Shri Jawahar Vidyapith Binasar, Bikaner
Swadhyay Mala
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जय नानेश
जय महावीराय नम
जय रामेश
स्वाध्याय माला
संकलन-संपादन
श्रीमती असलेखा सोनावत
:: प्रकाशक ::
श्रीमती चांदादेवी बोथरा
बोथरा चौक,
गगाशहर (बीकानेर)
फोन : 09461203251
पुस्तक
:
स्वाध्याय माला
सकलन-सपादन
: श्रीमती असलेखा सोनावत
गंगाशहर (बीकानेर)
फोन 0151-2271418
प्रकाशक
: श्रीमती चॉदादेवी बोथरा
बोथरा चौक, गगाशहर (बीकानेर)
फोन . 09461203251
लेजर सेटिग
चैनरूप भूरा
फोन : 0151-2272964
मो 9414230675
मुद्रित प्रतियाँ
100n
प्रथम अनावरण
: मई,
मुद्रक
: सुराणा उद्योग, बीकानेर
प्राप्ति स्थान : श्रीमती चांदादेवी बोथरा
बोथरा चौक, गंगाशहर (बीकानेर)
फोन : 09461203251
: श्रीमती असलेवा सोनावन
रोशनीघर के पीछे
गंगाशहर (बीकानेर)
फोन : 0151-2271418
• श्रद्धा समर्पण -
प्रातः स्मरणीय परमाराध्य समता विभूति
आचार्यश्री नानेश के पट्टधर प्रशान्तमना
आगमरहस्यज्ञाता तपोप्रदीप व्यसनमुक्ति संस्कार
क्रांति के अग्रदूत हुक्मगच्छाधिपति आचार्यश्री रामेश
के चरणो मे सादर समर्णणा।
निवेदक :
श्रीमती चॉदादेवी बोथरा
RREARRERNAMEEREM स्वाध्याय माला-3
प्रकाशकीय परिचय युगद्रष्टा युगपुरुष दादागुरु पूज्य जवाहराचार्य की पावनधरा गंगाशहर के धार्मिकता से ओतप्रोत श्रेष्ठि स्व. रावतमलजी बोथरा के घर माता बाइयादेवी की कुक्षि से स्व भंवरलालजी बोथरा का जन्म हुआ। युवावस्था को प्राप्त करते ही आपका पाणिग्रहण स्व मूलचन्दजी धर्मपत्नी स्व. भूरीदेवी लूणिया परिवार की धर्मशीला बहिन श्रीमती चॉदादेवी जिनका जन्म फाल्गुन सुदी 3 सम्वत् 1987 को हुआ, के साथ सम्पन्न हुआ। आपने जीवन मे पुरुषार्थ से अनेक सफलताओ को वरा, साथ ही पारिवारिक दायित्वो के निर्वहन के साथ समाज सेवा मे भी अग्रणी रहे। स्व. भंवरलालजी बोथरा पर फक्कड महात्मा पूरणबाबा की विशेष कृपा थी। जीवधडा का एक-एक खुला बोल आपको कण्ठस्थ था। धर्म पर आपकी विशेष रुचि थी। जीवनपर्यन्त सामायिक का बधा था। 20 वर्ष तक चउदस का उपवास भी कर लिया। बोल थोकडो का विशेष ज्ञान था। 24 तीर्थकरो का लेखा और श्रावक की 10 ढाल, जीवधडा आदि भी कंठस्थ था। आपश्री ने साधना को अपनाया तो पाया कि जीवन का आनन्द तो इसी में है। अन्त समय में अपने देह का परित्याग सथारे सहित सजग रहते हुए किया। आपकी धर्मसाहिका श्रीमती चॉदादेवी का जीवन भी अत्यन्त ही सरल है। बपचन से ही आपश्री की धर्म पर विशेष श्रद्धा रही है। आपने चार आचार्यों के दर्शन का लाभ प्राप्त किया है। आपश्री को चालीस वर्षो से चोविहार, 25 वर्षो से सचित का त्याग है तो जमीकद का त्याग भी बचपन से ही कर रखा है। आपश्री दशवकालिक, नन्दी सूत्र, सुखविपाक, णमिपव्वज्जा, वीर स्तुति - (पुच्छिस्सुण) का स्वाध्याय पुस्तक पर करती हैं। खण्ड योजन, गुणस्थान द्वार, नक्षत्रो का थोकडा, 20 थोकडो का ज्ञान, भक्तामर, कल्याणमन्दिर, दस राणियों का तप, तथा 24 तीर्थकरों का लेखा ज्ञान है तो तपस्या मे भी आप अग्रणीय 4- स्वाध्याय माला बदनादनवनविनमान है। तपस्या मे 1 से लेकर 8 तक की लडी, 15 की तपस्या, मासखामण, 24 तीर्थकरो की ओली, गणधरो की ओली, एकान्तर तप, 2 बरसी तप कर रखा है। इन सारी तपस्याओ के साथ उपवास से छोटा पखवाडा भी किया। 15 आयम्बिल ओली, 3 मासखामण आयम्बिल से 45 आयम्बिल का 16-17 विहरमान की ओली, 400 आयम्बिल 250 पचक्खान, सोलिया एकासना का कर्मचूर, 3 खद, सामायिक का मासखामण, एक वर्ष मे 2000-2500 सामायिक आदि कर रखी है। हमेशा एक हजार गाथा की स्वाध्याय करते है। आपके दो पुत्र अभयकुमार धर्मपत्नी इन्द्रादेवी, स्व सुरेन्द्रकुमार धर्मपत्नी विमलादेवी तथा चार पुत्री-1 पुष्पा धर्मपत्नी श्री शुभकरणजी चौपडा, 2 चन्द्रकला धर्मपत्नी श्री गुलाबचन्दजी सेठिया, 3 उर्मिला धर्मपत्नी अशोककुमारजी सेठिया, 4 असलेखा धर्मपत्नी धर्मचन्दजी सोनावत हैं। आपके दो पोत्र श्री मोहितकुमार एव गौतमकुमार तथा एक पोत्री प्रवीणा धर्मपत्नी आसीसकुमारजी दुगड हैं। आप सभी की गुरुभक्ति श्रद्धा समर्पणा प्रेरणादायक है। पूरा परिवार धार्मिक भावना से भरपूर है। धार्मिक भावना से प्रेरित होकर आपने वीतराग प्रभु महावीर की जनकल्याणकारी वाणी को जन-जन तक पहुंचाने व मुमुक्षु आत्माओ की साधना को सबल बनाने मे सहायक के रूप मे 'स्वाध्याय माला' के प्रकाशन को सभव बनाने हेतु उदार सबल प्रदान करते हुए आर्थिक सहयोग दिल खोलकर दिया तथा गुरुचरणो मे श्रद्धा-समर्पणा रूपी भेट दी। धन्य है बोथरा परिवार जिन्होने ऐसा महान् कार्य किया है। आप के पात्र है। सादर जयजिनेन्द्र। मयक सोनावत सभी साधुवाद बिनबिनविमाननाबाद वजाबागबान स्वाध्याय माला-5 अनुक्रमणिका 7 9 11 41 60 6. 83 88 1. वीर स्तुति : (पुच्छिस्सुण) 2 सिद्ध-स्वरूप दर्शन : (उववाई सूत्र-बावीस गाथाएँ) 3. श्री सुखविपाक सूत्रम् 4. श्री अनुत्तरोववाइयदशांग सूत्रम् 5. दशवैकालिक सूत्रम् (5 अध्ययन) उत्तराध्ययन सूत्र के कतिपय अध्ययन णवमं णमिपव्वज्जा णामज्झयण हरीएसिज्जं-बारह-अज्झयणं महाणियण्ठिज्जं-वीसइम-अज्झयणं रहणेमिज्जं-वावीसइम-अज्झयणं जीवाजीवविभत्ती-छत्तीसइम-अज्झयण 7. सिरि नन्दी सूत्तं 8. श्री ऋषभदेव भगवान शिलोका गौतम रास 10 चौबीसी 11 पंच परमेष्ठि 12 मेरी भावना 92 97 101 122 160 9 164 172 173 174 6-स्वाध्याय माला ARERARERARMERERAMERARRAREER
: वीर स्तुति :
(पुच्छिसुण)
पुच्छिसुण समणा माहणा य, अगारिणो या परतित्थिया य।
से केइ णेगत-हिय धम्ममाहु, अणेलिस साहु समिक्खयाए।11।।
कहं च णाण कह दंसण से, सील कह णायसुयस्स आसी।
जाणासि ण भिक्खु ! जहा तहेण, अहासुय बूहि जहा णिसन्तं ।।2।।
खेयण्णए से कुसले महेसी, अणत-णाणी य अणत-दसी।
जसन्सिणो चक्खु-पहे ठियस्स, जाणाहि धम्म च धिइ च पेहि।।3।।
उड्ढ अहेयं तिरिय दिसासु, तसा य जे थावर जे य पाणा।
से णिच्च-णिच्चेहि समिक्ख-पण्णे, दीवेव धम्म समिय उदाहु।।4।।
से सव्वदसी अभिभूय णाणी, णिराम-गंधे धिइम ठियप्पा ।
अणुत्तरे सव्व जगसि विज्ज, गथा अईए अभए अणाऊ ।।5।।
से भूइपण्णे अणिए अचारी, ओहतरे धीरे अणत-चक्खू ।
अणुत्तर तप्पइ सूरिए वा, वइरोय-णिन्देव तम पगासे।।6।।
अणुत्तर धम्ममिण जिणाण, णेया मुणी कासव आसुपण्णे ।
इन्देव देवाण महाणुभावे, सहस्स णेया दिविण विसिटे।।7।।
से पण्णया अक्खय सागरे वा, महोदही वावि अणन्त-पारे।
अणाइले वा अकसाइ मुक्के, सक्केव देवाहिवई जुइम ।।8।।
से वीरिएण पडिपुण्ण वीरिए, सुदन्सणे वा णग सव्व सेढे।
सुरालए वासि-मुदागरे से, विरायए णेग-गुणोव-वेए । । । ।
सय सहस्साण उ जोयणाण, तिकण्डगे पण्डग वेजयते।
से जोयणे णव-णवइ सहस्से, उद्धस्सित्तो हेट्ठ सहस्स-मेग | |10 ||
पुढे णभे चिट्ठइ भूमिवहिए, ज सूरिया अणुपरि-वट्टयति ।
से हेमवण्णे बहु-णन्दणे य, जसि रइ वेदयति महिदा।।11।।
नानाMAMANARARIA
बाबमान स्वाध्याय माला-7
से पव्वए सद्द-महप्पगासे, विरायई कंचण-मट्ठवण्णे। अणुत्तरे गिरिसु य पव्वदुग्गे, गिरिवरे से जलिएव भोमे।।12।। महीए मज्झम्मि ठिए णगिन्दे, पण्णायते सूरिए सुद्धलेसे। एवं सिरिए उ स भूरिवण्णे, मणोरमे जोयइ अच्चिमाली।।13।। सुदंसणस्सेव जसो गिरिस्स, पवुच्चई महत्तो पव्वयस्स। एत्तोवमे समणे णायपुत्ते, जाइ जसो दंसण-णाण-सीले।।14।। गिरिवरे वा निसहाययाणं, रुयएव सेढे वलयायताणं। तओवमे से जग भूइपण्णे, मुणीण मज्झे तमुदाहु पण्णे।।15।। अणुत्तरं धम्ममुई रइत्ता, अणुत्तरं झाणवरं झियाइ। सुसुक्क-सुक्क अपगण्ड-सुक्कं, संखिन्दु-एगंतव-दात-सुक्कं ।।16 ।। अणुत्तरग्गं परम महेसी, असेस-कम्मं स विसोहइत्ता। सिद्धि गई साइ-मणन्त पत्ते, णाणेण सीलेण य दसणेण। 117 || रुक्खेसु णाए जह सामली वा, जंसि रइ वेदयति सुवण्णा। वणेसु वा णन्दण-माहु सेहूं, णाणेण सीलेण य भूइपण्णे।।18।। थणियं व सद्दाण अणुत्तरे उ, चंदोव-ताराण महाणुभावे। गन्धेसु वा चंदणमाहु सेटुं, एवं मुणीणं अपडिण्ण-माहु ।।19 ।। जहा सयम्भू उदहीण सेट्टे, नागेसु वा धरणिन्दमाहु सेटे । खोओदए वा रस-वेजयन्ते, तवोवहाणे मुणि वेजयते । |20 || हत्थीसु एरावणमाहु णाए, सीहो मियाणं सलिलाण-गगा। पक्खीसु वा गरुले वेणुदेवे, णिव्वाण-वादीणिह णायपुत्ते।।21 ।। जोहेसु णाए जह वीससेणे, पुप्फेसु वा जह अरविन्दमाहु । खत्तीण सेटे जह दन्तवक्के, इसीण सेढे तह वद्धमाणे।।22 ।। दाणाण सेढे अभय-प्पयाण, सच्चेसु वा अणवज्जं वयति। तवेसु वा उत्तमं बम्भचेरं, लोगुत्तमे समणे णायपुत्ते ।।23 || ठिईण सेट्ठा लवसत्तमा वा, सभा सुहम्मा व सभाण सेट्ठा। णिव्वाण-सेट्ठा जह सव्व धम्मा, ण णायपुत्ता परमत्थि णाणी । |24 11 8-स्वाध्याय माला बनातावादनावानवानवानवावावा
पुढोवमे धुणइ विगय गेही, न सण्णिहि कुव्वइ आसुपण्णे।
तरिउ समुद्द च महाभवोघ, अभयंकरे वीर अणन्त-चक्खू ।।25।।
कोह च माण च तहेव मायं, लोहं चउत्थं अज्झत्थ दोसा।
एयाणि-वन्ता अरहा महेसी, ण कुव्वइ पाव ण कारवेइ । [26 ||
किरियाकिरिय वेणइयाणु-वायं, अण्णाणियाण पडियच्च ठाण।
से सव्व-वायं इइ वेयइत्ता, उवट्ठिए सजम दीहराय। 27 ||
से वारिया इत्थी सराइभत्त, उवहाणवं दुक्ख खयट्टयाए।
लोगं विदित्ता आर पर च, सव्व पभू वारिय सव्ववार | 28 ||
सोच्चा य धम्मं अरहत-भासिय, समाहिय अट्ठ-पओव सुद्ध ।
त सद्दहाणा य जणा अणाऊ, इदेव देवाहिव आगमिस्सति ।।29 ।।
.
XXXX
: सिद्ध-स्वरूप दर्शन :
(उववाइ सूत्र)
कहिं पडिहया सिद्धा, कहि सिद्धा पइट्ठिया।
कहि बोन्दि चइत्ताण,
कत्थ गन्तूण सिज्झई।।1।।
अलोगे पडिहया सिद्धा, लोयग्गे य पइट्टिया।
इह बोन्दि चइत्ताण, तत्थ गन्तूण सिज्झइ ।।2।।
ज सठाण तु इह भवे, चय-तस्स चरिम-समयम्मि ।
आसी य पएस-घण,
त सठाण तहि तस्स ।।3।।
दीह वा हस्स वा ज, चरिम-भवे हवेज्ज संठाण।
तत्तो त्तिभाग-हीण, सिद्धाणो-गाहणा भणिया । 14 11
तिण्णि सया तेत्तीसा, धणुत्तिभागो य होइ बोधव्वा ।
एसा खलु सिद्धाण, उक्को-सोगाहणा भणिया।।5।।
दिनविमाननावानविनवादावादनानालाल स्वाध्याय माला-9
चत्तारि य रयणीओ, रयणि-त्ति भागणिया य बोधव्वा ।
एसा खलु सिद्धाण, मज्झिम ओगाहणा भणिया।6।।
एक्का य होइ रयणी, साहीया अगुलाइ अट्ठ-भवे।
एसा खलु सिद्धाण, जहण्ण ओगाहणा भणिया।17।।
ओगाहणाए सिद्धा, भव-त्ति भागेण होइ परिहीणा।
सठाण-मणित्थ-त्थं, जरा-मरण विप्प-मुक्काणं ।।8।।
जत्थ य एगो सिद्धो, तत्थ अणता भवक्खय-विमुक्का।
अण्णोण्ण समोवगाढा, पुट्ठा सव्वे य लोगन्ते । 19 ।।
फुसइ अणते सिद्धे, सव्व पएसेहि णियमसो सिद्धो।
ते वि असखेज्ज गुणा, देस-पएसेहि जे पुट्ठा।।10।।
असरीरा जीव-घणा, उवउत्ता दंसणे य णाणे य।
सागार-मणागार, लक्खण-मेयं तु सिद्धाण । 111 ।।
केवल णाणुव-उत्ता, जाणति सव्वभाव गुण भावे।
पासति सव्वओ खलु, केवल दिट्ठी अणन्ताहि । |12||
णवि-अस्थि-मणुसाण, तं सोक्ख-णवि य सव्व-देवाण।
सिद्धाण सोक्ख, अव्वाबाह उवगयाण/11311
जं देवाण सोक्खं, सव्वद्धा पिण्डियं अणन्तगुण ।
ण य पावइ मुत्तिसुहं,-णताहि वग्ग-वग्गूहि। 114}}
सिद्धस्स सुहो-रासी, सव्वद्धा पिण्डिओ जइ हवेज्जा।
सोऽणत वग्ग भइओ, सव्वागासे ण माएज्जा | 115 11
जहा-णाम कोइ मिच्छो, णयर-गुणे बहुविहे वियाणन्तो।
ण चएइ परि-कहेउं, उवमाए तहिं असन्तीए 1116 11
इय सिद्धाणं सोक्खं, अणोवमं णत्थि तस्स ओवम्म ।
किचि विसेसे-णेत्तो, ओवम्म-मिण सुणह वोच्छ । 117 11
जह सव्व काम-गुणिय, पुरिसो भोत्तूण भोयणं कोई।
तण्हा छुहा विमुक्को, अच्छेज्ज जहा अमियति त्तो।।18 ।।
ज
10-स्वाध्याय माला नावानवादावा
इय सव्व कालइत्ता, अउल णिव्वाण-मुवगया सिद्धा। सासय-मव्वाबाह, चिट्ठन्ति सुही सुह पत्ता । 119 || सिद्धत्ति य बुद्धत्ति य, पारगयत्ति य परम्पर-गयत्ति। उम्मुक्क-कम्म-कवया, अजरा अमरा असगा य ।।2011 णिच्छिण्ण सव्व-दुक्खा, जाइ-जरा-मरण-बधण विमुक्का। अव्वाबाह सोक्ख, अणुहोन्ति सासय सिद्धा। 121 ।। अउल-सुह-सागर गया, अव्वाबाह अणोवम पत्ता। सव्व-मणागय-मद्ध चिट्ठति सुही सुह पत्ता ।।22 || XXXXX श्री सुखविपाक सूत्रम् : प्रथम अध्ययन : तेण कालेण तेण समएण रायगिहे णाम णयरे होत्था। रिद्धिस्थि- मियसमिद्धे गुण-सिलए चेइए। वण्णओ- तेणं कालेण तेणं समएण समणस्स भगवओ महावीरस्स अतेवासी अज्जसुहम्मे णाम थेरे जाइ-सपण्णे, कुल-सपण्णे, बल-रूव-विणय- णाण-दसण-चरित्त-लाघव-सम्पण्णे, ओयसी, तेयसी, वच्चसि जससि, जियकोहे, जियमाणे, जियमाए, जियलोहे, जियइन्दिय, जियणिद्दे, जियपरीसहे, जीवियास-मरण-भय-विप्पमुक्के, तव-प्पहाणे, गुण- प्पहाणे एव करण-चरण णिग्गह, णिच्छय, अज्जव, मद्दव, लाघव, खति, गुत्ति, मुत्ति, विज्जा, मत, बभ, वेय, नय, णियम, सच्च, सोय, णाण, दसण, चरित्त-प्पहाणे उराले, घोरे, घोरवए, घोर-तवस्सी घोर-बंभचेरवासी उच्छूढ-सरीरे, सखित्त-विउल-तेउलेस्से चउद्दस-पुव्वी, चउ-णाणोवगए पचहि अणगार-सएहि सद्धि-संपरिवुडे, पुव्वाणु- विमानना मानमानाबाद विमानन स्वाध्याय माला-11 पुलिं चरमाणे, गामाणुगामं दूइज्जमाणे, सुहंसुहेण विहरमाणे जेणेव रायगिहे णयरे जेणेव गुणसीले चेइए तेणेव उवागच्छइ, उवागच्छित्ता अहा पडिरूव उग्गहं उगिण्हित्ता संजमेणं तवसा अप्पाण भावेमाणे विहरइ। तए ण रायगिहे णयरे जाव परिसा णिग्गया, धम्मो कहिओ, परिसा जामेव दिस पाउड्भूया, तामेव दिसं पडिगया। तेण कालेण तेणं समएणं अज्ज-सुहुमस्स अणगारस्स जेट्टे अतेवासी अज्ज जम्बू ! णाम अणगारे कासव-गोत्तेणं सत्तुस्सेहे सम-चउरंस-संठाण-संठिए वज्जरिसह-नाराय-संघयणे, कणय- पुलयणिहस-पम्हगोरे जाव ऊछूढ-सरीरे सखित्त-विउल-तेउलेसे, चउदस-पुव्वी, चउ-णाणोवगए सव्वक्खर-सण्णिवाई। अज्ज- सुहम्मस्स! थेरस्स अदूर-सामन्ते उड्डं-जाणू अहो-सिरे झाण-कोट्टोवगए संजमेणं तवसा अप्पाण भावमाणे विहरइ। तएणं से अज्ज-जम्बू ! णामं अणगारे जाए-सड्ढे जाव समुप्पण्ण- सड्ढे, समुप्पण्ण-संसए, समुप्पण्ण-कोउहल्ले उठाए उडेइ, उठाए उट्टित्ता जेणामेव अज्ज-सुहम्मे थेरे तेणामेव उवागच्छइ उवागच्छित्ता अज्ज-सुहम्मे ! थेरे वदइ णमसइ अज्ज-सुहम्मस्स थेरस्स णच्चासण्णे णाइदूरे सुस्सूसमाणे-णमंसमाणे अभिमुहे पजलिउडे विणएण पज्जुवासमाणे एवं वयासी- जइ णं भते ! समणेण भगवया महावीरेणं जाव संपत्तेण दुह- विवागाण अयमढे पण्णत्ते ? सुह-विवागाणं भंते ! समणेण भगवया महावीरेणं जाव संपत्तेण के अटे पण्णत्ते ? तएण से सुहम्मे अणगारे जम्बू अणगार एवं वयासी, एवं खलु जम्बू ! समणेणं भगवया महावीरेणं जाव सम्पत्तेणं सुह-विवागाण दस अज्झयणा पण्णत्ता। तजहा- सुबाहू भद्दणंदी य, सुजाए, सुवासवे, तहेव जिणदासे। धणवई, य महब्बलो, भद्दणन्दी, महचंदे वरदत्ते।। - 12 - स्वाध्याय माला विजानाविकाSESSER/विन जइ ण भन्ते ! समणेण भगवया महावीरेण जाव सपत्तेण सुह-विवागाण दस-अज्झयणा पण्णत्ता। पढमस्स ण भते ! अज्झयणस्स सुह-विवागाण समणेण भगवया महावीरेण जाव सपत्तेण के अटे पण्णत्ते ? तएण से सुहम्मे अणगारे जम्बू अणगार एव वयासी । एव खलु जम्बू ! तेण कालेण तेण समएण हत्थिसीसे णाम णयरे होत्था। रिद्धिस्थिमिय-समिद्धे । तत्थण हत्थि-सीसस्स-णयरस्स बहिया उत्तर- पुरत्थिमे-दिसीभाए एत्थण पुप्फ-करण्डए णाम उज्जाणे होत्था। सव्वोउ य पुप्फ-फल-समिद्धे, रम्मे-णदणवण-प्पगासे, पासाईए- दरिसणिज्जे, अभिरूवे, पडिरूवे। तत्थ ण कयवण-माल-पियस्स- जक्खस्स जक्खाययणे होत्था, दिव्वे. । तस्स ण वणसण्डस्स बहुमज्झ देसभागे एत्थ ण मह एक्के असोगवर-पायवे पण्णत्ते-कुस-विकुस-विसुद्ध रूक्ख-मूले जाव अणेग रह-जाण-जुग्ग-सिविय-पविमोयणा सुरम्मा पासादीया दरिसणिज्जा अभिरूवा पडिरूवा। तस्स ण असोग वर पायवस्स हेट्टा ईसि खध समल्लीणे एत्थ ण मह एक्के पुढवि सिलापट्टए पण्णत्ते-विक्खभाया-मउस्सेहसु-प्पमाणे जाव णिद्धघणे अट्ठसिरे आयसय तलोवमे सुरम्मे जाव सीहासण- सण्ठिए पासाइए दरिसणिज्जे अभिरूवे पडिरूवे। तत्थ ण हत्थिसीसे णयरे अदीणसत्तू णाम राया होत्था। महया हिमवते, तस्स ण अदीणसत्तुस्स रण्णो धारिणी पामोक्ख देवी-सहस्स ओरोहे यावि होत्था। तए ण सा धारिणी देवी अण्णया कयाइ तसि तारिसगसि वास-भवणसि सयणोवयार कलिए अद्धरत्त-काल-समयसि सुत्तजागरा ओहीरमाणी-2 अयमेयारूव उराल कल्लाण सिव-धण्ण मगल्ल सस्सिरीय महासुमिण पासित्ताण पडिबुद्धा। हट्ट तुट्ठ जाव हियया। बिलावजाबमानवाबनवावगा नामावन स्वाध्याय माला-13 " । त सुमिणं ओगिण्हइ ओगिण्हित्ता सयणिज्जाओ अभुढेइ, रायहस- सरिसीए-गईए जेणेव अदीणसत्तुस्स-रण्णो सयणिज्जे तेणेव उवागच्छइ उवागच्छित्ता अदीणसत्तु रायन्ताहि इट्ठाहि जाव मिय-महुर-मंजुलाहि- गिराहि संलवमाणी-2 पडिबोहेइ, 2 त्ता जाव एवं वयासी-एव खलु अहं देवाणुप्पिया! अज्ज तंसि तारिसगसि सयणिज्जंसि सालिगण- वट्टिए तं चेव जाव णियगवयण-मइ वयत तं सीहं सुविणे पासित्ताणं पडिबुद्धा। तण्णं देवाणुप्पिया! एयस्स उरालस्स जाव महासुमिणस्स के मन्ने कल्लाणे फलवित्ति-विसेसे भविस्सइ ? तए ण से अदीणसत्तू-राया धारिणीए-देवीए अतिय एयमट्ठ सोच्चा णिसम्म जाव तस्स सुविणस्स अत्थोग्गहणं करित्ता धारिणी- देवी ताहिं इट्टाहि जाव सस्सिरीयाहि गिराहिं संलवमाणे-2 एवं वयासी- उराले णं तुमे देवी ! सुविणे दिट्टे, जाव मंगल्ल-कारए णं मा) दिटे, अत्थलाभो भोगलाभो पुत्तलाभो रज्जलाभो देवाणुप्पिए ! एवं खलु तुम देवाणुप्पिए ! णवण्हं मासाणं बहु-पडिपुण्णाणं अट्ठमाण- राइदियाण विइक्कताणं अम्हं कुलकेउ कुलदीव जाव कुल-विवद्धणकरं सुकुमाल-पाणिपाय अहीण-पडिपुण्ण जाव सुरूवं देवकुमार समप्पभं दारगं पयाहिसि। तए णं सा धारिणी देवी अदीण सत्तुस्स रण्णो अंतियं भद्दा सणाओ अब्भुढेइ जाव जेणेव सए सयणिज्जे तेणेव उवागच्छइ। उवागच्छित्ता सयणिज्जंसि णिसीयइ णिसीइत्ता एवं वयासी-मामे से उत्तमे पहाणे मंगल्ले सुविणे अण्णेहि पाव-सुविणेहि पडिहम्मिस्सइ त्ति कटु देव-गुरु-जण सम्बद्धाहि पसत्थाहि मंगल्लाहि धम्मियाहि कहाहिं सुविण-जागरिय पडिजागरमाणी-2 विहरइ। तए णं से अदीणसत्तू राया कल्ल पाउप्पभायाए जाव बाहिरिया उवट्टसाला तेणेव उवागच्छइ-2 त्ता सीहासणवर पुरत्थाभिमुहे 14- स्वाध्याय माला दिनमाबाबमानसावादिविनावानवाबनवावा ! सण्णिसण्णे। तए ण से अदीणसत्तु राया अप्पणो अदूरमासते उत्तर- पुरस्थिमे दिसिभागे अट्ठ-भद्दासणाइ सेयवत्थ-पच्चुत्थुयाइं जाव कणग- पवर-पेरत देसभाग अभितरिय जवणिय अछावेइ-2 त्ता जाव धारिणीए देवीए भद्दासण रयावेइ-2 त्ता कोडुम्बिय पुरिसे सद्दावेइ-2 त्ता। एव वयासी-खिप्पामेव भो देवाणुप्पिया ! अट्ठग महाणिमित्त सुत्तत्थ-पाढए विविह-सत्थ-कुसले सुमिण-पाढए सद्दावेह-2 त्ता एयमाणत्तिय खिप्पामेव पच्चप्पिणह। तए ण ते कोडुम्बिय पुरिसा जाव सुमिण पाढए सद्दावेन्ति । तएण ते सुमिणपाढगा जेणेव अदीणसत्तु राया तेणेव उवागच्छइ-2 त्ता राय जएण विजएणं वद्धान्ति जाव पत्तेयं पत्तेय पुबुन्नत्थेसु भद्दासणेसु णिसीयति। तए णं से अदीणसत्तू राया जवणिय-तरिय धारिणि देवि ठवेइ ठवेत्ता पुप्फ-फल-पडिपुण्णहत्थे विणएण ते सुमिणपाढए एव वयासी- एव खलु देवाणुप्पिया ! धारिणीदेवी अज्जतसि-तारिसगसि सयणिज्जसि जाव महासुमिण पासित्ताण पडिबुद्धा। त एयस्स ण देवाणुप्पिया ! उरालस्स जाव सस्सिरीयस्स महासुमिणस्स के मन्ने- कल्लाणे-फलवित्ति विसेसे भविस्सइ। तए ण ते सुमिण पाढगा अदीणसत्तुस्स रण्णो अतिए एयमट्ट सोच्चा णिसम्म त सुमिण सम्म ओगिण्हति-2त्ता इह अणुपविसति, अणुपविसित्ता । अण्ण-मण्णेण-सद्धि सचालेइ-2त्ता तस्स सुमिणस्स लद्धट्ठा गहियट्ठा पुच्छियट्ठा विणिच्छियट्ठा अभिगयट्ठा अदीणसत्तुस्स रण्णो पुरओ सुमिण-सत्थाई उच्चारेमाणे-2 एव वयासी-एव खलु अम्ह सामी ! सुमिण सत्यसि बायालीस सुमिणा, तीसं महासुमिणा बावत्तरि सव्व-सुमिणा दिट्ठा। तत्थ ण सामी अरिहत-मायरोवा, चक्कवट्टि-मायरोवा, अरिहंतसि वा, चक्कवट्टिसि वा गम वक्कम-माणसि एएसि तीसाए महासुमिणाणं इमे चउदस महासुमिणे पासित्ता ण पडिबुज्झति, तंजहा- जावाजावाजावादबावन स्वाध्याय -15 गय-उसभ-सीह-अभिसेय-दाम-ससि-दिणयरं झयं कुम्भं । पउमसर सागर विमाण भवण रयणुच्चयसिहिं य ।। वासुदेव-मायरो वा वासुदेवसि गब्भ वक्कममाणसि एएसि चउदसण्हं महासुमिणाणं अण्णयरे सत्त वा। बलदेव-मायरो वा बलदेवसि गम वक्कममाणसि एएसि चउदसण्ह महासुमिणाणं अण्णयरे चत्तारि महासुमिणे पासित्ताणं पडिबुज्झंति। मण्डलिय-मायरो वा मण्डलियसि गम वक्कम-माणंसि एएसि चउदसण्हं महासुमिणाणं अण्णयर एगं. महासुमिण पासित्ताणं पडिबुज्झंति। इमे य ण सामी ! धारिणीए देवीए एगे महासुमिणे दिहे। तं उरालेण सामी ! धारिणीए देवीए जाव आरोग्ग-तुट्ठि दीहाउ- कल्लाण-मंगल्ल-कारएण सामी। धारिणीए देवीए सुमिणे दिढे। अत्थलाभो सामी ! सोक्खलाभो सामी ! भोगलाभो सामी !, पुत्तलाभो एवं खलु सामी । धारिणीदेवी णवण्हं मासाण बहुपडिपुण्णाण जाव दारगं पयाहिसि। से वि य णं दारए उम्मुक्क बाल-भावे विण्णाय परिणय-मित्ते जोव्वणग-मणुपत्ते सूरे-वीरे-विक्कन्ते-वित्थिण्ण-विपुलबल-वाहणे रज्जवइ-राजा भविस्सइ, अणगारे वा भावियप्पा, तं उराले ण सामी। धारिणीए देवीए सुमिणे दिखेत्ति कटु भुज्जो भुज्जो अणुबूहन्ति । तए ण अदीणसत्तू राया ते सुमिण पाढए-सक्कारेत्ता सम्माणेत्ता विउल जीवियारिह पीइदाणं दलयइ 2-त्ता पडिविसज्जेइ। तए ण सा धारिणी देवी त सुमिण सम्म पडिच्छइ-पडिच्छइत्ता जेणेव सए वासघरे तणेव उवागच्छइ उवागच्छित्ता सयं भवण अणुपविट्ठा। जाव ज तस्स गब्भस्स हित मिय पत्थ गब्भपोसण त देसे य काले य आहार-माहरेमाणी जाव ववगय रोग-मोह-भय- परित्तासा तं गब्भं सुह सुहेण परिवहइ। , 16-स्वाध्याय माला नवजानाजावागावावागाबाद तए णं सा धारिणी देवी णवण्हं मासाण बहु-पडिपुण्णाणं, अट्ठमाण-राइन्दियाणं विइक्कंताण सुकुमाल पाणिपाय अहीण पडिपुण्ण पचिदिय सरीरं लक्खण-वज्जण गुणोववेय जाव ससि सोमाकार कतं पियदसण सुरूव दारगं पयाया। तएणं से अदीणसत्तू राया बाहिरियाए उवट्टण-सालाए सीहासण-वरगए पुरत्थाभिमुहे सण्णिसण्णे सइएहि य साहस्सिएहि सय-साहस्सिएहि य जाएहि दाएहि भोगेहि दलमाणे-2 पडिच्छेमाणे-2 एवं च ण विहर। तएण तस्स अम्मापियरो जाव सुइजात-कम्मकरणे सपते बारसाहे दिवसे विउल असणं पाण खाइमं साइम उवक्खडावेन्ति 2-त्ता जाव आसाएमाणा, विसाएमाण, परिभाएमाणा, परिभुंजमाणा एवं च ण विहरंति। जिमिय भुतुत्तरागया वि य ण समाणा आयता चोक्खा परम- सूइब्भूया त मित्त-णाइ-णियग-सयण-सबधि-परियण गण-णायग. विउलेणं पुप्फ-वत्थ-गधमल्ला-लकारेण सक्कारेति सम्माणेति, 2-त्ता एवं वयासी-अम्हं इमस्स दारगस्स णामेणं सुबाहुकुमारे ! तस्स दारगस्स अम्मापियरो अयमेयारूवे गोण्ण गुण-णिफण्ण णामधेज्ज करेन्ति सुबाहु त्ति। तए ण से सुबाहुकुमारे पच-धाइ परिग्गहिए। तंजहा-खीर धाईए मडण-धाईए मज्जण-धाईए कीलावण-धाईए, अंक-धाईए अण्णाहि यं बहूहि खुज्जाहि चिलाइयाहि। इगिय, चिन्तिय पत्थिय वियाणियाहि सदेसणे वत्थगहित वेसाहि णिउण कुसलाहि विणीयाहि चेडिया-चक्कवाल-वरिसधर कचुइज्ज महयरगवंद परिक्खित्ते हत्थाओ- हत्थ साहरिज्जमाणे अंकाओ-अकं परिभुज्जमाणे, परिगिज्जमाणे जाव णिव्वाय णिव्वाधायसि गिरि कदर-मल्लीणेव चम्पग-पायवे सुह सुहेण वड्डइ। विमानवालावावाasaaस्वाध्याय माला-17 - 156 शता तए णं तं सुबाहुकुमार अम्मापिअरो सातिरेग अट्ठवास जातग चेव गभट्टमे-वासे सोहणंसि तिहिकरण मुहुत्तंसि कलायरियस्सं उवणेति। तए णं से कलायरिए सुबाहुकुमार- लेही गणिय रूवं णट्ट गीय वाइय' सरगय' पोक्खरगयं। समताल जूयं जणवायं" पासय अठ्ठावयं पोरेकवच्चं दगमट्टियं । अण्णविहिं16 पाणविहिं117 वत्थविहि विलेवणविहि सयविहि0 अज्जन पहेलियं22 मागहिय3 गाह4 गीइय25 सिलोय26 हरिण- जुत्तिया सुवण्ण-जुत्ति चुण्ण-जुत्ति आभरण-विहि तरूणी पडिकम्म इत्थि-लक्खणं2 पुरिस-लक्खण हय-लक्खण गय-लक्खण ।' गोण-लक्खणं कुक्कुड-लक्खण' छत्त-लक्खणं डण्ड-लक्षण असि-लक्खणं० मणि-लक्खणा कागणि-लक्खणं वत्थुविज्ज खंधारमाणं णगरमाणं वूह पडिवूहं चार पडिचारं चक्कवूह गरूलवूह सगडबूह जुद्ध जिंजुद्ध जुद्धाइजुद्ध अट्ठिजुद्ध मुट्ठिजुद्ध" बाहुजुद्धं लयाजुद्ध ईसथ छुरूप्पवाय धणुव्वेयं हरिण्णपाग सुवण्णपाग सुत्तखेड वट्टखेड णालियाखेडा, पत्तच्छेज्ज कडगच्छेज्ज सज्जीव' णिज्जीव सउणरूया मित्ति। बावत्तरि कलाओ सुत्तओ य अत्थओ य करणओ य सेहावइ सिक्खावइ-2 त्ता अम्मा पिऊणं उवणेइ। तए णं सुबाहु कुमारस्स अम्मापिअरो तं कलायरियं महुरेहि वयणेहि विउलेण वत्थ-गंध मल्लालंकारेण सक्कारेति सम्माणेति' सक्कारेत्ता सम्माणेत्ता विउल जीवियारिह पीइदाणं दलयंति-2त्ता पडिविसज्जेति। तए णं तस्स सुबाहुकुमारस्स अम्मापिअरो सुबाहुकुमारं बावतंरि कला-पण्डिए णवंग सुत्त-पडिबोहिए अट्ठारस्स विहिप्पगार देसी-भासा विसारए गीयरई, गधव्व णट-कुसले, हयजोही, गयजोही, रयजोही बाहुजोही बाहुप्पमद्दी अलंभोग समत्थे साहसिए वियाल-चारी जाएं 18 - स्वाध्याय माला बजावताना AAAAAAD STER लामा मा स जाणति, जाणित्ता अम्मापिअरो पच पासाय वडिसग सयांइ करेति अब्भुग्गय-मूसिय-पसिय विव भवण। तए णं तं सुबाहु कुमारं अम्मापिअरो अण्णया कयावि सोभणंसि तिहि-करण-दिवस-णक्खत्त-मुहुत्तसि जाव पुप्फ-चूला पामोक्खाहि पंच सयाहि रायवर कण्णयाहि सद्धि एग-दिवसेणं पाणि गिण्हावेइ। तए णं तस्स सुबाहु कुमारस्स अम्मापिअरो अयमेवारूवं पीइदाणं दलयन्ति, तंजहा-पंचसय हिरण्ण-कोडीओ, पंचसय-सुवण्ण-कोडीओ पंचसय-मउडे-मउडप्पवरे, पंचसय कुण्डल-जुए, कुण्डल जुएप्पवरे जाव अण्णं वा सुबहुं हिरण्णं वा सुवण्णं वा कस वा दूसं वा विउल धण-कणग-रयण-मणि-मोत्तिय-संख-सिलप्पवाल-वालरत्त रयण सत सार सावइज्जं अलाहि जाव आसत्तमाओ कुल वसाओ पकाम दाउं, पकाम परिभोतुं पकाम-परिभाएउं। तए णं से सुबाहुकुमारे एगमेगाए भारियाए एगमेग हिरण्ण कोडि दलयइ, एगमेगं सुवण्ण कोडि दलयइ, एगमेगं मउडं दलयइ • एवं चेव सव्व जाव एगमेग पेसणकारि दलयइ । अण्णं य सुबहु हिरण्ण जाव परिभाएउ । जाव उप्पि-पासाय-वरगए फुट्टमाणेहि मुइग मत्थएहि जाव विहरइ। तेणं कालेणं तेण समएणं समणे भगव महावीरे आइगरे तित्थयरे सयं-सम्बुद्धे, पुरिसुत्तमे, पुरिससीहे, पुरिसवर-पुण्डरीए, पुरिसवर-गंध हत्थीए, लोगुत्तमे, लोगनाहे, लोगहिए, लोगपइवे, लोग-पज्जोयगरे, अभयदए, चक्खुदए, मग्गदए, सरणदए, जीवदए, बोहिदए, धम्मदए, धम्मदेसए, धम्मणायगे, धम्म-सारही, धम्मवर चाउरंत-चक्क-वट्टिणा अप्पडि-हय-वर णाण-दसण-धरे, विअट्ट-छउमे जिणे-जावए, तिण्णे- तारए, मुत्ते-मोयए, बुद्धे-बोहए सव्वण्णू सव्वदरिसी सिव-मयल मरूअ- मणंत-मक्खय-मव्वाबाह-मपुणरा-वत्तिअ सिद्धिगइ णामधेज्ज ठाण सम्पाविउ-कामे अरहा, जिणे, केवली सत्त-हत्थुस्सहे, सम-चउरस विमानामानाबमानसावागावल स्वाध्याय माला-19 संठाण-सण्ठिए, वज्ज-रिसह-णाराय-संघयणे, अणुलोम-वाउवेगे कक- ग्गहणी, कवोय-परिणामे, सउणि-पोस पिटुंतरोरू-परिणए, पउमुप्पल- गंध सरिस णिस्सास-सुरभि वयणे छबी, णिरायक-उत्तम-पसत्थ- अइसेय णिरूवमपले-जल्ल-मल्ल-कलक-सेय-रय-दोस वज्जिय सरीर-णिरुवलेवे, छाया-उज्जोइ-अंगमगे जाव अट्ठ-सहस्स वर पुरिस-लक्खणधरे णग-णगर-मगर-सागर-चक्क-कवरक मगलकिय चलणे विसिट्ठरूवे हुयवह णिचूम जलिय तडितडिय तरूण रवि-किरण सरिसतेए अणासवे, अममे, अकिचणे, छिण्णसोए, णिरूवलेवे, ववगय पेम-राग-दोस मोहे, णिग्गंथस्स-पवयण-देसए, सत्थ-णायगे, पइट्ठावए समणग-पई, समणगविद परिअट्टए चउत्तीस बुद्ध-वयणाति-सेसपत्ते, पणत्तीस-सच्च-वयणाति-सेसपत्ते । आगास- गएण चक्केण, आगास गएणं-छत्तेणं, आगास-गयाहि सेयवर-चामराहि, आगास-फलिह-मएण, सपाय-पीढेणं सीहासणेणं धम्मज्झएण पुरओ पक्कढिज्ज-माणेण सद्धि सम्परिवुडे पुव्वाणु-पुस्विं चरमाणे, गामाणुगाम दूइज्जमाणे, सुहंसुहेणं विहरमाणे हत्थिसीसे णयरे पुप्फकरण्डे उज्जाणे पुढवी सिलापट्टए वण्णओ। तेण कालेण तेणं समएण समणे भगव महावीरे समोसढे । परिसा निग्गया। अदीणसत्तू जहा कूणिओ तहेव णिग्गओ। सुबाहु वि-जहा जमाली, तहा रहेणं णिग्गए। (समणस्स भगवओ महावीरस्स छत्ताइ-च्छत्त पडागाइ-पडागं विज्जा-चारणे जम्भए य देवे ओवयमाणे उप्पयमाणे य पासइ पासित्ता चाउग्घंटाओ आस रहाओ पच्चारूहइ, पच्चारूहित्ता पुष्फ तंबोला उहमादिय वाणहाओ य विसज्जेइ। विसज्जित्ता एगसाडिय उतरासंगं करेइ, करित्ता आयते चोक्खे परमसुइब्भूए अंजलि मउलिय हत्थे जेणेव समण भगवं महावीरे तेणेव उवागच्छइ। उवागच्छित्ता महावीर वदइ) जाव तिविहाए पज्जुवासइ । धम्मो कहिओ, राया परिसा पडिगया। -- 20-स्वाध्याय माला विमाननाबमानना तए णं से सुबाहुकुमारे समणस्स भगवओ महावीरस्स अतिए धम्म सोच्चा णिसम्म हट्ठ-तुढे हियए समण भगव महावीरं वंदइ णमसइ एव वयासी-सदहामि ण भंते ! णिग्गथ पावयण, पत्तियामि णं भंते ! णिग्गंथ पावयणं, रोएमि ण भत्ते ! णिग्गथ पावयणं, अब्भुडेमि णं भते ! णिग्गंथ पावयण, एवमेयं भते ! तहमेय भते ! अवितहमेयं भते! असदिद्ध-मेयं भंते! इच्छियमेय भते! पडिच्छियमेयं भंते। इच्छिय-पडिच्छियमेयं भंते ! जेणं तुझे वदह त्ति कट्ठ एव वयासी-जहा ण देवाणुप्पियाणं अतिए बहवे राईसर-सत्यवाह-पभइओ मुण्डे भवित्ता अगाराओ अणगारिय पव्वइया। णो खलु अह तहा सचाएमि मुण्डे भवित्ता अगाराओ अणगारियं पव्वइत्तए। अह ण देवाणु-प्पियाणं अतिए पचाणुव्वयाइ सत्तसिक्खा-वयाइ दुवालसविह गिहिधम्म पडिवज्जिस्सामि। अहासुहं देवाणुप्पिया ! मा पडिबध करेह। तए णं से सुबाहुकुमारे समणस्स भगवओ महावीरस्स अतिए पंचाणु-व्वयाई, सत्तसिक्खा-व्वयाई दुवालस-विहं गिहिधम्म पडिवज्जइ पडिवज्जित्ता, तमेव चाउग्घण्ट आसरहं दुरूहइ दुरुहित्ता जामेव 'दिसिं पाउद्भूए तामेव दिसि पडिगए। तेणं कालेणं तेण समएणं समणस्स भगवओ महावीरस्स जेढे अंतेवासी इंदभूई णाम अणगारे जाव पज्जुवासमाणे एवं वयासी । अहो णं भंते ! सुबाहुकुमारे इ8-इट्ठरूवे, कते कंतरूवे, पिये- : पियरूवे, मणुण्णे-मणुण्णरूवे, मणामे-मणामरूवे, सोमे सुभगे पिय- 3 'देसणे सुरूवे, बहुजणस्स वि य णं भते ! सुबाहुकुमारे इट्टे इहरूवे- 5 सोमे जाव सुरूवे। साहु जणस्स वि य ण भते ! सुबाहुकुमारे इडे , 'जाव सुरूवे। सुबाहुणा भते ! कुमारेण इमा एयारूवा उराला १. "माणुस्सरिद्धी किण्णा-लद्धा? किण्णापत्ता ? किण्णा अभिसमण्णागया? को वा एस आसी पुव्वभवे ? कि णामए वा ? किं गोत्तए वा ? नावालानाबानाबादESAल स्वाध्याय माला-21 । . कयरसि गामंसि वा ? सण्णिवेसंसि वा ? किं वा दच्चा ? कि वा भोच्चा ? कि वा किच्चा ? किं वा समायरित्ता ? कस्स वा तहा-रुवस्स समणस्स वा माहणस्स वा अंतिए एगमवि आयरिय धम्मियं सुवयणं सोच्चा णिसम्म सुबाहुकुमारेणं इमेयारूवा उराला माणुस्स-रिद्धी-लद्धा, पत्ता, अभिसमण्णागया ? एवं खलु गोयमा ! तेण कालेणं तेण समएणं इहेव जम्बूद्दीवे दीवे भारहेवासे हथिणाउरे णाम णयरे होत्था, रिद्धिस्थि-मिय समिद्धे वण्णओ। तत्थ णं हत्थिणाउरे णयरे, सुमुहे णाम गाहावई परिवसइ, अड्डे दित्ते जाव अपरिभूए। तेणं कालेण तेणं समएणं धम्मघोसे णाम थेरे जाइ-सपण्णे कुल संपण्णे जाव पचहि समण-सएहि सद्धि संपरिवुडे पुव्वाणुपुव्वि चरमाणे गामाणुगाम दूइज्जमाणे जेणेव हत्थिणाउरे णयरे जेणेव सहस्सम्ब वणे-उज्जाणे तेणेव उवागच्छइ उवागच्छित्ता, अहा पडिरूव उग्गह उगिण्हिइ उगिण्हित्ता सजमेणं तवसा अप्पाण भावेमाणे विहरइ। तेण कालेण तेण समएणं धम्म-घोसाणं थेराणं अतेवासी सुदत्ते णामं अणगारे उराले जाव सखित्त तेउलेस्से मास-मासेण खममाणे विहरइ। तए ण से सुदत्ते अणगारे मासक्खमण-पारणगसि पढमाए पोरिसीए सज्झाय करेइ। बीयए पोरिसीए झाणं-झियाएइ। जहा गोयम सामी तहेव धम्मघोसं थेर आपुच्छइ आपुच्छित्ता धम्मघोस-थेरस्स अब्मणुण्णाए समाणे धम्मघोस थेरस्स अंतियाओ सुदत्ते अणगारे पडिणिक्खमइ हत्थिणाउरे णयरे उच्च-णीय-मज्झिम-कुलाइं अडमाणे सुमुहस्स गाहावइस्स गिहं अणुपवितु। तए ण से सुमुहे-गाहावई सुदत्तं अणगारं एज्जमाणं पासेइ, पासित्ता हट्ठतुढे आसणाओ अभुडेइ, अमुट्टित्ता पाय-पीढाओ पच्चोरुहइ, पच्चोरूहित्ता पाउयाओ ओमुयइ, ओमुइत्ता एगसाडियं-उत्तरासग 22- स्वाध्याय माला ललनवलनAREEVAR करेइ, करित्ता सुदत्त-अणगार सत्तट्ठ-पयाइ अणुगच्छइ अणुगच्छित्ता तिक्खुत्तो आयाहिण पयाहिण करेइ, करित्ता वदइ, णमसइ वदित्ता, णमंसित्ता जेणेव भत्तघरे तेणेव उवागच्छइ उवागच्छित्ता सयहत्थेण विउलेण असणं पाण खाइम साइमं पडिलाभिस्सामि त्ति कटु तुट्टे, पडिलाभेमाणे वि तुट्टे, पडिलाभिए वि तुढे । तए ण तस्स सुमुहस्स गाहावइस्स तेण दव्व-सुद्धेण, दायग- सुद्धेण, पडिग्गाहग-सुद्धेणं तिविहेणं तिकरण-सुद्धेण सुदत्ते अणगारे पडिलाभिए समाणे संसारे परित्तीकए। मणुस्साऊए णिबद्धे । गिहसि य से इमाइ पंच दिव्वाइं पाउभूयाइं। तजहा-1. वसुहारा वुठ्ठा, 2 दसद्ध-वण्णे कुसुमे णिवाइए, 3. चेलुक्खेवे कए 4 आहयाओ देव दुदुहीओ 5 अतरा वि य णं आगासंसि अहोदाण अहोदाण घुढे य। तए णं हत्थिणाउरे णयरे महापहेसु-बहुजणो अण्ण-मण्णस्स एव-माइक्खइ, एव भासइ, एवं पण्णवेइ एवं परूवेइ 4 त धण्णे णं देवाणुप्पिया ! सुमुहे गाहावई, कयत्थे ण, कयपुण्णे णं, कय-लक्खणे कया ण लोया सुलद्धे णं माणुस्सए जम्म-जीविय फले सुमुहस्स गाहावईस्स, जस्स ण गिहसि तहारूवे समणे, समण-रूवे पडिलाभिए समाणे इमाइ पच दिव्वाइं पाउब्भूयाई। तए णं से सुमुहे गाहावई बहूहि वाससयाइ आउय पालेइ, पालित्ता कालमासे काल किच्चा इहेव हत्थिसीसे णयरे अदीण सत्तुस्स रण्णो धारिणीए देवीए कुच्छिसि पुत्तत्ताए उववण्णे। तए ण सा धारिणीदेवी सयणिज्जसि सुत्तजागरा-ओहीरमाणी-ओहीरमाणी तहेव सीह पासेइ । सेस त चेव जाव उप्पि-पासाए य वरगए विहरइ। एवं खलु गोयमा ! सुबाहुणा इमा एयारूवा माणुस्सरिद्धि लद्धा पत्ता अभिसमण्णागया। पभू ण भन्ते ! सुबाहुकुमारे देवाणुप्पियाण अतिए मुण्डे भवित्ता अगाराओ अणगारिय पव्वइत्तए ? हता, पभू ! तए ण से भगव गोयमे बनवानानानानानानामावालानाबमान स्वाध्याय माला-23 - समण भगवं महावीरं वंदइ णमंसइ-वंदित्ता-णमसित्ता सजमेणं तवसा अप्पाण भावेमाणे विहरइ। तए णं से समणे भगवं महावीरे अण्णया कयाइं हत्थि सीसाओ णयराओ पुष्फ-करण्डाओ-उज्जाणाओ कयवण-माल-प्पियस्स जक्खस्स जक्खाय-यणाओ पडिणिक्खमइ पडिणिक्खमित्ता बहिया जणवय विहारं विहरइ। तए णं से सुबाहुकुमारे समणोवासए जाए अभिगय जीवाजीवे (उवलद्ध पुण्ण-पावे, आसव-संवर-णिज्जर-किरियाहिगरण-बन्ध- मोक्ख-कुसले, असहेज्ज देवतासुराइएहि देवगणेहि णिग्गथाओ पावयणाओ अणइक्क-मणिज्जे, णिग्गंथे पावयणे णिस्सकिए णिक्कंखिए णिविइ-गिच्छे लट्टे, गहियढे पुच्छियढे अहिगयडे, विणिच्छियढे अहि-मिज-पेमाणुरागरते अयमाउसो ! णिग्गथे-पावयणे अट्टे, अय परमट्टे, सेसे अणट्टे, उसिय-फलिहे, अवगुय-दुवारे, चियत्ततेउर घरप्पवेसे बहूहि सीलव्वयगुण वेरमण पच्चक्खाण पोसहोप-वासेहि चाउ-दसट्ट-मुद्दिट्ट-पुण्ण-मासिणीसु पडिपुण्णं पोसह सम्मं अणुपालेमाणे समणे णिग्गंथे फासु-एसणिज्जेण असणं जाव ओसह भेसज्जेण य पडिलामेमाणे अहा परिग्गहिएहि तवोकम्मेहि अप्पाण भावेमाणे विहरइ। तए ण से सुबाहुकुमारे अण्णया कयाइ चाउ-द्दसट्ट-मुद्दिट्ट पुण्ण-मासिणीसु जेणेव पोसहसाला तेणेव उवागच्छइ, उवागच्छित्ता पोसहसाल पमज्जइ, पमज्जित्ता, उच्चार-पासवण भूमि पडिलेहेइ, पडिलेहित्ता, दम-संथारग सथरेइ, संथरित्ता, दब्म-सथारग दुरूहइ, दुरूहित्ता, अट्ठम-भत्त पगिण्हइ पगिण्हित्ता पोसहसालाए पोसहिए अट्ठम-भत्तिए पोसह पडिजागरमाणे विहरइ। तए णं तस्स सुबाहुस्स कुमारस्स पुव्वरत्ता-वरत्त काल-समयसि धम्मजागरियं जागरमाणस्स इमे एयारूवे अज्झथिए चिंतिए, कप्पिए, पत्थिए मणोगए सकप्पे समुप्पज्जित्था धण्णा ण ! ते गामागर, जाव सण्णिवेसा जत्थ ण समणे भगवं महावीरे विहरइ। 24-स्वाध्याय माला जिवनावनाASAHESHEET धण्णा ण ते राईसर-तलवर-माडम्बिय कोडुम्बिय-इम सेट्ठी सेणावइ सत्यवाह पभइओ। जे ण समणस्स भगवओ महावीरस्स अंतिए मुंडे भवित्ता अगाराओ अणगारिय पव्वयति। धण्णां ते राईसर जाव सत्थवाह पभइओ जे णं समणस्स भगवओ महावीरस्स अतिए धम्म पडिसुणेन्ति। त जइ ण समणे भगवं महावीरे पुवाणुपुचि चरमाणे गामाणुगामं दूइज्जमाणे-इह- मागच्छेज्जा जाव विहरेज्जा। तए ण अह समणस्स भगवओ महावीरस्स अतिए मुंडे भवित्ता अगाराओ अणगारियं पव्वएज्जा। तए ण समणे भगव महावीरे सुबाहुस्स कुमारस्स इम एयारूवं अज्झत्थियं, चिन्तियं, कप्पिय, पत्थियं मणोगय सकप्पं वियाणित्ता, पुव्वाणुपुट्वि-चरमाणे गामाणुगाम दूइज्जमाणे, जेणेव हत्थीसीसे णयरे, जेणेव पुप्-करण्डे-उज्जाणे, जेणेव कयवणमाल पियस्स जक्खस्स जक्खाययणे, तेणेव उवागच्छइ उवागच्छित्ता अहा पडिरूव उग्गह उगिण्हित्ता सजमेण तवसा अप्पाण भावमाणे विहरइ । परिसा, णिग्गया राया वि णिग्गओ। तए ण तस्स सुबाहु कुमारस्स तं महया जहा पढम तहा णिग्गओ। धम्मो कहिओ। परिसा पडिगया राया वि पडिगओ। तए णं से सुबाहु कुमारे समणस्स भगवओ महावीरस्स अतिए धम्म सोच्चा णिसम्म हट्ठ-तुट्टे समण भगव महावीर वदइ णमसइ एवं वयासी-सद्दहामि ण भंते ! णिग्गथ पावयणं एव पत्तियामि ण, रोएमि ण, अब्भुढेमि ण भंते। णिग्गथ पावयण एवमेय, तहमेय, अवितहमेय असदिग्घमेय भंते णिगगथ पावयण इच्छिय-पडिच्छियमेय भंते ! से जहेव त तुभे वदह । ज णवरं देवाणुप्पिया ! अम्मापिअरो आपुच्छामि तओ पच्छा देवाणुप्पियाण अतिए मुण्डे भवित्ताण अगाराओ अणगारिय पव्वइस्सामि । अहासुह देवाणुप्पिया ! मा पडिबन्ध करेह । तए ण से सुबाहुकुमारे समण भगव महावीर वदित्ता णमसित्ता विनावावानजानका स्वाध्याय माला-25 जाव जेणामेव सए भवणे तेणामेव उवागच्छइ जेणेव अम्मापियरो तेणेव उवागच्छित्ता अम्मापिऊण पायवडणं करेइ, करित्ता एव वयासी- एवं खलु अम्मयाओ ! मए समणस्स भगवओ महावीरस्स अतिए धम्मे णिसते, से वि य धम्मे से इच्छिए पडिच्छिए अभिरुइए। तए णं तस्स सुबाहु-कुमारस्स अम्मापियरो सबाहुकुमार एव वयासी-धण्णोसि णं तुम जाया सपुण्णो. कयत्थो. कय लक्खणोसि तुमं जाया, जे ण तुमे समणस्स भगवओ महावीरस्स अतिए धम्मे णिसंते से वि य ते धम्मे इच्छिए पडिच्छिए अभिरुइए। तए णं से सुबाहुकुमारे अम्मापियरो दोच्चपि तच्चपि एवं वयासी- इच्छामि ण अम्मयाओ ! तुडभेहि अब्मणुण्णाए समाणे समणस्स भगवओ महावीरस्स अतिए मुण्डे भवित्ताण अगाराओ अणगारिय पव्वइत्तए। तए णं धारिणी देवी त अणिटुं जाव अस्सुय पुव्वं फरूस गिर सोच्चा णिसम्म इमेण एया-रूवेण जाव विलवमाणी। सुबाहुकुमार एवं वयासी-तुम्हंसि ण जाया अम्ह एगे पुत्ते जाव णो खलु जाया अम्हे इच्छामो खणमवि विप्पओग सहित्तए, त भुञ्जाहि ताव जाया ! विउले माणुस्सए कामभोगे जाव, ताव वयं जीवामो। ताओ पच्छा अम्हेहिं कालगएहि, परिणयवए वड्डिय-कुलवस तन्तु-कज्जम्मि णिरावयक्खे समणस्स भगवओ महावीरस्स अंतिए मुण्डे भवित्ता अगाराओ अणगारिय पव्वइस्ससि । तए णं से सुबाहुकुमारे अम्मा-पिऊहि एव वुत्ते-एवं खलु अम्मयाओ माणुस्सए भवे अधुवे, अणियए असासए वसणस- उवद्दवाभिभूए विज्जुलया चंचले, अणिच्चे जलबुब्बुय-समाणे, कुसग्ग- जलबिदु सण्णिभे, सझब्भ-रागसरिसे, सुविण दसणोवमे सडण-पडण विद्धंसण धम्मे पच्छापुर च ण अवस्स विप्पजहणिज्जे, से के ण जाणंति अम्मयाओ ! के पुट्विं गमणाए, के पच्छा गमणाए। त . 26-स्वाध्याय माला बनानावनात aga ANNA GAVCA इच्छामि णं अम्मयाओ ! तुभेहि अब्भणुणाए समाणे समणस्स भगवओ महावीरस्स जाव पव्वइत्तए। तए णं तं सुबाहुकुमार अम्मापिअरो एव वयासी-इमाओ ते जाया। सरिसियाओ, जाव राय-कुलेहितो आणिल्लियाओ भारियाओ तं भुजाहि ण जाया ! एताहि सद्धि विउले माणुस्सए कामभोगे तओ पच्छा भुत्तभोगे समणस्स भगवओ महावीरस्स जाव पव्वइस्ससि ? तए णं से सुबाहुकुमारे अम्मापियर एव वयासी-एव खलु अम्मयाओ। माणुस्सगा कामभोगा असुई, जाव सुक्कसोणिय संभवा, अधुवा-अणितिया-असासया-सडण-पडण-विद्धसण धम्मा, पच्छा पुर च णं अवस्स विप्पजहणिज्जा जाव त इच्छामि णं अम्मायाओ। जाव पव्वइत्तए। तए णं तं सुबाहुकुमार अम्मापिअरो एवं वयासी-इमे य ते जाया। अज्जय पज्जय पिउपज्जयागए सुबहुहिरण्णे य जाव पगाम परिभाएउं तं अणुहोहित्ति ताव जाव जाया विउल माणुस्सग इडिसक्कार-समुदय, तओ पच्छा अणुभूय-कल्लाणे समणस्स भगवओ महावीरस्स जाव पव्वइस्ससि ? तए णं से सुबाहुकुमारे अम्मापिअर एव वयासी-हिरण्णे य, सुवण्णे य जाव सावइज्जे अग्गि-साहिए, चोर-साहिए, राय-साहिए, दाइय-साहिए, मच्चु-साहिए, अग्गि-सामण्णे जाव मच्चु-सामण्णे सडण-पडण विद्धसण धम्मे पच्छा पुर च ण अवस्स विप्पजहणिज्जे। से के णं जाणइ अम्मयाओ। के पुषि, के पच्छा गमणाए। त इच्छामि ण अमायाओ तुमेहि अभणुणाए समाणे समणस्स भगवओ महावीरस्स अतिए जाव पवइत्तए। तए ण तस्स सुबाहु कुमारस्स अम्मापियरो जाहे णो सचाएति, सुबाहुकुमार बहुहि विसयाणु-लोमाहि वा ताहे विसय-पडिकूलाहि सजम भउव्वेय कारियाहि पण्ण-वणाहि य पण्ण-वेमाणा एव वयासी- बनानाबानाबालाननादावलावताना स्वाध्याय माला-27 एस णं जाया। णिग्गंथे पावयणे सच्चे अणुत्तरे केवलिए, पडिपुण्णे, णेयाउए, ससुद्धे, सल्लगत्तणे, सिद्धि-मग्गे, मुत्ति-मग्गे, णिज्जाण-मग्गे, णिव्वाण-मग्गे, सव्व-दुक्ख-पहीण-मग्गे, अहीव एगतदिट्ठीए, खुरो इव एगंतधाराए, लोहमया इव जवा चाबेयव्वा, बालुया-कवले इव णिरस्साए, गंगाइव-महाणइ पडिसोय-गमणाए, महासमुद्दो इव भूयाहिंदुत्तरे, तिक्खं चकमियव्व, गरुय, लम्बेयव्वं, असिधारेव्व संचरियव्वं। णो खलु कप्पइ जाया। समणाणं णिगथाणं आहाकम्मिए वा, उद्देसिए वा, कीयगडे वा, ठविए वा, रइए वा, दुभिक्खभत्ते वा, कतार-भत्ते वा, वदलिया-भत्ते वा, गिलाण-भत्ते वा, मूलभोयणे वा, कदभोयणे वा, फलभोयणे वा, बीयभोयणे वा, हरियभोयणे वा, भोत्तए वा, पायए वा। तुम य ण जाया। सुह-समुचिए णो चेव ण दुहसमुचिए, णाल सीय, णाल उण्हं, णाल खुहा, णालं पिवास, णाल वाइयं-पित्तिय -सण्णिवाइय विविहे रोगायंके उच्चावए गामकण्टए बीवासं : ह. -सग्गे उदिण्णे सम्म अहियासित्तए, भुजाहि ताव जाया ! पु.i, कामभोगे तओ पच्छा भुत्तभोगी समणस्स जाव पव्वइस्ससि ? तए ण से सुबाहु कुमारे अम्मा पिऊहि एव वुत्ते-एवं खलु अम्मयाओ णिग्गथे पावयणे कीवाणं, कापुरिसाण, इहलोग पडिबद्धाण परलोग-णिप्पिवासाणं दुरणुचरे, पायय जणस्स णो चेव णं धीरस्स णिच्छियव-वसियस्स एत्थ कि दुक्कर करणयाए। त इच्छामि णं अम्मयाओ। तुभेहि अब्भणुण्णाए समाणे समणस्स जाव पव्वइत्तए । तए ण त सुबाहु कुमारं अम्मापिअरो जाहे णो संचाएइ बहूहि विसयाणु-लोमाहि य, विसय-पडिकूलाहि य, ताहे अकामए चेव सुबाहुकुमारं एवं वयासी-इच्छामो ताव जाया। एगदिवसमवि ते रायसिरि पासित्तए। तए ण से सुबाहुकुमारे अम्मापिअर-मणुवत्तमाणे 28-स्वाध्याय माला (वाब तुसिणीए संचिट्ठइ। तए ण से अदीणसत्तु राया कोडुम्बिय पुरिसे सद्दावेइ सदावित्ता एवं वयासी-खिप्पामेव भो देवाणुप्पिया ! सुबाहु कुमारस्स महत्थ महग्घ महरिह विउलं रायाभिसेय उवट्ठवेह। तए ण ते कोड्डम्बिय पुरिसा जाव ते वि तहेव उवट्ठवेन्ति। तए ण से अदीणसत्तू राया बहूहि गणणायग-दण्डणायगेहि य जाव सपरिवुडे सुबाहुकुमार अट्ठसएण सोवण्णियाण कलसाण' एवं रुप्पमयाण कलसाणं सुवण्ण-रुप्पमयाण कलसाण मणिमयाण कलसाणं सुवण्ण मणिमयाणं कलसाण रुप्पमणिमयाण कलसाणं सुवण्ण-रुप्प-मणि-मयाण कलसाण भोमेज्जाणं कलसाण सव्वोदएहि सव्व-मट्टियाहि सव्व-पुप्फेहि सव्व-गंधेहि सव्व-मल्लेहि सव्वोसहिहि य सिद्धत्थएहि य सव्विड्डीए सव्व-जुतीए सव्व-बलेण जाव दुंदुभि-निग्घोसणादि-तरवेण महया महया रायाभिसेएण अभिसिचइ, अभिसिचित्ता करयल जाव कटु एव वयासी- जय जय नन्दा ! जय जय भद्दा ! जय नन्दा ! भद्द ते, अजिय जिणाहि, जाव विहराहि त्ति कटु जय जय सद्द पउजति। तए णं से सुबाहुकुमारे राया जाए, महया जाव विहरइ, तए ण तस्स सुबाहुस्स रण्णो अम्मापियरो एवं वयासी-भण जाया ! कि दलयामो, किं पयच्छामो, किं वा ते हियइच्छिए सामत्थे (मते) ? तए ण से सुबाहूराया अम्मापियरो एव वयासी-इच्छामि ण अम्मयाओ! कुत्तिया-वणाओ रयहरण पडिग्गहग च आणियं, कासवयं च सद्दावेउं। तए ण से अदीणसत्तू राया कोड्डम्बिय पुरिसे सद्दावेइ, सद्दावेत्ता एव वयासी-गच्छह णं तुमे देवाणुप्पिया ! सिरिघराओ तिण्णि सयसहस्साइ गहाय दोहि सयसहस्सेहि कुत्तियावणाओ रयहरण पडिग्गहग च उवणेह, सयसहस्सेण कासवय सद्दावेह । तए ण ते कोड्डुम्बिय पुरिसा अदीणसत्तुणा रण्णा एव वुत्ता बानाबानाजावाजावाजानSEaasa स्वाध्याय माला-29 समाणा हट्ठ तुट्ठा सिरि घराओ तिन्नि सयसहस्साइं गहाय, कुत्तिया . वण्णाओ दोहिं सयसहस्सेहिं रयहरणं पडिग्गहं च उवणेन्ति । सय- सहस्सेण कासवयं सद्दावेति। तए णं से कासवए हट्ठ तुट्ठ हियए ण्हाए मंगल-पायच्छित्ते सुद्ध-प्पावेसाइं वत्थाई मगलाइं पवर-परिहिए अप्प महग्घाभरणालकिय सरीरे जेणेव अदीणसत्तू राया तेणेव उवागच्छइ, उवागच्छित्ता अदीणसत्तुं रायं करयल-मंजलिं कटु एवं वयासी-सदिसह णं देवाणुप्पिया ! जं मए करणिज्ज? तए णं से अदीणसत्तू राया कासवयं एवं वयासी-गच्छाहि ण तुमं देवाणुप्पिया ! सुरभिणा गधोदएण णिक्के हत्थपाए पक्खालेह । सेयाए चउप्फालाए पोत्तीए मुहं बधित्ता सुबाहुस्स कुमारस्स चउरगुल वज्जे णिक्कमण पाउग्गे अग्गकेसे कप्पेहि। तए णं से कासवए सुरभिणा-गधोदएण हत्थपाए पक्खालेइ पक्खालेत्ता सुद्ध वत्थेण मुहं बधित्ता परेणं जत्तेणं सुबाहुस्स कुमारस्स -वज्जे निक्खमण पाउग्गे अग्गकेसे कप्पेइ। तए णं तस्स सुबाहुस्स कुमारस्स माया महरिहेणं हसलक्खणेण पडसाडएणं अग्गकेसे पडिच्छइ। जाव विलवमाणी एवं वयासी-एस णं अम्ह सुबाहुस्स कुमारस्स अभुदएसु य, उस्सवेसु य, पसवेसु य, तिहीसु य, छणेसु य, जन्नेसु य, पव्वणीसु य अपच्छिमे दरिसणे भविस्सइ त्ति कटु ऊसीसामूले ठवेइ । तए णं तस्स सुबाहुस्स कुमारस्स अम्मापियरो उत्तराव-क्कमण सीहासणं रयावेन्ति, रयावेत्ता सुबाहुकुमार दोच्चपि तच्चपि सेय पीयएहि कलसेहि पहावेन्ति, जाव गंथि-मवेढिम पूरिम संघाइमेण चउविहेणं मल्लेण कप्प-रुक्खग पि व अलंकिय विभूसियं करेति। तए णं से अदीणसत्तू राया कोड्डम्बिय पुरिसे सद्दावेइ, सद्दावेत्ता एव वयासी-खिप्पामेव भो देवाणुप्पिया ! अणेगखम्भ सय सन्निविट्ठ 30- स्वाध्याय माला बजारमानाबा सुहफास सस्सिरीय रूवं सिग्धं तुरिय चवल पुरिस-सहस्स वाहिणी सीय उवट्ठवेह । तए णं ते कोड्डम्बिय पुरिसा हट्ट तुट्ठ जाव उवट्ठावेन्ति । तए णं से सुबाहूकुमारे सीयं दुरूहइ, दुरूहित्ता सीहासण वरगए पुरत्याभिमुहे सन्निसन्ने। तए णं तस्स सुबाहुकुमारस्स माया ण्हाया कयवलि-कम्मा जाव अप्पमहग्घा-भरणा-लकिय-सरीरा सीय दुरुहइ, दुरूहित्ता, सुबाहुकुमारस्स दाहिणे पासे भद्दासणंसि णिसीयइ। तए णं तस्स सुबाहुस्स कुमारस्स अम्ब धाई रयहरणं पडिग्गहगं च गहाय सुबाहुस्स कुमारस्स वामे पासे भद्दासणसि निसीयइ। तए णं तस्स सुबाहुस्स कुमारस्स पिट्ठओ एगा वरतरुणी। तए ण तस्स सुबाहुस्स कुमारस्स पिट्टओ एगा वरतरूणी सिगारागार चारूवेसा जाव हिमरयय कुंदेन्दु पगासं सकोरट मल्ल-दाम धवलं आयवत्त गहाय सलील ओहारेमाणी चिट्ठइ। तए णं तस्स सुबाहुस्स कुमारस्स दुवे वर तरुणीओ सिंगारागार चारुवेसाओ जाव कुसलाओ सुबाहुस्स कुमारस्स उभओ पासं सुहुमवर दीहवालाओ सख-कुंद-दग-रयअमय-महिय फेणपुञ्ज सन्निगासाओ चामराओ गहाय सलीलं ओहारेमाणीओ-2 चिट्ठन्ति । तए ण एगा वरतरुणी सुबाहुस्स कुमारस्स पुरओ पुरत्थिमेण चन्द-प्पभव-इरवेरुलिय विमलदण्ड तालियण्टं गहाय चिट्टइ। तए ण तस्स एगा वरतरूणी सुबाहुस्स कुमारस्स पुव्व-दक्खिणेण सेय रययामय विमल-सलिल-पुन्नं मत्तगय महामुहा किति समाण भिगार गहाय चिट्टइ। तए ण तस्स सुबाहुकुमारस्स पिया कोडुम्बिय पुरिसे सद्दावेत्ता एवं वयासी-खिप्पामेव भो देवाणुप्पिया। सरिसयाणं जाव एगा भरण गहिय निज्जोयाण कोडुम्बिय वर तरूणाण सहस्स सद्दावेन्ति, जाव तेणामेव उवागच्छित्ता। अदीणसत्तु राय एवं वयासी-सदि सहण देवाणुप्पिया। जण्णं अम्हेहि करणिज्ज । तए ण से अदीणसत्तू (दमननावमाननवानी विनाबाना स्वाध्याय माला-31 राया तं एवं वयासी-गच्छह णं देवाणुप्पिया ! सुबाहुस्स कुमारस्स पुरिस-सहस्स-वाहिणिं सीयं परिवहेह। तए णं तं कोड्डम्बिय वरतरुण सहस्सं हट्टतुटुं सुबाहुस्स कुमारस्स पुरिस सहस्सवाहिणि सीयं परिवहइ। तए णं सुबाहुस्स कुमारस्स पुरिस-सहस्स वाहिणि सीय दुरूढस्स समाणस्स इमे अट्ठट्ठ मंगलयात प्पढमयाए पुरओ अहाणु-पुव्वीए सम्पत्थिया। तं जहा-1 सोत्थिय 2. सिरीवच्छ 3 णदियावत्त 4. वद्धमाणग 5 भद्दासन 6. कलस 7. मच्छ 8 दप्पण 8, जाव वहवे अत्यत्थिया जाव ताहि इट्टाहिं जाव अणवरय मगल जय जय सदं पउंजंति। तए ण सुबाहुकुमारे हत्थिसीसस्स णगरस्स मज्झं-मज्झेणं णिग्गच्छइ । जेणेव पुप्फ करण्डे उज्जाणे तेणेव उवागच्छइ, पुरिस सहस्स वाहिणीओ सीयाओ पच्चोरुहइ। तए णं तस्स सुबाहुस्स कुमारस्स अम्मापियरो सुबाहु कुमारं पुरओ कटु जेणामेव समणे भगव महावीरे तेणामेव उवागच्छइ, समणं भगवं महावीरं वदन्ति णमंसति, एवं वयासी- एस णं देवाणुप्पिया ! सुबाहु कुमारे अम्हं एगे पुत्ते, इट्टे, कंते पिये जाव संसार भउविग्गे, भीए जम्मण-जरा-मरणाणं, इच्छइ देवाणुप्पियाणं अन्तिए मुण्डे-भवित्ता आगाराओ अणगारिय पव्वइत्तए। अम्हे ण देवाणुप्पियाणं सिस्स-भिक्खं दलयामो। पडिच्छतु णं तुम्हे देवाणुप्पिया ! सिस्स भिक्खं । तए णं समणे भगव महावीरे सुबाहुस्स कुमारस्स अम्मा पिऊहिं एव वुत्ते समाणे एयमटुं सम्म पडिसुणेइ। तए णं से सुबाहुकुमारे समणस्स भगवओ महावीरस्स अन्तियाओ उत्तर-पुरस्थिम दिसीभागं अवक्कमइ, अवक्कमित्ता सयमेव आभरण मल्लालकार उम्मुयइ। तए णं से सुबाहुकुमारस्स माया हंस लक्खणेणं पडगसाडएणं 32- स्वाध्याय माला बिनादालाबजावलनिनवादावन आभरण मल्लालंकारं पडिच्छइ, जाव विलवमाणी एवं वयासी- जइयव्वं जाया ! घडियव्वं जाया ! परिक्कामियव्व जाया ! अस्सि च णं अढे णो पमाएयव्वं । अम्हं पि ण ‘एवमेव मग्गे भवउ' त्ति कटु। तए णं से सुबाहुकुमारे पंच मुट्ठिय लोय करेइ, समण भगव महावीर वदइ नमसइ, एव वयासी-आलित्तेण भंते ! लोए, पलित्तेणं भते! लोए, आलित्त-पलित्ते ण भते ! लोए, जराए मरणेण य। से जहा णामए कोई गाहावई अगारंसि झियाय माणसि जे तत्थ भण्डे भवइ, अप्पभारे मोल्ल-गरुए तं गहाय आयाए एगत अवक्कमइ, एस मे णित्यारिए समाणे पच्छा पुराहियाए, सुहाए, खेमाए णिस्सेसाए अणुगामियताए भविस्सइ एवामेव मम वि एगे आया भण्डे इढे कंते पिए मणुण्णे मणामे एस मे णिच्छारिए समाणे ससार-वोच्छेय-करे भविस्सइ । त इच्छामि णं देवाणुप्पिएहि सयमेव पव्वाइय, सयमेव मुण्डावियं, सेहावियं सिक्खा-विय सयमेव आयार-गोयर-विणय- वेणइय-चरण-करण जाया-माया-वत्तिय धम्म-माइक्खिय। तए ण समणे भगवं महावीरे सुबाहुकुमार सयमेव पव्वावेइ, सयमेव मुण्डावेइ, सयमेव आयार जाव धम्ममाइक्खिइ। एव देवाणुप्पिया! गतव्वं चिट्ठियव णिसीयव्व तुयट्टियव्य भुञ्जियव्व भासियब्व एवं उठाए उट्ठाय पाणेहि भूतेहि जीवेहि सत्तेहि सज्जमेण सञ्जमियव्वं अस्सि च ण अष्टे णो पमायेयव्व। तए ण से सुबाहुकुमारे समणस्स भगवओ महावीरस्स अन्तिए इम एयारूव धम्मियं उवएसं णिसम्म सम्म पडिवज्जइ। तमाणाए तह गच्छह, तह चिट्ठइ जाव उठाए उट्ठाय पाणेहि भूएहि जीवेहिं सत्तेहि सञ्जमेइ। तए णं सुबाहुकुमार अणगारे जाए इरिया-समिए (भासा-समिए, एसणा-समिए, आयाण-भण्ड-मत्त- णिखेवणा-समिए, उच्चार- निदानावनात्माननवान स्वाध्याय माला-33 पासवण-खेल-जल्ल-सिघाण परिठ्ठावणिया समिए, मण-समिए, वय- समिए, काय-समिए, मणगुत्तिए, वयगुत्तिए, कायगुत्तिए, गुत्ते, गुत्तिदिए.) गुत्त-बंभयारी। तए णं से सुबाहु अणगारे समणस्स भगवओ महावीरस्स तहा रूवाणं-थेराणं अंतिए सामाइय-माइयाइ एक्कारस-अगाइ अहिज्जइ, अहिज्जित्ता बहूहिं चउत्थ-छट्ठट्ठम् दसम्-दुवालसेहि मासद्ध-मास- खमणेहि विचित्तेहि तवोविहाणेहि अप्पाणं भावित्ता, बहूइ वासाइ सामण्ण परियागं पाउणित्ता मासियाए सलेहणाए अप्पाण झूसित्ता सट्ठि भत्ताई अणसणाइ छेदित्ता-आलोइय-पडिक्कते समाहिपत्ते- कालमासे-काल किच्चा सोहम्मे कप्पे देवताए उववण्णे। से ण ताओ देव लोगाओ आउक्खएणं भवक्खएणं ठिईक्खएणं अणतरं चयं चइत्ता माणुस्स विग्गहं लभिहिइ लभिहित्ता केवल बोहि बुज्झिहिइ बुज्झिहित्ता तहा रूवाणं थैराणं अतिए मुडे भवित्ता अणगारियं पव्वइस्सइ । से णं तत्थ बहूई वासाइ सामण्णं परियाग पाउणिहिइ' पाउणिहित्ता आलोइय पडिक्कते समाहिपत्ते कालमासे कालं किच्चा सणकुमारे कप्पे देवत्ताए उववज्जिहिइ। से णं ताओ देवलोगाओ माणुस्सं जाव पव्वज्जा, बभलोए। तओ माणुस्सं । महासुक्के । तओ माणुस्सं। आणए देवे। तओ माणुस्स। तओ आरणे। तओ माणुस्सं सव्वट्ठ-सिद्धे । से णं देवलोगाओ अणंतरं चयं चइत्ता कहि गच्छिहिइ ? कहि उववज्जिहिइ ? गोयमा ! महाविदेह वासे जाइं इमाइ कुलाहिं भवंति, अड्डाइ, दित्ताइं वित्ताई विच्छिण्ण-विउल भवण-सयणासण-जाण-वाहणाइं. बहु-धण, बहु जाय रूव रययाइं, आओग-पओग सम्पउत्ताइ, विच्छड्डिय पउर-भत्त पाणाइ, बहु दासी-दास, गो-महिस, गवेलग-प्पभूयाइं बहु जणस्स अपरि-भूयाइ, तहप्प-गारेसु कुलेसु पुत्तताए पच्चायाहिइ। - . - 34 - स्वाध्याय माला बनवाबनवनाबावामानामावEिRMA - तए ण तस्स दारगस्स माया णवण्ह मासाण बहु पडिपुण्णाण सुरूवं दारयं पयाहिइ, जहेव पुव्वं, तहेव णेयव्व जाव भोय रएणं णोवलिप्पइ तहेव मित्त-णाइ णियग सम्बंधि परिजणेणं, से ण तहा रूवाणं थेराण अन्तिए केवलं बोहि बुज्झिहिइ। केवल मुण्डे भवित्ता अगाराओ अणगारियं पव्वइस्सइ। से णं अणगारे भविस्सइ, इरिया समिए जाव सुहुय-हुयासणो इव तेयसा जलंते। तस्स ण भगवओ अणुत्तरेण णाणेण एवं दंसणेणं चरित्तेणं आलएणं विहारेणं अज्जवेण, मद्दवेण लाघवेणं खतिए गुत्तीए मुत्तीए अणुत्तरेण सव्व-सञ्जम, तवसु-चरिय-फल-णिव्वाण मग्गेण अप्पाणं भावे-माणस्स अणन्ते अणुत्तरे कसिणे पडिपुण्णे णिरावरणे णिव्वाघाए केवल वर णाण दंसणे सम्मुप्पज्जिहिइ। तए णं से भगवं अरहा जिणे केवली भविस्सइ। सदेव मणुया- सुरस्स लोगस्स परियागं जाणिहिइ पासिहिइ, तजहा-आगइ, गइ, ठिइं, चवण, उववायं, तक्कं पच्छाकडं, पुरेकडं मणो-माणसिय खइयं भुत्तं कडं पडिसेविय आवीकम्मं रहोकम्म अरहा अरहस्स भागी त त कालं मण-वय-काय-जोगे वट्टमाणाणं सव्वलोए सव्व-जीवाण सव्व भावे जाणमाणे पासमाणे विहरिस्सइ। तए णं से सुबाहू केवली एया रूवेण विहारेणं विहरमाणे बहूइ वासाई केवलि परियागं पाउणित्ता अप्पणो आउसेसं आभोइत्ता बहूई भत्ताइ पच्चक्खाइस्सइ, पच्चक्खाइत्ता, बहूइ भत्ताइं अण-सणाए छेदिस्सइ, छेदित्ता जस्सट्टाए कीरइ णग्ग-भावे, मुण्ड-भावे केसलोचे बम्भचेर-वासे अण्हाणगं अदंत-वणं, अछत्तगं अणुवाहणगं भूमि सिज्जाओ, फलह सिज्जाओ, पर घर-पवेसो, लद्धाव-लद्धाइ, माणाव- माणाइ, परेहि-हीलणाओ, णिदणाओ, खिसणाओ, गरहणाओ, तज्जणाओ, तालणाओ, परिभावणाओ, पव्वहणाओ, उच्चावया, विरूवा बावीसं परीषहोव-सग्गा, गामकण्टगा अहिया सेज्जन्ति तमट्ठ आराहेइ PARAMETERTAARAलानालाबाल स्वाध्याय माला-35 आराहित्ता चरमेहि ऊसास-णीसासेहि सिज्जिहिइ, बुज्झिहिइ, मुच्चिहिइ, परिणिव्वाहिइ सव्व दुक्खाण मंतं करेहिइ। सेवं भते! सेवं भते ! भगवं गोयमे समण भगवं महावीरं वंदइ णमंसइ वदित्ता णमसित्ता संजमेण तवसा अप्पाणं भावे माणे विहरइ। एव खलु जम्बू ! समणेणं भगवया महावीरेणं जाव सम्पत्तेणं सुह विवागाण पढमज्झयणस्स अयमढे पण्णत्ते। ।। त्तिबेमि।। सुहविवागस्स पढमं अज्झयणं सम्मत्तं ।। । दूसरा अध्ययन : भद्रनन्दी कुमार (2) बिइयस्स उक्खेवओ। जइ णं भंते ! समणेण भगवया महावीरेणं जाव सम्पत्तेणं सुह विवागाण पढमस्स अज्झयणस्स अयमढे पण्णत्ते। बिइयस्स णं भंते ! अज्झयणस्स सुहविवागाणं समणेण भगवया महावीरेणं जाव संपत्तेण के अढे पण्णत्ते ? एवं खलु जम्बू ! तेणं कालेण तेणं समएणं उसभपुरे णाम णयरे, थूम- करण्डग-उज्जाण। धण्णो जक्खो। धणावहो राया। सरस्सई देवी। सुमिण-दंसणं, कहणं, जम्म-बालत्तणं कलाओ य जोव्वणे पाणिग्गहणं, दाओ पासाय य भोगा य । जहा सुबाहुस्स। णवर भद्दणंदी कुमारे। सिरीदेवी पामोक्खाणं पंचसया कण्णा पाणिग्गहण। सामिस्स समोसरणं, सावग-धम्म पडिवज्जे। पुव्वभव पुच्छा, महाविदेह वासे पुंडरीगिणी णयरी, विजए-कुमारे। जुगबाहू तित्थयरे पडिलाभिए। मणुस्साउए णिबद्धे । इहं उववण्णे। सेसं जहा सुबाहुस्स जाव महाविदेहे- वासे सिज्झिहिइ बुज्झिहिइि मुच्चिहिइ परिणिव्वाहिइ सव्व-दुक्खाण- मंतं करेहिइ। एवं खलु जम्बू ! समणेणं भगवया महावीरेण जाव सम्पत्तेण सुह विवागाणं बिइयस्स अज्झयणस्स अयमढे पण्णत्ते। ।। सुहविवागस्स बीयमज्झयण सम्मत्त ||2|| 36-स्वाध्याय माला नामदानावनाबमाबाद तृतीय अध्ययन : सुजात कुमार (3) तईयस्स उक्खेवो। जइ णं भते ! समणेणं भगवया महावीरेणं जाव संपत्तेणं सुह विवागाण बिइयस्स अज्झयणस्स अयमढे पण्णत्ते। तईयस्स ण भंते ! अज्झयणस्स सुहविवागाणं समणेणं भगवया महावीरेणं जाव सम्पत्तेण के अढे पण्णत्ते ? वीरपुर णाम णयरं। मणोरम उज्जाण वीरकण्हे जक्खे। मित्ते राया। सिरीदेवी। सुजाए कुमारे। बलसिरी पामोक्खाणं पंचसया कण्णगाण पाणि गहणं । सामी समोसरिए। पुव्वभव्वं पुच्छा। उसुयारे णयरे। उसभदत्ते गाहावई। पुप्फदंते अणगारे पडिलाभिए। मणुस्साए णिबद्धे । इह उववण्णे। जाव महाविदेहे वासे सिज्झिहिइ। बुज्झिहिइ मुच्चिहिइ, परिणिव्वाहिइ सव्व दुक्खाण मंत करिहिइ। एव खलु जम्बू समणेणं भगवया महावीरेणं जाव संपत्तेणं तच्चस्स अज्झयणस्स अयमढे पण्णत्ते। ।। सुहविवागस्स तइयं अज्झयण सम्मत्त ।। चौथा अध्ययन : सुवासव कुमार (4) चउत्थस्स उक्खेवओ। जइ णं भते ! समणेण भगवया महावीरेण जाव सपत्तेणं सुह विवागाणं तयियस्स अज्झयणस्स अयमढे पण्णत्ते। चउत्थस्स णं भंते ! अज्झयणस्स सुहविवागाण समणेण भगवया महावीरेणं जाव सम्पत्तेण के अढे पण्णत्ते ? -विजयपुरं णयरं। णदणवणं उज्जाणं। असोगो जक्खो। वासव दत्ते राया। कण्हसिरी देवी। सुवासवे कुमारे। भद्दा पामोक्खाण पच सयाण रायवर कण्णगाण जाव पुव्व भव्व पुच्छा। कोसम्बी णयरी। धणपालो राया। वेसमण भद्दे अणगारे पडिलाभिए। इह उववण्णे जाव सिद्धे। - विमानानASHEETAHARविमाननाद स्वाध्याय माला-37
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एवं खलु जम्बू ! समणेणं भगवया महावीरेणं जाव संपत्तेण
सुह विवागाण चउत्थस्स अज्झयणस्स अयमढे पण्णत्ते।
।। सुह विवागस्स चउत्थंअज्झयणसम्मत्तं।।
पाँचवा अध्ययन : जिनदास
(5) पंचमस्स उक्खेवो। जइ णं भंते ! समणेणं भगवया
महावीरेणं जाव संपत्तेणं सुह विवागाणं चउत्थस्स अज्झयणस्स
अयमढे पण्णत्ते। पंचमस्स णं भंते ! अज्झयणस्स सुहविवागाणं
समणेण भगवया महावीरेणं जाव संपत्तेण के अटे पण्णत्ते? सोगंधिया
णयरी। नीलासोगे उज्जाणे। सुकालो जक्खो। अपडिहओ राया।
सुकण्हा देवी । महचंदे कुमारे। तस्स अरहदत्ता भारिया। जिणदासो
पुत्तो। तित्थयरा गमणं । जिणदासो पुव्वभवं पुच्छा । मज्झमिया णयरी।
मेहरहे राया। सुधम्मे अणगारे पडिलाभिए जाव सिद्धे ।
एवं खलु जम्बू ! समणेणं भगवया महावीरेण जाव सपत्तेण,
सुह विवागाणं पंचमस्स अज्झयणस्स अयमढे पण्णत्ते।
।। सुहविवागस्स पंचम अज्झयणं सम्मत्त ।।
छडा अध्ययन : धनपति
(6) छट्ठस्स उक्खेवो। जइ णं भंते! समणेण भगवया महावीरेण
जाव संपत्तेणं सुह विवागाणं पंचमस्स अज्झयणस्स अयमढे पण्णत्ते।
छट्ठस्स णं भंते ! अज्झयणस्स सुहविवागाणं समणेणं भगवया
महावीरेण जाव सम्पत्तेण के अढे पण्णत्ते '? कणग पुरं णयरं।
सेयासोये उज्जाणं, वीरभद्दो जक्खो। पियचदो राया। सुभद्दा देवी।
वेसमणे कुमारे जुवराया। सिरीदेवी पामोक्खाणं पचसयाण रायवर
38 - स्वाध्याय माला बिमानवजEASESAMADHAN
।
कण्णगाणं पाणिग्गहणं । तित्थयरागमण । धणवई जुवराय पुत्ते जाव
पुव्वभवं पुच्छा । मणिवइया णयरी। मित्तेराया। संभूय विजए अणगारे
पडिलाभिए जाव सिद्धे।
एवं खलु जम्बू ! समणेण भगवया महावीरेण जाव सपत्तेण
सुह विवागाणं छट्ठस्स अज्झयणस्स अयमढे पण्णत्ते।
।। छ? अच्झयणं सम्मत्तं।।
सातवाँ अध्ययन : महाबल
-
(7) सत्तमस्स उक्खेवो। जइ णं भंते ! समणेण भगवया
महावीरेणं जाव संपत्तेणं सुह विवागाणं छट्ठस्स अज्झयणस्स अयमढे
पण्णत्ते। सत्तमस्स णं भंते ! अज्झयणस्स सुहविवागाण समणेण
भगवया महावीरेणं जाव सम्पत्तेण के अढे पण्णत्ते ? महापुर णयर।
रत्तासोगे उज्जाणं । रत्तपाओ जक्खो। बलेराया। सुभद्दा देवी। महब्बले
कुमारे। रत्तवई पामोक्खाण पंच सयाणं रायवर कण्णगाणं पाणिग्गहणं।
तित्थयरागमणं जाव पुन्वभव पुच्छा। मणिपुर णयर । णागदत्ते गाहावई,
इन्ददत्ते अणगारे पडिलाभिए जाव सिद्धे।
एवं खलु जम्बू ! समणेणं भगवया महावीरेण जाव सपत्तेण
सुह विवागाणं सत्तमस्स अज्झयणस्स अयमढे पण्णत्ते।
।। सुहविवागस्स सत्तमं अज्झयणं सम्मत्तं ।।
17
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आठवाँ अध्ययन : भद्रनन्दी
(8) अट्ठमस्स उक्खेवो। जइ ण भते ! समणेणं भगवया
महावीरेण जाव संपत्तेण सुह विवागाण सत्तमस्स अज्झयणस्स अयमढे
पण्णत्ते। अट्ठमस्स णं भते ! अज्झयणस्स सुहविवागाण समणेण
भगवया महावीरेण जाव संपत्तेण के अढे पण्णत्ते ? सुघोसं णयर |
" PAPERMANETARIANTARIANTERMENTERTAINM स्वाध्याय माला-39
देव रमणं उज्जाणं। वीरसेणो जक्खो। अज्जुणो राया। रत्तवई देवी। भद्दणन्दी कुमारे। सिरीदेवी पामोक्खाणं पंचसयाणं रायवर कण्णगाण पाणिग्गहणं जाव पुव्वभवं पुच्छा। महाघोसे णयरे। धम्मघोसे गाहावई। धम्म-सीहे अणगारे पडिलाभिए जाव सिद्धे। एवं खलु जम्बू ! समणेणं भगवया महावीरेणं जाव संपत्तेणं सुह विवागाण अट्ठमस्स अज्झयणस्स अयमढे पण्णत्ते ।। सुहविवागस्स अट्ठमं अज्झयणं सम्मत्तं।। नौवाँ अध्ययन : महाचन्द्र (७) णवमस्स उक्खेवो। जइ णं भते ! समणेणं भगवया महावीरेणं जाव संपत्तेण सुह विवागाण अट्ठमस्स अज्झयणस्स अयमढे पण्णत्ते। णवमस्स ण भंते ! अज्झयणस्स सुहविवागाणं समणेणं भगवया महावीरेणं जाव सपत्तेण के अढे पण्णत्ते ? चम्पा णयरी। पुण्णभद्दे उज्जाणे । पुण्णभद्दो जक्खो। दत्तेराया। रत्तवई देवी । महचदे कुमारे जुवराया। सिरीकंता पामोक्खाण पंच सयाणं रायवर कण्णगाण पाणिग्गहणं। जाव पुव्वभवं पुच्छा। तिगिच्छा णयरी। जियसत्तू राया धम्म-वीरिए अणगारे पडिलाभिए जाव सिद्धे। एव खलु जम्बू ! समणेण भगवया महावीरेणं जाव सम्पत्तेण सुह विवागाणं णवमस्स अज्झयणस्स अयमढे पण्णत्ते। ।। सुहविवागस्स नवम अज्झयणं सम्मत्तं ।। दसवाँ अध्ययन : वरदत्त (10) जइ णं भते ! दसमस्स उक्खेवो। एवं खलु जम्बू ! तेणं कालेणं तेणं समएणं साइए णाम णयर होत्था । उत्तर कुरू उज्जाणे। पासामिओ जक्खो। मित्तनंदी राया। सिरीकंता देवी। वरदत्ते कुमारे। 40- स्वाध्याय माला बिलाबलाबलाASARAMA वीरसेणा पामोक्खाण पचदेवी सयाणं रायवर कण्णगाणं पाणिग्गहण । तित्थयरागमणं। सावग धम्म पडिवज्जइ, पुव्वभव पुच्छा। सय दुवारे णयरे। विमल वाहणे राया। धम्मरूई णाम अणगारे पडिलभिए। मणुस्साउए, णिबद्धे ! इह उववण्णे। सेस जहा सुबाहुस्स चिता जाव पवज्जा । कप्पंतरिए जाव सव्वट्ठसिद्धे । तओ महाविदेहे जहा दढपइण्णे जाव सिज्जिहिइ बुज्झिहिइ, मुच्चिहिइ, परिणिव्वाहिइ, सव्वदुक्खाण मतं करेहिइ। एवं खलु जम्बू ! समणेणं भगवया महावीरेण जाव संपत्तेण सुह विवागाण दसमस्स अज्झयणस्स अयमढे पण्णत्ते। सेवं भंते ! सेवं भते ! सुहविवागस्स दसम उज्झयण सम्मत्त । णमो सुयदेवयाए विवाग सुयस्स दो सुयखंधा दुह विवागे य सुहविवागे य। तत्थ दुहविवागे दस अज्झयणा एक्कसरगा दससु चेव दिवसेसु उद्दिसिज्जंति। एवं सुह विवागे वि सेसं जहा आयारस्स ।। ।। सुहविवाग सुत्त सम्मत्तं ।। ll श्री अनुत्तरोववाइयदशांग सूत्रम् ।। तेणं कालेणं, तेण समएण रायगिहे णाम णयरे, गुणसिलए चेइए होत्था । वण्णओ। अज्ज-सुहम्मस्स-समोसरण, परिसा णिग्गया, धम्म-कहिओ। धम्म सोच्चा णिसम्म जामेव दिसं पाउड्भूया तामेव दिस पडिगया। तेणं कालेणं तेण समएण अज्ज सुहम्मस्स अणगारस्स जेट्टे अतेवासी अज्ज जम्बू ! णाम अणगारे कासव-गोत्तेण सत्तुस्सेहे जाव बनवानSARAPARबाल स्वाध्याय माला-41 1... अज्ज-सुहम्मस्स थेरस्स अदूर-मासंते उड्ड-जाणू अहोसिरे झाण- कोट्टोवगए संजमेणं तवसा अप्पाणं भावेमाणे विहरइ। तए णं से अज्ज जम्बू जाए सड्ढे जाव समुप्पण्ण सड्ढे, समुपण्ण ससए समुपण्ण कोउहल्ले उठाए उद्वेइ उठेत्ता जेणामेव अज्ज-सुहम्मे थेरे जेणामेव उवागच्छइ उवागच्छित्ता अज्ज सुहम्मे थेरे वंदइ णमसइ वंदित्ता णमंसित्ता णच्चासण्णे णाइदूरे सूस्सूसमाणे णमंसमाणे अभिमुहे पंजलिउडे विणएणं पज्जुवासमाणे एव वयासी- जइ ण भंते ! समणेणं भगवया महावीरेणं जाव सम्पत्तेणं अट्ठमस्स अंगस्स अन्तगड-दसाणं अयमढे पण्णत्ते, णवमस्स णं भंते ! अंगस्स अणुत्तरोववाइय-दसाणं समणेण भगवया महावीरेणं जाव संपत्तेणं के अढे पण्णत्ते ? तएण से सुहम्मे अणगारे, जम्बू अणगार एवं वयासी-एवं खलु जम्बू ! समणेणं भगवया महावीरेण आइगरेण, तित्थयरेण सय-सम्बुद्धेणं पुरिसुत्तमेणं पुरिस-सीहेण, पुरिसवर-पुण्डरीएण, पुरिसवर-गंध- नत्थिणा लोगुत्तमेणं लोग-णाहेणं, लोग-हिएणं, लोग-पईवेण, लोग- ज्जार २ अभय-दएणं, चक्खु-दएणं, मग्ग-दएण, सरण-दएणं, जीव-दएणं, बोहि-दएणं धम्म-दएणं, धम्मदेसएण धम्म णायगेणं, धम्म-सारहिणा, धम्मवर-चाउरत-चक्कवट्टीणा, दीवोताणं सरण गई पइटेणं, अप्पडिहय-वर णाण-दसण-धरेणं, वियट्ट-छउमेण जिणेण जावएणं, तिण्णेणं-तारएणं, बुद्धणं बोहएणं, मुत्तेणं मोअगेण सव्व-पणेणं, सव्व-दरिसणेण सिव-मयल-मरुअ-मणन्त-मक्ख्सय-मव्वाबाह- मपुणरावित्तिअं सासयं ठाणं] सपत्तेणं णवमस्स अंगस्स अणुत्तरोववाइय- दसाणं तिण्णि वग्गा पण्णत्ता 19॥ जइ ण भंते ! समणेण भगवया महावीरेणं जाव संपत्तेणं णवमस्स अंगस्स अणुत्तरोव-वाइय-दसाणं तओ वग्गा पण्णत्ता, पढमस्स णं भंते! वग्गस्स अणुत्तरोव-वाइय-दसाणं समणेण भगवया महावीरेणं जाव संपत्तेणं कई अज्झयणा पण्णत्ता ? | 42 -स्वाध्याय माला बनवाबनवान CARIGRAD ODCARA - एवं खलु जम्बू। समणेण भगवया महावीरेण जाव संपत्तेणं अणुत्तरोववाइय-दसाण पढमस्स वग्गस्स दस अज्झयणा पण्णत्ता, तंजहा- जालि, मयालि, उवयाली, पुरिससेणे य, वारिसेणे य। दीहदंते य, लट्ठदंते य, वेहल्ले, वेहासे, अभए इ य कुमारे||1|||||| जइ ण भंते ! समणेणं भगवया महावीरेण जाव सपत्तेणं पढमस्स वग्गस्स दस अज्झयणा पण्णत्ता, पढमस्स णं भंते ! अज्झयणस्स अणुत्तरोव-वाइय-दसाणं समजेणं जाव संपत्तेणं के अटे पण्णत्ते ?| एव खलु जम्बू ! तेणं कालेण तेणं समएण रायगिहे णयरे रिद्धिस्थि-मिय-समिद्धे, गुणसिलए चेइए, सेणिए राया, धारिणी देवी, सीहो-सुमिणे पासित्ताण पडिबुद्धा जाव जालिकुमारे जाए जहा मेहो जाव अट्ठओ दाओ, जाव उप्पिपासाए जाव विहरइ। ॥३॥ तेण कालेणं तेणं समएणं समण भगवं महावीरे जाव समोसढे, सेणिओ णिग्गओ, जहा मेहो तहा जाली विणिग्गओ, तहेव णिक्खंतो जहा मेहो। एक्कारस अगाई अहिज्जइ। तएणं से जाली अणगारे जेणेव, समणे भगव महावीरे तेणेव आगच्छइ आगच्छित्ता समणं भगवं महावीरं वंदइ णमसइ वदित्ता णमसित्ता एवं वयासी-इच्छामिण भंते ! तुडभेहि अब्मणुण्णाए समाणे गुण-रयणं संवच्छरं तवोकम्मं उवसपजित्ताण विहरित्तए ? अहासुहं देवाणुप्पिया ! मा पडिबन्ध करेह । तएण से जाली अणगारे समणेणं भगवया महावीरेण अभणुणाए समाणे समण भगवं महावीरं वंदइ णमंसइ-2त्ता गुण-रयणं संवच्छरं तवोकम्म उवसपजित्ताणं विहरइ । तं जहा- (1) पढम मास चउत्थ चउत्थेण अणिक्खित्तेणं तवो-कम्मेणं निवाSAREERAREMEMESTER स्वाध्याय माला-43 दियट्ठाणु-क्कडुय सूराभिमूहे आयावण-भूमीए आयावेमाणे रत्ति वीरासणेणं अवाउडेण य। (2) दोच्चं मासं छटुंछटेणं अणिक्खितेणं तवोकम्मेणं दियट्ठाणुक्कडुए सुराभिमुहे आयावण-भूमिए आयावेमाणे, रत्ति वीरासणेणं अवाउडेण य। (3) तच्चं मासं अट्ठम-अट्ठमेणं अणिक्खितेणं तवोकम्मेणं दियट्ठाणुक्कडुए सुराभिमुहे, आयावण-भूमिए आयावेमाणे, रत्तिं वीरासणेणं अवाउडेण य। (4) चउत्थं मासं दसमं-दसमेण अणिक्खितेण तवोकम्मेणं दियट्ठाणुक्कडुए सुराभिमुहे आयावण भूमिए आयावेमाणे रत्तिं वीरासणेणं अवाउडेण य। (5) पंचमं मासं बारसमं बारसमेणं अणिक्खितेणं तवोकम्मेणं दियट्ठाणुक्कडुए सुराभिमुहे आयावण-भूमिए आयावेमाणे रत्तिं वीरासणेणं अवाउडेण य। (6) छठें मासं चउदस चउदसमेण अणिक्खितेणं तवोकम्मेणं दियट्ठाणुक्कडुए सुराभिमुहे आयावण-भूमिए आयावेमाणे रत्तिं वीरासणेणं अवाउडेण य। (7) सत्तमं मासं सोलसमं सोलसमेण अणिक्खितेणं तवोकम्मेणं दियट्ठाणुक्कडुए सुराभिमुहे आयावण-भूमिए आयावेमाणे रत्तिं वीरासणेणं अवाउडेण या (8) अट्ठमं मासं अट्ठारसमं अट्ठारसमेणं अणिक्खितेणं तवो कम्मेणं दियट्ठाणुक्कडुए सुराभिमुहे आयावण-भूमिए आयावेमाणे रत्ति वीरासणेणं अवाउडेण य। (9) णवमं मास बीसइमं वीसइमेणं अणिक्खितेणं तवोकम्मेणं दियट्ठाणुक्कडुए सुराभिमुहे आयावण-भूमिए आयावेमाणे रत्तिं वीरासणेण अवाउडेण य। 44-स्वाध्याय माला विमानबाबाजान
(10) दसमं मास बावीसाए बावीसईमेण अणिक्खितेणं तवो
कम्मेणं दियट्ठाणुक्कडुए सुराभिमुहे आयावण-भूमिए आयावेमाणे रत्तिं
वीरासणेणं अवाउडेण य।
(11) एकारसमं मासं चउवीसाए चउवीसईमेणं अणिक्खितेणं
तवोकम्मेणं दियट्ठाणुक्कडुए सुराभिमुहे आयावण-भूमिए आयावेमाणे
रत्तिं वीरासणेणं अवाउडेण य।
(12) बारसमं मासं छब्बीसाए छव्वीसईमेण अणिक्खितेणं तवो
कम्मेणं दियट्ठाणुक्कडुए सुराभिमुहे आयावण-भूमिए आयावेमाणे रत्तिं
वीरासणेण अवाउडेण य।
(13) तेरसमं मासं अठावीसाए अठावीसईमेणं अणिक्खितेण
तवोकम्मेण दियट्ठाणुक्कडुए सुराभिमुहे आयावण-भूमिए आयावेमाणे
रत्तिं वीरासणेणं अवाउडेण य।
(14) चउदसमं मासं तीसइ तीसईमेणं अणिक्खितेणं तवो
कम्मेणं दियट्ठाणुक्कडुए सुराभिमुहे आयावण -भूमिए आयावेमाणे रत्ति
वीरासणेणं अवाउडेण य।
(15) पण्णरसमं मासं बत्तीसइम बत्तीसईमेण अणिक्खितेणं
तवो कम्मेणं दियट्ठाणुक्कडुए सुराभिमुहे आयावण-भूमिए आयावेमाणे
रत्ति वीरासणेणं अवाउडेण य।
(16) सोलमं मासं चोत्तीसइमं चोत्तीसईमेण अणिक्खितेण तवो
कम्मेण दियट्ठाणुक्कडुए सुराभिमुहे आयावण-भूमिए आयावेमाणे रत्तिं
वीरासणेणं अवाउडेण य।
तएणं से जाली अणगारे गुणरयण-संवच्छर तवो-कम्म अहासुतं
अहाकप्प अहामग्ग अहातच्च सम-काएणं फासित्ता पालित्ता सोहित्ता
तिरित्ता किट्टित्ता आणाए आराहित्ता। ||४||
जेणेव समणे भगवं महावीरे तेणेव उवागच्छइ उवागच्छित्ता
समण भगव महावीरं वदइ णमसइ वदित्ता णमसित्ता बहुहि चउत्थ
न
बिनमालामावादावानल स्वाध्याय माला-45
- छट्ठ-अठ्ठम-दसम-दुवालसेहि-मासेहिं, अधमास-खमणेहि विचित्तेहि तवोकम्मेहिं अप्पाण भावेमाणे विहरइ। तएणं से जाली अणगारे तेणं उरालेणं विउलेण पयत्तेणं पग्गहिएण एव जा चेव जहा खंदगस्स वत्तव्वया, सा चेव चिन्तणा आपुच्छणा, थेरेहिं सद्धिं विउलं तहेव दुरूहइ । णवर सोलस्स वासाइं सामण्ण परियागं पाउणित्ता कालमासे कालं किच्चा उड्डं चन्दिम-सोहम्मीसाण जाव आरणच्चुए, कप्पे, नवगेवेज्ज य विमाण- पत्थडे, उड्ड दूरं वीईवइत्ता विजय विमाणे देवत्ताए उववण्णे। तए णं ते थेरा भगवंता जालिं अणगारं कालगयं जाणित्ता, परिनिव्वाण-वत्तियं काउस्सगं करेइ, करित्ता पत्त-चीवराइ गिण्हति तहेव उत्तरंति जाव इमे य से आयार भण्डए। ||५|| भंते त्ति ! भगवं गोयमे समणं भगवं महावीर वदइ णमंसइ, वंदित्ता णमसित्ता एवं वयासी-"एव खलु देवाणु-प्पियाण अंतेवासी जाली णाम अणगारे पगइ-भद्दए। से णं जाली अणगारे कालगए कहिंगए, कहिंउववण्णे ? एवं खलु गोयमा ! ममं अंतेवासी तहेव जहा खदयस्स जाव कालगए उड्ढे चदिम। { सूर गहगण-णक्खत्त-तारा-रूवाणं बहूई जोयणाई, बहूइं जोयण-सयाई, बहूई जोयण-सहस्साइ, बहूई जोयण सय-सहस्साई, बहूई जोयण-कोडीओ, बहूई जोयण कोडा-कोडीओ, अडढं दूरं उप्पइत्ता सोहम्मीसाण सणंकुमार, माहिद-बंभ-लतग- महासुक्क-सहस्साराणय-पाणयारण-च्चुए तिण्णि य अठार-सुत्तरे गेवेज्ज विमाणा-वाससए वीई-वइत्ता। विजये महाविमाणे देवत्ताए उववण्णे। जालिस्स णं भंते ! देवस्स केवइयं कालं हिई पण्णत्ता ? गोयमा ! बत्तीसं सागरोवमाइं ट्ठिई पण्णत्ता। से ण भते ! ताओ देवलोयाओ आउ-क्खएणं भवक्खएणं ठिइक्खएणं कहि गच्छिहिइ, कहिं उवज्जिहिइ ? - 46-स्वाध्याय माला बिEEEEEEEEEEEEEEEवन गोयमा ! महाविदेहे वासे सिज्झिहिइ जाव सव्व दुक्खाण-मन्तं करेहिइ। एव खलु जम्बू ! समणेणं भगवाया महावीरेण जाव सपत्तेणं अणुत्तरोव-वाइय-दसाणं पढमस्स वग्गस्स पढमस्स अज्झयणस्स अयमढे पण्णत्ते। ॥६॥ एव सेसाण वि णवण्हं भाणिअव्वं । णवरं सत्त धारिणिसुआ, वेहल्ल-वेहायसा चेल्लणाए, अभओ नन्दाए । आइल्लाणं पंचण्ह सोलस- वासाइं सामण्ण परियाओ, तिण्हं बारस बारस बासाइं। दोण्हं पच वासाइं। आइल्लाणं पंचण्हं आणुपुव्वीए उववायो, विजये वेजयन्ते जयन्ते अपराजिए सवठ्ठ-सिद्धे। दीहदंते सव्व-सिद्धे, अणुक्कमेणं सेसा। अभओ विजये। सेसं जहा पढमे। अभयस्स णाणत्त-रायगिहे णगरे, सेणिए राया, नंदादेवी माया, सेसं तहेव। एवं खलु जम्बू ! समणेणं भगवया महावीरेणं जाव सपत्तेणं अणुत्तरोव-वाइय-दसाणं पढमस्स वग्गस्स अयमढे पण्णत्ते। !!७!! ॥ इति पढम वग्गस्स दस अज्झयणा समता ।। द्वितीय-वर्ग जइ ण भंते ! समणेणं भगवया महावीरेण जाव सम्पत्तेण अणुत्तरोववाइय-दसाणं पढमस्स वग्गस्स अयमढे पण्णत्ते, दोच्चस्स णं भंते ! वग्गस्स अणुत्तरोववाइय-दसाणं समणेणं भगवया महावीरेणं जाव संपत्तेण के अटे पण्णत्ते ? | एवं खलु जम्बू ! समणेण भगवया महावीरेण जाव सपत्तेणं अणुत्तरोववाइय-दसाणं दोच्चस्स वग्गस्स तेरस अज्झयणा पण्णत्ता, त जहा- दीहसेणे, महासेणे, लट्ठदते य, गुढदंते य। सुद्धदते हल्ले-दुमे-दुमसेणे, महादुमसेणे य आहिए FARMERARMERARMERMERIAAAAAAAAE
सीहे य, सीहसेणे य, महासीहसेणे य आहिए।
पुण्णसेणे य बोधब्बे, तेरसमे होइ अज्झयणे21|||9||
जइ णं भंते ! समणेणं भगवया महावीरेणं जाव संपत्तेण
अणुत्तरोववाइय-दसाणं दोच्चस्स वग्गस्स तेरस अज्झयणा पण्णत्ता,
दोच्चस्सणं भंते ! वग्गस्स पढमस्स अज्झयणस्स समणेणं भगवया
महावीरेणं जाव सम्पत्तेणं के अटे पण्णते ?
एवं खलु जम्बू ! तेणं कालेणं तेणं समएणं रायगिहे णयरे,
गुणसिलए चेइए, सेणिए राया, धारिणी देवी, सीहो-सुमिणे जहा
जाली तहा जम्म, बालत्तणं, कलाओ, णवरं दीहसेणे कुमारे। सव्वेव
वत्तव्वया, जहा जालिस्स जाव अन्तं काहिइ। ॥शा
एव तेरसण्हं वि रायगिहे णयरे, सेणिओप्पिया, धारिणी माया,
तेरसण्ह वि सोलस-वासा परियाओ, मासीयाए संलेहणाए आणुपुव्वीए
उववाओ विजय दोण्णि, वेजयंते दोण्णि, जयंते दोण्णि, अपराजिए
दोण्णि, सेसा महादुमसेणं माइए पंच सव्वट्ठ-सिद्धे।
एवं खलु जम्बू ! समणेणं भगवया महावीरेणं जाव संपत्तेण
अणुत्तरोव-वाइय-दसाण दोच्चस्स वग्गस्स अयमढे पण्णत्ते, मासियाए
संलेहणाए दोसु वि वग्गेसु। त्ति बेमि।। बीओवग्गो सम्मत्तो। ||३||
तृतीय वर्ग
जइ णं भंते ! समणेणं भगवया महावीरेणं जाव संपत्तेणं
अणुत्तरोववाइय-दसाणं दोच्चस्स वग्गस्स अयमढे पण्णत्ते, तच्चस्स
णं भंते ! वग्गस्स अणुत्तरोववाइय-दसाणं समणेणं भगवया महावीरेणं
जाव संपत्तेणं के अटे पण्णत्ते ?
एव खलु जम्बू ! समणेणं भगवया महावीरेणं जाव संपत्तेण
अणुत्तरोव-वाइय-दसाणं तच्चस्स वग्गस्स दस अज्झयणा पण्णत्ता
तंजहा-
-
48-स्वाध्याय माला बिभावना
बागवान
. धण्णे य, सुणक्खत्ते इसिदासे य, आहिए। पेल्लए, रामपुत्ते य, चदिमा पिट्टिमाइय ।।1।। पेढालपुत्ते अणगारे, णवमे पोट्टिले वि य। वेहल्ले, दसमे वुत्ते, एते अज्झयणा आहिया ।।2 || IIII जइ ण भंते ! समणेण भगवया महावीरेण जाव सपत्तेण अणुत्तरोववाइय-दसाणं तच्चस्स वग्गस्स दस अज्झयणा पण्णत्ता, पढमस्स ण भंते ! अज्झयणस्स समणेणं भगवया महावीरेणं जाव सपत्तेण के अट्टे पण्णत्ते ? | एवं खलु जम्बू ! तेणं कालेण तेण समएण कायदी णाम णयरी होत्था, रिद्धस्थिमिय-समिद्धा, सहसब-वणे उज्जाणे सव्वो उ य पुष्फफल-समिद्धे जाव पासाइए जियसत्तू राया। तत्थ ण कायंदीए णयरीए भद्दा णामं सत्थवाही परिवसइ, अड्डा जाव अपरिभूया। ||२|| तीसे ण भद्दाए सत्यवाहीए पुत्ते धण्ण नाम दारए होत्था, अहीण {पचिन्दिय सरीरे लक्खण वजण-गुणोववेए माणुम्माण-पमाण- पडिपुण्ण सुजाय सव्वग-सुदरंगे ससि सोमाकारे कंते, पियदसणे।} सुरूवे, पचधाई-परिग्गहिए, तजहा-खीरधाइए। जहा महब्बलो जाव बावत्तरि कलाओ अहीए जाव अल भोग-समत्थे, साहसिए वियालचारी जाए यावि होत्था। ||३|| तए ण सा भद्दा सत्थवाही धण्णदारय उमुक्क-बालभावं जाव भोग-समत्थं यावि जाणित्ता, बत्तीस पासाय-वडिंसए कारेइ कारेइत्ता अभुग्गय-मूसिए जाव तेसि मज्झे एग-भवण अणेग-खभ-सय- सन्निविठ्ठ। जाव बत्तीसाए इब्मवर-कण्णगाण एग-दिवसेण पाणि- गिण्हावेइ गिण्हावेत्ता बत्तीसओ दाओ जाव उप्पि पासाय वडिसए फुट्टेएहि मुइग-मत्थएहि जाव विहरइ । IIII तेण कालेण तेण समएण समणे भगव महावीरे समोसढे, परिसा णिग्गया, राया जहा कोणिओ तहा जियसत्तू णिग्गओ। विजाबावामानाबमानना बाबा स्वाध्याय माला-49 तए ण तस्स धण्णस्स तं महया जणसदं जहा जमाली तहा णिग्गओ, णवरं पायचारेणं जाव ज णवर अम्मय भई सत्थवाहि आपुच्छामि। तए ण अह देवाणुप्पियाणं अतिए मुण्डे भवित्ता अगाराओ अणगारिय पव्वयामि। अहासुह देवाणुप्पिया ! मा पडिबन्ध । जाव जहा जमाली तहा आपुच्छइ। त इच्छामि णं अम्मयाओ ! तुब्भेहि अब्मणुण्णाए समाणे समणस्स भगवओ महावीरस्स अतिय मुण्डे भवित्ता अगाराओ अणगारिय पव्वइत्तए। तए ण सा धण्णस्स कुमारस्स माया त जाव असुयपुव्वगिर सोच्चा मुच्छिया। वुत्त-पडिवुत्तिया, जहा महाब्बले जाव कदमाणी सोयमाणी विलवमाणी जाव त णो खलु जाया ! अम्हे इच्छामो ! तुब्भ खणमिव विप्पओगे सहित्तए, त अच्छाहि ताव जाया ! जाव ताव अम्हे जीवामो, तओ पच्छा अम्हेहि कालगएहि समाणेहि परिणयवये वडिय-कुल-वस-तन्तु कज्जम्मि णिरवयक्खे समणस्स भगवओ महावीरस्स अंतिय मुण्डे भवित्ता अगाराओ अणगारियं पव्वइहिसि। तएण धण्णे-कुमारे अम्मा-पिअरो एव वयासी-तहेव ण त अम्मयाओ। ज ण तुझे मम एव वयह, तुमंसि ण जाया। अम्ह एगे पुत्ते, इट्टे, कते चेव जाव पव्वइहिसि, एवं खलु अम्मयाओ। माणुस्सए भवे अणेग जाइ-जरा मरण रोग सारीर-माणस-पकाम-दुक्ख -वेयण- वसण सओव-द्दवाभिभूए अधुवे, अणिचए, असासए सज्झब्भ-राग सरिसे, जल-बुब्बुए-समाणे, कुसग्ग-जलबिन्दु-सण्णिभे, सुविणग- दसणोवमे, विज्जु-लया-चचले, अणिच्चे सडण-पडग-विद्धसण-धम्मे, पुव्वि वा पच्छा वा अवस्स विप्पजहियव्वे भविस्सइ। से केस ण जाणइ, अम्मयाओ। के पुब्बिं गमणयाए के पच्छा गमणयाए इच्छामि ण अम्मयाओ। तुभेहि अभणुण्णाए समाणे समणस्स जाव पव्वइत्तए||५|| ? त 50-स्वाध्याय माला बनवावाSadrasad तए ण त धण्ण कुमार भद्दा-सत्यवाही जाहे णो सचाएइ जाव जियसत्तु आपुच्छइ, छत्त-मउड-चामराओ सयमेव जियसत्तू-निक्खमण करेइ, जहा थावच्चा-पुत्तस्स कण्हो, जाव पव्वइए, अणगारे जाए, इरियासमिए जाव गुत्त-बभयारी ||६|| तएण से धण्णे अणगारे, ज चेव दिवस मुडे भवित्ता अगाराओ अणगारियं पव्वइयए त चेव दिवस समणं भगव महावीर वदइ णमंसइ वदित्ता णमसित्ता एव वयासी-एव खलु इच्छामि ण भते ! तुभेहि अब्भणुण्णाए समाणे जावज्जीवाए छटुं-छटेण अणिक्खित्तेण, आयम्बिल-परिग्गहिएणं तवो कम्मेण अप्पाण भावेमाणे विहरित्तए। छहस्स वि य णं पारणयसि कप्पइ मे आयम्बिल पडिगाहित्तए, णो चेव णं अणायबिल, तपि य ससट्टेण णो चेव ण असंसटेण । त पि य ण उज्झिय-धम्मियं णो चेव ण अणुज्झिय-धम्मिय। तं पि य जं अण्णे बहवे समण-माहण अतिहि-किवण-वणिमगा णावकंखति ? अहासुह देवाणुप्पिया ! मा पडिबंध करेह । तएणं से धण्णे अणगारे समणेणं भगवया महावीरेणं । अब्मणुण्णाए समाणे हट्ट-तुट्ठ जावज्जीवाए छट्ट-छट्टेण अणिक्खित्तेण तवो-कमेणं अप्पाण भावेमाणे विहरइ IIUII तए ण से धण्णे अणगारे पढम-छट्ट-खमण-पारणयसि पढमाए पोरिसीए सज्झाय करेइ । जहा गोयमसामी तहेव आपुच्छइ {बीयाए पोरिसीए झाण झियायइ, तइयाए पोरिसीए अतुरिय-मचवल-मसंभते, मुह-पोत्तिय-पडिलेहेइ पडिलेहित्ता भायणाई वत्थाइ पडिलेहेइ, पडिलेहित्ता भायणाइ पमज्जइ, पमज्जित्ता, भायणाई उग्गहेइ, उग्गहित्ता, जेणेव समणे भगव महावीरे तेणेव उवागच्छइ उवागच्छित्ता समण भगव महावीर वदइ णमसइ एव वयासी-इच्छामि ण भते तुम्भेहि अब्मणुण्णाए छट्टक्खमण पारणगसि कायदीए णयरीए उच्च- नीय-मज्झिमाइ कुलाइ धर-समुयाणस्स भिक्खायरियाए अडित्तए। विलवानानव स्वाध्याय माला-51 अहासुहं देवाणुप्पिया मा पडिबंध । तए णं धण्णे अणगारे समणेणं भगवया महावीरेणं अभणु-ण्णाए समाणे समणस्स भगवओ महावीरस्स अंतियाओ सहसंब-वणाओ उज्जाणाओ पडिणिक्खमइ, पडिणिक्खमित्ता अतुरिय-मवचल-मसभते जगुंतर पलोयणाए दिट्ठीए पुरओरियं सोहमाणे सोहमाणे |} जाव जेणेव काकंदी णयरी तेणेव उवागच्छइ 2 त्ता कायंदीए णयरीए उच्च-नीच जाव अडमाणे आयम्बिलं णो अणायम्बिलं जाव णावकखइ। तए णं से धण्णे अणगारे ताए अब्भुज्जयाए पययाए पयत्ताए पग्गहियाए एसणाए, एसमाणे जइ भत्त लब्भइ, तो पाणं ण लब्मइ, अह पाणं लब्भइ, तो भत्तं ण लब्भइ। तएणं से धण्णे अणगारे अदीणे अविमणे अकलुसे अविसायी अपरितंत-जोगी जयण-घडण-जोग-चरित्ते अहापज्जत्त समुयाणं पडिगाहेइ पडिगाहेत्ता कायंदीओ णयरीओ पडिणिक्खमइ पडिणिक्खमित्ता जहा गोयमो तहा पडिदसेइ। तए ण से धण्णे अणगारे, समणेणं भगवया महावीरेणं अब्मणुण्णाए समाणे अमुच्छिए अगिद्धे अगढिए अणज्झोव-वण्णे बिलमिव पणग-भूएण अप्पाणेण आहारं आहोरइ आहारेत्ता, संजमेण-तवसा-अप्पाणं-भावेमाणे विहरइ IIGII तए ण समणे भगवं महावीरे अण्णया कयाइं कायंदीओ णयरीओ सहसंब वणाओ उज्जाणाओ पडिणिक्खमइ-पडिणिक्खमित्ता बहिया जणवय विहारं विहरइ। तए णं से धण्णे अणगारे समण्णस्स भगवओ महावीरस्स तहारूवाणं थेराण अंतिए सामाइय-माइयाइं एक्कारस्स अगाइ अहिज्जइ-अहिज्जित्ता, संजमेणं तवसा अप्पाणं भावेमाणे विहरइ। तए ण से धण्णे अणगारे तेणं उरालेणं जहा खंदओ जाव सुहुय- हुयासणे इव तेयसा जलन्ते उवसोभेमाणे चिटुंइ ||९|| 52-स्वाध्याय माला बिलामाबाबजावावा बवानाAAREY
धण्णस्स ण अणगारस्स पायाण अयमेयारूवे तवरूव-लावण्णे
होत्था-से जहा णामए सुक्कछल्लीइ वा, कट्ठ-पाउयाइ वा, जरग्ग
ओवाहणाइ वा, एवामेव धण्णस्स अणगारस्स पाया सुक्का, लुक्खा
निम्मंसा अढ़ि-चम्म-छिरत्ताए पण्णायति, णो चेव ण मंस-सोणियत्ताए।
धण्णस्स ण अणगारस्स पायगुलियाण अयमेयारूवे तवरूव
लावण्णे होत्था-से जहा णामए कलसगलियाइ वा, मुग्ग-सगलियाइ
वा मास-संगलियाइ वा, तरुणिया छिण्णा उण्हे दिण्णा सुक्का
समाणी मिलायमाणी मिलायमाणी चिट्ठइ, एवामेव धण्णस्स
पायंगुलियाओ सुक्काओ लुक्खाओ णिम्मसाओ, अट्ठि-चम्म-छिरताए
पण्णायंति, णो चेव णं मंस-सोणियत्ताए ||3||
धण्णस्स अणगारस्स जघाण अयमेयारूवे तवरूव-लावण्णे
होत्था-से जहा णामए काक-जघाइ वा, कक-जघाइ वा, ढेणियालिया
जघाइ वा, जाव णो चेव ण मस सोणियत्ताए।
धण्णस्स अणगारस्स जाणूण अयमेयारूवे तवरूव-लावण्णे
होत्था-से जहाणामए-काली-पोरेइ वा, मयूरपोरेइ वा, ढेणियालिया
पोरेइ वा, एवं जाव णो चेव णं मस सोणियत्ताए।
धण्णस्स णं उरुस्स अयमेयारूवे तवरूव लावण्णे होत्था-से
जहाणामए–सामली करिल्लेइ वा, बोरीकरिल्लेइ वा, सल्लइय
करिल्लेइ वा, तरुणिए उण्हे दिण्णे सुक्के समाणे मिलायमाणे
चिट्ठइ, एवामेव धण्णस्स अणगारस्स उरू जाव सोणियत्ताए ।1991
धण्णस्स कडिपत्तस्स इमेयारूवे, तवरूव लावण्णे होत्था-से
जहा णामए उट्ट-पाएइ वा, जरग्ग पाएइ वा महिस-पाएइ वा जाव
णो चेव णं मंस सोणियत्ताए।
धण्णस्स ण उदर-भायणस्स इमेयारुवे तवरूव-लावण्णे
होत्था-से जहाणामए-सुक्कदिएइ वा, भज्जणय-कभल्लेइ वा,
कठ्ठकोलम्बएइ वा एवामेव उदर सुक्क जाव णो चेव ण मंस
सोणियत्ताए।
बिEMARA
मानवजवजवन स्वाध्याय
धण्णस्स णं पांसुलिय-कडयाण इमेयारूवे तवरूव-लावण्णे होत्था-से जहा णामए थासया-वलीइ वा, पाणावलीइ वा, मुडावलीइ वा, एवामेव पासुलिया कडयाण जाव सोणियत्ताए । धण्णस्स पिठ्ठ करण्डयाण अयमेयारूवे तवरूव-लावण्णे होत्था-से जहा णामए-कण्णा-वल्लीइ वा, गोला-वलीइ वा, वट्टया- वलीइ वा, एवामेव पिट्ट करण्डगाण जाव सोणियत्ताए। धण्णस्स उर-कडयस्स अयमेयारूवे तवरूव लावण्णे होत्था-से जहाणामए-चित्तकट्टरेइ वा, वियण-पत्तेइ वा, तालिअंट-पत्तेइ, वा एवामेव उर-कडयस्स जाव सोणित्तयाए ||१|| धण्णस्स ण अणगारस्स बाहाण तवरूव-लावण्णे होत्था-से जहाणामए समि-सगलियाइ वा, बाहाया-संगलियाइ वा, अगत्थिय- सगलियाइ वा, एवामेव बाहाण कडयस्स जाव सोणित्तयाए। धण्णस्स ण अणगारस्स हत्थाणं अयमेयारूवे तवरूव-लावण्णे होत्था-से जहाणामए सुक्क-छगणियाइ वा, वड-पत्तेइ वा, पलास- पत्तेइ वा एवामेव हत्थाणं जाव सोणित्तयाए। धण्णस्स ण अणगारस्स हत्थंगुलियाण अयमेयारूवे तवरूव लावण्णे होत्था-से जहाणामए कलाय-सगलियाइ वा, मुग्ग- सगलियाइ वा, मास-संगलियाइ वा, तरुणिया छिण्णा आयवे-दिण्णा सुक्का समाणी एवामेव हत्थगुलियाण जाव सोणित्तयाए |||१३|| धण्णस्स अणगारस्स गीवाए अयमेयारूवे तव रूव लावण्णे होत्था-से जहाणामए-करग-गीवाइ वा, कुण्डिया-गीवाइ वा. (कोत्थवणाइ वा) उच्चठ्ठ-वणएइ वा एवामेव गीवाए जाव सोणित्तयाए। धण्णस्स णं अणगारस्स हणुयाए तवरूव-लावण्णे होत्था-से जहाणामए-लाउय-फलेइ वा, हकुब-फलेइ वा अब-गठियाइ वा, एवामेव हणुयाए जाव सोणित्तयाए। धण्णस्स ण अणगारस्स ओहाण अयमेयारूवे तवरूव-लावणं 54 - स्वाध्याय माला ESAKASEASEASESASAR होत्था, से जहाणामए सुक्क-जलोयाइ वा, सिलेस-गुलियाइ वा, अलत्तग-गुलियाइ वा, (अम्बाडग-पेसीयाइ वा) एवामेव ओट्ठाण जाव सोणित्तयाए। धण्णस्स ण अणगारस्स जिब्भाए अयमेयारूवे तवरूव-लावण्णे होत्था-से जहाणामए वड-पत्तेइ वा, पलास-पत्तेइ वा (उम्बर-पत्तेइ वा) साग-पत्तेइ वा एवामेव जिब्माए जाव सोणित्तयाए |||४|| धण्णस्स ण अणगारस्स नासाए अयमेयारूवे तवरूव-लावण्णे होत्था-से जहाणामए अम्बग-पेसियाइ वा, अम्बाडग-पेसियाइ वा, माउलिग-पेसियाइ वा, तारुणियाइ वा एवामेव णासायस्स जाव सोणित्तयाए। धण्णस्स ण अणगारस्स अच्छीण अयमेयारूवे तवरूव-लावण्णे होत्था-से जहा णामए-वीणा-छिड्डेइ वा वद्धीसग-छिड्डेइ वा, पाभाइय- तारगाइ वा, एवामेव अच्छीण जाव, सोणित्तयाए। धण्णस्स णं अणगारस्स कण्णाण, तवरूव-लावण्णे होत्था-से जहाणामए मूला-छल्लियाइ वा, वालुक-च्छल्लियाइ वा, कारेल्लय- छल्लियाइ वा, एवामेव कण्णाण जाव सोणित्तयाए। धण्णस्स ण अणगारस्स सीसस्स अयमेयारूवे तवरूव-लावण्णे होत्था, से जहाणामए तरुणग-लाउएइ वा,तरुणग-एलालुएइ वा, सिण्हा- -लएइ वा, तरुणए छिण्णे आयवे दिण्णे सुक्के समाणे मिलायमाणे चिट्ठइ एवामेव धण्णस्स अणगारस्स सीस सुक्क-भुक्ख-लुक्ख णिम्मस अट्ठि-चम्म-छिरत्ताए पण्णायइ णो चेव ण मस-सोणियत्ताए। एव सव्वत्थ। णवरं उदर-भायण, कण्ण, जीहा, उट्ठा, एएसि, अट्ठी न भण्णइ, चम्म-छिरत्ताए पण्णायइ इति भणइ||१५|| धण्णे ण अणगारे सुक्केण भुक्खेण लुक्खेण पाय-जघोरुणा विगय-तडिकरालेण कडि-कडाहेण पिट्ठमवस्सिएण उदर-भायणेण जोइज्जमाणेहि पासुलिय-कडएहि अक्खसुत्त-मालाइव गणिज्जमाणेहि विशालविवादि) स्वाध्याय माला-55 पिट्ठ-करण्डग-संधीहिं, गगा-तरंग-भूएण, उर-कडग-देसभाएणं, सुक्कसप्प-समाणेहि बाहाहि, सिढिल-कडाली विव चलंतेहि य अग्ग-हत्थेहि कम्पणवाइए विव वेवमाणीए सीस-घडीए पव्वाय-वयण- कमले उमड-घड-मुहे उच्छुद्ध-नयण कोसे। जीव जीवेण गच्छइ, जीवं जीवेणं चिट्ठइ, भास भासित्ता गिलाइ, भास-भासमाणे गिलाइ भासं भासिस्सामित्ति गिलायइ। से जहाणामए इगाल-सगडियाइ वा। जहा खंदओ तहा-हुयासणे इव भासरासि-पलिच्छण्णे, तवेणं तेएणं अईव अईव तवतेय-सिरीए उवसोभेमाणे-उवसोभेमाणे चिट्ठइ||१६|| तेणं कालेणं तेणं समएणं रायगिहे णयरे, गुणसिलए चेइए, सेणिए राया। समणे भगव महावीरे समोसड्डे। परिसा णिग्गया, सेणिओ णिगओ, धम्मकहा, परिसा पडिगया। तए णं से सेणिए राया समणस्स भगवओ महावीरस्स अतिए धम्म सोच्चा निसम्म समणं भगवं महावीर वदइ णमंसइ एव वयासी- इमेसि णं भंते ! इंदभूइ पामोक्खाण चउदसण्ह समण-साहस्सीण कयरे अणगारे महादुक्कर-कारए चेव महाणिज्जर-यराए चेव ? एवं खलु सेणिया ! इमेसिं इदभूइ पामोक्खाण चउदसण्ह समण-साहस्सीण धण्णे अणगारे महादुक्कर-कारए चेव, महाणिज्जर- यराए चेव। से केणढेण भंते ! एवं वुच्चइ, इमेसि इन्दभूइ पामोक्खाण चउदसहिं समण-साहस्सीण धण्णे अणगारे महादुक्कर-कारए चेव, महानिज्जर-यराए चेव । एवं खलु सेणिया ! तेणं कालेण तेण समएणं कायदी णाम णयरी होत्था, जाव धण्णेदारए उप्पि-पासाय-वडिसए विहरइ । तएण अहं अण्णया-कयाइं पुव्वाणु-पुवीए चरमाणे गामाणुगाम दुइज्जमाणे जेणेव कायंदी णयरी जेणेव सहसंब-वणे उज्जाणे तेणेव उवागच्छइ, ? 56-स्वाध्याय माला जातानाजानवविहान उवागच्छइत्ता अहापडिरूव उग्गहं उगिण्हित्ता सजमेण तवसा अप्पाण भावेमाणे विहरामि। परिसा णिग्गया, त चेव जाव पव्वइए जाव बिलमिव जाव आहारेइ। धण्णस्स णं अणगारस्स पायाण सरीर- वण्णओ सव्वो जाव उवसोभेमाणे-उवसोभेमाणे चिट्ठइ। से तेणढेण सेणिया ! एव वुच्चइ इमेसि चउदसण्हं समण- साहस्सीण धण्णे अणगारे महादुक्कर-कारए चेव महानिज्जर-यराए चेव ||Jull तए णं से सेणिय राया समणस्स भगवओ महावीरस्स अंतिए एयमढे सोच्चा निसम्म-ह-तुढे समणं भगव महावीर वदइ णमसइ जेणेव धण्णे अणगारे तेणेव उवागच्छइ उवागच्छित्ता, धण्णं अणगार तिक्खुत्तो आयाहिण, पयाहिण करेइ-करित्ता वदइ णमसइ वदित्ता णमसित्ता एव वयासी। "धण्णे सि ण तुमं देवाणुप्पिया ! सुपुण्णे, सुकयत्थे, सुकय-लक्खणे, सुलद्धे ण देवाणुप्पिया ! तव माणुस्सए जम्म-जीविय- फले" त्ति कटु, वदइ णमसइ । जेणेव समणे भगव महावीरे तेणेव उवागच्छइ 2 त्ता समण भगव महावीर तिक्खुत्तो वदइ णमंसइ 2 त्ता जामेव दिस पाउड्भूए तामेव दिसि पडिगए |||CII तए ण तस्स धण्णस्स अणगारस्स अण्णया कयाइ पुव्वरत्ता वरत्तकाल समयसि धम्म जागरिय जागरमाणस्स इमेया-रूवे अज्झथिए चिन्तिए, मणोगए सकप्पे समुपज्जित्था-एव खलु अह इमेण उरालेण तवो कम्मेणं धमणि-संतए जाए जहा खदओ तहेव चिता । आपुच्छणं। थेरेहि सद्धि विउल दुरूहइ । मासियाए सलेहणाए। '. पाउणित्ता कालमासे कालं किच्चा उड्ड चदिम जा विमाण-पत्थडे उड्ड दूर-विईवइत्ता सव्वट्ठ-: - - उववण्णे। थेरा तहेव ओयरंति जाव इमे से । विAावनाव ? भंते त्ति, भगव गोयमे तहेव आपुच्छइ, जहा खदयस्स भगव वागरेइ जाव सवठ्ठ-सिद्धे विमाणे उववण्णे। धण्णस्स ण भंते ! देवस्स केवइयं काल ठिई पण्णत्ता गोयमा ! तेत्तीसं सागरोवमाइ ठिई पण्णत्ता। से ण भते। ताओ देवलोगाओ आउक्खएण भवक्खएण लिइक्खएणं कहि गच्छिहिइ कहि उववज्जेहिइ ? गोयमा! महाविदेह- वासे सिज्झिहिइ बुज्झिहिइ मुच्चिहिइ परिणिव्वाहिइ सव्वदुक्खाण मतं करेहिए। त एव खलु जम्बू ! समणेण भगवया महावीरेण जाव सपत्तेण पढमस्स अज्झयण्णस्स अयमढे पण्णत्ते||१९|| || पढम अज्झयणं सम्मतं ।। जइ ण भते ! उक्खेवओ एव खलु जम्बू ! तेण कालेण तेण समएण कायदीए णयरीए, जियसतू राया। तत्थण काकदीए णयरीए भद्दा णाम सत्थवाही परिवसइ, अड्डा। तीसे ण भद्दाए सत्थवाहीए पुत्ते सुणक्खत्ते णाम दारए होत्था, अहीण जाव सुरूवे। पच-धाइ-परिक्खित्ते जहा धण्णो तहेव बत्तीस्साओ दाओ जाव उप्पि पासाए वडिंसए विहरइ ||२०|| तेण कालेण तेणं समएण सामी समोसड्डे, जहा धण्णो तहा सुणक्खत्ते वि णिग्गओ जहा थावच्चा-पुत्तस्स तहा णिक्खमण जाव अणगारे जाए इरिया-समिए जाव गुत्त बभयारी । तए णं से सुणखत्ते अणगारे जं चेव दिवस समणस्स भगवओ महावीरस्स अतिए मुण्डे जाव पव्वइए तं चेव दिवसं अभिग्गह, तहेव जाव बिलमिव पणग-भूएणं आहारं आहारेइ, सजमेण तवसा अप्पाण भावेमाणे विहरइ ||२१|| समण भगवया महावीरेण जाव बहिया जणवय-विहार विहरइ । 58 - स्वाध्याय माला विनाASTATEMEDAARAAT एक्कारस्स-अगाई अहिज्जइ, संजमेणं तवस्सा अप्पाण भावेमाणे विहरइ। तएण से सुणक्खत्ते अणगारे तेण उरालेण जहा- खदओ ॥२२॥ तेणं कालेणं तेणं समएण रायगिहे णयरे, गुणसिलए चेइए, सेणिए राया, सामी समोसढे, परिसा णिग्गया, राया णिग्गओ धम्म- कहा, राया पडिगओ, परिसा पडिगया। तए ण तस्स सुणक्खत्तस्स अण्णया कयाइं पुव्वरत्ता-वरत काल समयसि धम्म-जागरिय जहा खन्दयस्स बहु-वासाओ परियाओ। गोयम पुच्छा तहेव कहेइ जाव सव्वठ्ठ-सिद्धे विमाणे देवत्ताए उववण्णे, तेत्तीस सागरोवमाई ठिई पण्णत्ता। से ण भते ! महाविदेह वासं सिज्झिहिइ। एवं सुणक्खत्त गमेणं सेसावि अठ्ठ भाणियव्वा, णवर आणुपुव्वीए दोण्णि रायगिहे, दोण्णि साइए, दोण्णि वाणियगामे, णवमो हत्थिणापुरे, दसमो रायगिहे। णवण्ह भद्दाओ जणणीओ। णवण्ह वि बत्तीसाओ दाओ। णवण्ह णिक्खमण थावच्चा पुत्तस्स सरिस, वेहलस्स-प्पिया करेइ, णवमास धण्णे, वेहल्ल छमासा परियाओ, सेसाण बहु वासाइ, मास सलेहणा सव्वट्ट-सिद्धे, सव्वे महाविदेहे वासे सिज्झिहिइ। एव दस अज्झयणाणि। एव खलु जम्बू ! समणेणं भगवया महावीरेण सम्पत्तेण अणुत्तरोव-वाइय- दसाण तच्चस्स वग्गस अयमढे पण्णत्ते । अणुत्तरोव- वाइय-दसाओ सम्मत्तओ। अणुत्तरोव-वाइय-दसाण एगो सुयखधो, तिण्णि-वग्गा, तिसु चेव दिवसेसु उद्दिसिज्जति, तत्थ पढमे वग्गे दस उद्देसग्गा, बीइए वग्गे तेरस्स उद्देसगा, तइए वग्गे दस उद्देसगा, सेस जहा णाया धम्म कहा, तहा णायव्व ।।इति । ||२३|| XXXXXXXXXXX वनमाजवाDATEASE स्वाध्याय माला-59
11 दशवकालिक सूत्रम् 11
दमपप्फिया पढमं अज्झयणं ।।
धम्मो मंगल-मुक्किटुं, अहिसा संजमो तवो।
देवा वि तं णमंसन्ति, जस्स धम्मे सया मणो ||1||
जहा दुमस्स पुप्फेसु, भमरो आवियई रस।
ण य पुप्फ किलामेइ, सो य पीणेई अप्पयं । |2||
एमे ए समणा मुत्ता, जे लोए सन्ति साहुणो।
विहगमा व पुप्फेसु, दाण भत्तेसणा रया।।3।।
वय च वित्तिं लब्भामो, ण य कोइ उवहम्मइ।
अहा-गडेसु रीयन्ते, पुप्फेसु भमरा जहा ।।4।।
महुगार समा बुद्धा, जे भवन्ति अणिस्सिया।
णाणा-पिण्ड रया दन्ता, तेण वुच्चन्ति साहुणो। 15 ।।
।। इति दुमपुफियानामं पढममज्झयणं समत्तं ||1||
अह सामण्ण पुवयं दुइअं अज्झयणं २
कहं णु कुज्जा सामण्णं, जो कामे ण णिवारए।
पए पए विसीयन्तो, संकप्पस्स वस गओ।।1।।
वत्थ-गन्ध-मलंकारं, इत्थीओ सयणाणि य।
अच्छन्दा जे ण भुञ्जन्ति, ण से चाइत्ति वुच्चई।।2।।
जे य कन्ते पिए भोए, लद्धे वि पिडि कुव्वई ।
साहीणे चयइ भोए, से हु चाइत्ति वुच्चई।।3।।
समाइ पेहाइ परिव्वयन्तो, सिया मणो णिस्सरई बहिद्धा।
'ण सा महं णोवि अहंपि तीसे इच्चेव ताओ विणएज्ज राग ।।4।।
60-स्वाध्याय माला विनवाबनव-Aasalaaaवज
आयावयाही ! चय सोगमल्ल, कामे कमाही कमिय खु दुक्ख ।
छिन्दाहि दोस विणएज्ज राग, एव सुही होहिसि सम्पराए। 15 ।।
पक्खन्दे जलिय जोइ, धूम-केउ दुरासय ।
णेच्छन्ति वन्तय भोत्तु, कुले जाया अगन्धणे।।6 ||
धिरत्थु तेऽजसो-कामी, जो त-जीविय कारणा।
वन्त इच्छसि आवेउ, सेय ते मरण भवे ।।7 ||
अह च भोग-रायस्स, त चऽसि अन्धग-वण्हिणो।
मा कुले गन्धणा होमो, सज्जम णिहुओ चर।।8।।
जइ तं काहिसि भाव, जा जा दिच्छसि नारिओ।
वाया विद्धोव्व-हडो, अहि-अप्पा भविस्ससि । 19 ||
तीसे सो वयण सोच्चा, सजयाइ सुभासिय ।
अकुसेण जहा णागो, धम्मे सम्पडि-वाइओ। 110।।
एवं करेन्ति सम्बुद्धा, पण्डिया पवियक्खणा।
विणियट्टन्ति भोगेसु, जहा से पुरिसुत्तमो।त्ति बेमि ।।11।।
।। इति सामण्णपुव्वय नाम अज्झयण समत्त ।।2।।
अह खुड्डियायारकहा तइयं अज्झयणं ३
सञ्जमे सुट्टि-अप्पाण, विप्पमुक्काण ताइण।
तेसि-मेय-मणाइण्ण, णिग्गन्थाण महेसिण ||1||
उद्देसिय कीयगड णियाग-मभिहडाणि य ।
राइ भत्ते सिणाणे य, गध मल्ले य वीयणे।।2।।
सण्णिही गिहीमत्ते य, रायपिण्डे किमिच्छए।
सम्वाहणा दन्त पहोयणाय, सम्पुच्छणा देह पलोयणा य ।।3।।
अट्ठावए य णालीए, छत्तस्स य धारण हाए ।
तेगिच्छ पाहणा पाए, समारम्भ च जोइणो | 4 ||
विविविविवि
ASSASS स्वाध्याय माला-61
सिज्जायर-पिण्ड च, आसन्दी पलियङ्कए ।
गिहन्तर णिसिज्जा य, गाय-स्सुव्वट्ट-णाणि य ।।5।।
गिहिणो वेयावडिय, जा य आजीव वत्तिया।
तत्ता-णिव्वुड भोइत्त, आउ रस्सरणाणि य। 16 ||
मूलए सिङ्ग-बेरे य, उच्छु-खण्डे अणिव्वुडे।
कन्दे मूले य सच्चित्ते, फले बीए य आमए । 17 ||
सोवच्चले सिन्धवे लोणे, रोमा-लोणे य आमए !
सामुद्दे पन्सुखारे य, काला लोणे य आमए । 18 ।।
धूवणेत्ति वमणे य, वत्थी-कम्म विरेयणे।
अञ्जणे दन्तवणे य, गाय-भग-विभूसणे । 19 ||
सव्व-मेय-मणाइण्ण, णिग्गन्थाण महेसिण।
सञ्जमम्मि अ जुत्ताण, लहुभूय विहारिण । |10||
पचासव परिण्णाया, तिगुत्ता छसु सञ्जया।
पच णिग्गहणा धीरा, णिग्गन्था उज्जु-दन्सिणो।।11 ||
आया-वयन्ति गिम्हेसु, हेमन्तेसु अवाउडा ।
वासासु पडिसलीणा, सजया सुसमाहिया । |12||
परिस-हरिऊ-दन्ता, धूअमोहा जिइन्दिया ।
सव्व दुक्ख-प्पहीणट्ठा, पक्कमन्ति महेसिणो। |13 ।।
दुक्कराइ करित्ताण, दुस्सहाइ सहित्तु य ।
केइऽत्थ देवलोएसु, केई सिज्झन्ति णीरया।।14 ।।
खवित्ता पुव्व-कम्माइ, सजमेण तवेण य।
सिद्धि मग्ग-मणुप्पत्ता, ताइणो परिणिव्वुडे ||15 ।।
।। खुड्डियायारकहा तइयमज्झयण समत्त 113 ||
62 - स्वाध्याय माला Dिasaradaasantasranasrana)
अह छज्जीवणियाणामं चउत्थ अज्झयणं ४ सुय मे आउस ! तेण भगवया एव-मक्खाय, इह खलु छज्जीवणिया णामज्झयण समणेण भगवया महावीरेण कासवेण पवेइया सुअक्खाया सुपण्णत्ता सेय मे अहिज्झिउ अज्झयण धम्म-पण्णत्ती।। कयरा खलु सा छ-ज्जीवणिया णामज्झयण समणेण भगवया महावीरेण कासवेण पवेइया सुयक्खाया सुपण्णत्ता सेय मे अहिज्झिउ अज्झयण धम्म-पण्णत्ती।। इमा खलु सा छज्जीवणिया णामज्झयण समणेण भगवया महावीरेण कासवेण पवेइया सुयक्खाया सुपण्णत्ता सेय मे अहिज्झिउ अज्झयण धम्म पण्णत्ती ।। तजहा-पुढवी-काइया आउ-काइया तेउ-काइया वाउ-काइया वणस्सइ-काइया तस-काइया पुढवी चित्तमन्त-मक्खाया अणेग-जीवा पुढो-सत्ता अण्णत्थ सत्थ-परिणएण। आऊ चित्तमन्त-मक्खाया अणेग-जीवा पुढो-सत्ता अण्णत्थ सत्थ-परिणएण। तेऊ चित्तमन्त-मक्खाया अणेग-जीवा पुढो-सत्ता अण्णत्थ सत्य-परिणएण। वाऊ चित्तमन्त-मक्खाया अणेग- जीवा पुढो-सत्ता अण्णत्थ सत्य-परिणएण। वणस्सइ चित्तमन्त- मक्खाया अणेग-जीवा पुढो-सत्ता अण्णत्थ सत्थ-परिणएण | तजहा अग्गबीया, मूलबीया, पोरबीया, खन्धबीया, बीयरुहा, सम्मुच्छिमा, तणलया वणस्सइ- काइया, सबीया, चित्तमन्त-मक्खाया अणेग- जीवा पुढोसत्ता अण्णत्थ सत्थ परिणएण। विनSASARASADADArad स्वाध्याय माला-63 से जे पुण इमे अणेगे बहवे तसा पाणा, तंजहा अण्डया, पोयया, जराउया, रसया सन्सेइमा, सम्मुच्छिमा, उब्भिया, उववाइया, जेसि केसिं च पाणाणं, अभिकन्त, पडिक्कन्तं, सकुचिय, पसारिय रुय भन्त, तसियं, पलाइय आगइ-गइ-विण्णाया, जे य कीड-पयङ्गा, जा य कुन्थु-पिवीलिया, सव्वे बेइन्दिया, सव्वे तेइन्दिया, सवे चउरिन्दिया, सव्वे पचिन्दिया, सव्वे तिरिक्ख जोणिया, सव्वे णेरइया, सवे मणुआ, सव्वे देवा, सव्वे पाणा, पर-माहम्मिआ, एसो खलु छटो जीव-णिकाओ तसकाओ त्ति पवुच्चइ। इच्चेसि छण्ह जीव णिकाएणं णेव सय दण्ड समा-रम्भिज्जा, णेवन्नेहि दण्ड समारम्भिज्जा, दण्ड समा-रम्भते वि अण्णे ण समणु-जाणेज्जा, जावज्जीवाए तिविह ति-विहेण मणेण वायाए काएण ण करेमि, ण कारवेमि, करन्तम्पि अन्न न समणु-जाणामि तस्स भते ! पडिक्कमामि णिन्दामि गरिहामि अप्पाण वोसिरामि। पढमे भते ! महव्वए पाणाइ-वायाओ वेरमण। सव्व भते ! पाणाइवाय पच्चक्खामि । से सुहुम वा, बायर वा, तस वा, थावरं वा, णेव सय पाणे अइवाएज्जा, णेवअण्णेहि पाणे अइवाया-विज्जा, पाणे अइवायन्ते-वि अण्णे ण समणु-जाणेज्जा, जावज्जीवाए तिविह तिविहेण मणेण वायाए काएण ण करेमि, ण कारवेमि, करन्तपि अन्न ण समणु-जाणामि, तस्स भते ! पडिक्कमामि णिन्दामि गरिहामि अप्पाण वोसिरामि । पढमे भंते ! महव्वए उवडिओमि सव्वाओ पाणाइ-वायाओ वेरमण। अहावरे दुच्चे भते ! महव्वए मुसा-वायाओ वेरमण | सव्वं भते! मुसावाय पच्चक्खामि । से कोहा वा, लोहा वा, भया वा, हासा वा, णेव सय मुस वएज्जा, णेवण्णेहि मुस वायाविज्जा, मुस वयन्ते वि अण्णे ण समणुजाणेज्जा जावज्जीवाए, तिविह तिविहेण मणेण वायाए काएणं ण करेमि, ण कारवेमि, करन्तपि अन्न ण समणुजाणामि। - 64-स्वाध्याय माला SasasaramSassadoraDAD) तस्स भते ! पडिक्कमामि णिन्दामि गरिहामि अप्पाण वोसिरामि। दुच्चे भते ! महव्वए उवडिओमि सव्वाओ मुसावायाओ वेरमण। अहावरे तच्चे भते ! महव्वए अदिण्णा-दाणाओ वेरमण। सव्व भते ! अदिण्णा-दाण पच्चक्खामि। से गामे वा, नगरे वा, रण्णे वा, अप्प वा, बहुं वा, अणुं वा, थूल वा, चित्तमन्त वा, अचित्तमन्त वा, णेव सय अदिण्ण गिण्हिज्जा, णेव अण्णेहि अदिण्ण गिण्हाविज्जा, अदिण्ण गिण्हन्ते वि अण्णे ण समणु-जाणेज्जा, जावज्जीवाए तिविह तिविहेण मणेण वायाए, काएणं, ण करेमि, ण कारवेमि, करन्तम्पि अण्ण ण समणुजाणामि । तस्स भंते ! पडिक्कमामि णिन्दामि गरिहामि अप्पाण वोसिरामि । तच्चे भते! महव्वए उवडिओमि सव्वाओ अदिण्णा-दाणाओ वेरमण। अहावरे चउत्थे भते ! महव्वए मेहुणाओ वेरमण। सव्व भते ! मेहुण पच्चक्खामि । से दिव्व वा, माणुस वा, तिरिक्ख-जोणिय वा, णेव सय मेहुणं सेविज्जा, णेव अण्णेहि मेहुण सेवाविज्जा, मेहुण सेवन्ते वि अण्णे ण समणु-जाणेज्जा ! जावज्जीवाए तिविह तिविहेण मणेण वायाए कारणं ण करेमि, ण कारवेमि, करन्तपि अण्ण ण समणुजाणामि । तस्स भंते ! पडिक्कमामि णिन्दामि गरिहामि अप्पाण वोसिरामि। चउत्थे भते ! महव्वए उवडिओमि सव्वाओ मेहुणाओ वेरमण। अहावरे पञ्चमे भते ! महव्वए परिग्गहाओ वेरमण । सव्व भते ! परिग्गह पच्चक्खामि । से गामे वा, णगरे वा, रण्णे वा, अप्प वा, बहु वा, अणु वा, थूल वा, चित्तमन्त वा अचित्तमन्त वा। णेव सय परिग्गह परिगिण्हेज्जा, णेव अण्णेहि परिग्गह परिगिण्हा-वेज्जा, परिग्गह परिगिण्हन्ते वि अण्णे ण समणुजाणिज्जा जावज्जीवाए तिविह तिविहेणं मणेण वायाए काएण ण करेमि, ण कारवेमि, करन्तपि अण्ण ण समणुजाणामि । तस्स भते । पडिक्कमामि णिन्दामि विविARASADASAN) स्वाध्याय गरिहामि अप्पाण वोसिरामि। पञ्चमे भंते ! महव्वए उवडिओमि सव्वाओ परिग्गहाओ वेरमण। अहावरे छट्टे भते ! वए राइ-भोयणाओ वेरमण। सव्व भते ! राइ- -भोयण पच्चक्खामि । से असण वा, पाण वा, खाइम वा, साइम वा। णेव सय राइं भुञ्जिज्जा, णेव अण्णेहि राइ भुञ्जाविज्जा, राइ भुञ्जते वि अण्णे ण समणुजाणेज्जा। जावज्जीवाए तिविह तिविहेण मणेण वायाए काएणं ण करेमि, ण कारवेमि, करन्तपि अण्ण ण समणुजाणामि । तस्स भंते। पडिक्कमामि णिन्दामि गरिहामि अप्पाण वोसिरामि। छठे भते ! वए उवडिओमि सव्वओ राइ-भोयणाओ वेरमण। इच्चेयाइ पञ्च महव्वयाइ राइ भोयण-वेरमण-छट्ठाइ अत्त- हियट्टियाए उवसम्पज्जित्ताणं विहरामि। से भिक्खू वा, भिक्खुणी वा, सजय-विरय-पडिहय पच्चक्खाय पावकम्मे, दिआ वा, राओ वा, एगओ वा, परिसागओ वा, सुत्ते वा, जागरमाणे वा, से पुढवि वा, भित्तिं वा, सिल वा, लेलु वा, ससरक्ख वा काय, ससरक्ख वा वत्थ, हत्थेण वा, पाएण वा, कट्टेण वा, किलिचेण वा, अगुलियाए वा, सिलागए वा, सिलाग-हत्थेण वा, ण आलिहिज्जा, ण विलिहिज्जा, ण घट्टिज्जा, ण भिन्दिज्जा, अण्ण ण आलिहा-विज्जा, ण विलिहा-विज्जा, ण घट्टा-विज्जा, ण भिन्दा- विज्जा । अण्ण आलिहन्त वा, विलिहन्तं वा, घट्टन्त वा, भिन्दन्तं वा ण समणु-जाणिज्जा। जावज्जीवाए तिविह तिविहेण मणेण वायाए काएण ण करेमि, ण कारवेमि, करन्तपि अण्ण ण समणुजाणामि । तस्स भते ! पडिक्कमामि णिन्दामि गरिहामि अप्पाण वोसिरामि। से भिक्खू वा, भिक्खुणी वा, सजय-विरय-पडिहय-पच्चक्खाय- पाव-कम्मे, दिआ वा, राओ वा, एगओ वा, परिसागओ वा, सुत्ते वा, जागरमाणे वा, से उदग वा, ओस वा, हिम वा, महिय वा, करग्ग वा, 66 - स्वाध्याय माला विsasaanaasaasaanwar, हरि-तणुग वा, सुद्धोदग वा, उदउल्ल वा काय, उदउल्ल वा वत्थ, ससिणिद्ध वा काय, ससिणिद्ध वा वत्थ, ण आमुसिज्जा, ण सम्फुसिज्जा, ण आवीलिज्जा, ण पवीलिज्जा, ण अक्खोडिज्जा, ण पक्खोडिज्जा, ण आयाविज्जा, ण पयाविज्जा, अण्ण ण आमुसाविज्जा, ण सम्फुसा-विज्जा, ण आवीला-विज्जा, ण पवीला-विज्जा, ण अक्खोडा-विज्जा, ण पक्खोडा-विज्जा, ण आया-विज्जा, ण पया- विज्जा अण्ण आमुसन्त वा, सम्फुसन्तं वा, आवीलन्त वा, पवीलन्त वा, अक्खोडन्त वा, पक्खोडन्त वा, आयावन्त वा, पयावन्त वा न समणुजाणिज्जा, जावज्जीवाए, तिविह तिविहेण मणेण वायाए कारण ण करेमि, ण कारवेमि, करन्तपि अण्ण ण समणुजाणामि । तस्स भंते ! पडिक्कमामि णिन्दामि गरिहामि अप्पाण वोसिरामि। से भिक्खू वा, भिक्खुणी वा, सजय-विरय-पडिहय-पच्चक्खाय- पावकम्मे, दिआ वा, राओ वा, एगओ वा, परिसागओ वा, सुत्ते वा, जागरमाणे वा, से अगणि वा, इङ्गालं वा, मुम्मुर वा, अच्चि वा, जाल वा, अलायं वा, सुद्धागणि वा, उक्कं वा, ण उज्जिज्जा, ण घटिज्जा, ण भिन्दिज्जा, ण उज्जालेज्जा, ण पज्जालेज्जा, ण णिव्वावेज्जा, अण्ण ण उञ्जाविज्जा, ण घट्टाविज्जा, ण भिन्दाविज्जा, ण उज्जालाविज्जा, ण पज्जाला-विज्जा, ण णिव्वाविज्जा, अण्ण उज्जन्तं वा, घट्टन्त वा, भिन्दन्तं वा, उज्जालन्त वा, पज्जालन्त वा, णिव्वावन्त वा, ण समणु-जाणेज्जा जावज्जीवाए, तिविह तिविहेण मणेण वायाए कारण ण करेमि, ण कारवेमि, करन्तपि अण्ण ण समणुजाणामि । तस्स भते ! पडिक्कमामि णिन्दामि गरिहामि अप्पाण वोसिरामि। से भिक्खू वा, भिक्खुणी वा, सजय-विरय-पडिहय-पच्चक्खाय- पावकम्मे, दिआ वा, राओ वा, एगओ वा, परिसागओ वा, सुत्ते वा, जागरमाणे वा, से सिएण वा, विहुयणेण वा, तालि-अण्टेण वा, पत्तेण वा, पत्त-भङ्गेण वा, साहाए वा, साहाभगेण वा, पिहुणेण वा, विमानाजावाजानाजावाSASIESEA स्वाध्याय माला-67 पिहुण-हत्थेण वा, चेलेण वा, चेल-कण्णेण वा, हत्थेण वा, मुहेण वा, अप्पणो वा काय, बाहिरं वावि पुग्गल ण फुमिज्जा, ण वीएज्जा, अण्ण ण फुमाविज्जा, ण विआविज्जा, अण्ण फुमन्त वा, वीयन्त वा, ण समणुजाणेज्जा जावज्जीवाए, तिविह तिविहेण मणेण वायाए काएण ण करेमि, ण कारवेमि, करन्तपि अण्ण ण समणु-जाणामि। तस्स भते ! पडिक्कमामि णिन्दामि गरिहामि अप्पाण वोसिरामि। से भिक्खू वा, भिक्खुणी वा, सजय-विरय-पडिहय-पच्चक्खाय- पावकम्मे, दिआ वा, राओ वा, एगओ वा, परिसागओ वा, सुत्ते वा, जागरमाणे वा, से बीएसु वा, बीय-पइटेसु वा, रूढेसु वा, रूढ-पइटेसु वा, जाएसु वा, जाय-पइटेसु वा, हरिएसु वा, हरिय-पइटेसु वा, छिण्णेसु वा, छिण्ण-पइडेसु वा, सचित्तेसु वा, सचित्त-कोलपडि णिस्सिएसु वा, ण गच्छेज्जा, ण चिढेज्जा, ण णिसीएज्जा, ण तुयट्टेज्जा, अण्ण ण गच्छाविज्जा, ण चिट्ठाविज्जा, ण णिसीयाविज्जा, ण तुयट्टाविज्जा, अण्ण गच्छन्त वा, चिट्टन्त वा, णिसीयन्त वा तयुट्टन्त वा ण समणु जाणिज्जा जावज्जीवाए, तिविह तिविहेण मणेण वायाए काएण ण करेमि, ण कारवेमि, करन्तपि अण्ण ण समणुजाणामि । तस्स भते ! पडिक्कमामि णिन्दामि गरिहामि अप्पाण वोसिरामि। से भिक्खू वा, भिक्खुणी वा, सजय-विरय-पडिहय-पच्चक्खाय- पावकम्मे, दिआ वा, राओ वा, एगओ वा, परिसागओ वा, सुत्ते वा, जागरमाणे वा, से कीड वा, पयग वा, कुन्थु वा, पिवीलिय वा, हत्थंसि वा, पायंसि वा, बाहुसि वा, उदरसि वा, सीससि वा, वत्थसि वा, पडिग्गहसि वा, कम्बलसि वा, पाय पुच्छणसि वा रय हरणसि वा, गुच्छगंसि वा, उड्डगसि वा, दण्डगसि वा, पीढगसि वा, फलगसि वा, सेज्जसि वा, संथारगसि वा, अण्णयरसि वा, तहप्पगारे उवगरण-जाए तओ सञ्जयामेव पडिलेहिय पडिलेहिय पमज्जिअ पमज्जिअ एगन्त-मवणिज्जा, णो ण सवाय- मावज्जिज्जा। 68 - स्वाध्याय माला ( नवनाविका Sadhanaman ॐ उसि वा,
2
अजय चरमाणो अ, पाण भूयाइ हिसइ।
बन्धइ पावय कम्म, त से होई कडुअ फल ।।1।।
अजय चिट्ठमाणो अ, पाण भूयाइ हिसइ ।
बन्धइ पावय कम्म, त से होई कडुअ फल ।।2 ||
अजय आसमाणो अ. पाण भूयाइ हिसइ ।
बन्धइ पावय कम्म, त से होई कडुअ फल ।।3 ||
अजय सयमाणो, अ, पाण भूयाइ हिसइ ।
बन्धइ पावय कम्म, त से होई कडुअ फल । 14 ।।
अजय भुञ्ज-माणो अ, पाण भूयाइ हिसइ ।
बन्धइ पावय कम्म, त से होई कडुअ फल ।।5।।
अजय भासमाणो, अ, पाण भूयाइं हिसइ।
बन्धइ पावय कम्म, त से होई कडुअ फल | 16 ||
कह चरे कहं चिट्टे, कहमासे कह सए
कह भुञ्जन्तो भासन्तो, पाव कम्म ण बन्धइ ।।7 ||
जयं चरे जय चिट्टे, जयमासे जय सए।
जय भुञ्जन्तो भासन्तो, पाव कम्म ण बन्धइ । 8 ।।
सव्व-भूयप्प-भूयस्स, सम्म भूयाइ पासओ।
पिहिआ सव्वस्स दन्तस्स, पाव कम्म ण बन्धइ। 19 ||
पढम नाण तओ दया, एव चिट्ठइ सव्व सजए।
अण्णाणी कि काही, कि वा नाहीइ सेय पावग | |10 ||
सोच्चा जाणइ कल्लाण, सोच्चा जाणइ पावग।
उभयम्पि जाणेई सोच्चा, ज सेय त समायरे।।11 ||
जो जीवे वि याणइ, अजीवे वि ण याणइ।
जीवाजीवे अयाणन्तो, कह सो नाहीइ सजम ? |12||
जो जीवे वि वियाणइ, अजीवे वि वियाणइ।
जीवाजीवे वियाणन्तो, सो हु नाहीइ सजम ? |13 ||
EिDIESTI/ASADASIANESED/AAानका स्वाध्याय माला-69
जया जीव-मजीवे य, दो वि एए वियाणइ।
तया गइ बहु-विह, सव्व जीवाण जाणइ ।।14।।
जया गइ बहु-विह, सव्व जीवाण जाणइ।
तया पुण्ण च पाव च, बन्ध मोक्ख च जाणइ ।।15।।
जया पुण्ण च पाव च, बन्ध मोक्ख च जाणइ।
तया णिविन्दए भोए, जे दिव्वे जे य माणुसे ।।16 ।।
जया णिविन्दए भोए, जे दिव्वे जे य माणुसे।
तया चयइ संजोग,
सब्भिन्तर बाहिर। 17 ||
तया चयइ संजोग, सब्भिन्तर बाहिरं।
तया मुण्डे भवित्ताण, पव्वइए अणगारिय । |18 ।।
जया मुण्डे भवित्ताणं, पव्वइए अणगारिय।
तया सवर-मुक्किटुं, धम्म फासे अणुत्तर ।।19 ।।
जया सवर-मुक्किट्ठ, धम्मं फासे अणुत्तर ।
तया धुणेइ कम्म-रय, अबोहि-कलुस कड | 120 ||
जया धुणेइ कम्म-रयं, अबोहि-कलुस कड।
तया सव्वत्तग णाण, दसण चाभि-गच्छइ ।।21 ||
जया सव्वत्तग णाण, दसण चाभि-गच्छइ ।
तया लोग-मलोग च, जिणो जाणइ केवली। 122 ||
जया लोग-मलोग च, जिणो जाणइ केवली।
तया जोगे निरूम्भित्ता, सेलेसि पडिवज्जइ ।।23 ।।
जया जोगे निरूम्भित्ता, सेलेसि पडिवज्जइ।
तया कम्म खवित्ताण, सिद्धिं गच्छइ णीरओ।।24।।
जया कम्म खवित्ताण, सिद्धिं गच्छइ णीरओ।
तया लोग-मत्थ यत्थो, सिद्धो हवइ सासओ।।25।।
सुह-सायगस्स समणस्स, साया-उलगस्स णिगाम-साइस्स।
उच्छोल्लणा-पहोअस्स, दुल्लहा सुगइ तारिस-गस्स | 26 ||
।
70-स्वाध्याय माला SasasasasranaSaraswayam)
तवो गुण-पहाणस्स, उज्जुमइ खन्ति-सजम-रयस्स ।
परीसह जिण-तस्स, सुल्लहा सुगई तारिस गस्स | |27 ।।
पच्छा वि ते पयाया, खिप्प गच्छन्ति अमर-भवणाइ।
जेसि पिओ तवो सजमो अ, खति अ बम्भचेर च ।।28 ।।
इच्चेयं छज्जीवणिअ, सम्म-द्दिद्धि
सया जए।
दुल्लह लहित्तु सामण्ण, कम्मुणा ण विराहिज्जासि ।।29 ।।
।। छज्जीवणिआ नाम चउत्थ अज्झयण समत्त ।।
पिंडेसणा णाम पंचमज्झयणं
प्रथम उद्देशक
सपत्ते भिक्ख-कालम्मि, असभन्तो अमुच्छिओ।
इमेण कम्म-जोगेण, भत्त-पाण गवेसए।।1।।
से गामे वा णयरे वा, गोयरग्ग-गओ मुणी।
चरे मद-मणुव्विग्गो, अव्वक्खित्तेण चेयसा ।।2।।
पुरओ जुग-मायाए, पेहमाणो महि चरे।
वज्जतो बीय-हरियाइ, पाणे य दग-मट्टिय ।।3।।
ओवाय विसम खाणु, विज्जल परिवज्जए।
सकमेण ण गच्छेज्जा, विज्जमाणे परक्कमे ।।4।।
पवडते व से तत्थ, पक्खलन्ते व सजए।
हिसेज्ज पाण-भूयाइ. तसे अदुव थावरे ।।5।।
तम्हा तेण ण गच्छिज्जा, सजए सुसमाहिए।
सइ अण्णेण मग्गेण, जयमेव परक्कमे । 16 ||
इगाल छारिय रासि, तुस-रासि च गोमय ।
ससरक्खेहि पाएहि, सजओ त णाइक्कमे ।।7 ||
।
विdिaSICADDADASANASANTASY स्वाध्याय माला- 71
ण चरेज्ज वासे-वासते. महियाए व पडन्तिए।
महावाए व वायन्ते, तिरिच्छ-सम्पाइमेसु वा।।8।।
ण चरेज्ज वेस-सामन्ते, बम्भचेर-वसाणुए।
बभयारिस्स दंतस्स, होज्जा तत्थ विसुत्तिया ।। ।।
अणाययणे चरन्तस्स, ससग्गीए अभिक्खण।
होज्जा वयाण पीला, सामण्णम्मि य संसओ। 11011
तम्हा एय वियाणित्ता, दोसं दुग्गइ-वडण।
वज्जए वेस-सामन्तं, मुणी एगत-मस्सिए। 11 ।।
साण सूइय गावि, दित्त गोण हयं गय।
सुण्डिब्भ कलह जुद्ध, दूरओ परिवज्जए। 112 ||
अणुण्णए णावणए, अप्पहिडे अणाउले।
इदियाइ जहाभाग, दमइत्ता मुणी चरे । 113 ।।
दव-दवस्स ण गच्छेज्जा, भासमाणो य गोयरे।
हसन्तो णाभिगच्छेज्जा, कुल उच्चावय सया। 114 ||
आलोय थिग्गल दार, सन्धि दग-भवणाणि य।
चरतो ण विणिज्झाए, सकट्ठाण विवज्जए | 115 ।।
रण्णो गिह-वईण च, रहस्सा रक्खियाणि य।
सकिलेस-करं ठाण, दूरओ परिवज्जए। 116 ||
पडिकुट्ट कुल ण पविसे, मामग परिवज्जए।
अचियत्त कुलं ण पविसे, चियत्तं पविसे कुल । |17 ||
साणी-पावार-पिहिय, अप्पणा णाव -पगुरे।
कवाडं णो पणुल्लिज्जा, उग्गहन्सि अजाइया ||18 ||
गोयरग्ग-पविट्ठो य, वच्चमुत्त ण धारए।
ओगासं फासुय णच्चा, अणुण्ण वि य वोसिरे।।19 ।।
णीयं दुवार तमस, कुट्ठग परिवज्जए।
अचक्खु-विसओ जत्थ, पाणा दुप्पडिलेहगा।।20।।
क
72-स्वाध्याय माला विवSESaSasasra
जत्थ पुप्फाइ बीयाइ, विप्पइण्णाइ कोट्टए।
अहुणोव-लित्त उल्ल, दठूण परिवज्जए ।।21 ||
एलग दारगं साण, वच्छग वावि कोट्ठए।
उल्लघिया ण पविसे, विउहित्ताण व सजए। 22 ||
अससत्त पलोइज्जा, णाइ दूराव-लोयए ।
उप्फुल्ल ण विणिज्झाए, णियट्टिज्ज अयम्पिरो।।23 ।।
अइभूमि ण गच्छेज्जा, गोयरग्ग-गओ मुणी।
कुलस्स भूमि जाणित्ता, मिय भूमि परक्कमे ।।24।।
तत्थेव पडिलेहिज्जा, भूमिभाग वियक्खणो।
सिणाणस्स य वच्चस्स, सलोग परिवज्जए।।25।।
दग-मट्टिय आयाणे, बीयाणि हरियाणि य।
परिवज्जतो चिट्टिज्जा, सव्विन्दिय समाहिए ।।26 ||
तत्थ से-चिट्टमाणस्स, आहारे पाण-भोयण ।
अकप्पिय ण गिव्हिज्जा, पडिगाहिज्ज कप्पिय ।।27 ||
आहारती सिया तत्थ, परिसाडिज्ज भोयण ।
दिन्तिय पडियाइक्खे, ण मे कप्पइ तारिस । |28 ||
सम्मद्दमाणी पाणाणि, बीयाणि हरियाणि य।
असजम-करि णच्चा, तारिस परिवज्जए। 129 ।।
साहटु णिक्खिवित्ता ण, सचित घट्टियाणि य ।
उदग सम्पणुल्लिया।।30 ||
ओगाहइत्ता चलइत्ता, आहारे पाण-भोयण ।
दिन्तिय पडियाइक्खे, ण मे कप्पइ तारिस । 131 ||
पुरेकम्मेण हत्थेण, दव्वीए भायणेण वा।
दिन्तिय पडियाइक्खे, ण मे कप्पइ तारिस । |32 ।।
एव उदउल्ले ससिणिद्धे, ससरक्खे मट्टिया-ऊसे।
हरियाले हिगुलए, मणोसिला अजणे लोणे।।33 ।।
तहेव समणट्ठाए,
विदESERVARANASनिन स्वाध्याय माला-73
गेरुय वण्णिय सेडिय, सोरट्टिय पिट्ट कुक्कुस कए य ।
उक्किट्ठ-मसंसट्टे, ससट्टे चेव बोद्धव्वे ।।3411
अससट्टेण हत्थेण, दव्वीए भायणेण वा।
दिज्जमाणं ण इच्छिज्जा, पच्छा-कम्म जहि भवे ।।35 ।।
संसटेण य हत्थेण, दव्वीए भायणेण वा।
दिज्जमाण पडिच्छिज्जा, ज तत्थेसणियं भवे ।।36 ||
दुण्ह तु भुंजमाणाण, एगो तत्थ णिमन्तए।
दिज्जमाण ण इच्छिज्जा, छन्द से पडिलेहए। 137 ।।
दुण्ह तु भुंजमाणाण, दोवि तत्थ णिमन्तए।
दिज्जमाणं पडिच्छिज्जा, ज तत्थेसणिय भवे।।38 ।।
गुठ्विणीए उवण्णत्थ, विविहं पाण-भोयण ।
भुञ्जमाण विवज्जिज्जा, भुत्त-सेस पडिच्छए। 139 ।।
सिया य समणट्ठाए, गुविणी काल-मासिणी ।
उडिआ वा णिसीइज्जा, णिसण्णा वा पुणुट्टए । [40 ।।
त भवे भत्तपाण तु, सजयाण अकप्पिय ।
दिन्तिय पडियाइक्खे, ण मे कप्पइ तारिस | |41||
थणग पिज्जमाणी, दारग वा कुमारियं ।
त णिक्खिवित्तु रोयन्त, आहरे पाण भोयण | 142 ||
त भवे भत्तपाणं तु, सजयाणं अकप्पिय ।
दितिय पडियाइक्खे, “ण मे कप्पइ तारिस" 1 143 11
ज भवे भत्तपाण तु कप्पा-कप्पम्मि सकिय ।
दितिय पडियाइक्खे, ण मे कप्पइ तारिसं। 144 ||
दग-वारेण पिहिय, णीसाए पीढएण वा।
लोढेण वावि लेवेण, सिलेसेण व केणइ ।।45 ||
त च उभिन्दिया दिज्जा, समणवाए व दावए।
दितिय पडियाइक्खे, ण मे कप्पइ तारिस ।।46 ||
74 - स्वाध्याय माला Esamasasaradastaraman
असण पाणगं वावि, खाइम साइम तहा।
जं जाणिज्ज सुणिज्जा वा, दाणट्ठा पगड इम ।।47 ||
त भवे भत्तपाण तु, सजयाण अकप्पिय ।
दितिय पडियाइक्खे, ण मे कप्पइ तारिस । 148 ।।
असण पाणग वावि, खाइम साइम तहा।
ज जाणिज्ज सुणिज्जा वा, पुण्णट्ठा पगड इम । 149 ||
त भवे भत्तपाण तु, सजयाण अकप्पिय ।
दितिय पडियाइक्खे, ण मे कप्पइ तारिस ।।50 11
असण पाणग वावि, खाइम साइम तहा।
ज जाणिज्ज सुणिज्जा वा, वणीमट्ठा पगड इम। 151 ।।
त भवे भत्तपाण तु, सजयाणं अकप्पिय ।
दितिय पडियाइक्खे, ण मे कप्पइ तारिस । 152 ||
असण पाणग वावि, खाइम साइम तहा।
जं जाणिज्ज सुणिज्जा वा, समणट्ठा पगड इम। 153 ।।
त भवे भत्तपाण तु, सजयाण अकप्पिय ।
दितिय पडियाइक्खे, ण मे कप्पइ तारिस । |54 ||
उद्देसिय कीयगड, पूइकम्म च आहड |
अज्झोयर पामिच्च, मीस-जाय विवज्जए। 155 ||
उग्गम से य पुच्छेज्जा, कस्सट्टा केण वा कड।
सुच्चा णिस्सकिय सुद्ध, पडिगाहिज्ज सजए | 156 ||
असण पाणग वावि, खाइम साइम तहा।
पुप्फेसु हुज्ज उम्मीस, बीएसु हरिएसु वा। 157 ।।
त भवे भत्तपाण तु, सजयाण अकप्पिय ।
दितिय पडियाइक्खे, ण मे कप्पइ तारिस । 158 ||
असण पाणग वावि, खाइम साइम तहा।
उदगम्मि हुज्ज णिक्खित्त, उत्तिग-पणगेसु वा । [59 ।।
निवाSAMESEASE स्वाध्याय माला-75
तं भवे भत्तपाण तु, संजयाणं अकप्पियं ।
दितिय पडियाइक्खे, ण मे कप्पइ तारिस । 160 ||
असण पाणगं वावि, खाइम साइम तहा।
अगणिम्मि होज्ज णिक्खित्त, त च संघट्टिया दए। 161 ||
तं भवे भत्तपाणं तु, संजयाण अकप्पिय ।
दितियं पडियाइक्खे, ण मे कप्पइ तारिस । 162 ||
एव उस्सक्किया ओसक्किया, उज्ज-लिया पज्जालिया णिव्वाविया।
उस्सिंचिया पिस्सिचिया, उववत्तिया ओयारिया दए। 163 ||
तं भवे भत्तपाणं तु, सजयाणं अकप्पिय ।
दिन्तियं पडियाइक्खे, ण मे कप्पइ तारिस । 164 ।।
हुज्ज कट्ट सिल वावि, इट्टाल वावि एगया।
ठवियं संकमट्ठाए, त च हुज्ज चलाचल | 165 ||
ण तेण भिक्खू गच्छिज्जा, दिवो तत्थ असंजमो।
गम्भीर झुसिरं चेव, सव्विन्दिय-समाहिए। 166 ।।
णिस्सेणि फलगं पीढ, उस्सवित्ताण-मारुहे।
मंचं कील य पासाय समणट्टाए व दावए। 167 ||
दुरुहमाणी पवडिज्जा, हत्थ पाय व लूसए।
पुढवी जीवे वि हिन्सेज्जा, जे य तण्णिस्सिया जगे। 168 ।।
एयारिसे महादोसे, जाणिऊण महेसिणो।
तम्हा मालोहडं भिक्खं, ण पडिगिण्हति संजया। 16911
कन्द मूलं पलम्बं वा, आम छिण्णं य सण्णिर।
तुम्बागं सिंगबेरं य, आमग परिवज्जए | 170 ||
तहेव सत्तु-चुण्णाई, कोल-चुण्णाइ आवणे ।
सक्कुलिं फाणियं पूय, अण्ण वावि तहाविह 1 17111
विक्कायमाण पसढ, रएण परिफासिय।
दिन्तिय पडियाइक्खे, ण मे कप्पइ तारिस । 17211
,
.
aanasana
76- स्वाध्याय माला ASEASVasana
बहु-अट्टिय पुग्गल, अणिमिस वा बहु-कण्टय ।
अस्थिय तिन्दुय बिल्ल, उच्छु-खण्ड व सिम्बलि ।।73 ।।
अप्पे सिया भोयण जाए, बहु-उज्झिय-धम्मिय।
दिन्तिय पडियाइक्खे, ण मे कप्पइ तारिस । 174||
तहे-वुच्चावय पाणं,
अदुवा वार-धोयण।
ससेइम चाउलोदग, अहुणा-धोय विवज्जए। 175 ||
ज जाणेज्ज चिराधोय, मईए दसणेण वा।
पडिपुच्छिऊण सुच्चा वा, ज च णिस्सकिय भवे। 176 ||
अजीव परिणयं णच्चा, पडिगाहिज्ज सजए।
अह सकियं भविज्जा, आसाइत्ताण रोयए । |77 ||
थोव-मासायण-ट्टाए, हत्थगम्मि दलाहि मे।
मा मे अच्चम्बिल पूय, णाल तिण्ह विणित्तए । [78 ।।
त च अच्चम्बिलं पूय, णाल तिण्ह विणित्तए।
दिन्तिय पडियाइक्खे, ण मे कप्पइ तारिस ।।79 ||
त च हुज्ज अकामेण, विमणेण पडिच्छिय।
त अप्पणा ण पिबे, णोवि अण्णस्स दावए। 180 ||
एगन्त-मवक्कमित्ता, अचित पडिले हिया।
जय परिट्टविज्जा, परिठ्ठप्प पडिक्कमे । 181 ||
सिया य गोयरग्ग-गओ, इच्छिज्जा परिभुत्तुय ।
कुट्ठग भित्ति-मूल वा, पडिलेहित्ताण फासुय | 182 ||
अणुण्ण-वित्तु मेहावी, पडिच्छिण्णम्मि सम्वुडे ।
हत्थग सपमज्जित्ता, तत्थ भुजिज्ज सजए ।।83 ||
तत्थ से भुजमाणस्स, अट्टिय कण्टओ सिया।
तण-कट्ठ-सक्कर वावि, अण्ण वावि तहाविह। 184 ||
त उक्खिवित्तु ण णिक्खिवे, आसएण ण छड्डए ।
हत्थेण त गहेऊण, एगन्त-मवक्कमे ।।85 ||
DिAMADARAMATAasaadTENT स्वाध्याय माला-77
एंगत-मवक्कमित्ता, अचित्त पडिलेहिया।
जय परिडवेज्जा, परिठ्ठप्प पडिक्कमे । 18611
सिया य भिक्खु इच्छिज्जा, सिज्ज-मागम्म भुत्तुयं ।
स-पिण्ड-पायमागम्म, उडुय पडिले हिया। 187 ||
विणएण पविसित्ता, सगासे गुरुणो मुणी।
इरियावहिय-मायाय, आगओ य पडिक्कमे। 188 ।।
आभोइत्ताण णीसेस, अइयारं य जहक्कमं।
गमणागमणे चेव, भत्तपाणे व
सजए।18911
उज्जु-प्पण्णो अणुविग्गो, अवक्खितेण चेयसा।
आलोए गुरु सगासे, ज जहा गहिय भवे। 190 ।।
ण सम्म-मालोइयं हुज्जा, पुट्विं पच्छा व ज कड।
पुणो पडिक्कमे तस्स, वोसिट्ठो चितए इम | 91 ।।
अहो ! जिणेहि असावज्जा, वित्ती साहूण देसिया ।
मोक्ख-साहण हेउस्स, साहु-देहस्स धारणा। 192 }}
णमुक्कारेण पारित्ता, करित्ता जिण सथव ।
सज्झाय पट्टवित्ताण, वीसमेज्ज खण मुणी। 193 ||
वीसमन्तो इम चिन्ते, हियमट्ठ लाभ-मडिओ।
जइ मे अणुग्गह कुज्जा, साहू हुज्जामि तारिओ। 194 ||
साहवो तो चियत्तेण, णिमतिज्ज जहक्कम।
जइ तत्थ केइ इच्छिज्जा, तेहिं सद्धिं तु भुजए। 195 11
अह कोइ ण इच्छिज्जा, तओ भुजिज्ज एगओ।
आलोए भायणे साहू, जयं अपरिसाडिय। 196 ||
तित्तगंव कडुय व कसाय, अम्बिलं व महुर लवण वा।
एयलद्ध-मण्णट्ट-पउत्तं, महुधयं व भुजिज्ज संजए। 197 { {
अरस विरसं वा वि, सूइय वा असूइय।
उल्लं वा जइ वा सुक्कं, मन्थु-कुम्मास-भोयण । 198 ।।
78 - स्वाध्याय माला बिERaranaanaapan
उप्पण्ण णाइ-हीलिज्जा, अप्प वा बहु फासुय ।
मुहालद्ध मुहा-जीवी, भुजिज्जा दोस-वज्जिय। 199 ।।
दुल्लहा उ मुहादाई, मुहाजीवी वि दुल्लहा।
मुहादाई मुहाजीवी, दो वि गच्छति सुग्गइ।। त्तिबेमि।। ||100 ||
।। इति पिण्डसणाए पढमा उद्दसा समत्ता ||1||
पिण्डेसणाए बिओ उद्देशो
पडिग्गह संलि-हित्ताण, लेव-मायाए सजए।
दुगन्ध वा सुगन्ध वा, सव्व भुजे ण छड्डए ।।1।।
सेज्जा णिसीहियाए, समावण्णो य गोयरे।
अयावयट्टा भुच्चाण, जइ तेण ण सथरे ।।2।।
तओ कारण समुप्पण्णे, भत्तपाण गवेसए।
विहिणा पुव्व-उत्तेण, इमेणं उत्तरेण य ।।3।।
कालेण णिक्खमे भिक्खू, कालेण य पडिक्कमे ।
अकाल च विवज्जित्ता, काले काल समायरे।।4।।
अकाले चरसि भिक्खू, काल ण पडिलेहसि ।
अप्पाण य किलामेसि, सण्णिवेस च गरिहसि ।।5।।
सइ काले चरे भिक्खू, कुज्जा पुरिसकारिय |
अलाभोत्ति ण सोइज्जा, तवो त्ति अहियासए ।।6 ||
तहेवुच्चावया पाणा, भत्तट्टाए समागया।
त उज्जुय ण गच्छिज्जा, जयमेव परक्कमे। 17 ||
गोयरग्ग-पविठ्ठो य, ण णिसीइज्ज कत्थई ।
कह च ण पबन्धिज्जा, चिट्टित्ताण व सजए ।।8।।
अग्गल फलिह दार, कवाड वावि सजए।
अवलम्बिया ण चिट्ठिज्जा, गोयरग्ग-गओ मुणी। 19 ।।
विविवानिवजावानी
. समणं माहणं वावि, किविणं वा वणीमग। उवसंक-मन्तं भत्तट्ठा, पाणहाए व संजए। 110 || तमइक्कमित्तु ण पविसे, ण चिट्टे चक्खु-गोयरे। एगत-मवक्कमित्ता, तत्थ चिट्ठिज्ज संजए। 11 ।। वणीमगस्स वा तस्स, दायगस्सुभयस्स वा। अप्पत्तियं सिया हुज्जा, लहुत्त पवयणस्स वा।।12 || पडिसेहिए व दिण्णे वा, तओ तम्मि णियत्तिए। उवसक-मिज्ज भत्तट्ठा, पाणट्टाए व सजए। 113 11 उप्पल पउम वावि, कुमुय वा मगदन्तिय । अण्णं वा पुप्फ-सचित्त, त च सलुचिया दए ।।14।। त भवे भत्तपाण तु, सजयाण अकप्पिय । दितिय पडियाइक्खे, "ण मे कप्पइ तारिस” | 115 ।। उप्पल पउम वावि, कुमुय वा मगदतिय । अण्णं वा पुप्फ-सच्चित्त, त च सम्मद्दिया दए। 116 ।। त भवे भत्तपाण तु, सजयाण अकप्पिय । दितिय पडियाइक्खे, “ण मे कप्पइ तारिस" ||17 || सालय वा विरालिय, कुमुय उप्पल-णालिय। मुणालियं सासव-णालिय, उच्छुखण्ड अणिवुड । 118 ।। तरुणग वा पवाल, रुक्खस्स तणगस्स वा। अण्णस्स वावि हरियस्स, आमग परिवज्जए। 119 ।। तरुणिय वा छिवाडिं, आमिय भज्जिय सइं। दितिय पडियाइक्खे, ण मे कप्पइ तारिस ।।20।। तहा कोल-मणुस्सिण्णं, वेलुय कासव-णालिय। तिल-पप्पडग णीमं, आमग परिवज्जए ||21|| तहेव चाउलं पिटुं, वियडं वा तत्तऽणिव्वुड । तिल-पिट्ठ पूइ-पिण्णागं, आमगं परिवज्जए ।।22 || - w- 80- स्वाध्याय माला aaaaaaasarasana
कविटुं माउलिंग य, मूलगं मूलगत्तिय ।
आम असत्थ-परिणय, मणसा वि ण पत्थए।।23।।
तहेव फलमन्थूणि, बीयमथूणि जाणिया।
विहेलग पियालं य, आमगं परिवज्जए। 124 ||
समुयाणं चरे भिक्खू, कुल-मुच्चावयं सया।
णीय कुल-मइक्कम्म, ऊसढं णाभिधारए। 25 ।।
अदीणो वित्ति-मेसिज्जा, ण विसीइज्ज पंडिए।
अमुच्छिओ भोयणम्मि, मायण्णे एसणा रए ।।26 ।।
"बहु परघरे अत्थि, विविह खाइम-साइमं ।
ण तत्थ पण्डिओ कुप्पे, इच्छा दिज्ज परो ण वा। 27 ||
सयणासण वत्थं वा, भत्त-पाणं च सजए।
अदिन्तस्स ण कुप्पिज्जा, पच्चक्खे वि य दीसओ।।28 ।।
इत्थियं पुरिसं वावि, डहरं वा महल्लगं।
वंदमाण ण जाइज्जा, णो य ण फरुसं वए।।29 ।।
जे ण वंदे ण से कुप्पे, वन्दिओ ण समुक्कसे।
एवमण्णे समाणस्स, सामण्ण-मणुचिट्ठइ।।30 ।।
सिया एगइओ लद्धं, लोभेण विणिगूहइ।
“मामेयं दाइय सन्तं, दळूण सयमायए" ||31 ||
अत्तट्ठा-गुरुओ लुद्धो, बहुपावं पकुव्वइ ।
दुत्तोसओ य से होइ, णिव्वाणं च ण गच्छइ ।।32||
सिया एगइओ लड़े, विविहं पाण-भोयण।
भद्दग-भद्दग भुच्चा, विवण्ण विरस-माहरे ।।33 ।।
जाणतु ता इमे समणा, “आययट्ठी अय मुणी।
संतुट्टो सेवए पन्त, लूह-वित्ती सुतोसओ। 134 ||
पूयणट्टी जसोकामी, माण-सम्माण-कामए।
बहु पसवइ पावं, माया सल्लं य कुव्वइ ।।35 ||
विमानामावलSERIENTATA स्वाध्याय माला-81
-
सुर वा मेरगं वावि, अण्णं वा मज्जगं रसं।
ससक्खं ण पिबे भिक्खू, जसं सारक्ख-मप्पणो । 136 ।।
पियए एगओ तेणो, ण मे कोइ वियाणइ।
तस्स पस्सह दोसाई, णियडिं च सुणेह मे। 13711
वड्डइ सुण्डिया तस्स, माया-मोसं य भिक्खूणो।
अयसो य अणिव्वाणं, सयय च असाहुया। 138 ||
णिच्चुविग्गो जहा तेणो, अत्त-कम्मेहि दुम्मई।
तारिसो मरणंते वि, ण आराहेइ संवरं। 13911
आयरिए णाराहेइ, समणे यावि तारिसो।
गिहत्था वि णं गरिहंति, जेण जाणति तारिस । 14011
एव तु अगुण-प्पेही, गुणाणं च विवज्जए।
तारिसो मरणन्तेऽवि, ण आराहेइ संवर 114111
तव कुव्वइ मेहावी, पणीय वज्जए रसं ।
मज्ज-प्पमाय-विरओ, तवस्सी अइउक्कसो। 1421|
तस्स पस्सह कल्लाणं, अणेग-साहु-पूइयं ।
विउलं अत्थ-संजुत्तं, कित्तइस्सं सुणेह मे।।43 ।।
एवं तु गुण-प्पेही, अगुणाणं य विवज्जए।
तारिसो मरणन्तेवि, आराहेइ संवरं । 4411
आयरिए आराहेइ, समणे यावि तारिसो।
गिहत्थावि णं पूयंति, जेण जाणंति तारिसं। 14511
तव-तेणे वय-तेणे, रूव-तेणे य जे णरे।
आयार-भाव-तेणे य, कुव्वइ देव-किविसं 1146 ।।
लखूणं वि देवत्तं, उववण्णो देव-किविसे।
तत्था वि से ण याणेइ, किं मे किच्चा इमं फलं? 1147 11
तत्तो वि से चइत्ताणं, लब्मइ एल-मूयगं।
णरगं तिरिक्ख-जोणि वा, बोही जत्थ सुदुल्लहा। 148 ।।
82-स्वाध्याय माला विनवनात
वारविकका
एयं च दोसं दटूण, णायपुत्तेण भासियं । अणुमायंऽपि मेहावी, माया-मोसं विवज्जए।।49 ।। सिक्खिऊण भिक्खेसण सोहि, संजयाण बुद्धाण सगासे। तत्थ भिक्खु सुप्पणिहिन्दिए, तिव्व लज्ज-गुणव विहरिज्जासि ।।50 || ॥ इति पिण्डसणाए बोआ उद्दसा। 1211 ।। पंचमज्झयणं समत्तं ।।5।। उत्तराध्ययन सूत्र के कतिपय अध्ययन || अहणवम-नमिपवज्जा-णामज्झयणं ॥९॥ . चइऊण देव-लोगाओ, उववण्णो माणुसम्मि लोगम्मि । उवसन्त-मोहणिज्जो, सरइ पोराणियं जाई।।1।। जाइं सरित्तु भयवं, सयं-सम्बुद्धो अणुत्तरे धम्मे। पुत्त ठवेत्तु रज्जे, अभिणिक्खमइ णमी राया। 12 || सो देवलांग-सरिसे, अन्तेउर-वरगओ वरे भोए। भुञ्जित्तु णमी राया, बुद्धो भोगे परिच्चयइ ।।3।। मिहिलं सपुर-जणवयं, बल-मोरोहं च परियणं सव्व। चिच्चा अभिणिक्खतो, एगंत-महिडिओ भयव ।।4।। कोलाहलग-सम्भूय, आसी मिहिलाए पव्वयतम्मि । तइया राय-रिसिम्मि, णमिम्मि अभिणिक्ख-मतम्मि। 15 ।। अब्भुट्टियं रायरिसिं, पव्वज्जा ठाण-मुत्तमं । सक्को माहण-रूवेण, इम वयण-मब्बवी।।6 || विमानवानाARASANATASTERनन स्वाध्याय माला-83
किण्णु भो ! अज्ज मिहिलाए, कोलाहलग-संकुला।
सुव्वन्ति दारूणा सद्दा, पासाएसु गिहेसु य।।7।।
एयमहूं णिसामित्ता, हेऊ-कारण-चोइओ।
तओ णमी रायरिसी, देविन्दं इण-मब्बवी।।8।।
मिहिलाए चेइए वच्छे, सीय-च्छाए मणोरमे।
पत्त-पुप्फ-फलोवेए, बहूणं बहु-गुणे सया।।७।।
वाएण हीरमाणम्मि, चेइयम्मि मणोरमे।
दुहिया असरणा अत्ता, एए कंदन्ति भो ! खगा। 110 ।।
एयमटुं णिसामित्ता, हेऊ-कारण-चोइओ।
तओ णमि रायरिसि, देविन्दो इण-मब्बवी।।11।।
एस अग्गी य वाऊ य, एयं डज्झइ मन्दिरं।
भयवं अन्तेउरं तेण, कीस ण णाव-पेक्खह ! |12||
एयमहूं णिसामित्ता, हेऊ-कारण-चोइओ।
तओ णमी रायरिसी, देविन्दं इण-मब्बवी।।13।।
सुहं वसामो जीवामो, जेसिं मो णत्थि किंचण।
मिहिलाए डज्झ-माणीए, ण मे डज्झइ किचणं।।14।।
चत्त-पुत्त-कलत्तस्स, णिव्वा-वारस्स भिक्खुणो।
पियं ण विज्जइ किञ्चि, अप्पियं वि ण विज्जइ ।।15।।
बहुं खु मुणिणो भई, अणगारस्स भिक्खुणो।
सव्वओ विप्पमुक्कस्स, एगन्त-मणुपस्सओ | 116 |
एयम8 णिसामित्ता, हेऊ-कारण-चोइओ।
तओ णमि रायरिसिं, देविन्दो इण-मब्बवी । 117 11
पागारं कारइत्ताणं, गोपुर-ट्टालगाणि य।
उस्सूलग-सयग्घीओ, तओ गच्छसि खत्तिया । 118 ।।
एयमटुं णिसामित्ता, हेऊ-कारण-चोइओ।
तओ णमी रायरिसी, देविन्दं इण-मब्ववी।।19 ||
84-स्वाध्याय माला बना
विमानना
।
३
सद्ध णगर किच्चा, तव संवर- मग्गल ।
खन्तिं णिउण-पागारं, तिगुत्त दुप्पधसय । 120 ||
धणुं परक्कम किच्चा, जीवं च इरिय सया।
धिइं च केयणं किच्चा, सच्चेण पलिमन्थए । 21 ।।
तव णाराय जुत्तेण, भित्तूण कम्म-कञ्चय ।
मुणी विगय-संगामो, भवाओ परिमुच्चए। 122 ||
एयमट्ट णिसामित्ता, हेऊ-कारण-चोइओ।
तओ णमि रायरिसिं, देविन्दो इण-मब्बवी ।।23 ||
पासाए कारइत्ताणं, वद्ध माण-गिहाणि य।
वालग्ग-पोइयाओ य, तओ गच्छसि खत्तिया। 124 ।।
एयमट्ठ णिसामित्ता, हेऊ-कारण-चोइओ।
तओ णमी रायरिसी, देविन्दं इण-मब्बवी । 125 ||
ससयं खलु सो कुणई, जो मग्गे कुणई घरं।
जत्थेव गंतु-मिच्छेज्जा, तत्थ कुव्वेज्ज सासयं । 126 ।।
एयमट्ठ णिसामित्ता, हेऊ-कारण-चोइओ।
तओ णमि रायरिसिं, देविन्दो इण-मब्बवी | 127 ||
आमोसे लोमहारे य, गण्ठिभेए य तक्करे |
णगरस्स खेमं काऊण, तओ गच्छसि खत्तिया।।28।।
एयमट्ठ णिसामित्ता, हेऊ-कारण-चोइओ।
तओ णमी रायरिसी, देविन्दं इण-मब्बवी।।29 ||
असइ तु मणुस्सेहि, मिच्छा-दण्डो पउञ्जइ ।
अकारिणो-ऽत्थ वज्झति, मुच्चई कारओ जणो।।30 ।।
एयमट्ट णिसामित्ता, हेऊ-कारण-चोइओ।
तओ णमि रायरिसिं, देविन्दो इण-मब्बवी ।।31 ।।
जे केइ पत्थिवा तुज्झं, णाऽणमति णराहिवा ।
वसे ते ठावइत्ताणं, तओ गच्छसि खत्तिया । 132 ।।
बवावगावागावान स्वाध्याय माला-85
।
एयमटुं णिसामित्ता, हेऊ-कारण-चोइओ।
तओ णमी रायरिसी, देविन्दं इण-मब्बवी।।33 ||
जो सहस्सं सहस्साणं, संगामे दुज्जए जिणे।
एग जिणेज्ज अप्पाणं, एस से परमो जओ।।34।।
अप्पाण-मेव जुज्झाहि, किं ते जुज्झेण वज्झओ।
अप्पाणमे व-मप्पाणं, जिणित्ता सुहमे हए । 135 ||
पंचिन्दियाणि कोहं, माणं मायं तहेव लोहं च।
दुज्जयं चेव अप्पाणं, सव्वं अप्पे-जिए जियं । 136 11
एयमटुं णिसामित्ता, हेऊ-कारण-चोइओ।
तओ णमि रायरिसि, देविन्दो इण-मब्बवी। 137 ||
जइत्ता विउले जण्णे, भोइत्ता समण-माहणे।
दच्चा भोच्चा य जिहा य, तओ गच्छसि खत्तिया। 138 ।।
एयमटुं णिसामित्ता, हेऊ-कारण-चोइओ।
तओ णमी रायरिसी, देविन्द इण-मब्बवी।।39 ||
जो सहस्सं सहस्साणं, मासे मासे गव दए।
तस्सावि संजमो सेओ, अदिन्तस्स-ऽवि किञ्चणं। 140 ||
एयमटुं णिसामित्ता, हेऊ-कारण-चोइओ।
तओ णमि रायरिसि, देविन्दो इण-मब्ववी।14111
घोरासमं चइत्ताण अण्ण पत्थेसि आसमं ।
इहेव पोसह-रओ, भवाहि मणुयाहिवा। 142 ||
एयम8 णिसामित्ता, हेऊ-कारण-चोइओ।
तओ णमी रायरिसी, देविन्दं इण-मब्बवी।।43 ||
मासे मासे उ जो बालो, कुसग्गेणं तु भुञ्जए।
ण सो सुयक्खाय धम्मस्स, कलं अग्घइ सोलसिं। 144 ।।
एयमटुं णिसामित्ता, हेऊ-कारण-चोइओ।
तओ णमि रायरिसिं, देविन्दो इण-मब्बवी । 45 ||
86- स्वाध्याय माला बिलावादनाARARIAAAAHAamad
हिरण्ण सुवण्ण मणि-मुत्तं, कंसं दूस च वाहण।
कोसं वड्डा-वइत्ताण, तओ गच्छसि खत्तिया । 146 ||
एयमट्ट णिसामित्ता,
हेऊ-कारण-चोइओ।
तओ णमी रायरिसी, देविन्द इण-मब्बवी ||47 ।।
सुवण्ण-रुव्वस्स उ पव्वया भवे, सिया हु केलास समा असखया।
णरस्स लुद्धस्स ण तेहि किञ्चि, इच्छा हु आगास समा अणन्तिया। 148 |
पुढवी साली जवा चेव, हिरण्ण पसुभिस्सह ।
पडिपुण्ण णाल-मेगस्स, इइ विज्जा तव चरे।।49 ।।
एयमट्ट णिसामित्ता, हेऊ-कारण-चोइओ।
तओ णमि रायरिसि, देविन्दो इण-मब्बवी। 150 ||
अच्छेरग-मब्भुदए, भोए चयसि पत्थिवा !
असन्ते कामे पत्थेसि, सकप्पेण विहम्मसि । 151 ||
एयमट्ठ णिसामित्ता, हेऊ-कारण-चोइओ।
तओ णमी रायरिसी, देविन्दं इण-मब्बवी।।52 ||
सल्ल कामा विसं कामा, कामा आसी-विसोवमा।
कामे भोए पत्थेमाणा, अकामा जन्ति दोग्गइ । 153 ||
अहे वयइ कोहेणं, माणेण अहमा गइ।
माया गई-पडिग्घाओ, लोहाओ दुहओ भय | 154 ||
अवउज्झिऊण माहण रूवं, विउविऊण ईन्दत्त।
वदइ अभित्थुणन्तो, इमाहि महुराहि वग्गूहि ||55 ।।
अहो ते णिज्जिओ कोहो, अहो माणो पराजिओ।
अहो ते णिरक्किया माया, अहो लोहो वसीकओ। 156 ||
अहो ! ते अज्जवं साहु, अहो ! ते साहु मद्दव।
अहो ! ते उत्तमा खन्ती, अहो ते मुत्ति उत्तमा । |57 ||
इहन्सि उत्तमो भते, पच्छा होहिसि उत्तमो।
लोगुत्त-मुत्तम ठाणं, सिद्धि गच्छसि णीरओ। 158 ।।
विवादावादावन स्वाध्याय माला-87
।
एवं अभित्थुणन्तो, रायरिसिं उत्तमाए सद्धाए।
पयाहिणं करेन्तो, पुणो पुणो वंदइ सक्को।।59 ।।
तो वंदिऊण पाए, चक्कंकुस लक्खणे मुणिवरस्स।
आगासेणु-प्पईओ, ललिय-चवल-कुण्डल-तिरीडी। 16011
णमी णमेइ अप्पाण, सक्खं सक्केण चोइओ।
चइऊण गेहं च वेदेही, सामण्णे पज्जुवडिओ। 161}}
एवं करेन्ति सम्बुद्धा, पण्डिया पवियक्खणा।
विणियदृति भोगेसु, जहा से णमी रायरिसी।। ति बेमि । 162 ||
।। अह णवमं-नमिपवज्जा-णामज्झयणं 119 ।।
|| अह हरीएसिज्जं-बारह-अज्झयणं ||12||
सोवाग-कुल-सम्भूओ, गुणुत्तर-धरो मुणी।
हरिएस-बलो णाम, आसी भिक्खू जिइंदिओ।।1।।
इरि-एसण-भासाए, उच्चार-समिईसु य।
जओ आयाण-णिक्खेवे, संजओ सुसमाहिओ।।2।।
मण-गुत्तो वय-गुत्तो, काय-गुत्तो जिइन्दिओ।
भिक्खट्ठा बम्भ इज्जम्मि, जण्णवाड उवडिओ।।3।।
तं पासिऊणं एज्जन्तं, तवेण परिसोसिय {
पन्तोवहि उवगरणं, उवहसन्ति अणारिया।।4।।
जाईमय-पडिथद्धा, हिंसगा अजिइन्दिया।
अबम्भ-चारिणो बाला, इम वयण-मब्बवी। 15 11
कयरे आगच्छइ दित्त-रूवे, काले विकराले फोक्क-णासे।
ओमचेलए पंसु-पिसायभूए, संकर-दूसं परिहरिय कण्ठे । 16 ।।
कयरे तुम इय अदंसणिज्जे, काए व आसा-इह-मागओ सि।
ओमचेलया पंसु-पिसायभूया, गच्छ-क्खलाहि किमिहं टिओसि ।।१।।
88- स्वाध्याय माला बनवाबनवानाAARADARADARA
जक्खो तहि तिन्दुय-रुक्खवासी, अणुकम्पओ तस्स महामुणिस्स। पच्छाय-इत्ता णियग सरीरं, इमाइ वयणाइ-मुदाह-रित्था ।।8 || समणो अहं संजओ बम्भयारी, विरओ धण-पयण-परिग्गहाओ। परप्पवित्तस्स उ भिक्ख-काले, अण्णस्स अट्ठा इह-मागओमि। 19 ।। विय-रिज्जइ खज्जइ भुज्जई य, अण्ण पभूय भवयाण-मेय । जाणाहि मे जायणा जीविणुत्ति, सेसाव-सेस लभऊ तवस्सी। 110।। उवक्खडं भोयण माहणाणं, अत्तट्ठिय सिद्ध-मिहेग पक्ख। ण उ वय एरिस-मण्ण-पाणं, दाहामु तुज्झ किमिह ठिओसि ।।11।। थलेसु बीयाइ ववन्ति कासगा, तहेव णिण्णेसु य आससाए। एयाए सद्धाए दलाह-मज्झं, आराहए पुण्ण-मिणं खु खित्त । |12|| खेत्ताणि अम्हं बिइयाणि लोए, जहि पकिण्णा विरुहन्ति पुण्णा। जे माहणा जाइ विज्जोव-वेया, ताइ तु खेत्ताइं सुपेसलाई।।13।। कोहो य माणो य वहो य जेसिं, मोस अदत्त च परिग्गहं च । माहणा जाइविज्जा विहूणा, ताई तु खेत्ताइ सुपावयाइ।।14 ।। तुमेत्थ भो ! भार-धरा गिराण, अटुं ण जाणेह अहिज्ज वेए । उच्चावयाई मुणिणो चरन्ति, ताइ तु खेत्ताइ सुपेसलाइ । 115 ।। अज्झा-वयाणं पडिकूल-भासी, पभाससे किण्णु सगासि अम्ह । अवि एय विणस्सउ अण्ण-पाण, ण य णं दाहामु तुम णियण्ठा ।।16 || समिईहि मज्झं सुसमाहियस्स, गुत्तीहि गुत्तस्स जिइन्दियस्स । जइ मे ण दाहित्थ अहेसणिज्ज, किमज्ज जण्णाण लहित्थ लाह।।17 || के इत्थ खत्ता उवजोइया वा, अज्झावया वा सह खण्डिएहि। एय खु दण्डेण फलेण हन्ता, कण्ठम्मि घेत्तूण खलेज्ज जो ण ।।18 ।। अज्झावयाणं वयण सुणेत्ता, उद्धाइया तत्थ बहू कुमारा। दण्डेहि वित्तेहि कसेहि चेव, समागया त इसि तालयन्ति ।।19 ।। रण्णो तहि कोसलियस्स धूया, भद्द त्ति णामेण अणिन्दियगी। त पासिया संजय हम्ममाण, कुद्धे कुमारे परिणिव्व-वेइ । |20 ।। विदESTATEMESTERTAMAN) स्वाध्याय माला-89 देवाभिओगेण णिओइएणं, दिण्णामु रण्णा मणसा ण झाया। णरिन्द देविन्दभि-वन्दिएणं, जेणामि वन्ता इसिणा स एसो।।21 11 एसो हु सो उग्गतवो महप्पा, जिइन्दिओ सजओ बम्भयारी। जो मे तया णेच्छइ दिज्जमाणिं, पिउणा सयं कोसलिएण रण्णा} |2211 महाजसो एस महाणुभागो, घोर-व्वओ घोर-परक्कमो य। मा एयं हीलेह अहील-णिज्जं, मा सवे तेएण भे णिदहेज्जा।।23।। एयाइं तीसे वयणाई सोच्चा, पत्तीइ भद्दाइ सुभासियाई। इसिस्स वेयावडि-यट्ठयाए, जक्खा कुमारे वि णिवारयन्ति ।।2411 ते घोररूवा ठिय अंतलिक्खे, असुरा, तहि तं जणं तालयन्ति । ते भिण्ण-देहे रुहिरं वमन्ते, पासित्तु भद्दा इणमाहु भुज्जो । ।25।। गिरि णहेहि णहेहि खणह, अयं दन्तेहि खायह। जायतेयं पाएहिं हणह, जे भिक्खु अवमण्णह | |26 || आसीविसो उग्गतवो महेसी, घोरव्वओ घोर-परक्कमो य। अगणिं व पक्खन्द पयंगसेणा, जे भिक्खुय भत्तकाले वहेह ।।27 || सीसेण एयं सरणं उवेह, समागया सव्व-जणेण तुमे। जइ इच्छह जीवियं वा धणं वा, लोगं वि एसो कुविओ डहेज्जा । [28 ।। अवहेडिय-पिट्टिस-उत्तमंगे, पसारिया-बाहु अकम्म चेट्टे। णिभेरि-यच्छे रुहिरं वमन्ते, उड्डं-मुहे णिग्गय जीह-णेत्ते ।।29 ।। ते पासिया खण्डिय कट्ठभूए, विमणो विसण्णो अह माहणो सो। इसिं पसाएइ सभारियाओ, हील च णिन्द च खमाह भंते !1130 || बालेहिं मूढेहि अयाणएहिं, जं हीलिया तस्स खमाह भंते ! महप्पसाया इसिणो हवन्ति, ण हु मुणी कोव-परा हवन्ति । 13111 पुलिं च इण्डिं च अणागयं च, मण-प्पदोसो ण मे अस्थि कोई। जक्खा हु वेयावडियं करेन्ति, तम्हा हु एए णिहया कुमारा । 132 || अत्थं च धम्मं च वियाणमाणा, तुझे ण वि कुप्पह भूइपण्णा। तुमं तु पाए सरणं उवेमो, समागया सव्व-जणेण अम्हे ।।33 ।। 90-स्वाध्याय माला बाबा aprasannn अच्चेमु ते महाभाग !, ण ते किञ्चि ण अच्चिमो। भुञ्जाहि सालिम कूर, णाणा-वंजण-सजुयं ।।34 ।। इम च मे अत्थि पभूयमण्णं, त भुञ्जसू अम्ह अणुग्गहट्ठा। 'बाढ' त्ति पडिच्छइ भत्तपाणं, मासस्स उ पारणए महप्पा ।।35 ।। तहिय गन्धोदय-पुप्फवास, दिव्वा तहि वसुहारा य वुट्ठा। पहयाओ दुंदुहीओ सुरेहिं, आगासे अहोदाण च घुट्ठ। 136 ।। सक्ख खु दीसइ तवो-विसेसो, ण दीसई जाइ-विसेस कोई। सोवाग-पुत्तं हरिएस साहूं, जस्सेरिसा इड्डि महाणुभागा।।37 || किं माहणा जोइ समारम्भन्ता, उदएण-सोहि बहिया विमग्गहा। ज मग्गहा बाहिरियं विसोहि, ण तं सुइट्ठ कुसला वयन्ति ।।38 ।। कुसं च जूव तण-कट्ट-मग्गि, सायं च पाय उदगं फुसंता। पाणाइ भूयाई विहेडयन्ता, भुज्जो वि मन्दा पकरेह पाव ।।39 ।। कह चरे भिक्खु वय जयामो, पावाइ-कम्माइं पुणोल्लयामो। अक्खाहि णे संजय जक्ख-पूइया, कहं सुइट्ठ कुसला वयन्ति ।।40 ।। छज्जीव-काए असमारम्भन्ता, मोसं अदत्तं च असेवमाणा। परिग्गह इथिओ माण-मायं, एय परिण्णाय चरन्ति दन्ता। 41 ।। सुसम्वुडो पचहि संवरेहि, इह जीविय अणव-कखमाणो। वोसठ्ठ-काया सुइ-चत्तदेहा, महाजय जयई जण्णसिट्ठ। 142 || के ते जोई के य ते जोइठाणे, का ते सुया कि य ते कारिसग। एहा य ते कयरा सन्ति भिक्खू, कयरेण होमेण हुणासि जोइ । 143 ।। तवो जोई जीवो जोइठाणं, जोगा सुया सरीर कारिसंगं। कम्मेहा संजम-जोग-सन्ती, होमं हुणामि इसिणं पसत्थ । 144 || के ते हरए के य ते सति-तित्थे, कहि सिणाओ व रयं जहासि। आइक्ख णे संजय जक्ख-पूइया, इच्छामो णाउ भवओ सगासे। 145 ।। धम्मे हरए बम्भे सन्ति-तित्थे, अणाविले अत्त-पसण्ण लेसे। जहि सिणाओ विमलो विसुद्धो, सुसीइ-भूओ पजहामि दोस। 146 ।। बिलाAARENTAMARRESTERIENEMA स्वाध्याय माला-91
एयं सिणाण कुसलेहि दिट्ट, महासिणाणं इसिणं पसत्य।
जहिं सिणाया विमला विसुद्धा, महारिसी उत्तमं ठाणं पत्ते। 147 11
|| त्ति बेमि।। इति हरीएसिज्ज-बारह-अज्झयणं-समत्तं। 112 11
अह महाणियण्ठिज्जं-वीसइम-अज्झयणं । 120 ||
सिद्धाणं णमो किच्चा, सजयाणं च भावओ।
अत्थ-धम्मगई तच्चं, अणुसिद्धिं सुणेह मे।।1।।
पभूय -रयणो राया, "सेणिओ मगहाहिवो।
विहारज्जत्तं णिज्जाओ, 'मण्डि कुच्छिंसि चेइए।।2।।
णाणा दुम-लयाइण्णं, णाणा पक्खि-णिसेवियं।
णाणा कुसुम-संछण्णं, उज्जाणं णन्दणोवमं । 1311
तत्थ सो पासइ साहुं, संजयं सुसमाहियं ।
णिसण्णं रूक्ख-मूलम्मि, सुकुमालं सुहोइयं ।।4।।
तस्स रूवं तु पासित्ता, राइणो तम्मि सजए।
अच्चन्त-परमो आसी, अउलो रूव विम्हओ।1511
अहो ! वण्णो अहो ! रूवं, अहो ! अज्जस्स सोमया।
अहो ! खन्ती अहो ! मुत्ती, अहो ! भोगे असंगया।।6।।
तस्स पाए उ वन्दित्ता, काऊण य पयाहिणं।
पञ्जली पडिपुच्छइ । 1711
तरुणोसि अज्जो ! पव्वइओ, भोग-कालम्मि संजया।
उवडिओऽसि सामण्णे, एयमहूं सुणेमित्ता ।।8।।
अणाहोमि महाराय ! णाहो मज्झ ण विज्जइ।
अणुकम्पगं सुहिं वावि, कंचि-णाभिसमे-मह । । । ।
तओ सो पहसिओ राया, सेणिओ मगहाहिवो !
एवं ते इड्विमंतस्स, कहं णाहो ण विज्जइ। 11011
णाइदूर-मणासपणे,
92-स्वाध्याय माला बनावान
वातावानवानव
होमि णाहो भयन्ताण, भोगे भुजाहि सजया !
मित्त-णाइ-परिवुडो, माणुस्स खु सुदुल्लह ।।11।।
अप्पणा वि अणाहोऽसि, सेणिया मगहाहिवा !
अप्पणा अणाहो सन्तो, कहं णाहो भविस्ससि।।12।।
एव वुत्तो गरिन्दो सो, सुसम्भन्तो सुविम्हिओ।
वयण अस्सुय-पुव्व, साहुणा विम्हयण्णिओ।।13।।
अस्सा हत्थी मणुस्सा मे, पुरं अन्तेउर च मे।
भुञ्जामि माणुसे भोगे, आणा इस्सरियं च मे ।।14 ।।
एरिसे संपयग्गम्मि, सव्व-काम समप्पिए।
कहं अणाहो भवइ, मा हु भते ! मुसं-वए । 115 ||
ण तुमं जाणे अणाहस्स, अत्थं पोत्थ च पत्थिवा।
जहा अणाहो भवइ, सणाहो वा णराहिवा !||16 ||
सुणेह मे महाराय ! अव्वक्खित्तेण चेयसा।
जहा अणाहो भवइ, जहा मेयं पवत्तिय | 117 ||
कोसम्बी णाम णयरी, पुराण पुर-भेयणी।
तत्थ आसी पिया मज्झ, पभूय-धण-संचओ ।।18 ||
पढमे वए महाराय ! अउला मे अच्छि-वेयणा।
अहोत्था विउलो दाहो, सव्व-गत्तेसु पत्थिवा।।19 ।।
सत्थ जहा परम तिक्ख, सरीर-विवरन्तरे ।
पविसेज्ज अरी कुद्धो, एव मे अच्छि-वेयणा ।।20।।
तियं मे अन्तरिच्छं च, · उत्तमग च पीडई।
इन्दासणि-समा घोरा, वेयणा परम दारुणा ।।21 ||
उवट्ठिया मे आयरिया, विज्जा-मत तिगिच्छया।
अबीया सत्थ-कुसला, मत-मूल विसारया ।।22 ।।
ते मे तिगिच्छ कुव्वति, चाउप्पाय जहाहियं ।
ण य दुक्खा विमोयंति, एसा मज्झ अणाहया।।23 ||
निदानालाANEEN स्वाध्याय माला-93
पिया मे सव्व-सारं वि, दिज्जाहि मम कारणा। ण य दुक्खा विमोएइ, एसा मज्झ अणाहया। 2411 मायावि मे महाराय !, पुत्त सोग दुहट्ठिया। ण य दुक्खा विमोएइ, एसा मज्झ अणाहया।।25।। भायरो मे महाराय !, सगा जेट्ठ-कणिट्टगा। ण य दुक्खा विमोयन्ति, एसा मज्झ अणाहया। 126 11 भइणीओ मे महाराय ! सगा जेट्ठ-कणिट्ठगा। ण य दुक्खा विमोयन्ति, एसा मज्झ अणाहया।।27।। भारिया मे महाराय !, अणुरत्ता अणुव्वया । अंसु-पुण्णेहिं णयणेहि, उर मे परिसिंचइ।।28।। अण्णं पाणं च पहाणं च, गन्ध-मल्ल-विलेवण। मए णाय-मणायं वा, सा बाला व भुझइ । 129 }। खणं वि मे महाराय !, पासाओ वि ण फिट्टइ। ण य दुक्खा विमोएइ, एसा मज्झ अणाहया। 13011 तहोऽहं एव-माहन्सु, दुक्खमाहु पुणो पुणो। वेयणा अणुभविउं जे, संसारम्मि अणन्तए। 131।। सई च जइ मुच्चेज्जा, वेयणा विउला इओ। खन्तो दन्तो णिरारम्भो, पव्वइए अणगारियं । 132 !! एवं च चिंतइत्ताणं, पसुत्तोमि णराहिवा। परीय-त्तन्तीए राईए, वेयणा मे खयं गया। 133 11 तओ कल्ले-पभायम्मि, आपुच्छित्ताण बन्धये । खन्तो दन्तो णिरारम्भो, पव्वइओ अणगारियं । {34 {{ ततोऽहं णाहो जाओ, अप्पणो य परस्स य। सव्वेसिं चेव भूयाणं, तसाण-थावराणं य। 135 ।। अप्पा णई वेयरणी, अप्पा कूड- -सामली। अप्पा कामदुहा धेणू, अप्पा मे णन्दणं वणं । 136 !! 94-स्वाध्याय माला बिल RAanana मे - -- अप्पा कत्ता विकत्ता य, दुहाण य सुहाण य। अप्पा मित्तममित्त च, दुप्पट्ठिय सुपट्ठिओ।।37 || इमा हु अण्णावि अणाहया णिवा, तमेग-चित्तो णिहुओ सुणेहि । णियण्ठ धम्मं लहियाण वि जहा, सीयन्ति एगे बहु कायरा णरा ||38 ।। जो पव्वइत्ताण महव्वयाई, सम्म य णो फासयई पमाया। अणिग्गहप्पा य रसेसु गिद्धे, ण मूलओ छिदइ बन्धणं से।।39 ।। आउत्तया जस्स णअत्थि काइ, इरियाए भासाए तहेसणाए । आयाण-णिक्खेव-दुगुंछणाए, ण वीरजायं अणुजाइ मग्गं । 140 ।। चिरपि से मुण्डरुई भवित्ता, अथिरव्वए तव-णियमेहि भट्टे । चिरपि अप्पाण किलेसइत्ता, ण पारए होइ हु सम्पराए ||41 ।। पोल्लेव मुट्ठी जह से असारे, अयन्तिए कूड-कहावणे वा। राढामणी वेरुलिय-प्पगासे, अमहग्घए होइ हु जाणएसु ।।42 || कुसील-लिगं इह धारइत्ता, इसिज्झयं जीविय बूहइत्ता। असजए सजय-लप्पमाणे, विणिग्घाय-मागच्छइ से चिरं पि||43 || विसं तु पीयं जह कालकूड, हणाइ सत्थ जह कुग्गहीयं । एसोवि धम्मो विसओव-वण्णो, हणाइ वेयाल इवाविवण्णो। 144 ।। जे लक्खणं सुविण पउञ्जमाणे, णिमित्त-कोऊहल सपगाढे। कुहेड-विज्जासव-दार जीवी, ण गच्छइ सरण तम्मि-काले।।45 || तम-तमेणेव उ से असीले, सया दुही विप्परिया-मुवेइ । संधावइ णरग-तिरिक्ख-जोणिं, मोण विराहित्तु असाहुरूवे। 146 ।। उद्देसियं कीयगडं णियाग, ण मुच्चइ किचि अणेसणिज्ज | अग्गी विवा सव्व-भक्खी भवित्ता, इत्तो चुओ गच्छइ कटु पाव। 147 || ण त अरी कठ-छित्ता करेइ, ज से करे अप्पणिया-दुरप्पा । से णाहिइ मच्चु-मुह तु पत्ते, पच्छाणु-तावेण दया-विहूणो।।48 ।। णिरट्ठिया णग्गरुई उ तस्स, जे उत्तमट्ठ विवज्जासमेइ । इमेवि से णत्थि परे वि लोए, दुहओ वि से झिज्झइ तत्थ लोए | 149 ।। बिजनजामाबजाजEED स्वाध्याय माला-95 एमेवऽहा-छन्द कुसील-रूवे, मग्ग विराहित्तु जिणुत्तमाणं। कुररी विवा भोग-रसाणुगिद्धा, णिरट्ठ-सोया परियावमेइ ।।50 ।। सोच्चाण मेहावी सुभासियं इमं, अणुससाणं णाण-गुणोव-वेयं । मग्गं कुसीलाण जहाय सव्वं, महाणियण्ठाण वए पहेण । |51।। चरित्त-मायार-गुणण्णिए तओ, अणुत्तर सजम पालियाण। णिरासवे संख-वियाण कम्मं, उवेइ ठाणं विउलुत्तमं धुवं । 152 !! एवुग्ग-दन्तेऽवि महा-तवोधणे, महामुणी महापइण्णे महायसे। महाणियण्ठिज्ज-मिणं महासुय, से काहए महया वित्थरेणं । 153 ।। तुट्ठो य सेणिओ राया, इण-मुदाहु कयञ्जली। अणाहय जहाभूयं, सुट्ठ मे उवदंसिय । 154 || तुज्झ सुलद्धं खु मणुस्स जम्मं, लाभा सुलद्धा य तुमे महेसी। तुझे सणाहा य सबन्धवा य, जं भे ठिया मग्गे जिणुत्तमाण। 155 ।। तंसि णाहो अणाहाण, सव्व-भूयाण संजया ! खामेमि ते महाभाग !, इच्छामि अणुसासिउं। 156 ।। पुच्छिऊण मए तुमं, झाण-विग्यो य जो कओ। णिमन्तिया य भोगेहि, तं सव्वं मरिसेहि मे। 157 || एवं थुणित्ताण स रायसीहो, अणगारसीहं परमाइ भत्तिए। सओरोहो सपरियणो सबन्धवो, धम्माणुरत्तो विमलेण चेयसा । 158 11 ऊस-सिय-रोम-कूवो, काऊण य पयाहिणं। अभिवन्दिऊण सिरसा, अइयाओ णराहिवो। 15911 इयरो ऽवि गुण-समिद्धो, तिगुत्ति-गुत्तो तिदण्ड-विरओ य। विहग इक् विप्पमुक्को, विहरइ वसुह विगय-मोहो। 160 1| त्तिवेमि ।। || महाणियण्ठिज्ज-वीसइम-अज्झयण-समत्त ।।
|| अह रहणेमिज्जं-वावीसइम-अज्झयणं । 22 ||
'सोरिय पुरम्मि' णयरे, आसि राया महिड्दिए।
वसुदेवत्ति णामेण, राय-लक्खण-संजुए।।1।।
तस्स भज्जा दुवे आसी, रोहिणी देवई तहा।
तासि दोण्हं वि दुवे पुत्ता, इट्ठा राम-केसवा ।।2।।
सोरिय पुरम्मि णयरे, आसी राया महिड्डिए।
'समुद्दविजय' णाम, राय-लक्खण-संजुए।।3 ।।
तस्स भज्जा सिवा' णाम, तीसे पुत्तो महायसो।।
भगवं 'अरिहणेमि त्ति', लोग-णाहे दमीसरे।।4।।
सो अरिठ्ठणेमि णामो उ, लक्खण-स्सर-सजुओ।
अट्ठ-सहस्स लक्खण-धरो, गोयमो काल गच्छवी।।5।।
वज्ज-रिसह-संघयणो, सम-चउरंसो झसोयरो।
तस्स रायमई-कण्णं, भज्जं जायइ केसवो।।6 ||
अह सा रायवर-कण्णा, सुसीला चारु-पेहिणी।
सव्व-लक्खण-सम्पण्णा, विज्जु-सोया-मणिप्पभा। 17 ||
अहाह जणओ तीसे, वासुदेव महिड्डियं ।
इहा-गच्छउ कुमारो, जा से कण्ण ददामि ऽहं ।।8।।
सव्वो-सहीहि एहविओ, कय-कोउय-मगलो।
दिव्व-जुयल-परिहिओ, आभरणेहि विभूसिओ। 9 ।।
मत्तं च गन्धहत्थि च, वासुदेवस्स जेट्टगं ।
आरूढो सोहइ अहियं, सिरे चूडामणी जहा । |10||
अह ऊसिएण छत्तेण, चामराहि य सोहिए।
दसार-चक्केण य सो, सव्वओ परिवारिओ।11111
चउरगिणीए सेणाए, रइयाए जहक्कम।
तुरियाण सण्णि-णाएण दिव्वेण गगणं फुसे। |12||
विनामिनावनाबानाबानाबमान स्वाध्याय माला-97
एयारिसीए इड्डिए, जुईए उत्तमाइ य।
णियगाओ भवणाओ, णिज्जाओ वहि-पुंगवो। 113 11
अह सो तत्थ णिज्जन्तो, दिस्स पाणे भयदुए।
वाडेहिं पञ्जरेहिं य, सण्णिरुद्धे सुदुक्खिए}}1411
जीवियन्तं तु सम्पत्ते, मंसट्ठा भक्खियव्वए।
पासित्ता से महापण्णे, सारहिं इण-मब्बवी ||15 ||
कस्स अट्ठा इमे पाणा, एए सव्वे सुहेसिणो।
वाडेहि पञ्जरेहिं च, सण्णिरुद्धा य अच्छहि।।16।।
अह सारही तओ भणइ, एए भद्दा उ पाणिणो।
तुझं विवाह-कज्जम्मि, भोयावेउं बहुं जणं ।}17 ||
सोऊण तस्स-वयणं, बहु-पाणि-विणासणं।
चिंतेइ से महापण्णे, साणुक्कोसे जिएहि उ||18 ||
जइ मज्झ कारणा एए, हम्मन्ति सुबहू जिया।
ण मे एयं तु णिस्सेसं, परलोगे भविस्सई ।।19 ।।
सो कुण्डलाण जुयलं, सुत्तंग य महायसो।
आभरणाणि य सव्वाणि, सारहिस्स पणामए | 2011
मण परिणामो य कओ, देवा य जहोइयं समोइण्णा।
सविड्डीइ सपरिसा, णिक्खमणं तस्स काउं जे }}2111
देव-माणुस्स-परिवुडो, सिविया-रयणं तओ समारूढो।
णिक्खमिय बारगाओ, रेवययम्मि ठिओ भगवं। 22||
उज्जाण सम्पत्तो, ओइण्णो उत्तमाओ सीयाओ।
साहस्सीए परिवुडो, अह णिक्खमइ उ चित्ताहि ।।23।।
अह सो सुगन्ध-गन्धिए, तुरियं मउ कुञ्चिए।
सयमेव तुंचइ केसे, पंच-मुट्ठीहिं समाहिओ। 24 11
वासुदेवो य णं भणइ, लुत्तकेसं जिइन्दियं ।
इच्छिय-मणोरहं तुरियं, पावेसु तं दमीसरा ! 125 11
98-स्वाध्याय माला ESHARENERMERARMERananKDIO
णाणेण दंसणेण च, चरित्तेणं तहेव य।
खन्तीए मुत्तीए य, वड्डमाणो भवाहि य।।26 ||
एवं ते राम-केसवा, दसारा य बहू जणा।
अरिट्ठणेमिं वंदित्ता, अभिगया बारगापुरि।।27 ।।
सोऊण रायकण्णा, पव्वज्जं सा जिणस्स उ।
णीहासा य णिराणन्दा, सोगेण उ समुत्थिया ।।28 ।।
राईमई विचिन्तेई, धिरत्थु मम जीवियं ।
जाऽहं तेण परिच्चत्ता, सेयं पव्वइउं मम ।।29 ||
अह सा भमर-सण्णिभे, कुच्च-फणग-प्पसाहिए।
सयमेव लुञ्चइ केसे, धिइमंता ववस्सिया।।30 ।।
वासुदेवो य णं भणइ, लुत्तकेसं जिइन्दियं ।
संसार सागरं घोरं, तर कण्णे ! लहु-लहुँ। 131 ।।
सा पव्वइया सन्ति, पव्वावेसी तहिं बहु।
सयणं परियणं चेव, सीलवंता बहुस्सुया । 132||
गिरिं रेवययं जन्ती, वासेणुल्ला उ अंतरा।
वासन्ते अंधयारम्मि, अंतो लयणस्स सा ठिया ।।33 ||
चीवराणि विसारन्ति, जहा-जायत्ति पासिया।
रहणेमी भग्गचित्तो, पच्छा दिट्ठो य तीइ वि।।3411
भीया य सा तहि दटुं, एगते सञ्जयं तयं ।
बाहाहिं काउं संगोप्फं, वेवमाणी णिसीयई। 135।।
अह सोऽवि रायपुत्तो, समुद्द विजयंगओ।
भीयं पवेवियं दटुं, इमं वक्क-मुदाहरे ।।36 ।।
रहणेमी अहं भद्दे !, सुरूवे चारु भासिणी।
ममं भयाहि सुयणु, ण ते पीला भविस्सई ।।37 ||
एहि ता भुञ्जिमो भोए, माणुस्सं खु सुदुल्लहं।
भुत्त-भोगी तओ पच्छा, जिणमग्गं चरिस्सामो।।3811
बाजEENENDRASIESTATEMENTERTAINMETA स्वाध्याय माला-99
दह्ण रहणेमि तं, भग्गुज्जोय पराजियं ।
राईमई असंभन्ता, अप्पाणं संवरे तहिं । 139 11
अह सा रायवर कण्णा, सुटिया णियम-ब्बए।
जाइ कुलं य सीलं च, रक्खमाणी तयं वए। 14011
जइसि रूवेण वेसमणो, ललिएण णल-कूब्बरो।
तहावि ते ण इच्छामि, जइसि सक्खं पुरन्दरो। 14111
पक्खन्दे जलियं जोइं, धूमकेउं दुरासय ।
णेच्छन्ति वन्तयं भोत्तुं, कुले जाया अगन्धणे। 142 11
धिरत्यु तेऽजसो-कामी !, जो तं जीविय-कारणा।
वन्तं इच्छसि आवेउं, सेयं ते मरणं भवे। 143}}
अहं च भोय-रायस्स, तं चऽसि अन्धग-वण्हिणो।
मा कुले गन्धणा होमो, सञ्जम णिहुओ चर। 144 ||
जइ तं काहिसि भावं, जा ज़ा दिच्छसि णारिओ।
वाया विद्धोव्व-हडो, अद्विअप्पा भविस्ससि । 145 11
गोवालो भण्डवालो वा, जहा तद्दव्व-ऽणिस्सरो।
एवं अणिस्सरो तंपि, सामण्णस्स भविस्ससि ।।46 11
तीसे सो वयणं सोच्चा, संजयाइ सुभासियं ।
अंकुसेण जहा णागो, धम्मे सम्पडिवाइओ। 147 11
कोहं माणं णिगिण्हित्ता, मायं लोहं य सव्वसो।
इन्दियाई वसे काउं, अप्पाणं उवसंहरे । 148 ||
मणगुत्तो वयगुत्तो, कायगुत्तो जिइन्दिओ।
सामण्णं णिच्चलं फासे, जावज्जीव दढव्वओ। 14911
उग्गं तवं चरित्ताणं, जाया दोणि वि केवली।
सव्वं कम्मं खवित्ताणं, सिद्धिं पत्ता अणुत्तर | 15011
एवं करेन्ति सम्बुद्धा, पण्डिया पवियक्खणा।
विणियटुंति भोगेसु, जहा से पुरिसुत्तमो। ।त्तिवेमि । 151
।। इति रहणेमिज्ज-बावीसइम-अज्झयणं-समत्त ।।
100-स्वाध्याय मालावविवाद
।। अह जीवाजीवविभत्ती-छत्तीसइम-अज्झयणं। 13611
जीवाजीव-विभत्तिं, सुणेह मे एगमणा-इओ।
ज जाणिऊण भिक्खू, सम्म जयइ सञ्जमे।।1।।
जीवा चेव अजीवा य, एस लोए वियाहिए।
अजीव देस-मागासे, अलोए से वियाहिए।।2।।
दव्वओ खेत्तओ चेव, कालओ भावओ तहा।
परूवणा तेसि भवे, जीवाण-मजीवाण य।।3।।
रूविणो चेव अरूवी य, अजीवा दुविहा भवे।
अरूवी दसहा वुत्ता, रूविणो य चउविहा।।4।।
धम्मत्थि-काए तद्देसे, तप्पएसे य आहिए।
अहम्मे तस्स देसे य, तप्पएसे य आहिए। 5 ।।
आगासे तस्स देसे य, तप्पएसे य आहिए।
अद्धा समए चेव, अरूवी दसहा भवे । 16 ||
धम्माधम्मे य दो चेव, लोगमित्ता वियाहिया।
लोगालोगे य आगासे, समए समय-खेत्तिए। 17 ।।
धम्माधम्मागासा, तिण्णि वि एए अणाइया ।
अपज्जवसिया चेव, सव्वद्ध तु वियाहिया ।।8।।
समए वि सन्तइ पप्प, एवमेव वियाहिए।
आएसं पप्प-साईए, सपज्ज-वसिए वि य ।।9।।
खन्धा य खंधदेसा य, तप्पएसा तहेव य ।
परमाणुणो य बोद्धव्वा, रूविणो य चउव्विहा । 110 ।।
एगत्तेण पुहुत्तेण, खधा य परमाणु य ।
लोगेग-देसे लोए य, भइयव्वा ते उ खेत्तओ।।11।।
सुहुमा सव्व-लोगम्मि, लोग-देसे य बायरा।
इत्तो कालविभाग तु, तेसिं वुच्छ चउव्विहं । ।12 ||
निवाबEMIERTAIADAARTISEME स्वाध्याय माला-101
सन्तइं पप्प तेऽणाइ, अपज्जवसिया वि य।
ठिइं पडुच्च साईया, सपज्जवसिया वि य।।13।।
असंखकाल-मुक्कोसं, एगं समयं जहण्णयं ।
अजीवाण य रूवीणं, ठिई एसा वियाहिया।।14।।
अणंतकाल-मुक्कोसं, एक्कं समयं जहण्णयं ।
अजीवाण य रूवीणं, अन्तरेयं वियाहियं ।।15।।
वण्णओ गंधओ चेव, रसओ फासओ तहा।
सण्ठाणओ य विण्णेओ, परिणामो तेसिं पंचहा।।16।।
वण्णओ परिणया जे उ, पंचहा ते पकित्तिया।
किण्हा णीला य लोहिया, हालिद्दा सुक्किला तहा।।17 ||
गंधओ परिणया जे उ, दुविहा ते वियाहिया।
सुभिगन्ध. परिणामा, दुभिगन्धा तहेव य||18 ।।
रसओ परिणया जे उ, पंचहा ते पकित्तिया।
तित्त-कडुय-कसाया, अम्बिला महुरा तहा।।19 ।।
फासओ परिणया जे उ, अट्टहा ते पकित्तिया।
कक्खडा मउया चेव, गुरुया लहुया तहा ।।20।।
सीया उण्हा य णिद्धा य, तहा लुक्खा य आहिया।
इय फास परिणया एए, पुग्गला समुदाहिया।।21 ।।
सण्ठाणओ परिणया जे उ, पंचहा ते पकित्तिया।
परिमण्डला य वट्टा य, तंसा चउरन्स-मायया।।22 ||
वण्णओ जे भवे किण्हे, भइए से उ गंधओ।
रसओ फासओ चेव, भइए सण्ठाणओ वि य ।।23।।
वण्णओ जे भवे णीले, भइए से उ गंधओ।
रसओ फासओ चेव, भइए संठाणओ वि य।।24।।
वण्णओ लोहिए जे उ, भइए से उ गंधओ।
रसओ फासओ चेव, भइए संठाणओ वि य25 ।।
102 - स्वाध्याय माला ARRERNAalaanaPEDKARKapana
वण्णओ पीयए जे उ, भइए से उ गधओ।
रसओ फासओ चेव, भइए संठाणओ वि य | 126 ||
वण्णओ सुक्किले जे उ, भइए से उ गधओ।
रसओ फासओ चेव, भइए संठाणओ वि य । 27 ||
गधओ जे भवे सुभी, भइए से उ वण्णओ।
रसओ फासओ चेव, भइए संठाणओ वि य ।।28 ।।
गंधओ जे भवे दुभी, भइए से उ वण्णओ।
रसओ फासओ चेव, भइए संठाणओ वि य ।।29 ।।
रसओ तित्तए जे उ, भइए से उ वण्णओ।
गंधओ फासओ चेव, भइए संठाणओ वि य ।।30 ||
रसओ कडुए जे उ, भइए से उ वण्णओ।
गधओ फासओ चेव, भइए सठाणओ वि य ।।31 ।।
रसओ कसाए जे उ, भइए से उ वण्णओ।
गधओ फासओ चेव, भइए संठाणओ वि य] 132 ||
रसओ अम्बिले जे उ, भइए से उ वण्णओ।
गधओ फासओ चेव, भइए संठाणओ वि य ।।33 ||
रसओ महुरए जे उ, भइए से उ वण्णओ।
गंधओ फासओ चेव, भइए संठाणओ वि यं।।34।।
फासओ कक्खडे जे उ, भइए से उ वण्णओ।
गंधओ रसओ चेव, भइए सठाणओ वि य ।।35।।
फासओ मउए जे उ, भइए से उ वण्णओ।
गधओ रसओ चेव, भइए संठाणओ वि य||36 ||
फासओ गुरुए जे उ, भइए से उ वण्णओ।
गंधओ रसओ चेव, भइए संठाणओ वि य।।37 ||
फासओ लहुए जे उ, भइए से उ वण्णओ।
गधओ रसओ चेव, भइए संठाणओ वि य ।।38 ।।
DanieNNABBDCDDPDCAGABE
फासओ सीयए जे उ, भइए से उ वण्णओ।
गंधओ रसओ चेव, भइए संठाणओ वि य ।।39 ।।
फासओ उण्हए जे उ, भइए से उ वण्णओ।
गंधओ रसओ चेव, भइए संठाणओ वि य 114011
फासओ णिद्धए जे उ, भइए से उ वण्णओ।
गंधओ रसओ चेव, भइए संठाणओ वि य।141।।
फासओ लुक्खए जे उ, भइए से उ वण्णओ।
गंधओ रसओ चेव, भइए संठाणओ वि य। 142।।
परिमण्डल-सण्ठाणे, भइए से उ वण्णओ।
गंधओ रसओ चेव, भइए फासओ वि य | 143 ।।
संठाणओ भवे वट्टे, भइए से उ वण्णओ।
गंधओ रसओ चेव, भइए फासओ वि य। 144 ||
सण्ठाणओ भवे तंसे, भइए से उ वण्णओ।
गंधओ रसओ चेव, भइए फासओ वि य||45 11
सण्ठाणओ जे चउरन्से , भइए से उ वण्णओ।
गंधओ रसओ चेव, भइए फासओ वि य | 146 11
जे आयय सण्ठाणे, भइए से उ वण्णओ।
गंधओ रसओ चेव, भइए फासओ वि य||47||
एसा अजीव-विभत्ती, समासेण वियाहिया।
इत्तो जीव-विभत्तिं, वुच्छामि अणुपुव्वसो। 148 ।।
संसारत्था य सिद्धा य, दुविहा जीवा वियाहिया।
सिद्धा-णेगविहा वुत्ता, तं मे कित्तयओ सुण । {49 ।।
इत्थी पुरिस-सिद्धा य, तहेव य णपुंसगा।
सलिंगे अण्णलिंगे य, गिहिलिंगे तहेव य15011
उक्को-सोगाहणाए य, जहण्ण मज्झिमाइ य।
उड़े अहे य तिरियं च, समुद्दम्मि जलम्मि य15111
104-स्वाध्याय माला बनवाबनवावा
दस य णपुंसएसु, वीस इत्थियासु य ।
पुरिसेसु य अट्ठसयं, समए-णेगेण सिज्झई ।।52 ||
चत्तारि य गिहिलिगे, अण्णलिंगे दसेव य।
सलिंगेण अट्ठसय, समए-णेगेण सिज्झई | 153 ।।
उक्को-सोगाहणाए य, सिज्झते जुगवं दुवे।
चत्तारि जहण्णाए, जव-मज्झे अठुत्तर सय । 15411
चउ रुड्ढलोए य दुवे समुद्दे, तओ जले वीसमहे तहेव य ।
सयं च अठुत्तरं तिरिय लोए, समए-णेगेण सिज्झई धुवं । 155 ।।
कहिं पडिहया सिद्धा, कहि सिद्धा पइट्ठिया।
कहि बोन्दिं चइत्ताणं, कत्थ गन्तूण सिज्झई। 156 ।।
अलोए पडिहया सिद्धा, लोयग्गे य पइट्टिया।
इहं बोन्दिं चइत्ताणं, तत्थ गन्तूण सिज्झई । [57 ||
बारसहिं जोयणे हिं, सव्वट्ठस्सुवरि भवे ।
ईसी-पष्मार-णामा उ, पुढवी छत्त-सण्ठिया। 158 ।।
पणयाल-सय-सहस्सा, जोयणाणं तु आयया।
तावइय चेव वित्थिण्णा, तिगुणो तस्सेव परिरओ। 159 ।।
अट्ठजोयण-बाहुल्ला, सा मज्झम्मि वियाहिया।
परिहायन्ती चरिमन्ते, मच्छियपत्ताउ तणुयरी।।60 ||
अज्जुण-सुवण्णग-मई, सा पुढवी णिम्मला सहावेणं।
उत्ताणग-छत्तग-सण्ठिया य, भणिया जिणवरेहि।।61 ।।
संखक-कुन्द-सकासा, पण्डुरा णिम्मला सुहा।
सीयाए जोयणे तत्तो, लोयन्तो उ वियाहिओ।।6211
जोयणस्स उ जो तत्थ, कोसो उवरिमो भवे।
तस्स कोसस्स छडमाए, सिद्धाणो-गाहणा भवे। 163 ।।
तत्थ सिद्धा महाभागा, लोगग्गम्मि पइट्टिया।
भव-प्पवंच-उम्मुक्का, सिद्धिं वरगई गया। 164 ।।
ISRSबनानागालग स्वाध्याय माला-10
उस्सेहो जस्स जो होइ, भवम्मि चरिमम्मि उ।
तिभाग-हीणा तत्तो य, सिद्धाणो-गाहणा भवे। 165 ।।
एगत्तेण साईया, अपज्जवसिया वि य।
पुहुत्तेण अणाईया, अपज्जवसिया वि य। 166 ।।
अरूविणो जीवघणा, णाण-दसण-सण्णिया।
अउलं सुहं सम्पत्ता, उवमा जस्स णत्थि उ।।67}}
लोगेग देसे ते सव्वे, णाण-दंसण-सण्णिया।
संसार पार-णित्थिण्णा, सिद्धिं वरगई गया। 168||
संसारत्था उ जे जीवा, दुविहा ते वियाहिया।
तसा य थावरा चेव, थावरा तिविहा तहिं। 16911
पुढवी आउ जीवा य, तहेव य वणस्सई।
इच्चेए थावरा तिविहा, तेसिं भेए सुणेह मे।।7011
दुविहा पुढवी जीवा य, सुहुमा बायरा तहा।
पज्ज्त-मपज्जत्ता, एवमेए दुहा पुणो। 171 11
बायरा जे उ पज्जत्ता, दुविहा ते वियाहिया।
सण्हा खरा य बोधव्वा, सण्हा सत्तविहा तहिं117211
किण्हा णीला य रुहिरा, हालिद्दा सुक्किला तहा।
पण्डु-पणग मट्टिया, खरा छत्तीसई
विहा117311
पुढवी य सक्करा बालुया य, उवले सिला य लोणूसे।
अय-तम्ब तउय-सीसग, रुप्प-सुवण्णे य वइरे य । 17411
हरियाले हिंगुलुए, मणोसिला सासगंजण-पवाले ।
अब्म-पडलम बालुए,
बायरकाए मणिविहाणे 117511
गोमेज्जए य रुयगे, अंके फलिहे य लोहियखे य।
मरगय-मसारगल्ले, भुयमोयग-इन्द-णीले य। 176 ।।
चंदण-गेरुय-हंसगमे, पुलए सोगन्धिए य बोधव्ये ।
चंदप्पह वेरुलिए, जलकन्ते सूरकन्ते य। 1771
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106-स्वाध्याय माला ERRRENERARMARRERMARKamapam
एए खर पुढवीए, भेया छत्तीस-माहिया।
एगविह-मणाणत्ता, सुहुमा तत्थ वियाहिया।।78 ।।
सुहुमा सव्व लोगम्मि, लोग देसे य बायरा।
इत्तो कालविभागं तु, वुच्छं तेसिं चउव्विहं ।।79 ।।
सन्तइं पप्प-णाईया, अपज्जव-सिया वि य।
ठिइं पडुच्च साईया, सपज्जवसिया वि य||8011
बावीस-सहस्साई, वासा-णुक्कोसिया भवे।
आउ-ठिई पुढवीणं, अन्तो-मुहत्तं जहण्णिया। 181।।
असंखकाल-मुक्कोसं, अन्तो-मुहुत्तं जहणिया।
काय-ठिई पुढवीणं, तं कायं तु अमुंचओ। 182 ||
अणंतकाल-मुक्कोसं, अन्तो मुहत्तं जहण्णयं ।
विजढम्मि सए काए, पुढवी जीवाण अन्तरं। 183 11
एएसिं वण्णओ चेव, गंधओ रस-फासओ।
सण्ठाणा-देसओ वावि, विहाणाइं सहस्ससो।।84 ||
दुविहा आऊ जीवा उ, सुहुमा बायरा तहा।
पज्जत्त-मपज्जत्ता, एवमेए दुहा पुणो।।85||
बायरा जे उ पज्जत्ता, पंचहा ते पकित्तिया।
सुद्धोदए य उस्से य, हरतणू महिया हिमे।।86 ।।
एगविह-मणाणत्ता, सुहुमा तत्थ वियाहिया।
सुहुमा सव्व-लोगम्मि, लोग देसे य बायरा । 187 ||
सन्तई पप्प-णाईया, अपज्जव-सिया वि य।
ठिइं पडुच्च साईया, सपज्जवसिया वि य||88 ।।
सत्तेव सहस्साइं, वासा-णुक्कोसिया भवे।
आउठिई आऊणं, अन्तो मुहुत्तं जहण्णिया।।89 ।।
असख-काल-मुक्कोस, अन्तो मुहुत्त जहण्णयं ।
कायठिई आऊणं, तं कायं तु अमुंचओ।।90 ।।
RAMERMERNAMASTARARARERARASHARAM स्वाध्याय माला-107
अणंत काल-मुक्कोसं, अन्तो मुहत्तं जहण्णयं ।
विजढम्मि सए काए, आऊ जीवाण अन्तर। 191।।
एएसिं वण्णओ चेव, गंधओ रस-फासओ।
सण्ठाणादेसओ वावि, विहाणाई सहस्ससो। 192।।
दुविहा वणस्सई जीवा, सुहुमा बायरा तहा।
पज्जत्त-मपज्जत्ता, एवमेए
एवमेए दुहा पुणो। 193 ।।
बायरा जे उ पज्जत्ता, दुविहा ते वियाहिया।
साहारण-सरीरा य, पत्तेगा य तहेव य । 19411
पत्तेग सरीरा उ, ऽणेगहा ते पकित्तिया।
रुक्खा गुच्छा य गुम्मा य, लया वल्ली तणा तहा। 195 ।।
वलया पव्वगा कुहुणा, जलरुहा ओसही तहा।
हरिय-काया उ बोधव्वा, पत्तेगाइ वियाहिया। 196।।
साहारण सरीराओ, ऽणेगहा ते पकित्तिया।
आलुए मूलए चेव, सिंगवेरे तहेव य ||9711
हरिली सिरिली सिस्सिरिली, जावई-केय कंदली।
पलण्डु लसण-कंदे य, कन्दली य कुहुव्वए । 198 ।।
लोहिणी हूयथी हूय, कुहगा य तहेव य।
कण्हे य वज्जकन्दे य, कन्दे सूरणए तहा। 199 ।।
अस्स-कण्णी य बोधव्वा, सीह-कण्णी तहेव य।
मुसुण्ढी य हलिद्दा य, णेगहा एवमायओ।।100 ।।
एगविह-मणाणत्ता, सुहुमा तत्थ वियाहिया।
सुहुमा सव्व-लोगम्मि, लोग-देसे य वायरा । 1101 ।।
सन्तई पप्प-णाईया, अपज्जव-सिया वि य।
ठिइं पडुच्च साईया, सपज्जव-सिया वि य। 1102 ||
दस चेव सहस्साई. वासा-णुक्कोसिया भवे।
वणस्सईणं आउं तु, अंतो मुहुत्तं जहणियं । 1103 ।।
108-स्वाध्याय माला व
Pasan
अणंत काल-मुक्कोस, अन्तो मुहुत्त जहण्णिया।
कायठिई पणगाणं, त काय तु अमुंचओ | 1104 ||
असंख काल-मुक्कोस, अन्तो मुहुत्त जहण्णयं ।
विजढम्मि सए काए, पणग जीवाण अन्तर ||105 ||
एएसिं वण्णओ चेव, गंधओ रस-फासओ।
सण्ठाणादेसओ वावि, विहाणाइं सहस्ससो| 1106 ||
इच्चेए थावरा तिविहा, समासेण वियाहिया।
इत्तो उ तसे तिविहे, वुच्छामि अणुपुव्वसो। |107 ||
तेऊ वाऊ य बोधव्वा, उराला य तसा तहा।
इच्चेए तसा तिविहा, तेसि भेए सुणेह मे।।108 ।।
दुविहा तेऊ जीवा उ, सुहुमा बायरा तहा।
पज्जत्त-मपज्जत्ता, एवमेए दुहा पुणो । |109 ।।
बायरा जे उ पज्जत्ता, णेगहा ते वियाहिया।
इंगाले मुम्मुरे अगणी, अच्चि-जालातहेव य||110।।
उक्का विज्जू य बोधव्वा, णेगहा एव-मायओ।
एगविह-मणाणत्ता, सुहुमा ते वियाहिया । 1111 ।।
सुहमा सव्व-लोगम्मि, लोग-देसे य बायरा।
इत्तो काल-विभाग तु, तेसिं वुच्छं चउव्विह। 1112 ।।
सन्तइं पप्प-णाईया, अपज्जव-सिया वि य।
ठिइं पडुच्च साईया, सपज्जव-सिया वि य।।113 ।।
तिण्णेव अहोरत्ता, उक्कोसेण वियाहिया।
आउठिई तेऊणं, अन्तो-मुहुत्तं जहणिया।।114 ||
असंख काल-मुक्कोसं, अन्तो-मुहुत्तं जहणिया।
कायठिई तेऊणं, तं काय तु अमुचओ ||115 ।।
अणंत काल-मुक्कोसं, अन्तो-मुहुत्तं जहण्णयं ।
विजढम्मि सए काए, तेऊ जीवाण अन्तरं11116 ||
विजानातिनावबाबा स्वाध्याय माला-109
एएसिं वण्णओ चेव, गंधओ रस-फासओ।
सण्ठाणादेसओ वावि, विहाणाइं सहस्ससो||117 ||
दुविहा वाउ जीवा उ, सुहुमा बायरा तहा।
पज्जत्त-मपज्जत्ता, एवमेए दुहा पुणो।।118।।
बायरा जे उ पज्जत्ता, पंचहा ते पकित्तिया।
उक्कलिया मण्डलिया, घणगुंजा सुद्धवाया य||119 ।।
संवट्टग-वाया य, णेगविहा एव-मायओ।
एगविह-मणाणत्ता, सुहुमा तत्थ वियाहिया।।120 ।।
सुहुमा सव्व-लोगम्मि, लोग-देसे य बायरा।
इत्तो काल-विभागं तु, तेसिं वुच्छं चउव्विहं । 1121 ||
सन्तई पप्प-णाईया, अपज्जवसिया वि य।
ठिइं पडुच्च साईया, सपज्जवसिया वि य।।122 ||
तिण्णेव सहस्साई, वासा-णुक्कोसिया भवे।
आउठिई वाऊणं, अन्तो मुहुत्तं जहणिया।।123 ||
असंख काल-मुक्कोस, अन्तो मुहत्तं जहणिया।
काय ठिई वाऊणं, तं कायं तु अमुंचओ। 1124।।
अणंत काल-मुक्कोसं, अन्तो मुहुत्तं जहण्णयं ।
विजढम्मि सए काए, वाऊ-जीवाण अन्तरं। 125 ।।
एएसिं वण्णओ चेव, गंधओ रस-फासओ।
सण्ठाणादेसओ वावि, विहाणाइं सहस्ससो||126।।
उराला य तसा जे उ, चउहा ते पकित्तिया।
बेइन्दिया तेइन्दिया, चउरो-पंचिन्दिया चेव।112711
बेइन्दिया उ जे जीवा, दुविहा ते पकित्तिया।
पज्जत्त-मपज्जत्ता, तेसिं भेए सुणेह मे ||128 ||
किमिणो सोमंगला चेव, अलसा माइ-वाहया।
वासीमुहा य सिप्पीया, संखा संखणगा तहा। 1129 ।।
110-स्वाध्याय माला ARE
BESMARNERMERNARENDER
पल्लोयाणु-ल्लया चेव, तहेव य वराडगा।
जलूगा जालगा चेव, चंदणा य तहेव य||130 ।।
इइ बेइन्दिया एए, ऽणेगहा एव-मायओ।
लोगेग-देसे ते सव्वे, ण सव्वत्थ वियाहिया। 1131||
सन्तई पप्प-णाईया, अपज्जव-सिया वि य।
ठिइं पडुच्च साईया, सपज्जव-सिया वि य ।।132 ||
वासाइं बारसा चेव, उक्कोसेण वियाहिया।
बेइन्दिय आउ-ठिई, अन्तो मुहत्तं जहणिया।।133 ।।
सखिज्ज काल-मुक्कोसं, अन्तो मुहुत्त जहणिया।
बेइन्दिय काय-ठिई, तं कायं तु अमुंचओ।।134।।
अणंत काल-मुक्कोसं, अन्तो मुहत्तं जहण्णयं ।
बेइन्दिय-जीवाणं, अन्तरेयं वियाहियं ।।135 ।।
एएसिं वण्णओ चेव, गंधओ रस-फासओ।
सण्ठाणादेसओ वावि, विहाणाइ सहस्ससो।।136 ||
तेइन्दिया उ जे जीवा, दुविहा ते पकित्तिया।
पज्जत्त-मपज्जत्ता, तेसिं भेए सुणेह मे।।137 ||
कुंथु पिवीलि उडुंसा, उक्कलु-देहिया तहा।
तणहारा कट्ठहारा य, मालूगा पत्तहारगा ! |138 ||
कप्पासहि मिजा य, तिन्दुगा तउस-मिजगा।
सदावरी य गुम्मी य, बोधव्वा इंदकाइया। 1139 ।।
इन्दगोवग-माईया, णेगहा एव-मायओ।
लोगेगदेसे ते सव्वे, ण सव्वत्थ वियाहिया।।140।।
सन्तइं पप्प-णाईया, अप्पज्जव-सिया वि य।
ठिइ पडुच्च साईया, सप्पज्जव-सिया वि य।।141 ।।
एगूण-पण्णहोरत्ता, उक्कोसेण वियाहिया।
तेइन्दिय आउ-ठिई, अन्तो-मुहुत्त जहणिया।।142||
'EREEमाननाबमानाबाद
संखिज्ज-काल-मुक्कोसं, अन्तो-मूहुत्तं जहणिया।
तेइन्दिय काय-ठिई, तं कायं तु अमुंचओ।।143 ।।
अणंत काल-मुक्कोसं, अन्तो-मुहुत्तं जहण्णयं ।
तेइन्दिय-जीवाणं, अन्तरं तु वियाहियं । 1144।।
एएसिं वण्णओ चेव, गधओ रस-फासओ।
सण्ठाणा देसओ वावि, विहाणाई सहस्ससो।।14511
चउरिन्दिया उ जे जीवा, दुविहा ते पकित्तिया।
पज्जत्त-मपज्जत्ता, तेसिं भेए सुणेह मे।।146 ।।
अंधिया पोत्तिया चेव, मच्छिया मसगा तहा।
भमरे कीड-पयंगे य, ढिंकुणे कुंकणे तहा।।147 ||
कुक्कुडे सिंगिरीडी य, गंदावत्ते य विच्छिए।
डोले भिंगिरीडी य, विरली अच्छि-वेहए।114811
अच्छिले माहए अच्छि-रोडए विचित्ते चित्तपत्तए।
ओहिंजलिया जलकारी य, णीयया तम्बगाइया ||14911
इय चउरिन्दिया एए, णेग-विहा एव-मायओ।
लोगेगदेसे ते सव्वे, ण सव्वत्थ वियाहिया||150 ||
सन्तई पप्प-णाईया, अपज्जव-सिया वि य।
ठिइं पडुच्च साईया, सपज्जवसिया वि य। 115111
छच्चेव य मासाउ, उक्कोसण वियाहिया।
चउरिन्दिय आउठिई, अन्तो-मुहुत्तं जहणिया। 1152 ||
संखिज्ज काल-मुक्कोसं, अन्तो-मुहत्तं जहण्णयं ।
चउरिन्दिय कायठिई, तं कायं तु अमुंचओ। 1153 11
अणंतकाल-मुक्कोसं, अन्तो-मुहुत्तं जहण्णयं ।
विजढम्मि सए काए, अन्तरेयं वियाहियं | 1154 ||
एएसिं वण्णओ चेव, गंधओ रस-फासओ।
सण्ठाणा देसओ वावि, विहाणाई सहस्ससो11155।।
112-स्वाध्याय माला बाबमा बजानवजात
EDIA
. पचिन्दिया उ जे जीवा, चउविहा ते वियाहिया। णेरइया तिरिक्खा य, मणुया देवा य आहिया। 1156 || णेरइया सत्तविहा, पुढवीसु सत्तसु भवे । रयणाभा-सक्कराभा, वालुयाभा य आहिया। 1157 || पंकाभा धूमाभा, तमा-तमतमा तहा। इइ णेरइया एए, सत्तहा परिकित्तिया।।158 ।। घम्मा वंसगा सिला, तहा अजण-रिट्ठगा। मघा माघवइ चेव, णारइया य वियाहिया।।159।। रयणाई गोत्तओ चेव, तहा घम्माइ णामओ। इइ णेरइया एए, सत्तहा परिकित्तिया। 1160 || लोगस्स एग देसम्मि, ते सव्वे उ वियाहिया। इत्तो काल-विभाग तु, तेसिं वोच्छं चउव्विह ।।161 || सन्तइं पप्प-णाईया, अपज्जवसिया वि य। ठिइ पडुच्च साईया, सपज्जवसिया य। 1162 || सागरोवम-मेगं तु, उक्कोसेण वियाहिया। पढमाए जहण्णेणं, दसवास-सहस्सिया।।16311 तिण्णेव-सागरा ऊ, उक्कोसेण वियाहिया। दोच्चाए जहण्णेणं, एग तु सागरोवमं । 1164 ।। सत्तेव सागरा ऊ, उक्कोसेण वियाहिया। तइयाए जहण्णेणं, तिण्णेव उ सागरोवमा।।165 ।। दस सागरोवमाऊ, उक्कोसेण वियाहिया। चउत्थीए जहण्णेण, सत्तेव सागरोवमा।।166 ।। सत्तरस सागरा ऊ, उक्कोसेण वियाहिया। पंचमाए जहण्णेण, दस चेव सागरोवमा। 167 ।। बावीस-सागरा ऊ, उक्कोसेण वियाहिया। छडीए जहण्णेणं, सत्तरस-सागरोवमा।1168|| विमानवावगाव बजावानबाबाबाग -113 5
तेत्तीस-सागरा ऊ, उक्कोसेण वियाहिया।
सत्तमाए जहण्णेण, बावीसं सागरोवमा।।16911
जा चेव य आउ ठिई, णेरइयाणं वियाहिया।
सा तेसिं काय-ठिई, जहण्णु-क्कोसिया भवे। 1170 } }
अणंत काल-मुक्कोस, अन्तो-मुहत्तं जहण्णय ।
विजढम्मि सए काए, रइयाणं तु अन्तरं। 1171 ||
एएसिं वण्णओ चेव, गंधओ रस-फासओ।
सण्ठाणा देसओ वावि, विहाणाई सहस्स्सो।।172 11
पंचिन्दिय तिरिक्खाओ, दुविहा ते वियाहिया।
सम्मुच्छिम-तिरिक्खाओ, गम वक्कन्तिया तहा। 1173 ।।
दुविहा ते भवे तिविहा, जलयरा थलयरा तहा।
णहयरा य बोधव्वा, तेसिं भेए सुणेह मे।।174।।
मच्छा य कच्छभा य, गाहा य मगरा तहा।
सुंसुमारा य बोधव्वा, पंचहा जलयराहिया। 1175।।
लोगेगदेसे ते सव्वे, ण सव्वत्थ वियाहिया।
इत्तो कालविभागं तु, तेसिं वोच्छं चउव्विहं | 1176 ।।
सन्तई पप्प-णाईया, अपज्जवसिया वि य।
ठिई पडुच्च साईया, सपज्जवसिया वि य}}177 ||
एगा य पुव्वकोडीओ, उक्कोसेण वियाहिया।
आउठिई जलयराणं, अन्तो-मुहुत्तं जहण्णिया। 178।।
पव्वकोडी पुहुत्तं तु, उक्कोसेण वियाहिया।
कायठिई जलयराणं, अन्तो-मुहुत्त जहण्णयं । 1179 ।।
अणंतकाल-मुक्कोस, अन्तो-मुहत्तं जहण्णयं ।
विजढम्मि सए काए,
जलयराणं अन्तर ||18011
एएसिं वण्णओ चेव, गंधओ रस-फासओ।
सण्ठाणा देसओ वावि, विहाणाई सहस्सओ। 181 11
114- स्वाध्याय माला बनानावनाबाबEADERERIAL
चउप्पया य परिसप्पा, दुविहा थलयरा भवे।
चउप्पया चउविहा, ते मे कित्तयओ सुण। 1182 ||
एगखुरा दुखुरा चेव, गण्डीपया सणप्पया।
हयमाइ गोणमाइ, गयमाइ सीहमाइणो। 183 ||
भुओरग-परिसप्पा य, परिसप्पा दुविहा भवे।
गोहाई अहिमाई य, एक्केक्का ऽणेगहा भवे।।184 ।।
लोएग-देसे ते सव्वे, ण सव्वत्थ वियाहिया।
इत्तो काल-विभाग तु, तेसिं वोच्छं चउव्विह।।185 ।।
सन्तई पप्प-णाईया, अपज्जव-सिया वि य ।
ठिइ पडुच्च साईया, सपज्जव-सिया वि य।।186 ।।
पलिओवमाइं तिण्णि उ, उक्कोसेण वियाहिया।
आउठिई थलयराणं, अन्तो-मुहुत्तं जहण्णिया।।187 ||
पुव्वकोडी पुहुत्तेणं, अन्तो-मुहुत्तं जहणिया।
कायठिई थलयराणं, अन्तरं तेसिमं भवे ।।188 ||
अणत काल-मुक्कोसं अन्तो-मुहुत्तं जहण्णय ।
विजढम्मि सए काए, थलयराणं तु अन्तर । 1189 ।।
एएसिं वण्णओ चेव, गधओ रस-फासओ।
सण्ठाणा देसओ वावि, विहाणाई सहस्सओ।।190 ।।
चम्मे उ लोमपक्खी य, तइया समुग्ग-पक्खिया।
विययपक्खी य बोधव्वा, पक्खिणो य चउविहा।।191 ।।
लोगेग देसे ते सव्वे, ण सव्वत्थ वियाहिया।
इत्तो काल-विभाग तु, तेसिं वोच्छं चउव्विहं । 1192 ।।
सन्तइ पप्प-णाईया, अपज्जव-सिया वि य।
ठिइं पडुच्च साईया, सपज्जव-सिया वि य||193 ||
पलिओवमस्स भागो, असखेज्ज इमो भवे।
आउठिई खहयराणं, अन्तो-मुहुत्त जहण्णिया ||194 ||
वाललनबEMIERARAMETE स्वाध्याय माला-115
असखभागो पलियस्स, उक्कोसेण उ साहिया।
पुवकोडी पुहुत्तेणं, अन्तो-मुहुत्तं जहण्णिया}}195।।
कायठिई खहयराणं, अन्तरं तेसिम भवे।
अणतकाल-मुक्कोसं, अन्तो-मुहुत्तं जहण्णयं । 119611
एएसिं वण्णओ चेव, गंधओ रस-फासओ।
सण्ठाणा देसओ वावि, विहाणाइं सहस्ससो।।19711
मणुया दुविह भेया उ, ते मे कित्तयओ सुण।
सम्मुच्छिमा य मणुया, गब्म-वक्कन्तिया तहा। 1198 }}
गब्म-वक्कन्तिया जे उ, तिविहा ते वियाहिया।
कम्म-अकम्म-भूमा य, अन्तर द्दीवया तहा। 1199 ।।
पण्णरस तीसइविहा, भेया दु-अट्ट-वीसइं।
संखा उ कमसो तेसिं, इइ एसा वियाहिया। 1200 11
सम्मुच्छिमाण एसेव, भेओ होइ वियाहिओ।
लोगस्स एग-देसम्मि, ते सव्वे वि वियाहिया। 1201 ।।
सन्तइं पप्प-णाईया, अपज्जव-सिया वि य।
ठिइ पडुच्च साईया, सपज्जव-सिया वि य !!202 ||
पलिओवमाइ तिण्णि उ, उक्कोसेण वियाहिया।
आउठिई मणुयाणं, अन्तो-मुहत्तं जहणिया । |203 11
पलिओवमाइ तिण्णि उ, उक्कोसेण वियाहिया।
पुवकोडि पुहुत्तेणं, अन्तो-मुहुत्तं जहणिया । |204 ||
कायठिई मणुयाणं, अन्तरं तेसिमं भवे ।
अणंतकाल-मुक्कोस, अन्तो-मुहुत्त जहण्णयं । 1205 ।।
एएसि वण्णओ चेव, गधओ रस-फासओ।
सण्ठाणा-देसओ वावि, विहाणाई सहस्ससो। 1206 11
देवा चउबिहा वुत्ता, ते मे कित्तयओ सुण।
भोमिज्ज वाणमंतर, जोइस वेमाणिया तहा। |20711
116 - स्वाध्याय माला विमानाASTERESERVATEDAAR
दसहा उ भवणवासी, अट्टहा वणचारिणो।
पंचविहा जोइसिया, दुविहा वेमाणिया तहा। |208 ।।
असुरा णाग-सुवण्णा, विज्जू अग्गी य वियाहिया।
दीवोदहि दिसा वाया, थणिया भवण-वासिणो।।209 ।।
पिसाय-भूया जक्खा य, रक्खसा किण्णरा किपुरिसा।
महोरगा य गन्धव्वा, अट्ठविहा वाणमन्तरा । |210 ।।
चदा सूरा य णक्खत्ता, गहा तारागणा तहा।
ठिया वि चारिणो चेव, पंचहा जोइसालया।।211 ।।
वेमाणिया उ जे देवा, दुविहा ते वियाहिया।
कप्पोवगा य बोधव्वा, कप्पाईया तहेव य ।।212 ||
कप्पोवगा य बारसहा, सोहम्मीसाणगा तहा।
सणकुमार माहिदा, बम्भलोगा य लन्तगा। 213 ||
महासुक्का सहस्सारा, आणया पाणया तहा।
आरणा अच्चुया चेव, इइ कप्पोवगा सुरा । |214||
कप्पाईया उ जे देवा, दुविहा ते वियाहिया।
गेविज्जा-णुत्तरा चेव, गेविज्जा णवविहा तहि ।।215 ।।
हेट्टिमा-हेट्टिमा चेव, हेट्ठिमा मज्झिमा तहा।
हेडिमा उवरिमा चेव, मज्झिमा हेट्ठिमा तहा। 216 ||
मज्झिमा-मज्झिमा चेव, मज्झिमा-उवरिमा तहा।
उवरिमा-हेट्ठिमा चेव, उवरिमा-मज्झिमा तहा।।217 ||
उवरिमा-उवरिमा चेव, इय गेविज्जगा सुरा।
विजया वेजयन्ता य, जयन्ता अपराजिया । |218 ।।
सव्वट्ठ सिद्धगा चेव, पचहाणुत्तरा सुरा।
इय वेमाणिया देवा, णेगहा एवमायओ । [219 ।।
लोगस्स एग-देसम्मि, ते सव्वे वि वियाहिया ।
इत्तो कालविभाग तु, तेसि वोच्छ चउव्विह।।220 ||
विनदानाबाबESIRESनाव स्वाध्याय
-117
सन्तई पप्प-णाईया, अपज्जवसिया वि य।
ठिइं पडुच्च साईया, सपज्जवसिया वि य । |221 ||
साहियं सागरं इक्कं, उक्कोसेण ठिई भवे।
भोमेज्जाणं जहण्णेणं, दसवास-सहस्सिया 11222 ||
पलिओवम-दो ऊणा, उक्कोसेण वियाहिया।
असुरिन्दवज्जित्ताणं, जहण्णा दस सहस्सगा। [223 ।।
पलिओवम-मेगं तु, उक्कोसेण ठिई भवे ।
वन्तराण जहण्णेणं, दसवास-सहस्सिया।।22411
पलिओवम-मेगं तु, वासलक्खेण साहियं ।
पलिओव-मट्ठ भागो, जोइसेसु जहणिया।।225 ।।
दो चेव सागराइं, उक्कोसेण वियाहिया।
सोहम्मम्मि जहण्णेणं, एगं य पलिओवम ||226 ||
सागरा साहिया दुण्णि, उक्कोसेण वियाहिया।
ईसाणम्मि जहण्णेणं, साहियं पलिओवमं | 1227 11
सागराणि य सत्तेव, उक्कोसेण ठिई भवे ।
सणंकुमारे जहण्णेणं, दुण्णि उ सागरोवमा ।।228 ।।
साहिया सागरा सत्त, उक्कोसेण ठिई भवे।
माहिन्दम्मि जहण्णेणं, साहिया दुण्णि सागरा।।229 ।।
दस चेव सागराइं, उक्कोसेण ठिई भवे।
बम्भलोए जहण्णेणं, सत्त उ सागरोवमा। 123011
चउद्दस सागराइं, उक्कोसेण ठिई भवे।
लंतगम्मि जहण्णेणं, दस उ सागरोवमा। 123111
सत्तरस सागराइं, उक्कोसेण ठिई भवे।
महासुक्के जहण्णेणं, चउद्दस सागरोवमा । [232 11
अट्ठारस सागराइं, उक्कोसेण ठिई भवे ।
सहस्सारम्मि जहण्णेणं, सत्तरस सागरोवमा । 1233 ||
118-स्वाध्याय माला बिमानवजाब
सागरा अउणवीसं तु, उक्कोसेण ठिई भवे।
आणयम्मि जहण्णेणं, अट्ठारस सागरोवमा। 234 ||
वीस तु सागराइ, उक्कोसेण ठिई भवे ।
पाणयम्मि जहण्णेण, सागरा अउणवीसई ।।23511
सागरा इक्कवीस तु, उक्कोसेण ठिई भवे।
आरणम्मि जहण्णेण, वीसई सागरोवमा।।236 ||
बावीस सागराइं, उक्कोसेण ठिई भवे ।
अच्चुयम्मि जहण्णेणं, सागरा इक्कवीसई ।।237 ||
तेवीस सागराई, उक्कोसेण ठिई भवे ।
पढमम्मि जहण्णेण, बावीसं सागरोवमा । |238 ||
चउवीस सागराइं, उक्कोसेण ठिई भवे ।
बिइयम्मि जहण्णेणं, तेवीस सागरोवमा।।23911
पणवीस सागराइ, उक्कोसेण ठिई भवे।
तइयम्मि जहण्णेण, चउवीसं सागरोवमा||240।।
छव्वीस सागराइं, उक्कोसेण ठिई भवे।
चउत्थम्मि जहण्णेण, सागरा पणवीसई ।।241 ||
सागरा सत्तवीसं तु, उक्कोसेण ठिई भवे।
पचमम्मि जहण्णेण, सागरा उ छवीसई | 242 ||
सागरा अट्ठवीस तु, उक्कोसेण ठिई भवे।
छट्टम्मि जहण्णेणं, सागरा सत्तवीसई | 243 ||
सागरा अउणतीस तु, उक्कोसेण ठिई भवे।
सत्तमम्मि जहण्णेण, सागरा अट्ठवीसई । [244 ||
तीस तु सागराइ, उक्कोसेण ठिई भवे ।
अट्ठमम्मि जहण्णेणं, सागरा अउणतीसई ।।24511
सागरा इक्कतीस तु, उक्कोसेण ठिई भवे।
णवमम्मि जहण्णेण, तीसई सागरोवमा । 246 ||
विजानवजाबाकाबलाASA स्वाध्याय माला-119
तत्तीसा सागराइ, उक्कासण ठिइ भव।
चउसुं वि विजयाईसु, जहण्णे-णेक्क-तीसई। 1247।।
अजहण्ण-मणुक्कोसा, तेत्तीसं सागरोवमा ।
महाविमाणे-सव्वडे, ठिई एसा वियाहिया ।।24811
जा चेव उ आउठिई, देवाणं तु वियाहिया।
सा तेसिं काय ठिई, जहण्णुक्कोसिया भवे । ।249।।
अणंतकाल-मुक्कोसं, अन्तो-मुहुत्तं जहण्णयं ।
विजंढम्मि सए काए, देवाणं हुज्ज अन्तर ।।250 ।।
अणंत काल-मुक्कोसं, वासपुहत्तं जहण्णयं ।
आणयाईण कप्पाणं देवाणं, गेविज्जाणं तु अन्तरं ।।251 ।।
सखिज्ज सागरुक्कोसं, वासपुहुत्तं जहण्णय ।
अणुत्तराणं देवाणं, अन्तरेयं वियाहिय । |252||
एएसिं वण्णओ चेव, गंधओ रस-फासओ।
सण्ठाणा-देसओ वावि, विहाणाइं सहस्ससो।।253 ।।
संसारत्था य सिद्धा य, इय जीवा वियाहिया।
रूविणो चेवारूवी य, अजीवा दुविहा वि य | 1254 ।।
इय जीव-मजीवे य, सोच्चा सद्दहिऊण य।
सव्व-णयाण-मणुमए, रमेज्ज संजमे मुणी।।255 ।।
तओ बहूणि वासाणि, सामण्ण-मणुपालिया।
इमेण कम्म-जोगेण, अप्पाणं संलिहे-मुणी ।।256 ||
बारसेव उ वासाई, संलेहुक्कोसिया भवे ।
संवच्छरं मज्झिमिया, छम्मासा य जहणिया। 1257 ||
पढमे वास चउक्कम्मि, विगई णिज्जूहणं करे।
बिइए वास चउक्कम्मि, विचित्तं तु तव चरे।।258 ।।
एगन्तर-मायाम, कटु संवच्छरे दुवे।
तओ संवच्छरद्ध तु, णाइविगिटुं तवं चरे।।259||
120- स्वाध्याय माला बनानाACHANADA
तओ सवच्छरद्धं तु, विगिटुं तु तव चरे।
परिमिय चेव आयाम, तम्मि संवच्छरे करे।।260 ||
कोडी सहिय-मायाम, कटु सवच्छरे मुणी।
मासद्ध-मासिएणं तु, आहारेण तव चरे | 128111
कंदप्प-माभिओगं य, किदिवसिय मोह-मासुरत्त च।
एयाओ दुग्गईओ, मरणम्मि विराहिया होन्ति । 262 ||
मिच्छा-दंसण-रत्ता, सणियाणा हु हिसगा।
इय जे मरंति जीवा, तेसिं पुण दुल्लहा बोही ।।263 ।।
सम्मइंसण रत्ता, अणियाणा सुक्कलेस-मोगाढा।
इय जे मरति जीवा, तेसि सुलहा भवे बोही।।264 ||
मिच्छा-दंसण-रत्ता, सणियाणा कण्हेलेस-मोगाढा।
इय जे मरंति जीवा, तेसि पुण दुल्लहा बोही।।265 ।।
जिणवयणे अणुरत्ता, जिणवयण जे करेन्ति भावेण ।
अमला असकिलिहा, ते होन्ति परित्त-संसारी।।266 ||
बाल मरणाणि बहुसो, अकाम मरणाणि चेव य बहूयाणि।
मरिहन्ति ते वराया, जिणवयण जे ण जाणन्ति ।।267 ।।
बहुआगम-विण्णाणा, समाहि-उप्पयगा य गुणगाही।
एएणं कारणेण, अरिहा आलोयण सोउ । 1268 ।।
कन्दप्प-कुक्कुयाइ तह, सील सहाव-हास विगहाहि।
विम्हावेन्तो य पर, कदप्प भावण कुणइ ।।269 ।।
मता जोग काउ, भूईकम्म य जे पउजति।
साय-रस-इड्ढि हेउं, अभिओग भावण कुणइ ।।270 ||
णाणस्स केवलीण, धम्मायरियस्स सघ साहूण।
माई अवण्णवाई, किदिवसिय भावण कुणइ ।।271 ||
अणुबद्ध-रोस पसरो, तह य णिमित्तम्मि होइ पडिसेवी।
एएहि कारणेहि, आसुरिय भावण कुणइ ।।272 ||
दिनानालालNESIASTER स्वाध्याय माला-121
सत्थगहणं विसभक्खणं य, जलणं य जलपवेसो य।
अणायार भण्डसेवी, जम्मण-मरणाणि बंधन्ति । 127311
इइ पाउकरे बुद्धे, णायए परिणिव्युए।
छत्तीसं उत्तरज्झाए, भवसिद्धिय सम्मए। 1274||
गाथा नम्बर 223 बहुत-सी प्रतियों में नहीं है, किसी प्रति मे
है। इसलिए यहाँ दे दी गई है।
|| त्तिबेमि।। जीवाजीवविभत्ती-अज्झयण-समत्तं ।।
।। इति उत्तराज्झयणं-सुत्तं-समत्तं ।।
....
LOROPOM.
(OX.
A..
MOONAM....ma
01.
णमा सिद्धाण
सिरि नन्दी सूत्रों
जयइ जग-जीव-जोणी वियाणओ जग-गुरू जगाणंदो।
जग-णाहो जग-बधू, जयइ जगप्पिया महो भयव।।1।।
जयइ सुयाण पभवो, तित्थयराण अपच्छिमो जयइ।
जयइ गुरू लोगाणं, जयइ महप्पा महावीरो।।2।।
भदं सव्व-जगुज्जोयगस्स, भदं जिणस्स वीरस्स।
भई सुरासुर णमंसियस्स, भई धुयकम्मरयस्स।।3।।
गुण-भवण-गहण सुय-रयण-भरिय दसण विसुद्ध-रत्यागा।
सघ-णगर ! भद्द ते,
चारित्त-पागारा। 1411
सजम-तव-तुबारयस्स, णमो सम्मत्त-पारियल्लस्स।
अप्पडिचक्कस्स जओ, होउ सया संघ-चक्कस्स। 1511
अखड
122- स्वाध्याय माला जवजविलSAMERABAR
भदं सील-पडागूसियस्स, तव-णियम-तुरय-जुत्तस्स। संघ-रहस्स भगवओ, सज्झाय-सुणन्दि-घोसस्स। 16 11 कम्मरय-जलोह-विणिग्गयस्स, सुयरयण-दीहणालस्स। पच-महव्वय-थिर-कण्णियस्स, गुणकेसरालस्स ।।7।। सावग-जण-महुयरी-परिवुडस्स, जिण-सूर-तेय-बुद्धस्स। सघ-पउमस्स भई, समण-गण-सहस्स-पत्तस्स। 18|| तव-सजममय लंछण, अकिरिय-राहु-मुह-दुद्धरिस णिच्चं । जय सघ-चंद ! णिम्मल, सम्मत्त-विसुद्ध-जोण्हागा। 1911 पर-तित्थिय-गह-पहणासगस्स, तवतेय-दित्त-लेसस्स। णाणु-ज्जोयस्स जए, भदं दम-संघ-सूरस्स ।।10।। भद्द धिइ-वेला-परिगयस्स, सज्झाय-जोग-मगरस्स। अक्खोहस्स भगवओ, भगवओ, संघ- संघ-समुदस्स रुदस्स।।11।। सम्म-इंसण-वर-वइर-दढ-रूढ-गाढावगाढ-पेढस्स। धम्म-वर-रयण-मंडिय, चामीयर-मेहलागस्स। |12|| णिय-मूसिय-कणय-सिलाय-लुज्जल-जलंत-चित्तकूडस्स। णदण-वण-मणहर-सुरभि-सील-गधुद्ध-मायस्स । [13 || जीवदया-सुदर-कद-रुद्दरिय-मुणिवर-मइद-इण्णस्स। हेउ-सय-धाउ-पगलत, रयण-दित्तोसहि-गुहस्स ।।14।। सवर-वर-जल-पगलिय-उज्झर-प्पविराय-माणहारस्स। सावग-जण-पउर-रवंत-मोर-णच्चत-कुहरस्स। |15 ।। विणय-णयपवर-मुणिवर, फुरत-विज्जुज्जलत-सिहरस्स। विविह- -गुण-कप्प-रुक्खग, फलभर-कुसुमाउल-वणस्स 1116।। णाण-वर-रयण-दिप्पत, कत-वेरुलिय-विमल-चूलस्स। वदामि विणय-पणओ, सघ-महामंदर-गिरिस्स ||17 || गुण-रयणुज्जल कडय, सील-सुगधि-तव-मडि-उद्देस। सुय-बारसग-सिहर, सघ-महामदर वदे । |18 || नाRIEERIAAAAAAAबनाबाल स्वाध्याय माला-123
णगर-रह-चक्क-पउमे, चंदे सूरे समुद्द-मेरुम्मि।
जो उवमिज्जइ सययं, तं संघ-गुणायरं वंदे।।19 ।।
वंदे उसमें अजियं, संभव-मभिणंदण-सुमइ-सुप्पभ-सुपास।
ससि-पुप्फदंत सीयल-सिज्जंसं वासुपुज्जं च ।।20।।
विमल-मणंतं च धम्म संति, कुंथु अरं च मल्लिं च ।
मुनिसुव्वय णमि णेमि, पासं तह वद्धमाणं च ।।21 ।।
पढमित्थ इंदभूई, बीए पुण होइ अग्गिभूइत्ति।
तइए य वाउभूई, तओ वियत्ते सुहम्मे य ।।22 ||
मडिय-मोरियपुत्ते, अकंपिए चेव अयलभाया य।
मेयज्जे य पहासे, गणहरा हुंति वीरस्स ।।23।।
णिव्वुइ-पह-सासणयं, जयइ सया सव्व-भाव-देसणयं।
कुसमय मय-णासणयं, जिणिंद-वर-वीर-सासणय ।।24।।
सुहम्मं अग्गिवेसाण, जम्बूणामं च कासवं ।
पभवं कच्चायणं वंदे, वच्छं सिज्ज-भवं तहा।।25।।
जसभई तुंगयिं वंदे, संभूयं चेव माढरं ।
भद्दबाहुं च पाइण्णं, थूलभदं च गोयमं । 26 ।।
एलावच्चसगोत्तं, वदामि महागिरि सुहत्थिं च ।
तत्तो कोसियगोत्तं, बहुलस्स सरिव्वयं वंदे । |27 ।।
हारिय-गुत्तं साइं च, वंदिमो हारियं च सामज्जं ।
वंदे कोसियगोत्तं, संडिल्लं अज्जजीयधरं | 128 11
ति-समुद्द-खाय-कित्तिं, दीव-समुद्देसु गहिय-पेयाल।
वंदे अज्जसमुदं, अक्खुभिय-समुद्द-गंभीर ।।29 ।।
भणगं करगं झरग, पभावगं णाण-दंसण-गुणाणं।
वंदामि अज्जमगुं, सुय-सागर-पारगं धीरं ।।3011
वदामि अज्जधम्म, तत्तो वंदे य भद्दगुत्तं च ।
तत्तो य अज्जवइरं, तव-णियम-गुणेहिं वइरसमं । 131।।
124 - स्वाध्याय माला (AAAAAAAAASENA
वंदामि अज्ज-रक्खिय-खमणे, रक्खिय-चरित्त सव्वस्से।
रयण-करडग-भूओ, अणुओगो रक्खिओ जेहि।।32 ||
णाणम्मि दंसणम्मि य, तवविणए णिच्च-काल-मुज्जुत्तं।
अज्जं णंदिलखमण, सिरसा वंदे पसण्णमण | 133 ||
वड्ढउ वायगवंसो, जसवंसो अज्ज-णागहत्थीण।
वागरण-करण-भंगिय, कम्मप्पयडी-पहाणाण। 134 11
जच्चजण-धाउ-सम-प्पहाण, मुद्धिय-कुवलय-णिहाण।
वड्ढउ वायगवसो,
वायगवसो, रेवइ-णक्खत्त-णामाण । |35 ।।
अयलपुरा णिक्खते, कालिय-सुय-अणुओगिए धीरे।
बंभद्दीवग-सीहे, वायग-पय-मुत्तमं पत्ते ।।36 ||
जेसिं इमो अणुओगो, पयरइ अज्जावि अड्ड भरहम्मि।
बहु-णयर-णिग्गय-जसे, ते वदे खदिलायरिए। 137
तत्तो हिमवंत-महंत-विक्कमे, धिइ-परक्कम-मणते।
सज्झाय-मणंतधरे, हिमवंते वदिमो सिरसा।।38 ||
कालिय-सुय-अणुओगस्स, धारए धारए य पुव्वाणं।
हिमवत खमासमणे, वंदे णागज्जुणायरिए । 139 ||
मिउ-मद्दव-सपण्णे, आणुपुवि वायगत्तण पत्ते।
ओह-सुय-समायारे, णागज्जुण-वायए वदे । |40 ।।
गोविदाणं पि णमो, अणुओगे विउल-धारिणिदाणं।
णिच्चं खंतिदयाण, परूवणे दुल्लभिदाण।।41 ||
तत्तो य भूयदिण्णं, णिच्चं तवसजमे अणिविण्णं ।
पडियजण-सम्माण, वंदामो सजम-विहिण्णू। 142 ||
वर-कणग-तविय चंपग, विमउल-वर-कमल-गम-सरिवण्णे।
भविय-जण-हियय-दइए, दया-गुण-विसारए धीरे।।43 ||
अड्ड भरह-प्पहाणे, बहुविह-सज्झाय-सुमुणिय-पहाणे।
अणुओगिय-वर-वसभे, णाइल-कुल-वस-णदीकरे। 144 ||
विवादESEDIARIEDIEE) स्वाध्याय माला-125
जग भूय-हियप्पगमे, वंदेऽहं भूयदिण्णमायरिए।
भव-भय-वुच्छेय-करे, सीसे णागज्जुण-रिसीणं। 145 ।।
सुमुणिय-णिच्चाणिच्चं, सुमुणिय-सुत्तत्थधारयं वंदे।
सब्भावुब्भावणया तत्थं, लोहिच्च-णामाणं114611
अत्थ-महत्थक्खाणिं, सुसमण-वक्खाण-कहण-णिव्वाणिं।
पयईए महुरवाणिं, पयओ पणमामि दूसगणिं। 147 ।।
तव-णियम-सच्च-संजम, विणयज्जव-खंति मद्दव-रयाणं।
सील गुण-गद्दियाणं, अणुओग-जुग-प्पहाणाणं । 148 ।।
सुकुमाल-कोमल-तले, तेसिं पणमामि लक्खण-पसत्थे।
पाए पावयणीणं, पडिच्छय-सयएहि पणिवइए।।49 ||
जे अण्णे भगवंते, कालिय-सुय-आणुओगिए धीरे।
ते पणमिऊण सिरसा, णाणस्स परूवणं वोच्छं। 150 11
सेलघण, कुडग, चालणि, परिपुण्णग, हस महिस, मेसे य।
मसग, जलूग, बिराली, जाहग, गो, भेरी, आभीरी । 15111
सा समासओ तिविहा पण्णत्ता, तंजहा-जाणिया, अजाणिया,
दुब्बियड्डा। जाणिया जहा-
खीरमिव जहा हंसा, जे घुटुंति इह गुरुगुण समिद्धा।
दोसे य विवज्जंति, त जाणसु जाणियं परिसं । 152 ।।
अजाणिय जहा-
होइ पगइमहुरा, मियछावय-सीह-कुक्कुडय भूआ।
रयणमिव असंठविया, अजाणिया सा भवे परिसा। 153 ।।
दुब्बियड्ढा तहा-
ण य कत्थइ णिम्माओ, ण य पुच्छइ परिभवस्स दोसेणं।
वत्थिव्व वायपुण्णो, फुट्टइ गामिल्लय वियड्ढो । [54 ।।
सूत्र
1 णाणं पंचविहं पण्णत्तं तंजहा-आभिणिबोहिय णाणं,
सुयणाण, ओहिणाणं, मणपज्जव णाणं, केवलणाण।।
126- स्वाध्याय माला विमानमालालाबालानाAMARAVADIES
- - - 2 त समासओ दुविह पण्णत्तं, तजहा-पच्चक्खं च परोक्ख च।। सूत्र 3 से किं तं पच्चक्ख ? पच्चक्ख दुविहं पण्णत्त, तजहा-इन्दिय-पच्चक्ख, णोइन्दिय-पच्चक्ख च ।। सूत्र 4 से किं त इन्दिय-पच्चक्ख ? इन्दिय-पच्चक्खं पंचविह पण्णत्तं, तंजहा-सोइन्दिय-पच्चक्ख, चक्खिन्दिय-पच्चक्खं, घाणिन्दिय-पच्चक्खं, जिब्भिन्दिय-पच्चक्ख, फासिन्दिय-पच्चक्खं, से तं इन्दिय-पच्च्क्खं ।। सूत्र - 5 से किं तं णोइन्दिय-पच्चक्ख ? णोइन्दिय-पच्चक्खं तिविहं पण्णत्त, तजहा-ओहिणाण-पच्चक्खं मणपज्जव-णाण-पच्चक्खं, केवलणाण-पच्चक्खं ।। सूत्र-6 से किं तं ओहिणाण-पच्चक्खं ? ओहिणाण-पच्चक्खं दुविह पण्णत्त, तंजहा-भवपच्चइयं च खओवसमिय च ।। सूत्र - 7 से किं तं भवपच्चइय भवपच्चइय दुण्ह, तजहा- देवाण य णेरइयाणं य।। सूत्र - 8 से किं त खओवसमियं ? खओवसमियं दुण्हं, तंजहा-मणुस्साण य, पंचिदिय-तिरिक्ख- जोणियाणं य। को हेऊ खाओवसमियं? खओवसमिय तयावरणिज्जाण कम्माण उदिण्णाण खएणं अणुदिण्णाण उवसमेणं ओहिणाणं समुप्पज्जइ।। सूत्र 9 अहवा गुणपडिवण्णस्स अणगारस्स ओहिणाणं समुप्पज्जइ। त समासओ छव्विह पण्णत्तं, तजहा आणुगामियं, अणाणुगामियं, वड्डमाणयं, हीयमाणय, पडिवाइयं, अपडिवाइयं। सूत्र – 10 से किं तं आणुगामिय ओहिणाण ? आणुगामियं ओहिणाणं दुविह पण्णत्तं, तंजहा–अंतगय च, मज्झगय च। से किं तं अतगय ? अंतगय तिविहं पण्णत्तं, तजहा-पुरओ अतगय, मग्गओ अंतगय, पासओ अंतगयं। ? विजिवनावबादEDIAम स्वाध्याय माला-127 ओहिणाणं अप्पसत्थेहि अज्झवसाय-ट्ठाणेहिं वट्टमाणस्स वट्टमाण- चरित्तस्स संकिलिस्स-माणस्स संकिलिस्समाण-चरित्तस्स सव्वओ समंता ओही परिहायइ। से त्तं हीयमाणयं ओहिणाण।। सूत्र – 14 से किं त पडिवाइ ओहिणाण? पडिवाइ ओहिणाण जहण्णेण अंगुलस्स-असखिज्जइ भागं वा सखिज्जइ भाग वा, वालग्गं वा, वालग्ग-पुहुत्तं वा, लिक्ख वा लिक्ख-पुहुत्तं वा, जूय वा जूय-पुहुत्तं वा, जवं वा जवपुहुत्त वा, अगुलं वा अंगुल-पुहुत्त वा, पाय वा पायपुहुत्तं वा, विहत्थिं वा विहत्थिपुहुत्तं वा, रयणि वा रयणिपुहुत्त वा, कुच्छि वा कुच्छिपुहुत्तं वा, धणु वा धणुपुहुत्तं वा, गाउयं का गाउयपुहुत्त वा, जोयणं वा जोयणपुहुत्तं वा, जोयण-सयं वा जोयणसय- पुहुत्त वा, जोयण-सहस्स वा जोयण-सहस्सपुहुत्तं वा, जोयणलक्ख वा, जोयण-लक्खपुहुतं वा, जोयणकोडि वा जोयण-कोडिपुत्त वा, जोयण-कोडाकोडिं वा, जोयण-कोडाकोडि-पुहुत्तं वा, जोयण-सखिज्ज वा जोयण संखिज्जपुहुत्त वा, जोयण-असंखेज्ज वा जोयण असंखेज्ज-पुहुत्तं वा उक्कोसेण लोगं वा पासित्ता णं पडिवइज्जा। से तं पडिवाइ ओहिणाण।। सूत्र 15 से कि तं अपडिवाइ ओहिणाणं ? अपडिवाइ- ओहिणाणं जेण अलोगस्स एगमवि आगास-पएसं जाणइ पासइ, तेण परं अपडिवाइ ओहिणाणं से त्तं अपडिवाइ-ओहिणाणं ।। सूत्र 16 तं समासओ चउविहं पण्णत्तं, तजहा-दव्वओ, खित्तओ, कालओ, भावओ। तत्थ दव्वओ णं ओहिणाणी जहण्णेण अणताई रूविदव्वाइ जाणइ पासइ, उक्कोसेणं सव्वाइं रूविदव्वाइ जाणइ पास। खित्तओ ण ओहिणाणी जहण्णेणं अंगुलस्स असंखिज्जइ भाग जाणइ पासइ, उक्कोसेणं असंखिज्जाइ अलोगे लोगप्पमाण- मित्ताई खण्डाइं जाणइ पासइ। - 130-स्वाध्याय माला बनावावर शनिवा 2 कालओ णं ओहिणाणी जहण्णेणं आवलियाए असखिज्जइ भागं जाणइ पासइ उक्कोसेण असंखिज्जाओ उस्सप्पिणीओ अवसप्पिणीओ अईय-मणागयं च काल जाणइ पासइ। भावओ ण ओहिणाणी जहण्णेण अणते भावे जाणइ पासइ, उक्कोसेण वि अणते भावे जाणइ पासइ। सव्वभावाण-मणत-भाग जाणइ पासइ।। ओही भव पच्चइओ, गुण पच्चइओ य वण्णिओ दुविहो। तस्स य बहू विगप्पा, दव्वे खित्ते य काले य ||63 || णेरइय-देव-तित्थकरा य, ओहिस्सऽबाहिरा हुति। पासति सव्वओ खलु, सेसा देसेण पासति ।।64 || से त्तं ओहिणाण पच्चक्खं सूत्र – 17 से किं त मणपज्जव णाण ? मणपज्जव णाणे ण भते ! कि मणुस्साणं उप्पज्जइ अमणुस्साण गोयमा ! मणुस्साण, णो अमणुस्साणं। जइ मणुस्साणं किं समुच्छिम मणुस्साण गब्भवक्कतिय- मणुस्साणं? गोयमा ! णो समुच्छिम मणुस्साणं, गब्भवक्कतिय-मणुस्साणं उप्पज्जइ। जइ गब्भवक्कतिय मणुस्साण कि कम्मभूमिय गब्भवक्कतिय मणुस्साण, अकम्मभूमिय गब्भवक्कतिय मणुस्साण, अतरदीवग गमवक्कतिय मणुस्साण गोयमा ! कम्मभूमिय-गब्भवक्कतिय-मणुस्साण, णो अकम्मभूमिय गब्भवक्कतिय मणुस्साण, णो अंतरदीवग-गब्भवक्कतिय मणुस्साण। जइ कम्मभूमिय गमवक्कतिय मणुस्साण, किं संखिज्ज वासाउय कम्मभूमिय गमवक्कतिय मणुस्साण, असखिज्ज वासाउय कम्मभूमिय गब्भवक्कंतिय मणुस्साण विमाननाबानाAASEASEानन स्वाध्याय ? 2 गोयमा ! संखेज्ज वासाउय कम्मभूमिय गमवक्फतिय मणुस्साणं, णो असंखेज्ज वासाउय कम्मभूमिय गमवक्कंतिय मणुस्साणं। जइ संखेज्ज वासाउय कम्मभूमिय गमवक्कंतिय मणुस्साणं किं पज्जत्तग संखेज्ज वासाउय कम्मभूमिय गमवक्फतिय मणुस्साण, अपज्जत्तग संखेज्ज वासाउय कम्मभूमिय गमवक्कंतिय मणुस्साणं ? गोयमा ! पज्जत्तग संखेज्ज वासाउय कम्मभूमिय गमवक्कतिय मणुस्साणं, णो अपज्जत्तग संखेज्ज वासाउय कम्मभूमिय गमवक्कतिय मणुस्साणं। जइ पज्जत्तग संखेज्ज वासाउय कम्मभूमिय गमवक्कतिय मणुस्साणं, किं सम्मदिट्ठि पज्जत्तग संखेज्ज वासाउय कम्मभूमिय गमवक्कंतिय मणुस्साणं, मिच्छदिट्टि पज्जत्त संखेज्ज वासाउय कम्मभूमिय गब्भ-वक्कंतिय मणुस्साणं, सम्मामिच्छदिट्टि पज्जत्तग संखेज्ज वासाउय कम्मभूमिय गमवक्कंतिय मणुस्साण गोयमा ! सम्मदिट्टि पज्जत्तग संखेज्ज वासाउय कम्मभूमिय गब्भवक्कंतिय मणुस्साणं, णो मिच्छदिट्टि पज्जत्तग संखेज्ज वासाउय कम्मभूमिय गमवक्कंतिय मणुस्साणं, णो सम्मामिच्छदिट्टि पज्जत्तग संखेज्ज वासाउय कम्मभूमिय गम्भवक्कंतिय मणुस्साणं। जइ सम्मदिट्टि पज्जत्तग संखेज्ज वासाउय कम्मभूमिय गम- वक्कंतिय मणुस्साणं, किं संजय सम्मदिट्ठि-पज्जत्तग सखेज्ज वासाउय-कम्मभूमिय गमवक्कतिय मणुस्साणं, असंजय सम्मदिहि पज्जत्तग-संखेज्ज वासाउय कम्मभूमिय-गब्भवक्कंतिय मणुस्साणं, संजया-संजय सम्मदिडि-पज्जत्तग संखेज्ज वासाउय कम्मभूमिय गब्मवक्कंतिय मणुस्साणं? गोयमा ! सजय सम्मदिट्टि पज्जत्तग संखेज्ज वासाउय- कम्मभूमिय गम्भवक्कंतिय मणुस्साणं, णो असंजय सम्मद्दिद्वि-पज्जत्तग ? - 132 -स्वाध्याय माला बनवाबनवानाAAREE संखेज्ज वासाउय कम्मभूमिय गब्भवक्कंतिय मणुस्साण, णो संजया-संजय-सम्मद्दिट्ठि-पज्जत्तग सखेज्ज-वासाउय कम्मभूमिय- गब्भवक्कतिय मणुस्साणं। जइ सजय सम्मदिट्टि पज्जत्तग सखेज्ज वासाउय-कम्मभूमिय- गब्भवक्कतिय मणुस्साण, किं पमत्त संजय-सम्मदिठि पज्जत्तग- सखेज्ज वासाउय कम्मभूमिय गमवक्कंतिय मणुस्साण, अपमत्त संजय-सम्मदिठि पज्जत्तग-संखेज्ज वासाउय कम्मभूमिय गमवक्कंतिय मणुस्साणं? गोयमा ! अपमत्त संजय सम्मदिठि पज्जत्तग-सखेज्ज-वासाउय कम्मभूमिय गमवक्कंतिय मणुस्साण णो पमत्त सजय सम्मद्दिठि पज्जत्तग-संखेज्ज वासाउय कम्म-भूमिय गब्भवक्कंतिय मणुस्साण । जइ अपमत्त संजय सम्मदिठि पज्जत्तग-संखेज्ज-वासाउय- कम्मभूमिय गमवक्कंतिय मणुस्साणं किं इडिपत्त अपमत्त सजय सम्मदिठि पज्जत्तग-संखेज्ज-वासाउय-कम्मभूमिय गब्भवक्कंतिय मणुस्साण, अणिडिपत्त अपमत्त संजय सम्मदिठि पज्जत्तग सखेज्ज वासाउय कम्म-भूमिय गमवक्कतिय मणुस्साणं ? गोयमा ! इड्डिपत्त अपमत्त संजय-सम्मद्दिठि पज्जत्तग-सखेज्ज वासाउय-कम्मभूमिय-गम्भवक्कंतिय-मणुस्साणं णो अणिड्डिपत्त अपमत्त संजय सम्मद्दिठि पज्जत्तग-सखेज्ज वासाउय-कम्मभूमिय गमवक्कंतिय मणुस्साणं, मणपज्जव णाण समुप्पज्जइ।।17 || सूत्र- 18 तं च दुविहं उप्पज्जइ तजहा-उज्जुमई य, विउलमई य। तं समासओ चउविहं पण्णत्त, तजहा-दव्वओ, खित्तओ, कालओ भावओ। तत्थ दव्वओ णं उज्जुमई अणते अणत पएसिए खंधे जाणइ पासइ, तं चेव विउलमई अमहियतराए विउलतराए विसुद्धतराए . वितिमिरतराए जाणइ पासइ। विमानसालानालामाबलाबलानालामाल स्वाध्याय माला-133
खित्तओ णं उज्जुमई य जहण्णेण अंगुलस्स असंखेज्जय
भागं उक्कोसेणं अहे जाव इमीसे रयणप्पभाए पुढवीए उवरिम हेडिल्ले
खुड्डग-पयरे उड़े जाव जोइसस्स उवरिम तले, तिरिय जाव अतो
मणुस्स खित्ते अड्डाइज्जेसु दीवसमुद्देसु पण्णरससु कम्मभूमिसु तीसाए
अकम्म भूमिसु छपण्णाए अंतर दीवगेसु सण्णि-पचिन्दियाण पज्जत्तयाण
मणोगए भावे जाणइ पासइ, तं चेव विउलमई अड्डाइज्जेहि मंगुलेहि
अमहियतरागं विउलतरागं विसुद्धतराग वितिमिरतराग खेत्तं जाणइ
पासइ।
कालओ णं उज्जुमई जहण्णेण पलिओवमस्स-असंखिज्जय
भागं उक्कोसेण वि पलिओवमस्स असखिज्जय-भाग अतीय-मणागय
वा कालं जाणइ पासइ, तं चेव विउलमई अमहियतरागं विउलतराग
विसुद्धतरागं वितिमिरं तरागं जाणइ पासइ।
भावओ णं उज्जुमई अणते भावे जाणइ पासइ, सव्वभावाणं
अणतभागं जाणइ पासइ, तं चेव विउलमई अब्भहिय तराग विउल
तरागं विसुद्धतराग वितिमिरतराग जाणइ पासइ ।
मणपज्जव णाणं पुण, जण मण परिचिन्तियत्थ पागडण।
गुणपच्चइयं चरित्तवओ। 165 11
से त्तं मणपज्जव णाणं। [18।।
सूत्र - 19 से किं तं केवलणाणं ? केवलणाणं दुविह पण्ण
तजहा-भवत्थ केवलणाणं च सिद्ध केवलणाणं च।
से किं तं भवत्थ केवलणाण ? भवत्थकेवलणाण दुविह पण्णत्त
तजहा-सजोगि भवत्थ केवलणाण च अजोगि भवत्थ केवलणाण
माणुस्स खित्त णिबद्ध
चा
से कि त सजोगि भवत्थ-केवलणाण ? सजोगि भवत्थ
केवलणाणं दुविहं पण्णत्तं, तजहा-पढमसमय-सजोगि भवत्थ
केवलणाणं च अपढमसमय-सजोगि भवत्थ केवलणाण च, अहवा
134-स्वाध्याय माला लावामानाबाद
नविनवजात
चरमसमय सजोगि, भवत्थ केवलणाण च अचरमसमय स जोगिभवत्थ
केवलणाण च , से त्त सजोगि भवत्थ केवलंणाण।
से कि त अजोगि भवत्थ केवलणाण ? अजोगि भवत्थ
केवलणाण दुविहं पण्णत्त, तजहा-पढम समय अजोगि भवत्थ
केवलणाण च, अपढम समय अजोगि भवत्थ केवलणाणं च, अहवा
चरम समय अजोगि भवत्थ केवलणाण च, अचरम समय अजोगि
भवत्थ केवलणाण च, से त्त अजोगि भवत्थ केवलणाण, से त्त
भवत्थ केवलणाण।।19।।
सूत्र 20 से कि त सिद्ध केवलणाण ? सिद्ध केवलणाण
दुविहं पण्णत्त, तंजहा अणंतर सिद्ध केवलणाण च परम्पर सिद्ध
केवलणाण च।
सूत्र
21 से किं तं अणतर सिद्ध केवलणाण ? अणतर
सिद्ध-केवलणाणं पण्णरस-विहं पण्णत्त, तजहा-तित्थ सिद्धा, अतित्थ
सिद्धा, तित्थयर सिद्धा, अतित्थयर सिद्धा, सयबुद्ध सिद्धा, पत्तेयबुद्ध
सिद्धा, बुद्धबोहिय सिद्धा, इथिलिग सिद्धा, पुरिसलिग सिद्धा,
णपुसगलिग सिद्धा, सलिग सिद्धा, अण्णलिग सिद्धा, गिहिलिग
सिद्धा, एगसिद्धा, अणेग सिद्धा, से त्त अणतर सिद्ध केवलणाण।
सूत्र 22 से कि त परम्पर सिद्ध केवलणाण ? परम्पर
सिद्ध-केवलणाण अणेगविह पण्णत्त, तंजहा-अपढम समय सिद्ध
केवलणाण दुसमय सिद्ध केवलणाण, तिसमय सिद्ध केवलणाण,
चउसमय सिद्ध केवलणाण जाव दससमय सिद्ध केवलणाणं, सखिज्ज
समय सिद्ध केवलणाणं, असखज्जि समय सिद्ध केवलणाण, अणत
समय सिद्ध केवलणाण, से त्त परम्पर सिद्ध केवलणाण, से त्त सिद्ध
केवलणाण।
त समासओ चउविह पण्णत्त, तजहा-दवओ, खित्तओ, कालओ,
भावओ। तत्थ दव्वओ ण केवलणाणी सव्व दव्वाइ जाणइ पासइ।
हिनावानजामानिमालाला स्वाध्याय माला-135 -
खित्तओ णं केवलणाणी सळ खित्तं जाणइ पासइ। कालओ ण
केवलणाणी सव् काले जाणइ पासइ। भावओ णं केवलणाणी सव्वे
भावे जाणइ पासइ।
अह सव्व दव्व परिणाम, भावविण्णत्ति कारणमणंत।
सासय-मप्पडिवाई, एगविहं
केवलणाणं ।।66 ||
केवलणाणेण ऽत्थे, णाउ जे तत्थ पण्णवणजोगे।
ते भासइ तित्थयरो, वइजोग सुयं हवइ सेसं। 167 ||
सूत्र
23 से त्तं केवलणाणं, से त्तं णोइन्दिय पच्चक्खं, से त्त
पच्चक्खणाणं।
सूत्र 24 से किं तं परोक्खणाणं ? परोक्खणाण दुविह
पण्णत्तं, तंजहा आभिणिबोहिय णाण परोक्खं च, सुयणाण परोक्खं
च। जत्थ आभिणिबोहिय णाणं तत्थ सुयणाणं, जत्थ सुयणाण
तत्थ आभिणिबोहिय णाणं, दोऽवि एयाई अण्णमण्ण-मणुगयाइं,
तहवि पुण इत्थ आयरिया णाणत्तं पणवयति-अभिणिबुज्झइत्ति आभिणि-
बोहियणाणं, सुणेइत्ति सुयणाणं, मइपुत्वं जेण सुयं, ण मई सुयपुब्विया।
सूत्र 25 अविसेसिया मई, मई-णाणं च मई-अण्णाणं च।
विसेसिया सम्मद्दिहिस्स मई मइणाणं। मिच्छद्दिहिस्स मई मइ अण्णाण।
अविसेसियं सुयं सुयणाणं च सुय अण्णाणं च। विसेसिय सुय
सम्मदिहिस्स सुयं सुयणाणं, मिच्छद्दिहिस्स सुयं सुय अण्णाणं।
सूत्र – 26 से किं तं आभिणिबोहिय णाणं? आभिणिबोहिय
णाणं दुविहं पण्णत्तं, तंजहा–सुय णिस्सियं च, अस्सुय णिस्सिय च।
से किं तं अस्सुय णिस्सियं ? अस्सुय णिस्सियं चउन्विहं
पण्णत्तं, तंजहा-
उप्पत्तिया, वेणइया, कम्मिया, परिणामिया।
बुद्धी चउव्विहा वुत्ता,- पंचमा णोवलब्मइ । 168 ।।
पुव्व-मदिट्ठ-मस्सुय-मवेइय, तक्खण विसुद्ध-गहियत्था।
अब्बाहय-फलजोगा, बुद्धी उप्पत्तिया णाम। 169 ।।
136-स्वाध्याय माला REATESमानाबाद बालबाबEDIARIES
भरहसिल, मिंढ, कुक्कुड, तिल, बालुय, हत्थि, अगड, वणसण्डे। पायस, अइया, पत्ते खाडहिला, पंचपियरो य।170|| भरह सिल, पणिय, रुक्खे, खुड्डग, पड, सरड, काय उच्चारे। गय, घयण, गोल, खंभे, खुड्डग, मग्गित्थि, पइ, पुत्ते।।71 ।। महुसित्थ, मुद्दि, अंके य, णाणए, भिक्खू, चेडगणिहाणे। सिक्खा य, अत्थसत्थे, इच्छा य महं, सयसहस्से।।72|| भरणित्थरण समत्या, तिवग्ग सुत्तत्थ गहिय पेयाला। उभओ लोगफलवई, विणयसमुत्था हवइ बुद्धी ।।73 || णिमित्ते, अत्ये सत्ये य लेहे, गणिए य, कूव, अस्से य। गद्दभ, लक्खण, गंठी, अगए, रहिए य, गणिया य।।74|| सीया साडी दीहं च, तणं अवसव्वयं च कुंचस्स। णिव्वोदय य गोणे, घोडग पडण च रुक्खाओ। 175 || उवओग दिट्ठसारा, कम्म-पसंग-परिघोलण-विसाला साहुक्कार फलवई, कम्मसमुत्था हवइ बुद्धी । 176 || हेरण्णिए, करिसए, कोलिय, डोवे य, मुत्ति, घय, पवए। तुण्णाए, वड्ढइ य, पूयइ, घड, चित्तकारे य।।77 || अणुमाण हेउ-दिटुंत साहिया, वयविवाग परिणामा। हिय णिस्सेयस फलवई, बुद्धी परिणामिया णाम | 178 ।। अभए सिट्ठि कुमारे, देवी उदिओदए, हवइ राया। साहू य णन्दिसेणे, धणदत्ते, सावग, अमच्चे ।।79 || खमए, अमच्चपुत्ते, चाणक्के, चेव थूलभद्दे य। णासिक सुंदरिणंदे, वइरे, परिणामिय बुद्धीए । 180 ।। चलणाहण, आमण्डे, मणी य, सप्पे य, खग्गि, थूभिन्दे । परिणामिय बुद्धीए, एवमाई उदाहरणा118111 से किं त सुय णिस्सियं ? सुय णिस्सियं चउव्विहं पण्णत्तं, तंजहा-उग्गहे, ईहा, अवाओ, धारणा। मानाबमाबजानाजावादनानालालज स्वाध्याय माला-137
-
सूत्र 27 से किं तं उग्गहे?
उग्गहे दुविहे पण्णत्ते, तंजहा-अत्थुग्गहे य वजणुग्गहे य।
सूत्र – 28 से किं तं वजणुग्गहे ?
वंजणुग्गहे चउविहे पण्णते, तंजहा-सोइन्दिय वजणुग्गहे,
घाणिन्दिय वंजणुग्गहे जिभिन्दिय वंजणुग्गहे फासिन्दिय वजणुग्गहे।
से तं वंजणुग्गहे।
सूत्र – 29 से किं तं अत्थुग्गहे ?
अत्थुग्गहे छबिहे पण्णत्ते। तंजहा-सोइन्दिय अत्थुग्गहे,
चक्खिन्दिय अत्थुग्गहे, घाणिन्दिय अत्थुग्गहे, जिभिन्दिय अत्थुग्गहे,
फासिन्दिय अत्थुग्गहे णोइन्दिय अत्थुग्गहे।
सूत्र 30 तस्स ण इमे एगट्ठिया णाणाघोसा णाणावंजणा
पंच णामधिज्जा भवति, तंजहा-ओगेण्हणया, उवधारणया, सवणया,
अवलम्बणया, मेहा। से त्त उग्गहे।
सूत्र 31 से किं तं ईहा?
ईहा छव्विहा पण्णत्ता। तजहा-सोइन्दिय ईहा, चक्खिन्दिय
घाणिन्दिय ईहा, जिभिन्दिय ईहा, फासिन्दिय ईहा, णोइन्दियईहा,
ण इमे एगडिया णाणाघोसा णाणावंजणा पंच णामधिज्जा
तंजहा-आभोगणया, मग्गणया, गवेसणया, चिता, वीमसा।
से त्त ईहा।
सूत्र
32 से किं तं अवाए ?
अवाए छविहे पण्णत्ते। तजहा-सोइन्दिय अवाए, चक्खिन्दिय
अवाए, घाणिन्दिय अवाए, जिभिन्दिय अवाए, फासिन्दिय अवाए,
णोइन्दिय अवाए, तस्स णं इमे एगट्ठिया णाणाघोसा णाणावजणा
पंच णामधिज्जा भवंति, तजहा-आउट्टणया, पच्चाउट्टणया, अवाए,
बुद्धी, विण्णाणे। से त्तं अवाए।
सूत्र ~ 33 से किं तं धारणा ?
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138 - स्वाध्याय माला बिलाADIESEमदिनविनाविभागीय
धारणा छविहा पण्णत्ता, तंजहा-सोइन्दिय धारणा, चक्खिन्दिय धारणा, घाणिन्दिय धारणा, जिभिन्दिय धारणा, फासिन्दिय धारणा, णोइन्दिय धारणा। तीसे ण इमे एगट्ठिया णाणाघोसा णाणावजणा पंच णामधिज्जा भवंति, तंजहा-धारणा, साधारणा, ठवणा, पइट्टा, कोटे से त्त धारणा। सूत्र - 34 उग्गहे इक्क समइए, अतोमुहुत्तिया ईहा, अंतो-मुहुत्तिए अवाए, धारणा संखेज्ज वा काल असंखेज्जं वा काल। सूत्र 35 एव अट्ठावीसइ विहस्स आभिणिबोहिय णाणस्स वंजणुग्गहस्स परूवणं करिस्सामि, पडिबोहग दिहतेण मल्लग दिट्ठतेण या से किं त पडिबोहग दिट्टतेणं ? पडिबोहग दिटुंतेणं से जहा णामए केइ पुरिसे कचि पुरिस सुत्त पडिबोहिज्जा, अमुगा अमुगत्ति। तत्थ चोयगे पण्णवय एवं वयासी-किं एगसमय पविट्ठा पुग्गला गहण-मागच्छति ? दुसमय पविट्ठा पुग्गला गहण-मागच्छंति ? जाव दससमय पविठ्ठा पुग्गला गहण-मागच्छति ? सखिज्ज समय पविट्ठा पुग्गला गहणमागच्छति ? असखिज्ज समय पविट्ठा पुग्गला गहण-मागच्छति ? एव वयंत चोयग पण्णवए एव वयासी–णो एगसमय पविट्ठा पुग्गला गहण-मागच्छति, णो दुसमय पविट्ठा पुग्गला गहण-मागच्छति, जाव णो दससमय पविट्ठा पुग्गला गहण-मागच्छति, णो सखिज्ज समय पविठ्ठा पुग्गला गहण-मागच्छंति, असंखिज्ज समय पविठ्ठा पुग्गला गहण मागच्छति, से त पडिबोहग दिटुंतेण। से कि त मल्लग दिट्टतेण ? मल्लग दिट्टतेण से जहाणामए केइ पुरिसे आवाग सीसाओ मल्लग गहाय तत्थेग उदगबिन्दू पक्खेविज्जा, से णडे, अण्णेऽवि पक्खित्ते सेवि णट्टे एव पक्खि प्पमाणेसु पक्खि प्पमाणेसु সসবস fff जानना . उदगबिन्दू जे णं तं मल्लगं रावेहिइत्ति, होही से उदगबिन्दू, जे णं तंसि मल्लगंसि ठाहिति, होही से उदगबिंदू जे णं तं मल्लगं भरिहिति, होही से उदगबिदू, जेणं तं मल्लगं पवाहेहिति। एवामेव पक्खिप्पमाणेहिं पक्खिप्पमाणेहिं अणंतेहिं पुग्गलेहि जाहे तं वंजणं पूरियं होइ, ताहे 'हु त्ति करेइ। णो चेव णं जाणइ के वेस सद्दाइ ? तओ ईहं पविसइ, तओ जाणइ अमुगे एस सद्दाइ तओ अवायं पविसइ, तओ से उवगयं हवइ, तओ णं धारण पविसइ, तओ णं धारेइ संखिज्जं वा कालं, असंखिज्जं वा कालं। से जहाणामए केइ पुरिसे अव्वत्तं सदं सुणिज्जा, तेणं सद्दोत्ति उग्गहिए, णो चेव णं जाणइ के वेस सद्दाइ ? तओ ईहं पविसइ, तओ जाणइ-अमुगे एस सहे, तओ णं अवायं पविसइ तओ से उवगयं हवइ, तओ धारणं पविसइ, तओ णं धारेइ संखेज्जं वा कालं असंखेज्जं वा कालं। से जहाणामए केइ पुरिसे अव्वत्तं रूवं पासिज्जा, तेणं 'रूव' त्ति उग्गहिए, णो चेव णं जाणइ 'के वेस रूव' त्ति ? तओ ईहं पविसइ, तओ जाणइ अमुगे एस रूवेत्ति, तओ अवायं पविसइ, तओ से उवगयं हवइ, तओ धारणं पविसइ, तओ णं धारेइ संखेज्ज वा कालं, असंखेज्जं वा कालं। से जहाणामए केइ पुरिसे अव्वत्तं गंधं अग्घाइज्जा तेणं गंधत्ति उग्गहिए, णो चेव णं जाणइ 'के वेस गंधे ति? तओ इहं पविसइ, तओ जाणइ 'अमुगे एस गंधे, तओ अवायं पविसइ, तओ से उवगय हवइ, तओ धारणं पविसइ, तओ णं धारेइ संखेज्जं वा काल असंखेज्जं वा काल। से जहाणामए केइ पुरिसे अव्वत्तं रसं असाइज्जा, तेणं रसो' त्ति उग्गहिए, णो चेव णं जाणइ 'के वेस रसो' त्ति। तओ ईहं पविसइ, तओ जाणइ-'अमुगे एस रसे । तओ अवायं पविसइ, तओ 140-स्वाध्याय माला बनाना CNCNCSICHANONGO
से उवगयं हवइ, तओ धारणं पविसइ, तओ णं धारेइ संखिज्ज वा
कालं असखिज्जं वा काल।
से जहाणामए केइ पुरिसे अव्वत्तं फासं पडिसंवेइज्जा तेणं
'फासे' त्ति उग्गहिए, णो चेव णं जाणई' 'के वेस फासओ त्ति ?
तओ ईहं पविसइ, तओ जाणइ-'अमुगे एस सुफासे', तओ अवार्य
पविसइ, तओ से उवगयं हवइ, तओ धारणं पविसइ, तओ णं धारेइ
सखेज्जं वा कालं असखेज्जं वा कालं।
से जहाणामए केइ पुरिसे अव्वत्तं सुमिणं पासिज्जा, तेणं
'सुमिणे त्ति उग्गहिए, णो चेव णं जाणइ 'के वेस सुमिणे' त्ति, तओ
ईहं पविसइ, तओ जाणइ-'अमुगे एस सुमिणे तओ अवायं पविसइ,
तओ से उवगयं हवइ, तओ धारणं पविसइ, तओ ण धारेइ संखेज्जं
वा कालं, असंखेज्ज वा कालं।
से त मल्लग दिटुंतेण।
सूत्र
36 तं समासओ चउविहं पण्णत्त, तंजहा-दव्वओ,
खित्तओ, कालओ, भावओ।
तत्थ दव्वओ ण आभिणिबोहिय णाणी आएसेणं सव्वाइं दव्वाई
जाणइ, णं पासइ।
खेत्तओ णं आभिणिबोहिय णाणी आएसेणं सव्वं खेत्तं जाणइ,
ण पासइ।
कालओ णं आभिणिबोहिय णाणी आएसेणं सव्वं कालं जाणइ,
ण पासइ।
भावओ णं आभिणिबोहिय णाणी आएसेणं सव्वे भावे जाणइ,
ण पासइ।
उग्गह ईहाऽवाओ य, धारणा एवं हुति चत्तारि।
आभिणिबोहिय णाणस्स, भेयवत्थू समासेणं। 182 ||
अत्थाण उग्गहणम्मि, उग्गहो तह वियालणे ईहा।
ववसायम्मि अवाओ, धरण पुण धारण बिति।।83 ।।
दिनदनादनानानिदिलानालामाबाद स्वाध्याय माला-141
उग्गह इक्कं समयं, ईहावाया मुहुत्तमद्ध तु। काल-मसंखं संखं च, धारणा होइ णायव्वा । 184 || पुढे सुणेइ सई, रूवं पुण पासइ अपुढे तु। गंधं रसं च फासं च, बद्ध पुट्ठ वियागरे । 185 ।। भासा-समसेढीओ, सई जं सुणइ मीसियं सुणइ। वीसेणी पुण सदं, सुणेइ णियमा पराघाए | 186 1| ईहा अपोह वीमंसा, मग्गणा य गवेसणा। सण्णा सई मई पण्णा, सव्वं आभिणिबोहिय। 18711 से त आभिणिबोहिय णाण परोक्ख। से तं मइणाण। सूत्र - 37 से किं तं सुयणाण परोक्खं ? सुयणाण परोक्खं चोदसविहं पण्णत्तं, तजहा-अक्खर-सुय, अणक्खर-सुय, सण्णि-सुयं असण्णि-सुयं, सम्म-सुयं, मिच्छ-सुयं, साइयं, अणाइयं, सपज्जवसियं अपज्जवसियं, गमियं, अगमिय, अंगपविट्ट, अणंगपविलु। सूत्र 38 से किं तं अक्खर-सुयं ? अक्खर-सुयं तिविहं पण्णत्तं, तंजहा- सण्णक्खरं, वजणक्खर, लद्धि-अक्खरं। से कि त सण्णक्खर ? सण्णक्खर अक्खरस्स संठाणागिई, से तं सण्णक्खर। से किं तं वंजणक्खरं ? वंजणक्खरं अक्खरस्स वंजणाभिलावो, से तं वजणक्खर । से किं त लद्धिअक्खरं ? लद्धि-अक्खर अक्खर लद्धियस्स लद्धि-अक्खर समुप्पजइ, तंजहा-सोइदिय-लद्धि-अक्खरं, चक्खिदिय-लद्धि-अक्खरं, पाणिंदिय- लद्धि-अक्खरं, रसणिंदिय-लद्धि-अक्खरं, फासिंदिय-लद्धि-अक्खर, णोइंदिय-लद्धि-अखरं। से तं लद्धि-अक्खर से त अक्खरसुयं। 142 - स्वाध्याय माला बाबालाजानाजानना दिनानिमालामाल
?
से किं त अणक्खरसुर्य
अणक्खरसुय अणेगविह पण्णत्त, तजहा
ऊससिय णीससियं, णिच्छूढं खासिय च छीय च ।
णिस्सिघिय-मणुसार, अणक्खर छेलियाईय। 188 ।।
से त अणक्खरसुय।
सूत्र – 39 से किं त सण्णिसुय ?
सण्णिसुय तिविहं पण्णत्त, तजहा-कालिओवएसेण, हेऊवएसेणं,
दिहिवाओवएसेणं।
से कि त कालिओवएसेणं?
कालिओवएसेण जस्स ण अत्थि ईहा, अवोहो, मग्गणा, गवसणा,
चिता, वीमसा, से णं सण्णीति लभइ। जस्स ण णत्थि ईहा,
अवोहो, मग्गणा, गवसणा, चिता, वीमसा, से ण असण्णीत्ति लब्भइ,
से त्तं कालिओवएसेण।
से कि त हेऊवएसे णं।
हेऊवएसेणं जस्सण अत्थि अभिसघारण-पुब्विया करणसत्ती
से ण सण्णीत्ति लब्मइ । जस्स णं णत्थि अभिसघारणपुब्बिया करणसत्ती
से ण असण्णीति लभइ । से त हेऊवएसेण।
से किं त दिहिवाओवएसेण?
दिट्ठिवाओवएसेण सण्णिसुयस्स खओवसमेण सण्णी लब्भइ ।
असण्णि सुयस्स खओवसमेण असण्णी लभइ । सेत दिहिवाओवएसेण।
से त सण्णिसुय, से त असण्णिसुय ।
सूत्र – 40 से कि त सम्मसुय
सम्मसुयं ज इम अरहतेहि भगवतेहि उप्पण्ण णाण दसण
धरेहि तेलुक्क णिरिक्खय महिय पूइएहि तीय पडुप्पण्ण मणागय
जाणएहि सव्वण्णूहि सव्वदरिसीहि पणीय दुवालसग गणिपिडग।
तजहा-आयारो, सूयगडो, ठाण, समवाओ, विवाहपण्णत्ती, णायाधम्म
?
विगावगाना
बाबा स्वाध्याय माला-143
- कहाओ, उवासग दसाओ, अंतगड दसाओ, अणुत्तरोववाइय दसाओ, पण्हावागरणाई, विवागसुयं, दिहिवाओ। इच्चेयं दुवालसंगं गणिपिडगं चोद्दस पुविस्स सम्मसुयं । अभिण्ण दस पुस्विस्स सम्मसुयं, तेण पर भिण्णेसु भयणा। से तं सम्मसुयं । सूत्र - 41 से किं मिच्छासुयं ? मिच्छासुयं जं इमं अण्णाणिएहिं मिच्छादिट्ठिएहिं, सच्छद बद्धि मइविगप्पियं । तंजहा- भारहं, रामायणं, भीमासुरुक्खं, कोडिल्लय, सगड भद्दियाओ, खोडग (घोडग) मुहं, कप्पासियं, णागसुहुम, कणगसत्तरी, वइसेसियं, बुद्धवयणं, तेरासियं, काविलियं, लोगायय, सहितन्तं, माढरं, पुराणं, वागरणं, भागवयं, पायंजली, पुस्सदेवय, लेहं, गणियं, सउणरुयं, णाड्याई। अहवा बावत्तरि कलाओ, चत्तारि य वेया संगोवंगा। एयाइ मिच्छ दिहिस्स मिच्छत्त परिग्गहियाई मिच्छासुयं एयाई चेव सम्मदिहिस्स सम्मत्त परिग्गहियाइं सम्मसुयं। अहवा मिच्छदिट्ठस्स वि एयाई चेव सम्मसुयं, कम्हा ? सम्मत्त हेउत्तणओ जम्हा ते मिच्छदिविया तेहिं चेव समएहिं चोइया समाणा केइ सपक्ख दिडिओ चयंति। से तं मिच्छासयुं। सूत्र - 42 से किं तं साइयं सपज्जवसियं, अणाइयं अपज्जवसियं च ? इच्चेइयं दुवालसंगं गणिपिडगं वुच्छित्ति-णयट्ठयाए साइयं सपज्जवसियं, अवुच्छित्ति-णयट्टयाए अणाइयं अपज्जवसियं। त समासओ चउब्विहं पण्णत्तं, तंजहा-दव्वओ, खित्तओ कालओ, भावओ। तत्थ दव्वओ णं सम्मसुयं एगं पुरिसं पडुच्च साइयं सपज्जवसिय, बहवे पुरिसे य पडुच्च अणाइयं अपज्जवसियं । खेत्तओ णं पंच भरहाई पंचेरवयाइं पडुच्च साइयं सपज्जवसिय, पंच महाविदेहाई पडुच्च अणाइयं अपज्जवसियं। 144-स्वाध्याय माला बनवाबनवाबनवा . .
कालओ ण उस्सप्पिणिं ओसप्पिणिं च पडुच्च साइय सपज्जवसियं, णो उस्सप्पिणिं, णो ओसप्पिणिं च पडुच्च अणाइय अपज्जवसियं। भावओ णं जे जया जिण पण्णत्ता भावा आघविज्जंति, पण्णविज्जति, परूविज्जति, दसिज्जंति, णिदसिज्जति उवदसिज्जंति, तया ते भावे पडुच्च साइय सपज्जवसियं खाओवसमियं पुण भाव पडुच्च अणाइयं अपज्जवसिय । अहवा भव सिद्धियस्स सुय साइयं सपज्जवसिय च, अभव सिद्धियस्स सुय अणाइयं अपज्जवसिय च । सव्वागास-पएसग्ग सव्वागास-पएसेहिं अणत-गुणिय पज्जवक्खर णिप्फज्जइ। सव्वजीवाणं पि य ण अक्खरस्स अणतभागो, णिच्चुग्घाडिओ। जइ पुण सोऽवि आवरिज्जा तेणं जीवो अजीवत्त पाविज्जा। सुटुवि मेह समुदए, होइ पभा चन्दसूराण । से त साइयं सपज्जवसिय, से तं अणाइयं अपज्जवसियं। सूत्र - 43 से किं त गमियं ? गमियं दिहिवाओ। से किं तं अगमिय ? अगमियं कालियं सुयं। से त गमियं। से तं अगमियं । अहवा तं समासओ दुविहं पण्णत्तं, तंजहा–अंगपविट्ठ, अंगबाहिरं च । से किं तं अंगबाहिर ? अगबाहिरं दुविहं पण्णत्त, तजहा- आवस्सयं च, आवस्सय-वइरित्तं च । से कि त आवस्सय? आवस्सयं छव्विहं पण्णत्तं, तंजहा-सामाइय, चउवीसत्थओ, वंदणय, पडिक्कमण, काउस्सग्गो, पच्चक्खाण, से त आवस्संयं। से कि त आवस्सय वइरित्तं? आवस्सय-वइरित्त दुविहं पण्णत्तं, तजहा-कालिय च, उक्कालिय च | से कि तं उक्कालिय? उक्कालियं अणेगविहं पण्णत्तं, तजहा- दसवेआलिय, कप्पियाकप्पिय, चुल्लकप्प-सुय, महाकप्प-सुयं, उववाइयं, राय पसेणियं, जीवाभिगमो, पण्णवणा, महापण्णवणा, पमायप्पमाय, बनावमाननाबERARAMETARA स्वाध्याय माला-145 णंदी, अणुओग-दाराई, देविदत्थओ, तंदुल-वेयालियं, चंदा-विज्झये, सूर-पण्णत्ती, पोरिसि-मण्डलं, मण्डल-पवेसो, विज्जाचरण-विणिच्छओ, गणिविज्जा, झाण-विभत्ती, मरण-विभत्ती, आय-विसोही, वीयराग-सुय, संलेहणा-सुयं, विहार-कप्पो, चरणविही आउर-पच्चक्खाणं, महापच्चक्खाणं, एवमाइ। से तं उक्कालियं। से कि त कालियं? कालिय अणेगविहं पण्णत्तं तजहा-उत्तरज्झयणाइ, दसाओ, कप्पो, ववहारो, णिसीहं, महाणिसीह, इसि-भासियाई, जम्बूदीव- पण्णत्ती, दीवसागर-पण्णत्ती, चंदपण्णत्ती खुड्डिया विमाण पविभत्ती, महल्लिया-विमाण पविभत्ती, अग-चूलिया, वग्ग-चूलिया, विवाह- चूलिया, अरुणोववाए, वरुणोववाए गरुलोववाए, धरणोववाए, वेसमणोव-वाए, वेलधरोव-वाए, देविंदोव वाए, उट्ठाण-सुए, समुट्ठाण-सुए, णागपरियावणियाओ, णिरयाव-लियांओ, कप्पियाओ, कप्पवडिसियाओ, पुफियाओ, पुष्फ-चूलियाओ, वण्ही-दसाओ, {आसीविस भावणाणं, दिट्टिविसभावणाणं सुमिणभावणाणं, महासुमिणभावणाण, तेयग्गिणिसग्गाण।} एवमाझ्याइं चउरासीइं पइण्णग-सहस्साई भगक्ओ अरहओ उसहसामिस्सा आइ-तित्थयरस्स, तहा सखिज्जाइं, पइण्णग सहस्साई मज्झिमगाणं जिणवराण चोद्दस पइण्णग सहस्साई भगवओ वद्धमाण सामिस्स । अहवा जस्स जत्तिया सीसा उप्पत्तियाए, वेणइयाए, कम्मियाए, पारिणामियाए, चउविहाए बुद्धीए उववेया, तस्स तत्तियाई पइण्णग-सहस्साई, पत्तेयबुद्धा वि तत्तिया चेव । से तं कालिय। से तं आवस्सय वइरित्तं। से तं अणंगपविट्ठ । सूत्र - 44 से कि तं अंगपविठ्ठ? अंगपविलु दुवालसविहं पण्णत्त, तजहा-आयारो, सूयगडो, ठाण, समवाओ, विवाह-पण्णत्ती, णायाधम्म-कहाओ, उवासग-दसाओ, अतगड-दसाओ, अणुत्तरोववाइय-दसाओ, पण्हा-वागरणाई, विवागसुय, Qoranasan 146-स्वाध्याय माला बिगावागा दिविवाओ। सूत्र - 45 से किं तं आयारे ? आयारे ण समणाण णिग्गथाण आयार-गोयर-विणय-वेणइय- सिक्खा-भासा अभासा-चरण-करण जाया माया वित्तीओ आघविज्जंति, से समासओ पचविहे पण्णत्ते, तंजहा–णाणायारे, दसणायारे, चरित्तायारे, तवायारे, वीरियायारे। आयारे ण परित्ता वायणा, सखेज्जा, अणुओगदारा, सखिज्जा वेढा, सखेज्जा सिलोगा, सखिज्जाओ णिज्जुत्तीओ, सखिज्जाओ सगहणीओ, सखिज्जाओ पडिवत्तीओ। से ण अंगठ्ठयाए पढमे अगे, दो सुयक्खधा, पणवीस अज्झयणा, पचासीइ उद्देसण काला, पंचासीइ समुद्देसण काला। अट्ठारस पयसहस्साइ पयग्गेण, सखिज्जा अक्खरा, अणंता-गमा, अणता- पज्जवा, परित्ता-तसा, अणंता-थावरा। सासय कड णिबद्ध-णिकाइया जिणपण्णत्ता भावा आघविज्जति पण्णविज्जति, परूविज्जति, दसिज्जति णिदसिज्जंति, उवदसिज्जति। से एव आया, एव णाया, एव विण्णाया, एव चरण-करण-परूवणा आघविज्जइ। से तं आयारे। सूत्र - 46 से किं तं सूयगडे ? सूयगडे ण लोए सूइज्जइ, अलोए-सूइज्जइ, लोयालोए-सूइज्जइ, जीवा सूइज्जति, अजीवा-सूइज्जइ, जीवाजीवा सूइज्जति, ससमए सूइज्जइ, परसमए सूइज्जइ, ससमय-परसमए सूइज्जइ। सूयगडे णं असीयस्स किरियावाइयस्स, चउरासीईए अकिरियावाईणं, सत्तट्टीए अण्णाणिय वाईण बत्तीसाए वेणइय वाईणं, तिण्ह तेसट्ठाण पासडिय-सयाण बूह किच्चा ससमए ठाविज्जइ। सूयगडे णं परित्ता वायणा, सखिज्जा अणुओगदारा, सखेज्जा वेढा, सखेज्जा सिलोगा, संखिज्जाओ णिज्जुत्तीओ, संखिज्जाओ सगहणीओ, सखिज्जाओ पडिवत्तीओ। बिलावलालालबाबलावलबजाननाबाल स्वाध्याय माला-147 से णं अगट्टयाए बिइए अगे, दो सुयक्खंधा, तेवीस अज्झयणा, तित्तीसं उद्देसणकाला, तित्तीसं समुद्देसण काला छत्तीस पयसहस्साई पयग्गेणं। सखिज्जा अक्खरा, अणता-गमा, अणंता-पज्जवा, परित्ता- तसा, अणंता-थावरा। सासय कड णिबद्ध णिकाइया जिण पण्णत्ता भावा आघविज्जति, पण्णविज्जति परूविज्जति, दसिज्जति, णिदंसिज्जंति, उवदंसिज्जति। से एवं आया, एवं णाया, एवं विण्णाया, एवं चरण-करण-परूवणा आघविज्जइ। से तं सूयगडे। सूत्र - 47 से कि तं ठाणे ? ठाणे णं जीवा ठाविज्जति, अजीवा ठाविज्जति, जीवाजीवा ठाविति, ससमए ठाविज्जइ, परसमए ठाविज्जइ, ससमय-परसमए ठाविज्जइ, लोए ठाविज्जइ, अलोए ठाविज्जइ, लोयालोए ठाविज्जइ। ठाणे णं. टंका, कूडा, सेला, सिहरिणो, पल्भारा, कुण्डाइ, गुहाओ, आगरा, दहा, णईओ आधविज्जंति। ठाणे णं एगाइयाए एगुत्तरियाए वुड्डीए दसट्ठाणग-विवड्डियाणं भावाणं परूवणा आघविज्जइ। ठाणे ण परित्ता वायणा, संखेज्जा अणुओगदारा, संखेज्जा वेढा, संखेज्जा सिलोगा, संखेज्जाओ णिज्जुत्तीओ, संखेज्जाओ संगहणीओ, सखेज्जाओ पडिवत्तीओ। से गं अंगट्टयाए तइए अंगे, एगे सुयक्खधे, दस अज्झयणा एगवीसं उद्देसण काला, एक्कवीसं समुद्देसण काला, बावत्त िपयसहस्सा पयग्गेणं, संखेज्जा अक्खरा, अणंता-गमा, अणंता-पज्जवा, परित्ता- तसा, अणंता-थावरा| सासय कड णिबद्ध णिकाइया जिण पण्णत्ता भावा आघविज्जंति, पण्णविज्जति, परूविज्जति, दंसिज्जति, णिदंसिज्जति, उवदंसिज्जति। से एवं आया एवं णाया, एवं विण्णाया एवं चरण-करण-परूवणा आघविज्जइ। से तं ठाणे। सूत्र 48 से किं त समवाए? समवाए णं जीवा समासिज्जंति, अजीवा समासिज्जति . 148 - स्वाध्याय माला विमानाASTERMANENT जीवाजीवा समासिज्जति, ससमए समासिज्जइ, परसमए समासिज्जइ, ससमय-परसमए समासिज्जइ। लोए समासिज्जइ अलोए समासिज्जइ लोयालोए समासिज्जइ । समवाए णं एगाइयाण एगुत्तरियाण ठाणसय- विवड्डियाण भावाणं परूवणा आघविज्जइ, दुवालस-विहस्स य गणिपिडगस्स पल्लवगे समासिज्जइ। समवायस्स णं परित्ता वायणा, सखिज्जा अणुओगदारा, सखिज्जा वेढा, संखिज्जा सिलोगा, सखिज्जाओ णिज्जुत्तीओ सखिज्जाओ सगहणीओ, सखिज्जाओ पडिवत्तीओ। से णं अगट्ठयाए चउत्थे अगे, एगे सुयक्खधे, एगे अज्झयणे, एगे उद्देसणकाले, एगे समुद्देसणकाले। एगे चोयाल-सयसहस्से पयग्गेणं, सखेज्जा अक्खरा, अणता-गमा, अणता-पज्जवा, परित्ता-तसा, अणता- थावरा। सासय कड णिबद्ध णिकाइया जिण पण्णत्ता भावा आघविज्जति, पण्णविज्जति, परूविज्जति, दंसिज्जति, णिदंसिज्जति, उवदसिज्जति। से एव आया, एवं णाया, एवं विण्णाया, एवं चरण-करण-परूवणा आघविज्जइ। से त समवाए। सूत्र - 49 से किं त विवाहे ? विवाहे ण जीवा विआहिज्जति, अजीवा विआहिज्जति, जीवाजीवा विआहिज्जति, ससमए विआहिज्जइ, परसमए विआहिज्जइ, ससमए-परसमए विआहिज्जइ, लोए विआ- हिज्जइ, अलोए विआहिज्जइ, लोयालोए विआहिज्जइ। विवाहस्स ण परित्ता वायणा, सखिज्जा अणुओगदारा, सखिज्जा वेढा, सखिज्जा सिलोगा, सखिज्जाओ णिज्जुत्तीओ, सखिज्जाओ सगहणीओ, सखिज्जाओ पडिवत्तीओ। से ण अगट्टयाए पंचमे अंगे, एगे सुयक्खधे, एगे साइरेगे अज्झयणसए, दस उद्देसग सहस्साइ, दस समुद्दे-सग-सहस्साइ। छत्तीस वागरण सहस्साइ, दो लक्खा अट्ठासीई पयसहस्साइ पयग्गेण सखिज्जा अक्खरा, अणत गमा, अणता पज्जवा, परित्ता तसा, विजानामावादमानाबाद निजामाबाद स्वाध्याय माला-149 अणंता थावरा। सासय कड णिबद्ध णिकाइया जिण पण्णत्ता भावा, आघविज्जति, पण्णविज्जंति, परूविज्जंति, दसिज्जति, णिदंसिज्जति उवदंसिज्जति। से एवं आया, एवं णाया, एवं विण्णाया, एवं चरण-करण-परूवणा आघविज्जइ। से त विवाहे। सूत्र - 50 से किं तं णायाधम्म कहाओ? णायाधम्म कहासु णं णायाणं णगराई, उज्जाणाई, चेइयाई, वणसण्डाई, समोसरणाई, रायाणो, अम्मापियरो, धम्मायरिया, धम्मकहाओ, इहलोइयपरलोइया इड्डि-विसेसा, भोग परिच्चाया, पव्वज्जाओ परिआया, सुय परिग्गहा, तवोवहाणाइ, संलेहणाओ, भत्त पच्चक्खाणाइं, पाओव गमणाई, देवलोग गमणाई, सुकुल-पच्चायाइओ, पुण-बोहिलाभा, अत-किरियाओ य आघविज्जति। दस धम्मकहाणं वग्गा, तत्थ णं एगमेगाए धम्मकहाए पंच-पंच अक्खाइया सयाई, एगमेगाए अक्खाइयाए पंच-पंच उवक्खाइया सयाई, एगमेगाए उवक्खाइयाए पंच-पच अक्खाइया-उवक्खाइया सयाई, एवमेव सपुव्वावरेणं अद्भुट्ठाओ कहाणग-कोडिओ हवति त्ति समक्खायं। णायाधम्म कहाण परित्ता वायणा संखिज्जा अणुओगदारा, संखिज्जा वेढा, संखिज्जा सिलोगा, संखिज्जाओ णिज्जुत्तीओ, संखिज्जाओ संगहणीओ, संखिज्जाओ पडिवत्तीओ। से णं अंगठ्ठयाए छठे अंगे, दो सुयक्खधा, एगूणवीसं अज्झयणा, एगूणवीसं उद्देसणकाला, एगुणवीसं समुद्देसणकाला। संखेज्जा पयसहस्साई पयग्गेणं, संखेज्जा अक्खरा, अणंता गमा, अणता पज्जवा, परित्ता तसा, अणंता थावरा । सासय कड णिबद्ध णिकाइया जिण पण्णत्ता भावा आघविज्जति पण्णविज्जति परूविज्जति दंसिज्जति णिदंसिज्जंति, उवदंसिज्जंति। से एवं आया, एवं णाया, एवं विण्णाया, एवं चरण-करण-परूवणा आघविज्जइ। से तं णायाधम्म-कहाओ। 150-स्वाध्याय माला बिलावादनवनवजाबाद सूत्र - 51 से कि त उवासगदसाओ ? उवासग दसासु ण समणोवासयाण णगराइ, उज्जाणाइ, चेइयाइ, वणसण्डाइ, समोसरणाइ, रायाणो, अम्मापियरो, धम्मायरिया, धम्मकहाओ इहलोइय परलोइया इड्डि-विसेसा, भोग परिच्चाया, पव्वज्जाओ, परिआगा, सुय परिग्गहा, तवोवहाणाइ, सीलब्ब्वय-गुणवेरमण-पच्चक्खाण-पोसहोववास- पडिवज्जणया, पडिमाओ, उवसग्गा, सलेहणाओ, भत्तपच्चक्खाणाइ, पाओव गेमणाइ, देवलोग गमणाई, सुकुल पच्चायाईओ, पुण-बोहिलाभा, अत किरियाओ य आघविज्जति। उवासग दसाण परित्ता वायणा, संखेज्जा अणुओगदारा, सखेज्जा वेढा, सखेज्जा सिलोगा, संखेज्जाओ णिज्जुत्तीओ, सखेज्जाओ सगहणीओ, संखेज्जाओ पडिवत्तीओ। से णं अगट्ठयाए सत्तमे अगे एगे सुयक्खधे, दस अज्झयणा, दस उद्देसणकाला, दस समुद्देसण काला। सखेज्जा पयसहस्सा पयग्गेण, सखेज्जा अक्खरा, अणंता-गमा, अणंता-पज्जवा, परित्ता- तसा, अणता-थावरा। सासय कड णिबद्ध णिकाइया जिण पण्णत्ता भावा आघविज्जति पण्णविज्जति परूविज्जति दसिज्जति, णिदसिज्जति, उवससिज्जति । से एव आया, एव णाया, एव विण्णाया, एव चरण-करण-परूवणा आघविज्जइ, से त उवासगदसाओ। सूत्र 52 से किं तं अंतगड दसाओ ? अतगड दसासु ण अतगडाणं णगराइ, उज्जाणाइ, चेइयाइ, वणसण्डाइं समोसरणाइ, रायाणो, अम्मापियरो, धम्मायरिया, धम्मकहाओ, इहलोइय परलोइया इड्डि-विसेसा, भोग परिच्चाया, पव्वज्जाओ, परिआगा, सुय परिग्गहा, तवोवहाणाइ, सलेहणाओ, भत्त-पच्चक्खाणाइं पाओव गमणाई, अत किरियाओ, आघविज्जति। अतगड दसासु ण परित्ता वायणा, सखिज्जा अणुओगदारा, सखेज्जा वेढा, सखेज्जा सिलोगा, सखेज्जाओ णिज्जुत्तीओ, सखेज्जाओ सगहणीओ, सखेज्जाओ पडिवत्तीओ। - विमाननानाभाबलाANTICE स्वाध्याय माला-151 से णं अंगठ्ठयाए अट्ठमे अंगे, एगे सुयक्खधे, अट्ठ वग्गा, अट्ठ उद्देसणकाला, अट्ट समुद्देसणकाला। संखेज्जाइं पयसहस्साई पयग्गेण, संखेज्जा अक्खरा, अणंता-गमा, अणंता-पज्जवा, परित्ता-तसा अणता- थावरा। सासय कड णिबद्ध णिकाइया जिणपण्णत्ता भावा आघविज्जंति, पण्णविज्जति, परूविज्जंति, दंसिज्जंति, णिदसिज्जति, उवदंसिज्जति। से एवं आया, एवं णाया, एव विण्णाया, एवं चरण- करण-परूवणा आघविज्जइ। से तं अंतगड दसाओ। सूत्र - 54 से किं तं अणुत्तरोव-वाइय-दसाओ ? अणुत्तरोव- वाइयदसासु णं अणुत्तरोववाइयाणं णगराई उज्जाणाई, चेइयाइं. वणसण्डाइं, समोसरणाइं, रायाणो, अम्मापियरो धम्मायरिया, धम्मकहाओ, इहलोइय परलोइया इड्डि-विसेसा, भोग-परिच्चाया, पव्वज्जाओ, परिआगा, सुय-परिग्गहा, तवोवहाणाइं, पडिमाओ, उवसग्गा, संलेहणाओ, भत्त-पच्चक्खाणाइं पाओव गमणाई, अणुत्तरोव- वाइयत्ति उववत्ती, सुकुल पच्चायाई, अपुणबोहि लाभा, अतकिरियाओ, आघविज्जति। अणुत्तरोव-वाइय-दसासु णं परित्ता वायणा, सखेज्जा अणुओगदारा, संखेज्जा वेढा, संखेज्जा सिलोगा, संखेज्जाओ णिज्जुत्तीओ, संखेज्जाओ संगहणीओ, संखेज्जाओ पडिवत्तीओ। से णं अंगट्ठयाए णवमे अंगे, एगे सुयक्खधे, तिण्णि वग्गा, तिण्णि उद्देसण-काला, तिण्णि समुद्देसणकाला। सखेज्जाई, पयसहस्साई पयग्गेणं, संखेज्जा अक्खरा, अणंता-गमा, अणंता- पज्जवा, परित्ता-तसा, अणंता-थावरा । सासय कड णिबद्ध णिकाइया जिणपण्णत्ता भावा आघविज्जंति, पण्णविज्जंति, परूविज्जंति, दंसिज्जंति, णिदंसिज्जंति, उवदंसिज्जति। से एवं आया, एव णाया, एवं विण्णाया, एवं चरण-करण-परूवणा आघविज्जइ। से तं अणुत्तरोववाइय दसाओ। 152- स्वाध्याय माला जिवजनाSADEDIA सूत्र 55 से किं तं पण्हा वागरणाई ? पण्हावागरणेसु ण अठुत्तर पसिणसयं, अठुत्तर अपसिणसय, अठुत्तर पसिणापसिणसय, तजहा-अंगुट्ठ-पसिणाई, बाहु-पसिणाइ, अद्दाग-पसिणाई, अण्णे वि विचित्ता विज्जाइसया, णाग-सुवण्णेहि सद्धि दिव्वा सवाया आघविज्जति] पण्हावागरणाणं परित्ता वायणा, संखेज्जा अणुओगदारा, सखेज्जा वेढा, सखेज्जा सिलोगा, संखेज्जाओ णिज्जुत्तीओ, संखेज्जाओ सगहणीओ, संखेज्जाओ पडिवत्तीओ। से ण अंगठ्ठयाए दसमे अगे, एगे सुयक्खंधे, पणयालीसं अज्झयणा, पणयालीसं उद्देसणकाला, पणयालीस समुद्देसणकाला। सखेज्जाइ पयसहस्साई, पयग्गेणं संखेज्जा अक्खरा, अणता-गमा, अणता-पज्जवा, परित्ता-तसा, अणंता-थावरा। सासय कड णिबद्ध णिकाइया जिणपण्णत्ता भावा आघविज्जति, पण्णविज्जति, परूविज्जति, दंसिज्जंति, णिदसिज्जति, उवदसिज्जति। से एव आया, एव णाया, एवं विण्णाया, एवं चरण-करण-परूवणा आघविज्जइ। से त पण्हावागरणाइं। सूत्र 56 से कि तं विवाग-सुयं ? विवाग-सुए ण सुकड दुक्कडाण कम्माण फलविवागे आघविज्जइ, तत्थ ण दस दुह-विवागा, दस सुह-विवागा। से किं तं दुह-विवागा ? दुह-विवागेसु ण दुह-विवागाणं णगराइ, उज्जाणाई, वणसण्डाइ, चेइयाइ, समोसरणाइं, रायाणो, अम्मा-पियरो, धम्मायरिया, धम्म-कहाओ इहलोइय परलोइया इड्डि- विसेसा णिरय गमणाई, संसारभव पवचा दुह-परम्पराओ, दुकुल पच्चायाईओ, दुल्लह बोहियत्त आघविज्जइ । से तं दुहविवागा। से कि त सुहविवागा ? सुह-विवागेसु ण सुहविवागाण णगराइं, उज्जाणाइ, वणसण्डाई, चेइयाइ, समोसरणाइं, रायाणो, अम्मा-पियरो, - विमानमानसालानाबाल स्वाध्याय माला-153 धम्मायरिया, धम्म-कहाओ, इहलोइय परलोइया, इड्डि-विसेसा, भोगपरिच्चागा, पव्वज्जाओ, परियागा, सुय-परिग्गहा, तवोवहाणाइ, संलेहणाओ, भत्त-पच्चक्खाणाई, पाओव-गमणाइ, देवलोग-गमणाई, सुह परम्पराओ, सुकुल पच्चायाईओ, पुण-बोहिलाभा, अंत-किरियाओ, आघविज्जति। विवाग सुयस्स णं परित्ता वायणा, संखेज्जा अणुओगदारा, संखेज्जा वेढा, संखेज्जा सिलोगा, सखेज्जाओ णिज्जुत्तीओ, संखिज्जाओ संगहणीओ, सखिज्जाओ पडिवत्तीओ। से णं अंगठ्ठयाए इक्कारसमे अंगे, दो सुयक्खधा, वीसं अज्झयणा, वीसं उद्देसणकाला, वीसं समुद्देसणकाला। सखिज्जाई पयसहस्साइ, पयग्गेणं संखेज्जा अक्खरा, अणता-गमा, अणता पज्जवा, परित्ता-तसा, अणंता-थावरा । सासय कड णिबद्ध णिकाइया जिण पण्णत्ता भावा आघविज्जति, पण्णविज्जंति, परूविज्जति, दसिज्जति, णिदसिज्जति, उवदंसिज्जति) से एवं आया, एवं णाया, एवं विण्णाया, एव चरण करण परूवणा आघविज्जइ । से तं विवागसुयं । सूत्र 57 से किं तं दिट्ठिवाए ? दिट्ठिवाए णं सव्वभाव परूवणा आघविज्जइ, से समासओ पंचविहे पण्णत्ते, तंजहा-परिक्कमे, सुत्ताई, पुव्वगए, अणुओगे, चूलिया। से कि त परिक्कमे ? परिकम्मे सत्तविहे पण्णत्ते, तजहा-सिद्ध सेणिया परिकम्मे, मणुस्स सेणिया परिकम्मे, पुट्टसेणिया परिकम्मे, ओगाढसेणिया परिकम्मे, उवसंपज्जण सेणिया-परिकम्मे, विप्पजहण सेणिया परिकम्मे, चुयाचुय सेणिया परिकम्मे । से किं तं सिद्धसेणिया परिकम्मे ? सिद्धसेणिया परिकर्म चउद्दस विहे पण्णत्ते, तंजहा-माउगा-पयाई, एगट्ठिय-पयाइ, अट्ट-पयाइ, पाढो-आगास पयाइं केउ-भूयं, रासि बद्धं, एगगुणं, दुगुणं, तिगुण, awasata 154-स्वाध्याय माला बालविमानना का केउ भूय, पडिग्गहो, ससार पडिग्गहो, णदावत्त, सिद्धावत्त, से तं सिद्धसेणिया-परिकम्मे। से कि तं मणुस्स सेणिया परिकम्मे ? मणुस्स-सेणिया परिकम्मे चउद्दस विहे पण्णत्ते, तजहा-माउया पयाई, एगट्ठिय पयाइ, अट्ठ पयाइ, पाढोआगास पयाई, केउभूय, रासिबद्ध, एगगुण, दुगुणं, तिगुण, केऊभूयं, पडिग्गहो, ससार पडिग्गहो, णदावत्त, मणुस्सावत्तं। से तं मणुस्स-सेणिया परिकम्मे। से कि तं पुट्ठसेणिया परिकम्मे ? पुट्ठसेणिया परिकम्मे इक्कारस विहे पण्णत्ते, तजहा-पाढोआगास पयाइं, केउभूयं, रासिबद्धं, एगगुणं, दुगुण, तिगुणं, केउभूयं, पडिग्गहो, ससार पडिग्गहो, णदावत्त, पुट्ठावत्त। से त पुट्ठसेणिया परिकम्मे। से कि त ओगाढ सेणिया परिकम्मे ? ओगाढ सेणिया परिकम्मे इक्कारसविहे पण्णत्ते, तजहा-पाढोआगास पयाइ, केउभूय, रासिबद्धं, एगगुण, दुगुण, तिगुणं, केउभूय, पडिग्गहो, संसार पडिग्गहो, णंदावत्त, ओगाढावत्तं। से त ओगाढसेणिया परिकम्मे। से कि त उवसपज्जण सेणिया परिकम्मे ? उवसपज्जण सेणिया-परिकम्मे इक्कारसविहे पण्णत्ते, तंजहा-पाढोआगास पयाई, केउभूय, रासिबद्ध, एगगुणं, दुगुणं, तिगुण, केउभूय, पडिग्गहो, संसार पडिग्गहो, णदावत्त, उवसपज्जणावत्त। से तं उवसपज्जण सेणिया परिकम्मे। से किं त विप्पजहण-सेणिया-परिकम्मे ? विप्पजहण-सेणिया- परिकम्मे इक्कारसविहे पण्णत्ते, तंजहा-पाढोआगासपयाइ, केउभूय, रासिबद्ध, एगगुण, दुगुण, तिगुण, केउभूय, पडिग्गहो, ससार-पडिग्गहो, णदावत्त, विप्पजहणावत्त। से तं विप्पजहण-सेणिया-परिक्कमे। से किं त चुयाचुय-सेणिया-परिकम्मे ? चुयाचुय-सेणिया-परिकम्मे इक्कारसविहे पण्णत्ते, तजहा–पाढोआगास पयाइ, केउभूय, रासिबद्धं, विमानानानानानानानाननादागिना स्वाध्याय माला-155 एगगुणं, दुगुणं, तिगुणं, केउभूयं, पडिग्गहो, संसारपडिग्गहो, णंदावत्त, चुयाचुयवत्तं । से तं चुयाचय-सेणिया-परिकम्मे। छ चउक्क-णइयाइ. सत्त तेरासियाइं। से तं परिकम्मे। से किं तं सुत्ताइ ? सुत्ताइं बावीसं पण्णत्ताई, तंजहा-उज्जु-सुय, परिणया-परिणयं, बहुभंगियं, विजय-चरियं, अणं-तरं, परम्पर, आसाण, संजूहं, संभिण्णं, आहव्वायं, सोवत्थियावत्त, गंदावत्त, बहुलं, पुट्ठापुट्ठ. वियावत्तं, एवंभूयं, दुयावत्तं, वत्तमाणपयं, समभिरूढं, सव्वओ-भद्द, पस्सासं, दुप्पडिग्गहं। इच्चेइयाई बावीसं सुत्ताइं छिण्णच्छेय णइयाणि ससमय सुत्त परिवाडीए, इच्चेइयाइं, बावीसं सुत्ताई अच्छि-ण्णच्छेय णइयाणि आजीविय सुत्त परिवाडीए, इच्चेइयाइं बावीसं सुत्ताइं तिग-णइयाणि तेरासिय सुत्त परिवाडीए इच्चेइयाई बावीस सुत्ताइं चउक्क णइयाणि ससमय सुत्त परिवाडीए, एवामेव सपुव्वावरेण-अट्ठासीई सुत्ताइ भवंतीत्ति-मक्खायं। से तं सुत्ताई। से किं तं पुव्वगए? पुव्वगए चउद्दसविहे पण्णत्ते, तंजहा – उप्पायपुत्वं, अग्गाणीय, वीरियं, अत्थिणत्थि-प्पवायं, णाण-प्पवायं, सच्च-प्पवाय, आय-प्पवाय, कम्म-प्पवायं, पच्चक्खाण-प्पवायं (पच्चक्खाण) विज्जाणु-प्पवाय, अवंझं, पाणाऊ, किरिया विसालं, लोकबिदु सारं । उप्पाय-पुव्वस्स दस-वत्थू, चत्तारि-चूलियावत्थू पण्णत्ता । अग्गाणीय पुव्वस णं चोदस्स- वत्थू, दुवालस-चूलियावत्थू पण्णत्ता। वीरिय-पुव्वस्स णं अट्ठवत्यू अट्ठचूलियावत्थू पण्णत्ता। अत्थिणत्थि-प्पवाय-पुव्वस्स ण अट्ठारस वत्थू, दस चूलियावत्थू पण्णत्ता। णाण-प्पवाय-पुव्वस्स ण वारस वत्थू पण्णत्ता। सच्चप्पवाय पुवस्स णं दोण्णि वत्यू पण्णत्ता । आयप्पवाय पुव्वस्स णं सोलस वत्थू पण्णत्ता। कम्मप्पवाय-पुवस्स ण तीसं वत्यू पण्णत्ता । पच्चक्खाण पुवस्स णं वीसं वत्थू पण्णत्ता। विज्जाणुप्पवाय प 156-स्वाध्याय माला बनविलवाववादबावजावानात - पुव्वस्स ण पण्णरस वत्थू पण्णत्ता। अवंझपुव्वस्स गं बारस वत्थू पण्णत्ता। पाणाउ पुव्वस्स णं तेरस वत्थू पण्णत्ता। किरिया -विसाल- पुव्वस्स णं तीसं वत्थू पण्णत्ता। लोकबिदुसार-पुव्वस्स ण पणवीसं वत्थू पण्णत्ता। दस, चोद्दस, अट्ट, अट्ठारस, बारस, दुवे य, वत्थूणि। सोलस, तीसा, वीसा, पण्णरस, अणुप्पवायम्मि। 189 ।। बारस इक्कारसमे ? बारसमे तेरसेव वत्थूणि। तीसा पुण तेरसमे, चोद्दसमे पण्णवीसाओ। 190 ।। चत्तारि, दुवालस, अट्ठ चेव दस चेव चुल्लवत्थूणि। आइल्लाण चउण्हं, सेसाण चूलिया-णत्थि।।91 ।। से तं पुव्वगए (3) अनुयोग से किं तं अणुओगे ? अणुओगे दुविहे पण्णत्ते, तंजहा मूलपढ-माणुओगे, गंडियाणुओगे य। से किं त मूलपढमाणुओगे ? मूलपढमाणुओगे णं अरिहंताण भगवताणं पुव्वभवा, देवलोग गमणाई, आउ, चवणाई, जम्मणाणि, अभिसेया, रायवर-सिरीओ, पव्वज्जाओ, तवाइं य उग्गा, केवल- णाणुप्पयाओ, तित्थ-पवत्तणाणि य, सीसा, गणा, गणहरा, अज्जापवत्तिणीओ सघस्स-चउव्विहस्स जं च परिमाण, जिण मणपज्जव ओहिणाणी, सम्मत्तसुय णाणिणो य, वाई, अणुत्तरगई य, उत्तर-वेउविणो य मुणिणो, जत्तिया सिद्धा, सिद्धिपहो जह देसिओ, जच्चिर च काल, पाओवगया, जे जहिं जत्तियाई भत्ताइ अणसणाए छेइत्ता अतगडे, मुणिवरुत्तमे, तिमिरओघ विप्पमुक्के मुक्खसुहमणुत्तर च पत्ते, एवमण्णे य एवमाइ भावा मूलपढमाणुओगे कहिया। से त मूलपढमाणुओगे। से कि त गण्डियाणुओगे ? गण्डियाणुओगे कुलगर गण्डियाओ, विमानानाननाबालालवानाला स्वाध्याय माला-157 FREE: गणिगायो. चषकावधि गण्डियाओ, दसार गण्डियाओ, को माओ वासुदेव गण्डियाओ, गणधर गण्डियाओ, भद्दवाहु "गो का गण्डियाओ, हरिवंस गण्डियाओ, उस्सप्पिणी गोणी गण्डियाओ, चित्तंतर गण्डियाओ, अमर णर fileर गई-गमण-विविह परियट्टणाणु ओगेसु एवमाइयाओ जाति, पण्णविज्जति। से तं गण्डियाणुओगे, से में लियाओ? चूलियाओ आइल्लाणं चउण्हं पुव्वाणं, का सालाई अचूलियाई। से तं चूलियाओ। मसाण परिता वायणा, संखेज्जा अणुओगदारा, स. 1. सज्जा सिलोगा, संखेज्जाओ पडिवत्तीओ, For jीओ, संखेज्जाओ रांगहणीओ। में गार वारस अगे, एगे सुयक्खंधे, चोद्दस-पुव्वाइं, न रोज्जा चूलपत्यू, संखेज्जा-पाहुडा, संखेज्जा पाहुड- समाओ पाहुडियाओ, संखेज्जाओ पाहुड-पाहुडियाओ। सम-सहरसाइ पयागेणं, संखेज्जा अक्खरा, अणंता-गमा, Mear-मा. परिता-सा, अणंता-थावरा। सासय कड णिबद्ध मकाया जिण पण्णता भावा आघविज्जति पण्णविज्जति, सविति, दसिज्जति णिसिज्जति, उवदंसिज्जति। से एवं आया, एवं पाया, एवं विण्णाया, एवं चरण करण-परूवणा आघविज्जति। सेतलिहिवाए111211 सूत्र ~ 58 इच्चेइयम्मि दुवालसंगे गणिपिडगे अणंता-भावा, अणंता-अभावा, अणंता-हेऊ, अणंता अहेऊ, अणंता-कारणा, अणंता अकारणा, अणंता जीवा, अणंता अजीवा, अणंता भवसिद्धिया, अणंता अभवसिद्धिया, अणंता सिद्धा, अणता असिद्धा पण्णत्ता- भाव-मभावा हेऊ-महेऊ, कारण-मकारणे चेव। जीवाजीवा भवियमभविया, सिद्धा असिद्धा य। 19211 156 - स्पारयार माला ARARKADKEDARADASE
इच्चेइयं दुवालसंगं गणिपिडग तीए काले अणता जीवा आणाए
विराहित्ता चाउरन्तं संसार कन्तारं अणुपरियट्टिसु। इच्चेइयं दुवालसंगं
गणिपिडग पडुप्पण्णकाले परित्ता जीवा आणाए विराहित्ता चाउरन्तं
संसारकन्तार अणुपरियद॒ति । इच्चेइयं दुवालसगं गणिपिडग अणागए
काले अणता जीवा आणाए विराहित्ता चाउरन्तं ससार कन्तार अणु-
परियट्टिस्सति।
इच्चेइय दुवालसंगं गणिपिडगं तीए काले अणता जीवा आणाए
आराहित्ता चाउरन्तं संसारकंतारं वीइवइंसु। इच्चेइयं दुवालसंगं
गणिपिडग पडुप्पण्णकाले परित्ता जीवा आणाए आराहित्ता चाउरन्तं
ससार कन्तारं वीईवयति । इच्येइयं दुवालसंग गणिपिडगं अणागए
काले अणंत जीवा आणाए आराहित्ता चाउरन्तं ससार कन्तारं
वीईवइस्सति।
इच्चेइयं दुवालसगं गणिपिडगं ण कयाइ णासी, ण कयाइ ण
भवइ, ण कयाइ ण भविस्सइ। भूवि च, भवइ य, भविस्सइ य । धुवे,
णियए, सासए, अक्खए, अव्वए, अवट्ठिए, णिच्चे।
से जहाणामए पचत्थिकाए ण कयाइ णासी, ण कयाइ णत्थि,
ण कयाइ ण भविस्सइ । भूवि च, भवइ य, भविस्सइ य, धुवे, णियए,
सासए अक्खए, अव्वए, अवट्टिए, णिच्चे । एवामेव दुवालसंग गणिपिडगं
ण कयाइ णासी, ण कयाइ णस्थि, ण कयाइ ण भविस्सइ। भूवि च,
भवइ य, भविस्सइ य, धुवे, णियए, सासए, अक्खए, अव्वए, अवहिए,
णिच्चे।
से समासओ चउबिहे पण्णत्ते, तंजहा-दव्वओ, खित्तओ, कालओ,
भावओ।
तत्थ-दव्वओ णं सुयणाणी उववत्ते सव्वदव्वाइं जाणइ पासइ।
खित्तओ णं सुयणाणी उवउत्ते सव्व खेत्तं जाणइ पासइ।
कालओ णं सुयणाणी उवउत्ते सव्वं कालं जाणइ पासइ।
भावओ णं सुयणाणी उवउत्ते सव्वे भावे जाणइ पासइ ।
वावमा
विवाद
विजावाबगाना स्वाध्याय माला-159
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इच्चेइयं दुवालसग गणिपिडगं तीए काले अणंता जीवा आणाए विराहित्ता चाउरन्तं संसार कन्तारं अणुपरियट्टिसु। इच्चेइयं दुवालसग गणिपिडग पडुप्पण्णकाले परित्ता जीवा आणाए विराहित्ता चाउरन्तं ससारकन्तारं अणुपरियति । इच्चेड्य दुवालसग गणिपिडगं अणागए काले अणता जीवा आणाए विराहित्ता चाउरन्त संसार कन्तारं अणु- परियट्टिस्सति। इच्चेइय दुवालसंग गणिपिडगं तीए काले अणता जीवा आणाए आराहित्ता चाउरन्तं संसारकंतारं वीइवइंसु। इच्चेइयं दुवालसंग गणिपिडग पडुप्पण्णकाले परित्ता जीवा आणाए आराहित्ता चाउरन्त ससार कन्तार वीईवयंति। इच्चेइयं दुवालसग गणिपिडगं अणागए काले अणत जीवा आणाए आराहित्ता चाउरन्तं संसार कन्तारं वीईवइस्सति। इच्चेड्य दुवालसंगं गणिपिडगं ण कयाइ णासी, ण कयाइ ण भवइ, ण कयाइ ण भविस्सइ । भूविं च, भवइ य, भविस्सइ य। धुवे, णियए, सासए, अक्खए, अव्वए, अवट्टिए, णिच्चे। से जहाणामए पंचत्थिकाए ण कयाइ णासी, ण कयाइ णत्थि, ण कयाइ ण भविस्सइ । भूवि च, भवइ य, भविस्सइ य, धुवे, णियए, सासए अक्खए, अव्वए, अवट्टिए, णिच्चे। एवामेव दुवालसंगं गणिपिडगं ण कयाइ णासी, ण कयाइ णत्थि, ण कयाइ ण भविस्सइ। भूवि च, भवइ य, भविस्सइ य, धुवे, णियए, सासए, अक्खए, अव्वए, अवट्ठिए, णिच्चे। से समासओ चउबिहे पण्णत्ते, तंजहा-दव्वओ, खित्तओ, कालओ, भावओ। तत्थ-दव्वओ णं सुयणाणी उववत्ते सव्वदव्वाइं जाणइ पासइ। खित्तओ णं सुयणाणी उवउत्ते सव्वं खेत्त जाणइ पासइ। कालओ ण सुयणाणी उवउत्ते सव्वं कालं जाणइ पासइ। भावओ ण सुयणाणी उवउत्ते सव्वे भावे जाणइ पासइ । नमानिनवादा स्वाध्याय माला-159
-
है
+
+
१
अक्खर सण्णी सम्म, साइय खलु सपज्जासिक
गमियं अंगपविट्ठ. सत्तवि एए सपलिया
आगम-सत्यग्गहणं, जे बुद्धि गुणेहि अदिति
बिति सुयणाण लम्भ, तं पुव-विशारणासा
सुस्सूसइ पडिपुच्छइ, सुणेइ गिण्हइ य ईहए साल
तत्तो अपोहए वा.. धारेइ करेइ वा सम्म
मूअं हुंकारं वा, वाढक्कारं पडिपुच्छ दीमरा।
तत्तो पसंग-पारायणं च, परिणि समर!!
सुत्तत्थो खलु पढमो, वीओ णिज्जुत्ति मीसिओ भनि।
तइओ य णिरवसेसो, एस विही होइ अणुभोगे।
से तं अंग अंगपविलु। से तं सुयणाण। रो त पर
तं णंदी।
।। णंदोसत्तं समतं ।।
श्री ऋषभदेव भगवान शिलोका
सरसत सांवण तुज पायेजी लागु, जाणु तो दुनिया
रीषभदेवजी रा केसु शिलोको, एकण चित करने का
लोको।1111 नगरी वनीता भली वीराजें, जिणमैं तो श ..";
छाजे। माता मोरादेजी गर्भज धरीयो, ज्यांरी तो कुरा मा .
अवतारीया।।2।। जनम्या कंवरजी जुगल्या सुख पाने, व.
मिल सागे नवरावे। छप्पन कंवारी मिल गोध्वनी ! . . "
जिनेश्वर दिनो।।3।। दिन-दिन कंवरजी मामा , "..
ने दादोजी बंठा। वीस लास पूरब में कवरजी म. .
रा दिना छे दुदा। 14 !! परन्या सुमंगला
160- स्वाध्याय माना कananamara...
जनम्या जोडा भाई। भरतजी सग बिरामी जाई, बाहुबल संग सुन्दरी बाई। 511 रीषभ जिनेश्वर मन में विचारे, जुगल्यारे धर्म करणो जी न्यारो। जोडा पलटाइने लगन लिखाओ, भरत बाहुबल सारा परणावो।।6 || तीजो तो आरो उतरतो आयो, कल्पवृक्ष तो ईसडी फुरमावे। मै थारी मनस्या पूर्ण करस्या, थे मारा धणी होय कर बैठा। 17 || इसडी बाता तो हमने नही रे सुहावे, जुगल्या तो जाय नाभ ने केवे। थे मारो न्याव कीजो महाराजा, मनसा पूरण दीजो जी ताजा | 18 || नाभ राजा तो मुखसुं फुरमावे रीषभ कने थारो न्याव करावो। रीषभजी आप कचेडी मे आवे, नाम राजा तो इसडी फुरमावे।।9।। जुगल्यारो न्याव तुहीज कीजे, मारे ताई तो आवण मत दीजो। न्याव पृथ्वी रो बराबर कीजो, लोक सारो ने दिल्लासा दिजो। 110 || पृथ्वी उपर तो उद्योत किजो, हुक्म पिता रो तुरन्त उठावो। जुगल्या साराने धंधो भोलायो सार फेरी ने चावल नीपजावो । 11 || हुवा चावल ने जुगल्या ने दिना, पाणी पिवोने चावल खाओ। इसडी बातां सुं सारा सुख पावो, कोरा काचा से जुगल्या दुख पावे। [12 || नाके अग्नि मे आप गटकावे जुगल्या तो जाय रीषभजी ने केवे, इसडी बातां सु हम तो सारा दुख पावां, रीषभजी आप कलश बणावे। 11311 माटी रा कलशा अगनी मे पकावे, चावल पानी रो मेल बतावे। इसडी बाता सुं सारो सुख पावे, अबे भगवन्तजी सदा नचीता ||141| त्रेसठ लाख पूरब बिच मे जी बीता, जीव दया रा मोटा उपकारी। संसार जाणे काची जी काया, तपकर सोसी आपरी काया।।15 || प्रभाते उठी लागा माताजी रे पावो, माताजी माने आज्ञा दिरावो, आज्ञा देवो तो दिक्षा मे लेसा, जैन धर्म रो उद्योत करसां। 116 || आदि जिनेश्वर अरिहन्त कहवा सा, माताजी थारो दूध उजवाला। आज्ञा माता रो सुख ज्यू किजी, पलक-पलक मे माने काई पूछो। 117 || आज्ञा लेयने बारे जी वे हिनदिमानवाना बावन स्वाध्याय माला-161
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शरण चारूइ मांगलिक कारी। 30 || नव कडासु गुणों नोकरनली, एकण चित होय ने सामायिक ठाओ। भव भवरा पातक दूर गमावो, भगवन्तरो वरण कैसो बखांणो।।3।। रत्लारी रास अभी चंदन जीऊं, जाणो वृपन लंष्ण ने कंचन वखांणो धज्जा कलश ने रतनागर दुदो, गज गन्तो गेवर सिंधु ज्यु मुंजो! 132|| इसडी वातां तो माता सुण लीनी, पुत्र बांदनरी त्यारीजी कीनी। भरत ने कहवो नगरी सिणगारो, बान्दु अरिहन्त ने रीषम हमारो।।33 || माताजी मननें हर्ष बदाई, हाथी रे ऊपर करी भारी सजाई। चढीया माता नौरादेवीजी नंगल गावे, समोशरप सुनेडा जी आवे।।34] ! देखी सायबी पुत्र की भारी, मुगते जावण री लीरी छे त्यारी! विगधिग जीवड़ा हियोड़ा फुटा, किणरा माता ने किणराजी देटा!!35 ।। कीणरा नाइने निणरी नोजाई. किणरी बाई ने किगरी जी जाई। भव जीवां थी पातक रंगराचो. घर के कुसुंबो मुंगती को ताजो ! 26 }} नातां मारादेजी लेवल उपजायो, गज होदे बैठा मुगत सिवाया। रापन जिनेश्वर गरज कीनो, मका में जायने पांवडा घरीया।।37!! आदम बाबारी जोत सगई, बाहुक्ल कने जावे बाई! दाहुल्ल कीदी वान्दणा नी त्गरी पुत्र पोता ने सेना सिणगारी । 33 1 उठे भगवंतरा दर्शन कुंजातां, पुत्र पोता ने लेसा जी साथे। रीद्ध साय्वी गणीजी लेसां, पो उठे बाहुबल दर्शन कुंआवे।।39 | आदम-आदम कर गणा पुकारे, चरणां रे आगे खूप खेवादे। मका रे माये चीतली करावे, पगल्यां ऊपर रतन जड़ाव 14011 मका रं मांये पगल्या , भारी, मुसलमान की दी जावण की त्यारी, भरतजी रया भरत खंड माई. बाहुबल रय मकारे मायी । [411। भरत की स्याही प्रथमां तुं पुंजे, बाहुबली की त्याही पगलीया सुं पुंजे। आप भगवन्तजी मुक्ति सिधाया, जैन धर्म में मोटी छे दैया । 142|| ज्यांरा तो गुण रिख केवलचदजी गाग, भरत खेतर म विचरता आया, समत गणीसे Manaन्दसारपस-163
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पेक्खवि निरुवम रूव जास, जण जपे किचिय।
एकाकी किल भित्त इत्य, गुण मेल्या सचिय।
अहवा निच्चय पुव्व जम्म, जिणवर इण अचिय।
रभा पउमा गउरी गग, रतिहा विधि वंचिय।।5।।
नय बुध नय गुरु कविण कोय, जसु आगल रहियो।
पच सया गुण पात्र छात्र, हीडे परवरियो।
करय निरतर यज्ञ करम, मिथ्यामति मोहिय।
अणचल होसे चरम नाण, दसणह विसेहिय । 16 11
।। वस्तु ।।
जबूदीव जुबूदीव भरह वासमि, खोणीतल मंडण!
मगह देस सेणिय नरेसर,
वर गुब्बर गाम तिहां, विष्प वसे वसुभूइ सुन्दर !
तसु पुहवि भज्जा, सयल गुण गण रूव निहाण !
ताण पुत्त विज्जानिलो, गोयम अतिहि सुजाण ! 17 11
|| भास ॥
चरम जिणेसर केवलनाणी, चौविह संघपइहाजाणी!
पावापुर सामी सपत्तो, चउविह देवनिकायहि जुत्तो! 18 ।।
देवहि समवसरण तिहा, कीजे, जिण दीठे मिथ्यागति छीजे ।
त्रिभुवन गुरु सिहासन बैठा, ततखिण मोह दिगत पझ्झा । 1911
क्रोध मान माया मद पूरा, जाये नाठा जिम दिन चोरा।
देव दुदुभि आगासे बाजी, धरम नरेसर आव्यो गाजी111011
कुसुम वृष्टि विरचे तिहा देवा, चउसठ इन्द्रज मांगे सेवा।
चामर छत्र सिरोवरि सोहे, रूवहि जिनवर जग सहु मोहे 111111
उपसम रसभर वर वरसंता, जोजन वाणि वखाण करता।
जाणिवि वर्द्धमान जिन पाया, सुर नर किन्नर आवइ राया। 112} !
कतसमोहिय जलहलकंता, गयणविमाणहि रणरणकता।
विमानEDIASAD स्वाध्याय गाला-165
पेक्खवि इन्दभूइ मन चिंते, सुर आवे अम यज्ञ हुवंते।
तीर तरंडक जिन ते वहता, समवसण पुहत्ता गहगहि
तो अभिमाने गोयम जपे, इण अक्त्तर कोपें तणु कंपे।
नूढ़ा लोक अजाण्युं बोले, सुर जाणता इम काई डोरे
मो आगल कोई जाण मणीजे, मेरु अवर किम उपमा
।। वस्तु
वीर जिणवर वीर जिणवर नाण सम्पन्न, पावापुर सुर
पत्त नाह संसार तारण, तिहिं देवइ निन्महिय,
समवसरण बहु सुक्ख कारण,
जिणवर जग उज्जोय करै, तेजहि कर दिनकर।
सिंहासण सामी ठव्यो, हुओ तो जय जयकार!16 ।।
॥ भास ॥
तो चढ़ियो घणमाण गजे, इन्द्रभूइ भूदेव तो,
हुँकारो करी संचरिय, कवणसुजिणवर देवतो!
जोजन भूमि समवसरण, पेक्खवि प्रथनारंम तो,
दस दिस देखे विबुधवधू, आवंति सुररंम तो! 117 11
मणिमय तोरण दंड ध्वज, कोसीसे नवघाट तो,
वइर विवर्जित जंतुगण, प्रातिहारिज आठ तो।
सुर नर किन्नर असुरवर, इंद्र इंद्राणी राय तो,
चित्त चमक्किय चिंतवै, सेवंता प्रमु पाय तो।।18 ।।
सहसकिरण सामी वीरजिण, पेखिय रूप विशाल तो;
एह असंभव संभव ए, साचो ए इंद्रजाल तो।
तो बोलावइ त्रिजग गुरु, इंद्रभूइ नामेण तो,
श्री मुख संत्तय सामी सवे, फेडे वेद पएण तो! 119 ||
मान मेलि मद ठेलि करी भगतिहिं नाम्यो सीस तो।
पंच सयासुं व्रत लियो ए, गोयम पहिलो सीस तो।
166-स्वाध्याय नाला
बंधव संजन सुणिवि क्री अगनिभुइ आवेरा तो.
नाम लेई आभास करे, ते पण प्रतिबोरा तो! 120 !!
इण अनुक्रम गणहर रयण, थाप्या वीर इग्यार तो,
तो उपदेशे भुवन गुरु, संयमशुं खत बारतो।
बिहुँ उपवासे पारणो ए. आपणपे विहरंत तो,
गोयन संजन जग सयल, जय जयकार करंत तो 12111
11 वस्तु ।।
इन्द्रभू इन्द्रभू चलिगे वहुमान हुंकारो करि कप्त
समवसरण पहुतो तुरंत तो, जे जे सता सामि तवे
चरमनाह फेडे फुरंत तो, बोधिखोज सजाय नने,
गोयम भवहि विरत, दिसा लेई तिला सही,
गणहर पय संपत्त!1221
|| भास ।।
आज हुयो सुविहाण. आज पचेलिमां पुण्य भरो,
दीठा गोयम सानि, जो निय नयणे अमिय झरो,
समवसरण मझार, जे जे संसय ऊपजे ए.
ते ते पर उपगार कारण पूछे मुनि पवरो !!23 ।।
जिहां जिहां दीजे दीख, तिहां तिहां केवल उपजेए,
आप कने अणहुंत, गोयम दीजें दान इन !
गुरु ऊपर गुरु भक्ति, सामी गोयम ऊपनिय,
इणिछल केवलनाण, रागज राखे रंग भरे | 24||
जो अष्टापद सेल, वंदे चढ़ि चउवीस जिण,
आतम लब्धिवसेण, चरन तरीरी सो य मुनि।
इस देसणा निसुणेह, गोयम गणहर संचरिय,
तापस पन्नरत्तएण, तो मुनि दीठो आवतो ए।।25।।
तप सोसिय निय अंग-अन्हां संगति न उपजे ए.
DिARERANDIDANEED स्वाध्याप माला-16-
किम चढसे दृढकाय, गज जिम दीसे गाजतो ए,
गिरुओ ए अभिमान, तापस जो मन चिंतवे ए।
तो मुनि चढियो वेग, आलंबवि दिनकर किरण ।।26 ।।
कंचण मणि निप्पन्न दंडकलस ध्वजवड सहिय,
पेखवि परमाणन्द, जिणहर भरतेरस महिय।
निय निय काय प्रमाण, चहुँ दिसि सठिय जिणह बिम्ब,
पणमवि मन उल्लास, गोयम गणहर तिहा वसिय | 127 ||
वयर सामीनो जीव, तिर्यक मुंभक देव तिहां।
प्रतिबोध्या पुडरीक, कंडरिक अध्ययन भणी।
वलता गोयम सामि, सवितापस प्रतिबोध करे,
लेई आपण साथ, चाले जिम जूथाधिपति ।।28।।
खीर खांड घृत आण, अमिय वूठ अगुठ ठवे,
गोयम एकण पात्र करावे, पारणो सवे।
पच सया शुभ भाव, उज्ज्वल भरियो खीर मिसे।
साचा गुरु संयोग, कवल ते केवल रूप हुआ। 29 ||
पञ्च सया जिणणाह, समवसरण प्राकारत्रय,
पेखवि केवल नाण, उप्पन्नो उज्जोय करे।
जाणे जणवि पीयूष गाजती घन मेघ जिम,
निसुणेवि, नाणी हुआ पंचसया।।30 ।।
।। वस्तु ।।
इण अनुक्रम इण अनुक्रम नाण संपन्न पन्नरसे,
उप्पन्न परिवरिय, हरिदुरिय जिणणाह वंदइ।
जाणेवि जगगुरु वयण, तिहि नाण अप्पाण निंदइ।
चरम जिणेसर इम भणे, गोयम म करिस खेह,
छेह जाय आपण सही, होस्या तुल्ला बेव । 31 ||
→
168-स्वाध्याय माला बिग
|| भास ।।
सामियो ए वीर जिणन्द, पूनमचन्द जिम उलसिय,
विहरियो ए भरहवासम्मि, वरस बहुत्तर संवसिय।
ठवतो ए कणय पउमेण, पाय कमल संधै सहिय,
आवियो ए नयणानंद, नयर पावापुर सुरमहिय ।।32 ||
पेसियो ए गोयम सामि देवसर्मा प्रतिबोध करे,
आपणो ए तिसला देवि, नंदन पुहतो परमपए।
वलतो ए देव आकाश, पेखवि जाण्यो जिण समए,
तो मुनि ए मन विखवाद, नाद भेद जिम ऊपनो ए।।33 ।।
इण समे ए सामिय देखि, आप कनांसु टालिया ए,
जाणतो ए तिहुअण नाह, लोक विवहार न पालियो ए।
अतिभलो ए कीधलो सामि जाण्यो केवल मागसे ए,
चिन्तव्यो ए बालक जेम, अहवा केडे लागसे ए।।34।।
किम ए वीर जिणद, भगतिहि भोले भोलव्यो ए,
आपणो ए अविचल नेह, नाह न संपइ साचव्यो ए,
साचो ए वीतराग, नेह न हेजे लालियो ए।
तिणसमे ए गोयम चित्त, राग वैरागे वालियो। 35 ।।
आवतो ए जो उल्लट्ट, रहितो रागे साहियो ए,
केवल ए नाण उप्पन्न, गोयम सहिज ऊमाहियो ए।
तिहुअण ए जय जयकार केवल महिमा सुर करे ए,
गणधरू ए करय बखाण, भविया भव जिम निस्तरे ए1136 ||
।। वस्तु ।।
पढम गणहर पढम गणहर बरस पच्चास गिहवासे सवसिय,
तहा बरस सजम विभूसिय, सिरि केवल नाण पुण,
बार बरस तिहुअण नमंसिय ।
हुँ
विमानानाजवलालाबाजार स्वाध्याय
राजगृही नयरी ठव्यो वाणवइ बरसाउ,
सामी गोयम गुणनिलो, होसे सिवपुर ठाउ । 137 ।।
|| भास ॥
जिम सहकारे कोयल टहुके, जिम कुसुमावन परिमल महके,
जिम चन्दन सोगंध निधि, जिन गंगाजल लहरिया लहके,
जिम कणयाचल तेजे झलके, तिम गोयम सोभाग निधि। 3811
जिम मानसरोवर निवसे हंसा, जिम सुरतरु वर कणयवतंसा,
जिम महुयर राजीव बनें, जिम रयणायर रयणे विलसे,
जिम अंबर तारागण विकसे, तिम गोयम गुरु केवल घनें। [39 ।।
पूनम निसि जिम ससियर सोहे, सुरतरु महिमा जिम जग मोहै,
पूरब दिस जिम सहसकरो, पञ्चानन जिम गिरिवर राजे,
नरवई घर जिम मयगल गाजे, तिम जिनसासन मुनि पवरो। 140।।
जिम सुर तरुवर सोहे साखा, जिम उत्तम मुख मधुरी भाषा,
जिम वन केतकि महमहे ए, जिम भूमिपति भुयबल चमके,
जिम जिन मन्दिर घण्टा रणके, गोयम लब्धे गहगह्यो ए।।41||
चिन्तामणि कर चढ़ियो आज, सुरतरु सारे वंछित काज,
कामकुम्म सहु वशि हुआ ए. कामगवी पूरे मन कामी,
अष्ट महासिद्धि आवे धामी, सामी गोयम अणुसरो ए{{42||
पणवक्खर पहिलो पभणीजे, माया बीजो श्रवण सुणीजे,
श्रीमती सोमा संभवए, देवां धुर अरिहंत नमीजे,
विनयपहु उवझाय थुणीजे, इण मंत्रै गोयम नमो ए। 143 ।।
पर घर वसतां कांइ करीजे, देस देसांतर कांइ भमीजे,
कवण काज आयास करो, प्रह उठी गोयम समरीजे,
काज समग्गल ततखिण सीजे, नव निधि विलसे तिहां घरे ए।[4411
चउदह सय बारोत्तर वरसे, गोयम गणहर केवल दिवसे,
कियो कवित्त उपगार परो, आदिहिं मंगल ए पमणीजे,
170-स्वाध्याय माला ANDSHAama
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चौबीसी
।
मनवा छोड रे राग न द्वेष, खमाले सुध भाव से।
आया पक्खी पर्व महान, खमाले सुध भाव से।।
ऋषभ अजित संभव अभिनन्दन सुमति पद्म सुपार्श्व।
चन्दा प्रभुजी सुविधि शीतलजी श्री हस वासु पूज्य राज।
विमल अनत धर्म शान्ति जिन खमाले सुध भाव से।
कुंथु अर मल्लि जाण, मुनि सुव्रत नमि नेम जी।
पारस महावीर धीरे-खमाले
श्री मदिर युगमदिर स्वामी, बाहु सुबाहु सुजात ।
विशाल वज़ चदानंनजी, चन्द भुजंग स्वाम।
ईश्वर नेम वीर सेनजी, महाभद्र देव अजीत नाथ।
महाविदेह में चौथो आरो, विचर रहा जिनराज जी।
मैं तो रहती भरत क्षेत्र मे, कैसे काटूला कर्म आठ।
इन्द्र अग्नि वायुभूतिजी, व्यक्त सुधर्मा साथ।
पांच-पाच से शिष्य तारे, दिक्षा लेने बण गया नाथ।
मडी मौरी अकम्प अचलजी, मेतारज श्रीप्रभास।
ग्यारही गणधर वीर प्रभु रा ब्राह्मण कुल अवतार
ब्राह्मी सुन्दरी राजुल चन्दना, ध्यान धरी चितलाय।
कौशल्या सीता अतिद द्रोपदी साहु बहु सुखदाय।
चेलना प्रभावति मृगावति सुलसा सुभद्रा
शिवा प्रभा दमयति नलपति नार।
हु,सि.ऊ.चौ.श्री जगनाना जाप जपो सुबह शाम ।
करे निरन्तर राम राज्य केसर चावे आठो याम।
172-स्वाध्याय माला हलवान
andare DCDONADON
पंच परमेष्ठि
तर्ज : जरा समाने..
....
:
जरा श्रद्धा से सुमिरन करीये, यह महामंत्र नवकार है।
शुद्ध मन से करे जा उपासना, उस व्यक्ति का बेडा पार है।।टेर।।
दर्शन ज्ञान अनन्त शुद्ध रूप से जाग रहा अर्हन्त।।
यथाख्यात चारित्र शक्ति गुण पूर्ण रूप से राग रहा।
जो अरिहन्त पद के धार है, उन्हे बार-बार मेरा नमस्कार है।।1।।
अष्ट कर्म बन्धन से जिनको सदा काल विसराम मिलता सिद्ध ।
आव्याबाध सुख और अटल, अवगाहन अक्षय धाम मिला ।।
इसलिए तो सिद्ध श्रेयकार है, उन्हे बार-बार मेरा नमस्कार है||2||
आठ सम्पदाओ से जिनका, जीवन अंग में राज रहा आचार्य
सद वचनो से सकल संघ, पर समता शासन छाज रहा।
छत्तीस गुणो के धार हैं, उन्हें बार-बार मेरा नमस्कार है।।3।।
लोकोत्तर दीपक प्रकाश, मोक्ष मार्ग सब पाते हैं।।
पच प्रकारा चार चरणा, विधि करते और करवाते।।
जिनशासन के खेवनहार है, उन्हे बार-बार मेरा नमस्कार है। 14 ||
वीतराग श्रुत चरण करण के, नय प्रमाण से ज्ञाता है।।
जिनक चरण कमल मे रह कर, धर्म बोध जग पता है।।
जो उपाध्याय उर हार है, उन्हे बार-बार मेरा नमस्कार है।।5।।
सम्यक दर्शन युक्त जगत मे, पच महाव्रत पाल रहे।
सदा श्रमण निर्ग्रन्थ धर्म मे, जीवन अपना ढाल रहे।
जो सचे साधु अणगार है, उन्हें बार-बार मेरा नमस्कार है।।6।।
सर्व श्रेष्ठ मंगलो मे मगल, सब मत्रो मे मत्र महान प्रधान।
सब सूत्रो मे सूत्र सार यह, सब धर्मो मे धर्म प्रधान ।
सब पापो का नाशनहार है, उन्हें बार-बार मेरा नमस्कार है। 17 ||
সরাসরি
पंच परमेष्ठि महा मंत्र में, जिनका मन रम जाता है।
लौकिक और लोकोतर सब, संकटों से वह बच जाता है।
हो जाता सुमेरु भव पार है, उन्हें बार-बार मेरा नमस्कार है।।8।।
: मेरी भावना :
जिसने राग द्वेष कानादिक जीते, सब जग जान लिया।
सब जीवों को मोक्ष मार्ग का, निस्पृह हो उपदेश दिया!
बुद्ध वीर जिन हरिहर ब्रह्मा, या उत्सलो स्वाधीन कहो।
नक्ति भाव से प्रेरित हो यह, मित्त उसी में लीन रहो।।
विषयों की आशा नहीं जिनले साम्य भाव धन रखते हैं।
निज-पर के हित-साचन ने जो निशदिन तत्पर रहते हैं।
स्वार्यत्या की कठिन तपस्या, दिना खेद जे करते हैं।
ऐले ज्ञानी सावु जमत के दुख समूह को हरते हैं। 21
रहे सदा सत्संग उन्हीं का, ध्यान उन्हीं का नित्य रहे।
उन्हीं जैसी चर्या में यह, चित्त सदा अनुरक्त रहे।
नहीं सताऊँ किती जीव को, झूठ कनी नहीं कहा कल
परवन्न वनिता पर न लुमाऊँ, संतोषान्त पिया करूँ।।।
अहंकार का नाद न रल्लू नहीं किसी पर मोच लत।
देख दूसरों की बढ़ती की, कभी न ई-नाद वक्त।
रहे भावना एसी नेरी, तरल सत्व व्यवहार करूँ।
दने जहाँ तक इस जीवन में, औरों का उपकार लो।
मैत्री-भाव जगत् में मेरा, सब जीवों से नित्य रहे।
दीन दुःखी जीवों पर मेरे, उर से लाणा-स्रोत बहे।
दुर्जन-क्रूर-कुमार्ग स्तों पर, क्षोभ नहीं मुझको आदे।
साम्य-भाव रखू मै उन पर, ऐसी परिणति हा जाये। 5 ।।
ENT
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अटल सत्य
इस संसार का कोई भी मनुष्य निश्चयपूर्वक यह नहीं क
सकता कि जो कुछ होना है वह अनादिकाल से नियत है।
सब कुछ नियत है तो उस नियत काम के हो जाने के बाद
संसार में कुछ रहेगा ही नही। अनेकों धटनाएँ नियत नहीं है।
अनेक प्रकार से हमारी जिन्दगी में घटती रहती है तथा संसार
बढाती रहती है। इसी से संसार चलता रहता है। वास्तव मे
को व्यवहारवादी होना चाहिए। व्यवहारवाद ही संसार है और
अनुकम्पा की जननी है। यही धर्म यही अटल सत्य है।
176- स्वाध्याय माला बनाना
विजन
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