंडी रळी मिळी सगत मे होने वोजो नैडो नी प्रावण दय विणीन पीवणो हुवै तो प्रोळातर जाय पीवै । झ पड मे स'गायबी आप-पाप रे ढब सारु वठग्य! । सभा रोणोराण भेळी हुयोडी। लोगा मे 'अव गायबो पोळावै अब गायबो पोळावै' रो गोरबो चालू । इतरे में एक बडेर मिनख क्या मळ किण री उडीकना है, रात माधी भाषण नै लागी है रे । अवै क्यू मोडो करो हो ? पुळावो रे भाई गायबो।' बडेरै मिनखरी प्रा वात सुणी के गायब्या रा कान खडा हुवा । अबै तो आपोपरी मे गावरण सारु गिगरत करणन लागा। घो कव पला ये गावो। में वै पला थे उधेरो। इतर म एक जण बोच मे बोलत थकै कयो- "लाधुदासजी सगळा मे नडरा है पैलो अहीज उधेर सी।" आ वान सुरण'र लाघदासजी बोल्या-ना-सा, म्हारी प्रठ के चिकारी है। प्रोडी के प्रोकात है जिशाहू पैली गाऊ? व आगे बोल्या - 'हाथी तुलं जठं गधा काण में जाव । इया केयर प्राप- 32 ] -- । री लुळताई दरसाई। लाधूदासजी रीमा वान'मुण र हेमदास रो सागोवाळ घेतन बमक्यो पर बड पोल, मे पाछो बोल्यो"पा कदेई पैल करी के? चेतन रो बात सुण र जेठादासजी रै घोरै रो गोयददास बचा ही दगड नाखतो बोल्यो- 'मा पैला नी करी तो थे कर देवो । थारी तो गढ लका तोडयोडी हे, जीतर।" } ' गोयददास रो पो मैणो सुण्यो के हेमदास पर चेतन रै चरडको सो लाग्यो, जाणे तेल रोतडको दियो है। गायव्या में इण तर आपोपरी में जंद' सबदारी बटाबट बाजती लागी तो जासाणियै रा हाइसिंघ वातनै रस्तसर सावट ता बोल्या-"थे रीस नी करो तो मैं मनाऊ गणेश सूड सूढाळ नै "अब ठीक रैसी गावो । कैयन सगळा ही हाडसिंघ री यी बात री लड मारी । प्हाडसिघ- "सू ड सू डाला दून्दूनाळा" गाय'र ढव्या। हाड़सिंघ ढबता ही, हेमदास री जूट, मे मजीरा री झिणकार उमडराने लागी पर तन्दूर, रै कम्य तारा माथै अणभैरी निरभ वाणी गाईजणन लागो । हेमदास पाप रो सवद पूरो करतो ढब्यो। हेमदास र ढवता ही लाधूदासजी प्रडक चूट पाळी अडवो खडी करै, जिसो वाणी गाई । वाणी रा बोल इण तर हो- माटो घटने लगो कुमार ने खातोनै छोल रैयो लकड़ी सूई तो दरजी ने सीवै भोजन बैठ चूलने जीमै दूध दहो सै धीमे निरस -1 - ग . न [ 33
.
सोनो घडै सुनारने विल्लो न मूसा पकडी
खाती ने छोल रयी लकडी
प्राधा देख बहरा सुण
पागाळ्या परवत नै तोल
इण रा प्ररथ विरला खोले
खायगी नार भरतारने या उलटा बेद री झकडी
खाती नै छोल रयो लकड़ी
धरती वरस अम्बर भी
कट
कुहाड दरखत से सीज
बीज पकड हाळीने बीजे
लोहो घडै लुहारने जाळाने पूर रयो मक्डी
खाती नै छोल रयी लकडी
बकरया र सिंघा रा खाणा
मछली खा पकड्या मरदाणा
'सुवीराम रा भेद नही जाण्या
रे | चूडी घडे मणियारन वाण्याने तोल रैयी तकडी
खाती न छोल रैयो लकडो
लाधूदासजी रै आ वाणी गाय'र ढबता ढबता हेमदास
तदूर रे सागी सुर मे आप रा सुर रळावत सैजोड वाणी गावरणी
सुरु करी-
इक लू का पकडयो सैरने बैठी हैं कान पकड के
सब जीवां न मार लू कंडी
खासा मोटी हुयगी मोगडी
पकही बा सेर रीथोवडी
34 ]
-
-
.
.
M
मारण लागो सेर नै छोडया है पिंजर जडके
इक ल का पकडया सेर ने
गादडमिंघ ले पायो टोली
सुसियो के म्हे फौजा बोळी
लू का के मचादयो रोळी
ल ट नेवो ससारनै कुरण जीते म्हा सू लडके
"इकलका
घग्धू कोचरी सेही खाजा
तोतर बुटबड गला राजा
वैइयो क'वै हूँ सब रो राजा
पाट मकं नी वारने से भाग म्हासू डरक
इक लू का
देई देवता डर के भाग
भाज गयो विरमाजो आगे
जम देवता सूत्यो जाग
कै' शकर छद वणाय के इदर भी सुरण के धडक
'इक लू का
लाधूदासजी पर हैमदास रौ गायोडी अंडी-अंडी वाण्या
सुणी जद गोयददास र जी'मे ध्याई-फाई लागगी। गोयददास
अदानाथजी साम प्राप रो मूडो फोर'र कान-बातो करी क'
'सबै तो ऊदानाथजी, कोई भडो भडवो माळो भर अडीखम
सबद गावो नी तो भरी सभा मे मानसो जासो स्थानमिस्ट
होसी, मापा र धोरै रो नाक फटसी।'
ऊदानापजो एटमोडी रकम पर फैरोज्योडा घोडा वं
[ 35
..
20-
जाणे मूळ
.
प्राटी लगाव तो अडी लगाव के वाढचा ही नोसर नी ।
वै अडवो अडावै जणा मोटे-मोटे रावणया रा मुहाणा फार
नाख क्यू के व पूरा तरक बाज । वात माथै वात अडी अडान
में हळ अडियो हुन ।
व गोयददासने कैयो- "तू इतरी काई कानो लाव है?
में आ गायमा रो जोभ, हाथ-दाय कढ़ार छोडूला, तू तन्दूरो
साम हू गोरू।"
गोयददास तन्दूरै रा तार भागोडा कस लिया पर बूटिया
ठरका'र थिर करलो । अव दानाथजी खासे करियो अर
भू. माथ मुळकावण पसारता गायवो सुरु क्यिो-
अवधू, बडका बीज बिस्तारा, कोई,जाणं, जाणन हारा
आपो आप और नही बीजो आपो आप पसारा
भाई भया भतीजा मेरै, बाप नया घर वाळा
दादा है घर पोता मेर सुसरा है घर साळा
भार्या है पुत्रो घर मेर सासु भई लुगाई ,
भोजाई भतीजी मेरै साढू-साळी जाई
नाना है घर मामा मेरै, नानी मेरी माई
- मामो, मेरा मामा जाया, मातारै घर बाई
बेटो मेरी जाई जाया, भूवा जाई दादी
काकी मेरीकाको जायो मा गत प्रददी अनादी
मैं ही मात तात सुत भ्राता मैं ही मेरा गोती
पुत्र वधु घर इमडी जामी हुय गई मेरी पोती
मैं जग माही जगत मुझ माही मे जगत सू न्यारा
आपो माप मे बठा दीसे श्राप उपावण हारा
361
, वट मे बीज बीज है वट मे इसडा वट बहु मीणा कहत लालगर सुग रे पूता उपज हुवा सव लोणा "ऊदानाथजी नाणी गायर थम्या क. साभळू उणन वा' पाही' दीनी भर यो 'धिाधिन है थारै मात-पिताने माछो ज्ञान गोधळी खोली है, थे। पण इण ज्ञान गोथळीने जाणे जाणन ग्राळा हो।' ऊदानापजी हा भाई, अंड ज्ञानने गावो तो पापा सगळा ही हा ? पण जाणे इणन किंतरा लोग है, 'इणन जाणसी कोई सुगरा रुचियां राही ज।" आ कयनं ऊदानाथजी प्रापरी गभीरता दरसाई। ऊदानाथजी रो गायवो पर गलरस अंडो मीठो मधरो पर सोधणो-मोवणो हो, जिणकर सभा मे रग जमावरणो उण रै एक सहज बात ही। ऊदानायजी ज्ञान में दो पग आगळा मेलता वोल्या-"वाणी गावा तो पापा सगला, ही हा, । परण प्ररथावरणो क्तिराक पर है ? अंडी वाण्या विना परथाया की पल्ल पडनी।" ऊदानाथजो भळे मागे बोलता कयो- "प्रा भाई हेमदास हैण गायो के लू कडी सिघ रो कान पकड लियो भर पा लू कडी सगली जिया-जूणने खायगी। इणरो फोज कुण | गादडो अर सुसियो पण इण रो प्ररथ काई ? पयू , हेमदास, प्ररथायसो गाई जिकी पाणी' । क्यर ऊदानाथजी सभा मार्य प्रापरी निजर नाखी हेमदास ऊदानाथरी वात रो पडू तर करतो" बोल्यो- "पै'ला लाधुदासजी हीज वाणी भरथाय सी, कारण के लाध- -
दास जी टिकायत हैं अर मा होज अंडो गायवो पंला मुरु)
करयो। जद पण पला हीज प्ररथायसी वाणी।"
लावूदासनी ढोळी रा भोळा पण सगत माय वठियोडा।
साधूदासजी कयो -"मैं तो जद प्ररथावतो जद हेमदास
म्हारी वाणी माये तोर पाळी वाणी नी गावतो तो।
लाधूदामजी री बात माय हेमदासन बोलण ने जागा
लाधगी।
,
हेमदास कई भिचकतो सो बोल्यो-"जणा तो ऊदानाथजी
हो वाणी प्ररथाव सी, म्हारी वाणी माय मा तोड पाळी वाणी
गाई है।
हss, ऊदानाथजी मुळकता सा वोल्या-
अदानाथजी भळं प्रागै टुणकलो नासता बोल्या -'यो चेतन
क'वै होनी, लाधूदासजीने क पा कदेई 'ल करी के ।
चेतन उदानाथजी रो प्रो टूणकलो सुरणता पाण चुपचाप
जाडा वोचग्यो । चेतन रे चेतन मे चेतो हुवै तो बोले । ।
सभा आपोपरी रे सवदा री लडाई मे बोलीबाली बठो
ग्यो। जाण चिडकल्या मे भाटो नारयो हुवे ।
मभान बोली बोली देख'र ऊदानाथजी बोल्या "अरे
सगळा ही सास कूकर सारग्या? अरथाबोरे भाई।
निकन अरथावरणो ही चाहीज। प्ररथाचे जरणा तो 'गाये रो
कई रस पण पावै अर में जिका मिनख इतरी भू चाल' र
पाया है, प्रान भी कई भोम वधै। नी सवा देखल्यो थे।"
ऊदानाथजी भाग मळ आप री वातने खाचता बोल्या-
'धणा दिना री बात कोनी काल री हीज बात है रतिराम
38 ]
= सिराणरी ढाणी मे बाण्या गाई, एक सू एक बंधतो। पर
आगा पाळी जिसी वाण्या तो प्ररथावता मोटे-मोट ज्ञान्या रो
- आल्या दुखण नै लाग जावै । वाणो किसी'क । जिके री के पूछो
।
A
हो?"
एक जण विचाळ ही बोल'र कयो-"कया जाणीजे?"
ऊदानाथजी वा वाण्या री सद करावता बोल्या-"वा वाण्या
रो सिरे नोळी हो
1 कोडी चाली सासरं, नौ मण काजळ सार
2 सूसियो प्राळ सिंधा सू खेल
3 पढियोडा पिंडता करोनी विचारा, 'लो पुरुष हुया क'
नारी एलो।
4 बारा बरस सू बाझ ब्याई पुतर लाई पागळा
5 विरछ एक ऊग्यो भोमी पर नहीं पान नही डाळए
नही पात नही छायाए
6 नदी के किनारे अवधू घूसली जुऊगी पेड मछलिया छायो
एलो।
अडी सी और परण कितरी ही वाण्या गाईजी। पण मा
बाण्या रो प्ररथ रतीराम परथायो जठे रतीराम नी नावडियो
उठ मे पण सायरो लगायो।' "
ऊदानाथजी री बात सुण र प्हाडसिंघ बोल्या- 'बात तो
साव साची फरमाई माप पण महाराज, अठ तो था सू बती
कुण है जिको मंडी वाण्या रो प्ररथावणो करं।
'नो भाई में गायबी हैं, मैं तो ' वालो 'महाराजन अ
माया सुपर साबत र साथै बुवो आयो। उदानाथजी बात री
[ 39
स'को सारता वोल्या। 'तो महाराज ने अरज करा के अथ करण सारु।' एक जर कैयो। . 1 - ऊदानाथजी बोल्या-"महाराजने क परज परा महागज को ज्ञान रा समदर है। प्रठे तो श्रापारो वात चालायी है" अदाजी सरधा जतावता कयो। सभा मे सू एक जणो वोल्यो- 'का तो भाई कई क'वा नातर आ के वो के प्रो काम म्हार ढब रो कोयनी । अब तो मभा मे सू केई जणा सांग ही बोनता कयो- अर यावो वाणी हैमदास। पण हेमदास तो जाणे हेम हुयग्यो हो। वो केई ताळ बोल्यं A r कोयनी । T . , कदानाथजी ने अंडो ढग देख'र झु झळ आयगी। वे आपर गोडा नीच दिगोडो टोराक मरमावता वोल्या-'म भाई ज्ञानो हैं जद में ज्ञानरो गहरो गम मे जाब गुडग्या नी, हेमदास बोलतो तो खरी'? हेमदास अब कई पाप रामायो-ऊचावतो वोल्यो-"महाराज (उदानावजी) मैं तो साची कंऊ म्हे तो खाली गावणो हीज जाणा प्ररथावणो म्हार ताचे रो काम नो।' सभा मे सू -एर जणो कई मीठास सारतो, बोल्यो- 'महाराज उदानाथजो हेमदास थार आग कोडी'क चीज, जको था थका,वाणी प्ररथावरण री हिम्मत वाधे"? " ठोर है पण, बात मी ढवतो प्रावणो चाहीज।' ऊदानाथजी कयो। । 40 ] - भळे एक डोकर वोलर कैयो-"ऊदानाथजी थारे प्राग सगळा बाम्बा हाथ पसार दिया है, सोबा लग-सा हुयग्या है । अब तो ही समझावो।" दानाथजी गहराई ₹ भाव मे बोल्या-"हा, भाई, अवै यू नी अरथावा, तो ल्यो सुणो- लू कडी नाव माया रो है सिंघ जीवात्मारो नाव है, माया । वधर जीव मर अर जलमैं । ओ हो जगतनै खावणो है। 'मनस रो ओ नानपणो गादडो पर सूसियो है जडपणो (अज्ञान) र सासो ही घग्घू पर कोचरी जाणो, वैइयो ही अभिमान है। 'जठ अरेव उठ देवी-देवता रो के काम ? वै तो उठ सू भाजसी, सिसी हीज ।" ऊदानाथजी रो पो छछम अरथ सुरण'र एक जणं लाधूदास । गाई जिकी वाणी रो अरथ पूछयो- ऊदानाथजी लाधूदासजी गाई जिकी वाणी रो प्रो अरथ करयो- 'माटी सू हीज सगळा रै शरीरा री रचना हुवे पर लकडी अन- ITळ मे सगळा रै शरीरने बाळ'र पूरो करै । ओ हीज छोलणो है। समै री सूई जगत रुपी दरजी नै सो' अर शरीर रुपी चूल्हे काळरुपी भोजन जीमै। तत्त्व रै मा हीज माछी चीज है। सोने सरीसा सदगुण हुवै जणा सुनार रुपी शरीर रो घडीजणो है । जिका मिनख आप री बार भटकती विरत्यानै ससार कानी सू हटावै, अतर री प्रात्मानं देखै पर जोग ममघी मे मणहद सबद सुण । मील मिरजाद (निर अभिमानी) सू न्यारो रं' उणन हीज पागलो जागो-जिक मायाने कडख कर नाखो है अापर तन-मन सू भर आत्मरै भाव मे र'वै वो होज पागलो है। [ 41
जिको अभिमान र परवत न तोल । माया ही नार है, प्रा ही
आपरै जगत रुपी पति ने खाय रयी है।"
सभा ऊदानाथजी रो अंहो समझ में प्रावण माळो अ
सुण'र घणी परण राजी हुई अर ऊदानाथजी रो घणो प्राधम
करयो।
सभा मायला मे सू एक जपो बोल्यो थान मार्ग की पूटर
हुवै तो पाट माय वठियोडा महाराज ने पूछ लिरावो । मै बान
आयो मौको क्यू खोवतो हो, मैं कैयो मनै लाथको ज्ञान हो
ऊदानाथजी री प्ररथावरणी समचं वीरो कुण पण ? प्हाडसिंघ
पण अरथ प्रछोतो दुकोवे है। प्रा बाण्याने नाडी बोली मे उन
वाणी केव पण शास्त्री री बोली मे आ हीज विपयय बारा
कुहावै । कबीर, गोरख, प्रासाभारतो, हरीराम बनानाथजी में
आज रै जुग रा लाधूनाथ अर विवेकनाथजी जडा योगी आई
वेदात सू मेळ खावण पाळो अरथ बैठाव । घूडाराम, रूडाराम
विहारी दास अर नवल रामजी जिसा ज्ञानी सता अंडी बाण्या
मायकर उपनिषदा रो ज्ञान पावू दुनिया सारु मा वाण्या मायक
प्रगट करें।
इस तक सभान राजी देख'र ऊदानाथजी हसता मुळकत
सा गोयददास फानी मू हा फोर'र सेन करो के किसी क रयो ?
गोयददास राजी हुयोडो पाछी सेन री भाषा में हीज क्या
"साड खोपरा सी।" पर मिसरी माखणा सी।
42 ]
संपादक
केई दिना ताई घणो अर चौतरफो सोच-विचार कर र एक
जणे अखबार काढणो पोलायो। सपादक आप री जाणमे नही
स्याणप सू छापो काढणो चालू करयो क मत पूछो । छापे
सारु सपादक र जी' मे कोड घरगो, हिय में उमाव घणो।
छाप रो ऊपरलो- 'मुख पानो' कोई देख तो देखतो ही रेय
जाव । मनीराम छापने देख'र ललचावरणने लाग ज्यावै
भैस न देव'र पाडियो डोडावणने लाग ज्याव अर टोगडियो गाय
नै देख'र हुरकरणने लाग ज्याव । छाप रे ऊपरले पाने माथ
फूठरा चित्राम, रग-बिरगी लिकोव्या, नैन सुखाळी छिव्या,
से चड़ डाक (आखर) अर मायल पासै रु काटा खडी करणळी
खबरा। छापे रो पैसडो पानो इस-विर्ष चितेरै लम सू थोडो
ही चित्राकोज्यो हो । प्रो पानो तो सपादक खुदाखुद हाजर
रेयर नगर र नामो कळाकार सू हाथोहाथ रोकडी दाम देयर
। चियाकोयो हो।
सपादक अखवार काढण मे पर आप री नाववरी खातर
मरधो जीव । सपादक आखो दिन प्रापरी नाडा हेठी नाख्या
| लिखा-पढी में लाग्यो रे'वै। कई कूडी पर कई साची खबरा
छाप्या सपादक रो जी' मोखातर पावै । इण रो जरणा जावतो जो
सोरो हुदै। सपादक राजनीति मे पण मंडो नास, जाणे प्रवे
[ 43
।
अळू झ्यो नै घडी माय अलूझर पडयो।
सपादक प्रापरे च'र मोरे सू खासा फूठरो, डील सू क
सूल सूल नी थाक्योडो तो नी घणो माता ।
सपादकने उपरली हसी हसण री खासा रबद । लुळता
मे हाथ जुडता ही बत्तीसी खुल ।
सपादक री आस्या री जोत इतरी घणो तेज के उरा
आगली पाछलो पर एक रो दो सूझ तो ही पण उग्ण दाम मा
मडा'र चश्मो लियो है। लिखा-पटी घणी चश्मो उतारया ही
सुनसर हुव पण जोर के, करै विना चश्म र लोगा माथ प्रभा
की कम पडे । वो घडी-घडी चश्मो उतार पर घडी-घड़ी पाह
लगावै । सपादक किणी सू बात करता थको चश्मे न रुमाल म
पूछतो रै'व।
जिकै दिन छापो प्रेस सू बार, नीमर उण दिन ओ ए'
प्रादमीन प्रापर साथै तिया-लिया इतरो उतारळो-उतावळ
चाल'र चटक सी थारै-म्हारे हाथा मे छापो पुगाय दिराव जा
मोफडदान मे होज लका लुटावतो हुवै । पर जिके दिन सपाद
छाप रो अक लोगाने देवणन जाव उण वेळा पो आपने सगळा सू
मातबर पर लू ठो समझ । ओ प्रापर मन मे जाण के
लोगा माथ म्हारो प्रभाव पड रयो है । ठोकरी रे. लाल ग्ग ज्यू
जिको नी घोयो ऊतर पर नी माज्या मिट ।
स्याणा आदमी मिनस रो थो'मो' लगा लिया कर पा
आज पोमाईज्योडो है । सागीडो मोदाईज्योडो। पण आ बात उण
र मू है मार्य क्यार कुण खारा तु या तोड इण र मूड प्रागस
मनरसी पर मोठी बडाईज करें।
44 ]
सहर र सैन
लोग बड़ाई वरता क'वै."
-"ग्राठा गुणी हो थे, देश विदेश री
समूधो खवरा छाप नाखी थे तो। थान समच कू कर ठा लागै है,
भावाता रो।
कोई वीर बैताळ मेयोडा है काई थारो !
प्रागै रै जमान मे से वडा अलगो सू अळगी पर प्रावण बाळ वगत
री वात रोपतो लगा लेवता।।'
सपादक लोगा री छदेमद रो पडी मोठी वाता सुरण'र घणो
पण राजो हुवती।
सपादक बिया मन सू साव भोळो हो पण आपनै वो गजब
रा गोळो समझतो।
सपादक मोटोडा आदम्या सू घणी पण सेदमेद राखतो पण
गरीब-गुरबै माथे मीट ही नी नाखतो । जद के सपादक वण्या सू
प'ला पो हमेशा ही गरीबा री हिमायत करतो हो। वो उण राज
तेज प्राळा सू मोकळी घालमेल रावणी सुर करदी ही। हेठले
सिपाही सरडाने तो वो साव गिनारतो हीज नी । वान जू जितरा
ही समझतो नी।
जे कोई सपादक री गिगरथ करतो तो वो काना मे तेलपाळर
वैठे ज्यू बैठ जावतो । किणी री बात माथै धान नी देवतो हो पण
मन मे महा रोनाव लिख'र राखतो पर कैतो बख मे आय ठा
सू 'ऊपरल मन सू करतो आज री दुनिया है कोई आछो
बतावै कोई माहो"।
सपादकन नै'चो हो के लाभ पाळी सुरणमी पर बै लाभ पाळी
ने कोरा कारा जाण'र छोड देवणी । विना भोगे पडती काना ही
[ 45
।
घाल
--
वयू टोळणी। सपारक पण छापो पाउमा राग्यो। कागद पर छपाई रा परसा लागता गया। मपादय सोचतो जिवं दिन छाप रो पदो भेळो करणनं टूयू ला, उण दिन लोगा सू मिंट दो मे काना विचाळे पारो देय र दाम लेयनू ला, मन कुण नटलो ? विपरा भोगना किस्त खाया है के मनं नटलो।" यो प्रापर मन में इस तक मनचूरिया लाडू फोडतो। वो सोचतो के जद चदे री रसीदा पटणो सुरु हुवैला, तापाछ नाण री ताई टारण नी रखें'ला। अरडाट करतो धन आ पडलो।" लोग जाणता के सपादक प्रो छापो खाली उपकाररी भावनाने लेय'र काढे । प्रा कुण जाणे के एक दिन वो छाप रा पइमा माग बैठेला । सपादक प्रापर मन सू गाव रै अाख लोगान गायक बणा नास्या है । छापो तो सगळा ही पढे, लोग छापो पढता जावं पर उरा री सरावना करता जावै। वे व 'सपादक परउपकारी जीव है" लोग क वै 'जिको आप रो विगाड मर जगतनै सुधार उण र जस री जडा पत्ताळ मे गुडै ।" इण तुमार सपादक प्रापर छापरा मोकळा ही अक नीसार चुक्यो हो। पण छाप रे सपादन मे पर घर मे ऊजळो बरच लाग्यो, राजार री मोकळी रकम माथे हुयगी। लोगार कूडिय- गैल खरच बघतो ही गयो । लोगा रो काई, लोग तो 'लूम्बा- लाड खम्मा घणी करता यग्या। जो-जरणो पइसा मागणन पण पल्ले पइसो एक पण पडयोनो'खाली उण गाव री कुवराणी भाव । अब तो सपादय रे घणो मुसकल हयगी । जठी कर +5
.
नोसर लोग गाभा फाड, जणो जणो 'क्यो-दयो' करर खालडी
खावै । मागतोडा खल्ला खोलर लार पडग्या। एक बोजे नै ओ
पतो हुयग्यो क सपादक रै वो 'उतरा माग वो जितरा माग ।'
मागताडा सोच ले पडसी जिको जीत मे रै'सो, नीतर इण
फ्कोरमल सपादक कनै मरयोडी मावी ही देवरगनै कोनी।
प'ली तो 'हम चौडा गळी माकडी' करतो बापरो सो माल बजार
सू तुलालियो। लोगान पै'ली जणायो क सपादक परळी सुदा
हुव, उण र पाईमा टक्का री ऐ कमी । राजतेज आळा रे साथ
ऊठणो-बैठणो पण अब कठे गया व नीजु? चुकावनी सपादक
गै बळी? नीतर लोग तो डूव्या जका डूव्या ही सपादक जीवतो
हो मूडो दिखाण लायक को रेयोनी।
सायरा साची यी है क 'लुगाई रो खसम मोटधार पर
मोटयार रो खसम मागतोडा।"
सपादक रै जद च्यारा पासी सू चू टाचू टी लागगो जद उण
साच्यो "प्रबै तो कूवो-पासी करणो हीज पडसी ।' मन मे पक्को
भरोसो हो के "चदो चालू करता ही करजदारी रा मोरिया पोऊ
पीऊ करता उडता निर्ग प्रासी"
सपादक रसीद बुक साभ'र नीसरयो, मापर प्रखबार रो
मासिक-वार्षिक शुल्क वसूल करण रो श्री गणेश करयो ।
को दामा सारू उगाही करणने अगूण सू माथूण पर
दिखणाद सू उतराध, मंडे-छंड, पास पसवाई गळी-कू चळो,
हवेलो दरुज, हाट-बाट भर बनार सगळं सरम नास्या फिर प्रायो
बामण रो बेटो जाण'र एक साल रो चदो दियो पण रसीद
भरण री मनाही करदी। उप सपादक्ने अखबार काढण मे
[ 47
.
जिकी अबढी अबखाया प्राव, बार बार मे पण चरचा करो
अर देश-समाज री मोटी सेवा अखबार मायकर हो सके रा
पण विचार क्यिो। उण सपादक ने अगद पाळो पग रोपर
अखवार काढं जिण तुमार काढण रो उमावो चढायो रण सपादक
र तो चित्या री हाडी खद बदावै ही।
बाकी रै लोगा तो जद सपादक छाप रा दाम भाग्या
तो वा निराताळ री वाता कंयो।
एक जण तो के यो के अंडो काई सपादक जिको पाठका
सू बत्ती पईसान समझे। म्हे तो आज तकायत प्राही सुणता
माया हा क ' मिनखा री माया है अर रूखो री छाया है । 'पइसो
तो हाथ रो मैल है । दिया लिया तो डूम राजी हुवै, मान बडो
क्तानी "म्हे तो सदा मू सपादक जी रो मान करता आया हा
जद थे म्हारी दूकान पावता जणा म्हे सगळा पगा ताण थार
साम खडा हुय जावता, आ तो था सू पण छानी कोयनी ।
एक दूजे क्यो- सपादक जी महाराज, थे तो राजोग म्
बामरा रा बेटा नीसरग्या, वामण तो साली हाथ जाडया ही
राजी हुय जाया कर पण अवै श्री क वरतारो मायग्यो के वामण
हो लोभ-लालच करणन ढूकम्या ।
एक बीज आदमी पा कयी-'ना महाराज, कागदा रा
वाय रा पइमा, थे अठे अगवार पक जाता जद म्ह उठा र
वाच लेता ता पछ उरण मे गुट घाल'र काई ना दे देता । गुडरा
म्ह म्हारा पईसा ले लेता पर अमवार रे पाना रो थाने पुन
हो ज्याती जणा म्हे बापडा वाणिया यान पइमा के वातरा देवा
अवां कणाई सराध पावडो प्रावण दमो दूजे वामण ने नी जिमार
-
पछ- पपिकरी सू पळपळाट करणने लागग्यो। वेफिकरी रो बायरो एने जिमा देसा। म्हारे ऊपर तो आप मेरवानगी ही राखो सोनूग मू लगार सिंझ्या ताई पावले री मञी करा अर वोमैसू मी याने द देवा तो म्हारा टाबर किन खासी ? के वै म्हार बटका नरसी । प्रावो तो थारी दूकान है पण पइसा मागणनै प्रोज्य हारी दुकान पर पग मत मेल्या ।" लोगा री अंडो बात्ता सुण र सपादक रे काळजे मे लाट पो खडी हुयगी । जीव रे मढ माय चित्या रो झालर बाजपने शागगी । अब करे तो वो के कर, काय मे हाथ धाले । पातडी सपादक र मरण पाळो ढग हुयग्यो । सपादक ने घणा झ झळ पावे सास उतावळा चालण ने जागग्या । चिंत्यारी चिणगारी जुवाला बण' र डोल ने 'पड-धपड पाळणनै लागगी, पण उपाय के ? सगळा साग या ज्या परण इसाळो सांग पइसा कनें हुया तू होज पावै । नाणो क्न हुया ही काम पेण चढ़े। सपादक कनै की लुगो-तुगो हो वो ठ. दिना ही खा पूगे कयो । मपादक ने ग्वाली प्रो हो भरोसो हो के "प्रखबार रो चदो मेलो कर परो'र बजार मे पल्लो राव लेमी पण उरण री पा उप पण खाली गई। संपादक रो माथो अब की काम कोनी करे। वो इण यामने विसं घड बैठाय, प्रा बात उण र समझ मे नो पावै । मपादरने छेवट एक उपाय सूझी। उपाय मंडी कारगर जिण सू सरव दोस गधे र सोग ज्यू लोव हुवता ताळ मा उपाय सूझता हो सपादक रो मूडो - क्तिरोक लाग? [ 49
सपादक र चेरै मार्य प्रायोटी उदासीन धूपैन उडाव
उडार लेयग्यो।
अवै सपादक इण उपाय सू सासा वाता पूठो का
पा उपाय सपादक सवा सालाना करसी जिक मे फरपगा
जे सपादक इण सोच्योडी उपाय सू हट ज्यावं ता सा
मे "अंडी दुबै साव कुत्ता गोर।'
सपादक न सूझियोडी उपाय इतरी सोरी भर इतरो सार
को ही नी पण वीची उपाय के ? मिनस प्रापर मान
राखण सारु दुखन पण घणो सारो सुख मान लिया करै । सपा
रो सोचियोडो पो सुख अंडो ही हा, मतलब के पो हो तो बजरा
दुग्व पण इणन सुख कर'र मान्यो अरदिन दशा देख्या भी सुख ही
हो आग ठाकुरजी नै लाज है।
इण उपाय रा भाव सपादक महाराज रै सू डी ताई खामखा
छलीजग्या हा ।
सपादक नै मागताडा रो भा मौज सू पण बती लाग्या
जमडा म दमडा रा मागतोडा खोटा।
सपादक आपरै सोच्य उपाय रे मुजब सहर में ए
मौके 7 जागा देख'र वो पासरण विछा'र बैठग्यो । अन्न-जळ'
त्याग कर'र अनखन रो वरत माललियो । सपापक आप री में
ने तंडण सारु अनखन पाळी उपाय ही सोची ही।
मपादक जद अडी जागा पासण जमा'र बैठग्यो तो सह
र लोगा न ठाव लाग्यो दुनिया तो मजा रो देस है । लो'
सारु भो एक तमासो हुयग्यो जणा परण लोग भेला हुवणनै लागर
लाग सपादक रे मोळे दोळे कडोजूपर बैठग्या । मूडा जित
50 ]
-
विला।" जाणती ही क अखबार काढणो गगनो हामो गोभो। -त, लोग बाराक टा। कोई में- नादर हारोडी बापावार सायन रोमा मायो है,या--का दौरा पल रहे पकान पास करा, मारी हा रोयो है।" में कैद-"मुदाड यो पाई है, इस बान्ने भावा- प्पा हो बार है। मादर को इस परवी में मोसापर अहो बाका डार वाढ द लोग मुगी तो और पानोर दा दुवर ने नाना। एक गद रा दो गाव भेग पुरया। र नहर में दरा बात रो हाका फूटयो । जिको नी जातो । तो वो नो नपादन जारानने लागग्यो । चिमटकाराम- मातोडानं इण मायलो वात रो पतो सागपो हो के पादक मानोडा सू उथवर मरणो तेजियो है । जापान । नी पाया काल ने ग्रापान कोई दोस्मारी मारपडे हत्यारे नम में पहनी नवे।" जिकी कु वराणो सपादक ने एा परस से दो दियो हो गिन डा लाग्यो तो वा पण सपादला पने पाई। मा गाई रोटै मा-बाप रो पर भव्य-गुण्य पराणे री दी। समार री तिन जाणन पाळी हो, इस मामारहाणी-सामने साकार उण सपादकन पूछियो ए- 'मामा भनी ।।" संपादक प्रापरै मायले गगरी रोग मात पण मलाई । संपादक्ने उरण लुगाई ऊपो-गीचो गणो ही . ।
व अड मिनया मार्य प्रणमो कर परो'र नोनारायण री इराद
न इस तक नाश करणे प्राछो कामनी । थारं अखबार
ग्रायक साली दीसतरा मिनख है थानोरं असलो रुपन नी माळ
पार प्रसली डोळ न जाणन सार थे म्हारे इण प्रोणिय मायका
देखो पच्छे मरणे अथवा जीण रो विचार लेया।'
सुगाई सती ही जद सपादक उण र प्रोणिय माया
लागा माथ निजर नाखी तो उरण सतो लुगाई र छाडा सवरा सन
लोग अोळपिचोळा जिनावर दोस्या। काई मिनख तो लू कहा
रुप में तो कोई गादडो कोई विरगडो पर कोई-कोई माकड झाक
जिसा जगल रा जिनावर दोस्या। वा मे मिनख एक ही परा
निजर चढियोनी।
प्रोढणिय मायकर छण्योडी दीठ मे लोगा रो वारलो प्रय
मायलो रुप भलीभात पारया लाग्यो दीसग्यो जद पण सपाद
चटकसी आप रो भासण काल मे दाव्यो अर प्रापर घर कानी
चाल वहोर हुयो।
सपादक सोच्यो अर्ड मिनखा माय प्रणेसो कर र मरणो
जाब पागलपणो हो। मरण जीण री कीमत मिनख हुवै तो जाए
पण तो बापडा जिनावर
2 ]
धायलीन साग लेय'र बहोर हुयो। कान सू तू कोडी जितरी भी चित्या मत करी । राम- -धायली दो पइसा री कार मजू रीकरण सारु मुरघर रो वासी रामू जाट पजाब कानी गयो। रामू आप री जोहायत धायलीने भी आप रै साग ही लेयग्यो । दोनू लोग-लुगाई मणत-मजूरी कर दी पइसा री प्रापर घर में प्रोत घालसी। बिया हो घायलीने रामू लार किण रै कन छोडतो? जाण्यो काळ कुसमो है । पजाब मानी जाय'र पेट भराई करसा । आ सोच'र रामू आपरं गाव सू आग पजाव मे जायर रामू अर घायलो एक मिय र सेत मे हाडी वाढणन लागया। जद में काम रोनाको मायग्यो रामू दो पग आधा दिया पण व रामू धायलीने साग नी लेय जा'र इणी मियन मानख प्राळो आदमी जाण'र सभळाय दी। रामू जद अठ सू जावणन लागो जणा मियनै कयो क "घायलीने सोरी रास्या। प्रोदरण मत देया । मैं वेगो ही पायो मिय पण रामून पूरो-पूरो भरासो दिरायो के "धायली रामू सीधे सुभाव रो हो जणा पण उण मिय री बात रो अकोदो कर लियो अर आप उठ सू आगे चाल बहीर हुयो । आग जाय'र रामू काम री पडताळ में लागग्यो। काम री [ 53 तो प्रावतो धायलीन प्रठ सू लेय जासू । ४
रो
लेवतो।
रामू
आळे नै मिल' । रामू मेत जोतरण री चुन मे एकरगो धायली
दी । वो घायलीन आप रै साग लिया विना ही पाघरो
राम र बेत मेऊचाटूचा। डूच पर वठया रामू रागली उधेरे
विध बैठण मू वो काम मे भूत हुय'र लागग्यो । काम री कई
कमो को ही नी जद रामू र मनूरो रो कमी क्यू पडतो ? रान
परलो रत पाई जतं इक्जाई काम मे लाग्यो रयो।
रामन र-रेर घायनो चतै प्रावती परण वो दो पइसा
श्रावत री सोरप में धायली कान नावत मनन रोकर राम
इया काम करता करता र सूने प्राधो जेठ वतीत हुयग्यो।
प्राधो जेठ बीतते चोतते प्राभो बादल छायो र मेह घरायो ।
वोजळया पळका मारणनै लागगी के रामू रो जी' गाय कान टोग
डियो तणाव ज्य् पापरं देश काने तणावणन लागग्यो ।
इण वेना आप रो जाळ पालो सेत नै आयो जिको मातो
रामू सोचे "पैला वेगो देश जाऊ र जाळ आळं खेत में
हळ खडो करु । कवात है क जेठो वाजरो पर भाभी बेटा भाग
ने
भुलाय
भाप र गाव ढायो अर सजत बैठा'र जाळ पाळो खेत बायो।
खेत मे लीली छतरी प्राळ री कीप सू पाछा धान लाग्यो
सुरगो सावण पर भर भादूडो सातरो हुय र प्रायो। सार मै का
छिन छाजो मैं जाण नगवान सान्यात ही आय विराज्या हुव ।
चालतो सो कातोसरो। टीडमो मतीरडी जोई लाध । कुळया-
काडिया जोम तो निरपत हुदै ।
ढेर हो।
पण रामून धायगा प्रचता प्राव धायली विना साही सुविाड
541
डोल तोवो तप ज्यू तपणने लागग्या। करणा ही राम माप री
रामू ऊचेडू चैपर बठो-बैठो बात मन के विना पिराणरै डीलसू पर
विना पह्यिा री गाडी सू जिण तुमार कोई काम सजे नी उगी
तुमार थायली विना रामू रो कोई काम सरै नी ।
रामू गे मन पल-पलक घायली धक धावै उणन अब
धायली बिना धाप कठे? धायली विना रामू आकळ बाकळ हुयोडो
र'वै। बो सतरो वतरो सो हुयग्यो । जाट रोही री रुत मे मेह
वरस्या बीजा सगळा काम छोडर पला हळोतियो करणो चासी पण
पच्छ तो तुगाई रो चितार कर हीज ।
एक दिन रामू समग आधी रात रा उठियो अर गैलै सारु
चायतो चीजा आप री पेशो मे जचाई पर घायली न लावण सारु
पजाव कानो धूपाडे चाल खडो रेयो। तापच्छे रामू प्रापर पगा
न कठई ठाव्या नी ! धायली र कोड मे रामू चाल्यो तो इसो
चाल्यो के आठ पोर मे सागी अंडं जा पूग्यो ।
राम ताफड कर' र सागी अंडे पूगतो गयो पण अठ रामू न
समचार की भूडा होज मित्या ।
जिक मिय रो राम् इतरो घणो विश्वास कग्यो हो, वो ही
रामू र साथ इण तक रोधोखो परयो क उण धायलो न भगरार
प्रापर घर मे घालली
अठावता रामू जद प्रा सुणी तो उण रे जो मे कई बाकी
नी रयो । रामू र एक चढ एक उतर पण वो अब करें तो के करें
गतागूम में की वैठी नी। रामू रो काळजो होळी चुके ज्यू बुकण
न लागग्यो। होळी झळ सी झळ उठणन लागगी। उण गे
मा नप पर च्यार च्यार चोसरा ना तो कणा ही वो मीयरै विश्
[ 55
i वास घात रो पात ने चरी पर'र खाग प्रासू टळकावं । पण जार राम राठ आगढ जितरो ही चाल नी । राम जे अठरी पचा यत मे प्रावात राखें तो ही पण उण । तो अठ सावलसर पर आवतो दास नो। राम बातने च्यारु फेरा सोच'र अन्ते पन्द्र ढोलो ढपर हुपर बेठग्या पण इस तक ढोलो हुपर इस तर्क बैठा सू काम कू कर चाले । नासर रामू जाटरो वेटो हो, कबत मे कैयो है के नट विद्या प्रा जावं पण अट बुद्धि को पानी । जणा रामू ने गोई न कोई जट बुद्धि उपजावणी ढोलो हुयर चाहीजे। पच्छे राम् क्य् पाछ राख हो, उण एक जट विद्या उपजाई पर उणने पजोपी। रामू आपरो वेश बदळयो माताजी र भोप रो सातरो सो साग बणायो, कड्या मे मोटा-मोटा घुघरा बाध्या एक हाथ में है लियो पर बीजोडं हाथ मे काचळी बाध्योडो तिरसूळ झाली अर ता पच्छ उण घर-घर फरी घातणी सुरु करी । रामू घर- घर जायर रागळी उधर अर तान तोड । मूड मे गोळा गिटकाव अर मू उ सू सूइया नीसारै। छुरी पलार अर प्रापरी जो मन डाळ-डाळ कर नाख । हथाळी पर वास्तै जगाव पर मूड मू झळा काढे । राम जिकी दिश मे मूडो फोर उणी दिश मे लोगो रोडो जूप ज्याव । राम घर-घर पर गठी गठरी मे धायती री खडग लगावै । इया करता-करता पर फिरता फिरता एक घर में धायली राम र प्रारया दीठ चढी। दोनू च्यार निजरा हुया। दोनू ही एक बोजने देवर हुरकरण लागा पण इण रा विणी न जामनी लाग जाय जद पण वा अंडा मनोवरोने लगोई राखी। 56 ]
लो राम कान भरवा मीट सू देरयो पर नापाछ प्रापर अतस
दिन बदिया रे साथ में तू, दे मिया री छान
यती विरग देश में राम कनै कोकर जाव?
डिनै जणावण सार पां री आगळ्या सू जमी बुचरणन
पो।
इण सन सू रामू जाणग्यो के घायली अठ पितरी उरणमणी
घायलीन माप से भेद बतायण अर प्रावण री जुगल जतावण
रामू गोत उधेरघो-
मेरी राम घायलो, उतराध कूव पर मेरो डेरो ए ।
भागिय में नोपजे अर मूगिय रे मान
-
नासेन मे पूछयो
कठ है पारियो कठ धावळियो कठे है चुडलै रो जोग
काली खु खणत्या परया म्हाने
हस रे गावा रा लोग
मेरी राम घायली
काग्व दबाय' र लायो धाबलियो
पारियो म्हारे हाथ
ऊचड चू चड मोचड परचा
चुडलो हाथी दात
मेरी राम घायलो
तू मत जाणी काळ पडयो है
गैरा घणी समामी
घोणा धापा घरे मोकळा
गाव गीत दमामी
[ 57
कुटोज्योडो रैव ।" रामू समझायो के हे घायली, गाब सू उतराई
पूवो है उठे मेरो भासण है मतलब कै मै उठ तनै उडोकतो त्या
पण प्रवर्ग समामी तरही है। रोही मे साग तरकारी सार
घसके धोकानेर री परतो वही सुरंगी है। मापा रोजार
मेरो रामधायली-
काकड बोर मतीरा पाक्या
पाक्या टीडस वैर
जाळ आळा खेत पाक्यो
सुरगो बीकानेर
मेरी रामघायली
रामू गीत गे सैन सू आपरै प्रदेश री माली हालत रो व्यो'
बता दियो क "घायलो, आ नी जाणं क मुरघर तो काळा
मिन सू तू दिन बदे-सो मियरी छानडी मे मु गीयमान वास्ते
चिणागदरी नाख देयी छान जगणन तागसी जणा मिया तो उणे
वुझावण मे लाग जासी अर जद तु मौको देख'र मेरे
उतराध कूवै माथै दौडकर प्राज्याई ।
रामू कैयो-'तू आ ना सोची के थार सारू धारिष
धाबळियो कठ सू आसो, मैं तो काळी खू खणतो पैरचा इण
देख' र रस्त रं गावा रा लोग हससी के इणन कळ सू उठा ला
पण मैं सन चीजा साथ लेयर पायो हूँ । हाथी दात रो मुठियोमा
ऊची नोक री मोचही पण साथ लायो है।
तू पा ना सोची के प्रापा रै मुलक में लोग काळ
टोडसो काकडिया पर मतोरडी मिलणन लागगो है । फातीसर
(बनफल) जयरो है।
समो
58 ]
को खेत पक्काण पर पायो खडो है। घर मे गाय व्यायोडी है।
च, छाछ री ताई कमी नी है।
तू मेरो बतायोडी जुगतो बैठा'र मेरे कने दे ठोकार आज्या
पा अडा घूपाडे चालसा क भिया रा बाप भी आपा नै नावड
सका
रामूरी एक-एक बात घायली रैरू रू मे जमगी। उरणरे
य-जिये मे ऊजळ धोरा री चितार जामी भर जाग्यो सनेपी
-हेज।
घायली रामू रे वताय मुजब सूटकलो करयो पर पाख
क नितरो ताळ मे जा साकडो करयो उतराधो कूबो अर
पाछै रामू भर घायलो दिया तेतीसा के जाये बूचकी तीखा
न। जणा हो किणो सायर केयो है के नट विद्या सू जट बुद्धि
नोलो पडे।
। 59
भाळू भी गजब री भाळू है। नौकरी री भाळ मे सर
समुदा दफ्तर चारण राख्या। नौकरी लागणो नी लागणो भा
* मारै नही पण नौकरो री भाळ मे भाळू तिल जितरी भी कर
पडण नही दो।
भाळ नै प्राज ठा लागी के पापार इण सर में रेडियो स्टस
चालू हुवण पाळो है । उण सोच्यौ "उठे और भाळ कर र
क्दास नौकरी री विध लाग जाव तो"।
भाळ किणी जाणकार आदमी क्नै सू अरजी लिखाय ।
4- मनै प्रापर अठ गावरण-बजावण साह राख लियो जाव"
भाळ दफतर मे जाय'र प्रौ प्राथना पत्र पेस पर दियौ अर
लोगान, वारे बैठया देख'र आप परण उणा कनै बार बैंठग्यो।
इण दफतर रा मोटा साब दूज अफसरा करता घणा आछ
बखतो-बखत काम पर प्रावणो अर ईमानदारी सू आप रो दा
निभावणा । बडा अफसर हावा ठापता लाये।
[साव दफतर मे प्रावता ही उमेदवारा री अरज्या री
जोवणन लागग्या । साब ने रेडियो स्टेसरण' माथ काम करणि
साजिदा री घणो पण जरूरत हो, इण वास्त साब इण काम स
इटरव्यू लेवणो चावता हा के जिका अठर प्रोग्रामा मे सा
बजाय सक । भाळू री अरजी अक साजिन्दै री अरजी ही,
60 ]
नि
-
नाम के
सू साव रो निगै उण ऊपर सगळा सू पैली पडी।]
सार अरजी देख'र (पापो प्राप] 'यह 'प्रार्थना पत्र' किमका
है ? अर वा सरसरी निजर म् पढ परा र] टन टन घटो बजाई ।
घटी री अवाज सुण'र चपडासी पायो ।
चपडासी [हाथ जोडतो थको] 'हुकम सर ।'
साव 'अरे, देखो तो यह एक प्रत्याशी है ,
जरा उसे भिजवादो।'
चपडासो 'यस सर !' कैय परीर कमर री चिका में
चोर'र बार प्रायो अर प्राथान हेलो पाड्यो। हेलो सुण'र भाळ
चपड़ासी सामै आय ऊभो हुयो पर आपने ईज हेलो मार'र
बुलावणियो बतायो । जणा चपडासी प्रत्यासी भाळू न चिक कडखे
कर परी'र साबरे कमरे मे वाड़ दीन्यो।
साब [प्रत्याशी ने देख'र] क्या नाम है तुम्हारा?'
भाळ 'म्हारी नौव तो भान है सा।'
साव 'भाळू
ܙ 7
भाळू 'म्हे सा।'
"
साब इस दरख्वास्त पर तो भाळू नाम नही है । [पाथना-पत्र
दिखा र]
क्यो, यही है न तुम्हारी दरस्बास्त
भान 'म्है सा! है तो प्रा हो ज।'
साब 'फिर यह नाम-भेद कसे ?'
भाळू 'इस मे नाव-भेद कायरो है सा म्हारी बोलतो नाव
तो भो हीज है, जलम रौ नाव खाली गोपाल किसन है ।'
साव . 'हमे बलम और मरण से कुछ मतलब नही, जो
[ 61
.
तुम्हारा असली नाम हो, वही बोलो।'
भाळू म्है सा' | वो हीज नाव बोल सू ।'
साब हा तो तुम्हारा असली नाम कौन-सा है ?"
भाळू "म्हार देखणं मे तो संग नाव असली हीज है, मापन
जिका-जिका म्हारा नोव नक्ली लागे, छोड देया।'
साब 'तुम्हारे सभी नाम असली हैं'
भाळू 'हा सा, म्हारी जारण मे तो स' ही नाम असली हैं ?'
साब तुम्हारे और कौन-कौन से नाम है, जरा बताओ तो"
भाळू 'हा, ल्यो सुणो मा।"
साब बोलो.
भाळू प्रापर नावा रो इतिहास बतावतो थको प्राप रा
न्यारा-यारा नाव बताव है --'म्हारी मा रै टावर को जीवता
नी जणा घर आळा म्हारो नाव फुसियो' कढायो । म्हारली भूवा
र पण 'लाधियो, नाव जच्यो । वा म्हन 'लाधियो' कवण ढूकगी।
मानारण पाळा र 'कचरियो' नाव दाय पायो जणा पण व
'कचरियो-कचरियो' के र हेलो मारण न लागग्या। पण म्हारली
वैन रे 'कोझियो' नाव राखण रो जची भर पडोस्या म्हन
'कुरडियो' नाव क्य ने हेलो पाइयो । किणी मन
'मगतियो'
क्यो । चौक पाळा म्हारी नाव 'भाळू' रखायो। चौक पाळा रो
र'वरणो है क तू प्राछो-मदी री भाळ राखरण माळो है जद ही ज
तेरो नाव भाळ, है । वा रा क्वणो है तन इणो नाव सू
नौकरी मिलण में मदद मिलसो ।' माळू माग वोलते वयो अब
पाप के'वो जिको नाव पक्को करर राख लेवा ।'
साव । 'तो क्या तुम्हे गोपालकिसन कोई नही कहता
62 ]
. भाळ के'वै सा! पण खाली म्हारी मा हो ज कदे कदास मन गोपाल किसन कवै।' साव बस तुम्हार इतने ही नाम है या और भी नाम है? भाळ 'हैण ताई तो म्हारा इतरा हीज नाव है,आग जे आप कोई नाव राखस्यो, जिको जचाय लेस्या।' साय तो क्या, रोज-रोज नाम बदले जाते है ॥ भाळू बदळण आळो चाय सा, नाव बदळन मे किसी रकम लागे? म्हारा अं नाव बोलता नाव तो है म्हारै चौक आद दूजा छोरा रा नाव तो इसा है के बीजी जागा जोया ही को लाध नी' साव [विनोद भाव म ] ऐसे दो-चार नाम लो देसे' भाळू [ भोळप री चादर प्रोढ'र ] 'श्रे | रोडियो मोडको, गजियो, फदियो, गोडियो गुड नै काकडिये री पतळी फाडी।' साब 'ये आदमियो के नाम है भाळू [डोढ मे ] 'नातर के डागरा रा नाव है सा साब अच्छे नाम हैं भी तु हारे और तुम्हारे चौक वालो के !' भाळू इणमे अचू भै आळी काई बात हुई सा में तो पण बोलता पर प्रोपता नाव है,बोजा छोरा रा नाव तऊदरियो कूकरियो पर मीगणो धारणा जिसा तकायत नाठ कढायोडा हैं।' साब चलो हम तुम्ह रा नाम गोपाल किसन ही मान लेते है।' भाळ , नी सा 'इतरा दौरा हु'यर क्यू मानो,आप रो ऊदरो- इदरी राजी हुवै जिको नाय मानो, भापरै जे हाडोहाढ गोपाल- किसन ही जचग्यो हुवे तो भाव गोपालकिसन ही ज राख लेवो, म्हारे तो किस ही नाव रों मडकास कोनी।' [ 63 " साव हमे तो तुम्हारा नाम गोपाल किसन ही पसद आया है पार यही तुम्हारा असली नाम है भी । तुम्हारी दररवास्त पर भी यही नाम लिखा है।' भाळ 'पापर औ नाम जचग्यो तो सगळा सू हो ज सावळ गोपानकिसन नाव राखण मे कावळ काई सा?" साब 'अच्छा तो गोपाल किसन | इससे पहले भो तुमने कही नौकरी की है ?" भाळू ना सा, नौकरी चाकरो पला तो म्है कठई कोनी करी सा पण कई जागा नोकरी रो पण भाळ जरुर करी है जिकी री आपर अठ प्रावता नाको पोयो है।' साब 'अभी तय कहा हुअा है ? अभी तो तुम्हारा इन्टरव्यू ले रहे है, तुम यदि पास हुए तो नौकरी भी पा जापागे।' भाळ [पास रो वास्तविक भाव नही जाण र] में तो सा आपरै पास होज रंय सू , मापन छोड र कठ जाऊ ही कोय नी ।' माव पास से मेरा मतलब है यदि तुम इटरव्यू मे निकल गए तो। भाळू [भळं भी साब रे कवण रौ मतलव नी समझ र] मैं तो निकाळयो ही ज कोनी नीकल सा साब नौकरी तो तभी मिलेगी जब तुम योग्य सिद्ध होगे ।' भाल 'तो क नौकरी जोगी और सिद्धा ['जोगी' पर 'सिद्ध' प्रेर जाति विशेष] नै होज मिन" माव 'हा-हा, नौकरी वही पाता है जो लायक होता है।' साव पाग बोल र क्या-'अच्छा अब यह वतानो तुम्ह कौन- यौन में साज बजाने पाते है क्या, तबला बजाना प्राता 64 ] .
भाळ ना सा
साब सारगो?
माळ
N
साव हारमोनियम?
भाळ
ना सा।
साव तो क्या वेला पाता है ?
भान ना सा । वेलो तो बजावणो कोनी भाव।
साब ढोलक आती है ?
ढोलक रो काई आवैसा ।
साव तो क्या, लावणी-दूहो पर देशी ढग पर नगाडा-
गाडी बजाते हो?
भाळ नगारा-नगारी बजावण गे के काम पर्ड हो सा
साब • तो क्या तानपुरा आता है ?
भाळ तानपुरै रौ तो खाली नावहीज सुण्यो है सा बजा-
गो पण मन जावक ही मावै कोयनी सा ।
तब तुम्हे क्या बजाना आता है ?
भाळू मावे तो है सा।
साब अच्छा, तुम्हे फूक के बाजे बासुरी अथवा इसी
टेगिरी के दूसरे बाजे आते होगे
भाळ ना सा, फूक तो साली चूल्है मे होज देवणी मावै
1 अकडोडिया रा 'फू कला' उडाया करै जणा फूक दिया करा।
तो फिर बताओ कि तुम्हे क्या बजाना आता है।
भाळू सा एक तो मनै चूडीबाजो पर बीजो रेडियो बजा-
पो आवै।
[ 65
साब
?
साब
हसर] बस, यही पाता है कि कुछ और भी माता भाळ, और तो सा काखा वनावरणी मावे का सावरण र महीने मे स्यादाल में गाल बजाया करा अर का कठैई आमसभा मे जावा तो नेतावा रै भासणा मे ताळी बजाया करा। साब क्षोभ अर पाश्चय मैं प्रार) तव क्यो बेकार मे इतनी देर तक हमारा माया पाया। भाळ में बामण हू सा, मैं किरण रा माथा खाऊ, मैं तो रोटी भी मुसकल सू अंक दिन मे ग्रे करगी हीज खाऊ । साव क्यो, रोटी अंक बार ही क्यो दिन में दो बार हो खाया कगे। साब [मन मे ग्रेड कमाऊ प्रत्याशी रो डोळ जाण'र- कयो ] तुम गोपाल क्सिन इन्टरव्यू में फैल हो गये, अब तुम जा सकते हो।' भाल सा | आजकाल फेल हुया कर जिका रेल तळं क्टर मरया करे मन काई करणो चाहिजे' ? साब तुम घर जाकर आराम करो, खू टी तान कर सोयो। . 66 ]
लाखीणी
बात री खरी अर सुभाव सू करडी बरजो भूवा आखै
बास मे आपरे नाव सू अोळखीजै । इसो आदमी सायत ही
काई हुवे, जिको बरजो भूवा रे थोडो-घणो लबश्यक नी बाज्यो
हुवै । लुगाया गे ही-ही कर हसणो, अर मोटवारा रों सी-खो
कर दात काढणो भूवा नै अळगै- पातर ही को सुवावतोनी ।
अंडे ही किणी कारण सू वा जद-कद ही बान टोकती तो
उणा रै मू लै मू बासतै सो बरसतो। भूवा रो सामनो करै इती
हिम्मत कोई री ही को ही नी । पण, आ ही बरजी भूवा जद
बास रै टाबरा न धमाचौकड़ी मचावता देखती तो ना तो बाने
बरजती ही अर ना वा पर भूजती हो, उल्टै रो राजी मन सू
बा री बाल लीलीन निरखती रवती । एक बडो गुण जिको वरजी
भूवा मे हो वो मा के वा भला ही घर * गोरख घ धं मे उलझी
हुवो भला हो ग्याली वठो-राम रो नाव लेवती रेवती। इण
कारण बा रो पोपलो भू ढो पालो चरती बकरडी रो सो हरदम
हालतो हो रेवती।
आज तो वरजी भूवा रै च'रै माथै सौ-सौ सळा पडी दीसे
आख्या खासी भली माय बैठगी है, उणा रै माथ रा केस बुगले
री पाख्या सा धोळा-धप्प हुयग्या हैं अर हाथा पगारी चामडी
[ 67
। मरयोडै साप रो सी लागण लागगी है। अवतो वा चालतो फिरतो अंडी लाग जिया कोई गम्योडी सूईन सावळसर जोवती हुवै । पण, जुवानी-गाळे आ ही सागण बरजी भूवा चालती जद घोडावण सी लागती । मुठिया काचर सी पाग्या गिगनार चढ योडे बाद सो म ढो पर काचलो नास्योड नाग सो पळपळाट कर काळा भवर केस- सौरभ सू भरचो इण रो मो सरूप प्रापरी जात रो अकलो हो हो । आज बा बात कोयनी । आ तो सगली बीत्योड समय री बात है। समै कोई रे नाळिये रे बघर को रव नी। वो तो ढळती छावली रो तरिया भेळो हुय'र सरकता ताळ ही को लगावैनी । बखत रा बाजा प्रापर ढग मू बाजता ही रै'व कुदरत र इण खेलन कुण रोक सक अर करी हिम्मत है के जिण र रोक्यो पा रुके। एक दिन वो हो हो जद बरजो भूवा ढोला र ढममा पर- गोज्या अर पातळिय अर लळवळिय राइवर रे साग इणा रो गठ जोडो जुडयो। मा-बाप जिया किया ही आप री लाडपवर ने धोरिये चढाई। बाप आप रो पौच ! परवाण जायर देन दायज्यो दियो भळ ही मन में पोमिया कोयनी। नरमाई सू लोगा सामी पा हो कही "फल ही जाग्या फामडी कर'र डोळिय साम बायली रा हाथ पीला कर दिया. सगळी सावरिय री किरपा है।' ही वरजी र मुसर ही प्रापरी कुळबहुन छाजलो अक पोळियो (सोनो) घायो अर सेरावद चादी रा ठाव चढाया पण गिनार वण ही कोपरीनी। कवण रो मतलव ढीला ढमक, हरख- कोडे बरजी भूवा भापर सासर गया। पण, समै रो वायरो अडो चात्यो जिका सगळी पाता अर सैन मगळ-भावना नै साव मू पी 68 ] इया कर'र नाख दी। जकी वरजी भूवा, सोनेली पवरी प्रोढ'र रातें हाथा परणे फेरा सासर गई हो वा होज पाही प्रावती वेळा काळो मोढर आई । परणीज्योडो मोटा-मोट पाठ पौर ही जियो। पेट दूख्यो, नहाछ खा'र प्रागण मे पडयो पर पायो रो पडयो ही ज रेग्यो हाथा वासण छटग्यो। कोई कारी को लागी नी। वरजाने बाप, प्रापर काळजे र लगायली। बरजा टाबर यका सू होज स्याणी हो अर मा बाप रे घणी लाडेसर हो पण अठ आयपर तो वै ही एकरसी कमजोर पडग्या। फेर जाडा भीच जिया किंवा ओ दुख झलण सारू पापारी छाती माथै मोटी सी चिमाळ राखली । काया किणी री अमर नी हुवे । वखत पाया सगळाने ही जावणो पडे-एक टैम इसी ही आई के बरजी रा मा-बाप भी पाक पान दाई एक दिन मडग्या। बरजी रै जोध- जवान हुवरण सू पैला ही उण रा पो पासरो भी छूटग्यो। पण उपाय काई हुव । काळनै कुण ढाब सके ? रोया सू जे की सजतो हुतो तो बरजी न्हार कूक ज्यू कूक्न लाग जावती परण वा जागता ही क बीती न बिसारण' मे ही भलपो है। बग्जो हिम्मत को हारिनी । आपरै कडूम्वै रै काका, दादा अर भाया रै सायरै खेती री रुत मे दो हळिया बुवाय लेवती पर एक गाय-पाच सेर धार रो दूधारू, बारू मास आप र क्न ही राखती। आप र परियै मे रोटी-पाणी करण र बाद वा प्रापर बाब रै घरै जाय रातनै सोवतो । निकमाळ री रुत मे जे कठई गाव मे क्था-बारता, सत्सगत हुवती तो बा आपरी काकी-वडियान साग लेर' र सुणणने जावती । राम-राम करर आप रो बिख रो बखत किया ही पूरो करणो, खाली इतो ही बरजी रो अगे [ 69 ज्योडो हो। . आज रो तो खैर बात ही छोडो, पण एक दिन वो ही हो जद वरजी प्रापर मायकर सौ-सौ तोर कवाण निसरता भेल्या पण किमो घोडो घास खाज्यावै । लखदाद है वरजीन जको, प्राज रे ई भडे जमानेनै मार्य झाल्यो, आपरो पग को प्राखडण दियो नी । कैव'न मै कैयो है 'बडो बडा मे नोसरी तातो तवरी बार' पण आ वात भी तो क्बत मे हो क्योज है- सिखर पहुचता सूखा खोल खिडक बकलाळ ।' बरजो सिखर पोचणे अाठी मूरवी नारी हो । जोगण पर पापा सू पातर रेवरण आळी विजोगण । वरजी भूवा जद कद वात चाल जणा या करे में कोई रदापो काढ तो म्हारे जिया काढो नातरं बाळ विधवान आप रो पाछो घरवसावणो पाप कोयनी । पाप तो प्रोल- प्रोले पाप न पाळन मे है।" वरजी भूवा आप रै मात्म विश्वास मे प्राज भी क्या कर- "पा बैठी बरजी जीवती जागता । फाको मार कावळ रस्त घालण माळा री जद भी कमी को ही नो पण बरजो किसी री धाको मे भाई ? पण ही क्यो तो चड़ ड पडू त्तर दियो क अं काम थान हो छाजे । वरजी पराय पुरस रे को धनी,। को बधनी जिकी तो को ही वघ ।" वरजी भूवा रो वणो है व जेद म्हे म्हारो रहापो साबळकर काढ सकू तो दूजे मिनखा नै म्हारे जीवण में हक्षप करण रा काई इधकार है । जे कोई वदवाई सिंडाव 70 1
पा तो केठा'क अंडी सल्ला देवणी भी माछो पण जद कोई
मेरा बण'र जहर झाल तो पर कोई क्यू पाल ? लोगो री
गेच्योड़ी बाता सगी ही सारक वै, प्रा बात बरजी भूमा
का माननी।"
आज भास गाव मे वरजी म्वा हिमताळ, अर लासोपी
नाई गिणोजे । पाठ बरस साठ बरसा बखतनै किणी जे
नसं सू वाळाया है तो वो नार परजो भूपा है - अर फक्त
रजो भूवा रो हो है
[1
--
लकडया रो लादो
पूरियो ऊग-सुवारणी लकड्या रो लादो सहर लेय जाव पर
सहसा- दाम बट लावै । दूजा, लाद पाळा, जे पाज रिपिया वट ता
पूरियो दस । जे कदास दस नी बटै तो साढी सात रिपिया
मे तो कसर पडण हीज को देव नी।
पूरियो सदा पाळी दाई आज भी सदर मे लादो थेचणन
प्रायो । लादै सू लद चोड ऊठने सागी जागा लाय खडयो करघो।
थोडी ताळ पर एक लेवाळ आयो पर पूरियनै पूडयो
के मोन"
"थे हो क्यदयो।" पूरियो लार सू धोतियो झडवा
ऊभो हुवते कयो।
"धन यारो है तू हो क्य
" लेवाळ बोल्यो, "के दार
लाद र
-
.
सी ?"
पूरियो बोल्यो, 'मोलाई करू का एक ही दाम य देवू
लेवाळ 'एक होज दाम क्य, म्हार भोगे पडसी ता लेय
नेसू , नहीं थारो धन थार क्न है।"
'लाद रो मोल पली यको साढी सात रिपिया धम्योडो है।"
पूरिय कयो, "अब ये देवो जिका दाम क्य देवो ।
लेवाळ पोल्यो, "साढी सात घणा है।"
72 1
"
पूरियो-'मैं तो थाने लाद रो घामणी हुई जिकी बताई है।' 'पा दामा मे तो, जिकै धाम्या है, यो होज लेसी । हू तो रिपिया पाच रोकडी देसू । "लेवाळ कयो, “नाखरणो है तो प्रावगे।' पूरियो वेचवाळी र साद मे वोल्या, "इ या ना करो, सूल जचा'र कंवो, लादो सातरो है ।" पूरियो प्रागै बोल्यो, 'लकडी नू वी पर साव सूकी हैं, लादा लेय जावो, चूको मत ।" लेवाळ पाछो पाल्यो, "लेय जावा क्यू कर ।-दाम-तू सावळ- सर नय [ लेजावरणो तो है ही, पण मोल-तोल सावळ बठ्या नय जावाका" मैं तो कयोनी क साढी सात रिपिया धम्योटा है, पण उठे नादो डागळे पर नाखणो पडतो जद पण मैं उरण रै नाख्यो कोनी। बोजा, मोल तो पो हीज धम्यो हो ।" पूरियो सोदो पटावतो बोयो । - लेवाळ पाछो घिरतो बोल्यो, "म्हार तो को डागळे पर नाग्यणो पड़ नो पर न तिपह तै ही। घणी ही सोरी जागा है, गु भारियं मे नासरण है । मारग पर सोल्यो भर माय नारयो।" मा तो सावळ है के लादो सबकी जागा नाखणो पडसी पण ये दामा मे घणा हेठा योलो होनी | "पूरियो बोल्यो, "कई सूल- सर कवो तो लादो नाखू परो।" लेवाळ पाछो क्यो देखलै भाई | थारै पोसाव तो नाख नीतर घडी-खण और तप ले । सागोडो पाखतो हुया नाख देई । आपा रे तो को मोडो हुदैनी । नाखणो हुव तो जद थारी दाय आवै, हेलो पाड लेई । बो मामलो बारणो म्हारे घर रो है।" [ 73
पूरियो-"जरणा की सावळ दाम कवो।"
लेवाळ-"मैं तो सावळ हीज कया है।"
पूरियो ‘कया तो है, पण लकड्या घरणी है ।
घणी कितरी?" लेवाळ पूछयो।
'लादो पूरो साढी मात मण रो है । पूरिय उथतो दियो ।
लेवाळ-"देख ले भाई । घणी-थोडी करमा री।"
पूरियो केई ताळ सोच'र लेवाळने कैयो,'थे चालो, हू देखाणी
निगै करलू नही स थार नाखणो है हीज ।"
'कर ले । चोखी तरा निग करल | कठे ही जे बत्ता दाम
वटै तो बट लेई लेवाळ बोल्यो,“पाच मे नाखणो हुवै तो प्रापा र
आय जाई।"
"ठीक 1 "कय र पूरियो उण जागा सू चाल'र सहर र
गोरब-सी आयो अर ऊठन जेखायर उण एक लादै रा दो
लादा करया । एक तो उण जागा ही रास दियो अर दूजोडो
पोलो-डोला वाधार लेवाळ रं घरं आयग्यो । पूरिय उणन हेलो
करयो 'लो नखायलो लादो। कठ नाखणो है ?"
हेलो सुण र माय सू एक मिनख कयो, आयग्यो के ?
"पूरियो बोल्यो,'जागा बतावणनं टायरने ही मेल
देवो, वो सी बठे होज नास देसू ।"
लेवाळ बोल्मो, 'आवाहा ।"
"थे भाव मठ प्रावरण री तर वील (तकलीफ) मत करपा
नी भलाई।" पूरिय यो, 'घर री होज बात है। टावर सो
जठही लादो जचाय र नास देमू ।"
लेबाल-"म्हारे पर मै तो हू हीज टापर हू पर
होज
घडेरी"मा य र लेवान पारं नोसरयो र सादरं पामेर
74 ]
?"
गरणेटिया काटमन लाग्यो । उण र चेहरै माथ इसा भाव तिरगनै
लागग्या जाणं वो पूरिय री चालबाजीन साव ओळखली हुवे ।
छेकड लेवाळ मूडो खोल'र कयो- 'लाद मे ते लकडी कितरी
बताई ही
"व वित्ती होज ।" पूरियै कयो।
'वै वित्ती कित्ती होज?" लेवाळ पूछयो।
"वै वित्तो हीज, जित्ती पैला बताई ही 1" पूरियै रों भळं
पण पो होज कवणो हो।'
लेवाळ-खाली पूछ हू , कितरो वजन बतायो हो ते लादै मे?"
पूरियो वातने वोटतो बोल्यो ‘वतायी जिको किसी थान
चेते को नी ? क्यू भोळा बणो हो?"
लेवाळ --उण वखत तो के जाणा ते लादै रो वजन साढी सात
मण बतायो हो?
"हा, साढी सात मरण ही हो"-पूरियो बोल्यो---"अब घणी
जेज मत करो, तावडियो चढे, गाव जावरणो है । ऊठ भूखो है।
लादो वेगो नखावो।" पूरियो ताकड करतो बोल्यो जाणे कू कर ही
सोदो पट।
लेवाळ पूछना रे सुर मे बोल्यो, "लादै रो काट पर वजन
कराय लेवा
पूरियो-"पण थे तो मुकाते नखावण री बात करी होनी |"
"करी तो ही पण " - लेवाळ कंयो-"चाल-चाल लाभू
माळी काट पर लादै रो वजन करा लेवा ।"
पूरियो कई काठोकाठो हुयो पण लेवाळ ऊठ री मौरी झाल' र
काट कानी चाल बहोर हुयो।
[ 75
बेटे सुधी बहू
आज अवाळिया रो सुस्तावौ जोगीर तळाव मार्थ हो । अठ
उणमे सू कोई तबले मे खीर राधतौ हो, कोई भोभरिया सेवतो
हो । अंक जरणो आप री मौज मे अलगोजे माय टर काढतो हा
अर अंक वाळियौ सिराण भाखलो देयर आप री कमर पाधरी
करतो हो । खाजरु जाट्या तळ सुस्ताय रैयो हो । कदैई सो किणी
धेटिये री नस हिलण सू टाली टणमणा ऊठतो 'मक अवानिय
री निजर अचाणचक री प्राथूणे पास ढळते सूरज कानी गइ।
उणनै उठीन सू कोई प्रावतो दीसियो । वौ बोजोर्ड साथ्या धक
मू डो कर'र कैयो, अरे प्राथूण कानी सू ा क बलाय प्राव है?
किरडकाबरी-सी"
बीजोड अवळिय पण उठीन देखर क्यो ' हा पण पाक
जिनावर है । पैला तो कदेई इसो जिनावर इण रोही मे देखण
मे नी पायौ।"
तीजोडं आप री नसने ऊ ची करत, देखर कैयौ, नै'च ही
औ तौ भाई, कोई प्रोपरौ जीव लाग्यौ मान तो।"
चौथे पण देखर कैयो, सगळा सठा रैया, इसी नी हुव के
प्रो कल्छर मायने पड जाये।
लरडिया री निगै राखज्यो, आ नी हुव प्रो उठार ले जाव
अर प्रापा बाई रो-सो मूडो किया देखता ही रेय जावा । गैडी
76 ]
सगळा प्रापर हाथ बसु राखज्यो घणी करै तो कडतू मे मचका
दीज्यो।
इण विरतातनै देखर सगळा ही अवालियां भचदेणी सो ऊभा
हुयग्या । सारा ही उण जिनावर कानी सावचेतो सू टोर लगाय
ली।
"
अंक जपो बोल्यो "टागा तो इण रै दो हीज है।"
दूजी अवालियो कयौ "हाथ ही दा हीज है।
तीजोडो बोल्यो "लाग ता ो मिनख जडो है।"
चोथोडे कैयो 'भो तो कोई डोलबेडोलो है।"
अवाळिया इण तर बात करता होज हा के इत्त मे गेलार)
वाळिया कनै प्रायने भो हुयौ । बो अ वाळिया सू हाथ जोड
रामा-सामा करो पण अवारिया चुपचाप यभा ज्यू सडा ही
रेया।
पहो चात्रक मिनख ही, वो जाणग्यो क ' बापडा, राम-गम
र पडत्तर सार क जाण ? पहो वाळियान चला'र भळे पूछियौ
क्यू भाई | धकलो गाव फित्ता'क अळगी है ? मैं झालर बजते-सी
स्यात उठ पूग जाऊला?"
पण अवालिया तो गेलारथू री बात नै काना हैठे मारग्या ।
7 तो मूडो खोल'र की कयो हीज नी। पही जाणग्यो के में तो
बोकानद है। वो भळं कयो “वीग ! बोलो तो खरी, इया काई
[-वैतरा हुयग्या हा । मैं ही मिनस होज हूं।'
अंधाळिया अब जावता नोलिया 'तू मिनख, किसो है ? जे
तू मिनस है तो धार मो मंडो के प्रोडघोडो है? त भो प्रोळ--
पिचोळो साग रयू वणा रास्यो है ?'
[ 77
सतरा-व
वटाऊ बोलियो "आ तो म्हारे 'राम-नामी' नाव री चादर
ओढधोडी है। इणने देख'र थे कोई कावळ धारणा मत वरणाय
लीजी, बामण अर के साधु, म डो चादर पोढिया करें है।'
इण वात पछ अवाळिया रोधीजो बधियो क 'यो पकायत
होज प्रापा अंडो मिनख है, दो हाथ पर दो पगा पालो।'
अवालिया बटाऊ रो थो-मो लेवण साह पूछियो तू कुण
बाज है?'
पहा कयो मैं बाजू हू रामनेमी।'
अंबाळिया प्रचू भी करतासी' क पूछियो 'रामनेमी कुण हुब
अर वो काई करे?"
रामनेमी जाणग्यो क अवालिया साव 'सोळा मूठी खळबळा
हुवे । वो मागे वोल'र कयो ‘भाई रामनेमी ग्यानी मिनख हुव
भर वो नी हुवै जिरण रो व्याव करा देव ।'
अर तो अवाळिया प्रचभोज र बोलिया ध्याव करा देव ।
जद तो तू भी सायत व्याव करा देवता हुवैला।'
रामनेमी हा भरत कयो 'इणमे काई फरक है, मैं ब्याव पछ
क्यू नो करा देऊ, बिला जरुर में करा देऊ ।'
[पा बात कोई सू छानी नी है के वाळिया रो ब्याव बडो
दोरो हुवे क्यू के प्रवाठियो फकत लरडी चरावण र अलावा और
की नी जाणे । वो तो जगळ रो राजा हुव घर गिरस्तो से सारन
वो काई जाण' जद पण घणकरा भेवाळिया कवारा होज रवं,
च्याव खातर तरसता हीज रैव।]
प्रवाळिया ने रामनेमी जद आ बात कयो के 'मैं ब्याव करा
देऊ' तो वात वार वास्तै घणी सुवावती ही।
78 ]
रामनेमो नं प्रेक अवाळियो कयौ क "म्हार ई खेडतिय रौ
व्याव करा दे, देखा ।"
रामनेमो कयौ "हो, करा देऊ, पण ब्याध मे रिपिया अंक
जेट नैडा लाग जका तो लागेला इज दूजो ब्याव करावरणी
म्हारे सारू पायौ । व्याव पकायत इज व्है जाई।"
रिपिया री बात सूरणता ई अवाळिया प्रापरं पावर माय सू
काढ'र रिपिया रीढिगली कर दी पर कैयौ 'ले, रिपिया पण
याव व्हेण मे अब जेज नी लागणी चाइजै ।'
रामनेमी ब्याव करावण रौ पक्को हूकारी भरर रिपिया री
गड बाध लो पर पछ पाड नै ऊचार बठ 'चाल धूच की
तीखा कान' व्हेग्यो।
इण बात ने कोई तीन-च्यार बरस बीत गया। रामनेमो
सुफत रौ माल जारण र रिपिया रौ सागीडो गफौ किया पर मन में
प्रणू ती ई राजी व्हियौ । तीन-च्यार बरसा रे पातर सू रामनेमी
प्रोजू इणी मारग वैवतौ वा ई अवाळिया न भळे क्यू टकरा जावं
नी। रामनेमी देखियो 'अब किमा बै अवाळिया अठ मिळे है ?'
उण आवात कदमकाळ ई नो सोची ही के में हीज अवाळिया
उणने भळे इणी मारग माथै मिळ जावला, पण जोग री बात के
वै उरणने अठे मिळ होज गिया ।
अवाळ्यिा रामनेमीन देवता पाण उरण'रा कोड किया पर
करण लाग्या क 'अरे, रामनेमी आयग्यौ रे, रामनेमी प्रायग्यो।'
अवालिया रामनेमी र च्यारू मेर कडो जोड र बैठग्य पर उणन
बूझना करी क 'रामनेमी । तू कैवतो हो नी के खंडतिय रो ब्याव
करवा देऊला रिपिया देवणा म्हारै सारै हो पणे वो ब्याव करें"
[ 79
वाकयो
।
रामनेमी छटियोडी रकम अर अतकर हुसियार,
'व्याव तो जद करा दियो हो। अवै तो सतिय र छोरा भी व्य
गियो । खडतियो म्हारे साथ चाल र प्रापरो वहून लेयर क्यू ना
प्रावै। बापडो बाप र घरै खारसौ करे । म्हन ता ले-दे अोळ बा
मिळ उणर वाप रोक, "खडतोजी म्हारी बेटी ने अजताई लेवरण
नै कोनी पाया। सो भाई, म्हारे साथ चाल र थारी बहू-टाररा
न लेयर पावै ।"
रामनेमी र कैणं स खडतियौ प्रापर जोखेड माथ चढने माळी
पितलियौ पलाण माईर रामनेमो साथ सासर न व्हीर व्हेन्यौ ।
अवड दूजे नै समळायो।
रामनेमी र वडी माज हाथ लागी । जठ उणन खुरडा रगडन
ऊपाळो चाल'र आपर गाव जावरणा पडतो। उठ अब वो लचपन
लोचा-चालते पागळ माथ ड रका सू लरका नेवता जावे हो ।
रामनेमी खड़तिया न रस्ता मे समभायो क "सासर म
जवाई साथ लोग कई तर री रोळ मसखरी करिया कर पण तू
सैठौ रहिन । केई-कई गावा तो जवाई न लटकावण रोही
रीत है। वै प्रा देखणी चाव के म्हारै जवाई मे कित्ती क ऊरमा है
पर जवाई मार सावण मे वित्ती'क पक्को है । दे-दे तो जवाई
माय लाठी ठोगो भी उठा लिया करे। अर लाता मुवका री तो
गिणती ही को करनी परण में सगळा नेगचार पलही वार ई
दिया करें। दूजी बार तो फूल री छड़ी ही को लगाव
रामनेमी सहतिय नै भळं समझायो क 'तू सासरं मे सुसरे
अर साळा आग जरु वण्यौ र ईज। पीड व्है तो रोवण री मनाई
कोनी, भाव धाप-धाप र कूकर्ज पण खडताराम सासर में थारो
80 ]
कुटाई नानी व्हेला जकी तन में पैलाई समझाय दी है।
तू ध्यान राख।"
रामनेमो री फाको गिटावणो सीख सुण'र खदतियो बोलियो
"मनै ठा है, थे इण बात सारू चिता ई मत करो। मैं मार खावण
मे घणो मेठी हू । रावळिय खेता मे पैला जद कदेई म्हारो अवड
वडियो है तद म्हागे अंडी छिताई कई बिळियाहुयोडी है।
सासरिया तो वापडा कित्तौ'क कूटला, मिरचा रा लोधिया तो दाबण
सू रैया ।"
रामनेमी बोलियो "खडता, अंक बात ओजू सुणले के तने
जद व लढकावै तद तू इया भळे ई बोलतो रेइज क थारी वेटीने
मेलद्यो थारी बेटोने मेलद्यौ, मेलिया हीज सरसी, अब अठ में
ताई कोनी छोड । म्हारे साथ मेलिया हीज सरसी।'
'मेक पाम तने और करणो पडला' रामनेमी कयो आगलै
गाव सू पाचेक किलो मोतीचूर रा लाडू तनै भळ लेवणा पड ला
जका तू थारै टाबरिय नै भुळा-चुपळा'र खुवायत्तो रइज, पण
थारी लुगाईनै तू पला मत बतळाइजै । उण सू तो तू थार साथै
वहीर करा'र लाया पछ होज बोलणे।'
खडतियो रामनेमी क्या ज्यू -ज्यू हकारो भरतो रेयो ।
वी भागले गाव र मोदी कनं म् लाडूडा तुला'र साथ ले
लिया। इतर मैं वो गाव आयग्या जठे रामनेमी न खडतिय
रो सासरो ठावो करणू है । रामनेमी सू कोई बात छानो कोनी ही
वो खडतियन एक अड घर सामी सीध करी जिणमे उण घर
री बेटी आपरै सासर सू प्रायोडी ही पर उरण रे दो-अक साल
रामक टाबर हो । घर रा दूजा मिनख खेता मे गयोडा हा, पण
बैटीने भासूदगी सारू घरे छोडियोडी ही, जिकी घर से ऊपर
[ 81
सापर रा काम कर लेवे पर पीर मे च्यार दिन मोराई सू काट
लेवे। घणो अवस्खो काम नी करणो पड ।
जाट रो ओ गुवाडो बडो जगी हो । मठ पाया-गया पावणा
रो मरवरा सातरी हुया करती।
रामामो दूर मू होज आगळी री सोध कर र खडतिय न प्रौ
घर बतायो अर या "उण घर मे जकी वेटो माणस ह वा तो
थारो लुगाई है पर जको टाबर वठ रम है यो थारो वेटो है । तू
उरणी घर मे जाय'र थारै त रो पलारण उतार दोजे ।
खडतियनै अंडी सोध कर र रामनेमी आप तो बाथा-पाथर
पग उठार पागलो गाव साकड करियो ।
खडतियो प्रायो अर उण घर मे पार रोऊठ जखायो पर
पलाण उतार र वारली तिरवारो मे जा, डेरा दिया । खडतियों
गाभ-लत्त सू मागोपाग सजियो-बजियो हो । काना मे मुरकी-
साकळ गल मे च्यार आगळ चोडी गोप बाध्योडी अर डळो सा
सोने री मूरत पण पैर राखी हो । पग में कडियो-ताती प्रोपता
लपावता हा, बीटी-मू दडी पण जगासर प्रागळिया मे घात
राखी ही।
मानख आळो बटाऊ जाणर इण घर पाळी बेटी पाणी रो
लोटो, चिलम अर तम्बाग्वू पाळो गटौ उण र कन मेल दियौ ।
थोडी जेज पछै न्याई रोटी थाळी मे परस'र उरगर सामी जीमण
सारू लाय राखी । नानडियो पण पाप री मारै साथै बटाऊ कन
कई हेला आयो जिकै मू वो खडतिय र सैदो हुग्यो । खडतियो भी
उन लाडूडा दे-देर फेरु घणो सैदो कर नियो। सदो हया
पर्छ तो टावरियो पाप सू आप बिरिया विरिया हसतो मुळकतो
82 ]
खडतिय क्ने प्रावतो-जावतो रयो।
खडतियो कणा ही तो टाबयिय न खोल्या मे बैठावै अर
कणा हो कधोळ माथे चढा-चढा'र हिंडा दिरावै। जाणे आपरै
टाबर नै होज रमावता हुवे ।
प्राथण री पोर घर पाला सगळा ही खेता सू घर आया ।
वो खडतिपने देवर जाण्यो क कोई मारग बगतौ बटाऊ है।
गावा रा लोग पावणे-पही सू खासा हैत कर लिया कर जरणा ही
घर पाळा खडतियन सोरो राखियो जिया आपर निजी प्रसगी न
गख । मिझ्या री वेळ पण सगळा साय ही करो। रातनै सोवण
सारू गाभ-लत्तरी भी जुगत पण सावळ ही करी। घर आळा
अडतियन पाप र कनै चौकी माथै सुचाग लियो। दिनुगै जद
जीमा जूठी कर परार घर प्राळा खेत-पात जावरण लागा जद वा
खडतिय न वहोर हुवण रो क्यो । वा कयो "चटाऊ, रातवासी
लियो जको चोखो पण अब असद वटाऊ रो में कली लुगाई-पताई
कन क काम? अब तो बटाऊ ने रवानगो करणी ही चाहिजै।"
पण खडतिये तो घर माळा री अंडी बाता काना ही नी ढोळी
जद वान साफ कैवरणो पडयो क "बटाऊ' थारो पागली मारग
लेवो।"
आ सुण र सहतियो वौलियो ‘मारग तो साथ मेल्या ले सू ।
घर पाळा पूछियो "साथै भळे किणर्न मेलण मारू कैव है?
सहतियो बोल्यो "थारी बेटी न और किण नै।"
खडतिय री अंडी वाकल बात सुरगर घर माळो क्यो 'बटाऊ
प्रकल ठिकारण कोयनो के ? जाण, नी पिधारण, मलो, नी-तली तने
मडो बफेम री बात करता लाज को मावनी 'खडतिय क्यो 'इण
[83
-
मे लाज रो के बात है । ब्याव हुया नै बरस च्यार हुवरण लागा
है । अब म्हारी बहून थार घरे खोरसो करणने को छोडू नी ।
अवै तो थान मेलिया सरसी।"
खडतियो तो आप री जाण में साच ही बोल हो पण पराये
पुरस री अंडी बात घर पालाने भला कद पाछी लाग
? वा
खडतिय रा पकड बूकिया'र गळगोते पर गळगोता दिया जिक सू
उण री अकल ठिकाण आ जावणी चाहिजे ही पण खडतियो तो
इण तक जाण्या बैठो हो क 'सासर मे अंडा नेगचार तो हुया हा
कर।' उरण कैयो 'थे म्मनै भलाई किरा ही कूटो मैं पण थारा
बेटीन वहीर करा'र लेयर हो जासू ।
अवै तो घर माला रो धीरज जापक टूटग्यो हो, जद वा
खतियै नै सागीडो जरकावणो सुरु कियो । लात्ता रो लापसी पर
धुत्ता रो घी घालणो चालु कियो । वा खडतिय मे अडी करी जाण
अंची डागर न कूटता हुव ।
खडतियो मार खा र साथ ही तो कूक-गरळावै अर साय हो
मेलदयो-मेलदयो के'व ।
खडतियो आपर प्रा लखणा सू इतरो घणो कूटीजियो क उण
रै हाडा रो ना'नो चूरमा दैग्यो । पण उण किसी मानी ?
छेवट पास गावन भेळो हुणो पडिया पर दाय पाव जिका
ही इण जवाईन हरदुवारी अथवा गगारामो (लाठी) सू जुहारी
दवै । खतिय माथै कई लोगा हाथ उरळा करिया पण वो तो आप
रे मन में पक्को हो।
रामनेमो खडतियन सागोपाग समझा'र पक्को कर दियो हो
पाखे दिन प्रो गोघम रासो चालतो रयो । खेता मैं लावणी करण
84 ]
री वेळा ही पण उपाय के ? घर पाळा रै अहोई आफत गळ वगी ही। वा तोष्णी ही खडतियन लरडने ठरडे ज्यू ठरडयो, भुवायो, टिप्पा दिया पर घणो ही जतरायो पण खडतिय मेलदयो मेलदयो री लवा छोडी ही नी। छेल स्याणा आदमिया घर आळा नै कयो के 'इया मत करो, नेटन आदमो रो काम है जे 'काई किसी हुगी तो आपा सगळा बध्या मराला । धीरज राखर कोई मारग काढो।" गाव रे चौधरिया चोखळे रे पचा न भेळा करिया पर सगळी बात वा पचा र सामै राखी। पचा भेळा हृ'र खडतिय री समसुत बात बढ़ ही ध्यान सू माड'र सुरणी। घर आळा सू पण सारी बात दरियाफत करी। पछ पचा पापरै मन मे वई ज्यू करी । पंचा घर पाळा री बेटी रै सागी घणीने बुलायो । अब पचा न्याव-तपास करणो सुरु कियो । पाखर मे पचा रो फैसलो हुयौ। पचा अलान किया के घर आळी वेटी रो टाबरियो जिकरी भोळिया मे जाय'र बठ जासो वो हीज उण टाबर रो बाप है पर जद पण उण र साथै बेटी नै मेलणी पडसी।' पचा गाव री गुवाड मे मिनखा री दो पात करो। एक पात मे खडतिय न बैठायो पर बीजी पात मे छोरी र पेली पाळं धरणी नं बठायो अर टावरिये ने दोनू पाता रे बिचाळ छोडियो। टावरियो खहतिय सू नू वो-नू वो सँदो हुयोडो हो क्यू के उण छोरे न लाडूडा खुवाय-खुवाय अर लाड-प्यार सू रमाय- रमाय'र सेदो कर राख्यो हो। जद वो पाघरो खड तिये रो भोलि [ 85
या मे जाय'र वठग्यो। अब उपाय के ? मूडो तो पैला ही बळग्यो
हो जद फूक पण काय सू देव?
घर प्राळा नै पचा रो फैसलो मानणो पडियो।
भला ही पचा रो प्रो अन्याव करतो न्याव हो पण मिनख न
कठे ही तो सबूरी करणी ही पड़े।
वाह रे रामनेमो, तेरा चम्मा चालयोडा के पतियो बेट
सुधी बहु ले पडियो। सायरा कैयों क झगडो मा-बाप है । खड
तिय तो वा कर'र दिखाळी के अक घडी रो धामा-
दिन री सत्ता।
-बूटो सगळं
86 ]
"फगडळ
फगडळ न जे कोई फगडळ केवतो वो जाएँ मने बांबू के
अरजे कोई बाबू कै' तो वो जाणं मनं गाळ का । गाळ फगडत
र स्यावास पर स्याबास उणर फोट।
फगडळ रो सागी नाव तो हेतियो हो पण चौकर फगडळ
नाव सू हेतियो प्राख सहर मे नामी हुयो।
फगडळ चे'र मोहरे सू फोरो को होनी, केई परत्ता धो
प्रोपतो अर मूल हो। चैर री मोपताई रे कारण हीज केई जणा
फगटळ री सगाई करण मारू उपर घर रा चक्कर काटता क्यू -
क इणरा माइत व देई आपरे नाव सू पोळखीज ता हा, पण सगाई
कारण री इच्छा सू प्रावणिया ने जद ओठा लागतो के "कवरजी
रा दसकत डागळे सूक' जणा सगाई करणिया सागी पगा पाया
हीज बहीर हुय जायता।
एकर सगाई करणिया मे सू कोई फगडळ ने पूछलियो
"कवरजी थारे घर मे परण्योडो कुरा
फगडळ उथळी देवतो वोल्यो- "परण्योहा तो सालो म्हारा
बापू है, वोजी म्हे तो अजे दुवारा हीज रेसा।
फगडळ री गैलसफी बात सुणर पावरिणया मनोमन उपळो
परयो के "बापू ज परण्योडा नो हुवता तो था जिस निध कू कर
जलमता।"
87
?"
- पण' वा एक दूसरे कानो देन्यो पर सनासेन मे बात करो कपा तिला मे तेल कोयनी, टावर कोई बीजो ही भाळणो पहमी।' फगडळ कार मजूरी खातर एक कमठाण पर काम लाग्या । पण भागा री बाज के फगडळ अडाण मार्य सू हट जा पडयो। पडणं सू फगडळ रो डील सगळो खळकीजग्या। (पग र) लागी। लोही पायग्यो । पोड तो पच्छ हुवरणी होज । कमठाण रो ठेकादार दूजा करतो कई भलो मिनख हा। उग ने फगरळ माथै दया आई । उण फगडळ नं पूछयो "अरे, फगडळ तू तो पडग्यो।" फगडळ पाछो वोल्यो- पडग्यो तो काई ठेकादार कयो "पर थारै तो लोही पायग्यो ?' फगडळ बोल्यो "लोही तो काई पायग्या पण ठेकादार दया रे सुर मे बोल्यो प्ररै थार तो पोड हुपगी दोस ।' फगडळ पाछो कयो 'पीड तो काई हुयगी पण ठेकादार-'अरै अस्पताळ ले चाला काई ? फगडळ-"इसपताळ तो के ले चालो पण ठेकादार कई उत्तावको हुयर"अरे आ पण भल काई हुई?" फगडळ क्यो "पा पण तो काई हुई ठेकादार कई धीरज वधावतो बोल्यो 'पर है जिकी बात तो . . पण बता। फगडळ पण उगी भाँत बोलते कैयो "है जिसी बात तो काई . कयू पण ठेकादार कई गरमास परगट करत यो "कई तो कयसीक' 88 ]
-
परा फगडळ उणी भात बोलत कयो- कईतो काई के सू पण'
अब तो ठेकादार ध्यावस नाखत कयो-अर, पण ही पण, पण
या पण है के बलाय?"
अब तो फगडळ चुडावण रा-सा दात काढतो बोल्यो-
"म्हारली माऊ (मा) कैसी के पडग्यो पण नू क्यू पडग्यो ?"
फगडळ नौकरी री पडताळ मे नोसरचो-रस्त मे एक भायलो
मिल्यो। भायलो खाली नाव रो ही ज हो, बाकी तो फगडळ री
गैल सफी वाता माथ उणन घणो मजो प्रावतो हो ।
भायलो फगडळन खाथा खाथा पग मेलता देखर कयो
फगडळ अाज सिंघसार चाल्यो?"
गडळ कयो- नौकरी बीजो जोवलन',
भायल पूछयो-"नौकरी कायरी पर कठे करसी ?"
फगडळ उथळो करतो बोल्यो 'जिसी मिलसी पर हुयसी उठे
हो कर लेसा रे।"
भायलो-"तने उण जागा रो ठाव है क्या
फगडळ-'मन तो कोठा न को ठेगो।'
भायलो "हू बतावो वा जागा
फगडळ- बतावोनी भाईजी, भळ चाहिजे ही के ।'
भायल क्यो 'ग्रेऽऽ तू फलारण दफ्तर मे मुकाँ बापू कने जा
परो'र म्हारो नावले लीये, बाबू तन साव सू मिलाय देसी,' भायलो
माग ताकड देवतो बोल्यो-'हा तो जा वेगो, पग उठा'र' भायलो
तो इतरो केय'र ग्यारतिया तेतीस हुयग्यो।'
फगडळ लाम्बी डिग मेलता जा बडपो उण फ्लाणे दफ्तर
[ 89
"
र मुकड बाबू कने । फगडळ बाबू रो कुरसी रे लार नेडो सरकार
ऊभग्यो।
बावू फाइल सू जद प्रापरी नाड ऊची करी तो गळी पाळो
फगडळ ऊभो है । बाबू पगडळ नै ऊभो देख'र पूछयो- 'अर किया
फगडळ,पाव ।"
फगडल -'प्रायानी भाइजी।'
बाब्-'बोल किया प्रायो?"
फगडळ कयो- 'पगा-पगा आयो भाईजी, और किया पावतो?
हुवाई ज्याझ चढ'र तो पकायत ही को प्रायोनो ।
बाबू-'पगा पगा आयो जिको तो सावळ करयो पण अ
दरसरण कू कर देय नाख्या आज ?"
फगडळ-'दरसण तो देय नारया जिका देय हीज नारया ।'
बाबू कयो- 'अरे काम के आयो है जिकी बात बतावैन ।'
फगडळ बोल्यो- 'नौकरी वेई प्रायो हूँ लगा देवोनी'
वावू पूछयो-'काई नौकरी करसो?'
फगडळ-थे कसो जिकी हीज कर लेसू ।'
बाबू-'तो साव सू मिलाय दू
फगडळ-'मळे के चाहिजे, मिलाय देवोनी'
वायू फगडळनै आपरै साथै लेयर सा'ब रे कमरे मे चिय
कडखै कर'र गयो पर सा'व सुजैरामजीरी कर परी'र फगडळ सार
नाकरी रो अरजकरी के 'इन रोट्यासर करो।'
सा'ब सगळी वातने जाण'र नावून तो पाछा मेल दियो भर
फगडळ ने इटरव्यू सारू राख लियो।
इटरव्यू लेव'त सा'ब फगडळ ने पूछयो- 'नौकरी करना
?"
90,
चारते हो?'
?"
7.
फगडळ -'हकारो भरतै कयो हमैसा ।
सा ब-'पहले पही सर्विस की है
फगडळ-'हा, सा करी है।'
सा'ब ~'कुछ पास हो?'
फगडळ पास रो अथ कनै जाण'र सा'वरै नेडो सरकत
कयो 'हा सा'
सा'व- सर्टिफिकेट है "
फगडळ क्यो-'हा सा, है।'
सा'ब पूछयो-'सर्विस कहा कहा करी है
फगडळ उथलो करते कैयो-'वाली बाल में सा।'
सा'ब जाणकारी करते पूछयो- वाली वाल मे ?'
फगडळ हा सा, मे वालीवाल मे सर्विस हीच करया करतो।'
सा'ब हसत सी पूछयो 'भैया, तब पास क्या हो
फगडळ प्रापरी राफा खेलसी करते कयो-'सा पास कई कदे
मै हीज दिया करतो।'
साब-फिर सार्टिफिकेट काहे का है ?"
फगडळ-सा एक तो सेविंग सर्टिफिकट है अर चीजो अडाण
माथ सू पडग्यो हो जणा मेडिकल सार्टिफिकेट लियो हो ।'
साव हसी पर अचों मे भरोजतो बोल्यो 'फिर नौकरी से
करोगे।'
फगडळ बोल्यो-'नोकरी अगा करसू सा।'
सा'ब फगडळ रो डोल माजनू जारणग्यो हो के प्रो इण डोल
रो है जद वा कैयो-'वस,हो गई तुम्हारी तरफ नू नौकरी'
[ 91
7
फगडळ आप री भत्तो भूवा र सासर मू फूफाजी फकीरचद
जी र फोत पाया पच्दै मिलण सजा'र पालो प्रावती विरिया
बालाजी री ठेसण सू टिगट कटार गाडी मे चढया। डब्ब में
छोड हो। सोही डब्यो खाली सो पडियो तो ही पण फगडळ
पाप रो जूत्या खोल र वाध अपरल धोतिये ने वैरी फरस माय
विद्या'र हे बैठग्यो। दूजा मुसाफर आप री मोय मे बैठा हा व
पण उण ने क्यू केवता हा के पाप हेठे नी बैठर सीट माथे विरा
जो सा । मुसाफर आपस मे बाता करता हा ।
एक छोरलो, हुवतो-सो मोटियार पण वा मुसाफिरा भेळा
बैंठो हो, उण एक बूढे प्रादमीन कयो -"मैं कवि हू, पाप क'वो तो
आपने कविता सुणाऊ
डग बोल्यो- 'भाई, तेर जे कविता सुणावण साह समोड उप
रुग्यो है तो सुरणापरो, क्यू उधार राख है।"
छोरे कविता बोलणी सुरु करी-
"कोरी कोरी प्राख का भाटो वा'मी के ?
तेरो बाप चौधरी मने मार लेसो के"
डैग छीर ने बीच में ही टोकते क्यो--- "भाया तू
कितर
परसा रो है ?"
छोरै उत्तर दियो-"मैं तो कोई तीसेक साल रोहू।"
डैण-"या कविता मैं म्हारो समझ पकइया स् लगार प्राज
ताई सुणता पायो हू, कविता केठाक तेरी ही बणायोडी हुवला
।"
डेण री बात सूण'र - कवि वण्योडो छोरो ढाई भूणिया री
ढील सू दिनो कट ज्यू कटग्यो । वो तो भळे वोल्यो न को चाल्यो
बोलो-बोली आपरो मू डो फोर र वैठयो रयो।
92 ]
.
पण फगडळ रे आतर वैठच रे मचमची मी चालगी। वो
इण कन आय र बोल्यो-"तो मै सुणाऊ पापन कविता, पला रो
सुण्योडी हुवे तो बता देया।
डण कयो- तू ही थागे सुणा परी क्यू बाकी रासै । पैला रो
मुण्याडी हुयसी तो तने पण कैय देमा।"
फगडळ जच'र कविता सुणावण लागो-
"इकतारो खडताळ लीनी, भजन गासी के
भजन र परताप सेती सुरगा जासी के
बड़ा सारो वीटो वाध्यो, गाव जासी के
गोजिय सू लोट काढ, टिगस कटासी क
दस पाच रिपिया माग्या, नाका पासी के
देऊ ला तो पाछो देवरण, काको पासी के
फगडळ कविता सुणा'र डण कानी आपर कोइया री सळा
खाचर पूछयो क-"बतावो, प्रा सुरणी हो के कदेई ?"
डैण बाल्यो-कूडी नी कुवाव राम, आ तो आज ही मुणो है ।
फगडळ फेरु बोव्यो- “अर पा, जिको में यापन सुणाऊला।'
डण कयो-'कैया जाणीजै।"
फगडळ भळ प्रापरी कविता सुणावण लाग्यो जच'र। प्रा
कविता भाव मत हुवो पण तुक्बदी तो जीसोरो करण पाळी ही ।
मन बिलमावण आली कविता ने सै'ही सुणनो चावै । फगडळ री
कयिता प्राख डब्ध र बदा सुरणी। कविता इया हो-
खावणो चाहिजै बोरियो हुवो भला ही आलो ही
चूसणी चाहिज आइसक्रीम पडो चाय पालो ही
बैठरणो चाहिज छाया माय, हुवो चाये ढाळो ही
[ 93
मूतणो चाय छात माथ, पडो चाये नालो ही
हुक पैमली मार देवणो, हुवो चाय साळो ही
करणो चाय प्राग्वर फिचर घर में हुवो घाळो ही
फगडळ या सुणा र डंग न पूछयो ही- 'पा कदेई मुणी के।'
डण हसतो सी बोल्यो - 'पा तो ग्राज हो थार मू'ड सू सुगी
फगडळ वोल्यो- 'लो, आ और सुणो अर जे पै'ला कदेई सुणी
हुवै तो बताय देया ।"
डैरण वोल्यो--- "तू जबरो भी, थारो कैयोडो स्यात ही कद
सुणी हुवं ।
फगडळ भळं सुणावणी सुरु करी-
खाणी चाय पालो चीज, हुवो भला ही गोवर ही
पजाय देणी प्रागतोन हवो चाय भोभर हो
खाणो चाय जैर विष हुवो चाय जाभर ही
मार देणो जबर डुक हुवो नाराज सौ वर ही
फगडळ री यविता सुरण'र डेण पल डे कवि नै कयो
मोटयार, कविता नाव इणरो है । प्रा खुद री बणायोडी
पविता है थारल दाई चारी बरघोडी कोनी।"
94
सपादक री पूछडी
के मोद में थोबडो होबडो सो सुजाया राजस्थानी भापा
रो कूडो माघ पिंडत वण्यो, भूण सो भोड ऊचो करया कू जडै री
पावलो साढ-सा होट छिटकाया ऊधै खुरडा मे उतरयोडा खू सडा
पैर या एक जावक सू गलो-सो आदमी सडक रो भो विगाडतो-सी
जावै हो।
उरणन देस'र एक जण मन कयो- "यो है वा सपादक, जिको
आप री मूरखता रै माफडदान में राजस्थानी भाषा न सिरणगार री
भोळप में ऊनी धारियो पैरा'र सासण नाच नचावरण री गईमाळी
चेप्टा करै।
उरण गईयाल मिनखन देखता ही मन छीकणी-सी आवणन
लागगी, तोही पण मैं उणन हाथ रा झालो देय र हैलो पाडयो
के 'भाईजी थोडा पग ढाव्या।
म्हारे हेन माथै वो ढबतो गयो पररा प्रापरै 'रेरी सळ
सारतो बोल्यो- “कहिये कहिये पीछे से आवाज क्यू लगाई ?"
सपादक री बोली रा अं बाजा सुण'र म्हारे सू नी रयोज्यो
जणा म बोल्यो “सपादकजी, मै तो खानी हेलो हो मारयो है, लोग
देसी लार सू बाग ।"
सपादक आप र नाक माथै सू चस्मैरी डाडी ऊतारतो वोल्यो
"बाग क्या होती है
[ 95
m
हुवला?
में कयो - "बाग होती है जणीताळो सिर ।"
वो बोल्यो-'क्या मतलब
मैं पाया कयो मालव चटक सी समझ में को प्रावनी।'
में उणरै भापा ज्ञान माथ प्रवभो करयो पर बोल्यो-'ल्याई'
वो बापडो त्याई रा मतलब पद समझनो हा, वो बोले तो
के बोल | आखर में हो उणनै चला'र पूछयो-'पाप निकाळो
हो राजस्थानी भापा मे छापो'
वो म्हारी इण वूझना माथे राडरा सा दात काढतो वोल्यो-
'जो जी जी |"
मैं पूछयो - 'नीसरग्यो परो
वा बोल्यो-'अभी नहीं, अभी नही अभी देर हैं ।'
मै कयो-काधिया तो प्राय
उण क्यो--"जी नही, वो तो नौकरी बोरकर चला गया।
म भळे उणरे राजस्थानी भाषा ज्ञान माय म्हार पटपड म
लो पर म मनमन मे सोच्यो , 'प्राछो विध लागी है फटग्या पाव
घाट पसेगे स् वो मन पटपटी मे खाता देख'र संतरो चतरो
हुयग्यो अर सू द साड ज्यू म्हार कन नाड नारया ऊभा रैयो ।
म भळे उणन चला र पूछयो 'प्रापन राजस्थानी सरासरी
सी पाव दोस?"
म्हारी इण वात माथे वो आपरो सगलो शरीर काद म
हुयोडी कुतडी दाई फडफडावै ज्यू फडफडा र बोल्यो -"वासा वा
सरासरी क्यू नी पाती! हमरो जलम तो अठको ही है, सिर्फ
हमारी नानी को जलम आसाम को है । जिसे क्या हुवो।"
म उणरी अंडी वरी वाता सुण र मन में सोच्यो के तेरे
96 ]
। सू बात करणे मे हो तसियो है । टाळ, टालोकडजी देव । अब आप ही विचारो क है सपाद सू राजस्थानी भाषा आपरी एक रुपतारै ढाल में ढल तो कूवर टल । अनाडी वेदर हाथा में पडयाडो रोगी ठोक हुवतो इस सपादका सू राजस्थानी मापा रा भलो हुदै । ज किरणोन सारदेशिक राजस्थानी भाषा रो ज्ञान नहीं है तो उणनं आपरी क्षत्रिय बोलो मे हीज लिखयो चाहिज । गजस्थानी रा अंडा केई लेखक है जिका अंपरी मे दूढाही मे का हाडौती मे लिखे उपने कुरण दास देवें । मडं लेखण सू ओ पायदो जरुर हुव के बोनै क्षत्र रा लेखक उठे र सवदा सू प्रयोगा सू सैदा हुव । पण भापा नै कचावणी प्राछो वात कोयनी । अवै तो खैर, ओ सवाल को रैयोनी क किरणी एक रै कचोया भापा खराव हुव पर एकर लिस मुजव नै हो सब भाषा माने क्यू क अवै राजस्थानी में लेखका री कमी नी है चारू वला सू हीज राजस्थानो मे लिखोज रया है भर पोथ्या पण छाप रयो है शिक्षा विभाग पण राजस्थानी रो पोयी साल साल छाप पर केई विश्व- विद्यालय मे पण राजस्थानी री भणाई चालू हुयगी है। -- 97
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