Agarchand Bhairondan Sethiya Jain Parmarthik Sanstha, Bikaner
Kile Ki Rani
Front matter
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'रेना" अन्य माला-स..
किले
की रानी
अनुवादक
वा० गंगाप्रसाद गुप्त,
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SCERVEERRAHEERERECERECE
ना" अन्य माला-सख्या :
किले की रानी
---
रेना साक्ष्य के "दि या फिशरमैन"
मामय उपन्यास का भाषानुपाद
अनुवादक-चा. गंगा प्रसाद गुप्त
दुर्गा प्रसाद खत्री
प्रोप्राइटर लहरी बुकडिपो-फाशी
द्वारा प्रकाशित
--
(इस गन्थ का दुरु अधिकार प्रकाशक को है)
तृतीय वार]
१६२५ [मूल्य--1)
awasaiNBADHANAawani
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-
॥ श्रीः॥
किले की रानी
पहिला बयान
एक झील के चारों तरफ वे छोटी छोटी पहाडिया चली
गई हैं जिनके भद्दे पन क छिपाने के लिये कहीं कही प्रकृति ने
हरी हरी घास लगा दी है, लेकिन कोई कोई ऐसी पहाडिया
भी हैं जो विल्कुल ही सूती हैं और जिन पर हरियाली का
फहीं नाम भी नहीं है। यह पहाडी सिलसिलाकहीं कहीं इतना
ऊंचा हो गया है कि उसकी पथरीली चोटियां हरियाली से
छिपी न रहने के कारण बहुत ही भद्दी लगती हैं, परन्नु पाहुन
सी ऐसी भी हैं जिन पर उगी हुई लम्बी लम्बी घास ठण्डी
उण्डी पहाटी हया के थपेटों से हरदम लहलहाती हुई बहुत
मनोहर मालूम होती है।
झील के पश्चिमी किनारे पर पहाडिया बहुत ऊची हो
गई हैं, लेकिन पूरवी किनारे पर यह बात नहीं है अर्थात्
किले की रानी पहाडी सिलसिला ढालू होते होते इतना नीचा हो गया है कि रारपट मैदान के विल्कुल बरार पहुँच गया है। यहां पर एक छोटा सा गांव या जिसमें मछली वाले रहा करते थे। उन मछली वालों को भर पेट अन्न मिल जाता था क्योंकि झील में मछलियां बहुत मे जिनको वे बरोडल नामक एक कसवे में जो उनके गाय से करीब चार मील की दूरी पर था, ले जा कर अच्छी तरह बेच रकते थे। जिस भील का जित हम अपने पाठकों से कह रहे है उसका नाम डेलामीन था । यह तीन मील लम्बी और करीन एक मील चौडी होगी। मछली बालों के कनवे के सामने अर्थात् झील के पश्चिमी किनारे पर जिधर पहाडों की चो- टियां सूर्य ही ऊंची हो कर झील की हदवन्दी कर रही हैं सव से ऊची चोटी पर एक इमारत बनी हुई थी, जो बहुत खूब- सूरत तो नहीं लेकिन मजबूत सूव थी ।, यह इमारत, जिस -पहाडी पर बनी थी उसके नीचे का हिस्सा पानी के अन्दर तक चला गया था चल्कि अगर इमारत के पिछले हिस्से से कोई चीज दूसरी तरफ फैकी जाती तो वह आ कर अवश्य शील के अन्दर गिरती ।, इस इमारत या छोटे किले का यह हिस्सा जो झील की तरफ था अपनी पुरानी और टूटी फटी मूरत दिसा कर मानो कह रहा था कि किसी के दिन एक तरह नहीं बीतते लेकिन वह हिस्सा जो दूसरी तरफ था बहुत ही भता मालूम पड़ता था ! . T उपन्याप्त स इस इमारत का सदर दर्वाजा भी उसी दूसरी तरफ था जिधर पक सडक दूर तक पहाडी घाटियों में चकर पाती हुई। निकल गई थी। इस सड़क के दोनों तरफ दूर दूर तक की जमीन इली इमारत के मालिक की समझी जाती थी। फिले के पीछे कई डॉगि उस पहाडी के नीचे बंधी रहती थीं जिस पर यह किला बना हुआ था और उसी जगह से सीढियों का एक सिलसिला किले के अन्दरतक चला गया था ताकि अगर किसी को झील की सेर करने की इच्छा हो तो उन्हीं सीढियों से उतर कर डोंगी पर सवार हो जाय। झील के किनारे वाली पहाडियां अपने ऊपर उगी हुई सब्जी की हरियाली हरदम झील साफ पानी में देखा करती थीं सुबह के वक्त लम्बी लम्बी हरी हरी सब्ज घास का हवा के झोंके सा घर लहलहाना और उन पर से रात भर पड़ी हुई ओस की वू दो का टप टप टपकना पडा सुहावना मालूम पडता था। हम अपने पाठकों से यह भी कह देना जरूरी समझते हैं कि हमारी कहानी उस वक्त से शुरू हानी है जव दूसरा चार्स जिसको लोग 'मेरी मानर्क' अर्थात् ऐशरतन्द वादशाह कहा करते थे इगलण्ड का बादशाह था । सन् १६८२ ई० की बात है कि पक दिन शाम के वक फिले के उस तरफ के कमरे में जो झील की तरफ था, एक बहुत ही खूबसूरत लडकी खिडकी के पास बैठी इधर उधर- किले की रानी देख कर अपना जी बहला रही है। यह कमरा जिसमें यह सुन्दरी धैठी है एक बड़े आंगन से मिला हुआ है, जिसको पहाडी पौधों ने और भी सजा दिया है। कमरे के दर्वाजे खुले हुए हैं और बाहर आंगन में लगे हुए फूलदार पौधे दिखाई -- इस लडकी की उम्र १६ वर्ष से ज्यादा नहीं होगी। इसकी खूबसूरती और भोलेपन के बारे में बहुत बातें बनाना वेफायदे हैं, इतना ही कहना काफी होगा कि इसके खूशबूदार चमकीले बाल कुछ तो पीठ की तरफ विखरे हुए हैं और कुछ छाती के ऊपर से होते हुए पतली कमर तक चले गए हैं। इसकी बड़ी बडी चमकीली आसे मन को मोह लेने वाली हैं और अगरेजी पोशाक इसके सुडौल बदन पर बहुत ही भली लगती है। यह लड़की अपने कोमल हाथ का सहारा किये बैठी सव तरफ का दृश्य देख रही है। हम नहीं कह सकते कि यह चेप- ही से केवल पहाडियों और झील की शोभा ही देख रही है या इसकी निगाह किसी खास चीज को दूर तफ दृढती हुई चली जाती है और फिर अपना मतलव न पा कर नाउम्मीद र लौट आती है। यह इस समय अपने ध्यान में उसी तरह हवी हुई थी कि उसी कमरे के एक तरफ का दर्वाजा खुला और एक बुदडा आदमो अन्दर चला आया, लेकिन इसको खबर भी न हुई। बुढ्ढे की उम्न साठ वर्ष के लगभग होगी। उसका बदन देखने भ उपन्यास में कमजोर मालूम पड़ता था। हमें यह भी कह देना चाहिये कि इस आदमी का नाम "सर माइलिज कोर्टलेण्ड" था और यही इस किले का मालिक था तथा यह सोलह वर्ष की नौ- जवान खूबसूरत लड़की जिसका नाम फ्लोरा था इसकी इक- लौती बेटी थी, जिसके पैदा होने के कुछ ही दिनों के बाद उसकी प्यारी मां मर गई थी। लडकपन ही में मा मर जाने के कारण सूबसूरत फ्लोरा जानती ही न थी कि मा की मुहब्बत क्या चीज है, लेकिन कुशल यह था कि उसकी एक चाची थी जिसने उसको अपनी ही बेटी की तरह पाला था और बहुत प्यार करती थी, मगर वह बुढिया भी चार पांच वर्ष हुए इस दुनिया सेचल बसी थी । मरते वक्त भी उसने यही कहा कि "हाय ! मैं अपनी भतीजी की भरी जवानी न देख सकी।" यह तो हम पहिले ही कह चुके हैं कि जिस समय "सर माइलिज फोर्टलेण्ड" कमरे में दाखिल हुआ फ्लोरा को उसके आने की आहट भी नहीं मालूम हुई थी, यहां तक कि जय सर कोर्टलेण्ड ने आ कर फ्लोरा के कन्धे पर हाथ रख दिया तो खूबसुरत फ्लोरा यकायक चौंक पड़ी और बोली। फ्लोरा अहा ! पिता जी आय हैं ? ओहो ! में कैसी डर गई। सर को प्यारी बेटी! तुम इतनी सोष में क्यों डूबी
-
फिलेकी रानी
सर कोर्टलेण्ड ने यह वात बड़े प्यार से कही थी मगर
उसके बात करने के ढंग से मालूम होता था कि उसके वात
में वह सचो मुहम्मत नहीं है जो मां याप को अपनी सलान
के साथ होनी चाहिये । थोडी देर ठहर का वह फिर बोला-
सर को में नहीं समझ सकता कि यह कैसा ध्यान या
जिसमें तुम इतनी ही हुई थीं कि मैं कमरे में चला आया
और तुमको आहर भी नहीं मालूम हुई !!
फ्लोरा०। (रुक रुक कर) पिता जी! यया में मरने
ध्यान में . दूगी हुई
यह कहते कहते उनके चेहरे का रंग एकबारगी बदल
गया। जान पडता था कि उसका जो बहुत घबरा रहा है।
सर को० हा हो कहा तोह कि तुम अग्ने ध्यान में
डूबी हुई थी, लेकिन इसका सरर. सैर यह कोई ज्यादा
ताज्जुब की बात नहीं है।
फ्लोरा कुछ घवरा कर अपने बाप की तरफ गौर से देखने
लगी मगर उसकी यह घबराहट बहुत जल्द दूर हो गई ।
उसने अपने जी को सम्हाला ओरचुर हो गई।
सर फो० । तुम्हारी धनराहट भी ठीक ही है। कोई का
तक चुपचाप अकेले में बैठा रहे । यह सुनसान मकान जिसमें
मुद्दत के बाद कभी मेहमानों के मा जाने से चहल पहल हो
'जाया करती है यो फभी उन दोस्तों को मुलाकात से यों ही
सीरीनक हो जाती है जो बहुत दूर रहने के कारगजन्दी आ
+
।
उपन्यास
.
भी नहीं सकते हैं और फिर वस्ती से भी बहुत दूर एक पहाड
पर! वेशक ऐसी जगह तुम्हारे रहने के लायक नहीं है।
अगर तुम यह चाहती हो कि अपनी वरावर पालियों से मिले
जुलें तो उसका वन्दोवस्त यहा हो सकता है और यदि लदन
जाने को तुम्हारा जी चाहता हो तो कुछ दिनों के लिप वही
चली जाओ। वहां दरवारी औरतों से मेल मुलाकात पैदा
करना या जिससे तुम्हारा जी चाहे मिलना इससे तो अच्छा
होगा कि हर वक्त उदास रहती है।
फ्लोरा० । पिता जी 'आप मेरे मन का ठीक ठीक हाल न
जान सके, नहीं तो कभी ऐसा न कहते। दरवारी सुन्दरियों
की मुलाकात से मेरा जी नहीं वहल सकता, उनके साथ
दोस्ती करना मैं नहीं चाहती।
को। सैर इसमें कुछ हर्ज नहीं है। तुम्हें यहा बैठाये
रसने से मेरा यही मतल्य है कि अगर कोई अच्छे सान्दान
का लडको मिले तो उसके साथ तुम्हारी शादी करदू
हैं। तुम घवरा क्यों गई जान रक्सो यही चक है कि इस
काम के वास्ते तन मन और धन तीनों से कोशिश की जाय।
फ्लोरा।प्यारे पिता
यह कहते कहते फ्लोरा की आवाज रुक गई, रेपिन
उसने फिर अपनी तबीयत को सम्हाला गौर कहने लगी,
फ्लोरा०। यह आप क्या कहते हैं ? मुझ से चाहे जो
कसम ले लीजिये, मुझको इसका जरा भी ध्यान नहीं है।
किलेकी रानी
आह! आप के मुंह से ऐसी पाते ! मुझे बहुत दुख होता है।
क्या भाप यह चाहते हैं कि आपकी वोहने पाली बेटी याप
से अलग हो जाय?
कोर्टापेटी! यह तुम्हारा लड़कपन है। सोचो तोकि पाप
का धर्म है कि वह अपनी सन्तान को सुखी रक्खे और यह
उसके लिये सब से पहिली बात है कि वह अपनी लडभी के
लिये कोई लायक और होनहार.
फ्लोरा०। (जोर दे फर) लेकिन लड़की का भी धर्म है
कि वह अपने मां बाप का साथ दे चाहे वे कैसी ही हालत में
हो और फिर ऐसी अवस्था में जब कि लड़की के जुदा होने से
न उनकी कोई सेवा करने वाला ही रह जाय और न उनके
दुख से दुःखी होने घाला। कोई ऐसा भी न रहे जो वीमारी
में वक्त पर दवा दे और धोरज धरावे, फिर ऐसी हालत में
यह कैसे हो सकता है कि मैं आप से जुदा होऊ
सर कोर्टलेण्ड ने फ्लोरा के चेहरे को गौर की निगाह से
देखा ताकि उसके उतार चढ़ाव से दिल के भीतर का हाल
मालूम कर ले और तप धीरे से कहा-
को। लेकिन सुनो तोसही।मान लो तुम्हारी शादी किसी
ऐसे आदमी से हो जो यहा से थोही ही दूर पर रहता हो और
तुम कभी कमी यहाँ आ जाया करो तव तो कुछ हर्जन होगा?
फ्लोरा०। (धवरा फर) आप इस बात को जाने दीजिये,
कोई दूसरी धात कहिये।
उपन्यास कोर्ट नही, इस वक्त तो मै यही सलाह करने आया हूं। मैं तो बहुत दिनों से चाहता था कि कुछ कहूं लेकिन मौका न पा कर चुप हो रहा था कि शायद तुमको रज हो। फ्लोरा के चेहरे से फिर वही घबराहट घरसने लगी और उसका नाजुक दिल फिर धडकने लगा । वह ध्यान दे कर अपने बाप की बातें सुनने लगी। कोर्ट । प्यारी वेटी तुम जानती हो कि मैं बहुत कमजोर है और दिन पर दिन गिरता ही जाता हू.फिर तुम्हीं बताओ कि जिन्दगी का कौन ठिकाना ? आह ! उस वक्त को कौन बता सकता है जब हमेश के लिये मैं तुमसे जुदा होऊंगा । इस- लिये मैं चाहता ह कि इससे पहिले कि मैं इस दुनिया को छोड तुम्हारे आराम का वन्दोवस्त करता जाऊ । फ्लोरा ने अपने प्यारे बाप का हाथ अपने हाथ में लिया और भासू उसके गुलावी गालों पर दुलफ आये। कोर्ट । हैं हैं तुम रोती क्यों हो १ बस, अपने आसू पोछो मुझको दुस होता है। आदमी जरूर ही मरता है, एक न एक दिन सव ही मरेंगे लेकिन आह ! अगर मैं तुमको सुसी देस लेता तो मेरी आसू आराम से हमेश• के लिये बन्द हो जाती। (यकायक कुछ सोच कर ) हा, यही वक्त है कि छिपे भेद सोले जाय लेफ्नि गैर फ्लोरा०। ( आसू पोंछ कर बेचैनो के साथ) के फोन से भेद हैं?
,
।
किले की रानी
कोर्ट। तुम जानती हौ कि लोग मुझे बडा दौलतमन्द
समझते हैं, लेकिन अगर सच पूछो तो दौलतमन्द होना तो
दूर मैं तो इस लायक भी नहीं है कि ओसत् दर्जे के लोगों में
गिना जाऊ ।
फ्लोरा०। (ताज्जुब से) क्या आप इस किले और सब
जायदाद के मालिक नहीं हैं,
कोर्ट(सिटापिटा कर ) नही, मालिक तो मैं जरूर F
लेकिन
फ्लोरा० । थाह ! अब मैं समझी! शायद आपके कहने
का मतलब यह है कि जब आप न रहेंगे तो यह जायदाद
मुझको न मिलेगी मगर मुझे इसकी कुछ पर्वाह नहीं है। मेरे
पारे पिता! मैं गरीबी को ज्यादा पसन्द करती है लेकिन
कोर्ट। लेकिन क्या ?
फ्लोरा का नाजुक दिल धडकने लगा परन्तु उसने अपने
को बहुत सम्हाल कर धीरे से कहा-
फ्लोरा०। लेकिन यह कि मैं आगे के लिये अपना फायदा
न सोच कर व्याह करना या अपना हाथ किमी ऐसे आदमी
के हाथ में दे देना जो मुझको प्यारा न लगता हो नही
चाहती।
फ्लोरा कहने को तो कह गई लेकिन शर्म के मारे उसके
प्यारे फूल से गालो पर पसीना आ गया और वह चुप हो गई।
कोर्ट 01 यह कोई जरूरी बात नहीं है कि मेरे बाद यह
-
उपन्यास
जायदाद तुमको न मिले, परन्तु हा फर्ज का बोझ न होना
चाहिये।
पोराफिर आप मेरे वास्ते इतना क्यों हैरान होते
हैं? आपकी ऐसी इच्छा क्यों होती है कि चाहे जो कुछ हो
मेरा ब्याह जल्द हो जाय?
कोर्ट । तो तुम चाहती हो कि मैं साफ साफ खोल कर
कह दू ? अच्छा सुनो, पिना कहे फाम भी नहीं चल सकता।
तुम जानती
कि मैं वादशाह चाल्र्स ( पहिला) पा वडा
खैरसाह था, इसलिये उसकी तरफ से लडाई के समय मैंने
फौज की तैयारी में अपना सब धन खर्च कर डाला । जब
चादशाह हार गया और मारा गया तो मुझको भी वहा से
भागना पड़ा, उस समय कौन ऐसा था जो मेरी मदद करता?
लेकिन नहीं, एक आदमी ने मुझ पर रहम खाया और मैं भूनों
मरने से बच गया।
फ्लोरा० शायद आप उस युड्ढे की बात कहते हैं जिसका
नाम मास्टर टिलबर्न था और जिसके मरने की खबर उस
दिन आई थी ? उसका एक लडका भी तो है, जिसका नाम
रे मी टिलबर्न है । मैं कुछ बुरे विचार से नहीं कहती, परन्तु
मुझको उन बाप बेटों की चाल अच्छी नहीं लगती ओर खाल
कर ट्रेसी घडा दुष्ट है।
फोट०। (कुछ गुस्से में आ कर) चुप रहो फ्लोरा, चुप
रहो ! तुम उस आदमी की घुराई करती हो जो बहुत ही
.
किले की रानी
१२
भोला और सीधा है।
फ्लोरा०। मैने कोई झूठी बात नहीं कही और आप ही के
सामने उसकी निन्दा की, नहीं यों तो जब कभी वह यहां
आता है मैं उससे इज्जत का बर्ताव करती हू।
कोर्ट । यह तो मैं जानता हूँ कि तुम्हारा स्वभाव बहुत
ही सीधा है और तुम मेरी इच्छा के विरुद्ध कोई काम नहीं
करती, परन्तु हा,
मैं
क्या कह रहा था?
फ्लोराही बादशाह के मारे जाने पर अपने भागने
काहाला
कोर्ट। हां, ठीक कहा, तो मैंने उससे रुपये उधार लिये।
तब से आमदनी एक कौडी की नहीं हुई, लेकिन खर्चा बरावर
होता रहा, इसी से मैं उसका रुपया दे नहीं सका । सूद बरा-
बर चढता गया और अब वह इतना हो गया है कि मैं दे नहीं
सकता, फिर तुम्ही सोचो कि उसका लडफा जब चाहेगा
यह सब जायदाद ले लेगा।
फ्लोरा० । क्या उसका लडका रुपये मांग रहा है ?
कोर्ट। (फ्लोरो के चेहरे की तरफ गौर से देख कर जैसे
कोई कुछ पूछना चाहता है) नहीं, उसने मुझ को कुछ भरोसा
दिलाया है। वह बडे पान्दान का लडका है
फ्लोरा०। (नाज्जुब से) क्या मामूली महाजन का
लरका बडे सान्दान का ? यह भाप क्या कहते हैं!
कोर्ट। कैसी बातें करती हो। यह वह समय है कि वस
उपन्यास
+
-
'रुपया ही पड़ा खान्दान है। जिसके पास धन नहीं है उसको
कोई नहीं पूछता । देखो टेमी टिलवर्न जब यहा भावे नो तुम
उसके साथ इजत का वर्ताव करना, बल्कि हां तो सुना
तुमने लेकिन सैर, मुझको ज्यादा कहने की क्या जरूरत
है, तुम आप ही समझ गई होगी।
फ्लोरा। पिता जी!!
यह एक चीख थी जो उसके मुह से निकल गई । उसको
तरह तरह की बातें सूझने लगी, लेकिन शाम की अन्धियारी
के कारण उसके चेहरे का रङ्ग उसका वाप न देख सका ।
कोर्टहै। झील में यह रोशनी कैनी हो रही है!!
फ्लोरा क्या ! रोशनी?
फोर्ट हा हा यह देखो सामने।
फ्लोरा उस तरफ देख कर बोली, "हा ठीक तो है । यह
रोशनी कैसी.
कोर्ट । अहा, अब मैं समझ गया ।
फ्लारापया ? पिताजी ! आप क्या समके ? मुझसे
भी कहिये।
कोर्ट । कुछ नहीं, यही कहता था कि यह रोशनी मेंने
"पहिले मी कई दफे देखी है. इससे कह सकता कि इस
समय कुछ घोसा नहीं हुआ।
फ्लोरा आग्पिर यह है क्या ? (चौफ फर) मरे! यह
तो बुझ गई।
किले की रानी
कोर्ट। मैंने इस रोशनी को कई गर देखा है, लेकिन रात
का वक्त होने के सवव से मैं कुछ न जान सका कि यह क्या
है। मैं समझता कि शायद कोई धीमर होगा लेकिन आ
श्चर्य है। मछली पकरने के वास्ते रोशनी की क्या जरूरत थी
परन्तु हा, एक बात मेरे व्यान में आती है, वह यह कि शायद
वह सन्दूक' लेकिन उसके निकाने की कोशिश बेफायदे है।
जव बहुत खोजने पर भी मुझको नहीं मिला तो भला किसी
और कोण्या मिलेगा।
फ्लोरा० यह कैसा सन्दूक था पिता जी ! मैं ने आपसे कई
चार पूछा, परन्तु आप ने कुछ साफ साफ महीं बताया ?
मि० को० । (लम्बी सास ले कर) सुनो, कर्नल ब्लण्डफोर्ड
मेरा चचेरा भाई था । हम दोनों में बचपन से बडी दोस्ती थी।
जय वडे हुए तब भी हम दोनों फौज में साथ ही रहे। बादशाह
पहिले चार्ल्स के मारे जाने पर वह भी हमारे साथ मांग कर
यहा आया । एक दिन यह बहुत बीमार हो गया और उसके
चचने की कोई उम्मीद न रही तो उसने अपनी प्यारी स्त्री को
जिसके साथ व्याह किये चार ही वर्ण बीते थे छाती से लगा
लिया और अपने दो वर्ष की उम्र के छोटे बच्चे आर्यन का मुंह
चूम कर कहने लगा, "हे ईश्वर ! तू ही इनका मालिक है, मैं
तेरी ही हिफाजत में इनको छोड कर जाता ह।" वह इतना
भी नहीं कहने पाया था कि उसका गला बैठ गया, लेकिन
वह थोडी देर दम लेकर ठहर टहर कर अपनी स्त्री से कहने
उपन्यास
लगा, "में तो मरताह कुछ ही मिनट की कसर है
जो मैं कहता उस पर अमल
करो झील के
पास पार चलत के सब से ऊचे पेड के नीचे
एक सन्दूक
उसमें दस हजार अशर्फिा
हैं पोला नहीं जाता
" यस यह इससे ज्यादे
कुछ न कह सका और मर गया।
फ्लोरा हाय ! वेधारी जवान स्त्री और छोटे यच्चे का
क्या हाल हुआ होगा। लेकिन उसने अशर्फिया कहा पाई थीं?
मि० को० । गाव में एक यहुत ही सुद्धा आदमी रहता था।
मण्डफोर्ड उसके पास बहुत जाया करता था । मेरी समझ
में यह अशर्फियो से भरा सन्दूक उसी बुड्ढे ने लण्डफोर्ड
को दिया होगा मगर न मालूम उसने उसको बहा क्यों
छिरा रक्खा था।
फ्लोरा। उसके मरने के बाद उसकी स्त्री ने क्या किया?
मि० फो । मेरी मदद से फरर खेद कर अपने पति की
लाश गाडने के बाद यह रात के वक्त मय अपने छोटे बच्चे के
डोगी पर चट फर सन्दूक निकालने के लिये झील के दूसरे
किनारे की तरफ चली। उस वक्त में उसके साथ या । सच.
मुच पेड के नीचे सोदने पर हमलोगों को एक भारी सन्दूक
मिला । मन्दूक को लेकर हम सब इस किले की तरफ लौटे,
लेकिन यकायक यह डॉगी किसी चीज से टकरा कर उलट
गई और हम सत्र पानी में गोते खाने लगे। घडी सकलीफ
.
T
किले की रानी
से इवता उतराता हुआ किसी तरह मैं तो फिनारेमा लगा
लेकिन अफसोस ' कर्नल फी जवान और खूबसरत जोरू और
उसके छोटे बच्चे तथा मशर्फियों से भरे सन्दूक का फहीं
पता न लगा । उसी चक झील में जाल डलवाये पर कुछ
काम न निकला।
फ्लोरा को यह सुन कर बहुत दुख हुआ। अभी तक तो
अन्धियारी ने झील और पहाडी के दृश्य को छिपा रक्खा था,
लेकिन यकायक निकल पाने वाले चांद की रुपहली चांदनी
ने अब चारों तरफ रोशनी कर दी। भद्दी चीजें भी इस सुहा-
वनी रात में अच्छी लगने लगी। झील पर जो चाद फा अक्स
पडा तो कुछ अजब रड दिखाई देने लगा। पानी की हलकी
लहरें जो हवा के कारण लहरा रही यी चाद की रोशनी पड़ने
से जगमगाने लगी। मिष्टर कोर्टलैण्ड और फ्लोरा ने जो
आख उठा कर देखा तो झील में डॉगी पर एक आदमी सडा
दिखाई दिया। चांद की उजियाली में दोनों ने उसकी सूरत
भी अच्छी तरह देख ली। वह एक खूबसूरत और नौजवान
आदमी था। मिष्टर कोर्टलेण्ड ने उसको पहिचान कर कहा,
कोर्ट । माह ! यह तो वही धीमर है जो बहुत दिनों से
मछली वालों के गांव में रहता है। क्या यही उस सन्दूक को
निकालना चाहता है ? लेकिन यह उसका हाल क्या जाने ।
फ्लोरा०। आपने क्या कहा
फोर्ट । कुछ नहीं। यह देखो वह हमलोगों को सलाम,
?
उपन्यास
फर रही है।
नौजवान धीमर ने अपनी टोपी सिर से उठाई और सलाम
कर भपनी डोंगी का मुह फेर कर ले चला। इतने में नौकर
ने आ कर कहा, "सर्कार । भोजन तैयार है" जिसे सुन फ्लोरा
वहा से उठ कर अपने बाप के साथ भोजन के कमरे में
चली गई।
T
दूसरा बयान
दूसरे दिन सुबह को एक आदमी मछली वालों के गाव
की तरफ से आता हुआ दिखाई दिया। झील के किनारे पर
पहुच फर यह एक डोंगी पर सवार हुभा जो और डोंगियों
से मजबूत और खूबसूरत थी। उस आदमी की उम्र कोई
चीस या बाईस वर्ष की होगी। उसके कपडे बहुत कीमती तो
नथे, परन्तु साफ थे और उसके सुडौल बदन पर भले लगते
थे। उसके चेहरे से ईमानदारी और भलाई झलकती थी,
लेकिन साथ ही कुछ पीलापन बता रहा था कि उसका दिन
रात किसी घात की फिफ लगी रहती है । वह कभी कभी
पक ठण्डी सास ले कर अफसोत की निगाह से इधर उधर
देख लेता था।
उसका नाम हपर्ट फारेटर था। यह डॉगी को झोल में
कुछ दूर तक सीधे ले जा कर उत्तर तरफ मुड़ा मौर जाते
जाते डॉगी एक ऐसी जगह पहुंची जहा झील की चौड़ाई
किले की रानी
बहुत कम थी और किनारे किनारे गुआन तथा अन्धेरी
झाडियां दूर तक चली गई थीं । डोगी उसी जगह पहुँच कर
ठहर गई और एवर्ट उतर कर झाडियों की ओर चला । जाते
जाते थोड़ी दूर पर उसे फिसी औरत की झलक दिखाई दी।
देखते ही उसका दिल खुशी से धड़कने लगा, पाव जल्दी
जत्दी उठने लगे और पास पहुंच कर जय उसने एक खूबसूरत
तथा जवान औरत को खडे देखा तो उसका चेहरा खुशी से
दमकने लगा। यह गहरी निगाह से उसकी तरफ देखने लगा
और उसकी आखों ने इशारे ही इशारे में कह दिया कि "तुम
जमीन पर क्यों खडी हौ ? तुम्हारी जगह तो मेरे दिल में है।"
वह कुछ हिचकता हुआ आगे बढ़ा।
औरत०। ( उसको रुकता देख कर प्यार से ) यह श्या !
तुम रुक क्यों रहे हो ? प्या मैं यह नहीं कह चुकी है कि मैं
तुमको प्यार करती ? लेकिन हाय ! दिल भी क्या चीज है।
इस पर किसी का अधिकार नहीं है। देखो पिता जी मेरे
ऊपर कैमा भरोसा करते हैं अगर उनको यह हाले मालूम
हो जाय तो मुझको फैसा दगाबाज समझे ?
हपर्ट । (आगे बढ और उसका हाथ पकड फर) प्यारी
फ्लोरा ! मैं यह नहीं कह सकता कि तुम मुझसे मुहब्बत करो
परन्तु
मैं अपना दिल तुमको दे चुका, अब यह दूसरे का
नहीं हो सकता।
फ्लोरा० । लेकिनःसुनो तो सही, क्या तुम्हें इसका शक
उपन्यास नहीं है कि जो लडकी अपने से दगाबाजी फा वर्ताव करे यह तुम्हारी स्त्री चन पर तुमको धोखा न देगी? हर्ट नहीं में ऐसा नहीं सोचता क्योंकि मैं खूब जानता है कि सास मेरी मुहम्मत के कारण तुमने इस भेद को अपने चाप से छिपाया है। फ्लोरा०। हां अब तुम जो चाहो सो समझो । मैं तुम्हारे साथ शादी करने का तुमको भरोसा दिला कर पछताती नहीं हूं. मैं तो आप ही अपना दिल तुमको दे चुकी हू किन यदि तुम यह जान जाते कि हुनटे हां क्या कहा? वह कौन सी बात है जिस का जानना मेरे लिये जरूरी है ? क्या तुम्हारे कहने का यह मत- लब है कि तुमको मेरी मुहब्बत का भेद छिपाने में बडी तक- लीफ उठानी पडती है ? यह तो मैं जानता है । हे ईश्वर ! तू हमलोगों पर दया कर । यह प्यारा हाथ जो इस समय मेरे हाथ में है क्या मेरा न होगा खैर ! अगर फिस्मत में ऐसा ही लिया है तो कुछ परवाह नहीं। अपनी जिन्दगी इमी उम्मीद में बिता दूंगा कि कभी तो तुम मेरी होगी। मेरे मर जाने पर भी तुम्हारा ध्यान मेरी आत्मा के साथ साथ फिरा करेगा। फ्लोरा०। (प्रासो में मासु भर कर ) तुम कैसी दर्दनाक चातें करते हो । ईश्वर वह दिन न दिखावे । प्यारे हूवर्ट! मैं तुम्हारी हू, हमेश तुम्हारी ! अच्छा बताओतुम्हें कुछ रात की बात भी याद है ?-
किले की रानी
हवर्ट । क्या ?
फ्लोरा०। यह तो तुम्हें मालूम है कि रात को जर तुम
अपनी डोंगी पर सवार थे तो चांद की रोशनी में मैंने तुम्हें
देखा था, और जय झील में कुछ रोशनी हुई थी तो मैं समझ
गई थी कि हो न हो यह तुम्हारी डोंगी है।
हूवर्ट। हां, जब रात को अधियारी हर तरफ छाई हुई
थी तो मैं डोगी में सवार हो कर किले के पास इधर उधर
फिर रहा था ताकि दूर ही से तुम्हारे प्यारे चेहरे की एक
झलक देख सकूँ।
फ्लोरा०। मैं किस मुह से तुम्हारे इस प्रेम का धन्यवाद
दूं, लेकिन तुमने अपनी डोंगी में रोशनी क्यों की थी?
हूबर्ट क्या तुम नहीं जानती कि उस वक्त ओस पड़ने
के कारण अंधियारी छाई हुई थी और हाथ को हाय सुफाई
नहीं देता था।
फ्लोरा० । खैर यही सही लेकिन
हुअर्ट० । आखिर तुम साफ साफ क्यों नहीं कहती ?
जरूर तुम्हारे मन में कोई भेद है जिसको तुम खोलना नहीं
चाहतीं। वताओ वह क्या बात है ?
क्लोरा० । पिता जी उस समय मेरे पास ही बैठे थे 1
एवर्ट । हां उन्हें तो मैंने भी देखा था और सलाम भी
किया था, मगर उनको मेरी तरफ से कुछ शक तो नहीं हुआ
कि मैं ऐसे पक में किले के पास क्यों पाया है।
.......
.-
उपन्यास
फ्लोरा० । नहीं, क्योकि उन्हें कुछ शक होता तो जरूर
कहते।
हपर्ट हा तो फिर वह क्या कहते थे?
फ्लोरा। वह कहते थे कि शायद तुम उस खोए हुए
सन्दूक को खोज रहे हो।
हुयर्ट। हां
फ्लोरा० । तुम उसके निकालने के लिये चेफायदे कोशिश
कर रहे हो, क्योंकि पिताजी ने उसको सैकरों बेर ढुंढवाया
मगर कुछ पता न लगा
तुम चुप क्यों हो गए?
हूवर्ट० । कुछ नहीं, मैं सोचता था कि.
फ्लोरा० । नहीं तुम्हें मेरी कसम, सच कहो नुम उदास
क्यों हो । मुझसे नाराज तो नहीं हो गए?
पर्ट (चौंक फर) ईश्वर न करे, भला मेरी मजाल हे
कि में तुमसे नाराज हो जाऊ तुम जो मुझसे कहती थी
उसी पर विचार कर रहा था।
फ्लोरा० । अहा! अब मैं समझी। मैंने सोचा कि शायद
सन्दूक के मिलने की उम्मीद हट जाने से तुम्हें अफसोस हुआ,
लेकिन सुनो तो, तुम्हारी उम्मीद के साथ तो मेरी उम्मीद
भी बंधी है, फिर भला यदि यह सन्दूक भी हाथ से जाता रहे
तब हम लोग क्या करेंगे?
वर्ट प्यारी फ्लोरा! निराश न हो तुम तो मेरा जी
भी तोडे देती हो। सच तो यह है कि मेरी सब आशा तुम्ही
?
किले फी रानी २२ पर निर्भर है। मैं उस समय का हाल कैसे बता सकता हूं जब थोडे दिन हुए मैं इस फसबे में आ कर रहने लगा और एक दिन तुम्हारी इस प्यारी सुरत पर अचानक नजर पड़ जाने से मैं समझ गया कि सास इसी के पूजने के लिये स सार में मेरा जन्म हुआ है। मैं तव से दिन दिन भर तुम्हें देखा करता था। प्यारी फ्लोरा । तुम्हारे पग पग पर आंखें विछाता था और यद्यपि तुम्हारे पास जाने की हिम्मत नहीं पडती थी तो भी दूर ही से तुम्हें देख कर अपने दिल को धोरज दे लिया करता था । तुम्हें याद होगा कि उस रोज जब तुम सैर कर रही थीं और मैदान में चरने वाले जानवरों ने तुम्हारे ऊपर हमला किया था तो मैं तुम्हें बचाने के लिये दोड़ आया था और तुम्हें हाथों पर उठा कर एकाआराम की जगह पर ले गया था। उस वक्त तुम्हारा नाजुक सिर मेरे हाथ पर रक्सा हुआ था। उस समय मेरी खुशी का अन्दाजा कौन कर सकता था ? कौन जानता था कि मैं इप्स तरह तुम्हारे पास बैदूंगा? उसके बाद अक्सर जब तुम से मुलाकात हुई और मैंने तुम्हारे चेहरे पर खुशी की झलक देखी धीरे धीरे तुम्हारे मुहब्बत का हाल मुझ पर खुलने लगो और यह मालूम हुआ कि ऐसी इज्जतदार लेडी मुझको प्यार की निगाह से देखती फ्लोरा।यह कोई ताज्जुब की बात नहीं है, बल्कि यह क्यों नहीं कहते कि तुमने मुझे मुहब्बत करना सिखा दिया।
उपन्यास पहिले जव तुमने मेरी जान बचाई तो तुम्हारे एहसान ने मेरे दिल में घर किया, फिर तुम्हारी गरीवी पर मुझे बहुत अफ- सोस हुआ। यह मानो तुम्हारे प्रेम की पहिली सीढी थी, और फिर धीरे धीरे तुम्हारी इस प्यारी सूरत की याद अच्छी तरह मेरे दिल में जम गई । में नहीं कह सकती कि उस समय मुझ- को कितनी खुशी हुई जन मुझको मालूम हुआ कि तुम बहुत सीधे ओर भले हो हां तो वह बात तो रही गई पिता जी ने जो कुछ मुझसे कहा उससे यही मतलब निकलता है कि वह मेरी शादी कही कर देना चाहते हैं। हवर्ट। हा, यह बात है ? फ्लोरा० अफसोस ! क्या- कहू , उन्होंने तो कुछ इस तरह जोर देकर कहा हूयर्ट० । लेकिन अभी किसी सास आदमी को तो तुम्हारे लिए उन्होंने नहीं चुना ? फ्लोरा । यह तो मैं नहीं जानती, लेकिन आह । एक बात मेरे दिल में सटकती है। उनकी बातचीत के ढङ्ग से मुझे कुछ सन्देह सा होता है, जिसे सोच कर में काप उटना हूँ। हवर्ट। किस बात का सन्देह ? फ्लोरा। मेरे पिता की बातों से मालूम पडता है कि उन्होंने ऐसे भादमी को चुना है जिससे यदि में तुमको चाहती न भी होती तो भी नफरत करती। इवर्ट । यह कौन है?
किले की रानी
२४
,
.
.
फ्लोरा० । देसी टिलवर्न।
हुवर्ट । क्या तुम उस महाजन के लडके का जिक्र करती
हो जो बहुत फजूस है?
फ्लोरा० । यह तो मैंने तुम से पहिले ही कह दिया कि
अभी सन्देह ही सन्देह है। हाँ, सुना मुझको अभी तुमसे बहुत
कुछ कहना है, लेकिन नहीं मैं तुमसे नहीं कह सकती.
इस कारण कि वह भेद मेरे पिता से सम्बन्ध रखता है।
हुवर्ट । नही प्यारी फ्लोरा! वह भेद मुझसे कभी न
कहो जो खास तुम्हारे भरोसे पर छोड़ दिया गया हो, लेकिन
मैं समझता है कि तुम्हारे पिता सर कोर्टलेण्ड ने जो कर्जा
वुड्ढे मिष्टर टिलवर्ग से लिया था, उम कर्जे से, वह तुम्हे
ट्रेमी को सौंप कर अपना पीछा छुडाना चाहते हैं।
फ्लोरा । (ताज्जुब से ) यह हाल तुम्हें कैसे मालूम हो
गया?
हुवर्ट । कुछ नहीं, उड़ती हुई वात लोगों के मुह से मैंने
भी सुन ली । तुम सूब समझ लो कि तुम्हारे पिता ट्रेसी के
हाथ में हैं और निश्चय उसी के साथ घह तुम्हारा सम्बन्ध
भी कराना चाहते हैं। आह ! फ्लोरा ! मैं किस मुह से यह
कि तुम्हारा हाथ कैसे नीच आदमी के हाथ में दे दिया
जायगा। मेरी आंखें इस दुखदायी घटना को नहीं देख सकती
है। यह बात नहीं हो सकती नहीं हो सकती।प्यारी फ्लोरा!
तुम भरोसा रक्सोफि तुम्हारे वास्ते मैं अपनी जान
।
उपन्यास
फ्लोरा का चेहरा खुशी से दमकने लगा। उपको बहुत
कुछ उम्मीद घंध गई। उसने पटे प्यार से दोनों हाथ अपने
प्यारे चाहनेवाले नौजवान हरर्ट के गले में डाल दिये । हूबर्ट ने
फ्लोरा के नर्भ नर्म गुलाबी गालों को चूम लिया। हाय ! यह
पहिला चुम्बन या जिसको उसने अपना नक्द दिल दे कर
लिया था।
फ्लोरा०।(अलग हो कर) लेकिन हमको नादानी से कोई
फाम न करना चाहिये । मान लो कि हम दोनों पिता जी के
पाचों पर गिर पर प्रार्थना करें कि वह हम दोनों को दुखी
न करें तो किस उम्मीद पर तुम उन की तबीयत का हाल
जानते हो कि वह कभी मञ्जूर न करेंगे।
हुवर्ट । यदि तुम्हारे पिता ने तुम को लाचार किया तो
तुम इसके सिवाय कर ही क्या सकती हो कि ट्रेसी टिलवर्न
के साथ शादी कर लो।
फ्लोरा यह सुन कर काप उठी। वह जिस करफ देखती
थी सिवाय नाउम्मीदी के कुछ न दिखाई देता था। उसका
मिर चकर खाने लगा, पैर लराखडा उठे और यह मालूम हुशा
कि वह एक सायत में मूर्छित हो कर गिरा चाहती है ! वर्ट
ने उम्मको सम्हाला और बडी दर्दनाक आवाज में बोला,
"प्यारी इतनी नाउम्मीद न हो।” परन्तु फ्लोरा ने कुछ
जवाब नहीं दिया। आँसू उसकी आखों से रह रहे थे और
हिचकियों का तार वधा हुआ था। आपिर कुछ देर बाद
किले की रानी उसने अपने घबराये हुए जी को सम्हाला और अपनी टूटी फूटी और भर्राई हुई आवाज में कहने लगी फ्लोरा० । हाय ! तुम कहते हो कि मैं इतनी नाउम्मीद न न हाऊ ! इससे ज्यादा और कौन दिल दुखाने वाला खयाल होगा ( कांप कर ) कि मैं तुम से जुदा हो कर दूसरे की स्त्री वनू । अरे निष्ठुर प्रेम ! तेरी कठोरता ने एक छिन भी चैन से न वैठने दिरा । आह ! अब यह एक जान वाकी है, इसे भी ले ले । प्यारे हुबर्ट! तुम दुखी न हो, जब तक दम में दम हे में तुम्हारी हूँ यद्यपि मैं शपथ खाया है कि अपने बाप ने से फभी दगा न करू गी तो भी उसी सच्ची मुहब्बत की फलम खाती ह जो हमारे और तुम्हारे दिल में मौजूद है कि मैं इस प्यारे हाथ के सिवाय जो इस वक्त मेरे हाथ में है, दूसरे की नहीं हो सकती । मै अपनी जान दे दूगी लेकिन प्यारे हवट ! तुमको छोड दूसरे का मुंह न देखेंगी। क्यों अब तो तुम को सन्तोप हुआ? हूवर्ट । हाय ! तुम उस दिल को सन्तोप दिलाती ही जो हमेशा के लिये तुम्हारा हो चुका है। क्या हुआ चाहे हमारी वाहिश पूरी न हो, पर हमारे दिल की असली मुहब्बत का जोश कम नहीं हो सकता । फिर भी मुझको यह जान कमर वडी खुशी हुई कि तुम मेरी न होने पाओगी तो दूसरे की भी न होगी। फ्लोरा ने इपर्ट का हाथ पकड लिया और उसको मुह- -
उपन्याम
'ध्यत भरी निगाहों से देखने लगी। खुशी की घड़ी बहुत जरद
चीत जाती है । फ्लोरा को मालूम हुआ कि दोपहर ढल गई
है, इस लिये उसने हवर्ट की तरफ एक अफसोस की निगाह
डाली और कहा, "मुझे आये बहुत देर हो गई, अब मैं जाती
हूं।"
हूवर्ट । हाय ! तो अब तुम जाओगी? अच्छा, तो फिर
फव मिलेंगे?
फ्लोरा० । देखो, ईश्वर मालिक है। मैं मिलने की कोशिश
फरूगी लेकिन अगर कोई मौका जल्द न मिला तो लाचारीहे।
हर्ट । लेकिन प्यारी फ्लोरा! तुम जानती हो कि मैं
किस वेचैनी से तुम्हारा इन्तजार करता ह? तुम्हारी इस वक्त
की बातें अकेले में और ज्यादा तीर की तरह दिल में चुभंगी,
इस
लिये
तुम
अपने चाहनेवाले फो ज्यादे राह न दिखलाना
और हा सुनो, एक बात मेरे ध्यान में आती है कि यदि तुमको
मुझ से कुछ कहना हो तो एक पुर्जे पर लिख कर किसी
लफडी के टुकड़े में बांध फर झील में
फ्लोरा। अच्छा मैं समझ गई। जब मुझको तुमसे
मिलने की जरूरत होगी तो मैं एक गुलदस्ता अपनी खिडकी
में रख दिया करूगी । बस तुम समझ जाना ।
हरर्ट० । (एक दूरबीन अपनी जेब से निकाल कर ) इसके
लिये यह खूब काम देगी। हां एफ घात भोर भी है-कभी
फभी एक आध फूल या और कोई निशानी झील में फेंक
केले की रानी
२८
1
दिया करना जिसे मैं उठो कर अपनी आसों से लगा लूगा
और समझू गा कि मेरे दिल की मालिक मुझे भूली नहीं।।
फ्लोरा ने मुस्कुरा कर "अच्छा" कह दिया। इसके बाद
दोनों एक दूसरे से गले मिल कर अलग हुए । फ्लोरा एक
तरफ को चली लेकिन हूवर्ट वहीं सता रहा और उसकी
धीमी चाल को प्यार और अफसोस की निगाह से देखा
किया । जब वह एक चट्टान की आड में हो गई तो यह भी
अपनी डोंगी में आया और जैसे ही चाहता था कि अपनी
डोगी को किनारे से अलग करे कि यकायक एक तरफ से
आवाज आई, "अरे भो मल्लाह ! जरा अपनी राह रोके रह देख
सरदार आगे न बढना, मैं आ पहुँचा । एक बहुत अमीर
आदमी तेरी नाव पर चढ कर सामने वाले किले तक
जायगा।"
यह आवाज उन गुजान और अन्धेरी झाडियों की ओर से
आई जिनका हाल हम पहिले कह चुके हैं और साथ ही जिस
आदमी ने पुकारा था वह भी लम्बे लम्बे डग बढाता हुआ
दिखाई पडा । उसके हाथ में एक वावुक था और उसकी
पोशाक बहुत बढिया थी । उसका कद लाया था और सुरत
के
वारे में कहा जा सकता है कि अगर सूबसुरत नहीं तो कुछ
पेसा बदसूरत भी नहीं था, लेकिन उसके चेहरे से वेचकफी
और छोटो छोटी आंखों से बेईमानी झलकती थी । उम्र के बारे
में कहा जा सकता है कि करीब बीस वर्ष के होगी ।
૨e
उपन्यास
,
उसने पास पहुंच कर हवर्ट से कहा, "वाह भाई चाह !
तुम तो बडे भाग्यवान् निकले ( एक रुपया दिखा फर) लो
मुट्ठी गरम करो। भला कोन जानता था कि रास्ते में मेरा
मजबूत टह लगडा हो जायगा। मैने भी उसको एक किसान
फे हाथ घर भेज दिया । (हट की तरफ गोर से देख कर )
हा भाई माष्टर क्या नाम है तुम्हारा ! उह होगा कुछ।
अच्छा तो तुम अपनी डॉगी पर मुझको बैठा कर जरा चाल
तो दिसामो। मगर अपनी नाव हटा कर वहा लगाओ, यहा
किनारे से मिल जायगी और यहा किनारे रे कुछ दूर है।"
हवर। अच्छा माव जव आप प्रार्थना करते हैं तो में
ऐसा येमुरोक्त नहीं है कि आपका फहा न मानू ।
आदमी० । ( व हस कर) प्रार्थना? अवे मैं तुझ से
प्रार्थना करता हूँ? यह नहीं जानता कि तु वढा भाग्यवान है
जो मैं तेरी नाव पर सवार होना चाहता । अच्छा जा, अर
तुझे वह रुपमा न दू गा।
इयर्ट। (क्रोध में आकर) क्या तू इतना बडा इज्जतगर
चन गया कि मैं तेरेसवर से भाग्यवान् हुआ
आदमी०। (गुस्से से थरथराकर) अये कमीने मल्लाह !
तेरी शामत तो नहीं आई हे?
हर्ट । और तू कहा का भला आदमी है ? एक वेईमान
'सूदखोर का लडका होकर ऐसी बातें बनाता है !
इसी टिलवर्न०। (क्योंकि यह वही था जिसका नाम
P
१
किले की रानी
३०
-
पाठकगण पहिले धयान में सुन चुके हैं) सवरदार, जो और
कुछ कहा तो पानी में ढकेल दुगा।
यह कह कर देसी आगे बढा और चावुक का एक हाथ
हवर्ट पर जमा ही तो दिया । हूपर्ट भी नाव पर से कूद पडा
और उसकी गर्दन पफड कर जमीन पर दे मारा और चार
धूसे जमा कर ट्रसी को तिरछी नजर से देखता हुआ अपनी
नाव पर चला गया।
ट्रसी० । ( जमीन से उठ कर और क्रोध से दांत फठकटा
कर ) अवे तेरी यह मजाल कि तू मुझकी मारे? देख मेरे पास
तलवार मौजूद है, अगर तू कोई भला आदमी होता तो मैं
इसी वक्त अपनी तलनार से काम लेता, लेकिन मेरी तेरी पचा
बराबरी? तू एक मल्लाह, गुलाम बल्कि उससे भी नीच है।
हर्ट । वेवकुफ ! बप ज्यादा मत बोल । भला तूने अपने
दिल में समझा क्या है?
हपर्ट यह कह कर अपनी डोंगी को किनारे से हटा कर
गहरे पानी में ले चला।
ऐसी टिलवर्न। भहा | तू मुझसे लडेगा ? सैर देसा
'जायगा।
हवर्ट की डोगी हवा से बात करती हुई झील में चली जो
रही थी। ट्रेसी ने यह देख कर कहा, "हा! अर इतनी दूर
किले तक पैदल जाना पडा । एक तो मार खाई दूसरे यह एक
और तकलीफ उठानी पड़ी। सैर, लाचारी है।" यह कहकर
+
उपन्यास
उसने अपना मुह पोंछा और उन्हीं गुजान झाड़ियों को पार
फर के फ्लोरा के पिता सरमाइलिज कोर्टलेण्ड के किले की
ओर चल निकला।
तीसरा बयान
देसी टिलवर्न जय किले में दाखिल हुआ तो उसने झील
की घटना की बात किसी से न कही। वह एक सुनसान
कमरे में सर माइलिज कोर्टलेण्ड के साथ वेठा न मालूम क्या
क्या बात करता रहा और इस बीच में फ्लोरा अपने कमरे में
अकेली बैठी अपनी मुहब्बत के नतीजे पर गोर कर रही थी
जो उसने एवर्ट के साथ की थी। बैठे बैठे उसको पयाल
आया, "मी टिलवर्न इस समय पिता जी से न मालूम क्या
क्या बातें कर रहा है। क्या केवल रुपये के मामले में बहस
हो रही है ? अभी तक तो मुझको कुछ शक ही शक था, मगर
अब विश्वास होता जाता है कि जरूर कुछ दाल में काला है।
हाय ! तो क्या मैं अपने प्यारे हूवर्ट से बडी बेदर्दी के साथ
जुदी कर दी जाऊगी ? ( जोर से) नहीं, यह नहीं हो सकता।
मेरे इवर्ट ! मेरे प्यारे दृघर्ट में तुम्हारी हो चुकी । (चौंककर)
अरे किसी ने सुन तो नहीं लिया "
यह कह कर फ्लोरा ने घबराहट के साथ चारों और
किले की रानी
૨૨.
देखा, लेकिन कुशल यह हुआ कि कोई वहां नहीं था। थोडी
देर के बाद फ्लोरा को मालूम हुआ कि ऐसी टिलपर्न सर
माइलिज से मुलाकात रके जा चुका है और जब यह खाने
के कमरे में बुलाई गई तो उसे सन्देह था कि सर माइलिज
के से अब कुछ न कुछ नई बात जरूर सुनेगी, परन्तु सर
माइलिज ने उस बारे में क्लोरा से कुछ नहीं कहा, लेकिन
उसके ढंग से पाया जाता था कि वह जरूर कोई यात अपने
दिल में लिये हुए है जिसको उसने किसी अच्छे मौके पर
कहने के लिये उठा रक्पा हे ! सुबह को जब वह सो कर
उठी तो उसने अपने बाप के ढग से मालूम कर लिया कि
आज यह कुछ कहना चाहता है। वह वेचैनी और जल्दी में
मामूली तोर पर सिंगार फर के अपने कमरे में जा कर
उदासी से वेठ गई । जलपान करने के वास्ते जिस समय यह
घेठी उसने अपने बाप को अपनी ओर ऐसी निगाह से देखते
पाया जेसे वह कुछ पूछना चाहता हो । जलपान करने वाद
सर माइलिज ने फ्लोरा से एक कमरे की तरफ इशारा कर के
कहा, 'जरा तुम मेरे साथ आना तो। मुझे तुमसे कुछ कहना
यह सुन कर फ्लोरा का दिल धड़कने लगा, लेकिन वह
अपने बाप के पीछे पीछे चली गई। कमरे में पहुच कर सर
माइलिज ने फ्लोरा को एक कुर्सी पर बैठने का इशारा किया
और आप भी एक कुर्षी खींच कर फ्लोरा के बिल्कुल सामने
उपन्यास
बेठ गया ताकि चेहरे के उतार चढाय से मालूम कर ले कि
फ्लोरा पर उसकी बातों का क्या असर पडा। उसने फ्लोरा
के चेहरे की तरफ सूब गोर से देप कर कहा -
सर० मा० । प्यारी बेटी जानती हो कि मैंने इस वक्त
तुमको किस वास्ते तकलीफ दी है ? आह ! इस समय पिता
अपनी प्यारी बेटी से प्रार्थना करता है कि वह उसको तवाही
से बचा ले।
फ्लोरा को यह मालूम हुआ कि मानो उमफा खून ठण्डा
होकर रगों में जम गया है। उसने अपनी कुसों का सहारा
लेकर चडी मुश्किल से कहा
फ्लोरा० । पिता जो आपके कहने का मतलब क्या है ?
सर० मा० । यद्यपि मैं जानता कि इस समय मेरी बात
सुन कर तुमको बहुत दुख होगा लेकिन में इसके सिवाय
फुछ नहीं कर सकता कि जहां तक वने उसको थोडे में; कह ।
अच्छा सुनो, मैं इस समय बिल्कुल अपने महाजन के हाथ में
है, उसको अरितयार है कि यह मकान जिसमें में इस समय
बैठा ह और यह जायदाद जिस पर इस वक्त मेरा अधिकार
है ले ले और मुझ को इस मकान से निकाल दे।
सरमाइलिज इस वक्त कोशिश कर रहा था कि किसी
तरह आसु निफल आचे, लेकिन यह न हो सका तो भी उसने
अपनी आवाज को बहुत ही उदास बना लिया ताकि उसकी
भोली भाली चेटी का दिल पसीज जाय। उसने फिर कहना
किले की रानी
A
आरम्भ किया,-"हां मेरी प्यारी फ्लोरा! तुम मुझे स.
साफ बता दो कि क्या तुम चाहती हो कि तुम्हारा बुड्डा
बिल्कुल तवाह हो कर एक एक पैसे कामुहताज हो जाय
जगह जगह मारा फिरे तथा उसकी कोई बात भी न सुने ?
तुम यह चाहती हो कि अपने चाहनेवाले पाप को इस
से छुटकारा दिलवाओ ? मेरी प्यारी बेटी ! तुम बता दो
इनमें से किस बात को ज्यादा पसन्द करती हो ?
फ्लोरा०1(अफसोस के साथ) पिता जी! मैं किस बात
को पसन्द करू ? आप साफ साफ कहिये तो मालूम भी हो।
मर माइलिज को यह सुन कर कुछ क्रोध आ गया लेकिन
उसने अपनी तबीयत को सम्हाला ताकि वना बनाया खेल कहीं
विगड न जाय और जोर देते हुए गिडगिडाहट के साथ कहन
लगा
, सर० मा० । साफ साफ यह है कि क्या तुम इस बात
को मजूर करोगी कि तुम्हारा पाय देसी टिलबर्न के हाथ में
दे दिया जाय ताकि तुम आराम से जिन्दगी बिताओ और
मुझ पर से भी इस कर्जे का बोझ हलका हो ?
फ्लोरा० [ क्या ट्रेसी टिलवर्न ने खुद अपने मुंह से
अपनी इच्छा प्रगट फी है।
सर०मा० ( दिल में सुश हो कर ) वेशफ | अरे तुम क्या
जानो कि यह किस दिळ से तुम्हें चाहता है। उसने तो यह
, कहा है कि मेरा दिल नहीं मानता है, नहीं तो मैं फ्लोरा के
उपन्यास
साथ शादी करने के बारे में इतना जोर कमी न देता।
फ्लोरा० ( उसी तरह धीमी आवाज में) मैं देसी टिल
यन के साथ व्याह करना मजूर करू! यह बात ऐसी है जो
मेरी संव आशानों को मिट्टी में मिला देगी और सम्भव था
कि आप के सिवाय दूसरे के मुह से यह बात सुन कर मैं
चुप न रह जाती। हां, यह सम्भव है कि मैं आपकी हुपम
मानने वाली बेटी होने के कारण आप की बात मान लू और
चाहे वैसा ही दु.प मुझ पर पडे, सह ल्लू । अच्छा तो आप
बिना कुछ सोचे उन सच दातों को मेरे सामने ययान कर
दीजिये जो ट्रेसी टिलवर्न ने आप से कही हैं।
सर०मा० । मेरी प्यारी बेटी मैं सव हाल तुमसे ययान
किये देता है । मैंने सब हिसाव पिताय जांच लिया है । (एक
कागज जेब से निकाल कर ) यह देखो, हम को सब मिला-
कर नौ हजार सात सौ पचहत्तर पौण्ड देना है।
फ्लोरा० । हा यह तो मैं समझी, लेकिन उसने कहा क्या,
मैं साफ साफ सुनना चाहती हूँ।
सर माइलिज मन में आगा पीछा करने लगा और उसको
चार वार खयाल आता था कि देखें इम चातचीत का नतीजा
क्या होता है पर फिर भी वह अपनी बेटी से गिडगिडा कर
कहने लगा, "अब जो कुछ मुझको कहना है यह केवल इतना
ही है कि ऐसी टिलयन ने सिर्फ तीन दिन की मुहलत दी है।
-
किले की रानी
इसके बाद उसे अरितयार होगा कि तुम्हारे चूहे पाप को
इन मकान से निकाल दे।"
फलोरा०। (चौंक कर ) इतनी जल्दी ।
सर०मा० । हां अफसास ! अब पिर्फ इतनी ही मुहलत
है। इसके बाद हम दोनों के लिये सिवाय खराबी के और कुछ
भी नहीं है।
फ्लोरा० लेकिन क्या ट्रेसी टिलवर्न सचमुच हम लोगों
के साथ ऐसा बर्ताव करेगा ?
सर०मा० । वेशक, वह अवश्य ही ऐसा करेगा।
फ्लोरा । पर फिर भी आप को मेरी किस्मत का ठिकाना
ऐसे भादमी के साथ लगा देना मंजूर है ?
"सर मा०। (चौकन्ना हो फर) लेकिन तुम्हीं लोचो
इसके सिवाय यह कर ही पा सकता है। जब उसकी सब
उम्मीदें पक दम तोड दो जाय, उसकी सब आशायें एक धार
ही धूल में मिल जाय तो क्या यह सम्भव नहीं है कि उसकी
भुहवत नफरत के साथ वदन जाय अर्थात वह तुमको प्यार
करने के बदले तुमसे नफरत फरने लगे? बल्कि पदला लेने
को भी उसकी इच्छा हो' यह तो मामूली बात है कि आदमी
तब तक मतलवी नहीं हो जाता जव तक उम्मीद उसके दिल
को कुछ भी सहारा दिये रहती है, लेकिन इसमें तुम्हारे घर
राने की कोई बात नहीं है । वह तुम्हारे साथ हमेश मुहब्बत
का बर्ताव करेगा और उसी तरह प्यार करेगा जैसे एक
*
.
-
.
उपन्यास
मझदार पति अपनी पती को चाहता होगा।
'फ्लोरा०। (आखों में आंसू भर घर ) यसबस, अव आप
धिक न कहिये, मैं समझ गई कि मैं "जुल्म" के पंजे में दे
'जाऊगी।
सर० मा० । क्या ? "जुत्म" कैसा? तुम इसको जुल्म
मिझती हौ कि लडकी अपने बाप को चेइज्जती और उन
व मुसीवतों से बचा ले जिनसे मरना अच्छा है ?
फ्लोरा। अच्छा, जो कुछ हो, आपकी बात को मानना
धर्म है।
सर०मा० । तुम्हीं सोचो। तो क्या तुम मेरी बात मानती
?
,
फ्लोरा०। हां, लेकिन कब ?
सर०मा० । यही तीन दिन में।
फ्लोरार । लेकिन इतना समय तो बहुत कम है।
सर० मा० । परन्तु मैं तुम से कह चुका है कि मोहलत
इतनी ही है, इसके बाद हम कुछ भी नहीं कर सकते । तो
ज वुधधार है, बस शनिवार को आठ बजे रात्रि के समय
हारा विवाह हो जाय।
फ्लोग। अच्छा, मान सीजिये कि यह सब अगर हो
जाय तो नतीजा क्या होगा?
सर० मा० । नतीजा यह होगा कि ऐसी टिलयन, कर्जे के
बन्ध में जितने कागज पत्र मेरे हाथ के लिये उसके पास
किले की रानी
मौजूद हैं, उन सवको मरे हवाले कर देगा और मैं सह
आफतों से बच जाऊँगा तथा ईश्वर को धन्यवाद दूगार
चुढापे में मेरी इजत बच गई।
फ्लोरा की सूरत इस समय बहुत उदास थी । वह धार
चार चाहती थी कि कुछ जवाब दे, परन्तु उसके थरथरात
हुए होंठ उसके मुंह से एक शब्द भी नहीं निकलने देते थे।
वह सोचती थी कि चाहे जान ही क्यों न चली जाय,
लेकिन बाप को धोखा देना और उसका हुक्म न मानना वडा
पाप है क्योंकि-"पिता धर्मः पितास्वर्ग. पिताहि परमन्तप
पितरि प्रीति मापन्ने प्रीयन्ते सर्वदेवता." यद्यपि हर्टका
प्रेम उसके दिल को उभार रहा था तो भी उसने अपने को
बहुत सम्हाल कर कहा, "अच्छा मैं राजी ह| जैसी आपकी
इच्छा हो वैसा ही कीजिये।"
सर माइलिज खुशी में आ कर सर दुःख भूल गया
और
उसका चेहरा खुशी से दमकने लगा परन्तु फ्लोरा सुस्त होगई।
सर० मा० । प्यारी बेटी-! मैं किस मुंह से तुम्हें वन्यवाद
दू कि तुमने मुझपर तरस खा कर मेरी प्रार्थना स्वीकार का
ली। विश्वास मानो कि देसी टिलर्न बहुत ही लाय:
आदमी है। हां तो तुम उससे मुलाकात करोगी? मैं उम्मीद
करता हूं कि तुम उसको प्यार करोगी और खुश भी होगी।
फ्लोरा०। हाय, खुश होऊंगो ? लेकिन खेर, वह का
आवेगा?
३६
उपन्यास
सर० मा० । बस अब आया ही चाहता है । यह मुझसे
इसी वक्त मिलने का घादा कर गया है। (सिडकी की तरफ
देख कर) देखना तो सही यह तो नहीं आ रहा है।
उस चक देसी टिलवर्न जल्दी २ पांघ उठाता हुया किले
के सामने वाली सडक पर से चला आता था । उसको जल्दी
थी कि किसी तरह अपनी शादी के बारे में जो पात टीक हुई
हो उसको सुन ले।
सर० मा० । (फ्लोरा का हाथ अपने हाथ में ले कर में
जा कर उसो तुम्हारे पास भेजे देता है । देयो बहुत ही सुशी
ओर प्यार से बातचीत करना।
यह कह कर सर माइलिज कमरे के बाहर चला गया।
उसके जाते ही फ्लोरा कुर्सी का सहारा कर के बैठ गई । उस
समय उसकी आंखों में आसुओं की पफ वूद भी नहीं थी
और न उसके
बिल्कुल
मुर्दनी सी छा
टकटफी
4
न
किले की रानी
४०
चाप अपनी कुर्सी से उठकर सडी हो गई और दिलवर्न अजय
तरह से अठलाता और मूछों पर हाथ फेरता हुआ फ्लोरा
के पास आ कर कहने लगा, "प्रिये ! तुम्हारे प्रतिष्ठित पिता ने
इस समय जो समाचार मुझ को सुनाये, वस जी ही जानता
है कि उनसे मुझको कैसी खुशी हुई । अहा ! मैं कैसा भाग्य
वान हू । (मन में) अहा ! यह भी बहुत अच्छा हुआ कि मैं आज
खूर बढिया कपडे पहिन कर पाया है । ऐसे कपडे बडे बडे
शौकीनों के पास भी नहीं निकलते, लेकिन हाय | न हुई वह
लाल जैकेट, नहीं तो फ्लोरा मुझे देखते ही मोहित हो जाती।"
फ्लोरा० । (उसकी बातों से घबरा कर) माष्टर हिलवर्न!
अव तो अवश्य ही आपको मुझसे मिलने का हक हो गया।
टिलवर्ना मेरी प्यारी ! मैं अपनी मुहब्बत तुम्हारे दिल
में पैदा करने के लिये कोई यात वाकी न रखंगा और सोची
तो कि तुम्हारा प्यारा पति किसी से किस वात
यदि धन की ओर देखो, तो बडे बडे रईस इस समय मेरी
घरावरी नहीं कर सकते, यदि अपना प्रेमी चाहो, तो मुझसा
चाहने घाला दुनिया में कहीं न मिलेगा और चतुराई तो मानो
मुझमे जर कूट कर भरी है। लोगों को धोखा दे देना मेरे बायें
हाथ का खेल है। यदि खान्दानी बडाई चाहो, तो देखो मेरे
पिता कितने बडे साहकार थे कि तुम्हारे पिता तक उनके
देनदार हैं। प्यारी'तुम यह न समझना कि मैं ताने से कहता
E, जब हम तुम एक हो गए तो मेरा जो कुछ है राव तुम्हारा
कम
उपन्यास
सब
ही है-यदि अल ओर लियाकत की तरफ देखो तो ईश्वर की
कृपा से वह भी मुझमें मौजूद है। मतलब यह कि मुझ
ही पाते हैं, मैं कहाँ तक अपने ही मुह से अपनी तारीफ करू,
तुम तो आप ही समझदार हौ । ( ठहर कर ) हैं! तुम्हारा
चेहरा पीला क्यों पड गया?
पशोरा। महाशय । मेरे पिता से और मुझसे अब तक
जो बातचीत हुई है वह तो शायद आपको मालूम ही होगी?
टिलयन । मैं समझ गया, रुपये घाली .यात न? तुम
भरोसा रखो प्यारी, मैं तुम्हें इसलिये घुरा भला न सुनाऊँगा
कि मैंने तुमको विना जहेज के पाया।
फ्लोरा० । (बहुत ही बेचेन होफर) बुरा भला?"
टिलबर्न । कहता तो ह कि कुछ न कहूगा।
देसी टिलवर्न दीवार में जो आईना लगा था उसमें
सपना मुंह देख फर और तन गया ताकि ज्यादा खूबसूरत
मालूम हो, फिर फ्लोरा की तरफ देख कर योला, "प्रिये !
वह दिन कब आयेगा कि मैं तुम्हें खून चनाव निंगार किये
देस कर सुश होऊंगा ?"
फ्लोरा०1(उसकी बात को अनसुनी कर के) में समझती
फि थाप मुझसे इस समय शायद इसी धास्ते मिलने भाये
हैं कि मैं आपके सामने उस पात फाप्रतिज्ञा कर जिसके
बारे में मेरे पिता आपसे कह चुके हैं।
टिलवर्न । हाय । तुम्हारे मुह से ऐसी बात
३
+
किले की रानी
४२
"
फ्लोरा (जोर देकर) आप पहिले मेरी बात सुन लीजिये,
फिर और चातें कीजियेगा। मैं आपसे साफ साफ करती ह
कि मैं अपने याप के हुक्म को कभी न टालूगी । आप अगर
मुझसे शादी करना चाहते हैं तो मैं राजी है। ।
टिलवर्न। तो क्या प्यारी तुम अपने नाजुक हाय को जरा
चूमने दोगी? या अगर तुम्हारे पतले होठो का वोसा लू तो
नाराज तो न होओगी?
फ्लोरा को बहुत ज्यादा गुस्सा चढ आया । उसके गाल
तमतमा उठे और उसने घडी नफरत से कहा-"अच्छा अब
मैं जाती है। खूय याद रखिये कि इन तीन दिनों तक
मैं अपनी मालिक है, आपका मुझ पर कुछ भी अशियार नही
है। आप मेरे नासून तक को नहीं छू सकते । अच्छा अब मैं
नहीं ठहर सकती।"
' यह कह कर फ्लोरा कमरे के बाहर चली। टिलवर्न ता
ज्जुब से आंख फोड फाडकर देखने लगा। जब फ्लोरा उसकी
आखों के सामने से दूर हो गई तो वैठ कर सोचने लगा "वाह !
न प्यार की बातें न कुछ हाथ भी न लगाओ, यह न करो।
हाय । इस समय मैं अपनी लाल रंग की जैकेट न पहन माया,
नहीं तो वह देखते ही मोहित हो जाती । सैर, क्या बडी बात
है, तीन दिन की और कसर है इसके बाद वह मेरी ही होगी।
फिर कैसा इन्कार । फिर तो चैन ही चैन है । लेकिन वाह, में
भी कैसा येवकृफ हू । यह न समझा कि औरते पहिले यों ही
.
-
+
४३ उपन्यास शर्माया करती हैं। वस कल मे वह लाल जैकट जरूर पहिन कर आऊ गा, फिर तो वह मेरी खूबसूरती देख कर मुझको मनावेगी और मैं रूट रूठ जाऊगा!" यह सोच कर सिलवर्ग खूब हँसी । फ्लोरा उस कमरे से उठ कर सीधी अपने खास कमरे में जा कर बैठ गई लेकिन यकायक एक सयाल ने आ कर उसे चौंका दिया, ओर उसने उट कर एक वडा गुलदस्ता उस खिडकी में रस दिया जो झील की तरफ पड़ती थी। चौथा वयान सुबह के आठ बज चुके हैं और नो वजा चाहते हैं। दो मुसाफिर अपने घोडॉ पर मवार उस तङ्ग और ऊबड खाबड सडक पर जा रहे हैं जो मछली वालों के गाव की तरफ गई है। इस जगह पर बिल्कुल घना जगल हे ओर पेड ऐसे गुजान हैं कि निगाह दूर तक नहीं जा सकती । यहा अगर कुछ चहल पहल है तो यस उन्हीं जगली पक्षियों को जो कहीं कहीं चैठ कर एक आध तान उडा दियो करते हैं या उन गाय भैस वगैरह जानघरों की जो प्राय खुले मेदानों में चरते हुए दिख- लाई दे जाते हैं। मतलब यह कि यहा कोई ऐसी दिलचस्पी की चात नहीं है जिसको सुन कर पाठकगण खुश हो सफें।
किले की रानी
जिन मुसाफिरों की बात हमने कही है, उनमें से एक का
घोडा दूसरे से कुछ आगे था जिससे जान पडता है कि अगला
आदमी मालिक था और पिछला शायद उसका नौकर,
क्योंकि वह वडे अदय से धीरे धीरे अपने घोड़े पर चला
आता था । आगे वाले मुसाफिर की उम्र कोई चालीस वर्ष
की रोगी । यद्यपि उसके गाल कुछ कुछ सुफेट हो चले थे
लेकिन उसकी मूछ विल्कुल फाली थीं। यह एक बढिया
सफरी पोशाक पहिने हुए था। उसकी फमर से एक तलवार
लटक रही थी और कोठी के दोनों तरफ दो पिस्तौल रक्खे
हुए था। उसका साथी भी हथियारवन्द था, मगर उसके
पास सिर्फ एक तलवार ही थी। रे दोनों मुसाफिर डाक के
घोडो पर सवार थे जिमसे नाल पढता था कि ये बहुत दूर
से चले आते हैं।
कुछ देर तक दोनों मुसाफिर'चुपचाप अपना रास्ता तै
करते रहे। थोडी देर बाद जब वे एक ऐसे स्थान पर पहुंचे
जहां से सडक दो तरफ को मुडी थी तो कुछ ठहर गये। और
सोचने लगे कि किम सडक से चलें। कुछ नोच कर अगले
मुसाफिर ने पिछले से कहा "विल्मट ! जरा आगे माओ,
तुम्हारी क्या राय है ? किस गस्ते से चलना चाहिए ? तुम
तो यहां से जमीन्दार से रास्ता अच्छी तरह पूछ चुके हो
विल्मट ( हाय से इशारा फर के) महाशय यह मंडक
जो दाहिनी ओर गई है, यह तो सीधी जगल में होती हुई
4
उपन्यास
मछली वालों के कसये को चली गई है, और यह दूसरी जो
चाई तरफ को है, यह चकर सोती हुई झील के पश्चिमी
किनारे पर निकली है-उस तरफ जिधर लण्डफोर्ड का
फिला है।
फौजी अफसर० । ( क्योंकि यह सचमुच फौजी आदमी
था) हां, तो यही सडक मछलीवालों के कसचे को गई है ?
तो आओ इसी तरफ तो जाना ही है।
यह कह कर दोनों आगे बढे। थोड़ी दूर जा कर उनको
इससे ज्यादा घना जंगल मिला । एक ओर तो ऊचे ऊचे पेडों
झुक कर सडक को छा लिया था, दूसरी ओर पहाडियों
का ऊंचा नीचा सिलसिला दूर तक चला गया था। ये लोग
कुछ ही आगे बढे होंगे कि किसी तरफ से जोर से सीटी
घजाने की सावाज अई और सरफ के एष तरफ से सूखे
पत्तों की खडसडाहट के साथ ही दो आदमी जिनकी सूरत से
मालूम होता थ कि डाकू है, निकल कर इन मुसाफिरों पर
झपट पडे । दूसरी तरफ से भी दो और डाकू निकले और इन
चारो आदमिरों ने हमारे मुसाफिरों पर हमला किया, परन्तु
फौजी अफसर यड़ा होशियार आदमी था, जैसे ही उसने
सीटी की आवाज सुनी उसका हाथ पिस्तोल पर पडा । अब
दो डाकृ तो फौजी अफसर की ओर बढ़े और दो विल्मट से
मुकाबला करने लगे। घिल्मट अपनी तलवार खींच ही रहा
था कि पफ आदमी ने पीछे से झपट कर एक हाथ जमा ही-
किले की रानी
तो दिया और यह वेचारा चेहोश हो कर अपने घोडे पर से
गिर पड़ा। इसके बाद चारो डाक मिल कर अफसर पर
हमला करने लगे, लेकिन ना पहिले ही अपने दोनों पिस्तौलों
के घोडे चढा चुका था और जैसे ही डाक उसके पास पहुंचे
उसने फायर किया, परन्तु गोली एक डाकू के कान के पा
से हो कर उसकी टोपी में लगती हुई निकल गई यह देख कर
हमारे अफसर ने फिर फायर किया, लेकिन यह निशाना भी
खाली गया, आखिर उसने लाचार हो खाली पिस्तौल खींच
फर इस जोर से एक डाकू को मारी कि वह थोडी देर के लिए
बेहोश हो गया। अव ये तीनों बचे हुए डाकू उसके पास आ
गये और उसने तलवार निकाल कर बडी बहादुरी से वार
करना शुरू किये, लेकिन डाक्त भी बडे लड़ने वाले थे। कुशल
यह था कि उनके पास बन्दूक या उस तरह का कोई हथियार
नहीं था, नहीं तो वे बर तक अफसर का काम तमाम कर
चुके होते।
एक डोकृ ने बढ कर घोड़े के मुह पर एक डण्डा मारा
और घोडे ने भडक कर अफसर को जमीन पर गिरा दिया।
यह बड़ा वारीक समय या, डोकू बरायर वार कर रहे थे और
अफसर अय पैदल था। यद्यदि वह बडी बहादुरी से लह रहा
था फिर मी अकेला किस किस को जवाब देता, तो भी वह
अपने भरसक उनके वारों को वरावर रोक रहा था! यका-
यक उन डाकुओं में से एक ने मौका पा अफसर के पोके;
P
४७
उपन्यास
पहुंच कर अपनी तलवार ऊंची की और वार किया ही चाहता
था कि जगल में एक तरफ बन्दूक दगने की आवाज आई ।
गोली उस डाक की छाती पर पड़ी और एक भयानक (चीख
के साथ ही यह जमीन पर गिर कर ठण्डा हो गया। जिस
आदमी ने यन्दूक फायर की थी वह बहुत जल्दी जगल में से
निषल कर अफसर के सामने पहुंच गया और झपट कर एक
और डाक पर ऐसा हाथ मारा कि वह भी वहीं ठण्डा हो गया!
इसी समय जो अफसर के खाली तमचे से चुटैल हो कर
बेहोश हो गया था होशियार हो कर लडने लगा लेकिन शायद
एक मिनट पीता होगा कि दोनों डाकू भाग खड़े हुए। हमारा
यहादुर आदमी जिसने अफसर की जान बचाई थी, उनके
पीछे दौडा, परन्तु अफसर ने पुकार कर कहा, "मेरी जान
घचाने वाले अय तुम तफलीफ न उठाओ। उन कुत्तों के
पीछे परेशान होने से क्या फायदा ? आओ आओ लौट आओ,
मैं तुम्हें धन्यवाद तो दू।"
-
वह आदमी अफसर की इस बात को सुन कर रुक गया।
अफसर ने जब उसकी तरफ ध्यान दे कर देखा तो उसको
मालूम हुआ कि उसकी जान बचाने वाला एक खूबसूरत और
नौजवान आदमी है।
आदमी०।। बडी नम्रता से ) मैं भला किस लायक है कि
आप मुझको धन्यवाद देंगे ? मैंने कोई बड़ा काम तो किया
। "किले की रानी यह सुन कर हूयर्ट ने जेब से एक दूरवीन निकाल कर सर रिचर्ड को दी और पहा, "इससे आप किले की इमारत अच्छी तरह देख सकते हैं।" सर रि०। (दूरवीन लगा कर) हां यह तो यहुत अच्छी चीज है, अव किले की इमारत साफ साफ दिखाई देती है। वह देखो उसकी खिलकियां भी खुली हुई हैं धौर यह कौन खडा है ? यह तो कोई औरत है । लेकिन खूयसूरत है ! और यह उसके हाथ में क्या चीज है ! इसमें तो यहुत से फूल बधे हुए हैं, शायद कोई गुलदस्ता है । लो! उसने उस गुलदस्ते को खिडकी में रख दिया ! हव० क्या ' गुलदस्ता !! यह कह कर उसने सर रिचर्ड के हाथ से जल्दी में दूरतीन छीन ली और अपने ध्यान में डूचे रहने के कारण सोचा भी नहीं मैं कैसी असभ्यता से दूरवीन ले रहा हूँ। फिर वह दूर- बीन लगा कर सररिचर्ड से कहने लगा, "हां ठीक है। उस सामने वाली खिडकी में गुलदस्ता रव्या हुआ है।' अब ये दोनों झील की भोर से लौटे और हुयर्ट ने अपने मन में कहा,-"छि । मैंने क्सि घबराहट में दूरदीन छीन - M हवर्ट के मकान पर पहुँच कर सर रिचर्ड: हुए और कहा, 'मेरे माननीय
किले की रानी
H
" उसने उस गुलदस्ते को खिड़की में रख दिया ।"
(पेज ४)
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उपन्यास सान न भूलूंगा जो आज तुमने मेरे साथ किया है। अच्छा वन्दगी" यह कह कर चे चले गए और चिल्मट ने भी उनका साथ दिया। इसके बाद वर्ट अपनी डोंगी पर सवार हो कर एफ मोर को रवाना हुआ। पाठकगण ! जिस गुलदस्ते को फ्लोरा फी खिडकी में सर रिचर्ड और चर्ट ने देखा, यह वाही गुलदस्ता था जिसका हाल आपको पिछले ययान के अन्त में मालूम हो चुका है। -ries in- - पांचवां बयान "जब मुझको तुमसे मिलने की जरूरत होगी तो में एक 'गुलदस्ता अपनी सिडफी में रख दिया करूगी बस तुम समझ जाना यह बात जो फ्लोरा ने विदा होते ससय हर्ट से कही थी, उसके दिल पर जम गई थी । वह बडी बेचैना से उन श्शारे की बाट जोहता था जिसकी उसको उम्मीद दिलाई गई थी और यही धजह थी कि सर रिचर्ड के मुंह से गुलदस्ते का नाम सुन कर उसने जल्दी से दूरबीन उनके हाथ से छीग 'ली थी। जिस समय यह डॉगी पर सवार था, उसका दिल आशा 'और निराशा के समुद्र में गोते खा रहा था यद्यपि वह जानता
--
मैं
किले की रानी
सूरत देखते ही सब भूल गई । हाय ! अब तो केवल इतना
याद है कि प्यारे ! बिदा ( सिसक कर ) हमेश के लिये
विदा!
हुघर्ट ने फ्लोरा को अपनी छाती से लगा लिया और दोनों
इतना रोये कि हिचकी बन्ध गई।
हर्ट । हा प्रिये ! मैं तुम्हारी या मदद करू ? क्या
नम्रता से तुम्हारे पिता से प्रार्थना करू १ क्या वह हम दोनों
पर दया करेंगे? या प्यारी फ्लोरा ! मैं तुमसे यह कह
कि
तुम मेरे साथ कहीं चली चलो मेरी तो कुछ समझ में नही
आता कि क्या फरु !!
फ्लोरा०। (आंसू पोंछ कर) नहीं प्यारे १ यह नहीं हो
सकता, इसमें मेरे पिता की अप्रतिष्ठा होगी और मै अपने बूढे
चाप की येइजती नहीं चाहती।
हवर्ट । हाय ! तो क्या अव फोई उपाय नहीं है ?
फ्लोरा०। कोई नहीं।
यह ऐसी बात थी जिसने एवर्ट और फ्लोरा दोनों का
, दिल तोड दिया।
फ्लोराकाहां, मुझे और क्या कहना है ? तुम्हें अच्छी
तरह देख लू, शायद यह पाखिरी मुलाकात हो। यह प्यारा
हाथ (चूम फर) यह प्यारा हाथ शायद आखिरी दफे मेरे हाथ
है।ऐ मेरे चाहने वाले ? मेरे चाहने थाले ! मेरे प्यारे ! मुझे
गले से लगाओ, मैं और कुछ नहीं चाहती। एक निगाह
-
-
-
.
उपन्यास
.
एक मुहब्बत की निगाह इधर देखो, हां. बस, अब
मुझको जाना चाहिये।
बट० । (वेचैन हो कर) क्या जुल्म के पजे में फंसने के
लिये
होरा० । नहीं, यरिक अपनी जान देने के लिये, अपने वाप
इजत बचाने के लिए। मच्छो मेरे सच्चे चाहने वाले ! में
विदा होती हूं-जाती है।
पर्ट। विदा
'कहते ही कहते हर्ट मूर्छित हो कर गिर पड़ा, लेकिन
सोरा पहिले ही बिजली की तरह चमक कर गयव हो चुकी
थी । उसको मालूम भी न हुआ कि प्यारे हूधर्ट पर क्या हुआ।
पर वह इतनी जल्दी क्यों चली आई १ वह इस लिये चली
आई कि अपने प्यारे के पास देर तक खडे रहने से उसकी
इन्छा कहीं यदल न जाय और उसको अपनी वाप की आशा
का उल्लङ्घन न करना पडे ।
वि०१
' जच पलोरा यहुत दूर निकल आई तो रुकी और एक
चट्टान के टुक्डे पर बैठ कर आप ही आप कहने लगी, "विदा
यह पयों पया अय कभी न मिलेंगे? बेशक,
अप कभी न मिलगे।"
। इससे ज्यादा वह कुछ न कह सकी और फूट फूट कर
रोने लगी। हम नहीं कह सपते कि उस वक्त उसके दिर का
क्या हाल था। बहुत देर के बाद रसके स्वास टियाने हुए
1
होती है
.
.
किले की रानी
ओर जर वह करने किले में दाखिल हुई तो उसने एक अप
रिचित आदमी को अपने बाप के साथ नाग में टहलने देखा।
वह उस समर कदापि अपने बाप के सामने न जाती क्योंकि
रज ओर अफसास के कारग उसका चेहरा उतरा हुआ था,
लेकिन सर माइलिज ने यकायक उसको देख लिया और
पुकार कर कहा, "फ्लोरा! यहां भाआ।" फ्लोरा जव पाल
पहुची तो अजननी आदमी ने जो वास्तव में सररिचर्ड थे सिर
पर से टोपी उतार कर मलाम किया। फ्लोरा भी सलाम
फा जवान दे कर बडे अदव से उनके पास खड़ी होगई ।
सर मा० । देखो फ्लोरा यह मेरे बडे पुराने दोस्त हैं।
फ्लोरा० । मैं बहुत प्रसन्न हूं कि आप हमलोगों पर करा
कर यहां आये।
सर रिचई० 1 मैं ईश्वर का धन्यवाद करता ह कि उसने
चरमाइलिज को तुम सी भली ओर सुन्दरी बेटी दो। तुमको
तो काहे को मालूम होगा कि मैं ओर यह (सरमाइलिज) कैसे
कैसे अवसरों पर एक साथ रहे हैं। तुम उस वक पैदा भी
नहीं हुई थी।
सरमा० । फ्लोरा देखा यह भो पडो खुशो की वात हे
कि यह बहुत मुहत के बाद आज यहा मा गर हैं। अच्छा तो
तुम जा के इनके वास्ते पर कमरा सजादा ओर टेवुल पर
भोजन भो चुनवा दा, लेकिन चार भादमिरों के लिए खाने
-
उपन्यास
पा इन्तजाम करना पडेगा पयोक्ट्रेिसी भी आज आने का
वादा कर गया है।
ट्रेसी का नाम सुनते ही पलोरा का चेहरा पीला पड
गया। सररिचर्ड ने तुरन्त उसफा भाव समझ लियो ।
सर मा० । लेकिन फ्लोरा ' इस वक्त तुम्हारा चेहरा क्यों
उतरा हुआ हुआ है?
फ्लोरा०। (घबराहट के साथ इधर उधर देस कर ) जी
कुछ नहीं, यही धूप से जो चली आती है।
सर मा० । अच्छा जाओ । (फ्लोरा के जाने के बाद
सररिचर्ड से तुम मेरी लडकी को देख कर खुश तो जरूर हुए
होगे। देखो वह जितनी सूक्सरत है उससे ज्यादा हुक्म
मान्ने वाली है और अब उसकी शादी भी होने वाली है।
सर रि० । क्या ऐसी के माय ?
सर मा० । हा लेकिन आपको कैसे मालूम हुआ?
सर रि० । (कुछ सोच कर ) क्या मुझे कैसे मालूम
हुआ ' फ्यों, मालूम क्यों न होता। ट्रेसी का नाम तुम्हारे मुह
र आते ही मैं देख चुका था कि फ्लोरा के चेहरे पर सुशी
कलकने लगी थी।
थोडी देर में ऐसी भी पहुंच गया। उसने घोडे से उतर
र सलाम पिया और पास पहुंच पापहने लगा"क्यों र.
दलिज! यह आप के साथ कौन है"
सर मा० । यह हमारे याहुत पुराने मित्र है।
फिले की रानी ६२ देसी० । हां मैं समझा ! यह भी कोई फौजी आदमी है। पद्यपि फोजी लोग उजह होते हैं तथापि मैं आप से मिल कर बहुत खुश हुआ। उहँ ! आप के कपडे इतने मैले क्यों हो रहे शायद अपाने बहुत दूर का सफर ते किया है ? सरमा । (ट्रेसी को बेहूदी बातों को काटने की इच्छा से) हाँ, यह अभी बहुत दूर से चले आ रहे हैं। तुमतो इन को नहीं जानते होगे। यह वादशाही दरवार के एक प्रतिष्ठित उहदे. दार हैं। ट्रेसो हमारे चाल्स के दरबार के? लेकिन इको पोशाक का यह हाल ! (हस कर ) आप बडे सीधे . सादे आदमी जान पड़ते हैं । ( सररिचर्ड से) यद्यपि शाही दरबार से मुझसे कुछ भी सम्बन्ध नहीं है, तो भी मैं अपने कपड़ों का बहुत खयाल रखता हूँ। देखिये न, यह मेरी लाल जैकेट कैप्सी अच्छी है । मैं समझता है आपने इसको जरूर पसन्द किया होगा। संर रि०। (लापर्वाही से) जो हा, अन्धी क्यों नहीं है.॥ सर मा० । अव आप लोग अन्दर चलें तो ठीक है। ट्रेसी० । अच्छा आप जाइये, मैं तो अभीजरा वगीचे की सैर करूगा ॥ सरमा० । अच्छी बात है। सर माइलिज़ अपने मित्र का हाय पकडे हुए बाग में टह- लते हुए मकान की तरफ चले ।
उपन्यास
सर मा० । मैं नहीं समझ सकता कि तुमने मेरे होने वाले
दामाद के विषय में क्या सोचा, लेकिन यह यात अघश्य है
कि तुम धीरे धीरे उसका स्वभाव जान लोगे ॥
सर रि०। हा, क्यों नहीं ॥
सर मा०। लेकिन तुमने इतना तो अवश्य देखा होगा कि
यह कितना सूबसूरत है ।।
सर रि० 1 यहुत।
सर मा० । और धनवान् भी है । इ पके सिवाय पहुत ही
सोवा सादा और भोला है, लेकिन इतनी पान है कि जरा रुपये
के मानले में कहा है।
सर रि० । खैर यह तो कायदे की बात है ( कुछ सोच
फर) हा यह तो तुमने बताया ही नहीं कि यह शादी होगी
कब तक?
सर माह ठीक कहा, माई फ्लोरा बहुत भली लडकी
है। वह तो इतनी सीधी हे कि उसने साफ साफ कह दिया
कि शादी में कुछ धूमधाम न की जाय, नहीं तो जानते ही हो
कि ऐसी को-रुपये की कुछ कमी हे ही नहीं लेकिन यह भी
फ्लोरा के कहने से राजी हो गया कि फेल विवाह हो जाना
चाहिये, बस और कुछ जरूरत नहीं।
सर रि०ा तो फ्याइम विवाह में और लोग शामिल
ने होंगे।
सरमा० नहीं नहीं यह नदी होगा कि मेरे पुराने दोस्त
किले की रानी
भी शामिल न हो, मगर बहुत धूमधाम न होगी। पर तुमको
तो जरूर ही दो चार दिन ठहरना पडेगा।
लर रि० । तो क्या यह शादी बहुत जल्द होने वाली है ?
सर मा० । हां बस इसी शनिवार की रात को ॥
सर रि० । ओह इतनी जल्दी । आज क्या है? बुधवार ?
सर मा०। हां वस तीन दिन और बाकी हैं। क्या तुम
अपने पुराने मित्र की प्रार्थना स्वीकार न करोगे? देसो यदि
सम्भव हो तो जरूर ठहर जाओ।
सर रि० । अच्छा, मै ठहर जाऊगा।
सरमाइलिज ने धन्यवाद दे कर अपने मित्र को उस कमरे
में पहुचा दिया, जिसको उनके लिए साली करा दिया था
और
खुद अपने कमरे में जा कर मन ही मन सोचने लगे,"यह
बहुत अच्छा हुआ कि सर रिचर्ड तीन दिन तक यहां ठहर
जायेंगे, नहीं तो फ्लोरा से जान छुडाना मुश्किल हो जाता
हर घडी सिवाय रोने के और कुछ नहीं, इसकी भी कोई हद
है ? जिम समय देखो चेहरे पर मुर्दनी छाई है, जब देखो
आंखों से आंसू निकल रहे हैं। भाई ! मुझको तो इन बातों से
नफरत है। सररिचर्ड के ठहर जाने से बहुत अच्छा हुआ,
मुझे यह भी लोग न कहेंगे कि तालच में आ कर लडकी को
जबरदस्ती व्याह दिया, क्योंकि सररिचर्ड तो यहां मौजूद ही
रहगे।"
इसी बीच में जब सररिचर्ड अपने कमरे में पहुचे तो उ•
उपन्याम
न्होंने विल्मट फो कमरे की चीजे ठीक करते देखा । सररिचर्ड
एक कुर्सी पर बैठ कर वडी देर तक किती वात पर गौर
करते रहे, इसके बाद विलमट से बोले, "कधी वित्मट । अव
तुम्हारे दर्द का क्या हाल है ?"
पिल्मट। आप की कृपा से अर में पिल्कुल अच्छा ह ।।
सर रि० । तुम जानते हो कि कल रात को हम लोग कहा
हरे ये?
विल्मए । हुजूर रोडल में ।
सर रि० । अच्छा तो तुम अभी बरोडल जाओ। यहा कुछ
बहाना कर देना कि यहा कोई चीज छूट गई है । म एक बहुत
जरूरी काम तुमका सपुर्द करना चाहता ह ।।
गिल्मर० । यहुत अच्छा ।।
सर रि० । मुझको जरा फलम दानात दो, मैं एक चिट्टी
लिख दूंगा । चारशाह चारर्स आज कल "वारविक" में आये
हैं उन्ही के पास यह चिट्ठी भेजनी होगी "धारविक" यहा से
फितनी दूर हे ?
विरमट । दो सौ मील।
सर रि० । दोलो मीरा!पैर, अभी इतना समरह फि में
अपनी चिट्ठी भेज सा ।
वित्मा ने लिखने का सामान ला फर टेबुल पर रख दिया
और मर रिचर्ड ने दस मिनट में एक चिट्ठी लिस फर लिफाफे
में फरने याद रिमट को दे फार कहा।
किल की रानी
६६
"लो यह लिफाफा लो और चले जाओ। देसो जरा भी
देरी न होने पाये। मैं तुमको अशर्फियों की एक थैली देता है,
इसे ले जाओ बरोडल में पहुच कर एक आदमी को कुछ रुपया
दे कर ठीक करना और उसको एक, बहुत तेज चलने वाला
घोडा किराये पर दिला कर तुरत वारविक भेज देना । लेकिन
उससे कह देना कि शनिवार को सूरज डूबने से पहिले इम
चिट्ठी का जवाब हमारे हाथ में ला दे, हम उमको इनाम में
वहत कुछ देंगे। अच्छा अव तुम जाओ।"
विल्मट सलाम कर के चला गया। थोड़ी देर में भोजन के
लिए बुलाहट हुई और सररिचर्ड उस कमरे में चले गए जहा
सर माइलिज, फ्लोग और देसी उनकी बाट जोह रहे थे।
छठवां चयान
इस कमरे की सब चीजें फ्लोरा के हाथों से सजाई ग
थीं, परन्तु इस भोज में केवल चार आदमी शामिल थे, जिनम
से एक फ्लोरा भी थी । वह अपने चेहरे को हंसमुख बनाएं
रखने का बहुत उद्योग करती थी, लेकिन उसको यहा के
चहल पहल जरा भी न भाती थी। इस समय उसकी आख
के सामने उसके प्यारे हर्ट की तस्वीर फिर रही थी,
वह पटी अफ्लमन्द थी और बहुत समझ बूझ, कर फार
परती थी। इसी को देसतेरी उसका चेहरा, गुस्से से लाद
६७
,
उपन्यास
हो माता था और उसकी चेहूदी बातें उसके दिल पर छुरी का
काम करती थीं, लेकिन वह अपने भाव को इतना छिपाये हुए
थी कि उसके मन की बात कोई नहीं समझता था । यद्यपि
वह बहुत सीधी सादी और भली लडकी थी, परन्तु यदि
कोई यह पूछे कि वह छिप छिप कर हूवर्ट से क्यों मिलती थी,
तो इसका जवाव चे ही लोग दे सकते हैं जो यह बात जानते
हैं कि प्रेम क्या चीज है। तो भी फ्लोरा अपने बाप के वास्ते
अपनी जान तक दे देने को तैयार थी। वह यह बिल्कुल नहीं
सोचती थी कि उसका चाप कितना स्वार्थी है और वह
सिवाय अपने फायदे के अपनी प्यारी बेटी के हानि अथवा
लाभ का जरा भी खयाल नहीं करता। सर माइळिज अपने
पुराने दोस्त से मिल कर बहुत खुश था और उन्हीं से ज्यादा
गातें भी कर रहा था, अगर ऐसी कोई बेहदी वात कहता भी
तो यद कोई दूसरी बात छेड देता था।
सर रिचर्ड के विषय में हम कह सपते हैं कि नह बहुत
ही गम्भीर आदमी थे। सभी कभी यह सब के चेहरे की
तरफ देख लेते थे, जिससे जान पडता था कि यह कुछ
जानना चाहते हैं। ट्रेसी के बारे में सिर्फ इतना ही फहना
काफी होगा कि वह चाहियात यात घहुत वकता था।
भोजन के बाद सर लोग तो बात करने लगे, लेकिन ट्रेमी
रावी था, इसलिये यह शराय की बोतलें साली करने रागा।
ट्रेमी०। (सर रिचर्ड से) म मापसे मिल कर यदुत
.
न
1
-
किले की रानी
खुश हुआ, लेकिन आपको पोशाफ देख कर नहीं, क्योंकि
इसके बारे में तो चुप ही रहना अच्छा है।
सर मा० ।मेरे दोस्त सररिचर्ड ने बहादुरी के यडे या
काम किए हैं। में उस समय की बात कहता है जब हम दोते
फौज में एक साथ थे।
सर रि० । र, यह तो तुम तारीफ करते हो, लेकिन तु
किससे कम थे?
ट्रेसो० । वेशक, मैं भी मानता हु कि आप दोनों बडे वह
दुर थे, लेकिन इससे फायदा १ मान लीजिये कि आपने मन
को टाग चीर डाली और इन्होंने खटमल को अकेले म
डाला, तो इससे क्या लाभ ? इसी से तो मैं चुड्डी के प
बैठने से घराता है।
यह कर ट्रेसी शराय उडेल कर पीने लगा । फ्लोरा वह
उठ कर दूसरे कमरे में चली गई और सरमाइलिज को
बहुत क्रोध चढ आया, किन्तु सररिचर्ड चुपचाप थे,-उ
चेहरे से पिटकुल नहीं मालूम होता था कि देसी की वे
-चातों का उन पर क्या असर पडा।
देसी ग्लास पर ग्लास चढाता जाता था। सररि
योडी देर तक कुछ सोचने के बाद सरमाइलिज ले र
"तुम्हें कर्नल डार्मन का भी कुछ हाल मालुम हुआ?'
सर मा० नही, मैं क्या जानू ।
1
६
.
उपन्यास
१
E!
सर रि०ा तो तुम लन्दन का हाल बिल्कुल नहीं जानते?
और सुनो, बेचारा फर्नल डार्मन मर गया।
सर मा०1 मर गया! अफसोस !! यह कर
सर रि०। यही थोडे दिन हुए।
सरमा०। क्या कुछ बीमार था?
। सर रि० । यीमार तो कुछ भी नहीं था,यस मौत की वीमारी
गे, लेकिन जान पडता था कि उसकी मौत उसी दुस से
हुई, जो उस वक्त उसको हुआ था जब हम तुम दोनों उसी
कौज में थे। उसके दुस का कारण अर्थात् वह घटना तो
तुमको याद होगी!
३.सर मा० । सूर याद है । अफसोस । कैसी दर्दनाक यात
.
?
ऐसी० । कौन बात
सर मा० । कुछ नहीं, वह एक बडा लम्बा चौडा किस्सा
ऐसी० । लेकिन कोई सवय नहीं मालूम होता कि मैं वह
किस्ता न सुन सक!!
सर माइलिज चाहता था कि किसी तरह मी खुश रहे,
इस लिये सर रिचर्ड से कहा,-"क्या आप इतनी तकलीफ
करेंगे कि कर्नल की काहानी देसी के आगे बयान करें?
सर रि०ा हा हां, में अपने दोस्त का हुक्म जरूर मानू गा।
अच्छा सुनिये,-
AN
किले की रानी
यह कह कर सर रिचर्ड ने इस प्रकार कहना शुरू
और सब लोग ध्यान दे कर सुनने लगे।
जित फौज में में ओर सर माइलिज नौकर थे, उसी कार
में डार्मन नामक भी एक कर्नल था और उसकी मातहती में
फौज का एक पूरा हिस्सा था । फर्नल डार्मन यहुत हो नेक
आदमी था, लेकिन उसमें एक ऐ यह था किवह कुछ घमडी
था, जिन्के सवा से वह अपने उन साथियों से जो उहदे में
उससे नीचे थे, वहुत मेल जोल नहीं रखता था।
जिस समय फर्नल डार्मन फौज में दाखिल हुआ था, उस
समय उसकी उम्र अट्ठाइस वर्ष की थी। कुछ ही दिनों में
उसने ऐने अच्छे अच्छे काम किये कि फौज के छोटे बडे सब
असर उससे बहुत खुश हुए। भला वे खुश क्यों न होते
अच्छे और मेहनती आदमी को सब ही चाहते हैं। खैर, फोन
में दाखिल होने के दो वर्ग वाद कर्नल ने एक बहुत ही खूब
सूरत लेडी से शादी की और उसको बहुत प्यार करने लगा
लेकिन उसकी स्त्री में दो एक बात ऐसी यो जिनसे वह फु
परेशान रहता था। वह बहुत गुस्सैल थी, जरा जरा सो बात
पर रिगड जाती थी और यह चाहती थी कि सब काम उसके
मन के माफिक हो, इतना होने पर भी उसमें एक ऐसा गु
था जो उसके सब दोपों को दूर कर देता था अर्थात् वह बड़े
ही खूबसूरत थी, अगर वह किसी दावत या जल्से में जात
तो सब आदमियों की निगाह अधिकतर उसी पर पड़ती थी
+
उपन्यास
उसकी आवाज इतनी सुरीली थोक सब आदमी उसकी
बातें सुनने की इच्छा करते थे। उसकी आंखें ऐसी रसीली
थीं कि सर यही चाहते थे कि वह एक बार मेरी ओर देस
ले, चाहे गुस्से ही से क्यों न देखें। इन्हीं कारणां से कर्नल
उसको घदुत प्यार करता था और उसको इस बात का धमड
था कि उसे ऐनी सूसूरत स्ना मिली है कि उससे पढ कर
दुनिया में शायद ही कोई दूसरी औरत होगी।
कर्नल को उस सूरसूरत जोरू का नाम एमिलिन था ।
यह बात भी मशहूर थी कि पमिलिन के राप ने उसकी शादी
कर्नल के साथ जबरदस्ती कर दी थी, नहीं तो वह खुद उससे
विवाह करना नहीं चाहती थी। उसकी इच्छा किसी और के
साय अपनी शादी करने को थी जिपको वह पहले हो से प्यार
करती थी। यद्यपि एमिलिन ने चाहा कि उसका बाप अपना
इरादा बदल दे, परन्तु उसने अपना इरादा नहीं बदला, व वल्कि
कुछ दिन के लिय उसको फ्रांल रवाना कर दिया। पमिलिन
के जाने के बाद उस आदमी का हाल कुछ नहीं मालूम हुआ
जिसको वह प्यार करती थी। आठ महीने के याद एमिलिन
फास से घर लोटरी। उस समय उपके वारने फर्नल आर्मन
को बुला भेजा और दोनों की शादी ज परदस्ती कर दी ।
फर्नल की शादी के एक महीने के बाद एक दिन पक नया
आदमी फौज में आया। उसके कपडे बहुत मैले थे। यह नहीं
कहा जा सकता कि उसने कभी अच्छी पोशाक ने पहिनी
चल्कि
किले की रानी
होगी, क्योंकि देखने में वह गन्दा नहीं मालूम होता था,
उसका बदन सुडौल और खूबसूरत था और अच्छी पैशाक
उस पर अवश्य ही खूब भली लगती। उसने फौज के सबसे
वडे अफसर से प्रार्थना की कि वह फौज में भर्ती होना
चाहता है । अफसर ने कर्नल डार्मन की सिफारिश चाही।
निदान वह कर्नल डार्मन के पास पहुचा उन्होंने उसकी सि-
फारिस तो नहीं की, लेकिन यह कहा फि भर्ती हो जाने के बाद
मैं उसकी चाल चलन जांच लूगा तब उसके बारे में कुछ
कहगा।
खैर वह आदमी फौज में रख लिया गया और रजिस्टर
मे उसने अपना नाम हार्वी लिसाया । कुछ ही दिनों में उसने
अपना काम अच्छी तरह सीस लिया और मिहनती तथा
खुशमिजाज होने के कारण राव का दोस्त बन गया,
लेकिन
हावी में एक विशेष बात थी जो बहुत ही गौर करने से मा.
लूम होती थी अर्थात् उसके, मिजाज में बहुत धेचैनी थी.
क्योंकि उर के चेहरे से मालूम होता था कि वह कुछ उदासी
और अफसोस में रहता है ।।
निदान धीरे धीरे समय बीतता गया। सर्दी का मौसिम्
बीत गया और वसन्त ऋतु का राज्य स्थापित हुआ। चार
तरफ का दृश्य सुहावना सुहावना दीसने लगा । यह मकान
जिसमें कर्नत की स्त्री पमिहिन रहती थी, उन मकानों है
कुछ दूर पर था जो फौली लोगों को सरकार से मिले थे।
1
उपन्यास एक दिन इसी मौसिम अर्थात् १मिल के महीने में शाम के वक्त अपेरेठे रहने के कारण मिलिन का जी बहुत घबरा उठा, क्योंकि उन दिनों फर्नल डार्मन हमेशा अपने फौजी दोस्तों के साथ रहा करते थे, एमिलिन उस धक्क अपने घर से जी बहलाने के लिये अफेले चल खसी हुई। वर घदी देर तक घर घडे मैदानों और हरे भरे खेतों की मर फरती रही, जिनकी लहर हाती हुई सब्जी पर उसकी निगाह रक रफ कर पडती और मानन्द रेती थी। इस सर देर लग गई । पमिलिन थोडी ही दूर भागे गई होगी कि उसे कुछ धूबा दिखाई दिया जो एक घाटी में से उठ रहा था। उसने सोचा कि शायद वहा कुछ वस्ती होगी। यह अभी यही सोच रही थी कि उसे कुछ खुशी की आवाजें सुनाई दी। यह मालूम हुआ कि जैसे कुछ लोग हस हस कर बात कर रहे हैं, उसमें बूढे बच्चे सब ही की आवाजें मिली जुली मालूम होती थीं । एमिलिन ने उस तरफ ज्यादा ध्यान न दिया और और उसको उधर ध्यान देने की कुछ ऐसी जरूरत भी नहीं थी क्योंकि यदि यह मालूम हो कि इस जगह कुछ बस्ती है तो सारजुब ही क्या था ! सर रिचड ने इस किस्से को यहा ही तक कहा था कि देसी घोल उठा, "और वहां रहते कौन लोग थेne- सर रि० देखिये, आप ही मालूम हुभा जाता है | यह कह कर सर रिचर्ड ने फिर पहना शुरू किया। - 17 -
-
किले की रानी
-
उस वक्त एमिलिन ने सोचा कि सैर करने में बहुत देर
हो गई है, क्योंकि सूरज डूब चुका था और अंधियारी चारों
ओर से झुकी आती थी, इसलिये वह आगे न बड़ी और जब
उसने अन्दाज किया तो उसको मालूम हुआ कि उसको अमी'
घर तक पहुचने में कम से कम एक घटा लगेगा। खैर, वह
अपने घर की तरफ मुडी, लेकिन दत ही पाव कदम आगे
बढ़ी होगी कि उसको ऐसा जान पड़ा कि कोई पीछे पोछे आ
रहा है। यह देख वह डरी, परन्नु तुरन्त ही एक छोटे बच्चे के
हमने की आवाज उसको सुनाई दी। उसने मुड़ कर देखा तो
मालूम हुआ कि वह एक छोटा बच्चा है जिनकी उम्र छ.
वर्ष
के लगभगाहोगी। एमिलिन ने उससे कडी आवाज में पूछा,
"क्यों ! तू क्या चाहता है ? लडका रोने लगा और बड़े अफ
सोस के साथ घोला कि "देखो, तुम मुझ पर नाराज न होश्रो
मैं तुमको हाथ जोडताद, मुझको एक पैसा दे दो, नहीं तो
वह मुझको मारेंगे और कहेंगे कि मैं किसी काम का
नहीं है।"
एमिलिन० 1 (लडके को मैलो कुचैओ पोशाक से घबरा
कर, लेकिन फिर भी मीठी ओर सुरीली आवाज में ) कौन
मारेंगे?
-
लड़का (उस तरफ इशारा कर के जिधर से धुमा उठ
रहा था) वे गिनी ।
प: एक जमलो जातिका नाम है।
७५
उपन्यास
एमिलिन० बिहा तो तुम गिप्लियों के साथ रहते हो!
क्या वे तुमसे मेहरबानी का वर्ताव करते हैं या हमेशा तुम पर
कडाई करते हैं ? वे तुम्हें क्यों मारते हैं । बड़े बेरहम हैं ' तुम्हें
साने पीने की तकलीफ तो नहीं होती और हा,
क्या वे तुम
से हमेश मीस मगवाया करते हैं ?
लड़का तुम तो ऐसी जल्दी जल्दी कह गई कि जरा भी
मेरी समझ में न आया ॥
एमिलिन० । उह ! गया है बिल्कुल । न मालूम कौन हे,
कोई चोर चोर होगा। (जोर से ) अच्छा लो॥
यह कहते हुए उसने चवन्नी उस लड़के के हाथ में रख
दी और चल पडी। रास्ते भर वह न मालूम किन किन बातों
को सोचती जाती थी। उस वक्त उसके चेहरे से बहुत उदासी
टपकती थी। जिस समय वह अपने वगले पर पहुँची, उसने
अपनी लौडी फो दर्वाजे पर खडी देखा, मानो वह उसी की
बाट जोह रही थी। उसने देखा कि लोंडी के मुख पर हवाइयाँ
उड रही हैं और वह बहुत ही घबडाई हुई है । लौडी ने देखते
ही आगे बढ कर कहा, "हार । माप इस वक्त पहुँची।"
एमिलिन०1(घरा फर) क्या एञ्जिला ! क्या हुआ?
क्या कर्नल-मेरे पति, घर में हैं ?
एअिला। जी हां, घर में हैं और
एमिलिन०। (घयरा फर) और क्या !!
पमिला। और
..
.
दाय॥
.
।।
-
11
किले की रानी
पमिलिन। अरे कुछ कह भी तो कि क्या हुआ?
एञ्जिला। कर्नल .. ...
पलिमिन०। (बेचैन हो कर) वस जो कुछ कहना हो,
जल्दी कहो, मैं ज्यादा देर तक नहीं रुक सकती, तुरन्त कहो ॥
पशिला। घायल हो गए !"
एमिलिन घायल ! सो फैसे?
वह जवाब के लिये न ठहरी और फौरन् अन्दर चली
गई । सीढियों का एक सिलसिला ते पर के वह अपने पति के
कमरे में पहुँची । कर्नल डार्मन अपने पलग पर लेटा हुआ था।
उसके गाल पीले हो गए थे और चेहरे पर मुर्दनी छाई थी,
लेकिन जब उसने एलिमिन को अपने पास देखा तो वह कुछ
मुस्कुराया ॥
एमिलिन। तुमे
कर्नल । नहीं कुछ नही, वस थोडे दिनों में अच्छा हो
५
जाऊगा ॥
ܝ
पमिलिन० प्यारे डार्मन ! क्या तुम धायल हुए हौ ! तुम
मुझसे छिपाते क्यों हो? हाय ! तुम घायल हुए और मैं यहाँ
मौजूद न था !
कर्नल।सैर कुछ हर्ज नहीं बल्कि मैं तो सुश हूँ कि उप्त
समय तुम यहा मौजूद न थीं, नहीं तो मेरा खून तुमसे न देखा
जाता, अवश्य ही तुमको दुप होता ।-
पमिरिन कर्नल के पास बैठ गई । उसने देखा कि कर्नल
।
।
७७
उपन्यास
फे पावों पर पट्टिया वधी हुई हैं और वह विरफुल कमजोर हो
रहा है। एमिलिन का जी भर आया। यद्यपि इसका मिजाज
कडा था, लेकिन वह ऐसी भी नहीं थी कि अपने पति को
भूल जाती। वह अपने मन में अफसोस करने लगी कि कर्नल
के घायल होने के समय वह घर में क्यों न रही, ताकि वह उसे
हाथों हाथ लेती, उसकी सेवा करती, उसमे घावों को अपने
हाथों से वांधती और उसके पास बेठकर उसका जी बहलाती।
उसकी दो तीन घण्टे की गैरहाजिरी में क्या से क्या हो गया !
सेर उसने कर्नल से घायल होने का सवर पूछा ओर कर्नल
ने सर हाल बयान किया।
देसी० । हा तो कर्नल के घायल होने की क्या वजह थी ?
सर रिचर्ड० । देखिये, वह भी कहता हूँ। जिस वक्त से
हार्वी फोज में भरती हुआ, कर्नल डार्मन उसको हमेश
नफरत की निगाह से देखता था। यह नहीं कहा जा सकता
कि क्यों, लेकिन देखने में हावी बहुत ही नेक और सीधा
आदमी मालम पडता था और वह अपने दोस्तों से बहुत
अच्छा बर्ताव करता था, इसी लिए मय लोग उससे खुश
रहते थे, शायद इसी सवव से कर्नल डार्मन उपसे चुरा
मानता था, क्योंकि प्राय लोग ऐसे भी होते हैं कि सुद उनकी
चाल चलन अच्छी नहीं होती तो वे इतरों से याद रखते हैं।
कर्नल डार्मन की यात चुरा मालूम होता था कि हावी को
लोग इतना क्यों मानते हैं। उसकी चिन्ता बढ़ती गई और
.
+
-
किले की रानी
,
आखिर उसने हार्यो को नीचा दिखाने का विचार किया,
लेकिन उसकी पक भी चाल न लगती थी क्योंकि हार्वी
अपना काम बडी मुस्तैदी से करता था, कर्नल ने मन में
ठान लिया कि किसी न किसी मौके पर उसको जरूर नीचा
दिखना चाहिये।
जिस दिन एमिलिन सैर को गई थी उस दिन की बात है
कि कर्नल डार्मन अपने चरावर घाले उहदेदारों के साथ
भोजन कर रहा था। जव भोजन समाप्त हुआ तो सब लोग
हंसी दिल्लगी की बातें करने लगे। कोई उठ कर अपने घर
चला, किसी ने शतरज विछाई और दो चार आदमी बैठ गये
कि घटे दो घटे इसी मे जी बहलावें । कर्मन डार्मन चुरुट पीता
हुआ कमरे के बाहर निकल आया और इधर उधर टहलने
लगा। थोड़ी देर में उसने देखा कि दो फौजी,सिपाही उसके पास
से हो कर निकल गये और उन्होंने खयाल भी नहीं किया कि
उनका अफसर खडा है। जब वे लोग कुछ आगे बढ गए तो
कर्नल ने उनको पुकारा । वे पास भाये तो नल ने उन्हें पहि
चाना । एक हार्वी था और दूसरा एक सिपाही ।
फर्नल० । हार्यो ' क्या मैं यह समझू कि तुमने मुझको
देखा नहीं दल लिये मेरे पास से हो कर निकले और मुझको
स्लाम नहीं किया, या यह समझू कि तुम्हारी ऐसी
नादत ही है।
हा: 1 महाशय मैं आपसे माफी चाहता। जान बूझ
.
उपन्यास
कर मैं कमी ऐसा नहीं कर सकता कि अपने अफसर को
सलाम न करू, मुझसे भूल हो गई।
कर्नला। लेकिन मुभको तुम्हारी बात पर विश्वास नहीं
होता । अच्छा यह तोमताओ कि तुमने मुह क्यों फेर लिया?
हार्थो।जी नहीं, मुह तो मैंने नहीं फेरा था।
कर्नल। (दुछ गुस्से से ) तो क्या मैं झूठा हू? अच्छा
अपने साथी से यहो कि यह चलाजाय । मुझको तुमसे कुछ
कहना है और यह मौका भी अच्छा है।
हार्वी का साथी चला गया और जव हार्वी अकेला रह
गया तो कर्नल विगड कर पहने लगा, मैं देखता हूँ कि
तुम्हारी चाल में कोई विशेष बात हे जो मुझको पसन्द नहीं
आती । मैं समझता हूँ कि तुम पढे लिखे भी हो और उसकी
चजह से प्रसिद्ध होना चाहते हो। मैंने प्राय सुना है कि
तुम्हारी बोल चाल बहुत अच्छी है और तुम्हारी बातचीत से
मालूम होता है कि तुम कुछ फिलासोफी भी जानते हो, तो
तुम्हारे मिजाज में नजाफत भी जरूर होगी, क्योंकि पढे लिखे
आदमी प्राय नाजुक मिजाज हुआ करते हैं, लेकिन फौज में
विद्वानों की जरूरत नहीं है, बल्कि ऐसे आदमियों का काम है
जो केवल लडाई और मार काट के लायक हो। मैंने
अक्सर सुना है कि तुम कितोवें भी बहुत देखा करते हो,
तुम्हारे और अफसरों को भी इसकी पर पहुंची है। यह
क्या बात है?
A
८०
,
-
किले की रानी
अब हार्वी ने अपना ढंग बदला। कर्नल की बातों से
उसको मालूम हुआ कि वह बड़ा दुष्ट है, इसलिये उपने उसी
तरह कड़ाई से कहा, जिस तरह कर्नल ने यात की थी, "आप
कहते हैं कि मैं प्रसिद्ध होने की कोशिश करता हूँ। मुझको तो
याद नहीं कि मैंने कभी इसकी कोशिश को हा। रहो मेरे पहने
लिखने को चात, सो में साफ कहे देता हूं कि मेरे अफसरों का
तिर्फ
इतना ही अधिकार है कि वे मेरे उन कामों की जाव
करें जिनके लिये मैं नोकर ह । जब मैं उन कामों को अच्छी
तरह करता होऊ तो उनको मेरे दूसरे कामों में दखल देने की
कोई जरूरत नहीं है।"
कर्नल० । तो तुमको अपने और अपने अफसरों में कुछ
मी फर्क नहीं मालूम होता! अफसरों की बडाई तुम इतनी ही
मानते ही कि वे फौजी कायदे से तुम्हारे अफर हैं. लेकिन
क्या तुम नहीं जानते कि जेन्टिलमैन और मामूली आदमी मैं
वडा भेद है?
हार्वी० । लेकिन मैं नहीं समझता कि जेन्टिलमैन कहते
किसको हैं। क्या बहुत सा रुपया इकट्ठा करने से आदमी
जेन्टिलमैन हो जाता है, या अच्छे कपडे पहिनने से
फर्नल० । तुम नहीं जानते १ खैर। मैं एक अदने आदमी
से ज्यादा बातचीत नहीं करना चाहता ।
हाची ! अदना आदमी ? महाशय मातहा कहिये ।
उपन्यास
धार्गल० नदी में भदना भायमी काइंगा। क्या तुम अपने
को मेरे घरायरममझते हो?
यह कह कर मारे गुस्से फे फर्नल हार्यों की तरफ पदा,
लेकिन फिर कुछ सोच कर रक गया हार्यो नेचारों ओर देखा,
परन्तु यहां कोई नहीं था। कर्नल की बातों से उसे भी गुस्ता
चद आया था। उसको यही मालूम हुआ कि फर्नल उसको
नीचा दिखाना चाहता है, तो भी उसने अपने गुस्से को रोक
कर कहा, "कर्नल डार्मन हम लोगों में विगाड होना बडे
कसोस की बात है । जव से मैं इस फौज में आया तब से
ग मेरी यही इच्छा रहा कि अपने अफसरों को हुक्म
लेकिन आपके घेर्ताध से मैं बहुत दु सिंत हुआ। मैं
र हो फर मापसे कहता ह कि यद्यपि आप मेरे अफसर
जोकि आप ज्यादा तनख्वाह पाते हैं और आरके कपडे
उत दामों के हैं, तो भी आप खूब समझ लीजिये
P
होने में मैं आप से किसी तरह पम
-
फिले की रानी
20
अब हार्वी ने अपना ढंग बदला। कल की बातों से
उसको मालूम हुआ कि वह बड़ा दुष्ट है, इसलिये उसने उसी
तरह कड़ाई से कहा, जिस तरह कर्नल ने बात की थी, "आप
कहते हैं कि मैं प्रसिद्ध होने की कोशिश करता हूँ। मुझको तो
याद नहीं कि मैंने कमी इसकी कोशिश को हो । रहो मेरे पहने
लिखने की बात, सो मैं साफ कहे देना है कि मेरे अफसरों को
सिर्फ इतना ही अधिकार है कि मेरे उन कामों की जाव
करें जिनके लिये मैं नोकर ई। जब में उन कामों को अच्छी
तरह करता होऊ तो उनको मेरे दूसरे कामों में दखल देने को
कोई जरूरत नहीं है।
कर्नल । तो तुमको अपने और अपने अफसरों में कुछ
भी फर्क नहीं मालूम होता! अफसरों की वडाई तुम इतनी ही
मानते हो कि चे फौजी कायदे से तुम्हारे अनर हैं, लेकिन
क्या तुम नहीं जानते कि जेन्टिलमैन और मामूली आदमी में
वडा भेद है?
,
हार्वी० लेकिन मैं नहीं समझता कि जेन्टिलमैन' कहते
किसको हैं। क्या बहुत सा रुपया इकट्ठा करने से , आदमी
जेन्टिलमैन हो जाता है, या अच्छे कपड़े पहिनने से
फर्नल। तुम नहीं जानते ? खैर मैं -एक अदने आदमी
से ज्यादा बातचीत नहीं करना चाहता-
हा। अदना आदमो? महाशय ' मानहा कहिये ।
।
उपन्यास
कर्नल 30 नहीं मैं अदना आदमी कहूगा। क्या तुम
अपने
को मेरे यरायर समझते हो?
'' यह कह कर मारे गुस्से के कर्नल हार्वी की तरफ बढा,
लेकिन फिर कुछ सोच कर रुक गया।हार्वी ने चारों ओर देसा,
परन्तु वहा कोई नहीं था। कर्नल की बातों से उसे भी गुस्सा
चड आया था। उसको यही मालूम हुआ कि कर्नल उसको
नीचा दिखाना चाहता है, तो भी उसने अपने गुस्से को रोक
फर कहा, "कर्नल डार्मन हम लोगों में विगार होना बडे
अफसोस की बात है। जब से मैं इस फौज में आया तब से
हमेश मेरी यही इच्छा रहा कि अपने अफसरों को हुक्म
मानू , लेकिन आपके घाव से मैं बहुत दु
मैं
लाचार हो कर आपसे कहता ह कि यद्यपि आप मेरे अफसर
है, क्योंकि आप ज्यादा तनख्वाह पाते हैं और आरफे कपडे
लत्ते बहुत दामों के हैं, तो भी आप खूब समझ लीजिये
कि भला आदमी होने में मैं आप से किसी तरह कम
खित हुआ
नहीं।"
। कर्नल। तुम भले आदमी कि भले आदमी की दुम !!
। होच: । अफसोस फर्नल' तुम्हारी चाल बिल्कुल नीचों
को सी है। तुम उसके दिल को दुखा रहे हो जो शिरसत का
मताया हुआ है और जिसने लाचारी से तुम्हारी मातहती में
-
,
नौकरी की है
यह कहते पटते हार्थी का चेहग गुस्से से लार हो गया,
किले की रानी
उगकी भौंहों पर चल पड गर और उसने नफरत की निगाह
से कर्नल की ओर देखा।
फर्नल० । नीच ! बदमाश ! तू मेरी इज्जत को नहीं
जानता?
यह सुनते ही हार्वी की आंखों से चिदगारिया निकलने
लगी। उसने विल्कुल नहीं सोचा कि कल मेरा अफसर है
और झपट कर एक थप्पड मार ही तो दिया। कर्नल को
बहुत गुस्सा चढ आया और उसने अपनी तलवार विकाल
कर हार्वी पर वार किया, लेकिन उसका वार खाली गया
और तुरन्त ही उसने अपने को घायल पाया।"
सर रिचर्ड ने यहां तक कहा था कि ऐसी कहने लगा,
"हार्वी ने उसे घायल किया "
सर रिचर्ड०। हा और क्या । यह तो कर्नल के घायल
होने का वृत्तान्त है, आगे सुनो कि कर्नल के जख्मी होने के
कई सप्ताह बाद एक दिन एमिलिन अपने कमरे में बैठी हुई
अपनी जिन्दगी की पुरानी बात सोच रही थी। उस समय
का, जप नई नई उम्मीदों ने उसके दिल में घर करके उसकी
आस्मान पर पहुचा दिया था, वह वर्तमान समय से मिलान
करती तो उसके चेहरे पर-दुस और अफसोस की झलक
दिखाई देती । उसको अपनी उस मुहब्बत का ध्यान आता,
जो उसको घाटर के साथ थी ! उसको ये बातें भी याद आई
कि उसके पाप ने पहिले तो उसको मांस भेज दिया था, फिर
60
८३
T
+
+
उपन्यास
जन्दाती फर्नल डार्मन के साथ उसकी शादी कर दी गी।
उसने सोचा कि पार्नल डार्मन उसे चाहता है, लेकिन
उसीके साथ उसको यह मी,मालूम हुआ कि वह स्वयम्
कर्नल हार्मन को उतता नहीं चाहती कि जितना यक स्त्री को
अपने पति को चाहना चाहिये।
वह यही सोच रही थी कि इतने में एक लोंडी एक चिट्ठी
लिये हुए कमरे में श्राई। एमिलिन ने तिर उडाकर देखा ओर
चिट्ठी ले ली।
पमिलिन । यह चीठी किसके नाम है ?
लौंडी० । मुझे मालूम नहीं, मुझसे यही कहा गया है कि
आपको दी जाय।
एमिलिन। लेकिन इस पर पता वगेरह तो कुछ नहीं
लिपा है ! अच्छा तुम जाओ।
लौडी चली गई तो एमिलिन ने चीठी खोली। अक्षर
देखने से मालूम होता था कि चोठी यहुत जल्दी में लिखी गई
है। चोठी में यह लिखा था,-
पमिलिन!
यम का दूत मेरी जान लेने के लिये सिर पर खडा है।
तुम्हारा
ओफ!,जिसके नाम से आग लग जाती हे
तुम्हाग पति, तुमको बहुत चाहता हे। तुम्हारे मुह से एक
शन्द भी मेरी जान बचाने के लिये काफी होगा। वह तुम्हारा
हषम अवश्य मानेगा।
-
।
- किले की रानी एमिलिन ! अगर तुम्हारे दिल में उस पुरानी मुहब्बत की जरा भी गर्मी वाफी हो, जो किसी समय तुम्हें मेरे साथ थी, तो मैं तुमसे निवेदन करता है कि तुम उस आदमी को जान बचा लो जिसने फेवल तुम्हारे पास रहने के लिये ऐपी तुच्छ नौकरी ससीकार की। पमिलिन । तुम उसी आदमी की जान बचाने की प्रार्थना करता हु. जिपके दिल में तुम्हारी तस्वीर ने उस वक्त से घर फर लिग है, जब तुम्हारी शादी भी नहीं हुई थी। हार्टी के नाम से में फोज में नोकर ओ और यद्यपि दिल नहीं मानता था, लेकिन मैंने कभी यह इच्छा नहीं को कि तुम से मिलू और न यह सोच कर कभी अपना नाम ही किली को बतलाया कि शायद ऐसा करने से भेद खुल जान और तुम्हारी बेइज्जती हो। जव तुम मेदान में सैर करने को निय- लती थीं तो मैं तुमको केवल दूर से देख लिया करता था। उस जमाने को याद करो जब तुम्हें देखने से सुशी होती थी, अब इतना फर्क है कि तुम्हें देखते वक्त दिल से "आह"निक्ल जाती है। मैंने सुना है कि कर्नल कल लन्दन जाने वाला है। यह अगर मेरे कैदखाने पर पहरा देने वाली से फह दे, तो वे जरूर मजूर कर लेंगे कि मैं रात के वक्त निकल जाऊं।। इस अन्धेरी कोठरी में, जहां में कैद है, यहां भी तुम्हारी याद मेरे दिल में है और यह याद उस वक्त तक न भूलेगी, -- . --
-
उपन्यास
जब तक मौत मुझको इस दुनिया से अलग न कर देगी।
तुम्हारा-
वान्टर।
चीठी एमिलिन के हाथ से गिर पडी और वह फर फूट
कर रोने लगी । यह इश्क की आग जो किसी समय उसके
दिल में सुलग चुकी थी, फिर से भभक उठी। उम्मीदों का
यह फूल, जो किसी जमाने में सिल फर कुम्हला गया था,
फिर सरसज्ञ हो गया । वह नाउम्मीदी जो पाटटर के मरने
का समाचार सुन कर उसके दिल में पैदा हो गई थी, योडी
देर के लिये, दूर हो गई। उसको मालूम हुआ कि उसका
सथा चाहने वाला अभी तक जीता जागता है। उसी की
चोठी थी, जिपको याद हमेश उसके दिल में बनी रहती थी,
जिसकी मुहब्बत भरी निगाहें उसके दिल में गुदगुदी पैदा
कर देती थीं और जो किसी समय साये की तरह उसके साथ
साथ रहता था।
- यद्यपि एमिलिन को उम्मीदें सदेय के लिये टूट गई थी,
यद्यपि उसको निश्चय हो गया था कि मेरा प्यारा अइपब
ससार में नहीं है, यद्यपि वह सोच चुकी थी कि अत्र उसको
कभी सच्ची खुशी न होगी, तो भी, जैसा कि घाटटर ने अपनी
चोठो में लिया था कि "अगर तुम्हारे दिल में उस पुरानी मुहम्मत
को जरा भी गर्मी बाकी हो "शक उसके दिल में उस
मुहब्बत की गर्मी अब भी योकी थी, अब भी वह कभी कभी
-
।
-
.
किले कीरानी
"प्यारेवाल्टर प्यारे चाल्टर " कह कर रोया करनीथी, अन
भी पुरानी और नई बातों कामुकाबिला करके पश्चात्ताप किया
करती थी, लेकिन इतनो सव होने पर भी वह जानती थी कि
विवाह हो जाने के कारण वह दूसरे की हो चुकी। वह सूब
जानती थी कि उसको कौन सी चाल चलनी चाहिये । प्राय
वह इन बातों को दिल से भुला देने की कोशिश किया करती
थी, लेकिन यह चीठी उसको ऐसे समय में मिली, जय हे
समझ चुकी थी कि उसका चाहने वाला अब जीवित नहीं है
और अफसोस करते करते वह नाउम्मीद हो चुकी थी, उस
समय उसको मालूम हुआ कि उसका' प्यारा वाल्टर अभी
संसार में मौजूद है और उसने केवल पमिलिन ही के पास
रहने के खयाल से नौकरी की और ऐसी तकलीफ उठाई। ये
ऐप्ती वाते थीं, जिनसे एमिलिन का दिल उसके अधिकार में
न रह सका । यद्यपि उसने अपने बहुत संभालना चाहा,लेकिन
वह सभल न सकी । उसने चीठी पढी, फिर इधर उधर देखा,
फिर पढी, इस तरह उसने कई बार उलट फेर किया । वह
उसके शब्द शब्द पर गौर करती थी और गौर ही नहीं करती
थी, वरन् उनको मुहब्धत की निगाहों से टेसनी थी।
थोसी देर के बाद पमिलिन ने निश्चय कर लिया कि अब
उसको क्या करना चाहिये, उसने अपने थरथराते हुए हार्थी
से चीठी को अगीठी में जला दिया और जब तक उपया एक
एक पर जल कर गांफन हो गया तय तक वह घराहट
--
८७
उपन्याम
की निगाहों से चारों तरफ देखती रही।
दूसरे दिन सुबह से शाम नक यह अपने पति कर्नल डार्मन
को समझाती रही कि वह हारों को, जो अफसर को धुरा
भला कहने और घायल करने के अपराध में पपडा गया था,
छुडया दे। लेकिन उसने यह नहीं बतलाया कि हार्थी हकीकत
में वही मादमी है जिसको वा जान
ज्यादा प्यार करती है।
निदान वह दिन भी आ गया जोहानी के कत्ल छ धाम्ने
निरत किया गया था। सुयह का समय था और यद्यपि यह
समय मुहावना हुआ करता है, लेकिन आज उमकी दिल
चस्पी और उमफा सुहावनापन न मालुम कहा है ? चे ही
फौजी लोग जिन मार काट के सिवाय कुछ अच्छा ही नहीं
लगता है, आज उदाल मालूम पड़ते हैं। लेकिन इस उदासी
का वास सरर है, क्योंकि यह मार काट और होनी है जो
उनको लडाई के मैदान में करनी पडती है । उस समय के
अपनी यहादुरी से काम लेते हैं। उस वक्त उनको अपने मोर
अपने देश के बचाव का पयाल रहता है। उस समय ये देखते
हैं कि उनका दुश्मन उनके सिर पर चढा आता है। ये बाते
उनके जोश को उस समय बढा देती हैं,
परन्तु ऐसी दशा मे
जब कोई भी सिपाही का मददगार न हो, उसके हाथ पांव
रस्सियों से जकड दिये गए हों ओर यह अफसोम निगाह से
उस दुनिया को देखता हो जिससे वह शीघ्र विदा होने वाला
है, तो कौन ऐसा दिल है जो न पसीजे !
किले की रानी
बचाई कि मैं उसके खून का अपराधी न होऊँ ।"
एमिलिन० । तुम्हीं सोचो। मुझसे यह कव देखा जाता
कि किसी बेकसूर का खून करा फर तुम' ईश्वर के अपराधी
।
चनते ॥
.
।
।
.
कर्नल० । उह, यह कोई बात है, यह तो केवल तुम्हारे
टयामय स्वभाव की बातें हैं।
ये दोनों इसी प्रकार बातें करते जा रहे थे कि थोडी दूर पर
इनको एक घाटी दिखाई दी और उसके साथ ही कुछ लोगों
के चाते फरने की आवाजें भी इनके कानों में सुनाई पडीं । उस
जगह कुछ हटे फूटे झोपडे पड़े हुए थे और जिग्मियों के दो
चार खेमे भी थे। एक झोपडे के दरवाजे पर आग जल रही
थी और वहां से धुश्रा उठ कर चारों ओर फैल रहा था । यही
पहुँच फर एमिलिन चौकी । उसको उस दिन की बात याद
आई जिस दिन उसे वह गिप्सी लडका मिला था जिसे उसने
चवन्नी दी थी।
कर्नल डार्मन ने उस समय लौटने का इरादा किया। दोनों
कुछ दूर आगे बढ़े होंगे कि वही उस दिन वाला लडका एमि-
लिन के पास आ कर भीस मागने लगा। एमिलिन ने उसको
थच्छी तरह पहिचान लिया। यह वही लटका था जो उसको
पहिले मिल चुका था।
फर्नल० । (गुम्से से लडके की ओर देस फर) दूर हो
यहां से, तू कौन है ?
कर रोने लगा।
रहा है।
जानते १ तुम नहीं जानते कि मैंने तुम को किस तरह मौत के
उपन्यास
यह कहते हुए उसने अपनी छडी लडके के सिर पर जोर
से मारी, जिससे उसका सिर चकरा गया और यह चिल्ला
पमिलिन० । हाय ! बेचारे बच्चे को पयों मारे डालते हो।
अफसोस ! तुम बडे निर्दयी हो । भला उसने तुम्हारा पण
कसूर किया था। हाय ! धेचारा लडका ! न मालूम यह फिल
का यचा है । देखो तो विचारा कैसा दिलफ विलय कर रो
यह यही कह रही थी कि एक ओर से आवाज आई,
"हेनरी ! हेनरी ! या मेरे व आ।क्या हुआ तू फ्यों रोता
है । वेवकूफाइसीसे समझाता हु कि शाम को न निकला कर"
लडका रोता हुआ उस ओर चला, जिधर से आवाज आई
थी, लेकिन उसके साथ ही एक फटे हुए खेमे से एक लावा
और सूबसूरत आदमी मैले कुचले कपडे पहिने हुए निकल
भादमी० । क्यों रे तुझको किसने मारा है ?
फर्मल डार्मन० 1 (ताज्जुब से ) ओहो, हावी ! तुम हौ !
तुम भी विचित्र आदमी हो । तुम अब तफ यहा क्यों ठहरे रहे?
क्या मुझे बदनाम कराभोगे ? क्या तुम फोजी कानून नहीं
।
आया।
-
4
पजे से बचाया?
घाटर (क्योंकि यह यात्रा में पास्टर था, परन्तु
किल की रानो
कर्नल दार्मन यह हाल नहीं जानता था) क्या आप पूछते हैं
फि में यहां क्यों हैं? मैं..
यह कहते कहते वह रुक गया। कर्नल डार्मल ने फिर
पूछा "हां हां, भागे कहो।"
घाल्टर०। (उदास हा कर ) जो कुछ नहीं, यही कहता
था कि अचानक में इन गिप्तियों की ओर आ निकला। यहां
मुझको यह गरीव बचा मिला, जिसकी बेरहम मा उसकी
खपर नहीं लेती और जो अब भीख मांग कर अपना पेट
पालता है।
फर्नळ० ।(उस गिप्सी लडके की ओर उंगली दिखा कर)
तो क्या वह यही लड़का है ? लेकिन तुमको क्या पढी है कि
तुम दूसरों के बच्चों की फिक्र करते किरो ? अगर तुमने यह
उपकार किया है, तो भी यह ठीक नहीं है। क्या तुम नहीं
जानते कि अगर यह मालूम हा जाय कि मैंने तुमको चुरचाप
भगा दिया है, तो मेरी कितनी बदनामी होगी (लडके की
तरफ देख कर ) यह कोन लडका है ? कैसा गन्दा
वारदर० । महाशय ! यह मेरा लडका है।
यह अद्भुत बात सुनते ही पमिलिन बेचैन होकर भर्राई हुई
आवाज में चीख उठी, वाल्टर वाल्टर क्या यह . . यह
हमारा बच्चा है ?" वह अपने को रोक न सकी। जोश में आ
उसने जिप्सी लडके को उठाकर अपनी छाती से लगा लिया।
कर्नल० । (गुस्से से लाल हो कर) हैं यह क्या बात है !
है।
.
१
लेकिन ईश्वर के लिए, बस करो। इन यातों से मेरा फलेजा
पमिरिन को कमजोर भावाज से पुकारते सुना, "ओह रहर
जाभो । ईश्वर के लिये थोड़ी देर और ठहर जामो। जब तप
इस अपराधिनीका प्रत्यङ्गठण्डान पड जाग, जय तक
उपन्यास
थाल्टर! यह क्या है ? एमिलिन । तुरत बता, यह तेरा लडका
कैसे
हुआ
पमिलिन अपने पति के पायों पर गिर पड़ी और रोरो
कर कहने लगी, "ईश्वर के लिए मुझ पर कडाई न करो, मैं
सब बातें साफ साफ कह देती है।"
कर्नल । कम्बस्त तू ऐपी दुष्ठा है ! अब मुझ पर मव
हाल खुला। मालूम होता है कि अपनी शादी से पहिले जव तू
मास गई, तो सफर का केवल वहाना ही बहाना था । असल
में तू अपने लड़के को जनने गई थी, जिसमें यह भेद किसी पर
एमिलिन० । ( उसी तरह रोते हुए ) बेशक यही बात है।
कर्नल० । अव क्यों न कलेजा फटेगा! दुष्टा! पिशाचिनी
अब भी मुभसे यात यनाती है ? येहया कहीं की !जा, में जाता
हैं, यह तेरा चाहनेवाला तेरे पास खडा है और यह तेरा हरामो
रहका भी मौजूद है जा दूर हो मेरे सामने से ।
यह बहता हुआ यह मुड कर चला, लेफ्नि तुरन्त उसने
नखुल।
फटा जाता है।
।
-
किले की रानी
मेरी आत्मा इस संसार से कूच न कर जाय, तर तक जरा
ठहर जाओ।
फर्नल डार्मन ने मुड़ कर देखा । एमिलिन जमीन पर पटी
हुई दिखाई दी । उसके काले काले वाल, जाकिती सम । माप
की तरह किसी के दिल को डंस लेते थे, इस समय जमीन पर
विखरे हुए थे। वह पारी ओर खुबसूरत सुरत, जो किसी
समय देखने वालों का दिल छीन लेती थी, इस समय बिगड
गई थी। क्या कोई ऐसा दिल है,जो ऐसी हालत देख कर टुकडे
२न हो जाय ? क्या ऐसी आखें भी हैं जा ऐपो खूबसूरती
मिट्टो में मिलते देख कर मिना आसू बहार चैन ले ? कमी
नहीं।
फर्नल डार्मन, एमिलिन का यह हाल देस कर बेचैन हो
गया । उसने कुछ कहना चाहा, परन्तु एमिलिन की धोमी.
आवाज जो मरने समय भी सुरीलो थो, यह कह तो हुई सुनाई।
दी,-
"नहीं, अब तुम कुछ न कहो । हाय ! अब दिल में सुनने
की ताकत नहीं है । यह हाथ '. ओफ ! कसुर से भरा हुम
है ( जोर से जमीन पर हाथ पटक कर ) हाय ! मेरा रोम रोम
अपराधी है। इस लिये कठिन दण्ड
.जहन्नुम की आग
लेकिन यह दिल
हाय ! इस पर किसी का अधिकार नहं
डान ! सुनो ( लेकिन अब उसकी आवाज उखड़ने लगी
सुनो
शादी के बाद में तुमको अवश्य प्यार करती थी
-
-
१५ . । उपन्यास सससे पहिले - मुफ्से भूल हुई हाय ईश्वर। मैंने क्या किया। अच्छा अर बाप मा .. मित्र सम्बन्धियों से विदा होती है लेकिन यह अवश्य कहूगी कि यह आफत मेरे बाप की लाई हुई है मुझ पर बद्धी जयदस्ती की गई मैं मनुष्य ह मनुष्य मात्र से भूल होती है मुझसे भी भूल हुई हाय ! अब मेरी हहियां नरक में जलेंगी ऐ ईश्वर १ दया दया दया का शब्द उसके मुह से निकला ही था कि उसने अपनी आसें वन्द कर ली और इस सप्तार में अपने चाहने पालों को सदा के लिये अकेले छोड गई । कर्नल उसकी बात सुनता रहा । यद्यपि उसका दिल बहुत कहा था, तो भी वह वरावर रोता रहा। वह कुछ और सुनने की उम्मीद करता था लेकिन उसने देखा कि एमिलिन की मासे बन्द हो गई और दो एक हिचकियों के बाद उसकी थावाज रुक गई, कर्नल डार्मन फा दिल भर आया । वह अपने को रोक न सका और एमिलिन की मोर झुक कर कहने लगा, "प्यारी एमिलिन ! मैं तुम्हारे सव अपराध क्षमा करता है। ईश्वर के लिये आसें खोलो, एक बार बोलो ! एफ दफे उस मुहब्बत की निगाह से देख लो । हाय' कुछ जवान तो । तुम चुप क्यों हो? अभी तो तुम वातें कर रही थीं, पार ओर बात कर लो। केरल यह एफरार फर लो कि चाल्टर को कभी न देखोगी। इसके सिवाय में कुछ नहीं , एक
किले की रानी
चाहता। मैं तुम्हारे लड़के को अपने भतीजे की तरह पालूगा।
ईश्वर के लिये अब तो मान जाओ। प्यारी मिलिन!
कप्तान की बातें सुन पाल्टर बोला, "अब वह तुम्हारी
बात का कभी जवाब न देगी। तुम्हारी झिड़की ने उसका
दिल तोड दिया और अब उसका अन्त हो गया।"
कर्नल०। (रो कर ) हाय ! मेरे तीरोही ने उसका कलेजा
टुकडे टुकडे कर दिया। अफसोस । मैं भी कैसा अभागा ।
नि.सन्देह, उसका अन्त हो गया । हाय ! यह घटना मरने तक
मेरी आंखों के सामने फिरा करेगी।
कुछ देर बाद वाल्टर अपने लड़के को साथ ले कर वहा से
चला गया और कर्नल डार्मन ने रीत्यानुसार एमिलिनके
गाडने की तैयारी शुरू की।' दूसरे दिन एमिलिन जमीन के
नीचे सुला दी गई ! उस दिन से कनल डॉर्मन को चुपकी सी
लग गई । उसका दोस्तों और जल्सों में जाना आना एकदम
बन्द हो गया और आखिर यह नौवत हुई कि उनी दुःख
घुल घुल कर वह मर गयो ।
सी० । लेकिन आपने यह नहीं कहा कि वाल्टर का क्या
हाल हुआ।
सर रिचर्ड । उसका अब तक कुछ हाल नहीं मालूम हुआ
और न कुछ उम्मीद ही है।
सर मा०! यह भी कैसी दर्दनाक घटना थी!
सर रिचर्ट० । लेकिन साफ बात तो यह है कि बिना मर्द
में
"
--
-
1
उपन्यास
औरत दोनों के राजी हुए शादी कर दी जाती हे उसका यही
नतीजा होता है।
यह आत सर रिचर्ड ने कुछ इस तरह जोर देकर कहा कि
सर माइलिज उनकी ओर गौर से देखने लगा कि ऐसा कहने
से उसका क्या मतलब है। लेकिन सा रिचर्ड चेपरवाई से
दूसरी ओर देख रहे थे जिससे जान पडता था कि उन्होंने सर
माइलिज के ताज्जुब को नहीं देखा।
जिस समय सर रिचई ने कर्नाल डार्मन का किस्सा छेडा,
उस समय फ्लोरा यहां नहीं थी। वह अपने कमरे में बैठी अपने
ध्यान में डूबी हुई थी। सूर्य भगवान् अस्त हो रहे थे और
बहुत ही धीमी धीमी ठण्डी हवा चल रही थी, लेकिन फ्लोरा
का जी बेठा जाता था, वह सल्या हो जाने पर भी अपने कमरे
से नहीं निकली।
नौकरों ने खाने के कमरे में पहुच फर 'टेवुल को साफ
'किया, लेकिन शराव उसी तरह रक्सी रही, क्योंकि ऐसी
अब तक बैठा ग्लास पर ग्लास पी रहा था। उसकी आखें
लाल हो गई थी और वह वहकी बहकी बातें कर रहा था।
यद्यपि सर माइलिज को ट्रेसी की चाल बहुत धुरी मालूम
होती थी तो भी उसका देनदार होने के कारण वह उसकी हा
हा
मिलाता जाता था! सच है, कजदारा की ऐसी ही दशा
होती है। फिर भी लोग न समझे तो उनका दुर्भाग्य है।
सम्रा हो जाने के कारण सर माइलिज ने सर रिचर्ड से
।
.
।
१
किले की रानी
चल कर वाग की सैर करने को कहा और वह तुरन्त तैयार
हो गए । इस समय ट्रेसी बिल्कुल नशे में चूर था । उसने
दोनी को जाते देखा ता कहने लगा, "क्या आप बाहर
जाते
है ? तो क्या में भी चलू? लेकिन अभी तो यहां शराब मौजूद
है !!" यह कह कर ट्रेसी ने उठने का उद्योग किया, परन्तु पैर
लड़खडाने लगे। उसने टेवुल को पकड़ लिया, उसका सिर
चकराने लगा। मकान की सब चीजें घूमती हुई मालूम हुई।
वह अपनी कुर्सी पर बैठ गया तथा पैठते ही शराब के नशे में
चेहोश हो कर सो गया।
सर माइलिज०। (कुछ लज्जित हो कर) बस, इस समय
यही उचित है कि यह सो जाय । कुछ देर में नशा उतर
जायगा।
सर माइलिज बहा चतुर था। बात को निवाह ले जाना
चह खून जानता था, लेलिन देशी की बेहूदगी देख सुन कर
भी उसने अपने स्वार्थ के लिये फ्लोरा को शादी उसके साथ
कर देने का पका इरादा ठान लिया था।
दोनों निकल कर बाहर दहलने लगे, परन्तु सर रिचर्ड ने
देसी के बारे में एक बात भी नहीं कही। बड़ी देर तक ये लोग
इधर उधर की बातें करते रहे। लौटते समय उन्होंने फ्लोरा
के कमरे में जा कर देखा कि यदि ऐसी भी वहा हो तो उसको
भी साथ में ले लें, परन्तु यह यहां नहीं था। उन्होंने सोचा
कि कदाचित् उनसे पहिले ही वह फ्लोरा के कमरे
उपन्यान
में चला गया होगा, लेकिन जर फ्लोरा के कमरे में भी न
मिला तो उन्होंने समझा कि शायद नौकरों ने उठा कर किसी
दूसरे कमरे में पहुचा दिया होगा, ताकि यहा आराम कर
सके। अस्तु उन्होंने ज्यादा खोज इट नहीं की और दोनों
जा कर फ्लोरा के कमरे में बैठ गए। सर माइलिज ने फ्लोरा
से बाजे पर दो एक चीजें बजाने को कहा। उसने वैसा ही
किया, जिसको सुन कर सर रिचर्ड बहुत प्रसन्न हुए ! यह
क इसी चहल पहल में फट गया और फ्लोरा को मौका नहीं
• मिला कि वह भील की तरफ वाले कमरे में जा फर हूबर्ट को
एक नजर देख लेती।
अप हमें यह देखना है कि ट्रेसी कहां गायब हो गया । सर
माइलिज वगैरह के चलें जाने के बाद उसको असल में नींद
नहीं आई, बल्कि वह केवल नशे की येहाशी थी। थोड़ी देर में
वह होशियार हुभा और इधर उधर देख कर कहने लगा,
ये लोग कहा चल दिये।हा, भर मैं समझा, शायद गर्मी चद
गई होगी, हवा खाने गए होंगे। तो क्या मैं भी चलू ! लेकिन
मैं अभी क्यों जाऊं,अभी तो शराब बाकी है। हा तो बस (शराय
पी और डकार ले कर ) अरे शराप खतम हो गई ! खैर।"
देसी,इस समय बहुत ज्यादा शराब पी गया था। उसने
सोचा कि अब चाहर हवा में टहलना चाहिये। कुसी से उठते
उठते दो तीन लम्प जो टेबुल पर जलते थे, उनमें ठेस लगी
और वे गिर फर टूट गए । अय कमरे में बिल्कुल अन्धेरा हो
1
किले की रानी
१००
गया। इतना कुशल हुआ कि माग नहीं लगी।देली दोनार
टटोलता हुआ एक दर्गाजे के पास पहुंचा दर्वाजा खोलने पर
उसे सीढियों का सिलसिला मिला । वह सम्हल सम्हल कर
उतरने लगा, परन्तु उसको यह नहीं मालूम था कि यह कहा जा
रहा है और ये सीढिया कहां कोगई हैं। यह भाप ही आप कहने
लगा, "मोह ! केसी अन्धेरी रस्त है । यह तो मानो कोई गुफा
है । मैं जा कहा रहा हूं ? ये सीढ़ियां सतम होगी या नहीं ? मैं
नहीं समझता था कि ये इतनी दूर चली गई होंगी। या कर
चिल्लाऊ ? नहीं यह टीफ नहीं। अच्छा तो फिर कुछ गाऊ
हा हा, (गाता)
"ले लो पी लो अगूरीशराव यार साकिया।
द्विस्की भी पी लो, नेण्डी भी पी लो,पी लो अगू ।"
अर्र-र-मै किधर आ निकला। पैर, 'चले भी चलो
देखा जायगा । अव कुछ हवा आ रही है। हां थोडी थोडी
रोशनी भी दिखाई देती है । तो क्या चांद निकल रहा है ।
अरं? कितना बड़ा है। जैसे कुम्हार की चाक या धोबी का
“पाट।
पाठकों को याद होगा कि किले के पीछे एक सीढियों का
सिलसिला झील के किनारे तक चला गया था, जहा दो एक
डोंगिया वधी रहती थीं, इन्हीं सीढियों से ऐसी इस समय
जा रहा था । ये सीदिया जिस जगह पर सतम हुई थी, वहा
झील का एक मुहाना आ कर मिल गया था, उसके पानी के
-
१०१
उपन्यास
अफ्स पर जो उसको निगाह पडी, तो नशे में उसने समझा
कि मानो चाद निकल रहा है।
जप यह झील के निल्कुल पान पहुंच गया तो उनको
मालूम हुआ कि वह अपना रास्ता भूल गया है। थोडी दूर
जा कर उसे एक तग रास्ता मिला, जिसको ते करने के याद
चह पफ चट्टान के टुकडे पर बैठ गया। यह भी कुशल ही
हुआ, नहीं तो अगर यह एफ काम भी बढना तो झोल में
गिर पडता। यह बैट पर सोचने लगा कि अप क्या करना
चाहिये ? लेकिन कुछ समझ में न आया और यह वहीं बैठा
रहा। नशे का खुमार जव कुछ कम हुआ तो उसको नींद
आने लगी । घोसी देर बाद उसे जान पडा कि कोई डॉगी
बड़ी तेजी से बहती हुई इवर ही चली आती है। पर ट्रेसी ने
उस तरफ कुछ ध्यान दिया जोर वही लेट कर सो गया ।
इसी समय हर्ट पो घर से निकल कर अपनी डोगी
पर सवार हुआ ओर रात अन्धेरी होने के कारण यह अपनी
नार को सिले के बहुत ही पास ले आया तथा इप उम्मीद
पर इधर उधर फिरने लगा कि शायद फ्लोरा को एक मालक
देग सके । उसने देखा कि एक नाव पर से दो आरमी बड़ी
तेजी से किले की तरफ जा रहे हैं। उसने पुकार कर पूछा,
"कोन जाता दे?" उसमें से एक आदमी ने कहा, "अहा
माटर एवर्ट तुम यहां कहाँ " अव हर्ट ने देखा कि ये दोनों
मछली पाले हैं जिन्हें यह खूब जानता था -
--
किले की रानी १०२ हवर्ट। कुछ नहीं, यों ही निकल आया और तुम कहा जाते हो? मछलीवाले०। हम लोगों ने आज कुछ मछलियां पकडी हैं, उनको किले में पहुचाने जाते हैं, सुना है वहां आज कुछ जरूरत है। ये तो यहां बातों में लगे हैं. लेकिन अव जरा हम देखें कि ऐसी टिलबर्न का जो झील किनारे सो रहा था क्या हाल हुआ। जिस समय वह सो गया, उस समय उसे एक विल- क्षण स्वम दिखाई दिया । उसने देखा कि अधियारी, जो चारों ओर से छाई हुई थी, दूर हो गई भौर जमीन में से एक रोशनी पैदा हुई जो ऐसी साफ थी जैसे चांद की रोशनी और यह रोशनी तमाम झील पर फैल गई। फिर उसने देखा कि भील से कुछ धुश्रा पैदा हुआ जो झील के पानी पर तैरने लगा । थे डी देर में उस धुएं में एक तरह की चमक पैदा हुई और उसी में से बहुत सी छोटी बडी चमक्दार पुतलियाँ निकल कर किले के पास आ गई । ट्रेसी को सोते देख कर उनमें से एक पुतली जोर से हस पडी। यह देख देसी को बहुत डर मालूम हुआ। उसने उठने की कोशिश की, लेकिन उठा न गया। उसको जान पडा कि उसके हाथ पाँच बिल्कुल वेबम हो गए हैं। उन पुतलियों ने अपनी चमकदार आखों से ट्रेसी की तरफ इशारा किया और उनमें से एक ने दूसरे से फहा, "देखो तो कैसा ढीठ है' उठता भी नहीं।" ܟܝܕ . उपन्यास दूसरी । सब मिल कर मारो बदमाश को ॥ देसी ने देखा कि सय पुतलियां उसको चारो मोर से घेर कर खडी हो गई। एक ने नाफ पकरी, दूसरी ने कान, तीसरी ने दाग, चौथी ने गर्दन और पांचवीं उसको पैरों से ठुकराने • लगी। दो तीन मिल कर उसकी लाल सदरी को फाडने लगी, तब वह चिल्लाया, "हाय ! मेरी सदरी गई।" घह सोते,ही में लाख चीखा चिल्लाया, लेकिन कुछ भी असर न हुआ । अर उसको जान पडा कि मानों उन पुतलियों ने उसको उठाया और एक ओर ले चली। उसने सोते में उन- से पूछा, "तुम मुझको कहा ले जाती हौ" लेकिन उन्होंने कुछ जराव न दिया यल्कि जोर से हम पड़ीं। डर के मारे- देसी का बदन थर्राने लगा। उसके बाद मानो वह बेहोश हो गया और फिर क्या हाल हुआ, सो न जान सका ।। जिस समय उसकी आस खुली, उसने देखा कि चाद निकल आया और तारे खिले हुए हैं। उसे उस समय कुछ सदी मालूम हुई। सो क्यों? अर्रर यह क्या हुआ उसके कपडे पानी में रिल्कुल तर थे। ऐसा जान पडता था कि मानो वह झील में गिर पडा लेकिन यह ओर ताज्जुरको चात है कि उसकी लाल सदरी सचमुच टुकडे टुकडे हो गई थी। देसी पागल की तरह चारों ओर देख रहा था, वास्तव में यात क्या थी वह इस समय कहा था ? जब-उसको होश ठि काने हुई तो उसने उस जगह को गौर से देखा । यह वह
-
.
1
किले की रानी
जगह न थी, जहा वह सोया था। उसने आस मल कर खु
मारी को दूर किया और चारों ओर देखा । किले की इमारत
झील के दूसरी तरफ कुछ धुंधली सी दिखाई देती थी । आज
पूर्णमाप्ती होने के कारण चांदनी साफ थी, इसलिये किले
की इमारल इतनी भी दिखाई दी, नहीं तो कदापि 'दीख न
पडती। ऐसी ने पीछे फिर कर देखा, उसको एक टट्टी दिखाई
दी जिस पर उसको एफ टूटा सा छप्पर नजर आया।
अब उसको मालूम हुआ कि वह एक मछली वाले के झोपडे
में बैठा हुआ है।
वह नडे ताज्जुब में था कि यह क्या हुआ । उसको स्वप्न
की सर बातें याद आ गई क्या यह सम्भव था कि उसको
पुतलियों ने उठा कर झील के दूसरी तरफ पहुंचा दिया और
राम्ते में पानी में वे गोते खिलाती गई ? उसने हजार कोशिश
की लेकिन कोई बात समझ में न आई ॥
वह उस जगह से उठ कर उस सराय में पहुँचा जो मछली
वालों के कसबे में थी और वहीं सो रहा। सुबह को जब
वह सो कर उठा तो उसको रात की बात याद आई और
उसके में
कुछ दर्द मालूम हुआ लेकिन इससे ज्यादा
कुछ समझ में न आया कि नशे की होलत में घहे कहीं गिर
पंडी होगा । पाठक ! देखी आप ने शराबी की दुर्दशा'
अस्तु इसी जगह से उसने एक चीठी सरमाइलिज'को
लिखी कि रात को जब यह किले से निकला तो रास्ता भूल
वदन
१०५
"उपन्यास
गया था ओर लाचार हो सराय में सो रहा था ! उसने यह
भी लिख दिया कि उसकी तषियत कुछ खराब है और इन
समय वह अपने घर जा रही है ।।
आज वृहस्पतिवार था । शुक्रबार भी चीत गया। शनिवार
को सुबह के वक्त सरमाइलिज को ट्रेसी की एक चीठो मिली।
उसमें उसने लिला था कि वह ठीक साढे सात बजे किले में
पहुँच जायगा क्योंकि आठ वजे विवाह की रीति भाति होने
चाली थी।
7
सातवां वयान
आज ही रात को आठ बजे फ्लोरा की शादी होने वाली
है, आज ट्रेसी प्रसन्न होगा और आज ही सरमाइलिज भी
फ्लोरा को उसके हाथ सौंप कर अपना छुटकारा करावेगा,
यही सोच कर वह भी हपित है, परन्तु अभागिनीफ्लोरा क्या
तूं भी खुश है ? क्या तू भी भविष्यत् की यात सोच कर ट्रेसी
की तरह आनन्दित हो रही है ? नहीं नहीं, परन्तु सुन्दरी
फ्लोरों। यह तुमको क्या हो गया। प्रसन्न के बदले तू पित
क्यों है ? तेरी वे उम्मीदें जो चढती ही जातीधी; माज फ्या
हुई १ फ्लोरा बता कि आज तु हवर्ट की याद भी क्यों भूल
गई ? अरी तू बोलती क्यों नहीं, चुप क्यों है? हा भाज
फ्लोरा को कोई देखे । अब न उनके चेहरे पर वह चमक
दमक है, न उसकी आखों में रसीलापन, न उसके हॉटों पर
किले की रानी
१०६
पहिले सी मुस्कुराहट है, न उसका चित शान्त है ! आज वह
अपने बाप को खुश रखने के लिये अपनी हरी हरी उम्मीदों
को भी तोर देने के लिये तैयार है, वह आज अपने बाप के
लिए अपने प्यारे हुबर्ट को भूल कर जान तक दे देने के लिये
तैयार है।धन्य फ्लोरा धन्य तेरी पितृ भक्ति!भली लड़कियों
को यही चाहिये कि वे अपने मां बाप की आज्ञा माने, उनके
लिये तकलीफ उठायें, उनको खुश रखने की चेष्टा करें।
फ्लोरा! तुझमें ये सव यातें मौजूद हैं । सचमुच तू पिता पर
बड़ी भक्ति रखती है, सचमुच तू बड़ी सुशीला और नेक है ।
पाठको प्रेम का यही नियम है कि वह आप ही दो दिलों
में उपज कर उन दोनों को एक दूसरे पर आसक्त कर देता है।
इनमें उन प्रेमियों का कोई दोष नहीं है। प्रेम के उसी नियम
के अनुसार फ्लोरा और हवर्ट एक दूसरे को प्यार करने लगे
थे। दोनों ही के दिलों में सच्ची मुहब्बत थी, दोनों ही एक
दूसरे के लिये जान तक देने के लिये मुस्तैद रहते थे। इस
लिये हम फ्लोरा पर यह दोप नहीं लगा सकते कि वह हबर्ट
से छिप छिप कर मिलने के कारण व्यभिचारिणी- फहला
योग्य थी. क्योंकि मुहब्बत का दस्तूर ही ऐसा है
हाल वे ही लोग जान सकते हैं जिनके दिलों/-
थोडी सी भी बू मौजूद होगी, खैर ।
फ्लोरा आज यहुत बेचैन है, तो भी वह
नागज नहीं किया चाहती है। उसकी
।
उपन्यास
बात तो यहुत लोग जानते थे
किसी के साथ होने वाली है,
परन्तु यह बात किसी को भी नहीं मालुम थी कि यह इतनी
जल्दी हो जायगी। यही सयव था कि हूघर्ट को अब तक यह
नहीं मालूम हुआ कि वह समय कर माने वाला है जम उसी
सब उम्मीदें एक बार ही मिट्टी में मिल जायंगी॥
इस दो तीन दिन की मुदत मे जय से फ्लोरा से आखिरी
चार हपर्ट मिला था वह दिन भर देखा करता था कि शायद
कोई फूल या उसी तरह की और कोई चीज निशानी के लिये,
फ्लोरा भील में फेंक देगी और वह उसको उठा कर
अपनी आखों से लगावेगा ।वह इसी लिये अपनी डॉगी में
सवार हो कर पहरों इधर उधर फिरा करता था और प्राय
अपनी दूरबीन लगा कर देसा करता था कि शायद फ्लोग
अपने कमरे की खिडकी में कोई गुलदस्ता रख दे और यह
उससे मिलने को तैयार हो जाय, लेकिन इन सय बातों में से
कोई बात भी नहीं हुई । तय वह क्या समझता ' क्या उसकी
मुहब्यत फ्लोरा के दिल से कम होती जाती है ? या यह कुछ
बीमार है कि खिडकी तक पहुच नहीं सकती 'इपर्ट ने हजार
चार गौर किया कि क्या बात है लेकिन यह यही नतीजा
निकाल सफा कि शायद सररिचर्ड के कारण फ्लोरा को कोई
काम करने की हिम्मत न होती होगी कि कहीं यह भेद खुल
-
किले की रानी १०६ पहिले सी मुस्कुराहट है, न उसका चिरशान्त है ! आज वह अपने बाप को खुश रखने के लिये अपनी -हरी हरी उम्मीदों को भी तोड़ देने के लिये तैयार है, वह आज अपने बाप के लिए अपने प्यारे इवर्ट को भूल कर जान तक दे देने के लिये तैयार है ।धन्य फ्लोरा ! धन्य तेरी पितृ भक्ति ! भली लड़कियों को यही चाहिये कि वे अपने मां बाप की आज्ञा-माने, उनके लिये तकलीफ उठावें, उनको खुश रखने की चेष्टा करें। फ्लोरा ! तुझमें ये सब बातें मौजूद हैं। सचमुच तू पिता पर बड़ी भक्ति रखती है, सचमुच तू वडी सुशीला और नेक है ।। पाठको प्रेम का यही नियम है कि वह आप ही दो दिलों में उपज फर उन दोनों को एक दूसरे पर आसक्त कर देता है। इनमें उन प्रेमियों का कोई दोष नहीं है। प्रेम के उसी नियम के अनुसार फ्लोरा और हूवर्ट एक दूसरे को प्यार करने लगे थे। दोनों ही के दिलों में सच्ची मुहब्बत थी, दोनों ही एक दूसरे के लिये जान तक देने के लिये मुस्तैद रहते थे। इस लिये हम फ्लोरा पर यह दोष नहीं लगा सकते कि वह हूबर्ट से छिप छिप कर मिलने के कारण व्यभिचारिणी कहलाने योग्य थी क्योंकि मुहब्बत का दस्तूर ही ऐसा है इसका पूरा२ हाल वे ही लोग जान सकते हैं जिनके दिलों में मुहब्बत की थोडी सी भी वूमौजूद होगी, सैर । फ्लोरा आज बहुत येचैन है, तो भी वह अपने वाप नाराज नहीं किया चाहती है। उसकी शादी के बारे में यह
बार हबर्ट मिला था यह दिन भर देखा करता था कि शायद
नही मालूम हुभा कि यह समय कराने वाला हजप उसकी
मा उम्मीद पक यारही मिट्टी में मिल जायगी।
इस दो तीन दिन की मुदत में जय से फ्लोरा से आखिरी
कोई फूल या उसी तरह की और कोई चीज निशानी के लिये,
फ्लोरा भील में फेंक देगी और वह उसको उठा कर ।
अपनी याखों से लगायेगा । यह इसी लिये अपनी डॉगी में
अपने कमरे की खिडकी में कोई गुलदस्ता रपदे और
उससे मिलने को तैयार हो जाय, लेकिन इन सय पाती
मुहब्रत,फ्लोरा के दिल से कम होती जाती है ? या
बीमार है कि खिडकी तक पहुच नहीं सकती
चार गौर किया कि क्या बात है लेकिन वहानामा
निकाल सता कि शायद सररिचर्ड के कारणलोरा
काम करने की हिम्मत न होती होगी कि मदर
उपन्याप्त
बात तो बहुत लोग जानते थे किसी के साथ होने वाली है,
परन्तु यह पात किसी को भी नहीं मालम थी कि यह इतनी
जल्दी हो जायगी। यही समय था कि एयर्ट को अब तक यह
सवार हो कर
शायद फ्लोग
नजाय।
पहरों इधर उधर फिरा फरता था और
लगा कर देखा करता था कि
अपनी दूरयीन
क्या रमन
कोई यात भी नहीं हुई। तब वह क्या समझता।
.
--
न
7
किले की रानी
२०८
खास कर फ्लोरा के लिये यह शाम, बहुत ही बेचैन कर देने
चाली थी। ठण्डी २ हवा के हलके झोंके जो उसको प्रसन्न
करते थे, आज उसके शरीर को झुलसार देते हैं । चञ्चल
चिड़ियां मानों उससे यह कह रही हैं कि "अरी फ्लोरा जा
अब दुनिया में तेरा काम नहीं है ।" यदि वह आसमान की
की तरफ देखती है, तो दो चारतारे जो अब तक खिल आरथे
उसको आग की चिनगारियां मालूम होने हैं ! आह । जमीन,
मासमान, जल, थल, फहीं पर भी कोई फ्लोरा के दुखे हुए
दिल को खुश करने वाला दिखाई नहीं देता !!
एक तो योही अंधियारी झुकी हुई थी, दूसरे काले काले
वादलों ने चारों ओर से घिर कर उप रौशनी को भी गायब
कर दिया जो बेचारे तारों से योडी बहुत आती थी। अर
सिवाय अंधियारी के कुछ नहीं दिखाई देता, परन्तु ऐजे समर
भी हुयर्ट को चैन न पडा । वह अपनी डोंगी पर सवार हो
किले से कुछ दूर पर इधर उधर फिरने लगा, परन्तु जब वह
फ्लोरा के कमरे की ओर देखता था तो सिवाय उस धुंधली
रोशनी के, जो खिडकियों को दर्जी से छन छन कर आती थी,
कुछ नहीं दिखाई देता था। पैर, अब हुबर्ट को तो यही छोडना'
चाहिये और देखना चाहिये कि किले में क्या हो रहा है ।।
ठीक साढे सात बजे ट्रेसी किले में पहुच गया । आज
उसके फाडे बहुत ही चमकीले ओर बहुमूल्य थे ओर वह .
बहुत प्रसन्न जान पहना या याज से- गदा उसके हर्ष का
.
,
1
M
4 . , २०६ उपन्यास फोन दिन' हो सकता था जब उसके हाथ में फ्लोरा फा कोमल हाथ पकडा दिया जायगा ! इसी खयाल से वह खुश है, लेकिन साथ ही आज उसकी बेहदी भी खूब वढी चढी है। जिम समय यह किले में पहुंचा, उम समय दो नौकर भडकीले वस्त्र पहिने हुए उसके साथ थे, जिनमें से एक के हाथ में ऐसी की जरूरी चीज थी, और दूसरे के हाथ में एक सन्दुक था, जिसमें मजबूत और खूबसूरत ताला लगा हुआ था थोडी देर में दी भी पहुच गया और इसके कुछ देर बाद फ्लोरा ने अपनी लोडीको दुलबारोनी आवाज में उससे शादी के कपडे पहनाने को कहा। जिस समय पलोरा विवाह के कपडे पहिन रही थी, उसकी लोटी उसके चेहरे को ध्यान से देखती जाती थी कि देखें छोरा प्रसन्न है या नहीं, परन्तु फ्लोरा के चेहरे पर हर्ष का कोई चिन्ह उसको न मिला। जव देसी क्लेि में आया, तो सरमाइलिज के नौकरों ने उसे उस कमरे पहुचा दिया जो भील के तिल्कुल ऊपर था, और जो आज खूब सजा हुआ थासी के नौकर ने वह सन्दूक टेवुल पर रख दिया और बाहर चला गया। यहा'सर- माइलिज और सररिचर्ड मौजूद थे। देसी ने आगे बंद कर सलाम किया, परन्तु सररिचर्ड सलाम का जवाब देकर तुरन्त पाहर चले गये। उस समय सररिचर्ड के चेहरे से मालूम होता था कि यह बहुत घबराए हुए .
किले कीरानी
૨૨૨
फिर दस मिनट हो गए, परन्तु विवाह पत्र अब भी खतम
नहीं हुआ, तब तो सरमाइलिज ने घवरा कर पूछा,"क्यों भाई
मैं भी सुनू, हम देश क्या रहे हो ?"
सर रि कुछ नहीं, मैं एक चीज देख रहा था ।लो,
घस
न
,
देख चुका।
यह कह कर उन्होंने विवाह पर लोटा दिया । ठीक समय
से आध घटा ज्यादा बीत गया था, परन्तु विमट अभी तक
वापस न आया। पलोरा बुलाई गई और थोड़ी देर के बाद
वह वहां पहुच गई।
इस वक्त फ्लोरा के चेहरे पर खुशी है न प्रसन्नता,
दुप है न रंज, न नाउम्मीवी है न डर,तब हम अपने पाठको
पो क्या बतलायें कि इस समय उसके चेहरे की. रगत कैसी
है । खैर, इतना बता देते हैं कि इस समय उसके चेहरे पर
चडी गम्भीरता छाई हुई थी। जिस वक्त वह उस कमरे में
आई, उस समय उसके साथ कोई लौंडी नहीं थी। उसके
आते ही ट्रेमी अपनी जगह से अगवानी के लिये उठो । पास
पहुच कर उसने फ्लोरा का कोमल हाथ चूम लेना चाहा,
लेकिन उने तुरन्त अपना हाथ पींच लिय। लरमाइलिज
ने कहा, "मैं समझता है कि अन बिल्कुल टेर न करनी
चाहिये । अच्छा पादरी सार
सर रि० । लेकिन सुनो तो सही, तुम्हे कुछ - यह भी
।
.
किले की रानी
SANE
मर माइलिज ने कहा, "मै समाना है कि अब बितवल देर
नरनी चाहिये। 'प्रच्छा पादरी साहय
(पट २१)
किले की रानी
૨૨૨
फिर दस मिनट हो गए, परन्तु विवाह पत्र अव भी खतम
नहीं हुआ, तब तो सरमाइलिज ने घबरा कर पूछा, "क्यो भाई
मैं भी सुनू, हम देस क्या रहे हो ?"
सर रिस कुछ नहीं, में एक चीज देख रहा था ,लो, बस
देस चुका।
.
यह कह कर उन्होंने विवाह पत्र लोटा दिया । ठीक समय
से आध घटा ज्यादा बीत गया था, परन्तु वित्मट अभी तक
वापस न आया। पलोरा वुलाई गई और थोड़ी देर के बाद
वह वहा पहुच गई।
इस वक्त फ्लोरा के चेहरे पर खुशी है न प्रसन्नता, न
दुस है न रज, न नाउम्मीवी है न डर,तब हम अपने पाठकों
को क्या बतलावै कि इस समय उसके चेहरे की रगत कैसी
है । सैर, इतना बता देते हैं कि इस समय उसके चेहरे पर
बडी गम्भीरता छाई हुई थी। जिस वक्त वह उस कमरे में
आई, उस समय उसके साथ कोई लौंडी नहीं थी। उसके
आते ही ट्रेमी अपनी जगह से अगवानी के लिये-उठी। पास
पहुच कर उसने फ्लोरा का कोमल हाथ चूम लेना चाहा,
रेकिन उसने तुरन्त अपना हाथ खीच लिया। सरमाइलिज
में लसमता ह कि अत्र मित्कुल -देर
करनी
चाहिये । अच्छा पादरी साहब
सर रि० । लेकिन सुनो तो. सही, तुन्हें कुछ - यह भी
२
ने कहा,
"
उपन्यास
मालूम है कि विवाह के, पहिले कुछ ओर कार्रवाई होनी
चाहिये?
देसी० । ( अझला फर) उह
आप भी क्या हो
आदमी हैं । अच्छा वह भी कह डालिये, क्या कार्रवाई
करनी है?
सर रि०। मेरा मतलव उस सन्दुक से है जो तुम्हारे पास
रेवुल पर रफ्सा है।
देसी०। (जल्दी से ) हा, यह सन्दक! उसको तो में
भूल ही गया था। उसमें कुछ कागज पत्र और दस्तावेजें हैं
जो आज सरमाइलिज के हवाले कर दी जायंगी, लेकिन अगर
आप यह चाहते हैं कि उनका फैसला भी अभी हो जाय तो
यह भी सही।
यह कर कर सो आगे यदा ओर टेबुल पर रक्खे हुए
सन्दकचे का ताला खोल कर उसने तरता उठा दिया।
सर रि०ावात तो यह है कि तुम्हारी तरह दिल के साफ
आदमी मुश्किल से मिलते हैं, लेकिन मेरे कहने का पुरान
मानना, तुम अभी यह नहीं जानते कि दुलहे को यह चाहिये
कि विवाह के पिहले वह अपनी सब दौलत बीचो के पार्यों पर
रस दे। यह इस बात का प्रमाण है कि वह धन दौलत की
अपेक्षा वीयो को ज्यादा चाहता है।
ट्रेमी०] में अभी तक समझा ही नहीं कि इससे आप का
1
मतलब क्या है।
८
-
1
किले की रानी
११४
मररि० । भैया। अभी तुम वो हो, धीरे धीरे सब कुछ
समझोगे । मान लो कि तुम छोटे थे तो कैसी पोशाक पहिनते
थे, अब उसी को देख लो कि कैपी यांफी है।
ऐसी० । (मूची पर हाथ फेर फर) और चात भी असाल
में यही है कि सव पौशाको से उसी पोशाक को मैं अच्छा
समझता हू जिसमें बांकापन हो।
सर रि०। (चात बनोकर ) हांफणे'नहीं, अच्छा तो फिर
उन दस्तावेजों को निकालो।
ट्रेमी० । दस्तावेर्जा को ? अच्छा 'लीजिये ( कागजों का
एक मुट्ठा निकाल कर)ये सब रेहननामे हैं; इस में उस जाय
दाद फी सूची है, जिसको किसी जमाने में सरमाइलिज 'ने
रेहन रक्खा था।
सर रि० । अच्छा तो इनको फाड फूड कर फेंक दो। ऐसी
चीजों को रखना न चाहिये।
सर माइलिज० । हा यही उचित है (ट्रेसी से) तुम
मुझ पर भरोसा करना चहिये, क्योंकि जो धादा मैंने तुमसे
किया था उसफो पूरा करने को मैं तैयार है।
पादरी० बेशक भले आदमियों को यही चाहिये।
ट्रेमी० । अच्छा तो फिर इसका फैसला ही हो जाय । मैं
तो चाहता था कि शादी के बाद इन सब फागजो कोदू,ले.
फिन पाप लोग चाहते है तो यही महो। ( पादरी से) परन्तु
।
-
उपन्यास मैं भापको गवाह करता है, जिसमें पीछे किसी तरह का सन्देह न रह जाय। पादरी । जी हां, में गवाह है, आप अपना काम शुरू. इसके बाद ट्रेसी ने सन्दूकचे में हाथ डाल कर दस्तावेजो को निकालना आरम्भ किया और मरमाइलिज को देने लगा। सरमाइलिज ने यह समझा कि सर रिचर्ड ने ऐसी को यातों में लगा कर फागजों के लेने का अच्छा ढल निकाला है। यद्यपि वह सररिचर्ड का असत मतलब अभी तक न समझा था, परन्तु उसने सोचा कि शायद यह ट्रेसी से सप कागज पत्र लेकर उसको धता बताना चाहता है। मरमाइलिज स्यार्थी आदमी था और स्वार्थी लोग यदि ऐमी वात सोचे तो कोई ताज्जा नहीं है। देसी टिलवर्न कागजों को सरमाइलिज के हवाले करता जता था और वह उन्हें देख देख कर अपने हाथ से फाडता जाता था । जर तक गह कार्रवाई होती रही ट्रेसी सररिचर्ड की तरफ जांचने वाली निगाह से देखता रहा कि कहीं ये लोग दगाबाजी तो नहीं करना चाहते, परन्तु उसने सररिचर्ड के चेहरे पर सन्देह करने लायफ कोई बात नहीं पाई, वरिफ उस समग उनका चेहरा बहुत ही गम्भीर था।-जान पडता था कि वह किसी खास बात पर गौर कर रहे हैं। जब सब दस्त- वेजें फट चुकी तो दुसी कुछ घरराइट के साथ कहने लगा,
किले की रानी
1
-
"अब तो कुछ कमर नहीं है, अय शादी हो जानी चाहिए।"
पादरी। हां और क्या, अब तो बहुत देर होती है।
कागजों के फट जाने से सरमाइलिज के सिर पर से मानो
एक भारी वोझ उतर गया और उसने सररिचर्ड की ओर इस
मतलव से देखा कि टेलें अव उनका क्या इरादा है, लेकिन
सररिचर्ड बिल्कुल चुपचाप थे, क्योंकि अब वह कर ही क्या
सकते थे, वक्त टालने के लिये जितने बहाने थे, वे सब पूरे हो
चुके थे।
जिस समय दस्तावेजें फाटी जा रही थीं, फ्लोरा सररि-
चर्ड की ओर आश्चर्य से देख रही थी, उसको ताजय था
कि सररिचर्ड जो ट्रेमी से घृणा करते थे वह उससे मीठी बाते
क्यों कर रहे हैं। उसने सोचा कि शायद सररिचर्ड 'उसके
बचाने की फिक्र कर रहे हैं । यह सोचते ही उसकी टूटी हुई
उम्मीदें फिर से बंध गई, लेकिन एक ही मिनट में वह फिर
हताश हो गई जब उसने देखा कि सररिचर्ड अव विल्कुल चुप
हैं और उसके छुटकारे का कोई उपाय नहीं है। उसका सिर
चकराने और
हाथ
पैर में सनसनाहट होने लगी,
जान
पडा कि मानो उसके पैर लडखडा रहे हैं। वह राम्हल कर
खिडकी की तरफ देखने लगी।
यफायक उसने देखा कि मील में कुछ रोशनी हो रही है ।
यह समझ गई कि यह रोशनी एवर्ट की डोगी में से आ रही
है। आह ! वह इस समय फ्लोरा को देखने के लिये इधर उधर
उपन्यास .. - घूम रहा था। उस वक्त फ्लोरा फा जी ठिकाने नहीं था परन्तु उसने अपने को बहुत सम्हाला और धीरे धीरे आप ही आप कहने लगी, "नहीं यह नहीं होगा । प्यारे उफाक्या नाम लू •हाय ! अब नहीं मिलेंगे !" वह यह कह ही रही थी कि उसने अपने बाप की आवाज सुनी,-"फ्लोरा! आओ, अब देर न करनी चाहिये ।" यह मालूम हुआ कि मानो उसके कलेजे में तीर लगा ! उसने अपने चेहरे का कपडा उलट दिया। हाय । यह वह समय था कि हम उसके चेहरे पर खुशी की लोलिमा देखते, लेकिन नहीं, इस समय उसका चेहरा पीला था। जिस समय वह अपनी जगह पर आ कर पडी हुई पादरी कहा, "तो अब मैं अपना काम शुरू करता है।" फ्लोरा जरा और ठहर जाइये, मैं कुछ पूछ लू (सर- माइलिज से) पिता जी ! मुझे केवल एक बात बता दीजिये कि अब तो आपको ऐसी से किसी पात का डर नहीं है न ? सर मा०। हां, अब तो सब काम पूरे हो चुके। पादरी०।(फ्लोरा से) अव जो कुछ बाकी है वह यही है जिसको तुम अभी पूरा करने वाली हो। फ्लोरा०। लेकिन मैं पृछनी हु कि क्या इसके पूरा करने फा मुझे असियार है? सर मा० । फ्लोरा । तुम कैसी बातें कर रही हो ? फ्लोरा०। (सव लोगों की ओर देस फर बहुत ही नम - - .
।
किले की रानी
ओर रोनी मावाज में सुनिये मैं आप सब लोगों से कहती हूँ।
आह ! आप लोग अच्छी तरह मेरो बातों को सुन लें। यह मैं
नहीं कह सकती कि मैं को इसपर इतना जोर दे रही ह ऑप
लोग स्वयं समझ जायेंगे। (आखों में आंसू भरे हुए ) सुनिये;
में क्यों यह शादी करने का राजी हो गई। इसका केवल यह
कारण था कि मैं अपने वाप का उस होने वाली खरावो से.
बचाना चाहती थी। मैंने क पम खा ली थी कि मैं ट्रसी की
स्त्री वन कर कभी जीती न रहूगी, परन्तु मेंने यह भी निश्चय
कर लिया था कि अपने पाप की इज्जत अवश्य ही बचाऊगी।
मैंने यहा तक सकल्प कर लिया था, कि भगर दस्तावेज मेरे
चाप को न मिली तो मैं ट्रेसी से विवाह भी कर लूगी, यद्यपि
उसके बाद मावही कर डालती जो इस समय करने वाली
अर्थात् अपनी जान दे देती । (रुक कर) अब मुझे वडा हर्ष है
फि लाख लाख मुसीमतें झेल फर मैंने वह काम पूरा कर दिया,
'जिसे मैं अपना धम्म समझती थी।"
उसी समय झील की ओर से जोर से आवाज आई, "वह
यह आवाज कमरे भर में गज उठी, लेकिन साथ ही
फ्लोरा के मुह से एक चीख निकली, वह चेतहाशा खिडकी
की ओर अपटी और एक दम झीग में कूद पडी-
सब लोग चिल्ला कर बोल उठे, "अरे यह क्या हुमा
मगर सररिचर्ड ने कहा, "यह यात का वक्त नहीं है जल्दी
दौडो। वह लम्प . जल्दी लाओ।"
-
मारा"
।
, उपन्यास यह कह कर संररिचर्ड ने लम्प उठाया और खिडकी की ओर झपटे । उन्होंने बाहर झाक फर देखा, परन्तु इतनी ऊचाई से वह क्या कर सकते थे। वह मुंह निकाल कर चारो ओर देखने लगे । सब तरफ अंधियारी झुकी हुई थी और भयानक सन्नाटा छाया हुवा था ! यह देख वे अफसोस के साथ अपने हाथ मलने लगे, लेकिन नहीं, तुरन्त ही किसी डोगी के डांडों को आवाज सुनाई दी जो बडी तेजी से किले की ओर आ रही थी । सररिचर्ड ने पुकार कर कहा, "डोंगी पर कोन सवार है । अरे भाई जस्ती चढाओ और देग्यो झील में कौन डूब रहा है।" नरमाइलीज तो एक एक कुपी पर गिर पडा, मगर सर- रिचर्ड ने कहा, "चलो चलो जल्दा चला, हम भी अपनी एक डोंगी ले चले। ओफ! अनर्थ हो गया।" सररिचर्ड झपट कर चले। कमरे से निकलते ही उसको विल्मट मिला, जो दौडने के कारण जोर जोर से हाफ रहा था उसने एक मुहर किया हुआ लिफाफा जल्दी से सररि- चर्ड के हाथ में दे दिया। विल्सन | धुजूर । यया सर मेहनत मिट्टी में गिलई' सर रिहा सब चौपट हो गई, लेकिन तुम जल्दी मेरे साथ आयो।दो आदमी ओर ले लो, मगर बहुत गार चला, मै चल्वा । यह कह कर सररिचर्ड आगे पढे और झील के किशारे
किले की रानी
१२०
पहुच कर एक डोंगी खोल ही रहे थे कि इतने में उनके कानों,
में यह आवाज सुनाई दी, "हाय पारी 'फ्लोरा! यह तुमने
क्या कर डाला !!"
सर रि० । (पुकार फर) कौन 'इवर्ट ?
यह कह कर उन्होंने लम्प को ऊंचा किया जिससे उसकी
रोशनी दूर तक फैल गई। उन्होंने देखा कि एक डोंगी पर हुयर्ट
सगर है, एक हाथ से यह नाव से रहा है और दूसरे हाय के
सहारे किसी को अपनी गोद में लिए हुए है जिसके पेरतो
नीचे लटके हुए हैं और सिर को लम्बे याल गालों और मोढों
से चिमट गए हैं। उसके कपडे यिल्कुल भीगे हुए हैं और इस
लिये कि उसफो एक हाथ से सम्हालने में कठिनाई होती है,
हबर्ट ने उसकी दोनों वाहें अपने गले में डालली हैं और उसको ''
छाती से चिमटा लिया है ताकि वह बेहोश या बेजान आदमी
उसके हाथ से छूट न जाय । पाठक ने पहिचान तो अवश्य
लिया होगा कि यह बेहोश या बेजान आदमी कौन है? यदि
न पहिचाना हो तो अब पहिचान लें कि यह वही फ्लोरा है जो
इस समय इयर्ट की गोद में पड़ी है। ।।
हुई। ( पास बहुच कर सुशी से) अहा सररिर्चड !
देपिये, ईश्वर की कृपा से फ्लोरा यत्र गई।
सर रि० । जीती है 'धन्य है ईश्वर कि फ्लोरा के प्राग'
बच गये।
ऐसी जो ऊपर से सब देरा रहा था, बिल्ला कर कहने
।
१२१
,
लगा, "सरमाइलिज, आप मुनते हैं ? फ्लोरा अभी जीती है।
(आप ही आप) अच्छा हुआ, अब हमारी जोरू हमको फिर
मिलेगी।"
सरमाइलिज ने सी को कुछ जवान न दिया बल्कि
अपनी कुर्सी से जिस पर यह बहुत ही रज में इवा हुआ बैठा
था, उठ कर बाहर झपटा और जल्दी जल्दी सीढियां तै कर के
नीचे पहुचा।
सर मा० । हाय ! मेरी फ्लोरा अभी जीती है ? मेरे कलेजे.
के टुफडे को मुझे जल्दी दिखा दो, (पास पहुँच फर) हाय मेरी
घच्ची ! तूने यह क्या किया ।
सर रिक। मैं तुमसे यह पूछता हूँ कि तुमने यह क्या गजब
किया कि वह बेचारी जान देने को तैयार हो गई, देखो वह
कुछ कहना चाहती है । फ्लोरा ! कहो कहो क्या चाहती हो?
फ्लोरा (बहुत ही धीमी आवाज से ) आह ! मेरे याप
को कुछ मत कहो
अगर गई तो
परन्तु मेरे याप की इज्जत तो
गई
आह
सर रि० । नहीं फ्लोरा ! अब तुम ज्यादा न घोलो तुम
विल्कुल कमजोर हो रहीही हाय !देखो तो कैप्सी भोली लरकी
है । अच्छा हुयर्ट ! यह लौंडी तैयार है, तुम क्लोरा को इसकी
गोद में दे दो।
फ्लोरा लौंडी के हवाले कर दी गई । अय सय लोग उस
मेरी जान
फ्या
यच
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किले की रानी ~ उसी से पानी की वृदे टपक रही थी और दो भारी सिकड़ों में वह चंधा हुआ था, जिनमें मोर्चा लग गया था। संदूक में एक ताला भी लगा हुआ था जो करीब करीय गल गया था ।" पाठकों को याद होगा कि जिस समय फ्लोरा का विवाह होने वाला था, उस समय झोल की ओर से एक सुशी की आयाज ओ कर फमरे भर में गूंज उठी थी, वह आवाज इसी , हुवर्ट की थी जो उस समय उस खोये हुए सन्दूक की खोज में इधर उधर जाल डाल रहा था जिसको वह महीनों से खोज रहा था। जिस समय फ्लोरा ने अपनी भौखिरी बात समाप्त की उसी समय यह सन्दूक हूपर्ट को मिल गया था और वह खुशी में चिल्ला उठा था, "वह मारा || इस समय सदूक को अपने सामने देख सर माइलिज बोल उठे "यह , •सन्दूक | क्या मैं इस समय स्वप्न देख रहा हूँ !" इपर्ट । अच्छा अव आप इपको खोलिये, इसमें दस हजार पाउण्ड हैं, उन्हें निकाल कर इस कम्बल (अर्थात् ऐसी) का कर्जा चुका दीजिये। सरमा । (ताज्जुब से) मुझको बढ़ा, आश्चर्य है कि तुम हो कौन | तुम तो कुछ अजीब तरह के आदमी, मालूम होते हो" हर्ट 1 ( सिर झुका कर बडी नम्रता से ) मैं कौन है ? फ्या आप मुझको एक नीच मछली वाले से कुछ ज्यादा सम- झते हैं जो हबर्ट के नाम से पुकारा जाता है ? ( भाकाश को,, उपन्यास ओर देख कर ) हे जगदीश्वर क्या वह समय अभी तक नहीं आया? सर रि० । नहीं वह यहा समय है। अच्छा अब आप सब लोग सुन लें कि यह आदमी जो इस समय आप लोगों के सामने खड़ा है और जिसे आप एवर्ट के नाम से पुकारा करते हैं, यह अब वह नीच मछली वाला नहीं हे,परिक वह "आर्जन” है, जिसकी मां उसे साल भर की उम्र में साथ ले कर इन्हीं अशर्फियों को लेने के लिये झील के उस पार गई थी और लोटते समय इब कर लापता हो गई थी। सर मा०। (आश्चर्या से भाखें फाह कर ) क्या आर्वन! कर्नल ब्लण्डफोर्ड का लडका! सर रि०ाहाँ हा घही। सब लोग हूवर्ट अथवा मावन को आख फाड कर देखने लगे । वही आर्जन जा साल भर की उम्र में झील में डूब गया था, इस समय उनके सामने मौजद था । आनन को स्वयम् आश्चर्य था कि सर रिचर्ड को उसका वृत्तान्त कैसे मालूम हो गया। इतने में ट्रेसी चित्ला फर वोला, "तो अगर यह फर्नल ब्लण्डफोर्ड का लडका है तो जरूर यह यागी हे । में बादशाह चारर्स के हुक्म से तुमसे कहता है कि तुम इसको पकड लो।" सर रि० । घस, जरा तबीयत को रोके रहो । यह वाद- शाही माफी को पर्वाना तैयार है। ! ।
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