Charan Sahitya Shodh Sansthan, Ajmer
Kabirat Ramayan
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॥ श्री॥
तुलसीदासकृत
कवित्तरामायण.
यह पुस्तक
सुजनलोकौंकेवास्ते
मुंबई में
हरिप्रसाद भगीरथने
जगदीश्वर छापखानेमें छ०
ता० १ माहे मार्च सन१८९०
१
।
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श्रीः
अथ
तुलसीदासकृतकबित्तरामायण.
सवैया.
अवधेसकेदारसबेरे गईसुतगोदभूपतिलै निकसे।
अवलोकिहीं सोचबिमोचन कोठगिसीरहिजोनठगे
धिकसे ॥ तुलसीमनरंजनरंजितजंजननैनसुखंजन
नातकसे ॥ सजनीससिमेंसममीलउौनवनीलस
रोरुहसेबिकसे ॥ १॥ पगनूपुरऔपहुंचीकरकंजनि
मंजुबनीमनिमालहिये ॥ नवनीलकलेवरपीतउगा
उलकैपुलकैनृपगोदलिये ॥अरबिंदसोआननरूपम
रंदअनंदितलोचन_गपिये ॥ मनमानाबौऐसो
बालकज्यौंतुलसीजगमेंफलकौनजिये ॥२॥ तन
कीदुतिस्यामसरोरुहलोचनकंजकीमंजुलताइहरै ॥
. + my . १ - प हिं कवित्तरामायण वालकांड अतिसुंदरसोभितधूरिमरेछविचरिअनंगकीदुरिधरै॥ दमकैदतियांतिदामिनिजाँकिलकलवालविनोद करें ॥ अवधेसकेवालकचारिसदांतुलसीमनमंदिरमें विहरे ॥ ३ ॥ कवहूंससिमागतारिकरेकवहूंप तिविवनिहारिडर ॥ कवडूंकरतालवजाइकेनाचत मानुसबैमनमोदभरें। कबहुंरिसिआइरहेहटिकैपनि लेतसोईजेहिलागगर। अवधेसकेवालकचारिसदातु लसीमनमंदिर विहगावरदंतकीपंगतिकुंदकाली जयसवरपल्लवखोलनकी ॥ चपलाचमकैघनबीच जुगैठविमोतिनमालअमोलनकी ॥ धुंधुरारिलटें लटकमसऊपरकुंडल्लोलकपोलनकी ॥ नवछाव रपानरतुलसीदलिजाउललाईनवोलनकी ॥५॥ पलंगनिमंजुवनीपनही धनुहीसरपंकजपानिलि ये ॥ लरिकासंगखेलतडोलतहसरजूतटचौहत हार्गय ॥ तुलसीऐसेवालकसेनहिनेहकहाजप जांगममाधिकिये ॥ नखेखरसूकरस्वानसमानक
हिं कवित्तरामायण बालकांड १
होजगमफलकौनजिये ॥ ६ ॥ सरजूबरतीरहिं
तीरफिरघुबीरसखाअरुबीरसबै ॥ धनुहींकरती
रनिषंगकसैकटिपीतदुकूलनबीनफबै ॥ तुलसी
तेहिौसरलाबनितादसचारिनौतीनएकिससबै॥ म
तिभारतपंगुअईजोनिहारिबिचारिफिरिउपमानफबै
॥ ७॥ ॥ घनाक्षरी॥॥ छोनीमेकेछोनीपतिछा
जैजिन्हैछत्रछायाछोनीछानीछाएछितिआएनिमिरा
जके ॥ प्रबलप्रचंडबरिबंडबरबेषबपुपरिवेकोबोले
देहीबरकाजके ॥ बोलेबंदिविरुदबजाईबरबाजनेऊ
बाजेबाजेबीरबाहुधुनतसमाजके ॥ तुलसीमुदित
मनपुरनरनारिजेतेबारबारहरैमुखऔधमृगराजके ॥
॥८॥सीयकेस्वयंवरसमाजजहांराजनिकोराजनि
केराजामहाराजाजानौनामको ॥ पवनपुरंदरकृसा
नुभानुधनदसेगुनकेनिवानरूपधामसोमकामको ।
बानबलवानजातुधानपतिसारिखेसरजिन्हगुमान
सदासलिमसंग्रामको ॥ तहांदसरथकोसमर्थनाथतु
A N 4hAindi-Mar- + । हिं कवित्तरामायण बालकांड: लसीकेचपरिचढायोचापचंद्रमाललामको ॥९॥ मयनमहनपुरदहनगहनजानिआनिकैसवैकोसारच नुपगढायो । जनकसदसिजेतेभलेभलेभूमिपाल कीएबलहीनवलआपनोवढायोहै ॥ कुलिसकठोर कूर्मपीठितेकठिनअतिहठिनपिनाककाहूचपरिचा याहे ॥ तुलसीसोरामकेसरोजपानिपरसतहीटूट्यो मानोवारेतेपुरारिहिंपढायोहै ॥ १०॥ छपै।।डिगति उवींअतिगुवर्णसर्वपवैसमुद्रसर ॥ व्यालवधिरतेहिका लविकलदिगपालचराचर ॥ दिगगयंदलरखरतपर तदसकंधमुखभर ॥ सुरविमानहिमभानुयानिसंघ टितपरस्पर ॥ चौकेविरंचिसंकरसहितकोलकम जहिकलमल्यौ ॥ ब्रह्मंडखंडकीधोंचंडधुनिजबहि गमसिवधनुदल्यौ ॥ ११॥ ॥ घनाक्षरी ॥ ॥ लोचनाभिरामघनस्यामरामरूपसिसु सखीकहैस मीमोंतूप्रेमपयपालिरी ॥ वालकनुपालजूकेख्या लहीपिनाकतोयोमंडलीकमंडलीप्रतापदापदालि । - . द M . -year---
हिं कबित्तरामायण बालकांड १.
री॥ जनककोसियाकोहमारोतुलसीकोसबकोभाव
तोव्हैहैमैंजोकबैकालिरी ॥ कौसलाकीकोखिपरतो
षितनपरिबारियेरीरायदसरथकीबलायलीजेआलि
री॥ १२॥ दूबदधिरोचनाकनकथारभरिभरिार
तिसंवारिबरनारिचलीगावतीलीन्हेजयमालकरकं
जसोहैंजानकीकेपहिरावोराघोजीकोंसखियसिखाव
ती ॥ तुलसीमुदितमनजनकनगरजनऊकतीऊरोखे
लागीसोभारानोंपावतीं ॥ मानहुंचकोरीचारुबैठी
निजनिजनीडचंदकीकिरिनिपीपलकोनलावती ॥
॥ १३॥नगरनिसानबरबाजैव्योमदुंदुभीबिमानच
ढिगानकैकैसुरनारिनाचहीं ॥ जयतिजयतिहूंपुरजन
मालरामउरबरबँसुमनसुररूरेरूपराचहीं॥जनकको
पनजयोसबकोभावतोभयोतुलसीमुदितरोमरोममो
दमाचहीं ॥सांवरोकिसोरगोरीसोभापरतनतोरिजो
रिजियौजुगजुगजुवतिजनजाचहीं ॥ १४॥ भलेप
कहतमलेसबद्धिसभूपनिसोलोकलखिबोलिएपुनीति
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हिं कवित्तरामायण बालकांड १
रीतिमारखी ॥ जगदंवाजानकीजगतपितुराममद्रजा
निजियजोहोजोलगेनमुहकारखी ॥ देखेहअनेकव्या
हसुनेहपुरनवेदबूझहैसुजानसाधुनरनारिपारखी ॥
ऐसेसमसमधीसभाजनविराजमान नामसेनबरदुल
हिनसीयसारखी ॥ १५॥ वानीविधिगौरीहरिसेस
हूंगनेसकहीसहीभरीलोमसभुर्बुडिबहुबारिखो॥चा
रिदसभुवननिहारिनरनारिसवनारदसोपरदाननारद
मोपारिखो ॥ तिन्हकहीजगसोजगमगातिजोरीएक
दृजीकोकहैयाकोसुनयाचखचारिखो ॥रमारमारम
नसुजानहनुमानिकहीसीयसीनतीय नपुरुषरामसा
रिसो॥१६॥ ॥ सवैया ॥ ॥ दूलहश्रीरघुनाथ
वनदुलहीसियसुंदरमंदिरमांही गावतिगीतसबैमि
लिमुंदरिवेदजुबाजुरिविप्रपढाहीं॥ रामकोरुपनिहा
गतिजानकीकंकनकेनमकीपरछांहीं ॥ यातेसवैसुधि
भूलिगईकरटेकिरहीपलटारतिनाहीं ॥१७॥ ॥घ
नाक्षरी॥ ॥भूपमंडलीप्रचंडचंडीसकोदंडखनौचंड
। - हिं कबित्तरामायण बालकांड १ बाहुदंडजाकोताहीसोकहतहौँ। कठिनकुठारधारध विकीधीरताहिबीरताबिदितताकीदेखिऐचहतहाँ।। तुलसीसमाजराजतजि सोबिराजेआजुगाज्यौमृगरा जगजराजज्यौं । गहतुहाछोनीमैनछांब्यौछप्यौ छोनिपकोछोनाछोटोछोनिपानवाकौंबिरुदबहतु हाँ॥१८॥ निपटनिडरिबोलेबचनकुठारसानिमानी त्रासोनिपनमानौमौनतागही ॥ रोषेमांखेलखन अकनिअनसोंहीबातेतुलसीबिनीतबानीबिहंसि ऐ सीकही।सुजसतिहारेभरेभुवननिभृगुनाथप्रगटप्रता पआपकह्योसोसबैसही ॥ व्यौसोनजुरैगोसरासन महेसजूकोरावरीपिनाकमैंसरीकताकहारही ॥१९॥ सवैया॥ ॥गर्भकेअंर्भककाटनकोपटुधारकुठारकरा लहैजाको ॥सोईहौंबूझतराजसाधनकैदलिहोदरि हौंबलताको लघुआननउत्तरदेतबडेलरिहैमरिहैक रिहैकछुसाको गोरोगरूरगुमानभन्यौकहीकौसिक छोटोसोढोटोहैकाको ॥२०॥॥ घनाक्षरी ॥ ॥ .
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हिं० कवित्तरामायण अयोध्याकांड २
मखराखिवेकेकाजराजमेरेसंगदयेदलेजातुधाननेजि
तआविबुधेसकेगौतमकीतीयतारीमेटेअघभूरिक्षा
गलाचनअतिथिभएजनकजनेसके ॥चंडबहुदंडवल
चंडीमकोदंढखंयोव्याहीजानकी जीतेनरेसदेसदेस
के ॥ सांवरेगोरेसरीरंधीरमहावीरदोऊनामरामलछ
मनकुमारकोसलेसके ॥२१॥ ॥सवैया॥ ॥ कालक
रालनपालनकेधनुभंगसुनेफरसालियेधाये लक्षम
नरामविलोकीसप्रेममहारिसिहाफिरिआंखिदिखाये
॥धीरसिरोमनिवीरवडेविनईविजईरघुनाथसोहाये।
लयकहीं गुनायकमोधनुसायकौंपिसुभायसि
पाये॥२२॥ माइतिवालकांड समाप्तः॥ ॥ अथअयो
ध्याकांडप्रारंभः॥ ॥ सवैया॥ ॥कीरकेकागरज्यों
नृपचीरविकृपनउप्पमअंगनिपाई ॥ औधतजीभ
गवासकेरुखज्यापंथकेसाथजोलोगलुगाई॥ संगसु
बंधुपुनीतप्रियामानोधर्मक्रियाधरिदेहसोहाई ॥रा
जिवलोचनरामचलेतजिवापकोराजवटाउकिनाई।
हिं कवित्तरामायण अयोध्या०२
॥२३॥ कागरकीरज्यौं भूषनचीरसरीरलस्यौतजिनी
रग्याकाई॥ मातुपिताप्रियलोगसबैसनमानिसुभा
सयसनेहसनगाई।संगसुभामिनिभाइभलोदिनदैज
नुऔधहुंतेपहुनाई ॥राजिवलोचनरामचलेतजिबा
पकोराजबटाउकीनाई॥ २४॥ ॥ घनाक्षरी॥
सिथिलसनेहकहैकौसिलासुमित्रासोंमलखीसवति
सखीभगिनीज्योंसेईहै।कहेमोहिमैयाकहौमनमैंया
भरतकीबलैयालैहों#यातेरीमैयांकेकईहै । तुलसी
सरलभायरघुरायमायमानीकायमनबानीनजानी
कीमतेईहै । बामबिधिमेरोसुखसिरीससुमनसमता
कोछलछुरीकोहकुलिसरैटेईहै ॥२५॥ कीजेकहाजी
जीजुसुमित्रापरिपायकहै तुलसीसहावैबिधिसोईस
हियतुहै ॥रावरेसुभायरामजन्महीतजानियतभरत
कीमातुकोकीवोसोचियतुहै |जाइराजघरख्याहिआ
ईराजघरमहाराजपूतपायेहूंनसुखलहियतुहै ॥ गेह
सुधागेहतेऊमृगईमलीनकियोताहूपरबाहुबिनुराहु
हिं कवित्तरामायण अयोध्या० २
गहियतुहै॥ २६॥ ॥ सवैया ॥ ॥जाकेनामज
नामिलसेखलकोटिअपारनदीभवबूडतकाढे ॥जोंसु
मिरेगिरिमेरुमिलकनहोतअजाखुरवारिधिवाः ॥तु
लसीजेहिकेपदपंकजतेप्रगटीतटनीजौहरैजघगाढे॥
तेप्रभुयासरितातरिवेकहमांगतनावकारारेव्हेठाढे ॥
॥२७॥ एहिघाटतेथोरिकरिअहैकटिलौंजलथाहदे
खाइहाँजू ॥ परसेपगधूरितरैतरनीवरनीघरक्यौंसमु
झाइहाजातुलसीअवलंबनऔरकछुलरिकाकेहिमां
तिजिनाइहाजू॥परिमारिएमोहिविनापगधोइहोना
थननाऊचनाइहौजू॥२८॥रावरोदोपनपायनकोपग
घूरिकोभृरिप्रभाउमहाहै।पाहनतेवनवाहनकाठको
कोमलहेजलखाइरहाहै ॥ पावनपायपखारिकैनाउ
चढाइहीआयसुहोतकहाहै॥तुलसीसुनिकेवठकेबर
बैननमहंसप्रभुजानकीओरहहाहै ॥२९॥घनाक्षरी॥
पातरिसहरिसकलसुतवारेवारेकेवटकीजातिकछु
वेदनपढाइहाँ॥सवपरिवारिमरेयाहीलागिराजाजी
हिं०कबित्तरामायण अयाध्या० २
होंदीनबित्तहीनकैसेदूसरीगढाइहौं।गौतमकीघरनी
ज्यौतरनीतरेगीमेरीप्रभुसोनिषादव्हैकै बादनबढाइ
हौं।तुलसीकेईसरामरावरेसोंसांचीकहाँबिनापगधो
एनाथनाउनचढाइहौं॥३०॥जिनकोपुनीतबारिसिर
सिबहैपुरारित्रिपथगामिनीजसुबेदकहैगाइकै ॥ जि
नकोजोगींद्रमुनिबंददेवदेहधरि करतबिबिधिजोगज
पमनलाइकै ॥ तुलसीजिनकीधूरिपरसिअहिल्या
तरीगौतमसिधरेगृहगौनोसोलेवाइकै ॥ तेईपाइपा
इकैचढाईनावधोएबिनुरख्खैहौंनपढ़ावनीकेव्हैहीन
हंसाइकै ॥ ३१ ॥ प्रभुरुखपाइकैबुलाएबालकष
रनिबंदिकैचरनचहूंसिबैठेघेरिधेरी ॥ छोटोसोकठौ
ता भरिआनिपानीगंगाजूको धोइपाइपियतपुनीत
वारिफेरिफेरि ॥ तुलसीसराहताकोआगसानुरागसु
रबरषैसुमनजयजयकटेरिटेरि ॥ विबुधसनेहसानी
बानीअसयानीसुनि हंसैराघो जानकीलषमनतनहे
रिहरि ॥३२॥ ॥ सवैया॥ ॥पुरतेंनिकसीर
१२ हिं० कवित्तरामायण अयोध्या. २
घुबीरवधूधरिधीरदयेमगमैंडगर्दै ॥ उलकीभरि
भालकनीजलकीपटसूखीगएमधुराधरवै ॥ फिरबू
झतिहचलनोबकितोपियपरनकुटीकरिहौंकितव्है।
तियकीलखि आतुरतापियकीअंखियांअतिचारुच
लिंजलच्चै ॥ ३३ ॥ जलकोगएलपमनहलरिका
परिखौपियछांहधरीकव्हैठाढे ॥ पॉछिपसेउबयारि
करोंजरुपायपखारिहाभूरिहौभूभुरिदाढे ॥ तुलसी
रघुवीरप्रियाश्रमजानिकैवैठिबिलंबसोंकंटककाढे॥
जानकीनाहकोनेहलख्योपुलकितनवारिबिलोचन
बाढे ॥३४॥ठाडेहेनवट्ठमडारगहैधनुकांधेवरेकरसा
यकलें ॥ विकटीभृकुटीबडडीअखियांअनमोलक
पोलनकीछविहै ॥ तुलसीऐसीमूरतिआनुहियेजद
डारुधीप्राननिछावरकै ॥ श्रमसीकरमांवरिदेहलसै
मानोरासिमहातमतारकमै ॥ ३५॥ ॥ घनाक्ष
री | जलजनयनजलजाननजटाहँसिरजौवनउमंग
अंगउदितउदारहे ॥ सांवरेगोरेकेवीचभामिनिसुदा
हिं. कबित्तरामायण अयोध्या० २ १३
मिनीसिमुनिपटधारेउरफूलनिकहारहैं ॥ करनिस
रासनसिलीमुखनिषंगकटिअतिहीअनूपकाहूभूपके
कुमारहैं ॥ तुलसीबिलोककैतिलोककेतिलकतीनि
रहेनरनारज्यौचितेरेचित्रसारहैं ॥३६ ॥ आगेसो
हैं सांवरेकुंबरगोरेपाछेकाछेआछेमुनिवेषधरेलाजत
अनंगहैं । वानबिसिखासनबसनबनहींकेकटिकसे
हैंबनाइनीकेराजतनिषंगहैं । साथनिसिनाथमुखी
पाथनाथनंदिनीसीतुलसीविलोकेचितलाइलेतसंग
हैं॥ आनंदउमगमनजोबनउमगतनरूपकेउमगत
गअंगहैं ॥३७॥ सुंदरबनसरसीरुहसोहाएवैनमंजु
लप्रसुनमाथेमुकुटजटनिके ॥ असनिसरासनलस
तसुचिसरकरतूनकटिमुनिपटलूटकपटनिके ॥ ना
रिसुकुमारिसंगजाके अंगउवटिकैबिधिबिरचैवस्थ
- बिटयुच्छटनिके॥ गोरेकोबरनदेखेसोनोनसलोनो
लागेसावरेबिलोकेगर्वघटघटनिके ॥ ३८॥ बल
कलबसनधनुबानपानितूनकटिरूपकेनिधानघनदा
१४ हिं० कविचरामायण अयोध्या०२
मिनीवरनहै ॥ तुलसीसुतीयसंगसहजसोहाएजंग
नवलकमलहूतेकोमलचरनहैं ॥ औरसोवसंतऔर
रतिपतिमूरतिविलोकेतनमनकहरनहें ॥ तापसबेरे
वेंवनाएपथिकपंथेसोहाएचलेलोकलोचननिसुफल
करनह ॥ ३९॥ ॥ सवैया ॥ ॥ बनिताबनी
स्यामलगोरकोवीचविलोकहुरीसखीमोहिसीव्है ।
मगजोगनकोनलक्यौंचलिहैं सकुचातिमहीपदपंक
जछै ॥ तुलसीसुनिग्रामवधूविथकीपुलकीतनगौ
चनचे ॥ सवभांतिमनोहरमोहनरूपअनूपपके
बालकदै ॥४०॥ सांवरेगोरेसलोनेसुभायमनोह
रतातजिमैनलियोह ॥ वालकमानिषंगकसेसिरसो
हैजटामुनिवेषकियोहै ॥ संगलिएविधुदैनीवधूरति
कोजेहिरंचकल्पदियोहै ॥ पायनतोपनहीनपया
देहिक्योंचलिहें ॥ ४१ ॥ रानीमजानीअयानीम
हापविपाहिनहूतेकठोरहियोहै ॥ राजहुकाजअका
जनजान्यौकोतियकोजेहिकानकियोहै । ऐसीम
. हिं कवित्तरामायण अयोध्या० २ १५ नोहरमूरतिएबिछरेकैसेप्रीतमलोगजियोह ॥४२॥ आखिनमेंसखिराखिवेजोग इन्हकिमिकैवनवासादि योहै ॥ सीमजटाउरबाहुबिसालबिलोचनलालति रीच्छीसीभौहैं ॥ तूनसरासनबानधरेतुलसीवनमा रगमेसुठिसोहैं ॥ सादरवारहिवारमुभायचिंतनुम स्यौहमरोमनमोहैं ॥ पूंछतिग्रामवधूसियसीकही सांवरोसोसखिरावरोकोहैं ॥ ४३ ॥ सुनिमुंदरवानि सुधारससानिसयानिहैजानकीजनिभली ॥ तिरछे करिनैनदेखैनतिरैसमुदाइकछमुसुकाइचली॥ तुल सीतेहिऔसरसोहँसवैलवलोकतिलोचनलाहुजली अनुरागतडागभानुउदैविकसीमानोमंजुलकंज कली ॥४४॥ धरिधीरकहँचलुटेखियजाइजहांस जनीरजनीरहिहैं । कहिलैजगपोचनमोक्छफललो चनआपनतीलहिह ॥ सुखपाइकानमुनेवतिया कलआपुसमैकछुपैकहिलै ॥ तुरसीअतिप्रेमलगो पलकेपुलकीलखिरामहिएमहिलै ॥४५॥ पद - -- r MAIT
१६ हिं. कवित्तरामायण अयोध्या० २
कोमलस्यामलगौरकलेवरराजतकोटिमनोजलजए
करवानसरासनसीसजदासरसीरहलोचनसोनसो
हाए ॥ जिनदेखेसखीसबभावहुतेतुलसीतिनतोमन
फेरिनपाए ॥ एहिमारगआजुकिसोरखधूबिधुबैनिस
मेतसुभायसिधाए ॥४६॥ मुखपंकजकंजबिलोचन
मंजुमनोजसरासनसीबनिभो ।कमनीयकलेवरको
मलस्यामलगौरकिसोरजटासिरसोहैं॥तुलसीकटि
तूनघरेवनुवानअचानकदृष्टिपरीतिरछोहैं।केहिभां
तिकहौसजनीतोहिसोंमृदुमूरतिदैनिवसीमनमोहैं ।
॥४७॥प्रेमसोपिछेतिरीछेप्रियाहिचितैचितुदैचलैचि
तचोरै ।। स्यासरीरपसेउलसैहुलसैतुलसीछबिसोम
नमोरै॥ लोचनलोलचलैभृकुटीकलकामकमानन
सोतनतोरै॥ राजतरामकुरंगकेसंगनिषंगकसेधनुसो
सरजोरै ॥४८॥ सरचारिकचारुबनाइकसेकटिपानि
सरासनसायकलै ॥वनखेलतरामफिरमृगयातुलसी
छविसोवरनैकिमिकै ॥ औलोकिअलौकिकरूपम
हिं० कबित्तरामायण किष्किधा०४. १७. निसिलीमुखपंचधरेरतिनायकहै ॥४९॥बिंधकेबा सीउदासीतपोव्रतधारीमहाबिनुनरिदुखारे॥ गौतम तीयतरीतुलसीसोकथासुनिमेमुनिद्वंदसुखारेव्हेहैंसि लासबचंदमुखीपरसेपदमंजुलकंजतिहारे ॥कीह्नी भलीरघुनायकजूकरुनाकरिकाननकोपगधारे॥५० ॥इत्ययोध्याकांडःसमाप्त अथअरण्यकांडप्रारंभः॥ सवैया ॥ पंचवटींबरपरनकुटीतरबैठेहैरामसुभाय सोहाए ॥ सौहँप्रियाप्रियबंधुलसैतुलसीसबअंगध नेछबिछाये ॥ देखिमृगामृगनैनिकहे प्रियबैनतेपी तमकेमनभाए ॥ हेमकुरंगकेसंगसरासनसायकलैर घुनायकधाए ॥५१॥ ॥ इत्यरएयकांडः समा तः ॥ अथकिष्किंधाकांडं ॥ ॥घनाक्षरी॥ ॥ जबजंगदादिनकीमतिगतिमंदभईपवनकेपूतकोनकु दिवेकोबुलगो ॥ साहसीव्हैसैलपरसहसासिकिलि आइचितवतचहूंओरऔरनिकोकलुगो ॥ तुलसीर सातलकोनिकसिसलिलआयोकोलकलमल्यौअहि . २ १८ हिं. कबित्तरामायण सुं० ५ कमठकोवळुगो ॥ चारिहूंचरनकेचपेटचापेचिपटि गोउचकेउचकिचारिजंगुलअचलुगो ॥ ५२ ॥ इ तिकिष्किंधाकांड समाप्तः ॥ अथसुंदरकांडम् ॥॥ घनाक्षरी ॥ वासवबरुनबिधिबनतेंसीहावनोदसान नकोकानननबसंतकोसिंगारसो ॥ समयपुरानेपा तपरतडरतवातपालतलालतरतिमारकोबिहारसो॥ देखेवरवापिकातडागबागकोबनावरागबसभोगगी पवनकुमारसो॥सोयकीदसाविलोकिबिटपअसोक तरतुलसीविलोक्यौँसोतिलोकसोकसारसो॥५३॥ मालीमेघमालवनपालविकरालभटनीकेसबकाल सौंचेसुधासारनीरके॥ मेघनादतेंदुलारोपानतेपिआ रोवागअतिअनुरागजियजातुधानधारक।तुलसीसो जानिसुनिसीयकोदरसपाइपैठोबाटिकाबजाइबलर घुवीरके॥ विद्यमानदेखतदसाननकोकाननसोतहस नहसकियेसाहसीसमीरके॥५४॥वसनबटोरिबोरि वोरिलतमीचरखोरिखोरिधाइआइबांधतलंगूरहै
है
१९
हिं कबितरामायणं सुं०.५
॥ तैसीकपिकौतुकीडेराटतीलेखातकैकैलातकेअघा
तसहैजीमैकहैकूरहै ॥ बालकिलकारीकैकैतारीदैदै
गारीदेतपाछेलागेबाजतनिसानटोलतूरहै ॥ बाल
धीबढनलागीठौरठौरदीन्हिआगीबिंधकीदबारिकै
धौंकोटिसतसूरहैं ॥ ५५ ॥ लाइलाइआगिभा
गेबालजालजहांतहांलघुव्हैनिबुकीगिरिभेरुतेर्बिसा
लौं ॥ कौतुकीकपीसकूदिकनककंगूराचब्यौराव
नभवनचढिठाढौतेहिकालौं ॥ तुलसीबिराज्यों
व्योमबालधीपसारीभारीधेखेहहरातअंटकालसोक
रालभौं। तेजकोनिधानमांनोकोटिककृसानभानुन
खबिकरालमुखतैसोरिसिलालभौं ॥५६॥ बाल
धीबिसालबिकरालज्वालजालमानोलंकलीलिवेको
कालरसनापसारीहैं। कैधौव्योमवीथिकाभरे हैंभरि
धूमकेतुबीरससबीरतरवारसीउधारीहैं।तुलसीसुरेस
चापकैधौदामिनीकलपकैधौंचलीमेहतेकृसानुसरि.
भारिहैं।।देखैजातुधानजातुधानीअकुलानीकहैकान
3
२०
हि कवित्तरामायण सुं० ५
नउजारयोअवनगरप्रजारीहै।५७॥ जहांतहांबुबुकि
विलोकिववकारीदेतजरतनिकेतधावोधावोलागि
आगिरे। कहांतातमातभ्रातभगिनीभामिनीभाभी
ढोटोछोटोछोहराअभागेभोडेआगिहाथीछोरोघो
राछोरोमहिपषभछोरोछोरीछोरोसोवेसीजगावोजा
गिजागिरे ॥ तुलसीविलोकिअकुलानीजातुधानीक
हीवारवारकटोपियकपिसोनलागिरे।। ५८॥देखि
ज्वालजालहाहाकारदसकंधसुनिकायौधरोधरोधा
येवीरवलवानहैं ॥ लियेसूलसेलपासपरिघप्रचंडदं
डभाजनसनीरधीरधरेधनुवानहैं ।। तुलसीसमिधसौं
जलंकयज्ञकुंडलखिजातुधानपुंगीफलजवतिलधान
है । ववासोलंगूलवलसूलप्रतिकूलहबस्वाहामहां
हांकिहांकिहुनेहनुमानहैं ॥ ५९॥ गाज्यौकपिगाज
ज्योविराजौज्वालजालजुतभाजेबीरधीरअकुलाइउ
ब्योरावनो॥ धावोधावोधरोसुनिधाएजातुधानधरि
चारिधाराग्लदैजलदग्यानसावनोलपटऊपटऊह
२१
हिं कबित्तरामायण सुं० ५
रानेहहरानेबातमहरानेभटपन्यौप्रबलपरावनौपट
कनिटकेलिपोलिसचिवचलेलैटेलिनाथलचलैगो
बसअभनयावनो ॥६०॥ बडोबिकरालवेषदेखि
सुनिसिंहनादडयौमेघनादसबिखादकहैरावनो ॥
बेगजितो मारुतप्रतापमार्तडकोटिकालहूंकरालता
बडाईजितोबावनो ॥ तुलसीसयानेजातुधानेपछि
तानेकहैंजाकोऐसोदूतसोसाहिबअबैआवनो ॥ का
हेकीकुसलरोषेरामबामदेवहूकीविषमबलीसौंबादि
बेरकोबढावनो.॥६१॥ पानीपानीपानीसबरानी
अकिलानीकर्बोजातहैंपरानीगतजाहँगजचालिहैं ।
बसनबिसारेमनिभूषनसंभारतनआननसुखोनकहैं
क्याहोकोउपालिहैं । तुलसीमंदोवैमीजहाथधुनि
माथकहैकाहूकानकियोनमेंकेतोकटोकालिहैबापुरे
बिभीषनपुकारिबारबारकडोबानरबडिवालाइघने
घरपालिहै॥६२॥काननउजान्यौउतोउजा-यौनबि
गायोकछुवानरबिचारोबांधिआनोहटिआरसों ॥
-
२२
हिं कवित्तरामायण सुं०५
निपटनिडरदेखिकाहूनलख्यौविसेपिदीह्नयौनछडा
इकहिकुलकेकुठारसों॥छोटेऔबडेरेमेरेपूतउअनेरेस
वसांपनिसोखेलेमैलेंगरेछुराधारसों ॥तुलसीमंदोवै
रोइरोइकैविगोवैआपुवारवारकहोमपुकारिदाढीजा
रसों ६३रानीअकुलानीसवडाढतपरानीजाहिसन
विलोकिवेपकेसरीकुमारको॥ मीजिमीजिहाथधुनि
माथदसमातियतुलसीतिलोनभयोबाहिरअगार
को॥सवजसवावडाटैमनकाढेतॆनकाटेजियकीपरी
संभारसहनभंडारको ॥ खीझतिमंदोबसविषाददेखि
मेघनादवयोलुनियतसबयाहिदाढीजारको६४राव
नकीरानीजातुधानीविलखानीकहैहाहाकोझकहैबी
सबाहुदसमाथसौ ॥ काहेमेघनादकाहेकाहेरेमहोदर
तूधीरजनदेतलाइतक्यों नहाथों ॥काहेअतिका
यकाहेकाहेरेअकंपनअभागेतीयत्यागेभोंडेभागेजात
साथसों । तुलसीवढाईबादसालतविसारबैरयाही
वलवलसोंविरोधरघुनाथसों ॥६५॥ हादबाटको
हिं. कबित्तरामायण सुं० ५
टओटअटनअगारपौरखोरिखोरिदौरिदौरिदीन्ही
तिआगिहै।आरतपुकारतसंभारतनकोझकाहूव्याकु
लजहांसोतहांलोकचलैभागिहै बालधीफिरावैबा-
बारझहरावैझरैबूंदीयासीलंकपतिलाइपागिहै ॥तुल
सीबिलोकिअकुलानीजातुधानीकहैचित्रहूंकेकपि
सोनिसाचरनलागिहै६६लागिलागिआगिभागिमा
गिचले जहांतहांधीयकोनमायबापपूतनसंभारहीं।
छूटेबारबसनउघारेधूमधुंदअंधकहैंबारेबूदेबारिवानि
वारवारहीं॥ हयहिहिलातआगेजातघहरीतगजमा
रिभीरटेलिपेलि दिखौंदिडारहीं॥ नामलैचिलात
विललातअकुलातअतितातताततौंसियतझौंसियत
झारहीं ॥६७॥ लपटकरालज्वालजालमालदह
दिसिधूमअकुलानेपहिचानें कौनकाहिरे ॥ पानीक
ललातबिललातजरेगातजातपरमाइमालजातभात
तूंनिबाहिरे ॥ प्रियानूपराहिनाथनाथतूंपराहिबाए
बापतूंपराहिपूतपूततूंपराहिरे ॥ तुलसीबिलोमि
A
हिं कवित्तरामायण सुं०५
लोकव्याकुलवेहालकहैलेहिदससीसअबबीसचखु
चाहिरे ॥ ६८॥ वीथिकाबजारप्रतिअटनिअगा
प्रतिपवरिपगारप्रतिवानरविलोकिए ॥ अर्द्धउई
वानरविदिसिदिसिवानर,मनोरह्योहारिवानरति
लोकिए ॥ मूंदेआंखिहिएमेंउघारेआंखिआगेठाटो
घाइजाइजहांतहांऔरकोऊकोकिए । लेहुअवलेहु
तवकोऊनसिरवावोमानौसोइसतराइजाइजाहिरो
किए ॥ ६९ ॥ एककरैधौजएककहैकाढोसौंजएक
ऑजिपानीपकिकहवैनतनतनावनो ॥ एकपरे
गाढेएकडाढतहिकाढेएकदेखतहँठाढेकहपांवैका
यावनो ॥ तुलसीकहतएकनीकहातलाएकपिअज
हूंनछोडेवालगालकोकोबजावनो ॥ धावरेबुझावरे
किपावरेजिआवरेऔर आगिलागीनवुझावैसिंधुसा
बनो ॥ ७० ॥ कोपिदसकंधतवप्रलयपयोदबोले
रावनरजाइधाइआएजूथजोरिकै । कह्योलंकपतिलं
कवरतवुतायौवेगिवानरबहाइमारीमाहबारिबोरि;
हिं. कबित्तरामायण सुं० ५ २५ क॥भलेनाथनाइमाथचलेपाथप्रदनाथबरमुसल धारबारबारघोरिकै ॥ जीवनतेजागीआगीचपरिचौ गुनीलागी तुलसीभरिभरिमेघभागेमुखमोरिकै ॥ ॥७१ ॥ इहांज्वालजरेजातव्हांगलानिगरेगातसू खेसकुचातसबकहतपुकारहैं ॥ जुगषटभानुदेखेम लयकसानुदेखे सेषमुखअनलबिलाकेबारबारहैं । तुलसीसुन्योनकानसलिलसीसमानअतिअतिरज किएकेसरीकृमारहैं ॥ बारिदवचनसुनिधुनेसीसस चिवह्नकहै दससीसईसबामताविकारहैं ॥७२॥ पावकपवनपानीमांतुहिमवानजमकाललोकपाल मेरेडरडावाडोलहैं ॥ साहिबमहेससदांसंकितरमेस मोहिमहातपसाहसबिरंचिलिएमोलहैं ॥ तुलसी तिलोकआजदूजोनविराजैराजबाजैबाजैराजनिकेबे टीबेटाओलहैं। कोहँईसनामबामबामहोतमोव्हा सनमालवानरावरेकेबावरेसेबोलहैं ॥ ७३ ॥ भूमि भूमिपालव्यालपालकपतालनाकपाल लोकपाल ,
हिं० कवित्तरामायण सुं ५
जेतेसुभटसमाजहैं ॥ कहैंमालवानजातुधानपति
रावरेकोमनहुअकाजआनऐसोकोनआजहैं ॥रामको
हपावकसमीरसीखासकीसईसवामताबिलोकुबान
रकेव्याजहैं । जारतपचारिफेरिफेरिसोनिसंघकलंक
जहांवाकोवीरेतोसोसूरसिरताजहैं ॥७४॥ पानपक
वानविधिनानाकैसंधानोसीधो विविधबिधानधान
वरतवरवारही॥ कनककिरीटकोटिपलंगपेटारेपीट
काढतकहारसबजरेभारभारहीं। प्रबलपावकबाढे
जहंकाढेतहंदाढेझपटलपटमरेभवनभंडारहीं ॥ तु
लसीअगारनपगारनवजारवचोहाथीहाथसारजरेपो
घोरसारहीं ॥७५॥ हाटबाटहाटकपघिलचलो
धीसोधनोकनककराहीलंकतलफततायसों॥ नाना
पकवानजातुधानबलवानसबपागिपागिदेरिकीह्नी
भलीभांतिभायसों ॥ पाहुनेकृसानुपवमानसोपरो
सोहनुमानसनमानिकैजेवाएचितचायसों। तुलसी
निहारिअरिनारिदैदेगारिकहेंबांवरेसुरारिरकीर्तेरा
हि. कबित्तरामायण सुं० ५ मरयसों ॥७६ ॥ रावनसोराजरोगबाढतबिराट उरदिनदिनबिकलसकलसुखरांक्सो ॥ नानाउप चारकरिहारेसुरसिद्धिमुनिहोतनबिसोकओतपावन मनाकसो॥ रामकीरजाइतेरसाइनीसमीरसूनिउत रिपयोधिपरसोधिसरवांकसो॥ जातुधानवुटपुटपा कजातरूप रतनजतनजारिकियोहैमृगांकसो॥७७॥ जारिवारिकैविधूमवारिधिबताइलूमनाइमाथोपग निमोठाढोकरजोरिकै ॥ मातुकृपाकीजैसहिदानदी जैसुनिसीयदीन्हीहैअसीसचारचूडामनिछोरिकै ॥ कहांकहौतातदेखेजातज्यौबिहातदिनबडीअवलंब हीसोचलेतुमतोरिकै ॥ तुलसीसनीरनैननेहसोसि थिलबैनबिकलबिलोकिकपिकहतनिहोरिक।।७८॥ दिवसछसातजातजानबेनमातुधरिधीरअरिअंतकी अवधीरहीथोरिकै वारिधिबंधाइसेतुऐहैभानुकुल केतसांनुजकुसलकपिकटकबटोरिकै ॥ बचनबिनी तकहिसीताकोप्रबोधकरितुलसीत्रिकूटचढिकहतड हिं कवित्तरामायण• सुं५ फोरिकै ॥ जैजैजानकीसदससीसकरिकेससीकपीस कूटयोवातजातवारिधिहलोरिकै ॥ ७९ ॥ सास सीसमीरसून नीरनिधिलंपिलखिलंकसिद्धपीठसि नागौहैमसानसो॥ तुलसीविलोकिमहासाहसप्रस नभईदेवीसीयसारिखिदियोहैवरदानसो ॥ बाटि काउजारिअछधारिमारिजारिगढमानुकुलभानुकोप तापभानुभानुसो ॥ करतविसोकलोककोकनदको ककपिहजामवंतआयोआयोहनुमानसो ॥ ८ ॥ गगननिहारिकिलकारिमारिसुनिहनुमानपहिचानि भएसानंदसचैतहैं॥ वूडतजहाजबाच्यौँपथिकसमा जमानोआजुजाएजानिसवअंकमालदेतहैं ॥ जैजै जानकीसजैजैलखनकपीसकहिक्दै कपिकौसुकीन टतरेतरेतहैं। अंगदमयंदनलनीलबलसीलमहाबा लधीफिरावैमुखनानागतिलेतहै। ८१ ॥ आयेहनु मानमानहेतुअंकमालदेतलेतपगरिएकचुंवतलंगूर हैं ॥ एकबुझैवारवारसीयसमाचारकहो पवनकुमा
-
हिं. कबित्तरामायण सुं० ५
रमोबिगतश्रममूलहैं । एकमुखेजानिआगेआनिकं
दुमूलफलएककूजैबाहुबलमूरतोरिफूलहैं ॥ एकक
हैंतुलसीसकलसिद्धिताकेजाकेकृपापाथनाथसीता
नाथसानकूल हैं ॥ ८२ ॥ सीयकोसनेहसीलकथा
तथालंककहैचलेजातचायसोसिरानेपथछनमें॥क
यौजुवराजबोलिबानरसमाजआजुखाहुफलसुनिप
लिपैठेमधुबनमें ॥ मारेबागबानतेपुकारतदिवानगे
उजारेबागअंगदादिखाएघायतनमें कहैकपिराज
करिआएकीसकाजमहाराजकीसपथमहामोदमेरेम
१ नमें ॥८३ ॥ नगरकुवरकोसुमरकीबराबरी बि
रंचिबुद्धिकोबिलासलंकनिर्मानभो ॥ ईसहिचढा
। एसीसबीसबाहुबीरतहां रावनसोराजाराजतेजको
निधानभो ॥ तुलसीबिलोककीसमृद्धिसौंजसंप
दासकेलिचाकिराखीरासिजागरजहानभो ॥ तीस
रेउपासबनबाससिंधुपाससीसमाजमहाराजजीकोए
कदिनदानभो ॥ ८४॥ ॥ इतिसुंदरकांडःसमा
-
am
.
4
३० हिं० कबित्तरामायण लं०६
प्सः॥ ॥ अथ लंकाकांडप्रारंभः॥ ॥घनाक्षरी ॥बडे
विकरालमालुवानरबिसालबडेतुलसीबडेपहारलैप
योधितोपि ॥ प्रवलप्रचंडबलबंडवाहुदंडखंडखंडि
मंडिमेदनीकोमंडलीकलीकलापिहैं।लंकदाहदेखेन
उछाहरह्योकाहूकोकहतसवसचिवपुकारिपावरोपि
हैं॥वांचिहेनपाछेतिपुरारिहूमुरारिहूकेकोहैरनरारि
कोजोकौशलेसकोपिह॥८५॥ त्रिजटाकहतिबारबा
र तुलसीखरीसीराघोबानएकहीसमुद्रसातोसोसो
खिहै । सकुलसंघारिजातुधानधारिजवुकादिजोगि
नीजमातिकालिकाकलापतोखिहै ॥ राजदैनिवाजि
बोवजाइकैविभीपनकोवजैगोव्योमबाजनेविवुधप्रे
मपोपिहाकौनदसकंधकौलमेवनादबापुरोकोकुंभक
कीटजवरामरनरोपिहै ॥८६॥ विनयसनेहसा
कहतिसियत्रिजटासोपाएकछुसमाचारआरजुसुवन
के ॥पायेजूवंधाएसेतुआयेउतरेभानुकुलकेतुआ
येदेखिदेखिदूतदारुनदुअनके ॥ वदनमलिनबल
हि कबित्तरामायण लं. ६
३१
ܐܶ
। हीनदीनदेखिमानोमिटेघटेतमीचरतिमिरभुवनके।
लोकपतिसोकसोकदेकपिको कनददंडवैरहेहैरघु
आदितउवनके ॥ ८७॥ झूल ॥ सुमुजमारी
चखरित्रिसिरदूषनबालीबधतजेहिदूसरोसरनसा
ध्यो॥ आनिपरभामबिधिबामतेहिरामसोसकतसं
ग्रामदसकेंधकांध्यो । समुझिंतुलसकपिकपिकर्मष
घरबैरुबिकलसुनिसकलपाथोधिबांध्यो ॥ बसतंग
ढवंकलंकेसनायकअछतलंकनहीखातकोउभातरां
ध्यो। ८८ ॥ सवैया॥ विश्वजयीभृगुनायकसेबिनु
हाथभएहनिहाथअजारीबातुलमातुलकीनसुनी
सिखकातुलसीकपिलंकनजारी॥अजहूंतेभलोरघुना
थमिलोफिरिबूझिहैकोगजकौनगजारी।कीर्तिबडीक
स्तूतिबडीजनवातबडीसोबडीइबजारी ॥८९॥ जब
पाहनभवनबाहनसेउतरेवनराजैजैरामरढे ॥तुलसी
लिएसैलिलासबसोहतसागरज्यौँबलबारिबढेकार
कोपकरैरघुवीरकीआयसुकौतुकहींगढकूदिचढे ॥च
4
૨૨ हिं कवित्तरामायण लं. ६
तुरंगचभूपलमेंदलिकैरनरावनराडकोहाडगढे ॥९०
घनाक्षरी ॥ ॥ विपुलविसालबिकरालकपिभालु
मानौकालवहुवेखधरेधाएकिएकरखा ॥ लिएसिला
सैलतोरितालऔतमालतोरितोपैतोयनिधिसुरकोस
माजहरखा ॥ गडेदिगकुंजरकमठकोलकलमलेडोले
धराधरधरखा ॥ तुलसीतमकिचलेराघोकीसपथकरें
कोकरैअटककपिकटकमरखा ॥९१॥ आयेसुक
सारनवोलाएतेकहनलागेपुलकिसरीरसैनाकरतफह
मही ॥ महावलीवानरविसालालुकालसेकराल,
रहेकहांसमाहिगेकहांमही॥हस्यौदसकंधरघुनाथको
प्रतापसुनितुलसीदुरावैमुखसुखतसहमही ॥रामके
विरोधबुरोविधिहरिहरुहूकोसवकोभलोहैराजाराम
केरहमही॥१२॥आयौआयौआयौसोइवानरबहोरि
भयोसोरचढूंओरलंकआयेजुवराजके।एककाढेसौंज
एकधाँजकरकहाव्हहपोचाईमहासोचसुभटसमाज
के ॥ गाज्यौकपिराजरघुराजकीसपथकरिमूंदेकान
-- ३३ हिं कबित्तरामायण लं०.६ 'जातुधानमानोगाजेगाजके ॥ सहमिसुखातबातजा तकीसुरतिकरिलवाज्यौंलुकाततुलसीझपेटेबाजक। ॥ ९३ ॥ दूखनबिराधखरसिराकबंधबंधेतालऊ करालबेधेकौतुकहैकालिको॥ एकहीबिसिखबसभ येवीरबांकुरेसोतोहूहैबिदितबलमहाबलीवालिको॥ तुलसीकहतहितमानतन नेकुसंकमेरोकहाजैहैफल पैहोतुकुचालिको ॥ वीरकरिकेसरीकुठारपानिमानि हारिरीकहाचलीबूटेतोसोगनेवालिको ॥ ९४ ॥ ॥ सवैया ॥ ॥ तोसोंकहोंदसकंधररेरघुनाथविरोध नकीजिएबौरे । बलिबलीखरदूखनऔरअनेकगिरे जेतेमीतेमेदौरे । एसीन्यहालाईतोहिकोनतोलैमि लुसीयचहैसुखजौरे ॥ रामकेरोसनराखिसकैतुल सीबिधिश्रीपतिसंकरसौरे ॥ ९५॥ तूंरजनीचरना थमहारघुनाथकेसेवककोजनहोहौं ॥ बलवानहैरखा नगलीअपनीतोहिलाजनगालबजावतसोहौं।बीस मुजादससीसहरौंनड प्रभुआयसुमंगतेजोहौं।खेतें . ३ -
३४
हिं कबित्तरामायण लं०६
मखेहरिज्योंगजराजदलों दलवालिकोबालकतोहौं
!! ९६॥ कौसलराजकेकाजहाँगाजुत्रिकूटउपारिलै
वारिधिवोरों ॥ महाभुजदंडअंडकटाहचपेटके
चोटचटाकदैफोरौं ॥ आयसुभुंगतेजौनड सबमी
जिसभासदश्रोणितखोरौं ॥ बालिकोवालकतौतुल
सीदसहूंमुखकेरनमेंरदतो ॥ ९७॥ अतिकोपसो
रोप्योहपाउसासवलंकससंकितसोरमचा ॥ तम
केघननादसेवीरपचारिकैहारिनिसाचरसैनपचान
टरेपगमेसहितेगरुमोसोमनोमहिसंगविरंचिरचा ॥
तुलमीमनसूरसरहातहजगवलसालिहैबालिबचा
।। ९८॥ ॥ घनाक्षरी ॥ ॥ रोप्यौपाउपैजेकेबिचा
रिम्धुवीरवललागेअटसिमिटिननेकुटसतुहै। तजि
धीरचरनीधनियरबसकतधराधरधीरभारसहनसक
तुहै। महावलीवालिकोदवतदलकतामितुलसीउ
छलिमिधुमेरुमसकतहै। कमठकठिनपीठघंटापरो
मंदरकोसोईआयोकामपैकरेजोकसकतुहै ॥ ९९ ॥
हिं कबित्तरामायण लं० ६ ३५ ॥ झूलना ॥ ॥कनकगिरिसुंगचढिदेखिमर्कटक टकबदतिमंदोदरीपरमभीता॥ सहसभुजमत्तगजरा जनरकेसरी परसुधरगर्बजेहिदेखिबीता ॥ दासतुल सीसमरसबलकौसलधनोख्यालहींबालिबलसालि जीता ॥ रेकंतनदंतगहिसरनश्रीरामकहिअजहूंए हिमांतिलैसौंपुसीता ॥ १०० ॥ रेनीचमारीचबि चलाइहतिताडिकाभंजिसिवचापसुखसबहिदीन्यौ ॥ सहसदसचारिखलसहितखरदूखनहिपठेजमधा ममोतैतऊनचीन्यौ ॥ मैंजोकहौंकतसुनुमंतभगवंत सोबिमुखव्हैबालिफलकौनलीन्यौबीसभुजसीस दसखीसगयेतबहिजबईसकेईससोबैरकीन्यौ ॥ १॥ बालिदलिकालिजलजानपपानकियेकंतभगवंततौ तुमनचीन्हे॥ बिपुलबिकरालभटालकपिकालसे संगतरुतुंगगिरिस्टंगलीन्हे ॥आइगेकौसलाधीसतुल सीसजेहिछत्रममसिमौनिदसदरिकीन्हे ॥ ईसकब सीसजनिरखीसकरुईससुनुअजहुकुलकुसलबैदेहिदी
हिं. कवित्तरामायण लं०६
न्हे ॥२॥जाकेसैनसमूहकपिकोनगनैअर्बुदैमहाबलि
वीरहनुमानजानी। लिहँदसदिसासीसपुनिडोलि
हेकोपिरघुनाथजववानतानी।बालिहूंगबंजियमांह
ऐसीकियामारिदहपट्टकायोजमकीधानीकहतिम
दोदरीसुनहिरावनमतोवेगिलेदेहिबैदेहिरानी॥शाग
हनउजारिपुरजारिसृतमारितबकुसलगौकीसबरैबीर
जाको ॥ दूसरोदूतपनसेपिकोप्यौसभाखर्बकियोस
कोगर्वथाको॥ दासतुलसीसमयबदतिमयनंदिनी
मंदमतिकंतसुनुमंतह्माको॥ तौलौमिलुबेगिनहिजो
लॉरनरोपमयोदासरथिवीरवीरुदैतबांको ॥४॥धना
क्षरी ॥ काननउजारिअच्छमारिधारिधूरिकीन्हीनग
रमजास्योसोविलोक्यौबलकीसको ॥ तुमॆविद्य
मानजातुधानमंडलीमेंकपिकोपिरोप्यौपाउसोप्रा
उतुलसीसको ॥ कंतसुनुमंतकुल अंतकियेअंतहानि
यतोकीजैहिएतेभरोसोभुजबीसको ॥ तोलौमिलुबे
गिजोलीचापनचढायोरामरोषिबानकाब्यौनलदैआ
R
हिं. कबित्तरामायण लं. ६ ३७
दससीसको ॥५॥ पबनकोपूतदेख्यौदूतबीरबांकु
रोजोबंकगढलंकसो ढकाढकेलिढाहिगो ॥ बालि
बलसालिकोसोकालिदापलिकोपीरोप्योपाउचप
रिचमूकोचाउचाहिगो ॥ सोइरघुनाथकपिसाथपा
थनाथबांधिआयोनाथभागेतेखिरिरखेहरवाहिगो।
तुलसीगरबतजि मिलिबेकोसाजसजिदेहिसियनतो
पियपायमालजाहिगो ॥६॥ उदधिअपाउतर
तहूंनलागीबारकेसरीकुमारसोअदंडकैसोडांडिगो ।
बाटिकाउजारिअच्छरच्छकनिमारिभटभारिंभारिरा
वरेकोचाउरसोकांडिगो ॥ तुलसीतिहारेबिद्यमा
नजुबराजआजुकोपिपाउरोप्यौसबछूछेकैछांडिगो॥
कहेकीनलाजपियाजहूंनआवेवाजसहितसमाजग
ढरांडकैसोभांडिगो ॥ ७ ॥ जाकेरोखदुसहत्रि
दोखदाह दूरिकीसन्हेपैअतनछत्रीखोजखोजतखल
कमें ॥ महिखमतीकोनाहुसाहसीसहसबाहुसमर
समर्थनाथहेरियैहलकमें ॥ सहितसमाजमहाराज
३८ हिं कबित्तरामायण लं. ६
सोजहांजराजवूडिगयोजाकेबलबारिधिछलकमें ॥
टूटतपिनाककेमनाकबामरामसेतेनाकबिनुभयेगु
नायकपलकमें ॥८॥ कीह्नीछोनीछत्रीबिनुछोनि
पछपनहारकठिनकुठारपानिवीरबानजानिकै ॥ पर
मकपालजोनृपाललोकपालनपै जबधनुहाईव्हैहैम
नअनुमानिकै ॥ नाकमैपिनाकमिसिबामताबिलो
कीरामरोक्यौपरलोकलोकभारिभ्रममानिकै ॥ ना
इदसमाथमहिजोरिवीसहाथ पियमिलियेपैनाथरघु
नाथपहिचानिकै ॥ ९॥ कयौमतमातुलबिभीष
नहूवारवारअंचलपसारीपियपायलैलैहौंपरी ॥ वि
दितविदेहपुरनाथगुनाथगति समयसयानीकीही
जैसीआइगौपरी ॥ बयसबिराधखरदूखनकबधबा
लिबररघुवीरकेनपूरीकाहूकोपरी ॥ कंतबीसलोचन
विलोकिएकुमंतफलख्याललंकलाईकपिरांडकीसी
झोपरी ॥ १०॥ ॥ सवैया ॥ ॥ रामसोसामकि
एनितहैहितकोमलकाजनकीजियठाढे॥ आपनीसू
हिं. कवित्तरामायण लं. ६ ३९
झिकहौंपियबूझियेजूझिबेजेगनठाहरुनाढे ॥ नाथ
सुनोगुनाथकथाबलिबालिगयेचलिबातकेसाढे॥
भाइबिभीषनजाइमिल्यौ प्रभुआइपरेसुनिसायरका
ढे॥११॥पालिबेकोकपिभालुचमूजमकालकरा
लहुकोपहरीहै । लंकसेबंकमहागढदुर्गमढाहिबेदा
हिबेकोकहरीहै ॥ तीतरतोमतमीचरसैनसमीरको
सूनबडोबहरीहै। नाथअलोरघुनाथमिलोरजनीच
रसैलहएहहरीहै ॥ १२॥ ॥ घनाक्षरी ॥ ॥रो
खेरनरावनबोलाएवीरबनाइतजानतजेरीतिसबसंयु
गसमाजकी ॥ चलीचतुरंगचमूचपरीहुनेनिसानसै
नासराहनजोगरातिचरराजकी॥ तुलसीबिलोकिक
पिभालुकिलकतललकतलखि ज्यौंकंगालपातरीसु
नाजकी ॥ राममुखनिरखिहरख्यौहिएहनुमानमा
नोखेलकरखोलीसीसताजबाजकी ॥१३॥ साजि
कैसनाहगजगाहसेउछाहदलमहाबलीधाएबीरजानु
धानधीरके ॥ इहांभालुबंदरबिसालमेरुमंदरसे लि
---------
FASSEN
yo
हिं. कवित्तरामायण लं.६
एसैलसालतोरिनीरनिधितीरके ॥ तुलसतिमकित
किभिरारीयुद्धक्रुद्धसेनपसराये निजनिजभटभीर
के ॥ रुंडनकेझुडझूमिझूमिझुकरिसेनाचैसमरसुमार
सुरमारेरघुवीरके ॥ १४॥ ॥ सवैया ॥ ॥ तीखे
तुरंगकुरंगसुरंगनिसाजिचढेछटिछैल छबीले ॥भा
रीगुमानजिद्वैमनमेकबहूंनभएरनमेतनढीले । तुल
सीलखिकेहरिकेहरिकेझपटेपटकेससूरसलीले॥ भू
मिपरेभटघूमिकराहतहांकिहनेहनुमानहठीले॥१५
मूरसंयोगवलसाजिसुवाजिसुसेलधरेवगमेलचलेहैं
भारिमुजाभरिभारिसरीरवलीबिजईसबभांतिभलेहें
॥ तुलसीजिलधाइधुकेधरनीधरनीधरधोरधकानह
लेहे ॥तेरनतिच्छनलच्छनलाखनदानिज्यौदारिद
दाविदलेहैं ॥ १६ ॥ गहिमंदरबंदरभालुचलेसोम
नोउवएघनसावनके ॥ तुलसीउतझुंडप्रचंडझुकेझप
टेभटजेसुरदावनके ॥ विरुझेविरुदैतजेखेतअरेनटरे
हटिवैरवढावनके ॥ रनमारमचीउपरीउपराभलेबी
T
-
----
--
---
।
४१
हिं. कवित्तरामायण लं०६
। ररघुपतिरावनके ॥ १७ ॥ सरतोमरसेलसमूहषबा
रतमारतबीरनिसाचरके ॥ इततेतरुमालतमालच
लेखरखंडप्रचंडमहीधरके ॥ तुलसीकरिकेहरिनाद
भिरेभटखग्गखगेखपुआखरके ॥ नखदंतनसोभुज
दंडविहंडतमुंडसोमुंडपरेझरके ॥ १८॥ रजनीचर
मत्तगजदंतघटाबिघटैमृगराजकेसाजलरै ॥ झपटै
भटकोटिमहीपटकैगरजैरघुबीरकीसौंहकर ॥ तुल
सीउतहांकदसाननदेतअचेतभेबीरकोधीरधरै ॥ वि
रझोरनामारुतकोबिरुदैतजोकालहूकालसो बूझिपरै
॥ १९॥ जेरजनीचरबीरबिसालकरालबिलोकत
कालनखाये ॥ तेरनरोस्कपीसकिसोरबडेबरजोरप
रेफंगपाये ॥ लूमलपेटिअकासनहारिकैहांकिहटीह
नुमानचलाये ॥ सूखिगेगातचलेनभजातपरेनाम
! बातनभूतलआये ॥२०॥ जोदससीसमहीधरई
सकोबीसभुजाखुलिखेलनिहारो ॥ लोकपदिग्गज
दानवदेवसबैसहमेसुनिसाहसभारो ॥ बीरबडोबीर
४२
हिं० कवित्तरामायण लं०६
दैतवलीअजहूंजगगावतजासुपवारो ॥ सोहनुमान
हन्योमुठिका गिरिगोगिरिराजज्यौं गाजकोमारो॥
॥२१॥ दुर्गमदुर्गपहारतेभारेप्रचंडमहाभुजदंडबने
हैं ॥ लख्यमेपख्यरतिख्यनतेजसेसूरसमाजमेंगाज
गहें ॥ तेविरुदैतबलीरनबांकुरेहांकिहठीहनुमान
हनेहैं। नामलैरामदेखावतवंधुकोघूमतघायलघाय
घनेहैं ॥ २२॥ ॥ घनाक्षरी॥ ॥ हाथिनसो
हाथीमारेघोरेघोरेसोरथबिदरनबलवानकी ॥ चंच
लचपेटचोटचरनचकोटचाहे हहरानीफौजें अह
रानीजातुधानकी ॥ वारवारसेवकसराहनाकरतरा
मतुलसीसराहेरीतिसाहेबसुजानकी ॥ लांबीलूमल
सतलपेटिपटकतभटदेखोदेखोलखनलरनहनुमान
की ॥ २३ ॥वदकिदवोरेएकबारिधिमेबोरएकमगन
महीमेंएकगगनमेंउडातहैं ॥ पकरीपछारेइकचरन
उखारेएकचीरिफारिडारेएकमीजिमारेलातहै ॥ तु
लमीलखनरामरावनविवुधविधि कृपानिधि चंडी
हिं०कबित्तरामायण ले०६ ४३ - ; पतिचंडिकासिहातहै ॥ बडेबडेबानइतबीरबलवा नबडे जातुधानजूथपतिपातेबातजातहै ॥ २४ ॥ प्रबलप्रचंडबरिबंडबाहुदंडबरिधायेजातुधानहनुमा नलियोघेरिकै ॥ महाभुजदंडकुंजरारिज्यौंगरजिभ टजहांतहांपटकेलंगूरफेरिफेरिकै ॥ मारेलाततो रेगातभागेजातहाहाखातकहैतुलसीसराखिरामकी सोंटेरिकै ॥ ठहरठहरपरेकहरकहरउठेहहरहहरहर . सिद्धहंसेहेरिकै ॥ २५॥ जाकीबांकीबीरतासुनत सहमतसूरजाकीआंचअजहूंलसतलंकलाहसी॥ सो इहनुमानबलवानबाकोबानइतजोहें जातुधानसेना चलेलेतथाहसी ॥ कंपतकंपनसुखायअतिकाय कायकुंभउकरनआइरह्यौपाइआहसी ॥ देखेगजरा जमृगराजज्यौँ गरजिधायोबीररघुबीरकोसमोरसूप साहसी ॥ २६ ॥ ॥ झूलना ॥ ॥ मत्तमुकुटदस कंठसाहससैलसंगबिदरनजनुवज्रटांकी। दसनधरि धरनिचिक्करतदिग्गजकमठसेससंकुचितसंकितपिना
४४
हिं. कबित्तरामायण लं.६
की।चलतमहिमेरुउच्छलतसायरसकलबिका
धिवधिरदिसिविदिसिझांकी ॥ रजनीचरघरनिघर
र्भअर्भकश्रवतसुनतहनुमानकीहांकबांकी ॥२७
कौनकीहांकपरचौकिचंडीसविधिचंडकरथकित
रितुरंगहांके ॥ कौनकेतेजतुलसीमभटभीमसेभीर
तानिरखिकरिनयनढांके ॥ दासतुलसीसकेबिरद
रनतविदुपवीरविरुदैतवरवैरियांके । नाकनरलो
पतालकोउकहतकिनकहांहनुमानसेबीरबांके ॥
॥२८॥ जातुधानावलीमत्तकुंजरघटानिरखि गज
जमानोगिरितेटूट्यौ ॥ विकटचटकचोटचरनगहि
टकीमहिनघटिगयेसुभटसतसबकोछूट्यौ ॥ दास
लसीपरतधरनिधरकतझूकतहाटसीउठतजंबुकनि
व्यौ ॥ धीररघुवीरकेवीररनवांकुरेहांकिहनुमान
लिकटककूट्यौ ॥ २९ ॥ छप्यपै ॥ ॥ कतहुंबि
पभूधरउपारिअरिसैनवरपत ॥ कतहुंवाजिसोवा
मर्दिगजराजकरपत ॥ चनरचोटचटकनचकोटम
हिं० कबित्तरामायण लं.२
• उरसिरवजत ॥ बिकटकटकैबिदरतबीरवारिदजिमि
गर्जत ॥लंगूरलपेटतपटकिमहिजयतिरामजयउच्च
रत ॥ तुलसीसपवननंदनअटलजुद्धक्रुद्धकौतुककर
त ॥३०॥ ॥ घनाक्षरी ॥ ॥ अंगअंगदलितल
लितभूलेकिंसुकसेहनेभटलाखनलखनजातुधानके
॥मारिकैपच्छारिकँउपारिभुजदंडचंडखंडखंडडारेते
बिदारेहनुमानके ॥ कूदतकबंधकेकदंबबंबसीकरत
धावतदेखावतहैलघौराघोबानके ॥ तुलसीमहेसबि
धिलोकपालदेवगनदेखतबेवानचढेकौतुकमसानके
॥३१॥ लोथिनसोलोरकेप्रवाहचलेजहांतहांमा
नहुँगिरिन्हगेरुझरनझरतुहै. ॥ श्रोनितसरितघोरकुं
. जरकरारेभारेकूलतेसमूलवाजिविटपपरतहैं।सुभट
' सरीरनीरचारीभारिमारितहं सूरनउच्छाह कूरकादर
डरतहैं ॥फेकरिफेकरिफेरूफारिफारिपेटखातकाक
कबालककोलाहलकरतहैं ॥ ३२॥ ओझरीयझोरी
कांधे आंतनकीसेल्हीबांधेमुंडके कमंडलखप्परकिये
४६
हिं० कवित्तरामायण लं०६
कोरिकै जोगिनीजमातजोरिझुंडवनीतापसेनीरती
रवैठीसोसमरखोरिकै ॥ श्रोनितसोसानिसानिगूदा
खातसतुआसेएकमेतपियतबहोरिघोरिकै॥ तुलसी
वैतालभूतसाथलियेभूतनाथहेरिहेरिहंसतहहाथहा
थजोरिक ॥ ३३॥ ॥ सवैया॥ ॥ रामसरासनते
चलेतीररहेनसरीरहडावरिफूटी ॥ रावनधीरनपीर
गनीलखिलैकरखप्परजोगिनिजूटी॥ श्रोनितछटि
उद्यानिछुटीतुलसीप्रभुसौहैमहाछबिछूटी। मानौ
मरकतसैलविलासमैफलिचलीबरवीरबहूटी ॥३४
॥ घनाक्षरी॥ ॥ मानीमेघनादसौंप्रचारिभिरेभारि
भटआपनेआपनेपुरुषारथनटीलकी ॥ घायललख
नलाल निविलखाने रामभई आससिथिलजगन्नि
वासडोलकी ॥ माइकोनमोहछोहसीयकोनतुलसी
सकहैमैविभीपनकीकछुनसवीलकी । लाजबांह
वोलकीने वाजेकीसभारसारसाहेबनरामसेवलाइले
उमीलकी ॥ ३५॥ ॥ सवैया ॥ ॥काननबास
-----
१७
हिं कवित्सरामायण लं०६
साननसोरिपुमानश्रीससिजीतिलियोहें ॥ बालि
हावलसालिदल्यौ कपिपालिविभीपनपकियो
॥ तीयहरीरनबंधुपयोपैभन्यौसरनागतसोचहि
है ॥ बांहपगारकपालउदारकहारघुबीरसोबीर
हेयोहै ॥३६॥ लीन्हउखारि पहारबिसारचल्यौ
हिंकालविलंबनलायो ॥ मारुतनंदनमास्तकोम
कोखगराजकोबेगलजायो॥ तीखेतुरातुलसीकह
गोपहियेउपमाकोसमाउनआयो॥मानोप्रतच्छपर
तिकीनभलीकलसीकपियौधुकियायो॥३७॥॥
वाक्षरी॥॥चल्यौहनुमानसुनिजातुधानकालनेमि
ठयोसोमुनिभयोपायोफलछलिकै ॥ सहमाउखा
हैपहारबहुजोजनकोरखवारेमारेभारेभूरिभटदलि
के ॥वेगबलसाहससराहतकृपालरामभरतकीकुस
लअचलल्यायोचलिकै ॥ हाथहरिनाथकेविकानेर
घुनाथजनुसील सिंधुतुलसीसभलोमानोभलिक
॥ ३८॥ बापदियोकाननमोआननसुभाननसाचे
हिं कवित्तरामायण लं.६ रीभोदसाननसोतीयकोहरनभो॥घोररारिहेरित्रिपुरा रिविविहारेहियेघायललखनबीरबानरबरनोबा लिबलसालिदलिपालिकपिराजकैबिभीषननेवाजि सेतसागरतरनभो ॥ ऐसेसोकमैतिलोककैरिसोकप लहीमेसवहीकेतुलसीकेसाहेबसरनभो ॥ ३९ ॥ ॥ सवैया ॥ ॥ कुंभकरनहन्यौरनरामदल्यौदस कंधरकंधरतोरे ॥ पूषनवंसविभूपनपूषनतेजप्रताप गरेअरिमोरे ॥ देवनिसानबजावतगावतगोमनमा वतभोरे ॥ नाचतबानरमालुसवैतुलसीकहिहारेह हाभैयहोरे ॥४०॥ ॥ घनाक्षरी ॥ ॥मारेर नरातिचररावनसकुलदलअनुकूलदेवमुनिफूलवरप तुहै|नागनरकिनरविरंचिहरिहरहेरिपुलकसरीरहि यहेतुहरपतुहै । वामऔरजानकीकृपानिधानकेबि राजैदेखतविपादमिटेमोदसरसतुहै। आयसुभोलो कनिसिधारेलोकपालसवतुलसी निहालकैकैदियेस रपतुहै ।। ४१॥ ॥ इतिश्रीलंकाकांडःसमाप्तः ।।
हिं० कबित्तरामायण उ०७ ४९ अथउत्तरकांडप्रारंभः॥ ॥ सवैया॥॥बालिसेबी रबिदारिसकुंठथप्यौहरखेसुरबाजनबाजे ॥ पदमेद ल्योदासरथीदसकंधरलंकबिभीषनराजबिराजाराम सुभाउसुनेतुलसीहुलसेअलसीहमसेगलगाजे॥ का यरकूरकपूतनकीहदतेऊगरीबनेवाजनेवाजे॥४२॥ बेदपबिधिसभुसभीतपुजावनरावनसोनितआवै॥ दानवदेवयावनेदीनदुखीदिनदूरिहितेसिरनावै ॥एं सेउभागभगेसभालतेजोप्रभुताकबिकोबिदगावै ॥ रामसबामभयेतेहिवामहिवामसबैसुखसंपतिलावै॥ ॥४३॥बेदविरुद्धमहीमुनिसाधुसंसोककियोसुरलो कउजायौ॥ औरकहाकहोंतीयहरीतबहूकरुनाकरि कोपनेवायौसेवकछोहतेछांडिछमातुलसीलख्यौ रामसभाउतिहायौ ॥ तौलौंनदापदल्यौदसकंधर जालौंबिभीषनलातनमायौ ॥४४॥सोकसमुद्रनि ! मज्जतकाढिकपीसकियोजगजानतजैसो॥ नीचनि साचरबैरिकोबंधुबिभीषनकीन्हपुरंदरसैसो ॥ नाम ४
हिं० कवित्तरामायण उ० ७
लियेअपनाइलियोतुलसीसोकहैजगकौनअनैसो॥
आरतआरतिभंजनरामगरीबनेबाजनदूसरऐसो ।
॥४५॥ मीतपुनीतकिएकपिभालुकोपाले जौकाढून
बालतनूजो सजनसीवबिभीपनभोअजहूंविलसैव
बंधुवधूजो॥कोसपालबिनातुलसीसरनागतपाल
कृपालनदूजो ॥ कुरकुजातिकपूतअघीसबकीसुधरै
जोकरैनरपूजो॥४६॥तीयसिरोमनिसीयतजीतेहिपा
वककीकलुपाईदहीहै॥धर्मधुरंधरबंधुतज्यौपुरलोग
नकी विधिवोलिकहीहै।कीसनिसाचरकीकरनीनसु
नीनविलोकीनचित्तरहीहै।रामसदासरनागतकीज
नखाहीअनैसुभायसहीहै॥४७॥ अपराधअगाधपरे
जनतेजपनेउरआनतनाहिन । गनिकागजगीधन
जामिलकेगनिपातकपूंजसेराहिनजू॥ लियेबारकना
मसोधामदियोजेहिधाममहामुनिजाहिनजू ॥तुल
सीभजुदीनदयालहिरेरघुनाथअनाथहिदाहिनजू ॥
॥१८॥प्रभुसत्यकरीप्रहलादगिराप्रगटेनरकेहरिखं
।
हिं. कबित्तरामायण उ. ७ ५१
भमहां ॥झपराजग्रस्यौगजराजकृपाततकालविलंब
किएनतहां ॥सुरसाखीदैराखीहैपंडुवधूपटलूटतको
टिककभूपजहां। तुलसी भजुसोचविमोचनकोजन
कोपनरामनराख्यौकहां॥४९॥ नरनारिउधारिउधा
रिसभामहहोतदियेपटसोचहस्यौमनको ॥ प्रहलाद
विषादनेवारनवारनतारनमीतअकारनको॥जोकहाव
तदीनदयालसहीतेहिभारसदाअपनेमनको।तुलसी
तजीआनभरोसभभगवानभलोकरिहजनको॥५०
रिषिनारिउघारिकियोसठकेवटमीतपुनीतसुकीरति
लही। निजलोकदियोसबरीखगकोकपिथापिसोमा
लुमहैसबही॥दससीसबिरोधसभीतबिभीषनभूपकि
योजगलीकरही॥ करुनानिधिकोभजुरेतुलसीरघुना
थअनाथकेनाथसही॥५१॥कौसिकविप्रवधूमिथिला
"धिपकेसबसोचदलेपलमाहै । बालिदसाननबंधुक
थासुनिससुसाहिबसीलसराहै ॥ ऐसीअनूपकहैतु
लसीरघुनायककीअगुनगुनगाहैं ॥धारतदीनजना
૬૨ हिं. कबित्तरामायण उ०७
थकोरघुनाथअरेनिजहाथनछाहैं। ५२॥तेरेवेसाहेब
साहतऔरनिऔरवेसाहिबकेवचनहा।व्योमरसात
लभूमिमरेनृपकूरकुसाहिबसेतिहुंखारे।तुलसीतेहि
सेतवतकौनमरेरजतेलघुकोकरेमेरुतेभारे। स्वामिसु
सीलसमर्थसुजानसोतोसोतुहीदसरत्थदुलारे ॥५३
॥ घनाक्षरी ॥ ॥ जातुधानभालुकपिकेवट विहंगजो
जोपालेनाथसव्यसभयोसोकामकाजको ॥ आरतम
नाथदीनमलिनसरनआयेराखेसनमानिसोसुभाउ
महाराजको ॥ नामतुलसीपैोडेभागतेकहायोदास
कियेअंगीकारऐसेबडेदगाबाजको ॥ साहेबसमर्थद
सरथकेदयालदेवदूसरोनतोसोतुहीआपनेकीलाज
को ॥ ५४॥ महावलीवालिदलिकायरसुकंठकपि
राजकीएमहाराजहोनकाहूकामको॥ भ्रातवातपात
कीनिसाचरसरनआएकिएअंगीकारनाथएतेवडेवांम
को ॥ रायदसरथकेसमर्थतेरेनामलियेतुलसीसेकूर
कोकहतजगरामको|आपनेनेवाजेकीतौलाजमहारा
हिं० कबित्तरामायण उ०७ ५३
५ जकोसुभाउसमुझातमनमुदितगुलामको॥५५॥रूप
सीलसिंधुगुनसिंधुबंधुदीनको ॥ दयानिधानजानम
निबीरबाहुबोलको॥श्राधकियोगीधकोसरायेफलस
बरीकेसिलासापसमननिबाह्योनेहकोलको।तुलसी
उराउहोतरामकोसुभाउसुनिकोनबलिजाइनबिका
इबिनमोलकोऐसेहुसुसाहिबसेजाकोअनुरागनसो
बडोइअभागोभागभागेलोभलोकको॥५६॥ सूरसि
रताजमहाराजनकेमहाराजजाकोनामलेतहिंसुखेत
होतऊसरो ॥ साहिबकहांजहानजानकीससोसुजा
नसुमिरेकपालकेमरालहोतखूसरो॥ केवटपषानजा
तुधानकपिभालुतारेअपनायोतुलसीसोंधोगधमधू
सरोगबोलकोअटलबांहकोपगारदीनबंधुदूबरेकोदा
निकोदयानिधानदूसरो ॥५॥ कीवेकोबिसोकलो
कलोकपालहूतेसबहूंकोउभयोचरवाहोकपिभालु
को ॥ पविकोपहारकियोख्यालहीकृपालरामबा
पुरोबिभीषनधरौंधाहोतबालको ॥ नामवोठलेतही
हिं. कवित्तरामायण उ०७ निखोतहोतखोटखलचोटविनुमोटपाइभयोनहि हालको॥ तुलसीकीवारबलिटीलहोतसीलसिंघुवि गरीसुधारयेकोदूसरोदयालको ॥ ५८॥ नामलि येपूतकोपुनीतकियेपातकीसुआरतिनेवारीप्रभुपाहि कहेपीलकी ॥ छलनकीछोंडीसीनिगोडीछोजाति पांतिकीन्हीलीनापमेभानिनीओडीभीलकी.. तुलसीजोतारवोविसारखोनअंतमोहुनीकेहैप्रतीति रावरेसुभावसीलकी॥ देवतौदयानिकेतदेतदादिदीन नकीमेरीवारमेरीहीअभागनाथढीलकी ॥५९॥ गेपरेपाहनकृपाकिरातकोलनिकपीसनिसिअपनाए माथजू ॥सांचीसेवकाईहनुमानकीसुजानरायरि नि याकहायोहैविकानेताकेहाथजू ॥ तुलसीसेखोटे खरहोतओटनामहीकीमहगीमाटीमगहूंकीगमद माथजू ॥ वातचलेवातकोनमानिवोविलगबलि काकीसेवारीझिकेनेवाजेरघुनाथजू ॥ ॥ ६०॥ कौमिककीचलतिपापानकीपरसपाइटूटतधनुषव १
३
हिं. कबित्तरामायण उ. ७ ५५
निगईहैजनककी ॥ कोलखनसबरीबिहंगभालु
रातिचरचरिनकेलालचिनप्रापतिमनककी ॥ को
टिकलाकुसलंकृपालनतपालवातहुंकितेकतनतुल
सीतनककी॥रायदसरथकेसमर्थरामराजमनितरेहो
रेलोपैलिपिबिधिहूंगनककी॥६१॥सिलासापपाप
गुहगीधकोमिलापसेवरीकेबापआपचलिगएहाँसो
सुनीम।।सेवकसराहेकपिनायकबिभीषनकोभरतस
भासादरसनेहसुरधनीमैं ॥ आलसीअभागीअधी
आरतअनाथपालसाहेबसमर्थएकनीकेमनगुनीमैं ।
दोषदुखदारिददलैयादीनबंधुरामतुलसीनदूसरोद
यानिधानदुनीमैं ॥६२॥ मीतबालिबंधुपूतदूतदस
कंधबंधुसचिवसराधसाधसेवरीजटाइको ॥ लंकज
रीजोहौजियसोचसोबिभीषनकोकहौऐसेसाहेबकी
सेवानखटाइको ॥ बडेएकएकतअनेकलोकनाथ
पनेअपनेकीतौकहैगोघटाइको ॥ सांकरकोसेइवोस
राहवेसुमिरिवेकोरामसोनसाहेबनकुमतिकटाइको
-- । ५६ हिं कवित्तरामायण उ०७ ॥६३॥ भूमिपालव्यालपाललोकपालनाकपाल कारनकृपालमैसवैकेजोकीथाहली ॥ कादरकोमा दरकाहूकेनाहीदेखियतसवनसोहातहसेवासुजान टाहली ॥ तुलसीसुभायकहैनकी कछुपच्छपात कौनेईसकिएकी सभालुखासमाहली॥ रामहोके द्वारेपैतुलाइमनमानियतमोसेदीनदूबरेकपूतकूरका हली ॥६४॥ सेवाअनुरूपफलदेतभूपज्यौबिहीने गुनपथिकपियासेजातपथके। लेखेजोखेचोखेचीत तुलसी स्वारथहितनीके देखेदेवतादेवयागुनगथके। गीधमानोगुरुकपिभालुमानोभीतकपुनीतगीतसाके सवसाहेवसमर्थके ॥ औरभूपपरखिसुलाखितो लिताइलेतलसमकेखसमतुहीपैदसरथके ॥६५॥ रीतिमहाराजकीनिवाजिएजोमांगनोसोदोषदुखदा रिददारिद्रकैकैछोडिये॥नामजाकोकामतरुदेतफलचा रिताहितुलसीविहाइकैववूररेंडगोडिये॥ जाचैकोन रेसदेसदेसकोकलेसकरैदैहतोप्रसनव्हैवडीबडाइनो
हिं० कबिचरामायण उ०७ ५७
. डिये ॥ कृपापाथनाथलोकनाथनाथसीतानाथतनि
रघुनाथऔरकाहिऑडिये ॥६६॥ ॥ सवैया ॥
॥ जाकेबिलोकेतेलोकपहोतबिसोकलहैसुरलोकसु
ठौरहि ॥ सोकमलातजिचंचलताअरुकोटिकलारि
झवेसिरमोरहि ॥ ताकोकहाइकहैतुलसीतुलजाहि
नमांगतकूकुरकौरहि ॥ जानकीजीवनकोजनव्हैज
रिसाउसोजीहजोजाचतऔरहि ॥ ६७॥ जडपंच
* मिलैजेहिजेहकरीकरनीदेखुधौधरनीधरकी ॥ जन
कीकहुक्यौंकरिहैनसंभारजोसारकरैसचराचरकी ।
तुलसीकहुरामसमानकोआनहैसेवकिजासुरमाघर
की ॥ जगमगतिजाहिजगत्पतिकीपखाहिसोताहि
कहानरकी ॥६८॥ जगजाचियकोउनजोचियों
जियजांचियजानकीजानहिरे ॥ जेहिजांचतजांचक
ताजरिजाइजोजोरतजोरजहानहिरे॥ गतिदेखुबिचा
रिविभीषनकीअरुआनिहिएनुमानहिरे ॥ तुलसीभ
जुदारिददोषवानलसंकटकोटिघपानहिरे॥६॥सु
५८
हि. कबित्तरामायण उ० ७
नुकानदिएनितनेमलिएरघुनाथहिकेगुनगाथहिरे ।।
मुखमंदिरसुंदररूपसदाउरानिधरेधनुमाथहिरेर
सनानिसिवासरसादरसोतुलसीजपुजानकिनाथहिरे
॥ करुसंगसुसीलसुसंतनसोतजिकूकुरपंथकुसाथहिरे
॥७० ।। सुतदारजगारसखापरिवारविलोकुमहाकु
सुमाजहिरे ॥ सबकीममतातजिकैसमतातजिसंतस
भानविराजहिरे । नरदेहकहाकरिदेखुविचारगंवार
विगारनकाजहिरे ॥ जनिडोलहिलोलुपकूकरज्यौतु
लसीभजकौसलराजहिरे॥७॥विपयापरनारिनि
सातस्नाइसोपाइप-यौअमुरागहिरे ॥ जमकेपहरू
दुखरोगवियोबिलोकतईनविरागहिरे ॥ ममतावस
तेसवालिगयोभयौमूरमहाभयभागहिरे ॥ जरठाई
दसारविकालउयोजनहूंजडजीवनजागहिरे॥७२
जनम्या जेहिजोनिअनेकक्रियासुखलागिकरीनपरैब
रनी॥ जननीजनकादिहितूभये रिवहारिभईउरकी
जरनी॥ तुलसीअवरामकोदसकहाइहियेधरुचातक
हिं कबित्तरामायण उ०७
कीधरनी ॥ करिहंसकोबेषबडोसबतेतजिधावकबा
यसकीकरनी ॥ ७३ ॥ भलिभारतभूमिभलकुल
जन्मसमाजसरीरभलोलहिकै ॥ ममताकरपातजि
कैबरषाहिममारुतधामसदासहिकै ॥ जोमजै भगवा
नसयानसोइतुलसीहठचातकज्यौंगहिकै ॥ नतो
औरसबैबिषबीजबयेहरहाटककामधुकानहिकै ।
॥७४॥ सोसुकृतीशुचिमंतसुखंतसुजानसुसीलसि
रोमनिखै ॥ सुरतीरथतासुमनावतआवनपापनहो
तहैतातनछै ॥ गुनगेहसनेहकोभाजनसोसवहीसो
उठाइकहाँभुजदै ॥ सतीभावसदाछलछांडिसबैतुल
सीजोरहैरघुवीरकोव्है ॥ ७५॥ सोजननीसोपि
तासोइभ्रातसोभामिनिसोसुतसोहितमेरो ॥ सोइस
गोसोसखासोइसेवकसोगुरसोसुरसाहिबचेरो ॥ सो
तुलसीप्रियप्रानसमानकहांलौबनाइकहौबहुतेरो॥
जोतजिदेहकोगेहकोमेहसनेहसोरामकोहोइसबेरो॥
॥७६ ॥ राम.मातपितासुतबंधुऔसंगीसखागुरु
हिं० कवित्तरामायण उ०७
स्वामिसनेही ॥ रामकीसौहारोसोहैरामकोरामरं
गरुिचिराचोनकेही ॥ जीवतराममुएपुनिरामसदार
धुनाथहिकीगतिजेही । सोइजियैजगमैतुलसीनत
होलतऔरमुएधरदेही ॥ ७७ ॥ सियरामसरूप
अगाधअनूपविलोचनमीननकोजलुहै ॥ श्रुतिरा
मकथामुखरामकोनामहिएपुनिरामहिकोथलुहै। म
तिरामहिसोगतिरामहिसारतिरामसो रामहिकोबा
लुहै। सवकीनकहैतुलसीकेमतेयतनोजगजीवनको
फलुहै ॥ ७८ ॥ दसरथकेदानिसिरोमनिरामपुरा
नप्रसिद्धसुन्यौजसमै ॥ नरनागसुरासुरजाचकजोतु
मसोमनभावतपावनमै ॥ तुलसीकरजोरिकरैबिनती
जोकृपाकरिदीनदयालसुनै । जेहिंदेहसनेहनरावरे
मोएसीदेहधराइकैकाहजनै ॥ ७९ ॥ झूठोहैझूठोहै
सदाजगसंतकहतजेअंतलहाहै ॥ ताकौसहैसठसंक
टकोटिककाढतदंतकरंतहहाहै। जानपनीकोगुमान
बडोतुलसीकेविचारगवारमहाहै।जानकीजीवनजा
हिं कवित्तरामायण उ०७ ननजान्योतोजानकहावतजानकहाहै ॥८०॥ति नतेखरसूकरवानभलेजडताबसतेनकहकछुवै॥ तुल सीजेहिरामसोनेहनहीसीसहीबिनुपसुपोंछबिवान नद्वै ॥ जननीकतभारभुईदसमासभईकिनबांझगई किनव्है॥ जारिजाउसोजीवनजानकीनाथजियैजग मैतुह्मरोबिनुव्है ॥ ८॥ गजवाजिघटाभलेभूरि भटाबनितासुतभौंहतकैसवकै ॥ धरनीधनधामस रीरभलीसुरलोकहूंचाहिइहैसुखखै ॥ सबफोकट साकटहैतुलसीअपनोनकसपनोदिनदै ॥ जरिजा उसोजीवनजानकीनाथजियैजगमेतुह्मरोबिनुव्है ॥ ॥ ८२॥ सुरराजसोराजसमाजसमृद्धिविरंचिधना धिपसोधनों ॥ पवमानसोपावकसोजमसोमसो पूषनसोभवभूषनमों ॥ करिजोगसमाधिसमीरनसा धिकधीरबडोबसहूंमनमों ॥ सबजायसुभायकहैतु लसीजोनजानकीजीवनकोजनमों ॥ ८३ ॥ काम सेरूपप्रतापदिनेससेसोमसेसीलगनेससेमाने.॥ हरि in- ६२ हिं. कबित्तरामायण उ०७ चंदसेसांचेबडेविधिसेमघवासेमहीपविषयसुखसा ने ॥ सुखसेमुनिसादरसेवकताचिरजीवनलोमसते अधिकाने ॥ ऐसेभएतोकहातुलसीजोपेरोजीलोच नरामनजाने ॥८४॥ झूमतहारअनेकमतंगजजोर जडेमदअंबुचुचाते ॥ तोखेतुरंगमनोगतिचंचलपौन केगौनहुतेवढिजाते ॥ भोतरचंद्रमुखीअवलोकति वाहिरपखडेनसमाते॥ ऐसेभयेतोकहातुलसीजो पैजानकीनाथकेरंगनराते ८५ राजसुरेसपचासकको विधिककरकोजोपटोलिखिपाये ॥ पूतसपूतपुनीत प्रियानुजमुंदरतारतिकोमदनाये ॥संपतिसिदिसबै तुलसी मनकीमनसाचितवैचितलाये ॥जानकिजी वनजानेविनाजनऐसेउजोवनजीवतजाये ॥ ८६ ॥ कृसगातललातजोरोटिनकोघरवातखरीखुरपाखरि या ॥ तिनसोनेकेमेरुसेढेरलहेमनतौनअन्यौधरपैभ रिया ॥ तुलसीदुखदूनोदसादुईदेखिकियोमुखदारि दकोकरिया ॥ तजिआसभोदासरधूपतिकेदशरथके
हिं कबित्तरामायण उ०७ ६३
दानिदयादरिया ॥ ८७॥ कोमरिहैहरिकेरितयेरित
पैपुनिकोहरिजोभरिकै ॥ उथपैतेहिकोजेहिरामथ
पैथपिहैतेहिकोहरिजोटरिहै ॥ तुलसीयहजानि
हियेअपनेसपनेनहिकालहुसेडरिहै ॥ कुमयाक
छुहानिनऔरनकीजीपैजानकीनाथकृपाकरिहै ॥
॥८८व्यालकरालमहाविषपावकमत्तगयंदनकर
दतोरे ॥ सांसतिसंकिचलीडरपैहुतेकिंककरतेकरनी
मुखमोरे॥नेकुविषादनहीप्रहलादहिकारनकेहरिके
बलहोरे॥ कौनकीत्रासकरीतुलसीजोपैराखिहराम
तोमारिहैकोरे॥८९॥ कृपाजेहिकोकछुकाजनहीन
अकाजकछूजेहिकेमुखमोरे॥ केरेतिनकीपरवाहिको
जाहिविषाननपूंछफिरैदिनदोरे ॥ तुलसीजेहिकेरघु
बीरसेनाथसमर्थसोसेवतरीझतथोरे ॥ कहाभवभीर
परीतेहिधौबिचरैधरनीतिनसोहनतोरे॥९०॥का
ननभूधरवारिबयामहाविषव्याधिदवाअरिघेसंक
टकोटिजहांतुलसीसुतमातपिताहितबंधुननेरे॥रा .
६४ हिं० कबित्तरामायण उ०७ सिहरामकृपालतहांहनुमानसेसेवकहेंजेहिकेरेना करसातलभूतलमेरघुनायकएकसहायकमेरे॥९॥ जवहींजमराजरजायसुतेमोहिलैचलिहै भटबांधिन टैया ॥ तवतातनमातनस्वामिसखामुतबंधुबिसाल बिपतिवटैया॥सासतिघोरपुकारतआरतकौनसुनैच हुंओरडटैया। एककृपालनहांतुलसीदसरथकेनंदन बंदिकटैया॥१२॥जहांजमजातनघोरनदीभटकोटि जलचरदंतटेवैया। जहधारभयंकरवारनपारनवोहि तनावनमीतखेवैया ॥ तुलसीजहंमातुपितानसखा नहिकोउकहूंअवलंबदेवैया॥ तहांविनुकारनरामक पालविसालभुजागहिकाढिलेवैया ॥९॥ जहांहि तस्वामिनसंगसखावनितासुतबंधुनबापनमैया ॥ कायगिरामनकेजनकेअपराधसवैउलछांडिछमैया॥ तुलसीतहिकालकृपालविनादुजौकोनहैदारुनदुः खदमैया ॥ जहांसवसंकटदुर्घटस्रोचतहांमेरोसाहि बगरमैया ॥ ९४ ॥ तापसकोवरदायकदेवसबै
1
८
हिं. कबित्तरामायण उ०७ ६५
पुनिबैरबडावतबाढे ॥ थोरेहीकोपकृपापुनिथोरेही
बैठिकैजोरततोरतठाढे ॥ गेकिबजायिलियोगजरा
जकहांलोकहाँकेसोरदकाढे ॥ आरतकेहितनाथ
अनाथकेरामसहायसहीदिनगाढे ॥९५॥ जपजो
गबिरागमहामखसाधनदानदयादमकोटिकरै । मु
निसिद्धसुरेसमहेसगभेससेवतजन्मअनेकमरे ॥ नि
गमागमज्ञानपुरानपढतपसानलभेजुगपुंजजरै। म
नसोपनरोपिकहैतुलसीरघुनाथबिनादुखकौनहरे॥
॥ ९६ ॥ पातकपीनकुदारिददीनमलोनधरैकथवि
करवाहै ॥ लोककहैविधिहूंनलिख्यौसपनेहुनहीज
पनेबरवाहै ॥ रामकोकिंकरसोतुलसीसमुझेहीभलो
कहवोनखाहै। ऐसोभयोकबहूनभजेबिनुबानरको
वरवाहै ॥ ९७ ॥ मातपितजगजाजतन्यौबिधिहूं
नलिख्यौकछुआलभलाई ॥ नीचनिसदरभाजनका
दरकूकुरटूकनलागिललाई ॥ रामसुभावसुन्यौतु
लसीप्रभुसौकह्यौबारकयेठखलाई ॥ स्वारथकोपर
.
-
.
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६६ हिं. कवित्तरामायण उ०७ मारथकोरघुनाथसोसाहेवखोरिनलाई ॥९८॥ पाप हरेपरितापहरेतनपूजिभोहीतुलसीतलताई ॥ हंस कियोवकतेवलिजाऊकहांलौकहाँकहनाअधिकाई॥ कालविलोकिकहैतुलसीमनमें प्रमुकीपरतीतिअथा ई ॥ जन्मजहांतहांरावरेसोनिभयेभरिदेहसनेहस गाई ॥ १९ ॥ लोककहैअरुहींहूकंहूंजनखोटोस रोरघुनायकहीको ॥ रावरोरामबडीलघुताजसमे रामयोमुखदायकहीको ॥ कैयहहानिसौंबलिजा ऊंकिमोहूकरोनिजलायकहीको ॥ आनिहिएहित जानिकरोचाहोध्यानधरोधनुसायकहीको॥२०॥ आपुहोआयुकोनीकेकै जानतरावरोरामभरायोगा यो॥ कीरज्यौनामरटैतुलसीसोकहैजनजानकिनाथ पढायो । सोहखेदजोवेदकहैनघटेजनजोरघुवीरब ढायो ॥ होतोसदाखरकोअसवारतिहारेईनामगयं दवढायो॥१॥ ॥घनाक्षरी॥ ॥छारितेसवां रिकपहारहंतेमारिकियोगारोभयोपांचमेपुनीतपच्छ
हिं कवित्तरामायण उ०७
६७.
पाइकै हौतौजौसोतबतैसोअवअधमाइकैकैभरोपे
टरामरावईगुनगाइकै ॥ आपनेनिवाजेकीपैकीजैला
जमहाराजमेरीऔरहेरिकैनबैठियैरिसाइकै ॥ पालि
कैकृपालव्यालबालकोनमारिये औकाटियेननाथ
विषहूंकोरूखलाइकैर बेदनपुरानगानजानौनबिज्ञा
नज्ञानध्यानधारनासमाधिसाधनप्रवीनता॥नाहिन
बिरागजोगजागभोगतुलसीकेदयादानबरो हौपा
यहीकीपीनता॥ लोभमोहकामकोहदोसकोसमोसो
कौनकलिहूंसिखिलईमेरीऐमलीनता ॥ एकहीभरो
सोरामराबरोकहावतहौंरावरे दयालदीनबंधुमेरीदी
नता ॥३॥रावरोकहावोगुनगावोंरामरावरोइरोटी
दैहौंपावोंरामरावरीहिकानिहीं ॥ जानतजहानमन
मेरेहूंगुमानबडोमानोमैनदूसरो. नमानतुनमानिहीं
पांचकीप्रतीतिनभरोसोमोहिआपनो ईतुमअपना
इहौतबहिपरिजानिहौं ॥ गढिगुढिछोलिछोलिकुंद
कैसीभाई बातजैसीमुखकहाँ तैसीजोयजबआनिहीं
हिं. कवित्तरामायण उ० ७ ॥ ४॥ वचनविकारबहूकरतखुवारमनबिगतविचा रकलिमलकोनिधानुहै ॥ रामकोकहाइनामवेचिये चिखाइसेवासंगतिनजाइपाछिलेकोउपरवानुहै।ते हूतुलसीकोलोगअलोभलोकहैताकोदूसरो नहेतुए कनीके कोनिदानुहै ॥ लोकरीतिविदितबिलोकिय तजहांतहांस्वामिकेसनेहस्वानहूंकोसनमानुहै ॥५॥ स्वारथकोसाजनसमाजपरमारथकोमोसोदगाबाज दूसरोनजगजालहै ॥ कौनआयोंकरौनकरोंगोकरतू तिमलीलिखीनविरंचिहालाईभूलिआलहै ॥ राव रीसपथरामनामहीकीगतिमेरेइहांझूठोझूठोसौतिहूं कालहैं । तुलसीकोभलोपैतुझारोहिकिये कृपाल कीजैनविलंववलिपानीमरीखालहै ॥६॥रागको नसाजनविरागजोगजागजियकायननछांडिदेतठाढि वोकुठाटको ॥ मनोराजकरतअकाजभयोआजुलगि चाहै चारुचीरपैलहीनदूकठाटको योकरतारवडे कूरकोकृपालअतिपायोनामपारसहोलालचीवराट
हिं०कबिचरामायण उ० ६९
को ॥ तुलसीकीबानीरामरावरेबनाईनतोधोबीकै
सोकूकुरनघरकोनघाटको ॥७॥ ऊचोमनऊचोरु
चिभागनीचोनिपटहिलोकरीतिलायकनलंगरलबा
रहै ॥ खारथअगमपरमारथकीकहाचलीपेटकीक
ठिनजगजावकोजवारहै ॥ चाकरीनाकरीनखेतो
नवनिजभोखजानततकूरककिसिमकवारहै ॥ तु
लसीकीबाजीराखीरामहीकैनामनतोभेटपितरनसो
नमुंडहूमेबारहै ॥ ८ ॥ अपतउतारअपकारकोज
गारजगजाकेछाहछुयेसहमतव्याधबाधको ॥ पात
कपुहुमिपालिवे कोसहसाननकपटकोपयोधिअप
राधको ॥ तुलसीसेबामकोभोदाहिनोदयानिधान.
सुनतसिहातसबसिद्धसाधुसाधको॥रामनामललि
तसलामकियेलाखनकोबडो कूरकायरकपूतकौडी
आधको ॥ ९ ॥ सबअंगहीनसबसाधनविहीनम
नबचनमलीनहीनकूरकरतूतिहौँ ॥ बुधिबलहीन
भावभगतिबिहीन दीनगुनज्ञानहीन हीनभागहूंबि
हि कवित्तरामायण उ०७
भूतिहीं ॥ तुलसीगरीवकीगईबहोररामनामजाहि
जपिजीहरामहूंकोबैठोधूतिहौं ॥ प्रीतिरामनामसे
प्रतीतिरामनामकीप्रसादरामनामकेपसारिपाइसति
हौं ॥ १०॥ मेरेजानजवतेहाँजीवव्है जनम्योजग
तवतेवेसाह्यौदामलोहकोहकामको ॥ मनतिन
हीकीसेवतिनहीसोभाबनीकोबचनबनाइकहाँहोंगु
लामरामको ॥ नाथहूनअपनायोलोकरूढीव्हैपरी
पैप्रभुहुतेप्रवलप्रतापप्रभुनामको ॥ अपनीभलाई
मलोकीजैतोभलाईभलोतुलसीकोखुलैतोखजानो
खोटेदामको ॥ ११॥ जोगमबिरागजपजागत
पत्यागवतं तोरथनधर्मजानो वेदविधिकिमिहै ॥
तुलसीसोपोचनमयोहैनहीव्हैहैकहूंसोचैसवयाकेज
घकैमप्रभुलमिह ॥ मेरेतौनडररघुवीरसुनौसांचीक
होखलअनरहें तु.सजननिनगमहै ॥ अलेसुक
तोकेसंगमोहितुलाती लिएतौनामके प्रसादभारमे
रीओरनमिहै ॥ १२॥ जातिकेकुजातिकेजजातिके
Mit- ६ हिं. कबित्तरामायण उ०७ पेटागिबसखाएट्रकसबके बिदितबातदुनीसो॥ मा नसबचनकायकियेपापसतिभायरामको कहायदास दगाबाजपुनीसो ॥ रामनामकोप्रभाउधाउमहिमा प्रतापतुलसीसोजगमानियतमहामुनिसो॥ अतिहि अभागोअनुरागतनरामपदमूढयेतेबडोअचरजदेखि सुनीसो ॥ १३ ॥ जायोकुलमंगनबधावनोबजा योसुनिभयोपरितापपापजननीजनकको ॥ वारेतेल लातबिललातबारबारदीनजानतहाँचारि फलचारि हिचनकको ॥ तुलसीसोसाहिबसमर्थकोसुसेवकहि सुनतसिहातसोचबिधिहूंगनकको ॥ नामरामरावरो सयानकिधौबावरोजोकरतगिरितैगरुतनतेतनकको ॥१४॥ बेदहूंपुरानकहीलोकहूंबिलोकियतरामना महीसोरीझेसकलभलाईहै ॥, कासीहूंमरतउपदेस • तमहेससोईसाधनअनेकचिवईनाचतलाईहैं ॥ छा छिकोललातजेतेरामनामकेप्रसादखातखुनसातसो धे दूधकीमलाईहै ॥ रामराजसुनियतराजनीतिकी - ૭૨ हिं० कवित्तरामायण उ०७ अवधिनामरामरावरेतोचामकीचलाईहै ॥ १५॥ सोचसंकटनिसोचसंकटपरतजरजरतप्रभाउनामल लितललामको ॥ बूडीयोतरतविगरीयोसुधरत बा तहोतदेखिदाहिनोसुभाउविधिबामको ॥ मागत अभागअनुरागविरागभागजागतआलसतुलसीडसे निकामको ॥ धाईधारिफिरिकैगोहारिहितकारीहो तआईमीच मिटतजपतरामनामको ॥ १६॥ आं धरोअधमजबजाजरोजराजमनसूकरकेसाबकटका टकेलोमगमै ॥ गिन्यौहिएहहरिहरामहोहरामह न्यौहाइहाकरतपरिगोकालफंगमैं ॥ तुलसीबिसो कन्हैतिलोकपतिलोकगयो नामकेप्रतापवातबिदि तहजगमै ॥ सोईरामनामजोसनेहसोजपतजनता कीमहिमाक्यौंकहीहैजागतअगमै ॥ १७॥ जप कीनतपखपकियो नतमाईजोगजागनविरागत्याग तीरथनतनको ॥ भाईकोभरोसोनखरोसोवैरवरीई सोबलअपनोनहितजननीजनकको ॥ लोककोनसो
हिं. कबिचरामायण उ० ७
चदेवसेवानसहायगर्वधामकोनधनको ॥ रामहीके'
नामतेजोहोइसोइनोकीलागैऐसोइसुभावकछुतुल
सीकेमनको॥१८॥ईसनगनेसनदिनेससनसुरेससन
गौरगिरापतिनहितनजपौजपने॥ तुह्मारोईनामको
भरोसोभवतरिवेको बैठेउठेजागतबागतसुखसपने॥
तुलसीहैबावरोसोरावरोइरावरीसोंरावरेहजानिजिय
कीजियेजअपने|जानकीजीवनमेरेरावरेवदनफेरेठां
उनसमाउकडूसकलनिरपने ॥१९॥ जाहिरजहान
मेजमानोएकभांतिभयोबेचिय बिबुधधेनुरासभी
बेसाहिये ॥ ऐसेउकरालकलिकालमेंकृपालतेरेनाम
प्रतापनत्रितापतनदाहिये ॥ तुलसीतिहारोमनबच
नकरमजनयेहूनातोनेहनिजओरतेनिबाहिये॥ रंक
केनिवाजरघुराजराजाराजनके उमिरिदराज महारा
जातेरीचाहिये ॥२०॥ स्वारथसमाननप्रपंचपरमा
रथकहायोरामरावरोहोजानतजहानुहै ॥नामकेप्रता
पबापाजलौनिबाहीनीकीआगेकोगोसांई स्वामी
-
७४ हिं. कवित्तरामायण उ०७ सबलसुजानहै।कलिकीकुचालिदेखिदिनदिनदुनी देवपाहरुईचोरहेरिहियहहरानुहै। तुलसीकीबलि वारवारवारहींसह्मारकीवीजद्यपिकृपा निधानसदा सावधानहै॥२१॥दिनदिनदुनीदेखीदारिददुकालदु सदुरितदुगजमुखसुकृतसकोचहै मागेपेतपावतप्र चारिपातकीप्रचंडकालकीकरालताभलेकोहोतपोच है|आपनेतौयेकजवलंबअंबईभज्यौसमर्थसीताना थसवसंकटविमोचहै। तुलसीकीसाहसमराहियेक पालरामनामभरोसेपरिनामकोनिसोचहै॥२२॥ मोहमदमातोरातोकुमतिकुनारिसोविसारिवेदलोक लाजआकरोअचेतहै भावसोकरतमुखावैसोकहत कछुकाहूकीसहतसनाहिरकसहेतहै।तुलसीअधिक अधमाईहूंअजामिलतेताहूमे सहायकलिकपटनि केतह ॥ जैकीअनेकेटेकएकटेकन्हैवेकीसोपेरपि यपूतहितरामनामलेतहै॥२३॥जागियेनसोइयेजन मजाइदिनदुखरोइएकलेसकोहकामको ॥ राजरंक
हिं. कबित्तरामायण उ०७ ७५
'रागीऔबिरागीभूरिभागीएजागी जीवजरतप्रभा
उकलिबामको ॥ तुलसीकबंधकैसोधाइवोबिचारु
अंधधुंधदेखियतजगसोचपरिनामको ॥ सोइवोजो
रामकेसहेनकीसमाधिसुखजागि वोजोजीहजपैनीके
रामनामको ॥२४॥ बरनधरमगयोआश्रमनिवा
सतज्यौत्रासनचक्रितसोपरावनोपरोसोहै ॥ परमउ
पासनाकुबासनाबिनासोज्ञानबचनबिरागबेषजगत
हरोसोहै।गोरखजगायोजोगभगतिभगायोलोगनि
गमनियोगतेसोकलिहिछरोसोहै ॥ कायमनबचन
सुभायतुलसीहैजाहिरामनामकोभरोसोताहीकोभ
रोसोहै ॥ २५॥ ॥ सवैया ॥ ॥ बेदपुरानबि
हाइसुपंथकुमारगकोटिकुचालिचलीहै ॥ कालक
रालनृपालकृपालनराजसमाजबडोइछलीहै ।ब
नबिभागनआश्रमधर्मदुनीदुखदोषदरिद्रदलीहै ॥
स्वारथकोपरमारथकोकलिरामकोनामप्रतापबली
है ॥ २६ ॥ नमिटैभवसंकटदुर्घटहैतपतीरथजन्म
--
MPARAN
हि. कवित्तरामायण उ०७
अनेकजटौ ॥ कलिमेनविरागनज्ञानकहूंसवलागत
फोकटझूटजटी। नटज्याजिनपेटककोटिकचेटक
कौतुकठाढठटी ॥ तुलसीजोसदासुखचाहियेतौर
सनानिसिवासररामरटी ॥ २७॥ दमदुर्गमदानद
यामखकर्मसुधर्मअधीनसबैधनको ॥ तपतीरथसा
नजोगविरागसोहाइनहीदृढतातनको ॥ कलिकाल
करालमेरामकृपालईहै अवलंबबडीमनको ॥ तुल
सीसवसजमहीनसवैएकनामअधारसदाजनको ॥
॥ २८ ॥ पाइसुदेहविमोहिनदीतरनीनलहीकरनी
नकळूकी ॥ रामकथावरनीनवनाइसुननिकथाप्रह
लादनधूकी ।। अवजोरजराजरिगातगये मनमानि
गलानि कुवानिनमूकी ॥ नीकेकैठीकदईतुलसीज
बलंबवडीउरआखरदूकी ॥२९॥ रामबिहाइमरा
जपतेविगरीसुधरीकविकोकिलहकी ॥ नामहितेग
जकीगनिकाहूअजामिलकीचलिगैचलचूकी ॥रा
मप्रतापवडेकुसमाजवनाइरहीपतिपंडुवधुकी ॥ ता
७७
हिं० कबित्तरामायण उ०७
:) कोभलोअजहूंतुलसीजेहिप्रीतिप्रतीतिहैअखरदूकी
॥३०॥नामअजामिलसेखलतारनबारनबारबधूको
नामहरेप्रहलादबिषादपिताभयसासतिसागरसूको
नामसोप्रीतिप्रतीतिविहीनगिलोकलिकालकराल
नचूको ॥ राखिहरामसोजासुहियेतुलसीहुलसैब
लआखरदूको ॥ ३१॥ ॥ घनाक्षरी ॥ ॥ खे
तीनकिसानकोभिकारीकोनभीकबलिबनिककोबनि
जनचाकरकोचाकरी॥जीवकाबिहीनलोगबिद्यमान
सोचबसकहैएकएकनसोकहांजाइकाकरी॥ वेदहूंपु
रानकहीलोकहूंबिलोकियतसांकरेसबकोरामरावर
• कृपाकरी॥ दारिददसाननबाईदुनीदीनबंधुदुरितद
हतदेखितुलसीहहाकरी ॥ ३२॥ कुलकरतूतिभू
तिकोरतिसरूपगुनजोबनज्वरजरतपरतनकछूकही।
राजकाजकुपथकुसाजभोगरागहीकबेदबुधविद्यापइ
बिबसवलकही ॥ गतितुलसीसकीलखतनहिजोतु
रतपबितेकरतछारयवसोपलकही ॥कासौकीजैरो
m
-
हिं. कबिचरामायण उ०७
पदोपदीजैकाही पाहिरामकियोकलिकालकुलिष
ललपलकही॥ ३३ ॥ बबुरबहरेकोबनाइबाग
लाइयतरूंधवेकोसोऊमुरतरुकाटियतहै ॥ गारीदेते
नीचहरिचंदहूंधीचहूकोआपनेचनाचबाइहाथचा
टियतहै ॥ आपुमहापातकीहंसतहरिहरहूंकोआपुहै
अभागीभूरिभागीडांटियतहै । कलिकीकलुषमनम
लिनकीएकहतमसककीपांसुरी पयोधिपाटियतहै।
॥३४॥मुनियेकरालकलिकालभूमिपालतुमजाहि
घालोचाहिएकहोधोराखैताहिको हौंतोदनिदूबरो
विगारोढारोंरावरोनमहूहूताहिको सकलजगजाहि
को॥कामकोहलाइकेदेखाइयतआंखिमोहियेतेमा
नअकसकीवेकोजपुआहिको ॥ साहिवसुजानजन
स्वानहूंकोपच्छकियोरामवोलानामहौं गुलामराम
माहिको ॥३५॥॥ सवैया ॥॥ सांचीकहाँकलि
कालकरालमैडारीविगारोतिहारोकहाहै ॥कामको
लोभकोक्रोधकोमोहकोमोहीसोआनिप्रपंचरहाहै।।
mein
mawwanmamremarwanamaAN
हिं. कबित्तरामायण उ०७ ७९
हौंजगनायकलायकआजुपैमेरीयोटेवकुटेवमहाहै।
जानकीनाथबिनातुलसीजगदूसरेसोकरिहैनहहाहै
॥३६॥ भागीरथीजलपानकरीअरुनामढरामकेलेत
नितहौँ।।मोसोनलेनोनदेनोककलिलनरावरैली
रचितैहौं ।जानिकैजोरक परिनामतुझैपछितैहौपै
मैनभितैहौं । ब्राह्मनज्यौंउगिल्यौउरगारिहौंत्योहो
तिहारेहियेनहितहीं ॥३७॥राजमरालकेबालकपे
+ लिकैपालतलालतखूसरको ॥ सुचिसुंदरसालिसके
लीसंवारिकैबीजबटोरतऊसरको ॥गुनज्ञानगुमानम
भेरीबडोकल्पद्रुमकाटतभूमरको। कलिकालबिचा
रअचारहरीनहिसूझैकछूधमधूसरको ॥३८॥कीवेक
हापढिवेकोकहाफलबूझिनबेदकोभेदबिवायौ ॥
स्वारथकोपरमारथकोकलिकामदरामकोनामबिवा
यौ॥वादविवादविषादबढाइक छातीपराईऔजाप
। नीजान्यौ॥ चारिहूकोछहुकोनबकोदसआठकोपा
ठकुकाठज्यौंफायौ ॥ ३९॥ आगमबेदपुरानब
-
-
हिं० कबित्तरामायण उ०७ खानतकोटिकमारगजाहिनजाने॥जेमुनितेपुनिा पुहिआएकोइसकहावतसिद्धसयाने ॥ धर्मसबैकलि कालग्रसेजपजोगविरागलैजीवपराने ॥ कोकरिसो. चमरेतुलसीहमजानकिनाथकेहातबिकाने ॥४०॥ घृतकहीअवधूतकहौरजपूतकहौजोलहाकहौकोऊ॥ काहूकोवेटीसोबेटानव्याहिहाँकाहूकोजातविगारन सोऊ ॥ तुलसीसरनामगुलामहै रामकोताकोरुचे सौकहकछुओऊ ।। मांगिकैखैवोमजीतकोसोईबोले बो एकनदेवकोदोऊ ॥४१॥ ॥ घनाक्षरी ॥ ॥ मेरेजातिपांतिनचहाँकाहुकिजातिपांतिमेरे को उकामकौनहूंकाहूकेकामको ॥ लोकपरलोकरघु नाथहीकेहायसवभारीहमरोसोतुलसीकेएकनामको ॥ अतिहीनयानेउपखानेनहिवूझैलोकसाहेबकेगो तगोतहातहगुलामको ॥ साधुकैअसाधुकैभलोकै पोचसोचकहाकहाकाहूकेद्वारपोजौहौसौहौराम को ॥ ४२ ॥ कोजकहैकरतकुसाजदगावाज
है.
हिं० कबित्तरामायण उ०७
डोकोऊकहैरामकोगुलामखरोखूबहै ॥ साधू
नौमहासाधुखलजनै महाखलबानीझूठीसाची
कोटिउठतहबूबहै ॥ चहतनकाहूसोकहतनकाहू
कोकछुसबकीसहतउरअंतरनऊबहै ॥ तुलसीकाम
शेपोचहाथरघुनाथहीकेरामकीभगतिभूमिमेरीम
तिदूबहै ॥४३॥ जोगैजोगीजंगमजतीजमातध्या
नधरैडरैडरभारीलोभमोहकोहकामके ॥ जागराजा
राजकाजसेवकससाजसाजसोचै सुनिसमाचारवडेबै
रीबामके ॥ जागैबुधविद्याहित पंडितचकित चित
जगैलोभलालचधरनीधनधामके ॥ जागैंभोगीभो
गहिबियोगीरोगीरोगबससोवैसुखतुलसीभरोसेएक
रामके ॥४४॥ छप्पै ॥ ॥ राममातुपितुबंधुसुज
नगुरपूज्यपरमहित ॥ साहेबसखासहाइनेहनातो
पुनीतचित ॥ देसकोसकुलकर्मधर्मधनधामधरनि
गति॥ जातिपांतिसबभांतिलागिरामहिहमारमति।
परमारथस्वारथसुजससुलभरामतेसकलफल ॥क
,
हिं करित्तरामायण उ०७
हेतुलसीदासअबजवकबहूंएकरामतेमोरभल
॥४५॥ महाराजवलिजांवरामसेकउसुखदायक ॥
महाराजवलिजांउरामसुंदरसबलायक॥ महाराजब
लिजांउरामसंकटसवमोचन ॥ महाराजबलिजाउ
रामराजीवरिलोचनावलिजांउरामकरुणायतनप्रन
तपालपातकहरन॥ बलिजांउरामकलिमयबिकलतु
लसीदासराखियसरन॥४६॥ जयताडकासुबाहुमथ
नमारीचमानहरा मुनिमखरच्छनदच्छसिलातारन
कस्नाकर ॥ नृपगनबलमदसहितसंभुकोदंडविहंड
न ॥ जयकुठारधरदर्पदलनदिनकरकुलमंडन ॥ जय
जनकनगरमानंदप्रदसुखसागरसुखमाभवन। कहैतु
लसीदासमुरमुकुटमनिजयजयजयजानकीरमन ॥
१७॥जयजयंतजयकरअनंतसजनजनरंजन|जयवि
राधवधविदुपबिवुधमुनिगनभयभंजन ॥ जयनिसि
चरीकरूपकरनरबुवंसविभूपन ॥ सुभटचतुर्दससह
सदलनत्रिसिराखरदूपन॥जयदंडकवनपावनकरनतु
,
2
हिं कबितरामायण उ० ७ ८३
लसिदाससंसयसमन ॥ जगबिदितजगतमनिजयति
जयजयजयजानकीरमन ॥४८॥ जयमायामृगम
थनगीधसवरीउद्धारन ॥ जयकबंधसूदनबिसालत
रुतालबिदारन ॥ दवनबालिबलसालियपनसुग्री
वसंताहेत ॥ कपिकरालभटालुकटकपालककृपा
लचित ॥ जयसियबियोगदुखहेतुकृतसेतुबंधवारि
घिदमन ॥ दससीसबिभीषनअभयप्रदजयजयजान
कीरमन ॥ ४९ ॥ कनककुधारकेदारबीजसुंदरसुर
मुनिवर ॥ सोचिकामधुकधेनुसुधामयपयबिसुद्ध
तर ॥ तीरथपतिअंकुरस्वरूपजछेसरक्षतेहि ॥ मर
कतमनिसाखासुपत्रमंजरीसुलक्षिजेहि ॥ कैवल्यस
कलफलकल्पतरुसुभसुभाउसवसुखबरिसे ॥ क
हैतुलसीदासरघुबंसमनितोकिहोंहितवकरसरिसे ॥
॥ ५० ॥ जाइसोसुभटसमर्थपाइरनरारिनमंडै ।
जाइसोजतीकहाइबिखैबासनानछंडै। जाइधनिका
बिनुदानजाइनिर्धनबनुधर्महि ॥ जाइमोपंडितपढि
-
हिं. कवित्तरामायण उ०७
पुग़नजोरतनसुकर्महि ॥ सुतजाइमातृपितुभक्तिवि
नुतियसोजाइजेहिपतिनहित ॥५१॥ कोनकोष
निर्दहेउकामवसकेहिनहिकीन्हो ॥ कोनलोअदृढफ
यांधिवासनकरिदीन्हो ॥ कवनदृदयनहिलागक
ठिनअतिनारि नयनसर ॥ लोचनयुतनहिमयउअं
धश्रीपाइकवननर ॥ सुरनाकलोकमहिमंडलहुसो
जोमोहकीन्होजयन ॥ कहैतुलसीदाससोऊवरेजे
हिरासुरामराजीवनयन ॥५२॥ सवैया ॥ अहंक
मानसंधानसुगनजोनारिविलोकनिवांनतेवांचे ॥
कोपकसानुगुमानजवावटजेजिनकेमनांचनांचे
॥ लोभसवैनटकेबसव्हकपिज्योजगबहुनाचननां
च॥ नीकेहसाधुसंवैतुलसीपैतेईरघुवीरकेसेवकसांचे
॥ ५३ ॥ ॥ घनाक्षरी ॥ ॥ बेपसुवनाइअलेवच
नकहचुवाइजाइतौनजरनिधरनिधनधामकी ॥ को
टिकउपाइकरिलालिपालियतदेहमुखकहियतगति
गमहीकेनामकी ॥ प्रगटैउपासनादुरावैदुर्वासना
॥
हिं० कबित्तरामायण उ०७
हिमानसनेवासभूमिलोभमोहकामकी ॥ रागरोपई
किपटकुटिलाईभरेतुलसीसे -भगतभगतिचाहेरा
मकी॥५४॥ कालिहीतरुनतनकालिहीधरनिध
नकालिहीजितौंगोरनकहतकुचालिहै ॥ कालीही
साधोगोकाजकालहीराजासमाजमोसोकोउकहाभा
रेमहीमेरुहालिहै ॥ तुलसीयहोकुभांतिघनेघरघा
लिमाये घनेघरघालतहैवनेघरघालीहै ॥ देखतसु
नतसमुझतहूनसूझै सोई कबहूं कयौ नकालहूको
कालकालिहै ॥ ५५ ॥ भयोनतिकालतिहूलोकतु
लसीसोमंदनीदैसबसाधुसुनिमानोनसकोचहाँ ॥
जानतनजोगहियहांनिमाजैजानकीसकाहेकोपरेखो
हौ पापीप्रपंचीपोचहौं । पेटभरिवेकेकाजमहारा
जकोकहायोमहाराजहंकह्यौहैप्रनतबिमोचहौं । नि
जअघजालकलीकालकीकरालता बिलोकिहोतव्या
कुलकरतसोईसोचहूं ॥५६॥ धर्मकोसेतुजगमंगल
कोहेतुभूमिमारहरिवेकोअवतारलियोनरको ॥ नी
.
हिं कवित्तरामायण उ०७
तिजीप्रतीतिप्रीतिपालचालिप्रभुमानलोकवेदराषि
बेको पनरखुवरको बानरविमीपनकीऔरकीकना
वडोहसोप्रसंगसुनेअंगजरेअनुचरको ॥ राखेरीति
आपनौजोहोइसोइकीजैवलितुलसीतिहारोघरजा
इडहैघरको ॥ ५७॥ नाममहाराजकेनिवाहिनी
कोकीजैउरसवहीसोहातमैनलोगनसोहातहौं । की
जैरामवारऐहीमेरीऔरचखकोरताहिलगिरंकज्यौँस
नेहकोललातही ॥ तुलसीविलोकिकलिकालकी
करालताकृपालकोसुभाउसमुझतसकुचातहीं। लो
कएकभांतिकोत्रिलोकनाथलोकवसआपनोनसो
चस्वामीसोचहो सुखातहीं ॥५८॥ तौलौलो
अलोलुपललातलालचीलवारबारबारलालचधर
निधनधामको ॥ तवलीवियोगरोगसोगभोगजा
तनाकेजुगसमलागतजीवनजामजामको ॥ तौलों
दुखदारिददाहतअतिनिततन तुलसीहैकिंकरविमो
हकोहकामको ॥ सवदुखआपनेनिरापनेसकलसुख
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हिं. कबित्तरामायण उ०७
नौलौजनभयोनबजाइराजारामको ५५९ ॥ तौलौं
मलीनहीनदीनसुखसपनेनजहांतहां दुखीजनभा
। जनकलेसको ॥ तौलीउबेनपायफिरतपेटौखला
यवायेमुहसहतपराभवदेसदेसको ॥ तबलौदयाब
नोदुसहदुखदारिदकोसाथरीकोसोइबोओढिबोदूने
खेसको। जबलौनमजैजीहजानकीजीवनरामराज
कोराजासोतौसाहेबमहेसको ॥६०॥ ईसनकेईसम
हाराजनकेमहाराजदेवनकेदेव देवप्रानडूंकपानहीं।
कालहूंकेकाल महाभूतनके महाभूतकर्महूंके करम
निदानके निदानहीं ॥ निगमको अगम सुगमतुल
सीहूंसेकोएतेमानसील सिंधुकरुनानिधानहीं।महि
माअपारकाहूबोलकोनबारापारबडीसाहिबीमेनाथ
बडेसावधानहीं ॥६१॥॥ सवैया॥ ॥ आरतपा
लकृपालजेरामजेहीसुमिरतेहिकोतहांठगटे ॥ नाम
प्रतापमहामहिमाअकरेकियेखोटे ॥ छोटेउबाढेसेव
करकतेएकअनेकअयेतुलसीतिहुंतापनतेडाटे ॥ प्रे
हिं० कवित्तरामायण उ०७ मवदीप्रहलादहिकोजिनपाहनतेपरमेसुरकाटे॥६२ काटिकृपानपानकहुपितुकाकालकरालबिलोक नभागे॥ रामकहांसबटांउहखंभमेहांसुनिहांकनि केहरिजागे॥ वैरीविदारिभयेविकरालकहैप्रहलाद हिकेअनुरागे॥ प्रीतिप्रतीतिबढातुलसीतबतेसबपा हनपूजनलागे॥६३॥ अंतरजामिहुतेबडेबाहेरजा मिहरामजेनामलियेते ॥ धावतधेनुपन्हाइलवाइ जौबालकवोलनीकानकियेते ॥ आपनिबूझिकहैतु लसीकहिवेकीनवावग्विातवियेते ॥ पैजपुरेपहला दहुकोप्रगटेप्रभुपाहनतेनहियेते ॥ ६४॥ बालकबा लिदियोवलिकालकोकायरकोटिकुचालचलाईपा पहिवापवडोपरितापतेआपनीओरतेखोरिनलाई॥ भूरिदईविपभूरिभईप्रहलादसुधाईसुधमुधाकीमला ई ॥ रामकृपातुलसीजनकोजगहोतभलकोभलोई भलाई ॥ ६५ ॥ कराकरीव्रजवासिनपैंकरतूतिकु भांतिचलनचलाई ॥ पंडुकेपूतसपूतकपूतसुजोध - wwwnormawen- - m . --
हिं०कबित्तरामायण उ०७
नभोकलिछोटोछलाई ॥ कान्हकृपालबडेनतपा
लगयेखलखेचरखीसखलाई ॥ठीकप्रतीतिकहैतु
लसीजगहोइभलेकोभलोई भलाई ॥६६॥ अव
नीसअनेकअयेअवनीजिनकेटरतेसुरसोचसुखाहीं॥
मानवदानवदेवसतावनरावनघाटिरच्यौजगमाहीं॥
तेमिलयेधरीधूरीसुजोधनजेचलतेबहुछत्रकिछांहीं।
, बेदपुरानकहैजगजानगुमानगोविंदहिभावतनाहीं
॥६॥ जबनैननप्रीतिठईठगस्यामसोसयानिसखी
हठिहौबरजी॥ नहिजानौवियोगसुरोगहैआगेझुकी
तबहाँतौहिसौतरजी॥अबदेहभईपटनेहकेघालेसो
खोजकरैबिरहादरजी॥जराजकुमारबिनासुनुभंग
अनंगभयोजियकोगरजी॥६८॥जोगकथापठईज
कोसबसोसठचेरीकीचालचलांकी ॥ ऊधौजूकौनक
हैकुबरीजोबरीनटनागरहेरिहलाकी ॥ जाहिलगेप
रिजानैसोईतुलसीसोसोहागिनिनंदलालकीजानी
हैजानपनीहरिकीअबबांधियैगीकछुमोटकलाकी॥
-
हिं. कवित्तरामायण उ. ७
॥६॥घनाक्षरी ॥ ॥पठयोहैछपदछबीलेकाहकेहू
कहूखोजिकैखवासखासोकूबरीसोबालको।ज्ञानको
गढेयाविनुगिराकोपढ़यावारखालकोकढैयासौंब
याउरसालको प्रीतिकोवधिकरसरीतिकेअधिकनी
तिनिपुनविवेकहैनिदेसदेसकालको।तुलसीकहैनव
नैसहेहीवनैगीसवजोगभयोजोगकोवियोगनंदला
लको॥७०॥ हनुमानन्दकृपाललाडिलेलपनलाल
भावतभरतहैजेसेवकसहायजू ॥विनतीकरतदीनदूब
रोदयावनोसोविगरेतापुहीसुधारिलीजैभायजू ।।
मेरीसाहिविनीसदासीसपरविलसतिदेवीक्यौनदास
कोदेखाइयतपायजू ॥ झीरवडूमेरीझिवेकीवानिराम
रीझतहेरीझव्हैहैरामकीदोहाईरघुरायजू॥७॥ ॥स
वैया। ॥वेपविरागकोगगभरोमनभावकहाँसतिमा
यहाँतोसोतिरेहीनाथकोनामलेवेचिहापातकीपांव
स्माननिपोसो॥येतेबडेअपराधीमधीकहूतैकहाँअंब
किमेरोतूमोसो॥स्वारथकोपरमारथकोपरिपूरनभो
ने
हिं. कबितरामायण उ०७
फिरिघाटनहोंसो॥७२॥ ॥घनाक्षरी॥ ॥जहांबा
लमीकभयव्याधतेमुनिंदसाधुरामराजपेसिखसुनि
रिषिमातकी ॥सीयकोनिवासलवकुसकोजनमथल
तुलसीछुअतछांहतापगरैगातकी ॥ बिटपमहीपसु
रसरितसमीपसोहैसीताबटेपखतपुनीतहोतपातकी
॥ बारिपुरदिगपुरबीचबिलसतिभूमिअंकितजो जा
नकीचरनजलजातकी ॥ ७३ ॥ मरकतबरनपरन
फलमानिकसेलसैजटाजूटजनुरूषबेषहरहै ॥ सुख
माकोढेरुकधासंपदासकलमुदमंगलकोघरहै ॥ देत
अभिमतजोसमेतप्रीतिसेइयेप्रतीतिमानितुलसी बि
चारिकाकोथरुहै ॥ सुरसरिनिकटसोहावनीअवनि
सोहैरामरावनीकोबटकलिकामतरुहै ॥ ७४॥दे
वधुनीपासमुनिबासश्रीनिवासजहांप्राकृतहूंबटबूट
बसतपुरारिहै ॥जोगजपजागकोबिरागकोपुनीतपी.
ठि रागिनपैसीठिडीठिबाहिरीनिहारिहै ॥ आयसु.
आदेसबाबूभलोभलोभावसिद्दतुलसीबिचारीजो
.
-
.
९२ हिं. कबित्तरामायण उ० ७ गीकहतपुकारिहै ॥ रामभगतनकोतोकामतरुतेज धिकसीयवटसेयेकरतरफलचारिहै ॥ ७५ ॥ ज हांवनपावनोसोहावनेविहंगमृगगदेखिअतिलागत सनंदखेतखूटसो ॥ सीतारामलपननिवासबासमु निनकोसिद्धसाधुसाधकसबै बिबेकबूटसो ॥ झरना झरतवारिसीतलपुनीतवारिमंदाकिनिमंजुलमहेसज टाजूटसो ॥ तुलसीजोरामसोसनेहसांचो चाहिये तोसेइयेसनेहसो विचित्र चित्रकूटसो ॥ ७६ ॥ मोहवनकलिमलजरतजनिजानिजियसाधुगाइविप्र नेकभयकोनिवारहै ॥ दीह्नी हैरज़ाइरामपाइसोसहा यलाललपनसमर्थबीरहेरिहेरिमारिहै ॥ मंदाकिनि मंजुलकमानमसिवानजहांवारिधारधीरधरिसुकर सुधारिहै ॥ चित्रकूटप्रचलअहेरीवैव्यौघातमानो पातकेत्रातघोरसावकसंघारिहै ।। ७७ ॥ सवैया।। लागिदवारिपहारढहीलहकीकपिलंकजथाखिरखौ की ॥ चारुचुवाबढोरचलीलपटेझपटैसोतमीच ---
हिं कवित्सरामायण उ०७
रतौकी ॥क्यौंकहिजातमहासुखमाउपमातकिताक
तहकविकोकी ॥ मानोलखीतुलसीहनुमानहियेज
गजीतजरायकीचौकी॥७८॥ देवकहैअपनीअपनी
भवलोकनतीरथराजचलोरे ॥ देखिमिटैअपराध
भगाधनिमजतसाधुसमाजभलारे ॥ सोहैसितासि
सितको मिलिवो तुलसी हुलसै हियहेरि हलोरे ।
मानोहरेतनचारुचरैबगरैसुरधेनुकेधौलकलोरे ॥
॥७९॥ देवनदीकहजोजनजानकियेमनसाकुलको
टिउधारे ॥देखिचलैझगरैसुरनारिसुरेसबनाइबेबान
संवारे॥ पूजाकोसाजबिरंचिरचैतुलसीजेमहातमजा
ननिहारे॥औककीनेवपरीहरिलोकनिलोकतगंगत
रंगतिहारे ॥ ८०॥ब्रह्मजोव्यापकबेदकहैगमनाहि
गिरागुनज्ञानगुनीको॥जोकरताभरताहरतासुरराइ
सुसाहिबदीनदुनीको ॥ सोइयोद्रवरूपसहीजोह
नाथबिरंचिमहेसमुनीको मानिप्रतीतिसदातुलसी
जलकाहेनसेवतदेवधुनीको ८१वारितिहारोनिहारो
..
-
९१ हिं. कवित्तरामायण उ०७
निहारिमुरारिभयेपरसेपदपापलाहौंगो॥ईसम्हैसी
मधरोपैडरोंप्रभुकीसमतावडेदोषदहाँगो। बरुबरहि
बारसरीरधरौरघुवीरकोव्हैतबतीररहोंगो ॥ भागीर
थीबिनाकरजोरिवहोरिनषोरिलगैसोकहौंगो॥८२
घनाक्षरी लालचीलालतविललातहारहारदीन
बदनमलीनमनमिटैन विसूरना ॥ ताकतकराधकैबि
बाहकैऊछाहकछुडोलैलोलबूझतसबढोलतूरना।
प्यासेनपावहिवारिभूखेनचनकचारिचारतआहार
तेपहारटारिधूरनासोककोअगारदुखभारभरैतौलौ
जौलौदेवीद्रवनभवानीअन्नपूरना॥८॥छप्पै|भस्म
अंगमदनअगनसंततअसंगहर सीसगंगगिरिजाऽर्ध
गभूपनभुजंगवर मुंडमालबिधुबालभालडमरुकपा
लकर॥विवुधबृंदनवकुमुदचंद्रसुखकंदमूलधर ॥ त्रि
पुरारित्रिलोचनदिगवसनविषभोजनभवभयहरन ॥
कहैतुलसीदाससेवतसुसभसिवसिवसंकरसरन॥८४
गरलअसनदिगवसनव्यसनभंजनजनरंजन ॥ कुंदई
4
.
हिं० कवित्तरामायण उ०७
दुकर्पूरगौरसच्चिदानंदधन ॥बिकटबेसउरसेससीससु
रसरितसहजसुचि ॥ सिवअकामअभिरामधामनित
रामनामरुचि ॥ कंदर्पदर्पदुर्गमदमनउमारमनगुनम
वनहर ॥ त्रिपुरारित्रिलोचनत्रिगुणपरत्रिपुरमथनज
यत्रिदसबर ॥ ८५ ॥ अर्धअंगअंगनामहानामजो
गीसजोगपति ॥ विषमअसनदिगवसननामबिश्वेस
बिस्वगति ॥ करकपालसिरमालव्यालविषभूति
विभूषन ॥ नामसुद्धअबिरुद्धअमरअनवंद्यअदूषन
॥ विकरालभूतबेतालप्रियभीमनामभवभयदमन ।।
सबबिधिसमर्थमहिमाकत्थसोतुलसीदाससंसय
समन ॥ ८६ ॥ भूतनाथायहरनभीमभयभवन
भूमिधर ॥ भानुमंतभगवंतभूतिभूषनभुजंगवर ॥
भव्यभावबल्लवभवेसभवभारबिभजन ॥ भूरिभाग
रखकुजोगगंजनजनरंजन | भारतीबदनधर्मसदनस
सिपतंगपावकनयन॥ कहैतुलसीदासकिनभजसिम
नभद्रसदनमर्दनमयन ॥८७॥ ॥ सवैया ॥ ॥मां
-
हिं कबित्तरामायण १०७ गोफिरैकहैमागनोदेखिनखांगोकछजनिमागियेथोरे ॥ संकनिनांकपरीझिकरैतुलसीजगजोजुरेजाचकजो रे॥ नाकसंभारतआयौहोनाकहिनाहिपिनाकहिने कुनिहोरे ॥ विरंचिकहैगिरिजासिखवोपतिरावरोदा निहैवावरोभोरे ॥ ८८ ॥ विषपावकव्यालकपाल गरेमरेनागततीतिहुंतापनडाढे ॥ भूतबेतालसपाम धनामदलैपलमेअवकेभयगाढे ॥ तुलसीसदरिद्रसि रोमनिसोसुमिरेदुखदारिददोहिनठाढे ॥ भोनमेंभां गधतूरोइआंगननामेकेआगेमांगनेबाढे ॥ ८९ ॥ सीसवसेवरदावरदानिचढ्यौवरदाघरन्यौबरदाहै ॥ घामधतूरोविभूतिकोकूरोनिबासतहांसबलैमरदाहै व्यालीकपालिहैख्यालीचहूदिसिमांगठाटिन्हको परदारहै ॥ रांकसिरोमनिकाकिनिभावबिलोकतलो कपकोकरदाहै ॥ ९० ॥ दानिजोचारिपदारथको त्रिपुरारितिहूंपुरमोंसिरटीको ॥ भारोभलोभलेमा वको खोभलोईकियोसुमिरेतुलसीको ॥ ताबिनु
'हिं०कबित्तरामायण उ. ७
-
आसकोदासभयोकबहूंनमिव्यौलघुलालचजीको॥
॥ साधोकहांकरिसाधनतेंजोपैराधोनहीपतिपारब
तीको ॥ ९१ ॥ जातेजरेसबलोकबिलोकित्रिलो
चनसोबिषलोकलियोहै ॥ पानकियोबिषभूषन
भोकरुनाबरुनालयसांइहियोहै ॥ मेरोइफोरबे
जोगकपारकिधौंकछुकाहूलखाइदियोहै ॥ काहेन
कानकरौबिनतीतुलसीकलिकालबेहालकियोहै ॥
॥९२॥धनाक्षरी-॥ ॥ खायोकालकूटभयोअजर
अमरतनभवनमसानगथगाठरीगरदकी ॥ डमरूक
पालकरभूषनकरालव्यालबावरेबडोकिरीझबाहनब
रदकी ॥ तुलसीबिसालगोरेगातबिलसताभूतिमा
नौ हिमगिरिचारुचांदनीसरदकी॥ अर्थधर्मकाममो
क्षबसतबिलोकनिमेकासीकरामतिजोगीजागतिमर
दकी ॥ ९३॥ पिंगलजटाकलापमाथैतौ पुनीत
आपपावकनैनाप्रतापभूपबरतहै ॥ लोचनबिसाल
लालसोहैबालचंद्रभालकंठकालकूटव्यालभूलषन
.
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९८ हिं कवित्तरामायण उ०७ धरतहै।देतनअचातरीझिखातपाताकहीकेभोरा नाथजोगीजवअवडरढतरहै ॥ सुंदरदिगंबरबिभूति गातभांगखातरूरेसंगीपूरेकालकंठकहतहै॥ ९४॥ देतसंपदासमेतश्रीनिकेतजाचकनिभवनविभूतिभा गपभवाहनुहै ॥ नामवामदेवदाहिनो सदाअसं गरंगअरधंगअंगनाअनंगकोमहनुहै ॥ तुलसीम हेसकोप्रभावभावहीसुगमअगमनिगमहूंकोजानिवो गहनु है ॥भेपतोभिकारीकोभयंकररूपसंकरदयाल दीनबंधुदानीदरिददहनु है ॥ १५ ॥ चाहेनअंगन अरिएकोअंगमागतेको देवोइपैजानिएसुभावसिद्ध वानिसो ॥ वारिबुंदचारित्रिपुरारि परडारियैतौदेत फलचारिलेतसेवासांचीमानिसो ॥ तुलसीभरोसो नभवेसभारानाथकोतो.कोटिककलेसकरोभरोछार छानिसो॥ दारिददमनदुखदोपदाहदावानलदुनीन दयालदूजोदानिमूलपानिसो ॥९६ ॥ काहेकोज नेकदेवसवतजागैमसानखोअतअपानसठहोतहठि , Madrasi 4-memastu . . - ९९ . । , हि कबित्तरामायण. उ०७ प्रेतरे ॥ काहेकोकोटीउपायकरकमरतधायजाचतन रेसदेसदेसकेअचेतरे॥ तुलसीप्रतीतिबिनुत्यागेतीप यागतनुधनहींकेहेतदानदेतकुरुखेतरे॥पातवैधतूरके हैंभोरेकैभवेससोसुरेसहीकीसंपदासुभायसोनलेतरे ॥ ९७ ॥ सकटगयंदबाजिराजिभलेभलेभटधन धामनिकरकरनिहूंनपूजैक्कै ॥ बनिताबिनीतपूतपाव नसोहाबनऔबिनयबिबेकविद्यासुभगसरीरबै॥इहां औरसोसुखपरलोकसिवलोकआकताको फलै तुल सीसोसुनोसावधान है ॥ जानेबिनुजानेकैरिसानेके लिकबहुकसिवहिचढायेव्हैहैबेलकेपतोआहे॥९८॥ रतिसीखनिसिंधुमेषलाअवनिपतिऔनिपअनेकठा ढेहाथजोरिहारिकै ॥ संपदासमाजदेखिलाजसुर राजहूंकेसुखसबबिधिदीन्हैहैसवारिकै ॥ इहांऐसो सुखसुरलोकसुरनाथपदताकोफलतुलसीसो कहै गोबिचारिकै ॥ आककेपतौआचारिफूलकेधत्तूरेके दैदीन्हेव्हैबारकपुरारिपरढारिकै॥ ९९ ॥ देवसरि 4 1
हिं कवित्तरामायण उ०७
सेवोवामदेवगांवरावरेहींनामरामहीकेमांगिउदरभर
तहों ॥ दीवेजोगतुलसीनतेलकाहूकोकछुकलिखी
नभलाईभालपोचनकरहौं ॥ येतेहूंपरकोउजोराव
रोहूंजोरकरैताकौंजोरदेवदीनद्वारगुदरतहौं । पाइकै
औराहनोऔराहनोनदीजै मोहिकलिकालकासना
थकहे निवरतहौं ॥३०० ॥ रोरामरायकोमुज
ससुनितेरोहरुपाइतरआइरह्यौसुरसरितीरहौं ॥ बा
मदेवरामकोसुभावसीलजानियतनातोनेहजानिजि
यरघुवीरभीरहौं । अधिभूतबेदनविषमहोतभूतना
थतुलसीविकलपाहिपचतकुपीरहौं । मारियेतोज
नागासकासीवासरवासफलज्याइयैतोकपाकरिनिरु
जसरीरही ॥१॥जीवेकीनलालसादयालमहादेव
मोहिमालुमहतोकौमरभेइकोरहतहाँ॥ कामरिपुरा
मकेगुलामनिकोकामतरुअवलंबजगदंगवसहितच
हतहाँ । रोगभयोभूतसोकुसूतभयोतुलसीकोभूत
नाथपाहिपदपंकजगहतहाँ । ज्याइयेतोजानकीजी
हिं कबित्तरामायण उ०७ वनजनजानिजियमारियेतोमांगीमीचसुधियेकहत हौँ ॥२॥ भूतभवभवतिपिसाचदूतप्रेतप्रियआप नोसमाजसिवआपुनीकेजीनिये ॥ नानाबेषबाहन विभूषनबसनबासखानपानबलिपूजाबिधिकोबखा निये॥रामकेगुलामनकीरीतिप्रीतिसूधिसबसबसोस नेहसबहीकोसनमानिये ॥ तुलसीकीसुधरैसुधारभू तनाथहीकेमेरेमायबापगुरु संकरभवानिये ॥३॥ गौरीनाथभोरानाथ अवतभवानीनाथ विश्वनाथपु रफिरि आनकलिकालकी । संकरसे नरगिरि जा सी नारी कासी बासी बेदकही सहाँससिसेखरक पालकी ॥ छमुखगनेसतेमहेसतेपिधारेलोगबिकल बिलोकियतनगरीबिहालकी ॥ पुरीमुरबेलीकेलि काटतकिरातकलिनिठुरनिहारिये उघारि डीठिमा लकी ॥४॥ठाकुरमहेसठकुराइनिउमासीजहांलो कबेदहूंबिदितमहिमाठहरकी ॥ मठरुद्गनभूतगन पतिसेनापतिकलिकालकीकुचालकाहूतोनहरकी॥
हिं. कवित्तरामायण उ०७ बसीविश्वनाथकी विखाबडो वारानसी बूझियेन ऐसीगतिसंकरसहरकी ॥ कैसेकहैतुलसीखासुरके वरदानिवानिजानिसुधातजिपीवनजहरकी॥५॥ लोकबेहूंविदितबारानसीकीवडाईबासी नरनारीई सविकासरूपहें॥कालनाथकोतवालदंडकारिदंड पानीसभासदगनपसेअमितअनूपहें ॥ तहबूंकुचाल कलिकालकीकुरीतिकैयौंजानतनमूढइहाभूतनाथ अपहें।फलफूलैफैलेखलसीदेसाधुपलपलबाती दी पमालिकाउठाइयतसूपहैं ॥६॥ पंचकोसपुन्यकोस स्वारथपरमारथकोजानिआपुआपनेसुपासवासदि योहे ॥ नीचनरनारिनसंभारि सकैआदरलहतफल कादरविचारिजोनकियोहै। वारिवारानसीविनुकहै चक्रचक्रपानिमानिहितहानिसोमुरारिमनभियोहै। रोसमेभरोसोएकआसतोसकहिजात विकल बिलो किलोककालकूटपियोहैं ॥७॥ रचतविरंचिहरि पालतहरतहेरते रेहिप्रसादजगजगजगपालिकै ॥
हिं. कबित्तरामायण उ० ७ १.०३
तोहिमेबिकासबिश्वतोहिमेबिलाससवतोहिमे समा
तुमातुभूमिधरबालिके ॥ दीजैअवलंबजगदंबनबि
लंबकीजैकरुनातरंगिनीकृपातरंगमालिके ॥ रोष
महामारीपरितोषमहतारीदुनीदेखियेदुखारीमुनि
मानसमरालिके ॥ ८ ॥ निपटबसेरेअघऔगुन
घनेरेनरनारिअनेरेजगदंबचेरीचेरेहैं ॥ दारिददुखा
रीदेविभूसुरभिखारीभीरुलोममोह कामकोहकलि
मलेघरेहैं ॥ लोकरीतिराखिरामसाखीबामदेवजा
निजनकीबिनतीमानिमातुकहिमेरेहैं ॥ महामारी
महेसानीमहिमाकीखानीमोदमंगलकीरासीकासी
बासीदासतेरेहैं ॥९॥लोचनकोपापकैधौंसिद्धसुरसा
पकैधौंकालकेप्रतापकासातिहूतापतईहैं। उंचेनीचे
बीचकैधनिकरंकराजारायहठनिबजाइकरिडीठिपीट
दईहैं। देवतानिहोरेमहामारीनसोकरजोरेभोरानाथ
जानीमोरेअपनीसीकहीठईहै।करुणानिधानहनुमा
नबीरबलवानजसरासिजहांतहतिसीलुटिलईहै १०
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4 - १०४ हिं. कबित्तरामायण उ०७ ॥संकरसहरसरनारिनरवारिचारिबिकलमहामारिम हामायाभईहै ॥उछरतउतराहतहरातमरिजातभभ रिभगातजलथलमीचमईहै देवनदयालमहिपालन कृपालचितवारानसीवाढतअनीतनितनईहै पाहिर घुराजपाहिकपिराजरामदूतरामहूंकाविगरीतुहीसु धारिलईह११एकताकरालकलिकालसूलमूलत्तामे कोढमेकीखाजसीसनीचरिहैमीनकी वेदधर्मदूरिंगये अमिचोरभृपभयेसाधुसिद्धमानजातवी तेपापपीन कीदूसरेकोदूसरोनहाररामदयाधामरावराइगतिब लिविभवविहीनकी लागैगीपैलाजवाविराजमान विरदहिमहाराआजजोनदेतदादिदीनकी॥१२॥रा मनाममातपितुस्वामीसमरथ हितुआसरामनामकी भरोसोरामनामको ॥ प्रेमरामनामहींसोंनेमरामना हीकोजानोनमरमपगदाहिनोनबामको ॥ स्वारथस कलपरमारथको रामनामरामनामहनितुलसीनका हकामको॥रामकीसपथसर्वसमेरेरामनामकामधेनु + N -NCRORM-
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हिं० कबिसरामायण उ. ७ १०५
कामतरूमोसेछीनछामको॥१३॥सवैया॥ मारग
गरिसुरमारिकुमारगकोटिककैधनजीतिकैलीयो से
करकोपसोपापकोदामपरिछितजाहिगोजारिकैही
यो कासीमेकंटकजेतेभयतेगेपाइअघाइकैआपनोकी
यो आजुकिकालिपरोंकिनरोजडजांहिगेचाटिदेवारि
कीदीयो॥१४॥कुंकुमअंगसोरंगजितोमुखचंडसोहो
डपरीहै।बोलतबोलसमिद्धचवैअवलोकतसोचबि
पादहरीहै।गौरीकोगंगबिहंगनिबेखकीमंजुलमूरति
मोदभरीहै ॥पेखिसप्रेमपयानसबैसबसोचबिमोच
नछेमकरीहै ॥ १५॥ ॥घनाक्षरी ॥ ॥ मंगल
कीरासिपरमारथकीखानिजाकी बिरचिबनाइबिधि
केशवबसाईहै ॥ प्रलयहूंकालराखीसूलपानिसूल
परमीचबचनीसोउचाहतखसाईहै ॥ छोडिछितिपा
लजोपरीछितभयेकृपालअलोकियोखलकोनिकाई
सोनसायीह ॥ पाहिहनुमानकरुनानिधानरामपा
हिकासीकामधेनुकलिकुहतकसाई है ॥ १६ ॥ बि
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१०६ हिं. कवित्तरामायण उ०७ रचीविरंचिकीबसतविश्वनाथकीजोपानहूं तेचारीपु रीकेसवकृपालकी जोतिरूप लिंगमयी अगीनित लिंगमयीमोछवितरनि विदरनि जगजालकी ॥दे वी देवदेवसरिसिद्धमुनिवरवासलोपति बिलोकति कुलि पिभोडेभालकी ॥ हाहाकरेतुलसीदयानिधा नरामऐसीकासीकाकदर्थनाकरालताकलिकालकी॥ ॥ १७ ॥ आश्रमवरनकलिविबसविकलभयेनिज निजमरजादमोटरी सीडारदीसंकरसरोखमहामारि हि तेजानियतसाहिवसरोखदुनीदिनदिनदारकी ॥ नारिनरारतपुकारतसुनैनकोऊकाहूदेवननिमि लिमोठीमुटीमारदी ॥ तुलसीसभीतपालसुमिरेक पालरामसमैमुकरुनासराहिसनकारदी ॥ ३१८॥ ॥ इतिश्रीतुलसीदासकृतकवित्तरामायणसमाप्त ॥ ॥ श्रीलक्ष्मीनारायणार्पणमस्तु ॥ ॥ शुभमस्तु॥ .