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Purve Our Paschim

Dr.radha Krashan · 2010/12

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डा राधाकृष्णन
पूर्व
और पश्चिम
कुछ विद्यार
राजपालगण्डकमा दिल्लीः

LAST AND WEST : SOME RUFLICTIONS
काहिली अनुवार
'टी स्माररुप्यास्पानमामा
प्रपम मामा
अनुवाद
रमेश वर्मा
1
मूल्य
प्रथम संगमरम
प्रमागम
पाप सये
जनवरी १९६२
परपान परिम्मी
हिन्दी मिटिप प्रेस रिली

दो शब्द कमिम विश्वषिपातप ने टी प्यास्यानमामा उमाटम का माप देकर मुखसमानिन पिपा है। गत मनूबर माम में बाम्माम्मान मने मैरगिम मरिये प रहींपी विपरवस्तु प्रस्तुत पुम्मा मे।। प्रमन म्पाप्याम में भारतीय मसति पी मम प्रति का दान है। मए मायाम पापी मानि पर है का दो भापों म विभागितामा माय में मान मनिमा गेम सिप पौर माई मर्म पारम्भ पिम मार मरे माम मईमाई मिशत समाम धर्मगुर पारित बार पुनगिरन सुपार तथा प्रानिक रिमान एवं पापुनिक एमम के उदय का। पीसरे प्याम्पान में न समस्यामा परी पाया है रिनमे पार पूर्व पार परिषमा दोना पोमारमा एक परमालार्म की भावयता पर जोर रियामा है। गीत म्पास्यानों में इतिहास के ममे-मारपासों का प्रप्पपन प्रममय है। सम कुछ प्रमुख प्रमोंगोलिया जा सरता है।लर चुमार मे मीस्लिमत रषि परिलक्षित होगी तमा म्याम्यान अनिवार्यत सही। इस म्पादयानमाना । मौषिल्प बन ही।मने समय स्थान और भाग की नौमानों को पूष्टि रखने हए विपर का निरुपम पपन पिस रिमा है। मुझे पापा नहाँ किममी मुम्मे सह मत हागि चिन्तु मरिसन प्रम मोयों को विचार करने की प्रेरणा मिमी तो में अपना परिपम सफर मममसा। मत भन्नुपरमास म पपिम में पुर्ण प्रविसरणीय भनुमाए । इसपमेय शिनिपन मिरिम सम्म पौर श्रीमती मम्मोहै। नाम प्रश्पन्न सहममता पे पौरमपभम मापूर्ण मैरी मुविधामों मानता था। तपासी समापन २. मई ६R

प्रामुख
शरपटसम्मारक मास्यानमामाकीस्थापना पर पष..
बेटी पौर मिस मेरी बेटी ने अपने भाई की स्मृति में की है दवा बन्होंने ही
पावश्यक पमराधिका प्रबन्ध भी किया है। सर
एसी मे १९२०nt.
पा बाम गर्प समन्त म रमकी मृत्यु हुई, पैरागिन विश्वविद्यामय के कुमपति
पर का दायित्व मरमताrawikोष्टमाम वर्षा नाग में
पार्मिक समरिई दिर मुद्रास्फीति । दूसरे विषयपुर का भी मारम्भ हुपामस'
पार गुमपनियों में उसके नीपे काम किया तमा वो बार मम समय पर उन्हें ही
प्रपामनिम पारित भी पहन करना पग। पमत मचाम्ति के उन पचीमबों
म कगिम निपनियासपास का पभिमम श्रेय इस महान नागवासी
की दरपिता और ए मिापय गो।एम म्याग्मानमाना में उन्हीके माम से
स्थायित्व प्रामच्या पमा है।
इम प्यास्पानमाताका उपपाटन पूरे कर गित रखना पवाफ
टॉपटर राबाप्न अपम दी स्मार म्याम्प्याका मनमा पार
उनो प्यास्पानो के प्रति मिटे इस पुस्तक में प्रस्नुन रिया गाया मोपों में
तिमी एनिमी यह मी पान मे पार किमाटियाम के तीन हमार मे पिक
शिवा और नागरिक प्रतियति उहे मुनने माने थे। योतामों की पिकाएक
पौर प्रपात पाप न प ३० पिकनिया के मिण परम्पा महा है,
"मगिरा पोता मा प्राय गरी जिम्नागिपप-पारी मी गम कमियों पर
सुनो हे महा पापार मो यो मुनाई नहीं ली पी।प्याग्यानमाया भी गमाणि
परमप्यनित गरे।
ए-सिरिता
प्रिमियममानि
मोतिबिपरिणम

पापमे मुम दृष्टिरी। भर में पीर सपा कई?" मम्त में नगर के वीवीप पमीन पर पहा एकदा प्रारमी रोपामारोरहा पागहोंने उससे पूमा “तुम रोक्यों हो? पाने उत्तर दिया 'भा में मर मया पा(मापने मुझे फिर जीवन दिया। मामैं रोने ममाग पौरपा का? हमारी मालिक उपसमिया हमारे स्वास्प्प समरि अपराध यहां तक स्वयंशिवन की प्रामाजिम सहायक तो होती है, तामिनाम उनमा उपयोग करा परवा मपनी पारमा हो पर यामासना में रेप जाने देते हैं या पुग्यमार को मानने मम है जिसके अनुसार (पवना एक सपट है और जीवन से प्रपिक प्रयकर मम। हम कमी-कमी कहते है कि होगम बम शान्ति स्थापना का पात्र बन समता मोकि उसकी विमाध-समता परमोरोकने में समर्थ है। हारमोगम बम मानव के लिए एक चुनौती है एक ममीन स्वमार एक नबीम पाम्यात्मिक प्टिफोन के विकास की पुपर है। विपटी मे अपने समय के मोरामो को समाह 'पीवी कि भोप कम करें.मरों की मरमना म.को दूसरों के तप ध पर पास कार को पार में अहम पार पापा से मनो विकास करें। २ पूर्व और पश्चिम इतिहास पर म्यापर एपिट गममे पर हमें पता लगाईदिप्राय जीवन पापात्प पावन-रन से भिन्न नहीं है । राणीय प्रपमा महादीपीय मनो विमान के प्रममूमा विज्ञान में जिसके अनुसार सभी प्राय एक प्रकार हमार सभी पाश्चात्य दूसरे प्रकार पमिक सत्यता नहीं है। इस प्रकार सरसरे अपरम्प पिसी पदामिास की गटिमताका समेत दो करते हैं, किन्तु वह मास्तर में पसमे कहीं अधिक टिम है। सचाई तो यह है कि पूर्वी पार पश्चिमी पारियों का पारम्म एक ही प्रकार से प्रामा। मपमी प्रारम्भिक प्रमस्याओं से उन्होंने अपेपाल स्वतम इण्यिोगों का विकास किया और कुछ ऐमे मयप ससम्म किए जिनके कारपये परस्पर पमम बीतने मपे । भार दोनों एकही। समस्या का समापानने में मपे है पारबह समस्या है मानसि और पाम्या रिमा मुस्यों के एकीकरण की। इनही रोमों मूस्याकपारस्परिकतनाव में ही इति हास का पर्ष पार गाम निहित है। पूर्व और पश्चिम रोना में अनिश्चित प्रति प्रमताएं पार उमें हम करन के प्रपरम किए बापे। पूर्व पौर परिषम दोनों एक्सरे से सीलने नमीन पिपरिवर्तममीन परिस्थितियों के साथ प्रतीत से माप्त पराका पातर बिसने या उस एक नया जीवन्त मरेने को पूर्व पार परिषर प्रपरनपीस मारिसर मुस्पा मोर मस्तिक की उपलब्धियों नाम मेम करने के प्रयास में ही हमे नानगीप पारमा की प्रवननीय गानों पौर लम निमारमा हो । पार भी मानस की परेस पारमा पोनही पाये रेत पी की पोर निरस हा तारों पर की है फिर हे सहा मस कितना हो अभिर क्यों नही पौर परिनाम कुप्रीम प्रयस्तरमा हमारामसफलता से नहीं दियावा भयोकि असफलताएं ही समानता की पापरि। मा तीन पारपानों में पूर्व और पश्चिम के सम्बनीकी सम्पूर्ण पाया मारपास्या प्रस्तुत करना संभव नहीं है। इसके मिए पितमे पिटर पम्पपन और माइ ममवापी पावसाच्या है वह मुममें नहीं है। मैए गेस्प तो दिसत सीमित है। मइस विपर समस्या पर विचार-मात्र प्रस्तुत करना चाहता पूर्व पौर परिचम एसे पम है जिनकी बक-ठीक परिभाषा संभव नहीं। उत्तरी अमेरिका के रिमन' (पारिपाठी) निश्चित म से भमेरिकाराती है क्योकिदा परती की भी किन्तु मुवतणामी उनका सम्मानपूर्वी पातियों में पार पोहते हैं। पारका प्रमरीका पूरीप का ही प्रक्षेप उसकी ही पाया है। अमरीका ने रोप दी ही परम्परा प्राप्त की पौर रसही पिशाम्ती पार्मिक विश्वासौ परिष पार पाचारसंहिता कानून को पचामियों और सरकार प कसा पौर विज्ञान को पपना मिया है । ऐमो-सक्सन रत्तरी प्रमरीका मा मटिन मप्प और रसिनी प्रमरोमा पोनों यूरोप के भी हपौर परम भी। ममरीमापों को परमी रतो मी इममिति म्प से महादसत कि पूरोप कहाँ प्रारंम होता है और एमिया काही समाप्त। पूरोप वास्तव मे एपिका पिशाम पुभाग मे राहुमा एक समाविर प्रापीर और इसे पहनाम प्रमानियों में रिपापा को इमे पिशाम कमार' सममले थे। दवका समानरपात कटा-पटा तपा मम्बारशिन में यह परिचमी एपिपार पूर्वी पसरीका से मिसा मा रनर म शिपाई मुमाम संयुख है। इम समम्पा र परि हम इतिहास पौर वसतिक दृष्टिकोप म रिचार पर वो हमें मासूम है कि पासर समपित मापापों का एक परिवार- पूरापिपर-विमी पायरनी सपा मापारी में गंगा और उगम श्री पाम पर पापिनाममा पार एमर्म कहीं कोई प्रारोप नही है।" १ TARम मा तर बगए Nature .

सम्पापों पर पूर या परिषम पिसी मी एकाधिकार मी रहा। प्रमीयमय भमुमार,..ईसापूर्व श म पम गप सपो ममय (..सापूर्ष) में पहले कोई महत्पूर्व पटना नहीं पटी। मायमत है।मेटी म गहुत पहले ही एशिया विभिन्न मामा-भीम पिपार भारत में मानव सपा मी संस्पापों निरसानेको पारस्पना पर रिपार किया पसा पा। पर की परिहिवाम गेम्प गौधिक मार पर ही नही मामा पर भी सभों की नियर रिसालाई पोर इसकी सहायता से ही यूनानी रन परिपत होशमा पतिपत मृभ्य पोर तामाशिम भावारपार पर कमिम पिचारपरि। फिर मान का समय मामि-विपक्ष में हुमा धीर धमता नियके बारे में हम धनहीं मानते, गामी। इस एप मारके इन्दिास में शिराम परिवर्तन हए.. ईसापूर्ण है २. ईमापूर्ष प्रा सिमे प्रोमा फार्म स्पर्ध में ग्री पुषा संसारबीन विभिन्न मामा-भूमप्यमापरीर परेश बौन पार भाग-मैं धनों और मौका मिला। इन दिपार प्रभामियों माठीपर्म नजिर प्रारम्पतिका मामीनता तथा सायमार बार सो मुमत्य की पुष्टि की। प्ररपेट भाप में पौषि प्रपति समान परि स्पितिमा-परमोटे-मोटे पम्पों की सपस्थितिकारकरारनीतिक एसा स्थापित करने के प्रबल किए गए। समानान्तर प्राप्पातिक विकास पास्तव में मानवता की मूलभूत एकसा काही प्रमाण है। ममभग १५ पा तरल संसतियों का समानान्तर विकास होता फिर जानिक पारस कि परियों में पश्चिमी देशों में लिपाल परिवर्तनमा रिस पोर पानियो की मिन्नता स्पष्ट होममी बमोमी का अनुमान दिौतिक विष का प्रारंवार या पाच पण वर्ष पहने हुमाया। उससे पहले महोणारे पोरम परमामु। पुनीबाबम मपनप टीम परवप पाते हुमाया। फिर पारीमा स्तनपापी १ पिपरिया समाप (1) स्तो कि मेरे सर रोगी मनी भासा, निसान भ मगर रिमोदो रविसेच मनको पिर पिपरोसमप्रभमानीमा मोAMARRH र मसिार प्रारंभिक को मिल परभवे मोम पूर्व पीर परिषम - जन्तु पराइए । पारमोइस ग्रह पर नपमस पाच माण सात पासे पाया । बह पम्प प्राणियों में निम्न मारतीय मामी रामापपने एबसे नजदीकी रिपेयारों बनमानुषों से भी भिन्न पा क्योंकि उच्ने पो पर रहना पार को को पर बसमा पुरु कर दिया । मनुष्ष मपने पिएने पैरों पर चलने लगा तो उसके पगम परों पौर निसरीर का मार भाममेकी मायस्पकवान रहा पार पषिक मुहमार काम रमेपामे हापो म परम मए 1 इस कारण यह सीना बगो रहने पार दास जी श्यिा को निपत्रित रखने नया फमत मागी का विकास पाकिन्तु पारमी तथा सरे बानवरों के बीच का सबसे बड़ा पान्तर तो हमारमी के मस्तिकका पाकार पार पुत्र मानों पपमे से पहने * जान परों को पीये घोड़करपारमा तरहित बीपन के अपोजिम पापा और प्रान काम समा, सो? यी त बेलनवा का प्राइमति।। बह पब भी भौतिक परियो र बिकामही ... मी भविष्य के निर्माण 'म सब भागीयमा पामबर पनुभव से और नान करके ही सीबते । किन्तु अनुमब से सीखने की पमता का साविक पिकात पारमा म ही हो पारा। रिचार-समता का पहमा प्रकाशन हरियार बनाने में हमागपूरोप एगिमा मोर पोका में हमें पूर्व प्मीस्टोसीन पुप के परपरके हपियार मिमे है पोषिक्षेप कामोरे लिए बनाए गए। भावना पारस्पना दिपार के सती पूर्ण परियोसिपिक पुप में पत्थर इपियारामाकार बिनावट में सुपारपा पमरे पोर पषिक उप पोमी तथा सुमर हो गए। उत्तर पजियोमिषिक इस बी बनारमा पमता है नमूने--बार सोपिया और पाप नाप्पीसर कान तथा हापरित का नाक की कीस इमे पास भी मिलते हैं। पापों की दीवारों पर पंक्ति या पुरे इए पिनों पे पचा समता है कि उस समय के पादमी दोन रिमामौदाने दायों कौरोपिमालामे पिचों में मागित करने की पोम्पता रपवे । सप्ट कि पहे परिप्रेप मा तत्सम्मपित प्रकार के नियमो का मान पा। विधारममता और नापति दोनों पश्यि पी।"पारसना बस्तुएं को पाने पापी रेप सेवा परमत, बिलरापामही है राहत अपय धोको बमीरा पा समरिमना, पम्पोमिया प्रारमति पा. परम् समानारामा मग्न तथा समय और पानी को पारोबार नरसित पने पारसपारित माता पर भी पा। पत्तनापन्य तमिया भी प्यावहारिक और भौतिक हपिपारों के समान ही १Fat अपनी मनुवार (समरिन विमिर)।

पुरानी है। निपाहिमित युग में शामि। पापी मा-गहना पार पाय उनसे ममा । मनानी ती पोर पार म परिणाम के मुम्म माग पे मार ही परम ममम्मा उनी म म ममी। गमे एक मसीन धर्म-सस्मा पारस हमा । नी नाणी पाराम मे उमीन बोना पिर नमामी राय के दूसरे रानपरों द्वारा गरि जानेवासा मेलाम मरिया में मार निराकर पीनदी निई मान मबके कारण नये पिम्प का पारम्भ पानिपानिपत मानिका पर प्रति के प्रतिमा तपा पपि: भाममाया पिको। इम पप के मानों में शामित्रानोगे कोपापापमोकारको पानी पानानुसार गणेगमा नौ। यो प्रा शिकाम पापी पानेमाती पत्रिम बम्नुमो-म मिट्टी के बर्तन में का निर्मान दिया। उन्होंने पहिये बनाए पशु-पायत करने पर बनाने पौर गमगार के परिवों में पानी रता करने के नि मूत्री मा ऊनी करणे जुगार मा पमा मिमकर पहनने के बनाने मगे। स्वयको अनुशासित करके उनीने स्पापी समुदायों की मार समी। माप-पान सम्पना की पाय मत पर प्राण प्रमापो म पशपतासिरा मारम्म मिष पौर मम्पपूर्ण में पूरीपरिधी भी स्थान से 'सगरम २. • मान पहभ' हा पुल पा।' माता-गोगमा-मस्तिस्स मोर मायोपा मरल रीपन है। रामिक गोरम पाख्यिा मपतिपय है मिसम पिाए अतिम्मिानी मममी केयने या नीरियों की मामी की तरह सामाणिक या महोगी पोल पर प्रतिमा मलि म पोर नाम भार पहा । मी मामि यमाप कारण मानव-समार न माला भाषा पार किनी बाबामा पार गनी संस्पार्यों द्वारा यही पदार्प प्रकट होता। माधों को पाप प्रा शासम मानगरे निर्माण की रिण में निषित परम उटाए गए रिमी गुममा में पिसे हार को सिविन इतिहास पोहरी ममपराई। उनसमा युपनेक प्राकार के मनुष्य दुनिया के विभिन्न भागों में एक और एकतरे के पारे में नई समिट भी मान गया। पुरोकोमपानकर पूर्व पौरपश्चिमकामतरनमायापावा। मांगो राप्रपारिकि समजणे अनियनिक मममममा प्रवेश Hि मे मा सम (२ मगरले मविपर कर निश्चित प्राय का नियमित सम्म वर (५) मामूम होता है। पूर्व पार परिचम माइनोसोका साँस्कृष्ट समय ३५..-२२५. ईसापूर्व के बीच का । मगर योगनानुसार बसा पा। ततीस फुट चौड़ी सह पूर्व से पश्चिम सचर से रमिण पाती थी। गनियों की चौड़ाई इनसे प्रापी पी। इमारतें पकी ईटों पौर मिट्टी के गारे से बनी पी। प्रनेर इमार पो मरिमों की पी। मकानों में स्नानामार पोर मानिया का प्रबम्प वा। सावनिक स्नानागार भी थे। नानियों के पाइप मिट्टी के पे-पाकर, पापस में मोड़कर बनाए हुए। मिट्टी पा पत्थर की वागीयो से उनका सौन्दर्म-प्रेम स्पष्ट है । उनपर घमासार पानिपमान साप हावी या मयर के पिव मुदे है। बानबरों के विष पपाठप्प ।। सोना पदी सीमा ताबा प्रावि पातुपों का प्रयोग पानते थे। वे कांसे के सकर मनाना पानते थे। पाकर नृत्य करती हुई एक युबती की कास्प-मूति नुमाई से प्राप्त हई है। हो मन पौर माफ की काम भी मिनी! रार मिले हैं जिनसे तामने पौर मापने के उपकरणों का उभान पा । गोटियो मिमी पौर एक तरह का हेम वर्गों में विभागित तम्ती पर मोहरों से बेमा पाता था। उन्हें कपास (पास) को उपयोग में माना पाता पा।' मोहनजोदड़ो में प्राप्त पार्मिक प्रपोपों में मां पी की मूर्तिया ।। इसके पतिरित एर पुरप देवता की मूर्तियां भी मिली है बो परम्परागत सिम की प्रतिरूप मालूम पड़ती है। स्पष्ट है कि पानिक हिन्दू धर्म की अनेक रिसेपनापों मोत प्रस्पन्त प्राचीन है। सर बोन मार्सस मे दीन मुखौ बामे एकता (विमूर्ति) का पिक विमा है पो एक चौकी परपपासन में प्यातापम्पित बटा मुपधामा पर पासीन है और उनको मेरे ए है हामी बाप मंग पोर मेसा । महान पोगी धिर की माभूति पांच-पगारवर्षों मे भारत प्रापारिमर पपत् में प्रमुम स्थान प्राप लिए और इस दम्प की प्रतीक है कि पारमणिय साइस पवित्रता पीवन में एकता पौर मानिारे से। ही पूर्णता प्राप्तीसरा परती। यही पारप हमें परमारमा निम्तन में मौन पपनिपाटामों में प्रजान पौर ाि को पराजित करनेवाले पाम्त एवं सौम्परा में पारमगमग के पापा नामीम प्रेम में एकाकार हो जाने पौर परवानाम्सार सग को मपनि मोगा सजाना पार वित्पमो में मनाम पुष भीमही हायसरा। मात असं तर मोरिमन रागो मारिस, मोजो मनुवार (MR) । १ शनिवार रोम ने सरेमा किसिमममें सभी सपने पति मानसे भी मरम्मत होती भारतीय मिम्मे मोर पूर्व -- - निमोसिविक युप में शामि। पाश्मी पाए-मपद भरना पगार सापरतात कामे तमामनार की नी भोर पशुपाना स परिवनम के मुम्प मधन पे और इन्हीके रप बनमया रोगी से परमे मगी। गमे एक मौन पर्ष-पास्का का पहपा । नी मी या शाम मे जमीन खोरमा फिर म पारसी तरह के दूसरे जानवरों द्वारा पीओमानेगास इसका इस्तेमात मारियों से नहरें निरासकर समीन की तिपाई लाइन मारे कारण मपे शिप का पारम्भ हा नियोमिपि वानिया पर प्रातिप्रति एक नया तमा पषित पानममारमा सिकोम। म युग मानयों ने प्रहावरती को चुपचापीरमरके प्रपनी पाप यानानुसार गम्हें बदमा भी। उन्होंने प्रा तिक स म न पापी मानेपानी पिम बस्तुपो-से मिट्टी के बर्तन , कपाका निर्माप किपा । उन्होंने पहिये पनाए ये पमु-पामन करने पर बनाने मौर पसबारे परिवर्तनों से पानी पाकल के लिए मूनी पा ऊनी कपणे बुनकर पापमा पिसार पहनने के बारमाने मपे । स्वयं को अनुशासित करके उगोरे स्पापी समुणगोदी मार ली। पाप-वादन सभ्यता की मायक पर पार मात्र प्रमाणों से पता चलता हैमिमा पारम्भ मिय और मप्यपूर्व में किसी भी स्थान से 'सगमम २... पास पहम' हो सका था।' मानव-जीरम सह मस्तिस्य और सहयोग र संयम जीवन है। यह माम रामिक जीवन पर मामा नहीं है. पतिमय है जिसमें भिवाएं प्रतिष्यिाएं होती रामदुपातीक मते या दीटियों ही गावी की तरह, सामारिक या सहयोगी बारम पर प्रतियों का मरी बस्ति पार रम्य मार पासी मानविक पपाय मरव सामानव-समार पास मापा मार संतों तमा पानिपौर रानी संस्थापों द्वारा यही या प्रकार होता मा बोरे ममाप्य माम् इतिहास में मानव निर्माण को दिया में निश्चित कम उठाए गए। उसकी तुममा में पिछले महगार बपो का सिवित विहाष पोरेसमय का मनमे सुपों में प्रने प्राकार के ममुप्प दुनिया के विभिन्न पापों में रहते पे मौर एक-दूसरे बारे में तनिक भी मान गया। पूरोप को प्रेम मामकर पूर्ण पारपश्चिमका पम्तर बसमामा पाता है। मोपो १ मोसर की मूल सम्पपमा एम Rोप में निमोनिय प्रशारण भणमा परेरा निमम से पुभाष मिमी मोरात परिचरमको मिरिमा प्रभाव भी माता - भोर मेरेन्स सम्म (RROTE पूर्व पीर परिषम 1 मिड देष सतितिर या नवरयारकोप एकाइयो नयाँ मोठे। पूर्व पोर परिश्रम दोनों में से कोई भी समृष्ट हामिही है। दोनों में से प्रवेशमा एक पम्प पोशिकास की विभिन्न पानी में अनेक पृषक मोमों और धर्मो + मिए प्रमुख होता है।रोनों की संपतियों का प्रपमा प्राप जिला प्रमाल मुसलमान और मिसिपिनो स्थानिक पानीमा वामाचारी परिकामी में को समानवा मही है। पास मौरपर्मनीसपास्पेन परिडिनेविया केसमानपीन, बापान और भारत का अपना-पपमा ममग साप्ताहिक पिकापामा मत पश्चिमी यापूर्वी समतिकहने का कोई पर्ष मही क्योंकि समान पार होने पर भीम भने उपविमाम है। फिर भी विवमी पन्धी ताप परिषमी समाति को पाठियों को परस्सर सम्परिपत किया था सकतानी पच्चीवरह परिरमी पौर परियमेवर संसहतियों को नहीं। परिहास पर प्यापक दृष्टि गमने पर हमें मामुम होता कि सम्पूर्ण मानय पातिौर उसकी सामाशिक स्मामों के एप मानिकपमहोते ..बोहमारे विचारों को पात पिये हनेवासे प्रत्त से अधिक प्राथमिक रिमी में पन्तर स्पष्ट और किसी संस्कृतिको ग्याप पोर दिमित्रता प्रानपणे है। और मतविभपने सरस्मों को विपरीत दिसामों में रियाधीन मनाक मपन्त मुम्म संतुसन के सम्प रत्पन्न यमनतर मीरा HERatio भारतीय संस्कृति एक नमी एक पिम्पपूष परम्परा बन पार पमै कमा पौर साहित्य रिशान पोर मानव-विज्ञान मेलों में एक महान पर प्रयास पिसी ऐतिहासिक संस्कृति की बात करने का अर्थ है उसे मोरित एतराने. मृममा पोर विश्वासों की बात या उसके सामारिफ पप निरिप करते. बामी प्राप्यारिपा पठियों की राठ करना 1 मार्मगरियों का विसापाई। Priस्कृति उत्पादन के भौतिक उपार्यो का माहरी तिमात्र है रिन्तु महो नहीं। जित निमाण गोड एधिमा परिषभी ईसाई-चामाप पा मुसलमान समार मे नामों मे ही मामूम होता प्रत्येक समारी मातापिताए माम्मास्मिक परणपएपीबनमन । सामारि संस्थाएं, पापिक पर बाएं पारमानिक रिमी पुरावा मनपान, मिस पभोप मोनारमात्र रासिवान निम्न मरोरा माई माल पनि नराई बन पान और पेटमा

पर हासागर प्रपत्रीमतिको वता- पोर माननि पौर रिति
पार समाग परसिपी हो पाता है। रसोई ममान प्रपन पार पर
जोतिरामा वीमा उसके पwिalionरियाग
tra हो पाने पर ममार सिमिांगा पोरा पनि
राय निवासी र परमाना ही मस्त मान | REAL में
में, मताधिोरPASS मिति पापा जाप कर
मेवी निमम तरस पहा मरने जी.पारे मिनी मला माही
मानी। पुरानी पोर मां सभी मसतियापीही। उसपर सो प्रभार पण
।पुराने समय म पीनी पौर हिम मानिस माई पश्चिमी मानिया ।
माप इसी प्रकार परिषमी ममादियों का मगनी पौर मिसरियो
माप मा।विचारों पाराम पानपात पिक निमे उस सीमा र
वस्तीकार कर की प्रतिम ।
३ सिंधु-सम्यता
पियामेरकोट मेस्सीम भी मी. एड. सेवापा "भारत पौर
माम ही ऐने रोलिपट जिन्होंने समारहाम का मानना ।
चूनान पूरोपका पनमा पानी प्रकार भारत साथियामाप्रपा ऐया।''
भारत एशिया का मापा होने का राणा नहीरता पौर चीन की मम्मति की
भाचीनता पार महत्ताको स्वीकार कला रिमी इस रपर रवाना
स्पानीमाम से ही एनियाई मामों पर भारत का महापर्व प्रभाग
अपने प्रप्पामा पार नियमबार, मामविपया प्टिकोण मार देवबादी
रिपारपाय-माहित भारतीय संस्कृति प्रमाण पारगार पदों में मेसर पर
छापा हा मिमिका पार गर्यान नप्तम भार वाईमर बर्मा और मेका
बीम और पापान मंगों में भारतीय प्रारमान और गोर- मामी
है। मनोरमा पर प्रोपर्प पीर बोरारको पात रम्यता को मार
हमें उसके निर्माताओं की पमत मेरमा पौर शिल्पमुशनता पर पारधर्म हुए
पितामही एवा।
हमारे एक महान परिकामदास को मालूम पाdिi में भारत का प्रभाव
सिना पासीलिए पापा सरि सम्होंने हिमालय पर्वतापन सवय
(मार्स मिसाएर खममतावाद मामी (Part).
(अम्बरमपि

पूर्व पार परिष सिक पेष समितिक या नृतत्वधास्त्रीय इकाइयां नहीं होते। पूर्व प्रौर परिष रोनों में से कोई भी संपृष्ट इकाई नहीं है। रोनों में से प्रत्येक यम एक सम् । यो निकास की विभिन्न पद्यामों में अनेक पृषागृषक मोगों और धर्मों के लि प्रयुक्त होता है। रोनों की संस्कृतियों का अपना पनप पक्तित्व पा । पफमा मुसममान मोर प्रिमिपिनो ममि या पीनी तानोमानी पार नकाबासीर कोसमामता नहीं। फास पारधर्मनीबास्पेन पौर सरिनेपियारेसमाम पीर पापान पर भारत का प्रपना-अपना मतप सांस्कृतिक विकास मा पा । पर परिचमी यापूर्वी संसतिगाने का कोई मर्द नही पोंकि समान मारंभ होने प भी उनके भनेक परिमाप रहे हैं। फिर भी जितनी पन्धी तण पश्चिमी समज की उपसंस्कृतियों को परस्पर सम्बम्बित किया पा सकया है, उनी पन्धी तर पश्चिमी पौर पश्चिमेतर संस्कृतियों को मही। इतिहास पर पापक दृष्टि गमने पर हमें मालूम होगा कि सम्पूर्ण मानग पाति मोर उसकी सामाजिक समस्याओं के एस मोनित सवम होते हैं। मोहमा विचारों को प्रान्त किएनेकाने प्रन्ठरों में प्रषिक प्राथमिक है। फिर भी अन्तर स्पष्ट है पर किसी संसति को उसकाम पौर विशिष्टता प्रराम र है। और यताहिमपने परस्पों को विपरीत पियानों में बिमाशीम बार मरयम सूक्ष्म संतुमन के फलस्वरूप उत्पन्न समानुसर पर नारा रणव, भारतीय मसावि एक समी एवं पिप्यपूर्ण परम्परा है पठन पीर मर्म कमा पार साहित्य विज्ञान पर मानव-विज्ञान के दोनों में एक महान मदूट प्रयार किसी ऐतिहासिक समति की बात करने का पर्व है ये पोषित रसपा भूस्यों पोर विमानों की बात करना उसके सामाजिक रविना विपरिन करने मामी प्राप्पारिमा पनियों की बात करना । मापगारियों का विश्वास । मिसुति उत्पादन के भौतिक उपार्यो का बाहरी चा मात्र किन्तु महो। नहीं। शाम रितु माररा वीर एशिया पश्चिमी ईसाई सामाम मा मुसनमा समार मै नार्मों से ही मामूम होता है कि प्रत्पर समान की पापारभिमा पाप्यारिमा परम्मपए जीवनपर्धन ।सामागि समाएं, पारि म्यर स्माएं पौर मानि मिसान सभी पाप पाया है। निमरेका १ मोपरे साथ मौकपक मन पर सीध मनिमाम्ननिमार्गमा माम रामनार, मान, रोनेशिया और पूर्व कान मन भौर परोपन में कर १० परहीतानाप्रपनी प्रतिशत गु पोर माम प्रगमि पौर परियति पोर धमार-परमियी हो पाता।रो समान पपने मार्ग पर भोपित रहना तमीमा मोरियाम रित हो जाने पर ममारा रिशामिल पौरmaatma पनि बाय शिलार्मो का परम्पना ही मामगि ना मुसग पर गई 'म माविकठोर हाशमस्पताल निति पाहार प्रमहर मेडी थिममें ता परि ष पाम पर पी मारे सिम की समतामीर माती पुरानी पौर मई समी मंगारिया होती है। उनपर दूसरे प्रभाष पाले पुराने ममप में पीमी परि हिम मसानियत समय परिचमी सपनियों में मार पाइसी प्रकार परिपती ममातियो .मम्मीनी पोरन मशानिय के साप पापा का मान प्रदान बहन प्रधि मा हिमे उस सीम तकलाकार करने की प्रति हममे मी। १ सिप-सम्मता पिटकोट में स्वर्गीय मी सी एफ. एम मे कहामा "भारत पौर पूनान ही ऐमे यो विचारक राष्ट्र पेनिहनि ममाविहाम का सुजन पिया। पुनान मूरोपका अगुपा पाग्मी प्रकार भारत सरा एशिया कामगुपायेगा।' भारत एशिया का प्रपुमा होनारामा नहीं करण और पीन की समाधि प्राचीनता पौर महता की सीमारपरसा फिर भी एम पन मेना स्पपलिमाचीनकाल से ही एपिसाई मापर्मो पर भारत का मापपुम प्रमाग हा है। मपने प्रमारमया पीर नियकार, पारमरिपया प्टिकोण प्रौर हवाई रिवारमारा-मनि भारतीय साति का प्रभाव पार हसार पर्षों से मसार पर प्पामा पा है। गिनधिमा परि निधीम ममय पार पाईसा बर्मा पौरा भौन और जापान छुप प्रमों में भारतीय प्रारमा माग पोर पोर- सार्व है। श्रमकोर का पानबार पौम्य पार पारोतुर की पात रम्पता को रेखा हम उनके निर्माशों की पमुठ प्रेरणा और गिसकुगमता पर पारश्य : बिना महीना। हमारे एक महान कपिकमिदास का मासूम पाकियों में भारत का प्रमा। कितना पा। इमीनिए क्या प्रारमय यदि धर्मनि हिमालय पर्वत राममन सतरा "तिमान (१६४) पप dfort पूर्व और परिश्रम किमा मानो वह पपी को मापने का पर हो सम्पादों को मापने का पैमाना महापावा है कि हिमालय पर देवतामों का निवाए।' विध संस्कृति का विकास नमे समय ठ प्रतिनिहाहो उसकी पारमा से सासाकार रमे काग यह नहीं है कि किसी पिप समय पर उसका मेला मोपा से मिया पाए । या मेसागोता को उसके पास की रमाओं में मिन सकता है और मबार विकास में किसी ऐतिहासिक प्रश्मिा को समझने का रंग मही है कि उसकी सम्पूर्व पति हो समझा बापु मोर रस मुख धर्म को पाने का प्रपात किया जाए, बोहर सम्रा में पपनी प्रभिम्पक्ति के लिए संघर्षरत रहता है किन्तु कभी भी सम्पूणत पक्त महीं हो पाता। यही है वह मन्तपरमा को रविदास की लिपिम्न परस्थापों को एक सूत्र में बापती है, और प्राचीनतम तमा मयीनतम सभी पापापों में उपस्पित है। भारतीय संसति का पाप या पाप्यात्मिक माबिम्स् क्या है? पुष समय पामे हम सोचते पे किमगमग तीन र पहले भारत में एक उन सम्पदाबी सिसकारिणम प्रभाव परिचमी रेण पर पूनानियों पौर परणारा पा पाहाप्पा और मोहनगोषको की पुपपात्विक सोगे। पतापमा.. बापू सिन्दु पारी में एक प्रस्तम्त सम्मत सम्पता दी। मुहरों पोर वावीरों पर की पातुराई से परिपाम निकासा बासमता कि बार भारतीय मामिपीवन पर सम्पता का पमित प्रभाव पड़ा था। सर र मार्ममा काम प्रिने प्रमामा भारत में एक प्रत्यन्त विकसित हिमानो माम मामि। पूर्वाय पोलिसी काम पियानारद १ पमित रालो। परमन नियt समरलने प्रस्ताव मत कलियमरी कुमारिन शसी भारत र गमरेभरे प्पो और अनिय ने मामिरेमा शालन निती समारे Aपर मरेभर महान सिसिप्रदेश और मन्नुभोपानीस पर तानसम्मानित मास मार और प्रभार से परे An} मिनिममारियाणवीन सभ्यतामा नामोनिशान मारपर रेमो समम्मिर मिना भितोमर जमिनुपरभार या सेमिनाय(utmi मरादिपीपस्थिति का पता पमहा। जिसरे पीछे पाप ही भारत की परली पर एक मम्मा इतिहास हामा पाए, रिम प्रारम्भिक पुपमी पम्पना ही परीवासरती है। प्रोफमर पास मे मिपा है 'मिस पोर रिमोनिया के समान मारत में भी ईमा से ठीनगर सास पदम अपनी एक सपा स्वतन्त्र मक्सिरवलासिनी सभ्यता थी गोषम्य सम्पदामों को मिरमौर पी। पार पटत उसकी गोमारतीय परती में गहराई सरपती पाहै।" भागे निवा! 'यह प्रभी भीगीति। यह निस्समेह भारतीय है पौर पानिक भारतीय मरातिदीपापापमा सरिका पनि समापिकी पप्पों को मसतियों साप पा।' १ मोरनयेणारेशराम सिस्सिाशन (१६) पर। २ 'हार मंत्र र मोमोR (r) पप १५ ।मोटर ने वियपर निकर कि सम्पमारा निर्मातरानी मातम रिपती में पूनियन में पामेपला प्रमुग्यमान । सप मिनिाररान रनिमम रेगुष विनिरोप्य रशियन भार्षिोनाम, ना.११। क्यारा पान “ममें कोनानीक मारल प्रापसाप मारामनतिरेमेसोरमामा यी मान रिपरिषम मम मनाने करेस से पूर्व से मानेन पत्र प्रापी, हो न सो सेमेनिस देरे यार, परके ही निवामी । हपस 0 समर्मयोहाय मारनरों पिने समान सतप में मीही मालमत"m मिररिमोनियादी समसामान्य पान और मारना पेरर प्रारमियोभनन्धिामिक भी है और अमिती मी गएप मामले। सानिमाने का मानो पारा भायर पर स्थिम में मिसा मान मेमपम निचरषियो। “भामगिम परल और पीनको माबो मममम पनि युग में भारत की सेना प्रारम्पिक म मरन और नगोही पत्तिमक सम्वनामानि गारा मगर । मामि और तानियतबम्परतरबोनारिकाचिन को सम्मानका अपर मोरिमिक पाल माnि मगरेसी नुपर (१५), करेगर इस वा से प्रभामिन नही ।। नि: 'यो मौसम का संमार में नसको परिकमा शिव-पानी, मरतोष और रंग-सत्यमा पुगे। कम समय में माता दानामा समम्म मरना प म सही समय में और नरसन पनि पार्शनिक हो तपस्न परो और दिशा सामिका की मोर की। मन प्रोमि माना दारानिये, कामे DURe पर्मिक संवनिकम्पको गर्दै समाधि मन पुमा। परिष सामाभित्र प्रश्नो भाव रे भौसित मरे में मी, मिति पुनरी सरितमुपये वितरित्र २. पूर्व प्रौर पश्चिम . मोहनयोगो का सर्वोत्कृष समय १५..-२२५. ईसापूष के बीच बा। नपर योजनानुमार बसा पा। ततीस फुट चौड़ी साई पूर्व से परिषम उत्तर से रसिक जाती वी गमियों की पौड़ाई इनसे प्रापी दी। इमारते पकी हो और मिट्टी के पारे से बनी दी। प्रनेक हमाखें तो कई मंत्रिमों की पी। मकानों में स्नानागार पौर मानियों का प्रसाद पा। सावनिक स्नानागार भी थे। नानियों क पाइप मिट्टी के बे-पकाकर, प्रापस में गाकर पनाए हए । मिट्टी वा पत्परकी वारीयों से उनका सौदर्य-प्रेम स्पष्ट है । उनपर चमकदार पामिप ममनात बाप हाबी या मगर के चित्र नुरे हैं। मानव के पिए मपातप्प है। वे सोना पारी सोसा ताबा पारि पातुर्मों का प्रयोग बानते पे। ये कासे के संकर माना मानते थे। पाकर्षक नृत्य करती हई एक पुषती मी कास्य-मूर्ति नपाई से प्राप्त हुई है। पूनिया गन पोर मार की कीमें भी मिमी ६ तरार मिते हैं जिनसे मामूम होता है कितने पौर मापने के उपकरणों का उन्हें मान पा। मोटियो पिसी पीर एक तरह काम वर्गों में पिमानित तस्बी पर मोहरों से लैसा पाता था। पास (माई) को उपयोग में लाना माता पा' मोहनमोरको म प्राप्त पार्मिक परम्पों में मां देवी की मूर्तिया ।। इसके पतिरिका एक पुग्प रेवा की मूर्तियां भी मिमी है यो परम्परागत बिर की प्रतिरूप मासूम पड़ती है। स्पष्ट है कि प्राधुनिक हित पर्म की पमेक विऐपतापी योत परमन्तु प्राचीन है। सरपान माप मे तीन मुखी सामे एक देवता (मिमूर्ति) का सिनिया को एक चौकी पर पपासन में प्पानास्थित बेटा मुबधामा पर मासीन है और उनको परे हुए हाथी पाप ग पोर मसा। महान योगी पिव की या मूर्ति पाच- यगर माँ से भात प्राप्मारिमा पनन् में प्रमुप स्मात पाम किए है और इस एप्प को मातीप्रारपिय साहस पगिता जीवन में एकता और भाईचारे॥ हो पूर्पता प्राप्त की पा सकती है। पही पा हमें परमारमा चिन्तन में सीम उपनियों में पमान और ाि को परागित करनेणते पाम्त एवं सौम्य दुख में पारमगमर्पन के परमात् सार्वभौम प्रेम में एकाकार हा गर्म पौर रानिाम्यस्यमा सगुन की समाधि पार, पर मोना नानी पर पशिवितामों में काम कमी मही योहा मासा -पान सेमरपोरिमिनारबाहि अंगरेजी बनुमा (1) १ सपनिमार रोम परिमीतपोनि नाम्म मे मा पनि पानीमा परनीय निकोपर भो पिरामबन पाने पार पारमनीन मानसापों में ऊपर रटार परम पिता परमारमा बीमा पापातन इम पानिप अप में परमेयात सापुमा । माननाविरेक में पिबठा है। मगमारमा बीरन पान उन्हीये निए ममा ... मा एकाप पोर मिस एपले .. पौर सिनम एकाम्त-तिन मा गाहस है। एकात समों में ही सरप पीर सायन हात पार हम उन्हें पृथ्वी पर माते । भावनापों परिपाम पहनाते है पदों म प्यास करते है पतिमयमा प्रदान करते हैं पा पनप में पार है। मस्तिका पारमा का पाहन बनाने के लिए एकान्त पौर पिम्तन पायापक है। सम्पूग वृद्धि मीतर म बाहर की पोर होती है। पारमा ही मतमता है। सम्मा ऐपय मानसिक मौतिक नाहीसतमाता पतिपय व्यक्तियों से प्रमप है। भारतीय विहास प्रारम्भ में ही मानव-गमा की एक मिश्पितरिया निर्धारित कर पा । पपना पस्तित बनाए रखना प्रारमा भी मनुवा तस्विर रखना ही मानव-जीवन मा मरय है। हमम पारमपरकता का सित कामरण है पो बाहरी प्रभावों में मुफ्त है । सामारण हम स्वयंचामिव कम इमारे कपन पर कार्य मापरिक स्पितिया और भावनाए, विचार पौर अभिप्राय समी पाप पलिया बारा उत्पन्न होते हैं । किन्तु मामन को किसी सम्म प्राधार पर कार्यरत होना चाहिए। पर पृषक प्रस्तिष बना रसके लिए पाया है। वो यह है उतने मे ही उसे मम्तुष्ट नहीं होना चाहिए। अपनी पेतना में उसका पुनर्गगम मा कायास होना चाहिए। पामोप-प्रमोद पौर बिमासमप जीवन बितामबासा पक्ति पनिवार्यत प्रान्तरिक पपपधिक भीवर से बहने पौर मामा मपिनुयो र गुण प्राण करनयाने म्पति से और वन परमही होता। मामय वा मौतिक सम्पत्ति-यहाँ तक किसामान से ही समनुष्ट नहीं हो सका । रमा मेय एष पौरई-पारममाहाकार करना। ४ पनि सस्कृति १५ • मापूर्ण मे ..सापूर्ण तपरिक युग माना जाता है। अम्बर होमरमा 'पार टेस्टामेर' से भी पुराना है। धम्त के उगम मेरो प्रतिम पंचपत्रिपमिपों की रचना प्राधिक पौर एस्यूमोनिपाईपनमा पापा गोरस र मेरो सपहमे हापुडी भी। पाय और प्राय पुष वर्णन मम्मिमम प्रतीक। पाप्यारिमा रत्पीड़न बम-मात्र जिसमे मानन महान हो सकता। मम्मर इन प्रसिद्ध पर्यो म पर पहा "अस्तित्वमा मजिस्व एष नहीं बा। मायु। - पूर्व और परिचय मा सर माकास भी नहीं था। फिर यह क्या है मो मतिप्रीम है ? किस दिशा में गसिपीम है पौर किसके निधन में ! कौन बामता है! कौन हमें बता सकता है कि सृष्टि कहाँ हुई से हुई और मा देवता इस बार पैदा हुए। कौम मानता प्टिकहाँ से पाई ? पोर कहीं से पाई मौ तो इसका निर्माण भी हुमा या नहीं? बम मह प्रकला पानता है, पोवन में बैठा सम्पूर्ण सृष्टिको रेसहा है, पौर फिर स्पा यह भी पानठा है ! 'नसों में पारिमा वोर पापारिमा पस्त्रि रखा पौर मोरिक मन्दपार की.भिक्ति मौर महीं से भारत में मांसठिक विकास का पारंभ हुपा। सम्मेर के प्रप्टा एक सरय में निवासक है। यह सरम हमारे पस्तित्व को नियंत्रित करनेवाला एक नियम है, हमारी सत्ता के विभिन्न स्वरों को बनाए रखता है एक प्रसीम वास्तविकता 'एकम् सत्' है और विभिन्न 'देवता इसी मनेकप। अमेव के बवामास्वम में प्रमर स्वरकी परिता सरपपभिमापापा हम प्रार्थना उपासमा पौर भेंटगारा उनकी कपा प्राप्त कर सकते है। उनकी कृपा के बम पर हम सत्य के मियम प्रतस्प सीको पापान सकते हैं। देयों में जिन सरयों का इमित मात्र किया गया है, उपनिपरों में उनकी पास्या की मरहम पाते कि उपमिपाकेप्टानिस सत्वको सवे में उसके प्रत्येक रम-म्प के प्रति पूर्वत मानारस तप्प के कारण उनकी म्पास्या के प्रमेक निष्कर्ष ता प्रब पुराने पा पए है किन्तु उनकी कार्यविधि उनकी पात्मिक पीरबोरिकमानदारी सपा प्रारमाको प्रकृति के बारे में उमरिवारों का स्पाची महत्व है। उनका कहना है कि एमीय सत्ता प्रथम बस एक मिसरे मीवर सब पम्पाप्त है। प्रत्पप भौतिक नियों मन्तरिय की प्रमाप विपासता पौर प्रगपिठ प्राकापीय पितों से परे परमारमा का अस्तित्व है । सम्पूर्ण सत्ता का x,१२८॥ . वितमि पशि (R) में (पौर पदास) सिवा से अमिनस म्मित निमें किसानों न, मित्र राब और पत्तिनिका पिकामा मा परिसने मीस्थिा में कमनिरपरारमियदलले समाबर थोकी मगनी दी कि पीर बोतमिरम्मका निर मारिपात प्रानगर से राम और भारत निसी सार-माय मन मसीमिपूजनाकमान में मिपरा मनपा । मगर सम्प्रदारास्पिस में प्रमाणास सम्भावना भी मिल भगतान और मनन्त्रको महासभामातासमत भाप माम मनात प्रतिनित होने लगे | ममी पुष मदन RERNमें शिरशियभरोगनिर मिना।

पास्तिर परमारमा रेकारनी पौर परमात्मा के ही पारम इस संसार का गुप प्र।। पपा पुरपोप मारी बस्यों के भीतर प्याप्त है पानमकी पारमा में तो उमरा निवास ही " मम स पपिप नब और महत्तम म प्रपिक महामा पस्थित मा सारतत्त प्रवेश प्रापी भीवर उपस्थित है। भारत के बाहर निम सिदान्त पारम उपनिपर साधिक प्रसिधातु एवम् प्रति पसा का निपाठ प्राणी के भीतरापरमारमा हरपदी महराया में प्रतिष्ठिहै। "भाषिउता दिन नहीं है पंपहार दिरी प्रभात महराला वित पाटियों में प्रस्थित है प्राभियों के हृदय मनिवास करती है। परम । सोमपस्थिति की प्रतीति सम्पति पवित्र हो जाता है। पराप पुष्पोत्तम पो पाचामना पौर रसके साम एकाकार हो गाना मानव-मान का साप है। इस सम्मिमन भी पाया बाह से मही जा सस्ती बिरको अपम से बाहर मानार को उसकी भारापना की जा सकती पारमरामा प्रेम । यह एक ऐसा कार्य है मिमे सर को अपना बना मेना पारस सिरका मम पापा कहना है मामयीय गिरकीस धेष में कोई पहुंचनही है सीमिए इसका विस्त विवरण देना पामर के पिक के लिए प्रयभर है। किन्तु मानव सहप पर से प्राप्य प्रेम कर चतम परस्पा 'मान' की प्रवस्था की भाती है। इस एक सम्पदेही म्पप्ट हैरको समसा प्रमिगपठ पर है और साप ही मानीसम झने की सीमित पक्तियों से परे भी। नवम अवस्था चिनेक से परे है। विवेक हीन नहीं। मम्त टिपह सम्पूर्ण मान है पिसे हम अपनी तमाम मस्तिो । उप योग से प्राप्त कर सकते । प्रसवम पिपाका मही है। पापो काम को परिवर्तित करने की प्रक्विल को पुमति परम की पस्तित के मदीनीकरण की प्रश्मिायाएकपि, सवना, मसीम सपा में मुक्ति है। यह पर, पालना पोर होना सपा अपनाना और मामन्दित होना एक सीखि पति को परमासूम है पर सत्प पहनहीं करता पिस प्रकार भूप मे गाइपा पस्ति मूर्य की उपस्थिति में सम्देह नहीं करता। इस मामने को विधा कहा गया हमा विमोम है 'पबिया मवि मस्तिप मोर मियों का संकरी सीमापो में एना। पहसम्मिनन वाम मिरा नहीं परम् सम्पूर्वपक्तिलाराम है। इसके लिए पापायवाई मारमानुपासन की पात्ममित मामसा सपा उसक पार परिचम सहपोली अप मा पौर चिन्ता पर मियय पाने को।"प्रपनी पासनामो पर पिवय । पानेवाला सापा प्रपने ही मौतर प्रपनी पारमा के गीर्य को देख सकता है।' पूर्व पारमायापपावन मे ही हम उन्वरमान प्राप्त कर सकते हैं। इस माम पिना प्रस्थानी भाषनाए रिकको भूपित कर देती है। परिमी विस्थापिपानयों में बम की गिनी प्रपामियां प्रचलित है सनमें सापित सोकप्रिम प्रमामी का नाम है 'मॉगिरम पॉजिटिपिरम सम समी कमों को दो भिायों प्रपोगसिर प्रौर पप्रयोगसिर में निमावित ठिया गया है।कहा गया किप्रयोगसिद्ध कर्मा में बार-बार एक ही बात को दोहपपा पाता । इसके विपरीत प्रपोपसिद पन भनिश्चित मा इमियों द्वारा गर्न हिर प्रिया पा सकता है। गोबा पुनर्षित नहीं होती पपमा गि सिट नही पिया ना सकता एकदम पर होती है। प्रध्यारमषिचा मौविपात्र पमपारा भावनासम्म प्यों पे का कोई सम्माय नहीं । इसलिए परेशान नहीकहा जा सकता । इस सिमान्त में मान लिया गया है कि अनुभव मिस ऐनिकवा और बादिकापर मापारितोरिपरीत उपनिपरों में कहा गया कि मानव की पारमा की सीमा नागरितावस्पा के पनुभयो तर ही महीं है क्योंकि ये पनुमब पनिमातम्यो तपा रनसे प्राप्त परिणामों पर निर्भर है। प्रनुमय परगनीप भी होते पार पगो पपा विचारों हारा र मरों तक नही पापापा का मुफ्ता । मानव में ऐसी पमवाए जिनका पता उसे स्वयं नही है। मदिपियर का सापातार हो पम का मायोरस साक्षालार लिए मारे पास काफी समय होना चाहिए। एडाम्त में हो मानव सर्वाधिक माननीय होता है । पिसी एकाम्तसेवी श्री प्रितमें मपनी देवी हुई तो मार अनुभूषियों को पार करन की पाल रही है पविया परयात महल हो सकती है। पनु भूतिया रम पति की पनुभूतियों में पदिक परपष्ट होती है जिसका समार ही सामायिक कार्यों में भाम मेना होता है। हर समय है कि पिन यो अपरा प्रमाणों को गुमरे मोप एक पल भाका एक हमली टिप्पनीर प्रमा मुस्कराकर राम गाते है रहीम एपम्तमेडी का मान रमझ गावापाय प्रपा प्रभार पुरषाप पो पाते हैं पर्म पहन करते याने पावना का अनुभव पार पहनपरमरिसान पारसन साहित्य पार कमा सभी पारिक पना पिएपहिनीना मोमिना पितामोपपती माने राण' पारा में पानमा पिततिपणे मानर परेमा होता है। पर्म पापा अनुमा । पत पामि भापमा पार पामिर गौरन का पारना II । १ - -- - महाल प्रतिपामिकसियाम्तोतामा बार्मिक संपों से हमारा मवार हातामा समापी मिशाम्तो सिर-समापी मिसातों का मेमपं । मम पार्मिक अनुभव हा समाम दिगप सीमामों में हुए शिवाम म नही है परन् पास्तरिक मामीय मामयों को बाम पनौती प्रति सम्पूर्ण मारमा परी मनि Fमापगो परमारमाका अनुभव कापुरे वेगानते है कि धर्म पिमो भार मिरातोपर मापारियनरी है। सरकौएस्यमयता का मामाम । पौर, एस्पमयताकापही मामास सरप्रारी पाना है। इसम एक प्रकारकी गिनता का माम होता है और पाह दिनमवा मानवीय दिपक के प्रति प्ररपपिकमि मही होम दतमान पापभिमान हमें पस नही पाता। सभी रिपात पापनीय पर प्रापातिविधेिय महीप्रतिस की परिभाषा महादीपा मावा इमे तापम मान लिया जाता है।मम मो अपमान लिया गया है लना मुभम पीर मयुत Eि उम मगन पमों म म्पाय पही पिया पासता पिप पारमापारिसेपून विषारा किया गा मा मिनु पस्किार पानी पनिमार्पत इसे पिसी मिशान का कानगी रिपापा ममता । पारिवारीम पर है। समिप महान की सीमा का उस्तपन करल इमरार दिया गया है। 'हम पनों कि पारिद्वारा उस तक नहीं पहुच सकते। हम केवम यह कार उने रेल मस्ते । किर।" गए प्रतीम है। उमसे पहले या बार पही है। रमम बाहर भी पुप नही है। जिम साग बस्नुप्रोमा अस्तित्व कभी रहा है या कभी रह समता वस्तुएं उसी पम पम्तहित ममापमापी की पोधिक पोर पपून सीमामा एक नहीं है पोर न सामान्य काई है या एक पौराईकी पारपाएं हमारे सौमिन मस्तिकों की उपर! और बाद ममीम है। 'प्रांत और रितीय कहा पपा है मोंकि इसके संदर्य मेसाई और रिवीमा रामोई नहीं नवम नकारारमगम म्पम्पिा मासाता नाति नाति । मुश्य पुष मावाम परस्मा माग है । मह पनि ये परे है पीर परिक प्रमाणे प्रणा बाल और ममप को पषस्थाणे में प्रभावित पाइन सारी बातों हमाप बाइ प्रमिपतियों में है प्रान्तरिक पावरिया नहीं । विधाम मम्मनिता सिवान्त नमी पस्बादी पार परिवर्तनमीन मा उमरे मुस्प बरसत पने है। इसके विपरीत पल्स पापत पौर अपरिवर्तनीय है। मुनि पार स्मृति में मही मार भूवि पीची प्रेरणा है पिपुर अम्त प्रति पार 'स्मृति' समगत म्पपरवा में उसका प्रतिविमा । मापारमाणों में इतना - । २९ पूर्वपौर परिरप मनुशासन और पृपक्व होता है कि ये मन सस्प के रसन कर सावी किन्तु एम मोष तो सत्यको विभिन्न संगठनों में ही देख पाहे । प्रत्येक धर्म काय विन्दु सस्प एक पौर समान । सिमान्तों में पारस्परिक मम्तर पपामगोषि माननीय परिस्थितियों पर सरव प्रमार से उत्पम्न । प्रत्येक युग में पानी विशेषता होती है जिसका पता उस युग की मान्यतापों से मगताको युग बियेप में स्पयसिरमान मी माती। सरप की पमिम्पत्ति किसी प्रकार पत्र में नहीं हो सकती इसलिए सत्य को पृषत परिमापित नही किया पा सला। समी परिमापाए पनिवार्यत अनुपयुक्त होती है और सम कहा जाय तो प्रामक होती है। प्रत्येक फार्मूना पो पौर विचारों में सरम को पारमे का प्रत्येक प्रपास-पासीमित प्रपों में सत्वतमा समय पीर प्रमसर के अनुकस होता है- पास्तव में चिन्तन-मनन के लिए एक पापार-मात्र उमड़ी सहायता से हम उमे राममने की पोर प्रप्रसर हो सकते है जिसे फिसी फार्ममा प्रतीक पपा मिशात में बापा नहीं पा पावा। सिशन्त उत्तरदायित्वहीन नहीं है। हम सेम्पा के रिचार नही कर सकते। पौरन ही पिशान्त पनावश्यक है। जिस भाषा में सत्व की अभिम्पमिती गाती है उसमे विभिन्न सोपों की पावश्यकतानुसार विकसित बोमिया होती है। मार की प्राप्ति के अनेक सावन मान पन्तरपात माफ रिभ पपवान है फाईही पवार्य है। मान प्राप्ति के एक मस्य के मनेकानेक पार्यों को माल्पता भी पपी है। प्ररपेक उपाय का पारम्भ नहीं हो पाताई पहा मानव स्वयं को पाता है। हि पार गौर सियाम्त म्पापा पीर सार्वभौम । प्रत्येक मानर की प्राप्या स्मिक पापम्पाताो पौर पमतामों मनुस्म है । सरप को पापानने तपारस न पहुंचने का रास्त पनेक्सिी लिपेप विधि को अपनानेगाने मोप नमी को पम्निम पोर एकमा समभने समान है। किन्तु पर रे गहन सय रन कर पाल तापामास होता किमिवता पिपास सरप स्वयं है उतने ही पौर रमवा पहुंचने क पपपानिक पापों रासा प्रगामियों पर विनों हाग उनके परे एक मुस्पष्टता में पहुंचा जा सकता है, पौरामिण इन हाराषम मागेच मरपनाना महत्व रक्षित स्थान पर ही है। में परम गम मममन की पमती नही करनी चाहिए। यसरम की छाया-मात्र को गित पाते । पिनाते है परिभाषित गरी परपर र प्रक पार निरगर है जो प्रश्न परेको पार चिरता है। मरत को गोगिम बस्तु समझने मेन मही परनी चाहिए पिर पट्टी तम्म मसात परराय का प्रतिविम्ब इमर पर है सीमिए यह पवित्र है। यह स्पर कामगिर र मोर पर 'पप्पी म उपरिपत हाये हुए भी पृषी से ममम है एपी बम मही पहचानवी पर मानषिक प्रकार पावन है। मपीमिया मौर मपप मे पार को मुक्ति पर मिमनी है। मानसपी वाकप्रधि मे प्रपिावार प्राप्पामा प्रवृमि पर दिप जाना है। मागईमर की पना उत्तराधिकारी है। उसके भीता गगन प्ररणा हैजा उसकी सपना नाम है स्वय को सय मे उपर उन मामा है। या पनिमार्य aft कम नही। परि म मामा कोपर पापिर प्राग परिसरामधीम रिपारपामा प्राची समर्थ होहम समझीम मामा को प्रमिदायत सामाों मापा नहीं गा मरना पोस्मिा प्रतिस्प परिवार के समान है तथा एक ममिक पायाला मा गरन-माल नही पामारकी प्रमिााप पार्य नही है। मा पाप्यापि पानी और गमिए यह मेलगिक पौरपामानिसममारगरसे कार है। मानर काम्पामा बिसीवन प्रारम दाहामी उसके पाप्यारिमा पस्तित का पता पता है। प्राति प्रारमा की विरामी नहीं है। प्राति के साप ममाव पार पाप्यारिमका पौरखमा माग नही बटवा । राम्प मानन का मही मोहका बिरोपी है। पानि दी मीमापों को म मानना हमारे लिए पार पकनही मार परस्पर मदिर और 'पर्म सापन' ।। प्राप्मारिमा पालाम्य पार मोनिक पीपन म कोई और नहीं। प्राचीन रिचारकों में पम्मिरण की महान ना पारी मत्यमायाप्त रखना तथा जीवन पर प्रणिरर ममी सरोकी पारस्परिक प्राध्या पर मच और दिया है। परमात्मा के ममा पारपासम्पूर्ण समर्पम पारमा पीर परमात्मा के मवर्ग भीय समोपको प्रापित्रा में पास पिया गया है 'म पनि मे चिनमारिमा निकलनी पौर पिर पम्नि में वापस चली जाती है, मे समुबारमोगे पनी मरिया फिर मर में मौ पाती है। जब मामाका सपमान होता,मबरेपामरिमहा वर्गई अमुमन होता किमी प्रपनीयम परमारमा की पभितिक सारण मार,परमारमा 'बादल' है। यह प्रनुपर करमे पार हम यतिाना में मार रटमले पर अपने सहमानियों का पप पहन कामे मगले पाहिम पौर हमारे सहयोगी समा एरही परमारमा की प्रमिपसि। हम परमारमा - १ पसरसासनिार | पूर्व और पनि सपकरमनपाते हैं मार प्रेम, सदभावना पाकापारे परिपूर्ण पीपन मतीव करते है। हिमपर्म में सम्मि कामा बिममता पौर मानवीय कोममता काममा महत्व है।लि पर्म की मामयता का प्रसार पमुमो के लिए दी है। पुराई के साप संपर्प में सक्ति को नहीं रल् प्रम के उपयोग की बात कही गयी है। बुराई को पराजित कर पुरे प्रपरलों से दुर्गा कोही विषय होती है। संगतिक स से सभी मामोंका प्रसम-मन प्रतितीय मुस्वस्पीपारपिया गया है, किन्तु सामायिक चे में उसकी प्रतिक्रिया का पता नहीं लगाया गया है । पश्चिम में पूर्व से अधिक वास्तविक समानता है। प्यापक प्यक्तिगत पम्तरों को परमेसम्म से मावि-प्रमाका शाम हुमाया बिन्तु मर मर पिया भिकार पार पसभ्यता का प्रतीक बन मद। बस माम मा पपसरों की कमी के कारण अनेक पक्तियों को कठोर परिमम, यममा मौरलप बीबम बिताना पड़ता है। इसके रिपरीत भनेक पक्ति किसी प्रकार भी मषिक योप्प न होते हुए भी पासात मुखी पौर मुविधामों से भरा-पूरा बीवन म्यादीत करते है। दमगीन प्यक्तियों के मन में इसमें पुमा उपगती है। इस मिबिमाति-म्पपस्पा कपारम भनेक पति पम्पनिमास के शिकार हो गए है ऐसे धार्मिक संस्कार मानते है निगरेपतई महीं समझते। पाति-म्पयस्वा मानष में निहित रेगल में प्रान्समा विपत है। पह सिमाम्न नम हानाहाँ प्रपरमा का समर्थन पही करतापोइप सबको समान पना दना पौर यदि माहोतो एक कर देना बाले हम रिमाप एक नही हो सकते क्योंकि हम असम-ममा मन्मवे पार मरते हमार महीपारप मि तानापाही यस्तों से स्मैप भागते है। मामय में रेवत का निपाल:-इस मिशान्त पो मानने के पापात्यह निष्कर्ष निस्सापिोई भी पति पाहे यह कितनाही पापी गर्यो, हो मुति मे परे नही ।। मी पण नहीं है गिगार पर सिपाहो 'भीतर प्राय परामो पारी पासा पोरो। बिमासम्पक्ति नहीं होते। उनके पति को रन जीवन मर मलमा हावा । पापामा भिरत बीमार प्पति जिनका प्रम मापप्रप्ट हो गया है। गभी मामा घमास्व की सलाम प्रताप पुषा प्ररपे के भीतर, उमरे मागमार उमरे पति मोगरासर गरम्प प्रारमा पार है। पर पतियों की पारपा पदारता पौर निता माप पिर नगने नमानसीहोती मिल होती पाय है। पौर नीतिमा सषिय होती है पौर पर गपुरा परगर पर उमाने पामराली है।

२१ मुक्ति पपने पार मही मिम माती यह हमारे प्रवली पर निपर है। कहा जाता है कि प्रथम करके हम मुक्ति नहीं पा सकते यह पो परमामन् पा स्वातंत्र उपहार है और हमे समझ न पाना ही नर है। मारतीय विचार मे पनुमार प्रत्येक मानर पापही मोच प्राप्त करना है। मामा किमी दूरस्थ देवता की देन मारनहीं है। उपनियों में परमारमन् पौरबपरितकमर कबीच पावत पमिम परम पार मसर पम्तिल के सापेण साप के पार पमर सप्र बनाया गया है। कहा पया है किमानर र पान्तरिक रिकाममा पर्य है पापन कौतिक स्तर प्राम्पारिमर सरदी पोर प्रमाण । उनमें प्राध्यारिमा जीरन म्यतीत करने में ममताय गए। पेप परिपतनशीत निरन्तर ईपी इनमे सिर होता है सिप पर किसीचा एकापिकार नहीं। ५ोट पर्म पठनी गवाणी ईमापूर्व में गारे संसार में पूर्व पाठिबीन में पियम पूनाग में पावापोरस तसा भारत में महापौर पौरपुर सी काम में हुए। पुरका विगत पनिपरों के सत्या काही पुका है, जिसपर नये रंग मे पोर रिमा पपा है। धर्म को उन्होंने पम्म' हा पार बताया किमान प्राप्ति का उपाय यही है। परमारमन् कोमर ने 'प्रम पार करना मे भरे-पूरे पौरन में देना। किन्तु पपाप के सिडाम्दों का प्रतिपादन रगोने मही किया। अपने मनुमयों के समाप में सर्वमा मौन रहे। रगोने उम पप का निस च्यिा विसपर मबाप में बनकरम नीरस स्पिति पर पहुंच सकते हैं यहाँ स्पर्य है और सर पेन सम्वे यो उन्हान देना है। हमें माल प्रमान महासलिने पाहिए, किन्तु पाबाया परिपम पर सामान प्राप्त करना चाहिए। रुप में मपूर्ण मानरका परम दामने पौर रस्तुरे साप एकाकार करने की शक्ति है। सपनिपों मोरा विपरीत निब का पाप "पुरा का प्रप्टमार्य 4कि पर्म का हीमपपई पनिपरों या इम पार पान के सियाम्त का प्रकाराम्तर।मायेस पोमिप्राप्त पक्ति काय किमामीचे गिरेहए प्रम्पेर प्रयप्पषित की मानप्राप्ति में सहायक हो।हम पायानपा पाने या भपाने हमारे भीतरपत पाय है पौर मानव जीवनमा पुगप प्राप्त मातुसेन (पानी पताम्य सो) पुरकापर्णन निम्न पारी में शिपाई पूर्व पार पनि बुरा वाहनेवाने पपु के लिए भी तुम ममा पाइनेपामे मित्र हो।मेणा दोर निकामनामे में भी तुम मुषों को सोर करने हो।" "तुमने रखी भोमन रिया कभी-कभी तुम भूसे रोमठोर रास्तों पर चमे पानबरोरा पिए, कीषा पर सोए । तुम सामी पे किनु तुमने गोपिशाप्ति में दूसरों की सहायता करने के लिए अपमान महे अपने पत्र मौर वन बन्न ।'नीपो मनानी स्पिीके गौर दागनिन प्रमंग ने गुरकीकरणा के पिपर में कहा है बोषिमत्त सभी प्राणियों को उसी प्रकार प्रम करते हैं निम प्रकार कोईम्पति पपने एकमात्र पुषमाप्रम करता है। रिम प्रकार चिनिया पपने बमोंगोवाली है पौर उमकी देखभाल करती है उमी प्रसार का म्पबहार बोषिमस्व भी प्राणियों के साम पो बनो पपने पूरे करते।" उनमापन है कि इसी कोपी प्रसयमा पासना के पास तपा गसती करनेवाले सभी के प्रति करपा सयो। पान्तिम में बुरे मे दुरे पत्रों की मी भमा करने की समाह देते हैं। पापानी उपदेगा होनेन (११९२ १२१२ स्सिी)ने पमिताम (अमिरा-सापानी)ी उपासनापामारेम रिया है कोई भी ऐसी मोपरी नहीं है पाहा नाममा की पहली फिर पर स।कोई एमा पारमी मी नहीं है जो अपने चारों को गमुक्त करने के पापा री सस्प पो म पहनाम सो पार उसे हस्यमतमका में।" लिपौर और रोनों धर्मों में प्राय पोर पंपकार के सामाग्यो पा. सग और मरमका पम्तर पम्पायी है। परमात्मापी परम पति रमसामीम प्रेम की पराजय महीती। रिपोर पोरोनो पासमार है अपूर्ण मान मामी मुक्ति । महापान पोर पर्म के अनुसार, पुर ने गान-भार बारिकी पम्तिम पसरपा पो प्राण नही पिया वारियणप्रन्य लोगों की सहायता कर मरें। उमाने प्रप लिया है कि तक सारी मुष्टि भूमी प्रापेमण पप्प सानही पहुष गागा रे निर्वाम नहीं मम । 'मरा पप यह नहीं कि हिन्दू पोरबोर पम मिगलों में माता पार पुरा मुग पार दुर्सग म अन्तर ही नहीं समझा गाता । इमाम सम इतना है कि दुरापिए मी पग्मी संभाषनाए।म सिसम्म यही है कि पारमा को +पार पनेर प्राप्मारिमा परसर प्रापहोनहापरिमामारोत परमर दिया गाय वा एपीपनपन में पापाई बम पर मुक्ति पार गुप , बालन ग पुगिन। पना सिमाग मुन मगर पपE RE राधमा म्। में पम्प प्रमनार का तापम्प - पूर्व सबम पर मरफ ही पनि प्राप्त हो जाएगी। पौरपरिरम प्रनग्न प्रम पौर मनम्तगरपाई हो या अणूम सिवानही ठीक हो। पार यह तो मुघधिक गाईसन के प्रारंभ मे पागे निमा बर्मा भगान कम्बोरिया पनाम पान और जापान (पूर्ण पो) म पापा निस्तान पामीर पिस्ताम गौरिया पार फिलिस्तीन (पश्चिमी देगा) पनिक भी रसपान किए बिना पर पर्म का प्रचार प्रभार इमा। वीमरी सवारी विापूर्ण मगोपीन पानीधिया मपप प्रायमीर प्राधि सेषों में परिजम' का प्रारम्भ हमाहिए मगति बहुत पहले समय मही मात्रा में स्थापित हो गयी । बहो वारोदर मन्दिर पोर गिमीप पार भी पौर। पारिया में पंगओरबार विधान मन्दिर का निर्माण मगमप १.t.tी में प्रारंभ पौर उसके. बार ममाप्य हुमा । भारतीय उप निर्णमाम पौरपी में पाए पामेडापे मामा से पम्पा काम्मा भीर अपराठी -पर मदिए गए। ठीक इसी प्रकार प्रमगमा म सामे पहल गमने पामे पूरोपोप पाने पाप पोस्टम पर पौर मिरापूर गे नाम म पाए। इस गृहवर भारत में भी गौर और मानपान प्रारमा भौर सारतमान वहाँ भी दोनों में एक मामेवरप स्थापित होपया पतधारत के प्रन्तिम चाप्सन रामार ' (१.१-५४० ईसी) मे पिप और पुर मन्दिरों का निर्माण भारत में बार प्रम मोप हो जाने का कारण मही है शिम् मोर पोर पम एक प्रारमें प्रापप में मिल गए, पिमेप गप से पब अब दोनों पमो में प्राप मारास सहस्प ए यमा । एष गौर सम्प्रदामा महमा पारम किया निर्मान प्राप्ति का दम एक उपाय है। यह विचार भारतीय पार्मिक मानी मीमी पनेकपिपी रश्मिण गौरिया के सर्वथा विपरीत पार भारतीय धर्म में इस पफमा सिमान्तको करार पनपी प्रमुप शिक्षामा पहन कर भिवा पोरकार परम्पराोपनाप लापनेक महान राम मना मिर्गा महान वादिय मारमा प्रति गानिक विकास पौर अपरिमित पर जीवित पिता इस बुर की बियेषताएं दीं। पिन भारत के विचारों- ५ मामे बोरे मर्म रेसलमे सनम.पण का काम पामगरेममभिनेपालमा १२ (स) मे mywan kitarathना प्रिय भरततिर पिन १२ पूर्व प्रार परिपम पंकर रामानुग मावस ने उत्तर प्रौर रधिप प्रार्य प्रौर अमित को मसति एक मूत्र में गाय पिया मोर मारतीय राष्ट्रीय एकता की मीब रखी। ६ पारसो पम मुससमानों के प्रत्याचारों के कारण प्रपने देश से निकलकर पारसी धर्म के प्रमुपापियों में भारत में परम पापी । एक पारसी इतिहासकार का कपन है "फारसी या पारसी शरणापियों को प्रमपित कष्ट सहने पड़े। यहां तक किये सपमग विनष्ट हो गए। तब कहीं बाबर ये भारत के तट पर पहुंच सके । यहाँ एकति शाषक में उन्हें घरणी पौर पर बसाने का अधिकार दिया।" मनुमान है कि सन् ०१५ ईस्पी मासपास पारसी मोम संगम के पास सतरे पे पौर पनि ऐक्वा का उनका पाना मन्दिर एक हिन्दू शासक को सदापयता के बम परमही बना पा । पारसी बम दूसरे परिमम्बियों का मन-परिवर्तन कराने पामा मत न पा। यह पूसरे धर्मों को पनपने का पूरा पवसर देने पाहामी था। ७स्साम पारसी परपापियों केम्प में भारत पाए थे किन्तु मुमतमान मौर ईसाई विजेतामों के समान पाए। इस्लाम के प्रति हिनधिकोग सहिप्नपा। परय पिर प्राचीन समय से परवों साप मारतके मिन्टतम समाब-बियप सेप्यापारिक पौर प्राषिक सम्बन्प पे और रोनों देशों के बीच स्पम पौर पन-मार्म स्पापित पे। हिरा पासकों में भारत में मुराममानों का स्वागत किया पौर रहें मसविः बनानेकपा पपने मत का प्रचार परने की प्रातारी। मार टीप निवारपारा मोगों को जीवन के किसी पिसप रास्ते पर चममेकोमाप्प नहीं परवीर भारत भूमि पर रहनेरामे हर समुशाय को प्ररित करती थी किमान्य जीवन की प्रपनी परिमापा के अनुसार पीपम-पापन करे । पनाली पनामीपभग मध्य में भारत स्थित कारमणारादून पागुम पार मिपा है 'यहाँ (कानीट) के निवासी काफिर है लिए म सोचता हर में गाने में रितमाम पानवामे हर मामी को मुसलमान सपना रमन समम्मे है। पिरमी में स्वीकार करणार यहाँ पूर्व पानि परिप्पना है यहा तक कि हमें हारा भी मिलता है। हमारी दो मगिरें और न सामिरगम ममार पा गरते है। समस:रिबरपर्म (. २४) र प. .मरे म राजनराग' पर | .

पूर देशमएमा के प्रमारोपाप-माप गमाना और और रामगम पौर राराम पार तुममीराम तथानामा परि जय गिनों मप्राम पवाबी पारमा प्रास हाती पई। शिपौर मुगपमान रियामों में ममभौता कराने की कोगिय मन्द मारमापों पडिग्गिा महमा पार नीरा रगहमि शनाम भी पहला गाना म रिसा पा। पापा 7 मगिता मिलनगीप पा पोरयकामन। उमसी पोरगा है मभी गम ममममा पारमी तया ममी पण मपमनीमति मार रायमर सिरसम्पति होते है।" मामे उनका रहना है “पानी परिम्पितिप्रनमा पामीरा मारमा समाम पता है किन्तु पारगर मैं रम पापी ममा निग्नि परमा ममा है। 'महोपीर ने शिवम पापी मापकमा में मिगाfr " बिहान पनि मृदा रिजालका पूर्व भार पा। पारामुरम महा पुष रारागिरोह एक रोम प्रापसारपिता पा रिमम गिरिया ममा पापिहिम पौर मुनपमान मों में प्रमरपन भाषा पौरा। इस्लाम को ईरानी स्तिथियों का प्यार बिनाप मोर पोr fTO पोपाम मिमा का मामपूर्व पारमी पर्म मोर मामिणीगर मिपार म पाधिकालीन पर्मनहायान पारम में रामाय पाना प्रभार सामागपाम का मूफी सम्प्राप-भिम प्रमिर मम प्रताा मादी नामीमम्मी पौर हाफिर--भारलीप पात राम्तरे परयम ममीपारगामी गिता । परमाहको रिपेपरी परमाननामो नि मृत्रीमा म उमरीमानामय उपस्पिति मानस की पारमा परपम निप पानीमा निर्भमनमा पिनाम मौत परमपर में है परमेपर का काम माना गपाई और मापूपति मरा प्रतिविम्म । गार पर पहा मादि मातरपी मारमा परन माम पण हामी पौर भीतर मीन' मा पानी है रिपन्ध पाोिं बार पापस जाकर उसों में भय हो पाया प्रम-गगामी सनिय में हम पर्म मास्त्रपरि भक्तिमप प्रमाग्मवादकाममदम मिलता है। मी मामारामही पौरपुनमग्मतमा प्रगतार में विश्वास पाहामाया मित्रालाली के एक प्रतिरमूचन सम्पनी 'मौसमही बाते ममगिरों की परिपना मानते वे मन्दिरों में होमगाम हिनामिक अनुष्ठानी के समान प्रमुष्टाम मगिरी में करते पीर मुमप्तमानाममान सिमराकर नपार पाते। उनकी १ मिस मिपाकर रस (१८१R 1 १ मिनॉर्मर (भगरेकी मर), मामारपरिक पपर! ल्पना (भीमेजीमपर) अनुप्रयागी भोरम १॥

पूर्व पार परिषम जीवनयपि सन्नीसवीं पताम्मी के हिन्दू सम्ठ स्वामी रामान समान पी। म्मी मे उपासना की स्वतंत्रता के पास में मिगते समय प्राचीन हिनरिभार पाराकी परमरा फोही निमाया मिलते है 'पिराग ममग प्रमग । मेक्नि ऐपनी एक एकही दूर से प्राती है। यदि कोई चिराग को ही सता रह गया तो नसभा मेरा गहो पाएगा क्योंकि यहीं से मनेकता का प्रारंम होता है। रोपनी का मौर से देखने पर ही पार्थिव शरीर में निहित समस्या से मुक्ति मिप्तती। हे पिपर तुम सम्पप सृष्टि के सारहो। पौर मुसममानों पारसियों पर रियों में प्रम्पर सिर्फ दृष्टिकोण का है। कुहिनुपौने एकदापीचरी और उसे एक पोकमरे में बड़ा कर दिया। रमदेव पाना सम्भव पा इसलिए हर कोई उसे हमेती र महमूस करने मगा। एक का हाप हापी की सूपर पड़ा। उसने महा 'यापानबर ठो पानी के मन की तरह है। इसरे ने उसका काम एमा । उसे हापी वि मैसा मालूम पड़ा। तीसरे ने उसकी टीम पूर्ण मौर बतापा नि उसका मापार पभ मा। पाप ने रसकी पीठ अपनपाई। बोमा परे,यह तो धन सा ।। प्रमाउनमें से प्रत्येक पादमी ने एक पमतीहई मोमबत्ती मे नीहाती पोरमके मन में भिन्नता नरवी। इस्मामा भारतीय परिम् विपापोर पापा ममा गमा है। शियामन मुग्मीमत मी तुमना में रिनुपर्म के प्रषिक ममीप है। पोरापों के खिोत मन मोर धिपा सिवान्ती मिपम पे निर्मारित है उमरासिषास है पिसी रिकारसो भवतार है। भारत म प्रनामपार मातिया है। बार में पर निदमी मुमतमान प्रारमनमारिया मे भारत पर हममे शितो भारतीय मुमत मानों ने हिमों के मामले मे पा बिहाकर उनका गामना लिया। पिरया पानमसारी भी भारत में बस गये तब भी पोरी-मारी महाश्या होती रही। पने उसारपसर मुमममाना के नेतृत्व मे हितों मै पा रिगुपों मेतृत्व में मुमममानों में नहाइयां नही। मारतीय मुसममान भारतीय भाषाएं पोपने मर एक ही गालियर बने पोर मानीय मारारिक समुदाय में , स्मोनि. (1) TER ( पाप) मनुप्रा पर सामनरा।

मम्मिपितापमाननीनो प्रमागमदार मलि पो पर गगनोंद भा परमा उतना ही मुतिमा साना पसिना पार *-कानदार पापारपार पौर शिवानीप्रपितामनामेसा पापी। मुगों सामनरा में गाही दरबार दिपौर मुमपमान हिना र मिनन पपन पर मए गरारे पदमरेत परती पाली मगापामगर । पारानी पतारी में भय मुमनमान मिान प्रमरोजी म मगर भाग पर पिमर याम्पमा प्राणरमोउमरपिनमा पसा सिन पौर पर महिग्युषोंगरी तिला पानामपिग दीवानमारि गीपनाबमानीमा मानिने मुमगोमा प्रमाणिरिया पार गीग उन्नीसी गवादी ताकीमागनिक गरिदिपरा में मुिगामार माराग पए। ममीत और स्मारप ाि और नर मे गि पोर मुगपमान रिपारों उमप ममय पारमारिप पमा गामासिगरेगा पौर पामिपिनाको परमरा में मानाति पोर ममममामा र पनीर मुमान है। ८ ईसाईपम स्पी गन् के प्रारम्भ में ही माममा पर्म पाप्रपार है। मनागर मीरियाईमा यो पापियाम है जिउमा मा पम मोष मत टासम में प्रारम हुमा । उनमा राना । Eि मगाई पम माणसा पनिमगर पौरर मौर मट पाम ग स्थापित ईसा पर्म पापम मिन पोर मार। तीसरी प्रतापी एक पार्मिक प्रम 'द परम पॉफ्टमिम' म पिया है र पमनीमम माल नहीं माना जारहे मेरिन पर न मी मापा नीति मालपासक योगफारेमा प्रतिनिरिभाने हों उन्हें गुलाम मरेच दिया गया। पहम वा इस पूरी कहानी कोकास्थित समभा गाता रहा फिर मारत उत्तरीपश्चिमी काने में एक मुहर मन् १८१४ ममिमी हिमपर मोरा फोन का नाम मुरामा वामा हम पा निष्कप दो मही निझाम मम्वटि बर्मदूत टोमस पहली पानी में भारत ममेरे नामादि यह पर्ममाप्य मही- सेफिन या तो सोच हो सकनेकितीसरी पतासी ऐपारस पीर मेसापासमिया कईसाइयों के साप पाखनिए समय पे । इतनास्प है पिबहन पुराने समय भारत के पश्चिमी तट पर ईसाई पाबा रहे हैं। हिनाया मामाम करत र पौर हिन पामक उनके लिए पिरणामों का निर्माण कराने । राट रेवर स्टीफन मोत में दोष पमब तक रिस्मी के लिए रहे थे 'सोटेटर पूर्व और पश्चिम में मिला है 'सीरियाईनोपों कीपरावरिपोदारों की बातिमायर मोों के सार है वे स्वयको अम्य हिम्पाठियों से बचा पीर परियमित जातियों से तो गत उंचा समझते है।" प्रारम्भ के ईसाई प्रपने को सामान्य हिम समान काही पनिमार्य भंग समझते पे पौर पर्म-परिवर्तन के पिरोपी पे। ईसाई धर्म में परिवर्तन के लिए मिशनरी प्रचार भारत में पूरोपियों के बम ने के साप-साप मारम हुमा । पूर्व में धर्म प्रचार करनेवाम महान ईसाई मिसनरियों में से एक पे मसिस नपिपर, चिन्हें पपने मिगन की बी प्रति पर भटूट पिपास बा । रमोने पूरे पनेक गों में प्रपने धर्म का प्रचार पिया । उन्हनि पारपाहगोपापो रितीय को मिखा पा "अपने परिकारियों के सम्मुख पार यासंभव स्पर एमों में पोपभाकर बिपापके कोष से बचने और मापका मनुग्रह प्राप्त करने का फेवत पही यस्ता है कि जिन देयों पर पासन करते। पहा पपिक से पपिनोमाको ईसाई धर्म की रोमा।" हिनविषारपारा पनुसारईसाई बर्मको प्रस्तुत करने के प्रारमोगीम के प्रयलों को बहाना नही मिला और इसके बाद वो ईसाई मिघन हिन्दू विमानों पाप तनिक-सी भी प्रत्यक्ष समानताको मागमार मगरमगरकरने भने । पुर्तपान की शक्ति काहास परिषवपापग्रेज अक्तियों के उप पापात् व्यापार ही मुम्म प्रेम हो गया और प्रोटेस्टेरों को पनिकी पतिमिषियों सापसोई हमीम पी। ईस्ट संख्या कम्पनी अपने प्रपिात क्षेत्र में मिष गरी प्रचार मोबहारा नहीं रेवी पी।सब पूरोपोरेट वर्ष में पर्मप्रचारकी प्रवृत्तिमामी तो मारत में मिएनरी कारनाम भीपा मये । म संस्थाएं स्थापित हुई और हिम्पर्म के विस्य प्रकार इवना वीर हो गया किमाई मिगेको हिन्दू पम पिरोपी सारे उपवर मरने पड़े। रम्हनि बोर पाप गपरेपर्म पर मैन को मिला "हिन्दुपों को माप करके यो पटिया बात सिपो पाती है कृपया नहे पहिये। इनमें पसाई पाठक के मस्तिष्कका सन्तुष्ट करने या निगम रिसाने मायकएक भी गहरी होता किमी भी प्रकार मामही प्रस्तारिया पमा की माम मुनमती पती है मौर एक सम्पूर्ण मानव-नाति दोसपी टहराया गाता है-योफियापारियों में बन पा पेपर्म में मिपाम परवी है पीर पपने पर्म को सस्पना पर परिवास नही परती। क्या हमारे पर्म यही नीति है? १८१३ में कम्पमी का एकाधिकार समाप्त पाने मिसमरियाकरता को फिर सेबड़ागा मिसा। भारत प्रमगमगरीम मिाई पिस्वार स्मापित हर प्रौर ईमाई पर्म प्रचार के माममे में सरकार उत्ताह रिहानेगी। पावा पति

हिमगुरपाय पणाला परम प प मार
निमेशापासमामरपिारिमारनीय गरासिमपभोरमा
पोगोंय उमराममारेगामापीर मेयर मारगीर रातरीय
यस रोपिराला पार युग रहनामिनात
शानियों को गिपर्य पायपर बीमापार ren'।
मामायणमा परामावता ममममा पो मरे पुजार
पालना गमापर्ष हपार देश में मामी पगमे।मेरिकी
होते मागणपिणागे माप-माप गरागिपारि पीडाम"
पर्म परिसरात गाई पर्म पाग परमेाप पसारमार
मोप समारतीमान राषिरा नगपिता मानत ITI
पपिएमाली भारतीय मानता प्रमानाHomपित भारतीय
मामारिमा परमय पोर गृहीत मा मिसरामा सारा मपारय
bमाही मममप पर ही पाणगौरमा पनि
नियामों के बीर अरोर के भए पारितारी पिसारक ग्यास्तिर पारा ।
साई पम पर 'यूनानियों पौरांकार सिमाको पनि
पार उमापासीमामहामाना।
स्पातितो पा
भाल और मारपूर देणे मम-मे गा पारिवारिक समार
पौर पूर्वरों के प्रति पटापमान में परिपत विभागे पौर भारपायों में
कसारपर्य है शिम तापोरा पार बार पर्मी गिधाों में पापप पिमा।
मरणम पनीम पनाणियों मारपूर्व में और पर्म मे गम्मताको सिमित करने
काम दिया है एमिया की रिपाराको पाना दिया है महान मिर
पानीमों और मम्प एमिया की मापामों ममेत पने माताों में माहिया
गुगन किया है। वर्ष प्रारजातियों को जीप-मात्र प्रतिमा
पाने विशाल पर सम्म मामा है पोर महान सामुगम जिया है
पातीपाप्पारिमा निमामो मनोशानिः प्रीपरमाना मार मीनिमिपण
अर्प-मभीरता रेमिए पपायनित है। समय पूर्व रागनीतिक पनुमा ।
मारे छिया मिरा पूमि तैयार रहे।
पापोरा मस्तित सर्वप्रथम तापही एक ऐमा उपाप प्राति का प
पासuNTAINTAIT TIMNोस

पूर्वपीर परिषम म प्रान्दोलित संसार में रहनेवामे हम दोपों के लिए उपयोमी है। परिहमै राम्म काफाम मुपारम्प से घमाना जो प्रपने परिवारों को प्पयस्थित करणाहोपा पपने परिवारों को म्पबस्पित करने के लिए स्पर्य को मुबारना होपा पारम सुधार के लिए इसकी मुरिमावस्या है। कम्पपियस अनुसार राय की मुखि परिवार की पुनर्मवस्पा मोर राम्य का मुबारम्पस बासन हमारा स्तम्प है। कम्पपूसियस के प्रनुसार अनुसता का भोत म्पति ।पमतामा निगपास प्राप्त मकर पानवानी सरकार का पतन प्रयापभाषी है।' कम्पपूपियस मे 'बम' या परोपकार के सिवात पर मिसेप पोर दिया है। 'विस प्रकार कम्पबहार की पाशा दूसरों से पाप अपने लिए मही करते उस प्रकार का स्परहार प्राप स्रय दूसरों के साथ न करें।" कसपूपियस की सिमामों में अनुसार मन' का मतम्म है-मानपीय व्यक्तितप्रति सम्मान स्वयं पपनी तथा इसरो की प्रतिष्ठा की स्वीकृति ईमानरारी सहायता पौर मानवीय समवनाएं। पपनी 'एनानेक्स' (पारिक पर्ष 'साहित्प-समुन्धम ) में कम्पमूमिपस ने लिसाईकिपरमारमा बारे में मैं मौन ही पूगा। म पुषनहीं करना चाहता। सनका विचारी रमू-वर पूछता है "मरि पाप मौन रहेने सुरूगी तो हम पापके शिप्प मा मिर्त मौर किसका पालन करपे? गरवी उत्तर देते है “पया बझार बामता है' पारो तुप एक कम से पाती-पाती है और उन्हीके पनुसार सारी वस्तुपों का पत्तादन होता है, किन्तु पयानमार महता है?" 'परम पनिणामी पियर के पियामापों में मपनि होती है पीर म प ।' कम्पपूपियस काहानी पुस्प 'मयमद्गीता' रे स्विकार के समकम।' घियस कामपन है "मैं जामता विपक्षी उपसरते। मद्यमियो तर सती । पौर पधुरोड़ सकते है पिताक को मिराया राकको कटिमा मामा १ मरमर के परे में प्रश्न कि यो समशियम में का! RAT बाल पापं नाम जपमापी प्रभुत रोएसमय मुक्ति हो और राति बना में रिसामनेपाः यदि मम हो सो बम सेसको काममा पोगसम मे बान्न पदिय !" समी, गुग ने तिर रियाले TA मा वामनपरे मर शादा मेसी पोवास प्रश्न गान मे लागरमा गुम्बी रे रमणि 'पपातोकोतरा में माना-माधान मयुद्धी बिरहो। तिहामि रामा) विराम (गमन सी सामानमम 7 VIII नमान मापार ३ II 14 पूर्व पार मेलामे को दीरम मारामासस्ता है। शिम तरह 'मन' मारणोंबीच पा उनके पार गता। उसी प्रकार हमें भौतिक प्रपिणारा पापय म मुक्ति पानी ही माहिए पीनी पमान में मैनिकका स्पान मम्मानयना नही पाine प्रसिर बीनी बहाया पन्धे मोहे मे डीन महीनाई गाती पन्या पारमी पनिक नहीं बनता। खिर में पूर्व मी तो पायनिक मोहम्सापामा माफिनमान सपरिषणित पर में गिरास पा। अपर म्बित पर भय से हमें सुकम करने चाहिए, क्योंकि यह मरुधरेगना पना हरियमना पाटिया पौर पिरी बाहों (महा मामणीय दृष्टि प्रमफा एगी!) में यापा। बन रमे' ही प्रसन्न करने की रेप्टा हम परली पाहिए । 'यह पग्दा का पाहता परि एईसपा कता है। यह म्पाप मे प्रम पार पम्पाप से पा करता है। पुप्पी पर सारी रात उसी के कारण है पौर उम मगित मा उपयोग 'सी' प्रनुसार हामा चाहिये । 'बह पाया है कि राजा अपनी प्रसाद साप रयानुवाकर पवहार और मानव-मात्र परार प्रेम कर, पोंपिय समी मनुप्पो कोप्यार करता है। यह स्त्रियों को विषका पार पानी को पनाप बनानेरामे विश्वापों से पुमा कराना है। मोस्सू ने अपनी पिया का निपार बोरिया पर की पारापमा पोर मानव-माजप्रति प्रम-पहा विक पीनी लोप किमीम मत के पास नहीं है। इसीलिए मंगोपन की मभावना सर है।बीन की विभिन्न वार्षिक प्रणासियों में प्रपिक सीमावा पारम्परिक साप बामपहरमाई निगनरी पारीनी बोर धर्म के रिपन रा.पंगत मे निमा बोनी मोन एपमापमपूपियसबारी सामोपाती पोरमोटायपरस्पाइम पराजिनाईमली है। घरेनासमी पानिपगामियों में पाए नाव है। इसके पतिरिक्त पुष पोटे नमरों पाकला में सम्मिलित महिर है महा वीनों पा के वापों की मूर्तियां मिहामनोपर मार-सापानी है। प्रतिदिम कीपूमा वा पोत्री पर पीली मी मा पीपरेन् मदियों में हो जाती है कि विप प्रापरों पर मामाग्य पानी मोयममिरामा पसन्दरसे पर वेताप्रोषारीया और इनमे कोई प्रभार नही पाना परि पाप किमीपर गरहीम पार विप पामहमरमः समपूजीवन-यनकबारे में मामला सामो प्रापको समबन अनेक शिषित बातें मुममे को मिनापकर मोदीनेनाम रंग म मिमित विचार पविही सामने पाएमी जिसमें पगामियम सिवानों के अनुमार सुमे हुए पूर्वपौर परिषद प्राचीन पीनी प्टिरोष के साप पोर पस्तितवादी दर्शन मा पुषसा-सा मिय ही होगा। पीरन के प्रति चीनी दृष्टिकोनका पनिवार्य परिणाम है रियों से मुमित दापोवादियों का रूपन है “योपित मनुप्प कोमम पौर मुकुमार होता है मरम के पापात् कसा पौर सरत ।" इसलिए कहा पया है मापन पोर मस्ती मृत्यु के प्रेम है सपा कोममता और मुसुमारता जीवन ।'सगीय का निराप मुम। दुनापन परिस्थितियों के अनुसार स्वयं सामने भी समता । हम दूसरों पर अपने विचार मापने नहीं पाहिए, बसि प्रपने विचारों को दूसरों को समापित करने का अवसर देना चाहिए, पौर मपनी पारणामों को इसारा सोपन के मिप मा रखना चाहिए। पीमी 'मासिक पोसिक पारियों के मनुवारों द्वारा पुरोग पहल तो मीमनिर और गोल्प जसे रापनिको ने उनके मूम्य पोर महत्व को स्वीकार किया। १० धर्म में एदि पनाम स्वताता परिपामिक सिवातों के अनुमार पाभरणी ही पन्तिम परीक्षा समम मिया पास तो विभिन्न मतामुपापी परस्पर वितुष मनगान मासूम पाये परिपारख कीरिषि पर प्यान रिया बाय तो धर्मानुपापी पति परस्सर समान मासूम पाये। हमारा पर्म ही सत्य का प्रतिनिपि है पोर इसे म मानमेवाने माफिर बिना दिनाग पावरपाप्टिकोण पाप है। मोगर एवं समम में पासपनेबानीवस्तुमा के बारे मेहमारामान ममी प्रयोमा परपाम पौर मपूर्ण है फिर मी ईयर के स्वभाष मौरसार साप वो सांप बारे में हमें पलना विकास हो वह पापा की ही तो मात देवन मारा पर्मचाप या हमारी सरपा रोल निन्ति पीर पीरपायरीप गिता पौर पापी म्यास्पा मरने व उप प्रदान करने में समर्ष है प्रमार , हिमाम्न नपामगरमर (१९४१) १ बमोना िLXXVITRमका ससा म प्रार' Tur अंग्राममा ममी भी शासन प्रारम्भ बान गमन बाम में दानुग्गर पूर्ण मुभहूँ। मलने Naat गाह किमुपा मम सर कि माम्ना भामरेती भी 141 पानना (१) र (मन)।

४५ मात हरतारसूर्ण है। बात मे मैकर प्रारहामारठविभिन्न पर्म पनाते हे परमार सोयराम में समीके प्रति रिपो पार जीने मिसामना पासन प्रिया गाना पा है।१६पापर १९५१का पारित मारतीय सीपम प्रसार म यह पास है "अपने नाममाल से ही रोप्रा का पाप और पोषित मोति पीtti मनिरपेरा प्रमाननीय राम्पनी स्थापना हा निमम ममी पोकप्रति पारोशिमुरिसी भी धर्म सामान के प्रति पाराना पार गट रामनाम मामो ममी गावियों प्रपातोंकासमानाधिकार पोर पामरममा मिमा बाल मगरापारिपान इमी पापारमा मिशान पर प्राप्त है। ममी पप एक प्राप्यालिरप्रागको प्राणि महमारे मायाम पने पस्त सिमा पनि मा प्रप यह नाहिरिभिन्न माया गरम गाने है। हमाघ र पाप माम के बाद माम प मिमर पेट की एक साना में गोसिविनर गाती हो। मारतीय पमा में एकापिर पूरा स्थान नहीं है। उनका पागप नो हर तक पहनिप्रपात निरोपी चिन्नुसम्मम पूरफ मापाको पार-माप समझने का प्रसननकरके हम ममती लिपिरियापौर परमार पम्मी- विमारी मास्तिमा काम गरप मेवात एक है और मन्य से निम्भिर घले आनुराम मभी पति उमम प्रभारित हात । पहाइम बिपति पोर्चा नपरेर पाने । भारतीय शर्मिक परम्पय एक मरप का मानगाभ प्रत्यापकासोपारसी।मरपति पनि पार्मिक विपार म मही पाये। सपा कामानने परपामिर पदिप्मनाक कापारमा पो गामात रिप्रेमिनी कोई स्पाम नहीं पातरम वमनटिनाबारा मसिमी स्वातीनता बातीपतीपर को नहीं बलि उमरे प्रतिनिपिपाम भरनेशराने समूह या पपिगरीबी पूमा हती है। हर सवाईकागान नहीं परन् प्राधिकारी की प्रामा पार बम पाती है। - वाया HD मुस्कराम समाना दिनमा गुमा परिणत बानिय गुरोध सम्बकारे मन परे। नारा निर) पर। १. मारय ममिलान पर कि ' रामी मारकर यनिक चिमापन पत्य में में रिलीATAR पर murम्बरमपिक 'मरसिपीरिया मिीप मास लगे मारने, भाभप भने और प्रसार भरने का मन पूर्व पार पीएम पूरोपीय मामिक इतिहास के गावाबीन पौरभारती इस पारपर्यजनक इप्टिको समम नही पाते किमहो साम्प्रदायिक पतरों का उतना महत्व नहीं। स्तिमा पश्चिम में । किसी बैन कोपभी भी नहीं समेगापिरका पोसी पैन नास्तिक है, मिसे मनम्तमरकाम ही मिभया । ये रेताहोपरमेश्वर विभिन्न पोंमोतिसादी प्रारम्भिक पताम्बियों में अनेक चीनी यात्री भारत पाए थे। सनबर्मनों से हमें पता भगता है कि विभिन्न मतानुयायी एकसार बैटकर पारमा पौर परमारमा के प्रश्न पर पश्यिा करते थे और पिभिन्न पमा बमम्मी पिपिपरिधानों में अध्यापन करते थे। सम्पूर्ण मानव-जाति की पारमा का मात्र एक गम्य है प्रप्तग-असम तोप पमप-ममम म से उमे प्राप्त परला पाहते हैं। पात में बहुत पहले रो मस्पसस्पक पहरी सीरिवार साई पौर पारसी मार-पास पप्प प्रमाग है कि मारत में पार्मिक सहिप्तानी भावना तमावार कायम है। इसका पर्प यह नही शिपिका को प्रोत्साहन मही मिमता। प्रत्येक परम्परा मत सिगन्त मिमिन परों से बना एक पाकार पार इसमें परिवर्तन प्रान्तरिक मिराप के कारण होते है बाहर से सादे नही पाते। विभिन्न मत पठापियों की धि परिपाम है और मैतिक पारणे हाय निर्मित गातीय गुर्षों की मिट्टी में उनकी पापाकस्मिक परिपतनों का परिमाम भयानक हो सकता है रितु दूसरे पार्मिक दृष्टिकोनों का प्रभार एस प्रकार के खमारा काम पर स्वामा निए परिपर्वन परता है। मायमी मंत्र में निषित किमासरों को भेर पर उन पो द्वारा गित गोष तक पहुंचने का सवत प्रयास प्रत्येक व्यक्ति को करना चाहिए । बामपों से सन्तुषि ही पार्मिक पीरम का सबमे बहार है। मार पर मिनिम्म धर्म सामने-साममे पूर्वीय दृष्टिकोनासी बात पर पोरण किका स्पान दूसरे पहन किया जाना पावश्यक नहीं है। परि हम पाप्यारिमा पपा पार एतिहासिक परम्परा में वियर कर मोहर्म स्वीकारला होमा कि मानवता के प्राप्यास्मिक जीवन पीपगरे मिय विभिन्न धर्म समारमापूर्ण कार्य कर गाते हैं। भरचार और पानी पिला-संस्थापों कीगहायता मेमारल पर मरमी मरानि पापने परिचमी पापिसा प्रयत्नों में मारलीप रमता निधनामोप रिया पर मालीम ममारी मारमा पामोमित पिया, रितु महराई में पेटी भारतमीरीपापीन परम्परा पर पपि प्रमापनही पड़ा। मता पर हानेगरी जमरों को मुम्प प्राररारमा मरी गमभावामाना। मगुप मारल में माथीम पर्मा पुनरपान पा है रिमरा पापार मेरों पूष है गरी प्रतिमा मम दिनुपम की मिशान्त-पी प्रम्यान य निर्माण सरनेमामे उपनिपर, मगपामीना पार गम मम्मिभिगमपान गप {test-१०) में प्रतिमहिनुपर्म मुपार की प्राणा टपमा म पाई। दयानम माम्पती को गानि-प्रपा प्रौर प्रथम्पना में मुन पारतं मार्प मपाका प्रमाण पेसामा में मिमा । श्रीमती एनी बम मेप म पिपामोठिाम मोमापटी मेममा प्रमनिवास पर माननीय प्रति प्रगत दी। पाप पाम्बानन मे गिम पनुरारिराती मया पायाम हिमपर्म के प्रामारिमा एवं सामात्रिक पा पा पार रियायमा मरिभिन्न पार्मिक मागान पप्पपन किया और मसी पाकितार प्राप्यामि अनुसपना को उरामरन्सिा पास गपापानिपा पी प्रविण और महाया पापी ने एक पुनसणीवित मालाप नमारकी पापना के लिए मारपीनाका महारा मिया। हमारीनारियों के भारत के निवामिया में नमति का निकम्म पिपा मोर उमे मिनर कापपला। यह कोई मा रिचारपारा नहीं मियापित प्रक्रिया है या परिपतनगीप परिबिनिया पनुसार सम को कामना परि प्रपिनट होली गई है। विभिन्न गातियों के दिमित मापा भाषी सपा ममम ममनियों मोम भारतीय पनी पर पिरेपौर ममप ममप पर हुए मपोरेगावर ही सम्ता मरम्मों के गप में पन भये-मी मम्यता मिमा प्रमुख पुस । ममी गोपारियामपस पस्य पातपिका के प्रतिधारा प्राप्यामिक मनुमनपा महल स्किा पौर मिशनोंदी माधना रिम्पो पनि सपरनमान पोर प्रत्यय पिरापों को सम पर पीपाला। उनके पारणाको प्रकिाम नहीं करनीपत मप मम गाना गा मा पूर्ण मानाला की प्राप्यारिमा प्रापश्यमाों को पूरा कर ममता है। मन पुरान समय में पा कि मुमेर दान में पापरही कोपर्म पा मम्याप प्रामा पासण ऐमा हो निम पालमपरमपियाहो फिर भी मालकी माला पारियनित है। गांधीजी र गरिमामनिया पा "ममहीपालाहि मरेपरपारी पार एक पर उठा रोपाए पोर गिपियों का समरदिपा पाए। मैं चाहता पिपार्मर सबठापूर्वक समी पा की मम्मति मोर के पारों भोर मारानी में । मेणियह मिलिािमी महति मरे पार नहीं गया रोगी। इमरी संसानियों में भारत को प्रापिठमा पराजित गी।

पूर्व मौरपश्चिम पूरोप के समान भारतको प्रमाता भीप राष्ट्रीय प्रान्दोसनों में नही बदती है पौरहर असम मापा वामे पत्र में स्वतंत्र रारनीतिक काश्या नहीं बन पाई है। इसका कारण है एक प्राचीन संतति की मुवृष्ता पौर गहरी-सा की पायी पता मे मुमतमान पार पठाही घतानी पार पूरोपीम -प्रमाण मारत ही पकेमा ऐश यहाँ मदिरों गिरो पार मसविदों का चाम्तिपूर्व सह-प्रतित है। मैं ये हिसू मन्दिरों पारियों की प्रार्थना समापी बोर मों साई मिररी पौर मुमसमान मसमिदों में मापपाइपौरनतो ममे मपनी बौधिक पापम्मता साप कोई समझता किया है पौरन अपने प्राम्यात्मिक विलासों को ठेस पहुंचने री है। पसपावहीन विदेश की प्रवृत्तिमारत की पार्मिक परम्परा में व्याप्त है। अनेक महान प्रारमामों के प्रयत्नों से मारतीय संसविका निर्माण हुमा है- उनकी पीलापो से चाकार रठापौरक्त से निर्मितहमा है। पवादियागोतम के साप-माप उसमें मिट्टी का रंग मिम गया है। मपनी मम्मी हि सारे पार पार पम्ये उसार मौजूद है। यह प्रार्पर ली है पौर विकभी अपने पिरोपा भासों मे हमें दौसा देनी पौर विनापी बीवनी पक्ति ने मोह मेती है। मारत मेरा किराती रामरामीन संसठियां अपनी प्रदमी पोती की ममातियों को पमह रेगर मिलीन हो गई फिर कुप मगीन संस्कृतियां भी मुप्त हो गई, पितु भारतीय मसविफिर नी बीपित है। उनकी पारमा के पीपक कीमो कापी तो पी मिमी कमी नहीं। मानसीम रिकारमारा निर्मम सरिता महीं है सापारपत उसमें सूर मिट्टी मिमी होती है पर पान भारत में पापी मिट्टी जम गई है गिने हरामा पापायक परिवाम पूर पैसा है। प्रान भी बहुत सोग भूत-प्रों में निवास करो है। यहां पर सिमिथित भारतीय भी मपनी मतिमी प्रतिको उमरी उप मम्पियाँ पार गमावनापोंगो मही गममते । व्यवसायमा पन्तरामेपपातियों का प्रहार मिया है।सारित पिपानाम पति पर पता को पाराम मोर पुति मानते है । प्रने मामागिक रीतिरिवार कापमहासाफिरनमे जीवनमा प्रभार मया है। मेदिन ये पोषमीकरी नही है। भारत के पार गापनामा पाप नही है। भारत पार तभी पीरित ए पता है पर यह पान पाना मा प्रतिनिपिरमपरासी मस्पामों से मना कर। पमेहमस्पानोपहियामी बीदिन मागीमीपाराग प्रतिमा--मररह गपारमा माननापाको पुनः पीपन नगन पिपापा साहा। मान पावापावामारा पानी ही प्रतिया मोरगा।

दिलीप म्पाम्यान पश्चिम (१) - । - १ पश्चिमी संसति पश्चिमी मगति को पौर मिशनो के उदगम यूनान गेम पार रिपि सोन है। पूमान म मपीभापा दृष्टिोम पयाण-विपिपा मोर सनीतिक मिसन मिने। पर्मनिरपेणकापून मीर म्यरम्या-मम्मरपी नियम रोपनी देन। गररमार और सिर निरंगानुसार पापरण करमेराम मंदिर माना शिकार सिमितीन परत परिमो परमगरे तीन प्रश्यात-रिपार पनुपालन मीर पापा। पितु पूरोपीय विशारीरिमी मी पबम्पा में इन वानों का मार्मरम्य स्थापित हा मुमा एगा नही पहारा मकना । पान मी में पम्पापी मनुनन में ही है। पेम्स पे पुराना मौत के मार मार दिया और रामपाका कायम गया। गेमकमातुन में सौ मीगरों और सामान्य नाग तिकी सानियों पर प्रतिस्प नही मयाशा'मा भौतिक प्रतियोकी प्राप्ति के मिरा मपपोम | पार पणनीनिक मस्पापा की माता पर म्पसम्मा-ममी सिमान मागू परमेरे प्रपल रिफर एपौरपान हारा नियगिन मापौम ममात्र मार्गानुमार पापान में मीम मम्ममा मही मिनी --ौर पर सपा पिता की पपियो गी प्राणवार्यो के बाप सराम है। पूनान फिपिलीन पीर रोम पर पूर्ण भरमन प्रभार पा । एमिया मार गर पौर मिस की संपनियों म पूमान नमान छ महप पिया। ईमा में पाने की पनामियों में पानी-मंमार में पूर्व की भामिक पन्ना पिपईटी पी भी मिप ममापिका रमारमानुपामार शिपार को परम रिया माई पर्म में अपमे मार में पूजामा ममिया मम्प्रवास पर ममी मपाकाठान तिमा निर्मन और मंगात पाश्मण कारिो की रानीतिक मौरमिक परस्पामि के रानीतियटनको ४८ पूरी पौर पश्चिम प्रमाणित यिा। परवी इस्लाम में स्पेन मार एटमी से होकर, पश्चिमी संसाति को यूनानी सासविक विरासत का कुछ अंध पुन प्रदान किया जिसे पश्चिम रोमक साम्राम्प के दिना मे मूस पैटापा । पपने मनुसंपान और पपरेराम से प्राप्त मगीन मानिक सिमान्तों को भी परगों ने पूरोप में फैमाया और इस प्रकार पुनरुत्वाम पार नामापति की प्राधारभूमि प्रस्तुत की। २ पूनाम मोर पूर्व ऐतिहासिक प्रथमा सास्कृतिक पर्भ में पूष और परिश्रम की पर्वा करते समय हमें मापातिकमाम्यतामों का विचार त्यामना पाहिए । पचिपी सताम्ही ईसापूर्व के मूनानियों मिए पूर्व या एसियाका पर्प पा फारस और परिचम पा पूरोपमा पर्प पा प्राचीन मिपुर यूनानी (सेनिक) संसार । भापा के जन्म के सम्माप में हमारे विनिम्न सिराम्त है। परी परम्परा के अनुसार पापम ने पन्तुपों के नाम रते थे पार विभिन्न मापाए सिर की देन पोकियोम की मीनार का निर्माण रोक देना चाहते थे। मानिकों का पिपास है कि मापा का विकास मप हमा पस्पष्टसर पोर हापमान समय मापीय तत्वों म बरमदे गए। पन्य मोर्यों का मत है कि मानर में प्रकृति में पो पनि मुनी उनकी नकल की पौर इमीसे मापा बनी। पापा का पदमम पाहे पोहा सम पभिम्पषित की यह मक्ति है गो पमुों के लिए पुर्मम है । भापा के माप्पम सही विचारों पादान प्रदान मार सहयोग संभव है। यह सिौ मी मानप-ममूर में पाया पानपामा एक सामानिक प्राव है। माय से ग सो साम पहले पब सर पिसिपम मोन्स वैसे यूरोपीय प्राणियों में पूरोपीय पिहानों को महसत से परिचित राया तो पी मटिम सपा प्रम्य पूरोपीप मापामो साप उसका पनिष्ठ समाप सपो मया । जिस प्रकार फेंग इटाप्ती पुर्णमाली कपानिपाई पौर स्पेनी मापाएं अपने पम्पोप उभा रमपौरपानयमिग्याम म परस्पर समान है उसी प्रकार मरा पौर फारसी, मामानिया सम्मानिया मापानी भाषाएं, प्री मरिन सूटन मापा (मारपी स्लोग्नी पर्मन पीर प्रमा-गमन) तपा टिप मापाए (येस्मी धर्म मौर मैमिक) भी परम्पर समान पाय सभी भापार किमी ऐमी मूम मोमी में गमन मि इतिहास के पनी पुरा में रिमी स्पान के निरासी गोमा कर पे या में परम भिन्न बोमिपा है निर्म रोिप म पार पमानना भपिक है? पपा पे भापाए पर दीपोती रामर पिपरने है का परिया एकभूपरे परिषम (१) में मिमती एक ही पेन्द्र से प्रसारित बोगियों के निरन्तर प्रवाह' जैसी है? इनकी पाम्या पाहे पोहो मापापों की समानता मे इतना पता तो मग ही माता है कि पिसिष्ट मानव-नातियों की प्रर्षभ्यवस्था सामामि संगठन पार पार्मिक विकास किस सीमा तक परस्पर समान थे। महल ही मस्समा की बा सकती किम मातियों में एक निश्चित मीमा तक स्पानातीत सम्म स्थापित बा। वहाँ से हमें मंपिक भारतीयॊ पोर होमरी यूनानियों के इतिहास का पता है, उस समय में सामाजिक विकास की मपभय समान अवस्था तक पहुंच चुके देती-बादी विकार और मघमी पकाने की कमानों का मान बोनो कोपा। पोहों का सामाजिक महत्व था। पहिया पहिये की मामि' 'पुरी 'युमा' पादि पों से पता चलता है कि पहिसरार माहियों का प्रपोग हावा पानीकामा और हारा पल-परिवहन प्रमाणित ऊन कावा-गुना बाताबा। सामाग्यत पत्पर के बने पौगारों पर हथियारों हपार्यो कुम्हाड़ियों और वीरों का प्रधान पायाशात पा। कबीमे पिता की परम्परा में चमतये सासन सरवारों पौर रामार्यों के हाथ में पा। प्रसर सुरसा के विचार से गोर्चा पोपहारोबारी से और दिमा पाता था। एक पाकाप-रेयता (ग्यूपिटर पपूस पेटर, चौस पिता) की पूगा बसि रेफर की भाठी पी। ये सभी नाम प्राचीन 'हाई गर्मम' माम 'गि तपा प्राचीन मार्गी 'टापर' एक ही पातु 'चमकना से रमून है । परन समाप मौरानॉस' मा उपस् फारमोस । पुरासगरी में पर प्रपृपाप गुरागा प्रकाप पौर दीप्ति के पिम्प देवता पस्थिनिकुमार 'गमो समयूरी रिनका काम पा देवतामों की रक्षा तथा मानों की सहायता करना। । मोपियन म्हरिटेन्म (१५५४), पर पूछ । १ प्रोसमी पावसाने निati"ममा ममान करत प्रता-से और भारत में रहने और परस्पर समसमा बासियोमबार भवानी मला विमतीसमान मात्वा पर परम पार पास और पास मे समान राबायपारिवारको समान से नभाल्भारपसावितिक परतीच मौर होमगानी समुप मते है। प्रसव पीपुष मनिषा आपस में सने पप्स राहीही सिम्पर पंचर संस रोग भौरम्मरेनिमसमात्यो मामि मनोन संवाद ही होगी। ही पालिटी को रोप की सासे परको लिपि और प्रति मात्रा वास, भए म राम में सेट, मलिभानिमार माप्रमों से भिन्न समवनहोसयविपिसको कारमा प्रा एक्ने से पाने दोनो मौविस प्रनालिसान भरपर गति से प्रासादो मोगी पफ४।

पूरा घोर परिश्रम - पपेस (कामरेब) हिसियोर के देवतामा मे प्रथम पे।' पेरपौर होमर बोनों में पाकापीय पिों की पूगा सापारण बारा पी। वैदिक व प्राति नियम यूनानी 'गार में रिचमान है। यूनानियों का प्रपल परमात्मा को इसी संसार में तोरने का पा । वमरे धर्म में मतिमी पत्यम्त मात्वपूर्ण स्तिो पौर पर नामों को समाप मामकर बवापो केम्प में पूना गावा पा। इन समानतामा से पता चलता है किनरो मानपनातिपो-प्राचीन यूनानी पौर बरिक भारतीय में परस्पर सम्पर्ष परस्म पा होना वपपिरोनों में से किसीमो उस कास की याद नहीं है और पारसी सामाम्म में मपरिचितों की माति मिसीबी। मूनानियों को मिली प्रसीरियाई फारसी पोरगी सम्पताो कमरे में भी मासूम पा किन्तु मे रहर मानवे पे पोंकि उनके विचार से समत रिसरातों के पापार पर पीवन नहीं म्पतीत परतेपे । मिसियों को पब मुरवित गतने में पान प्राप्त होता था। मसीरियाई मिने-पड़ने स मनमिम पे पौर उन देवता माये । पाइदियों की प्रास्मा पनुष्ठानों में पी मोर पारसियों को स्वतन्त्रता का पर्पता मही मासूम बारामूनानियों को सपना पापापमों की दुनिया मे ये ही परेमे समसार सोग है और हर एमम उरई पापमपन की पूत मग गाने का तप है।परता मारवाय तो उनम मिए सपमुष प्रगती पा-काम बाहर मे नही भीवर मे मी। अनेक प्रबसरों पर पूनानी प्रपने को मिय पौर मेसोपोगामिया की प्राचीन सम्पनामामा शिष्य कहा करते पार-नानियों का हग यूमानियों पर कार्य पा नितुगसे पूनानी दुटिकी मोमिषना म कमी नही पा पाती पोलि दूगरों से प्राप्त निवारों को पाने माना अनुसून बनाने की रिया म उनोनि उन निताराका काफी बदम राना पाहिम याद में देपेपिर उन्होनि ईमा पागों दो पहन रिया हो र पपने म्पहार र धनुन बना लिया। मूनानियों के बारे में जाने महापा 'हमें मान मना बाहि पूनानियों ने यो एप भी पूमीवानियों मे पदम पिया उम पम्पत पठार ही बना दिया।" मटाने ििमपम में मिगा प्रिमियबानी यूनानियों कापा गममते थे। प्टो नि ममार पननोग्मुग रिना मजीवित इसलिए मियी मेस्सी । 'मनपर मादीमामरा प्रमानिक प्रेम। जमिम ।

पतिम (1) पापिणको माल मानते थे।' पिरामिर मानव-मालिनी महाम। पमा के प्रयास प्रिमियम तपा नियोजन और पार्यगुमनाबी पीलीय उप सपि । मियो मन्दिर पार भी मीमनीपानीमनम निषामिपोकी विर में पास्पा गवाहोरेप पप ।। तीम पारिश में भी प्रशिक ममम मे सामर मै पुमा होनीपाए है। म ममम के मार-मार नाम बरतने पा-धमन ईमा पम्माह। पूना मत परिणामेनागी भावना पार मी उपस्थित है और सहस्राम प्रारमी समाही पपिईनिनाईमाम पग्रहमा रामे पापामार मार पाले मिसवासी मतिमदाबार के नाम मिसाला को मानने पर सम्मु मे पूर्व हर प्रीमत मिपी ने नार्को पार गहयोगिया को पिचारिमादेना पाशापारि उमने मैनिक भास्पामय जोबन पवीत किया है। भाने मृत्यु मे पूर्ण के सपा मे में मारनार यही हो कि जीवन पर सहाय स्पानुपार पन्दे पडोसी है पने मपणापा बराबर हो विपनामा को भीरियापारमन पोटेगो में मेर नहीं किया। समी पर्मों के समान मियभी 'मृवर सुस्तक ('गुरु पोफर) मे मी प्रपन बिपिट मी में मापार दीपिभिष्टयाबारे में सिपाहै “मम रिमीको रोग का कारण नहीं दिया। मने किमीम कोरपूर राव नहीं की। मैंने कमी म्मिोकी प्राप्ति मही विपा मम्मी ग्यार और सत्प मे मरेपूर धमों को पनमूना मही किया। . उन प्राचीन भामरामसिरों का मदन भविष आपकाएक नपान पापियाकरताया। पुनानी मापी रमन और साहित्य के लिए मिमियों के पामारी। कहा माता निम्म होनन पारमारिस मोकरमामाटम पीर बटर में मिप की यात्रा की पी पीर मिमी पुरियो में गिटा प्रान की थी। इस पिकोषका ममुनि तिहासिक प्रयापनहीं है। फिर मीतमा तो मिति किपिप और विसोनियापन पौर प्रमान में पनुपरित होमरी पुनानी साहिरिया उपमम्मियो ममरा सी पी। मेलन-प्रेमी पौर मेसन-सामग्री के २ सम्प्रती मनिन्दप्रयम में गो "म मममम में मुझे पनी मो-यो प्राईम परमेशमा सेक सपन पाने पर भी प्रमा मातमना मेरा साना परत , "बोलित पर मी होनेगेाने राम मरमर प्रयास करत -माने पालिन पूर्व पार पश्चिम १२ मिरा भी यूनान मिय का प्राभारी पा।' यूनानियों की एकाम्त विधपता बी मान-सीमित म मास्पा। मामे मैतिक और पार्मिक दृष्टिकोनों का ईमंगत प्रापार प्रस्तुत करने का प्रयास हमेणा उमामि दिया है। उमरे मस्तिक तप्रधानप। मामय विचार पारा मेष को सीमित के यूनानियों मे सत्य के स्थान पर तई और प्राध्या रिमप्टिकोण स्थान पर शामिक दृष्टिलोम को स्थापित किया। यूनानियों पर बरी का भेदभार वर्गगत या पातिमत नही है। मेव है मस्तिप्प पी विपिष्टता का। पूनानियों को अपनी संसनिकी पेटमा में मपाप विश्वास पा पोर तुनमारमक प मे ये पानियत मसहिप्मता मे मुक्त पे। यूनानी संसति कोस्वीकार कर मेनेवासे बबर यूनानी मान लिए गात । उराहरगत' सेंट पॉम मै यो परवी परिवार में बम्मे पोर पर पे सारे यहरी अनुष्ठानों पौर पृपक्ष की भावनापों को त्याग कर पूनानी मसतिको स्वीकार कर मियापी भाषा पौर यूनानी बीवन-परति अपना मेने पर प्रवीन बातियों को भी नागरिकता और सामाजिक समानता के अधिकार प्रदान कर दिए जाते यूनानियों की दृष्टि म सत्ता पोर ऐश्वर्य प्राप्त करने मे ही पधिक महत्व पूर्ण पा मानसिक पतियों का विकास और उपमोन। के यूरोप के गुर। प्राति के प्रति नसत पौर नगनामक एपिकोन रगती रिमेपना पौ। उनकी रप्टि में रान पोर विधान मग एक ही थे। उम्नीमरी सनाबी प्रारम्भ नका 'दर्शन नमबह सभी एप सम्मिलित वा पिसे हम पार विमान पसे।। रन का गाय या निरीक्षण का हमा-मा पुर र परपरमम्बर विचारों की एयता उपस्वितारमा ग्रिाम म यथार्य मिरीसम रामनुपात प्रपिा होता है। यूनान : मप्रपम विगिष्ट पानिक पेस्म (५२५-१ ईमापूर) ही प्रारम्मिा ग्यामिति पोरगगोपजमादामरेममयईपपरामर मौर हानिक भी ये सिरहाने पानी, हमारे नियतिमापार प्रनिरिवल तर , मानपान मे रामपामायती राजानी मारित पार एप मारामारणारागारनियर पदी र मोही मपित र यता मामें इसममोम बीमार होनसामसापीरनाम मेमा मिनसिप बोकि बानो चारप्रभा साबमाचमें गमान-मीमा tim) Trimmनगन weatm परिम(१) पो मम मानकर मसार की प्यास्या करने का प्रवल पिया का। पारपानोरम (२८२-५.. ईमापूर्व ) एक महान ममानिक । मपि म म्यवस्था और मागत्पम मिठा पारिपार करके उन्हाने पानय को मारनारमा प्रतिमो समनुष्ट दिया था। पपने ममयोग पिग प्रमर रस्मी मी मम्बाई का मनुपात पौर योमाकार पृष्पी रिपार ग उम्हाने मिररिया मा नियमबर मन में काप्तिक मालिकों के ममान पापागाम किसी मिटान मोगारमीनी बरन निपनि नराम मुनिश्चित सम्मों का नियमो परर रिमा बमों में सामयम्य उनसे मिल काम्पमय विम मालमहीमा पोरासमे उगा सन्तोप पा। एनामामारम (१०-१२ मापूर्व) में मप मापनाती' पपगों ने प्रपप मिसाना के स्थान पर मस्तिपरपोषा। सनि गापर समार के कारगम्मर पर पगोपर प्रथम निर्माताप्रनिगमाया। पसारमी के विकार पर मिटा १२-13 मापूर्ण ) को विपात देतापनी मे मभितो तिनो प्रम का पता ममतर है। यूनामिरों में सर्वाधिक प्रभावामी मानिक प्रास्त (३८४-३२२ ईसापूर्व) को पनि वापर एक प्रपोजमीनरादिर ये पोर तप्यों को एक सानो समस्त या में मस्पित करते । मसर उन्हें माधुनिक विमान का बनु कहा जाता है। रगोन वर्षापास जमिशन और इनस्पतिािन की प्रामाशिमाए ली। उम्हनि मातिची काम्पारण मनोविशाम परिस-जान पगोस भूमीस मीनिमारपपार रामनीति पर सपनी यमाई नगमग इसी समय यूनानी पोपप-महान का उदय हुमा । परिषमी मसति का विमान में प्ररित करने का पर यूनानी सिालों को ही है। सदर ही परिधम को बौदिर और मरिक पतुणाम प्रधान प्मिा। यूनानी तोपोस में पनुपात समम्मय पार पाप के प्रति वापरतापी। प्राी सायपरक कवियों को मिपक्त पाने की मापारिनी पप्पी को पूनानी कमा सहाणमिमा। मानो अनुमों और पौधों को चित्रित करने में मानिने नेपानी कार्य अपनता मगा। मानी जापग्य मापा-मे भारतीय का दो किसी प्रप्राप्प किसी पुरस्म भरने से ऊपर पिसी तक पहुंच सकने में प्रमनधीम की नुनमा में प्रषिक मानवारी। किमीम प्रामीको हैसियत से प्राप्त सम्माम के मिए मापश्यक है कि मानर अपनी परनीतिक और पार्मिक संस्पायों की मंगल पाताचमारे, राजनीतिक क्षेत्र म पूनानियों में सब वियपूर्व पबम्मा स्वामित करने का पल पूर्व पार परिचम च्यिा प्रपितापाव पिस्ट क्रान्ति की प्रौर मे समाग को मार किया यो प्रपनी सामागिता के प्रति माग हो पीर स्वतंत्रतापूर्वक प्रपने कानून स्म बनाये।किपीत नामरिक सतह पार सम अपने द्वारा मिमिक कानूनों से नियरित है। पश्मित पापा को स्वाप से हायपोम होने से रोकनेपाली हर संस्पा से यूनानियों को दिए पी। उनके परक्तिपूर्ण परिवार ही यह परिणाम पाकिस्थानीय सरकारों को प्रमाणाप्रम्य प्रभावशासी राज मीतिर संस्पाए प्यापित करने पर वाहें पनाने मे सफल नहीं हो सके। फारसियों विम मुरम पूमानी एक एकाधिकारी सपाट की प्रमीम भक्ति के रित प्रपनी स्वापीमताप्रति नागा स्वतंम्पवितोंडीमियत से का। पूनान का पिकास वास्तव में 'पोनिम' (मगर) का विकास पा! पूनान मारों का समूह पापौर प्ररपेड नमर एकस्यापीम पूषा, सम्प्रभुताप्राप्त राग्य पा। नगरी में परस्सर पुर होत रहन पार मगरों के भीतर पने पयामक पप-मपर्प होते पे किषी सरी ईसापूर्व में पनास सीटस ने पशुपसि पिर नयरों मेनापतिमामि लिखी गई नियमावमी में पागाह मिया था कि पाहरपनाह पवार परिवन खतरनाक हात है ग्तमे ही भीवर भी। दुर्भाग्पका यूमानी सोम पारिकामीन समानकी पुरीतियों से राजनीति पौर मपंधारण का बापनेवामी सीता मही सके। स्वाधीन पूनानियों में। भारी मप्पा में गुमाम बना रमै थे। पूनानी पर रापो कामपनी निमुसता काम्पास्थित ने की दि माम नहीं दी। उठकर पूनानी राप्रपी बाप तम छोर राके में सेपटित होकर एकराम्प का निर्माण मर गये जो मसी ममस्यापी को गुनमा नाता । मामय प्रति प्रलय विहाम पर पार पोगा मगानेनामी चय रापपारिता पूनान की ही देन है। रिडीमला मानवमा पोर नामरिक मुम यूनानियों को विशेषता नापर, एमा"मम रिस्टोपन पेसापीर प्यूमौसम प्मरी पौर परतू निर, माइमोनार्म पूमानी मानगर प्रतिनिपि। राराट पूमानीमा पर मापने एमापण ममाम करत पूमाती लामाकी मपपरसरी निपामारों पर मशिन सामी मारे #रिपन हमरमपदमा रिया पा 'पारामा ममतत पाना पौर निगम मुगम गनेगान प्राणिमासियों माना उराग गपमुप हमारे पाग गापा महिमा सनित गोर पानपोरन पदिषम (१) पार पान-पौर फिर भी इस मुगीन पे हम रम परने मिए जीवित पे पौरप ममी को प्रसारिने थे। म मपे नही पौर मोमिए में पिन होना पड़ा" शिममी ममस्याएं ही सामग्निफिर मी सी पुटिन हालीकोई भी पुरिमाम पूमानी मप साडा वा मापानापिया पुटके पारजिता मार रितिरोमा ही विमी पपा हामी म पागप । किम्नु माना-मनापही ऐमा दाम्म पौरम्पारण नही हो पा पोर मा माई पीता समान सम प्रारमियर्यो पोर मर मियायामोहमा। नाममम्या प्रार हमें पामान मान्म पानी है मीना ममापान यूनानी नहीं प्राणमा गह पौर परिणामस्थम्प मानियाई पार रामर पसियों पार्टी और पिम गा। पूनानियों के बिना कागारम पा ममी ने दी पयाम्पना। ग्म मुग में प्रम्पका की परम्परा का प्रममा परनेवाली इमरी ममितिया पी। पारो सिनि भिन्न है । सामूहिक विभाग के प्रापुनिक पायो म पुरका पर्प यदि यह मही हरिपुप्पीपर सम्पूण नीयन पापिनाराहा गाए तो मामूहिक पारमहल्या ना पाप है।प भारनामों में उबाम पाये लगतामा पान्ति की रमापिए वन परिपार्मों पी रुमगत प्रामका पर मरोमा नही रिसा या माना। बिदर मम्मित पर प्रनील पामोम प्रभी मी भारी है। एक हो पाने की परस्पतामाहारन मान की कमी मही है, परम् मापाती ननिरवा पौर मसापना की कमी है। परि हम मन्त्री कप समझ में मारे मामन रोहा रास्ते!--पदमावनापाममूमरिनाम-पार पप्माणमा के लिए प्रयत्नपीम बन तोहमार पूर रेबना पोपरिपाई पनामा ममान राम नहीं प्रत्युत प्रमल हो। यूनानियों की पम-सम्माची पारमा मामन की पूमा पीर परपरागत मी एता तरी मीमित नही पीपारिकाप में पसी प्राणी भावना मे बिसयुम पमम एक भावना ने गगम लिपा एक पाय माप' को पासामने की ममः घनमी मर्मसार के प्रासाकारों में अपप एनसीमामा बागी। माम्पता प्राप्त यूनानी रग मे रिणाम पपग पीर पनिपदों रिपनने समान यह परम्परा पापी पार पस्यूमीनियाई एम्पबाद एपीसोर (५.... मापूर्ष) पारपागोरस पोर मेगेम रिचमान ईम्पा मे समीपुनसम्प-मिशास्त परम उन्मामन से मारमा पधारमा की मनमान निर्यामम-स्थिति पार तप-माय बाप मात्तिकमा पारपरमानन्द दी मूमपा में पुन पहुंचने की ममारमा पर विकास परम परम्पय पीर उपनिपारिवागेकी समानता म यह पर्प नहीं कि उनके गमों में भी गाम्य ।

पूर्व और पाचन पस्स्पोनियाई हस्तमप समारोह "दिमीतर' पद 'बीबमारिणी माता' के सम्मान में होते है । सर जॉन मायर्स के पनुसार पूर्वी भूमम्पसागरीय प्रदेशों में दिमीतर की पूजा 'उतने ही पुराने समय से होती मा रही है रितने पुराने का बान हम ममिसोमवमा स्मारकों से मनवा है। पनामिया की प्राइभारतीय पूरोपीय संसति पर मापदे गए सर पोन मामर्स ने कहा मा भगता है कि पहा कही भी उस मसति ने प्रपए किया मरे-पूरे परिणामी नारी मूर्तियां भी बहा पहुंच पाई, यो मायर उमसे पनियतापूर्वक समन्पित दी। इनसे समी प्रावि-पुरा के प्रकार का पता पमता है एपिया की महामाता सम्प्रदाय उसका एक विशिष्ट कायो भारतीय-यूरोपीय पर्म के सभी प्रनगर रूपों में पाए जाने पाम पिता-रेवता बिनम विपरीत।" 'माता देवी पौरों पन्तुरो पौर मानयों को भीवन पौर समृधि प्रदान करनेवाली फसवती परती की प्रतीक है। इसके प्रमामा गपनीसिमापिस होमर के यार के समय मे पास से गिरेगी भाषामाकोशीतिमाम पहुंचा रहा चपा काफी पिरोप हुमा। इस धर्म में परि पातीय मामोर प्रमार नस्प-तास का प्राधाम्प बानिमास श्मिा पाता वा इस मनुपापिया के विरपर देवता ' मानिसकारण मात्र के लिए, मयामों पुराण मात पार नृत्य के प्रभाव मे पूमापन करनेवाला स्पर्म को मापने मेगाहर एकसी स्तर पर उमामान समझने माता पारापनीसिपस परमो स्मास का पता था और उसका समारोह रात्रि में होता पापौर सियासी उसकी सबरा पपिक पौर सबमे निषिष्ट अनुपापी की। इस समारोपापन्त स्पर्य में एक अनुपम पारिपीवर के पति होमर की स्तुति में कहा गया है “भाम्प पानी रिमन इन बीमा कोरेगा है। पंसी पर्या बागान है परमास्मास तापरलबिा पपी मोग भारतीय दूतीय भाषा सामने पे पार रनका निमाम मामामा की पाएमा पनियायव कि। मॉरिसम का पन्य पाहे मोहा ही पूनावी इविहाम में सामान एक गमर पोर पुरत है। उन गित संकलन पौराण मिशान्तर उसरप पटरी से धोपी तापी ईसापूर्व भीरपनामा एमागासीर पूपिर' , भूमि मिनाममात्र माइमाम (३) me परमायो 'म की पति की .matha on ।। मरान मससितम माने मरेर लानको सर- Hnteसिपलनुपरपाhatar+गिन में Httगरेमा पनपतीपपkिमात्र 2 १७ . परिषम (१) (ver-४. धापू) केस पिंगर (५२२-1 ईमापूर) मौरमिमी परमी को को परसपी साने की तमिठों पर मिलता है। इन विभिन्न सोतों से हम समरपाते है कि पॉफिमा पीउन पपानी में प-मापन, मासाहार मिपम, पारपानपान से मोमप्राधिमारितासमम्मिमिन समव का विश्वास पाकि म्यादी सोगों को पुरस्कारस्वरस परमानम्न मा मायामी मोयो को दर मिमता है। प्राधिकार पाई गई पट्टियों पर मन पशि की मारमा को इस प्रकार सम्मानित किया मना तुम मानब से बवा बन मग हो।" पॉफियाईतियों समय में प्रोफेसर एफ. एम.कॉम में मिला है बिर की महती करा माप्त करने की सोत्तम रिपि है परिभिसत्सव रिमम सम्पूर्ण रट मानाने पान मोर पुगीन के पापात् पर कर प्रग मानय मारमा को प्राप्त हो जाता हैपीर इस प्रकार पानीमा उमकी मूक्ति निश्चित माती है। रहस्यों से सापाकार करनेवारी का पुनराम माना जाता है। सामोरे सपायो पावे। सबम पापम्प गप्प है पवलोपन मिरीतना दी रहस्यों को प्रकार के प्राणियों के पाप का पम्तर सप्ट हो पाता है-उमर पनुमर करनेवासे का सौभाग मोर उनमे पता रह मानेरान का प्पिा' एल्यूपीनियाई, गनीसिपाई और मॉपियाई मा विशाम्त मनिवार्यत होमरी पर्म सिद्धान्त र कापी बिम। होपरी बदामों के ममम मात्रा में लिए पापाय हिस्सयको भनाइत करे।बतायो पौर मान सम्माप बामदेवधामा साप सापासाईप्रसमर है। मामय मनिवार्यत बरतामों से निम्मकोटिलानिए बम देवता की कामना नहीं कर समोसारका रूपम "सूम मममे कोयना मत भरी।" उन्होंने ही मसरों के लिए नासरता ही पर्याप्त है।" पोर पुन रहा है मगर मनुषों को अपनी मित मासूम है और मासूम है कि राह पप बीवन में तिने की प्राप्ति होना इसीलिए में पतामों जाम को स्वीकार कर मेना चाहिए। पर है मेरी पारमा भमर मोवन की कामना माफ उपहासानों का समुषित प बोन करो।"" पूर्णपिसीनाही' में कोरस बहा "पपनी मपपरपा की AKAR निमोभिर्मर दिला है। 'रिपधिक - 1141 २ को ठिी ४ (१६0 पर। भिरमापति। ४ रूप में लगी भर रमन (१५., पूर्व पार परिषम पात मूल बाना मनुष्य का चातुर्य हो सकता है कि नहीं।' एस्पास्मा पो का विश्वास है कि सापक भार साप्प दीरऐक्य सभा है। गयनीसियाई परमानन में पक्ति की भारमा स्वयं को पसेपन मे मार खामा भनुम करती है और इसलिए, अपमी गाम मनुमतिकी परमसीमा पदा समं को 'वाकार पनि अनुप्रेरक रेषता के साप एकापार समझने ममती है। इस पार्मिकार से बम एक प्रस्थापी पामम्दानुभूति होती है। प्रॉफि याई सम्पराम पनुपापियों का प्रमुख विश्वास है मामय पारमा का दिया देवलपास्मा अपना मन्तिम प्राकार पहन करमे के पश्चात् पापिय परीर में मोटार महीपाती। वह कहती है “म पर दुपापी से बाहर गपाई है। परम पर नाबर मही। एस्पात्मक धर्मों की पप्ट-सान में प्रदूर मारमा। उनके अनुसार यह पीवन का नियम है मौर मानवीय प्रविष्य की मनु भूति के लिए पारमाकी मर्मान्तक पीड़ा प्रत्यन्त प्रावाया है। मन्तरिम-सम्मानी माफिमाई परपना महरको महाकार माना पया है (यही विचारधारा भी पाया जाता है) । प्रॉफियाईधर्म में मुक्ति के लिए पारमा की पापाकीस्पना मी। यूनानियों में एक सार्वभौम शिवासप्रति प्रपम्य पास्या का निरास मही किया कि पतिर्यो मार देवतापों में उनका विरासपा को अपने म्यवहार में मानव बमे सपा नामसामा केरमन में अत्यन्त कमजोर थे। इसके रिपरीठपाधिपापयाँका विवास एक सर्वम्याप्त मापारिमा सरप में पाएर मगार मॉफिपाई पहारत है-'रयूसही पारि मध्य पौर पम्त है।" मापनामय जीवन पर मोर पुनम पार मोध में विमाम मानर पौर पर मारमाबीच तारात्यकी ममारना तपा प्रम्परिणामों पारिपिपरनों मे-योमतो पूनानी है पौरम सेमरिक-पॉषिपाई धर्म पर कोई रिगी मंमा भारतीय प्रभाव मक्षित है।" गरी मnि (Pump I व दररमागरमपार मेलामा मायामियोप्राथपरमपरवनिम्बरनेगरी मा"मनमा माया। भाप मिपा घरमा भो मारमा प्रसारकोमा माक्न परम- ham परत nti"-'पोसार पर (m)। मानौरानमा परे मेमानो नावाने मतप्रामी मरनरम (III रामनवमीमामा परेप्रती या 1 परिषम (१) सपी पूनामी समाव में भी पम्पारमा पोको साकार नहीं किया । ये धर्म सब मपम्प पौर निती माने जात रहे। पर्म संथानम पम्य नारा अपने विार्य होता पा । नामरिक की सियत से प्रत्यक पति गग्य के प्रति अपने कार्डम्प का पालन करना पालापा। माईस्प्प जीवन में उसे हरपा प्रामो की पूमा करने की सला पी। एस्पारमा पर्म कि प्रनिरायन पसिनन प पौर पम्प की सत्ता की उपेमारते पे इमलिए गहें पम नही अपितास मानाबाठापा। एस्पारमा पाको यूमानियों से पूर्व गैर-पूनानी पिपाईप्रमाापारम नया सपागावा पा गिनपाद में होपरी रेखा मार दिये पये। पूरी पिरम्स बाली में मिया है कि सपनीमस मन 'एशिया की पक्षी मे पाया पा। सम्पूर्ण नाटक म इस पमरे पर-पूनानी गमप पर और दिया गया है। पेन्यू के एक प्रश्न के उत्तर प्रथमोपी नीलम पाहै हर वर(मर पूनानी)लरीतियों को मानता है पोर नाता है। हा ऐल्यूर तर देता है 'पीकि पूनानियों से स्पास देश है। कही इस बात में प्रपिक युधि मान है सिर्फ रीति रिवार भिन्न है।" पूनानियों में गाय ही इस पम को स्वीकार १ निम्न में बनी कुना मरम्मरपनी में लिमभामा बम . मान विरोषप्रम मानवपतिपर्म मोरयामापारमारमा पनि मे पास के मन में दो पुषच (प.)। मिमी, पर TO पारित भौकिन सिपितारगाम म (१) पर प्रेम का पानी सम्मत और मरोत नवीधर्म कारोबार तो अनुमार (मेमdonn को मात फातिमा भोर एक में भागवनीरजामीन सासरोगमा मोति र मानी पारि नाम मा मात्र कौनिक मानो मनिया गैर-हानी काम का मारा और बनिसमा वि।"शान म पनि त यति पास राम मुमकिन ममर पर्नेमा Runti ममी म भयिका पनाति और म-यम्। प्रोपही सिममा पतिरपी मिसी बामपर समान सम्पराको पासपुर पूनी रणराम मायेची मला पुलिस मामी र मिस नर्स सामनीम बनाना Exोर रमेशरमरिलि- पिपरमेशन बोरोन मिलेर स मभरमाको चिर मोपमा मलामग्रमा भी सपरेन मार मेहरीनही सन् परमि और मां भी भारत निर न (१९९९) २५४।

पूर्व पार परिक्षण कर लिया और अपनी हरकपना-पितका प्रयोग पर पहनि 'माता सार मैमी' को पोपीरको पगमारीपना पिया पोंकि उनके विचार पीगीर हो पामा मामी मपर पा रहा ये मामिमात्य पर पे। हेरोगेटमा विकार सपनीतस निम में पूनाम पहुँचामा पस्पारमा बर्म में सभी पीके प्रति प्रारर करना सिसामा पावा पा मोर उनको प्रवृत्तिमाम पी। इसके लिए रीव होमरी मा मोलम्पिपाईप अपने को ही अम्मतर मानवापा।' पारधागोरस ने एस्सारमा पोर तपत प्रतियों का सामगस स्थापित करने का पत प्रयत्न किया। उनके NिE मापार पेपर (सीपा) का सात्तीकरण । समठम पार कामून प्रति हारिक निष्ठा भी इस विचार में मौजूद है। पुष्टि एक 'कास्पांस ।स्पून-यप की पपस्था को समझने के बाद, उसरे नमूने पर मूम्म जगत में भी उसी प्रकार की परस्पास्मापिठको बा सकती है। अपनी मामाको संघारमा मानरका प्रथम पप्प है। पापागोरठ का रिपणास पाहिबस्तुसपर की वास्तविक पार पास प्रतिषम समानुपाव मोर संम्मा में मौगुए। उनके पितार से गपिठ मोर गीत का परम्पर समाप। पपोमो समीत कापता है। पापागोरस में एक बामियमार की पापा की पी जिसमा एक निश्चित जीवन-पान सपमानका गोप्य एरपा सिस मप्पा है। ये पंपत हो अप निपों को मानने तपा पपठ नारा प्राप्त प्पिा पा सकता है। पारपानोरस का सिमास्तमा “य संसार में एम पानी पीर परीर मामा कामको हिर भी पारमाहर मुश्विरम मदर है।कारण हम पिपरकी रम सम्पत्ति पर ही हमारा जाता है और धमकी पाशा के पिता मारने का हमे को परिकारही है।'' पुनर्जन्म पों बस पर प्रतिबंध पाकाहारी भोग्न प-मापमा राशीमरण मनन पपरा प्पोरिमा को पारयस्ता समापी उसके रिशार पूनानी र भारतीय प्रपिता । शामा मेr परिबार में मामे गत शनि रेस में भारत मारे मतकोनागा भवानपना।" • AnuriR रोकिराए करमेhिe कालिमानो र पाने मनपर गरमी देवाने निर। -सिनिल ureमग। (', ॥ मोरिन (१५ ।

परिसम (१) पपीतीर का काम है कि उहे अपने पूर्वगम्पो की स्मृति पी। उनके अनुणा, प्रत्य की प्राप्ति का पाचन चिन्तन-मन है। धर्मप्राण तपस्वियों की भारमारों को उनका रेबल पुन प्राप्त हो जातााएमास्मीरा कहना है देने सोप नागरपापियों पाप्पा कवि पास मौरविपिमान गाते हैं और पम्पन महामाग्य रेलावलप हो जाते है। उनि हानिक पानन्द केसरो में पाने गागारिकों का अभिनन्दन करणे हुए कहा पा "माप समातागत है में पारदेशीय परिपत मार माना नही पमर रेषता पगार ।" पुनार के सदमे महान बानिक मुपद मम्मिी विधार-पति की मापना नहीं की बों की रचना नहीं दी मिी सिवान की पिपा नही। मुराव की जीवन-पतिको हैरिस्तु कोई मुररावी सिमान्त मही है।बागार में मोमो मिम नरिवार पानने का प्रयत्न करते रहें रिपार करने की दिशा देने पार अपने कार्य को तुनना के कार्य सापरते बोपरो के विपाकीसम्म गने में सहायता करती है । मुकरात ने ही पश्चिमी मानवका विश्वास रिमाया कि उसले भीतर एक पारमा सामान्य परितापस्मा की बुद्धि और महिए परिण की प्राचारधिमा है-और बह मानव की सबसे अधिक महत्वपूर्ण बीर है और मानव को ससका अधिक से अधिक रपयोग करना चाहिए। मपनी मरमु, से पूर्व उन्होंने अपने मित्रों से कहा था कि पारमा सविनायी है और मृत्यु प्रकार स्प तक महीर सक्ती पारमा का पावि परीर के साथ नहीं पा चमिए परीर की मापुरेसाप उबका पन्त भी नही होगा। मुख्य का मन्तिम पर अविवई में एषम्सवासी प्रमा नानीमही विसर-नागरिक प्लेटो की दृष्टि में पारमा पनि का सबसे महत्वपूर्ण अंग है, क्योंकि उसका प्रमत्य शायद नगर मे है नवाब से मही रसका जीवन पनन्त है । मृत्यु कोई पुराई नहीं पकायमार से मुक्ति है, जिसके बार पारमा विचार-मसार पुन पहप बाती इरिसके सार पीपर बम्म मैने से पहले उस मावाया। पम्म पो पहमे यह वरपी का पानी पी मेती है पौर दूसरे संसार का प्रपि कोच मा सम्पून मान स्मिथ कर रेटठी महाँको पातुओं कान से उसे अपने किमी समरर सम्पूर्ण प्रौर परहित मामा इसकाइमा मामास होता है। समय में प्राप्त सम्पूर्ण गाम पुन स्मृति-मान है। तन जगत् में मरने में पर हो पाने पार छस मम्मूपोंकापामास पुन सपना। मानण ११ समा, मौत ५४, पप में मामला समेत भाषा में 1 पूर्व पौर पश्चिम का गप परमारमा साप पपार्मपण पूर्व ऐश्म-स्थापना ही होगा पाहिए। फोटो के भवानुमार मृत्यु के लिए मारी का माम पन है पोंकि उसके कारण मारमा इस योम्प हो पाती है कि एक बार फिर बह मानव-पार की मीमामी में मापय मानेकार पाने के बाप स्मायीम्प से विचारों के संसार में घरोए। मान एक नग मुफरात के इस सिगातकोसीकार करते समय पाटो मार' को वेतन अपना भान नही इसमे परेमपत प्रेष्ठ जगत् पौर परम पपार्षकि बिचार' हा पावा है पोर वेतन यपत् विसाएकसप प्रतिषम्म मात्र ई-का शान समझते हैं। हमारे विचारों का योग पौर सत्तिर विचार पुरपिार प्रात् पिपरको अनुभूति या दुधिग्रहारे माी कि पाम्पात्मिक पुलम्म प्रपनावर में दिनान हो पाने के प्रयाल पहपाना या समसामामय मारमा की गतिमय शक्ति है 'रोत पर्वाद प्रेम बोपने परस्मानों को पार कर सबीसौन्दर्य प्रतिमाससा में बरत पाताई पार पहली सौर्य वर्ष 'सत्प है। पाप के समय में प्मेटो का विचार परम्परागत पूनामी विधारमा परमारमा मारा। पौर पर पाग करने के बार एकापम में ही पारमा पपना बास्तविक रमन कर पाती है। यह मार्ग की पोर नामुम होकर सरप की प्राप्ति करती है। अपने मटकार सम्मे और बाबा पारमा ससम्यूग सरम की स्थिति में पहुंच पाती है तर बह प्रयर-अमर तमा पारिवर्तनीय बम गाती है । पसरप हमारी पारमा में मितिनु मामाम्प म्यन्तिको का पता नहीएला पौर परमपमुप पारित नहीं होगा।' पोटोभरिप्यभान होपनियों में रगा है। एक को उस मषिप्यासा भी पपा मा दोनों पार गमो का मिश्मेपन सीप एमपौर स्तियों केगन पामि दिए परा पशुको पानों का रेलार पपवानी दीपाला सकताएपमिरिया शाप्रकार का होता गिरेबाप्त पर परेमा भार पाने का दारातापिर भी यह प पू पर एता है। इमरी है प्रेरणासम्म मषिप्यापी पंगम्बरस प्रपनापति महीनाठा उतार दवा का प्रमाप हो पाता है और उनने समय के लिए पर साकीनाको रोहगनेवासा पग- मापाता। परामाकी पापियापिमापीरने पानीमहिनामी प्रारपीपी। मिमारियम' में 'ममानासिरा से हमें HattRAणना भरो- vt मा rets समिर परमरी।

पश्चिम (१) उपनियों में म्पा मोशके सिसाहकी यार बरबम मा जाती है। समिपदों के समान सिम्मिर मेंप्पन प्र प्रयवा 'सन् नपा रिमि पस मम्पस रेम्पूरवर प्रपना पॉर' या (स्वर) या बापार की प्रारमा (हिरप्पपर्म) में पम्तर है। उनकी प्रकादमी में तीन मौमिक मिसान्तों-अपम कारम पवारपवई मातोयास पोर झर की मारमा ममा परम पारमा--को तीन रेखता माना गया है जो अपमै प्रमान सम्मास म ही परपर पापर है। 'मोगोम' को तो पिपेपरूप से संसार के सा एवं नियंता प्रबिमापी पिता पुत्र में माना गया है। मुरा नेमेटो की रिपम्मिा में पारर्ण राष्ट्रमास का वर्णन घ्यिा है पौर म उनसे पूछा गया कि इस प्रकार का राष्ट्र महापामा जाता है नो वम्होंने कहा कि इस पाप क पनुरूप राग्य पृषी परसी मही। कस्तुणपरस्म में ऐसा है पो केबस उसे रीस सकता है को वेषना चाहे और रेसने के गर पानी पारमा में भी पैसा ही मारपसानका बलारे।यह कहीं स्थित है या नहीं प्रपणा कमी होमा भी या नहीं इससे कोई पम्वर नही पाता। कारण उस प्रभार का पति तो उसी प्रकार नगर में एसकेगा पिसी मम्प में नहीं।" रिप म्पिक में वर्गपरस्पातीन मापारपाने गए है-बिग्रेक भावना पारराधा पति-पोरन तलाम भारतीय वर्ग-म्पपस्पा को बार प्रायो। प्ररपा पोर पुनर्गम-समापी मिरान्तों के प्रतिरिका प्ोटो मे प्रयास और पोषों की समा- मोजाना स्तरों की बात की है। इनमें पौर उपनिषों को पिसामों में परमर साम्य है। होमरी पौर माफिया प्रवृत्तियों के प्रभाव के कारण प्मेटो के पारमा-पी मत में प्रतपिराप है।" "मेटा के मुख्य हिमाम्त तवा स्पर्म-मरपालीकमानों १-पिसिस मनिाम' (१) (म मेदिन) ३ मामलोपमिाए में खाना तिमिम तरप्लेयेरे यो में है। "जी और पोमारपाना पाप कि धीमान सोभ नि मोर मा पपर, सब रोनी कवियों में बम्परे मस्तिोको माने विचार पून विराट को को मतस ही पर्व और सपनीमारत हमरोमोसपा परपरार नगर से विपेरेम्स' २५थे। ४ प्रोवर पर सौमित ये भी मुस्स परिनिगरानिमो पारी में थी, जिसमें प्रेरणा मेगापिने से मिली बीजोपारसी बानियाई सबकान म और पिोरस से ईमाई सिम और विचारों, सपिक मालाई प्रम मचा रसिकार पाये (१९) पुष ३५ ६४ पूर्व और पश्चिम पपिपिनों काधापार मॉफियाई स्रोतों पर प्राप्त पिंगरमियरम है।" प्रॉफियाई विश्वासों का फोटो पर गमीर प्रमाव पापा। प्मेटो के मानम में होमर और पॉफियत वा मस्तिका मारमा का संघर्प पम रहा था। अपने निकोमामियाई मीविधान में परस्तू मे कहा है कि मानव का प्रमुख ठोप नापरता को पपासमय दूर रखना है। उनकी पत्तीमई मपेप्टार है पो पप्तम भी पयस्व होगा। मानप की सपतम प्रति सिर की प्राति के समान है।" इस (प्राति) को विकसितमरोपौर अमरता की प्राप्ति करो।" समस्त शान इन्दिपबम्प है। फुप मौर्षों में स्मरण-स्ति--पारमा में स्वामी ससे स्थान बना सेनेगामी इमिपगत प्रभावीसवा-पोती है दूसरों में स्मृति में बैठे प्रभारी मो संवारने की समता 'मोमोस होती है। विचारों के रोमाप्यम बम 'एपिस्सीम प्रति सप्पों को कई-कसोटी पर कसने के बार प्राप्त मान पमा द्वितीय 'नाब पति मस्तिष्क की सपतम पनी एकप्रकार की सहर पम्तरष्टि पपने प्राय पान र सोम' के तीसरे घर में परस्तू ने निपाकि प्रपिकार मान हमें पारीरिक मियाँ वपाइरियमम्प अनुभूतियों को विशारा पोसने के चार प्राप्त परिणामों से मिलता है। साप ही यह भी कहा है कि एक दूसरे प्रकार का ज्ञान मी होता।भरलू ने स्वर वो ममाम के सोबारे में घनहीं कहा किन्तु उनके माप्पकार प्रशारीगरने इमे पर बताया है। पूनान में पार्शनिक विचार की रोपाराएं । जिनके उगम पुरा तथा प्रवृत्तियां मिन्न।एको प्रमेवा घम्स प्रीमिका मेगपा प्रापनिपाई मिमेटस तपा दूसरी की स्थापनापापागोरस भरसिजी इरानी पोर तिमिमीमामा पश्चिमी राम्पों में की पी पहा पर प्रॉफिया पर्म का भी प्रामाण्य पा। पहली विषार पारावरं पुस्ता मास्तिर पी जिममे प्रतिवार को जन्म रिया बार ममी प्रतिकार का निफाम रेमासारत के परमापुषाद तमा एपीयूरम के पानगपार में प्रा। इमरी विचारपारा का प्रमार पासपोरस एपीपेषतौर मुम्पत प्मेटो' पीर परस्त्र, निवेगियों (नोप्पियों) पौर मर-मेगादियों में छिपा पा।इमने ईमा पम को बाहर का प्रभारित रिपा। १ शरमेन हिम्पी मान सम्ममा १४)पम पम पम १११ ॥ .x५ - ."40 पुरुष मिमननरभरमादीपावोसम्पनीमामापर अKutiniभारगिm२ . ite मिर (१) TIRI-मामे मुसाको"httr for frun T५ परिरम (1) पाने निसरपरस्परारम रादेम्म रापौर पर पानी-अपनी स्वामिनाही गारम। माम्पनीर (मगम मापू) में परिपाई प्रभुता से पुमान को पाने के तिल परस साप बिहानेका प्रातार रमापापमोतीरीक (४ मापूर्व) निहाने गा पा लि नामरागीकी रिमेषता रमही सराहति मे है रसा में नहीं मान को फारण दीपपीनता मे सपा मिए मामिया मिमि का मामन बोकार करने पोवार । ३ सिपमरको निमय चिपमर मे बहुत दरदर धोंडो रिरित च्यिा पाहि रहम्पारमाः प्रतियों मा म्पति पाामिय में यह मिराह रिफर पम्मन के परिदर म गया पौर मगिरमा में भले पुमारी माप भीतर प्रया। पान का मात महीं है विहाँ साहुपा पितु इतना सप्ट है कि रमे पनुमा पा दि पापा मार मका कोई विरोपसम्मम्बई और मसार-चरमपनास्पापित करना उसका रिवर प्रात वप है। मनी मानियाई पुष्पभूमि कोबायता से उसमे पूनान की बर्य को मगर सपने दोनोति निरोप में काम किए। अपने पुर पररन से मार-माप उसका भी निरास बाकिशिमा मोद सिर्फ सपने योग्य मेपित्र मिया राम और परिपपोत्तर भारत के निवामियी म सपना समयह विचार त्यान देना परम विभिन्न देसमातियों में परस्पर मैपीमा स्थापित करने के प्रदेश पाप लिये। उसका कहना पा कि उसके सामाग्य सभी मोप सामीदार प्रगामी। उसने सिनी मूरेवार नियुक्त किए. एक मिमी-युमी मैना का निर्माम पिया मारे पैमाने पर प्रविष्ट्रिीय रियों का प्रात्साहित किया। उसने पोपित यिा कि मनीम्मतिक परमारमा के बेटे सलिए सभी को मामयीय मन्पुत्व-स्थापना तए प्रपलीम शेमा पाहिए।' सियारको प्रामापी कि पूर्व पार परिषम का सामरस्य एक शिष-पर्म में होगा रिममें सभी धर्मों की सर्गेसम मा निहिप १ कप मे सिकार गरे । भि।"भा मे से मना किया न्य नोमिनुमा पलामी मने मानिको मात्र लिनु इतरों से पनु पोच। विमिनाले सो निरश मानक रोमि म मियम बाल मुर्मा को मेम संभार समातिना मजार पर प।इसके नियम में प्रम माँ बन्न तो माने गोरता र मिस नामोनिका और बोरग नि-विषयो विधा समांक अपर-रिवारीकोमारी पर पूर्व और पश्चिम । पूर्व पीर परिषप को प्रसग परमेवानी रीवार को सिरदर ने पोर रिसा तो दोनों में पापसी म्पबहार स्थापित हो मया ।बह ऐसे सामाग्म की स्थापना के मिए प्रयलसीम पा गिसमै पूर्वीय और पूनानी सम्पामों का मोग हो। अपनी मृत्यु से कुष पूर्व महामुरकी समाप्ति के प्रबसर पर उसने [.. मतिमों को एक मोग में पामंत्रित ख्यिा गिसमे देसम पूनानी ही नही वरन् उसके सामाग्य की सभी जातियों के मोम पामिम पे । मोर के पाचात् सभी उपरिषत मोगों में एकसाप बवापों को बम पाया (यो एक पार्मिकरम पा) मोर पान्ति मिए, यहाँ उपस्थित मोगों के सौ पापसी सहयोग के मिए तमा सम्पूर्ण समार मोमो के सहनिम्तन सहयोप तपा समानता के सिए सिकार का प्रार्षमा के साथ-साथ समारोह का मस्त हुमा। सभी मनुप्प माई मा'! इसलिए नरें मानसिक एवं हार्दिक एकता (होमो गोइया) की भावना से छह परिवत बनाए राना चाहिए। सिफदर में ही उस पूनानपारी (हेमेनिस्टिक) संसार का निर्माण च्यिा निस रोम को पौर रोमाण मापुनिक संसार को तीवरी। पूनानीसराति को पूर्वी भूमम्पसापरीय रंगों में प्रसारित करने के बाद यह उसे सिमुरार तक में मया । भारतीय सापोपी सावना से सिम्पर पहुव पपिक प्रमाणित हुपा। उसके पूनानी दिपाई उत्तराधिकारियों ने प्रममा तीन मतानिया वा पापा निस्तान और पंजाब में पूनानी मस्कतिको पीवित प्या। पराप्त (पासन कान १२१-२२५ सपूर्ण) सीरिया पामारी से विवाह म्मिा पोर मम्मू कम के साप मंत्री-गमप बनापे रसा। बिमार पौर मैप्पूाम के बीच पापम्त मनोरमा परम्पबहार राता पाएका विमुमार ने पोती पूनामी पराग गुम मुनको पार कमिप्यावादी सर्ममिक की माप को। मेयूएस ने उत्तर रिसा पिमराव ता पुगी में और देमा मणि मिम्मामाची पानिए मग पाने के लिए दुनी। बोकि 'यूनान में सर्गनिको का यापार करने की मा नहीं है। पश्चिम पाठपामा मौर्य-मामाग्य में पावा करत। १ "मोरे सपा ने अपने नमी सोमियों मार गई माने रसग । यि जीवनमानी नपामारकरगिमप्रभ्यासमान ने ममतसम प्राय नप मियामीनपा प्रामाणिक मुसलिम मानी गर्मी गर्मनिता और मै पराममा बनरसिमी परस्पना नया एनकायमा पनि मन परमें मगि मार्ग (११ ।

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पूर्व प्रौर परिषम प्रिया का प्रपसम वा! परी-विमान गतिप पार भूमोम में महातपूर्ण पोरें दत्तपारी मो पर सिमर मानवता को एक कान के सप्न का बड़ा प्रभाव पा। उमझे अनुसार समाहवानों का एक मिसामनार पारपारमी उम परम पापितल पर रामला है भिमे रम निरता मार्गनीम नियम पिर, पुष भी कहा जा सकता है। मत्ववारिया के अनुमा' 'भोमोम रिपरीय है। समसार मसाबा किसी किरकोम मानते थे। सारस या बीमारी सम्पन्नता या मिर्पमतारापषिक मापनपा। प्रारमाही सप्तपी--प्रारमा को पह मसार परीरमही समयादुनिया हमारे साप चाहेहेरे पाए, हमारे सामने पस्ला मुसा है कि हम अपनी पारमा में निहित होरा पनि प्राप्त कर में बाबा के समाम तत्तवादियों का भी पिण्याम पासिम को धोकर कोई किमीको हानि नहीं पहुंचा सकता । गुप सप अपना पुरस्कार है। यही एकमात्र मानरातत्ववारियों ने ही ईमाधिर्म को प्राति के नियम से उपभूतस्पतावना समानता पीर मनुल के सिमाम्सों में प्रास्पा प्रदान की। तासमादियों में रोम को एक समार मास पारेमियर परान किया। पारमपसमा कसन पाकिसमारपीनियन से सनका रेग रोम मा किन मनुष्य की हमियत मे बह मारी दुनिया राबह पागमकार्य तो करवा पा पिनु उनलाइपयही पार पा । रमका प्रतीर पा एम्पीशेपमीरनामतुमको 'प्रकार में प्रकाशित पा मोर ममी वस्तुपों नपा पपने भीतर के तप को रेगने म समर्ष पा। उसके मीरगम्म' मे पता पमता है कि यह मप मिए समाम पपि पारमपिरामकरताबा। निवार के पात्रमग एक पी पाटबारमिमिन (मनपर १७१- १५ ईमापूर्व) मे गगा की पाटी में प्रारा पिपा । भारतीय मन में उमसी र पीपीर बार पिता साप उसने पारवा रिया। मितिमारपा को सम्म प्रॉफपि मैनेगर' महायपूर्ण और पपई। मामिपर में मनगर रेमनी एक पापाम-मान (१५. ईमापूर्व) पा पासी मिति में अमनगर केराबार मरहनेकामे तर मानी रागातरी का परित "गापामर पर भागामी मप्राट पामीपुर भाममा + ममुविमापी पागमाराम बागा वर्ग में पराम मपार मिपासीसम पूमानी गमा पिन मात्र पर्यापपा निवामी होमियोहोरम में रेपो देर बामुन का महामार मामा (भमरान विष्णु मामा) रा निर्मित गया।" ।

पीपम (1) ४ ईसाई धमका राय बापासपी पहियों पर हिली और मिट्टनी नामा रामा गनिया के वीप पौदही पानाम्दो ईमापूर म हुई मपि कापणन है गाय मित्र पौर परम मेरितदेवतापो का प्रावाइन उनमा पररान प्राणाममिए पिया मया पा। इस विवरण में मप्ट है कि ईसापूर्व १. ...बपोंदौरान भारत का प्रभाव निपटपूर्व पार शिया माइनर पर पाए और मागम दाना गग्य परिवारों के बीच विवाह-ममाप उपमध्य म मामीदिरने मिपावा देवनामा 'पारियम' का जिगराम 'मरप कहा गया है प्रादान दिया गया बाहेमनामा पत्राम भारतीय मामपारामापापी मूबीका ति है। उतन प्राचीनकाम में भी भारतीय विचार समापीरत्तरी घाटी में पहषया बामिय की प्राचीन रामपानी मेम्पिम म प्राण भारतीय प्रबपाप्रापार पर मर क्ला परम पेट्रीका विश्वास है कि . ईसापूर्व म प्राचीन मिप में भारतीय उपनि देय स्पापित था। ५८ ईमापूर्व में मामयीमोन साम्राम्प को पगजिन परोसीमोम को अपमी गरमानी बनाया। उस समय यहदिया को मारनवासिया बार म अवस्य पता पमा होगा। उसके उत्तराधिकारी रागने मिन्पु पाटीको विजित पिया पौर उमे अपने मामाग्य का बीसा पा' बनाया । भारतीय पार पारी अमरप ही बीमान में परस्सर सम्पर्क म पाए होंगे।' भारतीय मोग यहरियों पोकानून के पारम्प अपना 'पनामी पहले ए। पुष यूनानियों का ता विश्वास पानि यारी मोम हिन्दुओं की ही सन्तान है।' २ माशोष या मारावीर मारने २ पूर्व अप में एबमारन के राशके मनी ।सार रोबिहीबरोबसमारपी भीऔर पुरनिर्माप्रतिवाभिमारोगों में से एक ही परिवादी भर पसरे को अपने मोजन के लिए पुरा नियमाने वाली कि एमसी सिपको और भी और तलबानी-पानी बोर और बिसे योग मिस अप म्सीमे सम्तापापविधीने सनियरको मन नियमितु सम्बीमा मे परेकामी भने पर अपना माय बी दूरी वीकोपाबीसर मलिया।पने समकामा दिया १ अमेस (भमायारेरिस्मरेतासनामनिर पर समयमा माम से प्रसिमनेर मशाभर प्रथममी, रेभायेम मोमर रामरी प्रत्य में ५ सितार) अनुर मिकि 'सो गुरु बरलून पीकी परिम्हम बना दो। निजामत्रानन्जमखमनिमम से पूषा पर मेनसरिरामनिवासी भारी मारतीय वासनिपास। भारत में प्रथमो मोर मारिन पीपाते पूर्व पार परिचय ईसापूर्व मन्तिम दो सवादियों में पूगपाद में पुष ऐसे मना ने विकास पाया जो भूत-प्रेत-समापी पारसी पिपास ही उपनमा पारसी समार में भारीमान की पात्रता के समान पारी एफेरपरमार में किसी प्रेतपति की सापीनता की मुगाइसन भी। विगुइन गठाम्पियों में गवार मे गाव परिवर्तन हातान ('सम) को पुष्टारमा बस में मान्यता दी गई, जिसका काम सिर को प्राशा मे वर्तमान युग म ससार म पचाइयों का पिरोपकरमा पा। इसके अतिरिक्त मंपकार के पक्तिसामी शासरी पात्रानुसार काम करनेवामी दुप्टारमामों की सेनाको मानवीय पाभियो पौर पार्कों के लिए उनादायी मान सिमा नमा । 'रंगों में मिलाकईसा सन् के प्रारम के समय पापियों में यह पारण तूप प्रचमित पी। पारसियों के मम्प के फलस्वरूप ही पानी रिचारपारा में यह रिचार गुरु मया था कि संचार म एट सक्लिा सश्यि स उम्प के प्रति कोई मौ सम्मेह इस सस्प से मिट जाता है कि सोमित' का पुष्टरमा 'परमो पिस' पास्तर में प्रस्ता' काश्मिा शीम है।"" फिलिस्तीन का 'पसीनी पौर सिकारियापा'पराप्यूटरी भवन बोर सम्प्रदाय में । कम मेकम बौर सिम्तों से परमिक प्रभावित पो प्रमस्य। सीरिया शानियां गोमा से पहम पी पाच पतामियों व पामे फारसी सामाम्प पीर पिर पूनानी-गेमा साम्राम्पराब पी भारतीय प्रभार में पाया । पानी का बन है कि सीरिया फिलिस्तीन मोर मिम में बोर पर्मानुपानी पस प्रमोनी मोमो एपमामि पियास पार पाचार गर पारियों की लप। जोनेकम पनुमार पसीनी "अम्मत पानी पौर पम्प मनायनम्मियों पीपणेगा पासार पपिप प्रेम पते ।। अमीनी गुपियों को पुरा समभरपूर हो । मोरय"मत्र यारत मिस या मकान भूमा कुम जी मरियम नबत ( १m.vi पर न न मना भोग दी ममम ममर, (41) में । रिबन की पूर्वी प्राभा २ मान [ भारतीय बामपनो मे मानपत्रकोपनीविमानमरामकिरीमी अमरभ पूर्व सभापतितपूपि सारे प्रतिमा समिति मिनिमम बारे मनापानम्नमामा में बाबाबानोरिमा ससार नीम और मोमोज मे नगर मगर भनेर एममा मानमरेभने बिम-गरनार मसाप-MAR - नो । निमन 1 RAMEa free परम परिचम (१) पिम्मु मयम प्रौर वासनापों के रमन पो मुम समझते हैं। ये पन-मम्मति मे दमा परत है पोर इनका माम्पराद प्रासनीय है। उनके समुशाप मकोई भी पति इमरे मे पपिर सम्पन्न नहीं है कि उनका नियम है कि उनके समुदाय मे सम्मिलित होने पाने मामा प्ररपाणि प्रपना मब अप मग साप साम में राग पहा ताकि उनके बीच मरोगी पवना धन-सम्पन्नता माग नही है बकि हर पादमी से सम्पत्ति हर पूसरे पारमो की सम्पत्ति के माप मिमित है पौर मानम पाता है कि सब एक ही पिता की सन्तान है। उनका कोई एक निश्चित नगर नहीं है किमुप नगर म ये पम्पमम्मा म हने है। उनका निश्चित मत है कि परीर सयकारक है और जिस तत्व मे उममा निर्माप हुमा है यह स्थायी नहीं है, निमारमा प्रमर पौर सौर पीरित रहनी है। इस मागेर कचन मे मुलती है तो माना उम्ह मम्ने कागबाम म घटकाग मिस गानापौर में प्रसन्नतापूर्वक गरकी पोर ग गाती है। बपतिस्मा परने बाम गोम एक मापुर यो बिमान सामान भारत परते पीर बाना से बने कपा पहनत पारसी गिरावना में मीन पर प्रपन तमा इसरों के पार्पोरेसमन के मिए प्रार्थना करो ।' घोपेफम की रतिया में इस बात के प्रमाम मिलते दिसा के समय में रहरियों को हिमुपों के सिवानों पर पूना प्रारिके बारे में बहुत कुछ पता पा। सन् ..सबी में यमससमममूत बिनाप मे पहन मयारा में पहले मगर फिस पर एनिमार नाम सिपी पक्ति के नेतृत्व में महरिया का मामा पा पारियों ने प्रातिरी बार गेमकों से नोहा मिमा । किमे के चारों पोर पेग राम रिया गपा पौर पर समप ऐमा पाया पब उमकी रक्षा करना प्रममय पमियापर ने अपने पाहयामियों सहाकि रोमारहाणों में पाने मे कहीं पया है किरा पम-मरे को मार गम । मनमा "पापो दुस्मनों के हार्यों मप होने मे पहम हम अपन बीपीयनों को पार गर्न पौर समो बार, गाहिर उमी पानार मौन को हम माय भी यमे ममा में पोर इस प्रकार स्वतन्त्रता को ही पानी उक्त सामारोप में घगवा । म भपाना परीषा से पबरामबामाके ममम उमने मोदक उपस्पित किए उनमे गमिपदों गौरपर्म पौर भपबमीता मी पियानों को मात्र प्रा गाती है। सामत प्रारमा पौर मसर परीरबीचका यास पगार 'मोरा रेस्मट में मही मिप्तता। 'पामा गमा। , 'सेम' मापय म. फिलोस । २ मैम् बाम सम्म १५-१ पूरपोर पीडा रेस्यमेंट हिम बाकी रचना प्रौर उपभापपी के समय में ही महरी उपदेण में याममा विराम हुमा माया मेटो का प्रसार मी हो सम्या है।किय पनियार मे सब हम हिमू-उरोमो से प्रभारित बताया बाबोसेफ्स रिमन सन् ..सबी में पदियों मार रोपों के पुर में प्रमुख माग मिया पा भाप का मम यो प्रस्तुत किया है इसपर भी यदि हमे माने रास्ते पर पतने के लिए विदेमियों की सहायतापीपाररयस्वा पोही तो हमें परार्मेनिक पारों के अनुपापी भारतीयों में गिना मेना चाहिए। भोप इस गीपन-काम को प्रतिमापूर्षक म्पतीत करते हैं मे पावावर दासता समापौर मपनी पारमामी को घरीर मे मुक्त करने को समुपप। यही नही बम परीर मे मुक्ति के पौदे कोई कुर्माम्मपूर्नपारगमागम्यता नही होती का भी उमप णापत जीरन के प्रति ऐमी रतट पराममा होती माय मोमों को प्रपती पिता की पूर्वमूत्रमारते है और कोई उमरोसा नहीं कि सभी उगमा सोमाम्य पामी समझते हैं। भारतीयों मे पपिक घिपले विचार रमन के कारण नया हम प्रम नही मानी पीए? ईमापी मापुरेमा चार एसियाराम प्रकार पारिपी गे बात करता था मानोरे हिनदिमामी और पायों में सुपरिचित पूमानणारी ममार मे विरेमी धार्मिक प्रमा सीरिया पिलानिया पनान मिपा पार पिपोहोर पाये। विमोन का योगरान पानसमापौर ग्यो विपकिमपि महत्वपूर्ण पेयापारमा पर्म शिहोंने भाम्पपल मे बाहर निबनने रागनारियापारिमीयम पर मे गे पय मृत्यु मा धिकार पौरबार पुनरमीवित पा ही पतिपन संयोग की स्पापना होने पर। मुपित सम्भव है। एम्यूमिनियाई प म मापा की मुक्ति का मापन समदी मुर पीर पन्नारामा पुनपिनबोलाया मया है।पियो 'पामिम म्यापी पर्न रनर ताना पामिरे भने माप । मतिमनी परंगुमदती सियों की गिनती मार पिता के कान पर मैडोना के प्रतिनि होने के ममप ममरापालन कायम रहा। मिरन्दग्पिा कल्पिों में पूनानी रिवारों को चीरकर मिपागा* सम्म मे मार्ग पहपे मिसमरिया पहरियों ने प्रोपिला नमाति रामि प्रपपीरनामी। म मुपेमान मिनरल पदा पातिप्रनार पामा मया। पूनारिया प्रभार में जगमस्या नही- Mannuitment FAIR मिग म पEmailoni ( Atr) - पापिन (१) पापी पंगमरों के मतानुसार निपारित एक पर समा बाग को सकसपत परस्पा में म्पत परमारमा मे परसरमा सम्पप है । सम्पूर्ण सृष्टि म मिहिन "पिरीय पियर'का सिमान्त पपनापरपिर मम्मम्धी हरी पार पूमानी मान्य वापों में समम्य स्पापित पिया गया यह सरीब विरेट रियर म पुपदुप पाप नए मी पृपा नहीं मप में गिरे तत्वमानियों 'सोयोम' प्रिय मिहिन गट मिदान गमिन नही है। नामसारी भागार में विसर पार'मोमोमी ममानता बामोरार पर मी मापन यह पोपहा कि इसका सम सर्वसिसम्मान परमारमा परमे दुनिया बनाई पोर मानमा पोसिर के प्रतितकामान कराया 'सागाम' मीरी पापीपीमिरम्परिया के फ्रिमो मे पारी एकेसरवाधि प्रापारमून मिरानों को मानी पाटो निए सी प्रसार तई-सहित प्रस्त पिया था। फिसोपस ( पहमी मामी सिापूर्ण) इस प्रर्प म पपूर्वक उनम मृमावादी विवाम पार सूनामी वर्मन का सामरस्परम में प्रधिकीपना भागस्टम धामनगाम म मारो मृत्यु से पीर गायर उनके सम्म म नौ पूषहई पी। फिमा नपरको पनापि कता पर विशेष जोर दिया है और रम मारे मम्मदा म परे बलापातम उमके पस्ठित कामान तोपिनु उमकी प्राति का मान नहीं है। उम विचार की मोफा में नहीं मापा जा सकता उनके लिए मोविएगदम प्रयोग मरने है उममे सापेप पार सौमिन दानों प्रकार के मालिक मसार मे उपरी पूरी काही पता पसमा परिबिर ही समार नहीं है वो फिर लोपा मम्मम्प बन रन्ही पत्तियों में मन रिमा गा मुकलाई गा उपरी है फिर भी 'उमः पाम मही है कि अनुसार, यही परम मान' ('मारिया), गिमे बार पीरिमार भावार मिल समूने पार XXII.XXIII नेकपाका समानार्थी रसमिस(पिणामबार) में मिलना में नगममातहपापा पोषम xXII म म 'भपने मन मगर मेरीपत मोरलिबरपरका हो। मालिप ममीसार में लाम भाभकोमान से सुनो, दिनसमम ममममो। रोनादिर बरसो महानोरोमामाको चीतिमा प्रार्थनधि मियो, -मम्पत्ति मन माया मम रिमी पीपारका चकि पान mtम कति बालमoिnो की Ekata शिमा राक्सिानीमसिममनसार परमा चलिर, मेरे पानी में तिलक बम-सम्पतिमि प्रभर परिणाम"' लममी परि (m) 40 प्रतिर।

। पूर्व पर जाम पारामों साम्पतिवरे याप पोररिया। पहदिरों लिए, यहाँ पर गुषों के मूर्तिमान सस्प है। फिलो के अनुसार, पौकिक सिर पर गीमित संसार को गोवामा सिमान्त तोपोर मर से रसम्म प्रथम पुत्र यहोवा Forतीय पर सरिक मानव है। बेशे में मात 'बार' (पग ही परीय पक्ति है) पुष्प यह भोपोप सिमान्त पीपी बीम में सम्मिति है। पेमबासी पूमानिया अपम शिष्यपारिता होने वापरहनि दूना नियों से बहुत कुछ सीमा। यूनानियों मे सरिपो रास-प्रपा को कायम रखा फिर मो रमम मामय प्रतिष्ठा की परमवात भारतापीको पूनानियों मोर पर्वरो मारमो पारमे में सम्पिको मानब उसकी ममता में पिसास करते । पूनानियों का या रिचार रोपारा प्य में परिषर कर लिया पया। रोमन कानून हमारे लिए धानदार पिरास। पूनामी रोमा सम्पना म रोमा पाराभों का सगम हुमा। बर्विस 'एनाद' रोम मापा में प्रधान पूनानी कल्पना पौ। पूनानियादी भागार प्रधि समता रोमाौकी गप्प पापित की भावमाको बाम गता। पेमा मस्तिष्क मुष्पपरपा पार परमारा पर जोर देतामा मह में बापनेमामी पंगीर नहीं पर विपक्षन है जिो हमन समामार रहा है। रोम का विकास कानून राभिमति एक रागनीति नियरी पर चा विसर प्रागारमापरिकको काम बनाने में माम मेमे पा मपिकार पा और काम का मिला में घमी पापरिक यपान राम मनिकना मह पाहिापारिक कार्यों पर पनप पियंत्रण एका जाप पोर समात्र भारस्पावापामामने पतिप्पा मे पानी पापम्मम्तामों को पचारासापानिज रहन-सहर पी प्टि से यूनानी रोमा पम्पमा पस्पा सपम पीने पर मायापिसतानामोंपीरमामा कार्य पमना पीर मामापारिमा को बारिपा। पर चापाग्य पुरोग उन भी मिग पौशिपूर्ण म मा पा राम मघार पस्तुल पूगीय गमार पही परम् भूमम्पबागरीय गनार पा जिम में मिया मानरमौर तरी पर मी मम्मितिन। पूनान में सपरिचार-पामना को प्रो माहिल रिया पार गेम मे पाग पानसमाप्पिामोपनिराित शिसस्तीभगोकोम मागमा ईमाई पर्म पर पिा । रोय न पहनी नामी गि मोरिपा पर तिमिस्तीमयो गीत नियाशिवाग्मिा पोर मीग्मिा रेपोगनपा में पानी जनमम्यापी मायभीममा गोपामाई, परिमाणमोगमापातपा पिकापागा मापा लियो पानीम 1 परिसर (1) पहुंकी पी। पूना समीपवर्ती एगिया प्रदेगों में पारा प्रचार बार ईसापूर इमरी पानी रे मगमप मप्य में समारतीप सरसार अपने रामा मिर सिर में प्रसपम होकर पौर मामार रनरी समान सारा मामा स्पाल में पहले यहां उन्होंने एक मगर मापा सपा प्रम-रिमा निर्माण गया। मपर और मंदिर पार सौम प्रपिक ममपा पग-माने हे पौरपाधिर पार मेंट पपरी मे सन् १.मली में मम्मिा का पनकर गता। पहा ही मी रोमामाप्राग्य का महाप्ता पाउमा पानी और मपटना तसा पापिकारियों के मंगटन पोर मम्मान को ममुपित मान्यता प्राप्त । राम मपटिपति पीकपन गरा। वमरी मति गतिमान पोर मामाकरिता धर्म तमा महिष्मता मौर थम्प प्रणामन की भावनामा बाम नपा पुमानम और मिा पर्म रोनारा सम्मिमग गा मामाम में हमा । सोपा जाने माना कि पर्म ममूर्ष भूमध्यसागरीप समार पो पकाएक नवीन मूर में बरसतानमा साप्राग्य का मा-नागरिकता र सपन को ममान पर्यापासाकीमपोग-गति म पार पपिल मयूर बना माना। पोपस्टम दो मयुमन् १४९मी में हुई पोर टायम को सवितार मिना। ईसाई परों में पगित पनाएं दाग्यिम के सामनपाम से पटिन। हिासमार एक प्रकार पा पानि मामा के एक रिपी पूनाकरी सिपाट रिवाया व्यापापीय प्रौर पर म पाना नायक मायने य मी पूजा मेगड़े पापा एनाक मूप में माप वा पाहिद परिकार में प्रममे मौर मिमीरप म पापित मूमा प्रम पाहणे महान का पैगमा माना गाया मा । बार पैगम-प्रमाामिपा पण परमिपा मारमियमग यमी पर्मको मनिल दरबार में परिवविनर रियारि पनिवार्य सामुमार पाहता किम गामा भी महापमा । याहनेह म्याम परा- पताका बना है पीर म्याप पा सपा सत्य मोसा सा प्रमुस गया। यह मशार नियमों यंपा है पौरममें मंतिक मूल्यों का महत्व मापरि है। सिकदर महान की पिपया पसल समम्म नि मोर सम्पूर्द के मार मार रिमा मीरेसनबार पत्र में जा पहुंचा। मारियों मपी मापा बोलना सीन लिया और अपने पम को यम पहुंपल रन की मीमा त पन वहासिवा पापारस्यपहार को अपना मियापिएन्पों श्रीक भाषा में प्रमुबार हुए । इस प्रकार हि परमार उप समम भराममित पौर पर पसात्मक विचारों और नमीप पहुंचा। ममा पूर्फम धर्म हात हुए भी रमने मोडिक प्रगामी पौर समीपापनामिया पियोमारकमा पुतीय विरामत - पूर्व पोर परिसर में प्रपिर होगा। यूनानी रिचारपारा पान्तिपूर्ण प्रोए उसकी पत करीमेगामी प्रति मुपर यी पौर विस्तृत मानवता के लिए उपपोपी हो मपी रऐक्ट्स शॉप मपोसिस्य एक साहरम है जिससे हमें पता पलता है कि उप एक पौरामिक प्रचारक और प्रमानापक किस प्रकार सामान्मएपौने से पूसरे कोने तागामा किया करते थे। सेंट पाम अपने बरंपरो सास रोष में पर पूर्ण विवाह मे उपरेश मोर पिसाए देते रहे और किसी मति में उगे रोजानो। रोम में विधा को सच परिक्ति को प्रोत्साहन दिया पाता पश्चिमी पपिया पर, यहाँ ईसाई धर्म परिकामा फारम मौर भारत राप्रपा पर विचार मूमानी नगरों से होते हुए सम्पूर्ण पूमप्प सामरीय परेप मे स नए ये इनानी नगर यापारियों तथा पम्न प्रतिनिधि मेनों के रास्ते पर पपवे पासिकमारिया में दो पूर्व + पिपारों का स्वागत सीरिया में भी पनि पासपी सन् के प्रारम्भ से पाम की पताप्दी में मानी रिमोनियाई, गोर पोर पारसी सी विभिन्न परम्परामा रिचारों का भर भूत सम्पिपहुा । इसी बीच नमे एमय तक रोम पोर पारतबीच पप्पर हामोरात गुन कालीमिर्च पोर रेम-पति सीसामों के भीतर न मिसने मामी बीचों-काम्यापार होता रहा। रोम मे गानिस्टपूर्वको राजनीतिक प म परास्त कर दिया को पूर्व की पारमा मे गेम में ही प्रवेश पियाराम पंसार मौर बाण रामनियों में बिन बोपोंटिनो पाप बना रिपा पा उनई मिस पूमानी गमक एक भावनात्मा से मपर्याप्त थे। पाम और रवेशित मोग मुतिस पोमिए पूर्व की भोर देगनेन । एपियामा नर में सारसी पूरा परिममें पीतों पर पानी पपरया के ताप-नाप क न रखना की रसमा पी को पुमर्गीकर लिए मासुकाबरण ता है। पौरिया में पान सारा पार पाडगे निपापडी पूग (पान र एप पौर पनुगमन माप-माष)मापे। बारपारनी धर्म म मिपारको मुरिसराला परमेयर मान तिवामपा "प्राण मा परिवारमा राप माना मामानिम्म XVIIII पापा मगन) at sarm Rm TALERथर niraffe कर तिरेर भोमियान गए 11 पश्चिम (१) बाग स्पिामा पाने पिस्तुत गगाहों के लता मियामी ग्वना दी तब मैने उसे अपने पहुग मयाममान यति प्रो मामा के योग्य बना दिया। 'मिनार निरीह प्राषियों एषापापियों का निराला है। मानेने प्रतियोगम मगर {१६-१८ ईसापूर्ण) की समापि रा पता चलता है कि म्पो-स्यों मिमा सम्प्रदाय परिषम प पैमता गया मिया को पपोमो होमिमोस पोर हो मीमाही निम्प मममा पाने मनाम सम्प्रदाय को समम मपिक सफलता रोमः माप्राग्य में मिली। पीवतापिपन मेरियम और सिसिनिमस ने ३.०सपी में सामन्तुम में मिपार माय पर एक मन्दिरमा निर्माण कराया। कॉमेसास की विजय के पात्रात् सम्प्रताप में विदिसतापाने मनीपौर मन्नत शिमोगेसिपस (३७१-५) की पाझा से इसपर प्रतिरप नगा दिया गया । मिप से प्रोषिरित पार पासिध को पूरा का पथ पहला इसमे सम्पूर्ण मानता केपट-निवाग्मभिए मात ए पीमित रिनु पयामपी'माता भपरती पी समापन रेषी-देवताओं के समय प्रोममममाम्यताप्राप्त रेगमों का महार सम हो गया। मे समस्त सम्याप पार पर्प पूमानसरोमकी प्राचीन भाषि कारिक पूमापों के लिए यो पारय निवेश पे किनु पस्पारमा पानिए, को मम्मे परमे तक पूनानियों के वास्तविक धर्म येथे एसयम प्रपरिचित नहीं । कॉन्स्टेगानारा ईसाई धर्म को माग्मता दिए जाने के मार भी निपन को मस्यूटिम के रहस्यमय बर्म पौर निवारी पूरा की सादी मा । रिसाई पर्म पिवयी मापा होना तो मिपार या मेराफ्नि पबया 'माता मययतो की पिपा होती मोमम्पिादेवनापों की नहीं। पिमा सम्प्रदाय और ईसाई धर्म म पद्मुत ममानताएं दी। उनके अनुसावी परसर बग्पु' ५। उनकी पास्वावपतिम्मा पोर तपस्यामूना पाचारो म बी। पोलों में ही बना पहनो और परलोर कामप्पथ या दोनों को पिला दीकि मुक्तिनाला परमेर पुनः परार्पच रेणा मृतकों को गिनायेमा पुष्प मिर्गममा नपापुष्पारमानों को प्रमालपापारमामागोबिमाम प्रधानकोमा। मस्टिम का कपन पारि सम्पूर्ण मिपाचार सम्पराप मैतान की वानवाली है। पौर उपका गम मारों को गुमराह करना है। रिकार' XI .xvix.। मम पर पैरामिलिनियर पीm मनमा तिबारी १५ पापा "E पूर्व पीर परिरम - ईसाई धर्म ने रहस्पास्मकता को प्रोत्साहिश और माग का सिसव प्रचारित किया गया उसकी प्राविवि मादर्य थी इसीलिए उसका प्रचार-प्रसार हपा उसकी पिता दी कि सिर मीष्टि म दास पार सम्राट समान। इसीलिए निम्ममी के मोग उसकी पोर पापित हुए। उसने प्रावत-प्रेम पार पाहार्य को महासपूर्ण मान दिया। पीघ्र ही यूनानी दर्पन को अपना मेले मे नसमें एक मौखिक तत उत्पन्न हो गया जिसने विचारों को प्रापित किया। उसके चमत्कारक तत्व पापविश्वासी मोनों के लिए पानी पापपरेन। ईसा-सम्बन्पी भनेक कहानियों और उनके द्वारा प्रयुक्त दृप्टोरों के समा मान्तर कहानिया या दृप्यत भारत में थे । ॥ईसापूर्व में रोम । पूरिया पर पपिकार किया। ३. ईसापूर्व से मेकर. साम तक यूरिया पर हेरीर का घासन पाईसा के बम्म से संबपित चीमों में रोका है। एक तारे हारा मिपित ईसा के मम्म के समय उपहार पर पहुंचनेबामे पूर्व तीन बुद्धिमान म्पक्तियों में हेरोप को बताया था कि एक सपाट का जन्म हो गया है। इसपर हेरोर रेमोम के सभी गमगात मिगुपो की एमा की भासा रे । बोसे प्रस ने इस प्रसंग का मन नहीं किया। मुम भी हो याममा हमे कंस की पार दिलाती है। उसे बताया पया पा कि उसका भागा ही उसका बग करके राम्प का उत्तराभिकारी बनेपा । इसी पारपरसने अपनी बहन के सारेबगे पैरा होव ही मरमा रिये केवमाण की हत्या यह नहीं कर सका। मैप्पू' के दूसरे मप्पाम म गनित संपूर्ण कपाकासम्म पीकपा से परमुन साम्य है।प्पी भाति ईसा मी भी गिर-पुष काप मे पूरा होने लगी। ईमा का स्पिानामा एप्टीत स्पष्ट पारधर्म से लिया गया है। पुर में पूछा गपा कि पोशात दुप मागों को प्रपिट रस्साह से पो से रेले है।मपर उन्होंने उत्तर दिया किमान मागिय स्विी निसान के पास तीन मैत-एक पम्पा मग मामूमी तीसग परिया।वह पहले पगेत को किस मामूमीसामोर राममे प्रम्न में पटिया गेन को दोएगा या गोषार पितो गर्म पानवरों का पारा ही रम प्रापगा। जानिए पुर पामै पपने मित्रों को पौर फिर मापारण अनुमापियों को उपगने या पम्न में गरे मनावमिर्गा को यह सोचकर उनले पनि एकही गारसममा गये तो बहुत समपन: मानामहापा। माको यो प्रोमन दिए गए थे ग्नग हम सानी नामी गापूर्ण बटोपनिषए पपित पम द्वारा मधिोनाका दिए पर प्रभावों पपरा मार गौतम मोरिएमए प्रतोपनी बीमारपाती है। पापापमो प्रमोभित करो - । परिपम (1) हए पहरीमान पता है "तुम पहरा मररा मुग मोड गाणेहगर गए पा मसार पर पम्प भरसको हो। साना उत्तर है "मेरे लिए एमाफरमा धर्ममर ई फिर माहे मरा पीर मरा जीवन मेरी पारमा ही पर्यो , मष्ट हो भार। ईमा के समय के पहरियों को ये दिल बोर पोर पारतीपहानिया पबश्य मानूप ही हामी । मिाद्वारा परिवार पर गृह का पगियाग भिमुर भारतीय परमग है। भारतीय मम्पामो पगबार हिन पर ही मोहा है। ईसा पा कपन है “मोमपियों की मार होती । पपी पामों में रहन। मकिन इसान के बेटे के पास सिर छिपाने की कोई गहनहीं है। उनकामरामपन है “दिर की प्रया का पालन करनेते प्पमित ही मेरी मो मारे मोर बहिन है। पहूदियों की बाइपित परम्परा मे ही ईसाई और इस्लाम नो पर्म गरम है। मेमिरिकमापियों के बीच मनमे ये तीन पर्पस पर्प में ऐतिहासिक माने गाते कि किसी न किसी समय में पिसी न किसी स्थान पर पानिमा हो इनकी पापारपिता है। ये तीनों इतिहास की पटनापों से संबपित है-पिरोप मार दी परमाणे रो जिनमे इतिहास के प्रति र प्रभार रवि का पता बसता है। सिर पर परम धपित है पह पप्पी परवपिए नहीं पता कि पृषी उसकी ही दृष्टिसिर मनुप्प को पानी पानी डारा प्रपना बोध कराता है। पारमा बम पर हम पिरीय गीपन के भागी बनते पौर इमर के सहयोगी हो पाते हैंपरा में पिर ने यहूदियों को पपना प्रिपरन कहा। साई पर्म में सिर के प्रियजनके पनी प्रास्पायान मोग। इसी प्रकार इस्माप पर्म में प्रास्पा रखमपात पुरावारे होते है। याहूदी धर्म में सिर मे अपनी पानी नम्परा पहचाई पो दिनु साई धर्म में तो उसकी शादी में मानवरूप पारण कर मिया । ईसा का प्रारी के गर्भ से बाम 'पास' पर मिस कोलो पादा पाना पौर पुनरिन सिरेन्छाक पनिवार्य मग है। ईमा स्पम को बहरी प्रनीत से सपा पृपक दो नहीं कर सके फिर भी एमसी शिक्षापों का पान्तर करने की कोधिन उन्होनि की। यादी पैगम्बरों की इश पारमा को ईसा ने भी माना कि यादी अपने वीर्वप्पस पुग हो गये हैं पौर सर्ग समान प्रापरिचय करके पुन प्रपना काम पासन प्रारंभ परमा पाहिए । रामक सामाम्पबाग यहूदियों की पराम्प मास्तम म राष्ट्रीय अपराध के मिश सिरीपर कासिमा पापा पार पतीय नियम को पुम राष्ट्रीय पौरन की प्रापारधिना के स में सीकार कला पाहिए। राष्ट्रीय प्रापरिष पौर परीप राम्य की स्थापना के प्रति मापा के स्पीकरण कस में गन्होंने सबसे पहना धाईनिक काम मह पाकिबपतिस्मा कानेपान पूर्व और पीथम मोल के पनुवादियों से अपना सम्बन्ध स्थापित कर लिया । यारी नोम रोम की पराधीनता से मुक्ति पामर भारते थे। एक बार तो म्होंने बसपूर्वकताको यारी-मार बना देना बाहा पा । गेम की सरकार मे ईसा को यादी-यमाट सप में ही सारी दी।ऐक्ट्स पॉफ एपोतिसरा प्रारब में कहा गया है किमा पुनर्वापनबार उपस्थित पतियों ने उनसे प्रान किया "प्र, पपा मारत ममय परापम को स्वताय करमे ' 'चाका बारबार रह कहना कि बारियों के लिए सममे । उनके एश्योरे राष्ट्रीय महत्त्व को पुष्टि करता है। राम मानी स्मी की कथा जिसमें महान महापारिलोको गेटी छीनकरों को देना उचित नहीं समा एक समाप।' उन्होंने अपने पियों को अन्तिमौ पौरभमारितनों के पास पाने से मना किया पा। इसके भगाय उन्हें 'चरायत की तोहों के पास मेगावासा मे अपना काम पारियों को पुन पर कि ममपाता निर्धारित किया था। निा मे स्वय को पपने पूर्वजों पतीनो अमरकर मिया पौरपाने पापन तपा पिसामा मे एक प्राप्पारिमा पर्म के मुताभारों को प्रस्तुत किया। मपमे प्पतिपत पनुपर के पापार पर पकाते। "मेरी विद्या मेरी नहीं एसपी रिपने मुझे भेजा है। 'पपनी प्रास्मा मे बोमनेदामा पपनी महना बनाता है कि जो अपने मेयोगामे की महत्ता बहाना पाहता अपनी पहा मी बगामेता है।मा परनी परमय रेतना मे प्रेरित होकर बोलते है।मा सारी माम्पनामों को दबाने कोई पुष भी पहना ए में तुमने पहना इस पपने मनुमा गे प्रमापित साप रमा पापार है। उनके लिए हरप कोई एतिहासिक सम्म भी गा पाप्यास्मिा पीपन ती पिपामों में पानी पर्म की तारी कानूमी पपीपियों की उपमा परिमापा कि माना पमित रामी बात रोनों पगल पायेगों म मारतुरे मरने प्रम परमेश्वर को पार करना चाहिए । 'नुने पानी ही तर माने पड़ोसिपो का पार करना चाहिए। मारे मन रोना साम बालों की माम्पा है। में गान पापिन काम के प्रभेना मूमा पे पोर या तपासाप मा। पामें पामार गाणेकरम करम कोपा गया तो उौने मेसर काराग्य प्रायश शिना नहीं पाता भौरममड़ी वा पता किरपुर-पमुमपान पर पामरा राम्प पनाम में । . .vi परिषम (१) है। हम स्व के जिसन ममीप, पग्मेपर उसमे गरी प्रपिर हमारे सपोप है। अपने पमम् के परमपर पहचानना नाग पम्प है। मानाय सपा सोम्पास्वापों की पोई दुर्मेध बापा मही है।' पनि मानब मईया प्रष्ट हो पोर पारिसम ममार में उमसामोई मगाव नो नो पर्म मा मा चनो हप म कमो मो प्रा नहीं पा सपना। पूनानी दमन के पनों मार परमाया पौरपतिक शेषका प्रनर ईसाईपम म मी प्रवि। माना सनाव पक्तिमन और मात्रयम' पापाप समोर हो पाई इसलिए रचनामा मार्यों के प्रयाम्प समय गाता है। मानब एक प्रकार म प्रालिमी उपर परिवर्तनपीम है प्रारम्याना पाप भाता है पपने मामायेसो हाग मंचामित हालाई रिमुबह पारमा की चिनमारी भी है पौर मीलिए बह पानि तपा जगत् मे पर भी है। प्राति पौर भाग्मा के मंगम पर पो मानप के पार में परमाणा में मिनमा निम्न मापूर है। मर्ग म मरे हुए पति को पारकर पोई पम्प पति सर्म नहीं पाप माना।'ला मनुष्य के बेटे थे पोर पर केभी पस्तित्व केरोनोमरों-सामारिक पौर स्वर्मिक-मम में। दे मप्पस्प केम्प में पाए प। माना गौरमियत स उनके सामने अनेक प्रसोमन पापही ना किसीवन मी पानिरी पड़ी में उन्हें प्रनोमन दिये गये। “मरे पर महार तुममे मुके स्पाम पोरियाई सर्ने मानमिक पावना महनी पड़ी। उनके लिए मर एपमा फप्टयर पा । पातरिकामों प्रौर मप प्रलो मनों पाररानों पर विजय पा सरे मीमिएर मानवमात्र के लिए प्रारणे बन मकामा की प्रामा पौर म्पतित्व पारिराम होता गया।"वन की उम्र पाली गयी उसकी पारमा मरगूत होती गयी युरिका विकास हुमा पौर पिर रन बॉन एप ने मे यमन पिनाम की निम्न पतियों 'सर में धन मन्तिममा भमरम की पोज में बम पनगर परमरकर मारें मन रम्मी मम्मामना करना होग मान मनी परमाधिस मारे सनब परमरसर मनी र निमारक म्ना भारमा समस्म कमनिरपर देव सवित परिवान' III रन पनि म मन मिसिनेमेर पारिवाम्म ना सिरप (११) II. पूप१५११॥ . अगदेन पास "मानसे मी निवामित जुग पर्मविपरिनि मानून भीमा। सपानी किसानून पर प्रति नापति ममिएम पाउने अपने सोपवल १ गन IILI पूष पौर परिचम फा उसपर मगर मनुषहपा। उन्होंने मानवीय प्रौर देवी केबीपी साईको पाट पिया। 'स्वर्ग का सामाग्य' प्रर्प है मानस की एक प्रयस्या पस्तित्व का एक उपसरसर, गान-प्राणिकी प्रषस्पा बोधि विधा। सस्प से सामना मिलती 1मिारे पचातापमापीतमा में परिणतन । पचाताप पीर पापा के एक प्रम 'मटा-मोइया' का अनुवाद है। इममा पर्प है पतना में परिवर्तन प्राम्न फिदिराम ज्ञान का उच्चार स्वर । मानव-मन रमतर सत्य की अनुभूति के पोप्प हो पाता है। पालमप्रापरिचत पपणा पाचातापमही है, पर मस्तिष्क मोर मन मा पामून परिवर्तन है हमारे पियोन म अनि , प्रविधा के स्पाम पर पिचा की स्थापना है। यह सोचने अनुभव करने पर कार्य करने का एक मया रंग। यह पुनम है। ईसा में मारेमुस से कहा था "नये सिरे से बनम बिना कोई मी पति परमेपर काराग्य रेख महीं समता।" प्राविक मनुष्य का नहीं परन् मुण पारिफ भाग्यास्मिक मानब का पुनर्गम होता है। यह विकास का पगला कदम है । “पाचाताप परो तो तुमारा परिपतन हो। यह हमारी तना का एकदम सट गाना है। "यदि तुम परिबक्ति होकर बनों के समान मन नापो। हमारे भीतर का बामाही मसार की माया पौर रहस्य के प्रति उत्सुक होता है। हम तो मापारमा भौतिक पमन् पोर गियपाए पस्तूपों में ही मोए रहते हैं। जीवन का एम्प जीन राही मरर रिपा पाता और मम्मनि मा ए पाता। पौर पर मर मोदी मी-कमी न बातों की पार पातीनिहे हम भी गानते थे या पोरनी हमारे पास पी। हम पवाय ही परनी पोपी ई निधि को पुनः प्राण करना चाहिए, 'वानी पार साभारिपना का फिर पाना चाहिए । मानव को अवाय बदममा । एसिया पोंमेरा पहना है 'सानेपामो पापो पीर मृतकी आर ठो। मंगठित पोर बापवान होन से पहले प्रारंभ में माई परेगी गार १ 'सू. . गुलमा विराम 'मने मामन मलमतिका बन मामnिtiMIL 1 न IIL पदमार्शमय LI १ ArT' XVIIL | ARI | परिषम (१) - - माम्तरिक प्योति के प्राय के कारण नीर गगागृति मे पहपना ही पा । पुसकी तरह ईसा मी नागरिव पे पार मरों को पाक्षिका साप बनातक । स्पर्ष का सापाम्प काही मनिप्प में नहीं है। यह हमारे सुपीप है। यह हमारे भीतर है। इस परस्पा को प्राप्त करने पर हम नियमों मे मुक्त हो जाते हैं। साल का दिन मनुष्य के लिए है मनुष्य सम्त के लिए नही ।। इसीस उपोट्पात में सेंट बॉन ने कहा है परामिमों ने उसकाम्बापत रिय उसके नाम पर विश्वास म्मिा उन्हें उसने पिपरको सम्मान बनने की पनि प्रान की।" सिर की सन्तान या पुष का प्र केबस पर-विरचित पापी नहीं है बल्कि मेंट पीटर के पदों में परीय प्रालिका सामेवार' । पम्निम भोर के समय ईसा की रचर-यापना के सट यौन हारा ये गये वन यह स्पप्ट है कि सर एकहोगाएं है पिता किस प्रकार तू मुभमें पीर मैं तुझमें ई से ही ये हममें हो यो महिमा तूने मुरी उमे मने रेपी जिससे किये भी एम होषाएं जिस तरह हम एक है। हममें से प्रत्येक इयर का अबतार बन सकता है। सेंट गॉन के उपोपात के पन्नों में 'मोमोस' ही 'सची ज्योति है मो ससार में पाकर, प्रत्येक मनुप्प को ज्योतिर्मय बनाती है। ईस्वर मस्तिक में उपमनेवासा विचार नहीं अनुभव किया जानेगामा सम्प है। बाद में पास्ता रखनेबामे कोरिस्बिवाई ईसाइयों के पिम्स पॉम ने कहा मा "क्या मर्ष करना किसी के लिए ठीक है ? क्या इसमे कोई नाम हो सकता है ? फिर भी में प्रमु के दर्शनों पोर प्रकापों की पर्चा करगा। मैं ईसा मामक एक यक्ति को मानता हूगो पौरापर्प पहले सर्ग-मोक की मोर ग्ठा मिया पवा। (हहित या देहसहित में नही मानता परमारमा पानता है)। मोर म बानता १ माई...1 . ... XVIL. २१। ४मपात संपास किमाने की सोनिया भारतमा हो। मोरेशम मार पहारा प्रयन ने हमला किमाके भौतिक औसनिक दोनों रूस ममे भारत ही शमीच मल कसार होने के प्रचार में साम राममान में सममें रस्सीय नेम भावास मर मित। पिदी सरपरेरान इनरोत्सास (११) एप २५५ । पाँच FRDीब मैग का कपन। 'मेरे स्थिर से सेंट पॉल ने मौसमोसाको परमप्र मकरी माना। मनियम समेत्र काम सेख 'पिखसेकोयमौर सरिन किमी रस समातिय विसासको भरमा सिकार समकमी मौसम के सामोर"-पाचम नरवानरसेविस (१५५।

SY पूर्व पार परिषम है कि उस सम मै माया गया और मैंने प्रेमी प्रपननीय पात्र मुनी चि मुह पर माना मनुष्य के लिए रचित नही।'धर्म विर के पस्तित्व का मान और देवना का रिफास है। पिाको स्थिर अस्तित्व रामान पापौर रमको चेतना दिन सित पी।सट पॉमन पो सिाकसमा समान प्रपना मी स्वभाव बमानों का मत पार्मिक चेतना परम पिता को सर्वम्यापकमा पनुभूति परमेम्बर माष सयोग मी पोर है। "तुम्ह अपने प्रभु-परमेश्वर को पपनमपूर्ण इप मारमा पीर मस्सिक से प्रेम करना चाहिए। हमें सिर को अपने सम्पूर्ण पस्तित समेत प्रम करना चाहिए । प्रोगस्टीन । मृत्यु से पूरे स्पष्ट पयन का सबसे प्रतिपाय है 'तुमने हमारी मुष्टि अपने लिए भी। पर हमारे पप रारा पापय न पा वायमे वैचम रहमे ।" भरन-महिता में एक दिप्पनी है "पिठ प्रभार हिरानी पानी परमे के लिए पात पती है उसी प्रकार, है परमेश्वर, में तरे लिए पास ह।""ईसा मा मत है कि मानस-परिसन्न हो पठना का उदात्तीकरण हो। हम मोग सापारमा इम्वियनमात् पास पाचन पीते है।म तपापित 'परीर के मस्तिक इमिय-मापूत मस्तिष्क पापार पर पीते है। मनुष्य का वास्तविक सम्पदो कमी रमर ही नहीं पाता। प्रान्तरिक परिकार ताराही मनुष्य समूता प्राप्त कर सकता है। इम ईमार समान र प्रविबागरा होना चाहिए। हमारे भीतर बह पागमता गुण पीच पार पपूर्ण विकसित है। मिा में या सम्पूर्णतया सामयिमान पी सर्वप्रपवमानन प्रारम का पानामहमारे लिए पहनी बार पम पनिका बीचमतिीय पादमा प्रपतरण पारा मग्न मेने की पपस्पाई। मानरमानिमिए पारिमापसे पारा सम्म मैना प्रारपर। मिाापारन मामीम हापारिपिटा उदाहरण है।ईमा हमारे १॥ोन-XII -ममतमातम पसरत कामवानरामरी मरमारामारापारमा मिोबारे मग (ARYAN) पारे प्रसारास प्रारोपाचन मरेंगा forम प्रामारोगों मे देगा मामा। प्रम र पारेमाभ्यप माम नगरसको परिम्परिन बनायो मामा पनि सीमाप्रपामा भरत ममानिने नेपय मामामारी मापारेमा सरेर में गत माल मिमा प्रसार ther सम-नापियन। .रिमा XLILI परिषम (१) मिए देवी पावन के प्रारम् ।। उनसे प्ररित होफर हम संपत ईसाई मही परन् स्वर सा बन सस्ते है। रेमियम के धम्दों म ईसा ने मानवता का पुनरसमोरुन रिमा । साकी एलिमें पप्पारमपिता धर्म का मूल उप्प मही है। सारे ग पोर सरप इसी बीवन म समाप्त हो गायने । परमेश्वर पस्तित्वका प्रामास मानायक है उसके पाम्पिन को प्रावस्यकता मही। मत-मिमाव तो पत्रिम समर्पिों भीमासम्सना । रिनास्तपितामों: स्पान पर सों का प्रयोग मियाता है। पृप्पी पर इस धीमेपार-पार काना-कामा देखते हैं।' पर भी पानापमापी गईन है। प्राकारागी राखिर सत् का माम प्रयान करते पौर उम प्राप्त करन की पाक्ति देते है। मनुष्य की प्राई नगर की महिमा भान है। इसमें एक प्रकार का ममतामा मात्र निहित है। परमेश्वर, मुझ पापी पर दया करो। सारा मत है कि मानव के भाग्य कामान न ही नहीं बरन् एक उपनायि भी है। इसके लिए परिणम भाराहना उत्तवा चिम्न-मनन का पौडन् प्यतीत करना पासपर है।' (कापर्म पचपि सीधा-सादाकिनु रसमा पासन पासान नही। अपनी प्पपिसमव रचियों का परित्यागका करम परमेश्वर की मात्रामा पामन करना होगा। पीएपीस' में ईसान रहा है "मेरा एकमात्र परम्प अपने भेगने । कोरिलिम XIILR सन् १५ भनी श में करने नियम मितिमारा रफिकोच में श्रम नियम। "ना-पसलिए सारा मनापरबपतमासामोरं रिसेप्रोममरतबमें माननीय मान मे मा पाने की प्रतिपादो माना पीलाप हो बात है और पार में माती ठेवामी की वासीया में राम अवेसा, मरियम और सन्पीच मक्ते यबारातियों और मानवम्बरशिप पर्वों से भामम रामपनि होते, मातक्ति मौर म मनिदिम के मासेमभरा गये। साने गरेव समिरलोभीपोर रिसको प्राप्त भने के लिए प्राचा मिलनरो। रेगा मारिपारित सम्ममुग (१५१) पप १५९ १ XVIII 1 पटलमेंट ने किना-मन मरियम नो सि"प्रगती एणन मर गए नियम सर से स्मात्परमार प्रस्तरको समान गर्ने ।" 'दोमेय VILोरिमन ने एसी पर राम पिस्तीग प्रममा प्रम मोर पसीपाखी जोगस्थिति अनुमान भारत और मामल_पय मनुपलर के समान का _avati पूर्व मौर परिचम पामे की पाशा का पामन पार उसके कार्य की सम्पति । 'हममें से प्रत्येक को सिरसाप निर्धारित पपने कम्पप्रति सजग रहना चाहिए। युविका विकास मापागास स मुक्त होने पर ही होता है फिर भी पौवन की रखाको माग्यवा भार मसद की स्वीकृति कभी नहीं री पपी। हमारे लिए उपवेप है कि इस पपने पड़ोसी को प्यार करें। पिातु ग्मे पापी सममकर प्यार करनेमा उपरेप नहीं है परन् उसमें रिचमान बिर मिा मानव सममार प्पारपरने का है। मंट पाल ने सिखा पा "प्रास्वा प्राणापौर प्रेम तीनोप निवास है, और तीनों में प्रेम सर्पोट । 'प्रेम म्पनस्पा की सिरि है।' ईसा न एक सार्वमीम मैतिकता की दोपमा की कि सभी मनुप्प गह एकही 'पिता' को सन्तान ।' 'गुरु समारितन' दृष्टान्त में ईसा ने पड़ोसी की नपी परिमापारी है। हर पावसस्ताग्रस्त प्राणी पौर पर पानी जिसकी सहा पता करन की सामप्प हममें हो हमारा पीसी है। सट पाम मे सीपीर पिठ यूस के प्रति मगन से ग्वरप दिया है हम उसीमें जीवित परिपामित उसीमें हमारी सत्ता है साकि तुम्हारे कुछ पारियों में रहा है पपाधि हम मास्तब म उमझी ही सन्तान हैं। सा का उपदेश है "मपने पामों से प्रेम करो अपना पुरा पानेगातों का भत्ता पाहो पपमे पुमा करमेनामों मामला फरी पपने सनानेकामों के लिए प्रार्थना करो तभी तुम अपने स्वप-स्पर पिता' की सम्मान बन सकोस ।"५ सेंट पॉम का कपन है "सान पारीन पूनानी मगर साइपिपाई गाम दास नववा फिर पीईसा नामETपकिन में सम समालि।" ये सारे पम्तर प्रसंगहपोंकि पौवन सपूष पौर परिमाग्य है । हम एक-पूरे के पपईसा कारनाम सपूर्ण माम वता का उत्तरापिस पाप करना चाहिए। पिप निवामियों और , 10 रोक-AXII. 1 । मे XVIIII Top XVII भvNIXIरफि कोमाम 11 मनोमन परे म पोमात पातामारी माग पनिया और भारत समममममम ममा मामि titing प्रदानापति LAR भागमोthiबानमन REmai (१) SH Surनमातिरनुपरव| मी मनुष।

परिचम (1) संसनिपों का पसमिसन मोईपर्ममाप पार नहीं म्पि प्यागारिक बात बिना है। ईमा के जीवन से प्रभावित होकर पा मुध मोगाम उन्हे मी पवनार मानने की प्रतिगामी ठो'तोगोस सिदाम रम पिपासपोरंसगरम्पप्रान पिया । पान के पत्रों में मंगार पौर निहाम माप मिा के समाप पोष रीप शिब पोर हा प्रत्यती माता मया है । गति में हम दृपिमान को पौर गिरमित म्प रिया।वीमायोस' पनन्नराम मे बनमान है मौर पर साप मिनपर एक सारा निर्माण करता है। यह उमकी प्रारमरित्रप्तिा पापन है। यह मंसार पिरीय 'होमोम परमपरा बिक पा विचार की रिमणि है।पा रिमापन मानरो मसिप में विगत परमागीयाण मनुष्यों पैगमरों पोर मरय के प्रति गापा किना भी रेप के मोगा के मस्तिष्क में हाता है। मनुष्य के मम्मिा में इमरपाटम का समुक्तिपरिमाम नहीं निगमा पौर मनुप्य रबरकममान बननगी दिशा में प्रगति मकर सके।सीभिए यि रीय ज्ञान की गोपिएक ऐतिहासिकसिय में प्रस्फुटिती।"मोगोष मांस का परी' मारपर हमारे और प्रापा पार हमने उसी महिमा रेखी। 'मोपोस दारापिरीय झारापान सर्वप्रपप सृष्टि में या फिर पाना जाति में फिर पंगमरों में पौर प्रतहमा में । हम पुष भी करें घिर का प्रम हमपर मरेर बना गला। मॅट पामा कपन है क्योंकि मुझे विधाम है कि मम्प जीवन पगि प्रधाननाए, पनिर्या पमान अपना भविष्य पाई गहराई या काई और प्राणी इनमें से कोई भी हमें परमेयाप्रम मे पमग नहाकर सरमा यही प्रेम हमारे प्रन मा म विधमान . ईमा के जीवन प्रौर पगारेमाप भाक-अनि मिसान्तसमिरम्पमही भरिम सर सर पर मम्। बन्द मरकामात मोममसरना। UPA VIIIre-मंगभग पनि RIPA मेरे मन होम मरा पानीमच मिमों पर कि तुम यो सर प्रोमथिए । परे परमात्र पनि नुप मेरे मन नियमोमेम कहीरानगरापतिदीम रामनी मै म देत मी मा प्रतिमा कम मारी बर्ष निकिनीमे मारपिtt और नमी मारा बीमा हो। दो तुममे पिपरे प्रम मे माया तुम मरे प्रसन मासकोम। स्प्रेकि मर्म मोर मारपर्गदर्षमा तुम मेरे पाम मा म रमतरतुदीन पाप कि सम और नी में परिमाप्त है। पCि.CXXXII.

पूर्व प्रौर परिषद मामे की पासा का पासन पार रसके कार्य को सम्पति। "हममें से प्रत्येक को ईसरारा निर्धारित प्रपने करण के प्रति सजग रहमा पाहिए। मुदिका विद्यास मायायाम से मुक्त होने पर ही होता है, फिर भी पोजन कीवाको माग्मता परि प्रसाद पासीदि कभी नहीं दी गयी। हमारे लिए उपोषकहम प्रपन पड़ोसी को प्यार करें। विनु सम पापी तमनार प्यार करने का उपरा नहीं है परम उसमें विद्यमान करके लिए मानव समार प्यार का। सेंट पॉल मे मिका बा HERT प्राणापौर सेम तामा मियो और तीनों में प्रेम सोरट"प्रेम मनुस्मा की सिवि है।" (भा मे एक सामीमतिकता की पोपणा की है कि सभी मनुप्म बम्पु एक ही पिता की चन्दाम' 'पुर प्रमारितम' के दृष्टान्त में 7 में परम्पी की नयी परिमापापी है। हर प्रायश्यकतामस्त प्रापी पौर हर प्रामी निसको सहा पता करम की सामर्थ हम। हमारा पड़ोसी । सेंट पॉस मे स्मीनार पित यस के प्रतिपयम से उतरवरिया हम रहीमें बौषित परिचालित रसीम हमारी सत्ता है जैसाकि तुमारे कवियों में कहा, 'पोकि हम बास्तर म उसकीही सम्वाम ईवा का उपदेश है "पपने पापा से प्रम करो प्रनमा पुरा पाहीमा काममा पाहो पपन गुमा करनेवानों का भला परो पपने सतानेकाम के लिए प्रार्थना करे बनी तुम सपने स्वर्ग-स्थित पिता' की सन्तान बम सका।"ट पॉम का कपन है "सान पहरी मनामी मरसाइबियाई पहराम महसम्म फिर भी भापक एक पारित परेमा समाहित है। धारे पम्तर प्रसव है क्योंकि बीपम सग पौर मनिमाम्पस एम्भूसरे के पास का कहना में सम्पूर्ण पाम पटाका तरवामित पहप परमा चाहिए। देशप के मिजामिया और - । - (IVri १ रोमम्मXIIS.1 A XVIII * XVII #1 1 Tv wixvf पारिका । (मिम 11 अमोल का सार "मारे कम सीमा मामामोरी मारे साप पनि पक और पासमार सस समय मइम परितोय! न बुरे सीमा मिस पप निरम परित माप माल tef पश्मणे सात 'मन मा गमय () में HOUT मा सिमित भनुपर।

परिन () संसातियों का प्रमिमन कोई प्रसमाम्म प्रापस नहीं बल्कि पानहारिप बास्त पिता है। ईसा के जीवन से प्रभावित होकर पर मुष मोगा म ह बी भवतार मानने की प्रवृत्ति बामी का 'मायोस' सिखाम्त ने उनके विपासपो तर्कसमव स्पप्रदान पिमा । पॉन के पनों में संसार और इतिहास साष ईसा के समय को शिव रीम मियेक पोर उसरा प्ररमपीपरम माना गया है। बान ने इस दृष्टिकोण को पौर विकसित परियारपी'मोमोस' अनन्तकाम में वर्तमान है पौरपरके साप मिलकर एप इकाई का निर्माण करता है। यह उसकी पारममित्राप्ति का सापन है। यह संसार ईश्वरीय 'मोयोस' परमेस्वर मा शिक्षक प्रपमा विषार की रिमप्ति है। इसका पिनापन मानव के मस्तिष्क मे रिपत सिरपाणीप्राप्त मनुष्यों समरों और सत्य के प्रति गायम किसी भी देश के सोमो के मस्तिफ में हवा है। मनुष्य के मस्तिपाइम उपाटनमा समुचित परिणाम नहीं निकला पौर मनुष्य विर के समामबनने की रिणा में प्रगति मकरसके इसीमियम रीप मान की ज्योति एक ऐगिासिकस्यक्तिरम में प्रस्फुटित हुई। 'मोमोस' हार मांस का परीर भारम कर हमारे बीच पाया पौर हमने उसकी महिमा देखी।" 'मोगोस' पारावरीय मान मा प्रकाशन सर्वप्रमम सृष्टि में हुमा' पिर मानव पाधि में फिर पैगम्बरों मे पोर पन्तत ईसा में । हम कुछ भी कर सिर का प्रम हमपर सरंग यना रहता । सट पॉप्स का कपन है कि मुझे विश्वास है कि मृत्यू, धीवन परिप्ते प्रपानताएं पाक्तिमा पर्वमान अपना पषिप्य संचाई पहराई यादोई और प्रामी इनमें से कोई भी हमें परमावर प्रेम से ममग नहीं कर सकता यहीम हमारे प्रभु ईसा में विद्यमान ए माकेबीपम और उपदेणे केसाप'नर-अम्नि' सिवान्तामोई साम्प नहीं करिम भर ममतोमा। पति में मरकम रोप्रारमा मौ। 'मान्मदिखा १५ . पेमा VIITE-11भागीन अपन"R रा निवास मेरे मन न तो मेरा भारत की नोज मि मचाई कि तुम मेरे समीप पात्रोमविर परेजसम परि तुम मरे मगर जिचमबमोने में भी मन मेरा पनि पापा । बदि तुम ममतमी मेरा कोई प्रतिमोथा कि माम सारी मताप निति मे मारी माने की सुधि और तुमा सारी कामों को समझ । में दो तुममें सचिनारे पास से मई म मेरे पास से पामोरे। पाकिब और मती मारामाईमाम मरे पास बासको समेतराम्दीने वो काम समोरनी में परिपाई। 'परिम C.C.xxxII.

C पूर्व पौर परिषम है। ईसा कहते है कि हमारे बंधुपाहे 'सात के सत्तर मुने बार" हमें कट पहुंचायें हमें उन्हें भमा करना चाहिए। ईसाकी अपेक्षा याताफिर परमेश्वर की भिल नही हो सकती। परि पर निम्बर नर-मम्मिलिए उत्तरदायी है तो निरम ही उसमें पुख परेवी होगा। यह सत्य है कि हम स्वतावर बिस्तु मानवीय स्वतंत्रता का उपमापपरने के लिए पावसा तो नही किपरमेसरका प्रमानवी करार दिया जाय वरिहमसरपामुताबरतने की प्राथा की जाय तो प्राय स्यकमहीं किहम सिर के प्रति सहाय महो।"पोंकि यह पोमोर पुरे दोनों पर अपने मूर्य की रोमनी चमकाता है तथा म्यापी पौर प्रम्यायी दोनों पर अपनी बी करता है। परिरकबासी सदैव ईसर का विरोध करने में समर्प है तो यह पाचाताप पौर परिवर्तन में भी अपनी स्वतंत्रता का उपभोप कर सकता है। पभिमान मार मा से हमारा समाव पाहे जितना मुपित हो चुका हो हम अपने भीतर बिरामित देखलको समाप्त नहीं कर सकता यदि हम परमेस्वर हर जपहनही सकते तो फिर कही नही रेप सकते। एकपामिर पापा के अनुसार ईसा की मानवता समूर्ण मानवता की प्रतिनिधि है, और ऐविहासिकता ही मही समस्त मानव-नाठि को इस 'अवतार'माम मिमेगा। संसार का मस्त समस्त सृष्टिा पन्तयाम्प है। सट प्रमानासियस मे मानव मार समूर्ण सृष्टि के सबर्म माई "परमेश्वर इसलिए ममुप बना कि मनुष्य परमेस्वर बन सके। दूसरे मानवापी किमाई में निवासरसनेमे पत्तियों को भी ईसा अपना मित्र मानते हैं। दुप मोनों ने ईसा से पूण कि क्या मिमियों को अपने म पन्चाईरतने देना चाहिए तो ईसा मे उत्तर दिया जो हमारा पिरोपमहीं करते हमारे सहयोगी है। सट पास के पनों में पर्ष 'सभी के लिए सबम होना पाहिए। इमे सभी प्रारमार्यो पर समान पति कीनता माशा करनी चाहिए पौर उमनपापना चाहिए। महानवम ईसाई पम्पारमवादी इस मन स्वीकार करता है किहम परमेसर कौप्रातिकाहारमा प्रत्यक्षीकरण नहीकर सकते । सेंट टॉमस एरिखनास का कपल है वो भावना के व्यवहार मनाने का मुत्यप परित्यागकाकारण अपनी विशामता बन पर बह बाबमा हमारे मान की सीमा के भीतर के सारे प्राकारों से परे हो जाती है इसीमिए, अपने ज्ञान माग उमा सम्प नहीं मान सानपुन 'परमेश्वर को पामने पाम है उमे मजाममा हमारे मस्तिकी , 'म XVIII १५॥ . मैम् Vni 1 'मासIXIVI परिचम (१) 1 सीमा से परे परमेसर साब सेयोग करना-परमस्तिप सारी पीयों से प्रमम हर माता स्वयं को भी त्यागरता है और फिर परमेश्वरमी परम-म्पातिर्मम किरणों में नम हो पाता है। परमपर परिधान की इस अवस्था में हमारे शान में परे कौवीमान की रश्मिमा मस्तिष्कको मामोफितरती है पोषित उस परमेस्वर को पहचानना सम्पूर्ण सत्ता में ही कसर नहीं परन् हमारी शान की सारी सीमामों से ऊपर है, और यह क्षेत्रम पी शान मे ही संभव है। पम्पामराव मोघ के लिए मावस्या निश्चित और मुरा विश्वासों पर प्रषिक बम देता है। इसमे विपरीत महानतम ईसाई पिपारकहते है कि हम पीके पार पार Uषमा युपमा देखते हैं पौर मुसवापूर्वक मनही कह सफ्त । एक हार्ट का पपन है "निषित सम्पों के भीतर परमेश्वर कोलापनमामा म्पति सम्म तो पा मेवा है किन्तु उसा भीतर स्थित पिर को नही प्राप्त कर पाता। रिसी निश्चित स्वरूप में परमपर को म खोजनेपासा पति रमे प्राप्त पर मेवा पोंकि परमेस्वर उसके भीतर ही है पर ऐसा व्यक्ति परमेसाब के साप रहतापौर स्पये बीवन बन जाता है। सापरणे में तपस्या का पुट है, मोसमी सन्न धर्मों का भ्रम है। स एक सामन पिसमे पन पर मनुप्प अपनी प्राति से ऊपर उठ सस्ता है। परमे पसर परपियो अनुसरण करने के लिए इसे सब पुष परिणाम कर देना पाहिए । “मिटि प्राप्त करनमिए," ईसा ने कहा मा "मावस्मक कि पपना सब पुपर गानो गरीयों कोरे गमो तुम्हें सन में प्रपार पन-सम्पदा मिस पाएगी। मिना पूर्ण वर्ष में यह पामत्रग गंभीरतापूर्वक स्वीकार किया गमा योकि यहाँ सानों की उपस्थिति का उस्लेव । मट एप्टनी (२. ईसी) में एकाकी पीरन पारन किया ये मरभूमि में एक सामी मकबरे के भीतर पाठे पौर इसी तरह बीस सान रिता दिए । घर प्रधानासियस पर 'माइफ माफ सेंट एष्टमी के मैटिन मनुवारशारा मठयार परिचम पहुंचा। पूर्ण गेमक यामाम्प के तपस्वियों ने एक मूफी (मिस्टिक) प्रम्पात्म का प्रतिपादन किया जिसमें सिमर सापालार और सिरव-मय पर बस रिपा गया है। हममै म प्रत्येक को एक नयी दुनिया का सरपवार मन माना चाहिए, पो ममी ममनमा है बिनु पग्म के लिए कराह अवश्य ही है। ईसा का सम्पूर्न जीवन पर उनके सिगात इतने सप्ट कि न पहरी मेटरविनिमनोमिनिस्स- VIII श्रीरवि CX.VII 1 मे XIX. १॥

। पूर्व और परिचम भवा यूनानी विचारों का स्वामायिक विकास नही मानामा सकता । सीय सी एक ऐप मारत की पामिर पिमृतियों की साधुता से प्रस्पनिक प्रभाषित होकर सोचने लगे पे कि ईसा मा सौंदर्य प्रवस्य भारत से अनुमानित है। उन्होंने सीमनाथ ठाकुरको मिसापा इतिहास के प्रम्यपन से मैने समस्या प्रारंभ कर दिया है किईसाई धर्म स्वतन सेमिटिक उत्पत्ति का नही है किन्तु हिम विचारों और बीवन से उसूत्र है। सिा मुझे ममु पुर्तम मुन्पर पुप्प-से ममते हैं, जिसमा मीन उगार प्रपत विदेषी भूमि पर पा पाना है। इस तपा प्रमक पम्प पपों में भारत विस्त इतिहास की महागमनी है। पाहवी किसान सा समारत प्रपमी रेपी प्रकृति के एक प्रब के रुप में मैरपारी पीसा के प्रादर्स को जो मूमत दिल पर्म से सम्पषित मानने लगे पे । उनमें सार्यमाम करना और सार्वभौम सदासयता पी गिनका प्रमान हमें मैतीमियाई पहाड़ियों पर 'कॉस' पर पाने की पंचना में मिमता है। इस मुस्प पिचार-विमुका पनिवार्य परिणाम यह होगा किम ससारके उच्चतम धर्मों को एक पेड़ की सामानों के सप में रेस सये। इसका पर्ष पह कि मेरी गाना एकाकी होगी पर्यो ईसाई विचार-विमुके सभी पानों को मुझे त्यागना होया पौर परिषम + मरे परिचित पौर प्रमी ऐसा करने की बात तक मही सोप सकते। - बरसनास अनुनी और मामी सम्मलित सो मा (it) पर मैं गएननपत्रमा ११परम भर म. एम. किरेन पर से मीर मालमपुर को मिला तना पीमिरे। म और "मरस मि परी गम मपी और का मागीय मन्त्रों की परम्परे सब की भी मारा हमारे परिभरा पिका MONSTRरामा धर्म में निहितमा की मामी सम- सामन मयकी मानपरत माय मने प्रसमसमा मात्र

द्वितीय म्याग्यान (उत्तराप)
पश्चिम (२)
१ ईसाई पम में सारित निरास
परसौ पौर मारी मातात्रियों कीच परिपसी रमाने ईमाई पम पोरीला
मेसी समे पश्चिम के विकास म एस नपा पोए प्राया। प्राचीन ममति पौर
माई पमरोनों दीपा मसूती मे परिचमी मृगाम पम पामिपित पामिष
मस्थामोंगरा एक प्रतीव गमोर प्राप्पारिमक एप सार्यमाम पास्पा पूनामी-रोमम
मेसारकी पारस्पना सामों लिवामा मौर प्राचार्गे अनुसार म गयी। इस
सिजनको पररामाधार पर उम्मपन परिया गया। गम मे अपनी प्यार
हारिफ्ना पौर मुझपटम-प्रमक बन पर बम का मेम्पा मापदेन म सबर की।
माई पम पावतो पूर्वीप रहा मुि रसमा मस्तिष मम्माम मोरधार
पार्मिक ममटन, पूनानी-नोमा गए।' मगस पूीय प्राम्पा तपा उसकी ममी
पाप्पाश्मिरता एवं 47 पार मानीय निधारों पर निरमर ए तनाप पी
स्पिति हो । सिरियातामपादिचारकि कापिपियायों में ईसा
माया पर मूडी षिक प्रपया मसा माईपर्मबारे में है "मैं पाममा
करवाई रितुमारी पारवा या निममे म नुमारी पहुंच से मारपीबा तुम्हे
१ मारेमर पर अगर समन: "मानियों में माम्बा को मैपनि स
पिपरपालिकामा भिान नामी मन का भूमि र पसिष।
रिझियमा, मिन और भयारिय रिपतनानी मनिमारमोर उमस
सिमराम प्रसार गर्म प्रय परग से ग्नमणिष गुप धारी
मीसको ।पमा मानव पूनानी म मन मा परम् राम माया समें
पारेमा भने संप ममब मिन मा म पिकात पर सपेर ती मनी
निरिममिन-नागभी प्रारीन पूनानी रानिकारक पनप युग
तोचमा मात्र परमजमार सप्रषों में मिरान दो महीसाग
मष्ट मनीससीनिम पिचर और माग समोर
मारमा म रिस (१००), पर।

:-- १ पूर्वमार परियम बता सई" "इससे ये हमें बताता है कि प्राध्यात्मिक पस्यों का मान यो परम पास्पाकी सबस्मा , सामाम्य उपदेशों से परेकी रस्तुहै। 'माम्यात्मिक पयों कामाम प्राप्त करने का उपाय फरिपतों ने मसिसित स से कुछ पारे-से प्राम्बा पारियों को बताया था वहीं से हमें प्राप्तहमा है। मॉरिवनका रुपमहै पवित्र पर्मयों के विचारों को अपनी मारमा पर तीन प्रकार से स्थिर करना चाहिए जिससे सामाग्य मक्ति की परिधि तो धर्मों के (कहना चाहिए) 'परीर से हास और बचाई तक पहुंचके पति ही परिधि धर्मों की 'मारमा' से। इस प्रतिरिक्त निरोप पति तपा ऐसे व्यक्ति की परिधि इसरे प्रकार से हो सकती है जिसके बारे मे ईसा मे कहा है हम पूर्णक नुपी लोगो के समक्ष विवेक पूर्णबातें कर सकते हैं-मांसारिक प्रणामसारकेपासकों के रिटेक की बातें नहीं परिवेबिनारसीम है।हम ईसर प्रमात पिक की पुप्त पिक पी जिसे पुर्षों पूसिर मे हमारे महिमा-बर्मन के लिए निश्चित रिया का बात करते है। ऐसे म्पक्तियों की परिमुनिमाम्यारिमक निमम से बोमनागतका क्ति करती है होती है। मनुष्यों के समान धर्मच में भी शरीर, पारमा और बियक है। बमीमेंट मॉरिवेन तवा पम्प सम्तों के समान सेंटरेनियस ने एक मौखिक गुप्त परम्परा की बात नही बिसका उमर ईमा से हमा पौर प्रसारण पंपमरों बारा। सेंटगेनिस मेरो प्रकार की प्रप्यात्मविचाों की बात कहीजिनम में एक सामाग्य है दूसरी पुप्त मौर गकी अपनी ममय-प्रमग 'सार्वजनिर पौर 'नुष्ण परम्पराएं है। दुसरी पतामी में 'एपॉसॉगिस्ट्स'नामक कुपनकों ने इस मपे पर्म की पूनानी पर्यन के सर्वोत्तर प्रों के अनुहम गौरन-मा पार वर्णन के रूप में प्रसा की। पस्टिन मार्टापर कपन है "जिन मोपों में 'मोमोस के मनुमार अपना जीवन प्पटीत कियाईवसभी ईसाई। फिरवाहमास्तिरहीमपों महेबाते हो। म पूनामियों में नरपत पौर हेपसाइटस संसार मोरवाने के लिए परमात्मा प्रिमियर IV पर xि.१॥ १ निरहि रामान रिपन समिम बन परम संयकी अनुपा(५४। 11'समानुनमाविमापन पर सिमावर्मा मान परमपम भी मौ मनुफ्यतिरिमेमसम्म हामी पनि बसी भी पाले मै मौरसरममसाई धर्म mIXIII माम मनिकम्मरमति निकोलमवार:पने निप कामों में मिमोमीनमा और शिम मानिरनियमों में श्र परिचम (२) पौरिस पापी ने ईसा के स्म में प्रपतार लिया था बही पानी पहने के पुर्गों में ससार को शिक्षा देती भी पानी मे यहूदियों को ईश्वरीय नियम रिप पौर यूनानियों को पर्मन । पस्टिम समी सत्पापियों का सायत ईसाइयों के सम करत है पाकिसिा सस्प है। ईसा पम को हेमेमवार के साथ मिश्रित करने के अनेक प्रयास किये गये जिन्हें 'जानमार्गी' ('नॉस्टिक सूनामी प्रम 'नॉमिस से पर्प माम) कहा गया। वर्ष मपनी ही मस्पामों को मुप बनाना चाहता पा समिए यस 'मानमार्ग से मोहा मेना पड़ा और एक प्रमग ईसाई पप्पाम्म कोपिकसित करना पड़ा।' सिम्परिया में एक समय मोटिनस के सहपाठी पॉरिवन ने यूमानीराम का महत्व स्वीकार करते हुए ईसाई मिशन्त पिकास में योग दिया । पस्टिम से पॉगस्टीन तरकमबमेटोपार पौरपके पाररिपों के ईसाई धर्म पा सम्मेष धर्म के साथ भषिक पावन पौर मिज्ञान के साप कम । कॉन्स्टटाइन के समय में ईसाई धर्म कोराम्प की मान्यता प्राप्त हो गई और पियोरोसिपस के पासमकाम में बह सामाग्यमा सर्वमाम्प धर्म हो पया। मारम्सिने सहममिपों को नर्मपुतहोने के पपराम में ररित करने तमी पौर इस प्रकार एक मई कहि बनी। 'न्यू टेस्टामेंट' 4 सेंट पॉम उन सभी म्पपितों को पाप देत ईपी ( उनकी दृष्टि में ) गलत इवानों का उपदेश देते है।' टिमोषी के प्रपम एपिसिन में मिम्नमवानुमापी धर्मोपदेयकों को वैवान ( 'सेटन' ) के मुपुर्द कर दिया जाता है। सेंट जॉन होईगीम में कहा पया है हि“साई नियमा बनी म गाननेवाला याम्मति पापपस्त है । निचित निमास एक पिपेप प्रकार सपने मस्तिकों में भीषम प्रतिक्रिया गत्पम्न करते हैं। इस 'मपितमुम (APortolio an)की मुम्प सिक्षा भी बग्मुसम प्रेम की जिसके स्पान पर प्रमी की पूरिविनों से भी सती मोर म्से विमिन नामों से पुण्य माता है। पेस से कारभामा कियाई पंचम (११)अमरप हिवरा नवरी १५५४ पष्ठ १ । में | पौती रावमी एक प्रमुबईसाई पोषादीमा पानस मरम्स से बतिनिशिप मनाविरों में जनही । किमर्म का भार नियनों में है। मगर मनिाप दे दियोबाची (00 छ। । .मी एवमो से गॉन मार्यम के सब मना कीमिर को मपनी मात स्वीकार मिनिम्न मापसमेतमोभरमा छिमबीग सको।' महाशिमास 1.1 VII.ti पूर्व पार पश्चिम . तीन प्रतादियों म मुममठिन प्रभना के बंधन की स्थापना हो गई पिसम पारीरिक सदेने का विधाम भी शामिल था। प्रभुता पवित्र और धर्मनिरपेक्ष पी पितु बार्मिक विश्वास के पन्य स्पा के प्रति प्रसहिप्पी मोर उमका मारावा मेरे साप मही है मैग पुस्मन है और वो मुझसे मिलकर नही रोपा नष्ट हो जायगा। रोमक सामाग्य मे समाज का निर्माचनही किया।सभी मागरिको को बांधने बामे समान पारर्ण सामायिक स्य प्रपा पार्मिक सिमाम्त नहीं थे। उसमें मनुष्यों का एक विधाम समुदाय-मात्र पाएक प्रासादीन कुरासमाटकी सरकार रोमक पियों का हिताना-मात्र रह गई राजनीतिक मुम्पवस्था कायम करनेवामी सरकार नहीं। सामाग्य का दिनमा मभिक विस्तार होता पया साप्राम्य के प्रति भावनाए उतनी ही कम होती गयी। पाम्तरिक पय पौरबाट प्राप्रमों से मानव रिणाम माग पर एक केस से शासन-म्परस्पा मुबार सप मेषमा सकना मुश्किल होगया।मॉम्स्टटाइम ने स्तुनतुनिया को पूर्वी रोमर साप्राम्पकी रामवामी बनाया पौर परिषी पनापीका मन्न होते-होते पूर्षी रोमा सामाम्य पश्चिमी सामाग्प मे विनम पतप हो गया। पयती बस शतारिदयों तक यह 'इसरे रोम' केप में स्थित रहा। पूर्वी पौर पश्चिमी सामान्योपा विमापन भौगोनि विमान- समुद्रवर्ग पारवाड़ियोपामे पूरोप के प्रायद्वीपीय माप पोर मुल्प महाद्वीपीय माम- पापार पर हमा। ईसाई धर्म सर्व प्रकार काहा गया-पश्चिम काको मिक पार पूर्वीसारी। रोम और एस्तुमनुनिया एकही मानिभानीरार ५ मेदिन मप्पयुग में सामनी यूरोप की मैनापों मस्तुमतुनिया पर मषिभरकर लिया और कमरे से ममम हो गये। • ईमबी के काम म मेतृत पूर्व हापो मेगा पहुंचा पार परिचमो मरान पूर्व मे प्रमापित हाने सगी सुननुमिया सामाग्य के लिए यह बात रमपम में गुमनामीतिर “मनमा चारपुरा मप्रलमारने नियमही पूदा उमा मेस्स माराम लम पाधिमे बाल कारिरिया VIII परनिरपर मटर मैना ने काम भयो पर्मनगर मगाश्रमामे भरिक एवम परिमानामा माथेरापानमा मानवाने मापने मायो ममताराम-नोपों से मनापमानामा रोमबार मामाननेता राम मनमा बनेगा। रोगावो विमानात मिसनसनी मरिसमसमेत hि पयप्रकापी निसरोबन मोमा प्रमरोजमार्गम पवन ( HTem ।

परिचम (२) साप है । यही गरमे पो यूरोपीय समिपी निममें पश्चिमी ममति के उपर तर वास्किा । कुस्तुननिपा पर पूर्वीय प्रमाप इलमा गहा पा उमणा पूयि सामाग्य ही ममा पातापा पिसने गौर भाषा को स्वीकार मौर गेमा माम पहनपर मिया पा किम्नुफिर भी यह परिधमी मानिकी नीषन मारमा से पनग रहा वा।' पुषित समम गानेबाने मिय निवामिमी म मनीय पा पपिपमो पराराम बिमाम मिम्म एप मिाई मठमार ना प्रचार हुमा । पूर्व में मोमोरिचारपार पाताएं, सई पौर प्राविणार पारी रहे। परिचमी मामाग्य बिनापबाद मी दुषविरमान सिपान्तिपूर्ण एकाम्न स्थानो मटकर उपदेश देतेपे पर्मपसी मामले परम तरह रहे मुरक्षित रखते थे। महोबह बिसरे मई या एमालमोरियों में प्रती धर्म-पापी पावमिक रिवारों को पाग करके इसरोंना पाचाने को उत्सुक र्पवान विचाी फा हारे पापा मम्ही एकाम्सापों में शिक्षा ग्रहण की और एही सामों में पुरि दिन सेमार का समय पुननिर्माण टिमा । २स्साम परमवारी पारियों का विचार पा कि ईसाई धर्म एकेदारपार की यही हिरासतप्रति बाराका पापा तोपरला पा किमु प्यावहारिक रूप से हेमेनीय मूतिपूगा पार पनेरेसरकार के प्रथीन हो पपा पा । उसने उस महान महरी उपरम की उपेसा करीबी मि"तुम अपने मिए पिमी भूमिका निर्माण नहीं करोगे पोर पृणी या पृषी मी पानी में प्राप्त किसी वस्तु की प्रतिति तयार म करो। तुम उनके सामने न मुसोपे पार न उनकी सेवा १ मा मोम पोर ले लिम्वनमुनिया की नाति नायिनी भी गा हरमा पारेर मात्रा मेनुप्रय किस रोगराई पापरमीम सुमिमामान पर मावि प्रसव पाय गप | मनी भरपाक प्रयन पुनिया मामामकी मिलिसपासचपन-मनन भीर मा सम्पनी रोमा सम्परा र साहिल चौर परान यूनानी सम्पपगड़ी पास के अनुसार पर ल सिम्या - -परम्प पेन सदोसन ऐपन रम्न सम्पन्न पचमा एस एम सि (urr) पर। समारोप का प्राचीन मन्ट एनपी पुरानी परम्परामा भारी मारिकामा बसरमसनस्पनरबपरित्र पर लाफ्ना और मनन व पूमा विवि में निगा।महिना त्याने रात में प्रमाणिक पत्रपतिकी और मानी मा रानीतिक नाम लिta ary राप्रापालन नमिया कसा पिपिएम पूर्व पार पश्चिम पौने।"'पान त्रिमूर्ति (ट्रिनिटी) मियास सस्तोंरेसम्भवाय मोर दिमिटा के तीनों मठियों और सम्माको मूति-स्मापमा कारण साईभम का पावरण स्पष्टत 'पोहरेगमेंट विपरीत है। पनेक परम्परावादी ईसाईपिचारकात प्रतिकामना से रए होकर मूर्तिमगत बन गये। एमीरासी काउंसिल (३. ईसपी) मे अपने पई नियम में पिरषो मे चित्र प्ररमित करने पर प्रतिबदमा रिया ! यू रिपाठ (२१४-1४. सिबी) कोमेटम महान रीहिम कॉस्ट विपा की पवित्र मूर्षि बनाने से इनकार कर दिया। कोस्टािपा मसाज मपरों विप एपीईनियस (३१५-४ २ सबी) ने एक सिरने में परोपोइसिए पारिया कि उसपर एक चित्र काागमा पाप्रमान हैरि पनेक पवामियों तक मूर्तिबन की मार सरतीयोपोर मनक मोनों में एक भये धर्म की सवारी गुरुवरी को इस समय में गहरीधर्म के भावों का पूर्वतया पासन परे। इसके अतिरिका परिचम में साईपर्मानबायोपरगादी विकारापनमने पौर निकायों में 'सायापक नियोपासन से अधिक पि उनकी प्रातिको समझने में मनाने हो। 'प्पान ईसाई धर्म से हटकर परमपिप' पापा ममा म किमाने पर्म का प्रचार के काम पर मार से विसोवामा पाइतप्राय सार में एक मैतिकपमा स्थापित करने पाती मिसान्तपथ से प्रषित कियापम में मिलाय रहमेवाने मोम पिसोमबकौलाराम। सात नाम्बी में मन इस्लाम को विपनाएं भी भौमिक माप उपा मानवीय माईधार पर मोर पस्माकी मामी भनेक पयपाप-विस गबना में अंतिम मार महानतम पैसमर मुहम्मर मे मनुप्पा तक पहुंची है। पर्मगुस्ता पुरान' ममाह की भूतियों और उपदेो कासकमना है। इसमें प्रमा की-मिमी पारापना निमित्त प्रतिदिन नियमानुसार नमार पीपाती है- इन्ध निहित है । इमाम में ईमाई पर की प्रानि एक 'परम पसिनत सत्य - सोनXX । १.तिनमा रोमय एम्पायर अन्य निरोए मिसायन मामेरम मे रिस:"Crसनिमप्राममे totaस ममतभिमरे परिवार में मेगा पिर्ममindi मरेमाणिकपना मार बोमानिसप्रेसिभरेगाथा पीसन सरकाभ-attacारिणी..(१९ कमी ममता परिचम (२) पान की बात मौन है सपा गूगवाद की भानिक र विषाय दिप्रामाह मनुष्य से ममम है। इस्माम को ईसा का देवत्व स्वीकार माी। मुहम्मर पचपि पामाम्म मनुष्य का बटा ही रहना चाहते थे फिर भी वाद के नीमनी नेयकाम उन्हें पिरीय मान का पबत्तार' ही कहा है। प्रस्मा साहचर्प की पावश्यकता मासूम पाने पर काम ने मा के सनीष पर पाये गाने का समास उपाहरण भी ममी इसन पौर हमेन पी पहा रत में निकामा तपा यही मामय योग गियामाहारा देवाय परतार बना दिये पपे । पस्मार की मरजी मानना सबसे बड़ा फम्प है पौर उसकी मरवीके पाम मुफ पानेवाले मुखममान गिनको इस्माम का प्रचार करना पौर दूसरो को मुसममान बनाना चाहिए । यही हार 7 पौविश्य है। मुहम्मद (पार के संसार की दृष्टि में ) गमानिों प्रममा पपरा के पिम्मेदार है किन्तु ये स्प मास्त्र में उस सामायिक परिषा के परिणाम निमें मुहम्मा हमार इनके मिए उमकी पक्तिगत पिम्मेदारी नहीं है। मापों में अपन समार से पेप्ठ हाव हुए भी उसी समाज की ही सम्तान रे । अपने समय में पर मूर्ति पूर्को पोर हेलेनीय पाई धर्म में प्रचलित अनकम्मरबार तपा मूर्तिपूगा से उमकामास्वान भा। धर्मशास्त्रों के म्पर्प तई-रिवकों पर ट्रिनिटी के सपस्मो में प्राथमिकता प्राप्त करने के साम्प्रदायिक झपों से प्रनेड मोप इतने पुग्ध पेलि रम्होंने सहर्ष सातमी पताम्दी परवरिखनापों का स्वागत रिया। मस्टोरिमा के एक पति हासकार में मिला “भरबपी पता-पापना म ईसाइयों में रिस पस्मियों सपमने नये-बर इस मत्ता को मुरमौर समुप्तत करे। अपेक्षाहन कम समय में इस्लाम मे मम्बे-बोरे मन अपने अधिकार में कर लिए । प्रपिल मेमा में पुस्तुमानिया सामाम्प के कुछ भूमम्पसायरीय मूब भी शामिमरे। ईमाई पर्म का अपम शिपिता धर्म इस प्रकार स्मास ही.मा।' र सर र सन: "मतमान बनी रबरा के बमुसार पूरियों और सरकों की निमा मते बानि मे भाने मारा पूमारहों में जा भो रे । मतिए समापन समाय में परेशर-योगस्पिति भावस्पोमई। बगग र ममतस्यन पम पम पर सरेश सपा पदीय बोम् होचो र मानम् मानव के मारे. परम पा- मारे रे माला और माम मामा के मसल । -'मुरम्मा निम(१९१६) । १.समिरमान दवाम को क पेशर्म समोर मिर्ग मचि पुराने कर्मों के मममम मनुसपी।पिसोनी पिरेन ल'मम्मा । ग्रामेन (१५) (डा पोन शमनायन)।

पूर्व और पश्चिम घन् १०२ में फ्रानिमी पिता मोहर मे प्रमहर स्थिरपी स्पापना की। पाकिसके लिए सी मासपूर्ण पटना पी। पर्म पौर कानून की शिक्षा पहा परने के मिए पार भी ससार के कोने-कोने मे विचाी यहाँ प्राते बर्मशास्त्रीय गिताकेन्दो म अरस्तूप बर्मनका पार प्रधिकझान प्राप्त फिमा पाने मगा क्योंकि परसाई दिवानों के विषय मामूम पटना मा । मुसागर समीप सन् १६ मिमी म बनमे प्रथममी एमेन पण सीमा (मिहें मदिन मापा में 'पविभेन्ना' कहा पाता पा)का पूर्व प्रौर परिणम दोनों पर विपन प्रभाव पड़ा पा 1 मिम्मन पार गैमोमकामत है कि पश्चिमी धर्माधिकारियों विणे पता टॉमस विनास पौर रम्स सोन पर उनका गभीर प्रभाव है। रायरमेन ने उनी बड़ी प्रगमा पी है। उमरा वर्णन पाकार बस्तु या गप्प में कम परस्सू पोटो और नवप्मेटोपारकपन समानमा। उनके रिचार से मामटो- बार मे प्लेटा परस्तूतमा पूर्वीय विचाराका सम्मिपण पा। पिसीना म स्वयं पनेकरिती तत्वो को मिमार एपिया मोर इस्माम के मारभूत मिवान्तों के अनुहार उनका एक मपुर सामथस्प स्थापित किया। बारहवी पनाची सोप्ट मुसलमान विचारक करोषा के समीप हकीम प्रदेश (११२६-१९८) उम्हाने परम्पर पिपप टीए मिवी। परम्न मे ही उन्होंने मानर-पारमा की प्रार्थना का सिसाम्त पहन यिा। परेरोग के पनुमार मानक के सभी प्रयानोंराकर मिना इमामौर परम्प मिला है। गराम हमारे बियरकी समझ मे बाहर है मिनु की मी प्राप्ति समय की योमामा-विरमे हम पे पीर बोहमारी सापाम्प पिचार-पति की मम्म रामी परेपमी पोर एश हो पाती।पिसी विपेप ममप मौरसपामपार्ष ब्रह्माटापू पालम्ब समय र उस पैमाने के अनुमार मही सा गिरागे हम परिषित हमारी विचारनी दिमा ममप मम पैमाने साप-परमती है मासिए म भिम्न नियोगको ममममा कटियम्तु प्ररेपेर मनु मार हम मनरी रियापारने पोर मनमोके पारही पान की प्राप्तिकर सतमा पर माल यही है कि ममम कतिलो रमिाग यमापना पाहिए। ३ ईसाइयों के पमपुर पर नाम पश्चिम म म नपा पौर पिपा मा नर पर मुरीका प्रापि परप हा या पार गाई गाभाग्यमी पूय रामपानी पमरे में पाई म पपिरारिया (होनी मी ) ने एक प्रधानमन को प्रात्साहन दिपा सिपा गर पा स्वर्य परमी एकता को पुन पापित मग्ना यो रमनिया रे मतभेन पाग ११४ में न हो पूरी पी। का मानक सिागटार पर करना बाहा पापौर पिमिस्तीन पा पापनारि हिमा'मा मार्यों को कहानिया पूर फम ही थी।इन दानों ने पाया निया दिपारप राममाय ।ईमाइया के मिरा परममा पषितमपर वा गराईमा मे पग दिये उगम पा सापा पौर रफमाया पया ! उमाकी भावना थी कि उम भूमि पर उना भिगार निसी परामम-बासी कम म पार्कोकि उनके नापा म प्रपन मारग उम परिम पियावा । उनका विचार मासिॉरीसरोपिन करमेयापे पार उनम प्रनुपापियों को मारनेरास मुमममान पौरों मप्रपनी विपरातमी रक्षा करता उनका पम्प । रोमन पनिक पर पोर पीर पार्योस बर्ष पढेि ही मुले को पराजित करन प्रपरन में एष हो गए। इस प्रकार म्यायनी गनापीपत मैपर्मपुरों (माम) का प्रारम्भ हुमा।' पहमा पर्मपुर १... म १.५ तक गारी पा। इसके फमम्माप पस्नम को मेरु तुओं के प्राधिपत्य मे मुक्त तोमरसिपापयापिनुईसाईउसपर अपना अधिकार न म सके। सन् ११४ रेमगी में तुओं ने एऐसा पर पुन प्रपिकार कर लिया ।इमपर पुगेप गगमों को नये धर्मपुरका पामाइन ११४१ ईमपी में किया गपा। पर मप्राट कामतृतीय वमा मुई मप्तम के नेतृत्व में तापीनियों भाम्पको परमन के लिए दूसरे पर्म पुरारा पायोमन हुा । यह ममयुर पायरी मेट बनाई (१.१ -११५३ मिमी) की प्रेरणा मे हुमा पा । प्रमिपनियों के पाचात् ११८ ईमरी पे इसका प्रस्ता। तुरी माप्राम्प माइरेमका से मेकर राफ करपिण रिषम व पैसा पा पौरबनारसमापन प्रमामिनाममात्र प्रभुत्व में ममाचीन सारे सामाम्प का मामक पा । रमन निष्टपूर्व के तानीमा उपनियनों पर मात्रमा पुरु किये पौर ११८७ मिमी म परामम पर मषिमार कर लिया । इसपर परमय बर्म दुरका प्रारम्ममा निममें समा शनिबारबपेमा तपारम्मा पार पम पारगाह सम्मिलित थे। बाबरीमा कमी भी पिभिस्तीन नहीं पहुंच सका किनुप्रिमिप प्रॉबस्टम और रिचा कोएर रमाबनने मियी में घिमिस्तीन के तटवर्ती नपर पारे पर अभिमार कर मिया पस्थलम मुमनमानोंक पपिकार में ही रहा । सत्तारोन ने मीपिया पौर मिन के तटों पर मुसममानों का प्रापिपाप १ मे रान मागम मेशिन रान म' मिस Itart 4 tet वर वामभरा।

। पूर्व और पति षम हई से प्रपिक महत्व सत्ताको मासीकार किया । टवार को सत्र विचार से भप बा । सम मत मे भयमा विचार मर्म के लिए पातको पस- मिप रे ग पिवारों रेपिरोपी थे। उनकी शिव सिदेना की मासिम में प्रये मारके मनसिबम्तों को पर्मरोगी मानकर नही भर्ममा की। देरी पोर पावही पतामी में पारिरवार प्रममे परम के प्रतिनिधि मनारस मैपरस रोबर देकन (१२१४-१२१४) टॉमस एपिबनाप्प बोगामेष्ट पूरा पौर ग्न्त कोटस । प्रतपर्टस मैननस (११.१-१२८०) पोर टॉमस एक्वि पाय (RE-१२७) मा विपी पताम्बी सभी परिवार नानी वर्णन तमा मुसममानी सम्रो पहा परस्तू विसव सम्पयन हा विषय मा को पोर पापित हो मिाई बप में भी पा सम्मिलित करन का प्रपल लिया पौर मप्पनीम मिवान्ता म भगस्तूको सम्मिमित कर लिया। अपने समय म उनका दष्टिकोप प्रापुमिकताबारी पा पोर माने ईमाई सिखातों में न मान फूल रिय । दुर्भाग्यप नई प्रतिया पु प्रसनही । कतिपके पमित रन का निर्मान हमी पुन म हुपा । इसके बार ए मोम्म मिनिमम (१३ १५ ला पर्मन प्रप्यारपवाडी पलहार्ट (१२९.-१३२७) टॉमर और मूमो मध्ययुगीन इन हसिम बानिस मिप्रियता के गुन मामातफर निबार पप्पबुम म परापार मौतिकी बरनावम का उपयोम बग्य विनाम में मिा पपा--हरकत पनुमा और बामकिर पी सामाम्प दृष्टिकोन मे धर्मगास्प मार ही विभाग मावा पा । मम्पयुम की बारकी पता मियों का एप्टिकोन अनिवार्यतामिपा । इस युग म ईमाईपर्म में प्रान्तरित पावापी कमा पात मामाथि गमनीरिक और मासनिक स्थानों सानिमानोहामा यो प्रविष्य में बहुन ममय ना बीमित रहन पीपौ।' पोपीय रिचारक पनाप्पिो वा भनोत म ही एपे पोर महमूम करते रहे। मपूर्ण सामान तीन मे ही निहित है। मप्पापीन पीरिक उपनम्पि प्राचार का माननीय विधागपुनावापन । पुमर्मागरम "पुरनिए पापा का पानी पूर्णपके गदर्भ मैम्मिा भर रप मा रमेबालि ९1 (1) पिचर (२) जाता है कि मुश्यिता वोर्गे पर पी पापा म नामावन बागार भूग पी पौर बी यूनाना और रोमा मेमार रमन ग मीप माशासार पानी विण मानमारक पर पुमननियारमानोंडागपपिमा मामा मानिस पूनानी पिमान मौरसमसाप स्मापित। मापा। नम यमागगय प्रा मेर मिमिमी मनिया नपा पिमितीन ना परिषमा गामाप व मीमा रिलारपारण परिषम पर उन क्षणात मिनीटर मामला प्रभाव पड़ा पमपम्प परिचमी ममार म पापी परिबन पा ।म मइस पर सोएर नई दुनिरा पोर नये मूम्या पापामाम [पा। पूरन मनानिया + बोटिन पुस्माइम पापम्बएमपी प्रनिता पन प्राप्त रयिया । पणि दणि पोष पमित पामिया फिर भी ममनिराप्रपरम पापमा पोर गिाया महान पुरसमा पोर महान विपापा हमापादामनमाया र सारा परमही मिमा। मप्पपुगीन पर्म-चरित्रमा मप्रान पोर पर पपम पमा बनाया पोरल प्रसार मानियन मनप्रपागमभावना पाम दिया परिपामबाप उन्होंन ही शानिए रिकाम म भी पागरिया । निर्मागरम माय परिधान मानावार प्रापि विज्ञाना 1 उगम मा दुनिया की यार भोर धर्म-सुपार। एवीं गवानी में विसरियामयादी बापनामागवी मनाली मही मानून रसमा का पारमरा गया पा र मरिणाम बामामा पर नपा परष पारिम उदारमानों पर पमगार में प्रनय हाया। शिवपिटामय हरप्पा में शामिक नियमग प्रपनी मनापचाप ग्यमा उम्मुर भान की पुनमाणिमा पारंग इटमी में हुमा पौर शीघ्र ही पश्चिमी पूरा प्रय मापों में कम मया। रोमम पविपनाम मेपिम्म विपरिपामय म प्रापमा पौर परप्पू पर एक पुनरवयिता। रात (१.६५-111१)पारी मप फिर भी उन्होंने अपनी महान कविता लिन मिनी म पारि समस्यामा को ग्यया । यह मुखान है मीलिए 'कमिली। मापीनना की गह पार पौर प्रायश्चित निम्न मंमार महाकर ही मानी है। ग्यारहवीं पतापी मे मपारको एक नयासाप प्रानन का प्रयास किया या पापा बोईपरकीया के अनुपम समझा जाता था यूनानी मामबार मे इस प्रयान को बाबा दिया। यह विचारविरमामाग्य इस पुप्पी पर महीं है स्याम रिया ममा पारमारियों तक गिर का कायाकल्प करने निश्पर पायम गा गिनने वानमार माना कि मानव-मस्तिषको बार पिया। इसमपर्म पौर मसान गुमार कपर्व मापरा म पामाहा गप परत पूर्व मार परियम पाप्मारिमम्ता पीप होना दुसरा मा, पूर्गीय पूरोपईसाई धर्म पारमो पिस्ता पार पाप्पारिमकता पर पोर येता पा किन्तु उसका पामाजिक परिष पश्चिम के मैटिन ईसाई धर्म के सामाजिक परिष से कही प्रमिकमगोर बा । पेट्राई (१३०४-११७४)पार उनके पिप्य बीवन के प्रति मानववादी दृष्टि मोष के हामी थे। इस दृष्टिकोप कागेश्य पामानबकी सस्तियों का विकास पौर पारीरिफ बौखिक प्राप्पारिमा पूर्वताप्राप्त प्रादर्श मानस की सिवि। मानम गादी ईसाई धर्म के विरोभी नहीं किन्तु उसको रविपी पौर साम्प्रदायिकता के कठार मातोष पाये पति के अधिकारों तथा स्वतन निर्मपतपति परपोर ते पे उपा मर्मावरम के फलस्वरूप मिलनेबामे पाराम की तुलना में तर्फ की निश्चितता को प्राधिक मात्व देते थे। प्रस्मस पारी होते हुए भी पके जीपन से प्रसन्तुरा साप्राम्पचाही पार पोप के नियंत्रण मइटनी पी मुक्ति के परमात् इति पौर पट्टाई हुए म । मरिस्तो पोर तासो (पग्रहनी पौर सामागी पवामियों में) के उपमन के समय इटमी ने स्पेनी पक्तिपी अधीनता मान भी पी। निकोलो मैकि- पारेमी ने एनीतिक सफमता प्राप्त करने की कना पर एक पुस्तिका प्रिम' (१५१३) सिती । इस पुस्तक म पाम प्रपा पपा का कोई स्थान नहीं है फिर भी गिरेगी पामन स मुक्त एक ममुक्त टनी भासप्रस्य रेला गया है। यूमानी साहित्य के प्रप्पयम का पुन पारम्बापा जिससे पूनानी कला के प्रति नामपि पानी । महान पिपरा में प्रथम पा मियाठो जो १२७१ म पसारमसमीप एक बार में राहुपा पा । उसके पश्चात् कई महान चिपकार हुए, बाबॉटिमेसी (१४-१५.) नियोनारों प रिवी ( ११२-१३१६) मारकमायनो ( १५-१९५८) तीरया (१४-१५०५) पौर राफेम (१४-१५५.)। उत्तरमप्ययुग पपने स्वापरयलिए भी इतिहाम में प्रसिरह। पहले पुम्वा शाप स मिली पाती थी। अब मुश्मर से हानिक प्राणि पार हुए जिनमे शान के प्रसार म निश्चित योग मिना । मुरित पुस्तकों से मान का प्रनार हुपा मिलन एकमयीन ताम्कि प्रवृत्ति को जन्म दिया। यही प्रवृत्ति पपिचर मोपाहबी पतामीपोरेट मामिम् गुषार मिरा उत्तरदापी पी। पामिक मुपार पोपनीति दंगाई पर्मामम्मि म पपिर मे मषिक मन माननी पी। ऐमा पा नारों पर नगारपाप प्रपितानियों की नियुक्ति सपा प्रत्येक मिनिममय चा पत्र करपा राना बा । म पति-नीति नै परमरपा परिश्रम (२) मामी में नो के गोपियों पर नीतियों के प्रति भी पारिरममाति और प्रसनापमप्रग साप पारपपिदि दाग निन्दित मिलानमन म पाएकी तामीमा मान दास नपोषी पारित पारियों को पता परिवर्तन निहारिष पिया (म्हनि रेसिमपार न पीपीमहायता मामा अनुसार प्रेरी में कियाास 16 मे जोन मातिापी मापने पापा म पिप्योहोरलकिपा मपा विमु नो रिपार जरिलो और उन रिमा मे ही डोगरी पारी में पेशी पायिक सुपारी मायामि प्रस्तुत कोमोजामिया के एक वर्षानमा बाधिमा प्रभाव पा। नहाने भी पाग की रसपाने की मीनि मगति प्रतिवी मामला पारियों की प्रभुमा परि मनुषहसारोिपपियारीन पग्लिनपटाना रिमरिया किमुपर्म गामन में पपिकाप्यामिक महतामांग की। उनी विमाए पधिप बी फिलाम्म दीकाउम्मिर के सामने ग करकाका मागी ममममा पोर मा ४२ में समा रिपा मपा । मुरपामा पारितारा कामिन का पापा पार हमारा पाट मे पार समरे विभिन्न विषयों में प्रमा-अमन मिनिए। मत्पनिष्ट पार महरणिका शिला ने मामानामा प्टिकोर से पारित का भम्पएनमिया माल पाना पमा प्रिमी धोरमा पीकि मानर अपने करो मनहीं पितुर्मप्रति उत्तयापासिनीपमा पुरारी पुरारियों को मारोगामा पिपली वाहिए, कि जि शामा समाका मन होना चाहिए कि mg माई परोपी है। भूपर उमरिमपिगम कोपामारमामा मामला प्रनुमाyि कापर्ष पा मावारिना मार मणवारपाक मत मकासपालमपा। कार्य मोम परिमार यो हो माया मार नहीं | मोर का मरमम मामा का परमात्मा में मारा धर्म निरोपागार मूपाकी मनमानी पाती, पार ये पापों को मार पमा रह। पर के पान्दोमन र राष्ट्रीय भावना कोहार सील गमाई मापक यन्य मरम में राष्ट्रीय पर्ष स्थापित हुए।सर्प को राष्ट्रीय संस्थाकाय सममो पिर 1 "मानापमान एम्न मे सनिक पुन चाप न र ऐनमें महिएमभी राम है योगास में पूर्व पारपपिप पनि कस्सिन पिस पार वर्ष की कल्पना करने मे पसे भू गप देने के लिए उन्होंने पेमेवार छोटे-से मगरलगम्प में एक पीसापना की।१५ में प्रका गिज अपनी तिम्टीट्यूटिमो पिरिषमानी रेतीगियोनिस' में रहने प्रोटेस्ट मिसान्त मी माझ्या मी पौर सरकार को स्परेणा प्रस्तुत की। स्पिनमा मत पाकिमम्पयुग प्रमान का पुप पा पार पोप मिमो प्रथम प्रेगरी महान सपा टब जिन सिद्धान्तों के प्रतिपाना पे मिशत सम्पर्म के इपित परिग पारगहोंने एक नई प्रकार की प्राधिकारिकता पोषम रियाकिनीनों में प्यक्त सिवान्त मिरिषत और पम्तिमायामिक सिमान्तों की पवित्रता को वैज्ञानिक उत्सुकता भषमा नबीन मान से इपित नहीं किया जाना पाहिए । म मनुमा पियों को माम्ममार-पत् परपेक मनुप्प लिए पूर्व निश्चित है कि उसे मोप प्राप्त होगा मा शामत यममा-माम्य पा। परिस निषिधासमम स्विमसमकालीनों में एक पग स्पेनी अफसर प्रमाटियस सोमोनारमनि पर्म का गाना पहन मिदा पोर पस प्रकार स्पेनी सेना र पाम पर अनुमासन पर भी सहायता प्रस्तुत किया। उनकी पुस्तक 'स्पिरिनुपम एसवरसाइयर' सोगों पिक को लिमास माननी पुस्तक नहीं भी उसका छोप तो मोगों को प्रामाकाप्तिा पार पहनधीमत्रा सिपाना पा। सगोने १५४. सिपो में 'सोसायटी पौष भीम की स्थापना की। उम समय में लेकर मार माई बर्मोपरि सम्पार्यो में हमा। सभी अपने सिसानों की प्यासा पोरगकी सारे लिए समाते हैं। पुगनिगमर्मनिरपेतमानपपारी दृष्टिकोन पर धीमही पार्मिक-गुषार तमाची वा भाभिष-गुपारनपी पान्दामन की चिों और पारपामा का भावार हो गरा । मरीन गतिविधिमाान्तिकारिणी प्रपा परिवारी-भी पामिक ही पी।पामिर मुपार पर विण के प्रति सपा और राष्ट्रीयतामी मापनाका हाममा मार मरा पमर सर्प मंसार पर पर। सभी जिनमेष म्भगे भायेगा -भरी मात्राभरा नाम पर ऐम ने दी मगरको भित्तामा मय पर इसे सानोरपितराम समितरते थे पर ममी पनुमार (Retr (१४) मदिरामाने KRL: 'मी मानतोदि पर असमतको पागबनेका पनि सामीप भासियाम्मर गरमा यति रिस किम-नामा जापनीजस्मा पिसोको पारितामास-प्रति रवार। - . परिश्रम (२) ७ मामुनिक विज्ञान मारत पौरपीन में प्राचीन पर मम्मरानों में शानिय सिवालों पर रिपियों को समझा तो भयम्य माता पास्तु समाशिम उन देशों ममही हमा पोर पानिर परिरमी संसार में मनोतिपा ही मामिपम गमका पटन सपा मन्पशानियों के प्रापिपरायसराईमा सन् गोपनी बीवर पामियों में पुरोगाम पत्र में मोन पोर मान से मागे पा ऐमा मही पराग ता प्रापनिक विमान की परम्मए प्राचीन पार मप्पानीन की सामाप प्रवृत्ति के प्रतिम मी पूमार के विमान का प्रायोगिक मापार प्राप्त न पारिन्तु पागह विमान दी। रवाहरबान परकार मन पापिंपूर्णक का निरी पोप्रापार पर ही परिमाम निकले समान है। स्पू टयम हारा प्रतिपारित प्राविडालात में गैमपी म माधुनिक विचारको पूर्णमास मा । मप्पयुगीन मियामी पौर मनोपदी वस्तुपों की प्रातिको समरने के प्रयास पे।पाधुनिक मनिकनारामा कियह मप्पमुपान पितालयों में प्रचमित परस्त पार की निपमार और भाममा प्राति मे मुक्त है, किन्तु न पिमामों में भी परस्पी मान्यतानुसार, निजाम की सभी शानिकोशणपिपापारिय गारो फरसाप पम्पूर्भ पापा मममत पियल हमा। इमरे तय विचारासामी और पभपानहान पम्पमरकोपा मिमा मही रोगों मान समुहानिक पत्रिका कारण बनी। मोट बम गुपार मै प्रानिकमप्पयन मोर पासिंगसोनीपूति रोगों में गानिक दृधियोच कोसावारिया। उसमा मत पाकिपाप्याग्मिक सत्पनीमार पर्याधिकारियोपप्पदमनजोममानना पाहिप भौर सीमों को पापा अपने अनुमरों दीपमारी परमानी पाहिए। इसका पर्ष पहीनि तपकी मोर प्राचीम रनों में नहीं मग्न भरने अनुमरों में मानी चाहिए। सिम के पनुपापिपास मत पाकि १ परिसिप'पिया मटाने रणि मोरर रकम सोनी (१५१.) Ent वर्ष और सचिन सोहराने की पर्यमल पिरोनमामि दर पाना परमार नामपि सरेने रकमसमें नौ ममि सम्पन गन ममप गौम को त प्रनिनिय मे गुमरमा पा और मम्मान पारिया ने मोबानो ने मनाया मेममा समारोपण रापपर मोर पसरनेमा मानी पूर्वपौर परिषय पतियों के प्रारम्ब में ही मोक्ष होता है किन्तु पीस ही कहा माने नयासिनो कामों से प्यामिन माम प्राप्तकर सकता है। उन्ही प्रकामों में से एकाप्रति कामानि पप्पयन । प्रानिक विमान देउवम ने सम्पूर्ण दृष्टिकोनातरिया: पाही बदाम्दी मम्प से सोमहवी शताब्दी के प्रन्धिम मायक मुरोप में विटने विधान परिवर्तन हुए, रहने प्रावस्टीन पोर मैक्मिावती के मीर के एक हार पों में भी मो सके । महाररानी की समस्यामा में बिके कारण पमारी पवाम्बी में प्रक्षगारमा पनोप्स का पुनपाम्म हुमा कोपनिषस (01-५) कारिम्म गपय मेमनेसमेक पिएर पास मानगा ये प्रेमन योमास मुमर(int-1) तमा माम मोपों में किये। कोमिका में ही मन को माना और पपी को तीन वि रानी--अपनी दुरी पर प्रतिलि पूमना वर्ष में एक मार मुर्म की परिसमा पा(पपन पसन का कारण समझाने के लिए)पप्पीीपुरी का हिनना (पारेपन) कोपर्निकस के पापा गाहकोबारमौर पसर पास कर पनुसार पूर्व ही पर ऐनापाकापीय पिरमाचो परम पितापरमात्मा के लिए उपयुक्त है, पात किये सप एक पा मिास-स्पान से सन्तुष्ट हो समोर पपने हापाप रेपवासाम बहाँ पने को नयारहो। सोनियो और प्यूटमने कोई निरस के कार्य को प्रावकाश।१५० सी में रेवाविरमग्याहार प्रथम प्रामाणिक पारित किमा। तीलियो (१५६४-1१२)ने पमोल के पमानिरस बीम पिताको विकसित करने के तापमाष पानिकी पप्पपन मगवितीय प्रायोगिक विपिका पोन किया। उन्होंने पापकमनी माग मिए पाहुना तापमापी बनाया समय की माप के लिए दुनम का प्रयोप पिमा पौर सर्वप्रपपलम नही काहगाइन बनाया । डम्पिबदा उ पनि कारियों का कोपभान होना पा पार को निरस-सिराम्त को मानने के कारण पर्म-पराप्रपषमेति होना । म्पूरन १६७१ मम सोसायटी के मरस्य ये गये । पुरापाप सम्ब में उमरा पंप मिरमा भिमसिपप स्पान पोरगति परम प्रसि ।। मनियारी होने के काय उम्ोने पर प्रारका पारिक रिता मादी पिकप पानाया।'रोपवादियों में मधिक समय तक पूरन प्रप माया दो मामिantoमोसमीरमाने पिपीत मा मतितारारानोदी मामा मामी बोभमनुमाप्रार मा-माबाRAमिरमा समेत सम्मा। Harमार स्थानीय समान पर पश्चिम (२) चिमिपिपा' पापार परापीमाधिक प्या या प्रकार मोनिक विमान राकिम किया पया मूरमबारे म मापहा पा बाम एक परि पौर नसके निपौरीमाया करलबाला तिनिहाम म केबस एपिता प्रापणी पवाडी में पताका मिजान मुबा प्रायोगिक वा पोर पास का निशान मुमत वालिकामाग(१६-१८१1)परि ताणाम(४१- १८२३) यांत्रिकी पौरमपात मियामों पासिम मिरा और मानिय (110-१७१४)ने गोपेठ पीस (१७-१८.) पानिकों के प्रा पोगिपरिणामोंपरस्मारकर रामापनि परिवर्तन का सिद्धान्त प्रनिरारित पिया ।इसी बी(30-१८२२) मोर माइग्रेम समापमा रमापन पौरारिकामु प्रारम्भ हुमा। उम्मीमी पम्मी शानिए युगरापासी बनानी माग मरता है। इम पी दिपारकों में प्राविक प्यास्था पी एवापोलीकार मिया मौर मानरको उमा परम्पा नियमों और परिमिनमापापपीन उमापन मानना प्रारम्भ कर दिया। मगदी पवानी में भूपर्ममात्र एक प्रमग विमान नमया। पार्म मेत(stat) भूपगारप पर महत्वपूर्ण पुनभिती सपा मिमिपस्म पौधरियोलोगी राम ऐम एटेस्ट एक्सप्पेन फमर पोर पोहरम मखेम बाईम दुकावनाउन प्रापरेगन (११-१८५५) पौर रिसिटीपॉफ मन' (१९५५) वार्म गरिन ने पारमा प्रारम्भिापार्म भूगमशास्त्र में किया पापौर रहाने भानो 'पारमा म मिनाये पर्म पाल पम्पपन के पश्चात् ही गोषमातियों के रिकाम-महान दर पाच मो मपि निमारकी प्रच्यिा पारितार उई मास्पमी एमे मान पतिमेगासे मिमा मा। परिधि मैनभनिम पनुचर में दाने मिता था 'मानव मपि मरने प्रसन्नों क फमम्पाप नहीं सर उठार प्रापिम मौर पर पाप सका है पवार र उमन पर्ष पम्प है। पौर मह सम्म किगपारिाम में पौर्य परमही पापितु अपार पहुंचा भागाका मार करता है कि मार भविष्य में उमरा प्रारम्ब रमे प्रौर चाईमा ग्यागा। इसी बीच, एक पन्न प्रपौवमेशानिक दासेम (१९२३-१९१३) शामिक नाव का निधन्' समसामयिनी भाग मानसन पर मना समयमा बमोबानुसार निरसन मानिया पुर्निमापनामा परी मानी प्रयोग पूर्व पोर परिषम विचित कर सिमाबत सिर मान लिया गया कि परिस्थितियों पाभिक अनुभम पानी ही पीमित एमाले भनुसार प्रमदितो प्रामस्या है। हार्ट मसर (१२२-११.३)ने सर्वत्र व्यापार और पापि प्रतियोगितामीमीदियों का समर्थन प्राकृतिक चुनाव के सामाविक रम' में किया। दिन में सिमान्त ने पारीरिक तौर पर प्रारमी को बनमानुम के साप धमक्ति बताया और इससे पर्म पर पाम्बा पलेवाने मोन परेशान इयती मे १९९४ में कहा माधाम सता साग विध प्रम को समान के सामने रखा गया है और वो मुझे मत्यन्त विचित्र मानम पाया है, यह है क्या प्रश्न है मनुष्य बनमानुष है या सरिता? माईनों में तो पिठों का पक्षपाती । मभूमा मोर उपेना से नमसे मिसान्ती का न करता। सागितिक विरोधों के बावजूर, बीवविज्ञान और वरपधास्त्र में विकास सिमान्तका पर्वान किया गया।बा मेमपंच-परम्परा की प्रतिमा पर सोगकी (१८१५)ोलिस पास्टर में मनुष्य के मानसिक विकास में उत्तए पिकार मोम पर रोर दिया (11)मिन्हेल्म पुरने मपनी रितिपात पापारियोमाविमा साइजोमात्री मे मस्तिकौर मरदीपरसरनमर्मरवा पर जोर दिया (१८७२) बालर पहाट ने रिकाम पार माविक पुनार ये पितों को सामाजिक रीति-रिवारों पर संस्थापी पर साध्या (१८७१)। सबसे मानस की गति पार कि-मममी को निकामनामा। मतर म टोमस हेनरी हसने मार जर्मनी में रहसमे पकिनसाती नेता मेशिनों को सोमामा पहनाने में दोष रिया। पोपप-विज्ञान पौर पपिरिमाग में बौनेक मिस्टर (१८६५), नई पासपुर और रॉबर्ट महत्वपूर्ण कान दिने जिनमे सानिक दृष्टिकोण को सम्मान पार न मात्मा बलों दोबारा पिता। पलट पाइस्याल ने जिनकी मृत्यु पुष वपर पूर्व ही हुई है, नियाबारे में हमारी विचारणाराही गरम यादी प्रसीम नहीं मौबित मापते । पासी परमा पोर्षि पार पर ही बदौसावरा सापाम बारम्पष्टिबनश्मिा में सहायकमा। ६ प्रामुनिकासांनी रोगस सोनापागेपपा कामिर गानुपीपा प्रयोगों पसी मापरसापा, उत्तारली बारनों पोर माविका के बारे में जाना मंगमरमा मातांनी बार में पिनदी सम्मान पोर पंकिान 1 पश्चिम (२) देविषयों और पिपियों पर प्रापारित है। शमिम बरम मेरेमामा करिराम के उन्हरनमम्प बाम मुरण पार यूतुबनुमा के पाविणारा तमाम मिया पा । उनि नेपौ पताम्मी के अपने नामरामि रजिर मन मिनरा मर पा तामिक बिपि उरयासस्वा प्राय तपनीको प्रापिपागें म भविष्य पापम मुन्दा हागा रिचारों को पाना मिपा पा । मिम नाकामा पा स्पिानिरीमतिकम्पाम्पा मोर उमरेनानीरानियानरमपोग में मा ऐम प्रारिपार समय हो मग 'पा मानवता की पाबायर नामों को कम पौर मंत्रमार्गों का ममाप्त कर मगे। मनही जाम में तापमापी दाबमापी दूर गणी पनूनीयन यन्त्र हमाराम गिधी की मगीम पर हममीपरी म उर करनौगरिसरामपा। पवरही पवादो में प्रायोगिक क्राति के युग में टेक्नापामारी भग्न उस सम्पिर्ग मामने पाईप्रयराबरी मशीमामबने महाभ प्रारिपार पा भाष मान। भार उत्तरी अमरीका में मानगिरा प्रायन्न समुन्नत है और बह पुर तपामाजिके पना विमातराय उपकरण तयार कर रहा है। मामय साबन पो मामा र मरितपा मानब मोपविराम मिाहीम उपकरपोपापाग पाक्षितपा। माधुनिक सम्पदामा नियन्त्रम बजानिक मार तानी रिपों के हम में प्रापा रिपेपन विकास पास्या की महान निषि की उत्पत्ति । पौर प्रसार भी। इसीविपिन प्रानिक विमानों टेक्नोलॉगी प्रापिक प्रतियागिता पौर राग्नीनिक प्रविम्तिा के माप ग्टान्नको प्रापुनिए पोपापि ममाग का सम्म दिया है।म सिम म परे माममा भारतमा मुमार को सम्म पर दिया और विणा समिधीपक्ष! भोपाचारप्रवान किया।रापिपुगे म पनि मजुमन रिमारिरा है, पौर टेक्नोगोली की बुनियाँमा पानाम- पाम विद्याम रमों में मापी प्रविशमिता है। काग्प सप्ट।। नामिणीय कर्माके में माना की बाों न मम्पूर्ण मानव-सम्पमा निर्मम उपाय पैदा कर दिमीर एक ऐम महिप्प प प्रामाम रियामा मानवता के प्रारक मणं विशन और मोनो र परिमामा यो अमममसरी वरयों की ममगाताभिमान मारहमासामी की पापा का ही मरासर सुपित करना होगा मानिछानिनामा मान्छ ष्ट्रिकोप पार गरि यो पबन र माला एपौतरही सीमित कर देना नहीं है। उमा गम्प है माननामी एमा। प्रति ममाम गगाना पहिसानिमाविषारों में मिमपानमालय पूर्व प्रौर परिषम को पम्म रिया है मोडारा ही समून विनाप से मानवता की रक्षा यही पहसास कर सकता है। १ मानिक पक्षम वैज्ञानिक पान्दोलन में मानव-मस्तिप्फ को उजागर कर रिया मोर पर्मन वमा धर्म को प्रत्यम प्रभावित किया है। प्रामुनिक पूरोपीय पर्पन का प्राविवि प्रत्पन्न ताप महानिक सश्मिता के सुप में हुआ है। कोसा के निरोगस (१४ - १४१४) म्यारनिी पूनो (१५४५-१६ )पौर पयसिस मेकन ने माधुनिक रन की भाभारभूमि तैयार की । इप्टिकोन का डेम सर नहीं पा मान हो गया। ममयुगीन वर्णन पाररिमों का उत्पादन पा पार पूर्णत ईसाई सिवान्तों के बारे के भीतर या इसके विपरीत मानिकरर्सन अधिकाधिक धर्मनिरपेम होता गया पौर सामाग्य जगहारा समूहमा । विज्ञान की प्रकृति और परिणस्पनाएं ही प्राधुनिक पश्चिमी पर्गन की केनीय समस्याएं बनी । मासिस बेकन (१९५१- १९२१) को मालूम था कि मानवता के जीवन में विज्ञान का कितना कमा माम हो सकता है। मानिक विधिको प्रायोगिक पौर पनुमानसीम मानते थे। मिशान के लिए पनित का महत्व तो उग स्वीकार बा किंतु विमान और निको (रिक्रिय) तपास्त्र का संच पसल नहीं पा । रोबर्ट मासेटेस्टे पौर पर बेन ने किसी भी विचारप्रमानी के प्रापार पर परिणाम निसामने ही प्रपाका पिरोष किया पौरवम्पनगरीषन गमित प्रयोग तथा प्रयोप-विधिका समर्थन । रेने फार्स (१५६९-११५ ) यानिकी के प्रप्पसम में प्रयुक्त गमितीय विपि का सापारपीपरप करके प्रातिक मिाम्मापा का मात्रिक दृष्टिकोन मस्तुत किया। किन्तु पवितीय-यागोपिकनिधिपी पहन माप-चोप्प प्रश्मिामों में परेमबी। पाप के साप-प्रमोस गुमे रेप, पार, पप, पो मानेत्रियों के बसनाविपपफ गुम मममम माता पा पाए सप्तार में जिनका कोई मस्तित्व नहीं है। इसके विपरीत सम्मात्रा पनि निमार मारि मापनोप्प गुर्गों को पाके प्रापमित्र वास्तविक पदा-विषम युष माना जाता था।कार्ड के अनुसार मी मारपोप गुपों का महत्त्व एक समान नहीं होता। सहर दुधि से पुष भापारमून विचार मूझे पे जिनम प्रारम्भ करके गान वीर परिणाम निकामे गये। ये प्रति विम्मार और रिरकाशापा भगति पौर विस्तार मुझे मिल पाय तो में मंसार का निर्माण परगा। उनकी रिवारमानीका मुहर पावार बरपाईपरमेषितार बनायापारमght का पनि प्रदाम पी।वार में पति परिणाम स्पिर है पाकि यह गम ।

पश्चिम (२) एक बार निर्माण के भाग में मिताबा । इस प्रकार दात संदेमकी ममिनश्यता के नियम ए बा पहुंचे। बेकन प्रयोममीत परम्परा पोपको।रकात ने घोर देकर बताया कि पषित का योग रिमाम में कितना हो सकता है। उन्होंने मषित की तकनीक में प्रमुप पोम दिपा पार मियामकोरिनेद) ग्यामिति का प्राविकार पिया। पा के मन में सभी मौतिक वस्तुए यामिकी के नियमों का पामम करने बामी मशीन है इन वस्तुपों में प्राथमिक पाई पापे पानवर और मानवधरी सभी को रहनि सम्मिलित किया पाकात न पाम्माग्मिर मेसार के पस्तिल कोसीकार किया है, मानर विसका भामोरार अपनी पारमा बम पर ममता है। मानव समार के माषिक मोर पाप्याग्मिर दोनों कपी में भाप मेता है। कार्य केसमम से बह विचार पूरोपीय बर्मन का प्रेम । पकात रे भनुसार पदार्थ का नियषण विषेक पौर विज्ञानाप तमापारमा का नियंत्रण प्रास्मा पौर धर्मशास्त्र हारा होता है। इस तो पागर कार्य का विचार पाकिमानष-मस्मिक प्रधिसित घरीर के प्रान्तरिक क्रियाकलापों पर निर्भर करता है। अपनी गति स्किोम पोन मेपर मसा कहते है “शरीर के अंगों को परस्पा तमा समन्त्रों के मान मस्तिष्क का इतना पहप समय कि मानव को पाग से पबिह युधिमान पौर प्रमीन बनाने का कोई उपाय पापमयास में ही पाया मा समठाईपार मही उसकी बोर होनी चाहिए। रकार ने गभित की उपपत्तियों के समान स्पष्ट मौर स्पसिय प्रमानों से प्रामात्मिक प्रश्नों का उत्तर देने का प्रयास किया। उनका विचार पाकिमर पागास संसार की सत्तासिर पर मानवतावपि में पार्ष और पारमा के परस्पर-सम्बल का मिशन प्रस्तुत कर परे है। एक बार सृष्टि के सूचना परचात् इसर ने उसकी कार्पपीमा में पवमान महाँ गमा। या घोषमा गमत है कि पर मार के दिनानुरिन कार्यक्रम में भाग लेता है। पासम शामिन और पर्मशास्त्री गोनों पे पौर सृष्टि के परिवामन के लिए सिर को लाने पौरबार में हमेशा के लिए एडीरेकने के विचार के लिए एकाको कमी क्षमा नहीं कर सक। कोई प्रापपर्प नही फिरोम पार पेरिस में रकात के सन्यों को निपिर कोटि में रसा पमा। स्सिनोत्साप्रपने प्रम्यारमबारकी पियेषनामिए ज्यामितीय विधि प्रप नायी । रम्होंने अपनी योग्ना का केमिदुईवर पो प्रयास मामा किन्तु प्राक- तिक नियों के अनुसार भोसर टेस्टामेंट की मामा करने का प्रयास किया । सन् १५५६ में गहरी धमाष मै ऐम्सटीम में उनके काम को धर्मनिरोगी पौरपर्म पूर्व पार परिषम के लिए खतरनाक होने का प्रपामी मामा । बर्मन दार्पनिक सीबनिन (१९४६-१७१५) रिठरेन्धियम मासस के प्राविकारों में से एक थे। उनके मन में पम्तिम सत्य सारे परिवर्तनों मोर भवरों के नीचे वाभप्रस्पक्ष कोई परिवर्तनसीम पस्तु नहीं है। परिवर्तन पौर प्रस्तर का सिसीत स्वयं ही एक मत है। उनका मन बाकि हमारी दुनिया सब सम्भव दुनि पामों में सर्वश्रेष्ठ है और अधिकतम बम्यूनतम के समन्धी पर मामिव मिसके कारप कम से कम म्पप करके अधिक से अधिक प्रभाव पैदा किया था समता है। मोर ने अपने 'एसे पान म मन पंगास्टमिंग' (१५१.) में मान-मस्तिष्क को बम्म के समय कोण कापर बतापा है जिसपर बाए संसार के ठीपनों का प्रमाव पड़ता है जिनके फलस्वरूप भावनामों पौर विचारों का पाम होता है। उनका दृष्टिकोन पायोपिक रन को माग परने का रास्तेयर ने मॉक के बारे में पहा है कि उनसे प्रषिक पदी तरह मोईनही सिट कर साइकियामिति खान के बिना भी ज्यामितीय प्रवृत्ति को कैसे प्राप्त किया जा सकता है। मॉक के मनोविज्ञान के सिमान्त ने तीन महत्वपूर्ण समस्याओं को माम रिमा (१) इटि पनि स्वाद स्पर्ण पोर मर के विभिन्न प्रभाष किस प्रकार मिमित होकर एक ही पेनमा प्रदान करते हैं? (२) बेतना किस प्रकार मावमा में बन पाती है? (३) भावमाए पिस प्रकार परस्पर सम्मिलित होती है ? मारने पर्म के मूम्बको पस्नीकार नही किया। कुछ पताम्पियो से बना भिक बितन पौर धर्मशास्त्रीय विचारों का सामरस्य स्थापित करने के प्रपल हुए है। १५९१ में शिटिन पार्लियामेंट मे एक विधेयक पारित किया किसिा केबल को प्रस्तीफार कमानीय अपराध है। किन्तु भनेक प्पपिनों की गिनी सम्म नियो परम्परामारी न पी। यूरोप के विभिन्न भागों में मामिर सहिप्ता रिमित मात्रामों में सपबी। पापरमेडम मॉनीमा पौरबी तपा फोस में दिरो पौर कॉप्टिमापने मॉक पिकोन का विकास किया। प्रम मे अपनी 'ट्रौटार पोम सूमन मेवर' (2018) में इस समस्या को उठाया कि भावमाएं किम प्रसार सम्मिमित होकर पिाको बग्म देती है। अपनी पनि में रम्हनि सिखा : "मापनार्मों में संयोग के तीन नियम मानम पाई है या 'साप ममप मास्थान में 'या' उपा' का प्रभाव मनोषिकाम नियम भौतिकी पालिसी मिवो ममनुम्य ।। यूम पारमनन को माना मही पर माम मानते थे। उनो मनुमार पारम बनम भावनामों पर प्रभावों की गंघमा यो कसमातीठ पीप्रता से निरम्मर परिषम (२) पाते हैं और वदेष प्रबहमान पतिपीपरहते है। पवि प्रारमचेतन मानसिक घट नामों का प्रवाह या पप मात्र हो तो मरसेपम अपना काम सम्भव नही । मान हमे एक पूर्ण इकाई के रूप में नहीं पत्रों में प्राप्त होता है जिनका समपन प्राय स्वर है। पारमपतम में एपमा पा पिपिष्टता महो तो झाम सभव नहीं । सम की परिकल्पना के अनुसार नाम समय ही नही है। हम किसी निरषय पर मही फेवत संमान्य परिणामों तक पहुंच सकते है। चिकित्सा विहार्टमी ( १७.५-१७५७ ) ने १७५ मे प्रापित अपमें प्रेप माघम्स पोन मैन' में इस समस्या का समापान प्रस्तुत करने का प्रयास भिमा पिसानेग्गियों पर पानेबाने प्रमाण किस प्रकार मारनामों में बरस बाते है। बिग्रियों पर स्वाभाविक रंग से प्रभाव हमेशापरते रहते है इसलिए कोई भी एष प्रभार सम्बय भावनामों की गंगमा का पारंभ पर समता है। इस सियाम्त का उपपोप स में मानवता की ममारे लिए पिया गया। परिणाम के समय समी मनुष्य समान है (मेसा मॉक मेहामा) वो उनमे मिग्नता पैरा होने का कारण वातावरण का प्रममान प्रभाष । हेमटिमस ( १७१५- १.७१) ने मनुष्यों में मिनता का कारण शिक्षा की असमानता को माना है पीर अपनी प्रतिमान र मारपोर देकर कहा कि 'समुचित विक्षा प्राप्त करके ही मानव मुबो मार सिवानी बन सकता है। वास्तुपरकीतियों मार दियरों की 'एन्माइग्मोपीरिया' की भी यही पनि है कि भान ही मानव की प्रगति का पापार है। माम्तेयर ने मिबाबा "विवेक पौर उचामों की भधिकामि प्रगति होगी नामय कसापों का सत्कर्ष होमा और मनुष्य को पूपित करनेवाले पुन वया उन पैरा होनेवाले सपकारी पमपात राष्ट्र के साठकों में क्रमम समाप्त हो पाएंगे।" पिरोने कहा कि 'एन्सारस्लोपीरिया के रेस्प है 'मूतम पर फैमे रामस्त शान मरो एक स्पान पर एकत्र करना और इस प्रकार एक सामाम्य विचार अमानी का मुबन परमा निमसे बीते युगोपी उपसमिया म्पर्ष म होने पाएं पौर हमारी मागामी पीरिया प्रषिक शानबान प्रत अधिक मुभी पौर सम्पन्न होनाए। बप्ति पार स्म के भयात्मकतको का उत्तर काष्ट मे पिया पारमचेतन के परम्प को प्रमुख मानकरकार में भारमचेतन के दो बिमाम किए बिपुर पारम पतन या माग पषमा म पोर अनुभवाग्मक मारमषेवन या मात ममा 'मुमे, मुममे मुमको '। प्रारमचेतन ही वर-सर पर बम प्राप्त प्राधारसामग्री का संस्मपनरके शान-वस्तु यार करता है। काष्ट अनुसार मान-सम्मश्री मिया कत्तापर्पो के तीन स्वर है प्रतियोषन यों से सम्मापित, सास-विषमई मेपाकी धारणामों से सम्बंधित विस्मेपनारम विपरता से सम्बंधित वार्षिक मेपा की पूर्व और पश्चिम - पारमाएं ही मस्तिष्क की पुरनात्मक प्रवृत्तिय या अनुभगो मा निर्माण मरती है बिनके बिना अनुभषारमा यम का ज्ञान प्राप्त नही हो सकता । ये मस्तिक की एकीकरण प्रवृत्ति के तर्कसंगत अमूर्त रूप नहीं वरन् सश्मि प्रकासन है । प्रनुमय बहस होने पर ही धारनामों का उपयोग सकता है। इन कारण-कार्य सिमान्तों का परात्पर उपपाम गमत है। उनके ही मनुस पनुमरात्मक बत् एस्प होता है। अतः मान मनुभव जयत् तक सीमित है । बस्तुों के वास्तविक स्म का नाम उनसे नही प्राप्त हो सकता। सैपाको वाणा प्रतुमा मोबाहेती है। इसके विपरीत मुठिपरवा परा त्पर है। सनक उपयुक्त वस्तुओं का प्रत्यक्ष अनुभव नही किया जा सकता।मास्तम में विचार के इतने उपे स्तर है कि इनियमान मनुमों के रूप में म्पयन नही हो सकते । माकांक्षाएं हसण , चिन्हें त्याला नहीं जा सकता । मुसिपरता उप सुस्त मस्तुओं का कोई निशान' मनप नहीं है, पापि हमारे प्रावरण मनिवार्यत' ऐसे होते है मानो इस प्रकार की वस्तुएं है हमारे मान-सम्मी जीवन का मापार अवस्था और पाया है। हम सिर नही कर सकतेनिसिलर की सत्ताईपोर मारमा प्रनसर ।तिक के मारण दुधिपरता को गंभीरतर प्र प्राप्त होता है। पपनी कृति बिटिक पॉप परमेट में कोट मे एक सहयोग की सम्भावना की बात पही है। या बोम पिपिष्टता पार सामामिछना में कोई मन्तर महीं करता। फोटो के परात्पर बुद्धिवारिता के समान दृटिपरता इस अनुमनामक संसार पी निपामर सिवान्न है पर के मृगनात्मक मस्तिष्क की उपग मसार का पन्तिम मारषापामारी कस्पना की उपर मही बया का मग ।। हींगम मानिकमान पोरगार्मनिर विचारोम पन्ना पर । प्रथम प्राधिक पौर प्रपूर्ण है, निमुदिनीय सागर पौर वपूर्ण । कार पार हीगम दोनों ही सांसारिक वस्तुमा कोन्द्रिपग्राम मानत है किन्तु कारपमिन है।हीने में मिला है "पाट के अनुमार इस्प जगत् की सारी वस्तुपों को हम देव मर सकते हैं उनमें पास्तविकम्पका गान भी प्राप्त नहीं कर पकवे गमावास्तविकप मरे जगत् गोमा पहा हम पहप ही मही सम्मे। सरम वास्तव में यौ। गिन पस्तुमा को सीप समम मते मात्र परमाण है, पर हमारे मिए मही प्रपने मास्त सिपम मो सीमित मनिए यही मानना उचित होगा कि उनकी सत्ता सामानारय मही परत एक सार्वभौम जनम्य है। यह सही है कि दृश्य पत्के बारे में परिवारहररे दिपार समान रिपारी,फितुइने बिटिकमहिपा- मी पारममन पिरतावा पित पूर्वत्रस्यपगार महमा पाहिए। 1 नामोरिय सीमा ममत।

परिचम (२) होमम पनुसार याश्मिस' पारणामों का विधान है। निम्नवर मारणाएं सक्षम ससाएं नही पाएर सपा स्वतंत्र पोरयपार्य उम्पसमपारमा की ! इसीलिए हम उनम पुराने परवाप्प हाना पाना है। मान के मनुभवारमा पौर तापिपमून पसारिपाधिक है। उपतम पारपारे पतिरिम पम्य पोई पारमा पूषत धिपरम पार पपामही हो समी।पूर्ण प्रत्यय उपनाम पारमा है। तपापारिक प्रपामार सपूर्ण पपाप और सारे अनुभवगतमी ममीपस्तुपों में प्राप्त है।पार भूमिमारे अनुमरों में यह पूर्ण प्रत्यय म्याप्त है इसीलिए हम पिसी निम्न पनुपरस्त भारमा मे मग्नुए नही हो पाने । हम सरेर पूर्णता प्राण करने का प्रयत्न करता है । मानम में निरचपत या 'पूम' रहता है निममे प्रापिर मरय निकलते हैं। पसनी विधपत पिस्ते पार हीपम के सर्गनिक पूर्णनापारमा सपा पा कि उसे पूषतया मासूम है कि पिबर क्या है पौर रमी भाभाएं क्या । इसमे मानव-दुरिम पर चामिक विचारों का परिकार मा है पोर मानव-धि में विश्वास रहपा। होपेत का पन है रिम्ना मामाधार सिर दानित के लिए मान प्राप्तिमी पस्तुए है। मठारी मामी की गानिको एरिका युग' कहा गया। बार मम स्थित नियमों के प्राचार पर लाया गया कि उममें परफर्मगन परस्मा व्याप्त है।पूर्ण विधान किया जान मपा नि मानब सभी बस्नुमों की माप का पैमाना है पार सर्वोप पावन है पविकाधिक मनुष्यों की प्रमिनम प्रसम्मता । धर्म की प्रवृत्ति मी मानवतावादी हो गइम्मर में भारी बर्मनी में पीरिस्टो पार 'सोमापरी माड फेम' ने चोर रियादि सामायिक प्रस्पाना मुबार हो तो पार पस्पतालों का मुपार हो रगरिबान में नरमी हो वासनाकामास हो।पुलि गादी पारमामिपरोनों प्रकार के पति पशिश सामागिल म्याय की ममि परम नगे। पमरीका कीरान्तुिबमनिरपेक्ष पौर पिसीखनक ईमाई-विरोधी बामृति मेंईपी किमु 'स्वाधीनताबोपनापर' की पारामों स सट दिउसने ईसाई पापण्या वो नहीं। पमरीकाको अन्तिपो समय पाषा पास में योनि हुई उसस्तमोता मयामों ने उर्ने तोड़ने की मषमुष कापिरा की । १० में ऐपोकेट समरण सम्पूर नमीकार किया पाकि"रिपारपान मोकमत परिवर्तित करके सिंहासन कोहिमा मौर पम को प्रसभुमित कर दिया है। झांसीमा प्रति १००१ में हुई थी। पना मोगों शामिम्बाय पाहि मान्ति के फलस्वाप दुनिया का पुनगम हराया है। दिन के पतन काबो सामान्य प्रमाव तोगों पर पड़ा उस परसपर्प पूर्व प्रौर परिचम ने लिखा है सुरोप में उस समय तुमी को तहरे दौर रही भी पोस सर्गयुम के पीर्ष पर स्थित पा मौर मग हा वा मानवता पुम पाम ने ही है। फांसीसी पान्तिपोवन यबमा पौर एसासन के पिस विद्रोह नहीं बरम् मानबार का रितीय पुनर्रम्म सममा मसा। सरकार जनता के मानस में है, यह विचार पोर पसता गया और मम्पमुम सचमी भा रही सस्थाएं या तो नष्ट हो पीया उनकी प्रमारपामिता बहुत कम हो गई। प्रगावधि प्रष्ट्रीयताको मावना मनसनी। बम्पुल के पादर्स में पारमारियों को बहुत प्रभाषित किया। गौरविन में मिला "उस पुम रिम में बीमारी यंत्रमा निरामा पौर विरोप प म होमा। सन् १७१४ मे गर्मट म प्रपना हिस्ट्री प्रॉफ प्रॉपस मॉफ व सुमन स्पिष्टि मिमा । म च में सननि मिला "मानस की पूर्णता प्राप्त करने की शक्ति पास्वप में निस्सीम है पाक्ति पर पूरी तरह स्वतंत्र है और कोई भी ताकत से रोक मही माती। इसकी सीमा का अम्त म पपी पा पन्त चिसपर हम पासीन है।" माप्मास पपना सिखाम्त प्रतिपादित किया कि वीरमरम पौषिकी प्रियाता पनुसार स्पायी है इससे मामयता की प्रसीम प्रगति का विस्वास दर हो गया । एक पार माप्मास में सौरमरम विकास र सिवान्त पामने रखा (१७९९) तो मरी पोर काबानी मे उसी विकासबारी इतिहास में फारसम्म मानर की मानसिक समनापाका अनुमान प्रस्तुत किया। मामाई (१७४- १८२१) का विवान पापिम मशीन बो रिफास के नियम पनुसार पी भैमी में पहप गए। उन्होंने प्राप्त पुर्षों की पिण्मत का मिशान प्रतिपारित किया।स्मन गरिन (१०११-१८ २) प्रपनी 'मोमिया' (१०१०) में पापों मार पमुर्पोपी नानियों के रिमात के मरम में प्रगति के सिदान्त को सामने गा। मामाई पर पयरमस गदिन का विस्वास पानि जीवधारी भीतर पहाता है मो उमे उपतर भनियों में पहुंचाता है। पोपों पर परनेवामा राबमामानिकपा मिना मूस (१७.0- १७७०) उगान पापों और पम्नुपर्णो रानों का पीरपश्यिा । सफा (१७00- १७८८)पापसापाकि ममी धिम पीकाम भ्रामा है। अपनी 'नपुग्म हिन्दी की भूमिका में उन्होंने निसा पा “प्रम ग्तम्न होता है कि प्रहतिकी प्रषिमा म समम पान में यो मल प्रमर प्रमम मरों भरा पिक पूर्वापारीस उभरते हुए प्रारहीन इम्प तपासगाना प्रकार समर पश्चिम (२) मिनुमन कम हो। पो होम (10-१९१६) में गर्ममी में जातिवाद का प्रभार किया। 'प्रानिषादी पूर्व विषयवार पर बिमाम पिरा याने मगा। माना गने मया कि पायर का पार पारपती परिणामी एमा पौर पीरे-पीरे मम्मे ममय पश्चात् जीरा परम मा पौर फिर परवापी मापतिया मीन पर पनास पपुणे पनीनमुमापाचा मारिमानव यामा।रिकास अपके पसीन मानियमानावग्पनुमार सपपोपम बना मने की प्रति परिपा मारण मस्लिप सिर पर पूम्प एक बन मातिक प्रनामो के को पूर्वनिषि मुर नियमों के अनुसार परिसित है उत्पादन म पत्रिका मातिमवार में मातम केलारमामाविमादमिए स्पाम पानी र रिया। पा माश्म पापम किनिहाम एक मोनिकारी प्रच्यिा पाना मीनिक पायनामों वर्गमा पार सम्पत्ति-अधिकारों प्रतिफम है। मारमा मोनिकबाद पहबम ईबो मानताको परिवर्तित करता बा रहा है। परती पर समारणारी सर्ममायादी सदेशनपरोरों कापमापीयाकोमया रिया : माधर्मशारीमामानिमिपपी शानिक विपि पौर राजनीतिमा पादानम की पोनि पोपक। पारपर्पजनरबहानिक पारिवारों और सपनीली अपमरिणयों माग पने मोर्चा का पिन हो गया है कि भौतिक पान को तोसा और मापागा मोदी सत्पी। मोनोगारामिड मीणामस्वामी स्पापनाममहीम मठ। प्रमोनमिरम्बारना, ये भौतिकीर नियम पोर प्रेशन ही मरप है। नीविमास्त्र पौर प्रम्पारपनिया की पारमापो कोई पर्ष नहीं।' मालगिक रस्तुपों से १ मावि भी मानना कम भएम में भी मिलता । बेटन ने पापी मारामि पानि मानिय बन मानियतक- निमिषा परिनतामणि श्वानि मा मीन मार्ग निसमा म मैरा पिच्यमन्स भरने म मर्मी निम्मे और सममिक प्राधिरम-रोम मनाशमन मे पराविपिनमा तिमीलानिय विनों से सरम में या ant "भावविपरिमालिन्शुमसतमय भारत विमाननीयममा परम्परपटाबो हमन संपरोधामोन परत परिसरातोपान प्रेरितम कीमती किमन में बनी ममप मम्स ममी शेरने और कवि रमले र रमने पानी पनि मोर समनिन समाएर पएममारमा ११८ पूर्व प्रौर परिषम ने मिसाहै मूरोप मे उस समय पपी की महरे दौर ही पी पास सर्पम के सौर्ष पर स्थित पा पौर लग रहा था मानता पुन पग्म दे रही है। फ्रांसीसी मन्ति को केवल यमणा और दुधासन के पिम मिशोह नहीं परन् मानमतामा पीितीय पुनर्जन्म समभा गया। सरसार ममता मानस में है यह विपार पोर परगना पया पौर मम्मपुर से पमी मा रही संस्थाएं मा ती नष्ट हो मी या उनकी प्रमावशासिता बहुत कम हो गई। प्रमातापिपष्ट्रीयतापी मापना सनममी। पापुत्व के प्रारर्प ने प्रारर्ममारियों को बहुत प्रभावित किया। गौरबिन मे मिसा 'उस सुभ दिन में बीमारी पथना निराधा पौर पिरोष कुछ म होगा।" सन् १.१४ मे कंगमेंट में पपना हिस्ट्री मोफर प्रोग्रेस प्रॉफ रमन स्पिरिट' मिला। इस ब में ननोन मिया मानव की पूर्णता प्राप्त करने की शक्ति मास्तम में निस्सीम है यह पति पर पूरी वयस्क है और कोई भी तास इसे रोक नहीं मकती। इसकी सीमा का अन्त इस पुप्पी का पन्त विसपर हम पासीन है। मामास ने अपना सिमाम्त प्रतिपादित किया कि सौरमरम योषिकी के सिवान्तों के अनुसार स्वामी है इसमें मानवता की प्रसीम प्रपति का विस्वास पर होपया । एक पोर माप्मास ने पौरमरम के विकास का सिवान्त सामने रखा (२०११) तो इनरी पोर पाबानी ने उमौ विकासमारी इतिहास के पमस्वरूप मानब की मानसिक समतामों का अनुमान प्रस्तुत किया। मामाई (१०४- १८२१) का रिनाम बा कि पमु मगीन । यो विकास के नियम के अनुसार पी धेपी में पहुंच गए हैं। राहमि प्राप्त मुषों की गिरासन का सिटाम्त प्रतिपारित किया। रास्मस गबिन (१०११-१८ २) ने अपनी पूमोमिया' (२०१०) में पौषा मार पमुमों की बानियों विकास के मरम में प्रगति सिरान को सामने रना । मामा मोर रास्मस राबिन का निवास बाहिर पीवपारी भीतर एक बम हानाहगी उमे रपवर प्रेपिर्यों में पहुंचाता है। पोपो का वर्गीकरण करनेवामा सबसपहा हानिक मामिमा स (१७०७- १७७)।उन्हाने पापों पोर पोरोना का वर्गीकरण किया। बहन (१0 0- १०८८) मा करना बाकि ममी भिम वर्गीकरण प्रामक है। प्रामी नपुग्म हिस्ट्री की भूमिका में उन्हाने मिना पा "प्रम उत्तम होता है कि प्रतिमा प्रमिया रो न समझ गाने में पो सच ममग प्रथम स्तरों पर होना 'मपिक पूर्वापारी रा सरन हुए पाधारहीन म्य तक पहुंच गाना इस प्रकार संचन परिम (२) किन्तु दूसरे दृष्टिकार का मामन काराबा परनेवाले मोगों के प्रापरण पहमें दृष्टिसाप माम मामों से झाले हैं। परिप अपनी मा परि ईप को पा यि कर सई तो मिमी गति प्राय हमारे पाम है उसमे हम इम पप्पीको स्वर्ग में बम पाते कि हमें मप है कि किसी पापालपण या पिम्पा गमना का काम करतेपापमठो हर देम में मौजूद हम सम्पना भी प्रारमहत्या का पण उपस्थित घर सान है। मैतिक नियम पार पाम्मास्मिर प्रणामन पी सकाम पावापरता।दियरी के गरमों में पूनान मौर ममीसौ का प्रपा मस्तिष्क और पारमाका भबर्ष ममी मी गारी है। पामारामारण देवम इतना है कि हम अपनी स्पिरिक प्रतिभागफ।

१२. पूष और परिचय सममित उक्तियों प्रार पोता के मन में निषेप मावनाएं पैदा करनेगाधी भाग नोत्पादक रश्तिों में अन्तर है। पिता की रक्तियों की सस्पता का प्रल पही उठाया पाता काम उनके द्वारा धापरित दिन की बात की जाती है। मारासतमा पर सुपस्थित विवरण का प्रयास पनि है, यह पब मही सोपा बाता रिपारे में ज्ञान प्रदान करता विधान का कार्य है। रमन का धोम प्रषिक से अधिक है पिस्मेपष, सप्टीकरण ।रासैनिककोई मतलब नहीं किस्विर, पारमा प्रषमा संसारमा नहीं। इस पित का पर्ष चानना पाना है किस्बर, पारमा मा संसार है। बोरिक मोग तो प्रस्पमत यांत्रिक मोतियार या ताकि प्रयोगठिरणार से सन्तुष्ट है किन्तु सामान्य बन में प्रास्मा की कमी होती जा रही है। शानिक जग से प्रशिक्षित मोगधर्मनिरपेम मानववार के हामी है तो दूसरे मोय पार्मिक परमरापन्य मून्पबार के पोपा है। हमारे समय की जूनिया रियर से प्रभग रहना पप्पारम को दूर रखना और मागाव मानसिक प्टिकोन। पौसमी ताब्दी के प्रारंभ में प्रोप में प्रकृतिवादी पर्सन का पातमाला मा। पादमी स्वयं को मसीन की प्रतिधषि में देखता था।' मानगो दृष्टिकोनों में गिरोष है। उसमे मूम्पों का मान प्रौर पसौम की भूत है इसलिए यह पृषी पर सर्वाधिक स्पष्ट मूर्तिमान स्थिर है। यह सिाई धर्म के पनेड स्पों से सम्बर उपनिपों पोर पोटो की परम्परा है। एक सरा दृष्टिकोप, निसा पारम पुनर्वापरणकान में हमापा मोर गिसकी पति प्रोत निझाम की महान बोयें और तकनीकी पारिमार। इस दृष्टिकोन अनुसार मामय एक ऐसा मापी बिसे उसकी सहमति के बिना जीवन-मबार में बतों संसार में फैरिया पया है और यह महसूस करता है कि उसका बबना एकही पर्व पर संभव है कि जिन पक्तियों के साथ उसका संपर्ष है उन्हें गा प्रविधिक मपन मभिकार में रखे। स्थायी समाप की स्थापना के लिए रोगों मूलभूत प्रा त्तियों का सामंजस्य पावसा। एक मानमा प्रतिकारमा वर्मनिरपेम मानवार और एक धिम प्रतिमानमवार, मायामबार हादसिस पोर नववाफियाबाद के स्पों में पोनों ही प्रक्रिया है। भगता है, हम किसी भी प्राप्ति में पाने को बार फिर पाहे यह पोप की हो या गाबिन या मार्म पी। १ मा गोविय, डॉप : "परमी एक बार दिपो कामी मोमगर समर एक मोनाबिपीन प्रबकि मनमान्न गई प्रामाने मी मुला मल। ' साम' (१५), पर१७॥

परिचम (२) शिशु मरे दृष्टिकोन को मानने का पाना परमेवाने लोगों के प्रापरम पहमे दृष्टिकोप बाम मोपों से होता है। यदि हम अपनी पपा पार पो को परा त्रि र सपा निमी पनि भाग हमारे पास है, उसम हम इस पृषीको समान में बम मरते है।णिम भय है कि पिसी पायातपन या मिप्या गममा काम करणे यामम तो हर रंग में माना हम सम्पना की पारमहापा का सब पस्मित कर सकते हैं। मैतिम निगम पार पाप्यारिमा प्रमप्रासन की काम पापनाविपटी पार्टी में प्रमान मोर नमानी का सपना मस्तिष्क और पारमा समपर्प प्रभी भी है। पापा का कारण बन बनना मि भारती स्पिति के प्रति प्रापस है।

पूष पार परिषण सम्मानित नतियों और मोके मन में निक्षेप भावनाएं पैदा करनेवाली पार मौलाएक उमिडों में प्रस्तर है। फपिता की सक्विों की सत्पता का प्रश्न नहीं उठाया पापा केवल नारा मापरित संदेरन की बात की पाती है। पापमप्रसार और मसित बिगरम पाप्रबास पनि । यह प्रब नहीं सोचा मावा । ब्रह्मारकबारे में शान रानमा विज्ञान का कार्य है।रना चरेय पपिए से अधिक है पिस्पष, सपीकरनारासमिकको कोई मतलब नहीं जिसमारमा प्रपना संसार है या नहीं। बहास रक्ति का पर्व मानना पाला हिमपात्मा या संसार है। जीविकलोग तो प्ररपयन योपिक मौविकमार या साविक प्रयोगसिपार पे सन्तुष्ट है किन्तु सामान्य बन में पास्पा की कमी होती पापी शामिल रंग से प्रधिमित महा धर्मनिरपेस मानवपार रे हामी तो दूसरे मोम पानिक परम्पगबम्प मूम्पबार के पोपक है।हमारे समय की भूविर्या है-नर से समय पा मारम को हर रखना और ममामार मानसिक पुष्टिकोन। बीसमीपताम्मी प्रारम में पूरोप में प्रतिवादी रम का मानराणामा। पारमी को मशीन की प्रतिष में ऐसता 'मानम के सेप्टिकोपों में विरोष है। उसमें मूल्यों का मान योर पसीम की भूब इसलिए माफी पर सरिक स्पष्ट मूतिमाम पिर एयरसाई धर्म के भनेक पों में सम्पर उपनिषदों पौर सेटो की परम्परा है। एक सप दृष्टिकोष निता पारंग पुमरिया में प्रा वा पौर विसी पक्ति पोत विमान भी महान दो पार तकनीकी प्राषिष्कार। इस दृष्टिकोष मनुसार मानव एक ऐसा प्राणी है बिते रखको पामति के बिना पीपम-प्रवाह में बों संसार में फेंक दिया गया है और यह महसूस करता है कि उसम्म बना एकही पर्व पर समकिचिन धक्तियों के साथ उसका समर्ष स या मपिमाषिक मपन मधिकार में रहे। स्पायी पमान की स्थापना के लिए बोला मूलभूत प्र त्तियों का सामेबस पारसक है। एक मात्रामा प्रतिवाद पा पर्मनिरपेक्ष मामपपार और एक पिम प्रधिमानपबार पामपार मेटमिल पौर भगमाफियापारमों में दोनों ही प्रालिया है। मपवा मरिसी भी प्रोनि में पाने को तैयार, फिर पाहेबह पोप की हो या पारपिन मा मार्म की। १ मना पिए, पॉपकरे: "माया, ति, प्रती अपोलमधर समापनाममय मेहमतिम मापन पर मक्मेि भी मुमपि मत। (११) ten पश्चिम (२) किम्नु मरे दृष्टिकोण को मानने का पावा करनेगामे मोगों के प्रापरम पहमे दृष्टिकोन माने तोपों से होते हैं। परिदम प्रपनी पूना प्रौर र्पा को परा पित कर सई तो नितमी प्रति प्राय हमारे पास है उसमे हम इस पृथ्वीरो सर्व में बरम सकते है।किमहमें भय है कि पिसी पावसपन या मिमा गबना का काम करके पापम तो हर दा में मौदूर है-म सम्पता की मारमहत्या का सत्र उपस्पित कर सकते हैं। मंतिक निमंत्रण पार पाम्मास्मिर प्रशासन की तत्काल पावश्यकता है। विपटी के पाने में पूनान और ममीमी का सपना मस्तिष्क पोर पारमा का समर्प प्रभी भी जारी है। पापा का कारण यस इतना कि हम अपनी स्थिति प्रति पागम है।

पून पार परिषद सम्पम्बित नक्तिों प्रार पोता के मन में विशेष भाषनाएं पैरा करमेवानी बार मात्सारक उमितयों में प्रस्तर है। कपिता की उक्तियों की सत्पता का प्रश्न मही उठाया माता केपम उनके द्वारा बागरित संबेदन की बात की जाती है। सारा सम्माण और सुमित निगरण का प्रयास वर्णन है पहभब नही घोचा माता । गरि के बारे में ज्ञान प्रभान करना विज्ञान का कार्य वर्णन का म पपिक से अधिक विस्मेपम सप्पीकरमापानिक को कोई मतलब मही किपि,मारमा प्रपा संसार है या नही । वह इस उक्ति का पर्प बामना पाहता है कि हर पारमा या संसार है। मौखिक मोग तो प्रत्यक्षात यांत्रिक मौतियारमा वार्षिक प्रयोगसिवाय से सन्तुष्ट है किन्तु सामाग्य बन मे प्रास्मा पी कमी होती बा रही है। वैज्ञानिक ग से प्रशिक्षित मोम धर्मनिरपेभ मानपवार हामी है तो दूसरे मोग बार्मिक परम्पराकम्प सम्पमार के पोपक है। हमारेसमम की बूपियो -कामर से प्रसग पना प्रमात्म मो दूर रखना पौर सवार्यभाव मानसिम दृष्टिकोन । बीसभी पताम्मी के प्रारम में पूरोप में प्रकृतिमादी बर्मनडा बामगाता था। पावमी स्वयं को मपीन की प्रतिमि में देखता पा।' मानन के रो दृष्टिकोषों में पिरोष। उसमें मूनों का मान और पसीम की भूस है, इसलिए यह पृप्पी पर सर्वाधिक स्पष्ट मूर्तिमान पर है। यह ईसाई धर्म के पनेक स्पो से सपर उपनिषों पोर मेटा की परम्परा है। एक दूसरा दृष्टिकोन जिसका प्रारंभ पुनर्वापरणाम में हुपा पा और जिसकी शक्ति के मोत विशाम की महान तो पार तकनीकी पाविष्कार है। इस दृष्टिपोषके पनुसार मानव एक ऐसा प्रापी है जिसे ग्मकी सहमति के बिना पीवन-मगाह में पहों के संसार में फेंक दिया गया है और यह महसूस करता है कि उसका बचना एकही पर्व पर ममम है कि जिन पत्तियों के साप पसका मंच है उन्हें या अधिकापिर मपने परिवार म रम। स्पायी समारपी स्पापना के लिए दोनों मूलभूत प्रयू तियों का सामंगस्प पावस्यक है। एक प्राममा प्रतिमार या पर्मनिरपेठ मानवार और एकत्रिम प्रतिमानपवार मपबामगार मटनिस पौर मनवापिसाबार रेम्पो में रोनों ही पप्पुतिया है। समता हम पिसी भी प्रीति में पाने मोवैपार फिर पारेमापोर की हो या गावित या मार्म की। १ जना नि साम्प 'पारसी पर पर म्मि प्रारी मम्मामा दार समाजामख प्रवमति मरेन गौ सम्मारिका मीरा मुमाया पक पर समेट माकन (PLN) NI परिषम (२) किन्तु दूसरे दृष्टिकोण को माननादामा करमेनामे मोगों के पापरम पहने दृष्टिकोन पात चोगों से होते हैं । मरिहम प्रपनी पृषा पौर र्पा को परा वित कर सकें तो जितनी शक्ति पार हमारे पास है उससे हम इस पृषीको स्था में बदल सकते है। किन्तु हम भम है कि किसी पागमपन या मिमा मपना का काम करके-पागत तो हर देश में मोगर है हम सम्पता की मारमहत्या काम उपस्पित कर सकते है। मंतिक नियंत्रण पार प्राप्पारिमा पनपासन की तलास पापस्यकता है। विपटी के पनों में यूनान पार पप्पीनी का प्रमा मस्तिष्क मार पास्मा का संपर्व प्रमी मी बारी । पासा का कारण फेयम इतना है कि हम अपनी स्थिति के प्रति जागरम है।

तृतीय प्यास्यान पूर्व और पश्चिम १ पुष पर परिषमी प्रभाव मिहान पोर टनामागी पानिक संसार का निर्माण करनेमाम मुन कारणों में से ! । मत...पों में पश्चिमी मामय में अपनी सम्पमा प्रसार परस्प मेों तक किया है और सभी महाडीपों पर अपना प्रभार सामा है। तगमम १२..छिी तर पूर्व प्रौर पश्चिम में काफी समानता पी। किन्तु टेक्नोसोगी दी है। प्रतियारम पर पम्वर पर पया है। हम पार पवाभियों में रविदास का पर्व है पूरोपीय इतिहास ऐप संसारमा मात्र पोपनिदेशिक इतिहास पा। होमेन पदों की सत्पता सिरहो चुकी है "पूरोपवासियों में पारों पर पृषी ही परिषमा की ईमार सिट कर दिया है कि पप्पी गोल है। उनके अधिकार म पषिकोई भीर महीमा पाई वा मा बहस पोम्प मही अपना भरिम में मा गाएगी। पूरोप मे एप्रिया पार पफीमा पर अधिकार कर मिया ठपा पास्ट्रेलिया पार पमरीका को पानावलिया। रतमा पमरीप होपर भारत के लिए समापन मानम होने पर अमरीका पीपार पचाय पप्पी के पिस्ती स्पानों पर परिचमी सोगों का भबाधित प्रमार मौर नियम पापित हाता पमा मया । इमेमी-कभी महापाता। परिपम में पूर्व पर भारमल कर दिया। पूरोपीय प्पापारियों में पूर्वी रेस में पार, निगारपान पोर नामनिक पो स्थापित किये। पंचार-सापनों के निसमा मगम संग भैप पश्चिम की है। परिचमी देशों के बहार ही दुनिया का पपिम्प सापार और सारियो सों मारगर समाते है। उसो विमान महामारों मार महादीपा पार गते पर्म बात है। पन रमये नि ठार,पियनीमिया, नीबानी नगा पिया और पपीता में सयोग में मारे ६ उपागानों के उतारन मुार बारापियों की पार साता भरत है। मादगार, गिमाईगी मौन पा रिनेमा टाण पूर्व पार पश्चिम गाट, फाउण्टेनपेन कैमरा पेट पाइयोसमी देशों में प्राम उपयोग की पश्चिमी सपिवयों के समपात से प्रपेशाात मषिक प्राचीन समतियों पर उन पक्तियों का रागनीतिक पौर प्रापिक प्रमुख वो स्थापित हो गया निम्नु उन (मसतियों) की प्रपनी मम्मे समय मे वीपी पनियां गाम उटी और उनम राष्ट्रीयता की माषमा सरिताई। पश्चिम ने ही अपने प्रभुरकी पिरोपी पक्विपा को समग निमा और गुनाम देसबासिया मे उन मोम्पतापो पौर सस्थामा को पन पाया जिनका प्रपोम उसके ही विउ माती प्रकार किया गया । टायपिंग पोर पॉपमर-विद्रोह भारत का स्वाधीनता-संगम और पापुनिर जापान का उपय 'पश्चिमाकरण' की उपम्पिया है। कुछ ही बनको में गापान भी पश्चिमी ममून की पूर्पत पीयोपिक पापुनिक पक्तियों में गिना गाम मपा । प्रमरीकी म्यापी नवा पोपमापन फोसीसी पौर हमी पादियों मतप्तातिक पापपापणापा ममुक्त राष्ट्र-योपभारमने कोही पामियों को प्रेरित किया कि वे शामवाका पुमा उतार पौर रामनीतिक पार्षिक और सामाजिक स्वतंबता प्राप्त करें। पापान में पसको पराजित छिया तो एकनमा विध्याम प्रारमियों के मन म गागा कि अपने गस्य को प्राप्त करमा नमकी यमता मे परे नहीं है। दोनों पुरों में 'भ-यूरोपीय' मेनामों के उपयोग से समानता की भावना माथी किन्तु उसके परिणाम तरकाम प्रत्वम नही हए । इस प्रकार पश्चिमी प्रमुख ने स्वयं अपने नाप के बीचमाय । एसियाई समान पर पश्चिमी सति का प्रभाव ही पपियाई राष्ट्रीयतावान पौर एगिमाई एकतामा पामार है। निमामिल पुनस्थान प्रपत्र पश्चिमी पोरापरिनाम -पंपव पश्चिमी प्रभुस्वकीप्रतिमिया कामोर पंथत ईसाई मिसनरी प्रचार के प्रति शिोहगा 'सोसापटी पॉछ पीसस' सदस्पों पर पूर्ण एमिमा के मिशन की पिम्मेदारी थी। सोसहगीं पताम्दी के उत्तरार्ष में प्रसिस रियर गोमा पोरापान गय । पोसायटी एक स्टाममी सरस्प मातियोरिषी १२५२ में मैकामो पहुँच पार १५.१ में पी यहाँ ११० में उनकी मृत्यु हो पई। सम्होंने पार उनके सहयोगियों मबीन के बौद्धिक समागरे पापार-प्पर । 'सामनानी कोमसापा सेवा प्रामिए उभा मे' सम्मे पने सिर दिपक मना सपिग मा का सामने मिमी मिशामिडों रोमक सों और गॉसिरिये से भी अतित मारमा परम्प उभ' समापी को सम्बर मारे में भागच निपारिक म अलि पोस के सामनभाव में नुमा इतनी विनय र एमी भरी अपाइस नियम सम्न मितिमा में परसेमारीदिएकमाव मिसमभरपाई।

पूर्व और पश्चिम १२४ हार सौस मिये पार पमित विकी तथा पनोम-सम्बन्धी प्रमेक बीमी प्रायों के अनुसार पिये। पूर्व में पूरोपीय बस्तियों की स्थापना प्रारम्भ होने के बाद ईसाई मियनों मे पपने कार्यक्षेत्र का विस्तार किया पपपि अनेक मिसन अपने कार्य की पार में पापिकप्रसार करणेथे मिस्टिम कामानिम्प मारईसाई-पम-सम्बन्धी मारा इस बात का प्रमाण है। उनका मा पा कि व्यापार के रास्तों केतुमने पार ही मध्य प्रफीका के भारिवासियों हम सम्पता प्रात् (उनके अनुसार) ईसाई-धर्म पहुंच संमर । रनके मिए ईसाई धर्म का मर्प एक सिखात नहीं पा परन् एक ममी वान-मारमा बी दबाइ पापार, शिमा थे। एपिया मौर पत्रीका के निवासी भी ईसाईमर्म के प्रतिभापित हुए क्योंकि उनका रिचार पाकि प्रनु परिणम का धर्म "साई-पर्म है इसलिए वह पश्चिम की भेप्टवर मैनिक समता पौरानिक शक्ति का व्यावहारिक प्रेरपापोत भी है। राइट रेवरेण स्टीफेन मास मे सिवा है "यह सयोगमात्र महोलिईसाई धर्म के प्रसार की 'महाम शताब्दी ही यूरोपीय प्रसार की महान पतामीभीपी।" भनेक पार तो मिशनरी प्रदेश राजनीतिक नियमनकारहाना बम पया 1. स्टीफेन नीम कापम है पदमिन भारत में को मुद्दा बनाने का कार्य हात के शिका मे किया जिनके बेतन का अधिकार सरकारी अनुरानों स मिलता था।" एशियाई पौर पसीकी राष्ट्रीपता की भावना के साप-साथ उन मिपनो की पिरोपी भाष नाएं बनती जा रही है जिनको सरकारी सहायता प्राप्त थी फिर चाहे वह पुनिया रारीलिए हो अपना मरपुष इमदिवासघापार परसाई-धर्म स्वीकार करने पर मोयों की स्पिति पषिक पच्ची हो पाएपी।स्वबापत राज नीतिवमाननी दिनों में पोर्ष प्रापिस में सरकार पर पापित स्थापीनता के लिए मर रोगामी जनता की महानुभूति पा सके। इसीलिए कहा गाने ममा रिमामाग्यमाही मनियों के एपष्ट राप्रपस्वाधीनता प्राप्त हो पुसी है माइयों की तरफी सारी बारे में समानही पपपे पौर अनेक राष्ट्रों मर मम्मानित नामरिक है। भारत में ममार के नेता बनने के मिए पारम्पर नमानमानितारी पोपमा सार। द्वितीय विश्वपुरीमपिमहरपपूर्ण पटना पहनही रिपरी राम अर्मनी परपी मान-की परामय हुई। तोइनकम समय में ही पानी पूर्वम्पिति पर पहुंचने पौर प्रमर्राष्ट्रीय मामलों में प्रमार गमने याग्प होनप है।मपि मरसा पटना है एगिया म नई गतियों-बीन, भारत पाटि रसारमोनीमिया, पर्मा, भीमरा फिलीपामा उत्य। सयर भर १५८ | पूर्व पार परिष १२१ विदेशी शासन की पवामियों के बारनूप, एगिया मोर पसीका के बारे में सर्वाधिक पिपिप तप्प है ग्मती प्रकपनीप दुर्गति नितान्त गरीबी प्रोर निरास ग्वा पकाम मौर बीमारियो । प्रदेसी मायामाबाई प्रपनी भयानर प्रमान सम्म परिस्पितियों से सूर उम्लेकीन देशकी महा की माप्तमा । मोम यह मूस करने मने हैं कि विम दुराइयों में से पीड़ित उन्हें परपिमा मा सम्वा है पौर उभं सहन महाँकरमा पाहिए।रे पिस्मास करने मग है कि पपनी वर्तमान मिति स बार रटने के लिए नामान का प्टिमोम तपा रेग्मोमारी की विधियां प्रपनानी परेंगी। यह सत्य है कि पश्चिम की तकनीकी विधिप्रता कारण मस्त्रास्त्रों की होड़ में पश्चिम प्राये हो गया। पूर्व पर पोर परिश्रम की मिक पियों पौर समस्ही शासन कापिरोपी, किन्तु दूसरी पोर परिषम रेमो बना सपनेमो पौर पिमान का सागत भी करता है। यह वियतापों को निकास बाहर करना चाहता है फिर भी उनकी विपर्यो सपकरणों यामिकी टेक्नालॉगी के उपकरणों पार राममोतिक संस्थापों को स्वीकार करता है। पूर्व रेपलका उपयोग परीबी को मिटाने पाविक पपवरों को रिस्तुत करने तमा जापपापों साम्प्प और सपाईस्वर को दबा उरने में परमा पाहते है। पोय प समयमो पूरा करने पर संसार के समुन्नत राष्ट्रों के समय पाने के निए पूर्व टेक्नोसोनी को मापुनिक विधियों को पपना रहा है।' मसयाम परिस्थितियों ने पूर्व पार पश्चिम दोनो को नाम कर दिया कि टेकामांगी का उपयोग पर पूर्व का गम्य है परनीतिक परवग्नता तथा प्रार्षिक और सामारि पिपोपन कोडाइमा, पौर परम लाडो प्रपनी अप्ठता बनाए रहना । इन परिस्थितियों मे मामकाईपिकहीं मनुष्य मशीन और भौतिक सफलता की मिरपुपता का सिकारमयम पाए। पूर्ण पार परिचम मा सम्पर्क एक ही पोर से नहीं पहा है। परिचम पर नवीन प्रमार पोरेमा ने मुगम पियों को पनरनिया बनाई पार बापाम सेना मतितकमाए पापी । व्यापार और पास के रेय से पूर्वीय भापाए पड़ी मान मसी । ईसाई मिन गैर-तता गरेपर्मन मे पचि मेने सये । कपापियर की 'भनामस्ट्स' रिक साहित्य दोपर्म का पिपिरक पुराण मा पम्प सलामी अषों पुरोपीय भाषाओं में मनुवाराए। विरोधी धर्मो में मिमेक और मार सा प्रामसमर मे, मेंनी दिर मेवनारा! बामक पुस पएमय परचर परिमिक परिकम को परासरतोसम ही बर्ष रोगविय परिकम परेमा थियो होला भरपर सच और पित्त पिपतभर परिमी सम्पत में परिप। ।

पूर्व पौर परिषम - रिमा पहराई मिसे गिनका पहले पता तक न पा । नीनिर ने कहा कि पूरोप पौर चीन के बीच विचारोंमा पारान प्रदान होना चाहिए। वास्तेपर पी एप्टि में माधिपम एक महारमा सर्ममिक पैगमरमौर रामनीवियरे पोर चमत्कार मही दिसताते थे अमिपस सनुगों की शिक्षा देते थे। २ साम्यबार भीर प्रमातंत्र पूयिशवम विज्ञान की प्रात्मा पौरटेक्नोमानी की विधियों को ही मही परम्पपिषम में सफम एनीतिन मवस्थापों-उपार प्रयाच पपया साम्पपार- को भी अपनाते पा रहे हैं। पारपूर्व-पश्चिम सम्ममोदीबातही पाती है तो हमे प्राध्य पार पाश्चात्य एमिपा पार पूरोप कास्पात नहीपाता वरन् पूपेप गगनीति पूर्व पार राम नीतिक परिश्रम का पान माता है। सब पूरोप में ईसाईसम का बोमरामा पा तो रोमन पनिक और प्रोस्टेट मत पश्चिम के प्रतिनिपिपेपौर प्रीता रसी परम्परामारी पर पूरे प्रतिनिपि । दोनों एकही मोत पानीमेनीय रा अमृत । रोनी में परम्पर जितनी समानता है उतनी समानता इनमें से रिसी एक पौर रिसी पम्प सम्य समान के बीच नहीं है। इसके बारसूर पाम्पमापी पूर्ण पौर प्रमाताभिक पश्चिम के बीच की साई पश्चिमी संसार के बीच भीमाई है। नाम्पा का पतपोटो म्यूटेस्टामेंट मोत-मुष के सामाजिक रामानवापारी रिपाणे ऐरम स्मिप हीरेम फ्पूरबार मापर्स ऑगस्स तमिन । साम्पबार के दुप विधि मात्र पश्चिम । पूनानी मानम प्रधान पा। उमो विदेशी विशिष्टता पर पोर दिया पाणाम्पबारका पारा हि मानि: बिमि पार शिपमेपम-गतिको योग में माता है । उमेस्सर्य म विदाम है पद निम्ति है। मानपार यूनानियों के समय मे हीपरिपमान का एक गुमरहा है। पूनानियों मामागिएपरिम्पिनियों प्रौर समिर प्रमानों पर गररियापा। मामपापी मी परती पर पूर्व समारो स्थापना करना चााले।। प्रोपोगिर अमित केमि पर पड़े प्रभाव-पान पर वन रिपोप्रोर स्त्रियों से काम पत्प पिसाबमायारामी ममीपम्मिा पारिवाति बीवनापिनाए+रिम्स माम्गादी पापार दुनारले । मामाणिकपाय के नाम पर पूजीवादी मपाकी मामचिना करते हैं। मेनिन का अपना है कि एक भी पीरित राजे की। बीग हमारी दुनिया के प्रति पिपार है। पामार गारहित भौति पावसावापों की पूर्तिकारी मांगी पूर्व प्रार परिषम करवा पुरी उपस्थिति समानता, पापियन मुसि रागनीदिम्पमापारिक पोपण से मुठि सी माननीय प्रासापानीमाप मी करता है। मार्म एक नये मानव की, एक सम्मानयीय मानव की बात सोप है विसकी सत्ता पहले कभी महीनी पार यो पारमपिरपिट में मुफ्त होगा। अपने पराये के पनुसार साम्पमार प्रत्येक मनुष्य की को पार निराध प्रौटामत है, गंभीरतम पारशामों की पूनिता अबसर प्रदान करता है। मानगीप प्रति म सबमे प्रया गोपय है इस तुम नागर पक्तिमा बीपन को जिसमें मनासरमाप्यारिसम्वा मौर है किसी ऐमे अपे काम में मगा दिया जाय बिमती बापना तक पर्म हासपोर मानिक सार उसपर पाबाद कोई मामसमरमकाहो। या पायी पृषी परत की स्थापनाका मानवजातिको बा उगने का पपने एक मानवीय कप में मार्म में एक पनायव वपासपाही समारकास्पणदेवापा नही "पिमानित मानव के स्थान पर पूर्नव विलसितम्यक्ति होगा ऐसाम्पत्ति विपके लिए विभिम सामा लिए कार्य पश्यिवाही सहो । मनुष्य महसौमारसमे शिकार वेस मुम मा साहिस्पिक मानोपना पणे पार इसके लिए हे पेशेवर मछमीमार, पिसा या पानोपा बनने की प्रारम्पयाम होगी।" विहाम में कोई मईमत नहीं है कि एक मिसनरी गेप तार्षिकता के फर ससम्म किम प्ररा पात्रामक प्रचार में परिवर्तित होगाता है। "तुम सम्पूर्ण महार म पापो पौर प्रत्येक प्राणी कोसीमा को पिसापो। ऐमा मगता है कि माम. पारपर्म निरपेमा। प्रतिषमता नियम अनुमार प्रतिमतताएं नाग-साय नियहि महीकरसकती। माम्पबारियाँ पीर प्रमाम्पबारियों कासपर्प एपेन्स पौरपा रोम पारका पादियों और महरियों सूनानियों पौर म मिामों पौर मूविषयों प्रोटे स्टेरों पौरमिकों संबई हाही भाराम ममदीय परत और समापन पीप। यह रचा 'यह मा गरम के कारण है। इसमे मंसार रोमों में विभारित होमपा-काका सामाम्प पोर पकार का सामाम्प । धर्मोग्मत्तम्मपित का मस्तिष्क पकारमय पोर एयपोरहोगाईतमा यह मपमे पशुको बिमष्टर समाचाहना है। अपने विरोपियों को मास्तिक भोपित परमे से एक प्रकार के नैतिक समावसभामाध होता है। पश्चिमी मानर की मानसिक रचना में विमान प्रति एक भापम्पक पवहार गर्म करानगाव मस्तापवती का एक पार कहता है "चामिकसमान स्थापित करने की सामानमा पारिपन से प्रत्येक मानव और मर्म मानवता के लिए 'पपने रेषतामों को ताक में रसार, पापो पार हमारे र पूर्व और पश्चिम - रिमा पाराई मिमे जिनका पहमे पता तक ममा मीबमिर ने कहा कि पूरोप पौर चीन के बीच विचारों का भावान प्रदान होमा पाहिए । पास्तेयर की दृष्टि में सम्पयूमियम पर महारमा रानिक पंगमर पार गरनीतिक ये पार नमस्कार नही रितमाते पस्कि बस सहनुमों की पिला देते थे। २ साम्यवार और प्रजातंत्र पूर्वीय रेशम विज्ञान की प्रारमा पोरटेक्नानांगी की विषिर्योदो ही नहीं पण पश्चिम म सफल राजनीतिक म्यवस्थामा-मार प्रजातंत्र भपका पाम्पबार- को भी अपनाते माहे है। पाना पूर्व-पश्चिमसम्बापो कीबाव की बाती है वोहमें प्राध्य पारपाचात्य पणिया पार पूरोपमास्यान नही पाता परन् यूरोप के पननीतिक पूर्ण पोर राग नीतिक परिश्रम का पास पाता है। पर पूरोप में ईमा-धर्म का मोमबालापा वो रोमन मितिका पौर प्रोटेस्टेट मत पश्चिम से प्रतिनिधि पे और पीकवर्ष तपा रती परपराबारी र पूर्व के प्रतिनिधि । दोनों एक ही मोत मृगई हनीय है रसून थे। दोनों में परम्पर जितनी समानता है उतनी समानता इनम से रिसी एफ और किसी पम्प सम्म समार के बीच नहीं है। इसके बारमूर साम्पमादी पूर्व पौर प्रमावारिक परिचम के बीच की साई परिचमी मंधारबीचको माई। माम्पमा काम है-प्लेटो पूटम्टामेट कॉमपेन-युग के सामाजिक पमानवापारी रिफा गरम स्मिथ होमेम पपूरगान मार्म मिस्स सेनिन । गाम्पबार पुष पिमिपनयन परिचम। पूनानी मानम पान पा। रमन पिक की मिगिप्टना पर गार रिपा पा। साम्पमालादार शनि लिपि पौर स्पिष-मनिको उप माम मनाता है। मास मे पियाम! एनिम्ति है। पानपार सूनानिपोरे समय में ही पश्चिमी वर्णन पाए पुमपानानियों मे मापारितिवनिपों पौरमपंसिड प्रमाणों पर गोपियाका । पार्मबादी गौ परती पर एक पूर्ण ममार की स्थापनाकामा पाइते । पोपोमि पान्ठि पामार्ग पर पा प्रभाव-बाहुन कम पठन पॉपौर स्त्रिी से पाप प्रत्प पिक पनमायापानीमा मियो पारिवारिस पीचनमा विमाएके विपर मामारी पापार युमन्त मले। सामारिणम्पाप नाम पर पुंगीवादी पबम्पापी पानाचना करते हैं। मनिन मापन है Eिए भी पीडित वामगी। पीग हमारी दुनिया के प्रति एपिामार है। मार मामीचम भौतिर पावयम्वापों की पूतिमीही मांगी पूर्व पार परिम भारम् उपस्थिति समानता, पापिपत्य मे मुक्ति रागमीनिकममा प्रापिक पोपम से मष्टिमी मामपीय मापामोंगो मांग भी करता है। मार्म एक नसे मामय पी एम समे मानरीय मानव होगा सोचते हैं, पिसकी सत्ता पहमे कमी नहीं पी और मो प्रारमपिरक्ति से मुक्त होगा। अपने पराये के अनुसार साम्पपाव प्रत्यक मनुष्प की पो पार निराप पार यान है पनीरतम पारामाों की पूर्ति का अबसर प्रदान करता है। मानवीय प्रानि म सबसे प्रधा गोप्य है इस तुम मरम्पतिगत जीवन को जिसमं पनावर पाप्मारिमामा मौरी रिसी ऐमे इषे काम में मना रिया बाप निमको सम्पना तक धर्म के हास पौर मोतिक- मार उपके पापा कोई मानस न कर सकाहो । यह पापम् । पुप्पी पर स्वर्ग की स्थापना का मामलाति को उंग पठाने का । अपने एक मानवीय पण में माझ्म मे एकपमापत मानवादी समारासणदेशापा यही "रिमारित मानक के स्पाम पर पूर्णत विपमित प्यक्ति होगा ऐसाप्पनि गितके लिए विभिन्न सामा शिक कार्य समिठा के होम होंगे। मनुष्य ममी मार सगे शिफारस सगे पासाहिरिपर मापोषना परमे पार इसके लिए उन्हें पेशेवर महनीमार, पिपरारी मा पानोपा बनने की प्रापस्यकता होगी। रविदास में कोई नई बात नहीं है कि एक मिशनरी गोप वापिकता के फस सप हिम प्रपर माममा प्रचार में परिवर्तित होगा।"तुम सम्पूर्ण संसार में पापो और प्रत्येक प्रामी कारबीमों की पिपादो। ऐपा मगता है कि साम्प JELSUESI । प्रविषमता नियम अनुमार प्रविमवाएं साप-माष मिहिनही कर सकती। साम्पमारियों पर प्रमाम्मवादियों का मर्प एजेम्स और सास रोप और कार पद्रवियों पार गैरपटरियों पूमानिो पार गारों मायाँ पौर मृतिपुरमा प्रोटे स्टेटोपोर कंपनियों के समर्प सा ही है। भाग माह संप ममरीय पनत्र पौर जानवारे पनप के बीच है। यह पण यह या बहन के कारण है। इससे मंसारपोर्मों में विभामित हो गया है-पाएका सामाम्प पीर पर का सामाम्प । पर्मोग्मत्तम्पतिका मस्तिकाकारमयपौर यसकठोरहोता है तथा माप्रपमे पशु को पिलट कर गमनापाहता है। अपने रिपेभियों को नास्तिक पोपित करने से एक प्रकार मैतिक पपस्त्रीकरपका पाभास होता है। परिचमी मानव की मानमिक रचना में विमायन-पत्ति एक पापाय तल पाई। परर्स करामगोर में एम्सापकी का एक पाचशा "पाकिसमार स्पापित पर भी यह नाममा पारिजात से प्रत्येक मानर पार सम्पूर्ण मानवता के लिए शपर है। अपने बिठामा को पाक में रहकर, पापो और हमारे १२८ पूर्व पोर परिषम पामा की पूजा करो परना हम तम्हे पौर तुम्हारे देवतामों सबको मार गये। पौर यही कम दुनिया के अन्त तक यहाँ तक किपर रेषता भी पृप्पी से गायब हो पायये पमता मायगा। जब तर पार्मिक सिद्धान्त पार सम प्रषित म्याफ्याकार रहगे तब तक मास्तिकता भी ऐसी पौर मास्तिक शीत मी किये गावे हेगे। मार्मिक सिमान्तों को प्रतिम पौर निम्ति सरयों का प्रकाशनमान मेने पर सदाम्तिक मतमेरों पौर पोषनी गिभिर्यों से मुक्ति संभव नहीं है। ईमाधम की प्रारम्भिक वामियों में सात समिठिया मुर मियाम्तमा निरुपम करने पर नास्तिकताको ति करने के उद्देश्य से बैठी थीं। तमापित ,पपराधियों पी पाप-स्वीकृति और कठोरतम गे की मांग की बातें हमने पपसर मुनी है । प्रारम्भिकईसाई पाप-स्सीकारोक्तियाँ पारपाचा ताप उपाहरणारसी नागरिकों की मारमा की पार्मिक प्रवृत्ति का ध्यान रत पाइ मापधर्म नहीं होगा हिरेराम के प्रति अपने अपरामों दोस्सीकार कर पश्चिम मुम्पत (पपपि एकाम्वत मही) taनिक हिरो मायर मिा गरी प्रभार पार समारको रोपिरोपी मों मे बाटने पर बोर देता है । साम्पमार ही गातों को पीरममा रेता है। पास मार्म के उपरों से सम्बग्पित अपनी कृतियों में मेनिन ने मिया है कि माम "पपूर्ण मैपापी पुपये गिम्हनि मानवता के तीन सर्वाधिक सनतोका मानिनिविलकरनवानी उन्नानी पताम्मी की तीन प्रमुख निधारपारापों का मागे बापा पार परिलमाप्ति तक पहुंचाया। ये तीन पापम् पी परमसापीयर्मन र्सन परतवादी पसी समनीतिक मात्र पौर फांसीसी अम्तिमारी मिसाग सहित फातीमी ममारणाए । माघबार सब तो परिचमी सन का परिणाम है ही ग्राम प्रसारमा परिषमा रामपानिमोमिन पीस, मेरा-म प्रविपिन मेलापाराहमा है। प्रथम मिरर वर्मन सरकार में परिप्य केएम को परेलकरिम में लारमहरषद रहे बिस्पोट लिए वतामीन पिन ऐपन पेशापार रवाना र दिपा पाप मापापपूर्णय भिसाम्त नहीं। पपि उसामनार १४॥ . शिरमा विवानपिरोधात समानी सनीutोनोसोमवतव बर्मनी में मान्य गरपि।

पूर्व पोर पश्चिम पण पूर्व एहा है।" पह मान मैना गमत है कि परिश्रम यो पामग के पम्म मापार सम समरीय प्रमाण हो मस्ती इममे पदो जाहिर होगा किम यूनान मम्पपुनीन रमी नगर राग्यों की निगता मेमेटर पपने पुगपो नामाही मो भूम है। परिसम की पिरामत में सभी प्रकार को मरकार पामिल हैं। यह मोबना यमत है कि परिमाम्यवादीमा-धर्मगोपीरार पर में वो पर नहीं होंगे। कॉम्प्टेटारन रे ममप म रोम-मामाग्य मे माई पम म्बीता कर सपा पा लिनु पपनी ममाणितक यह पुरन रहा । इतिहास का मारम नहीं दिमाई राम्य मरों में कम पुत्रप्रिय है। सिम्पनिह ममीप प्रगला मरसार मानिस सम्म पदिमम हम घागि सार्यों से पीम पार मानिहारी मामारिक-मापिर परिवर्तन सम्पन्न करमने है । प्रात्र म विधान करने पर हमारी जिम्मेवारी हो जाती कि हम राष्ट्रों के बीच मामाफि म्याम स्थापित करें मारमाय पट्रो को प्रमाणित पपिकार प्राप्त करने में महापक हो । पसरातही प्रमाणामारासमानापामान है मशा पालन करना कठिन । यदि प्रजाताभिक दरों मे गोप के प्रति ईमानरारी प्रोपास्या कानलाह पश हो जाय तो ये पोपित पट्रों को स्वतत्र रमे मेरमान मिटाने का प्रपन करेंगे और पिपा (एयों को पार्षिक प्रगति में हायक हो । परि मंमार के प्रमातानिए राणेमी प्रमावन के प्रति र नास्थापितहा मोठा प्रगति गुप्ठो कापिरोपपम हो जाएगा। पार (मर रेपी परवाँ निमामिपा प्रौर मंमार-मर के गहो कामपारों सम्मादी मारवा में सामाजिकममानता राजनीतिक पात्रता पौरपापित विषपाधिकार के उम्पूनन की संभावनाए पाखडी है। क्या य मारी बात ही प्रत गेल्प नहीं है? पारम्पलाई पलपराप्रति पानी गारी पाराकी पापस्यमतापाने पर मपनी गमिरेले मे मो दिनदो।हमें गातीय प्ठता की भावना मोरयाय रैना शहए पौरपुमरे देशों में होनेपाल बावियत प्रत्याचारों को पमान करना १ हानेगी ने मामा मिस सिम मार स्पिन विम्। मेस्मका पार मायरम नि हमने का प्रश्न निम्न पर मन से निकोतम निबममाजरेपमा भाषिक रोमन नाप रे बारे में पोमाता मान्थर में यम्मी मा पारगारी-निपन गरेमा मात में स्मिासन की दिशा में किसी प्राम स्थिप-परि पेर-मिनी मोटो मसेकम प्रदान की है।

पूर्व भार परिकम चाहिए परम् निम्दनीय दराना राहिए। हमें दूसरे राष्ट्रों के निवासियों में समठा के स्तर पर मिलने को तैयार रहना चाहिए, चाहे वे किसी भी गानि के हो और उमकी त्वचा का रंग पुष भी हो । मपनी बनता का प्रामाणिक माषिप/पोर ससितिक स्तर उंचा वठान के लिए पलसील सभी देशों की सहायता परने का हमें तैयार एना चाहिए । अन्तर्गप्ट्रीय समस्याओं को सान्तिपूर्ण टंग गे इस परमा प्रावामा है। समार की पुराभान्त पनना यह अनुभव नही करना चाहती कि पदों के बीच पानि मार मित्रता की पाठा पप नही रह गई है हम नहीं कह सकते कि साम्मबादी राम कामगारो के स्पर्म है यहाँ हर प्रकार के भेषमाप और बीय पिपाधिकारों का उमसन हो पनि परों में सम्पूर्ण सत्ता एक छोटे-मेबन हाव में पता है पौर रस का प्रमुख मगमग पसीम हो पाता है। उनकी नीति का पासन प्रशासनिक मौकरशाही हाराहोता है। रक्षा नेता हर व्यक्ति के लिए हर पाव का निर्णय करता है, पिसका परिवाम पाहोता है कि मानर-जीवन का प्रस्फुटन मी फोर नियंत्रण में होता है। परिक्सिी पानी इस प्रकार मासित होने को तैयार है पो पब तक ये गुस बीवनम में वापर नहीं बनने हमें उनके साप मित्रता का ही प्यार करना चाहिए। एक एमा विपरम्पपस्या कायम करनी चाहिए, विषमे गुर एक समारम्पमस्म को दूगरी मे भेष्ठ मानमरी भावना बर्गनेर प्रौर निरगुपता न हो। हमे एक सरिधान बमाने का प्रयत्न करना चाहिए, निमम ममी मानबीम समस्यामा माने म सभी गौरवानी ममुषित भाम सरें। हम माम्यवादी देवा माप गमाव नही बना पापे । प्रमी सम्बन पारित होने से हम मरे पर जाते है पौर परेमापत मा भयम) पमा प्राय रोपपस्त मंमार म सबमे महा गैप घोरेपो रोगों की प्रपनी-अपनी राम्भाति । मिम सपार मे हवा में उपना प्रौर परमानु कोतोना नीरा लिया है उसम्माननीय एकवादी स्थापना का प्रयास करना हमारा ही पम्प है। परसे रामप में सपा में पनेर समान पे गो प्रपने-अपने स धीरे-पीरे रिमित हो पपे। इन विभिन्न प्रयोगों के फलस्वरूप वर्णन कमा पौर रिमाम पो पम्प्प विरामत हम जिी पर दुनिया मिर एक समान में मालती पा रही है दानों पण नोकपि गरबटियर सो पारप मामही है। यहां तक रोना पिरोपी पपरपापा में भी पा समानता है और ये एक ही रिग में माहीसा पाfunपो-मॉमोरी। अपना पतिय सामाम्प प्रतियोर विक नापे रयम को उस्मुद पार समे .

पूर्व पार परिचम 1 मासूम है कि पश्चिमी प्रमातभा के मामने वह टेक्नॉमांगी पर काबू पाने के बार हरीकर मोगी।दम वर्ष पूर्व जब मई १ को गर्मनी ने प्रारमममर्पण किया पा मन्दन टाइम्स'ने मिपाचा "महनार करवा पौर प्रक्तिपीनाममा मे राष्ट्रों रोगों पीरिल इन्मानों पर जिम राममी यामम का युपामार दिया मा उराका तिरसारमप पिनाम इस प्रकार हो पया पोर टीमही हुपा। उम पुरम दुनिया में मामूम कर लिया था कि विकास प्रनिविन मानिर शान मे मनुप्यमा दिमाग की कितनी भयानक शक्ति प्रदान की है। मामूहिक बिनाप के पात्राती भपरहिमोमयरमें रखते हुए हम इसवान को ममामही मक्ते कि मानवयपुष राष्ट्रॉपी एकता और पान्ति की प्रपंता प्रत्यावश्यक माय है मामाम्य बानाए मात्र मही। किन्तु हमारे भीतर मय पुमा राष्ट्रीय प्रमिमाम और अपनी अपनी विचारधारा प्रतिभापनिवास उपम्पित है। ये विवेकपूर्व स्पिसिया महीपरन् भावनात्मक प्रवृत्तियां है मोसन मानव-मबहार को प्रभावित करती हैं।हरमवर्ष के प्रपसर पर उतर मानेवामी हम प्रवृत्ति को हम स्थापना होगा कि हमारे पषु पमित पातिकस्य है जिममा समून विनास नहीं तो कम से कम परामय सिवगाम्ति के लिए परमावस्या है। वर्षमान प्रचमित प्रमातियों में समान रोपनिये पानिकता और तकनीक कीमचरितमतापौर मोतिषवाद की प्रवृत्ति पर विवाम करते रोनों ही शक्ति पूगारो स्वयं में एप उत्स्य मानते है राम्प पी मायापकतानों के मामने पति कोरवा देते हैं और राष्ट्र पम्प के उपासक हीराम्प के प्रत्याचार से बनतापीरिठ होती है फिर चाहे वह परयाचार फोगी हिमा का पहम करे, चाहे वापिम्प समाधी मोम रा राष्ट्र पम्प की पूगा पूनानियों से मिनी बिरामत है हमने यूनानियों का मास पिया मोर प्रब हम भी उसी रास्ते पर स रहे है । पहार पारियों से घिरे जिन् बाग में हम एते है। राष्ट्र मही, एकता की भाकासिषी दुनिया के पापमहान है। मानव पर मानवीय पक्ति की पूजा करने मयते है और स्वय को बता अधिकारी समझ मेवेतमी प्रतिकार प्राधिकारी यमबाटापारासीद युर विमी रिमेपरपके मावनहीं है। यह यो राष्ट्रों के बीच का समर्प मही है, मानव की मात्मा पर पिार पाने के रोगों के बीच का संपर्प है। मौतिकवादको मूम प्रवृत्ति निमसे संपर्षकरने मोहमसे पहा गाता है वास्तव में हमारे लिए मन पान नहीं है बस्ति सम्पूर्ण दुनिया के अनुरूप ही मामूम पाती है। इस प्रवृत्ति का शिरोपरमेवानी प्रकृति का पता दोमो रनों को फिर सपाना है।हम पमिसराम्तों हो मानने कारावा करते हैं और कहत बिहमारे पापों के पास से मिराम्त महाँ ११२ पूर्व और पश्चिम है कि मावस्यकता स बात की है कि पापो को मनाने के प्रतिरिमाइन सिटाम्तों को समय मी मानें । मरि हमारा रहस्य मानवारमा की तानतर समाप नार्मो का उद्देश्य है, तो उसे हमारी सामाणिक संस्थानों में भी सम्मिमित होना चाहिए। हमें पार रखना चाहिए कि मानव पौर उनकी सस्माए गत पन्धी पौर पंपळपुरी है ममिए प्रमत प्रो पोर प्रथम पुरे उपयों के लिए ही उनमें संगपं होता है।बम शक्ति को पा समझने पीर पगा की प्रवृत्ति को उत्साहित करनेवाले लोग गमन पाते हैं कि प्रत्यक मनुष्य में स्थिर का प्रथ मौजूर है। अपने पमों में मानव को देन पाने की मसमर्पता का अर्थ विस्मयाम्ति पीस्पापना मही असीम विनायरा मुहै। सह-अस्तित्व की बात करते है तो हम पश्चिमी 'यह मामह' से ममग हट पाते हैं। हमारा सिपास है रिपोप्परस्पाए पर दूसरे को प्रभावित करती हर साब-सापप सम्ती है। सा-मस्तिल का पर्व समझोवा मा समर्पण मही है। इसमा धर्म है एक-दूसरे को समझना मुपार करना । काई भी सामाणिक प्पमस्पा स्थिर मही है, कोई भी निपम अपरिवर्तनसीम नही है, कोई भी संविधान स्थानी स्टामिन की मृत्यु के पापा मोषिपत प्परस्पा की कठोरता में रिसाई पाई है। यात्रा-मम्मान्धी प्रतियों में परिवर्तन हुपा है परिम्स मे बनता यो मुनिपाए मिनी है। पोरिपा पार होचीन सपो को पुरापनही पारग करने रिपा पपा पन्तरष्ट्रिीय नस्याप्रो मे भी मोपिपन रपया पहले की पपेसा परिक संपत पौर मोमिन गहा है। पश्चिम के माप मममीता करन मीमा स्पष्ट है। समुषित पमय सहिप्पता और ममदारी से शास्तिपप ममोना दो मफेया ऐमा मोपना पारंगपो मही। शिक्षा प्रमार और सोगों की मांगों में परिमामाप पक परिणाम है महिना दी प्रकिया माम्पपारी देगो मिए भी यही मप है। परिम प्रक्रिया पोरोरा गया तो ममी एरीय गामों की भांति भी सपने प्रामारिष बिरोपी के दम पर ही मष्ट हो पाएपे। ११पासूपयोगरमिटम पषिपने मासोमलिनापा "दमें मगता हैविटम्म गिकीन मार न बिगास पैमामा पपनाने पर हमारी म्यापापा के बीचमा पन्नर मोवाणा और प्रपिशापि सोनों जीवनमा प्रपित गरिमामी और मुगमप ममानेमा महाम मम्मिानित पापार हर मनाया पापनाम गान:मिए पालिस्पापित होणारा ताप पम्तरबापावनियारो पूर्व पार परिषम सिना पपिक परेपान करम है विशनों के विवादारे विषयमात्र एमाएंगे।" रम सात वाद.१२ जुनाई १९५४ को उन्हेंनि 'हाउस पॉफ कॉमन्न महमी दृष्टि पोपमोरोहराया "मुझे विश्वास है कि (पान्तिपूर्ण सह-अस्तितकी) इस नीति को अपनाने से पुषपो बाप संसार का प्रार विभारित करमेवामी समस्यामों का समाधान मिल पायपा-या अनेक समस्यापो की तहरे स्वप मुसम मायमी- पौरमा मीरस प्रकार किमानरमाति काणमूहिक बिनाप नहीं होगा और समय मानाशातितमा लिरकीपा से हम मुक्ति प्राप्त कर सकये। पही सुपर है पर हम निर्भप करना है और म्यादा पसा होगा कि हम सिर, म तमं पम्पबार देता हूं कि मैं पौरा पैसा नही । के स्थान पर प्रार्पना करें पर मुम पापी पर पाकगे। स्वतम (नियम) और साम्पबारी रोना पबस्पापों में भीपम र्पण है और यह ममब मही है कि पम्पूर्ण मानवता किसी एक को स्वीकार करने । हमारे लिए प्रावाया कि हम अपनी मामयर को मुहारें, अपने पिक को नवीनता प्रदान करें, महसूस करें कि जिस दिनाम कारी मणके गुम में हम एटपटा रहे हैं वह पवार्य नहीं है। हमारी वर्तमान यत्रमा एक मय मंमार सम्म मे पहम पी पीरा है। इससे अधिक मिहिपत पौर कृषनहीं है कि इस पृथ्वी कीपने प्रम्य मम्पवाों के समान इस सम्पदा का मी पंत होगा।कितने समय तक यह मम्पवाबनी ऐसी बताना पसमय मिस प्रकार पाश्मी की रम की भविप्पदामी नही की मासक्ती। हमारे ही प्रयलों पर निर्भर हैकिपा मम्पदा पवारियों तक रहे पा समय से पूर्व पतित होकर पासमरपु पोप्राप्तहो। निकषापे पोर मरती प्रनिगावामी पंथी पनिवार्यता मम्म पार्पोरेमाप नहीं होती।हमारा प्रयामरीमा पर पया अनुशासन कम हो गया हमारा पाम्परिक पोत्र बिमष्ट हो गया तो हमारा प्रस्त होगाएमा मिर्षय होपा गिक्षिणावस्था में प्रारमहापा'। मिस पुन में हम रहते है उसकी प्रवृत्रियों को ग्राम परमे रस मुग' मममने हमारे लिए प्रस्तुत गोपयों कोमहमूस करने और उन्ह माण करने के लिए प्रबलनीम होने पर ही बीवन का कोई पर्व है। हम पूनिषयवार के प्रसहाय मोगार महो। इतिहास प्रप्रत्याशित की पहामी है । इतिहास में कोई विक विकास नहीं हाता पौर मानवता पपने पतीत को त्यागकर ममीन हो पाती है पौर माप ही इममें किमी नबानमौर प्रजाताविकाम भी होता पता है। पार इम प्रपमे ही मस्तिको पौरों के बम पर मये सिरे से प्रारंभ करना। की महत्ता १ समान एरा देवी पूर्व और पश्चिम ३ टेक्नॉसांनी स्वामी महीं, सेवक हमारे मन में मह मानने की भावमा रती है किटेक्नोमॉगी की प्रतिही पास्तविक प्रपति है मौर मातिक सममता ही सम्पवा का मापर है। मरि पूर्षीय देषों के निवासी मशीनों पौर सकनीक के प्रति पापित हो और पश्चिमी राष्ट्रों समान उनका उपयोग विणत प्रायोपिक संस्थानों या सैनिक संस्थानों की स्मापना में करने मम तो पति रागनीति में उमम पाएमे पार मृत्यु का बावरा मोम में मे।हानिर पौर टेक्नामाविका सम्यता में प्रच्चे परसर और मच्छी संभावनाए १पौर साथ ही बो-गोगतरे और मामप भी है। मशीनों का प्रमुख स्पापित हो पया तो हमारी समूर्ण प्रपति म्पर्ष हो पाएगीहमारे सामने की समस्या सार्वभौम । पूर्व और पश्चिम रोमा के सामने एक ही बरा है और दोनों का भविष्य समान है । विमान और टेक्नालाजी न पच्चे है म पुरे। पाप 'स्माता में मिपिन परमेमोनही बल नियंत्रित रखने पौर उधित बाम पर सापिट मरने की है। ये प्रमु हो पाय तमी जतरा है। उस मार धमे प्रतीत से मेकर बब मानव मे पहसा परपर का भागार बनाया या सारे मुनों को पार करते हुए भाग तह र मानव मे सारे संसार पर रिमो का पाम विपरिया है और मायाम से बम गिराकर दुनियाभर के पहरों का मिनाप करन की योजनाएं बना रानी-मानीवन की यात्रा भौतिक विनय पार पोधित परियों की कहानी कमम कूची परिपा फाबा हम नाब 'मीवर' पिरी इन पम्तममम मम प्रमिक निमारक श्रम है। मन्दिर में मामिसाय मगमकी मिया पम्नि प्राधिकार से मिन्न नहीं है। मशीन पराम पर मस्तिष्क की पिगम की प्रतीक है।मा स्वयं मामे में ही गपयमही । वह है एम्पाप रिसका मानिकार मानर प्रपने पायी दो मूणने सिए पिया पा। हमारे पारर्ण हो ममत हातासकी रिम्मे पारीमा, मानों पर मही । हमारे पार सहीह नो मगीमा तारापोप पम्पास के निवारप मानवता की प्यायो भुपारने पौर प्रारमा दीपरिपता प्राण पर प्रपल म राहासम्हो साता है। मोटरसार में ऐसी कोई बात नही हिम उमे देवी स पातार पैरल पारमी को मार गर्म । विमान में ऐसी कोई पात नहीं मामे प्रपने सहयोगियों पर बम गिराने को पाप्प पर।मग्रीमों मम पो पुगी। उनके पूरा साबित हो जाने का कारण यही हम समुप है। पुप मोगोरापन रिमिक जीवन म मपानों पामपिभाषिक प्रयोग पूर्व और पश्चिम ही हमारी परिस्थिति का पतरा है। ऐसा कहकर वास्तव में प्रामुनिक सम्पता की परषिदेव रफ्तारपीने की प्रतिमोगिता स सम्पग्वित चिम्ता ग्रीषनपी पनिरिपतता पनेहपाममारोंक पीबन दो गुप्तता और एपरमता-चिन्ह पटे पर बंटे एक ही तरह के काम मधीनों की तह करने पड़ते है-हमारे मनोरंजनों को उमेरक प्रवृत्ति और बेहद तेर रफ्तार व कारक पर धानबासी पागारों में प्रति समाप की भोर पारापरते हैं। श्रम कीपा करमेनामी पुरानी तरकीरों पा उपभोप मानकीपाक्ति के मीवर ही किया जाता था। मानगीय नियंत्रण से मुक्त होगाने के बाद टेक्नॉमारी अपना पर्षदो बैठती है पोर गरम पर उपामों की गिनप हो पाती है। प्रोपो गिक माम्ति से पहले पारमी मधीनों को नियंत्रित करके वस्तुए तैयार करते थे। रेपपनी एपमता का प्रपोप करने म प्रसन्नता का अनुभव करते थे। अपने काम को पर्म के समनुस्य समझने का एसे काम के बारे में हीपत का फपम है 'नृत्य रेपङ्गबानन मे मेकर स्पापापाता की विम्मपसनक मिसासकाय रतियों तक ‘य सारे गाम यम की भेगो में पाते ६ छिया स्वयं मॅट इस उपम्पि में मेंट को बस एक बाट बस्तु म पार पारिप बस्तु हो जाती है एक पाप्यारिमा पियाधीनता है और मह प्रवास मारमचममता को नकार कर पन्तर्यामी पौर कस्पनापासी रेप की पूर्ति करता विभागास जगत् के लिए प्रस्तुत करता है।" टेक्नोलोगी की सम्पदा म यहाँ हम पम्पूर्ण के एक पंप पर ही मान देते हमारे काम को पारमा का मस्पर्ण नहीं मिलता। उत्पारन की रफ्तार बहाने की हो में कारखानों में काम को इतने छोटे-छोटे मों में बांट दिया जाता है कि कुममता परमा बुटिकी पाणायकवा ही नहीं पड़ती। इस पुनरावृत्तिासे काम से करोड़ों पाममार पापक पौर एकरसता म दूर है । कामगार अपनी पलियत प्रवृत्ति को देते और वना की सतह पर पीमित रहते है। इम मानव के सबपेष्ठ ग्रंप का प्रकामन महीपखे। उन्नार मान के लिए उत्सुइस सुप में हम सरस पार पवित्र जीवन के प्रनिवार्य मूम्प को मारपवार कर किसी परिस-निषेप का महत्व उसकी सम्मत्ति में नहीं बस्ति पावन पापन केडग से पाका बावामीतिक प्रावस्याठामों पर सांसारिक भाषी पापों के संदर्भ में भारत ने सन्तोप मार पारमपम के मुस्प पर रोर, विमा है। इस रेबनॉनोमी-सम्पत्ता में सम्पारक या उपमोना किसी भी सियत से मोबाने बाला मारमी म्पतित्वहीन हो पाता, प्रपनी में वो बैठना है, अपने मामा- किसेदर्म से समय मा पचता है और मानो शून्य प्पोम में दिया जाता है।

पूर्व पार परिचम मुक्ति के प्रसीम मूस्य माना के प्रामुमान पीर परिसरों पौर प्रारमा.लीसा जीनता को टेक्नोलॉजी के युग में परक्षित जना मासान काम नहीं है। मास्वारे पुनर्जीवन-रिसमाम है मानव की गहराार्यों में मात्मा की परिपति पौर विधमें अपने से ऊपर उठकर मानब अपनी सत्ता के सात से पुरमाता है-सेही या संभव है। दुर्भाग्यमय विद्वान पोर टेक्नॉलॉगी भी उपसम्मिो से पाहप्ट हमारे पुरुष चमैता मानव को एक विमुख यात्रिक नीतिक और स्पसंचालित इन्धाों से निर्मित प्रामीसमम है। ये मानर की भौतिक प्रवृत्तियों पर तो मोर देते है, गिन्न उसके मन्तस् में उपस्थित उपवर पवित्रता को भूमे-से लगते है। हमारे युप के मनेक नो! डारोप है पास्वाहीमवारी प्राप्पारिमाप से विस्थापित ६, उनकी सास- विक मा उमर की है। परम्पराहीन है। पौर भूपिनकी पानी नहीं है, इसलिए ये बहरापनापन महसूस करते है पौर ममतमही भी मैमो की तमास करते है। ये फिरपरस्त बन जाते है परठर कैरम यही है कि पानिक फिरा पिपी भी देश से पका है । या महादीपों में फैमा है । पृप्पी पर स्पर्म के मये मसीहा ग्न समी निरामितों सपोपन करणे योग्यत हो पुरेपा शिमम प्रत्यगारको पपरिमित मिराणा पर कर चुकी है। पपने भौतिक माताबरणपो काबू म रखने की हमारी मसीमित ममता से रही पधिक महत्वपूर्ण स्वयं पपन और अपने सहयोगियों के साप हमारे सम्बम्प। विरबी उपस्थिति हमारी मानवता की गारंटी मही है । मानब बनने मिए इम विषको प्रतिरिक्त पिनी पौर परतुदी मावस्यकता है। विमान और टेक्मामांगी कोहीन सम्पदा पा पापार नहीं बनाया था सम्वा । एक गुमानीव का निर्माण नहीं कर सम्ते। माम्य मिनागमोर करने दिए पापापा हिम किसी मये प्रापार पर जीना सीख । हमे निरषय ही शापारिसमापी पोर करनी होगी मासषीय मस्तित का सलारपता होमा सभी पार्मिक पापों में प्याप्त पाबनवा दी मावना पानागापौर जमके गयोग मे एक मप मानरमा निर्माण करना हाया गमतीन अनुभूति क गाप पपने पारिवारों म.प्रपामगरसहप्राति को नियमित से प्रपिम्-मसनापानी मति माघमनापान है । माप को मानसी उमरे भीतरीपनापी मेगा ए मोर माना चाहिए। माननीय पत्रमा का प्यान रपना प्रत्यावस्या है।' मनरेशुमार मास पचभर मरमा मार H पसायोनि पूर्व पीर परिषम ४ रपनारमक पर्म एक मोर पूरोप पर नये सदा मंगराह है पीर दुसरी मोर पश्चिमी विचारों और तकनीकी त्रुममता के प्रयार से एशिया पौर प्रपोकाका पप बनता ना रहा है। दुनिया पपिशाचिक परस्परसम्पत होती मा ही पौर मसतिगेम सम्पवामा का सम्मिमम हो पाई। कोई मिसेप पीवन पनि ही एकमात्र उपाय ऐसा सोचना हराने की प्रारमरेमीपता । पापामा मही कि सामी की विहिन मेमानों को एक समान स्तर पर मा का किया जाय । विभिन्न गुमो कोनागर की है। हपाप कार्य एक जीव-पति कलाम पर दुमरीकोमा करमा कहाँ रमिप्रायेण से समका प्रम प्राण माना। पूर्व पार पश्चिम में मापारभूत प्रस्सर नहीं है। हममें से प्रत्पर पूप भी है मार पश्चिमी भी। पूर्व और पश्चिमको विहामिक पा भौगोमिए पारगाए यही र पुन मे र पानर मे प्रति समापन मानीय देखना के परिचालन है। मनुष्य के समान म रसमी मानिक मौर वार्मिक प्रवृत्तियों के बीच तनातनी है। पहना या इमबम विपत्ति नही पुनौती है ममावना है। इममें से प्रावक मार्मिक पार पीरिक रोनों है। पूर्व का महत्वपूर्ण मानिक पापमान पर परिचम की सारप्ट पार्मिक उपसम्मियो। अधिक से अधिकतर करत पोर देने पर दिपार वना रोनों ही मामय प्रकृति के नाम सभी सन्तुलन मही स्थापित हो पाया है।' भार पारमा भीतर पिारों पौर तमा-पीप प्रसाई। अपने प्राषिप एनीतिक सागतिक और मामा सिस परों म समस्पस्थापित हो जाने के बार होगोई महापापी हो पाता है। मेव चित हो गये तो सामानिम्मवस्था भरमार हो पाती है। हमारे पुग की प्रापारनक पार निरासोपारक प्रवृत्तियां बस पूर्व या पश्चिम में नहीं परम् सपूर्ण संसार में म्याप्त है। संसार का मेय पूरा होने की वर्षापम प है कि पारेपपणे कामावरिष्मासीनीयरहो।यस संयुक्त पष्ट मप या रनरी पम्प मेम्बामापही विस-एमा स्थापित नही हो सकती। प्रमा-अमग पा में ही शान्ति स्थापना काफी नही। हर बात परस्परसम्बर है। पूर्व पालिमही पूर्ण पुर का बनयटम सम्हाई: पूर्षापार्मिक दृष्टि रामक कुनामाने नाम में पीने । "सौ यो रोरन बरे मन मार और सामी नमो भौर पर सन के मस नमावनि मनम प समुक्ति मिल मति और मानिए गान माल मसीहोम t"+५३।

पूर्व और पश्चिम पोष है-बिमसे परिचम मी प्रपरिचित नहीं-गि मानव गिसे मूस्या का समु पित योष है पप्पी पर ईयरामोहर मूर्तस्प है। विज्ञान की प्रवृत्तिमा गमत समझने से इस दृष्टिकोन मोगा परफा पहुंचा है जिसकी बगा से प्राप्यारिमा जीवन का मौरिस पिनास प्रौर रचनात्मक पक्सियों का हास हा पुमा है। विभिन्म परम्परामा के सपोय के फलस्वरूप महाम प्राप्यारिमर पुमरत्वान समय हो जाते है। मीमट क अमुसार ईसाईप स्पयो पारार्पो-हेमेनीय पौर यारी- का संपम है। ईसाई धर्म के प्रमाण से पम्मोहा यूनानी रोमा संसार एक मये समार में परिवर्तित हो गया। पप्पी की सतह पर सभी प्राणाहते है स्वाम पार समय की यह बहारदीवारी सभी प्रानिया मिए है। महीहमारा मौतिक मापार है पौर यही सम्पूर्ण मानवता की एकता को सभव करता है। मानवता की एकता प्रमी वष्य नहीं है कर्नम्प है। विचारों मौर उनकी पधिकाधिक सगृति के कारनबोरिक एकता की मभावमा पिन्तुमानरीय एकता पारमयोम की संभावना पनाममोर उपाटन दे उगम्बरा बों में ही है क्यादि यही राम इतिहाम म मबीन उमाबमापामा माते है। येही विश्व-एकता कसिए मान बीय प्रयास प्येय और पौषिय रोना है। हा मातापिपूर्व और पश्चिम के संपाप के फमस्सा एक प्राध्यामिक पुनर्मागरम हो पौर पर शिव-समार बम समोसम्म मन को पपा रहा है। विपकी तमान परिस्थितिया मानिक विपि का सार्वभौम स्वीमरण पो का नुमनामक अभ्ययन रि-एस्ता पी चुनौती लसबग ममी पर्मों में पामिरपनारमाताका मान्दापन जन्म मे रहा है। विभिन्न पाप्रपतिमीरा पिपा माप मिपकर माप मोर प्रेम द्वारा उत्तम जीवन की प्राप्तिमा प्रयानगीमा दुनिया पार तिवारी गर्म धिमे हुए पर्मों प्रपा प्रापरी परमेवामी पाँग्मानना कामही परम्पप बनामर पाप्यारिमा पम को पाना पाहती है। इस पर्माविमान पी प्रवृत्ति प्रनिरसन होना पायायाम मानापारी पावतो कामानिमारनामा पौर पिता स्थापित करने कप्रियमनीमाना पाnिi रिमान मोरी गम माग्यापम पी गहापर है। रिजान समामिन प्रकिया-मारनी। मौरन नागिा परियन मशात मार है। पिमान माशिम उम मागों की पुद्धि पर निभा देनिम माम पौगम और मुप्पगोप है। मारा परमार मनपर माना है मीसिमसाम्बानी नहीं बम माना। परमाणु भगन इनित कर गानामि उमरे भीतर पर पाप मोगरा मोतिर उम्पिानागप्प वीगाह पूर्व और पश्चिम मानबोतना क्या पुष प्राप्त कर सकती है। इसके अतिरिक्त पे उपमम्मियो कठोर मामसिक पौर नैतिक पुनचासुन पक्षपातहीन सत्यनिष्ण समर्पण की मापन पौर रचनात्मक कम्पनाशीलताकी सुपरिनाम है। विज्ञान पौर मर्म का संघर्प ऐतिहासिर परिस्थितियो के कारण है। बीते बमान में बझानिकों में पार्मिक और रामनीतिक परयाचार सह है । म्यादानो नोको पिठापर गोषित पमा दिया गया था और नीमियो को कर करके फासी के लिए धमकाया गया था। पार भी शानिमेंका राममीनिक माप या नैतिक परिकार की पमपिमा देकर सत्य पहन रा रोका पाता है। नामिरीय कर्मा का स्वापत पान इस रप में महीं किया गाता मि माति पर मामद की विजय में यह एक मप मुम का प्रारंभ है पौर इसकी पक्तियां मानवतानी मसाई लिए है इसके विपरीत से मानवता के लिए ममा मतग ममा भाता है। इसका कारण हैल राष्ट्रीयतामा पमित प्रभाव । मामिकों को सार प्रत्यापारी का सामना करना चाहिए । र मटियर एना चाहिए कि विज्ञान की सपाई को कायम रमे परिसरचित माभवापर उपयोगो से दमे मीनही गिरने गे पौर सम्मता के प्रपम ही विमास के लिए विज्ञान का उपयोग पान म रोममे। मम ही पियर है और सरय की प्रेराही सिर की मेरा है।' धर्म और विमान दोनों प्रकति की एकता की पुष्टि परत है। विज्ञान की केन्द्रीय बारमाही बम का पन्तान भी है कि प्राति बोधगम्य है। प्रकृति की प्रक्रियामो का प्रप्पयन करने ममय हम उनी स्पषस्था पार सामग्रस्म प्रमाणित करते है और सिर के मस्तित्व पर विश्वास होता है 1 मॅट टॉमम का पहना है "सिर-निर्मित वस्तुमों में हमें-सबमे पहने-बिरीय बियफ की एक झमक मिम सकती है, गोंकि पिसी हए तक उसको पनि समी बम्पुर्षों में मौजूर है। हमे पिरीम पिक कोप्रमाणे पार पविकसनामों में नहीं परन् प्रकृति की प्यकामा मौर सिरसा मुनरता मोर मुगाना में देखना चाहिए। वारका प्रस्तिरम नगभग क पर बो से है और इस कल्पना-मान मे कि सम्पूर्ण इतिहास का मार्रम बहार के किसी स्थान पर सिमी समर पटित एक प्रपूर्व घटना सहमा है सामान्य मनुप्या की मौ मानिक चेतमा म तनाब मा जाता है। प्रारम सही पिर पृप्ती से 1 १प्रसर ने महामारी राकेमात्यक स्पा हमारे मानस गुलाम बनाने का मन मसिम पर यह से बापनेपास। सिमोसा माकन :रो सत्ता रामही आत्मा की मद्रामा पिता मेषसोमनागम-मली पिपी मरमही मारनभनदी पारी पूर्व पीर परिषम पटेकाकपन रिफार ने मामधीमशान की समी पावाों का अम्बेपन किया कोई भी सन्तोपत्रमा उत्तर नहीं पाया मोर सत्य की खोप करता एमा मपुत्रापि ममा परमा पहुंचा। बह पिस्मा पाता, 'पौर पर मैं पापा पहुपा हूँ । मू! पर्ष भान प्रमिपरा है और मैं पहने ही बिना बुद्धिमान है।" उसका ज्ञान म्पर्ष सिर हो जाता है और सोर निरर्पका बह निराप हो माता वा एक प्राचीन पुस्तक को सोसता है, मोर उसकी पा सुमेमाम मी मुहर--- एक-दूसरे पर उमटे से दो त्रिमुग योनिम्नतर मोर सन्चतर, प्राति के संयोग के प्रतीक 1-परपावी हारसमें परिवर्तन होता है और यह विस्तापाता है 'बाह । हरभम कितना नया पिरीय नभौर जीवन प्रत्येक भाषना में भरता पाहा .! मुझे यौवन का सरम फिर महनुम होने मगा है किधी सिर पह पित बनाया पाक्या" पृष्मी पौर स्थिर मे मिसे ।' इस्य जगत् की एक नई समम उसमे मा जाती है। उसकी यात्रा में उसे प्रभार में पहुंचा दिया मिटनु उस सन भी उसके समा एक नया पापम्पोतित हुआ। विज्ञान प्रयोगसिर है यह परिवारी नहीं है पवार है। दिन पार्मिक मरयों को स्वीकार करने पी पाणए हममे की माती उनम पीर परिषसनीय सरियों में बड़ा प्रगर है। बार्मिक सत्यों का पापार है पमुमय-भौतिक संमार कामही परन् पार्मिक पपाई का अनुभव । विज्ञान के सिमाम्त मी अनुभव सारा प्रमाणिव होने है। पनुमय कामरचम ऐयिक प्रमुभव या चिन्तमकार्य कर मीमित नही है। सामाग्येतर पटनाएं और पाप्यारिमा अन्तरटि भी प्रमुगर ही है। मानिक माप के गमाम धार्मिक मस्य को भी पनुभव द्वारा प्रमाणित पिया पा मम्ता है। मानव-समापनपी कर माम को निश्चिारता नसता पौर प्रेम ने सपा दिला पाप नो वर का मान प्राप्त हो जाता है। पामिर प्रयामों फा गप है पामिक परिणाम र पानमा । प्रातरे मीटर का सा है पापानिक विषयुक्त विचारणाराका पम्न पप्यारम में होता। पूर्व में धर्म को मनुमा पाबीवन की मंशा री पहैि। या विमारपारा पर ममी ली पामिर नोपो ारा पपिरासि सीरीया ली। पारपाना पपी मही पाप भी है। 'बिर या पिम्मानेजान पामों . है "माधोरामसरोवर ममाम मरोगी गरीयपना पिरमही दोरी,रार-पार hनेभरमारती 21 - मली। पोमिरियम (110) पूर्व पार पश्चिम कीमही सरेया का पालन करनेवाप्त मोगों को प्रावग्यता है।' तास्मर कामपन है “प्रग्या हो कि मेरा माम मूम मार्य पौर मेरे प्रादेशों का पामन को। सिनीय निस्पयुट म पिमित धर्मानुयायी पवम की पविसनीय गहराइयों तकमा पापे और इस प्रकार प्रस्पक्ष सिर हो गया पा कि हमारे पार्मिक रिसायों की प्रावि स्तिनी सतही है। परम पिता की मामा मानन के लिए निजी पावनता भापश्यन पतनानी तो प्रत्यक माममात्मा में बालनी चाहिए । “पार पाम पिता परमात्मा ने कहा में तुमारे भीतर एक नई चेतना भर इंगा पौर में उनके सरीर में पत्थर का रिम निकासारहामा दिम एप गा।"मत्य मौर ईमानदारी परिपता पौर गंभीरता, या पौर ममाम गुप निस्पृश्ता से उत्पन्न होते पौर निस्पृहता पारादीपाप्यात्मिक परिवर्तन संभव है। हमारी मामसामों पार पभिमापार्यों का हमपर घासन है, हम अपने पगमी का अपमान करते ऐसे उमे पान्ति से न पने से पपनी हिसारमा प्रवृत्तिमा माश्मन पौर मोनुपता से परिपूर्ण संस्थाए और ममार निर्मित करते ऐगे। मारमयीयता स्पाम पर सिर फेनीमता की स्थापना से पान्ति पौर बीवन-सांसपी प्राप्ति होती है। परिस चिन्तन पौर मनासक्ति पारा सिर की प्रकृति को गहराई तक माना पा सकता है। धर्म का मून तत्व पार्मिक सिखातों प्रपया ऐतिहामिद पटमानों की मौक्षिक स्पीति महीं है। यह तो उम भनुमग पौनयारी मात्र मोहमारी सम्पूर्ण सत्ता को प्रमाणित कणा है हमारी प्रशान्ति पीग हमारी मनुर पौर निष्मन्त सत्ता की पर्वतापी भावना का पन्त पर देता है। सेंट ऐमोर का मन है 'परम पिता परमारमा पपने नपासकों की रक्षा तगास्त्रारा नहीं करना चाहते थे। पर्म केवम मस्य-चिन्तन नहीं वरन् सत्य के लिए पीड़ित होना है। हमारा विलास है कि सम्प प्राप्त हो चुका है, मूर्तिमान है उसके मानक निश्चित किये गा है पौर पर मानव का केवल यही काम एपमा है कि निरिपत परिपूर्णता पमुस्म गूगों को मात करें किन्तु पुरविम विषाम मे मानव-मन की पामिन विवारपारा को पंगु बना दिया है। यह तर्कसंगत मारमतुष्टिका दृष्टिकोण पर्म का एक पुष मारपवास करता है कि पम पाभ्यात्मिक एगवर भी है। १ सरमनेट रा रा में मार से बने पुत्र के नाम पत्र में प्र "सनिक काम सपियनपरिक नही समरकर मतिको भने अनुसार बattimबी. बम विनास मोंगेशनेपाली कार मे (१३) प. .XL१र१६।

पूर्ण पार परिचम पूपि धर्मों में माना जीपन की सिद्धि एक अनुमाई पिगमें उसकी सत्ता का अस्पा स्वर सम हम तक पहुंच पाता है। हम अपार मे प्रकाश में पहुंचते है। हम समय को एक मायभीम मेश्य मे बामामा पाप है।हमारी सत्ता सम्पूर्ण हो जाती है हमारे प्रतेपमा पात हो पाता है। हम अपने चारों पोर के मार छिमार मही पनि बामो बन जाते हैं। विस सन निती पामिर परको धि प्राप्त होती है पोर बह प्रपती मना भी गहराई में पारा मी पाप यह एक नये मार्ग पर पम पड़ता है।पुर या ईसारमै मयाबीपन प्राप्त करने की प्रेरमान पर ही हमारे मुक्तिदाता अपवारसा हो सकते हैं। उनके जीवन और चपराइम परिवर्तन के उगाहाम है इन्हीस पामम करके हम अपने पालेभम्म मौर प्रातिप्रदन पनों गोतोपरमपमी मीनिक ममता से भर उठ सकते है। हमारी वेतनता सामान्य स्तर मे मार उठ जाती हम प्रक्षेपको मानने ममते है पर इतनी प्रभिक प्रमम्मता का अनुभव करते है कि मारमा पपपी ही गहराइयों में प्राने बीपन पौर मपूर्ण मया पापार को प्राप्त कर देती है पत ममयमले पानयोगमारको दिसी भी भापामे म्मल करना संभव है। परम मसा के प्रति यह मापनि विमी पर्वा प्रा करते है अपनीय।" तुरस्मि रिशमसान मारम भरननीयता को प्रदरित तो किया पामरता है पदो म पापा नहीं जा सका। इस रिपय पर दाम्काभेप पर है "म प्रति मानिसामाभिक सुन है। फिर भी मानाए प्रारती १गिह कहनही पानी । इस प्रकार यही अनेक मानवाने पप्तिम पार्मिक प्रमाण पनि परको तई नहीं है। मनुमर को प्रतीक मैम्पल पिया गnt मो•मान मार विलामो अनुमार प्रतीक पने प्रारोपाच है। फिर भीम् रमाईया मूपी पप्यारमबारियो वीरा मून पनुमच एक पायसीनापन है कि पम पम मोर पदीपना बापचूप प्रमापारिया मारयों में पारपर्वमा सहमति है।' - मामान और पिनासमर IRTHएपिमा योनि sr"श-मासस nि naलरले गणमा समरिसोTARA Frम में ला पास हो गया कि पानीपसम्ममा। . रमनमिण २५११७। . नाम ATAur 1 ४रितमानारमन'. ।

पूर्व पार पत्पिम प्रपम पे गाय मगर मम्पूर्ण प्रत पिपपवासपूर्ण मामा : मनुभाका पोधिप्रतीरामाल किया जाता है ताप प्रतीक मात्र हो भनम्नता पोर्गन ममप रे पपान परम्पत नहीं किया जा सकता पम्निम मो मरतनता पो मत्ता के पैमाने पर प्ररि ममयनयान के प्रतीका मममी प्रसार म्पस नही पिया मा साना। फिर भी ये पममरमही है।एष पामिर रिसर गमीर तम प्रतपिपरिपाम है। मनीरा पौर विमा पा रायाम मगेसामना क मिा गहापाकेप में किया जाताम्वय उपासना को सम्मए मही। पार्मिमियों के निस्समा पर्म है.मारमा पम्मिान कोमिमी पाठ में परिवतिय पाना । गोकुव हमारे पम्नियमा पहन पिया बा उसे हम बस्तु में परिवर्तित परत मिमे हम स्पय प्रहण करत ।म अनुमा मानका एक माग मन जाता है। सिर कबारे म मानव की पारणाएं सबिर मही है। पिर बारे म पार्मिक मिदानामा परीमा पर्म केही नप्यों प्रपरा मनुभयो गोला। उन मिशाला का प्रन्तिम प्रौर सानामिप नही सममना चाहिए। मर्मा पौरर्मो पर मे पर पाकिपिपिम्पिापी अनिल का पासोषित करता पिर रखता और भाग्ममाना है। रिमू मसारस पम्प मनसिम पापहपामा कान है। ममूर्ग प्राति पौर बोजन धमम है। मनार परीक्षामा परिनाम रहने का प्रम यह नहीं है कि सभी राहा पर है। इसमें केवल यही प्रामाम होता है कि गामार की मम्मावनाएं निस्मीम पार प्रमेय है। इसका पप यह भी है किषि का समाप परम नहीं बन मरता। ऐमा मया होतानो मात्र ही परम हो जाता। भूमि माना पर के समान ? पोर उममेही प्रतिनिया है-परला वनरा पम्भिवहीन एना- इसलिए ममार बिर की पणि । ति मानव पर मे भिन्न मिनिए मंमार भीम भिन्न है। ममी पम पमी में प्रेम परमे का उपदेश ले ई, किमु प्रम करने कोषमता पा सम्माटिन काम है। पाप्यास्मिकीवन का निकासपीमा बम हमोपड़ामी को मम करने की समना प्रधना सरमा, फिर चाह हम समाषत' बसा म करणाचा । पिमिम पॉर मरम्म' म कहा पपातमारे बाप र मोर ममहे महसे पार है ? तुम पाहो मी तो तुम्हारे स पुर यहाँ मे मी पाने।" मानणेपी परम्परतीराबी मातीप्रामों मेरी मानों में मातमी और समपो पागम होता है। हमें अपने भीतर प्रनुपता पवना पारस्पर है। मेंटरेसा गनों में गंभीर पर है, "इस पृषी पर तुम्हारे घरीर के प्रतिरित ईसास पूर्व और पश्चिम पौर कोपिरीरमही है तुम्हारे ही परिजिनके बम चमार ममाई करने हवे है मुम्हारे ही हार है जिनसे ये पातीवि देते हैं।" प्रारहीं पताम्दी के महान प्रमारमबापी बिमिपम मानेकड़ा पा 'प्रम से मेरा मतमम उस स्वामाषिक कोममता से महीं है बोप्रत्येक पक्ति में उसकी शरीर रचना रे अनुसार कम मा अधिक मात्रा में उपस्थित इससे मेरा प्रर्य है बिपौरपर्मनिष्पपरपापा रित पारमा का एक अधिक व्यापक सिवान्त मिससे हम प्रत्येक प्राणी को पिर द्वारा निर्मित प्रामी मानते है और उसके प्रति कोमस पास मोर सरार हो जाते पौर ऐसा हम सिर के लिए ही करते है।"वामिक पहिस्मता के कारन इस दुनिया ने यो एउठाये है पोर सतबहाया है। हमारे समय की राम मीतिक पसहिडता मे मी--को किसी भी पार्मिक संग के समाम पूप, विस मापी पार ठीसी हैवामिक मामा पो मिया है यो मप्मयुग के धर्मपुगेकी मार दिलाता है। धर्म के माम पर तिाई मनामों ने पूर्व पर पारमण किया था। किन्नु मभीर पार्मिक पास्वामी सम्मत्त प्रसहिप्नता से रक्षा नहीं कर सकती । पर्मपोयामा का पार पा कि मुसलमानों के लदा पिर पर ईमाइपों के सिर + प म साहे। इस विचार को संभव ही मही समझने मुसम मानो का बुरामही पर हो सकता है निमपर उनकी अपनी प्रास्था है।' पामर मोम मोचते हैं कि प्ररने पर्म के प्रति बमवार रहकर पतिगत रूप से कुछ मी करमे को स्तर है। हमारी मात्वाकांक्षाएं सपाती पपने लिए - पनि रिता में समाचार बरि। प्रबारसम्पयामिति निम्॥ FA मा पानी का प्रतिपक्ष सदापर पति तोगा कोरिगा। पौरपोल मेstोषबात' (१५)। पपुरानाASTर | सन सोपान बस्ने किराए कोल मधून राम गणपला मानामपिसिरिसर मे निमर्मत। "पूरी रिपम परमरिकमान्य और मोगसम्दा ससा में शिम पारी सम्पमा धर्म और विनाशकारीपना की। समिति का निशानारोमा ममान सामान दुरा गाना प्रतिकिपीमामिन ना पति मदनपत्रिी निए मानरामा परमविमानको साम मरम्मान पाणी लिलाममाम मत परिण मार्च मे बम और सीमामा पर्म-५ दिदी भात मेला (1) रत।

पूर्व पार पश्चिम । यदि नहीं बलिप्रपनी धार्मिक संस्थानों के लिए। इस प्रपिया को दिमियम में माम को पागे बिना सरकी पोर पापना हाइपय की सारी मामसाए पार पक्षपात पो रेपो बने रहते हैं पार किसी नपारपित पार्मिक रेश्य से गुरुमाते है । "इप पारम प्रशस्ति पृणा और प्रस्यापार प्रने कार्यो को बार्मिक पोशाबाना पानाकर पवित्र बना देते है प्रतिस्प विहे ग्यास्पर मम माती है।" पिरभक्ति के नाम पर हम पागनी पौर प्रत्याभार पो भी नैयार पहते हैं। सनता है कि मानयता किसी मामूहि पापकर्म को नाम हो गई है पौर फारस करती पमी बा रही है। मगता है रिपोरिप पानमा पर मनुप्प पार उसपी परिस्थितियों पर, हावी हो गया है। पर ईमानदार पावमियों के समस्त सत्प्रयासों और महिमा का उपयोम पुपो में करता घमा बा रहा प्रेम ही सिर' पोईपर पिमु महीं हो माता । परिबिर के प्रकाश से ही प्रत्येक मामर मालोपित होता है' पौर परम पपनी सना का प्रमाग मी प्रस्तुत किया हमारे धर्मरे पतिरिक्त पम्प बों के अनुमापियों को मी पर प्रेम प्राप्त है। रिपर पस्य को जानने के प्रमेक रास्ते। मंभीरतापूर्वक विचार पर तो धर्म मपम मौन और भाषामता मे समान है। एक ही मापार पर लिभिम पार्मिक परम्पराएं स्थित है। इस मामान्य प्रापार का मोग इतिहास से परे है, पास्वत है, इममिए इमपर सबका समान अधिकार है। विभिन्न पौ प्राणों के प्रमुमयों में नमान पत्त मिलते हैं। विभिन्न मों के हम एक ही नम्य तक पाना चाहते हैं। चमूमों की सीमार्मों पौर निममो प्रतिरों को पार करने के बाद सभी को समान प्राप्यारिमर बीवन प्राप्त होता विहास पम्पयन बारा प्रमाणित प्राधारभूत सिगान्तों की सागौमिरता ही भविष्य की भाषा है। इसमे फिर उमी गंभीर सरप पर प्रकास पाता है निस पर पूर्वीय धर्मों ने मदेव पोर दिया है-पौदी प्रत्यक्ष भनेकता में एक प्रत्या एक्वाई। ईसाई ससार में भी अनेक ऐमे मीर पिचारकाएको पाम्मास्मिक पनम्पता पर मिश्याम महीं करते थे। सानिकोनस पैर-नसाई धर्मों में मी सस्प के तस मामदे । के कॉपम्सीमिपा मारोपिटोरम-प्रपति प्रत्येक बस्तु दो बिरोदालों के स्टार विन्दु पर स्थित है, और इसी कारण पारित का प्रभावशमी पर विश्वास परोपे। पर सर्वग्यापी प्रमन्त पौर मठम १ प्रथम,IV १३॥ . In पEXIY १॥

पूर्व और पश्चिम बस्तुषों में भी पाप्त है। प्रोफेसर पार्न टोपनबी२ मे मिष्ठा है मेरा विवाग है कि मेरे जीवन-ाम के चार उम्मवर धर्म वास्तव में एक ही बीम' के चार सपोर परि म सगिक संगीत के चारो प्रकार एकसाप समान स्पष्टता मे पृषी पर एक मामय पो मुनाई पातो प्रोता प्रसन्न होगा कि उसे कए पनिया नहीं मपुर मंगीन पुनाई पाहा है। वे विपास नहीं करते कि पोई एक धर्म ही माम्पारिमक मप सपनाय पौर मुनिश्चित वपाटन है। दूसरे पोको मह कहाा पम्पीपार करना कि हो सकता है मरने समें भीपीकार मिपा हो पौर रे मी पुष मानबीय पारमापों के समापिरहस्य का उप पाम मग्न हो मेरी दृष्टि म विरनिन्दा है। उन्होंने साइमाप का मन पर पिया तन महाम प्रमेयमा ज्ञान एप ही रास्ते पर चमार नही हो एमता' पाविएप विनियम रेम्पित एसरे एमा म यही बात कहते है "गैर ईमाई रिचार मा पापार या पागपना की प्रमानिया में पाएष भीमावर्ग हैा मर उनपर और उनके भीतर मिा का प्रभाव है। विरोप मान-पति सिा रान रे पण मारमने वालोनियाको सिमा वितार में मिलाप पराजित भने पराम म मरि पुनर्निर्मगरिएपरियों को समय मापस में बरी रेखमा 'यो समिम मिनिममरने का पोयानिये.भेजनी मनुमा और भारत पालनाने और पर धर्म के पोतरा परतरिय विमो मो धर्मानुगामी यो पानी बासरे चमनियों का सामन में अपने पनि पा साकायत परम। - fri- सभी १५४ छ ५० पर गया। . मरिमा पार ()94.१८ । मायमर राना मानdि में मतलेसमारे मायामा पा में मेग अनुमान मिरिकम समभार माना गे र एलेग २४१-मारावीमामा पर्मनिरपेण पसारमानापमो मार-- रतमनुपी बनने पर बिमामा म म म मा परिसम मामा मामामhatममा मिनि मे यनान और रोम मचा परिपके मोनापाटम माना मम्मर में पाया कि धर्मरामार मम पर माना गया। सिमरामा मीर में मप मारला द्मा मानमाता प्रिपरमा मीरणी और मनु तरपार प्रा6 TAL नगरी वन म रिस पदेगा। बममा सरसामा बिनाम(ो प्रेममा मेस रत) tariuमातरम करने काममम भरने R-या FARA (भर १५४) Tran.

पूर्व पोर परिश्रम - ममीह के दम पर ही गायह प्मो मपुत्र पुर मौर कन्यमियम मान पापिठ मारो गो समापौर पर मरे पे बाप कपिरीय प्राप अपनी मीमा के प्रमुमार प्ररपेट पक्ति उमम प्रातापित होना है। फिर भी प्रत्यको उम प्रायपीयुष किरण ही प्राप्त होती है पर मपूर्व प्रा प्रामोजमरे लिए मम्पूर्ण मानपीय परम्परापों के मम्पूर्ण मान बी मावश्यकता होगी। पाईपर्म का इतिहाम बताता है कि अपने घरमोबई के ममप म उसम पारान प्रदान की प्रवृत्ति पो । वह हमेशा पनन बातोपामहाब देना और अपनी कारियों को पामता भी रहा है । रोमा मापाप को सीमित मरने के बार उसने स्वयं को सलामीम पास्वापों के अनुसार पदम सिया इमम पूर्वमा सामाग्य अपनी पुषा समितिक परम्पराों और सामानित मस्पापोवामा बबर समार पा। मम्पयुमीन चामिक निमाम विबिना मुमित समय नहीt अपनहीं रहमपा। सोचना किमातेरा सुष के साफ-साफ गमे फिरे संपामिका को माननबास अधिक मोग होम । फेममा बार्मिक माम्पाबानों का वन एक सार्वभौम पर्व है, जिसमे गार मिसीकी मुक्ति नहीं है। इस परिवर्तनपीस संसार म रुपिया मी यरत गाती ।। उपाहणत मध्ययुगीन सिवान्त हिबिन मनोकाबपतिस्मा म पिया गया प्रमन्तकाम तक मरक पासी रहा। प्रॉपस्टीन के पद "प्रच्छी दम्पस बात को समझ मो। समम पर प्राथमियों के पतिरिका बिना परतिस्मा के परिकोई माममम बचा भी इस पसार मेचमा मया तो उसे सरेप मरासी पम्नि में अपने कारणमिलेगा।" पसिर 'एम्सालोपीरिया मनुमार ११. ईसगी म भी मेंट प्रम्सम्म भी मॅट पॉपस्तीन के साप पूर्णतया सहमत पे कि बिना बपतिस्मा + बच्चों को पापिर्यो समान मनपाएं सहनी पनी । काउम्सिस प्रॉफ ट्रेष्ट' की प्रपिात प्रश्नोत्तरी (१५६५) में कहा गया है कि पिना बपविम्मा के सम्मो का बन्म 'मनन्त यत्रगा पार मरफास मिए होता है। प्रारमिनोम इस मिसान्त को नहीं माना। हमें सिौ पातुपरक सार्वभौम सिमान्त की पपेना नहीं करनी चाहिए। सबके एक प्रकार से सोचनेमा मतमब है कोई नहीं पोषण। बिम-समान में प्रत्पर व्यक्तिको सामना कर पपने अनुमार शयर कासमा,पौर ऐति हासिक तप तो सवग्यतापूर्वक परमार्पोरे अनुसार विकसित होते ही पाएंगे। निस प्रहार किसी सिम्मती संगीतमापटिपता पीर ममुरता में प्रत्यक सर का योग होगा। उमी प्रकार प्रावक पर्म का पाप सम्पूर्ण की धमृति में हाया है। १ एरिम राम गोवा' प्रभम ग्राप () १४८ पूर्व और परिचम प्राव के समटकाम में प्रापश्पक ईलि समस्त विश्व की प्राप्यारिमा पापिठया प्रापस में मिस बार्य प्रौर महान पामिक परम्पराएं अपनी स्पगत भिवाों को भूनकर अपनी प्राधारभूत एकता समझ और उसीमे मौविर पूर्वनिरषयवारका शिराम करन की पनि ग्रहण करें। पिस धर्म कीम्परेसा यहाँ प्रस्तुत हैरह वैमानिए प्रयोगसिर पौरमानवतामारीमर्म है। इसीसे मानव और उसकी मारमा का पूर्ण विकाम हो सकता है। मानव के प्रति मानव की अमानवीयता रहकरमा मौन नहीं ऐगा। सिाई धर्मानुयायी धर्मशास्त्रीय विरोषों में उममार प मए मोर सामाजिक समस्यापों से उनका प्यान हट गया इसी कारण स्माम मे मोर्गों को पापित किया। पुनः, पर्म की प्रपर-सोसारिक और प्रतिक्रियावादी प्रवृत्तियों की मर्ममा के कारण साम्पबार पार पारपंच-मसच्ने पर्मात्मा पार पा रही सामा- सिधार माननीय शान्ति के साथ सामयस्य स्थापित परके मामयताकी प्रेप्टवर व पूर्णर पीरन की पाकामा प्ररर्पक बनेंगे। ईमा परा पारम है एकनमानसमाति का प्रपम उपम पुरप । ग्यों-ज्यों पृष्मी पर प्राप्यात्मिक राम्प का प्रसार होगा पापया ईसा प्रकृति और पतिप्रति में ऐपय स्थापित कर सगे--विस प्रकार रा ऐपय पायपिधारों प्रौर पन्तु-प्राति में स्थापित होता है-पौर रसमे भी प्रापेापापि जिस प्रकार विशेष पीपन अपम मे निम्मतर ऐगिक जीवन दरो पार कर पाता है। एक सिरीम प्यपस्था अनुमार सय रो पौर अपने संसार को पुनर्मिमित करने पामान पीप प्रसन्म उसकी पसममवापों को महानता और विधिप्यता प्रदान करता है। ईसाइया की पागा है पाप्यास्मिक पस्तित की एकमा माति का मुगन चिसके प्रपम सरम्पपईमा तपा प्राय सम्त ! रे पृषीपर सत्य के प्रमुपाई पाप्यात्मिक परापनार करनेवापे पिरीय उपारण । मृगन की प्रक्रिया पर भी पारी है। यह नमाजमही हो गई ममाजिरी गह पर है।' ५ मिजप हम माईगौम मनालापानी नये युगस में पानी तेरना है पारमाणे मी इमरान है मा प्रावास म पर भोर की हिरण पप्पी को मातीर होला हमसायानबा रहते एक मंसार मही "पारदम माना १ बोममिक्स 1 .बिरस मागत और राम मामाकोपपत होनेरोपियो। 2 पूर्व प्रौर पश्चिम IYE के गम प्रौर भाग्य की समान मारणा प्रपमानी है। विभिन्न राष्ट्रों को मामा गाति के सदस्यों के रूप में पकाइयों के समान नही बलि सम्पता को विक सित करने के प्रयास में संसान मित्र-मागीरों के समाम रहना पाहिए । शक्ति सामी पटकमसार की सहायतारेया पार सारेमानव स्वाराष्ट्राने मिसम्यापी संघटन के सदस्य हपि । यदि हम गैरगिम्मपारपक्तियों के निराम पौर पर वर प्रणम्पनीय पति-जोतों के पतरे से पप गए तो हम सभी जातियों को एकत्र करके एक चार, विधाम सहयोगी समारी मापना कर सकेंगे। हम समझ ने कि सम्पता के रिकास में पिसी मावि मा पाति-समूह का एकाधिकार नही रहा है। हम सभी राष्ट्रों की उपसम्भिों को मान्यतायेगे उनके लिए प्रसन्न होने पौर सप्रकार सापमोम बापुत्ल यो प्रोत्साहन मिलेगा। मिसेप म्प से पामिक माममों में तो हमें दूसरेवों पौर मुर्षों के मनीपियों के महत्वपूर्ण योगदान को तो प्रणाम समझना चाहिए। पुरकी अनुपस्थिति ही शान्ति मही है यह एक मुदर बन्दुल-भावना का विकास है, पम्म मोर्गों के विचारों और मूपों को ईमानदारी से समममे का प्रयास है। मानव पान्तरिषदीपन की महत्ता कामान बावा तो मौतिक सूमो के अन्तर मारय कम हो पाता है। हमें पूर्व भार पश्चिम के भतिसमीपी संसर्प की ही नही प्रतिसमीपी ऐप की विचारों के मिसन की मारनामों के सयोम की पाब (यस्ता है। मानरतामा उद्भव एक मोत स है यहाँ से इसके मने पाकार हो गये है। प्रया टूटे हुए को जोड़ने के मिए प्रयलशीत है। पूर्व पार पश्चिम का प्रमगार समाप्त हो पाना दुनिया का एक दुनिया का इतिहास प्रारम्म हो मया है। भाषा है कि महाविदास प्यापक बहुरंगी और पुर्सभनयुक्त होगा। सबकीनी मूरण पतिमपर रिमामा और पनि मेला में किन सीमारे बारे मनोरा देने मुमुपरस्र बीबगामा मुस्कान थी। भरब मा मात्रा दुरिमा पनी बोये हो गई। कि हममें मौदान दियार सब सच मान । मारे संधर मेमसामो और सनत्या सोव नामोसमय। –पनि किनर रमाब' सन और नि परिशिष्ट भारत में विज्ञान विमान का सामान्य प्रर्य समा बाता पश्चिमी रिशान' मिसने पनेक महमुत मारिपारा और मिॉनधिस पत्रों को बम्म रिजिन्तु पापार भूत मानिक सिम्त पौर वसनीक प्राचीन काल में मी मौष पौर विज्ञान विकास में पूर का महत्वपूर्ण योग है । सम्मुतारी समेर सिपि पूर्व से मिनी है। उदाहरवत वर्षमाना का पारिपार मीरिया पौर फिलिस्तीन (पात् पूर्व) में हमा पा पार बही म ग पूनान पोर पदरिया हार रोम पार पश्चिमी ससार म पहुंची। भारत भारभिम विमान दीपो प्रमुत पाराए स-पाम.गवित पार पगोन प्या प्रितीप, मोपप पिलान । पापस्तमात 'सम्तमूर' में पाश्पागोरस के प्रमेवी तपाई पम्प विशिष्ट प्रमों का सामाम्प पिपरण है। 'सम्बर राप्रपयन पाइपागोरस के बाद के मपम यहपा पा किन्तु उस पिपिए गूग निरप ही पूनानी नही भारतीय है। प्राचीन प्रयामसिर पीय पारिपार निमो पापार पर बाद में स्पामितीय प्रमेयबने या प्रमेयमापार पर विमसिन विपिन विप्रयाग, महसना स्पष्ट नहीं है। मैं इतना कहना है कायम सारे पहा पित मम्पुिर्षों बीमापूर्ण पोलिम्पिको है। 'प्राधिक प्रका महापापानिमार सपा प्रस्य । सिए मरेत हिस-योगदान ।। गपागप में हमारे पास पाच गिगम्त माया पगिष्ट्र मूर्प पीमिप पौर गेम । पन्निम में मापा पूनानी प्रभाव स्पष्ट है । परम्परा पर पी है--पार्यभट (पानी पनापी ईमपी) गहमिहिर (पनी पताम्बी) पस ..पर पर गुराग मारगरपोच (16) । पर वार, हिम्मा पापमान मेरम म# ART है। नानी और मनमा गुमना बरले ने LEAR: 4 निमोसिन, मानापन परमाल र मी नमारे साराको पाम मम ममामा सामे मामा मामाचरिया गपना भाभी की मर मे RACER -तिर पर (१९४३) पर।

भारत में विधान सुप्त (बो मार सातमी पनाम्बा) महाबीर (ममी पताम्दी) पीपर (समी घवामी) माससर (बारहमी प्रवामी)। पोपपरिमान का राय बहुत पहले हुमा । मुटके युग में मात्रय वमतिमा में प्रप्यापक प पौर स्नस प्रपदास्त ममम समकालीन मुपत मापी (पपया बनारस) में पिसायाबारे विज्ञानिया में मस्यचिकित्सा पर पोर रिया- मसमाप म प्रोत उतरमे पापारकर बच्चा 40 करम मूत्राशय की पपरी मातियाबिनमी पस्पपिपिसाए प्रचमित हुई। एस्पतिया १२१ मिन पौठारों पावन मिलता है । मरिया पौर मन्चरों मा सम्बन्ध मानूम पिया वा एका पापौर मनुमहरामियों के मूष में पर्करा को उपस्थिति मानूम पी। कश्मीर में पममे पार कनिक समय में जीवित (१२ -११२ ईसी) परम ने प्राय एकमिप्य पग्निपरे प्राचार पर एकमोरपना कीमाभद्र (पिता पौर पुर) मा मापारम्प रस मत्र के पम्य म्पस्ति। रिस्ती का सौह-मुम मगमग ४ सनी में बहा दिया गया पा। इसकी कमाई २२ फूट मे परिकामा मापार काम्यास १६४चयो कम होते होव १२.४हो पाता है। यह पिपुर मोर्वा ममानेबामे माहे का बना है। से ये से मना सके ? सुस्तामांग कीर की मूर्ति विनर डाग की रो परतो से पनी मोफुट चौर एक टन भारी एक प्रबर्माग पर मही गई है। ये रंगीनियरियो कोमम के पापपर्यजनक नमूने है। मसन पाफरम का विकास पीक पारप से पहमे हुपा पा । यारस ने देर्यो की पुतत्तिविषयक टीका निममत' मिमी । मह पामिनिनाम में पहमे ... ७ •ईसापूर्व के भासपास की है। भाषाविमान पोर मारन में पापिनि का माम सोपरि है। ये पठनी सी ईसापूर्व के उत्तरार्ध में हुए थे । पामिनि ने मास्क पौर धोनरको अपना पान माना है। उनकी 'प्रप्टापायी' एक कामीन भाषाविज्ञानी विकास का पीविन्दु है। पाणिनि म नियों को ससीकार पार अपनाकाम्पल किया है। उनकी प्राप्यायी में मममम ४. मूत्रविम एक सेवा प्रास्मात् इनका भाविकार करणे सर्गेपर मारनहीं सकता पाया सवामियों की विपौर पाणिनि परम्परागत प्यार को अन्तिम संस्कार प्ररान परमवारी यादरमधे पार उनकी गति में अनेक प्रमों के नाम है। अपनी मुरता मार विस्तार के कारण ही अपने प्रपयो म प्राग बा ममे । पतंगमि के भनुसार, पापिनिकी निममी प्रा सम्पारित एक महान पवहाम्यापन में पानी टिप्पणियों कात्तिाचप्रपयन पाणिनि के सूत्रों १ पाविनर बन समिरिता ३५२२२ । भक्ति मानिन म मम पूर्ष मार परिसर देगेनीशिया" पिन ५.५.१.... ईसाई धर्म १६ १५-10 ७६४२-१.७ ११२ ११० १२. १२३-१२४ १२७ एपोसांगिस्ट्स ९२ एपीक्यूरस १४ एपीफैनिमस ६५ एप एम.फिर ७ एम.रिणी १२ एम स्किनर, ११ एमीगेनीर ५० ५५.१५, १४ एरिस्टोफेस १४ एमिवार २ एम्यूधिनियाई एस्पारमक धर्म १६ ७२० एस.ए.म. एस. जी. ए.नm एस. सीमाम १..१४ एमाामस" एपेस १२६ ईसाई धर्मपुर १८-१०१ १४४ ईसामसीह १.-११० ११॥ or u-t..११११४२, माई पिपामरी १२६-१२४ स्टिटिया कम्पनी वाविपद् २. २१ २२.२४ २५.२० २६ १८५,१.११७८ ऐटम रिमा १२५ ऐमारम ११३ मो.म्पप १० पोमियरमामयेस १२१,१४१ पौगोगियान्ति १२१ ए पार पासेम.. ए.एस.पारिना छ पााहर १२ एकहाई ५१.२ प्रथम १.. पांवटपर्ष बिपटी-1.१२१ पापान ११. पारिम बम आप एम.पाररिम " पप बीपुर १५० पप निक पंगार, १७ १ अपर २१ २२,४३ पमित ११ मगीर 11 पम्बोडिया मालागाण.

मनुत्रमणिका पम्पपूधिपम १३,२६३५-४१ १२१ प्रेगरी महान १.६ मेटे १४. १४२ पेमगर १० मंडी १.० मैपीमियो १.० १.८ १३९ काष्ट ११५-११० पापानिम ११८ काम मार्म ११-१२१ १२३ १२१ १२८ पार्सलम १५ १६ पॉना वृतीय १५ कारणान,०५१४१.१२ कॉमगिया १ पिन १२१५१२१ पुस्तुमतुमिपा १.११॥ मुम्नुमनुनिया साप्राम्प १४ १.९० पार्मा गाबिन १.६ पार्म रियर ऐंगर १० ॥ पाम बिर्या १२५ पास्म मेम १०१ बीन १ ९११-१२.४४ १०७ १२१-१२४ १२१ बुपास्म, ४२ न्य ॥ जयारिस्य १२२ वहांगीर ॥ संबभिकर्ष ३६,४२.१४१८-१ १२६ १२७ १०-१४८ कोरेनियम १८ बोरिया ११२ भोपबर, ११२ गरमट ११८ कारिता ११४ कृष्ण ७८ जर्मनी १२८ १२-१३१ अस्टिन ०५ परक्सर २२ परपूस्त १३ ७६१ बापान .११२३ १२५ बाबा १ जॉममिम १.१७ जॉन मागास्टोम (सन्त) बॉमरप्टिस्ट ७१८. जॉन पर्षी १.१ बॉन मापसे (सर) ५१ बॉन मार्मन (सर) १८ २. गानमारपिमा १.५ ४ पातो ? प्पाना ना ११२ ११९ गिबन ११. पिपरीम,१४ पूर्व और पश्चिम पौन इस ११ गार्च मेंटेत ११ पी. एम. देवेतमन ११ जी. रेरो १.१ गवार ७.-१४-5 ५७ १२,१५५ १४१ पूनियन ७० जे.ए. स्टीवर्ट ६४ गयनीसियस (रागत) १० रायसीधिमन मेरियस ४७ गिरामती ११. तीनार १४२ पी एच. मिमर-बारों ६१. सीमापस १० गन मैम्पूर ११४ रेमोनारस १४ मास्वनीर" रेषित तिषिमटम १२४ पिर हार्ट मी ११५ बर्नेट . पेफर्मग १३ पेनो ६५ पर महार्ट १४ जोपापा हिताय (सपाट) " जोसेफप्रीम्से ११ गोमेफ सिस्टर ११. पोमेन १९७०-७१० ताप्रोबार -२ तासो १.४ तिम्मत ११ तीरयो १.४ तुकाराम " तुमतीपारा॥ तु १-१ . मुकिस्तान १ शामोपा.१. टारदेरिपत कर टामर,१२ रामेमी फिलाडेसम्म ७ टोमम विवनात १.२ सोमम स्प्रट १.७ टी पर. हमने १५ गिटन ४ थियोडोमिपस ०५ वियोमरस ० पियोमोफिटम घोनापटी ५ परापूरीर . पेम्म १ १२४ पुमीगरदन १५४ पानवसरमती १ सम्म मोरम १८ १.२ रामपिन ११ सभ्यू जीपा ५॥ सापनीमिपाई धर्म १९५८६. रारागिमोह,

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१५० पूर्व पीर परिचम बम ११८ माम्मर १११ बर्देष रमम ६४ पर मामथ -१ बर्मा १ समुप्त १५०-१५१ पारपरापाः १.६ बाम पमापर विमा ४१ पालम धर्म २५१ २-18 दाग्मिती १०४ विष्णुसार, पी.दीभित १२ (04. २०६७ १२५ पोमोनिया १ ९९२६ मकमिया ५५१५ मनी ४७ ममय प्रायद्वीप " महात्मा गांधी ३.४५ महावीर २९ १११ माइकल फैरो १.६ मारेमा पेतो १.४ मापी (दुरिमाम मक्ति) ७८ मातृमत २९-३. मापा २ मापकर,११ मानीकीपार माम्पस १.8 माम पारेसियस व माटिम भूमर १.५ मानीपूत ११४ मिपार २२ ६५०७६-७७ मिप १५ १९४७१.१११२१. १७५८०.७२००९) १५.११ मिरो (मोट) " मुहम्मद ५१.१ मेगाम्बनीर ० मंपारिस ११० मैनाम्दा प्रपदा मिमिन्द(प्रा) 10 मेमोगरामिया ... मेरगिन विपपिपानम । मैगाम मैरिमारती १.१.. मोहनगरपो १०,१८२० रमन प.पेम १ मोरया १२ रोगपुर, १० ३१ मोहा १० परएगीता ..१ मनहरि ११२ गरण ११०१८२. २११ २४३.४.४५ ०८९७१. १४.-११२ भारतीय पट्रीय बाजेद ॥

अनुभमणिका मोरम, ४५ रिताओं १२६ मौर्य ५५ रिपर प्रथम १ मंगोस ४७ रीस्ट (गैर) ४१ समी ४ मस्तमम स १२१ १२७-१२८ ११.११२ परी , ४७ ४८ ५.११- प्सी प्रान्ति १२८ रेमो १२५ यात ११ मुस्मिर ७ रेम दमात ११२ ११५ पूनान १५ १० १५ ४-६८ ७२, रोम ० ५ १ १८१८०१ ०४-७६१ १२५ १.३ ७४-७७८. ११,१२१ १२६ १२७ १२९ १.५ १२० १२७११८ १४. १११ १५८ १४.११. पूनानी परम्परावादी वर्ष १५.१८- रोमक १. १११.११४१२५ पूरिपिरी १७ ॥ मामोस्मे १८१८ मेवियस " मान्न १. पोप्रामकेपसर १.६ माप्मास १.८११८ योग २ मामा ११८ मौष ११४ १११ रवीनानापाप.. माजिकम पॉरिटिपिरम २४ मिनाइयस ६० ११८ रामाग४४१ सियोनारोंरा विधी १४ रामबास ॥ लियो प्रथम ११ रामानम् ॥ मिसिनियम ७ रामानुग १२ मीभिर ४२.११४ १२५ राममोहन राय सुई नवम १ रोगरफल १८ १२.१११ ११२ पास्यु, ११. मुगनिम मिटोस्टीन १४२ राबर्टकोप ११ मुई सप्तम १ प्रास्टेटे ११२ मेनिम १२६ १२८ रोमन सोमायरी १. १०८ ११ मवाइसिये ११ है पूर्व और परिचम देस्ती स्टीग्रेन ॥ सोगिकम पारिटिपिरम २४ सूटिवस १.. संकर, १२ पर्ववर्मन १२२ पर्सग ११० पास्तिदेव १० बभिम ७४ साहहाँ ५ पाहिद १५ पिया ३४ पसिष्ठ १५ सिप २ पारमह १११ प्रौनक १११ वामन ११२ भी प्ररविना पाठेपर १४१११,१२११ भीष,१२१ वितरैट. बिमियम (मोषम के) १२ सम्पनी ॥ रिमिपम पोम्स (सर) ४८ समान ११ विनियमप्पिन १४५ बम ३२ विनियम माँ १४ १४१ संयुक्तराम्प पमरीका ११११११० विल्हेम बुट ११ संयुक्त राष्ट्रसच १५० रिपरेषताबारी १.८ समापस विषपुर (प्रथम) १२९ साइमोनारस ४ विसापुर (हिनीस) १२४ १३ -११ सारस ११४५ सारी ॥ विष्ण, १४ साम्पबार १,१११-१२. १२१- विस्टम चपिम (मर) १२२ १५॥ १५१४८ विमान १.११. ११८-१९६ नियर महान १५-१६०१ १२२.१०५५-३॥ ११८- मिामरिया (७७२७३६ ११ १४. १५.-१५२ मिपुभम्पता १७ १८२५ भी गोमाग १६११४१ मिमनोरमा ११५-११४ १३९ मौरिया १७.७२.०७. मिग १. पैमामियम ...१५ सो योग २ अम्माँ (विना) . मुम्न ०११-१२ परमम्पना २१-२६ ८.२९५ मुम्नी।"

भनुगमपिता मुमैमान २ मामापटी मार जीमम १.६ १२५ मुसुन १११ मोमापटी प्रॉऊ फेदम १७ मूफीवार ३३ म्टामिन १२ पूर्व १५. Pारपे.. भूमो १२ म्टीगेन मीम मैग्नापर,११० ४८ मेस्पूरम, ७ में प्रवानासियस ८. १ मेंट मन्मेन्म १.११४७ मट प्रमोर (४१ वर स्पॅम, ११. टप्रोगसीन १८४ ०१२ हाय रेषी १.१ हम्मरखी ॥ सेंटरेमॉस ८.१२ सेंट एटनी कर हगरी ११ मॅट मनोमट, ८५,६१२.१५ हाशोजन बम ११ १११ मर प्रेपरी ०१ हापित ३३ मेंट प्रगरी (भ्यासाक) ५ हाम (गर) १९ मटान ३७१५ हाडी (प्रोमर) १२९ मटण हारी , मटटोपस हिन पर्म १९ २० २५ २६ २१ सेंटटोमस एषिमास, Y कम १० १२५.७१-७२. १.२.१.३ BE-०६१. १२२ १२२.१४ सेंटोसा m ११.-१५२ मेंटरेनिस ६२ हिपास १० मेंट पास ५.१२,७६4150 हिमानम १७-१८ E८१४११६ हिसिपोर १. मॉपर,५२ हीरोम 11-10१२२१२६ १२६, मट मिमरवियर, १६, १२३ संरब (मयरमा के) १८१.१ मग ०१.१ हेमाटम १२ सोमोपनी १४ हैरास (प्रार) १९ मोमोग १ हेरोडोटस २ १८६

पूर्व पोर पश्चिम
होमा ३६
म.म ११४-११५.११७
हेरोष ७८
हस्बेटियस ११५
होनेन .
होम,२१४१ ५४ ५४ १.५
बिपिटक १२५
६४
०००

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Purve Our Paschim

Author
Dr.radha Krashan
Title
Purve Our Paschim
File name
Purve Our Paschim
Text
OCR done
Citation
1962
Published
2010/12
Publisher
Delhi,rajpal And Sanj
Language
Sanskrit
Pages
166
Library
Bhartiya Vidya Mandir Shoudh Pratisthan,bikaner
Classification
Science
DLI number
514599
Barcode
4990010022241.00
Scanning centre
C-DAK, Kolkata
Digital publisher
Digital Library Of India
VMLT id
Gl5LwRMqZ2r
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