Shree Jubilee Naagari Bhandar Bikaner
Haad Saat-e- Hayaat
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हादसाते-हयात
मज्मूआ-ए-गजल
गजल संग्रह
निसार अहमद 'अनजान' बैस
थाइर
हादसाते-हयात
गग्गूजा-ए-गजल गजल संग्रह
निसार अहमद 'अनजान' बैंस
कायमग्वानियो की मस्जिद के पास
मोहल्ला कुचीलपुरा
बीकानेर-334001 (राजस्थान)
-
मई 2003
लेखकाधीन (शाइर)
प्रकाशक
ग्राफताब प्रकाशन,
बीकानेर
सस्करण
सरया पाच सौ प्रतिया
मूल्य 125 रुपये
मुद्रक रोशन प्रिण्टर्स, कुचीलपुरा, बीकानेर
फोन 542883
Haadsaat-e-Alayaat
Ghazal Collection
by Nisar Ahmed 'Anjan Bains
Rs 125/-
हादसाते-हयात मे शामिल गजलो की तरतीब नम्बर গলুল सफा 9 10 2 12 13 3 4 5 6 7 8 9 45 46 10 11 पहले-पहल जो पाव उठा राहवर हुना कौन कोहे तूर पर प्राता रहे, जाता रहे तकरार न शरारते, न अब शबाब है सरफरोशी की प्रारजू लेकर गमे-तनहाई मे घबराये तो महफिल मे आये थे वाकिफ नही जमाने के चालो-चलन से हम महरूम मजिलो से है राहो मे जिन्दगी सारे शिकवे-गिले भुला डालो हर शरस परेशान है इस दौर मे यारो घने अधेरे मे नन्हा दीया ही, काफी है जव उन्हे पहली बार देखा था इस जगह धूप है न साया है ज्यो-त्यो कर दिन बीत गया है खुले दरीचो से अब कोई देखता ही नहीं कौन जूझेगा अधेरो से बतायो, मेरे बाद हर कोई ढूढा करे है, धूप मे साया कोई सास लगी दम घोटने, तुम अब भी मौन हो बहुत हो चुकी है सियासत की बाते सहमे-सहमे दरो-दीवार नज़र आते हैं कभी तो काश ऐसा हो कि आह निकले असर बनकर किसके घर जा के दर पे दे दस्तक पहलू मे मेरे दिल है, दिल मे है चाह तेरी कुछ रिश्ते पुराने टूटते है, कुछ रिश्ते नये बन जाते है क्यो लोग अपने-आप से कतराने लगे है 17 18 19 20 21 12 13 14 15 16 17 18 19 20 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 रात गये तर जाग चुके हैं प्रललसुबह कुछ प्राय लगी है 33 साजिशो के शिकार हैं हम लोग 34-35 सर जिसमा पिसी पल भी हमो न उठा देखा 36 जो अधेरो यी वात परते हैं 37 पयो वेवजह मोर मचाये हुए हैं लोग 38 जो मुहब्बत से प्राश्ना होगा 39 पहा ले जाता है हमारा दिले-नादान देसेंगे 40 भीड में कोई प्राश्ना न मिला 41 सूरज को लिये पहलू मे जीता हूँ कमर सा 42 न राहत रूह को पाराम ही न दिल को हासिल है 43 कौन किसको यू ही सताता है 44 वेसवर हूँ कि बासर यारो 45 पाती तो होगी याद उन्ह भी प्रतीत की 46 सिर्फ इक बार यू किसी से मिले 47 तनहा मजिल पे पहुचने से भी क्या हासिल है 48 नाम लेकर किसी का मर जायें 49 वाजगश्त उसको साथ-साथ रही 50 देर तक आज ज़िके-यार चले 51 उनको अपना बना के देख लिया 52 बहुत बेतार ये दिल हो गया है, अब तो आ जामो 53 दर खुला रखियेगा आज तो मयखाने का 54 पाप जिनके भी तरफदार हुए 55 जैसे पिंजरे में परिन्दा कोई पर मारे है 56 उठे नदम जो तेरी सिम्त तो रुके जाकर 57-58 चीख तो चीख है, सदा तो नही 59 आखिरश उसका दर खुला तो सही 60-61 तालिवे-दीद गर हो तो इतना करो 62-63 41 42 43 44 45 46 47 48 49 50 51 52 53 54 65 56 57 58 59 60 61 62 63 64 65 66 आज उनको सलाम कर पाये उस यार ने वफानी का ये सिला दिया महमूद की नजर से देखो अयाज को तुम इनको हटाओ, चाहे उनको विठाओ अब तो जनाब जीने के अन्दाज़ सीखिये उकताये हुए हम तो हर बम से उठ पाये घडी उम्मीद लेकर हम तेरी महफिल मे आये हैं यार से प्राज सामना होगा शहनशाही तखय्युल है, मुकद्दर है फकीराना जाने वाले को बुलाया कितना श्राप पाये तीमारदारी को हम हैं, हमारी वम सजी है तो पाइये सभी मुजरिम हैं, मुसिफ कौन है, कहिये ज़माने मे अब फर्क रहना चाहिये न खासो-प्राम मे ले लें क्या उसका नाम सरे- -आम दोस्तो डर क्या दिखा रहे हो हमे कफस और दार का कल तक जो बावफा था, हुमा आज वेवफा उस यार के कूचे मे सौ बार में हो पाया हम न होगे तो हमे याद किया जायेगा दरो-हरम को छोड़कर जब मयकदे मे आ गये तग आ गया हू शोरे-मुसलसिल से, जाम दे कदम लडखडाने लगे बेखुदी मे कौन कोशिश करे दीवाने को समझाने की सरगर्मे-बगावत हैं गुल बर्गो-समर यारो सहरा को कैस, दार को मन्सूर मिल गये इश्क की तौहीन हम कर न सके चलिये बाजार में नीलाम पे चढ जाते है 64 65 66 67 68 69 70 71 72 73 74 75 76 77 78 79 80 81 82 83 84 85 86 68 69 70 71 72 73 74 75 76 77 18 87 88 89 90 79 80 81 82 83 84 85 86 87 88 89 90 91 से 93 94-95 96 97 98 99 100 101 102-103 104 105 106 91 मेरी तनहाइया तो मत छीनो मुकद्दर बन गई शायद यही तनहाइया यारो उनका ढलता शबाब क्यो देखें स्वाहिश जो देखी आपके तीरे-नज़र मे है किस-किससे फिर फरेब न खाना पडा हमे सर उठेगान प्रास्ताने से शहर सारा उदास-सा क्यो है अफलाक की गर्दिश मे गिरिफ्तार नही हू रखवाला घर लुटाने पे जव है तुला हुआ मायूस हो गये है सभी राहवरो से हम क्या हमी बस रह गये हैं आजमाने के लिये मरने से नही डरते जीने के तमन्नाई शवे-फुरकत मे वस्ले-यार का अरमान तो देखो इधर पत्थर, उघर पत्थर जहा देखो वहा पत्थर दद को ला दवा हो जाने दे नाला-ए-नीम-शब ने तडपा दिया उसे जीना भी ढग से आया न मरना करीने से काश अपना सर हो, पा ए-यार हो ठोकरे खा चुके जमाने की कभी गुजरे दिनो की याद मे पासू बहाते है उठ गये तेरे दर से अगर दिलरुवा जिसे जिन्दगी से लगाव हो, वो क्सिी से दिल को लगाये क्यो अहदे है-शबाब है तो गुनाह वेशुमार कर कलम उठा भी तो क्या दिल का हाल लिखेगा मचाओ शोर कि खामोश हो गया हूँ मैं दरमिया फिर न फासिले होंगे 107 108 109 92 93 94 95 96 97 98 99 110 111 112 113 114 115 100 116 117 101 102 118 103 104 119 120 105 106 107 108 109 110 iii 112 113 114 115 116 117 118 119 120 121 ख्वाब था, वहम था कि साया था 121 तिश्नगी थी कि कम हुई ही नही 122 अगयार पे भरोसा है न अपनो पे एतवार 123 क्या करे ऐसी ज़िन्दगी लेकर 124 प्राग थी जो कभी वो पानी है 125 शम-ए-उम्मीद को जला रखिये 126 वो तो घोडे बेचकर सोता रहा 127 दर-व-दर ढूढता फिरा होगा 128 फलसफो का फलसफा कुछ काम हो पाया नही 129 राजानी का राज गया, वल था लेकिन आज गया 130 फिर उन्ही के खयाल मे उलझे 131 तू भी मेरी तरह सराव हो, वो भी दिन कभी तो खुदा करे 132 सिवा तेरे दिल मे कोई नहीं, ये यकीन कैसे दिलाऊँ मैं 133 तुम्हारी बेवफाई भी तसल्लीवरूश लगती है 134 कोई तिनका न बच जाये कही पर आशियाने का 135 इक आT-सी सीने मे, दिन-रात सुलगती है 136 जाने क्या दिल को हुआ है, तेरे बाद 137 जब जिगर पारा-पारा होता है 138 बात प्राधी-अधूरी रहने दो 139 मलकुलमौत बार-बार आये 140 जो शख्स गिरिफ्तार रहा उनकी चाह में 141 जब तेरी तरफ देखा, नजरें ली फिरा तूने हम गदिशे-अय्याम के मारे हुए तो है 143 आफताब क्यो बुझा वुझा-सा है 144 क्व तलक कोई दिलासा दिल को दे बतला तो दे 145 रूदादे-गमे-उल्फत हर एक से क्यो कहते 146 122 123 124 142 125 126 127 128 129 130 131 132 133 134 135 136 137 138 139 140 141 142 143 144 145 146 147 ये दर्द ही हमको तो विरासत में मिला है रूठे है बेसनव जो उहे क्यो मनाइये जरूम सोने के कर के भर जाते तेरा खयाल आ गया सास्ता मुझे मैं अपनी दास्ताने-दिल सुना न तो चला जाऊँ आहो-फुगा के बाद हसाया गया हूँ मैं ऐ गर्दिशे-अय्याम | तेरा एहसान है कितना जानेमन | पास में आयो कि जरा जी बहले थोडी देर और यू ही चलने दो कोई सावित कदम रहे कैसे सगरेजे है चमकते हुए तारे तो नही जितना जीवन अभी बिताया है सिफ तूफान रास पाया है चल ही पडा है ज़िक्र अगर सोजो-साज का तनहाई मे कल बीता है, तनहाई मे कल बीतेगा दिल को दुखाइये न यूं इन्साफ चाहिये न हमे कोई फैसला मुमकिन है किसी मोड पे मिल जाय दुबारा पहली ही मुलाकात में जो अपने लगे हैं यूं ही मिलते-मिलाते रहियेगा शवे तारीक से हर हाल में लडना ज़रूरी है 147-148 149 150 151 152 153 1:4 155 156 157 158 159 160 161 148 162 163 164 165 166 167 168 149 150 151 * हादसाते-हयात मे शामिल गजलो के कुछ उद्-फारसी-अरबी लफ्जो का हिन्दी तर्जुमा (हिंदी अर्थ/भावार्थ) * तरमीम सशोधन 169-184 184 चद अल्फाज उठेराट. जो तेरी सिम्त तो रुके जाकर- जहाँ पे दार थी कैदो-तफस या वीराने । मगर चलना जरूरी समझा, सिफ यही धुन लिये कि अब क'रहना चाहिये न खासो-आम में- बदलाव लाना चाहिये कुहना निजाम में । नतीजतन ये दर्द ही हमको तो विरासत में मिला है- तुम देख लो क्या हमको मुहब्बत मे मिला है ? फिर भी ज़िन्दगी से कोई शिकवा-शिकायत किये बगैर वस यही तमन्ना दिल में है ज़ी जब तलक बन नहीं जाती जन्नत- मैं ले न सक्गा कहीं पर भी राहत । मैं मुटों में इक जिन्दगी फूक दूठार- मैं कमज़ोर हाथो को बरशूगा ताकत । चाहे फिर सिला मिले न मिले हमको वागवानी का- जमाना देख ल आँखो से गुलफिशानी का। 'हादसाते-हयान' के बारे मे अपनी तरफ से इतना लिखना भी शायद जरूरत से ज्यादा ही है, बाको पढने वालो और तनकोदनिगारो पर मुनहसिर है कि इस किताब को किस नजरिये से लेते है। किताब की इशाअतो-तबाअत के लिये दिगर यारो-अहबाव के साथ ही रोशन प्रिण्टस व आफताब प्रकाशन के साथियो और सरे-वरक (टाइटल) के नक्काश जनाब मानवेन्द्र कुमार बगरहट्टा का तहे-दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ। -अनजान बीकानेरी
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बामश
इन्तिसाब (समर्पण)
जन्नतनशी वालिदे माजिद मोहतरम शहजादखों बैंस
और वालिदा माजिदा मोहतरमा जीयाँ उर्फ बिस्मिल्लाह
के नाम जिनकी शफकतो-तबियत की बदौलत खाकसार
में शेरो-सुखन की जानिब बचपन ही से लगाव पैदा
हुआ और आखिर मज्मा-ए-गजल हादसाते-हयात'
किताब की सूरत में मन्जरे-आम पर आ सका।
साथ ही खुदा-ओ-रसूल के फज्लो-करम का तहे दिल
से शुक्रगुजार हूँ कि वालिदैन के इन्तेकाल के बाद भी हम
चारोभाइयो और खानदान के तमाम लोगो के बीच
बाहमी इत्तेफाको-मुहब्बत का रिश्ता आज तक दायमो-
कायम है और मेहनतो-मशक्कत के साथ जिन्दगी बसर
करने का जज्या दिलो में मौजूद है।
-निसार अहमद 'मनजान' बैस
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[ 1 ] ? पहले-पहल जो पाव उठा राहबर हुआ- थोडी जो दूर साथ चला हमसफर हुआ। दे-दे सदायें हार गये, खामोश हो गये- दस्तक से जख्मी हाथ हुए, वा न दर हुआ। सन्नाटा मौत का सा क्यो पसरा है शहर मे- दर पैश ऐसा हादसा कब पेशतर हुआ अपने हैं सारे लोग पराया कोई नही- अपनो से अपनी जान का क्यो आज डर हुआ कैदो-कफस की सख्तिया हम झेल आये हैं- राहतपजीर फिर भी न हमको घर हुआ। जो तुरम मिल के मिट्टी में रूपोश हो गया- बरसो के बाद उसको जो देखा शजर हुग्रा। ? अनजान सरबुलन्द रहे कत्लगाह मे- कातिल के खौफ का न दिल पर असर हुआ। हादसाते-हयात/9 सोन पोह-गुर पर पा से, जागा रे. जय भीम दिल मे गृही जनया गिताता रहे। परवानाकोपमोहमदोरम गरमोगा- मादर-पिपरत मुगसगिन र परमाता । पायदा मया यहरासी यस्ती में पिस्मारगे- पाईना प्रपा मोमपा येमूर दिगमाता रहे। पो-नाहर से शिम मिटरो नहीं हैं पार रग- यारहा दामापू पारित प्रपा धुनयाता है। या म हांगे दस्ता से परमरी में दर भी. चाहे तू गाण सर पटये या मुममाता रहे। हादसाते-हयात/10
[3]
तकरार न शरारतें, न अब शबाव है-
गोया गुरुवे-वक्त का आफताब
जब देखने की ताब रही न निगाहो मे-
क्या कीजियेगा हुस्न अगर बेहिजाब है।
तुम सर की इस सियाही के धोके मे न रहो-
बालों में आजकल वो लगाता खिजाब है।
बस एक वो ही आदमी है आज काम का-
सीने मे जिसके प्राग तो आँखो मे प्राव है।
दीवाना क्ल का प्राज नजूमी है दोस्तो-
सच कह रहा है जिन्दगी बस एक ख्वाब है।
अनजान मजिलो का निशा किस तरह मिले-
हर मीरे-कारवान की हालत खराब है।
हादसाते-हयात/11
[ 4. सरफरोशी की प्रारजू लेकर- सू-ए-मकतल चले हैं दीवाने । अब तो हर सू सुनाई देते हैं- उनकी दीवानगी के अफसाने । खुद ही जुल्फे-दराज में उलझे- लोग जो-जो गये थे सुलझाने। अपने पाचल का डाल दो साया- धूप अब तो लगी है मुलसाने । सिफ सन्नाटा सासें बुनती हैं- बढते जाते हैं दिल के बोराने। हम ही अनजान कुछ नहीं समझे- अहले-दानिश लगे थे समझाने । हादसाते-हयात/12 [ 5 ] गमे-तनहाई से घबराये तो महफिल मे आये थे- है अब महफिल से उकताये हुए जाये कहा यारो? शुभआए नूर की जिन-जिन दरीचो से निकलनी थी- जरा सोचो उन्ही से उठ रहा है क्यो धुमा यारो? लुटेरे ही लुटेरे है सभी चौराहो पर काबिज- कहा पायेंगे हम ऐसे मे मजिल का निशा यारो? यहा तो कोई हिन्दू है, कोई सिख-पारसी-मुस्लिम- जहा इन्सान बसते हो, वो बस्ती है कहा यारो? दीवाली ईद-होली पर जहा हम दिल से मिलते थे- क्यो ठहरें है रुकावट कोनसी है दरम्या यारो? हमारी जान जाती है तुम्हारी शोखिया ठहरी- लिये जाते है क्या ऐसी अदा से इम्तेहा यारो? यही तो वक्त है कि प्यार के दो बोल तो बोलो- खुदा ने किसलिये दी है तुम्ह मुह मे जुबा गरो? चलो कसकर मिलें शायद न फिर मिलना मुयस्सर हो- जो पल हैं हाथ में अपने क्यो जाये रायगा यारो? जमाना याद रखेगा जिसे अनजान सदियो तक- हम अपने खून से लिखेंगे ऐसी दास्ता यारो? हादसाते-हयात/13 [ 6 ] - वाकिफ नही जमाने के चालो-चलन से हम- हां, प्राश्नाई रखते हैं दारो-रसन से हम । अहले-वतन यकीन करें या कि न करें-- जा-दिल से प्यार करते है, अपने वतन से हम । गो थक चुके हैं, पावो मे छाले हैं वेशुमार- चलने का वक्त आये तो चल दें मन से हम । दिल है कि फिर कही भी किसी ढव नहीं लगा- उठने को उठ तो आये थे उस अन्जुमन से हम । फरहादे-कोहकन के जुनू पर हैं हम फिदा- वावस्ता कब रहे है किसी दिलशिकन से हम । तुम देखते कि दौरे-असीरी के बावजूद- रूदादे-इश्क लिखते रहे बाकपन से हम । उनसे लिपट के रोये न 'अनजान आज तक- लेकिन लिपट के रोते हैं गोरो-कफन से हम । हादसाते-हयात/14 [ 7 ] महरूम मजिलो से है राहो में जिन्दगी- यू ही न बीत जाये पडावो मे जिन्दगी । हर-हर कदम पे हादसे होते है शहर में- महफूज होगी शायद गावो मे जिन्दगी । यू चल पडे थे घर से किसी को तलाशने- अब तक बिता रहे है छलावो मे जिन्दगी । कल जो बुलदियो के सतायशगरो मे थे- अब वो बिता रहे है गुफामो मे जिन्दगी । सरजद कोई गुनाह, हुआ ही नहीं मगर- क्यो खत्म हो रही है सजाओ मे जिन्दगी ? तुम चाहो तो सुकूने दिलो-रूहो-जा मिले- ले लिजियेगा अपनी पनाहो मे जिन्दगी । होटो पे गीत है न तरन्नुम है सासो मे- अनजान बीत जाये न आहो मे जिन्दगी । हादसाते-हयात/15
[ 8 ]
सारे शिकवे-गिले भुला डालो-
जरम जो-जो मिले मिटा डालो।
पाया-ए-अश तक हिला डालो-
कुछ असर ऐसा, ऐ दुपा ! डालो।
-
आज अपना उसे बना डालो-
दिल मे जो कुछ भी है बता डालो।
चेहरे पे पर्दा-ए-हया डालो-
कही दुनिया को न जला डालो।
जुल्फ को साया-सा बना डालो-
आग को वाग-सा बना डालो।
--
पत्थरो तक को गुदगुदा डालो-
हसने वालो को यू रुला डालो।
वरना 'अनजान मरने वाला है-
तुम अगर चाहो तो जिला डालो।
हासाते-हयात/16
[9.] हर शख्स परेशान है इस दौर मे यारी- किस-किसकी परेशानी में शामिल हुआ जाये? हर सिम्त नजर आते है बिखरे हुए खण्डहर- तामीर का आगाज कहा से किया जाये? उठती है यहा रोज तमन्नाओ की अर्थी- किस एक की अर्थी को सहारा दिया जाये। हर एक के होटो पे है रूदाद गमो की- दिल रखने को किस-किसका फसाना सुना जाये। मत पूछिये जो रज मुहब्बत मे मिला है- जो जरुम है सीने में उसे कैसे भरा जाये ? अनजान तलब दीद की अव दिल मे नही है- आँखो मे तलब है भी तो क्या किया जाये? हादसाते-हपात/17
[ 10 ]
घने प्रधेरे मे नन्हा दीया ही, काफा है-
सहारा पाने को तिनका मिला ही, काफी है।
न रास देर ही आया, न जो हरम मे लगा-
हमारे वास्ते अब मयकदा ही, काफी है।
तुम्हारी यादो के साये हमारे साथ रहे-
सुलगते सहरा मे ये आसरा ही, काफी है।
नही जवाब दिया, उसकी मौज है यारो-
हमारे यार ने खत तो पढा ही, काफी है।
बकौले-गर वो अनजान' है खफा हमसे-
हमारा करते तो है तजकरा ही, काफी है।
हादसाते-यात/18
[ 11 ] जब उन्हें पहली बार देखा था- जाने क्यो बार-बार देखा था। फिर निगाहो ने कुछ नही देखा- यू उन्हे पहली बार देखा था। पाव दीवानगी मे बढते गये- खित्ता-ए-खारजार देखा था । कोई राहे-फना मे साथ न था- साया तक तो फरार देखा था । हमकदम कोई हमसफर न हुआ- हमने सवको पुकार देखा था । दार तक वो ही खीच लाया है- ख्वाबे-दीदारे-यार देखा था। रूह अनजान है तरो-ताजा- जिस्म तो तार-तार देखा था । -
[ 12 ]
7
इस जगह धूप है न साया है-
किस जगह दिल हमे ले आया है
जरम अब तक न भरने पाया है-
तीर कुछ ऐसा हमने खाया है ।
काविले-इश्क विलयकी है वो ही-
शिद्दते-गम मे जो मुसकुराया है ।
अब रिहाई फिजूल है यारो-
कि कफस हमको रास आया है।
हम हैं तैयार हर सजा के लिये-
दिल किसी का अगर दुखाया है।
हिचकिया बध गई अभी से क्यो-
हाले-दिल कब अभी सुनाया है।
हमने अनजान साफ देखा है-
जिस्म होने तलक ही साया है।
हादसाते-हयात/20
[13] ज्यो-त्यों कर दिन बीत गया है- रात मगर घिर आई है। भीड मे गुम रहता हूँ दिन भर- रात मे फिर तनहाई है। सूरज प्राग उगतता दिन भर- ठडक छाई है। रात मे प्रलल -सुबह तो धूप खिली थी- शाम मगर धुधलाई है। दिन भर जिसके पीछे दौडा- रात मे इक परछाई है। रोक-टोक दिन होने तक है- रात मगर पगलाई है। मुर्गे की कुकड़-कू सुनकर- रातरानी कुम्हलाई है। जान कही अनजान' न ले ले- दर्द ने ली अगडाई है। हादसाते-हयात/21
[ 14 ]
खुले दरीचो से पर कोई देखता ही नहीं-
उदास चेहरो पे मुसकान फेंक्ता ही नहीं।
मैं उसके दर पे कमी सर को टेकता ही नही-
जो मेरा दिल मुझे उस दर पे भेजता ही नहीं।
मैं नाग-पानी से हगिज भी खेलता ही नही-
जो साकसारी से हर गम को झेलता ही नहीं।
ठिठुर रहा है मगर हाथ सेंक्ता ही नही-
बदलते मौसमो का अन्दाज देखता ही नहीं।
जो मुझको देख के खुद आप ऊपता ही नहीं-
यकीन मानिये मैं आईना देखता ही नहीं।
जमाने भर मे ये किस्सा यू फैलता ही नहीं-
जुनूने-इश्क से गर हुस्न खेलता ही नहीं।
हमारे दौर में अनजान' को पता ही नहीं-
भुगत रहा है सजा, को कोई खता ही नहीं।
हादसाते-हयाव/22
[15] कौन जूझेगा अधेरो से बताओ, मेरे बाद- रास्ता सीघा भी शायद भूल जाओ, मेरे बाद । मूरतें मुझसे भी ऊची तुम बनामो, मेरे वाद- हां, मगर मुझ-सा न पायो, मेरे बाद । उम्र भर काटे विछाते राह मे आये मेरी- फूल फिर क्यों का पेाकर चढामो, मेरे वाद। हर तरफ शैता मिलेंगे, या मिलेंगे देवता- आदमी शायद कही न ढूढ पायो, मेरे बाद । लो दीये की कम जो कर पढता रहा मैं रात भर- मुबहे-रोशन मे सवक वो ही पढायो, मेरे बाद । जीते-जी होने न दूगा मैं खिजानो का गुजर- झाड झखड जितने जी चाहे उगानो, मेरे बाद । मिट नही सकते निणा अनजान की तामीर के- बिजलियो पर विलिया चाहे गिरानो, मेरे बाद । - हादसाते-हयात/23 [ 16 ] हर कोई ढूढा करे है, धूप मे साया कोई- हमने दामन तेरा समझा, चाहे लहराया कोई । थे बरना-पा, बदन-सर भी वरहना थे मगर- जेव देता ही नही जाहिर मे सरमाया कोई । दरअसल ताउम्र मुतलाशी रहे दिलदार के- हम जिसे दिल अपना देते ऐसा न भामा कोई । आईना भी पानी-पानी हो गया है देखिये- यू -कद देखकर अपना ही शरमाया कोई। तेरे आगे और पीछे प्राकिलो के काफिले- मजिले-मकसूद की क्यो न खबर लाया कोई? सरो- आजकल अनजान के होटो पे अक्सर गीत है- क्या उसे इस दौर में अपना नजर आया कोई? हादसा-हपान/24
[ 17 ]
।
सासे लगी दम घोटने, तुम अब भी मौन हो-
गूगे लगे हैं वोलने, तुम अब भी मौन हो ।
पानी तो सर से ऊचा कभी का गुजर गया-
नया लगी है डोलने, तुम अब भी मौन हो
अब तो तुम्हारे शहर में मिलते हैं अजनवी-
अपने लगे विष घोलने, तुम अब भी मौन हो
जर्जर हुई दीवारो पर छत कैसे ठहरेगी-
चूहे लगे जड खोदने, तुम अब भी मौन हो।
-
'अनजान अपने आप से ही बात कीजिये-
सब तो लगे मुह खोलने, तुम अब भी मौन हो।
हादसाते-हयात/25
[ 18 ] वहुत हो चुकी हैं सियासत की बातें- चलो प्रामो करलें मुहब्बत की बातें। सियायत के गुर तो बहुत जानते हो- नही जानते बस मुहब्बत की बातें। सियासत ने दुनिया को दोजख बनाया- बना देगी जन्नत मुहब्बत की बातें। नसीहत मे मसरूफ रहता है हर दम- ऐ नासेह । कभी कर मुहन्यत की बातें। महल मिट गये, मिट गये महल वाले- है बाकी अभी तक मुहब्बत की बातें धुपा ही धुआ है ताहद्दे-न यू नफरत मे डूबी मुहब्बत की बातें। वसेरा वहा जा के अनजान करलो- जहा सुन सको तुम मुहब्बत की बातें। -नजर प्रव- - हादसाते-हयात/26 [ 19 ] सहमे-सहमे दरो-दीवार नजर आते हैं- ये तो तूफान के आसार नजर आते हैं। कल सरे-ग्राम जो नीलाम चढ़े थे यारो- वो आज जो लोग खरीदार नजर आते हैं। कल यही मसनदे-इन्साफ पे बैठे होंगे- आज जो लोग गुनाहगार नजर आते हैं। देसने पाये हैं सय्याद के हाथो का हुनर- हम वफस मे जो गिरफ्तार नजर पाते हैं। याद रहते ही नहीं पाव के छाले हमको राह में जब भी हमे खार नजर आते है। जाने क्या दे गई पैगाम इन्हे बादे-सबा- फूल गुलशन के शररबार नजर आते है। मर्ज पहचान के अनजान दवा कौन करे-- अब मसीहा भी तो बीमार नजर आते हैं। - हादसाते-हयात/27 { 20 ] कभी तो काश ऐसा हो कि प्राह निफ्ले असर वनकर- सरापा सामने हो यार, महबवे-नजर बनकर। वोहत पंचिदगिया देखी हैं हमने तो वशर बनकर- कभी परवाज में अव्वल, कभी वे-बालो-पर बनकर । हमे अब दपन कर दो, हो गया तैयार घर बनकर- रहेगे हम तुम्हारे दिल मे यादो का शजर बनकर । वो प्रासू पा गये इज्जत जमाने में गोहर बनकर- किसी मासूस की आंखो से जो निकले थे डर बनकर । खुदाया। देख ले इक रोज तो तू भी बशर वनकर- समझ लेगा उठाये सदमे जो हमने वशर बनकर । दहाडे जा रहा है जग मे, जो शेरे-नर बनकर- गिरेगा आज दुश्मन पर, यकीनन वो कहर बनकर । कभी देखो खुद अपने-आपको मेरी नजर बनकर- कि मैं अनजान आऊगा नजर महबूबतर वनकर। हादसाते-हयात/28 re- [ 21 ] किसके घर जाके दर पे दें दस्तक- ख्वाबे-गफलत मे शहर सोया है। दाग सीने के धुल नहीं पाये- आंसुओ तक से इनको घोया है। सिर्फ तूफान ही की बात नही- नाखुदा ने हमे डुबोया है। बज्मे-ऐशो-तरव मे क्या जायें- दिल मे तो गम ही गग समोया है। बाज आता नही मुहब्बत से- हमने सौ बार दिल को रोया है । कोई अनजान को तलाश करो- जाने कमबरत कब से खोया है। हादसाते-हयात/29 [ 22 ] पहलू मे मेरे दिल है, दिल में है चाह तेरी- जिस सिम्त चाहे जाऊ, मिलती है राह तेरी। मैंने बना लिया है, महबूब तुझको अपना- दिल मे उतर गई है, दिलवर निगाह तेरी। सब जानते थे हार रहा हू मुकाविला- लेकिन जिता गई है मुझे वाहवाह तेरी। खानाबदोश होकर मैं जीना चाहता था- रास आ गई है मुझको लेकिन पनाह तेरी। ये चाँद तारे-सूरज और रोशनी दीये की- गुल कर न दे कही पर ऐ यार । आह तेरी। मैंने तो इस जमी को जन्नत बनाना चाहा- या रब | क्यो हो रही है दुनिया तवाह तेरी । सर सजदे से न उठता अनजान जिन्दगी भर- मिल जाती काश उसको वस बारगाह तेरी। हादसातेन्हपात/30
[ 23 ]
कुछ रिश्ते पुराने टूटते हैं, कुछ रिश्ते नये बन जाते हैं-
कुछ घाव पुराने भरते हैं, कुछ घाव नये लग जाते है ।
कुछ जानी-पहचानी राहे, अनजानी लगने लगती है-
कुछ अनजानी राहो पे कदम, अनजाने में उठ जाते हैं।
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मन की महफिल आबाद रही, ना भीड घटी परवानो की-
कुछ दीप पुराने वुझते है, कुछ दीप नये जल जाते है।
किसको फुरसत कि याद करे, उन भूली-बिसरी यादो को-
फुछ फूल पिजा मे झडते है, कुछ फूल नये खिल जाते हैं।
क्या दैरो-हरम की बात करें, मसरूफ रहे मयनोशी में-
कुछ जाम तही हो जाते हैं, कुछ जाम नये भर जाते है।
सच पूछिये तो अहसास नही होता हमको तनहाई का-
कुछ मीत पुराने छूटते हैं, कुछ मीत नये मिल जाते हैं।
'अनजान' हम अपने जीवन से,
मार भला कैसे होते-
कुछ सपने टूट गये तो क्या, कुछ सपने नये दिस जाते है ।
--
।
[ 24 ] क्यो लोग अपने-आपसे कतराने लगे हैं- आईना देख-देख के घबराने लगे हैं। वेवाकिया मशहूर सरे-उज्म थी जिनकी- वो आज अकेले मे भी शरमाने लगे हैं । वादो पे भरोसा ही नही उनके रहा जब- दे-दे के दिलासे हमे बहलाने लगे हैं । तजदीद के कल तक जो परस्तार थे यारो- अफसाने वोही माजी के दोहराने लगे हैं। चलने की धुन मे मजिले ठुकराते रहे जो- साया जहा भी देखा कि सुस्ताने लगे हैं । जितने भी हुए दूर रहे पास ही दिल के- खत उनके दिगर शहरो से गो भाने लगे हैं। ये बस्ती है आबाद तेरे दम से ही हमदम- बाजार भी वरना हमे वोराने लगे हैं। अनजान मिले आपसे कुछ और ही ढब से- जब आप लगे रोने तो हम गाने लगे है। हादसाते-हयात/32
[ 25 ]
रात गये तक जाग चुके हैं, अललसुबह कुछ आंख लगी है-
जलती रही है साथ ही शम्मा, आँख लगी तो बुझने लगी है।
दूर तलक हैं धूप के साये, बर्गो-समर का नाम नहीं है-
रेत ही रेत है हद्दे-नजर तक, जोर से कितनी प्यास लगी है।
लौट रहे हैं नीड के पछी, ढूढ ही लेंगे अपना ठिकाना--
जिनका कोई घर-द्वार नही है, सूने फलक पर आंख लगी है।
भूलना चाहे भूल न पायें, छोडना चाहें छोड न पायें-
जितना ही उनसे दूर हुए है, उनकी मुहब्बत और बढी है।
एक तेरे दीदार को धुन है, परवाह नही जो राह कठन है-
तेज कदम अनजान डगर पर, जिस्म की ताकत चुकने लगी है।
हादसाते-हयात/33
[ 26 ] साजिशो के शिकार हैं हम लोग- जिन्दगी से फरार हैं हम लोग। प्रासमा बिजलियाँ गिरायेगा- जब तलक साकसार हैं हम लोग। हम मै ठडक तलापाने वालो- आग के पावशार हैं हम लोग। वदापरवर देखिये न हमे-- गोया कि इश्तिहार हैं हम लोग। दर्द की दास्ता सुनो हम से~ दद के राजदार है हम लोग । आँख वाले ये देख सकते है- जुल्म की पैदावार हैं हम लोग। सर क्यो कदमो में भापके रख दें- आखिरश बावकार हैं हम लोग। आपके पावो मे चुभेंगे ही- खित्ता-ए-खारजार हैं हम लोग। हम कयामत के साथ उठेंगे- यू अभी तो मजार हैं हम लोग। जो भी भायेगा जद मे डूबेगा- तेज तूफानी धार है हम लोग। हादसाते-हयात/34
हमसे टकरा के सर को फोडोगे-
पाहनी-सी दीवार हैं हम लोग ।
शीशमहलो मे दुबके बैठे रहो-
सग लिये बेकरार है हम लोग।
जेब मे अब कही न रख लेना-
कि सुलगते शरार हैं हम लोग।
जो थे 'अनजान' अव समझते हैं-
साजिशो के शिकार है हम लोग।
कर
[ 27 ] सर जिसका किसी पल भी हमने न उठा देसा- उस शरस के कदमो मे हर सर को भगा देसा । साकी-प्रो-शराबी का पुछ भेद नहीं मिलता- हर एक को प्रोखो मे हमने तो नशा देखा। काशी थी कि कावा था, क्या इससे हमे मतलव- जब झाक लिया दिल मे हमने तो सुदा देखा । इक बार जो डूये तो ताउम्र नहीं निक्ले- उन झील-सी प्रोसो मे मत पूछिये क्या देखा। दरवारे-मुहब्बत के निराले हैं- शाही को गदारो की चौखट पे खडा देखा। आदाव अनजान जा लासानी परवाज मे था अपनी- उस शख्स को पस्ती मे गुमनाम पडा देखा। हादसाते-हयात/36 [ 28 1 जो अधेरो की बात करते हैं- वो क्या जानें कि रोशनी क्या है ? दोस्ती से जिन्हे नही फुरसत- वो क्या जानें कि दुश्मनी क्या है ? जो सुलगते हैं धूप मे दिन भर- उनसे पूछो कि चांदनी क्या है ? सारी दुनिया ही जिनकी अपनी है- वो क्या जानें कि अजनवी क्या है ? जो दरिन्दो की तरह जीते रहे- वो क्या जाने कि आदमी क्या है 7 जो मुहब्बत से आश्ना न हुए- वो क्या जाने कि जिन्दगी क्या है ? हमने 'अनान करके देखी है- हमसे पूछो कि दोस्ती क्या है ? - हादसाते-यात/37 [ 291 क्यो बेवजह मोर मचाये हुए हैं लोग- क्यो मासमान सर पे उठाये हुए हैं लोग? जमते नहीं हैं पाव कही भी किसी तरह- बुनियाद से यू अपनी हटाये हुए हैं लोग । जल्लाद और मसीहा में जर फकं कुछ नही- क्यो नब्ज फिर किसी को थमाये हुए हैं लोग? बस इक हवा के झोंके की दरकार है इन्हे- यू आग अपने दिल मे दवाये हुए हैं लोग । कोई बतादे किसको निशाना बनायें बस- हाथो मे अपने संग उठाये हुए हैं लोग । ऐ आसमान ! तेरे सितारों की खैर हो- तारीकियो के सख्त सताये हुए हैं लोग । 'अनजान हस्तो-बूद की जजीरें तोडकर- जोशे-जुनू मे पाव बढाये हुए है लोग । हादसाते-हयात/38
[ 30°
जो मुहब्बत से प्राश्ना होगा-
दोस्तों। वो न फिर फना होगा ।
मिस्ल शम्मा के जो जला होगा-
तीरगी से वो ही लडा होगा ।
कर भला तेरा भी भला होगा-
किसलिये तेरा फिर बुरा होगा
हुस्न जव आपका ढला होगा-
कितना हैरान पाईना होगा ।
दरम्या पर्दा-ए-हया होगा-
शौके-दीदार फिर सिवा होगा ।
इश्क उस वक्त कीमिया होगा-
दर्दे-दिल जव भी लादवा होगा।
रिन्द है, पारसा लगा होगा-
कोई अनजान से मिला होगा।
हादसाते-हयात/39
[31] कहा ले जाता है हमको दिले-नादान देखेंगे- कनारे तो नही देखे मगर तुफान देखेंगे। प्रदा-ए-बेनियाजी मे नही उनका कोई सानी- वो लेंगे किस अदा से अव हमारी जान देखेंगे । वावक्ते कल जो कातिल की आंखो मै चमकती है- मुकद्दर साथ दे अपना तो वो मुस्कान देखेंगे । किसी को सहरा में जाकर किसी को दार पर जाकर- मुहब्बत किस तरह से चढती है परवान देखेंगे । तलाशे-यार मे दर-दर भटकते हैं जमाने मे- कहाँ जाकर के रुकते है कदम अनजान देखेंगे । हादसाते-ह्यात/40 [32 11 । भीड मे कोई आश्ना न मिला- और दरीचा कोई भी वा न मिला। वो अभी तक भरम मे जोते है- लगता है उनको आईना न मिला। रोज दानिशवरो से मिलते हैं- राहते-दिल को सरफिरा न मिला। सर ये दैरो-हरम मे क्यो झुकता- इन जगहो पर हमे खुदा न मिला। खाक उडती है शाहराहो पर- गामजन कोई काफिला न मिला। हैफ | अनजान जा-ए-मर्ग है ये- यार का सर को नक्शे-पान मिला। हादसाते-हयात/41
[33]
?
सूरज को लिए पहलू मे जीता हू कमर-सा-
गो शहर तो अपना है मगर लगता है डर-सा ।
नामाश्ना क्यो लगने लगे प्राश्ना चेहरे-
हर शख्स के सीने में है क्यो खौफो-खतर-सा
महफिल मे भी तनहाई-सी महसूस है होती-
सैलावे-तकल्लुम क्यों गया प्राज ठहर-सा।
कल तक तो मेरे होटो पे थी शीरी-वयानी-
हर लफ्ज मे मौजूद है क्यो आज जहर-सा
आदावे-
-मुहब्बत का मिले दस जहा से-
हर वस्ती मे अव चाहिये इक ऐसा मदरसा ।
7
अनजान थे भागाज का अन्जाम तो देखो-
घर वाला नजर आने लगा आज तो बेघर-सा।
हादसाते-हमान/42
[ 34 ] न राहत रूह को, आराम ही न दिल को हासिल है- न मरना ही तसल्लीबख्श है, जीना भी मुश्किल है। थका डाली जुवा दे-दे, सदायें देने वाले ने- मगर लगता है मेरे शहर का, हर शहरी गाफिल है। जमाने से गिला-शिकवा-शिकायत क्या मुनासिब है- सताने वालो की फहरिश्त मे, जब अपना शामिल है। नमूदे-सुबह के घोके मे, शम-ए-शब बुझा डाली- मगर हर सू अधेरा है, उजाला कोसो मजिल है। निशाना दिल तो पहली ही नजर मे वन गया तेरा- इरादा और क्या तेरा, बता ऐ चश्मे-कातिल है? कसम खाते हुए देखा-सुना, हर एक को लेकिन- जमीर इन्सान का कहने लगा कि कौले-बातिल है। लिये जानोगे आखिर इम्तेहा अनजान' का कबतक- घडी भर का ये मेहमा है, यकीनन जाने-बिस्मिल है। हादसाते-हयात/43 [35] कौन किसको यू ही सताता है- हाँ, जिसे अपना वो बनाता है। थपक्यिा दे-दे के वो सुलाता है- और झकझोर कर उठाता है। प्यार से जब कोई बुलाता है- उम्र भर के लिए रुलाता है। उसको इन्सान तो नही कहते- दिले-मजलूम जो दुखाता है। जव जमीर आदमी का मर जाये- हर कही सर को फिर झुकाता है। शवे-तारीक होगी ही रोशन- शम-ए-दिल यू कोई जलाता है। चलिये अनजान साथ दे उसका- पांव पहला कोई बढाता है। हादसाते-हयात/44
[ 36 ]
बेखवर हू कि बाखबर यारों-
आपकी तरह हू बशर यारो ।
कल तलक मैं था मातवर यारो-
प्राज करते हो दरगुजर यारो।
राहजनो ने तो अपना काम किया-
कर रहे थे क्या राहवर यारो।
पाया-ए-अर्श हिलने लगता है-
हो दुअआयो मे गर असर यारो।
पाव जलते है, सर पे साया नही-
ये जमी तो है वेशजर यारो।
खौफ इस दिल मे गर खुदा का है-
फिर तो हर राह है वेखतर यारो।
और अनजान क्या सुनायेगा-
किस्सा-ए-गम है मुख्तसर यारो।
हादसाते-ह्यात/45
[37]
आती तो होगी याद उन्हें भी अतीत की-
अपनाइयत के दिन थे वो रातें प्रीत की।
अफसोस किस मकाम पे ले आई जिन्दगी-
जिज्ञासा तक रही न जहा हार-जीत की।
तुम देखते कि एक तुम्हारे अभाव मे-
वीरान महफिते है सगीत और गीत की।
से धके मन से भी हारे हुए-से हैं-
उम्मीद छोड पाये न हम फिर भी जीत की।
लाता है यू तो डाकिया चैक और एम प्रो.
वरसो से चिट्ठी लाया नही मन के मीत की।
उस गुमशुदा को हमने तलाशा कहा-कहा-
अनजान' हमने उम्र इसी में व्यतीत की।
हादसाते-हयात/46
[38 ]
सिर्फ इक बार यू किसी से मिले-
उम्र भर हम न फिर किसी से मिले।
कोई चाहे कभी किसी से मिले-
याद तो आये कि किसी से मिले ।
आज हम ऐसे आदमी से मिले-
जिन्दगी जैसे जिन्दगी से मिले ।
न मिले प्रापसे, मिले तो सही-
जस्मे-दिल चाह्येि किसी से मिले।
मुद्दतो बाद वो मिले तो सही-
अजनवी जैसे अजनवी से मिले।
तेरी-मेरी न इसकी-उसकी है-
माग तो आग है किसी से मिले।
चलिये अनजान दोस्तो से मिलें-
मुद्दते हो गई किसी से मिले ।
हादसाते-हयात/47
[39]
तनहा मजिल पे पहुचने से भी क्या हासिल है-
चलिये तूफा मे अगर सामने ही साहिल है।
कैसे इन्कार करू कवच और कुण्डन के लिये-
भेस बदले ही सही, इन्द्र प्रभो साइल है ।
रगो-यू-बास मे वेमिस्ल उन्हे पानोगे-
जिन गुलावो में लहू दिल का मेरा शामिल है ।
कोई आहट न कोई नक्शे-कदम है यारो-
ऐसा लगता है इसी सिम्त मेरी मजिल है।
हमने पहले ही कहा था कि उजड जायेगी-
एक हम ही न रहे, सब हैं, तेरी महफिल है।
खदा-पैशानी गये सर को कटाने हम तो-
सर निदामत से झुकाये हुए कातिल है ।
जो कि आगाज के अन्जाम से अनजान रहे-
अहले-दानिश की निगाहो मे वो ही गाफिल है ।
हादसाते-हयात/48
[ 40 ] नाम लेकर किसी का मर जायें- तोहमतें सो हमारे सर आयें । काम ऐसा कोई तो कर जायें- . याद तो पायें, चाहे मर जायें । " वो इधर से अगर गुजर जाये- खुशबूए रास्तो मे भर जायें । धूप मे हो गुमा घटाओ का- जुल्फें उस शोख की बिखर जायें। कसे कहदें नजर से दूर हुए- वो ही जब हर तरफ नजर आयें। उनकी चौखट से हम न उठेंगे- जिनको जाना है अपने घर जायें। आज वो वेहिजाब प्राये हैं- काश अनजान आज मर जायें। हादसाते-हयात/49
[ 41
घाजगश्त उसकी साथ-साथ रही-
बहरे होते तो कोई बात भी थी।
जस्म कैसे ? सरौंच लगते हैं-
गहरे होते तो कोई बात भी थी।
पलके कालीन-मी विखी ही रही-
गुजरे होते तो कोई वात भी थी।
सिर्फ दालान ही मिले हमको-
कमरे होते तो कोई बात भी थी।
प्राये उजलत मे पौर चल भी दिये-
ठहरे होते तो कोई बात भी थी।
उनसे बेरोक-टोक मिल माये-
पहरे होते तो कोई बात भी थी ।
परचम अनजान अपनी अजमत के-
फहरे होते तो कोई बात भी थी।
हादसाते-ह्यात/50
[ 42 ] देर तक माज जिरे-यार चले- तीर इस दिल के आर-पार चले। चार दिन उम्र के गुजार चले- शोर बरपा हुआ 'निसार' चले । उसका क्या दिल पे इख्तियार चले- जिस पे शमशीरे-पाबदार चले । पास जो कुछ था वक्फ कर डाला- है सफर लम्बा, क्सिसे वार चले । जो उठे तेरी वज्म से सीधे- मिस्ले-मन्सूर सू-ए-दार चले । तेरा रहमत को कब गवारा है- सर झुकाये गुनाहगार चले। उम्रे-रफ्ता की याद आती है- सिर्फ धुन थी कि रोजगार चले। मेरे मरने पे जश्न मत रोको- दुनिया, दुनिया है, कारोबार चले। अलविदा अहले-गुलसिता ' हम तो- सू-ए-सहरा-मो-खारजार चले। दावरे-हश ने पुकारा जब- हम ही 'अनजान' खुशगवार चले। हादसाते-हयात/51 [ 43 ] उनको अपना बना के देस लिया- सवको दुश्मन बना के देस लिया। मुसकुरा उठे कायनात अगर- वक्त ने मुसकुरा के देख लिया । उठ गये गायवाना सारे हिजाब- सागरे-मय उठा के देस लिया। सू-ए-मजिल कदम बढे ही नहीं- बारहा तो वढा के देख लिया । तीरगी थी कि कम हुई ही नही- शम-ए-दिल जला के देख लिया। एतबार उनको हम दिला न सके- खुद को हस्ती मिटा के देख लिया। जिसको अनजान इश्क कहते हैं- हमने भी कर-कराके देख लिया। हादसाते-हयात/52
[ 44 ]
बहुत बेताब ये दिल हो गया है, अब तो आ जायो-
गमो का दौर नाजिल हो गया है, अब तो आ जायो।
शकिस्ता करती है, मौजे तलातुम जानलेवा है-
नजर से दूर साहिल हो गया है, अब तो आ जाओ।
वो लम्हा आप जिस लम्हे मे, दिल को रास भाये थे-
वो लम्हा आज कातिल हो गया है, अब तो आ जाओ।
लिखी जानी थी जो अश्को से, रुदादे मुहब्बत मे-
जिगर का खून शामिल हो गया है, अव तोमा जानो।
विना पाये तुम्हारे जान न निकलेगी इस तन से-
हमारा मरना मुश्किल हो गया है, अब तो आ जाओ।
कहो क्यो नीद से परहेज रख एक बस हम ही-
शहर सारा तो गाफिल हो गया है, अब तो आ जाओ।
वो जो अनजान हर महफिल का था रूहे-रवा यारो-
वो ही महरूमे-महफिल हो गया है, अब तोपा जाओ।
हादसाते-हयात/53
[ 45 ] दर खुला रसियेगा अाज तो मयखाने का- रखते हैं इरादा इधर पाने का। जिस दिन से जुदा हमसे हुए- हमने मुह तक भी नहीं देखा है पैमाने का। पाप था इरादा तो कई रोज से मर जाने का- आज लगता है सही वक्त है मर जाने का। जाम मे डूबे हुए होशो-खिदं हैं वाइज- है कोई वक्त ये आपके समझाने का। सिर्फ तारीफ किये जानो मुसलसिल उसकी- है तरीका यही उस शोख को बहलाने का। कहकहा मिसरा-ए-अव्वल मे था, दोयम मे बुका- दे दिया उसने मजा आज तो दोगाने का। चलिये अनजान चलें, साथ कोई है तो चले- हो गया वक्त यकी मानिये अब जाने का। हादसाते-हयात/54 [ 46 1 आप जिनके भी तरफदार हुए- वो बलामो मे गिरफ्तार हुए । वेगुनाही का ये नतीना है- कि गुनाहगारो में शुमार हुए । तुझसे मानूस ऐ बहार हुए- तो गरेबान तार-तार हुए । दूर दैरो-हरम से जा बैठे- मयकदे से यू हमकनार हुए । जो जुदाई मे यार को निकले- अश्क वो मोती प्रावदार हुए । नामो-नामूस मिट गया उनका. होने को कितने ताजदार हुए। सुर्खरू और सरवुलन्द रहे- इम्तेहा यू तो बार-बार हुए। खिदमते-कोम दिल से करते रहे- लोग ऐसे गले के हार हुए । सौ हिजाबो मे शर्म थी जिनको- प्राजकल गर्मी-ए-बाजार हुए । प्रज्मे-तामीरे-पाशिया न मिटा- हमले सो बर्के-शोलावार हुए । काश 'अनमान खाक ही होते- खाकसार कितने बावकार हुए । . हादसाते-हयात/55 ( 47 ] जैसे पिंजरे में परिन्दा कोई पर मारे है- सगदिल दर पे तेरे यू कोई सर मारे है । दिल तो पहली ही नजर मे तुझे दे बैठे- जान लेने को तू अब तोरे नजर मारे है । लाख तूफान उठे, चाहे मुखालिफ हो हवा- उसको साहिल ही मिलेगा वो अगर पारे है। तल्खी-ए-जीस्त हुई तल्खी-ए-जाम मे गुम- सुनते आये है जहर ही तो जहर मारे है। वो मुसाफिर न पहुंच पायेगा मजिल पे कभी- बीच रस्ते में ही जो हौसला गर हारे है। ऐसे बीमार का 'अनजान खुदा हाफिज है- क्या बचे जिसको मसीहा ही अगर मारे है । हादसाते-हयात/56 [ 48 ] उठे कदम जो तेरी सिम्त तो रुके जाकर- जहा पे दार थी, कंदो-कफस या वीराने । वो लौटकर न इधर आये दोस्तो अब तक- गये थे जो कि उधर घर किसी को बतलाने । जमाना करने को सूदो-जिया को वात करे- किसी की बातो मे पाते नही है दीवाने । खुदारा डाल दो जुल्फे दराज का साया- सुनगते सहरा मे सूरज लगा है झुलसाने । हरम उदास है, वीरा हैं बुतकदे लेकिन- कभी उदास न वीरा हुए मयखाने । क्यो राहजनो से गिला अब कोई करे यारो- कि राहबर ही लगे आजकल तो भटकाने । क्यो काप उठा है कातिल के हाथ का खजर- बड़े सबात से हम आये सर को कटवाने । बिना हमारे ही महफिल सजाने वालो सुनो- न वैसी शम्मा ही होगी, न हम-से परवाने । मधुसूदन । ये कोई जग का उसूल नही- मैं खाली हाथ हूँ अजुन है तीर को ताने । करन करन है, कवच और न सही कुण्डल- पितामह भीष्म जिसे अर्द्धरथी ही थे माने । हादसाते-हपात/-7 - चला का जोश लिये पा रहा है शेरे-नर- महान योद्धानो, महारथियों को धूल चटवाने । गिरा करन तो कोहराम मच गया हर सू- मगर मां कुन्ती का गम और कोई क्या जाने। करन को अजुलि भर पानी पाडवो दो तुम भी- तुम्हारा अपना है जिसको थे गैर तुम माने । वो दर्द पाया है अनजान' एक दिलबर से- किसी भी दर पे गये फिर न हाथ फैलाने । हादसाते-हपात/58
[ 49 ]
चीख तो चीख है, सदा तो नही-
माना बहरे नहीं, सुना तो नहीं ।
जो तेरे दर पे सर को फोडे है-
देख ले, तेरा प्राश्ना तो नहीं ।
जब हिकायते-दद उसने सुनी-
उसके चेहरे का रग, उडा तो नही ।
पर मेरे-
मिस्ले मन्सूर, दार
वाद मे दूसरा, चढा तो नहीं ।
ज्यो का त्यो लौट पाया खत मेरा-
शुक्र है उसने, ये पढा तो नहीं ।
सहमा कौने मे, कौन बैठा है-
देख लो, वो कही खुदा तो नहीं।
बूदा-बादी है आज सहरा में-
पावलो से धुमा उठा तो नहीं ।
न सही रूनुमा निगाहो मे-
नक्श जो दिल मे है मिटा तो नही ।
जाने क्यो मेरा नाम लेते नहीं-
इतना 'अनजान मैं बुरा तो नहीं ।
हादसाते-हयात/59
[ 50 प्रासिरश उसका दर खुला तो सही- गुन्चा उम्मीद या पिला तो सही। हमसफर क्यो न में यहू उसको- दो कदम ही सही चला तो सही। पौनसी शै है जो नहीं मिलती- तू कभी दिल से दिल मिला तो सही । नगे पावा ही दौर आयेंगे- तू हमे प्यार से बुला तो सही । इन अधेरो की उम्र थोडी है- दीप दिल का कोई जला तो सही । शायद को यकीन आ जाये- हाले-दिल उनको तू सुना तो सही। देख लेना कि चाक फिर होगा- ये गरेवान तू सिला तो सही । साथ मे चलने वाले भी होंगे- पाव पहले तू ही बढा तो सही । गैर मुमकिन है न मिले मजिल- सू-ए-मजिल कदम बढा तो सही । खेमाजन होगे हक-परस्त हुसैन- लोग कहते हैं करवला तो सही । हादसाते-यात/60
सामने दोस्त है कि दुश्मन है-
उमर-बिन-साद है खडा तो सही ।
फिर नई आग ले तुलू होगा-
आफताब आज का ढला तो सही ।
वो लगा लेगे अपने सीने से-
उनके कदमो मे सर झुका तो सही।
उम्र
अनजान कट ही जायेगी-
तु किसी से ये दिल लगा तो सही ।
हादसाते हयात/61
[ 51 ] तालिवे-दीद गर हो तो इतना करो- अपनी प्रसो से पर्दा हटा दीजिये । कारवा जिदगी का न भटके वही- दीप राहो मे दिल का जला दीजिये। जिससे कोई गुनाह आज तक न हुआ- बेगुनाही की उसको सजा दीजिये। जान निकलेगी हर्गिज न उसके विना- आखिरी वक्त उसको बुला दीजिये। याद आये हमारी, रहे जय न हम- अाज महफिल को इतना सजा दीजिये। पहले लैला के तेवर तो पैदा करो-- हमको फिर चाहे मजनू बना दीजिये । जब मुहब्बत की दौलत है हासिल हमे- घर मे जो कुछ है उन पे लुटा दीजिये । गर बुलन्दी का अरमान सोने मे है- पस्त लोगो को हिम्मत बधा दीजिये। खेतिया लहलहायेगी फिर प्यार की- तुरमे नफरत को दिल से मिटा दीजिये। सावन कर लिपट जायेंगे पावो से- खा में चाहे हमको मिला दीजिये। हादसाते हयात/62
यार के
पहलू
मे प्राकर सुकू पा गये-
गर्दिशे-वक्त को ये बता दीजिये।
आच जिनकी तुम्हे भी जलाने लगे-
शोलो को इस कद्र न हवा दीजिये।
जब दवा कारगर कोई हो न सके-
रोक दो सब दवायें, दुमा दीजिये।
ख्वाब कितने ही महरूमे-तावीर है-
एक-दो की तो ताबीर ला दीजिये।
दूध और खून का रिश्ता नकली नहीं-
शरपसन्दो को इतना बता दीजिये।
कर चुका हू जो अहदे-वफा दोस्तों-
मैं निभाऊगा तुम भी निभा दीजिये।
वो ये समझे कि उनको लिखा ही नही-
उनके हाथो मे खत ये खुला दीजिये।
देख लेना कि पछतानोगे इक दिन तुम्ही-
फिर भी चाहो अगर तो दगा दीजिये।
आज 'अनजान' हसते हुए ही सही-
जो भी सगदिल है उसको रुला दीजिये।
हादसाते-हयात/63
[ 52 ] प्राज उनको सलाम कर पाये- जिन्दगी को तमाम कर पाये। चन्द युशिया जो पास थी अपने- आज वो उनके नाम कर पाये। सुबह होते ही हम गये थे वहा- बातो-बातो मे शाम कर पाये। जाने क्या देसा उनकी मोखो में- जो गये दिल को थाम कर आये। खुश्क जाहिद दिखाई देते थे- पंश उनको भी जाम कर पाये। उनके कदमो में गिर पड़े थे मगर- जव उठे हाथ थाम कर पाये। प्रवन अनमान' रूठ पायेंगे- रूठना तो हराम कर आये। हादसाते-हयात/64
[ 53 ]
उस यार ने वफाओ का ये सिला दिया-
खुद न मिला तो खाक मे हमको मिला दिया।
मजमून कोई मरूफी नही है हयात का-
खत भी दिया तो यार को अक्सर खुला दिया।
ये जज्वा-ए-उम्मीद कहा जागने लगा-
दे-दे के थपकिया जिसे हमने सुला दिया ।
चलती हैं तेज आधियां, झडती है पत्तियां-
दौरे-खजा मे फूल ये किसने खिला दिया।
ये जरम भर न पाये थे, नाखून बढ गये-
मरहम मे गोया नमक किसी ने मिला दिया ।
बेचैन खुद खुदा है, जरा थामिये उसे-
दीवानगी मे अर्श-मुअल्ला हिला दिया।
अनजान' हमको मौत का अब खौफ कुछ नहीं-
हम मर रहे थे आपने पाकर जिला दिया।
हादसाते
[ 54 ] ? महमूद की नजर से देसो प्रयाज को- वदनाम इश्क हुस्न को रुसवा करे तो क्या ता क्यो नाजनीने-मिस्र करी बैठी उगलिया- कोई फकत जुलेखा का चर्चा करे तो क्या ? जन नावे-दीद ही न रही अहले-बज्म मे- हो हुस्न वेहिजाय कि पर्दा करे तो क्या गश खा गये, हवास भी गुम थे कलीम के- ऐसे में प्राशकारा वो जलवा करे तो क्या जिसको शदीद दर्द मे मिलती हो लज्जतें- बीमार गर न चाहे मसीहा करे तो क्या ? 7 ? तपती हुई जमीन ने झुलसा दिया वजूद- अव अब आसमान से बरसा करे तो क्या 7 अनजान आरजू-ए-मुलाकात जब नही- पैगाम उनके आने के आया करे तो क्या? हादसाते-हयात/66 [ 55] तुम इनको हटाओ, चाहे उनको विठामो- है वक्त की आवाज कि भारत को बचानो। सर साप उठाये हुए फुफकार रहे है- इबलीस की औलाद की ताकत को झुकानो। त्वारीख के पन्नो पे सियाही न उडेलो- गुम कारवा हो जायेगे, जुलमत को मिटायो। ये आग कही फूक न दे सारे चमन को- इस पाग की बढती हुई शिद्दत को घटायो। हक छीनते आये है जो मजलूमो का अब तक- उन लोगो की बढती हुई हिम्मत को दबाओ। अब और दरिन्दो के डराये से डरो मत- हर चेहरे पे छाई हुई दहशत को मिटानो। फिर चन मे मिल-बैठ के वत्तियाया' करेंगे- हां, पहले मगर दिल मे मुहब्बत को जगायो । 'अनजान मुहब्बत के सिवा कुछ न बचेगा- तुम जान बचाओ, चाहे दौलत को बचाप्रो- हादसाते-हयात/67 [ 56 ] अव तो जनाब जीने के अदाज सीखिये- कल तो न सीख पाये मगर आज सीखिये। . दिल को सुकून वरूशे, तसल्ली दमाग को- मसरूर रूह जिसमे हो वो साज सीखिये । उस रास्ते पे चलिये जो मन्जिल का दे पता- अन्जाम जिसका अच्छा हो, आगाज सीखिये । यू पर-क्टे परिन्दो-सा जीना फिजूल है- अफलाक जेरे-पा हो वो परवाज सीखिये । भुर्दो मे जान डाल दे, जिन्दो मे हौसला- जिन पर यकीन सबको हो अल्फाज सीखिये। कोई भी जिसको कर न सके यू ही दरगुजर- हर सिम्त जिसकी गूज हो, आवाज सीखिये । 'अनजान इस जमाने मे हमदद कम नही- कैसे बनाये जाते है, हमराज सीखिये । हादसाते हयात/68 [ 57 ] उक्ताये हुए हम तो हर वज्म से उठ पाये- तनहाई ही अच्छी है, रास आये कि न आये। पथरीले से चेहरो पर क्या खाक नजर भाये- कोई तो नही ऐसा जो दिल मे उतर जाये । इस शोर के दरिया मे आवाज कोई अपनी- अव्वल तो नहीं होगी, हो तो क्या सुनी जाये। सय्याद के सीने मे, दिल नाम की शै कोई- अल्लाह ने दी होती, बुलबुल तो यही गाये । कल शहर में चर्चा था, जिन शोख-जमातो का- आईना जरा देखा, तो देख के घबराये । हैरान है बामो-दर उस यार के आने से- दीवारो की ख्वाहिश है कदमो मे लिपट जाये । "अनजान भटकने से अब बाज भी आ जामो- लाजिम है ठहर जाना, कोई प्यार से ठहराये। हादसाते-हयात/69 ।
[ 58 ]
बडी उम्मीद लेकर हम तेरी महफिल में पाये हैं-
यहा तस्कीन पायेंगे ये हसरत दिल मे लाये हैं।
अगर तू ही सहारा इनको न देगा तो क्या होगा-
तेरा ये नाम सुन कर दूर से मुकिल मे पाये हैं ।
तलातुमसेज मौजी ने किया जो कुछ मुनासिब था-
हमे तो हादसे दर पेश हद्दे-साहिल मे आये हैं ।
हमारा नाम ले-लेकर वो छाती पीटता क्यो है-
ये कैसे इन्क्लावात आजकल कातिल मे आये हैं ।
निगाहे-मेहर कर 'अनजान पर इस वक्त तो साकी-
हजारो जन्म ये हसते हुए दिल मे छुपाये हैं?
--
हादसावे-हयात
[ 59 ]
यार से आज सामना होगा-
दिल को हाथो से थामना होगा।
आह भरना जहा मना होगा-
दर्द दिल का वहा धना होगा।
पाया-ए अर्श तक हिला होगा-
जब कि आदम का दिल दुखा होगा।
---
मैं क्या जानू
कौन है यारो-
होने को वो कोई खुदा होगा।
टूट जायेंगी सारी जजीरें-
जब रिहाई का हौसला होगा।
गम तो कुछ और ही सिवा होगा-
यार मिलकर के जब जुदा होगा।
कौन फिर आप पर फिदा होगा-
हुस्न जब आपका ढला होगा।
जो है तकदीर मे लिखा, होगा-
बुजुर्गों से यही सुना होगा।
माप 'अनजान' को नहीं समझे-
बारहा आपसे मिला होगा।
*
हादसाते-हपात/71
[ 60 शहनशाही तखय्युल है, मुकद्दर है फकीराना- कोई देखे कि किस अन्दाज से जीता है दीवाना। लडाते आये है दरो-हरम सदियो से इन्सा को- मगर लडतो को मिलवाता रहा है सिर्फ मयखाना । लगा है माये-सा पीछे ये शैता जान ले प्रादम- न इसकी वातो मे आना, पडेगा वरना पछताना। मजारो पर नहूसत का जरा तुम हाल तो देखो- कभी इन नाजनीनो का भी था अन्दाजे-सुलताना। गया जो वक्त हगिज लौट कर पाता नही लेकिन- मैं फौरन दौडे पाऊगा, कभी तुम दिल से बुलवाना । नाहट ही हुई कोई, न थी उम्मीद पाने की- हमेशा याद आयेगा तेरा चुपके से यू पाना। हमे अनजान कितना नाज है जख्मो पे मत पूछो- गवारा कसे करलें दोस्तो फिर इनका भर जाना। - हादसाते-ह्यातn2
[ 61 ]
जाने वाले को बुलाया कितना-
जाने वाले ने रुलाया कितना।
॥
दिल के नजदीक वो पाया कितना-
दूर फिर उसको ही पाया कितना ।
उसको मखसूस बनाया कितना-
गैर की तरह सताया कितना ।
लौट कर मेरी सिम्त पाया नही-
गो बुलाने को बुलाया कितना ।
याद वो बार-बार प्राता है-
यू भुलाने को भुलाया कितना ।
वो कभी अपने पावो पर न चला-
गो चलाने को चलाया कितना।
दिल का 'अनजान खरीदार नही-
गो सजाने को सजाया कितना।
--
-
हादसाते-हयात3
[ 62 ]
पाप आये तीमारदारी को-
मुद्दामा मिल गया बीमारी को।
आजकल दोस्तो में पीता नही-
जी रहा हू उसी खुमारी को।
प्रामदे-फस्ले-गुल के चर्चे हैं-
भूल भी जामो गिरफ्तारी को।
वक्ते-सहरी तो कोई आया नही-
शहर आया है इफ्तेयारी को।
आप आये हैं गमगुसारी को-
देखिये दिल के जख्मे-कारी को।
अपने बारे मे सोचते हम भी-
जानते काश दुनियादारी को।
आप अनजान से मिले होते-
तो भुला देते होशियारी को।
-
हादसाते-हयात4
[ 63 ] ।। हम है, हमारी बज्म सजी है तो आइये- तस्कीने-रूह आप यहा पा के पाइये । । -- वक्ते-सहर से पहले ही घर अपने जाइये- जो लोग सो रहे है उन्हे क्यो जगाइये। । । । - हम तो तुम्हारे अपने हैं फिर क्यो छुपाइये- कितना है प्यार आपके दिल मे दिखाइये । । बस एक तेरी सीधी नजर हमको चाहिये- तिरछी नजर से हम पे न बिजली गिराइये। फूलो की प्रारजू है तो फिर जरुम खाइये- काटो से अपना दामने-दिल क्यो बचाइये। •अनजान कोई साथ नहीं है तो क्या हुआ- राहे-सफर मे पहला कदम तो उठाइये। . हादसाते-हयात/75
64 ]
सभी मुजरिम हैं, मुन्सिफ कौन है, कहिये जमाने में-
न उजलत कीनियेगा, फैसला अपना सुनाने में।
यू ही वर्वाद कर डालोगे शव सजने-सजाने में-
सवरने की जरूरत कुछ नही नजदीक आने में
सिवा मेरे कोई माहिर नहीं है गम उठाने मे-
करोगे वक्त जाया, हर किसी को आजमाने में।
अगर लज्जत तुम्हे मिलती हो विजली ही गिराने मे-
तो फिर देरी न करिये, माशिया मेरा जलाने मे ।
लगा क्यो वक्त इतना, आखिरश ये जान जाने में-
कराहत पा गई क्या आजकल उनके निशाने मे ।
कहा से आ गई रगीनियां मेरे फसाने में-
मेरी तो उम्र गुजरी है, यू ही रोने-रुलाने मे ।
मिला अनजान क्या उनको मेरे दिल को दुखाने मे-
वो ही बदनाम होकर रह गये सारे जमाने में ।
हादसावे-हयात/76
[ 65 अव फर्क रहना चाहिये न खासो-ग्राम मे- बदलाव लाना चाहिये कुहना निजाम मे । जागी हैं कुछ उम्मीदे नई जो अवाम मे- वर आयेंगी यकीनन, लग जाम्रो काम मे । सर जो झुके तो दिल भी झुके बारगाह मे- अजमत ये होनी चाहिये अपने ईमाम मे। पलकें बिछी हुई है, मानिन्द-फर्श-राह- करना मुआफ गर हो कमी इन्तजाम मे। तू मौसमे-बहारा, जरा आ तो लेने दे- सय्याद देख लेना रहेगे न दाम मे । 1 इसरार उसका टालना अब तो मुहाल है- इजहार ऐसा कुछ ही क्यिा है पयाम मे । 'अनजान पारसाई की बातें न कीजिये- डूबे हुए है आप तो तहसीने-जाम मे । हादसाते-हयात/17 [ 66 ] ले लें क्या उसका नाम सरे-ग्राम दोस्तो- हो जायेंगे ईमान से, बदनाम दोस्तो। लेते है सुबहो-शाम वो ही नाम दोस्तो- गोया नही है और कोई काम दोस्तो। मुद्दत से जो कि जह्न मे है घर किए हुए- क्यो मानले रयाल है वो खाम दोस्तो। रावन तो हर जगह पे दिखाई दिये मगर- ढूढा कहा-कहा, न मिले राम दोस्तो । मजिल का क्या है, चाहे मिले या कि न मिले- चलने से रखना चाहिये बस काम दोस्तो। न उससे मैं जुदा, न जुदा मुझसे वो कभी- होता रहा है मुझको तो इलहाम दोस्तो। तू कौन ? मैं ह कौन ? कहा कौन-कौन हैं- कुन मे जवाब इनके मिलेगे तमाम दोस्तो। दोवारो-दर को देखें कि हम वाम दोस्तो- आया है उनके आने का पैगाम दोस्तो। अनजान मुद्दतो की लिये प्यास आया है- गर दे सको तो दीजियेगा जाम दोस्तो। हादसाते-हयात8 [ 67 ] डर क्या दिखा रहे हो कफस और दार का- पत्थर का दिल नहीं है हर इक पहरेदार का। प्रा न सकेंगे आप ये कहला भी दीजिये- कि खत्म सिलसिला तो हो इन्तजार का । हर ज्यादती खजा की गवारा हमे मगर- दिल मे यकीन रखते है फस्ले बहार का। सय्याद । बे-परी पे मेरी नाज तू न कर- उड जाऊगा, सुनूगा जो मुज्दा बहार का । जिसने पनाह ले ली, तेरी बारगाह में- कोई पता लगा न सका उस फरार का। वाहम रहेगी दोस्ती हर एक हाल मे- अन्जाम हो बाखैर उस कोलो-करार का । "अनजान पैरोकार है बस इत्तेहाद का- मन्जर उसे दिखाइये न इन्तेशार का । हादसाते-हयात/79 [ 68 ] यल तर जो वायफा था, हुमा माज वैवफा~ दिन ये दिपा रहा है हमे पिसलिये सुदा 7 सावित पदम प्रगर है तो चलने से शाम रस- पावो के छाले देस न काटा कोई चुमा । मौत और मसीहा साथ में आते नही कमी- मरने का वक्त पाया तो कोई नहीं जीया । देखो तुम्हारा नाम था वावक्ते-हरसती- कलमा कहो इसे या कहो आखिरी सदा । ए यार । देस गर भी गमगीन हो गये- इस वक्त तू भी चेहरे पे रजीदगी तो ला। भर-भर के मिट्टी लाये है मुट्ठी मे यार लोग- हमको यही वफानो का अपनी सिला दिया। •अनजान के जनाजे में शामिल है आज वो- ऐ प्रासमान। देख अनोखा ये माजरा । --- हादसाते-हयात/80 । प्राया- उस यार के कूचे मे सौ बार मैं अश्को के तसलसुल से दामन को भिगो पाया । जज्बात की शिद्दत ने पहुंचा ही दिया उस तक- उन झील-सी आँखो मे ईमान डुबो आया। तस्कीने-दिली पाने निकला था नशेमन से- अफसोस कि जव लौटा गम दिल मेसमो पाया। ये जान निकल जाये उस यार की गलियो मे- ईमान तो कब का ही उन राहो मे खो आया। चाहत का शजर शायद फल-फूल गया होगा- जब देखने पहुंचा तो बेसाख्ता रो पाया। मकतूल की प्रांखो मे तस्वीर थी कातिल की- गो खून के धब्बे तो वो घोने को घो पाया। 'अनजान' मुहब्बत की राहो मे बहकने दो- हर एक बहकता है इस राह में जो प्राया। हादसाते-हयात/81 [ 70 ] हम न होगे तो हमे याद किया जायेगा- घर जो वीरान है अावाद किया जायेगा। बस यही सोच के हर रज उठा लेते हैं- जुज हमारे किसे वरवाद किया जायेगा। हम तो हर हाल में तामील करेंगे उसकी- मान कर अपना जो इरशाद किया जायेगा। फिर कोई जुर्म किया जायेगा सावित हम पर- जीते जी हमको न प्राजाद किया जायेगा। जिन असीरो को रिहाई की तमन्ना ही न हो- उन असीरो का क्या सय्याद किया जायेगा? इसी उम्मीद पे अनजान सितम दिल पे सहे- जब दुखी होगा तो दिलशाद किया जायेगा। । हादसाते-हयात/82 -- [ 71 ] दैरो-हरम को छोडकर, जव मयकदे मे आ गये- अब पारसा समझो हमे, या रिन्द का खिताव दो। तलवार भाजते हुए, वरसो से थक गये है जो- अब उनके हाथ मे कलम और प्यार की किताब दो। इम हादसाते-ह्यात ने, रातो जगाया है हमे- तावीर जिसकी हो हसीन, पाखो को ऐसा रवाव दो। नफरत दिलों की दूर कर, सबको मिला दे जो गले- ऐसा मुगन्नी ढूढकर, हाथो मे उसके रवाब दो। दुनिया मे शान से जीयो, उकबा मे सुखरू रहो- महशर मे यजदा जब करे, बेखौफ हो जवाब दो। नगे बदन को चाहिये, कुछ ढापने को दोस्तो- हो छाल-खाल-बाल या रेशमो-कमखाब दो । - 'अनजान तग आ गये, कुहना निजाम से तो अब- दस्तूरे-दुनिया बदलने को, नारा-ए-इन्दलाब दो । हादसा
72 ]
तग पा गया हूँ शोरे-मुसलसिल से, जाम दे-
मजबूर हो के पाया है मैं दिल से, जाम दे।
दम ही निकल न जाये सवालो-जवाब मे-
इतने सवाल पूछ न विस्मिल से, जाम दे ।
दरो-हरम की सिम्त न जाना पडे कहीं-
साको अगर उठा तेरी महफिल से, जाम दे।
नाप्राश्ना हैं लोग जो तूफाने तुन्द से-
उनको पुकारने दे तू साहिल से, जाम दे ।
'अनजान झूमता हुआ दर से उठे तेरे-
होना है -ब-रू इसे कातिल से, जाम दे ।
हादसाते-हयात/84
[ 73 ] कदम लडखडाने लगे बेखुदी कहा आ गये हम दीवानगी मे? उसे लुत्फ जीने का क्या खाक आये- नहीं रखा जिसने कदम आशिकी मे । न उलझा जो जुल्फो के पंचो-खम मे- यकीनन भटकता रहा गुमरही मे । बुझा दो चरागे-दहर को बुझा दो- सुकू दिल को मिल पायेगा तीरगी मे । अधेरे मे पा ही गये अपनी मजिल- भटकने का डर था हमे रोशनी मे । नही एक पल भी उन्हे भूल पाये- हो काफिर जो गफलत हुई बदगी मे । जब हासिल है 'अनजान उनकी मुहब्बत- हमे भौर क्या चाहिये जिन्दगी मे ? -- हादसाते-हयात/85 [ 74 1 कौन कोशिश करे दीवाने को समझाने को बात सुनता ही नही जो किसी फरजाने को। हौसला किसमे है तूफान का मुह फेर सके- सिफते-फरहाद है चट्टान से टकराने की । गर कोई कैस हो सहरा से गुजर भी जाये- राह दीवाना ही चल सकता है दीवाने की । जो भी आता है यहा रिन्द-बलानोश हुआ- सुध किसी को न रही लौट के घर जाने की। इतनी हैरत से मुझे देख रहे क्या हो- सगे-बुनियाद हू मैं काबा- -प्रो-वुतखाने की। इसको मे'राजे-मुहब्बत के सिवा क्या कहिये- शम्मा पे जान निकल जाये जो परवाने की। कितने नादान हैं, कम-अक्ल हैं दुनिया वाले- कोशिश करते है अनजान को समझाने की। हारमान्हपात/86
[ 75 ]
सरगर्मे-बगावत है गुल-वर्गो-समर यारो-
होने को चमन मे है अब बरपा कहर यारो।
सय्याद के जुल्मो से, बेजार परिन्दे हैं-
अब जाल से निकलेंगे, पर हो कि न पर यारो।
इस रात की जुल्मत से, तग आ ही गई आंखें-
चीरेंगी अधेरे को, देखेंगी सहर यारो ।
कमजोर कनारो से, सैलाब नही रुकते-
इस तौर से उट्ठी है, तूफानी लहर यारो ।
गर जिदा रहे तो हम मिल जायेंगे अपनो से-
मैदान मे निकले हैं, हम छोड के घर यारो।
करनी ही पहल होगी, हम सोच चुके दिल मे-
इक रोज तो मरना है, किस बात का डर यारो।
'अनजान भगतसिंह के बलिदान की सौगद है-
इस देश पे जा देकर, हम होंगे अमर यारो।
हादसाते-हयात/87
[76-] ? सहरा को कैस, दार को मन्सूर मिल गये- इस दौर में नहीं क्यो मुहब्बत नवाज लोग जिसको भी देखियेगा परेशान-हाल है- किस दर्जा बेकरार हैं अन्दर से प्राज लोग? चेहरो पे है तनाव, निगाहे उदास हैं- जाने कहा चले गये, खुशमिजाज लोग? जो वारगाहे-यार मे जा-दिल फिदा करे- क्यो अाज भूल बैठे हैं, तर्जे-नमाज लोग' रूदादे-हुस्नो-इश्क का उनवान खो गया- महमूद भी रहे न रहे हैं अयाज लोग। आवाज दो, मसीहा कोई है तो पायेगा- मायूस हो चले हैं कई ला-इलाज लोग। वो तो इसी शहर में भटकता है रात-दिन- गो जानने को जान सके उसको बाज लोग। जिसको हटाना हो राह से तो लागू कीजिये- दस्तूर इसको कहते हैं कामराज लोग। 'अनान उनसे हकपरस्ती को पास क्यो- रावन के राज को जो कहे रामराज लोग। हादसाते-हमात/88. , [ 77 ] इश्क की तौहीन हम कर न सके- शिद्दते-गम मे भी आह भर न सके । यार से शिकवा-गिला कर न सके- तोहमतें सर उसके हम घर न सके । बढ गये नाखून हो तो आइये- जस्म हैं ताजा अभी भर न सके । यार के दर पे झुका सर न उठा- सजदा ऐसा शेख जो कर न सके । कर चुके नज्रे-हवादिस जिदगी- बुजदिलो की मौत हम मर न सके । रब्ते-बाहम जब अदम-मौजूद है- खोल कर दिल बात हम कर न सके । हसरतें 'अनजान' दिल मे रह गई- चाह कर इजहार हम कर न सके । हादसाते-हयात/89
[ 78 1
चलिये बाजार में नीलाम पे चढ जाते हैं-
फैसला छोड दें हाथो मे खरीदारो के ।
ऐसा लगता है कि इन्साफ मिलेगा इनको-
चेहरे ऐसे तो नहीं होते गुनाहगारो के ।
वुतशिकन हाथो मे तलवार लिये आये थे-
हौसले कम न हुए बुत के परस्तारो के।
क्यो मेरे मुल्क मे अब गर्मी कही दिखती नही-
सर्द उनवान नजर पाते हैं अखबारो के।
आपका दौरे-हुकूमत जो यू ही चलता रहा-
भाग तो फूट ही जायेंगे समझदारो के।
दिल्ली-प्रो-थर्मापल्ली गोया हैं वहशी बहनें-
बस मे आ सकती हैं हर दौर के खूख्वारो के ।
चलिये 'अनजान गुलिस्ता से उठा ले डेरा-
जद मै हर फूल नजर आता है अब खारो के ।
-
हादसावे-हयात/90
[ 79 ] मेरी तनहाइया तो मत छीनो- भीड मे तो मैं जी सकूगा नही। अपनी नजरोसे गिर गया जिस दम- हश तक फिर कभी उठूगा नही । प्यार किस दर्जा तुमसे है मुझको- गर कभी पूछा तो कहूगा नहीं। लोग मरते हैं आजकल जैसे- मौत ऐसी तो मैं मरू गा नहीं। बेरुखी से जो पेश आयोगे- तो गले आपसे मिलूगा नही । झुकना जल्लाद को पडे तो पडे- सर कटे कि रहे झुकू गा नही । जानता हू कफस क्या होता है- अब हू आजाद तो फसू गा नही । तुम सितम पर सितम किये जामो- मैं शिकायत कभी करू गा नही । जानता हूँ तू सिर्फ मेरा है- हो किसी और का सहूगा नही । रात जब चांदनी मे जलती है- सदं आहे तो मैं भरूगा नही। हादसावे-हयात/91 7 "अस्सलातो-गरम-मेनन्-नोम" - दे मोमज्जिन सदा सुनू गा नही मौजे-तूफान सर पटकती रहे- मैं हू चट्टान-सा हिलू गा नहीं। थाम रखा है तुमने बाहो मे- अय किसी हाल मे गिरू गा नहीं। खूब वाकिफ है हाल से मेरे- खत कमी यार को लिखु गा नहीं। मिल गया है सही ठिकाना जब- दर-ब-दर अव तो मैं फिरू गा नहीं। मस्लहतन में खामोश हूँ यारो- वरना तुम जानते हो गूगा नहीं। किससे लेना है, किसको देना है- इन हिसाबो मे तो पडू गा नहीं। साख है तो सवाई इज्जत है- साख खोकर तो मैं जियू गा नहीं। जिसका पीना हराम हो साकी- जाम ऐसा कभी पियू गा नही चाक जब तक हैं सीने फूलो के- तो गरेवान में सियू गा नहीं। । हादसाते-हयात/92 दिल दिया है तो जान भी दूगा- कौल से अपने मैं डिगू गा नही । राहे-उल्फत मे मुश्किलें ही सही- जीते-जी इससे मैं हटू गा नही। उनके मेहरो-करम हो याद रहे- जुल्म जो-जो किये गिनू गा नही। कौन नासेह से बेवजह उलझ- ध्यान समझाने पे धरू गा नही । याद पाऊगा फूल की मानिन्द- फास की तरह मैं चुभू गा नहीं। तुम कदम से कदम मिलानो तो- हो सफर लम्बा मैं थकू गा नहीं। मैं हूँ फौलाद कोई बर्फ नहीं- तेज गर्मी से भी गलू गा नहीं। लोग 'अनजान' ढल गये जिनमे- ऐसे साचो मे तो ढलू गा नहीं। I हासा-सात/93
[ 80
मुपहर बन गई शायद यही तनहाइया यारो-
हमारे हिस्से मे पाई हैं यस गुमराहिया यारा।
न कोयल कूकतो है, न महक प्रामो की पाती हैं-
सजा की जद में गोया प्रा गई अमराइया यारो।
झुके सर को लिये कब से उठे हाथो में बैठा हू-
गिरे हाथो से ली जाती नहीं अगडाइया पारो ।
भुला बैठे हैं उनकी याद और नाम तक फिर भी-
मगर क्या कीजिये कि साथ हैं परछाइया यारो।
अघेरा ही अधेरा है जहा तक भी नजर जाये-
कभी हर-सू उजाले थे, कभी रा'नाइया यारो।
यकीनन मजिले-मकसूद पे पहुचेंगे दीवाने-
कठन हो रास्ते चनने मे हो दुश्वारिया यारो।
किसे आवाज दें, हर तरफ सन्नाटा-सा छाया है-
इन्ही वोरा इलाको मे ही थी अावादिया यारो।
शहर बरवाद हो तो फिर से कर आबाद सकते हैं-
मगर जाती नही दिल में बसी वीरानिया यारो।
हम ऐसे ही गुरु-गम्भीर पहले तो कभी न थे-
नतीजा उनकी सोहबत का है ये खामोशिया यारो।
जिह हम हाशिये पे छापना वैजा समझते थे-
वो ही बनने लगे अखबार की अव सुखिया यारो।
.
हादसाते-हयात/94
राई से मुबर्रा कौन है, बेएब दुनिया में-
रे तो बस दिखाई दी हैं उनमे खूविया यारो।
फस मे हैं मगर क्या कीजिये जो याद आये तो-
मन मे इन दिनो किस हाल मे है भाशिया यारो।
हर बरबाद होकर रह गये हैं प्रालीजाहो के-
गर कायम रही हर हाल मे ये झुग्गिया यारो।
अक्सर देखता हू चलती-फिरती जिन्दा लाशो को-
ये फिरते है घर-दफ्तर जो अपनी अथिया यारो।
जज्वा-ए-मुहब्बत जान है अनजान आदम की-
कल कर खुल्द से चाहे सहे फिर सख्तिया यारो।
हादसाते-हयात/95
[ 81 ] 3 कनका ढलता शबाव क्यो देखें- शाम का आफताव क्यो देखें? जिसकी तावीर गैर मुमकिन है- दोस्तो। ऐसा रवाव क्यो देखें? आपका चेहरा देख लेते है- तो भला माहताब क्यो देखें? उनके पारिज की ताज देखी- तो चमन के गुलाब क्यो देखें? क्या दिया उनको,क्या मिला उनसे- ताजिराना हिसाव क्यो देखें? आखिरे-शब बहा जो आंखो से- वो लहू था कि आब क्यो देखें? क्या गुजरती है इन दिनो दिल पर- हम ही देखें, जनाब क्यो देखें? हमको हर शख्स अच्छा लगता है- कोई होगा खराब क्यो देखे ? याद अनजान है करम उनके- दुख मिले वे-हिसाव क्यो देखें। हादसाते-हयात/96 [ 82 ] ख्वाहिश जो देखी अापके तीरे-नजर मे है- अरमान जख्म खाने का अपने जिगर है। पढिये कि नाम आपका वाबस्ता तो नही- अपना तो जिक्र आज की ताजा खबर मे है। अमनो-प्रमान दरहमो-बरहम न हो कही- सुनते हैं इन दिनो वो हमारे शहर मे है। वो ही समझ न पाये तो समझेगा कौन फिर- यो कश्ती-ए-हयात हमारी भंवर मे है ? सस्याद फस्ले-गुल का हमे इन्तजार है- लेकर कफस उडेंगे ये दम बालो-पर मे है। जो नूर उनके चेहरे पे देखा है दोस्तो- ऐसी चमक कमर मे न लालो-गुहर मे है। जिन्दादिली का राज कोई उनसे सीखता- आंखो मे जिनके पाब तो प्रातिश नजर मे है । जिसने शबे-फिराक इबादत मे काट दी- लेने दो नीद लेता अगर दोपहर में है। तुम वो सवाल पूछते हो हमसे किसलिये- जिसका जवाब आपके दीदा-ए-तर मे है। किस दिलजले की प्राहो से टकरा के भाई है- तासीर अाज लू की सी बादे सहर मे है। 'अनजान रास मा गई वीराना जिन्दगी- दुनिया क्या खाक समझेगी जो सौदा सर में है।
[ 83 किस-किससे फिर फरेव न साना पडा हमे- उस वेवफा से दिल जो लगाना पडा हमे । गो दास्ताने-दर्द नई तो नहीं मगर- उनवा बदल-बदल के सुनाना पडा हमे । जो साथ एक पल भी निभाये न निभ सके. ताउम्र वो ही साथ निभाना पडा हमे । जाये भटक न कारवाने-जीस्त राह से- मिस्ले-चराग दिल को जलाना पडा हम। नाखून छिगुली अगुलि का मांगे से जो न दें- उनके लिये ही सर को कटाना पडा पमे । हमने कभी किसी का सहारा लिया नही- किस-किसका बोझ सर पे उठाना पडा हमे । हमने तो प्राज तक न दुखाया किसी का दिल- दरिया क्यो प्रांसुमो का बहाना पडा हमे कोशिश यही रही कि करे सवको शादमा- दिल का तो दर्द दिल में छुपाना पडा हमे। "अनजान हम भी रखते थे फूलो की प्रारजू- काटो का कर्ज पहले चुकाना पडा हमे । हादसाते-हयात/98
[ 84 ]
सर उठेगान प्रास्ताने से-
लग गया है सही ठिाने से ।
रज अपनो न कम दिये तो नही-
क्या शिकायत करें जमाने से?
इंट रख लेंगे रखनी होगी तो-
हाथ हटा लिजिये सरहाने से ।
दिल झुका ही नही जो सज्दे मे-
फायदा क्या है सर झुकाने से?
दर्द जव हासिले-हयात हुमा-
वाज पाये दवायें खाने से।
सुनो से तो और भडकेगी-
प्राग बुझती नही बुझाने से।
सागरो-खुम उदास हैं साकी-
यू उठे हम शराबखाने से ।
गो असीरे-कफस थे गुलशन मे-
वाज माये न गीत गाने से ।
हर तरफ तीरगी का साया है-
रोशनी होगी दिल जलाने से ।
उनसे अनजान दिल लगा बैठे-
जो हैं अनजान दिल लगाने से ।
हादसाते-हयात/99
.
[ 85 ]
शहर सारा उदास-सा क्या है-
हर कोई बदहवास-सा क्यो है?
जब भी मिलता है रज देता है-
शख्स वो फिर भी खास-सा क्यो है ?
मुद्दतें हो गई हैं उनसे मिले-
फिर भी वो दिल के पास-सा क्यो है ?
सास के साथ-साथ चुभता है-
दिलवा दिल मे फास-सा क्यो है
जिसका जी चाहे रोद डाले जिसे-
आदमी आज घास-सा क्यो है
कोई हिटलर कुचल दे जब चाहे-
आज हर दिल फास-सा क्यो है
उसने दीपक जला
दिया होगा-
तीरगी मे उजास-सा क्यो है
गर्क
रहता है जामो-मीना मे-
पारसा क्यो है ?
7
?
7
रिन्दे-अनजान
हादसाते-हयात/100
[ 86 ] अफलाक की गदिश मे गिरिफ्तार नही हू- फानी हू मगर साया-ए-दीवार नहीं है। है याद मुझे मैं ही था मस्जूदे-मलाइक- मैं खाक सही फिर भी शमसार नही है । इवलीस ने मासूम-मी हव्वा को खिलाया- प्रादम हूँ मैं गन्दुम का तलबगार नहीं है। यजदा ने मुझे खुदे-बरी से सो निकाला- मैं अपनी निगाहो मे गुनाहगार नहीं है। मैं युसूफे-लासानी की तकदीर लिए हू- मूसा की तरह तालिवे-दीदार नही है। काधे पे सलीब अपने उठा रखी है मैंने- समझो तो मसीहा हू मैं बीमार नही हूँ। सरचश्मा-ए-रहमत मेरे सीने मे रवा है- मैं नूह के तूफान का आसार नही है। इन तीरो के विस्तर पे हू आराम से अर्जुन- मैं जग में हारा हुआ सरदार नही हूँ। अनजान रवायाते-वफाओ की कसम है- मैं खुद ही जफाकश हू जफाकार नही है। mam re/101
8
रसवाला पर लुटाने पे जर है तुला हुअा-
बेसोफ माये कोई भी दर है खुला हुमा!
जर अाप देख पाये न सूरज चढा हुमा-
देखोगे कैसे यार का चेहरा वुझा हुआ।
तुमको पसद रग जो आये चढाइये-
दामन सफेद और है ताजा बुना हुआ
हर वक्त चेहरा आपका प्रसा में है वसा-
हक बन्दगी का हमसे यकीनन अदा हुआ।
अब उससे कौन इश्व की रूदादे-गम कहे-
जो शरूस सर-ता-पा है पत्थर बना हुआ।
कारून के सजाने की तफसील मे न जा-
दिल को टटोल देख कि क्या है छुपा हुआ।
दर-दर की ठोकरे क्यो खाता है फिर रहा-
सब जानते है वो तो बहुत है पढा हुआ।
जो शरम तेरे-मेरे के झगडे मे पड गया-
समझो कि जीते जी ही वो तो मर गया।
शीशे के घर मे बैठकर पत्थर न फेंकिये-
उलटा जवाब दे दगा सर फिरा हुआ
मायूस अन्दलीप न यू दौरे-खजा से हो-
पामोगी तुम बहार मे हर गुल खिला हुआ।
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हादसाते-ह्यात/102
शायद वो इत्तेफाक से गुजरें इधर से आज- चौरास्ते पे मैं तो हू कब मे खडा हुअा। कोशिश नो की भुलाने की उनको हजार चार- क्या कोजिये लगाव मुसलसिल सिवा हुआ। रहने दो अब उठाने की कोशिश फिजूल है- उठ न सकेगा अपनी नजर से गिरा हुआ। ये रजो-गम, दर्दो-अलम, नालाए-रसा- सरकार। आप ही की बदौलत अता हुआ। मतलूब तक न पहुचेगा हरगिज भी ऐसा खत- अश्को की रोशनाई से हो जो है लिखा हुआ। नजे पे सर बुलन्द रहा वादे कत्ल भी- झुकता नही है हक के लिए सर उठा हुआ। तुम जान कर के प्राव इसे पी न जाइये- इन आसुप्रो मे खूने-जिगर है मिला हुआ। जलते हुए अलाव पे पानी न डालिये- कडवा धुआ ही देगा जबरन बुझा हुआ। जो शख्स कहकहो पे लगाता है कहकहे- सच मानिये कि दिल है उसका दुखा हुआ। तुरबत पे मेरी आके कभी आप देखिये- कत्वा तुम्हारे नाम का भी है लगा हुआ । 'अजजाज' सब नसीब की बातें है वरना क्यो- जिसको भी चाहा हमने वो ही बेवफा हुमा । हादसाते-हयात/103 [ 88 1 मायूस हो गये हैं सभी राहवरा से हम- अरमान कितने लेके चले थे घरो से हम । - हम होशो-सिदं दुरस्त हैं, नियत भी ठीक है- न जाने लग रहे हैं क्यो सरफिरो-से हम । तुम प्यार से पुकार के देखो भी तो कभी- लब्बैक कहते पायेंगे अपने घरो से अम्वाते-नागहानी की पढते हुए सवर- कितने करीब होते हैं इन दुस्तरो से हम । यू देखिये न नजरे-हिकारत से दोस्तो- अन्तर नहीं है आपके उन बेहतरो से हम । क्या कोई उस जमीन पे आकर न रोयेगा- महरूम जिस जमी पे हुए है सरो से हम । अनजान क्यो उडान की उम्मीद छोडदें- महरूम न रहेगे हमेशा परो से हम । हादसाते-हयात/104 [ 89 ] क्या हमी बस रह गये हैं आजमाने के लिये- और कोई दूढिये अव गम उठाने के लिये । क्या जरूरी है सफर मे जान-ए-दिलदार हो- इंट रख लेंगे सरहाने थोडा सुस्ताने के लिये । वर्क से कहिये तहम्मुल से जरा तो काम ले- तिनका-तिनका चुन रहे हैं आशियाने के लिये । सिर्फ पानी से न होगी खेतिया सरसब्ज प्रव- खूने-दिल भी चाहिये इसमे मिलाने के लिये । पाप वादा करके भी आये नहीं है बारहा- मिल ही जाते हैं वहाने, यू बनाने के लिये । किसके घर जायें, कहा ये रात काटें हिज़ की- मौत ही पा जाये सीने से लगाने के लिये । आदमी को आजकल अनजान ये क्या हो गया- हर कोई तैयार बैठा है सताने के लिये । हादसाते-हयात/105
690 ]
मरने से नही डरते जीने के तमन्नाईक
कुछ सोच समझकर
ही उनके
शंदाई
सुनते है कि कल वो शख्म रुरुस्त हुआ दुनिया से
अवमरसिया पढिये, कि रजवाइये शहनाई ।
हर जख्म छुपा -लेंगे, हसते हुए हम यारों-
कया इश्क ये लाहेगा, हो हुस्न की रुसवाई ॥
तनहाई से उकता कर इस भीड मे आये थे-
क्या, कीजिये याद आये रह-रह के जो तनहाई ।
वो भूल गये होंगे, मजबूर हैं पादत से-
वो आयें कि न पायें, है जान पे बन पाई ।।
सय्याद
कफस में भी मायूस नही बुलबुल-'
महला के निकलती है चलती हुई पुरवाई ।'
'अनजान चलो चलकर देखें तो सही उसको-
किस हाल मे जिन्दा है वो इश्क का सौदाई ।।
B
हादसावे-हयात/106
191 ] शाबे-फुरकत मे वस्ले यार का अरमान तो देखो- ने समझाये से मममें है, दिले-नावान तो देखो। शेकिस्ता करती है और नाखुदा पर भी भरोसा कम- गर्जता फोले-बेजजीर-सा तूफान तो 'देखो, दिले-अपसुर्दा को सौ रज देने पर उतारू हैं- हमारे चाहने वालो के ये एहसान तो देसो । फरिश्ता-सिफ्त इन्सा हो गये नापद दुनिया से- मगर हर गाम पे मिल जाते हैं शंतान तो देखो । न वरसे वक्त पे पानी, फलक की अजअदाई है- मशक्कत करने को तैयार है दहफान तो देखो । फसल इस बार तो उम्मीद से ज्यादा ही थी होनी- मंगर खाली के खाली रह गये खलिहान तो देखो । मरीजे-दिन अगर अच्छा नहीं होता तो क्या कीज- यगाना अपने फन मे पाप है लुकमान तो देखो। कभी इसकी खुशामद की, कभी उसकी खुशामद की- हमारे दौर के इन्सान का ईमान तो देखो। न पहुचे उस तलक आवाज तो क्या कीजिये यारो- सानो पर सदायें दे रहा 'अनजान तो देखो । हादसाते-हयात/107 कि दामन मे हमारे भी भरे है ढेर से पत्थर । [ 921 इधर पत्थर, उघर पत्थर, जहा देखो वहा पत्यर- इस पथरीले शहर में प्रादमी भी बन गया पत्थर । सितम सहता सितमगर के विला शिकवा-गिला हसकर- इलाही। काश दिल के तू बना देता कोई पत्थर । ये लहरें खुद-वा-सुद उट्ठी नही दिल के समन्दर मे- किसी को शोख नजरो ने है मारा ताक कर पत्थर । तुम्हे इस भीड मे पाकर मुझे अफसोस होता है- न मारा होता तुमने फूल, कस कर मारते पत्थर । वो मारे पहला पत्थर, जो गुनाहो से मुवरी हो- सभी रुख्सत हुए, मारा गया न एक से पत्थर । जिसे हम मोम का पुतला समझते पाये थे अब तक- वो पत्थर था, वो पत्थर है, रहेगा कल भी वो पत्थर । न मारो शीशमहलो से हमे अव भूल कर पत्थर- पलस्तर पर पलस्तर कर रहे है कारीगर लेकिन- जो पत्थर है न बदलेगा रहेगा आखिरश पत्थर । किसे अनजान है फुरसत कि सर फोडे यहा प्राकर- रहेगा मुतजिर कब तक हमारी क्व का पत्थर 7 हादसाते-यात/108 [.98) दर्द को ला-दवा हो जाने दे- मौत से सामना हो जाने दे । नीद हमसायो तक की उड जाये- झम कर गीत गम के गाने दे। नौगिरिपतागे में से लगता है- पख जब तक हैं फडफडाने दे। जो हमे प्राजमा चुके बरसो- एक दिन उनको आजमाने दे । तुमने नाखुन वढा लिये होंगे- जस्म पहले के भर तो जाने दे। कैफो-मस्ती है छाई नस-नस मे~ गीत रिन्दाना गुनगुनाने दे । चार तिनके जमा हुए होंगे- वर्क को प्राशियां जलाने दे। तुझको जी भर के देखना है मुझे- आँसुमो से नजात पाने दे। बात साकी की मान ले जाहिद- तोवा टूटे तो टूट जाने दे । मुद्दतो तिश्नालब रहा है जो- प्पास उस शरस को बुझाने दे । जानू-ए-यार पे धरा सर है- मौत 'अनजान पाये, प्राने दे । हादसाते-हयात/109 माला-ए-नीम-शव ने तडपा दिया उसे- जोशे-जुनूने-इश्क ने पिघला दिया उस । कासिद जवाव खत का न लाया है अब तलक- ऐसा न हो रकीबो ने वहका दिया उसे । मैं मयकदे से लौटा था तौबा की सोच कर- छाई हुई घटामो ने तुडवा दिया उसे । जीने का जो शऊर सिखाने को आया था- सूली पे जालिमो ने लटका दिया उसे । उसने कफस मे तोड दिया सर पटक के दम- जाती हुई बहार ने सदमा दिया उसे । हर एक पे भरोसा किया जिसने जीते जी- किस-किसने किस तरीके से धोका दिया उसे । उरियानगी-ए-जिस्म भला कौन देखता- कफना के दोस्तो ने दफना दिया उसे । वस एक मेरा नाम सुबहो-शाम लेता है- खुद अपना नाम तक भी भुलवा दिया उसे ! नहीं- जुल्फो के पंचो-खम मे उलझा दिया उसे । फरज दे-माफताब था, वेदाग था करन- गुस्से में परशुराम ने ठुकरा दिया उसे । अनजान उस दीवाने को फुर्सत नही जरा- माहो-फुगा के काम पे लगवा दिया उसे । वेरोजगारो-वेसरो-सामान अब हादसाते-हयात/110 [ 95 ] जीना भी ढग से आया न मरना करीने से- सीखा न जिसने दुनिया मे रहना करीने से । खूने-जिगर से लिखी है रूदादे-इश्क जो- ऐ पढने वाले । उसको तू पढमा करीने से । नाजुकतरीन होता है रिश्ता-ए-दोस्ती- कहनी हो सस्त बात तो कहना करीने से । हमसाया कोई दर्द से वाकिफ न हो कभी- आहो-फुगा करो भी तो करना करीने से । दामन पे दाग बनके नमूदार हो गये- इन आसुओ को चाहिमे बहना करीने से । ऐ शम-ए-इन्तजार । अभी से न माद पड- लम्बी शवे-फिराक है जलना करीने से। यादो के फूल-काटे उगे होगे हर तरफ- ऐ यार । इस जमीन पे चलना करीने से। देखो भटक न जाणो कही तीरगी मे तुम- कदमो को राहे-इश्क मे रखना करीने से। तीवा अभी-अभी तो है अनजान हमने की- फिरना पडे जो तौवा से फिरना करीने से। हादसाते-हयात/III [ 96 ] काश अपना सर हो, पा-ए-यार हो- बस्ते-खुपता क्यो न फिर वेदार हो ? हमे- पावला-पाई मयस्सर हो राहे-मन्जिल होने को पुरखार हो । जिन्दगी जीने मे लज्जत है वहाँ- जिन्दगी जीना जहां दुश्वार हो । दरअसल वो है रगे-जा से करीब- चार-सू फिर क्यो तलाशे-यार हो ? बाज हकगोई से हम न आयेंगे- फिर मुकद्दर मे कफस या दार हो मुश्किलें आसान होने जब लगी- यू लगा जैसे हमारी हार हो। नाखुदा लगर उठा, पतवार झेल- नाव को ले चल जहा मझधार हो । हक अदा अनजान होगा जीस्त का- जांकनी के वक्त वस्ले-यार हो । हादसावे-हयात/112 [ 97 ] ठोकरें खा चुके जमाने को- क्या जरूरत थी दिल लगाने की? बक चक्कर लगा गई आकर- नीव रखी जो आशियाने की। जिन्दगी ने हजारो सदमे दिये- हम मे हिम्मत रही उठाने की। उनकी जिद है कि वो न पायेंगे- करिये कोशिश उन्हे बुलाने की। आजकल मीरे-कारवां है जिन्हें- खुद खबर भी नहीं ठिकाने की। अब सितमगर को कौन समझाये- कोई तो हद हो आजमाने की। उनको 'अनजान प्यार है हमसे- है वजह बस यही सताने की । हादसाते-हयात - - कभी फरजानो की सफ मे, हमे फरजाना पायोगे- [ 98 ] कभी गुजरे दिनो की याद मे आंसू बहाते हैं- कभी भूले हुए लम्हात फिर से याद आते हैं । कभी दर-पर्दा-ए-नफरत वो उल्फत याद आती है- कभी दर्दे जुदाई भूल कर हम गुनगुनाते हैं । कभी बज्मे-हकीकत मे, अकेले डूबे रहते हैं- कभी बज्मे-तखय्युल, यार के दम से सजाते हैं । कभी बज्मे-अदू मे भी गये तेरे लिये जालिम- कभी तेरे ही कूचे से गुजरना भूल जाते हैं। कभी मसरूर रहते हैं, कभी रजूर रहते हैं- कभी खामोशियो के, गत मै हम डूब जाते हैं । कभी गैरो से मिलते है, तुम्हारी याद कमे करने कभी गुमनाम राहो पे, बढाये पांव, जाते हैं। कभी कुल्फत-सी होती है, कभी राहत ही राहत है- कभी हम आहे भरते है, कभी खुशियां मनाते हैं। कभी पैगाम देते हैं कजा को जल्द पाने का- कभी तारीक शब मे जीस्त की शमा जलाते हैं। कभी दीवानो-सी अनजान हम सूरत बनाते हैं । हादसाते- 1-हयात/114
[ 99 1
उठ गये तेरे दर से अगर दिलरुबा-
याद रखना कि रो-रो के मर जायेगे।
पा रहे हैं उन्हे छोडकर तो अभी-
दो ही दिन बाद फिर लौटकर जायेंगे।
जिसकी सूरत हो खाना-ए-दिल मे बसी-
उससे दामन बचाकर किधर जायेंगे।
आज हसता है हम पे जमाना तो क्या-
याद रखेगा वो काम कर जायेंगे ।
कोई प्यासा न उठेगा मयखाने से-
जाम खाली अंगर हैं तो भर जायंगे।
नीम शब हो गई, साकी | तू ही बता-
रिन्द इस हाल मे कैसे घर जायेंगे ।
ख्वाधे-गफलत में खोये रहेगे न वो-
नाले 'अनजान क्या बेअसर जायेंगे?
हादसाते-हयात/
[ 100 ]
जिसे जिन्दगी से लगाव हो, वो किसी से दिल को लगाये क्या-
जिसे दोनो-दिल का खयाल हो, वो वुतो से ग्रांस लडाये क्यो ?
जो न ताव हुस्न की ला सके, न हो जिसमे जन्त का हौसला-
किसी ममरी-शाहकार का, वो खयाल दिल मे भी लाये क्यो?
जो हो तल्खियो से नाग्राश्ना, न हो अपने जर्फ से प्राश्ना-
वो खयाले-मयकशी क्यो करे, वो लबो से जाम लगाये क्यो'
जहा हर कदम पे हो मुश्किलें कि सभल के चलना मुहाल हो-
जिसे खौफे-पावला-पाई हो, वो हुदूदे-इश्क मे जाये क्यो'
जिसे इश्क होता है हमनशी, उसे चैन मिलता कही नही-
जिसे हो तलाश सुकून की, वो दयारे-इश्क मे पाये क्यो'
यहाँ होशमदी हराम है, यहां वेखुदी ही का
ये हरीमे-नाज है दोस्तो, कोई आके होश उडाये क्या
कोई कहदे सारे जहान से, यही दर्स ले 'अनजान से-
कोई या तो इश्क करे नही, जो करे तो अश्क बहाये क्यो?
काम है-
?
.
हादसाते-हयात/116
[ 101 ] अहदे-वाब है तो गुनाह बेशुमार कर- गर दिल मे हौसला है तो पत्थर से प्यार कर । इकरारे-जुर्म करता हूँ जो चाहे दो सजा- आया हूँ दीनो-दिल वुते-काफिर पे हार कर । परवानावार शम-ए-मुहब्बत पे मर मिटे- मक्सूदे-जीस्त पा ही लिया जां निसार कर । ऐ पैकरे-जमाल। लगा डाले न नजर- आईना देखा कीजिये सदका उतार कर । वादे पे उनके करना भरोसा फिजूल है- गुजरेगी रात आंखो मे तारे शुमार कर । मजलूमो-मुफलिसो के लिये दिल में दर्द हो- अल्लाक ये अता मुझे परवरदिगार कर । अनजान मुर्दा जिस्मो मे मैं जान डाल दू- बागे-दरा से दुनिया को दू बेदार कर । हादसावे-हयाव/117
[ 102 ]
लिसेगा?
कलम उठा भी तो क्या दिल का हाल लिखेगा-
उरुजे हुस्न का क्योकर जवाल
तुम्हारे हुस्न को ढलना था, ढल गया होगा-
ये इश्क
उसे लाजवाल लिखेगा।
मगर
वदल के रह गई तकदीर माने-वाहिद में-
तो कसे कोई दिनो-माहो-साल लिखेगा?
न दे सकेगा कोई खुद जवाव जिसका कभी-
तो खत में ऐसा कोई क्यो सवाल लिखेगा?
तमाम उम्र
वो कैसे दोस्तो।
गुजारी है हिज़ मे जिसने-
हाले-विसाल लिखेगा?
तुम्हारे पाने से रौनक-सी आ गई घर मे-
मगर ये बात भी कव खस्ताहाल लिखेगा?
कोई बताये कि 'अनजान' मेरा यजदा मुझे-
कब अपने हाथ से रोशन-खयाल लिखेगा।
हादसाते-हयात/l18
।
[ 103 ] मचानो शोर कि खामोश हो गया हूँ दिखामो जलवा कि रूपोश हो गया हू मैं बुलन्दो-पस्ती की गदिश से खूब वाकिफ हू- जमाना समझा कि पापोश हो गया हू मैं । रुस्खे-जमील पे आँखें जमी रही लेकिन- दिलो-दमाग से पाबोस हो गया हू मैं मुरीद पोरे-मुगां ने बना लिया जब से- मुसल्ला छोड के मयनोश हो गया हू मैं । तुम्हारी बज्म मे पाने को आ गया लेकिन- गमो-निशात से बेलौस हो गया हूँ मैं जमाना मिस्ल शिकारी के पंश पाता है- वो सोचता है कि खरगोश हो गया मैं करम ये साकी का अनजान खास है यारो- कि जितना पीता हू, बाहोश हो गया हू मैं । हादसाते-हयात/l
L
दरमियाँ फिर न फासिले होंगे-
आप-हम दिल से गर मिले होंगे।
हर कदम पर निशां मिले होंगे-
पावला-पा अगर चले होंगे।
वाद जुम्विश के लव सिले होंगे-
बाग मे फूल अधखिले होंगे ।
बन्द पलको के पट खुले होंगे-
विन खिले फूल फिर खिले होंगे।
रजो-राहत के सिलसिले होंगे-
वस्ल मे हिज़ के गिले होंगे ।
लोग दरअस्ल वो भले होंगे-
सच के सांचे मे जो ढले होंगे।
आप 'अनजान से मिले होंगे-
ऐसे दीवाने कम मिले होंगे ।
हादसाते-हयात/120
[ 105 ] स्वाव था, वहम था कि साया था- चश्मे-दिल मे जिसे बसाया ण । खिदं ने वार-वार समझाया- जब कदम इश्क में वढाया था। सुर्ख जो सारजार लगता है- मावला-पा दीवाना गुजरा था । माज सहरा नजर जो भाता है- कल लवालब भरा वो दरिया था। पर्श कितना ही पायेदार सही- माज डोलेगा, कल भी डोला था। इसको लेकर क्या रोना-घोना है- लिखा तकदीर का तो होना था। माज सोया है खाक के अन्दर- पास में जिसके चांदी-सोना था । खेल कर रोये टूट जाने पर- जिस्म मिट्टी का इक खिलौना था । जिसको अनजान हम खुदासमझे- पास पहुंचे तो कितना बौना था। हादसाते-हयात/ [ 106 ] तिश्नगी थी कि कम हुई ही नही- जाम पर जाम कर गये खाली। तीरगी दिल की दूर तो न हुई- हर वरस यू प्राई दिवाली। अांखें पथरा गई हैं दहका की- दूर तक है कही न हरियाली । पहरेदारो पे एतबार नही- अब किसे सौंपें घर की रखवाली? दरो-दीवार पर नहूसत है- कैसे पायेगी घर मे खुशहाली? सुबहे-रोशन न जाने कब होगी- आज की रात वहुत काली। दर पे 'अनजान पाये इजाईल- आखिरी सास उनको दे डाली। 22 [ 107 ] अगयार पे भरोसा है न अपनो पे एतवार- अल्लाह ही जाने कैसे लगेगा यू वेडा पार । मैं सिर्फ रेत पाता हूँ हद्दे-नजर तलक- होने को होंगे दोस्तो दरिया-प्रो-मावशार। ईमान वेच पाये जो मिट्टी के मोल मे- बाजार मे वो बैठे हैं मब बनके साहूकार । पहले तो खुद ने हिच का बीमार कर दिया- आये हैं हाल पूछने अब बनके गमगुसार । 'अनजान जव यात का अन्जाम मौत है- पुतला-ए-खाक हूँ तो रहूगा हो खाकसार । हादसाते-हयात/123 [ 108 ] क्या करें ऐसी जिन्दगी लेकर- जो कि पाती है मौत भी लेकर । मेरे अपसुर्दा दिल की धडकन मे- यादें पाती हैं ताजगी लेकर । घुप अधेरे मे घुट रहा है दम- कोई आ जाये रोशनी लेकर। धूप मे झुलसा जिस्म जलता है- यार पा जामो चाँदनी लेकर । साकिया। डाल दे नजर अपनी- कितनी पाया हूँ तिश्नगी लेकर । गर नजर से गिरा दिया तूने- जी न पाऊगा बेरुखी लेकर । हम तो अनजान जी लिये बरसो- सैकडो गम मे इक खुशी लेकर । हादसाते-हयात/124 ।
[ 109 ]
प्राग थी जो कभी वो पानी है-
देखिये ये मेरी जवानी है।
प्राज तो मेरी बात मानी है-
आपकी बहुत मेहरवानी है ।
जज्बा-ए-इश्क गैरफानी है-
वरना हर चीज पानी-जानी है।
हमने माना कि बन्दा फानी है-
उसकी तस्लीक गेरफानी है।
हमने दर-दर की खाक छानी है-
दुनिया कैसी है खूब जानी है ।
चश्मे-पत्थर में आज पानी है-
ये मेरे गम की
तर्जुमानी है-
हमने 'अनजान' आज ठानी है-
माग पानी मे अब लगानी है ।
हावसाते-हयात/125
[ 110]
शम-ए-उम्मीद को जला रखिये-
रात भर अपना दर सुला रखिये।
एक ही दर पे सर झुका रसिये-
दिल मे क्यो सैकडो सुदा रखिये।
हिम्मतो-प्रज्मो-हौसला रखिये-
सिम्ते-मन्जिल कदम बढा रसिये।
रू-ब-रू उनके मुद्दोगा रखिये-
करल होने को सर उठा रखिये ।
-
-
मिस्ल बच्चो के होते हैं अरमा-
थपकियां दे इन्हे सुला रखिये ।
दौरे चाके
गरेवो मायेगा-
पेशतर इसके तो सिला रखिये।
चाहे रिन्दो की रहिये सोहबत मे-
खुद को 'अनजान पारसा रखिये।
हादसाते-हयात/126
[ 111 ] - वो तो घोडे बेच कर सोता रहा- मैं अकेला रात भर रोता रहा । शहर सारा जश्न मे मशगूल था- एक दीवाना मगर रोता रहा । दिन चढे सरकार पहुंचे रोकने- कले-आम रात भर होता रहा । खूने-नाहक के निशा मिट न सके- अपना दामन घोने को घोता रहा । सू-ए-मन्जिल कारवाँ रुस्सत हुआ- मुझ-सा गाफिल नीद मे सोता रहा। दफन कर पाया हूँ मैं अपने उसूल- लाश जिनकी उम्र भर ढोता रहा । ये जमी 'अनजान बजर ही रही- बोने को तो बीज मैं बोता रहा। हादसाते-हयात
[ 112 ]
दर-व-दर ढूढता फिरा होगा-
फिर कही सर के बल गिरा होगा।
जो उन्हें पाईना दिसाता है-
यो यकीनन ही सरफिरा होगा।
जदं पत्तो मे प्राज लिपटा है-
कल यही पेड फिर हरा होगा।
मौत मे'राजे-जिन्दगी होगी-
जो वतन के लिए मरा होगा ।
जिसको तनहाई रास प्राई हो-
अपने साये से भी डरा होगा ।
तू कसौटी पे कस के देख जरा-
हर हर्फ सोने-सा खरा होगा ।
सारी दुनिया का दर्द उसका है-
जो मुहब्बत से दिल भरा होगा।
माज 'अनजान' तनहा बैठा है-
कल यही भीड मे घिरा होगा ।
-
[ 113 ] । - फलसफी का फलसफा कुछ काम ही पाया नहीं- । जिन्दगी जीने का ढग हमको समझ पाया नही । दिल हमे अल्लाह हो जाने, भा गया लेकर कहा- इक समन्दर रेत का है, दूर तक साया नहीं। मन्जिले-मकसूद पे पहुंचेगा कोई किस तरह- तन थका है. मन दुखी है, पास सरमाया नहीं। शहर के अदना-प्रो-पाला थे जनाजे मे शरीक- हम मरे जिसके लिये, वो तो नजर पाया नहीं। चाहे इस्तकवाल मे सारा जमाना हो खडा- जो गिरा नजरो से अपनी फिर वो उठ पाया नहीं। मुज्दा-ए-फरले-वहारी अब कोई लाये तो क्या- गुन्वा ए-दिल फिर किसी सूरत भी खिल पाया नहीं । वेसरोसामानी कोई देखता 'अनजान' की- जो पारीके-दर्द हो, हमराजो-हमसाया नही । हादसाते-हयात/129
[ 114
.
राजाओ का राज गया, कल था लेकिन प्राज गया-
कल क्या होगा कौन कहे, क्ल के भरोसे आज गया ।
बगलें बजाने वाले हैं,
तवले बजाने , वाले हैं-
सप्त-सुरो के ज्ञाता बोले, महफिल में से साज गया ।
मन की व्यथा मन ही मे राखो, दुखियारो के दुख को बाटो-
किसके लिये रोना-धोना है, जब जग से हमराज गया।
इन उखडी सासो को थामो, चाहे यको लेकिन न बैठो-
अपने दम पर जीना सीखो, गम न करो गमसाज गया।
बूद-बूद पानी को तरसे, घडे लिये निकले थे घर से-
वरसा न बरसने वाला था, काला वादल गाज गया।
सोने वाले जाग पडो, भागमभाग है भाग चलो-
बहरे लोग नहीं सुनते हो, गजर सुबह का बाज गया।
गांव-घाट-घर छूट गया, 'अनाज शहर को कूच किया-
खेत गया, खलिहान गया, और पुश्तैनी काज गया ।
हादसाते-हयात/130
[ 115 ]
फिर उन्ही के सपाल मे उलझे-
उनके रुखसारो-बाल मे उलझे।
जिसका देना जवाव मुश्किल है-
फिर उसी इक सवाल मे उलझे।
--
दोनो-दिल दोनो हाथ से निकले-
एक काफिर-जमाल मे उलझे।
कर वो प्राये-गये खबर ही नही-
हम यू उनके खयाल मे उलझे।
हर कोई दिल को थाम लेता है-
जाने हम कैसे हाल मे उलझे ।
भाज तक लोग दूढते हैं हमे-
जाने हम किस ववाल मे उलझे।
जिसको अनजान इश्क कहते हैं-
कोई ऐसे
जाल मे उलझे।
हादसाते-हयात/131
[ 116 1
तू भी मेरी तरह खराब हो, वो भी दिन कभी तो मुदा करे-
तेरे दिल को दर्द हो वो प्रता, T कोई भी जिमकी दवा करे।
शवे-गम तुझे भी नसीव हो, न कोई भी तेरे करीब हो-
तू अकेला आहे भरा करे, न कोई भी साथ दिया करे ।
तुझे शवगुजार न मिल सके, न कोई भी गम में शरीक हो-
तेरे दिल से टीस उठा करे, न कोई भी जिसको सुना करे।
मेरी तरह तुझको मिले सिला, तेरे प्यार और खुलूस का-
तू भी जिसके साथ वफा करे वो ही तेरे साथ जफा करे ।
शवे इन्तजार तेरे लिये मेरी तरह इतनी तवील हो-
तुझे नीद आये न स्वाय ही, यू ही रात भर तू जला करे।
जो वहार पाये तो सगदिल, तू खां की जद मे रहा करे-
जिस शाख पे हो तेरा आशिया, शवो रोज वर्क गिरा करे।
जो तडप मिली 'अनजान को, न किसी को तेरे सिवा मिले-
जो अदू को भी न नसीब हो, वो तुझे नसीब हुआ करे ।
हादसाते-हयात/132
[ 117 ] - सिवा तेरे दिल मे कोई नही, ' य यकीन कैसे दिलाऊँ मैं- तू ही दे वता कोई रास्ता, तुझे दिल से कैसे भुलाऊं मैं ? तेरी याद आती है हर नफस, तेरी शक्ल दिखती है हर तरफ- जो हसूले-जिन्दगी बन गया, वो सयाल कसे भुलाऊँ मैं ? तेरी हर जफा के जवाब में, मैं वफा ही पेश किये गया- यही गरखता है तो जानेमन | तुझे अपना कैसे बनाऊँ मैं ? मेरी स्वावगाह मे थी रोशनी, तेरे दिलफरेब वजूद से- विना तेरे तू ही बता मुझे कि चराग कैसे जलाऊँ मैं ? कई तोहमतें मेरे नाम पर, तेरी वजह से लगी बारहा- मुझे इनसे इतना लगाव है, कि खराव कैसे बताऊँ मैं । जो तेरी नजर ने दिया मुझे, वो सुरूर रहता है रात-दिन- में कदम सभालू तो किस तरह, ये खुमार कैसे छुपाऊँ मैं ? दो खता वता 'अनजान की, मुझे कब सजा से गुरेज है- तेरी बारगाहे-नियाज मे, ये निगाह कैसे उठाऊँ मैं ?
[ 118 ] 7 तुम्हारी वेवफाई भी, तसल्लीनरश लगती है- कि हर मजबूर की सूरत, हमे अपनी-सी लगती है । फरिश्तो को भी हैरत है, हिने है अर्श के पाये- असर होता है उसमे, प्राह जो दिल से निकलती है । अगर है हौसला तुझमे, तो चल पड राह पर अपनी- कफे अफसोम मलने से, कही मन्जिल भी मिलती है सिला हमको वफाओ का, मिले या न मिले लेकिन- है कौले-हकवयाँ कि सच के आगे दुनिया झुकती है। अगर इल्जाम आता है, मुहब्बत मे तो पाने दो- मुहब्बत दुनिया वालो की, कहाँ परवाह करती है ? करोगे याद रह-रहकर, चले जाने पे तुम हमको- हमारे दम से ही शम-ए वफा, महफिल मै जलती है । हमें अनजान समझाने की कोशिश क्यो करे कोई- जो रग-रग मे बसी हो, वो कही पादत बदलती है ? हादसाते-हयात/134
[ 119 ]
कोई निनका न बच जाये कही पर प्राशियाने फा-
इरादा कर लिया तून अगर बिजली गिराने का।
मेरी वरवादी मे तू भी पसर किस वास्ते छोडे -
मुझ वरवाद करने का इरादा है जमाने का ।
टपकती है उसी जरें-जर से गुलिस्ता के-
कोई लाता नही पंगाम फस्ले-गुल के आने का ।
तलातुमखेज मौजो से बचाना उसको मुश्किल है-
इरादा नाखुदा रखता सुद है कश्ती डुबाने का ।
जुवां पर नाम अब तेरा नही आता है भूले से-
हुया है खात्मा कैसा मुहब्बत के फसाने का।
तबीयत भर गई 'अनजान अब तो रने-बाहम से-
इरादा कर लिया है जिन्दगी तनहा बिताने का ।
हादसाते-हयात/135
[ '120 ] इक प्राग-सी सीने मे, दिन-रात सुलगती है- न मांद ही पड़ती है, न तेज भडकती है। -- वरवादी-ए-हस्ती का, हम किससे गिला करते- हर एक मेहरवां की तस्वीर उभरती है। कुछ भी तो नहीं ऐसा, हम जिसके लिये जोते- वेसूद यू ही कब से ये उम्र गुजरती है। घनघोर अधेरे मे कुछ भी तो नहीं दिखता- मवहम-सी इक सूरत, साये-सी गुजरती है। हैरान है क्यो दुनिया हम खानाखरावो पर- मुश्किल ही से वसती है जो वस्ती उजडती है । टकरा के कनारो से, खुद लौट पडी वापस- इस दिल के समन्दर मे, जो लहर मचलती है । अनजान मुहब्बत में होता है यही अक्सर- कुछ बोलने से पहले, आवाज लरजती है । हादसाते-हयात/136 [ 121 ] जाने क्या दिल को हुआ है, तेरे बाद- खोया-सा रहने लगा है, तेरे वाद । ये गली-कूचे, दरो-दीवार, चौराहे वोही- शहर बदला-सा लगा है, तेरे बाद । जो हमे ले पाया था इतना करीब- याद उस पल को किया है, तेरे बाद । वो सुरूरो-कैफ वो मस्ती कहां- यूं तो पीने को पिया है, तेरे बाद । सिफ रस्मन ही मिला हर एक से- जो कोई मुझसे मिला है, तेरे वाद । किस कद्र रखता है तुझको दिल अजीज- भेद ये मुझ पर खुला है, तेरे वाद । तू मेरा महबूब, मन्जूरे-नजर, पारामे-जां- जाने तू क्या-क्या लगा है, हाँ यही अनजान' होगो इतिहा- दद ही दिल की दवा है, तेरे बाद । बाद । हादसाते-हयात/13 [ 124 1 मलकुल मौन वार-चार माये- जिस्म मे जा नही क्या ले जाये ? देखो उस शख्स को कि हसता है- जुल्म दुनिया ने कम नही ढाये । दिल तो दिल है कोई तिफल नही- कब तलक कोई दिल को बहलाये । उससे पूछो कि दर्द क्या शै है- गीत खुशियो के जिसने हैं गाये । आग लग जाये चाहे दुनिया मे- तू मगर इसकी जद मे न आये। मौत ही भाखिरी पड़ाव नहीं- मरने वाले को कौन समझाये ? जल रहे हैं जो तेज धूप मे हम- काश 1 फेला दो जुल्फ के साये । नालाकश इस कद्र रहा वो शरस- रात भर सो न पाये हमसाये । चैन से वो न जीने देंगे कभी- हम तो 'अनजान उनसे भर पाये। हादसाते-हयात/140 [ 125 ] जो शख्स गिरिफ्तार रहा उनकी चाह मे- गुमनाम वो भटकता रहा बरसो राह मे । युसुफ बाजारे-मिस्र मे नीलाम जब चढे- चाहत खरीदने की रही मुफ्लिस-मो-शाह मे। जिस रोशनी को तरस गये हम तमाम उम्र- वो रोशनी नसीब हुई कग्रगाह मे । समझा न कोई मेरी हिकायाते-दर्द को- हर इक को डूबा देखा है वस वाह-वाह मे । तुम भी कही दवे हुए मलबे मे देखलो- न जाने कौन-कौन था इस दिल तबाह मे । तुमने जिसे दिलेर समझ कर के चाहा था- तगदिल-ओ-तगखयाल है खुद की निगाह मे । 'अनमान उनके हौसले की दाद दीजिये- खन्दापेशानी आये हैं जो कत्लगाह मे। हादसाते-हयात/141
[ 126 ]
जब तेरी तरफ देसा, नजरें ली फिरा तूने-
ऐ यार सितमपेशा । अच्छा न दिया तूने ।
7
क्या तेरा बिगड जाता, गर राह में न मिलता-
क्यो दौरे गुजिश्ता को, ला याद दिया तूने ।
उल्फत न सही फिर भी, रस्मन ही मिला होता-
स्दन क्यो चला पाया, क्या ठान लिया तूने
बतलाये कोई वैसे, ये फासिले कम होंगे-
खामोश रहे हम भी, कुछ भी न कहा तूने ।
मातम न करे कह दो, गुलजार की बुलबुल
को-
वदनामी-
1-ए-गुलशन है, नाला जो क्यिा तूने ।
पंगामे-वहारो है, दीवाने जरा सुन ले-
सदचाक गिरेवा कर, जो नि है सिया तूने ।
आसाइशे-जानत के, सामान नजर आये-
भूले से जो वाइज को, दी रिद पिला तूने ।
कुछ और करीने से जीने की जरूरत है-
बैसूद गया अब तक, जो कुछ भी जिया तूने ।
अनजान उमे कहिये कि जगो-मुहब्बत
जायज है सभी कुछ वो, अब तक जो किया तूने ।
हादसाते-हयात/142
[ 127 ] हम गदिशे-अय्याम के मारे हुए तो हैं- आखिर में जीत होगी, अभी हारे हुए तो है । जब चाहे माग लेते, पल भर मे जान देते- ये बात दिल मे बरसो से धारे हुए तो है । कल चाहे फासिले हो, दोनो के दरमिया- इस वक्त वो करीब, हमारे हुए तो है । दर-दर की चाहे ठोकरें खाना पडे हमे- तस्वीर उसकी दिल मे, उतारे हुए तो है । किस-किससे कीजियेगा, जफानो का तजकरा- माना कि उनके जुल्म के, मारे हुए तो हैं । अव देखियेगा वादा वफा वो करेंगे कव- खल्वत मे आज आने के इशारे हुए तो है । अनजान अव शहर में कोई आश्ना नही- दो-चार लोग इनमे से प्यारे हुए तो हैं । .
[ 128 ]
आफताव क्यो बुझा-बुभा-सा है-
रात को हादसा हुआ क्या है ?
आप नाराज जिससे हो जायें-
मापसे ऐसा कुछ कहा क्या है ?
वो खफा किसलिये हुए हमसे-
कोई बतलाये माजरा क्या है?
चारागर सर पकड के बैठ गये-
मर्ज समझे भी तो दवा क्या है ?
?
जो उतर जाये दिन निकलते हो-
ऐसे पीने से फायदा क्या है ?
अर्श तक जो पहुँच नही पाये-
दिले-म
-मजलूम फिर दुना क्या है ?
इतना तूफान क्यो मचा हर-सू-
जुज तेरे नाम के लिया क्या है
खून होता तो बहता प्रांखो से-
वरना इस रोने मे धरा क्या है?
आप ऐसे तो हो नहीं सकते.
आपके बारे में सुना क्या है ?
इश्क 'अनजान जानता ही नही-
इब्तिदा क्या है, इन्तिहा क्या है ?
म
--
-
हादसाते हयात/144
[ 129 ] कब तलक कोई दिलासा दिल को दे बतला तो दे- एक पल पाकर दिले-मुन्तर को तू बहला तो दे । मैंने माना वरुखी है, तेरी पादत में शुमार- मैं हू तेरे चाहने वालो मे, ये जतला तो दे । न सही तुझको मुहब्बत, न सही मुझसे लगाव- बावजूद इसके हू तेरा, ये यकी दिलवा तो दे । रात-दिन उसके तखय्युल मे तडपता है मगर- ऐ दिले-नाकाम । उसको भी कभी तडपा तो दे । । शहर मे हर सिम्त छाया है सुकूते-मर्ग-सा- ऐ सदाये-जीस्त । इस मन्जर मे हलचल ला तो दे । काधा देने वो न आये, उसकी मर्जी है मगर- मेरे मरने की खबर उस तक कोई पहुँचा तो दे । वो शरीके-मय नही, 'अनजान उसके नाम से- सागरे-लवरेज भर कर, सामने रखवा तो दे । हादसाते-हयात/14
[ 1301
स्दादे-गमे-उरफत हर एक से क्या कहते-
कह डाली अगर होती, वेचन-से क्यो रहते ?
जाहिद को पिला साकी । कुछ सहमा-सा पाया है-
मस्जिद में अगर मिलती, मयसाने मे क्यो फिरते ?
चाहान
अगर होता, वोहो वा सहारा तो-
कमजोर नही थे हम, इस तरह से क्यो गिरते ?
कुछ बात तो है शमा, सामोश रहो चाहे-
अन्जाम से वावाकिफ परवाने ये क्यो जलते ?
मा'दे-नजर अपना, जुज उसके नहीं कोई.
जब मिल ही गये उससे, हर एक से क्यो मिलते ?
पथराई निगाहो से देखा न अगर हाता-
झरने ये पहाडो को फिर गोद से क्यो वहते
?
अनजान अभी उनको जी भर के नहीं देखा-
गर देख लिया होता तो प्यास से क्यो मरते ?
--
हादसाते-हयात/146
[ 131 ] ये दर्द ही हमको तो विरासत में मिला है- तुम देखलो क्या हमको मुहब्बत मे मिला है ? सय्याद के अब दाम में दम तोड रहे है- ये रज हमे फूलो की चाहत मे मिला है। वो शख्स फटेहाल-सा क्यो फिरता है पूछो- जिसको कि जरो-माल विलादत में मिला है। - ये रजो-अलम, जुल्मो-सितम और तडपना- सरमाया हमे यार की उल्फत मे मिला है। सर जाये तो जाये, न झुके जुल्म के आगे- ये दस शहीदो की शहादत मे मिला है । जो शख्स हमे उम्र मे, इक बार मिला श- वो शरस हमे आज कयामत मे मिला है। हर वक्त तेरा जिक्र, तेरी याद, तेरा नाम- वो लुत्फ हमे तेरी इबादत मे मिला है। जिसको भी यहाँ देखिये मसरूफ मिलेगा- हम जैसा ही दीवाना कोई फुसत में मिला है। वो पुसिशे-अहवाल को तशरीफ जो लाये- प्राराम वडा दिल को अलालत में मिला है। खुद फैसला कर लीजिये करना है तुम्हे तो- इन्साफ यहाँ किसको अदालत में मिला है ? हादस हर शख्स नावाकिफ है जीया जाता है कैसे- जिसको भी यहाँ देखिये गफलत में मिला है। आराम से दो बाते ही मिल-बैठ के करता- फुर्सत है कहा उसको जो उज्लत में मिला है। मत पूछिये क्या गुजरी शबे-तार मे हम पर- हर दद हमे आपकी फुर्कत मे मिला है। जो नूर कभी जीते हुए आँखो ने न देखा- वो नूर हमें देखिये तुरबत मे मिला है । फरियाद कभी होटो पे फरहाद न लाया- ये जर्फ उसे कोह की सोहबत मे मिला है। 'अनजान वो ही दर्द है मे'राजे-मुहब्बत- जो दर्द हमे उनसे इनायत में मिला है। . हासाते-हयात/148 [ 132 ] रूठे है वेसवव जो उन्हे क्यो मनाइये- समझे न दिल की बात उह क्यो सुनाइये वावर उन्हे वफानो का क्यो दिलाइये- वो जिस जगह खडे है उन्हें क्यो हिलाइये? वो ही समझ सके न मेरे गम का माजरा- रूदादे-दर्द फिर क्यो जहां को सुनाइये ? मुंह देखे की प्रीत, मिलाते है हाथ भी- बन जाये वात दिल से अगर दिल मिलाइये। हर पान उसका जिक्र रहा है जुवान पर- मुमकिन कहाँ है उसको कि दिल से भुलाइये? गर हो सके तो दर्द को रूपोश रहने दो- पूछे कोई मिजाज तो बस मुस्कुराइये । हमको तो साथ रहने की आदत-सी हो गई- कोटो से आप अपना तो दामन बचाइये। अनजान उनके आने की उम्मीद है कवी- अपने गरीबखाने को चलकर सजाइये ।
[ 133 ] - जरम सीने पत्र के भर जाते- हाय गर आप इन पे घर जाते । याद करता जमाना बरसो तक- याम ऐसा कोई तो घर जाते । जिस्म हारा थमा निढाल सही- सन्दापेशानी दार पर जाते । मन परिंदो-सा उडता फिरता है- गर तुम्हारा था कंद कर जाते । उनकी यादो ने थाम रसा है- वरना हम तो कभी वे गिर जाते । प्रखिरे-शव वो मा गये मिलने- मुस्कुरा उठे तारे घर जाते । उनकी चौखट पे पड़ रहेगे अब- पयो भटकने को दर-ब-दर जाते। चद लम्हे जो साथ मे गुजरे- काश वो उम्र भर ठहर जाते । आपको किसने रोका है यारो- आंखो से दिल मे भी उतर जाते । तिनका-तिनका जमा किया हमने- प्रांघिया चलती तो बिखर जाते। बेगुनाही की पा रहे है सजा- काश कोई गुनाह कर जाते । दिल की अनजान रह गई दिल मे- कोई तो मिलता जिसपे मर जाते। हादसाते-हयात/150 [ 134 ] तेरा खयाल आ गया बेसास्ता मुझे- गर मैं गुनाहगार ह तो दे सजा मुझे । अब तक तेरे फिराक मे गुजरी है जिन्दगी- किसने कहा कि वस्ल का तू दे मजा मुझे। तू दिलरुबा है, जाने-वफा, हासिले-हयात- तुझसे गिला हराम है, तू दे मिटा मुझे। तेरी निगाहे-नाज ने मजरूह कर दिया- मुमकिन नही कही भी मिलेगी शिफा सुझे। तेरा असीर हूँ जब चाहे कर रिहा- वरना बुरा है क्या, कर न रिहा मुझे । दुनिया के रजो-गम से आजाद कर दिया- उस दिलरुबा ने दद क्यिा वो अता मुझे । दिल लेके इन दिनो 'अनजान बन गये- क्या कीजिये, पसद है ये भी प्रदा मुझे। हादसाते-हयात)
[ 135 ]
मैं अपनी दास्ताने-दिल सुना लू तो चला जाऊँ-
जो मुझमे रूठा है उसको मना लू तो चला जाऊं।
तेरे दीदार की हसरत कही फिर खीच न लाये-
तेरी तस्वीर प्रांखो मे बसा लू तो चला जाऊं।
जमाने की तरह तू बेवफा कह न सके मुझको-
यकी अपनी मुहब्बत का दिला लू तो चला जाऊँ।
अभी तक तो मुहब्बत ही मुहब्बत देखी है तूने-
मैं अपने दाग सीने के दिखा ल तो चला चाऊँ।
मैं नादिम हूँ तेरी महफिलमे इस बेवक्त आने पर--
मैं अपने हाल पर आंसू बहा लू तो चला जाऊं।
वका-ए-गैरफानी है मुहब्बत मे फना होना-
वजूदे-जिन्दगी का राज पा लू तो चला जाऊँ ।
शबे-फुकत के सदमो से अभी अनजान है यारो-
उसे अपना शरीके-गम बना लू तो चला जाऊँ ।
हादसाते-हयात/152
[ 136 ] आहो-फुगा के वार हसाया गया हूँ मैं- कसे पहूँ कि कैसे सताया गया हूँ मैं ? मेरे बगैर रौनके-महफिल मुहाल थी- वुझने लगा तो फिर से जलाया गया हूँ मैं । मैं हूँ चरागे-राह सभी जानते थे फिर- कर-कर के साजिशें क्यो बुझाया गया हूँ मैं ? कल तक निशाने-मन्जिल सबके लिये मैं था- फिर जान-बूझकर क्यो मिटाया गया हूँ मैं ? हैरत से देखिये न मुझे इस तरह जनाब- गोहर था प्राख का जो गिराया गया हूँ मैं । गिरती है वर्क मेरे नशेमन पे बार-बार- किस शाखे-गुल पे ला के बिठाया गया हूँ मैं 'अनजान मयकदे ही से निस्बत है आजकल- दैरो-हरम से कब का उठाया गया हूँ मैं । ? हादसाते-हयात/153
[ 137 ]
ऐ गदिशे-प्रय्याम | तेरा एहसान है कितना-
दिल तेरी बदौलत ये, परेशान है क्तिना ?
-
आवाज किसे देते, किसे पास बुलाते-
हर एक गली-कूचा, सुनसान है कितना?
जख्मो से जिगर छलनी, सौ दाग लिये दिल है-
इक यार की फुकंत में, ये सामान है कितना?
हमराज कोई होता तो, हम राजे-दिली कहते-
हमदर्द मिले हमको भी, अरमान है कितना?
खुद कर लोगे अन्दाजा, कश्ती में चले पापो-
साहिल पे क्या बतलायें कि तूफान है कितना?
तुम जब से गये रूठ के, ऐ जाने-तमना-
माहौल शबिस्तान का, वीरान है कितना ?
'अनजान बदल शक्लो-शवाहत न गई हो-
आईना हमे देख के, हैरान है कितना ?
हादसाते-हयात/154
[ 138 ] जानेमन | पास मे पायो कि जरा जी वहले- रुख से पर्दा ये हटायो कि जरा जी वहले । जाम आखो से पिलामो कि जरा जी बहले- ये नशा और बढायो कि जरा जी बहले। मीर की गजल सुनामो कि जरा जो वहले- बर्बते-स -साज उठायो कि जरा जी बहले। कितना वीगन है इस दिल का शहर तेरे बिना- तुम जरा देर ही आयो कि जरा जी बहले। जिन्दगी तल्खी-ए-माहौल से बेजार है अब- रुखे-रोशन को दिखाम्रो कि जरा जी बहले। कब से अनजान जुदाई का प्रलम सहता है- मुज्दा-ए-वस्ल सुनामो कि जरा जी बहले ।
[ 139 ]
थोडी देर और यूं ही चलने दो-
जिक्र उस यार का अभी यारो।
उसको जी भर के देसने दो अभी-
प्यास दिल की नहीं बुझी यारो।
उसकी आवाज जो सुनी हमने-
सास चलने लगी रुकी यारो।
वो हमे याद करते रहते है-
ये खबर हमने भी सुनी यारो।
छोड दो तनहा तो करम होगा-
रात आधी तो ढल चुकी यारो।
लम्बा-चौडा हिसाब रहने दो-
मुख्तसर-सी है जिन्दगी यारो।
उनको चाहा है, उनको याद किया-
बस यही की है बदगी यारो।
तीरगी है कि दूर होती नही-
जाने कब होगी रोशनी यारो।
आप अनजान को नहीं समझे-
है निराला ही आदमी यारो।
हादसाते-हयात/156
[ 140 ] कोई सावित कदम रहे कैसे- हर कदम जलजले-से मिलते हैं । फिर सुकू दिल को मिल नही सकता- वो अगर फासिले से मिलते हैं । उसका ही दर खुला नहीं मिलता- यूं तो सो दर खुले-से मिलते हैं । प्राप शायद इधर से गुजरे है- राह मे गुल खिले-से मिलते हैं । कोई राहबर ही राहजन निकला- गुम कई काफिले से मिलते हैं । दिल से जब दिल मिला नहीं सकते- लोग फिर क्यो गले से मिलते हैं । नग्माजन बुलबुलें रहे कैसे- जब नशेमन जले-से मिलते हैं । रोया होगा लगा के आग कोई- घर ये जो अधजले-से मिलते हैं । दफ्न 'अनजान' हो चुके अरमां- होट जो अब सिले-से मिलते हैं । हादसाते-हयात/157
[ 141 ]
सगरेजे है चमकते हुए तारे तो नहीं-
सहरा है समन्दर के नजारे तो नहीं।
अश्क आंखो मे तेरी याद मे पा जाते हैं-
साथ देने को मुसलसिल ये सहारे तो नहीं?
यूं तो कुछ कहते नही, होट सिये बैठे हैं-
उनकी आंखो मे जरा झाक इशारे तो नहीं।
तेज तूफान से कश्ती को बचा लाये हैं-
कोई साजिश किये बैठा है पनारे तो नहीं ?
इनको दामन मे छुपा लेना कहाँ मुमकिन है-
बर्फ की गेद के मानिन्द शरारे तो नहीं ।
शग्ल कोई तो जरूरी है यहां जीने को-
जीस्त वेमा'नी-प्रो-मक्सद के गुजारे तो नहीं ।
दद देता है मजा दोस्तो । तनहाई मे-
कोई ऐसे में मसीहा को पुकारे तो नहीं ।
आप चलने का कहे, दौड पडेंगे यारो-
तन थका होगा मगर मन से यू हारे तो नहीं।
किसने अनजान अभी समझा है दीवानो को-
वक्त क्या चीज है, ये वक्त के मारे तो नहीं।
हादसाते-हयात/158
[ 142 ] + जितना जीवन प्रभी बिताया है- हर कदम पर फरेव खाया है। यून मगरूर पा के हो दौलत- घूप है तो कभी ये छाया है। जान-सी पड़ गई फसाने मे- उस परीवश का जिक्र पाया है। उनकी अगवानी को अधेरे मे- हमने दिल का दीया जलाया है । ताजगी है लबो पे फूलो के- कौन गुलशन मे मुस्कुराया है जीते-जी के तमाम झगडे हैं- कौन अपना यहाँ पराया है ? बात जो सच थी, सच कही हमने- सच के खातिर ही सर कटाया है। नक्श होकर के रह गया दिल पर- नाम कागज से तो मिटाया है। मौत 'अनजान' चैन दे शायद- जिन्दगी ने बहुत सताया है । हादसाते-हयात/159 [ 143 1 सिर्फ तूफान रास पाया है- हम नहीं जानते है साहिल को । ये अलग बात है कि नाम न लें- खूब पहचानते हैं कातिल को। सिर्फ दो मीठे बोल ही दे दी- खाली लौटाइये न साइल को। कारवां कब का हो गया रुरुसत- कोई आवाज तो दे गाफिल को। वो वफा-आश्ना नही हर्गिज- कितना समझा चुके हैं इस दिल को। खौफ मिलने पे है जुदाई का- कौन समझेगा ऐसी मुश्किल को ? एक 'अनजान जो नहीं शामिल- जाने क्या हो गया है महफिल को? हादसाते-हयात/160 [ 144 ] चल ही पडा है जिक्र अगर सोजो-साज का- वरजस्ता नाम आयेगा उस दिलनवाज का। मस्जिद को शेख जानो, मुअज्जिन ने दी सदा- रिंदो का मयकदे मे पहर है नमाज का । गर्मी-ए-इश्क, हुस्न की शोखी का ये जवाल- महमूद का कुसूर कहे या अयाज का ? उसने दिये फरेब मुसलसिल जो आज तक- मस्लक तलाश करते रहे हम जवाज का । शायद हो रोजनामचे मे दर्ज सारा हाल- पिंडारियो की लूट, मुगलिया खराज का । उठते ही चेहरा आपका दिखलाई दे गया- अब देखते हैं कैसे कटे दिन ये आज का? होते ही रात जानिबे-मयखाना चल पडे- दिन भर तो दौरदौरा है वाइज के वाज का। हैरान चारासाज मगर मुत्माईन मरीज- क्या कीजिये इलाज कोई लाइलाज का ? 'अनजान पाजकल है परेशान हर कोई न जाने हाल कैसा है उस फिलासाज का? हादसाते-हयात/161 [ 145 ] तनहाई मे कल बीता है, तनहाई मे कल बीतेगा- आज भीड से भरा हुमा मन, निस्तदेह कल रीतेगा। छायानो को ठोस समझकर, वांहो मे भरना चाहा- वक्ष स्थल पर घाव लगा है, आज नहीं तो कल टीसेगा। हारे का हरि नाम है प्यारे, मन के हारे हार हुई- जो इस मन से हार न माने, आज नहीं तो कल जीतेगा। माओ से सतान छिनी है, बहनो से बिछडे भाई- उत्तर क्या दोगे मेरे पुनो। पूछने वाला कल पूछेगा? प्राज हवा खामोश बहुत है, गुमसुम हैं पौघे-पक्षी- यह ससार वाचाल बहुत है, आज नहीं तो कल बोलेगा। देखते ही मरवा दो गोली, चिडी का पूत दिखाई न दे- भगडो के इस मौसम मे मन, आज नहीं तो कल नाचेगा। सपनो के सौदागर वोली, वोल रहे हैं जिस्मो की- जिस्मो का व्यापार ये सारा, आज नहीं तो कल डूबेगा। गुण्डा और बदमाश सही, इस बस्ती का वाशिम्दा है- आज बहुत बिगडा है लेकिन, देखिये आकर कल सुधरेगा। कहना मेरा मान ले बेटे, मैंने दुनिया देखी है- प्राज अगर बच भी आया है, जेल मे चक्की कल पीसेगा । पहरेदार हमारे घर के, मिले हुए हैं चोरो से- आज अगर न लूट सका है, लूटने वाला कल लूटेगा। रूठना होता उसको यारो। रूठ गया होता कब का- आज अगर अनजान न स्ठा, क्या कहते हो कल स्ठेगा। हादसाते-हयात/162
[ 146 1
दिल को दुखाइये न यू-
दामन छुडाइये न यू ?
आये हो बैठो चैन से-
माते हो जाइये न यू?
इसान हूँ मैं सग नही-
ठोकर लगाइये न यू
?
?
जो खो गया सो गया-
खोकर पछताइये न यू?
दिल को लगे जो वोझ-सा-
उसको उठाइये न ।
सुनकर हैं सोपे लोरियां-
उनको जगाइये न यू
गुम कारवा हो जायेंगे-
दीपक बुझाइये न यूं ?
मजिल के हम निशान हैं-
हमको मिटाइये न यूं?
अनजान याद करता है-
उसको भुलाइये न यू
१
हादसाते-हयात/163
[ 147 ] इन्साफ चाहिये न हमे कोई फैसला- मुन्सिफ को जानते है कि मुजरिम से है मिला। होगा अगर यजीद तो होगे हुसैन भी- डरता है कौन सामने चाहे हो कर्वला । अब मीठी-मीठी बातो से बहलाना छोड दे- कर तल्ख कोई बात कि जाऊँ मैं तिलमिला। मैं आया, आप आये, कई आये और गये- चलता रहेगा दुनिया मे यूं ही ये सिलसिला। इन्सान आज रस्मे-मुहब्बल भुला चुका- रहता है जोड-तोड मे हर वक्त मुन्तिला । बनवाई हैं इमारतें मजबूत किस कद्र- फिर भी वशर तो फानी है, पानी का बुलबुला । पाया खुदा ये पूछने, तकलीफ तो बता- अनजान पाया अर्श का लगता है कि हिला । हादसाते-हयात/164 [ 148 ] 7 मुमकिन है किसी मोड पे मिल जाय दुबारा- फिर तर्के-ताल्लुक हो भला कैसे गवारा जो शिकवे-गिले वाहमी पैश पाते है यारो- करते है मुहब्बत की तरफ साफ इशारा । ? लज्जत के लिये उठाना है जरूरी- गम होगा नही दिल मे तो होगा क्या मदावा जिस यार को बरसो से बसा रखा है दिल मे- क्या ज़िक्र करें उसने रुलाया कि हसाया ? उस बज्म मे फिर रौनकें आईं न पलट कर- जिस बज्म से उठ पाये थे हम करके कनारा । है जब भी कनारे पे सफीना मेरा पहुंचा- तूफान ने सर पीटा है लहरो से सवाया । अनजान हमे यार की प्रागोश मिली क्या- जागे न मुअज्जिन ने हमे लाख जगाया । हादसाते-हयात/165 [ 149 ] पहली ही मुलायात मे जो अपने लगे हैं- अव जान से प्यारे हमे लगने लगे हैं। खुदगरजी के इस दौर मे खुद्दारी के अफसाने- हम जैसे ही चद लोग हैं जो लिखने लगे हैं । क्यो जरूमो के भर जाने का देते हो दिलासा- नाखून जो उस यार के फिर वढने लगे हैं । चलिये कि ज़रा रोनके-बाजार तो देखें- कल तक जो खरीदार थे वो बिकने लगे हैं। बदले हुए हालात मे जब हम ही न वदले- बेअक्ल सभी लोग हमे कहने लगे हैं। हो उठेगी सरसब्ज जमी लगता है ऐसा- प्रकाश पे बादल वो घने घिरने लगे हैं । "अनजान मुहब्बत के बिना जीना है मुश्किल- ये सोच के मब आप पे हम मरने लगे हैं । हादसाते-हयात/166 [ 150 ] यू ही मिलते-मिलाते रहियेगा. याद अपनी दिलाते रहियेगा। ज़िन्दगी का सफर तवील नहीं- हो भी तो मुस्कुराते रहियेगा । जिससे तस्कीन दिल को हासिल हो- गीत वो गुनगुनाते रहियेगा। हमको साबित कदम ही पापोगे- आप तूफी उठाते रहियेगा। ये शवे-तार खत्म भी होगी- दीप दिल का जलाते रहियेगा । गर पडे लहू देकर- फूल हर-सू खिलाते रहियेगा । तुमको महसूस हो मगर राहत- तो मुसलसिल सताते रहियेगा । लाख दुश्वारियां हो राहो मे- पांव आगे बढ़ाते रहियेगा। हम तो अनजान हो रहे हैं विदा- आप मांसू बहाते रहियेगा। हादसाते-हयात/167 [ 1511 शवे-तारीक से हर हाल मे लडना जरूरी है- नुमूदे-सुवह की जद्दोजहद, करना जरूरी है। यहाँ हसना मुनासिब है न रोने की इजाजत है- मगर अाहो पे पाबन्दी नही, भरना जरूरी है। न जाना पास शजरे-मम्नूया के याद रख प्रादम-- है हुक्मे-एजदी गर खुल्द मे रहना जरूरी है। मुझे मालूम है कि मुत्तफिक होंगे न वो हरगिज- मगर जो बात है दिल मे, उसे कहना जरूरी है। मुझे मन्जिल मिले या न मिले कब फिक्र की मैंने- मगर जोकै-सफर दिल मे लिये चलना जरूरी है। अधेरा दूर हो पाये कि न हो मुझको क्या लेना- मगर मेरे लिये तो रात भर जलना जरूरी है। में अब अनजान जीने का करीना सीख माया हूँ- जीयो जीने को लेकिन वक्त पे मरना जरूरी है। हादसावे-हयात/168 हादसाते-हयात मे शामिल गजलों के कुछ उर्दू-फारसी-अरबी लफ्जो का हिन्दी तर्जुमा (हिन्दी अर्थ भावार्थ) गज़ल न 1 -राहबर मार्गदर्शक, सदायें आवाजें, दस्तक- खटखटाना, वा खुला हुअा, हादसा = दुर्घटना, कैदो-कफस कारागार ध पिंजरा, राहतपजोर-शातिदायक, तुरुम-बीज, रूपोश= अदृश्य/ विलीन, शजर=वृक्ष, सरबुलन्द प्रतिष्ठित/ऊँचा सिर किये हुए, कत्लगाह - बधस्थल । 2 -कोहे-तूर-तूर पर्वत (सीरिया मे एक पर्वत जिस पर हजरत मूसा ने ईश्वरीय प्रकाश देसा था), जलवा -दर्शन/छवि, कद्रदानो =गुणग्राहक / सत्कार करने वाले, मुसलसिल=निरतर, प्राई = दपण, वेसूद व्यथ, खूने-नाहक-निर्दोप का रक्त, वारहा=बार बार, दामन-प्राचल । 3 -शवाय-यौवन, गोया = मानो/जसे, गुरुवे-वक्त डूबने का समय, आफताव = सूर्य, ताब= शक्ति, बेहिजाब घूघट रहित, सियाही कालापन/अधेरा, प्राब-पानी/चमक, नजूमी-ज्योतिपी, स्वाव स्वप्न मोरे-कारवान - अग्रगण्य/काफिले का सरदार । 4 -सरफरोशी - जानिसारी जान की बाजी लगाना, मारजू अभिलापा, सू-ए-मयतल= वधस्थल को पोर, दीवाने-प्रेमी/उन्मादी, जुल्फे-दराज लम्बे वे शराशि, साया छाया, वीराने जगल, प्रहले- दानिश - बुद्धिमान । 5 - गमे-तनहाई = एकात की पीडा, गुमाए-रश्मिया/किरण, नूर-प्रकाश, दरीचो-सिडकियो/झरोखो, जुबा = वाणी, मुयस्सर- उपलब्ध/प्राप्य, रायगांध्यघ/निप्पल, सास्ता गापा/पहाती। 6 - वारिफ-परिचित, पारनाई-मंत्री/लगाव, दारो- रसन- सूली पोर फासी या पदा, गो = यद्यपि, बेशुमार-प्रगरिंगत, भजुमन =सभा/महफिल, फरहादे-फोहरन-शोरी पा प्रेमी, जुनू उमाद/विक्षिप्तता, पिदा-निसार/पोद्यायर, सम्बद्ध हादमाते-हयात/l69 यावस्ता- दौरे-असीरी=वदीकाल, रूदादे-इश्क प्रेम कथा, गोरो-कफन कद्र और मृतक का वस्त्र। 7 -महरूम-वचित/निराश, महफूज़ =सुरक्षित, सतायम गरो-प्रशसको, सरज़द = घटित, गुनाह-अपराध, पनाहों- शरण। 8 ~पाया-ए-अर्श- प्रश का पाया/ईश्वरीय सिंहासन का स्तम्भ, असर - प्रभाव, पर्दा-ए-हया-लज्जावरण । 9 ~दौर-युग, सिम्त-दिशा, तामीर-निर्माण, भागाज = प्रारभ, रज-पीडा, तलव-इच्छा, दीद-दर्शन । 10 - रास-पसद, देर-बुतखाना/मन्दिर, हरम = खुदा या घर/मस्जिद, मयकदा-मदिरालय, सहरा रेगिस्तान/अरण्य, प्रासरा- सहारा/अवलम्ब, बकौले-गैर-अय के कहे अनुसार, खफा नाराजी रुप्ट, तजकरा-वार्तालाप । !! -सित्ता ए सारजार= पाटो से परिपूर्ण क्षेत्र, राहे- फना-मृत्युमाग, हमकदम = सहगामी, स्वावे-दीदारे यार - प्रिपन्दशन या स्वप्न, रूह-मात्मा, जिस्म-शरीर/बदन । 12 -जरुम = घाव, काविले-इश्क = प्रेम करने योग्य, विलयी- निस्सदेह, शिद्दते गम - अत्यधिक कष्ट, फिजूल-व्यय/भयहीन, - सजा दण्ड। . 13 ~ तनहाई - एकात, अलल-सुबह --प्रात काल । 14 -दर-दरवाजा/वोम्बट, हगिंज-दापि, साबसारी- विनम्रता/रेत के समान, जुनून-म-प्रमो माद ! 16 -वरहना पा नगे पर, जय% शोभनीय, सरमाया सामान, मुतलाशी - गोज मे, सरो-३६ मायार/माति, मास्तिो बुद्धिमा, मजिले मपमूद यह स्थान जहा पहुचना है/गलव्य । 18 गियासत - राजनीति, जग-नरस, नाग, मीरा- उपदेश, ममाफ-व्यम्न/सन, नामह- उपदेगा। 19 -प्रामार-सक्षक्षण, ममन-मा-'यायामन, सम्मान हारमा पान/170 शिकारी/वहेलिया, हुनर = कौशल, खार-काटे, पंगाम- सन्देश, बादे-सदा-सुगधित पुर्वा हवा, गुलशन उद्यान, शररवारप्राग बरसाने वाले, मसीहा- मृत को जीवित करने वाला। 20-बशर-मानव, परवाज़ - उडान, अव्वल-अग्रणी/प्रथम, बे-बालो पर-पसविहीन, गौहर- मोती, महबूबतर-प्रियतम । 21 - स्वावे-गफलत = गहरी नीद, नाखुदा=मल्लाह, वपमे- ऐशो-तरव-विलास की सभा, कमवस्त हतभाग्य /प्रभागा । 22 -पहलू -पाश्व/पसली, चाह-चाहत/प्यार, राह - माग, निगाह = रष्टि, खानाबदोश - बेघर/सचारजीवी, तवाहनष्ट, वारगाह: दरबार/राजमहन। 24 - वेबाकिया-धृष्टताए। खुलापन, सरे-वरम= सभा मे, सजदीद - नवीनता, परम्तार-पूजक/मानने वाले, माजी= भूतकाल, दिगर-पृथक/अन्य। 25 -वर्गो-समर-पत्ते और फल, फलक-माकाश । 26 -साजिशो-पडयत्रो, फरार भागे हुए. पावशार-झरना/ प्रपात, बावकार स्वाभिमानी, क्यामत-प्रलय, मजार- कन, जद- निशाना/सामना/पकड, प्राहनी सो लोहे की, सग-पत्थर/पापारण, शरारम्यग्निकरण/चिन्गारिया। 27 - ताउम्र-प्राजोवन, प्रादाब शिष्टाचार, गदारो याचको/ भिखारियो, लासानी-अद्वितीय, अनुपम, पस्ती-निचाई। 30 -प्राश्ना परिचित/जानकार, मिस्ल-तरह/समान, तीरगी- अधकार, दरम्या-बीच मे, शौके-दीदार-देखने की उत्क्ठा, सिवा= अधिक कीमिया सफल पारस, पारसा चरित्रवान/सदाचारी। 31 - अदा-ए-वेनियाजी लापरवाही का हावभाव/चुलवुलापन, सानी-दूसरा/तुलना योग्य, मुकद्दर-भाग्य/प्रारब्ध । 32 -दानिशवरा-बुद्धिमानो समझदारो, दैरो-हरम मन्दिर और मस्जिद, शाहराहो राजमार्गो, गामजन-चलता हुआ, जा-ए-मर्ग= मृत्यु का स्थान । हादसाते-हयात -- . 33 -कमर चन्द्रमा, नाप्राश्ना-अपरिचित, खौफो-सतर डर भय/शका, सैलावे-तमरलुसम्यातचीत करने को उत्कठा, शौरी-बयानी मधुर भापण, दसं-शिक्षा/उपदेश । 34 -हासिल-प्राप्त, तसल्लीयरुश-सान्त्वनादायक, শাকিল सजाहीन/वेखवर, फहरिस्त-सूची/विवरणिका, नमूदे-सुबह-सवेरा प्रकट होना, ज़मीर-प्रत करण, कौले-वातिल-असत्य वचन, जाने- बिस्मिल-घायल प्राण ! 36 - वशर-मानव, मा'तवर-विश्वस्त, दरगुजर-अनदेखा करना/टालना, राहजनो= लुटेरो, वेशजर-वृक्षविहीन, खतर- सकटरहित, मुस्तसर सक्षिप्त । 39 -तनहा-अकेला, साहिल-तट/किनारा, साइल-भिक्षुक/ याचक, बेमिस्ल-अनुपम, नक्शे-कदम पदचिन्ह, खदा-पेशाना- स्मितमुख/प्रसन्न मुद्रा, निदामत लज्जा/शर्मिन्दगी, आगाज-प्रारम्भ, अन्जामअन्त/परिणाम, अहले-दानिश बुद्धिमान/समझदार । 40 -तोहमतें प्रारोप/दोष लगाना, गुमा भ्रम, बेहिजाब-घूघट खोले हुए/वेपर्दा । 41 -बाजगश्त-अनुगूज/वापसी, उजलत-शीघ्रता/जल्दी, परचम- पताका, अजमत-महिमा/महत्व । 42 -वरपा उपस्थित/खडा हुमा, इस्नियार-वश शमशीरे- प्राबदार= काट करने वाली तलवार, वक्फ-ईश्वरापण/उत्सग, रहमत-दया/अनुकम्पा, गवारा रुचिकर स्वीकाय, उम्रे-रफ्ता:विगत आयु, दावरे-हश ईश्वर/क्यामत के दिन इसाफ करने वाला। 43 --कायनात ससार / ब्रह्माड, गायवाना=अदृश्य / परोक्ष, हिजाव-प्रोट/पर्दा, सागरे-मय मदिरा पात्र, तीरगी-अघेरा/निमिर, हस्ती-अस्तित्व/जीवन । 44 ~वेताब-व्यग्र, नाजिल-उतरने वाला, शकिस्ता-भान/ हादसाते-हयात/172 , जीण शीण, मौजे-तलातुम= तूफानी लहरें, लम्हा-क्षरण, रास-पसद, अश्को-प्रासुओ, परहेज़-अलग रहना/निषेध, रूहे-रवा-प्राण वायु । 45 -होशो-खिद-चेतना और बुद्धि, वाइज-धर्मोपदेशक, मिसरा-ए-अव्वल-शेर की प्रथम पक्ति, दोयम-द्वितीय, दोगाने दो लोगो द्वारा गाया गीत । 46 -बलानो विपत्तियो, मानूस-हिला-मिला/परिचित, तार- तार-चिथडे-चिथडे, हमकनार-सम्बद्ध, प्रावदार-आभावान, नामो- नामूस-यश और प्रतिष्ठा, सुखरू = सम्मानित/निर्दोप, अमे-तामीरे- आशिया नीड निर्माण का सकल्प, बर्के-शोलाबार-अग्निवर्षक विजली। 47 ~ परिन्दा-पक्षी, सगदिल-पाषाणहृदय, मुखालिफ-विरोधी/ विपरीत, तल्खी ए-जीस्त जीवन की कडवाहट । 48 दार =सूली, कंदो-कफस = कारागार और बधन, वीराने- जगल, सूदो-जिया लाभ-हानि, गिला =उपालम्भ/शिकायत सबात= दृढना, उसूल =नियम, शेरे-नर बहादुर/नर सिंह, कोहराम -हाहा- कार/शोरोगुल/वावैला, गैर पराया। 49 -हिकायते-दर्द =व्यथा-वृतात, शुक =धन्यवाद, प्राबलो- पाव के छालो/फफोलो, रूनुमा चेहरा दिखाई देना, नक्श =अकित । 50 -पाखिरश = प्रतत , गुन्चा =कली, \ =वस्तु, चाक फटा हुआ, गरेवान =कुर्ते-कमीज आदि का गला, गैर मुमकिन =असभव, खेमाजन =शिविर लगाना/तम्बू गाडमा, हक-परस्त =सत्य के पुजारी/ सत्यनिष्ठ, उमर-विन-साद = यजीद की सेना का अधिकारी, तुलू 3 उदय। 51 -बुलन्दी =उच्चता, पस्त दवे-कुचले, तुस्मे-नफरत = घृणा का बीज, गदिशे-वक्त समय का चक्कर, कारगर-प्रभावी, महरूमे-ताबीर -स्वप्न जो सच न हो, शरपसन्दो प्रातकवादियो/ कलहप्रियो, दगा विश्वासघात । 53 -सिला बदला/पुरस्कार/प्रतिकार, मजमून = लेख/विषय, हादसाते-हयात/173 माफी छिपा हुआ/गुप्त, हयात जीवन, दौरे-खजा =पतझड का समय, अर्श-मुअल्ला ईश्वर का सिंहासन । 54 - महमूद -सुलतान महमूद गजनवी, अयाज़ =गजनवी का प्रिय दास, नाजनीने-मिस्र =मिस्र को सुदरिया, जुलेखा =मिस्र की महारानी जो हजरत युसुफ पर ग्रासक्त हो गई, गश =मूर्छा, हवास = चेतना, कलीम हजरत मूसा, प्राणकारा प्रकट, शदीद =तोत्र वजूद अस्तित्व, अब बादल । 55 -इबलीस की औलाद = शैतान की सतान/दैत्य-सतति, स्वारीख =इतिहास, जुलमत =अधकार शिद्दत =तीव्रता, दरिदो- हिंस्र पशुप्रो/जानवरो, दहशत: भय । 56 ~अन्दाज पद्धति/तरीका, मसरूर =प्रानदित/प्रफुल्ल, अफलाक जेरे-पा-पावो के नीचे सभी प्राकाश, परवाज = उडान, यकीन -विश्वास, अल्फाज =शब्द दरगुजर अनदेखा करना। 57 -शोर कोलाहल, दरिया- नटी अव्वल= प्रथम, शै- वस्तु, शोख-जमालो- चचल सुदरिया, हैरान = आश्चर्यचकित, बामो- दर-छन और द्वार, रवाहिश = लालसा, लाजिम= उचित/अनिवाय । 58 --उम्मीद: पाशा, तस्कीन शाति, हमरत- इच्छा, तलातुमखेज मौजो तूफाा उठाने वाली तरगे, हद्दे-साहिल तट को सीमा, इन्क्लाबात = परिवर्तन /बदलाव, निगाहे-मेहर= दया-दृष्टि । 60 -तखय्युल= विचार, मुकद्दर - भाग्य/प्रारब्ध, अदाज़ = तरीका, नहूसत=उदासी/अमागलिकता, गवारा स्वीकार । 61 -नजदीक = समीप, मखसूस घनिष्ठ/ग्वास, गो- यद्यपि । 62 तीमारदारी-रोगी की सेवा/परिचर्या, मुद्दामा प्रथ/ उद्देश्य, खुमारी नशा, प्रामदे फस्ले-गुल = बसत का आगमन, वक्ते- सहरी- सुवह का समय/रोजा रखने का समय, इफ्तेयारी-रोजा खोलने का समय, गमगुसारी-सहानुभूति/हमदर्दी, जम्मे-कारी-गहरा पाय । 64 -मुजरिम = अपराधी, मुसिफ न्यायकर्ता, उजलत- । . हादसाते-ह्यात/174 , . शीघ्रता, शब - रात्रि, माहिर - निपुण/सक्षम, जाया-नष्ट/व्यर्थ, कराहत - अरुचि/उदासीनता । 65 -पर्क =अतर, खासो प्राम=असाधारण एव साधारण/ विशेष/सामाय, कुहना पुराना, निजाम = व्यवस्था, अवाम प्रजाजन, वर-पूण होना, वारगाह-दरवार/शाही मकान, अजमत= -महिमा/ सम्मान, ईमाम-नमाज पढाने वाला, मानिन्दे-पर्श-राह - विनीत। रास्ते में बिछी हुई-सी, इन्तजाम = प्रवघ, दाम = कंद/जाल, इसरार = प्राग्रह, मुहाल = कठिन, इजहार-स्वीकारोक्ति/प्रकट होना या करना, पयाम-सदेश, तहसीने-जाम = मदिरा के प्याले की प्रशसा । 66 -सरे-प्राम= खुल्लमखुल्ला/सबके सामने, खामः: वेकार, इलहाम= देववाणी, कुन होजा ये शब्द ईश्वर की तरफ से थे जिनसे सृष्टि की रचना हुई। 67 -वे-परी-पखहीनता, नाज = अभिमान/घमण्ड, मुदा सुसमाचार, पनाह == शरण, वाहम- पारस्परिक, कौलो-करार-वादा/ कथन की स्थिरता, पैरोकार पक्षकार, इत्तेहाद = एक्ता, मन्जर दृश्य, इन्तेशार = विखराव । 69 - जबात = भावुक्ता, वेसारुना= सहसा, मक्तूल - वधिता जिसका कत्ल दिया गया हो । 70 -रज-प्ट, जुज=अतिरिक्त/अलावा, तामील-प्राज्ञा पालन निष्पादन, इरशाद = माज्ञा/प्रादेश, जुम - अपराध, असीरोवदियो/कैदियो, दिलशाद-खुश/प्रस न चित्त । 71 -खितार - उपाधि, हादसाते-यात जीवन की दुघटनायें। जीवन की नई घटनायें, ताबीर स्वप्न का परिणाम, मुगन्नी गाने वाला/गायक, रवाव-सितार के प्रकार का एक बाजा/वाद्ययन, उक्बा = परलोक सुखरू -प्रमन्न/निष्कलक, महशर न्याय का दिन, यजदा= ईश्वर, बेखौफनिडर, कमखाब=एक प्रकार का बहुमूल्य कपडा/मखमल, कुहना निजामपुरातन प्रबध, दस्तूरे-दुनिया सासा- रिक नियमोपनियम। हादसाते-हयात/175 का 72 -नाप्राश्ना-अपरिचित/अनजान/प्रजनवी, तूफाने-तुन्द- तेज तूफान/तीन प्लावन, रूबरूस मुस/मामने-सामने । 73 -लुत्फ-प्रानन्द पंचो समवता/धुमावदार, गुमरही- अज्ञानता, चरागे-दहर- सांसारिक दीपक, तीरगी-अधकार, माफिर सत्य को झुठलाने वाला, वदगी-आराधना । 74 -सिफने-फरहाद फरहाद (शोरी का प्रेमी) की विशेषता, कसलेला का प्रेमी 'मजनू' प्रसिद्ध है, रिद-बलानोश बहुत अधिक पीने वाला, सगे-बुनियाद-नीव का पत्थर, मे राजे-मुहब्बत-प्रेम का चरमोत्वप/प्रेम की पराकाष्ठा । 75 -सरगर्मे-बगावत-पाति करने को तत्पर, गुल-वर्गो- समर-पुप्प, पत्ते एर फल, वेज़ार-अप्रसन्न/युद्ध, सहर-सवेरा, सैलाब-तीव्र जल प्लावन/वाढ, सौगद-शपथ । 76 - मुहब्बत नवाज प्यार बढाने वाले, खुशमिजाज-प्रसन्न चित्त, तर्जे-नमाज -पूजा-पद्धति, उनवान - शीपक, ला-इलाज= जिसका उपचार न हो सके याज= =कुछ/योडे, हरपरस्ती=सत्यनिष्ठा। 77 - नरै-हवादिस= घटनामो के भेंट चढना, बुजदिलो = कायरो, रब्ते-वाहम - पारस्परिक लगाव/ग्रापसी प्रेम, अदम-मौजूद गायव/अनुपस्थिन। 78 -तशिकन मूर्ति भजक, परस्तारो-पूजने वाले, दौरे- हुकूमत = शासनकाल, खू रवारा = रक्तपिपासुमो, गुलिस्ता/उद्यान । 79 -वेरुखी उदासीनता, सद-ठडी, अस्सलातो-रुम्- मेनन्-नोम = नमाज (पूजा) नीद से श्रेष्ठ है, मोअस्जिन अजान देने वाला, सदा-पुकार, मस्लहतन = कारणवश, हराम वजित, कौल = कथन, मेहरो-करम उपकार, नासेह = उपदेशक, मानिन्द- सदृश/ समान। - 80 -रा' नाइया-छटायें, दुश्वारिया-कठिनाइया, सोहबत सग, हाशिये = किनारे, वेजा-असगत/बेतुका/अनुचित, सुखिया हादसाते-हयात/176 . मुग्य समाचार, मुवरी = मुक्त/पवित्र, खूविया= गुण, पानीजाहो : सम्राटो/वडे रत्वे वाले लोग, सुल्द= स्वग । 81 - प्राफताव = सूर्य, माहताव= चद्रमा, पारिज गाल/कपोल, ताजिराना= व्यापारियो जैसा, मासिरे-शव रात्रि का प्रतिम पहर, लहू% रक्त, प्राव-पानी। 82 -वावस्ता जुडा हुग्रा/सम्बद्ध, अमनो-प्रमान- सुख-शाति, दरहमो-बरहम = अस्त-व्यस्त, यश्ती-ए-हयात= जीवन नोका, नूर= प्रकाश/चमक, कमर-चद्रमा, प्रातिश= अग्नि, शवे-फिराक-वियोग- रावि, इबादत= पूजा/अाराधना, दीदा-ए-तर-भीगी प्रांखें, तासीर = प्रभाव/असर, वादे-सहर =प्रात कालीन वायु, सौदा =पागलपन । 83 -कारवाने-जीस्त=ज़िदगी का कारवा मिस्ले-चराग = दीपक की तरह, शादमा= खुश/प्रसन्न, कज़= ऋण । 84 -प्रास्ताने = चौखट/यार की देहलीज, हासिले-हयात = जीवन का उद्देश्य, सागरो-खुम= मदिरा का प्याला और मदिरा-घट, प्रसीरे- रे-कफस पिंजरे मे बदी, गुलशन बाग/उद्यान । 85 -बदहवासः- हतबुद्धि/उद्विग्न, दिलरुवा= चित्तचोर/प्रेमिका, गव= डूबा हुअा, जामो-मीना= मदिरा का प्याला और मदिरा का बडा पार (जग), पारसा पवित्र/गुनाह से बचने वाला। 86 -इस गजल के ज्यादातर अशार कुरान और महाभारत में उल्लिखित घटनामो के परिप्रेक्ष्य मे समझे जा सकते हैं । अफलाक = नाकाश-समूह गर्दिश = कालचक्र/दुर्भाग्य, फानी नश्वर, मस्जूदे-मलाइक = देवदूतो के लिये पूजनीय, शमसार लज्जित, मासूम= मालीभाली, हव्वाससार की पहली स्त्री, आदम-ससार का पहला पुरुष, गन्दुम = गेहूँ, तलबगार अभिलापी, यजदा= = ईश्वर, खुल्दे-वरी = सर्वोच्च सातवा स्वग, सलीव = सूलो/कास, सरचश्मा ए- रहमतः दया का झरना/कृपाम्रोत, रवा-प्रवाहित, तीरो के विस्तर = शरशय्या, जग युद्ध, जपाकश - कृप्ट उठाने वाला, जफावार पीडा पहुचाने वाला। हादसाते-हयात/177 87 ~बेखौफ-निर्भय, हा= क्त्तव्य, यकीनन =विश्वासपूवक, अदा=पालना किया हुआ, सर-ता-पा= सिर से पैर तक, तफसील: विस्तार, मायूस= निराश, अन्दलीय - बुलबुल, दौरे-खजा= पतझड, गुल = पुष्प, इत्तेफाक = सयोग/अचानक, नालाए रसा=निरतर राते रहना, बदौलत-कारण से, अता प्राप्त, मतलूब = वाछित, हरगिज- कभी नही, रोशनाई-सियाही, मसि नजे-भाला शकु, जवरन वलात्, तुरबत- कव/समाधि कत्वाकन पर लगाया जाने वाला पत्थर, नसीव= भाग्य। 88 --होशो-खिद-चेतना और बुद्धि दुरस्त = ठीव/सही- सलामत, लब्बैक मैं उपस्थित ह/हाजिर हुमा अम्वाते-नागहानी- आकस्मिक मौते, दुरतरो बेटियो नजरे-हिकारत - हेय-दृष्टि, अन्नर= निम्न/क्षुद्र, वेहतरो- श्रेष्ठजनो। 89 - जानू-ए-दिलदार मित्र का घुटना, तहम्मुल - धप/ सहिष्णुता, आशियाने = नीड/घोसला, सरसब्ज = हरी-भरी/उपजाऊ, हिज्ज-विरह/वियोग। 90 - तमनाई- इच्छुक, शैदाई-आसक्त/पेमी, रुस्सत- विदा/रवाना, मरसिया- मृतक का गुणगान, सौदाई-उन्मादी/पग- लाया व्यक्ति । 91 -शवे-फुरवत--विरह की रात्रि, वस्ते यार- प्रियदशन, दिले-नादान - नासमझ मन, शकिस्ता = जजर, नाखुदा मल्लाह/ नाविक, फोले-वेजजीर = शृखला मुवत हाथी, दिले-अपमुर्दा = खिन चित्त बुझा मन, एहसान = उपकार, फरिश्ता-सिफ्त = देवदूता जसी विशेषता, नापद - अनुत्पन/गायर, कज प्रदाई-टेदापन /दु शीलता, मशक्क्तपरिश्रम/मेहनत देहकान - किसान/देहाती मरीजे-दिल-- हृदय रोगी, यगाना अकेला/अद्वितीय, फन = कौशल/हुनर, लुकमान = विस्यात वैद्याहकीम, खुशामद -चापलूसी । 92 -मुवर्रा पवित्र/बरी किया हुआ/वेऐव, आसिरश =अन्त- तोगत्वा। भादसाते ह्यात/178 - 93 -हमसायो-पडोसियो, नौगिरिफ्तारोनये-नये बदीजन, कैफो मस्ती मानद और प्रसन्नता, नजात = छुटकारा/मुक्ति, तिश्ना- लव-प्यासा। 94 -नाला-ए-नीम-शब अर्द्ध रात्रि का विलाप, कासिद: डाकिया | समाचार पहुचाने वाला, रकोवो -प्रतिद्व द्वियो/प्रतिप्रेमियो, तौबा पश्चाताप/पछतावा/बुरा कार्य न करने की प्रतिज्ञा, शऊर = प्राचरण/ढग, सदमा-प्राघात, उरियानगी ए-जिस्म-शारीरिक नग्नता, फरजन्दे-आफताव सूयपुत्र, वेदाग =निष्कलक । 95 -करीने =ढग/शिष्टता, रूदादे-इश्क =प्रेम-कथा, नाजुक- तरीन अत्यधिक कोमल, रिश्ता-ए-दोस्ती =मिनता का सबव, सरत = कठोर, नमूदार व्यक्त/प्राविभू त । 96 --काश खुदा करे/ऐसा होता, बरते-खुफ्ता -सुसुप्त भाग्य। सोई हुई किस्मत, बेदार जागना/जाग्रत, पावला-पाई -पैरो के छाले, मयस्सर प्राप्त, पुरखार-काटो से भरी हुई/कटक-सकुल, दुश्वार % दुरूह/कठिन, दरअसल =वास्तव मे, हकगोई =सत्यकथन, जाकनी = यम-यातना/शरीर से प्रारण निकलने की अवस्था । 98 - लम्हात =क्षण, दर पर्दा-ए-नफरत घृणा की प्रोट मे, बज्मे-तखय्युल =रपनानो की सभा, वज्मे-प्रदूशनुमओ वी सभा, कुल्फत =पीडा कजा=मृत्यु/मौत, फरजानो-होशियारो/बुद्धिमानो, सफ-पक्ति/क्तार। 99 याना ए दिल मन मन्दिर, नीम-शव-अद्ध रात्रि, वेअमर अप्रभावी। 100 - ताव सहनशक्ति सामथ्य, जन्त -सहनशीलना/सयम, तल्खियो- कडवाहटो/खारापन, जफ =सहनशीलता, खयाले-मयकशी -मदिरापान का विचार, लवो =अधरो, मुहाल =असभव/दुष्कर, खौफे-याबला-पाई-पावो के छातो का भय, हुद्दे-इश्क-प्यार की सीमायें, दयारे-इश्क -प्रेमगृह प्यार का स्थान, होशमी चेतना हराम =निपिद्ध, खुदो अचैत य/वेखवरी, हरीमे-नाज प्रेयसी का घर, दस शिक्षा/सदुपदेश । हादसाते-हयात/179 - --- - . - 101 -ग्रहदे-शवाव = यौवनकाल/युवावस्था, वेशुमार असरय, इकरारे-जुर्म अपराध स्वीकारना, सदका-सिर से कोई चीज दान करने के लिए उतारना, अख्लाक = गुण/विशेषतायें, परवरदिगार =ईश्वर/विश्वम्भर, वागे -दरा =अत करण की पुकार । 102 कलम =लेखनी, उरुजे-हुस्न = सौंदर्य का उत्थान, जवाल -हाम/पतन, लाजवाल =अपतनीय/जिसका ह्रास न हो, प्राने- वाहिद =एक क्षण, हाले-विसाल -मिलन का वर्णन, रौनक =चहल- पहल/प्रसन्नता, खस्ताहाल =दरिद्र/अकिंचन, रोशन-खयाल =दीप्त प्रज्ञ/उज्ज्वल विचारो वाला/प्रज्ञावान । 103 --शोर कोलाहल/हुल्लड, वुलन्दो-पस्ती ऊच-नीच ऊपर-नीचे, पापोश =पादुका/जूता, रुग्वे जमील =सुदर मुखाकृनि, दिलो-दमाग =मन -मस्तिष्क, पाबोस =पाव चूमने वाला/पदचुम्बक, मुरीद =शिष्य, पीरे-मुगा = मधुशाला का स्वामी, मुसल्ला =नमाज पढने की दरी या चटाई, मयनोश =शरावी/मदिरा पीने वाला, गमो- निशात =दु ख-सुख, वेलीस =निस्पृह/निलिप्त, बाहोश =चेतन । 104 -दरमिया =बीच मे फासिले/दूरिया, जुम्बिश =हिलना। कम्पन, वस्न-मिलन । 105 -वहम-भ्रम, चश्मे-दिल =मन चक्षु सुर्ख =लाल/रक्तिम, खारजार कटकारण्य, पायेदार =स्थिर/दृढ, खाक =रज/रत/मिट्टी। 106 –तिश्नगी =तृष्णा/प्यास, देहका क्सिान/देहाती, सुबहे- रोशन = उज्ज्वल सवेरा, इज्राईल =यमराज/मौत का फरिश्ता । 107 अगयार पराये लोग, एतबार भरोसा/विश्वास, हद्दे- नजर दृष्टि-सीमा, दरिया-प्रो-पावशार नदी और झरना/जलस्रोत । 109 –गरफानी अनश्वर, तस्लीक = रचना/सृजन, चश्मे- पत्थर-पापाण-चक्षु तर्जुमानी-अभिव्यक्ति । 110 -हिम्मतो-अज्मो-हौसला =साहस, सकल्प और उत्साहा सिम्ते-मा जल =गतव्य की प्रोर, मुद्दोमा आशय/मनोभाव, पेशतर =पूर्व मे/पहले, सोहबत =सगत । हादसाते-हयात/180 - मृत शरीर। 111 - जश्न - उत्सव/समारोह, पले-ग्राम = सर्वसाधारण का वध, उसूल - नियम/प्रादश, लाश - 112 –जर्द - पीले/मुरझाये हुए, वतन मातृभूमि, हफ-शब्द/ अक्षर, तनहा एकाकी/अकेला। 113 -फलसफीदाशनिक/फिलोस्फर, फलसफा-दशन/तर्क शास्त्र, अदना-प्रो-पाला=बहुत छोटा और वडा, जनाजे=शवन्यात्रा, शरीक = सम्मिलित/भागीदार, इस्तकलारस्वागत-सत्कार, मुज्दा- ए-फस्ले-नहारी-बसत ऋतु के प्रागमन का सुसमाचार, गुन्चा-ए- दिल-मन की क्ली। 116 - शबगुजार-रानि साथ बिताने वाला, खुलूस निष्कपटता/ निश्छलता, तवील लम्बी/दीघ, शास= लता/डाली, शो-रोज== रात दिन, प्रदू= शत्रु/वैरभाव रखने वाला। 117 - नफम क्षण/पल/श्वास, हुमूले-जिन्दगी जीवन का निष्कप, पेश = प्रस्तुत, जानेमन - प्राणप्रिय रवावगाह - शयनागार, दिलफरेबमन को मोह लेने वाला, वजूद = अस्तित्व, तोहमते-पाक्षेप, वजह कारण, सुस्रहपं/हलका नशा, खुमार = तेज नशा/उमाद, गुरेज़-उपेक्षा/घृणा/इन्कार । 119 - जरे-र- कण-कण रख्ने-वाहम = परस्पर मेल-जोल । 120 - मबहूम = घुघली, साये सी-परछाई-सी, हैरान चकित, खानासरावा=अभागो, लरजती. कापती। 121 - अजी-प्यारा/स्वजन, मजूरे-नजर-दृष्टव्य, पारामे- जाप्राणो को मुम देने वाला। 122 --पारा पारा-टुकडे टुकडे, प्रामारा-प्रकट, शरारा- अग्निकरण, खल्पननशी-एकातवासी। 123 - प्राहिस्तगो-धीरे-धीरे, नापसदीदगी-अरुचि, सदहा-3 शत-शत/सकडा, तहरीर लिखावट/हस्तलिपि, कया-दोहरा लबा अगरखा/गाउन, हदेसीमायें, वावस्ता सम्बद्ध,जुडा हुआ । 124 -मलकुलमौत-यमराज, तिपल-बच्चा, नालाकश विलाप करने वाला/परियाद करने वाला। 126 -सितमपेशा अत्याचारी, दौरे-गुजिश्ता-भूतकाल, कस्दन- हादसाते-हयात/181 -- जानबूझकर, गुलजार-उद्यान, सदवार गो-सौ टुपडे, प्रासाइशे जनन स्वर्ग की समृद्धि/म्वगं का गुस-चैन । 127 -गदिशे-अय्याम-दिना या हेर-फेर, सत्वत-एकात । 128 -माजरा घटना/वृत्तात, चारागर-उपचारक/चिकित्सक, मज-रोग, दुपाईपयर से प्राथना/ईश-स्तुति । 129 दिले-मुजर व्यथित हृदय, दिले-नाराम-हताश हृदय, मुबूते-मग मौत का सन्नाटा, मदाये-जीस्त-जीवन यो पुकार, मजर- दृश्य, सागरे लबरेज शराब से लगालव प्याला। 131 -विरासत-उत्तराधिकार दाम जाल/फन्दा, विलादत जन्म/उत्पत्ति, रजो-अलम-दु स-क्ट, शहादत बलिदान, क्यामत- प्रलय, इवादन- पागधना, ममम्फ-व्यस्त, फुमत-अवकाश/सतोप, पुसिशे-ग्रहवाल हालचाल पूछना, अलालत-रोग/वीमारी, इन्सान न्याय, अदानत न्यायालय, उज्लत शीघ्रता/जल्दी, शवे-तार अधेरी रात, नूर प्रकाश/उजाला, तुरवत-पत्र/समाधि, फरियाद आतनाद/ दुहाई, कोह-पवत/पहाड, सोहबत-सगत, मेराजे-मुहब्बत प्रेम को पराकाष्ठा, इनायत-कृपा/दया। 132 -वेसरव-अकारण, वावर विश्वास/भरोसा, माजरान घटना/वृत्तात, हर पान-प्रत्येक क्षण, मुमकिन-मभव, रूपोश/छिपा हुआ/अदृश्य, मिजाज-तबीयत/मनोदशा, प्रादत-स्वभाव क्वी बलवान्/मजबूत, गरीवखाने निधन का घर । 133 - खदापेशानी-म्मिनमुख सुशील, परिंदो-सा-पक्षियो के समान, पाखिरे-शवरात्रि का प्रतिम पहर, दर-ब-दर-द्वार-द्वार, चद लम्हे कुछ पल, वेगुनाही निर्दोषता/निरपराधता । 134 -बेसारता सहसा/बिना सोचे हुए, हासिले-हयात जीवन का उद्देश्य, मजरूह-घायल/ग्राहत, शिफा-रोगमुक्ति, अता-प्रदान/दत्त, अदा-हाव-भाव/भगिमा/चुकाना/वेवाय । 135 -नादिम लज्जित मिदा, वेवक्त-असमय, बका ए. गैरफानी-कभी नष्ट न होने वाली नित्यता/अनश्वरता, वजूदे-जिन्दगी जीवन का अस्तित्व, राज-भेद, शरीके-गम-पीडा का संगी-साथी । 136 -आहो-फुगा= रोना-धोना/यातनाद, मुहाल = कठिन, निशाने-मन्जिलगतव्य-चिह/माइल स्टोन, हैरत-पाश्चर्य, व हादसाते-हयात/182 . - तडित/बिजली, नशेमन = निवास स्थल/नोड, शासे-गुल-पुप्प-लता, निस्वतसवध/सगाई, दरो-हरम = मन्दिर-मस्जिद । 137 --गदिशे-अय्याम=दिनो का उलट-फेर, राजे-दिली मन का भेद, अन्दाजाप्रमान, माहौल - वातावरण, शविस्तान- शयनागार/सोने का कक्ष, वीरा उदास/योझिल, शक्लो-शवाहत= डीलडोल /प्राकृति, हैरान-प्राश्चर्यचकित । 138 -रस=मुख, मीर=मशहूर शाइर, ववते-साज-सितार की जाति का एक वाद्ययन, तल्सो-ए-माहौल = वातावरण को कटुता, बेजार - प्रप्रसन्न/तग पाया हुआ, स्मे - रोशनग्राभायुक्त मुस, अलम ==दु स, मुदा ए-वस्ल - दर्शन का सुसमाचार/मिलन की खुशखबरी। 140 -सावित करम-दृढ निश्चय/इरादे मे अटल, जलजले- भूकम्प/नूडौल, सुकू =शाति पाराम नग्माजन-मधुर आवाज मे गाना। 141 - सगरेजे पत्थर के छोट छोटे टुकडे, नजारे-दृश्य, इशारे = सकेत, साजिश-पडयन, शग्ल-कार्य/मन बहलाने का काम, वेमानी-प्रो- मक्सद निरथर और उद्देश्यहीन । 142 -मगरूर-ग्रहकारी/घमडी, फमाने-कहानी/कथा, परीवश- अप्सरायो जैसी, लबो-अधरो, गुलशन बाग/पुप्पोद्यान, तमाम समस्त, सातिर बाम्ते/पाव-भगत, नक्श =अस्ति/खुदा हुआ। 143 -गस रुचिकर/पसद साहिल =किनारा, कातिल = हत्यारा, साइल =याचक, रुग्सत = रवाना, गाफिल -असावधान । 144 -जिक =चर्चा सोजो साज-दुख-सुख, वरजस्ता %D फौरन/सडाक से/तुरत, दिलनवाज =प्रेमपात्र/महयूप, गर्मी ए इश्क = प्रेम नी उरणता, हुस्न को शोखो सोदय मा चुलबुलापन, जवाल = पतन, मस्ला=रास्ता/मत/पथ, जवाज =ौचित्य, रोजनामचे = दैनिकी/प्रनिदिन का हाल लिखने की किताब, दज लिखा हुआ/प्रविष्ट, खराज = चौथ/लगान, जानिवे-मयखाना =मदिरालय की ओर, दौर- दौरा-चक्कर/सिलसिला, वाइज =धर्मोपदेशक, याज-धर्मोपदेश, चारासाज =रोग का उपचार करने वाला/चिकित्सक, मुत्माईन = निश्चित/फिक्र, मरीज रोगी, फित्नासाज-उपद्रव कराने वाला) भडकाने वाला। हादसाते-हयात/183 .
, . मुत्तफिर -सहमत, 147 --मुन्सिफ न्यायकर्ता, मुजरिम अपराधी/दोपी, ताम: कडवी, मुनिला-ग्रस्त/फसा हुअा, बशर-मानव । 148 -मुमकिन सभव/सभाव्य, तर्क-ताल्लुक सबध-विच्छ, गवारा ग्राह्य/स्वीकार्य, वाहमी प्रापसी, लज्जत -सुख/प्रानन्त, मदावा-उपचार, सफीना =नाव कश्ती, आगोश गोद/पाश्व/सामिप्य) 149 -खुदगरजी स्वार्थपरता/स्वहित, बुद्धारी स्वाभिमान, चद-थोडे/विरले, दिलासा-सात्वना, वेअक्ल बुद्धिहीन/वेवकूफ 151 ~शवे-तारीक =अधेरी रात, नुमूदे-सुबह-सवेरा होना, जद्दोजहद विशेष प्रयत्न, पावन्दी = रोक/वन्दिश, शजरे-मानूप्रा-गेहू का वह पेड जिसे अल्लाह ने आदम के लिए निपिद्ध कर दिया था, हुक्मे-एज़दी-ईश्वरीय आदेश, सुल्द-स्वग, फिक चिंता/विचार, जौके-सफर यात्रा-सुख/यात्रा का रसानुभव करीना ढग/तमीज। तरमीम सशोधन गजल न पक्तिन गवत/प्रशुद्ध ठोम/गुद्ध 9 जो कोई 14 काई देखेंग देखगे जुवा जुवा फहरिश्त फहरिस्त 44 रस 55 इना दे (सारे से पहले छपा ही) प्रजनदाई हपा 121 सर (बाद मे पहते छपा नही) सेरे (पना पा) 123 तोटो- 143 वाम हीद दी •y: -73 (121 विदु) मा य इससे या शन्द जहां भी १ मा रन (पिपि) में जाये-मुगनि। 9 27 30 42014 बाराशर 31 3 34 34 6 55 7 9 91 इना दे (पाया) यजमाई देहा 91 10 ४ S उ तो बहनेटो- रोलहीरा 10 青
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