Bhartiya Vidya Mandir Shoudh Pratisthan,bikaner

Kavi Shri Mala Urdu

Ikbal,mohamad · 2010/12

PDF Proofread

Front matter

No text on this page.

कृषि-श्री माला
• उर्दू
कमित
मुहम्मद इकबाल
सम्पाबर-मनुबारक
मुहम्मद हसन
पर राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा

प्रकासह
मोहमखाक मट
मन्त्री
राष्ट्रभाषा प्रचार समिति,
हिन्धीनगदमा
सर्वाधिकार सुरक्षित
प्रथम संस्करण-1...
मा १९६२
मौहमहात भर
पदमापा प्रेस
हिन्दीनपद

भामुख बम विषप है कि यम्दावा-प्रचार समिति पर्ण अपने पार्य का . वर्ष सन् १९९१ में ये काम । इस उपहलपमें मनाये अनेवाले रक्त-जयन्ती ममेरसक्के अपमर पर ममी मास्तीय माषाओके मान्य कवियोष तथा उनके उत्कृष्ट फाटयका परिचय पवि-यो मानकी पापीम पुस्तकम मिन्ट-गवानुवाद माहित प्राजित परको योजपके अन्तर्गत प्रस्तुत मन्च पमो समय आ रहा है। मपि किमी मी माषाके मधष्ठ काव्य-फाईका प्रिय करन क काठिय पर्य है फिर भी अपनी सीमाओंने प्यानमै रोए गम्यमाग्य उग-उन पाक विमौकी राय में क्या कार्य सम्पन्च किया गया है। प्रत्येक पुस्तके अम्मम जिस मापा विकी स्व-ओका चयन किया गया है उस मापा माहित्य परिक्व और कवि विशेषता परिचय दिया गया। बिमाको कवियोका जुम्प लिया गया है, उनका पुप्रय परते समय मइ १९२ मे पूर्व माहित्य और १९२० मेगपत मास्पि- म सराम्मे एक विमासम्म प्याबमें रम गई। कारण सोम ममम सन् १९२. पूर्वक तया ११२ के पास मास्पिमें प्राप्ति पिपर-बरामे का विशेष प्रस्न अगाव-सा पाया जाता है। मुहम्मद समाधी प्रस्तुत पुस्तकमे कवि-परिचय और पाग्यायो सम्पादित तपा अनुवादित कसरी समापीको म झसमें प्रस्तुत कर माग दिया। ममाम मचालित माहित्य परिपाको भी रमून आमद 'अबोध' में वार किया। पुस्तक संकलित च पितमी अबोध' के मदम्यासे उपलब्ध हुआ है। अपम्की आपापरिबारमोबनवा देनमेनीवाल, अमस्करडी (य, म टीटयूट माफ अपर आई, बर्मा) उपर सम्योग मिथा। उसके सिममिति माग आवरी। इसके अतिरिक्त पाई तपा अम्पाग्य दृष्टियोंमे निम-विमान प्रत्यास एवं अनयम मइयोग मित्रो के प्रति मी ममिति अपनी माता व्यक्त करती। मो प्रस्तुत संमा पाने सवियर एवं उपयोगी मौत होगा। hilarin 24 मनी, राष्ट्रमापा प्रचार समिति, बर्या

अनुक्रमणिका
पृष्ठांक
उर्दू-साहित्य-परिचय
१
पमि-परिचय
३७
काम्प-सज्चय

कपि-धी माला
उदू
-
.
मुहम्मर इकबाल

अनुक्रमणिका
पृष्ठांक
३०
उर्दू-साहित्य परिचय
पबि-परिपय
काम्प-सम्पय

कवि-ग्री माछा
उर्दू
--
-
।
महम्मर इकबाल

No text on this page.

उर्दू साहित्य परिचय [प्रारम्मसे १९२० तक]

No text on this page.

उर्दू भाषा मौर उसका साहित्य प्रारम्भिा-काल-१ (दक्षिण) पपिम भारतपर ममान बिमाके वाममो बार दो ऐसी महत्वपूर्ण घटनाएँ घटी मिन्होंने रसिप भारतमें उत्तर भारतकी मिमी चुप्ती बोलीको विकसित होने के लिए उपयुक्त वातावरण उत्पन्न कर दिया। इसमें पहली पटना है मुहम्मर तुमहकमा पिस्तीकी बनताको यह मामा रेमा कि यह दिल्ली छोड़कर गिरि (समतावाव) भाषाव करे। इसरी उसके एक बधिकारी पर जाका गिरोह करके महागीन हसन मोबममी बनकर रक्षिममें बहमनी राग्यकी स्थापना करमा। मिन पोर्नो बनामोने समानव इक्षिण भारत में एक ऐसा वातावरण रत्पत कर दिया जिससे कालान्तरमें एक मापा और साहित्यका विकास सम्भव हो सका। हसन मंगो बामनीने रविपमें पिस गामनी राम्मकी स्पापना की यह सन् १३.६ से १५२१६ सगमग दो सौ पावा रक्षिणमे पम्प परखा था। मन्त मर्यात् सन् १५२६ मे बह राम्म समाप्त होकर १-माद साही - बुरीर माही -निवाम पाही ४-नारि पाही और तुम पाही नामा पांच राम्पोंमें पिसा हो गया।

४ उत्तर भारतीयोक परिममें पहुंचनेके कारण यो एक नई पापा का साहित्यका विकास हो हा पा उसमें सबसे पहली रचना इसी पदमनी कातर्फे प्राप्त होती है। साषा बनानेवार मेनूरपर के पहले म्पत्ति है जिन्होन उक्त भापामें सपनाएँ की और मिनको सपनाएँ प्राप्त होती है। सागा यमानेपान पेमूरयन रिस्मारे मुसिर मुस्लिम सन्त निजामुद्दीन मामिलाके प्रिप्य तपा रत्तरा- पिका नसीरीन पियम एपीके प्रधान पिप्य तवा रत्तराधिकारी। कहते है कि एक बार मतोपान पिराम पाली पासपर ही पाऐ। पासको उठाकर बस्नेषाहोंमें रक्त मेनूपपर भी पे। उनके बोबो यात पालकी फस गए पर उन्होंने इससे होनेवाले कप्टको मोर म्मान न रिपा मोर सपने माम्मास्मिक मुम्की पालकी पठाए पलते पे। पर पिसौम्मान रिकानेसे मसीसीन पियम हामीको पता चला तो उन्होंने मेरा पाकर पर्ने सम्बोधित किया तमासे पर पेपरले मामसे प्रसिटहए। और बर १४१२९ में रमिनमें भपने विचारोंका प्रचार पसे तमा नोक्नुपाणे लिए पहुंचे और यहाँको जनतापर उनका मापक रपसे प्रभाव पड़ा तो पदानेबार बार भसगस्ततको उपाविसे विभूपित पिए पए। लामा बतानेपान सन् १४१२६ मे दुबमर्म (मोनाणा) पाई मौर पही स्वामी रूपसे रहमे कपे। स्वाया बदामेवाब माध्यात्मिक साताप हो बहुत यो विधान पुष्प मी मरपी और फारसीम माम्मामि विपपपर उनकी अनेक प्रमियपी। पाक्षिण पण प्रत्येक प्रेमी मनि मा हरपसे स्थापत किया मौर बहुत ही पीप नो मनुमापियाँको मस्या बने समी। इन्ही अनुयायियोंके लिए मो निमारह भरी और पारमी भापासि परिचितम २ इस नई मापा T बनाएं का। जननि मपने मनुपापियोंके लिए मिनी रचनाएँ की है म मम्बन्ध तो निश्चित पर पुरा नहीं कहा जा सकता। उनसे एका रचनाके मतिरिका कोई प्राप्त ही नहीं है। पी रचना उनकी प्राप्त है पना माम मेरागुम्बापिकीन है। पारपना एक होगमा पुस्तिका पम हो । मोर इसम विषय मामिा। मेमूरामको मृत्यु मन् १Rnt में हुई। पागा बमानेर गेमूरपर बार उनके पौर मम्मर मुहम्मा भतार इननीने पेय अणुन पारिर जीलानीसी प्रमिस भरी गुम्मा निप्रानुन-भरा का सा मापामे मनुवार पिया। मा किया जाएगाईमनी एक साल इन प्रसारमा नाच मागार्म विमा हो गया। इस बार पम्पोम पोमारक पारित पाही पग्परा और पोगाणही राम्पमा मापा गौर माल्पिती उमतिकी टिम बिगेर माय है। मारिसपाही परमाणक पातमें गो मामे पहना भाव गमने माना है पर निर मुस्लिम मन पार पाएगी यम्मुम गामा है। यह सुप भारित पाही राम्पकार सन् १४९०-१५१८ मे हुए है। मप भोर पर्म साह मीमी प्रम्सुक नापाकी का रचनाएँ प्राप्त है पपा- १-राइमरसूपठमा २-सबरस पीनामा ४-हातुक जीत पन पाह मौएंगी सम्मुख उस्याडो पाह पुरहानुद्दीन बानम भी मपने पुपके सिर सन्त और कवि हुए है। उनकी मौ रचनाएँ प्रप्सिस है वो इस कार है। १-सीयतुत हारी २–क्तये-नाहिर --मसीमुन महाम मूगुम्याफेतीन वधारतुनिक नवमया नरपानामा :-- नफम ईमान १-मुख मोना। पाहपुरहानुद्दीन बानमकी मृत्यु सन् १५८२.के मपमपाई है। इन्होंने अपनी रचना की मापाको पनी कहा है। इसकी सपी रचनाएँ पचारमा और विपकी प्टिसे सभी माम्यास्मिक है। इनकी समस्त पनाम मुख बसीयतुम्हारी मौर परणार नामा अत्यधिक प्रसिद है। पिपयके मम्मीर हनेपर भी पापा सरह तया काम्मात्मा सौन्दर्पस परिपूर्ण है। पह बहानुन पानमळे पुष माह ममीनुन माना नपने पूर्वोही भांति भाम्यारिमक नौवन रिवानेपाने सन्त पुस्प थे। मप मोर पच दोनोंही प्रकार की इनकी रचनाएँ प्राप्त है। मुहम्मत नामा गौर रमूनु-पाडेकीन इनकी अत्यधिक प्रसिर रचनाएँ है। इम सन्त कमियॉकी पचारमक और पचारमा रमामोबितिरिम यो इनकी पपात्मक रचनाएँ उसी प्रकार फारसी मनसबी पर भाचारिण है पिस प्रकार प्रेम मापी मूफी कपियों की प्रसवात्मक रचनाएं है। मम्प ममेक ऐसे परियों की पनाएँ मी प्राप्त होती है जिनकी रचनायक रिपप धर्म हा याम्मारिमको स्थानपर कौकिक रहे है। इस प्रकार पपितामें सबसे अधिक प्रसिटशाहीम मारित पाह (१५८.१२.१)है। माहीम मारित पाको मानिनी पापा और समरे काम्पसे ही प्रेम नपा प्रत्युत मारतीय मॅगीवसे भी उसे मायनिक प्रेम इतना ही नहीं यह पातीय संपौवका प्रामाणिक माता भी पा। मामासाहीम बारित पाहली रचनासे यह बात स्पष्ट हो पाती किया मारलीय समीवरा मम पानकार पा। प्रसिटी कि पा एम प्रकारको पुस्तक निबनेका उमरे मममें विचार बाया तो रवर माणसे विद्वानोको गुलाकर रमने पहले मापाश सम्पयन किया तत्पश्चात् मा पुस्तककी रचना की। माहीम मारित शाहले इस पुस्तर में परमापा भी प्रयोग मिा मौर भरवी भरली राम भी इसमें पाप्त माए है। शिनॉय मनुमान है कि यह पुस्तक १५पी पताम्मा मन्न अपमा १०ी पतामा प्राएम्मम मिती गई होगी। पा।

- पाहीम बादित पाइको रस पुस्तक 'मयरम की भूमिका पारसार प्रसिद्ध कषि वमा सेवा परी ने सिपी है जिसे 'सेह-भर यह मामसे भारत पारसी साहित्यकी प्रत पनामोम माना जाता है। माहीम बारित साहरे पश्चात् मुहम्मर मादिन पार बोनापुरको पर पहीपरटा। मुहम्मद मानिसहवमा नसो पलानोको पितानमा कपियोस अत्पषिक प्रेममा। पस्तमी मसिरप पर और दौलत साह चनो पम्प- का उत्खनीय कवि है। स्वमी को एक रपना पापर मामा प्राप्त पो एक प्रापारमा पाम्प पवार। यह एक मामी कामना मनुवार गिसे समी ने मुरम्मद मारिल पाकी पत्मीक मनुरोपपर पिया पा। २४.. पेबकास विचार मनुवार पम्पको स्वमी मे मा गेममें समाप्त रिया पा। मनुबारा कासमपमम १४है। मलिक पनर की रचना भी प्रसारमा है। पनामा नाम | पहिव है। मामा ममीर ससकी एम फारसी रमनापर माधारित है। सन् १५५१ में बौनापुरकी राममहीपर मसौमादित पर नितीय या गह सम कपि मा और प्रसिर कपि नुसरदी पा इमीके पाप सम्पाप मा। नुसती की समामि तीन प्रमन्त्रात्मक रचनाएँ प्रसिरह मानीनामा २-अपसने विस-मारीवे-सिम्ररी। अतोनामा में नुसरती ने सिप भारत में भूपों मराठों मारित पाहो बार गुमाहिर उत वर्षको पानी मियी पोति प्राप्त करने के लिए उस भामर्म पा रहा पा। सपनाम तिने तालीम मामाका भी भरपधिक मुन्दर विक्रम पिया है। पुमाने पर में उसने मनोहर पौर पदुमालतीको उत्त प्रेम का मुरन रियायो उस्त माम रभिपौ बारिक मोरप्रिय प्रेमसमादीमा भिम पामोरे माप पनि भी अपनी पाम्प नारा पिपप बना करे। पारोपे-मिरनरी मुमती की मयूरी रमाको ५७ मेगापुरके विपसमोर नमरती रे मारे पारण पूर्वमहो सकी। बौनापुरक मारित पाही पाती पबियॉर्म एप्रिमी 'बीगापुरी भी एक प्रमिवामा। हामिमी बौगापुरीकी रपना मुम्नया है। म गमन बाप्प हगार पर है। एमिमीको मृत्यु १९९tt। सरि बनितिम काममें बाब भी भगवाए है कि सम्पम्प पर मिपी मापाताना मालम ली। बोरापुर मारिसपाही राग तिरिम रहिमन रागा भाग मोर मारियर निसरी पिटने महत्वपूर्ण स्थान है गोगुणा बिगादी पर हमनी पर ममानिमार मह गरम में रपापित हुमा । बारा मार मारपी पुष्टिी इन सीमा मनिष परम पिरोप महत्वका है। मन् १५२ में गोलपुलेके राजमिहासमपर मुहम्मर कुमी पुतुर पार ठा। माय पिपताबा मतिरित यह एक महान कवि भी पा। प्रसिव है कि उसने एक माउसे भी ममिकमेर कहपे । बह पश्विनी फारमी और तेसमम कविताएँ पापा ममम उमका उपनाम तुई मान पा। पिबनी का यह पाता कपि गिमको मारी साम्य रचना प्राप्त और गिमका फाग्मीक मारारि क्रमसे मंग्रह किया जा सका। मुहम्मद मुमी कुतुप पाहमाम्नवर्मे रक्सिानीका पहलाकवि विमने भारतीय पाताबरको मनुमार कविताएँ रबी है। यह मुस्लिम स्योहाराकी भाति ही हिन्द्र त्योहारों बमम्त होपी रिणामी मादिमें भी उत्साहपूर्वक सम्मिलित होला बा। साहित्यकी पूपिम मुहम्मर फुटी युगुष माह ही यह प्यसि है गिम पपिचानीमा पहला मौर मर्य मेष्ठ पनि कहा जा सकता है। उसके पूर्व कवियोंकी भापाम यह प्रोडना महाँ लिामी देती को बास्तबमें मुहम्मद मुनी पुतुब माइकी भापामें प्राप्त होती है। माप भापा और मावापताही पिम मुहम्मर मी तुज पाहता स्थान बम्पतम । पती का पूरा नाम सम्मुहीन बाली उफामा। पही उनका उपनाम पा। मौरंगापारमें पाए से गौस पर्पकी मायु देवामाबाद (गुगरात) मए पहा कुछ दिनों तक उन्होंने मिया प्राप्त की। शिक्षा प्राप्त करनेके बाद मापन सम्पर वह मपानीके माप रिस्ठीको यात्रा की। या यात्रा मम्भपत पानी में में की थी। रिस्मीमें बनी नेपाह सामठाइ गुसपन समाप्मा- रिमापान प्राप्त छिया। कुछ दिनों बार पग्मभूमि तौर पाए। मन् १७२. में बबीने फिर रिलोकी पापा की थी। सन् १७४१ में बहमद्यपार ( पुररात) में उनकी मुरम हुई। भाषा पिसे पनी की भापारे तीन रूप। एकप मत दिल्ली पानसे परहेका गुरु रक्सिनी इमरा दिल्ली गाने वाला भरपी मिमित पस्मिनी है। मौर वीमरा यह है मिमे शिमौकी तलातीन भापा पपा रेखा यह सपी है। प्रारम्मिह-कास–२ (दिस्री) मन् १०..में बली रेरिस्तो पपनेपर सपा उनको काम्प-रचना रेशन पर रित्तोपानोको इम पम्पन पता चहा पिये मपनी पापभाको चापाको भी काम्प रचना प्राप्त कर सकता है और इमरी मोर बनी पोरिस्पीमें एक एमी मापा प्राणी शिमको परिबनीस ममाना पना हुए मी ही अधिर परि माग्निपी। यह परिमार्यन प्लिीकी पाशके लिए पामाणिक प्रौपा। एएसोपा रिम्नीको स्थानीय मापा भी दूमरे रमा पौडियोम प्रयोग होता पाना मा पा सन् १० मायहरभिम पंगामापानीयवाटो निश्चय ही एकामिन बावारण पीबी से बाहर परिमानित होना ही चाहिएमा। समापन पर पती रिस्ती प्रकारको मापा प्राप्त तो उसे उगहन निस्सकोष तोपरर या। मौर पर मनी दधिम मोहे टोयही परिपानित पापा उमरे साप रहिम है। निगमय ही बता मे बानमार सपनी बापाको पारसी मिमित बनाकर सर नही किया प्रत्युत उसे उन्होंने उतरे उस वक्त भावारपो निपटर मा पोवास्तबमें रसका बना पवावरपामार पिसके बिना तो विकासका आमही पवा। इस कामयाबियाम अत्यधिक प्रसिरकवियोमाम इस प्रभर परपुरोग नवमून (मृत्यु १०nt) साह मुगार मार (मृत्यू ०१.१) मुहम्मर पाथिर मारी गमोन हानि (१७.-१९t) ने मार मिरवा मगरे यानेगांमा पारम साग इस विकास काठमें रिल्ली और उसके मारुपास देने महान कमि पर र भाषा और काम निकासी परम सीमापर पर गया। सदियों में न्हें विप स्माति प्राप्त हुई वा सो विवाद पर मार पनेका उनसे माम इस प्रकार साता मौर नोमिन पपर मौर का वास्तविक नाम ना कोपा। मौर उपनाम है। मा -०२rt समयमा मामय पचाए। रिसौनीमी इनिहालाने और पिता माम मौर अमुस्ताह मिना किलाने मीर मुत। पर Afve पर उनके पितास नाम मानम नही है। मोर को भार ल वर्षी ही की पिकासापान हो पथा। इस प्रकार और राजौरम प्रारम्भमे ही दिनार ता। इन्ही कठिनावारष मौर भामरेम सिौपते पर, यहाँ मुहम्पर न मम नाम एस सरयनो माग मोर को गहना हिमारा जाने भारः सीमासे पर मामा तयाये पते । - प्रिारम्भमें एलिसा मीर वाले मार माहे। पर पाने माने और पा स्पमा मिला मामलिए मनमानी ही मार को पाने मारा - छाला पा शिस्ती पर मोर रेगनसे एनी-मानी मतिर मौरी पार उमा प्रभारी मनोपरा जोपर गाजम पाणि प्रसारमममम रिलीज परमार बिर बना पता था। गाना चाहिए और पारगर को नोराम्पर सम्म समें पाम्मा लिनेमा अमिर गौरमा माली है। पा मोर'की तामारप- मौर हसन - ९ रिती पवारोका मा मनपर है। यह नपर तो मर्वया मा पपा । मास्वपमें रिस्तो मरनेकी ही बात होती है। मौर की रचनायोंमें रिस्टोकी परापूर्व कहानी जिस प्रकार काम्पको मापामें हमें प्राप्त होती है उस प्रकार अन्यत्र ही नहीं मिलती। मीर की वापबीती मौर बगबीती रोनॉमें एक प्रकारही यो मानता पी नसीने उनके काम्पको करुणा तपा मेनासे परिपूर्ण कर दिया है। र उन्हें यह स्थान दिया है बो बहाँ तक मगह काम्पका सम्मम्मी किसीको प्राप्त मौर के परब इदियोंने मीर दी जिस प्रकार प्रपंसा की घापर ही किसी करिको प्रसंसा इस प्रकार उसके परपती कवियों की होगी। 'ग्राहिम कहते है। रेलवे के तुमी रस्तार नहीं हो पारिन । सुनते है मपते बमानमें कोई मार मो पा॥ मिसी प्रकार 'पातिय भपना यह माहारा है की 'नासिब। भाप मेरा हैबो मोतकिले और नहीं॥ महमा पर महमा 'मोर' का मबाग मतीच। जोर पारीरे बहुत बोर पर मारा। मारि बनेक प्रसंसापूर्म माय मौर के परवठी कवियोने मार के समय में मौरहसनका पूरा नाम मीर मुलाम हसनपा हसन उपनाम है। पिताका पाम मीर जाहरू पा। मार सन् १011 मे पित्ती पच हुए माप की बायुमें पिताके साप फैबावार पए पुप दिनकि सर सपनळ गए मोर नहीं स्पायौ सपसे पने का। ये पहले अपने पिताको मपनी काप्प सपना रिवाते थे बना पनेक बार मौर म्पानहीन स्पा केपिप्प बने। मन्तमें सापामार र मौर की मोर और सौदा का अनुसरण करने समे। सन् १७८11 में मोर सनका रेहान्त हुवा। इनकी रचनामोंमें एक काम्प-सण पपा मोर ममनपिया (प्रबल-साम्प) और एक पारसी भापामें बिता दियाँका वपन है। गत काम्पमें भी मौसमका स्थान रखनीय है पर गिन रचनामोन उनको सबसे ममम स्पान रिपाईनकी मसनपिया है। मसमपिर्योम मी ममनी "महेतबयान रिस ममनपी मीर हसन भी महापाता है ऐमी रचना है गितको तुम्नामें कोई मम्प रखना नही रखी।

मगीर भामरागीमा नाम यमी मुहम्मर मनौर उपनाम है। से सन् १७४. मरित्या पैरा हुए। परन्तु मबीर का सारा नोषण मापय नदि मम्मयगावर वा। मापसे वारपन महल परी मगर नै बले नापम मि विवाए में नहीं १८१.१ में उनकी मृत्यूहरंगौर उसी परम पिसमें पीने की समाधि बनाई है। पौर का नाम पेव मुहम्मद साहीम था। चौकापरा पनाम है। सन् १८९६ में उनका बम्ममा मोर सन् १८४१ में पनकी मृत्यु । पपग्मसे माप वा रिलोकी पनि रही न पए। प्रतिरकि एक बार महागा बदलाराने रह हैदराबा गुमाया पा पा न पए। इसी पटनासे सम्बन्धित मका निम्न प्रेमा बहुत प्रसिप है म है मुलेमान इन लिों को सकुन । कौन गाये और परलोकी पक्षिा गागरा बीस पपको बायुम गापुर पाह पार गो रस समर मुसलयम्म रखराधिकारी पीक को अपना काम्प-पुरुबना लिया। पफर की प्रासामें रत समय नीक ने यो फपिता मिली उसपर उन्हे पानिए-तीन की साधि मानको पई। पोक मिप्पाम सिरपिरहै। सफर मारफ बोयर मनपर और आप इसमें सबसे अधिक प्रसिर। माहिर माम मि मसान्तारपार सन् २०१७ में वायर पनका सम्म हमा। ममी पाचही एक पितापाव हो पपा। लितापाने रमा पानपोपपरिया परपार पारसदाबी मृत्यू हो पर मर स्माह मेसको मानहास में पमा पापर्पकी मापु रिली एसिठिन म उन विपारही पपा मार बम रेम्बापोमम रिली में ही रहने मये। दिम समय बमनुस्मा म रिती पने भने तिमी पापाग बनी र पौ। र सौ परिको भापत होनेम रतनपतर प्राणाया। तितो अमीदा ऐनी मितिमा रिभरना पाप-पनारमा गिमप महारी पान मममी बानीपोप ऐसे भी गोवानी में दो पिसाएँ को। ऐने भरली रिसॉर्म मिर्ग माणुसकारि प्रेरित में मामला रेप सर्मपि प्रमाणित हुए और नाम नामें उस मनुषले म। विगातीर गिट ममारमै पिरमार नमानापमा पानि मी मानी और रेयना में पाप-पमा और माने गा साम्मारामाशिराम बीही पहापारिमरमामे मुनमा सहरमिष पर ई ई कि रेनवा स्पोकर हो रपके बारधी। पुफ्तए-पामिल एक बार पाकर उसे सुना रिपो॥ रेषता कवियोंमें नासिब रस्मानके ममम ना ही कहा या माता कि गत पपाम बोर्मे मासिब पर बने मानोषनारमा प्रम्प निम के है। माम मौ गालिब का मध्ययन करनामों की कमी नही है। और एमा महमूम होला कि भविप्यमें भी पालिख पा सम्पयन होता हेपा। बिकास-कार-२ फुगा नपा रिस्तीपी केत्रीय राम्प-गक्तिके ममाण होनेका परिणाम यह हुआ कि रिम्पीके पास पहोममें मने होरे-धारे राम्म स्पापित हो गए। इन राम्पा माध एमपुर, सागा फखागार फैजाबार मग्रीमावार तपाई-पबार मुम्प है। इनमस कुछ यम्म तो बाप अपी ही ममाप्त हो गए पर ममता राग्य बहुत दिनों तक स्थिर रहा। मन् १७२४१ के हमनग इस राम्पनी स्थापना हुई मौर सन १८५५ तक यह अपने पूरे गौरपके माप चमता रहा। पचपि पुगागाला यग्य-नाम ही सौरा मादिक भारि मा पुगे पर बास्तविक स्मने मामटीमा राम्य-काठस ही साहित्यका सबनम्मे विकाम हमा। १दी मनामगर प्रारम्भमें मरका राम्प पूर्णपस स्थापित हो चुकापा मा यो कवि रिस्ताको तगाहो बारम रिलोकार यहाँ मात रनका यपौचित मागत किया जाता। निम्मा हम प्रसारक सामनमें विपीको नापा रिखानेका भीमका बहुत मारना होगा। इमाम पाम की कसा नपा साहित्यको मोर स्वाभाविक पवि भी प्रेस सिनहाती हामी मारम्ममें रिस्तीसे मानेपाने उम मोपोंमें गिनाने मवनोमाहिरियोगको मत्यधिक प्रमाणित मिया मिमा ममा खत तपा मीर हमन मिष महत्व रखा है। माना म होगा कि ये चारों करि पो मानो मनसे प्रमारित भी हुए और मसानो साहित्यिक मेत्रको प्रमाणित भो किया रिफीस ही बन पाये। और इसका कारण बनठिकमा बरि पिस्मीको सपाही। एपमारम्भिीबार होपी पी और इमरी मोर पवनऊ मापार हो गया। समनपसीनमाबारीका सम्माचार क्षेत्रमे पा। मारो या मरने यापकी हर क्षेत्र में मानम्मे मिम्म रितामा पालापा। यह मगर गो एकसमे ममप तक रिमोगी मोय परिसर बपीन भूवारपारा पामिन होता पणा पेन्द्रीय पति नियत होना माप नाप समान हाप-पैर निधारने मुरूकर रिप पे। महो ना कि पानीउरोन बने ईस्ट इणिया पम्पनीकी महायता कर पाणरकी गाधि पारपरमा और म माम मायके व बाते हुए समयको पी मयाप्त पाना १..मि पका १२ मा पापा। इस पपनैतिक परिवर्तनको प्रतिभिन्या मामले सारेपीपम उमर भाई। कोई देश ऐसा नपा पिसमें सवनम्ने रिस्तीसे भिन्न मपना स्थान बनानेका प्रयतम मिया हो। मापा मार साहित्यक वेबमें मऊस ही अधिक नुपूत परिस्थितियो भी उत्पन हो गई पी। मापे दिन एनतिक परिपरिकार जो रिस्मोके पावन अस्थिरता पी सो को पीही देवी बार विदेशियोडोष्ट बमोटने बापिफ सेकर भी रत्पन्न कर दिया था। ऐनी पाम रिमी सोपोके सामने मानिस पोम यह प्रश्न माता ही पता था कि- 'हमने यह माना किसिमीम में वायपे पा! खानेकी समस्याका बरिलीम समाजानम मिल सका तो सोबरिस्तीकी पार हपमें सिमे हुए मौर मिटी रिमी पुषगान करते हुए भी अपनी प्यारी रिस्तीको डोरोको विषय हो गए। रिस्त्री होने पार पहा कोदोगे पानेकी समम्बाका समाधान रिताई पड़ता पापहरुबाऊ ही बा। पाना भी रिहीसे कर मनऊो बनाना चाहते थे और इस प्रकार रिलीस स्ववान अपने मस्तित्वको मापाप्रापन करणे मानसिक मम्मोप भी प्राप्त करना बाह रे बतएर रिलास जो भी बुमी म्पति समझ पाता सम्म रसमा स्पायन किया जाता और हतारो रपमें उनको रिहाकी पनियोंकी यार भुनाने का प्रयन पिपापाता। ऐसे दुमी म्पनियों हो सवा के पि भी रेनिनि माविक संकटमि विषय होकर मनी एमी पो। स्या परा पूरा नाम या माला तो वा उन्होंने अपने भामरे हो गोपअपना उपनाम बना लिया पा। इनके पिताका नाम मायामाह पा। मापामस्तार शिमीमे मुपियवार बने पए हीपर क्या का बाम या मुर्षिागार साह मातम एम्पकाम रिमी पर। पपि बारह ममप पापब दिनोपर मारिपा (मना होगापा। नामा मोर पाहमालम माम बारको ही पारपार पपए थे। पर उन्होंने Pा का गहा बार-नम्मान क्मिा। पर इ की महरपारावारे बनुनार रिलीजीपरिम्बिनिपौ। बा पुलिॉ बार रितीम तयार पारे। मनम् गन्होंने पारमाश मुनमान पिकोहरे पानीकरी और मोरेममय गार अपने रिनो समाज पोर प्रयत्नास मुसमान कि मामपुर ममाफी पापान निया। पर एक रिम समापति पे गोतस हो भन्दा नेपाहा मा मासिौ-मनामी प्रसार प्रयत्नामोसानीन मामगार ममातमी परिणाम पहुँच पए यहाँ पन ममप तामापीयन और मनोरोभाया। अनमें मोनिती समारनेमा मनको मती गा।

रिसे फेर दिया और उनके दीपनके बन्तिम दिन पड़ी ही एचपूर्व मास्मामें पीते । दया का बना ही में सन् १८१.१ में रेहाम्तमा। एक काम-संग्रहके अतिरिक्त इम्मा को एसरी मात्वपूर्ण रचना 'परिमाए साव है। इस पुस्तकमें मापा-मिशन म्याकरण प्रपा काम्य-शास्त्रपर विचार किया गा है। यह पुस्तक फारसा है पर इसका सम्मब पड़ी बोप्सीसे है। तोसरी -हत्वपूर्ण रचना पोहानीके स्पर्मे । रानी केतकीकी कहानी है। इस कहामीको एपा ने पह प्रप कर लिया है कि हिन्पी फुट किसी और भापाका पुट न बाने पाए। मवहफ्री का नाम पेब गुलाम हमानीचा मसहकी उनका उपनाम है। मतही' अमरोहा एनेगाने पे ये पुवापस्मामें रिस्ती पहे पए पे। रिस्तीमें पते एरे यहाद कपि-सम्मेल्लोंमें मातेचाते रहते है। इस प्रकार साहित्यिक पीयनसे भी उनका सम्बन्ध पा। पुलिों तक रिस्लीम मौरीको दोगभटम पे। मन्त करना चले गए, यहाँ मिर्गा सुलेमान शिकोहरे यहाँ नौरोपए और मन्चमें पुममान किम काम्प-पुस्के स्थान वह पहुँच भए। यहाँ मवाफी और इया मपने ससानों को मुरक्षित रखने के लिए मम होते पते पे। ये मग इसने या कि एक दूसरेको नीचा दिखानेके लिए बहुत नीचे तक उतर माते थे। निस्सार इस प्रकारके यसबनम्मे रस जीवनके स्मामाविक परिणाम निसने समाजको विलासिता तमा बानोप-अमोषको मोर उम्मुख कर रखा पा और मसनको साहित्यको भी बहुत हरसक प्रभारित पर रखा था। मुबहफी की मनमा रन होटिके पाम्पाचार्योंमें की जाती है कपिके ममें मी र पर्याप्त प्रसित है। हो उनकी अपनी कोई निश्चित मैसी नहीं बन सकी रिपका कारण यो-यो रिपोके मनुपरमकी मोर उनकी इपिबी। गुप्मत जिनका नाम पेबान्दर बसपा रिमोसे पंगापार बार समापिही गिमा प्राप्त की। गिस समय गे रिस्सीसे बदनऊ माए नपानमें मियानुनमान सिकोरके ररवारको ही भूम पौ। सुतेमाल मिकोइ पाहमानमरे पुष और मासफररागरे यग्यकालमें भवन से माए । ये सप तो परिये हो करियोगामारर-सत्कार भी करते समावत रिलीसे पो भी कामिकतामऊ माता मा मुसमान पिकोहको घरममें मपश्य पहुँचता पा। बा गुरमत पाए वो भी मुकेमान निको पारी बम पए। उस काम्मे राम्यापित बियाँको तर गुरमत मुमही और इत्या में पारम मुम्प स्पान प्राण के लिए परस्पर मोमा बता रवी पी मार एकपूनरको मीना रिलाने के लिए निम प्रभारपासप र गाते ये मामम्तमासीन प्रम्यामिव साहित्यका बा रपारण है।

दिमतीसमो प्रसिर पिसवमाए वे उममें एक मुकाम हसन भी या मोर हसनो मामस प्रपिस हुए। इम मीर सनके पिताका मान पाहिए । *बाहिक उपनाम हो मालूम होant बाहित छितीसे भागार मए यहाँ मीर हन भी रनरसा मए थे। मीर हसन सिधिमालयी साम्यमान के कारण। इस मसनवी पाने उस काम मोपनको समनने पर्याप्त पापता मिलती है। मापा मोर साहित्य विकासको दृष्टिले बताउम जिमको विमेप माल प्राणमा उममे मामित सानिध मतीम अनीस स्वीर मुम है। मासिप माम पेश इमाम मा फेलापारम भरा बम हमा पा पर सपनऊम उम जोपर पिडायलिम्वत हुए। कारनामें बहुत पोप उरकी ऐसो प्रमिति बोयो राप-कर्मचारी उनके शिष्य बन गए। इम परार सपपि नहोंने पर पारसे सपमा सम्बन्ध स्थापित नही रियास प-मिर राज दरबार मातार बमा पनामा। ऐमी पार्म उसको मारक नियमामा पानरमा पानापा। पर सनरा पाभिमान पहें एमा करता का। ऐसो रमाम उगवना छोड़ना पका गौर उन्होने अपने धोबना कुर मात इलाहाबाद कानपुर फैजाबार तमा बनारमम बिताया। भयानमे पापा और साहित्यकाको विकास मारह भबबा भाम मासिग हो है। मानित मापारे सम्बन्धमे बहुत सारे मोर मासान परेषामे म्पति। इसम परिणाम माग निम्म पापा बहुत कुछ परिभाषित हो गई। नको पिस पदपि नामित को कोई सन्न स्थान प्राप्त मही हो पा पर पापा मुर प्रयोग और मानवामनर प्रयोग गरी सरप पगी बिपता। मापापी मोर पिम्मान कारण माटोबाय परि- मानिता, पररिसर और माकिस्तानपर मोनोरा म्यानमाम्पमा म प्रासमोरना सरा मांगर-पोरनापर होशित हो पमा पोशाकम कामको राम्पको सिमपता बन गई। नामित ही मोनियाntrit मानिरा भी मनोनित पम्पिाए। मानिय पिता लामामा नर मुरादाबारेमा रिम्पोमगागापमए । मारिप होपर पमाना। बापामने है। पिनापरेरान हो परामिन र शिक्षा प्राप्त कर मो। बोहामार मार मिया मुरम्मर को पा सरा मामीर होमए मोर मी मार रायन परेबाए। ममप मम I और मामै राहिस्पिटल पगामापा माति पुमा रेगिया पर। परनामा मुमकी से रिपारो ना मोर दर बारमा राम्म एसमे ही हमने मासिख मार मातिए के समसामयिक होने कारण उस समय, मानस कवि भी दो भागोमें बेट पए थे। कुछ सोप भासित के प्रगसकोम और कृ मातिम के। परिणामसाप इन दोनों महापिकि बीच कभी-कभी नोभी पाया करती पी। साम ही पापा और काम्पो इपिस यह मामा काम हुमा किस प्रतिस्परकि कारण दोनों महापषिमपनी रचनामोपरममिक मम्मीलाम म्मान देते रूप मए। मातिष की भापा बहुत मुम्दर घर और प्रमापूर्ण है। मासिव मोर माविध मे मबसपा पेद यह है कि मासित की मापा हाँ मनावस्या पसे वर्तकारासे सोहीपो भाति की भापा यव सरम तपा स्वाभाविक है। 'माठिप की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मैं अपने भाषाको प्रभावपूर्ण तमा भितारपा भाषामें मान करते है। मामाचो हमादि इस रिसे मीर मौर पामिय के बाद परि किमीको स्थान दिया पा समता मोरे मागिय है। मसीमा पूरा माम पमित रमाकर कौत पा। नसीम उमा उपनाम है। पामारी बाह्मम । मातिए के पियोंमें इनका मुम्म स्थान है। बस इन्होंने पमन मी लियो । परन्तु उनकी प्रसिदि ममनी मुहमारे मसीम के कारण। उ मसनको साहिपमसनदी सेहपान के मामले प्रमिय ममनरी मही ममीम की गुमशारे नमीम है। मसीम पा १२ वर्षकी मायुमै मन १८४४ में मवनभूमे हात मा। यपि उक सारे काम्पमें रिस प्रार परतमा माथिक प्रचलन पाई मी प्रकार मपन में भी पा पापही मर्माभिकरपा मया है। पर जिस समय मान नामित पंस काम्पमा पारण काम्प नाप स्पपर ममिक म्मान देलेबाला पामीर रचनाममि स्वाभाविकता म्पानपर प्रतिमासा ममिम्म-अधिक प्रभारी पपा पा। मन माम्पामाम दो ऐसे पियोंका उदय हुमा मिनकी रचनामाने उक्त समानुमित मास्वामें मग्नुमा उत्पन्न कर दिया। मेोपनि मनीम मोर पीर । सामानम पवन पाम: शिपा प्रमो माननमामले मन मपनपूरे पूरे समाचार एप्रमरसे गिपा पानापरणायामा पा। मुहर्रम के निॉमें हमार्गे स्पानगर इमाम हुमनके पसिनानम् मम्पम्धित मातिमा होना मनोजौरनम माना। इन ममिमामा पाप पापालाई उम ममिपा कहा जाता है। ममियाना मीधा म मधपि गो पीत। पानुस है माम हमन मोर उनके माधिदिमिनम सम्परिणत पर गीत। मरि पर यहां पिमा मुमनमार्मी नमारपाई पदापी इस मनिमों ममिपास रिमोनीमात्र प्रपन भी सर एण है। इसीलिये ममियांग प्रधानमग मी मिलता है। परमम ममेरमही मिसिपेको साहित्पिरमात नम् भी यति मनास और और की रचनायोमें। मनोस' और एबीर पूर्व पूरे मतिमा इपिमि सर्वाधिक प्रतिम रिपार माह बतीफ और पमोर एहै। इन्हो बमौर के सिमा नौस और बोर र नि निस्सम्य मसिमह ाम्म दुर्म मोर पाहाता है। बनीठ का पूप मान मोर बार बातोपा। मनात मा उपनाम है। इनके पिता नाम मौर रतीया। मौर वीर नाबादमें परे। गावार ही मौर मनासका सन् १८४में कामया। बोहनपर मनीस अपने पिता साप मापार सनऊ पसे पाय मासिवादरमहागार हमारायबरमौर पणा यौ। सम्मेवाहर बार पसारमही की ये मा कमी गार मानेका प्रसार मावा बा तोकही कि मेरी कविताको सो पारसे लोप ठीक्वेसमम त है बरबस्मानडिलोप याया ममता करने। समयूमें से 10xt में मौत का मा। मसिमे कमरे पि मिजा महामव मनी रबीर है। नाम रिसती हुमा। पीर के पिशापित समयूपोमायेरे यारसार का शारागीरमाता। पैसा लिहावा भाई अनीस गोर गार समसामरिक माला प्रतिस्पर्धा भोवो पी और नयनो मसिंगा काम्पस पिमपस्पी रखनेवाकोपबीसिये और वरिपके भामापोमें। मानीस और रकाम्पीरिऐपहाबोले समयमे पड़ी पापा साता किनिस प्रसर बानिय मोर माविण की पापा उपा वन पंही कामता मौर सामासिवा पापी पाता है उसी प्रकार मनौत और पौर कोना है। बनीस कोरपनायोमेसरमता तपास्वामाविम्वाई और कोरपनामों मैं लिष्टता और इषिमता। भनान और पार को पनादिमी पेरने भनीन को तोपिम पराया और पीर मोपनिय महोमो। पमा पापा बनीम मौर और न मनिषा पाम्प मेवाको उम बोपनको गोहरप्रभामेमामारमोबिनिताकोबार भामरा मोर साबि पी गिगो लिए प्रेमिर ही पापा रमापी पनिको मार रिपा। और इस पार नवमी पापा और पाप मानुनम बा नवा। बानिक-कात (प) रामपुर मौर हीरागर मा १.साता मंग्रामविलादीन का पिनी पाप पम्पमै म्यापित हो जाने पार रिती र गोरि नामने गौरन मापन सम्पपीरित समरमा मापसे। एक प्रसार रितिकार म मब उनके लिये यह सम्भव न रह गया ना कि पूर्ववत् अपने अपने स्पार्नोपर रह उसी प्रकार बीवन बिता सकते में विस प्रकार मभीतर पिठाते मा हे। पायरोंकी द्रष्टि मास पासके नन स्थानोंकी मोर ममी मरि घासापोडीग साहित्यिक रचि रखत पे। इन स्मानाम यहां रिस्मी मौर बनने वापर सन १८५.' पाव पिप आपस मिनका उस्मेब पिया जा सकता है। इस प्रकार है- फरयाबार भगीमावार मुभिदाबाद यम टॉक मंगरोठ भोपा रामपुर बार पियवाद। इन स्पानों मर्याधिक महत्व रामपुर मौर हररामारका है मम्म स्मानोंकी मपेशा यमपुरम उर्दू शायर मरिक सम्मामें एकत्रित इसका एक कारण तो यह पाहि रामपूर विम्ली मोर मामाबीच है। दूसराकान मह वा हि रामपुरके पासकोंको सप भी पायरीस रचि बी पोर में पायरों : शिााँको सपना माफर न समझकर परापरीका प्रहार करते थे। मगाव पुमा अपीता सर्प उमौर फारसीके पापरपे। इसी प्रकार नबाब यमुफमनी क उनके पुत्र नराम मममी भी वापरों तथा साहिरियौका यहा सम्मान करल' इसमा परिमाम पहामा कि रामपुरमें रिस्मी मौर सामने पायरोंना एकम समुराय एकत्रित हो मया बार इस प्रकार रामपुर रिडी मोर सबनम्मा सर ससा बन गया। याँ सा किया बारा कि रामपुरम रिकी मार सनळमे म हए पापरोंकी मच्छी मम्या एकत्रित हो गयी थी पर इनमेसे मधिक स्पानि प्राम पामर इस प्रकार मौर मुगफ्फर माती मार व इमपाद मती पर मुन्नी मम मिति तम्तीम हम 'भाषिक पापा मारित इनमें मुन्गी बमौर महमर ममीर मीनाई मिरविापरा सर्वाधिक मान। अमीर सन् १५२८ में ममीन पर राम्प राबमें सतन पराहुए। ये पाउने ममिर मुस्टिम सन्त मनाम पाहू मीना निमकी समा हवनऊमें है के सत्र है। सौपारण मौनाई कहता है। मास्पसामने इनको मायरोरा मौक पैरा हो मया पा। इसम समय भी यह मान- बातावरण पायरी मामा बा। मवनोम प्रसारमानापरपने ममी मीनाकि पीप्रभाषिकम्पिा और यह भी मोरे ही भयो भन्यामम एक मन्छे साय' रूपम प्रमिद हो मये। मन् १८१२ई में इनकी स्पानि तसामीन पामर ना पारिबलाके दरबार पहुंची। राम्पधी मोरसे इनको दुशया मया तपादन महपर बमीर १८ बनाये मुनी ममी और ये एबार सभा हो पये। परम पोड़े ही दिनों बार अदि १८५७ ई. मे घर नबाव बाविद महो पाइको सितार कर कहा और दिया गया और वाजपेठ विमा पपा दो तन बरपायरामी भी स्थिति निया मरी बिना रबार सम्बन्ध पार पर पुल निषि बाद अमौर मौनाईक प्रमपुर परमाहीन समपार मुमतीयाने रामपुरमा निमा कहाँ समीर ४३ वर्ष कामावर तथा सम्मान पूर्वक पे। मन्तम ११.१ मे मे हररामार गमें यहाँ एक दिनार बार बीमार इस बार विहन्तर वर्पको मायुमै नकारात हो गया। मनार की पनामांकी पर्याप्त सस्मा पप शेरप रोनों ही दाने लिया है। यह ए मारे पार ही नही प्रत्युत् भापा और काम्पो मर्मम भी। कमरे शायर विमा एमपुर और फिर दरबाररवारसे समाप पापा को मिप रप इस्तेवनीयाप लगी। राम का पूरा नाम मिया बा र उन स्पनाम है। सम १६ मरिस्कीमें 40 हुए। राप के पिताका माम मार पम्मुनिया पा। में वाय निमारदीय यो कोहावामाई। ममा पम्मुदीनाका हाल जिम समम हया रस समप दाग को बार बार सावकीपी। पिठापाठक पार प की मानाने मिरी मुहम्मद मुस्लान + मिर्गा या यशार मासे विकार मिया। जिस प्रकार मावा साब राप सास पि काम किा भt लिल पारीकीपर्श एवी पी नाम का पालन पोषण मा पिता-पीता - कर मेरा पिडा पिसारापान होपरामरे एकही पपे पार सन् १९४ार्प पाया निमगाएकागो रिस्मीवानोसलिली छोमा पा न भोमले पम्प सहित सम्म विमार रामपुर पषित बम समय मबार मुम्पीयो को पससे पनी सग की पहरीम पानी। राप दुरापर मबार कागतीको रे मुसाहित और बनाम रामा निम्न पियेबए। र २४ वर्प एमपुरण ऐ। रामपुरला गौरी मुए निवासीरम न रामपुरी मायमरले । सन् १ti गार गोपीगी ममारिकाप राम की सारी गापामार पानी रिया और उऐपमर पापा। सर पर पगार म्मिी पर। रिस्मी शनि एमके पारमन् १८८t मHिIT महर। परन माग रगतीमुमार कोई काम नपा सरावानुरिरिम्पीय प्पे। तीन वर मार सियार गरे। इस पार सोमनामना पूरी हुई। एन पहन मानापार मी तर मानिन यिा पण पुण्ही रिलाय एक पार मामिर मार फिर पत्रहमी मामिकहो मये। पाप नगभग बापपर्प हैररागारमें रहे। सन् १९५१ में परावा ही दाग पा रात हमा। पाप काम्प माह प्रकाशित हो चुके गुप्तमारे राग महतादे दाम दौर यादगारे पाप ये चार दामको पयोद संग्रह है। फरपारेगाम मामसे एक ममनबी भी है। इन रचनायक मसाबा ममाय रामपुर बौर निगरामकी प्रासामे पुछ कमीरे है मौर एक पहरे मायोष रित्तीको बरबाणीसे सम्बन्धित एबना है। गिम प्रकार मोर ग मोरा नाक 'माठिय इनपा मुसहपी मानिय मामित मौर मनीम र बीर मारि मममामयिक पिया में परस्पर प्रतिवादिता यही है रमी प्रपार बमीर और आप भी मममामयिक पनि मीकारिक रूपमें प्रमिरहुए है। निस्मन्नेह ममीर मौर राप की प्रतिशिमला का सम्मान पक्तिगत सीमा तक कमी महीं पहुंचा मार न कोई ऐमी पटना घटी है रिममे यहाणामक किस पापा एक मरेले प्रति निमी प्रकारका मनी मालिम्प यहा। हाँ ममीर मौर पाप के पिप्य जिनकी पर्याप्त मस्या पी बाप्प ही बरमे गुम्की रचना की प्रममा विपत्नी की पाकीत मातीचना कर विापरते थे। परमतो ममीर मेमोरम राग हीने इम प्रारकी मातोचनाओं को कमी पमर किया है। पाग की गर्मी प्रमाय मुप युक्त ईमापारा पहनामा प्रमाह प राग को पमहीकी सबसे बड़ी विमपता है। हाराबार उर्दू भाषा मौर सारिएपके सिमडी दृप्टिमे रामपुरके मतिरिक्त रिस स्थानको विषेप मास्त्र प्राप्त है बह निस्मा पवार है। निस प्रकार 'भापा मार माशिमो पिकाममा प्रारम्भिक मागणार है रमी प्रभार उमापा मार माहिम मानिकपालमा ममाय भी हैराबादम है। निमामुमपुष्क मामफयाा प्रपम (१६.१-१७१८) मिनरा नाम मौर कमीन नापा। परमी पायर। प्रामीम उमदे दी पाम्पमपह है। मम्भर है न मी वन्होंने रचनाकी हो पर यह प्राप्त नहीं है। मामासाही राम मौर माया ममी तो मामफगार पट मौर उनके पुष पौर उम्मान मनीयामागास वई मापा और मागिरको उलति नपा निगमकी एप्टिम रमेशनीय है। यपि विस्ती मार लवनऊमबारदे पार होने पारण सम्मार पौरु पहकार परि- इन रिना मुफन है बड़ी दो सगुन । दोन बाम 'नीर पर रिस्की पत्तिाणाहर।।

२० बार न पापि पर फिर भी रपवार (स्पन) को को सघुमने बहुपोको मपना भपना स्थान पाने के लिये विवर करपा। पैसा कि सिवा पापा पिरो प्रतिर पापर अमौर मौर 'राग' को इस यो सामने वीर ही लिया था। इनके मतिरिमा माय भी प्रसिर वापर और साहिरिया समप समयपर हररागार की और विपते एमौर यहाँ उनको स्पान मिताहा। अमिर निशान सम्मरमही मिरम्ममी मोबाना सिबसी नोमानी मौहानाहासी पपित सननाप 'सरपार मौसमी ममुह हसीम पर वारि पानसे साहित्यिक करार पारसे सम्बन्धित है। तपा इसी प्रकार बहुतोंको ईराबावरी बापिक सहायता मिलती दी है। पपपि रामपुर मौरीबारको रियासत रिल्सी बौरहवाको पापरों- कोमापयरिया और इस प्रकार पापर परम्परापत स्पर्मे पापरीकरते रहे परन्तु इनके साधनों की एक सीमा पौ। बत उपज रियाममिनदी मारे शायर और साहित्यिक मामय हो पा सकी ये बौर म यही सम्भव पाकि बिनको मामय प्राप्त पा उनको प्पापी पसे यह प्राप्त ही रहता। ऐसी राम बार-बार पापरोंफोमामय प्राप्त करनेके लिए पर उभरौना पातापा। परिपाम-सस्प पायरोको पम्पनामाको पतिरिकन पपाको पपरीती भूमिका भी अनुभव प्राप्त इमा। दूसरी मोर मीनी पासनको स्थापना माप-साब मिली पिनाका भी प्रचार हमा। दिन प्रार अपनी प्रासन म एक जातिका दूसरी पातिपर मानन मात्र ही न पा उमी प्रारोगी मापाकी शिक्षा पिसी पिपिष्ट मापारी पिता मात्र ही पी। प्रत्युत बपिनी पासम माम्पमसे वहाँ हमारा सम्पर्क मापूनिम्ता साप हो गया नहीं अप्रिती भापाने हमें मामुनिक विचार सपा प्टिसे परिचित कराया। पहर बपि भरि पूर्व विरेपिपोत सम्प, मा पुराा पर पह बिगी पपिपा गोही रहगामे इसलिए एक सीमा तरी उस सम्पर्कमे देसमामिमा संस्कारों मरमोरा पा। पर मेग्रेनों मपई ऐमा म पारे एक पोरपाय पानिक सागरे। उस मोरपीर पातिक पहाँ बामुनिश्वारा सर्व स्पर्मे उरम हो पाया। बा भगाके मम्पर्क में पानी नापाको गिलाने दमारे पीपनके प्रत्येक क्षेत्रको सामोराही प्ररस्त प्रभापित भी पिया। भनी नापा साबभाष पर दिनी माहिरपा परिषय मिमा तो मानो हमारीबाग पी। मौतम मारिएपको पपवर मलाही समापे। अन्य भाषामोजी तपदी पी एक प्रकारको पपामा मा गि गमनमा पाताईसीमा पीपी पोएमजीवनम्बरमपीगोपनी पम्पोमारण परम होणपा। प्रेमी नाएिर म न कोई निरिए प्रभारी पणाही भारिप पा प्ररपुर उनमें पपरे निरिसामानी उसयाम नारा नि मारिनेक प्रारको सनाबी। समार त पापर और नाशिस्विर भी पुहिम प्राण मारिप सपनेसरीमान मारने लगा।

२१ मेरेगी राम्पकी स्थापना मौरी मापाकी धिमाके बार मपम परि स्पितिके मनसार बिन मोर्गाने नई कविताका विश परिवर्तन किया है उममें सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति मौणना मुहम्मद हुसैन भागार मौर मौलाना मम्ताफ हुसैन हामी है। निस्सन्देह नई धापरी रिया परिवर्तन करनेवाले ये दोनों महानुभाष ऐसे म पे कि जिनका पिनी भापा मार साहित्यसे कोई विशेप परिचम पा यह अंग्रेजी साहित्यकी स्परेचासे उन मनुवादाकेशाराही परिचित हुए पेयो मेपेगी राम्पही मोर से कराये गये थे। पर इन मनुवारसि वाधुनिस्वाके साप साप उनको चर्दू साहित्यको भुटियोका भी पता बछ गया। परिमाम सम्म उन्होंने उर्दू काव्यको एक ऐसा अप देना चाहा पो मपमी सारी परम्परासे भिन्न न होते गए मी मामुनिक बीवनकी मागको पूरी कर सके। मोठाना मुहम्मद हुसैन बागार सन् १८१२ या १८३18 में रिलीमें पैदा हुए। पिताका माम मौच्ची मुहम्मर पाकर वा। मौल्मी मुहम्मद बाफरफा उस्ताद जोर से मित्रताका सम्बन्ध बाबत उन्होने बाजार को जोर की सेवाम दिया। मागार मे पौर की ही रेखरेख में प्रारम्मिा मिमा पापी और काम्प पारपसे भी परिषद प्राप्त किया। सन् १८.६ में पिता मारे गये पौष को पहले ही मृत्यु हो पुकी मी। पर रिस्मामें कोई सहायक वा सम्बन्धीन प पया पो मागीविकाकी खोजमें भागार लाहौर चने पमे पहारे शिक्षा विभापम नौकर हो गये। पोरे ही दिनों में माती पंगाय नामक पत्रके सहायक सम्पारको ममे। धिमा विमागने हमसे कसमुक हिन्द सपा मम्परपुस्तके बिगाई। समस्त सन् १८९० में भागार में एक प्यारयानमें कविताके सम्बन्ध अपने नये विचार प्रकट किये जिसमें उन्होंने उर्दू और फारसी काप्यकी पुटिमाँकी मोर मोगका प्यान मारष्ट किया। इन विधाके प्रचारके सिए उ दिनों बार साहोरमें अनुमने पनाव नामक एक संस्थाको स्थापना हुई जिसके तत्वापमानमें मा सन् १०४ को यह पहला मुसायरा (कषि सम्मेम्न ) हमा विमम नये रिपाटि बनुसार पौवन बार प्रति बमसे सम्बन्धित कविताएं पड़ी पई। कपि सम्मेलन के पूर्व भागार मे मापण रिया जिसमें उन्होंने स्पष्ट म्पमें कहा कि पितामें वास्तविकता पा पानीयता अवश्य होनी चाहिये। बागार की कुछ कविताबॉश साह उनके पुष मुहम्म माहीमने सन् १८९९६ में प्रकाशित कपया है। बागार मतिरिक्त मौछाना मस्ताफ हुसैन हामी म स्पान है। हाती मन् १९५० में पानीपवमें पैरा हुए। हासी के पिवान नाम सारा निबरप था। हामी ममी नो वहिए पे कि इनके पिनाका देहान्त हो मया। - 'हाती निमा वाम प्राय सोयोमा और बहनने पिा। समा पर्पकी मार्म हामी का निराहा सन् १८५४ में एमी पुपकेसे दिल्ली पते मये। पिल्लामे पाविस महासे पुछ दिनों का बरवी भापाहामायन यिा। सन् १५५६ में पानापनकोटमामे। सन् १९९६ में हिसार में पीपरी करी पर १८१. फिर वापस पानीपत बसे पपे। दोनचार वर्प पानीपत में पने मार मार मुस्तुमा पो पता है मुकाव हो गई। पेपता के पास बहामीणगार मिला पदर हामी मार धाऐ। महमि माहर परमही गरमेट रिपोर्स एपनाकरी मिल गयो। यहाँ हाती को प्रेमीसे उम बनूदित पुस्तकोंकी पापा मुर करना पड़वा । मिस गो माधुनिक चिारोंकी बानकारी प्राप्त हो गई। बार बने बार की हिर पिता पर यहाँ उनको ऐसो बनि सहमे शिक्षामा स्पान मिल मया। पही तर सप्पर बहमद खां से रमका परिषयमा। सर पम्मद महमरवारे अनुरोपी मारपरकाम माम माम्म सिमो मुमामे हानी के मामले प्रसिरह। हाती को सम्म मात्रोंमें मुनाबाठि रेषा परप्राप्त नियाले उम्मीर पा रोगाने हाली मनिषित है। हामी मौलाना हम्मर इसन भागार पापिन अनुमने पंसार मुशायरोमें भी सम्मिनित मा करो। शासी अपनी पार कपिधाएँ बरवात मिण पम्मीर जमानिये पम-की-इन्साफ इमेपतन इसी मेनुमन मुशायरे में पड़ी थी। धन् १९.४ मे हानी पो पामुक-तमाको मारि पिली। १ ९में हाता पा पानीपन ही सर्परान दो पया। नगरसरिया भागाकारापाशीवास्थान सबसे मत है। मगरको सबसे बड़ी पिता यह है रिति रित प्रारकरना हम पराला पंचमतो रमपूर्व रितीन सितारगारमें ही कई मापूर उमा अनुमरण कर मसी पनानी पर मारा मनापा पोमानी सम्परे सिम पानी मुरिकम मागममें पा। मावर बषिरारी बोरर पर मार पौत परी होनही मी पम्प मापनम बाबाता धारीवातारा रोडीदा। मारा परि मसाप मोरोम महीने और गुमार सारी बातेपाती निमारे सगे ममा पम्प जा महोते। शारा यममानिस्पतियों मर गप्पा मार ली भी। सरमप्पा मरियाणा प्रतिनिपितर हे हि मुमतमामानी एप प्रतिरोबार ममताराराले सामही भागार मनवी भागरियापारमान पर मनमानी रामो पाप मल्योप रमा वारिप और नीतिमा प्राण र सारी २३ मौररियोंम बाना चाहिये। इसी मेश्यको सम्मुख रखकर उन्होंने मसीगड कासेकी स्थापनाकीपी पर मयर पिसी म्पमें भी यह माननेको तैयार नरे। यद्यपि स्वयं सरकारी नौकरी । इस प्रकार बाबर मुसम्मानोंको उस मनोवृत्तिमा बपने काम्पमें प्रतिनिधित्व करते थे को मुस्लिम मासनको समाप्ति के कारम मुसलमानोंमें उत्पन्न हो गई दी। इसी मनोवृत्तिका प्रतिनिमित्त रसमा राम मीतिक क्षेत्रमें कर ऐ थे। बार माहागावीमा पूरा नाम भयर हुसैन पा। मस्पर सन् १८ में दमाहाबारको तहसीठ बारामे पैरा हुए। सन् १८६६ में मुन्तियारीकी परीक्षामें सफल हुए पिससे नायब तहसीलदार बना दिये गये। सन् १९७में हाईको में पपह मिल गयो मौर उन्होंने बकामतकी परीक्षा पास कर की। पुण समय तक पकात करके पार पर हो गये। सन् १९.३६तक माबरका पायाभय दिमागसे किसी-न-किसी रूपम सम्बन्ध बना हा। इसी बीच उनको बान बहादुरकी उपाधि मी मित मई मार इमाहाबार पिएपरिचायके फेनो भी पुन मिए गये। सन् १९२११ में बाबरकी मृत्यु हुई। भारर की रचना की संप्रद निहत पुरे है उनकी रचनामोंका प्रभार भी पर्याप्त है। बम्परको रचनामोको ठीक से समझने के लिए स्माम धर्म वमा भारतीय मुसलमानोंकी समातिके साप हो मायके कालको राजनैतिक तपा सामाधिकाका मान भी मारपयक है। इस मासके बम्प कवियोमे पिप स्पसे उम्मेबानीम मुहम्मा स्माईम मेरठी मुम्पी दुर्गा सहाय मुर पगरनारायप पावस्त मोर ग मुहम्मद हमपात है। मुहम्मद इस्माइट मेरटी १२ नबम्बर १४ में मेरठमें पैरा हुए। सोसह पर्पको मापुमे पिमा विमाममे मारर हो पये। सन् १९९१म पेरान ही मार सन् १९९७ में उनका हाम्त हो गया। इस्माइस मेरठीसी पाठप पुस्तकात ही स्वाम है गो मौनाना मुहम्म हुमैन मागाय की पाठप पुस्तकों का गारमें रहा है। इनकी पारप पुस्ता प्रबार पूर्व मापा मार विषयको टिम बत्पतिः महसपूर्ण रही है। मुकर पहानाबाद मन् १८०३ में पैरा हुए। १७ बपको अपस्मार्मे सन् १९१.६ में मुकर का देहान्त हो गया। मामे मुकर बौर दुमतानसे मुकर मामफ रनको पनामा साह प्रापित हो परे । परयस्त मन् १८८२६ में मयमम्मे राहुए। मन् १९.८ में पाबस्त मे काम मुहकी और मन् १९५९ में रमा हार हो गया। मुबहे पान नामक उमस पाप ना बहुत प्रमिर है। उन्होन रितू मुम्मिम एगवा सपा रामपितम परिपूर्ण रचनाएं की है मिमा एमपयमें बड़ा महातपा। - २४ ग मुहम्मर सवाल उडिसन महाम परिर्पोमें है जिनकी संख्या अधिक नहीं है। पात रस कमि हो। ये प्रत्युत् ए गत को विधायक। इमानी पामाम्य रचनाओंगोरेवार उमदे सम्मान मियी प्रकार निर्णय करना मासके प्रति मन्याय करना हो। पर साब कहना पावर किमानके प्रति मा अम्पाय भाव लिोसे होगा मा पा है और पहले प्रहमा और विरोधी रनों ही मरने अपने पक्ष इस बन्याममें भाप लेवे है। हमारे पाहमा निम्न मेर उनके प्रति कौनक दृष्टिकोन और नमको गाम्यधिक स्पितिको प्रापरयो मामिाणसे प्याज करता है। माहिरे बम नगरने मुझे काहिर माना। मोर हिर यह समझता है मुमतमा में। पात्पर्य याम्बिाम काप्पको समझने के लिए गहरे मम्मपनकी माय- (सकता है। ऐसा पहरा बम्ममन पो पूर्ण और पीनी पर्यन पास्त्र धर्मधारण बिहान इतिहास मा रामनीतिबादि विषमोकीमात्मसात् करके। पाने सवाल को घमारे लिए हामी निवारपारा और विहामो साप फेटो मोत्ये वर्षमा और माइनस्टीमवेदी बीमाति परिचित होमा पापा है। समान सन् १८४४ में सिनामकोर (पगार) में पराए प्रारम्भिक पिसा है सिपानको प्राप्त हई। गारमे काहीर ने पए। पर भारत पम र मेरे बार म पिमा मिए गए पहा नहारे रिटरी भी पास पर हो या बना रर्मन पारब पी. एकीको मात की। महसि पापन पाने के बाद ग्न्होंने बाहार रिस्टरी पुरुर । रम्होने पण तिरंगारकी पोठि भी पाप किया। सन् १९५१में भारत ममममानो प्रतिनिधियोंके रूप में मोसमेत परिपर पौसम्मिलित हुए। सन् १९1 पारा समास्व रिपात नगा और मन् १.६ में गौर बाम गरा मर्यपात हो गया। सामने और फारनी नामें पनाएं पी। रपमामि बाम्तीगोत सीम और गर्मगाने गर । फारमीम उनको पाए है। राम मारियो पूर्ण समसमा लिये प्रामा पापा मार भी बार पाई। हमपान बाप उमरनीय पियामे माम इन प्रार रिपार गरी सच स्पनी माय पाकिम भरलाय पियामा प्राधिक पसि। फिर-पिपी पर्मसम्पा २५ मबतर मगार प्पनी बामूनी मीमाष मारामारी असपर गोडदौ निगर मुपवागावी हमल मोहानी मूह मारपी वारि। आधुनिक काप्त पा-२ जूक पायरोंमें इस नईगर पर पहनेवाम शायरोंकी मूभी पर्याप्त समी है। जिसमेत प्रस्पेकका मामोसा करना भी यहाँ सम्भव नहीं है। पो पायर अधिक प्रमित हो चुके है रनके नाम इस प्रकार है गोस ममीहाबादी हौर बाधरी सागर निगामी सौरानी फिराा मोरथपुरी रविध सिद्दीकी एहसान रानिए फैन जहमा मनमो बानिसार बदतर, महीसरवार बाफरी साहिर मुधिपानी पी बाबमी मरस मुकतनापुरी बर्ग मासिमानी जमन्नाप भावार । मोटके काम संघह है सोम्यो साम नरस-को-निगार मोनिपात हर्फ मोहिकायत रामिम-मोम सुम्थुम-मो-सहासिष्ठ समूम-ओ-ममा सरोद-यो-शरोश । भोप हफै वाबिर मामक एक बड़ा काम्प मिव है जिसमें मनुप्प के शामिक विकासका पिमपम है। हफ्रीन पासपरी बाळपर पंजाब के इनेबामे पासर है। इसके बनेपाम्प-मग्रह प्रकासित हो चुके है। पाहमामए इसकाम उनकी ऐमी रचना है जिससे ये बातही मोत्रिय हुए है। सागर नियामी मेरठ के पनेपाते है। ये सीमाव मामरामापके पिप्प है इनकी मापा भी सरल बोठपाठकी मापा है राष्ट्रीय विपर्योपर मा राष्ट्रीय मेतामापा इसकी रचनाएं हैं। इनके बार-ए-मशरिक मौज-मो-साहित तमा रंप महम पीन काम्प संग प्रापित हो चुके है। मतर पीरानी टी एनेबान में। पुमावस्पाम ही उनका देहान्त हो मगा। के सम्ममताप्रवियोंमें मवर पीरानीका उन्न समान है। इन - कविता साह प्रभाषित हो पुके है। रगिस मिहीडी माठापुरके बने बाले है याबरमके पायरोंम रविध का पा स्थान है। रविश की भापा प्ररमी मिभित्र है और इमामसे प्रभावित है। फिराक पारपुरी पूरा नाम रघुपनि सहाय है। फिराक उनका उपनामहै। वर्तमान पियामें फिराक स्पान गाव चा है। फिराक की गरम मौर बाइयां मान प्रमित ही प्ररपुन पाम्पही इपिमे भी बहुत फिराफ उछि उन कबियॉम है या मप्रेमी साहित्यसे भी मत्ती- ।

२१ पति परिचित है और भावनिक नाम-पत्रामसे भी मी पामक है। कामनाव मसयस रममोहिनाबाट भोर-ए-सार पाममित्तान 'जिराक की परक पाई वा प माइयाँका सार है। एहसान शनिट भी एक व कषि। मितान और मगदूरोके बोरन परनिको रथमाएं बहुत प्रक्षित है। हमने भीम संग्रह प्रकापित ही पूरे है। प्रेर महमर और प्रगतिमी पनियों में सबसे अधिक पो-सित पस्तियोमें है अपनी साहित्य साप मानिक मानमानसे भी ये मन्त्री तरह परिचित है। पर पाकिस्तान बनने के बाद बहुत रिलों तक अपन विधामारण पापितानकी अकोंमें एके। प्रगविभीत विचारले कवियोपर सबसे अधिक और का हो प्रमार पड़ा है। र पोकाम्म सा नायरकरियानी मौर रस्त-ए-ममा प्रमापित हो । मनार धमाम प्रयास गार उपनाम है। मगार का स्माम भी बहव शहै। बनीमहमें शिक्षा प्राप्त करने वालों तर बॉस लिया तो मोम ऐ पर अपने प्रतिपाल विचारो काम प्रीपदी सम्होने मारी। मगार की कविताशोका एक संग्रह भाइस मामसे प्रामिर हो रहा है। प्रगनिमीत पिपोंमें बड़ी ही कोमम भामाबोके करि। रनको बिना सामान भारतम्म पुगक समारो मामामों सममा प्रपनामा प्रतिषिम्म मिला है। सन् 'मे उनकी मात मृत्यू मा निमार पर भी प्रपनिमात प्रयोग । इनामी रामान है। बत्तीपा विधा ममाण करणे शामियर और भोपातकाडेयाम मापन गर्य रिपाई। उनकी रमाएं मतासित और सम्म माया अमिरह। मती मरार जाहरा स्पाम भी मारपूर्ण है। भाभिम बनी सरकार पापा स्पान पर। उनको पनाएँ मागासी रिचार-पाराम प्रभावित है। रनोंने करिनार न मारमौकी प्राप्तिपरक प्रमगामहीमा सिधा है निमारविमान मोती मगार पर काप्प माह प्राप्ति हो रहे निर्मम गुम्प है बारा नितारा यूनको मार पापरकी र एपिया पाम जग तमा न लियाहो माम। माहिर धिवानपीवी एप पोरिरह। तसविनोबामा पमा रापमा पापिता। नारमा मामास रपिता मानाधिक। में भारी बोरप्रियाप्रतिनील पार बागिरी र मामा रोपाम पर प्रति हो।

२७ मवर सुस्तानपुरीकी सिनेमा बगठसे सम्बन्ध होनेके पारम मच्छी पाति है। वैसे मी र एक मन्छे कवि है। परस नामक चमका एकाम्प संग्रह भी प्रमित हो चुका है। मर्ष का पूरा नाम पालम्ल है। वर्ष उनका उपनाम है। मर्मक हफ्त रंग मोर प-बो माग काम्म संग्रह प्रकापित हो पके है। मागपत में केन्द्रीय मरकारके उई मासिक मायाम के सम्पारक ह। परमार भारार पाबके प्रसिद्ध उर्दू परि है। उनके पिता विलोकवाद महम्म भी नक प्रसिस करिये। भावाद की बेकरी मोर सितारों से परों तक दो काम्य-संग्रह प्रकाशित हो चुके है। ' गधका प्रारम्भ उई-ए-कदीम के सेवा मौलाना बनुम हफके मनुसार उर्दू मचकी प्रारम्भिक रपनाएँ मेष ऐनगीन ग म (मृत्यु सन् १९२६) की पुस्तिकाएँ है। पर मे पुस्तिकाएँ ममी तक प्राप्त नही हो सकीं इसमिए निश्चित स्पमें हनक सम्बन्ध पुछ भी नहीं कहा बा सम्वा । पर पाया बम्वानेवाग पेरण (सन् १३९८६ ) की रचना मेमराम-रम-आपकीन नो कि प्राप्त हो पुकोई उई पपकी पहमी रचना ठहरती है। ममरा-तम-आपकीम के पार ममम सो पौना किसी गव रचनाका पता मही पाना। सौ बफिवारो इसरी मप रपना प्राप्त होती है पापीमापुरके पाह मीरांगो सम्म-उख मया की रसना पण मरपून-उम्मुम है। यह रचना सन १४ जगमग की है। प्रारम्भिक परामकी तीसरी यच रचना मारहानुदीन बानमकी रस्मत उमस्काया है इसका रमा कात भी सन् १९८२ पूर्ण है। भाषी रचना मन् १९२२ को महकाम-रस्ममात है इसके रविनाका माम मौलाना मनुलगाए। रक्षण मारतकी शिनी रचनात्रामें सब रम सवस प्रमिस तया साहिरिया बना है। इस सपना काम सन् १t मोर पयितारा माम मुस्ता पमही है। इम कामकी बम्प रचनाओं मी पता नमवा है पर पिम्पम उम्मानीय रचनाएँ यही है। सबरम है बाविरिका मम्प बनाौधा विपय मामिमा वार्मिक गोको सम्मत रण कर रची गई है। मारम हो एप्मार साहित्यिक रचना है। उत्तर भारतको सबम पहमी पप रचता माह फरम्म्मा फ्रानी की करा मा पा पमबतिस है। मधाचना राम सन् १०१२ft:

२८ परपस का मान समय मार मिना राम तारा ने अपने पान मसिबाकी भूमिप्र पदम लिपीमोन मुस्किपात (पत्यारसी) में मौजूर। सौ की इस भूमिग सगमम मापस मर्प बाद मर्गद् सन् १८८६ में पाह रफीगीमने पुरान सपा में अनुवाद किया। और रो वर्ष बार मन सन् १४९.६ मे पाह मनुन पारिरने भी कुरान पगफमा सामे अनुसार लिया। सासी इस पद पवाम पाह इस्माईक सहारको विस्त- सम्मान और सेठे मुस्तकीम दिप प्रसिर है। इन पापिक रचनादि बतिरिका प्रारम्मिा लामो मीर अवासिम तहमीन की मौत मुरस्सा है। यह पुस्तक एक मरतो पना सिम्म-ए पहार पेश का न मनुमाव है। दुध पोरोपियन सेवक तपा फोर्ट विलियम कालेज माणमें ईस्ट इपिया कम्पनीले प्रमायके गाने माप-माप दो पॉमें पोरीप निवासिपामा भारवसे सम्पन्ध मारा। कुछ मोरोप निजामी वाईटालिया कमी नीरो स्पर्म महा माय गोर छ व प्रशासपमें। विहाँ वक यहाँ जीवन परिचय प्राप्त रोका प्रश्न या बोलीके लिए यह मायापा दियाम देसी पिसी ऐसी भापायो वनेका प्रयल करे जितके माध्यम से इस देसी मग मम्मापनमा सम्पर्कमे या परे। इस स्पस महोबा भरपा स्नानी सौपरेषा असल पिया। इस प्रकार विपकीय चिन्हले गई अपमा लिस्तानी मापने और अपने पोरोपानिको विधानेरा जाम पिपा मम रिसिप्ट पसिरकि नाम इस प्रकार है- पार जोगमा दमर पर्मन पारी मुल मिल माणित युर्व गट, पारी मारिन बाहिर एमपीसीय मेलोने परम्पार और मोमोमरपनाको मोर ही प्यार ाि पोधिमा गई मौवना निशाना मात्र हो म धर्म प्रचार पारिश माविमो बनुनीबोर म्यान रिस माणु मारा हिन्दुस्मानी। मसे पहला सरप पोयुगमारा रतिमामा माता पिते रमहीने सन् २०१५ मा इमो प्रसार जर्मन पारी पायने भी मामला पाशिने हिममानी पर्मपामार र पुनः मिली। परममिर इन रिशमें गिन मषित पाये fruit और रिपने गई पप लिामो लिए मा निशाना बॉन मिममार। पोर मिल मन र अनेर पाए पी अपुन कोर्ट लिमिन पा सारिप-निर्माण विभागरो मापी योय मोर - 1 पिस्सी और बनउसे समय-समयपर बनेक सेयर बाम गिर भाइस्टकी पदाता सुन सुनकर सत्ता पहुंचने को मौर फोर्ट विलियम कामेबके साहित्य निर्माण विभागसे सम्बर होने पे। मिन बनि फोर्ट विलियम कारके साहित्य निर्माम मिमागम रहकर उर्दू गपमे रपनाएँ की है उनके नाम या उनकी रचनाएं इस प्रकार मीर मम्मन इम्पी दिपसरी मीर शेरमकी मफसोस मिर्गा अमीरफ बहादुर पछी हसैनी मगहर महीनों विटा काबिम भसी बवान निहालपादनहौरी बेनीनारायम यहाँ तपा मस्लाम। इन मारतीम बाकि अतिरिक्त स्वयं मिसाइस्टने भी उर्दू में अनेक रचनाएँ की है। वो इस प्रकार है १-पिगी हिन्दुस्तानी विपनरी (सम् १७९११) २-हिन्दुस्तानी प्रामर (सन् १७९५६) बोरियन्टा भिमुइस्ट (सन् १७९८१) ४- कसम-ए-मपरिकी (सन् १८.१६) रहनुमा एपबान-ए-उई (सन् १८.४६) -कवामिद-ए-रई (सन् १८९६)-प्रेमी मोठ पाठ (सन् १८२.६) गकर गिएकाइस्टने सन् १७८७६ से चक सम्बन्धमे मिचमा प्रारम्भ किमा पिसा क्रम बीस वर्ष तक पठाया। पन् १८४१ई में पेरिपमें गिल- मास्टका देहान्त हुना। मिठप्रास्टकी रचनार्मोकी सपा बिसमे छोटी-बड़ी समी प्रकारको रचनाएँ सम्मिस्ति । एक दर्गन तक पहुंचती है। निसमाम्ट मा फोर्ट विध्यिम कानके साहित्य-निर्माण विमापसे सम्बन्धित मचका पामने एक निषित गेल्प मा। उसी उद्देश्यके मनुसार मे पुस्तक पते पे पर एनक अतिरिक्त रेसमें भम्प भी कई ऐसे म्मक्ति पे मोसमावत' गप बनाम प्रवृत्त । इन पचारोंमें रिसेप पसे रस्मेवनीय इम्यामलामा 'इन्या रणब बसी मेन मुपर तवा फकीर मुहम्मरमा गोया मावि है। इन्या बसला चौकी मप रचनायोंमें रानी केतकीकी कहानी मौर ररिया-ये-सतात मत्यधिक प्रसिट है। रब बती बेग मुपर सवनम्के पहले 'गध सेवा है। ये सन् १०. में सवनम पैरा हुए मोर सन् १८५.1 में वनऊमें ही इसकी मृत्यु है। इनकी रपमानोंमें मुगर-ए-मुस्तानी पर-ए-सा 'पिपुष्प-ए-मुहमा' गुरुवार-ए-मुर विस्तान-ए-मुहर एमा-ए-मुर या फिसाना-ए बगायब है। मुगर की सर्व श्रेष्ठ रचना फिसाना-ए-अगायर है। फडौर मुहम्मर मोया सबनरके इनेपामे यह मपने समय बठे पपिपीरे नामित कोमा मपनी काम्य रचना रिचावे। सन् १५५. में पोमा'का रेहानामा। मनमार -ए-मुहमी नामक फारमी पहानी पुस्ताका करवाकपा के मन ममय बार मिर्गा र माग मे मपने गवान मसियाही भूमिका पप मिली है जो उनके हस्तिपात ( प्रश्माममी ) में मौजूद। मौरा की इस भूमिका सगमम बाइम मर्प बारमात् मन् १७८८ ई. में गाह रफोगानने कुरान परोपका ईमें मनुगाररिया। बौर से वर्प मार मर्यात सन् १०९ में पाह अनुमारिरने मीरान शरीफमा उईम मनुगार पिया। इम पामी इमरी मच रचनामाम पार इम्माईर मारी पियर- ऊपमान और सेराव मुस्तकीम विमेप प्रसिनी। इन धार्मिक रचनाओक तरिम प्रारम्भिक रचनामे मीर बना हुमेन तरमीन की मांगर मुरम्मा है। यह पुस्मक एर पारमी रपना रिम्म-ए बहार परमेस का नईमपाप है। कुछ मोरोपियन सेवक तया फोर्ट पिसिपम कालेज भारतमें ईस्ट इस्न्यिा कम्पनीले प्रभार पाने माप-मार रो पोम पारोप निरामियोका भारतम समन्ध याया। कुछ मोरोग निवामी गे ईस्ट इणिया कपनी नौकरके स्पमें यहाँ बाप और पुछ पर्म प्रचार पौ। रितु यहाँ तक साइकि गौषमम परिचय प्राण करनेश प्रान पा रोगकि लिए या भावप्पापा कियाइम रेगकी रिमा एमा भापाको मीखनेश प्रपल परें जिसके माध्यमम इस देगी या मस्पफ जनता सम्पर्क देया सरें। इस गप्पम उन मोगाने गई परमा हिमुम्मानी मीबनेपा प्रमान पिया। हम प्रराके विपिनाम दिने या दिनुस्तानी मौवने मोर अपने मोरोपवामियाँको सिखामेरा प्रमान पिया उनम बिगिष्ट म्पपितोष माम इस प्रकार पान गोमुभा केटनर पर्पत पाररी पुरय मित खामिन मुन्न साहित दुर्य गपटर, हट८ पारी मारिन मारिए इन पोरोपीय सेवा विप स्पसे म्पारप मौर पम कोनोमीरपनाकी और ही म्मान रिया पोधिसमका गोप्य उई मीनना मिवाना मात्र पा। हो इनम पम प्रचार पारिपनि पाइपिमा बनुगाडी मोर ध्यान दिया। बस्नु उ मा हिमपानीका सबस पाहता पाकरम पोमुमा परमर बारा रचित समता पाया। शिसे उन्होंने सन् २०१५ में रखा। इसी प्रकार पर्मन पारी गुस्वो भी म्पापरप मिया नया मिझने निमुनानी वर्षमानापर एक पुस्तक मिली। पर नवा मभिः इस दिशा जिस मतिने तार्य म्पिा मार जिसने गए पपक विममा पिए मार्ग निगरापाग पॉन किमाष्ट। जोर पिन भाम्रो काम समं बने रचनाए की प्रत्युत पोर्ट रिलियम पारंगो पारिप-निर्माप विमामम माता रेखोसमें ममेर पुनः मिणबाई।

दिस्ती मौर मसानउसे समय-समयपर अनेक सय पाम मिह मास्टकी राणा नग मुनकर कलकत्ता पचने ममै मौर फोर्ट रिसिमम पासेरके साहित्य निर्माप विमागस मम्मर होते सगे। जिन पनि फोर मिमियम कामे साहित्य निर्माण रिमाममें रहार गरमपम रचनाएँ की उसके नाम का सनकी पनाएं इस प्रकार है मौर मम्मन इल्मी दरबन्ध मौर परमती मम्मोस मिर्जा मनीमरफ बहादुर महीसनी मबहर मनीता विला कामिम ममी जवान निहासपद माहौरी नीनारामन यहाँ तया साहात इन मारतीम भाका अतिरिमा सय गिममास्टने भी उमें बने बनाएं की है। पो इस प्रकार १-अपनी हिनुस्तानी मिसनरी (सन् १७९३६) २-हिन्दुस्तानी पामर (सन् १.१६६) प-बोरिया सिंहस्ट (सन् १०९८६) कमस-ए-मपरिकी (मन् १८ १६) - पनुमा ए चबान-ए-नई (सन् १८४६) एकाशि-ए-गई (सन् १८१t) -गीबाट बाल (सन् १९२६) गपर पिममास्टने सन् १७०१ से उत सम्बन्धमें लिखना प्रारम्म यिा निमा कम बीस वर्षे पर पता पा। मन् १८४१ में पैरिसमें गिल- भाइटका दात हमा। मिठाइटकी रचनामांकी मम्या जिसमें छोटीनही ममी प्रसारको बनाएं सम्मिलिई एन पहुँचती है। विरुवाट तमा प विडियम काठेगडे माहिम-निर्मान रिमामसे सम्बन्धित गसके सामने एक लिपिक गेम मा । उभी उद्देश्य के अनुसार पुस्तक र पे पर इनके मतिरिकासमें मम्म भी गई ऐसे पनि पे पोसभाषतः गप रखना प्रवृत्त । इन पारामें पिरोप स्पसे सम्मेवनीय इमामलावी 'इम्पा पर बपीबेग मुपर' का फकीर मुहम्मरबा गौमा मारिहै। इम्पा बस्ला वांकी गप पलामो रानी सीटी कहानी' मार परिपा-ये-जवान बरपषिक प्रमिय। एवम प्रमी वेग मुर, तमनने पहले नई मय मेवर है। मे १७0 में सवनम्मे पराए मोर मन् १८७६ में बना ही इनकी मृत्यु हुई। इनकी रचनामा नुर-ए-गुमानी गररएम पिठा-ए-मुरप्पा मुहमार-ए-मुहा पारिवान-ए-मुकर श्या-ए-मुकरमा भिमानार भगायर है। मुगर ही सर्व पेठापना घिमामा-ए-अगायब है। और मुहम्मद मोपा सानको पनेबारे वह अपने ममय माने पारिधीरे नापिन कोमामानीसम्म रपना रिवाये। मन् १४. में गोपा कागतमा। मनपार पईनी नामा फारमी परानी पुस्मता २६ करबत कपा के समय गार मिर्ग रफीम सौरा मे अपने दीवान मसिमाकी भूमिका मध मिवी है पो उनके स्तिपात (पन्चायती ) में मौजूद है। सौदा की इस भूमिका मगमग बाइस वर्ष भार मध सन् १७८८ ई में पाह रफीगदीनने कुपण सरीफा में मनुवाद किया। मौर रो वर्ष बार पर पुत् ९ में शाह मनु कापिरम भी पुरान धरीफका उमें बनुवाद मिा। इस कामको दूसरी पद रचनामोंमे का इस्माईत पहीरकी तकनिमक- कपमान और सेयते मुस्तकीम विशेष प्रसिर है। इन धार्मिक रचना भतिरिक्त प्रारम्भिर रचनामोंम मौर पता सेन वहसीन की नौतन मुरस्सा है। यह पुस्तक एक फारसी रचना किस्म-ए बहार रमेश का उर्दू मनुमार है। कृष मोरोपिमन मेखक तपा फोट विलियम कासेज भारतमें रेस्ट इपिया कम्पनीक प्रभावले बाने साप-साप दो सौ पोरोप निवासियोका मापसे सम्बन्ध मामा। पुप मोरोप निवासी तोटिइणिमा कम्पनीके तौरसे सम यही माये और कुछ धर्म प्रचारको रूपमैं। रितु यहाँ तक पहाट बीपना परिचय प्राप्त करने का प्रस्न वा पोलकि बिए मा मालम्पकपा दिबहस रेसकी पिसी ऐसी भापाको सौबनेका प्रयत्न करे जिसके माध्यमसे एस देणकी गा संम्पक बनताके सम्पर्कमे मे था सके। इस गेमसे न मोमोन ५ भरमा हिन्दुस्तानी सौबनेका प्रयत्न किया। इस प्रकारके विरोधिमोमें मिलने गई मनपा हिस्तानी सौखने मौर अपने मोरोपवासियोंको सिवानेका प्रमरन किया पनमें विशिष्ट पस्सियोले नाम इस प्रकार पान बोममा केटाहर, गर्मन पार पुम्ब मिस मेवामिन मुस्व कामिन- पुर्व गटर हट, पारप मार्टिन मारि। इन पोरोपीय मेवान पिपम्पसे व्याकरण और पम कोर्पोकी रचनाकी मोरी मान गिा मोकि उमा रेस्प एसीबमा शिबाना मात्र पा। ही इनसबर्म प्रचारक पाररियाने पाविस बनुवाकी भोर म्यान रिमा। मस्तु उमा हिस्तानी सबसे पहला पाकरण बोपुमा टकरारा (पित समझा जाता है जिसे उन्होने सन् १.१५१ में रचा। इसी प्रकार मर्मम पायरी पुस्मने भी पाकरम लिवा तपा मिल्ने हिदुस्तानी पर्पमालापर एक पुस्तक मिली। पर सबसे अधिक इस रिसा विस म्पपिचने कार्य किया है और जिसने नई मपडे विकास के लिए मार्प निकालापाग पनि मिसमास्ट। बार पि मास्टने या सर्व अनेक रचनाए का प्रत्युठ फोर्ट बिभिसम कागो साहित्य-निर्माण विभामसे अपनी रेबरेवम मनेक पुस्तके निवाई।

२९ दिली गौर सनसे समय-समयपर मनेक मेवपाल गिर मास्टकी उपरता सुन सुनकर कामता पाचने बगे वीर फोर्ट प्रिमियम काहेबके साहित्य निर्माण विभामसे सम्पर होने की। चिन मेन फोर्ट विम्मिम कामेषके साहित्य निर्माम विभागमे एकर उगच रचनाएँ की है उनके माम तपा उनकी रचनाएँ इस प्रकार है- मीर बम्मन हम्मी पस हैरी मीर गरमठी मफसोस मिर्गा असीमरफ बहादुर माती सैनी मपार मीया बिछा काबिम मसी बवान निहासमन्द हारी देनीनारामन हो पा लाम। इन मापीय प्रबको गतिषित सय मिसमास्टमे भी नई भनेक रचनाएँ कौर। बोस प्रकार १-बीगो हिन्दुस्तानी सिनरी (सन् १७९५६) २-हिन्दुस्तानी नामर (सन् १७९५६) मोरियण्टल सिस्ट (सन् १७९८९) - कसर-ए-मयिकी (सन् १८०11) एनुमा-ए-बयान-एच(सन् १८.४६) -सामिड-ए-नई (सन् १८०९१)-पिगी मोम पार (सन् १८२ १) गरर पिछमास्टने सम् १७८०६ पर सम्बन्धम सिखना प्रारम्म किया जिसका क्रम बौय वप तक पता पा। सन् १८१६ में पेरिसमें मिक- मास्टका रहान्त हुमा। गिनाइस्टकी रचनामोंकी सम्मा पिसमें छोटी-बड़ी सभी प्रकारकी रचनाएँ पम्मिक्ति है एक पन तक पहुंचती है। गिकमाइस्ट मा फोर्ट मिश्मिम कामेबके साहित्य-निर्माण विमापसे सम्बन्धित पचकारी सामने एक निश्चित रेस्य पा। उसी उद्देश्यो भनुसार में पुस्तक पवे पर इनके बतिरिक्त रेशमे बाय पीना ऐसे म्पक्ति में बो स्वभावत गप रचनामें प्रवृत इन परमारोंमें विलेपमसे सरलेखनीय इन्धामला 'इन्या रकब- मसी देर मुघर तबा फकीर मुहम्मरबा गोपा मारि है। या वस्न बाँकी बच रचनार्मोमें रानी तकाकी कहानी मौर ररिया ये सवाल अत्यधिक प्रसिर है। रबर मही मेष मुपर स्वम पासे उर्दू पप सेवा है। ये सन् १.७f में सवनम्मे पराए मोर सन् १८९७ में सबनम्मे ही इनकी मृत्यु हुई। इनकी रचनामोंमें सुपर-ए-मुस्तानी परर-एससक 'सिपा-ए-मुहम्मत पुयार-ए-मुरूर भविस्तान-ए-मुरूर दया-ए-मुकर वमा फिमाना-ए मुराराकी सर्व भेष्ठ सपना फियाना-ए-मरामय है। और मुहम्मद गोया बनके पनवा पे यह अपने समय म पवि भी पे नासिप को यह अपनी साम्य रचना रिवात थे। सन् १८५६ में मोमाजाचमा। बनवार -ए-महनी नामक फारसी कहामी पुस्तका -

No text on this page.

भोलाना मुहम्मद हसन मामार (सन् १८६९-१९१.६) की प्रसिद्ध चनाएं इस प्रकार है वाब-ए-हयात परमार-ए-बारी रम एसमान सोधनवान-ए-परम। आर-ए-सपात में नई के कवियोंश वर्मन है। दरवार स्वमरी में बागार ने मार के कामी सामागिम बोर सोसटिक बस्पाका वर्षन मिया है। नरंग-ए-पमास में मैग्गी ( Allegory) का मनुकरण किया गया है। मोबनान-ए-पारस भाषा विज्ञान सम्बन्धी पहठी गई पुस्तक है। जगमा मम्ताप हुदैन हाती (सन १८५-१९१४६) की पच पुस्तकों, चस्मेवानीय रचनाएँ इस प्रकार है हमा-ए-मारी मुभम-ए-ग्रेमर-वो पापरी *यादमार-ए-पासिय मात-ए-बाबर । हयात-ए-सापी प्रसिद्ध फारसी कमि प्रेच मारीरा जोबन परित है। मुहाम-ए-रोबर-मो-यामरी मामोषनारमा पुस्तक। यादपार-ए-नालिय मिर्गा पाभिमबीवन और साहित्यसे सम्बन्धित रचनाई। हयात-ए-पावेद सर सय्यर वामद बांका जीवन परिख। गनबार बामद (सन् १८१६-१९१२१)की पिप उल्लेखनीम रचनामों में मेरा-मम्मोम्म बेनात-मनमास दीपत-उन-मसूह इन-उस- पका पारि है। ग नगार बहमा उडूक पाने उपग्यासकार होनेक साप ही ऐसे मेवारी जिन्होंने सामयिक समस्पा पर भी प्रकाप गणहै। नीर बहमर की मापा भी बड़ी प्रवाहपूर्व गौर रिस्ठीको विमुस है। मौलाना पिवतो नोमानी ( सन १८१४-१९१४१ ) ने विभिन्न विपर्योपर बनाएं की है मौर इस प्रकार उनकी रचनावों की सस्मा भी बहुत । पर सई धिक प्रसिद्ध रचनाएँ इस प्रकार अम्मामून सीख शुन-नोमान बसमास्क मा मेगामी पम्म-उस-साम मबानेह मौलाना स्म पेपरउबरम सौरत-उस-सपी भवादना वसीसवीर। 4 खननाच सरपार (११-१९२१) मुस्पत' उपन्यास स्वरपे, लको प्रमिर पनाएँ इस प्रकार फिसाना-ए-बार बाम-प-सरपार सैर-ए-कोहसार कामिनी। इनमें सबसे प्रसिर सपना फिमाना-ए-मागार 1। म रपम्पासा मागार मा के नाम रेषनामरीम प्रेमभन म संक्षिप्त संसरण प्रकाशित मिा है। मौलाना ममुसहतीम पर (सन् १८९०-१९२५६) परर ने सन् १८५७ में रिशर नाम परिरा निरासी। इसी पदिसा उनहोंने मपने उपम्याम मा निबन्ध मिनना प्रारम्म किया। गरर के प्रमिद उपन्यास इस प्रभार फिरसान-ए-री मपाम-ए-परब मन्मूर मोहना स्नका राष्ट्र पहीर-ए-मध । फिीम-ए-री सबसे प्रसिर उपम्पास प्यार-ए-वन माय है। परर ने पचपि मोर माफ भी मिलेर पर मारपसार परे सस महीं हो सके। अहमहाम १० विसमे पंचवा वा दिवीपरेसको मानिया संपहीत है पोया ने गए अनुसार पिया पोमा अनुगारका माम मुस्तान एनीमत है। पर विहास सामूहिक प्रममा रिस्ती कामेर मा उसको पी पक्षिर ट्राधणन सोसापटी का सस्य मी गायत्मक है। पानी कोषकी मापना सन् १८२१६ मे मम्द फोर्ट विलियम फासेपाकी स्थापनाके २५ वर्ष बार पो। सन् १८४५६ मे सा सधन सोसायटीची स्थापना हुई। मिन पुस्तकोके घोसापटीने मनुवारकरार है सनकी पूर्ण भी देना हो सम्भव नहीं। पवमा हो बवामा मा सम्वा कि सोसायटीने अंग्रेजी बरवी पारसी उमा सस्य मापासे अनुवारपराए थे। अनुवारकों में विशेष स्पसे उत्तेखानीय पर्म नायरन बोम्माप्रसार धौवा प्रसार गौरवमी पुलाम बनी माम्मर इन मा मास्टर रामचन्द्र है। मास्टर यमपातको सबसे अधिक महल प्राप्त है। मास्टर रामपण कोदो मौलिक रचनाएँ बापब-एनरोबमार वकिरात-जम्माम-ए-जीन निक्षेप स्म प्रसिम्ह। चई मया विकास-कास पचके विकास कालो पर सम्पर मामर पांसे प्रारम्भ किया पा सकता है। मौर इस प्रकार सातको सर सम्पर का मौकहा बा swarti सर सम्पर मामय पौष पन्म सन् १८१.१ मे गिल्लीमेमा। तर वयाने अपनी राम स्थापित हो जाने पार की उपस्थितिका बो पिप स्पले भारतमा मुसनमानस सम्बन्धित बीकी और अधिक मान दिया। उसका मधिकोप साहित्य और पिमा प्रचार गर्ने माग कामेरको मापना सब कुछ मुसलमानोंती स्थितिको सुपारने गेल्पसे किया गया कार्य है। पर सम्मपने मन्प काकि अतिरिटल छोटीनही पौष गुस्त सिपी है। सर सम्मको पहली पुस्तक लिएका गिऐप प गोवामा समसापासा समा। तर सम्पाकी सबसे प्रसिर पा महत्वपूर्ण पना बुधगाव-ए. मामरिया समझी जाती है। २४ सन् १४.९ में सर सय्यरने वालीमा नामक पमिका मिकामी। वागमन में घर समरके निकाय ग मए पथका नमूमा सीमा सभी है। इस प्रकार मगर सम्परके नियम कोटिको प्रत्युव नये रंगके निवाब मेवानी यमरावा भी है। इस मा मग्य पासाराम मौलाना मुहम्मरन भागार माना बागमन हामी समीर गहमर, माहामा पिनही नोमानी 4 खमनार मौलाना अमुल हमीम मार मुत्पी तयार हुन मिनी मुहम्मर हामी मा राणुिन मामाइम कामारी मौलामा मयुत कलाम मागार हमान निमानी मातामा मुहम्मर मी मामाना बफर पानी पो मारिहै। सरपार - मौलाना मुहम्मा हपन बाजार (सन् १८५५-१९१.९) की प्रसिद्ध रचनाएँ इस प्रकार है दरबार-ए-मम्मरी मैरंग-ए-वयात सोखनशान-ए-पारम। माव-ए-पाठ में उर्दू कपिर्योका पवन है। ए-सबरी में बागार ने वम्बर काही सामायिक बोर सोसाविक वसाका पर्जन विमा है। मेरग-ए-थयार में मेरेमी ( Allegary) का अनुकरण दिया गया है। मोबनवान-ए-फारस भाषा विज्ञान सम्बन्धी पाहसी उई पुस्तक है। सगरा बस्तासन हाती (सन १८९६-१९१४) को पप पुस्तकॉमें उस्लेखनीय रचनाएँ इस प्रकार है हमारा-ए-सारी मुनम-ए-पेपरस्मो डायरी *यारमार-ए-पारित हयात-ए-नायर । हमात-ए-सारी में प्रसिर फारसी कषि व मादीका गायन परित है। मुहम-ए-पेपर-योगायरी मासोचनात्मक मारनास्ए-पाख्यि मिनासिब पौवन और साहित्य समन्धित रमना। इसात-ए-बाबर मर सम्पर महमद बांश बीवन चरित है। ग. नगीर महमर (सन् १८३५-१९१२ ६) को विषेप उस्मेवनीय रपनामोंमें मैरात-उ-मोम्म बेनात-उन-नास तौबत-उन-नसूह हमक बारि है। ग ममीर मामा उनि पहत उपन्यासकार होने के साप ही ऐम गार भी मिन्होंने सामयिक समस्मानोंपर भी प्रापगता है। मनीर मामा की मापा मीसी प्रवाहपूर्ण मार रिस्पीडी विगुर राई है। मौकामा भिवती मोमानी (सन १८५७-१९१४६) विभिन्न रिपॉपर रचनाएँ कोई मार ध प्रकार उनकी रचनाओं की स्या भी बात है। पर सी- धिक प्रसिद्ध रचनाएँ इस प्रकार है बवमामून सौख-युम-नोमान ममफाक माह मेगाती इस्म-उडनमाम मवाना मौलाना-सम टेगर-उस-पबम सीख-उन-मबी मकामना मसोमवीर। खननाम सप्पार (११-१९.२६) मुम्पत उपग्याम साये इनको प्रसिर रखनाएं इस प्रकार-फिसाना-ए-वामार पाम-ए-सरमार सैर-ए-कोहसार पामिनी - इनमें सबसे प्रसिद रखना पिमाना-ए-बागार १। म उपग्पामा बामाद कपा के माममे रेषनागरीमें प्रेमचन्द ने संभिपत संस्करण प्रभाषित किया है। पीतामा अपुरु हनीम पर (सन् १८६-१९२९६) परर मे सन् १८. में रिसदार नामक पत्रिका निधाती। इमी पत्रिकाम उन्होंने सपने उपम्पाम तपा निबन्ध मिलना प्रारम्म छिया। पररमिर उपम्पास इस प्रकार फिलीम-ए-वरी मम्पाम-ए-बरब मन्भूर मोहना बरा-ए-सपर पहार-ए-मन । शिरीप-ए-वर्गी सबसे प्रसिर उपम्पास है। महार-ए-श भाटर। परर ने यपपिपई और नाटक भी पिने पर माटापारस्पमें ये समन नही हो सके। ।

पारे नामह एक कहानी संपर प्रापित किया। यह कहानी संग्रह क्या पा बममा मोहा पायो तरकालीन समारपर गिरा। धर्म वा मतिता मारिमार पर इस रपनाने ऐमो चोट की किलोग तिमिळा ठे। पर इसमें सरह मही कि यह रचना तिमिमा देलेबाती रचना पो किसी प्रकारका रचनात्मक दृष्टिकोन इससे सम्भय म पा! इसी समय काफी सम्मे मतैसे निमार फहपुरीको निमार मामक पत्रिका भी निकल ही पी पी पिसका गोष्म पी बहुत कुछ सर्व साधारपके नीति या धर्म सम्बन्धी विचारोंपर चोट करना होगा। पारे से प्रापनके तीन वर्ष बाद सन् १९५९ में प्रेमपरकी मम्पमता बनमें प्रगतिमील सेवा संपकी स्थापना हुई। जिसने सेवाको एकरप्टिी। परिमामत नकि अधिकोस बने प्रगतिशील विचारमाराको अपना लिया। पर बहवसे बानि प्रपतिशील विचार धारासे मपने भापको माग रखा और पुरानी परिपाटीपर पते थे। ऐसे मेषकोंमे निम्होने प्रगतिशील विचार को अपना मिया तवा मासकेपर्यनको स्वीकार कर पिया था उनकी सम्पा एक समपमें बहुत काफी पौ। पर धीरे-धीरे मायके विचारोंका मामेबाकॉपर प्रमाण पड़नेमा मौर इस प्रकार भामोहानी नपा उपम्पास मेच मासंगारी फापमापी उपासतब विचारक है। बामुनिक सेवामि जिनका विपेपम्पसे नाव किया जा सकता है उनमेसे कुछ इस प्रकार अपचन्न समारत हसन मिटो प्रोतविही इस्मत मवाद पेमनाप बार हयात नस्लाइसन्सारी मामर मीम कासिमी मामा मामर ममास बगीर महमा मुमतान मुक्ती सराव पर पर उपम्पास तथा कहानी संग्रह इस प्रकार है शिकस्त तुफानकी कम्पिा उम्टा परत पब घेत पाने (उपन्यास) मणारे, जिदपीके मोहपर टूटे हुए तारे मन्नवा तीन गुपे हम पापी समुन्दर र ममतासे बाप मै पारस्पा एक मिर्गा एकता (कहानी) बारि। मिटोके पहानी संह इस प्रकार है मुंगी मिन्टोफे मफसाने सायो सेम बामाशिमेवागदोवमें जमाती पुई सियाह हाधिये' हपापोस्त पनीर बारपातका वातमा एकरके किनारे प्रति प्रसिरहानी संग्रह राना-बो-वाम पहन पर बादि। स्मत पुलवारिकहानी संग्रह कमियाँ पोर्ट कामुर एम्पाव । उपेनमार मार कहानी संग्रह कापड मामूर पहान मागि।

३५ - हमातुल्लाह मन्सारी कहानी संग्रहका नाम भरे गावार' है। यहमर मवीम कासिमी यो विभागले कारण पाकिस्तानमें है। उनके प्रसिद्ध कहानी संग्रह इस प्रकार है बपूरे पापाठ सन्नाटा मापसे परमोपीवार, बाप सागा महमन वनासके कहानी संग्रह इस प्रकार है बाफरानके फूल मात्री कहते है इस मिसको बादि । बगीच महमरके ो उपम्पास ऐसा एबम्द सो पस्ती और गुरेज . मगारो कहानी संग्रह भी प्रकाशित हो एक्स-ए-मातमाम बैंकार रिम बेकार पड़ें। मुमताय मुफ्ठी हानी संग्रह इस प्रकार अनकही महमामामी , . पुर। - ईसराय रबर के कहानी बहाक माम इस प्रकार है नया उपक हम कौम । इन सेवको मतिरिक्त मन्य मेवहाक माम तपा उनके गहकि नाम इस प्रकार पुरंतुन ऐन ( सिवास बामे पीपेश भर ) पुरणस्यह पाहाग (नफ्याने ) प्रेमनाथ परदेसी (दुनिया इमाणे) गुणम मनास (बानापा') महेनानाप (चोरी तार') 'यहाँ मै हवाई माबीमारी माई गतिम होटल (हिन्दुस्तान पाकिस्तान तक ) मुमतान पीरी (बपनी मगरिया') हापरा मसार ('पर हाय बस्णा) रीगा मस्तुर ('देस गोगर ) हम पठीस (बई पहरे, पाठीव कपर भिवारी तिकोना च) मे हमार (विध गीत) पीत सिहोडी (तीसरा मारमौ) इविनार हुसैन (गती कृष) प्रकास पडित (मीरास) पनि सम्भार बहोरका कोई संग्रह ममी तक प्रकापितहा हुमा। एक हास्य मेवो भी होग रप कोटिके हास्प मेखक हो गए उनमे कुछ माम इस प्रकार है पीर महमर सिटीको मरीम बेम पता, पाप्त पानी' इम्मियार ममी 'वार मापरा पराबादी हामी समर सिनपारबहामी समर्पमान बहमासाहपूर मारि। उस्म भवनकी परम्परा १९ शवाम्बोसे अपप पर मामक पाये प्रारम्भ होती है। पर्बानोपोंमें भार कम पिसेप स्पसे उत्तयनीय भाले महमर मुकद एनिमाम हुसन भागा भामर फापसी एगान हुसैन मुमवार सन सपा मारत परेगी। सबालोरकोंमें मधिशेप मासंगाली मिह मनुछार साहित्यका मूस्पावन को पनपाती है। मगनू पौरतपुरी से पुछ बम होग मौके पर मवरम सनकोमाणी माशेषमा विषिष्ट स्पान महा है यमि त बॉमें उनका भी बागोषकॉम मा स्थान समझा गावापा। मिसह यहाँ बिन म्पत्तियों का निबन्धकार, उपन्यासकार महानीकार, बमा माओषक म्पमें सब किया पया है उनकी संख्या मत्थर है। भनेक ऐसे पाए गए है जिनका परि माय किया जाता तो संम्मा पौर मी मधिक बड़पाती। फिर भी इस बात का पमा सम्पम म्यान रखा मया कि किसी महत्वपूर्ण पक्तिका नाम पम पाय।

मुहम्मद इकबाल [कपि परिचय]

No text on this page.

मुहम्मद इकबाल भूमिका इसीसी पुस्तककागेश्य हिन्दी ससारकोमामा प्रारम्भिक परिचय देता है। बाममोरमोर माणके उन नियमि है जिनकी कविता मोर मस्तित्वा प्रपा राष्ट्रभूमिसे बाहर निकम कर सारे संसार फैमा। उनके सम्रेप भिन्न भिन्न बरं कमाए, गए मोर मारणीम नवपुषकों बोर एशि बीषियोंकी बनेक पीड़ियाँ उनकीमा मार उनके बारा प्रतिपादित पनकी उमणयामें पाही और बड़ी। मत दम होगी-सी पुस्तक में एकबासको का मोर पर्सनका पूरा परिषय रेला कठिन है। प्रसल यही होगा किया कहारमक बौर दर्सनारमा मस्विरवका चित्रण ऐमा च्यिा बाए कि उसके मुस्वका मापार सामने मा पाए। एक कविको पिपार सर्मनिक कषि को दूसरे साहित्यमाटोंसे भली भांति परिचित कराना मासान नही है। पिता मनकी मौर भी होगीमार पापोकामनार मौ। सम्मकी यह पति तमो समनी बार समझाईमा सपती पर दम साहित्य और रस भाषाके मूल समिता मोर उसके मूोस पाठक मठी नाति परिचित हो। यही कठिनाई सुनके परिषयमें भी है। रमन पापा पूर्ण सम नहीं ममा माला। रनको कापमानॊ विस्पों मार विचार मनका साप भाषा नहीं दे पाती। रिम बिमें उन दोनों पापि मम्मिलन हो पाता है उस पिकी ममनना हौर ममताना और भी कठिन हो पाता है।

४० पापरीके सम्मम्ममें यह विचार प्रचलित है कि वह केवल पेमास है। उसकी बान मरहीमोर गवस प्रेम विभास और मस्तीकी कहानी होती है जिसमें भामनात्मक नो होता है परन्तु विचारकी महराई और दृष्टिकी सूक्ष्मता नहीं होती। ऐसी बात तो नहीं है कि यह मारोप एकरम निराधार ही हो परन्तु इसमें बमूरा सत्य है वो मुठसे मषिक पातक है। मरीजल प्रपा नाम महाँ है मौर न ममा केषप्त प्रेम विलास और मस्ती ही अभिम्यक्त होगी। गण्डकी पदावमा मन्य भाषामाहाको पोषा देती है। कारण यो कुण भी हो फारसी कविता सममें ही एक मिसेप रूपा कितबार प्रचलित हो गया था। सराय साकी महाग धुमधुरु कपस बार, जगीर मारिके संरत न केवल अपने काम पाने मम प्रयुक्त किए पए मरिक राष्ट्र समान धर्म मैतिक मोर पार्यमिक विचार भी इन्ही पदाँ और समतोमे सक्त हुए। से हिन्दी साहित्पधिकारमें कवितापर सामन्ती आप गहरी हो पर भी मार भाषना मौर बानित सूक्मनाका स्थान बोधित काम्पत्व मत्पषिक मा- कारिकता और पामित्व प्रसनने पहन पर च्यिा पाठौकसी प्रकार सायरी भी ऐसे ही सुमसे पुपरी। गवत धौ परम्पपबारसे नाम हई गोर बोरी प्रेममापी तक ही सीमित कर दिया गया। कमाने भी परमें मिली। परन्तु उनकी पब (केनल कुमोडार) परम्परा-बार सानपर अनुभव मार पौठे बापते विचारोसे पूर्ण है। ठीक किला मुगसापूर्व ही नई पायरीमें एरति हो चुकी थी। एमाले पस भविको नया मार्य भारत इष्टि माम्य ही परतु इनके पहले TV कषि इससे पहले इस नवनाकी मार गए। सपाचने पत परम्पराकी माने महाकर परम सौमातक पाचाया। १स १८७४ में माहौरकी अनुमने पंगागका मुशायरा कल हाला मौर मौ हम्मर हुसैन मागाके मेतृत्वमें मापा घिससे नाराको पाप-शाम नग्म या पश्चिमी पाररीके पर एक विषमक कपिता पम हुना। राष्ट्रीय भावनाएँ, पर्जनात्मक करिता मारपर्मगात्मक कर्षिता Descriptive Poetry और कपियाँका मान गया। मसनऊम पर मारायण पयस्त मार माहामारके हास्य कवि अम्बर गहावापाने हाती माचार बार सिम्धीकी इस मम्मपाली परम्पपको और मा। सामने नपारी ती मोगको सपनामा मा। मुहम्मर मामका सम्म स्पातकोर (पंगार ) में २२ परसरी १६३ को हमापा। महाभाता है कि पुरचे कामारी झन पे और मममम . पं पूर्व मुसलमान हो गए। सबामको प्रारम्भिक पिना पहले स्पासमोर और फिर गारमे ।। स्वासकोट होम समालको पममुन उसमा मीरासन से मुंर मित्र मए ने जिम ।

।। समान हैं फारसी और बरखाक साहित्य के प्रति मी रचि पैरा करारी भी रोटी रन ही से प्रापरी करना पारम्भ कर दिया पा मार मपने युपके प्रसिद्ध कपि मन्दीको मपना गुरु माना। पापडी पिता अपनी सूक्ष्म दृष्टि मौर विधार पौषता कारम प्रसिठ बी के मापाको सरमता मोर टकसाठी मुहावरेशर बार प्रेम बस्किमाम पिठास और रोमांस कारप होकप्रिय पी। बाग मुसापरी गौर समामकिमि। उनकी पायरीमें सस्ती मायाको मधिपता थी। उनकी कविताम भापाकी सरसता और माम फाम मोहीमा मनापा मपर गहरामपाष पाया जाता था। प्रवास परम्परासे ऊपर उठे। पाको प्रमापके परिमाम सम्प उन्होंने कुरु सरहे कहीं। परिणामत स्वयं रागको पीप ही विश्वास हो गमा कि उनके इस नए धिप्पको रनके नेतृतकी मधिक यावश्यकता महाहै। फिर दिनों तक हाबी बाबार मोर पनतको स्परपर बसते हुए रवाह राष्ट्र प्रेम और रातिक स्वतन्त्रताकी मोर मुक मोर सनकी मग बाहारले मुपायरों और समाकि मतिरिक्त सर बनुछ कादिरके प्रसिब मासिक पत्र मस्मन में पर सारे भारतम मपर। मौरी हुई गम इस बातका साल ही में अनुमान किया था सम्वा किनासको गगते विचारतकागसे प्रमाणित है न बावे हमें इसमें तकरार क्या थी मपर बारा करते हुए भारपाबी तुम्हारे पयामीमे सब पर गोता बता सरिकी सरकार याबी म इमो प्रकार हामी गौर पमस्तकी परम्पराक नमारममै मालकी " "नया पिपासा" 'पारे पष्टि का हिन्दोस्तों हमारा" और "दम्बारेको प्रस्तुत किया का सम्मा। मी पुनमें छयालो बन्नति लिए पत सी मगी मर मरत मम्मे भी मिली। "माझाए पतीम" (मनाकी फरपार) और "प पहिरवार" (मोती परमानेवागबारक) भी इसी पमानेकी लिया हुई हनीपार मपहमें नही पापी | माहार मारोवार सिर्यासे प्रभालिए। एक प्रमिस विधान सर धमम मोलासे चिन्होंने गावकी वन धास्त्र मार परिपनी रिपारक महरे मम्मपनकी और मारप्ट म्मिा मौर मरे सर मलमारािमै गा"मन" सम्पारक मौर निरन्तर प्रयासमोर गायरी दौरभापित फले रहते थे। रन मास्त्र और षिवाका यह पर्व की निशानदासमें उपम युपत माता पहा और एक ऐना बमाना भी माया परिमान ४२ स्पाम लेका निश्चम कर मिया पा! मेक बार सर बमुक्त पारिएको नहाने भिवा मुगर मामले कोई माल बारे मेरा पपाम कह रे जो काम करही है की यहें समाये मुबन नही है। [सम्मारक मम्मनसे माकर कोई मेरा यह धनदेव कह कि ससारमें यो बप्रसर राष्ट्र र उन्हें पिता रचि मही है।] या सम सर टामस मोरमसपर छोड़ा गया कि इकबामको परोपायरी जाना चाहिए या नहीं? रनका फैसा याबारा पायरी कप्त रहो पमम मा। यामकी पापरीका पहला दौर १९५ठा समाप्त होता है। इस समय उन्होंने यूरोपकी पापा की पी। इससे पाकी शयरीम एक मोर गहरी राष्ट्रीयता और भारत-प्रेम भरा हुमा हे पिसका उदाहरण मया मियामा हिन्दोस्तां हमारा और तस्वीरे दर्द" में मिलताई और दूसरीमोर सनपर सूफी मतले उन मूल विचारों- का मी प्रमाण मिमता है जिनका इमारने बारको बड़ो तोहतास वमन किया। कमाने माने पसार राष्ट्रवारको रपार रिमा शिस्तु भारपा मट प्रेम इनके मनमें सपा बना पहा। इसीका यह परिणाम हुमा कि "पारेर मामा " में दाम्टेकी "रिवाइन कमिगे" के रगकी पुश रचनाएं मिश्री मिस्त्री है। उन्होने माणसे मारी जेवाको गरको सबसे निचले भागमें स्थान दिया है। सन् १९ ५ मे पास विलायत गए मौर पर तीन पर्प पर होने केमिसे रिपी की म्युनिषसे पो बसेकी थिो सी और महीने तक उन्होंने मन युनिवर्सिटीमें बरवी पढ़ाई और कौस्टन हातमे वर दिये। तीन वर्ष पाचा मरमट काहेब माहोरमै पर्थन पारपके मनापक नियुक्त हुए। बारप बार उन्होनिकालेरकर परिस्टरी मारम्भ कर। १९१५ में “मसपरे पुरी पी गौर सके पनि पार " रमूने पुरी। में दोनों नग्में पारसी मिची गई पी। इनमें पहले पहल हकमासकी पार्षनिस्तादी स्पष्ट स्पमे रिचाई। अब किमान पापान के पे कि पनको साप एक सन्देपकी पोता। १९२१ में "बिबरे राह और एक वर्प बार “तुम्ए इस्लाम मी। इसके उपरान्त फारपी उनकी दीन पनाएँ “पयामे मपरिक" (बो गेटेकी रचना West Othcher Drvan के उत्तरमें मानो पास्पि संस्कृति को मोर से पाश्चिमात्य संसाविरे नाम एक बार )"बरे बमम" और "बार मामा" प्रकासित हुई। इनके मविपित इसमाने में भार संभह प्रकाशित किए। पाना “मे रिय* १९२४ में *पाले गिरीत"१९१५ में और "बपनीम" १९५९में नका गुण पा रामकी मस्पो पाचापपा। इसी समप ४३ फारसीकी दो मम्मी ममें मुमाफिर मौर “पमरे बापर कई" भी प्रमाणित वकील होनेके नाते इकबास सतत रिपारसमे। उन्होंने रानीतिमें भी पाम मिया। उनको राजनीतिकी मूस ममम्यामि मधिक मगार पा परन्तु गर- मीनिकी पैतरेषागीसे नवा परिचित ही ये मोर न इम प्रकारको एमनीतिम पर्ने अधिक समावही पा। मात इडिया मुस्लिम सीमके प्रधान भी चुने गए ये मोर १९३. कारमा मध्यापीय भाषम सचमुच ऐतिहासिक पहा या माता है। इसके करीब सर्प बार उन्होंने पठग टेवित कान्फेग्ममें भी लगन गाकर माप हिमा रोबार मूरोप पए कमा यहाँके प्रमिड नेताओं मौर वन मास्त्रियोस भी बा। मिमे। पितासे कयामको मत्यन्त गहरा पाया। उन्होंने कान यूनिवर्सिटी- की स्पापनामें महत्वपूर्ण भाग लिया पा। इसी प्रकार जामिया मिसियासे भी उन को पहरी दिकपप्पी पी। १९२८ में उनाने मनाम मैमूर, पिरामा मार मीणा मादिमा दीप करके अपना मापम श्म पूरा किया जो बादर्ने इम्गमके धार्मिक प्नंनकी नई रचना के नामसे अपनीमें छपा। १९२२ में चर्ने सर की मुपधि मिपी। .44 “गायेर मामा - "4 बासकी रचनाओं में वर्ष मात्र (Economics) पर एक पुग्णा 'दम्मामके पार्मिकपन को नई रचना (मनीम ) मौर कविता (उर्दू माह) बांगेरिस मामे गिरीक परमीम मौर ममगाने हिगार बोर (फारमी में) मसपरे दुरी" " " रमू येचुरी' 'चारे परम पयामे भमरिक पसषे वापरकर्व " "मसाफिर" मोर उर्दू संपा“मर्ममाने हिगार"मा फाग्मी भाग मामिल है। इनके मसिरिता उनकी ऐसी एपनाओं का भी पता चमनार निरमास पूरा मकर मझे। ममें एक उर्दू पच प्रमाणपका मनुवार बा और मरे अपनीम "The book of a forgotten prophet" (मूने हुए पंपमरको पुनर") है। मात करिअनिरिस गमानित और शिमा शास्त्रीसमें भी अभिर हुए। पमनीनिमें उनके उम म्यामानामापारपर (गोनोने हहाहाबादमें १९५० में मननिम मीनके मनियम में ममापति परम रिया पा) पुण्होप में पारिम्नानका निर्माता पी मोपित पले है रिम्नु सामने अपने पाप्पानमें पो पसना की पी यह पारिस्तानके मापुनिक स्पस मिल है। पाम्मरमें सामने मुन्मिम गरि एक ऐसे पाकी रचनामा प्रभाव पारा या तुम मारम्म पर मारमा मुम्निम-ह-मस्या प्रान्तों तक मा हुमा हो। यह प्यान रखना चाहिये कि फसामने एपी सरनौनिमें ममिपम बभिक माप नही मिया मार दम पमें उनमा मायम है। हा गाना tir मौलाना मुहम्मद बगेने एक बार इयानसे पिकायतके समे यह करा पा नि अपनी कविताये तो ममतामें माप इतना उत्साह पीर समर पवा करते है परन्तु राजनीतिमें प्रश्मि भाग नहीं लेते। यह पपा बात है? इफबामने तुरन्त उत्तर दिमा कि माई कवि तो अपने राष्ट्रमा बास होता है घिसकी कवामियोंको मुन मुनकर मोतापम मूम ठप है। स्वयं माचना उसका काम नहीं। रुपासपोवन मन्तिम दिन कौर रोप प्रमित पाम बीते। पहले सनो गमेपर फारिएका प्रभाव या जिससे उनकी वापाव पाठी पी। फिर मामि तकलीफ मारम्भ हुई दौर या सररास मसूरके पास भूपाममें चिकित्साके लिए माकर ये। किन्तु कोई काम नहीं हो पाया। २५ मार्च १९३८ को उनका रेहान्त छाहारमें हो गया। एपिया और योरोपके सभी प्रसिर परिगीषियोंने किया रेहान्तपर भादमिया मर्पित की। फयाको कविताका मृग १९ी क्तानीके बन्द गौर २ मी बारम्पके २५-३ बर्षको सममिका है। यह परमामा पा पर एक बोर हो योरोपमें शानिकमवा वीर सक्ति परम सीमाकी मोर सासर मी मौरपूसरी ओर ऐपिया मोर पिरोपकर मुस्मिा राष्ट्र पपमीनता मोर रामनतिक गुलामीके पोर समकारम पिरते ना । तुहा बो कभी मुडमानोंका सबसे पवितधामी रेस मा नब निर्मम हो गया ना मार मोरोपका "बीमार मारमौ" कालाने माना। बाप सभी मुसिम राष्ट्र मा पराधीन होपो या उनमें पीनरी फूट और संघर्ष तीसवासे चत हा पा। बापीबारीने मुसम्मामोंकी बया विषाय रखी पी बीर परिणम गौर कार्यक्षेपसे पर होते वा ऐ में। एपिया दुसरी मावियों बार राष्ट्रॉकी रसा भी अधिक ठीक नबी और ये सब पतमकी परम सीमा तक पर युके। सबसे भारमको पात हो यह पी कि उन्हें यहाँ तक भान पगमा पाकि मि सीमा पर पतित हो पुरे पल अपने भवितको मौर मेताबोंगो भकी भाति पहामनेकी ममता भी बोठे। दिनुस्तानी मुसहमानामि पर सम्पर महमद नेतृत्तम पाश्चात्य शिक्षा मार समताका प्रभाव पड़ना तो बारम्न हो गया परन्तु नवयुगक इस विमापति और समताको बारी चमक रमा और टीम टामसे प्रभावित हो पेमेबार इसी पूनम पनी परम्परा और बपने उस महोतको भूत ठे। चार पोरोप पारेरोष्टम पा। मामने अपने पास इसरे पारियोंही मांति घिस पदपार मतदाता मोचीमाहरण दौर प्रेसीय प्रजातन्त्र निष्ठ मको भारत मौर एसिया कमी पपपीन राष्ट्र का एकमात्र इमाम समय ऐसे स्पर्य यूरोपमें यह सारा विमान संकटम पिराहमा रिपाई दिया। बस संस्टक रोम-ए मापिर और दूसरा मैतिक मानिक दृष्टिसे दूरोप मशीनों मौर कारबानि गीवनकी समी मावस्यक पस्तुमाको रात बड़ी सस्पाम बागाराम उपमा कर रिया पा। परन्तु बनाके लिए नमें मौत सेना भी सम्भव नही रह गया था। यहाँ एक मोर पूंजीपतियोंके भूमाफे बड़ पे यहाँ दूसरी बोर बनता कमाल होती बापी पौ। मिन्न-भिन्न राष्ट्रषि उपोमपति पषिक मुनाफेडी चिन्ता दिन प्रति दिन पोर स्पर्धाकी होरम मगारोंका बेतन कम करले उनपर कामका बाम माने सस्ते रार्मोपर कच्चा माल परीरले मार मई मरियोंका पता समानेकी निरन्तर बोगम पणे हुए थे। इसका परिणाम यह हया कि एक तो हर राष्ट्रको बनता से भार्मोमें बंट गई एक पूगापति मौर उनके समर्थक और दूसरे इन झूटो विधानमें परिवर्तन पाहलेबाळे मगर मोय । हम भौधोगिक होने पवनैतिक स्तरपर उपनिदेयोंके सिने राष्ट्र गई बनाननी पराकारी। पर उमत रे नए-नए उपनिवेश पाहता पा मार उससे मातरराष्ट्रीय पणा बार उसके पापा महापुरकी राय मेठ पड़ी। पर राजनीतिम पाभी रेल हे रे कि पाम्पिाटोरा मो प्रमावर स्पापित हो रहा है यह बास्तबमें केवल पूंजीपतियोश पासम होई मार प्रथा मुसम मतदानके मतिरित मौर किमी प्रकारका माम नहीं लेती। इसीलिए मार्म मौर उनके सापिनि इस बायोपिक और पवन ठिक विधान विप मावाम उगई और समापार मौर माम्पमारका सप्तरेवा बिसमें सोपन न हो। कारखाने राष्ट्र मौर मरफारसा मनाने लिये नही बलि मावस्यकताओंको पूरी करने के लिये बताये बाएँ और सरकी बराबरीका सिदान्त स्वीकार च्यिा बाय और ममारों की सरकार स्थापित हो। इसीकी प्रतिम्यिा पूंजीवार बस्यम्त भयकर समागीमम वीर फासिगममें प्रकार ए बिनकी मां मन्ये राष्ट्रवार मोर पहरे म्पक्नुिलबारम फैली हुरमी। प्रतिक स्पर्स मोरोपका मह पतन और भी भयानक था। इसी ममीनी युमर्म साधारण पति इतना पस्त मौर कारोबारी होकर रह गया पाकि उसके पौवनामूबवाधार यह मन ही रह गया था। उसके मारे समर प्रेम ममता दोस्ती मार मित्रता मानवता और हम सब हुए पैसे तक ही सीमित है। और पिनके पाम पन पानी एक मानिरिक हमपम पम हए रे। धन उगाहरके साजन मौर मुखके सामान दौरेतामा परन्तु उनको बारमाला मुघ मोर परिपकी प्रयाला प्रधनमकरता था। इस प्रकार पोरोपका परीर तो मिमी र मुखी पा मी परतु रसको मारमा पुची पी। इस पर पुराना पायर सबसे स्पष्ट प्पी बर्षन (Decline of Wat) “पश्चिमका पतन नामक पुमनाम हुमा। माती मफ्नी पानी योरोप यात्रा ही योरोपकी इस मम्मीर स्थितिको पण लिया पा। उन्हें यह पता लग गमा पाकिपिस मापनासन पधियार्मे ला परत पे ग मी गम्पसे सन्तोष जनक नही है। राष्ट्रमार पनतिक सहायता सो भवस रिण सम्ता पातु यह समारको पृभाष गमे हुए है।

४६ मोमोनाकरन मापिक सेकससे कुछ बाहर निकाल्ने साप साप गोवारमार बरामस्वाकी मोर है भाता है मौर इनसे एक ऐसा वातावरण परा होता है जो मनुष्पको मानवी स्वरसे मीचे गिराफर केमा मपीनका पुर्ग या कमाने चामे पीने ऐप उड़ानेवाला एक बोर बना गमता है। इफमामी करिता मोर उनका निवारण इसीएची मानवताकी पुकार है वो एक र राजनैतिक पराधीनता बीमारी अविधा मौर पतनमें गिरी है मार दूसरी मोर गौधोगिक मुम्नतिके सार परिप और मारिमा मग्रान्ति मौर संपर्प फैला हुमा है। एक और मौतम सपाय पा सरी भोर मारमा मौर मैतिकताका कोलाहरू। इसी प्रश्नको मापने निमकी बजानी चुपके सामने रवाई बह कौन सा भाबम ह विसका है मानूर ममरिफरे पुरावर सजाने हिरवी मपरिवरे पावन परसबा पतिबात। मगरिव पुत रोपनीए इमोहनर सर यह है कि पानऐ पी है यह म.कमत । - - उक्त परिस्थितियों में कमालकी शायरी मारम्भ हुई। इसमाकी धापरीको समझने के लिए उनके दामन परिण और उनके पनकी नैविक पजनेतिक और मिक परिस्थितियोका जान भी बावश्यक है। हामाम्ने “भमरारे पुरी की भूमिका मिला है. मस्तितकी समस्माकी गरमीनमें मुसम्मानों मोर हिमोक विचारात्मक इतिहासमें एक माभुत समानता है और यह यह कि जिस दृष्टिकोनसे भी फरमे गीताको टीका की है उौ दृष्टिकोनसे मुहागहीन बने बरसी अपन परीफकी टीका को बिसने मुसलमानो मन मस्तिष्कपर बहुत माप प्रभाव रामा। यहाँकयाम्ने हिम्मेवार माइस्थामा नूफी मतको समानता रिचाई है। मुको मनके सम्पाप नाकका पर विचार का दिनों तक पाकि इस्लामने ससारको त्यान देने मार म्यापहारिक जीवनके स्थानपर बाम्मास्मिक पावन मिठानेका गिरोही पिया पा परनु पब इस्वाम निमें फैा वो बहकि भारपाई परिक माम्मास्मिक दृष्टिकोपने इस्लाम म्मानहारिक सचिमें रमने स्पानपर स्पर्य स्वाममें इस प्रकारकी प्रवृत्तियोंको पाम रिणा। एक मोर सूनानी पन- पानोरा प्रभाव पड़ा मौर मफलातुन (फेटो) मीर उसके सियों नौकानियों (Neo-platonists) + पिचार फस पे मोर रसौके साप साप पाखौर न पुसदर्सन मौर मेरान्तिक मम्मारममावकी मूंग बसीफा हास्न रसीद मौर मामून रघौरके एबमें बसाव तक पहुँच चुकी पी। इस माघारपरक्यासने मारम्भमे यही विचार प्रकट किया है कि कम-से-कम स्वामी सूफी मार्गका एक स्पको तुमन" (बझगार) में विस्वास परवा है वयस्म ही रानी यूनानी वीर भारतीय पर्सनका प्रभाव है मार सूफी मतका यह स्प इस्मामके मुखार्सनिक माघारके विसर है। 'बहातुल बर" पपा है? मौर सूफी मत मौर मेदान्त मध्यात्मवायमें क्या धमानता है। इन प्रश्नोंपर बड़ा मठ मेर रहा है। परन्तु इस्मामी सूफी मतके पक्षबामे यह मानते है कि इस्लाम मौर उसके मूक पधरानके दोस्म है। एक प्यावहारिक मो समस्त संसारके पिए है मौर मिसमै एम्म व्यवस्था भौर नैतिक धार्मिक तपा समाधिक मति मोर मलाकि नियम बताए गए है। इसका नाम हरीमा है मार यह साधारप बनसमूहके लिए है। परन्तु खनके सब्दों और गायोंकि एक माम्मास्मिक मीर बहरे मर्प भी है बिरें केवल रिसे नहीं समझा पा सस्ता परिक उन तक पहुंचने में भक्ति मौर महाकी विक्षेप आवस्यकता होती है। यह जानकारी मस्तिष्क नहीं बरन मनकी मौन बार प्रेम स्याम तमा एकाग्रचित्ततारा ही प्राप्त हो सकती है। इस्मामी मूफी मत मारम्भमें तो केवल सीधे साधे पोषम बितानेपर पोर रेता पा मोर मपना माधार हरान मोर स्वयम् हजरत मुहमएकी पानी का पौने समानापरत भगीको मावोंको बताता या परन्तु पी वर्ष बीव पाने पार उसमा अपना एक विस्तृत पनि विधान-सा बन गया और उसके सिवान्तोम सूदमता और विचारणीमता या मह। उन्होंने पहा प्रश्न या पिमा किरा मार मनुप्पम रया सम्बन्ध मौर उसके गत्तरमें इस तत्व तक पहुंभ कि संसार मौर सारी भौतिक पास्तपिठाएँ को पत त मिमिन्न स्ससे प्रस्तुत है बस एकमाएके मस्तित्वक सम्पहै। इसका बापार उन्होने इस्लाम मून मनसे निकामा मिसका मर्ष है मम्हााके मतिरिक्त कोई विरही मोर मुहम्मद उसके भेये हुए पयामी है। इसमी टीका सूफियोने इस प्रकार की किससे संसार मौर मौतिकताके मस्तित्वको मम किया गया है मौर इम्फाम रेषा एक ऐमी परम भारमामें विश्वास रखता है मोहगारों रपसे प्रगट होती है। इस उप मुफी मम्मारमवारको नीष पड़ी। मुठियारी प-सी पिार धाराएँ है। इनमें सबसे प्रमिस ने बरवी मामक एक मुफी एदि बीपी विभार है मिन्होंने मतिताको प्रम बताया और सारे संसारकी मम्मारमवादी एम्वापर बोर रिया। उन्होंने तस्वमसि ही की तरह इमामात परपोर रियामारमहा कि एक मात्र वास्तनिम्ता पम्पामगार है और माहिरी वस्तुमौका मूह सी परमात्मा मोर सता पहुँचनेका माइन शान

No text on this page.

४९ - प्रसंसा की। नाई कार्यभीम और कर्मण म्यवसाय म। दे मिलते है कि मानवता के इतिहासमै पीरप्पा माम मरा सम्मान भोर मादरसे रिया पाएगा कि इस सर्वश्रेष्ठ महापुम्पने एक भरपन्त मममोहक स्पसे मपने राष्ट्र मौर जनताकी परामिक परम्पराकी मालोचनाकी और इस मास्तविकताको प्रगट किया कि सग्यास का बर्य कार्यक्षेत्रसे पूर्व ससे बरकाप पहण करना मही है क्यापिपा गार कार्य पातिक मनुएमईमार बीवनका माघार है बस्कि त्यापका बर्ष यह है कि कार्यक परिमामसे सगाव महो। कार्यकी बाई कामना मार अमिमापा। इसी कारण सूपी मौर सिट अमितापाको मिटा लेरा उपरेप ले रहे है क्योकि इमत पुष बीर मोहका सम्म होता है। बाम्ने उर्दू शायरीकी इम रनिारमा प्रवृत्तिको बिमा उलट दिया। समाम्ने कामना मार ममितापाको पौवनका माधार माना है मार पीपनकी पापान बताया है। बीवन पोर प्रान्ति का नाम नहीं। यह पोर शान्ति तो पेहो बार पापोंको भी प्राप्त है और उनसे कही बधिक पान्ति पत्तरों और ममा पर बस्तुबाको प्राप्त है। पावन धान्ति नहीं यह तो निरन्तर पतिमीठ और मशाम्त है। मठि मनुष्यक मावापरनमें मसन्तुष्ट होने मोर रसमें नई कामना नई वमिनापा और मए उत्सारके परिणाम सम्म पैरा होती है। इसलिए बाम पान्तिको मृत्यु और मतिको पीवनका पातर मानत है। मत बाल पम्पम इपयको कामना से वानी करने मोर ममि नापार्मीको गन्ने स्पानपर माममा बार ममिहापारे उपासक है। उनको यामनुप्प पा राष्ट्र मारपा ममार पम है जो नई काममामोके लिए प्याक और मुफ हो। कामना कार्यका रत्मा परा होता है मौर कार्यस मनुप्प मपने विचारके अनुसार समानको परिवर्तित कला है मार पोपनो नए सचिमें समता है। इन बावोंकी मभिप्यक्ति के लिए बाम्ने कपिठाम मिा भिम प्रवीलिए मार पुपने मोंकी नई टीका करकेम्पमत पिया है। रिगी मारग या रेम्पकी जगन मोर उस्माहको रेरा (प्रेम) 7 नाम ले है। पामनारा रे मुरी (अम्निस्य) बहन है मौर में पोलों पम नकी पायरी मूफ माघार है। एकबाम कामनाको म्यानुमताको परिसता मापार माना है और इसी लिए सरपीस या मैतानको फरिस ॐाम्पाम से है। मानाको नाम मधिर मम्मान प्रसन करते है। तास या सीमो मम्मम्मम इमामन या बार्ने रमाउन मनुमार इम्सीम भी पहमे एक रिता पा मोर उमको फरिमॉरी शिक्षा दीपा रापाम और निशान नही गया बोर मान्तरिक म्मान है। पर मनुष्य बर मस्तित्वको बोरेता है और अपने पतित और भौतिकतना मा मविधाको छोड़ा है की मा परमारमा मुसम्म पा सस्ता है। मत बाम्यात्मिक वास्तविश्वाको पाने के लिए स्वयं अपनेकोबोमा मापना है और अपने पापको बोनेका मां मह है कि मनुष्य सबसे पूर्व अपनी कामनायों समसामों और मभितापायोको पूरी तर बामे कर से। सतारामला ही मनुष्यको पंसारमा होमी बनाती है और उन्ही के लिए मनुप्म पहचूप करता मम खामौर मुखसे पो बधिक अवा है। इस प्रकार मापो जाठिकवापना बाधार कामना ही है। इस विचारधाराका परिणाम यह हुमा कि एसियाम साधारण म्प और भाख निषेप स्पसे गर्मभेष बनवाका प्मान र पमा। भौतिक गतिको पम सममा बामेया। बार उसका स्वामअम्मामबार और नियमे में लिया। पाखीमानमें तो रपनियों और मेरान्तकी यह परम्पप गत पुण्णी पी परन्तु सारके बनुसार सामने भो बरबके कार्य राष्ट्र मोर मठान पनवाम परवान पड़ा मासूफी मतका मामलादी मममें मारेगारमारम्म हमा। इसको भाउम पैसे प्रसिर विशालने तो सूनानी यम्मात्मबागकामात बतामा मोरपियो परमम्वी मत मीर गायोकी बात की प्रकृति और समामा परिणाम बताया है। पुरा धिाम से भारतीय वनपामारली मनुवारपाय सलामी संसारमें परमेका प्रभाष मानते है।माने इसे प्र प्रभाव बताया। पारम भी क्यों न हो ही मत एक अभिशापा निरोगी मन्वनी मत रूप सारे स्वामी रेखो प्रतिमा कोष तन की निमा और पीठिक- माकोर मन को निमाकी वाय बन गए। इखा महाँगाप्रपा पार एपिमा सामारण मते और भारत विप ससे पाखा प्रेम और एक दूसरे प्रति प्रेमको मारता मापी और स्याम मोर मांसारिक मोह तपस्पीभीरमायामामामा एपल महोपमा। गौर यही माखोर पापा कविताका मूल सूत्र मन थमा। परीकी पामका भी मून बापार महो। एकविताके चम्म हो सेमिनापा विरोधी और स्यायवादी विचारापी प्रथामवा ही बार माय बोरसी- पर रिया पावा हा कि पोषण विरह है और प्रियसे मिसनका एक मात्र सावन पहोर भौतिकमासे मुक्ति प्राप्त की बाए गौर सपना इस्तीको मिटा दिपा पाए। मारिकाममाहीन अभिवापाहीन मलितमाहील होना ही मुविधा एकमान सामन इस परम्पराको पिरोपी प्रवृषिमा पाणार एनमें प्रमयता बीर भी रामानुग पंप मिस्पाईसौर एसोगिय कमाने भीमा मपपीता विसरको - अर्पसा की है वह है कार्यभीम वार कर्मण म्पमसाप स्प! ये मिबते है कि मानवताके इतिहासमें मीहप्परा नाम सदा सम्मान गौर भावरसे मिमा पाएगा कि इस सर्वमेष्ठ महापुरुपते एक बत्पन्त मनमोहक पसे अपने राष्ट्र मौर बनवाकी दानिक परम्पराकी मालोचनाकी मार इस बास्तविकताको प्रगट किया कि सन्यास का मर्य कार्यसबसे पूर्म म्पसे भयकार प्राण परना नही है क्योंकिपा मोर कार्य प्रतिके मनु मीर पीपनका माधार है बरिफ स्पागका अर्थ यह है कि कार्यक परिणामसे कमाष म हो। फार्मको नाकामना मौर अभिनपा। इसी कारण सूफी और सिस बमिनापाको मिटा देनेका उपदेश देते हे योकि इससे दुध मौर मोहका बग्म होता है। इसयाम्ने नई पापरीकी इस पर्सनारमक प्रवृत्तिको विकुछ नम्र विया । कमान्ने कामना बार मभिठापाको गौवनका माघार माना है मौर जीवनकी पहचान बताया है। जीवन मोर पाम्ति का नाम मही। यह पोर पाम्ति तो पेड़ों पीर पौधों को भी प्राप्त कर उनसे कहीं मधिक शान्ति पत्पर्गे मोर भत्रत पर बस्तुबाको प्राप्त है। पावन पान्ति नही यह तो दिरम्पर गतिधील बौर मपास है। गति मनुप्यके पावापरममें मसन्तुष्ट होने और उसमें नई सामना नई बभिटापा मार नए उत्साहके परिणाम स्वरूप परा होती है। इसलिए इकबाब सान्तिको मृत्यु वीर पतिको बीचमका बोतक मानते है। भव माह पम्पस हदयको पामनार्मोस बाठी करने मोर गभि सापार्मोको मत गमनेरे स्थानपर कामना मौर अभिशापाके उपासक । उनको यह मनुष्य पर प्रष्ट्र मार पासमार पसन्द है बो ना दामनायकि लिए स्पात बोर रत्सुक हो।काममासे कार्यका उत्साह पैरा होता है मार कार्य मनुष्य मपने विषारके मनुसार समागको परिवर्तित करता है मौर बीवनको नए सपने पालता है। इन बााकी मभिम्पत्ति के लिए बामने कवितामें भिन्न भिम प्रती रिए है मौर पुराने समोकी नई टीका करणे म्पमत किया है। किसी मारर्म या रेस्पकी मसन और उत्साहको रे सा (प्रेम) मा नाम देते है। काममाको पुरी (अस्तित्व ) कहत है और ये रोनों पग उनकी पापरीका मूल माघार है। मात कामनाको म्पायुमताको म्पपिवत्वका मापार मानते है और इसी- सिएशमीम या तानको प्ररिप्तास ऊँचा स्मान देते है। मानबको इन रोनोस अधिक सम्मान प्रदान करता है। सेठान या पीसके मम्मत्यमें इस्माममे मो बार्ने बताई है उनके मतुमार इम्सीम भी पहले एक रिश्ता बामौर उसकी फरिपतोंको प्रिया दीक्षा देनेपापाम सांपा गया था परन्तुबर पराने मिट्टोसे मानवका पुतमा बनाया और उसमें पान गटार फरिपतसि कहा कि मानव भव मेप उत्तराधिकारी होगा और उसको सब सबरा (पत) करे। सभी परित्तोने इस मात्रामा पानन पिया परन्तु इमोसने कहा कि हम मम्मिसे बने है हम मिट्टीसे बने इस मामरको क्यों सम्मान मौर पदाने इस सिकारण नसे दुनिया मेवार रिया यहाँ यह मानवको बजाकि रास्तेसे बहकानेमें सगा हुमा है। इसी ब्लीची परमम्मका परिणाम पहना कि बारमको पिता ने अपना उत्तराधिकारी बनाया पाइसीसने उनकी पत्नी होपा बारा बापा मार गे कि पानेपर पाया मोर काम मि पत्ताफर मानरके इस पूरके मनमे मामा गौर विहिकी चिनगारी मापार गर्ने होगा सहित बनत (स्मर्ष) से निकम्माया। क्याम्ने इस पिस्सेडी टीका इस प्रगर की है प्रस्तेि मभिशापाहीन है। उनके मनमें सेवामात्र पो काममा महो है। इसलिए इकोस मा वामसे भी मारे क्योकि धैवानका एक मस्तिलपा। उसके मममें शिरकी सही परन्तु एक मिनपारी अपाय पी और छ चिनारीने कार्यका माप रिवाया। पहपीर मात है कि उसकी काममाएँ उसे पस्त रास्तेपर मटका है पई बार उनपर बनाई मोर मस्तिप्पका कोई निसनम हो या। मामयको पापी वान भी महान है कि उसके पास कामना मार अभिटापा की पूगी भी है पो सपकार्यक्षेपमें बाती और उसके सार-साथ पहअपनी मिनापाबाको नियन्त्रितरलेली शक्ति भी रखता। इमाम भटकी हो पा बभिसापाकी भाठोपमा ममस्म की परन्तु उसे बमिमापाहीन होनेसे कही मग बामते है। सक्ति पार्वधीमता और बपूर्व मनिकापाको एकसामने स्थान पानपर बारकि पर्मे मनेक प्रकारसे प्रस्तुत किया है। विशेषकर विभिन्न सक्दिों मोर प्रतीकोके मम पर मच्छी पीकी चाहने मीर इनके लिये कार्यक्षेत्र में तन मन धनकीबागी बगानेवाली पपिसी रिवाते है। साहीनको ग्नाने इसी प्रकार से प्रतीक बनाया है कि या पक्षी इसके विपरीत कमी पोसला नहीं बनाता गौर सदा पिकार करणे गाता गा रहता है। एक समानपर पाहीन कौएको अपार देताएका को सबूतरफ सपटनेमें बरा है हम नया पए ममा भापर तरले हर्मनी नहीं। मरपा मसा ममा पिसी श्रीमती प्राप्तिमें भी इतना नहीं होता जितना कि उसकी प्राप्ति सिपोर-पूपमरनेम है। बोपन-संपर्परा म तल महो। पार्म का उत्साह मोर मन है मून गेस यही है बाकी सारे गम पाने मार। सामने इसी प्रतिसे सस्तो मौर प्रतीकॉरा एक पूरा नपार युगा है। उनकी सबसे बड़ी सफलता यही है कि नहोंने पुराने पनोंको मए म गौर मकर रेरिमे। इस माम विरर (रि) बबर (मान) भारि भनेक पनोंको उन्होंने ममीन बना दिया है। परन्तु उनका सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक " मई मोमिन" है। ए साधारण स्पसे इसमा बनुमार परिमा ही हुमा परन्तु समाम्मे से एक महा-मानबरे समें पिया है। ऐसे मानपमें उनके अनुसार केवन बुद्दी ही नही होती कामना बार मभिसापाही की ज्योति नहीं होती बस्ति यह मपनी म्पक्तिगत नामनामोको समायकी सामूहिक कामनाओं मौर अभिनापामोसे समन्वित कर देता है। इकबालके पनुसार कामना मौर मभिसापाके दो स्प है। एक पक्तिमत जिसमें मनुष्य वपना भला चाहता है और उसका हित समारके हितसे टकराता है। यही पीपा पक्तिगत पामनामोंका पैतानी रूप है। इसमें संसार भरके सारे हत्यारे, पोर हटेरे मौर मुर प्रेमी समाद् मा बावे परन्तु इसका एक इसरा म्प यह है कि पत्रिकी कामना समायके हितसे न टकराए और दोनों लिए काभपको। काममा मौर मभिशापापर मगर किसी पसे नियनप रवाना सकता है तो इसी धरा कि उनें पूर्ण पसे समार हित मधीन कर रिया पाए। बो पवित्र ऐमा कर पाते है और स्वयं ही बमर महीं हो पाते बलि मपने यमको नया मार्ग रिखानेपा सिख होते है। यहां पयास मम्पारमगार बहुत निष्ट होकर यह सोचते है कि राष्ट्रो मार रेसों हो का नही पायर मानता विभिन्न पुर्वाका ग्लाम पतन भी केवल मौतिक मार राजनैतिक कारपो ही से मही होता मस्ति उनक पीछे पिसौ म निसी महापुस्पको विचार समित मौर सामूहिक मामनाकी चिनगारी भी होतीमो पूरे राष्ट्रके मनमें कार्यक्षेपमें कर पानेको माग एका रेपी है। प्रमाको महामानवकी विभिन्न टीकाएँ की गई है। पुण्ने उसपर गर्मन बानिक मारके सुपरमैन (Superman) महापुरुपका प्रभार बताया है और मासको असिम्मके निकट बापित कर दिया। ये बामोधक यह भूत गए किएकमाल सिम्पो मूल मापार राष्ट्रीयता बोर पातीयभरको मही ही मानते न २ यह सीकार से है कि पुनियाम पिसी रपदातों या किसी ऐसके रहनेवालोको पह मधिकार शिवह अपनेको सम्परेतों या राष्ट्रॉसे सन्म और सम्प पीपित करें। पुरऔर बाहपनि कहा है कि प्यासने परब यूपी विधान मनुरु करीम अलमारीकी की पुस्तक “म्माने पार्मिक" से सहायता की है। और मोग इस भादको मापनबार शिरोपर मौलाना चहानहीन स्मीती मसनवौको बताते है। सरप गुण भी हो इहवासरे मामानवका समयाना मौर रायमा मी। केवल उसकी पति ही चित्रण महाँ करले केबस से मौत्यो मरापुस्पके समान पुर प्रिय मोर पून पिपासु मीवि मोर नियमसे मुक्त दिवा है बसि छवासका महामानम मनमोफ मोह मातरानी पार्पोज इमार - मोहनौर बासनासे मुक्त है। उसके पर काम सिरके उत्तराधिकारी होनेके ममें है जिनमें उसकी अपनी प्यक्तिमत माकांक्षा सम्मिमित नही है। उसका हर काम इससे पिए है। उसका हार भमानका हाथ बोर उसका कार्य पुराका कार्य है मौर इस स्मानको मह मन मारपरमार संसारकर सम्पास सेकर प्राप्त नहीं करता यह कामक्षेत्र वारा प्राप्त करता है। ऐसा समजना समाविक ही है किामासने महा पुस्पका प्रतीक पुना पाहे कहीसे हो परन्तु इनको रुपमा इरान गौर इस्लामके मूत तत्वॉकाही प्रमार । तपापियामी सत्य ही है कि मनेक प्रों मोर पनौकी भांति इलामको भी कर मसे टीका हक है। यात मी ऐसा ही मानते है परन्तु उनके अनुसार इस्लामका सन्ना प पर है पो हपरत मुहम्मद मोर उनके चारों उत्तराधिकारिकि युपमें माना और उपयोपमें साया गया। इस्लामका यह रूप सबालके मनुसार ईरानो प्रभाव और सूफी मतक प्रचमित स्पसे भिन्न है। इस्ताम इमामो अनुसार म्यापहारिक धर्म है पो किसी एक जाति राष्ट्र या रप तक सीमित नही। इस्लाम सम्पासका नहीं कार्यपाल्ताफा प्रचारकह। पक्तिमतमाम मोह मोर नामसा के विपरीत परिणाम- की पिपासे मुक्त होकर मपने सम्मका पालन करला मोर पसारको त्याग देने के स्पानपर मुसे गिरको इन्गके मनुसार मानव समागकी पहा मोर नैतिक प्रतिके गेस्पो परिवर्तित करनेका नाम है। स्वामके इस स्पकी बानकारी प्राप्त करनेपर कमातको सफीर्ष और साम्प्रापिककहना कठिन है। ये इस्लामको एक धर्म एक सम्मान नही मानते मलि एक ऐसी मीति और नियम मानते है वो सारी मामबारे मिए मुक्तिका सन्देश है। यह पापनका एक नया विधान है। इसीलिए रे मुला और कट्टर पन्नी मौषियोंकी को माहोचना करते है जो इस्लामके बाहरी स्पको महत्व तमोर रस पीयन विमानमौर मिपमोको नही पानामते मिना किया इन बाहरी नियोंमें मिते है। उनके अनुसार इस्लाम पाला धर्म बिसने धर्म संकीर्ण से निकलकर एक म्पापहारिक जीवन विमानका स पिया। संसार त्याबके स्मानपर संसार परिवर्तनके उत्साहको महत्व रिपा तसारकी सारी पक्तिपीको महारसर देवम एक वरपर विश्वास का प्रचार पिया और पाविभेद, राष्ट्र बे, रंगमे वर्गमेरमौर ममेरको समाप्त कर पारी मानव जातिको एक स्वापर या कर रिमा गौर सबको मपने अपने कार्पषम मपनी महामता सिर करके समान अवसर दिये। एक तहबासका स्किाम पड़ा पियाड मौर महान पोषन-माधार है। जिस प्रकार तुलसीदासको रामायम मौर मिस्टनको एगईमोट या रटिकी "ािस कामेडी" को यह सनातन धर्म या ईसाईपक्की पुस्तके पर संदी या साम्प्रराविक मही कहा था सवा उसी प्रकार इकबासो पनको भी कोरा धार्मिक या साम्प्रदायिक भोपित करना ठीक नहीं है। पाकिस्तान बननेपर उस नमें यह प्रवृत्ति उमरी है किबहायासमोइवामी शायर कहार में पाकिस्तानका प्रेष्ठ निर्माता बोपित करने लगे है। इसका मापार रे हायातकी एप पारिवायो सते है जिनमें उन्होंने हिनुस्तानसे दुबारा मोर कायपर बसे म्मी पष्ट्रॉकि मुसममानोंको एक हो पानेका सम्देन रिया है या उनका यह मापण यो उन्होंने मुस्सिम कीम धिरेगनम सभापति पदस रिया या इसकी पुष्टि प्रस्तुत किया जाता है। परन्तु मे प्रमाम काफी नहीं है। बाम्ने बिस पारिस्तानी स्पना की पी पाहिन्नुम्नान टुकारे करके बमाया बानेबाठा राष्ट्र नहीं था। पहा यह बात स्पप्ट कर देनी चाहिये कि क्यामर यहाँ महामानवकी कल्पना पुछ समानें है। "पिया" और "बनाये सिया" में में बम ऐस मुमम्मानोंकी पनामी फरपार करते है वो मुमहमान परममि बग्म पानसे मुसनमान को पाते है परन्तु उनकी बनेक मम्मोंमें महामानवका यह प बम प्रामा मुमतमाम महबानेपानी तक सीमित नहीं है बक्ति मुन सबके लिए पोइम्झामको जीवन पाम स्पम मानते है। ये सोम है मो प्रमागमें परिवहन करते है और जिनका जीवन एक प्रेरपा भी है मौर तपस्या की। इन परियोंके पस्तित्वको दबाने का महत्व दिया है। एक स्पान- पर वो महाँ का कर दिया है कि नोको कर गुमर इतना जिहर तकरीरसे पाते। पुरा बरसे पुर पूणे बता तेरी रमा क्या है। [मपने मारम सम्मान और कामनाओंको हनना उच्च रखना चाहिए कि समय पर मानबसे उसकी इच्छा पूछने लगे।] रामक बनुमार मानर एक मगर मौर मपमर बार मिटनेवाला गुरुबुना नदोहयो मिटनेपर अपना म्पतित्वबोदेलाईसिपाएर ऐमा बस्तिल बोगमा है। इसलिए ये मूफियों मार मानोंडी तह इस बालको नही मानते दि मारमा मृत्यो बार परमाग्माम समन्वित होकर अपना पतिल वोरेगी। मूफियोंकी एर मारी मम्पाने बना मिट गाने मार मृत्यु या समाधिके बाद परमारमा इम प्रकारमे पुरु-मिल पानेको अपना गेल्य गतामा tir " मै बम बार बार में गुम बमपाऊ उपवान मानब मम्मियका पिमी रिसाम भी उसम्पतिस्परमामाने की पत्पना नहीं करते। मांसारिक बनाम मुप्त हा मानेपर भी ये मानर मार परमारमारे ऐप समाबपको मानत है जिसमें मानरके पक्तिबमें गामा नही पाती मौर पर परमात्मा मत्यन्त निपट मार सम्बन्धित मयस्य प्रता। ये रोगों म्पसिय उनके मनुनार मन्म मपम पी है मौर एक दूसरेसे सम्म भी।

पवारम्पतितापरपर्ममपि पर्मनका प्रभार भी बताया जाता है। बिस प्रकार वर्गसाने रचनात्मक परिणामबार (Creative Evolution) को एक ऐसी पारित बताया है बोपमात्मा से भरनेको संसारमें अनेक स्पमें मस्त करती है मौर उमति पा समाष पस्याग की ओर से पाती है। पहीसी हुई भक्ति मामले यहाँ "बुदी" म बाती मौर रखाको पर पपितों मौर राष्ट्रोकी छातिका मरमौर मूड माधार मानते है। एफपास इस समितको मृत्युसे चामोर ममर मामत है। साकीनामे में उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि यमाप म्पक्तिको तो नष्ट कर सकताई पतु परम्परित की मृत्यु पाप ही दुसरे मोक म्पति बन्म मेते है। गातीपर एक फूझे मुरमानेसे पामकी बहार नही मुट पाती । मनेक फूल विसकर उसका स्थान में मेरे है। मौर इस प्रकार बोपन प्रवाह पता पता है। ये बापानमनको महाँ मानते और उन्होंने स्पष्ट रूपसे इस विस्वासका वर्णन किया कि बीवन-सून कमी के स्पमें नहीं गेटवा मौर हर पड गये एस्प और नये म रिचाता पवा है। मृत्युको सामान बोपनका मन्त नहीं मानते व उसका परिवतितम मानते है। पाक परीरको नष्ट कर सरती परन्तु मार्ग और कामना मौर कार्यको पलामी हुई हएको मही एक सस्ती। मानव मर जाता है परन्तु उनके साहस गन दामना बौर उत्साह मौरा रिस्मास के पूर्व मे कार्य संचारमे परिवर्तन करते रहते। कबाबके मनुसार “मोमिन की सच्ची पापान होग कि मृत्युपासागत मुसराते होठसिरसके। मृत्यु मास्तपम परिक्तिी वीरका नाम है तो यह सास के माने वाले बारामानेका नही बस्किमन बामना गोर रसाइके महोनेका नाम है। इमाने इसी प्रकार समय और स्थान पोनकि नये म बपनाए ।। बासकी तरह या मानते है कि स्थान पर भौतिक वस्तुमार भौतिक पस्तुएँ सब की समन्तिम पिपनमें पति या एनर्णा में परिवर्तित हो सकती है। भार समर मास्तममें सी सी एनों या पक्सिा नाम है पिसमे संसारम प्रापर पेतनाके साथ-साय ही प्रवेश किया होगा। इस परह स्पान मार समय र बसस एक ही सपनारमक पति रोस्प है। हा पाता है कि वर्षससि करामकी मुलाकात हुई मौर मानने उसे हबत मुहम्मरको बह पानी मुनाई कराने कहा है कि मैं ससम् माना या समय तो बर्मसी उडात पका। इसमापीपर बहुत मिता गपाई मौरतोोगा रिचार है कि इसका वजन इतना ही किराने नमानेको दुरा कहनेकी इसलिए मनाही दी है कि समय और पमानेकी रचना नी तो स्वयं वराहो मे की है। माना समय सम्बन्धी सारा पर्गम "मस्विरेकरतारेबाएमम मा पया है। बन्द पोशम्दालको कवितामा सम्बन्ध कहना है।

१५ श्यामके पूर्व नई पापरीका बड़ा पाम सही कामा। सब यूं वो रोमाष्टिक होती है परन्तु उनकी सीमित मापा मोर समेत प्रमामी र युगम परिर्वन होते मायेनार नैतिक मार कभी-कभी दानिक वीर राजनैतिक विपय तर सम दुस गये है। फिर भी एण्याठसे पहले पूरी सायरीमें फेवा मामिर ही एक उदाहरण मिता विसने परम्तो पानिक योग मौर गहरे मूम्म विचारका माध्यम बनाया। गासिमने नई भापरीको मस्तिष्क दिया परन्तु यह योग करनेवाण सन्दरा करनेवाला मस्तिष्कपा। १८४४ में सर सम्पर महमर वा मौर उनके सापिर्योने पायरीम कोरी अन्तर्मपी पातों या रोमासरे म्यानपर राष्ट्र और समाज यम्पामका रंग पैरा करनेकी बात पपाई मौर हाती मावार मिली इस्माईक मोर कुप दिनों बार मपर गौर पहबस्तने राष्ट्र प्रेम मौर मैतिकताको पापरीका विषय बनामा मौर मगर्मोका युग मारम्भमा। सरसोंगानिक मूत्र के मुफी मतमें ही बाबोर चाहे घायर मुफ्री हो या न हो बहसमा मपनी कविता रसास्वार वा करने के लिए सदा सूफ्रीमतो विचारही भ्या करता था। हामने इस परम्पराको विकृत रमर रिमा। उन्होंने पहली सफलतासो इसमें प्राप्त की कि वनको चापरीका विषय बनाया पो उनकी बहुत बड़ी रेल है। उनके पनन पारसका महत्व है परन्तु रसमे मौरहीं यो महत्वाकी बात यह है कि वर्णन से कठिन विषयको बपनी रसीसी समीती पायरीम समोमेने और पूरी सुन्दरला गौर मिठामसे समोमेने में सफलता प्राप्त कर सके। इकराम अकेले कवि है जिनका सपना दमन है जिनके पास प्रस्तुत करनेको एक मौरा मोर स्पष्ट जीवन विधान है। इकबासने पायरी और कहामा यो गप अपने सामने रखा पा उसम म्पनियमन रोमासमा स्माम न पा। रेसाको बुरी या उस्माह मौर मार्यप्रम को पालाको प्रयस्ति करनेका साधन मानते है। वह आर्ट यो मनुष्यम बापट मार दिया जमाए, उमा अनुसार भाई मही है। मार्ट मौर मुन्दरताको सौरी ही यह है कि रनस बीवनगा रत्माह बड़े और पार्यो प्रति मानपको माफर्पग हो। इम कसोरीको काम्ने स्पयं मपनी कविता मी रखा है। पायल इम कारण राम्भव हुमा किमाने परम्परामा माई हुई पाद प्रभासीको नए मर्म और मई सीमाएँ प्रदान की। ये पराकी परम्पराम महामान परिचित परनु रामकी मीमामोंगे नहाने मन भास्त्र त फैला दिया। उनकी परिचा शराब साको बार पैमाना मा इदा मार मार इम्म (माम) से मापारण राम भी पिपिप ममें इस प्रकार र एमोर तो पवन की पण प्रमामीमे काम करा रसीलेपनको कायम रख सके मार दूसरी मोर बपने पर्भन पास्मो सारे विमानको मसे कविता मोर का रूप रे सके। इकबाकी पाको एक दूसरी पिपता यह है कि उनकी रचनात्मक पति अमितीय है। उनकी नोमि भणी बेकार मा केरम बाभूपग मात्र टुमे यात कम मिलेंगे। एक ऐरसे दूसरे तर एक ऐसा रसारमक वीर रचनात्मक सूत्र है मो निरन्तर बाग पाता है मौर पूरी कविताको एक विचार-सूममें बार मेता है। इकबाकी कपिता कता इस कारण भी बड़ी महत्वपूर्ण है कि उनकी पविताएँ सुन्दर चित्रों परपनामों मोर संगीतकी मपुर बसे मरी हुई। रे एक महान कलाकारकी मांति बीषन मानने पर विमामसे पूरी स्वतन्त्रवासे अपने लिए सामग्री समेते है मोर करिता मोर कस्पनाके माधारपर बर्षन इतिहास और राजनीति से-विपर्योको रसात्मक मौर बापक बना देते है। ध्यातकी उपमाएँ मौर पित्र ग्नके किरा और प्रतीक सभी एक मादुर मौर मनमोहक पातारपको बरम रेते है और उनकी मरमार्म एक ऐसा बार पैदा कर कि पानेगण उनमे बोया रहता है। इफबासकी कला पदापाठीको नहीं मर्म और उत्साहकी कसा है। बोछ मियते यह महरे विकास और मारसका परिणाम हवा और ऐसा प्रतीत होता है कि किसी भाषनासे विषय होकर समिता कर है। टी एस इलियटने पायरीकी बिन तीन बापाचोरा उस्लेख किया है उसके अनुसार मालकी भाकार दूसरी पीकी है बसपा काठमपने मापसे स्वयं मपने म्पपिनमत एव-मुखकी बात म परके पूरे राष्ट्र बन्ति कमी भी पूरी मानवताको सम्बोधित करने मंगते है परन्तु उनकी सापरी पिसेपर मोमन की शायरीही है मार इस प्रकारको सायरीमे उत्साए पैरा करना नासान होता है परन्तु इस पैरा करना पए कठिन होता है। मालकी बड़ी सफल्ता यही है कि वर्मन पास्मीसे कही गई पापर गौर कलाकार थे। उनकी सायरी पुप राष्ट्र और एकातको सीमासि पर उठ पुकी है। होय भी यो प्रणालो बिचास सहमत नही मोर सनक पपपास्त्रको स्वीकार नहीं करते उनकी कहा जाने माषा टेकते है। यहाँ हमें एक प्रश्नपर गौर विचार करना है। इमाम्ने समारो किस एपको मापना की पी मीरा मामय समायकी रचना फिम रैवार्मोपर करना चाहते पर पहले कहा बा पुका है कि बात परिचम और पूर्व दगॉफी प्रवृत्तिक मामोपाये। एघियाम उ कार्य पुरसता सामना मार उत्साहका ममाप रिवाई वा पा जिसके कारण मापारिक मार मैतिक गुोंक होनेपर भी पद पर किमोर मानसिक पराधीनताम पाहमा है। इसके विपरीन योरोपको पीपमा १७ सत्सा, पुरी मौर अभिशापाको मोति उसकी भक्ति प्राप्त है परन्तु यह हानिक प्रगति बार पौधोगिक उन्नतिको दौडमें मारमा बौर मीति ही नहीं बल्कि मानवताको बो पैम है। उसके पास पिमनियोंगा (गा बीर भौतिक उन्नति बोर प्रासारिक सुबके सामान तो बसम है परन्तु उसकी मारमा सुखी नहीं है। बहू उस प्रान्ति सचित है बो काममा मौर बासनासे भर उठनेसे पैदा होती है। योरोपके पास दुरी पोहै परन्तु "तानी परी है जो समाषिक वायाप मौर ऊँच-नीपड़े स्पर्म म्परत ऐतीहै। च्यात ऐसे समाषका स्वप्न देखते है जिसमें पूर्व पोर पश्चिम दोनों सम्पतार्मोका समापय हो सके। इसहा मुख बाधार एभियाकी गाम्यारिमा पनित मामय प्रेम मौर विस्ता होनी चाहिए मोर दूसरी मोर योरोपको यह शक्ति और कार्यपीमता ऐनी चाहिए जो मानिक चेतना ही को बाम नहीं देती पतिक एमतिका एक मात्र रास्ता दिखाती है। पर्ने एशियाई अन्तर्मुखीपन कार्यहीनता मोर नत्साहहीन समापसे भी पूणा है वीर पोरोपको मानवताहीन मारमाहीन परितापूर्ण समागसे भी। इन रोनौका समन्वय पह इम्मामी समाजकी कल्पनामें रहे है जो समाधिक माईचारे, म्पाय मौर मानबको समानताके मामारपर स्थापित किया बाय। क्या इसमाके इस सन्देसका मए भारत के लिए कोई माल है? इण्यासको साम्प्रदायिक कह पर उनकी सिया महत्वसे मषित रहना पुर्मास्यकी हो बात है। माम्ने जिस नौरस निरासाबार मोर सासारिक उमविसे मुंह मोड़कर मनमें दो बानेकी प्रवृत्तिकी मालोचना की है पर बाप भी भारतम भणी-माधि प्रचलित है। भारतवर्ष बिस नए समावड़ा निर्माण कर या उसके लिए नए मानवकी पना मापामक है और यह तभी हो सकता है कि मामले सरमें स्वर मिनार भपने समागम म्याप्त निण्याबार अन्तर्मबीपन मौर दुबर्मतास पोर संभप पिया बाय। पहपार-बार कहा गया है छिपाका पर्भन केवम स्वाम पर निर्भर करता है। पर जिस प्रकार स्क्य इहवाम्मे पूर्ण मोर पश्चिम विनों मार रर्सन पारितोसे चुन चुनकर दुम प्रहण किए है उसी प्रकार बाम पर्सनमात्र गौर ननकी इवितास मूत्र पुसीको कुमार अपनानेकी माषपाता है। माम्ने महरि, स्वामी रामतीर्थ गुरु नानक श्री रामचमी मोर धीरुप्यका सान पानपर बड़ी प्रथमास पर्मन घ्यिा है इसी प्रकार राम रमी योरोप मीत्ये मार्म सेमिन मुसामिनी नेपोलियन वर्गमा मार दूसरे दिनोंगा भी मर्मम करते है। माय मातरे दर्पन पास्कस मए भारत पर्पको यह सीच फेनी चाहिए कि पीवन पतिमें है और मोप्पति या राष्ट्रपति मार कार्यर उत्साहमें विश्वास रखते -

फक्-िश्री माता-
२ नया विवाला
सच कह ऐ ब्रह्मम गर तू दुरा म माने।
तेरे सनमकरोंके पुत हो गए पुराने ॥
मपनोंसे बैर रखना तू मे तोंसे सोचा।
बपो गरस सिचापा मासको भी पाने॥
वंग माके मैने माधिर रो हमको छोड़ा।
बार का बारा छोड़ा छोड़े तिरे प्रसा॥
पत्परकी मूरतोंमें समझा है तू परा है।
चाहे वतनका मुझको हर पर्रा देखता है।
मा परियत पर्ने एक बार फिर उठा है।
वियोंको फिर मिशा में, मारो दुई मिटा॥
सूनी पड़ी हुई है मुहत से विलकी बस्ती।
ना एक नया शिवासा इस रेसमें बना।
निपाके तीोसे केवा हो अपना तीरप ।
मामाने मास्मासे उसका कल्स मिमा ॥
हर सुबह गठम गाएँ मन्तर यह मीठे मीठे।
सारे पुगारियोंको मय पीत की पिता ॥
शक्ति मी शान्ति भी भक्तोंके गीतमें है।
धरतीके वासियोंकी मुश्ती प्रोतम है।

२. नया शिवाला ए ब्राह्मण! यदि तू बुरा न माने तो एक सच बात कह कि तू गिन मूर्तियोंको पूजता है वे अब बहुत पुरानी हो गई है। तूने इन मूर्तियोसे यह सीचा है कि अपनोंसे दुश्मनी मरे मौर इसी प्रकार मुस्ताने पासे पेषल मही सीखा है कि अपनोंसे सड़ाई-मगड़ा किया जाए। मैंने सग आकर मस्जिद और मन्दिर दोनोंको त्याग दिया है मुस्साके उपदेश मौर तरी पाएँ सभी छोड़ दी है। तू समनवा है कि खुदा परपरपी मूर्तियोंमें है, मेरे सिए तो अपने पेचकी मिट्टीका हर अणु देवता ही जान पड़ता है। मा, हम मापसमें मिसकर एक हो पाएँ और एक दूसरेको गैर समाप्मना छोड़ दें को फूटसे गिर गए हैं उन्हें फिर मिसा में और अपमे को दो अलग अम्ग अस्तित्व समझने पासोको एफ बना दें। एक प्रमानेस मनमी दुनिया सम्नाटा छाया है इस पेचमें अब एक मया मन्दिर ममामेका समय आ गया है। यह मन्दिर दुनियाके सारे तीर्पोसे ऊँना हो मौर उसका करपा बाप तक पहुँपवा हो। हर प्रभातको उठकर उसके पुजारी मीठे मन्त्र परें और सब प्रेम मौर प्रीतिको मदिरा पिएँ। मतों गीतमें शान्ति भी है और पति भी। घरखोरे वासियोंकी मुक्ति प्रीतिमें है।

कवि-मी माता-
३ सिग्र राम
पर तर मग मम्वेशए सूबो पाया है सिवगी।
है कभी बां मौर कमी तस्मोमे गा है दिमगी॥
तू इसे पेमानए इमरोखो फासे , माप ।
नागिरी पहम रवा हर बम नबी है सिम्बगी।
मपनी दुनिया माप पैदा कर मगर सिम्बॉमें है।
सिर मारम है समीरे कुन फकी है निम्बगी।
निम्बगानीको हकीकत कोहकमके विलसे पूछ।
नए शीरो तीशामा संगे गरी ह सिम्बगो ।
बाबमोमें पुटके रह जाती है एक भूए कम मार।
और मावारीमें बहरे बेकत है विम्बगी ।।
माशकारा है यह अपनी पुरवते तसबीरसे।
गर्षे एक मिटटीने पंकर मिहाँ है सिम्बपो॥
दुसममें हस्तीसे तू उभरा है मानिम्म हुमाव ।
इस बयाँ वाने में तरा इम्तहा है विम्बगी।
पाम है भव तक तो है मिटटीका एक भंगार तू।
पुख्ता हो पाए है तो है शमभीरे ये गिन्हार तू॥

३ रिसर राई - ["विण पर" इबासकी मम्मी मम्मोन है जिसमें कमि पग्रम विग से पीपन और संसारको स्पिति सम्बग्यमें प्रश्न काजा है। विच हरत मुहम्मदसे बहुत पहले हो गए ये मौर उनके बारेमें विश्वास किया जाता। किरनी रहती दुनिया तक मृत्यु नही बीर मामा मी भटके हुए कोमाँको मार रिचात- नीचे बाबतीस पितासे तो माग दिपे माठे है जिनमें पति प्रहन पर दिय जीवन यापार मौर रायमत्ता तपा गपासमारपर अपने विचा प्रस्तुत करने है। इन मंगाको पड़ते समम यार रखना चाहिए जि यह पवित उम समय सिवी मई मी पप स्ममें ममारपार पूरी वह र मी महमा प भार उसकी पी बनसाधारपणी पवानपर भागको तहमपी।] जीवन माम मौर हानिस कहीं चाह। कभी प्राण है की कभी प्राणोंका परिदान। तू इसको मार और पलक प्याले द्वारा र नाप क्योंकि जिन्दगी कमी समाप्त हानेबाली नही बीर हर क्षण आर बाती रहती है। यदि सपनेको जीवित कहता है सा अपनी दुनिय आप ही पैदा पर क्याकि जिन्दगी मानव पिता ( आदम ) का भेद । और यही वह धमलारिक मन्त्र ह मिसम विग्ने ससारमी रचना की पोवनकी वास्तविकता तो फरहादरे दिएस पूछनी पाहिए मिमन अपनं प्रिय पोरीको प्राप्त करने लिए ॐ अपे पहाहाको पाटकर दूध महर यमाई पी। जीवन भी इसी प्रकार कठोर परियमका नाम । गिसक प्रतीक महर विपास पहार मौर फरहादका कुल्हारा है गुसामीमें गीवनी लालसा पटकर एक छारी-सी महरमी भाति । पाती है और म्पतन्त्रतामें यहीं नहर एक महासागर बन जाती है। या पीवन माससा अभिलापा वर यपनी विजय पानीको पक्विस ध्या होती है यद्यपि यह जीवन धारा एक मानबर पमें एक मिटटीर पूतला छिपी रही है। तू जीवन महासागरमें एक मुससका माति उमराह हर सण पाटा देनवासे म्यान तेरी इस जिन्दगीको परीक्षाए हैं। जवता तेरे अन्दर जीवन-अभिलपारम्पी है उम ममय ततामय मिट्टी मूनि ममाम है, परन्तु यदि यह अभिमापा परी हा जाए तो एम एस सम्मारपी भौति हो पाएगी जिमना बार मधूप होता है।

कषि-मी माला-
३ सिर राह
पर तर मग मम्मेशए सूमो नया है शिवगी।
है कमी का मौर कभी तस्सोमे ना है बिम्बगी।
तू इसे पैमानए इमरोखो फर्शसे म माप ।
बाविस पैहम पां हर बम बना है सिमगी।
मपनी दुनिया माप पैरा कर मगर सिम्पोंमें है।
सिर मारम है समीरे कुम फकी है सिम्बपी।
निम्बगानीको हकीकत कोहकमरे विनसे पूण।
ए पीरो तीक्षामो संपे गरी ह सिबगो॥
बम्बगोम युटके ह नाती है एक भूए कम भाव ।
और भासामे पहरे रेफरी है विबगी।
भाषाकारा है यह मपमी मुरवते तसबीरसे।
गचे एक मिटटीके पैकरमें मिहीं है जिन्दगी॥
दुमजमे हस्तीसे तू गभरा है मानिन्द हुपाव ।
इस यो पाने में तेरा इम्तहा है निन्दगी।
पाम है मब तक तो है मिटटीका एक मंवार तू।
पुख्ता हो जाए है तो है समभीरे ये गिम्हार तू॥

३ सिटर राह ॥ ["बिच राह" यापकी मम्मी मोम है जिसमें कपि पैगम्बर लिय से नीमन बीर संसारको स्पितिक सम्बन्धमें प्रश्न करता है। विष हसरत मुहम्मदसे गाव पहले हो गए पे बार उनके बारेमे विश्वास किया जाता है किनकी पती दुनिया तक मृत्यु नहीं बार यह मब भी भटके हुए। लोगों को मार्ग रिचाते है- मीरे वाहकीय कवितासे के भाग दिये बाते है बिनमें परिक प्रस्न पर पिप जीवन माघार मौर राणसत्ता पपा ममत्रवादपर मपने विचार प्रस्तुत की है। इन बच्चोंको पाते समय मार रखना चाहिए कि यह करिता उस समय छिपी गोपी पर सभे समारपार पूरी तरह पुल भी न हुआ पा और उसकी पर्चा बनसाधारणको बवानपर मापकी तएमपी।] जीवन लाभ और हानिसे कहीं ऊँचा है। सभी प्राण है और कमी प्रागोंका बसिवान। सू इसको बाग मोर कलके प्यासे द्वारा न माप क्योंकि जिन्दगी कभी समाप्त होमेवासी नहीं और हर कण मागे बढ़ती रहती है। यदि अपनको जीवित कहता है तो अपनी दुनिया आप ही पैदा कर क्योगि सिन्दगी मानव पिता ( आदम ) का भेद है मौर यही यह पमतारिक मत्र है जिससे किरन ससारसी रचना की। जीवनकी वास्तविकता तो फरहायके दिससे पूछनी पाहिए जिसने अपनी प्रिय क्षीरीको प्राप्त करने लिए अंधे-पहाड़ोंको पाटकर दूधकी नहर बनाई पी। जीवन भी इसी प्रकारक कठोर परिश्रममा नाम है बिसक प्रतीक नहर विशाल पहार और फरहादका कुल्हारा है। गुलामीमें बीवमनी लालसा घटपर एक छोटी-सी सहरसी भौति रह पानी है मौर स्वत तामें यहीं महर एक महासागर यन गाती है । यह पोपन लारसा अभिटापा केवस अपनी विजय पानीकी पग्निस व्यक्त होती है यपि यह जीवन धारा एक मानब लपमें एक मिट्टी पुतसमें छिपी रहती है। तु जीवनये महासागरमें एक पुस्वरेकी भाति उभरा है। हर क्षण पाग देनेपास स्थान सेरी इस रिन्दगीको परीक्षाएं हैं। पयतम तर मन्दर जीवन-अभिसापासपी है उस समय तब तोक्यम मिटटीमी मूर्ति समान है परसु र यह अभिमपा पानी हो जाए सो एप एसी तसगारको भांति हो पाएगी जिमका बार अपूफ होता है। -1

कदि-भीमासा-
हो सबाइसके लिए जिस रितमें मरनेकी ताप।
पहसे -वपमे पैकरे पाकीमें बां पैरा करे।
फूक गते यह अमीनो भास्मामे मुस्तबार॥
मौर बाकस्तरसे आप अपमा यहाँ पर करे।
जिन्दगी को हुमते पिन्हाँ को कर माश्कार ।
ता यह चिंगारी रोपे बानि पैग करे।
बाके मशरिक पर चमक पाए मिप्ताले माफसाय ।
ता बरक्षा फिर ही साले, गरा पैदा करे।
मए गर मासए सवगीरका मेथे सनीर ।
राप्त तारोंमें अपने राखी पा करे।
यह घड़ी महारकी है तू मरसए महरमें है।
पेश कर पानिक अगर कोई ममत रफ्तरमें है।

यो सन्चाल लिए पान वेनकी लालसा रखता हो उसे पाहिए कि अपन मिटटीक बने परीरमे पहले प्राण (सक्ति) पैरा करे। इस मांगकी दुनिया को (जो उसे पूर्वगॉस मिली है ) फूल गसे मोर इस दुनियाकी रावसे अपने सिए मए ससारकी रचना करे। जीवनकी छिपी हुई शक्तिको म्पत कर दे ताकि इस चिनगारीसे एसी रोशनी पैदा हो यो अमर हो। पूर्वकी दुनियापर सूरजी माति प्रमा गाए ताकि ईरानके प्रसिद्ध बदाकी धरती फिरसे पुराने युमकी सरह लाल मौर कीमती पत्पर पैदा करने सगे। आसमान तक अपनी भावान मोर फरयादले दूतको भेज मौर रातके तारोंको भी अपना मित्र मना में। यह समय प्रणयके वाद अपने गोगमका हिसाव देनेका है यदि तेरे पास कार्यका श्रय हो तो प्रस्तुत पर।

कवि-थी माता-
म
8. सततनत
मा बताने तुमको रम्छे मायाए मम मुनक ।
सस्तनत मावा गालिबकी है एक बागरी॥
स्वाबसे बेहतर होता है परा मेहकूम मगर ।
फिर मुला देती है उसको हुममराको साहिरी॥
बाबुए महमूरकी तासीर से परमे भयान।
देखती है हसाए गरवनमें सारे विसबरो॥
ने इसराईत आगाता है माविर मोम में।
तोड़ देता है कोई मूसा तिलिस्मे पामरी ।।
सरबरी सेवा फक्त उस बाते हमता को है।
हममरा है एक नहीं माक्रो इताने बामरी ॥१॥
है वही सासे कुहन मगरिबका बमहरी निजामा।
जिसके पर्चामे मही गर भन नबाए कैसरो।
प इस्समार अमूरी बामें पाए कोर।
तु समाता है यह मातापी की है मौतम परी॥
मसिसे माईनो इस्माहो रिपायातो हरू।
तिमे मगरिब मजे मोठे असर वाव मावरी॥
गरमिए गुफ्तारे माधाएँ मजासिस मा ममा।
यह भी एक सरमाया पारों की है, बगे सरगरी।
इस सराब रंगों को पुरुसिता समामा है तू।
माह ए मा कसको मापायां समता है तू॥२॥

उर्दू B. राज्य - विय कहते है कि बा तुमको पह भेद बताऊँ जो खुदाने पुरान में 'इन्नस मुएप' मासी बायतमें प्यास किया है। मायतमा बर्ष यह है कि पद कोई नया राग्य स्थापिस होता है तो मए राजा पहले के सम्मानित लोगोको पलील करते है और नर्योगो सम्मान देकर मिसा लेत है और यमीनपर उपस-पुषस पदा करते हैं रागसत्ता का शक्विप्मासी राष्ट्रोंकी पादूगरी ही है। मगर कभी प्रना राजानी इस भादूगरीको समझने लगती है मौर नींदसे पाग पाती है तो सप्ताधारी फिर उस किसी न किसी प्रकारसे सुला देते हैं। सत्ताधारी ( मेहमूद गावशाह ) २ पादू से मुसाम (महमूवके प्रिय गुरुराम मयामी भौति) गरदनकी जगीर मीर सौक को भी अभूपण समझने सगते हैं। परम्तु एक न एक दिन यह भ्रम उसी प्रकार टूट पाता है जैसे मियम फिरौनके विस्य (जो कि अपनको बुवा कहलवाता था। हमरत मूसा की क्रोम मा म जोशमें वाया और फिर औन की तरह सत्ताधारी तस्तेसे उतारकर फेंक दिए पाते हैं और यह सिट हो जाता है कि सत्ता केवल एक वृदा की है और शेप सब उन मूर्तियोंको भौति है जिन्हें हररत इसाहीमके पाप मबार मनाया करते थे ॥१॥ पश्चिममें यो रामसत्ता गणतन्त्रके मामसे प्रसिय यह भी वास्तव एसा माना है जिसमें पारवाही के ही स्वर भरे है। यवरता ही पा राक्षस है यो भासादीकी नीसमपरीमा मुन्दर रूप धारम परके उधमपूर दिखा रहा है। भोपन्समा पनहित सुधारको बातें मौर सविधानके अधिकारों की बातें बस ऐसी मोठी मोपधियोंमी मावि है जिनका उद्देश्य कबस नींद साना और सुना ही होता है। लोक समामें जो गोर-चोरफे भापण हाप हिसा-हिसाकर होते है, यह पस पूंजीपतियोंगे एक तमाशसे अधिक कुछ मही है। ऐ मूर्त तू इन दिनों मौर सुगन्धोंने भ्रमको पुष्पवाटिका समान मंठा है। तेरी सममपर दुरा होता है कि हाय सूने पिंजरे ही कोपममें मपना पोसमा मान लिया है।।२।। गुल्म मौर

कवि-मी मामा-
५ साकी नामा
हमा चेमा बन कारखाने बहार। हरम बम पपा गाममे कोहसार।
मुतो नरगिसो सीसनो नस्तरन । महीये मसस माला पनी कफन ।
वहाँ एप पया पीए गर्ने । सहूकी है मरविश णे संगमे ।।
प्रिया मोली-नोती हवामें सुगर । ठहरते महीं माषामें तपुर ।
पह ए मुहिस्ता रचती हुई। मटकती तबकाती सरगती ह।
उछलतो फिसमती सम्मसती हई। यो पेच पाकर निकम्म्ती॥
के अब तो सित पीर येती है यह। पहाड़ोंके बिस वीर तो है यह ।।
सराव एक साहिए माता काम । सुनाती है यह निम्बमी का पयाम ।।
पिसारे मुझे बह मए परवा सोर । कि माती नहीं करसे गुप्त रोज-रोस ।
यह मप जिससे रौसम समीरेहमत ।बह मप जिससे है मस्तीए काएनात।।
बह मय जिससे है सौसो साये मजल । वह मय मिससे पुसता है रावे मरास
उठा साक्रिया पर इस रायसे।
काममोसे को पाहमाय से ॥१॥

५.साकी नामा [साकी मामा माँ तो फारसी पविताही एक प्रसिड तय है पिसमें माहीसे सरार पिठाने और भूम ममानेको विधी की गाती है परन्तु कुछ उ दौर फारसी सामरमि राम और माताको पम्दप्रभानीमें पहरी बातें मी नहीं है। इस नग्ममे एकवाका पुरका पर्गमारमा प यो मुनर बीर सीधे माघे संमसे अभिम्पास हुआ है। । बहार आ गई है और उसक काफिरोंमे रेरै गए दिए हैं। पहाहाको पाटिया म्वर्ग वन मई है। तरह-तरहर फूर खिस्ने एग जिममें नरगिम सौसन नम्तरन भी है और सालाका लाल रगा फूर भी है जो मानो हमेगासे किसी पहीदकी भांति खूनस मरा सार फन पहने हुए है। ससार रगाने परदेमें छिप गया है और परमरों तक खूनका बहार मोर मस्सीका आवरण है। वातावरण मीसा नीला है हमाम मस्ती छाई हुई है और पवरु ताका मन घोसमामें पर एनको नहीं परता पहाड़ी नदी उपकती पटगतो सरकती हुई यह रही है। यहे मार पर वाकर उष्टगती फिमलती सम्भलती हुई बह रही है। यहीं पहार नदीकी सहर त गाए तो पत्परमी विसाका वाकर राम्ना निकास सती है पहाड़ोंग मोर दिसों तक पीर गसती है। ए (परावा मगेस साल पहरेगास माङ्गो यह पहाड़ी मनी भी जीवनरा मद मुमा मह भदापो नप्ता दनवारी घराब मुझे पिला दे क्याफि दिन प्रति दिन तो यह बहारका मौसम नहीं मावा । यह पराव एमी है जिमसे जीवनी अन्तर्रामा ग्योतिमान हैं और ममस्त विश्व मस्त है-जिसमे समार-मृष्टि पन्मय पहल दिनसे बदना और मानन में पिरा है मौर निम राबसे ससारक बम भेद स बाएँ। ऐ साली इस भरको खोम्पर निर्वस ममोमे एम पसेको वाजम पाने भरमा वस प्रदान पर दे।

कवि-भी माता-
५२
रमारम रा ह यमे जिन्दगी। हर एक सयसे पैरा रमे शिरगी।
इसीसे हुए है बामको नमूर। कि शोसमें पोशीदा है मौने दूर ।।
गरी गरमिह सुहस्ते मायो पित । पुश भाई से मेहमते माबो पिस ॥
यह साबित मीह मौर सम्पार भी। अमासिर के फेबोसे बेगार भी।
यह वहबत ह कसरतमें हर बम मसीर । मगर हर कहीं बेच नखोर॥
यह मालम यह युतवानए सक्ष नहात । सीने तराशा है यह सोमनाप।
पसम्म उसको तकरार की नहीं। कि तू मैं नहीं मार मे तू नहीं ।
ममोतीसे है अनुमन माफ्ररी। मगर ऍन मेहफ़िसमें विसयत नी ।।
चमक रसको विबतीमें सारे में है। यह पारी सोनमें पारे में है।
इसोके व्यावो इसीके पबूत। इसोके है कोटे इसीके हैं फूल ॥
कहीं इसकी ताकतसे हसार पूर। कहीं इसके फीमें निबरोसोर।।
कहीं पुरी शाहीम सोमाव रण। मासे चकोरोंके लाभूमा बैग ।।
कबूतर कहीं माम्याने से पुर।
फरमता हुमा बालम नासपूर ॥२॥

-"
जीवन-धारा हर क्षण घस रही है और हर वस्तुसे जीवनकी गति
म्यक्त होती है, जैसे हर शोसमें धुएंपी लहर भी छिपी रहती है इसी
प्रकारसे भौतिक वस्तुओंमें पस्कि हर परीरमें यही मौजूद है।
जीवन धारा (खुदी) पर कोचर और पानीका यह प्रतिवन्ध भारी है
परन्तु उस मही प्रतिवन्ध अच्छा लगा है। यह धारा ठहरी हुई भी
मगती है और हरदम गतिमान भी दिखाई पड़ती है और भौतिक
वस्तुओंमें पिरे होनपर भी भौतिकमायके पिंजरेसे असन्तुष्ट भी है। यह
एक होकर भी अपनेको हबारों और अमेक सोमें माहिर करती है
परन्तु हर स्थान पर मद्वितीय भौर सर्वधप्ठ रहती है। यह ससार
जो एक ही दिशाओं मूर्ति स्थान को शाम्ति ह उसीने इन भौतिक
मूर्तियोंकी रचना की है। संसार शक्तिको अपनेको बार-बार दुहराना
पसन्द महीं और वह (आवागमनये स्पान ) हर बार नई बस्तुएँ और
आत्माएं सामन साती है और हर व्यक्ति दूसरसे विभिन्न होता है।
म्पत्ति मौर में और सू की भावनासे ही ससारसी यह सभा सजी
है परन्तु सभाक मीचमें भी यह शक्ति सबसे असग रहती है। इसकी
पमक बियसीके तारेमें है यह पावीमें सोने में और पारेम है। पसीने
बगल बनाए हैं इसीने बवूस इसीके कोटे मोर फूल है। कहीं इसकी
पाक्तिसे पहार टुकड़े-टुकड़े हो जाते है मौर कहीं सर्वश्रेष्ठ फ़रिश्ता
ग्रिीस और हरें भी इसकी सक्ति-बाममें फैसी है। पही यह पुर्रा
(वारे नर बने) को पाहीन (प्येन-वाग) बनाता है और उसके
पंजोंको शिवारफे खूनसे रंगसा है। कहीं कबूतर अपने पोसस्से पर
पाप्तम म्यागुप्त मौर तड़पता हुमा दिखाई यता है ॥२॥

कपि-पी माला-
फरेचे मखर है सुरनो सिबात । तरूपता है हर पर्राए काएनाप्त ।
ठहरता नहीं कारणामे पुर। कि हर महना है तासा झाने पर
सममता है दू राम है चिन्नगो । फ्रात चौक परवास है निम्बगी ॥
बहुत रसने येथे हैं पस्तो बान । सफर उसको मंमिससे बाफर पसम्म ।
सफर बिन्दगीके सिए वर्गोसाय । सफर है हकीकत हसर है मजाय।
उसमकर सुससनेमें तरसत इसे । तापने फाकनेमें राहत इसे ॥
हुआ बब इसे सामना मौतका । कठिन पा बड़ा पामना मौतका ।।
पप्तर पर महाँने मकाफ्रातमें। रही विगो मौसकी पातमें ।
माहे दुई से बनी लौन जौम । सठी सो कोहसारसे प्रौन प्रोज
गुल इस भावसे टूटते मी रहे। इसी मासे फूटते भी है।
समझते है नाव इसे में बात । उभरता है मिट मिटके मस्से हयात ॥
बको तेस बौला बड़ी भूर रस। ममतसे मबर तक रमे यक ममस ।।
समाना कि नीरे मस्याम है।
दमों सट फेरका नाम है ॥२॥

५ नई । पास्तष शान्ति केवल प्रम है, तम्पना ही गीवनका भेव ह र विश्वमा हर जर्रा (अण) तम्पसा है। पोवनका काफिला ठहरता ही है और हर मण गीवन अपनी नई शान और दृष्य विधाता है। समानता है कि जीवन एक भेद है-नहीं-पलि बीवन कपरू उडानका स्साह है और कुछ नहीं। उसने बहुत ऊँच-नीच दखी है। उसे टहरनेसे धिक यात्रा और गति ही पसन्द है। जिन्दगीकी गति ही सारा साप मान है। असली सफ़र (गति) ही ह शान्ति प्रम है। उसे उसमकर लम में मया मिलता है और परपने-फरकनेमें मानन्द । पव उसे मृत्युका मना हुआ मौर मृत्युको पाममेरा कठिन कार्य आ पड़ा और दोनों इस निपाके कार्य क्षेत्रमें उतरकर एक दूसरसी पातम रही तो जिन्दगी वो माने (समूहमा म्प धारण) की शक्तिसे जोड़ा-जोड़ा बनकर मैदान और पहाड़ोंसे समूहमे स्पर्म फोन वन वनार उठी। इस शाखासे म तो टूटते रहे, परन्तु उसी साप साप नए फूल बम भी लेसे रहे। पूच ही गीवनको मर्म और विनाशी समानते है, परम् जिन्दगीका रूप तो मट मिटकर और भी उभरता है। यह जीवन मस्ति परी तीव्र गतिमी है। और हर स्पानपर घीप्र पहुंचती है। ससारके जमसे उसा अम्त होने तकमा प्रासला उसकरिए एक सांसमें पूरा हो जाता है। समाना जो न दिनोंको पगीर-सा है दर असस सांसोंपे माने-मान ही का नाम है ॥३

करि-भीमासा-
यह मौजे मस क्या है तलवार है। पूरी क्या है तमवार को धार है।
करी पपा है से मुख्ने ह्यात । परी पया है पेरारिए काएनात ॥
बीबलवा गरमस्तो चिसक्त पसन्द । समम्बर है एक र पानीमें बन।
मधरे उमालेमें है ताबनाक ।
मनोती में पैरा ममतौसे पाक ॥
मयत उसके पीछे मबर सामने। न हर उसके पीछे म ह सामने ॥
समानेके परपा बहतो हुई। सितम उसकी मौगोंगे सहसो हुई।
तबस्सुसकी राहें बरमती हुई। बमाबम निगाहें बरमतो हई।
सुबक उसके हापोंमें संगे गरी। पहार उसको बसे रेगे रखा।
सफर रसका मागायो आगार है। यही उसकी तबीमका रारा है।
किरम बाबमें है शरा संप में। यह रंग है यूगकर गर्ने ।
इसे वास्ता श्या कमो बेषा से। मोबो फरायो पसो पेश से॥
मखमसे है यह कशमकश मसोर । हई काके भावममें सूरत पनीर ॥
बीका मोमन तिरे रिममें है।
सक जिस तरह माचके तिसमें है ॥४॥

1 -उ' सास की यह सहर तसगारको मांति है मौर खुदी इसकी धार । खुरी पीरमके मन्दरका भेद है, यही विदयके पागरपकी प्रतीप है। खुदी साहिर स्पमें म्पत होकर मस्त है परन्तु उसकी मिसाल उस समुद्रकी भौति है, जिसकी सारी सक्ति एक बूंद पानीमें समा गई हो। अंधेरे मासेमें म्यातिमान है। पक्तियों ही द्वारा व्यक्त होती है फिर भी म्पनियोंके बाहरी ससे मुक्त है। उसकी कोई सीमा, कोई समय नहीं है। मसारका मन्म-दिम उसके पीछे है धौर अन्तिम दिन उसके आगे। पमानकी नदीम वहती और टसकी महरोंके पपरे खाती भए-नए रूप धरती और पैतरे बदमतो और रामके नए रूप धारण परती चली जाती है। उसके सामने भारी पत्पर हमक है और उसकी पोटके आग पहाइ रवा परोको भौति है। मति मौर यात्रा ही उसका मारम्भ मोर मन्त है और यही उसके अमर होनेका भद है। यह पन्द्रमा में किरण वनार और पस्परम चिनगारी वनकर रहती है। और पक्त रूप धारण करके भी यह इन वस्तुमोका रग नहीं मपनाती- रेममें दुबार भी उससे मुक्त रहती है। इसे भौतिक मामलों कोई मवरण नहीं। उमे ममका भय है म अधिषका साथ। यह केवाई- नीपाई मोड़-पेबसे नहीं पबरातो। यह बम ही से म्याकृस्ताम घिरी है और मानव मपमें म्यत हो गई है। मुवीका स्थान ठरे मनमें है परन्तु मह उसमें सीमित नहीं बैस पासमानका प्रतिबिम्ब बाबोंके रिए पाता है परन्तु मापा उसमें सीमित नहीं होता ।।

स्मिी माता-
+
७८
पू.बीके निगाको है बहरे नाव । बह-नौ विससे गाती ऐ उसकी भाव।
बहीना है उसके लिए मनमन । रहे जिससे दुनियाम गज युतम ।।
रोनामे मेहमूरसे पर गुर। बीको निगह एप मयायो म कर ।।
बही सबबाह माएके एहतराम । किहो जिससे हर समरा हुमपा हरामा
यह मासम यह हंगामाए रेपोसौत। यह मातम कि है मेरे फर्मान मौत ॥
यह मालम यह पुतदानाए बशमोगोश । यहाँ शिवगी है फ्रात एर्गोनोम।।
बोकी यह है मरिसे मम्बसी । मुसाफिर यह तेरा मशेमम नही ।।
तिरी माग इस वाकवासे महीं। नहाँ तुमसे है तू बहाँ से महीं ॥
बड़ेगा यह कोहे पर तोड़कर। तिलिस्मे समानो मका तोड़कर ॥
प्रवी बोरे मौसा नहीं उसका सेव । बर्मी उसकी सेब-आस्मा उसका सेर ।।
नहाँ बौर मो हे मभी ये नुमूर। कि वाली नहीं है बमीरे युग ॥
हर एक मुम्तबर तेरो यमग्रारका । तिरी शोभिये फिकरो किरपार का ॥
यह है मत्सरे गरगिभे रोगगार । कि तेरी बुरी तुम पे हो माश्कार ।
तु है फ्रातहे मालमेमो विस । तुझे क्या बता तिरी सरनविस्त ।
हकीकत पे है मामाए हर्फ संप । हकीकत है मानिा गुफतार बंग॥
अरोचा है सीनेमें बमए नफ्स । मपर ताये गुफ्तार कहती है बस ।।
'मगर पक सरे भूए पर तर परम
फरोगे तजस्ता विसोसब परम"॥५॥

खुदोके रक्षकने लिए वह भन्न विप है बिसस सम्मान पावा हा। उसके लिए वही रोटी रामी अच्छी है जिसस दुनिया में सर पा रह, या पाहोंगी मी शानम प्रभावित न हो। आरम-सम्मानका देख और गृहामी न कर। बस यही सजदा मानवा योग्य है मिसस हर मय सजदा उसपर हराम हो जाता हो। यह संसार जो रंग और मुरकी दुनिया ह और जिसपर मृत्युपा राज है। यह ससार पा आँच मानमा बनाया हुमा एक मूर्ति-स्यस समान है और जहाँ जीवन क्वस खाने और पीनेपा माम है यह खुदीकी पहली ही मषित है और ऐ पात्री ! यह तेरा पर नहीं है। सेरी मारमाकी चिनगारी इस ससारकी मिट्टीकी नहीं है। तू इस ससारस सिए नहीं बलि ससार तर लिए बना है। बड़े जा यह मारी पहारबाटपर यह जमानका मादू यह समयमा मायानाम तोड़ दे। बुदी खुवारे परकी भांति है भौर ससार उसका धिकार है। धरती-आकास उसके शिकार है। यमी और भी दुनियाएँ ऐसी है जो प्रगट नहीं हुई है। हर एक ठरे पात्रमणका प्रतीक्षम है तेरी पम्पना और कायकुशलताका प्रतीक्षक है। संसार पत्रमा उद्देश्य ही यह है कि सरी खुवीकी पाक्ति तरे ऊपर खुरे। सू तो इस अच्छाई-सराई की दुनियामा विनयी है। भला तुमे तरी स्मितमा हास क्या बताऊँ। मास्तविकता पारदोंने कपड़ोंमें पूरी तरह नहीं समाती। वास्तविकता पण है और शम्द उसक सिए जग या धम्प की भांति है। मरे सीनमें समिकी रामा पर ही है परन्तु पद शक्ति और बासमती प्रक्ति कहती है कि समाप्त परो पि “अब अगर इस स्पानसे एक पर भी पागे मारोग तो सम्पाई और ईदवरती म्पोठिसे पर जस गाएम"||५||* • या रसासने एक ग्रामी पापरम मिपा है यह मनासा प्रमग है। मेगरात मुहम्मदक जीरनरी एम महबम पटना है। यह पटना इम प्रभार एक रामको रिशस प्ररिता पो भगवानः मबसे बमिम निपट पनवाना है मार हारत मुहम्मरमे का कि भगवान तुमको मिनमरे लिए बुहाते है। हत माम्मर सिीता साप हो लिए सिने हरण माम्मरको मन भासमानोंकी सैर। पर वह एक स्पानमे पाड़ी दूर प गया तो पहा बिमै मौरमाप मीरा मा। मपर गाउंगा हा मेरे पेज बस पाएंगे।

कवि-भी माता-
६ मास्जदे कर्तवा
सिलसिकाए रोयो शब का गरे हारिसास।
सिकसिकाए रोबो सब मससे हमातो ममाप्त ।
सिमसिसाए रोयो पाच तारे हरीरे दो रंग।
मिससे बनाती है सात मपनी बवाए सिफ्रात ।।
सिससिसाए रोडो शाम सारे असल की फुया।
जिससे रिवाती है सात सेगे बमे मुमकिनात ॥
तुमको परखता ह यह, मुझको परखता है यह।
सिससिकाए रोसो बाब संरफीए काएनात ।।
तू हो मगर कम मयार, मैं हूँ मगर कम मयार।
मौत है तेरी बरात, मौत है मेरी वरात ।।
तेरे यो रोसकी और हकीकत है क्या।
एक समानेको रौ मिसमें न दिम है न रात ।।
मानौमो फ्रामो तमाम मुमुवाहाए हुनर।
कारे यहाँ से समाप्त, कारेनहा रे सवात ।।
मम्बसो मादिर ना बातिनो भाहिर फ्रना।
मक्शे कुहन हो, कि, मी मंमिसे मादिर ना॥१॥

-नई ६ मस्जिदे कदा [ यह नग्म स्पेनमें सिती प बार उम मस्मिाको देवकर मिनी गई मिस कमी मुसनमानोंने बनाया पा और यो बब मुसलमानों स्पेनमे बसे पानेक मार चमार पपी।] यह रात दिनको बगमासा ही पटनामांकी रपना करती है। यही पीवम और मृत्युका मूल है। यह वो राँवाले रपमक तारोंकी भांति है जिससे अस्तित्व अपनी बाहरी परिमापाका ताना वाना बुनता है। यह दुनियाकी रचनाके पहले निमा सगीठ ह जिसस जाप्त या अस्तित्व (खुला) सम्माबताया की ऊप मीच दिखाता है। यह तुझको और मुमकी सभीको परखता है कि यह बिएसको परमनासा यदि तू या में पाई भी चोटा निकले तो फिर उसके भागमें मृत्यु हो है। तर रात दिमती वास्तविकता इसमें मतिरिक्त और क्या है कि एग समयसी एहर है निममें न दिन हैन रात। मारे सारे पमलार सवरे सब ही मिटन मासे है क्योकि दुनियार सार कार्य ही ममाप्त हानेमार है। समीका अन्त मृत्यू ही है। मौत हो भारम्म है रहा अन्म है वहाँ ग्यान है मोर वही भीतरी भेद है। पाह चित्र पुराना हो या नया उपमा मम्त मरप ही है ||१|| ६६-६ कवि-भी माता- ८२ १ है मगर इस नक्साम रंगे सबाते वाम । निसरी किया हो किसी म माने तमाम ॥ मपाका भमस पासे साहब फरोग। पएक है मससे हयात मोत है उसपर हराम ।। तुंगे सुबक सर है गरचे समामेको रौ। इक पुर एक सैत है संत को लेता है पाम॥ शा की तबीममें मसरे बांके सिवा । मौर समाने भी है जिनका नहीं कोई नाम ॥२॥ का बमे मित्राकि इस रिसे मुस्तफ्रा। झापाका रसूस इस प.बाका कलाम ।। पक्रकी मस्तीसे ह पैकरे मिस ताब नाक । माह सेहवाए ग्राम का है कासुसविराम॥ पल कोहे हरम, ६ ममीरे जुनूर । दमा है इनसबीस रसके हवारों मकाम ।। के मियराबसे मामए तारे हयात । कासे दूर हयात से नारे हयात ।। ऐ हरमे कतबा से तेरा पुग। एक सरापा बाम मिसमें मही रफ्तो सूर। रंग हो या पिरतो संपचंग हो या हः सौत। मोरनाए फ्रमकी है चूने विपरसे नुमूर।। तराए ने बिगर सिसको बनाता है दिस। पूने निगरसे सा सोचो सुएरो सुन्न ।। तेरी या रिल फ्ररोज मेरो नपा सीना सोर। तुमसे रितोंका हनूर मुझसे रिमाका मुमूर ॥

८ उर्दू हो ऐसे मित्रों को अमर होनेकी पनि होती है या किसी स्विर मक्सरे हापों पूरे हुए हों। ऐसे ईयर भक्तका काय वास्वपमें प्रेम मोर उस्साहसे प्रज्ज्वलित होता है क्योंकि यही जीवन माघार है और मृत्युसे मुक्त है। यपि जमानेगी सहर वही ही तम और पार्टी और फैम नामेवाली है परन्तु इदक (प्रेम और उत्साह) सय एक लहर है और उस सहरसो रोमटती है। प्रेममी गपरीमें वो बाधुनिक कालो अतिरिक्त एसे और भी कई युग है जिनका कोई नाम नहीं है।॥२॥ प्रेम ही जिबीस फरिप्तानी साँस ह जिससे वह खुदाका सम्बंध हररत मुहम्मद न पहुंचाता पा और यही हजरत मुहम्मद खुदामे रमूस मा दिल है। इमोरे नभस मिटटीम बना हुआ इमान प्रबलित हया। यही सम्भा ना लाने वासरी पराव है यही यह प्यासा ह मिसमें प्रसिद्ध महाप्राणियों ने शराब पी है। यही कामे मंठा हुाइम्सामका विधायक है यही फोगोंका नवृत्व परनबासा है। यही रही है भौर इसकी हबारों मरिसे हैं। इमोरे मावूनमे जीवन-वीणा तार पर रटते है यही जीवनकी म्पोति है और मही जीवनको बाग है।।।। मा स्पेनमें बनी हुई मस्विर तू भी प्रेमर ही हायों ममी पी। पा किमामा तमाम अमर है और जो माने मान वारा नही है। कालाकी कोई भी प्रणाली हा-पाहे रगकी चित्रकारी हा या टि- परयर द्वारा भवन रचता हा या सगीत हो या पविता गो सुर मौर पम्द की कम्गएँ है -इन सबका माघार केबस परियम यौर खूने निगर ही है। सूने गिरकी एक र परपरमें मानव दिली धापन पैदा पर दती है। इमीम हर प्रकारमा सयोन म श्ता है। ऐ मस्बिर तेरा पावावरण मनको म्यानिमान परनबाण है मौर मरा मन मोममें माग पंदा परता है। सुभमे मन बापित हाताह मोर मुमसे मन यस पाते हैं।

मि-भी मासान
८
मर्श ममस्मासे कम सीनए मारम महीं।
परचेकने पापको हर है सपहरे मुबूर।
पैकरें मूरी को है सबरा मपसार तो क्या।
उसको मयस्सर नहीं सोखो गुपये सुदूर।।
काफिरे हिम्मी हूँ मैं रेख मेरा चौडो शौक।
रिममें सहप्तो दुख सर पे समातो पुर
शौक मेरी मय में है शौक मेरी लय में है।
मसमए "मस्ताह" मेरे रगो पपमें है ..

५ शिवरके स्पान बर्मसे मानवके हृदयका महत्व कम नहीं है यद्यपि मिट्टीसे वने मानवकी सीमा तो आकाश ही प्रतीत होती है। फरिश्तोंको सबका और पूचाका नबसर तो प्राप्त ह परन्तु उन्हें पूजाका सामन्द उसकी वेदना प्राप्त महीं क्योंकि वे अमिसापाहीन है। मैं हिन्दुस्तानका रहनेवासा काफ़िर है परन्तु मेरा प्रेम और उत्साह तो देयो कि मेरे मनमें भी सूदा मौर हसरत मुहम्मदकी भक्ति है और बोझैपर भी। मेरी रूपमें मेरी आगारमें यही प्रेम मौर उत्साह भर गया है और यही भल्लाह यही है" का संगीत मेरी रग रग में वस गया है। ।

कवि-भी माता- ८५ • लेनिन (सवाके हुजूरमें) ऐ मममसो मामाकम पैरातिर मायात । हा यह ह कि है सिम्ता मो पामरा तिरो दात ।। में कैसे समझता कि तुहया कि महों है। हरबम मुताम्पर ने बिरयके मसरिस्मात ॥ मेहरम नहीं फ्रिसरतके सरोरे पसती से। बोनाए कबाकिब हो कि सनाए मवातात ।। माग आपने देखा तो यह मातम हुमा सावित । में निसको समन्तता पा कसीसा परामात ॥ हम बरे पाबो रोममें नको हए बरे। तू पामि मासारो मिगारंपए मानात ॥१॥ एक बात मगर मुमको इनाखत हो तो पू। हम कर म सके बिसको हकीमोंके माहात । बब तक मैं मिया मए मफ्लाक मीथे। फोटेगी तए रिहमें बटकती ही यह बात। गुफ्तारके उससूब पे काबू महीं रहता। मब रहके मदर मुततातिम हो ज्यासात ॥२॥ यह कौन-सा बाबम है कि तू जिसका है माबूर? बह मारमे पारी कियो है रे समावात ।। मरिक के पुरानन्द समाने फिरेंगी। मगरिब प्रावद रखमया फलिरवात ।। पौरपमें बहुत रोगनीए इस्मो हमर है। हक यह है कि वामए हैवां है यह सम्मात ॥ राना तामीरमें रोममें, गिरखोसे कहीं पके है कोंके हमारत ॥३॥ सफ्रा -उई ८४ लेनिन (सदा हुजूरमें) ऐ खुदा मिसको निशानिया सांसों और ससारम म्पत है। सप तो यह है कि तेरा ही पक्तिरय है जो अमर है और पीमित है। में से समानता कि तू है या नहीं है क्योंकि हर क्षण दुनियाक बुद्धिजीवी अपने विचार मवमते रहते थे। चाहे वाराका देखनवामे हा या पनस्पति पास्त्र में पणित हां कोई भी प्रासिके मनन्त भेदोंमे परिचित नहीं। भव मृत्यु माद स्वय मपनी आँखसे देवा तो यह सिब हुआ कि रिसे अबतक में पादरियोंकी यमास समासा मा । अब ईयरका अस्तित्व सिम हमा हम दिन मौर रासकी गहियोंमें पकड़े हुए मानव है और तू जमाने युग मीर भोंको जन्म देनवारा है।।१।। पदि तरी आमा पाऊँ तो एक बात पूर्वी गिसे बुद्धिजीवियोंकी पिता भी सुनमा महीं पाई है। जवता.पाराम नीचे में जीता रहा पही यात मममें बटकती रही। जव पारमामें बहतसे विचार तूफान मपा रहे हों तो बात बहनो, तरोपेपर भी पूरी नरह नियन्त्रण नहीं रहता ।।२।। ६ । प्रश्म यह है कि वह कौन-सा मानव हमि तू रिमा बुन है? क्या यह मह मामबह मो मानापा नीष बमा हुआ है। मगर पूरयो गुरा या मालिग सा योग्पमें बसनबाम गठ बन बंट हैं और परिपमर्म मका हुए परों (परमाणु) मा गर है। यों ता पोरापमें कम्प और विज्ञानमा बा प्रमाण है परनु सप यह है कि यह एम अपार मपी भरतीसरी भौति है जिसमें अमृत नहीं है। (महा आता हैसि ममन एस एम प्रसगम है या मगधरम मिरा रहता है ) रसना को मुन्दरता गामा मार मफाई में गिनाम महो मधिक समीर पवर ह ।।

कधि-भी माता-
८८
साहिरमें तिमारत ह हाहीकत में पुमा है।
पर एकका मावोंके लिए मर्गे मफ्रामात ।।
यह स्म यह हिकमत यह तरमुर यह हमत ।
पोते है भर मेते है तामीम मसाबत ॥
बेकारोमो उरपानीमो मनवारो मो इफसास ।
पया कम है फिरंगी मामिम्मत के वहात ॥
बह कोम कि प्रयाने समापी से हो महरूम ।
हर उसके कमामातको है बों मुमारात ॥
है रिसके लिए मौत मशीनोंको मत।
एहसासे मुरम्मतको पुषस येते है मालात ॥४॥
मासार तो कुछ नर माते ह कि मादिर।
तरबीरको ताबीरके शातिरमे किया मात ॥
मानेकी गुम्पार में माया है तमसुक्त।
बैठे है इसी फिनमें पोराने पराबात ।।
बहरों पे को मुर्घा नकर पाती है सरे प्राम।
या पाना है मा सागरो मीमाको करामात ॥५॥
तू कापिरो बारित है मगर तेरे हाँ में।
तस्व बहुत रए मसूरके मवहात ।
कब सूबेगा सरमापा परस्तीका सोना।
पुनिया ह तिरो मुतमिरे रोते मकानात ॥६॥

मों तो इनका म्यवसाय तिजारत ही प्रतीत होता है परन्तु वास्तबमें उनकी मप म्यवस्था एक प्रकारका चुआ हो है जिसमें एक को यो मूद मिसता है यह साखों लिए मृत्युका सन्देश बन पाता है। यह विज्ञान यह दर्शन मास्त्र यह मुदिमानी और यह राममोति--सव प्रम ही है। खून पीते है एकता घोर समानताकी शिक्षा देव है। बकारी मग्नता पराव मोर गरीबी ही पोरपनी सारी समता चमत्तार है। यह राष्ट्र या बनता जो ईश्वरकी दीक्षासे यपिठ हो वह बस भाप बोर दिली ही के पमत्कार दिखा सकती है। मगीनोंकी प्रधानता मौरहमत दिसके छिपे मौत हक्योंकि एमे यन्त्र प्रेम और उम्भ भावनाओं को पुपस देते हैं। पृछ पुछ इसका पता भगता है कि सदबीरको तकदीर (भाग्य) न मात दे दी है भोर पश्चिमी सभ्यताको नीष ही रोगास हो उठी है और पोरापरे दृट मुखिनीयरी इसी चिन्ता चे हुए है। मुनपर को घामको लारी दिखाई देती है। यह या परावके नक कारण है या पाठार मोर गारफे प्रसाधनक कारण है ॥५॥ ऐ खुदा तूं म्यायो मौर मपतिमान है। मगर तेरी दुनिया मगदूरों मोर निघनॉ दिन रात परे पठिन हैं। माविर पूंगीमापी माव का बगीवरी दुमिया उमफे दण्डका दिम देवमेकी प्रतीक्षामें है ।।६।।

पि-श्री माला-------
१०
८ फरिश्तोंका गीत
मक्स है ये समाम ममी इसा है ये मुकाम मभी।
नाश गरे अव: तिरा मशह नातमाम ममी॥
पसोपा को पातमें रिपो फ्रकीहो मीरो पोर।
तेरे बहाँ में है नही पररिने सुप्हो शाम बमो।।
तेरे अमीर मास मस्त, तेरे प्रकार हाल मस्त ।
बराह कूचागर ममो समाजामसम्म माम मभो।।
पानियो गोनो स्मो झन बमगोए हवस तमाम ।
मोमिए कुचाएका मन नहीं है माम ममो॥
नौहरे सिम्बगी है या बौहरे एक है।
माह कि है यह तेरे तेत पररिगिए नियाम ममी।।

५ G फरिश्तोंका गीत अभी तक बुद्धि नियन्त्रित नहीं है और अभी प्रम अपनी मजिससे दूर है। बुवा ओ समारको रचना करनेवाले। तेरा बनाया चित्र अधूरा है। मनताकी पातमें परावी, घमा विधान नमानेगार सरदार और साधु (गुरु) सभी म्गे हुए हैं और मेरी दुनियामें अभी तक रास और दिनका बही पत्र पर रहा है। तेरे धनवान अपने धनमें खोए हुए है मौर वरे मुनि और साधु अपने ही में बाए हुए है। सेरी प्रजा अभी तर इधर-उधर भटक रही हूँ और तेरे धनवान अनीतक ऊँच कोठों पर है। बुदि, मान कसा और धर्म समी सालसाक पराधीन है अभीवन उस इक (मभिमापा और उत्साह) को प्रग्या प्रपषित नहीं हुई है पो सारी कठिनाइयाँको मुरमा देता है। जीवनमा मूल वस्त्र इश ही है और एक (प्रेम) का मुए तत्त्व खुदी है। सदह कि यह तेज बसनगाली सुदीकी समगार अभीतक म्मानमें छिपी हुई है।

कवि-मी मामा-
२. फर्माने सुवा
रको मेरी दुनियाके परोबोंको बगा दो।
काले उमराके परो पीबार हिला दो।
परमामो गुलार्मोका सह सोगे यही से।
कुबके रोमायाको शाही से ममा पो॥
मुस्तानिए मरका माता है माना।
मो नक्मे कुहम तुमको मसर माए मिरारो॥
बिस चेतसे रेहकोको मयस्सर नहीं रोती।
उस तक हर बोशए गमुमको बता दो।
क्यों हासिको मनाम हायत रहें पर।
पीराने कतीसाको कहीसासे ठा यो।।
'हरु रामसपुरे, सनम रा बतबाफे।'
बेहतर है घिरा हरमो और पुप्तारो॥
में मारतो बेचार मरमरकी सितोंसे ।
मेरे लिए मिट्टोका हरम मौर बना दो।
पहजोदे नवो फारमहे शोमा गरी है।
मारा जुर्मू झाएरे मशशिको सिखा दो।

१३ सदाका हम (फरिपोंको) उठो, मेरी दुनिया मुरीओंको जगा दो मौर ममीरों मौर धनवानोंके महलोंकी दीवारें हिला दो। गुलामोंके खूनको उनके मनके उत्साहसे गर्म करो और जो शक्तिहीन पिरियाकी भांति है उनको पिडियोंके शिकार करनेवासे वागसे सहा दो। अव बनता राजका युग मा रहा है वो भी पुरानी रेखाएँ तुमको दिखाई दें उन्हें मिटा दो। जिस घेतसे किसानको रोटी और राजो म मिने उस खेतमे गहरे हरे पानेको फूंक दो। सिंबर मौर रसमी प्रमाके वीपमें क्यों परदे परे रहे। गिरजोंके पादरियाको, यो दोनोंके वीचमें पड़ गए है गिरगोस उठा दो। हक ( सत्य बिर ) सम में हो मौर मूर्तियां कायेका तबाफ (पत्र) मगा रही हों। अच्छा यही है कि काया और मन्दिरम चिराग बुमाकर उनके भेदभाव मिटा दो। मै स्फटिक और बहुमूल्य पत्थरक बने हुए सदनों और मन्दिरोंसे उकता गया हूँ मरे लिए मिट्टीमा एक कामा मौर बना दो। मई पश्चिमी सभ्यता पीयोंकी बनी दुनिया है इसे तोड़ने के लिए पूर्वरे कविको दीवामापन बोर पागलपनके विधानको सिवा दो।

मादि-मी माता
१० मिरीतोपलीस
मिडोस हम रमे रीना मा हाने रंगो ।
इस्तीसमोती साबो परों साम्रो सातुमू बो बार ।।
विनीलहर पो मला पर एती है मेरी गुमनुर।
क्या नहीं मुमकिन कि तेरा पाक गमन हो ।
For- माह ए बिडीत तु बाकिस महीं इस सबसे।
कर गया सरमसत मुमको दूरकर मेरा मु॥
मब यही मेरी गुवर मुमकिन नहीं मुमकिन नहीं।
निस र बामोल है यह मातमे वे पायो ।
जिसको नौमोरी में रो मोझे पुस्मे कारएमात ।
उसके हमें "तकमा" अछा है या "का तानत"
पो लिए इकार से सने ममामाते बुमन
चाम पत्ता प्रतिही ही क्या माना।
To- है मेरी पुरमतरी मुले शाम पोर नम्।
मेरे फितने नामाए यको हिसका सारो ॥
देचता है तू प्रात साहिमसे रदमे रोशर।
कौन तुझा तमाच पा रहा है, मैं कि?॥
जियभीतोपाइल्याप्स भी पस्तो मा।
मेरे तुम पम पम परया गरया पू॥
गर कमी दिसपत मयस्सर हो तो पूर्ण मल्लाहो ।
किस्साए माबमको रोगी कर गया जिसका डू।।
म पाहता हूँ रिने यम कोटे की तए ।
सात पाहा!' 'मस्ताह ' 'मास्साह है।'

उर्दू १० जिद्रीलोतीस फ़रिश्ता निद्रीस इम्लीस (शैतान) से पूछता है कि ऐ सापी यह रग बोर सुगन्धका ससार कैसा है। फीस कहता है कि यह 'भौतिक संसार केवल दुम और मानन्द - अभिसापा और बोन पेवमा और पीडाका ससार है। जिग्रील कहता है कि अब भी हर क्षण बाकाए पर वेरी चर्चा होती है। क्या यह सम्भव नहीं है कि तेरा फटा हुआ दामन फिर रफू हो पाय अथवा भगवानसे तू क्षमा मांगकर फिर फरिमों में सम्मिसित हो गाए। इम्छीस महसा है कि ऐ मिनीस सूइस मदको नहीं बामप्ता। मेरा प्यासा टूटकर मुझको मस्त कर गया है। अव उस ससारमें मरा पाना असम्भव है। मुझे प्रतीत होता है कि वह सपाट दुनिया कैसी नीरस फीकी है और कैसी मौन है। जिसके निराश होनपर सारे विश्वकी मान्सरिक शक्ति और तप निर्भर हो उसके लिये यह कहना उचित है कि मिराश म होना चाहिमे या यह कहना कि निराश होना पाहिये। निद्रीछ कहता है कि तूने सजवा करनेको मना करके सम्मानका स्मान खो दिया और तेरी इस यातस दुदाकी दृष्टिमें फरिश्तोंगी यावरु गिर गई। इम्पीस जवाब देता है कि मेर साहससे मिट्टीने पुतसमें मागे पदनमा उत्साह पैदा हुया है। मेरी सरारत बुद्धि मौर समानदारीने बस्त्रोंका ताना-बाना बनी हुई हैं। तू वो किनारे पर घमा मग्छाई और युराईका सपप देवता है इस संघपर्मे पूदकर सूफामके थपेड़े सूखा रहा है या में ? सिपर और इल्यास जैसे पैगम्बर विवश है परन्तु मेरे उठाए हुए सूफान हर महर, हर समुद्र मोर हर नदीमें है। यदि कभी तुझे यस्लाइसे एषाम्तमें मिसना हो तो यह पूछना कि मह किसका रक्त पा गो मामक किस्समो रगीन पर गया। में भल्लाह दिसमें माज भी काटा बनार पटमता हूँ और सू तो विस उसको प्रससा फग्नेमासा हो है यही कहता है कि "यही अल्साह है' वही मत्साह है', वही अन्साह ह । - कषि-मी मासा- ११ मुहमत उसे पायही पुस्ने की अभी ना माधना प्रमसे। सितारे मासमाके मेजर पे सस्वते रम से। क्रमर मपने लिबासे नौमें बेगाना-सा ममता पा। मपा बाहिक ममी गररियके बानि मुसस्समसे। ममी इमका पुसमत बानेसे उमरी ही पी दुनिया । मसा शिम्बगो पोशीदा था पहनाए मामम से ॥ कमासे मग्में हस्ती की ममी पी इमारा गोया। हवेग घी नमोनेरी तममा बममे पातम से ॥१॥ सुना है मासमे वासामें कोई कीमियापर पा। सफा पी जिसकी नाक पा में मकर सम्परे अमसे। सिवा पा मके पाए पे एक मसीरका मुस्मा। फुपाते पे रिश्ते मिसको पामे बहे माबम से। निगाहें ताम्मे हतो पी लेकिन कीमियागरकी । वह इस नुस्खेको बढ़कर मानता पा इस्मे बासमते॥ बड़ा तस्वीह स्यानोके महामे मर्शकी नामिय। तममाए बिली माविर पर आई सइए पैहम से ॥२॥ फिराया फ्रि मदना ने उसे मरम्ने इम्फा में। एपेगो क्या कोई शे गारगाहे हा मेहरमसे ।। चमक तारसे मांगो बारसे गाणे जिगर मामा। का तीरगी थोड़ी-सी बावको गुम्फे बरहम से। ताप विमतोसे पाई हरसे पाकोसमी पाई। हरारतती नमत हाए मसीहे इने मरयमसे ॥ परासे फिर रबीयत से पाने में मिपारी सो। मसकले मानियो उग्रतारमी सारेबममसे।। पिर इस मनताको मोता पश्मए हैगी के पानीमें । मुसबने मुहम्बत नाम पाया मर्स मारामसे १७ -उर्दू ११ मावत रातकी दुल्हन के वाल अभी एपरासे म बमे में और आकाशके सारे सभी बस्ने मनसे परिचित न । चाँद अपने मए वस्त्रोंमें वेगोर सा लगवा पा कि यमी चछनके मामे हुए विधानसे पानकारी म रखवा पा। सभी सम्भावनाके अन्धकारमय ससारसे विश्व उमरा ही पा और उसकी मात्मामें पोवन प्रेम और उत्साह छिपा हुआ पा। पीपनकी म्पबस्पा की सीमा सम पहुँचनेका अभी मारम्म ही हुवा पा मौर अंगूठी मनसे मगकी अभिसापा प्रगट हो रही थी। सुना है दूसरी दुनियामें एक कीमियागर पा जिसके पावोंके मीपे मिट्टी मी आकर शुरु हो जाती थी। मर्ग (श्विर स्पान) के पाए पर एक इसीरका नुस्खा रिवा पा गिस फ़रिश्ते आदमीकी मसरोंसे छिपाते पे परन्तु पीमियागर निरन्तर उसीकी खोरमें लगा रहता था वह इसको इस्मे माजम (महामन्त्र ) से भी बढ़कर पानता था। पूजा के बहाने मासा सकर पानी बोर बढ़ा मौर परावर कोशिश करनेसे पाखिर एक दिन मनकी मामना पूरी हुई। एक दिन फिर इस नुस्खेने तत्वोंकी वोगमें पूरी दुनियामें इधर-उधर मटमा, भसा कौनसी भी शिवरकी सभाके भेद पाननेमामेको निगाहोंसे छिप सकती है। उसने तारोंसे पमक मोर दिसे उसके दिसमा राग मांगा और पतरे बिखर पासासे पोड़ा-सा सम्धेरा मांगा। विजसीसे साप प्राप्त की मप्मराओंसे पुरता पाई। हसरत ईसाके प्रागों (पो मुदको जीवित पर देवे पे) से मर्मी सी । परा से फिर खुवासे ये-परवाही और स्वतन्त्रता को फरिश्तोंसे पूजा नम्रता सी और बोसमी प्रातिसे सामसारी सो फिर इन वस्तुमाको ममसमें पोसा और इस मिश्रणाने महान मासे मुहम्पत या प्रमका माम पाया।

कवि-भी मामा-
म
मुहामिसने यह पानी हस्तिए मौरेस पर मिला।
पिरह मोतो नरमे उसके गोया कारे मालम से।
हई मुंबिया मां सरोने सुरके स्वायको छोड़ा।
पसे मिलने लगे उठ उठके अपने अपने हमदम से।
पिरामे मारा पाया मामताबोंने सितारों में।
पटक मुषोंने पाई, गाय पाए मामा चारोंने।

९९ गई कीमियागरने यह पानी मए पैदा हुए जीवनपर छिरमा मौर उसकी साने ससारफे सारे कार्योकी कठिनाइयोंको सुलझा दिया । इसका प्रभाव यह हुआ कि सोई हुई पुनियामें गतिमा गम हमा और परमाणुमोने नींवके मरेको छोड़ दिया और उठ उठकर अपने अपने मोसे मिलने लगे। सूरज और तारोंन मस्तीसे पमरसे पहना सीब किया। कलियोंने पटकना सीखा और सासारे फूरके याोंने प्रेमका दाग पाया।

कषि-श्री मासा-
१॥
१२ गजलें
फिर, चिरागे सासा रोशन हुए कोहो बमन ।
मुतको फिर नगर्मों पे उमसाने लगा मुर्गा चमन ।
फूम है सेहराम मा परियां कतार मम्बर तार ।
मेरे मोसे नीमे पीसे पीसे पैरहन॥
वर्ग गुलपर रख गइ शबनमका मोती बारे सुम्ह।
मौर चमकाती है उस मोतीको सूरबकी किरम ।।
हस्ने परवाको मपनी में महाबो के लिये।
हो मगर महरोंसे बम प्यारे तो बाहर मन्छे कि बन ॥
भपने मनमें दूर कर पाना भुराने सिनगी।
तू मपर मेरा मही बनता म बम अपना तो बन ।
मनकी दुनिया? मनकी पुनिया सोयो मस्ती पस्यो शोह ।
तनकी दुनिया? उनकी पुनिया सूरो सौरा मररो फ्रन ।
मनकी दौलत हाप माती है तो फिर बाती महीं।
सनतो दोस्त छोर है माता है धम पाता है धन ।।
मनकी बुनिमा म पापा मने अप्नरंगी का राण ।
मनको दुनिया म येथे मैने यो बहमन ।।
पानी पानी कर गई मुझको इसा को यह बात ।
व सुका मब प्रेरके मागे म तन तेरा नमन।

. ए. गजलें फिर काले के फूससे पहार और वादियों में प्रकाश फैला है और मुसको माग बगीचोंके पोस फिर गानेकी प्रेरणा देने लगे हैं। नगसमें फूड नहीं है ऐसा प्रतीत होता है कि उसे, पीसे बोर नीले वस्त्र पहने परिया (अपसराएँ) पर्ग है। गुमावळं फूमके पत्तोंपर मोसके मोती प्रभातमी हवा रख गई है और उस मोतीको सूरजमी किरोने और भी चमका दिया है। यदि अनीसे बौर स्वतन्त्र सुन्दरताको यपनको प्रगट करने के लिये नगरोंसे जगम मच्छे सगते हों तो मला नगर मले या पगल। ऐ मानव ! अपने मनमें एक्कर भीवमका मेंद पाळे यदि मेरा नहीं बनता तो न सही मपना ही बमना। मनकी दुनियामें उत्साहकी पलन और मस्ती प्रेम और मगन है मौर वनकी दुनियाँ पाटे और साम छस-झपट मौर धोखा ही है। मनकी दुनियामें मैंने अंग्रेोंका राज म देवा म मुस्ला बौर ब्रह्मोका ही पता पाया। मुमको एक फकीर की यह माप्त पानी पानी कर गई (मग्मित पर गई) कि यदि तू पूसरेके आगे मुक गया सो फिर न मन ही तेरा है न सन (परीर) ही वेप है।

मि-मी माला-
.
सितारोंसे मागे महाँ भौर भी है।
मिमी दशा इमतिहां और मो है।
तही जिन्दगीसे नहीं यह प्रवाऐं।
यहाँ सकों कारवां और भी हैं।
क्रमात मकर मालमे गो पर।
अमन और भी मशिया भौर भी है।
मपर पो गया एक नोमन तो क्या ग्रम ।
महामाते माहो फुगो और भी हैं।
तू शाही है परवार है ग्राम तेरा।
तिर साममे भासमा मौर भी हैं।
सो रोयो सबमें उमप्तकरमपना।
किरे समानो मका और भी हैं।
गए दिन कि तम्हा पा में मंजुमनमें ।
पहा भव मेरे प्राव और मो है।

१०॥ इस रग और सिवारोंसे आगे भी अभी बहुससे ससार हैं। अभी प्रेम और उत्साहको और भी परीक्षाएं है। पीयनसे यह वातावरण मपित और खासी नहीं है अभी इनमें सैक्रों काफि और भी है। सुगधी बाहरी दुनियापर ही सन्तुष्ट न हो क्योंकि यभी बहुतसे वाग और बहुउसे पोसरे मोर ठिमाने मौर भी है। मगर एक स्पान या ठिपाना बो गया तो वही क्या है ? अभी फरयाद करनके और भी परस्पान है। तू माग पवेस्ली भांति है, सरा नाम सदा उहते रहना ही है तरे सामने बभी और कई माकान है। इसी रात-दिनके पामें उमाकर न रह पा। मेरे लिए समय भौर स्थानको यही सीमाएँ नहीं ह तेरे मुग बौर स्पान और भी हैं। वह समय गया पयावास को यह शिकायत भी कि वह इस सभामें अकेला है अव इस समामें उसका भेव मानने वाम मोर भी हैं।

Kavi Shri Mala Urdu

Author
Ikbal,mohamad
Title
Kavi Shri Mala Urdu
File name
Kavi Shri Mala Urdu
Text
OCR done
Citation
1962
Published
2010/12
Publisher
Vardha,rasth Bhasha Pracharak Samiti
Language
Sanskrit
Pages
116
Library
Bhartiya Vidya Mandir Shoudh Pratisthan,bikaner
Classification
Literature
DLI number
514752
Barcode
4990010022438.00
Scanning centre
C-DAK, Kolkata
Digital publisher
Digital Library Of India
VMLT id
GqeaPCRUmki
Download PDF

Kavi Shri Mala Urdu