Bharti Bhawan Liabrary, Allahabad

Hindustani Gayaki Kramic Pustakmalika Bhag 1

Pandit Firoz Fram Ji

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Text Book on the Practical Study
of Indian Music.
Compiled specially for the use of High Scools & Colleges,
हिंदुस्तानी गायकी
क्रमिक पुस्तकमालिका
अर्थात्
तानालापसह गाने बजाने को सहलतासे सिखलानेवाली हिंद भाषा की
क्रमिक पुस्तक
भाग १ ला.
इस प्रथम भाग में १५ प्रचलित आलापयोग्य रागों के १७ चुनीदा हिंदी
पदें उन के रागांग विस्तार, स्वरविस्तार, तान और बोलतानों
के साथ बहुत गमकदार नोटेशन में दिया है.
लेखक और प्रकाशक:
पंडित फिरोझ फ्रामजी ( संगीतशास्त्री
Research Scholar & Author of 80 Books on Indian Music:
३२२, मेन स्ट्रीट, कप, पुना.
सन १९३६
मूल्य ॥ रुपया

SHIVA HE (Modern Research ) Text Book on Shruti-Swaras of Indian Music. ( Compiled specially for the use of High Schools & Colleges.) ( भरतमुनि, साङ्गदेव प्रभृति प्राचीन महर्षियों के मत प्रमाण) * संगीत श्रुति-स्वर शिक्षा.. प्राचीन श्रुतिस्वरों का आधुनिक संगीत में कैसा व्यवहार होता है उस का बहुत विस्तारपूर्वक विवरण प्रश्नोत्तर पद्धति से इस पुस्तक में दिया है, जिसे संगीत के नये शिक्षार्थिओं को भी श्रुतिस्वर सम्बन्धी हर- एक बाबत समझना बिलकुल सुलभ होगा. सर्व संगीत निज्ञासुओं को इस पुस्तक का ठीक २ अभ्यास करना परमावश्यक है. मूल्य केवल रुपया १. ( Moderm Research Text Book on Classification of Ragas According to Ancient Murchana System. ( Compiled specially for the use of Schools and Colleges, ) प्राचीन मूर्छना अर्थात् आधुनिक शास्त्रीय थाट-पद्धति. इस पुस्तक में प्राचीन मूर्छनाओं में से ११ मूर्छनाओं में कईक आधुनिक थारों का और १७० रागों का समावेश प्राचीन शास्त्रीय पद्धति से किया है, और प्रत्येक थाट के स्वरों के श्रुत्यंतर, कम्पन- संख्या, परस्पर संवादादि का बहुत विस्तारपूर्वक विवरण दिया है, जिसे सब प्रचलित रागों के सचे सुरों का ठीक २ ज्ञान होगा. मूल्य केवल १२ आना

Text Book on the Practical Study
of Indian Music.
Compiled specially for the use of High Scools & Colleges.)
हिंदुस्तानी गायकी
क्रमिक पुस्तकमालिका
अर्थात्
तानालापसह गाने बजाने को सहलतासे सिखलानेवाली हिंद भाषा की
क्रमिक
पुस्तक.
भाग १ला. १५
इस प्रथम भाग में १५ प्रचलित आलापयोग्य रागों के १७ चुनीदा हिंदी
पदें उन के रागांग विस्तार, स्वरविस्तार, तान और बोलतानों
के साथ बहुत गमकदार नोटेशन में दिया है.
लेखक और प्रकाशक:
पंडित फिरोझ फ्रामजी ( संगीतशास्त्री)
Research Scholar & Author of 30 Books on Indian Music.
३२२, मेन स्ट्रीट, कॅप, पुना.
सन १९३६.
मूल्य शा रुपया.

Moona. B Science & Art must go hand in hand Importance of Systematic & Scientific Study of Indian Music. HTTAIT sla-FTT-TT ma, 5. 3. fà-FIT BETEIT, 5.8. 1511a posat 372pfa rata TIETU TE-tela, 82 291. You may be an expert singer, a Binkar or a Sitarist, but you will frankly admit that the practical skill that you have acquired, is purely through blind imitation like majority of musicians, and not by a systematic or scientific study of the art. Don't you therefore think it essential that you should also have a thorough scientific knowledge of what you sing or play ? If you at all do, then get the afore-said theory-books printed in Hindi language without any delay and study them properly. You will thereby come to learn many to learn many more items of musical interest and importance that you were quite ignorant of during all these years of your practical study. Rest assured that the theoretical knowledge you will derive, will far surpass the negligible cost you will have to pay for these books. An English chart of the Natural Scale of 22 Tones of Indian Music will be given free on application to the author. WESORA 322, Main Street, Pandit Firoze Framjee.

no of Indian music. In his present publication U OPINION EN of G. H. RANADE, Esqr. Professor of Physics, Willingdon College, Sangli, 28th March 1936. Mr. Firoze Framjee of Poona is well known in these parts for his selfless and untiring endeavours in in three different languages several valuable books illustrating with Chijas,' the high traditions of the art Shruti-Swara-Raga-Shastra ' he has succeeded in making sound presentation of the scientific aspect of Indian music, The book is bound to be of great help to students of Indian Music especially in understanding the pros and Cons of the Shruti problem. Due to the scanty internal evidence and the great distance of time between, the Shruti problem has always been a matter of controversy. But this does not mean that it need be given up for ever. It is in this spirit that fresh interpretations are always welcome. Mr. Firoze Framjee is to be congratulated upon having published the present book giving a new and almost convincing interpretation of the Shruti problem. Yours truly, Sd/-G. H. RANADE, Professor of Physics, Willingdon College. IOCO प्रस्तावनिका. प्राचीन तथा अर्वाचीन संगीतशास्त्र विषयक सब प्रकार की अत्यावश्यक बातें हमारे " भारतीय श्रुति-स्वर-राग-शास्त्र ग्रन्थ में कहीं गई हैं. तदनंतर प्रचलित ११५. रागों का शास्त्रीय वर्णन तथा उनके लक्षण-पीते हमारे राग-लक्षण गीतमालिका" पुस्तक के दोनों भाग में दिये गये हैं, जिसे संगीत विद्यार्थिओं को राग सम्बन्धी शास्त्रीय ज्ञान का पूरा बोध होगा. अब प्रचार में रागों के पदें जिस रीतिसे आलाप-तान के साथ गाया बजाया जाता है, वह अभ्यास के लिए इस " सशास्त्र हिन्दुस्तानी गायकी क्रमिक पुस्तक- मालिका" नामक ग्रन्थ संगीताभिलाषी पाठकों की सेवा में उपस्थित करने का सौभाग्य आज प्राप्त हुवा इस ग्रन्थ में प्रचलित ७० आलापयोग्य रागों के चुनीदा हिंदी ख्याल, ठुमरियां, वगैरह उनके रागांग विस्तार, स्वरविस्तार, तान और किसम २ के बोलतानों के साथ भिन्न २ ताल और लय में बहुत सरल व सुलभ नोटेशन में दिये हैं, जिसे नवसिखों को इस ग्रन्थ द्वारा अभ्यास करने में कुछ तकलीफ न होगी. सब पदों का संग्रह जनता के प्रस्तुत रुची के अनुसारही किया गया है. इस ग्रन्थ का लाभ संगीताभिलाषी स्वीओं को भी होवे इस उद्देश से निति-भक्ति वगैरह अध्यात्मिक विषयों के गायनों का चुनाव किया है. इस ग्रन्थ में लिखी हुई कईक पुराणी खान्दानी चीजें अन्य संगीत पुस्तकों में भी छपी है, पर हमारी गायकी उन्ही सब से उमदे ढंग पे गमकदार नोटेशन में लिखी गई है यह इस अन्थ का अध्ययन से स्पष्ट होगा. गायकी का अभ्यास सुलभ करने के हेतु से सहल और कठिन रागों की व्यवस्था क्रमवार की गई है. जिस किसी को आलाप -- तानसह गाना बजाना शीघ्रता से साध्य करना हो तो उस के लिए यह चार भागों का ग्रन्थ बहुत (३) उपयुक्त सिद्ध होगा. गरीब संगीत जिज्ञासुओं को कम दाम में एक-एक भाग का लाभ उठाना सहज हो इस हेतु से प्रत्येक भाग का मूल्य केवल रु. १॥ रखा है. एकत्र चारों भाग के पुस्तक का मूल्य रु. ४॥ है. डाक खर्च अलग. आज तक हमने करीब ३० संगीत पुस्तकें प्रकाशित किये हैं. यह हमारे पुस्तकों की लोक-प्रियता का प्रत्यक्ष प्रमाण और संगीत जिज्ञासुओं के प्रेम और सहानुभूति का ही सूचक है. ये पुस्तकों को प्रकाशित करने का मेरा यही अभि- प्राय है कि भारतीय संगीतविद्या और कला के उत्साही छात्रों की अभिलाषा पूर्ण होते हुए इस अमृतरूपी नादविद्या की भली प्रकार से उन्नति हो और सज्जन मेरे इस पुरुषार्थ को सफल करें. अन्तमें इस ग्रन्थ के प्रकाशन में गायनविद्या के आचार्यों से मुझे जो सहायता मिली है उसके लिये कृतज्ञताभाव व्यक्त करते हुए यह प्रास्ताविक निवेदन समाप्त करता हूं. आपका कृपापात्र, ३२२, मेन स्ट्रीट, कँप, पुना, ता. १५-११-३६.) पंडित फिरोझ फ्रामजी, संगतिशास्त्री. [इति प्रस्तावनिका समाप्त] आवश्यक सूचना. इस ग्रन्थ में हमारे राग-लक्षण-गीतमालिका के पुस्तक की स्वर- लिपि का ही अंगीकार किया है. रागांगविस्तार, स्वरविस्तार और नानों के सम्बन्ध में कुछ अधिक खुलासा नीचे लिखा है. रागांग विस्तार में जहां कोमा (,) लिखि हो वहां थोडा रूकना और जहां सेमिकोलन (B) लिखा हो वहां इच्छानुसार ज्यादा रूकना. स्वरविस्तार में जहां २ सेमिकोलन लिखा हो वहां २ प्रत्येक तान का टुकडा खतम हुआ ऐसा समझें. तानों में कहीं २ कोमा और सेमिकोलन लिखे हैं वे सिर्फ के अलग २ टुकडे बताते हैं. वहां रूकने का मतलब नहीं है, किन्तु जिस स्वर के आगे कोमा या सेमिकोलन लिखा हो वहां श्वास तोडकर फिर आकार कहने को आरम्भ करना चाहिये. यथाः- निरि गम, रिंग मध, | गम धनि, मध निसां, आs 5, आss, আS S, আS उपरोक्त तान में प्रत्येक स्वर को आधी मात्रा के अवकाश में उच्चारकर चार चार स्वर आकार में गाना. निरि गरि गम गम | धम धनि धनि सांड আS S S S | Sসা S আs S उपरोक तान में प्रत्येक स्वर को आधी मात्रा के अवकाश में उच्चारकर तीन तीन स्वर आकार में गाना. इस ग्रन्थ में दिये हुए पदों की तानों में स्वरों के नीचे आकार लिखा नहीं अतएव उपराक्त सचना अवश्य ध्यानमें रक्खें.

(4 (५) सारिम रिगप गपध पधसां आऽऽ आऽऽ आऽऽ आऽs जब त्रिताल के प्रत्येक खंड में चार मात्रा में बारह स्वर लिखा हो तब प्रत्येक स्वर को मात्रा अवकाश उच्चारकर तीन तीन स्वर एक मात्रा में गाना. के में सारिंग रिंगप । गपध पघसां आऽऽ आऽऽ आऽऽ आऽऽ जब त्रिताल के प्रत्येक खंड में चार मात्रा में छे स्वर लिखा हो तब प्रत्येक स्वर को मात्रा के अवकाश में उच्चारकर तीन तीन स्वर दो मात्रा में गाना- सारिगम् पधनिसां, सांनिधप गरिसा, आsss आsss S S जब त्रिताल के प्रत्येक खंड में चार मात्रा में १६ स्वर लिखा हो तब प्रत्येक स्वर को मात्रा के अवकाश में उच्चारकर चार चार स्वर एक मात्रा में गाना. एवं त्रिताल के प्रत्येक खंड में चार मात्रा में २४ स्वर लिखा हो तो के अवकाश में उच्चारकर छे स्वर एक मात्रा में गाना. विलंबित लय के पदों के तानो में त्रिताल के प्रत्येक खंड में १६ किंवा २४ स्वर लिखा जाता है. प्रत्येक स्वर को है मात्रा इसी प्रकार कोईभी ताल में उस के खंड के मात्रा की संख्या के हिसाब से सब स्वरों को गाना बजाना. जो पद विलंबित लय से गाने का है वहां विलंबित करके लिखा है. इतर सब पदें मध्य लय से गाना बजाना. [इति आवश्यक सूचना समाप्त ]

संगीतलेखन के चिन्ह परिचय,
मंद्र सप्तक के स्वरः-प, ध, नि, इ.
तार सप्तक के स्वरः- सां, रि, ग, इ०
मध्य सप्तक के स्वरः-सा, रि, ग, म, प, ध, नि.
अतिकोमल या कोमल स्वरः- रि, ग, म, थ्, नि.
( राग के नियमानुसार कोमल या अतिकोमल स्वरों का प्रयोग करें.)
तीव्र या तीव्रतर स्वरः- सा, रि, ग, म, प, ध,
नि.
लघु काल के स्वरः-सा, सारि, सारिंग, सारिगम्, इ.
अधिक मात्रा, अवग्रह चिन्हः-s
अधिक मात्रा, विश्रान्ति चिन्ह:- 1
सम का ताल:-= । सादी तालः-२, ३, ४) काल (खाली):-
ताल खंडकी पूर्णतादर्शक चिन्ह:-।
ताल के आत्त की पूर्णतादर्शक चिन्हः- ॥
। ये चिन्हों के भितर के स्वर दुबारा गाना बजाना.
:
पग अथवा पग-मींड के राह से स्वरों का गाना बजाना.
रि
सा- मुख्य स्वर पर छोटे टाईप में लिखे हुए स्वर का स्पर्श प्रथम
करके मुख्य स्वर गाना बजाना.
(सा) = रिसानिसा. (रि)= गरिसारि. (राग के नियमानुसार स्वरों
का प्रयोग करें.)
* (अंतरा)- अस्ताई पूरी हुये बाद फिर आरम्भ से * यह चिन्ह
जहां बीच मे लिखा हो वहां तक गा बजाकर अंतरा शुरु करें.
[ इति संगीतलेखन के चिन्हपरिचय समाप्त ].

m रागवताल. पृष्ठ . .... Text Book on the Practical Study of Indian Music. ( Compiled specially for the use of High Schools & Colleges:) (आलाप, तान और बोलतानों के साथ) हिंदुस्तानी गायकी क्रमिक पुस्तकमालिका. (भाग १ से ४) un + प्रथम भाग के पदों की सूची. १५ पदे. १ प्रभुजी सुनियो अरज हमार. मांड-त्रिताल ११ २ बिन ति सुनो मेरि अब गिरधारी. अलैया-त्रिताल ३ रे मन समझ समझ पग धरिये. झिंझोटी-त्रिताल २१ ४ रे मोरे सैयां खता का हमार- खमाम-त्रिताल २४ ५ छब दिखला जा बांके सावरियां. खमाज-त्रिताल (विलंबित) २९ ६ बौंसरी कान्हा बनाई जमुना तट में. तिलंग--त्रिताल ७ तुम मावो प्यारे रब गुण. यमन-त्रिताल ८ सखियन संग बिहरे मुरारि बनवारि. काफी-त्रिताल ९ सुनिये मुरारि बिनति हमारी. धानी-त्रिताल १० मोरि गुय्यां नजरियां लागी. सारंग-त्रिताल ११ साई मेरी नैयां पार उतारो. जौनपुरी-त्रिताल ६२ १२ रचा प्रभू तूं ने यह ब्रह्मांड सारा. १३ सावरिया रे नाहिं पडत मैं का चैन. भैरवी-दीपचंदी १४ अब आयो शरन तुमारे. भैरव-त्रिताल १५ मथुरा न जावो मोरा कान्ह. पूर्वी-त्रिताल १६ काहे बजाई बीन सावरे. सोहनी-त्रिताल ९२ १७ ब्रजपति जागो भोर भई री. हिंडोल-त्रिताल [इति सूचीपत्र समाप्त ] नोट- एकत्र चार भागों के पुस्तक, मू. रु. ४॥. प्रत्येक अलग भाग, मू. रु. १॥ ३२ ..... भैरवी-दादरा ७० ..... ८० ८७ marati ...

शुद्धिपत्र. पृष्ठ. सा ऽ नि साबि १ गपम् । विषय. लाईन. अशुद्ध २० ( रागांग विस्तार नं. २) २ सानि २० (स्वरविस्तार) सानि ३५ (अंतरा) सा 555 ats ss1 ३६ ( नोटेशन) ३ रि नि सो नि। रि'नि सौ नि। म् नि प पम् नि प री का न्हा ब री का न्हा ब ३७ (रागांम विस्तार नं. २) पनि ४२ (नोटेशन) साsss। सो sss ५० (नोटेशन) गपम्। (रागांग विस्तार नं. ३) सांग सांग २ रि नि सा रि' नि सा ५३ (नोटेशन) गरिं मंगं । गरि मंगे। ५७ पनि । पऽपि ६० (रागांग विस्तार नं.२) पधसा पसा; ६७. (रागांग विस्तार नं. ३) रिम् ग रिम् ग्; ६८ (रागांग विस्तार नं. ५) धप ध् प 5 ( ३ ) जौनपुराः- रिम् , ९२ (स्थायी) निरिं सांनि, ९३ (अंतरा) निरि साग निरिं सांग १ १ २ १ ७० रिम्, ४ ८ नोट-शुद्धि के मुताबिक उपरोक्त गलतियां प्रथम सुधारकर फिर पढने की बिनती है. छपे हुए टाईप में और कुछ गलतियां दृश्य हो तो पाथक महाशय अपनी बुद्धि से सुधार लेवे. [इति शुद्धिपत्र समाप्त]

*KISEKSISEASE
हिंदुस्तानी गायकी
क्रमिक मालिका.
पुस्तक
(प्रथम पुस्तक)
राग मांड.
रागांगविस्तार.
(१) सारि ग (सा) 5; सारि म् गऽ, सारि ग (सा) 5॥
(२) सारि म्प ध , पनि धप म ग 5, सारि ग (सा) s ||
(३) गम् पध नि पथ सां सांरि सांनि धs, पनि धप म् ,
ग 5, सारि ग (सा)॥
( १ ) गप धनि पध सा ऽ निध पध सां ; पध सांरिंग सापध
सांरि मंग रिंग सा; सांरिं सांनि धs, पनि धप म् ऽ गs,
सारि ग (सा); रिम् पध म्प सा॥
स्वरविस्तार
सारि मग रिंग सा 5; सारि म्प धप म्ग रिंग सा 5; सारि म्प निप
धम् पग मरि गसा रिंग सा; निसा गम् पध सा (अथवा) सारि म्प धनि
पध सांऽ निध पम् गसा रिग सा; निसा गम् पध सांरिं गंग सांरि गम् गरि
सांनि धप मग रिसा, रिम् पध सा ।।

हि. गा. क्र. पु. मा. प्रथम पुस्तक. उपयुक्त सूचना. उपरोक्त रागांग विस्तार में तानों के जो छोटे २ टुकडे लिखें हैं वे इस राग के कोईभी पद में उस के तालानुसार रचाकर गा बना सकते हैं. यह बात ठीक २ समझने के लिये आगे लिखा हुवा त्रिताल का पद का उदाहरण नीचे दिया है. म् ग ग सा 5 |रि रि म s प्रभु जी सु नि यो s . ३ सो ऽ 5 S सारिम् ग 5, सारि ग सा s, | सारि म्प धs, आs 5 5 5,आs s ss, आssss मा 5 ऽर ३ म् पनि धप म् । ग 5, सारि ग| सा, रिरि म प ध प ध ss, आss s, सुनि यो । ITS S SS साss S माऽऽऽर गम् ध नि पध सा sss, | सारिं सांनि धs, s s s, 3915 S S s, 31TS S SS S पनि धप म् । आ5 S SS ग 5, सारि ग सा, रिरि म् | प ध प ध S S 37155 s, सुनि यो 5 अ र ज ह सा ऽ ऽ सा माSSS शेष तानें आगे दिये हुए पद में लिखी हैं सो देखिए. इसी प्रकार इस पुस्तक के चारों भाग में लिखे हुए रागांगविस्तार तथा खरविस्तार की छोटी २ तानों को कोईभी ताल के पदमें अप - अपनी इच्छानुसार ठीक २ रचाकर गाना बजाना, जो बार बार लिखा नहीं.

राग-मांड. मांड - त्रिताल. प्रभुजी सुनियो अरज हमार, हम बालक तुझे शरण पड़े हैं, लिजियो बेग उबार.- प्रभुजी हमरी मंद मति शुद्ध होवे तुमसे, माया प्रबल तुमार.- प्रभुनी रि ग ग सा s|रि रि म् जी सु नि यो । म S - -- सो ऽ ऽ सा माSS ऽर म् म् म् । ह म S bar T ल क तु शे ३ प म् | पध ऽप धसां |ध रि'सो नि ध प ध पडेss हैंss लि जि यो 5बे 5 ग उ म् । प म् पध निसा निव पध | मग रिंग साs रिरि arss ऽ र प्रऽ भुऽ जी सु नि यो । (अंतरा) (सा) 55 सौ सांनि धप धनि सी सानि धप धनि सौम् प ध | सां सां सां सा SS ST 35 S SS है म री मं द म ति मा प ध सो शुद्ध हो वे रि' सांरिं ग (सा) 5/5 मम् प ध | सां सा सो सो तुs म से ss हम री s मं द म ति S पुध सा कि सुरि मे सिंग सा| 5 मा या प ध सा रिसारिं मंगं रिंग सा शुद्ध हो वे तुऽ मऽ सेऽ ऽ प प ध रि' प्र ब ल तु म् सो नि ध ध म ग सा s|रि रिम् s| प प पध प्र भु जी ऽ | सु नि यो 5 | अ 5 जे हऽ माSS र १२ हि. गा. क्र. पु. मा. प्रथम पुस्तक. स्थायी. मार 5, गम् पध | सांनि धप मग रिसा । सुनियो अरज ह गम् पध निरिं सांनि । धप मग रिसा निसा । सुनियो अरज ह गम् पध सारि गरि । सांनि धप मग रिसा । सुनियो अरज ह मा ऽ ऽ र । प्रभु जी ७ । सारि मग रिंग सा, । सारि म्प धप मग रिंग सा, सारि म्प । निप धम् पग मरि । गसा रिंग साs, । निसा गम् पध गम् पध निसां निध पम् । गसा रिंग सा । सुनियो अरज ह मा ऽ ऽ र । प्रभु जी । निसा गम् पध, गम् । पध निसां, पध सारि गंगं सांरिं गम् गरि । सांनि धप मग रिसा । सुनियो अरज ह मा ऽ ऽ र प्रभु नी । निसा गम् पध सारिं । गम् गरिं सांनि धप मम्, गम् पध सारिं । गरिं सांनि धप म्म् । गम् पध निरिं सांनि । धप म्म् , गम् पध सांनि धप म्म्, गम् । धप मग रिसा निसा । सुनियो अरज ह मा 5 5 र । ग रिंग मग रिंग । ध पध निध पध । रिसारि गरि सांरि ग रिंगं मंग रिसां,। सांरिं सांनि सांनि धनि । धप धप म्प म्ग । मग रिंग रिसा रिसा, निसा गम् पध निसां । निध पम् गरि सा। सुनियो अरज हमार । अंतरा. " हमरी मंद मति" सो s s s । ऽ ऽ ऽ ऽ । गप धनि पध सा । ऽ ऽ निध पध सौ ऽ ऽ ऽ । ऽ ऽ, पथ सांरिं । ग सांss, | पध सांरि मंगं रिंग राग-मांड. सा 5 ss, | सांरिं सांनि धs, | पनि धपम् । ग, सारि ग सा 5 s s, I रिम् पध म्प सा । हमरी मंद मति. ratnang सारिं सांसां रिसां निध। धनि धध निध पम् । मप मम् पम् मग। सारि गसा रिंग सारि, मम् रिम, पप म्प, | धध पध, सांरिं सांसां । हमरी मंद मति ऽ धध पम् गरि । सारिरिं सांनि धप । मग रिसा, मम गरि । सांनि धप मग रिसा, रिंग सारि, म्प रिम् , । पध म्प सोऽ। हमरी मंद मति सो सांनि धप, नि। निध पम्, ध धप । मग, प पम् गरि, म् मग रिसा निसा, साग रिम् गप म्ध । पनि धसां निरिं सांगं । गंसां रिनि सांध निप । धम् पग मरि गसा, सारि रिम्प म्प | धप धनि धनि सौ। हमरी मंद मति शुद्ध हो वे । तु म से 5 । गम् पध सांरिंग। रिरिं सां सां, निनि -- ऽध ध, पप ऽम् । म्, गग ऽरि रिसा, । निसा गम् पध सांरिं । गंगं सांरिं गम् गरि सांनिधप मग रिसा,सारिं सांनि धप म्ग। रिसा, सांनिधप मग । रिसा, धप मग रिसा, पम् गरि सा, निसा । गम् पध सां। हमरी मंद मति सारि सांनिसांनि धनि। धप धनि पध निसां,निसां निध निध पधा पम् पध म्प धनि, धनि धप धप प । मग म्प गम् पध, । पध पम् पम् गम् । गसा रिंग सारि गम्, मग रिसा, निसा गम्,। साग म्प, 'गम् पध। सांसा, गम् पध | सा सा, गम् पत्र सां 5 5 5 । प्रभुजी सुनियो अरज ह हि. गा. क्र. पु. मा. प्रथम पुस्तक. बोलताने. म् पध निसां 5 सा नि सा (५) 5 | पध प ग : यो । S ATS S Sर S S S है (सी) s s s|s s नि रि' सो ऽनि धम् ७ प ध मा s 5 से नि । यो ऽ रे अ5 ज है SSS - पध निसां इस मा गप धनि ध ग म प ध नि योऽ ऽ रे । S ह सो s s सा पध पध रि'निसा निध पध | 5 गम् पध मा SS र | रेऽऽ SS सुनियोss 5 अर ज ह an सा मा साघ - s सो SS र S S SS H सो नि सु नि यो ऽ SSSS गप धनि पध सांनिसा धs सा धs s| सुऽ ऽ ऽ ऽनि यो यो sss ऽ पध सारि ग सांरि गरि सो s gs sls S SS S S 5 निसां निध पध रि'सा sss सां 5 s s|सा नि साध 5 म प ध निssss SS S सु नि यो 5 अन है यो पध निसा 5 सो मा S Sर सा । सा सा ऽ ध ऽम् 5 रि । मा 5 ss S S S S रि ग 5 रिंग |सा, गम् पध निसां| निसी (घ) म् 5 प ध र, रेऽऽ 5 सुनि यो Sअ 5 जे है S S S 5 सारि म्प धनि पध | सां सां निसां ध | ऽ निसा निध पध | 5 म् पध KTS S SS ऽ ऽर रेऽऽ रेऽ 5s सुनि योऽs 5 अ जे ह . सा ऽ (अधिक बोलतानों के लिए हमारी "दिलखुश उस्तादी राग- अल्हैया बिलावल. 'सा 5 सा निरिं सांनि धसां निध पनि धप म् 5 | ग म प ध ssर रेड s सा मा Ss र गायकी" पुस्तक का द्वितीय भाग देखिए.) मा SS हमा S SS सा * राग अलैया बिलावल.. रागांग विस्तार. (१) गरि सा 5, सा रि 5 सा 5; ग रि, ग प म ग म् रिs, सा॥ प नि (२) सा (सा) नि.प; सासानिध ऽनि सा; रि सा 5; ग प म ग म् रि सा ॥ (३) सा रिग म् रि 5 सा 5; गरि ग प ध नि ध प म् गम् रिऽ सा॥ (१) ग प ध नि सा 5; सा (सी) ध नि प 5 ध गम् रिs; ग पम् गम् रिसा॥ (५) प प नि नि सा ऽ सां; स ग ग गरि' सा; 4 म् गरि सासां (सा) ध नि पs, ध ग म रिs; प नि रि नि ग प म ग म रि सा; ग प ध नि सा ।।

हिं. गा.ऋ. मा. प्रथम पुस्तक. स्वरविस्तार. सारि गरि सा5; सारि गप मग रिसा 5; सारि गप धनि धप मग रिसा ; सारि गप धनि सो धनि धप मग रिसा (अथवा) सारि गरि गप धनि सांनि धप मग रिसा 5; सारि गप धनि सांरिं सांनि धप मग रिसा 5; सारि गप धनि सारि गरि सांनि धप मग रिसा निसा 5; सारि गप धनि सारि गम् गरिं सांनि धप मग रिसा (अथवा) सारि गरि गप धनि सांरि गम् रिसां निसां धनि धप मग रिसाs; सारि गप धनि सांरि गरिंगपं मंग रिसां निध पम् गरि सा (अथवा) सारि गप धनि सारि गम् पम् गरि सांनि धप मग रिसा निसा, गरि गप धनि सोऽ॥ अल्हैया बिलावल-त्रिताल. बिनती सुनो मेरी अब गिरधारी, आया शरण तुमारी. मेरे अवगुण नाथ बिसारो, लीजियो बेग उबारी.-- बिनती ग पनि धनि विनती न ती सु ३ S सा sss ध न प 5 |ग रि.प म् ग रिप म्ग रि सा नो sss री अब गिर रीड में S २ घ गड रि ग प प नि नि सांनि धप मग रिंग/पनि पनि आ 5 याऽ ऽश र ण तु | माऽ ऽ रीऽ बिs न ति ऽ ऽसु प (अंतरा) नि सा ऽ ऽ नि | धनिसां 5 सौ s|s ss ग प ध नि 771 ss sl Ass s @ ss ss 5 में 5 रे S S राग-अलहैया बिलावल. नि रिं सां सां सां सौ सा ग गं गरि'सा सारि गरि अ व गु ण ना 5थ बि सा 5 रो ऽ लिज यो ऽ सा (सा) ध प गप धनि सारिं सांनि धप मग रि, ग | प नि ऽ नि बे 55 री, बिन ती s स्थायी. 5 गाउाबा S S स नो s s s | मे 5 री । सारि गप मग रिंग बि नती सु । नो sss 155, सारि गप । धनि धप मग रिबि । नती सु नो ऽ ऽ ऽ । सारि गप धनि सा। धनि धप मग रिबि। नती सु नो ऽ 5 5 5 । सारि गप धनि सांरि । सांनि धप मग रिबि । नती । - नो 5, सारि गप। धनि सांरि गरि सांनि । धनि धप मग रिबि । नती सु मोऽs ऽ । सारि गप धध पम् । ग, धनि धप धध । पम् ग, धनि सांनि धप धध पम् ग, । धनि सांरिं सांनि धप । धध पम् गरि, बि। नती सु नो 5 5 5 | गप धनि धप, गप । धनि सांनि धनि धप,। गप धनि सांरिं सांनि धनि धप, गप धनि । सांरिं गम् गरिं सांनि । धनि धप मग रिबि । नती सु । नो s s s| सारि गरि सा, सांनि । धनि सांनि धप म्ग । रिसा, गरिं सांनि धप मग रिसा, पम् गरिं । गंम् गरिं सांरिं गार। सांनि धप मग रिवि । नती सु नो ऽ ऽ ऽ । गग रिंग, पप गप,। निनि धनि, सांसां निसां, गरिं सांनि धप धनि May सांरिं सांसां रिसां सांरिं । गरिं गपं मंग रिसां । निध पमू गरि, बि । नती सुनो मेरी ।

हि. गा.ऋ. पु. मा. प्रथम पुस्तक.
अंतरा "मेरे"
अ व गु ण । सां s ss, धनि सां s s। मेरे
अ व गु ण । सरिसा , । ग मरिं 5 सां। 5 s, ग 4
म् गरि' सा । ss, सारि'। सो ध निप , | धग मरि ,
ग पम् ग । म् रि सा 5 । गरि गप धनि सा । मेरे
अ व गुण । धनि सांध निसां धनि । सांरिं सांनि धप धनि । सांरिं मम् पंम गरि
।
सांनि धप मग रिसा, । सारि गरि गप गप । धप धनि धनि सौ । मेरे
।
अ व गुण । गप धनि सांरिं गरि । सांसां निनि धध पप ।मम् गग रिरि सामा,
रिंग पप, गप धध, । पध निनि, धनि सांसां, । निसां रिंग मंग रिसां । मेर
।
अ व गु ण । रिंग मंरिं गम् रिसां । धनि सांध निसां धप । रिंग मरि गम् रिसा,
--
सारि गरि गप गप । गप धप धनि धनि । धनिसांनिसांगं गरि । सांनि धप, सांरिं सांनि
।
धप, धनि सांनि धप, । धनि धप मग रिसा, । गरि गप धनि सा । मेरे
अ व गु ण । सारिं सांनि सांनि धनि । धप धप म्प मग । मग रिंग रिसा रिसा
सारि रिंग गप पध । धनि निसां सांरिं रिंगं । पंपं मंग रिसां निध । पम् गरि गप धनि
सांरि गंम् गरि सांनि । धप मग रिसा, सारि । गप धनि सा, गप । धनि सा, गप धनि
सा
5 5 | गप धनि सांसां सांसा | सांग गंम् गरिं सां सांरि गरिं सांनि धप
मेऽ रेऽ अव. गुण नाऽ थबि साऽ रो लिजि योऽ बेऽ गउ

रांग- अल्हया बिलावल. १ ध २ ध धनि धप मग रिंग पनि नि सांs, ऽग पनि ऽनि सोs, ऽग पनि ऽनि बाs 5 रीऽ ऽबि नती ऽसु नो s, Sबि नती ऽसु नो 5, ऽबि नती ऽसु - - - सा ss नि धनिसां 5 सा || नो ss मेss s री - - - H S - वोलताने. साग रिंग रिप गप पनि धनि धसां निरिं निसां निध निध पध। मग रिंग पनि धनि बिन ऽती सुनो 5) मेऽ रीअ बगि र. धाऽ रीआ ऽया 5 शऽर्णबि ऽसु S प ऽ - सा नो ऽ S ध नि 5 मे ऽरीs SHE गै रिसांऽरिं सांनि बिनती ऽसु नोड SS F- सांध निध पध पग पम् गम् रिसा रिसा | ग रिप ऽग ध| पनि ऽध सो रि' ऽमे ऽरी अऽ बगिरधाऽ रीआ ऽया श ऽर्ण ऽतु मा रीबि ऽन ती सु S सा 5 नो. S ध नि पs गरि प म् | गरि सा 5 मेरी ब गिरधारी 5 रच S S अ गरि पग धप निध | सांनि रिसा गरिं सांनि | धप म्ग रिसा, गप | धनि सा गप धनि बिन तीस नोऽ मेरी अब गिरधारी आया शरणतु मारी, बिन तीसु नो बिन तीसु सा 55 S ध नि पs | सो ऽरिं सांनि धप | ध नि धप मग 5 रीs बि ऽन तीs सुऽ नो ऽ मेऽ रीs नो S S पऽध मग रिसाग रिप ऽग| धऽप निध निरिं सांनि धप गप धनि अब गिs 5 धा ऽरी आ ऽया श र णऽ तुs माऽ रीऽ बिन तीसु S सा नो 5 5/सारि गरि गप गप गप धप धनि धनि धनि सांनि सांग गरि बिs इन 5 ती सुऽ ऽनो 5 ऽरी 5 अs 55 s मेs

२०
हिं. गा. क्र. पु. मा. प्रथम पुस्तक.
सानि धनि धप धप मग रिसा, धप मग सांनि धप गरिं सांनि धप मग पनि धनि
बऽ ऽगि 5 Rs)घाऽ रीऽ, आऽ ऽया शs Sर णऽ तुs | माऽरीबि नती ऽसु
at S S s धनि पनि सांरिं सांनि धनि | रिं सांनि सांध निध
'नो sss
s s| मे री बिन तीसु नोऽ मेरी 57 बगि रधा ऽरी
१
S,
पध पग मरि गप मग रिसा, गप धनि | सांड, गप धनि | साs, गप धनि
आऽ याश ऽरणतु माऽ रीऽ, बिन तिसुनो s, बिन तीसु
चिन तीस
सो ऽ
नो ss
S
5
S
राग झिंझोटी.
रागांग विस्तार.
(१) सा रि ग म् गरि सा 5, रि सा नि ध नि ध 45;
ध सा 5; रिम् ग॥
(२) सा रिम् ग5; गम् प ग म ग s; ध नि ध प ऽम् प
म् ग5 रिरि पम् ग 5; सा रिग म् गरि साऽनि
ध, घसा रिम् ग ॥
स्वराविस्तार,
पध सारि गम् गरि सानि धप धसा 5; पध सारि गम् पध पम् गरि
सानि धप धसा 5; पध सारि गम् पध सांसां निध पम् गरि साबि धप धसा 53B
पध सारि गम् पध निसां रिंगं म्पं मंगं रिसां निध पम् गरि सानि धप धसा 5 ॥

राग - झिंझोटी. झिंझोटी-त्रिताल. . रे मन समझ समझ पग धरिये, इस जग में ना, अपना कोई, परछाये सो डरिपे. - रे दौलत दुनिया कुटुम कबीला, इन सों नेह न करिये, राम नाम लुख धाम जगतपति, सुमर बेग अब जासों तरिये. - रे ध सा रि ग S म न ३ पम् ग रिम् ग सा रिम् ग रिनि सा गरिनि सा | सा सा ग ग रियेड स म झ ग ध स 5 प ध सारि ग प र छाऽ 5 ना 5 पम् गम् गरि | सा नि सा रिनि में 5 नहिं अ ₹ 5 गम् प प ध मग म् गरि सानिध, प येssss सोंड डड ये 5s, अ (अतरा) पम् गरि म ग सा रिसा 5 ग ग मी दौ प सा रि ग S मन -पप 5 दु नि या 5 स स म प 5 लत ग म प ध | ग प न्ग रिंग | ग म पध सां नि ध प ध कु 8 म क बी 5 ला इन सोंs 5 ने 5 ह न नि 5 | सारि गप म् ग | ग 5 रि गम् | पध म् ग रि क रि ये 5 म सु ख S555 TS मना S . नि । सा रि | नि सा निधप नि. ध प ध सा पति सु म नि s रि गरि 5 ग.अब घाम ज म र

हि. गा.क्र.पु. मा. प्रथम पुस्तक.
गम् पम्प ध | मग म ग रिसा नि ध प सा रि ग
सांss त रि ये 55, अ
GTIS SS
न
ताने.
धसा रिरि, सारि गग, । रिंग रम्, गम पप, । पम् गरि सानि धप । रं मन
पृध सारि गम् पध । निध पम् गरि गम् । पम् गरि सानि धप । रे -
मुनि धनि पध पसा। साम् गम् रिंग रिप । सानि सारि सानि धप । रे मन
।
म्प ऽध पम् गरि । गरि ऽप मग रिंग । निसा ऽरि सानि धप । रे मन
।
स म झ स । सारि गम्, रिंग म्प, । गम् पध, म्प धन्,ि । पध निसां, नि सारिं,
सांरि गम्, रिंग स्पं, । पंम् गरि सांनि धप । मग रिसा निध प । रे मन
मप म्ध पनि घसा । निद्रि साग रिम् गप । म्ध पनि धसां निरिं । सांग रिन् गपं गम्
रिंग सांरिं न्सिां धीन् । पध म्प गम् रिंग । सारि निसा धनि प । रे मन
१
निध ऽसां निध पम् । पम् ऽध पम् गरि । गरि ऽम् गरि सानि । सानि ऽरि सानि धप
२
धसा रिंग प, सानि । ऽरि सानि धप धसा । रिंग प, सानि ऽरि । सानि धप धसा रिंग
प555॥

राग-खमाज.
+ राग खमाज.
रागांग विस्तार
मू
प
प
(१) नि सा गऽ म् ग ग म् नि ध , म प ध म ग 53;
म् गरि सा ॥
(२) नि सा ग म् 5; प ग ऽ म् s; म प ध गऽ म् 5;
नि ध , म प ध ग 5; म् गरि साऽ ॥
(३) ग, म् ग रि.सा ; नि ध म प ध गऽ,म् ग रि साs;
ग म नि ध 5; ग म सा 5 नि ध s, म प ध म्
ग; 4 s, म् गरि सा॥
म् नि
(४) ग म ध नि सा नि सा s, पनि सां रि' सां नि धs;
नि
सो ऽगम् गरि' सो sनि ऽ सां सां ध सां नि धs,
सां
म् प धम् ग 5; म् गरि सा ।।
स्वर विस्तार
(१) निसा ग मग रिसा 5, निसा गम् पम् गरि सा 5; निसा गम् पध
पम् गरि सा 5; निसा गम् पध निध पम् गरि सा ( अथवा ) निसा गम् पनि
निध पम् गरि सा 5; निसा गम् पध निसां निध पम् गरि सा S; निसा गम् पनि

हिं. गा. क्र. पु. मा. प्रथम पुस्तक. सांरिं सांनि धप मग रिसा, निसा गम् पनि सांगं गरिं सांनि धप मग रिसा निसा ( अथवा) गम् पध निसां गरिं सांनि धप मग रिसा 5; निसा गम् पनि सांगं मपं मंगं रिसां निध पम् गरि सा ( अथवा ) निसा गम् पध निसां गंमं पंम् गरिं सांनि धप मग रिसा निसा ॥ (२) निसा गम् धनि सांरिं सांनि धप मग रिसा 5; गम् धनि सांग रिसां निध पम् गरि सा 5; निसा गम् धनि सांरि गम् गरि सांनि धप मग रिसा ॥ (३ ) निसा गम् पध सांरि गंग रिसां निध पम् गरि सा 5; निसा गम् पध सांरि गंम् गरिं सांनि धप मग रिसा ( अथवा ) गम् पध निसां रिंगं मंगं रिसा निध पम् गरि सा ॥ नोट- इस राग के आरोह की स्वर रचना अनेक प्रकार से होती है. यथा :- (१) निसा गम् पध निसां, (२) निसा गम् पध सी, ( ३ ) निसा गम् पनि सां, (४) निसा गम् धनि सां. जलद तानें लेनेमें सवलता हो इस लिये आरोह में केवल तार सप्तक में ऋषभ स्वर कभी २ लगाते हैं. उपरोक्त तीसरा प्रकार देखिए. खमाज -त्रिताल. अरे मोरे सैयां खता का हमार, बोलत नाही ऐको बार, बिनति करत गई हार. अरे और जुलूम नो पिया करो नहीं, देना न दिल से उतार. -- अरे WAN राग-खमाज S घ प म ग सा गरि ग रे मोरे सै ऽ यां खता S २ प 5 पप पपध पध पधाग प ग प म ग सा ग रि ग मा र अरे s मोऽ रेड सै s यां ख ता S २ प S 5 S 5 मग पा । सा गम् रिंग S प मा SS 5 S S आरा बो लऽ तs ना S ही S S 45 पध पध | ग प मग रिंग निनि नि नि नि ए 5 कोड बा 5 र बिन s बिन त क नि सो नि त ग S र सांरिं निसां नि निध पध पs|s निनि नि नि नि नि नि नि सा नि ऽ र प्याऽ ऽ रे रे 55 बिन त क र ता सांरि निसांड, नि ध प गम् पध ग प म ग सा ग रि ग हाsss s मोऽ रेड सैड यां ख S का है (अंतरा) मू नि प SS S s मंग प ग म ध नि सी सो ऽ S S मा 5 S S s आर। औ ऽ र जु S S S ... म S sss निध निध | सा 5 555 5 नि नि नि | पध निसां ऽ ऽ s पि या क रोss 55 म्जो S S रो S 5 निसां निध प ध प S S न ऽ न ही 5 S से उ ऽ नि नि नि नि नि| नि नि नि सा नि 5 दे ना न न दि रि ऽ नि नि नि नि नि | नि नि सो नि ऽ दे ना न दि ल से सांरिं निसांऽ नि निध पध पs ताऽ ऽ ऽ प्याऽS S उ । सांरिं निसां 5 नि ध प गम् पध | ग प म ग | सा ग रि ग रेड सै ऽ यां रे ऽ मोड यां ख खाता ताड SS २ 5 का ६

हिं. गा. क्र. पु. प्रथम पुस्तक.
स्थायी.
4 s प पप 5 पध पध ग प म ग निसा गम् ग,ग म्प
मा ऽ र अरे s मोऽ रेड सै यां 5
आ5
S
S
।
S
S
धम् ग,ग म्प निनि । धप म्ग, गम् धनि । सांरिं सांनि धप म्ग, । गम् धनि सांग रिसा
निध पम् गरि ग । रे मोरे....ह
प प प प 5 पध पध ग प म् | गम् पध निध पम् ,
मा ऽ र अरे s मोऽ रेड सै 5 यो ऽआऽ s
गम् पध निसां निध । पम्, गम् पध निसां। रिसां निध पम्, गम्। पनि सांग रिसां निध
पम्, गम् पनि सांगं । मपं मग रिसां निध । पम् गप मग साग। रिंग प, साग रिंग
पपप
माऽ र अरे मोरे....ह
मा ऽ ऽरनिसा गम् प, गम् । पध म्प, गम् पध । निसां धनि पध मप,
१
२
गम् पध निसां सांरिं । निसां धनि पध म्प । गम् रिंग प, गम् । रिंग प, गम् रिंग
पपप
मा ७ र अरे मोरे....ह
मार S, निसा गम् । प, गम् ध, गम् । धनि सा, निसां गोमंगं रिसां सांरि सांनि
सानि धनि धप धपा म्प मग मग रिंग । रिसा निसा, गम् पध । निसां गम् गरिं सांनि
धप मग साग रिंग। रे मोरे..."ह
गम् गग मग रिसा, । धनि धध निध पम् । गरि सा, गंम् गंगं । मंगं रिसां निध पम्
गरि सा, निसा गम् । पप, गम् पध निध,। पध निसां गंगं सांरिं । गम् गरिं सांनि धप
मग रिसा साग रिंग । रे मोरे हमार

राग-खमाज.
अंतरा. " और जुलू
सानि सा, धनि पध । सांनि सां, निध पम् । गम् पध सांनि सानिध पम् गरि सानि
सा गम् पध निसां । गम् पध निसां ऽ । और जुलू
निसां निरिं सांनि , धनि । धसां निध, पध पनि । धप, म्प मध पम् । गम् गप मग रिसा,
निसा गसा गम् गम् । पम् पध पध निसा । और जुलू
sss s। म्जो s s । धनि सांध निलो धनि । सारिं सांनि धप भूग
रिसा निसा, गम् गग,म्प म्म्, पध पप, धनि धध, निसां निनि, सारिं सांसां, गम् गरि
सांनि धप मग रिसा, । निसा गम् पध निसां । और जुलू
सधि निप धम् पग । मग रिसा, साम् गप । म्ध पनि धसां निरिं । सामं गंप मंग रिसा
निध पम् गरि सा । गम् धनि सांध निसां । और जुलू
निसां रिंनि सॉरि निसां । रिसां निध पम् गरि,। गम् पग म्प गम् । पम् गरि सानि सा,
निसा गम् ध, धप । म्प नि, न्धि पध । सा, सांनि धनि रि,। रिसां निसां , मग
रिंसां निध पम् गरि । सा, गम् धनि सा। और जुलूम इ. इ.
बोलताने, " अरे मोरे....ह"
प ऽ गम् पध | नि ध प ग प म ग | सा गरि ग
मा र रेऽ ऽ ss मो
s मोरे से 5 यां ख ताड काह
q 5, पध सांनि | ध प गम् पध | ग प म ग सा गरि ग
मा डर, रेऽ ऽ
ss मोऽ रे5 से 5 यां ख
ता का ह
-

२८ हि. गा. क्र. पु. मा. प्रथम पुस्तक. पs, सां नि ध पप घाग प म ग सा गरि ग मार s, मो 55 sरे सैयां ख ताका ह M गम् पध निसां रिसा मा55 S ऽर ग प म ग सा गरि ग 5 मोरे सैड यांख 5 का ह पs, निसां रिसां नि ध पध पध ग प म ग सा s 5 मोऽ रेऽ 5 या ख मार s, रेऽऽ Sका है पनि सांग रिसां निसां नि ध प ध | ग प म ग सा गरि ग SS र रे 5 मोरे से 5 यां ख ता5 का है माSS गम् पधं निसां, पाप पध पधा ग प म ग सा ग रि ग माऽ ऽ ऽर अरे 5 मोऽ रेड सै 5 यां ख ता ताका ह S S पागम् पध नि धप धप गप मग रिंग पऽ गम् गरि गम् र| अरे मोरे सैऽ याख ऽता काऽहमा र सैड यांख ताऽ काह मा 5 S पसाग Sग म्प ऽध | पनि सारिं सांनि धप | गप गम् गरि गम् र) अरे ऽमो रेसै ऽयां खता काऽ हमा sर | मोरे सैयां खता काह मा प 5 प, पम् गम्, धप म्प, निध पध, सांनि सांनि धनि धप धप म्प मग मा 5 र, अरे मोरे सैयां खता काह मार बोल तना हि एऽ कोबा र अs १ २ मग रिंग प गम् |गरि गम् प, पगम् गरि गम् पप गम् गरि गम् रेमो डरे से यांखाताऽ कोहं मार, सैयांख ताऽ काह मार, सै यांख ताऽ काह प 5 s प|गम् पम् पध पध | सांनि सांनि पध सांरिंगसां निसां सांनि सांनि मा ss २ अरे मोरे सैयां खता| काऽ हमा डर बोल | तना ऽहिं एऽ कवा पघ सांरिं सांनिधप | गम् पध प गम् | रिंग, प गम् रिंग, | प गम् गरि गम् र विन तिक रत | गई हार सै यांख, ताऽ, सै यांख ताs, | से यांख ताऽ काह राग- खमाज. २९ प 5 S पगम् पप म्ग, म्प धध पम्, पध निनि धप, धनि सांसा निध, sरमोऽ ऽरे 5, सैs ऽयां खऽ ऽता काs मा 5 S पध सारिं गम् गरिं सांनि धनि पध सारिं सांनि धप मग रिंग | पगम् गरि गम् हSSS HIS S S S S ST यांख ताऽ काह S S पऽ पप F सा गरि ग 5 पध पध रेड सै ऽ यां ख मा र अ ऽ मोड S का ह गम् धप म्ग, पध सांनि धप, पध सांरिंगंनि सांरि धनि सांगा धनि म्प धप मग मोऽ ऽ रेऽ, सैऽ ऽ यांs, खऽ ऽता 5 काऽ ऽह 5 माऽ ऽ ऽर गम् पप मग रिसा गरि गम्' गम् पम् पध पध पध निध प गम् गरि गम् बोऽ ऽ लऽ तऽ नाऽ ऽहिं 5 एs/sको ऽ बाऽ ऽर से यांख ताऽ काह १ गम् पध निसां सां 4 गम् गरि गम् | प पम् गरि गम् | प पम् गरि गम् माऽ ऽ ऽ ऽर | सै यांख ताऽ काह मा रख- ताऽ काह मा रख ताऽ काह खमाज - त्रिताल. अरे मन काहे करे तुं गुमान, दौलत दुनिया माल खजाना, दो दिन का महिमान.- अरे यह संसारा झट पसारा, धर प्रभु का नित ध्यान.-अरे नोट "अरे मोरे सैयां" के नोटेशन में गाना बजाना. खमाज-त्रिताल (विलंबित) 0 ए छब दिखला जा बांके सावरियां, ध्यान लगो मोहे तोरा रे. बांकी रे चीत्रबन अरू नैनवा रसीले, चाल चलत मोहन बनवारी, कारे करूं कित जाऊं सजनी, ना माने जिया मोरा रे.

हि. गा. क्र. पु. मा. प्रथम पुस्तक. सां ssssगम् पधनिसां नि नि नि नि सा ऽ धनिधनिसाऽ निधपध ||q sss Ssssए छ ब दिखला जाsss S S S ૨ ३ ss मूग म्प ऽ धध | पधपध निरिसांs s s घसांनि ऽ ध प ssबा के 5 सावरीsss SS 5 SS S या ३ S 5 S 5 गम्पध निसांऽऽ पन्धिपधs पम् | गपम्ग रिंगऽऽ ऽ सारि नलगोsss s 5 मोहे SS S ध्या S 5 २ ३ सारिंग ऽऽरि ssरि रिगम् 5 गपम्गरिंग ऽऽसाऽ गम्पधानिस पन्धिपधs तोऽs 2755 S SSSSS ETSSSSS S S S INDIA २ मप धप 5 मम् | गपग रिंग 5 सारि ॥ रिप ध गप म् 5 नल गोssss s मोहे तोऽ ऽ राss ध्याऽS ३ मपम्ग रिंगऽऽ पनिसारि निसांss | धसां 5 नि निधपs रेsss हांऽऽऽ S S ध्याऽऽ लS55 गपम्ग रिंगsss सारि | सारिगरि रिंगम्ऽ ऽ गोsss s मोहे तोssss राssss S गपम्ग रिंगऽऽ पधसारि. गंसांऽऽ | घसां 5 नि निधपs रेsss s हांऽऽऽ S ध्याऽS न लSSS मपम्ग रिंगss 5 सारि || सारिगरि 5 रिगम्ऽ ऽ | गपम्ग रि गम्पध घऽऽ गोऽss s s मोहे | तोऽss 5 राssss | रेऽऽऽ ऽ हांsss 5 २ ग प 5 मुन् । गपम्ग रिंगss 5 साऽसारि || सारिंग 5 रिंगम् s ध्य 5 s नल | गोsss s s मोऽहेड | तोऽs s राऽऽ ऽ राग-खमाज. रिंगपम् गरिंगऽ साऽ,गम् पधनिसां रेsss 5 SSES S छब....तोरा रे (अंतरा) पप पधपध पम्गऽ म् | 5 गम्पध निसांऽऽ निनि बांकी रेऽऽऽ s ची sss S बन गम्पधनिसां ऽऽसांसां सां सां धनिधनिरिंऽ ऽ सां TSSSSS वा रसीsssss ले 5 ww ssनैन S ૨ निसांनिधपऽ ऽऽपध पम् गऽ म् | 5 पसां 5 निनि बांsssकीs ssरे ss चीsss बन 5 ऽऽसांसां सांसां सांसां निसांगरिं सानिधनिरिंऽ ऽऽसांss s ऽऽअरु नैंन वार | सीsss S ssलेड S २ sनि नि नि नि निरिसांनि धनिss sऽनिऽध सा 5 निसां S चा ल च ल तsss S ऽऽमोह 5 बन . निसांनिध पधss sssssनि नि नि निरिसांनिसांऽ ऽवसानि ऽधपऽ ऽऽम्ग s sऽरीsss का रे करुंsssss s sऽकित S aSSS m म् ध 5 धध पधसांरिं गंसांऽऽ धसांनिऽ धपऽऽ| प ध ग प जा ऊं 5 सजनीsss S नामा प्र S S गपम्ग रिंगऽऽ सा रािसारिंग s रिगम् | गपमग रिंगऽऽ साऽ,गम् पधनिसां नेssss नि या मोऽs 5 राsssssss SSTS S २ नि नि नि नि नि | सा ऽ धनिधनिसांड निधपध | सा ब दि व S S S ३

३२
हि. गा. क्र. पु. मा. प्रथम पुस्तक.
राग तिलंग.
रागांग बिस्तार.
( १ ) नि सा गऽ सा 5 नि सा ग म , गऽ सा S; नि सा
ग म प , म्ग 5 सा॥
( २ ) निसा गम् पनि ड, पम् ग 5; गम् पसी 5; नि पम् गई
पम् ग सा॥
(३) गम् पनि सो ऽ पनि सा 5; पनि सांगं 5, में म ग साs,
नि पम् ग; गम् पनि पसां निप sग ऽम् ग, सा:
गम् पनि सा॥
स्वरविस्तार.
गम् पनि पम् गसा 5; गम् पनि सांनि पम् गसा निसा 53; गम् पनि सारि
सांनि पम् गसा S; निसा गम् पनि सांगं सांनि पम् गसा निसा ; निसा गम् पनि
सांगं मंगं सांनि पम् गसा ।।
तिलंग-त्रिताल.
बौंसुरी कान्हा बजाई जमुना तट में, ब्रज जन मन हर्षाई.
राग तिलंग के सूर सुनाई, सुधबुध सब बिसराई.
ग म प सौ नि प/s
ग 5 म्
बौं s|सुरी 'का न्हा s
म्
फा
०
३
s s ग साग म्प मग म् | प सां नि प
प सां नि ५ | 5 ग 5 म
जा 5 s ई
रेऽ ऽ 'बाss
सु री ऽ का न्हा 5 ब

रांग-तिलग. म् S S S त s s| गम् पनि एम् गसा | ग म प नि | सां नि सो ऽ GL S SS s ईsज मु ना ट में 5 सां पनि सारिं सां नि नि नि नि | सा नि सा सा S S SS SSS 5 S SS न म म् S S निनि पनि पनि सांरिंसांनि पम् ग म् | प सां नि प ग 5 म TTS SS S ईs s बों ऽसुरी का न्हा ( अंतरा) sगम् पनि पम् गसा s नि नि | सां 5 सांसा जा s ईs रा ग ति । लंग के नि रिं सा गं गं मग रि' सांs प नि नि | सा सा पनि पसां सू ऽ र सुना ऽ ई s Sसु घ सब बिड सs S S SS S प बु ध म् निनि पनि पनि सांरिं| सांनि पम् ग म् | प सां नि प|s ग ss ईs 5 बौं । सुरी 5 का s न्हा s राsss ब स्थायी. जा , निसा गम् । पनि सांनि पम् गम् । सुरी कान्हा ब जा s, गम् पनि । सारिं सांनि पम् गम् । सुरी कान्हा ब गम् पनि सांगं सांनि । सांनि पनि पम् गम् । सुरी कान्हा ब गम् पनि सांगं मंग । सांनि सांनि पम् गम् । सुरी कान्हा ब ना ई । निसा गम् पनि सांगं । मंगं मंगं मंगं सांनि । पम् गम् पनि सांरि सारिं सारं सांनि पम् । गम् पनि सांनि सांनि । सांनि पम् गम् पनि । पनि पनि पम् गम् हि. गा. क्र. पु. मा. प्रथम पुस्तक. गसा निसा, निसा गम् । पनि पसां निप गम् । सुरी सान्हा ब जा ऽ ऽ ई। रे s s, म् । गम् पम् गम् प । म्प निप म्प सां - निसां रिसां निसांग । सांगं मंगं सांगं सांन्।ि पम् गम्, गंग गम् । म्म् पप पनि निनि सांसां सां, पनि सांरि । सांनि पम् , बौं ऽ । सुरी कान्हा ब जाई ।ss, गम् पनि ।सांग सांनि सानि पनि । पम् पम् गम् गस Powesome निसा, गम् पनि सांरि । सांनि पम्, बौं । सुरी कान्हा ब । नाई 5 । गम् गप मग, म्प । मनि पम् , पनि पसां । निप, निसां निरिसांनि, पनि पसां निप, म्प । मनि पम्, बौं । । सुरी कान्हा ब जा ऽ ई 51 मग गप म्म्, निप । पसां निनि, रिसां सांगं । सांसां, रिंनि निसां पप, निम् म्प गग, मग । गसा सासा, बौं । सुरी कान्हा ब जा ऽ ई s। मम् गम् गग, पप | मप मम्, निनि पनि । पप, सांसां निसा निनि, sang गंगं सांगं सांसांगिम् गंग मंगं सांसां,। निसां निनि सोनि पप, पनि पप निप मम्, गम् गग मग सासा, निसा गम् पम् गम् । सुरी कान्हा ब जा ऽ ई 5 | निसा गम् पनि निनि । निनि पम् गग सा, निसा गम् पनि सांसां - सांसां निनि पम् गम् । गसा निसा, गम् प,। म्प नि, पनि सां, निसां ग, मंग मंग मगं सांनि पनि निन् ि। निनि पम् , बौं । । सुरी कान्हा बजाई

राग-तिलंग
अंतरा
राग तिलंग के"
सू । र सु । ना 5 ई ऽ । सा sss | sss निप
निसां sss, | सांरि निसां । राग तिलंग के
गम् पनि सां । पनि सां 5 s, । सो गं ss, सांरिं निसी ss,
गं में गं सां । रि' नि सा 5 । राग तिलंग के
निसां सां निप निप । पनि ऽनि पम् पम् । म्प ऽप मग मग | सा, पम् ग, निप
म्, सांनि प, रिसां । नि, गंसां निसांऽ । राग तिलंग
निसां गंगं गंगं सांसां । निनि सासां सांसां निनि । पप निनि निनि पप । म्मू पप पप म्म्
गग मम् गग सा, । निसा गम् पनि सां । राग तिलंग के
ऽ पम् गम् , निप । म्प, सांनि पनि, रिसां । निसां, सांग मंनि सांग पनि साम् पनि गम्
।
साग म्प निसां, गम् । पनि सांग म्प निसां । राग तिलंग के
पनि सांप निसां, पनि । सांनि पम् गम् गसा, । मग पम् निपसांनि । रिसां मंगं पं गंसां,
१
सांरिं सांनि पम् गम् । गसा निसा, गम् पनि । सांसा, गम् पनि। सांसा, गम् पनि
MAmaya
सा sss | ss, बौं । । सुरी s का। 5 न्हा 5 ब

हिं. गा. ऋ. पु. मा. प्रथम पुस्तक. बोलताने. TSUS ss ग म् प सांs, गम् प ग म प नि सां जा ई ss बौं । सुरी , बौ s, बौंसु री का र ब नि सां नि | प_s, ग प सा s s| निसां निरिं सो नि s ई| रे 5, बों सुरी sसु री s s| बौऽ ऽसुरी का जा पनि पसा नि पम् ग, ग म प सां नि प|s न्हाऽ ऽब जा ई रे s, बौंसुरी 5 का 5 का न्हा बौं सु S प म् नि नि प | सां नि रि' सा | ग सां रि' नि | सा 5 ग म् री का न्हा ब जा ई रे ज s बौंड प मुना त ट म प सा s नि | 5 प, ग म्प प सां नि प ग 5 म् का | न्हा, बौंसुरी s का |s न्हा s सु री प ब ग S ग S S S s S S ई s| गम् पम्प नि | पनि सा निसां गं says s gs slits s FIS S S S S सांगं में गंम् गरिं | सांनि प, ग म प सा नि प ग म s बड जा ई, बौं । सु सुरी का । STS ब S S ग S S ग | साग म्प गम् पनि ई | रेऽ ऽ ऽ ऽ नि नि नि नि | 5 नि नि सुरी का | न्हा 5 ब S S पनि सारिं सांरिं सांनि | पनि पम्, ग म् | प सा नि प|s ग ऽ ग म ईऽs बौं sसु री ऽ का 5 न्हा 5 ब OTIS S रे S, ग 5 प जा ऽ ई, का का | 5 ग 5 म् | ग 5 ग, पऽ ग 5 म. 5 न्हा 5 बजा ऽ S FETS का ।

राग-यमन.
ग 5 ग 5 | गम् गप म् गम् | पनि पसां नि पनिसा निरिं सां नि
जा ऽ ई 5 बौंऽ ऽसुरी का न्हाऽ ऽब जा रेऽ ऽज मु ना
पनि पसां निप, गम् | पसां नि ऽप, गम् | पसांऽनि ऽप, गम् | पसां नि पग ऽम्
तऽ ऽट मेंs, बौं सुरी ऽका ऽन्हा, बौंऽ सुरी ऽका ऽन्हा, बौंऽसुरी ऽका ऽन्हा ऽब
ग ऽगनिसा गम् गम् गम्| गम् पनि पनि पनि । म्प निसां निसां निसां.
जा ऽई 5 बौंऽ सुऽ रीऽ का न्हाऽ बऽ जाऽ ईs जमु नाऽ तट मेंs
१
२
पनि सारिं सांरिं सांरि निसां निप, गम् पनि सांनि पम् ग, साम्प ग, सांनि पम्
ब्रज जन मन हर पाऽ ईs, बौंऽसुरी काऽन्हाब जा,कान्हाब जा,काऽन्हाब
ग S
जा ऽ ई ऽ
राग यमन.
रागांग विस्तार.
सा
(१) ग 5 रिऽ सा s, नि रिऽ सा; नि , रि नि गऽ ;
रि
गरि , नि रिसा 5॥
ध
नि
asan
(२) नि, रि नि नि ध प म ध नि धनि
ग
रि; नि रिग 5; रिग s रिs; ग म ग , रि s;
नि
ध नि रि सा ॥

३८
हि. गा. क्र. पु. मा. प्रथम पुस्तक.
म
(३) नि रि ग म प 5; पग प ध प 5; म ध नि ध प;
सा (सा) नि धs, म ध म नि ध प प (प) मग 5,
रिग रि ; निरि गम पs, रिऽ सा ; नि रि सा 5 ||
पनि सा
(४) प ग प धप सो ऽ साs, निरिसा 5; म ध निरि'
सां
गरि', निरि' सा; नि रि' ग म प रि's, सांs;
सा (सा) नि ध 5, मध नि ध प प (प) म ग रिग 5
रि, नि रिसा ॥
स्वरविस्तार.
(१) सारि सा 5; सारि गरि सा s; सारि गम गरि सा; सारि गम
पम गरि साsइसी प्रकार तार सप्तक के पंचम स्वर तक एक
एक स्वर बढाते जाना.
(२) निरि सा 5; निरि गरि सा; निरि गम गरि सा 5; निरि गम
पम गरि सा; निरि गम पध पम गरि सा; निरि गम धनि
निध पम गरि सा 5; निरि गम धनि सा निध पम गरि सा 53B
निरि गम धनि रिसां निध पम गरि सा s; निरि गम धनि
रिंग रिसां निध पम गरि सा; निरि गम धनि रिंगं ममं गरि
सांनि धप मग रिसा s; निरि गम धनि रिंग मपं मंग रिसां निध
पम गरि सा (अथवा) निरि गम पध निसां रिंगं पंपं गरि सांनि
धप मग रिसा निसा ॥
.
.

राग-यमन. नोट-अवरोह में गांधार के जोड में मृदु मध्यम स्वर का अल्पसा प्रयोग करनेसे यमन कल्याण राग होगा. यथाः- गम् गरि गम पध निसां निध पम गम् गरि सा, इ. यमन राग के स्वरों में लौकिक तीव्र रि के बदले कोमल रि का व्यवहार करनेसे " दिन की प्रिया (पूर्व कल्याण) राग होगा. wation यमन तुम गावो प्यारे रब गुण, और न पालक तेरो उन बिन. भक्तजनों के है रखवारे, दास उन्ही के सब ऋषिमुनि गण. ग नि मपधम परिऽ सा 5 गा 5 वोssss प्यारे S. ३ रि गरि ग ग गम धनि मध निध निध मप ऽम | रि र ब गु ण S ऽ तुम गाड s वोss प्यारे 5 ध S सा S. S रि गरि ग ग | निरि गम रि ग | गप धनि (प) म | पध पम गरि सा र ब गु ण s तु म | गाऽ ऽ वो ऽ प्या 5 रेऽऽ रि रि गरि ग ग मध पम ग पनि मध पम ग पनि ऽध प ऽम | ग ऽरि (सा)s र ब गुण ऽ तु म गा s वो 5 प्या 5 रि गरि ग ग ।। Tगम ग पाम ध म प र ब गु ण ।। || औ ऽ र न । पाल S ग IHA न हिं. गा.क्र.मा. प्रथम पुस्तक. प अ. क ध नि सानिध (प) म ग ग प म ध म नि म प ते ऽ रोड न बिन और न पाड रि नि धनि निध धप पम | गरि सा सागम पध निसां रिसां निध पम गरि सा तेऽs रोss उ न बिन गाऽs वोss प्याssss अंतरा) रि गरि ग ग ग 5 पप प ऽ धनि ऽध र ब गुण T भऽ क्त जनो के ss घ - for . - (सां)ऽसां सां सांनिधनि रि'(सां)ऽधनि रिंग मंरिंगरिं (सा)ऽनि (प) ऽम है र ख वाsss रे आssss S 5 555 के S (ग)ऽरि (सा) | सारि गप गरि साग 5 ग प गम ध (प) s SS SSS SSSभ ऽ क्त जनोss सां नि ध सां निध | निरि'सानिरि'गरि' (सा) s निध र खs| वा ऽ रे ऽ दा 5 स उ | न्हीं रि रि म ध (प) पभ |ग रि नि सा | नि ऽ मपधम प गरि सा स ब ऋ षि मुनि ग ण गा 5 वोssss प्या 5 रे । S घ ला स्थायी. ( र ब गुण | निरि सा, निरि । गरि सा, निरि गम । गरि सा, निरि गम पम गरि गम प । रिसा, निरि गम । पध निध पम गरि । गम परि सा, निरि गम पध निसां । निध पम गरि सा | गावो प्यारे रिनि गरि मग परि गसा रिनि सा,नि रिनि गरि मग । पम धप धम परि गसा रिनि सा,। नि रिनि गरि मगापम धप निध निम । परि गसा रिनि सा, राग-यमन. नि रिनि गरि मग । पम धप निध सौ । गाऽ वो 5 । प्याs, गम गरि, गम पध पम गरि,गम पध निध पम।गरि, गम पध निसांनिध पम गरि,गम पध निसां रिंग रिसां । निध पम गरि सा । गावो प्यारे र ब गु ण । गम पम गs, । गम धप मग s, | गम धनि मध निध यम गss, । गम धनि मध निसां । धनि रिसां निध पम । गs, गम धनि मंध निरिं गरिं सांनि । धप मग रिसा निसा। गावो प्यारे र व गु ण | sss sनिरि निग रिंग रिम । गम गप मप मध पध पनि धनि रिसां । निध पम गरि सा । गावो प्यारे र ब गुण । साग रिसा, रिम गरि, । गप मग, मध पम, । पनि धप, धसां निध, निरिं सांनि, सांग रिसां । निध पम गरि सा । गावो प्यारे मंग मंग रिसा, पम । पम गरि, धप धप ।मग, निध निध पम, | सांनि सांनि धप, रिसां रिसां निध, गरि गरि । सांनि धप मग रिसा । गावो प्यारे । र ब गुण | 5 s ss। निरि गम पध निसां । रिंग मंप ऽम गरि सांनि धप, मग मध । निसा रिंग ऽरिं सांनि । धप, मग मध निरिं ।ऽसां निध पम गम पध निसां नि धप । मग रिसा, निरि गम । गावो प्यारे रब गुण अंतरा" भक्तजनों के" सांनि धप मग रिसा । निरि गम धनि सा । भक्तजनों के सांरिं सांनि धप मग । मध निरिं धनि सा। भक्तजनों के 3

हिं. गा. क्र. पु. मा. प्रथम पुस्तक.
सांरि गरिं सांनि धप । मग मप धनि सा । भक्तजनों के
है र ख । वा 5 रे । गरि सांनि धनि रिसां । निध पम गम धप
मग रिंग मप धनि । सांनि धप मग रिसा। भक्तजनों के
साssss, सांनि सा, सांनि । धनि सा, सांनि धप । धनि सां, सांनि धप
मप धनि सां, सांनि । धप मग मप धनि । सो, सांनि धप मग रिग मप धनि सा,
सांनि धप मग रिसा । रिंग मप धनि सां। भक्तजनों के
है 5 र ख । वा 5 रे । निसां रि, सांनि धनि । सो, निध पध नि,
धप मप ध, पम । गम प, मग रिसा; । गरि मग पम धप । निध सांनि रिसां गरि
मंग रिसां निध पम । गम धनि सां । भक्तजनों के
सांनिधप मग रिसा, । गंग रिसां निध पम । गरि सा, पंम गरि । सांनि धप मग रिसा,
निरि गरि गम गम । धम धनि धनि सा । मक्तजनों के
है । र स्त्र । वा 5 रे । सांरिं सांनि धनि मध । निरिं सांनि धनि मध
निरि गरिं सांनि धनि मध निरि धनि साधनि सारिं गंमं गरि सांनिधप मग रिसा,
१
૨
3
निरि गम, गम धनि, । मध निरिं सां, गम । धनि मघ निरिं सा, गम घनि मध निरिं
सा ऽ ऽ ऽ । ऽs ऽ ऽ। गावो प्यारे

राग-यमन. ४३ बोलताने. नि रि ग म ध नि रि' सौ नि ध म परि रि सा तु म गा वो प्यारे र ब गुण तु म गा वो प्या रे ग रि ग गा गाIT ब T रि नि रिग रि रि ग म म गा s वो प्याज गु Cal घ मग ग S म ध निरि'नि गरि'गे नि सा ध नि रि'सा रे र 5 औ S: रन 5 पाS S ल र नि ध म प म प|गरि सा सानि ऽध प ऽरि सा क ते 5 रोउ रो उ न न वि न गा 5 वो प्या 5 रे । रि गरि ग ग गा II गरि सा, नि ध प, गे रि' रब णा ग तुम, गा म , गा| वो, प्या s य सा 5 नि ध ध म पमध नि म |रिs बगु गाss वो प्या ऽ म] S ण सा 5 रे । नि रि नि ग तु म गा रि म ग पाम ध पनि धरि ध रि' नि सा प्या रे र बगु ण औ र न पा लक गं रि' नि रि' रो उ नि ध म पनि ऽ धम मरि s सा बि न तु म गा 5 वोऽ ऽप्या 5 ते । न S गरि सा सा नि ध प प रि' सा सो नि ध म प गा वो प्या रे र ब | गुण औ न पा ल क ० ग रि ग परि सा ग प गप धनि पध मप रि 5 सा s न तु म | गाऽ ऽ वोऽ ऽ प्या 5 रेड हि. गा. क्र. पु. मा. प्रथम पुस्तक. ध ग S घ रि ग रिग ग गम धनि म ध | मध नि म रिऽ साs र ब गु ण रे 5 तु मागाss प्या ऽ रेड रि ग रि ग गा. प म ध म नि म प ब गुण और पा रि नि धनि निध धप पम | गरि सा सानिरि गम धनि रिसां निध मप रिसा तेऽs रोडs उ नविन गाऽ ऽ बोss प्याऽ ऽ रे । T -- H T for T गरि ग गा गु -- गम धप मग मध निध मप धनि गाs s चोऽप्याs 5 रेड र - रिसांनिध निरिंगरिं सांनि धनि मप गप धनि पध निध | पम रि 5 सा 5 बड गुड S UTS SIHITS SS 5 वोऽप्या ऽ रे रिंग रिनि रिंनि धनि | धम धम गम गरि गरि सासा, निरि निरि गरि गम गम धनि तुऽ मगा ऽवो प्याड, रेर ऽब गुरु णड औऽ रन, पाऽ ऽल | sक तेऽऽरो ऽउ R १ ૨ ३ घम धप मप मप | निप, मप निप, मप नि १ 5 रिऽ सा नऽ ऽबि ऽन तुम गा वो, तुम गा वो, तुम गा , तुम गा वो ऽप्या । रे गरि ग ग गु प । निरि निरि गम गम धनि धनि रिनिगरि ।। गावो गावो प्यारे प्यारे रख गुण और नपा १ सांनि धनि मध मप | निध पम गरि सासा| निध पम गरि सासा निध पम गरि सासा लक तेरो उन बिन गाऽवोऽप्याऽ रे गाऽवोऽप्याऽरेऽ | गाऽवोऽप्याऽ रेड ग रि ग ग र ब गु ण

रांग - काफी.
राग-काफी
रागांग विस्तार
म्
(१) नि सा रि ग 5, सा s रिपपम्प गरि ; 5
रि सा5; साग रिग 5, सा 5 रिप 5॥
नि
(२) साऽरि सा; नि ध नि सा नि सा 5, रि ग्
रिम् प गरि; ध प म प गरि धनि पध
मू
म्प ग् ऽ रि ; रिग रिम् गरि सा 5; सारि रिंग 5,
सा रिप॥
(३) सारि 45; मग म्, ग्रि सारि पs; धम् पं गम् ग् रि,
सारि प 5; निध निध प, धप मग रि, सारि प5; म्प थान
म्
सांनि धप 5, म्पध म्प गरि 5; सारिप ॥
(१) म् म् प ध नि 5 साम् पनि सो गरि' में गं
म्
रि' सा 5 गं रिसां निध 5, नि धप म्प गरि ; ग्
रि
रिs; गरि , म गरि सा 5; सारि रिग 5, सा 5
रिप॥

हिं. गा. क्र. पु. मा. प्रथम पुस्तक. खरविस्तार. (१) निसा रिग रिसा, निसा रिग् मग रिसा 5; निसा रिग् म्प मग रिसा 5; इसी प्रकार तार सप्तक के पंचम स्वर तक एक-एक स्वर वढाते जाना. (२) सारि नि सा 5; सारि गम् गरि सा 5; सारि गम् पम् त्रि सा 5; सारि गम् पध पम् गरि सा 5; गम् पथ निध पम् गरि सा; सारि गम् पध निसां निध पम् ग्रि सा, इ. इ. काफी-त्रिताल. Rom सखियन संग बिहरे मुरारी बनवारी. निरखत द्रुम द्रुम लागे फुलफल, हरियल झुक रही डारी अत प्यारी. सखियन रि म् ग म् ग् रिरि ग म् म् स खि य न संग बि ह रे मु : वि سه म् प प ध म्प ग म् ५ | गम् गम् रिग् सारि | रि ग म् म् रा री बनवारी वा री "स खि | यऽ नऽ संऽ गड २ 0 - SS (अंतरा पध नि प ssss म् म् प धनि नि सो सो TIS S fi ss नि र ख त । द्रु म द्रु म सां सां सो घ सो 5 | नि नि ध प म् म् म् प नि नि सा सो ला ऽ गे 5| फु फ ल नि र-ख त दु म द्रु म

राग-काफी.
४७
सां सां
रिगं रि' सां नि नि ध प प नि सा सा | निसां निरिं सां नि
ला 5 गे 5 फु ल फ ल ह रि य ल
झुऽ कऽ र हि
रि सा
ध प ध म्
डारी अ त
प ग, म् प ग म् ग् रिरि ग म् म्
या री, स खि य न संग बि ह रे मु
स्थायी.
रा री ब न । वा री स खि । य न संग । गम् गम्रि, गम् पत्र
निध पम् ग्रि, गम् । पध निसां निध पम् । गरि, गम् पध निसां । रिंग रिसां निध पम्
ग्रि सा, रिंग मम् । पप धप मग म्प |
सखि यन संग बिहरे मु
पध नि प | गम् प 5, म्प | धप, म्प धनि धप, । म्प धनि सानि धप,
राऽ ऽरी
म्प धनि सारि गरि ।सांनि धप, म्प धनि ।सारिं ग्मं गzि सानि।धप मग रिसा निसा,
रिरि ग्ग् मम्' पप । धध पप मग म्प
सखि यन संग बिहरे मु
-
रा ऽ री ऽ । साग रिम् गप म्ध । पनि धसां नि सांम् । रिंग सांरिं निसां धनि
पध म्प गम् रिंग । सारि निमा, रिग् म्प । यन संग बिहरे
6-4
राऽ, सारि गम् । पम् गरि, गम् पध । न्धि पम्, पध निसां । रिसां निध, निसां रिंग
मग रिसां निध पम् । गरि सा, रिग म्प । यन संग बिहरे मु
राs, रिग रिरि,गम् ग्ग्, म्प म्म्, पध पप, धनि धध,। निसां निनि, सारिं सांसा,

हिं. गा. क्र. पु.मा. प्रथम पुस्तक.
रिंगं रिरिं, गमं गरि । सांनि धप म्ग म्प
साखि यन संग बिहरे मु
रा, सारि गम् । पध निसां रिंगं रिरिं । सांसां निनि धध पप । म्म् गग रिरि सासा,
सारि गम् प, मग । ऽम् प, सारि गम् । प म्ग् ऽम् प, । सारि गम् पम् गम्
प प ध म्ापग, गम् गम् रिग सारि | रि मग म् L
रा री बनवा री, स खि| यऽ नऽ संऽ गवि हऽ रे गु
S
S
पध नि प 5/5
राs 5 री
S
5
S
अंतरा. " निरखत द्रुम द्रुम
सां सांनि धप, नि । निध पम्, धधप । मग, प पम् ग्रि, । म् मग रिसा निसा,
रिंग म्प ध, म्प । धनि सा धनि सा । निरखत द्रुम द्रुम
ri
सांनि रिसां निध, निधासांनि धप मग रिसा, ग्रि साम् गरि पम् ।ग्ध पम् निध पसी
निध रिसां निगं रिसां । निध पम् पध निसां । निरखत द्रुम द्रुम
धनि सारिं सांनि धनि । सा, निध पधानि, धिपम्प ध, पम् । रि, मग रिसा निसा,
रिग् मग म्प म्प । धप धनि धनि सा । निरखत द्रुम द्रुम
गंमं गरें गरिं सांरि सांनि सांनि धनि धप । धपम्प मग्मग्ारिग रिसा रिसा निसा,
गरि सारि, मग रिग, पम् गम्, धप म्प गम् गम् रिग् सारि| रि मग मम्
यन संग, बिह रेम, रारी बन, वारी सखि यS नऽ संs ग | बि ह रे मु

राग-काफी.
४९
बोलताने.
५ प ध म प ग, म् पग म् 5, धप | गम् गरि
रिग पम्
रा री ब न वा री, स खि य न , सखि यन संग बिह रेमु
प प ध म्प ग, म् परिग रिंग मग म्प | मप धप धनि धनि
रा री ब न | वा री, स खि | सऽ ऽखि 5 यs| ऽन s संऽ ऽग
म
सांनि रिरिं सांनि सो/निस निध प, धप गम्, धप गम्, धप गम् ग्रि रिग पम्
sबिहड
मुरा ऽरी, सखि, यन, सखि यन, सखि यन संग बिह रेमु
प प ध म |प ग, म् पम्प निसां रिंगं रिसां रिसा निसा निध निध
रा री ब न वा री, स खि सखि यन संऽ गवि ऽह रेऽ मुरा ऽरी
पध पम् पम् गम् | रि िऽसा रिसा ऽनि ऽप मग मरि | नि रि गम् पम्
बs नवा ऽरी सखिय उन ऽसं ऽग ऽस ऽखि यऽ नसं| ऽग बि हरे ऽमु
५ प ध म्।प ग, म प गम् गम् रिग् सारि साग रिग, रिम् गम्,
रा री ब न वा री. स खि | यऽ नऽ संऽ गऽ सखि ऽयं, नस ऽग,
ग्प म्प, मध पध, पनि धनि, धसां निसां, रिंगं रिसां रिसां निसांनिसां निध निध पध
बिह ऽरे, मुराऽरी, बन ऽवा, ऽरी सखि, यऽ नसं ऽग बिह| रेऽ मुरा ऽरी बन
पध पम् पम् गम् | ग्ऽ रिम् पम्' गम् | गड रिम् पम् गम् | ग्ऽ रिरि गम् पम्
वाऽ रीस ऽखि यन | संऽ गस ऽखि यन | संऽ गस ऽखि यन संऽ गबि हरे ऽमु
प प ध म प ग, म् परिऽ ऽग् 5 म्ऽ | ऽप ऽ धऽ ऽनि
नव
वा री, स खि | सऽ ऽखि ऽ यऽ ऽन 5 संऽ ऽग
रिंऽ ऽगं 5 रिं| सांऽ ऽनि ऽ धs | सांऽ ऽरिं सांनि धप | निऽ ऽध पम् गि
बिऽऽहऽ रेड मुऽ ऽरा ऽ रीs | सऽ ऽखि यन संग | बिऽ ऽह रेमु रारी

'५० हिं. गा.क्र.मा. प्रथम पुस्तक. १ ३ धऽ ऽप म्प धप म्म् नि , धप | मम् गरि s, धप मम् नि रिग पम् बऽ ऽन वारी सखि | यन संग S, सखि | यन संग s, सखि , यन संग बिह रेमु ५ प ध म |प ग, ऽसाग् | रिमग पम्ध | पन्धि सांनिरें रा री ब न | वा री, ऽसखि | यनसं गबिह | रेमुरा रीबन निसानि पगम् | गिरि ग्पम् पपरि गपम् वारीस खियन | संगबि हरेमु | रारीबि हरेमु | रारबि हरेमु २ पपरि गपम् १ २ प्प पधम् | पग म्प गम् नि | रिंग मम् प, रिंग म्म् प, रिंग मम् || प रा री ब न वारी सखि यन संग बिह रेमु रा, बिह रेमु रा, बिह रेमु | रा राग धानी. रागांग विस्तार. (१) सा रि नि सा ग् 5 सा s; सा ग म प (ग्) 5; रि नि सा ॥ है (२) सा ग म प, ग म प 5; ग म प नि 5 45; ग् म् प नि 5 प नि सां s, नि प ग 5; सा ग् म् प (ग्) s; रिनि सा॥ (३) म प ग म प प नि नि सा 5 सा s; सा गं सां 5; सा ग् म् पंग ऽ रि' नि सा s; सां नि प म ग 5; साग म्प गम् निप ग 5; रि नि सा 5 ॥ प म् म राग-धानी. स्वरविस्तार. निसा ग्ग् रिनि सा 5; निसा गम् नि दिसा 5; निसा गम् पम् गम् गरि निसा 5; निसा गम् पनि पम् नि निसा 5; निसा गम् पनि सांनि पनि पम् गरि निसा 5; निसा गम् पनि सारिं सांनि पम् नि निसा 5; निसा गम् पनि सांगं रिनि सांनि पनि पम् गरि निसा ।। धानी-त्रिताल सुनिये मुरारि बिनती हमारी, अब तो दया कर लिजिये उबारी. तुमरा पसारा यह विश्व सारा, प्राणो से प्यारा रसिया बिहारी. नि । प (ग) नि सा सुनि ये ( ग S मु ग् 5 सा ग् | म पनि सारिं निसां | निप ग् म् ., ग् | म पनि नि राऽ रि बिन तीss माऽ ऽ रि ब तो द २ सो 5 सांप नि सा । म् | सांगं सांनि प, नि |प (ग) नि सा या क जि ये 5 उबाड 5 रि, सुनि ये 5 मु (अंतरा) म् 5 सा ग म पनि सांरि निसी | निप ग् म्, म पनि नि 1: राऽ रि बिन तीss हमाऽ ऽ रि, तु म. रा प सो ऽसां 5 पनि सां । नि सा ऽ गे रि' असा गरि' सां 5., नि सां नि रि' सां ह विश्व सा डरा s ऽ णोऽ से । सा राय प्रा नि sप 5 नि | प ग 5 म् | रि' ऽसां 5, नि | प (ग्) नि सा प्या राड र सि या 5 बि हा ऽरी s, सु नि 5. मु ५२ हि. गा. क्र. पु. मा. प्रथम पुस्तक. स्थायी. ग् 5 सा 5| निसा गम् पम् गम् | पनि पम् पनि सांनि | प (ग) नि सा रा 5 री आ5 s s 5 5 5 ऽसु नि ये 5 मु न S का रा 5 री । निसा गम् पनि सांनि । पनि सांगं रिसां ऽसु । निये मु रा 5 री । साग् गम् म्प पनि । निसां सां रिसां ऽसु । निये मु रा 5 री । निसा मग पम् निप । सांनि रिसां नि सांसु । निये मु रा 5 री । निसा गस। ग्, साग् । मग म्, गम् पम् । प, म्प निपानि, पनि सांनि सा, निसां । रिसां रि, निसां गरि । सारिं सांरिं निसां पनि । निये मु रा ऽ री 5 । निसा गम् ग् सा, । निसा गम् पनि पम् । ग् सा, निसा गम् पनि सांरिं सांनि पम् । गसा, निसा गम् । पनि सा गंम् पम् । गरि सांनि पग निसा ऽ ऽसु निये मु । । रा , निसा गम् । पनि म्प निसां ग। सांनि पम् गम् । पनि सां सां निनि पम् गम् नि नि । पम् गम् प १ । मग सा, गम् पसु । निये मु रा ऽरी । निसा गसा गम् गम् । पम् पनि पनि सांन् ि।सांग सांगं मंगं मंगं सांरिं सांनि सांनि पनि । पम् पम् गम् गसा । निसा, निसा गम् पसु । निये मु रा, निसा गम् । पनि म्प मनि ऽप, । मग म्प निसां पनि । पसां न्,ि पम् गम् पनि सारिं निरिं ऽसां । पनि पसां ऽनि, म्प । मनि ऽप, गम् पसु । निये....हमार।

S S S S, सुनि ये 5 मु राग-धानी अंतरा "तुमरा प सां 5 सां/पनि सांप निसां पनि सारिं सांनि पम् गम् गरि निसा, निसा निग सारााआss sls S SS SS साग साम्, गम् गप, । म्प मन्,ि पनि पसां, । निन् िपम् गम्, तु । मरा प सा 5 रा ऽ । सांरिं निसां पनि म्प । गम् रिग सारि निसा, । निसा मग पम् निप सानि रिसां गरि मंगं । पम् गरि सांरि निसां । पनि म्प गम् , तु । मरा प सा ऽ रा । निसां निरिं सांनि , पनि । पसां निप, मा मन् ि। पम् , गम् ग्प म्ग्, साग म्प, गम् पनि, । म्प निसा, पनि सांगं, । सांनि पम् गम्, तु । मरा प सा 5, गम् पनि । सांरिं निसां निप निप । म्प मग मग सा, । पम् गम् , निप म्प, सांनि पनि, रिंसां निसां, । गंगं सांरिं सांनि सांनि । पनि पम् गम्, तु । मरा पसारा, इ. बोलताने. गम् गम् पम् पनि पनि पनि सां नि सांगं सांगं सांनि सांनि पनि पनि पम् पम् गम् सुऽ ऽनि 5 येऽबिऽ ऽन 5 तीs हऽ ऽमा ऽ रीs| अऽ ऽब ऽ तोऽ ग्म् ग्सा ग्रि निसा | गम् गम् पम् परि | निमां निप निप, नि प (ग) नि सा सुनिये मु den ग 5 सा 5 | निसा निरिं सांऽ निप पनि पसां निऽ पऽ | म्प मनि पऽ ग्ऽ रा री 5 सुऽ ऽनि येऽ मुऽ राऽ ऽरी बिs नऽ तीऽ ऽह माऽ रीs गम् पनि सारि निमा सांग सां निसां निनि पनि पग् ऽम्, नि| प (ग) नि सा अब ताs s sद | याऽ ऽक लीऽ जेड उऽ ऽबाऽरी, सु| नि ये 5 मु म हिं. गा.क्र. पु. मा. प्रथम पुस्तक. s मऽ ग्प ऽम् | निऽ पसां नि रिंऽ | मागं ऽरिं निऽ सांनि ऽप ग्ऽ नि ऽप s सुऽ निये ऽमु राऽ रिबि इन तीऽ हमा ऽरी अऽ बतो ऽद याऽ कली ऽने १ २ ३ ग्ऽ रिनि ऽसा, नि | पग् निसा ग् सा, नि पग् निसा ग्] सा, नि पग् निसा उड बाऽ ऽरी, सु | निये ऽमु रा री, सुनिये ऽमु रा री, सुनिये ऽमु a S 5 ग् 5 सा । रा ऽरी 55 5) गम्म् म्पम् | पनिप निसांनि s| सुनिये मुरारी | बिनत हमारी S S सांरिसां निसानि गरिसा रिन्तिां प (ग) नि सा अबतो दयाक | लीजिये उबाs उबारी s s, सुनि ये 5 नि | ୫ ग् सा ग् म् पनि सारिं निसां म् पनि सारिं निसां | निय ग् म् 5 | साम् गप मनि पसा राऽ रि बिन तीss ह माऽ ऽरी सुनि येमु रारि बिन २ निरिं सांगं सांरिं निसां । निप गम् गरि निसा, परि सरि निसा पनि तिह मारि अब तोद याक लीजि येउ बारी, सुनि येमु रारी सुनि । २ म्प गम् गरि निसा ग् 5 सा s येमु रारी सुनि येमु रा ऽरी =3 R

राग-सारंग.
* राग सारंग.
रागांग विस्तार.
.-
(१) सा s, नि सा रिs; म् रि s; प म रि ; म प ध नि ५
म् रि परि s, सा॥
(२) सा , नि सा 5; नि पनि सारिम रि सा ;
रिम् प म रि, सा, नि नि प, म पनि पम्
रिपरि, सा ॥
(३) निसा रिम् प नि नि प5; सां 5 निनि प5; म् पs
निनि पम् रि ; परि , निसा 5 ॥
(४) म प ध नि नि ऽ सांs, निसां 5; नि सा रिमरिऽ नि
सा s; रिं नि 5 सांरि निसां , निनि प_s; रिम् पनि
म्प सां, नि पम् रिs; पम् रि , निसा 5; निसा रि॥
स्वरविस्तार.
निसा रिम् रिसा 5; निसा रिम् पम् रिसा S; निसा रिम् पनि पम्
रिसा ; निसा रिम् पनि सांनि पम् रिसा ; निसा रिम् पनि सांरि सांनि पम्
रिसा निसा 53; निसा रिम् पनि सारि म रिसां निप मरि परि ऽसा ॥

हिं. गा. क्र. पु. मा. प्रथम पुस्तक. नोट - लोक व्यवहार में मधमाद और विद्रावनी ये दोनों सारंग के प्रकार केवल सारंग नामसे ही पयछाने जाते हैं. कचित् बिंद्रावनी के अवरोह में धैवत स्वर अल्पसा लगाया जाता है. यथा:- निसा रिम् पनि सो निध निप रि साs; अथवा निसा रिम् पनि सां नि नि म्प धप रि परि 5 सा ॥ की आरोह में लौकिक तीन मध्यम भी लगानेसे शुद्ध सारंग राग होगा. बाकी सब बात एकसमान है. यथा :- मप निसा रि5; मप धप रि ; निप मप धप मरि, परि ऽसा ।। अवरोह में धैवत का अल्पसा प्रयोग जो उपर दिखाया गया है वह खुब ध्यान में रखना अवश्य हैं, क्योंकि आगे लिखे हुए कानडा और मल्लार के विविध भेदो में इसी प्रकार अवरोह में धैवत स्वर का अल्पसा व्यवहार किया जाता है. सारंग-त्रिताल. मोरि गुय्यां नजरियां लागी, मन बिबस भयो बिरागी. रैन दिना गिरधारि लाल के रंग में रहूं अनुरागी.--पोरि सौ सौ नि प म रि मो गु य्यां न म् पनि पम् ज रि यांss मू रि ss s|सा 5 ला 55 sगी 5 नि सा। रि म् रिम् | पs 5 पनि म न बि ब स भयो 5 बिs म २ म म्प निसां रिं 5| नि प, सां सां | नि पम् रिरि म् पनि पम् राs s s s| गी 5, मो रि s, मो रि | गु य्यां 5 न ज रि यांss राग-सारंग. (अंतरा) ff ss sसा 5 S S म् । म् म् पनि प प्ला: SS sगी ss S S S न दिनाऽग र .. नि सां सां, नि सां सां नि सां सां रि रिम् |रिं सां सां सां 'धाऽ ऽ रि ला| ल के रंग में रहूं । S अ सांरिं सांनि सांनि पनि | पम् रि, सां सां नि पम् रिरि म पनि पम् गीss, मो रि गु य्यां न ज रियांss रा S S S स्थायी. रि साऽपारि म्प, रिम् पनि, म्प निसां, पनि सांरि, निसी रिम रिरिं सांसां ला ऽगी आsss S SS S S SS SS निनि पम् रिसा निसा । रिम् पनि, मो रि । गुय्यां नजरियां लागी । सारि रिम् म्प पनि । निसां सांरि रिसां सांनि । निप पम् मरि रिसा, निसा रिम् पनि सांरि । निसां निप, मो रि । गुय्यां नजरिया ला ऽगी। रिसा मरि पम् निप । सांनि रिंनि सांप निम् । परिम्सा रिनि सा, साम् रिप मनि पसां । निप म्प, मो रि । गुय्यां नजरियां ला ऽ गी । पऽनि साऽरि मऽप निऽसां । रिऽ रिंऽसां निडप मऽरि । साऽरि निऽसा, पनिसा रिम्प ॥ निसांरि रिसां निपम् रिसारि । निसारि म्पनि, मो रि । गुय्यां नजरियां लागी २ ४

हिं. गा.क.पु. मा. प्रथम पुस्तक.
अंतरा. "रैन दिना गिर
धा ऽ रिला | 5 ल के । पनि सांप निसां पनि । सोरि निसा पनि म्प
रिम् सारि निसाs, । निसां रिनि सौरिं निसां ।रिंम् सांरिं निसां पनि ।म्प रिम् सारि निसा,
निसा रिसा रिम् रिम् । पम् पनि पनि सौ । न दिना गिर
धा ऽ रिला । ऽ ल क sरिपं मंरिं, सांम् रिसां, । निरिं सांनि, पसां निप,
रिप रि, साम् रिसा,। निसा रिम् ऽम् प, । पनि ऽनि सौ, सारिं। ऽरिंम्, भूप में
रि', निसां नि प, । म्प ऽम्' रि, निसा । रैन दिना गिर
।
धा ऽ रिला | Sल के ऽ । रिरिं सारि रिसां रिरिं । सानि पम् रिसा निसा,
शिरसारि,मम् रिम्, पपम्प, निनि पनि, सांसां निसा,रिरिं सांरि,सम रिम् रिसां निसां
१
२
निनि पम्, पप मरि,। मम् रिसा, निसा रिम् । पनि म्प सां, पनि । म्प सा, पनि म्प
सांsssssss। रैन दिना, इ. इ.
बोलताने. " मोरि गुय्यां नजरियां"
सा
S
रिs ss
लाSSS
s| मरि म् रि, पम् | पम्, पनि
ss मोऽ ऽ रि, गु/5 य्यां, न ज
गुरु
सा
सारिं सांkि ऽसां नि | ५ प, सां सां नि प म रिरि म पनि पम्
रिऽ य्यांऽ ऽ ला| 5 गि, मो रि। गु य्यां 5 नज रि यांs 5
रिsss सा sss | निसा रिम् पनि पम् म्प निसां रिमं रिसां
ला555 गी ss s| मोs s s रिs) गुई ऽ ऽ यांs

राग-सारंग. सांरि सांनि सांनि पनि | पनि पम् पम् रिम् | रिम् रिसा रिसा निसा मरि पम् निप सा नऽ ऽज रीड यांऽऽला ऽ गीs) मऽ ऽन 5 बिs बऽ सऽ भऽ यो निसां रिरिं सांनि पनि सांसां निप, सा सा नि पम् रिरि म पनि पम् विss s, मो रिगु य्यां न ज रि यांss राऽ गी S रि 5 s s|सा , म्ऽ रिप | ऽम् निऽ पसां नि | रिऽ सांड निसां निप ला s s s| गी s, मोऽ रिगुऽय्यां नऽ जरि ऽयां लाऽ गीऽ मऽ नबि निप म्प रि मरि | सारि सा, सां सां नि प म रिरि म् पनि पम् ऽब सऽ भयो ऽबि | राऽ गी, मो रि गु य्यां 5 न ज रि यांs s रिs s s|सा s s s| निसां निरिं सांसां निनि पनि पसां निनि पप ला 5 s 5,गी ss s| मोरि ऽगु य्यांन जरि याला ऽगी मन बिब म्प मुनि पप निनि पप ऽम् रिम् पम् |रि सासा, रिम् पम्/रि सासा, रिम् पम् सभ योबि रागी मारि गुय्यांऽन जरियांडला गिन, जरियांला गिन, जरि यांड रिss s| सा 5 s s|साम रिम्, रिप म्प, मनि पनि, पसां निसां, ला sssगी 5 5 5 मोरि गु, यांन ऽज रियां ऽला गिम ऽन निरिं सांरिं, निसां निसां| निऽ प, सां सां नि पम् रिरि म पनि पम् विब ऽस भयो ऽबि | राऽ गी, मो रि गु य्यां ऽ न ज रि यांss रिs s s|सा 5 s s| रिमनि म्पम् पनिप निसांनि ला s s s| गी 5 s s| माऽरि गुऽय्यां नऽज रियां सांरिसां निसांनि पनिप म्पम् || रिरि सारिसा, सांऽसां निऽप কামী मऽन बिऽव सऽभ योऽपि रागी, योऽबि रागी, मोऽरि गुऽय्यां % 3E

६०
हिं. गा. क्र. पु. प्रथम पुस्तक.
૨
रिऽम् निष्प रिसा, सांडसां| निऽप रिम् निऽप रिसा,
नऽन रिडयां लाऽगि, मोरि गुऽय्यां नऽन रियां लाऽगि,
२
सांऽसां निऽप रिऽम् निऽप || रि 5 सा 5
मोऽरि गुऽय्यां नऽज रिऽयां | ला s गी 5
* राग-जौनपुरी..
नोट - आसावरी राग के आरोह में निषाद स्वर यदपि वयं है तथापि
जलद तानों लेनेमें सुगमता हो इस लिये आसावरी राग के आरोह में लोग
निशाद स्वर लगाते हैं, अतएव लोक व्यवहार में आसावरी और जौनपूरी राग
बुछ फरक नहीं माना जाता, और जानपूरी राग को ही आसावरी राग
कहने का रिवाज है.
रागांग विस्तार.
में
म्
म
(१) सा 5, रिम् , म पs, नि धs, प 5; म्पध्म्प ग् 5,
रिरि s, सा॥
नि
नि
(२) सा, नि सा निसारिनिसा धपध, सा; रिम्
म
म्
सा सा
प 5; म्पध्म्प ग् 5: सा रिप ग्5; रि , सा; नि नि
सा s, रिऽ सा ॥

राग-जौनपुरी. ६१ (३) सारि म्प नि ध्s, 45; म्पध्म्प ध नि ध प 5; म् 5, प नि नि नि प, ध् ध् , नि ध्s, 45; म्प ध्ऽ, पथ् नि , 5, नि नि 45; रिम् पs, म्प ध्ऽ, पथ् नि , ध्s, 45; म्पध्म्प ग्5; सा रिप ग्; रि रिs, सा; नि नि सा s, रि म् म् मू सा सा सांसा नि ऽ सा॥ नि (४) म् म् , प ध सां नि नि सांs, ध् 5, 45; म् म् प नि नि धू 5, सारिं निसा ध्ऽ 45; म्प नि सांरि ग ऽरिं नि सा नि नि नि s, 45, सो ऽ ऽ 45; सारि म्प सांऽ ऽ 45 नि रि' निसां 5, पध् ग , रिs, सा 5; रिम् प सांध्s, म् प5॥ खरविस्तार सारि मग रिसा 5; सारि म्प मग् रिसा 5; सारि म्फ निनि धूप मम् रिसा; सारि म्प ध्प सा (अथवा) रिम् पधू म्प सा निनि ध्प मग रिसा 5, सारि म्प निसां रिरिं सांनि ध्प मग रिसा 5; म्प निसां रिंग रिसां निध् पद गरि सा (अथवा) रिम् पध् सारि गरि सांनि ध्प म्ग् रिसा 5; म्प निसां रिम गार (अथवा) पधू सारि म गरि सांनि ध्प म्ग् रिसा 5; रिम् पध् म्प सौ रिंम् पंपं मंगं रिसां निध् पम् नि सा 5 ॥ Munawwanimandal हि. गा. क्र. पु. मा. प्रथम पुस्तक. जौनपुरी-त्रिताल. सांई मेरी नैया पार उतारो, डूबत मझ धारो. भवसागर जल दुस्तर भारी, तुमरे चरण जहाज हमारो. न ० मू 5 पऽ सो s सांऽ ई ३ नि प 55 5 प पध् म्प ग् गरि 5 सा 5 मे 5 रीs 5 यांपाss र र उतारोs ૨ म (ग) 5 रि सारि म् प ध् ध्प म्प रिम् प 5 सा डू ऽब त म झ धा 5 S S S नि प (अंतरा)नि नि घडप 5 4 515 S S SIS 55 म् प ५ ध् मे ऽरी s S S S SS S 5 S नि सा सां सां सां निसा रिंग रि सानि रिसां नि पम् 5 मम् प ५ भा रीsss भव सा नि सां सां सां सा सांरि मंगं रि'सा निसा रिसां ध् म् | रि' सा दुऽ ऽ स्त र भाऊ 5 रीतु म रे सांड ई S h S - रि' नि ५ प | म प ध् म् | म्प ध्सां रिंसां नि । पम् प 5 सौ च र १ ला माऽ 5 s रोडs सांई स्थायी. मे 5 री 5 | s s, सारि म्प । निनि ध्प म्ग् रि। म्, सां 5 ई मे ऽ री 5 । s s, रिम् पध् । सांनि धूप मग रि। म्, सां । ई राग -जौनपुरी. ६३ - । मे 5 री ऽ ।सारि म्प निसां रिरिं। सांनि ध्प मग् रि। म्, सां 5 ई मे ऽ री । सारि म्प निसां रिंग। रिसां निध् पम् नि । म, सां 5 मे ऽरी । ध् प, नि म्प । निथ् ऽप, ग्रि म्प । सांनिध्प, रिम्प रिरिं सांनिध्प, ग्रि । म्प गूगं रिसां रिरिं । सानि ध्प, ग्रि म्प । ५ गरि सो रि'नि ध् प, । रि म्प नि: ऽप । म्प धूम् पग् रिसा । रिम्, सां s ई मे ऽ रीऽ । सारि मग रिसा, रिम् । पम् नि, म्प निध् । पम्, पध् सांनि ध्प, सौरि मंगं रिंसां, रिम् । पम् गरिं सांनि ध्प । मग रिसा, रिम् पध् । म्, सां 5 ई से 5 री ऽ । म्प धम् पध् म्प । ध्प मग रिसा, पध् । निप ज्नि पध् निध 'पम् गरि सा, सीरि । गंसां रिंगं सांरि गरि । सांनि धप मग रिसा। रिम् , सांई मे ऽरी 5 | सारि म्प निनि ध्प । म्प निसां रिंगं रिंसां । निसा रिमं पंम् गरि सांनि सारि गरि सांनि । धप म्प निनि ध्प । मन् रिसा, रिम् पध् । म्, सां 5 ई मे ऽरी ऽ । साग् रिसा, रिम् नि, । म्ध् पम्, पसां नि । सांगं रिंसां, रिमं गरि सांनि ध्प म्ग् रिसा, । शिर सानि धप. मप. । सा, सारि म्प ध् । म्, सांs मेरी अंतरा। भवसा नि नि ग र ज ल । सारि म्प ध् म्प । सा , ५ ५ । सो s, पध् रि' नि सो ऽऽ ऽप । सा s, पध् सांरिं । ग अरें नि सा । ऽऽ ऽप साs, ६४ हिं. गा.क्र. पु. मा. प्रथम पुस्तक. सां नि सो ऽऽ ऽप | 5, म्प धूम् । s, रि, सा । भवसा ग र ज ल । रिरिं सांनि, सांसां निध, । नि नि ध्प, ध्ध् पम्, पप म्ग्, मम् गरि नि नि ग्ग् रिसा, सारि म्प । ध् म्प सां, । ध् म्प सौ ऽ । भवसा ग र ज ल । गनि गरिं सांनि, रिसां । रिसां निध्, सांनि सांनि । धूप, नि निध् पम्, धूप ध्प मग, पम् । पम् नि, मग रिसा, । रिम् पध् म्प सौ । भवसा - ग र न ल । गंगं रिंग गरिं सांसां । ध् प धप म्प । ग्ग् ।रग् गरि सासा, सारि म्प ५ म्प । सारिं मपं मंगं रिसां । निध पम् गरि सासा । भवसा ग र ज ल । दुइ स्त र । भा 5 री । रिरि सारि रिसां सिर । । - सांनि ध्प म्ग् रिसा, । गंग रिगं गरि गंगे। रिसां निध् पम् नि । सा, मम् गम मंगे ममं गरि सानि ध्प । म्ग् रिसा, रिम् पध् । म्प सा, रिम् पध् । म्प सौ, पध् म्फ i s ss1 बोलताने. is ऽ पऽ सा 5 सांई در تهراء s प s|s म्प नि ध्प | म प रिम् |प पं 5 सा मेरी sjs मे ऽरी ३ 5 सां 5 ई नि धू 5 प s| म्प निसां रि' सा | रि'नि ध् पम् प सा मेरी | सांs मे ऽरी S ऽ सांड ६ S प S 0 5 इ5 राग-जौनपुरी. नि s/म्प निसां रिंग रिसां निसां रिसां नि पम् | रिम् प 5 सा S sais SS sus 5 सां। नि धू प |म्प निसां रिम् गरि | सांनि ध्प मग रिसा | रिम् प 5 सां मे ऽरी सांss मेऽ ऽरीs 5 ऽ सांई नि 5 पड़ 1 पम् पम् गरि, निथ् | निध पम्, रिसां रिसा sरी सांss ईs, मेऽ s रीड, नैऽ ऽ धि, गरि गरि सारं । मम् गम्रि सांनिध्प मग रिसा रिम् पध म् प ऽ सा यांs, पाs 5 रउताss रोss .ss/5 सांड नि रि ध् नि नि प सा रि म प धू धू सां मे सां ई मे री ने 5 यां s T S SSS S for S - उ S S S S म् सा S S S S S S नि धू गं रि'सार' नि ध प | मग रिसा, रिम् पध् म् प 5 सा पा र ता ऽ रोड ऽ सांs ई नि म् प ध् घ sध् म् पध् म्प | ग् रि सा रिम् प सी sरी नै यां S सां 5 s ई नि प ध् नि ध सा सां 5/5 निसा रिंग रिसां निसा रिसां ध् प म् प ध् सा री 55 नैऽ ऽ यांs पाs र उता ऽ रो म् s नि ध् पम् प रि म् पध् सारि गरिं सांनि धम् प 5 सौ डू ब त म झधा siis s s सांऽ ई नि ध् प पध् म्प | ग 5 रि सा | रिs 5म् प ऽ सा मे री नैऽ यांडपा र ता 5 s रो ऽ सां 5 ई. S S 5 S S म् हिं. गा. क्र.पु. मा. प्रथम पुस्तक. सारिम्पनि सानिमम ग्रि, गंग रिसा, रिरिं सांनि, सांसां निध, निन् ध्प, ध्ध् पम्, सांड 55 ईsss, Rs , नऽ ऽ यांड पाs 5,उड़, S मम् गरि, ग्ग् रिसा, सारि मारे म्प म्प | ध्प धान नि सांनि सारि सानि ध्प म्ग ताss, रोऽ ऽ, डूऽ ऽब 5 तs/ऽम 5 शऽ ऽधा sirs s नि नि रिसा, निसा रिम् पध् म्प ऽसां ध् प|s, म्प ऽसां धूप, म्प ऽसां sssसो ऽई मे री|s, sसां ई मेरी 5, ऽसां ऽई ૧ ર प S 5 - पनि ध् ५ ।।। मे ऽरी . H -- T म् रिंऽसा रिंऽनि सांऽरिं निध्प || पध्प ग्ऽग् रिसाग् रिऽसा सांई मेऽरी नैऽऽ यांss पाऽऽ रऽउ ताऽऽ रोऽऽ १ नि म्ऽप ध्ऽध् सांऽसां रिसागं | रिऽसां सांनि धम्म् पऽसां डूऽऽ बऽत मऽझ રોડ 5 सांई घाSS 5 २ नि ध्ऽप, पऽ धूऽप, पऽसां घ5 प 5 मेडरी, सांई मेडरी, सांऽई मे री s ३

राग-भैरवी.
६७
* राग भैरवी.
X.
रागांग विस्तार.
नि
नि
(१) निध नि , धू, 5 सा 5, रि, रि िs
नि सा S, निसारि ऽ साधू सा 5, रि ग 5; सा ग्ड,
रिs, सा 5; (म्) s रि ग ; रि नि सा 5; रिम् 5,
सा रिसा, नि सा॥
(२) सा ग म रि5; ग् म् 5 सा 5; साऽरिs, पम् गम् 5;
सा रिम् 5, गम् ; पम् रि, सा; पऽध्; पम्ग्सा
गम्पम् 5; गम्पम् गरिऽ 5; सा 5; प, ध नि , म ऽम्
नि
ग; रि सा; साs, रिम् ग् ; रि, साs;
नि. नि. साs, रि, सा॥
(३) निसा गम् ध्ऽ , म् 5; साऽ, ग् रिसा 5; गम् पध् म ,
नि
ध् नि सा 5; रि' 5; नि सांरि सांs, रि सां नि ध् प;
नि
रिप ध् म् 5, ग ग म् 5; साs, गरि सा ; धू साs,
मूग
रिम् ग 5; रि 5, सा 5; नि नि सा , रिऽ साऽ ।

६८ हिं. गा. क्र. पु. मा.प्रथम पुस्तक. नि न्ि ध् नि (१) धम् ऽ ध् नि सांs; L ऽ साs; म् ध् सां; सा ग् म नि म् ध् नि सां घ सारि नि सारिं सां ग म ध नि सा सां सां गं मू नि सांरिंग रि' नि सा रि'15; सो रि सा; नि नि निs, सो रिग 5 रि5; रि's सा 5; निसा ध्ड, 45; पध् साs, नि ध् प; मप मप नि ध प म् 5; गम् गम् पम् रि5; सा; 45, ध नि 5; म ऽम् (म्) 5; रिs नि सा; सा , रिम् ऽ ग् 5; रिs, सा; नि नि. सा 5, रि, सा॥ (५) निसा गम् पध्प म्ग् म्प ३ प ;म्प नि ध् , नि पs, धप 45; म्प नि सारं सांनि ध्ऽ नि प; म्प नि सारि गरि सांs; नि ऽसां ध् ऽनि पs; म्प धनि प, गम् पध् म् s, रिग् म्प ग् 5, साग् पऽ म म् ग् रि साधू साs,_t नि म् सा सा रिम् 5 ग्रि, सानि नि सा; रिs, साऽ॥ म् (६) प प ध् 5, 45; मप मप नि ध प 5; ग् प ध नि 5 नि धम् s; रि म, म् पs,: प ५ , साs, ध् 5 458 नि 5; धप नि 5; पध सांऽ नि 5; पध पनि ; ध म ;

राग-भैरवी.
नि
म् पs, प साऽध् 5, 45 ग् पम् ध्ऽ; पम् गसा गम्
नि
पम् 5; गम्पम् गम् ि5; साधू साs, रिम् ऽ (ग्) s;
सा रि सा 5; नि नि सा 5; रि s, सा 5 ॥
स्वरविस्तार.
(१) सारि साs; सारि ग्र् िसा 5; सारि गम् ग् िसा 5; सारि
गम् पम् गरि सा5; इसी प्रकार एक - एक स्वर बढाते जाना.
(२) निसा रिसा 5; निसा यि सानिसा गम् नि सा 5;
निसा गम् पम् ग्र् िसा s; निसा गम् पध् पम् गर् िसा 5;
निसा गम् नि नि पम् ग्र् िसा ; निसा गम् नि सा निध
पम् ग्र् िसा 5; निसा गम् नि सां!ि सांनि ध्प म्ग् सि5;
निसा गम् नि सारिं गंगं रिसां नि पम् गर् िसा 5;
निसा गम् नि सांरिं गंम् गरि सांनि ध्प मग रिसा ऽ ।।
नोट-उपरोक्त रागांग विस्तार में सबी प्रकार के स्वरों का प्रयोग
दिखाया है. ये विस्तार बीन या सितार पर बहोत उमदा तौर से बजेगा. इस
का और भी अनेक चलन हमारी पास है, परंतु ग्रंथविस्तार के भय से यहां पर
सब नहीं लिखा. यदि सब रागों के रागांग विस्तार याने जोडकाम विस्तार से
लिखा जाय तो वह पृथक् पुस्तक रुप से प्रसिद्ध होना चाहिए.
उपरोक्त रागांग विस्तार में सिंध भैरवी, तोडी, जोनपुरी, मालकौंस,
भीमपलासी, खमाज इत्यादि रागों की छाया दृष्य होगी. तांडा और जौनपुरी

हिं. गा.ऋ.पु.मा. प्रथम पुस्तक.
राग की छाया गाते बजाते वक्त लौकिक अति कोमल स्वरों का व्यवहार करना.
ये सब रागों की छाया नीचे मुजब :-
(१) सिंध भैरवी :-ग 5 रि ग 5; रि नि सा; रिग 5, सा रि
सा॥
सां सां
( २ ) तोडीः- नि नि s, सां रि गू; रिग्; रिऽ सा s,
निसां ॥
অথবা
नि
(३) जौनपुरी :-रि म् 5, म् पऽ, प सा , ध्ऽ ५ ॥
नि
आसावरी ) निस २ जगह ध् , पऽ ऐसी स्वर रचना होगी
वहां जौनपुरी अथवा आसावरी की छाया समझना.
म् ध् नि सां
(१) मालकौंस:- गम् ध् नि सा ॥
(५) भीमपलासी :-निसा गम् पऽ ॥
(६) खमाज :-पध नि 5; पध सांऽ नि 5; पध पनि s; धम् ।।
उपरोक्त रागों के सिवाय इस राग को और रंगीन करनेके लिए तीव्र
मध्यम स्वर का भी अल्पसा व्यवहार किया जाता है.
भैरवी-दादरा.
रचा प्रभू तूने यह ब्रह्मांड सारा,
प्रानों से प्यारा तूं है सब से न्यारा.- रचा
तूंहि माई बंधु तूंहि जगत जननी,
सकल जगत में एक तेरा पसारा.-रचा

राग - भैरवी म् साप s (प) 5 पध् निसां पध् निसांध् पग म् भू || तूंs Sय ह S र चा प्र ૨ S गम् पध् । पम् (रि) 5 ब्रड 5 ह्मांड सा 5 S S रा S * म् नि सा सा ग | (ग) 5 s नो ऽ से 5 सा ग म प ग (म्) प्रा प्याड S S S S S से S पध् निसां ध् पम् ग् (म् तूंs डास ब न्यारा नि *(अंतरा) घ5 (ध्) | s नि || नि सा | निसां रिमांड तूं हि भा बंss धु S S S (नि) |नि सा तूं 5 सां नि नि म भाव :1 S S नि ध् पध् प मा रि' | सा नि | सा नि ] नि इ.५] मु म । म रि | र म् | (नि) 15 सा स क 5 एक S ते ७ sरा S स्थायी." रचा प्रभू । निसा गम् । पध् पम् । गरि सा ॥ रचा प्रभू पध् निसां । निधू पम् । र्सिा ॥ र चा, । निसा गम् । पध् निसा हिं. गा. क्र. पु. मा. प्रथम पुस्तक. । गंगं रिसां । निध पम् । गरि सा ।। र चा, । गम् पध् । निसां रिंगे मंगं रिसां । निन्ध् पम् । ग्र् िसा ।। रचा....सारा निसा गम् । पथ् निसां । रिंगं मपं ।। मंगं सिन् । न्धि पम् । ग्र् िसा ।। रचा..सारा निरि साग् । ग्प । मध् पनि । ध्सां नि । सांगं रिम् । गंप मंगं रिसां निध् । पम् ग्र् ि। सानि सा ॥ र चा । s, निस। । गसा गम् गम् धम् । नि नि । सारि गरि ।। सारि सान्।िसांनि धान्। ध्प ध्प म्प म्ग् । मग् रिग् । र्साि रिसा ।। रचा....सारा निसा ग्म् । नि सारि। गंमं पंम् ।। गरि सांनि । ध्प म्म् । रिसा निसा, म् ग्र् ि। सार्,ि ५ । मग रिग्, ॥ ध् पम् । गम्, नि । ध्प म्प, सौ निध् । पध, रि' । सांनि नि, ।। गं रिसां । निसी, रिंगं । मंगं रेंसां, । निसां गोरें । सांनि , नि । रिसां निध ,।। पथ् सांन् ि। ध्प, म्प । निध पम्, गम् ध्प । म्ग्, रिंग । पम् ग्र्,ि ।। सारि मग् । रिसा, निसा । गम् पध् निसां निध् । पम् गर् ि। सानि सा ॥ रचा....सारा अंतरा. " तूंहि भाई बंधु" सारि गरि । मानि, नि । सांनि ध्प, ॥ म्प ध्य । म्ग, रिग् । म्ग् रिसा, नि सा गम् । प, गम् । पधू नि, ॥ म्प नि । सा, पधू । निसां रि सांनि ध्प । म्ग् रिसा, । निसा गम् ।। तूहि भाई बंधु रांग-भैरवी. ७३ सांरि सांगं । रिसा, निसां । निरिं सांनि , ॥ नि ध्सां । निध्, पध् । पनि धूप, भूप म्ध् । पम्, गम् । गप मग, ॥ ग् िरिम् । गरि सा, । निसा गम् ।। तूंहि भाई बंधु नि सांधू निसां नि । सांनि ध्प ॥ मग रिसा, । निसा गम् । साग म्ध् गम् नि । मध् निसां । नि सांkि॥ निसां गंम् । पंपं मंगं । रिसां नि पम् गर् ि। सानि सा, । निसा गम् ॥ तूंहि भाई बंधु । पथ् निसां । रिंगं सांरिं। निसां ऽ । रिसां निध् , । पध् ऽसां । निध् पम्, गम् ऽध् । पम् ग्रि, । सारि ऽम् ॥ गरि सानि । सा, निसा । गम् पध्, गम् पध् । निसां, धूनि । सारि गम् ।। गरिं सांनि । नि सांध् । निसां नि सां। भैरवी-दीपचंदी सावरिया रे नाहिं परत मै का चैन. दरस तुमारो बेग दिखावो, मानत ना दिन रैन. रि नि सा ना हिं s|रि सा रि सारिप म् ग् | रि सा रि निसान S S S S S काड S S त २ H ३ 5-5 सा S s]s s s सा | नि साग् रिसा | निसा के एs 5 मा S S SS: न SSES SS S ७४ हिं. गा.क्र. पु. मा. प्रथम पुस्तक. सा नि सा हिं s|रि सारि गम् पध् | ऽ म्पम् गम्ग् | रि सा रि नि 5 पऽऽ रात . S S S S S सा S SIS 5 सा 55 5 सा धनि साग साग्! मग हांड s 5 الى S S 5 5 न S 5 नि सा हिं s|रि सारि गम् पनि | ध्ध् म्पम् ग् | ध्ध् म्पम् ग् | रि सा रि नि त मै ना S S 5 S S S TSST का S सा SSSSss सा चै sss SS SS न निध सानि रिसा | ग् सा । हांड रे S S 5 S निसा निसा गम् | पध् म्प गम् गम् | प म ग नाs हिंड र हि रि सा रि नि S SS S S प 5 स S S S S S AT S S S S S S AT धनि साग रिसा | निसा S SS चै sss S SS न हां गू ग् गू | ग् s s रिसा | सारि गरि नि | सानि 5 सा या 55 रेड S S र या व S 5 S S 5 S S S पध | सा ऽ ऽ निसारि s हिंड sसारि ग S S S Sss S S S S S रिग S s गम् म् S गम् प 5/s S SS S म् गरि सा रि नि मै S SIS प र त सा SIS S MA ar सा | सारि ि ि| सानि सा ss हांड SS ssss 5 M S S न S | 0 सा रि म् । म् । व रिया । गम् पम् पम् | गर्ि S रे । पर S S S S राग-भैरवी. निसा गम् पध् एड S ऽम् ५ गम् ऽग् पम् पम् गरि | सा 5 s s S S S S S S S S S SSS प ध प S 5 धूप मग मग प! 5 प व S रि या 5 S S S S S S S - تدر 5 s घ् सा 5 म्ध् म्ध् मग सा 5 SS बा व या S 5 S S S र S S S S S S S S S S S S सानिध.. सारि निसा गम् पनि ध् ऽनि थ् | ऽप म् गरि सा रि नि नाs हिंss र त मै 5 का म्(अंतरा) S s| ग् म् धू नि Sद र स तु म् ध् नि नि सां सा 515 सा गू म् धू नि मा S द र तु चै S S S 5. ह S S S S 5 nu S S S 5 रो S S स S सांड मा | धुनि सांगू मियां निसां । सा नि सौ सा 5 ग ग दि S S 5 S ग्नि सांरिं सांरि | सांनि ध प s| धूप मग 5 धूप निध नि खा s ass 55द र सऽ तु मुगु म्ग S S सा S सा 5 मा 5 । अनि सांगू सांगू इंगे | सा । नि 5 सा सा बे 5 ग दि S 5 सांगं सांनि ध S 5 na S नि सांरिं | खाऽ 5 प S ss SS S S S S S S S S * सा S S ध् प S प S تر له । SIS SIS धू सा 5 दि न मा.5 S SS ना ७६ हिं. गा. क्र. पु. मा. प्रथम पुस्तक. नि ध् नि ध प ५ | पम् गम् | म म् प वरि नि S S S S S न S 5 सा S S S S म्प धम् पध् । म्प s s|निध् पम् गरि | सा s s s याSS S S S S ss रि सा |रि सा रि सारि | प म् म् गरि सा रि निसानि हि ऽ S र त मै s का नि र वि S S 5 S प सा S SS 5 5 सा ग रिग् पम् HITS चै 5 S S S S न ना हिं प र त मै रिम् ग्रि साग् रिसा नि पध सारि। सारिप म्/गम रि िसारिसा निसानि चैss s उन नाऽ हिंड Sqlass ass SS Fiss S S SIS S 5 सा SS सा चै ग्नि साग रिसा | निसा s हांड S Ss S 5 न S S 5 555 पप ऽप पप | पथ् पम् ऽम् म्प | म्प नि: पम् पम् ऽग् सारि सानि नाहिं ऽप रत मैऽ काचै ऽन्सा वरि याऽ ऽना हिंऽ पर ऽत मैऽ काs सा 5 Sis S 5 5 सा नि साग साग | मग सा हांss S 5 S 55 ना पनि S 5 S S S साग साग् मग | म्प म्ध् पनि धूप | पध् परि सांनि ध्प ऽम् गरि सानि, नाऽ ऽहं 5 मैs का ऽप रत चैऽ ऽन्सा वरि वरि याऽ ऽप रत मैका सा 5 सा| रिसा निध पध निसा | रिग् ऽरि सारि | सा, सारि निसा गम् न । साs S ss वरि या, साऽs चै । S S 5 पध् निम ऽम् | ग् सारि सा | निसा गम् पध् ऽप ग् रिसा रिनि 5 वरि या 5 नाs हिंss तमै ऽम् | म H S. S ऽप र का राग-भैरवी. सा 5 चै S SIS Ss सा s सा निध सानि सि | ग् सा 5. s SS न हांड रे । S S S S S 55 गसा ऽम् ग्प | मप धूप ऽनि ध्सां निसां ऽगं रिसां ध्प ऽम् गरि सानि नाऽ ऽहिं ऽप रत मैs sका ऽचै ऽएन ऽसा परि याऽ ऽप रत मैका सा S S चै SS s सा निसा गम् पप | मग रिसा निसा 5 SS न नाड हिंड पड 15 तऽ S S S S साSS S S S ऽप पध् प पध् प, रिग पध् रिग् पध् नि पध् | प, गंगं सांनि | ध्ध् निसां रिंगं 5 ऽसा वरि या, 5 वरिया, ना S s नि रिसां धूप | पधू निसां निषि सांनि ध्प ऽध् पम् ग्मग् रिरिसारिसा निसान हिंप रत 5 मैका चैऽ ऽन्सा वरि याऽऽना हिंप Rss तss मैss काऽऽ सा sssss सा धनि साग रिस | निसा 5 s s हांडs S SS SS न S S SS os sf sfis Sais la sq ऽप मऽ ऽम् । म् नाऽ ऽहिंड पड ऽर S त मैs sका चैऽ ऽन्सा 5 व नि । ग्ऽ ऽरि रिऽ ऽसा 5 नि | सा रि पम्ग् ऽरि ऽसा ऽनि रिऽ ऽया s| साऽ ऽव 5 रिया ना हि पर ऽत ऽमै का ૨ सा, गम् पध् | ऽप मग रिसा रिनि | सा, गम् पध् | ऽप मग रिसा रिनि ऽन्प र तमै का ss Sर तमै का S S सा 5 S S ७८ हिं. गा.ऋ. पु. मा. प्रथम पुस्तक राग भैरव. मम् नि मू म् नि नि रागांग विस्तार. नि (१) सा s, रि रि सा 5, 4 5 सा s, रि 5 सा 5; गरि 5; मग रि ; पम् गरि 5; रि 5, सा 5॥ नि (२) सा , रि रि सा , निसा ध, , नि ध प म प नि ध , नि सा 5; सा म् 5, म् ( (म्) रि ; रि ग म प म् गरि रिऽ सा ।। नि (३) साम् ऽ गम्, म प प ध् ध् प; ध्ऽध्प पम्गम् ; म् () र ; ग म प म गरि ; रिसा ॥ नि (४) सा म् ऽ गम्, म प म्प; प ध 5, 45 पनि ध् , 45; ध्ऽध्प पम्गम् 5; म् (म्) रि5; गम् पम् गम् रि5; रि मू ग म् नि नि मू मुनि प सा॥ नि प मू म नि (५) म प, ध् , नि सो ऽ सी (किंवा) गम् ध् नि सो ऽ सांs; रि'रि' सांs; ग म रि'रि' सा ; निसां ध् sus म् ध् नि पनि ध प , ध्ऽध्प पम्गम् ; म् (म्) रि ; रि; नि नि सा5; गs, प 5 प, ध् ध् 5, 4.5॥ मू राग-भैरव. ७९ खरविस्तार. (१) निसा म्ग रिरि सासा 5; निसा गम् पप मग रिसासा 5; निसा गम् पध् ध्प म्प मग रिरि सासा 5; निसा गम् पनि न्धि ध्प मग रिरि सासा 5; निसा गम् पध् निसां रिं सांनि धूप मग रिर् सासा 5; निसा गम् पध् निसां गंगं रिसां निध पम् गरि सासा 5; निसा गम् पध् निसां मम रिसां निध् पम् गरि सासा 5; निसा गम् पध् निसां गंम् पं गरिं सांनि ध्प मग रिर् सासा (अथवा ) निसा गम् पध् निसां गंम् पंपं मग सिां निध् पम् गरि सासा 5 ॥ (२) गम् पध् ध्प मग रिरि सासा 5; गम् पध् सांनि ध्प म्प मग ििर सासा 5; सारि गम् निध् सो रिरिं सांनि धप मग म्प म्ग रि सासा 5; सारि गम् निध् सा मपं मंग रिए सांसां, सारिं सांनि धूप मग म्प मग रिरि सासा ॥ कि छाया दूर करनेके नोट-इस राग के स्वरविस्तार में कालिंगडा राग लिये ऋषभ स्वर का बहोत चमकाते रहना चाहिये. उपरोक्त स्वर विस्तार के आरोह में पंचम के जोड में तीव्र मध्यम, और अवरोह में धैवत के जोड में अतिकोमल निषाद अल्पसा लगाने से रामकली राग की स्वर रचना होगी. यथाः- MAA- निसा गम् पध् निसां रि!ि सांनि ध्प मप नि ध्प मग रिसा 5 ।।

८० हिं. गा.भ.पु.मा. प्रथम पुस्तक. भैरव-त्रिताल अब आयो शरन तुमारे, शरनग्रहे की लाज रखो तुम तारन तरन हमारे. - अब जाल जग बीच जाके पडयो मैं, सूझत साधन नहिं तरने को, विफल मनोरथ होके जासे, घडि घडि आन पुकारे. - अब म् नि पप ध् म् आ5 यो श र न तु ग म् ध्ध् पम् पम् म् गम् 5 धूप प ५ म् माSSS ssरे अब आ 5 यो s|श र न तु - म् S ध्ध् पम् प म ss AIS S S S S S ग गम् रिग म् पs sश र न ग्राहे 5 की श म ला 5 ज म नि म् ग म् म्। म् म्। रि 5 सा सा | सा 5 ग म प प प ध् रखो ऽ तु तार न * (अंतरा) नि नि पथ् निसां रिसां निसां धूप म्प म् गम् 5 म् म् प प ५ ध् माऽ ऽ 5 s | रेऽ 5 अब जा ग बी s च नि नि सा 5 सौ सौ नि सां सां | ध् ऽ ध् सो सो 5 सांसा जा 5 के पडयो 5 मैं s|स नि नि पर'रि' सां सा | नि सा धू ५। ध् घ् सो सां। ध् नि ध् प तर | ने 5 को 5 वि फ ल नोड | माम S 5 झ त सा 5 घ न.

हो र सा नि सा ग म प प ध्
राग-भैरव.
s म् मग |रि साs
जा 5 से s|घ डि घडि आ ऽ न पु
नि
पध् निसां रि!ि सांनि | ध्प म्प म् गम् ऽ धू प प ध् म्
अब आ 5 sश र न तु
नि
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--
काSS
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S
S
1
स्थायी.
गम् पध् ध्प मग । रि िसासा, अ ब | आयो शरन तु
गम् पध् सांनि ध्प । म्प मग रिरि सासा । आयो शरन तु
।
गम् पध् सांरिं सांनि । धूप मग रिरि सासा । आयो शरन तु
मा sss | रे s s s । सारि गम्' पध् निसां । सांरिं गम् मंगं रिस
सांरिं सांनि ध्प मग । म्प मग रिरि सासा । आयो शरन तु
ध्ध् पध् ध्प ध्ध्। पम् गरि, रिंसिारि। रिसी रिं सांनि ध्प, । गंग रिंग गरिं गंगै
रि िसांनि ध्प मग । म्प मग रिरि सासा । आयो शरन तु
मा sss | रे sss | रिरि रिरि सासा, ध्ध् । ध्ध् पम्, गिरि रिरिं
सांसां, सांनि ध्प म्ग । म्प मग रिरि सासा । आयो शरन तु
मा s s s।रे sss | निसा गम्, पथ् पम्, । गम् पनि निध पम्,
गम् पध् निसां निध् । पम्, गम् पध् निसां । सिांनिध् पम्, गम् । पध् निसां ममं रिस
निध् पम्, म्प म्म् । रिरि सासा, अ ब । आयो शरन तु

हिं. गा. क्र.पु. मा. प्रथम पुस्तक. मा sss | रे s s s। निसा रिरि सासा, र्गि । म्म् गरि, गम् पप म्ग, म्पध्ध् पम्, पथ् निनिध्प, नि।सांसां निथ्, निसां रिंसिांनि, सारिं गंगं रिसी, रित्रि सांनि ध्प मग । म्प म्ग रि!ि सासा । आयो शरन तुमारे अंतरा." जाल जग बीच" सांनि ध्प मग रि । सारि गम् निध् सां । जाल जग बीच सांरिं सांनि ध्प मग । रि गम् निध् सां । जाल जग बीच जा 5 के प । डयो 5 मैं 5 । सांरिं गम् मग रिसां । सांरिं सांनि ध्प मग म्प मग गिरि सासा । निसा गम् पध् सा । जाल जग बीच जा ऽ के प । डयो ऽ मैं ऽ । रिसारि रिसी निसां । ध्ध् पध् ध्प म्प म्प म्म् पम् गम्।रासारि सि निसा,सारि सासा,गि रिरि, गम् गग,म्प म्म् पथ् पप, प्नि ध्ध्, । निसां निनि, रिं सांसां । जाल जग बीच जा 5 के प । डयो s मैं 5 । सांरि गम् रि!ि सांसां । ध्प गम् रीरि सासा निसा गिरि सारि सासा । रिंग म्म् गम् रिगिम् पप म्प मग । म्प ध्ध् पथ् पम् १. धनि सांसां निसां निध्।निसां रिसिरिं सांसां,सांनि निष्प पम्।म्ग गरि सा,सारि ૨ गम् पम् गम् निध् । सा, सारि गम् पम् । गम् निध् सा, सारि । गम् पम् गम् निध् सो 5 s s|मम् पप छ | सां सांसां निसां सां ध् ध्सां सां सांसां जा लज गबी ऽच जा केप डयोऽ मैं सू झत सा धन पप धम् S S S अ निसा गम् पध् निसा 5s अब आ ऽ यो ऽश र न तु राग-भैरव. रिसिांसां निसाध्प |ध्ध् सांसां नि ध्प ग मग रि िसासा निमा गम् प पध् नहिं तर नेऽ को विफ लम नोऽरथ हो केऽ जाऽ सेऽ घडि घडि आ नपु १ नि २ नि पथ् सांनि धूप मग म् । ध् पप धम् म् ध् पप धम् का sss आ यो शर न आ यो शर न आ यो शर नतु बोलताने. घध् पम्प s| म् नि ५ | सां नि ध प प धूम् मा 5 बा आ आ5 इयो । 5 श ने तु नि म्प ध्प म्प धूप | म् ग नि सांनिध् सां निध् प|s पप s पप धूम् माSS 5 रे अ ब आ 5 योs s ऽ शर न तु गम् निध् सांनि ध्प म् ग प्नि सांkि | निसां नि धूसां निध्पऽ|पप ध् म् माSSS s 5 रे ऽ अs बऽ आऽ ऽ योऽ शर न तु गम् पध् निसां निध् | पम् ग म् गम् नि ध प 5 पप ध् म् माऽS 5 Rs 5 अ ब आ 5 यो s 5 शर न तु निध् प म् गम् धू । प प ५ म् ATS S नि नि धूसां रिंगं म्सिां निसां धू प म गम् । ५ प प ध् म् मा रे s अब आ इ यो श र न तु S S S नि S S साई S S S S S गम् पध् निसां ब्नि | सारिं सांनि ध्प मग रिस निसा गम् ५ | 5 पप ध् म् ATS S SSS sरेड ऽ आऽ यो ऽ शर न तु नि गम् पध् पम् गम् | पम् गरि सानि सा| 5 गम् ध् [५ प ध् म् ATS S SS SS 5 रे आऽ यो s|शर न तु ८४ हिं. गा. क्र. पु. मा. प्रथम पुस्तक. मा नि नि घथ् पम् पम् म् ग म् ग| म् नि म् नि धू ध् ऽ सां सां सा माSSSS रेड अब आ5 यो 51s श तु नि धनि सांरि s 5 | सा 5 5 5 सा गरि' सांसा (सा) ५ प SSS SSS की नि ध् सां नि पम्प म्म् रि सा| 5 गम् प ध् । सो सां सां सां ला 5 जड र खेोऽs 5 ताऽ र न त र न ह नि ग्नि सांगं रिसां निधू | पम् गरि सानि सा गम् धु पप ध् म् मा ssss ऽ आऽ यो श र नs S S S 5 S ग म् गम् पध् | निसां 5 5 5/5 s s s|s सांसां सां सो आ 5 यो S SS SS SS s/s शर नि नि पथ् निसां रि' सारिं निसां 5 5 | सांरि निसां 5 नि | ध् ध् प म् मा sss रेsssss 155 नाम कि नि s ग रि मग | पम् रिऽ सा | सारि निसा ऽ नि | धूसा सा सा सा s ला •ज र खोऽ तु s म ताSSS रन तर न ह नि सारि गम् पध् निसां रिरिं सांनि ध्प मग | 5 गम् ध् पप ध् म् माssss is SS ऽ आऽ यो ऽश र न तु 5 गम् पध् धूप मग | रिसा निसा म् ग | सांऽरिं सांरिसां निध् पधूप sss s अब आऽयो शरन तुमाऽ रेऽऽ HIS S SS २ म्पम् गम्ग रिरि साऽसा | साम्ग मुपप मनिध् सांऽसां शऽर नऽ हेss sऽकि || लाऽऽ जहर खोऽऽ तुऽम - राग-पूर्वी. नि ममरिं सांसांसां सांनि पप गम् ध् SIS एप 5 एप ध् म् तारन तरन हमा रेऽऽऽ आऽ योs शरन तु aa २ S s गम् पप [ मग रिसा गम् पथ् धूप मग गम् पथ् | निसां गिर सांनि ध्प ऽ ऽ आऽ ऽयोऽ शss S IS ATSS 5 रेऽऽ नि नि ज्नि प्रिं सांनि ध्प गम् गप मग रिर्सा | सारि गम् मरि गम् ध् ध् पध् निसां शऽ ऽर नऽ ऽ ऽ ऽ कीss लाऽ ऽ जा रखो ऽ तुss रिंसी सारिं गंम् पंपी मंगं रिसां सांरिं सांनिग्नि सांनि ध्प मगारिरिसासा, निसा गम् म ताSSSS नऽ त नऽऽ ऽ हमाऽ ऽ ss १ नि २ नि अनि पध् सांनि ध्प म्गम् ध् पप धम् म् ध् पप धम् म् ध् पप धम् SS आ यो शर न आ यो शर न आ यो शर नतु S S ध्ध् पम् पs म् SS S ATS S SS SSS * राग-पूर्वी.. रागांग विस्तार. (१) नि नि s सा रि ग s, म् ग 5; ग म म म म ग 5; रिग ऽ म ग s, रिसा॥ (२) नि रि गरि सा 5; नि रि नि पम. नि ध प; म प ध नि 5; नि , धू नि सा ; नि , सा रि ग; रिग म् ग s, रि गरि सानि रिs, साऽ॥

हिं. गा. क्र. पु. मा. प्रथम पुस्तक.
गम प
(३) नि रि ग म प , ग म ध् प5; नि ध् 5 45;
मपध् मप म ग म ग 5; नि रिग , ५ म ग 5; र्गि,
रिs, सा; नि रि, सा 5 ॥
(४) म ग , म ध् म सां 5 सा, नि रिसा 5; नि रि' गरि'
धू
सां
सा
सा; रिसांs, नि ध प 5; मप मप म ग म् ग 5;
ध्
नि रि ग 5, मध् मग 5 रिग 5, रिऽ सा; नि रि 5,
सा॥
स्वरविस्तार.
(१) निरि सा; निरि गरि सा; निर् िगम गरि सा 5; निरि
गम पम गरि सा 5; निरि गम पध् पम गरि सा 5; निरि गम
पध् निथ् पम गरि सा 5; निर् िगम पध् निसां निध् पम गरि
सा॥इ.इ.
(२) निरि गम नि निथ् पम गरि सा 5; निरि गम ग्नि सांरिं सांनि
धूप मग रिसा 5; निरि गम नि रिंगं रिसां निध् पम गरि
सा; निरि गम धनि रिंगं ममं गरिं सांनि ध्प मग रिसा ।।
मृदु मध्यम के साथ स्वरविस्तार:-
निरि गम् ग 5; गम् मग मग 5; मध् पम गम् ग; मध् निध् पम गम्
ग, मध् निसां रिसां निध् पम गरि सा, निरि गम् ग॥
ध्यान में रक्खें कि " सांनि ध्प मग मग रिसा इस प्रकार तान
परज राग हो जायगा.
लेनेसे

राग-पूर्वी. पूर्वी-त्रिताल. मथुरा न जावो मोरा कान्ह, मना करे गोपियो, गोकुल तेरी मथुरा तेरी, ब्रिज में मची धुमधाम. म गरि सा | नि रि ग म म थु रा न जा वो मो रा S SS S Mm s| म ग रि सा | निरि ग म 5 न्हाम थु रा न जा वो मो रा का S 5 प S 5 S 5 S S S S ध् ध् म प मग म् ग Sम रि ग ग का555 S S 5 55 *( अंतरा) धू ध् म गरि गरि सा 5 म ग म ध् | सां 5 सांs म ना करे गो पि यो ऽ गोड कु ल ते ऽरी 5 री । ध् धु नि रि' गं रिसां निसां रिंनि ध प म ग म ध् रि' नि ध् प म थुरा तेऽरी नि ज में मची 5 । 5 सा प धा 55 ध् म पम | ग म् ग, म | ग रिसा सा | नि ss ऽम, मथु रा 5 जा वो मो रा मा S स्थायी. का ऽन्ह । । । निरि गम नि सारि । सांनि ध्प मग रिसा, निरि गम धनि रिंग मंमै गरि सांनि ध्प । मग रिसा, निनि रिर्ग । मथुरा न जावो मोरा का ऽन्ह, पम गरि। गम प, प पम । गम् गरि गम प, । मध् निनि ध्प मध् ८८ हिं. गा. क्र.पु. मा. प्रथम पुस्तक. पम गम् गरि गम । प, मधू निसां निरि । सांनि ध्प मध् पम । गम् गरि गम प, मध् निसां गंगं रिसां । निध् पम गर्सिा । मथुरा न जावो मोरा का ऽन्ह । । निरि गग, रिर्ग मम,। गम ध्ध्, मध् निनि,। ज्नि रिरि, निरिं गंगं, रिंग ममं गरि सांनि। ध्प मग, मध् निरि। गंगं रिसां निनि ध्प। मग, मध् निमां रिरि सांनि ध्य मग, मध् । सांनि ध्प मग रिसा । मथुरा न जावो मोरा का ऽन्ह ।। मम गम मग रिसा, । निनि नि निध् पम गरि सा, ममं गर्म मंगं रिसां निध् पम । गरि सा, निरि गम । ज्नि रिंग मम गरि । सांनि ध्य, मध् निरि गंगं रिसां निध् पम । गम् ग मग रिस । मथुरा न जावो मोरा कान्ह. अंतरा." गोकुल तेरी" नि!ि गंमं गरि सांनिध्प मग रिस निसा, मग रिर्ग, पम गम, निध् मध्, सांनिधनि, रिसां निसां, गंमें गंरि । सांनि ध्प मग रिस । गोकुल तेरी निरिं गम् गरिं गंमं । पमं गंम् गरिं सांनि । ध्प मग रिसा, निर् ि। गम् गरि गम ज्नि मधू निरिं गंग रिसां । निध् पम गरि सा । गोकुल तेरी गंगं रिसी, रि िनिध, निनिध्प, ध्ध् पम, पप मग, मम गरि,गग रिस, निरि गम प, रिंग मध् नि, । गम नि सा ऽ। गोकुल तेरी सांनि ध्प मप मग । र्गि ऽम रिग मप । गम ऽप गम पध् । सांनि ध्प मग रिसा, पम गरि, धूप मग, निध् पम, सांनि धूप,रिसां निध,गरि सांनि,मिंग रिसा, पंम गोरे सांनि ध्प मग रिसा, । गम पध् मप सां । गोकुल तेरी, इ. इ.

राग-पूर्वी. बोलताने. " मथुरा न जावो मोरा" S for प ध् प, म ५ मा म थु, रा Sन जा 5 वो, T T - ग म ग, म गरि सा सा म गरि सा | नि रि ग म मो 5 रा, का sरा, काss ऽहम थुरा मोरा न जा वो for नि रि ग म प 5 मा ५ प S का ऽन्हा T म थु रा 5 S sन, जा नि, 5 वो, नि , म ध् प म ग रि सा | नि रि ग म मोs/रा, का 5 न्हम थु रा जा वो मोरा धु मा न - प S T का ऽन्ह । मप मधु पथ् मप मप मग म् ग मऽ ऽथु 5 राऽ नऽ ऽजा 5 वो - - पम गरि सा, निरि गम पम गम् ग रि सानि रि ग म मोऽरा, काsss s ऽन्ह | म थु रा । न जा वो मो रा प । । गम पम ग, गम पथ् पम गम् ग, म थु, राs थु, राऽ नऽ जाऽ ऽ वो, का उन्हा TT गम पध् निध् पम | गध् पम गम् ग म ग रि सा-नि रि ग म मोड 5 राकाSSSऽन्हम थु रा न जा वो मोरा निरि रिंग गम मध् धनि निरिं रिंगं गंमें पमं गरि सांनि ध्प | मग रिस निरि गम मऽ थुऽ राऽ नऽ जाऽ वोऽ मोऽराज काss ऽ ऽन्ह मथु रान जावो मोरा for -- प का ऽन्हा H । साग रिसा, मि गरि, गप मग, मध् पम, राss, is, - - म S, थुs 5 ९० हि. गा. क्र. पु. मा. प्रथम पुस्तक. पनि धूप, सां निध, निम् िसांनि, सांग रिसा निध् पम गम् ग | मग रिसा निरि गम जाss, वोs 5, मोऽ s , राs s काsss ऽन्ह मथु रान जावो मोरा - -- - प का ऽन्ह । TH म गरि सा नि रिग म जा वो मोरा -- निरि गरि गम गम | पध् निसां निध् पम । धूप मप मग मग | मग र्साि निरि गम मऽ ऽथु ऽ राsss sas जाऽ ऽवो 5 मोऽरा 5 जावो मोरा प S T T HH । निसां निम् िसानिध्प। मप मधू पम ग मऽ ऽथु रा नजाऽ ऽवो मोडरा का ऽन्हा गम् गम गरि सीसा निरि गरि गम पथ् म गरि सामग रिसा निरि गम काऽन्हम ना करे | गोऽ ऽपि योऽs थु रा न मथु रान जावो मोरा प 5 कान्हा HE एमप मध् पम, निसां निरिं सांनि, मप मध् | पम, गम गप मग, मऽ ऽथु, रान s,जाऽऽवो 5, मोऽ ऽरा , प ૨ ३ मग र्गि,मग सि|निरि गम प, मगर्साि निर्गिम पमग हि निरि गम काऽ ऽन्ह,मथु रान जावो मोरा कान, मथु रान जावो मोरा कान, मथु रान जावो मोर। प mammHAAN MAHAN

राग-लोहनी.
९१
राग-सोहनी.
रागांग बिस्तार.
(१) सा ग , म ध नि सो ऽरि' सांs; सो ऽनि धs
म ध नि ध ऽ मग 5; म गरि सा॥
ध
(२) सा s, रिसा s नि ध 5; म ध नि सा ऽरि सा 5;
गs, म. गs; ध म ग 5 निध मध निध मग 53;
ग म धs, म ग रि सा॥
(३) ग म ध नि नि सा s, सां रि' सा रि' 5 नि नि
सां 5 ध नि सा गे, मगर सा; नि धनि
सांs, नि घऽ ग5; म ध नि सा ऽ रि'रि' सा ॥
स्वरविस्तार.
निसा गरि सानिसा गम गरि सा 5; निसा गम धम गरि सा s;
निसा गम धनि धम गरि सा , निसा गम धनि सांनि धम गरि सा 5; निसा
गम धनि सांरि सांनि धम गरि सा 5; निसा गम धनि सांगं मंग रिसां निनि
धम गरि सा (अथवा) निसा गम धनि सा निरि गम गरिं सांनि धम गरि
सा॥

१२
हि. गा. क्र. पु. मा. प्रथम पुस्तक.
सोहनी-त्रिताल
काहे बजाई बीन सांवरे मन मोहन गोपाल लाल तुने.
श्रवण सुनत है धुन मुरली की, मोह लियो सब ग्वाल बाल तुने,
सा ग ग म पनि मध
s का हे ब जाईss
सा 5 सो सनि रि'सारि निसां सां सां निसां रिसां नि ध म ध
बी s न सां 5 व रे
ss म न मोऽs
*(अंतरा)
म
धनि सांनि धगम
TTS लला
s ग रिसा म ध म पनि सांसा
s ल तु ने श्रवण सुन त है 5
सां
सां
सा रि' सा रि' नि ऽ सारिं निसां नि रि'
गरि' सो
धु न मु र ली 5 कीss मो ह लियो । म
धनि सांनि ध गम | 5 ग रि सा | सा ग ग म ऽ धनि मध
ग्वाऽ ऽ ल बाss ल तु ने 5 का हे बजा ऽ ई
ss
स्थायी.
सो s s [निसा गम, साग मध, गम धनि, मध निसा, धनि सांगं, मंग रिसा,
बि ऽ ऽ न | आऽ s, s s,Iss, ss,Iss, ss
गरिं सांनि, रिसां निध । गम धग मग रिसा । काहे बजाई
बीऽऽ न । साग रिसा, रिम गरि, । गध मग, मनि धम, । धसां निध, निा सानि,

राग-लोहनी. १३ सांग रिंसां, रिमं गरि । सांनि धम गरि सासा । काहे बनाई बी 55 न । निसा गग रिसा, लिंग । मम गरि, गम धध । मग, मध निनि धम, धनि सांसानिध,निसांगिंग रिसा,रिंग मेमोगरि,निसां गंगं रिसा, धनि सांसां निध,मध निनि धम, गम धध । मग, रिर्ग मग रिसा । काहे बजाई गग रिरि,मम गग, धध मम, निनि धध, सांसां निनि, िसांसां, गंग रिरिं, मम गंग रिरि सांसां निनि धध । मम गग रिरि सासा । काहे....सांवरे अंतरा.. श्रवण सुनत धनि सांसां निध, मध ।निनि धम, गम धध ।मग, रिंग मग रिसा, निसा गम धनि सांगं मम गरिं सांनि धम । गम धनि सांऽ । श्रवण सुनत है सांनि धनि सां, निध । मध नि, धम गम । ध, मग रिंग म, । गरि सा; निसा ग, साग म, गम ध, । मध नि, धनि सा । श्रवण सुनत निसां रिंध निसा मध । निगमध रिंग मसा। रिंगानसा रिध निसा, । साग गम मध धनि निसां सांग गंमं गरि । सांनि थम धनि सा । श्रवण सुनत है मं रिंगं सारिं निसां । धनि मध गम रिंग । सारि निसा, निरि साग । मिगध मनि धसां १ २ निरिं साग रिमं गरि । सांनि धम, गम धनि ।सो सा, गम धनि । सो सा, गम धनि At sssis ss sl हिं. गा.क्र. पु. मा. प्रथम पुस्तक. बोलताने. s साग गम ऽ धनि मध s का हे ब जा ऽ ईss s म ग, घ | म, नि ध, सां नि, रि'सा, रि'| नि, सां ध, नि s का हे, ब जा, ई बी, न सा, व रे, मन, मो ध ग, म, ग, रि सा नि | 5 सा ग ग सारि सारिं ऽ सौ गो, पा ल, ला|s, ल तु ने | 5 का हे ब | काऽ हेss ब निसां निसां अनि घनि धनि ध मध मध 5 म गम गमग जाऽ ईs 5 बी नऽ साऽ ऽ व रेऽ मऽ ऽ न मोऽ हऽ 5 न रि मध नि सा रिं गं सा ग म ध | नि सा रि'सां सा ग ग म 5 धनि मध गो पा 5 ल ला ल तु ने 5 का हे ब जा ऽ ईs s सांड T निसां निरि सांसां सांसां धनि धसा निनि धध बी ऽन । ।। काहे ऽब जाई बीन साऽ ऽव रेऽ मन - - मध मनि धध मम | गम गध मग रिसा 5 सा ग ग म 5 धनि मध मोऽहन गोपा ऽल लाऽ ऽल तुs ने 5 का हे ब जाऽईss सांनि सांनि धनि धनि धम धम गम गम गम गरि साऽ, साग मग मध मध बजाऽ ऽई 5 बीs/नऽ ऽसा 5 वs, रेऽ ऽम 5 नs काऽ ऽहे S मध निध निसां निसां | रिसांऽ िनिसां निसां| 5 सा ग ग म ऽ धनि मध गोपा ऽल लाल तुने |5 का हे ब जा ऽ ईs 5 मोऽऽहऽ न - सो ऽ T बी न । सारिस निसांनि | धनिध मधम | गमग सागम बजाई | बीऽन सावरे | मऽन मोहन काह राग-हिंदोल. गमध मधनि धमध गोपाल लाल धनिसा निसांग सांगंम गरिसी सागम तुऽने काऽहे | बजाई बीन | काऽहे काऽहे बजाई - सा ।। बी उन । गम धध मग, मध | निनि धम, घनि सांसां 11 काऽ ऽहे 5, बऽ ऽना 5, ईs ऽबी fam निध, निसां रि िसांसां, धनि सांसां निध, मानिनि धम, गम धधामग,साग मम गरि, वऽ ऽरे 5 , मऽ ऽन 5, मोऽ ऽह, नऽ ऽगो ऽ S . नऽ ऽसा 5 ध ३ घ सा ग मध निसां | ऽसां गग म ध ( सा सांग ग मध सा सांग ग मध पा ल लाल तुने का हेब जा ई| बी नब जा ईबी नब जा ईs सा S 5 बी 5 ऽन mammeRADEEWANA राग हिंदोल. रागांग विस्तार. (१)सा, गड, सा; सा गमग; ग म ध म गमग सा॥ ध (२) सा ऽ, निध, मध सा 5; गS, सा; म ग सा S; धमग सा; नि ध म ग, मग, सा॥ ग म धनि (३) सा ग म घ सानि ध मंग, मग 5, सा ॥

९६ हि. गा. ऋ: पु. मा.प्रथम पुस्तक. सा (४) गऽ म ध सो ऽ सी 5; सां ग ग म ग स ध सा-53B ध मध मसा5; साधम गमग, सा॥ खरविस्तार. (१) सासा गग सासा 5; सासा गग मम गम मग सासा 5 सासा गग भम धध मम गम मग सासा-5; सासा गग मम धध निनि धम गग सासा 53 सासा गग मम धध मध सांसां निनि धम गग सासा5; सासा गग मम धध सांस गंगं सांनि धम गग सासा 5; सासा गग मम धध सांसां गंगं ममं गंसां निनि धम गग सासा॥ (२) साग सा 5; साग मग सा5; साग मध मग सा 5; साग मध निध मग मग सा 5; साग मध सां, निध मग मग सा5; साग मध सांस गंगं सांनि धम गग सासा 5; साग मध मध सांसां ममं गंसां निध मग मग सासा 51 हिंदोल-त्रिताल. ब्रजपति जागो भोर भई री, बौंसी की धुन बाज रही री. सब सखियां हिंदोल झुलावत, गावत हर गुन हरख भरी री. BANERABAR सां सां ध म डग सा ब्र प तिऽ जा ऽ गो ३ सा घ निध मध मध | म सा मो ऽ ऽ भs 3 री E-hren नि सा 5 ग s| म ग म ध बौ ऽ सी की धु न

रांग-हिंदोल.
९७
* अंतराध
सां सां सां साध सां मध | ग ग म धसां सां ।
बाज र ही 5 रीs ब स खियां 5 हिंs
सांगग म 5 सा सा। s गं मागे गैसा सा
दो
ल झु ला व गा व तह र गुन
सां सां सां सां साध साम ऽध | सां साध म
ह र ख भ
री 5 रीss
ब्र ज प तिs जा 5 गो
S
स्थायी.
सासा गग मम धध । सांसो सांघ सांम ऽध । ब्रजपति जागो
सासा गग मध सांसी । गंगं सांध सांम ऽध । ब्रजपति जागो
सासा गग गग सासा | गग मम मम गग।मम धध धध मम । धधसांसां सांसां घव
सांसां गंगं गंगं सांसां । सांसां निध निम ऽध । ब्रजपति जागो
"
मम गम मग सासा, । निनि धनि निध मम | गग सासा, ममं गमे । मंगं सांसां निनि धम:
गग सासा, साग मध । सांसां सांध सांम ऽध | ब्रजपति जागो
साग गसा निम धसा ।सानि निध धम धसा ।सासा गग मम गग । सासा गग मध सांसा
धम गम धसां गंसां । ममं गंसां निनि मघ । बजपति जागो भोर भई री
अंतरा. "सब सखियां हिं"
दो s ल झु। ला 5 व त । सो धसां, मध हो, । गग मध सां s,
सासा गग मन धध । गग मम धध सौ,। सांग सांध निध मव । मग मग साग सा,
७

हि. गा.क्र.पु. मा. प्रथम पुस्तक.
सासा साग गग मम । मध धध मध सौ। सब सखियां हिं
ममं गंसां,गंगं सोनि, सांसां निध, निनि धम, धध मग, मम गसा; सामगसा,गध मग,
मनि धम, घसां निध, । सांग सांनि मध सा । सब सखियां हि
मंगं गसां सांनि निध । धम मग साड, । साग गम मध धसां । सांगं गम गंसां इसी
।
निध ऽम, धम ऽग, | मग ऽसा, गम धसां । सब सखियां हिं
दो ल झु । ला 5 व त । स ब स खि ।
सांगंसां निसांनि धनिध मधम ॥ गमग सागसा, सागसा मऽम, ।
१
गमग घऽध, मधम सांडसां, । निधम धमग मगसा ऽ,साग ।
२
ર
मधसां, सागम धसां,सा गमध ॥ सां
बोलताने. " ब्रजपति जागो"
साग मग मध मध | सांगंऽसां सांध सांम | ऽध सांधधम ऽग, सांसां धम गऽ साड
ब्रज पति जागो मोर भई ऽरी बंसी कीधु ऽन बाज रही ऽरी, ब्रज पति जाऽ गोड
घ
सा ग म ध साध सा मध | सौ सा ध म सांग सांध सांध मध
मो ऽ र भ ई 5 री ब्र ज पति ब्रज पति जागो भार
प
S

राग-हिंदोल. सांध ऽम गग मग ऽसा गम धसां मध | सां सां ध म | ग सा भई ऽरी बंसी कीधु ऽन बाज रही ऽरी| ब्रज प तिs जा 5 गो 5 सामसा 5 सा गग सासा, मम गग, धध मम, निनि धध, भई 5 री ब्रऽ जऽ , पऽतिऽ, जाऽ गोड, भोऽरज, S रह सांसां निनि, गंगं सांसां, निनि धध मम गग साग मध सांसां मध सांसां धम गग सासा भऽ ईs, रीss | बंऽ सीऽ धुनs बाऽ जर हीऽ ऽरी ब्रज पति जाऽगोऽ ध नि सा ग म ध| साधसा मध | सां सां ध म ग सा सा 5 भ sरी 5 ब्रज प तिजा 5 गोड भो 5 र wear निसां निसां धनि मध धनि धनि मध गम मध मध गम गसा, साग साग, गम गम, as as पऽ तिs) जाऽ गोऽ भोऽ रs) भऽ ईरीss, as सीड, धुs नs, मध मध, सांग सांग | ममं गंसां निनि मध सां सां धम| s ग 5 सा बाऽ जs, रऽ हीडारीss ब्र ज पति 5 जा ऽ गो S S सांग ऽसां, धसांऽध, मध ऽम, गम ऽग, साग मग मध सांसां मध सांसांधम गसा ब्रज ऽप, तिजा ऽगो, भोर ऽभ, ईरी ऽबं, सीकी धुन बाज रही ऽरी ब्रज पति जागो नि ध साध सांसां मध | सांगंसां निसांनि धनिध मधम भोs S fiss ब्रज पऽति जागो भोर र भ २ - गमग सागसा, गमग मधम भाई रीऽऽ , बंऽसी धुन धनिध सांसांड, सांसां धम बाऽज रहीs, ब्रज पति २ गs साss, सांसां | धम गऽ साऽ s|सांसां धम गऽ साड जाऽ गोऽ ऽ, ब्रज | पति जाऽ गोऽ ऽ ब्रज पति जाऽ गोड २ अ

१००
हि. गा.क.पु.मा. प्रथम पुस्तक.
घड निध मध
मा र म
AN
ध सा sss, सान गमगध मध मनि धनि
sus ss, ब्रज ऽप तिना गो भोर ऽम
१
२
घसां निसां सांगsग| सांसाधम ऽध,सांस धम गसा,सांसां धम गसा,सांसां धम गसा
ईरी ऽयं सिधु ऽन बान रही ऽरी, ब्रज पति जागो, ब्रज पति नागो, बज पति जागो
भोर भईरी.
हिंदुस्तानी गायकी क्रमिक पुस्तकमालिका
प्रथम भाग समाप्त.
SHRSHIRAHINI

-- संगीत ग्रंथों की सूची. नोटेशन के साथ हिंदी भाषा के पुस्तकें. . 0 200 0/ " Phone E ७ NIMAHAITA (डांक महसूल अलग) भारतीय श्रुति-स्वर-राग शास्त्र संगीत श्रुति-स्वर शिक्षा प्राचीन मूर्छना अर्थात आधुनिक शालीय थाट-पद्धति ... राग-लक्षण-गीतमालिका, प्रथम भाग ... राग-लक्षण-गीतमालिका, द्वितीय भाग हिंदुस्तानी संगति की एनसाइक्लोपीडिया (छे भाग) १ कल्याण थाट के १७ रागों के उत्तमोत्तम पदसंग्रह के पुस्तक २ बिलावल थाट के १२ रागों के ३ संधिप्रकाश थाटा के ४५ रागों के ও জান আমি এই ২০ ী ৪ ५ आसावरी, भैरवी तथा तोडी थाट के २० रागों के पदसंग्रह २-० ६ खान थाट के १२ रागों के हिंदुस्तानी गायकी क्रमिक पुस्तमालिका ( भाग १ से ४ ) प्रत्येक भाग .. ख्याल गायकी ( आलाप, तान, बोलतान के साथ ) दिलखुष उस्तादी गायकी ( अलाप, तान, बोलतान के साथ, प्रथम भाग)१-८ दिलखुष उस्तादी गायकी द्वितीय भाग ०-१२ तान प्रवेश (२०० किसम २ के तानों के संग्रह ) राग सिरीझ (छे भाग, आलाप तान के साथ ) प्रत्येक भाग ०-१२ सन्त गीत लहरी ( ८५ अपूर्व भजनों के स्वरताललिपिबद्ध संग्रह.) सितार होमटवटर सितार गत-तोडा संग्रह સા નોટેશન સાથે ગુજરાતી ભાષાના પુસ્તકે. ઘટાડેલી કિ મત રૂ આ. હિન્દુસ્તાની સગીત વિદ્યા( બીજો તથા ત્રીજો ભાગ ) પ્રત્યેક ભાગ ૧- શાસ્ત્રીય સ ગીત કળા શિક્ષક ( આલાપ, તાન સાથે १-८ પ્રવાહિરે જરાતી સ ગીતમાળા ( બે ભાગ ) પ્રત્યેક ભાગ ૦-૧૨ 12 . S ON ३२२, मेन स्ट्रीट, केंप पूना. पंडित फिरोझ मामजी- ---

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Research Work
ON
INDIAN MUSIC.
(भरतमुनि, साङ्गदेव प्रभृति प्राचीन महर्षियों के मत प्रमाण)
भारतीय श्रुति-स्वर-राग शास्त्र,
AAAAAAAAAAAAAAAAAAA
इस अन्थ में प्राचीन शुद्ध स्वरों से अर्वाचीन स्वरों का मिलान, प्राचीन
शास्त्रकारों की सारणा-चतुष्टयी से प्रचलित वीणे के स्वरों का
मिलान, संगीत रलाकर के " साधारण-प्रकरण" में
लिखे हुए श्रुति साधारण, स्वर साधारण, ग्राम साधारण
इत्यादि विषयों के परमगौप्य मर्म, प्रार्चान मूर्छनाओं
में से आधुनिक थाटों की उत्पत्ति, वह थाटों में
सम्भवते हुए १७० आधुनिक रागों के स्वरों के
श्रुत्यंतर, कम्पनसंख्या, वादी-संवादी स्वर
इत्यादि के पूर्ण विवरण, और श्रुति, स्वर,
प्राम, मूर्छना, रागादि के सम्बन्ध में
बहुतसे संगीतोपयोगी विषयों का
विस्तारपूर्वक हाल लिखा है.
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शंकर नरहर जाशी. मनेजर, चित्रशाळा प्रेस, १०२६ सदाशीव पेट, यूनान,
काश्क- पंडित फिश फ्रामजी, ३२२, मेन स्टीट कप ना.

Text Book on the Practical Study
of Indian Music.
Compiled specially for the use of High Schools & Colleges.
हिंदुस्तानी गायकी
क्रमिक पुस्तकमालिका
अर्थात्
तानालापसह गाने बजाने को सहलतासे सिखलानेवाली हिंद भाषा की
क्रमिक पुस्तक.
*भाग २ रा.
इस द्वितीय भाग में १५ प्रचलित आलापयोग्य रागों के २० चुनीदा
हिंदी पदें उन के रागांगविस्तार, स्वरविस्तार, तान और बोलतानों
के साथ बहुत गमकदार नोटेशन में दिया है.
लेखक और प्रकाशकः
पंडित फिरोझ फ्रामजी ( संगीतशास्त्री)
Research Scholar & Author of 30 Books on Indian Music
३२२, मेन स्ट्रीट, कॅप, पुना.
(
सन १९३६.
सर्वाधिकार सुरक्षित.
मूल्य १॥ रुपया.

। S (Modern Research ) Text Book on Shruti-Swaras of Indian Music. Compiled specially for the use of High Schools & Colleges,) ( भरतमुनि, साङ्गदेव प्रभृति प्राचीन महर्षियों के मत प्रमाण) * संगीत श्रुति-स्वर शिक्षा.* प्राचीन श्रुतिस्वरों का आधुनिक संगीत में कैसा व्यवहार होता है उस का बहुत विस्तारपूर्वक विवरण प्रश्नोत्तर पद्धति से इस पुस्तक में । दिया है, जिसे संगीत के नये शिक्षार्थिओं को भी श्रुतिस्वर सम्बन्धी हर- एक बाबत समझना बिलकुल सुलभ होगा. सर्व संगीत जिज्ञासुओं को इस पुस्तक का ठीक २ अभ्यास करना परमावश्यक है. मूल्य केवल रुपया १. JasmineKOMMAHAR Modern Research) Text Book on Classification of Ragas According to Ancient Murchana Systemi. Compiled specially for the use of Schools and Colleges, ) प्राचीन मूर्छना अर्थात् आधुनिक शास्त्रीय थाट-पद्धति, BRAN इस पुस्तक में प्राचीन मूर्छनाओं में से ११ मूर्छनाओं में कईक आधुनिक थाटों का और १७० रागों का समावेश प्राचीन शास्त्रीय पद्धति से किया है, और प्रत्येक बाट के स्वरों के श्रुत्यंतर, कम्पन- संख्या, परस्पर संवादादि का बहुत विस्तारपूर्वक विवरण दिया है, जिसे सब प्रचलित रांगों के सच्चे मुरों का ठीक २ ज्ञान होगा. मूल्य केवल १२ आना

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of Indian Music.
( Compiled specially for the use of High Schools & Colleges. )
हिंदुस्तानी गायकी
क्रमिक पुस्तकमालिका
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तानालापसह गाने बजाने को सहलतासे सिखलानेवाली हिंद भाषा की
क्रमिक पुस्तक
भाग २ रा.
इस द्वितीय भाग में १५ प्रचलित आलापयोग्य रागों के २० चुनीदा हिंदी
पदें उन के रागांगविस्तार, स्वरविस्तार, तान और बोलतानों
के साथ बहुत गमकदार नोटेशन में दिया है.
लेखक और प्रकाशक
पंडित फिरोझ फ्रामजी ( संगीतशास्त्री).
Research Scholar & Author of 30 Books on Indian Music.
३२२, मेन स्ट्रीट, कँप, पुना.
सन १९३६.
सर्वाधिकार सुरक्षित.
मूल्य १॥ रुपया.

OPINION of Ali Janab Raja Muhomed Nawab Alikhan, M. L. C. Talukedar Akbarpur. Lucknow, 3rd March 1934. Dear Mr. Firoze, Please accept my grateful thanks for the books 6 on music which you have sent me. Your zeal in the cause of music is highly praiseworthy and I have no doubt that the music-loving public will derive a great deal of pleasure and profit from your publications, Yours Sincerely, Sd.-Nawab Ali Khan, veterina 99900AG 94 49. OPINION of Rai Saheb H. L. Varma, M. B. E. Deputy Commissioner, Balaghat, C. D. This is to say that I have known Pandit Firoze Framjee of Poona for some years. He has published a very large number of books on Indian music and in some of them he has satisfactorily explained the scale and Shruti. As regards tho problem of Shrutis he must have devoted considerable labour in studying old books to comprehend their correct significance. He has advanced the cause of Indian Music considerably by writing the books in easy language and notation. His labours in this direction deserve recognition. Sa./--H. L. Varma, Rai Saheb, M. B. E. Balaghat, C. D. 30-7-36 40 HƏ400-6940s 160-460-460-460-09-20 SAR द्वितीय पुस्तक के पदों की सूची. ne DESH भूप-त्रिताल .... ... ..... पदे. राग और ताल. पृष्ठ १ कान्हा करे मोसे रार. भिन्नषड्ज-त्रिताल २ कोन जतन से मैं खोलं. खंबावती-एकताल ११२ ३ परदेसवा सैयां न जैयो. दुर्गा-त्रिताल ११६ ४ वंदौ राम को. बिहाग-त्रिताल १२२ ५ आये कब मोरे पियरूवा. बिहाग-त्रिताल (विलंबित)१२६. ६ जनम जनम के दास तुमारे. १३० ७ सूधे बोलत नाहि. भूप-त्रिताल (विलंबित) १३३ ८ प्राणनाथ प्रात भयो. देशकार-एकताल १३७. ९ जय जय जय जगदिश्वर प्याराः सिंदुरा-दीपचंदी १० टेर सुनो ब्रिजराज दुलारे. भीमपलासी-त्रिताल.... १४५ ११ कदर प्यारे लागे तुमसे नैन. पीलू-दीपचंदी १५१ १२ सावरिया से बतावो मोरि सजनी. बागेश्री-त्रिताल १५७ १३ मैं ढूंड एंड गई हार हार. मालकौंस-त्रिताल १४ कृष्ण माघो राम निरौंजन. मालकौंस-त्रिताल (विलंबित)१६६ १५ बन भ्रमत शिव जोगी. जोगीया-झपताल १७१ १६ मूरत मन में लागी रही माई. श्री-एकताल १७ आना रे मोहन मेरी गलियां. मारवा-त्रिताल १८१ १८ मोरी अरज सुनो दस्तगीर पीर. पूरिया-त्रिताल १९ तोरे दरसन प्यासी अखियां. पूरिया-झपताल २० चली नार बनठन होरी खेलन. पूरिया-धमार [इति सूचिपत्र समाप्त] .... १६३ ..... ..... ...

शुद्धिपत्र. में विषय. लाईन. १०८ (नोटेशन) मम् गम् मंगं सांसां । निनि धनि निध मग । ५ ८ ४ म्म् गम् मग सासा, अशुद्ध. शुद्ध. ११३ (अंतरा) । रिरिं सांनि । । रिरिं सांन्।ि ११४ (बोलताने) गम् धड गम् ऽध तन उसे तन ऽसे १३५ रसूऽऽ रसूऽधे १४६ (अंतरा) सान्ि सांनि १४८ १३ ।पनि सांग ।पनि सांग १५३ १३ ।नि प ऽम् । । नि प ऽम् । १६२ (रागांगविस्तार नं. ४) १ ग म ग ग मग १६२ (स्वरविस्तार) मुम् गसा 53 मन् गसा 58 १७१ ५ स्बर क्या १७४ ( रागांगविस्तार नं. ४) १ रेम ५ १७ नि रिग म। नि रिगम १८७ ( नोटेशन) । नि रिग में। । नि रि' में। १ रेम्प [इति शुद्धिपत्रं समाप्त.] download

सशास्त्र
हिंदुस्थानी गायकी
क्रमिक पुस्तक मालिका
(द्वितीय पुस्तक.)
राग भिन्नषड्ज.
रागांग विस्तार.
(१) साग, म ग 5 सा 5, गम् ध ग म ग सा ॥
नि
(२) नि सा , ध नि सा 5; ग म ध s, मग म्ध नि ध 5;
सां नि ध ; निध म्ध s, गम् ग सा ॥
(३) गम् धनि सांऽ निध-सा s; सां गं 5 सागम् गे सांs,
सौ नि ध 5; सा नि ध ध s, म्ध निसां निध मग मग
सा , निसा गम् धनि सां
स्वरविस्तार.
निसा गम् गग सासा 5; निसा गम् धध म्ग सासा 5; निसा गम् धनि
निध मग सासा 5; निसा गम् धनि सांसां निनि धम् गग सासा 5; निसा गम्
घनि सांगं सांनि धम् गग सासा 5; निसा गम् धनि सांगं मम् गंसां निनि धम्
गग सासा 50

मा 5 १०६ हिं. गा.ऋ.पु. मा. द्वितीय पुस्तक. भिन्नषड्ज त्रिताल. (मध्यम द्रुत लय ) कान्हा करे मोसे रार, अबही जाय करूंगी पुकार, झगर गगरि मोरि दीनि डार. कान्हा अंछर जा जसोदा सों कहियो, अपने लंगर ढीट को संभार. - कान्हा ध नि ध s ग म ध ऽ नि - सां 5 s सो धनि सांनि धs रा ऽ ऽ र हांऽ ऽ रेऽ सां सां सां निसां निसां नि ध ब ही जा जायक अ 3 S र झ ग ग 5 म् ॥ 5 सा सा सा नि ध नि सा सा ग रूं गी 5 पका र ग रग ग रि मोs *(अंतरा) म् ऽ नि सांसां निसां निध म्ध ग 5 म् ध नि सां सां सां रि दी s नि ss/ अं 5 छ र जा 5 ज सो SIS S निसां नि ध । सां ऽ सां दा ऽ सो s ध नि सां ग म म ग सा अप ने लं ग र ढी s कऽ हि यो । नि सांs ध मध निसां निध मध नि ध 5 ग म ध नि ट को 5 सं भाss 5 s का न्हा s करे मो ऽ स्थायी. । तर, निसा गम् । धनि सां निध म्घ | कान्हा करे मोसे निसा गम् धनि सां। निसां गंसां निध म्ध । कान्हा करें मोसे राग-भिन्नषडज. १०७ निसा गम् धनि सांगं । म गंसां निघ म्ध । कान्हा करे मोसे राऽऽर । निसा गम् गसा निसा । गम् धनि धम् गम् । धनि सांगं सांनि धनि सांगं गंम् गंसां निसां । निसां गंसां निध म्ध । कान्हा करे मोसे रा ऽ ऽ र । धनि साग म्ग सा । निसा गम् धम् ग । गम् धनि सांनि ध घनि सांगं मंगं सौ । निसां निसां निध म्ध । कान्हा करे मोसे रा ऽ ऽ र । साग म्ध गम् ध । म्ध निसां धनि सा । सांनि सांनि धनि ध धम् धम् गग सा, । गम् धनि निध म्घ । कान्हा करे गोसे रा ऽ ऽ र । गग सासा, मम् गग, । धध म्म्, निनि धध,। सांसां निनि, गंगं सांसां, निनि धध म्म् गग, । साग म्ध, गम् धनि, । म्ध निसा, धनि सांग, । मंगं मंगं मंगं ऽसां निध मध सांनि सांनि । सांनि ऽध निध म्ध । कान्हा करे मोसे रार हारे अंतरा " अंछर जा जसो" सा निसां धनि सां। सांनि धम् धनि सो, । सांनि धम् गम् धनि। सा, सांनि धम् गसा निसा गम् धनि सां । s, 5 सा, । मम् गंम् संगं सां । , नि s सा, धनि सांनिधs, । गम् धनि सां । अंछर जा जसो दा 5 सो ऽ । कऽ हि यो ऽ। धनि ध, धनि सांनि । ध, धनि सांगं सांनि ध, धनि सांगं मंगं । सांनि धम् धनि सां । अंछर जा जसो धनि सांध निसां धनि ।सांनि धम् गग सासा, सांगं मंसां गंम् सांगीमगं सांनि धम् गसा ।

१०८
हिं. गा. क्र. पु. मा. द्वितीय पुस्तक.
निसा गसा गम् गम् । धम् धनि धनि सौ । अछर जा जसो
गम् धनि सां,ध निसा, धनि,सांग मंगं सांसां, निसां गंगं सांनि,धनि।सांसां निध,म्ध निनि
घम्, गम् धध मग । सा, गम् धनि सा । अंछर जा जसो
मुम् गम् मंगं सांसां । निनि धनि निध मग । म्म् गम् मग सासा, । निसा मग धम् निध
सांनि गंसां मग सांनि । धम् गम् धनि सा । अंछर जा जसो
दा ऽ सो ऽ । कऽ हि यो ऽ। धनि सांगं मंगं मंगं । मंगं सांनि धम् गसा
सासा निसा गग गग, । गग साग म्म्म्म्, । मम् गम् धधधध, धध म्ध निनि निनि,
।
१
૨
3
निनि धनि सांसां सांसां, निनि धम् गग सासा, गम् धनि सां, गम् ।धनि सा,गम् धनि
सा sss | 5 s s s । का न्हा 5 क । रे मो से
बोलताने.
सां ।
रा 5
5 सा धनि सांनि ध | नि ध 5 गम् ध
र हांड रे 5 का न्हा 5 करे मो 5 से
S
ग म धनि धनि | सांनि ध ऽ ध ग ऽ सा गम् | ध म् म्ध निध
का न्हा कऽ रेड s मो 5 से राइ र हांडs 5 रेऽऽ
नि ध ऽ ग म ध ऽ नि सांऽसां ध ध नि सांऽसां ध ऽ नि
का न्हा 5
करे मो ऽ से रार मोड से राडर मो 5 से
सा 5 सा पनि सांनि ध । धनि सा निसा ग साग म् गम् ध
स ऽ ऽ र हांऽ ऽ रे 5 काss न्हाss कऽ ऽ रेss

राग-भिन्नषडज. १०९ म्ध नि धनि सो निसां गंसां निध मध ] नि ध 5 ग ध ऽ नि मोऽ ऽ सेऽऽ TISS का न्हा करे मो 5 से Ss S S सां रा 5 सा सा धनि सांनि ध नि ध 5 नि सा धनि ETS S रे s का न्हा ss का न्हा क S र सा ग 5, मो से म्। ध म्, ध नि । ध, नि सां नि, सांग 5 सा रा र, हां 5 रे, अ ब हि, अ ब हि, जा 55 य s, निसां निसां नि । धनि धनि ध नि ध नि ध 5 गम् ध 5 नि रूंऽ ऽ गि| पुऽ काss र | का न्हा 5 क | रे मो 5 से रार....मोसे S ग 5 सा, ध ऽ म, नि | ध, सो ऽ नि, गै 5 सा का न्हा क ऽ रे, मो 5 से, रा 5 र, हां ऽ रे S म् ध नि नि सा ऽ निध s म् । ग म् 5 ग ग सा ग म्ध अ ब हि जा ऽ य क रूं 5 गि 5 गि। पु का ss ग S सा सा नि ध ऽ नि ध नि ध घ: 5 गम् ध नि र का न्हा का न्हाका न्हा रे मो 5 से म S रार....मोसे सा , मग 5, ध ध 5, | सां नि , गे का न्हा 5, क क| रे s, मो से 5, रा र s, हां रे , अ S, नि सा s, सा नि s, नि धs, ध म् 5, म्ग, ग सा ब , हि जा, य क 5,रूं गिs, पु का 5, र का S, सा ग म् | ध नि सो ऽसां नि ध ग] म् ध ऽ नि s, न्हा क रेमो से रा ऽर का न्हा 5 का रे मो 5 से रार....मोसे S हि. गा. क्र.पु. मा. द्वितीय पुस्तक. सा ग सा म् ग म ग धम् ध म् सां का न्हाक रेमो से रा र अ ब हि जा ऽ सां धसा ऽ य करू s गं सां । ऽ सौ नि सां नि ध ध धम् ध म् ग पु काउ र झ ग ग ग रिमो रि दी नि गी S र - । १ म् सा म् गध म नि ध ध सां ऽसां, निध सांऽसां, निध ऽर का न्हा क रे मो से रा र , मो से | रा र, मो से सा 5 सा ग म् म् । म का न्हा क रे मो ऽ से S S S ग ग S रा S S र S SS घ S ध घ S म् ध नि सां s सा नि सां धनि हि ऽऽ जा 5 य क रूं S र हो । १ गे 5 सौ सासा अ ध ध नि ध । 5 ग म ध नि गी S पु का 5 5 र का न्हा ऽ करे मो 5 से - S २ घ WW s नि | नि ध 5 ग म् ध 5 नि करे मो ऽ से का न्हा s करे मो 5 से का न्हा 5 S s सा सा रा र भिन्नषडज-त्रिताल (द्रुत लय). तेरी दया है अपार; प्रभुजी, तुमरो नाम रटे संसार, निसदिन भक्तन के हितकार. - तेरी तुम बिन और न पालक मेरो, दया करी हरो दोष हमार. - तेरी नोट – इस पद कान्हा करे मोसे रार" के पद के नोटेशन में गाना बजाना.

राग-खंबावती.
राग खंबावती.
(एक प्रकार)
रागांग विस्तार.
(१) सा 5, रि सा , नि ध नि सा ऽ म् 5; ग म ध ग 5,
म् गरि सा ॥
(२) सा , नि सा ऽ म् ग 5; म् ध ऽ म् ग 5; म् ध नि धs
म् ग 5; म् ध नि सा, नि ध म ग 5; s गम्
गरि सा॥
(३) गम् ध नि सा ऽ ध नि सा 5 नि स ग सानिध,
नि साम् गरि सा , नि सा रि' सानिध
सो नि ध ; ध नि ध ऽम् ग 5; म् ग रि सा॥
स्वरविस्तार.
निसा मग रिसा 5; निसा म्ग म्ध मग रिसा 5; निसा मग म्ध
r निध मग रिसा 5; निसा म्ग म्ध निसां निध मग मग रिसा 5; साग म्ध
निसां गंसां निध मग मग रिसा 5; निसा गम् धनि सागं मंग रिसां न्धि म्ग
मग रिसा॥
नोट - इस राग की शकल बागेश्री राग के तुल्य है अतएव कईक
गुणिजन इस को रागेश्री राग कहते हैं. बागेश्री राग में अतिकोमल गांघार स्वर
का उपयोग होता है और इस राग में तीव्र गांधार है. बागेश्री में पंचम स्वर
थोडा लगाते हैं और इस राग में पंचम स्वर वर्ण्य है. यह दोनों का विशेषतः
r भेद है.
sonie

११२ हिं. गा. क्र. पु. मा. द्वितीय पुस्तक. कोन जतन खंबावती- एकताल. से मै खोलं गांठरी मैं मोरे पिया के जिया मे परी रे. - कोन बिन कि सखी आई बन बन, मैं बैठी बीस घोलं, अब के फाग सैयां बिरागि, नगर नगर घर डोरूं. -- कोन सा सा धम् गम् गरि सा को ऽ त न से मैं| 5 खो खोs s लु नि च न २ . ४ S सा गम् गां 58 ध री गम् ध नि | सा सा रे पिया के मो S nä म् गम् | धनि सा S सा गं| सां सां ध जि या S परी s is s *( अंतरा) म् गम् घ | ध नि सां सां सां सां । सां सा ब्रिज सखी 5 आ आ ई ब ज कि न न ब में S सो ऽ। ग s| सो 5 सा सा | नि सा नि ध s/ठी 5 बि स | घो 55s सा सा नि धs म् म् ध नि सा | 5 सौ अब के फाs ग | सै या बिरा म् 5 गि म् ग र न ग घ सा सौ नि ध ध म् |ग म् | गम् ध | म्ध नि र डोs s|रूंss स्थायी. " कोन जतन से मैं खोलुं निसा गग । रिसा, साग । म्म् गग, । गम् धध । म्म्, मध । निनि धध, धनि सांसां । निनि , निसां । गंगं सांसां, । निनि धध। म्म् गग। रिरि सासा॥ कोन ....खोलं राग - खंबावती. prammam मम् गम् । मग रिसा, । निनि धनि । निध म्म् । गरि सा, । म गम् मंग रिसां । निनि धम् । गरिसा, । निसा गम् । साग म्ध । गम् धनि ॥ कोन खोलुं निसा गम् । ध, साग । म्ध नि, । गम् धनि । सा, मध । निसा गे, सांगं सांनि । सांनि धनि । धम् धम् । गम् गसा । गम् गम् । धम् धनि ।। कोन खोल । गग रिरि । सासा, म्म् । गग रिरि । सासा, निन् ि। धघ मम् । गग रिरि सासा, रिरि ।सांसां निन् ि।धध म्म् ।गग रिरि ।सासा, निसा । गम्धनि । कोन खोल अंतरा. " बिन कि सखी आई बन बन धान सांध । निसां धनि । सांनि धम् । गरि सासा, । निसा गम् । साग मध गम् पनि । म्ध निसां । धनि सांगं । मंगं रिसां । निनि धम् । धान सा॥ ब्रिज....बन निसां गंगं । सांसां, धनि । सांसां निध, । म्ध निनि । धम्, गम् । धध म्ग, साग गम् । मध धनि । निसां सांगं । म गरिं । सांनि धम् । धनि सां। बिन....बन म गरिं । गंगं रिसां । रिं सांनि । सांसां निध । निनि धम् । धध मग म्म् गरि । गग रिसा , साम् गध । मनि धसां। सांगं सांनि । धनि सा ॥ ब्रिज बन निसी गंध । निसा म्ध । निग म्ध । साग नि । साग धनि । साग म्ध १ २ उ निसां गंसां । निनि धम् । गम् धनि । सा, गम् । धनि सां। गम् धनि ॥ कौन खोलं हिं. गा. क्र.पु. मा. द्वितीय पुस्तक. बोलताने. सा गम् धग म् ध नि ! सां सां 5 सा को नज त | न से 5 मैं खोलु सा गं सां नि | सां नि ध नि ध गांड sरे पिया के म् ध नि ठ S सां 5 सो नि को 5 ध ध साग ऽम् | गम् धड म्ध ऽनि न कोन ऽज तन से मैखो ऽलं न ज त धनि सांसा सांग ऽसा | निसांऽनि धनि ऽध | 5 मनि धनि सो कान खोलं गांड ठरी | मैंमो रे पिया ऽके जिया ऽमे 5 परी | ऽरे 5 साम् गध | नि धसां सांगं निसां) धसां निध | धनि धग ) मग रिसा कोन खोलं कोऽ ऽन जत नसे मैंखो ऽलु गांड ठरी पिया केजि यामे परी मग रिसा निध मम् |सांनि धध | मंग रिसां निसां निध| निध मध | कोन खोलं कोड नऽ जत नसे मैंखो ऽलु गाऽ ठरी | पिया केनि यामे परी सागसा गम्ग मधम् धन्धि | निसांनि सांगसां कोऽन नतन सेऽमैं खोऽलु गांठ रीऽऽ २ निसांनि धन्धि | म्धम् धन्धि | मन्धि सा पियाके जियाम | परीऽ जियामे | परी रे कोन खोल 3 ४ निसांऽसा निन्धिध | गगऽम् गरिसासा | निसानिसा धनिसास कोऽऽन जतनसे | मैखोऽलुं गांष्ठरी | पियाकेजि यामेपरी ० २ सागऽग म्म्धध | निसाऽसां सांसांसांसां । सांगंऽसां सांसानिध कोऽऽन जतनसे | कोऽऽन जतनसे कोऽऽन जतनसे कोन खोलं 3 ४ राग - दुर्गा. राग दुर्गा. -X*X- रागांग विस्तार. सा सा (१) सा 5, सा रिs, 4 5 सा 5; सा रिम रि, ५ सा 5 ॥ (२) सा रिम रि पs; धम् रि , ध सा 5; सारि मरि पs; धम् रिs, रि प; म्प धम् रिs, ध सा ॥ ( ३ ) सारि म्प घसां रिंध सां 5; सा धम् रि ; रिम् पध म्प धs, म रिs; सा॥ (४) म् ऽ पध, सां ऽ सा s, सौ रि' सा 5; सा रि'म 5 म रि' म रि म रि, रिम् पध सांरिं 5, धs म रिs; सा घसा 5; रिम् पध सा॥ स्वरविस्तार. सारि मम् रिसा Si घसा सारि म्प म्म् रिरि सारि धसा 5; सारि म्प धष धम् रिरि धसा 5; सारि म्प घसां धप मम् रिसा धसा 5; सारि म्प धसां सिरै सांध ऽम् रिसा धसा (अथवा) सारि म्प धसां रिंरिं सांसां धप म्म् रिसा 5; सारि म्प धसां रिम् मंरिं सांसां धप म्म् रिसा धसा ( अथवा) सारि म्प धसां सांरि म रिसां धप मम् ( अथवा धम् ) रिसा घसा ।। नोट - जलद तानों लेनमें सवलता हो इसी लिए "धप धम् रिसा" के बदले "धप म्म् रिसा" ऐसी स्वर रचना करते हैं.

११६ हि. गा. क्र. पु. मा. द्वितीय पुस्तक. दुर्गा-त्रिताल परदेसवा सैयां ना जैयो, मन हरवा तुमरे लागू गरवा. तुम बिन मोहे कलना परे आली, खान पान मैंका कछु ना भावे पियरवा. - परदेसवा पध म् ऽ रि प। New ss जै mahe प S 515 5 म्प धम् पध 5 म् S 5 सा 5 चा S ss सैड यांना 5 S २ म ध सां घ 5 सा 55 ऽ ध सा | रिम्प धऽ ऽ ध सा यो । 5 S S S म न हर वा SSS तु म प न s रि र दे स म् धरिं सांसां धम् म्प म्म् रि सा | रिध 5 सा, प रेऽ ऽ ला s| गूंड 5 ग र वाsss, प (अंतरा) s_s, म् | म पध सारिं ध सो S वा s s, तु | म बिऽ ऽ मो ऽ s's S रिंध S S S S S SS सा s s सोध सा ऽ रि' हे s s क ल ना 5 प सारिं सांसा 5 | धसां धप म् । is S ss315 S 1S म म्प घसां घप म् ऽ म् रि सा | रिप 5 पप घसां घघ सारि खाs 5 नऽ पा न मै S का 5.5 कछनाऽऽ भाड सांसां रिमं रिरिरि'। सांरि म रिसां धप म्म् रिसा घसा, प ध म् 5 रि s वेऽ ऽपि s 5, प र दे 5 स यड 5 वार्ड 5 राग-दुगों स्थायी. वा sss । सारि म्प घसां धप । मम् रिसा घसा, परदेस वा 5, सारि म्प । धसां रिरिं सांसां धप । म्म् रिसा धसा, 4 रदेस वा , सारि म्प | धसां रिम रिसां धप । मम् रिसा धसा, परदेस वाऽ, मम् रिसा । धसा, धप धम् रिसा । धसा, रिरिं सांसां धम् ।रिसाधसा, रिम् पम् पध पध सांध सांरिं । म रिसां धम् ऽरि । सारि धसा s, प । रदेस वा s s s| ध पध म्प रिम् । पध म्प धs, । सा धसां पध म्प घसां पध सा 5, । म रिसां, रि'सांध । सो धप ,ध रि, । म् रिसा, सारि म्प, रिम् पध, म्प धसां, । पध सारि म रिसां । धप धम् ऽरि, प । रदेस वा ऽ, सारि म्प । रि, रिम् पध म्, । म्प धसां ध, धसां ।रिम रि, सांरिं सांध सांध म्प रि मरि । सारि धसा , परदेस वा , सारि म्म् । रिसा, रिम् पप नि, । म्प धध पम्, पध । सांसां धप, धसां रिरिं सांध, सांरि म रिसां । धप मम् रिसा,प । रदेसवा अंतरा "तुम बिन मो" सांसां धप म्म्, रिरिं।सांसां धप म्म्, म । शिरं सांसां धप म्म् ।शिर सासा, रिम् पध म्प स s, तु । म बिन मो पध सांप धसां पधासांसा धम् रिसा धसा, धसां रिंध सांरिं घसां।रिरिं सांध रि धसा, हिं. गा. क्र. पु. मा.द्वितीय पुस्तक. सांरि मुसा रिमं सांरिं । ममं रिसां धप धम्। रिसा घसा, साम् रिप । म्ध पसां धसां रिमं रिसां धसा 5; तु । म बिs न । मो s s s | सांसां धम्, धध मरि, s मम् रिसा; रिरि रिम्।म्म् पप पध धधासांसां सांरि रिरिं; मं|मरिं रिंरिं सांसां सांघ धध,रिरिं रिसां सांस||धध धम् मम्, सांसां।सांध धधम्म् सिरिरि धसा, सारिम्प घसां पध सो, तु । म बिन मो रिम रिसां रिसा धसां । धप धप, सांरिं सांध । सांध पध पम् पम्, । धसां धप धप म्प १ ૨ मरि रि, पध पम् । पम् रिम् रिसा रिसा, | रिम् पध सा, रिम् । पध सा, रिम् पध तुम बिन मो, तुम बिन मो, तुम बिन सां 5 सौ सा मो ऽ हे क ल ना परे, इ. इ. बोलताने. "परदेश" S प प s s sसा, रि म् ५ सा, रिम् | रि, म् पम्, प ध प, ध वा 55 , स, वा 5 से, या 5 ना, नै रि'सा, ध सा ध, म् । म् रि s s, प ss, प ध म् 5 रि ऽ यो, म s न, ह 5 वा 5 s, पर देस र प 5 S sls S S s| सा रि S प र म् प ध रिऽ सा स वा सै ऽ यां वा 5 S S S S S दे ध सौ ऽ धम् म् रिरि | सा s s, प ध म रि ना जै 5 यो म S, पर दे 5 स वा 5 प S 5 | सा रि सा म् | रि प म ध प स ध रि' वा 5 s s| प र दे स वा र दे स वा सै यां न जै यो रांग- दुर्गा. ध सा पध परि म् म् | रि रिसा, प ध म 5 रि ह र वा तु म रे ला गुं गुंग र वा, पर दे ऽ स रिम् पध म् धसां सांध ऽध धसां रिम् । रि' सांरिं सांध ऽध धसां धप धम् ऽरि पर देस वा सैयां नजै ऽयो मन हर वा तुम रेला ऽगू गर वाप रदे ऽस प S S S 5 ऽ म्प ध पध S s, प ध म् 5 रि s सैड यांss s, प र दे स वा 5 S S S रिप ऽप पप पप म्ध ऽध धध धध धरि ऽरि रि'सांसां धध ऽम् पध रि पर ऽदे सवा सैयां नाजै ऽयो मन हर वातु ऽम रे लागू गर ऽवा पर देस S S S 5म्प धम् पध s म् 5 रिऽ ऽ सारि s. s सैs sयांss ना S SSS पर वा 5 S S म्प ध म्प धसां रि'धसां रिम् रि' सारिं ऽसां, धसांऽध, पध ऽप, धम् ऽरि देस वा सैयां नजै यो मन हर वा तुम डरे, लागु ऽग, रवा ऽप, रदे ऽस sss म्प धम् पध ss, धसां रिसां घसां धप म् SS s सैss यांs s s, पर रऽ देऽ ऽस S S वा 5 S रि सा 5 sसारि म् रिम् पम्प ध पध सा धसां रि'सांरि मूर्ति बा S S sसैऽ ऽ यांऽ ऽ नाऽ ऽ ऽ ऽयोs 5 मS न मं म् 5 सां में रि's सा म् रि sध रि'सारि सांसा ह र वा s गुंग र वाऽ s मू सा ध म् S S S १ .२ धप मम् रि सारि धसा, प धम् ऽरि s, प घम् ऽरि , प धम् ऽरि s, प रदे ऽस , प रदे ऽसs, प रदे ऽस SSS S S S प वा MM S 5 Imamein हिं. गा.क्र. पु. मा. द्वितीय पुस्तक. * राग-बिहाग. रागांग विस्तार. नि (१) सा; रिनि सा नि , धम 45 पनि सा 5; सा ग , रिनि सा॥ नि (२) सा ग 5; रिनि सा 5; सा ग प ऽम ग म् ग5; ग म धम रिम् प, ग म ग 5; रिनि सा॥ (३) निसा गम् प म ग म् ग s; गम् पनि s, धम प म गम् रि गs; गम् पध ग म ग 5, (सा) 5; सा सा, नि सा ग5; सा गs, (सा)॥ रि म् (१) सा ग 45; प प, म म, ध प म ग म् ग 5; गम् पनि 5; नि घ पनि सां नि s, 45; प (प) म ग म ग 5; सा नि नि प म रि ध ध प प म म्ग 5; म्, म, म्, ग 5; म, म, म्, ग5; रि ग 5, (सा); सा सा, नि सा ग s; ग 5, (सा) ॥ (५) गम् पनि ; नि ; गम् पसां 5; सां रिंनि सां नि s, धम प ग म ग 5; गम् पनि s, सां नि ध प 5 प सा , प सा सा रिम् रि म ग म ग 5; नि नि सा ग प 5, ग म्, ग 5, (सा) s; सा सा, नि सा ग 5, ग 5 (सा) 5॥ सा राग-बिहाग (६) निसा गम् पनि s; धप मग रिसा नि 5; गम् पसां ऽसी 5; सांगs, शिंन सांसो ग प म गम् s, रिंनि सां सा सांरिं निसां नि प5; प (प) गम्, ग5; सा ग, पम रि म् ग 5; गम् पध ग म्, ग s (सा) s; सा सा, नि सा रि ग; ग 5, (सा)ऽ॥ स्वरविस्तार (१) निसा ग रिनि सा 5; निसा गम् ग रिनि सा; निसा गम् पम गम् ग रिनि सा 5; निसा गम् पनि निध पम गम् ग रिनि सा 5; निसा गम् पनि सां निध पम गम् ग रिनि सा 5; निसा गम् पनि सांरिं सांनि ऽध पम गम् ग रिनि सा (अथवा) निसा गम् पनि सारिं सांनि धप मग रिसा 5; निसा गम् पनि सांगं गरिं सांनि ऽध पम गम् ग रिनि सा (किंवा) निसा गम् पनि सांग रिसां निध पम गम् गरि सा (अथवा) गम् पनि सांगं रिसां निध पम् गरि सा 5; निसा गम् पनि सांगं मपं मंगं रिसां निध पम गम् गरि सानि पनि साग म्प मग रिनि सा ॥ (२) निसा रिनि सा 5; निसा गरि निसा 5; निसा गम् गरि निसाs, निसा गम् पम् गरि सानि सा 5 निसा गम् पनि निध पम् गरि सानि सा s; निसा गम् पनि सा निध पम् गरि सानि सा; निसा गम् पनि सांरिं रिसां निध पम् गरि सानि सा 5; निसा गम् पनि सांगं रिसां निध पम् गरि सानि सा 5; निसा गम् पनि निसां गंम् पं गरि सांनि धप मग रिसा निसा 5 ॥ ८ हिं. गा. क्र. पु. मा. द्वितीय पुस्तक. विहाग-त्रिताल वदौं राम को, जन्म मरण दुख दूर करण को. सुमर तुं निसदिन प्रभू चरण को, भवसागर जल पार तरण को. - वंदौं ध नि । धम पम गम् वं 5 रा दौंss 5 म रि ग S S रि सारि निसा s s. नि प नि सा पनि सा गरि रि नि सा को ss SSS जन्म म र ण दु ख. S 5 ana min 9 DA * अंतरा म् सां ध प म ग (म्) ग ग s) ग म प नि । सां नि सा सा डर क र कर र तुं नि स दिन रि (सा) निऽ (प) नि सा नि | नि प नि सा गरि'सा नि प्र भू 5 च र ण को भ व सा ण को सु S छ । म S S S धम . प ग म् । ग रि गम् पनि ) सांगं रिसां निध पम ग गम् पम् पाsSरत र ण कोss S S राम रि ग 5 s रिसारि निसा s s|नि 5 पधपम प मग 5 म् को s s S S Sssä saisss s ऽ राम घ स्थायी. को ssss s s s। पनि सारि निसा s, । ग रिनि सा s, मध मप गम् ग । रिनि साs, सांरि । निसां पध मप गम् । ग रिनि साs,

राग-बिहाग.
१२३
गंम् गरिं सांरिं निसां। पध मप गम् गरि। सारि निसा , निसा । गम् पनि सां गं
पंम् गरिं सांनि धप । मग रिनि सा ऽ । वंदौ राम
को ऽ ऽ ऽ । निसा गम् पम गम् । ग, गम् गा निसा । गम् पनि सांनि पम
गम् ग, गम् ग | निसा गम् पनि सारिं । सांनि पम गम् ग, । गम् गा निसा गम्
पनि सांगं रिंसां निध । पम गम् गऽ । वंदी राम
को ऽ ऽ ऽ । गम् गरि निसा, गम् । पध मप, पनि सांरिं । निसां, गंम् पम् गरि
सांनि धप, गम् पनि । सांगं गरि सांनि धप, गम् पनि सांरिं सांनि । धप, गम् पनि सांनि
।
धप, गम् पनि धप, । मध मप गम् ग । वंदौ राम
को 5 s s। निसा गम् पनि s, । गम् पनि सां नि । s, गम् पनि सारि
निसां नि , गम् । पनि सां गंगं रिसां । निs, गम् पनि । सांगं मंगं रिसां निध
पम गम् गरि सानि । , पनि सा । वंदो राम
को 5 5 5 । गम् गरि सा, पम । गम् गरि सा, धप । मप निनि सांनि ऽध
पम गम् ग रिसा, । निसा गम् पप गम् । पनि निध पप निसां । रिसां निसां गरि निसां
गम् गरिं सांनि ऽध । पम गम् ग रिसा । वंदो राम को
अंतरा."
सुमर तुं निसदिन"
निसा गम् पनि । सां 5 s s, | सो
रिंनि सांs, I नि ऽ धम प
ग म् ग 5 । गम्
पनि ऽ सां। नि ध प म । ग म ग s

१२४ हिं. गा. क्र. पु. मा. द्वीतीय पुस्तक. s, रिनि सा , । गम् पनि सांऽ । सुमर तुं निसदिन सांरिं सांनि धप मप । गम् पनि धप मप । गम् पनि पनि सांनि । धप मग रिसा निसा, निसा गम्, साग म्प, । गम् पनि, म्प सा । सुमर तुं निसदिन ग गरिं सांनि, रि। रिसां निध, सां सांनि । धप, नि निध पम्, । ध प मग, प पम् गरि, निसा गरि । मग पम धप निध । सांनि रिंसां गरि मंगं । पंम गंम् गरिं सांनि धप मग रिसा निसा, । गम् पनि सांऽ । सुमर तुं निसदिन पनि सांप निसा पनि सांनि धप मग रिसा, निसां रिंनि सांरि निसां ।रिसां निध पम गम् - गरिसा, निसा साग ।गम् म्प पनि निसां । सांगं गंम् गरिं सांनि धप मप निसां रिसां निघ पम् गरि सा, । निसा गम् पनि सो । सुमर तुं निसदिन BHARA सांनि धनि धप धप । म्प मग मग रिंग। रिसा, निसा गसा गम् गम् पम् पनि पनि सा गंम् गरिं सांनि। धप मग रिसा निसा । गम् पनि सा, गम् । पनि सा, गम् पनि साsssssss | वंदौ राम बोलताने. रि प ध 5 ५ म प म ग ग म् | ग रि नि सा वं दौ ७ राउ म को 5 म म र ण दु ख F 15 न ध सा म् ग प | म नि धम पनि ऽ धम प ऽ धम प प नि ध प द् 5 र क र न कोs s| वं 5 दौs s| वं s दौ रा प म प ग म प ध म् गरि नि सा | नि प नि सा म को 5 ज न म म | र दुख र क S S राग -बिहाग १२५ १ २ ग रि नि सा नि ऽ ध म प ग र न को 5 5 S रा 5 ग , नि S 5. म को , वं S ध म दौ । ग) s म् ग 5, नि ऽ धम रा| 5 म को , ऽ दौ ऽ म् S रा S म S S S ध 5 S S S S S S ग s| रिन सा 5 s| गम् पध मग रिसा पनि सांरिं सांनि धप को 5 S ss s s s दौs s| राs s मऽ कोऽ सांग रिसां रिसां निसां निसां निप धप मपनि ऽ धम पम ग जन मम रण दुख | दुऽ रक रन कोऽ) वं 5 दौऽ ऽ रा 5 म ग s) रिनि सा 5 5 | मप मध पम गम् ) पनि धसां निध मप को ssss ऽदौ राऽ मको जन मम रण दुख सांगं रिमं गंरिं सांनि धप मग रिसा निसा नि धम प ऽ म् दूऽ रक रन कोऽ ss वं 5 दौऽऽ राम 5) रािने साऽ ऽ गेऽरिं सांनि धप निसां निध मप मग को S S SS वं ऽदौ राऽ मको जन मम रण दुख गम् पम् गरि सा नि 5 प, नि) 5 प, नि ऽ प ग म दूऽ रक रन को वं 5 दौ, वं | दौ, वं 5 दो राs S 5 S ग S S S S S ग S S को 5 S S S SSS 5 रिनि सा 5 s|नि 5 धम प म ग ऽ म् वं 5 दौऽ ऽ Sराम साम्ग मपम पनिध निसांनि सांगरिं मुंगरिं सांनिध पमप वंऽदौ राऽम कोऽऽ जनम मरण दुऽख दूरक रनको निसान्नि २ १ mami निऽप गऽम् ग, निऽप | गऽम् ग, निऽप गऽम् ग 5 रिनि सा वंदौ राम को, वंडदौ । राऽम को, वंऽदौ राऽम को sss - हिं. गा.ऋ.पु.मा. द्वितीय पुस्तक. बिहाग-त्रिताल ( विलंबित) आये कब मोरे पियरूवा, अत सुख होवे जियरवा. याद पिया की सतावत मनवा, और जरावे हियरवा. गऽऽरि निसा ऽ नि सा नि साम् । आsssss ये 5 कब 5 S ग 5 रिनिसाऽ ऽ (सा s s s | (सा) निसा 5 | सारिनिसा ऽ नि s s 5 ss पि sss मोऽ यऽर S वा ० S s मध मप S S SS ग ऽ ऽ म् सा म् ग म् अ त सु ख S s S S SSSS हो ऽ ऽ ss वे प ऽ निध नि धमपऽ ऽम ग म् गऽऽरि निसा ऽ नि सा नि साम् । जि 5 यऽ र 91555 S S S 391555 s sa 5-5 कब 5 ( अंतरा) ग 5 रिनिसाss SSS S SSS प 5 सा ऽसां मो ऽ ऽ S SS 555या। द ऽपि S S साऽ र सनिसा रिसां नि प प प स नि नि 5 सा म् ग या ऽ की .स TS 5 व तम न वा s और ज S ग म प सां नि ऽध पधमप ऽमगम् गऽऽरि निसा ऽ नि सा नि साम् 5 रा 5 वे हि | य तर वाssss आsss s s ये 5 s कब s बोलताने. ग 5 रिनिसाऽ ऽसा s s sss s 5 सानि साप पप पम s| रे s s s s s s आड येऽ कब मोरे मोड S पनि धसां निध पम गम् पम् गरि सासा गऽऽरि निसा ऽ नि सा नि साम् । पिऽ यरू वाऽ अत सुख होवे जिय रवा आ555 s s ये 5 5 कवs राग-बिहाग. १२७ मोऽ ग 5 रिनिसाऽ s| सा sss धप ऽध पऽ पम गग ऽम्' गरि सानि रे sss आये ऽक बऽ मोरे पिय ऽरू वाऽ अत S साम् गप ऽप पम पनि घसां निध पम् गऽऽरि निसा 5 नि सा नि साम् s सुख ऽहो ऽवे जिऽ| यर वाs s s आsssss SSकत्र ग, ऽग म्प नि | ऽ धमपऽ ऽ सा | 5 5 5 सांरिनिसां नि धमपऽ ऽम गम् मो, ऽक बमो ऽ ऽ रेऽऽऽऽपि sss यऽरु: वा S 5 अत गम् गगरिंग ऽम् प निधनिऽ धमपऽ ऽम गम् गऽरिनि सा नि सा गम्ऽऽ सुख होsss ऽवे जि यऽऽ वाsss s s आ5 5 5 येक बड ग 5 रिनि सा सा sss ssss गम्पध गरिसा पनिसारिं सांनिधप रे sss ssss आsss येऽऽऽ कऽऽऽ बsss मोsss सांगरिंम् गरिसांनि गम्पम् गरिसाऽ गम्पनि सांगंगरिं सांनिधप मगरिसा मोऽरेपि यरूवाऽ अतसुख होऽऽ जिऽयर वाsss S S % 3D गऽऽरि निसा आsss Ss ये नि सा नि साम् 5 || गम्गप मगरिसा पनिषसां निधमप s कब ऽ आऽऽये कऽबs मोऽऽरे पिऽयड S सांगरिंम् गरिसांनि पनिधसां निधमप गऽऽरि निसा ऽ नि सा नि साम् रुऽऽवा अतसुख होऽऽवे जियरवा आssss s ये SS S ग 5 रिनि सा 5 गम् पनि रिसा) ऽऽनिध पऽ सा 5 5 5 सांरिंनिसां नि ऽ कब मोऽ ऽरे । ऽ पि sss यऽरूड वा मो ss २ D धमपऽ गम्पनि सांरिसांऽ ऽनि पऽऽग ऽम् पम निध | सांनि रिसां निऽधम पऽऽम अsss sss ऽसुखऽऽहो ऽवे जिss 5 यर वाssss M || ૨

१२८
हिं. गा. क्र. पु. मा. द्वितीय पुस्तक.
SSSS
गम् गरिनिसा निसा साम् || ग 5 रिनिसाऽs | साsss
sl sssssss
আS
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येऽ कब
मोड
S
२
साम्गप मनिषसां निगरिम् गरिसांनि धपम्ग गम्पनि धपधप मपमग
आयेकब मोरेपिय रूवाअत सुखहोवे जियरवा अतसुऽ खहोऽवे जिऽयर।
म्गगम् पधऽम गगऽम् गरिसानि
ऽवाअत सुखऽहो वेजिऽय रऽवाड
गऽऽरि निसा ऽ नि
आsssss ये
२
सा s, गंडरिं सांरिंस
ss, आऽये कब
निसांनि धनिध पधप मपम
मोऽरे पिऽय रूऽवा अऽत
१
गम्ग पऽम गऽम् गरिसा | साऽनि साऽम् गरिसा, साऽनि
सुऽख होऽवे जिऽय रऽवा | आऽये कऽब मोऽरे, आइये
२
साऽम् गरिसा, साऽनि साऽम् || ग ऽ रिनि सासाsss
कऽब मोऽरे, आऽये कऽब || मो ss रे sss
॥
S

राग - भूप राग भूप (भूपाली). रागांग बिस्तार. ध (१) गऽ रिऽ सा 5; सा ऽ रिs, सा; साधs, सारि सा सा ग; रिग रि, रिंगs, रिऽ सा; सा ऽ धरि ' सा ॥ (२) गरि सा 5; सा ऽ रिs, सा (सा) ध; पधसा; ग रिसाs; गरि सा; रि गऽ, प ग 5; रि गरि साs; सा ऽ धरि s, सा॥ (३) सा रि ग प गs; ध प ग 5; रिग पर सांऽध पग; सासा रिग पग 5; रिग 5; रि, रिग, रिसा s; सा 53; धरि s, सा ॥ (४) ग ग s, पध सां s, सां रि'स 5; पध सांरिं ग 53B ध में 5 रि' सांs; ए गरि's, गरि' सा.s; सा (सा) ध- ध प ग 5; रिगs, 4 s रिs; सा ऽ धs, रिs, ग. सा॥

हिं. गा. क्र.पु. मा. द्वितीय पुस्तक. स्वरविस्तार सारि सा 5; सारि गरि सा5; सारि गप गरि सा 5; सारि गप धप गरि सा 5; सारि गप धसां धप गरि सा; सारि गप धसां रिसां धप गरि सा 5; सारि गप धसां रिंग रिसा धप गरि सा 5; सारि गप घसा रिंगे पंप गरिं सांसां धप गरि साऽ ॥ इस राग में ऋषभ और धैवत वे दो स्वरों को कोमल करने से रेवा राग होगा. यथाः- सारि सा 5; सारि गरि सा 5; सारि गप धूप गरि सा, इ० इ. भूप-त्रिताल जनम जनम के दास तुमारे, करूणा करके तार मुरारे. कहां तलक गुण तुमरे गाऊं, कौन हृदय में ध्यान लगाऊं, सफल करो प्रभु जन्म हमारे.-जनम सा सा सां धप गरि सा रि न के S साधू सा रिग रिns दा 3 स तु | मा रे गप धसां ध प गप रिंग सारि जा न म ज न मा के 5 २ ३ सा सा रिग रिंग रिंग s दा 5 स तु मा 5 ग ग प रि ग प सांध सा करू णा 5 क र के S राग-भूप. पध सी ध धसांधप गरि सारि गप धसांध प ताs s र मु राऽ ऽ रेऽऽ जनम ज (अंतरा) गरि सा रि न म के S घ साध सारि गरि ग ग ग ST दा मा 5 रे । क हां 5 त 5 स तु क गु ण S सौ सौ सा सोरि'सा उस घ सो ध सा सारि म रे गा s ऊं s को 5 न हद य 5 सांरिंग रि' साध सा ध प ग गरि गप S ध्यान ल गा5 ऊं 5 स फ ल क रो S सा प सांध सा सा धसांधप गरि सासा सा सा धप गरि सा रि ज न्म हमाss रेऽऽ न म के S स्थायी. दाs, सारि गप । धसां धप गरि सा । जनम जनम के सारि गप धसां रिरि । सांसां धप गरि सा। जनम जनम के सारि गप धसां रिंगं । गरि सांसा धप गरि । जनम जनम के सारि गरि, गप गरि, गप धसांधप गरि, गप धसां रिरिं सांसां । धप गरि, सोधप गरि, ध धप गरि, । गप धसां धप गरि। जनम जनम के दा 5 स तु । मा 5 रे 5 । साध सारि ग 5, । रिंग धप ग, रिंग पध सांसां घप ग,। रिग पध सांरिं सांसां । धप ग, रिंग पध । सांरिगरिं सांसां घप ग, सां धप ग, । ध धप गरि सा । जनम जनम के हिं. गा. क्र. पु. मा. द्वितीय पुस्तक. दा 5 स तु .. मा 5 रे । गरि गरि सारि साध । पध सारि ग, सांध सांध पध पग रिंग। पध सां, गरि गरिं। सांरिं सांध पध सांरिंग, सांरिं रिंध सांसां पध धग पप रिग गसा रिरि धसा सा । जनम जनम के सारि गग रिसा, रिग। पप गरि, गप धध। पग, पध सांसां धप, घसां रिरिं सांध, सांरि गंगं रिंसां, धप गरि,। गप गरि, गरि सा । जनम जनम के दा 5 स तु । मा ऽ रे । रिंग ऽप, गरि गप । ऽध, पग पध ऽसां, घप घसां रिं, सांध । पध ऽसां, धप गप । ऽध, पग रिग ऽप । गरि सा, सारि गप, रिंग पध, गप धसां । रिसां धप गरि सा। जनम जनम के दास तुमारे - अंतरा" कहां तलक गुण तु म रे ऽ । गा 5 ऊं 5 । पध सांरि गरि सांरिं । गंपं गरि साs, धसां रिसां धसां पध । सांरिं सांध प । सारि गप गरि सारि । गप गरि साs, सारि गप धसां रिंगं | रिंसां धप गरि सा। कहां तलक गुण तु म रे ऽ । गा 5 ऊं 5 । सांरिं ऽरिं सांध सांध । धसां सां धप धप पध ऽध पग पग । गप ऽप गरि गरि । सा , सारि सासा,। रिंग रिरि, गप गग, पध पप, घसां धध, । सांरिं सांध पथ सां। कहां तलक गुण तु म रे ऽ । गा 5 ॐ ऽ । सांरि गंगं गंग रिसां। धसां रिंरिं गिरिं सांध पध सांसां सांसां धप । गप धध धध पग । रिग पप पप गरि । सा गग, रिरि पप, राग-भूप. गग धध, पप सांसां,। धध रिर धध सांसां । कहां तलक गुण तु म रे । गा 5 ऊं 5 | सांरिं सांग रिसां, घसां । धरि सांघ, पध पसां धप, गप गध पग,। रिंग रिप गरि सा,। गरि पग धप सांघ । रिसां गरि गंसां रिंध सांप धग परि गसा, । रिंग पध सांरिं धसां । कहां तलक गुण तु म रे ऽ । गा 5 ऊं ऽ । ग गंगं रिसां धसां । रिरिरिं सांघ पध सा सांसां धप गप । ध धध पग रिग । प पप गरि सारि । ग गग रिसा घसा, सारि गप धसां पध । सां सा, सारि गप । धसां पध सां सा, । सारि गप धसां पध सा sss। भूप-त्रिताल (विलंबित ) -सूधे बोलत नाहिं न रूप की कीनी मरोर. कर रही मान मान ले प्यारी कीन्हे जतन करोर. सारिगप धसांऽऽ धपपऽ ग ऽप सूऽऽऽ घेsssss S S S 3 रिंग ऽ रि सा (सा) रिग रिंग ऽ पग पs s| रिग ऽ रि बोsss लऽ त 5 नाsssssss हिं २ सा ऽ सारि गप सांध साप सांध | सांध पग रिसा, सारिगप 5 रूप कीकी नीs s मरो ऽर, सूऽऽऽ Maya 5 S S 0 ૨ हि. गा. क्र. पु. मा. द्वितीय पुस्तक. . धसांऽऽ धपपऽ ग sप) रिग ऽ रि सा | (सा) रिग रिंग 5 | s s ss s धेsssss बो 5 5 5 लऽ तssssss S ० (अंतरा) 5 गग पसां ऽध || सां ऽ ऽ ऽसां सांध धसां सांkि 5 s कर रही 5 मा 55 ऽन ATS नले S S 3 सांरिं सांरिंसांसांध पग गरि ss प्याऽ ऽ रीssss कीऽ हेs ss गप धरि ss जत नक 5s ३ - सो ध सांरिसांसां धपपध) सांसांधप पगरिऽ ऽसा, सारिंगप रो । S sर, सूऽऽऽ S S S २ बोलताने. घसांऽध प ग प रिंग रिसा सा सारि गप घसां रिंग धे ऽ ऽ बोss ल सूधे बोल तना हिंन S S उ - रिसां धप गरि, सो ध प ग प रिंग रिसा सा रूप कीम रोर, सूऽ धे ऽ ऽ बोs s S रिंगऽरि गपऽग पधऽप धसांऽध | सारिं सां रिंगंडरिं सांरि धसां Asss Esss alsss 5555 तsss नाsss हिंन रूप २ पत्र गप रिसां धपगप | रिंग रि सा सा कीम रोऽ रसू ऽधेऽऽ बोsss ल ३ H सारिगप परिगप धसांसांध धसांरिंग | गंरिंसारिं सांधसांध सांधपध पगपग सूऽऽऽ घेऽबोऽ ऽऽलs तsss नाऽऽहिं ssनs रूss ssकीs .

राग - भूप. पगरिंग रिसासाऽ धप गप रिंग रिसा सा मऽऽरो ऽरसूऽ ऽधे 5 बोs s 1 S गंऽऽरिं सांऽधs रिंऽऽसां धडपs| सांऽऽध पss धऽऽप रिऽसाs सूऽऽधे. बोऽलऽ तऽऽना हिंऽनऽ रूऽऽप कीडमऽ रोऽऽर सूऽधेऽ २ सारिंगप धसांसारिं सांसोधप गप रिंग रिसा सा।।। बोsss ऽलसूऽ sss s बोss TTTT S ल ૨ गरिप ऽगधs पसाऽध रिंऽसांगं | ऽसांरिंऽ सांसोऽध पपसांऽ धपगप सूऽधेबो ऽलतऽ नाहिंऽन रुऽपकी | sमरोऽ रसूऽधेऽ ऽऽसूऽ ऽधेऽऽ रिंग रिसा सा। सारिसासा रिगरिरि बोss s ल , सूऽधे बोऽलs गपगग पधपप धसांधध सांरिसांसां । रिंगरिंसां धपगरि सांसांधप ऽऽगप तऽनाऽ हिंऽनाऽ रुऽपs कीकीs नीऽमऽ रोऽऽर सूऽधेऽ ऽ । रिंग रि सा सा, सारिगरि गपगप धसांघसी बोss 1, सूधेबोल तनाहिंन रूपकीकी S - सांसांधप ऽऽगप, सांसोधप ऽऽगप रिसांगरिं सांधपध सांसोधप ऽऽगप, नीमरोs sssर सूऽधेऽ , सूऽधेऽ S, सूऽऽऽ ऽ . रिंग रि सा सा | सारिगप सांधसांऽ ऽ सांसां बोsss ल | सुऽधेड बोssss लत Jammu २ घसांसारिं सांरिसांघ पघसारि गरिसांड धपसांघ सांसांधप गरिसांसां घपगप नाsss हीsss नऽरूऽ पऽकीs कीऽनिऽ मऽरोऽ ऽरसूऽ ऽधेऽऽ

हि. गा. क्र. पु. मा. द्वितीय पुस्तक.
रिंग 5 रि सा (सा) रिंग रिंग । पग प ss
बोs ss
Sasslas S SS
S
S
PawinAN
૨
रिग, सांरिंऽगं रिरिंसांसां || धसांऽरिं सांसाधप गपऽध पपगरि
s_s, सूऽऽधे बोलत ॥ नाहिंऽन रूपकीऽ कानीऽम रोऽऽर
सारिंगप धसांरिंग रिसांधप गरिसारि | गपधसां रिंगरिंसां धपगरि, सारिंगप
सूधेबोल तनाहिंन रूपकीम रोरसुधे बोलतना हिंनरूप कीमरोर, सधेबोल
।
घसांरिंग रिसांधप गरिसांऽ धपगप रिंग रि सा सा
तनाहिंन रूपकीम रोरसूऽ ऽऽऽ | बोss
S
ल
राग देशकार.
XX
रागांग विस्तार.
(१) धs, ध प 5 ग प ध प ग रिसा s ध प ॥
(२) सा, रि सा; ग 45; पs, ध प ध ग प 5, सांs,
ध प5; ग प ध प ग रिसा 5 ग प s, पधs, s॥
(३) ग ग प ध सा ऽ सां; सा ध सौ रि's, सा ऽ ध प s;
गै रिसा, रि'साध , ग प ध प गरि सापs,
५ धs, पऽ॥

राग-देशकार खरविस्तार. सासा गग रिरि सासा 5; सासा गग पप गप गरि सासा5; सासा गग पप 'धध पप गप गरि सासा 5; सासा गग पप धध पध सांसां धप गप गरि सासा सासा गग पप धध पध सांरि सांसां धप गप धप गरि सासा 5; सासा गग पप घध पध सांसां गंगं रिसां धप गप गरि सासा 5; सासा गग पप ध 5; पऽ । नोट- आरोह में ऋषभ स्वर दुर्बल रखने से और उत्तरांग प्रबल करने से म्प राग की छाया दूर होगी. इस राग में पंचम और धैवत ये दो स्वर ऋषभ और गांधार ये दो स्वर प्रधान है. प्रधान है. भूप राग में . देशकार राग के स्वरों में ऋषभ और धैवत ये दो स्वर अतिकोमल करने से बिभास राग होगा. देशकार-एकताल प्राणनाथ प्रात भयो जागो बलि जाऊं. सोवत में रैन गई सुवेन में गुवाऊं, उगत सुरज ज्योति भई, फुल हरि पहिराऊं. ॥ १ ॥ सूरदास मदनमोहन गुण तिहार गाऊं, हरवि निराख तेरी छबि, नित्य बलि जाऊं. ॥ २ ॥ ध 5 प गप : प्रा ण ना 5 | रिसा सा S थप्रा 5 त भयो । २ ४ प प ध ध साध प : ब लि जा ऽ S ऊं S S सा ना ऽ | गो "..

हि. गा. क्र. पु. मा. द्वितीय पुस्तक. * (अंतरा) प गग प ध पध सांड सो S व त में S S सां सां सां सा न ग सां ध | सा सा वे 5 s रिसा रिसा घ १ . 5 गु| वा S ऽ ऊं ऊ5 S. न ध प घाग प प ध ध | सो रि' स ध प s र ज ज्यो ऽ ति भई S. - । साध प ध | सा ध पग रिसा ह रिप हि राs SS स्थायी." प्राणनाथ प्रात भयो" पग पप | गरि सासा, । धप धध । पग पप । गरि सासा, । सांध सांसों धप धध । पग पप । गरि सासा, । गरि गंगं । रिंसां रिरिं । सांध ऽप || प्राणनाथ प्रात भयो सासा गप, । सासा गप । धध पप, | सासा गप | धध सांसां । धप गप, सासा गग । पप धध | सारिं सांसां । धप गप, । सासा गग | पप धध सांरिं गंगं । रिसां धप । गप धप । गरि सासा, | सासा गग । पप गप ॥ प्राणनाथ प्रात भयो प गप | धप गप, । ध पध । सांध पध, । सां धसां । रिसा घसां, रि'सारि । गरि सोरि । गपं गारें । सांसां धप | गप धप । गरि सा ॥ प्राणनाथ प्रात भयो - सासा गग । पप धध । पध सांसां । गंगं रिंग । गरिं सांसा, । घघ पध धप गप, गग रिंग | गरि सासा, सासा गग | पध सांसां धप गप प्राणनाथ प्रात भयो -হাল্কা अंतरा " सोवत में रैन गई" घसां रिसां । धसां धप । धप गप | धप गप । गरि साग । पग गप धप पध । सांध धसां । रिसां धसां । रिसां धसां । मंगं रिसां । रिसां धप सोवत में रैन गई सांध पध । सारं सांध | घसां धप । पध पग । गप गप । गरि सा साग गप । पध धसां । सांगं गरिं । रिसां सांध । धप पग । गप घसां सोवत में रैन गई सांरिं ऽरिं । धसां धस, । धसां ऽसां । पध पध, । पध ऽध । गप गप गरि सा, । सासा साग । गग पप | पध धध । सांसां सांगं । रिसां घसां सोवत में रैन गई धध पध । घप धघ । पप गप । गरि सासा, । गंगं रिंगं । गरि गंगं रिरिं सांसां । धप धध । पग पप । गरि सासा, । पंपं गंपं । पंग पंप १ गरिं सांसां । धप धध । पग पप । गरि सासा, । सासा गग । पप धध २ •सा सा, । सासा गग । पप धध । सां सा, । सासा गग | पप घघ सा।

हि. गा.क्र. पु. मा. द्वितीय पुस्तक.
* राग-सिंदुरा.
रागांग विस्तार.
म्
सा
म्
म्
म्
(१) सा s, रिऽ गरि ; म् ग् रिs; रि म् पध म्प ग् रिs;
म् रि , गरि , रि सा ॥
(२) सा s, 4 सा 5; प सा 5; ध सा रि गरि ; नि ध
नि पs, म प गरि नि ध 5, म्प ध ग् रिs; म् ग्
रिs; रि ग् सा ॥
(३) म् प ध प 5, नि ध प 5; सौ नि ध प; रि' सा नि
ध प म पनि ध प म प गरि ; नि ध ऽ म्प ध
गरि, गरि सा॥
(१) म् 5, घसा साध सौ रि' रि' सौ (किंवा) म्
पनि सां रि' रि' सा; रि' नि ध प ६, म्प ध ग्
रिs; रि गरि म् ऽ गरि सा 5 ॥
स्वरविस्तार.
निसा रिम् गरि सा 5; निसा रिम् पम् नि सा 5; निसा रिम् पध
पम् ग्रि सा 5; निसा रिम् पध सा निध पम् नि सा ; निसा रिम् पध सारि
सांनि धप म्ग् रिसा 5; निसा रिम् पध सांरिं गंगं रिंसां निध पम् नि सा
( अथवा). म्प निसां रिंगं रिंसां निध पम् नि सा 5; निसा रिम् पध सांरिं
ममं गरिं सांनि धप मग रिसा ऽ ॥
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राग-सिंदुरा. सिंदुरा-दीपचंदी जय जय जय जगदिश्वर प्यारा, विश्व चराचर सर्जनहारा. सकल जगत को आप ही रचायो, सब का हो तुम पालनहारा. ॥१॥ परम कृपाला दीन दयाला, कीजिये भव भय दूर हमारा. ॥ २ ॥ सा 444 S S न म् ग् ग् | रिऽ सारि सा | रिम् प ध य S S य ज य S ग 5 नि मू (सा) नि ध नि ध पम् प 5) म्पध म्प गरि । दी 5 S S श्वरप्याड S S SS S ॥ S 5 s. घपम् न हा S 5 प S घ S S ज 5 सां नि सां नि । 5) सां s_s रि' (नि) (नि) s|घ नि ध प वि S श्व S 5 S 5 S च र म् म् रि म | रिम् पध नि धप म् (प) s| ग् रिम् । STS हा । डरा 5 S S * (अंतरा) म् म् s| सा घ s| सां । SS क ल ग त को 5 SS सां मुं सां घ सा s| धसां रिंगं ग रिसां घ आ प हीऽ ऽ ऽ ऽ चाड सां म् नि नि । पनि सांरि निसां रि नि) s s. प . स ब 5 काSS S हो ऽ ऽ तु म 5 म् रिम् | रिम् पध नि घन् ि| धप म्प ध | ग् रिम् (म्) पा S S लड SS नऽहाऽ ऽ डरा 55S S SS प S म् हिं. गा. क्र. पु. मा.द्विय पुस्तक. स्थायी. " जय....प्यारा म्प ग्रि S, I रिम् पध म्प रि । 5, रिम् पध । सांनि धप म्प गरि s, रिम् पध । सांरिं सांनि धप म्प । निसां रिंगं रिसां । न्धि म्प गरि ऽम् ।। जय जय जय जग दि sss 5 श्व र । रिम् पध निध । प, म्प धसां निध प, म्प घसां । रिसां न्धि प, म्प । धसां रिंग रिसां । न्धि पम् नि ऽम् जय....प्यारा निसा रिम् पध । म्प निसां रिंग रिसां । निसां निध पम्, । धप म्ग्, पम् ग्रि, म्ग् रिसा 5, । सारि रिम्प, म्प । धप धसां निध । पम् zि ऽम् ।। जय जय जय जग दी 5 5 | रिग् रिरि, म्प म्म्, । पध पप, धन् ि। धध, सांरिं सांसां, रिगं सिर, पं मम् । गंगं रिं सांसां निन् ि। धध पप म्म् । ग्ग् रिरि ऽम् ।। अंतरा." सकल जगत को" रिम् पनि धप । म्प, पनि सांगं रिसां । निसा, सांगं रिम् । रिं सांरि, सांनि ध, निसां निध प, । धनि धप म्, पत्र । म्प रि म्प । निध पध सां ॥ सकल जगत को सांरिं सांगं रिंसां, । निसां निरिं सांनि, धनि । धसां निध, पथ । पनि धप, म्प म्ध पम्, रिग रिम् । ग्रि सा, निसा रिम् । पध सारिं मगं । रिसां निध सा ।। सकल जगत को ।

राग-भीमपलासी.
रिम गरि, सांगं । रिसा, निरिं सांन्,ि धसां। निध, पनि धप, । म्ध पम्, रिम् नि,
साग् रिसा, साम् । रिप म्ध पसां निरिं । सांम् गरि सांनि । धप म्प सांऽ ॥
को
।
सकल जगत
रिंगं रिसां निध, । निरिं सांनि धप, घसां । निध पम्, पनि । धप म्ग् रिसा निसा
रिम् पथ सां, रिम् पध सा, रि । ऽरि म् ऽम् । ५ प ध ऽध ॥ सा
राग भीपपलासी.
रागांग-विस्तार.
(१) सा ऽ नि , प नि सा 5 Ps, रिs, सा 5 ॥
म्
ग
(२) नि सा म् ; नि सा ग्s, रि, सा; म पनि सा
ग् ऽ म् 5; l S, रि s, साs; रिऽ नि sys, s;
म् पनि s, पनि सा s, नि सा म् 5, ग्ऽ, रि,
-
सा
सा; नि , नि सा गरि s, साऽ ॥
सा रि म्प
(३) नि सा ग् म् पs; म् पनि s, धs, पs; म् प म ग्
म्
सा
म् 5; गम् पऽ ग् 5, रिs, सा 5; नि , नि साग रिs,
सा॥

हिं. गा. क्र.पु. मा. द्वितीय पुस्तक. पनि सां सा ( ४ ) निसा गम् प नि, प नि सा 5; नि , धs, 45; पनि सो गरि', सारि नि सा, 45, सां, नि , धs, 45; म् पनि s, धs, 4 s, म प ग्ऽ म् ; नि सा ग् म् पs, ग, रि s, सा 5; नि , नि सा ग् रि s, प मू सा रिम् प म् सा सा॥ म् सां (५) ५६, म् प६, नि , पनि सां नि सां म् , Ls, पनि सां रि' ऽ सारिंनि सां नि , धs, 4s; म् पनि सा सां रि'नि सांs, नि , धs, 45; म प सांs, म्प निs, प प म् सा रिम्प म् धs, पs; म् पम् ग् म् ; नि सा ग् म् पs, , सा रि s, सा; नि , नि सा ग् रि, सा 5 ॥ खरविस्तार. निसा म्ग् रिसा निसा 5; निसा गम् पम् ग्रि सानि सा 5; निसा गम् पनि धप म्ग् रिसा 5; निसा गम् पनि सांनि धप मग रिसा निसा s; निसा गम् पनि सांरिं सांनि धप मग रिसा 5; निसा गम् पनि सांगं रिसां निध पम् ग्रि सानि सा 5; निसा गम् पनि सांगं मंगं रिसां निध पम् गरि सा, (अथवा) निसा गम् पनि सां, निसां मगं रिसां निध पम् नि सानि सा 5 ॥ नोट-भीमपलासी और धनाश्री ये दोनों समप्रकृति के राग है. केवल वादी स्वर में भेद है. बाकी चाल ढाल सब एकसमान है.

राग-भीमपलासी. भीमपलासी-त्रिताल. टेर सुनो ब्रिजराज दुलारे, दीन मलीन हीन सब गुणते, आय पर्यो हूं द्वार तिहारे.- टेर काम क्रोध अरू कपट मोह मद, सो जाने निज प्रीतम प्यारे, भ्रमत रह्यो संग इन विषयन के, तुव पदकमल न मैं उर धारे, - टेर सां पनि सा गं टे 5 सु 13 सां रि' सां सां सां पनि सांनि ध प ग गरि सा. सारि निसा म् म् नो 5 ब्रिजरा s ज दु ला 5 रे । दीss नम ર म् यप म् म्प गम् म् पसांनि सांनि पनि सांनि ध ध प 5 | पध म्प ग् म् लीडs SS s नऽ सऽ बs गु ण ते ऽ आऽ s * (अंतरा) सां प सांनि सा 5 | सांनि धप म् प ग सा गम्प सांनि | म् 5 प नि यो ऽ हूं द्वाऽ ऽ र ति हा ऽ रेऽऽ ऽ का 5 म क्रो सो सां सां सां | पनि सां गं सां रि' सां सां | निसां रिसां नि ऽ Sघ अरू ऽ ह म द | सोडs जा ऽ म् पनि सांनि ध प धप म्प ग सा | ग् म् म् 5 ग् म् ग् म् ने 5 निज प्रीss त म रे । Sभ्र म त र मो ट म् म प्याड पम् प नि | प नि सां नि | सा गरि'सा | में गं रि'सा सं ग इ न वि ष य न के 5 तु व पद S सां म् सा नि ध पग सा ग् म् | गम् पम्प नि | प नि सा गं ऽ र सु नि म न 5 3 र धाऽ ऽ रेऽ हिं. गा.क्र. पु. मा. द्वितीय पुस्तक. स्थायी. नो 5 ब्रि ज । रा 5 ज दु । ला s रे ऽ। निसा गम्, गम् पनि, पनि सांगं रिसां निध । पम् गम् पनि सांरिं । सांनि धप, निध पम् । टेर सु नो ऽ ब्रिज । निसा गम् पनि सांरिं । सांनि धप म्प सा । सांनि घप म्प नि न्धि पम् गम् प । गम् पसां निध पम् । ग्रि सा, निसा गम् । टेर सु नो ऽ ब्रिज । निनि धप, धध पम्, । गम् पग् म्प गम् । गरि सा, साग म्प गम् पनि सांनि धप । म्प निसां गरिं सांनि । सांनि घप म्ग् रिसा । टेर सु नो ऽ ब्रि ज । रा ऽ ज दु । ला 5 रे । निसा गग, साग् मम्, गम् पप,म्प निन् ि।पनि सांसां,गंगं सांरिं ।निसां धनि पनि सांरिं ।सांनि घप,म्प निसां निध पम्, गम् पनि । धप म्ग् रिसा नि सा । गम् पग् म्प गम् । टेर....दुलारे । अंतरा" काम को" ऽ घ अरू । सांरि सारिं सांन्,ि पनि । पनि पम्, गम् गम् । ग्रि सा, निसा गम् पनि सांगं मपं मंगं । रिसां निध पम् गम् । पनि सां, पनि सा! काम को sअरू । निसां मंगं रिसां निसां । गंमं पंम् गरिं सांनि । धप म्प, ग्म् पनि सानि धप मग रिसा, । निसा गसा गम् गम् । पम् पनि पनि सा । काम को 5 घ अ रू । क प ट मो । 5 ह म द । गरि गरि सारि सानि राग-भीमपलासी. PARAN - । सांनि धनि धप धप। म्प म्ग् मग रिसा, ! साम् गप नि पसां। नित्रि सांम् गरि सांनि धप म्ग् रिसा गम् । पनि सांगं रिसां न्धि । पम् गम् पनि स । काम को sध अ रू। क प ट मो । ऽ ह म द । सांग ऽरिं सांनि सांनि धप ऽप धप म्ग् । ऽग् मग रिसा निसा, । साग म्प ऽप, गम् । पनि ऽनि, पनि सांगं १ सां s रिसां निध पम्, । गम् गम् प, गम् । गम् प, गम् गम् | प नि सा गं S बोलताने. सा म् रि' ऽसां सां सां सा नि सा म्म् म् ग् म् | ग म प सा नो ऽ त्रि जटे सु नो s ब्रि जरा ज रा ज दुला S न सब नि नि प नि | प नि सा गं | रि' सां नि सा | नि सो नि ध रे दी न म ली न ही गु ण ते आ म् पम् ग् म् | ग् रिऽ सा | गम् पनि सा गं प याहू द्वा 5 रति हा ऽ रेटेड s S प य टेऽ ऽ र सु S सां सां S त्रि ज 25555 सां ध प रि' ऽसां सां सां | गम् ऽग् म्प ऽम् पनि ऽप निसाऽनि सांऽरिं नि सांन्ि नो सुऽ ऽ नोऽ ऽ | ब्रिऽज रा जदु प ग् मग गम् गम् पम् पनि ) पनि सांनि धप म्प| प नि सां ला रे दी नम | लीऽ नहीं ऽन सब | गुण तेऽ 5 5/टे 5 सां रिऽसां सां सा पनि सांनि ध प ग ग रि सा | म्ऽ गप ऽम् निप नो 5 ब्रि ज TIS 5 ज दुला 5 s/टेड रसु ऽनो ब्रिड सां पसी ऽनि रिंनि असां [रिं सांरिं सांनि सांनि धप ऽम् पम् गम् प नि सा गं जरा ऽज दुला ऽरे दीऽ नम लीन ही नस ऽब गुण तेऽ टे 5 र सु म म्.

हिं. गा.प्र. पु. मा. द्वितीय पुस्तक सां रि' ऽसां सां सां | नि. ग् सा म् | ग् प प पनि ऽ पध s नो ऽ त्रि ज र सुनो 5 ब्रि जरा ऽजदु सा नि ड ग रि सा | गम् पनि सारिं नि | सां सां नि सां नि सा गरि' दीss न म ली न ही न | गु ण ते 5 S रे सा ऽ रि' नि | सां नि ध प | निम् ऽ प प ग रिसा, गम् पनि यो हूं 5 द्वाऽ ऽ र ति हा रेऽ , आ S य प सो ऽ सां सा सांरिं सांनि सांनि पनि पध पम् पम् गम् | गम् ऽग् मग रिसा नो ऽ त्रि जटेड' ऽर s सुऽ नोऽ ऽब्रि ऽ जऽ| राऽऽन दुला रे साम् ऽग् म्प ऽम् | पनि ऽप पनि सांगं | रिसां निध पम् गम् | प नि सा दीऽ ऽन मली ऽन | हीन इन सब गुण तेऽ ऽ ssts सां रि' ऽसां सां सां पनि सांनि ध प | ग गरि सा पम् पग ऽम् ऽम् नो ऽ ब्रिज | राs s ज दुला 5 रे | टेर सुनो ऽबि ऽज सां S सानि साम् ऽम् मम् | पनि उनि पनि सांनि धप म्प गम् प प नि सा गै राज दुला रे दीन मलि ऽन हीन सब गुण तेsss/टे नो ब्रिजराज दुलारे, गम्ग् म्पम् पनिप निसांनि । सांगरि सांरिंसां निसांनि पधप टेर सुऽनो ब्रिज राज | दुलारे दीऽन मलीन हीऽन Hamic १ धपम् गम्ऽ गम्ग् रिसासा | गम्प निपनि सांऽप निसांगू सबगु णतेऽ आऽय पर्योहुँ । द्वाऽर तिहाऽ रेऽटे ऽरसु २ ० २ 3 रिसांप निसांग रिसांप निसांगं नोऽटे ऽरसु नोऽटे ऽरसु राग-पील्. रि'ऽसां सां सी) मंगं रिसांगरिं सांनि सांनि धप मग रिसा| s s नि सा नो ब्रिज टेssss सुऽ नोsss ss ब्रि ज १ २ रा 5 - म् । म् म् | पम् गम्, पनि सांग रि' ऽसां, पनि सांगं रि'ऽसां, पनि सांगू ज दुलाइ रेड, टेऽ रसु | नो s , टेड रसु नो s, रि'ऽसां सा सा पनि सांनि ध प सारे सांरिं सांन्,ि पनि पनि पम्, गम् नो ऽ त्रि जरा ज दु| टेऽ ऽ ऽ, सुऽ ऽ नोड, ब्रिड S १ गम् नि निसा, सामग् पम् धप सांनि रिसां गं, सानि रिसां गं, सानि रिसांगू जऽ राऽ जऽ, दुलाs s रेऽ टेs | रऽ सु, टेऽ ऽ सु, टेऽ रऽ सु रि' ऽसां ss नो ऽ 55 राग पिलू. रागांग विस्तार. रि (१) प ग 5; नि साs; (ग) s (ग) 5; सा रिसा, गरि सा रि नि 5; पध् .म्प नि सा, ग्s; नि सा 5 ।। (२) (ग्) 5 (स) s; रिग् मग रिग् 5; सा रि सा ग् 5; सा रि रि सा नि 5; सा s, गऽ म् प ग 5; नि साऽ ।। ( ३ ) (ग्) ऽ (ग्) 5; सारि गम् ग 5; सा ग् 5, सा 5; गम्पध मू म्पग 5; सानि सा ॥

हिं. गा. क. पु. मा. द्वितीय पुस्तक.
( १ ) ss; मपध मप, मग 5; म्प घनि ध प , मप मग 5;
म्
सा ग 5, ग म् s, म् प , प नि , ध प ग 5;
सानि सा ॥
( ५ ) गम् पनि ; ध्पमप निसांगंड 5, सां ; 5; सांरिंग ,
मू
(सां); प सांs, नि ध प 5; गम् ध् प ग 5; सानि
सा 5; निनि सारि सानि धूप , पध नि सा 5; पग;
नि साऽ॥
( ६ ) निसा गम् 45 घ प5; नि ध प 5, ग प म ग सा,
म्
गम् 45; नि , ध प ग 5; नि सा 5;
म
(७) निसा गम् पश, ध् पनि ध प ध् म् प ग 5; साs,
मू
गम् पs, गम् पनि s, ध प ग 5; सानि सा 5 ॥
उपरोक्त स्वरविस्तार में गौरी, काफी, भीमपलासी, भैरवी, खमाजादि
रागों का मिलाप है. यथा:---
गौरी:- पध पध नि सा.
काफीः- म्प धनि ध १६, सौ नि ध प म प ग्, इ.
भीमपलासी:- निसा गम् 45; नि ध प.
भैरवी:-पड, ध् प 5; नि ध प 5; म् ५ ग्.
खमाजः-निसा गम् प 5; ध प 5; नि ध प ऽ ग प म ग.

राग -पीलू स्वरविस्तार. ( १ ) सानि धूप. मप निसा ग् रिनि सा 5; सानि धूप मप निसा म् गम् प ग रिनि सा; सीन धूप मप निसा गम् पसां 5 प ग रिनि सा; ( अथवा ) गम् पसां ऽनि ध्प मग रिसा निसा ऽ ।। (२) निसा ग् रिनि सा; निसा म्ग् रिनि सा 5; निसा गम् पध् पम् गरि सानि सा 5; निसा गम् पनि न्धि पम् गरि सानि सा 5; पध् पम् गम् पनि सांनि ध्प म्ग् रिसा ( अथवा ) निसा गम् पम् गम् पध निध पध म् सांनि धप म्ग, गम् पध् ध्प मग रिसा निसा, गम् प ग ििन साऽ || नोट:-यह एक मिश्र प्रकार होनेके कारण इसकी आरोहावरोह की स्वररचना नियत नहीं. पीलू - दीपचंदी. कदर प्यारे लागे तुमसे नैन. जबसे गये मोरि सुधहु न लिनी, बिन देखे नहिं चैन. ऽ ग् ग् ग् ग s| रिम् नि सा द CTS 5 रेऽऽ र M W S S. S क o सानि धूप मप | निसा मग पम् धप | नि ५ ऽम् | गम् नि सा नि তা s गे । तुम ऽ ऽ s से s S S SS उ ૨ m निसा गम् s gs पाप प प पघ sला गे तु म्से सा 5 साड S S नै न S SS =(सम) S हिं. गा. क्र.पु. मा. द्वितीय पुस्तक. गप S गप म्ग रिंग 5 न SS S S साग म्प धनि | प नि सा नि ने । S लाड 55 गे से S सा 5 सा | निसा गम् प 5 S एड 5 प प गम् ला गे तुम पध सांनि ध प 5 से 5 S S S s प S ग नै म्प मग रिग सा गम् पध न S S S लाड S नि प नि सा नि डगे तुम से 5 S S s गम् पध नि S सा 5 सा S न नि नि निध ला गे तुम पध प 5 5 से 5 STS S S S S प नै s गप मग रिग 5 न S साग म्प लाड धनि | पs (ग्) रिनि गे s तु म्से 5 S S s S S S S सासा नै 5 न S s s s निसा रिग् ग् ग् रिम् गरि ला गे तुम से S S S S 5 ए S S पध सारि सारि zि) सा: नि s नैs s s म्प नि । सा नि सा नि तुम से 5 न S S S लाड S S गे सा S S मा 5 ग् ग् S क द रिम् ग्रि सा । S र प्या S रेड SS सानि धूप मप निसा म्ग पम् धप । नि प ऽम् | गम् ग्रि सा नि S| तुम ऽ ऽ से लाड SS S SSS S गे प नै 5 सा| निसा गम् प 5 s न । ऐड S SS । प द प प र ग प SS प्याड S क राग-पोलू. म्प मग रिंग | 5 गम् पध रेड नि नि । नि पध पसा 5 S 맨 5 ए 5 र प्याड 5 5 न्धि प S S ग 5 S 5 गम् पध नि s एड 5 S S S S S S S S रेड S S नि नि नि नि नि । सा ss | घसा निधप क द र Ca S SS 5 5 । ग S S S S S S S S S au 5 साग S लाड गम् म्प पनि धप नि सा नि रे S S S S 5 S S गेड तुम से S सा, साान धूप । मप निसा साग गम् । म्प पध धनि । निसां सांनि निध धप नैन पम् मग ग्रि । रिसा सानि निध .ध्प ] म्प निसा गम् | प नि सा नि से 5 ला S S गे तुम सानि ध्प म्प । मनि पसा निग् साम् । गप मनि पसां । सांरि निसां धन पध म्प गम् रिम् । सारि निसा ऽ गम् ] नि प ऽम् | गम् नि सा 5 गे लाड S S S तुम ५॥ S 5 सा S न निसा गम् प ऐss S प प प क द र an S प्या 55 S S सा S S म्प मग रिंग रेड 5 S निसा गम् पघ प गे रि सानि लाs s sगे तु s म्सेs S S S S सा ने is in a न कदर प्यारे लागे तुमसे नैन.

हिं. गा. क्र. पु. मा. द्वितीय पुस्तक. अंतरा. नि सा सा ग म् ब से ग - प S S S S S S sl ये प प S मो रिs ग म् नि प सु ध s S S S S S म्ग रिंग ऽरि S S S S सानि सा s नीss SS ऽ निसा निसा ग म् से ग लीss S S S S S प. S S S S S " S गम् घ प 5 सुध हु न S मो रिs S S S S गम् पध नि | ध येss रि (ग) 5 नि सा ली नी S S S S S 5 निसा ग म्. न S S S S 5 S S S जब से ग S प ये S S SS S प प s निसां रिसा | निध् पम् पथ् निसां s मो मो रि रिऽ आऽ S S SSS S । निध् पध् म्प । गम् पध् पम् गम् । पम् नि निसा 5 s गम् पनि म्प ऽ सुध हु न ग् रिग सारि | निसा sss 5 नि सा ग ली ss नीsss ब से ग S S S S 5 S ज म् S S प ये पध पम् गम् पध | नि नि प मोऽ ऽ ऽ s रि म् S S ग निध घप. Sसु घ सु ध हुऽ ना S S S पम् मग गरि | निसा s ss लीss S नीs s ss SS S S नि सा गम् ज ब से ग S राग- बागेश्री. १५५ प S S पध पम् गम् पध) सांनि धप s5 गम् पान म्प मोs 5 S s रिss S सुध हुs न ये S S S S गम् प S S पध गम् रिग सारि । निसा 5 लीss नीड पंड ख 5 ऽ ऽ नाहिं S S S बिन S ग प S म्प मग रिंग 5) गम् पध सांनि | ध प sबिन देऽ खे । S S ऽ नहिं न S S S 5 ग प चै । म्प मग रिंग 5 न 5 S S s निनि नि सां 5 सा सा ऽ बिन देखे न हिं S ध् S S S S S प गम् पप नि प गरि सा नि गे तुम से 5 S S S S S न S लाSS सासा S न कदर प्यारे, इ. इ. राग बागेश्री. रागांग बिस्तार. (१) म् ग् रि सा , नि ध सा s, म् ग् 5; म घऽम् ग् , म् ग् रि सा ॥ (२) सा 5 नि ध ध नि सा 5, म् ग् म् प नि धम् ग् ऽ, म् ग् रि सा॥

हिं. गा.क्र.पु. मा. द्वितीय पुस्तक.
नि
(३) ध नि सा म् 5, म् घम् 5; म ध नि , निधs
म् 5; म् धs, पध पध नि ध म् ग् 5, म् ग् रि सा 5 ॥
( १ ) गम् धनि सांs; नि ध सा 5; सा s, रिंनि सां नि ,
धs, म् 5; म् निध सा ; , रि s, सा॥
म् ध नि सां
(५) ग् म् ध नि सी 5, सांs, रिंग रिं सां नि सां नि ध 53
म्
म
सां
धनि सांरिं s, रिंगं मंगं रि' सां5; सांs, सिन सो नि ।
घ; ग् म् नि ध 5 ग म साँs, नि ध नि ध 5
म् ग् , म गरि सा॥
स्वरविस्तार.
(१) निसा म्ग् रिसा निसा 5; निसा गम् धम् गरि सानि सा 5;
निसा गम् धनि धम् नि सा 5; निसा गम् धनि सां निध म्ग् म्ग् रिसा 53
निसा गम् धनि सांरिं सांनि धम् नि सा 5; गम् धनि सांरि गरि सांनि धम् गरि
सा ; निसा गम् धनि सा, निसां मंगं रिसां निसां निध म्ग् रिसा निसा ।।
(२) निसा म्ग् म्ध पध निध मग रिसा निसा 5; निसा म्ग म्ध पध
निसां निध म्ग् रिसा S; निसा म्ग् म्ध पध निसां रिसां निध पध निध मग
रिसा निसा 5; निसा म्ग् म्ध पध निसां मंगं रिसां निसां निध पध निध
मग रिसा निसा ॥

राग-बागेश्री.
(३) निसा गम् धनि सांनि धप म्ग् रिसा निसा 5; निसा गम् धनि
सांरिं सांनि धप मग रिसा 5 गम् धनि सारि गरि सांनि धप मग रिसा s;
निसा गम् धनि सां, मंगं रिसां निध पम् नि सानि धनि सा 5 ॥
नोट - लौकिक तीव्र गांधार का व्यवहार करनेसे रागेश्री राग होगा.
आरोह में तीव्र और अवरोह में अतिकोमल गांधार स्वर का व्यवहार करनेसे
मालगुंजी राग होगा.
बागेश्री-त्रिताल
सावरिया से बतावो मोरि सजनी, जा को ढूंडत गई दिन रजनी.
मोर मुगुट तोरे सीस बिराजे, गले बिच माल सोहावन कछनी.
धनि सो नि धम् ग् रिसा
व रिया 5 से ब
साड व
३
रिनि सा सा नि ध म म्ध निसांघ म् म् ||s नि ध नि
ताs वो मो रिस ज नीs 5 जा 5 को 5 s हूं ड त
SS
२
०
*(अंतरा)नि
सां सां रि' सौ नि ध ध निसां ग म ध नि | सां सां सां सां
ग ई दि न र ज नीऽ ऽ मो 5 र मु | गु ट तो
नि
नि सां रि' सां नि सां नि ध | ग म ध नि | रिनि सां सां सां
सी ड स बि रा 5 जे s मो र
र मु | गुड ट तो
सा

हिं. गा. क्र. पु. मा. द्वितीय पुस्तक.
सा
मं
रि' । रि' सा | निसां रिसां नि ध नि नि सां में रि' सां सां
सी 5 स बिराऽ ऽ sग ले बिच ल सो
में भी
च। मा
निसां रि' सां नि | ध म् म्घ नि सा 5 नि ध | म् ग् रिसा
क छ नीss
व रिया ।
हा वन
सा
5
से
S
स्थायी.
निसा गम् धध गम् । धनि सांसां निध म्ध । सावरिया से
निसा गम् धनि सांरि । निसां रिसां न्धि म्ध । सावरिया से
रिसा निध निसा म्ग् ।म्ध पय निध निसी ।न्सिां मगं ग्रेि रिसां।सांनि निध धम् मग्
गरि रिसा निध निसा । साग् गम् म्ध धनि । सावरिया से ब
ता वो मो रि । स ज नी 5 | रिरि सासा, म्म् गग् , धध मम्, निनि धध,
,
सांसां निनि, रिंरिं सांसां, । म गरि सांनि धनि । सावरिया से
म्ग् रिग,धम् गम् ।न्धि म्ध, सांनि धनि, रिंसां निसां, गzि ऽरिं ।सा, सांनि ऽनिध,
धम् ऽम् ग्, । ऽरि सा, गम् धनि । सावरिया से ब
ता वो मो रि । स ज नी । निनि धम् धनि सांरिं । गरि मंगं रिंसां, रिसा
गनिसांनि,सांनि रिंसी।न्धि,न्धि सांनि धम्,।धम् न्धि म्ग्,ग्रिशमग् रिसा, निसा गम्
७
गम् धनि, म्ध निसां, । रि रिसां निध पम्, । सां सांनि धप म्ग, नि निध मग रिसा,
गम् धनि सा, गम् । धनि सां, गम् धनि । सावरिया ....सजनी

राग - बागेश्री.
अंतरा. " मोर मुगुट तोरे
मंगू रिसां निध पम् । ग्रि सानि धनि सारि । र, रिग म्ध नि,। धनि सांरिं गं रिंसां,
रिं सांनि, सानिध, । नि धम्, धम्ग्, । म् गरि, रिसा, । रिसा निसा, मग रिग्,
न्धि पध, सांनि धनि, । रिसां निसा, मंगं रिसां । मोर मुगुट तोरे
सांम् ग्भे रिंगं सांरिं। निसां धनि पध म्पागम् रिग् सारि निसा, नि मग धम् निध
सांनि रिसां गरि मंगं । रिसां निसां निध पम् । मोर मुगुट तोरे
धनि सांध निसा धान् । सांरिं सांनि धप म्ग् ।गम् पनि सांरि निसां गं गं रिसां निसां
रिरिं सांनि धनि । सां सां निध पम्' । ध ध मग रिग् । म् म् ग्रि सारि
।
ग् ग् रिसा निसा । गम् धनि सो ऽ । मोरे मुगुट तोरे
ran
मंगं रिंगं रिसां रिंस।निसां निध निध म्धाम्ग् मरिग रिसा, सान्सिाम् गम्, मग्
म्ध म्ध, धम् धनि।धनि, निध निसां निसां । मोर मुगुट, इ. इ.
बोलताने." सावरिया से ब
रिनि सा सा नि | घ म् म्ध निसी | ध नि सा म् | s म 5
स ज नीs s सा व रि या 5 से 5
म्
ता वो मो
म् ध ध नि | ध म धनि सा सांरिं सांनि सांनि धनि धनि धप धम् िधम्
ता वो मो रिस ज नीss जाऽ ऽको 5 हूंs | डऽ ऽत 5 गऽ
म्प धध मग मग | रिग् मग रिसा 5 सा नि ध | म् गरि सा
ईऽ ऽदि 5 नऽ ऽ ऽ ज नी | s व रिया 5 से ब
सा

हिं. गा. क्र. पु. मा. द्वितीय पुस्तक.
रिनि सा सा नि ध धनि ऽध ऽम् | गम् गरि ऽरि सा रिसा ऽनि सानि धनि
ताऽ वो मो रिसा वरी ऽया ऽसे बता वोमो ऽरि स जनी ऽजा को दंs
साम् म्म् ऽम् धध गम् धनि सांनि धनि सां नि ध | म् ग् रि सा.
दऽ तग ऽई दिन रजनीss
व रि या 5 से ब.
S
सा 5
रिनि सा सा नि | निसां निरिं सांनि ध धनि धसां निध म् रिग् रिम् नि सा.
ताऽ वो मो रिसाऽ ऽव रीऽ या सेऽ ऽद ताऽ वो मोऽ ऽरि सज नी.
निसा निरि सानिधध सानि इसा गम् धनि | सो 5 नि ध | म् ग् रि सा
जाऽ ऽको ढूंड डत गई ऽदि नर जनी सा ऽ व रिया 5 से बा
शिन सा सा नि | सानि धध निध पम् | गंम् धनि सांऽसां) धनि सांरि मंगं रिसां
ताऽ वो मी रिसाऽ ऽ वरियाऽ ऽ से ऽब ताऽ वोऽसज नीs
गरिं सांनि , रिसां निध, गम् धम् धानि धनि |सांनि सांरिं सांरि गरि गंम् गरि गरि सारि
जाऽ ऽ , कोs 5 5 5 5 डs/sत 5 गऽ ऽई/S दिऽ ऽन 5
सांनि सांनि धनि धम् | गरि सा, गम् धनि धनि सां नि ध म गरि सा
15 Sज उनीsssss साऽ ऽ व रिया ऽ से ब
रिनि सा सा नि | धम् म्ध निसां | म्गम् धम्ध | निधनि सांनिसा
ताऽ वो मोरिस ज नीs s सावरि यासेब | तावोमो रिसज
रिसांनि सांनिध | धिम् गम्धनि धनि सां नि ध
नाजाको ढूंडत | गईदि नरजनी | साs s व रि
MAN
२
म्ऽग् घऽम् निऽध सांऽनि | रिंऽसां मंडगं रिसांऽ सांरिसां
साऽव रिया सेऽब ताऽवो | मोऽरि सऽज नीऽऽ जाऽको
ma

राग-बागेश्री.
निसांनि धन्धि गम्ध म्धनि सां 5 नि धम् ग् रिसा
दूंड तऽग इदिन रजनी सा 5 व रि या 5 से ब
रिनि सा सा सा निसा मग म्ध पधपध निध निसां निसा निसा मंगं मंगं रिसी
ताऽ वो मो रि साऽ ऽव रियाऽ ऽसे ऽ बताड वोमो ऽरि सज
१
सारिं सांनि सांनि धनि धनि धम् धम् गम् गरि सा, गम् धनि | सा निध मग रिसा
नीऽ ऽजा ऽको ढूंड डऽ तग ऽई दिन | रज नी, s
सा वरि याऽ सेब
S
२
३
रिनि साम् म्ध नि, सानिध म्ग् रिसा शिनि साम् मध नि, | सानिध म्ग् रिसा
तावो मोरि सजनी, सा वरि याऽ सेब तावो मोरि सजनी, सा वरि याऽ सेब
रिनि सा सा नि ) धम् म्ध निसां | धनि सां नि ध । म् ग् रिसा
ताऽ वो मो रिस ज नीs s
व रिया 5 से 5
HTS S
गरि रिसां सांनि निध | धम् मग् गरि सा, निसा गम् ध ध ध नि धनि सां
साः 5 वऽ रियाऽ ऽ सेऽ ब, ताऽ ऽ वो स जऽ नीss
निसां रि' सांरिं गं | रिंग में गरिं सांनि धप मग रिसा निसा, /ग्म पग् मग रिसा
जाऽ ऽ कोs sJढूंड 5 डऽ तऽ गई दिन रज नीऽ, साऽ वरि याऽ सेऽ
-
सां निध मग रिसा | गम् पग् मग रिसा
सा वरि याऽ सेऽ साऽवरियाऽ सेऽ | सावरिया से इ. इ.

हिं. गा. क्र.पु. मा. द्वितीय पुस्तक.
राग मालकौंस.स
-X*X.
रागांग विस्तार.
म्
(१) सा s, नि सा म् 5; ग् म् ग् सा 5; नि ध नि सा s
म्॥
घ
म्
(२ ) सा (सा) नि ध म ध नि सा 5; ग म् ग्
सा 5; ग् म् ध् म् ; नि ध , ; ग् म् ग् सा 5 ॥
सा ग् म् ध नि सां
(३) नि सा ग् म् ध् नि सां सां नि ध् म् 5, नि ध् म्
ग् 5, ग् म् ग् सा॥
नि
म्
(१) गम् , नि सौ , स स [ में, में ग्
सां 5; गांन सां नि ध् 5, म्ध् नि ध म ; ग म 5,
नि
ग् सा 5; नि सा ध नि सा , म् ऽ ।।
स्वरविस्तार.
निसा मम् गसा 5; निसा गम् धम् गसा ; निसा गम् नि धम्
ग्सा निसा 5; निसा गम् धनि सांनि धम् गसा 5; निसा गम् नि सांगं सांन्ि
ध्म् ग्सा निसा 5; निसा गम् नि सांम् गंम् गंसां निनि धम् गम् गसा 5 ॥

राग-मालकौंस १६३ मालकौंस - त्रिताल. मैं ढूंड ढूंड गई हार हार, अब दरस दिखावो एक बार. कोन देस गये हो मेरे स्वामी, खोजें कहां मेरे अंतर-यामी, कहां छूप गयो मन मुरार.-मैं म् म् नि ग म ग म् सा सा नि गसा धनि 5 ड ढुं 5 35 ग ai नि सा म् म् म् | 5 म् ग् गम् ध् नि नि सां 5 सा नि : हा ७ र हार अ ब द र स दिखा 5 वो 5 3 म् नि नि ध् नि ध् म् | s म् ग् गम् | ग् म् सा सा| 5 सानि ध नि र मै | 5 ड मा ए s कबा S S ड5 ग सा 5 म् म्। हा र हाड (अंतरा) नि s ग म | 5 म् ग् ग् | म् म् ध् नि 5 को न दे ग ये S S र 5 स सां 5 सा सां नि सां सां s 5 स स स (सा) 5 नि धू हो । मे स्वा 5 मी 5 खो 5 खो जं क हां 5 मे S मं म् ध् नि नि । नि ध् म् । सो में 5 गं ।'म् गं सा सो अंत या ऽ मी 5 क हां छ प ग यो नि ध् नि ध् म् | म् ग म् | ग 5 सा सा | नि गसा ध नि मु रा| र 5 हूं 5 ड 5 डग म् मैं ढं

हिं. गा. क्र. पु. मा. द्वितीय पुस्तक.
स्थायी.
।
॥
हा, निसा गम् । ध्नि धम् गम् नि । सांनिध्म्, गम् न्।ि सांगं सांनि धम्, गम्
ग्नि सांगं मंगं सांनि । धम् गम् ग्सा, मैंऽ । ढूंड ढूंड गई
हा ऽ र ऽ । निसा गम् नि स । निसां मंगं सांनि सांग।सांनि, नि सांनि धम्
ज्नि धम्, गम् धम् । गसा गम् ग्सा, मैंऽ । ढूंड ढूंड गई
हाऽ, साम् ग्ग् । मन् िऽध, ध्मा निनि । साम् ऽगं, गंगं सांन्।िध्ध् ऽम् , गम् धनि
सांगं ऽसां, निनि धूम् । गसा ऽसा, मैं ऽ । ढूंड ढूंड गई
हा 5, नि सा । साम् गम, ग्ऽम् । मनि नि, म नि । ध्सां निसा, ध् ऽनि
सांग निसां, ममं गंसांनिध् मम्, गम् नि ।सांनि गंसां गं गंसी।न्धि म्म्,सां सांनि
धम् गग, नि निध् । म्म् गसा,
मैं 5 । ढूंड एंड गई
हा र । निसा ग्नि साग, निसा । गम् साग म्सा गम्, |साग मध् गम् धग्
मध, गम् नि मध्। निम् धनि, मध् निसां। नि सांध् निसा, नि ।सांगं सांनि सांनि नि
।
-
।
धम् धम् गम् गसा । गसा 5,
मैं ऽ । दंड....हार
अंतरा. " कोन देस गये"
हो 5 मे रे । स्वा 5 मी । धाने साध् निसां नि । सां सांनि ऽनि, ध्
धम् ऽम्, ग् ग्सा | ऽसा, गम् नि सा । कौन देस गये
।
।
मम गम् मंगं सांसां । नि नि नि निध् मम् । म्म् गम् मग सासा, निसा म्ग् धम् निध

राग-मालकौस. । सांनि गुंसां मंगं सांनि । धम् गम् नि सो । कौन देस गये हो ऽ मे रे । स्वा 5 मी ऽ । मम् गंगं मंगं सांसां । सांसां निनि सांनि ध्ध् - मम् ग्ग् मग सासा साम् ग्ग्,मनि ध्ध्, 'ध्सां निनि निगं सांस।सांम् गंगू सांसां निन्न ध्ध् मम् गग् सासा, । निसा गम् नि सा । कौन देस गये गम् नि सांध् निसानि सांग मंगं सांसां, निसां गंगं सांनि नि सांसां निध म्ध् निन्नि घम्, गम् ध्ध् म्ग् । सा, गम् धनि सा । कौन देस गये हो ऽ मे रे । स्वा ऽ मी 5 । सांगं गंसां, निसा सांनि, । नि निध, मध् धम्, गम् मग,साग् गसा,गम् मग,म्ध् धम्,नि निध, निसांसानि, सांगं गंसां सांनि निध धूम् मग् गसा, निसा । गम् नि सा ।। कौन देस गये हो 5 मे रे । स्वा 5 मी 5 । सांनि धम् गम् गसा, । म्ग् मग, धम् धम्, निध् निध, मध् गम् । नि नि नि नि । नि निन्नि नि निन्।ि म्ध् निसा धान सांनि ग्नि नि म्ध् निन् ि। गम् नि नि नि । म्ध् म्ध् गम् गम् । ग् सा, धम् ग, निध् म्, सांनि ध्,। नि सा सा, । नि सा नि सो, । नि नि म्ध् निन्ि निन्नि निनि ध्ध् मम् । ग्ग् मम् ग् सा। , निसा गम् नि । सांगू ऽगं, साग् ऽग्, १ ર ३ म्ध् निसां निने धम् । गम् ग्सा, गम् नि ।सां सा, गम् नि । सां सा, गम् नि F S S ST हिं. गा. क्र. पु. मा. द्वितीय पुस्तक. मालकौंस-त्रिताल ( विलंबित ) कृष्ण माघो राम निरौंजन गोविंद गोपाल. इतनी बिनत मोरी सुन लिनो भगवान तूंहि करेगो भरो काम. म् 5 ग् म् 5 सा निसाऽऽ.५ नि ऽ कृष्ण मा S घा नि सा म् म् ss 5 ग् ग् म्साऽऽ ग् म् | सा निसाऽऽ ऽ नि रा S म कृष्ण घोs S मा S SIS SSS २ w JE सा म् म् । म् 5 ग ग् साग् म् ग् सा ऽ ऽम् नि राम नि sss जऽ ऽ न गो ऽविं द ( अंतरा) सानिध्ऽऽ म्ध् नि ध् म 5 ss मध् ऽन् ि। सां सां सो निसांss गो ऽ पाssss ल sss इतनी ऽबि न त s मोऽss म् सा s s सांसां | ऽन्सिांगं सां s}s निऽनिध्ऽन्धि म् | प्नि साम में री ऽ ऽ सुन ऽ सुन | लिsss ऽजो Ss भऽऽगss वा न तूंड ही 5 क मुं नि नि म् में गं सां सां (सा) निध् म् | ग, ग् म् 5 सा निसाऽऽ ऽ नि 5 गो ऽभ रो ऽ का | म, कृष्ण 5 मा बोलताने. नि साम् ऽम् ग्ग् | धम् ऽम् गम् नि | सांनि ऽध् निथ् म् कृष्ण माधो ऽरा ऽम | निरौं ऽज नहे गोविं ऽद ऽगो पा S घोड PHPAN . ध्मग्ऽ गम्ग्सा गसानिमा निधनि | सा म् म् 5 लऽऽऽ कृऽऽष्ण ऽऽमाऽ ऽधोऽs राम

राग-मालकांस.
निसानिम् म्म् गनि निन्नि | धनिगं गंगं सांगंऽसां सांऽसांनि
कृऽऽष्ण माधो राऽऽम निरं जऽऽन हेगोविंद गोऽपाऽ
२
ध्म गमगसा गसानिसा निधनि । सा म् म् s
लऽ कृऽऽष्ण ऽऽमाऽ ऽधोऽs
म् म्
ss ग ग्
S S SS
रा 5 म 5
२
नि
सांगसांनि सांनिनि निधम् धगम् | गम्गसा गसानिसा म्ऽगम् गसाधनि
कृऽष्णमा ऽधोराम निडरौंज ऽनहेड/गोऽविंद ऽगोपाड लऽकृ ष्णमाऽधो
सा म् म् 5 | साग्ऽसा गम्ऽग मध्ऽम् निऽध्
रा 5 म 5 कृऽऽष्ण माऽऽधो राऽऽम निऽऽरौं
२
निसांऽनि धनिऽध् म्ध्ऽम् गम्ऽग् ) म्सा गमगसा गसानिसा निधन
जऽऽन हेऽऽगो विऽऽद गोऽऽपा| ऽल कृऽऽष्ण ऽऽमाड ऽधोऽs
म् म्
सा म् म् 5/5 5 ग् ग् म्साऽऽ 5, गसाम्ग धमनिध
रा ऽ म Sssss s, कृष्णमाधो रामनिरौं
S
२
सांनिसांध् निम्ग् मसागम् गसाधनि । सा म् म् ऽ
जनहेगो विंदगोपा लऽकृ ष्णमाऽघो
राम
सांऽगं सांनिसां निनि धम्ध् | सांनिसां निनि धमधु मगम्
कृष्ण माऽधो राऽम निरौं जन गोविं दऽगो पाल
२

हिं. गा.प्र. पु. मा. द्वितीय पुस्तक सा म् म् 5) सागसा गम्ग मध्म निथ् | रा 5 म उ कृष्ण माऽघो राऽम निरौं कृष्ण माऽधो कृष्ण कृष्ण माधो २ निसानि निध् मध्म् गम्ग् | सागसा निधन सागसा निधन जऽन गोऽविं दऽगो पाल| कृऽष्ण माऽधो कृऽष्ण माऽधो मू म् म् नि सा म् म् 5/5 s ग् ग् म्साऽऽ ग् म् |सा निसा धू राम SSsss कृष्णमा 5 घा 5 धी नि S २ ग् मनिसां निसiss s|s निऽऽ ऽ ऽनिध् | सौ सौ s कृ ष्णsss माssss s घोss S S 5 S २ wwe गंनि सो निसांम् गुंसां || सांसां नि सांनिध्ऽ ऽध् राऽ म निsss रौं जन sगो ऽऽविंड ऽद म्ऽन्धि निऽसांनि ध्ऽनिध् म्ऽधम् । ग्ऽम्ग् सा, ऽऽगम् सानिसा ATTSSSSS ल, sss ब्णमाऽधो S S S २ ३ म्ऽग्म् साधनिसा म्ऽग्म् साधनिसा म रामऽकृऽ ष्णमाऽघो रामकृऽ ष्णमाऽधो राम

राग-जोगिया.
राग जोगिया ( हिंदुस्थानी पद्धात्त)
GANA
रागांग - विस्तार
म्
म्
नि
(१) सा; रि रिम् 5, रि सा; रिम् 5, म प 5 पs,
ध् म् ऽ रि , सा 5; सा रि सा ॥
(२) सा s; रि सा s, नि ध , सा 5; रिम् प 5;
ध् प ध् म् 5; नि ध प ध् म् 5; रि म प धूम् 5; रिs,
सा 5; सा रि सा॥
(३) सा रिम् प ऽ, ध्ऽ प ध् सा 5; धूप ध् म् 5; म् प
निध्प, ध् म् 5 सा नि ध् पम् , म रि 5,
साs; सा रि सा ॥
(४) म म् 5 प ५६, ५ 5 सा , सां रि' सां सां रिम में
s रि' रि' सा 5 सा 5 रि' साs, रि' नि ध प म प
५ प ७, नि ध् ५, ध् म् 5; म रि s, सा 5; सा रि
नि
सा॥
स्वरविस्तार
सारि मम् रिxि सासा 5; सारि मम् पप म्म् गिरि सासा 5; सारि
भूप धूप धम् रि िसासा 5; सारि म्प निनि ध्प धम् रिस 5; सारि म्प ध्सां
सांनि ध्प धम् रिरि सासा 5; सारि म्प ध्सां गिरे सांनि ध्प धम् रिसा 5,
सारि म्प ध्सां मम् रिं सांनि ध्प धम् रिरि सासा 5 ।।

१७०
हिं. गा. क्र.पु. मा. द्वितीय पुस्तक.
** राग जोगिया. ( कर्णाटकी पद्धत्ति.)
रागांग विस्तार.
म्मू
म्
प
नि
नि नि
(१) साs, रि रि सा; धरि रिसा; रि म् ,
म् प , म गरि 5; ग रि s, सा 5 ॥
नि
(२) सा, रि सा नि ध नि ध प म १५ ऽ सा 5;
रि5; म् प म गरि s, सा 5॥
(३) साs, रिम्प 5, 5 5 45; म पनि ध प ; म्प धूप
मग रि ; गरि सा ॥
(१)म् म् पध् सा 5 सौ , सारि' सा 5; सारि गरि'
मं में
s, सां 5; रि' रि' साँऽ नि ध प 5; म् पऽ नि ध प 5,
म् प ध् नि
ध् म् , प म गरि ; ग रि, सा 5; रिम् पध्
सा॥
स्वरविस्तार.
(१) सारि सा 5; सारि मम् गरि सा 5; सारि म्प मग रिस 5;
सारि मप ध्ध् पम् गरि सा 5; सारि म्प निनि ध्प मग रिसा 5; सारि म्प
ध्ध् सा निध् पम् गरि सा 5; सारि म्प ध्सां रिसां निध् पम् गरि सा 5;
रिम् पध् सांरि म गरिं सांनि धूप मग रि िसा 5 ॥

राग-जोगिया १७१ (२) Hि पध् पम् गरि सा; रिम् पथ् सांनि ध्प मग रिस 5; kि पध् सांसां रि सांनि ध्प मग सि S; रिम् पध् सारें मम गरिं सांनि ध्प म्ग रिरि सासा ॥ नोट- इस प्रकार में भैरव राग की छाया विशेष है. अवरोह में गांधार स्वर क्या व्यवहार करनेसे जल्द तानें लेनेमें सवलता होती है. जोगिया- झपताल. बन भ्रमत शिव जोगी, करत अलख पुकार, हैमवति स्वरूप रत, रटत मन ॐकार. मत्त गज चर्महर, परिधान कर रुचिर, शूल अरु डमरु घर, माया सब बिसार. - बन सा सा रिम् म् | पम् | प ध प धूम् ध् म प सां सां सा सां सां सांरि नि ध् प भ्रमत शिव जो ऽगी करत अ ल ख पुकार ब ०. म् सां नि ध प ध प ध् म् म् | ध प नि ध् प धु म | रि ऽ सा म व ति स्वरूप र त र ट त म नकार (अंतरा) इस S प म् प ध प ध् सांसारि'सां नि ध् सा 5 में रि'रिसा सां सां मत्त गज च म ह र धान क र रुचि र प म म् रिम् |प में रि' रि' सा | नि ध प म पनि ध् ५। ध् म् |रि 5 सा शूल अरूड म रु ध र माया 5 सब बि सा 5 र

हिं. गाः क्र. पु. मा. द्वितीय पुस्तक.
स्थायी.
सारि मम्, । रिम् पम्, रिम् । पध् पम्, । रिम् पध् निनि
।
।
धूप धम्, । रिम् पध् सारि । सांनि ध्प । धम्, रिम् पध्
सांरिं ममं । रिंसी रिंनि ध्प । धम्, म्प । म्म् रिरि सासा ।। बन....जोगि
सासा सारि। िमम्, पप । पध् ध्ध् । गएँ, सासा सांनि
निनि
ध्ध, । पप पम् मम् । रिरि, मम् । मरि रिरि सासा ॥ बन....जोगि
रिम् पध् । म्प सां, पध् । सांरि, ध्सां । रि, रिसां निध,
सांनि ध्प, । निध पम्, ध्प । मग, पम् । गरि, मग रिसा ॥ बन....जोगि
म्प धप । ध्प ध्प म्म् । रिर्सा, पध् । रिसां रिसां रिसां
निध् पम् । धम् रिस, रिम् । पध्, म्प । सां, पथ् सांरि
मम रिमं । मंरि मम रि ि। सांसां ध्प । धम् रिरि सासा ॥
।
अंतरा “मत्त गज चर्महर"
रिम् पधू । सांरि म रिर् । ऽसां सा, I निनि अध् ध्,
पप ऽम् । म, रिरि ऽसा । सा, रिम् । पध् म्प सां ॥ मत्त गज चर्महर
।
Pawan
सारं सांपी । रिसां निथ्, नि । ध्ध् निध् । पम्, म्प म्म्
पम् रिसा, । सारि म्प थ्, । रिम् पध् । सां, पध् सौ । मत्त गज चर्महर
--

राग - श्री.
--
गि सांसां । निनि ध्ध् पप । म्म् रिश् । सासा, सारि मर्ि
म्प म्प | ध्प ध्सां ध्सां । रिसां निं । रिं सांनि
धूप
म्प धनि । ध्प म्म् रिस, । रिम् पध् । म्प सा ॥ मत्त गज चर्महर
।
सारिं मंसी।रिम सांरि मरि । सांनि ध्प, । म्प धम् पध्
१
म्प धप । मम् रिस, म्र् ि। पम् ध्प । निध् सा 5,
मरि पम् । ध्प नि: सां । 5, मर् ि। पम् ध्प निध्
२
सां।
राग- श्री.
रागांग विस्तार.
सा
साग
(१) सा s, रि रि सा 5; नि 5 सा रि रि सा s; ग रि s;
म् गरि s, सा, नि रि , सा
(२) साइ, निरि नि ध पाने घ. म प, धूप
मप नि नि , सारि सा; म गरि ६ प म ग
प
ग
रि5; रि , सा ; नि रिs, सा; ॥

१७४
हिं. गा.क्र. पु. मा. द्वितीय पुस्तक.
प
(३) सा s, रि रि s, म प s; म ध प ; नि ध प s; मपध्
मप ऽम ध् म गरि 5; म ग रि, सा; नि रि ,
सा॥
(१) रि रि म प 5 रिम् 45; प 5; मप धूप निध् प5; सा
प
नि ध प 5; मध् निरिं निध् प 5; म म ऽ ध् म गरि s;
म गरि ; ग रि ; रि सा; नि रिs, सा 5 ॥
प सां
सां सां
(५) म पनिs, साऽ सा s (अथवा) पs, ध् प, सांऽ सा,
सा रि' सां 5 नि , रिमरि' सा; नि नि सांs,
रि' नि ध् 45; 45 मध् मग रि ; रिप मग रि 5; ग रि,
रिs, सा 5; नि रि , सा॥
स्वरविस्तार.
निसा रिरि सासा s; रिरि गरि सासा 5; गरि मग शिरि सासा 5;
रिरि पप मप ध्प मध् मग रिर्ग रिसा 5; रि िपप मप ध्प निनि ध्प मरि गरि
ऽसा 5; रि सासा, मप निसां रि िसांसां निनि ध्प मप ध्म गर् िसासाऽ; पप
धूप सांसां रिंसां, निरिं गरि सांनि ध्प, मप निसां रिंनि ध्प, मघ् मग रिंग रिसा,
निनि रिनि धूप मप, निनि सासा रि िसासा ऽ ।।

राग-श्री. नोट- इस राग के आरोह में गांधार और निषाद ये दो स्वर वर्ण है, किन्तु "निसा रिम प" ऐसी सरल स्वर रचना नहीं होती हैं. इस के दो टुकडे करके " सासा रिस, मप धूप" ( अथवा ) " निसा रिसा, रिरि मफ घ्प " ऐसी स्वर रचना बहुधा कीई जाती है. आरोह में ऋषभ और पंचम ये दो स्वर की संगती से भी स्वर रचना कीई जाती है. यथा :-' रिरि पप मप धूप. कईक गुणिजन आरोह में धैवत स्वर कभी २ लगाते हैं:- यथा :- रि िसासा, मप ध्प, मध् निध् प, मध् निरिं निध प, इ. इ. यह प्रयोग बहोत मर्यादित होना चाहिये, क्योंकि रागहानी न होवे इस बात पर खुब ध्यान रखना अवश्य है. इस राग में स्थाई सा को मिलते समय रि स्वर का बहुलत्व रखके "ध् म गरि, म गरि, गरि" और आखिर को " और आखिरं को "रि सा" ऐस मिलते हैं. यह प्रयोग भैरव और मारवा राग में भी किया जाता है. यह बडे विद्वानों के गाने का राग है, अतएव क्वचित सुननेमें आता है. कईक गुणिजन इस राग के आरोह में धैवत स्वर का व्यवहार करते हैं, यथाः- म ध् नि सा 5 सारिरिसा, निरि'नि ध् प प ध्s रिनि ध् प, इ.इ.

हि. गा. क्र. पु. मा. द्वितीय पुस्तक. श्री - एकताल. मूरत मन में लागी रही माई, कासे कहूं एती पीर. देखे बिन मोहे को कल ना परत है, दरसन बिना नैना बिरागी. सा प पप प पध् म ग रि गरि सा 18 र त म न में 5 1924 म . S S ला 5 गि . सा नि. 5 | रि गरि सा नि रिनि ५. १ र S S S S मा S SS. प पनि | सा s! म रि गरि गरि 5 सा का 5 से कहूं 5ए 5 ती पीs *(अंतरा) सां प ५ | प नि | नि नि सा | सा नि सांड दे खे 5 | बि न बिन मोड मोहे को S5. ऽ नि रि' में रि' सौ सा निति नि | रि' नि | ध् प है|ss है] 5 क ल ना S प र प म प नि सा सारि' सां निसां नि | धूप बि s ना S स S न S S. पम पम ध् प निसांगि सांनि ध्प मार गरि नै ss नाss ऽ बिराss ऽ गीsss स्थायी. सारि मप । रिर्म पध् । मप निसां । पनि सांरिं । सांनि ध्प । मरि गरि मूरत मन में लागि मम गग । रिरि सासा, । निनि ध्प । मम गग । रिरि सासा, । रिरिं सांस - राग-श्री. निनि ध्प । मम गग । रिरि सासा, । रिरि मप । सांनि ध्प । मरि गरि मूरत मन में लागि रि िपप । मप ध्म । पम गरि । निनि ध्प । मप ध्म । पम गरि, रिणि सांसां । निनि ध्प । मप ध्म । पम गरि । मग ऽरि । गरि ऽसा मूरत मन में लागि रि िसासा । गग रिरि । पप मम । ध्ध् पप । सांसां निनि । रिरिं सांसां गंगं रिरि । सांसां निनि । ध्ध् पप । मम गग । रिरि मप । मर् िगरि मूरत मन में लागि । रिनि धप । मप निसा । रिरि पप । मप निसी । रिंगें रिसां । रिनि ध्प निध् पम । धम गरि । पम गरि । सारि मप । निनि म । मरि गरि मूरत मन में लागि अंतरा. "देखे बिन मोहे को" िसांगिम्सिां निसां, । ध्ध् पाध्प मप, । रिर् सारि।रिसा निसा, साम सिं । मध् पसां । रिंग रिसां । रिनि ध्प । ध्म गरि । मप सां देखे बिन मोहे को निसां रिरिं । ममं गरि । सांनि ध्प । मप निनि । ध्प मप । ध्ध् पम पम गरि । मंग रिसा, । रिर्प मप । निसां गिरें । रिरि रि ि। सारि निसा देखे बिन मोहे को Photo mammy पनि सापानिसां पनि । सारिं सांनि । म गरि, । पम गरि । मग रिसा, सारि मरि । मप मप । निप निसां,। निसां रिंगं । रिसां निध् । मप सां देखे बिन मोहे को हिं. गा. क्र. पु. मा.द्वितीय पुस्तक. सां सांनि । ध्प, नि । निध् पम,। ध् ध्प । मग, प । पम गरि, म मग । रिसा, रिम । पध् मप । सा, पध् । मप सां, । पध् मप २ 3 सा 5, । देऽ खेऽ । बि न । मोऽ। हे को।s 5॥ इ. इ. । बोलताने." मूरत मन में लागि" रिम पध् । पम प ध्म मग ग मग गरि रि सा सा 55 २७ तs मन मे लाऽ ग र ही रि st/ s गरि रि सा परि म रि गरि मा ऽई 5 काऽ से क हूं ए 5 ती पी डर मूरत मन में लागी मप मध् प प निसां निरिं सां नि | मप मध् । प प म्ऽ ऽर त म नऽ में ला ग रऽ ही मा S ए S रिरि गरि । सा सा रि सा | परि | ध् म गरि गरि काऽ ऽसे क हूं 5 ती 5 पी मूरत मन में लागि मप धूम पध् मप निसां रिंनि सांरिं निसां रिंग रिरि गरि सारि म्ड र त मेंडला मन S रड सांरिं सांनि सांनि धूप रिम पथ् मप निसां मप निसां रि िसांनि हीऽ ऽमा 5 इs काssss कड S हूं SS ध्प मप मप ध्ध् पम गरि सारि मप ध्प मध् पम गरि gs sats sais sl s र ss मरत मन में लागि 5 राग-श्री. १७९ सारि सासा| पध् पप सांरिं सांसां रिंगं रिरि गरि सारं सांसां निसां 5 में515 मूड रत S मऽ ऽन लाड ऽर का55 निसां निनि सांनि ध्प पध् पम । रिंग रिसा रिंग ऽरि रिप ऽम गि 5 हीऽमाऽ sss स मध् ऽप पसां नि सां िऽसां सांनि ध्प पध् पम रिंग रिसा हूंss तीss पीss ss की S एs 5 मूरत मन में लागि सारि मप | ध्प मप मप निसां रिसां निसां | पमं रिंगं | रिसां निसां मेंs मूड Sऽ त म नऽ S लाड रऽ ही सारि सांनि सांनि ध्प पध् पम पम गरि र्गि रि िगरि सा s काऽ ऽसे क S S रिरि मप | निसां रिंरि रि | सारि मप निनि ध्प | मरि गर्ि ए 5 तीs पीsss S S S SS मूरत मन में लागि सां रिं सांनि ध्प | प मरि गरि सासा सारि साम | पम पध् तऽ मन | मे ऽला | sग रही । माऽ ऽई | 5 काs मूड र मप | सांनि ध्प रिंगं रिसां | सारिं सांनि ध्प मरि गरि सासा, सेऽ ऽक हंऽ एती/पीड र मुर तम नमें लाग रही माई, २ सांरि सानिध्प मरि गरि सासा, सारि सनि ध्प मरि गरि सासा मुर तम | नमें लाग रही माई, मुर तम | नमें लाग रही माई मरत मन में लागि

हिं. गा.ऋ. पु. मा. द्वितीय पुस्तक.
राग मारवा.
रागांग विस्तार.
म
सा
ध
(१) ग 5, रि, सानि रि 5 सा 5 नि रिग रिs
गम गरि 5; गरि s, सा 5; नि रिs, सा 5॥
(२) सा s, नि रि नि ध मध सा 5; नि रि s, सा s;
रिs, गरि 5; गम गरि 5; ध मग रि 5; गरि S, सा 5;
नि रि 5, सा ॥
(३) धम धम गरि नि ध म ध मग रिऽ; ग म धs, गम गर्ऽि,
सा 5; नि रिs, सा ॥
(४) म ग , म धम सा 5 सांs, नि रि' सा; नि रि'ग म
सो
ध
सां
सां
ध
सा
गरि' सां; नि रि'निध 5, मध मग रि s; गम ध मग
रि 5; गम गरि S, सा 5; नि रि s, साs ||
स्वरविस्तार.
(१) निरि सा 5; निरि गरि सा 5; निर् िगम गरि सा 5; निरि
गम धम गरि सा 5; निर् िगम धनि धम गरि सा; निरि गम धम धसां निध
मग रिसा निसा 5; निरि गम धनि रिंनि धम गरि सा 5; निरि गम धनि रिंगं
रिसां निध मग र्साि 5; निर् िगम धनि रिंगं ममं गरि सांनि धम गरि सा 5॥

राग-मारवा.
(२) निरि गरि सा 5; निारे रिंग मम गरि सा 5; निरि गम धध मग
रिसा 5; निरि गम धनि निध मग रिसा 5; निर् िगम धनि र निध मग रि,
गम गरि सा; निरि गम धनि रिंग गरिं सांनि धम गरि, गम धग मग रिसा 5,
निरि गम धनि रिंगं ममं गरि सांनि धम गरि सा 5 ॥
नोट- इस राग में एवं इस का समप्रकृतिक पूरिया राग के आरोह में
" मध निसां, मध निसां रिसी," इ. इस प्रकार की स्वर रचना करनेसे सोहनी
राग हो जायगा, यह अवश्य ध्यान में रखें. सोहनी राग प्रथम भाग में लिख
चुके हैं सो देखिए. पूरिया राग आगे लिखा है.
मारवा-त्रिताल.
आना रे मोहन मेरी गलियां,
घिस घिस चंदन लेप लगावं, धोवु चरनन की तलियां. - आना
तेरे कारन हार बनावं, चुन चुन फूलन की कलियां. - आना
घ म ऽ ध| म गरि सा
आ ना ऽ रेमो 5 ह न
M
'ध
नि रि ग म ध म ध ऽ ध म ध म नि म ध
मे ऽरी sग लि यां घिस घि सचं द न
३
मग रि म ग रि सा | नि रि ग म ध नि रिनि
ले 5
5 प लगा s, s| धो 5 g s|च र न न
घ
घ
* (अंतरा)
ध नि म ध | ग म रि ग म ध म ग म ध सा सा
त लियां s s s/ तो ऽ रे 5 का ऽ र न
की 5

१८२ हिं. गा. क्र. पु. मा. द्वितीय पुस्तक. नि र S में गैरि'सा र बनाs Q 5 रि' नि ध नि ध म ध मा चु न चु न हा 5 फ S लन S नि ध म ध म ग रि 5 की 5 क लि यांs धम गरि सा मोड ह न S S आ ना S स्थायी. मम गम मग मम । गरि सा, निनि धनि ।निध निनि धम । गरि सा, रिरि सारि रिसां रि िनिनि धम । गरि सा, निर् िगम । आना रे मोहन निरि गम धध मग । रिर्ग मध निनि धम । गम धनि रिरिं निध । मध निरिं गंगं रिनि धनि रिंगं ममं गरि । सांनि धम गरि सा । आना रे मोहन निरि गम धनि रिंगं । म गरि, गे रिंनि, । रि निध, नि धम, । ध मग, म गर्,ि गम धनि गिरें गरि । सांनि घम गरि सा | आना रे मोहन मे 5 री ऽ। ग लि यां ऽ। गग रिस, मन गरि । धध मग, निनि धम, रिरि निध, गंगं रिंनि, । ममं गरि सांनि धम, । गम धनि रि निध । मग, रिंग मध नि धम गरि, निरि गम । ध मग रिस निसा । आना.... ..गलियां अंतरा. " तोरे कारन रिरि निध, निनिधम, धध मग, मम गरि ,गग रिर्सा, निरि गरि, गम् धम धनि रिंनि, रिंगं मंगं रिरिं सांनि । धम गरि गम धसां । तोरे कारन ममं गंमै गरि, गंगं । रिंग रिंनि, रिरि निरिं । निध, निनि धनि धम, धध मध मग, मम ।

राग:-मारवा. गम गरि, निार् गरि । गम गम धम धसां । तोरे कारन हा ऽ र ब । ना s ऽ । ममं गंगं रिरि निनि । धध मम गग रिरि, निरिगर्,ि गम गरि । गम धम गरि, गम। धनि रिनि धन गरि । गम धनि रिंग मम । गरिं सांनि धम गरि । निरि गम धनि रिसां । तोरे कारन हा ऽ र ब । ना s 5 । सांनि सांनि धम गम । धम धम गरि सा, साम गरि, गध मग, मनि धम, धरि निध, ।निगं रिंनि, मिं गरि । रिम गरि, निरि गम् धनि रिंग ममं गरि । साँनि धम गरि सा । तोरे कारन, इ. इ. बोलताने. " आना रे मोहन " नि रि ग रि आ ना रे मोह न मे री ध म ध नि ग ली यां धि ध नि रिं नि स धि स चे ध नि ध म घ मग लगा 5 घ म ऽ ध | म ग रि सा आ ना रे मोड द प नि रि ग म घ. ध म धड नि रिं 5 नि ग लि यां । आ ना धनि s मो ह । S री 5 न 5 म म घ में री ग म गरि गरि । निरि 5 सा लियां ऽधि स घी 5 स चंदन | S FFEE- नि रि ग म ध म ग रिध म ध म ध गरि सा. लेप 5 लगा 5 g s आ ना 5 मों 5 ह न हिं. गा. क्र.पु. मा. द्वितीय पुस्तक. नि रि ग म ध म ध 5 | रिर्ग रिम गध मनि धरि निध, मनि धम, 5 रीग लि यां s आना रेमो हन मेरी गलि यांधि सधि सचं गध मग, रिम गरि, निरि गम धम गरि ध म ऽ ध म गरि सा दन लेप लगा बुंधो बुंच रन कित लियां आ ना 5 रे | मो ऽ ह न ध नि रि ग म ध sर्गि मरि गम धम | गम धग मध निध री 5 ग लि यां s आना रेमो हन मेरी गलि यांधि सधि सचं S मघ निम धनि रिनि धम गरि गरि सासा ध म 5 ध म गरि सा दन लेप लगा बुंधो बुंच रन कित लिया आ ना ऽ रे मो 5 ह न T T । निरिं निध निध मध | मघ मग मग रि िनिरि गम घम ऽध आना रेमो ऽह ऽन मेरी गलि यांधि ऽस घिस चंद नले ऽप - for मनि धम ऽध मघ निरिं निध मग रिसा ध म ऽ ध | निििन धनिघ लगा बुंधो ऽव॒ चर नन कीऽ तलि यांऽ आ ना 5 रे | आनारे मोहन मधम गमग मेरी गलियां गिरि रिगम घिऽस घिऽस गमध मधनि चंदन लेऽप धनिध मऽध लगाऽ 'qss गंडरिं निरिंनि | धनिध मगरि । ध म ऽ ध म गरि सा धोऽवं चतर ननकि तलियां| आ ना ऽ रे | मो ऽ ह न नि रि ग म ध म ध | निरिं निध मध निध | मध मग रि गम sरी s|ग लि यां s| आऽ नाऽ रेऽ मोऽहऽ नऽ मेरी: म धम गरि गम गरि साऽ निरि निध मधानिरि साऽनिरि गम धनि धम गम धाने गऽ लिऽ याऽ घिऽ सऽ घिऽ सऽ चंऽ दऽ नऽ लेऽ पऽ लऽ गाऽ बुंऽ ऽ राग-पूरिया. रिंग गंमं गरि सांनि धम ऽध मग रिसा | धम ऽध मग रिसा धम ऽध मग रिसा 5 s s s आना ऽरे मोऽ हन आना ऽरे मोऽ हन आनाsरे मोऽ हन रि ग म ध म ध ध म s धम गरि सा ग लि यां. 5 आ ना 5 ३] मे S S मो 5 ह - निर्गि मधम धनिध निरिसां निरिरि गमगं रिंगरिं निरिंनि । आनारे मोहन मेऽरी गलियां धिसधि सचंद नलेप लगावू s - - ૨ धनिध मधम गमग गिरि | धनिध मधम गमग गिरि घोऽवु चरन नकीऽ तलियां धोऽ, चरन नकीऽ तलियां धनिध मधम गमग रिगरि | ध म 5 ध म ग रिसा धोऽ, चरन नकीऽ तलियां आ ना ऽ रेमो ऽ है न २ राग पूरिया. -X*X- रागांग विस्तार. रि सा सा ध (१) गs, रि सा , नि रि , सा ; नि रिग 5; म गरि ग; नि रिs, सा॥ (२) सा , नि ध नि , रि सा 5; नि , ध नि म ध नि , ध ध ध ध म म ग मध, रिसा 5; मध निरि ग , मरि ग 5; निरि गम ध ग मारे ग 5; निरि गम धनि म धग म गरि ग; नि रिनि ग 5; नि रिसा 5 ॥

हिं. गा. क्र. पु. मा. द्वितीय पुस्तक.
सा
ध
(३) निरिं गम धसां 5, नि रि' सां नि नि , रि' निऽ मs,
ध ग म ग ; नि म ध ग म ग ; नि s म 5 ग , मरि
ध
ग; नि रिs, सा॥
ध
सां
(४) म ग 5, म ध सांऽ सा s, नि रि' 5 सा; नि रिंनि गंs,
नि रि' सां नि रि' मग 5 नि रि' 5 सा 5; सांड,
सां
ध
ध
नि ध नि , रि' नि । म , नि म ग 5; म गरि
सा
सा , नि रि, सा॥
स्वरविस्तार.
(१) निरि सा 5; निर् िगरि सा; निरि गम गरि सा 5; गम धग
मग रिसा 5; निरि गम निनि मग मग रिसा 5; निरि गम धनि रिंनि धम गरि
सा 5; निरि गम धनि रिंगं रिसां निध मग रिसा 5; निरि गम धनि रिंग मंमं
गरिं सांनि धम गरि सा 5॥
(२) निरि सा 5 निरि गरि सा 5; निरि गम गरि सा 5; निरि
गम धम गम गरि सा 5; निर् िगम निनि मध गम गरि सा 5; निरि गम धनि
सां निम धग मग रिसा 5; निर् िगम धनि सो रिस निध निम धग मग रिस
5; निरि गम धनि निरिं गंग रिसां निध मध निनि घम, गम धग मग रिसा s;
निरि गम धनि निरिं गमं मंगं रिसां निध मग रिस 5; निरि गम धनि निरिं
गम धंगं मंगं रिसी, निध मग मध निसां, निध मग मध नि घम गर् िगम धग
मग रिसा ।।

राग-पूरिया. १८७ पूरिया - त्रिताल मोरी अरज सुनो दस्तगीर पीर, आन परी मोपे भीर पीर. - मोरी सब पीरन के पीर तुम्हीं हो, आवो बहावो हमरि भीर. – मोरी ध । नि रिसा नि ध नि म 5 गम मो री| अ र जसु नो ऽ द स्त सा र 5 सा नि । सा गीऽ र पी5 र । सा सा | नि रि ग ग म रि ग ग मो री आ 5 न परी 5 मों पे ध गा गम धग म ग 5 रि, s रि, नि रि। सा नि ध नि म गम भीऽ ऽ र पीर मो रीअ र ज सु नोड द स्त (अंतरा) ध रि 5 सा नि 5 सा सा सा म ग म धसां सां सा गीर पीड र मो रीस ब पी सां । सो सा सां रि' सां 5. नि रि' में रि' सां पीड र तुम्हीं 5 हो । आ ऽ वो बहा 5 वो's सा नि नि ध म | ग रि, नि रिसा नि ध नि । म निम गम ह म रि भी र, मो रि अ र ज सु सुनो द स्त माग स्थायी. गी ऽ र पी। ऽ र मो री । निरि गम ग, । निरि गम धग मग, निरि गम धनि मध । गम ग, निरि गम । धनि गिनि धनि मध । गम ग, निरि गम धनि रिंग रिसां निध । मग रिसा, मो री । अरज सुनो दस्त हि. गा. क्र. पु. मा. द्वितीय पुस्तक. गी 5 र पी । ऽ र मो री । उनि रिनि गरि । मग मरि गसा रिनि साs, नि रिनि । गरि मग धग मरि । गसा रिनि सा, नि रिनि गरि मग घम निध निम धग । मरि गसा रिनि सा, । नि रिनि गरि मग । धम सां, निरिंगमं रिं सांनि धनि मध । गम गरि, मो री । अरज सुनो दस्त ममंगम मग मम । गरि सा, निनि धनि। निध निनि धम गरि । सा, ममं गंमं मंग ममं गरि सांनि धम गरि सा, निरि गम, रिंग मध, गम धनि, मध निरि, धनि रिंग, मुंमं गरि सांनि धम । गरि सा, मो री । अरज सुनो दस्त गी : र पी। ऽ र मो री । निरि निरि गरि, गम । गम धम, धनि धनि रिंनि, गिं गिं मंग,। रिंग रिंनि रिनि धनि। धम धम गम गरि। गरि निरि निध निध, मध निरि गम निनि । धम गरि, मो री । अरज....मोरी अंतरा. सब पीरन के" ममं गरि सांनि धम।गरि सानि धम धनि। निर्ग मध निरिं गंग। रिसां निध, मध निरि निध, मध निनि मग । मग रिस, निर् िगम । सब पीरन के गंगं रिसां, गिर निध, निनि धम,धध मग,।मम गरिगग रिस, निग रिम गध मनि धरि निंग रिंमं गरि । सांनि धम गम धसां । सब पीरन के पी ऽ र तु । म्ही 5 हो । रिंग रिंगं ममं गरि । निरिं निरि गंगं रिंनि धनि धनि रिं निध। मध मध निनि धम । गम गम धध मग । रिंग रिंग मम गरि निरि गम धनि रिंगं । रिंनि धम गरि सा । सब पीरन के राग- पूरिया. ऽ रिसा निरि सा,। साम गम रि, रिर्थ । मध ग, गनि धनि । म, मसां निरि सा, सांनि धनि म, मध । मध ग, गम गम । रि, रिस निरि सा,। निरि र्गि गम मध धनि निरिं ममं गरिं । सांनि धम गरि सा । सब पीरन के इ. इ- नोट – इस पद का गाने में यदि मंद्र गांधार स्वर निकालना कठिण हो तो प्रथम लाईन में "गम' के बदले " "ध' " स्वरों का व्यवहार करें. . पूरिया-झपताल तोरे दरसन प्यासी अखियां सावरे, कैसे बनेगी आज. मोर मुगुट तोरे सीस बिराजे, गले बैंजती माल, पीतांबर की कछनी काछ, मृरत तेरी बिशाल. ध RECE रिग गमध गम गरि ऽ साम धसा ss|सा s/ रिसा ऽ द र सऽs न प्या ऽसी अखि यांss सा वरे 3 ध *( अंतरा) म नि रि | ग म ध |ग मग रिसा | ग 5) म धसासा साऽ सा के 5 से 5 बने गी आ ज मोर 5 मुगुट | तो ऽ रे सां सौ 5 | सा ऽ सा सारि' सां नि रिग रि'सांऽ नि नि म 5 ग स ऽ बिराजे ऽ गले 5 बै जं| ती माऊल घ सी 5 ग 5 | ग ऽ म म नि ध ग म ग सारि साऽ/नि नि रिग म पी s| तां 5 बर की 5 क छ नी का| 5 र त तेरी S मू सा ग धनि | रि नि ध म गरिऽ सा नि नि रि ग मध| म गरि 5 सा बि शा|s sss sss ल sऽल तो द र सऽऽ न प्या 5 सी १९० हिं. गा. क्र. पु. मा. द्वितीय पुस्तक. बोलताने. निग रिंग रिर्म गम गम गध मध गम गमग रस ऽन प्यासी आखि ऽयां साव रेकै ऽसे तोरे ऽद = २ . रिस ऽसा | निरि निध ऽम धम ऽग | मग ऽरि सासा बने sगी आज तोरे ऽद | रस ऽन प्यासी अखियां तोरे....आखियां - = २ निरि गरि गम गम धम | धनि म मध गम ऽग | म ग मग रिसा ऽसा तोरे दर सऽ नप्या ऽसी आखि यां साऽ वरे / कै से बने गोआ ऽज o २ 3 ० तोरे....अखियां निरि गम | नि म ध || ग सा ग सा | ऽनि रि' ऽसा | ग ऽरिं | रि' ऽ सा स ऽन प्या 5 सी s अंs खि 5यांss तोरे दर o ३ २ ३ ऽ नि | ऽम घ ऽग | म गरि 5 सा s कै ऽ से बने गी आ 5 ज तोरे दरसन प्यासी २ १ गिरि गमग | मधम धनिध निम्ििन धनिध मधम तोऽरे दर | सऽन प्याऽसी अखियां साऽव रेऽकै गमग रिसा निरिसा, सेऽब नेऽगी आऽज, धनिध मधम | गमग रिऽसा निरिसा, साऽव रेऽकै | सेऽब नेगी आऽज, उ 3 धनिध मधम | गमग रिऽसा निरिसा साऽव रेऽकै सेऽब नेऽगी आऽज | तोरे दरसन प्यासी a 3 wwBE राग - पूरिया. पूरिया - धमार. चली नार बन ठन होरी खेलन लिये पीचकारी. मुडीत भये जैसी शरद चांदनी, पुरन कला ब्रीख भामिनी राधा प्यारी.-चली म ग रि रि सा 5 सा ना Sर च ली S घ रि नि ऽ धू S ग म ध नि s रि साs sरी ऽ w na S न ब न 575 २ ० म ग नि 5 रि ग । खे मग 5 लि ये 5 म ध म ग पी S च ल न S S म गरि | रि सा ऽ सा च ली 5 ना डर S S का म ग रि सा नि रिs 5 री S (अंतरा) म म ध सा सांs मु डीs त 5 भ ध S सा 5 s सां रि' सौ । ये s som s सी S S S सां सां 5 सा श र 5 द5 नि रि' नि चां द म S T S नी sss S S S ग S म म 5 ग रि पु र 5 न S क S म ध म सा 5 ss सा ला SS ब्री sS ख ध ध म ध नि म घ ग म रा S ET S S s ग M नि रि' नि म । भा ऽ मि नी । S म गरि सा नि रि । S. म ग रिरि सा ऽ सा च ली 5 ना 5 5 र S प्या S S S १९२ हिं. गा. क्र. पु. मा. द्वितीय पुस्तक बोलताने रि नि धs मग निरि निरि गरि । गम धनि मध चs लिना र बन ठन होरी ब न Sठ 5 मग ऽम ग रिस निसा | निध नि म ग रि। रिसा 5 सा खेल ऽन लि येड पिच का री ना S र marwarican निस निग रिम गध मनि मध | मग ऽम | मग रिसा निरि म गरि सा चली नार बन ठन होरी खेल ऽन लिये पीच कारी च ली ना र बन ठन होरी धनि धम धम गम गरि | ऽसा निसा | मग ऽग मव | सांनि मग मग रिसा चऽ लिना र बs नठ ऽन होरी खेल ऽन लिये पीच कारी चली नार बन ठन होरी निग रिग रिम गम गघ मध मनि धनि मध मध | मग रिस मग रिसा चली ऽना रब ऽन ठन हो रीखे ऽल नलि ऽये पिच कारी चली नार बन ठन होरी निरि गम धनि रिंग रं | ऽसां निरेिं | निम ऽध ग मग रिसा मग रिसा चलि नार बन ठन हो ऽरी खेड लन ऽलिये पिच कारी चलि नार बन ठन होरी १ रिंगरिं निम्ििन धनिध मधम गमग | निधम धमग | मगरि मऽग रिसा, चली नाऽर बऽन ठऽन होऽरी खेलन लियेपि चकारी चऽली नाऽर २ मऽग रिसा, मऽग रिसा चडली नार, चडली नार बन ठन, ई. हिंदुस्थानी गायकी क्रमिक पुस्तकमालिका द्वितीय भाग समास. 20%D0900%D 2+44-34-341) संगीत ग्रंथों की सूची.. नोटेशन के साथ हिंदी भाषा के पुस्तकें. . RA -- 9AR ( डांक महसूल अलग) भारतीय श्रुति-स्वर-राग शास्त्र ३ संगीत श्रुति-स्वर शिक्षा प्राचीन मूर्छना अर्थात् आधुनिक शास्त्रीय थाट-पद्धति ०-१२ राग-लक्षण-गीतमालिका, प्रथम भाग ... राग-लक्षण-गीतमालिका, द्वितीय भाग हिंदुस्तानी संगीत की एनसाईल्लोपीडिया (छे भाग) १ कल्याण थाट के १७ रागों के उत्तमोत्तम पदसंग्रह के पुस्तक २ बिलावल थाट के १२ रागों के ३ संधिप्रकाश थाटों के ४५ रागों के ४ काफी थाट के ४० रागों के ५ आसावरी, भैरवी तथा तोडी थाट के २० रागों के पदसंग्रह २-० ६खमान थाट के १२ रागों के हिंदुस्तानी गायकी क्रमिक पुस्तमालिका ( भाग 1 से ४ ) प्रत्येक भाग ... ख्याल गायकी ( आलाप, तान, बोलतान के साथ ) दिलखुष उस्तादी गायकी ( अलाप, तान, बोलतान के साथ, प्रथम भाग-2 दिलखुष उस्तादी गायकी द्वितीय भाग ०-१२ तान प्रवेश ( २०० किसम २ के तानों के संग्रह ) ०-१२ राग सिरीझ ( छे भाग, आलाप तान के साथ ) प्रत्येक भाग सन्त गीत लहरी ( ८५ अपूर्व भजनों के स्वरताललिपिबद्ध संग्रह.) सितार होम-घटर सितार गत-तोडा संग्रह નોટેશન સાથે ગુજરાતી ભાષાના પુસ્તકો. કે ધટાડેલી કિમત રૂ .. હિન્દુસ્તાની સગીત વિદ્યા(બીજો તથા ત્રીજો ભાગ ) પ્રત્યેક ભાગ ૧-૦ शास्त्रीय संगीत का शिक्षः ( AIEn५, तान साथै ) ... १८ ઝવાહિરે જરાતી સંગીતમાળા (બે ભાગ) પ્રત્યેક ભાગ ૦-૧ર ३२२, मेन स्ट्रीट, केप पूना. पंडित फिरोझ फ्रामजी. 22-12--23

REFEREFERENCE
Research Work
ON
INDIAN MUSIC.
(भरतमुनि, साङ्गदेव प्रभृति प्राचीन महर्षियों के मत प्रमाण)
भारतीय श्रुति-स्वर-राग शास्त्र.
a
इस ग्रन्थ म प्राचीन शुद्ध स्वरों से अर्वाचीन स्वरों का मिलान, प्राचीन
शास्त्रकारों की सारणा-चतुष्टयी से प्रचलित वीणे के स्वरों का
मिलान, संगीत रत्नाकर के । साधारण प्रकरण
लिखे हुए श्रुति साधारण, स्वर साधारण, ग्राम साधारण
इत्यादि विषयों के परमगौप्य मर्म, प्राचीन मर्छनाओं
में से आधुनिक थाटों की उत्पत्ति, वह थाटों में
सम्भवते हुए १७० आधुनिक रागों के स्वरों के
श्रुत्यंतर, कम्पनसंख्या, वादी-संवादी स्वर
इत्यादि के पूर्ण विवरण, और श्रुति, स्वर,
ग्राम, मूर्छना, रागादि के सम्बन्ध में
बहुतसे संगीतोपयोगी विषयों का
विस्तारपूर्वक हाल लिखा हैं.
ARRARE
मूल्य ३ रु.
ParerewerervAASAAS
मुद्रक शंकर नरहर जाशी. मॅनेजर, चित्रशाळा प्रेस, १०२६ सदाशीव पेठ, पूना नं.
महाशक पंडित फिरोझ फ्रामजी, ३२२, मेन स्ट्रीट कप, पूना,

Text Book on the Practical Study
of Indian Music.
( Compiled specially for the use of High Scools & Colleges.)
हिंदुस्तानी गायकी
क्रमिक पुस्तकमालिका
अर्थात्
तानालापसह गाने बजाने को सहलतासे सिखलानेवाली हिंद भाषा की
क्रमिक पुस्तक.
भाग ३ रा.
इस प्रथम भाग में १८ प्रचालित आलापयोग्य रागों के २६ चुनीदा हिंदी
पर्दै उन के रागांग विस्तार, स्वरविस्तार, तान और बोलतानों
के साथ बहुत गमकदार नोटेशन में दिया है.
लेखक और प्रकाशका
पंडित फिरोझ फ्रामजी (संगीतशास्त्री)
Research Scholar & Author of 30 Books on Indian Musio
३२२, मेन स्ट्रीट, कॅप, पुना.
सन १९३६
सर्वाधिकार सुरक्षित.
मूल्य १॥ रुपया.

(Modern Research) Text Book on Shruti-Swaras of Indian Music. (Compiled specially for the use of High Schools & Colleges.) | ( भरतमुनि, साङ्गदेव प्रभृति प्राचीन महर्षियों के मत प्रमाण) * संगीत श्रुति-स्वर शिक्षा.. प्राचीन श्रुतिस्वरों का आधुनिक संगीत में कैसा व्यवहार होता है उस का बहुत विस्तारपूर्वक विवरण प्रश्नोत्तर पद्धति से इस पुस्तक में दिया है, जिसे संगीत के नये शिक्षार्थिओं को भी श्रुतिस्वर सम्बन्धी हर- एक बाबत समझना बिलकुल सुलभ होगा. सर्व संगीत जिज्ञासुओं को इस पुस्तक का ठीक २ अभ्यास करना परमावश्यक है. मूल्य केवल रुपया १. MAIN Modern Rosearch) Text Book On Classification of Ragas Aocording to Ancient Murchana System. ( Compiled specially for the use of Schools and Colleges, ) प्राचीन मूर्छना अर्थात् आधुनिक शास्त्रीय थाट-पद्धति. इस पुस्तक में प्राचीन मूर्छनाओं में से ११ मुर्छनाओं में कईक आधुनिक थाटों का और १७० रागों का समावेश प्राचीन शास्त्रीय पद्धति से किया है, और प्रत्येक थाट के स्वरों के श्रुत्यंतर, कम्पन- संख्या, परस्पर संवादाद का बहुत विस्तारपूर्वक विवरण दिया है, जिसे सब प्रचलित रागों के सच्चे सुरों का ठीक २ ज्ञान होगा. मुल्य केवल १२ आना

Text Book on the Practical Study
of Indian Music.
( Compiled specially for the use of High Schools & Colleges.)
हिंदुस्तानी गायकी
क्रमिक पुस्तक मालिका
अर्थात
तानालापसह गाने बजाने को सहलतासे सिखलानेवाली हिंद भाषा की
क्रमिक पुस्तक.
भाग ३ रा.
इस तृतीय भाग में १८ प्रचलित आलापयोग्य रागों के २६ चुनीदा हिंदी
पदें उन के रागांगविस्तार, स्वरविस्तार, तान और बोलतानों
के साथ बहुत गमकदार नोटेशन में दिया है.
लेखक और प्रकाशक:
पंडित फिरोझ फ्रामजी (संगीतशास्त्री).
Research Scholar & Author of 30 Books on Indian Music.
३२२, मेन स्ट्रीट, कँप, पुना.
सन १९३६.
सर्वाधिकार सुरक्षित.
मूल्य १॥ रुपया.

तृतीय पुस्तक के पदों की सूची. ... पदे. राग और ताल. १ जरा कहे दो सावरिया से आया करो. पहाडी-करवा २ इंगन लागी मोरे सावरे सलोने. देस-एकताल २०२ ३ अब तो लाज तुमरे हाथ. तिलक-कामोद-एकताल २०७ १ तन मन काम और धन धाम. तिलक-कामोद-रुपक २१. ५ दीजो दरसन नाथ मुरारी. जयजयवंती-झपताल २१३ ६ बन ठन कहां जो चले. केदारा-त्रिताल (विलंबित)२१८ ७ मोरि नेद गेंद लागी रे. कामोद-एकताल २२२ ८ गोरे बदन पर श्याम घिटो ना. कामोद-झपताल २२५ ९ जोबनभरी दध बेचें गुजरियां. श्याम-झपताल २२८ १० रे मन काहे करे तुं गुमान. हमीर-त्रिताल २३२. ११ चमेली फूलि चंपा गुलाब. हमीर-झूमरा (विलंबित) २३५ १२ किरपा करो तुम जगनाथ प्यारे. छायानट-झपताल.... २३८ १३ प्रथम सुर साधन साध खरज. छायानट-एकताल.... २१० १४ मुझे दे दरस गिरधारी. गौडसारंग-त्रिताल २४४ १५ तेरो सुमिरन करूं मैं अल्ला. गौडसारंग-आडचौताल ( विलंबित) २४६ १६ बलमा बहार आई. गौडमल्लार-त्रिताल १७ करुणा सुनो श्याम मेरी. पूरियाधनाश्री-त्रिताल २५५ १८ सुमिर हो नाम को मन ही के मन में. तश्री-झपताल २६० १९ ऐडि ऐंडि गैंडि गडि फीरत सब नार. २६५ २० आई ऋत नवेलरिया अतर सुगौंध लागोरी. बसंत-त्रिताल (विलंबित)२६८ २१ राम सुमर राम सुमर, यही तेरो काज है. परज-दादरा २७२ २२ पियु पियु रटत पपीयरा. ललित-त्रिताल २३ धन धन मूरत कृष्ण मुरारी. तोडी-त्रिताल २४ बर सरस्वती से मांगत हूं विद्या. तोडी-त्रिताल २८३ २५ सुदर सुरजनुवा सांई. मुलतानी-त्रिताल.... २६ गोविंद सो प्रीत कीनी. मुलतानी-एकताल [इति सूचीपत्र समास] २५० बसंत-एकताल ... ....

शुद्धिपत्र.. অম্মুক্ত पृष्ट. विषय. १९७, रागांगविस्तार लाईन (४) २०० (२) नि. निधप (३) गरि नि निध गरि २०० " २०३ तान गन २०३ अंतरे की तान । धनि पध। । धनि पध। २११ नोटेशन १ पम्। घ न। २१३ ४ नि धप नि धप न ना S - २२० बोलताने ॥ सारि साम् पम् पध। २२२ स्वरविस्तार रिंस रिंस २२४ नोटेशन ३ सा गी। लागी २२८ " रिम् पध जोडs रिम पध जोड . २२८ रिम् चंड रिम चंड २३१ रगांगविस्तार (४) त्रि 5 ग; मरिs; ग २३५ नोटेशन निसांसां Sऽब निसांसांड Sऽब ( १९६ ) २३५ नोटेशन ६ पधमप पधमप ला लाऽऽऽ २३५ ८ गम्पड हा गम्प हाऽऽऽ २३६ नोटेशन धनि धनि औs और ३ धिन निध २४० ७ धनि प S न २४१ बोलताने २ निध निध नि (En S । S घ २४७ ऽरि ऽसां ऽक रूंs रिं सांs ऽक २५४ रागांगविस्तार (१) S S नि रि । रि ग प । नि रि । रि ग प । २५७ बोलताने ५ " ७ ।पधमप। । प ध म प॥ २६६ नोटेशन ७ सांग। सा ग.r २७६ १० । रंग की म। ।रंग की। २८४ ५ । नि ध रिरि। ।निध् रिरि। [इति शुद्धिपत्र समाप्त]

सशास्त्र
हिंदुस्थानी गायकी
क्रमिक पुस्तक मालिका
(तृतीय पुस्तक.)
राग पहाडी.
रागांग विस्तार.
(१) गऽ गरि s, गम् गरि s, सा रि गरि सा नि धs;
पूध सा॥
(२)१५ सा रिग 5 सा रि ग ग, रि ग प 5; ग प म रि
सा नि ध; ग प ध नि, पध सा 5 ॥
(३) ग प ध नि, प ध सां; नि सां नि ध प ध प ध पप,
गरि सा; नि सा नि ध, पृध सा ॥
( ४ ) प ध प म, ग म ग रि सा नि ध प ध नि ध, पध
साs, रि गरि सा ॥
१२

१९८
हिं. गा.क्र.पु. मा. तृतीय पुस्तक..
स्वरविस्तार.
सारि सानि ध, पध सा 5; सारि गरि सानि ध पध सा 5; सारि गफ
गरि सानि धप ध, पध निध पध सा 5; सारि गप धs,. पध पम गम् गरि.
सानि ध, पध सा 5; गप धनि पध निध प s, गध पप गप गरि सानि ध,
पध सा5; गप धनि पध सां, निसां निध पध 5, पध पप गरि सा, निसा
निध पध 5, पध निध पध सा ॥
पहाडी-केरवा.
कहे दो सावरिया से आया करो.
दिन नहिं चैन, रात नहिं निंदियां, सपने में दरस दिखाया करो.
सारि रिंग | 5 गम् | गरि सा | साग 5) ग ग म्ग म् | ऽग रिंग
कहे दोs/s सावरि या 5 से आ sया क रोऽ ज राऽ
NRNA
सारि रिंग ) 5 गम् गरि साऽ सा | सापपम् ॥ मग म् | ऽग रिंग
कहे दोऽ साऽ वरि या 5 से आ5 या क रोऽ ऽ ऽज राs
* (अंतरा)
55 गग गग प 5154 अप धधध प. धपधमप
:
's 5 दिन नहिं चै 5
SSन ऽ रा तन हिं निं दि यांs s
.
मम्
म् म्
नं म
म
ऽ म्म् ऽम् ऽम् | ग प प म्] मग म् | ऽग रिंग
ऽ दर | ऽस ऽदि खा s| या क रोsssज राऽ
S सप

राग-पहाडी. स्थायी." कहे दो सावरिया से " गरि । गप धनि ॥ धनि धप ! ऽम ॥ रिग म । गम् गरि।। सानि धपाधसा सारि आया करो, जरा कहे दो सावरिया से गप धनि । पध सा॥ धसा रिंग सारि गा|सारि गप ।गप गरिरासानि धप । घसा सारि आया करो....सावरिया से सारि सानि। धपध॥ऽऽ, पध रि॥ सारि सानि । धप ध ॥ ss, । पध सारि गऽ । सारि गप ॥ गरि सानि । धपध,। पध निध । पध सा,। धसा रि, सारि गम् आया....सावरिया से अंतरा. ६ दिन ....निंदियां" पध पप । गप गरि ॥ सारि सानि । धनि पध ।। साध सारि । सारि गम् ॥ गऽ। दिन....निदियां पघ पम पम गम्॥ गरि गरि ।सारि सानि।।सानि धप । धपधपाधसा रिंग । सारि गम् रिंग प । गम् गरि । सानि धप । धसा रिंग ॥ सारि गम् । गऽ ॥s s। दिन....निदियां पऽ । गरि सा, ॥ध। पध पप ॥ गरिसा, । गप धनि ॥ पध सा। निसां निध पध , पध पप ॥ गरि सा। निसा निध॥ पध 5, सारि गम ॥ पध निसां । निध पम १ धप मग । पम गरि।मग रिसा। निध प,॥ धसा रिंग । सारि गम् ।। ग ,घसा रिंग । सारि गम् । गड, ॥सा रिंग । सारि गम् ॥ आया करो, इ. इ.

हिं. गा. क्र. पु. मा. तृतीय पुस्तक.
राग देस.
5
रागांग विस्तार.
म्
meena
म्
(१) रि s, म् पs, नि ध 45; प ध प म ग रि ग साs;
रिग सारिम्प , नि ध ॥
२) सा s, नि सा5; पनि सा 5; नि नि ध पम्प
सा; रि , गरि ; म प नि ध प , धम् गरि;
रिप म् गरि , सा रि नि सा 5 रि रिम् ।
नि ध प;
( ३ ) म पनि ध प 5; नि सा 5; सांनि रिसां रिं नि ध प 5
म् प६, म्प धम् ग् रिs; रिs, ग् रि, सा रि नि सा 5;
रि, म् पs, नि ध प 5॥
नि
(१) म् म, पप, नि नि, सांs, पनि साम् प नि सा
रि's, गरि गरि, सा रिं नि साs; म्प निसां
मं
रिम रि' रिप में गरि's Ts, नि सा 5; सांनि रिसां
रि नि ध प प ध म गरि ग सा 5; रिग सारिम् पs,
नि 5 सा॥
म्
सा
रिं

राग-देस. स्वरविस्तार. घ पम् गरि सा 5; निसा रिम् पनि सा निसा रिग मग रिसा 5; निसा रिम् पम् गरि सा; निसा रिम् पध पम् गरि सा; निसा रिम् पध निध निध पम् गरि सा 5; निसा रिम् पनि सांरिं सांनि धप मग रिसा 5; निस रिम् पनि सां रिंग रिसां न्धि पम् गरि सा; निसा रिम् पनि सां रिंग मंग रिसां निध पम् गरि सा; निसा रिम् पनि सांरिं पम् गरि सांनि धप मग रिसा ( अथवा ) निसा रिग सारि म्प धम् पनि सार गंसां रिपं मंग रिसां निसां निध पम् गरि सा॥ नोट-इस राग की अवरोह की स्वर रचना विविध प्रकार से होती है. यथाः . (१) धप मग रिंग सा, (२) धप धम् गरि गसा, (३) धप धम् गरि निसा, (४) न्धि पम् गरि निसा, (६) निनि धप मग रिसा. आरोह में क्वचित गांधार और धैवत स्वर लगाते है. यथाः- रिंग म्प धम् गरि 53 रिरि म्प धानि धप धम् गरि ; रिरि म्प धनि सोरिं सांनि धप धम् गरि गरि निसा 5; इ. सोरठ और देस ये दोनों समप्रकृति के राग है. सोरठ के आरोह में गांधार और धैवत ये दो स्वर बिलकुल वर्ण्य है, और अवरोह में गांधार स्वर अल्प है, यथाः- सारि म्प निसां रिम रिसां निसां निनि धप धम् रिs; रिप मरि सारि निसा, इ. इ. व्यवहार में लोग बहुधा ये दोनों राग को मिश्र करके गातें हैं, अर्थात् सोरठ राग के अवरोह में भी गांधार स्वर का स्पष्ट व्यवहार करते हैं, जिससे अवरोह की जल्द तानें लेनेमें सुगमता होती है. कोई वादी स्वर में भी भेद मानते हैं. किन्तु ये दोनों राग की चालढाल सब एकसमान ही है.

हिं. गा. क्र. पु. मा. तृतीय पुस्तक. देस-एकताल. दगन लागी मोरे सावरे सलोने, संदर मुरतवा को चितवन प्यारी.-इंगन चंचल चपल अचपल पिया, प्यारी की हैं मुसकिन न्यारी.-दगन घप ध ऽ गरि ग सारि पम् 5 ६ ग लाऽ5 न S S २ 3 पध सांनि | धप नि सां निसां रिसा नि | ध पध गीs मो रे सा म गरि लो ने S S S व स - ર ४ म॥ ग रि ग रि प र मु म गरि प NE सु सा वा की चि म् व र तऽ त न -- S S ग S S S रिम् पध | निसां निध पम् गरि ग सा त्रि पम् | धप ध प्याऽS री न ला (अंतरा) प नि सो सा नि सो सो सा चं च प प पि या सा नि | सा 5 | निसा रिसां रिनि धप म् पनि सा री कीऽ ऽ है। है ss मु कि न प नि सा sl प्या S S स निसां रिंगं | रिसां निध | पम् गरि ग सा मरि पम् | धप ध sरीऽ दग न न्याSS S S लाss स्थायी." द्दगन....सलोने" निसा रिम् । गरि , । म्प धम् । गरि s, । निनि धप । धम् गरि s, रिंगं । रिंसां रिंनि । धप धम् । गरि S, । गग रिग । सारि निसा, रम् पध । निसां निध । पम्, ६ । गन ला राग-देश. निसा रिम् । पनि धप, । म्प निसां । रिंगं रिंसां, । निसी रिंगं । मंग रिंगे रिसां रिंसां ।न्सिां निध । निध पध ।पम् पम्। गम् गरि । गरि निसा, रिम् पध । निसां निध । पम्, ६ । गन ला pranamang निसा रिसा । रिम् रिम्।पम् पनि । पनि सां, । पनि सारि । सांनि धप मुग रिग् । रिसा निसा, । रिम् पध । म्प सां । निसां रिंगं । मंगं रिंगे रिसां निसी । रिनि धप । घम्, ६ । गन रिंग रिम् । गरि, पध । पनि धप, । निसां निरेिं । सांनि, रिंगं । रिम् गोरे, । निसां निरिं । सांनि, पध । पनि धप, । रिग रिम् । गरि s, I निसा रिम् पनि सांरेिं । सांनि धप । धम्, ६ । गन ला अंतरा. " चंचल....पिया" सांनि धप । मग रिग् । रिसा निसा, । रिम् पनि । म्प निसां । पनि सांरि निसां रिंगं । रिसां निध । पम् गरि, । सारि म्प । न्धि म्प । सो ऽ चंचल....पिया निसां रिंगं । मंगं रिंगं । रिसां निसां । रिंनि धप । मग रिग् । रिसा निसा, निसा मरि । पम् धप । सांनि रिसां । निध पम् । गरि सारि । म्प सां चंचल....पिया निसां रिंग । मंगं रिंगं । सारिं निसां । धनि पध । म्प गम् । रिंग सारि साम् रिस । मध पसां । निरेिं सांम् । रिपं मंगं । रिसां निध । म्प सा चंचल....पिया हिं. गा.भ.पु. मा. तृतीय पुस्तक. रिंगं रिरिं । गरि निसां । निध पम्, । पध निध । पध निध । पम् गरि सारि निसा, । गिर सारि । म्म् रिम् । पप म्प । निनि पनि । सांरि निसा चंचल चपल, इ.इ. बोलता." गन ला पध सांनि धप नि सा s. रिम् पनि । थप म्प | निसां रिसां गीऽ मोरे , इंग नला sगी मोरे साव रेस- 5 S रिनि धप धम् गरि | गनि सा| मरि पम् | न्धि परि। पम् धप लोड नेसुंदर मुर तवा ऽकी चित वन प्याऽ रीद गन लाऽ. S S पघ सा निसां ऽरिं| सांनि धप | म्प . म्प ऽध पम् गरि मग रिंग इंग ऽन लाऽ गीऽ मोरे ऽसा ऽव रेऽसलो ऽने रिंग निसा | रिम् ऽप | निध पसांनि धप | मग रिंग सारि म्प ऽसुं दर मुर ऽत वाS की चित वन न्याऽ रीढ़ | गन लाऽ पघ सांनि धप नि सा निसां | रिसां s, साम् रिप] मनि धप गीs मो s, दग नलागीमो रेसा s S साड S पसां निरिं । साम् गरि गरिं सांरि निसां निध) पध मग | सारि म्प वरे सलो नेसु दर मुर तवा कीचि तव नप्या रीद गन लाऽ. पध सांनि धप नि धप नि सा निसां रिसां नि ध पध गीऽ मोरे सा म् गरि S S S व सड लो ने मरि ऽप | म्ऽ धप ऽस निरिसां रिंनि धप धम्ड लाऽ गीमो ऽरे साड वर नेसुडद र इंग न ऽस | लोड रिम् पध गरि ऽसां नि धप ऽध म्ऽ गरि ऽग निसा रिम् मुर SGT वाऽ कीचि ऽत वऽ नप्या ऽ ऽद्द गन ला राग -तिलक कामोद. पध सांनि धप नि | सां निसा | रिसां नि ध पध, रिसां नि ध पध, | ऽनि ऽनि गीs मो रे साड S, ऽद्द S S S क रे ऽग ऽनि निनि सां सां सां सांसां रिं सां | ऽरि निध] ऽप ऽध उन लागी मो रे | ऽसा वरे ऽस sलो ऽने सुंदर ऽर मु ऽम् गरि | ऽम् ऽग | ऽरि निसा | ऽम् गरि ऽग सारि म्ऽ पध ऽर तवा की ऽचि ऽत वन ऽप्या ऽरी ६ गन गी....सलोने TS S रिमरि म्पम् । पनि प निसांनि | सांरिसा रिन्धि पत्रप गरि द्दगन लाऽगी मोऽरे सावरे सलोने सुंदर मुरत वाकीचि २ सांनिध पधम् | गसारि मूऽप तवन प्याऽरी हगन लाऽऽ गी मारे, इ. इ. ४ र राग तिलक कामोद. ५ -- रागांग - विस्तार (१) पनि सा रि ग, सा रि ग सा s; सा रि प ६, म ग रिनि सा नि 5; पनिसारिग S, सारिग साऽ ॥ (२) सा रिs, पम् ग ; सारिग सा 5; सारि म्प धs, म् ग रिनि सा s; रिम् पध पs, म् गs, रिनि सा 5; सारि म्प नि ध प 5, म ग ििन सा नि ऽ पनिसारिंग साऽ ॥

हिं. गा.क्र. पु.मा. तृतीय पुस्तक. (३) सारि म्प सांs; पधम् ग रिनि सा ( अथवा ) पर पम् गs, रिनि सा नि 5; पनिसारिंग सारिंग सा॥ (१) म प सां 5 सा s, रिंनि स; पनि सारिं में सांरिंग सां 5; सांरि म में 5, सांरिं गं सां 5; पध म्प सा 5, पथ मग 5, सारिंग सा॥ स्वरविस्तार. (१) पनि सारि निसा 5; पनि सारि गसा रिंग सा; निप निसा रिप म्ग सारि गसा 5; निसा रिम् पम् गरि सारि गसा 5; निसा रिम् पध यम् गरि सारि गसा ऽसा 5; निसा रिम् पसां सां पघ पम् गरि सारि गसा ऽसा 5; सारि म्प निसां रिसां न्धि पम् गरि निसा ( अथवा ) सारि म्प निसां रिसां पर मग सारि गसा 5; निसा रिम् पनि सांरि गंसां ऽसां पध मग सारि गसा ऽसा ( अथवा ) सारि म्प निसां रिंगं गरि सांनि धप मग रिसा निसा 53; निसा रिम् पनि सारि गरिं पंम् गरि निसां पध मग सारि गसा ( अथवा ) निसा रिम् पनि सांरि गरि पंम् गरिं गंसां ऽप ऽसां प धम् ऽग सारि गसा 5 ॥ नोट- इस राग की अवरोह की स्वर रचना बहोत वक्र है. मध्य षड्न को मिलते वक्त " गरि सारि गसा" अथवा "गरि निसा" ऐसी स्वर रचना कीई जाती है. धैवत मध्यम की संगती बार २ दृष्य होती है, यथाः- "पव मग सारि गसा. सारि गसा." यह धम् संगति रहित भी स्वर रचना हो सकती है, पध पम् गरि सारि गसा ऽसा." न्यथाः NavsSANEEN तार षड्ज से एकदम पंचम स्वर पर आते हैं. यथाः-" सो, प, धम् Sग, सारि गसा ऽसा." मृदु निषाद स्वर का क्वचित व्यवहार करते हैं, यथाः-" निसां रिसां निध पम् गरि निसा."

राग-तिलक कामोद. २०७ MAHARune wwesome देश राग के सदश आरोह में कचित गांधार स्वर लगाते हैं, यथाः- निसा रिंग म्प धम् गरि गसा. आरोह में धैवत स्वर वर्ण्य है. आरोह में भी पंचम और तार षड्न की संगती विशेष है, यथाः- " रिंग म्प स" किंवा " निसा रिम् पसां सां , प धम् ऽग s, सारि गसा ऽसा. अब दूसरा प्रकार नीचे मुजवः (२) पनि सारि मग रिंग सारि सानि 5; पनि सारि म्प धम् ऽग सारि गसा ऽनि ; पनि सारि म्प धप म्प सांसां पध पम्' गरि पम् गरि सानि ; पनि सारि गरि सारि म्प धप म्प सांसां पध म्प सांरि निसां पध -म्प न्धि पम् गरि सानि 5; पनि सारि म्प धप म्प निसां रिसां निसां पनि सांरि मंग रिंग सांरि निसां पध पम् गरि सानि पनि सारि गसा रिग सा ।। राग का स्वरूप न बिगडे इसके लिए उपरोक्त सब तानों के टुकडे खुब याद रखना अवश्य है. ये सब तानों का उपयोग इस राग के कोईभी पद में उस की तालानुसार करें. तिलक कामोद - एकताल. तो हाथ, राखो उमर सारी खेल खोई, अवगुण की बेल बोई, तुंहि करीम जग निस्तार, परूं मैं तोरे पैयां. ॥ १ ॥ मात पिता सूत बंधु नार, सब है जग के झूठ पसार, तुम बिन है कवन मोरे, बिपत के हरैयां. ॥ २ ॥ रि ग पनि सा रिग (सा)| रि गम् (ग) सा तो ला तु मरे हा Sam अब लाज तुम रे शरम सैयां. . अ ब S S थ २ म् रिम् | प प ध म् । गरि ग (सा)| नि रा खो श म सैs s यां | र २०८ हिं. गा. क्र. पु. मा. तृतीय पुस्तक. *(अंतरा) म् म् पनि | नि | सां नि सां सा रिखे । ल खोs ई 5 प पनि सा गु ण नि सां सां सरि नि ध की 5 बे ल बोई. प प रिरि तुं हि करी नि धप S 5 र5 पनि सा रि' म जग नि स्ता ध नि ग सा रिम् प S S S घ म् प म् गरि मैं तो S यां रि सा अS S थ गरि ग नि नि सा सा ग रिम् (ग)|s सा तु म रे हा स्थायी. अब । तो ऽ । पनि सारि । गसा रिम् । पध मग । सारि गसा, पनि सारि । गसा रिम् । पध म्प । सो छ । पध मग । सारि गसा अब तो लाज तुमरे हाथ पनि सारि । गसा रिम् । पध म्प । निसा रिंसी । पध मग । सारि गसा, निसा रिम् । पध म्प । निसां रिंगं । रिंग सांसां । पध मग । सारि गसा अ ब । तो ऽ । रिम् पध । म्प सा पनि सां । पनि सांरिं गंसां रिं । पम् गरिं । निसी पनि । सांरि निसां । पध मग । सारि गसा अब तो लान तुमरे हाथ सारि म्प । धम् ऽग । सारि गसा । ऽसा, रिम् । पसां सां । म्प निसां रिंगं सांरि । रिपं मंगं | सारि गंसां । पध पम् । गरि सारि । गसा ऽसा अब तो लाज तुमरे हाथ

राग -तिलक कामोद.
२०९
पनि सारि । गसा ऽसा, । रिप मग । सारि गसा । ऽसा, सां । प धम्
ऽग सारि । गसा ऽसा, । रि' गंसां । ऽसां, प। धम् ऽग, | सारि गसा
अंतरा. "उमर सारि खेल खोई
सारि सांनि । धप मग । रिसा निसा, । रिम् पघ । म्प सां । पनि सा
उमर सारि खेल खोई
पनि सांरि । निसां पध । म्प सां, । पनि सांरि । ग सारि । ग सा
उमर सारि खेल खोई
रिम् पध । म्प सा । रिपं मंगं । सारि गंसां । पध म्प । सो s
उमर सारि खेल खोई
पनि सोरिं । निसां 5, । पनि सांरिं । ग निसां । 5, पनि । सारि गंसां
।
रिम् ग । निसां, पनि । सारि गरि । पम् गे। निसा पध । म्प सा
उमर सारि खेल खोई
पनि सारिं । गरि पम् । गरिं गंनि । सांप ऽनि । सांरि निसी । पनि सांरिं
।
।
गंसां ऽप । ऽसां प। धम् ऽग । सारि गसा, । रिम् पध । म्प सां
उमर सारि खेल खोई
गरि मग । सा, रिम् । पध म्, । पनि सांरिं । सौ, गरि । गरिं सा,
रिपं मंगं । सांरि गंसां । रिसां निसां । म्प निसां । रिरिं सांनि । धप मग
रिसा निसा, । सारि म्प । सां सा, । सारि म्प । सा सा, । सारि म्प
२
3
सां ।

२१० हिं. गा. क्र.पु.मा. तृतीय पुस्तक. SADIO तिलक कामोद रूपक (मात्रा ७) तज मन काम और धन धाम. झूठ जग यह अनित नरतन, साच एक रब नाम. तs जs ૨ २ रिंग सारि म प ) पनि सारि सा पध पध प म गरि ग सा : म नकाऽऽ म औऽ ऽ ध न धाऽ ऽ म ० (सम) (अंतरा) रिंग सारि म् प म् प नि नि सां सांप नि सां ठ य है अ नि म त जड S रिंग रिंग सां सां सां पप र साड च पध पध | म् म् | गारे ग सा एड कर ब नाSS म तज....घाम बोलताने. म् रिप ऽम् ध | पसां निरिं नि, | सांसां ऽप | रिम्प | नि सा साँ उन का मऔ र ध नधा ऽम तज मन का त S म पध पघ पम् | गरि ग सा घ न धाSS म ५ ऽ पनि सांरिं निसां पध पम् गरि 5 तन मन काम और घन घाम औऽ म् रिरि त ज पनि सारि सां का 5 म पध पध | पम् | गरि ग सा SSध न घाड म म न S रिग सारि । म् प तड जड ऽ सांरि सांनि || सांनि पध) पम् पम् | गरि गग गसा S तs जम ऽन काs मऔऽर धs नधा ऽम रिंग सारि म पनि सो सा s पनि सांरिंग सां, पनि सारि 5 तन मन काम, तज मन तऽ जड म न का S म राग-तिलक कामोद, ग सा, रिरि म्प नि सा का म तज मनका S प ध गरि ग सा धन घात S औ र ऽ नि | पम् धप | सांनि रिसां गैस, पनि | सांरिं नि । सो, पनि सारि ऽ तन | मन काम और धन धाम, तज | मन का म, तज मन ७ मू नि सा, | रिरि म्प ) नि सा का म, तज मन | का नि सा मा सरिऽमा निको अनि सां सांरिं सां | निसां ऽनि | पध ऽप, म्प तज ऽम नका ऽम और ऽध, नधा २ म ऽम्, मरिम्प सां सां, मरि म्प || सां सां, मरि म्प) सां । सो ऽमा तज मन का म का म, तज मन का 5 म् पध पध प म् ! गरि ग सा रि रिम् पारिरिम्पम् पधप धाऽऽ म म नतज मन काम और र म् निसांनि सांरिसीरिंगंसां, सांसां पध म्प, मगरिंग सासा, गिरिम्प पनि सांरिं सां और धान धाऽम, तज मन काम, तन मन काम, तज मन काs s म , पम् ) गरि ग सा || रिम् ऽरि | म्प ऽम् | पध ऽप, तब ऽम | नका ऽम | ओर ऽध, नधा औ र ध नधाSS म ऽम, तज 5 म ऽनि, पनि| सारिं गे| सो, पनि सारि | ग सा, रिम्प | नि सा सो मन का म, तज मन का मीतज मन | का म् पध पध/ पम् | गरि ग सा रिम् पध | म्प निसां रिंग सांरि निसां औऽ र धनधाss म तज मन काम और धन धाम सन || रिन पध म्प | मग रिंग | निसा, मरि म्प || मरि म्प | मरि म्प | सा 5 सा मन काम और धन घाम, तज मन तज मन | तज- मन तज मन तज. मन काम • (सम), नोट- रूपक ताल में काल याने खाली पर सम लेनेका रिवाज है.

हिं. गा. क्र. पु. मा. तृतीय पुस्तक.
राग जयजयवंती.
रागांग विस्तार.
नि
(१) सा धनि रि; रिग रि ; ग म् ऽ रि गरि ,
रि ग म प 5 ग म् s, रि गरि सा 5; रि सा 5, ५ नि
नि
रि॥
सा
(२) नि सा 5, रि गरि सा नि ध प रिरि ग म पड़
गम् , रि गरि ; रिंग म्प ध पs, गम् रि गरि
नि.
रिसा , धृ नि रिऽ॥
(३) सा ऽ नि सा 5; नि ध नि सा 5 रिs, रिम् पध 5 गम्
प,ग म् ऽ रि गरि ; नि ध प 5, म्प सो ऽ नि ध प 5;
ध प 5; गम् प,ग म् । रि गरि ; नि सा रि॥
(४) , प नि s, सां 5 निसां सा; रि' रिंग रि' सांs
रि'नि सां नि सो ऽ निसां रि' नि ध प परि's
सां , रि' नि ध प 5; रिम् पनि सांरि गम् रिंगं रिसां निध
सां
4 5; रिम् पनि ध पs, ध ग म s, रि गरि सा,
धनि रि॥

राग-जयजयवंती २१३ स्वरविस्तार. रिग् रिसा-5; रिंग मग रिग रिसा 5; निसा रिंग म्प गम् रिग रिसा 5, रिंग म्प धग ऽम् रिग् रिसा 5; रिम् पनि सांनि धप धग ऽम् रिग् रिसा 5; रिम् पनि सांरिं सांनि धप गम् रिग् रिसा 5; म्प निसां रिंगं रिंसां रिंनि धप धग ऽम् रिग रिसा 5; रिम् पनि सांरिं गंम् रिंगं रिसां सांरि संनि धप गम् रिग् रिसा ॥ जयजयवंती- झपताल. दीजो दरसन नाथ मुरारी, तरसत रही है नैनां हमारी जिस दिन से परदेस गवन कीनो, हर लीनो हमरी सुध बुध सारी नि धनि रिरि | रिऽ रिग प 5 गम् ) रि ग् दी s दरस ऽनना थमुऽ रीs रि ग म् म् SS रा * । प ग नि नि सा 5 सा रि गरि ऽ सा नि धप | ग म प म | रे गरि त रस 5 तार र ही है ss नैं ना ना ऽह मा sus *(अंतरा) सां गं म् पनि ऽ नि सो नि | सा ऽ सांनि सौ रि' गरि सो सा| नि ध प जिस दीड न / से 5 पर दे स 5 ग ब न की 5 नो सां म् रिम् 5 प | नि नि | सा ऽऽ || रि' नि ध ऽम् | गम् | रि गरि ह र ली s नो ह मरीs s|| सु ध बु ऽ ध | सा s sus १३ हिं. गा. क्र. पु. मा. तृतीय पुस्तक. स्थायी. "दीजो दरसन रिग रिसा । s, रिंग मग । रिग रिसा । s, निसा रिग म्प गम् । रिग रिसा s, I रिग मग । धग ऽम् रिग् रिसा 5, रिम् पनि सा । निध पम् । गम् रिग रि ॥ दीजो दरसन रिम् पनि । सांरिं सांनि धप । गम् रिग् । रिसा s, रिम् पनि सारिं । गरिं सांनि धप । गम् रिग् । रिसा s, रिम् पनि सांरिं । गंम् रिंगं रिसां । निध पम् । गम् रिंग रि ॥ दीजो दरसन निसा रिग । म्प गम् रिग् । रिs, | धग ऽम् रिग् रि , । सांरिं सांनि धप । गम् रिगा रिs, गम् रिंगं रिसां । निध पम् गम् । रिग रि । साध ऽनि रि ॥ दाजो दरसन निसा रिम् । पध म्प निसां । रिंग मपं । गंम् रिंगं रिंनि सांरि निध । पम् गम् रिम् । रिसा, निसा । रिसा धनि रि ॥ दीजो दरसन PosMAIN धध पध । धप म्प, रिरिं।सांरिं रिसां । निसां, ममं गम् मंग रिंगं । रिसां निध पम् । गम् रिगू । रिसा धनि रि ॥ दीजो दरसन सारि सासा, । रिग् रिरि, गम् । गग, म्प । मम्, पध पप, निसां निनि, । सांरिं सांसां, रिंगं । रिरिं, पंपं । गंम् रिंग रिंरिं सांसां निन् ि। धध पप म्म् । गम् रिग् । रिसा धनि रि॥ दीजो....मुरारी राग-जयजयवंती. २१५ अंतरा."जिस दिन से पर सांनि धप । म्प गम् रिग् । रिसा, रिरिं । सांनि धप गम् रिग रिसा, । पंपं गम् रिंगं । रिसां, निसां । धनि रिसां निध पम् गम् । रिग रिसा, निसा । रिम् पध । म्प सां ॥ जिस दिन से पर _ निसां रिंगं । रिसां निसां, पनि । सारिं सान् ि। धप धम् गम् रिग रिसा, । निसा रिम् पध । म्प सा । पध म्प सा ॥जिस दिन से पर सांरि निसां । धनि पध म्प । गम् रिग् । रिसा, रिंग म्प, गम् पध, । म्प निसां, पनि । सांरिं, धन्।ि रिसां निध सां। जिस दिन से पर । " रिंग रिसां । रिसां, निसां निध । निध पध । पम् पम् गम् गरि ग्रि, । निसा रिंग ऽम्, । रिंग म्प । ऽध, गम् पसी ऽसां, रिरिं । गम् रिंगं रिंनि । सांरि निध । म्प सा 5 || अंतरा पूरा करें. बोलताने दीजो....मुरारी" धनि गरि, निसा रि, निसा रिंग म्प | धग ऽम् प्रि दी जो , दिजो दर सन नाथ ऽमु रारी दीजो....मुरारी निसा ऽनि सारि ऽसा रिंग रिंग ऽरि गम् ऽग म्ध दीड जोऽ ऽ द ss S S सSS न ऽप धनि | ऽध पध ऽप गम् ऽग | रिग् रिसा निसा मुऽऽ राऽ ऽरी 5 5 नात SS S दीजो....मुरारी हिं. गा. क्र. पु. मा. तृतीय पुस्तक. गरि ऽग | गम् धध | पध ऽनि धनि धनि सांस दिजो ऽद र सन नाथ मुरा ऽरी तर सत रही रिसां निध | पम् गम् धप मग रिग मग रिसा निसा हैऽ नय नाह मारी नय नाह मारी नय नाह मारी दीजो....मुरारी सारिं सांनि सांनि धनि धग मग रिग रिसा, धनि रि दी जोद र सऽ नना ऽथ मुरा ऽरी, तर स सारि नि गम् गम् धध | सांनि धनि धप मग रिसा तs डर ही हैऽ ऽमैं| ऽना | ऽह माऽ रीs पनि रि गरि | निसा रिंग | म्प धम् गम् जो 5 s दिजो दर सन ऽना ऽथ पनि सारिं । निध पम् गम् । रिम् रिसा | निसा धनि र दीजो...मुरारी मुरारीत रस तर ही नैंऽ ऽना रि's| सांनि धप म्ग रिसा 5 निध दी जोड दर सन थ 5 मुरा ना घडग ऽप मग रिss सSS डरी तर मग रि रि ऽही न ये त ऽर रिग मग रिसा निसा रिंग नाऽS हऽ माऽरीs मध निसां निध पम् गरि S S S दीजो दरसन, इ०

राग-केदार.
राग केदार.
रागांग विस्तार.
मू
म्
(१) सा म् , रि s, सा 5; साम् 5, म्म् ऽम् प5, पथ
मप ऽम् , रि सा 5; साम् ।।
(२) सा; रि साs, निध ऽ 45; सा ऽ रि सा; म् 5, रि
साs; 5, रि सा; सा म् ; पध म् ; नि ष
sus, मप धप म् 5; पम् s, रि सा5; साम् ॥
(३) सा मरि सा 5; सा म् 5, पध पम् रि सास निध
5 पs, मप धप म् ऽ, रि सा; म्प पसां सांkिs, सो
मू
नि धम पम्म् रिसा 5; साम्॥
(१) पप सी 5, सां रि' सां; में में रि' सा 5; सांरिं सांनि
धप मप धप म् 5; सा म् 5, 4.5; मप धनि धप मप धप
म् ; सा म् पध म्' , पम् , रि सा; निसा म्॥
खरविस्तार.
सासा म्म् रिर सासा 5; सासा म्म् पप धप म्म् पप म्म् रिसा,
सासा म्म् पप धप सांसां धप म्म् रिसा 5; सासा मम् पप धप सांसां रिरि
सांसां धप मम् रिसा 5; सासा मम् पप धध पप सांसां रिरिं सांसां मम रिसां
धप मप धनि धप म्म् रिसा, निसा म् ॥

हि. गा.क.पु. मा. तृतीय पुस्तक. केदार-त्रिताल ( विलंबित ). बन ठन कांहां जो चले, ऐसी को मन भावन सांवरे सलोने कन्हाई.-बन दूजो कैसो चंद्र मानी को हि लागत, छिपछिप देत दिखाई.-बन 5 पधमप ऽम् ऽम् बऽनड Sठ ऽन S S BFM पम प ध पम् । S का ss ss हांs s जो चले 5 S S मम् मग प S कोsss 5 ऐसी पधाप म् गम् रिसा 5 5 | सारि साम् ss) म्म् ऽग 4 5 न 5 5 सांव रेऽ ऽs सलो 5 मन भाSS 55 प S S S प ध निध पं । सांध सा म प मपधs पधमप ऽम् ऽम् क न्हा 55 ईs s ss बन ठन S S S S 5 S 5 प SS कांss पम प ध प म्। हांs जो च प (अंतरा) s पप सां सां ऽ दूजो कै ऽसो S 5 S सा निरिं स sस धसां निरिसारिंनिसां निसां घपम्ऽ ऽसारि साम् ऽ ऽग चं ऽद्र मा s/s नी sो ऽहि लाsss ऽ गऽतss/ छिप छिपss प ध प प ध निध प सांध सौ म प | मपधऽ पधमप ऽम् ऽम् दे ऽ त दिखा sssss बन ठन S. 5 राग-केदार. २१९ स्थायी. sss | सासामम् पपधध पपसांसां रिरिसांसां । -- NA २ ममरिसां निरिसांसां धपमप मरिसा । साम्गप, बऽनऽ ऽठ छन । 3 का S S ऽ । सारिसासा म्पम्म् पधपप सांरिसांसां । २ मपंम् रिसांनिसां रिरिसांनि धपमप । मपधs, बऽनऽ ऽ ऽन ।। का s, म्ऽगम्' पम्गम् । पमप धपमप सांऽनिसां रिसांनिसां । - -Rs २ मंगम् पगंम् रिसांनिसां धपमप । मपधs, बऽनऽ ऽठ ऽन || ३ कांहां जो चले मपधप मम रिसा, मपनिध सांनिधप ॥ रिसा, मपनिध सांरिसांनि धपमप । म् रिसा, मपनिध सांरिसांम् रिसांनिसां । धपमप धन्धिप रिसा, साम्गप । मपधs, बऽनs sठ ऽन || कांहां जो चले अंतरा. " दूजो कैसो" सांसोधप म्मरिसा, साम्गप मधपनि । धसांनिरिं सांगपं मुमरिसां सांरिसांनि । ર धपमप धनिधप रिसा, मगपम । धपसांड, दूजो के ऽसो ॥ सांरिसांनि घपमप धनिधप मरिसा, । सासासाम् म्म्पप पधधध पपपसां । itya Gamin २ मुमरिसां घपमप रिसा, साम्गप । मघपसां, दूनो के ऽसो ।

२२० हिं. गा. क्र. पु. मा. तृतीय पुस्तक. म्पपम्' पपम्म् रिसा,सांरि रिसारिरिं । सांनिधप मम रिसा, मपंपम् पंपमम् । रिसांनिसां धपमप रिसा, सारिसाम् । पधपसां, दूजो कै ऽसो ॥ 3 ममंरिम मरिसांसां, धधप धपमप, । मम रिम मरिसासा, सासामम् पपधध । ૨ पपसांसां रिरिसांम् रिसांनिसां धपमप, । सो, दूजो कै ऽसो ॥ इ. इ. बोलताने. ऽ पधमप ऽम् ऽम् || मम् पप धनि धप म् रिं सांनि ऽध 5 बडनSSठन बन ठन काहां जोच ले सांवरे ऽस २ मा लोने ऽक न्हा ई, बऽनऽ ऽ ऽन बs नठ न कांड भुत पसां रिसां धs पs | सांनि धप मप धप | रिसां निध धप मम् हांजो ऽच लेऽ साऽवरे ऽस लोऽ ने कहा ऽई बन ठन २ पsss) पम प ध पम्पसांसां निऽसां रिसांऽनि सांधपs कांsss हांऽऽजो च बनठन कांहांऽजो चलेऽसां ऽवरेऽ SHREEDO SEAMSUND ૨ पम प ध प धम्ऽम् पसांऽनि ऽघऽप ऽमऽम् || 4 sss सलोऽने कन्हाई ऽबऽन Sठन का s s s| हांऽ ऽ जो च ३ NARIYAR ૨ घऽपध ऽप,रिंऽ सांरिंऽसां, मंऽरिसां सांरिंऽसां निसांधप ऽधपम धपम्म् बऽनठ ऽनकांऽ हांजोऽच, लेऽसांऽ | वरेऽस लोऽनेक ऽहाऽई बनठन 3

राग-कामोद.
२२
पss s|पम प ध प साम्गप मधपसां निरिंनिसां पधमप
कांsss हांss जो च बनठन कांहांजोच लेसांवरे सलोनक
--
ર
सांनिधप ऽमऽम् पपधप ऽमऽम्प sss
न्हाईबन ठन कांहांबन ठन || कां sss
गंमरिसां निरिसांऽ निसांधप मधम्ऽ मम्ऽप ब्रिसा, रिसांनिध पमपध
बऽनठ ऽनकांड हांजोच ऽलेसाs | वरेऽस लोडनेs, कन्हाऽऽ ईsss
૨
.
१
२
धपम्म् पपधप म्म्पप धपम्म् पSSS
बनठन कांहांबन ठनकांहां बनठन का sss
राग कामोद.
rande
रागांग विस्तार.
(१) सारि 45; मप ध, 45; ग म प ग म् रिसा 5;
रिप॥
(२) सा s, रिसा, निध 5 45; सा s, रि सा ; गम् ॥
पs, गम् रि सा; रिप।।
(३) साम् रिपs, म प ध प 5; नि ध प 5; सां नि ध प;
मू
मपघ मप 5 गम् पs, गम् रिसा 53 रिप॥

२२२ हिं. गा. क्र.पु. मा. तृतीय पुस्तक. ( ४ ) प प स 5 सा रि' सा 5 में रि' सोs; ग में पंग में रिसा; रि'रिसा, धs प; रिपध प, सो म् ध प5; ग म प ग म रिसा; रिप॥ स्वरविस्तार. सासा रिरि सासा 5; सासा मरि पप गम् रिरि सासा 5; सासा मरि पम धप गम् रिसा 5; सासा मरि पम धप सांसां धप गम् रिसा 5; सासा मरि पम धप सारिं सांनि धप मप गम् रिसा 5; सासा मरि पम धप सांसां ममं रिस धप गम् पग मरि सासा, रिरि पऽ ॥ कामोद - एकताल. मोरि नेद गेंद लागी रे, तुम से महंमदसा पिया के सुमरन करत रहत निसदिन घरि पलछिन.-मोरि हूं तो तेहारी बात तकत हूं, सोने न देत याद तोरी पलछिन. मपध मप | ग म् | रि सा रि सा मोऽऽ रिड ने sद 5द ૨ 3 < म् घ प रि पम पs लागी रे म् ग 5 ग से s म्घ प S म द म २ Ir to y w घ म s पि या प S. ग मरि सा | रि सा मा सा राग - कामोद. २२३ पूसा सा सा नि सारि रिग म् त नि स दि न घरि ह म् घ ध प प मपध मप) ग मरि सारि सा छि न मोऽs रिज मोडs रिs में 5 5 द प म (अंतरा) प S पसा सड सा S S सां नि हा रि' सा री S S ते SS सा सांनि सा ध बा S s रि' सां सां धप s सा S 5 क त 5 SS मप गम् रिसारि सा साइम ग न दे द तो रि सोड ने या 5 म् घ प म् ग म्ध प ग म र सारि सा छि न मोड रिने S Sद स्थायी. ला गीऽ । रे , । गम् रिप, । गम् रिप । मप धप, । गम् रिप मप सारिं । सांसां धप, । गम् रिप । मप सांसां । गंम् पंगं । मंरि सांसां । सारं सांनि । धप मप । मोरि नेद गेंद सासा म्म् । रिरि पप । मप धप । पप सांसां । रिरिं सांम् । रिसा धप गम् पग । रि सासा । मोरि नेद गेंद ला गीऽ। रे , । रिरि पप । मप सां, । रिसां मरि । पंग मरि २२४ हि. गा.क.पु.मा. तृतीय पुस्तक. सांरि निसां । पध मप । गम् रिसा, । मरि पम | धप सो, । गंम् रिसां गम् रिसा, । मरि प । मोरि नेद गेंद सा गीऽ । रे ।s s। रिरि सासा, ! रिप गम् । गिरि सासा, रिप मध | मप गम् । रिरि सासा, । रिप मघ । पसां पध । मप गम् रिरि सासा, । रिप मध । पसां रिसां । गंम् पंगं । मंरिं सांसां, । गम् पग मरि सासा, । मरि । मोरि नेद गेंद अंतरा. "हूं तो तेहारी" सांसां धप । गम् रिसा, । रिरिं सांसां । धप मप | गम् रिसा, । म रिसां घप मप । गम् रिसा, । साम् रिप | मध पसां । गंम् रिसां । निध सा हूं तो तेहारी गंम् सारिं । निसा पध । मप गम् । सारि निसा, । रिम् रिप । ऽप, मप मध ऽध, । पध पसां । ऽसां, सांरि । साम् ऽम्, । रिसां धप । मप सां हूं तो तेहारी निसां रिनि । सांरि निसां, । मप धम । पध मप, । गम् पग । म्प गम्, निसा रिनि । सारि निसा, । सासा मरि । पम धर | सा मम् । रिसां निसा हूं तो तेहारी, इ. इ.

राग-कामोद.
कामोद - झपताल.
गोरे बदन पर श्याम घिटो ना,
तिलक भाल पर बूंदन माई.-गोरे
गोरे गोरे करजा में हरि हरि चुरियां,
पौंचि गजर और गूदन माई.-गोरे.
म्
रिसारि पप पडप प ममप ध प /पघ मप | पग म् रि
गो रे बदन श्यामऽऽघि टोडना ss
रि प मप मप गम् गम् रिसारि सारि प ध प स ग म | सा रिसा
तिल कऽ ऽ भाऊ sलप रps ss दs न 5 मा 5 ई
(अंतरा)
पपसां सां सांसारि'सासा साध सारि"सांरि निसां सांप
गो रे गोरे क र जा 5 में हरिह ऽरि चुs रिड
रि' में रि' सारि' सा मरि पम ध प सा गम् सारि सा
s चिऽ गज र औऽ र गूs ss द न 5 मा s ई
बोलताने.
रिसा
रि पप, साम् रिम् रिप मप मध
गो ऽ रे 5 ब, गोरे ऽब दन ऽपरशा
पध पसां सां पध ऽध | पप मप गम् ऽम् रिसा
ऽम घिटो ऽना तिल ऽक भाल पर
बुंद ऽन भाई
रि सारिप प, मप सांसारिनि सांध. पप
गो ऽ ऽ ब, गोरे बद नप ऽर श्याम
सार

हि. गा. क्र. पु. मा. तृतीय पुस्तक. मप घप मप ऽम् गम् । ऽरि पग | ऽम् रिसा घिटो नाति लक ऽभा लप डर बुंद| इन मा ईगोरे बदन पर म्ऽ रिप | ऽम धs पसा रिं ऽसां गोऽ रेब ऽदनऽ पर ऽश्या ऽम मं िऽसां ऽरिं घिटो ऽना ऽति निसां ऽध sप ऽप मप | मप धप । गम् पग मरि लक ऽभा ऽल ऽप र बुंs ऽद नऽ ऽमा ई| गोरे बदन पर | गोरे ऽसां ऽरिं सांसां घप ऽग म्प गम् रिश रि ऽसा ऽगो ऽरे बद नऽ ऽ ऽर श्याम ऽर श्याऽ म घिटो ऽना ऽध मप | ऽरिं निसां मंडरिं ऽसां| ऽघ ऽप मरि ।। ऽति लक ऽभा ऽल पs| sर ऽबुं | ऽद ऽन माई गोरे बदन पर साम् रिप | मघ पसां निरं | निसां नि | सांध ऽप मप गोरे बदनप रश्या मधि नप रश्या मधि टोना तिल कमा ऽल पर २ ३ पग ऽम् । रिसा ऽप गऽ रि साऽ पग ऽम् रिसा बुंद ऽन | माई sबुं दऽ नमा ईs बुंद ऽन माई गोरे बदन पर गोरे बदन पर १ म् ऽरि पपम | घडप सांऽनि रिनिसां । गरिं सांरिसां गोऽरे बदन | पर श्याऽम घिटोना तिलक भाऽल २ २ गंमरिं सांरिसां धऽप गम्प गरि, पर बुंदन माई, तिलक भाऽल घऽप गम्प गरि, पर बुंदन माऽई, २ गंमरिं सांरिसां| घऽप गम्प गमीर तिलक भाऽल पडर बुंदन माऽई || गोरे बदन पर

राग -श्याम.
२२७
900
राग श्याम.
00000000
रागांग विस्तार.
(१) सा ऽ रिs, म रि s, नि सा 5; रिमाप 5s, धप
मप म् रिs; प ग म रि , नि सा ॥
म्
(२) 45, नि सा s, रि नि सा; रिs, म प 5 निध मप53
गम् प गम् रि, नि सा 5॥
सां
(३) प प स ऽसां, सां रि' सा; नि सा रिs, म रि' नि
सां 5; पनि सांरि निसांs, निध मप 5, मप रि5; रि
ऽम् रि नि सा ॥
खरविस्तार.
रिम् रिनि सा 5; सारि मप गम् रिनि सा; रिम पध मप गम् पप
गम् रिनि सा 5; रिम ऽप निघ मप गम् ऽप रि निसा 5; रिम पधः मप सा
निध मप गम् पग मरि निसा 5; रिम पध मप सां निसां रिसां निध मप हि
ऽरि पग ऽम् रिनि सा; रिम पध मप सां निसां रिरिं मंरि निसां निध मप
गम् पग मरि निसा ॥

हिं. गा.ऋ. पु.मा. तृतीय पुस्तक. श्याम-झपताल. जोबनभरी दध बेचें गुजरियां, चंद्र बदन मृग नैना रसीले.-जोबन आवत धन श्याम मिले मारग में, घेर लिनो वही ब्रज की डगरियां.-जोबन रि रिम् पध | मप गम् पम् रि नि सा सा|| रिम पम | नि ध प म रि जोऽ s बऽ ऽ न | भरीद ऽ धबे चे ऽ गुड जरियांss म् * maun २ प रिम् | पनि रि'| सां नि ध प म म प प गम् प गम् रिs चंद्रब द नामृग ग नै 5 नारसीss/ले s s *(अंतरा) पसां सां सां सां सारि'सांसो साध सोरि'सानिध माप आवs तधन श्या ऽ म मि ले {s मा 5 र ग | मेंsss म् मप निसां रि'ऽ सांरिं| निसा 5 निध पम परिमाप निध प) गम् पागम् रिs घेड र 5 लिऽ नोऽ ऽ वऽ हीऽऽ ब्रज की 5 ड गऽ रियांsss स्थायी. " जोबनभरी दध रिम पध । मप गम् पनि । सारि मरि । निसां, सांरिं निसा निध मप । धम ऽप, गम् । पग मरि । निसा, रिरि मप ॥ जोबनभरी दध मम् रिनि । सा, पध मप | गम्' रिनि । सा, सांरि निसां पध मप । गम्' रिनि सा, । रिंनि । सोरि निसां पध । मप गम् । रिनि पनि सारि । मप गम् । रिनि सा ॥ जोबनभरी दुध

२२९
राग-श्याम.
रिम् रिम | पनि मप, निसां । निरिं सांरिं । निसां, रिंनि मप
धम ऽप, । मरि ऽप धप । मप, गम् । पग मरि निसा ॥ जोबनभरी दघ
पनि साप । निसा पनि सारि । निसा, रिम । परि मप रिम
'पध मप, । पनि सांप निसां । पनि सांरि । निसां, निध मप
'घम ऽप, । रिम पध मप | गम् रिसा । निसा, रिरि मप ॥ जोबनभरी दध
अंतरा.
आवत घन श्याम
सांरिं सांनि । धप मप गम् । पग मरि । निसा, रिम् ऽरि
मप ऽम, । पध ऽप, निसां । ऽनि, सांरिं । ऽसां, मंरिं निसा ।।
आवत धनश्याम
गंम् पंगं । मंरिं निसां, धध । पध धप । मप, गम् पग
मरि निसा, | रिम पध मप । सो, निसां । रिंनि सांरि निसां ।।
आवत घनश्याम
सोरि निसां । निध मप, गम् । पग रि । निसा, मरि पम
थप सां, । निसां ऽरिं रिं । निसां निध । मप साऽ॥
आवत धन श्याम, इ.इ.
बोलताने.
रिम पध | मप गम् प,
रिम ऽप | निध मप, गम्
जोडs
बs s न, जोब ऽन | भरी दध, बेचे
ऽप मरि | निसा, रिम् ऽरि | मप मप (रिसा ऽनि धप
शु जरि | यांड, चंद्र ऽब | दन मृग | नैना र सीले
१४

जोडs
चंड द्रा बद ऽन मृग, नै ऽनारसी
२३०
हिं. गा.क्र. पु. मा. तृतीय पुस्तक.
रिम पध | मप गम् प, मरि मप (निऽ मप निसां
बऽ ऽ न, जोब नम रीऽ दध बेचे
रिरिं सासा, निध ऽप | मप रि | मरि ऽम् रिसा
यां, चंद्र ऽबदन मृग | नैना डर सीले जोबनभरी दध
रिम् रि| मप ऽम पध | sप सांरि | निसां, ऽ ऽरिं
जोब ऽन | भरी ऽद धबे | ऽचे गुज
ऽचे गुज | रियां, ऽचं द्र
सारिं सां| निध म परि ऽरि पग ऽम् रिसा॥
मृग नै ना रसी ले जोब ऽन भरी जोबनभरी दध
पऽ ऽध | पऽ मप, सांड
पs मप, सांड | ऽरिं सांऽ निसां, निध मप
जोऽऽब | नऽ भरी, दऽ ऽध बेड चेड, गुन रियां
पध sप | मप ऽप मरि, । रिम् रिम | पम धम sप:
saap
रिम पध | मप गम् प, साम् रिप मनि धप, रिसां
बs 5 न, | जोब नम रीद घबे, चेगु
जोss
निध मप | सांरिं सां पध | ऽप मप निध ऽप मप
जरि यांs/चंड ऽद्र बद उन नंग नैना र सीले जोबनभरी दध
रिरि मपम
पधप निधप सिंनिसां । निधप धपम
जोबन भऽरी दऽध बेचेगु जरियां | चंद्र बदन
२
0

राग-हमीर. २०१ २ परि मरिसा रिमप निधप धपम परि रिसा रिमप मृऽग नैऽना रसीले || चंद्र बदन चंद्र बदन मृऽग नैऽना रसीले Manage २ निधप धपम परि म रिसा रिमप चंद्र बदन मृऽग नैऽना रसीले जोबनभरी, इ. इ. नोट-इस पद की अस्थाई की नोटेशन की पहिली लाईन में रिम् पध और तीसरी लाईन में रिम् छपे है वह अशुद्ध है. कोमल मध्यम के जगह तीव्र मध्यम सुधा- रकर पढना ऐसी विनंती हैं. राग हमीर. नि नि रागांग विस्तार. नि (१) साs, रिसा s, गम् धs; धss, गऽ रि5; गम् ध प ग रि, सा रिs, सा; गम् ध नि (२) साs, रि साs, sysमप धs, सा ऽ रि सा; गम् रि सा; ग म ध प ग म रिसा ; गम् 'ध.॥ (३) साs, रिसा s, गम् ध नि ध सा (किंवा ) सारि गम् धs, नि सांs, नि ध प म प ध प ग म् रिश; गम् ध पगम् रिसा 5; गम् ॥5॥ (४) प प स s, सारि सां; गे में रिसा 5; सारि सा नि ध प; मप धनि सांनि धप गऽ, मरि ऽगम् धपरिs, नि नि नि नि साs; गम् (ध)॥

हिं. गा.भ.पु. मा. तृतीय पुस्तक. स्वरविस्तार. सारि सा; सारि गम् रिसा निसा 5; सारि गम् पप गम् रिसा निसा 53B सारि गम् धध मप गम् रिसा 5; सारि गम् धध मप धनि सांनि धप मप गम् रिसा 5; सारि गम् घध मप धनि सारिं सांनि धप गम् रिसा 5; सारि गम् धध मप धनि सारि गम् रिसां सांरिं सांनि धप मप गम् पग मरि सा, सारि गम् धप निध सांरिं सांनि धप मप धनि सारिं गंपंग मरिं सांनि धप मप गम् पग रिसा, गम् ध ॥ हरि-त्रिताल. रे मन काहे करे तूं गुमान, तन तो तेरा खाक मिलेगा, ये अक्सर तूं जान.-रे दीन गरीबी चितमें धरना, काम क्रोध से हरदम बचना, प्रभु का नित घर ध्यान.-रे सां सौ नि स ध नि म प 5 म का ऽ हे करे तूं 5 ध S म न तूं 5 गु (घ) ऽ नि ध | नि ध सां सां नि नि म प ध ग म् माSS न ऽ न रेऽम न का हे क तूं 5 गु २ (घ) 5 5 5 | धनि सांरिं सांनि सो ग ग म् रिग म ध प SSSSS नत न तो तेरा S ग म् रि सा | सा रि सा ऽ प 5 प प प प ग म् खा 5 क मि ले गा s ये 5 अक सर तूं 5 S.

राग-हमीर. २३३ नि घ नि ध जाSS नि S S रे । ध ध सां सां नि नि नि म प प ग म् म नका ऽ हे करे तूं 5 गु (अंतरा) S S प S प पसा सा S S Sन ग रीबी S MM un य मा S S सारिस S घ S घर ना S S सा सा सा | सां रि'सां गं 5 में रि' का 5 म को ध निध सा रि नि सा धप S प प ग म् नि त घ र ना प्र भ का ध (घ) नि ध ध सां सां नि नि नि म पप गम् घ्या 55 न s न रे s म न का ऽ हे करे तूं 5 गु स्थायी. मा 5 5 न। रे । म न । सा गम् ध निध । सांनि धप मप गम् मा 5 5 न ।रे s म न । निसा गम् धनि सांरि । सांनि धप मप गम् मा ऽ ऽ न । रे म न । धनि सांरि गंम् रिसां । निसां निध मप गम् मा 5 5 न । रे....गु मा , सारि गम् । रिर सासा, सारि गम् । पप गम् शिर सासा,। सारि गम् धध पप मप धप गम् रिसा, सारि गम् धप निध । सांनि धप मप धप । गम् रिसा, निसा गम् मान....तूं गु धनि सांरि निसां गंम् । रिसां निसां रिसां धप । मप सां, धप मप । नि, धप मप गम् मान....तूं गु

२३४
हिं. गा. क्र. पु. मा. तृतीय पुस्तक.
धनि सांध निसां धनि । सांरि निसां धप मप। गम् रिसा, निसा गम् धप ध, गम् निध
नि, धनि सांनि सी,। धनि रिसां रिगम् । पंपं गंम् रिसां निरेिं । सांनि धप मप गम्
मान....तूं गु
धनि सांरि निसां धप । मप गम् रिसा निसा,गम् धप मप गम् । धनि सांरि निसां गम्
पंग मंरि सारिं निसां। धप मप गम् रिसा, निसा गम् ध, निसा । गम् ध, निसा गम्
मान.....गुमान
अंतरा, "दीन गरीबी"
सा sss | ध निध सां ।s s, साध । ऽ रिसा 5
s_s, गम् रिसां । निध सा ऽ ऽ । दीन गरीबी
सांनि धप गम् रिसा । निसा गम् धनि सारा दी । न ग ।री 5, सारि सानि
धप मप गम् रिसा, । निसा गम् धनि सां। दीन गरीबी
सांरिंगंम् रिसां निसां। घप मप गम् रिसा, धनि सानि सा, गम् । पग म्, धनि सांध
नि, निसां रिंनि सो, । गंम् रिसां निध सा । दीन गरीबी
गरिंगार सांनि, रिसां। रिसां निध, सांनिसांनिधिप, निध निघ पम्, गंम् रिसांऽनिधप
गम् वप गरि सा, । सारि गम् निध सा । दीन गरीबी
चि त में । घर ना ऽ । रिसां सांनि निध धप । पम म्ग गरि रिसा,
सारि साग ऽग, मग । म्ध ऽघ, निव निसां । ऽसां, मम रिम मरि । सांसां, धध पध धप
मप, मम् रिम् नि । सासा, गम् धनि सो । दीन गरीबी

राग-हमीर. mmam चि त में 5। धर ना | निसां रिंनि सांरि निसां, । मप धम पधमप, १ २ गम् पग म्प गम् । रिसा निसा, गम् धनिासां सा, गम् धनि । सो सा, गम् धान सा 5 ss हमीर-झूमरा ( विलंबित ) चमेली फूलि चंपा गुलाब गुंद लावो री मालनियां हरवा नौशा के गरे डारो.-चमेलि हीरा मोतियन को सेरा विराजे, और सोहे सोवा साज. - चमेलि पऽनिध सांम पप गम् चऽमेऽ ऽ लिफू ऽलि नि धऽ ऽ धनि सांनि ध निधसांनि रिसांनिसां ऽ निसांसां सां धनि मप प चंss ss पाऽ 5 5 गुडलाई S s ssas is S २ 3 पघमप SS प ग म् रि | रिंग मग म्धमप 5 प ग s लाss s s! वो SSS sरिऽ माऽ लऽनिs/5 यां 5 s गम्पऽ गम् रि सारिसानि सा s s | सा सानि रि) सारिसानि सा s s हाsss र वाSss sss | नौ शाss केsss SSS (अंतरा) साऽगम् पप गम् सारि सा sss पप सांसां गरेऽ s s| डा sss sरो 5/5 s हीरा मोति सांस ssसांsss धनि सांरिं सांरिंसानि | सां सां धs यन ss को sss सेऽ राबि राsss s जे 5 हिं. गा.क.पु. मा. तृतीय पुस्तक म् धनि सारिं सांरिसांनि सा निघ निधसांनि रीनिसांड सांध पापऽनिध साम पप गम् और रसो हेsssss सोऽवाड सा ऽज चऽमेऽ ऽ लिफू अलि S बोलताने. " चमेली फुलि चंपा गुलाब s रिसांडरिं सांनिसांनि धनिसां | रिसांऽसां सांनिधम ऽपडप ऽ चमेलि फूऽलिऽ चंपाs गुलाऽब गुंऽदला ऽवोऽरी पऽगम् रिऽसाऽ गम्ऽरि पऽगम् | निधऽध रिसांनिसां निधमप माऽऽल निऽयांऽ हाऽऽर वाऽनौऽ शाऽऽके गरेऽऽ डाऽरोड २ नि पऽनिध सांम पप गम् | घ, मरिऽसा | ऽगऽम् निऽधऽ सांनिऽध रिसांनिसां चऽमेऽ ऽ लिफूऽलि चं, चंमेऽलि |ऽफूऽलि चंऽपाऽ गुलाऽब गुंदलावो Caindia २ गर्रिऽ सांरिंनिसां निसांनिध | निधऽप धपऽम ऽपसांध ऽपगम् रीऽमाs. लनियांऽ हरवाऽऽ नौशाऽके गरेऽडा ऽरोचमे ऽलिफूलि नि ध s, गंमरिसां । ऽरिसांऽ धनिधरि सांनिधs मपमप चं 5, चमेलिफू | ऽलिचंड पाऽऽगु लाऽबऽ गुंदलावो २ ऽधमप गम्पग मरिसाऽ | निधऽध धनिसांरिं सांधऽप ऽगऽम् ऽरीमाल नियांऽह ऽरवाऽ | नौशाऽके गरेडारो चमेलि ऽफूऽलि गरि निधध सांनिध रिसांनि गरि सांरिसां सांनिध चमेलि फूऽलि चंऽपा गुलाब गुंडद लावोरी माऽल २ पमप घमप गरि । गम्प रिसा सांधप गऽम् निऽयां हरवा नौशाके | गरेऽ डाऽरो चमेलि फूअलि 3 राग-छायानट. २३७ नि ध, सारिगम् | धनिसांरिं गंम्पंगं मुरिऽसां रिसांनिसा चं 5, चमेलिफू लिचंपागु लाबगुंद लावोऽरी मालनियां २ निधनिध मपगम् परिसा सांधऽप सांधऽप सांधऽप ऽगऽम् हरवानौ शाकेगरे ऽडाऽरो चमेलि चमेऽलि चमेऽलि ऽफूऽलि नि ध, मगऽम् रिरिसासा | निधऽध निधमप रिसांऽरिं सांनिसांनि चं, चमेऽलि फूलिचंपा | गुलाऽब गुंदलावो रीमाऽल नियांहर २ १ ર नि ध घनिरिंनि ऽसांनिध मपसांध ) ऽपगम्, सांधऽप गम्सांध ऽपगम् वानौऽशा ऽकेगरे डारोचमे ऽलिफूलि, चमेलि फूलिचमे ऽलिफूलि चं *राग छायानट. -X*X- रागांग विस्तार. (१) सा , धs प_s, रि ग म प ऽ म् ग म रि, सारि सा5॥ नि (२) सा 5, रिसा ऽ ध नि. प प परि5; रि गरि गम् 45, म् गम् रि , सा रिऽ सा ॥ नि (३) सा, रि ग म प ध नि प; म प स ध नि प5 म रि पधप धरि ग ऽ गम् 45, म् गम् रिs, सारि सा॥

हि. गा. क्र. पु. मा. तुतीय पुस्तक.
(१)पप सां सां रि'सांरिगेम गेम रिसासा,
नि
रिं सां ध नि प; रि ग म प ग म रिs, सा रिसा ॥
स्वरविस्तार
सारि सा 5; सारि गम् रिरि सा 5; सारि गम् धध पप रिंग म्प गम्
रिसा 5; सारि गम् धप सा धप मप धान धप रिग म्प गम् रिसा 5; सारि गम्
धध पप सांसां रिंरिं सांसां धप रिंग म्प गम् रिसा 5; सारि गम् धप सा रिंग
रिं सांनि धप रिंग म्प गम् रिसा 5; सारि गम् धप सा रिंग स्पं म रिसा
धनि धप रिंग म्प म्ग मरि सारि सा॥
छायानट-झपताल.
किरपा करो तुम जगनाथ प्यारे, जिव जंत सारे शरन तिहारे.
अब्बनखां गुनी येही कहत है, सहाय करो नित्य जग की मुरारे.
प परि गम् पम् गम् रिसा सा सारिऽ सा | सा ध नि पs
किरपा 5 करो 55 तुम ज ग नाऽ थ प्याऽ
S
।
२
सा सारिरि ग म पध मप 5 रि गरि गम् पम् गम् रिसा
जि व जंऽ त | सा ss रेऽऽ श न ति हा s| रे s
*(अंतरा)
प 5 | सां सां सां 5 |सा रि'सां) रिगरिं ग म प म गरिसी
अब्बs न खां 5 गुनी 5 ये ही 5 क ह त है 5 स
मं
पऽसो रिसा ) धपरि गरि ग म प म ग म रिसा
हाय 5 करो अनि त्य ज गऽ की 5 मु| रा 51s रे s

राग-छायानट.
स्थायी. " किरपा करो तुम
रिंग म्प । गम् रिसा, सारि । निसा धप । मप, रिंग मनि
घप मप । सांरिं सांनि धप । मप रिग । म्प गम् रिसा ।। किरपा करो तुम
सारि गम् । पध मप धनि । सारि रिंनि । सारि रिंग मपं
मंम् रिसां । सारिं सांनि धप । मप रिग । म्प गम् रिसा ॥ किरपा करो तुम
धव पप । रिंग म्प गन् । रिसा, शिरें । सांसां धध पप
रिग म्प । गम् रिसा, मम् । रिसां धध । पप मप सां
रिंगं मपं । मम् रिसां धध । पप रिग । म्प गम् रिसा ॥ किरपा करो तुम
सासा रिरि । गग म्म् पप । धध पप । सांसां गिर गंगं
म पंपं । म रिरिं सांसां । धप रिंग । म्प गम् रिसा ॥ किरपा करो तुम
अंतरा. " अब्बनखां गुनी"
धध पप । रिग म्प गम् । रिसा, रिरिं । सांसां धध पप
रिग म्प । गम् रिसा, ममं । रािरं सांसां । धप रिग म्प
।
गम् रिसा, । रिरि गग मम् । पप सांसां । धप मप सां। अब्बनखां गुनी
सांनि सांरिं। सांनि धप मप । धध मप । गम् पप गम्
रिसा निसा, । सारि गम् धध । पप सांनि । धप मप सां । अब्बनखां गुनी
रिरिं सांरिं । रिसां निसा, धघ । पध धप । मप, रिरि सारि
रिसा निसा, । सारि गम्, रिग । म्प, गम् । धप सांरि निसां

२४० हिं. गा. क्र. पु. मा. तृतीय पुस्तक. रिंग मपं । गंम् रिसां सांरि । सांनि धप । मप रिग म्प गम् रिसा, । सारि गम् पध । मप सा, । पध मप सां ॥ अब्बनखां गुनी सांरिं सांनि । धप मप, घघ । मप गम् । रिंग म्प धम पग मरि । सारि गम् पध । मप धनि । सांरि रिंनि सांरि रिंग स्पं । गम् रिसां घध । पप रिंग । म्प गम् रिसा, १ २ सारि गम् । धध पप सा, । धध पप । सा, धध पप सां। छायानट-एकताल. प्रथम सुर साधन साध खरज वाही को, सुरन के धरन मुरन गत प्रमान सीख लेत. प्रथम गुनिजन के संगत सो अचल ताल तान राग गायन को. रि नि रि नि सा धनि | पप थ म S o साध धिन नि सासा सा रिरि सा न सा 5 घ ख सा 5 ध S M0 ર रि गरि। गम् १ प S पम घ पम्ग मरि वा 5 ही 5 को 5 सुर न केss रि नि गरि गम् (प) मग मरि नि सा| रि सा धनि प घड रन मु TS SET ग त प्र मा S रि ख 5 त, म ता न रात रि सु रिग रिंग म्प ऽरिरिंग म्ध ! ऽप राग-छायानट. प नि परिग ग मरि | 5 सा, 5 सा, | रि नि सा धनि ११ सी 5 ख ली प्र थ S सुर ( अंतरा प पसां सां सां सां sसारिश सा s गु नि न के 5 सं 5 सो ऽ सां सांसा ध सा 5 सौ साध म् रि Sग नि गम् प म् सा रे नि सा धनि प TTIS S य न को 5 प्र थ म S बोलताने सा घनिध नि नि सा सा | सा रिसा ऽरि सा S सा ध 5 प्रथम सानि सा निध सा धूध पप धूध पप | पऽ ऽरि रि रिरि रिंग रिग सुर सा धन सा घख रज वाऽ ऽही को सुर ऽको सुर नके ऽध म्ध मप | ऽरि गम् | परि ऽसा | सांऽ धप | ऽरि सानि साध पप रन मुर उन गत प्रमा ऽन | सीऽ खले ऽत प्रथ नि सा निध नि सा सा सासा ऽसा | रि रि सा 5 ध न 5 प्रथम ऽमसु र साऽऽधानसा ऽध खर जवा | ऽही को सुर नके ऽको सुर नके | ऽध रन सा 5, S 5 S न मऽ सुर S S S रिंसां ऽनि मुर न सांध ऽप | धs धप । ऽप रिऽ साऽ रिसा | ऽध पप गत ऽप्रमाऽ नसी | ऽख ले तऽ प्रथ ऽम सुर हिं. गा. क्र. पु. मा. तृतीय पुस्तक. सा, सारि | रिंग गम् । मध धप पसां सांरि सांरें। रिंग रिंगं गंम् । स्पं पम् सा, प्रथ मसु रसा धन साध खर जवाहीको सुर नके घर थम सुर गंम् रिसां । रिसां सांघ | धप परि | सारि सासा रिसा सारि | सासा धप नमु रन गत प्रमा नसी खले तप्र थम प्रथ मप्र नि साध निध नि सा सा, घप ऽध ऽरिं सांड सा 5 प्रथ ऽम सुऽ रसा ऽघ न पऽ रिसा S घ ७ पंगं ऽमरिंड सांरिं सां धs पध ऽध पऽ परि | ऽसा रिश साध ऽख २७ जवा | ऽही कोऽ सुर ऽन के घर इन मुऽ रिंग ऽग | म्ऽ सांधप पs | रिरि ऽसा रिसा ऽसा | धs पs रन गति प्रमा ऽन सी खले त प्रथम सुऽ ऽ निध नि, रिंऽ सांरिं सां धप, | धs पध | ऽप पार, घ, ऽम सुर, साऽ ऽधन साऽ, सा S प्रऽ ऽथ रिड सारि रिसा साध, रिसा साध, सारि ऽसा | ऽरि गम्, । पऽ ऽरि पऽ ऽरि | रिंग मध, घडख रज वाऽ, हीs sको| ऽसु रन, केऽ ऽध रन मुर, घड पप सांध र पऽ रिरि | ऽसा रिs | साऽ ऽधप नऽ गत प्रमा ऽन सीऽ खले | ऽत प्रऽ थऽ ऽमासु र सा ध निध नि सा सा S s s|रिगम् रिंगम् धडप सा S प्रथम सुर पनिसां रिंऽसा | रिंगम् मरिसां । रिसांनि सांधप | रिगम् सांधप साधन साऽध खरज वाहीको घरन मुरन । S घ S S सुरन केss d ૨ रिंनिसां धडप | सोधप परिरि । रिसासा धपप रिसासा धपप || सा 5 गतप्र माऽन । सीऽख लेऽत प्रथम सुर um सा 5 ४

राग-गौडसारंग.
२४३
राग गौडसारंग.
00000000
00000OGIO
Mandar
रागांग विस्तार.
(१) साs, गरिम् ग 5; पध मप ऽ म् गम् गरिम् ग;
परिs, सा ||
(२) गरि म ग 5; पध मप सांध मप 5, घम प म ग म ग रि
,
म् ग 5 परिs, सा ।।
( ४ ) पध मप सा 5; सां रिपनि सां; गरि मग परिs
सो 5; सा ध मप 5, धम प म ग म गरि म ग 5; परिs,
सा॥
स्वरविस्तार.
(१) सारि सा 5; गरि सा; गरि मग परि ऽसा 5; निसा गरि
मग पम धप ऽम् गरि मग परि ऽसा ; निसा गरि मग पम धप निध निप
धम पग मरि गरि मग परि ऽसा निसा गरि मग पम धप निध सो ऽध
निप धम पग मरि गरि मग परि ऽसा ; निसा गरि मग पम धप निध सांरि
सांध निप धम पग मरि गरि मग परि ऽसा 5; निसा गरि मग पम धप
निध सांs, गरि मंगं परि ऽसां सांरिं सांध निप धम पग मरि गरि मग परि
ऽसा॥
(२) निसा गरि मग पम धध मप गम् रिसा 5; निसा गरि मग ऽप
मध मप सांनि धप म्ग रिसा 5; गरि मग पम धम पध मप पनि सांरिं
रिनिं सांरि गरि मंगं मंनि सांसां धप मग रिसा निसा 5; साम् गप मघ पनि
घसां निरिं सांगं रिमं गं मंग रिं सांनि धप मग रिसा निसा 5 ॥

पघ मप SS 5 स र | चा हिं. गा. क्र.पु. मा.तृतीय पुस्तक. गौडसारंग-त्रिताल. मुझे दे दरस गिरधारी, तुम पर हम बलिहारी रे. जमुना तट हरि धेतु चरावे, मधुर मधुर सुर बैन बजावे, वृंदावन में रास रचावे, कांधे कमरियां कारी रे. नि रि ग म् रिसा | सारि नि सा "मुऽ झेऽ दे 5s द र र गरि म् ग ss सा सा म् ग पप धनि सा घारी 5 ss SSतु म प हम बड लि २ धम प गम् | रि ग पध मप | ग म् रि सा सा रि नि सा als s is रे s मुऽ झे दे 55 द (अंतरा) S 5555 प ५ सा | सां सां सां सां घा5 S SSSS ना प सा सांसारि सा 5 | सा सांग गे गे गे घेs राऽ बेड मधु र म । घु र गरि म गरि सा | प रि' s|रि सा सो s न बजा ss वे s वृंदा न में सा ध प म गरि म् ग सा 5 म् ग गप प धनि सांरिं रा वड कां । कम रि यांss ३ । ट 5 5 व 5 नि रि रिनि सा घम प | गम् रिंग, पध मप गम् रि सा|सा रि नि सा काs 5 रीs 5 रेड 5 मुड झेऽ दे 5 s द र से गि राग - गौडसारंग. स्थायी. था s री । निसा गरि मग 5, । पध मप गम् रिंग । रिम् ग 5, सारि सानि धप मप गम् । रिग रिम् गs, | सांग रिम् गोरे सांनि । धप मप धग ऽम् गरि मग परि ऽसा, । गरि म्ग, मुझे । दे दरस गिर था s, निसा गरि । मग पम धप निघ । सांनि रिसां गरि मंगं । मरिं सांरिं निसां धनि पध मप गम् रिंग | रिम् ग, मु झे । दे दरस गिर घारी । गरि मग परि ऽसा, । पम धम पसां सां । धप मप सांध ऽप मप धग ऽम् गरि । मग s, मु ज्ञे । दे दरस गिर निसा गरि मग पम । धप निध सांनि रिंसी । ग रिसां, रि' सांनि,। सो निध, निधप, पम धप निध सांनि । घप म्ग, मुझे । दे दरस गिर गरि म ग ss, सा सा सा म् ग प | मप धनि सांनि धप धारी SIS s s, मु झे । दे 5 s द | रऽ सऽ गिs रs मप मप म् ग| गम् रिग प प ध सा रि' सांरि निसां धम प घाऽ ऽ री 5 रेऽ ऽ मु झे दे 5 रऽ सऽ गिर म् ग म ग गम् रिग गरि निसां धनि सांरिं ऽ सा | सांरिं निसां धप मप धा ऽरी रे मुऽ झे s मुऽ झेऽ दे देऽ ऽ ऽ द रऽ सऽ गिऽ ऽ नि सांसां धप मग रिम् | ग 5, पध मप ग म रि सा | सा रि नि सा घाs Rs 5 ss, मुऽ झेड दे द र स गिर S S s ग म् ग SIS घारी SIS S. S S २४६ हिं. गा. क्र. पु. मा. तृतीय पुस्तक. अंतरा. जमुना तट पर घे 5 नु च । रा 5 वे ऽ। गम् पसी गारें मंगं । पंरिं सांनि धप मग रिसा निसा, गरि मग । पम धप निध सां । जमुना तट पर पप सांसारिरिं सांसां । गरि मंग परि ऽसां । रिरिं सांनि धप मप ।धपम्ग रिसा निसा, गरि मग पम धप । निध सां 55| जमुना तट पर मंग रिम् गरि मंगं । रिरिं सांनि धप मप । धग ऽम् गरि मग । परि ऽसा, 5, गरि १ २ मग पम धप निघ । सा, गरि मग पम । घप निध सां, गरि । मग पम धप निघ सांsss ) गौडसारंग-आडचौताल. (विलंबित) तेरी सुमिरन करूं मैं अल्ला जो लो रहे घट में प्रान. सुख संपत और संतत दीजिये, दीन दुनी की आन. मपघ निसांऽ धपम पss|म् गम् तेss s रोऽss सु मि ४ रिंग ऽरि। म् ग ) मग पम ) धमपऽ म् ग रिसा रि ग रिसा रिसारिसानि सा न करूं र 5 S S S S SSSS : S ४ जोsss स S गगरि सारिऽ | सारिसा निसाऽ| सा म् ग मरिम् ग सा म्ग | पम धप लोऽऽ र हे S SS घट मेंss निध सांनि | रि' निसांरि गरिंसां सांधप | मगरि मगड SS S प्राऽऽऽऽन S S S तेरो सुमि राग-गौडसारंग. २४७ (अंतरा) पप । सां सां सां रि सांप नि | सा रिसा s सु खसं 5 त औ र सं दी प त त M 5 (प)म् म् गरि | म ग ) मंगं 5 रि' सारिं निसां सां निसां जि ss दीss न दुनी 5 की 5 रि S S मप निध | सांनि रि" सांरिसां सांधप । मगरि मग S नऽऽ BTIS S S S S S बोलताने. मपध निसां घपम प, | साम् गप || मध पप | सा रेिं | सा गरि तेss रोऽss, तेरो सुमि रन करूं मैं अल्ला जोलो S 11 ग सांरिं सां पध पम् | गग धपऽम् गम् || रिंग ऽरि sर हे घट मेंप्रा) ऽन तेरो ऽसु मि र S न S २ मग पम कारूंड धमपऽ म् गरि, मग ऽप । मऽ धप | ऽरिं सां ss, तेरो ऽसु मिऽ रन डक लंड S ४ सांध पम् गम् गंम् रिसां | ऽरिं सांऽ | धप ऽध | मप ऽम् | गग, मैं अल्ला ऽजो लोऽ रहे ऽघटमें ऽप्रा| ऽन, तेरो ऽसु मिड २ रिंग ऽरि । गमरिं सांरिंसांसां | पधप ऽम्गड) गरिमग परिसासा रऽ ऽन | तेरोऽसु मिऽरन करूं मैं ऽअल्लाऽ जोलोर हेऽघट ર WHA

हिं. गा.क्र. पु. मा. तृतीय पुस्तक.
सागरिरि मगपम | धमपरि निसांधप । सांऽधम पम्गम्
मेंऽऽप्रा ऽनतेऽ रोऽऽसु मिरन तेऽरोऽ ऽसुमिs
रिंग रिम् गम्गम् रिसासा | धमप मगड रिंनिसां धपs
न 5 तेरोसु मिरन करूंमैं अल्लाऽ जोऽलो रहेs
रड
S
२
गरि सांरिंसां सांधप म्गम् || रिंग ऽरि | गंमरिं सांरिसा
घटमें प्राऽन तेरो सुमिऽ ऽ ऽन | तेऽरो सुऽमि
४
२
पघप मगग रिऽ सारिसा | मगऽ पमम | धऽप सांऽऽ
रऽन करूमैं अल्लाऽ जोऽलो रहेऽ घटमें प्राऽन तेऽऽ
धमप म्गम्
रोऽऽ सुमिड
रन करूं मैं
अल्ला
गऽरिम् ऽगपम | घऽपसां ऽनिरिसां | गंऽरिंम् ऽगंपरि
तेऽरोसु ऽमिरन | कऽरूंमै ऽअल्लाs | जोऽलर ऽहेघट
ર
सांधऽप सांऽधम | पम्गम् रिम्गऽसांऽ ) घमपम् गरिम्गड
मेंप्राऽन तेऽरोऽ ऽसुमिऽ रऽनऽतेऽ रोऽऽसु मिऽरऽनऽ
3
सांऽधम पम्गम् || रिंग रिम्
तेरोऽ ऽसुमिऽ । ऽ ऽ
ग
S

राग - गौडमल्लार.
२४९
* राग गौंडमल्हार.
ONGuavaHOD
रागांग विस्तार.
(१) रिग रिम्, गरि साs, रि गरि ग , म प म ग 5 ॥
(२) सा, रि साम् गरि सा; रि पम्प, धम्
गऽ म् गरि सा॥
(३) रिs 45, म प ध प 5; म्प ध नि प 5; म प ध
सांs, धऽ नि प म रिपs, म् ग रि सा 5 ॥
नि
(४) पऽ 45, नि ऽ धनि s, सां सां, सा रि' सा 5 म
रि' साऽ ध नि प; म रि प; म प ध साऽध पम्
ग; रिग रिम्, गरि साs, रि गरि ग, म्प घप मग
म् ॥
स्वविस्तार.
(१) रिग रिम् गरि सासा 5; रिंग म्प मग रिसा 5; रिंग म्प धसां धप
मग रिसा 5; रिंग म्प घसां रिसां धप म्प धनि धप मग रिसा (अथवा) रिंग
म्प धसां रिसां निध निप मग रिसा 5; रिंग म्प धसां रिंग रिसां घप मग
रिंग म्प घसां मम रिरिं सांसां निध निप मग रिसा (अथवा) रिंग
म्प घसां में रिसां धप मम् रिसा ऽ ॥
रिसा

२५० हिं. गा.क्र.पु. मा. तृतीय पुस्तक. (२) रिप म्प मग रिसा 5; रिप म्प धनि धप मग रिसा 5; रि म्प घसां धप मग रिसा 5; रिप म्प धसां रिसां घप मग रिसा निसा 5; मरि पम् धप सा म रिसां निध पम् पध निसां धनि धप मग रिसा 5॥ नोट-यह एक मिश्र राग होने के कारण इस की आरोहावरोह की स्वर रचना कुछ नियत नहीं. Connommon गौंडमल्लार-त्रिताल. बलमा बहार आई, दादर मोरे पपिया पिवन गत छाई. निस अंधियारी बिजली चमके, कोयल सबद सुनाई. ग ग सा 5 सा गड रिंग ब ल मा ब हाऽऽर म्प धप म् 5/5 s म्ग रिंग ) म्प धप म्ग रिंग | सा ग रि ग ब हा 5 SITS S SSSS ૨ S बड लड मा55 ॥ म्प धप S S min S S आSS S म् रिप पम्प S S ss दा द मों रेप पि या पि प S ध सा ध प व न ग त म् पम् s, | ग ग सा 5 सा ग 5 रिंग छा ऽ ई s, ब ल मा ब हा 5 र S ( अंतरा) मुप धप म 5 sss sम् प प स ध साs आss ई s s s नि स अघि या ऽ री ऽ S

राग- गाँडमल्लार.
२५१
सां सां सां 5 सा रि' सां 5 में में रि' सा] ध प म प
बि ज ली । च म के को 5 य स ब द सु
ध साध प
S S S
म्प धप म S ग ग सा 5 सा गs, निसा
S sइ ब ल मा S ब हाऽ, आ
स्थायी.
रिंग मग रिंग म्पं । धप म्प मग रिम् । ब ल मा ऽ। व हा , निसा
रिंग म्प धनि सांसां । धप म्प मग रिम् । ब ल मा s| ss, निसा रिंग
म्प धनि सांरिं सांसां । धप म्प मग रिम् । ब ल मा S। रिप म्प मग रिसा,
रिप म्प धनि धप । मग रिसा, रिप म्प । धसां धप मग रिसा,। रिप म्प धसां रिसां
चप मग रिसा निसा । रिग म्प धप म् । बलमा बहार
आ ऽ ई s। म्प धसा धप म्, । म्प धसां सांरिं निसां । धप म्, म्प धसां
म रिसां धप मम् । रिसा निसा, रिंग म् । ब ल मा ऽ। रिंग म्प मग रिसा,
धप म्प धनि धप । मग रिसा, रिरिं सांनि । घप म्प धनि धप । मग रिसा, मरि पम्
थप सां, घप मग । रिसा निसा, रिंग म् । बलमा बहार
swamang
आ ऽ ई ऽ । म्म् रिम् नि म्म् । रिरि सासा, धध पधाधप धध पप मम्
रिरि सासा,रिरिं सांरि रिसा रिरिं सांसां धप।मम् रिसा,साम् रिपाम्ध पसां मम् रिम
मरिं सांसां धप म्म् । रिरि सासा, रिंग म् । बलमा बहार आई
।

२५२
हिं. गा. क्र. पु. मा. तृतीय पुस्तक.
अंतरा. "निस अंधियारी"
बिजली ऽ । च म के 5 | सा sss | ssss
सांसां धप मग रिसा । रि पम् धप सां। निस अंधियारी
सांरिं सांनि धप मग । रिसा रिप म्प सौ। निस अंधियारी
सांरि गंम् रिसां निसां । धनि धपम्प सा । निस अंधियारी
म्प धसां पध सां। रिंग रिंम् गरि साँ। सारिं सांनि धप म्प। धनि सांनि धप म्ग
रिसा निसा, रिम् रिप । धनि पध सऽ । निस अंधियारी
घनि सांध निसा धनि । सांरि निसा धनिम्पाधनि सांरिंगम् रिसांनिसांधप मग रिसा
सारि गरि गम् गम्।पम् पध पध सां। निस अंधियारी
mona
सांरिं सांनि सांनि धनि। धप धप, म्प मग । मग रिंग रिसा रिसा, । रिंग रिप ऽप म्प
म्ध ऽध, पघ पनि। ऽनि, धनि धसांऽसां, धनि सारि पंपं गंम्। रिसां निसां रिसोधप
१
मग रिसा, निसारि । पम् धप सा सा, । रि पम् घप सा । सा, मरि पम् धप
सां 555555 ब ल मा 5 ब हाड र
बोलताने.
म्प धप म् | रिंग म्प धप मग म्प धनि सांसां धप म्प धनि सांरिं सांkि
आऽ ऽ ई 5 बs 5 ल्मा इबs हाऽ ऽ ऽर आss 5 ईs
सांनि सांरि सांनि घपम्प धप म्प धपम्प धप म्ग रिंग सा ग रि ग
s s s s| रेsss s बऽ ऽ ल्माss
S
र

राग-3ौडमल्लार. २५३. म्प धप म् | रिग रिंग मग म्प म्प म्प धप धनि धनि धनि सांनि सारि बऽ ऽस्मा 5 बड हाऽ ऽ ऽ आऽ/ईs s दादर आSS S गंम् रिसां निसां धप | धप मग रिंग म् म् ५ मग रिंग ) सा गरि ग मोऽ रप पिया पिऽ/ वन गत छाऽईब 5 स्माss ब हार आई.... बहार । सारि ग रिंग म् | गम् प प नि धनि सो निसारि' सांरिं गम् रिसां निसां बल्माऽ5 as S S S रऽ ऽ आऽsss ESSSS धप मग रिंग, म गरि, म् ग रि, म् गरि, सा गरि ग रेऽ ऽ S, बाल्मा , बत्मा 5, बल्मा , ब हा र आई ....बहार निसा रिंग म्प धप | मग रिंग गम् गम् | पध निसा ऽ सा धप म्म् पध निसां बड ल्माऽबऽहाऽ S र आss ईs s S S S S रि सांसां धप मग रिंग म्प धनि सा, धप मग, धप मग, धप मग, साग रिंग s is ss बऽल्माऽ, बऽल्माऽ, बऽल्माऽ, बहा र आई बहार SS S S , s रिंग ऽरि गम् | sग म्प ऽम् पध | ऽप धनि ऽप म्प धनि सांरिं सांसां घप डबडमा]5 बड5 हा 5 S S TTS sss 5 S १ २ मप मग साग रिंग पम्, म्प मग | साग रिंग पम्, म्प म्ग साग रिंग बऽल्माऽ बहा र आई, बऽ स्माऽ बहा ऽर आ ई, बा स्माऽ बहा ऽर, म्प धप म रिंग मरि गम् रिसा धान सांध निसां धय | रिंग मंरिंग रिंसी आSS३ डब मा SS बऽ ऽहा 5 रऽ आऽऽईs S

२५४
हिं. गा. ऋ. पु. भा. तृतीय पुस्तक.
१
२
सांरि सांसां धप म्ग म्प मग साग रिंग पम्, साग रिंग पम्, साग रिंग
रेड s. Ss स्माऽ बहा तर आई, बहा ऽर आ ई, बहा ऽर
S
म्
S
म्प धप
STTS S
S
राग पूरियाधनाश्री.
रागांग विस्तार.
(१) ग , रिसा 5 नि रिऽ सा ; नि रि ग 5, रिंग 45;
ध
मध् प 5, म ग मरि ग 5; मध् मग ऽ, रि सा; निरिऽ
साs; मरि गप ॥
ध.
ध्
(२) सा s, नि रि नि ध प म सा 5; नि रि ग 5
मरि ग 5; मध् मग s, रिंग ऽ रिसा 5; निरि गप 5 ।।
(३) निर् िगप 5; निर् िगम ध्प 5; मध् निम ध्प 5; रिं नि धूप,
५ म ग 5 मरि ग 5; निरि गम म ग , म गरि साs,
सां
नि रिऽ सा; 45, प ध् ऽ ऽ ॥
(४) म ग 5, म ध् सा s सां s, सां रि' सां नि रि ग,
मंरिं गं, रि' सां; नि रि' नि ध् ५ ; नि म गs
मरि गऽ; मध् मा ऽ रि सा; नि रिऽ साऽ; मरि गप ॥

राग - पूरियाधनाश्री. स्वरविस्तार. निरि गरि सा; निरि गम गरि सा; निरि गम ध्म गरि सा5; निरि गम नि ध्म गरि सा 5; निरि गम नि रिसां निध् पम गरि सा (अथवा) निरि गम नि रिंनि ध्प मग मग रिस (अथवा ) मध् निसां नि निध् मध् मग मग रिसा 5; निर् िगम प्नि रिंग रेंसां निध् पम गरि सा 5; निरि गम नि रिंग मंगं रिसां निध् पम गरि सा; निरि गम नि रिंगं मपं मंग रिसा निध् पम गर् िसा 5, मरि गप ऽ ।। नोट - कईक गुणिजन इस राग को "दिन की पूरिया" कहतें हैं. पूरियाधनाश्री-त्रिताल. करुणा सुनो श्याम मेरी, मैं तो होय रही चेरी तेरी. दरसन कारण भई बावरी, विरह-बिथा तन घेरी. ॥१॥ तेरे कारण जोगन हूंगी, दूगि नगर बिच फेरी. ॥ २ ॥ - प ध प म प मप ध् क रु णा 5 ऽ सु नोऽs में S 3 KIRAN म रि ग गरि ग प 5 म ध् म ग | म गरि सा श्या ऽ ऽ म मे ऽरी s तो हो 5 य र ही ૨ * ध् (अंतरा) ऽ नि रि ग ग म रि ग म ध् सां सां सां रि' सा सा चे री ते ऽरीद र स का kि सां सां नि ध् | रि' नि ध प . नि रिग रि' नि रि' सां सा भ ई 5 बा वरी बि र ह बि था 5 त प ग S S S न प मध् निसा रिरि निध | मध् मग मरि ग प ध् 5म प मप घ घेss SS री क रु णा 5 रु णा 5/5 सु नोऽs S S २५६ हिं. गा. क्र.पु. मा. तृतीय पुस्तक. स्थायी. , श्या ऽ ऽ म । मे 5 रीऽ । मरि गप, मध् निध् । प, मध् निरि निध् प, मध् निरि गरि । सानिध्प, मध् निरिं । गंमें गरि सांनि ध्प, । मध् निरिं गमं पंपं मंगं रिसां निध् पम । गरि सासा, रिंग प । करुणा सुनो श्या s s म । मे 5 री 5 । निनि ध्प मग रिसा, । रि िसांनि ध्प मग रिस निसा, गंग रिसां ।नि पम गरि सा, निरि गम, र्गि मध् ।गम नि, मध् निर्ि गंमै गरि सांनि घ्प । मग रिसा, रिर्ग प । करुणा सुनो श्या ऽ ऽ म । मे ऽ री । निर् िगग, रिंग मम, । गम ध्ध्, मध् निनि, धनि रिरिं, निरिं गंगं, । रिंगं ममं,गरिं सांनिध्प मध्,सांनिध्प, ।निध् पम,ध्प मग, यम गरि, मग रिसा । निरि गम रिंग प । करुणा सुनो श्या ऽ ऽ म । मे ऽरी 5 । निरि गग रिर्मा, रिंग । मम गर्,ि गम पप मग,मध् निनि ध्म,धनि रि िनिध्,निरिंगिंगं रिसी,रिंग मेमोगरि, रिसा सांनि निध् धूप पम मग गरि । सा 5, मरि गप । करुणा सुनो श्याम मेरी अंतरा." दरसन कारण सांनिध्प मग रिस, गिर सांनि ध्प मग । रिसा, गगं रिसां निध् । पम गरि सा, निरि गम धनि रिंगे ममं । गरिं सांनि नि सौ । दरसन कारण ममं गंमें मंगं रिसी । निनि नि निध् पप। मम गम मग रिस, । निरि गरि गम गम Line पूरियाधनाश्री. ध्म नि नि रिनि । ध्प मग मध् सां । दरसन कारण गंगं रिसां, िसांनि, सांसां निध,निनि ध्प,ध्ध् पम,पप मग। मम गरि, गग रिसा, निरि गम ज्नि रिंग । रिसां निध् मध् सां । दरसन कारण मगं रिंगं रिनि, रिनि । प्नि ध्प, ध्प मप। मग, मग र्गि रिसा, । निग रिर्म गध् मनि िनिगं रिमै गरि । सांनि घ्प मध् सां । दरसन कारण, इ. इ. बोलतान. " करुणा सुनो" नि रि ग रि ग म प प ध्म प म प क रु णा सु नो श्या । म मे उरी मैं म रि ग s तो हो य रि ग प म गरि सा सा| प ध प म प मप धू र ही s चे रि ते रीक रु णा 5 क रु णा 5s सु नोs s S म रि ग गरि ग् प s|नि रि गरि ग म मे ऽरी 5 क रु णा 5 श्या 5 S 5 5 सु नो प S ध प म प प म ध् । प म पम रि गरि ss म मे री 5 मैं | तो हो 5 S 5 श्या य पम गरि सा प ध प म प मप धू र ही 5 चे रि तेरी | क रु णा 5 5 स नोऽ ऽ म रि ग श्या S ध् प | नि रि ग प म ध् नि रि | नि में sरी क रु णा 5 S S SS म रि ग ग म ध् म ग म ग रि सा म मे री मैं 5 तो हो य र ही सु नो ऽ श्या S हिं. गा. क्र. पु. मा. तृतीय पुस्तक. नि ध प री 5 | रि' नि ध प प ध प 5 Sम प मप ध. त sरी करुणा 5 s सु नोड S 5 म रि ग गरि ग प s| मध् निरिं निध् प प प मरि ग म | मे ऽ री 5 करु णाऽ ऽसु नो श्याऽ ऽम मेऽरी श्या S निरि नि रिऽ गरि गम गम पध् मप ध् प ऽतो होऽ ऽय रही ऽचे ऽरि तेरी क रु णा में 5 म प मप ध् 5 S सु नोड S म रि ग गरि ग प 5 पध् पम गरि सा सारि सांनिध्प मप म मे 5 री 5 करु णाऽ ऽसु श्याऽ ऽम मेऽरी श्या S मग पि मग धूप निरिं ऽनि नि ऽध् |प ध् प 5 मैं तोहो ऽय रही चेऽ ऽरि तेऽ ऽरी क रु णा ऽ म प मप ध् S सु नोss म रि ग ग | रि ग प 5 निरि निग रिप मध् मनि धूसां निरिं निध् म | मे 5 री s करु णासु नोश्या ऽम | मेरी मैंतो होय रही श्याSS निष् पध् पम पथ् | पम गरि गरि सा प sम प मप ध् चे रीते ऽरी करु णाऽ ऽसु नोऽ श्याम क रु णा रु णा 51s सु नोss ध म रि ग ग निर् िग ऽरि ग रिर्ग मरि गप पप | मध् पम पर निष् करु णा ऽसु नो श्याऽ ममे ऽरी मैंतो होऽ यर हीचे ऽरी श्या 5 5 म १ । ૨ निध् प, पथ् प ) मप ध्ऽ प, पध् पथ् प मप धडप, पध् प मप तेऽ री, करु णा |ऽसु नोऽ श्याम, करु णा ऽसु नोऽ श्याम, करु णा ऽसु नो म रि ग गरि ग प श्या 5 5 म | मेरी S sl निरिनि गिरि गमग कऽरु णाऽसु नोऽऽ श्याम मधम S २

राग-जतश्री.
धुनिध् निरिंनि रिंगरिं निरिंनि | धनिध् पध्य मपम गमग
मेरी मैंऽतो होऽय रही चss s रीss s
ર
रिसा, पऽध् पमप मपथ् मरिर्ग, पऽघ पमप मपथ्
तेऽरी, करु णाऽसु नोऽऽ श्याऽम, कऽरु णाऽसु नोऽऽ
मर्गि, पऽध् पमप मपध् | म रि ग गरि ग प 5
श्याऽम, कऽरु णाऽसु नोऽऽ श्या 5 s मेरी
म
३
P0000000
राग जेतश्री.
0000000
रागांग विस्तार.
ध्
(१) साs, नि रिसाs; ग 5 45 मध्यपs, मध् मग 53B
मग s, रिसा ॥
(२) साऽ, नि रि सा; पनि सा s, रि साs; गरि सा;
मग पधू पा नि ध प म ग 5, मध् मग 53B
मग s, रि सा॥
(३) साs, नि रिसा 5; गरि सा 5; गम पध् मप मग 5,
म गरि सानि नि म गऽ, म गरि , साऽ; सान
ध् प म ग , म ग रिसा 5 ॥

२६०
हिं. गा. क्र. पु. मा. तृतीय पुस्तक.
(४) म ग , म ध् प, सां ऽ सां नि रि' सांग रि' सां;
सां
में 4 में से 5, मग रि's, सांs; नि रि' नि ध प s,
मध् मग 5; म ग 5, रिरि सा॥
खरविस्तार.
निर् िसा 5; निसा गरि सा 5; निसा गम गरि सा 5; निसा गम पम
गरि सा; निसा गम पध् पम गरि सा 5; निसा गम पथ् पनि ध्प मग मग
रिसा 5; निसा गम ध्प सा, सांनि ध्प मग सिस ( अथवा ) रिंनि (निनि)
मग मग रिस 5; मग पम ध्प सां, पनि सांरि सांनि ध्प मग रिसा 5; निसा
गग पप सा, निरिं सांग रिसा निसा रिंनि ध्प मग हि 5 ।।
जेतश्री-झपताल.
सुमिर हो नाम को मनही के मन में,
दीजिये दान गुरुशाहे माली.- सुमिर
सीचिये बेल तन बाग मेरे को,
अमृत फल लगे हर हर डाली.- सुमिर
नि सा ग प म ग म ध प म म ग म ध् म गरिऽ सा
मि | र हो /
नाम को म न ही 5 के मन में ss
Jain
२
0
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२
म ग म ध् पनि सां नि ध् प म ग प ध प म गरिऽ सा
दी जि ये 5 दाs न 5 गु|| रु 5| शा 5 हे मा 5 लीss

राग-जेतश्री.
२६१
*(अंतरा)
सां
सां
म ग म ध् पसा | नि रिं सां नि सा गरिसारि'सां नि ध्प
सी चिये 5 बे ल त न
sल त न बाग में 5
बाग में 5रे को ss
॥
ग म ध् पनि रिनि ध प नि नि म s ग म गरिऽ सा
अमृऽ त फ ल ल गे ह र ह 5 र डा 5 लीss
स्थायी.
निसा गम । गरि, गम पध् । पम, पनि । सारिं सांनि, निसां
गमं गरिं, । सानि ध्प, निध् । पम, ध्प । मग, मग रिस ॥ सुमिर हो नाम को
प, मप । ध्प सांनि ध्प, । मप ध्प । सांरि सांनि ध्प,
मप ध्प । सानि रिसां गरिं । सांनि ध्प । मग मग रिसा ॥ सुमिर हो....मन में
मम गम । मग सि, निनिाग्नि निध् । पम गरि सा,
मंमं गंभ । मंगं रिसां निध् । पम गप । धूप मग रिस । सुमिर हो....मन में
निसा मग । पम ध्प सांनि । रिसां गरि । मंगं पंप गरि
सांनि ध्प । मग, मप निरिं । सांनि ध्प । मग मग रिस ।। सुमिर हो....मन में
अंतरा. “ सीचिये बेल तन
सांरिं सांनि । ध्प मग निनि । मग मग । रिस, निसा निसा,
गप गप, । ध्प ध्प, निसां । निसां, गिरें । सांनि ध्प सा ॥ सींचिये बेल तन
मंमं गंमें । मंगं रिसी, निनिध्नि निध् । पप, मम गम
मग रिसा, । निसा गम पध् । मप सां, । पध् मप सां ॥ सींचिये बेल तन

हिं. गा.क्र. पु. मा. तृतीय पुस्तक.
गंग रिसा, । रिरिं सांनि, सांसां । निध, निनि । धूप, ध्ध पम,
पप मग, । मम गरि, गग । रिसा, मग । पम ध्प स ॥ सीचिये बेल तना
रिरि सासा, । मम गग, पप । मम, ध्ध् । पप, सांसां निनि,
रिरिं सांसां, । ममं गंगं, पंपं । ममं गंगं । रिरि सांसां निनि
ध्ध् पप । मम गग रि ि। सासा, गम । पध् मप सां ।। सीचिये, इ.
बोलताने " सुमिर....मन में "
पध् पम ) गप मग रिंग ऽरि गप ऽम ऽग रिग
सुमि रहो | ऽना ऽम कोऽ ऽम नहीं के ऽम नमें
रिंग रिसा | ऽप घ्प पप | निध् प पम गरि सा
दीड जिये ऽदा ऽन गुरू | शाऽ हे माऽ लीऽ ऽ
सुमिर....में
सारि सासा गम गम पम ) पथ् पनि ध्प मग गम
मिऽ ऽर होss नाऽ ऽम कोड
S
। सुमिर...
सुमिर....में
इन
पनि सारिं सांनि धूप मग | रिग ऽप मग रिग रिसा
मन हीके | मन मेंऽ दीड जिये ऽदा/ ऽन गुरू
सारि ऽसा, | पथ् ऽप, पनि | ऽध्, पप | ऽसां, ऽनि ध्प
सुमि र , | होना ऽम, कोम | ऽन, हीके | ऽम ,
पध् ऽप मप | रिंग ऽरि । पम गरि सा
दिजी ऽये | दाऽ ऽन गुरू | शाऽ ऽ हेऽ माऽ ली | सुमिर....में
रिसा गरि | पम धूप सांनि । रिसां गरि | सां!ि सांनि ऽसां
सुमि रहो | नाम कोम नहीं | केम नमें
केम नमें दीजि येदा ऽन
सांरि ऽसां

ध्पम गमग ति दिजिये दाऽन | गुरुऽ शाऽहे मालि
राग - बसंत.
२६३
पध् पप | मप मग रिर्ग | रिसा सांनि ध्प मग रिसा
गुरु शाहे | माली सुमि रहो नाम कोसु मिर होना मको
सुमिर ....में
निरिं निध् । ऽप ऽप पध् पम ऽग | र्गि पम गरि
सुमि रहो ऽना ऽम कोम नहीं ऽके मन मेदी जिये
सार् िऽसा | पान ध्प ऽप | सांनि ध्प धूप मग ऽरि
दाऽ ऽन ) गुरु ऽशा ऽहे | माऽ लिसु मिर होना ऽम सुमिर ...में
गर्साि पमग | ध्पम सांनिध् रिसांनि गोरेंसां निसांनि
सुमिर होनाम कोमन हीऽके मनमें दिजिये दाऽन
गरिसां निसांनि | ध्पम गमग रिऽसा
१
२
०
२
२
गरिसां निसांनि | ध्पम गमग रिसा
दिजिये दाऽन | गुरुऽ शाऽहे माऽलि सुमिर हो इ. इ.
* राग बसंत.
रागांग विस्तार.
ध् ध्
(१) नि सा ग , म ग 5, म ध् रि' 5, सां 5; सां नि ध् पs
म ग म ग 5; गम नि म ग 5, म गरि s, सा 5; नि सा
सा
ध्
म् म् , म म् ग 5, मध् रि', सो ॥

हि. गा.क्र. पु. मा. तृतीय पुस्तक
ग
धु
(२) म गरि सा; नि ध् प, प (प) म ग 5, म ग रिसा 5;
रि नि ध प म ग म ग 5; गम ध् ग म गरि सा 53;
सा
ध्
नि सा म् म् 5, म म् ग 5, मध् रि', सांऽ ॥
ध्
सा
सां
(३) म ग म ध सो ऽ सा s, नि रि', सा s; नि रिग रि'
सां
सानि रिगs, म गरि सा; रि' नि ध् प म ग म गs;
ध्
नि नि मग 5, म गरि सा 5; नि सा म् 5, म् , म s,
ग
ध्
म् ऽ ग म ध् रिs, सा॥
स्वरविस्तार.
निसा गग मग रिस 5; निसा म्म् मम मग गम ध्ग मग रिसा 5; निसा
मम् मम मग निनि ध्प मग रिसा ( अथवा ) निनि ध्म गरि सा ( अथवा )
निनि मग मग रिसा; निसा म्म् मम म्ग मध् सा (अथवा) साग मध् सा(अथवा)
निर् िगम ध्सा 5, निनि ध्प मग रिसा 5; निरि गम ध्सां निध् रिंनि ध्प मग
रिसा (अथवा) मध् निरिं निनि ध्प मग रिस 5; निरि गम प्नि रिंग ममं गरि
सांनि ध्प मग रिस, निसा म्म् मम मग मध् सा ॥
नोट--इस राग में मध् निसां रिसां " ऐसी स्वर रचना करनेसे
परज राग की छाया उत्पन्न होगी.
aominate

राग-बसंत. बसंत-एकताल. ऐडि ऐडि गैंडि गडि फीरत सब नार, गरवा लाग रंग बरसे, ऋत बसंत मान आई, जोबन माति बेस थोरि.-ऐंडि सोला सिंगार कर आ भरन, पायन पेहेर पैंजन, गूंद गूंद गूंद नार, अबिर गुलाल लिये भर झोरि.-ऐंडि ध् सां नि ऐं डि है। S प s डि में 5 म म डि गैं SUT s डि ४ ADD ध सां नि S सां नि सा सा फी डर ब ना S S S *4 निसां रिसी निध, नि धूप, सांनि मप धूप मग, गम पम ग SES is ses is 5 डि ថ្មី S डिs ऐड सा ग ग म ध् मध् निसां रि' सांरि निसां सा फीs स ब नाSS S S 5 र सा | वि सां ध् म ध् ध् | स सां नि सा | नि ध् | ५ म ग र वा ला S ग रं ग ब से 5 ध् म नि म ध् म ग रि सा ऋ त ब सं5 त मा 5 ई म सा नि सा म्| 5 ग म जो ब न माऽ तिबेs धू नि । म घ स थो 5 रि हिं. गा. क्र. पु. मा. तृतीय पुस्तक. *(अंतरा) ध् 5 सौ सा सो सो सो सा सा सो ला सिंग। S र आ भ र न सां सां / सां रि' 5 सां नि सो नि प। 4 5 14 नि धू ज न S ध् ध् म ध् | नि म ध् ग गूं 5 द गूं द | गूं म द गरि सा ना सा गरि' मग रि' सां सां सां नि अ बिर ललि ये ध् म ध् झो रि ला ल भ स्थायी. "ऐडि ऐडि गैंडि गैंडि" मम गर् ि। सा, निनि । धूप मग । रिसा, गंगं । रिस निध् । पम गरि सा, ममं । गरिं सांनि । ध्प मग । रिसा, निसा । गम ध्सां । निध् मध् ऐडि ऐडि गैंडि गौंड निरि गरि । गम गम । ध्म नि । धनि रिंनि । रिंग रिंगं । ममं गरि सांनि ध्प | मग रिस, । निसा म्म् । म्म म्ग । मध् सांसां । निध् मध् ऐंडि ऐंडि गडि गैंडि निर् िमम । गरि, गम । ध्ध् पम, । धनि गरें । निध्, निरिं । ममं गरि सांनि ध्प । मग रिसा, । निसा म्म् । मम म्ग । मध् सांसां । निध् मध् ऐंडि ऐंडि गैंडि गैंडि ।

राग-बसंत. २६७ । निर्गम । नि रिंगं । ममं गरि । सांनि ध्प, । मध् निरि। गंगं रिसां निनि ध्प, । मध् निरिं । निनि ध्प, । मध् निनि । ध्प, मप । ध्ध् पम पम गरि । मग रिसा, । निग रिर्म । गध् मनि । प्रिं निगं । रिनि मध् ऐडि ऐडि डि गैंडि । अंतरा. " सोला सिंगार कर आ भरन RaniRSA रि!ि सांरि । रिसां रि!ि । सांनि ध्प । मग रिस, । गंगं रिंग। गरि गंगं रिंरि सांनि । ध्प मग । गम धग । मग रिसस, । ममं गंमं ।मंगं ममं गरिं सांनि । ध्प मग । निनि मग । मग रिर्सा, । साग मध् । सो ऽ सोला....भरन गंगं रि । सांसां निनि । ध्थ् पप । मम गग । रिरि सासा, । निनि रिरि नाग मम । ध्ध् निनि । रिं िगंगं । ममं गरि । सांनि ध्प । मध् सां सोला....भरन सांनि ध्प । मग र्साि, । गरिं सांनि । धूप मग । रिसा 5, । मंगं रिसां निध् पम । गरि सा, । निसा मम् । म्म मग । मध् रि' । सो सोला भरन रिंगं गरि । सांरि रिसां । निसां सांनि । नि निध् । मध् म । गम मग रिर्ग गरि । सारि रिसा, । निरि रिर्ग । गम मध् । नि निरिं । रिंगं गंमें गरिं सांनि । ध्प मग । गम ध्ग । मग रिसा, । गम नि । मध् सो ।

हिं. गा. क्र.पु. मा. तृतीय पुस्तक. बसंत-त्रिताल ( विलंबित) आई ऋत नवेलरिया अतर सुगौंध लागोरी बिरहा दहन. जा मोरे कौंथा जा रे पपियरा, उन बिन लागो री बिरहा दहन.-- -आई सां नि सा आ ई S S S S S ૨ नि ध् पप पम | पध्ध् पमग मग साग | म्म् मगनि निनिध् पमग ऋ त ऽन वेड लरिया । 5 अत | रसु गौंऽऽ धला सां ममग रिसाऽ, नि सा | नि ध पप पम | पध्ध् पमग मऽग सासा गोऽऽ रीऽऽ, आ ई ऋत ऽन वेऽ | लरिया ऽ S अत २ मम् म् (म्) मग मध् रि'रिसां 5 | निथ् निध् प मग लाss गोरी रसुगा ध S S SSS ध् धनि नि ध प मनि निध प मग | म ग, मध् सा बिर हा दह नsss ss, आई ૨ नि ध् पप पम | पध्ध् पमग मऽग सासा | मम् मगनि निनिमग मगरिस ऋ त ऽन वेड लरिया s रसु गौऽऽ धलाss गोsss S अत ૨ (अंतरा) ध् ऽ मऽध् सो ऽसां || सो ऽसि sऽध् निसांऽ रिऽसांरि निसांऽनि निनि ऽध् ऽ जाऽऽ मो ऽरे| कौं ऽ थाऽ ऽ।ऽ जा रे 5 पऽपिs S यडराउ ।

राग-बसंत.
ऽ नि सांग 5 || मंगं रि' सां रिंनिसांऽ ऽ निध् प )
लाss गोरिssssबिर हा
२
ध्मपs 5 पऽमग मग म ग मध् सा | नि ध् पप पम
ऽ दहS नs| s s आऽ ई ऋ त ऽन वेs
S
बोलताने.
पध्थ् पमग मऽग, मनिसां | रिनिऽध् निध्पऽ मध्मग मगरिसा
लरियाs s, आईऋत नवऽल रियाऽ अतरसु गौंऽधs
२
मम्ऽग मध्सांनि ध्पमग मध्सांऽ / निध् निध् प 5
लागोरि बिरहाऽ दहनऽ आऽईs ऋऽ तs s s
मनिसां सिऽरि निसांनिध् पमगऽ मनिसां मंगऽमं गंसिांऽ रिनिसांऽ
आऽईs ऋतऽन वेऽलरि याsss | अतरऽ सुगौंऽध लागोऽ रीsss
२
निध्पा मगमग मग मध्सा | नि ध् पप पम
बिरहाऽ दहनऽ ऽ आऽईs || ऋत ऽन वेs
पध्ध् पमग मऽग 5 | सांनिध्प ध्पमग मगर्साि म्म्ऽम्
लरिया 5 s, आईऋत नवेलरि याअतर सुगौंऽध
S
२
गमनिनि निसांनि ध्पमग मध्साऽ || नि ध् पप पम
लागोऽरि बिरहाऽ दहनऽ आऽईs | ऋ त ऽन वेड
3
पध्ध पमग मऽग सासा | मम् मग, सांसिांनिसांनि निध्पमग
लरिया ।
रसु गौंड, आऽईऋऽत नवेऽलरिया
S

२७०
हिं. गा. क्र. पु. मा. तृतीय पुस्तक.
गमध्निधम गमगरिसा सांसानिध्प मनिसांनिसां || नि ध् पप पम
अतरसुगौंऽ धलाऽगोऽरी बिरहादहन आऽऽईऽऽ ऋत उन वेs
पध्ध् पमग मऽग साग मम् म्ग, सांऽऽसिांनिध्प मनिऽध्पमगऽ
लरियां
रसु गौंड, आऽऽईऋऽतऽ नवेऽलरिऽयाऽ
S
अत
२
मगमगरि साऽ म्ऽऽम्ऽम्गम् निऽऽनिध्पमग मगमध्साऽऽऽ
अतरसुगौंऽधs लाऽऽगोरिबिर हाऽऽदहऽनऽ ऽऽआऽईsss
नि ध् पप पम | पध्ध् पमग मग सासा | म्म् म् म्, म्ऽगनिऽध्सांनि
ऋत ऽन वेड लरिया s अत | रसु गौं ध, आऽईऋऽतनs
S
WER
२
रिऽसांमंगसिांऽ सारिसांनिसांनिध् पमऽगध्पमनि ध्पमगमध्सांड
बेलरिऽऽयाऽ अतरसुऽगौंऽध लागोऽरिबिरहद हनऽऽआऽईs
नि ध् पप पम | पध्ध् पमग मऽग साग
ऋत ऽन वेड लरिया s
S अत
२
म्म् मुग, साम्ऽम्म्म्गम् निध्ऽपमनिसां
रसु गौड, आईऽऋतनवेल रियाऽअतरसुगौं
०
१
२
मंगऽरिंसांनिध्प मगमगमध्सांऽ निध्पऽमध्सांऽ निध्पऽमध्सांड
चलाऽगोऽरिबिर हादहनआईऽ ऋतऽऽआऽईऽ ऋतऽऽआऽईs | ऋत

'AA
परज.
ध
राग परज.
--
रागांग विस्तार.
(१) नि सा ग म् ऽ गs; म प ध प ऽ ग म ग 5; गम ध्
ग 5; म ग रिसा ॥
(२) सा ग , संध् नि सांs; नि सारिं निसां 5; नि ध प 5;
म पध् प 5 गम् ग 5; म ग रिसा ॥
(३) नि सा ग , म् 5, प ध नि सा रि', सारि निसां 53B
५ प 5 ग ग 5; रि ग s, म ग रिसा 5 ॥
(४) म ग म ध् ऽ नि नि सा s, सां रि' सा रिऽ नि नि सा;
नि रिग म गरि' सांs; नि नि सा रि' 5 सां नि ध्
ध्
सां
सा
नि
पs; गम् ध् पऽ ग म ग 5; म् गरि सा5; सा गs,
ध्
मध् नि सां॥
स्वरविस्तार.
निसा गम्' गरि साs; निसा गग मध् निनि ध्प मग मग रिस 5;
निसा गग मध् निसां नि सांनि ध्प मग मग रिसा 5; निसा गग मध् निसां
रिरि सांनि ध्प मग मग रिस 5; निसा गग मध् निसां निरिं गम गरिं सांनि
ध्प मग मग रिसा ॥

हिं. गा. क्र.पु. मा. तृतीय पुस्तक. नोट- गायक लोग इस राग को कालिंगडा के साथ मिश्र करके बहुधा गाते हैं. यथा:- निसा गम् पध् निसां 5, मध् नि ग्नि साs, निनि ध्प मप ध्प गम् गs, मग रिसा ॥ राग परज-दादरा. राम सुमर राम सुमर, यही तेरो काज है, सकल जगत के वो स्वामि, सब के सिरताज है. राम माया को संग त्याग, प्रभुजी के चरन लाग, जगत सौख्य मान झूट, मिथ्या सब साज है.-राम सां नि सां रिनि सां सां धू सानि रा 5 मासु म र रा 5 मासुम र ध् नि सो नि N ये S PRON म् । ध् TSS || सा सा सा ग ग ग म नि सा सा ज ग त के s वो स्वा 5 मि का 5 ज S S ध् सा gha रि'सां रि' नि सा सो नि म ऽ धू स ब के 5 सि र ता 5 ज है ss राम....काज (अंतरा) म 5 ग| 5 मध् नि नि सां सां सां रि' सारि' नि सां मा ऽ या 5 को 5 संग त्या ऽ ग s के 5 सां नि निथ् नि नि | नि नि रि' से ऽ गे || म म गे| रि' सा सां च र नाला ऽ ग ज ग त | सौ ऽ ख्य | मा 5 न | झू 5 टं प्रभु जी निनि सां : रि' नि सां नि ध् सां नि म ऽ ध् मि ऽ थ्या | 5 स ब / सा 5 ज है ss राम ....काज है राग-परज. ર૭૨ स्थायी. निनि ध्प मग । मग रिसा निसा, ॥ रिरिं सांनि ध्प । मग मग रिसा, गंग रिसां निध् । पम गम् गरि ॥ सा , निसा । गग मध् निसा निरिं गमं गरि । सांसां निम ऽध् ॥ राम....काज है निर् िगग रिसा । रिग मम गरि ॥ गम पप मग । मध् निनि ध्प प्नि रिरि निध् । निरि गंगं रिसा ॥ रि िनिध्, निनि । ध्प, ध्ध् पम, पप मग, मम् । गर्,ि गग रिसा, ॥ र्गि मध् निरिं । निसां निम ऽध् ।। राम सुमर राम सुमर मध् निनि ध्प, । मध् नि!ि सांनि ॥ धूप, मध् निरिं । गंग रिसां निध् प, मध् निरिं । गंमं मंगं रिसी ॥ निध् पम गम् । गरि सा, निसा गग मध् निसा । रिसां निम ऽध् ॥ राम....काज है अंतरा. "माया को संग त्याग सांरिं सांनि ध्प । मग मग रिसा, ॥ गंगं रिंसी निध् । पम गम् गरि सा, ममं गरि । सांनि ध्प मग॥ मग रिस निसा। गग मध् निसां॥ माया....लाग नि नि, मध् । नि, गम धनि, ॥ रिर्ग मध् नि, । नि सांनि, नि सांरिं निसां नि, । रिंग रिसां निसां ॥ नि, ममं गरि । सां रिसां नि, धूप मप गम् । ग मग रिस, ॥ रिंग मध् नि । नि सा 5 ।। माया....त्याग रिसां निध् पम । गम् गरि सा, ॥ रिर्ग मध् नि । गम नि सा -

हिं. गा. क्र. पु. मा. तृतीय पुस्तक.
मध् निसां रि। प्नि सांरिंग ॥ ममं गरि सांनि । ध्प मग मग
रिसा निसा रिग | मध् निसा 5 ॥ माया....त्याग
सांग रिंग रिसां । निरिं निसा निध् ॥ पनि ध्नि ध्प । मध् पथ् पम
गम गम् गरि । गम पध् पम ॥ प्नि सांरिं सांनि । सांरि गंमं गरें
सांनि ध्प निासाथ् निसा, नि।।सा ऽ ऽ । sss
राग ललित.
रागांग विस्तार.
सा
ध
ध
सा
( १ ) गऽ रिसा 5; नि रि ग म् 5; गऽ म् 5, म म् 5;
म ग रि ग s, म ग रि सा; नि रिग ऽ म् 5 ॥
( २ ) साs, रि सा ; नि रि नि ध , मधऽ म.म 5; ग.
मधs, मध सा; नि रिऽ सा 5; नि रिग ऽ म् 5;
धम म् 5; नि म ध म म् ; म ग रि ग 5, म ग ऽ
रि सा; नि रि गम् ॥
( ३ ) नि रिग 5; रि ग ऽ म् ग 5; म धs, म म् ग 5; नि
धs, मध ऽ म म् ग 5; नि रि' नि ध 5, मध म म ग 5,
म गरि साs; नि रिग म् ।।
घ
घ

राग- ललित. ( १ ) ग ग म ध सा ऽ सी 5, नि रि' सांs; नि रि' गरि सां 5; सा s, रि's नि ध 5; म ध नि रि नि धs; ध म ध नि ध 5, मध म म् ; म ग रिग , म गरि साs; सा नि रिग ऽ म् ।। खरविस्तार (१) निर्सिा 5; निरि गरि सा5; निरि गरि गम् मग, मग सि 5; निरि गम धम म्ग, मग रिसा 5; निर् िगम धनि धम, धम म्ग, मग रिसा 53; निरि गम धनि रिंनि धम म्ग, मग रिसा ( अथवा ) गम धनि रिनि धम, धम मग, मग रिस 5; निरि गम धनि रिंग मंगं रिसां निनि धम, धम म्ग, मग रिस ( अथवा ) निरि गरि गम् गम् धम धसां, निर गंमं गरि सांनि धम मग, मग रिसा ।। नोट- इस राग में तीव्र धैवत के बदले कोमल धैवत का उपयोग कर सकते हैं. ललित-त्रिताल. पियु पियु रटत पपीयरा, उड रे कोयलिया कवन देस मोरे पियु को मिलना कब होवे.-पियु झिंगर झिंगार दादुर बोले, मुरवा बोले बन बन के, अवन सुनी पीतम मनरंग की, मगन भये सब घर के हियरा-पियु रि ग रि ग म् । गरि नि रि पि यु पि यु र ट त प ग ग म् 5 म् | म गम्म म् ग पी ss यारा 5 SS 5 मध् म ध् सां सां सा ऽ s उड रे को य. लि या 5 । २ हिं. गा. क्र. पु. मा. तृतीय पुस्तक. ध् ध् AA. नि सां नि रि' 5 S ध् सांरि नि म मम् ग ग म ध् क व न दे स मो रे पि यु को मि *(अंतरा) ध् नि ध् म नि ध् म म् ग म ध् म क ब 5 s | हो 5 s वेझिं ग र झिं सा । गा S 5 सौ 5 र नि सा ले तमु S S म् S S सा 5 सां सां सां रि' सो रि'नि ध् । नि नि नि म दा ऽ दु र बोs र वा 5 बो ध् म ध् रि' नि ध म म् म् म् म् म् । S ब न ब न के 5 न सुनी । पी 5 नि ध् गरि गम् गरि सा s सा सा ग ग म धू सा सा त म म न रंग की म म ग न भाये ध् रि' नि म ध् ध् म म् ऽ ग रि ग म् । गरि नि रि "घ र हिं य य रा 5 पि यु यि युर ट त प स्थायी. । पीऽ ऽ य । रा 55 5 । निर् िगम्, र्गि मध्,। गम ध्नि, मध् निरिं, ज्नि रिंगं, ममं गरि । सांनि ध्म ध्म गम् । पियु पियु रटत प पी ss य । राsss । निर् िगरि गम् गम् । धूम ध्सां निरिं गाँ गंमं गरि सांनि सांनि । नि ध्म ध्म गम् । पियु पियु रटत प गम् मग मग रिसा, । निनि ध्म ध्म मग । मग रिसा, गिरि निध् । निनि ध्म ध्म मग । मग सि, निरि गम । ज्नि रिंनि धूम गम् । पियु पियु रटत प २७७ राग-ललित. निरि गारे गम गम । ध्म ध्सां थाने गेन । रिंग रिंग मंगं मंगं । रिंग रिंनि गरेन धनि ध्म धूम गम् गम।गरि गरि सा, गम् । पियु पियु रटत पपीयरा अंतरा. "झिंगर झिंगार । सांनि नि रि, निध् । मध् नि, ध्म गम ।ध्, मग र्गि म, गरि निर् िगम नि रिंग ममं गरि सांनि । धूम म्ग मध् सां । झिंगर झिंगार मंगं रिसां,गरि सांनि ।रिनि धमाधम मग, मग रिसा,निरि गि।गम मध् नि निरिं रिंगं गंमं गरिं सांनि । धम म्ग मध् सा । झिंगर झिंगार ऽ निरिं गंगं रिंनि, प्नि गिरे निध, मध् । निनि ध्म,गमध्ध् । मग, निर्ग मग रिसा, निरि गम् म्म म्ग । मध् सां, मध् सा । झिंगरे झिंगार । ममं गंमें मंगं रिसी।रिरि सारि रिसां निध् । मम गम मग रिसा,।निग रिम् गध् मनि ध्सां निरि निगं रिन् । गरिं सांनि ध्म ध्सां । झिंगर झिंगार, इ. इ. बोलताने. " पियु पियु रटत प निर् िऽग म् मम् ।ग मध्सां निध् मम् निरिं निध् मध् ऽध् मध् ऽध् मऽ म्म् पियु ऽपि यु रट त पऽपी ऽय राऽ उड रेको यलि ऽया कब ऽन देऽ ऽस गम् गरि सा निरि म् गम् निध् मम् ग रि ग म् | ग रि नि रि मोरे पियु को मिल ना कब होऽ वे पि पि य यु प र ट त निारे निथ् निध् मम् | म्ऽ मम् ऽम् ग | मऽ गरि ऽसा सासा| म्ऽ म्म् ऽग मध् पिड युपि ऽयु रट | तs पपी ऽय रा| उऽ डरे ऽको यलि याऽ कव ऽन देस १७ २७८ हिं. गा.क्र.पु.मा. तृतीय पुस्तक. सांनि नि ध्म धनि | धम म्म म्ग रिंग ग गि गरि ग म् मोऽ रेपि ऽयु कोमि लऽ नक ऽब होवे | पि यु पि यु ग रि नि रि र ट त प. गम् म् | साग रिम् गम म्ध् मनि ध्सां निरिं निध् निरि ऽनि नि ऽध् पी ss य पियु पियु रट तप | पीय राउ डरे कोय लिया ऽक वन ऽदे मध् ऽम म्म ऽम् | गम् ऽग मम् गम् | ग रि ग म ग रि नि रि समो ऽरे पियु ऽको मिल ऽन कब होवे पि त प सांनि प्नि धूम मम् | गऽ मग ऽरि सा साम् ऽम् म् म्म् नि ऽनि ध्म मग पियु ऽपि युऽ रट तऽ पपि ऽय रा| उड ऽरे को यलि याऽ ऽक वन देस रिंनि ऽध् निध् ऽम | धम ऽम् मम् ऽग ) ग रि गम् गरि नि नि रि मारे ऽपि युको ऽमि लना ऽक बहो ऽवे पि यु पि यु ग म् म् | म गम्म गम् ग ) निरिनि गिरि गम्ग गम्म पीss य ss पिऽयु पिऽयु रटत पपिय रा PM म्ऽऽ, मध्म धनिध् मम्ऽ । निरिंनि धनिध् मध्म म्मम् राऽऽ, उडरे कोयलियाss कवन देऽस मोऽरे पियुको गर्गि मगरि निर्गि म्मम् ग रि ग म ग मिलना ऽकब होऽवे पि यु पि यु र पि यु र ट त प ર निरि निग रिंग रिम् गम् गध् मध् मनि धूसां निरि गरि निध् मम् सांनि नि धम पियु पियु रट तप पिय राउ डरे कोय लिया कव नदे ऽसामोरे पिया कोमिलन मम् गम्, गरि गम् [गरि निर्म्,ि गरि गम् गरि निर्मि, गरि गम् गरि निरि कब होवे, पियु पियु | रट तप पी, पियु पियु रट तप पी, पियु पियु रट तप १ २ ग म् । म्म्म गम् ग 5 पी s s य राs s SS राग-तोडी. २७९ राग तोडी. -XX रागांग विस्तार. सा नि (१) ग् रि 5 सा 5; नि सा रि ५ , ७ ग 5; रि S, सा s; नि रि, सा - ध. ग ग ( २ ) सा s, नि सा s, रिऽ नि ; नि ५ 5, मधू ऽ नि नि सा नि सा रि ग्; रिग , म म् 5, रि ग्ड रि s सा 5; नि रि , सा ॥ मध् ध् नि । ( ३ ) सा ध्ऽ पs, ग म ध् s, म प म ग 5 मरि ग 5; सा ग् म ध् नि, नि नि रि ग म धू धू s, is, रिऽ सा; नि रि s, साऽ॥ सां ग सा ग म ध नि सा (४) नि रि ग म ध नि सा 5; नि , रि' नि , , 45; ध् म प ध् , म ग 5; नि ध् म ग , मरि ग 5; रिग नि रि सा 5 नि सारि ध् , ग् 5, रि s, सा; नि रि, सा |

हिं. गा. क्र. पु. मा. तृतीय पुस्तक.
ध्
ध्
नि
(५) मग 5, मे ध् सा 5 सौ 5, सो रि' सा 5 ध् नि सारि
सां
ग
15 में गं s, रि' गं s, रि' s सां s; नि सा रि',
नि
प गम ध् 5; नि ध प , ध् ग् 5, मरि ग 5 नि
सा रिम् 5; रि ग्ड, रि, सा 5; नि , सा रिम् ।।
स्वरविस्तार.
(१) सारि सा 5; सारि गर्सिा 5; सारि गम गर् िसा 5; सारि गम
पम गरि सा 5; सारि गम पध् पम ग् िसा 5; सारि गम पध् निध् पम ग्रि
सा 5; सारि गम पथ् निसी निध् पम गर् िसा 5; इ. इ.
(२) सारि गम नि सांनि ध्प मग् रिसा निसा 5; सारि गम नि
सांरिं सांनि ध्प मग् रिसा 5; सारि गम ग्नि सांरि गंगं रिसां नि पम गर्ि
साs; सारि गम नि सांरि गंमं मंगं रिसां निध् पम गरि सा ॥
(३) निर् िग्र् िसा; निर् िगम मग् रिसा 5; निरि गम पम zि
सा 5; निर् िगम पध् पम र् िसा 5, निरि गम नि निध् पम र् िसा:
निरि गम ग्नि सांनि ध्प मग रिसा निसा 5; निर् िगम नि सांरिं सांनि ध्प
मग रिसा 5; निर् िगम ग्नि सांगं गरि सांनि धूप मग रिसा 5; निर् िगम
नि रिंगं ममं गरि सांनि ध्प मग रिसा ऽ ।।
नोट- पंचम स्वर वर्ण्य करनेसे गुर्जरी तोडी राग होगा. यथाः-
निरि सा 5; निर् िग्र् िसा 5; निर् िगम गरि सा 5; निर् िगम धूम
र् िसा; निर् िगम प्नि ध्म र् िसाs; निर् िगम नि सा निनि ध्म
र्सिा, इ. इ.
MAINASHISAR
moanemunNAMAND

राग-तोडी. २८१ तोडी-त्रिताल. धन धन मूरत कृष्ण मुरारी, सुलच्छन गिरधारी छब सुंदर लागे अत प्यारी.-धन बौंसीधर मन मोहन सुहावे, बलबल जाऊं मोरे मन भावे, सबरंग ग्यान बिचारी.-धन रि गरि रि िसा सा धन ध न मूऽऽ र त 3 नि 5 सा रिसारि ग् ग् म गरि रि गरि 5 सा सा कृष्ण मु राऽऽरी 5 मूऽ ऽ र त न २ 0 धु ध् धू नि सा रि | ग् 5 ग 5 कृ 5 राऽरी सु ल 5 च्छ S न गिर नि 5 घा 5 S अत रि रि गरि रि सा | रि रि ग म पऽ ध् घू री s ब सूंदर ला s गे *(अंतरा) ध् निनि नि सांरि सांनि ध्प मा रिग् सि म 5 ग् s 5 ग 5 म म ध् ध् ssssबौं सी s ध प्याऽSS 5 रि मो ह ब S नि नि सां सां | रि' 5 सा | रि'रि' में रिपरि गरि रिसा न सुहा 5 वे 5 ऊं सां रि ध् नि नि सां रि नि ध् म ध् नि स । ध् नि ध् प भा ७ वेs सब रंग ग्या ऽ न बि ब लाजा नि स मो रे म न S मध् निसां रिंगं गोरे सांनिध्प मग रिग्म गरि रि s ass aiS S S 5

हि. गा. क्र. पु. मा. तृतीय पुस्तक.
स्थायी.
निसा ग्म नि सांनि । ध्प मग रिसा निसा । धन धन मुरत
निसा ग्म नि सारिं । सांनि ध्प मग रिसा । धन धन मूरत
गम टिन सारि गरि । सांनि ध्प मन् रिस । ध न ध न । मू 5, गम ध्नि
सांरिं गमं पंम गरें । सांनि ध्प मग रिसा । धन धन मूरत
नि
ध् नि सा र ग् ऽ ग् 5 (सारि ग् रिग् मग्, रिग् मप ध्प मग,
कृष्ण मुरा ऽ री ऽ आऽऽ, आ5, आs 5
S Si
रिग् मप नि सांनि । ध्प मग, रिग् मप । प्नि सांरि गरि सांनिध्प मग, रिग् मप
ग्नि सांरिं गंमं गरिं । सांनि ध्प मग रिस । धन धन मूरत
सारि सासा,रिंग गिरि , गम गग,मध मम, । धनि धध,निसां निनि, सारिं सांसां, रिंग रिरिं
सांसां निनि ध्ध् पप । मम ग्ग् रिरि सासा । धन धन मूरत
सारि ग्ग् रिस,रिग्मम गरि , गम ध्ध्।मग्,मध् निनि ध्म,नि सांसां निध,निसां
रि!ि सांनि, सारें गंगं । रिसां निध् पम नि । धन....मुरारी
अंतरा. बौंसीधर मन
मो ह न सु । हा ऽ वे ऽ । सांरि गंगं रिसां निध् । पम गम नि सांरि
सांनि ध्प मग रिसा, । निसा गम नि सा । बौंसीधर मन
मो ह न सु । हा 5 वे 5 । गंगं रिंसां, गिरि निध्, । निनि धम, ध्ध मग,
मम नि, गग रिसा, । सारि गम नि सा । बौंसीधर मन
।

२८३ राग- तोडी . मो ह न सु । हा 5 वे ऽ । गंगं रिंग सिां, रि । निरं निध्, निनि नि ध्म,ध्ध् मध् मग,।मम गम ग्रि, ग्ग् । रिग रिसा, साग् रिम । ग्ध् मनि ध्सां निरिं सांगं रिमं प्रिं सांनि । ध्प मग् रिस निसा । बौंसीधर मन नि सांध् निसां नि सांनिध्प मग रिसा, मग ग्,िध्म ग्म,।निध् मध्,सांनि नि रिसां निसां, गरि सांरि । मम ग!ि सांनि ध्प । मग् मध् सां, मग् । मध् सां, मग मध् सांsssssss | बौंसीधर मन, इ. तोडी-त्रिताल. बर सरस्वती से मांगत हूं विद्या अधिक सरस निरतन कीजें, सब जगत के गुनिजन को दीजे.-बर सांचे सुर और राग सेहत बकस दीजे देवि दया दयानी अपने कर.-बर सा रिम् रि सा ऽ रि बर स र स्व ती से ध् ध् S म ध नि ध् अधि क स S SS रि रि ग । मध् ग त हूं 5 विs द्या सा मां S SS सा जे 5 स प प म ५ र स नि र म गरि गरि सा नि सा सा ग म प ध त न की 5 ज ग त घ मग रि रिम् म् । रि सा 5 रि को दी । जे ब र स्व ती 5 से प नि जन हिं. गा. क्र.पु. मा. तृतीय पुस्तक. ध् (अंतरा) नि म ऽ थ् सां सां सां सां सां ध् नि सारि ग । रि'रि' साs सांचे सु र औ र ग से S । ब याद या ध् म ग् रिग रि सा रि' si s रि' | L 5 में गं क स दी s जे ऽ दे ऽ विऽ द नि 5 सौ ऽ ध् नि धरि रि नि धरि रिसा रिम् सा रि ग् ग् र सा s रि नी । स्व ती से S र स र बोलताने. नि रि गरि | ग् म ग म स ती से मां प ध् नि ध् ग त हूं वि --- ब र 5 द्या अधि ऽ ध् मग 5 क स म ग् रि ग | रि सा 5 सा स नि र त न की 5 जे नि रि । नि ब 5 S रि ग् ऽ रि त ऽ के ध ग नि ऽ ज न को ऽ दी 5 प, म ध्. s जे, ब र s रि' नि ध् प म ग रि र स्व ती. 5s से सा रि ग् ग् ब र रि सा 5 रि स्व ती 5 से S स निध् ऽनि धप मप ध्म ऽध् मग रिग् । ग् िऽम रिग रिस रिसा ऽनि छिन सारि बर ऽस रस तीसे मांग ऽन हूंवि ऽद्या अधि ऽक सर सनि रत ऽन कीजे सब गरि ऽसा ध्ऽ मग् निध् ऽप मग रिग् रि रि ग् ग् रिसा रि जग ऽत केऽ गुनि जन को दी जेड स्वती से बरस र सा SSS मा SSS रि रि ग ss S s| निरि निरि गरि ग्म त हूं । S S S S | बड रस डर सऽ WW ग राग-तोडी. २८५ S ग्म पम पध् पध् निध् निरिं निध् निध् पऽ ध्म ऽग् रिग् मग ऽरि ऽग् रिसा तीसे s मांऽ गत | ऽहूं बिऽ द्याअ धिक सऽ रस ऽनि रs | तन की ऽजे सब सांऽ निध् ऽप मा ग्र् िऽग् रिग् रिस | रि रि ग् ग् |रि सा 5 सा अऽ गत ऽके गुऽ निज ऽन कोदी ऽजे | ब र सरस्वती 5 से नि ५ s | निरिनिग ग् िरिम गम ग्प मप मध् | मध् मनि टिन प्रिं मां 5 s| बर सर सती सेमां गत ऽहूं विद्या ऽअधिक सर सनि रत सांनि ऽध् पम ग्रि ध्प मग म िाि सा रि ग् ग् रि सा 5 सा नकी ऽजे सब जग तके गुनि जनको दीजे ब र स र स्व तीs से रिंगं रिंरि गरि सांनि धनि ध्ध् निध् पम रिग रि ि िसानि ध्ऽ निरिग्म पध् बऽ रस डर सती | सेऽ ऽमां ऽग तहूं विऽ द्याअ धिक सर सऽ निर तन कीजे मग् ऽर् िग्रि सानि निध् ऽप मग् रिसा | सा सा ऽ रि सब ऽज गत के गुनि ऽज नको दीजे | ब स रस तीs ती 5 से र सा 5 निरिग् ग्सिा मपध् धमग् बऽर सडर सतीऽ सेऽऽ मां 5 5 S ॥ २ मनि निध्प निरिंगं गसिां | रिसांनि सांनिध् निध्प ध्पम मांऽऽ गतहूं विद्या अधिक | सरस निऽर तऽन कीऽने १ पमग् म िसिा रिसानि | सारिग् मपध् मगरि, सारिग् सऽब जग तऽके गुनिऽ | जनको दीऽऽ जेऽs, वरस २ २ सिा ऽऽरि, सारिग रिसा | ऽऽरि, साग् िरिसा ऽऽरि | सा रसती sऽसे, बरस रसती | ssसे, बरस सरती ऽऽसे

हिं. गा. क्र.पु. मा. तृतीय पुस्तक.
र राग मुलतानी.
रागांग विस्तार
प
(१) नि 5 साs, म ग 5; मप ध्प म ग 5; प गड, रि साs;
नि s, सा गरि सा ॥
(२) नि नि सा 5; ग् रि साs, नि ध प म पनि ऽ, पनि
सा; म ग 5; प म ग 5; प ग , रि सा : नि ,
सा गरि सा॥
म
सां
मम
(३) निसा मग् पs, मग प5; घ्प मग प 5; निनि घप मग पs;
सांरि सांनि ध्प मग् प 5; धूप मग 5; पम् 5, रि सा5;
नि s, सा गरि सा॥
(५) (५) ग् म पनि ऽ सौ नि सां; निs, सां गं रिसी5
नि सां नि ध प 5; सां 5, नि ध प म ग 5; ध प म
ग; प ग् , रि सा ; नि s, सा ग् रि सा 5 ॥
स्वरविस्तार.
(१) निसा ग्रि सा 5; निसा गम ग्र् िसा 5; निसा गम पम गरि
सा 5; निसा ग्म पध् पम नि सा 5; निसा गम पनि ध्प मग रिसा 5;
निसा ग्म पनि सांनि ध्प मग रिस निसा s; निसा गम पनि सारिं सांनि
ध्प मग् रिसा 5; ग्म पनि सांगं रिसां निथ् पम गरि सा ( अथवा ) ग्म पनि
सांगं गंरिं सांनि ध्प मग रिस 5; निसा ग्म पनि सां निसां मंगं रिसां नि पम,
गरि सानि सा; निसा गम पनि सा गंमं पंपं मंगं रेंसां निध् पम गरि साऽ॥

Pos मुलतानी. २८७ (२) निसा मग रिस 5; निसा मग् पम गरि सा 5; निसा मग् पम धूप मग रिसा 5; निसा मग् पम ध्प सांनि ध्प मग रिसा 5; निसा मग पम ध्प सांनि सा गरिं सांनि ध्प मग् रिसा निसा S; निसा मग् पम ध्प सांनि रिसां मंगं पंम गरि सांनि ध्प मग रिसा निसा ॥ मुलतानी-त्रिताल. सुंदर सुरजनुवा सांई, सांई रे मन भाई. निसदिन तुमरो ध्यान धरत हूं, आन मिले रब सांई. मग पग रि सा | नि सा ग् म सुंऽ ऽ दर सु र ज न प Sप S प वा 5 ध् पनिध् पग मग रिसा (प सां ईss सां s ई S S S with m S प S S S S *(अंतरा) ग्म पनि सांरि सांनि सांनि ध्प मग रिसा प म प प प ग म प भाऽऽ ईss नि स दिन तु म रोड सां नि 5 सां नि | सां सां सां ने 5 सा गरि s सां सां ध्यान ध र त हूं । आ ऽन s न मिले 5 र सा निध् पनि सांगं रिसां |निध् पम गरि निसा | मग पग रि सा | नि सा ग म सांss ईss सुंss द र जनु SSS स्थायी. वाs, निसा मग् । रिस, निसा मग पम । सिा, निसा मग्। पम धूप मग रिसा, निसा मग् पम ध्पा सांनि धूप मग रिसा । सुंदर सुरजनु २८८ हिं. गा. क्र. पु. मा. तृतीय पुस्तक. re वा 5 सांऽ । ई.sss | निसा मग् पम ध्प । सांनि रिसां रिं मंगं रिसां रिंनि सांनि ध्प । मग् मग् रिसा निसा । सुंदर सुरजनु वा ऽ, पम नि । सा, निनि ध्प मग् । रिसा,रिं सांनि ध्प । मग रिसा, गंगं रिसा निनि ध्प मग् रिसा,। निसा गम पनि सारि ।सांनि ध्प मग् पम सिासा निसा मग् सुऽ दर सुर जनु वाऽ, मम गम । मग मम र्सिा, । निनि पनि निप निनि । ध्प मग रिसा निसा, रिं सांरि रिसां रि।सांनिध्प म रिसा। निसा ग्म पनि सांगं ।ममं गरि सांनिध्प मप सांनि ध्प, मप । निनि ध्प मग् ाि । सुन्दर सुरजनु वा 5 सांऽ । ईsss । निसा गम पनि सां । गंमं पंपं पंपं पंपं मंगं रिसां निध् पम, । गम पनि सांगं गंगं । गंगं गंग रिसां निध् । पम,ग्म पनि निनि निनि निध् पम, गम । पप पप मग रिसा । सुंदर सुरजनुवा सांई अंतरा. “निसदिन तुमरो" घ्या 5 न ध । र त हूंऽ । पनि पनि सो, मप । मप नि, गम गम प,साग साग म,। निसा गसा,मग् पम,। निप सांनि, रिसां ।ि मंगं पंम रिं सांनि धूप मग् रिसा निसा, । गम पनि सा ऽ ! निसदिन तुमरो व्या ऽ न ध । र त हूं ऽ । सांनि ऽसां पनि सा । निप ऽनि मप नि पम ऽप गम प । मग् ऽम साग् म, । सासा साग राग मम मप पप निनि निसां सांसां, निनि ध्प मग् । रिसा, ग्म पनि सा । निसदिन तुमरो । Say

राग-मुलतानी.
पनि सांप निसां पनि।सांरिं सांनिध्प मम्। रिसा निसा,मग पमाध्प सांनि रिसा गरि
मंग पंम गरि सांनि । ध्प मग मप सां । निसदिन तुमरो
।
च्या s, गम पनि । ऽ, ध्प मप नि, । निसा मग् मप नि,। सानि, सांग रिसां
नि, निसां गंमं पंगं । रिंसां नि, मप सां । नि, नि साग् मप । नि ऽ सौ ,
ग्म पग रिसा निसा, । गम पनि सो ऽ । निसदिन तुमरो
व्या ऽ न ध । र त हूं ऽ । निसा ग्म पनि सांगं । मंगं रिसी, निसां गंमं
पंगं ऽमं प्रिं सांरिं । निसां पनि मप गम,निसा गम,ग्म पनि, मप निसा, पनि सां!ि
निसां गंमं पंम गरिं । सांनिध्प मग् रिसा,। ग्म पनि सां, गम । पनि सां, ग्म पनि
--
सांsssssss | सुंऽ ऽ द र । सु र ज नु
बोलताने.
र
म ध् प नि प सां नि रिसां नि ध् प
सुं द र सु र ज नु वा | सां ई 5 सांई रे म न
म ग् रि सा | मग पग रि सा| नि सा ग् म
भाई 5 म न भा 5 सुंऽ ऽ द र सु ज नु
प ऽध् पम गम | पसां ऽनि ऽऽ ऽप | िऽसां निध् पम | ग्म ग्सा निसा ग्म
सुं ऽद रऽ सुर ननु ऽवा ऽसां ईसाई ऽरे मन भाई | ऽसुं दर सुर जनु
प 5 ध् प (निध् पग् मग रिसा) मग पग रि सा | गम ऽग् मप ऽम
वा 5 सां ईs s s sसुंss द र सुंss द
ss

हिं. गा. क्र.पु. मा. तृतीय पुस्तक. S S २ पध्ऽप निसां ऽनि सांरिं ऽसांऽनि ध्प गरि सांनिध्प मप | मग ऽनि साग् ऽम रss सुर | जनु ऽवा ऽसांई सांई रेम नभा ईसु | दर ऽसु रज ऽन ध् पनिध् पग् मग् रिमा ऽसां ऽनि ध्प मप | ऽम ऽग् ऽरि सासा वा ऽ सांs सां | ई sss ऽसुं ऽद र सुरज ऽनु ऽवा सांई ऽध् पध् मप गम (ऽम ग्सा निसा गम | ऽम गसा निसा गम (ऽम ग्सा निसा गम ऽसां ईरे मन भाई | ऽसु दर सुर जनु ऽसुंदर सुर जनु | ऽहुँ दर सुर जनु प5 ध् प साम गम पम गम | पसां ऽनि ऽध् पम ) पगं ऽरिं सांनि ध्प बा 5 सांs सुंऽ ऽद ऽर सुर | जऽ ऽनु ऽवा सांई | सांई रे मन भाई ऽप मग निसा गम । प_s, sप मग | निसा ग्म पs, sप मग ऽप मग निसा गम ऽसुंदर सुर जनु वा s, ऽसुं दर सुर जनु वा 5, दरं सुर जनु ध् प (निध् पग् मग रिसा | मग पग रि सा वा 5 सां ईs 5 s सड द र सानिसा मगम पमप मग्म || पनिसां निसांगं रिसांनि ध्पम रऽसु रऽज नुऽवा || सांई सांई रेमन भाई १ ૨ प S 1 २ पमग् रिसाऽ निसाऽ मग्म | पमग् रिसाऽ निसाऽ मग्म ऽसुंड दरऽ सुरऽ जनुऽ | वासुंऽ दरऽ सुरऽ जनुड २ पमग रिसाऽ निसाऽ मग्म प SSS वासुंऽ दररु सुरऽ जनु जनुऽ ॥ वा sss मुलतानी-एकताल. गोविंद सो प्रीत कीनी तबही मन अटकी. अबतो बात फैल गई जैसी ब्रिज भटकी.

राग-मुलतानी. : मधमपमग गम प ग म | ग् सिनि । सा सा गोड s|विंद सोऽ ऽ प्री त की S नि २ 3 । 5 S S पप प s| पनि ५ प | ग्ऽमप निसारिऽ / निऽसांनिध्पमप त बही अट कीऽऽऽ * (अंतरा) प प प म ग म प नि | सा रिस अ ब तोऽ बात फै ऽ ग S सां नि s | सां | रि'नि | ध्र प गऽमप निसांरिंऽ निऽसांनि धूपमप जैसी 5 वि ज भट कीssss S S " स्थायी. गोविंद सो प्रीत कीनी' । पम गर् ि। सा, निनि । धूप मग् । रिसा, गि ि। सांनि ध्प । म्ग् रिसा, गंगं रिसां । निध् पम । र्सिा, । निसा गम । पनि सांनि । ध्प मप गोविंद....कीनी निसा मग् । पम ध्प । मग रिर्सा, । निसा मग् । पम ध्य । सांनि ध्प मग सि, । निसा मग् । पम ध्प । सांनि रिसां । गरिं सांनि । ध्प मप गोविंद....कीनी निनि ध्प । ध्ध् पम । गम पग् । मप गम । गरि सा, । निसा गम गम पनि । सांनि ध्प । मप निसां । गंमं पंमं । गरि सांनि । ध्प मप गोविंद....कीनी । मम गम ।मग् मम । गरि सा, । निनि पनि।निप निनि । ध्प मग् रिस निसा, । म गमं । मंग ममं ।गरि सांनि । ध्प मग् । रिमा निसा, ।

हि. मा. क्र. पु. मा. तृतीय पुस्तक.
mawarang
गम पमापनि पनि।सांनि सांगं । सांगं ममं । गरि सांनि । ध्प मप ।
गोविंद....कीनी
अंतरा “ अबतो बात फैल गई"
PLANATERIAnimum
TAILSHRESTHATRIMANAang
पनि सांपानिसां पनि । सांरिं सांनि । धूप मग् । रिसा निसा, । मग पम
धूप सांनि । रिसां गरि । मंगं पंमं । गारं सांनि । धूप मग् । मप सो
अबतो....गई
सांग रिं । सांनि सांनि । ध्प ऽप । ध्प मग् । ऽग् मग् । रिसा असा
साग मप । ऽप, गम । पनि ऽनि, । पनि सांगं । ऽगं मंगं । रिसां निसा
अबतो....गई
सांनि ध्प । मग रिसा, ! निसा साग् । गम मष । पनि निसां । सांगं गंमं
गरिं सांनि । धूप मप । निनि सांगं । रिसां निध् । पम गम । पनि सा
अबतो....गई
मंगं रिसां । निसां गंमं । पंगं ऽमं । गरि सारें । निसां पनि । मप गम,
निसा गम । गम पनि । मप निसां । पनि सांरि । निसां गंमं । पंमै गरि
।
१
२
सांनि ध्प । मग रिसा, । निसा गम । प, निसा । गम प, । निसा ग्म
अबतो बात, इ. इ.
हिंदुस्तानी गायकी क्रमिक पुस्तक मालिका
तृतीय भाग समाप्त.

SH SHE- संगीत ग्रंथों की सूची.. नोटेशन के साथ हिंदी भाषा के पुस्तकें. 400 . 40 Asomers प्रत्येक भाग ( डांक महसूल अलग) भारतीय श्रुति-स्वर-राग शासन ३- संगीत श्रुति-स्वर शिक्षा प्राचीन मूर्छना अर्थात् आधुनिक शास्त्रीय थाट-पद्धति ... राग-लक्षण-गीतमालिका, प्रथम भाग राग-लक्षण-गीतमालिका, द्वितीय भाग हिंदुस्तानी संगति की एनसाइक्लोपीडिया (छे भाग) १ कल्याण थाट के १७ रागों के उत्तमोत्तम पदसंग्रह के पुस्तक २ बिलावल धार के २२ रागों के ३ संधिप्रकाश थाटों के ४५ रागों के ४ काफी थाट के ४० रागों के ५ भासावरी, भैरवी तथा तोडी थाट के २० रागों के पदसंग्रह २- ६ खमाज थाट के १२ रागों के हिंदुस्तानी गायकी क्रमिक पुस्तमालिका (भाग १ से ४ ) १-८ ख्याल गायकी ( आलाप, तान, बोलतान के साथ ) दिलखुष उस्तादी गायकी ( अलाप, तान, बोलतान के साथ, प्रथम भाग)१-८ दिलखुष उस्तादी गायकी द्वितीय भाग ०-१२ तान प्रवेश ( २०० किसम २ के तानों के संग्रह ) ०-१२ राग सिरीझ (छे भाग, आलाप तान के साथ ) प्रत्येक भाग सन्त गति लहरी ( ८५ अपूर्व मजनों के स्वरताललिपिबद्ध संग्रह.) सितार होम-ट्वटर सितार गत-तोडा संग्रह १-० આ નોટેશન સાથે ગુજરાતી ભાષાના પુસ્તકે , ઘટાડેલી કિંમત રૂ.આ. હિન્દુસ્તાની સંગીત વિઘા (બીજો તથા ત્રીજો ભાગ ) પ્રત્યેક ભાગ ૧-૦ શાસ્ત્રીય સ ગીત કળા શિક્ષક (આલાપ, તાન સાથે) ઝવાહિરે જથાતી સ ગીતમાળા ( બે ભાગ ) પ્રત્યેક ભાગ ०-१२ ३२२, मेन स्ट्रीट, केंप पूना. पंडित फिरोझ फ्रामजी. ----- WAL C. TAPAR RA

Research Work
ON
INDIAN MUSIC.
( भरतमुनि, साङ्गदेव प्रभृति प्राचीन महषियों के मत प्रमाण)
भारतीय श्रुति-स्वर-राग शास्त्र.
इस ग्रन्थ म प्राचीन शुद्ध स्वरों से अर्वाचीन स्वरों का मिलान, प्राचीन
शास्त्रकारों की सारणा-चतुष्टयी से प्रचलित वीणे के स्वरों का
मिलान, संगीत रलाकर के " साधारण-प्रकरण" में
लिखे हुए श्रुति साधारण, स्वर साधारण, ग्राम साधारण
इत्यादि विषयों के परमगौप्य मर्म, प्राचीन मुर्छनाओं
में से आधुनिक थाटों की उत्पत्ति, वह थाटों में
सम्भवते हुए १७० आधुनिक रागों के स्वरों के
श्रुत्यंतर, कम्पनसंख्या, वादी-संवादी स्वर
इत्यादि के पूर्ण विवरण, और श्रुति, स्वर,
ग्राम, मूर्छना, रागादि के सम्बन्ध में
बहुतसे संगीतोपयोगी विषयों का
विस्तारपूर्वक हाल लिखा हैं.
मूल्य ३ रु.
wevereservARAS
मुद्रक शंकर नरहर जोशी, मैनेजर, चित्रशाळा प्रेस, १०२६ सदाशीव पेठ, पूना नं. २
प्रकाशक-पडित फिरोझा फ्रामजी, ३२२, मेन स्ट्रीट, कप, यूना.

Text Book on the Practical Study
of Indian Music.
(Compiled specially for the use of High Schools & Colleges. )
हिंदुस्तानी गायकी
क्रमिक पुस्तकमालिका
अर्थात्
तानालापसह गाने बजाने को सहलतासे सिखलानेवाली हिंद भाषा की
ऋमिक पुस्तक.
अंत भाग था.
इस चतुर्थ भाग में २० प्रचलित आलापयोग्य रागों के २२ चुनीदा हिंदी
पदें उन के रागांगविस्तार, स्वरविस्तार, तान और बोलतानों
के साथ बहुत गमकदार नोटेशन में दिया है.
Dammamerasma
लेखक और प्रकाशकः
पंडित फिरोझ कामजी ( संगीतशास्त्री).
Research Scholar & Author of 30 Books on Indian Music.
३२२, मेन स्ट्रीट, कॅप, पुना.
(
सन १९३६.
सर्वाधिकार सुरक्षित.
मूल्य १॥ रुपया.

00 300 DOC feel greatly indebted to Mr. Firoze Framjee for havin OPINION of His Highness SHRI VIJAYADEVJI, Maharana Saheb of Dharampur, President, Maharashtra Sangeet Samitee. Mr. Firoze Framjee has been for years busy examining the tradition and technique of Hindustani Music. He has published several books and articles on Hindustani Music. He has recently published a book entitled Bharatiya Shruti-Swara-Raga Shastra '. He has classified 170 Ragas in this volume according to the Murchana system. It is true that he has thus attempted to simplify an important problem of 'Murchana.' He has devoted many years of study and research to prepare himself for the work of which the present volume is the result. It is indisputable that the problems of the 'Shrutis in Hindustani Music do require intense study and re- Search. Students and exponents of music would, therefore, in some measures smoothed their path. The present volume ought to be read and studied by them. It will be to their advantage. By order, Sd/- B. J. MODY, Personal Assistant to Maharana Saheb of Dharampur State. 12th March 1936.

चतुर्थ पुस्तक के पदों की सूची. .... पदे राग और ताल. पृष्ठ. १ बाजो रे बाजो मंदलरा. शुद्ध कल्याण-त्रिताल २९८ २ थोरे थोरे दिनन की सखियां. जेत कल्याण-त्रिताल ३ राम सखा तब नाव बुलाई. शंकरा-त्रिताल ३०८ ४ आद महादेव बीन बजाई. शंकरा-झूमरा ( विलंबित) ३१० ५ गूंढ गूंढ लावो रे मालनियां. देसी-त्रिताल ३१४ ६ ऐरी मोहे नाहिं परे चैन. बरवा-एकताल ७ माई री मैं कासे कहूं पीर. शुद्ध सारंग-एकताल.... ३२२ ८ दयानिधि दया करियो अष्टसिधि. मीया का सारंग-एकताल ३२६ ९ तुवे म्हमदशाह दरबार निझामुदिन. सुहा-एकताल .... ३३१ १० मेरी मदद करो या शाह मेरे. सुधराई-झपताल ११ सजन बिन भई निरास हूं कहो सखी. नायकी-त्रिताल ३३८ १२ गूंद ला मालन फूलूदा सहेरा. शहाना-झपताल १३ बंधनवा बांधो रे बांधो. दरबारी-त्रिताल ३४८ १४ गगरि मोरि भरन नहिं देत. अडाणा-त्रिताल ३५४ १५ बहार आई सकल बन फूलन लागी. बहार-झूमरा( विलंबित) ३५९ १६ चमके ठौर ठौर रे बिजलियां. मीयांमल्लार-एकताल(विलंबित)३६४ १७ गरजत घटा धन कारे कारे. सूरमल्लार-झपताल ३७१ १८ घोर घोर घोर घोर बरसे मेहरवा. ३७३ १९ परिये वाके पायन सजनी, देवगांधार-त्रिताल ३७६ २० प्रात समय नंदलाल दरस को. ३८० २१ माया मय सकल जगत. त्रिवेणी-एकताल ३८३ २२ नीके चुंगरिया ठुमकत चाल चलत है. बिलासखानी तोड़ी-एकताल ३८६ [इति सूचीपत्र समाप्त] .... सूरमल्लार-त्रिताल ३ .000 बिभाल-झपताल 9..

शुद्धिपत्र. bawapan लाईन. अशुद्ध शुद्ध. विषय. बोलताने ३०१ १८ सुऽ ऽसु ३०४ अंतरा । स न ss । तनss । रोsss।।रीsss। मोऽऽरि। भोऽऽरि। ८ ३०८ च ११ सा ३२७ स्थायी ४ निरि निरि ३३२ अंतरा ४ ३३६ ३४३ स्थायी ७ गम् रिसां, । गम् रिसा, । गंमं सांरिं। । गम् सांरिं। मरिसासा, रिसासा,। नोटेशन ७ गऽऽऽम् आऽऽवे गऽऽम् sissa ३७० रागांगविस्तार म् नि ३७४ बोलताने रागांगविस्तार (३) म् नि १८ घेडा (२) नि धूप ऽयो ३७५ नि धूप [इति शुद्धिपत्र समाप्त. ]

सशास्त्र
हिंदुस्तानी गायकी
क्रमिक
पुस्तक
मालिका.
(चतुर्थ पुस्तक)
राग-शुद्ध कल्याण.
XX
रागांग विस्तार
१) गs, रि, सा; निध, नि ध, 45; सा 5, गरिs;
गपगरि परिs, सा ।।
(२) प प ध प, सा; रि साs; गरि सा; ग प गरि
सा; ध प ग प 5, रिऽ सा ॥
(३) सा नि ध प नि ध प 5 गS, गरि प ग ऽध प
गरि s; सांs, नि ध प ध प गरि 5; सारि गप
रि; परि; सारि सा |
(४) पग, प सांध सा 5 सा , सां रि' सा 5; सारिरि'
सा 5; प ध रि' सा 5 निथ नि, ध प 5; ग प रि
निनि धध पम गरि s; परि, सा 5; सा रिसा ॥

हिं. गा.क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक. स्वरविस्तार. सारि गरि सा 5; गप गरि परि ऽसा 5; सारि गप धप गरि परि ऽसा 5; सारि गप सांध सांसां धप गरि परि ऽसा 5; सारि गप धप सारि सांनि धप मग रिसा 5; रिंग पध सारि गरि सांनि धप गप गरि परि ऽसा, सानि धपग गरि सारि गप रि सा॥ शुद्ध कल्याण-त्रिताल. बाजो रे बानो मंदलरा, सुधर सुधर नर नारि मिलकर ही, आनौंद रहस रस गाये हुं मंगलरा.-बाजो एक सम धन संग चौक पुरावो, एक सम धन गर डारो हि हरवा, एक सम हस घिस लावो संदलरा.-बाजो गरि गय थप चा s is s ध साध सा ग रि s सा 5 साध सा सा ग रि सा ss जो 55 : बा रा S | || आ नौं ग ग ग ग ग ग गरि ग 5 स ध पध ना रि मिल कर ही 5 *(अंतरा) नि ५ ग गध ५ रि रि सा रि साध प, गप ग है स रऽ स गा वे हं में ग ल रा, बा| ए क ग राग-शुद्ध कल्याण. पप सा सां 5 सा सा नि सां रिसा 5 सा ध ध ध रा ऽ वो ऽ एक सम चौ ऽ के पु घ सां सां सां सां सां रि' गं रि' सां रि' सां ध| प ऽ रो हि ह ए न र वा S क स म प ग 5 प रिग रिसा, गरि गप ध प s को स द ल रा, बा ऽ जोऽ रे ह स्थायी. रिऽ सा 5 सारि गप रि सानिध पम गरि गप रि सा, गरिं सांनि SIIS S S S. आssss SS, आऽs थप ऽम गरि गप । रिसा, सारि गरि । सानि थप 5, बा । जो रे वा 5 जोड। 5 गग रिग रिसा, । पप गप गरि, धध । पध पग, सांसां घसां रिरिं सांरि सांनि, । गंग रिंग रिसां, धप । गरि सानि धूप, बा । जो रे बा ऽ जो ऽ । गग रिग पप गरि । धध पध सांसां धप । रिरिं सांरि गंगं रिसां निध धप पम मग । गरि, थप गरि, गप | गरि सानि धप, बा । जो रे बा sss | जो 5 5 मं । द ल रा । गरि सारि साध ऽप पध ऽप गs, | ग गरि पग पप । घघ ऽप पग पप । सांध ऽसां धप गग धप ऽध पग रिरि । पग उप रिरि सासा । रिसा ऽरि सानि धप ग रिग धप बा जोडsरे बाजो मंदलरा हिं. गा. क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक. अंतरा एक सम धन संग । चौ 5 क पु । रा 5 वो ऽ । सांसां धप गरि सा, सारि गप धसां रिंग । परिं सां धप गरि । गप गरि गप सां। एक सम धन संग । सांरिं सांनि धप गरि, । गप गरि, परि ऽसा, । सारि गरि गप गप घप धसां धसां रिसारिंग रिंगं पंप गरिं । सांनि धप गप सा । एक सम धन संग । गंग रिंगं गरि सांसां । निनि धनि निध पप । गग रिंग गरि सासा, । रिंग पध, गप धसां, । पथ सांरि सांनि धप । गरि सारि गप सां। एक सम । घन संग । चौ 5 क पु । रा ऽ वो ऽ। रिसां ऽरि सांध सांध । सांघ ऽसां धप धप । धप ऽध पग पग । पग ऽप रि सा, । साध रिसा गरि पग धप सांध रिंसां रिंध । सांप धग परि ऽसा, । सारि रिंग गप सां। एक सम, इ. इ. -- बोलताने "बाजों रे" ग ग ग परिs गरि सारि बा जो रे बाजो में द ल रा 55 सुघ र सुध नि ध 5 5 सा 5 साध साध साध पप साध सा धरि रन ना' रिमिल कर हि आ नों आ ना द ग ध प ग ( प सां ध प ग रिसा धग रिंग ५ प र ह स र । स गा वे स गा वे हुंम ग ल रा बा जोड रे प सारि सा गरि गरि प बा ना रे बाजो मं दल । ग पग ध रा सु घर ध पसा G4 राग -शुद्ध कल्याण. ध सा ध सांग रिसा सांरिंग रिरिं गरिं सांध सांरिं सांसां रिसां धप र नारि मिल क र हि आऽ ऽनौं । दs रऽ ऽहऽ सड प गप गग पग रि) रिग रिरि गरि सा) साप, गरि गप ध रऽ ऽस ऽ गा वेऽ ऽहुं 5 मंग रा, बा 5 जोडs रिऽ साऽ सा घसा सा गरि सा 5 बा5 SS रा जो ऽ सारि गरि गप गप बा 5 ऽ जोड रि ग पध पसांघ ऽध सांरिं सांरिध ऽप धप गप रि ऽग परि सा रे ऽबा S SÅS रा ऽसु घर सुध र डन रना ऽरि साध ऽप गरि सानप ऽरि पसा ऽध | सांरिं ऽसां पध ऽप | गप रिग रिग धप मिल sक रही आ नोंद ऽर इस डर सगा नौद ऽर हस र सगा ऽवे हुंमं ऽग लरा ऽबा ऽजो रे रिऽ सा 5 बा S S 5 साध सा सा S S F- ग रिसा, गरि गप ध प द ल रा, बा 5 जोऽ ऽ रे मं सारि गप ऽरि, गप धसांऽध, सारे सांघ। ऽप,पध पग ऽरि, गरि गग धप, रिरि बाजो रेबा ऽजो, मंदा लरा ऽसु, घर सुध र,नऽ रना ऽरि मिल कर ऽहि, आनौं ऽसा, साग रिंग, रिप गप, गध पध, गप गप रिंग परि, ग रि गप ध प ऽद, रह ऽस, रस ऽगा, बेहुँ ऽमं, गल. 5 राss, बा ऽ जोs s रे धसां घरि सा धप | पध पसां ध प गप गध परि सारि गरि गप गप बाजो मंद ऽल रा लु घर सुऽ घर F बा जोड नर नाऽरि मिल पध ऽप पसी ऽब | धरिं सांध सांब ऽप | रिंग ऽप सिर, गरि गप ध प कर ऽहि आनौं ऽद रह सर सगा ऽवे हुंमं ऽग लरा, बा ऽ जोऽ ऽरे रिs सा S सा प साई जोड SS S मारिंग वाजोरे रिंगप गपरि सा बाजोमं दडल रा SS 5

३०२
हिं. गा.क्र.पु.मा. चतुर्थ पुस्तक.
गपध पधसां पधप रिरि
सुघर सुधर नर नारि
रिंगरिं सांरिंसां धसांघ पधप
मिऽल करहि आनौंद रहस
१
२
गरिंग गधप गपरि सा | गरि गधप रिरि, गरि गधय रिरि, गरि गवप
रसगा वेऽहुं मंगल रा बाजो रे बाजी, बाजो रे बाजो, बाजो रे
रिऽ सा ।
बा 5 जो ऽ
राग जेत कल्याण.
रागांगविस्तार.
(१) साऽरि सा; ग परि 5 साs; गप 55; धप
रि, सा॥
(२) पप साs, रि सा 5; ग प 5 45; प ध ग 5 45; ध प
रिs, सा ॥
(३ । सा ऽ रिसा, प ग प ध प 5 साप ध प ग 53;
ग पध पs, रिऽ सा ॥
( १ ) प प सा 5 सा रि' सा 5; साs रि' सांs, सीप ऽध
45; सा ग प सांs, पऽ ध; प घग परि
सा ; ग प॥

राग-जेत कल्याण. ३०३ स्वरविस्तार. सारि सा; सासा गप रिसा 5%; सारि सासा गप धप रि सा; सासा गप धप सा पध पग परि ऽसा 5; सासा गप सांरि सांसां गप धप रि साs; सासा गप धप सा गंसां रिसां पध पग परि ऽसा 5।। नोट -इस राग की स्वर रचना बहोत विकृत है. इस को देशकार, भूष, शुद्ध कल्याण इ., रागों से बचाकर गाने में कुशलता जगह मृदु ऋषभ का व्यवहार करने से पूर्वकल्याण थाट का जेत राग हागा. है. तीव्र ऋषभ के जेत कल्याण-त्रिताल. थोरे थोरे दिनन की सखिया, मैं मिलन करो री बरजोरिया. बहु भातन के करिलो सिंगरवा, एक गोरी दूजे भोरिया. पग पध प थो रे थोड रे ग 5 ग प 5 5 दिन रि सा S प ss गप घप सा 5 की ssss सऽ खी 5 न S सा ग ग प S S SS २ प S S S SS गप घप पग 5 Tass पग H S या S S SS S SS S S S SS सा 55 सासा साग गप ग प 55 प 5 प प मैं ss मि न 5 करो sss रीब र ३०४ हिं. गा. ऋ. पु. मा. चतर्थ पुस्तक. प गप S *(अंतरा) पप सां S ब हु भा । ध परिसा या 5 सा सा ss जो s S S S स नSS S साss के SS साध सा सांरिं सांसां 5 5 4 5 ध प क रि लो सिंऽ गड SS S S र S S S रिऽ सा । सासा पग वा SS S ए क गो ऽ प रो प सा 55 SS. S S प गप धप रिसा ss मो ऽs रि या S SS प ग पध प थो रे थोड रे ग 5 ग 5 5 दिन प स्थायी. सासा गप धप सांसां । पध गप रिरि सासा । थो रे थोऽ रे। 5s, सासा गप धप सांसां रिरिं सांसां । पध पग परि ऽसा । थोरे थोरे दिन न sss | सासा गंग पप गरा । गग पप धध पप । पप सांसां रिरिं सांसां सांप धग पप सांसां । गप धप रिरि सासा । थोरे थोरे दिन ऽ । पं गप पध गप । घ पध घसां पध । सा धसां रिसां घसां रि' सांरिं सांप धप । गप धप गरि सा। थोरे थोरे दिन न sss| सासा रिसा गप गप । पप धप सारिं सांरिं। सांध ऽसां पध पग घप ऽध गप गरि । पग ऽप रिंग रिसा। थोरे गोरे दिन न राग-जेत कल्याण अंतरा.॥ बहू भातन ss 5 । सा घसां धप सो। पप धप गप सां। रिरिं सांसां पध गप गप धप रिरि सा, । सासा गग पप सा । बहु भातन के s s s। सारिं सांसां रिसां धसां । पध पप धप गप । रिरि सारि रिसा धसा, सासा गग पग पप । पप धप सांध सां । बहु भातन के sss | गंसां रिसां सांप धप । पध पग परि सासा, । साग गप पसां सांरि सांरिं सांप सांप पधापग परि, साग पसां । बहु भातन के sss| सांरिं ऽसां, पसां ऽप, । गप ऽग, सारि ऽसा, । धसा साग गप पसां सांग सांप धप गप । पप गप धप सा । बहु भातन, इ. इ. बोलताने. "थोरे थोरे दिन" रिसा 55 सा ग ग प. S 5 5 5, सा ग सा, गपग, प ५ थो 5 रे, थो| ऽ रे, 5 रे, दि न न 5 SS घ पर ग प सा प, न की 5, स ग सा सा सारिऽ साs मिल रो ऽरीs खी 5, S त म सा ग सा, गप ग, पध पपप ग पधप ग 5 ग प ब र , जो 5 रि, याss थोरे थोऽ रे ss दि न रि सा 55 सा ग ग प प गप ऽग सासा साग पग पसां प न SSS 5 S ss थोऽ रेथो ऽरे दिन नकी ऽस खीऽ सांग ऽसां पसां उप | पध पग परि सा प ग पध प ग ड ग प मिल न करो ऽरि ) बर ऽजो ऽरि या थो रे थोऽ रे| 5 दिन हिं. गा. क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक. रिसा s sग ऽसां रि'सासाऽप ध प ग ऽप रि सासा ss थो रे थोरे दि ऽन न की स ऽखि मैं मिल न 5 साध सासा रि साप गप धप सा प ग पध प नऽ ऽक रो रीब रजो ऽरि या था रे थोड रे गडग प ss दिन २ रिसा ऽ ऽ | साग साप गप गसां | सांगं सांप धप गप | ग सारि साध सा न 5 5 5 थोरे थोरे दिन नकी सखी मैं मि लन करो री बर जोरि या १ प गप धपगसा ग 5, प गप धप गसा ग 5, प गप धप गसा यो रेथो पुरे दिन न s, थो रथो रे ऽरे दिन न s, थो रेथो ऽरे दिन (अनाधत ग्रह ग सा साग ग प प ss ऽसां ऽप धप गप S SS 555 की 5 ss ऽथो ऽरे थोरे दिन म S S न S ऽप गप गप रिसा ऽसा गसा गप प/sप धप ऽग प गंसां रिसां सांप धप ऽन ऽकी सखी मैंऽ ऽमि लन करो री | ऽब रजो ऽरि या थोरे थोरे दिन नकी पध पग परि सासा सा पग धप सांग पध पग 5 ग प सखी मैंमि लन करो री बर जोरि या थो रे थोऽ रे रे थोऽ रे 5 दिन S S रिसा ss न 555 सा ग ग पाप S S SS 5 की 5 S S सांगंसां सांरिंसां पसांप पधप पधप गपरि सागसा गपs थोऽरे थोडरे दिनन कीसखी || मैंऽऽ मिलन करोड रीss १ २ सांडप धडप गऽप रिऽसा | पगध पगसा गss, पगध बर जोऽरि याऽऽ हांऽऽ थोरेथो रेदिन नंऽऽ, थोरेथो .२ 3 पगसा गऽऽ, पगध पगसा || ग सा ग सा SS रेदिन नऽऽ, थोरेथो रेदिन न SSS 1 R- He

राग-शंकरा.
३०७
राग शंकरा.
Malmaned
रागांग विस्तार.
MAIN AURINARIm
(१) सा 5, गप, (प), गपग सा; सा गपs,
Frammarwasna
नि sqs, गपs, गऽ सा ॥
(२) नि ध सा s, नि धनि प; सा 5 रि साs; सा ग ५s,
HAIR Ummam
नि ध सौ , नि ऽ 45; गपs, गऽ सा ।।
(३) सा ग पनि 5; निध सांऽ नि; गे सां, रिसां निs,
पगपs, गरिसा ।।
(४) पप सो ऽ, सांऽ रि'साs; गंs (सा); सो ग
S
ग 45 5 (सा); निऽ प ग प सा ; नि घनि
पग पग 5 सा॥
स्वरविस्तार.
सासा गरि सासा 5; सासा गप गरि सासा 5; सासा गप निप गप गरि
सासा 5; सासा गप निध सो, निप गप गरि सासा 5; सासा गप निध सां,
गंग रिसां निप गप गरि सासा 5; सासा गग पप निध सांगं गं गरि सांनि धप
गरि, निसा गप निध सा ॥

३०८ हिं. गा. ऋ. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक. शंकरा-त्रिताल. राम सखा तब नाव बुलाई, प्रियहि चढाय चढे रघुराई. लखन धरे धनुवाण बनाई, आप चढे प्रभु आयसु पाई. s नि ध सा 5 रा म स Mausamasamsung नि 5 पध मप/5 गरि ग प ग 5 सा 5 वा ऽ तs बs नाऽ व बुला ऽ ई s ऽ निप नि सा s प्रिय हि च २ ० ग ई 5 ग ग प ऽ नि ध | साs s रिसां निध | प, नि ध सां + य च |ढे ऽ र घुरा ss ईs s, रा म स (अंतरा) न s पध मप ऽ गरि ग प रिग ऽरि सा खा 5 तs बऽ 5 नाऽ व बु लाऽ ऽ ई 5 प प सा सा सो ऽ सां सां निसां रिसां नि पप निध सां नि) 5 सा गं च ण बना 5 ईs s आ पप र S घ नु । बा S घ ग 4 ग सां। 5 सौ नि प| पप निसां रिसां निध | प, नि ध सां ऽ प्रभु। 5 आ य सुपाss ई ss, रा म स ढ5 S स्थायी. खा sss | साग गप पनि धसां । निप गप गरि सासा ! गप, रा म स वा ऽ तऽ बऽ ऽ नाऽ व बु । ला ऽ ईऽ । सानि पनि साग पनि असां गंपं गरि सांनि । सांग रिसां निप गप । पप गप गरि सासा | गप, रा म स राग-शंकरा. ३०९ खा ऽ तs बऽ । ऽ नाऽ व बु । निसा गग, साग पप, । गप निनि, पनि सांसां। सांगं पंपं गरि सांसां । निनि धप निध सांनि । पप गए गरि सासा। गप, रामस खा sss | पप गप पग पप । गरि सासा, निनि पनिानिप निनि पप गप गरि सासा, मांग रिंग गरिं गंग रिसां निस। निप गप गरि सासा | गप, राम स । खा 5 तऽ बऽ । ऽ नाऽ व बु । लाई ऽ । सासा गग रिसा, गग पप गरि, पप निनि। थप, निनि सांसां निध, सांसां गंग रिसांs, सांरिं निसां धनि पध गप रिंग सारि निसा । साग पनि धसां निध । पप गप गरि सा। गप, रा म स अंतरा." लखन ६ रे ऽ धनु । सांनि धप निध साँ, । सांनि धप गप निध । सौ, सांनि धप गर्ग गप निध सां, सांनि । धप गरि निसा गप । निध सांss | लखन ध रे ऽघ नु । सांनि सांनि, पथ पथ, । गप गप, गरि सासा, । गप निध सांनि रिस गरिं सांनि पग धप । गरि सा, निसा गग । पर धप निध सा । लखन ध रे ऽ ध नु । निध सांनि धप पग । पप गरि सासा, पग । पप गरि सासा, सांf धप पसां सांरि, सांनि । धप पसां सांग रिसां । निप गप गरि सासा । लखन घ sansar रे ऽ धनु । साग गप पनि धसां । गरि रिसां सांनि निध । धप पग गरि रिसा निसा गग ऽग, सागापप ऽप,गप निनि। ऽनि,पनि सांसां सां, सागं रिसां रिसां निस निघ निध पध पग । पग रिंग रिसा रिसा, गप निध सां, गप। निध सां, गप नि १ २ Panam साsss हिं. गा. क्र. पु. मा. चतर्थ पुस्तक. शंकरा-झूमरा ( विलंबित ) आद महादेव बीन बजाई, पाई न्यामतखान पिया सदा रंग कर करम दिखाई.-आद सप्त सुरन की सुर की सप्त तान मनरौंग ते उनच्यास कूट तान ले सब गुणियन को समझाई.-आद ऽ धनिरिसां निधनिऽ (प) आsss दम हा S सां नि 5 पग गऽगप गप ऽग पग पधपप रिंगss रि सासाs दे ऽव 5 | बीऽ नऽबऽ जाऽ ऽई | पाऽ ईsss s न्याsss s मत 5 tamatun गरिगऽ रि सा धनि रिसा सासागग पपनिधनिड सारिसारिनिसी sऽनिध सा खाsss s न | पिया 5 सदारंग करकऽरs, मदिखाऽऽऽ ऽऽईs 5 P (अंतरा) निपऽs, धनिरिसां निधनिऽ पसां नि ऽप निध सां सां सां सां सां s, आsss दऽमऽ हा दे ऽव 5 स तऽ ऽ सुर न की ર रि'सांसां सांसां गंगं । ग ग गंऽऽ पंगंऽऽ गरि सांसा ऽ सुर सुर की स प्त ता S २ 0 सा सांऽनिध सांऽऽसां सां | गरिंगरिं सांरिंनिसां नि | निऽधम पss ते उऽनंऽ च्याऽऽस कू ESSS GISSS S7 लेssssss २ का anal राग -शंकरा. प धप ग ग प प पनिऽध | सांऽ सांरिं| सांरिसांनि सा ss स बऽ गुणि य न कोssss s सम झाSSS SSS २ निधऽऽ सा ऽ निपऽऽ, धनिरिसां निधनिऽ (प ईsss आऽऽऽ दम हा. सां नि । SS S , दे ऽदs बोलताने. पगप रिगऽरि सासा नि पऽगप गऽरिसा आ दम हाऽऽऽ देव बी नऽऽब जाऽई २ धनिरिसां नि प गप गरिं सांरिं सांनि पग निप सांनि रिसां पाऽऽऽ ई न्या मत खानपि ऽया सदा रंग कर कर गंसां रिनि धनिरिसां नि, धनिरिसां निधनिऽ (प)|| सां नि s मदि खाऽ ई, आsss दऽमs हा S दे ऽव सागपग पग गपनिध निप / निसांरिंसां रिसांनिऽ गरिसांड आऽऽऽ दऽ मऽऽऽ हा देsss sss बीऽनऽ २ पंगं sपं गरिं सां निरिंसां निनि पप घनिरिसां निनि पप | 45 गप ऽग रिसा बजा ऽई पाई न्याऽऽऽ मत खान पिड यास ऽदा रंग २ साग Sग गप पनि सांरिं सांनि पप कर करम दिखाई आद महा सांऽनि दे ऽव बीन बजाई पाई Home सागपप गरिसासा, गपनिनि धपगप, निसांगंगं रिसांनिऽ, सांऽनिs आऽऽद ऽऽमहा, देऽऽव ऽऽबीन, || बऽऽजा ऽऽईs, - हिं. गा. क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक. पपगप पगगऽ गरिसाप पगनिप न्याऽऽम ऽऽतऽ खाऽऽन ऽऽपिया सांऽनिरिं ऽसांगपं गरिसनि सऽदारं ऽगकर करमदि धनिरिसां निसांसाऽ निघनिष गपनिश्च । सो ऽग्नि धनिरिसां निसांसां निधनिप गपनिध। सां नि s खाऽऽई ऽऽआऽ दऽऽ ऽहाऽ ss सागसाप गनिपसां । निरिसांग सारिनिसां निनिपग ऽ ऽ आदमहा देवबीन बजाईपा ईन्यामत खानपिया पपगरि सासापनि सांरिसांनि सांधनिप सदारंग करकर मदिखाई आदमहा देव.... न्यामत रिसांऽरि सांऽनिसा धनिभरि सांसानिनि पगऽप गरिसासा, गगसासा आदऽम हाऽदेव बीनऽब जाईपाई न्यामऽत खानपिया, सदारंग २ पपगग निनिपप निरिसांऽ | धनिपऽ सांऽधनि पऽसांऽ धनिपs करकर मदिखाऽ ईऽआऽ दमहाऽ आऽदम हाऽआऽदमहाड सो ऽनि 55 5 5 5 दे ऽव 5 SSSS सागसा गपग पनिध आऽद महाऽ देव M २ निसांनि रिंनिसां गरिसां पंगपं ।। गरिसां रिसारिं सांनिसा बीऽन बनाई पाऽई न्यामत || खाऽन पियास दारंग १ निधनि पगप निधनि, सांऽध | निपऽ सांऽनि, सांऽध करऽ करम दिखाई, आऽद | महाऽ देऽव, आऽद २ 3 निपऽ सांऽनि, सांऽध निपऽ | सो ऽनि ऽ महाs देऽव, आऽद महाऽ ॥ दे ऽव S । me

राग - देसी.
राग देसी.
--
रागांग विस्तार.
(१) सा , नि सा s, रि प ग 5, रि नि सा ; रिम् प 5;
म्
म्
म प ध प 5 ग् रिs; प गरि s, नि सा 5 ॥
म्
म्
( २ ) सा ग् रि सा 5 रि नि सा ; म प सा; रिम् 4 5
म्
रि म प ध प 5, म प गरि ; नि सा ऽ रिप ग् 5,
रि नि सा ॥
म्
( ३) नि सा 5; पनि साs; म् प नि सा रि सा s; ग् रिs
म्
म्
म्
नि सा 5; रि प ग 5, रि नि सा 5; म् प सौ s, पध
45; रिम् प ऽ नि ध प म प ग्ऽ रिs; रिम् पध
म्प गरि प गरि , नि सा 5 ॥
म्
म्
(४) म् म् ऽ प सांs, सां नि सां सां; L रि' सा 5;
नि
रि' सांs, नि ध प रि म प ध प म प ग रिs;
पग् रि, नि सा ॥

हिं. गा. क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक. स्वराविस्तार. सारि निसा 5; रिग् रिनि सा 5; रिप ग रिनि सा 5; रिम् पध म्प म्ग् रिनि सा5; सारि म्प धप सां षध म्प नि निसा 5; सारि म्प घप सा रिंगं रिसां पध म्प रि निसा 5; सारि म्प निनि धप म्प सौ, म्प निसां रिपं गं रिंमि सो, पध म्प रिग् सारि निसा ऽ ॥ नोट-इस राग की चलन टेरी होनेके लिए इस में घुमना फिरना ज्यादा नहीं हो सकता है. यह राग आसावरी अंग से भी गाया जाता है. यह प्रकार में लौंकिक अतिकोमल धैवत और निषाद स्वर का व्यवहार होता है. बाकी चाल ढाल सब एकसमान ही है. इस राग में स्वरों की सरल रचना करनेसे बरवा या सिंदुरा राग की छाया उत्पन्न होगी. यथा- Name सारि म्प निसां रिंगं रिंसां निध पम् नि सा. इस देसी राग के अवरोह में पंचम के जोड में तीन ध के जगह मृदु धू कभी २ लगाते हैं. यथाः-म्प ध्प ग्रि निसा. देसी-त्रिताल. गूढ गूंढ लावो रे मालनिया फूलंदा सहेरा, आज मारे घर माहन आये, रचहूं मैं फूलंदा सबहू सिंगार. नि गरे ऽ सा गूढ गं । सा म रिऽ नि । सा 5 सा 5 साऽ ऽ रि s| 5 5 वो | रे ऽ ऽ मा म् पध म्प ss लड निs ला 55 २ राग-देसी. म् SSS रिऽ ग 5 रि ss या 5SS S S SS sss फू म् म् प 5 प s लूंदा द म् सां 55 पनि ध पम् प ध पम् प ग रिs, म् रि s, रि| ग् रि 5 सा स 55s ऽ ऽ हे s| रा s s, गूढ गं 5 (अंतरा) रि नि । साऽ सा 5 सा 5 s, म्म् प ऽ प ss वो रे । s, आज मो 5 सी सां सा ss नि 5 सा । सा ऽ ऽ नि | 5 सा ऽ रि' घ S SS ss मो ऽ ह ला 5 SS SSS S सां हूं मू सां sss नि नि सा । पS पध म्प गम आ555 S S S S ये ऽ ऽ रच ss मैं सा पऽ सांs नि सा पनि पनि | पs प 5 5 नि म प ध प फूड S S S लूं S दा55 स बहू 5 सिं ग S SS रिऽ ऽ नि | सा सा s, सा ग् रि 5 सा s, गू। ढ गूं गाSSS S SS S 5 ho स्थायी. लाssss s, रिरि सारि । रिसा निसा, धध पध । धप म्प, सिं सांरि रिसां निसां, पध म्प । ग्रि निसा रिप ग् । रिनि सा , गूं । ढ गूढ ला sss | निसा रिम् पघ म्प । निसां रिंगं रिसां निसां । पध म्प रिम् परि मू म्प रिम् पध म्प । गरि निसा रिप ग् । रिनि सा 5, गूं । ढ गूढ हिं. गा. क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक. मं ला sss । रिम् पध म्प सां। निसां रिसां रिपं ग । रिनि सां, पध म्प -- भू सांरिं निसां पध म्प । ग्रि निसा रिप ग् । रिन सा 5, गूं । ढ गूढ ला sss | S, पध म्प नि । निसा, रिरिं सांसां पध । म्प ग् िनिसा, पंधं मपं गरि निसां, सांनि । अनि घ, धप ऽम् । ग्, नि नि , गूं । ढ गूंढ लावो रे अंतरा. " आज मोरे: घ 5 s sis s s sर s, गंगं रिंगं । गरि निसां, पध पप धप म्प, ग्ग् रिग् । गरि निसा, रिम् पध । म्प सा s, आ । ज मोरे सांsss | ss, रिंगं सांरि । निसां पध म्प रिग् । सारि निसा, साम् रिप घsssss, म्ध पसां निरं निसां । रिपं ग रिंनि सां, । पघ म्प सा, आ । न मोरे - घsss | s.s, पनि सांप निसां पनि सो पघ । म्प, रिम् परि म्प रिम् प ग्रि निसा, । रिसा मरि पम् धप । सो ss, आ । ज मोरे घऽ, सांरिं सांरिंगनिसां निसां, पध पध,म्प म्प, रिग् रिग्,सारि निसा, रिम् पध म्प सा, पनि सांरिं । गंग रिंग गरि निसां । पध म्प सा, पध । म्प सा, पध म्प १ २ af sss बोलताने. "गूढ गूढ रिम् रिम् पम् पम् | पध पम् पम् ग्रि ) म्प सांप धप म्प । पिम् नि ऽसा गुंड ढगू ऽढ लाऽ | वोऽ रेमा ऽल निऽ यांऽ फूलं ऽदा सेहे | राऽ गूं ढगूं 5;

राग-देसी. ३१७ १ ૨ 3 ला S S S रे S SS साम् रिप म्ध पसां निरिं निसां पध म्प गरि, मग रिग् साम् ग्रि ग्सा म्ग् रिग् गूंढ गूंढ लावो रिमा लनि याफू लोंदा सहे राज, गूढ गूंढ लागूढगू ढला गूढ गूंढ रि s नि । सा 5 सा 5 सा sss सां s s| सा ऽरिं नि सा s वोs s| गूं ऽढ गूं ढ परि नि सा रिम् प ऽध म् प गरि म् ग्रेि ऽसा मा ल ऽनि या फूऽ लो ऽदा स है | राड यूं ढगू ऽढ रि नि । साऽ सा SS ss वो 5 प ऽध ला ऽवो SSSS HT SSS S SS ला SSSS म्ऽ रिप ऽम् धs | पसां ऽनि रिंऽ सांरिं । स्पं गंड रिंसां sप धप म् गरि ऽसा गूंऽ ढगू ऽढ लाऽ वोरे ऽमा लऽ नियां | ऽफू लोंऽ दास ऽहे राऽ गू ढगं ऽद्ध रि नि । सा 5 सा रिम् पध ऽप म्प s वो 5 रे s s s गूढ गूढ ऽला वोरे सा 555 ला 55 S 5 १ ૨ पसां निसां sप धपम्प म्म् ऽग रिसा/रि, म्ऽ गरि ऽसा | रि, म्ऽ गरि.ऽसा माल नियां ऽफू लोंदा सहे रागू ऽढ गूंढ ला, गूंऽ ढगू ऽढ ला, गूऽ ढगू ऽढ अका रि 5 नि. सा 5 सा 5 ss वो साssss s s s SS S s S S SS ला 55 S सांरिसां निसांनि पधप म्पम् । रि िपम्म् धपप सांऽऽ गुंड गूऽढ लावोरि मालनि याऽऽ फूलोंदा सऽहे राऽऽ १ २ म्ऽग् रिऽसा रिनिसा, म्ऽग् रिऽसा रिनिसा, म्ऽग् रिऽसा || रि गूढ गूडट लावोरे, गूडढ | गूढ लावोरे, गूढ गूढ ॥ o

३
हिं. गा. क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक.
राग बरवा. ----
रागांग विस्तार
म्
(१) सा; रि गरि सा 5; रिम् पध म्प s, रि गरि साऽ
रि नि सा ॥
म्
म्
(२) रिम् पs; रि म प ध प 5 रि म प नि ध प रिम
म्
म्
पध् म्प रि गरि साs, रिनि सा ॥
(३) म् ऽ पध, नि सां सां 5 ( अथवा ) म पनि नि, सो ऽ
सा सांs; निसां रिंगं रिसा, नि धनि ध प म प
म् प ध
रि'सा, रि नि ध प 5; सा, रिम् 5, रिम् पनि,ध
म्
45, पध् म्प रि ग रिनि साऽ ॥
स्वरविस्तार.
(१) निसा रिम् नि निसा 5; निसा रिम् पध (अथवा पध्) म्प रिंग
रिनि सा 5; रिम् पनि धप म्प रिग रिनि सा 5; रिम् पध सांनि धप रिम्
पघ मग रिग रिनि सा; रिम् फ्ध निसां रिंसां निनि धप पथ् म्प रिम् रिनि
सा; म्प निसां सिं रिसां सिंनि धप रिम् पनि धप म्प रिग रिनि सा 5॥

- (२) रिग स्सिा रिनि सा ; रिग रिम् गरि सारि निनि सा s; निसा रिम् पय म्प गरि सारि निनि सा s, रिम् पनि धप मग रिग् रिसा रिनि सा5; म्प निसां रिंनि धप मग रिसा रिनि सा5; म्प निसां गरि गंसां निध पम् गरि निसा 5; म्प निसां रिंगं रिम् गरि सारि निसां धनि पध म्प गि गसा रिनि सा ॥ मोट-काफी, सिंदुर तथा देसी राग के संयुक्त रूप है. अताई लोग इस में तीन गांधार का भी व्यवहार करते हैं. बरवा-एकताल ( विलंबित) ऐरी मोहे नाहि परे चैन, तरपत हूं मैं परी. विमनरंग पिया अजहु न आये, आंसू लागी झरी. मू S ग् । सारि पम्प S s मोऽहे। रिs ना गरि सा हिं प रे रि ऽरि नि सा S S s 5 सा S न ४ रि रिम् म् / पक|सा नि ध मनु | 3 SS म प ध नि म् रिम् पध ग् रिs, रिरि री SS $/s, ऐ री 5 सारि पम्प 5 मोऽहेड हिं. गा. क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक. S S रि ना " (अंतरा) मम् वि म S ग रिसा । Sहिं प S S पधा s नरें S S S S मू s रिम् म् नि सौ । सा सा रि सारि नि ध प 5 ग पि या हुन आ रि सा 5 ध । सो नि ध प यां सू ला S झ धनि म् रिम् | पध म् ग् |रि, रिरि ग | सारि पम्प री 5 SS s, ऐरीs s मोऽहे. S S S गी 5 SS स्थायी. ना ऽ । हिं प । रे ऽ । रिम्पध म्पग्रि, । रिम्पध सांनिधप । ૨ म्पग्रि, रिम्पनि ॥ सांरिंगप्रिं सांन्धिप । रिम्पनि धपम्प । ग्रिऽग् रिनिसाऽ । ऐरी मोहे नाहिं परे रिम्पध म्पनिसां । रिंगंसारिं निसांधनि । पधम्प रिग्रिनि । सारिम्प रिम्पनि । o 3 ४ सांरिसांनि धपम्प । रिणिनि सा । ऐरी मोहे नाहिं परे ० रिरिसा रिनिसाऽ। रिम्पनि सारिंगरिं । सांसानिनि धधपप ॥ रिम्पान् घपम्प | ३ ४ ર सांरिंनिसां पधम्प । रिणिनि सा । ऐरी मोहे नाहिं परे रिरिरि म्पमम् । पधपप धनिधध। निसांनिनि सांरिसांसां ॥ रिंगिरिं सांनिधप । रिम्पान धपम्प । रिग्रिसा रिनिसाऽ । ऐरी मोहे नाहिं परे उ ४

राग -शुद्ध सारंग.
अंतरा "विमनरंग पिया"
3
सांरिसांगं रिसां निसानिरिसांनि घनिधसांनिध,पध पन्धि पारित्रिम् ग्रि, सारि।।
साम्रिसा, निसारिम्। पनिसारिं मगरि । सानिधप रिम्पध । म्परिग् सारिनिसा ।
विमनरंग पिया
रिमरिं सांगिसां । निरिसांनि धसांन्धि । पन्धिप रिनि । साग्रिसा, सामरिप।
NAM
२
૨
म्धपसां निरिसांगं । रिम्गरिं सांरिंनिसां । रिंनिसांड, धनिपघ । म्परिग् सारिनिसा।
विमनरंग पिया
सांरिसां निसांनि । धान्धि पधप । म्पम् रिनि । सारिसा रिनिसा, ॥
रिरि म्पम् । पधप धन्धि । निसांनि सांरिंसां । रिंगंसां रिंनिसां ।
विमनरंग पिया, इ. इ.
* राग शुद्ध सारंग.
--
रागांग विस्तार.
(१) सा , नि सा रि ; रिपम् रि5; ध प 5, मप धफ
म् रिपरि , नि सा ॥
(२)म् पनि साऽ, पनि सा; धप मप सा; नि सा रिs;
म् म् रि; प म रि ; नि नि पम् रि s; मप ध 5, पम्
रि ; प रि s, नि सा ॥

हिं. गा. क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक.
म्
सू
(३) सा, रि १५ प म रिसा, नि प;
मऽध रिरि म प ध प म रि,
पम् रिम रिरि सा ।।
(३) म प सा 5 सा, नि सो ऽ रि'रि' सा; नि सां रि',
म रि'नि सांs; धप मप सानिधs 45; मप धप
त्रि , रिम् पम् रिपरि ; रि 5 सा ।।
स्वरविस्तार
सारि निसा 5, रिम् रिनि सा; रिरि मप धप मप रि निसा 53
रिम् रिप मप धप निनि पम् रिसा निसा 5; रिम् रिप मप साँ निसां निप मरि
ऽसा 5; म्प निसां रिसां निसां धप मप धप रि परि ऽसा S; रिरि मप निसां
रिमं गिरिं सांसां निप मप धप मरि परि ऽसा ॥
शुद्ध सारंग-एकताल.
माई रि मैं कासे कहूं पीर अपने जिया की, व्याकूल होवत शरीर.
जा को लगी सोहि एकहुं जाने, कहो कैसे रहे अब धीर.
सा रिम्
मा ईरि मैं
प । म प
का 555
घ प
से 5
फ्ध पम् | पम् रि; 5 सा
कऽ हूं 5 पीड र
पी
स
४
*

- शुद्ध सारंग. नि नि | सारि पप s जि म् रि S 5 सा s की नि 5 या 55 S s नि | सा सा सा रि| म रिसा ब्याड हो । व 5 त रि पपरिम् | सा रि नि सा, सा रि म् रि शरीs 5 , मा रि मैं *(अंतरा) म् पनि | प नि । सां सां नि सा 5 सा जा को S ल गी 5 सो s हि S S S S नि सारि रि s हुंजा स सोध | नि प in a S ने 5 म् रि सा | नि सा s S र ब रि प रिम् सा| रि नि सा, | सा रिम् रि घी 5 S S S S मैं स्थायी. रिम् रिप । मप धप । मप सां । धप मप । रि निसा | सारि मरि ॥ माई रिमैं कासे कहूं पीर म्प निसा । रिम् रिसा । रिरि मप । धप मप । निसां रिम् । रिसां निसां।। । 'निसां रिसां । निप मप । धप मरि । परि ऽसा । ऽरि निसा । माई रिमै ॥

हिं. गा. क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक.
का। मप धप । मप धप
। मप सां । निध ऽप । मप निनि ।।
पम् रि, । मप धध । पम् रि,। परि ऽसा । ऽरि निसा, । माई रिमै ॥
का ऽ । धध पध। धप मप । सांरिं सांसारिसां निसां । रिम रिरि ।।
म् सांसी। निनि पनि। निप मप । धप नि । परि ऽसा, । माई रिमैं ॥
अंतरा " जा को लगी सोहि
सांरि निसां । पध मप । रिम् सारि। निसा पनि । सारि निसा । रिम रुप ॥
मप धप । मप सा, । मप धप । मप सां, । मप धप । मप सां ॥
जा को लगी सोहि
रिरिं सांरिरिंसां निसां । धध पध धप मप । रिरि सारिरिसा निसा ।।
साम् रिप । मध पसां । निरिं सांम् । रिसां निसां । धप मप । सां॥
जा को लगी सोहि
।
निनि पनि।निप निन्।िपम् रि, । पम् ऽरि । मरि ऽसा । ऽरि निसा ॥
रि मप । धप मप । निसां रि' । म ऽरि । सांनि धप । मप सा॥
जा को लगी सोहि
पनि सांप निसां पनि।सारिं निसां । पध मप । रिम् सारि । निसा ॥
निसां रिनिसारि निस।रिम रिसां । निसां पर । मप रिम् । सारि निसा ॥
।
१
२
3
सारि साम् । रिम् रिप । धप मम । सो, धप । मप सां, । धप मप ॥
सां।

राग-मिया का सारंग.
३२५
राग-मीया का सारंग.
रागांग विस्तार.
नि नि
(१) सा , नि सा 5; प ध नि 45; म पऽ निध निध 5,
प
नि
नि सा; नि सा रिs; म् रिs; पम् रि ऽ सा 5 ॥
नि नि
(२) सा रि , म रि , म प ध ध नि पs; साधs
नि प 5; म् प म रिपरि 5 सा 5॥
नि नि
(३) म प, ध ध, सां 5 सा s, सां रि' सामरिसांs,
नि
नि नि
रि' सां नि 45; म प ध ऽ रि' सा s, ध ध नि पम् प
म् रिs; म प 5, 45, ध प म रि5; पम् रिs; सा 53B
नि
धु पम्प, नि पध सा s, सा रि साऽ ।
स्वरविस्तार.
निसा रिसा 5; निसा रिम् रिसा 5; निसा रिम् पम् रिसा 5; निसा
रिम् पध पम् रिसा निसा ; निसा रिम् पध निप रि सा; निसा
रिम् पनि धनि सां 5, निध निप मरि सा; निसा रिम् पनि धनि सारि
निसां धध निप म्प मरि सारि निसा 5; निसा रिम् पनि धनि सांरिं निसां
मुंम् रिसां निप म्प धप मरि पम् रिसा निप म्प निध निसा ऽ ।

३२६ हिं. गा. क्र.पु. मा. चतुर्थ पुस्तक. माया का सारंग-एकताल दयानिधि दया करियो अष्टसिधि नवनिधि, जो सब विधि सुख पाऊं. - दयानिधि जीवन मुक्त कर, हर दुख दलिद्र, पतित पावन तेरो ही जस गाऊं.- दयानिधि 5 सा नि धरि सा या नि धि ४ नि सा ध/5 नि द या नि नि मप सिड S en -a Sक ० सा सा | सा रि5 सा | सा 5 सा 5 | सा रि सा रिम् म् धि न व नि 5 धि जो इस ब बि धि रि सा सु या 5 a पघ पम् | रिसा, 5 सा निघ ख पा 5 ऊं, s द नि घि (अंतरा) नि पध | सो रिसा | सांs | सां सां रि' सा जी 5 व न मु क्त । ला सां सां सां नि प लिs -- पघ सा S S S प प प नि द्र पति त नि gs धरि S रो सारि सां सां नि प पा 5 व न S s सा ही S म् । 5 रि सा, 5 सा| नि धरि सा नि घि जस गा 5 ऊं, या 5 राण- मिया का सारंग स्थायी. म्म् रिम् ।रि मम् । रिसा निसा, । निनि पन्।ि निप निन् ि। पप मम् रिसा निसा, । रिरिं सांरिं ।रिसां रिंरिं । सांसां निध । निनि पम् । रिसा निसा, निध निप । मप निध । निध निसा । दयानिधि पनि धसा । निरि निसा, । पनि धसा । निरिं साम् । रिसा निसा, । पनि धसा निरि साम् । रिप रिम् । सारि निसा, । पनि धसा । निरि साम् । रिप मनि म्प रिम् । सारि मिसा, । पनि धसा । निरि साम् । रिप मनि । धनि सा धध निप । म्प रिम् । सारि निसा । दयानिधि रिरि सासा, । पप म्म् । रिरि सासा, । निनि पप । म्प म्म् । रिरि सासा, । रिरिं सांसां । निनि पप । म्प म्म् । रिरि सासा, । निसा रिम् । पनि धनि, सांसां निध । निप मम् । रिरि सासा । दयानिधि निसा रिम् । रिसा, रिम् । पध पम्, । पध निसां । निध, निसां ।रिम् रिसां, रिम सारिं । निसां धनि । म्प रिम् । सारि निसा, । सारि निशम्प म्प धप धनि । धनि सां। रिरि निसा । दयानिधि अंतरा "जीवन मुक्त कर हर Hary धनि सांघानिसां धनि । सांरि निसां । धध निप । रि निसा, । निसां रिंनि सीरि निसां । रिम् रिसा । धध निप । मरि निसा, । सांरि मुसी।रिम् सांरिं हिं. गा. क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक. स्पं मरि । सांरि निसां । धध निप । मरि निसा, । रिम् पनि । धनि सां। जीवन मुक्त कर हर स्में रिसां । निनि सांरिं । सांs, । निनि पम् । रिम् पध । पऽ । मम् रिसा । निनि सारि । साs, I निसा रिम् । पनि धनि । सा॥ जीवन मुक्त कर हर म् रिम् । मरिं सांसां, । रिरिं सांगिरिंसां निप, । म्म् रिम्।मरि सासा, मम् रिसा । पप रि । निनि पम् । सांसां निध । रिरिं सांनि । म रिसा धध निप । मम् रिसा, । साम् रिप । मनि धनि । सा, मन् ि। धनि सां ।। जीवन मुक्त कर हर निसां रिंधानिसां पधानिम् पध । रिम् पसा। रिम् निसारिध निसा - साम् रिसा । रिप मरि । मनि पम् । पसां निप । निरिं सांनि । सांम् रिसा १ सांम् रिपं । रिम् सांरिं । निसां धनि । म्प रिम् । सारि निसा,। साम् रिप २ ३ मनि धनि । सा, साम् । रिप मन् ि। धनि सा, साम रिप । मनि धनि सा ऽ ।

राग-सहा.
३२९
राग सुहा.
रागांग विस्तार.
म्
(१) नि सा 5, ग 5 : 5; प ग 5, म् रिs, साऽ ॥
(२) सा , नि सा ; नि.म.प सा पनि सा 5;
म् रि सा 5; प ग , म रि सा 5; निप म्प ग् ; रि
म्
सा॥
म्
(३) नि. सा; रि नि साऽ म् ; प ग् म् ; नि पs साs,
निप म्प ग् म् 5; नि प ग 5; म् रिऽ सा 5 ॥
सां
(४) म् प पऽ नि प सा 5; नि सो रि' (किंवा ग्) मरि'
म्
सा; नि सारिरिसोड, नि सां नि प; म प ग म ,
म्
प सा 5; निप म्प ग् म् s; रि रि सा 5
स्वरविस्तार.
निसा गम् रिरि सासा 5; निसा गम् पप ग्म रिरि सासा 5; निसा
गम् पनि म्प गम् रिसा 5; निसा गम् पनि पसां निप म्प गम् रिसा 5;
निसा ग्म् पनि सांरि निसां निप गम् रिसा 5; निसा गम् पनि सांरि म रिसां
निप म्प गम् रिसा ॥
२०

हिं. गा. क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक.
आरोह में गांधार के बदले ऋषभ स्वर भी लगाते हैं.
यथाः
amawon
निसा रिम् पनि म्प सांरिं मम् रिसां निसां निप म्प गम्
रिसा॥
कभी २ अवरोह में मृदु वैवत स्वर अल्पसा लगाते हैं. यथा:-
सांरिं निसां न्धि निप गम् रिसा.
आरोह में मृदु धैवत स्वर का व्यवहार करने से अडाणा राग की छाया
उत्पन्न होगी यह अवश्य ध्यानमें रखे.
सुहा और नायकी ये दोनों समप्रकृति के राग है. सुहा राग मध्य
दिन को गाते हैं और उस का पूर्वाग प्रबल है. नायकी राग मध्य रात को
गाते हैं और उस का उत्तरांग प्रबल है, यह दोनों का विशेषतः भेद है. ये
के अवरोह में
मृदु
धैवत का प्रयोग उपरोक्त स्वरविस्तार में लिखे
अनुसार अल्पसा होता है. सुहा राग से अलग करने के लिये नायकी राग में
दोनों राग
कभी २ " सा रि नि सा, रिप ग, म् रि सा” ऐसी स्वररचना की जाती
है, जो सुहा राग में नहीं. बाकी सब सुहा राग के तुल्य समझना. ये दोनों राग
के स्वरविस्तार, तानादि एकसमान है. सुहा, सुघराई, नायकी, देवशाख,शहाना,
दरबारी, अडाणा, मीयांमल्लार, बहार, इत्यादि कानडा के विविध प्रकारों की
अवरोही की स्वर रचना एकसमान ही है. यथाः
muman
(१) म रिसां निनि पम् गम् रिसा. (२) ममं रिसां निप म्प
गम रिसा.
(२) म रिसां निध ( अथवा धध) निप गम् रिसा.
(३) सांरिं निसां धनि म्प गम् रिसा.

राग-सुहा. अवरोह में मृदु धैवत भी इसी प्रकार अल्पसा लगाते हैं. अवरोह की स्वर रचना वक्र होनेसे इसमें घुमना फिरना ज्यादा नहीं हो सकता है. सुहा, सुघराई, देवशाख, नायकी और शहाना कानडा के आरोह की स्वर रचना नीचे मुजबः sampus ( १ ) निसा रिम् पनि म्प सा (२) निसा रिम् पनि सा. (३) साम् रिप मनि पसां. (४) मरि पम् निप सा.) सारंग अंग. (५) निसा गम् पनि म्प सा. दरबारी, अडाणा, मीयां मल्लार और बहार ये चार प्रकारों के आरोह की स्वर रचना का खुलासा आगे दिये हुए उनके गीतों का अभ्यास से होगा. सुहा-एकताल. उन पर जैये तुवे ममदसा दरबार निझामदीन सुजान. धवल कलस पर बलबल जये, कुरबान निझामदीन सुजान. म् नि नि पम् प म् म् रिसारिs सासा वेड S मंड सा Sद र २ म्भ म् प S साग 5 |म उनि पम् नि प बाड र S झाड म S S सां ऽ।ऽ नि | पम्प म्प निप | ग् दी 5 5 सुजा न v नि । न S S SS हि. गा.क्र. पु.मा. चतुर्थ पुस्तक. * (अंतरा) 444 Sक म् प नि | नि प नि प ( सा सौ) रिनि सा सा 5 पड़ डर सां नि नि साँ) निरिं] ऽसां सांरिं नि सा 5 |नि प जैs Sऽव S ल य S S प म् पनि सौ गं 5 S | म / नि रि s ये 5 | सां नि उ न S S सांड s नि | प 5 न नि नि -- प 5 झा पम् नि प नि म 5 SS सा दी । ऽ नि | प ० ० मू म्प निप | ग 5 जाSS S म् । न न SS स्थायी. " तुवे मंमदसा दर निसा गम् । रिरि सासा, । निसा गम् । पप गम् । रिरि सासा, । निसा गम् निनि पम् । गम् रिसा, । निसा गम् । पनि म्प । सां निन् ि। पम् गम् तुवे मंमदसा दर निसा गम् । पनि सांरिं । निसां निन् ि। पम् गम् । गिर सासा, । निसा गम् पनि सांसां । म रिसां । निन्नि पम् । गम् रिसा, । निसा गम् । निप गम् तुवे मंमदसा दर निसा गम्, । निध निप । म्प गम्, । सांरिं सांध् । निप गम्,। म रिसां निध् निप । म्प गम् । रिरि सासा, । गम् पनि । म्प सां । निप गम् तुवे मंदरसा दर

राग-सुहा.
तु ऽ । वे ऽ । मं 5 । म द । गम् रिसा, । पप गम्
रिसा, निन् ि। म्प गम् । रिसा, रिरिं । निसां नि । म्प गम् । रिसा, मम
रिसां नि । म्प गम् । रिसा , । निसा गम् । पग् ऽम् । निपं गम्
तुवे मंमदसा दर
निसा रिसा । S, निसा । रिम् रिसा, । निसा रिम् । पनि म्प । गंम् रिसा,
निसा रिम् । पनि सांरिं । सांनि पम् । गम् रिसा, । निसा रिम् । पनि सारि
गंमं पंगं । मंरिं सांसां । निप म्प । गम् रिसा, । निसा गम् । पग् ऽम्
तुवे मंमदसा दर
।
अंतरा.
धवल कलस पर
रिरिं सांसां । ध्ध निप । म्प गम् । रिरि सासा, । म रिसां । ध्ध् निप
म्प गम् । रिरि सासा, । निसा गम् । पनि म्प । सा, पनि म्प सा
घवल कलस पर
निनि पनि। निप निन् ि। पम् गम् । रिसा निसा, । रिरिं सांरि।रिसां रिरि
सांनि पम् । गम् रिसा, । म रिम् ।मरिं मम । रिसां निसां । निप म्प
गम् रिसा, । निसा गम् । पनि म्प । सो, निसा । गम् पनि । म्प सा
धवल कलस पर
रिरिं निसां । नि मप । गम् रिसा, । म रिसां । निसां रिंसां । नि म्प
गम् रिसा, । पंपं गं । रिंसां निसां । धनि म्प । गम् रिसा, । निसा गम्
१
उ
पनि मप । सा, निसा गम् पनि । म्प सो, निसा गम् । पनि मप
सा।
Hamay

३३४
हिं. गा.क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक.
राग सुधराई.
Liye
रागांग विस्तार
मू
म्
(१) नि सा s, रिम् ऽ 45, ग् म् ऽ रि s, सा; रिनि
साs, रिम् म् पऽ॥
मूमू
(२) साs, रि ग ग म रि, सा; नि ध नि प;
म् पऽ सा 5; रि s सा 5; म् ग् ऽ म् रि s, सा 5॥
नि नि
(३) नि सा s, रिम् । म् 45; ध ध नि 45; प ग म्
रिs, सा रिसा॥
म्
म्
(१) म पनि प सां 5 सांs, रि' रि' सां; नि पनि
मं
ग्
साs, रिम रि' साs, नि ध नि 45; म् म् ऽ ऽ
नि
सो , ध नि 45; ग म ध प 5, ग् म् रिसा ॥
म्
म्
स्वरविस्तार.
निसा रिम् रिसा 5 निसा रिम् पनि म्प गम् रिसा 5; निसा रिम्
पनि म्प सा ऽ निध निप गम् रिसा 5; निसा रिम् पनि मप सांरिं निसां निध
निप गम् रिसा s; निसा रिम् पनि म्प सांरिं मम् रिसां निसां धध निप गम्
रिसा ॥

राग -सुधराई. सुधराई-झपताल, मेरी मदद दद करो या शाह मेरे, दुख दलिद्र अलियो नबी तेरी बिनती करत हूं, सदका हसन का छुवत चरण तेरे. लेद दूर करो सुख दो घनेरे. म् म् म् धप 5 म्प नि पम् | रि रि साम् 5 ग् ग् म् रिसा नि सा ऽ में 55 री मदद करो ऽ या शाह | मेs SS chem २ म् सां नि नि सा रिम् म् । म् प|| पनि सां 5 रिं सांप नि म् प दु ख दलिद्र दऽ के रोs सु ख | दो ऽघ | ने रे ss *( अंतरा) म् प नि सां नि सां नि सा s सा || नि सा रिम रिसा सा पनि प अलि यो ऽ न बीते ऽरी बिन ती ऽ क र त Jहूंss सां सा नि निनि पम् | रिम् म् प प ध म पाप रि सां निसारिं सांरि सो पनि म प छीव त च रऽऽ नऽ ते ऽरे's s सदकाऽहसनाका छवत स्थायी. " मेरी मदद करो" निसा रिसा, । निसा रिम् रिसा, निसा रिम् । पनि म्प गम् रिसा, निसा । रिम् पनि पसां । निप म्प । गम् रिसा s, । निसा रिम् । पनि म्प सांरि । म रिसां । निसां निनि म्प ।। मेरी मदद करो निसा रिम् । प, म्प धध । निप, म्प । निसां धध निप, म्प निप । निसां रिसां धध । निप, मुप । निप निसां रिमें हि. गा. ऋ. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक. रिसां निसां । घध निप गम् । रिसा, निसा । रिम् पनि मप ॥ मेरी मदद करो ग्ग् भम् । रिरि सासा, पप । गम् रिरि । सासा, धध निप सुप गम् । रिरि सासा, रिरिं । सांसां धध । निप म्प गम् रिरि सासा, । म रिसां धघ । निप म्प । गम् रिरि सासा, साम् रिप । मनि पसां निसां । म रिरिं । सांसां निनि म्प ।। मेरी .... मेरे । अंतरा" आलियो नबी तेरी" s सांम् । गंमें रिसां, निसां । निरि सांन्,ि । पनि पसां निप, म्प नि । पम्, गम् रिसा, । निसा रिम् । पनि म्प सी । अलियो नबी तेरी पनि सांप।निसां पनि सांरि । निसां पनि । म्प ग्म् रिसा, निसां रिनि।सांरिं निसां रिम् । रिसां पनि । म्प गम् रिसा, । सांरिं सां।रिमं सांरि मपं । गंमें रिसां । निसां पनि म्प गम् रिसां, । निसा रिम् पनि । म्प सा, । पनि म्प सां । अलियो नबी तेरी निनि पनि।निप म्प गम् । रिसा s, । रिरिं सारि रिस निसा निप । म्प गम् रिसा, । ममं रिम्। सांसां निप म्प गम् । रिसा, रिरि रिम्।मम् पप । पनि निप सा । अलियो नवी इ. इ.

राग-नायकी.
राग नायकी.
रागांग विस्तार
म्
म्
(१) सा; रि नि सा s, रि पम् म् रि , सा :॥
प
(२) सा रिप ग्5म रिऽ सा; नि पs, ,म् प सा;
मू
म् मू
मू
म्
रिs, ग् ग् म् रिऽ, सा 5; म्प निप म्प ग्5 प ग् ,
म् रिऽ सा॥
म्
(२) नि. सा 5, रि पम् म् , म १६, प 5 सा; निप म्प सांs;
निप म्प ग् म् 5; प ग् म् 5, रि सा ||
(४) म् प नि प स 5 सा 5, रि नि सा रिपर, मरि'
म्
मं
म्
सानिप म्प सा s, निप म्प ग् म् 5; प ग , म रिs,
सा॥
स्वरविस्तार.
निसा रिसा 5; निसा रिम् रिसा 5; रिप गम् रिसा निसा 5; रिप
गम् निनि पम् गम् रिसा 5; रिप गम् म्प सा (अथवा ) साम् रिप मनि पसां
निनि पम् गम् रिसा 5; म्प निसां रिसां निसां निनि पम् गम् रिसा 5; म्प
निसां रिमं ( अथवा ममं ) रिंसां निप म्प गम् रिसा 5; म्प निसां रिपं गं
रिसां निसां ध्ध् निप म्प गम् रिसा निसा, मरि पम् निप सा ॥

हिं. गा. क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक. (२) निसा रिसा 5; निसा मम् रिसा निसा 5; निसा रिप गम् रिसा 5; निसा म्म् निनि पम् गम् रिसा; निसा म्ग् पम् निप सां निनि पम् गम् रिसा SB निसा रिप ग् म्, म्प सौ, म्प निसां रिसां निसां निप म्प गम् रिसा 5; मरि पम् निप सां, म्प निसां मम रिसां निप म्प गम् रिसा 5 ।। नायकी-त्रिताल. सजन बिन भई निरास हूं कहो सखी किस विध पाऊं दरस. कहत नायकी अपने जिया की रूज हरके दरस बिन निसदिन तरस. नि नि प प म् ज न बिन 3 म् प ग 5 भ 5म् ग् ग् म् पs नि म् प स 5 s नि ई ऽ नि | रा 5 स हूं| 5 क हो स खी sss २ ( अंतरा) म् म् म् प प ग कि स बि घ S घ म् | रि रि सा.,म् | म पनि प s पा 5 ॐ द र स Bha क ह त ना 5 म् नि सा 5 पम् प नि सा रि' रि' सां नि | प ग् म य की 5 अपने जिया कि रू ज ह र के ऽ द पनि प सां नि ५ ग् म् रिरि सा नि | नि प प म र स बि न | नि स दिन त र स, स ज न बि न निज राग-नायकी. स्थायी. मई 5 नि । निसा म्, निप गम्, । सांसां निप गम्, रिंरिं । सांसां निप गम्, स्म रिसां निप गम् , रिपं । गम् रिसां निसां निप । गम् रिरि सासा, स । जन बिन मई ऽ नि । मम् रिरि, पप मम्, । निन्नि पप, सांसां निनि । रिरिं सांसां, में रिरिं, पंपं गं रिरिं सांसां । निनि पप म्प गम् । रि रि सा, स । जन बिन भई ऽ नि । रा ऽ स हूं। ऽ, म्म् रिरि सासा । s, पप गम् रिरि सासा s, निनि पप । म्प गम् रिरि सासा । 5, रिंरिं सांसां निन् ि। पप म्प गम् रिरि सासा, साम् रिप मन् ि। पसां मम् रिसां निप । म्प गम् रिसा, स । जन.... सखी पनि पसाऽ, पनि।पसा निरि निसा,पनि। पसा निरि साम् रिसा। निसा, पनि पसा निरि साम् रिप गम् रिसा। निसा,पनि पसा निरिसाम् रिप मनि म्पागम् रिसा निसा,पनि पसा िित्र साम् रिप । मनि पसां 5, ग् । म् रि सा, स । जन .... दरस अंतरा"कहत ना नि साssss, सांरिं सांरि । निसां निसां पनि म्प | गम् रिसा, निसा गम् य की ssss, आऽ ss, आss S S S S S ऽम्, गम् पप ऽप, । म्प ििन अनि, पनि । सांसां ऽसांs, क । हत ना य की ऽ ऽ । पनि सांप निसां पनि । सांरि निसां निप म्प,। गम् पग म्प गम् पनि म्प गम् रिसा, । म्ग् पम् निप सौ । रिरिं निसां s, क । हत ना ३४० हिं. गा.क्र.पु. मा. चतुर्थ पुस्तक. य की 55 । निनि पनि निप नि नि । पम् गम् रिसा निसा, रिंरिं सांरि रिंसां रिरिं सांनि पम् गम् रिसा, मम रिम मरिं मम् ।रिरिं सांसां निनि पम्।गम् रिसा,निसा म्म् पग्ऽम्, गम् पनि । सांप ऽनि, पनि साम् । रिसां निसां s, क । हत नायकी, इ. इ. बोलताने ॥ सजन बिन" निनि पनि पम् पाम्ग् ऽम् रिऽ सासा सासा म्म् पनि म्प परिं सांरिं निसां निनि पम् सज नबि नभ ईनिराऽस हूंऽ कहो सखि किस बिधपाऊंदर सस जन बिन भई सारि ऽरि सारि मग सज ऽन बिन भई म् मप ऽम् निप म्प | परिं सांरि निसां निप | ग्ऽ म्सा रिसा, नि नि प प म् निरा इस हूं, कहो | सखी कि सबि ऽध पाऽ ऊंद रस, स ज नबिन म्ग् पम् निप सांनि रिंऽ सांरिं निसां निप निप म्प गम् रिसा रिसा ऽनि निप पम् सज नबिनम ईनि राऽ सहूं कहो सखि किस विध पाऽ ऊंद रस ऽस जन बिन म् प ग् । म् । ग् ग् म् प 5 नि म् प स sss s नि रा 5 स स हूं 5 क हो स खी 5 नि रा रिसां ऽरि निसां निप मग ऽम् रिसा निसा साम् गप मनि पसां निम् पनि निप पम् सज ऽन बिन भई निरा ऽस कहो सखि किस ऽबि धपा ऽऊं दर सस जन बिन म् प ग् ऽ म्| निप म्प म्ग् मग मग मरि सारि निसा निसा मग म्प गम् ss सऽ ऽज 5 नS बिs ऽन ईऽ ऽनि 5 रा म 5. भड राग-शहाना. म् S S म्प निप निसां निसां रिसां ऽरिं सांनि ऽसां | निप ऽनि म्प ऽनि | नि प पम् सऽ ऽहूं 5 कहो सखि ऽकि सबि ऽध पाऊं ऽद रस ऽस ज न बिन म म् पग्ऽम् ग् ग् म् प ऽ नि म् प सा रा 5 स हूं मं निसां रिपं गं 5 में रि' सां निप म्प सा 5| निप म्प ग् 5 सज नबिना 5 sम ई निरा ऽस निरा ऽस हूं s| कहो ऽस खि s मई ऽ नि S खी SS म् म् गम् निनि म्प ग् ग् म् |रि रि सा, नि नि प 5, मरि किस विध पाऽ ऊं| ssss ज न , सजन वि पऽम् निनिप सांऽनि म्पनि | सांरिम् रिसारिं सांनिसां निनिप बिऽन भईनि राऽस कहोस खिकिस विऽध पाऽऊं दरस १ म् निन्पि पऽम् पम्ऽ, निन्पि पऽम् पम्ऽ, निन्पि पऽम् पग्ऽम् | सजन बिऽन भईऽ, सजन बिऽन भईड, सजन बिऽन || भ ई 55|इ. इ. ॥ राग शहाना. -MAC- रागांग विस्तार. म् (१) नि साs, रिऽ ग् , म रिऽ साs; पऽ ग् म् 5; म् निप ग् म् s, रिऽ सा 5॥

हिं. गा. क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक.
म्
(२) नि सा s, रिम् रि सा 5; नि सा म् ; पग्म 5
नि प ग म , पसां नि ध नि प 5, म प ग म 5;
नि म्
ध प ग 5; म् रिऽ सा 5॥
(३) म पनि सा, सां नि सा नि सां, रिमरिसा
म्
नि पs; धम् पऽ प सा s; ध ध नि पऽ म् प ग 5;
म् रिऽ सानि ध नि प, धम् प प, सां । ।
स्वरविस्तार.
निसा गम् रिरि सासा 5; निसा गम् पग् ऽम् रिरि सासा 5, निसा
गम् पग् ऽम् निध निप म्प गम् रिरि सासा 5; निसा गम् पग् ऽम् निध निप
धम् पप सा , निध निप म्प गम् रिरि सासा 5 निसा गम् पनि पनि सारि
निसां निध निप म्प गम् रिरि सासा 5; निसा गम् पग् ऽम्, निप गम् पसां
ऽसां, सांरि निसां रिम रिसां निध निप म्प गम्, धप गम् रिरि सासा 5,
निसा गम् निध निप घम् पप सांऽ ।।
शहाना-झपताल.
गूंद ला मालन फूलंदा सहेरा,
आज बना बनरी को मुबारक.-गूंद
शाह कुतुबद्दीन ब्याहन चढिया,
बनिजी का बनरा सल्ले अलासलम्.-आज

राग-शहाना. नि ध | नि ऽ प धम् 45प सोऽन्धि नि पम् पगम् ।'s | दs लामा लs न |, फूलोऽ ऽदा स है | राss WHA २ म् आ5 जब नाब ब इन रक सां सा । ध प ग ऽ म् | रिs | सा ऽ सा | साम् म् प प म्प निप | ग्ऽ म् री 5 को ऽ मु बाss *( अंतरा) नि पनि सां सां सां निसां 5 सानि सां निसां रिं सां नि सा निध नि प. शाह 5 कु तु • बद्दी 5 नव्या 5 हs s न च ढि याsss म् नि ध । नि 5 | ध प | ग् म् पसां ध नि पम्प ग् ग् म् व निजी s का ब न रा ss|| स । ल्ले 5 अलाs सल ऽम् .... मुबारक नि म् म् সাল स्थायी " गूंद..... सहेरा" निसा गम् । पग् ऽम्, न्धि । निप म्प । गम्, सांरिं निसां निध निप । म्प गम् रिरि । सासा, निसा । गुम् पग् ऽम् ॥ गूंद ला मालन निसा मग । प, धध निप, । सो धध । निप, रिरिं सांसां धध निप । म्प गूम् रिरि । सासा, निसा । मम् पप गम् ।। गूद सहेरा है सहेरा BOAD निसा गम् । पनि पनि सांरिं । निसां मम् । रिसां निध निप, म्प गम् । धप गम् रिरि । सासा, सांसां । निप म्प गम् ॥ गंद साम् गम् । पान पनि साम् । ग्मं सांरिं । निसां धनि म्प गम् पग् । मरि सा, सांरिं । निसां निध । निप म्प गम् ॥ गूद । सहेरा

हिं. गा. क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक.
अंतरा.
शाह कुतुबदिन
सांरिं निसां । धनि म्प गम् । रिसा, मम् । रिसां धनि म्प
-
गम् रिसा, । निसा गम् पग् । ऽम्, निप । गम् म्प सा ।। शाह कुतुबद्दीन
मम् रिम मिरिं सांसां, रिरिसारि रिसां । निप, मम रिम
मरि सासा, । साम् गम् पनि । पनि सांरि । सांस रिसां निसां ॥ शाह कुतुबद्दीन
सांरिं सांनि।सांनि पनि पम् । पम् गमारिसा रिसा, निसा
मग म्पाम्प निप निसां, । न्धि निप । धम् ऽप सा ॥ शाह कुतुबद्दीन
रिरिं सांगिरिसां निसां धन्।िपध निप । म्प, गम् रिग
मरि गम्, । रिरि सारि रिसा । निसा, साम् । रिप मनि पसां ॥ शाह, इ. इ.
बोलताने.
धप
ऽप
नि ध नि ७ ५
धप ऽम् गम्
गूं । द 5 ला | गूंद ऽला | माल ऽन फूलों
ऽम् रिसा | रिन् ऽसा रि पग् ऽम् | मप निप गम्
ऽदा सेरा| आज ऽब ना बन री | लोमु बाऽ रक
नि ध नि 5 प | रिप म्ध
गूं द s ला | गूंद लामा
म्प सांघ निप
लन फूलों ऽदा
निप म्प
सेरा आज
गम् गम् गप | म्प नि
म्प ऽनि | धनि पम् गम्
बना ऽब नरी को ऽमु
TS ऽर क

80- नि घ -- ST पम् गम् | सारि साम् पम् | पनि सांम शहाना. नि । प रिंसां ऽरिं | सांनि ऽसां निध गू द 5 ला गूंद ऽला | माल निप ऽम् । ऽप ग् ऽम् | सांसां न्धि | न्प म्प गम् लोंदा ऽसे ऽरा ऽआ ऽज बना बन रीको मुबा रक म्ग् म्प म्प निध निप म्प सांनि | सांनि धनि पम् is sa I s FIS SAT Sल. ऽन फूड Sला 5 दाऽ ऽसे 5 राऽ ऽआ गूंद .... सहेरा S S जब सानि धनि | पम् पनि धनि पनि पम् पग मरि सासा 5 ना ऽरी कोमु बाऽ रक । ऽब न नि ध गू 5 नि । प धम् दला मा प, सांनिसां निधन ल, गूऽद लाऽऽ पम्प म्गम् | रिऽसा साऽरि पऽम् । परम् माऽल नऽफू | लोऽदा सेऽरा आऽज | बऽना बनरी पगम् निधन R पम्प म्गम् रिसा कोऽमु बाऽऽ रऽक गूंद .. सहेरा 3 १ मरिरि पम्म् | धनिप सांनिसां मंगमं । सांरिंसां निमोनि गूंदला मालन | फलोदा सहेरा आज बनाऽ बनरी - Hain २१ ३४६ हिं. गा. क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक. २ धनिप म्पम् गऽम् । सांरिसां निसांनि | धनिप म्पम् ग्ऽम् कोऽऽ मुबाड रऽक बनाऽ बनरी कोऽs मुबारक Morya ma २ सांरिसां निसांनि धनिप म्पम् गऽम् बनाs बनरी कोऽऽ मुबाऽ रऽक | गूंद ला. इ. इ. . * राग दरबारी. -- रागांग विस्तार. नि सा सा Panaunmunia नि (१) सा ऽ धूऽ, नि. प म पऽधू , नि नि सा 5; म् म् नि सा रि रि 5; सा रि ग ग 5; रिसा निध , नि रि सा॥ नि. (२) म्s, रिसा निसा रिसाधू , नि सा 5; नि रिऽ साs; म् नि. म्प नि सारि ग्s; S, निरिऽ सा; नि सा नि रिऽ रि ; धूऽ ग् 5; रिसा. निसा सिs, सा; नि.. सा नि रिऽ सा ॥

राग-दरबारी. ३४७ म् म् म् सां सां सां प सा सा नि नि नि ( ३ ) म् 5 4 5, ध् ध् ध् नि प 5; म्पनिम्प ग् 5; रिसा रिs, नि साs; 5 S, निरिऽ सा 5; रि पम् ; गम्पग्म् रि सा रि रिऽ सा S; नि नि रिऽ सा 5 ॥ नि नि (४) म् म् प प ध् ध् नि नि सां सां नि सा सा; साs नि नि 5; धनिसांरि निसांरिसां ध् 5, नि नि सांम्पनि नि सांरिंगं ; ध् S; नि रि's सा 5 में 5, रिंसांनिसां रिसांध् s, नि प 5; म प सांग 5; रिसा रि रि , सा; नि नि रिs, सा ॥ स्वरविस्तार (१) निसा रिरि सासा 5; निसा रिम् रिरि सासा 5; निसा रिम् पप गम् रिरि सासा 5; निसा रिम् पनि म्प गम् रिसा 5; निसा रिम् पध् निसां निप म्प गम् रिसा 5; निसा रिम् पध् निसां रिरिं निसां ध्ध् निप म्प गम् रिरि सासा 5; निसा रिम् पध् निसां म रिसां निप म्प गम् रिसा, निसा रिरि ध निप म्प साध निसा नि रि रिऽ सा 5 ॥ (२) नि सारि गग रिसा 5; टिन सारि पप गम् रिरि सासा 5; नि सारि ग् म्प सा s, ध्ध् निप म्प ग्म् रिरि सासा 5; धनि सारि गग म्प नि रिसां निप म्प गम् रिसा ; नि सारि ग्ग् म्प ध्ध् निसां रिरिं गंगं रिरिं सांसां ध्ध् निप म्प गम् रिरि सासा 5; धनि सारि ग्ग् म्प मं ध्ध् निसां रिपं गं मरिं सांसां ध्ध् निप म्प गम्' रिरि सासा, ध्ध निप मप मम् सा, नि सारि ग् गरि रिसा ॥ mean ३४८ हिं. गा. क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक. दरवारी-त्रिताल. बंधनवा बांधो रे बांधो सब मिलके मालनियां, म्होंमदशाह प्यारे के घर काजे. सदा रंगीली तानन सों बधावा गावो माई सोप साहब सोहाजे. ऽ पनि म sas ध न नि सा S S बांड ॥ RAM 3 मू म् ध्। सा रिऽ रि ग5 ग 5 रिऽ सा वा 55 S धो S S बां 5 धो ૨ नि साम् गम् रि रि सा ऽ निसा रिम् | रिसा निसा रिसा ध् नि पनि म प सऽ बड मिल के s माss लड नियांss s as ध न नि म् धू ऽ नि | सा रिऽ रि । ग ऽ ग्s s रि नि सा वाSSS 5 बां 5 धो S S S s म्हों म द म् नि ग् म् निनि पम् प गम् रिसा | रिसा निसा रिसा ध् नि पनि म प शाह ऽ ऽ प्या रेऽ के घऽ रऽ काs ज s बंड नि (अंतरा) ध् । नि सा 55 S म् म् ऽ म्प ऽ निम् प at S SS स दा ऽ रं गी 5 लीss S S --- S S S म् S -- सो ऽ निसां नि। | ग्ऽ म् प ! सा ऽ सा s रिऽ सा सा ai SS नन | सों 5 ब धावा 5 गा वो 5 मा 5 मा ई नि म् माने पम् | रि रि सा 5 | रिसा निसा रिसा रिसा निसा रिसा ध् | नि पनि म्प सो ऽप सा । हब सो ऽ हा 55 घ न ज s बंड राग-दरबारी. स्थायी." बंधनवा बांधो रे बांधो" निसा रिरि सासा,निसा ।रिम रिरि सासा,निसारिम् पप गरिरािसासा, निसा रिम् पध् निनि म्प ग्म रिरि । सासा, निसा रिम् पध् । निसां निप म्प गम् । रिसा, बंध न वा sss | Ssss | नि नि सासा रिरि सासा, । म्प गम् रिरि सासा, ध्ध् निप म्प गमागिरि सासा,रिरिं सांसाध्धि निपम्प गम्।रिरि सासा, निसा रिम् पध् निसां गंगू मम् । रिरिं सांसां ध्ध् निपम्प गम् रिरि सासा। नि , बंधन वा, नि म्पासारि निसा, नि म्पासारि साम् रिसा निसा, धाने म्प सारि साम् रिप गम् रिसा निसा, धनि म्प सारि साम्।रिप मनिम्प गम्।रिसा निसा, धनि मप सारि साम् रिप मनि । पसां नि म्प गम् । रिसा, निसा रिसा निध । नि, बंध न धनि साथ् निसा धनिसारि निसा धनि रिसा! म्प धनि सारि निसा सारिम्प ध निप म्प नि सांरिं निसां । मंगं ऽम् गग ऽम् । रिसा निसा रिसा निध । नि , बंध न वा बांधो रे बांधो me म्म् रिम् मरि सासा। निनि पनि निप म्प।म्म रिम् मंरिं सांसानिप म्प गम् रिसा, निसा रिम् पनि म्प । सारिं गंम् रिसां निसां । ध्ध् निप गम् रिसा । नि , बंध न वा अंतरा सदा रंगीली" ताsss | सांसां निप गम् रिसा, निसा रिम् पनि म्प । म्प नि सांरिं निसां निसां में रिरिं सांरिं । निसां पनि म्प सो। सदा रंगीली ३५० हिं. गा. क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक. ताsss | निसा रिम् पनि सारिं । सी, निध् निमां नि, । पम् पनि प, मा म्प म्, रि गम् । ग्, रिसा रिग रि, सानि सारि सा,रि | पम् न्यि सांनि रिसां मरि पंगं मरिं सांरि । निसां पनि म्प सी, । सदा रंगीली ताs55। सांरि गिरे, निसां सांसां, पनि नि नि , म्प पप, गम् म्म्, रिरि सासा, मम् गम्, निनि नि , । सांसां निमां, सिरं सांसां । सदा रंगीली ता 5 5 नन । सो ऽ ब धा । वाsss । म रिसां, रिरिं सांन्,ि सांसां निप, निनि पम् ।मम् रिसा,निसा रिम्।पनि सांरिंग्मे पै, । गंग रिसां निप म्प म् म् गम् रिसा, नि सारािग् म्प सा, नि ।सारि ग म्प सा, नि सारि ग म्प सा sss I sss s| सदा रंगीली, इ. इ. बोलताने. "बंधन" नि सा म् ध् नि म पनि ५ सा नि. सा नि रिसा ग् । म घ न वा 5 बांड धो रे बांधो नि । वा SSS या ग् म् प ग । म् रि निसा रिम् रिसा निमा रिसा निध | नि पनि म प सब 5 मिल के माऽ 5 लs निss 5 बंड धन नि रि रिरि रि | सा नि सा नि । ५ नि । ब ध न वा S S aj s 5 घा 5 5 S S नि वा SSS - १ म नि पसा नि रि सा | गम् १ गम् रिसा धनि म रे 5 सबमि ल के 5 मा5 लड नि | यां बंs घ न राग-दरबारी. नि सा ध् नि सा रिरि सा रिऽ रि | सारि गम् ऽरि ऽसा निम् ऽप गम् रिसा 5 बांधो बंध नवा ऽबां ऽधो रेबां ऽधो सब मिल arss S मग म्प म्प निध निसां ऽरि निसां निप | निम् ऽप गम् रिसा! धनि पनि म प केऽ ऽमा ऽ लनि यांऽ ऽमों मद साऽ प्यारे ऽके घर काऽ जेऽ बंऽ धन नि सा ध्ऽ नि. 5 सा रि 5 रि | म्ग् ऽम् पम् ऽप (निध् ऽनि सांनि सांस वाSSSS बांड ऽ बां 5 धो बंध ऽन वाबां ऽघो रेबां ऽधो सब मिल सा रिनि ऽसां नि प गंम् रिसां नि उनि पनि म्प गम् रिसा धनि पनि म.प केमा ऽल नियां मोऽ मद साप्या ऽरे केघ र काss बंड घन नि सा ऽ नि सा रि रिम्ग् पम् निप सांनि रिसां सां रिंनि सांध् 5 बांड बो | बंध नवा बांधो रेबां घोस बमि लके माल - वाSSS १ २ निप निम् पसां ऽनि |म्प गम् रि s |सानि म्प सा, नि.म्प सा, ऽनि .म्प नियां मोम दसा ऽप्या | रेके घर का s जेब धन वा, ऽबं | धन वा, ऽबं धन । सा मू सा सा 5 SS "" s रि 5 रि ग ऽ ग 5 | रिऽ सा 5 5 बां 5 घो । रे । SSS बां 5 धो ऽ वा SS 5 - नि । सां म रिसां निप म्प | स s s s ध् नि सा SSS 5 बंss धs नवा घडनडवा SSS S S 5 S SSSS नि सां सां धू s sनि सांरि निसां रिसां नि सांरि निसां रिसां | s s s | नि नि सा । बांघो 55 s s s बां 5 घो s म् म् नि SSS SSS नि सांरिं गं 5 ग 5 ग् s| ऽ निरि SSS सब मिल के 5 sss मा ऽ ल नि E low S S S S म S S ३५२ हिं. गा. क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक नि S सा SS S यांsss s रिसां निसां मा म द | रिसांध s|नि प ss HIS SSS S S55. म् प सां SS 5 | रिसा रि रिसा, नि म प प्या ऽ रे 555 ss के 5 का SS जे, बंड ध ना ग मू । घ.s नि । . सा रिऽ रि बां घो ग ग S रिऽ सा बांड वा SS S S SS S 5. ग्मंरिं सांरिसां निसांनि निप ) निम्प गऽम् रिऽसा रिसारि बंधन वाबांधो रेबांधो सब मिलके माऽल निऽया मोमद ૨. १ २ 3 म्गम् निम्प गम्रिसा, निमप | साऽऽ, निम्प साऽऽ, निम्प || सा साप्यारे केघर काऽजेड, बंधन वाss, बंधन वाऽऽ, बंधन वा राग अडाणा. म् म् रागांग विस्तार. नि (१) नि प ग 5, म्प सा 5; ध् नि पऽ; म्पनिम्प ग 5; म् I रिs, सा॥ नि (२) नि सा 5 रि (किंवा ग् ) म प ध्ऽ नि 5 रि's सो 5 गम्प s, म्पनि ऽ, पन्सिां 5, निसांkि s, सांनि सांनि ५६, निप म्प सा s; ग् s, म् रि , साs || म् म राग-अडाणा. प नि ( ३ ) म्प निप म् S, म्प सांs; म् 5 4 5 ध्s, नि s रि' साs; नि नि निसां ध् , नि प5; म्प निप सा , ध्ऽ नि 45; म्प म् सा सां सां सां मू ग 5; म् रिऽ सा; नि प ग 5, म प सा॥ नि मं (४) म प ध् , नि नि सां 5; रिसां निसां ग म रि' सा; नि निसां रिसां ध् s, नि नि सा ; निप म्प सांs; ग् 5, म्प नि नि सां5; सारि म्प सा; s, निनि सा; रिसां ध्ऽ, निरि नि सो में रिसां निरिं सांs, ध् ििन सां 5; निप ग् 5, सां म्प सा 5; नि 5 4s; म्प नि ग 5; म् रि 5 सा 5; म्प निप ग् 5, म्प सां ॥ रागांग विस्तार. (१) निसा रिसा 5; निसा रिम् रिरि सासा 5; निसा रिम् पनि म्प ग्म रिसा; निसा रिम् पनि म्प सा, निप म्प गम् रिसा S; निसा रिम् पनि सारि सांनि पम् गम् रिसा 5; निसा रिम् पनि सांरिं ममं रिंसां निप म्प गम् रिसा 5; निसा रिम् पनि सांरिं गंमें पंगं मरि सांसां निप म्प गम् रिसा, निसा रिम् पनि म्प सा॥ (२) निसा गम् रिरि सासा 5; निसा ग्ग् म्प गम् रिरि सासा s; निसा गग म्प ध्ध् निप म्प गम् रिसा S; निसा ग्ग् म्प ध्ध् निरिं सांसां ( अथवा) निसा रिम् पथ् निरिं सौs, ध्ध् निप म्प गम् रिरि सासा 5; निसा गग् म्प ध्ध् निनि सांसां गंम् ( अथवा मम् ) रिंसां ध्ध् निप म्प सा निप म्प गम् रिसा, निसा रिम् पध् निरिं सां॥

हिं. गा. क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक. अडाणा-त्रिताल. गगरि मोरि भरन नहिं देत, ढीट लंगरूवा मतवारो. जित जाऊं उत आडोहि दोरत, अब न रहूंगी तोरि नगरि. रि'नि 1: सां नि प प म् पसा ग गरि मो रि भ रिभर न न हिं नि निसां ध् । देssss नि पनि ऽनि त ढी ऽट म् पम् पम् ग् म् रिसा गरू वा म त S AME ૨ सा 5 S SS (अंतरा) नि रि sss ss | म प ध् नि । सा 5 सा सा चा 555 रो न त जाड ऊं 5 उ त नि सा म नि सां रि' सारि ध् नि प म् प नि सा रि'सा आ s डो हिदो ऽ र त अब न हूं 5 गी । सा । म र निसां रिसां नि निथ् नि सां, रि' नि सो नि पनि प म प सा तोऽ ऽ रिऽ नग रि, ग गरि मो रि भ र न न हिं स्थायी. देऽत,निसा म्म्।रिरि सासा, निसा रिम्।पग् ऽम् रिरि सासा,। निसा रिम् पनि म्प गम् रिसा, निसा रिम् । पध् निसां, ग ग । रि मोरि भरन नहिं दे ऽ ऽ त । निसा रिम् पध् निारें । सांनि पम् गम् रिसा, । निसा रिम् पथ् निसां म रिसां निप म्प । नि सा, ग ग । रि मोरि भरन नहिं राग अडाणा. देऽत, गम् रिसा, पनि पम्, निरं सांनि , गेम रिसां,पंपं गम्। रिसां निसां,रिरिं सांध् निप म्प नि सारें । निसां निसां, ग ग । रि मोरि भरन नहिं दे ऽ ऽ त । म्प निसां रिंग ऽम् । रिस निसां, रिरिं सांनि । नि सा, निनि पम् गम् प, म्म् रिसा । रिरि सा, ग ग । रि मोरि भरन नहिं । देऽत, म्प निसां । रिम पम् रिसां निसां । रिम रिसां निमां रिरिं। सांनि सांनि पनि पम् गम् रिसा, निसा रिम् । पध् निसां, ग ग । रि मोरि मतवारो ... अंतरा. " जित जाऊं उत आ ऽ डो हिऽ । दो ऽ र त । म्प नि सांरि निसां । म रिसां रिंध् निप म्प गम् रिसा निसा, । मरि पम् ध्प सा । जित जाऊं उत आ ऽ डो हिऽ । दो ऽ र त । ममं रिंरिं सांसां निन् ि। पप गम् रिरि सासा, सारि रिं म्प म्पाध्प नि नि सा । नित जाऊं उत रिरिं निसां नि म्प । गम् रिसा, मम रिंसाध्नि म्प गम् रिसा, पंपं मंम् रिसां निसां ग्नि म्प गम् रिसा, । रिम् पध् निरिं सां । जित जाऊं उत आ ऽ डो हिऽ । दो ऽ र त । सांसां निप म्प निसां । रिरिं सांनि नि सांसां निप म्प निनि पम्।पम् गम् रिसा निसा, म्म् रिसा निसा,निनि पम् गम्,सांसां निध, रिरिं सांनि, म रिसां, । रिरिं सांनि नि सा । जित जाऊं, इ. इ.

S तT SS हि. गा. क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक. बोलताने " गगरि मोरि भरन नहिं " नि नि निसां 5 5 ध् । नि प ।। सा रि म पनि ध् ध् नि देऽ ऽ SS ग गरि मो s रि म र नि सा रि' नि सा ध् नि, रि' नि । सां नि प नि प म प सां न न हिं दे 5 त, ग ग रि मो रि भ र न न हिं नि निसां ध् । नि प ।। s नि ध् नि as ss S त ग गरि मो s रिभ र सां नि धू नि । ऽनि ध् नि सा । म् ग् म् रि' सां रि's सां न न हिं दे ऽत ढी डट लं ग रूवा नि ध् नि रि' नि | सां नि, रि' नि | सां नि प नि । प म ५ सां वा रो ग ग रि मो, ग ग | रि मो रि भ र न न हिं निसां 5 5 सा गंमरिं सारिसां गगरि मोऽरि मरन नाहिं देऽत ढीऽत --- म् म् म् नि S S म त | निसानि निप मुगम् रेऽसा त सारिम् पनि | निसांन्,ि रि' नि | सां नि प नि | प म प सौ लंगरू वामत वाऽरो, ग गरि मो रि भर न न हिं म्म् रिरि, पप म्म्, निनि पप, सांनि धनि सांरि निसां नि प ग म प सा गऽ गऽ, रिऽ मोऽ, रिऽ भऽ रs नs | नऽ हिंड दे भ | र न न हिं नि निसां ऽ ध्ऽ | नि प ।। नि नि निऽ नि नि ! धनि ध्सां सांसां सांसां देऽ ssss त IT गऽ ऽग रिऽ मोरि | भर ऽन नहिं देत १ गंम् रिसां रिनि सांनि सांसां निनि सांनिपरि निसां निप रिंनि सांनि पनि पम् पसां दीऽ टलं गरू वा मत वारो गग रिमो रिंग गरि मोरि गग रिमो रिभ रन नहि राग-अडाणा. निसां 5 पनि प, रिर मो रि भ as sss s त, ग गं प म् पसा र न न हिं १ मुम गंम् रिंसां, रिरि सारिं सांनि, नि सारि। निसां : नि प ग म प सां गऽ गऽ रिs, भऽ / रऽ नs, नऽ हिंऽ देऽ ऽ त भर न न हिं २ म् निसां 5 नि देऽ ऽ त भर न न हिं ग् म् प सा निसां 5 नि पं देऽ ऽ त म ग् म् प सा न न हि निसांऽ ऽ सांप निसां रिऽ गिरि | रिसां निसां निध ऽनि ) गंम् ऽरिं सांरि ऽसां गग रीs 5 मोरि| भर नन हिंदे ऽत | ढीऽ ऽट लंग ऽरू देsss त निसाऽनि धनि रिनि सांनि पनि पम् पसा| सा, पनि पम् पसां सी, पनि पम् पसां वाम ऽत वारो गग रिमो रिभ रन नहिं| दे, तम रन नहिं | दे, तभ रन नहि नि निसा इ.५ / नि ५ । ।। ऽयं गेम रिऽ सांसां | Sसां ऽरि निसां नि देड sss ऽ त । । ऽग ऽग रीऽ मोरि ऽभ र नऽ नहिं ऽम् निनि निनि निन्न। ऽसां पनि ऽप पप ]रिनि सांरिं निसां रिंनि सांनि पनि पम् पसां ऽदे तढी टलं गरू | ऽवा ऽम ऽत वारो गग रिंग गरि गग रिमो रिभ रन नहिं निसां 5 45|नि पनि ऽनि नि निनि निऽ निऽ, नि निन्,ि ध्नि निनि, देऽ sss/5 त ढी ऽट म् म् नि सांरि रिरि रिरिं। रिरिं रिरिं सांरिं निसांििन सांड, पनि म्पाग्ऽ ग्ऽ,ग्म् रिसा नि रिऽ साऽ,रिरि म्मू । पप धूध निनि सा, ध्ध् निन्नि सां, ध्धानिनि सा, ध् नि न हिं सो sss । SG S S ३५८ हिं. गा. क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक. राग बहार. RANG रागांग विस्तार सा (१) नि सा म् s; म् प ग म 5; निप म्प ग् म् 5; पम् 5, म् रिसा ॥ (२) निसा रिसा निसा म् 5; गम् पग् म् 5; निप मप गम् ; म् म् निध निसां निध निप म्प गम् 5; प ग म् , रि सा ॥ नि नि (३) सा म् ; म प ग म् धs, नि सा 5; सांरिं निसां s, निप म् म्प ग् म् ; प ग , म रिs, सा ।। म् म् नि सां नि (४) ग् म् ध नि सा ऽ सां5; म् म रिसा , रिसां निसां म् म् नि धs; म् म् प ग्ऽ म् नि ध नि सां s, निप म्प ग्ऽ; म् ग् म् , रि सा॥ स्वरविस्तार. निसा रिसा 5; निसा गम् रिसा निसा s; निसा गम् पग् ऽम् रिसा निसा 5; निसा गम् पग् ऽम् निप म्प गम् रिसा ; निसा गम् पग् ऽम् निध निसां निप म्प गम् रिसा 5; गम् धनि सारे निसां निप म्प गम् रिसा 5; निसा गम् धनि सांसां में रिंसां निनि पम् गम् रिसा 5; निसा गम् धनि सांसां गंमें पंपं गंमें रिसां निनि पम् गम् रिसा ऽ ।।

राग-बहार बहार-झूमरा ( विलंबित ) वहार आई सकल बन फूलन लाग कलियां बेलरियां. टेसवा अंबुवा सब फूल रहीला, और अर्गना बलरियां, महंमदसाह से लरियां.-वहार म्प ऽम् निनि पम् गम् बहा S ऽर म् नि s sध | नि सां 5 5 | रिरिसांनि सांऽनिसां ऽऽनिप । ग् म् आ 5 SSS सडक लऽऽऽ ऽऽब न SSS ॥ म् म्ग् म् ग् | म्प ग् म् रिसा | रि सा 5 | सान्सिानि साम् s ऽग् कालिs यांss फूऽs S लन ला 5 S S s S S 5 S S बहा 5 S ऽर म् नि ऽध | निसां नि रि' सा | निसां निध निप | म्प ऽम् निनिपम् गम् बे लरि । यांss (अंतरा) नि 5 ऽध | नि सा s s| s s s | गम् नि ध निनि ई । 5 s s | टेसु वो ऽ अंबु सां सा (सा) सांसां | सा रिसां रि' सां निसां नि ध | म् म् निध 5 फू लर ही s ऽ औ . आ5 S ई S S S वा S सब 5 ला निप गम् नि सो निरिं| सां सां में रिसा 5 निरं | सा अर्ग जा बे s रिs यां ब S S 5S म निध निसां निरिं सां सां म् रिसां निरिं सांनि पम् | म्प ऽम् निन्पिम् गम् हूं मद सा से 5 लरि यांs 5 बहा 5 5 S. Sर

३६०
हिं. गा. क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक.
स्थायी.
नि 5 ऽध ) निसां, निपम्प गरिसा, रिरिंनिसां
ईs, आऽऽऽ s,
आ5
आsss
२
३
निपम्प रिसा, मंगम् । रिसांनिसां नि पम्प गरिसा, निसागम् ।।
पग्ऽम्, गम्धनि सांधऽन्,ि । निसांग्मं रिसांऽसां निपम्प गमरिसा, ।
निसागम् धनिसांरि निसांनिप । बहार आई
निनिपनि निपानिनि पम्गम् । रिरिसासा, रिरिसांरि रिसारिरिं सांनिपम् ।।
गरिसा, मंगमं मग्म्म् । रिरिंसांसां नि निपम् गरिसा, निसागम् ।
TRAIN
२
पग्ऽम् धनिसांरिं सांनिपम् । बहार
आ,
धनिसांरिं निसांनिन्न् ि। पम्गम, गम्पग् म्पग्म् रिसानिसा, ।
२
॥
साम्म्ऽ गम्ग्म्, गन्ऽि । धन्धिन्,ि धनिसांऽ निसांनिसां, मरिसां ।।
.
निऽनिसां सांड,निप स्पग्ऽ । गम्म्ड, रिसा निऽनिसा सा, ।
२
निसाग्म् धनिसांसां निन्पिम् । बहार आई
धन्म्पि ब्रिसा, रिरिंनिसां । धनिम्प गमरिसा, गंम्ग् सांरिनिसा ॥
घनिम्प रिसा, पंपंगं । सांरिनिसां धनिम्प गरिसा, निसागम् ।
२
पगऽम् धनिसांसां निघनिप । बहार आई

राग-बहार.
अंतरा."टेसुवा....रहीला"
गुमधऽ निधss, गम्धनि सांऽनिऽ ॥ निसांन्धि, गम्पनि सारिंनिऽ ।
निसांनिध, गम्धनि सांऽम्म रिसोनिऽ । निसांन्धि, गम्धनि सां।
टेसुवा....रहीला
२
सामगंम् रिंग्सारि निसांधान म्पग्म् ।। रिग्सारि निसाधान निधान ।
धनिसारि सानिरिसा ग्रिम्ग् पनिप । निधसांनि रिसामरि सारिनिसा ।
टेसुवा अंबुवा सब
स्मरिंसां निन्पिम् पग्ऽम् रिसानिसा । साम्ऽम् मम्,नि ऽनिनिन्, ।
२
निसाऽसां सांसां,सांरिं ऽरिरिरिं, सांग्ऽम् ॥ रिसांनिसां निपम्प भिसा, ।
निसागम् पग्ऽम्, गम्धनि सांघऽनि, । धनिसांरिं निसांऽसां ऽ ।
टेसुवा अंबुवा, इ. इ.
बोलताने.
म्प ऽम् निनिपम् गम् || नि ऽ ऽध | नि सा, मग्ऽम् रिसा
ऽर आ ss ई 5, बहार आई
बहा 5
S
२
पम्पग् म्ऽन्धि सांनिरिंऽ | सांऽगंम् रिसां निसांदिप म्पगम्
सकलब नऽफूड लनलाऽ| गीऽकलि यांबे लरियांऽ बहार
3
नि ऽ ऽध | निसां , साम्गम् मन्धिनि | धसांनिसां निसांरिंनि ऽसांनिध
आ s sJ ईs s, बहाऽर आईऽस | कलऽब नऽफूल ऽनलागी
ऽनिसांनि उमंग रिसां निपग्म् नि s, सांग्ऽम्
ऽकलियां बेऽल रियां बहार आ s, बहाऽर
२
MARA

हिं. गा. क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक. गंसिां रिसांऽनि धनिसारिं निसांऽनि | म्पगम् .. पग्ऽम् रिरिसासा आईऽ सकऽल बनफूड लनऽरे | लागी5 कलियां बेलरियां २ निसागम् धनिसारि निसांनिप म्पगम् | नि ऽ ऽध आsss S S बहार . आ55 निसां, मगन्धि सांनिरिसां ) मंगमार ऽसांनिसां निधनिप ईs s, बहारआ ईसकल | बनफूल ऽनलाऽ ऽगीकलि ૨ ग्ममंगं मरिसारि निसांदिप मगमम् | नि 5 ऽध यांsas ऽलरिऽ यांऽबहा sssर आ Ss निसां , गंमऽरिं सांरिंऽसां | निसांनि धनिऽप मपऽम् ईs s, बहार आईऽस | कलऽब नफूडल नलाऽगी) २ ग्मऽरि साऽम्ग् निधनिप म्पगम् || नि ऽ ऽध नि सा ss कलिऽयां ssबेड लरिऽयां बहार 891 $ ssss 3 ऽऽसाम् गपनि धसांनिरिं| सांगमं सांरिंनिसां धनिम्प गम्गम् ऽऽबहा रआईस कलबन | फ्लनला गीकलियां बेलरियां बहार नि ऽ ऽध | मगम् रिऽसा निधनि पऽम् | मंगंम् रिंऽसां निसांनि आ s s| बहार आऽई सकल बऽन फूलन लागी कलियां WWW २ धनिप म्पम् निपम् पगम् |नि ऽ ऽध | नि सांss 4sल रिऽयां बहाsssर आss ई sss A ર

राग-मायांमल्लार.
राग-मीयांमल्लार.
GE
रागांग विस्तार
नि
( १ ) नि सा 5 रि सा 5, नि ध नि 95; म् sus,
म्
नि सा 5; सा रिऽ प ग 5; म् 5 रि सा 5 ॥
मू
(२) सा, रिऽ नि सा नि ध नि सा; म पनि नि ,
धनि सा 5; म रिऽ सा 5; म रिपs, नि म प ग 5;
म् ऽ रि साऽ॥
नि
(३) सा; रिनि सा s; निप म्प 15, नि सा 5; म रि ५%;
निध ऽ नि सां; ध नि म्प 5, पध मप ग् 5; ग् म् रिs
नि
सा 5; सा रि सा॥
नि
घ
(१) म प ध नि सा 5; निध ऽ सांरिंनिसां 5; म म रिसा
म्
रिनि सां नि ५s; म्पनिम्प नि ग; म् म् ऽ रि
सा 5; सा रि सा॥

हिं. गा.ऋ. पु. मा. चतुथ पुस्तक. स्वराविस्तार. निसा म्म् रिसा s; निसा रिप गम् रिसा 5; निसा रिप नि म्प गम् रिसा 5 निसा रिम् पनि धनि सांसां निप गम् रिसा 5; निसा रिम् पनि धनि सांरि निसां निप म्प गम् रिसा 5; निसा रिम् पनि धनि सांरिं निसां ममं रिसां निप म्प गम् रिसा 5; निसा रिम् पनि धनि सांरिं निसां रिप गंम् रिसां निसां धनि म्प गम् रिसा ॥ नोट-गांधार स्वर को वर्ण्य करनेसे मीयां का सारंग राग होगा. यथाः रिम् पध निप सां, पध निसां ममं रिसां धध निप म्प रि परि सा ॥ मीयांमल्लार - एकताल ( विलंबित). चमके ठौर ठौर रे बीजलियां, पियु बिन देखे चैन न आवे, कछु ना सुहावे.-चमके पापी पपीहार पियु पियु रटत जोर, बरस बरस चहूं ओर, जित तित ते दादुर चात्रक मोर शोर.-चमके प नि पनि । म् प च म के ठौर के ४ M म् 5 निप। ग् । S म् ग् म् | रि रिसाs बी 5 ज लि| यां ठौ । در فرم تم मुनि S . ४ नि सा| म् म् | रिs रि s|सा s(नि सा म् रि पि यु । बि न दे | ख | चैs न न म राग-मीयांमलार. प प प पन्धि निध | नि पम्प पनि कछुाना sसुहाss आ5 वे S S S च म क Sर सांरिं सांनि । सां सां निसां, नि पप नि म् प s वेss, *(अंतरा) सां प पन्धि नि सा s 5 नि सा सा s पीड पीs डर नि नि सां | 5 सांनि | रिसा रि' सा | सां ध | नि प पि य s पीs 5 युर त जो ऽ र | पा 5 हा ट सो पा Wr E स ब र म् प | सां सां नि प ग् ग् म् रि| 5 सा च s ओ| र में सां f नि सौ गं गंम् | रि' सा नि सां। रि' नि | सा ध जि त ति ताते त्र क S नि पम् प (निध नि, सारि सां नि । म् प मो ऽ र शो ऽ च म के ठौर ठौर बीजलियां A: स्थायी. निसारिप गरिसा, । निसारिम् पनिम्प | गरिसा, निसारिम् । पनियनि सौ । निपम्प रिसा | निषफ निन्नर ठौर वीजलियां हिं. गा. क्र.पु.मा. चतुर्थ पुस्तक. निसारिम् पनिधनि । सांरिंनिसां निपम्प । गम्सिा, निसारिम् । २ Aawan पन्धिनि सांरिम । रिसांनिसां निधनिसां निपप निम्प चमके ठौर ठौर बीनालियां पनिधसा निरिनिसा, | पनिधसा निरिसाम् । रिसानिसा, पनिधसा । २ निरिसाम् रिपग्म् । रिसानिसा, पन्धिसा । निरिसाम् रिपनि । ४ म्पग्म् रिसानिसा, । पन्धिसा निरिसाम् । रिपनि धसांऽऽ । २ चमके ठौर ठौर बीजालियां सारिसासा मरिसासा, । मरिपग् मरिसासा, । निधानप निम्पम् । ૨ रिसासा, रिरिसांसां । निधनिप निम्पग् । मरिसासा, मरिसां । निधनिप निम्पम् । मरिसासा, सारिप । मनिधनि सां। चमके....बीजलियां २ रिरिसासा मरिरि । पपग्म् निन्धिध । सांसानिनि रिरिसांसां । । २ मुमरिरिं सांसानिन् ि। पपगम् रिरिसासा | निपप निम्प चमके ठोऽर ठौर बीजलियां ४ अंतरा. " पापी पपीहार " सांसान्पि रिसा, । गिरसांसां निपम्प । रिसा, मरिसां । ne ० २ निपम्प गरिसा, । निसारेर पन्धिनि । सा 5 ॥ पापी पपीहार ४

राग-मीयांमल्लार.
निन्पिनि निपनिनि । म्पग्म् रिसानिसा, । रिरिसारि रिसारिरि ।
सांनिधनि म्पगम् । रिसानिसा, ममरिमें। मंम्म्म् िरिसांनिसां ॥
धनिम्प रिसा, । निसारिम् पन्धिनि । सांऽरिरिं पंपंगंम् ।
।
रिसांनिसां धनिम्प । गरिसा, म्ऽरिप । ऽम् निऽ धसांऽऽ ॥ पापी पपीहार
धनिसांध निसांधनि । सांरिनिसां निपम्प । गरिसा, निसांरिंनि ।
सारिनिसां ममरिसा । निपम्प रिसा, | सांरिम्सां रिम्सारि ॥
४
पंपग्में रिसांनिसी । निपम्प गरिसा, । सारिप मन्धिनि ।
सी, सारिप । मनिधनि सां, । सारिप मानिधान ।
४ चम केठौडर
airat
s निप | ग्
S
AUSA
म् म् । रि रिसा 5
ज लियां 5
S
S
बी 5
बोलताने.
रिनि साम् (ऽरि पs | पध निप (म्प धनिसांऽ सांरिं निसां धनिपऽ म्पधनि
चम केठौ । र ठौड ररे ऽबि |जलि यांsss | पियु बिन देऽखेऽ चैऽऽऽ
मू
म्
सा धनिपऽ | गम् म्प | गम् रिसा | नि प प नि । म् प
s नऽनऽ | आवे कछु | नसु हावे | च म के ठौ | s
र

३६८ हिं. गा.क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक. साs ठौ र -- । साम्ऽम् रिपऽप | पनिऽध निसांनिरिं ।। चमडके ठौऽऽर ठौऽऽर रेऽऽबि सांनिसांऽ धनिपप || गंमरिसां सांरिंनिसां धनिसांऽ म्पधनि नलियांऽ पियुबिन | देऽऽखे चैऽनन | आडवेऽ कछुनाऽ प T सांऽम्ऽ रिसाs | नि पप पनि | म् प|| सांs sऽसुऽ हाऽवेड च म के ठौ र ठौ डर ૨ ४ सारिम् रिऽपऽ | मपम्प पनि घनिधनि धनिसांरिं चमऽके ठोऽरs | ठोऽऽर रेऽबिs | जलीऽयां पियुबिन म् निसांऽसां धनिपप | गऽऽऽम् सिरसासा | रिंऽऽसां धन्ऽिप देऽऽखे चैऽनन | आऽऽवे कछुनसु हाऽऽवे चमऽके %E ૨ नि प पनि | म् प|| सा ऽऽन्धि | निसांss s के S S 1 ॥ S s ४ निसांऽऽ ऽऽसांs| निसां रिंनिसांड | ऽध निपम प ररेऽऽ ऽऽबिड जलि यांsss SS पि यु ० म् धनिसांऽ ऽनिपऽ | गम् रिसा | साम् रिप | निप म्प s ऽबिनऽ देऽ खेड | चैऽ नs S S. २ में ऽनिधऽ निसां | ऽसां गंम् ॥ (सां) िऽऽसांऽ |पंगंमऽ (सा)रि ऽन आ कछुऽऽ जा स M S as 5 राग-मीयांमल्लार. ३६९. म् सांनिम्प धनिसां|निप ग मरि सा | निप पनिम्प S सुहा चम · केठोऽर S S २ ४ म् सा ठो s निप ग 5 | म्ऽरिरि साऽम्म् | रिऽपप म्ऽनिनि ऽ ररे ऽऽचम केऽठौऽ रठौड र रेऽ S २ 3 धनिनि सांभरि | निसांधनि पऽमम् । रिसांधनि सांऽम्प बिऽजलि यांऽपियु बिनदेऽ खेऽचैऽ| ननआऽ वेऽकछु । ४ धनिसांम् रिसा | नि प पनि प स s|| नाऽऽसु हावे | चम च म के ठौ र ठौ ऽर Sरा प HIH ર ૨ सारि रिपम् | मन्धि धसांनि | निरिसां मंडरिं || सांनिसां निधन चमके ठौडर ठौर रेऽबि । जलि यांऽपि || युबिन देखे 3 ४ ર पम्प मुगम् । रिसारि सानिसा | निपप निम्प | निपप निम्प चैऽन नआवे | कछुन सुहावे चमके ठौर | चमके ठोऽर निपप निम्प | सांऽऽसां, निसामरि | पन्धि सां| 5 निपम्प चमके ठौर ठौऽऽर, एsss ऽऽचs म ४ नि म 5 केठौर ૨ ५ निसा | रिनिसाऽ । रिसा ! 4 में ठो ऽ यां म म् सां निप | पनिम्प निग् | गम् रिसा । निप पनिम्प ऽ पियु। बिन | देऽ खेऽचम कठोर S ४ ३७० हिं. गा. क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक. म् S सौ 515 धप ठौ S SES ग म | रि रिसा बी 5 ज लियां 5 S . ૨ ४ म् नि निसांनिसां धनिम्प | गम्ऽम् रिरिसासा | सारिम् रिपम्प चमडके ठौरठौर रेबीज लियांपियु बिन ऽदे खेचैनन २ पन्धिनि सांरिंनिसां | सांनिभनि म्पान्ध | निम्पनि निम्प || सा 5 आवेऽक छुनसुहा | वेचमके ठौरचम | केठौरच मकेठौर || ठौ ऽर ४ राग सूरमल्लार. रागांग विस्तार म् म् (१) सा 5, रिम् ऽ म् पs, नि ध प म प म रि ; नि नि पम् रिs; s म् रि , सा (२) सा; नि सा 5; प नि सा; रि ; म रिs; पम् रिs; नि नि म प ध प म रि, सा5 ।। (३) सा र म पनि ध प नि सारि सानि , म नि घ प s; ध प म रि, साऽ । (१) म् म् प , नि ऽ नि सांs; सां ऽ रि' नि सा 5; नि सा रिम रि' सरि निकम् 45 नि ध प ध पम् रिऽ सा ॥

राग-सूरमल्लार. स्वरविस्तार. निसा रिम् रिसा निसा रिम् पम् रिसा ; निसा रिम् निध पम् रिसा निसा 5; निसा रिम् पनि सां निनि म्प न्धि पम् रिसा निसा 5 निसा रिम् पनि सांरिं सांनि धप म्म् रिसा 5; निसा रिम् पनि सांरि म रिसां न्धि पम् रिसा निसा ॥ सूरमल्लार झपताल. गरजत घटा धन कारे कारे, बरखा ऋत आई, जिया तरसावे, कारी कारी रतियां, बिजरियां चमके, पलछिन पिया बिन कछु ना सुहावे.-गरजत म् म् सो सा नि म पनि ध | पऽ || रिरि म | रिऽ | सा ss जत घटा s घन का रे 55का रे ss 3 ર क प पनि सा | रिम् 5 प प नि नि पनि सां रि' सां नि | म प नि ध प ब रखा 55ऋत आ5 जि या 5 त र साऽवेss *(अंतरा) सां सां म् प स 5 सौ नि सा | सो 55| नि सा |रि सा | नि धम् पs का री का ऽ री | र ति | यांss || बि ज|रि यां s| च म के ss पम् | नि ध प म रिसा 5 सा नि सामरि' सौ नि म् नि ध प पल | छि ऽ न पि या बिन क छु ना सु | हा 5 वे ss स्थायी. गरजत....कारे" मप निसा । रिम् रिसा, रिम् । पनि पम् । पनि सांरिं मंत्रिं सांनि सां, । मनि धम् पम् । रिसा, निसा । रिम् पनि म्प ।। गरजत.... ....कारे निसा रिसा । रिम् रिम्, रिम् । पम् पनि । पनि, पनि सांनि

३७२
हिं. गा.क्र. पु. मा. चतुथ पुस्तक.
।
सारं सांरिं, । निनि ऽरिं सांरि । निसां नि । प, पप ऽनि
पध म्प । रिम्, म्म् । ऽप मप । रिम् रि सा,
निसा रिम्, । रिम् पनि, पनि । सारिं मम् । रिंसी निध म्प ॥ गरजल....कारे
त्रि पम् । निप सांनि रिसां । प्रिं सांरिं । निसां पनि म्प
निनि धप । धम् रिसा, निसा । रिम् पनि । सांरिं निनि म्प ।। गरजत....कारे
रिम् रिप, । म्प नि, पनि । पसां, निरिं । साम्, रिसां निसां,
रिनि म्प । निनि धप, धप । रि, पम् । रिसा, पनि साप
निसा पनि । सारि म्प निसां । रिम् रिसां । निसां निनि म्प ।। गरजत....कारे
अंतग. "कारी कारी रतियां
म्प निसी । म रिसां निनि । म्प, निध । पम्, धप मूरि,
पम् रिसा, । रिम् रिप निनि । धप म्प । सां, म्प मां ॥ कारी कारी रतियां
।
-
पनि सांप । निसां पनि सांरि । निसां न्धि । म्प म्म् रिसा,
साम् ऽरि, । रिप ऽम्, नि । ऽप, पसां । ऽनि , नि िऽसां ।। कारी कारी रतियां
सांरिं सांरिं, । निसां निसां, निव । म्प रिम् । रिसा, रिम् रिप
नि पसां । निरिं सांम् रिसां । निसां रिसां । न्धि म्प सां ॥ कारी कारी रतियां
निसांनि रिसांनि ,। पनिप सांनिध, म्पम् । निधप, रिमरि । परि, सारिसा रिनि
१
२
सा, रिम् । पम्प निपनि सां, । पम्प निरनि । सां, पम्प निपनि
।
सा ॥

राग-सूरमल्लार. ३७३ सूरमल्लार-त्रिताल. घोर घोर घोर घोर बरसे मेहरवा, बिजरियां चमकत अनत गाम जि न जावो मेरे पियरवा.-घोर मधवा पिलावो राग सुनावो भरभर शरवा हां.-घोर म् । प नि म् प घोर घो 5 र सा s s सा | सा ss sरि नि नि म् प घो ss र घो ऽ ऽ र ब र नि ध प । हर वा 5 ૨ पर रि रिम् |रि रि सा सा पनि पनि | सा सा नि सा वि ज रि यां च म क s म जिन त अ न त गा रिम् पनि पनि सांरिं जा 5 वोss नि म पनि ध् प, पनि म प मे रे ऽपि य र वा, घो य र वा, घो र घोऽ र पि सो s 5 सा घोडs र (अंतरा) TIT म् म् प प | सा ऽ सा 5 TITI म घ वा पिला 5 वो s नि सारिरि नि ध म प रा s ग सु ना 5 वो म् प नि सां| म म रिसा भरभ र श र वा नि सा रिसा) नि नि म पनि ध प, म् | प नि म् प हां 5 ss, घो | र घो 5 र SS S SSS S ३७४ हि. गा. क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक. बोलताने. सोs, रिम् ऽरि |म्प ऽम् पनि ऽप निसां ऽनि सांरिं ऽसां सांम ऽरिं सांरिं ऽसां घो ऽर, घोऽ ऽर घोऽ ऽर घोऽ हर घोऽ ऽर बर ऽस तमे ऽह रवा ऽबि निसां नि ऽध म्प रिम् ऽरि ऽसा ऽसा | सारि म्प निध पम् | पनि म् प जरि ऽयां ऽच मके अन ऽत ऽगा ऽम | जिऽ ऽन जाऽ बोयो र घोर साs 5 सा | सांs, साम् ऽरि | म्प प, म्प सांनि | धम् प, म्प निसां घोs s र घो ऽर, घोऽ ऽर घोऽ र, घोऽ ऽर | घोड र, बर सत ममं रिसां निध म्प रिम् रिसा, निसा नि | पम् निध म्प ऽरिं निसां निम् पनि म्पा मेह रवा बिज रियां चम केअ, नत गाम जिन जावो मेरेऽपि यर वाघो रघो डर सी 5 5 सा | सा 55 रि' | नि नि म प ] खारि सारि निसां निसा निध म्प रिम् रिसा| साम् गिरि पम् मानि धप म्प प निसां निव पम् पनि म्प बर सत मेह रवा बिज रियां चम केनत गाम जिन जावो पिय वीवो रघो ऽर घोर....मेहरवा म्ऽ रिप ऽम् निऽ धम् ऽप म्ऽ रिसां । रिसां निसां निध म्प | म्ऽ सारि ऽसा, पम् घोऽ रघो ऽर घोऽ| रघो डर बऽ रस ऽत मेऽ हर ऽवा विs जरि ऽयां, चम ग्नि धम् पनि सांप | निसां रिंऽ सांसां ऽनि निऽ धम् ऽप म्प | निसां सिर निनि म्प. केअ नत गाऽ मजि ऽन जाऽ वोमे ऽरे पिड यर ऽवा मरे पिय बांघो रघो ऽर घोर....मेहरवा ऽसां रिं सां नि | म्प ऽनि धम् परि ऽम् रि सा | ऽम् ऽप निन्ध म्प वेडा र घो र यो ऽर घोड रब डर स त ऽमे ऽह र वाs राग-देवगांधार. ऽम् ऽप निसारिरिम ऽरिं सांरिं सां निसां नि निध म्प निसां रिरि निनि म्फ ऽवि ऽज रिऽ यां चम के अन त गाऽ ऽम जिन जावो पिय रवा घोर घोस घोर घोर बरसे रिमरि म्पम् पन्धि पम्प || मपनि सांरिम् रिसांरि सांनिसां घोऽर घोऽर घोऽर घोऽर बरस तमेऽ हरवा बिजरि । ७ निऽऽ मरिसां रिसांनि सांनिध | मऽप रिऽम् रिऽसा मम्प यांss चमके अनत गाऽम जिन जावो मरे पिऽय २ निसांरि रिसांनि म्म्प निम्प | सो sss रूऽऽ वाऽऽ घोऽर घोऽर घो sss राग देवगांधार (औडव-संपूर्ण प्रकार) * -DEC- रागांग विस्तार. नि नि (१) साs, पपs, ध् 5, ७ प नि ध १३, ध् म् प ग.53 रिरिs, सा॥ नि नि निप (२) साs, ध् ध् १; नि ध् ७, प ५ प5; सां नि ध्ऽ, 4 5; नि प ग्ऽम् 45, रि' सां नि ध्ऽ, पध् प; म प, निधप म ग सा ग्s, रिरि , सा 5 ॥

हिं. गा. क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक. सां सां सां (३) म प, नि ध् प, सा, नि सा नि नि सा रि' सा नि ५ 5, 45; प गरि सा s, रिनि ध् 5, 45; म प, नि ध् , पध् म्प ग् 5, रि रिs, साऽ ॥ म् स्वरविस्तार. निसा नि सा 5; निसा गम् ग्रि सा 5; निसा गम् पम् नि साs; निसा गम् पधू पम् ग्रि सा 5; निसा गम् पनि ध्प म्ग् रिसा ;. निसा गम् पनि सां नि पम् नि सा 5; निसा गम् पनि सांरिं सांनि ध्प म्ग् रिसा 5; गम् पनि सांगं रिसां निध पम् ग्रि सा ऽ ।। नोट- इस राग का और एक संपूर्ण प्रकार है जिस के आरोह में दोनों गांधार का प्रयोग किया जाता हैं. देवगांधार-त्रिताल. परिये वाके पायन सजनी, जो न माने गुनियन की सिखियां. ऐसो ही बिघनारोही आवे, ऐसे मानस के पास न जइये, दरश कहे वासो लरिये.-परिए प प सां नि ध् प रि ये 5 पम् प ग बा 5 के 5 म् ग सा (FM रि सा ग् म् | १ म् प 5 ग् र सा |रि रि सा सा स ज नी | जो 5 न मा s ने गु नि S य न २ राग-देवगांधार. ३७७ म *(अंतरा) प ग म प सा | रि' नि ध् प म् प ध् पसा 5 सा सा य न की 5 सिखि यां। ऐs सोश ही 5 बि -सा सां नि नि सा रि' सां नि ध प प गं रि' सां । रि' नि ध् प ना रो हि आ s आ वे ऐ 5 से मा न स के नि सां म् प ध प ग् ग् रि सा | म् म् प प । सा ऽ नि सा पास न ज इ ये 5 5 द र श के हे 5 वा सो नि सो गरि सा | निसां रिसां निध् पम् | प सां नि ध् | प म प ग् ल रि ये 5 परि ये 5 वा 5 के 5 स्थायी. 'प S S S S - ऽ पप मग रिसा, निनि ध्प म्ग् रिसा,। रिरिं सांरि रिंसां रिरिं। सांनि ध्प म्ग् रिसा, मम् गरिं सांनि ध्प । मग रिसा गम् प । परिये वाके 'पा ऽ य न । स ज नी । । गम् प, ग्ग् मम् । पप निनि ध्ध् प, ग्ग् म्म् पप निन् ि। सांसां निनि ध्ध् प, ।ग्ग म्म् पप निनि ।सांसां गंगं रिरिं सांसां निनि ध्ध् पप म्म् । ग्ग् रिसा, गम् ५ । परिये वाके पा 5 य न । स ज नी । साग म्प म्ग् रिसा । म्प निसां निध पम् पनि सांगं रिसां निसां । मंगं ऽरिं सांऽ । रिसां नि ध् 5 । सांनि ऽध् प 5, गम् पसां रिनि धप । म्ग् रिसा, गम् प । परिये वाके गम् पग् म्प म्म् । रिसा, निसां नि सारें । सांनि ध्प म्ग् रिसा,। गंम् पंगं मपं मंगे रिंसां नि पम् नि । सारि निसा गम् ५ । परिये ....सज नी २३

हिं. गा. क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक.
अंतरा. " ऐसो ही बिध"
गंगं रिसा,सिर सांनि, सांसां निध, निनिध्प, पम्,पप म्ग,।मम् गरि,गग रिसा,
साग् मम्, गम् पप, । म्प निन्,ि पनि सां। ऐसो ही विध
पनि सांप निसां पनि। सांरिं सांनि ध्प म्म्। रिसा निसा, गम् पाम्प नि, पनि सां,
निसां गंगं रिसां निध् । पम् पग म्प सा । ऐसो ही बिघ
गि गरिं सांनि,रिस।रिंसां निध,सांनि सानिध्प, निथ् निध् पम्, ध्प ध्प म्ग,पम्
पम् ग्रि, मग मग् । रिसा, गम् पनि सां। ऐसो ही बिघ
गरि सारिं सांनि सांनि।नि ध्प ध्प म्प । म्ग् मग रिग् रिसा,। साग मग म्प म्प
निप निसां निसां गंगं । रिसां नि पम् नि ।साग म्प सां, साग् ।म्प सा, साग स्प
सां s s s।
राग बिभास.
रागांग विस्तार.
(१) ध्ऽ 45, ग प ध् प, गरि सा ; ध् ध् ऽ पऽ ॥
(२) ५ ऽ १ प ६, ५ ५.५ सा ऽ १.५ सा s, रि रि सा 57
ग प ध प ग रि सा ; ध् ध् 45॥

राग-बिभास.
(३) सा; ग प ६, ध् ध् 45; पध् ग प 5 सा ऽ ध् प5;
ग प ध प 5 गरि साs; ध् ध् ऽ ऽ ||
(४)पग पप, ध् ध् सा 5, सां रिसां सां रि' गे रि'सां;
सारि'ग गरि सां सां रिसा, 545 गप
धू 5, सो ऽ ध्र प5; रि ग प ऽ ध् ध् प ग प धूप
गरि सा 5; ध् ऽ ऽ ऽ पऽ ॥
स्वरविस्तार.
सारि सा5; सारि गरि सा 5; सारि गप गरि सा5; सासा गप ध्ध्
पप गप ध्प गरि साs; गप ध्सां पध् सा ध्प गप गरि साs; गप सां
पध् सा रिसां ध्प गरि सा 5; सासा गप गप ध्सां गंगं रिसां ध्प ध्प गरि
सा; गप ध्सा पध् सा गंगं रिंगं पंपं गंरिं सांसां धूप गरि सा; ध् , s,
प॥
नोट- यह एक उत्तरांगप्राधान्य राग है, अतएव इस में पंचम, धैवत
और तार सप्तक के षड्ज स्वर का प्राबल्य रखना अवश्य है. आरोह में ऋषम
स्वर को कमजोर रखना चाहिये. आरोह में ऋषभ स्वर का ज्यादा व्यवहार से
और पूर्वाग प्रबल करनेसे रेवा राग होगा. यथाः-
सारि ग 5; सारि गप ग; सारि गप ध्प ग s, इ. इ.

३८० हिं. गा. क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक. बिभास - झपताल. प्रात समये नंदलाल दरस को, सब मिले ब्रिजबासि आनंद द्वारे. वंदी जन सब हरिगुण गाये, जागो यदुपते तुम मन मुरारे. रि धूप धपाग पाग प्रात 55 तास म रि रिसा ग प ध ध प ध प नं दलाल दरस को s S S २ प ग प ध्सा सा सां रि' सां सां रिसा ध् पध् प प/गरि सा स ब मिले 5 वि जबा 5 सि आ 5 | नं ७ द द्वा रे ss *(अंतरा) पध्। 5(सां सां सां रि' सा सांग रिसा रि। सांध् प वं दी 55 ज न स 5 ब ह रिगुs ह रिगुण गा 5 ये 5s E साहि पम् | ग प ५ | रि'रिसा ध् प || सा रि' सांध् प | ध् प ग रिसा जा 5 गोऽ य | दुप ते ss म न मु| रा रे 5s स्थायी. " प्रात समये, ध्ध् पप । गप ध्प गरि । सा s, | गप पध् ध्सा सांरिं रिगं । पंपं गरि सांध् । ऽप गप । ध्प गरि सा ॥ प्रात समये ध्ध पध् । ध्प ध्ध् पप । गप गरि । सा, रिं!ि सांरि रिसां रिरिं । सांसां ध्प गप । ध्प गरि । सा, सारि गप घ्सां रिं । पंपं गरि सांसां । ध्प गप । ध्प गरि सा ॥ प्रात समये । धू पध् । धूप ध्ध् पप । गरि, गिरें । सारि रिंसी रिं राग-बिभास. ३८१ । । सांसां ध्प, । गंगं रिंगं गरिं । गंगं रिरिं । सांसां, गरि ऽसां धू, रिसां । ऽध् प, धूप । ऽग रि, । पग ऽरि सा ॥ प्रात समये सारि गप । गरि सा, ध्ऽ । पध् ऽप । ध्प गप ध्प गरि सा, । सारि गप ध्, । रिंग पध् । सां, प, सारि गंपं गरि । सांसां ध्प, ध्ध् । पग, पप । गरि, गग रिसा ॥ प्रात समये । अंतरा. वंदी जन सब " सांरिं सांसां । रिसां धूप, पध् । पप धूप | गरि, गग र्गि गरि सासा, | सारि गप ध्सां । रिंग रिसां । धूप गप ध्सां ॥ वंदी जन सब रिंगं सां!ि । ध्सां पध् गप । रिर्ग सार् ि। धूसा, साग गप पथ् सां, । गंग रिसां ध्ध् । पप, गप । ध्सां पध् सां ।। वंदी जन सब गंग रिसां, । रि िसांध्, सांसां । धूप, ध्ध् । पग, पप गरि, गग रिस, । सारि गग, रिंग । पप, गप । ध्ध, पथ् सांसां, ध्सां रिरिं, । सांरिं गंगं, पंपं । गरि सांसां । ध्प गप ध्सां ।। बंदी जन सब सांध् सांसां, । धूप धध, पग | पप, गरि । सासा, गरि गंगं, रिंधू सांसां, । थप ध्ध, पग । पप, गरि । सासा, पंगं पंपं, गरि सांसां, I रिंधू सांसां, धूप । ध्ध, पग । पप, गरि गप २ भूसां पध् । सां, गप ध्सां । पध् सा, । गप ध्सां पध् । सां

३८२
हिं. गा. क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक.
राग त्रिवेणी (तिरवन).
रागांग विस्तार.
(१) सा s, रि रि सा5; नि रि गरि 5, ग प गरि s,
गरि 5, सा 5; नि रि 5 सा 5 ।।
(२) सा5, रि नि धूप, नि ध प नि रि सा; रिरि
पपs, प प म ग रिs; ग प नि ध प म गरि
ग प ग रि 5, गरि सा; नि रि 5 सा 5 ॥
(३) नि सा रि सा; रिग रि सा; रि रिपs, धूप
नि घ्प 5; सां नि ध् प; नि ध प म गरि ; ग प ग
रिसा 5; नि रि, सा॥
(४) पऽ गs, ५ ऽ धूप, सां s साs, नि रि' सां; निरि'
रि' सा; नि र निधू, नि ध प प म गरि ; गप
गरि 5, गरि सा 5; नि रि 5 सा 5 ॥
स्वरविस्तार
निरि सा; निरि गरि सा 5; निरि गरि गप गरि गरि साs;
निरि गप ध्प गरि सा ( अथवा ) रिरि पप पध् पम गरि गप गरि सा 5,
निरि गरि गप निथ् पम गरि गरि सा 5; निर् िगरि गप गरि गप सां रिनि
ग्नि ध्प गरि रिंग रिप गरि सा 5; पप गरि गप सो, निरिं गरि गरि सौ,
निरिं निथ् पम गरि, गप गरि, गरि सा, रिनि धूप नि रिसा, निरि गप गरि
सां
सा॥

राग-त्रिवेणी. त्रिवेणी-एकताल. माया मय सकल जगत, तूंहि रचत संहारत, तेरी विभु अवटित कृति, सुरमुनि बुध सब मोहत.-माया काम दुखद क्रोध मूल, लोभ बढत पडत भूल, समझे भी मोहशूल, मनमति को विकल करत. प ग रिरि सा निरि ग रिसा सा मा या S य (अ २ नि रि | गरि ग प तूं हि र गरि । गरि | सा सा सं 5 हा 5 रि रिप प ध् । नि ध् नि ध् । प प । सा सा ते ऽरी | अघटित वि भु कृ ति मु नि बु प स ब 5 प नि ध् । पम गरि | ग प गरि | सा सा बु ध मो *( अंतरा) गरि ग प स s|रि'रि' 5 सां म दु ख द को 5 घ मूल सां नि | रि' गं | रि' सारि' नि | ध् नि | ध् प लो ऽ का 5 त प त 5 ल S घ क. 4 5 |नि सो रि' नि भीड मो 5 सम झS 5 ल 'प म गरि गरि ग प म ति | को ग गरि गरि | सा सा वि क किसा र त हिं. गा. क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक. स्थायी. माया मय सकल जगत रिरि सासा, । निर् िगरि । गप गरि । गरि सासा, । पम गरि । गप गरि गरि सासा, । गप निध् । पम गरि । गप गरि । गरि सासा । निरि सा॥ मायामय सकल जगत. पप गप। पग रिसा, । निनि नि।निध् पम । गरि गप । गरि सा, रिरि सारिरिसां निध् । पम गरि । गरि सा, । रिने धूप । नि रिसा मायामय सकल जगत निरि गरि, । गप गरि, | गप ध्ध् । पम गरि । गप प्नि । निनि ध् पम गरि, । गप नि । गिनिध् । पम गर्,ि । गप गरि , । गरि सा ।। माया मय सकल जगत रिरि सासा । गग रि ि। पप गग । ध्ध् पप । सांसां निनि । रि िसांसा गंगं रिरिं । सांसां निनि । ध्ध् पप | मम गरि । गप गरि । गरि सासा ॥ मायामय सकल जगत. अंतरा." काम दुखद क्रोध मूल सारि सो, । निरिं गरिं । गरिं सां, । निरिं गपं । गोरे सां, । निरिं निध् पम गरि । गप गरि । गरि सा, । रिग रिप | पप गार । गप सां ॥ काम दुखद क्रोध मूल सांरि निसां । प्नि पध् । गप रिर्ग । साारे निसा, । रिरि पप । गग ध्

राग-बिलासखानी तोडी.
३८५
पप सांसां । ध्ध् रिं । रिसां सांनि । निध् ध्प । पग गरि । गप सा ॥
काम दुखद
क्रोध
निरिं गंगं । रिसां निध् । पम गरि । गप गरि । गरि सा, । पप गरि
गप सां, । रिंग रिसां । रिनि नि । ध्प गरि । रिग रिर्प । ध्प सा ।।
काम दुखद क्रोध मूल
रिं!ि सांगि।र्मा रि ि। सांनि ध्प । मग रि, । ध्ध् पध् ।ध्प ध्ध्
पम गरि । गरि सा, । रि िपप । धूप सां । निरि गरि । सारि निसां ॥
काम दुखद, इ. इ.
* राग बिलासखानी तोडी..
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रागांग विस्तार.
ग
(१) सा 5; रि नि , सा s, रिग 5; रिऽ रि s, सा 5;
ग
रि ५ 5 ग्s; म् ग् 5, रि गरे , सा 5 ॥
(२) साs, रिs, सा5; गरि s, सा 5; रि नि , 5; म् ,
रि
म
नि धऽ साs; I 5, म् ग् 5; प ध् ऽ म् ग् म् म्
रि गरि 5 सा॥

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सां
घ पथ् साार
हिं. गा.क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक.
(३) सा 5 रि रि, म् ग् 5, ध् घ् । प नि धू प नि ध
सां 5 नि ध प 5; ध् घ् 5, पध् मग रेि; गम् 5ि,
र 5 सा 5; सा 55; रे सा धू धू ग्; रि ग् 5,
म् गरि , सा 5; रि नि s, सा रि ग 5 ॥
नि नि
( १ ) म प ध्ध साs, नि सा ; रि नि सा रिगं मंग
र'
सारं नि ध्; ग म्', नि ध् म ग र गम्
गरि ; रि 5, सा॥
स्वरविस्तार.
सारि सा 5; सारि ग्रि सा 5; सारि ग्ग् मग रिसा 5; सारि गम्
पप ग्ग् मग रिसा 5; सारि ग्ग म्प धम् पप ग्ग् मग रि ि िसासा 5;
सारि गग म्प ध्ध् पनि ध्प धम् पग् मग रिसा 5; सारि गग म्प ध्ध् पध्
सांध् नि पप म्प ग्ग् रिग रिसा (अथवा ) सारि ग्ग् म्प ध्ध् पध् सांसां
गंगं रिंगं रिरिं सांसां धाने ध्प म्प ग्ग् रिग रिसा, रिनि सारि ग रिग् मम्
नि, गरि सासा 5॥
म्
बिलासखानी तोडी- एकताल.
नीके चुंगरिया ठुमकत चाल चलत है.
सुनत साथ जिया बेकल होत, सदारंग ले हो बलैयां.

राग-बिलासखानी तोडी. ३८७ सा रिनि | सा रि नी के 5 S SS ग् रिग रि| सा 5 गरि या 5 सा रिनि S SS S S २ ४ सा रिध् ध् ग् ग् । ग्र् ि ग 5 त SST चा 5 लड.S च 5 म् सा 5 5 रि गरि | सा (अंतरा) प. सुरु SS S S s | नि सांरि। S सांss सांसो सा सा थजिया 5 ब कल S रिनि ध् म् | ग् रे ग रे | सा रिनि / सारि गग sts तडस दा ग S लेड हो म् म् । गरि ग् रि| सा 5, सा रिन | सा रि नी के 5 है । रि S S SS या , स्थायी. । धु sss 155 | ग रि, । ग्ग् ग् ि। गर् िसासा, निनि नि । निथ् निन् ि। ध्ध् पप । धम् गर् ि। गरि सासा, । गंगं रिंग गरि सांसां । नि ध्प । धम् गर् ि। गरि सासा । नी ऽ । के s एं 51 5 51s गरि । या 5, । सार् िग्, ३८८ हिं. गा. क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक. । रिग् मग् । धम् ग्, । निनि ध्प । धूम् ग्, । रिरि निनि । धम् ग्, गंगं रिसां । रिंनि ध्प । धम् म् । रिंग रिसा । नी । के s g sis sis s। ग रि, । म्म् ग्ग् । रिरि सासा, निनि ध्ध् । म्म् ग्ग् । रिरि सासा, । गंगं रिरिं । निनि ध्ध् । मम् गा रिरि सासा, । रिरि निध । धूग ग् ि। रिरि सासा । नी 5 । के s g s| s sis s। गरि, । म्म् ग् ि। ग्ग् रिसा निनि धम् । ध्ध मा । मम् गरि । ग्ग् रिसा, । रि नि । निन्नि धम् ध्ध् मग । म्म् गरि । ग्ग् रिसा, । ग्र् िमग । धम् निध् । सांनि रिसां ग्गं रिसां । नि ध्य । म्प गग् । रिग रिसा । नी । के 5॥ घुगरिया....है - । अंतरा.॥ सुनत सा 51 5 थ । रिने निन् । धम् मा । गरि सा, । गरि रिंनि धम् मन् । गरि सा, । मंगं गोरे । रािने निध् । धम् मग् । ग्र् िसा, ग्रि मुग् । धम् निध् । सां, धम् । निथ् सां । सु ७ । न त सा 5 | s थ । गंगं रिंगं । रिसां, गिरें । निरें नि:, । निनि नि ध्म्, ध् । म्ध् मम्, । मम् गम् । ग्र्,ि ग्ग् । रिंग रिस, । रिरि निध, निध सा । धूग् रिग । गं रेंगे । रिसां निसां । सु ऽ। न त - - राग-बिलासखानी तोडी. ३८९ सा s। 5 थ । सांरि सांरिं । निसां निसां । नि नि । पधू पथ् । म्प म्प । गरि गरि । सारि ग्ग् । म्प ध्ध् । पध् सांसां । रिं िगंगू मम् गरि । ग्गं रिसां । रिरि निध् । पध् सां । सुनत साथ, इ. इ. बोलताने. "नीके" सारि निध् । ग्ग् ऽप ग् िऽरि | मग ऽरि सार् िग् | सानि सारि नीके धुग | रिया ऽठु | मक ऽत | चाल ऽच लत है नीड के ग SS ग सा गरि S S ॥ घु 5 S S S S ग या 5 SS पध् पग् | पग् रिसा | सारि ऽग् | मग रिग् | सारि सानि | सानि सारि नीऽ केवु | ऽग रिया ठुम ऽक तचा ऽल चल तहै नीड केड धुंगरिया ऽ रिम् | ग्ग पऽ | पध् पप | निध् पग् | मग् गर् ि| सानि सारि नीऽ कंधु | ऽग रिड याठु ऽम धुंगरिया कऽ तचा ऽल चल तहै नीके रि' सांध् | निथ् पगप ऽग् ग् िऽरि मग रिस | निसा ऽरि वेधुं | गारी या| ठुम ऽक | तचा ऽल चल तहै । ऽनी ऽके चुंगरिया ऽग् ऽरिं | सारिं सांध् । ऽप ध्प गम् ग्र् ि| ऽग् ऽरि | सानि सार्ि उनी sके | चुंग रिया| ऽछु ऽम कत चाल | ऽच ऽल | तहैं नीके हि. गा. क्र. पु. मा. चतुर्थ पुस्तक. 5 सारिग मरि | गऽप धूम | निध्प सारें। नीऽके धुंऽग | रिऽया ठुऽम | कऽत चाऽल S २ गंसिां निध्प | गम्ग् रिसारि चलत हैss/नीsके नीके S S ग रि गरि | सा s SS ग धुं 5 sl SS S S या S 5S ग् िमग | ध्प ग | निध सा | रिनि रिमा गरि गरेिं | सां निसां नीss s के गड रीडाया S रिरि निध् । निध् ऽप | पध् मग रिंग मग् | रिरि सा | रिनि सारि छु म लत है नोड के कडताचा लऽ चs 5 गरि । ग् रि । सा s 5S gs SS S ग या S SS सा रिनि । सारि ग म्प ध्ध् पध् सौ | ऽ निथ् | सा s नी केऽ धुं S S गरि या S S S S रिम् । ग में गं रि' सां सां रिरि नि ध् म तु चा 5 . S च 5 पध् मग | रिग् मग ) रिग् रिसा | रिनि सारि । रिनि सारि रिनि सारि | ग् हैs s नीड के नीs के नीs के धु S S. S S DDDD हिंदुस्तानी गायकी क्रमिक पुस्तकमालिका चतुर्थ भाग समाप्त. 108 JOID 000D हिंदुस्तानी संगीत की एनसाइक्लोपीडिया (भाग १ से ६) यह बंडा ग्रंथ के छे भागों में प्रचलित १६० रागों के प्रत्येक के सुप्रसिद्ध सरगम, धृपद, धमार, तराणा, ख्याल, ठुमरियां, इ. नोटेशन के साथ दिये हैं । इस ग्रन्थ में भारी खान्दानी चीजों का अपूर्व संग्रह निन्न- लिखितानुसार किया है: १ कल्याण थाट के १७ रागों के पदों का संग्रह, रु.२॥ २ बिलावल थाट के २२ ३ भैरव, पूर्वी, इ. संधिप्रकाश थाटों के ४५ रागों के पदों का संग्रह, १ काफी थाट के ४० रागों के पदों का संग्रह, रु.३॥ ५ आसावरी, भैरवी और ताडी थाट के २० रागों के पदों का संग्रह, रु. २ ६ खमाज थाट के १२ रागों के पदों का संग्रह, नोट-छे पुस्तक के ओरडर पर २५ टका बलतर दिया जायगा. DISED दिलखुष उस्तादी गायकी (भाग १-२) प्रथम भाग में प्रसिद्ध लोकप्रिय रागों के ११ चुनीदा ख्याल ठुमरियां, इ. आलाप, तान और किसम २ के बोलतान के साथ बहुत विस्तारपूर्वक दिया है. मूल्य रु. १॥. द्वितीय भाग में ५ पदों का समावेश किया है. मूल्य केवल १२ आना. ख्याल गायकी इस पुस्तक में १५ भारी खान्दानी ख्याल, तराणा, इ. किसम २ के तान, बोलतान और आलाप के साथ दिया है. मूल्य रु. १॥. तान-प्रवेश इस पुस्तक में किसम में किसम २ के २०० तानों का संग्रह किया है निस का अभ्यास से प्रचार के सब रागों का तान सहीत गाना सहज होगा. संगीत विद्यार्थिओं के लिये बहोतही उपयोगी शिक्षक है. मृत्य १२ आना. राग-लक्षण-गीतमालिका (भाग १-२) संगीत प्रेमीओं को रागों का उत्तम प्रकार का शास्त्रीय ज्ञान हो इस लिये उपरोक्त पुस्तक हमने दो भाग में प्रकाशित किया है. ये दोनों भाग में प्रचलित ११५ रागों के संक्षिप्त विवरण तथा स्वरतालंलिपिबद्ध बहुत उत्तम हिंदी लक्षण-गीते दिये हैं. ये दोनों पुस्तकों को अच्छी तरह पढनेसे राग सम्बन्धी कोईभी बात बाकी न रह जायगी. प्रथम भाग में १० राग का समावेश किया है. मूल्य रु. १॥. द्वितीय भाग में ७५ राग का समावेश किया है. मूल्य रु. २॥.

Hindustani Gayaki Kramic Pustakmalika Bhag 1

Author
Pandit Firoz Fram Ji
Title
Hindustani Gayaki Kramic Pustakmalika Bhag 1
File name
Hindustani Gayaki Kramic Pustakmalika Bhag 1
Text
OCR done
Citation
1936
Publisher
Harvard Federation Of Territorial Clubs Cambridge
Language
Sanskrit
Pages
406
Library
Bharti Bhawan Liabrary, Allahabad
Classification
Sanskrit
DLI number
272843
Barcode
5990010894181.00
Scanning centre
IIIT, Allahabad
Digital publisher
Digital Library Of India
VMLT id
IwKcOvN7oQG
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