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अथ विज्ञापन

Amaradaas · 2006/01/11

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अथश्रीमन् पंडितअमरदा सविरचिनअनामनभा. षा प्रारंभः ॥ ॥ यहअ.न्यमनसंज्ञकनाटकग्रंथा शुनिअर्थकाविचाररूपम्मसुजनों के हितकेनिमिनश्रीकाशीपुरीमैमु रुगोवईनदासनेअपनेहरिहरर नाकरसजयत्रालयमैमुद्रितकी याहै जिसकूआपेक्षिनहोवे निमकू चौकमैकुंजगेलीकेपश्चिमहारके समीप गोवईनसाहरामलालकी दुकानपरमिलेगा दामरुपया एक संवत् १५४६ आषासुदी पंचमी ५॥ ॥

॥ॐ नमः शिवाय॥
॥अथविज्ञापनपत्रम् ॥
॥अथयनिवरपरउपकारी श्रीमनजगन्नाथसरस्वतीन
लोकोंके वोधकेनिमिन सर्वउपनिषदकासारअर्थग्रंथ
नकरके रूपक अलंकाररी निसे देववाणीकर अहलामृत
संज्ञकथकीयाहै सोइसप्रकारइसमैरूपकप्रक्रियाहै।
विवेक वैराग्यशमदमइनचारोकोसंन्यासीरूपकरकेवर
ननकीयाहै विवेकका नामविवेकाश्रमहै वैराग्यकाना
मवैराग्यनीर्थहै शमकानीमशमारण्य दमकानामद
मारण्यहै अरचिनहनिकोंस्त्रीरूपंकरकै वरननकीया।
है शरीरकमहरूपकरकेवरननकीयाहै सोविवेकायम
अरचिन निकाइसमैसंवादहै सोविवेकाश्रमयनिने ना
नाविधश्रुतियुक्ति प्रमाण करके चिननिकुंआत्मउपदे।
शकीयहि सोइसप्रकारकीरूपकरचनादेखकरके वह
तजनों के उपकारकेनिमिन श्रीमन पंडितअमरदास
दासीनने छंदरचना सेअनिललिनरीनिसे विस्तारपूर्वक
भाषामैकीयाहै अरअनिअल्पमति पुरुषों केवोधके।
निमिन किसी किसी पद काटिपाकीयाहै जिसजिसा
श्रुतिका अर्थ दोहा चौपाई गैग्रंथनकीया है, सोसोन
नि अन्वेषणकरकेदिपणमैलिखदीयाहै सोममसु
रुषों के कल्यानके करने वालायह ग्रंथहै पढ़नेसुनना
करचितमैहर्षहोवेहै सभाकेरंजन करने के प्रकार इ
समैललिनरीनिसेलिखेहै सोवहनरमणीकग्रंथभाषा
मैभयाहै षटइसकेकवलहैं प्रथमकवलमैनाना।
धानोंकरकेविषयोंनिएवरूपनानिरूपणकीयाहै
दिनीयकेवलमैघटदीपादिशेनकरके आत्महत्वका
सूचनकीयाहै तदननरयाज्ञवलकजनकराजाकास
वाद रूपनिप्रमाणेकरके नया युनिप्रमागणकरके।

आत्मानिरचैतन्यरूपनाकानिरूपणकीयाहै. नदनंन
रआत्मचेतनरूपनामैपितापुत्रकासंवादरूपअंधापार
ख्यानवरननकीयाहै नीसरेकवलमैनानाथूनियुक्ति
प्रमाणकरके आन्यानिएआनंदरूपनाका निरूपणकी
याहै। चतुर्थकवलमै जगनमिथ्यात्वकानिरूपणाकी
याहै अविवेकाश्रमवैराग्य नीर्थ के संवादमैनारायण
नारदकासंवादरूपपरमहंसउपनिषदकानात्पर्य अ
र्थनिरूपणकीयाहै ॥ पंचमकवलमै नानाविधमना
कोनिगसकरके निनियाघअहैतमनका निरूप
कीयाहै ॥ षटेकवलमै जाननादिअवस्था निरूपण
द्वारा जीवपरमान्याकांअभेदार्थनिरूपणकीयाहै इसा
प्रकारसंक्षेपकरके सूचनकीया है । इसग्रंथमैसर्व
त्रुटिपूर्णीजानने काप्रकारयहहै मूलमैजोभंकजिस
पंति के ऊपरहै सो अंकटिपणीपंक्तिकेआद्य मैहै।
सोइसप्रकारकमिल्यायकरकेअर्थदेखा जैसे गौ
रीकर्णाभरणधर इसपंक्ति के ऊपरएक काअंकहै औ
गौरी केकानकेभूषण को मुंडसे पकड़करइसटिपणके
आद्यमै एककाकहै सोगोरी करभरणधरइसपं।
किकाटिपणहै। इसीरीनिसेसर्वत्रजानना ॥

श्रीमतपडिनसमरदासजी'
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दमारएप। शमार वैराग्पतीर्थ।
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अ.भा. के. में श्रीगणेशायनमः ॥ कविरुवाच दोहा गौरी काम रणधर खेलनगौरीअंग सोगौरीनंदनसदा करविधन ममभंग १ श्रीनानकपदपदमको वंदोधरउरध्यान॥ जोकोजगभवलव्यानर पावेपद निरवान २ श्रीगुरुच रासरोजकोवंदोवारंवार जोकरकपाकटासकर पावेनरमा खसार ३ देवगिराअनिकठनमै जाँकोनहिअधिकार नौके हितभाषाकरों उरधरपरउपकार ४ कुंउलीआछंद नाम हरिहरसरस्वनी यतिवरपरमउदार नोंके शिष्यसरस्वनी॥ जगन्नाथगुणसार जगनाथगुणसार मुमुखजनकेहिनका री विवेकादियनिमान चुनीकोंकीनोनारी श्रुनिसागरकोसा र पनिउरभूषाअभिराम जैसोरचनसुग्रंथ अहेनामनभस नाम ५ सोरा भयोसुयनिंवरराक विवेकानमसंज्ञकम नि जाकेसंगअनेक प्राप्नभयेनरमोशमग ६ चौपाई वि वेकाश्रमसायनिमहाना विचारतभयोस्खवासस्थाना अ समठन हिदेख्योजगमाही शुधहोवेमुनिकोमनजाही ७ ध्यासीलखनवनवतिहजारा नवशनअरनवन निउचारा एतेमरूदेखेजगजो वासयोग्यनहितों मैकोऊ ९ भैसेगिरिवरअरवनभारे नदीजलधि पुरवापीसारे देखननिनदेयोमभूपा पांचजन्यजसना मअनूपा र दोखंभाभररस्यनाजाके नवहारकरशोभिनवाके। १- गौरीके कानभूषणकोसंडसेपकड़कर गौरीभंगगौरीकी गोद मैमाविवेकादिविवेक वैराग्यशमदमादिककू संन्यासीस्पकरकेवरनन कीयाहै विवेककानामविवेकामहै। वैराग्यकानोमवैराग्यनीर्थहै।शमकार नामशमारण्य है।दमकानामरमाररोयहै। इसप्रकारसंन्यासीके नामदशप्रका रहै आश्रम पनीर्थरवणारख्या गिरिपपुरीई सागर पर्वन सरस्वती भारतीयहरशनाममंन्यासीआकेरखजानेहै-18 व्यासीलख३००००० ००० हजाराई शतारनवे नवाअर्थानसककर्मचौरासीयोनीकेशरीररू पमरदैखेहै।पामभया सर्वसेउनममनषशरीररूपमठ- पांचजन्यपंच जननाममनुकाहै ननसंबंधी दोखभादोर्टङाखभादोहै जिसम-10 काननासका नेत्रमुख सानछिद्रदोछिद्रअंधोदेशमैहै सोनवहारहै-%D ९८ अ.भा.के.२ उचित करणीकरांति पावे।भोगनमाहिखभावकधावे १० शौरगम्पपरपावेजोकाअनेकजनमसुनकरहोऊ सिकललोककेये उपभोगापनों के मिलनउपावनयोगा। ११ सोरठा जगमंगलवपरामचंदार्चनकेयोग्यवराजों मैकरविश्रामपंडिनचिनहरखेसदा।दोहा।। वहतंक थनसकामको विपतालदिविमाहिायनिनिवासकेयो ग्यपुन असमदेख्योनाहि ॥१॥चौपाई॥विवेकान मसायनिदिशाकलाफिरत फिरनभयोअनिव्या कलावास योग्यमठदेखसुचारू करनिवासउरहरखेभारू १५ ॥ कृशिनननविवेकामनामा यतिवरभूपनिनआन्मका मायाविधमरपायोमनिभारी आईनहाएकदिव्यनारी १९ दोहा मनमनंगसममंद ममि चलेनसुललनाचाल भू मोकामविलासकीयतिवरकाजेंनकाल १६ चौपाई मा दहासकरमखविकसाई। स्वरपंचमसंज्ञकजिनगाईस वेदनकरलिप्तशरीरा। नन्नमसमवरण गंभीरा १७को कलममपोलेवरवैना मदरापानकरएर्णनैना सूक्ष्म चीरमारधरभासे मानोकांचनकुंभप्रकासे .८ वि शालवदनानिलकयुनभासे मानोसांकशशांकप्रकासे रक्तदंतडाइमसमभासोनवपलवसमअधरमकासे १९ कैमलनेत्रकरकमलप्रकासेोकमलाखबजनकरन निरासे पीनवनगनकांची छाजेोपीनपदाजिमछटी विराजे ॥२०॥ १-शास्त्रविहिनकर्मकरके। वास्तुकरगम्यजोपरब्रह्मानिसकेपावरका स्थानहैम-निनभोगोंकी प्राधिकासाधकर्मकरोकेयोग्य है ना कुलसा कलदिशाना-दिव्यसर्वोनमा जनमानोकालरूपहै शनिबाद। ऋषभागंधारावीमध्यमाधैवनापंचमायहमतवररागकाहै निसमै पंच मुसंन्कूलरमतमहेनिसका विष्णुदेवता है विप्रकुलभई कोकिलरवकेतुल्पहै। यौनसर्वसे उनमहास्वरवालनकाभेदग्रंथालरमैकहा है स्वखरमपूरवोलहेशि गाल ऋषभाभजाभेडीगंधाराक्रौरमधामाअन्नधैवनागजनिबादाकोकिलपंच मखरखोलेहासत्मवस्त्रमैचभासेहैनरी कमलवन हैनेजिसके क रहायमै-10-लक्ष्मीकीशोभाका जनमानो-११- इटाविजली ॥ - ॥

५ रुकशापदमैनूपुरवाजे । करकंकणगलहारविराजाधू धनधरकुदासशरभारे।कामीमनमृगमटिनिविदारेश सोरठा सुरफुरसुनवरकेश पीनकुचभरविलासराय निचिनकरन निवेश वारकरीनजानजोराचौपाई। नेन्चंगीजबदेखीनारी विवेकाश्रमसविसमेभारी।मली। नमुखपंकजयनिभागकरनभयोमनमाहिविचागास। मानसीविचारवरननकोयहवालाप्रवलप्रभावा जिसक रयहमठअधिक महावा।लखनपडिनअसस्पअपारा जि मभानेशननेजननधारा।२४। भूमैभनवन्सलभगवाना ॥ धरनभयोय दिनरवश्यानानिसखोजन किमकमलामा ईरहिनसकनपनि विनालुगाई । २५ किमनाभवसेहि नभवानी। भवखोजनहितफिरेनदिवानी किमवाकमा लासनकीनारी। अधर्माजानपनिभईन्यारी।।किमवा गति निजपतिकरहीनाखिोजनदग्धकामपतिदीनाकि मवाकोऊप्राकृतनागकामानरखोजननरभारीशकि मवाहै यहभगवनमायारूपधारमममोहिनआयाकिम वासुरपुरसेसुरराई। विघनहेनममनिकटपठाई। ॥करनेजामुनिजननयभागाभेजनद्रनहाँसुरनारी। याविधपूर्वश्रवाहमकीना सोहमओजनेत्रसेचीना॥ ॥२९॥वहनयननकरमठहमपाया। यहअतिविघनक हाँसेभाया।सकूनकर्ममैविधनमहाना॥ १-सुरफुल पारिजानादि२१- यनिपरमपदप्राप्तिकीछावाला संन्यासीजनोकेचि निवेशकरेहै अर्थान चिनकोमोहिनकरेहै। आनन्चंगी सस्म शरीरी-सुनिमूटी मैत्रनिकाअभावहोगका शरीरशवकीन्याई अमंगलरूपहोवह निकेसयभावदशामैअधिकार शोभाहोवेहै इसीसेकहा है अधिकसहावा-- यदिजेकरपृथिवीमेकअव नारधाराहावैनाली- देशसेजन्यशरीरकूदकरकेभनसे रहिनभवानी कमलासनब्रह्माकीस्त्रीसरखनी है क्याअधीकामवृद्धिसेनिजकन्याकूदेस नारूपभधर्मसहितपनिकुंजानकरपारीभईहैकमहादेवकरदेग्ध निजपनिसेरहिनरनिकामकीस्त्रीहेक्या। ॥

अ.भा.
याविधजनसन्यवखाना।३०ावैराग्यनीर्थहैयनिभाग
जोप्राणनसेमोहिपित्रागा सोअसनिकटरहेगाकैसे।र
रामेराभीनकनरजैसे॥शमारपदमारण्यजोकार
नहमदोनोविनराजाशदोहा गोविधहमसभछोर
करजावैगेयानभूपाममसापिावनहिनपकररुशि
नसरूपा॥चौपा जबहमयनिसभर्भयेनिरासा॥
नवन्यागोमुक्ति कीासायनिवरभयोसमागमभारू॥
निवासमठेरचयोविधिचारूपायोमटमेअसभयो।
प्रवेश अनिमूर्खविनालीसमवेशा। दारुमयी युवति
अफ्जिोऊनिहिपरसेपदकरयनिसोऊ॥सायाविर
धपजनभननसवानी।करतसंगअर्सनानेहानी॥
वस्त्रमार्जिनशनपात्रजोऊोनेजसमीपद्रवन जिमसो
ऊ॥३५॥ निमयनिपाययुवनिकोंसंगा।प्रचलनचिन
उरजगनअनंगा। जिताहारवाहै योगी। होइविर
कवाहोवेगेगी।३६ असोयनिभूपिनहाँनजावालिखि
तनारीजहीसुनपावे।जिमविंधदेशविषवलीवायुक
रसंबंधहरजजनआयुशिनारी नसबंधीमारुन।
नैसेयनिवरकोउरजारनाभावदर्शनआदिकसारे।
॥युवनिसंगसभरहैनिारे॥३॥विषधरदेशचिंता
नसमाना। संवनिचिननकरननरहाना ॥३॥सोरठा॥
सभअनर्थकोमूल युवनिसंगबुधजनकहा।
॥
सनाने सुधजनोके वारप्रमाणकरके उसस्त्रीकासंगमेरीहानी।
करेगाभरा-वस्त्रकरकेपोच्याइआएनकापाचश-विंध्याचलपर्वनमै
जाविषकीवलीहै ननसबंधीवायु-आमा-कुंकमकस्तूरीअनरादिसुगंधी
द्रव्यूकलिप्रजोनागकाशीरननसंबंधीमारुन वायुभा-विषधर
संर्पकेदंशकाचिननजैसेपरुषकूनाशकरेहै नथानारीकाचिनना
होनरकादि दुखप्राधिकारण है।
का

अ.भा का ब्रह्मादिककीभूत अन्यजीवकीकोकथा॥३॥सवैया। ॥कमलासनदेखसुनाअपनीमदनानरहोइमहादुरखपा यो। मेघवाजबगौतमनाररमीभूगएकहजारतबीगंगा टायो। सरदैशकयोपिनसंगननेविधुदैहविषेपिरो गलगायो।ईमदेवअनेकअनंगअधीनभयेअनिदीना महादुखपायोसासोरगाना यमपरहार नानेजानर बचरहे।सोभवउनरेपार बडेभागाकैगनाराचौपा । नरकेसमानराज्यजोदेखे।माटिपिंडसमकांचन खोनारीदेखेकापसमाना।भवमैअसयनिदर्लभमा। ना।४। सोरम मिलादैववसवास उदिनभईनसहर एणको योग्यनवागविलास उजदोषभावसे शिवोपा ई।योहिठौरनरआनुनकोजावांछितयाँकापूछेजो। सदारहे किमवाकहजावे।योविभेदकौनअसपाये। सायहोयाकावांछीननोक्राहममिलकरसभपूछेसोज प्रत्यकप्रणवचिनहमसारे। किमकरसनवराकीहमारे ॥४॥प्रवलविषयअवलादिकसारानावनहीउरलगना पिअनिअनिहरमआन्मामाहीं।प्रगटेयावनने रखना हजिमकामीमनकामिनिलोगा|जननीमेमनबहा नेभागानिमआत्मरनिजवप्रगटानी।भईविषयप्रेमकी हानीशआन्मनन्नविनकोभवमाही।कल्पिानदारतन नेभयनाही परकारजमैसर्पप्रनीनिास्तुविनकों नहि जनेसोभीनि॥॥ नारनपंडभेदसरूपा॥ १- मघवा इंद्र२। सरदैशक सुरगुरुवहस्पनिकीभार्या साथसंगकरनेसे विधुचंद्रमा-19 कुरणपशव-107 वागविलास संभाषणकरने केयोग्य नही।उनदोष.दारुमयीय वनिमपिजोज इत्यादिग्रंथकरकहाजोदोषनिसकेप्रतिकुभयसे- । सदारहे इसमठमैसदारहेगीअथवा किसीदूसरस्थानमैजावेगी कपाश-वरकी अनितुदरिद्राकंगलीयाकरसकेहै॥3॥ ॥

अभा के॥६॥ नमनावताउदिनअनूपायावननिउदयाचलमा। होउदेभयोचेननरविनाही दोहाविरोग्यनीर्थसचि। वहम नारपोढनाको जिमव्याघ्रकेनिकटमै अजान गढीहोई॥५०॥कविरुवाचासोरमाअसनिश्यार। धार लोदीदासीसमप्रतिवोलेलखकरनाऊँधीनवेद नरवरयनिाश विवेकाश्रमउवाचोदोहो। हेकानेको नहै किसकीहनूनाराआसनमकिसदेशसेकिमवांछा। उरधार। नहीयहमरवरीनने नवनिवासकेपोगा यूनिवजनामैवसे नजकत्सकलेभोगासाचीपा ईयत्रवसेंसंन्यासीशांना उपरतसहनशीलमुनिदी मासमाधिनियमनकरयनिभूपादेिखन हैनिम्यान्म रूसााानहानबनेभद्रेनववासनानेनजअसमठकी आसारजहाँबैठमुनिआत्मध्यावनिहाँननववासाममभा वेाकविना जहाँमोशाइस्तयनि चिदात्माकोदे सति देहइंद्रमाणामन धासेन्यौरोकरकोजहोंवेदपा उकरे यज्ञदानन् पूरे सीजनवालआन्मजा नवा छाधरेकामेहाँवास्लेबैरआर्य सकलनिमात्पर्यभुनना चिदाम्ममाहिऊचीधुनीकुरकोबालेअसमरमाही ना वासवनेनाही नजोनानेमठआशादयाउरघरकाई। दोहागपंडिनजनआयसदा पांचजन्यमरजानायो मैबनेनवासनव विश्वसदननिजमानाशकविरुवा चायाँविधसुनयतिवरगिरदीरघनैनीनार॥ १- चिमरूप उदयाचलपर्वनसे-वैराग्यनीर्थ हैसचिवसह कारीजिसकासाविवेकाश्रमहम, सोहमारेआगेनारीकीकोनस मर्थाहै। अध्येनकीपहिवेदजिनपुरुषोंने मिसमैवरप्रेष्यनि विवेत्रमा हेवरानने। हेभद्रेचदा हेसनि हेपनियते देहइंद्रियमाणमनवुद्धिसेभित्रकरके आन्मापू देखे है ननसक लश्रुनिकानापर्यभसंगद्दिनीयब्रह्ममै निर्णयकरकेकहैहै।

अभा का क्रमकरउजरकथनहिनतालीकरसुविचारायानार्यवार चाचिनहनहिनाममन्याभगनीनोहियोनभद्रनुमभब भयेकहीपछानोमोहिमा चौपाई।पूर्वन्यागातमम ठजेना जोअक्आश्रयकीननिकेनापिालेनसभकोक रौंअनूपा अधिदेवनजानोममरूपा॥६॥मनरमा गीयविषयशब्दादी। नोंकीवाछामोहिअनादी। तेन साधककरणी अनिचारू।सोहमकोंमरलगनपिआ रू॥ईशा कर्मनजननहिवाछामोरे। नाकाफलहम कबीनछोभिभावआयकरढान्यागोकर्म यथानममूढा॥२॥सुनाईयणविना ईषादोऊ॥ लोकयानीसरजोनिजकरनीनर्दषणाभारी। होवेप्रनिग्रहभिशाचारी औसातिविधानजोकीनो अविचारिनउरनोंकोचीनो॥ईकबिन आद्यसं निवेशजोका पैठन हैनथाविधरमीकगेहमाहिभ लीविधीजीस॥अर्थअनवानरूपयत्तविनसा। ध्यजोंमै भैसासमीचीनवेदसोनोन्यागदीजीसामने संनिदेशजोका पठनहैनथाविधकानारदेशनमाहि भलीविधकीजीए॥ अर्थअनुसानोमैभिक्षाश्रुति चयभासे सोनोहेयनाहि असाअनहठलीजीगाई। ॥ज्योनिटोमयागसेतो स्वर्गभारीहोननर जैसोवेदना। कागुडजिहिकासमानहै।नग्रमंडीहोई॥ गूढ अप्रसिहसंन्यासमावकोआश्रयकरकेनशहदारण्यकाईना.।। पत्रैवगायाविनेषणायावलोकैयणायाश्चत्यन्यायाथमिसाचर्यचनिन ग्रंथरचनाकरकेजिसकाआयमैउलेखहैमरगर्भाधानादिसंस्कारकाविधा यकहोरोसेआद्यमैजिस योजनहै-जिसकापग्नभीआयमैहैअवर्षवा ह्मण पुनयीनाथाध्याययीन इसअध्यापनविधिकरकेजिसकापठनप्रथमा अवस्थामैहै अरग्रंयक्रमसेभीमथमपनहैमा कुवनेवेहकर्माणिनिजी विषेछन,समाइत्यादिकविधायकवावरकरविनसाध्ययागादिकमीज सभैअनेरेयदा-अंनअवस्थाकरके ग्रंथक्रमकरकेअंतमैजिसकासंनिवेश है कानारवनादिशून्यदेश-भिक्षाप्रतिपादकश्रुतिसमूहस्पअर्थका सैवन हैनन्यागकेयोग्यनही वेदवाकावर्गका मोज्योनिशेमेनयनेना ॥

अ.भा.का॥ करभिक्षारटेदरदर असोवेदवाक्पसारअर्थकोंवरखा नहै।सीकल्पनाभवमैकरेनहै प्राणीजोऊ सेनोपू र्वजन्मकृतसुक्न सेहानहै ।भागहीनचीननीकों शास्त्रवोधहीनरंकई शकरमोहिने सोमदगलनान है॥६॥दोहा॥नमुडीयनकेअहोजगेभिशाक रंभागजाकवाकरनृपवन गयेंराज्यकोंन्याग। ॥ई॥चौपाई॥ भिक्षाचरणनिजअनिवखाने।नों तेनीकोहमसदमाने। असआशययदिनोहिअगाधा। ॥श्यनादिकिमकीन अपराधा॥६॥भिक्षाचरनया थाक्रनिगावे॥ तथाश्येनादियागसुनावै॥औनस्मार कमजेने मोक्षेछुनरत्यागकरनेने॥ई॥मिसाजा नधर्मनिभारी होवन हैसोभिसाचारी जेकरभिक्षा लाभनहोऊ॥अनि कस्लेशनबपावेसोऊ॥ई॥अथवा निदिनकर्मकमाव।कहोन्यागकरकिमसखपावातीन ईषणाकीनरत्यागोआन्मचिंतनमैसदलागे॥७॥भस विधानकरतश्रनिजोकाभिसाकहिनकिमलजिन नही। जाअनेकवधासकरनवखानाहोवन हैदलीयक्षसमान।। Iभागहीननरको निओनागभिसाभिनकिमकरेवि धानाजोआन्मदर्शनश्रुनिगावाासोप्रत्यचकिमहमना हिपाया॥२॥दोहा॥करपादादिश्वयवकीरचनायु नहजोदासोप्रत्यछसभकीसदाविधिन अर्थवनहो ।। मै है। 1- सारअर्थपरमार्थकोंकथनकरेहै -121% रंकदरिद्र है। ३ जाँकेवावर जोंकेतपदेशकरों नपराजालोकत्रामा श्येनादिकिमकीनअपराधा श्यनादियागकूकर्तव्यताकरकेन मान कौन हेतु है श्येनादिकने कौन अपराधकीयांसोकहो। 141- तीनईवरणा पत्र ईवणा विनईयणालोकवरणा- । यथायालयावलीनिधाक्ति: ।। आनो और विधि. आत्मावारेद्रव्यःोनव्योमनव्यो निदिध्यासिनव्यः इनि आन्मदर्शनउदेशकरके श्रवणादिकका विधान अर्थवालानही होवेगा निवफल है -13 अ.भा.के. ॥७॥चौपाई।जोनिगम्यदेहसेन्यारा।जोमभकोअनि लगनपिआयोजॉकेहिनेभवप्रियलगानाायोविधआन्या यदितुममाना॥७॥ नथापिविनसुनआदिकजोकापर मप्रेमविषयहसोकानोकान्यागकहोकिमकारनाकायक लेशधरोकिमंदारन॥७॥परमप्रियशरीरसेन्याजोआ माअसनिउचागाविषयनकरतातनिहकोजायोंविधा मसुखनित्यलीजो दोहा। मुंडनशौचसनानकरअधो शयनवनवासाब्रह्मचर्याशमादिकर करोकिमान्मना स७॥कविनावीणानारीमुरवसेजोमीरघुनीउदेहोइ नोकोसुनोप्रेमकरआन्मसुखकीजीये।मुचारूसेजामा। हिमृगनैनीनारीरमी हेमसमनारीरूपनैनसेपीजीयोचतुन विधअन्नरस भोगोसदादैववस माथेकस्तुरीतिलक लीविधदीजीये।मौलीफूलमालाधरो चिनोसदाक रो पैसामुखमोहिप्रभवोरवारदीजीये।७कविरुवा चादोहा।चिननी निजअनजप्रनि अमजबकीनवखाना विवेकानमवोलेमुनि हसकरअवस्लाजानाविवेक श्रमउवाचाचौपाई।चितहतविपरीननुमचीना।वह विध भाषणायोनेकीनागरहोविपरीनअसवानीनोनिसंकर नहिकुछहानीमोरी।च्यासोरणाअविवेकनमोनासनहिक रसकनवराननोमूर्यकोटिकोभास अन्यनेजकीकोकथा। पाचौपाईनिमनअविद्यामैजोप्रानीनोकोमपुरलगनता बवानीशिर्करमाहिमपुरनाजोऊा विगतकृमकिमजाने। सोफाशलोकालोकपरजोदेशााजहाँनदिनकरनेजनिवेशशा १२ निगम्य उपनिषद प्रमाणकरजाननेयोग्यालयाचश्रुति ने वो पनिष पुरुषपछामीतिनारा जिसभान्माकेवासेसंसारमैप्रेमा पुरुषकरेहै। नथाक्रति नेवारसर्वस्यकामायसवाप्रयं भवति आन्मनकामायसर्वप्रियंभवनीनिन । मौली मुकटमै नाअनुज पश्वा नजान छोडेभाईकेप्रतिशर्क राचीनीमैत्री विटगत विशमैजोनीवरेहनेहैश लोकालो। केपर्वनसेपरेवादिनकरसूर्यकानेजहीनहीलागे ।

१ अ.भा.क.॥१०॥ तहाँनिनासो हैं नरजोजाहिमादिरूपलखे किमसोका। दोहा। अविवेकीनरकोयदा होईपरमार्थभानानबमंत्री सेउदिनखर बधिराकरेपलानोमानौपाई अविद्याआश्रि नहैनरजोजानाचमधरनालखेनसोजामानादुग्धकीजो मधुराई कमढ़वाली जमकबीनपाई॥५॥अविद्यार मैजिनकामनलीनानिन्वगंधनिनकबीनचीनाज़िमक पूरसुगंधकेताना नहोवें मिललसुनकमाना नानी नतापनापिननरजोऊोतवछायामुख निसेनहोजानि मरविरथकरयुग तुरंगाशीनस्पर्शनिनलगेनेभंगा। गाविषयप्रेमनजनानेवालेधारनकरममवचननि गलेोविषयासक्तभटेनरजोजचिननेसुखपावेनसो जोपसचिननेचिनि आनंदरूपाअिनिप्रियपायब्रह्मभ नूपा।अनिदरवरूपविषयकीआमाकरेधरेन हिरव्या हासादिदोहा॥अनुगनप्रियसनआत्मा इकरसनो। कोजानाचितचनेनजनिषयसखव्यभिचारीउरमाना सकाचौपाई। आन्मानंदजलधिनववासाकरेकिमा अपरसुरखकोआसानीरनिधीवासीजिममीनाहोवेन अपरजलहिनदीनारशचिदात्मसुखसागरके अनशन रैउन्मजननिमजननिरंतरराचिनविषयनमंगओ नोचा किमनचाहनहानाशभनेतवआश्रयहैजोका परसुखरूपआन्मलखमीकासुखलवहेनविषयसभनानो सुखसरूपनाकोमनमानाचिननेजविषयसुखले शाचिदात्मसुखमैकरोप्रवेशाचिदान्यसुखविनभटेनोहू॥ हिमादिस्स. स्वादिक कारुपयासोनरजाननेहै किंतु नहीजानने-10 नवमधुरनो नत्वंपरमार्थरूपंप्रत्यगभिन्न ब्रह्मा स्वरूप ननअभिन्नमधुरनानामनिरनिशयभानंदरूपनानीकोनही जानतेत्रकमवालककावालकाशनगंधपरमार्थका लेश निराले एकानमैवैठकरममवचनवेदोनवारको धारनकर सपा चिनिचेतन आनाऔर।।

अ.भा.के.॥१॥ अनेकपननकरवप्निनहोऊपर॥ दोहा ॥अविना शीसुखकीयदाचिनहानेकरेंआस॥देहउपाधिन्यागा करकरोआत्मसुखवासपराअंतरमुखथिरहोर करआनरामसुखपायाभदेवाहिरविषयकोचिनीक रनलजाय॥६॥ चौपाई ॥ सुखप्रकाशरूपचिनि जोऊ करगनवलुसमजानोसोऊ॥विषयजन्यजन सुखमैप्रोनी॥ करनन्ने उलटीनवरीनी॥७॥विष यजन्यसुखजाहिप्रसादु।भासन है नोहिपरमवाड़ासो आन्मसुरवन्यागकरभारू॥चिनन्दने किमंचासुचारु॥ अनिस्वादुगडकोपरिहारे। जैसेनगावालापमा धारे नयाआन्मसुखननकरचारू॥विषयसुखकिमा चांहेनिकारागायथाउसराम्रहषपावनानजकरक रनकंटवृषधावनानिमनुमान्मानंदम्यागाविषयति सदनवमनलागा॥१०॥अहोकरधरविषयध्याना॥ भटकेदरदरयुनीसमाना॥आत्मानंदपायउरभनर॥ चिनने स्थिरहोवोनिरंतर॥१०॥जैसेपरगणा नजार करभारेगखेलरनदोषसुदानीहारेगनथानुमआत्मनन्द विहीवाविषयनिरीक्षणमैमनलावा॥१०॥राहा।वहनक थनसेकामको सुनभइअवसार आत्मसुखकरव्याप्सनम बैठदया उरधार॥३॥चिननेनहीनियमकर विषयना सेमुखहो॥मिलिनामिलिनविभागकर प्रायोडखकी। बोअलिमृगमीनपतंगगजविषयाशाकरहान ॥चिननेनिहारेनही सममेकिमनअजाना।। ॥ १८. हेभ-चिंनाकरन लजाय चिंतनकरनेकरलजानही पावैहै। जिसआन्माकी कृपाकरके-18 परिहारेत्या गेहै। निकास निकार अशोभनरूपाचनविहावा न्या गा-19 मिलिना मिलिन प्राप्रिभप्रातिभेदकरके प्रायोवहल नाकरके दुखकू बौवे हैं उन्यत्रकरेहैं :- ॥

अ.भा.क.॥१२॥ ॥१०॥ चौपाई। जेकरशद होइसुखदाई।विषया। सतनबन्जेनकाई।जिमको किलरवमैमनलावे॥ तिमरांसभरव किमनमुहावे॥६॥यदिस्पर्शसुखा कॉविसनारे॥चिन नेविषयलंपटभारे॥जिमकानाको कंउलगावनिमकोलागलकिमनहिलायें॥१७॥रू पयदासरखकारणहोऊाविषयार्थीनरनोंनेजोऊ॥क नकरूपजिमरुचिकरदेखेगकाकरूपनिमकिमनहि पेखे ॥१०॥ चिनवृत्तसेविनरसजोफामुखकारण यदिहोवेसोजानबरसालफलजिममनभावेकिमा नवारुणनिमरवावै॥०॥निननेभवमैगंधजो जासुखकारणयदिहोवेसोजानबजिमधपधमनरभार वेचिनाधूमनिमकिमनमहावे॥१०॥भमखदायिकहजो जाडरवदानाहोविनसाजिमनपायसहैसुखदा नाअजीर्णरोगीकरनेविघाना॥शादोहानिरतिशयसु रुअनंनजोचिननेआत्मरूपातकोउरधरथिररहो भंवरुगभेषजभूप॥११॥कविरुवाचादोहा॥विवेकान मचिननिको याविधकरउपदेशातूरमा होइस्थिनभये उरधरकरमायेश॥१३॥योकीमायाप्रवलेकर मोहिना जीवअशेशाप्रथमकवलसोपायकर ननहोइमायेश। moइतिश्रीअनामनभावाप्रबंधेविवेकाअमचिना तिसंवारे विषयन्यागउपदेशवरननंनामप्रथमःकवला ॥१॥ श्रीमन्नारायणार्पणमिदमस्तु॥ ॥ १-एसभरव गधेकाशब्दमा- कोलाअंगार।३।-रसालफलओवका फला इंदवारणफल अनिकड होना अनारकहनेहै पंजावमैनं माकहनेहैमा चिनाधुमचियांकाधूनामाही-हेमदेशनपायस चीनीधनकरमिश्रिनसीरामराभवसंसाररूपरोगकापरमऔष धीरूपमा मायेश नारीरूपमायाकूदेखकरके मायाका नियं ताभगवानकाध्यानकरनेभया याते भगवानकाध्यानकरनेसे पुरुष भगवममायासेवचेहैन तिप्रथमकवलटिपणी॥

भाभा के॥३॥ ॥अथाहितीयकवलारंभः। कविरुनाचादोहापंचारकरपंच कोजोनिनकरेनकासासोज्योनिश्रीकृलममकरेसदाउरवास। शश्रीगुरुचरणासरोजका धरकर उरमैध्यानाभायोदूसरक वलकी करोनिजमनिसमानाशविरागादिसाधनविना नहीं। ज्ञानअधिकारानानेप्रथमेकवलमैकीनविषयपरिहारशक हिनदूसरेकवलमै आत्मनात्यनिभूपानानाविधप्रमाणकर। नयाज्योतिनारूपासायाविधसनयनिवरगिराआदरकररवार जिज्ञासाआन्मनन्दकी उपजीनिअपारमानिकटवैठकरजों रकरचिननिसीसनिवायाविवेकाश्रमयोगीप्रति वोलाव सरपायाचिनतिरुवाच। चौपाई आनंदरूपयाकोगा वो। कोअसभान्मामोहिवनावपापशून्यमान्मनवजोऊ सदाविचारेपंडिनसोऊ॥७॥जाननयोग्यअसआत्मरू पा। श्रुतिशासनजससुनीअनूपा॥ मैत्रेयोप्रनिभान्मज्ञा नारायानवलकमुनिकोनवखाना। कैरउदेशरओ त्पज्ञानाश्रिवणमननकरआन्मध्याना। आत्मदर्शनमा वणकराना। मननज्ञानकरहोवेभानागानो नेकहो। ममआत्मरूपा॥चिदानरपनेएकसरूपा।जिसकरम कलविषयहमन्यागाँचिदान्मचिंतनमेसदलागें॥२०॥ देहादिसंघानसेन्याराभबनकनहिअसरूपनिहारा॥ जबअसभात्मनाहिकोउभामा नबसुखनाकीन्यागौआ साशन्दादिजनिनसुखसेआना।भासेसखनराईसमा ना।कहोविवेकाप्रमयनिराईकैसेलखा आन्मसुखदाईश्र १-पंचहारपांचज्ञान इंद्रियहागापंचकोशब्दादिपंचविषयांकू।सोज्योनि सोप्रकाशरूपश्रीकृल। अपनीसुद्धिके अनुसार निसेचि मनिका हाथ जोड़करके नागाश्रुतिशासन छांदोग्यके। अमअध्यायमै सरअसुरकेप्रनिब्रह्माकाकथनरूपश्रुनिकोआना। सुनी है नथाचतनश्रुनिशसना यान्मापहनपामाविजरोविमान्यविशो कोविनियन्सोऽपियासःसत्यकामःसत्यसंकल्पः सोन्वेषव्यासविनि जासिनत्यःनि आन्यावाअद्रव्य-श्रीनव्योमनव्योनिदिध्यातिः नव्योपत्रेयात्मनोवाअरेदर्शनेनवणेनमत्याविज्ञानेनेदश्र्वधि दिन। ध्यानानिदिध्यासन

अ.भा.क.॥१४॥
॥दोहा॥ नानेहमरेवोधहिनमुनसेतरणसमाना कार्यक
रसंघानसेभिनकरकरोवखान॥३॥कविरुवाच॥
जैसेवचनचिनजिके सुनयनीशउरधारणनेत्ररछि
नभनदा असउरकरतविचार॥१॥अथमानसीविचा
॥चौपाई॥ है अज्ञविपरीत तिननीना गुरुशास्रथहा
सेहीनागहरेडापंडितअभिमानोगकैसेयोकोवोधेलानी।
॥१॥जोनरहोगकरेविदारनाकरेपानपावअनिदार
नारेमनाकरसागरोजाखलकोवोधसकेनहिसा
॥जोविपरीनमनिखलपानोपनाकोहमकरसकेनता
नीगोविधकथनकरननस्जोऊनजनयोग्यखलनपने
रसोऊशाप्रगरसमीपविषयअपिहोकाविपरीनमति
नजानेसोऊापिनकरहन हैरसनाजोकौं।गुडदानाकिर
मकरेसनोको पायद्यपिमहामूढयहनारी नहोचित
दात्मवाधअधिकारी नथापिअमवोधनविननाहीवने
वोसममयोमठमाहीं॥नोनेकरअसने केविदारन
उरमैउमाकरकेधारनाकरोयोकोआत्मउपदेशा॥
जिसकरयनिनपावेकलेशा॥२०॥ कविरुवाच॥दोहा॥
याविधकरसुविचारजर संवाधाननापायामूलाज्ञान
आनलख असवोलेयनिएय॥२॥विवेकाश्रमउवा
चादोहा॥भवसंज्ञकवनशोभने हैदुर्गमगंभीराभरकेज
नअनेकनिह निकसेकोइकधीर॥२॥चौपाई॥विचरेंज
होपिसाचीनारी ॥ कालरूपेअजगरभयकारी।
कार्यकरण शरीरइंद्रियादिसंघानसे-१२- अन विवेकसेरहि
नह इसीहेतसे विपरीतदेहादिसंघान•आमरूपकरहने जानाहै।
सारंडा पनि सरहिन है सहा सोजा हीरादिक के वेधनादिकरनेवाला
पुरुषभीमूर्वपरुषकुंवोधन नहीकर के हैनपाखलनप० मूखों का
राजाहै नदी नर्क देहादिसंघानमआन्मत्व वृद्धिकासाधकयुक्ति
उपमा रनआयकरके मूलोज्ञानकराचा
दिनबुद्धिजानकरकेचसेजही जिस संसारखनमे ॥ ॥ ॥

अभा के. १५ कामरूपनसकरडरभारी क्रोधव्याघ्रगजेभयकारी पोशानिंदकवानीजोजीकरणभूलकर्मिलीरवसोज । अनिमखसेप्रियवादी असलूजहाँवसिनअनादी। २सालोकिकयश हिनकरगीचापपर्वनकरदर्गम्यअनिमा हातस्त्रावनकशी कसारखागयोंविधभववनवजनभा खा।२५॥असेकांनाररटेनतमन्यागा॥राजमार्गमेनवर मनलागा।वोधनयोग्य आजमजानीकरौनक्आम्मसंश यहानी अथआत्मवोधनप्रकाराकविनाभद्रमर पात्रेभारूघराकारलीजेचारू नौकेमध्यमाहिवालेछिपांच कीजीयेोपनादोपपात्रलीजे नेलवानीनामदीजे गाढनमपार वोजहाँनहींधरदीजीये।दीपकजगायकरगखोवालेभूमि पर अधोमुखीघटदीप ऊपरधरीजीये।शब्दादिजनक। पांचवीगादिकलीजेपांच प्रतिछिद्रभिन्न भिन्नवाले घरदीजीये॥५॥चौपाई॥शब्दजनकवीणावर लीजै प्रथमछिद्रसमीपधेरदोजेस्पर्शजनकशिरीर पवरफूला॥हिनीयछिद्र केकरेअनकूला॥७॥रूपजा नककांचनवरजोमानीसरछिद्रलिंगराखोसोफारसच्य। जकरसपात्रलीजेग छिदकेसनमुखकोजाणगंधनि मिनकस्तरीजोड़ी पंचमछिद्रागिराखोसोईयोंविधा पांचवस्तुवरवाला छिद्रछिमनिराखनिगलाशकविरु वारपदोहा॥याविधजनमनिवरकहा चिनतिनब चिनलायनथाविधतिनकीयोसंभमेनिवरआज्ञापार य॥ ॥ देखकरमनिप्रसन्नचिनचिनतिकनसभा फिलीरव मिलीनामजनविशेष ग्रीषमतमैहषोंपरवहनश्व करेहै पंजावमै बिंडाकहनेनिसकाशब्दहै-१२। जैसे संसाररूपवना काभ्रम राजमार्ग• वेदानवाकारूपराजमार्गमै हेभ ट्रेच मधमाहिघटके उदरीचागेनरफाईशब्दादियांचविष्य काजनकवीरादिपांचलीजे::टिंग-समीपःतुर्यछिद्र चौर थेछिद्रके करी: निराले जदोंकरके : जुता अ भा के १६ नि काजाविवेकाश्रमचिननिको पुनवोलेयराज ॥३२॥ विवेकानमउवाच॥३॥चौपाई। कमलपत्रसमनेत्र विशालोनममैकिमनवभासेवासे। कविरुवाचायो वि घजबमुनिगिराउनारी॥सुनिनमनोहरवोलीनारी॥ ॥ चिनतिरुवाच। सुनामुनेअसघटकेपासेोची। गोदिपंचकमोडिभासा आनवस्तुयाडौरनकोजोकहो मुनेकिममासे मोजा४ाकविरुवाचार्याविधसनचित निकेवैनाप्रिसनमनमनिविकसिननैना हर्षमहिनवोले पुनवानी। विवेकाश्रमयतिपरमज्ञानी।३॥ विवेका मड्वाच॥ पंकजदलसमनेत्रविशाले चिनबनेअवा. कहोममवाले।वीणा दिपंचक जोउगावै॥खने भानकि मनीकापावै॥६॥किमवाछिद्रप्रकाशकमाने।किमवा घरमकाशकरजाने।भिनप्रकाशककिमवाधागाकहो रत्नेसंशयममभागाशकविरुवाचायौविधसनयनि। क्चनरसालाक्विनमनोहरवालीवाला। चिननिरुवा चाशालाशोभासंपनभारुखेनेनलखोवीगादिचारु॥ मुनेननोकोछिद्रप्रकासोनहिघटकरवीगादिक भासीघटमैजोचमकनअनिचारादीपतेजभीयनिवरभा सासानिमकरभामिनसकलसमाजाधिरसमीपजोमने। विरानादीपतेजविनआननकोजाभासकोमैमासमो हू।४। कविरुवाच।दोहा। विवेकामचिनन्तनिके । नेअसवचनमहानाप्रेसचमनबोलेपना वचनसक लसुखखान॥४२॥ १- नम० इसअंधकारमै० -121 वीणदिपंचकवीरादि। पांचवला हेकमलपत्रवन विशाल नेत्र वालीखनेभान. अपनेप्रकाशकरकेभान होते है क्यानपा-संशयममभारा सममेरे कोंभारीसंशयहनिसकीनिनिवासनेकहो ा। हेमनेघटकसमीप विराजमानजो वीरादिसकलसमाजहै भोगकासाधनसमग्री है सोनिसदीपनेजकरकेप्रनीन होवैहै। ॥ ॥

अ.भा.क. १७ विवेकाश्रमउवाच॥चौपाई॥मतिकामयघट भोज नजोजादीपने पदार्थकिमसोजाकिमवावानीया गनशरीवा। दीयनेजपदकरतुमगावा ४२ किमवाई नसेकोजन्यागादीपकपदकरनोहितचायाजोदीप कपदकरतुमगावो।चिनने मोहिप्रगेटसुनावो४३। कविरुवाच॥दोहा॥योंविधनुयनिवरवचन चिनच निकरमविचाराविवेकाश्रमयोगीप्रनिहसकरवो लोसारामा चिननिरुवाचा दोहा।मनिकामयश रावानहि दोपअर्थयनिभूपासनेसनवानीनथा ।। नहिदीपार्यसरूपानयुगनदेशापात्रकर चा मनचंपाकारानेजगिराकरमनमम सोचाछिना उरधाररा४६ केविरुवाच॥चौपाईजवचिनति 'असंवचनसुनावा। नौकरतोषयनीश्वरपावागनेत्रमूंद करभयेअसंगारीमांचकचकव्याप्तअंगाशचलननेत्र जलविंदमहानाअचलभयोमुनिअचलसमानाअखि लरूपआन्मनन्दजीजाकरविचारउरपेयनसोजाए। दोहा यांविधविषयसंबंध भासिनअंधसमान यानेस भवृधनभयेभान्मभानकरहानापरीनिजसमीपमैदेखक यो विधयनिवररूपानदाअवलाचिननियर विसमिनभ अनूपापाचौपाईपूर्वजपरविचारमाही करनभई अवलोप्रवलाहीमोहिआन्मवोधनकै काजाभियोपत्र नयहयनिवरराजापशमनिउपमाउपमेयवखाना। घडशरीरोनोसममाना। इंद्रियछिद्रकीतलनाकीनी परशरावकीसमनालीनी॥५२॥ नदीपतेजपदार्थ. दीपनेजपदकावाच्या काशरावास नेहकाभाधारमनिकापात्रा सारीपनेजपदकायथार्थ ४ दशा वातीचा चंपाकार चंबालाकीकलीकोन्याईजोचमहै। चनेजगिरा दीपनेजशब्दकरके कंचुक जामा-अचलप नके समान नामकरके अवलाहै वस्तुनःप्रवला है। ॥3॥१०॥ उदयः॥ ॥

के. अ.भा. क. १९ सनेहलिपिनवानीसमानाअंतस्करणमुनिकीनव। खानादीपसमानजीवमनिभारखा। वीणादिसमविषय शरगरवादोहा-गोविधचिदान्ममोहिकोदेहादिक सेआनास्वप्रकाशदेहादिकाभासिककीननेखाना। अनुसंधानप्रसंगसेन्यकचिदात्मपायामुकरलायसम दशाम रहिनभयोमनिरायामाचौपाई। आत्मज्या निरूपनाजोऊोनामैमानमनिकहोंनकोकोनोनेप्रत्र योग्यमनिरायासविचारकरपरसीकाया।५६ जबनिजननस्पर्शमुनिजानाानबमुनिभयोसमाधिज्या नाप्रिफुलनेत्रनों की डिठनाई।देखनहीवोलेयतिराई। ॥५॥ विवेकानमउवाच ॥ परमहंसशरीरभवसाही स्पर्शनयोग्य किसीकरनाहीं॥कामादिमलमलनतनुधा रीविशेषकरकरेसर्शननारीमाज्ञानसमानपवित्र नानामअर्जुनप्रनितलवखानााभन्मभानगोदाक रपूनारहितसदायनिवरअवधूता।पूरीभानसर्शक भवमाहीं तो कैयौम्पयनिदेहनाही दौप्रकारकरशीच घरखानावाहिरआंतरभेदकमानाकामदजलकरशुध नाहजोकावाहिरशोचकहावेसोजारोगादिमलरहिन। मनजोजाआंतरशोचकहावेसोकाशस्मनिकनेश चहोऊधारो। सोनिपदमरदनअधिकारी वाहिरा निरसदामलीना। असन्मयनिस्पर्शकिमकीनार दोहा। खगकोपरभंगसेस्पर्शकरेनहिको।असा निषेधगरजेसदाऊचेभुनकरदोर॥६॥ १विषयशर शमादिविषयांचा अनुसंधान-आन्मचिंतनप्रसंग करकेगा-मुकरलायोकेसमानजोदशादर्पयाकेसमानजोसमरिया एलसूत्मकारणशरीररूपाबाह्यदेशानन प्रनिविविनविरोधस्त्र रूपानदेनरगनविश्वनैजसमानरूपा निससरहिनभयोनरीयस्वरूपमा स्विनमाहिना चिनसाविचारकरके-५ असम वाहिर आनर मसीनजोमानिसमुमनेयनिर्केस्सर्शका हेकूकीया।।

अभा.के 8
चौपाई मुमुसाकरदेहादिसारेविषयसंगसेनोनरागस
सयनिकरेउलंघननाहीं। उकनिषेधधरेमनमाहीं।।
पदमरदननन पूर्ववरखानापुनानिषेधसर्वथामानापू
परअसजानोविरोधाअसंशंकाकासुनोनिरोधाई।
सर्वसंगयनिहरविहावनिर्जनदेशवसनमनलावे॥
यौविधार्थकरनिरदेशानिषेधवाका विरोधनलेशा
॥ई। श्रद्धावानमूढनरजोऊाविधिनिषेधअधिकारी
मोजोमीमासिकसकथनसुकीनानिषिधकर्ममा
अहाहीना।ईशाश्वानचंडालादिसहचारीविषयसंग
करदूषितनागमोकिमकरेस्पर्शमअंगा।परमहंसह
मसदोअसंगा। भंगलस्पर्शखलनरपावासोहि
कूदकाधेपरआवे।योविधकथनकराँचीना तथा
हिनुमोअबकीनाला दोहा । यतिनहिपरसे।
आनकोनहियनिकोनरआनाउभेशहिकरयगनजोव
सेसफटकसमान चौपाई।अधीनकैयालेसोवें
यियतिचीरकवीनहिधोवाशैनलजिनकवहनधोना
येगनिनदंडअधोना शव्यसंचयहिनादमधारी
येपुनाममोहिअधिकारीयोनारुढयेशवसमाना"
येनारीभाषणालेपटाना।।ध्याकथामयेअनुरागी
परिहासप्रियजाकोलागी।येअंथर्वकरणीकेज्ञाना।
येयनिजनरंजनमेगनी ॥३॥येनरहै परमाहीमारी॥
जोकाचिननिनवाहिरचायेपरदूषणमचकलैग ॥
देहादिसंधाननराम्दारेवजीना उनिषेपःखभंगकोपरमंगसेस्सोहा
मैकान्होजोनिषेधाजननशंकाअर्थमेहे।पाडावान गरुषलवाका
मैविश्वासवानपुरुषगई। ननुनिषिआचरणकोपापाजनकहोनेसेनिषि
धकर्ममैत्रहावानकीप्रनिकैसेहोके इसशंकावूमनमरखकरकहा है श्रद्धा
हीना निषिदकर्ममैकेवलगगकोहीपनिकाजनकहोनेसेमराविनाहीपट
नहोवेहै ।।प्राचीना वृधानअपर्वकरणी मारनमोहि
नादिकर्म गरा: लंगमूहा ॥

अ.भा.के. कलहामैजाकोउनकंठाभाचिनहने असउनयनि भासाताकस्पर्शकीकीजेआसा निषेधशास्त्रविननरजोऊ सुप्तनरनप्रवोधेसोऊाशचिदात्मचिंतनकंचुकधारी॥ असयनिकोकिमयोधेनारीचिननतेरहोकथानिराले। योमैनवअपराधनवालानवसंवाददोषरजानाादीनदं असमोहिविधानादोहा॥चिनहनेकहोममवंचा। नमकिमनिश्चयकीनाकिमवानहिहमनहिलखे औनगैर मनलीन कविरुवाच॥चौपाईयोंविधसुनकरम। निवरवानी।चिनकरदरिखननभईभवानीििनजअपराधस निश्यकीन।निजस्वामीकोदोषनदीना का स्वभावका पूचिननरजोगासनसंगनयरिपायेसोकाप्रसत्रमनया दिहोवनभाना। सोनरनहि कुशमषिसमाना ॥७९॥ ॥ ॥सोरगमलनवदनलजाय चिननिनिजअपराध करवोलीसीसनिवार विनयनीनिसंयुनवचा॥०॥ ॥चिननिरुवाच ॥चौपाई जोहिपरअपराधकरजाता ॥साधुकोपअनलप्रख्यानापिअज्ञानकेविनाविचारोशां निकरसकतनजलधिभारामशजिज्ञासाजबमनमैजागीम उनकंटानबमलागी अनिनिदिनअविनयहमकीनी। समाकरोनहिआजादीनी॥२॥समानिमिनयाँचामम जोजानवआगेविफलाकिमहोऊोसमासनकासहज खभाऊ॥दीनवचनकरनहिउपजाजाशदोहा।घटेदी। पकदर्शनकर देहादिकसेआनाप्रगदकीयोनुमआमा सो ममनिचिनजान॥४॥ चौपाई॥ आयनिभासायनिकीन्याप्रतीयमानामा इसप्रसंगकोजाणे देशानगर आत्मअनुसंधान मेलगाथा -करप्रसार बमननहोवे।५ कुशाकीमुषिसमान हैनई-जलजायकमलमल नहैमुखरूपकमलजिसका मीचिनहानियहकाम सनेना नकेरनहीकीयामकारकाजोविचारतिससे विनानगर जेलधिस मुद नारी ओपपरआज्ञानहीकीया॥०॥ ॥

अनिमूर्सविपरीनमनिवाणास्त्रीखभावकरसूषिनभारी।
नुमविनकौनमुनेअमजाना। तुरनकरेममुन्मिज्ञाना।
आन्मानिएज्योतिनाजोई जिज्ञासानोंकीममहोरीमा
नयुक्तिकरमने कहीजोदासीजानदयाममकीजोहाकवि
रुवाचाहोहायोवि कहाचिनतिजेब तबबोलेयनिराज॥
॥विवेकामचिन निकोचिझामविनसिरेनाजाशविवेका
श्रमउवाचाचौपाई आत्मज्योतिरूपताजाजाकहाँमाननौर
मैसुननोहा भयो विदेहदेशकागजाजनकनामचिदान्मनु।
खभाजान्जिनोंकेगहमैसहजखभावायोगीयाज्ञवलकच
लआवराविधिवतनसपूजननपकीनी विविधमैटनृपनों
कोदीनीभनिनरमनिवचनउचानावरमागोनपजो
मनधागकामप्रप्रवरभूपनियाचानिसीनवमुनिदीनीया
चारदोहा।जनकसभासंवादमै चिदात्मविनमुनिना
नावहनप्रअवसानमै वोलेजनकमहानारशकमज्यो
नियहपुरुषपुनकरनसकल विवहारा इमयोगीमनिमही
पनिकोननिमारारशचौपाई यौविधसुनकरन
वरबानीयाज्ञवलकवोलेमुनिज्ञानीरविज्योनियहपुरु
घकहावेनिसकरनरविहारसभपावरानोंकासाधा
कवाचाजोजानरपेनिप्रनियोलमुनिसोजास्थितहोवेग
हवाहिस्जावोकरेकर्मसभपुनराहावे॥४॥
१-माननिप्रमाणनआन्मवेन्योमैशिष-३-हदारण्यककेव।
अध्यायमै नीसराबाह्मरण जनकहवैदेहं याज्ञवल्क्योजगामस्या
दिजनकयाज्ञवल्करसंवादस्पंचिननिप्रतिविवेकाश्रमसुनावेहैम
योविदेह देशइत्यादि । तस्मैहयात्वूल्क्यावरंदीसहकामप्र
अमेववेवेनहास्ददौइसनिकाअर्थसकचौपाईकरक है भ
निनरस्त्यादिना याजवेल्का किंज्योनिरयंपुरुषत्यादिन्यज्यो।
निःसम्रालिनि होनानादिन्येनैवायंज्योनियालेपल्पयेनेकर्मकरुने
विपसेनीन्येवमेवयानवल्कर। इसनिकाअर्थएकदोहासा दोनों
पाईकरकह है किमज्योनि इत्यादि।व्यवहारकासाधककोनज्योनिवाला
यहपुरुषहैं ।इसीनरासर्वत्रकिमज्योनिपुरुषपदकाअर्थकरना।
॥ ४ ॥७७७७७७७७॥

अ.भा.क. २२
यावनकरेपुरुषविवहाराारविज्योतिकरसोउरधागायों
विधमनमुनिवरकीवानीपुनवोलेनपआत्मज्ञानी राज
बरविअनभावकोपावेकिमज्योनिनववंकहाव।सुनन्।
पवचनसकलसुखकारी।चंद्रज्योनिनबमुनिचारी
।।
चंदज्योतिकरनरसभकाजापूर्वउक्तकरतधरोगजागयों
विधसुनमुनिवचनरसालावोलेपनाजनकभूपाला॥७॥
अहशभयोजवचंद्रमुनिराजाकिमज्योनिकरकरेनरकाजा
याविषजनकप्रभजबकीनानबवोलेमुनिशास्त्रप्रवीना॥
नवनरअनलज्योनिउचाराअनलकरकरतउतवि
हारा॥सुनमुनिवचनमकलसुखदाई।मनिप्रनिपुनवो
लेनरनाराउतनीनरजहानपावकिमज्योनिनबप
रुषकहावे॥अससुनजनकवचनमुनिराईनवबोलेनपा
पनिवरदाई १०जबनरनिजकरकौपिनपावानबवाचाज्यो
निनिगावाआसनादिक्रियाहैजेतीवाचाकरनकरनसुर
नेनी॥१०॥अमजबकथनमुनीश्वरकीनाानबवोलेनपज
नकप्रवीनानिखिलज्योनिनरजहाँनपावेनहाँपुरुषकि
मज्योतिकहावे॥याविधनपमुनिप्रनिनबभाषावा
यंज्योति नरेमनितबराया॥१०२॥दोहा॥आत्मज्यो
निसरूपता विषेश्रुनिनोहिमान॥ कहाभलीविधशोभा
नेनिश्चयकरउरजान ॥१०॥
अस्तमितआदित्येयाज्ञवल्क्पकिंज्योतिरेवायंपुरुषनिचंदमारावास्य
ज्योतिर्भवतीनि चंदमसैवायज्योनियालेपल्सयनेकर्मकरुने विपलेनी ये
चमेवेनद्यातवल्का अलमिनेमादित्यानवल्काचंद्रमस्थलमिनेकिंज्योनि
रेवायपुरुषरत्यग्निरेवास्पज्योनिर्भवनोनिअयिनवार्यज्योनिया०२अन
मिनादिन्ये चंद्रमसलमिनेशानेभनौकिंज्योनिरेवायपुरुषनिवागे
वास्यज्योतिर्भवतीनि वाचैवाय ज्योनियालेराम्यहनीनश्रुनिका
थसहोपकरके विवेकामचिनहनिप्रनिकहनेहै जवरवअनभावईही
सेलेकरलेचौपाई मैदिखावेहैनर-धराराजा हेधराराज-
अलमिनेआदित्येयानवलपदमसल मिने शानेगौशानायांवाति
किन्योनिरेवापुरुषहन्यात्मवान्पोनिर्भवनीन्यात्मनवायंइसकाभ
थेरकेचौपाईमैकहा है निखिलेनि॥३॥

के. अ.भा. ॥चौपाई॥सुनायकिअपनोहिवखानोचिननेचिनलाया करजानोकिहोज्योतिलवस्तुकिमरूपाजिसनिमिननवप्र अनूपा॥१०॥जानिरूपयाँदनोंकोगावानवान्ममैकवई. नआवाजातिव्यनिनहिआत्ममाहौसभसेपरेसंगकोनाहीं ॥१०॥शुलभातुररूपनाजोजोज्योतिरूपयदिमानेसोका लसर्शनायदिसौभागे।ज्योनिरूपनानवमनलागोराचिन हनेनवअनलकेमाहीरहेदोऊआन्ममैनाहीस्पिस्पर्शसेभिः अनादीभन्मरूपगावैश्रुतिवादी॥१०उदयअलमयनों गप्रधानज्योतिरूपनायदितममानीनबरुणेअसनरूणि चोगाआमाउदेअलसेन्यागासाकारजन्यविंधना पायदिासराखेज्योनिसरूपानबचपलेचपलानवजाना॥ नहिआत्मज्योतिनोहिभाना॥धनरहिनहेनुसेशूना।आन्स ज्योतिजानअन्यूना॥१०॥दोहा॥वप्रकाशजोहैसदाभा सकपरकोजाना असज्योनियदिइनव सोआन्मानहित आन॥११॥चौपाई॥सौहिज्योनिकाज्योनिमहानेत्र निधरसुनमत्रनिवेरखानदीप्यमानचिदात्मपश्चाना भासिनसभभासकजाना ॥शयोंविधदूसरथनिव खानेस्वयंप्रकाशआन्यकोमाने जासभासकरभासिन सारे॥चिननेअमअपराउचारे॥११॥जिसकरसकल क्लुकोजानाअसंआत्मनन्वकिसकरजानाचिनहानेसअप रनिगावोस्वयंप्रकाशआमाहरावे॥१३॥ - नानाविधविकल्पकरकेआन्मानिएज्योनिरूपनासिहकरेंहै कहोज्योतिष न्यादिकरकेनश भागसेविनावेदानकाप्रवणदुर्लभहै सभाशयकरकहने है। हेसौभागेश हेनारीयोमैत्रिषनारी-18 हेनरुणेयौवने-नरूणिमर्य। सेकरकेचंद्रादिककाभीग्रहणकरणापा अपनल हैइंधनकाररूपजिसे मैदा हेचपलेचपलाविजली नदेवाज्योनिषाज्यो निरायुहीपासनेड़ा निनिविदांन श्रवणाकरपुरुषमहानभावकोप्राप्नहोवेहै इसआशयकरसंबो धनदोयाहै हेमहानेपानीप्यमाने.कठथुनिः ननत्रसूर्योभानिनचंद्रनारकनेमा विद्युनोमांनिकुनीयमग्निःनमेवभानमनभानिसर्वनसभासासर्वमिदेविभानिय मुंड कथुनिअपिनसभासासर्वमिदंविभानियेनेरसर्वविजानानिन केनविना नीयान इनिरहदारण्यकश्रुतिःत्रः ॥

अ.भा. को २४ किसकरआत्मनाचनरजाने। याविधअर्थकाथुनिमः हानोप्रन्यगात्मगनप्रगटवखाने।ज्योनिरूपनापरममा जोना१४ायदिआन्मानहिसनेप्रकासानबहोवेजड़ना। कावासा। निजजड्नाकरअंधप्रसंगा।जगतमाहिनहि। होवेभंगा॥११॥ दोषप्रसक्तियुक्किमहामा|आत्मजरू पवमैमानाायोविधश्रुतिनर्कप्रमाना।ज्योनिस्पूनादिया वरखाना॥१६॥ दोहा ॥आन्मनेजरूपत्वमै नुतना सुननिहासावरणमात्रकरजासके नरनमहोवन जास॥११॥चौपाई॥ भरतखंड विपूनकहावें। भद्रकर्मकरभदेपावे गोदागरुडमनीकोसंगाकिरन दुरितसेवनकरभंगा।साहरिदानामनदीप्रख्याता के रनदुरिनजनकेसभघाना सैविनहरिद्धासललमहाना। पूक्षककरनडुरितसभहाना॥११॥वजराजलसीस जोधारे तीन दिवसकरडेरिनविदारेगौतमीजलों निमहानाकिरदरिनदर्शनकरहाना॥१०॥ संगमज लसुननेत्रविशालाहरतदुरितदर्शनकखालेाचिनत। नेबाहयादीपुरानागवारवारअसकरनवखाना॥२॥ निहिवंजरासंगमसमाना॥ नरकोमुनिदानीर्थआना॥ ब्रह्मशमोहिजभयोप्रवीना॥ अससंगमवासानिनकी ना।। २२॥ सुमंगलारख्यामंगलरूपाहिजपनीसंगअनि अनूपा॥ पूजापासदिकनपभारी॥करनभयेदोनोनरना री॥१३॥ दोहा ॥ गोदावरीसेवामै प्रसकचिना नरनारण कीनवासचिरकालनिन सुनवांछाउरधार॥ ॥२४॥ सुनवांछाकरकर्मनिननरनारी मिलेकीन । ॥१॥ आत्मानं केन विजानीयात् इनिश्रुतिः ॥ २॥1हेम हाने- 1- हेसुजानेवा-निजजडना आन्मजड़त्वकरके। नजरूपन्व ज्योतिरूपत्वा भदकर्म सुहनकर्म। हेभदै। - गरुङमती गरुडगंगा नेत्रविशालेहेविशालनेवाली। गर। हेवालेत्रमा समंगलाख्या सुमंगेला हैनामजिसका मंग लस्सा शोभनरूपा-1-

के. २५
अ.भा.
सहभयेजशोभनेभयोसुननेत्रहीन ॥ १२५॥ नवा
प्रभावकरशोभनेअशोभन सुखविशेषाविषयजा
न्यचा,सदा चिनचनेजनअशेष॥१६॥चौपाई॥
अससुतजबनरनारीपावापुरभयोनननरिमना
वामनपालनमै अनिहिनलागा॥आननसभदंपनी
त्यागा॥ १२७ ।। मोहशकिसुनमैअनिजानानिसदिना
लालनमैमनराना अश्वर्षजबभयेविनीना। कीना
पिनासनकोउपनीता ॥१२॥नेत्रहीनसुनपठनलगा
या। वेदपाठनिससकलपडाया।यथाशक्तिनधर्ममै।
रानापिनोंप्रभाववाहिवलजानां ॥१३॥दोहा॥सदाचा
रलखपुत्रको ब्रह्मचर्यमैवासापिनाहअतिप्रेमकरआ
एनिजसुनपास॥ १३०॥चौपाई॥खरकरपुत्रपिनाको
चीना॥ प्रज्ञानेप्रश्नअसकीनाकोअसकर्मनानहम
कीना।जिसकरभयेनेवसेहीना॥१३॥याविधजब।
सुनवचनाचारा॥सुननपिनाहंगचलिजलधारा दुखिन
चिनचिननेअसवैनावोलेपिनामोर्जकरनैना।२३॥
सुनसुनजोनरखनचरावे। नेत्रहीननासोनरपावै॥अस
जबसनीपिनाकीवानी हसकरनेबपोलेसुनज्ञानी।।
जन्मांतरकृनकरणीजोजाअवहेतु किमभावोसोज।
कहोडकारणयामाहीमा सुनोनानसंशयकुछनाहीं॥
॥३४॥कार्यमाहिकारगुजावै॥ भूमैसकललो
कअसूगावे। शुक्रलनंनसेसिनपटहोवायांविधसभ
नरनारीजोबा३॥निमहमअंधपिनासेजाना॥ने
जवानकसकरेविधाना। यदिकहोअंधनाममकैसे ॥
दंपनी स्त्रीपुरुष-11-गोदावरीनटपरपिनाकृतपुण्यकेमा
नापकरके १२५% नेत्रजलपोचकरकेश अत्रवर्तमानजन्यमै परममा
त्यशसियामाही अंधनाविषेशामिनसुपेदःजोवेजानेहै॥ ॥

अ.भा.के. २६ ॥सुनोनातनुमअंधेजैसे॥ईतत्वज्ञानगोदाहैनान॥ निष्कामकर्मवंजराव्यान।उभेसंगमैजोऊनानासोनर नानमुक्तिकोपाना भगोदावरीसुनदीमहाना जहावं जरासंगमिलाना नहाँस्त्राननिवासजलपाना मुक्ति हेतु व्यासादिमाना॥१३॥ दोहा ॥नदीगारुनमनीजहाँ संगगोनमीभासाधरेपागनिसनीर्थकीयमावकीओ स॥ १९॥ चौपाई॥ पावननदी गौतमोजोजगधारा मल्लाज्ञानकीसोजसकलकर्मकरेसहानीलामैजला मनीयमज्ञानी ॥१४०॥ नानवअनुमधारा॥अहो नामछमेशकविदारयानेगमेदामुक्किदासाचागनाको पायमकिनमयाचा ॥१४१॥अहोपिनाअननुमकरनी ॥ करीसकलजोजाननवनीयाविधसभजनकरने वखाना।सुनवाछाकरकोनीहाना॥१४॥स्त्रानअग्रिहो त्रादिककर्माग सुनेइछाकरकीयेसमधर्माश्वान शकरादि कभवमाहीं।प्रियवालककिमचोहेनाहीं॥१४॥सुनेहि कौनधर्मतिनकीन अहोनान तुमअबीनचीनाको यकस्लेशनृथातुमदीनानाहिकार्यसिह किंचिनकीनाn ॥१५॥दोहा॥ नरसूकरसुखक्षणिकहिनरमरण करत हैनार॥ सुनउत्पति खभावकरहोवेदेख विचार॥ ॥ १४पाचौपाई॥जीवउत्पनिनानभवमाहीं। पिनाकर्मक रहोवत नाहीदिनमानोनानुनम से विटकमीकहो जन्मेकैसेपरजोनस्जहाजन्मकोपावे॥स्वकृतम ॥१॥ गोदा गोदावरीसराः गौनमी गोदावरी-भूत्यभावासी भावांतों मै गौतमोजलधारामैजलवहिवालापुरुषभ्रमजानी है। भागमा पानसकरादिकाने पकनिमिन कौनपुत्रेसादिधर्मकीयाहै सोकहो यौनधर्मादिक केअभावेपिवान सकरादिकका पुत्रवहनदै रख्या है तानेव्यतिरेक व्यभिचारआया कारणाभावेपिकार्यकासन्ये व्यनिरकव्यभिचारकहावेहै।वहीन हेनानजेकपिनाकामहरम नउत्पनिमैह नमानो नविते कृमकी उत्पनिनई ईचाहीये

अ.भा.क. २७
नसहेतुकहावोजननीजनकवृथानपभारापूर्वकहायों
नेव्यभिचारा॥१४ायदिसुधर्मवांछितसंनानाजिनेनानन
बसेजानानाम्यधर्मविनसंन निचार किमनकरनछ
नकरशीभारू॥१५॥दोहा॥हरकर्मउत्याधमै करेअर
एवखानापसोपोंकजन्यनुप्तिहिन करेयगादिमहानायर
जिसज्ञानहिनजानसुनकरतविवेकीन्यागानेजकरमा
न्मज्ञान असमनवांछानवलागा१५० चौपाई। पश्य
सिसेजोऊअलावा जैसान र शरीरजिनपावागयदि।
नआत्मज्योनिनिनचीनासोअंधानहिनेत्रविहीना।।
।१५१॥उदयुअलवजिनसनरूपानिजसथात्मज्योनि
अनूपा।उदयभूलज्योतिजिनचीना॥सोनरताननेत्र।
हीना॥ १५२॥ श्रुनिश्रवश्यदर्शनजसगावोजोअसओ
मज्योनिविहावा कलत्रमित्रसुनादिनिहारेरासोअंधामु
सशास्त्रउचारे॥१५३॥ पायगोनमीनानेमहानाजिहाँ
वजरासंगमिलाना।दर्शनयोग्यनदेख्योयोनातुमअंधार
संशयन हिनाने॥१५४ावहनकथनसेकामनकोजागौ।
नमीनटवसेनरजोजायदिअसक भोगनमाहीं॥सो
अंधा हैसंशय नाहीं॥१५॥दोहा॥अंपिनासैजानह
म भयेभंघमजान॥सुनमायाहिपिनाके होवेनानस
मान ॥५॥चौपाईनथापिन परननमनवाचा
वनसुनकरजन्मममेयाचाराननीनानहेमअपनाहीं।
पानसकरारिकभवमाही इसचौपाईमैव्यनिरेकव्यभिचारकहा है।
मैथुनसेविनाशकरगीकर्स जोपुरुषपिनातनधर्मकोंहे
नकहेहै। पाकजन्य भोजन सेजन्यादा अलावा विलक्ष
-101% उदयअलरूपसूर्यादिदृश्यज्योति अनि आन्मा।
वाअरेराव्यरत्यादिश्रुति जिसआमदर्शनकूआवश्यकथनकरेहै जन्म
ज्ञानसमोसासवआन्मज्ञानाभावेमोक्षकाअभावइसमकारअन्वयया
निरेककरकेआमसामानकारकीअवश्यनाजाननीचा निहारे कल्पा
गसाधनावरूपकरके देखेचानटपर गोनमीनारमै शरीरमनवा
गीकरकीयाजोधर्मनिस्करतुमने मेराजन्मप्रार्थनाकीयाथा॥3॥

अ.भा.क.२८ ॥सर्वहंगममजानमनमाहीं॥१५॥ गमर्यादिनका शकभारी|भासकचिदान्मकेसहकारी।दृश्यविशेषरू। पादिमाही निजसरूपप्रकाशकेनाहीश्चाताननमो गनवस्तअनेक भासेना कोदीपकराकानेलादिक सहकारीजैसेसहायकचिनिसूयर्यादितैसे।रपुरासो दिनहिखनेप्रकाशाचेननसनापायुकरभासावनेमका शयदिमानोनानकदापिनहोवेममसासानारायोग्य करणकरविषयकाज्ञानाहोवन हेनहिअन्यथाभान॥ विमलनेत्रनिहोवैजौको। शमैकिमकरेसोनाको १६शवधिरपदमदलनेत्रकहावेकहोशब्दको कैसे पावानानेसर्ववस्तदृश्यजानाचेनंनज्योनिकोभासेनार न॥१६॥धारूपसंभवलकहावेचिदात्मभिचना सनापावोअरज्योनिजिसभासेसेशासोनहिअंधास भकाशा। दोहा॥जोनानाममअंधना सोनपा पकरजानायोनेचिदात्मरामकी भईअनुग्रहनाने । १६४ाअंधनाकरयाने ममदारा दिवंधहानानहीकर्मअ धिकारमम मनानार्थममभानााचौपाई॥वाघु। ज्योनिजोऊप्रकाशअमज्योनिममअंतरभासोवाधि नधितानममजानाालखानवाहिरजइसंघाना॥५ ॥१६६।जायाविनपुवादिकजोजामायामात्रलरोहमा सोकादेहादिभिन्नचिदात्माकी भईरहाकर्नव्यनवाकी। नासर्वकादशाहगमर्यादि नेत्रअरमर्यादिजोभारीप्रकाशक हैसोह श्यविशेषरूपादिककेप्रकाश नमैान्याकेसहकारीहै।।३-अपनसरू पकाप्रकाशकनही है। विति चेतनत्रया- ममसाक्षाना मेरेभारस सर्यादिनहूयेचहीये यानेसूर्यादिमेरेडसहरसीकारणसेखनेमकाशा नहीहैदर दर्शनक्रियाकेयोग्यजोनेत्र निसेकरकेरूपकातानहोवेहै। शब्दकालानहोनही नैसेश्रोत्रादिकरणभीअपने अपने विषयग्रहे राकरेहैन। सर्ववमुद्रशरूपहै द्रष्टाचेतन से भिन्ननही योने सर्वकल्पिनवस्नुअधिशनसरूपहोवेहै रजुसविनतथाचश्रुनिस खल्विदंब्रह्मेतिगमग काकी साक्षात कार 13101

अ.भा.के २४
निर्जनदेशवासहमकीना अमलज्योतिचिंतनमलीना
कहाँदिवसकहाँस्जनोनानाव्यापकरूपमासेमासान॥
हमहे रामपरमसुखधामागनहिसनविनसेममभवका
मामोहकथाममदूरपलानाकर्मवीनसहवीजजलाना ॥
पराभवजलधिकानामभयदानाकहोंगयाकुछकहानना
नानिहिममदर्शनयोग्यशशिभानानानन हिदर्शनयोग्यता
शॉन॥१॥परनरकोजोवचनविशेषानिहिममकरेसोका
र्यलेशाचंद्रादिकाजहाव्यनिरेकालसेनहोआत्मज्योनिएका
॥५१॥असज्योनिमासेममअंतरराचिननाकाकरोनि
रंतर शानभईमेनदशाविशेषाविषयसनेहयानेले
शादीपतज्ञानअधिमैनात॥भयोममकर्मपनंगविद्या
न॥१२॥दोहा॥ सुनोनानअवहिनकथा नमसेकरों
वखान। जिसकरविषयासंगनज पावैपदनिर्वाना।
॥चौपाई॥अहरोमअसजोसंवेदनाहनाममनाकरता
छेदनाअज्ञानरूपदावानलनानाभसमकत्तलखमारणीजी
नाथासुधाजलधिज्ञानभवमाहीं।अहोकरकिमसेवनना।
हीगंगानटवासीनररूपाखनेजिमषशानिहिनकृपा।
शनिमान्मसुखनानकरवारनालहाउस किमविषया
सुखकारनाखंड्यनशीनजलखाइपानज्वरपीडिनकोकर
नजिमहानादानानविषयसुखनिमदरखदाईनिजोभना
सुखस्सरघराहीचेननसुखसरूपहैलोजाअसआम्मनित्य
१-कर्मकावीजजोवासनासोअपनेकार अज्ञानकेसहिनतानरूपअधिकरभसम
भयाहै। शशिभानुल्यानवलकनेराजाजनककेनिज्योनिवरूपकरकेकहेजोसूर्या
दिकसोमेरेलूंदर्शनयोग्यनही हेनान व्यवहारकासाधनावरूपकरकेमुमकुंभापशिनन
हीहैं। कृशानुअग्निाभवचनविशेषा-ज्योनिवरूपकरकेकयाजोशब्दविणे
पाण व्यनिरेका अभावाई। विषयनेलसेरहितमनरूपवनीशानभईहे हे
नानाविषयासंग विषयोंमैआसक्निकून्यागकरबाहेनानमैरामहूं इसप्रका
रकाअभेदउपासना वनकीभनिभाजीपसमूहब नयनषा-
विषयसुखके वालेकलेशका हे कोंपावनहीं।

अ.भा.के.३०
माननोह॥१७॥शिरिणविषयसुखकोकिमनाना।
करेवृथाचिननदिनरानागारखेडेएनपयंकरजोवतानासो
नचहें काजीजलपाना॥१॥ पश्यनानचिनकीढिना।
होयोनेपरेकृतघ्नकाई जिहचेननसनाकरभारूपक
रलेसकलविहारचिनचारू॥१७॥असचेननचिननचि
नत्यांगाककिमतुलविषयअनुरागाभवकानुनार
नचिनजाना॥वारवारमनिवशिश्वखाना॥१५॥कर
ननानचिनचेशजेनी। भवकलेशकाकारणानेनचिन
कौशातिविनाकल्याना॥होवननहिकश्यननमहा।
ना॥१८१॥चिनशानिहिनयनननिकीजेायानेलोन
परममुखलीजे॥कामादियुननडमननवनानासिक
रसाधेनिनकार्यजानशा असज्योनिजोखनेप्रकाशी
भासेतवनरअविनाशी|अहोनानकरनीसउपेक्षाचा
हिज्योनिकरेंअपेशारिशदोहो।होवेनाननयमनयरि
यौविधशंकालेशपिंडिनसमयेहवोलमम करतकथ
उपदेशाच्या चौपाई।सुनोनुमसमाधानअसनानापा
करहोवनवसंशयघानापरहसपनामभवमाहौदेह
माहिदेहीमैनाहीं॥१७५॥ देहनिवासीचिदात्मअछैदा।।
कहो नानौमैकिमभेदविवेकौविवेकधर्मसुजोजाप
रमहंसपशुभेदकसोकानों नेमनपरिगामसरूपाचेन
नभावनचेतनरूसारद।दोहा ब्रह्मादिसकलभूलम।
चेननकरसजानाजचनीचनागगनमैभ्रकरचेननभाने ।
11- नाना. हेनान हेपिना राखंडनकरकेमिश्रितजोफ्य
पयदूधकाविकारक्षीरादिकनिसकर जिसकजिसचेननक
रकेत्रमा नासनिसचेतनज्योतिकी उपेसाकरकोना-परहंस०
परमहंसभरपंशुसंज्ञा देहमैहै देहीमान्मामैनहीं है।
- विवेक अरविवेकरूपनस्करणकधर्मपरमहंसभरपस
काभेदकहैं-19 विवेक अविवेकमनकापरिणामहीना
गुणनमै सवादिगुणोनिष्टहै आत्मानिएनहीं है -113

अ.भा.के. १
१८॥चौपाई॥गमनागमनभिचनाजोऊ॥लिंगगन
हैनचिनिमको जिमघटीयंत्रपरीकाछन्ना। भाg
सिनतानभ्रमननभभिन्ना॥१९॥नथादेहादिगाना
कार्यजान भासेभमकरआन्मगननान काममा।
हमलयुनमननोह।शोधनकरोनान्तुमसोज॥
विनाचिनहिचिदात्मरामा॥होवनभानना।
नसुखधामा॥चिननिरोधकरतानविचारो॥आत्मा
देहादिकसेन्यारो॥१०॥शोकमोहादिधर्मकर
लेपानिहिसासीकोयनोअलेपा॥ नीलपीनादिरूपवि
शेषा॥ जिमभानमैभासेनालेशा ॥११॥ दोहा ॥
॥शोकमोहमनकेधर्म जरामृत्युननुजान॥सुधापि
पासापायागेन हैमहान ११२॥जिमपरधनके
निम आन्मादूषिनजान॥१३॥चौपाई॥ भासमा
नदेहांतरजोगअन्यनेजप्रकाशकसोईसोअविना
शीनेत्रमहाना नेत्रमाननरनोंकरजानाशपूर्वज्ञानये
दुरिनसंघानाानिसकरअंधपत्रममजाना असभ्रानिक
रनाननिवारनाविमलनेत्रचेतनकरचारन॥४॥चि
दोमामुख्यनेत्रहनानाजोप्रकाशेसकलदृश्यजाने।
चिनसंगनकरभासेमलना नजोनाननों ने चितक
लना॥१६॥ असमुनमुनवानीसुखदाई।
१-गमनागमन० लोकपरलोकमैजोगमनागमन है अरभित्रनाजी
परस्परजीवोकाभेदहै सोलिंगशरीरनिरहै चेननमैनही ।।
जिमघटीयंत्र० घटीयंत्र पंजावमै हरटकह न है जिसमें वांधीजो
घरीसुदघटिका निनपटिकाके उदरंगन जोनभआकाश है मोआ
काश जैसे घटिकाकेअधः अर्धगमन करनेकरगमन की
नीन होवे है अरघटिकाभेरकरके आकाशकाभेद प्रनीन हो
है तथा गमनागमनादि आत्मामेनीनहोवेहै. चिनका
लनाचिनकाफुरना -13

अ.भा.के.३२ वोलेपुनापिताहिजराई ननुकरमाप्राणादिसंघान॥ कहोआत्मानौमैकोनान॥१॥योमै अन्यतरकिमा वाआनाजाहसोमोहिकरोवरखानायोंविधमननपि नाकीवानी॥चिनचनेवोलेसुनज्ञानी ॥१०॥जिसी करनरसभरूपनिहारे।सुननशब्दजिसकरनरसारे ॥जिसकरजाननगंधसुहावनालहेस्सर्शयोकरेनर पावनगरराजानननरजिसकररसजानासोआ मानिश्यकरनाना॥ नाननयोमैसुधापिपासागशो कमोहकाजहाँनवासा॥ २०७॥ जरामरणानहीयों चिन मैजानसीआमनानलखोचिधातु॥असआत्म नाननो हिसुनाया॥ उक्तियुक्तिप्रमाणावतावा ॥२०॥ याविधकथनपत्रजवकीना॥भयोब्रह्मशाइखहीना गसंगमतीरआन्ममनलाई शांगिमुनभयोहिजराई। ॥२०॥दोहा॥अंधकथावरतोहिकोचिनहानेकरीगान॥ चिंतनकरसकाग्रचिनाविषयाशाकरहान॥२०॥कवि रुवाच॥ यौविधसनएकाग्रचिन चिननियनिउपदेश निश्चयकरचिदस्पतान्यागेनिखिलकलेशा२०४ामा संयोकभासकर भोसकतेजअशेषाधारेसोश्रीकृल उर दूसरकवलविशेष॥२०॥ ॥ इतिश्रीअना मृतभाषाप्रबंधेविवेकानमचिनहनिसंवादेचिदात्मे रुपनावरन नामहिनीयः कैवलः॥२॥ भदेहादिकमैकोईसकआमाह अथवादेहादिकसेन्याराकोईआन्मासोर कहो जिसकेर जिसआमाकेप्रकाशकरकेपुरुषरूपादिसकलेवि षयकुंजानेहै सोआन्मा हैनथाचकरनिगयेनरूप्रसंगंधंशब्दानस्य नि मैथुनानायनेनैवविजानानि इनि३ जिसके प्रकाशकर॥त्रा नशा भासकसूर्यादिः॥ नथाचमुंडकश्रुनिः यस्यभासासर्वमिदवार भानिनि ॥ इनिदिनीयकवलः ॥२॥ ॥

अ.भा.क. ३
॥नमःशिवाय ॥ ॥अथवतीयकवलारंभः॥
कविरुवाच॥ दोहा . ॥ योगीश्रीचंद्रके पदपंकज
उरचाराभाषानीसरकवलकी करोखमनिअनुसार।
॥१॥योंविधसरकवलकर पदार्थशोधनहाराक
हीआन्मचिदरूपना उकियुक्तिअनुसार॥२॥अथा
अबनीसरकवलमै आन्मानंदविचारावेदयतिप्रमा
करयनिवरकरनउचार॥॥विवेकाश्रमयोगीजा
बयोंविधबोधनकीनानियकरचिदरूपनापुनवोली
अनिदीन॥४॥ चिननिरुवाच॥चौपाई॥वेदयुक्ति
मानकरीना.उ.चिदात्मज्ञानममजाना आत्मा
नंदरूपनाजोऊ॥दौमैमानकहानहिकोऊ॥५॥मे
यसिद्धिविनमाननहोजायाविधकथनकरनसभको
ऊ॥नानेवेदयुक्तिबमाना॥करोमुनीश्वरमोहिवा
खाना॥६॥कविरुवाच॥असचिननिकावचनम
हाना॥विवेकायमसुननिहर्षाना॥ धर्मदर्शनभे।
देकअसवानी॥यनिवरवोलेपरमज्ञानी॥॥विवेका
अंमउवाच॥ कृशांगिफलवांछानवजागी नहिहो।
बैंसाधनअनुरागी।मलनचिनाविषयनकरभारू।
पूछेक्यं आत्मसुखचारू॥॥विषयजन्यमणिका
सरेक्जोऊनौकरआन हैमननोहयनिविरका
वाछिनसुखजोऊोकिमानेभद्रेमसोऊपरे॥
दोहा ॥ नरकाअंतस्करगाहै ॥
3
।११० उक्ति श्रुनिप्रमा॥२॥ वेद० श्रुनिप्रमारण। ३। हेभाना=
॥४॥ मेयः प्रमेयवस्कीमिदिन ५: भ्रमदर्शन०विपरीत ज्ञानको
दूरकरनेवालीवानी॥ ६ ॥ आन आछादिन ॥७॥%विरका
सन्यासीयोंकों वाछितजोआत्मानंदसो कैसेजाने त्रा-

अ.भाः क. ३४
आम्रवषफलसमानाअयुकजनकवहदोषकाकरलतोष
पकजाना॥चौपाई दोषयुनाईदियनरजोजाइना
मविषयलखेकिमसोजापिनकरहनरसनाहैजाकोगगुड
गुनरसहेलभनौकोसावलवननिजसजानीकोजान।
नौकरजनिन अपरअभानाकामलकरजिमपीननाभान
॥होवेनशखशकलनाजानाशदोहाविषयानंदज्ञानक
रनिमनवभयोअभानाकृशागिआत्मानंदका होवकिममा
दनिभानाशाविषयसखलवचमनमे लंपटेशुनिसमा
नाहोआत्मसुखजलधिनय कैसेदोभान॥१४॥
॥चौपाई॥भूमिपूरिनहेमकीरवारी॥क्षेत्रज्ञानशून्या
जिममानी॥ऊपरतावसनिरंतरविनावोधनहिपार
वैअनर॥१५॥नथाजोयहंजीकहा।ब्रह्मस्पनानि
सदिनपावैगप्रत्यकस्पनोंकोजान।महामोहकरयों
नेछाने॥१६॥याविधनिशिवायजोऊवार्तिक
कारवावायहदोजमदनअर्थकाकरनवरवान।
नगिभसनिश्चयकरजान॥७॥महामोहविलासा
उत्पन्नाविषयरूसीमेघ करछन्ना प्रत्येगानेरचंदमा
हानाानिकरस्थापिहोवेनभानापत्रिलोकराज्यल
धनरजोकानहिभिसाचाहेजिममोजायौविधपरानंद
जिनपाई॥चहेननुकानंदेदुखदाई ॥१९॥
१-जैसेकचाभाम्रफलरोगकाजनक है अरपकाफलनुदिकोहेन है।नसे
शुचिनजन्ममरणसंसारकाहेन है शचिनज्ञानहारामोसकाहनहै। म
विषयवासनारूपदोषकरयुक्त हैनस्करणजिसकानम अ
धिकारीपुरुषकोंदवलवैराम्पहै इतस्मान्मज्ञानहै इनमस्वरू।
पसखहैवानिजकरकेमुक्तरूपनिसकामजानोरूपत्वधर्मकरकेपीन
रूसून सूर्णराशीही स्वर्णस्थानतानः। अंतरभेदनिशि
खावेदानासोहैआश्रयमूलजिसका।भूमिपूरनस्यादिदोचौपाईवानिकवार
काहारी महामोहभज्ञाननिसकाविलासधमज्ञाननिससेउत्पन्नभयाविषया
रूसमेघसर्वजगनकोंभ्रमकाविषयहेणेसेअथवामहामोहराविलासईषणारू
पतिविशेषनिमसेजन्यवियदादिप्रपंचसोई मेघसघशहैन॥ ॥

अ.भा.के. ३५ सोरहाउपमामिषामजान वार्निकलनकोवाक्यहाग निकरनवखान परमानंदसरूपकीरचौपाईयोंविधपरा नंदहेजोजापावैकचिननेसोकाविषयजन्यमुखमैअनुरो गाचिनहनेजबकरैमुन्यागाप्रत्यकप्रवणतानबपावापरानं दमैजारसमावाशरभादिकजोहैसरना नौकेभोगजनिता मुखभागस्वर्गमानश्रवणकरसोजचिननेनरपावेनको राज्योनिशोमादिककाकारीस्वर्गमानवाविनमासु रपुरगतसुखपाविनसोजामानसुननकाकामनकोजा। दोहा।तिमनवजबचितशुद्धीकरचिदात्मपरताहोदावरा रोहेनबहिलखेंपरानंदहेजोमानानेग्यमविफलनव वताकेत्रमहेनाआत्मानंदप्रमाणाजोपूहेयुक्तिसमेनाश चौपाईयद्यपिकथनयोग्यांनाही प्रसकचिनयोनेभवमा हीनथापिभगनीन ज्येशाशाखमार्गमैहैनवनेशार। उपदेशयोग्यनों नेनो हिजोनाकरौ संशयनवहाना।आत्मा नंदमैथुनिप्रमानाकहाँप्रथमपुनायुनिमहानाशंकरअन्वय व्यतिरेकमहानाानपंकरभाचिदान्मसखजानानिधर सुनभुनेश्रुनिगावोआनंदरूपान्मठहरावे॥विज्ञानानी देस्सहब्रह्मायाविधनिमेटेसमभ्रमासुनोश्रीनआनंदवि चोगाकगदुरनवसंशयभागाायोवनयनसनमार्गचारी निअधीनभनिभोजनकारी॥रोगरहिनभनीवबलवा नाविनयनसकलधरापनिदानारायविधयदिनरहोव महानारामानुषसुखनाकोकमाना॥७॥ उपम्ममियाजयाजकरकेवा महामोहइत्यादिनीपाइदोमैवानिककारमरे वरनार्यवासकाअर्थहैन-इराप्ति दुर्लभ नाममा हेसचराइंद्रियमनकीएका अनास्सनपकरचनथाचतैनरेयश्रुनिःसनयोनयनसनपलबाआनंदोब्रोमिय जानानामविज्ञानमा रंब्रह्मेनिश्रुनिम्नशमोन श्रुतिप्रतिपायभानंदवि चारसुनानथाचनैनरेय१निःसैयानंदस्यमीमा साभवनि युवासान्साधु युर्वाध्यापकःआशियोइंदिशोवलियनसेयंएथिवीविनेनपूणासानसा- कोमानुक्आनंदः आशिअनिशयेनअशिनाभोजनशक्तिमानादिया अनिशयेनदृढः रोगादिकसेरहितायहश्रुतिपदका अर्थ है।

अभा- केई विषय 7 कर्मकरगंधर्वनायोकोनरमेशनगणहैसखनाको शयेहिजानि गंधर्वकहानिनोअधिकशनगुणसखपाचागंधर्वसुखशनेगणि नमहानापिनसुखयुनिकीयोवखाना।शपिनसखसेशन गुणा महानाजानजानदेवमुखमानास्पार्नकर्मकरसस्तनधारीश नगुरगसुखनाको हेभारी॥हापौनकर्मकरसरताजाकोनिनोशना गुणअधिकसुखनाकोनॉनेशनगुणा सुखमहानासुरपलिका सुखश्रुनिवरवानाधासुरपतिसुखशनंगुणितमहानादेिवगुरु सुखकीयोवरवानाानोनेशनगुणसुखअधिकाना होवनप्रजाप निकाभानापानानेमुखशनगुणिनमहानाब्रह्माकोहोवनहेमा नाकामहीननरश्रोत्रियमहानानोकोहीवनउनसुखभानाई। विषयीभावनिर्मुकाआन्मसुखश्रुनियोंविधनाभद्रेयाविधक थाविशेषानेनरैयमैजानभशेषारिंशदोहाउत्तरोनरसुखशा नगुमायो विधकुरमुविधानाअनुनमात्मानंदकोश्रुतिरमकी नवखानामाचौपाई ब्रह्मानंद विनभयनपावायौविधथुनि अंनमैगावापरमानंदयरोंकोजानायोविधपुनाअतिकर नवरतानाइएभवमैअपंजीवहैजेब्रह्मानंदलवभोगेनेने। अपरायोंविधश्रुनिमहानाआन्मापरमानंदवरवाना॥४॥ १ अजाननामवर्गलोककाहैनिसमैजानदेवासुरपनिइंद्रना-देवगुरु सहस्पनिम्न प्रजापतिविराटनपा-ब्रह्माहिरण्यगर्भनदी पापरहिनविहानन नैनरेयापनिषदमैसंपूर्णजानानथाचनैनरेयश्रुतिःनेयेशनमानुषा:आनं दाससकोमनुष्यगंधर्वारामानंदाश्रोत्रियस्यचाकामहनसानेयेश मनुष्यगंध वरिणामानंदा:सएकोदेवगंधर्वाणामानंद श्रोत्रियस्यचाकामहतस्यानेयेशनंदेवगंध वरिणामानंदा:सएकःपिनणापिरलोकलोकानामानंदःश्रोत्रियस्थानेयेशनपिनर चिरलोकलोकानामानंदा:सएकआजानजानांदेवानामानंदाश्रोत्रियसनेयेशनमा आननानांदेवानामानंहासएकाकर्मदेवानामानंदःयेकर्मरादेवानपियंनिश्रोत्रि। पसानेयेशनकर्मदेवानामानाःससकोदेवानामानंदाश्रोत्रिगनेयेशने देवानामा नंदा:सएकाइंद्रस्पानंदयोवानेयेशनमिदस्मानंदाःसएकोहसरानंद-श्रोत्रिय सर्वप्रह्मापर्यनजानना-आनंदब्रह्मणो विद्वाननविभेनिकुनश्चिनासकोः स्थपरमानंदा अस्स सापुरुषकाखरूपकाअनुभवसानंदपरमानंदहै विष पसंवैधजन्यसुख सेविलक्षणहै।सासनस्वानंदस्पान्पानिभूनानिमाचामुपजी अ.भा.क. १७ यदियहआनंदरूपनहोजाकरेप्राणादिक्रियानवकोजा याविधअपराश्रतिमनकानोचिदात्मानंदस्पवरखाने।४शचि नहनेयाविधश्रनिनानाब्रिह्मानंदरूसमैमाना।उक्तश्रनिप्रमाण नामाहाँचिन नेसंशयकोउनाही भरायेत्रिवर्णकर्वपरजाना शिश्वशिशदिशुनिज्ञानानेनिवांछिनअर्थ नागमोनज कल्पिनुहमनहिधारोहशसोखासदानंदविज्ञानआन्मजय अनंनौनापर्यश्रुनिजान बटविधलिंगप्रमाणकरा४ाउपे क्रमडपसंहारअभ्यासअपूर्वफलनाअर्थवादारधार उपर पनियोंविधलिंगवरामाचौपाईसदेवसैम्पइनिथुनिमहार नोसहिपूर्वसनवस्तुनखानीयोंविधहैप्रतिपादनजोगाउपक मलखचिनहानेसोजाधमनीयमानजगनअवसानासदानमा रूपजोश्रुनिवखानोवालेलखअसउपसंहागामिलदोडलिंग एकउचाराशनवलकाजोअंगलोवारवारापादनवार लोनतमसीनियथानववारा॥असअभ्यासमरूपउचारी।। आन्माश्रुनिप्रमाणकरंगम्याप्रमागांनरंकरसदाअग म्याअपूर्वनारमजानमहानाऔपनिषदमिनिनिवरवा। नोधरापारधनिवृतियावेतनाहीनावनकालचिरमुक्तिमा हौजवहोवेपारयकीहानी ब्रह्मरूपनबपावेज्ञानी ॥७॥ कोहोवान्याकःपारायान्यदेषआकाशानंदानस्सानाइसथुनिकेपदो काअर्थ यन्यदिएपसर्वसामोआकाशापरमात्माअन्यानजीवन क्रियाको कौनकरापारापाननिश्वासनक्रियागराशिष-सर्वोनमात्रिवर्णकाविर शिवशादिब्राह्माजनकादिक्षत्रयासमाधिप्रभनिवेश्य है। छांदेग्यकेष रोअध्यायमैःसदेवसौम्मेदमग्रआसीनाहेमहानोसहिपूर्व उत्पनिसेपूर्व। भागनदास्यमिदंसर्वमिनिथुनिया प्रकरणमनियाद्यवस्तुकाअनुगले मध्यमेव औपनिषदमिनिनि-ननीयनिषदंपुरुषएछामीनिश्रुनिाऔप निषदंउपनिषदप्रमाणगम्यान्वानामनेरेश हानीनिनिनियाचश्रु: निःनस्सनावदेवचिरंयाक्त्रविमोशेअथसंपन्यानसनिसविहानकों यावत्र विमोझे जिन्नाकालपारधनाशनहीभयाअथ प्रारब्धनाशसेअनंतर ॥ संपत्स्से मोक्षकों प्रातहोवेगा एनिश्रुति अर्थः॥३॥ ॥ ॥

अ.भा.के. ३८ यौविधंकोप्रतिपादनजोऊचिननेफलजाननुमसोजाकि मर्ननवसप्रश्रनुमकीनाशुनहोवेयोंकरश्रुनहीनाशा सप्रशंसावाचाजोगाअर्थवादजानोरमसोजायोचारंभगा मुनिकविकारामुनिकासकसत्यउरधागा५शयाविधमृद जन्य कार्यसारेगमूदसरूपजिमश्रति उचारेब्रह्मविरचिन दृश्यनिमवालीब्रह्मसरूपनननोनिरालेायाविधकोप्रनिपा दनजोगाउपपनिलिंगचिनबनेसोजाणादोहायोविधषट विधलिंगकरनार्थमहानाचिनलगायसुनचिननेति सभकरनवखानामाचौपाईऑपानरम्यानकरवादी करे विवादप्रमादीश्रुतिस्वार्थसंसर्गसम्पाकल्पेजोनिजमति अनुरुपा५॥विशिअर्थकल्येवाजोमानेनरनहिवानरल खसोजागसमारोहमादिक दंडानृिपनाकोएनकरेमचंडा ५६अहयचिदानंदश्रुतिवेद्याकल्यनकरेजोनामभेद। निनमुखदेर्शनयोग्यनवालोपरसेनोकोकरेनिगला५॥ भूमैहवरवंध्यानागाव्याघ्रजननीवरियाचारी|सीनहो वेसुर्घमानायनोभेदूवादीनरजानामभेदकथनमद्या करउन्मनाविहिताविहिनकृतवर्जिनचिनाकैिसेसोनर हिजकहावोयनोभेदमदरामनलावे॥५॥ १चाननवस्तु किमसोवसनैने पूछमाहै जिसवस्तुकेशास्त्रहाराश्रवणकरने र कंचनवलुभीश्रनहोवेचिश-वाचा श्रुतिवचनानयाचनननिः उनने मादेशममात्योयेनाश्रुनेश्रुनभवन्यमनमनमविज्ञान विज्ञानइनिाजिमा वस्नुकेशास्त्रहोगश्रवणकरनेकरमचनभीश्रवणकाविषयहोवे है जिसके नककरमननकीयेसेअमनभीमनहोवेहे अविज्ञानवलुभीविज्ञानहोवेहैन मादेशशास्त्राचार्य केवचनकरजाननेयोग्यवसुनैनपूछी हैक्साइनिश्रुति अर्थः। श्रुतिउचारे वाचारंभरगविकारोनामधेयंमृनिकेन्येव सत्यमिनिश्रुनित्रा- अविचारिल-10-जीवब्रह्मअभेदअर्थमः। १६॥: श्रुनिस्वार्थः तत्त्वमस्सादिमहावाकाजोअभेदअर्थहै निसको संसर्गकल्पनाकरने हैं नत्वंपदार्थोकापरस्परतावकखखामीभावादिसंवं धकूहीवारकाअर्थकल्पनाकरहै।अथवापरस्परयानिकीआपेक्षासेरहिन संसऐपदार्योकापाधान्यरूपकरकेविशिषअर्थकीकल्पनाकरहै नीलविशिा उत्पलहै दंडविशिरपुरुष इत्यादिवाक्पार्थवन॥ - ॥ n अ.भा. के. ३१ जीवब्रह्माअभेदुमैरोवारोपणकरजोपावेतोयासोनभद्रे हिजातिनाहीत्रिजानिलखना कोमनमाहीदिदीहायदिनहो वेत्रिजातिसो सवभनेअसजानानिअर्थविपरीननबकबी नकरेंवरखानाशसोरगानीनदोषविनजान अपौरुषेयाश्रु निवचामिभकहानवमानचिदात्मसुखरूपत्वमाशियोंविध श्रुतिसमान कथिनेअपितालेयदा।चाहेयुकिमहाननाको। नअवशोभने। ३॥चौपाईसकलजनआन्य प्रियमानायोमै नहिसंदेहमहानोआमगनप्रियनाकिमस्यायोहिननवहै प्रश्नअनूपाशामुखउत्पनिहेतुत्वमहानाविषयकरासो मप्रियतामानामुखकीआअयनाहैजोजाकिमवाप्रियता मानेसोजाई। सुखप्रकाश हेतुनाजोई।किमवाप्रियता मानेसोई॥अथवाइटनमकोआनाप्रियरूपनाकिम करेवखानाई। सुख उत्यतिकारशानाजोऊ॥प्रियत्वप दार्थवनेसोकायाने इंद्रियमैव्यभिचारा॥आवनभदेह बगाभारा॥६॥दोहारयेदिकरणप्रियरूपनवइशान वअसजान॥ आत्माहिप्रियरूपअसवचनविरोधमा हान॥ ८॥शेषनहोवैआनका अभिवांछिन हैजोर असप्रियताको विदक नथानइंद्रियहोइ॥६॥ ॥ त्रिजाति-वर्णसंकरादिनीचजानिनिनकोंजानव-श्रीनअर्थ-शुनिया निपाद्यअभेदअर्थ-तीनदोषविन भ्रमप्रमादप्रलिपसारूपनीनदोषरहि नहा ईश्वरकोनिश्वासहोणेसे पुरुषप्रणीननहीहै नया हेवाले ई-हेशोभना हेमहानेआमाकेमियन्वमैकिसीकीसंदेहनहीं है। प्रियना निमिहानंदरू पनाकिमस्याहैसोकहो हेमहानेजैसेविषय इंद्रियमैसुखकी उत्पनिकाहेनन्द स्पप्रियत्न हैनैसआत्मामैप्रियवमाने हैक्सा सुखउत्पनिहेतुत्वस्यलक्षणे का। ईद्रियोमैसवहीणेसेअलक्षमैलझाकीप्रतिस्पदोषआवेहन यदिजेक रइंद्रियभीप्रियरूपनाकरकेनेरेकोंदट है नवआमाहिप्रियरूसहै इसबाक्या काविरोधरूपदोषआवेगारमा जोकिसीकाशेषनहोवेअरसर्वकू अभिलाषाकाविषयहोवे असौप्रियनापंडितजनमाने है सोईदियों मैनहोआवेंहै।

अ.भा.के. ४० ॥चौपाई॥ विषयजन्य जोउमरखमहानासुखवरूपा जोकोनरमाने असप्रियताओपनहि संहावे। उनला क्षारानयानेआवे॥७॥अनुकूलवेजोसुखनिशेषा असप्रियत्नामैनजोनिवेश आन्माशेषनाहैयामाहीं। अन्यशेषचिदात्मसुखनाही ७॥कुलजनअनुकूलेचा करजानााअन्यशेषत्वनोमैमानागोविधसुखेनैया। यिकमानासोआन्मामैवनिनमहानोरादोहरा मुख उ सतिहेतुत्वको यौविधकरमुनिगसासुखायल सकीनजभद्रेअबआसा॥ चौपाई। कहोभद्रेखम निअनुरूपा आन्मगनआश्रयत्व किमरूपा सुखंउपा दाननायदिगावैगनवआन्मपरिणामिनापावै॥४॥ जहाँकरेपरिणामिनावासानहाअनित्यनाकरेनिवा। साप्रियासरतीदोनोसहचारीगरहेनयलभरदोनोन्यारी।। १७ायत्रअनिन्यानाकरेप्रवेशाआवेनंहीसुदोषअशेशाग यौविधभयोअमुनिप्रसंगायोनेभयोनिजआन्मभंगा। श्रवणादिकसाधनहेजेनोभयेव्यर्थभद्रेअबनेनेभयोव्य र्थगुरुशास्त्रसमाजाभियोव्यर्थभनेपखिाजा शुकोस खभोगेखादिमहानायागादिहमव्यर्थसभजानाविध वालेदूषणानाना। उनपक्षमैहोवनभाना॥७॥ ॥ 10 हेमहाने नहिसहावे: नहीवने २५% उका लक्षण शेषनहीवेआनका अभिनछिन जो यहपूर्वक्लसरा। थाअनुकूलरूपनाकरके जाननेयोग्य जोसुखविशेषहै।पानिा वेश असीनियनामैमीहरकोत्यागोत्र वनिन आन्मामैमोलक्षाव नेहै हेमहाने सेखकामाश्रयत्वरूपनियत्व हैयहहूसरेपक्षकी चाय जिसस्थानमावरान आत्मभंगा आत्माकानाशी हेमा परिवाजासंन्यासभीव्यर्थभया-१९४: उनपक्ष सुखआश्रयन्दप समेभानप्रतीनहोवै है।

अ. भा. क. ४१ के. वदरआश्रयजिम कुंडमहान। निमआश्रयत्वयदि करेवरखान॥नबनवमनमैअससुनवालोउपादानता देखनिराले।७४॥ सुखकारणावचिदात्ममाहीं।उक्तदो अवशमानेनाहीं॥यकोटीअसंदूरपलाना सुननीसर अबकरोवरखाना॥७॥ दोहा सुखज्ञानहेतुन्दकी चिनहनजोआसाउनदोषप्रभावकरयोनेभयोनिमा सा१॥ चौपाई॥ इश्नमप्रियरूपनारूपानुर्यपस यदिअनूप ॥ नबसुखनाप्रियताहैजोजा आमिनि षमानानुमदोऊ॥२॥चिनेचनेसपक्षप्रमानी॥ कमवादीकीकरननहानी। इमआन्मानंदनामेमाना ॥संक्षेपकरयुक्तिक विधान ॥३॥दोहा ॥उन चिदात्मानंदम। चिननचिनलगायाविषयजन्यम खकोनजो मतअववहनकहायासाकविरुवाच॥ विवेकाश्रमचिननिको असजवबोधनकीना नबचे ननआनंदमै छिनभरभई विलीन॥१५॥आग्मान। दविचारयह कवलनीसरोपायउरअंगणरिंगणक विकसितमुखयदुराय॥ई॥ इतिश्रीअनामन भावाप्रर्वधे विवेकामचिननिसंवारे आन्मानंदरू। पतावरन नामननीयः कवलः॥ ३॥ ॥ निरादरीफलकाआश्रयजैसे कुंड हैनि सीप्रकार सुखआश्रयनारू पप्रियनाजेकरकथनकरो- उपादाननाआत्मासेभिन किसीमैरान खो। ३॥ सुखकीउपादानकारणमात्राउनदोष परिणामिनार नित्यनादिदोषकेवशसेवामुखजानहेनुवरूपनीसरेपसकी। उन्नदोष परिगामिताअनित्यनादिदोषनाई।विधान कार्यनत्रण चिनलगायः चिनकोलूगावो।। ।। पाय:स्वीकारकर। केस: उरअंगा. मेरेअंतकरारूपअंगणमै रिंगणक क्रीडाकरें जयदुराय श्रीकृनानि श्रीननीयकवलटिपणीस माताः३॥

अ.भा. क. ४२ जोश्रोगणेशायनमः अथचनुर्थकवलारंभाकविरुवाच॥ दोहा।श्रीलपदहको करोननिधरध्यानायोमभासेमा षाभव रजमैफीसमानाशकरुणानिधिश्रीगुरुके पदप कजारधारा र्यकवलभाषाकरौं भवमिथ्यात्वविचारा सोरठागनआन्मसुखकीचाहि उपजेजगतमषान्व विन॥ नौनेचनर्थमाहिकहनजगनमिथ्यानको ॥॥चौपाई। योगोंद्रविधुवचनप्रभाकरराविकसितचिनचिनवृतिप्री निकरणनिजभ्रानाप्रतिवचनरसालाकोकिलसमदो। लीवुनवाला॥४॥चिननिरुवाच॥आत्मसुखरुपना मैमाना। अनियुक्तिनमकीयोवरखाना।यनिवरहमा जाना हैसोऊयाँमैनहिममसंशयकोऊ॥अबभ्राना। कुछपूछोआन प्रसन्नमनमोहिकरोवरखाना। नविषयसुखत्यागनमाहीं।भ्रानाकारणाभासिननाहीं। सकलधरापनि नरमहाभाग। मृगौलब्धशशकरने नन्याग॥६॥ ननोपूनपिपरसुखमाहीविषयगनसे खत्यागोनाही।मुनेकौनअसपंडितज्ञानी॥सुखसंप नमैनप्तिजिनमानी ॥७॥विषयमखनतिकरभ्राना। विवेकाश्रमहिममजाना।आत्मानंदकथाअबपाई॥ ॥ मरान नुर्पकवलाचतुर्थकवला भवेनि:जिसकवलमैजगतके मिथ्यानकाविचारच जगननियमिथ्यात्वज्ञान विनाश-योगी विवेकाश्रमरूपविषचंद्रमानिसके वचनरूपीप्रभाकरकेचांदनीकर के विकसिनहै हर्वकरयुक्त है चिनजिसकासीचिनतिनया हेयनिवे रविवेकाश्रम। हमहाभागाअथवामहाभागराजाकाविशेषण रखरणामगानामशिकारका है शिकारकरप्राप्नभयार्शसाहा सो निसकात्यागनहीकरेहैननो पूर्वउक्तहेतुसे परसुखनामपर। मानंदमैपूनापि परमानंदकरकेव्याताअपिविषयजन्यसुखकोनन्या गोगी।नारा विषयजम्पसुखकरके भईजोननिनिसननिकरके ।।११। भवपाई अबसुनीहै। ॥

४ अ.भा.क. ४३ नजोक्मिविषयसुखयनिराईमा त्यागोअवयदिवि षयमनेहा॥पापकरहोइभस्मममदेहायथासनासनपा लिनकोजोविनअपराधनजेनसमोजाराधनीपुरुष कीसंगनपावे नोकेसंगविरोधकमावायनिवरसका ननजोमानी। होनाशनिश्चयकरजानी॥१०॥विषयजन्य सुखन्यागमैहेनानीनिकहोअबपंडिनकेतु विनहेननवव चनसुनकानात्यागोनहिविषयमखमहाना।शाकविरु वाच॥ यौविधअविनयवचनविषलनाविषयसंगम करवनचिना।देख्यविपरीनमतिअसनारीवोलेक्च नयोननमोहारी॥॥विवेकाश्रमउवाच॥दोहा॥विष पसरूपपूर्वकहा नचिनाकोभुलाय॥विषयपक्षेउरधा। रकर पुनपूछेमनलाय॥शी चौपाईस्खलब्धराज्या कररंकामनमैधरेनहर्षकी शंका॥संकलधरापतिरा जाजोऊ॥नोंकोहर्षकही किमहोऊ॥१४॥सकुलभूमिप निनस्यदिआनाचिननेसुखचाहेमहाना सोसन्या खचाहेवरवरनिगकरननवमसुखहिकरनी॥१॥वा लेकोउनपसुननिदानावनमैमिलकरभयोमहीना। नहिमिल हैराजकुमारा।यौविधऑप्तवचनसुनधारा। समयतिराई हेयनिराजनाहन मनापापकरके इसीअर्थ मैरातकुंकहे हे सनासनेत्यादिसतसाधुअसनअसाधु सेकोमपुरुषमा धुअथवाअसाधुपुरुषकरकेपालिनहोवेशापालकपुरूषकेअपराधसे दिनाना-अपनेपालककेसाथ ही पंडित केनहेपडिनोमैधजारूपन यो विधपूर्वकप्रकारकरके अविनय अशिषिनवचनस्पविषकर मुकलनाके सशचिननि पुनाकैसी है विषयसंबंधकरकेदूषन है चिा नजिसकासी चिननिकोदेख्यकरके पूर्वप्रथमेकवेलमोहे मन्तिमूदाशरीवास्नीकारा हवरखरनि सुंदररूपालीधा करनी पुरपकारजनककर्मशाबालेश-निदानावालका महानायौर वनयुकवरण-भातवचन यथार्थवक्तापुरुषकेवचनसुनकरेउरचार शाकीयाजबः ॥

अ.भा.के. नजभिलधर्ममिलनसेनाना राजधर्ममैमोजिमरा ना॥१६॥ निमन्मजवविषयसुखविहावें। चिदात्म मे। भद्रेमनलावे॥चिननेअसकौनअपराधाजीनया- करेवामोरुवाधा॥७॥जिममूर्खनज्यराज्यसमाजा॥ भदेख राज्यकेकाजासनजनवर्जितवनमैजावे। निद्राहिनदुसेजविछावे॥१८॥ नथाकरगतआर मसुखनजकर।भ्रांनिकरसिधविषयसुखरघर॥ ॥इन उनभोगनिमिन उधावै॥चितवनेनोहिलाज नावे ॥१९॥ सोरठा ॥सन्यरूपयदिहार विषा यानबसुनशोभने । वारणकरेनको नैनसुखल। पटपुरुषको ॥२७॥ चौपाई जाँकोफणीममाला ज्ञान। नजकररंगनमालामेहान॥ सर्पसमीप धहिनजावे। सोनरभद्रेकिमसुखपावे॥२१॥धानि सिधनिमविषयसभवाले॥निजसस्स्सेलर्सेनिराले। श्रीनिमिधनासुविषयनमाहीं। कहनश्रुतिसुनसंशया नाहीं॥२॥दोहा॥हदाररायचतुर्थमै तुब्रिाह्मण जान उनअर्थकोशोभने सुनअवकरनवखान॥२३॥ रु वामोरु हेसुंदरऊवाली ॥२॥ वनजन्यराज्यकीप्राप्तिके निमिनः। 1 करंगना हाथमैमानवस्नुकीन्याईनिन्यप्राप्तआन्म सुख-४- ननसुख विषयसुखलंपटपरुषकोवारणकोनक अनिवारणशास्त्रकरेहै इसीकारगसेसनरूपविषयसुखनहीं। है ना करगत हाथमैप्राप्तः॥ ६॥निहदारण्यकृय तिन बहदारण्यक उपनिषन केचतुर्थअध्यायमैचतुर्थना ह्मणजानकहमरेकरउक्तअर्थकोंहेशोभने कथन कोही ॥ ॥ ॥ ॥ ॥ ॥

अ.भा.के. ४५
चौपाई। जिसअज्ञानदशामैवालाहैतसमभासेवस्तुनिए
लोनिसदशामैहोरकरऔनराकरेवभिन्न गंधआदानाग
।२४॥होइकरअन्यदेखआनाइनराइनरसननधरकाना॥
इतराइनरमुकरतवखानागइनरोकरलइनरकाध्याना॥२५॥
जोननदेनरस्तरकोजानासकेलविहारसभुमजाना।
कलवस्तुमैओन्मज्ञाना। दिनभयोजवभानसमानारद
॥बकिसकरसुगंधकोंधारे।किसकरकोनरस्पनिहा।
रोश्रवणकरेकिसकरनरकिसकोकरेकथननरकि।
संकरकिसकों॥२॥किसकरनारकिसकोपनमाने॥कि
संकरकिसको भामिनिजाने।जिसकरसर्ववस्तुकोजाने
निमआत्माकोकिसकरजाने॥७॥जाहैसर्ववतुका।
जाना॥किसकरनिसकौलखेप्रमाना॥भेद्रेयाविधवा
चनमहाना॥याज्ञवलकमुनिकीनवरखाना|मैत्रे
योसुनकरउरधारेशनिबंधमुखमुनिपुनाउचारोसोयहीं
नेनिन निकरजानाभग्राह्यश्रुतिकरनवखाना॥३०॥
॥
सानिराले अपनेसेभिनन होकरआना-जयसेभित्र घानाहो।
स्करसभिन्नगंधकोंघाण इंद्रियसेग्रहणकरेहै इसीप्रकारआगेभीअर्थक
रना-1-नथाचहदारण्यकश्रुनिः। यत्राहिदैनमिवभवनिनदिनरह
नरंजिघ्रति नदिनरइतरं पश्यनि नदिनरहनरेशणोनि नदिनरहनरमभि
वदनि नदिनरहनरमनने नदिनाइनरविजानानिय हेसुभुनास
कलवस्तुमै कनकमक्रियाफलादिसकलवस्तुमै प्रत्यगात्मरूपकरकेजवज्ञा
नउदेभयानपानबनिसज्ञानकालमैकिसइंद्रियकरकिसगंधरूपविषय
कोकोनममानागहणकस्सीप्रकारआगेभीअर्थकरनानी-मानेमनन
करेवश हेभामिनित्र नथाचवहदारण्यकश्रुनिःश्यत्रवानससर्वमान्ने
वाभूतन्केनजिनकेन कंपश्येनकेनक मृणुयान केनकमभिव
देनकेनकंमचीनन केनकविजानीयान येनेदई सर्वविजानानि ना-
केनविजानीयान विज्ञानारमरेकैनविजानीयादिनिधनानिषेध.
सकलप्रपंचनिषेद्दागर नथाच श्रुनिःसएमनेनिनेत्यामाग।
घयोनहिरायते॥ ॥

अ.भा. कै शब्दमन्ययप्रनिनिमिनासकलधर्ममेयनोभनीनाननोकर एकरजाननजाइीयाविधकथनकरतमुनिराईपायही ननशीरशाहोकाअसंगोहिनाहिसंगनकोकाहैसितनव्यथा कौंपावानाशहीनचिदान्मामनिगावशदोहा आन्मभित्र सभवस्तुको मिथ्याभजानामुनिवरप्रियभार्याप्रति योवि धकीनवरखान॥५॥चौपाई॥ बाहोगवनसकरत अपमाना। आत्मभित्रजिसनों कोजाना क्षेत्रा वकरन नामअपमाना।आन्मभिन्न जिसनाकोजाना। ३४ारतलोकताकाअपमाना|आत्मभिन्न जिसरलोकपा छानाकरनदेवनाकाअपमाना।आन्मभिन्नाजिनदेवपछा ना।साकरनवेदनाँकाअपमानाआन्मभित्र जिसतोको। जाना।करतभूतनाकाअपमाना।आत्मभिन्न जिसनोंकोजा ना॥करनसर्वनोंकाअपमाना॥आन्मभिन्न जिससर्वप छानामा दोहावामागसत्रलोकसुरवेदभूतसमजाना यावतवसुलखात्मा श्रुतिसकरनवरखान॥३७॥ समशीनिहिशीयन संगोनहिसज्जन सिनोनव्यथनेनरिष्यनीनिवानरियनि- नाशनहिहोवे ।। ब्राह्मणवजानिय शवनजानि-लोक-चतुर्द शलोका-भूत-पृथिवीआदिकपंचभूताई बाह्मण ब्राह्मणवानिक्षेत्र सत्रयत्वजानिानथाचहतारपकनि ब्रह्मपुरादायोऽन्यत्रान्मनोबृह्मवेद शत्रतपरादायोन्यत्रान्मनोसत्रवेदालोकालंपरार्योन्यत्रात्मनोलोकानवेददे वासंपरादुर्योन्यत्रान्मनोदेवान्चेद वेदालंपण्ड्र्योन्यत्रात्मनोवेदान्चेदभूनानि नंपरादयोन्यवान्मनोभूनानिवेरसर्वनंपरादायोपत्रान्मनःसर्ववेद ब्रह्म दसत्राममेलोकाइमेदेवाइवेदाइमानिभूनानिद सर्वयद्यमान्मार नि। इसनिकाअर्थनीनचौपाईकोहामैलिख्याहोनिमैब्रह्मशब्द करके वाह्मणवजानिकाग्रहणकरना श्रुनिकाअर्थजोपरुपान्मासेअन्यत्रभिन ब्रह्माम्बामणबजानिकोनानेहै निसभयथार्थदर्श पुरुषकूसोबाह्मणवजानिप गदान निरादरकरेहै यहानामरूपकरके मेरेढूंदेखेहरूसीअपराधसेमोशनही होणे देवेहै यहीनिरादरजोननारसीप्रकारागभीअर्थजाननाचा अ.भा. आन्मभिवसकलोजगत याविधमिथ्यारूपाहहरारण्यकमै कहाभाप्रिनिनिभूपासुनभदेलांदोग्यमै उदालकमुनिप्र बीनाआम्मभित्रमिथ्याजगन सुनकोवोधनकीनालीचोपाई सदेवसौम्पहश्यपूर्वजानाएकअहिनीयवस्तुमहानायौ विधमनप्रनिपिनासुनाव जगतसनाकोप्रगटउडावा४०॥ नेहनानालिनिअसआनाभवमवावकोंगत्वरवाना॥ मत्सुसेसोमत्युकोंपावायोयोमैनानासमगावभेददीको निमहाने जनिमुनिधाराप्रगस्वरखाना निखिलप्रपंचा चिदान्मरूपामोआत्मसन्यएकअनपाइन्यादिवामोरुअनि नानाभवमषालवोधनमैमाना॥४॥नतोभासिनजोभव महानाजानसकुलमरुसलसमानासच्चिदानंदआन्मा जोकाधरयों नेविघनकोऊ॥४॥जोप्रपंचभासिन हैनोहागंधर्वपरसदृशाहसोहाआत्मधामनजकरउरों दरांचवथाकिमकसितमंदर॥४४॥नाडिनछिन छछिन्त्रकरणाचरंमआयुगन केपिनचरायोविध संरेमायथाछिनमात्रानजेनमाभटकेदिनरात्र॥४॥ दोहाकहंछिचाभिनाकई कई पायकरहान ॥ चिन नेविषयरटनकोननम्युनीसमान॥४६॥५॥ १अमुनिभूप मुनिराजयाज्ञवलकारागाहे सौम्यप्रियदर्शनपूर्वउत्पनिसे पूर्वमकलहश्यमनस्मथासेजान सोसनकैसाहै एक महिनीयमहानव्या पकहै।नयाचनिःसंदेवसौम्पदमग्रआसीना आना पूर्वउकशुनिता मन्यो समन्युमा मोनियदहनानेवपश्यनियुहश्रुनिहेमहानेपानसभा मासाय एकहैअनूपहै उपमासेरहित हैनथाचनिः सेनदास्यामि देसर्वनन्मयंसओन्मातलमसिश्वेतकेनोइनिन उरधर सचिदानी ब्रह्ममैहूं इसमकारनिश्चयकर जैसेब्रह्मलोकादिकुकीमाप्तिमैनानाविध है नसेको विघ्रनहीजिसकारणसेअपनासरूपहचरम । निम अवस्थामैमानावसरमा कुनीनारादिवानाडिनाभिन्ना भेदनकी प्राता मनिकापिंडवन नाशकीयायकर सेभिन्ना नथाचकनिः नेहनानालिकिंचना श्रुति त्रुट पं.

अ.भा.के. वारवारवारितयथा मषिका कोजायानिषिधापि निमभद्रेतुम भजविषयमनलायााअविद्याकलिना जगनका आश्रयचेननएकाभ्रमकरनजेनों कोयदि है सेनवजनभनेकाश्गलगनमालाकोयथा फणीजान करनारानजेंभी निकरशोभने हसेसकलसंसारात । चौपाई अज्ञानजानजगनयहजानाअवरनकारणासन्य उरमानोभासिनरजनशक्तिमजोजानजअज्ञानहेतुनहि कोऊपाजगनजेनिसन्यसेयदिहोजामुषाननासक हेनबकोजाअनुभवसिधमुबान्वभवमाही भद्रगोमैसं शयनाही।शभरेभासिन अकनोजाभावीदिननक रहनसोऊोअसप्रसिधभवनाशीनाना।आस्थानामैनजो महाना।५॥भवमृवान्चभमाना॥वाध्यत्वहेतुनर्क वरखाना आत्माएकरससुजानोष्टिविकारशरीर गनमानो॥५३॥उन्यतिरहिननहोवेलीनास्थि निरहिनपुनावृद्धिविहीनाक्षीनहीन परिणामनपा वे॥चिननेअसयाकमुनिगावे॥५४॥ दोहा ॥ ॥ देशकालपरिछेदसे रहिनसर्वगजान॥ वायोनर योमैनहीं पूर्णव्योमसमान ॥ ५५ ॥ ... सब्रण-फोडादिघाउपरानोंको कल्पिनजगनकाअधिष्ठानस्सचेनन कोअज्ञानसेजन्यनामा भवर-अज्ञानभिन्नसत्यब्रह्मजगनकाकारण नहीजीयाँमैसीशकाकरेके सूत्रकारभाध्यकारादिकों नेब्रह्मजगतकाकारण कुदाहै नॉनेईहोकेवलअज्ञानको कारणकहनाअयुक्त है सोशंकावनेनही का हेसेकसक विज्ञानकरसर्वविज्ञानकीप्रनिज्ञासिडिकेवाले प्रधान कारणवादखं डनमैसूत्रकारभाष्यकारादिकोंकानान्युर्यह ब्रह्मकारनामैनात्यर्यनहीभर ब्रह्मकारणत्वनिपादक निकाअनमैतात्पर्य है ब्रह्मकारणत्वमैनापर्यनही। है।इसीकारणसेवानिक ग्रंथमैसुरेश्वराचार्यनेब्रह्मकारणावकारखंडनकीयाहैअघि सोनवमात्रकरकेब्रह्मकारणावकहाहै नौने अज्ञानसेविनासत्यब्रह्मजगतका कारणनही पाजगनमिथ्यावाध्यावान किरजनवनइसप्रकारवाध्यात्व हे जिसमेसीतर्क ॥

अ. भा.के.४१
सुरनरनिर्यगभेदजो हिलघुतासमानाचिनहतेदेहग
नलखो आत्माकरसजान॥१६॥नानेसुखचिनिसक
रस प्रत्यगात्ममनलाया शोकरहिनचितहतेभव शोकनि
निनिगायााकविरुवाच॥दोहा-निजभानाचिन
शनिको असजबवोधनकीनाविषयनसेरतिकोनवीन्या
गनभई प्रवीनाचौपाईजलनिमगननलिनीकोन्यारा॥
करनसललसेजिमकरिटागाजिमनिजरतिविषयनसेवा।
रनाकरनभईचिनननिसुखकारनादीपशिखायोमै
अनिभासायाविधकचघट्यथाप्रकासोनिमपज्योति
उरघरवालाभासिन हैनजविषयजवालाई॥दोहा॥
गोविधअवसरपायकरममक्षाअनिसुजानाविवेकामा
योगिनि कटआईसखकीरखानाशनपकरपामुक्षाकों
देखकरयनिमहानाप्रसन्नमनवोलेगिराजलयनमेघस
मानाशविवेकाश्रमज्याच॥चौपाई॥करभद्रेअबा
मठमेवासा ॥ भूबिनकरमनरहोउदासोपांचजा
न्यसंज्ञिकमउमाहीं।यसभयकरनवेवासानाहीं॥
६॥ सोचिनतिनिर्मलहमकीनारागादिकमलेनि
नजदीना। मुमुक्षेसकलेअबतबकाजासाधेगीचि
नहनिमुखंभाजा।।। हेनापसिअबसमठमाहीं।
राजननुएकपूर्णआन्मामैसुरन्दरसकरकूकरादिभेदकिमानमिन
कहै दूसशंकाकूमनमैरखकरकहू नेहै सुरनर इत्यादि। दिलघुनाममा
न जैसे वृद्धि हास्वदेहगन है नैसैसात्वादिगुणोकरजोसुरादिभेदहै।-
सोदेहमैं है आत्मा मैनहीशा नरनिशोकमान्मविदिनिनि आ...
म ज्ञानकरके शोक उपलक्षिनसकलसंसारभनर्थको निहनिकुंकहे।
है। कमलिनी-1४1 सुखकारन: आत्मानंदनिमित।
वाला चिननिना। जलसहितमेघकेसमानगंभीरवाणी-1013
हेभद्रेमुमुक्षेत्र11: यसभयकर जिसचिनतिकेभयकरमारा
हैमुमुक्षे नवाजा आन्मानुसंधानरूपसकलकार्यबल मुखभाजा-आमा
नंदसेवनपरायणचिननि-ना-

अ.भा.क.
करोनिवासविप्रकोनाहींकविरुवाचायोंविधसुनयनिवर
कीवानी।मुमशाकशिनननहर्षानी।।चिनहातपिकद
लनानजकरा देखनहिनापसी कोउठकरादिंडवत करनभई
मरामा अदृष्टपुरानजीकोनामाईहा सारा विकसित
मुखभरविदछचिनजानचिननिकोवोलीवचनानि।
समसाधनपवनीशमुमुसोवाचाचौपाई अहोत्रित
वभागसजागाायनिवरकेपदनवमनलागा।पूर्वकरनेवरक
रगीजोगासनसंगनयावेनरसोकाईबासाधुदर्शनपुत्रिभु
विपावनानीर्थरूपसाधुमनिगावनाविधुचंदनननुनापनि।
वागसाधुसंगउरनापविदारे॥ईरदुर्लभमानुषनुनव्या
वाअहोभागचिदान्ममनलावाचिदात्यदेवकृपानवहोऊ.
हरणाकरेंनविषयमननोहू।।कविरुवाच।दोहा।अम
ममुशाचिननिकों देकरवरआसीमानेत्रदाचिन
नपनाकरनभईजगदीसा७१॥ सोरठालखअस
मठअभिगम वैराग्यनीर्थ महामुनि। आयेपरमुखा
धाम विवेकाश्रमसेवरयति ॥७२॥चौपाईगायक
दंदिगअंवरधारी। मैचकजोकाभूमीसारीभुज
उपधानकरपात्र आशी।नग्नपादगुहाँगेहवासी ॥
शजलपात्रहिनदीनडागा नहिकाहसदेवनगगा।
मूद उन्मनपिशाचसमाना।विचरतरहिनमानअपमाना।
१ अररपुरा-जोमुमुक्षापूर्वनहीदेखी-शुनजीकोनामा जिसम्ममाका
नाममात्रसुन्याहैरा-वचनअनिंद निंदासेरहितउत्तमवचन ।
हेपुत्रिनमा विधुचंद्रमानाचिदात्मदेवकीकृपानेरेपुर।
होवेत्रही- भुज-भुजाहसिरहानाजिसकागुहा गुफास्पग्रहमैनि
वोसकरनेवाला-1012 मूढउन्मनादिपुरुषजैसे संकल्पसेरहि
न पूर्वपश्चमदिशाकूगमनकरेहै नथायह वैराग्यनीर्थसंकल्पसेरे
हिनमानअपमानसरहिनथिवीमैविचरे है।
॥

१३ अ.भा.क. ५१ कर्नकरणकर्मादिविहीनाब्रह्मरूपसभनिश्यकीना॥ अयाचिनलयदैवअधीनोकरतअगदसमअदनअदीना॥ ॥७॥उरघरपरमज्यानिअसंगा।वाहिरलीधसरअंगा। करमननिविवेकाश्रमनाई।आज्ञालैवयनिराई। दो हा॥बैराग्यनीर्थभिक्षकार्याविधदेखमरूपाविवेकाश्रमप्रेम कर बोलेयनिवरभूप॥७॥विवेकाश्रमउवाचाचौपाई॥ गन्यागमुनेकिमकीना॥करमंडलपुनकिमनजदीनो। कौपीनाछादनपटजोजामुनेत्यागकिमकीनासोऊ॥७॥ कंथापादुकेअतिसुखदाई किमन्यागानुमसोयनिराई। शास्त्रविहिनन्यागमाही यनिवरकहोदोषकिमनाहीं॥ १७८॥ कविरुवाच ॥ दोहा ॥विवेकाश्रमयनोंदकेसेन करवचनरसालु॥वैराग्यं नीर्थवचनतब वोलपरम। दयालु॥८॥ वैराग्यनीर्थउवाच ॥चौपाई परमहं संउपनिषदकासार॥विवेकाश्रमसनकहोविचारायकको लनारदऋविगई।वदराश्रमपहचेसुखदाई देखा नहोनारायणादेवासुरनरकरनसंदाजिनसेवोनारदाना कोकीयोप्रणाम आज्ञापायवैठेनिसथामादक जोडविनययुनवानी ॥ बोलेहर्षसहिनमुनिज्ञानी॥६॥ भककरणकर्मादिविहीना. यत्रत्वससर्वमात्मैवाभूत्रन्कनकंपश्येदि। न्यादिश्रुनिसेस्वरूपसाझानकारजवभया नबूकर्नाकरणकर्मादिसर्ववस्तु। कोंब्रह्मरूपकरके जाननेसेसोवैराग्यनीर्थकीकरणकर्मादिभावनासेरहि नहैन-आनापायक रके-३०-यनिएई वैराग्पनीर्थ-दंडादिकसे रहिनसस्पत्रमा कौपीनाबादनपटः कूप मैपननकेजोग्यहोवेसोकहावैको पीन पापकानामकौपीन है निसपापकासाधनहोणेसेपुरुषकालिंगइंद्रि यभीकौपीनकहावेहै निसलिंगरंद्रियकाआछादकपदवस्त्रालंगोटी या। अथवा कौपीननामलिंगनिसकाआवादकहोणेसेलंगोटीकानाम भीकोपीनजानना।आगेआबादनपटपदकरकेजलपात्राछादकज लशोधनवस्त्रजाननाअथवाकौपीनकाआछादनपरकटिवस्त्रजानना। 11 सार• सारी।

अ.भा.क. ५२ नारदरवाचा भगवनपुरमहंसनरजोजा कहोमार्गोंकाहै कोपरेनितोकीहैजोकहोकृपाकरभगवना सोफायनाननवांछाहमधारी॥ दयाकरोममसंशयभा गावैराग्यनीर्थउवाच॥याविधनारदविनयमहाना मनकरभनवन्सभगवानारामार्गकथनहेनमुनेवानोवो लेपन्समानमुखखानी॥श्रीभगवानुवाचायहपूरह। समार्गभवमाहोगदुर्लभनारदसंशयनाही असमार्गको रचलननरजोजादुर्लभुनारदेहैनरसोकोन्दासोनरस होमनिमैगनासोनरनिशेषकोजानामोनरनारदपुरुष महानायौविधमुनिसभकरनवखानाचिननाममोहि वसैनिरंनराव सदाहमनिसचिनअंतरानारदयौ विध नरहेजोजोन्यागेसुनमीनादिकसोझासादागभानावों धवजेनेत्यागेसोनरनारदनेनेोशिखासत्रांगादिन्या गोवंदपाउमैकवीनलागे॥रानजेकर्मज्योनिशेमादि। नब्रह्मांडसकलसुखसादि०॥ १-को-कौनहारा परमस्थिनि-घनसमान मेघगर्जनकेसमानगंभी रसुखकीराशीवानीपोलोहामुलिनामब्रह्मरूपतानिसमैसदास्थिन । श्रुतिशेयनितिनेनिवाकरकरकेसर्वनिषेधकाअवधिरूपकरकेजोशेषरहे हैं तिसके जाननेवालाहै--परमहंसकूकहकरमार्गकुंकहेहै नारदनि हेनारदमदारास्त्रीयायागादिस्मनिउक्तयागादिकोआदिपद करकेदानादिकजानने वेदपाठ-वेदाध्पेनकान्यागकरोइननेकरकेनि हासंपुरोलादिककाभीन्यागजाननाला ज्योनिशेमादि-वेदउनकीकर्मप देकरके लौकिकवेदिकनित्यनैमिनिकनिषिधकाम्यादिकर्मत्यागे नजे ब्रह्मांड-ब्रह्मांड की प्रापिकासाधनविराटहिरण्यगर्भादिउपासनाकून्यागाइस कारसकन्तु उक्तअमुक्तसुखकासाधनसकलपदार्थकाव्यमंत्रउचारणपूर्व कन्यागकरे: नर्थाचपरमहंसउपनिषदश्रुतिःअथयोगिनीपरमहंसा नांकोयंमार्गस्तेषांका स्थिनिरिनिनारदोभगवनमुपगम्योवाच भगवानाहयौर्य परमहंसेमार्गोलोकेदुर्लभनगेननुवाहरूपोयद्यप्येकोभवनिसस्वनिनमूनस्थः सस ववेदपुरुषानिविडयोमन्यने महापुरुषोयचिनननदामय्येवावनिक्षेनस्मानद चनस्मिन्नेवावस्यीयनेअसौनपुत्रमिवकलत्रवंध्वादीन शिरवायसोपीनेच पोगंम्वाध्यायंचसर्वकर्माणिसंन्यास्पायव्रह्मांइंचाहिन्वाइनित्रा अ.भा. क. ५३ कौपीनकदिवस्त्रादिजोजानजेनदंडजलयात्रुकोजारादे हमोगहेननिहजानानथालोक उपकारपछानायौविधहैमार्गम नेजोकासकनकर्मकनपावेकोजाशिदोहागपरमहंसकोमा यह मुख्यननारदजानामखनिष्ठापरहंसकी सुनअवक रोवरखाना शचीपाइदेउनपाचनशिखानेस्ताविखनपादु कहैअवधूना कंथान हिनहिवासस्थानाशीनजसनहिमखें दुखमानास्मीनअमाननमेल्यावामीस्पर्शनकबहेपावे शब्दस्पर्शरूपरसगंधानहिनसकोउ विषयसंबंधारानि दागर्वअसूयाहीना। हेयभजिनकबीनचीनादर्पकामको धसेन्यागाननिसलोभमोहभहंकागानिजतनदेखेकुरा पसमाना।शोकरहिननहितनअभिमानारासोरखापर चिहान्ममैभज्ञानसंशयीनिहनजोमूलाविद्याहानभयोति दान्मज्ञान करारी हाचौपाहीनारदनित्यमुकअसमानी। देहभागहत कौपीनकरकेलजाकीनिनि-वस्वकरशीनादिककीनिनि दंडकरके गोसोदिककानिवारणकरनाश-लोकउपकारडंडादिहिकर कैनिसकूउनमाश्रमीजानकरनमस्कारभिक्षादानादिकरकेलोकाकुंपण्याज पनिरूपोपकारकूमानेनारामानअमान-मानअपमानाना स्पिर्श । धापिपासाशोकमोहजरामरणरूपषटकर्मीकुंप्राणमनशरीरकाधर्मजानकरा स्मामैसंलगनचिनयोगीपुरुषकोषटमीकास्पर्शनहीहोवे ।।-परदोषकथा ननिंदाअन्यपुरुषसेभापळूअधिकजाननागवीपरगुणमैदोषकाभारोपभास्या अह अपनेप्रतिकूलकाअनिचितनवानिजकर्मका कीनदंभत्रश-परनिरा दूरमैचिनकी निदेषीविषयाभिलाभाकामा यांचाके विधानसे जन्पचिन विशेषा क्रोध प्राप्तवलु केन्यागतूनसहारनालोभादागपत्रादिकमैचिनकीभासक्ति मोहादेहादिकमैहनाअहंकारवरा अज्ञानकरके कार्यभविद्यालीयांसोनारमा कारकीह अनित्यपदार्थनमैनियलभानिाराअशुचिपुवकलत्रादिदेह मैमुचित हिशखरूपभोगौमिसरवत्वमनिसदेहपत्रदेहादिक अनान्मामैआन्माना- बुद्धिाआमाकर्ताह के नहींइत्यादिसंशया देहादिकमैअहंमनिभ्रांनि इन. काहेतुमलोविद्यामूलाज्ञान- विचरेभूमैनि भिमानीपरमहंसमुनेनाकोजानानस निशानोहिकरीवरखान॥९॥शानअचलअयसुखरू पा असविज्ञानघननिजसरूपागसोनारदपरधामवरखा नासोसत्रसोशिखामहानागापरमान्मआत्मसेक्रज्ञाना । सोनारदआसनहममानाअज्ञानशानभेदकीहानी सोना दसंध्याहममानी॥राजकरसकलवासनोआना॥धा रेब्रह्मान्मउरध्यान॥पंचमद्रायनवरयदंडालिखना। रसभअपरपखंडा॥०॥ज्ञानदंडकीयोजिनधारन॥ दंडोनाकोकरनउचारना का दंडधारनजिनकीनो। सर्वाशी है ज्ञानविहीनागोरखधारतरकसोपावे।ज्ञान दंडनानेममभावे॥१०॥योंविधज्ञानजिनउरपाया। परमहंसनारदसोगायाननिनकरेकाईकोमोजामधाकारक नकरेनकोजारशनहिौषटवषरभधिकारीनिहिवाहिनना विसर्जनकारीनमंत्रनकरेअपरकोध्यानाकबनकरे उपासनआना१००वर्णसंचयमेचिननलावारीनयुना दर्शसर्शनयावे॥यदियनियुवनिकनकमनलावे॥०॥ असानकीहानीअज्ञानतभेदकीहानीचश-पंचमुदा-नागमुझधेनुमुद्राप रसुमुहावैलवीशंखमुद्राब्रह्ममुदायहचमुद्रासहिनदंडन सुधाशब्दको उचार पाकरके जोपिरकर्माद्दादिककीयाजाना है। औषटवरशब्दकुंउचार नकरके देवनादिककोहविदाननकरे- पूर्वएशकेआरंभसेलेकरइसएशके अननकयहपरमहंसउपनिषदकावाक्य है।कौपीनंदंडकरमंडलमालादनंच खशरीरपोपभोगायचलोकस्मोपकागायत्रपरिगहेनच्चनमयोऽलिको मुख्य निचेदयं मुखोनदंडनकरमंडलंनशिखानयज्ञोपवीननस्वाभायंना छारनंचरनिपरमहंसःनशीनेनचौमनसुखेनहःखनमानापमानंचषडर्मि रहिननशब्देनसर्शनस्पनरसनगंधनचमनोप्येवनिंदांगर्वमन्सोभदछ। हेषमखदुःखकामक्रोधरोषलोभमोहमदहसियाहंकाराहीश्वहिन्वास्वव पुः कुरापमिवश्य नेत्यादिपरमहंस उपनिषदमैशेषवासदेखना। -- लिखनेसेविस्तारहोवेहै त्र

अ.भा.के. ५५
नरकपर्यतअतिदुखावे॥॥दोहा॥परमहंसउप
निषदयह निजहरिकरीवखानाविवेकामनारदपनि
जानेममअसजान॥१०५॥चौपाई॥जोचेननघननि
जसुखसागर॥अंतर्यामीसन्यांजोगरानामैरमनममचि
नयनिराजानाहिकंथादंडादिसेकाजा०६। कविरुवाचा
सवैराग्यनार्थकीवानी श्रवणकरनचिनतिविस्मानी॥
कोकिलसमअनिवचनरसालाानि अनजप्रनिबोलीवा
लाारणचिनहनिरुवाचाधानाजीवात्माहेजोकामुखसा
रूपकटातमुसोजाननकरविषयरनिपुनोनामाजोनमक
होनसंशययोंमोहापरमेशिनिस्यस्य महानासुखरूपता
अबकरनवखानायनिवरबमममनिअनिकपली संश
यदोलाकीनीचपलाहायोगपिंडकरचटणान्याया।मु.
नेविवेकाश्रमजबआयायतोविषयतजकरभवमाही
॥चिदानंदकोभासिननाहीं॥११००कहाँमेलअवलाहमे
नारीपरनिटाममभासिनेभागाकपलादिकऋषिनक
रभागापरनिष्ठापाईमखकारी॥११॥नयाधानाअबार
पूछोआन। रुपाकरकरममसंशयहानाचिदात्ममैय
हजगनमहानाभयधिकल्पित होवितभानाजीभ
सपूर्वकहानमभानाशनहिनिश्चयतोममजाना॥ ५ म
मनिजसुख आत्मानंदसमुद्रमशः उजागर प्रसिहभा-विरमानी.
आर्यकोमाप्तभुई। निजअनुजविवेकाश्रममनिया विषयाकून्याग
करके नोआन्मामैरनिनुमनेकहीहदापरमेष्टिनिमब्रह्मानिहायनिमहान-म
हासंन्यासीवैराग्पनीर्थ-कपला अंधान संशयस्यमूलनानेचपलकीया
है।हाथमैमाप्तपिंडकून्यागकरकेहायकूचाटयाला मेडलअनिकोमल
अक्ला बुद्धिवलसरहिननारीमलनशशिरास्त्रीचा परनिमा ब्रह्मनिशान
॥१॥अवोधकल्पित अज्ञानकल्पिना नौमै अज्ञानकरकल्पिनजगन
है इसप्रकारकेकथनमै=1010
३
१

अ.भा.क.५६ ।११।दोहा। जीवात्मामैजगतयह किमकल्पितमुनिराज॥ पन्मिमैकिमवाकहो कल्पिनसकलसमाजामाचौपाई। प्रथमपशर्मजीवकिमनाना।किमवाएकजीवतुममाना। प्रथमपक्षमैभवकिमनानाप्रिनिजीवकल्पितमुनेमाना ।११४ किमवासकजगनसभमाहींकल्पित हदसम्भव नाहोचनिननहिसन्दोनोमकारा।यौनेभासिने दोषी पारा॥११पादोहा। अवोधकल्पिनजगनसभ कहोयदिआना माहि! । कल्पिनसोअज्ञानकिम किमयाकरिपननाहि ॥११॥चौपाई॥आद्यपक्षमैदोयमहाना॥सुनोमुनेअबक रोवरखाना निजैकल्सिनयदिनोंकोमालोआत्माश्रयदूषण नबपावो।१११यदिममानोअपरअज्ञानापरस्पराय पदोषनबजाना यदिकरोननीयांतीकारााचक्रदोयन वआविनभारा१मानोर्चनर्थपदिनमभाना अना वस्थादूषगान बजाना।यदिनमानेकल्पित अज्ञानानब होवेअनिकीहान।१९ जीवपक्षमैदोयमहाना॥सुनो मुनेअबकरोवरेवाना अंतस्कराविशिरसुजोजाजी वरूपकिममानोसोजान्र्दुपहिन किमजीवतुममाना किमवाशुधकोंजीववखाना ॥१२०॥ स समाज:यावनवजानना जीवात्मपामैन-प्रथमपक्षनाना जीवपसना-दूसरभव दूसराजगनना- दोनोप्रकाग-नानाजगनएका जगनरूपदोनोप्रकारचा अवोधकल्पिन अतानकल्पिनाश-जिसी जानकरकेआन्मामैजगनसंपूर्णकल्पित है।सोभज्ञानकल्पिनहै। अथवाका लिननहींसोकहोनन-आधपक्ष अज्ञानकल्पिनहैयहपसाबारीजनिंजक। स्पिन-अपनेकरअज्ञानकुंकल्पिनयदिकहोना प्रथमेअज्ञानकाकल्पकदू सगअज्ञानजेकरमानोअरेदूसरेअज्ञानकाकल्पकप्रथमअज्ञानमानोनवर न्योन्याश्रयदोषावेहै। इसदोषकीनिनि केनिमितजेकरनीसराअज्ञा नमानोअरतीसरेअज्ञानकाकल्यकप्रथमभज्ञानमानोनवचक्रकादोषओ है।१२५ जेकरतीसरेअज्ञानकाकल्पकचतुर्थअज्ञानमानोनव अन वस्याहोवआवेगा ॥३॥ अंनस्करण उपहिताः॥ ॥ " अ.भा. कै.५० ॥दोहा॥ प्रथमपक्षमैजीवअपि भयोकार्यसमरूपा अ धिमानताजगतकी मसनवनेमुनिभूपाशाचौपाई।हि नीयेखउपहितनाजाको स्वाधिष्ठाननावनेनतीकोनीयप शमैथुधकोहोनायनिवरदूषणजानामहानपराएकाम पसअपिअसोगायोमैनहिवेधमुकविहागायोविद्यिपक्ष करवारना सरकोअबकरीविदारनाशादोहापरमात्मप। समैमुने जगनहेनुअज्ञानाविवेकाश्रमयनीदनुम कैसेका रोवरखानासासर्वज्ञसर्वशक्तियुन ईश्वरमैअज्ञानानहि होवतयतिवरकबी श्रनिअसकरनवरखानारसाचौपाई॥के ल्पईशमैजोअज्ञानापावेसोमनदोषमहानायोंविधअझना रोमनिजानापंडिनमनिममहोवनभानाहानकर्कशत। हिनरजोकाकरमुनेभंजकोंगजसोकाउटकरभाजयतिों वरमाना। किसकामुखहमदेख्यानान॥शकोअसउग्रक महमकीना।जिसकरयामठमैहमनीनाकिमअवयहअनु जतनामाभियोष्टिगोचरखधामा।१२सादेखकर सविनापट अंगा॥भयंकररूपयथाभुजंगा। मनचि नपिनत्ननमो नाइनकरउरशिरहमफोरा॥१९॥ ॥थिरनारहीनमनमैराईकौनउपावकरोयनिराई। साधुसंगनकरतचिनशीनासोमममुनेभयोविपरीना॥ १) प्रथमपाः अंगकरणवशिश्पसमै अंतस्कररंगको कार्यहोणेसेनाम वशिरकामीकार्यकोटिमैप्रवेशभया३२: नस अंतरकरणावशिक्षकोकल्पि नवस्नुकोकल्पिनकीअधिशननावनेनही दिनीये उपहिनपक्षमै अन स्करगाउपाहिनजीवनिष्टनस्करणकीअधिशननावनेनही-४॥आयपसजी वान्मामैजगनकल्पित है यहपथमा५॥दूसरपक्ष-परमात्मामैमज्ञानका जगनकल्पित हैयहदूसरापसाई यौविध हेविवेकाश्रमयहपूर्वतप्रका राअनिमूर्खनारीजनोकी मेनिनानातर्क करकर्कशनीसराहैबुद्धिजिनकी॥ अजावकरकोंगजाहली) हेयनिवर-१०॥अनुज-छोदामाई सुननामा पूर्वजिसका नामवरणकीयाहैसोवैराग्पनीर्थ)२१॥भंग-शरीर) ६५

अ.भा.के. ५०
॥१०॥योविधसंशयशूलविशेशा॥यनिवरचिनमैकरनक
लेशापूर्वजन्मकतकर्मअसमोरादोषनामैभ्रानानोरा
॥१॥ कविरुवाच॥दोहा ।संचिनननचिनि
का याविधदेखअनीशाअग्रजानचिनहनिप्रति वोलेअन
जयनीशा१२। विवेकाश्रमउवाच भयकोनजीकृशांगिा
तुम चिदात्मसुखकोजानानहिआत्मसुखवेनाकों श्रुनिमय
करनवरताना॥चौपाई।जानवभयोसंशयमहानाना
कोकरोभानसमानाचिननेचिनकरसवाधाना। उत्तर
सुननोहिकरोवरखाना॥२४ाजीवात्मापरमात्माजोजावाने
वभिन्न होवेयदिदोऊनबनवदने उभेविधशंकाविजिन
भेदविषेश्रनिडंका॥१३॥जोमायाशुधसनोप्रधानानससं
गनकर शवखाना।मलिनअविद्यामैचिनिजीजाजीव
मंज्ञाकहावेसोऊ॥१६॥अघटनाघटनपदुअज्ञानाचि
निवलकरसभकल्पकमानानियायिकमनभेदसमाना
खपरनिर्वाहिक सोमाना॥१॥आश्रयविषयइकचिनिय
खानाायोविधदोषभयेसमहाना॥जोजोंकेअवोधकरभा
सामोनो केहिबोधकरनासचिननेभसव्यानिसमानारज
सर्या दिमैहोवैभाना॥१॥निजाज्ञानदिनाभवमाहीं
१) संकुचित वैराग्य नीर्थकेदर्शनकरभयाजोभयनिसकरसंकुचित हैं।
करपादादिअवयवजिसमोअनीशअसमर्थ३२॥ हेकशीगि ३॥
नि-आनंदैब्रह्मगोविहान्नविभेनि कुनश्वनरत्याकारकाक्रनिjene
अजान अनुत्पत्रकेतुल्य५॥उभेविधशंकाजीवान्मामैअज्ञानकरकेक
स्पिनजगन किमवायरमात्मामैहैयहदोनोप्रकारई॥निरंका-सयश्चा
यंपुरुषेयश्वासावादित्येसएकाअयमात्माब्रह्मासन्यमान्माब्रीवानवमसि
प्रज्ञानमानंदंब्रह्माचंब्रह्मासिअहंब्रह्मास्मिन्वमेवाहमहमेवानदत्यादिश्रुति।
डिमि कोटिमीवाजेहाशाएकवेतनकी उपाधिकसंज्ञाकहते है जोमाया त्या
दिकरके चिनिक्लकर-चेननसलाकरराचेननहिअज्ञानकाआ
श्रयविषयकहाहै ) ॥ आम्मानिसअज्ञान)

अ.भा.क. १९ भासिन हैनिमसंशयनाही आत्मबोधकरहोवेलीनाअसमा नतवेदीनप्रवीनारदोहा भकल्पिनजगनयह.स प्रसविसमजानाचहदारण्यकतिअपि करतानथाविध गाना१४०॥चौपाईजवभद्रेनरसेजामाहौकरनेशनइसर कोनाही नबनकोऊरथचारुानहिनहींअश्वनमार्गमा रु॥अथनहाँइशरथ नरदेखोअननथामहामार्गपेखे। चिंतनकरभद्रेमनमाहीविनअज्ञानहेतकोनाहीं॥१२॥ अनिकर उनहशनमहानासकलभ्रीनिउपलसमाजान। सममैरंकराज्यसपावसकरलेधरापनिरंककहावा१४३। सोविननरअवनिकामाही। समनदेखिनसंशयनाही। सौनरनिशरीरकी वाले।मेरुशिखरपरलेखेनिरी लोहामानुनमभिमानीपमानाकरपुनाव्याघ्रन नुअभिमानाच्याघ्रशरीरउचिनचनजोजाचिननेसभा करननरसोजारापरमार्थहष्टिकरदेखविचाराअवोधवि लाससकेलारधारागंधर्वपुरसमभरोजानाभाँसिन पुनहो वेनभानाम जिमनीचूगीकरनभचारोरतनधिसेनों भारीनिममायानटीआममोही रचनजगनसभवालवनाही। यदिनहोवेअबोधविलासानिवनहोवेज्ञानकरनासान वज्ञाननिनिभवमाहीपूर्वकहीकिमस्सरेंनाही॥१४॥ हेमदेहदारण्यकनिषअध्यायमैनीसरेवालमैत्रा सेजादिस्थानमेनेथोचनननिाननत्ररथानरथयोगानपथानाभवन्य थरथान रथयोगान्यथःसजने ननत्रानंदामुदाप्रमोभवन्यथानंदानमुदः प्रमुदःसजनेद्न्यादिश्रुतिः। ४॥सकलविपरीनज्ञानोंकाएकदेशजाना) ५॥ औरभीमिथ्याज्ञान केवहनदृष्टान है सोकुछकदिखावनाहूंचप्रमेश्या दिग्रंथकरकेश६॥हेवाला॥निरालेअवंतिकावासीजनोसेभिः त्रदेशमा व्याघ्रशरीर उचितमनुषमारणादिक्रूरकर्मा अधि हानकेअज्ञानकरकेभानुहोवेहै पनाअधिशनके जानकरेकेनहीभासने। १०॥जैसेनटेनी आकाशमैचूर्ण कूफैककरकेनभमैविचरनेवालीचारप्रका रकीसैनाकूदिखावे ? नामायोनटीअपि) १॥ एकसौवनीसकी। चौपाईमैकही अ.भा.के ॥ दोहा । नौनेखनसमानयह जगनचिनेजान ॥ स्वप्नसमनाविनभोमिनि वनेप्रकारनआन ॥१४॥ ॥सोरसा ॥ स्वप्रेमहर्नमान भासेभ्रमकरवर्षशन। चिरथिरतासमभान नहिचिरथिरतावारलेवी॥१५॥ मायामकुछनाहि नियमदेशभरकालका अल्पहृदय केमाहि भासँस्थोदिकभामिनि॥११॥ कविरुवाच॥ ॥दोहा॥याविधजगतमषान्चमै वैदयक्तिप्रमान॥ चि। नहनिप्रतियोगीवर कीनभलीविधगान॥१२॥योमै मायामात्र यह भासेईनअशेव॥ तुर्यकवलसोपायकर। तुमहामायश॥१५॥ ॥इनिश्रीहनामृतभाषाप्र वैधेविवे काश्रमचिननिसंवादेजगनमिथ्याववरननं नामचतुर्थः कवलः॥४॥ श्रीमन्नारायणायनमः॥ ॥ ॥ श्रीमन्नारायणार्पणमिदमस्तु॥०॥ १३) नाने अज्ञानकरजगनकीप्रतीनि जानकरनाशहोणेस२॥ हे चिनहानेस्वप्नपदार्थके समानजगनकोंमिथ्याजान॥हेमामिनिः) 18 मुहूर्नमान महर्नप्रमाणकाल भ्रमकरकेशनवर्षमनीतहीवे ॥५॥ अल्पदयदेशरयादिसरिकाआश्रयविशालदेशप्रतीनहोवेहैसोसभा- मायामात्रह) हेभामिनि ॥वेद ऋनिप्रमाणायोगीवर विवेकाश्रम नेकथनकायाहै )७॥याँमै सकलजगनाधिशनपरिपूर्णजिसील मै ॥ पायकर ग्रहणकरकेरामायेश मायाकानियंनाभगवाना मायेशइसविशेषकरकेभगवनप्रसन्ननाविनाभगवतमायाकीनितिन हीहोवेह नौनेमायेशकी प्रसन्न नामावश्ययनकरनायोग्पहैयहरूचन कीयाहै ॥ इतिचतुर्थकवल टिपणीसमाधा॥४॥ . ५७

अ.भा. के.
॥श्रीगणेशायनमः॥अथपंचमकवलारंभः। कविरु
वाच॥दोहा॥ कमलनेत्रकमलापने कमलनाभकमले
श॥ वंदोनवपदकमलको कृलसखेतलेशा॥आर्य
वर्यश्रीगुरुके पादपदमउरचार भाषापंचमकवलकी
करोस्वमति अनुसारकही चतुर्थकवलमै चिननि
यनिराजाननिमियाचना अनार्थसमाजाशस्थूणा
खननन्यायकर पदार्थशोधनहाराकथनकरनयनियंचमे
महावाक्पार्थसारामा आत्मनिटचिदरूपना औयमैयानिम
हाना उकियक्तिप्रेमाकर करनइनिप्रनिगाना विवे
काश्रमउवाच॥चौपाई॥ चिननेचिदरूपनामाहींगवार
किसीवादीका नाहीं ज्ञानुनमानेय दिनरजोऊजगतों।
धनसकिनसहोजा। ज्ञानरूपकिमान्मामाना।किम
वाज्ञानआश्रयवरखाना॥अससंशयनरकरत महाने।
यथार्थचिदात्मरूपनजाना
१२ हेकमलनेत्राहकमलापने लक्ष्मीपनाहकमलनाभाहेकमलेशलक्ष्मी
नियामका हेलसखेअर्जुनसखाहेकुलेशकलाद्रौपदीकरक्षक नवंप
दकमलकूनमस्कारकरना)२॥ दैननिमिथ्यान्चना अज्ञानविला
सत्वहेतुकरेके हैननिमियोचकाकथनकीया है मिथ्यावाविशेषण
अदनार्थसमाज अढनार्थअहिनीयअखंडार्थब्रह्मकीसिहिमेसमाजकही
मुहकारीहै काहेसेहेननिमिथ्यात्वकथूनविनाअईनार्थकीसिडिहोवेन
यौने दैननिष्टमिथ्याचकाकथनअनामिहिमै उपयोगी है आय
मैं इसकवल केआयमैः॥ हेचिनने चेननरूपमैकिसीवादीका विवा
दनही ज्ञानमारकासात्वसर्वकू अभिमन है काहेसे यौनेसकलव्यवहारकुंज्ञा
नसाध्याचेहै जोपुरुषज्ञानकूनमाने नवजगतके प्रकाशकका अभाव हो।
ऐसेजगनमै अंधप्रसंक्तिहीवेहै इसी कारणमेज्ञानके सावमैकिसीकानि
वादनही।इननकहनेकरतानसेविनाजगनप्रकाशककीअनुपपनिरू
पार्थापति प्रमाणाभीचिदरूपनाकेसन्चमैचनीयाहै॥ज्ञा
नरूपाहिआमाहै अथवाजानकाआश्रय आम्माहै इसप्रकारात्पपदा
र्थमैजनसंशयकूकरेंहै हेमहाने)

अ.भा. के: ६२ ज्ञानरूपआम्मपशमाहीजोजनसंशयमनभवनाहीस शिकरूपकिमहैसोजानाकिमवाहसोनियमहाना।। सोनाश्रयपक्षअपिवखानागमोकिमएककियोहैनाना। नर्ककनेकनुष्येवादीसिनिअसकरीविवादअनादी वैदानकानउपवनचारी॥भुननअत्रनिर्णयअसभागाजा नमुरुषआममनएकाकिरप्रतिपादननिअनेकाका विज्ञानानंदब्रह्ममहानाचिननेअसकरनफनिगाना ज्ञानब्रह्मनि महानाचिदात्मभावकोकरनेवरखान॥११॥ सैन्यज्ञानमननमहाना असश्रुतिभान्मताचवखानााचित नहानेयोंविधश्रुनिनानाजानचिदाम्पसमैमानाशदी हाऋनिकरसिधमनशोमने शोभना नेजान।अनमः नकथावरानने। मनसुनधरकरकान॥२३॥ ॥ १७ हेचिनमानेज्ञानरूपान्मपक्षमैजोजन मंशयतकरने है मोभवमुनयोंने। आन्मा वहुनजनोकाविवाद है बौधमनमैयोगाचार्यशोगाकविनानकुंआन्या मानेहै।सौत्रातिकज्ञानाकारानमेयमणिकवाह्यार्थआमामाले है।वैभाषिक सहितकवासार्थकुंआमामानेहै।शून्यवादीमाध्यमिक शून्यकुंआन्मामाने है।दे हादिआत्मवादीचार्वाकादिकदेहादिककूहिमामामाननेहै। इसपकारआन्ममै विवादहोणेसेजनाकूसंशयहोवे है।महाना व्यापक नियायिकमना मैतानकाआश्रयभान्मामान्याहै सोमान्माएक हैअथवानाना है सुखदुखादिव्य वस्थाकीअनुपपनिकरसांख्यनैयायिकनानाभान्मामानने हैं ॥ हेसनि पतिव्रतनिर्ककलंक जेकरएकआत्माहोवेनबएककेसुनहोणेकरसर्वमुक्त हूयेचाहीरात्यादिकनिविरुधशुष्कनरूपकलंककरकेनुप है चिनजिन कोजैसेवादी ५॥इसप्रकारविवादकूदेखकर वेदानरूपरमरणीकउपवन खा मु पुरुषोंकरचिनगहनिकटवतिविनकेसहनिसोचारी निसमैहैप्रति जिनकीजैसेपुरुषाअत्र विचादअवसरमै निर्णय सिद्धानमा विज्ञानमा नरंब्रह्म यहअनिचिदूधननिरतिशयआनंदरूसूबह्मकुंकहेहै।॥प्रज्ञा नंबायहनिप्रकृष्टनिरनिशयप्रकाशरूपब्रह्मा है इसप्रकारचिदान्म मार वकुंकहेहैरागसत्यज्ञानमनंनंब्रह्मयह श्रुतित्रिकालावाध्यचिदधनदेश कालवमुपरि दसेरहितपरिपूर्णआन्मसरूपकुंकहेहै)हेशोभ नेत्रा०॥हेवरानने ॥ अ.भा. आत्मवोधरूपानमै कहीऋतिनोहिमानाचिनबनेसवाधा नचिन सुनबयुक्मिहानाशाचौपाई।चिनिसाश्रयजोप रुषवखाननित्रनित्यत्वहेत किममानेकिमयानगगन वखाना अथवाअर्थरूपनामाना।शप्रथमाहेतअनुप संहागायनोनउपमाउभेप्रकारी अन्वयदृक्षांननभासेको उचिनिमात्रुयोनेपानोहाराहाव्यनिरेकीदर्शतनकोकोभ भावव्याभिनयानेहोजाचिदीश्रयगुवनहोवेभानासरूपा। सिधदूसरमजानाशनहि निमपसवालेसाधाया नेदूषोआवैभवाधावस्तुमात्रकासाश्रयजानायौविधान यममुकलजनमानसानिदाश्रयगनवस्तुन्वसमाना सोचाहेनिजआश्रयानाःयाविषभईअनास्थादारन॥ गवलीकरअपिनहोनेवारन॥१९॥ चिनिचेतना२धनाचेननसायटेसप्रनितामै किमनिन्यवहेतु है किमवागावहेनहै अथवाअर्थरूपत्वहन है इसमकारनीनविकल्प करकेवादीपू है। प्रथमाहेनुनिन्यवहेतुाअनुपसंहारी अन्वयव्यान रेकरांनुसैरहिन हेतुकूअनुपसंहारीकहनेहै यथासर्वमनियंप्रमेयवान इ संस्थल मैसर्वकूपसहोणेसे अचयव्यनिरेकरशनकोअवनेनही यानेप्रमे पबहेनुअनुपसंहारीहै नथाप्रधानमैनियावन है सोभसानहेतु है यौनेच्या विज्ञानकापनिवेधक है जहाँमाश्यत्वाइसमानाधिकरणनित्यत्व हैं जैसा ज्ञानहोवेह नहाँनिन्यावसमानाधिकरणान्यनाभावाप्रतियोगिसाश्रयान्वस मानाधिकरणनित्यत्वंसप्रकारअन्वयव्यानिज्ञानहोवेनही नथासाथ यत्वाभावव्यापकीभूताभावप्रतियोगिनित्यचंइसमकाव्यनिरकव्यानिमी नहीवनेहायनिदुपहेत है। इसीअर्थकूमलमैदिखावेहै अन्यशन इत्यादिकरके-14। पशमै हेतु के अभावसरूपासिडकहनेहै सोगुणत्व हेतुविनिरूपपक्षमैनहीहै याने ऋनिस्मनि मैचेननकू निर्गनिरूपणकी या चिदाश्रयगन चिनिकाजोआश्रयहै निसमैवलुत्व हैतुसमा नहै 11: सोचिदाश्रयवनअपनेसेभित्र आश्रयकी करहै सोचि दाश्रयकाआश्रयभीवस्तु है सोअन्यआश्रयकुंचाहेहै प्रकारअनास्या भनवस्थाषिआवेहावलोकर वलेवान पुरुषकरके) अ.भा के. ६४ दोहा । उक्तियुक्तिवहमानकर निदरूपान्मजानाकेवला नर्ककरमनिमति समनिमनकरहानारायणिकआन्म मनशोभने सुनअबकरोनिरासाअसमतसुननवराननेलो ककरेउपहासाशचौपाईसणिकविज्ञानआन्ममनजी जाचिनजानअसंगनसोकोभुकिमुक्तिसणिकमनमा। हाँप्रनिनिनिबनेकोउनाहीशपूर्वअनुभूनपदार्थजो कास्मनिननीकीक्षणिकमनहोजाअनुभवकर्नाकाभ्योहा नाअन्यकोवनेनस्मृतिज्ञानाशापूर्वज्ञानज्नरमजावे। असमनकृयननसुनुनसुहाने अनुभवजननीकीना। जोजागर्भगतसतकारसहोदामादोहाकिमदीप कहानवश कियोअर्थारधारा प्रतिसानाशीआमा तुमकीनोस्तीकार॥२५॥चौपाई चिनिसणिकदम नकेमाहीं। प्रयोजनकोउभासिननाहीं॥ निकरकेशनिस्मनिकाग्रहणकरना। मानकर प्रमाणकरकेन। हेमनिमनिानाजसमनि पूर्वक आत्मविषायणीवहिकाशुष्कनों करन्यागमनकरोइसीअर्थकूकठश्रुनिभीकहेहै नैषातणमनिरापनेयार नि-पूर्वपूर्वतानउनउत्तरदानमैजावेहाकियो अथवााभर्थ-प्रयोज ननशकविकल्पोनोमैसैप्रथमहूसरेपशकू चौपाई कैदोपादकरनिरास करने, मूलमै चिनिइत्यादिकरकेन)भोशाणिकआत्मवादी किमभोजना। दिव्यवहारमैचेतननिसकिन्वकाप्रयोजनहै किमवायागादिकसेजन्यस्खा गोदिव्यवहारमैप्रयोजनहै किमवाप्रवणादिजन्यनत्वज्ञानरूप व्यवहार प्रा योजन कियवानवज्ञानकरप्राप्यमोसरूपव्यवहारमशतिकत्वकाप्रयोज नहआयेकापशनहीवन है योनेभोजनकत्तीकाअभावहोरोसेभोजनजन्यति काहिमभावह दूसराभीनहीवने यांनेयागादिकर्ताकाअभावहोरोसेसर्गादि। फलभोक्तन्तकाअनुपपनि हानीमरामीनहीवन है योनेसाधककाअभावहीरोसे ज्ञानकी अनुपपनिआवेहै। चतुर्थपक्षभीनहीवन यानेज्ञानकाआश्रयपूर्वसरण व पुरुषकाउनरसणीअभावहोगसेमोक्षरूपव्यवहोरही सिद्धदायहस। पूर्णमर्थमनमैरखकरमूलमै कयाहै प्रयोजनको भासिननाही नि ) ॥

अ.भा. क. ६५ यदिक्षणिकदीपकसममाना स्थिरमानोनवमानसनाना॥ राघरपलब्धिकालकमाही पटताननरहोवन नाहीज बहोवेनरकोपरज्ञानाहोंवेननबनरकोंघटभानाशवाला गोपालादिनरजोजोअसप्रसिधिमानेसभकोजास्थिरनहो तेयरिआन्याको निबनहिसीप्रसिधिसिधहोडासादी हा उपाधिकनहैक्षणिकना स्थिरतावालवजाना इसी र्थमैशोभने सुनअवउपमाआनााचौपाई।जबमणिराज तुरमसंगमहावा नबनहिपीनभावकोपावोपीनवस्तुजवा निकरधरावानिबनहिरक्तभावमणिपावा।३०औसाँप्रसि। घिसकलजनमाहीं।चिनचनेकोउसंशयनाही अमलस्फ टिकजिमस्थिररूसोगिंगसंगकरमाणिकसरूपा॥१॥ १२) प्रयोजनकाअभावरूपडूसरापक्षनिराकरणकरकेअवप्रथमपाळू निराकरणकरेंहै यदिइत्यादिदीपादकरकादीपकसमान शरिणकभाननेमी कोऊनियामकनहीं हैशवाल-अनिमूर्खन्वकरमसिहवालादिपुरुषः॥३॥ जेकरयांमैकोई असीशंकाकरे पूर्वपूर्वज्ञानकानाशहोवे है उनर उतरता ननवीनउत्पन्न होवेहै यौनविज्ञानक्षणिकहै स्थिरस्सनही सोशंकावनेनही काहे से जोउपाधिकेनाशकपहिनकानाशभ्रमरपनीनहोवेहे वास्ते वसेनाशनहींहोवेहै नौने अनस्करणकोहनिरूपउपाधिनाशकरचे ननमैनाशव्यवहार भ्रानिकरहोवेहै वास्तवनहीं इसीअर्थकूटशेनस हिनमूलमै दोहा सेलेकरपाचचौपाईकरनिस्पण करते है उपाधिकृत इन्यादिनामा उपमा दृशंतत्रापा- मणि स्फटिकमणिजिनुरस ला शेकालालरंगकेसमीपमहावे शोभेही मणि स्फटिकमणि 19 रागसंग रक्तपीना दिरंगके संबंधकरके यथारकरंगकेसा मीपरत मणि है पीतनही पीनवसुकेसमीप करने से पीनमणिहैलो लनही इस प्रकार उपाधिकरमणिकव्यवहारहावेहै वालवस म गिनिर्मलस्थिररूप हैक्षणिक नहीं॥ ॥

अ.भा.क निमयहआमाअमलमहाना अचलनित्यज्ञानमयमा नानिउदिनाकरउदिनसमानातिनाशकेरनएस मभाना। ३२॥ मणिभिनि प्रनिर्विविनरविजोजोजेनिम निकोपावेजिमसोऊाविषयाकारचितमनास्पात्र निविविनआन्मानिमभासे।हाचिनविनाशकरनाशसमा नाचिनउदेकरउदिनसमभानाचिननेचिनगमनकयुगा नोभासेओन्मानिन्येअनंना साकरेप्रकाशनयाकोंकोंडा सर्ववनप्रकाशेसोजा उत्पन्न करेनयोकोकोजानिखिलभ बनउत्पादकसोऊ॥३५॥असहेताभनेकोनाही करेह ननभुवनक्षमाहीं।चिनहतेअसवलुकोनाही चिदो मनाचनयोकेमाहीं॥चिननेअसकालनहिको जाअधिगनआन्माजहानहोजाचिनचनेनहिअसा कोउदेश।जहाँनआन्मनवप्रवेशा॥शननुगनवाल्पा दिकसेवाले अमलचिदान्मासदानिगलोलखेनवागसंगसेही नो। यनोअसंगकथेनथुनिकीना ॥ ३८ ॥ . शहशनमैउकअर्थकुंदार्शनिकमैदिखावेहै निमयहरनिअमलमाया. रूपमलरहिनामहान व्यापकमाउनअर्थकं औरहमानकरेकहैमरण मिति मणिकररचिनदिवालमैप्रनिविविनमर्यजसे दिवालरूपाउपाधिकेजन्ममर एकजन्ममरणकूपावेहै।३ दार्शनिक।कहेहैंविषयाकारतिर हे सुआस्पसुरुमुखवाली गंना गमनकर्ता नथाचकग्श्रुतिःस्परूप प्रनिस्सोवभूवेनि).६ कोऊमर्यादिप्रकाशका नथाच मडकनिः॥ ननत्रसूर्योभानि नचंदनारकमिति सर्ववस्तु-सूर्यादिवसुमात्रान थाचमडकश्रनिः यस्यभामासर्वमिदंविभानीनियन् उत्पनिकेअभावमैक ग्वनिः नजायनेमियनेवा० उत्पादक उत्पन्न कानथाचनैनरेया निः यनोवाइमानिभूतानिनायनेयादिना हननकानथाचा हदारण्यकऋतिः अविनाशीवारेयमात्मइत्यादिः॥१९॥देशकालवस्तु परिवरशून्पना कुंडेट चौपाई करकहे है शितरनेरनिः॥१२॥ शुनि असंगोनहि सज्जने इनि नि।।

अ.भा.क. मानरहितमनजोंकेमाही करेप्रवेशचिनहनेनाहीस वहिनिमाशीजोजगनिविषयकहो कैसेहोऊ ॥३॥ ॥दोहा॥ वाणीविषयनकरसके मनकीजहानगोन। असआत्मनत्वशोभने बोधेघरसमकौन ॥॥चौपाईग चित्रलिखितजैसेनपसारेगनेनिनेनिकरउषानिवारे॥ जबअनिरूरचित्रदिखलाया।नलीहोकरउवाजनायो। ४शनयामानंगनवसअशेषाकिरेनसंकलकोंवेदनिशेषा शिषचिनिनिचकितजनावोनहिवाचाकरनोंकोगा। वेराससदमकोकवस्तुनाही चिदान्मनावनों के माहीं असवखनदिकोऊमहानअधिकनयाँचिदात्म जानोसामनसरहिनसकलमनमनासर्वगहागतसकला नियंना ईशकृपाकरजोनरजानाशोकरहिनसोहोवेमहाने४४ १२)मानरहित जोप्रमाकाकरण होवेसोप्रमाणकहावेहव्यापारवा लाअसाधारणकारकूकरणकहने, मनकूसार्वज्ञानकेमेनिसाधारणकार रगहोगरोसेप्रमाणनही किनप्रमाणकोसहकारीहै-२-गौन-गमन: जैसेवारणकीकंन्याऊषानेखनमैहरपुरुषकैपछानकेनिमिनचित्रले खानेसर्वराजाकीव्यनीलिखीथी सोसर्वव्यनीकायहनहीयहनहीइस प्रकार पानेनिषेधकीयाथा जबचित्रलेखानेअनिरुदकीमनिलिखी नबऊषानेदेखकरलजासहिननीचेमुखकरके मसकायकरचपरहीन वनिकटवसभसरवीआनेजाना यहकथाहरिवंशमेलिरतीहै इसीप्रकार वेदभीसर्वकार्यमातकानिषेधरकेसकलनिषेधकाअधिवानरूपान्याकू जनावेहै सोईअर्थदो चौपाईकरकहें है चित्रलिखिनर्तिमानगन। प्रमाकाविषयरूपापानिनेनिनेनियाकारकाथुनिभीनीकरकेजनार है।पुष्पदमाचार्यनेभीकहाहै अनाहत्यायंचुकिनमभिधतेश्रुतिरपी निशाखेनाश्विनरउपनिषदके तीसरेअध्यायमैमंत्रअगोरगीयान्य हतीमहीयानान्माराहायोनिहितोऽसजनोगनमकनपश्यनिवीनशे कोधा तुःप्रसादान्महिमानमीशंयहमंत्रआत्माकीदुर्विज्ञेयनाडूंकहेहै सोड्सम काअर्थदो चौपाई करकहतेहै असमम इत्यादि ऋतिमैअनुप एकाअर्थचौपाई मैमनसेरहिनयहलिख्याहै। हेमहाने)।

अ.भा. कई पादनयाँकेअतिजववाना हलरहितसभकरनअरोना। नेत्ररहिनसभवस्तुनिहारे।सुननशब्दकर्णविनसारेगमा सकलवस्तुकोजानसोकालखेननोकोभद्रेकोजाकारणव जिंतपुरुषमहानाचिदात्मविनअसकरनंवरखाना४ि६॥ जोनिकानिनिवखानाामनकामनभद्रेजोमाना। जोवाचाकावागकहावाजोहिरिणकाप्राणकहावेश जोहिनेत्रकानेत्रमहानाभिसन्मानानुनिवखानानाको पायविमकशरीयाअमनभावकोपावेधीगानाजोहिनि दिनसेन्याशावतानसेजोभिनउचागाभूनेभविष्यकाल सेआनाजीव्याख्यापदविषयनमान दोहानानेयों विधशोभनाभूमाब्रह्मपछानाचेननसाक्षीसर्वका॥ श्रु निसभकरतवरखान॥७॥ २) अपाणिपादोजवनोगृहीनापश्यत्यचसुःसशृणोपकर्णासवेनिवेधनचन सालिवेनानमाहरग्रंपुरुषमहानंइनि इसउनीसकेमंत्रकाअर्थदोनीपाईकरक हनेहैं पादनाक इत्यादि।अनिजववाना अनिवेगवालाहै-भ राना ग्रहणकुंकरेहैशकैनउपनिषदश्रुनिकाअर्थदोचौपाईकरदिखावेहै जोब्रह्म अतिका श्रुतिहि शब्दकी उपलधिकाअसाधारणकारणजोश्रोत्रद्रियनिसइंद्रिया शब्दग्रहणकीसामर्थकाअसाधारणकारणहै।इसीप्रकारआगेभीअर्थकरना प्राणकाप्राश-पंचनिरूपजीवनकारण प्राणकोपारा है जीवनकारणानाकीमामा र्यकाकारण है पानीकोंपाय स्वाभिन्नरूपकरके जानकर धीरा ब्रह्मचर्या दिसंयुकापुरुषानथाचतनश्रुनिःश्रोत्रस्य श्रोत्रंमनसौमनोयडाचोहवाचं सउपाणखमाणः चक्षुषश्वशुनमुधीराःप्रेन्यासालोकादमनाभवती। केत्र निशानाशुनिकारकपादकरकहतेहै विदिन जानकाविषयसकलवसु- मात्रसेभिन है। अविदिन ज्ञानकाविषयसेभिन है। नथाचननश्रुतिः अन्य देवनद्विदिनादयोअविदिनादधिइति-दोपादकरकठनिकामर्थकहने है कलाकृतरी कनकार्यभनकारगसेभिंनहै मनभविष्यनकालसेभिन है। नथाचनमश्रुतिः अन्यत्रास्माकृताहनान अन्यत्रभूनाचभष्याचरनिरी ॥ शामकवाणीकाविषयनही॥ ६ ॥ ॥ अर्थ अ.भा. काहस ॥चौपाई॥चितहतेजोकालत्रयमाहीवाचाकरणकार शितनाही।जिसकरवाचासकलनकासासोओन्मान वोंगरभासे।ामनकरलखेनजाकोकोडासदाज्ञानम नजिसकरहोऊोसोईआत्माब्रह्मकहावेचिननेअसर सकलक्रनिगावाचसुकरनरनहिजोकोदेखें। जिसक स्वासकलकोपेखोमोआनमाऋतिमिधलखवालोभना मलखमभननोनिगले।५॥श्रोत्रकरजननजोंकोजाने। जिसकरसुननोत्रमहानोनिकरसिधसदवोधसरूपा। मोआन्माभदेनवरूपामा प्रोगनकरेनप्राणाकरजोगमा रगचेशसभजिसकरहोडासोईआमानवारभासचिदा दसभवस्तुप्रकासे॥ सोरठा ॥धरउरफलकाध्या न जनयसकरत उपासना॥ अनामिनाकोजान॥ ॥श्रुनिशेषकहेशोभने॥५६॥ १पुनाकेनऋतिकाअर्थ पांच चौपाईकरकेकहते है चिनवृतेह न्यादि।।२- वाचाकर जोब्रह्मवर्णपदादिस्पलौकिकवैदिकवारणी करप्रकाशितनही है। जिसब्रह्मकरकैवर्णादिवाणी सहितवा ग इंद्रियप्रकाशेहै शब्दउचारणस्पनिजव्यापारकूसमर्थहोवेहै।इसी प्रकारआगेभीर्थकरना। हेमहाने प्राणनकरेजोब्रह्म पंचतिरूपमाणकरकेप्राणननहींकरैहै. जीवनस्समागचेपाडूंना होकरहै। नथाचकेनश्रुतिः यहाचा नभ्य दिनयेनवागभ्युयने नदेवब्रींचे विद्धि यन्मनसानमनने ये नाहर्मनोमान नदेवब्रह्मविहि यच्चयान पश्यनि येनचोषिपश्यनि नदेवब्रह्मवंविहिक योगनगोनिये नश्रोत्रमिदन नदेवब्रह्मवंविधिक योगेननप्राणिनियनमा रणः प्रणीयने नदेवब्रह्मावविदित इति ।। पांच श्रुनिकाशवभाग काअर्थसकसोरखामकहने उरघरन्यादि।जनकर अज्ञानीजनक। रके। नथाचतिशेषवचनं नेदयदिदमुपासनेनिग सभश्रुनि काअर्थ चौपाईमैसएलिख्या है ।। ॥ । ॥

अ.भा. सनिसंकल्पालापानाज्ञा ॥चौपाई॥अनधिगनहै आत्मचिनिजीको। जानविज्ञाना आन्मानाको।अधिगनओमायोनरमानानहिआन्मनल सोनजाने।शयोंविधविरुधअर्थकेमाही चितन्ने कोउसंशयनाहीं। यौनेसर्वकौनककीरखानाचिदात्माकों निकरनवखानापासुनअबसारवखानोनोहाब नासुकामवश वाच्यप्रज्ञाना।योंविधनामउपाधि धीना॥ वालवचिनिसभधर्मविहीना ॥६॥ S १- अनधिगन जिसपुरुष ब्रह्मअनधिगन है कर्नकर्मादिभावकरके अधिगमहीहेनिसपुरुषकूसोब्रह्मअधिगन है राजोपुरुषान्माकूकते। कर्मादिभावकरके अधिगतमाने है ज्ञानमानना है सोपुरुषआन्म सरूपकू नहीजाने हैनथाचकेन ऋतिः यस्सामनेनस्सम मयस्यनवेदसःदुनि। सर्वकौतुक सर्वआश्चर्यकास्था नहैया श्रुनि आश्चयोस्य वनाकुशलो स्पलब्धाइतिकठश्रुति।आश्चर्यवत्यश्यनिश्चिदेनंद। निस्मतिअपिआश्चर्यरूपआन्माकथनकरेहै-1५- ऐतरेयश्रुति आन्माकूसर्वरूपकरकेवरननकरेहै मेधाइत्यादिडेढचोपाईकरके मे था ग्रंथततअर्थधारणकीशकिा दृष्टि नेत्रहारारूपकीउपलब्धिका जनकमनकीतिजूनि-मननियरोगादिजनिनदुखित्व की प्रानि॥ संतान सम्यक ज्ञानबाई धैर्य अपदाकालमैमनकोस्थिरताश्रुनिमै धुनिशब्दकाअर्थहमति अनुभूनपदार्थकास्मरणासंकल्पअसा म्यकवलमैसम्पक स्पकरकेकल्पनानिा विज्ञान यहहमारेसेशि रहैइसप्रकारका विवेकान-मनन-राजकार्यादिकका विचार । निमम निशब्दकाअर्थहै।मनीषा तिसविचारमैखनेत्रनाक्रितु आवा श्पकार्यकरयोकानियोआज्ञानं आज्ञप्तिईश्वरभावा-15:असुजी वनहेजप्राणादिहनि।काम पदार्थावशास्त्रीसंसर्गकोइलाामे धादिशब्दांकावाच्यप्रकृश्नानरूपचिदान्मा हैनथाचननतिः। संजानमाज्ञानं विज्ञानप्रज्ञानमेधाष्टिधानमनिर्मनीषाजनिःस्मतिः संकल्पातरमःकोमोवशतिसर्वाणयेवेनानिप्रज्ञानस्यनामधेयानि। भवंनितिाक्रनिकेपदोकाअर्थचौपाईकेटिपणमैलिख्याहै।% ॥

अ.भा. क.७१
॥दोहा॥ ननुरंद्रियगनधर्मसे रहिनसकलगुणहीनाचि
दान्मरूपवराननै सुनपरिणामविहीनामा अर्धनपंगुव
घिरगुंगवाीगाभूभजनाहिानवैश्यनशूटुअनंजा व्याप
कचितिसभमाहि॥२॥ सोरठा॥हैनरहितपररूप निरा
कारसंगवर्जिना अंशहीनसनरूप त्रिधाभेदविवर्जिी
ता।।चौपाई।अपरिणामीआनंदस्साापरप्रकाश्या
सेरहिनअनूपास्थूिलनारहिननअणमहानानिहिदीरच
नहीलेघुपरिमाना॥४॥रकविहीनसनेहअनीनागनमो
रहितमारुनविपरीतारापावकभिन्नआकाशविहीनाभ
देसर्वसंगसेहीना॥६५॥ रमविहीन गंधजिननयोगा।नेत्र
विहीनअकाअवागा।मनसेमिनमनोनिविहीना।मुख
वर्जिनप्रायविनचीना॥६मात्राहीनअननररूपाचा
यविहीनाअचलअनूपा॥अदनकरतनहिकिंचिनसो
ऊ॥आननभीकाजीकाकोऊ॥
१)नन शरीर11-शरीरइंट्रियधर्मराहित्यप्रतिपादन करे।
अंधन इत्यादिकरकेनरा अनज चांडालोनिविधामेद सजा
निविजानिखगनभेद अपरिणामी परिणामसेरहित है ऋ
निमअक्षरशदुकाअर्थहै।६- स्थूलनारहिन इत्यादिचार।
विशेषणाकरकैद्रव्यत्वकोप्रयोजकरिणामकेनिषेधकरनेसे।
द्रव्यन्वकानिषेधभीजानना:10गंधादिकसे भिन्न है।
गोत्रानाममानकाहै निसमानरहित है।नयाचबहदारण्य
कनिःअ.ना.महोवाचनबैतदक्षरंगार्गिब्राह्मगाअभि
वदत्यस्यूलमनबहसमदीर्घमलोहिनमस्नेहमछायमनमोऽवावना
काशमसंगमरसमगधमाचमुष्कमश्रोत्रमवागमनोऽनेजस्कमप्राणम
मुखममात्रमननरमवाझं ननदनानिकिंचन ननदनातिकश्वनइनि
॥श्रुनिकेपदोकाअर्थचौपाई मैसरहै।

अ.भा.क. १० पुरुषनपुंसकस्त्रीविभागा॥चिननेनहीजों मैलागा वर्णाश्रमनधर्मविहीना।जानिरहिनविशेषसेहीना। ॥६॥दोहा॥ उदेअलसेरहिनसोप्रकाशरूपमहीना सुनिनिंदाके योग्य नहि गुणदूषणाविनजान॥६॥ वैननईशअनीशता निरुपाधिकशुधमाहिादेशका। लकृतभेदूपुनवस्तुभेडनसनाहि।। चौपाई म लकमलनेत्रयामाहीं। ईशजीवनावास्तवनाहीं।ई शजीवनाभासेजोऊउपाधिकृतलखवालेसोज। ७शकौनउपाधिव्रह्मअसंगायदिअसकहेमदेगन नंगीसमाधानयोका हैजोजावासोरुमनकहो अबसो जा७२। सकलसंसारवीजमहाना।असपरउपाधि विद्यामाना सोनसतास उभेसरूपा॥भनन अनिर्वा चीमुनिभूपा॥१३॥ संगविद्याचेननजोका अनिर्वा च्यलखवालेसोक ॥ १-पुरुषादिविभागसेरहित है।नथाचश्वेनाविनरनिः॥अ.नेवस्त्री नपुमानेषोनचैवायंनसकः इनि। २विशेषः नित्यद्रव्यति। विशेषपदार्थसेभिन्न है।।३-महान व्यापक है।४- सोआन्मासर्वत्रपू रहै इसकारणदेशनपरिछेदसैरहिन है। तीनोकालमैनिसकावाध्य नहींहोवेहेयोने कालकृमपरिछेदसैरहित है। आन्माभिन्नदूसरीवस्तुना वकको जनही योवस्तुकृतपरिछेदसेशून्य है । ५८ हेअमेलकमल नेत्रेखछकमलसमाननेवालीबाई हेमदगनअनंगमदकरकेग नप्राप्त है अनंगकामजिसमै हेवामोरु-16: परब्रह्माकीच्या धि। - मोअविद्यासनस्पनहीकाहे से जोयों ने हैनापनि मुनि काअभाव ज्ञाननिवार्यतानुपपनिदोषविहै। असनरूपेमानेनोपनी निकीअनुपपनिजगनकारनाकाअनुपपनिरूपदीषआवेहै । सत्तासन उभेरूपमानेनोविरोधआवेहै योनेकह्याहै नसतन असन नउभेसरूपाइनि। मुनिभूपा शास्त्रविन पुरुषों मै शिक्षा पुरुषः। भविद्यावेतनको संवैधा-६० अ.भा.क. १३ चिननेअविद्याकीहानी। यहाअनुरूपवलिसममा। नी। ७४ सोरठा। बीजरूपयहजान भवपादपकाशो भने। योंविधकरतवखान ऋनिवेनापंडिननिविला 1७५॥ दोहा ।मधिपूर्वयहजगतसभ हैअव्याकृतरू पारंगपरिमित निजवीजमै जिमहैबटनेरुभूपा! साध्यविकलदृष्टीनयह असयदिकरेंवखानानवयों। मैमनशोभने कही नर्केअबआन ।। 11 १- यक्षअनुरूप यथायालथावलिइसन्यायकेअनुसारमानीहैजैसे अवित द्यामनिर्वाच्यहै नथाभविद्या कीनिनि अनिर्वाच्यमानीहीब्रह्ममिहिकारोंनेअवि द्याकीनिहतिआन्मसरूपमानी है यौनेकल्पितवनकानाशअधिशनसस्यहोवे है।जोयोमैसीशंकाकरेअविनानिनिकुंआन्मसळपमाननेसेज्ञानसाध्यान कीअनुपपनिदोषआवेहै सोशंकावनेनही काहेसेजोजिसवालुकेसनसनरमा रणमैजिसकासव होवे औजिसकेअभावमेजिसकाअभावहावसोवलननसाध्य कहिये है यौनेतान के सबसे उतरक्षणमैआत्मरूपअविद्याकीनिनिकासन्यहोवे ज्ञानकै अभावसेननप्रतियोगिअविद्याकासबहोवेहैयोनेजानसाध्यापकीअनु पपतिनहीआवेहै। आनंदवोधाचायों ने पंचमप्रकारअविद्याकीनिनिमानी है काहेसेजोअविद्याकीनिनिसनरूपमानेनो हैनापनिदोषआवेहै।असनपक्षमै कारकव्यापारमाध्यताकीअनुपपनिरूपदोबआवेहै परस्परविरोधहोरोसेस नअसतरूपभीनहीवने है अनिर्वाच्यपसभी संगनहै काहेसेजोअनिर्वाच्य वनअविद्याओअविद्याका कार्यरूपहोवेहैनाने जैसेप्रोगभावकीनिहनिघटरू पहै नेसेअविद्याकीनिनिअविद्यारूसमानेतोजैसेअविद्याअनादी है तैसेनिहा निनिटभीअनादिनकाप्रसंगावेहै। निनिनिहनिमनकाअभेदमानेमेघट प्र धंसका विरोधाभावप्रसंगावेहै।कार्यवपसमैननमूलअविद्याकीस्थिनिहो। गोसेमोलप्रसंगआवेहै इत्यादिऔरदोयभीन्यायमकरंदग्रंथमैलिखेहै विस्ता रकेभयसेनहीलिखेयों नेअप्रसिद्ध पंचमप्रकारअविद्या नितिमानी है। अदैन विद्याचार्यों ने निर्वाचअविद्यानिनिमानी है काहेमजोजैसे प्रसिद्धयादिपदार्थोकावं सक्षणिकभाववस्तुकाविकारनैसंविधानिहनिब्रह्मसाशानकारकेअनंरक्षणव नोभावविकारस्म है याने मुक्किमेनिसका अभावहै इसीकारणअनिर्वाचपसमै कोईदोषूनहीआवेहै सोड्सप्रकारभदैनविद्याचार्यकैमतकूस्वीकारकरकेड्सग्रंथ मैअनिर्वायअविद्याकीनितिलिखीहार-साध्यविकल यहजगातउत्सनिसेपूर्व अव्याकृतस्यथा कार्यवहोरणेसे वटवृक्षवन इसअनुमानमैवटरूपानमैनि जउत्पनिसेपूर्ववीजरूपवसाध्पकाअभावहै यौनेकार्यवहे अप्रयोजक है - 10 अ.भा.क. ७४ चौपाई बानिनवीजकेमाहौ।खजनिपूर्वयदिहो। वेनाही अन्यनामेनबटनरुजोऊ॥उदेनहोइवीजसेसोऊ अत्यनासनबदकीवाले।उत्पनियादिमाननिजकाले। नबबट्वीजसेघरतिमाहीचूनाकरकिमहोवतनाही। रानोनेसत्यकार्यहैजोजोउदेहोवेकारणासेसीजायोविध कथनकनिअनकूलायोविनदोषेनहोननिर्मूलाकाद। हाचिनिआश्रिनजीअविद्या पूर्वकी नौवस्वानासोअव्याके नेनामलख भद्रेजगननिदानापाचौपाईसोउपाधिचेनन जबपावईशशब्दकावाच्यकहावेजोकोकसर्वाधीशासे भभूताधिवासर्वशी ईशाशसंकलंभूलपालेकसोउसेत॥ सकललोकनिभेदेकाहेतासर्वविनसभशक्तिप्रधाना सर्वलोकापास्मभुविमानानासर्वलोकेशपालकहावे निविनवरभदेअसगावोबुद्धिप्रधाननाजबपावाहि रण्यगर्भपदेवाच्यकहावाचामनप्रधानभावजबहो जासूत्रसंज्ञाकहावेसोऊ॥हिरण्यगर्भपूर्वइकजाना। सकलभूनपतिसेकलपानाारा जिसद्यावारिरिणय हधारी। पूजानाकीकरोंसुभारी ।। १५ जून-आवास-निअनेला-सदेवसौम्पदमनासीत्सऋतिकेअनुसारहै १३ दोषाचूनांकुरको उत्पनि आदिदोष-1४- स्वतंत्रपालकहै-अधिष्ठान पकरकेसर्वस्थितहै वशी ब्रह्माइंद्रादिकजिसकेवशमैहाईश सकलकानियंना है। -जनिमानसंपूर्णकार्यकूचननसनादेकरपालनाकरेहैरा-लोक. चतुर्दशलोककेभेदका नथानिवपश्रिमव्यवस्थाधारणकाहेनसेनकेसमानहै। नथाचरहदारण्यकऋनि अथवा सासर्वसवशीसर्वस्पेशानःसर्वस्याधिपनिःस नसाधुनाकर्मरणाभूयानोसवासाधनाकनीयानेषसर्वेश्वरस्षभूनाधिपतिरेषभू जपालण्यसेतुर्विधारणएषांलोकानामसभेदायति।२९।- 1 -- ऋतिविन: मंत्रद्रशऋषिः। -उपाना सकलकी उत्पतिकाकर्ता-१०- की निसहिरण्यगर्भकी एनादिद्रव्यकरके पूजाकातथाचसहिनामंत्रमाहिरण्यग भसमवर्तनाग्रेभूतस्पजानः पतिरेक आसीनसाधारएथिवीधामुनेमाकस्मदेवाय हविषाविधेमइति मंत्रमैट्कारदीर्घछादसहै। कस्मै स्नैभावछादसहै कायहि रण्यगर्भरूपाय- ॥

अ.भा. क.७५ चिनयोंविधऋतिजोई उपाधिक रूपवखानेसो ईच्दा कमलनेत्रजिमलूताजेतापसारेनिजशरीरसेन नोजिमपावकसेननचिंगागा करनसकलदिगमैसंचार तिमात्मामेवाणअशेषासिकललोकसभदेवा विशेषाब्रह्मादिकयेभताशेषा। उत्पनहोवेकरप्रवेशा ।।दोहा। ब्रह्मचरोचरजगतका भदेकर्नाजाना उपादानंवराननेलनाजनसमानासाचौपाई असंग कूदस्थचिनिसेवालाजिमभासिन हैब्रह्मानिगलाया। अविद्यानामैमानानिखिलनोहिवामोरुवरवाना। ब्रह्मादिस्थावरअरमाना।भद्रेजोयहजगतमहाना।आर विद्यकसभूचेननमाहीं। भासिन हैकुछसंशय नाहीर। जोब्रह्मादिशारीरमहानासिकरकूकरदेहसमाना॥ वानिकलनअसउक्तिमहाना। आविद्यकभवकरनवा खाना।जोचिनिआधिनविषयवखानी अविद्यास कलदुखकीरखानी। निसकरजगनचराचरभासेरिजमै फसमानवैरासे ॥२३॥ ॥ .. १९ हेकमलनेत्रे ।२-नन मामा जिमलूनाइत्यादिदो चौपाई कैअर्थमै रहदारण्यकनिः अ.२० वा. १॥ सयेयोनाभिस्लंना नोच्चरेद्यथाऽमेः शुद्राविस्फुलिंगायचरंत्येवमेवास्मादात्मना सर्व प्राणाःमर्वेलोकाः सर्वेदेवाःसर्वाणिभूतानिव्यचरंनिरूनि ॥२०॥ ३ का निमितकारणY:निराले भित्र पाहवामोरुन ६- वानिककृत वार्निककारमरेश्वराचार्यकी उक्ति जीब्रह्मादिश रीपमहानाइत्यादिअर्धचौपाईरूपवावा- नथाचनचनीब्राह्मादी नाशरीराविश्वयूकरशरीरवनेरति विरक्तपुरुषोंने जैसे रोहिकश रीरमैजिहामाकीया है नथाब्राह्मादि शरीरमैजाननाकाहेसेजो ब्राह्मादिशारीमैअविद्याकार्यवश्वानादिदेहकेसमान 10% हेवरासे सुंरदमुखि- ॥

we
भा. क.
॥दोहा॥ज्ञानाज्ञानविरोधना गटसर्वथाजानाज्ञाना।
माकोशरानबप्राप्तभयोअज्ञानाराक्रनिअवाजन्य
निकों अविद्याशत्रुजानानहीशुधचिनिवनिने करे
विद्याहानार॥चौपाई। उदासीनअसंगचिनिजोचित
हनेजगदाश्रयसोई ज्ञानउपाधिसंगप्रभावावाधकया
ध्यभावकोंभावर अवोधकरकल्पिनभवमाहीचिन
वनेशंकाकोउनाही रजभुजंगहष्ठानमहानाायानयों में
पूर्ववरवानारशकविरुवाच।दोहा।।योविधमुन्य
निवरगिरा मुधुरगिराकरजोराअनुजातप्रतिअग्रजा
बोलीगिराबहोरारचिनतिरुवाच चितिआश्रित
चिनिविषयजो करीअविद्यागानासोनवनेयोनेमुने
नहिकोनोमैमानासाकविरुवाचायाविधमनभग
नीगिरा यतिवरगिरामहानाबालेज्येषभगनीप्रति
घनघनघोरसमान ॥१०॥ विवेकाश्रमउवाच
॥चौपाई॥ मानाभावचिननेनाहीं ॥
१० प्रगट तमप्रकाशवनप्रसिद्धः।-ज्ञानात्माकी जानसरू
पब्रह्मकी ऋनिश्रवण-महावाक्यरूपक्रनिकेश्रवण सेजन्यत्र
४ा हेवराननेवाज्ञान उपाधिप्रभावकरकेज्ञानवाचकवाध्या.
भावकूपावेह जैसेअज्ञानेकानाशक निके संबंधकरके वाधकभावा
कुंपावहै घरोकारवृनिरूपउपाधिकेसवंधकरकेघटादिककेवाधकर
कैवाध्यभावकूपाचेहै
।ई। - योमै जगतआवि
पकायमै।पूर्व०मान २१ की चौपाई मै:19: बहोर फरवोली
सोनवने सोनवकथनूनही बने है। हेमने याने जिसका
रणसेनिसअविद्याके सत्वकोई प्रमाणनहीहै18: घनमेषका
घनघोररूपगंभीर शब्द केसमान वोले- ॥
॥

अ.भा. के. ७७ बहुविधमानकहीं नामाहीं।मायाकरइंट्रोवहरूपा।भासि न असकनिअनूपा॥ भोलोकानुमसोनहिचीनानि। खिलभून उत्पनजिनकीनानानेतुमरामयोविछोरा अवि द्याकरमानचिननोरा॥१०॥उदरभरोनियअन्नगावो नोनेजन्ममरणकोंपावोचिननेयोंविधऋनिभाना॥ अविद्यामैवामोरुमाना।१०।अजाएकोविधकनि। आना|चंद्रमुखिअविद्यामेमाना।इत्यादिवामोरुक्रनिना नाअविद्यासदभावमैमाना।शादेवीत्रिगुणमयीमा ममाया।अर्जुनप्रतिकुल्लअसगाया।अज्ञानाहनज्ञाना पुमानानिसकरपावे मोहमहान।।१०पायो विधभगवनव चनमहाने प्रगटभविद्यारुपवरवाने।मायावशकरभेद अनेकापावेआन्मावास्तवएका।१०।याविधपराशर उक्तिजोजामायाप्रगटवरखानेसोमाचिननेअसवचन नाना अविद्यामेवामोरुमाना।१०७॥ दोहा आन्माएके अनेवाअसनवसंशयधूर॥ कनिस्पेनिन्दवचनक र नजअबनीकोदूर॥ ०८॥ ॥ । १- रंद्रो परमेशरमानथाचहदारण्यकनिःाभारावापाइंदोमाया भिःपुरुरूपईयतेइनिारा भोलीका हेलोकानथाचऋनिःनविदाथय इमाजजानान्यद्युस्माकमनवभूवनीहारेणाप्राहनाजल्याःचासुदपउक्य शासश्चरतिनिाइसक्रनिकाअर्थभोलीकादत्यादिडेढचौपाईमैस्यशलि ख्याहै परंतु अतिस्पषनानिमिनपुनालिखनाहूंन विस्थ हेलोकातुमा निमपरमान्मावूनहीजान्याहै।यमाजलान-योरसप्रजाकुंउत्पन भयाहै। निसवल्ले सेनुमागमहाभेदहोनाभयाजिल्या अन्नवादीही।उक्थशासःसा मविधिनिषेधकरवांधेहयेहीब-श्वेताशुनरनिासोअजामेकालो- हित शुक्लवलांबही प्रजासजमानांसस्साः इत्यादि।। ४: गीताके सनमाध्यायमै दैवी वागुणमयीमममायादुरन्यया सागपंचा माध्यायमै अज्ञानेनावृत्तंज्ञानतेनमुह्यमिजनवाइनिया परोशरस्मतिः एक सभिद्यतेशनयामाययानस्वभावत इनिः।।

अ.भा.क.७० एकदेवसभभूतमै गूढाव्यापकजानासर्वभूतानर आर मानसाक्षीभगवाना१०सासर्वभूनवासीसहासाशीचेन नरूपानरहिननिर्गुणामदा असकहेऋतिअनूपाशा चौपाई। एकीभूतात्मा हैजोई।भूतभूतेमैस्थिनहेसोई। सकअनेकअकारमहानाभासिनलचंद्रसमानाश यमैवमिनगूढएनसेविसिनचिनिसभभूनमैनेसामथ नमनमथानकरकोजेमिंगविज्ञानात्मसुखलीज।१२॥ जोब्रह्मपूर्वनोहिवखाना निर्गणचेतनरूपमहाना।अवित धाकरसोनानाकाराव्योमचित्रसमकल्पगवाक्षसोर गायथास्फटिकघटएक नानामणिसवंधकराभासेरू पअनेक नथामायाकरआत्मा।शायथाएकआकाश नानारूपघटादिमैानिमचेतनआभास भासेअंतस्करमा मै। ११५॥ चौपाई। ननअहंकृतिमुकरकेमाहीप्रतिविं विनचेतनइकआहौं। नौविविधजीवनापावैवारलका एकअसंगकेहावे॥१६॥०॥ १हानसासी कौकासाशीहै। ऋतिमैकर्माध्यक्षपदयहअर्थहीनथा चश्वनाश्वतरकनिःअछराकोदेवःसर्वभूनेखुगढःसर्वव्यापीसर्वभूनां नगमाकर्माध्यक्षःसर्वभूताधिवासासाशीचनाकेवलोनिर्गणवइनि व्याप्यव्यापकभेदकीनिनिवारलेसर्वभूतानरामायहकयाहै।सर्व भूनोंकाअधिवानस्पकरकेस्थितहै।साक्षी परिणामव्यवधानसेवि। नासाक्षान सर्ववस्तुकूदेखेहै: राजलमैप्रतिबिंक्निचंदकेसमान। नथाक्रनिः एकस्वाहभूनात्माभूभनेव्यवस्थिताएकधावहधाचे दृश्यतेजलचंद्रवन इनि। ३- पयमै दूधमा ४ामनरूपमंथा नीकरकेमंथनकी जेविचारकीजे तथाचश्वेताश्वतरश्रुनिः।अ.१॥ सर्वव्यापिनमान्मानंक्षीरेसपिरिवार्पिनम् तिार-19: गवार मा यानीकरमोहिनपुरुषमहीनीलपीनादिनानामणिके संबंधकरके। शनन सुरनरादिककाअहंकाररूपदर्पणमै ॥ ॥

अ.भा. ७९ कविना भयोजबहकृति संगएकरूपनिनि कर्नाभूना भद्रेन्थाप्रमानाकहावेह कर्तवादिधर्मसारे निजआन्मम। निहारे अपनाअसंगरूपमनमैनल्पावेहलोहके संबंधक रघनीभूगलोहकर पांवकामोरुजिमें नाइनामैआवेहे तथाअहंकृतिसंग शुधुचेननअसंगनानाविधयोनिमा धेसुखूडखपावेह।११चौपाई संदर्रमविभविद्याप्रभावा। आर्यरूपमुनिजनगावा।जिसकरमनदारादिकलेशामा नेनिजामविषेअशेशा॥११॥अहंकृतिमिलिनचेतनजो जाजीवभावकोपावेसोकामानसधर्मकामादिसाचिन चिदात्ममनिहारे। १४ावसाजीवचिदात्मरूपानित्य असंगसुखाधिअनूपाअिसंआत्मकोंपायकरवालोर होशोकसेसदानिराला १२० सभकाज्ञानाहेजगदीशा॥ किंचिनजानवानअनीशांसभकाकाहईशानाकिचितक नौजीववरखानाायोंविधभेद उपाधिकभासावालवडकरसा चितिप्रकाशिदोहा-भानेजकाभेदजिममृगाक्षिका ल्पिनजानामायाचितकरभिन्ननिमहोवेचेननभाना। ॥१२॥ अहंक्शनि-अहंकारकेसाथनादान्म्यअध्यासकूँप्राप्नभयोचेनन-२० घनीभूतहथौडास्पलोहेकरके ।।हेवामोरुन हेसंदरमुखिअविद्या. विचार करनेसेजोविद्यमाननहोवेनिसकुँअविद्याको हैप-कामादि० कामोविषयाभिलाषाआदिपदकरकेनिउक्तसंकल्यादिजानोरथाचा हदारण्यकतिः अावा. याकामःसंकल्पोविचिकित्साहानहाति रनिहीं ीिरियेनत्सर्वमनरावति ऋतिमैसंकल्पपरकाअर्थयहनील हैयहपीनहैइसप्रकारअवधारणरूपनिजानना विचिकिन्सासंशयरू पावृति। नर्थमविश्वासकरणाग्रहा।औरसरमा सर्वज्ञान वानानथाचमुंडकऋतिः यःसर्वतःसर्वविन इनि-अनीशा। जीवा-८- ईशाना• ईश्वराजारीप्रभा आनेपानेज-प्रकाशः॥

अ.भा.क. ८० ॥कविरुवाच॥ कमदिनिजभगनीको यौविधकरउपदेश छिनभरआंतरमुखभये नजकरनिखिलकलेशाशाप रूपप्रनिरूपजो भासग्निसमानारधरपंचमकवलमो॥ रूपहोवर्भगवान।१४।।इनित्रीअनामनभाषाप्रबंधेवि वेकाश्रमचिनतिसंवादेनानामनिरासपूर्वकआत्मानन्द निरूपनामपंचमः कवलः॥५॥ ॥॥॥॥ १ कर्मदि विवेकाश्रमसंन्यासी-।२। यथाप्रकाश स्पअनिस्सा लोकमैनानोकाएभेदकरकेकॉरकेप्रतिननननरूपहोवेहै निसीप्रकार जोपकहिपरमात्मासर्वशरीरमैप्रवेशकरके नानाउपाधिभेदकरके। नानारूपभासेहै। तयाचकठऋनि: अग्निर्यथैकोभुवनं प्रविष्ठोरूप रूपं प्रतिरूपोवभूवा एकलयासर्वभूतानरान्मारूपेरूसंप्रनिरूपोवभू वनि-11 भगवान श्रीकृलपरमात्मा ॥ ॥निपंचमकवलटिपणी।। ५. एका२ ॥ ॥श्रीगणेशायनमः॥अथषष्ठकवलारंभः॥कविरुवाच॥ सोरठागकालिंदीसमसाम इंदीवरसमनेवभोगममउरकी जेधाम हेमलारक्षकाशदोहा । श्रीगुरुचरणसरो जका धरकरउरमध्यानाभाषाषटेकवलकी करौनिज मतिसमानोरासोरठा याविधसुनयनिवन नयापुनाचि। नतिनबाहसकरविकसिननन वोलीनिजधानाप्रति चिनचनिरुवाचाचौपाई।चिन्माचनुमनवखाना। सोहमवनसनथाविधमाना.॥॥ एकालिंदी-यमुना हेयमुनाकेसमानसाममूर्मिनाइंदीवर-कमल। १३ हेमाद्रौपदीकरसका ४ विकेसिनकहिये प्रफुलिनहै नेत्रजिसकासोचिननिहसकरकेवोली-ए-हेवनस हेप्रियः॥ 11 ॥

अ.भा.क. १ योमैममविवादयाजोजा भयोअबनभकुसमसममो जाकल्पितजगतकरचिनिअनूपाकिमहोवता सोसहयरूपाजाकोमिलीखनमैनारीनिसकरेहोवे। कोपरवारीपाजभुजंगकरमनेभुजंगापावैयदिसंह। यप्रसंगानबगोवधनादिकसमकाजारजुकरवनेनको पिमुनिराजादायद्यपिअसनिश्चयममजाना नथापि। शंका उपजीभ्रांना जोतुमकल्पिनजगनमुनायायनिव रसोनहिमनमैआया शनववीधउनरसयामाही जो वनुमुनेभासन्नाहीं।सोउआविद्यककरीवरखानानथा। विधजगननहोवनभाना।आयुअनववादियदिमा नाआविद्यकभवकीजेवरखानातुबरजसर्पसर्पकमाही भेदनियामकभासेनाहीरीवाज्ञानकालकेमाहौजी वस्तुमनेभासिननाही। मोकल्पित असलछुनमहाना। सकलकल्पिनवसमैमाना॥१०॥जेकरविनावाधयनी भूप। मानोजगन आविद्यकरूपानवआविद्यकनाचि निमाहीं। कहोमुनेकिमाविननाहीं॥२१॥ - १७किमहोवन किंतुसड्यरूपनही होवेहेना२-रजुमैकल्पितसर्पका रके: ३ : आयौनमेअभावकूमानकरकेजेकरकल्पितजगन कूमानो- 81 रजसरिजमैकल्पिनसर्प औविलमैस्थिनसर्पकामे देनयाचहिये-५ वाधज्ञानकालमैअपनीयमानावकल्पिनवस्न कालक्षणहै : हेयनीभूपजेकरवाधसेविनापिजगनकुंआदि धकरूपमानो-७:चिनिनवचेतनभीआविद्यकताआवेगी।

अ.भा.क.
जगनभानवाधकधीजोडीकहोविवेकाश्रमममसोई।
नजकरयानेशंकालेशाचिननेतन्यररहोहमेशाशक
विरुवाचे।दोहा गाविधमनभगनीगिरा निजवशनों
कोजानाहसहिनयो गीतब वोलेवचनमहाना।
विवेकानमउवाच। चौपाई। चितवनेकटस्थचिनिरूपा
।आन्मानविहीनअनूपाअिशनपिपासाप्रभूनिवि।
होनाविप्रकाशेअसंगमेलहीनाजोनरबह्मावि
नेमहानामिहिमाताकीनिन्यवरखाना सुनकरेनहिहो
वेमहानाहोवैनमोहनकुरहाना।मामायाउपाधिषि
निजपावचिनसाउर्दशकहावे।अंतस्करणसंग
जबपावानबभद्रेसाजीवकहावरायांविधपूर्वकथा
नहमकीन चिनबनेसोसकलनमचीना अबनेवप्रश्न
उनरहिनजोजाकथनकरौसुनसकचिनसोउ।ाभ
देभ्रमलखउभेप्रकाशनिरुपाधिकसोपाधिकंधारा
शुकिरजनरज जगमहानायॉविधनिरुपाधिक
धर्ममानो।सानीरतीरगनपुरुषअसंगाजलगन
उलटाभासिनअंगा।
॥॥
१.जगनकी प्रतीनिकावाधकज्ञान-२-निजवश अपनेआधीन-३॥
अन-नाशसेरहिनहै अशनपिपासाप्रभृति ईहाआदिशब्दकापर्या
यप्रभृतिपदकरके शोकमोहजरामृत्युकाग्रहराकरना इनसभसेरहिन है।
तथाचहहदारण्यकति अावा पायोशनायापिपासेशोकमोह
जरांमत्युमन्येनिनिमाया नोंकी निसब्रह्मवेमापुरुषकी महिमा.नि
जस्वरूपभूतऐश्वर्यनित्यकह्याहै।ई- सुकून पुण्यकर्मक
नपापकर्मकरके नथाचहदारण्यकृऋतिः अंहावा.४॥ नियाम
हिमाब्राह्मणस्पनवईकर्मणानौकनीयान इतिगजलकेतीरेप
रस्थितपुरुषअसंग-जलसंबंधसेरहितारोउलटा नीचेसिरप
पाद हैं जिसके जैसाअंगकहिये शरीरमनीनहोवैहै सोइसप्रकारका
सोपाधिकभ्रेमहै:13

अ.भा.क.
स्फटिकमणिरंगरंजितभासेसोपाधिकरण्यादिप्रकासे।
॥९॥ दोहा ॥ निरुपाधिकमगोचरनज्ञानसमका
लासोपाधिक|मभामिनि रहेनानपरकाला२००वरारी
हेउपाधिका यावनहोननहाना नोवनकल्पिनजगनयह
भौमिनिहीवेभानाशा अंनस्करण उपाधिगत चेननजी
कहायाजाग्रनसनसनियह तीनअवस्थापाया।
जाग्रतदशामेआत्मा योवनदह अशेशानखकेअयममा
गनक भद्रकरेप्रवेशा॥रधानामैसुरयथा जिमा
पावकनिजडोको आन्मनेजकरके तथा व्यासिनहैसभा
लोका २४॥ चौपाई।वाहिरशब्दादिकजेहाकामादिक
येआंतरदेहासकलवस्तुकोआम्माभासोरवियथाब्रह्मा
उपकासासाजोजाग्रनमै अनुभवकीनावासनानस
हायकलीना वासनारूपपदार्थसारे।चिनहतेनाना।
विधनिहारे। २६ । करंगजाननदर्थअपागाउमैका
रकेउपूसहाग विज्ञानमयपरज्योतिजोउ।विषया।
कारधीभासेसोउ॥२॥॥
१-भ्रमगोचर भ्रमकाविषयवस्तु २४ सोपाधिकश्रमका विषया
वहभामिनि-मानसेउनरकालभीरहेहै जैसेनलाउकेरपरस्थि
नपुरुषजाननाभीहै में जलसेवाहिरहंऔसधाखडाहूं नथापियावनका
लजुलके समीपरहेहै तावनकालपानी निकावाधहोवेनही।४है
वरारोहे प्रारब्धकर्मकरस्यापिनअंनस्करणरूपउपाधिकानाशयावे
ननहीभया-५- हेभामिनि शुरधाना नाउकेरारमणकाध
रानथाचहहदारण्यकशुनिः।अं.१॥बा.४ सरषदहमविरआन
खाग्रेभ्योयथाक्षरःशुरधानेवहिनः स्यादिश्वंभरोविश्वभरकुलायेइ
नि। ऋतिमविश्वभरपदकाअर्थमूलमैपावकलिख्याहैतस.
जाग्रनमैअनुभूतपदार्थकीवासना करण• इंद्रिया
ननननरथादिविषयाकारहि को प्रकाशेहै:
॥

अ.भा. क. ८४ ॥ दोहा ॥ स्वमदशामैशोभने सूर्यादिभयेलीनाल प्रकाशयहपुरुषतब भद्रेनिश्चयकीनारामहामा तसजिमनदीकै विचरेदोनोनीराजाग्रतमुपनेमैनथा। विचरेआमाबीरा चौपाई यथाव्योममैश्येनविह गा।फिरत फिरतअतिपीडितअंगा।श्रांतपशदोअंगले गावे।विनिहितनीडमैधावे॥३०॥निमजाग्रनवप्नसंचा री।परिश्रमपायान्माभारी विवानिनिमितनस्था नांगमनकरतयहपुरुषमहानाराजहाँसुननरस्वा पिनिनामा।चाहेनकोउवाहिरकामा। कुंठिनचिनचिना बनेनरमोठादेखनखन्नपदार्थकोउ।जिमकुमार थवाभूपाला। अनिपंडितजिमवाअनिवालापायका रसखकोदशाविशेषाकरेशैनसुखपावेअशेषा । नथापरमसुखआश्रिनस्सा। करनशेनचिदान्मसभा भूपा। अहनाममनादिहेजोऊ लखेनसनचिन इलेकाऊ॥३४॥ १नव स्वप्नदशामा नथाचहदारण्यकनिःअवार्थपुरुषःस्वयंज्योनि र्भवति इनि-२ महामतस महामछातथाचरहदारण्यक ऋतिः। अहोवा नद्यथामहामन्स्पड़भकूलेअनुसंचरनिपूर्वचापरं चैवमेवायं पुरुषसमावभावनावनसंचरनिस मार्नरखुद्दीनचन्तित ३. अंनस्थान सुनिस्थानीयथाव्योमइत्यादिनीनचीपाईकैअर्थ मैकनिःवह अावा. नद्यथास्मिनाकाशेश्य नोवासुप गोवाविपरिपत्यांना संहन्यपक्षी संजयायैवध्रियनस्वमेवायपुरु बसनस्साभनायधावति यत्रसुनोनकंचनकामुकामूयनेनकंचनख अंपश्यति इनि-४ जिमकुमारइत्यादिदोचौपाई मैहहदारण्यक ऋतिः अशेवा-सयथाकुमारोवामहाराजोवामहाब्राह्मणौवा निधीमानंदस्यगन्नाशयीनैववैषएनछैनेति ॥१६॥ अनिशयकरजोदखनाशकरेसोअनिघ्रीआनंदकीका-१

अ.भा.का ८५
दोहा. प्रिययुवनिकरकामीनर आलिंगितजबहोड़ा
बाहिरीनरवलकुछ यथानजानेसोइशानथासुपनि।
मैप्राजकर आलिगिजबहोडावाहिरीनरवलकुछ
पुरुषनजानेकोदाराचौपाईयोंविधरूपंपरुषकाजोजा
भजानवनंत्रसोऊोपापशून्यभयहीनअकामा अवारका
महैआन्मकामाशशोकरहिनुअसरूपमहानासुपति।
दशामैऋनिवखानामानाजहाँअमानाहोऊोलनपिना
पेनाकोंकोजारासकलेलोकअलोकसमानानिखिलदेव
अदेवसमजाना होवेभ वेदअदा होवेचौरअचौरअछ।
दागर्भहनाअहंनाहोऊोजहोनअनजनजकोजाप
लेकसजहाँअपलकसंगीनाश्रमयनहोवेभमसेहीना॥४०॥
नापसजहाँअनापसहोऊापुण्यपापजनपावेनकौऊोजेओ
नरगतशोकसुभारेगरहिनसुपननरनोनेन्यारे॥४१॥
प्रिययुवनिकरइत्यादिदोंटोहाडेढचौपाई अर्थमैत्रहदारण्यक
निअिावा अनपथाप्रिययात्रियासपरिवतीनवाह्यकिंचनवेदनातरमें
मेवायं पुरुषःपानान्मनासंपरिखकोनवाहाकिचनवेदनानर नहाने
स्मैतदानकाममान्मकाममकामरूप शोकीनर इतिासाआप्तकहियेणा
नकामनाका विषयसुखादिकजिसरूपमैनतस्पआनकामाआमाहि
कामहै सुखादिरूप है जिसमैनतआत्मकामंनिऋतिपदकाअर्थहै।
पिताकोपिनारूपकरके नहीजानेहै- ३-अनजनामचांडालकाहै ना
मागीस्त्रीविषेशूद्रसेउनपनहीवेसोचांडालकहियेहै-औदूसराजानि
चांडाल है-४ पलकस शूद्रास्त्रीविषेत्राह्मणसेजानकूनिषादकहेहैं।
निसानियादसेसवराणीविषेनोउत्पनहोवेनिसळूपलकसकहेहैन मा
नाजहाँअमानारत्यादिसाडेतीनचौपाई मैहदारण्यकनिहावा.
अत्रपिताऽपिनोभवनिमानामानालोकाअलोकादेवा देवावेदा
अवेदाअत्रस्नोलेनोभवनि भ्रूणहाभूताहाचांडालोडचांडाल पोल्के
सो पोल्कासःश्रमरणे श्रमणलापसोऽ नापसोऽनन्दागनंपुण्येनानन्दाग
पपेननीहिनदासर्वान् शोकान हृदयस्यभवनि ॥२॥

१०
अ.भा. के. ई
मारता- निजसुखमैस्थिन्जान शरदसलिलसमनि
मलाअपरूपमहान एकोद्रशसर्वको।४॥चौपाई।
एहीजानअसगतिमहानापरासंपनयहअसवरखानो।
परमलोकअसंएडीजानायरअसपरमानंदवरखाना।
४ाभामिनिइसआनंदकीलेशाभोगन, अन्यजीवा
शेशोभद्रेयहांनवखानादाशतिकुअबसनोमहा
नानानाजन्मलनकरशीजोडानिहसंस्कारयुक्त
नरहोजाधर्मयोग्य ब्राह्मणादिदेहापावेतबनिहकर।
तसनेह। ४५। सोरठा। लोकाचारसमान नीकैपढ।
करवेदको असमनधारेध्यान चितवनेसन्ध्यानध
रामाचौपारी अबहमवेदपढावाँचारूहोवेशिष्यशा
खाममभारू।पायकरनानधनमहानाहीवोजगना
विषेधनवानाभायोजनकरधनवहनकमावायों
नेअधिकधनाढकहावाकुलाचार्यभांवकरोंजारी॥
निसकरपावोसंपनभारी।४ पैटभूषणभोजनकरना।
गानपनकरोंसदप्राणपिआरी। मानापिनाअबकरोन्या
गोनहिकुछनिनसेकामहमारा
१- निजसुखमैइत्यादिएकसोरगदोचौपाईअर्थमैवहदारण्यकाका
निअ दीवा-सलिलस्कोद्रयाऽ नोभवत्येषब्रह्मलोक सम्रालिनिहैना
मनुशासयाज्ञवल्क्पएषास्यपरमागतिरेषा स्पपरमासपदेषोऽस्सा
परमोलोकरुषोऽस्थपरमाआनंदएन सैवानंदस्यान्यानिभूतानिमात्राम
पजीवनि इति।१।- नीके भलीप्रकार याजनकर
यज्ञकरवायकरके ४० कुलाचार्य कुलकापुरोहिनभावकूप्रग
टकरों। पट वस्त्र:।

भ.भा.के. ७
चितहतेभसकरेमनोराजापडेआगमधनपूजाकाज॥
करविवाहजबभायर्यापोड़ीमानपिनासेकश्मिलडाई।१०।
भानादिकवांधव नेनोलेडकरजेवामोरुने नोकरविरो
घसकलसंगवानेोनिजवालासंहवसेनिरालापाखर
गोश्वानविडालखभावानारीसेवन मेमनलावाभिओ
सनरतोहिप्रसाडापावन है इस्खमानन्सादाबा
भार्यासेसंततिजाना। नबनौकेलालनमेगना। मलमूतर
करलिपिनशरीगा विकसिनगावनमावेचीराक्षसभ
जुनमैनिजकरेशलाघायहम्मकन्याभयोअदाचा
चमासासनयहममचासाभार्थीहै फिरउदरकीभासापा
दोहायोविधनानाकर्मकर दारादिककेसंगायौवनमै
सुनयाने कोकालनरभंगा५५॥हभयोजबशोभने।
शोभनरहीनदेहानिकदनआवनमोनिया जोकाअधि
कसनेहाप। केविन डिंडोरकेपिंडसमसीसकानि
हारेदार बालविलनुलनाके मुखकॉनिहारेहै। कपासकेवी
जसमनेत्रमधुनारेदेखे रिक्तपेशीसमदेहावचाको विचार
रेहेप क्लदलदलसमा-
शास्त्रभर प्रासमयी ३-हेवामोरु-४-खरगया।गोवैलाश्वानकुनावि
डालविला इनकेखभावकुंअंगीकारकरके जैसेगधीपादोंकरमाडिनगर
धभनिसकूनहील्यागेहै जैसेवैलमारसेरहिनहोकरभीशकढीपरुषकूनही
त्यागेहे जैसवानलागेकरताडिनभीग्रहदूनही त्यागेहै जैसेविडाललाठी
करताडिनभीहोवेहै परंतमहांडग्यादिकदैमा हैनहीं अावश्यजावेह निसी
प्रकारपुरुषनिजभार्याकरनिरादररूपावेहै परंतुनिसकात्यागनहीकरे
गाव शरीरनमावेचीरा-वस्त्रमैनहोसमावेहै-
दोघा अंगभंगादिदाघसेरहिन अनिसंदरी - पंचमोसा पांचम
हीनेकाह हेयौवने समुद्रफेन केगोलेसमान-१७: सर्पकी
विल०१९- खालीअंडेकेसमानापियलकेपत्रसमान.10 :

. अ.भा. के.स नाडीयुनग्रीवादेखे देरीकेसमान नौकाउदरनिहारे घर घुरशब्दकरयककठदेखकरव्याघ्रगलउपमोको भन्दै उरधारेहै। पीठमधगनअस्थिधनुषसमानजाने शिवनाकोदेखतूंलगोलसममाने है। वियतनासादेख मोनीकोमलकमाने नितंबकोंदेखमरिपरिमिनमाने है। भ्रषकोंडागंधसमदेखमखअनिलकों चंडालकेपर्श समसर्शनौकाजानोबलहीनचीनभन्यायागनहेवामी यथा नथानथाविधपनिनजसुखमाने है।दोहा। करत सुनउपहासनिह सेवाकरेनको पुत्रवधासीक ₹ जेकरडयाहोडू।पानिजयोलिनजनजानमै कोपि नपूछेबानापूर्वकरें उपकारकों भदेस्सरेननानाकाची पाई अंनकालेसमीपजबआवा। ऊखासशब्दप्रग दावा।भारआक्रोनेशकटावालेोकरनशब्दसेगनिका लेशितथाप्राजकरव्याप्तअंगागमनकरन जीवप नंगा|आम्रफलउवरफलजीजापिपलफलवाआनफ लकोकाशवातादिककारराकरवालोयथावससेहोननि गलानथाजीवखोगसेन्यागाहोवनभदेरहिनविकारा॥३॥ सदरी-पर्वनकीकंदरा-३२-हेभानूलगोल-मईकीपूगीस। मानाम-विंदु शमविंदु नितंब चुनाई। के कोंडेकीगंधा मुखसेनिकसीजोवायुजनजान जनसमूह रशका गडा नियाचरहदारण्यकनिः अ.दावा मानधैथानःसुसमाहित सर्जद्यायादेवमेवायथ्शारीरयान्यामानेनात्मनान्वारूढ उत्सर्जद्यानियत्रैनछोड़ा सीभवनिरनि-११०० खांगसे अपनेशरीरसेन्याराहोवे हमाचदा रएपक ऋतिः अहवामानयथा नवोदुंबरंवापिप्पलवावंधना प्रमुच्यने एवमेवायपरुषसभ्योऽगेभ्यःसंप्रमुच्यपुनःप्रनिन्यौयंप्रतियो न्याद्रवतियोगायैवइनि-: प्रनिन्यायथागनथा योनियोनिप्रतिआइवनि देहांतरग्रहणकेनिमिन क अ.भा.क. १ ॥दोहा ॥ मणकालमैजीवकी होनभवस्थाजोरानीकों सुनअवशोभने सवाधानमनहोदााचौपाई निकैतमा यवांधवजनसारेजचेवरकरना हिपुका नहिवोलेन। हिसुनेघरकानन हिदेखेरसहोवेनभानाधामनकरक रेसकल्पनकोउ। करननगंधग्रहानरसोउ। शीनाश नसर्शनजाने। नहिकिंचिनसोवलपछाने।।दोहो ॥जालूकानूयथा जायतणांनमभागाअग्रमणे कोंपायर करनपूर्वकान्यागावासनाकरपूर्वी तथा आश्रयकरतेनुआनापूर्वदेहकान्यागनब भद्रेक रत्नपुमानासाकविनायथावर्णकारनरलैकरवा मात्राको नूनकल्पानरूपभद्रेशीघ्रकरे तथाजीव पूर्वधनशरीरकोत्यागंकर नूतनकल्यानरूपानदेह। धरैहै। पितलोकदेहधारेअथवागंधर्वदेह देवदेहधारेत्र ह्मलोकदेहधरेहै।प्राजापत्यदेहधारेअथवाअन्यभूतों की देह कोधाराकरे यथाकर्मकरेहै॥७॥ निकरआयइत्यादिचौपाई दोकेअर्थमै रहदारण्यकनिःअ.ई। वा-हाएकीभवनिनपश्यनीन्याहरेकीभवतिनजिवनीन्याहरेकीभवनिन रसयनन्याहरेकीभवनिनवदनीयाहरेकीमवनिनमानीन्याहरेकीम वनिनमननस्याहरेकीभवनिनसशतान्याहरेकीभवतिनविजानानी त्याहः इत्यादि। अनिएकीभवति नेवादिदेट्रियमैजोमर्यादिदेवनाकीअंशदसौ सूर्यादिदेवनामैअभेदहीवे इसी कारण सेदेशनादिकियानहीहीवेहैन-जा लूकोजनूड्न्यादिएकदोहे मैक ऋनिः नद्यथानणेजलायकानणसांनंगा नाऽन्यमाक्रममाम्पान्मानमुपसंहरन्येवमेवायमान्मेदशीनिहन्यावि घोगमयिन्लान्यमाक्रममाक्रम्यान्मनमुपसंहरतिइति यथास्त कारइत्यादिकविनमैनिः नद्यापेशकारीपेशसोमात्रामपादायान्य नवनरंकल्पागनरंरूपननुएवमेवायमात्मेदशरीरं विन्याविद्यांगमयि नाऽन्यन्नवतरंकल्यागतरछरूपंकुरुनेपियंचागांधर्ववादैवामानापन्य वाब्राह्मवान्येषांवाभूनानाम नि ४. वरनररूपआश्रयं-आधिन्य पातयिता अचेननंहला "

--
अ.भा.के.
॥दोहा॥ अविद्याश्रमतानकर यौविधनरसंसाराभटकेस
दासुलोचने कबीनजनरेपाराशचौपाईकर्मनकेका
नरजेकाकर्मकरमोशवरवानेनेकानेकुनासितनरमूलक
हावासदाहिजरामरकोपारचकरवाहिर इंडिया
जोनाायोविधर्हिसनकीनेधानानानेजनसभवाहिरदेखे।
अंतरआत्माकवीनपेखोशाअनेकजन्ममैपुण्यमहान।
करेपार्जनजोजपुमाना संयनकरणमोझार्थीजोडोप्रत्य
गान्माकोंदेखेसोजानाभवसंतकयहचमहानातिभ्र
मिननरहविश्रांनाचिनतेमोक्षार्थीनरजोजानकरपावें
अकृतनहिकोजाआयोतिधनिश्चयवालापुमानामोसला
र भकाधरउथ्यानालेभाज्ञानार्थीजावाआत्मविनश्रोत्रिय
गुरूपावापाचार्यवान नरहजोई परब्रह्मकोंजानेस।
ब्रह्मबिननरबह्मसुपावोर्याविधनिशिखासभगावे।
१.अविद्या मूलानानानिमसेजन्यभानिज्ञाननिनदोनोकरकेमर-ईश्वरमैत्र
पैगाबुदिसेविनाजोकर्मो केक पुरुषारचकरइत्यादिदोचौपाईकेत्रा
मैकठऋति-वल्लीपरांविवानियतणखयंभूत मान्यरोड्पश्यति।
नांतरात्मनाकविहीरप्रत्यगात्मानमैतिचारमनयमिछनारीऋतिका
अर्थचौपाई मेसलिस्याहाहनचक्ष पदकाअर्थसंयनकरणलिया है।
भवसंज्ञकइत्यादिदोचौपाईकेअर्थमैमंडकऋतिःप्रथमखंडमै पा
रीयलोकान्कचिताबारमोनिर्वेदमायात नास्पाचनः कनेननहिला
मार्थसगुरुमेवाभिगछेन समित्याणिः श्रोत्रियं ब्रह्मनिएंइति श्रुनिमैना
विज्ञानार्थ अकृतस्सब्रह्मकेजाननेकेनिमिना श्रुनिमै निर्वेदमायाना
वैराग्यफू प्राप्त होवे इसप्रकारविधिजाननी।गुरुमेवाभिगछेन इसकुँ विधि
जानना५:आचार्यवान पुरुषोवेदनि छोटोग्पनिमा ब्रह्म
विपरमाप्रीति निक्रनिऋतिशिखा वेदांना

अ.भा.क. ब्रह्माविनहोवेब्रह्मसरूपायोंविधजानअपरंऋतिस्प। अवेदवितनरब्रह्मनजानाभ्रदेनिअमअपरवरखाने। सानोंकोजानपुरुषधीमानाकरेप्रज्ञाकात्मपराना॥ आत्मतत्वज्ञानकरवालामृत्युसेनरहोवेनिरालारामो शलाभहितमार्गनआना।अपरश्रमिअसकरनवरखाना। ज्ञानकर रमनिकोपावचिनतिक्रनिअपस्मसगावे। 1०दोहा-नयाविधनानाऋतिकमनिसाधनज्ञानाज्ञा नविनामनशोभने साधनआननजानाशचिननेनि। सतानका ब्रह्मरुपमनजानासाधनफलकीएकना। पतिदोषमहानायनिजकरके निजरूपकी जेकरमाप्ति होहानबसाधनविनशोभने मोशालहेसभकोदाराची पाई।तिमैप्रनिविवित्तचिनिजोजामौशहेनतमजानो सोऊोजोसामानअपरोक्षमहान। ब्रह्मरूपकनिकरण नवखान॥४॥ १ अपरऋनि ब्रह्मविहौवभवनियहरनिगाहेभऋति स.नावेदविनंमनुनेपरंइनिनि-तीको आत्मा.नथाचटह दारण्यक निः अहवा.४ानमेवधारोविज्ञायम्नां कुर्वतिब्राह्म इतिधीर-धीमान विज्ञाय पदार्थशुद्धिकुंकरकोपहा वाक्यार्थ रूपवहिर्लेकरेनिनिपदार्थः।४-निराले जन्ममरणसेर हिनहीवेही नयाचश्वेताश्वनरक्रति अनमेवविदिनानिमत्युमेनि नान्यःपंथाविद्यतेश्यनाय इनि।।सीअर्थमैकैवल्यऋतिमी है झार त्यानंमत्युमन्येनि नान्यःपंथाविमुक्तयेति ।११।५ऋनि नानादे वनुकैवल्पनिकैवल्पऋति। महानदोषआवे है। सीपक्षमैदीवानरकहते हैं निजकरके इत्यादिदोह करके वृतिमैप्रनिविविनचिनि. चिदाभासक्रनियन्सासादपरोक्षा इह्मा तिक्रानि

W
अ.भा.क. १३
सकलप्रपंचलयाआधार।कूटस्थचिदात्मनिर्विकारा।
असामानरजिसकरजानोसोअसनिज्ञानमुनिमा
नेपानामहेतुमानजोखने नजानसकेनरको
ईनानेगुरुशरेशाशिव्यजावाननिसेवाकरविनयम।
नावादागुरुउपदिएमार्गउरधाराभवसागरसेउनर
पारोवंधनमोसचिननेदोजानवप्रसादलहेसभको
।दोहा।योहिना
हमउत्यनभये विवेकादियनिगजाचिननेसोउनि
खिलअब नवअधीन हैकाजाभवमायामात्रत्व
मैं पूछयाना हिनिदानाभदेदेख विचारकर तमविन
हेतुनेओनाराभवसाधनवाघननथाहैसभनोहि
अधीनादयापालअबशोभनेचिदान्ममैभवलीन।
र कविरुवाचायौविधसुनयनिवरगिरा विमा
लाअंबुसमान। श्रहाभक्तियुनमुनिप्रति वोलीवच
नमहानारशचिनननिरुवाचा चौपाई॥रुचिरा
पवोलितमधुराईनिजकरअसशुककोयनिराई।
कनकपंजरमनमभानाराविना है किमकाककुंबाना।
॥२॥रकैनेचचर जिहारिकननेत्र।
सितपंक्षसतरुरोगा
१निरूपज्ञान-२१ तामैनिसहनिरूपज्ञानकेविषे३१- नि
म्रतासहिन पूछेभगवाननेभीअर्जुन केनिकयाहै नदि हिमणिपानेन
परिप्रश्नसेवयारनि४ योहिन जिसमोक्षके निमिनमा हेभ
देविचारकरके देखेनेरेसावकरके संसारकासात्वहै नेरेअभावकरके
संसारकाअभावहै।६ भवचिदान्माविवेलीनहीवो-शुक.
जोना हैयनिराईवाना कुनसित हैवानकहियेवोलीजिसकी
जैसाको क-लालहै चुचजिसका १०% युवान

अ.भा.के. ३
नजकोंविधमुनेमुगला। पदमाकरमैउलकिमया
लाररावेदपाठीमुनमैगना नजकरसेरिजकोंधी
नाश्रिाइविषेकिमश्वानमगावप्रथमासनपरेनाहिब
ठावराअनेकहोमकर्ममैदानातजकरधनपाय
ससुखदातापिलोडलसुनअमेधकिमकाजाहवनहि।
नकरोग्रहणयूनिगजा रानथाविषयसुखमोहिअधो
गानाहमममुक्तिविषेअधिकाराजगनाभावमुकिमा
भाना प्रेरनकरकिमकविघानारदाकविरुवाचादो।
हा- यौविधमुनअनुनापयन निजभगनीकीवानाप्रेमस
हिनबोलेगिगभगतीप्रतिअनजानार विवेकाश्रम
वाचा संदगिअसमतकहो निजहनांनउरधारानिज
गुणहीसमदोषक भासेदेखविचारानचौपाई।
स्फटिकविषेऊजलगुगजोई।दूषणसम्भासिने है।
सोईमलनवस्नसमापजबकीनोचिनबनेमयिभासे
मलीनारिरीनथानवस्वछनाहैजोजादोषकरी भासे
नवसोकाजोजोवस्तुनिकटतवहोऊनिदाकारनिज
भासे नाहू। ११०॥
१-मरालहंसकून्यागकरकेबाउलकीपालनाकाहे कोंकरतेहोना
पुण्यकर्ममैप्रीति वालाब्राह्मणाकोंन्यागकरकेमभाना:समें
संप्रथमआसनपरका ६ पलाइनामसलगमका है पंजावमैगोंगलक
हने लसुनापियाजेकानाम है दोनोअमेधकहियेअपवित्र हैं.७
यनिराजनगरानफूंककर दार्शनिककूकहेहै नथाविषयत्यो
दिएकचौपाईकराती हैभाना-११- अनुजोन-पश्चांनभावी।
छोटाभाई धार- हेसुंदरांगिः:१२ निसनिस वस्तुकाआकारनेरे
विषेपनीने होवेहै -१० ॥

अ.भा.केस वारंवारकथनअसकीनाअहोस नुमभवीनचीना ॥ नॉनेविषयसंगनवदीयानोकोनजकररहोअदोषा॥२०॥ एकअसंगआत्मचिनिजोहोनिन सुधरूपेविचारोसोई अभ्यतनावमसिहजीजाहेप्रमागविचारमैसोको । ।१०।महावाक्यूजनिनन जौहब्रह्माकारसभुजबहोहू ॥असनवरूपदेखभवभारुहोवेनाशनलागेवारू॥ ॥१॥स्जवडिकादेखजिमवालाहविनाशसपननका। लानानेजबविषयनकोन्यागचिदात्ममैभडेयदिलागे ॥१०४ानबहमयनिअनर्थमहीनापरानंदमहोवेलीना भयहसभनोहिअधीन। करोकृपाविलवकिमकीना॥ ।१०पाकविरुवाचादोहा। याविधमुन्यनिवरगियाचि ननिकरसविचार विनयसाहिनवोलीगिरा मरणभी निउरधाराहाचिननिरुवाचा ॥चौपाई॥भाताज गननाशजोगावा सोनहिमोमनमाहिसहावा। जोजों के आश्रिननरहोजाना विनरहेनपलभरसोफा१००सहाविष यसुखजीवनमाहाविषयसुखविनमरणममहोहाअहोक उनउरनवधानी।ममअबलापरदयानजोन।१०। "कविरुवाच॥ ॥ अहो वडाअश्चर्यह।हेसुध नवमसिनत्त्वमसिइसप्रकार नववारजिसकोपुनापुनाउचारनीयाहै पैसामहावाकाविचारकी कर्तव्यानामैप्रमाणे काहसे जोजैकरविचारकर्नव्यनहोनानुबोन केतुकेमनिपिनानववार उचारयानक औञ्चारमनीकीयाहयानेआ त्मविचार आवश्यकरणायोग्य है। तचमस्सादिमहावाका सेउदेभयाजीनेराशरीर४ हेसुधुः शयहरजहै इसप्रकार कीरजुश्राकारजोबुद्धि है तिसकोदेखकरके हेवालेन हेभ्राना

अ.भा. के. ५
दोहा। यविधमुनविन नीकेकरुणारसयनवैनाकर
रणोकरबोलेमनी आरनजनमुखदैन। १० विवेकाना
मउवाचा चौपाई चिनवने जान्मसुखराशा नजीवि
षयमवक्षशिकविनाशीजिनिमरणासंघानंगनजानो।
आन्मासदाअनाशीमानो।१०चिननेअसकथनवहकी
ना।अहोसचनमअवीनचीनानवमरणामममंगलरूपा
यौनेसुखपावयनिभुया॥१९॥वहुजनमुखहिननिमा
निजोकोमुनिजनवरमानिनसाऊचितवनैजिमभूप
रसुखकाजा। निजननमरणमेहेरसरीजाशसोजीव
नमरणासमानापरउपकाररहिनजोजानापरउपका
रहेनुमतिजीजाजीवनसममुनिमाने मोजाशनोनी
योगमरणभयवालाभजआत्मनित्यवेटनिरालेोजना
ममरणालखदैवअधीनागरहोभआत्मसखलीनागर
॥१कविरुवाच। दोहायोविधयतिवरवचन
न चिननिभई प्रवीनाचिदात्मनिश्चयधारउर पुनबों
लीअनिदीनापश्याचितहतिरुवाचादियानिधेनवदया
करभयोगमआन्मभानाजगननिखिलभासेसदारजमफेरी
१जनममरणदेहादिसंघातमैजान1 निजमानि-अपनामर
गावर ओएमानने हैं। ४. रसराजा पारा-५ मति मर
गाई। प्रारब्धकेाधीनजान भईनवीन प्रवधा:
२८ हेदयानिधे दयाकेसमदर आत्मभान आन्मारमा
सातकारभयाहै: १०.० फरणी सर्प

रई
अ.भा. के
समानारा हमअवलाचपलाकहाँ नारीमनितिही
नाकहाचिदात्मज्ञानमम परतवकृपाप्रवीनाशचौपाई।
रय अहोमहासतसंगप्रभावा जिसरपंदवीहमपावाभिानो
नवरूपाकरभ्रीतिभिईशांतचिनमैभईशांनिसका
लवनचेतनहमजाना सोचेननममरूपमहानाभ्राना।
मनमर्यादिकसारे। नानाभानस्सहमधाराशाशांना
चलजोअइयअनूपासोधानाममजानसरूपाशुधरूपह
मज्ञानसरूमा। अनियनिराकारहकरूपा।१०संकलवेदी
तवेद्य अपागासोचेननहमसकलेअधोगामनवानाअधि।
षयचिनिजीजासप्रकाशसंरुपममसोफाममिसक
सचराचरजानामोमैसलस्थिनभाना।मोमैहोवेसक
लविलीना सोअहंसकलसंगविहीना।१२३॥ अहं ब्रह्मा
चिदात्मसुखरूपारामायासंगविहीन अनूपासकलेजगा
नमोमैअसभासेोरजविवेजिमसर्पप्रकास।१॥कविरु
वाचादोहा ॥ नवमस्यादिवाकरकर असनिश्चयजबकी
नाभईनापनकीप्रायनिभईलीनकालीन ।सा
१. रनिहीन गुरुशास्त्रमैत्रीतिसरहित २४-पर-केवलरीकृपाहिप
वीन मरकोनानउत्पनकरणोमैसमर्थहै। मोक्षः४ भ्रांति
अनान्मामैआत्ममनि:चिनि चेतनाई मोमै मेरेविषेप
प्रकासे प्रतीत होवेहै असनिश्चय सनचिनआनंदरूपब्रह्म
मैहूंइसप्रकारकानिश्याम भईमापनकीप्रापति निन्यमापन
आनंदरूपान्माकीप्रापति भईहै प्राविधकहोरोसेनिया
निवृत अविद्याअस्मिनारागहेषअभिनिवेशरूपकलेशकीनिलिभ
४ ईहै

अ.भा.के.
सोरठा। यौविधमुनयनिराज अनुभववचनचिनना
निकोजानसिइनिजकाज अनरसंखउपरतभयो५॥
॥दोहा। ममुसुजनकेवोधहिन नाटकरचनाधार॥
यतिवरकी नोपॅथयह करउधारतिसागायला
पमनीजनवोधहिन नौकीभाषाकीनापांचकवलहैं मू
लमै कवलषटक असचीन।१२७॥छपेछंदविंदोभा
सरोजरोजश्रीचंद्रयनिकोजोकोनरअक्लव्य विलंब
विनपायगीतको श्रीमतआर्यवरिए इविद्याकीखा
नीजोजलधीनिर्वेद वेदमयजाकीबानी श्रीमतब्रह्म
विज्ञानअस बंदोचरगासरोजको दिवाकरसमनिन्य
करतेजो विकसितचिनअंभोजको॥१२॥दोहाकवन
सुखीभरनाकवन कोहरनारिकोनाकोदुखदाकोगं
गधर वंद्यनीयगुरुकोना१२॥श्रीमनमररामजी॥
व्यस्तसमलजानिः॥॥
नथुनिनामउपनिषदकासारनिकासकरकेा गनि-मोक्ष
कवनमुखीत्यादिसानमनकाउतरश्रीमतअमरदासजीएसवावरकरके
जानना जैसे कवनसुखीहै इसप्रश्नकाउत्तरहै श्रीमानधनवानपुरुष
सुखीहै। भरना-जगनकापालककौन है इसप्रकाउतरा है अका
नामवासुदेवकाहै सोईजगनकापालिक है। कोहरना-जगनसंहार
कौनकरें। इसप्रकाउनमा है मकारनामशिवकाहै सोजगार
कासंहारेकरहै।अरिकौन है इसप्रेमकाउनर हैरकारनामेछ।
दियोंका है सीई प्रवलशत्रुहाँकोडखदासप्रश्नकाउत्तरदाहैदाना
महागका है सोस्त्रीहिसुखदाई है।कोगंगाधररसप्रश्नकाउत्तर(स.)
हैसकारनामशिवकाहे निसानगंगाधारणकीयाहार्वदनाकरनेयो
ग्यगुरुकौन है.इसप्रश्नकाउतरा श्रीमेत अमरदासजी है सोवंदना
करनेयोग्यशों ने मूर्तिश्रीमनु अमरदासजी है।व्यलसमलजादिः
उत्ररहै:-

अ.भा. कर अमविद्यानिधीगुरुपदवंदोवारंवाराजासक्रपाकरयन नविन देखेग्रंथअपारा १९ वटोश्रीमतपरमगुरु॥ रामदासपदकंजामुक्तिजहानिमदिनवसेकरे सकल दुख जा॥छपेछंदानकोपालेसंसार करेकीवस नरनारी।किसकरपावराज्य कवनरामैजसधारी॥ कवनकमलआधार कवनजसपावतभारी।कवमुख देतकूमार कवनकबनपभूपहागाश्रीशमदननपह नाअरी सरदानाजिसकालमाप्रथमसनवरकरवा यकीपदरजधारोभालमै व्यस्लसमलजानिः॥ दोहा प्रश्नसानकै उत्तरके न्यारेधरपदसानाप्रथमव रगानों केगहो गुरुनामभयोख्यानामा पराभक्तिया संदेवमै गुरुमैदेवसमानामों के उरभाससदा योंके र्थमहान॥१४॥ ॥५ अस सेवंदनाकरने योग्यविद्याकेसमुद्रश्रीगरुके।२९ संसारकी। पालनाकौनकरेहै इसप्रश्नकाउतिर श्रीशाविवानरनारीकी कौनवसक रेहै इसप्रश्नकाउतरामदना कामाराज्यको किसकरपावेहैइसप्रकाउजर। लपानपकरपावेहोरामै कौनजसकोपावेहै इसप्रकाउनररहनाभरी) शत्रुकोहननका कमलकाआश्रयकीन है इसप्रश्नकाउत्तरासराजगना मैभारीजसकौनपावेहै इसप्रश्नकाउनरेर दोनाकसार-तलाकवर खदेवहै इसप्रश्नकाउँनरेसरदाना)जबसरदऋतुआवनाहैनव॥ कवन कवनपकों अपहरनकरे है इसमकाउत्तररश्रीशमनन। पहनाअरी सरदानाजिमकालमै हेश्रीशमदनरूपेशजबसेरदा ना सरदाराकोचलावेहैनबत पका हंनाहोवेहै अंनम पाद कोअर्थदोहे मैसपेश्करेहै कोपालेसप्रश्नसेलै कुरवसुखदेनकेसारइसप्रश्नासानप्रभयेसो मदन नौके उत्तर केसानपदस्थापनकरके नौकेआरकेसा तअक्षरकोन्यागकरमिलागोसेगुरुजीका : हनाभरी नामप्रगट होवेहै । श्रीमन हसदासजी ॥ दाना सराना श्रीश अ.भा:कार कविता रमणीकदेशजहाँ उतरमुखीश्रीगंगा हर्षय नचलेसहाजनपापहरेनी नौकेतौरवसेपुरी भवनिज शूलधरी विधिनिजकरकरीजनसखकरनीजची है। अदारीजोमेघनछटाधारोभासे संबोचढारीमानौना कतिरकरनीचारविधजीवजाम देह देहदेह कौनपावें पावैशिवरूपविनाशुभकरनी॥१३सा भानदेशवासी नीर्थ करेंसदावासजीमै जोमैनरनारीसदाकरेशभका रनी।इमाउरकेजरवि भूजभूतपनिजहाँउमासंगवसैसदा सदाभूतभरनी कहवेदधुनीकहनी सुविचारकरे कई तोपुगनकथाहोवे मनहरनी। कहदेवपूजाकहोमजू। नवभारी कहेंगीनवायनादकरैनारीतरुनीक्षिा और सीकाशीवैठकरउमापतिउरधरकीनीवरभाषाअहै। नामनविचारको नानातिसारजाम कीयोहैविचार नीकेहकरेजीकेपढेसनेप्रेमधारकाषटकवलसथा केकरेजोपमानपान पामोसमगउरजावभवपारके । तीनमनिमाननर साधनाकाधारकर प्रेमसेविचारे योकोमोसवांछाधारके॥१०॥ १-त्रिशूलऊपर-विधि ब्रह्मा-३ नाकावर्गकेनिर। स्कारकरनेवाली है।।४६ देहदेह शरीरकून्यागकरके १५५ रविभून सूर्यरूप: भूतभरनी भूनीकीपालनाकरनेवाले। मोसमग मोक्षकासाधनहानरूपमार्गकुंपावे विवेकवैराग्यादिचतुषसाधनकूधारणकरके दुननेकहनेसेट्स ग्रंथकाअधिकारीसूचनकीयाहै .

६ अ.भा.क. १०० दोहा. अमरदासकविकीनयह भाषाललिनविनोदा मनसररहितविहानके चिनमैजनेमुमोदाईदया रणरसकाव्यको जानोनकोउचालासमांकरोकविता जलख वालकवचनरसाला१३ फागनसिततिथि दूसरी रविदिनमानाकारला शरयुगांकशशिवर्षमै से मौनिभईविशाला१४०निजमायाकरविविधनन जो धारतपरैकाजावषकवलसोपायकरतप्तहोवहजरा जा१४१॥ ॥इतिश्रीमदमरदासपदपेनमकरंदता तमानसेन श्रीमते अमरदासविदयाविचारित है। नामृतभाषाप्रबंधे विवेकाश्रमन्निति संवादेअहै। नार्थवरन नामषः कवलः ॥६॥समाप्नोयग्रंथः॥ श्रीवालि वायही कर्मन द्वारा काशीत-सं- ॥श्रीमन्नारायणार्पणमस्तु॥ ॥ १० फागुनमासमैासिनः शुक्लपक्ष। दिनीयानियिादिन्यवार। शरूर) युगर४) अंकल) शशिरा उलरा अंकयोजनाकर नेसे संवत मैसमाप्निभईहै१२विविधननु राम कलादिनानाशरीर परकाज़ भजनों कीरख्यानिमि नपायकर स्वीकारकरके॥ इनिश्रीमत-अमरदा सकविविरचिनकवलस्पटिपणीसमाप्ताई। समाप्तोर्यग्रंथः। श्रीमन्नारायणार्पणमिदमनः॥ ५ ॥ काशीपुरीमे मीरघाट शकरकंदकीगलीमैश्रीमात्महतह रिदारजीकीसंगतमैयहथसमातभया संवत ११४५०

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अथ विज्ञापन

Author
Amaradaas
Title
Ath Vijnj-aapan
File name
अथ विज्ञापन
Text
OCR done
Citation
1889
Published
2006/01/11
Publisher
Gobardhanadaas, Harihar Ratnaakar Yantraalay, Kaashii
Language
Sanskrit
Pages
105
Library
University Library,gurukul Kangri Vishwavidyalaya
Classification
RELIGION THEOLOGY
Keywords
Saadhan
DLI number
477181
Barcode
99999990173017.00
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C-DAC, Noida
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