Acharya Shri Vinaychandra Gyan Bhandar, Jaipur

Trishashthismritishastram

Pravarashadhar, Pandit · 2011/08

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Kn:--.माणिकर प्रपमाम मुंबई,
मोठीसमहरिपचंद पंपी रस्मानापार,
बाप प्रप्रतिक
सरल-भी पापमानमत्री
बासाउदीपात

निवेदन
IFT
परिवार माणावर किम प्रतिवर्षी परीके उत्तराई भोर चौरसी सदी
प्रारम्ममें एक मसाभारन द्विान् हो मपे हैं। उनकी प्रतिमा पठोमुत्री थी।
याच पासष सम्म साहित्य पर्मशाम रेप आरे विविध विषयापर
उनत्र मषिकार पा। मगरमोमेषु निर्षिण भार दुयमीम पे फिर
मी नोंने पास राती सपर परस्पाम में प्रात्त पना पसन्द यिा।
पपि उमाने निर्मनमानगिग पारपस मिया मि मी मनेक मुनियास
भी निर्मश्री सेवा और प्रमाना की।
ऐसा जान पम्वा कियेमपमे एमपरे सबसे परे झिान पेमौर हामेर
रिफम्बरमादायमें नोबार की बोरम तपसी मिन् कम से म
प्रती तो दुर्मीमी है।सो पाप मोर निम्यारी मौर दुखरे मन
पिहानीको प्रम्बाणपन मिया ।
ने अपने पार विविष सियोन पिसाम्सादिम र पा । मिसभा
उसी मने पोती भन्नास्तिनी म मिमाना है। परन्त उमका
पिकास ममीक मामित है और पावसे महत्वपूर्ण प्रन्योर तो मर्मा-
तक पताही ती पासारामरताम्मुलम्, रागीमतीतिमाम (पम्प)
भास्परयोपोषिनी (पाम्मट मुपसिद रेषमानो या) पामती
पमिया का प्रमेवरत्पार (बाय) अप्पारमरहस्य अमरकोष टोप
परिपाकार की येका पापि ऐसी प्रवानिममीको पता
भी सपा मार ली गावरमाना मोर प्रयत्न मी मही मिया
मा निपहिस्मृतिधाम कम होमेपर मी ममीतकमाणित वा । पर
ममनियमेन मोर गुषमास्वामी महापुराना पार और
माया पातकी प्रार्थमा और प्रेमासे निवस्था परने लिए रखा गया
बाम पाठमे महापुरामका सारा पाभाय समतियोबार हो पाता।
इसकी पश्चिम रिपती पैर पर प्रत्येक वर्ष मनतम पी पर।

पारापर नगर ममारिदार और रितपासणी माग
भपुन होमास रिमापीने सा भर मराधी बनपार करने
महागष्याम बाबा रपमराती मासिन
प्रन्यमाम म मगन माग सम्बधित मनपातु भौयुत
मोनी मिल भास सिमराठी अनुसार मी सायरी मममी
मरन नरेएमसीम परामती प्रमारित रिचार और
इस बार अमगे मनी परमे प्रमाम्मनपर। इसके
पमार समिति रमो प्रति मम्मी स्मिता भपिन परनी है।
भागमोवी
मंत्री-मा प्रे मात्र

प्रस्तावना
torts
धर्मामृतमयी परिसस्वा मम्पेषु नित।
* पार्वताप स्पर्धामा पर्युपास्मो।
-4 माशापर
बन समागत इस प्या भावना त्यापासून पंचरामा मतभपषत मोठे
मोठे परितरा होम्न मे सम्म स्वार्नी ममतमाश्मयात बरीच मर मावनी
मारे बारागस्तर पामय मुत्माम प्रति मापातून बाबारे
पत्ता पीय पासव परसे उपनय मन में भारत प्रात मापातून मा
पन पर रिकल्पा मात देन परिवामी जी उमा प्रपत्थना करम ठेपिमै
मारे स्वानी सात पामराव पिकावर चाप कम म मयनास
मक्सियोधि रोषार माही न परिवाना वा प्राव रामाबरोठा महा
भामयापिपापी रम्पर्मप्रेमामुळे काही परिता मामय बना में
माहे. सरस्सनिपुन मागाभर परिव परीठ दोनो गीत मोडताव
परिवगंधा कारस 14 ते ११५ पर्यषा मसापा बसें स्वामी
भिरमा मापस पाते त्याच यम्मस्थान मेपार राज्यातील मारमा
दोर त्याही वा प्रदेशास उपाय मत बापासम्म एक सरोपर होते
स्पारमा सापर एक माम मापाचा णिहोवा पपा बापी मर
सापाचीही पिसाय ममरी होठी स्पाच्या बहिसा बाप सास्तव
मावलीमापी रल्यमाई होते सम्पनीमारमात पामिन
पामुळे मेवार एम्पस ११९१ म पारावीमपोरया येग्मीप
बम परवापर त्याना स्परमपापाटी माया मावाठ पेय पाहाय
मामायानावर परमारणारे पो रामपरीत होते. पण मोबटर गरमा-
रित परबर्मा बसोवर्मा मपवर्मा इतर राहोम्स गेफे. त्या भाषा
Kा विन्यपर्मा राम करीत राय दिलाता मात्रामा मखूप मोक
रामाची प्रतिमसबारे ती पिम्पयर्माचे दिसा ही मामा
साने सवारसा पिापा सम्मानपूर्वक बाभय दिनम
मान्यानातापी राजमार्मा पारानव समान उन परिभाषा

(२)
परापर होने पर मान्य महावीरसरिता प्रमाण
मारवासारवें प्रम पार पाठपिपात भाडे महागीरपरित है
मनाम पारिपरपति परम्प पिरो लापारमा पर्वत
बासाभरानी मनस्यार स्थापित प्रयास प्रारम रेम मामा-
भोपाचे पर स्वारी बारीमनिपाति परराधमत्री पविराम पिसा
पर, मरनोपापाय पसल गसेन गरे बरेच विद्याप होते त्याली
माधापराप्या बिपी मुम्पने प्रभसा न माह विप पाना
स्मरत्ववि पुत्र का पानी रिमै परिव पपसेनान स्वामा मामास
मस बोषिबारे मरासिंक्तीनी स्थापनापुन मगे भारे लाली
ही तो पति रेस पाच जानन पिपानी स्वारे निरनिराम्या
बामान्यमबामा बामडेरा मान मग्यतारा बापाला
पिपबाव वी पारम्पायबापमपौषिपातविम्म पाम दिसलामौकात
भाष पौनचा गोप गो
पोवाम्माकरणापि पारममयपुश्पपमाणाममा
परतपरमानमाप्यम पता प्रत्यार्थिनःक्षिपन् ।
वापस्थापिटनपेन जिमपानीप पार्थिप्रादित
प्रीत्या काम्पहर्ष पतम सिमापुप्प्रतिमः।
परित भागामामा पिन्नापती बाप्रेष पारी माणस्य
बामन महोरपीग्य पैन्दीपत मालापीत पाहाँचालिबानी या प्रेष
बारी ज्यान परममा ममोप पत्र हा जन प्रतिपादिवाना कि
माह सा कोन मो मायावत्पग्विाम्मा बोक्न मियामी यो मोड
मानम बी त्याप्रमाणे या गोषबारे बोत्स्वाना वा
कायापत पिन रमिक पुस्पात प्रतिम पापा नाही या पोकामा
मन्विार पर ताप परिव पापपरा सिम्याराव समिक्व
पान, चाम परिव मावि मर्म रसिपमेरे पापारपत माम
हावा महान् बार परेवा, म्नास्याच बालवामिन बिमार्ति
भकारक भिचार सिरपर मरतापप्पाला विमस्त
लाप्पा एमया कमर माया पुनारित्वाची नीति वामम एकम
ही विपर्मा रामामात मुम्मा मागमा सम सागर बर्मा

गारीवर बसमा राममान कापियवासोवा पाप्या पदरी बरीबभिन् पती मने परित होते नहि भापता पि गपास ए. पाचे भरीत सण होत ते परराधमत्री ते मसे दिसून येते भईनर्मा निपुत्रिक पारम मामाच्या पुस्त पक्याचा भात पायरिया साहसमा पास पारी मिष्यगे परन्तर त्याचा मुममा मिर्प मैगिदेव पारी- पर बसष्ठा पाघरकी व पं भाषापरानी सायरपर्मापत भावाली मेन मिमी पारानपरीत असताना त्यानी पाच बाप्पा मारकीपी पाहिमा परितनी मुमते एम साताकद परिव पमते तर मोदिप गैरे सामातरि पारफ्त होते त्याक्षिमाग समपर्मावर त्याचे रेंगार प्रेम होते को पमप्रय मिन विकलापीपी सेवा प्रमारिता पर बारामारी सोग्ग निषाले एसेंब न तर समयमा प्रपत्र सोमबार पला- नातीनाम्गव के राहिले. त्याची पाम्म मावास मार ममत पसत प्रमाण स्वाहिर गाण सक्न बैन भारकानी मग्ति होते बसे विवे एरडीपासमासापरामी पसत नसते भीमपर्सन- भूमाम राज्ये बापतसक। बिमारा मो ममपुर असत् " में महापारे भाषम्म मामानमीषा पसत मे पहाचा व किती पोस्ट पिस्ते पर मप मामागासी मा प्रविगौतममवापरामध परम निमामी प्रमरपा गिन पहिले मारपस ममम्पास हरकत नाहीं पाचावर सर्वासन परम सानुसार शाबा रमाप मापापर परिताप्रमाम भारवर बार वीस वरमा पापा प्राणी मिनासाको रार मालाभिमान मुर्मच राहनार माहीं मालागस ११५ -५ पारम्बाम मिसाये मया मनाम भार मानवर बसा ॥पाचा प्रहबानी परमात मामि समा मानापराचे मुच वान प्रप कम भारत (1) नियम (1) पापारममावत (1) नागपरमापत या तीन्दी बाय स्वामी बाप रितुत प्रास्ति मितिम बारे पि सपत् ११ पर्वत स्वामी प्रेममा प्रधाची पषमा स्वा सीमा प्रशस्तीत पारेको प्रम (१)प्रमेवरत्नार-पापाता व पामर नारे (२) भरपराम्पुरम-- रम पम्प प्रसाचा पेरी सिर

पर वो सोमाया मम प्रष सोमापिसने मारी
मागरातो
(1)भापवणा हास्पटीसा सुपर मिदिम
(.) मधमारोपोविनी--हो पाग्मरसहितली काहीच
(५) भूपपला- माती भारावास दाताच रफायने
प्रापीमा
(१)परेड-बावर्षीय
(-) अमरपावर पिचापाप मापाची ला भिीसी
वा प्रभाषा गोश पिसासाच्या प्रपतीत मारेल सर १९८५
भाचोरा पो पर १९च साबारापतापी यस
मिपिटवामान मिले.
(.)पाच पायानारावरील सोपपिरचे मागत
भारे
(१)माम स्तोर-पालोषाचे सत्र समय
(३)भिपातास-मयर उपमा प्रति
(1) स्पितिक्षाम-पास १३ मापुमा बाल वरिपाख
सपा प्रतिपक्षमागोव
गि म १९ मा म TRA व मनपारमापत्रमा गज
पायानात
(१) बामवापिस पापामायतीपम्पोसा मामला
(१)मात्मपरक पारमा मामा मामी सितम
पौषमाविकका
(1) रामायपिणाव- एमविषाना पण महात्म्यापी परवाय
मर
मिपापा मम प्रतिसी होचा मारा समाप
मान्ला मारकर्मीमन समासासी परोपकारी ऐपूना
पासाममिवान बोध करणारे प्रतिमममी पापापाचारवारमा
पर भिीम पो बखि
१५ बि स ११४५ तल्पामा
रामात बार नमीया मिपच स्वायत्त पूर्व जाम

सामारपमापत-ही मर मयप्पाची या पाप बना १९९ पसमा स्वामी भीमान नुयितरेर माम्मामर राज्य करीत होते मनापरधर्मामृपारी टला स्पोपायच वार्मी पापासापूरे पुत्र पारेष पपसिंह देवाचे पुराव गरम समदेव बाप रोगाप्पा होपस्मरबापाप्या भामाहारस्नी यश मिगीरी गेली दीमाप्राव भमिनाम मममनालायात मि" प्पा कादि महिम्पात पूर्ण प्राग पापियाब निस्पमपात भूपोस्तोत्र प्रब गिरे भाव मा १२ प्रपामप्प मशापर आपसायपर रेप बामणाम मधि भाभि पोपमार्गपर नसे दुविन प्रम माहेत ना मनविस्तापी नाग्राममा प्रयापुत्र ही परी रिचीती किती साप नारे पर होत मारे नियासमपात ते ममता की 'बापत्रिोपमा सिनमदिरापा तिन्ति पारिमिरचमाना विधिनारि प्रविमा ठिा सिमापिमाऽनेन रिपापयत' जौपक्त पा सीम स्पेरात पासिम सिमममपामापी पूग रोत राजक वोपम मा प्रपामा मापाराने प्रमाणु मिमविाची प्रतिमा परोत त्याला त्या परोपमा प्रपरे हापार नाही! ममोकि प्रब तिन स्वामी व परभाचा मार्म मुझम पर रिमेम्म बाहयत्वाचा बाम भाषा पेत भारतष सागरमाताप्पा मम्ममुपदिामाममितिात- जागतिशत शासन सिमपानमन्वस्तमा। पापानिणरो प्रातः पूसा रहामुत्तमम् । नारतिय पर्मप्तरिभिरिय पारपरमानानिएम् । जमाना पुटलोष सपिरतावारप्रपोषापुरा॥ निगमम पापण समार मार को गारवा हिरा बापर प्रमाचे सावरान गाय मुनिपमान भारती गावो मापापर पारेवा मुरारमापन पूर्व परम्यान बाटी पारिता परिम्या पायवात प्रविधामा मार्ग हा की पूर्ण पाचन देत मापदुमचा गटीम भारपसरारी ६ दिनाया प्रमा व परमात र मापारी पोरदोष भाषर मात्र मध्यम - तर मनिमम सापपापाचारणे प्रयास गाविस वा बाप हातिमसालास पारितसरे पन भामा समुदायानुसार बसम्म पाहिले मम मुनीदि वामन निषताव मामि सारा पोप बोबसम्मास्पद स्थिति प्राप्त होने से भारत मुनि बसपा भाषा भापिस धामापा मासा निवासात पसरमार | मस भासाली सरगा पारमिग पारिवाना समापिस पारि म सन्ध पतवारी मुर्मानाच मागासपोदारापा बापच पाहिजे प्रामपंचनास ला पिरम भवे ते पेयवाभिमान मुधि माही पेपणावाटी परित बावापरणाममा धर्मशालीम पूर्ण जी पाहिजे मुसत्माहत्मा टोटवारमा पात मियामी मरमा पम्ति प्रारमै पिनामयाबधिर मपपनारमा परेवा का स्पस्यामा साठीच त्याने व पाम प्रपोप माचरण म बापक सास को काय! समपरी मोठी मतवा रोग मन त परचापियाममा परबाही भायपरिसासारामा प्रब पाम स्मन प्रभावमा पस असम बिषीया प्रभार परमसीमापा बहे भयो परित भाधामरामा हातासोबरपासमता स्वामा परिभाष मस्पति. माना मारमा पुत्र रोगरा मुम्मा लिप भिम पता बसे रिस्ते पन माघापरामर भिन्न बरेच निवासीर नीचे पुरस्चम् मुनिसम्त सम्म ममयमरण रेबमभि समेत पच्तमी पर्वत महोते १५ लापा र एमी सामानयन गम वार्मी बर्मपमाया देवी होते पर रिस्पामा प्रयापी पहीच बनयमिपाक लपि मामी प्रतिकात मरा र प्रब होग निरिमतिपत्र एका व मागरकर इस्पिर मत मागम होता पाये मराम मापात काम पो भव सागर परम्पचा विचार पासून पक्व होतो पर क्या बोम्म पोप ना काही पर्याप्ला मुस्तन मा श्री माफिया प्रया पूल प्रमिकाबा यान की प पारामम्मीने पायल रम रवान वो भी मामबारे स्वाभबामपी एक जिला प्रय गेम पा मग मप बामी जस उत्तर मा रातो (७) प्रसाच पल सीग मतरी मेम्मानणासाठी भारिपुराप । गतपुराण पापम्पास ही पेटम स्वापेश्यिपिस्पतिप्पा म्मुबारावी म्पमा पेस्मात माम त्वाब पनवे मूर्तस्वस्प ममने प्रस्तुपमा सवार रोब हा मनुवार मूग औकाती मोम परम पग मामाठ पुste संप समनापा पा पाने मिहग भारे पारप नियपिस्पति शाम भगी सिर १ समिस मारे स्वात वर मोकाट प्रेस समाच पुण्याचेच परित्र पापिने बारे भावपर्यंत नवासामुमावर्षे मी फैन समामाची पोग्बहुत सेवा ऐसी बारे पन हा प्रब मा मावः प्रण्ट म पता श्री माणिकपदवमान्न प्रति परम्मानी र होती मुषाय पूर्ण होताच पुना ६ भीमाबुरामम्मी । माथे ट्रस्टी भी बरदास भगवानदाम पारा मेदन स्वाषी सम्मति प०ी सम्मतिमा ट्रहीय बभिनयमास पात्र माहेत सहर माने प्रशासना प्रम परेप सारे मराय मायामामपारे भगासप्यार मनामुळे मराठी मनुपापिठाप मानिकपर प्रथमाम मन मनबमच प्रसिद रामसी पूर्ण अपेक्षा गती माथी सापतिमीस्पती सम्मा पामरमेशी मारे. स्वामुई माी हा प्रय भामच्या एषांनीच काफ्न मानेर प्रस्मि त बात साप हान्मार प्रत्येक मपम्यमीमांनी मामेळा भन्न माम मा मपाइप वास राहीम ममा प्रयन परम त्या मुलम्म होम मना मदुमय प्रसासनाचे कार्य परमाचा माग मापात नाहीत स्तरामा बामग्वेवारी पाहिले तर मापने पात्मनामधीपरपा क्षेत्र अपनी हा सित एकपा मोना बपरम्पापी नगमाची कुलिती।। प्रमचा महिमा भोर मामा माया प्रपतींत माघापर परिव मिरतात सोप्रमाणापर पध्ममक सर्मनाम् । पत्रिकामात प्रथमिम पुनमरीषम् ॥ ॥ सरिताम्परामानि मिस्वस्थामा सिरप ।। इविपमितमामापतित्राप्ति रिपत्रमे ॥ ९॥ पार्मिकाचे ठ भूपिव परम्पासाठींपरा प्रम मा मिरम मिसाणावापाठी प्रेसर बाम पुण्याची पुसभिसपनपा ममी मापदा परिवादी नसी प्रेरणाच पा प्रम पारण बारे वा गुम्ममावत उप मामबाबा धीमे वा बाको पाएप पर्मक माया प्रेमप्या मर पेच्या पूपिच सोने पाहि पादिक बालीम सोपरर, बाराममनी पड़ पपुष बामदेव १ मा प्रविवारे मिमा प्रेसर मापुरुषांना निम्मेष (८) भर पच माणवाव स्वामा नामापीर पनि सर्प मापासून अमे कि पानी गिरी बाहेव महापुराण परतपुराम हे प्रमत्वाम प्रमुखभारत- व पर प्रपा मारेक-ऐप पारायबरबाप यादीत नावाने माधाकर परिवानी हमारे पार मेलये भोर) बिपी स्मतिसम्म बिन बाम्मै पोष पसरग मारे बसे मनवास परत नाही रामायन मामारवादि प्रमाहिमसे सरिसारणमाम्मे मारेल ला प्रयापेक्षा राबवषिोप पारेर पर मूक्लियर जिस मसला मुम्पापराचा निपाव भाम को त्वामुरे महानुमापाच्या सातिक विमित्वमा प्रयाप्रमागधबाबी पतबाग यो लारीत मा बाप्या प्रश्रिीमुळे मापापा परिता एक पर पाये व बारे मामिलाममाण मराठी प्रब प्रस्मिसीमेव मिश्य भाग बर्मामाप तापम पम्पास एल मिद बारे व परे स्त बाहेव र सामवाना प्रभाषा बनार परवाना मिमोसा मास्य परममिमाया परवापर मादा प्रब प्रभापित समास मिला सम्म विपत्ता माना चाम्सबा परस्पामाधामी सीमारे पानी १९५ पाभी पर्षमानवामी सोमपूर पानी पापाचा प्रवासमास ममि बागपत्वाचा मी एमाप प्रेमापनाम पोमरे बापालापी पुस्वभावी गिलपन मगर मन सिपाप मामारी बार बीच रत्तरोत्तर मयमा वा पोलिस परी मापी माते भावापराधी राप्रब भापमारापर सम्मन प्रसन होमो ममी एमपम प्रारमिषबारे त्वाप्पाच पीक मोपने मी प्रस्तावना पुरतो शान्तिावानुवं समस्तमगता सम्पम्पको पार्मि। पामा परिवर्षय नयधुपपुर्पो परिणीपति।। सहिपारसमतिकपा मामात्यपस्पास्त मा। माविपरम एक शिषनर्मों अपत्वात। मायमानि प्रपिाल परारा रामा बार्मिणेभाप साम्बाम 4 दिमात माल पति इमान पारयो विमान सपिवान प्रचार पतन पाम बापामाद नोव प्रभारी नावाचा पिता पार स्या कशाची इमरानी! पिम् पास पौर्णिमा पारस १४१ थापनामा गम सचिनार, बारा मोवीमा दिपदणी (वात ॐ ममा मिरम्प। आवायफल्पाधापरविरचितम् त्रिषष्टिस्मृतिशास्त्रम् । -- मोर नस्पेन्द्रविन पिपष्भिापुंभिवम् । इतिवृचम्बे सस्पै सपासेने पयागमम् ॥ १॥ सीकर महार, गणपर पति पाना नमन फरून सपयेष्ठ वशा वेसए (चोरीस तीर्थकर पारा चक्रम्सा नऊ परदेश, नऊ यासदेव व मऊ प्रतिवामुग) शसाका-पुरुप मा सक्षिम .. परिध भागमासा परून पायात सगतो १ मेपुमार, एमापुम्याः २ मापन कारवाहपुरा साय ग्राम।

[२] त्रिपरिमनिशालम् । 'दीपस्मिन्गपिस सिपर स्प्टना नगेमिषम् । हामिदान नामपिर्मयपमॉग्गान्मृत ॥२॥ पा गीत मेरपनाप्पा पथिमम् असत्या अपरविदा क्षेग गधिम त सिम्पुर मग जाती या रामा ओरेग पाया मरी मामफ, राणी ती तिप्पा पोसपर्मा पानी नाम बन पुन शान रामान मोम्य सताने गम्प कम्प्न प मुमो- पमाग पस्न वा पाडी तेव्हा स्पान मुम्गा मारमा पास माने गागर कमपि स्पामुळे परिठ मुरगा जपरर्मा संपठा रागापे मगत पारिराधा फेला पण संपमा गौरन स्पाय में माही मात्रामागान रिमनपान गाणान्या महीपर विधापराने फमर पाम स्पाने जारणाम तस मा मियत मस मोहाने निदान थप मनो मप शाम मरण पारा तहारमोन्द्रामामापीम्पो मागबमः म्पपमहापापमामारीपाने मश्विाला ॥ ३ ॥ गविसमाप्पा मप्पमागीमसमस्या निम्पार्य पर्वतारत्तर प्रेणार असा भगरी हातो. त्या अम्मा मगरीत सराय मएम १ भम्वारपस्दै ३ सम्परम मारासनमाम्बामप पपणा विधि ५ मापारम्पनिम्म स्पतानिगान पम् मनन वनाराण मपा मे मबारे पास पाम् । मायस' पर मामला साम्य भागमनाम मनुमा सम्परचमानमरातसम्ममानप प्रभाव, मामला ने पपमपनि समय ८ पापा नियमिसतिशामम् । [२] नामक राना राता स्पस मान्य-गवने गम्परमार कम्जदोक्षा घेतली पासपात मरण पावून तो मोझास गेला. त्याचा मुख्या शतका पनि राम्प कमल धर्मप्यानात पेठा म्याचा मुख्य भतिषस स्पाटा ममोहरा मामक रागी होती तिचे पोटी मक पांच मी महार मानाने सन्मास नाम मागप्रमान पुरु- याचा निपमग यम्य सम्पी अतिमहान पाम गादीवर बसपून दीक्षा घेतली भासाम साकापतिक मताचा मामवि, स्मिानपदी समियमति, मनामवादी शवमति र स्पापी मणा जनमताचा वापर असे चार मची होते स्वादाने मानस अनघमा यस्प समजावून सागिता एकदा हो वापत्रिम त्या व्यास नाथ गेला असता से महाका दस्ताव मरिस नगराध गगम-पारण मुनि गादिस्यगति वासे बसर्व महापड साम्पा जन्मी वायकर रोगार नारे बस पानी मंदिराठा सागितक पुरे योग्यवेळी महालाम बास दिवसपयत सदसना धारण केली मरणानवर तो ऐशान स्पर्गात टिरांग नामक दस मला मुला म्पाप्रेण सन्पासापरापादम्मिन्निामे । हानापियवस्तग्मा सपम्ममयाम्मद ॥ ४॥ सापालसर्सटशी पसनस्पपि सो मिया । सम्पादिचरा भनिभाठेसमसरापसः ॥ ५॥ मनापाव २ मविषयमपरानाभापमानावा सममान्य।

[] विपरिमविशात्रम् । मंत्री मविपर श्रेष्ठी पनमिमा रोहित । मानन्फम्पन: सेना पद्मस्प श्रीमती मिया ॥६॥ पूर्वनिवड क्षेपाताड पुकंगाली देशातांस उत्पसारे नगरीमा रावा कर स्पापी मार्या मसेवर पाचे पोटी महावमापा जार टिमादेर लगाने सुख भोग्न पारष नामे जम्मम स्पाचे मामा बकाया भारत पाचौ पुत्र श्रीमती स्पांची प्रिपा मागाही भौमती सम्तिांग देवाची सरपरी मपप्रमा मत पावकोटागत पूर्वमदरपरताप्पा पधिमझोर हिगत गपिम्- देशात पापरत नामक गारत देक्सि पारगी मुमी होती स्पा भनात तिने समारिगुप्त मुनि पानन्य वसता त्पा भगार मेमें कु टाकून त्याचा अपमान फेला पुढे ती पाटसाप्रामात नगरस माम्पाची करपा होज्न उन्मी ते पिहितामर मुनि नपळ ते घेऊन तिने ती पाळम्पामुळे ऐगान स्वगत सर्वप्रमा देवी शासी मातिवन रानाप्पा मुनिदानास बमुमोदन दिम्पामुळे माम्या फुग्योपार्जनाने पुरोहित, सेनापति - मनी यांचा मामि प्पाप्रमातील वपामुळे मविर मध्याचा समागम साम अर्थात् ते म्पानाविक मापाचे पुरोमित, मती, सेनापति व भेष्टी घाई मपाचे मात्र मतिमर, मेनी नर बनर्मित्र, पुरोशिता नाम मानद व सेनापताच मान वईफ्न होते पयपानाने दमपर र सागरसेन मुनीना MAR दान दिल्यावर वाफ्स्पा चार मिनी T 1-1 त्रिपपिस्मृतिशासम् । [५] - मनापछी विचारली विधा मपिताप बसा-मतिवर मंत्री एभमपात प्रमाकरा नगरीचा अतिगद राना होता तो फार विषयी मस- म्यामुळे पकप्रमा नरकात परम नरकातून तो पानाच्या जन्मास गेहा एकदा प्रमाफरी नगरीच त्यावेळचा गमा मातिपनि जंग- स्मत गेला असता पिहिसासव मुनि स्याण मटके माध्यान्हकास असन्यामुळ पुरोहितान स्याना बाहारदान करण्याचा रागास सम्मा दिशा राबाने सो फेल्पामुळे रत्नराष्टि साठी मुनि पणाले की पवळच एक माव तपमा फररीत आहो पुढे भरत चक पत्ती शेणार आहे राना मुनीसा तो चमत्कार पडाक्माम गेम भठरा हिपस अनशन फरून स्पास विपीन तो पाष मेला देक- हामात गेग सो प्रकार पाहून प्रीतिपन रागाचे मत्री, सेना- पति व पुरोहित याना उपरति मामी व मरणानतर से मोगमीत जन्म तेथून ऐशान स्वर्गात गेले स्वर्गातून से पौधे वनप रावाचे मित्र होऊन जन्मले, या साया समागम सुख साग वो दम्पती मृत। धमारपिदानाददईरी । माता म्यानमारकीननकुलार ठिीतः ॥ ७॥ द्वितीयकोपादिषदायका व्यामादयस्वदा पनादेत्य नृपावासाहहिस्सस्ससनीक्षिण ॥८॥ १ उममेगमूमौ उत्पमी र म बारा । तयोर्मनि मुगल- मोहिनापूबक्तः अपिएनासमेदिनाद. ५समस्याम्मान रानमा राना

r"] नियरिरमृतिशतम् ।
पाप य भौमती हे दापय ऋषि शनामुळे मरणानंतर
परपुर माम मागभूमीत रमल या पताने नेहा मुनीम डान
Pसे तेव्हापानि पिच पार पापामुळ म्पाना ती (नियंगति)
गति प्राप्त जारी हानी है मुर्माको पहात उपहार उमे
को स्पना पाहन राजानेहि रपये माना विचारस मुनि मग
" पुलाम्ती रेशीर इलिनापुरप्पा सागरस्त भौम पनाती
मापक मापासून उप्रान नामक पुर शाम अपपाम्न्यान -
कपापाप्या उड्यान पम्वास गवून तो राजाच काहान
मत बोनम ने रागाने शमन फेल्यामुळे मानो बाप साम
रिस्पनगरात महान यस सनोप्या हरिपाइन नामक
पुरवा दीमापाम्यान मानकापापामुळे मातापितराचाहि अपमान
की साध का नियाची जागा मोहन सा फटन मुटठा बसव
बवावर टाके वाटून मेला सूफपल्या मम्माम गठा धP4-
भगमत पुगेरौस मुले पोग नगत नाम पुत्र हाम
से अप्रमाभ्यान मापार सम्मामुळे पाण्यानाहि ममीत भम यामुळे
मपावर तो माहामा समविहित नगरान सोस नामक मिर्ग
बाग होता पयाग्याच बाभकाम पास अप तो नमुराना मिठा-
मरउन रिग बोरण मापी पासप्रपाम्पान तोमामुळे तो
मेम्पानगर मुएम धाग पुरो भाष, मकर बानर व मामुझे
सीमुळे पणरे मनिदानापा अनुमोदनाशामन उत्पन्न साम्पा
पुण्यामुळ त्याच मोगमीत गठ

प्रियाप्टिस्मृतियाणम् । [७] लेस्मिन्मिदरालामामीमत्पाप्याके सपम् । भीपरा गमजस्पार्यों भूस्पैशाने करचराम् ।।९।। स्पा उत्तरकुनमागभूमीत त पार तिर्यच जीवही उत्तम वार्य- पुरुष मासे ५ श्रीमतीसह वाघ ईशानस्वर्गाध श्रीपर नामक देव साम स मातु स्रार प्राप्तकरस्य मार्घ्य मंपिका । १ मे कापति पृष्ठा वदोषा यी मतौरभम् ॥१०॥ महारताचा मी स्वयगुर मान सौधर्म स्वगातार स्वयप्रम विमानात माणिपूल देव भामा यस्तापाताउ पूर्वविदह क्षेत पुलावती देशात मोडणाऱ्या पुंउकिणी नगरीचा राजा प्रिपसेन, पाया मरी राणाप्पा पाटी स्वयमुनाचा जोर प्रतिकर नामें जन्मा पार्ने दीक्षा घेतली जाभिझामानें पूर्वमर जागून त्याने पपास उपरकुषमागममात जाऊन उपदेश Pिला पुढे पास श्रीप्रम पतावर केसहानप्राप्ति झाला तेव्हा पावर-वाने येऊन त्याचे पूजन केले 4 महाबलमगवछ मात्र इतर विध मी ही कारें बात मन पौधरोपाने विचारमें तेहा ते मरमात आहेत असे प्रीतिकरमुनीनी सागिवन्यावर ता दुसन्या नरकाको गेग १ सम्पपिए. ४ हिताय नसमुष २ प्रतिगमहामनि ३ प्राविमगुमनेन 14] नियनिस्पतिभावम् । नीस्मा भत्तमति पड़ी तुम्योपयमोपवम् तपा नीस्मा अममक्रीकर्मस्याहसानम् ॥ ११ ॥ ग्रोवर देवान शतमताम सम्यम्र्थनामा उपदेश केला तो पटत्यामुळे तो नरकातून निषून पुफरीपाच्या पूर्वानातील पूर्व- दिहतीर मगराती देशामा मप्पमागातील रनसंचय नगरीचा मो महीपर पकवता त्याच्या सुटरमाच्या पोटी चयन नामे फस्त सन्मरी पुढ यमघर मुनिरक्षा घेऊम समानाने मेल्यास तो ग्रामस्वर्गास एघाख्य यो भागमतिसम्मिएमवी मिथ्यात्पठात्यान वो निगीवास्स पावा वनोक्तः सोऽन्येसम्पत् ॥१२॥ महामति र समिमति मारत दुसरे लोन मत्री निगोदाम भणमे नकर सितपत पाते बाटेत बस प्रीतिकरमुनिकान पम श्रीवरदेय काळमळम मापसे सीमेन स प्रस्ता मुपिपिः एते । पंचमे भीमतीमीन स्नादार्पयत्र गई ॥ १५ ॥ अशाप मिहान महास दशा मुमामा नगरीचा रागा मुनि म राणी मुरनदा पापा पोटी भाषरदेष स्कगोवन मेऊन सुनिधि नारान बमण वमपोप स्वताची १ पुन पूर्णमदर मसनमाया रम्नसमे महीयसपा पुगे बच्चासम्मो मूत्ता सिपा.. भोपा मम्बनमत ४ हैन गुमा ५ मतमार, मीरा रा प प परमाणे औरणाम मत्वा पपपत बसवमल माला पण 'त्रिषष्टिस्मृतिशतम् । । [९] मुलगी मनोरमा स्पागोण्यात आसी तिच्यापासून त्याला केशव नामक पुत्र झाला (हा श्रीमतीचाच जीरहोसा कारण तो स्मगात देप झाला होता व सोच केशर शाळा ) भाला मावोऽभ्युचन्द्रास्य तुफ्मतीन्द्रो महान त । व्याघ्रापार्यामरा रामपुपा सामानिकाय ॥१४॥ या पापस्कानी प्रारकास पाइन रेहत्यागानसर से अपुतेद व प्रताट हाले म्याघ्रादिकाचे मीर बानपावरपर उपर- पुरत माउन सम्मले तेपून प्रीतिघर चारण मुनीया उपदेशा- मुळे एमान कम्पात व सासे सेयून यानराचा तीन चित्रांगद, परवाचा नीच रामा नदिपेण याची राणी अनसमताच्या पोटी परसेन, म्याराचा जोर विमापणरामाप्या प्रियठता देमाच्या पोटा परदत प नकुराचा नीर प्रासमान नाम चन्मठे या सर्माना ममयघोषधकरती बरोबर दीक्षा घेतन्यापर ते मन्म सामानिक देव सारे अपनः पुष्पलामस्यां पसनामिः स पफमत् । सामानिकास्पदनुना' प्रतीन्द्र वीणा ।। १५॥ नतर तो अम्पुसट पुष्पहारती रेशातीउ पुंश्चरिणी नगरी- पा रागा यमसन प राणी श्रीफरता याचे पाटीपानामिनामे करून पवावेते परन सर प्यारा प्रतिपमा । मया प्रदाताऽभवन् । यस्ताव रागपुरातामानमा भमरन् । २ सपिपिए । वस्स बीणा बम्परम्पदममवापत हा भामगारकपनमारमा [१. नियमितिमम् । सन्मान म्पाणादि पौधे सामानिक देशगतान पांथालय विनय, वक्त, अस्त व अपयनित मान समास बासे माम पुर्ण लाच मगरात पुरेसी नेतमतो मेगा उदी धादेव नापान सम्मला बस्पारोगसमस्पस्प येस्स पाडेमोनमा। पपा सचपसा प्राप्वादमागेपेयापरवा ॥१६॥ पारचे जेबार मनियमित्र ने बोलेषक स्वादन बरमेन राना पोटी जन्माश वसे आर्य पुरोहित माया ममें कम मापन सेनापनि परिनामें काम घनमिओपये महापाठ हामवामि मतिर मत्री सबार माम सम्मम पूर्णमा सपपामुळे से मजम सहादर मम देदापि भिप रस्ता चिर श्रीवासमतः । वास्तपासम्पपिरे सर्प पादिम ॥१७॥ बगदाावणानी स्मार करल बराच काळ बासनाची पम्पही भोग्न दीक्षा पती आणि मनामान तर पाकर गोत्र भाषण्याबोगी उपभर्या कमी रमिरारापाविवस्वपिकत बहापराकमाए । सभापतिकी मातीमा साध्यासीन नोमिनुप१४ १ मालारापुर, मामा मामध्य, मानरम मा मा १ ख मम मममममी र एमगुमनामय मनपसमापिएस मामिमायमरणम् ।

त्रिमरिस्मृतिशवम् । [११] मय दर्शननिमि, विनय, वनतिघार शाखा, अमौम्पज्ञानोपयोग बसंवेग वगैरे साठा माश्ना पाकून पानामाम तोर्यकर-कर्म गोप (निःशका वगरे आठ भगानी युक्त, धम्मदीत, सवा मनायत- न निमित दमयरहित वे तत्वावधान ती दर्शनाविभदि, कपाप सोडणे व रत्नश्यमदित मुनींचा जादर करम म्हणने विनय, अतिचारविरहित शौरम् पाळणे, सम्पधानाचा मसापणे विचार करणे हा अमरणझानोपयोग आणि सपेग म्हणजे समारतापाचे बाळगून पैराम्य वाण ) वाठ भाऊ , पनगादि गुरुगधूसह तो सर्विसिदिनामक स्वर्गात गाऊन महमिददेव बनता तोच जाता नामिराजाचा पुत्र बारितार्थकर शाम आहे मैनः पादयो रामरामखिनन्दपस्यम् । रत्नाइपभोऽस्वभीनटभीलाजसास्पयात ॥ १९ ॥ पपराका मनु (देशाविरति य व्यवहारोप शक मसा ) पको तौम अाफ्याचा जनक, सुधिताना सुरसाचा माहार करण्याचा ज्यान उपदेश केम अशा पूपमावाने नीमयसा नामक वगना मुम्पकरीत अमता अमस्मात मरण पाली हे पाहून राम्फ्याग कन्न स्पाने दीक्षा क्षेसी म्यारोपदेश देयमरम २ साम्प्रमादाना राम ३ पुष्यातप्रमाणपयानि सनतमन, ४ माना गुपताना तुमचा बापरेशकरपायानमा ५ सत्ताक [१२] विपतिस्मृतिशयम् । भपाम्मम्पपुरसपारितान्टसासत । मरपक्षस पापसीयस्य निमत ॥२०॥ पर याम्ण उपगमार पारण धेयान् युररानाकान मिटापा म्सुरसान करणाग कन्य प्राप्त झाग असा तो वादि नाथकर मुन्न भण्डा भयरममाववामितास्मामरश्मनस्वकुरनुलयाम्पात् । भीपरमपिरितपायुसमयभना-पन्यमुरतयात्र पुन २१ जपरमा, महाम्रा सम्प, पत्रमय, उत्तसुम्मागम मांतर आर्य प्रगटन सुरिपिरान, भन्युट पनामि, सर्पि सिदि म्यगान र अमित ना समान उत्तीर्ण मारल मोआदिनाथ सर्पिर नामष रमण फरमान पनीरनिनाम्नी तवा पी म्पयम्ममा । श्रीमस्पय पुरुविम्वतीय स्वयम्पम ॥ २२ ॥ कसयक्ष प्रवीनम धनानी पनाधिप । नतीज्नयायाम अपामन्पारानादितीपरुन ॥२३॥ बन्धी निनामा, स्पप्रभा'चा पती स्त्री, स्पप्रमदेव, केशर, प्रतात चना चाट मत्यय, नाचा प्रर्तक धेपाम् गमा छाम स्पापा ममयकार मसा भेषमा पुनरागमनानानन मारून पाक पचपाना पनिन पम्पमावाणिवामाना मा पोपमा For पाल मविपक्ष २ मरमपुरमा भाएपमा त्रिपतिस्मातिशास्त्रम्। .. रामातियघी घार्मोथी म्याम्रो देवो दिपाकर । मन्मी मविपरोपोमिन्द्रो याऽभूसुपाहका २४॥ बिराद सपापीमदम स जीयादरत पुरो। आप पुत्राश्य पकमृत्पारयो दि मनुर्महान् ॥२५॥ अतिगयना, नारको जीव, माव, देव, मतिबरमन्त्री, मह- मिन्द्र, सुबाहु, वासेन तीर्थक्राचा पुत्र परदपराब, सर्गसिद्धि स्वर्गातील देव आन मवघेऊन मरत झालेला प्रथम सीर्य कराधा प्रथम पुत्र पक्रयता, सोळावा मनु ( देश विरति ६ टोपबहायेपोशक या अर्थाने ) जपशाली हागे यो मत्री पत्सकावत्या मीतिपर्दनमूपसे । मोकरीपूरीपादरकुना कनकमम ॥ २६ ॥ आनन्दामोधमिन्द्राऽमन्मएमाहुरचर । मुरमान्स्य स पुस्तुपामा वामसीताम् ।। २७ ॥ बासकारती दरातार प्रमारी नगरप्पा प्रतिमन रागामा मंत्री । उत्तर कुरमोगमीता आर्य कनकप्रम नामक वैमानिक न २ . धर्माया ममो पामा Aपिर पमा परमेन वीर्यमपुरा मनमो ४ मम्मे ना पुम्मर ५ मानरिमानेग । तर पूमा पिविभि [१] रिपरिमपिशाचम् । देव मामा मात्र पान पुरोहित शण पुढे पोप्रोपकार मामिम'माय मातर मार मान्न सपिसिदि सातव देव बनम तपन ता पार प्रम मममम पापर्ष शाम बार तो पूपमा मीतिपपनसनानी पाश्मदाप उदाहरी । ममाडरममापी सनापविरफम्पन |॥ २८ ॥ मपिकामस्पर पीठ सपासिदिन । मीपापमसेमागणी स मरवानुमः ॥ २० ॥ प्रतिमन पगाचा समापत्ति उसमागमात बाप होउन प्रमावर स्मिान दा नाश यून को प्रमाणापा मापन मी मापा नेपून ता पार पोप्रोयक स्मगाव साम पुढे वा समान रागाचा पार मामक मुमगा भाडा नतर वसर्भि- मिदिमामक वर्गात गाउन मात्र भरतपस्मतामा माउ पम- सेन मान सन्मदा हा पारितार्यकपचा मपमगणपर साग स्पाचा अपमपकार मसो. पुरीहिता ममाकपा मा माग्मोगम्पिनः । ममजनी पिवराट् बनमिडी बपिपतिः ॥३०॥ मामिम्मी मारापीटपरमानुचरामर । पापीपली मावासानन्तपिमया पुरः ॥३१॥ . किमान १ प्रतिपनपत पावन वामो मात् ५ पापा मप्यमाचार. --- त्रिपरिमाशिमम् । [१५] प्रतिवर्षम-रामाचापुरोहित रक्ति विमानांत प्रमग्न देव धाम नंतर तो धमिशेठ साठा पुढे तो वामिद होऊन पारसन रागाचा मुरगा महापाठ शाम नंतर सपिसिदि सर्गात देष होऊन अपमतीपंकरप्या पशोमता राणा पोटीमनंतपिनय मारने सम्मा या पैश्य ग्यसनाम्म्यो म्पानीमौदानमः। पिपासात सरी मो परचो मृपात्मनः ॥ ३२॥ सामानिफोऽप्युवेन्द्रस्प पिजपो रजसनमः। मन्स्पायमिन्द्र सोऽनन्तरीरी पीरः पुरान्मतः ३३ उपसेन नामक मोबस्य मयारूपान झोपामुळे पाप मन होता तो उपरफुल मोगममात मार्य भाग मतर चिरागद देर साग पुढे बरदचनामक नृपपुष हराउन सामनिय दर वमुता शाला तेथून तो आप पानसेम रागाचा पिचय नामक पुत्र झाला नतर महमित्र रान भाता तो मनतवार मामक भादि तीर्थकर पुत्र भागमा हरिमाननापत्या एका इस्मानमः । मणिमासिनन्देशा परसना नरेन्द्रवह ॥३४॥ पोऽस्सामानिकामत्या पमपम्तो मिनागमः। मनस्यानुपरदेसम पारा साऽयुवामप ॥ ३५ ॥ १ गमभार नपसनविमानतामा पारस्प ४ पुणेरमय J . [१६] निपष्ठिस्पतिशास्त्रमा पूर्वमवात हरिबाइन नामफ राजपुत्रवडा शूकर पुढे उचा कुल मामझ मोगमीत वार्य वनठा नंदास्प रिमामात माणिकुम देर ऐऊन वरसेन राना शाला पुढें तो नांव सामानिक देव होऊन नंतर यमसेन राबापा पुत्र बयत नामें शाठा सेथून सर्वार्थसिदात वामिद होऊन तो वाला बयुत नापान तार्यकरपुत्र शाम बारे यो पणिम्नागवचास्पा कपि. पूर्वनदायका मनोरामरी राजपुसभिप्रासावर्भति ॥ ३६॥ मा सामानिफमरा मपन्तस्तातुर पुनः । पमेनुपरेऽमर्पः स पीर पुरनन्दन ॥३७ ।। नात नागपा मो वणिक् बानर सास्य होता ता देवगीत मनोहर नामदेव होऊन पुढे चित्रगद नामफ राजपुत्र शाम तो जोर सामानिक देव हाकम व परमेन रामाचा अपत नामक पुत्र शाठा नतर पाचम्पा मर्गात अनुतर स्निानातक देन होऊन तो बाब बारितीपरपुत्र गौर नामें फरज साया मारे मापिको माछपाग्यो नसो दिम्पमानुप॑ । मनोरैयापार्षिगर प्रशान्वमदनामिप ॥ ३८॥ पोरसवेन्द्रसमो देवा मिनपुशेश्ररामितः । सरेकैपरमपामस्मपीसम्प्प स पारयः ॥ ३९ ॥ १ नत्रविमाने २ नाम परपुर । पानतीरस्स मिी ५ वारया उत्तरान प्रधानमने ८ निम्म्पम्निाप्रमान बारमसियो। गासनिक १ पोनस ११पपी - नियटिस्पतिशतम् । [१] सोलप भोगपा को मिटानाला नकुल साठा होता तो पुढे उत्तरकुरुभोगभूमात जाऊन तेथून प्रमाकर विमानात देव साया मसर प्रशांतमदन नावाचा रानपुत्र झाला पुट भयुसदाचा सामा निक देव होऊन तो जीव वनसेन राजाचा अपरानित नामक पुत्र साला नतर सर्वार्थसिदिरेवलोकानून तो वामा सुपौर नामक सार्थ करपुमसाठा संन्यासमृत्युदानानुमादसएक्सपार्जिवे । पुम्पैस्तऽभ्युदपान्मरत्वा सिदासिदि दिनन्तु ना४० सन्यासमरण, नानुमोन, मंगरे मारम्मा पुण्पकमानी मिन्मन्छे वम्युय भोग्न में सिद साठ ते भाम्हालादि सिदि देवास इस्याशाघरसम्मै श्रिपष्टिस्मतिनाम्नि महापुरा- णान्तस्तस्वसम्ग्रह पीपमतीर्थस्कर भरतेश्वराविनिप्रतिपुराणं प्रथमम् ॥१॥ मत्सादर मुसीमाप्त स्वामी विमनाइनः । चित्राद्राग्याद्विरपात्रता पम्मान्त्पनाम शेम ॥१॥ पसरशात मुसीमा नगरीचा पति विमवाहन नामकरामाहोपा स्यान बराच काळपर्यंत राग्यसुस मागून त्याचा स्पाग फेम धारी हाऊन तीर्थकर कर्म बार- पेऽस्ममिति वर्तवे पीपलदेवस्ये पत्रमा माता माता करता पदीयम ४ वर्षमानाम, सगा पापीया पर मारवेध रामभुमान यम ।१८] विपरिम्पतिशातम्। निर्विये पिगये मुस्था साकत नसशाम । भीमपोरसा स्पाराग्याश्यास्तववीर्यो मोनित तमन तो निश्यनामक प्रथम मनुचर विमानात देव साम पुरे अपोयानगरीत शिवरामा निगममापी पाप्या पोटातोगार बनिसमाप नीचर म्हगून मन्नठा उम्पापात पाहून त्यामा उपरति हामी अमित न नाफ पुन हाती सम्पकारभार सोपसून स्पानी दीक्षा घेतली धमप्रसार पस्न मोबास गेले यो यस्सकारतापापुरेभी गपसैन । रविपणमुशीत विपेपिततिति ॥३॥ समूपात पूर्व शिक्षेत्रात सीवानीच ती प्रसकारती मा बामा देशवीत पृमापुर मगरीचा रामा मयसेन र राणां अपना स्पाना रविपण पतिपण नामक गेन पुत्र होते रतिपेण बसस्मात् बाण्यामुळे सिन राऊन अपसेम रामाने स्तिपणाला गादीम असमिक पहासन पासन सा कस्वा पाऊत । देवा पापसा सोमीदवरा मणिनफ ॥१॥ मारग मागा महास्त पाप्मास पर मुभारळ या १ पुसा २ बमानपत्रमाने ३ दिमागम मारे मानमा सय मनीविनातनपुगाव मनाया ममावि चौपाल सपो.पापा की कास्मात मेन पावर विषीरस्मृतिशास्त्रम् । [१९] फेठेन मयसेन रामान तपमर्या केल्यावर तो सोळाम्या सात महाक्स नामक देश कालाष महास्तवप्युत स्वर्गात मणिफेछ नामफ देव धारा माक्च्युत गोषयस्मन्य इति वाया फवा स्पिति । प्युत्वा महावल की सगराऽभूजिनान्वये ॥ ५ ॥ स्या दोघा देवामन जमा करार साझा फो जो देवगतील प्रथम म्युस होईल त्याला दिसन्यान समजवा महापपवास सागरका पर्यंत स्वगमुस मोगून शिल देतील अयेयानगरीत इश्माकुमशामप्य समुदरिमयराना , मुबारायणी याच्या पोर्ट सगर मा करून पक्रपती जम्मा पटरलॉन्द सस्पोरवो पसीभूय मिनासये न पुरो पोपिता विमीयप मापास्तमुफ्याधिः ॥६॥ सिम्पमात चतुर्मुस मुमीना पहचान पान सान्यावर कन्या- ममहोत्सर पासायछादित्य जाले यसव मणि तुहि तेय १ वावगावपम पमभूमिमा २ सप सपस्थिता समनपरा ५ पलमुम धर्मापे परमानन्सार भाबि सागरीन मी फेाना उत्ता प्रगतस्पिवा + मारि मिनाले नर पुनुरकर, पुषम्पामोदरान एसा | परममोम्नमाविसमा उपपरसव मेयरोस्प तस्वाप पार पाखी एरनेन गंगा साविपरमपना मपितम्सन मागमा परगोमय ापामस्मीना व परिनास पाना पार गरे पति तपोवापिस पिक शिरमा रामर मला मार प्रदिपिन ।

[२०] विपरिसतिशास्त्रम् । माता होता व त्याने क्रममाण मागप्पा पागा एगरे सगर पक्रस्ताला कारण दिम पण सगर साबधाम नही तेहा पुरर तस्ण मतीचे रूप घेऊन माणिकेतदेव पुहा बाग स्याम्प सगरामें विचारमें पस्ता देशाचा मरवसा माही मन मा स्या समर दीक्षा घेत असें मणिकपने उपर विछ सहि मायने पछाम्मेडा सगर उमगया माही पुट टासपर्वतावर पाल्पा बिनाठपा मोस्ती गगेचा साफ सणण्यास त्याने भाप पुत्र पाठ विस बसता मणिकने निसर्प होवन स्पाना दशकास्न मुनि केले तेरा स्मार परमती शोकाकुम होऊन विप्रोपभारी ममिकेत देवाच्या उपोशानें पैगम्प धारण करता माग मगीरपे मिपं न्यस्य स सिदस्तपसा सदा परदेचमत पुनराम्य सीऽप्यपितामर ॥७॥ नता मणिकदमें देममाया काडून घेवपार सगरपुत्र मुद्राम मातो भगाग्याया गयर बसवून इतर पुनासा माग्ने दाब पेठ भागि तपपर्या कसन सिम्पदाला गेम पत्त ऐकून मगारपाने वापरम पुन पाच त्याच्या पुनास गादीवर बसरि । १ पुरेगा भगारसम्म पुगे बाद पारस श्री पुमा ममारकन फारच ! पुरे राम पसपस्मामी रमा मरिया मेरे रस मिला प्राम गमातरे कामोगल सिता कम गरमभावामा बिरसाया तामा प्रगापमा प्रमार मार मार । पविा किया त्रिषष्ठिस्पतिशायम्। [२१] पापणदिक्षा घेऊन गगाताको कापोसगपूर्वक तर वाचरिलें सेपद माने त्याचे पूजन फेन्यामुळे गगोदफहि तीर्य साठे मगी. रयहि सिदफ्यास पोहोचला इति श्री अजितनाथसगरेनिष्कृप्तोत्तरं द्वितीयम् ॥२॥ फच्छधमपुर याऽमद्रामा मिमलवाइन । स्वपम्पमिनान्तसी मनध्यातान्त्पनामकः॥१॥ बापाच्या पूर्वकिना-यावर विदक्षयन सीतान या तटासी छ देगातार झेमपुगत विमस्याहन राना राय करीत होता पान स्मिखानाचे हाती रायकारभार देऊन म्बयप्रम निमंगामटवा घेतरी मरीघ सपमर्या फम्न स्याने तीथर फम बातें सुरमन रिमानमारा प्रयकाटिम । सत मापस्निनगर रानागनाऽमनि ॥२॥ समापिमरगपूर नगररयाग पत्यावर ता पहिम्या प्रश्यक म्गात सुन विमानात अहमिटर माला तेयून प्रारम्ती मग पा रामा तुगा रागी मुपेग पार्टी तो मठा शम्भपाम्प स एवाभ्ररिभ्रसस्पस्तराम्परः । गाप्पान्प पमा छत्या मुफ्नाऽस्तु नाभिप रामा १ मारा: २ शाम ५ मिना पूर्व सामान नाममम्मी।

[२२] नियरिसतिशतम् । त्याचे वार समनाम सदा हा विळपासा गाव भने पन स्पांना रम्प टापम शाप स्पानी पुडाग गागर मम दीक्षा घेतली पप रन धर्मतीर्थ प्रतिवनमोल गेत बामध काम्याण परोत इति शम्मपजिमस्प वतीयम् ॥ ३॥ पो मगसारीरस्नसंपयेची महापस । निर्मिण्णा संपर्म माप्य रोमिसपाहनात् ॥ १॥ दोस्त पूर्वनिदेह क्षेमत सीतामदाथा दक्षिणतीराम मंग- नतीनामा देशमा रनसबपनामक मग होती तिचागमा मा का मागोपमोगापासून रिक होऊन त्याने विमान मुनायड दीक्षा घेत एकादशामाममदायस्पीभमित्रवाम् । निमये माप्प साफेव सपारसुवोऽभवत् ॥ २॥ माय बगाचा तो पामी माल सोय भाना मान स्याने ताफर माम धर्म माभने सम्पासपूर्वक देहत्याग स्पार तो रिसपनामा पहिल्या मनुतर विमानात मामिद हा तेवून तो अपोम्पानगरीचा रामा लयर स्मो सिवा पा मनगरपशारिम्पास्पाचम् । पी मरस्प मतम स नन्यादाभिनन्दनः ॥ ३॥ जरेता २माया।

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[२०] रिपरिस्पतिशासम् । मुमतिनाप मा फस्न ममा पुषळ बौ राम्प फम्पारस्पना राम्प प्रान मा य दीक्षा घेऊन यानी पमनाच प्रमाण स्पा मुमतिनायाची भाषी मति मरता इति भीमुमतिजिनम्य परमम् ॥ ५॥ प्रदीप समिमी पस्मायां पापराजित । मनग्यमाणानि मात्वात्पिदिवासमान ॥१॥ पातयिा मामफ पान पूरिक्षात बसेपनाम मुमीमा नगरांचा गडा अपगजित नामें पन्नाला स्पाने मित्र सापर मुनाजळ दोभा पऊन गा मम्मपन को परान्स्पनामा पाऽभूमातिसरविमानमः। अभावपर्क मनु कीनाम्पा परणम्प तृट् ॥ २॥ नार्यकरम बाप्न ता उपनापक स्वर्गात प्रालिमर नामक विमानात भइमिट व माता नयून काशागनगरीचा रामा परम र राणी गामा पा पोटी ता पमप्रम मा परज जन्मला मत्यार पारिपन्पस्म गर्न भस्माचसयम || उस्वा प निमाण पातु पषमम स न ॥३॥ पुपट पप गरमर मोगम्यानतर ममन्या तीस पाडून पाना कारकी गम्प प्रम घ2 वीमा भेन स्मामी प्रमती १ प्रामात तो २ मा वामममा ।

त्रिपरिस्पतिशासम् । [२५] सुन फल्न निर्वाणप मिळपिठे से पमपम सीकर भामर्षे रक्षण फरोत इति श्रीममममस्थामिन' पष्ठम्॥ ६ ॥ पातकासगषा सुधाक्षम पति ॥ नन्दिपणास्तसमागमननादरतीयकम् ॥ १ ॥ धानको माया परिजन मुफमागपतीए क्षेम- पुरीत मारपेण नागचा राजा होमा परीघ पर्षे राष्प फेम्पातर स्याग पैगम्प प्राप्त झाउ य ज्यान धनपनि नामक मुलाम गाली- पर ममनून मन मामक मुनीर धा पेली एफार भागामें अपयन पग्म य पाश मावना मायून स्पान सीधकर मामकर्म यापले प्राफत सुमद्रासप यो प्ररपकमध्यम । मध्यपरिमानध्य मुमतिष्ठनपात्रांग ॥ २ ॥ पुरे ना मार मप्पम प्रोयफान पुमा मामफ मध्यम विमानात महमित्र मारा नतर फारिस समनिष्ट राजा प पिणा राणाय पारी मुपापनाप मापसर नाम पान तो नीर जनम पापामृनुपगरनामिरिंपामाप पपलम् । परम्प ताप मुक्तोऽमस्म मुपायोऽस्तु नाभिप ॥३॥ अनुपगलनापा रिपार पम्पामुळे पाना पैराग्य प्रान मानें १गरिन् सपनाममा । - [२५] (सिविविधासम्। दीक्षा पेटम तापपर्तन यावर जे मोमहा गेसे ते सपा- नाय तापकर जाम कम्पाम करोत इति मीसुपार्वजिनस्प सप्तमम् ॥ ७॥ मायकरापाबोस्से विदो मापुरे सूपः। समन्विी मीपण' श्रीसम्पावनि पलिया १३ पूर्वपुकारा पाया मभ्यामराम पमिस नसके स्पा किशोत मगन्धिदेशातील भीपुरत पेन नामक राणा हा माची रामी बाकरवा सर्व सपा निःपुषर्षाको मात्रा पुरोपसः । मिनाची सम्पभिसमरियाप्पाशरिकापर्नम् ॥ २॥ माना पुत्र नसल्यामुळे ते फार विवस्त होते पुरोहिता- पा समानुसार पानी रानजरिव पुर्ण प्रतिमा कस्लपिनेवरात्रा भापतिक मा महोत्सर केला कत्ता समेसिमक्स्पा सस्नो वनामवाट । तवा वविधसम भीवासीचमोपत ॥२॥ था गपोषक तापनि सा दोषमा लान से रात्री श्री बतिगरी, सिंह पर ममी स्मात दिसग पुरे तिम गर्म पान मानी नाचमा मुख्य साम १-मिम पियल म मा ४ लान पर।

त्रिपरिस्पतिशाचम् । [२] पिनामिपिक्सोऽसौ राज्यं मिट्वाईतो निति । उपोपितो असौपस्वी पीपालापातमापिनान् ।।४।। मुमसर बरीच वर्षे चामत पाठविल्यावर राजाने श्रीपर्मास गाशेवर यसपून दीक्षा घेतली पुढे श्रीधर्मा एकयां जिनमन कस न उपनासाचे दिवशी रात्री गमावर वसग असता त्याने उम्कान पात पाहिला निर्द वपसा नमे सौपर्मे भीपरस्वत । पावकासमपूर्षिऽसफानीवि नामनि ॥ ५॥ अयोध्या पावती पोऽदमिवसेनकः । सवोऽयुते सवपसा ततस्वीपपूर्वव ॥ ६ ॥ मेष स्पाला यग्य प्राप्त झाल्यामुळे त्याने श्रीका नामक पुत्राम गासपर बसान प्रौप्रममुनीयबळ दावा घेतमै परेष तप नाचल्न तो सौधर्म नामक पहिल्या सात मीप्रमविमानात भीमर नामक व साम्य वेपून धावकरसात इचाकार पर्वमध्या पूस सम्मा देतील अयोध्या नगरीचा राग मनितम्प र राणी अनितसना पाच्या पोटी तो भीपर देव अजितसेन नामे उम्पन्न पून तो सोठाम्या वधुत नामक सर्गात शातिकर विमानात देकर भाग निर्वये मम्गसापत्पां नगर रत्मसाये। पपनामी महारागो मनिस्वा पीपरान्ति॥७॥ १ प्राप्त कर २१ व पानी और दीपः पापवितो --- [२८] रियरिस्मृतिशवम् । सिस्वा नाम पप्पान्स्पं बैमपन्तेऽममतः । चंद्रपुर्या महासेननृपस्यामाप्प पुवाम् ॥ ८ ॥ वेचून पूर्वेस घातकीपटात मगमारती रेशातीक नसचय मामक मगरात फनकामराना व फमकमाला राणीचे पोटी पानाम मामें कम्न जमला बरीच वर्षे रागमन मोगान्यानतर राम्प प्राप्त होऊन पाने श्री परमुनीजवळ तीक्षा धमली व पोटश म पना मानून तीर्थकरमर्म माधसे नसर तो जयतरिमानात बदामद माछा पुट पम्पुरीपा रामा महासेन प रामी छम्मणा याच्या पोटी पद्रप्रम भागने तो जन्मरहा दर्पणे मफ्पीति मुमस्या दृष्ट्वा भिर निन । अनेभाममपची स नमन्द्रप्रमोमताद ॥९॥ बरीच प रापमुस मोगस्पानतर एकदा आरशात पाहाताना स्पना गर उपम झाडे व राम्परमर सोहन त्यानी दीक्षा घेतग तीर्थप्रमानित बस्न मोबाळा गेम ते चाप्रमताकर मामथ रमण कति भीषमा भीपरा देयोऽमितसनोऽध्यतापिप' । पचनामोशमिन्द्रोऽयूपीपाचन्द्रमम स नः॥१०॥ मागर्मा प्रीधरेन अनितसेन अप्पता पधनाम माणि बामिद मगातून सो बद्रप्रम साया तो तीर्थकर वामचे रक्षण करी इति मीचन्द्रप्रमस्याष्टमम् ॥८॥ बमबाग, २ नम्मुख परमेमोग्यावाममार, ४मम्माम्रा राम्प त्रिपाठिस्मृतिशासम् । [२९] पुष्करार्दम्य पूर्वाद पुकतापत्याला । ईशिता पुमरीकिम्पा महापपी जिनापिपा ॥१॥ पुफरा श्रीपाच्या पूर्वेस मदराचसाजवळ पूर्णविरह क्षेत्रात पुष्कलावतीदेशातील पुरीकिणीनगरीत महापपराना करीत होता एकदा अपळभ्या उपानान मूमाहित नामक सीर्यकर वाले भुत्वा मूतीदवाष्ठम्या वप स्व सीखमा ।। य माणवेन्द्र सुप्रीफामन्दीधस्य साऽभ सुन्।। २ ॥ त्याच्या पासून बांध घेऊन स्पाने धनद नामर पुनास गम्य दिखें बरक्षा घेऊन तावकरनामकर्म वाधछे तेयून तो बार चौगम्या प्राणत नामक स्वांत इन मामा नतर काफी नगरीपा रामा मुमार प जपरामा राणीचे पार्टी पुष्प त नामें कम्ज जम्मा उल्कापावास्यरतराज्यस्तपसा माप्तम्पतः । पर्मती म्पपातम्म पुप्पदन्दास्त नमः ॥ ३ ॥ पुप्पस तीर्यफरानी परीप व रब सेन्पार उम्कापात पाहून त्याना वैराग्य उत्पम म प दीक्षा घेऊन स्पानी वा प्रव वित कप्त माझप गोट स्पा पुष्पत वरिहताना ममम्फार असो इति भी पुष्पपन्नाई तो नषमम् ॥ ॥ (पारिपार भूतश्विनाम्न ३ भापामिर सुमारनाम्ना भारदीपुरको परामरामागमें ।

[१०] त्रिपरिसतिशयम्। दीपे तमेव परसायां यासुसीमापुरीपति । पपगुल्मी सन्तमीकान्तामृस्पीम्शुचातर ॥ १ ॥ पुफरार्थ पनीर पूर्वमदरापरामरळ पूर्वमित्रताछ पासोरेन सीमा पुराचा पपगुम्म काम राना होता तो बसत मौनामक राणावर फार प्रेम करीत असे तिच्या मृत्युमुळे तो शेवटी करी साठा स नन्तसरेस्सिारस्प वपस्तीपरत्वयु। मस्वारगन्द्रो मतये रामभद्रपरमभो ॥ २ ॥ विष्या मरणानंतर उदित होऊन स्पाग रम्य उत्पन सा त्पा आपल्या चाम नामक पुमाकरे राम्पकारमार सोपवून मान मुनीमनळ दीक्षा घेतणे पुढे पोग्य तपपर्या करून त्याने तीर्पकरमामकर्म बापः वेधूम पपरामा भारण मामक स्वर्गात मोउन मम्प यां भद्रपुरचा रागा दरप व राणी मुना पाम्या पोटी जम्मा मती रग्यस्पार्य हिमानीविरुपाचप । भिस्या ती प्रांगाछि जीयास्स शीतस ॥३॥ या शोमनाय तोपरानी से पै सपसुम मोगन्यार एकदा समि पमर पते एकाएकी रिपाण गेले पाइन स्याना रम्प उत्पम मा दीक्षा पउन पानी तपपर्या केसे व पर्मतीचे प्रस्न फल मोरपद गम से शासनाय चिरायु होमोन २ पुणराव मरणार. एप रामनाया।

रिपटिस्मृतिशास्त्रम् । [३१] कन्याभूगाऽवदासीमरयामतिलाकसाम् । दान बनेय तीयान्त मुमनासायना दिमः॥ ४ ॥ जतिटनाय तायफ्रानतर ममपटेशात मनिष्टपुरीत मघरय राजा राज्य करीत हाता त्याना मत्री सयकार्ति सम्यावी होता रामाने एका कोणतेपन श्रेष्ट मणून विचारले असता जमशाला- नुसार स्पाने सागितरे की शानदान, मयाान व बलान बसे उत्तम मप्पम पकनिष्ट अमे दानाचे तीन प्रकार भारत राजाचे दरबाररत मुसिलमा प्रामणाचा मिप्पास्वी पुत्र मुन्शामपन नामक होता तो मणाला की, कन्यागन, गनान, सुपर्णदान, बदाम, दासोपान, गोगन, विधान, पृथ्वीन, रपान, - ग्रहदाम भी दहाप्रकारची माहेत काळप्रमानानुसार रामाठा मिप्यान- मताची दहा प्रकारचीच दाने उपरी ॥ इति मीशीतलनापत्य दशमम् ॥ मौगि दीप सकाणरूप दी क्षेमपुर नृप । ननिमम इत्यासीस्सोऽनन्तमिनपस्वप ॥१॥ पुफरीपात मारापासपस पूर्णविहक्षेत्रातील सुकपोशात क्षेमपुर नावाचे नगर हाते वेये नचिनप्रभ नानाचा रामा राप १ पौतमस्म २ मनपरे मनिपूर मेपरमप्रगत मम्पनेन सवर्विमा पा पामारिएनए परसम्पति मपि मोवापारम्बमानस समाच पारमान मिपास मप स्विरमामात पौष मनापादेव भवापारम्परा वारिपा पपरिस्म पूर्वि माना।

[१२] त्रिपरिम्मृतिशासम् । करत होता एका सहसामानात अनंतपिने गाठे असता स्याची गाणी ऐम रागग उपाति बाठी त्याने दीक्षा घेतमब तप मापरि स्वीकृत्य तार्यक्रमाम बदनागादम्पूर्वन्टताम् । पुप्पोपरपिमान पुन सिंहपुरभितु ॥२॥ पोशमाषना मावून त्याने तीथकरनामकर्माचे प्रपन को न सोडण्या पुप्पोचर विमानात अम्युट भाग तसून तो निक पुरचा रामा विष्णु प राणी महा पाप्पा पोरी जम्मा रिप्यालाऽभ मुश्वभरसन्तपरिचवनाद । धर्म मणीर्य निमाण स भयान् भेपसस्त न ॥२॥ प्रेयसनाप तीमारानी गरीब व गर पत्यार एकदा सतनु गलगा पाहून त्याना उपरति मार्ग द स्पानी दीक्षा पऊन तपपा केटी से धमताप चार करन ते निर्माणासा गठ ते अपसनाप माम्हाला कन्याण रफान पानी राममा वचं भ्रामीया विश्वस्तिना । पिपासवेपनीपानिधनन्दी वक्तिमः ॥ ४ ॥ रायगानगरामा विमति गजाने विगायमूति नामक पा- कपा मागको रुपामार सोपन्म दौमा पेतो त्पासा -ि शाप्त नी मामझ पुत्र होता व त्या पिमम् चा पुत्र विषनरी १भरा मर्म.. २ रूपमम्मी पापा ४ रखा पुन पिम्होरपुमत पगे मासा ! • पिचमि ।

प्रियास्मृितिशाप्तम् । [३३] विधासनन्दिनः स्वासरन मंवत्मानुयुवतम् ।। सपिलम्पसपा कुपन्मासागपारणे ॥५॥ विपनदीन उत्तम पीपा पनविला होता तो जबरस्ताने विशालनदीने घेतला अयात् दोपामध्ये मारण जुपलें राजाने पुस म्यापाप पक्ष पाला तेव्हा मुज्गा फ्यान गठा त्यामुळे निधनदीच्य उपरति उत्पल साठी व त्याने आपल्या फाकासह समूतमुनाजळ दीक्षा घेतली पुढे विश्धनतरी महिन्याचे अनशनरत वाचान पारणे फरम्पासाठी मधुरा नगरीत गठा प्रविष्टा मपुरी पन्या पाविस सपिकमः । प्रति सैनी पासिवा पक्ष्यासापाग्रतिना ॥ ६ ॥ पापाण गुरुत माराठा की गो गादीचा खरा पारस हाता वशा दोघाना राज्य सोहन नाम्पास फारणाभूत झालय मणून प्रोने प्पा दुराचारी रिशासनदाग वामाय पगरेनी हास्न हाते ता नगरीतष वेश्येम्पा घरी होता. विमनामुनि रम्यान पारस असत्य गाईचा घमा सागून पारी परत येश्यमा गप्पीरम शिाम्मनदाने पाहिले व पिपनदास भोगून क्षणाला, दुळ आहे वा तुमा पराठम। १ सेम्पो पनपापम्प भाच रणदीव वम पन । स्वपिना भि मान पामभूपम्म्मफ्यम्पात नि प्रस्पाय पनपानमिद a नदनापमनमा पन २ माम दामगासगुपरिवरियासाप्राथपिला भनुग्म त पिताम्वममभिप स्थित तयारण म पपिया पिरत मा मगार समाचार पम्प वन पदमा प्रायो रामाधार पाप रखा प्रपतन रिनुमा तभूतगुम्लनिपी स्पम् । ४ मारता एमापादिभी पारिवारियन बनत गोपीय भावना [२] त्रियटिस्मृतिमानम् । मोपाभिदान तळावरुत्वाप सपिष्पक ॥ महाभुर्फ चतश्च्युस्वा पादनेमा ममापवे ॥७॥ स्पाने टोचून पोटसेस ऐक्म विचनदिमाग राग मानव येप तो मरण पापम महाशुस्मामा स्मगाव देव साग विशा- नतिर त्याच स्वगात देन सा होता पोम्पुरचा रागाप्रमा- पति व राणा मृगारतो याच्या पोटी त्रिपृएमागगने पिसनीसम्मला पर पिम्पो भिमपी पसाऽभूविरारि । निपृटो मिसिहानी मये प्रान्त्या पुरा रिपम् ॥८॥ विशाममृतीचा जीव राजा प्रजापति राणी जयबती पापा पोटी निमय मागने जम्ममा पा प्रमाणे शुष्मा पुतणे सावत्र भाऊ त मावमलकापीधमनीमार्दाक्षिणाम् ।। इत्ला सपम्पमाहेवोलिसण्याम्मरवावनिम् ॥ मुक्त्वागास्सपोमी सारिमारंमपरिणा। पिपृटरी समिमस्वारि पिनप पुनरमीम् ॥१०॥ विशासनीमम्मापुरीचा पमा बसमाच पाप्पा पोटी सपम पिए रिनप पूरी मम्मनारायण होते स्पानी मसपाका माम्म निमपी परमात केली होती सम्पप्रमागणी सातर निगम १ लिविबर ५ रिमारिकर एएए प्रमोपासनादि मिलितपशवमरिन ।५ मतमममनरक मुष ममी- बीच • मुभिन्ममाए ।

रिपपिस्मृतिशारदाम् । [३५] पुफळ पापाचरण के प शेयटी महातम प्रमा नांगप्पा सातम्या नरत गेला असावापा आयडि स्पाच नरकात गेष्टा विजयाने विरकहोऊन दीक्षा घेतली व मोक्षास मेण इति भीमेपन्स्तीकराचनीय प्रसिषासुदेव पिज यपलदेष पिएष्टपासुषेतिवृत्तोत्तर मेकादशम् ॥११॥ माम्दीप पस्सफारत्या यो रत्नपुरपासका। पोचराऽमणो युगन्धरमिनाभपात् ॥ १॥ पुण्यद्वीपाच्या पूर्वेस मेरुपर्वतानवळ पासावती देशातीय रामपुरत पयोत्तर मामक रपा राम्म करीत होता एमग ममोहर पर्वतावर पुगधर तीर्षफर बाळे असता रयाप्पा-वळ रागाने मा तम माप्तान्त्पनामा मझोऽय महाशुमध्य नन्दन । पसपूम्पस्प देवी चम्पायर्या सारसपमम् ॥२॥ स्पाने सोळा मारमाचे पितम कम्म प तप वाघम्न तीर्थ- फरमामार्म बापते तेयूम तो महाराझनामा विमानात साठा नतर चपानगरचा राया पसुम्प य राणा नयारती पण पेटी तो पामपूम्भनामें कस्न यम्मम्म १ पुचपलीन माबिते २ गमन ५ पप्पस्यामा मायनरी।

[१५] नियटिस्पतिशासम् । छमार एप ससार वस्यादप्पानादुपेस्य प । निधी वीर्यकोपास्स भि५ पासयताम् ।। ३ ॥ फुमार यसवानपि त्पाना राज्य प्राप्त होऊन स्पांनी दीय घेतरी उपचर्या करन वीय प्ररर्तित केसें मोझाग गेछे मिन्पशक्तिनृपा पिम्पपरऽम्दा मारते । सुषणस्याप कनकपुरेशी गुणमम्मरीम् ॥ ४॥ या मरत यात मध्यदेशातील रिप्यपुत्र वियशस्ति नामक रामा राय करीत होता त्याची प्रनकपुरात सुपेणग्रमा राम्प करीत होता स्याप्पानमळ गुणमंजरी नामक नका होती नवकारस्नमामपरातन पाभितम् । मददानमपस्मन् मिस्यागी वदणी ॥५॥ प्पा मर्तकारनापी कीति ऐकून विशाक्ताने सिम आफ्माको पाटविण्यासाठी मुपेण गमाकर दूस पाठविला त्याने तिला पा- विण्याचे माझार यामुळे युर मान विन्यसतान नर्तकी नाणी वम्मानमरगामिपिप सुपेणा समवास्निनाद । महापुरेशिना मायुरपनामापरचपः ॥ ६ ॥ मानमग मायामुळे सुपेणयमा सिम सम्म त्याली पुत निद्राजवळ महापुरच्या पारपराजासह दीक्षा घेऊन तपमा १ माप ५ मुदामू . यामपसमाप बाक्वा ता बापत मपि । बामग स सुन्न । ६ महापुरतपुरमाामना ।

त्रिपरिमनियासम् । [७] निमानेऽनुपरे पायरयोऽ मूत्मामेवे पर। निदानिकाज्योऽपमे देवो दौराबवीपतेः ॥७॥ मामुरमुनि माणसस्वातील अनुपविमानत समाया तैयून वो भनुपरविमानेच दारावतीचा समा प्रभा व राणी उपा पोप्या पोटी विपुए भावाने जम्मा सुग्नमणाऽचसापाऽभूतों रामम्परो रि। दिपटारम्पो ममे प्रान्ता मोगमनप पविम् ॥ ८॥ सुपेणयनाचा चौर रामा मम व राणी सुमदेच्या पोटी जपल नापाने जन्मछा हे दोष बम्मद मारायण होते पिम्पशासाने मोगवर्षननगरचा रामा श्रीधर याचे पोटी तारक मागाने सन्म पता सारफॉरस्य मावारीवं गधेभपापिनम् । त्यारि सोऽपिस्यानं नामागाइसाभिषम् ॥ ९॥ वारक प्रतिनारापण होता वारफान विपृष्ठ पमपठ पाप्यारे बसमेत प्रस्त्यात हती मागविम वो स्पांनी न पापित्यामुळे तारकाने त्याच्याशी युद्ध केले पण तो त्यात मारा पाउन सात या मरकात गेला हिपृष्म स्पाप नरकात गेला नपरने मात्र यमुळे विरळ होऊन दोधा घेत व तो मोझासा गेण रसगै २३ मिणतिरपे नयना गुरेसा माक्सन अपमे विमाने समयनुपपुर • पूर्ण गापुरका 0 मुपेनः प्पियाधिकर 4 पम नरकपाता।

[२०] विपपिस्पतिशासम् । इत्याशापरमधे त्रिपष्टिस्मातिनाम्नि महापुराणा तस्तत्वसमहे भीपासण्यतारक प्रतिकेशवाचता- स्यबसाद्रिपटाल्पकेशवेतिपत्तोवरं पुराणं द्वापसम् १२ मेवीप पावकारण्टेमेसस्पम्बिदागे । विपी रम्पकारस्या यो मागनगरेऽपिराट् ॥ १ ॥ पातको समेत मे पताम्या परिमेस रम्पकाती देशात महानगरात त्मसेन नामक राजा राम करत होता पपसनस्तपा सर्परामगलिसभिपी मृहीतकादवारसास्वापकमाम पदनान् ॥ २ ॥ पाने प्रतिपरमात समसकेमा माले मस्त त्वच पाळ दौसा क्षेतमी एकारचा अप्पयन करून वाकर नाम कर्म वापि सासारश्य प्रकोप्रभूचता पाम्पिस्पपचने । रुपवमनृपस्पास्मती ईमन्तसम्पदाम् ॥ ३ ॥ रोमन तो सरकार नामक बाराम्पा सगात इंशाला पुरें काफिम्म नगचा रामा मसर्मा व राणी चस्पामा पाया पोटी विमनाप नापाने जम्मा पिसीना पीस्य निर्गन्धी भूप प्पानाप्पोपसा। पर्म प्रमीय सिदस्व स्तुरे मिमतपाइमम ॥ ४ ॥ पमिमः । २सपम्पमासमना। F निषष्ठिस्मृतिशतम् । [३९] एकदा हेमतमताल सृष्टिशोमा क्षणार्धात मठ साली पाडून पिमम्नापाना राम्य उत्पन झाले व त्यानी निर्णय बम्न तपयर्या मेसी व धर्मार्थ वा कम्न सिपाग ते गेले स्मा मिमान तापपराधी मी स्तुति करतो योआपरषिदेमधीपूरे नन्दिमिप्रराट् । स मुवतनतमुने माप्त व्रतोन्त्यावरं गत ॥ ५॥ याच मरतबाराया पमिमविदेहयतील श्रीपुरत मित्रना नामक रागा ऐवा एकदा तो सृावनापतीयकगथा दर्शनास गेज बसतो त्याची गोषणाणी ऐकून विरत झाला व तप मापन सर्पमिती नामक वर्गातील मनुतरपिमानात महम्द झाल्या मरतेऽस्मिनणासास्पे देशे प्रायम्त्यपीचरः। मुकेतुमिसकोऽभिषिदोऽप्यसकोदवा ॥ ६ ॥ या मरत क्षेत्रातील कुणास देशात वारस्ती नामक मगरात सकेतु नामक गया राम्य करीत होता तो फार भोगासक होता. त्याचे मातलग, मत्री र प्रशासन त्याचा फार निषेध करीत पूर्व दीम्पन्साल्पाम्प शरिवापरस्तकः । सदर्शनापार्यवापावपस्य तपसाना ।। ७॥ पूाविम्पसनात त्याचे सर्वस्व गमावस तेना पभावापासून सा सदर्शनाचार्याच्या बाळ दीक्षा घेतली व तप आचारिणे १ मारनपुर १ पदायिती प्रपात । मेयरमा पथ पर मामिपम नरामा म पविणा।

[१०] बिपरिसतिशासम् । सबसापदे इत्याचनिदानी सान्तपलातः । वापरतो मुतौ मद्रनाम्नो दारपतीपत ॥ ८॥ पा सपाने का, गुण पातुर्य बठ प्राता मो बसें माम बाप्न तो प्रतवतगत देव शाम तयन शास्ती नगरीचे रामा सब राणी पृणी याप्पा पोटी तो त्यभू नागम बग्मला पमस्तपम्मनामानी रामनिप्प भयेकदा । मपुपसिपर सोनक्री परपुरथिना ॥ ९ ॥ मिनीयमा अहमिदमातून स्वरामाच्या सुमगारागाने पोटी धर्म नाम फम्म जन्मला धर्म बता ससपमू मानुष रोता म्पार्ने पूरत सफेदझा निकले होते तो गगा यावेळी रत्म्पुरचा मधु नामक गरा भाग होता तो प्रविनामुदेष होता नापि परिव रामा मामृत दूर्वपावतः । स्वपम्ममा मुस्मा नारावाचावयासयो ॥१०॥ मधुरागाकडे दुस्पा पमामान भी मेट पेटम आणामा रोन दूताना सर्पमर्ने ठार मास्न भेट मरावून घेतो ते - मान ऐन मधु त्या बसदेव व सामुदवाबरोबर पप्पास गेम मुक्तवाहवस्दने समी पुनमामिपत् । पपासपम्पपिमादूर्ण धर्मः मुनियोः ॥११॥ १मलन भै फारममा का पवार नामा पण मल ५ - । बाप । समजामाबाद मौर त्रिपणिस्मृतिशाचम् । [११] प्या युगात स्क्याने सोन्या चक्राने मपुराना मारण गेडा तो सासम्मा मरकात परळा स्वयममा स्याच नरकात गेडा त्पामुळे भ्यषित होऊन धर्मबलदेपानें दीया फेसन मोबपद गायमें मधुरारामदचादिममी मेरुमन्दरः । पारणीपूर्णचन्द्रादिममी सिमलसरसपी ॥ १२ ॥ याचकाळत माविमसम्पार्यकरी मेह व मंदर नामक दोन गणधर होते त्याची मषापही मशी-फोस्छशातील पद मामक गावात मृगामण नावाचा एक ग्रामण होता म्याप्पा पापको माप मधुरा रिचाच जीव पुढे मेहगणधर साग या माम्हण दोपस्याम बारुणी नामा मुख्मी घासी हिचा चौर पुढे मदरगणपर साठा मधुराणाम्हणी मेम्यानतर रामरता रामो माग ही सिरसेन रामापी फ्नी हिमघ सुमतिभत्र्याने माभिन शेठची पळकायशेठी रानमन्धा मोम्पा मुस्ताने बोटसा मिळवून Pमी हौ राणी मेन्यानंतर महाचफस्पांत देव मागे तेम ती घरणीतिसमनगरपा रामा मतिबेग व राणी सुख्क्षणा पाया पोटी भीमरानाम कास्न मम्मसी ग्रोपरा पुढे अनिका कनन मेल्यावर भाटम्पा कापिष्ट स्मात वी साठी पुढे पृणीतिटक मगरीचा रामा मतिवेग बराणी प्रियाकरिणी पाम्या पोटी रनमाला मामें स्म मम्मी मंतर तो नीर स्वर्गात नव्युत्त देव माम वेयूम १ मेम्मा २ समाचारममा पस्प मेप. मनापानी भागी। +--

[१२]
विपतिसतिश सम्।
तो चार गयोप्पानगरीचा राजा रमन गणो माता सोमा
पोटी बारम्प मामें करन स्मन शबदेश मेपानतर सन्ता
सर्गात यादिस्पाम नामक देख छाडा बार देख उत्तरमपुरानगरीमा
रागा ममतार्य र राप्पी महमालिनी यांचे पोटी मेस मावाने -
मग र सिमानाप तापना गमभर हम मधुराणामणाची
मुम्ममा साम्पा मेत्यानतर तिच्या रामनाभपात तिचा पूर्णपण
नामक मुख्या होऊन मी पूर्णचद दीक्षा पठन पारम्पार
बाषि साग
मतर मपुरेप्पा श्रीरामपत तो वे पशोषय
मा फस्न जन्मला तिचे स्माशी न जाय त्याना सिग
नामक मुगा साम पोषयवनिका होउन मेन्मानतर माठम्म
कापिष्ठ स्वर्गात देवो डाम मधुरेथ्या रस्नमाममात होवो रना
पुषनाम पुत्र होऊन विका जन्मी अयोध्येचा रागर
राणी बिनवता याचा पोठी पुर रानामुप मेन्यानतर निमारण
मात्रने सम्ममा नारायण मेम्पावर
दुस-या मरकत
गेम
तेथून तो भयोम्येचा रामा प्रोपर्म व राणा सीमा पचे पोटी
ओबाम मानाने जम्मा दीक्षा घेऊन तो मेम्यानतर पंचम्पा मग
नामक सग देव शाम बीवशोकपुरचा राना मयत सम्मा
सर्वमी पापा पोगो देव जपत नांवाने जन्मम पुरें तो
परणे सासा रोपटी वापरणेद उत्तरमधुरनगरीचा गया
ममतारपणीयामितमती याच्या पोटा मारनामें कस्न मन
विमाप्रमाप ठार्याचा गणपर बनठा पाप्रमाणे हे दोन गणपर

पिठिस्मृविचम् । [१३] मागीय मन सावन माऊच होते पाहांचा मार बाग बम्मान- म्तर मदर झाला आणि मधुरेचा चीव वाठ ममानन्तर मेह गणभरण भावी पेव तदर्य मरहम लगायपाह। मानीय गपमासिन्पा नदीपम्पकसम्गमे ।। १३ ॥ गयतमुनि मनात प्रतिमायोग धारण करून क्स- बस्ता विमुदप नामक विषापराने पूर्वजन्माचे वैर स्मन्न न्याना मरत- क्षेत्रात विजयाईपर्वसाम्या पूर्वेस गघमारिनादेशास असमस्या मुमपती इरिषता, सुवर्णक्ती, गमक्ती वाणि परमेगा या पांच नमाम्या संगमात सोल पाल्पात भाग्न ग्राल सिप्ला माग्नरतो विपाष्ट्रसेटेन मारित । खेटेस्तदीरितमान्म सम्पन्नः मार्मनिः॥१५॥ स्याला इतर विषयनति मदत केली वकरपाणेपीराइस्वी निदानादागतोऽनुर्ग । वस्या नील्य कष्टीरि समान्तसपस ॥१५॥ मुबयस मुनीचा माऊ जयत धरणे बापल्या मागम भागेका पीग पाहन विभुषाला सर्व माघासह समुसत युग्म्म मार मागला १ वाममारमोर २ मापापहम्पपिम्पा ३ पति नसणारानीय मपा पानीमतिमो सिम निरन रा मनपात् । ५ श्रीमतिको उपासो विस्तारितासानप- का ८ पद्रव माता - समानामा १ नागपामेन पदमा समुद्र [१] विपरिसतियामम् । वेथून तो मारित्सामसुरणोक्ता मस्पपापाविषकम् । भोरिती मन्दराम्पोऽपत्रणी मेरसममात् ॥१६॥ राम ने रामपा मामित शरण परत विजय श्रीमति उर्फ सम्पनोप मध्याची सबारी बाहेर वाणम्पार बिसेन रामाने त्पाग शिक्षा विमा होती त्यामुळे तो त्याचा बनण होता मेन्पानावर ता मन्त्री गगन नामक सर्प माप मेम्यार तो विम्या मरकस्त गला तेम्म धमरहरिण मासा पुढे इ. संपमानात गंग नहर पुन्हा सिसन्या मरकत जाऊन वमगरयोनीत जमा मतर तो मिड साठा मरम्ममताप मूतरमन नामक यनात गोरग नारसी स्या- भी पापको समिपा पाम्या पोटी मृगशृग मापान सन्मम पाने पचामि सारन करेंग विपापरवमा पाडून ते निदान फेसे स्मा- मुळे ता पर विपुप्रमा मा विपावर बोडप्यापासूम निपुरए नामकरन मन्मा रागा सिंहसन मन्यानतर बानिपोफ्नामक रची माता मम्न नतर मोररदय, रमिग प्रिम परे जन्म घेऊन परपुरचा राजा पलायन प राणी चिप्रमासा याप्पा पाटी गायुषनामे करून ममप बानिपोष हवीण निपुराना सर्पमालात "श फान मार हे समा गमायुष मुनि ऐन प्रतिमा पोग धारण कम तपथ' करीत नसय रिपुष्पाने मिठ पसर पोल पर पमनुए मेममूर पापम परमार त्रिपरिस्मृतिशासम् । [१५] मवात स्पानो ठार मारले होते तेव्हा तो गाव सर्वार्थसिरिसर्गात महमित्र शाल व नसर समयत शाला अशा रीतीने सनपतमुनि व मिपुरणाचे भवोमवाचे वैर वस्त्यामुळे विपुष्टाने मुनिला कि नाकारण सगात पुरपिठे असे वरणेवाम वादिस्यादेवाने सय पोप न सिंहसेन मषापासून इचारत साग्न समाविल्यावर तो स्वस्प साका इति भीविमलनापधर्मस्पयंमूमवृत्तगर्मसम्ज- यन्तमसमन्दर परितोत्तर प्रयोदशम् ॥ १३ ॥ रामा माग्घातकीमण्डपटकावत्पपास्थितः । पुरे पपरयोरिष्ट य' भित्थाईत्स्वयंममात् ॥ १ ॥ पातकासर पिात मेम्पोतावळ ककारती देशात ब- रिए नामक गावचा राना फारच सयाम नीराजबळ दीक्षा घेऊन स्पाचाच काय करवा पाला तेपी पमा वीर्यरुष एक्साभ्युतरमान्यत । साफवे सिंासनस्य पुत्रीमुवै मिरग्य च ॥ २॥ मरीच तपचर्या हरम स्याने तीर्थकरनामकर्म मापसे 4 सोळाम्पा अध्युतस्वर्गात पुप्पोखर ममानात देव माग तेथून तो अयोध्येचा राना सिस्न प राणी जयश्यामा यमा पोटी बन तनाम मामें पान बममा बरीच वर्षे राज्य करुन स्पाने दीक्षा भेती १ मिणा मादित्य । २ पास्यतर्गगा समर्मी ५ सामामपा ।

[१६] रिपरिस्मृतिशायम् । उस्कापावेमणाम्मास सस्पस्वीर्यकस्सवाम् ॥ मान्याऽनन्तम्पदम्माप्यात्मना पायावनन्तमित् ।।३।। एकदा उस्कापाव पाहन त्याग पेराम्प उत्पम सा व दीक्षा घेऊन त्याने सपर्या केली व सर्पद बसून सम्बनाव श्रेष्ठ साग धर्मवीर्य प्रबर्तित करून थे मोमाग गेले ते अनसमाप तार्यकर वामचे रक्षण करत पसपेण पौवनेस्मिन्तृपो मन्दास्य मधमा । ती पस्यि ममपापाशस्तन्मिर्ष पप्पशासन ॥४॥ याच मरत क्षेत्रातक पीमपुरस रागा यमुपेण र राणा नदा राम्म करीत होती मम्मदेशचा रामा पाशाना सुपेण गगाचा मित्र होता मागणीला पाहून यो मोहित माग धमार्यो विवर्या पोकाती सन्मोपित ॥ मेयोगणं तर्प एस्सा सिानिशीरि वप ॥५॥ कामपारित छाम्या परशासन में तिग पळपूम मेण तेमा एमा पापेण फर की शाम पण त्याचा निरूपाय होता मम स्पाने बागे होऊन प्रेय मामक गणपरायपछ दीक्षा घेतली , सिहमि मोहित मामक घार तप स्माने वापरिखें खपुष्पाला मप्पे माम् । परप मार्भमा मा ४ यह मास ५ उपपम बनासपुर सानोमा प्रोपा पानी परतोषिका ८ मुला।

नियष्टिम्पतिशामम् । [७] तवा निदानतासामार परस्पिति ॥ माम्दिा नैन्दनऽमत्पुर रामा मापसः॥ ६ ॥ मी पुढीउ सम्मात बरिष्ठ गमा पहाये बसें निदान गपून समुपेण मुनि मेन्पारर माराम्पा सहसार मामक गाँत देव झाडा दिमित मन्नपुगत रामा महापल राम्य करीत होता सोऽपि तदचपकता प्रमापालाईदन्तिक। शन्तस्तपय देवाऽऽसवरपुत्वाऽमपत्मत ॥७॥ प्रमापास तीर्थरामफळ पीक्षा फेडम स्यानदि तशीष तप- सर्या केटी भाराम्या सदवार नामक स्गात दर मासा झारस्पाममुरमोमममम्पस्प मुमम । बसपणरोग्यासीदनुग पुरुषांचम ॥ ८॥ तेथून तो हाबी नगरीचा राजा सोमप्रम प राणा जपा- पती याच्या पार्टी सुप्रभ मांगने गमग त्याच्या सौताराणापासून म्पाउा पुरुषोत्तम मामक मुन्गा मारा ता बसुपेणाचा गोर दोप तापर्य नारदापात्वा फार्शया मम्दन । वो पचासनमरी मेनरमादिककरम् ॥ . ॥ काशीमगरीपासमा मधुमन पाने मारपासून पुरुसोचम मरलप पन्या मामिति १पए मासमा ३ गारप 'पावनाम्य ५ नाकार परमार तम्प पुलमाप ८ पापारा पापमो. मानिसमादिरा inपिति [१८] त्रिपतिस्मृतितासम्। सुप्रम याचे पाढतें सामH ऐकले तेव्हा मार्ने हत्तीमगरेर मार बस्स करण्यासाठी नारदाछा पालीप पाविसौम्यं तपोभूत्वामुयस्तो तमामतः । स इवी रिप्णुना सारि मांगटोन्स्या परीरिकमा१. स्पषी उस उत्तरे एफून तो पाना मारण्यास गेसा तेस पुरुषोतमान त्याला मारसे पुट पुरषोत्तम मल्ल सप्तम्पा मरन गेठा पणून सप्रमठा फार दु समासे तेस्पाने सोमप्रम ता- करायरळ पक्षिा घेऊन फठिण तप करतो मोशाया गेला इति भी मननासुप्रभपुरपाराममपुसूवमेनिया चतुर्दणम् ॥ १३॥ पम्मीमापुर पूर्व पातीसत्संग। मृषा वचस्याम्माविमाणानात् ।। १ ।। बातमपराया स मरेपणानना पस शत पुमीमापुरीन परप नामक गया रायसम होता स्पा- प्र ण पाल पैराग्य उपम भर क्षित नाकरणम्प पध्वासपासिरि स्नम् मुर समानुपागम नाफा रत्नपुरऽनि ॥२॥ नग पेन ग्यान पालभाम्नाप तिन पेस बतार्यर मामरम पर नको सापामा मामा सात कि १TTrnvrमगा त्रिपरिस्पतिशासम् । [१९] माम पुढे तो रानपुरमा राजा मान व राणी सुप्रमा यांपा पोय चन्मा पीपोल्का यानमाला संयमाराम्भस । मेस्सपर्मतीयोऽसौ पो पर्म बनातु नः ॥ ३ ॥ एकदा उल्कापात पाडून धर्मनाथाना पैराम्य उत्पम शालेय स्पानी दीक्षा घेऊन तप भापरिने धर्मतीर्य प्रस्न कान में मोमासा गेले ते ममनायतार्यकर भामचे रक्षण पपेत परो-मत्यगिह दीपे बीतशोकापुरीपतिः । नरादिपमस्तप्त्वा तपो दमररान्तिः ॥४॥ मेरु पर्वताप्या पथिमस पाच धासकी पट राजगृह नग रीत मरप्पम नागचा रागा होता त्याने दमपर मुनानगळ दक्षिा के- उन तपमापरि मरमानतर तो सहलारमामक स्वर्गात दम झाला सासार समापास्मिस्तया रामदे नृप । सुमित्री मल्लवादसा रामसिीन भूसजा ॥ ५ ॥ म्माच गमगहीचा राजा सुमिन पागला मठ हावा र सामुळे म्याग गर्ष माला हाता रामसिंह नामक दुसरा एफ महाग राम गदौस एमाला निर्मितो दोर्युपा रुप्णायायान्त दुर तप । रुस्वा मृतो निनन माइन्द्रऽभून्माटिक ॥ ६ ॥ १मनट मसिमास्यसता भिमे प्रिनित्रीरवारका [५] त्रिपरिस्मृतिशासम् । पुसत स्पाने सुमित्रा निकर ते तो फाराम पणापार्यानरळ माऊन त्याने दोझा तरी सिनिम्करिताद घोर तापहन स्पाने निदान बहीबापण गरिष्ठ राम- मारें मरणार तर तोचोप्पा माहेद्र नामक स्वगत मासिकोमा सामा भाषोश्य सिासेनस्म सनालगपुरैशिनः । सोरी सुदर्भनाज्योऽदिम पुरुपसिका।।७॥ रूगपुरचा पसा सिंहसन प राणी पिण्या पाया पोटी नर- रुपमाचा जोर गावून मम नामाने अम्मका त्याच रामम अविकापणीपासून सुमित्राना सान स्पादन पेठन विष्णु नावाने साम रामसिरपरी म्रान्स्पा सेतो गस्तिनापतिः । मधुझीगमिपी भी पार्षमानस्वेताकरम् ॥ ८॥ रामसिंहमचा चौर भनेक योनीत जन्मत हस्तिनपुरषा रावा मपुकार नामें करन चालान स्पाने सुदर्शन विष्ण-पुरुष- मिा रामाको करमार मागितला केपन वोऽमण्यपपिस्मानपम्परि । प्रमवीपकराष्ट्रम्पमापि सिदिमगाबलः ॥ ९॥ सेम्हा स्मा मानी करमार नाकम्त्यानर तो पुमासबागम विष्णूम मारण गेम रिणी नतर मेग सात्म्मा नरमम्स गेम स्पामुळे सुदर्शनास यग्य बटूम स्पा पनपारमा २ मिरवरा २ अरनवर ५ समापनपणास हैरहवा ५ पुगपुण्यपिन ।

नियटिस्मृविकासम् । [५१] . धर्मनापतीपकरानफळ दीक्षा घेती व तपथमे पचास प्रम करून घेऊन तो मोझाडा गेण विपित्रपुरामध्यपेयकमगाधपः । सप्या नरपतिर्वासपूम्यान्ते कोमसाप्तः ॥१०॥ मपणा य समिप्रस्य पुगो मूत्वा स पशिवाम् ।। मुक्त्वापामयपोपास्पोनस्यन्त परं पदम् ॥ ११ ॥ बिचित्रपुरचा राना मरपति नामक होता त्याने तप आचस न मध्यम प्रेयक नामक सर्गात लहमिदफा मिळविठे वैयून तो अयोध्येचा रामा मुमित्र व राणी मदा याच्या पोटी मघान मावाने जमठा तो पता होता परेच पैमन मोगत्यानतर त्याचा उपति शार्ग व स्पान बमयघोष निवाची पाणी ऐश्न दीधा देतली बरीच तपश्चर्या करून तो मोमाग गग अपाम्यवादत्य सूर्यवंशमाऽनन्तपीपमः ॥ चमी सनकमारोऽभूत्साकवेपन्तस्मान् ॥ १२ ॥ बयाम्पेचा सूर्यवंशी रामा बनौर्य प राणी सहतेपी म्या पोटी वपवनामा सोळाम्या स्पर्गातील देवाने सनत्कुमार भागाने घन्म घेतम U मुछगा पगान वसूम पर्ती होता सौपर्मेन्द्रस्तुत भुत्वा तदप वीक्ष्य ससरि । दौदेवापतुर्व मो पक्रिन् । भूण पयाभुवम् ॥१६॥ रिचियस्पनगरस नामो नरपतिमामा । २ मिनस्म । सरप।

[१२] निटिसाविशालन् । सोमबाप्पा समेत सनकुमाराप्या रूपाची सति के में ऐल्न रोन देव ते प्रत्यक्ष पाहम्पास मासे सूप ऐम प्रणाले सं वपैक वे देतनमपतमात्मनाई। मुतविपत्री निरिंप दीक्षिता विपरन् ॥१५॥ हे पक्रवर्ति, रूप सामान्म बाहेनरे पण बाज वामी प्रपम पाहिन्या फेचा बाद में पोरसे कमी माझे माहे. ते ऐकून त्याग यम्प उत्पप ध नदीक्षा घेऊन त्याने पर्या केली १ मातरि प्रसापापीन्सौपग पुन स्तुवा । मैपीमूयामरेः पिच परामितमागतः ॥१५॥ तपयत तो दुमम मानता भनेक पाधि साम कर भगठा पणून सौधर्मेद्राने त्याची पुना सति साग ऐन एक देव याचा मेष घेऊन त्याची पर्वा करण्यास मो मुने ! इन्मिवै भ्पामीनिस्पुकस्वेन साप्रपद् ।। सरीरस्पर्शर्षिण पश्य साम्पन्धि में गदाः ॥ १५ ॥ हे मुन मी उसी म्पाधि माडीया करतो बसें देवाने मटो ते घराण्डा सस्त स्पर्श करून मुनीनी भाप सर्व रोग मास फेरे पारण मन र मितके किना सहमाना ५ स्वर मावि प्रामप्प प्राकर उत्पादितः ।

रिमाटिसम्मिासम् । [३ र जन्ममरादमिदसि पैप इतारित। से स्तुस्वागास गा सीपिया कर्माम्पकापीम् १७ पते पास मगासे वाद पेप बाइस तर मममरा- दिन्यायाचे मिपारण पर से पन देव स्वर्गाला परत गेडाग परसता स कर्माचा उपो कम्न अशराप बनमा मणमे मो- साग गेडा इति श्रीपर्मनाथसुवर्णनपुरपसिंधमधुपीरमपप सनत्कुमारपरित पडदशम् ॥१५॥ धीपणा मलय पामूचि रलपर नृपः। ईन्द्रापन्द्री मुनी मिानन्दितानिन्दिवाम्पपीः ।।१।। मटप देशातील रस्नपुगत श्रीपण मामा रामाता म्पाग मिनिता भनिदिता नामान रापा कोपा पहिया मुगारान प दुसरांचा उपे सेन पन्यासीनीमनदिर्मस्तत्पिपा सत्यमामिला। संपवायमादित्यगत्सरिजपपारणा ॥ २ ॥ १रपि । र्गम् पनी ५ मिलम्बन् । डा राममा मिनाता उपेन्द्र मनिलामा मारि मतो मान सम्मा। मगाराम म्नापीमनपरम्प पी रमा पुगप मिन, मुरत मापुरका जमा बारा पापा [५९.1 निपत्रिमविपनम् । मापदेशातीउ उपसगाचा प्रामण परमावर र माघमी वमिस माच्या पोटी ईवभूति व भामिति नामक-दोन पुत्र पा माममाचा करिउ नामक एक दासीपन होता एनपुरप्प्य सपा मापणाने बसू मारणापासून मासेमी सपनामा करिश्म दिली तो प्रारम रामाया दरमा का दिमस होता पण स्पा होनकुछ कळल्यावर त्याग हाफसून देण्यात मासे रानपुर एकदा गावित्पति र परिचय नामक चारणमुनि मासे पाना रागाने माहार दान देन्यामुळे पाच बायांची परि साम (एनापि, पुपामि, सदुदुमानिनाद, मुगधीराय, अपयफ कार हा प्रथमाधव) सन्तप्पोभन सोनास्पाप तामातुमीप वः । चारमन्तमविनम्नामापन सौमदा ॥३॥ । मुनाल मागान केन्पामुळे श्रीपेण गवारपाण अनुमोदन विम्यामुळे मिहरिता, माननिता प सपमामा या तापीना तर उरूमोगभूमीगाड बाप्पा चपन मा कोचाधानगरीचा राणा महाक्स र गगी श्रीमती याची मुख्गा प्राकमा स्नाम दिखी होतो विचारोबर बनरमती नागपीसी पाठराशीम वाली होती पिप्पाशी उपश्माचा सा पान १पमा एरिया मजम पमान न ४ ममता प्रतावा मिसिने बनवम्फीनाम्नेष ममा नाम पभमा दोनमधील त्रिपरिस्मृतिशासम् । [५५] -रंतु गवी बने प्रास्ता विपपुष्प मवासमम् । वाभिम पातकीखण्डमास्मैदरामसूद ॥ ४॥ स्पामुळे सेन घिरता दोबचे युद्ध अपठे स्पाना भाव पासाठी राणा दोन राण्या , सपमामसह गेला असता त्यांनी एक रिपारी नगले गते पौधे रोपे मेले धासकासंगत मेन- पर्वतानबळ उत्तरपर नामक भोगभूमीत राणा सिंहनंदिता माणि भनिन्तिा । सपमामा पा पार जीपची दोन मार्य जोडपी जम्मी सिनन्दितया मोगा मुक्तता तार्यपार्य स । सौपर्मेऽभूत्सत्यभामापस्नीकोऽनिन्दितोपर' ॥ ५ ॥ स्या उचरकुलभोगभूमीत सिंहनारितेसह बराच काळपर्यंत भोग मागून भीपेण सौर्मितर्गात देव साला अनिमिषा नीर मार्ग सापभामेया चौर मार्या घाला होता है मोहि सौधर्म स्वर्गात गेले मार्योऽपि वी मियम्मीती भीपापपरोभरः। ममामितादिवेनस्को दिर्भणीतस्मियाप्पद ॥ ६ ॥ १मी २ पनीमूतया । भनिदिताराणी मानोऽभूत् स्या- मापस पानी। औषमारपये देर भीरमनामा श्रीनितरे रिमाने । भीमफ्नी परिपत्रमाला निम्नरिवारापरी । सप भानीयवान परेकामाप्रमामे विमाने गावः । तापनी प्रापमामा कर भमा निनाशायरी माविमा मान । सबमामावरी समाप गया। ५ मस्मिन् मपणे सरकारनपुरममालपुरे रोशिपमा [५६ विस्मृतिमा । सभा पोपी परस्पर प्रेग मयत पिणापा बात सानिम्पदिमानव श्रीयमनामक देव नवित्त लिपपमानामक देषी भाग बनिदितेषा और मिपमानामा स्मिानात देव झाला म सत्पमामेभा गौच सुतारादेवी शार्म - बामपनूपुरका राना सनमटी पिपावर र रमा वायुमेगा मेन सर्यममानामक पुत्री साग सुरम्पताल पोमपुरमा रात प्रजापति - राणी पगारती याप्पा उन्य पिए जमग पाटण सपप्रमा रिसो पिपरिष्पमत्य सपम्ममावस्मृतम् । मुबारा तस्स्ससौ पाठीमर्व भीपिनयासम्॥७॥ पोदमपुरभ्या प्रनामवीराबास महाराणा पासून विनय बस रिपृए विष्णूला स्पप्रभेपासून स्पोतिप्रमा मामक मुख्यम चारी वियपमर माणि बीपिवयनामक मेन मुम्गे सारे लम प्रमेण नातिनामक माठ घेता त्याची फनी ज्योतिर्माम स्थाना भमिततेज माम पुत्र व मतमाम पुत्री बाण म्यातित प्रमा ममिततेसाम देण्यात भाजप सताय पारिवयाग देण्पाव कामे सौ तामाग्मरमेम्बामनिपापसगेपिना । पस्पानीपाहबारे संपर्म रिजयादव ॥ ८॥ १मा भूमौ वापरापत मावि मामले मापनी मध्यमबर ५ मुतापम विषय - पोदा।

पत्रितसितिसालम् [५] पमरपंचापुरषा रामा द्वारानि व राणी नामरिका याप्प पोटो मशनिघोचनामक विपाधर पुत्र मन्मथा त्याने सुतारेसा पाहत पांच तो मोहित होऊन विष पळयम मेठी एक मायामूग निर्माण करून स्पच्या मार्ग पार्ने प्राधिनया में होते पैतामाफ विषमा सुतारेचे मोटे रूप देखन बसविले होते प्रीमियम शिका ग्रेन परत जापानरोगर साप चाम्याचे रोग कसन ताली मरन परी मुताराप मे बसें मामून भौषिमय शोक करत होता इतक्यात एका तिवापरामें जशमिभोपाशी सन निछा माणून पोहोचसि रिमय अदिवामपळ भरानिषोपाने दीक्षा पाठी मामिसोम श्रीनिवपाप्या मदतीस भाग त्यानेहि देशसपम सौकारमा से दीया पिरं तफ्सा पासायुमायको मृव । कृत्वाशमई सम्म्यामानाऽभिनिनों ॥९॥ देशसयम घेऊन स्यानो ममन्दिक पूजा ही एकम- हिना अापुष्प उरसे असता पाने मदनमुनाबबळ दक्षिा घेता यमिततेन तेयम्या भामत सात नपारर्त विमानात मगिपूर मामफ 4 Bासा माणि श्रीपिनयहि स्पाप स्पर्गात स्पति रिमानात मणिपूष्मामा साठा ववाश मस्सकारस्पा ममाप्यो रमायुना । स्त स्मापरामितानन्तर्गयी स्तमितसागरी ॥१०॥ १ मामगार २ पानात् ३ मा पमा परिधिदिन मेम्पसन मारिनन नभमागुमना नदिमाता - गाभिपता समिनिरामन मिक्सPारनी [५८] सिरिस्मृतिशास्त्रम् । रपुरात पूर्वविधात बसकारती देशातील प्रमाकरी जगात रामा स्तिमितसागर व राणी पसुपरा म्या पोटी परिभूउदेश पररापित नामें कस्म यम्मका सम्पाप समाप्पा अमुमती राणीस मणिपूरदेश अनतर्य नाबाने जम्मा सिदपिपी नर्तकीम दमितापदपरिणम् । इस्ला तन हरिपिता यही पामोसोमनि ॥११॥ दोष माउ परम्पयर प्रम करीन राम्प करत बसी चिमाविका पा दोन नर्तिका माप त्यांना पार बा शिवमंदिर मगराचा राग दमितारि पाठा स्या नकाचा माइ पाम त्याने प्या मागविन्या पण बउ दोमा मायनी त्याना पाठविलें माय स्वत व रिपारेपाथा साहाप्पाने स्पा नर्तकीचा रेप घेऊन गेलेग एमाग सतुर के पावेषधारी ऐन मर्तका जाळ राबकापा करकमीम नतन शिकम्पास टेब सा रे दोपे माऊ तिठा पळवून घेऊन गेले पमिताराम सर्व प्रकार करम्यार तो प्रमा जरी नगरपर पास करून गेम मपरित मिताराची मर्म जुम्मै अगतापनि स्याणा मार बनतापमाण्यम मान रमममा मामा पहिल्या मरकर गेसा रामीऽप्युतिन्द्रस्वपसा वतीप्रीन्द्रपुरा रसो। संगत रूपा मार्प निन्य में प्रवीमवाम् ॥१२॥ बम बन सवा मनसोन समान ४जनठ श्रीवर ५ मा विपष्टिस्मृतिशासमा [५९] स त्यामुळे अपराजित बलदेवास फार हुलमा पाने यो पर मुनीमबळ दीक्षा घेतली अवविधान उत्पम शाम्पार एक महिनामर अनशनवत भाषस्न तो बतलात इंश भाग स्तिमितसागर मेन्यार धरणेर साण होता स्पाने भनवार्याचा गीवास बोध न्यावर पहिल्या मरकातून निसून तो मेपनाद विषा- धर झाला पुढे मुनि बनून मेन्यानवर पप्पुतस्वगात प्रतीद सम्म पपपेन्द्रो मासावस्यां पफी मामीऽममत् । युभरागीन्यातासायुप मेमरकरीपतः ॥ १३ ॥ अपणिताचा बीर स्वगांदन पाच दीपोत मगठारती देश- तीर रामसपपपुरचा राजा क्षेमकर व राणा कनकचिरा पाया पोटी बनापुभ मानाने चम्मला बनतवीर्याचा मापहि स्वर्गाल पेम्न स्याए रामाश उम्मीमती राणी पासून सहमायुधनामें परस्मशाला गुदरपसाबपियकी वपसापारमिन्द्रवाम् । सानुग पुष्कसाबस्पामवासी पुनरीकिणीद् ॥ १४ ॥ सम्पर्शन प्राप करून घेऊन गमायुधाने धमकर अमिता- १ प्रवद्रा २ ईनसात रनरिमरिस्नमवासन न बरेन निभूतरेपन प्रमिला पिर प्रचारस्वापर मुस्था सकतात मगामयिका । ३ उपरिमारामाविमाने रोमन हात।

[९]
विपतिस्पतिशम् ।
मस्त गाऊन मापामुलासर दक्षिा तमीब से उनका
स्पतीम सोममस नामक विमानात बहमिद सा पत्रमा
देशातीय पुरामिणी मगात गमा पारप पराणा मनहरा
पोटाम्बापुप वामित्र मपरप मा कम्त म्भम
जो पानरपिपरपो सरपाः ।
प्रमोम इन्य प्रकपाती पाप्प पन्यताम् ।
वामित्र समायुपदि रामा घरपायाप मनोरमा राणी-
पभून खरप माफाम झाम न करण्याची पुष दोन
दासानी मामी कोबो मेने त्याची मनाम्मै मेपरपाशी
सागि दोम कोपो मन र पम्प नामक सटे माउते.
मापापमात काम मेन्यापर यततर्ण व मामा मामक रची हाले
तेथे परस्पर पन मेम्पार से मोर भयोप्पप्पा गया परी
रेशले ते न भेट्न मेन्यारर फोन मेले मासे य टन
गेकून मे भाग या मगत कोकोहा मेघरपामा वाम्मत
ए एक बूतर भाडे व पाटोपाट गपचारि बामा मापन
अपीरित काम्यामुळे फबूतर सापास पा ममासा तेव्हा त्या
दोवामी महार्ण स्यामें सगितस्मै समगात हो पनमित्र
नपिण नामक गाणी पर भून मे भागि गुपकपोत
छले गमकपोत मैन्यास नमुरमें मुम्प र नमिल्म नामक
पवर चाले.
१ नसतानपुर २ तिील ।

निश्मिविशवम् । [६] दचीम्यानवधीलासपुष्पारेपिस्वपाविता । पितुस्तीर्यको पदार्थकतासानम ॥ १६ ॥ मुनीना पाहारदान उपवास तार्यकरपूमन वगैरे तें पाचहन मेयरया चारपाबळ दीक्षा ती एकागाचे वध्ययन करुन त्याने तीर्थकरनामकर्म मधले हरयानेहि दीक्षा घेतली सपिसिौ माता सक्स्वास्मिन् पिवसेनतम् । कामा शान्तिरमूषकी दीर्वाचानुनामः ॥ १७ ॥ कुरुबागदेशांतहस्तिनापुरात रामा पवितसेन व राणी प्रियदर्शना याच्या पोटी जन्मण विपसेम भामे करून राना एम्प परात होता गपारदेशात गंधार नगरपा रामा ममिवमय म राणी वनिता याची मुम्गी ऐग विश्वसनास देण्यात वारी त्यांच्या पोरी मेपरय स्वर्गातून येऊन पतिमाप तीयकर मामले दरय धासुर घेऊन जम्मला पफायपो गणश मालीश से पिम्पयन् । रष्ट्रगावः निमरणपादयममापिकः ॥ १८ ॥ मनिदिवाराणी, निमप्रभ य, मौनिमय देव, ममतमार्य नारायण, नारको, मेवनाय, प्रतीर, सहसापुभ मामिद इदरप, मामिद इतक्या मवादम आशेन्या तो खरयाचा और पायुध नाप पर्माता २ पुर पैगमे । पूर्वममुब परानी- मपि भयुमस्वानुमान मापनि भूतपापबार।

६२] मिररिस्पतिशासम् । - शातिनापतीपंकराचा गणवर साचा बनकर राम्प - मेम्पानतर शान्तिनापाना बारशात आपटी होन प्रतिकि न राम्य प्राप्त झा संपम्प मीरन्मपाऽमेवी भम्पाम्भरमारिपा । रमृत्य निति प्राप्ता दिश्यास्ता न भिमभिपम् १० दीक्षा घेऊन त्पानी तपथमा केसी व केसी बनून भाय मा ससारसागण्न तार बाणि त्यामा निर्वाणपर मिव्यरमें तिनाप तापकर व पामुष गणपर भामाठा मोश्चमी देवात भीपणो मागमम्पापा साप मीप्रमामर ॥ खगन्द्रामिदतेमस मानत मिदनी बसा ॥२०॥ योऽम्यूवेन्द्राऽममवत्री पुमा प्रेषयकामरः ।। नपा मेपरपानपोमिदा मावि स पातु न ॥ २१ ॥ मोपण, उत्तरा मोगममीनाम आर्य, सौरम स्वर्गवास माप्रम- विचार मानतस्वगतोय, बम्मा मयुरोट, गमायुध, मित्र मेपरपरामा मामिद इसकी मराठी मोगन नाखडा गीत मनाथ नामक वधिमा माग तो वाम रक्षम करो ॥ इति भीशान्तिनापपुराणं पोरशम् ।। १६ ॥ मुसीमद मामिल पिपत्ससिंदरपामा । दिवोतोपावमाक्प दीसिवा एपमारोः ॥ १॥ मापात पूर्वक प्रत पास शाताह सुसौम्य सोशष २ मातापित विपटिस्मृतिशाचम्। [६] नगरीव गमा सिरप राग्य करत होता एका दिवसा साया उत्कापात पाहून त्याचा वैराग्य प्राप्त धा कपममुनाच्या चपळ दीक्षा फेम याने तप मापरि पोग्श माननाचे चितम फन्न स्याने तीर्थकरनामकर्म बाप पदप्तीर्षफरस्तोगावन्स्पी दिवमयासुर्वः । या भस्मा मसेनस्य रामस्प हस्विने ॥२॥ शारटी समाधिमरण साधून तो सार्थसिद्धि विमानोठ मह म झाला तेमून पुलजागछ दशवाय हरिनापुरधा रामा सूर सेन प राणी प्रीता पाप्पा पोटी तो मुभुनाथ मामेकरून जन्मला प्राप्प पिभियं मातु रन्त्यागच्छन्वनान्मुनिम् । रप्ट्रया वप स्प मुक्वेन्दकिस्ले एप मारपत।। ३ ॥ स्या धकार्तिच प्राम धाउँ एकदा तो मत्र्यासह ममाग करून येत असता स्पाने एक तपस्वी पाहिमा मसे तप के असा भारतीय रमा प्रास हे मासह मिळतो असे भुनापान सागितले इत्पर मप्रिणा पृष्टा दृष्टपूनमरस्तपः । सन्मान्स्पि गतमा पार्ष फन्यं नमामि तम् ॥ ५ ॥ मंचाने विचारलेल्या प्रमास परोस उत्तर देउन युनापाना पूर्वमान फेले पा तयध स्मरण सारे नतर दोशन स्थानी १२रणाग) २ पारसागरम ४ सपाय मिनमो न पोसते ना परिपे मुम्मा मोर पारसति [६] विसरिम्मतिशतम्। सप वापरुन फेयमान मिळपिसें व धर्मार्थ सुई कम्न मोक्षा म गेहे स्पा कुंपनाना मी नमस्कार करतो इति भीकन्पुनापस्य सप्तशम् ॥ १७॥ फम्याक्षमपुर तपोभूदनपविनृप। नन्दवाकरासससयमार्मिवतीयरुद ।। १ ।। क७ देशातील शेमपुर्णन पनपतिनामक रामा राम्प मौत ऐता त्याने मरतामयाबी पोषगाणी ऐशन दीक्षा घेतली - बरण करून तीपंकर नामकर्म बांध गत्ला जपन्नमागत्य हस्तिनेशात्सुदेशनात् । पातमन्माणपक्रमी परम्मपसमभाद् ॥ २॥ तयून तो जपत नामक विमानात बालि साम । पुढे हम्निनापुरचा राजा मुर्गन प रामी मिस्सेना याप्मा पोटी जन्मला भरनाधाना चक्रवर्तीपर प्रम्म छाडे बरीच वर्षे ऐपर्य मोगम्यार स्पाना शरदृतीक बग एकदम विळ्याग गेसेसे पाहून परम्प उत्पम साठे भाठाय सपम सम्मा बम पचनाम् । विषादस्प पासिद स्मरामि तमरं परम् ॥ ३ ॥ दीक्षा घेत्तम्पारर त्याना फेषमान प्रान्तमा धर्मता प्रा. १मपीमायो र अनि पाठ अमिनमामि मिनायौ ४नपस प्रनम्मा।

त्रिपरिस्पतिशमनम् । [६५] वित कह पानी मम्पगौषांचा हार केला मोधपर मिरि त्पा भरमापाचे मी स्मरण करतो भपातारपा नृपोऽनासौजितो पुदेशरमिस्तपः । सम्मतान्वे स रुस्वागान्मामु निदानपान् या पाच भरतक्षेत भूपाल नामक रागा होता एका पुरा पाचा पपनम साम्यामु जिम होऊम पाने संमूतमुनीगाळ दीक्षा धनगर सब एमर्या करून त्याने निदान के की मापणाला पक्रातिप प्राप्त मारें समाधिमरण सापम्पानतर तो माना मक पाम्या वर्गात दर हाग सासबाहरिताए सांकते ऽ मनि दलिया। भाता विप्रति कन्यामरादपारतात्ममा || कौशलतार भयोम्यानगरीत माकु वंशापा सहसा गगा राम्प करीत होता त्याप्पा राणा मार विमति ती पुरम दशाप्पा पारत नामक रागभी मुहगीता तस्पर्म हावीरम तापसस्तत्पिदम्पम । नपदमिरमारिरित्रमपरामरी ॥६॥ स्पाना मगर मामक पुत्र मासा राना समयमारे काका गतमिदु पाना पारन राजानी यहिण श्रीमती दिखी THI १ मतगणीमः १ भाम्मे Rani पारमा पुरिमन सरमणसम्म ५ समग तिम्मा तिनले भाभीमपला पराए मपिनी तम्मा झापा पुरी अमरमित [१९] त्रिपरिस्पतिशासम् । स्याना बानि नाचा पुत्र धाम बालपणीष स्पापी बाई मेत्या- पर पाने का समय तपपरण के दमाही गया व हरि शर्मा या नावाचा प्रामण हदोष मित्र होसे मपुषस्पं गवि स्वीस्पपिप्या कीयकाकती। परिणायितपन्ती त रेणुकी पारवालानाम् । रखमाहीने मिनाक्षा घेतली हरिशर्मा तपसपोहोऊन मेन्या नवर म्पोतिषी दव साटा तपम्पाचे तप पशुस बसते व म मुमरिच तप सर हो गोए नोतिपदेनाग दासलून देण्यासाठी साधर्मदेवाने नाही चिमणाचे रूप देठन ममदमाच्या पाठी- मिशत माऊन पास्सप्प कस निपुत्रिमाला शुभगति नाही वसें म्या चिमण्या वापसात बोर गाम्या ते ऐकून नम मि तपपर्या सोड्न कम्पाकुन देशाच्या राजाको गेग तो राना स्पाचा मामा होता स्पामा मापी मन करण्याची या जमदम्मान सगिती पण कान्पफुप देगामा रामा पाचा पिसार फेग तरी पण आपली मुमा रेणुका पाठा Par हा प्रार पाहून चिमणीपी म्पोनिपदेवाची सार्यमासी की सप- म्याचे तप बपुर असमें सा कामपनुपरमू म्यानमारंभपानमनः। स्वीकनाणुजवा मम शास्था या समागमम् ।। ८ । मी परिलपिका पुण्ये मामा पार नापिरमविमानी । ५. मे । मापा ।

नियपिम्पतिम् ।
[६]
रेणुकेपा माउ मरिचयमुनि एकता निडा मेटारपास भाग
मसता तिने त्याच्यापासून सम्पर्शनासह अगुक्तें प्राप्त फतन
घेतली गाताना त्याने कामभनु य परतु भट देऊन तो स्पम्पानी
परत गेला
राजो सनामिासमवो भाभितो जमदमिना ।
सहरमा कामन वा लावायात फलादिकम् ।।९।।
एका सहसबाहराना वापळे मानद व पीर मामय
मुखासा नमरम्नीच्या आधनास आठा मसला रानावनातरि दुर्मि-
छ असे त्याचे बाराविम्य करण्यात आने काम मन्नळे तो ते
पर पाकला रानाने ती कामधेनू मागितली जम सिना
मण्न त्याला ठार मारून ती घेऊन गला
आरत्पापानिन्द्रराम सानुमस्वन्मन एमा।
त्या प्रिसप्तकत्तान्यान्समियांमारनगमवम् ।।१०।।
जम्मानीला एंगम व चैतराम अमरान पुन दात न लें
गोळा करण्यास गेम होने परत आल्यावर तस्य पाटन स रमा-
पोलपोप्न गाऊन मसबाह र फूलगना से
आणि सहसपास टार म.म्न फानन पर 4ऊम भाल नगर
स्पानी रागाने एकत्रीस पेय पपी नि शरिप की सन पृथ्वीचे
राम्प मागस
१ मा रमाए भारत परीता अमापुत्र ५ मा
माता

[६] विशिम्पविर सम् । ला वरिपरे पिममनि मामेवर्गमिगीम् । शामित्यस्तापसोपस्प सपमानिसीपी ॥११॥ भूपाळ राजाचा जोर महागुरु नामसदसकर हे तो सरसगामी राणी पित्रमारच्या पोटात होता चिप्रमतीचा भाऊ शाहिन्म मामक तपस्पागही गोए पांच सामें लिसा सुबधु मुनोमाळ भेउन टेनिम व प्रेम सारपि मगाम समठी वदा । पनदेशीमिरीयस्वामति सतपस्व सा ॥ १२ ॥ भारप्पा म्याचे रक्षण करण्पामा शाडिन्य परत निजून गेला कर चित्रमति बारवीण साग र पनदेवांना वो पुत्र पापी होणा सम्पामुळे त्याचे रक्षण के पोरभये पयं भाषी पीर मस्पेय भुम् । सामिपुागनस्यूसकिसांसमवमप्पगान् ॥१३॥ पप्णानपूपानादाप मसपिप्पत्पर्य पिग। इति माऽसान्सयत्प्प्ये निमन्पस्वा सदुःसिताम् ११ सुबमुनामा तिने मुमचे मरिम रिचार असता ते सपा की सळिये का करती होणार नाहेल्पाचे क्षणों रथामा समरपन । स्पासपमापकामरण मर्म- चन सम्पाय। मारवापिसा समसमाम गाराम / मामिम्मरले पचन.मा ११ २मास्मसमपर त्रिपतिस्मृतिसासम् [१९] की, कळमा पुगेपरी उकळो एप मसमेस्पा करंदन राताम पुमा काढून घेऊन तो तशाच करत करत साई सपन. निषित या बसें सांगून निथ मुनीम त्या दुसित मातेचे सावन के तवम्मस्पेस्य शामिस्पस्वा नीस्वा समता मठीम् । मुमोमनाम्ना नेस्तस्मयोगमायुमत्सुतम् १५ ॥ नतर शाहिल्याने परत येऊन मुडामह वाफमा बरिणीय मत ने स्याचे मार पुमोम ठेऊन श सप्रयोग शिक्षण स्पाला देण्यास सुरवात केली रामो यस्पाभवोऽमीरसत्रदन्तास से रिपुः। जावो यवसेप्मदिवा निमिधान निमर्मी ॥१६॥ इकर परशुरामासा निमित्याने सागितसे की, मी मारटेन्या गनाचे दात ज्याप्या प्रमामाने जेपीत असताना मातासारसे होतीष्ठ तो तुमचा शत्रु समना खेप्दा मापछ हित इम्णिान्या परशुराम्ने भोजनशाय पाठठी सप पहिरयाच्यापास्वं परिवामकारुतिम् । समाभन्त से निभिस्प तयेगोनसपत ॥ १७ ॥ पामना मनिरा--मि-भिप नाम मुम् मो माः । ३ मोग्न तर एस पुन ४ ममात्र नपतुः ५ सामावरिया माम्मनो दिसा: • मित्रताप्लेन रामो मभितः ८ गत भादान -मन पिडिग्री पचारिण १ समान ममन् । तामत" पमः १२ मत। पधारापर [७०] निरिम्मृतिशामम् । पोप्पानगरीप्पा बाहेर त्याने घातलेल्या मागनगार का परिमाजमाप्पा पपान अमाण सुभम मा पाने मार सारेर त दान पाहे नाहीत परशुरामाग है एत कळन्यार तो त्याग ठार मारण्यास टण्डमाण नकाससिद्धरण वस्तनपनिना। नपसा फ्रीतपक्रिर्भाग्सामाग्नसम्पर ॥१८॥ फास ते ग पाणची आठा पाई निर्माण मामें त्या रत्तीवर वसून मुमामान या तपपने प्रास कम्म पेनसेप्या बाम्ना पाये थैम मागण्यास पटारसेन्या परशुरामासद जमाने। मारण्यास सुररात त्याला गर मारठ स पभारमन्यत्तवन्त सदामिरकाम् । रसायनामां नदारपियोऽपानयस्कुपीः ॥ १९ ॥ पुन एप्याजमनग्मापन मामा भाचान्यान ग्मायन नावाची ममिका ( भाम पार्ष) मुभीमाम माम्मास Pठी असता वयपाक्याप्या पानी पिपरियामुळे रागाच मान त्याने त्यास हर पल इम पम्यासपिम्पावत्योऽसौ पुष्पटवा । ज्योविलमिरो पैरातमानी ग्याविषमनि ॥ याम मी ठमान से निदान करुम तो बाबारी मेग 4 पार पुण्य पाकी नमाम्यामुळे पोतिसाकारत ज्योतिष देव शासा ११ पातोशलतामा गभगवामम नाम्नी ४ पारण त्रिपरिस्मृतिशासम्। [७१] दिम्पैफिसै पश्याम्पि पोवेनामारयत्समय ।' माग्जन्माकविमादर्य पेरं चोक्लासिप ने ॥२१॥ म्पोनिपदेव वैश्पलपाने की दिग्स दिश्य फळ पुढे मुभीमामा भागून देठ सागला रागाग स्पाची घटफ छागली पण यासाती मिळणे शस्प नाही तरी तुझी मज्वरोबर पनात पा मणम अधिक मिळतील राजा फष्यच्या आशेने त्याचेयर विद्यास ठेवून निघाला महागांवन नात असत आफ्छ पूांचे आपायाचे रूप देवाने दासबून मुमीमाग ठार मारस मुतो रामो माम मी रोट्रम्पानापोऽगमत् । सास्रबाहुस्त पुत्रो सोमाधिर्यग्गविं गौ ॥ २२ ॥ याप्रमाणे जमदमि मुनाचे मुम्मे पराम व परशुराम दम्पा- नाने मरकांच परळे व सहसवाा बापन्या पुत्रासह छोमकपापामुळे वियप गतीत सम्म रामपुमस्तपाऽयकाराशर्यक्षस्परान् । मुकती प्राप्प सौप पुर्वा पमपुरोधिनः ॥ २३ ॥ समेत रामाच्या आभयाने पुरागकापा गौर निदानपूर्वक तप वापरून सौधर्म नामक परित्या स्वगांत देव साग व तेथून तो मरतक्षेत्रांत चक्रपुरपा इमानुसशाचा राजा परसेन 4 राणी मामती यांच्या पोटी पुस्तक नाबाने जगमना १ पापमोम्निस्तरतम् २ ममदमाः पुनर व मादी- पमरते ५ एमपन् मियामना ।

[२] त्रिपरिम्पतिशाखम् । समाकोपरसेमस्म तारपूर्वा मुतागि। मंदिगो पसा पूर्व पटलीको परि परम् ॥ २४ ॥ स्यान रानाम्पा यता राणापासून मंदिपण बप नन्मण प पुररीक बामदेव ऐता पवावामिन्द्रपुरापीपरोसेनमाम् । वेमपन्धमाकेम्प मुकेतपरपक्रमत् ।। २५ ॥ पुरचा राग ठरसेम पाने बापणे मुख्मी पपावती पुडरीकाग दिम या समापन ऐन एपेचामा पो निईम नामें कस्न पकपुरचा राग मासा होता, फार स्वापा निमुम्मारूप मा पनवस्तनाप सहिपन् । हरिस्तमम्ममा रामभिमपीपापि गत ॥ २५ ॥ तो पुकारी साम्पास रोग वस्यामापान मारण गाऊन नम.प्रमा मरकत गेम पुकळ वर्षे राम्मरमर मोएन पुगिनी याच नरकात गेला त्याच्या नियोगामुळे नरिपेमाठा बैगम्य प्राप्त सातोदीक्षा घेऊन तपथग्ण केन्पार मोशाया गेठा इति भीभरमापसमामचनिनन्दिपणवसापुरती कषिष्णुतानिशुम्महत्तोचरमष्टापशम् ॥ १८॥ पारपरा कायापस्यों पीवनापपुरपिरान् । पात्र मरणो मो स मुराप्तगरोगिरा ॥ १ ॥ पुरषक २ पानीपत मांसपुरोगाम पुर अपन सन् ५ पुष (म्मान गया ८ मारपूर्वमरल ।

बिपतिस्मातिशासम् । [७] नहीपत मेरुपर्वताच्या पूर्वेस कापती देशातक बीतशो- कापरस्त वैभवणमामक प्रचा पम्प करीत होता मुगुप्ताचार्याकडून साने मणुक्ते घेत होती उपाचागुनवोऽभ्यस्वरस्नायविमानक । मातु भर्पागमे ए पनमणी समन्वटम् ॥ २॥ तो रत्नप्रयापारी होता एका पापसाल्याचे प्रारम्मी पन शोमा पाइपास तो गेला असता त्याने एक पटाप पाहिण पूपदराभव स्ष्ट्या नानापतिकसाइसमें। अपस्मानपर्न गस्ता रन्स्पागपामिरीय तम् ॥ ३॥ स्याबवृक्षाय बन्याच विस्तार्ण फापा होस्या र मुषा फार मोठा होता स्मावर अनेक जातीच्या पाया पो होते बनशोमा पात तसाच तो पुरे गेण परतताना त्याने ता पटाप पुता पाहिला विपुता मस्मि प्राप्तचराग्योऽनुररस्तप । भीनागपतिसामिप्य वीर्यकत्वमुपाये ॥४॥ स्यावर पाम पदन तो छिन्नविष्ठिम शाला त्यामुळे स्पाला रम्य माट त्याने श्रीमागमुर्नाबळ दीक्षा घेऊन नपचचरम को बताकर नाम कम बाधम (अपात मुगुप्सापाबाचा पति मनम्न येन । र भक्त।

[७१] रिपरिस्पतिशतम् । माप्तोमरामि स्मारयुतोष मिथिसापट । पक्ष्ण कुम्भस्प पुप्रोऽदिस्वाधः सखा ॥ ५ ॥ समाधिमरण सापन्यानतर तो वपरनित नामक अनुत्तर श्मिा नात अम्धि साठा पुढे पाच भरतसात बंगदेशात मिपिता मगरीमा इमाशाचा राणा कुम । राणी प्रमारती पाप्या पोटी महिमाय नाम काज ताजमम्म पुरोपमामा एमासौ भियं स्मृत्वापरामिवाम् । रितस्वपसाइन्स्पं माता मछि पुनातु न ॥ ६ ॥ माफ्या मामाची शृगारमेसे मगर पाइन वपमित स्वर्गा साल मर भाटवा महिमापान पम्प टम्पस मा पदमा घेऊ- म पमता प्राठित कम्पार पानी भर मिलते महिमाप तीर्थकर मामचे रक्षण करत भीपरेऽन्मुकम्पा ममापासोऽत्र सभित । रस्कापातामगुप्त पी स्वत्वाप्पुवेन्द्रवाम् ॥ पाच पगात सक या देशातील योपुरषा प्रमापास नामक पमा होवा एका उम्कापात पाहून पाम राम्प उत्पम झा शिरगुप्त मिनराशावपळ मानें दीक्षा घेतलम मरोष उपवर्मा कम्जो वयुव स्मगांव देव हाडा - १ माद २ मादेश पियवागमे ४ पि दिगो की।५ मायगुप्ता प्रोच कपात त्रियटिस्मृतिशासम् [७५] काशीश पपनामस्य पुनोस्य वतीयऽमनि । धक्री पपोधेषिसयासंपमै सुकेतुना ॥ ८ ॥ तेयून तिसरा नम स्पान कागचा राजा पमनामाचे पोटी पर नावाने घेतला तो चक्रवर्ती माला पुष्कळा राज्यभर मागस्या- पर एकदा आछेले उग एकाएकी नाहीसे छालेले पाहून स्पाला वन- म्य उत्पम मा केहा मुफेतूने स्पासा पुष्कळ नास्तिक विचार सागून पण करण्याचा प्रयत्न केला इसमृदेन चायाफमतनापच अवाप्य वम् । सुफेत्यादिप सा सपस्वप शिरोऽमपत् ।। ९ ॥ फ्ण पप चक्रवर्तीन चार्वाकादि नास्तिक मता साम करन समाधिगुम नामक निमराजाजवळ सुकेतु गरे रामासह दाभा पाठी आणि तो पाच तपभर्या कल्पन मुफ झाला मीराऽ माध्यापिपाऽभास्याद्विरम्पवम्सुवापिमा । भीयाग्यापिति तो स्परस्पा स्नेहन स्पानुनाप स. १० भयोध्यम्या पगास टोन पुत्र होते पण स्पाप्यावर रामा प्रम मसम्यामुळे स्थान आफ्न्या माराठा युवरामपावर वसत्रिय यारराज्पपर्ट मादाचवस्ता कुपिया मृशम् । मत्रिणानन द्वारा निपिदापित्यकाभिता ॥ १९ ॥ १कानिक्स भरमा बामस्वागतर सा यिो मुचामामन म्मुनाम्न।

[७६] त्रिपरिस्मनिशाकम् । विषयवारमा तप सौषममापन । वापोऽपिपितवानपिरोऽसतोपला ॥१२॥ देस्य नामात्याच बाहे वो रामपुची ठाम समन्त होऊन मानी पाण्याचा पर बोपने पुरे यांनी शिवगुप्त मुनि बाळ दीक्षा घेऊन पधरण को लागि समापिमरण साप्न सौपर्म सगांत मविपास नामक सिमानात देव सामे वेयूम का- शांभागमा बामणियाला अपयरिताराणी पासून एक न केशी राणी पासून एक बसे दोन पुन साले नदिमिमी परिर्दच श्रीपषज्पो मंदिरे पुरे। मंत्री सदो पर्मान्द्रारूप साऽभूक्षीरोदसंबकम् १५ मदमित्र पण सासा पदच बासुदेर शाला जीव बिया पर्वतावर मर मामक नगराचा बीमामक रामा वामपामा माला पाचमान। गर्म सम्पपार्षिपन मासान् । रचनागारत सोऽ पंप सारिपसोऽपविम मश्रिमियनपळ क्षीरो मानक ही होता तो बहान मागविसा तुमच्या गेन मुन्न बाहा पाउ तर ही टेण्याने पात अस उदर ना पायरसमुळ व गारसा तो पड प्पाम बाग दत्त पामुदेवाची मात्र कारती राणीचा माउसेसरी भीपर्मनाकमान मानानाम्नो रुपमा मिनमीपवर. किमीपुर पन् त्रियष्ठिस्मृतिशयम् । [७७] पक्रम नामापा मरकांता मगरीचा रागा होता पा मामापासून दिवाहिनी नगरपाहिनी या दोन विमा स्यांना मिळापा र स्पाचे नोरमर दत्ताने त्या वटीडारा पर मार- नतर दह मेला व तो सातम्या नरमात गैठा न्यामळे स्लिम होऊन मंदिमित्रानाहि समूत मगपानावपळ दीक्षा घेतली व तपधरण करन मोबाना गेग इति श्रीमल्लिनापनीपकरपमधानविमिभरामदत्ता स्पकेशवताण्मुवटीचरितामसाममेकोनविंशम् १९ हरिषमान पम्पेश समानन्सपीयत । व मुत्लास्वसम्गोऽभूरमाणवेन्टोऽत्यनामयुक्॥१॥ भगदेशातार पपापुति हरिममा नावाचा पगा होता अनेतबार्य मुनिरारापा न पोध घेऊन स्याम दीमा पतसी पाश- मारना पितन कान पाने तापकर नामझम बाप समाधि मरण सापस्यानतर तो प्राणत नामक पोम्पा पगांत साठा हरिश मामिप्रम्प पुमा राममन । स भूस्ला मामपन्मपभिवास्तमनस्मृतः ॥ २॥ राजगह नगरीत हरिशाचागमा सुमित्र राम्प परात रोना स्पापा पापणीचे नाप सोमा तिप्पा पोटी मुनिमुकतनाप जन्मास आछे एफ मेयंपा गगगर मुरुमा त उगाप स्मरण गेन राजवापानउ साने मार्गेपिने सोन में १सोम गर्ने।

[७८] विपरिम्पतिशाप्रम्। गज प्रासमयमन्त भागपिया पुरामरम् । मामीचामपुरंशस्त्र नाम्ना नरपनिरूप ॥३॥ इपी पादानन माना इम्नी पर्न स्मा न मानयिनि प्राप्प पापक पिरकमान् ॥ ४ ॥ अपन मुनिमुनाप नी मिनासी सांगितली दरवी न्माउपुरपा नरपनि नामक गमा ऐनाम पुपानी दान न्यिामुळे पा जन्मी ग स स पना ग्मरण गुगात असे, पण पूर्ण जग्म गणित माहीम समान धारकाची अपे दे गाने नील तसा मपप माम्प सन्यै माना यि म्यपाठसा। मनिममतगयान समताप मसौदतान् ॥ ५ ॥ मुनिमुनमापागादि हाप्पा मनमणामुळे नैसम्म प्राम मा बरेष नपधरण फन्पार त्याना केरमान मा पमतम प्रगति कमन ये मोजाग गेडे ते मुनिमुमतनाप मुसामाठी वामम्पा पर प्रसमशेगात नगमिरामऽनवारचीय नरपुरभरा। सनकमारं तपसा पाप्प मोगपुर प्रमा॥ ६ ॥ अमरनापनौपम्यम्पाच्य नारनगरीचा राग बस गौर समापिमरण मान सनरमार नाम लिममा स्वर्गात सपि शाल विमानात देव सम्म रोमन मागपुरचा राजा पपनाम व राणी ऐय माम्या पोटीवो गौर रिपेण मारने जन्मछा १म९रमममममोरारपर्य।

त्रिपरिस्मृतिग्रामम् । [ ७९] इस्वाको पपनामस्य हरिपणोऽपरस्मतः। तसिवानन्द यशापति से भापकोऽप्पमूत् ।। ७ ।। वनम्तवीर्य भगवान् मनोहर उपानात बाडे असा स्प प्य जळ पमनाम प्रमाने दीक्षा घेतली हरिपेणाने ग्रास्कान घेतली. पझावीन्यसिधस्वस्य पितानससम्मन । संपायचितचमाञ्सी पिद्रस्नान्पापसप्त च॥ ८॥ पानामाला जेव्हा केबलहान साठे ते हरिपेण चक्रवर्ती प्पा वायुधशात पक, छन, तम्बार दर आणि कोठाति कारिणी, धर्म प माण अशी एकर सात अनापराने निर्माण झाली सात सबीररस्नेहि प्राप्त झाली निपीमदीमुस्तास्पांष गणपदामराप्तिान् । सपतभीमालसा रामा तनन्दायरामनः ॥९॥ गणवर मामक व मदीच्या मुसानीस मऊनिधि सपधि घेऊन बामे या सर्वरेणग्यांचा स्वीकार फम्न पावती पदापा उपमोग पामा म नगपराचे पूजन करता माता अन्य पापित सौपतमस्पो प्राण निश । प्यापक्ष भीनागापसापां दिन गम ॥ अनान त फकन गप्पार बमला बसता पं प्राण पाहन पाहून पाया पैराग्प उत्पम भासें सौमन परताठ भीनागमुनि १ परम २ निराला [८०] सिरिस्पतिशाम् । बाळ दोसा घेऊन सपभरण कम्पावरतो सपिसिसीसाठा जाती नाभरपी रामसप्पणी पसकेशी । साच बरक्सम्पमिस्पता:पृपाप्यते ॥ ११ ॥ दशरप यमाम राम राममण नामक पपपासुन साडे पच फार मोठे आहे पणून ते सप्रपणे सांगितस साल पार ॥ अथ रामायणम् ॥ माताऽभान्स्पातना रनपुरे रामाप्रमापवे । सुम्पन्नासस्तन्मिय बिमयास्पष, महि ॥१२॥ याच मरत क्षेत्रातील मलपदेशात रानपुरमा प्रगनिया राणी गुणस्ता याना धूप नामक मुरम्गा साग त्याचे प्रेम सचिराप्पा सिप नाम पुत्रावर फार होत विलापमान कामेरभिवचनातियापिनीम् । हरदो लासी सपिषी सावपा १३ || रानपुरचा नगरोट पुग्ने मापसी मममी पादत्ता पाच नगरानीऊ उमरणशेर । गीतमा समा मुसा मी त पासा देण्याचे टरमित ती फार पुर मम्मामुळे निग फळपून जपपासाई विजय मामक भित्रामा पाम निपास विपठिस्मृतिशासम् । [८१] मणिपपत्कारसा रामाविष्टेन पुरक्षिणा । जिवासिता सर्व इन्तुं व मित्ता मन्त्रिणो नृपम् ११ पप्यारंपति सरपं मापलगणशिना । सयपे लान्तसातीने तपम्प पुरुपोचमम् ॥ १५॥ सर पाम्पानी रामाको तमार केम्पार गनाने ग्रामरक्षकास स्पा दोषा युमफांचा पच फरण्याची आमा Pी पण प्रामरठकाने स्पाना जिन रामको आगळ प्रमानाने त्या ग पुषकांना महारल गणघराको नठे महापगणघरापाम ते दोघे भारले गेले षयात् स्पाना दीक्षा रिणी क्षेनतर ते सातर पमरण कर वागळे जित्वा रिक्ष स्वनगर निशन नील्प फेमसम् । समसामटियास्तवापे पल्पमापियाम् ॥ १६ ॥ रोपास सोमप्रम नामक राजाला साना राणीपासून सुप्रम पतिाराणापासून पुरुषोत्तम दस पुत्र होने से दापे प्रतिमाराय- गाडा मालन बाते दात स्था फार पुरुषोत्तमा सिप फन्न पताना पाहन पूण्मुनीन आदि कम मात्र असे निशान मारस मम्पायर ता सनकुमारगर रगात फनफप्रम मानान विपनामपप साठा 4 रिजन मुनि भेयार त्याच गाताड माणिप्रमापिमानात मणिपूरमामफ दप हाला तुपास्ता २ र ३ मारला गाडिना ४ सपनामा मगीत - सम्पम्पमानि रमठान । पम मि चारपी परन् पाएग10 भनटातीपास्म ८रघभी स्प।

[८२] विषधिसविमानम् । व काममा सपासपो म्यां दपरयास । रामोदिगपांप्रेमपरिप्या सामगा परि ॥१. पुढे काशी मगरीचा रामा दशरप र गमी मुबाम पन्या पोटी मत्रिपुत्र निमपत्रा नि मिना करन फ्मण स्पाप रानाम कापौराणापासून रामपुत्राचा गौर पमण मावाने शाला राम बसदेव होतामण वासुदेव माराकासापुरीस्वस्वपसा मधुपितास । भोपन्मुससपिरास्सापास्पं सगरं दिनी ॥ १८ ॥ पूर्वी पानी हरिपेम तपाने सर्टिसिदिम जन्मन्यावर हसार मांनी वयोम्पानगरी सार मा राजा साम सम्मा देवीप्या सयपरम्म नो गेग माता मर्पिगह नामक पम मुंगर कुमार तेथे मास्म होगा तेरा मसरग्रस्त होऊन साला त्याने दूषित सनणाचा पर होत त्यामुळे जिन मर्पिगम स्वपररमापास पारमा समान पान म्ह रोऊन पीमा राठी मेम्यानतर तो महामार नामस पवर धाम सो सगरप्पा कशाचा अमापामा माग करण्यास सम्ज शाम म्पैतरेर ग्राममाषा देय पल सगगका पेऊन पणाग पा शमा ना पा र रासमा बाहारी वो इसी इस नसेल तर दूपाकर मोरार होऊन संगराने पाकेला मरमात पाम तपय पद परमाणे महापामपुर स्वर मामा पापा मारतापेममानामेतको विस्म | निवरिविशवम् । [८] अस्मपरी पुरेत्पस्य सतुम्दसरयोपसन् । मायोप्या भरवं दम्यां मुनं मास्पनीमनत् ।।१९।। रामाने काशी सोड्न बापल्या पशाप्पा अयोध्येत वास्तव्य केले त्याला एका राणापासून मरत नामक पुत्र शाला दुसऱ्या एका राणीपासून शत्रुत साग मारवे पातकीस्सप्पे माचि सारसमुरपये। देशे नाफपुर रामा नरदमो वृषभुत' ॥२०॥ घातकोसमेत मरतक्षेत्रातील सारसमुचय देशात नाम्पुरचा रामा नगदेव मामझ होता स्पाने धर्मोफश ऐन बनत गणधरामबळ दीक्षा घेतली प्रवम्यान तप फुन्सिगेदपपमपात । हवा निदान सौपर्म गत्वाऽमोऽमान रावण ॥२१॥ स्पाने उप्र तप केले पण घपलोग पिावरायण पाहून स्पाचे पैमर वापणाठा मसा- बसें निगन फेछ व मेल्यानतर सौर्म सगात देव सासा वोध पुढे रारण माटा पौलस्त्य समिया रन्तुं सोशाप्पादिफानने । निपासिमपर्वा तपासाशामितपेगमाम् ॥ २२ ॥ मीमांत भरतक्षेत्रात विनया परताप्या विणणास मेषकूट मामा मगर माहे ते पिनिर्माच्या यशाल सहमप्रीय १ पुप पूर्ण एा पुष मस्मीमारी कारणास्प आग २ पूर्व भदरे । मनपाएपरिणापुश्मपरम भरप मेपभिपा।

[८] नियपिस्मृविशाखम्। विषावर करीत होता पापा पुतण्याने स्पासा हाल्न रिम्पार तो मकापुरीस जाऊन राज्य कसे सागम त्याचा मुख्या शतमीर पानंतर पापा मुधमा पपारामाच गावर गरुडा स्पांचे मतर पुम्सपाने राम्प के स्याच्या राणीचें नार मेषमी यांना दशानन नामक पुत्र सका एक दसानन मासह तप्पानिका- ननात गेग बसता मलकापुरम्पा बमितग रामाची मुष्णी मणि मती निपासिदि करीत बसम्णत्पान पारिणी द्वादभाडापासावर्या रदमा मणिमति क्षणार ।। कामार्वोऽपिनपदस्पापि पामासमात्ममा ॥२५॥ पाग बनाम करीत असलेल्या त्या माणमतीका पार- ताप दशानन कापान हाम व विष्यात स्पा बन पाणमें निमें सतापून वसे निदान संघ की, मी यानी मुग्गी होऊन यास ठार मारीन भूम्नममिवि संकस्सारमादा मन्दोदरीमवा । सरगन्मदिनपम्पापुत्सावारस्पति विदन् ॥ २१ ॥ म्या कापामाग दी मगरीची मुग्गी वासी तीजमन्या रोवर भकप उत्पाव गरे रोझम बनेक टपश्य मा तेही रानाप्पा मुळावर आसी बरे बसे योनिषा सागिता नीलमी कापि श्रीव सोमारीचमादिशन् । मन्मुसा पोल्प तद्रमपम्पपा मिपिसापने ॥ २५ ॥ सिरप्रामन् १ मारमासूमेपास्ताप नमानमारतनारमपि मरिणा मुन त्रिपपिस्मृतिशासम् । [८५) सा हुए दशाननाने सिण मोठे तरी मेऊन सोरण्याची मा- हा फेठी एका पेटीत पुफळ व्रम्प म पत्रासह तिला ठेऊन मारी- पान नेली व मिपिठापनात दूर नेऊन ती पेटी पुग्छी कझिस्वयं सौर सौर्षापानीय किवांम् ।। चराव्य भनको ललावावरतो ददा सदा ॥ २६ ॥ देवयोगाने त्याच गागी घर पाषण्यासाठी छाक बमीन मा- गई गस असा स्पाना ही पेटी सापासी ग स्पानी पी जमक राजामा मेऊन दिली पेटी उपास्यामर पत्रायरन बनकाला सर सीवास्पा बसपार्दष्य पमिता सा पाप ताम् ।। सापि भूगहों मेम्ला गणपन्ती सा कसा ।। २७ ॥ स्पा वानदाने ती मुध्यो पमुषाराणांचे साधीन के निचे मार सांता ठेउन ति ती सवर्धन करू सागरस्या बरोबर ति- या कलादि पाडूणगस्पा वां योपनोशासगा पापमानेषु मूपि । ट्रमा मनफाज्य सदस्षे पम्पतिम् ॥ २८ ॥ लारुम्माया उस्मासाने वाढत चामम्या तिला पाहम बरेष सण तिका मागमी पार सागलेले पान समेत राणा कुशमतीमा मणाछा ५.२ भागनि मिच ३ मारिधि मदिमी मुठा पीता ५ या परमो नदेति मनोरमसमति ।

[८६] सिरिसतिशासम् । या हुवा-मामससापानीमसगरादयः। सदेहा स्वपरिवि भूपये वाफव सः ॥ २९ ॥ पूर्वी यात मा मुख्सा, हत्ती, घोरे, केसे मग्न ते सोसगाग गे क्स फिवान बाई मणून तो पापरापा वसास्वाम्म्यन्स सामेततिरेप रिपिरामर । विपित गगमगर मात्र रारणात् ।। ३० ।। रामा बामणे पाल कुशम्मति मणाला विचार बगल वारे हा या महाकाममुम्ने सागितमा वारे स्पाचा नाग, बग मंगरे पशा छोक रावण विषस करीत शी शका भार सीवा रामाय लाम्पाम "स्पक्सा रामसात्मणी । पद्रलार्य तदानया मिपिसप्तस्वामणात् ।। ११ ।। रामाय नाही माला देश भम सागून राममणाना पा ग्क्षणासाग बाणा कुराहमीच बोलणे बनाने मान्य केले तोचदुक्तं भुत्वान कोसेली म्पपारपत् । तेष भेगानुपन्पित्वाचीपुर्मुमगन्यसैम् ॥ १२॥ कोण देशाम दूत जामम्मासाठी पाठविण्यात माम दफा- रप रागान मामसम्मत की सोची समात मिळाम्पानतर स्प मा पार पिण्याचे ठरए महामरोष प्राप २ पिणते . निमनपा मिनी सनापानात्मनात् । पम्पासम्म्मममस्म ५ नाप पुरोतिम्रप्रमुते र रमः ८९ एममताकारणारे मिकामा पमय १० मस्ते स्म १५ प्रमापनपत्रमार त्रिषनिस्पतिशास्त्रम् [८] राम्यतान्त्सनननै कामझापीदरामिषु । हुतात्मयां निगन्ति पनस्याभमणा इति ॥३३॥ कामाम्नि, कोषाग्नि व उदराम्न मध्य पनात राणारे प्रमण मनुकमाने वैपग्य, शांति व अनशन या भारती देऊन भामयह करवत न मुक्त होतात हा आपा होप मानापास यत्राणिपसिरपणाम् । सस्कारामिषु गन्मादीनुत्ता सिमति गेदिन ॥३१ वार्यकर, गणघर इतर केवटाप्या शरीराच्या संस्कारमीत गपारेक फल्न गृहस्प या करून सिर होतात हा भनार्ष का होय असे हे या मार्प । बनास नामक दोन प्रकार भारत हिंसापागन्तु सगरपिषमादिदिपा म्पपात् । दुर्गस्पै पर्पवमुलनासरस्वत्स दूप्यताम् ॥ ३५ ॥ राजा सगरवत्पापा मत्री विषम् वगरेचा देश महामास नामक पाररमाने त्याना दुर्गति प्राप्त मात्री मणून पर्वताम्पा द्वार दिसा- रमा पा सुरु केले ते दुर्गतिलाच कारण हातात सरकदर प्रा. मानपळ स्पाचा मुख्गा परत, नारद नामक परदशी पिपाया। समुत्र बम विपापारगत मासे पर्वत शवाचे वर्ष पिरत करीत मात्यामुळे तो टोफेस पात्र नजीके सिमा निरपति सेससान्ति २ वीरमगरमश पर्पमा ला पिपिपनसधिपति कोन गुणत ३ परम्त्रिमहो रमुखमादेशमा पफ्स्पोरिमा ।

। [८८] रियसिम्पतिशायम् । अंतिम्पमिस्पर नारदन विरहते। पर्वतोमुरतो यो पार्ये सोध्यावयस्पयन् ॥१६॥ तीन वर्षाच्या मुन्मा परमापाने पर करारा कारण त्या 4- माना भर पुरत नाहीत पमम ते दिसत कारण होत नाहीं वसा नारदाने वर्ष फेसा वर मणने पर मसून बकरा होप न होमव स्यामा पळी पाना असा पर्वताने मर्प फेला प तो यातना घात कर्म माम स्पामुळे पर्मत सकान तिरस्कारण गेन महाकासमतापएिसालासररासठ । से कस्ताप्यापरस्पास्मिषसासाम्यवाणि ॥ ३७॥ महाकाय म्पवरदेषामें वपरित साठ हजार सपा मजूम पर्वताम परिया पनाममममाणागैरिवि साल्पो सपना। सर्विसिदि पारिसामर्मेण नारदोऽगमत् ।। ३॥ बम रामाने मोहमश ऐश्न पताप्पा मवासच सार पिडा ते सर्प नरकात गेले गरिसपर्मामुळे नारद मात्र सर्वसिस्तिएक सामगेन रामोप सर्वसामायापित्रादिएसम्मणा । गत्मा विदरस्वत प्र निछाप्प बत्सवाम || १ पाम सिमानामावमिपीसे । वाममेष सामने देगा रोमापिसेर देण्यमान पनि प्रेरकमा प्रमावरम निवास पाठविस्म ५ पालन त्रिषणिस्पतिशाचम् । [८९] दशरपाच्या भाषेवरून सर्व साममसिह रामहि ब्यमणाडा बरोबर घेऊन विदेह देशाला गेला तेथील चनक रानाठा पात मत्त करून त्याच्या मुलीशी छम्न कम्प्न बाला विमापोधियं माप्त साकेत परिमायितः। वासनान्पा राजकन्पासप्त पारश लक्ष्मण ॥४०॥ मानतर राम अयोप्पेटा परत वाला सेको बसन्तु मुर झाडा दशरपाने वाणसी सात कन्याशी रामाचे म्म ठान सोळा कपाशी मणाचे महाप देमोदितीदित कार्य गत्वा कुर्भाव सानुम।। इति गमेण पिझप्तोऽमुघाक्स्पोदिव पुन' ॥ ४१ ॥ रमणासद रामाने शानियोचित देवकार्य को काशीत गम्य स्थापण्यासाठी जाण्यास रामाने परवागी मागितली असता प्रथम मोहाने दशरपाने ती नाकारी पण पुस्ता सममारिम्पति बाई राम्पमिपिम्य तं वायो योपराम्पे व सक्ष्मणम् । पिभूसत्तापषिष्ठा काशीपस्यदिवी मृतम् ॥ ४२ ॥ दशरथाने गमाग राम्पाभिषेक केला र मणा युषयम पर छे मागि बाल कासीत गम्य स्पापा मण्न दशरथाने स्पाना सागितसे से स्पांची बतिशय उमति साडी गस्पा नन्दनपचिपास्ये मातु पदने । कीरिस्मा प्रयसीयुक्तौ स्थिवापिन्द्रमवीन्द्रनम्।। ४ ।। १ गुस्परपसाव २ निरपर्मदिखमनापम्प ३ तपस्मा- जाम्पामिरेकानयर रिम कारग्रमपिम ममेरम।

[९.] त्रियसिविकाडम् । काशीत सम्म स्थापून मदमनना प्रमा, संगर पिस्ट नात राण्यासह व प्रतीप्रमाणे राममण कौडा करत सास नारवस्ती तमा हप्ना परमपी माप्य रापणम् । प्रसाम्प सीतास्मोक्रया करामस्मकम् ॥११॥ कमप्रिय नाराने साना तस मान-मम पाहिले व राबणाकरे पाउन सीनेप्या रूपाची माच्यापुढे इतर साति केली की तोक- माविष्ट होऊन तिचे हरण करण्यास उत्सुक भला मधमा सुपणखया प्रदयानीस्मोपिताम् । सीवा इता समारीच पुष्पकणासवत्स से ॥ १५ ॥ स्पाने मारीपाशी चर्चा मेसी र्पणसठा सम्ताहरणाचे कानावर पाठक्ति त्या माता-या गणनेने सांसठा शोधून कायम जो रामार पूर्ण मनुरक बनून शासपती मरे भने तिने रापणास सागितले तेमा तो मत पिन पुष्पक विमानात बसून मारीचा सह निषाग पन पागमामेणास्था रामण पियागिता । पपेणापगतं स्वं नास्था भिषिकया रनम् ॥ ४॥ माधान हममृगाच साप घेऊन एमाछा सानेपामून मगपा- मिपाने दूर नस मामि परणाम समाप्पा रुपाने पऊन पाम्मान सोम मे १ मान समता परिव २ पापेन परीसपोषिता सोवा पपनाम्पा ।

विपरिमनिशानम् । या भारिता भाका मूर्षियतात्मय मोभिता । म्माभिमानागुपः रामक्षममगारपि ॥ ७॥ म आन्पायर ८मगार्ने राना र मार सहारा पाहून दौ मसिवनी मुद्धीवर आल्यावर नियाभर खिया निधी सम- जूत घाल मागन्या 'ण रामापे पुरा पदपर्यत मी काही बार- णार नाही अम म्हान तिन मान रण कम तात्पातापानभासत पम्पमाक्षिपन् । मखमाला दिया नावामीन्स दिगुणात्य ॥८॥ सेहा मत मात्र उपान हो मगर पगाच्या आयुष शान गास करणारेपक निमाण साठ या चमाचे फळ पाला माहीत नफत या मौतथा पोसार का प्ठिगान्या रगणाग निठा साग्न व पथ्यका आह सगन सुनी मागित शीस्मा रारिणी राग गतम्भ्राम्पसभाम्पाम् । ममतासमिति प्रभास्सिा जानकी गत ॥ ४९ ॥ इफ मापामग नाहीमा शान्धार राम पिनटबमात परत भाडे तिा तय माही अम पाडून मी प्रास स्पा राणी दशरथामा म्पम पाल की राहून राहिणाम नम्पारर 3 उगाच ,सना पाप्य.. प्रचनावार सानाविक प्रतिम न भवामुनी र सत्मार्गमा मौनन किया ४ मा उत्ता मपम यम जाप्रपमानार से प्रा नाममा मात्र मी पत्तीपास मार।. दिलीप राय तस्पा-पावन न माननम, [१२] विपतिस्मविशरणम् । मठास होगा या स्मारम्न बागकाम घेऊन रावण गे बसें समज रारणे रापमो वाराणस्या विष्ट पूरीपसा । पिप्रा प्रस्तापितालादापस्त सादपीप ।। ५० पुरोरिवाने रामा फाशत ते स्यम साहनव विस्य उल्लेसिओल्या समाप्मा अपारसन पपणाने सीता मेमोन कळम्पामुळे शपर राम भूप रागारम मस्प नमः सब तबकोऽनदरममा ।। सुग्रीमा मान्म में विक्रान्तीपमितवंगपार इतपय पोन विपासनी यऊन रामाला नमस्कार कर स्पपिच एकमणाम, प्रमो ! मी समोर य हा मासा पर मित्र अमितवेग खगाप्पपारापिकिस रामपासी समाग्रमा । पुर प्रमागतापापराम्पाचनाइयो गतः ॥ ५२॥ रिजपा पर्वताच्या पिणेस मसोम्या मिकिक मा नगरात पठी विचार गग्य करीत होता रपाठा प्रिपा राणापासून माली व मीर नामक दोन पुत्र मा पार्ने र सोलामा बाम गावर गसम मग पुराणपर दिले बागने तहि मिन घेऊन मग हाकम दिले सम्मेद ससरमा माप मिनापाम्वष नारदात् । मात्सा पदाप्ति तपासागा वलतीद मो - त्रिपष्टिस्मृतिशासम् [९] एकदा मी मित्रासह सम्मेशिखरास गेला असता निनपूनम के से मारदाकान कळलें की रामभद्रापासून आम्हाला स्वपद- प्राप्त होईल म्हणून भाम्ही सेवसाठी हबर झाणे भावोत तर महाराम वामप्पावर सपा करा प्रेपो ममेस्पादिशन मियां मे गरेपय । बदुपयो एनुमान्सरका गला भूत्वालिरभ्रमत् ।।५४॥ तर मग मी तुमाठा पाठपितो माझ्या प्रियेचा शोध करा भसे रामाने सागितल्यावर हनुमान केला गेला न तेष मृगाम्पा रूपाने फिर छागमा वनव्या शिशपापा श्रासीद्रामाक्तसक्षणाम् ॥ सप्तमी वदामेत्य पदापे मञ्जरीगिरा ॥ ५५ ॥ तेम्हा स्पाने रामाने सागितल्या क्षणामी युक्त अशी सीता शिसमीया शारासाठी वसती पाहिली सीता आणून सात दिवस झाले होते अणून तिचे मन पालटले की नाही ते पाहप्पा सारी रारणाने मरीनाम दासीला सापकाळी पाठपिलें स्वयं चाभ्यर्षिता सीवामनियन्ती उषा खगेन् । वो निसिनिपिागान्मन्दादपा दुराग्री ।। ५६ ।। ममिराने सौपा ममबानि की रापणाछा पाच हमार राण्या मसून तुला तो घाइतो पतो तुला पासणी करीष आरा रामापी १ यादिना पारितुमिए । २ म्पस्पान गतः ३ मावा मन्या- पविग्रहामि ।

[११] रिपरिसतिशतम् । वाशा सोर ति सिने ऐक नाही मन कर होऊन पण स्मत बाठा म पणाला की, म मामाल तर तुम मी पटक मनपान पठार मारीन परीहि ती पश होईना तेषां सिम्म मारण्पा निठे पण मरमें त्याचा निपेष केला ते तो दुराग्रही रापण निघून गेला सापी पतया मनन्या सतीधुर्मे प्रसीट माम् । सम्स्य रस व पम्पा युत्युक्तपि नामीत् ५७ रेससोशियेमण माक्पार प्रसमा भापल्या देहाच रक्षण फस्न मनाहार घे तुमी रमाशी मेट हाईट मस पुष्कळ निमविले तरी ती गोरी नाही मरोदरीने त्याग निठा रमाको पाटीप असाच महा मिला माता स्वपा ममत्यास्पषिन्तयती प्रपाकम् । तमान्यप्पपि पायपु पानरीयूप रमझाम ॥ ५८ ॥ मोरीग मापना मुसीधी भाटवण झाग व रागाच्या मुणर मारेगी तो मुमीप ही सांता तर नसेट सा तिसा सशय भाग ही मग आईमाराध माटते असा विचार त सौता मसपी बसता व मोरी निघून गेस्पायर बानरी चिने पानर बनूम उ द्वारपारमाना र हाफम्न हनुमान सातवळ गेछा दरीत्यामुमामरपा भीरस्साककरणकम् । सकस्पाने इसमी राम म्यूपं सामदासम ॥५९|| १ मबार २ सम्वीर योग । परिवारम्ने से जुमा गानपरत्रातादचागमार त्रिपठिस्मृतिशासम् । [९५] सप मापळे दर करम नमन करून हनुमानाने पाक्रमा- कारणफ तिच्यापुढे ठेवला । यमकुशल माहे से स्पामें सागित न पेत्यद्धाव्य वदामनामाको पीप मुदिकाम् । सैफगम्यं प पप्रार्य निधिस्यासौ मुदारूपत् ।। ६०॥ प रूपांतर करून माछा राबण तर नये मशी सतिला शका बाली पण रामनामांक्तिमुनिका पाहून व पास बाशय माग्न विषो सात्री झाली व ती मणारी- मे व पिकवि सोऽवादी सं स्मामिनी मम । अफ्नोम्पपैव नेतुं ला परं नाशाम मे ममो ॥६॥ दू मछा परिसासारसा बाईस तेहानुमान सणाधा नाही समापी भनीण भास भागवि मी तुछ नेऊ शकतो पण गमा- श्री मला तशी या माही स्पारि नेप्पांशस्वां सामियामोम्पमा वत् । भस्युक्त्या क्या मुव मगदौत्य स मसम् ॥ ६२ ।। तो शत्रुचा नाश करूनच स्पाच्या संपत्तीसह सता अशा एक मेऊन नाईल व त्यामुळे स्पानी कीर्ति हो भण्न हे माते' साहार सेवन कर सिने मा मणणे माप केले व तिचा निरोप घेऊन सकाळी नुमान रामाका नाम १ भाममैव हात मोम । २ यता ता ३ मगाव ४ चर्मिता ५ प्रगे-प्रमावे ।

[९] विपरित्मविशामम् । सीवा द्रष्टेति पृष्ठन् नस्सा ऐत्युपाप सा। घरमै मैनापत्पमीपराम्प पेन्द्रदेगे ददौ ॥१३॥ सोवा पादिगाम कय भग्न रामा विचारांप होप पाहिली मन नुमानाने उत्तर दिलंपसर समाचार सागितला तेव्हा रामाने स्याम आपण सेनापति पद देऊन मुनीर अधिराज प दिलं सोमवागमन सीयों याप्यामकल्प सः। विमीपणन भाग्यान सत्युक्त्या सवंगद मटम् ॥६४ अगद मणाम की, सामदामा मागान प्रफम सतिग मिळ- रियाचा प्रपन पेश पारिने मका निमीपणची प्राह स्पान्यान गरणामा समानिस पाहिजे तेरा विजय सुमद, रगिति मनायेग गरे म तो पिपायर रनुमान रामामान पाविला गेडा गारिनन साम्नीरता याग्य में सो पगम्यमाम् । सीगल स्पीपमारत मा मिस्वग्नयत्तित ॥६५॥ शार पर वाऊन तो मा-पनागिने वापाशी बोरा पण गण मगाय मी हे रन मश्याप सारी भाई मगून मी हरण कम्प्त नागर मार रामाग मा विनर नि यार । पदी मा म्याग करम तगर मानी माय मामात । पूना मन्तिा ४ मा रापारी नाभम् पता है मनोरमार रियापरमा पत्रक फा ८ राम मागास पनि दरम। गरमा भागप्राय 1 विपरिस्मृतिशाखम् । [९७] धुपं भी सिप्त चप्य मंटनियासितामुना । मुंमती निमीपणना पारयिती सर्पस्य स ॥६६॥ हनुमाने रापणारा पथ निरस्मारिप धिारिस सम्हा पगापून राणाने स्पाम घल मारित हाकरन दिस पण निमीर णाने हनुमानाचे सानपन पो नुमानाने मोरीत सीतेला बार घेण्यास छारत मग ता गनारो परस आग सरप्रायद्राम पायाप शरपसी। निर्मूस्य वालि नावाप्र मुग्रीर्य तत्पदम्पैथात् ॥१७॥ हनुमानानी सागिसहेलोपनमान ऐक्न गबणाचा पामोर करण्पामा रामाने समा मन फनी व पवन सो निधारा मुमी बाठा युवराज पारसन व हनुमाना। सेना तिपारन का मी तुमाया सर्व मात फरतो जसें वाटी आटेज पर अमान्य कम्पन रामाने स्याठा टर मारन मुमाबाला गारीपर मसापडे सिमप्पिना सापि मतविक्सगर्वत । सम्मतघरपर्योग अधुमध्यगात् ॥ ३८ ॥ १खमता मेगावाग्मिस्तिरता नपरत् ६ उनमा । समाया तामा निामभिवा ४० स्पि ARI + साटा ६ भमदिन मरोदर्माहता पारषा पापरला ७ स्टेष्यम्मी गपणा ८ राम प्रसाद पारला. लसिक्न पा पाय ११ गमगायतष्ठि पिन समीण नास्तिपूर्णमिरविय१५ रिचरणीति का सो भंगारी पालीरितमाम सवा १४ यमा।

[९८] विपरिस्पतिशास्त्रम् । प्रारमिनामफ विपा ग्याठा साप्प आहे असा मुनार, निरनिरा या विषा पामी हस्तगत कन्या भारत अशा बनेमा विपापरा- र आणि पापळ पार बाटी ग्याशीम्स सेना घेऊन रामाबरोबर नेपालमा सर्व शनमाळ भार नानियतीम्मनपान्या मामिस्येमावस्प है। सीता सताप्रबंधस्य युक्तास्मीया न पारितुम् ॥१९॥ नाए जस्खेन्या परमाचा मी अगिगार फरणार नाही असे बत असलेल्या दुप्पा रेरामा मापसी मुम्मी सीता मोगण्याची इम्स धरणे बरे मम्हे आपल्या मुशागो पोमन नाही असे परणाम रिमीयम मणाण कामापाप्यता नीरस्पायसीण मरव कुषा । भ्रामा निगासिताऽभ्यस्प भिवा राम रिमीपिण ७० पणन निम रानामा उन असा त्याने सहा -स्पाम. रागान राम्णाने निमायणाणहाकन पिठे झन त्यानर एमाचा भाम्रय घेतम मपापालिनिविप्न रामोनुमवोऽपुमान् । कपिसन्पपन मस्या दग्यापावो पति परम् ॥७॥ समुशायरळ वाम्पानवर रामाप्पा बाबरून गुमान बानर सेनेकान पन तोन व एका फेटान भाग १ मापम्पा २ भावासारखी ५ ग्रामी परिमामालि गा५रतिमा , त्रिपरिस्मृतिशासम् । [९९] वत्सुप्रीचाप्तमिपौ तल्लंपिवान्पी पसासतौं । मानास्यौपपुर पीरण दिपा सिदिमास्थताम् ॥७२॥ सुमावाकडून प्राम शालेया शिपारगन समा सस्न पाउन राम बमण शगुनगरीमबळ भारे नुमानामळ स्पाना या कामात यश बाजे तमोऽरिणी फवा समरणेनेत्याक्षिपक्षा। पक्रमाठाय तच्ची पिछेद सत्मणोऽर्नु तत् ।।७३॥ रामउम्मणानी राणाबरोभर घनघार मुद फेस तेम्हा सम्मानें रमगाने सोरलेले चक्रप पेम्न छामणान स्पायावर पंकडे प स्याचा शिरच्छेद फेगा मत्पिाप्सोमिवो राम सीवपारिपद न्पपात । मिमीपणं मरैगोरभिषिक्तय सक्ष्मण ॥ ७४ ॥ रामाला त्याची साता स्याप्या बाप्तनमानी भतामिग राम णाप्या एम्पावर मिमीपणाम बसभि व अमणाहा देनी भिम गमीशपदावर बभिषेक केला. कोटिकारम्पभिसोयत्या हशीम्यासिमीप सः। सानन्यात्सायमी नित्या दिशोऽयोप्या भिवोऽवपत्७५ १ वाम्मा मोषनुमाया पासायविमानेनामवारिखतनो एममनोरम परिर्मुला ४ सुमन मा प्रिय जमवा कला ५ बरेन स्ति .. ८ सुप्रीपरिमापभिः १ मंग्राहा। प्रप्तात् ११ चैनरनामान । २ १ [...] रिपरितिशतम् । कारिफा नामक पिडा सामणाने उपन्छी तेरा मुनमा मक यक्षाने संतुर होऊन सौनंद नागाधी माम तबगर श्मणाम सिौ सेप्न त भयाप्पेको गाऊन यम्प कर सागछे एकदा सपरीपार गिरगुप्ताजिनाइसा। धर्म भुत्ला सानुमोऽमृदिष्टिमाप्प प्रमायुतः ।। ७६ ॥ यानी मनोदर भामा मात निरगुम बिनयमापासून सह- मी मरण के जिनपूरन चंदन मन से तेजम्मी मनमे सत विपपादान्त सातपानमा । रुपा ची गती पुश्पानगपस्वी नननः ।। ७० ॥ मरत प यनुन या संपूसा अयोध्येत की वर्षे रापमा भरेन स्माना राम्प न यमरमण कागांग गेसे पप पुरपौवाष्र जान त परिक रस्सममयो मुसा मारोगेण सत्मण । गती राणवाय वमकान्ते प्रयुद्धपी ॥७८ ॥ कदा पमणाला तीन स्पो पानी मस्ती मासेन्या ने मोग स्टाध पारग रेक ने प्रासमेजासूम रसातसागगेग हमरे का बुनेगही रामपापा एक भाग एमा रेमिमें. समानुपाचारिसुच २ रामा जम्माय प्रभवा पम्पा तोs भा ३ मतमो ५ स्वामिनी तो । मत्तम भाग्य यामती मजा मारेकरमामान मारत मापपर मरण विपिन नामा रुपचन समयमा पुस्ठेन पर।

त्रिपतिस्मृतिशासम् । [१०१) पदिस्या म्वामा फस मणून सम्मणाग असाप्य रोग भाग दुस- न्या समामुळे मा नए ईस म तिसन्या स्वमा फळ मान रामचद दीक्षा घेईल स्पाप्रमाणेच पाते गपणाममाणे छश्मण मग यस्याप्या शोकामुळे प्रग मयुरीया रामाने रक्षा घेतली सेगमणी पृषिषीपदे राज्य न्यस्यामिवमये । सीतात्मजष्टम यामराम्पच मियिलश्यमंत् ।। ७९ ॥ एश्मणाचा मुलगा पृप्तीचा पाठा गार यसरिण्यात मा सीतेप्या सात महान अबितनप नामम भाउन्मा पुत्राला युबरान परण्यात आलं मिथिलादेशति पाण्याच पाट्याला आला साकेतमत्य सिदायवन मित्या पलस्तप । शिपगप्पमिनास्सिर सम्मेदशमायिक ।। ८० ॥ नतर रामचंद्र अयोभ्पसा गेसे में शिरगुम जिनरामापासून क्षा घेऊन पानी मूग तपथया फेनी प सम्नशिसरामते मोक्षाग गे? हनुमान बग दिनेयष मुछ शान विमीपणा यानुनिश्व यगुस्तपापसाद । मौतास्यतं गतान्प नु यया स्वगमासन्न् ॥८॥ मिभाषण हनुमान, मुमाग आपामा भोवताप्रमाणे रामप मम्प सम्मनिम्मिन् मिमित्यमिता ३ गरा गत इमायम नभा पुमा भारी शिमम चिन यम प्रतिलिपपमा एपिहामिमा ।

[१०२) विपरिस्पतिशासम्। वरिश स्वर्गामा गेळे सौवा बन्युर नामक स्वगत गेली इतरी आपापल्या कर्मानुसार स्वर्गग गर्छ इति श्रीमुनिमुनतीर्थकरहरिपेणपामरामलक्ष्म रापणपरितोत्तरपिंशम् ॥ २०॥ देवेमूटभ काशम्मा सिटार्य भारकोचमः । भुस्या स्ववादसन्यास महापसमिनासी ॥१॥ संम्पस्य पध्दना नामान्स्पं साता धर्मापरामित । मिपिसमस्ये भूलाई सिमपारम्यस्य तुम्माम् ।। पम्मान मरतक्षेपात परदेशातीस फौशाली मगर रामा पापिन राणी सुदरी पोटी सियार्य नामक राना हो वा उम मारा होता पार्पिगने महाबलविनायगळ दी फेतली व तो समाधिमरण साधून मरण पाला हे ऐन सिपाप गजान मुनिकर मामक अभिशानी साथमाळ दी घेतमै र एकसागा अध्ययम बपोश भावना चितवम कर वीर्यकरमामम माधः वाणि तो अपराजित नामर उ अनुपविमानात अधि सा बगदावा मिथिलानगर पमा रिम्प र राणी बपिम याप्पा पाटी ममिनाप तीपंकर के वामिछम्मान पत्ता मेपागम र गमासा मन प्रसन् । नस्वा सौर्मदेशाम्पो नमास्पाम्पामिवारिता ।।। १ मा गग्य समयमा प्पलमनिष पा समेनो पारिने जाप मा।

विपरिस्पतिशावम् [१०३] स्पानी परच बर्षे राम्पमन मोगले एकदा बसवप प्रारमा एपीवरून ते बममी पाहण्यास गेले असता, सौधर्म स्पा- सास दोन देव बाडे बदन फरान भणाले, मामाभ्यां षस्सफापत्पामिछादपरामिवात् । भुस्वाप मारिसाई दर्व त्यो द्रष्टुमागवी ॥४॥ बबुरीच्या पूर्वहि क्षेतील सकारती देत सुसीमा मगरीत अफ्रजित सिमानाक्न अपरानित नामक वायकर उत्पम माझे बाहेत स्माया दर्शनास सर्व देष मेरे होते ते बसें ऐकले की, अपराजित स्वर्गदनप मियिका मगरीत जन्मोले नमिमाय मानी तोर्यकर वाहेत मग्न बाम्ही लापम्या पानास वाणे समालो स्यक्तराम्पोसा सपसा पाप केबसम् । ती मर्तयामास नमिमनं नमाम्यहम् ॥ ५ ॥ ते ऐकून शहरात परत आन्पावर पानी पम्पयुक्त होऊन राम्प सोडलें दीक्षा घेऊन तपधरण क माणि उपानी धर्म- साथ मपर्तित फेठे स्या नमिमाय पीपकराना मी नमस्कार करतो दीपरापवे मात श्रीपरशा पमुत्परः । पपापवीमियामस्पारपर्ममिनान्तिः ॥ ६ ॥ गंमुटीपाप्या उत्तरेस महारेरामत क्षेत्रातील प्रौपुरपा परा पहुंधर मराणी एपारवी पाना विनयधर मामक पुरावा धावती १बारे स्विवारे ।

[१०] त्रिपरिस्पतिशाधम् । राणी पारम्पामुळे राजा फार की शाम माने बरबर्म नामक सयामळ दीक्षा घेऊन बरीच तपपर्या केली स संयम्प मारा गवा कौशाम्ग्यपीशिन । पिमयस्य मुसा मावा उपसेनी स्पानगपत् ॥ ७ ॥ परी समावीमरण सापून तो महागुमनामा चिमानवताव झापा नेयून को पसविसर तप का नगरीचा गजा विजय बराया प्रभारी याच्या पोटी जयमेन भरता हाऊन अम्मला सापाग्रस्प सनसोल्कापात वप्त्या वपी जिनात् । परवत्ताजपन्तऽ भूरेयामोयापर्वमन ॥ ८॥ पर्षे ग्रामर नोगम्पार एक तो गधीवर बस्टा असना मेर गागटामा गमापान शाम वेगा रयामा राम्प प्राप्त होऊन पहनामा कामीमगरानावर यान दीक्षा घंनी भागि पि नएभर्या करून सनानिमरण सापपानंतर ता जपत नामक अनुचर विमानात अपत विभाग समित्र झाला उनि भीनमिनापजपसनपश्चिारितापसानमेयिंगम रियन मगर माता मिठी मायास्य पामुरा पिममाममपद पाम्या पारणा मारपस्नदा ॥ १ ॥ मरवानपी गमवर अष्ठी पमरचक । सपरपुरग्या निपिटामा जाती वा भापमापुमा ॥R दम ३ मामा त्रिपष्ठिस्पतिशासम् । [१०५] बशीपत, मरतक्षेत्रात मगपदेमात, म्यिपर्वतावर एक मिठ (होवा स्पाच्या बायकोभे नार बागुरा होते विममुद्धि ष मममुदि नामक ओन धारण मुनीना म्या मिला ठार कर ण्याचा विचार करा पण पा पारणमुनींचा अपमदत मामफ एफ मस्त राजगृहनगरीत बाडे अमें पागुरेने त्याला सांगितछे मुनिषण- पासून तिनें परामर फट उपशाम। तें मिष्टमय पचाए पानून धाम बनठ मल्मीक तुम्कार गृणन्नान्यदा। निदानन मृत साऽभूतस्पर प्रष्ठिनागना ॥३॥ माया माम्बार सुकमा अमनाना स्पा भिल्लाला माय चारला व नो भेग मरताना शुभनिगान यापन्यामुळे तो स्पाप अर्गप्पा पटीममा अभ्यास फनम्मा तन्द्रपना मनन । तहमो दत्तनाग्य नाहाक्षिप्नग गुया ॥ ५ ॥ म्याचे नार म्पपेन राजगप्पा मात्र रामान आपण मुलगी पनाममा न्याग दिती पुर रामान गाया घेऊन गम्पति स्पासा रिस पागुरेपा पनी मन्पामुळे ती कसरी माडी माप चा- यून मेन्डी १ रानाम्ना राम्पराम पुपी परिणीता २ पा मार- बाम वासिययन प्राम्म मावापिम्मरम माम् । ना अपस्मार मारगंगा पागुरा।

[१०६] त्रिपरिस्मतिरामम् । पामरामादिना इष्टय मुस्वा तस्सपिपीऽमनम् । भयोऽपि वपसी मावास्ते सौपमें मुरोत्तमा ॥५॥ वागुण मेस्पापर इम्पकपी सचिव म्णन बन्म दे दो मेष्ठी मेल्यानंतर सीधर्म स्वर्गात देव पाने पुफरार्पापरे मत्पम्गन्पिसायर्या तवोऽभवत् । सगावातटे सूर्यममेद सूर्यप्रमास्मो ॥ ६ ॥ पुष्कराभपात, परिमपिदेशत, गनिम्देशांतारा सूर्यप्रम नगया रामा सूर्यप्रम व राणी धारणी पाना तीन पुत्र सारे चिन्तामनपपसगस्यास्या मैगपंगे मिताम् । सप भिवा मीविमवीमनु वैश्य तपोऽममम् ।। ७ ॥ पितागवि, मनोगति बचपमाति से ते तीन पुत्र होत त्याच गेषित देशातीम रिदम मगरीचा यवा नरियप । राणी पमिसना पान्य प्रीतिमती मानाची मुम्गी मामी ती मेकपर्व- ताजा प्र-क्षिणा पाण्याप्पा पार्यतींत चिंतागती विभ्याइन भेष्ठ ठरण मणून त्याला परमाळा पासण्यास तयार नाही पण पाने ती वाफया म्मान भागना पाम्पास सागित, त्यामुळे तिन बेद होऊन तिने निरचनामक निकाळ पाया घेतली तेव (समभी २ मारस्वरापारगमन मुना पीन पी मनारस गय प्रमास राग पासपी वस्य । दमन प्रभामारपया कमेव मिद्यपानमनीपतियोच्या ५ प्रतिमा पिपासु लिए विपतिनेष मावि मिचल पिपरिस्मविशामम् । [१०७] परीक तीन्ही भावानीहि दमवर नामक मुनीनपळ दौमा पठन तप बाबरि सामानिकास्ट मान्द चिन्तागतिपुरस्सरा । दीपेऽप्रगपिसासिपुरमातापरामिते ॥ ८॥ तेवून ते चौथ्या स्वर्गत सामानिक देव शारे पुढे मनागति व परमगति, अनुशेपोत, पूर्व विदेश क्षेत्रात पुष्कलावती देशातील गगनगडम नगरीचा राजा गगनट व राणी गगनसुरी याप्या पोटी अमितगति व अमिततेम नावाने जन्मले चिंतामविहि सिंहपुरषा राजा भएपनित नारे फराज जम्मा श्रुतान्पदो सम पिर्मा सिद्ध विमलवाहनम् । बा पदाची घोल्य मास्यपित्पागे सभिवा नृपः॥९॥ स्थाम्या बापाचे नाव बहसास मनाई मार जिनदचा एकदा मनोहर नामक उपानात मिळवाहन तार्यकर भाले असता त्यांचा गाम एकून स्पाने दीक्षा घेतली पुट गरीष तपमा करुन तार्य- करासह तो मानाष्टा गेम स्पामुळे अपरामित फार फरी सागर पुन्छ मला दर्शन Pिल्याशिवाय मी अन माण करणार नाही असे मत पऊन तो बस आट विस उपोपण घान्पार पक्षपसीने स्पांची शिम रूपे दासप्न त्याला दान दिखें त्याने त्याचे पान कम्पन उपवास सोग १ पूर्व व पता: २ मपान् मननपरस्पर आम ५ पाविमनोनमनिम् ।

[१०८] त्रिपरिसतिशासम्। पदा सकारया यसपविर्षिमसपारनम् । वस्य सन्दर्भपामास माहात्म्त्या महागमः॥१०॥ नन्दीपरानि रुस्मा धर्म स्वान्तापुरं प्रयन् । पैस्पालपनमसरा सगीवी वपाभिवौ ॥ ११॥ नापरप्मन स्पाने को स्याम पाग पस्पाटयात दोन पारण मुमी सिके अमितमति र धमितमेव होते त्यानी दीक्षा घेतली होती पारणानागारवामिवादिगविनेमसी । मार्प रप्य युपी कापीत्युक्त्तरानादिमागणी ॥१२॥ स्या अमितमति अनिततेप धारणमुनीना पाहून व पुग्न भपरामित पणाला का तुमाला मी काठे तरी पाहिस बारे म्हा अमितमति घरणमुनि नमारे मागुच पासमामायुरय संभावितीशान | इप्रया द्रामिपि नातमायोपरधन ॥१३॥ राजा दश अम्पुप आता एक महिना उरठ बाहे पानी पूर्वमन्माचे तुम भाञ्च भारात व पटियप्पा मुम्पासमरणानतर मामी दासा पतली ते ऐकन अप जिताने मार पिस मिनेबर पूमन कम र पारीमा वम प्रापापरेन पग्न समानिमरण साबरें माताऽयमलाध्य नप मुमविष्ठोऽपरास्विन । पन्नापपिगनासपचार भिसस्वपः ॥११॥ । मनापसम्पविषये। २ सयमममारिकारम् कति । माम्माममानापुर माफ्तिार मारिनानि मिना पूरिस ।

त्रिषणिस्पतिशास्त्रम् । [१०९] तेप्न तो रामा सोम्या स्वर्गात पुप्पोवर निमानात नपुर शाम पुट तो पुरुबागल देती हस्तिनापुरपा राना श्रीपद व राणी ग्रीमती पाना मुप्रतिष्टित नावाने पुन माया स्पाने यशोभरमुनीनां माहारान Pन्पामुळे स्माटा पचाधर्माची प्राति माठी मुमन्दिराग्जिनारल्कापोत म्यायोन्स्पनामयुर । मृत्वा समापिना चामूग्नपन्स प्लबसचमा ॥ १५ ॥ पुष्कळ राम्ररमर मोगन्यापर तो गारर यसला असता उत्कापात पान स्पाला वैराग्य उपम झाल व त्याने मुमार नामक तीर्थकरानकळ गक्षा धरून फाराग पाभट प पोग्श- मापनाचे चितरन मेस यामुळे मधिकरनामझम माधून नो समा पिमरण सामान्यावर ममत नामक मनुवरीमानात भामिद भाग परिपंचपप्णेमारडियान्वयनहफ् । समुद्ररिजय सूर्यपुरदनमि सन स्मव ॥ १६ ॥ भरतप्रोत हरिवदिशातील भागपूरचा गना प्रभमन प राणी मुफर पाना सिंहमेत नाराचा पुभ सासा स्पाच सम रिपु ग्माशी घाई स्याप्या पति दागिरी हेमगिरी पमुगिरी पगरे रामे होऊन गेले पुगाध देशाच्या शौर्यपुरघे रामा सेनाया गुरगर नामक मुलगा आता स्पाप्या मार्येच नोर भारिणी रिभ्या- १ वि २ प्रख्या वाचमा ४ थाना पुकाना बायो र ५ गिरप्पामभूत [११०] जिपरिम्मृतिशासम् । पासून त्याला भरफाणिप नराणि अस दान पुन शारे अपमा गणीण सुममायणीपासून या मुरगे यौन मुसी सान्या परिण मुग्गा समरित्रय राग शिग सामून अपराविनापा गौर अहमिद, नेमिनाय तोचकर शाया द्वारपस्पापमपाणिनो बनो मृगेक्षणात् । व परग्याप्पकवल्यं समीप नमाशिनम् ॥ ७॥ द्वारस्ती मगरलपसमाप्पा पाणिमहणाचे भेटी मासाहाराप्पा मेव मानौकरिता आण परिण पाटून नेमिनापाना बैराग्य उत्पम शाले पत्यानी दीया पेम आणि कोर तर फरून धर्मार्थ प्रार्विस केस नतर में मोझाडा गेग सा कन्यामारक मेमिमाप तीपरामा आक्षी नमस्कार करतो मिसभ्यनुसापर्मदपचिन्वागवीटमाद । अपरानियोध्याम्पद समविष्ठा मपन्तनानेमि ॥१८॥ मिठ, इम्पोत, सौपर्मग चिम्तागनि दिपावर, चौथ्या गावामदेव अपगचित सोमाया स्वर्गात मतद, समविपित मयत विमानातील बहमिद इतस्पा मारमस मेमिनाय झाले सणसणादाम्पा नीवा मामिपिता वप । सपस्सासर्पनिर्नामा सयम्भूनारूत ॥१॥ पुम्देशातील पमान गावात सोमशर्मा नामक एक भाषण १ मदिषषा २ नरिनाम्प लिया। पावस रात सवनियनः । सप मानो त्रिपपिरमृतिशासम् । [१११] होता त्याच्या मुखाच नाव नरी सासा मामाची मुगी समासाद न मिळाल्यामुळे य साम्पा अशक्ततेबाप बोकात टीका झाम्यामुळे वैतागून त्याने आमहत्या करण्याचा निमय फला शम्पर्वतावर वारमा पेसी तो गेडा पण त्याची छाती होना ते निर्नामक रशस अशा दोन शिप्यासह बुमपेण नामक मुनिरान विहार - रून भाले होते शमाने ना योग्य मोघ पस्न दीक्षा परिली पुढाड दुसन्या अन्मात मदीघा मौष शमर निर्नामकाया बाप रोणार असे न्यानी टुमण मुनिवरापासून ऐकले निगनस्तपसा माता महायक ससी पस । पपलचर मर्पपुर महसदेवत ॥ २० ॥ शिलाने गुमनिदान अध व निर्नाम्याने अशुभनिगन बांध नगमा हे दोघे तपमनतर समाधिमरण साधून महागुरु विमा- नालास देव मासे मापा गौर स्वान पवून बमुरेप मासा सौरीपुरात समुदेपापाम्म कोश निर्नाम्पापा गौर रणपरता पणून साला व त्यासाच ये िणापासून शस्त्राचा गौर बम्मन नमि फस्न साठा गरिम्पो कम्मो देसक्यो मधुरायां परिमा। वदिवासीजरासपी ग्रामदचोऽय पममृत् ॥२१॥ कृष्ण र यग्यम पापा नु नगर्सप अर्यात् सो प्रतिनारापम होना नऊ मारापणामतर अपच मामक पति होऊन गेग [११२] पिरितिशतम् । ॥ अथ पपासंग्राह॥ मा मामयनु कापीमयिवि पारिवमापुर । उग्रसनीय निर्पि मासानमनपारण ॥१॥ गगा प गैबरता नपाच्या सामावर एक सापांप जाम्रम राता गुणम प पारमनाम रान चारणमुनि न्यून पाठ अमन्य स्थानी वरम्पाना उपना करण्गा प्रपन का बटा रामन्यान पसात पनि दाउन हिसग परण होने तमप पाप साधमानहरमा त पगरे पापा उपश कमिए नाम पर मम्यामा परसा प त्पान माय गमा धाग तापत माहि स्यापा उपपामाची नपभर्ग पर सागठा मुनीठा पानाचे पुण्य भा रणाडाच मामारे पणून मणपति उम्मनान गामातील मोकाना बशी वादा की कोणाति मुनाना बाहार देऊ मपे पर महिन्याच्या उपासाच पारण करण्यासाठी बसिष्ठमुनि मनरेत मारे मामयिध्ये मिमीमन्मरासपासनः। प्रिमिनित म्पर्यनास्म द भिसामसा परान् ॥२॥ स्यारळी गमवापाग माग गगम्पामुळे मुनौना बाहार माधून परतारे बगल मया महिम्पाची तपस्पा पूर्ण हान्यावर पुन्हा बारामार्ग म भाउ अमता मम्त रची माझाट सुरम्यामुळे भा मर्मस्य २ मजुरामा गमागमतलपमे मठरा रम्पवाफ्नपानामा मारता त्रिपरिसविशाणम् । [११] सर्वत्र गरबर मामणे होती म्हरिते तसेच परत गेले तिसऱ्या मान्याच्या तपस्यनतर पारण्यासाठी ते बारे वसताहि उमसेन मरासघाने मानापिलेल्या एका कामास फार गम गेला होता थापण स्पत पाहार देत नाही कानादि देऊ देत नाही अशी टीका होऊगी निषिध्यवाति लोफोरसस्वतीय मास्पसम्पसम् । बुमा मृतो निदानेन सोऽभूकंसो नृपात्मम ॥३॥ मुनीन ती टीका ऐकली म तीन महिन्यांचा उपवासी वसन्या- मुळे भुपेने तो मेमा मरता मरता त्याने क्रोपाने नसें निदान से की, मी या पम्याप्पा पोटी पेऊम स्पाचा वध करीम स्पा मुनाचाच बौर पावती पास्न कस नामे पमन उपसेन राजाम झाम दोदो दुरीकारो शासकीय प्रवादिता। कासिन्यो समम्पासिता सोशामायया ॥४॥ पपावतीच्या पोटात गर्भ रूपाने तो मनि बाल्यावर उपसे- मा मास पाण्याचे गहाळ तिसा होऊ गमे गन्मान्यापरहि तो फार विचित्र मत होता मणून त्या मुछाया रामाने पटीत पादन पालिदी नदीत सरछ तो पेटो पछाया माटा मदोदगा मिळाग १ प्रामपुर २ मवारमात समावि परदेस र सनियमेक ममायभाया।

[११] परिस्मृतिशासम् । कौशाम्यामुदवोमाता फुमारोपतुनो रुमैन् । निपासित पणिस्पा पमुदेवमसेनत ॥५॥ कौशादी नगरात मोइरीने त्याचे पाकन पोषम फेसे पण तो सोकाच्या मुलाना हाणमार कप म्हणून त्याला दिन घरामदर घातक ते। सूरापूरला गेला व ते बसुदेवाचा मोकर मना जरासन्भेन राम्यावरी मीनपशामिपाम् । दाई मता निवजय सिंहरवं रिपम् ॥ ६॥ पोनपुरचा राणा सिंहग्याग जो कोणी जित पस्न जाणून देईग रयामा वर्षे एप प फलिंदशेनेपासूम मडा साडेती गौरमशा नामक मुगी मी देईन बसे भासपाने बाहीर के मदिरसोसिदेप परिपादुएसक्षमाम् । मिमी मत्पचिनानेन स फसेनैवि पोपिर्व ॥७॥ बसु ने पगरम गापून सिहरपाला पकाबनरासंचाया सापान त्याग छ तेहा स्पाने बरे एम्प व मीरपणा स्याम देकरेग 'या मुलीनी मा भिी पक्षण पाहून कम मामक या मा नोरन निमपाग वरून माण माहे मन स्याम्मच ती मुगा । मम तमुव सणाण तेन मनोरीमाप्तमम्पापयवाचनात् भानमन य द्राक्तस्मै स राज्याझ सवामदात् ॥ ८॥ १ पत्पुनान २ चपेममूमिगा। मादेन रता पसारी एप मविपा ५ रिग्यापण्प मापना तमसम्म पर • मनपा पमा नमि-1 सिरप मचामा ८ पापणा विवापि। बा हम पहन ।

विषष्ठिरसविशाचम् । फसाम्पा फुलाची चौकशी फरम्पति बाली तेव्हा मदोरते पेटी पत्रासह हजर केली त्यामुळे कुणाचा ठराग हाऊन मग सुपीने जरासधाने मापसी मुख्गी ष म राम्प फसामादि गृहस्वा मयुरी यया प्रक्षेपाद्रिस्त भैरता । पिवरी गोपूरे न्पस्य रुता सूर्यपुरास्मसम् ॥९॥ मा जम्मत थ माता पित्यानी यमुनेत सो पणून रागारागानें कस तसाच मपुरेसा गेण ती आपल्या साम्याच घेतली व गान मावपिवयना वेशीवर टागडे टागून तो मसुदेवाण बरोबर घेऊन गेला पसाय देषमनी देवकमिनुमा निमाम् । स्वाकाय मृत्पामा सदास्ताशामना ददा ॥१०॥ देवसन राजाची मुहगी देपपी, आपछी मुख्स बहीण यसुदेवाग त्याने दिली व निगमिषाने तिचा स्वीकार प्रमुरेबाने भतिवमुनिमान मिलार्य गृहमागत । देवफी तेऽनुमा सापो! पुष्णमान पाससा।। ११॥ एप दा मतिमुफ्त मुनि मिसाटी बारे want बिपना ग्या मनीछा प्रणाली, की पहा तुमची यहीण पचममोगबनाम तुमभ्याको अभिमपाने पहात बाहे. १ ममुनाग वामपपिस प्रिभिना माता।

[१५] त्रिपरिस्पतिशाखम्। सहा म्पनक्स्पनेनेवि वत्सल्पो नर्ममोदिव । वासपेपार मवो रणस्पा कति निधम्प तत् १२ दिने मी मापी पेण कसा ऐकून मुनामी शाप विम कहिषा मुसगा राम विवा कर वैध विपैन कवाप्पपिवकामिति । वारसामर्दित पद्मविभवेन महीमिमाम् ।। १५ ॥ तमा लिने गगावून त्या भोगम्भाचे तुकडे तुको के तेमा मुनी पुन्हा शाप PिM की या पापामहि मान वो तुम मनाय की मग तिने ते कोहि पापासाठी तुगरिक तेरा मनि पणाले की, तो देवकीपुत्र स्पा मा रम्प फेटन भोसा पिसमापिति तपतासन वन्मसात् । देसम्पा स्ससरे सति यापितोऽमस्व तत्पतिः॥१४ ।। तो निसन्मीचा धास्ताव में मुनिष पन करपार कमाने देवी माहेरीच बाळत होउ देवसे बसगास कसरि म स्पाने ते मान्य के ठेपीपमुठचम्पा मोमरिस्वान्पदा सनिः । दीक्षा नी स्पान मस्पुरत सोनोपत्सप्त पी मुवा ॥१५॥ भरमण समारंपरेतस्मिन्न मिल्न भमा मौषमता परेषा ८ भाषणे दुरापोः।

प्रिषष्टिस्पतिशास्त्रम्। पुढे एकदो पसुदेव देवकोंमें बतिमुक्त मुनाना पाहादान कलम वाभारि दोक्षा घेठ की मा मन विचारों फेहा पनी उचर दिलं की तुमाग सात पुत्र होता मरितारा यमांस्त्र प्रयोज्यमातिनर्पिता। सत्स्पन्ति पभिमपार्षपकी मापीति भारमित ॥ परिग सहा तीनदा पुळी होतात व ती दुसरीकोष मासीक सपटमा मात्र नचकी दर से माक्ति त्या भविम्यक्त्या मुनी नी सागितसे यसकामदिसमष्ठीमियमैनगमर्पिणा । सपीमाक्मवेरिन्दादेशेन परिपर्वनाः ॥ १७ ॥ मदिरा नगरातील पश्यपुत्री बम्का त्याचवेळी बाळरोत नामाच्या प्रेरणेने भेगमर्पिदेव स्याधुळपांची वादलाबदल करीत श्रीनलसीयैपकिंसानिमाया सोमपीतामात । सप्तम मास्पताशावरुष्मोज्य स्पोमनि ॥१८॥ तीन सेपप्या सहा पुप्रनो फसाने शगिर जाफ्टम ठार मा रसे चोप्या सेपेस ती माहेरी बाळत म होय धरी माछी कसाच्य पपा न हागारा असा बदोबस्त करण्यात भाठा पोप्टुं मन्दरह कष्ण हरन्सीरीपरन्पिता । * गोमूतावादीमगोपन्मणिदीपिका ॥ १९॥ १ पुगताः पिणे मनिी । नामा सैन रेसमा मा मन्त्र मवाभवामुला पीपुपाम् माता सम्मान । ५ मार्गमीपुरम् दो पुनो बता पा विमापापातमन् पमप्ररेण मात ।

{१९८] निपरिसतिशाप्रम् । बगराम वाणि बमुदेवा गणाला मद गम्म्याप्पा घरी जतन सपास पाटमा बसे ठपछि रातोयव मुलाण त्यांनी पोपोचते के परवाने रमावर छप पर होने वयाने स्पागाईत परते नगरबतेने मापी गप घेउन मणिम्प शिगांना के पारण होता पान्ती निधीये तत्पा-स्पर्शेदपारितगोपुरी। सम्प्रन्टोत्ततनयायसनाभीपादमादिता ॥२॥ मपुरेप्पा पेशी मुमच्या पा स्पर्शाने एकदम उमाल्या उम- मनाया न्यापशीर टाग होते त्याला रानी दरमाचे उम उडे पाहून आपर्य पानसें स्याग सर्व हकीकत कळल्यावर त्याने पना वाशार म पानादचपन्यानी सपामातास्मार्पणम् । नन्दरहस्साम्पपान्द पृष्ठमाघाताप की ।। २१ ॥ पमुनेने बभग होऊन स्पाना बाट कमन Pी नुस्तीच सम्मम्मी कम्पा घेऊन भद पत पाटेवा पाना बाटेंत मेटछा में मम पा भार रावोगत वापणामो पोहोचविण्यास हिती बरेमसे स्पाने सागितम्पायर स्याना बाशय कसम तस्मै वा सरिम्म रिम्मो सास्वागवी ग्राम । कैरम सस्वा पील्प मुम्ननासम्पपामतात् ॥२२॥ १ भवनिमोपानयपुगवारमालितीक २ मना । - विषष्ठिस्पतिशासम् । [११९] ती मुलगी फेऊन प भाप मुख्गा स्पाच्या स्वाधीन देउम दोघे घरी परत भाले तप कस बाठा व त्याने तिचे माक दसूम तिठा नफ्टे के सा वास्पा स्पिना निन्ये म्यापमन्पाऽगमरियम् । स्वास्गुठीमपी सस्पा उत्पतिविम्यवासिनी ॥२३॥ तिला गुम तळपरत पाठमियो मोटी झाल्यावर बाहेर काठ म बाप विस्त स्वमप पाहून ती खानम मुरतानामक अनि केमबळ दीक्षा घेऊन विने बिम्पपरसायर हुन तपपर्या चालपिछी शेवटी तिठा पाघाने साड तन पोर्ट परडेसी होती सौ पाहून तेपाल नगगी लोकांना आधर्य पाठप स्पानी रिप्पवासी देपी म्हणून मा बोटाची पूजा सुन केली पृष्टा एना महोत्पावालसेन वरुणोऽग्रसीत् । मातस्तेरिरिवि मुत्यो सं ध्यायन्पदनादिमि ॥२॥ एकदा मपुरेत बरष उत्पात भाडे सेहो परण नामफ ज्योति- प्यानी स्याग सीमितो की, तुप्ता पात्रु निर्माण झाला आहे ते ऐ इन पूतना मैंगरे देपानी स्पाप्पा तपासम्पासाठी स्थान पाठविलें मासिदामिस्तगएफसाभि समामि भिव । संपारी विमरगर्न समान्याय विरुत्पता ||२५|| १ ग्रापारनगन रिा २ मा माषम्नरपानीम- विवारिध परिसिमकसनेम ८ मिम्पपिमा पिर पाता।

[१०] विपणिपतिशम् । स्पा पूर्णप्पा मम्मी प्रसन्म झरम पाया गया जन्मात सफळ देणा-या पाच देस्ता होत त्या सात देवानी माया पारम केसी निमगवानाने रणाम मात्र भोटमा मान मदनवासमासमिकापता:। मिपासन्स्पसामकि समपिर ।। २ ।। पा मान देवानी माता, गारी भर्सन पक्षाची चोरी, ता- प, गाड + घोरा यशी क्रमानें रूप धारण करम कृष्णाम मारण्याचा प्रयम केा पण पाव त्पा समर्ष सम्या,पानी सांस येऊन तसे साशिवसे अप्टुं सविक्रम इन्तु इरुणपाऊत । मापातोऽरिप्रदरम्प जानु ग्रीयों पभा सगा २७ ॥ वापसा पराक्रम दामविण्यासाठी भरिएर काम्या पैठा रूप घेऊन स्प्णा मारण्याम सम्म पण रणाने त्याची मान मोहन प्यासी सस्वा गारपीनामापासछपनाप तम् । पिवरी स्मारती सिमामांना सरहपाम् ॥२८॥ देशकौरमुवानी म्याच्या पराक्रमाचा वार्ता ऐन गोमुची उपास केम्पाप्पा मिपाने गरम्पाये गते जार ते पानी पाची १ विरतनी मावा मममममस्मारि फ्णमामीरामन ।

त्रिषष्टिस्पतिशासम् । (१२१1 पूजा मे ते देवकोप्पा स्तमातून वापोबार हुग्मधारा परस्पा गोपनमाादृष्टी नीषोऽयदा गपाम् । सोपीचयामनु शेरवान्यूदेवेंगामान्सयम् ॥२९॥ एकदा अतिरिसाठी असा रुणाने गोवर्धन पर्वताचीच गुनी करून गापांचे रक्षण के मधुरतील माचीन जिनाम्पाजप कीर मामवतप्पा मदिरात अहिशम्पा, धनुष्य , शण होतान राने कृष्णाला दिसा रमा साम्पान्ददाम्ये सापयि सवामिति । से वमोपिवेऽसौ वान्मान्ननोऽसापयन्महान् ॥३०॥ स्या बहिशप्येपर बवून जो कोणी धनुष्याण बाण सामील रशस बागीय स्पा मी माझी मुम्मी देईन तेन्हा स्पर्मान रागाचा मुख्गा मानु या नामाने हप्णाने त्या वो गोरी फेल्या भ्यानी प्रमझ पारि होते ते पण स्पा की मामूम काम नसून दुसन्या कुमाराचं पाहे पर कमाने स्पा कुमारसा शोधून पाणण्याची बाबा फेला सव समपामटे गोष्ठे फेनाप्पनुदवम् । वनोदस्प हरिसितम सेमे जनाक्षिप' ॥ ३१ ॥ स्या भाषेमुळे भिउम मदगवळी गान मोहन गहा म्यारी से गाऊन राहिले तेय एक दगडी लाम होता तो कोणादि उपा समत नरसे तोपणाने उपण्याप सांभी शाबासकी मिनीर्य १ मधुण्स्पाना म्याप पूरिपि पुरयाणे पुरानाम् ।

[१२२] परिस्मृतिशासम् । मस्पाग बजे भक्त्या महानोग पितुगिरा ॥ फर्स सहसपनागि ससरोमान्युपारद ॥ ३२ ॥ कहा दिवसांनी नदगवळी स्वप्रामी परत बाम तेया पाग एसम्यासाठी काबिपसर्प म्यापी रासण करतो तें सामकमळ भागून देशी भाशा कसान कमी मंदाप्या मारने कृष्ण में मागास विडून हि माणून मक मपाहतो नूपेणामामानन्दो प्रमन्गमम् । मंगस्वोत्सावरदापि रुप्मेनोक्तमपी पुतत् ॥३॥ भाणम्पा महासह एका कुस्तीसाठी येण्यास नदगवळमाया कसाने नहा केली स्पाप्रमाण कम्ही मल्लसणासह तो मभुरेत प्रवेश करीत बसवा पायावर मोमत ती सोडण्यात वाम पप्णाने त्पासा स्माचाच दा उपदम स्या दस्ताव मारले गत्वासमा नियुदेऽसी मायुंक्त नृपामया । साऽपि रम्ग मविश्पादा पारं समप्यान ॥ ३४ महाचे बाजामात ते गेम पाणाशा रणाची कुस्ती पण एका षणात स्पानें स्पाठा चौच केसे तेयो स्परा कस उरमुखास सम झाला पणाने स्याण मुस्तात ठार मास्न राइसे स माफिरतपुष्पपिरिपाई पपिचरी पर। मंप्रपति प्रीतास पूर्व पपी ॥ १५॥ १नाग र मानमान मनमा मारिसमा नया-समातिभिः ।

त्रिपटिसतिशाखम् । [१२३] सर्व देवामी स्याम्पार पुष्पहधि केळी स्पा पापल्या माता- पिकना बषमुक्त काले अनेक मांडलिक राजे व भारपा नातलग- रतो सूर्यपुरात गेला रानीवनसामुत्वा मुस्तासन्तुं यद्मवान् । शास्वा पळी मिताकासयरन मारिणोत्तमम् २६ जसपशेनें अपमषाला फसवपाची हकीगत मागितली तेन्दो स्याने वपराजिताग व पापन्या मुख्ना मारी सेनेसह पाठविपण पराजिस भाषा नसें ऐकून कापमानाला ग्याने पाठपिसे सत्वापान्तममयं तं गस्पाम्पी पाठवा स्तिाः । मठीप्यानि पृथु पास्पन्मिार्गे तत्फुलपवा॥७॥ माम्पयन पाइन पेन मारे नसें ऐकून सर्व पाश्य सूर्यपुर हस्तिमापुर, मथुरा मगरे गा सोहन समुद्रकिनारी गेष्ठ काम्पबन पाप्पा मागे गठा सम्हा याइप्पा बुटो बसेने मातारी म्प घेऊन बात पेटविला आणि तो मानारी पातच बसग कासपानाने हा काप प्रकार आहे. मणन पारम्पार सम्पा मीतने मापा पादमपुत्रानी प्रामस्याग करून स्वता माळून धेत भारे स्याचा हा पातळ भाहे असे उत्तर दिने पूरा मरायपमविश्यामि मयान्मृवा इस्पृक्तोऽस्तियापुर्गस्ता ता तयापदत् ।। २८ ॥ १सपापि महिवान् २ पुष या मार मयुधा पाराम अपार मात्पुमो पारन Aपरधि स्म ।

[१२.] निवरिस्पतिशासम् । मातारीच्या त्या मोकपार निघास ठेवून काम्ययन परतम व परसपान स्पाने बमिमानाने बाफल्या दराज्याचे समान सांगतम कृप्यावाष्टोपनासो पासापोपाम्पिनगमम् । मारमापारुविमेन सिधू सोऽसमयस्सैरेट् ॥३९ कृष्णाने समुद्रकाठी गाठ पसाचें बमशममत भावर रोपा नैगम्दगाने पन त्याचा सगितले की, धोपाप्पा बाकायचा एक देय परिपातर बसून त् समुद्रात बारा पोममें ना पासाठी ते नगरी बमेस त्याप्रमाणे पसरूपी रेप मान्यावर कण पावर स्वार होऊम समुवान गेछा स्य मुळे समय दुमगन एक पेट बम तम नमाम्या यक्षपदारमवीं पुरीम् । पसवस्तम रुष्माधीममिकस्पानिकोनिवान् ॥१०॥ साप्पा मोरस्म पुराने त्या बटारर रकानगये पसक्सिी ने कृष्णा याद रात ममताना मेमिनाथ तीथरापी गर्म व मम पाणि साम इम्स इस्विनशाखावा म्पास पराशरात् । वस्था पतराशज्या पाणष पिरापरः ॥११॥ बनिनापुस्त कुनमशाचा पाति नामक रामा रम्प करत होता स्णा शतकी नामक राणापासून पराशर नामक मुख्गा १ मुरम सरपरस्त पर स्वामी द२ सम्मा।

विपष्टिस्मृतिशासम् [१२५] शाळा स्यापा मुग्गा म्पास म्यासाछा मुमदा नामर भोपासून तराष्ट्र पोडप विदुर असे नि पुत्र झाले मृतराष्ट्री नरपविषष्णिपुम्यो शत मतान् । दुर्योपनादीन्गान्यो स्यापीयानमीमनत् ॥४२॥ वृष्णि रामापी मुनगी गांगरीपासून धृतगर रामाला दुर्योध नादि शमर मुमो साले फाममदापर पाण्डी कन्यां मन्ती गैत र ॥ भातसेवृत्य फालिन्याः फर्ण घम्पापिपाशुपद ॥४३ परमाग नामक विधायर हस्तिनापुराजवळ पनकीम फरीत बसतो बांगठी हरवली व सौ पाइटा सापटी पार्ने स्पाला ती की सेवा हो वागठी जबळ बसली मणके यारेस तेम्हा गुप्त होता येते बसें निपावराने स्यामा सागितल तिचा उ पोग करून कुचीनामक कुमारीशी पोर आन्यपण समोग कर न आटा मुख्या पमापावर स्याम्पा कानात पुल पास्न पेर्टस पत्राम्ह टेऊन ती यमुना मत सोहन देण्यात वाण चपापुरचा पमा पारित्य यास ती पेटी सापान त्या पाळका पालनपोषण केले यपिष्ठिरादीन्सोभूना ताममा पफनीप्णनाम् । भीन्नपा मग नामासादरस्तुमोऽस्जद ॥ ४५ ॥ १ पारस्प पुगी सुमद्रासममा २ गानाम्पा । मान- सिनमारोगगुगता।। उपमुपति रामनाम्या पुर्व मणापा मिल परिबनो । पावर्णमालाविलेन पापिन स्त ने पापुपत् पराममाय मपम्प पलाऽपुषत् • पुनाने पंच मनुस् भयना ।

[१२६] त्रिपरिस्मृतिशासम्। पुढे पायबाघा स्थित पाप पफरणीच्या फुलानामक मुलीबरोबर प्राण व वियापासून माण युधिष्ठिर, अर्जुन माम पसे तीन आणि कुतपासून प सरदेव साठे दयापनाइयो म्पार्म मरासपमयाममम् । मुभिष्टिरादय रुप्मं विपक्षसपोयतम् ॥ १५ ॥ दुर्योवनारिकानी कपटी चराम्मापा पक्ष घेतलाम युधिष्ठिरा विकांनी शधा माश करण्यास उपुक मारल्या कृष्णाचा पक्ष मागासन्मणीराम परियापदामपान् । ते पकिगते मामा इति पृष्ठा मगम्भमा ॥१६॥ मगधदेशातील नादी पश्य समुद्रमार्गाम म्यापार फरीन बसतो शारफेस मारे घ नेपीस पैमय पाहून भमित सारे ते त्यांनी रस्नमाणिसाधी सरेदी केण र सशी परत गेमे भयसन्मयनाग ताराने या म्पापा-यानी दारविमी की कोणत्या देशातील मा- हेव मम पान विचारध नसतात मणाले म येप्रमिदारपस्पास्ते दिग्पा यसमका । तो मापुरचारमाप्तरशस्मामरयामिता ॥ ४७ ।। बाम्दा नहमी या मागान प्रवास करीत असता मापाने मस्ती फोन गेग वेहा बाम्दी परारती बेगस गरों में पेठ रात्रा १ मपपर सपा २ पाना परिषा सपर्वमा नाच। भम्भो।

विपरिम्मृतिशास्त्रम् । [१२७) कृष्णाने सनाय के वाहे ते फार मरमराटीत भाहे तेयूम नाही करने जाणठी अलवत्पर गुदा युप्मा प्रत्यार दमदान् । इसि नारदाचारारत्या सात्वा यांत निवितम् ॥ १८ पादयघि भार ऐकन्यारोर मरास्थ चिटठा य से अमर- शाची वर्णन मन पर त्याचा TIT फरम्पासाटी एफरम निघाला नाटानी तो येत असम्याच यसमान पप्णा सागित मारपा नारयाग मापन पट्न जाउन खप्न बसले मसून म वाचा टोल मिरविणारे मत्तमाम है परप बाहेत असे प्रयसव मणान्पाहि मारदाने प्णाला मागितल यामारि पुरीमेसो रक्षमि स्वाप स्मृत । * मिरपुमतरतास्मित्या नर्मदात्या नर्य गिताद ४० पा नगरीवर शत्रु पारन येग आहे निष रक्षण पर बसें रण नमिनापाना प्रणा तेसवे जोम् मन इस प्यार स्न भारगारा जप मिरणार बरपाना पारसे फरक्षम मन सि मनिरपरररिम् । परसा बरखपम्ग मितारिरगिरीम् ॥ ५० ॥ आ3 मिनामार यति पान पण पुम्बमा. या गायें पनपोर पुन मगनं मोरया मानेच १ मारला पणाममा मिपामारीमा पा सामान म मन [१२८] सिरिस्पतिशासम् । त्पाग स्णा मारस याप्रमाणे सप-मिळवून पाने नगरीत प्रदेश के पकपक्तिमापहम्मपनुदणासयों पर करिमन्यापास्वष्टिनीसासाणि पोटच ॥ १ ॥ पाइकि, गहा शेष, धनुप्प, , उपार मगरे भोरप्या Pको होती मिमी त्याची पाराणी असून त्याब मोम्यागार मिया होत्या रत्नमालागासीरमशष्ठान्पप सस्मिता । देन्पबासन्पलस्याप्टर मिय मावी सस स्पिती ॥१२ रानमासा गदा; नागर मुमळ ही बसपापी मापुरवा स्पाया बाठ हमार लिया हो या त अचाने एकमेकावर प्रेम व काळ पापात हत भास्महान् जसक्रीरामनोहरसरोगरे । सम्मान्तयामिक तगाम्भमिमामयोः ॥ ५३॥ एका सर्व सावध मनोमर सरोगत मनगरपास गत नेय ममिनाय व सरमामा पाचा मनोदर सपाद शाम सस प सपनायन्त साद तामपति माइ। सस्पभामा प्रतिस्नानप नमि स्ममभिपत् ॥ ५० ॥ १मा मादेमाल लामा २ बम्मनाये गयी । ४ मा वत् ५ मारताने ५ उमला।

त्रिपष्ठिस्मृतिशासम [१२९] नसक्रोरेनसर याने स्पांनीही 'द' पणजे हे बम धे पाणि पणन सत्पमामेपु त टाकले किं नागभय्यामाप्रम्पोर शादीम्ममपूरणम् । लया कार्य यद गामविशस्पेक्दीरिवः ॥ ५५ ॥ सुमीण थोडेच पाहात की पार्ने परिशय्येवरज शाह घनुपाठा गाण छापला शनि केटा तुमर्षे स्नानवम मी काय पणन बुबा असे स्पभामेने मर्मोद्गार फारसे नवस्तपायुपागार गत्पासी तदसायत् । वामिकमुतत घस्तम्यामार्य स्मरोदयम् ।। ५६ ॥ तेव्हा नेमिनाप माषणात गरे व से भरलेल्या महि सम्येबर पान त्यांनी शामा धनुष्याला माण सारया र शसप्यान फेला तो धनि फुमुमधिप्रामाहात पसन्या प्रणामा ऐक्गमा तेषा सानाहि भापर्य नारों की मेमिनापास रमरोप कसा झाला' माप्याग्रदयं प्रायोग्रसेनं राममति मुताम् । अपामारोपपत्तप्णस्वपामाद्रवासान् ॥ ७॥ उपयशाप्पा रामा उमसन्फो साउनपणाने स्पाची राजर्मा। नामक मुलगी मागन आणूम नेमिनायाबरोबर तिमा परीर उभी करम प्णाने मगधाक्षता टापा १बनुमसन पतमापूर परवीर तानपिना पाचार पति पास ईरिता प्रोट बमामा पत्रर वाममार नि. बुना ७ निपम ८ मा पानी [१०] विपरिमविज्ञापम्। पाम्पसकसपन्यपुसराम्प नाशभकया। मृगानाम-प पृस्पा वा शिलपिता स रसमान्॥५८ पाणिमहणारे रेळी दुसरे दिवशी माता बनी शंका बाली की नेमिनाय आम्या राभ्याचे वाटेपरी होतीस मणून चिपापान पुफळ पशु मेवानीभ्या मामासाठी पाने आणाने से हीसा पाइन नमिनाथ मप्पास पनीर अनी न्यासा सात्री होती पर फशादा माणडे पणून न्पनी रिचारन्यास मारुन त्पाप्पा मामाची मानिनि मानोपासाठी प्राण माहेत मम म्पर उत्तर पाम प्रणान रक्षरम्ना शिकसून सर म्पहिना म्यपार रुप्मनत इति । नमपालगपपममियायासाहि दिन ॥ ५२ ।। मिशागफनामारी नभिनाय पाममात बसून चासो वमता नण पान पा विधाग्ने रणाने किम्पिाप्रमाणे रक्षकाना हर कि पाना समय निर्षिप सस्मृत्प सपुरामपान् । शाकानामपिमाक्वा स गोमर्मतिरामका ॥६०॥ हम च पर नामनापी बोळसा व परम पावून स्वत प्यार पानाचे मरण दुही मातेरा तपदा करन रानी- १त्रनम्मष २ मा पर्वतमाल पासनाचत ।

त्रियटिस्मृतिशाखम् । [१३] गति रस्त वाहे मसे पाहून तिष्यहि मरोवर घेतले व हमारों रान- पुत्रासह दीक्षा घेतली सहसाम्रपने भिस्या तप पट् पञ्चपासरान् । नास्वोनयन्ते फैपल्प प्राप्य मोई वित्य स ॥६१॥ ते सहसाम्रबनात जाऊन राहिले व पासष्ठ पिस पानी अनशन मत वाचर पारणे कापावर स्पाना संपत्पमान साठे यानी मोहाचा नाश केसा प्राप्ता रैवसकोपान कृष्णं वलममुघद । देवकीसत्यमामाया गणारिष्टा फयां निनाम् ।।६२॥ रैषसफउपानात मेऊन त्यानी कृष्णामा सवोपदेश देख्न देक्की, सत्पमामा बगैरे बियानी हि येऊन गणपराना त्यानी यापापसी मवावली मिधारी मपम्नादि मपान्पृष्ट्वा शास्षा पा रे फियत् । राम्प भानीवितस्मम्स सीरिणा नेमिरवरी ॥१३॥ प्रद्युम्नाची मवावठी विचारून ऐकल्यावर हरीम्या प्रेमाने योगामें नेमिनापाना प्रश्न विचारला की हे हरी राम्यमष किसी दिवस टिकेस तेम्हा ते पणारे दीपायनस्वपी सात्ला मेप्प मत्सत्यपक्ष्यति । द्वारको दादसाम्दान्ते पचयादमकोपित ॥ ६॥ १ गांणा माक्विा २ परिस्नऐन । बर्णवर मत्वा पभामा .

[१२] सिरिस्पतिशतम्। बायनितर मापानाने मोम्मत छापा पारसायन राब नए पर दीपायन तप बाचस्त यादनामुळे कोषित होऊन द्वारकानगरी जारुन टाकीस परि भरतमारोऽपि कामाम्भीगइनान्तरे । मुप्प पाते बनण भ्रान्त्या सयौ इनिप्पति ॥६५॥ कोणी गाळाड गाठ माननात रुम तानने प्पामुळ उन नियम असता पंगग हरिण समम्म जरायुमार ताकाट स्पा- स्म ठार माराम एतप्युलामनिदा पिसा साम्पाया । अपम्नपिमणीयम्पा मोली दक्षिामपिभपना परीस मविप ऐश्न पहाण्याना रेराम्प उत्पम मासा मादि मुछे । रश्मिणा गरे मियानी मोपपदापी दौसा म्सामीप्या पण गणाप्या माईने घेतली सम्मरमानिस्दम वमार्य मंदिप दीक्षियो। मपुम्नमाप नियामा मिरनामिटिगा ॥१७॥ परकेचा नारा ऐगार हे पाहून समा बनिम्मारि टीमा पेतली व प्रपुनासह ते गिरमार पतवर मोमाग गेस रामप्पापा ससस्स्पन्धियोरपुतास्तपसारमुकः। पमावास्प माहेन्द्राममस्ती करिप्मवि ॥१८॥ • AAष।

जिपतिस्मृतिशाचम्। [११] गरिमणी वगैरे विषा मयुत नामक स्वर्गातून पेन, नार मोमाजपातील.मदेव मरेंद्र स्वादन फेऊनम कण प्रथम नरका स्न पेरुन तप कस्ल येथे तीर्थ बनमितीस वर्षात् तर्थिकर हतार नेमि पुनर्षिहस्पोनी पल्लव देषमास्पिवः । भय मारवसिपी साक्षामेश्ममवेशिवा ।। ६९ ॥ नेमिनाप पुढे मिहार करीत पाठय देशात गेल मारत सो पाने वसे नारे परिष लाक्षागृहात कुरुफान रामुळे टाकले गेले इमि सहभारिस्पाभित्पावासरंगया। सापदानन्तु प्रौपार कम्पिल्पायर्या स्पर्यपरम् ॥७॥ पण फपट बोळसून मुरंगाच्या रस्स्पाने पारस गधागातून मिसटले व बलुत कर्मे करून त्यानी कपिण नगरीत प्रवेश के भपिश पामयास्तम विदरापो युषानप । वत पार्यास्समद्रापाममिमन्पुरस्मिसः ॥ ७१ ॥ ते स्मानी स्वयबरमापति मरेश फेग बर्डनाने पायेध (मस्पभेद ) करुन द्रौपदी मिळपिछी पुढे ममदाहरण अर्जुनाने सेप तिम्पा पासूम स्पाछा वमिमन्यु नामक मुम्गा साग प्रौपपामिगपुमॉनाम मनपोऽन्यमरनमात् । देशानिमान्तिविर्गुप्तं भ्रान्सा दस्विपिफमा ॥२॥ १ दुर्गा नापेर २ पसिनामपुरस्कान पिपुरेष रामरामप्रस्पप्प नम्रा पापानिमापर यमेन निश्चिमा सरमा महकर्मवासना पण परससरपाः पुपा मईना प्रवे स्म . प्रमाना ८ भूमी प्रसाद याममावि वा।

[१२] श्रिीस्मविधानम् । वर्णनापासून द्रोपामहिकमार्ने पांच मुम्मो भाने सर्व वध कातगान छिन पाष पारवाना पाम प्रगट केला एवं रन्त्या पर्मपुशे दुर्योपममहीमना । मिला इस्वरले भिस्वापाम्मपुरामः ॥७३ ॥ दुर्योधन राजा वरोवर धर्मराया खेळाबरम मणन सा वातास पल शाग होता पण स्पानवर औरवाना मिलन त्पानी पक्षिणमयुरेत मास फेला पानी पुफळ देशातून ममण के भत्ता दारमतीदारापाप्प निर्नेदर्मा। मातमन्मान्यरास्ते निधन्या नमुखये स्पित ७en धारका मम्मसात् मात्रमी ऐन त्याना राम्प प्रास हा व ममिनापाकान आपको ममाम्सी ऐकून से निर्मप मुनि सासे रानुनयापर गेन दिदस्पनिमाणस्वप्तसारसूपा मिसपिरे । कान्लयाम्प्पय सिदि पाडेया स्पेसिमा दिपम् ७५ तेप त तपश्चर्या करीत बसता दुर्योपनाचा माचा मासा , माने तापलेल्या मायापी गमभूषणे स्पा पार पाती तरी स्पानी म्पानाम्पा मारती नमी स्पामुळे कुतीचे तीन पुर सिर पदाला गेम । मात्रापे रोन पुत्र अनुम पाचम्पा सर्विसिदि नामक गतीमानात देव पाये १ पान मनुय प्रावि मरे पायम REA . ३ नमः स्मीमन् ४ बातम्नवोपनास्ता ५ॉफ्ननिय मा.

त्रिषष्ठिस्मृतिशासम्
[१३५]
अन्तीमुपदादौपचानिर्वास्यत्पच्युताच्युता ।
भाम्पदनरकायुष्क कपणाऽनुमाप्तशुदरा ।। ७६ ॥
अभ्युत स्वगम्न बासेले कुती, सुममा, द्रौपी गर स्निया
से चीर मोशाला जातीठ नरकातील थायुकर्म पापलेला प्रणाम
मोब मात्रापासून म्हणजे नेमिनायाग्मन शुद समम्पकरष्टि प्राम
करून घेता साठा व तार्थकर नामकर्माचा क्सन प्रयम नरकात
माराप्तान्स्यनामागार्भ मच्छमुरप्पपात् ।
नेमो सिदेऽय साफेत घसायां प्रमणो नृपात् ॥९८
स्याचा शत्रु जरासंघ मुदा मरून तेथेच गेला नेमिनाथ सिद
पदाण गेसे नतर अयोम्पत प्रमराना व चूलाराणीचा मुलगा
अमदच चक्रवती माला
स्वगादेस्प सर फबिधादत सवाऽमयत ।
स भूस्पामोसिमममी माविक्षन्सप्तमी सिविम् ॥९९
तो स्वर्गातुन पेउन बापती बनला होता व मेम्यानतर
सातव्या नरकासमा
समानुपामधिप्रांगट सयंडप तयम् ।
भस्म्मो मायकसुर सीरीमाद्रमा मिनेन् ॥१००
मुमानु पहिल्या वर्गातील देग चिप्रगद विपापर, घोप्या
१नेमेस्सरपामाससम्ममा २ भाषा पर्मय ४
सचतुर्पमोडीवा।

[१६] निवरिस्पतिशासम् । स्वदेश, सभी, मालिमानातीय देव को ममापी फिस्न बन्देष भाम सात वो महोगात बारे पु तार ममूवरसापनपम्पपदवीय नरकोअपमान | पसोर्मिनामा महादिशुकीजयुतीध्य पाानि १०१ वपतरसायन स्वयपाकी, तिसऱ्या नरकातील गोष, पक्ष माता- ना मनुष्य मिनमा, महाचकपिमानता देव वशी मनापसी मो- गून रुणाचा मौष नरकात गेडा पुढे तो तापकर ईल ॥इति मीनेमिमापपपकृष्णरास पत्रमपत्तच की परितोत्तरं द्वाविंशम् ॥२२॥ पीदनेबारपिन्दस्प राबो मन्त्री परदिन । मरुमूविरमुद्रामा सहमाप्तागमधिरा ॥१॥ या बबुद्धीपास दक्षिममरतक्षेत्रात पोदनपुरम्या वरबि मामक गमाचा मामूति नामक प्रामण मंत्री होवा रामासर स्पानेहि जागाचे पान मिळपि गते फार पूर्वापासून वो स्पाचा मत्री होता रस्ते परुणा ज्येष्ठ सभ्रास्फमठे सिया बम परी सरकान्ता सहावा ममतीवि स ॥ २ ॥ १ ममरते २ मुतिस्मृविधामविपिसी पर पातम्ममा ।

विपरिस्मृतिशासम् । [१३] माह कमठ नामक भाऊ होता स्पाप्पा मोचे मार वरुणा र मातीच्या मार्येचे मांव पसुपरी होते कमठाचे प्रेम पपरीपर होते तिम्पाशी वा रममाण होऊ शगा तुधा माठ तुझ्या भाषेसा मोगतो बसें वरुणेने महमूतीमा सागित सामानास्पान्पदा रेमो रप्ट्या तपेष्टिव स्वयम् । मिमाप्येनं विगाप्यासा अर्ट निरमासपते ॥ ३ ॥ सिला पोम्य भवासन देवन मरुभूतीने स्वस ससून बसून स्पाया प्रेम पेय पाहिल्या राजाश सागून फमठा पार गोपसिंधु पनामितपः फर्मन्स माइव । मनान्पदा सहपेशीगाप्पांभिर्प प्रणामिना 10॥ सिधू जवळी तापसपशत शिपापम्पामपळ जाऊन कमपने पचाग्नि साभन मामूसाने पुन्हा रानाला विचारून कमठाभा वामय घतमा स्थापीते मकी करीत असे मसापमानेस्व प्रोपानपान धीम्या तव । मसय हप्नास्पान सभात सहकीपन ॥५॥ पका मामूलि याचे पुट मम्न प्रार्थना फव बसता पूर्ण- स्मन्ज, मोगाविध रोज्न कमदाने ग्याग दगराने ठेचून मा- माभूति १ सयपायोपिम्पलालापारिक पाता निमावि ४ नगरे वापधरम्मा विद्यास्तसमीपे . मानक माधिना निमस्प किया ८ ताठ मानिस •मनापेराम्नान ममामीन मनामिना मतमा मालि प्राणी । [ १३० रिपरिम्मृति सम् । र तेहा मन्पायर तो ममपर्वतावरीष्ठ मुम्बक मामक सउ नातामा पमपापा गमेन्यप मनासीरणा मिया। सार्थनामागमिन्दर यान्त सम्मदर्मात ॥६॥ स्पाचे मात्र माघार होने पम्मा मन्यानर पूचिमामुळे हरीण मनन व्यापाठ रादिगा मारक सरासरोपर सम्माशिसरण पोरेम जा पात्य अरम्झिराजाने मुनि साल्पावर स्याप मनन मुकाम कम होना पन्दित संस्सरस्सीर भविमापागमास्पितम् । माय मरमा पन्तकामी पस भीमत्ससामानमा प्या "नासाठतम्याट मुनि भासम्म वर रामा प्रति- मायोग धारण करन प्यानम्य वमला मसना पापोपची संप दिस्त करन पाग मारण्यामाठी आला तेरा याम मुना मनारी भीम्मयामम मि नम्प रयामसा जासिस्मरी स्नेहादस्म स। मैन मीपिना पर्म भापरुप्रवमग्रहीत् ॥ ८ ॥ पिन पाहून त्याम्म पूर्णम्माचे म्मरण शाब रानमती- मुळे स्पामा मारम्पाचे विसरून त्याच्यापुरे सौर नमवून तो मसम्म पान उतरम्पावर पररिदमुनाने त्या भारतें मि निती २ यापनात सामसीन।

निरपिस्मृतिशासम् । 1 - वदामभ्यत्पघाविम्यनम्ना भासा परदिपैः । गुष्काणि वणपपाणि खादन्विध्धेस्वमम्मु प ॥२॥ व्हापासून पापमयाने तोहची समीप काना व वनहि उपस्त करीत नसे इसर हसाली पारळेळा पाठा पाचोळा प ष विध पाणी तो फिरून धापमा पाळीत असे पारणापां पियन्सीण पातु नेगमती चिरात् । पसममा समुदढे पवमानोऽ प्यञ्चमुवन् ॥ १०॥ एकदा अनशन प्रत वापराम्पापर पारणे करण्यासाठी तो वेगवसी नदीतीरी वाला म चिप्ससात रुतला फार महशत माग असल्यामुळे बाहेर निघण्यासाठी म्प धम्पर केसी पदि सो नि शकठा नदी मृता दट पकुहीमसेन फमठेन च। सासार मुख मुक्त्वा स निलोफोचम पुरेम् ॥११॥ कमठाचा नीर मन कुमुट सर्प माला होता त्याने पूर्व और स्मन्न हत्तीला श केला त्यामुळे तो मम्न महसार स्वर्गा- तस देव बनम मावाउन पुप्फलावत्पाममिग लगाऽन्पदा । से सपस्पारिगिरायो फेवसीहत ॥१२॥ स्वगादन तो मात विदेहमपत, पुष्कलावती देशात, १ उपमसामनामस्मरपनाव्यानुभूत मामिग मस्तक बनाया हिना नलिन इस्पष ।

[१.] विपरिसतिशतम् । निलयापर्वतारास नियतमपुरात विपापपा गया रिपुमति बरामी मन्माण पांच्या पोटी पनिवेग नामें करम पम्मम स्पाने सूब सुरोपमोग मोगापावर दीक्षा घेतली हरी नामक पर्व- वाताव गरेत तो तपस्या करीत असता त्याच्या समस्याम वग- रने केटाळे भाले गर्पात् गिठि भूमपमादमगरीभूतन दिपवा गव । पुष्करे सक्तपर्मास्लादेस्सास्मिन्पपमपंग ॥ १५ ॥ कुरमुट नाग मप्न पूमप्रमा नामक नरफरत परम पून तो ममगराचे जन्मास गेला त्यार पागपने पूर्वऔर स्महान वाप्निग मुमाग वारकून गर मारसे नेपून तो नाप युत सात पुष्कर निमामात देव माग पुर वा पधिम सिर खेत पर नामक देशातार बमपुरणा राग पापार्य र राणा शिवपा पाप्पा पोटी पानामि मारने चन्मया पसी भानिस्तापपरेसनामिस्वपाऽमनम् । पठभभावरमगाम्पो मिष्ठो मृत्यायकम् ॥१४॥ या पानामि बकरीने पाच पैमर मोगून मह तप बाचन रमें कमाचा मार बगर मेन्पार साहम्पा मरकत गेण । तेम तो हरग नाराषा भिड होमन मन्मन तो फर कर होता धूम प्रमा मात्र २ बद्रीपारपरक्सपोमा मार पप मपति पोरोफ्ल्पनालास ।

त्रिपरिस्मृतिशाचम् । [११] इवस्तेन ममद्राम्पसे प्रेषेपपत्रमे। सरस्वासमतोऽदानन्द ऐक्ष्वाकु कोभसेपरः ॥१५॥ पानामि मुनि समाधिमरण साधून ममा नामक मम्पम नयक पिमानातील अहमिद देव भाषा तेथून तो जगात फोरमदेशास अयोप्या नगरीचा मायाकुमशाचा रामा वमबार परामा प्रभारी याच्या पोय मानद मामें करन जन्मला कुर्षमष्टारिके पैत्री स स्वामिदिवमन्त्रिम । पापाभ्यर्य जिनेदापमा द्रष्टुमागवम् ॥१६॥ एकदा स्पामें मदोपर पति चैत्यालयात बहानिक महोत्सव स्वामिहित मामक मत्र्याच्या सक्षपानुसार फेग तेही तेय दर्शमा साठी वान्या मुनाना त्याने विचार मस्पा पिपुसमत्यास्पं गणेश मगम फरूम् ॥ गवना मिनेंद्रा मार्पता कि मोदिति ॥ १७॥ विपुग्मति मुनीना नमस्कार करुन पो मणाा बिनाप्प मवेतम अशा मूर्तीचे पूजन केले असता पूनाना काप बरे फर मिळते! सोनोपदपिदाम् सौरपादनगवा धनम् ।। न वस्तुतत्परीणाममक पुण्पाद ॥ १८ ॥ १ सम्पावनियमापमान २ मिनरे । पुरवा मलाना मनमा ५चनापीयप व स्परेन पर्व पति वेषा सोपालमा बस्तुपा पारपाममा पुम्भनर किन मास बाप तु म।

[१२] विपरिस्पतिशासम् । वापुस्ता असून विचारलपर्णनम् ।। मागपम्णि प्रतीपारिमास्यमिनमन्दिरम् ॥ १९ ॥ ते पणाले की बाईचि परी अचसन असो सरी उत्पन होमाया पायावर परिणामाषा प्रकार फेठा वर न पदार्य पुण्य पुगशाया स्कष पनरिन्पाशिकार कसा रासा निम बिशाल पुण्प पुनव समुदाय भव्य मोराना गुम परिमाम उत्तम कर ज्यास निमित्त तो बिनविामुळे जिनमनिह परित्र ठरते बगैरे उप श म त्या राजाने मूर्यविमानात भमसम्पा मिन- मरिराची मारपूजा केली इमं सानिनगर कारयित्वाम्मरसम् । पके माग्यो स्याघालीफ विमिनाम्यम् ॥२ ॥ पान पाराव्यामन्य नमधित मुरण निनाम्य बान याताय मूर्यविमानम्ध मिनगि । मामा की या महापूजा मणम चतुमुम पूजा रपाखामा मातीमत्र पूना गरे त सूर्यामा अर्घ न्यिापर पर भिननिय मन फेस मासे नी मूमा पाणेक पूजा पानें कठा प्रस्पन्वा दे मार्क मिनग्यायो युनाक्त छ। समाप्रमूनि मौकऽस्मिननाममोपसपनम् ॥२१॥ मो राता राज मूणन मोफ पूमा करणो से पाहम सर्व एपनिमान पनि २ सम्मादरमम ३ गुनासपनों महापारिक मालपमेन पर।

बिपरिस्पतिशामम् । [१३] प्रयानन सूमि वर्ण देके मगले व तेव्हापासून सूर्योपासना स्वभाव समुद्रदचाचपत पस्सिात्सान्स्पनाममृत् । भयु सम्रादेत्य सिहीवेनानतमध्यप ॥२२॥ नरोप प पग्पषमा मोगात असवा होईषा शुभ फेस पाहन स्पाम परम्प उत्पन सामे य समुद्रात मुनौजवळ स्पाने दीया धऊन पोजमापनाच बितन फेल व तीर्थकर नामकर्म बाप कमठाचा नाव नरकातून सिहमानात जमला दावा पूनर स्मरून त्याने प्यानमग्न बसतो राजाला उपसर्ग कसा व मम्म तो धानत स्पर्गातील प्राणत सिमामात देव साठा वैवाऽस्य सकाशीशपषसेनगुभाऽभवत् । पारशापयामाप्ता पर्ने सम्रादपन्य तम् ॥२५॥ घून तो बीन फागचा रामा विमसन प प्रमाथी याच्या पोटी पापनाम नारान जगमम सोळाम्पा पी पदा बनात गेठा फमाचा जीर नरकन निघून प्रभूप्या मापा बाप महीपास रामा हाऊन जन्माला घाला मीपासास्यात्ममावा मालमव मिपामत दीक्षित दारु भिन्दन्तमा बीमायितु नगी ।। २४ ।। १ एग। २सम्परा मोम मानवेश भूरिसर्फ मिनाया ४ मानतात् ५ मामीला मठ • प्रात सपए ८ पुनःमरी समामि।

[११] निरनिस्पतिशासम् । सो मसो मास्वपस्तिन्मा सादिन्दमिदं मिद । सवा दीमकमा वेन निन्य वसिपंप्रगा ॥॥ महोपाठ यायोप्या मरमामुळे दुमी रोज्न मिप्पा तपस्सी शाम स्याच बनाम पुमा पेटवुन पचाग्नि सापन करत अमला हाता धुमीतील एका माकन सर्पयुगा होते हैं जोयान पार्य नाथानी भसविसामफ ता कमन माप मापदा अस विचार" हा प्रश्न प्रभूमो नमस्कार न करताच विचारसा आता त्या माको सर्प युगल माहे आणि ते अळयामुळे तप कसे पाणार यामुळे स्पपी गगारंग पासून तो कमठाचा जोर पूर और स्मन्न अभिकन कुद माता र स्याने व साल पुराने फोडलं, छिमारस्ता नागेन्द्री भाचाररनिवा। पद्मारठीपरणको समामस्तम्पमस्व स. ॥ २६ ॥ म्पातून दोन तुकडे झारसे नागयुगठ मार परसें मुमीम भूमापने उपम्याची सरमिसना सी त्याने पच नमस्कारमा उपोश रिम्पाने नागमुगस भरणीट व पधानी माझे मिसापास्पयध्याप्पापविश्वामित्रम्य स । अमापा पुग्न स्तुत्पादागमापनाचसयम ॥ २७ ॥ १ ममस्मता २ रामनना चील मा पपरमाम ५ पिसार जम्मा मानोपानी मसाला नमुप गरमनापपरम्प मोनापन मा ८पमा मधणना नियष्ठिस्पतिशासम् । [११५] पानापाम्पा तिसाव्या वर्षी या यारिपति जपतनाने घारे बगैरे मेट दूवा नगर पाठरिटी असता अयान्यस झाच्या अषमासिार्थ कराध मणनह यान कल ने ऐकून पानाधकुमायनी दीक्षा घेवली विन्य चतुर मासाध्यापमपवन स्थित । सवरज्यातिपामर्त्यभूतन खगमनसते ॥ २८ ॥ चार म ने विहार कमन सीक्षावनत न्यानस्थ असता सपर नामर पोलिपवान आपल्या मनाला प्रापळा होऊ लागला मान तकारकरी दीप्तपैरामिनासरिरूपसँगमपटुत । दिपी परम्पपास्तम्यापचिम्मारायस ॥ २९ ॥ पूर्वऔर आठमन प्याने पार्थनाथमा खूब मटपनि कस्न उप- सगको कारण ता उमटाया मम होता पूर्वगमी माफ्ल जोर पाच स्निगचे उपकार मिरन रणद व पभापती पा नाग देवताना यापारर नागपणास्त्र धाम्न उपसग दर केस स्पाटी चार चातिकमाचा पूर्ण क्षय हाऊन त्यान' केवस्थान प्राप्त साठ धर्मामृतमपी सृष्टि फरवा मध्यपु नियत । संपाचं तापाचमायप पर्युपास्मा ॥३०॥ मा नायर धमाताधी म्जर निवाणास्ग रोख स्या पार्थनाधापी भा} मानिमारण सा उपासना परसा १रराथन २ मा विमानरमानात् ३ गडी सिमामा उता।

[१६] पशिपतिदायम । मसतरशानियाप मानाराध्य पारेगाऽत्तमः । मामिरमानन् नानती मनव पानिनम् ॥३१ मरी घर निर महस्रारम्पगोसाय प पिापर, नयाग लि नामिपम, मरेपमा आमिर न' वामत रात तो भरारी माग्न भासम्मा पाताप पर कामी मसन परतो फमट पारस पममनरकी पयस्तम मितिन । म्यापासायसिमा नरफी नरपाऽय सम्बर भितम् ॥३२ ५ मट, र पाप मरफान और अमगर, भिड गा | भरतरा TP मिर नारकीर, महापार ग म मर मरम ५ जी सरर २ मात्यावर वा नीर मम्प माज्ञा इति श्रीपाबनयम्य पार्षिशम ।। २७॥ मात्र पुरमावस्या मिल्लान मधुक रन । हनि सागरसास्य समय दिम्मिमारत ॥१॥ बयान - पुषणम्ती ATHRE मधुम् । पा मत रहात हाता भिधानीम्पापापा का fश पुर र सागरन नामर मुनि बिहार करीन | पर पन मासे मायाम्पमा ५ भीपानामापे भिसाव व पुरपपिपरिन । LI पर 41 प्रतन मरकरा त्रिपष्ठिम्मृतिगाजम [१७] या न्तुफामा मृग मत्या च्यापराम पुन्जना। दम देनायरन्तीति निपिढी निजभोपया ॥२॥ एम्ग हरिण ममन मुनिम पुरयामान प पाठा पण स्याया बारिता नामफ भायने न आ त प्राण माम् नका सन स्पारा रोष पान्ता तत म ममादिनपस्यागमन भित । गना सीपममत्या मून्मरीयान्य मृताऽग्रणी ॥ ३ ॥ मनीची भेट झाल्यानर यानी धर्मोर फका पाचा स्पा मनापर फार परिणाम होऊन पाने मध यगरचा बाग मन्या सवामुरता मेन्यावर सौधर्म एगात भाग नसन तो भयो- प्यत मरतगनासा अमतमात राणीपासून मीच नान फस्न पुत्र मम्मसा मररोपानन्तमत्या पुम्मासा दीक्षित । परीपदादिलो रख फसमरकादे स सायम् ॥ ५ ॥ अमावाबरोवर त्यानेहिला त ? Bot पण मठोर परिपद मान न सान्पामुळे तोपत पळ माउ गा-करें नेसू रागा भयपनि चमेतस्परस्त पान्सर भय । त्पाविष्टो देवतापि पारिजिनामात् ॥ ५ ॥ पापसा २ पाप पारमारियाणा रोड।

[१८] सिरिम्परिणामम् ।
निप्रयाणा कपन विगपर मायामाचरण निगम
थाह पग्न ।
पानर पर अस पानी माविम्या
स्याने परिवारका कारण या
मैनास्तापि मम दिपानमाात् ।
नेपामि माग्यवत्वानि कपिसाराममियात् ॥ ६
रुपमतीयपमान दौसा धतमी भर्नाह तात
पर शकाला माही सदम सोन पाने संप मामा मिप्पा
मत गर्गन सुन कर कपिशादि बनेक रूपमा त्याच शिप्पता
एवं प्रपामर साभरिनी रिसाउनेय ।
सैभिमदेगो स एप्पमित्रसौधर्मनाकताn on
पुट तो मम्यानंतर पाचम्पा मगांत दर सहा वे
अपाम्या नगरील करिट नाममात्र काटीपासून चरित मा
पुरनारा तार करच पत्रिक बनवाब मेन्यानतर सौ
समान भाग मंतर स्पूणागार नगरीतील मादाय प्रामण
पपदमा नौगम्मन ना पणमित्र मागाने पुत्र अममा स्पादिप
अमरक्षा नगर मत्यावर तो मोगर्म सगोत देव धामा
पिमाध्यापिसासानमारमामिपिमा ।
नती मानिमा भूस्खा मारदानोऽप क्धुत ।।८
१ मारिनाममा परम्परपच रम र मेम स
स्म २ पूष सपा प्रारमिला बाम्पीया मिरमा तपमा म
पर्य।
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विपहिस्सविशामम् । { ११९] सेपून तो मृतिका नगरीतील अमिमूतिनामक प्राममास गौतमीपमून मिह नागने पुत्र साग पग्विाजफ दीक्षा घेऊन मेल्यावर तोहि सनत्कुमार स्वास देर साठा पुरे मदिर नगरीतील गौतम मान्दणास तो कौशांचापासून अमिमित्र नागाने साला यपरिणामक मन्न मेल्पायर माहेंद्र स्वगीत-प धाय पु स्याष नगरीत सालकायन प्राम्हणास मरिय भीपासून मारदान नामक पुत्र झाला किती दक्षा घेऊन त्याने व तपश्चर्या फेठी मेन्यार तो माहेट स्वर्गात हेच साठा सतमसस्थापरपु समयनेषु पोस्कटम् । पार्टी स्थावरविम सनमानै माप पूररत् ।। ९ ॥ नतर त्या जागान म स्थावर योनीत अनेक मम धेसम्यार तो राजगृही नगरीत डिम्य मामणाम पाराशरीपासून स्थापर नागगन जम्मम परिवानफ पनून मन्यार तोह माद स्वर्गात रेय माग रिपन पय नापन्या भूत्वा निग्रन्यदीक्षपा। मार्ण गोऽवामूत्रिपृष्टोध्यान्त्यनारप ॥२०॥ पुन्हा मग पदयात रामगृहीचा पना रिमसि प रामी जनी याच्या पोटी निधनरी नागने नग्मठा स्याने दांना तसी गायीचा बका सायन मेन्यामर नहाशुक्रस्पगात मानिफ भूपति पुत्रा [१५०] निवरिस्पविक्षाधम् । देव माण तेमन तो पोइमपुरचा रागा प्रजापति व राणी मगा- बर्ष पापा पारी विट नागने पामण सोऽय सिंहोज्य मार्गोत सिंहो पाऽभून्स मात्वदन् । किचिन्मृगमगष्टम्प सामितगमन से ।॥ ११॥ पामितजनै राष्ट्र तीमनायत । स्मृत्योपन्य वमन्यास्स भिसामेनमुनाब स ॥ १२ ॥ रिट पिकवताने बरेच वैभर भोगन्यावर मझ्न तो सातम्या नरकात गेला तपन सिंश्योनाव जन्मला पुना नरकात गेला व पुवा सिंद सम्हा मेधे तो एकर एक रिण मारत समत बसत्म अम्तिमय नामक भारम मुनि बार व स्पामी त्याचा वावर मून स्व धर्मग्रोध केला तेव्हा सिदाम पूर्षभवा पानशाले मा मृगेन्द्र त्रिपृष्ट सन्दक्त्वा सौम्प पिफमव ।। मास पाधव यास वम स्मरसि यपना ॥ १३ ॥ मुनि समाउ है मगेना, त्रिपृष्ट वर्षचक्रवतींच्या मस्त पाकनि ठ मोगकेत तिपय रिसरलास काय ! त्या पापामुळे गुण नरपाल दुग भोगारे गठेही विसरलास काय ! दम्ब पौरभ मा वमीराप्रपापमृत् । सपी नातिस्परो भूला तलमपणसीदया ।। १४॥ wal PF प्रभाव पास भगिनात.

प्रिपष्टिस्मृतिश्मनन् [१५] इतके दु स मोगल अमूनहि ह पुन्हा पापापार्जन करणारे यसरे रिसार्म को करीस आईस ? मुनाच । कपन "कन सामा पूर्वमाचे स्मरण झाछ पशुपुदीन य ने तमान ऐमठ मेपमानो गसमाप्प या साऽभुत्सदय रक । रिमोक्यैप शुमानपीस्पापं स पनि पु ॥ १५ ॥ सरहान एकून तो अधू साठ्ठ पागा - म्य च अग का उागसे हे पाहून स्याघ शुभ पिणारा मुनि त्याला पुन्हा मणाला मुन्न पीम महापापं मम शार मग नुवम् । महीदि कापशमुख क्षम पढामिछसि ।। १६॥ मुश सिंहा तुला जर कन्याणाची एपडा बसेस तरह हिसचे महापाप स जगईप अस शाल धारण कर मागद पापरूपी शाहग कर Tar स्नीन्द्रनारयानि भुत्या स्यात्वा मिन पनि। वरवादानमासाप सप कामदिमम्भिव ॥१७॥ मुमीचा उपदेश एकुन • मिमा मग्ण र पान रन स्या सिदानमा दिसाधि प्राम फमन मार कारण फल मणिपाप महदिन भारफानन मुभा । मृपा सापमफल्पसा मिापन मुमऽमनि ।। पा मुझ माने भारागुन मन । म्यानुन म मगर तो साधम मग मिह नामक " माता [१५२} रिपविसतिगापन। मुलं युक्ता मामुत्ता पातकीयममाम्पमन् । गगादा मगमापस्या ग्रचर कनफनमी ॥१०॥ मागमुग भागून समून नो मार पानको पात पूरमहराचन पूम्म निपत मगराती देशातीउ विजया पर्वतामा उतर बार फनरममनगराध राजा फनपुग्य विपायर म राणी म्नम्मामा पाप्पा पारी फनामे म नामाने पुर जम्नम फनकोसनामा रन मर गना मन । अम्मा नियमनधर्म नप भिवा पया नरम् ॥ २० ॥ मनका न फनरसी नाम माम मागपछ पर्वतार काटा गीत पसन्द पाम प्रिपमित्र नामर परविशनी मुना पान मायाप्पाफान नर्मना व धरण समन म्याने दौसा प नसीब नर वापसम मयार तो सामनवम्बगान समानद नाममबभामा मगनना मपचम्याग्रस्पाम्पियोगसाधिप ।। रिपमा माफ नात मीनिस्करा प्रसाद ॥२१॥ नधन तो विच सम्मान गहना पाया पोटी हरिपण नावान समस न्य उपनमाम्या रक्षा बन पान नप मार मोदार मान: गात गेला निकर नान माग मम्मा पाग्य नायक पृष्फरगन्यमवर ॥ मिमित्र मामार माध्यस्मयममस्तव ॥२२॥ मण्यमुनी रिपटिस्पतिशासम् । [१५] तेभन तो पातकी मर्गस विवह क्षमान पुकारती देशा- र पुरीरिणी नगरधिा राजा सुमित्र व राणी सुस्ता याचे पोटी पिपमित्र नावान महा चक्रपताच पभर वरच थप मागून प्याने शा पेवन व मन्यार मो मइमार म्पगत मयप्रम नाभाप माग - छपामारपुरे भस्वा म नन्दारल्या माक्षितः ।। पाहिलामाम पटरान्स्पं जान पुप्पात्तरऽयुन॥२३॥ बसूरती Bापुरचा रामा ननियम गणी परिती पाना ना नापान नो पुन साग पचमुर भागन्पार त्याने मौपित मुनि दीक्षा पतली प नोटा नाचनाच चितन पम्न नर्षियर नामस्न बाधये ममाधिमास नर पानतर गा माटाच्या मिल पुष्णान निमानान साया मुस्ता पि नायस्प मिलायस्पारगमाभनि । माघ इटार मा मृत्लाभिपरणापिम् ॥२४॥ पिन प्यरन पापून ना कि हामी पुराचा राडा मिर५प रागी परिणी शो FT नाा फल जमा छान निर्माण पीर भारदमानःपत्यस्पनमपप्पपाद । मम्पाप म"या पम्पास मानन्नम्मीलितान् ॥२५ पिपभोन्द्र । भग्नान।

[१५] नियमिमनिशाकम् । पौर वर्धमान अशी स्पोपो दान मागे ठरा गरी जम्मा नतर त्याना पाहताच जपान व विजयनामक दोम पारण मुमषि सशय दूर सास निची मयसनाधयारिणा विमपेन च । उषेप सन्मविन इत्युक्त प्रमोदसौ ॥२६॥ म्हा स्पाना समति से नारहेछन ते दोघे पारण मुनि जान मन परत गले पीर प्राऽननस्युक्ति पुराणोमिन्द्रसंसदि । भत्ता सममको मेपुरामवस्त परीमितम् ॥२॥ महापौरपामा शूर वादे भी चर्चा समेत बाधे- खी एकून संगम मामक कोणी देव स्याची परीक्षा करण्यासाठी गेम रमा श्रीग्न्यापानमोसो नृपास्म । कापसपरै सार्च सबमोमिमाफमी ॥ २८ ।। इतर राजकुमारसह बगीपाती सागर जाम्ळ रामसे रामपुत्रासह महापार गटन बसड पाइन तो देव महासर्प बनता मृत्वा पटिनमाम्मन्यावस्पोचयतीसिता । पिपिम्पा मिपस्या गमपुपाम्परमपिता ॥२०॥ स्मा मझारापाने धारापा गुप्याला विळया घारापेला पान पारले रामकुमार पापारम्न उत्पा मामन पटन गेख १पन पाण्यामHिATRUT । भूमो ला।

पिटिस्मृतिशासम् । [१५५ ] बोराऽस्पादाम्स भीष्मं माकेबदरीरमत् । सत मीता महावीर इत्माख्यो यस्प से व्यपात् ॥३०॥ वीरनिन मात्र न भिता भईया मीर सेळम्पाप्रमाणे त्या संगर सद सागर तव्हा म्यूप होऊन मगम देवाने स्पाना महावी सन्छ पतो निवून गेला सापप्रतिभदबान्त स्मृमपूर्वमयान्सर । नपिप्मुनिदरसा दीक्षिस्पा पम्पमध्यगात् ॥ ३१ ॥ पुट तीस वर्षे वयास झाल्यावर महागीराना पूर्वमनाचे स्मरण साठे व पराग्य पारन पानी दीक्षा घेतमी प धमध्यान चालगिर रुला दुगानुगा दौष्ट पाच स्मशानेप्रतिमुनतः । फदाधिस्मतिमायागमाश्रित मीक्ष्य दुएपी: ॥ ३२ ॥ बिहार करीत करीन ते एका वतिमुक्तक स्मशानात पम्न प्रसिमापोग धारण करन यसले असत्य दुर्गेसर हान दुप्पणा सुर्स केला यांगाईसयितुं पारान्तालान्द्रारान् । किगतसन्यरूपाणि नासामन्यादीस्तया निशि ॥३॥ वाम्या पोगरगम न्योपान र पसरविशा मेलाल पा- ना अगाळविकाळ परन तारन व कास पारपिर मपपर सर्प मम्मत्त हा निमग फेर पनि पतिरा मोसाट्याचा बारा सुरू केला प्रप किग मन्य धार . मानुस्नगपामान ३ गगमदय सम्पपान पारतिस्प ५पानीमहिला [१५६] नियटिस्मृतिशासम् । विपारमात्महत्येप मना विक्षसमक्षमा । सं मातिमारोऽसीत्युक्त्यास्तान्मदानम् ॥३॥ या सगनी महावीगना सूप उपसग फेस पण तपोनिषण मोगर महारानी वफ मन मिचितिविपत होऊ सि नाही हे पाहून तुर्मा मइसिम्हागीर आहा म मणन रुवान प्रमुभी जानदाने नाचून मनुति को स्न्यां घटपरामस्प पन्दनो भारिसी धन ॥ म पन्नी पीध्य पामावा म्बा परिपपगीयजत् ।। बम साची मुरगी पदनानारिमा पनकोग करीत असता लिण पाहन कामात HPAT एफरियावर निय परमून मत होवा मरमामापिनी मन्चन्मााटन्याममाप्यताम् ॥ पहाशास्त्रसम्मानीला कागार्मामापपदन: ॥३६॥ तस्यान नापी बापका मान्यामुळे निपावरान विमा राना- नघ सा कारक मामा भिजागतिन पाहे अगिन हिले वाणि चर्माक्सग पा भिजन लिग मामर भिरामाम दस्न मारमाराप्या मिपारनाक मरिगण्या पानी स्पा ती परमसन माचरामा भागौम का नि जान अपनसेन ममा नमपि पु पसिनगरस्प ३ मनाया भग्नि पर बनयन नियष्टिस्मृतिशासम् । [१५७] एना वृपभसनस्प प्रप्यस्यापि स्वयापित ॥ सोऽपि समान्वसम्पकप्रीस्निी भालासिता ॥३॥ शेट्न निरग आपम्या सायकोची दासा मणन ठेवले पण शेटजीचा तिम्या । समग बरेउ या मीन तिन घग्नंटा ज्या पारन पैदत ठेवित भरावस्यसधान्पान्यमीणकोद्रपठित्सया ॥ साममाघयदन्यमुल्पि चयासमागतम् ॥ ३८ ॥ तिळा ती माम्यातून कोपा मात पवन सापाला दत बसे एकदा माच गा/ मिसाठी महावीर आसे वीर मत्यूपता मक्स्पा सपागलितमाला॥ दिन्यम्पाम्पग केमध्युतपुप्पाविवक्षिति ॥ ३९ ॥ महावीर स्वामीच मक्कीन स्वागत पर न बसता तिप्पा शुक्ला तुटम्पा तिची बह न्यि धामी फेस सशामित मास कमवम पुणे जमिनीवर ग्टून ती मदर सि लागली स्पीकृत्य नीलमापारम्पदिमीमवसरागम् ।। सीरभाल्पादनीमत तस्बमक्तमयोजयव ॥४०॥ शौरमाहाम्पामुळे माम साम्या असे काम मात पार साठा म स्पाचा मीनार मानी+7 सापचार मपम ननाम्न २ मा म्पाबा मम्पन् महा ४ा मम्गीती एमपरम् भी पीरममान गनी पिना मनिमम ॥

[१५८] पिरिस्मृतिशासम । पवारयायव माप्य मंयोगस म्बर पुभि । निर्मिपाचरता सागणिनीअरिनाम ॥४१॥ पाच मा निर्माण धार । आ तयार गरी पण पराम्प उपच होऊन तिन निदेशा परी तेहातची उदान पूजा पंडी पर सहिपच्या मजुमानट म्पित । भुकम्पार्नन घातीनि निरन्त्यमासदव ॥ ४२ ॥ पुत्र महावीर पारा 4 विहार फम्न अनुमान सी। सुस्पानाय यसम कमवा त्यो । घारी धातिममापामाश झाला असे अईराम गेरे मास्वा दिय्यपनॉट तस्पेन्द्राभवपारगम् । भावं गोतमगोपिमानास्म गवणन् ।।१३।। न्याळी पिपनि पाच कारण आळा सगौतन गाविसापारगा गौतम गो वा भूमि नामफ प्राणम्फडे गेश प्रमूनि बानि म बिमानस बसतन तेथे जन्मगता प्रामानुपायेनानीप सा पासवदिमः । सप नीत्मा रचित्तापन्न्त्रिमूर्ति गणाभिपम् ॥१५॥ पाचशे मापणास समूतावास्या गायन आणण्यात बार १ वसन् २ पनि मुमपापा: भारीपर्व अस्प मान पिातारा ५ पामरागत रिस्पनापरख मनाम्न मनिपामा ७सुर परमनन । ४ भास्ता विपटिस्मृतिशासम् । [ १५९ ] रयाने मागिता शमा विचारस्पा बाघ ममा गान मान्पामुछ सने नशा घेतली पाप माषा नाग फरणारे सप आचरिलें सम्हों को छमूनि गणघर हाया मिचिनवरचिन्नुस्माइन्त्यपर पढम् । पर माप्ता महावीर म दिश्यान पर पदम् ॥४॥ तास पाना काही कमी चिम महत पर भोगून में सह पाडा गले से महावीर आम्हासादिधर पर पोत म्यमांसमधुत्पागासाप स पुराना । पां मरीचिदिपीमय परसारान्साम्प्यतो गत ।।४६ पुनरपा भिल्ल मप, माम प मराचे दागामुळे साधर्मम्यगा- प्रत गेला तमून मावि होऊन द सासा र महा रेव्य सभ्य मनापा मारण पाडा वसम्रसस्पाररप पिलटना सम्प्पिा दिनोऽमपन् । मगन्ता रिपनन्दी सपि निग्रन्धदासया ॥ १७ ॥ मतर अनेफ प्रम प धारर पानीग मन्म घेऊन तो मन्य मान हम माग पतगतीसोनपिनी नारा मिष्टान्पभ्रसिलो पपम्प नत पसन् । निहाध्य भारफनापत्तिश्प इताम्पगः ।। ४८॥ मतर पगतान लिए माया पुढे मरफगतान सिंह सामग-पग पापर १ रियाना।

[१६] विशिम्पनिशमम् । नांना रिपण सन्महागुम सनाऽभवत् । पियमिम सध्या नन्न मपरयुतन्त्रताम् ॥ १९ ॥ गतान म्पन्न पण माग मा दक्ष शऊन नियमित भाठा नतर मार गित जाऊन नाग ५ मा सम्पुत्र पगाताग वतदम्युता पिरग्यावसयममाप्य फेपनम् । पिाय पासिदा मामी नमामि वम् ॥ ५० ॥ यून प्पन ग महानगर बाग प बराम्प पायनशा था- म्पार नपापरण कान न्याय केसवान माय मान पमनार्थ प्रपतन कम्म सिदफ मिडियामा नमन करण गणमृत्वान्सत्यसंपमापपिसस्लिप । विकिपदीनगन्यज्ञानिन बमक्षमा ॥५१॥ पादिनमापिका भारिकर भारर गण । पादप्यम विपस्तान्नमस्तीवनायकान् ॥ ५२ ॥ चार धारप सामान्यमुनि, अधिशानी Aनिग क नुनि मन पर्यभानी भरतनानी पामभ्य अबक्सा मर पापा सन बापट मुनि पवारिका पाक व माथिका यी तिवध प्राणी वात या वायकराना मा भम्न कर) स्पाशापराम्प पिटि मफिनानि महापुराणांतस्तत्मसार्दा मारपुरार्ग पारियम् ॥ शेष सरसिपले गणघर त्रिपाटस्मृतिगाममा [१६१] ॥ अथ प्रशस्ति ॥ भीमानस्ति सपादतसविषय प्राकम्मरीभूषणः ॥ नम भीरसिधाम मसफर नामास्ति दुर्ग माद ।। मीरल्पामुदपानि ना मिलम्पाघ्रर्रपामा ॥ सणीमसणवो मिनेन्द्रसमयप्रदायरामापर ।।१।। घम, वर्ष फाम या तीन्दी सपतीनी भरपूर असा शाक- मरीभूषण सपारस भामकश आहे त्या देशात रविघाममाल- पर मामक मोरा पिया र तेध शुद बशा पारेबाउ यशाप्पा श्रीमान् रक्षणशाइना श्रीरनाम्या पोरी निनशासनानुगत असे माशापर परित जन्माठा भाले सरस्पत्सामियात्मान सरम्बस्वामगिनत् ।। य शारं गुण्ये रंभिवाजुनमपतिम् ॥ २॥ मरम्मताच्या पानी पनि ममा गग गमा गारि परमातीनाम माया पाटी VIE मामा पंग म fना पान मुनरानाम्ग पार या गुणान पर लिनन पाटलक्षविपग पान गुमक्षति । मामापिनरन्दा परिमापन गाममि ॥ माप्ती मामरमण्टा पापगार मारसन ।। पा भागमपठप्रिनमिनिराकमा मारिन १३॥ Ifनपसिन • तार मा दिना।

[१६२]
वियरिस्मृतिनावम् ।
मोरागाने सपा ममामक दशा पाशमस्त म्यार उपमा
विकला हरकत पोहोबा या आसान रिम्पमरेद्राच्या वाभपास
मारपदेशातम्या धारा नगरीत मैन महायपासूम जैनेन्नम्या
करण न्याय पा निमशासनाच मापन करीत राहि
सामवचनम्पासराम्प भारफसंडसे, ॥
मिनभादयार्य या नमायपुरश्नसत् ॥ ५ ॥
भी अनोवाम्पा राम्पासास पाण्यात जिमघमाचा
परण्यासाठी मस्क पुरस गरिस
याम्म्याकरणाम्पियारमनयन्ससपमाणामकान् ॥
पतीपरमासमाप्प नयव मस्सायनसिपन् ।
मल पास गयेन मिनमान्दीप पपि प्रादिताः ।
पीचा पाम्पसमा यस व रमिकप्पापम्मनिष्ठा नके।
स्याने कोणपा विधाप्पाना म्याकरणापी स्मुवा पलीकर
मन माही घरे परतापरमर पाप्यारन हामामामुळे
कोणा प्रतिपक्षार प्रहार बेट नाहन स्याम बिममामाचा दौर
गजमागावर सायम्पामुळ मोम बिनधोक पागू गठे माराव
त्याची कापमुषा पिऊन रमिकाममें योगी का प्रतिष्ठा
निजीटी ना
पमामृताविधामाणि भापिपियामिर ।
मगिर मारामार्प रमिलार्मा ममत् ॥५॥

त्रिपटिस्पतिशाखम [१६३] फुशास्तुदीची पोसफ मामृतादि शालें व रसिकांप्पा प्रमो दासाठी सिम्यका महाकाष्प म्याने रचिल साइमाशापर फण्ठपसमर्नु सपमणाम् । पलिकासह ग्रन्पमिमं पुण्पमरीरयम् ॥ ७ ॥ म्या मी घा वाशापर परितान धामिफाप +ठ मषित करण्या साई पाचन प्रथ रचला कार्पम्पिक मदीस्तैस्तयाप्येतत मया । पुम्पसियाकपारस्नान्युमत्य प्रयिवान्पत ॥ ८॥ भारमयाचा सागर कोणाकडे र माझी अम्पयुमि कोणी- को! तयापि स्पा पावनसागराचा मी स्पर्श केला प सजनाप्पा साठी त्पादन कपारन काबून मी त्याचे प्रयन कसे संमिप्यतां पुराणामि निस्यस्पाम्पायसिय । पति पणिवभागाकादिप्ति मेरिफात्र मे ॥९॥ निप्प साम्पायासाठी प्रेसरशलामा पुरणाची पुराणे सशिन काम पावशा पायाफ परिवानी फेरसा प्ररणाप या प्रपाठा पारण माळी यमपस्यतया किमिदनास्तिस्वर्सितं मम । तरमशोध्य पठन्स्वनं जिनशासनमाक्तिका ॥ १०॥ जिनशासनभक्त पुन र माश्या हास्न काही भारम साप है धार करन पापोत मम मन पुन्पैः मरिमाप ममा नसेल तर ६१६१ निपारिस्पतिशासम् । महापुराणान्तस्वस्वसम्मा पठवामियम् । विपटिस्मृतिनामान रिदेवी प्रसीदतु ॥ ११ ॥ विषरिस्मृतिनामक महापुराणातील हा वर्गव तवसमा बाषणा-पार सम्यम्दष्टि देववा समोचो ममारपेशवान्दुिदेषपासस्पात्ममे । बीमअनुगिदपमिस्पेम्नापन्तीमयस्पमम् ॥१२॥ परभार बसपी समुद्राला पविगत करण्यास त्राप्रमाने असमा जो देवपाल राबाधा गुप्र जो बैतुनदेव तो मापस्या तरगरीभ्पा सामान बरतीय चागले रक्षण करीत असता नलकापुर भीममिपैस्यासपसिषत् । प्रन्याय निगयफपिममासमात्यये ॥ १३ नम्म्पुरताल नेमिनाथ मगिरीत हा प्रप विक्रम समत १२९२ मन्य मिद जाला साल्पियो मरणसमसभी मुधा सा ।। पीनाका पर्पता येन मिसिसास्पाप पुस्तिका ॥१५ ग्पामा पहिमा प्रत लिहिली स्पा माफिम्ममाज म्म्ममा मोमुत घनाकानी भरभराट को धम्मतिप्रसगेम---बाय विस्तार पुरे १ धम्मापुरपपुरापास्मापासात् २ सयमापवा । विरत प्रसव पर पा मामिममय विमा १२९२ अनमोपा

विपष्ठिापतिशासम् ।
[१६५]
पान्ति क्षन्तनुवा समस्तमगा सस्मएका पार्मिक
भैय भीपरिपर्दवा नयाराघुरों परिमीपति ।।
सद्रियारसपुहिरन्तु रूपयो नामाप्पपस्यास्लु मा ।
मार्प पा फियदेफ एस विकलो अपस्पतिः १५
सर्व जगाम सातिमायजिन शाति कल्याणाचीदिकरोत
पामियाबरोबर पुण्याची पदि होगो म्पापनातास वासर बसवन्या
पप्पोक्सामा पाठो कपिजन सरियेचा प्रसार करत
मोगाजहि कोठे म रगो दुसरे किती मागा कम्पाणकारक अशा
मसिनापा अपमयकार होगे
इत्यासापरपिरविता भिषाष्टिस्मृति ममाता ।
पार
समाप्त

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Trishashthismritishastram

Author
Pravarashadhar, Pandit
Title
Trishashthismritishastram
File name
Trishashthismritishastram
Text
OCR done
Citation
1937
Published
2011/08
Publisher
Solapur, Kalyan Press
Language
Sanskrit
Pages
178
Library
Acharya Shri Vinaychandra Gyan Bhandar, Jaipur
DLI number
314103
Barcode
99999990312250.00
Scanning centre
Banasthali University
Digital publisher
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