Agarchand Bhairondan Sethiya Jain Parmarthik Sanstha, Bikaner
Dhalti Firti Chaya Natak
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॥ श्री
ढलतीफिरती छाया नाटक
(मारवाडी बोलीमें)
बालविवाह नाटक, विवाह नाटक, एक मारवाडीको
वात,
एक मारवाडीको घटना, स्कूलमें मारवाडी सीठनोको
बुराई, जसरापुरका हत्तान्त आदि पुस्तकोंके
रचियता अग्रवशी वैश्य
जसरापुर निवासी
वावू भगवतीप्रसादजी दाखका
लिखित
तथा
रामलाल नेमाणी
अध्यक्ष "रामप्रेस" द्वारा प्रकाशित ।
कलकत्ता न. ५८ काटन ट्रोट "राममेस में
शिवप्रसाद नेमाणी हारा मुद्रित ।
सन् १८१८
पहलीयार।
मूल्य 15
साची कात है।
.
सब दिन होत म एक समान।
एक दिन राजा हरिचन्द्र ग्रह, संपति मेरू समान ।
इक दिन जाय खपच यह सेवत, अम्बर हरत मथान ॥
सब दिन ॥१॥
एक दिन दुल्हा बनत बरातो, चहु दिश उडत निशान ।
एक दिन डेरा होत जगलमें, कर सूधे पग तान ॥
सब दिन ॥२॥
एक दिन सीता रुदन करत है, महा विपिन उद्यान ।
इक दिन रामचन्द्र मिल, दोऊ विचरत पुष्प विमान ।
सब दिन ॥ ३॥
इक दिन राजा राज युधिष्ठर, अनुचर श्रीभगवान
एक दिन द्रौपदी नग्न होत है, चौर दुशासनतान ॥
सब दिन ॥४॥
प्रगटत है पूरबको करनी तजमन सोच अजान।
सूरदास गुण कलग वरण विधिक धक प्रमान ।
सब दिन ॥५॥
पला पोतकी बात
आजकल भापणे लोगामें कोई कोई धनवान चादमी
निरधन आदमियाने भोत नीची निगाइसे देखण लाग गया
है। उनके मन में यो अभिमान हो गयो है कि, म्हे बड़ा
प्रादमी छोटा आदमियासे बात करता के चोखा लागागा।
म्हे अफलमन्द और ईमानदार हा। छोटा आदमी मूरख
और वेईमान है।
या वो एका परमात्माको माया है कि, प्रादमी जद
भागवानसे कगाल हो ध्यावे है, जिकैई दिन मूरखता और
बेईमानो का घरमें जलम ले लेवें है और जद भादमी
कगालसे भागवान हो ज्यावे है तो मत्तई ने मगला जगा
हु सियार और प्रमानदार कहणे लग ज्यावें है। पण वे
महात्मा बडा बावु जिका गरीबी हालत ग्राशेतरा भोग ।
चुक्या है तथा आपका पेटमें प्राशेतरा जाण चुक्या है कि,
आदमीको ढलती फिरती छाया है। जिका या बौ पालोतरा
जाणे है कि "दिननो फेरसे सुमेह होत माटोको "सब दिन
होत 7 एक समान।" जिकाई बख्यिाका वावा, वडा बड़ा
ममडाके सहारे ऊ ची २ गहियापर बेठकर, घमडका घोडा
पर सवार हो, गरीब आदमियाने घणाको दृष्टीसे देखण नाग
ज्यावे है। सेखौको चगमो चढाकर, कटाघका बाण फेकणा
.
लाग ज्यावें है। गाने प्रायोडा गरीब आदमीने अपमानित
तथा लज्जित करण लाग ज्यावें हैं। या कितणी अचरज
और अन्यायकी बात है।
श्राजकल या बी बात भोत जगा देखी गई है कि, गरीब
आदमी बडे श्रादमौके पास कोई कामकै ताई चल्यो जावे
तो भागवान श्रादमी मनमें नाणे कि यो कंगाल मेरे पास
क्यु पागयो। के पास बैठण से प्रापणी आबरू हलको
होय है, सो आपण कान्ने यो कोई सुरतसे नई पावे तो
चोखो। जिकासे इसी २ खुनस निकलणे लाग ज्यावे मो वो
प्रापई उठकर चल्यो जावें। अागाने ऊ के पास जाण जोगोई
कोनी रवे।
देश दिशावरमें गरीब प्रादमो भगवान आदमी का कोई
रुजगार भिवारकै ताई चल्यो जावे तो पासरो दोण तो दूर
रिह्यो, उल्टो कोई ना कोई पाटो लगाकर जठेताई बस
पूचे ऊने गावमा से निकालणे की चेष्टा करण लाग ज्यावें ।
या कितणी अनुचित बात है !
पर या बात नई है कि, सगलाई भागवान इसाई है।
ससारमें इसा २ धनवान, उदारचित्त, दयावान मिनख पडा
है कि, वे सबने एक निगाहसे देखें हैं। गरव गूमान অযত্ন
लेस मात्र ही नई है। गरीब प्रादमियाको महायतामें
गतदिन लग्या रवे है। परोपकारने मापयो मुख्य धमा
समज है।
1 आज यो "ढलती फिरती छाया नाटक" जई आदमियाने चेत कराण के ताई बणायो गयो है जिका आख होता प्रास्ता पान्दा हो रिहा है। मैंको सगली बात मनसे नचाकर वर्तमान दशापर लिखी गई है। कोई के ऊपर खाश तौरसें नही लिखी गई है सो कोई चादमी आपके ऊपरको झुठो भैम मत करियो। के पैला वृद्धविवाह नाटक, बालविवाह नाटक मैं मारवाडी बोली में बणाया था। ज नाटकाको चोखो श्रादर देखकर, यो नाटक यी मारवाडो बोलीम बणायो गयो है। प्राशा है कि, कई माफक आप लोग अंको बी मादर कर कर मेरो उत्साह बढायोगा। में नाटकने पढकर, धनका मदमें चूर हुयोडा, गरीयाने नीची निगाहसे देखणे वाला, आपको भूलने मजुर करता हुया, में भारी दोपने दूर करेंगा तथा गरीबाने पाच्छो निगाहसे देखेंगा और उनको भलाईको ख्याल रखेगा तो में मेरा परिश्रमने सुफल समजुगो । - कलकत्ता सज्जनोंको दाम- । भगवतीप्रसाद दारूको। - । । - , . अँनाटक मांयला आदमियांका नाम । १ गोपीराम परोपकारी बापियु । २ लिकमी गोपोरामको लुगाई। ३ मुरली गोपीरामको बेटो। ४ मोजीराम मसखरो वामण। ५ सेवाराम साधारण सेठ। ६ घीशाराम इटवो बाणियु। ७ जुहारमल तामडे ती पडित। ८ भूरो जटवाल बामण। ८ नैणसुख साधारण बाणियु। १. रामली बाणियाकी छोरो ११ शिवदत्तसिह करकसा बणियाणी। १३ भोलाराम एक गहीको मालिक। १५ शिवकुमार पूरवियो पण्डित । १५ मगनूराम राडियो बाणियु। १६ रामप्रसाद गोपीयमको रोकडियो। १७ रंगलाल १८ धमडौलाल १८ मोतीलाग्न वडोसालको मुनीम। धोडीको जमादार। r १२ भेवली कपडाको दुकान्दार। घमडी सेठ। १
श्रीभगवती प्रसाददारुका ।
॥
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ढलती फिरती छाया नाटक।
२
--
मालिक हैज को तो आसरोई है। पण वा काद्या कार है-
"मोर नाच नाचे पग पगा कानो देखकर रो पड़े।" सो
नमा पूजो बिना कया काम चालसी ?
लिछमी-या बी ठोया हो ज्यायगी।
गोपीराम-तो बी, क्य
उपाय बी
लिकमी -उपाय तो या है, कि मेरे को गैा है जिको
लेन्यो, ऊ से काम चलावो । दिन बावडेगो जणा और घणाई
गैणा हो ज्यायगा। नई हुगा तो के पाट है। किसा गैणा
बिना मसारम मिनख कोनो रवै है के ? किमा सगनाकई
गैगया है के ?
गोपीराम-(मनमे ) लुगाई बी होय तो ईसाई, होय ।
लुगाई के है-"यथा नामा तथा गुणा है" और एक लम्बर
हिम्मतवाली वीरबानी है। आज कानको लुगाया प्रापके
मुसे तो गैण दीएको क्याकै ताई के देवे, अगर मुसीबतक
नखत् मर्द मोठ्यार गैणु माग बैठे तो, नो नाडी बहत्तर
कोटीको जी नौसर जाया करें है। यण धन्य है एकी
छातीने तगीकै बखत गेण दोगने त्यार होगई। तुलसीदासजो
बौती साची कहो है-
"धोरज धर्म मिन अरु नारो, आपत्ति काल परखिये चारी।"
लुगाईको परीक्षा प्रापत्तकालमें आपद हो ज्यावे है
। उपरसे ) तु कवैजिकी तो साची है पण ऐ गैणासे कितनाक
दिन काम चानसो ।
ढलती फिरतो छाया नाटक ।
दोब थो, अ'याई छप्पर पर घूम थी पण उगाके मरणे
लापई सोक्य उलट पलट होगई। प्राच्यो, व
'बातना, ढलतो फिरतो छाया है। फेरबी कद चोखो दि
श्राज्यावगी।
(इतणामें लिछमी पाये है)
लिछमी-पाज थे कैया गुम हो रिहा हो ? के फिकर
पड रिह्या हो।
गोपीराम-(निमलोसी जोबसे) नई का ईना।
लिछमोल्या बात तो क्य,
कवो
। क्यं ना क्य
सोचते
जरूरई है। साचो बतावी?
गोपीराम-काकोजो मरगेको आज कुछ ख्याल भागयो
जणा चितपर उदासी छा गई, निकासे चिन्त्या मालूर
देती होगी।
लिछमी-नया ख्याल कन्या, चित्तपर विचार ख्याय
कैया पार पडसो। मा बाप सदाई थोडाई वैव्या रिह
करें हे।
गोपीराम-या ता ठीक है। पण जणके मरगोसे घरको
बीज बो तो सगन्नो मेरे ऊपर गिर गयो।
लिकमी-थारे सिर पर बोज गिर गयो तो के पाट है
वो पूर्ण ब्रम्ह कौडीने कण हाधौने मण देव है जिको प्राप
भरण पोसपा करसो।
गोपीराम-वो जगतको पालन
करता तो सबको
1
न
1
ढलती फिरती छाया नाटक।
३
मालिक है ज की तो पासरोई है। पण वा कह्या करे है-
"मोर नाच नाचे पण पगा कानो देखकर रो पड़े।" सो
जमा पूंजो बिना केया काम चानसी ?
लिछमी -~-या बी ठोका हो न्यायगी।
गोपीराम-तो बो, क्य, उपाय बो'
लिझमी-उपाय तो या है, कि मेरे क गैणू है जिको
लेल्यो, जसे काम चलावो । दिन बावडे गो जणा और घणाई
गेणा हो ज्यायगा। नई हुगा तो के पाट है। किसा गेणा
बिना मसारमै मिनख कोनो रवे है के? किमा सगलाई
मैणा है के ?
.
गोपीराम-(मनमें) लुगाई बी होय तो इसोरे होय ।
लुगाई के है-“यथा नामा तथा गुणा है" और एक नम्बर
हिम्मतवाली वीरवानी है। श्राज कालको लुगाया आपके
मुसे तो गैण दीगको क्याकै ताई के देवे, अगर मुसीबतयों
बखत् मर्द मोट्यार गैणु, माग वैठे तो, नो नाडी बहार
कोटीको भी नौसर नाया करे है। पण धन्य है एकी
छातीने तगोकै बग्नत गैणं दोगाने त्यार होगई। तुलसीदासजो
बोतो साची कहो है-
"धोरज धम्म मिन पर नारो, आपत्ति कान परखिये चारो।"
लुगाईको परीक्षा प्रापत्तकालमें आपई हो स्यावर
{ उपरसे ) तु कवै जिकी तो साची हे पण ऐ गैपासे कितनाम
दिन काम चानमो?
४
ढलती फिरती छाया नाटक ।
लिछमी-जितणा दिन चाले जितणा दिन तो चलावो
पीछे ओर कोई रस्तो वैठ ज्यासो। दाल रोटी तो भगवान
देसो।
(इतणामें मुरली रोवती २ श्राव है)
गोपौगम-(मुरलीने ) क्यू बेटा। कैंया रोवै है।
मुरली-(जोरसे रोकर) एका छोरो थप्पडकी मारकर
भाग गयो।
गोपीराम-कुंणसो छोरो थो?
मुरली-भोलियो दरजियाको।
गोपीराम-आजकाल मेरा मटा दरजीडाको भोत सिर
सूज गयो।
लिछमो-रामका माया गोला है।
गोपीराम-गोलाकी,तो ये बातई है। साची बात है-
"गोलो और
मुज
पराये बल आवस्या करे है" एक बड़े आद.
मौको थोडोसो रहारी हो गयो है, जिकासे ये बदी के घोडे
सवार हो रिह्या है।
लिछमी -या बी दिनकी बात है। अंया छोराकै माया
करें है के ? कुजगा लाग ज्याय जणा के मण बोगोको कट।
मुरली-( सुवकतो २)मेरेकानौ लात बी बाई थी
पण मै सरक गयो, नई तो और बी जोरको लागती।
गोपीराम - क- के आट थी। ऊक भावै कठे लागो.
(मुरलीने पुचकार कर) ना, बेटा। रीवे मतना। आपण
।
ढलतो फिरतो छाया नाटका
दिन इसोई है। अंया मतना करे पापा बी जने मारागा।
मिलण दे देख किसीक करा (मनमें) शद्रको जात मार खाया
विना ठीक रस्ते पर कोनी भावै। माराज तुलसीदासजी
साची काही है-
"ढोल गवार शुद्र पशु नारो, ये सब ताडनके अधिकारी।"
सो कदेना कदे गोलाका सिरमें ठोलो लाग ज्यावेगो जणा
आपई मान ज्यावेगी।
लिछमी-(मुरलोने पुचकारकर) श्राव, आसू पूछले ।
देख तने खिलारा द्युगो । ~गांवमें मना जायाकर। घरमें
खेलबो कखाकर। बेटा, धूम मना करखाकर ।
मुरली-मैं के धूम करे हो। मैं तो मेरे गेले प्रावेथो,
जिको वो जोरामरदी मेरे चनपट लगाकर भाग गयो।
लिछमी -~-भाग व्याणदे। तेरा काकोनीने मिलेगो जणा
ॐ ने ये खूब मारेगा। बेठन्या, रामका सुवास्या कलेवी
करले।
(मुरली कलेवो करण लाग घ्यावे है)
गोपीराम-पाच्यो तो मैं बावडी में नान करवाई।
तु इतणे रसोई त्यार करले ।
मुरलोकाकोली! मैं वी बावडोम
न्हावण
चालुगो।
गोपीराम-ससरा गधा ! कालेवो तो करले। काल न्हावण
लावा जगा तुनी चायो चालिये।
१
दसती फिरतो छाया नाटका।
मुरली-(कलेवो छोडकर ) या ल्यो। मैं तो छाया
बिना कोनी खाऊ ।
गोपीराम-बावला बेटा। अया कस्याकरे है के ? कलेको
करले । नाराका मुडा कुण धोया है।
लिछमी-इव थे क्यु खा हो ? जावो न्हायावो क्यु ना।
यो तो प्रयाई करनो करसी। (मुरलौने ) बेगो वेगी जोमले
नने तमाशा दिखावागा।
(मुरली फेरू कलेवो करण लाग ज्यावे है और
गोपीराम बावडीमें नावण चल्यो जावे है)
1
® प्रवेश दूसरो
ठिकाणो सहरकै किनारकी बावडी।
(गोपीराम आधे है)
गोपीराम-(भोजीरामने ) मोनोरामजी महाराज डडोत !
मोजीराम-मुलककर) सुखी रहो सेठा ।
गोपौराम-के हो रियों है?
मोजीराम-देराल्यो । रामजो पाख तो बडी २दई है।
गोपीराम-देख्याई पद्या हो। वा कह्या करें --"घर
जायेका दात गिणियेक दिन ।
-मोजीराम-मोहो। जणा तो आप पूरा जाणार हो।
०
-
टलती फिरती छाया नाटका ।
गोपीराम महाराज । बारसे तो कमतीई हा।
मोजीराम-कमती कया हो? पूरा हो।
गोपोराम-पूरा महात्मा तो थे विरामण लोगई हो।
मोजीराम-आजकाल हमास्तिया बामणाने कुण
बजे है। म्हारो बूज तो उठ गई। अाजकाल तो वाणियाई
सगलीतरा महात्मा हो रिया है।
गोपीराम-डरो मतना । बामणाके मिश्राणो जोवती
रखो, पीछे तो बामणाका आपई पोबारा है।
मोजौराम-जणाई तो बामियाने महात्मा बतावा हा।
कुनदको जड़ तो थेई लोग हो। म्हारे तो यो झठो कल क
है ( रुककर) और बात तो जाणद्यो। हासी उट्टा तो युई
होमो करेंगा। बोलो। आज उदास कया हो ?
गोपोराम-थे किसा कोनी जाणू !
मोजीराम-ऐं बातको के फिकर है। सुस्त मतना रिया
करो। बुब ईसियार रिया करो। मामाप तो सबका मरता
श्रीया है। हिम्मत राख्या करो। वा कहोबो है-"हिम्मत
। मरटा मदत खुदा, बादम्याकी बेटी फकीरको निका"
गोपोराम-( मुलफकर) महाराज । बामण हो जणां
बोली भाव है।
मोजीराम-वाणियाको जोबपर देई माई बैठी रवें है के ?
गोपोराम-आज कैंया भचक बचक हो रिया हो?
मिथायौजी घर से निकाल दिया के।
ढलतो फिरतो छाया नाटक।
मोनीराम-निकाल्याई पचा हा। अठे तो अयाई "सदा
दिवालो साधके,
प्राठ्ठपहर मानन्द।
गोपीराम-पाज भाग टोकी मिसल कोनी चेठी दीखे।
मोजीराम-या कहो । भाई, वाणियावी जबरा होय हैं।
मनको झट नाग ज्यावे है।
गोपौराम-कधाबो तो करें है-"अगम बुद्धी बाणिय,
पच्छिम बुद्धो जाट । तुरत बुद्धी तुरकडोयामण सपट पाट ॥"
मोजोराम-खैर। बामण तो संघट पाटई सौ। घण
भाग बुटीके ताई खाली पूछई लईक क्य डोल डालबी बै ठसी?
गोपीराम-यातो थे जाणुई हो कि आजकाल घरमें
चाको न्योरता कर रही है। पीछे म्हे के मिसल बठाया ?
मोजोराम-यो थारो कैण भूल है। समदर सुसे तोबी
गोडा सद्धो पाणी जरूर ल्हादे। म्हारो तो एक चवन्नी में काम
बण ज्यायगो।
गोपीराम-धेबी वाई करी-"आन्दा स्वामी राम राम,
तेरै न्युतो।" पण सर ( चपनी हातमें लेकर) ल्यो, थारी
मतवलती बुणगी म्हारी तो देखी जासो।
राम-(चवन्नी लेकर) सुखी रहो। (मनमें ) भाज
तो भाई मोजोराम-मोज हो गई। (जपरसे) हे, शिम्भू
कैलासपति! गोपीरामजीने वेगोसो लखपती कर ज्यु
रातदिन दूदिया छणवो करै। दुश्मनकी छातीपर गेरो
रगडो लागवो करे।
ढन्नतो फिरतो छाया नाटक ] 1 इतमाम सेवागम श्रावे ) सेवाराम-(गोपीरामने देखकर मनमे ) आज यो गोपियो काठे मिल गयो । रस्ते गेलेमें मिन्नतो जणा तो मुडो फेरकार दूसरी कानो घल्या जाता पए अठे क्यामें वसा, अठे फाय- नेयो जगा कोनी। बावडीको काम ठेसो। पूव तो मुवाब- लाई होसी । ब यो स्यारमी जरूर क्यू ना क्यु मागसौ। नट- स्या तो बुरा लागम्यां नई नटा तो दोणने कठ्यासू पावे। भोतई मुस्कल मडी (रुककर ) चालो के पाट है देखो नासी टाला लीग का घपाई रस्ता है। मटण को शिक्षा तो बड़कासे घणोई मिली है। ऐंका रस्ता तो घणाई याद है ( गोपो- 'रामने ) प्राज मान करणने प्रायो के ? गोपोराम-हम्ब जो, जयगोपालोको। सेवाराम-जयगोपाल । गोपोराम-(घोडो उदास होकर ) के बताया। काकोजी को थारो तो घणुद मेल थो । सेवाराम-(लापरवाईसें) इय मेल के काम पाये। भागलाको सुरगवास हो गयो। जब उनसे के सीर रियो । गोपीराम-(मनमें ) यो तो काकोजी को भोत भारी जिगरी मायेलो थो। दीन एक दातको टुटी रोटो खाय था सो म को परिक्षा तो लेयो चाये देखा व ततयो हैक, खानी टफोल सखोई भायेलो थी (ऊपरसें ) याने र हारी मदत करपी चाये। अयम्मत् चोडी सहारो दीपों चा। .
दलतो फिरती छाया नाटका।
सेवाराम लाला। म तन, मनसें यारी मदत कारणाने
त्यार हु।
गोपीराम-तन मनसें मदत करणिया तो और घपाई
मिल व्यागा। थाने तो 8 बखत कुछ रुपयाको मदत
करणो चाये। मदाई इसा दिन कोनी रवेंगा। कदे म्हे बो
आदमी हो ज्यावागा।
सेवारामलाला। तु कहो जिकी तो ठोक, पण प्राज
कान रकम सगलो रजगारमें फैसो पडी है। और छाराबो
आप आपके मते हो रिया हैं सो रुपया पोसाकी तो मैं
या ई कोनी काहा सके। मेरा शरोरसे तो मैं यार ।
गोपीराम-(मनमें ) तेरा शरीरको के करा । घुमा द्याक,
चोराचे लेण्याकर- गाडा ( ऊपरसें ) खैर। थे थारा अगसे
मदत करणने त्यार हो, याई भोत है।
(सेवाराम न्हाकर चखो जाते है)
गोपीराम-(मोजीरामने) स्नान कर लिया तो चालो
चाला।
मोजीराम- चालो सेठ साब।
गोपोराम-बाबाजो, म्हे क्याका सेठ हा।
मोजीराम-देतो म्हारा मू से निकलीई है। इस धपाई
जलदो थे सेठ होज्यावोगा।
गोपीराम-चोखी बात है। चालो।
(दोनू जावें है)
।
1
-
ढन्नती फिरती छाया नाटवा ।
: प्रवेश तीसरो
ठिकाणी घीशारामको
-
(गोपोराम मोजोराम आवे है)
मोजोगम-(गोपीरामने) देथा, जमानाको बात । धारा
काकीजी में सेवारामको कितणी २ मदत करी घो। यो,
बात उधक मरताई भून्न गयो। ससारमै कोईबौ किसीको
नई है। माची कथा करें है-
"मतलयको मनुहार, भगत जिमावे तुरनू ।
विन मतलब ससार, राय न घान्ने राजिया।"
औ मुसलचदने जगबी नटता लाम कोनी था । झट
नटकर नाक होगयो, कोरबग नबाव टेदियो।
गोपौराम-म्हारी लिहाज क्याकी थावे धौ। न्हे दिसा
बरावरिया हा जिको काजन म्हारसे काम पड़े गो तो बदलाको
जबाब मिल ज्यायगो।
मोजीराम-सेठ। या तो टलती फिरती छाया है। मैं
वातको किसी कोईफो अमरपट्टो हो गयो है। श्राज ताई
लिछमी कोई के पीडी घालकर नही बैठी है।
डोन्नती फिरती रवे है।
गोपीराम महाराज। निझमी हुया पीछे या बात
दौरण से रह चावे है। ऊपरने चाचरोही व्याये है।
या तो
टलती फिरती या नाटवा ।
मोजीराम-उसो यो लिछमीवानवी तो कोनो।
काठे दस बोश जारको पूजी होगी। पण वा कक्षा करे
है-"जत गावमें काम्दारई मतो" " गावमे बस कोनों
जिकामें अरंडई रख।
गोपीराम-अठे तो योई टीकली कमेडी हो रियो है।
श्रको मारोई तेईपताल जाय है।
मोजीराम-जया के, चण जछन्नकर भाडन फोड गैरे।
गोपीराम- म्हाराज ! भागयानाको दूर बलाय है।
मोजीराम-वसी के, जण म्हे युई दे देवता मनावा
हा यिा, थे वेगासा लखपती हो । धेनो धनवान हुया पोछे
येई धन्दा करोगा के
गोपीराम-"काना काला से वापका साला। सगलाई
णादमियाने एकसार
ममझ लिया के
वे पोछा पादमियाका काम है कि, लिक्ष्मो पाकर
गुमानमें टेडा हो ब्याव है, गरीबाने नोचो निगासें
देखण लाग ज्यावे है। चोखा प्रादमियाका ये वाम
नई है।
मोजीराम-या बात चाये तो नई । क्यु कि मग मोठमें
कण छोटो बडो है। भादमौने ईश्वरसे नीचे बसकर गरब
गुमान कदेवो नः करण चाये। हर बरसत हृदयमें दया
रखणी चाये। दया धम्मको वृद्धि होय है, अभिमानसे
पापको , अदि होय है।
मझराज तुलसीदासजीबी तो
म्हाराज।
+
दसतो फिरतो काया नादया।
१३
पाही है-
"दया धर्मको नून है, पाप मूल अभिमान ।
तुलसी दया न छोडिये, जयनग घटमें प्राय"
गोपीराम-दया कठेसें होय । भगवानका भजनमें दयमें
जान छोय जग्गा होयना । जिका तो लोग रात दिन पापम
लीन हुया जावें है। भगवानका भजनकी उलटो चासो
उडाव है।
मोजीरामन्या के प्राछी बात है। घणा खोटा भुगातसौ ।
कधा कर है-
"हर भजता हासी करे, जाके पेटे पाप।
पेट पलाखा बालसी, नगल होसो साप ॥"
(मैं माफक दोगु नणा बात करता २ घीशारामको टुका
नके वारला चुतरापर आकर बैठ ज्यावें है)
घीशाराम-(मनमें) यो गोपियो अठे क्यु प्रागयो
यो बामणडोबी महा मूरख है।
वा कया करें है-'मान
ना ताने में लाडाको भुवा।" झट् दोन जणा होठामा
दुकानपर आकर बैठ गया। पादमी हाथ पकड कर उठा
देवे तो दुरो नागे। हा। एका बात समझामें पागई । भोतरने
नाजको धुल भोत पडो है सो भारी निकालणौ चाये, जिको
अपमें गरदो पडेगो, जणा आपई ऊठ न्यायगा (मारी
.
ढलती फिरतो छाया नाटका।
-
योगीराम-(इसकर घीशारामन ) बस । बस।। प्राज
तो मोत उडायो
गोपीराम-श्राज तो छाण्यो छुण्याई उडा दियो।
मोजीराम-(गोपोरामने) देखो के हो, बामियांवालो
भारी हो गई है। वाणियाको जोर दुकानपरई 'चाख्या करे'
है। याहीवीतो है-
"जाट न जंगल कड़िये, हाट्या बोच किराड ।
रागड कटे न छेडिये, तुरत काट दे नाड ।"
गोपीराम-घालो इब तो ऊठणु ई पडसी।
घीशाराम-(उपरला मनसे) नई नई । बैठो। बैठो।।
(मनमें) मेरा मटा जाय तो गया। बाणों भलाई पापा तो
या चावाई हा।
गोपीराम-( मनमें ) ऐसेबी काकोनी भोत दौण
लोणको विचार राख्या करता। यो काकोजोसे पांच च्यार
सो रुपया पैला लियाया करती, पाछे धोरा २ चोज बस्त
भेजकर पूरा कया करतो, सो एको बात वो तो जकर पजो-
खणी चाये ( उपरसें) घीशारामजी। प्रान तो घरा गि
कोनी सो पच्चीस रुपयाका गिज इबो भेज द्यो (गिवा कानी
श्रागली वारकर) ये थार गिज पधा जिका भोत चोखा है
सोयेई मेजयो।
घींशाराम-(मन) बस, या तो पैलाई दौलै यो कि
बैठ्याका नामको क्यु ना क्यं जरूर लपचेड लागसो। देखता
।
दलती पिारती शया नाटक ।
एक नन्नु
परात माधो ठिएक गयो घो, सो बाको बा हुई। पण
मो दुख इंडे है। इवतो चतराईसें बिलकुल नट
ज्यागुई ठोक । (ऊपरसे) गिक तो पूष ज्यासी, पण थे
घरा नाताई रुपया इवी भजच्यो। हुन्डौ लई है ए का रुपया
मन्ने ईवो दीया पड़ेगा।
मोजीराम-( गोपीरामने सुणाकर घिरासी) रुपया
होता तो तु इथो के। चुतिया मर गया पोलाद छोड गया।
इनदको गाठ लेकर मुंसो पसारोई होगयो। देख्यो ऐ को
डोल। संलिया जाणु चालणीमो।
गोपोराम-(धीशारामने) गिवाको भाव के है ?
धीधाराम-भावती दश सेरको है
गोपीराम-देखा, घरा जाऊ छ। चायेगा तो रुपया
भेजकर मगा लेगी।
घींशाराम-(लापरवाईसे ) तेरी खुशो।
मोजीराम--(गोपौरामने ) ल्यो । चाना।
गोपोराम-(अठकर ) चालो महाराज ।
(दीनु जाये)
१४
ढलती फिरतो छाया नाटक ।
मोजीराम-(इमकर घींशारामने) बस । वस पाज
तो मोत उडायो
गोपीराम-याज तो छाण्यों छुपों उड़ा दियो ।
मोजीराम-(गोपोरामने) देखो के हो, बाम्पियावानो
भारी हो गई है। वाणियाको जोर दुकानपरई चाल्या करे
है। वाहीवीतो है-
"जाट न जंगल जानिये, हाव्या बोच विराड ।
रागड कदे न छेडिये, तुरत काट दे नाड ।।"
गोपीराम-चालो इव तो ऊठाई पडसी।
घीशाराम-( उपरला मनसे) नई नई। बैठो। बैठो।
(मनमें) मेरा मटा नांगा तो गया। जाणों भलाई पापा तो
या चावाई हा।
गोपीराम-( मनमें ) ऍसेबी काकीनी भोत दीण
लीको विचार राख्या वारता। यो काकोजोसें पांच प्यार
मो रुपया पैला लियाया वारतो, पाछ धौग २ चोज बस्त
भेजकर पूरा करया करतो, सो एको बात बी तो जबर पजो-
खणी चाये (उपरसें) घीशारामजो। अाज तो घग गिऊ
कोनी सो पच्चीस रुपयाका गिऊ इबो भेज द्यो (गिया कानी
श्रागनी कारकर) ये थारे गिऊ पधा जिका भोत चोखा है
सोयेईमेजयो।
घींशाराम-(मनमै) बस, या तो पैलाई दी थी कि
ठ्याका नामको क्यु ना क्यु जरुर लपचेड लागसो। देखता
-
ढलती फिरती छाया नाटक।
-
मोजोराम थारोई जोमा हा। म्हेतो आज या बातई
देखें था।
-
लिछमो -बस के, नगातो वेरो पयो।
मोजीरामजद म्हे अथा जौमण लाग ज्यावागा तो
श्रोजु थे जोमयों को नामई वोनी लेवोगा। धम्ममूर्त। यो तो
उलटा हाघाई घो घल्या करे है।
(इतणाम मुरली खेलतो २ आवे है)
मुरली-(मोजीरामने देखकर) प्रा-हा-रे। अगड
धत वाबो आयोरे। बाबा ! रादाविशन २ बोल ।
मोजोराम-धत्तेरो नानीको नाक काटु । बोल, यौहरी
श्रीहरी। सौताराम, सीताराम बोल ।
मुरली-(नाड इलाकर) बाबा । रादाकिशन ! रादा.
किशन ! बोल।
मोजीराम-कोनी मानेके । मार खायगो के ?
मुरली-(हायका प्रसारास) बाया। यो देख तेरी पगडी
सुपट्टामें रादाकिशन बैव्यो है।
मोजीराम-(पगडी डुपट्टो फीककर) या वान्ने, देखा
एव बो कठे बैठेगो। बावला बेटा! चोरको नाम नई
लिया कर है।
मुरलो-बो चोर कया है। त'घोर होगो।
मोजीराम तेरो नानु चोर है। मैं न्यु चोरह।
ढलती फिरतो छाया नाटक ।
® प्रवेश चौथो
ठिकाणो गोपीरामको घर ।
( गोपीराम मोजीराम पावें है)
लिकमी-(गोपीरामने) न्हापाया।
गोपीगम-इम्बे।
लिझमौ-श्रावो, रसोई त्यार है, जोमल्यो।
भोजीराम-सेठाणोजो। म्हेवी न्हा पाया हा ।
लिछमी-महाराज। चोखो काम करयो ? विरामको
करम है।
मोजोराम-महान कोनी जिमावो के ?
गोपीराम-( मुलककर ) साची बात है-“वामणने
बतलायो, लग्या लाग्यो आया।" आगली पकाड तो पू चोई
पकडप्पने नाग गयो।
लिछमो-(मोजोरामने) चारो तो सगलो परतापई है।
मोजीराम-थेबी वा करो हो-"भू तेरोई सो क्यु है,
पण कोठ्यार कोठलीकै हाथ मत लगाये।"
गोपोराम-(हसकर) देखो, “पाई थी पागौने घरकी
धिरियाणोई हो वैठो।"
'सिझमी--(मोजीरामने) तो, थारमें हासी करें है।
श्रावो नोमो क्य ना।
-
-
है
ढलती फिरती छाया नाटक ।
१८
गोपोराम -ब तो तेरे समजमें प्रावे तो मेरे एक बात
भोत ठीक जचै है।
लिछमी--(अाग्रहसे) कणसी१ बतायो ।
गोपीराम-देख, श्रया बैठ्या २ खाया तो कोयार
कोठलो निमड च्याया करें है, सो मेरेतो परदेश जाकार
कुमाणे को समज में प्राव है। तेरे के जचे है ?
लिझमो-(सास लेकर ) थे या बात थारा मुडासे मतना .
कवो । अयाकी बात केसे मेरो कालजो जगा छोडे है।
मन्ने धारै सिवाय के दौर है। मेरेसे तो थारो यो विछोवो
कोनी सद्यो जावे।
गोपीराम-बावली। श्रया करवा कैंया काम चालसी ।
देख, सगनाई मर्द मोट्यार कुमावणने दिसावर जावे है।
मैंई किसो नयो जाजहु । पौराकै लुगाई कोनी है के ?
उणांक दुख कोनी होय। तेरेई इसो ज्यादा दुख कैया
होय है?
लिछमी-उण लुगायाने पुळ्या वेरो होय ना। वे मरें
तो है नई पण उ गगमे बाको क्युबो रवे नई । मोट्यार जोराम
रदी लुगायाने बिलखती छोड कर चल्या ज्यावे, जणा बिचागे
के जोर करें।
गोपीराम-बात तो तु कवे जिकी बी साचो है। पण
प्रदेश में तो कोई रकमको रुजगार भिवार है नई। घठे
बजगार धोखो होतो तो परदेश जाणको के जरूरत थी।
UN
Xia
ढलती फिरती छाया नाटक।
मुरली-(लिकमोने) देख ये मा। नानुजीने चोर
बतावे है।
लिछमी-बेटा। खिज्या नई करे है। बाबो है, पर्याई
करबो कर है। पान्या जीम ले।
मुरली-मैं तो काकोजी सागै जीमुगो। पैला कोनो
जीमु।
मोजीराम-(गोपीरामने ) सेठा। ईब तो म्हाने ईना-
मत द्यो, सावा हा।
गोपीराम-जावोगा ? आच्छयो फेरु मिलियो। कदे २
म्हार कने बी आज्याया करो।
मोजोराम-जरूर। जरूर ॥ थार को नई आवागातो
कैके कन्ने धावागा। थारी तो मालाई फेरा हा।
( मोजीराम जावे हे.)
गोपीराम-(जोमकर ) मुरलोको मा। श्राज तो काकोजी
का भायेलाने और बजारका बाणियांने श्राछोतरा जांच लिया
है। सगला जगा नट कर नाक हो गया है।
लिझमो-नथ्योडाई पद्या है सगलो ससार सुखको
सीरो है।
गोपीराम-साची बात है-विन मतलन कोई घिरी
पागलौपरर्द कोनी मुते।
निश्मी-कोके
पडी है।
कैणु !
या
बात तो चोर्ड
.
.
दलतो फिरतो छाया नाटक । २३
जुहारमल-थे या बात तो भोत सोवणी विचारी है।
बश्यको कर्नव्य है व्यापार करणु । "व्यापार वईते लक्ष्मो"
परदेश जावो खुब व्यापार करो। व्यापारही से लक्ष्मीको
वधि होय है। म्हारी तो थारी बढतोमेंई सोर है। भगवान
याने बुणाया राखो। थे वेगासा लखपती किरोडपती हो।
हे तो रात दिन आप लोगांकोई माला फेरा हा।
गोपीराम-देखो, आप लोगाको कृपा होगी तो दिन
बावडता के देर लागे है। पण म्हारै ती मुरलियाको मा
भोत हठकर रास्यो है।
जुहारमल-क्या को?
गोपोराम-को है-थाने परदेश कोनी नाय देऊ ।
ज्यादा कवागा तो वा जीवने पूरोसारो कलेश करण लाग
यावेगी। दातको पूरो डर लागे है भोत सुस्कल मंड
रही है।
जुहारमल-जणा अ यातको ओर कोई रस्तो सोचकर
ठीक ठाक करन्यो।
गोपीराम-रस्तो के ठीकठाक करा? बा तो कवे है-
मेरो गैणू भलाई लेख्यो पण अठेई वो परदेश मतना जावो ।
सो थे स्याणा हो या गैणासें कदाई काम धिकायो नायगो।
भाखर पार तो पडशी कामाईसें।
जुहारमल-थारा मन विसकुन्न नापनेई है तो कोई
मिस लेकर चरथा आव
-
-
ढलती फिरतो छाया नाटक।
लिछमी-दुकान पर तो जावो भलाई पण प्रोजें परदेश
जाणको नाम मेरे आगे मतना लियो। थार श्रागै में हाथ
जोएं हु।
गोपौराम-आच्छो, ठीक है।
(गोपीराम जावे है)
,
7
-
,
* प्रवेश पांचवों
ठिकाणो जुहारमलकी बैठक ।
(गोपीराम श्राव है)
जुहारमल-(गोपीरामने देखकर मनमें ) आज यो
गोपीराम कयां आप है। श्राजकाल अका घरमें तगी है सो
रुपया पोसाकै ताई तो कोन्या ख्यारसी। देखी जासी श्रावण
यो (गोपीरामने) भावो गोपीरामनी, श्राज केया पधाया ?
गोपीराम-(हाथ जोडकर) डडोत जोधोजी।
जुहारमल-सुखी रहो। फरमावो के हुकम है ?
गोपौराम-म्हार घरका हाल तो थारे से छिम्या नई है।
काकोजी मया पीछे तकलोफ ही तकलीफ भोग रिघा हा।
हातमें प्यारा परसगी सगला नाका देबठ्या सो यो
विचार कराधा कि परदेश जाकर तकदीर तो प्रनमाणी
2
पाये।
ढलती फिरती छाया नाटक। कर जावागा (पतडी देवकार) आज रातने तो पूर्वको मुहरतबी भोत श्रेष्ठ है। इन तो धारा मनका चाया हो गया। मुहरतबो ठीक हे, दोन बात मिल गई। गोपोराम-हा। तौसरा बिरामण वचन प्रमाण । जुहारमल- या बी ठोक है। गोपीराम-ठीक है तो, मे जाऊ ? आजको विचार पको रिह्यो। धे रातने सिद्ध करावणने जरूर आपर आज्यायो। जुधारमल-ठीक है। (गोपोराम जावे है) . । प्रवेश छठो। ठिकाणो एक गलीको मोड। (गोपीराम मोजोराम आमने सामने पाये है) गोपीराम-(हाथ जोडकर ) डडोत बाबाजी। मोजीराम-(मुलककर) सुखी रहो। भाज कठीने सैल सप्यहा हो पाया? गोपीराम-(मुलककर) पेला थारो कयो काठीने आ पाया? मोजीराम--म्हारी के पूछो हो। भगको तरगमें मता ३ ४
-
ढलती फिरतो शया नाटक।
गोपीराम-थे स्याणा हो। इसोई कोई जुगतो बतायो,
जेसे लाठो टुटन भाठो फुटै।
जुहारमल-एक काम करो । मुरलियाको माने कहद्यों-
मैं भ्यायो माल ल्यावण जागो। ऊठेसे माल ताल
ल्याकार अठे दुकान करू गो। बस या कहकर चुपचाप
स्याणोके नाम से सिद्ध कर कर कलकात्ते चल्या जावो ।
गापाराम-वाहजो जोशौजो वाह । अयाई करूगो।
यो रस्तो ठीक है। पण सुहरत तो निकाल द्यो ।
जहारमल-मुहरतकी या बात है-महुरत निकाल्या
तो कैमे वेरो इदर में वर्णगोके नई बर्ण गो, कई रकमको
अडास लागसी। एक काम करो-"अगिरा मन उत्साही।"
अगोरा रिपोको मत है कि, मनको उत्साह होय जगावो
यात्रा करणी श्रेष्ठ है। सो थारे मन में आवे जणाई चल्या
नावो।
गोपीराम-वा, जो बाबाजो! थारला बडकाबी खुब
रास्ता निकाल राख्या हैं।
जुहारमल-श्रया रास्ता हुया विना कैयाँ काम चाले।
शास्त्र अवकाश तो सब बाताको देवई है।
गोपौराम-जातराकै बखत पूजग कराया करे है, निको
कया कराव्यु
होगी?
जुझारमल-जिको तो थे पेलासे घरमें वाई दियो भ्यायो
पेला पोत मास ल्यावण जावा हा सो मुहरत से पूजन करा
टलतो फिरतो छाया नाटक ।
२७
स्यार हो ज्यावो । रस्तामें बोलता बतलावता इसी ठठ्ठा करता
चालांगा।
मोजीराम-बात तो थे कही निको सोला पाना है।
पण ऊठे म्हारसे के काम लेवोगा म्हे तो मोजी जीव ।
कदे इसी नई हो ज्याय कि "धोबोको कुत्तो घरको रहे न
घाटको।" अठे पाछा आंवण जगता बी कोनी ग्या। छठे
हाडिया विखर ज्याय ।
गोपीराम जग्गाके प्रांट है। भठेसे तो ठीयाई है। बठे
गगा माता काई है, जिको मोक्ष हो ज्यायगी।
मोजोराम- बातको के डर है। अमरपट्टी थोडोई
होगयो है। जलम लियो है जिकाने तो एक दिन मरण ई
पडसो। कहीनी तो है-
"पाया है सो जायगा, क्या राजा क्या रक।
मरनेका कुछ डर नहीं, रहरे जीय निसक ॥"
गोपीराम -या साची बात है । कबीरजोबी तो कही है-
"चलती चाकी देखकर, दिया कबीरा रोय।
दो पाटा बिच पायकर, बाकी रहान कोय।"
मोजीराम मच्या बोलो म्हारेसे के काम करावोगा।
म्हे तो पद्या ठाव हा।
गोपीराम-प्रठे हाथ पग कोनी इलावां पड़े के?
वैव्या सुत्याई खाणने मिल ज्याचे के।
मोजीराम बस, मठे तो भगवान घर बार्टि भोजन
.
-
ढलती फिरतो छाया नाटक।
-
।
डोना हो, पण म्हाने तो मेरा मटा छोरा कोनो टिकण देखें।
गोपीराम-थाने छोरा के कवें हैं ?
मोजीराम-चोरटाको नाम लेवें है।
गोपौराम-के नाम लेवें है?
मोजोराम-प्रादाकिशन ! आदाकिशन !! बोले है
मेरा मटा पिडोई कोनी छोडे ।
गोपौराम-थे बाबाजौ, सुख्या राधाकिशन, राधाकिशन
क्यु बोल्या करोना। अनामसे थारो के बैर है! बोली,
राधाकृष्ण! राधाकृष्ण ।।
(मोजीराम बस, वेरो पथ्यो। "बामाजीकी झोली में जेव
डाई नोकल्या । बोलो सौताराम-" सीताराम ।। (ठहरकर)
या तो जाण यो साची बतावो कठे जा पाया।
गोपोराम-मैं तो जुहारमनजो जोशो कानी गयी थी।
मोजीराम-धान जोशीसे के काम हो गयो ?
गोपोराम-(धौरासी) जिकर तो 'करियो मतना।
दिशावर जाणको मुहरत वाढावण गयो थो। आज,
रातनको
मुहरत भोत श्रेष्ठ निकाल्यो है।
सो आज कलकते
जावागा।
मोजीराम -वस के ? न्हारे तो थारोई घोडो रहारी थी।
भाग बुटो को मनमें पाती जणां दो यार आना थारेसे मिल
ज्याया करता। सो थे बो धर्माधको दीग्ण लाग गया।
गोपीराम-थेवी क्यु चानीना। थारै पठे के लपपेड है ?
-
ढलतो फिरतो छाया नाटक गोपौराम-में तो धरम भ्याणोको नाम लेकर जाऊगी। कलकत्ताको नाम लेनेसे घरमें कलेश होय है सो घ एक काम करियो-श्राज एक पहरके तडके, गावके बारण पूरबकानी टीबडामें त्यार होकर भाज्यायो। बठे थाने जटको भासण त्यार मिलेगो मो कपडा लत्ता घालकर भस- वार हो ज्यायो। मोनीरामभोत ठीक है। गोपीराम-देखियो ! थारे मनमें क्यु पकड चुकड होय तो ईबीसे के दियो। कदे हे जठे खद्या २ थारी बाट दिखबो करा। 1 मोजीराम-यायी कदे होय है। मेरी जवानने लोकी लोक समजो। मर्दको जबान तो एकई होय है। वा कहा करें है- "सिहभोग सायुरुष वचन, केम्न फले एक डार। तिरिया तेल इमोर हठ, चढे न दूजी बार ॥" गोपोराम-जगपा ठीक । चानो भोत देरी होगई। ईध -- मोजीराम-चालो (दोनु चस्या जावें), !
२८ -- 4 चालम्या। देखो ढलती फिरती छाया नाटक। मेन देव है। अलमस्त पया रवा हो, भगवान धापई दाल रोटीको फिकर करे है। वा कह्या करें है-- “इजगर पूछे ईजगरा, कहा करत हो मित । पडे रहत ऊजाडमें, दय करत है चित ॥" गोपीराम-अच्छया तो अठे सेंबी सी ऊठे बैठ्या मोज करवो वारियो। भगवानको दयासे रोटी म्हान मिलेंगो जणा तो थाने वी मिलेंगो। कदाचित् कालीमाई पापणी सुण लई तो गैरो दूदिया भाग घोटियो। योडोपर वेव्या भानन्द करियो। मोजीराम-या बात है जणा जरूर जायगी-"के तो घोडी घोडाम, के चीरा लेई लई" भोले मुणसी जणा तो गैरी दूदिया छणेईगी। नईम रोटियांकी हामी थे भरोई हो। पीछे म्हाने और के चाय है। गोपीराम--(छाती ठोककर) इसे माय, रोटियाकी हामी तो म्हे भराई हा पण रस्सा खर्चको डोलडाल तो है ना? मोजीराम-थेबी चुचियामें गोनी देवो हो।, म्हारे कन्ने के डोल देस्यो। वा कया करें है-"मरी क्यु तो सास कोनो प्रायो।" गोपीराम-पाच्छयो वाया। दुख और सुख, खचों बी महे दे देवागा। पण बठे थारे पैदा होय जग्गा दे दियो।' मोजीराम-जरूर। जरूर। - -
टन्तती फिरती छाया नाटक ।
लिछमी-या तो, ठीक । पण आज रातने भ्याणी
जायोगा के! धारे विना मेरो मन लागणुई मुस्किल है।
गोपीराम-पाच च्यार दिन तो लागईगा। घमा दिन
थोड़ाई लागेंगा।
(प्रतपामें सुरक्षी पाये है)
मुरलो-(लिझमोने) मा! के करे है।
लिछमी-(पुचकारकर ) बेटा, पाव । देख, तेरा
कायोजी पाज भ्याणी जाय है।
गोपीराम-(लिझमौने) बावली है के १ छोराने क्य
लगावे है। टाबर है और गैस पड ज्यावेगो तो पिडो कुटाणु
मुस्कल हो ज्यायगो।
मुरली-(गोपीरामको गोदी में लेटकर) काकोजी।
भ्याणी नावी हो के कोनी जाण देऊ! नावोगा तो
मैं बी सागे चालुंगो।
गोपीराम-(पुचकारकर ) बेटा! नेरो मा तो वारली
है। तने जोरामरदी बेकाव है। कदे जावा हा, कठेई
कोनी जाया। अठेई रयागा।
सुरनो-थे सुठ बोलो हो। मन्ने भुलावी हो।
गोपीराम---दावला वेटा! तेरेसे सुठ थोडाई बोला हा।
लिछमी-( मुरतीने ) नईरे। कठेई कोनी जाय ।
(तपार्म भूरो प्राये है)
गोपोराम-आपरे, भूरा! भाग तो भोत दिनापर आयो।
३०
ढलता फिरता छाया नाटका,
-
1
--
* प्रवेश सातवों
ठिकाणी गोपीरामको घर।
(गोपीराम आवे है)
गोपीराम-(लिझमीने) या ले. मुरलीकी मा। तेरे मन -
माफिक काम हो गयो। तुजीती और म्हे हाया। सेस में
[तेरोई बात भाल रैगई।
लिछमी-(मुलककर ) काया।
गोपीराम बस, तेरीई डिगरी होगई। परदेश जाणेकी
नेरे कोनी जची जणाम् भठे काम करणको बिचार लई ।
भ्योपोसे माल ल्याया करोगा और अठे बैव्या वेच्या करागा।
लिछमी-बस, ठीक है। अयाई कया करो।
गोपीराम-एक काम करणं होगो। सगलो गेहुं मन्ने दे!
होगी। जिको ऊ ने कोईके धरकर रुपया लियावागा। ऊंई
रुपया से भ्याणोसे माल ताल स्थायकर पठे दुकान कर
लेखागा।
लिछमी-गेणु तो सगलो त्यार। थारोई है थार
जदे पद ले लियो।
गोपीराम-जुहारमलजीने पूथ्यो थो सो पाज तडकान
को सुधरत माल स्यावणे को चोखो बतायो है। पेला पोत
माल ल्यावए जावे जणां मुहरतमें पूजन कराकर जाणु चाय
सो रासने पूजन कराकर चल्या जावागा।
ढलती फिरती शया नाटक ।
मुरली (गोपीरामने) देख ल्यो, थे ऊटना भाडे
फरी हो।
गोपीराम-बेटा! ये तो दूसरा भादमोके ताई भाडे
कया है। जा, थोडौसी बार वारण खेल।
(मुरली जावे है)
लिछमी-सव्या होगई है। मैं तो रसोई व्यार करूंछु ।
गोपीराम-हा। करले। थोडी धूरमू वो सुगनको
कर लिये।
लिछमो-कर ल्यु गो ( रसोई करण लाग न्यावे है)
(गोपीराम पिलगपर प्राडो हो ज्यावे है)
गोपीराम-(मन) साचो बात है-दिन करायमी
वेरीबी नई करावे। देखो, कितणी २ झूठ बोलणी पडी
है। छोरो मेरे बिना एक पलक कोनी रवे, पण सत्याने
पडसो । मुरलियाकी माने कलकत्ते गयाको
वेरो पटसो अणा देवी जाय 4का के हाल होसी।
रामकी बेटी नाम लेगेसेई सास मारे थी सो बेरी पट्या पीछे
तो पूरोई जोमे कलेश करेगी। एकवर तो पापा बी गायसे
नौकलताई मन लागणु मुस्कान है। इबौसे चित्त भीतरसे
उदास हुयो प्राव है। कलकत्ते में कोईको सहारोवो नई है।
जाताई देखी जाय किसोक मिसन्न बैठे। मोजीरामने अधान
दे दई जिको ज को बोनयी पापणे सिरपरई पा गयो। पण
यास परवा नई। भोतरसे विश्वास होय है कि, घाई
छोडकर जाण
या
।
५
-
- प रुपया तीन रासा - ढलती फिरती छाया नाटक । भूरोपकै दूरको भाडो हो गयो थो जणा घणा दिन ताग गया। गोपीराम-आज तेरा दोन जट अठे है के ? भूरो-इम्ब जी, पठेई है। गोपीराम-आज रातने नारनौल चल्यो चालसी को। भूरो~चल्यो चालु गो। गोपीराम-बोल, के,भाडो लेवेगी? भूरो-रुपीडा चार दे दियो। गोपौराम-चार तो ज्यादा है। ले लिये। भूरो-के ऑट है। थारे जचे सो दे दियो। गोपीराम-रात्ने एक पहरकै तडके कुची. करक आन्याये। भूरो-ठीक है, भोत चोखो। इव तो मै जाऊ. जटाने घराण्याकर त्यार वारणा है। गोपीरामाच्छो जा। पण देखिये रातने जकच नई होज्याय। कदे दोनों दीनसे जाता रवा । या त मतना कर दिये- "पैली तो हुयो जोगी, पोछे हुयो कुम्हार ! दोनू बोई बूबमा, आदेश न जुहार ।" भूरो-नईजी ! रातने जहर श्राच्याऊगी। (भूरो जावे) । - - - A
me
ढलती फिरती छाया नाटक ।
मुरली-(गोपीरामने ) देख त्यो, थे अटना भाई
फरो हो।
गोपीराम-बेटा। ये तो दूसरा भादमौके साई भाई
कया है। जा, थोडोसी बार बारण खेल।
(मुरली जावे है)
लिछमी-सल्या होगई है। मैं तो रसोई त्यार करू हु
गोपौराम-हा। करले। थोडी घरमू वो सुगनको
कर लिये।
लिछमो-कर ल्यु गो ( रसोई करण लाग ज्यावे है)
(गोपीराम पिलगपर प्राडो को ज्यावे है)
गोपीराम-(मनमें ) साचौ बात है-दिन करावेसो
देरीबी नई करावे। देखो, कितणी २ झूठ बोलणी पड़ी
है। छोरो मेरे बिना एक पलक कोनी रवे, पण सुत्याने
छोड़कर जाण
पडसी । मुरलियाको माने कलकत्ते गयाको
वेरो पटसौ जणा देखी जाय मैंका के हाल होसी।
रामकी बेटी नाम लेसेई सास मारे थी सो वैरो पव्या पीछे
सो पूरोई जौमें कलेश करेगी। एकवर तो आपण बी गावसे
नौकलताई मन लागणु मुस्कल है। इबौसे चित्त भीतरसे
उदास हुयो भाव है। कलकत्ते में कोईको रहारोबो नई है।
जाताई देखी जाय किसोक मिसल बैठे। मौजीरामने अबान
दे दई जिको जको बोजबी पापणे सिरपरई पा गयो। पर
कुछ परवा नई। भोतरसे विश्वास होय है कि, पूघाई
या
-
-
.
ढलती फिरती छाया नाटया ।
काली माई बेडो पार कर देगी। कुमाईको ढग बैठताई
टाबराने पठेसे बुला लेवागा (कुछ सम्हलकर) ओहो!
देखो, इतणीई देरमें मनमें के के लहर उठण लाग गई।
साची काया करें -
"मन लोभो मन लालची, मन चचल मन घोर ।
मनके मते न घालिये, पलक पलक मम ओर ॥",
(इसणाम लिछमी हेलो मारे है)
लिछमी-पापी, रसोई त्यार है, जोमल्यो ।
गोपीराम-आच्छ्यो मुरलीने प्रावण दे।
(इतणामें मुरली पावे है)
मुरली-(लिछमीने) मा। रसोई हो गई के ?
लिछमी-हा। हो गई। तेरा काकोजीने बला ले।
मुरली-(गोपीरामके कने जाकर) काकोजी! चाली
रसोर्ष जीमल्यो।
गोपीराम-(जठकर) चालो वेटा!
(गोपीराम मुरलो जोमे है)
मुरली-(जीमकर) काकोजी! चालो पापा तो श्रापणा
चोबाराम चोवागा।
गोपोराम-(जीमकर) हा! चालो बेटा।
(दोन चोवारामें जाये हैं)
लिकमी-(जीम जुठ चोको बरतण करकर ) चालो
जीवडा सोवा। पछे तडकाऊकी ऊठा है। (गोपीराम
H
-
-
ढलती फिरती छाया नाटक ।
३५
के को जाकर) ल्यायो थारा पग दाय छु। पीछे तो थे
जावोगा।
गोपीराम-जावागा तो के है। पांच प्यार दिनमें पाछा
थाज्यावागा।
लिछमी-पांच दिन तो पांच बरस बराबर
नीसरेगा।
गोपीराम-(मनमें ) ऐसें एव ज्यादा बोलण ठीक नई।
ज्यादा बोल्या भेद खुल ज्यायगो (ऊपरसे) मने तो ईव
नींद प्राव है। मैं तो सोऊ हु ( सो ज्यावे है)
(लिछमी मुरलो बी सोन्याव हैं इतणा, आधी रात
ढल ज्याये है)
जुहारमल-(हेलो मारे है), गोपीरामजी गोपी-
रामजी।।
गोपीराम-(जागकर) कणी १ जोशीजी!
शुहारमल-हा! बखत होणामें प्रागयो है।
(इतमि भूरो दो ऊर लेकर प्रावे है)
मुहारमल-पेला दोन अंटापर कपड़ी सत्ती घालकर
त्यार करल्यो।
गोपीराम-(जट त्यार करावार) तो त्यार है।
ब बोलो
जुहारमल-घालो पूजम करायो, टेम हो गई।
गोपोराम-चाली ( पूजन करावे है)
७परामारासपा
जुहारमल-(पूजन कराकर ) करो सिद्धदाता गणेश।
(भूरी घटाने आगे २ खीच लेवे है, गोपीराम गैल २
सिद्ध कर ज्यावे है)।
गोपोराम-(टीवडामें पू चकर) मोजीरामजी पूयाक,
कोनी
मोजीराम-त्यार ई।
जुहारमल-वस तो, देरी मत करो, न्यो गणेशजोको
पूया।
नाम।
(गोपीराम मोजीराम ज टापर चढकर पूर्वने सिद्ध कर
ज्यावें)
प्रथमाकसमाप्त।
--
-
।
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अंक दुसरो
-
9 प्रवेश
पेलो
ठिकाणी हबडाको स्टेशन ।
(गोपीराम मोजीराम नद्या है)
मोनीराम-(च्यार' कानी देशकर) पोहो। कठे
भागया। मेरी तो तोरन फुल गई। मैं तो मेरी जमरमें
इसी जगा कई कोनी देखी।
गोपोराम-बी के हुयो है। अन्त तो चरस होगी
सहर देख्या। वा कया करे है.--"बावाली लिखक तो भोता
चोडा कया, बच्चा सुक्या फाटसी।"
मोजीराम-सीके! म्हे तो या ठेसण देख करई चकरा
गया।
गोपीराम-पाच्च्यो तो, ईव बोलो, कठे चालणु चाये ?
मोनीराम-थारे गचे जठे चालो।
लाग्याई पैली की ऊपाय करो।
गोपीराम-बाबानो नो बजेई क्याकी भूख लाग्याई ।
प्यावसस्यो हाम्न दिन लग्योई है, रोटीबी मिल ज्यायगी।
धीरा २ सगली मिसह बैठ चायगी।
--
मन्ने तो भूख
-
५५ दसता फिरता शया नाटका। । मोजोराम-पापणे तो रोटीयाको तजबीन पैला करो और मिसल भलाई पीछे बठायो। पैलां पेट पूजा होगी चाये। वा वह्या करें है-"पैंसा पेट पूजा, पीछे काम 1 दूजा।" गोपीराम-बाबाजी। थार कैया रोटी २ लाग गई। कैया भूखे व्यापकी न्यु करे लागा? मोजोराम-ओर पठे के झक मारमने आया हा। यो पेट पापोई तो खराब कर है। भूख नई लागतो तो प्रप्तपीं दूर लुगायांने एकलो छोडफर कैया प्रायता गोपीराम-(मुलक कर) निवाणीजो याद आगया - 1 । दी है। मोजोराम-धे यमस तो क्युई याद आवे ना। पेटमें पितुरिया खडे है। गोपीराम-पेटका पिलुरियाको ऊपाय बी को ज्यासी । पण एकावर डेरो डामडो तो जचण घो। बोलो करें चाला मोजीराम-काठ चालणने जगा नई है तो धर्मावाला में चल्या चालो। धर्मशाला तो अठे घणोई होगी। इत बडो सहर है धर्मशाला किसी कोनी होगी के ? गोपीराम-निको तो पुख्याँ वरी परसो। (एक माद- मोने) काजी! अठे कोई धर्मशाला बी है के . १ - ।
ढलती फिरती छाया नाटक ।
एक आदमी-हा, है। हरीसगरोड पर तीन धर्मशाला
पौसपुररोडकी मोडपर है।
गोपीराम-ऊठे असर को पाराम है ना ? के की
धर्मशाला है?
एक प्रादमी--आपण सारवाडीयाकी है। छठे सतरले
को पूरो पाराम है। घोडोपर भोत भलामाणस जमादार
रखे है, सो धाने खाली कमरो बतादेवेंगा जिको में उतर
ज्यायो। एक भाको मुटियो कार स्यो सो वो थारी
असयाव मिरपर धरकर थाने आपई,धर्मशाला पुंचा देवमो।
गोपीराम-झांको मुटियो क्याने बोले है ?
एक पादमी-सिरपर छायडौ लियो डोले है, जिका
मजुर लोगाने । छावडीको नाम झाको है, मजुरको नाम
मुटियो है। अठे 4 रकमका झांका मुग्यिा भोत डोलें
है। देखो। मैं वो बुस्ताम (हेलो मारे है) ये झाका!
यांका॥
झाको भुटियो-(को थाकर) बोलिये?
एक पादमो-(गोपीराम मोजीराम कांनी हाथ कर
कर)ये लोग हरीसनरोडवाली धर्मशालामें नायगे। सो
इनको पहचादे, बोल क्या नेगा ?
झाको मुटियो-टू थाना लेय।
एक पादमी-दो पाना नही। खैर पांच पैसा ले लेना।
जायो जलदी पहनाटो
ढलतो फिरती छाया नाटक।
झाको मुटियो-बहुत अच्च्या (असबाब सिरपर धरकर
चाल पडे है।
(गोपीराम मोजीराम झाका मुटियाको गैल २ धर्मशालामै
चल्या नावें है)।
-
।
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प्रवेश दूसरो
करागा।
ठिकाणो गोपीरामको कमरो।
(गोपीराम मोजोराम बेव्या है)
गोपीराम-(मगमें) कलकत्तोबी दाता विधाता है।
कालोमाईको खेडो है। अठे प्रायोडाको गुजरान तो होई
जावे है। देशमें सोचे था कलकत्ते चाल कर के धन्दी'
पण भलो हो, विचार रगलाल रामगोपालको,
निको पना जाण शण कपडो दे देव है सो दिनभर फेरी
करकर वेचबो करा हा। सज्याने आगलाको कपडो और
वेच्या मालकी रकम सम्हला देवा हा। नफाका तीन धार
रुपया रोजीना मिल ज्यावे है जिका आपणे बच ज्या है।
रुपया पानसो तो भेला होगया सो दूब यो सुगलो काम छोड़
1 दोणु चाये। आजकाल कपडाको दलाली चोखी चाल है
-जिको चेष्टा करणो चाये।
N
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-
टन्नती फिरती छाया नाटक।
मोजीराम-बोलो, कैया गुमसम हो रिया हो, के
बिचारमै गोता लगा रिह्या हो।
गोपीराम-कपडाको दलाली करणको विचार कराहा।
मोजीराम-के पाट है। या कपडाको फेरी तो मैं
करबो करूगो। बैंको अटकाल तो मन्ने चोखोतरा आगई
है।
गोपोराम-जणा तो भोतई ठीक रखेगी। बाबानी थे
बी वेई हो-“पूछो आपको के नाम, वोल्या बैंगणदास, ती
बाबाजीका बाबाजी, तरकारोको तरकागे।" म्हाने बोनो
वरो थो 2 बी तणा मौनती हो। डोलणे फिरणे में, बात
चौतमें तो घेवो जबरा हो। एक लम्बर उस्ताज हो ।
मोजोराम-म्हारौ क्यु बात करो हो। म्हे तो घरतियामें
उकरतियाके साथ हा। म्हे तो वे हा -"स्याये वान्दो ऐसा
नर, पौर बबरची भिस्ती खर।"
गोपीराम-वाह, महाराज वाह। थारो के कैण, थे तो
थई हो।
मोजीराम-सेठा । परदेशको मामलो है। अठे धानकस
कया कैया काम चाले।
गोपीराम-बात तो याई है। पण हामण होय वै
तो कच्चा करें है-"मेरी छातीपर वेर पद्यो है जिको मुडामें
गेरदे। में ताबडामें पद्मोह जिको छायामें गैर दे।"
मोजीराम-वे ओर देखो।
।
-
४२ । ढलती फिरतो छाया नाटक। गोपीराम-(स्यामने देखकर ) वो देखो, चुंदलियो ‘पावे आज ने खुब छकावो। मोजीराम-कु ण चुदलियो। नैणसुखियो के ? गोपीराम-बम्बै, वोई है। मोजीराम-श्रावण द्यो। आजकाल योबी सोखोनाईकी सेस करे है। घरमें तो मुसा कल्ला बातो खाय है। आख्या में देई साताको दुहाई फिर रही है। पण कवे है-“मन्न घड़ गई'सो बाडमेंई बड़ गई।" नैणसुख---(कन्ने आकर) आज के हो रिह्यो है ? मोजोराम-क्यु पाख्यापर काच फिर रिह्यो है के ? गोपोराम-अया मतना कवो। श्रणको नाम: नैणसुख - - मोजीराम-श्रीहो। के कैणु' है- "आख्या पाटो, नाम नणसुख ।" "पघा पागलो, नाम फुदको।" "सिरपर खेई, तम्बुमें डेरा।" "नानी राड कुवारो मरगी, दोयताका नो नो फेगा" (गोपीराम हसण लाग ज्याव है, नैणसुख सरमाकर बट ज्यावे हे) नैणसुख-(पेटके हाथ लगाकर ) ओहो। पेट कुसके है, दर्द होय है, थोडी चुरण द्यो। गोपीराम-ज्यादा खा पाया के ? । -- --
बेसी
-
।
दलतो फिरतो छाया नाटका। ४३
नैणसुख-को बतावा। एक जवा जीमणवार थी सो बठे
क्य, खा पाया।
मोजोराम-मर गई राड खटाईका झोन बिना। पेटतो
यारोई थो,
क्यु
नाजको नास करवाया ?
नेणसुख-(मोजीरामने) कैंया अको बैको बात करो
हो, मिजाज सिड़ गयो के ?
मोजीराम-थारो सुरत देखकर मिजाज कैंया ठीक
रखे थो' थे सुरतका घणा सोवणा हो ना। जाए, पाख
होय कोचरीको सो।
नैणसुख-बोल्या तो ये बोल्या। ये तो दोखतकाई फल
ऊजला है। वा कया करें है-"ऊपरसे बाबाजो दौखे,
नीचे खोज गधाका।"
मोजीराम-वाहजी, बछियाका ताजजी वाह। देखो
जाण्यु साचलोई श्रादमी बोलतो होय। पैच्या पाण्याकी
टावण तो खीचल्यो।
नैणसुख-क्यु ! दालको पाणी,तो मिल गयो ना ?
गोपीराम-(मोनीरामने ) देखो, नँग्गसुनजीने ज्यादा
मत स्यारो। ये आपको घरवालोने के देवेगा (नैणसुखने)
क्य जो । आजकाल थे लोग लुगाई के का घरमें रखो हो ?
नैणसुख-भोलारामजीका।
मोजीराम-(मुनककर 'घारौ तुगाई भोलारामजीका
घरमें रवे है के
म ४४ ढलती फिरती छाया नाटक । गोपीराम-(मोजीरामने) महारान। थे तो मसकरी करो हो। म्हे तो सौदो बात पूछी थी, थे दूसरे रास्ते ले, . गया। नैगसुख-(गोपौरामने ) अाजकल अणक अकलको उजीरण वैसी हो रिह्यो है। जोसु मसकरीयाको सुहाली ऊतारै है। पण वेरो कोनी अठे अणका ऊपरला पाट बेठ्या है। मोजीराम-( नेणमुखने) इम्ब साय । श्राप हाडाका; धणो हो, नालका बावणिया हो। आप तो श्रापई हो। गोपोराम-राम । राम ॥ या के कही। हाडाका धणी तो भगी होय है। नालका बावणिया चमार होय है। अयांकी बात कह्या करें है के? नैणसुख-ये भगी चमार म्हाने क्यु ई कवो। म्ह थोडोई बुरो माना हा। मोजीराम-होय जिका दुरो कैया माने। गोपीराम-(नैण सुखने ) बोलो, आजकाल वय, पैदा पिरापती बी करी के? कपडाको बजार तो भोत तेज गयो। लुगावडीने स्यु गैणु गुठी बी बणाकर दियो के ? अ तेजीमें सगला सोनाको तागडी बणाली। थेबी बणाईक कोनी बोई नैणसुख-दबके म्हारे पदावाडी ढबसारुई-दुई। जणा ।
दलतो फिरती शया नाटक ! ४५ बोलो गेगा कव्यासु वणवे था। मोकली पैदा होय जणा मेगा बगाया जाय ना? मोजौराम-4 बातको के विचार है। आगन्तीको कमरमें जोर होगो तो, घणाई गैणा करा लेवेगी। एक शेडकर पांच सोनाको तागडो हो ज्यायगी। गोपीराम-(मोजोरामने) बस, जाण यो। मसकरी तो रैण द्यो (नैणसुखने) बोलो, म्हारो बिचार दलाली करणेको है सो धारे के जचे है, कपडाको दलाली करण लाग ज्यावा के? नेणसुख- -अलबत करण लाग ज्यायो। प्राजकान कप- डाकी दलाली को भोत मोको है सो भगवान चायो तो जल्दी पोबारा हो ज्यायगा। गोपोराम-काल रामनोमी है। कालमें श्रीगणेश कर लेवा। नेपसुख-बस, बामपनेई पूछों को काम नई है। मोजीराम-(नेणसुखने) यो पडिताईको ठको थारे नाम होगयो दोग्ने है। है, माता। कठे बैठौड़ी। नैशमुख-(इसकर ) टोकणो लेकर चुन मागल्यावो। थाने अप बाताको के बेरो। मोजीराम-चुन विना तो या चामडी कदेसको सक गई होती। बोलो कोन्या श्रावती। गोपीराम-(नैणसुखने ) चालो, पापा तो वृमण चाला।
--
ढलती फिरती छाया नाटक।
मोजीराम चालो, मैंबो कपडाको फेरो कण्याऊ । घोडी
दूर तो सागो रवेगो।
नैणसुख-चालो। चालो।।
(नोनु जणा जावे है)
।
1
1
* प्रवेश तीसरो
8
-
+
ठिकाणो एक मारवाडोको मकान ।
(मोजीराम बारणे खद्यो है)
मोजीराम-(हेलो मारे है) कपडो लेख्यो।।
रामलो-(बारचामें खडो होकर ) वो कपडावाला।
भीतर आज्या। म्हे कपडो लेवागा।
(मोजीराम भौतर जाण लागे है)
शिवदत्तसिह-भीतर कहा जई हो?
मोजीराम-बसीक! म्हाने वैरो कोनी, यो राजा म्हारा
जाको दरबार है।
शिवदत्तसिह-मालुम होय है अभी तुम नये आये हो।
तुम का जानो, कुछ रोज यहा रहिहो तो आपुई भालुम
होज्याई! हमरे बाह भीतर जाय खातिर मिन्हाई कर
रखीन है।
1
-
-
४७
-
ढलती फिरती छाया नाटक ।
मोजीराम-या बताव, तेरी क्यु भेट पूजा करणी पडेगी
के?
शिवदतसिंह-बस, समज ल्यो।
मोजीराम-अच्छो ठीक है। भीतर जितणाकी चीज
बिकेगी नंको पीसो रुपयो नने दे द्युगो ।
शिवदत्तसिह ह-तब ठीक है। जावो।
(मोजोराम भीतर चल्यो जावे है)
(लुगाया कपड़ो लेवें है, इतामें एक लुगाई ऊटपटाग
बकण लाग ज्यावे है)
भबली--( मोनीरामने देखकर) रामका माग्या फेरी.
वान्ता, रातदिन जकई कोनी लोण देवें। जद देखो जद
हीठासा बै व्याई रखे है। एक गयो तो एक आयो। या बी
कोई सराय समज लई। आजकालको भू वेटो हाथा रही
उघाड उघाड चुडाने झट आ बैठे है।
मोट्यारवी इसाई है। जणाई ये हो हो करती, दाताने
काडती, फेरीवानासे हासी ठठ्ठा करण लाग ज्यावे है। म्हारला
जमानाम अयाकी वात मोठ्यार देख लेता, तो जी निकाल
लेता। यो नपूतो जमादारियो बो कोई काम कोन्या कर
सके, बैट्यो २ डोड कागको न्यु देखबोकरे। बाडीवालो
अने योडीवान यणायो है ( बड बड कर है )
मोजीराम--(मनमें ) या के भाफत प्राव है। या चुडेन
सुरपपरखा कंकाली कव्यास नोकल्याइ ।
न बाथा।
भएका
या रावणामा
४८
--
ढलती फिरती छाया नाटक।
बसको ताडका कठे बाको रे गई। (लुगायाने) या
कुण है?
लुगाया-(धोरासी) बोलो मतना। या बणियाणी है।
सगली बाडीने हदर कर राखी है। सुण लेगी तो ओर भाड
गैरेगो। पिडो छुटावणु मुस्कल हो ज्यायगी। बडी करकसा
५५
।
-
मोजीराम-खैर! क्युई हो। अंको डोल देख ।
कर मेरे तो एक कवित्त याद आ गयो जिको अन जरूर
सुणाऊ गो।
लुगाया-थारो खुशी। या ल्यो, म्हे तो जावा हो।
थे क्यु ई सुग्णावो पण थारो जाबतो कर लियो। कदे इसी
न हो जो को ध्यारो मड ज्याय। अठासु जठणु मुस्कल
होन्याय।
(सगली जणी चली जावें है)।
मोजीराम-(मुलककर ) क्यई हो, देखी जासी (जोरसें
बोले है)
येरी राड बणियाणो, तोकु यार खड जाणी,
जरा प्यावत ना पाणो, “घर पाया बेटाऊने।।
मू से बोलत है खारी, नेक दयाहु न धारी,
तु है पूरी हतियारी, समजत ना स्याऊने ।
बहे नासामें सरडा, है हाथ भोत करडा,
तेरे बालामें अरडा, बोलत ना तमौज है।
1
1
टलती फिरतो छाया नाटक एसी सुगली लुगाई, तेरे दातोंकी सफाई, विधनेस ना लगाई, ना डाकण क्या चीज है। (सब कोई इसण लाग ज्यावें है) भेबली-(नोठी हाधमें लेकर) खद्योसो र रामका माया। तने मजो दिखाऊ। आयो है हरक्यु २ सुणा वणने (मोजोराम कानी आवे है) मोजीराम-(मनमें ) आई है, चडौ। इब भठे वैव्यो के धई में हाथ देव है।' कर दे है, माथी लाल । में को सिहो निकाले है व तो भागण ई ठीक है। (ऊपरसे) ने और सुणाजा "राबडीमें राख राधे, चुन चाटे पोसती। देखोर करकसा राड, चाले पल्ला घीसती॥" (मोजीराम जावे है) ७ प्रवेश चौथो * . ठिकाणी भोलाराम भीवराजकी दूकान। (भोलाराम वैम्यो है) भोनाराम-(मनमें ) धन्च, ईश्वर नेरी माया। वानमें भिखारी और भिखारीसे भागवान करण तो तेरा बाया भाग- ७ ५० . । दलती फिरती शया नाटका। हाथको खेल है। इव कपडे की तेजी होणसे, कई प्राद मियाकी तो पाचू पागली घोम होगई, पोबारा हो गया। कई बिचारा सफाचट्ट मैदान गलियाराका गीड होगया। या सब विधाता तेरौ लोला है। हानि और लाभ सब पर- मात्मा तेरे ई हाथ है। महाराज तुलसीदासनौ वो तो कही है- "अहो भरत भावी प्रवल. बिलख कहे मुनिनाथ । हानि लाभ जीवन मरगा, यश अपयश विधि हाथ ॥" (इतणामें शिवकुमारजी भाव है) भोलारास -पडतजी। पाये लागू । शिवकुमार-बाबूसाहब ! खुश रहो। भोलाराम-पडतजी या के बात है। आजकाल महा अधर्मी है जिका लखपती किरोडपती हुया जावें है। यो कलयुग कोई प्रभाव है के ? शिवकुमार-उनका पूर्व पुन्य कुछ बाकी है। इससे वे बढते है। कहा भो तो है- "जबतक तेरे पुन्य का, बोत्या नही करार। तवतक तेरी माफ है, श्रोगुण करो हजार ॥" भोलाराम-असल बात तो पडतजी याई है। कई पादमो भनेक रकमका कुकर्म करें है, येनकेन ऊपायसे द्रव्यसंचय करणु पापको प्रधान धम्म समझ है। नेपर बी वै रात दिन बढ्या जावें है। और जिका सतसे ईमानसे चालें F 1 .
ढलती फिरती छाया नाटक ।
५
-
*
है वे धनहीन हुया जावें है। या वितणी अचमार्क
बात है।
शिवकुमार-देखना, बाबू साहब! इन पापी धन
पानोंसे वे गरीव धमामा बहुत अच्छे रहेगे। अन्तम भलेक
भनाही होगा। ईमानदारी रहनेसे गरीब पुन लक्ष्मीवान
हो व्यायगे। कहाबी तो है-
“सत मत छाडी बावरा, सत छोडे पत जाय ।
सतको वान्धी लक्ष्मी, फेर मिलेगी माय ॥"
(इतणामें गोपीराम आवे है)
गोपीराम-(भोलारामने ) बाबू साब । जयगोपाल
बोलो, क्य लेस्यो वेचस्यो के ?
शिवडामार--(भोलारामने ) बाबु साहब! हमको तो
हम तो चले है।
भोलाराम-जावोगा के ?
शिवकुमार-हा! तो, इस बखत प्रापके व्यापारको राईम
है, सो इसमे बाधा डालना उचित नहीं।
- भोलाराम-(मुलककर) अच्छया तो पधारो! फेरु
पाई यो।
शिवकुमार-ठीक है (जाये)
भोलाराम-(गोपीरामने) थे कपडाको दलाली करो
हो के पेला तो थाने कदेई कोनी देख्या। इब नयाई
खद्या हुया दीखो हो।
1
हुकम हो।
१३
-
ढलतो फिरती छाया नाटक।
गोपीराम-हा। मैं पाजसे ई कपडाको दलाली में खद्यो
हुयो हु। पैला पोत धारे कन्नई प्रायो । सो आज तो
क्युना क्यं सोदो जरूर बतावणुं चाये।
भोलाराम-बस के, पेला म्हारै ई कने भाया हो के।
श्रच्च्या जावो, पचास गाठ कम्पनी मारको लियावो, पण ।
(सावलराम कांनी इसारो करकर) आदी दलाली अपने
दोणी पडेगी।
गोपीराम-(मनमें ) या खूब हुई। वा कह्या करें है--
"जपरसे गियो तो, खिजूरमें अटक्यो" (उपरसे') ये
7
भोलाराम-ये तो म्हारे भीवेका मामा है।
गोपीराम-(मनमे ) अ कलकत्ताने तो मेरामटा सालाई
सर कर लियो। चुकती फामाकै मालकांकी नकेल भापका
हातमें ले लई। या दलाली तो ढबको रैगई। बिना परसंग
क्यांकी दलानो, मृतगाघला करणा है। 3 मालकाको बुदी
तो साला गुद्दी पीछे कर दई । साची बात है-"भीतने खोयो
श्राला, घरने खोयो साला।" पण कुछ परवा नई, एक
फबित बडा बाबूने सुणाकर अँको चूद तो खोल दीणों चाये।
घी करेगा तो दलालो कोनी बतावेगा। सी के बात है?
वा बाह्या कई है-"गणगोर इसेगी तो श्रापको सुहाग
राखेगी।" (जपरसे ) बाबु साब, थे लोग सानाको भोत
पकस करो हो, सो एक यावित तो सुण स्यो।
1
ढलती फिरती छाया नाटक ।
.
भोलाराम-(मुलककर) के कबित है ? देखा सुपायो ।
गोपीराम-(मुलककर ) यो सुणो।
"बीनणोको भाई जाण, तन्ने में सुपो दुकान,
तकियाकै सहारे बैठ्यो, मोज तु जडाया कर।
जित्ता है नोकर मेरे, रहै से अधीन तेरे, ।
गहो ऊपर बैव्यो तु, हुकम चलाया कर ।
हिसाबकोनई दावो, थारे नचै सो लिखावी,
आप सुब खावो चावे, घराने पूचाया कर ।
गाडी जुतवावो बैठया, मोटरमे हवा खावी,
भंग परतापसे, मोज तु ऊडाया
सब जणा-(हसकर) वाह, माय! यो कविस तो
। सोवणु सुग्णायो। देखो के के नाका प्याया है।
भोलाराम-(मुन्नककर ) ये तो दलाल भादू है ना।
भी बात बणाया, बिना कैंया काम चाले । दो दुकानदारा
सिर नोडणु हासो खेल थोडीई है। भोत मुस्कलको
कर।"
सावलराम-(गोपीरामने ) ये थी तो कोईका साला हो।
गोपीराम-म्हारोबी भणेई लखपती हो तो, तो थारी
म्हारी ना कदर हो च्याती।
भोलाराम-(सावलरामने ) ल्यो सुणो। क्यु और
निी बाकी है तो और सुण ल्यो।
(सावनराम मू नीचो कर लेवे है।
। ५४ ढलती फिरती छाया नाटक । गोपीराम--(भोलारामने ) मोलो, गाठाके वास्ते हुकम होय है भोलाराम-हा, जावो। पच्चास गाठ बीस रुपयाक भावमै लिभावो दलाली धारी पूरी रै ज्यावेगी। गोपीराम-बाबू साब । भोला ढालाको,राम खाली थारो तो नाम है, जिसाई रिह्या करो। सेठ तो भोल ढालाई हुया करें है। भोलाराम-बाबाजो, म्हे क्याका सेठ हा । गोपीराम-लिछमीवान् हो। मूडा आगे मोकल रुजगार है, सब बाता ईश्वरको दौन है। . आप सेठ हो। । भोग्नाराम मैं तो सब भायाको दास । गोपीरामनी के पूछो हो। घणीई विपत भोगो है। (सिर दिखाकर या देखो, मोट ढोवता २ मेरी टाट गजी हो गई। या ते अहे पाया पीछे कालोमाई सुण ली, जणा दो पीसा चोख पैदा हो गया। ज वखत गरीबी हालत थी, जबखत मेरा मटा सजणा मूडा मोड मोड चाले था। ये सगला ई कुशामद करण लाग्या है। सो म्हे तो देख लो श्रादमी को ढलती फिरती छाया है जिको जो बाछ वणतीमें भावे सो गरीबको उपकार करणं चाये। गोपीराम-बसके! म्हे तो म्हारे ई वास्ते समजेथा कि, दुनियाम थे ई गरीब हो, थेई या बिपता भोग रिया हो। - 4 .
ढलती फिरती छाया नाटक।' यात सुणकार तो यो विश्वास बो होय है कि, कदे ना म्हारो दिन बी बावडे गो। भोलाराम-सी के बात है। नीत साबुत राख्या, हिम्मत घोडे मवार रिया तो जरूर बावडेगी। नीत खराब पा, हिम्मत हार ज्यायास क्याई होयना। क्यु का पिसाने बढता देर कोनी लागे। कबोरजी बी तो को ईमान- 'कबोर कुमाई आपकी, कदे न निस्फल जाय। बोवे पेड बवुलका, पाम कहासे खाय ।" गोपोराम-हा। या तो ठोकई है। नीत गेलई बरकत । तथा भादमीका कर्म बी चोखा होणा चाये। चोखा मांसे सब पदार्थ मिल सके है। कर्महीनके वास्ते ससारमें छबी नई है। 'महाराज गुसाई तुलसीदासनी ठीक कहो कि-"सकल पदारथ है जगमाही, कर्महीन नर पावत । भोलाराम--या बी ठीक है (ठहरकर) आयो। यो ठाको सोदो तो पशो करयायो ज्य, थारी दलालोको हुरत तो ठीक हो ज्याय । गोपीराम-धारी इतणी मेहरवानगो है, जणा थारे स्यामने Jठ बोलणु बी ठीक नई। मेरे कने घई भावको रगलाल की परवानगी वेचणको है, सी मांडल्यो। भोलाराम-जणा के पाट है (बही में लिख लेवे है)। --
.
ढलती फिरती छाया नाटक ।
गोपीराम-अच्च्या तो मै चालु हु । जयगोपाम्न !
भोलाराम-जैगोपाल!
(गोपीराम नावे है)
।
® प्रवेश पांचवों
J
।
.
-
-
ठिकाणो गोपीरामको कमरो।
(गोपीराम मोजौराम बै व्या है)
मोजीराम-(सुत्यो सुत्यो गावे है) "श्राया धमेडा,
रूपकमेडा मारा भचेडा सहरमें।"
गोपोराम-या ऊटपटाग ढडारा गीतके गावो। भाज
तो एक निहलदेकी कडी सुणावो
मोनोराम-ल्यो । निहालदेकी सुणो-
"ऊजड खेडा फिर बसे, निर धनिया धन होय।
गयान जोबिन वावडे, मुवायेन जिन्दा होय ॥"
गोपीराम-वस, रैंणद्यो, सुणलियो। यो तो कलेजा
माकर पार हो गयो। ५व तो मुरलिया होराने जल्दी
बुन्नावागा। आजई जाकर तार देवांगा।
मोजीराम-थे तो मुरलो होराने बुला लेवोगा पण या
बसावो के करागा ?
-
.
--
ढलती फिरती छाया नाटक ।
गोपीराम-थे वो मिश्राणोजीने बुलानियो। एक छोटो
कमरी लेकर रैबो करियो ।
मोजीराम-म्हे तो देशमेंई राखस्या । मियाणोने अठे
बुलाकर किसी बणियाको शिकार दणाणो है। थारो भाज
स्यात में प्रेम कैंया ऊजल्यायो।
गोपीराम-वो थारलो निहालदेको दुवो गजब धास
गयो। कालजा माकर पार होगयो।
(इतणामें मगतूराम आवे है)
गोपीराम-(मोजीरामने) देखो, स्यामने मंगतूराम
भावे है, सो असेई हामी ठठा करो ज्य, चित तो सुसी होय ।
यो पचास बरसको हो गयो पण को हालताई सगाई
कोनी हुई है।
मोजीराम-बसीके, जलम राडियोई है के ?
गोपीराम-(धीरामी) हम्बचुपचाप रखो।
मगतूराम-(प्रावतीइ) कया पद्या हो?
जायु
नन्दी
भुवाकर ढिगारै गैर गई होय । के सझा है ?
मोजीराम-केसला तो पसारिया के है। श्रावो थेवी
पड ज्यावो।
मगतूराम-म्हे किसो लुगाई हा, पड ज्यावां ।
मोजीराम-थे लुगाई सार के जाणु। वा कह्या करें-
रे-"बन्दर के जाणे अदरख को मुबाद।"
--
८
-
-
.
ढलती फिरती छाया नाटका ।
मगतूराम-वा, थे के समजो हो? वा कडा कार है-
"व्याया कोनो तो जनेत तो जरूर ई गया हा।"
गोपोराम-(मोजोरामने) मंगतूरामजोने थे के कमतो
समजो हा। वा कह्या करे है-"डु ती गावकी वेटो, पण
भू वा सें बो वेसो पडुई।
मोजीराम [-या भलाई हो। पण थे देख लियो, वे कुवारा
पागला जलम में कुत्ता हायगा। भू भू करता डोलेंगा।
देखो, धान एक कुवारा को कबित्त मुग्णाऊ ।
"जो दुनिया में कु वारो, वाको धृक है जमारो,
प्रभू नेक दया धारो, सुफल जिन्दगानी हो।
ऐसौ के मैं कोनो चोरी, दौनौ नही एक गोरो,
वेगही मिलावो जोरो, ऐसी महरवानी हो।
सुनोजी लगाके कान, कुवारको वचे ज्यान,
देवो एक नार दान, बाघरी वा दिवानी हो।
या कुवारको पुकार, थे सुणियो करतार,
वकसद्यो एक नार, चाये अन्धी या काणो हो।"
गोपीरामबम ।
बस !! रेणद्यो। मगदूरामजी न
ज्यादा कायल मतना करो। कुवाराका किसा न्य
न्यारा
गाम
मगतूराम-म्हाने थे के कायल करस्यो। हे तो आप
चादन्ता भैसाहा।
।
दलती फिरतो छाया नाटक ।
मोजीराम-( मगदूराम कानी
करकर) है
सीतला माता।
ठण्डका झोला देई।
गोपीगम-(मगतराम कानी इसागे करकर) येतो बारा
वरस ऊलाग गया।
मोनोराम-बारा बरम जलाग गया तो में है।
व्या नई
होय जितणे टाबरई समजणे चाये ।
गोपीराम-(मगतूरामने ) खैर, हासी उहा तो जागयो,
या बतावो दलाली में तो पेटा लिवाडी ई होवे है सो सो
कुणसो काम करा जैका करणासे पेदा पिरापती चोखो छोरण
लागन्याय?
मगतूराम-रूईको पाटियो करल्यो। आजकाल तेजी
चाल रही है सो मोको देखकर साचो डाव धरयो।
चाये तो गेरा हो ज्यायगा।
गोपीगम-ठोक है, या मेरेबी जच गई। काल सेतोई
यो काम सरू कारागा। कालको दिनबो चोखो है। दलालो'
में बाबुजी, वावुनी कहता २ कांठ सुरस गया। गोडामें पाणी
पड पयो। इवी बाड़ामें चानी दुकान भाडे लिखायावा।
करे वाई डावाघर है जिको मुरलिया होराने बुलायोको तार
यो दियाघागा।
एक पन्य दो काज होज्यावेगा।
मगतूराम-भोत ठीक है। घालो।
मोजीराम-(मगतरामने ) देखियो, सौडियामें चोकध
ऊतरियो। पड़ी तो हाथ भागने का दियो।
भगवान
।
-
दलती फिरतो छाया नाटक।
मगतूराम-म्हारो फिकर मतना करो। धे घारी निगे
राखियो (नाड हलाकर)
"रुण नाम लड़वा, गोपाल नाम घो।
माधवनाम खोरखाड, घोलघोल पो॥"
मोजीराम-वाजी, सीतला वाइनजी। क्या बात है।
(गोपीराम मंगतूराम चस्या जावे है)
* प्रवेश छटो
-
ठिकाणो गोपीराम मुरलीधरकी दुकान ।
(गोपीराम बैठ्यो है)
गोपीराम--(मनमें ) भाग चक्कर घूमती है। मुरलीया
होराको पग फेगे हुयो तो है। अशको आवताई गैरा होगया।
इव जिका काममें हाथ घाला हा तुरत फायदो होज्यावे है।
ये सब सदा दिनवाई लोछगा है। एक लाखको इष्टाक तो
अाजताई होगयो इब के है इब तो जैसे घणोई मार बैठी
करागा। पापणे 3 बखत रुईकी तेजी को घणु ई व्यापार
है। रुई दिन पर दिन तेज होती जावे है। आज डाव
एकठोई लगा दियो है जिको केतो दश बोश लाख तुरत
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माती फिरतो माया नाटक।
मंगतराम-मारी फिशर मतना करो। ये धारी निगे
राजियो (नाइ नाफर)
"लप नाम नइया, गोपाल नाम घो।
माधयमाम पौरांड, घोमघोन पो"
मोजीराम-पाली मोतना याहनजो। क्या बात है।
( गोपीराम मंगनगम धया जाये है)
-
प्रवेश छटो
ठिकाणी गोपीराम मुरलीधरकी दुकान ।
(गोपीराम बेठ्यो )
गोपीराम-(मनमें ) भाग चकर घूमती है। मुरन्नीया
भोराको पग फेरो यो तो है। णके आयताई गेरा फोगया।
प्रम जिका काममें हाय घाला हा तुरत फायदो होग्यावे है।
ये मय सुदा दिनवाई तीक्षण है। एक नाखको पटाक तो
अाजताई जोगयो अब के है इव तो जैसे घणोई मार बैठी
करागा। थापणे 8 बखत रुईकी तेजी को घण' व्यापार
है। रई दिन पर दिन तेज होती जावे है।
आज डाव
एकठोई लगा दियो है जिको केतो दम्प यौश लाण तुरत
ढिलती फिरतो छाया नाटक । फुडत मिल ज्यावेगा। के पैला जिना हो ज्यावागा। दीए- दारी होज्यावेगी तो कुमाकर दे देवागा। (इतणाम घोंगाराम प्राव है) गोपोराम-(घोशारामने देखकर मनमें) प्राज यो घीशो देश भठे कया धागयो (जयरसे) पायो। घीशा. रामजी। घोंशाराम-आगया ना म्हे देशमें सुखी व तो गोपीरामजी लखो मार दियो। या बात सुणकर चित्त भोत स्नुभो हुयी। गोपीराम-ठीकई है। आपवालाको तो जी राजोई हुयो चाये। धीशाराम-(सरमातो हुयो ) एक काम है। गोपोराम-~वोलो. सरम सकोच करणेको कोई बात नई है। थे थारा दिलमें कुछ विचार मत ल्यायो। वै बात तो वेन्द्र थी इब ज बाताको के विचार है। धींशारामजगवाथजी नाकर पाया हा सो खरची निमड़ गई रपया पचीस चाये है। गोपीराम-(एकमी रुपया को लोट हाथमें लेकर ) ख्यो । लेज्यावो। थार कन्ने हु जणा धर्म खाते लगा दियो। मन्ने पूछण को और भेजण को दरकार नई है। घीयाराम-(रुपया लेकर ) मेवारामजी बी आया हैं। गोपीराम--है। कद आया ? कठे उतम्या है ? । । "
भ
-
-
+
ढलती फिरती छाया नाटक।
घीभाराम-देशमें बेठ्या २ सोदा सध यस्या निको
नुकसान गैरो लाग गयो। रुपया पाच हजार गायका दोण,
रह गया जिको रात्यु रात टारराने लेकर पठे आया है।
थारे कन्ने प्रावता क्यं सकोच कर चा पण मैं कह पायोडे
सो पावताई होसी।
(इतशामें मोजीराम आये है)
घोशाराम-(मोजीराम कांनी हाथ जोडकर) डंडोत
महारानी।
मोजीराम-(मुलककर) सुखो रहो। • बोलो । गिधाको
के भाव है? याट है क ना?
धीशाराम-(सरमाकर) थारे जच्चे सो कवो पूव धणई
पिस्तावो है पणके कग्यो जाय गई बातने तो घोडाई कोनौ
নান। लाव पग तलामें नौकलगी सो नोकलगी (मइ
नीचोकर लेवेह)
(इतणामें सेवाराम प्राव है)
सेवाराम-(मोजोरामने) महाराज्जी डंडोत ।
मोजीराम-सुखी रहो। चिरंजीव रहो।।
बावडो को बाता? वाघडी कया छोधाया ?
सेवाराम--(सास मारकर) भगवान छुडा दी जणा
छोद्याया।
गोपीराम-(सेवागम का पगामें धोक खाकर), भावो।
ऊपरने बैठो।,
J
ढलतो फिरती छाया नाटक ।
सेवाराम-लालजो।
इन रहे
ऊपरने बैठण लायक
नो रिह्या। भगवान एक बरतो म्हाने धेले सस्ते कर
या। झै बखत म्हारे से जमीनफौ धून बी चोखो है।
गोपीराम-बाबाज, योके विचार जीवमें स्थावो हो,
नज राखो सा ठोक हो ज्यायगी।
सेवाराम-रूपया पाच हजार गावका दोणा है सो जिके
न वै रुपया देवागा जणा जियाका जलम पावागा।
गोपीराम-अ बातेको के फिकर है (पाच हजार का
ट हाथ में लेकर ) ल्यो । ये देश भेजकर मागततो चुकवाद्यो ।
एक काम करो धेई पाछा देश चल्या जावो। हरिप्रसाद
मप्रसादने मेरे कने छोड ज्यावो। 'पण देखो इन देशमै ।
-दो सट्टो बिलकुल मत करियो। होय जिसा कामको पापणों
हाल राखबो करियो। देशका थेई मानक रिह्या। थार
च लागे सो हुन्डो करबो करियो।
सेवाराम-ठीक है। न्हे और धीशाराम से नया सागेई
ख्या जावागा। छोरा तेरे कन रद्दबो करेंगा! देख,
ना! मेरे कानीको कोई रकम को नौम स्याल होय तो
फि करिये।
-
गोपोराम-राम! राम !! या के भयो हो। मेरे तो
माईता ममान हो (घोशारामने) देखिये, गगने चोखो
रा लेन्गाये। और पाच यारसो रुपया तन कदे चाये तो
न
-
।
ढलती फिरती छाया नाटक।
अगसें लेवो करिये (सेवारामने ) घींशारामने पाच ग्यारसो
रुपया चाये जणां थे देबो करियो।
सेवाराम-भोत ठीक है।
धीशाराम-अच्च्या तो जावा हा। जयगोपाल ।
गोपीराम-अच्छयो भोत राजी३ जायो ।
सेवाराम-मंबी जांऊई।
गोपीराम-हा। पधारो मलाई ।
(सेवाराम लुगाया पतायाने साथ लेकर घीशाराम के
साथ देश चल्यो जावें है, हरिप्रसाद रामप्रसाद गोपीरामको
दुकानपर काम करण लाग ज्या है)
I
।
। प्रवेश सातवों ..
-
1
ठिकाणो गोपीराम मुरलीधरकी दुकान ।
(गोपीराम बैठ्यो है)
कलकत्तामें
गोपीराम-(मनमें) साची बात है।
एक रात में गरीब से लखपती और एफई रातमें लखपती में
कंगाल होज्यावे है। दो दिन के भीतर बीश लाख रुपया
मिस्या है। दूब के है, व तो अठेका बडा बाबु जिका नाक
ढलतो फिरसो काया नाटक ।
.
मूडो मोधा करता, जयगोपाल को जयावर्ष कोनी दिया
करता जिका मत्तई उचे वठावण लाग ज्यावेगा। कुसा
मदिया टयाकीस गिणतीई के है, वैसी घणाई शाक्षी गोपान
हा में मिलावपिया हाजरी दींगा। ममा सुसाईटिया
मायवी व मान तान चोखो हो ज्यायगो, जिको सभामें मेम्बर
भोत कोसीस से बणावे था ऊ सभाम सभापती यो भासपा
पेला पोत मिलेगी। या सब पिमा तेरोई माया है | पिमा
विना प्रादमो को क्या ई मोल ना। कयो वो तो है-
"पिसा बिन बाप कहे, वेटो भोत कतगयो,
पिसा बिन भुदू कहै, घरकोई लुगाई है।
पिसा बिन भाई बन्द, कन्द्र नई बैठण दें,
पिसा बिन सास क है, किसको यो नवाई है।
पिसा बिन भायेलाबो, देख मुडा मोड चम्ने,
पिसा बिनभाण कहे, यो मेरो नई भाई है।
पिसा विन देखो कुछ, दुनीमें आदर नाय,
पिसा बिन पादमोकी, ईन्नत नई पाई है।"
रामप्रसाद-(मनमें) देखो, ईश्वरको माया है। जैसे
फदे मुडासे कोनो बोलता यो जराबी बोलतो तो झाड देता,
गोपिया सिवाय कदे बडी वोली में बोल्या कोन्या ।
धाहरे पिसा और बाहर तकदीर । दूध मैंनेई बाबुजी २ कहणु
पड़े है। कीची छातीने धन्य है निको जवात को
पण
-
दन्नती फिरती छाया नाटया ।
-
-
खयाल नहीं करकर झट पांच हजार रुपया एया, मुष्ट
निकालवार देदिया। गांवको करज चुकतो करवा दियो।
गावमें रण जोगा कर दिया। अको यो गण जलमभर
नई भूलणु चारे। देखो, या सुपना मे बी पाशा नहीं दी
कि, म्हारी या दशा हो व्यायगो और को दिन इस माफक ।
सिकन्दर हो प्यायगो। मनमें के के विचार करया करता
पण मनमा के टका उठे है। साची कही है-
"मन चाये माया करू, करकर करूं गुमान ।
माई हाथ कतरनी, रानेगो । जनमान ॥"
(गोपीरामके नजीक जाकर) बाबुजी , आज, तो रोकड में
दश लाख रुपया पद्या है सो के करणी चाये।
गोपीराम-एक काम करो बक वगाल हेड हाफिस में
भेजकर जमा करवा द्यो।
रामप्रसाद-मोत चोखो जी।
(इतणामें भोलाराम आवे है)
भोलाराम-(हाथ उठाकर ) जयगोपालजी की।
गोपोराम-भावो ! जयगोपालजीको
ऊपरने, बैठो।
भोलाराम-बाबाज, ऊपर नीचे सब एकई माया है।
म्ह तो सुणी भाजकाल मे काली माईको पास थाने दो
रुपया भोत चोखा मिन्न गया है। सो सुगकर भोत खुशो
पैदा हुई। मनमें विचार कस्यो चालकर निसचे तो करणी
चाये। देखा साची बात है का मुठी।
१
।
-
दलती फिरती छाया
नाटक
गोपोराम-( नम्रताई सें) हा। आपको दयासे इदरमै
खोई प्राप्तो हुई है। या सब रिदरोपना थारोई है।
ला पोत पचास गाठको दलालो को थे म्हुरत करायो थो
के बाद वारान्यारा होताई गया।
भोलाराम-सब परमात्माको माया है (धोरासी) एक
काम है?
गोपीराम-बोलो, फरमात्री ?
भोलाराम-रुपया पच्चास हजार चाये है। भीत भारी
डास नाग रही है। आज हुन्डी पूर्ण है। नई दीणैसें
बरू जाती रहेगी (आंख भरकर ) | वग्नत धारे सिवाय
रोड सहारो दीवालो नई है। या इज्जत राखणी और
वणी थारे हाथ है।
इज्जत बच जावेगी तो पैदा बाडो
गोई हो ज्यायगी। और कह्या करे है-"जावी लाख
और रही सारख ।" इज्जतको गन्नई सगला भलामाना है !
ज्जत नई बचेगी तो मैं बखत माटीम मिल ज्यावागा।
गोपीराम-(धीरज बन्धातो हुयी) घबडाभो मतना ।
ठीक हो न्यायगौ (रामप्रमादने) रामप्रमाद ! पचास
जार रुपया भोलारामजोने देदेभोनाराम भींवगज के पेंचा
ते नाव माड दे।
रामप्रसाद-(पञ्चाम हजार का लोट तिजुरीमे निकाल
र) ये त्यो। मोनारामजी।
भोलाराम-( रुपया लेकर ) प्राच्छो तो मैं नाज
दलती फिरती छाया नाटक।
ب
1
"
खयाल नहीं करकर झट पाच हजार रुपया 'एक मुष्ट
निकालकर देदिया। गावको काज चुकती करवा दियो।
गावमें रैग जोगा कर दिया। मैंको यो गण जलमभर
नई भूलणु चाये। देखो, या सुपना में बी पाशा नही' को
कि, म्हारी या दशा हो न्यायगो श्रोर को दिन इस माफक
सिकन्दर हो न्यायगो। मनमें के के विचार करा करता
पण मनका के टका उठे है। साची कही है-
"मन चाये माया करू, करकर करू' गुसान ।
माई हाथ कतरनी, राखेगो जनमान ॥"
( गोपीरामकै नजीक जाकर) बाबुजी आज तो रोकड में
दश लाख रुपया पद्या है सो के करणी चाये ?
गोपीराम-एक काम करो बक बगाल हेड हाफिस में
भेजकर जमा करवा द्यो ।
रामप्रसाद-सोत चोखो जी।
(इतणामें भोलाराम आवे है)
भोलाराम-(हाथ उठाकर ) जयगोपालजी को।
गोपोराम-भावो। जयगोपालजीको। ऊपरने बैठो।
भोलाराम-बाबाज, ऊपर नीचे सब एकाई माया है।
म्हे तो सुपी आजकाल में काली माईको कपासे : थाने दो
रुपया भोत चोखा मिन्न गया है। सो सुगकर भोत खुशो
पेदा हुई। मनमें विचार कम्यो चालकर निसचे तो करणी
चाये। देखा माची वात है का झुठी।
-
"
---
ढलती फिरती छाया नाटक।
गोपोराम-(नम्रताई सें) हा! पापको दयासे इदरमै
चोखोई प्राप्तो हुई है। या सब रिदरोपना थारीई है।
पैला पोत पच्चास गाठको दलानो को थे मरत करायो थो
जैके बाद वारान्वारा होताई गया।
भोलाराम-सब परमात्माको माया है (धोरासी) एक
काम है?
गोपीराम-बोलो, फरमाओ।
भोलाराम-रुपया पञ्चास हजार चाये है। भोत भारी
भडास लाग रही है। श्राज हुन्डी पूर्ण है। नई दोषणेमें
पाबरू जाती रहेगी (आंख भरकर ) बखत धारे सिवाय
कोई सहारो दीगोपालो नई है। या प्रज्जत राखणी और
खोबणी थारे हाथ है। धज्जत बच जावेगी तो पैदा बाडो
घणोई हो ज्यायगी। और कह्या करे है--"जावो लाख
और रहो सान।" इज्जतको गेन्नई सगला भलावाना है।
इज्जत नई बचेगी तो घबखत माटीमें मिल ज्यावागा ।
गोपीराम--(धीरज बन्धातो हुयो) धबडाओ मतना ।
सा ठीक ही न्यायगो ( रामप्रसादने ) रामप्रसाद । पञ्चास
हजार रुपया भोलारामजोने देदे, भोलाराम भीवराज के पेचा
खात नाव माड दे।
रामप्रसाद-(पञ्चाम हजार का नोट तिजुरीसे निकाल
गर) ये ल्यो। भोलारामजी।
भोलाराम-( रुपया लेकर ) पाच्छो तो में जा हु
.
.
। - १ एब तो म्हाने बी ६८ ढलती फिरती छाया नाटक । हुन्डीवाला बेट्या हैं जिको संपने भुगताप देकर नको करू । गोपीराम-हा। जावो। (भोलारास जावे है) (इतणामें नेणसख मगतूराम प्राव है) नेणसुख, मगतूराम-( हाथ उठाकर ) वावुजी ! जय गोपालजीको। गोपीराम-जयगोपाल। प्रामी, आज जुगल जोडी कैया आई नैणसुख, मंगतूराम-के पाया हा । कोई भलेरोसो नजगार वतावो। म्हेतो याई बाट, देखे हा जिको कालो माई सुगई लई । गोपीराम-थाने तो जरूरई बतावागा। इन्डियाको दलाली करण लाग ज्यावो । -नैणसुख, मगतूराम-भोत ठीक है। भाजसेंई सही। बोलो। पैला पोत थे के वतावोगा ? गोपीराम-जायो दो लाखको कलकत्ती (मुदती हुन्डी कलकत्ताकी) ठीका जचाई करकर, लियावो भावमें कमर ", नई लाग ज्याय। नैणसुख, मगतूराम-ठीक है। भाव कानी से तो केसी हायको सोड में सोवो। (दोनों जावे है) (इनणामें रंगलाल श्राव है) गोपीराम- (खुद्यो होकर रगलालने) आवो, सेठ साब। जयगोपालजीको, आज मैंया पधाया ? एक काम करी - 1 . A
ढलती फिरती छाया नाटक।
रगलाल-जयगोपालनीको। क्यों का सेठ घाव, पापा
तो भाई हा। सब एकई माया है।
गोपीराम-या तो क्यु कयो। म्हारे तो थे सेठई हो।
थारो गुण थोडोई भूला हा। साची पूछो तो थे म्हाने के
जाणथा! पण कितणी मातमरी करे था। थे इतणु
स्हारो नई देतातो में कलकत्ता म्हारा पगई कोनी जमता।
सेठ साब । थारो गुण म्हे भूलणेका नई हा। गुपने
पराम पादमी होय जिका भूल्या करें है।'
रगलाल-बात तो याई है। कही बीती है-
घरदी जरदो ना तजे, खटरस सजे न भाम ।
सोलवत गुण ना तजे, गण को तजे गुलाम ।"
गोपीराम-भाजकाल आपकै रजगार बाडीका के हाल है?
रगन्नाल-फिका हाल है। इदर में म्हे रुपयो मोत
खो दियो।
गोपोराम-क्यामें खो दियो ?
रगलाल- एक प्रादमीका फेर में प्रागया। वो सोनाका महल
दिखाकर पेन्ता तो म्हारा नाम से खुब सोदो कर लियो,
पोछे जद ज्यादा घाटो होगयो जणा नटकर नाकै होगयो।
गोपीराम-थे इतणा हुसियार समजदार होकर कैया
जकै फेरमें आगया?
रगलान फेरों के भागया पुणो के पस होगया।
बाधा को तो करें हैं-
1
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।
IN
-
।
ढलती फिरती छाया नाटक।
"जैसी हो होतब्यता, वैसी ऊपजे बुद्ध ।
होनहार हृदय बसै, बिसर जात सब सह ॥",
गोपीराम या ठीक है। मेरे साह. कोई काम
होयतो के दियो। सकोच मतनां करियो ।
रंगलाल-रुपया दो लाख को मदतकी दरकार है।
गोपीराम-रुपया तो थाराई है लेज्यावो। (रामप्रसाद
ने) रंगलालजीने दो लाख रुपया दे दे। रगलाल राम
गोपाल के नांवें माड दे ।
रामप्रसाद-दो लाखका लोट तिजुरी से निकाल
कर) गलालजी साब, ल्यो। ।
ग्गलाल-(रुपया लेवार) गोपीरामजी एव तो मैं चालु
हु ( मनमें ) गुण मानणु नाम को है। साचो मदत श्र ने
कह्या करें है। ऊपर में क्य ई। बोले भीतरमें क्य ई 'घाटा
घडियो राखे आत्माको चोरी रानकर आत्माके विरुव बात
करै जिका बी कोई आदमी है? वे विना सीग पूछका
पर है। 'इसा प्रादमियाने चोरावे ले ज्याकर गाडें ।
गोपौराममैं बी घरा जाऊगो, चालो सागै चाला।
(दोनों जावे है)
दुसराक समाप्त।
।
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1
* प्रवेश पैलो
।
मेरा मटा मने किरोडपती समज कर, मेरोवारो पटकलन,
मु लोपकाता चल्या पाये है। में भूरमान
ममजुई। मन अपाकी के
अंक तीसरी
ठिकापो घमडीलाल गिरधारीलालकी दुकान ।
(घमडोलाल बैठ्यो है)
धमडौलान-(मनमें ) साची बात है-"माया मद मो
मह, ओर मह सब रह ।” माया पाकर धर्मड नई क्रमो
तो जगमें आकर के कस्यो। लोग पीमी पामी करता,
धातियो माई धातियो माई करता डोले है, वेनिग काठका
अठे तो जठीने निजर' फेरांधा, पीमोई पीसो
नीजर आये है। मैं बखत तो वेटा पोतोको धी खुव
एक किरोड साचा । पीछे पोर
रुपयाने होता के बार लागे है। रुपया तो बात की यात
में पैदा हो ज्यावें है। मनै तो पण सगा मोयायो, भाई
बन्दाकी, गरीबडियांकी लीला देखकर पूरी झांसी भाव है।
h
ल्हर है।
रुपया
रुपया लीणने
के
गरज है।
।
हलती फिरतो काया नाटका ।'
काठाकर का कांनी देख्नुई कोनी। दलिदरियाने देखकर
तो मन्त्र सरमई भोत प्रावे, मेरे करने कगाल को के काम।
पण में वो जबरोहु । मेरे कने ये लोग भावे जया इसी
खुनस काडण लाग ज्याज, निको पण को खायो पियो
सो बल ज्यावे। आगेने पापणे को प्रावणई
जुगता
कोनी
रखें।
R
(इतणामें रंगलाल श्राव है)
घमडौलाल-क्य । कैंया पाया हो। थारी दुकान
पर आज काम कोनी के।
रगलाल-(मुलककर) थारा दरभण करणने प्रागया।
घमडीलाल-(लापरवाईसे ) दरशण करप्पा हो तो
मग्दर में जावो।
रंगलाल-(बात टालकर) प्राजकाल के हाल चाल हैं।
धमडीलाल-(त्योरी चढाकर ) म्हारा हाल चाल पूछण
को थाने के दरकार है।
रगलाल -मापसरी में पूछणे को क्यु दोस थोडोई है।
धमडौलाल-थे थारो कवीनां । क्युकाम हो, के यो ।
-काम तो यो है-थे बड़ा आदमी हो सो दया
मया राख्या करो। सुण्यो है क ना-
"दया धर्म को मूल है, पाप मूल अभिमान ।
तुलसी दया न छोडिये, जब मग घटमें प्राम ॥",
घमडीम्तामा-रेपायो, म्हे सा वाणा हा।
रगलाल
टन्नती फिरतो छाया नाटक ।
1
.
-
रगनाल-खेर! कोई चोखोमो रजगार होयतो माने
बी बतावो, ज्य दो पोमा ठाना बेठ्या मिल ज्याय। कोई
नयो काम करोतो करल्यो।
धमडोलाल-(झझलाकर ) कोई नयो काम नई करा
है। एक जणाकै सागेतो पार कग्योथो जिको रूपया दश
हजार बाकी रगया, तकादो करता २ जमादारका गोडाम
पागों पड गयो, जणा हारकर ईव नालस करणी पडो है।
रगन्नाल-जणा के श्राट है। वा कया करे है-
'नालस करो तकादो छुट्यो, घर घर दिछणा बाटो।
बडा भाग से रुपया पावो, नई धु का नगाकर चाटो ॥"
घमडीनाल-बस, रेण द्यो बतीलावाजी ने। चोटी
मे लाग्या वैरो पटे। चन्या आया है अठे ठालाभूना छाती
छोलणने।
रगन्नान-(मनमें ) औका मनमें तो घमडको ठिकाणुई
कोनो रिह्यो। मैं तो मोदो बोलु हु, यो मेरो मटो टेडो टेडो
ई बोल्या जाय है। देखो, गोपीराम बौ आदमी ई है।
गयोडा आदमी से वितणी हलोमो से वतनावे है, विाता
मान तान राख्ने है, कितणु सहारो रेवे है। को मिजाज
तो पाकास मे ई चढ गयो। पापों इन 8 कौ के गरन है,
किरोडपती है तो आपका घरको है। से दो बात तो
जरूर करणी चाये। अंको आख श्राछो तरा खोन दोगी
.
,
+--
ढलती फिरतो शया भाटा ।
जठाकर नए कानी देखुई कोनी । दलिदरियाने देख
तो म सरमई भोत पावे, मेरे कमे कगाल को को का
पण मैची जवरोहु। मेरे को ये लोग भावे जणा
एसो
खुनस काडण लाग ज्याज, जिको श्रण को खायो
सो बल ज्यावे। भागने पापणे वाने प्रावई जुगता के
रखें।
A
(इतणा, रंगलाल श्रवि है)
धमंडीनाल-क्य । कैंया पाया हो। थारी, दुप
पर पाज काम कोनी के?
रगलाल-(मुलककर) थारा दरशण करणने आगया
धमडौलाल-( लापरवाईसे ) दरशण करणा हो
मन्दर में जावो।
रगलाल (बात टालकर) पाजकाल के हालचाल
घमडीलाल-(त्योरी चढाकर ) म्हारा हाल चाल पूर
को थाने के दरकार है।
रगलाल -भापमरी में पूछण को क्यु दोस थोडीई है।
धमडौलाल-धे थारी कवीनां । क्यं काम हो, के यो
रंगलाल-काम तो यी है-- थे बड़ा भादमी हो सो द
मया राख्या करो। सुयी है या ना-
"दया धर्म को मूल है, पाप मूल पभिमान ।
तुम्नसी दया न छोडिये, जब लग घटमें प्रान ॥"
घमठीनामा-रेणयो, हे सा बाप्पा डा।
-
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ढन्नती फिरती छाया नाटक |
रगलान-खेर
ग! कोई चोखोसो रुजगार होयतो म्हाने
बी बतावो, ज्य, दो पोसा ठाला वेठ्या मिल ज्याय। कोई
नयो काम करोतो करल्यो ?
है
धमडोलाल-( झ झलाकर ) कोई नयो काम नई करणु
है। एक जणाके सागैतो बेवार कखोथो जिको रूपया दश
हजार बाको रंगया, तकादो करता २ जमादारका गोडाम
पाणी पड गयो, जणा हारकर ईव नालम करणी पड़ी है।
गलान -जणा के पाट है। वा वह्या करे है-
'भानस करो तकादो छुट्यो, घर पर दिछणा बाटो ।
बडा भाग से रूपया पावो, नई थुक लगाकर चाटो॥"
घमडोलाल-बम, रैण द्यो वतीलावाजी ने। चोटी
म लाग्या वेरो पटै। चन्या पाया है अठे ठालाभूला छाती
छोलणने ।
गन्नाल-(मनमें ) का मनमें तो चमडको ठिकाणुई
कोनी रिह्यो। मैं तो सौदो बोनु हु, यो मेरो मटो टेडो टेडो
ई बोल्या नाय है। देखो, गोपीराम वो आदमी है है।
गयोडा श्रादमी से कितप्पी इलोमो से पतला है, कित्ता
मान तान राखे है, कितण सहारो देवे हैं। अ को मिजाज
तो आकास मै ५ चढ गयो। पापणे पूध को के गरम है,
किरोडपती है तो पापका धरको है। से दो वात तो
जहर कारणों चाये। अंको पारख पाको तरा खोल
-
ढलती फिरतो या नाटका।
ऊठाकर कण कानी देखुई कोनौ। दलिदरियाने देखकर
तो मन सरमई भोत पावे, मेरे कन्ने कगाल को के काम ।
पण में बो जबरोहु। मेरे कन्ने ये लोग आ जणा इसी
प्रसो सुनस काडण लाग ज्याज, जिको अया को खायो पियो
सो बल ज्यावे। आगेने पापणे करे पापपई
जुगता
कोनी
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रखें।
(प्रतणामें रंगलाल श्राव है)
धमडौलाल-क्य
। कैया पाया हो, थारी दुकान
पर आज काम कोनी के
रगलाल-(मुलककर) थारा दरशण करणने आगया।
घमडोलाल-( लापरवाईसे) दरशण करणा हो
मन्दर में जावो।
रगन्नाल-(बात टालकर) आजकाल के ।
घमडौलाल-(त्योरी चढाकर) म्हारा
की थाने के दरकार है।
रंगलाल -आपसरी में पूछणे को क्यु पोत
घमडौलाल-थे थारी कवीनां । क्यु, काम
रगलाल-काम तो यो है-थे बडा,
मया राख्या करो। मण्यो है कना-
*दया धर्म को मूल है, पाप/
तुलसी दया न छोडि
धमडीतात-रेपो
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ढलती फिरतो छाया नाटक ।
रगनान-खेर। कोई चोवोसो राजगार होयतो म्हाने
बी बतावो, ज्य दो पोमा ठाला बेठ्या मिन्न ज्यायः। कोई
नयो काम करोतो करल्यो।
धमडौलान-(झु झलाकर ) कोई नयो काम नई करणु
है। एक जणाकै सागेतो पार करयोथो जिको रुपया दश
हजार बाकी रंगया, तकादो करता २ जमादारका गोडाम
पाणी पड गयो, जणा हारकर इंव नालम करणी पडो है।
रंगलाल-जणा के पाट है। वा क ह्या करे है-
नान्नस करो तकादो छुट्यो, घर घर दिछणा बाटो।
बडा भाग से रुपया पावो, नई थुक लगाकर चाटो॥"
घमडीनान-बस, रेण द्यो वतोलावाजी ने। चोटी
में लाग्या वेरो पटे। चन्या पाया है अठे ठातामुला छाती
छोलणने।
रगलाल-(मनमे ) का मनमें तो घमडको ठिकाई
कोनो रियो। मैं तो सोदो बोरा हु, यो मेरो मटो टेडो टेडो
ई बोल्या जाय है। देखो, गोपीराम बो आदमी ई है।
गयोडा आदमी से कितणों मन्नोमा से वतन्नावे है, कितगा
मान सान राग्ने है, कितणु सहारो देवे है। को मिजाज
तो पाकास में ४ चढ गयो। आपणे इन अंको के गरज है,
किरोडपती है तो आपका घरको है। असे' दो बात तो
जरूर करणी चाये। अंको पारख पाको तरा खोल दोगी
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ढमती फिरती शया नाटका।
अठाकर छप कांनी देखई कोनी । दनिदरियाने देखकर
तो मन्त्र सरमई भोत भावे, मेरे कने कगाल को के काम।
पण में वो जबरोहु। मेरे कने ये लोग प्राव जणा इसी
प्रसो खनस काडण लाग ध्यान, निको प्रण को खायो पियो
सो बल ज्यावे। भागने पापणे कन्ने भावपई
जगता
कोनी
खें।
(प्रतणामें रंगलाल प्राव है)
घमडीन्ताल-क्य। कैया आया हो ? थारो दुकान
पर भाज काम कोनी के ?
रगलाल-(मुलककर) थारा दरवण करणने आगया।
घमडीलाल-( लापरवाईसे ) दरशण करयां हों, तो
मन्दर में जावो।
रगलाल-(बात टालकर ) पाजकाल के हाल चाल हैं ?
घमडोलाल-(त्योरी चढाकर) म्हारा हाल चाल पूछणे
की थाने के दरकार है।
रगलाल -मापसरी में पूछण को क्यु दोस थोडोई है।
घमडीबाल-थे थारी कवोना। क्य काम हो, के यो ।
रंगलाल-काम तो यो है-धे बडा भादमी हो सो दया
मया राख्या करो। सुण्यो है काना-
"दया धर्म को मूल है, पाप मूल पभिमान ।
तुलसी दया न छोडिये, जब लग घटमें प्राग" .
ची, म्हे सा जागा हो।
។
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- है। पण - - ४ दलतो फिरती छाया नाटक। ये ( अपरसे ) सेठजी। कैया नाक चढाकर बात करो हो ? घमडौलाल-श्रमे के बात है। नाक तो म्हारो है। बढावागा, चाये जतारांगा रंगलाल-थारै बडा पादमिया लायक ,ये बाता नई है। कष्टीबी तो है- 'वडा बडाई ना तजे, बडा न बोल बोल । होरा मुखमे ना का है, लाख हमारा मोल ॥" घमडोलाल-ब देसा म्हाने कुण छोटो पादमी बणाव है रगलाल-छोटा बडा तो करमा से छोय है।। योडासा जीवगणा ताई इतणु गूमान करणु चोखो कोनी। | धमडीलाल-महे गूमान कैके सामने करा' कोई बरामरियो होय जपानां। थे के बाडोका बथुवा हो? रगन्नाल-धारे में बातको गुमान होयणे। म्हेती यगियांणो जायोडाने सबने एक समजा हा, पण यो वेरो कोनो पट्यो-थे बड़ा आदमो क्या पर इतणा इतरा, रिह्या हो? जाणा हा पाजताई या लिछमी कोईके सागं नई गई है। पगा था लोगावा सागे जकर जायगी। घसडोलाल-जणा टुनिया में बडा आदमी युई वणाया गया है। रगलाल-क्य बड़ा आदमियाकै सींग पुछ होय है के छोटा बडा में के फरक है? प्रतणु ई फरक हैं ना- बटा पादमौका दाग में ज्यादा आदमी चन्या जावे है, छोटा १ महारो । , - - . । मागण ढलतो फिरती छाया नाटक। प्रादमोका दाग में कमती चस्या ज्यावे हे। बस, पोरतो कबु फरक है ई कोनी। घमडीलाल-(खिजकर ) रैगयो, बस म्हारै आगे क्य, ज्यादा परमोद लगावो हो। सा जाणाहा। रगलान-के चुल्लाको राख जाण हो। जाणता तो इत- णी बातई के घो। थे तो थारा मनमें कोरा रामजी हो रिहा हो। घमडीलाल-(जोरसे ) अध्यातो, थारे कम्ने क्य जावा तो मत दियो। रगलान- बातको के गूमान करो हो। अयाई करोगा तो मागण जोगाबी हो ज्यायोगा। मागणको दिन बो भगवान जलदोई दिखा देवेगो। संसार में गरब गूमान कोईको नई रिहो है। प्राच्या २ को गरब गल गयो है। जरा कान खोलकर सुगों- जग में गरब किया मोई हाया। गरब कियो ग्तनागर सागर, जल खारा कर डाव्या । गरब वियो लकापति गवण, टुक टुक कर डाग्या । गरम कियो उ ण चकये चकयो, रेग विछोवा कर डाया। गरव कियो वा बनको चिरमो, नूडा कारा कर डाया ।। घमडौलाल-देण्याजी। मरगया गरम गालवा वाना। म्हाने मागणको दिन भगवान दिखा देवेगी, अंवातको खबर धारे कर्म भाग होगो। पाया हैं बात बगायणने । कक्षता - , 1 ७ ढलती फिरतो छाया नाटक। ,सरम कोनी आई-"मगती और भीट्यो साई कोनी।" रगनाल-देखो। गैलने तो धारे से क्य मदत मिलो कोनो। आगेने मिलणे की म्हाने प्रासा कोनी। क्यं धोती मा से निकाल २ पडो हो। मन्न थारी परवा के है ? घम होलान-परवा नई है तो म्हारै कान के भरत मारगा ने पाया हो। देख्यो डोल-"गलियारा में ही बैठे, उलटो घूरिया का.।" रगनाल-बस। थारा बो बडा आदमियाका डोन देख लिया। करदियो म तूतई सो। धमडोलाल-पाच्यो के पाट है, डोल देख लियो तो, श्रागैने म्हारी गहीम पावोगा तो धुल खायोगा। रगलान्न-थारे फन्द्र कुण श्रावे है। के चीज हो, क्याकै लागो हो ? गद्दी को घमड दिखावो हो। ठेर ज्यावो, गद्दी में तो धुलई खाणने मिलसी। धमडीलान-पाच्छयोइब भोत होगई, चुपचाप चल्या अण बाताम के खावो हो। रंगलाल-(ऊठकर) या न्यो। म्हे तो चाल्या। पण * बातको परचो थाने एक महीना के भीतर नई दिखा टेवा तो प्रसन्न बणियाणी के कोनो जाया (मनम) श्र बखत गोपीराम को भोत सावल पड़ रही है। बीस तीस लाय तो होई गया है। अयाई सावल पडतो रवेगो तो दश बोश दिनम बी बी किरोडपती ही व्यायगो। पोछ में । . . जावो। L
टम्नती फिरती छाया नाटक ।
पूतने चोखो तरा समज लेवागा जती मा काडकर सोदो लग्ग
कर देवागा। (ऊपरस) कोरो गद्दोका घमड मे बाको हो
रियो है। म्हे दिखा देवागा या गद्दो फदो अडती
फिरसी।
घमडीलाल-(धान लाल करकर) बस, चल दे।
को सेखो लगाव है।
रगलान-(चाल पडे है ओर मनमें सोचे है) पेनाई
जाणे था यो पाटमी महा खराब है। को प्राख में सील
नई है। मायाका मदमें चुर हो रियो है। सो कदे ना
कदे लडाई जरूर होगी, बाको वा हुई। आदमीने इसी
जगा न जाणु चाये जठे आव बेठ ओर प्रेम पागलो नई
करें। महाराज तुन्नमौदामजी बी तो कही है-
"अायाको पादर नहीं, नही नैनमें नेछ ।
तुलसी वहा न जाईये, कचन वरसो मह ।।"
पादमोने भाव बैठ और प्रमदाली जघाई जाणु चाये।
जैया कही है-
"पायाको आदर करे, चलत नियावे सोम ।
तुलसी वा घर जाईये, मिलिये विध्या बीस "
(सोचती २ रगलाल चल्यो जावे है)
ढलती फिरती छाया नाटक।
9 प्रवेश दूसरो
ठिकाणो गोपीराम मुरलीधर को मकान ।
।
( गोपौराम मोजोराम बैठक में बैठ्या है)
गोपीराम-बोम्नो। मोजोरामजी महाराज'
मोजीराम-बम, आनन्द होगया। पापा चावे था जिकोई
वात होगई। देखल्यो, कई सेवाराम का बेटा आकर धारी
नोकरी करण लाग गया है। पीसाको परताप सोई है।
मेरा मटा मुडासें कोनी बोल्या करता, जिको इव पापपई
बाबुजी २ कवे हैं।
गोपोराम-कोई बात ना ।
वा कह्या करें है-“करेगो
सो पावेगो, बावेगो सो लुणे गो।" पापणु के लियो।
मोजोराम-लोणपर वात थोडीई है। दुनियाका
धाराको बात कही है।
गोपीराम-समार समुद्र है। मे कै ने बेरो केया २
का जोव भया पद्या हैं । कपाली २ वुद्धी है। बोलो। थारा
के हाल चाल है।
मोजीराम-म्हारा हाल के पूछो हो ? रोजीना दुदिया
भाग छणे है। दुसमनको छातो पर मेरो रगडो नागे है।
गोपीराम-देखियो। यो रगडो लगावता लगावता, कदे
T
।
1
ढलतो फिरतो छाया नाटक ।
इसरो रगडो मत लगावण नाग ज्यायो। यो कलकत्तो है,
पठेको इवा भोत जलदो लाग्या करे है।
मोजीराम म्हारै तो इवा जलम ताई | भग भवानी
को लागो हो, जिको के म्यामने दूसरी हवा असर कोनी
करे। पण अठे बड़ा बायु कुशाण लाग ज्यावें जिका मैं
नैरवो चकरमें भोत जलदो फस ज्याया कहें है। सोना-
गोको सवा खाया मिना ऊग के पितरा पागो कोन्या रल्या
करें है। सोधे कट लगोटी मत भडका आयो।
, गोपीराम-महाग के ममजो हा। म्ह लगोटी का
ताचा हा
.
.
-
1
(तणा, नैगासण मगतूराम पावे हैं)
नैणसुख, मंगतृगम-(गोपौरामने ) जयगोपालजीकी !
वानुसाव।
गोपौराम- जयगोपाल ।
मोजीराम-बोलो, नैणसुखजो! भाजकान के करो हो ।
नैणसुख-दलाली करा हा।
मोजोराम-मासामी सुब पटे हे ना?
नेणमुख-म्हे तो दनाल माई हा, म्हार तो थे बौ
पामामौदो। देख न्यो, थे कितणा क पटो हो।
मोजीराम-(सुन्नककर ) चोखो २ माल हायमें गस्था
करो। धणी घामामी पट न्यायगो। आजकाम्नका बाबु
नोगाने पटाण को यो भोत सौदो रमतो है।
.
३
ढलती फिरती शया नाटया ।
मगतूराम-महाराज। यो काम चार ताई छोड राग्यो
है, क्यु को औका राम्ता थाने चोखा मालुम है। थे बाज
काल ठाला बी हो, सो या दलालो थे कन्या करो। थारै
पेटा गलब हो ज्यायगी।
मोजीराम-हा। हा ॥ समज गया। थारे से यो काम
कोनो होणे मकै। क्य को ये काम राडिया ढाडिया का नई
है। ये काम तो लुगाईवानाका है। ओर कठे मिसन नई
बेठे तो घरमें त्यार मिले, सो यो काम तो नैणसुखजोर्ड
नायक है। थे तो अगाको गैल २ बाबुपटाणे में रिह्या करो।
मगतूराम-धे या, मनमे क्यु राखो। थे बी देशसे
मिथागोजोने बुला ल्यो। पोछे बरगी पाठ को गई लम्बर
नाग ज्यायगो मत्तेई घोज धग पुचबो करेंगी।
मोजीराम-मियागी तो घा नौगाके लेखे तुलसी
पीपन्न को पेड है।
मगतूराम-जणाके पाट है। सोचणे को आराम हो
ज्यावगो।
मोजोराम-वाहनी, ढपोनसखजो । बाछो बिन्दी चाक
के मान लागो। म करे, लगुरौ माकडको सो भाग्य
लिया बुडा बान्दरा की सी ।
(इतणामें रगलाल आवे है),
गोपीराम-( सगलाने ) बम, चप रयो। रगलानजी
श्रावे है ( सब जणा चुप हो ज्यावे है।
--
1
.
ढलतो फिरती छाया नाटक । . रंगलाल-पाज के हो रियो है? गोपीराम-(मुलककर) आयो। क्य ई हो रियो गा, यैव्या हा। प्रगलाल--* दस पाच दिनमै का ओर बी सावन पडीके? गोपीराम-हा। रुपया पचास चाम्नोस लाख मिल गया . . 1 रगन्नाल-वस तो, म्हे बी याई चावे था। इब तो ऊने घणु समज लेवागा। गोपीराम -या के बात है? या क्यों पर कही। रगलान-या बी एक बात है। अठे पापा सगला जणा घरी घरका बेट्या हा ना? गोपीराम'हा! सगला धरकाई घरका है। बारको कोई कोनी। रगलाल- मेरा मटा घमडीलाल गिरधारीलाल याला के भोत दिमाग होगयो। आज सुशोई सुद भाव को गही में चल्या गया था, सो मारे मिजज के टेडो होगयो, ऊट- पटांग बकण लाग गयो। सेसमें ऊ को म्हारी पूरी सारी तकरार होगई। मोजीराम-ऊ को नामई घमंडीलान है, जणा श्रापका नामको लाज तो राखोई चावै। नामको असर या बिना कैया रखे।
ER
ढलती फिरती छाया नाटक।
।
गोपीराम-या ऊको भूल है। ईश्वर के नीचे वसकर
। धमड नई करण चाये। आपस मे भेद भाव नई राख
मब एकई माया है।
रंगलाल-यो तो, या बात और कवे है, मैं के के
म्यामने गूमान करू । मन्ने मेरो बराबर को कोई दोखेई
चाये।
.
कोनो।
पणा या बतायो
गोपीराम-दुनिया में एक से एक बढकर पड्या है। धरती
पर इब बो हिसा २ मिनख पया है, जण के आई गई को
छे कोनो है।
रगलान-अ ण तो आपके मनमें मगनी दुनियाने नबोजी
समज राखी है।
गोपीराम-ॐके समज्या के होय ।
आपणु के मुतबल है?
रंगलाल-एकबर जने कोई ना कोई सुरत से जकर
नोचो दिखावणु'चाये, कोई बी काम में ज ने जथलकर मदो
पकटणु चाये।
गोपीराम-जणा एक काम करो (नेगसुख, मगतूराम
'ने) बोलो, क्य काम है के ?
नैणसुख, मंगतूराम-(पापसरीमें, धीरासो) व ये पागला
आपको श्रोले की बात करेंगा, सो बैठ्या रहणु ठोक नंई ।
(जपरसें) काम तो क्य ई ना जो। वो कलकत्ती तो लिखा
यो । इब पोर लेवोगा के,
प
7
-
ढलती फिरती छाया नाटक।
गोपीराम-ना। और कोनी लोण ।
नैणसुख, मगतूराम-ठीक है ( दोनु जावें है)
रंगलाल-हा! कुणसो काम करा'
गोपोगम-जपा क मैं बखत रूई भोत मा) है
मन्दा २ भावको बेच्योडी हे। अबखत जमे पूरो घाटो है
सो पापणे रूद्धको खेलो कर गैरो। जितणी रुई है सो सगन्न
खरीद ल्यो। पीछे देखियो नोग उसे मु माग्या दाम लेवेगा
जणा प्रापेई जीव निकाल देवेगी।
रगलान-भोत ठीक। या जुगती तो भीतई सार्च
बताई। अम अंकी काच आपई निकल पडेगी।
गोपीराम-थारा, म्हारा, भोलारामजी का, तीनवाया
नाम से खरीद कर ल्यो, ओर बी बण जठे ताई लोगाने
सामिल कर त्यो।
रंगलाल-ठीक है, मैंयाई करागा। देखियो इव के के
रग खिले।
(इतणामें भोलाराम आवे है)
गोपीराम-वे स्यो। भोलारामजी बी या है।
अगने वो कैद्यो।
भोलाराम-बोनो के हुकम है।
रगन्नान-भाजकाल घमडीलाल को दिमाग भोत सुज
गयो है। सौऊ की सोई ऊतारणों चाये। जैको उपाय
था गोची गाई १ कि, में बस ज मैं रुद्ध भोत मचि है
--
, पारी। + २ । दलती फिरती छाया नाटक गोपोगम -या जको भूल है। दूसर के नीचे बसमा HT नई पारणा पाये। भापसरीमें भेद भाव 'नई राख सय एकाई माया है। गाभा--को तोया बात भोर कवे है, मैं के FAT गुमान कार । मने मेरो बराबर को कोई दोई कालो। गोराग-दुनियां में एया से एक बढकर पड्या है। धरती पर गोलिमा २ मिनख पडा है, जण के पाई गई को पानी। गगा-ग तो भापके मनमें सगली दुनियाने नभोज ममण रामोश गोपीराम के समज्या के होय । पापण' के मुरावा ? रंगालाल-एमागर जने याोई ना कोई सुरत से जरू नीयो दिखाया चाये, कोई भी काम में जाने ऊथलकर मर्ट . पगा या वता पपाटगा, चाये। गोपीराम-at एक याम करो (णमुख, मगतूरा ने) योगो, भय कामर के। नैणसुष, मगलूराम--(पापम धीरासो) इब ये पाग आपको पोले की बात करेंगा, सो बैठ्या रडणु'ठोक न तो घर ना लो। वो कलकत्तो ती नि और मेवोगा के? ( त है
-
ढलती फिरती छाया नाटका।
८५
प्रवेश तीसरो*
1-
ठिकाणो धमडीलाल गिरधारीलालको दुकान ।
(घमडोलाल बेठगी है)
घमडीलाल-(मनमें ) गरव गुमान बो तो दुनिया,
कोई वात के ताई बणायो गयो है। गरब गूमान सेई बडा
पादमी को बडप्पण सो मालुम देव है। लोग मेरी बढी
हुई आबरूने देखकर तथा मेरो ठाठ बाट, रोव दीव देवकर,
माई माय जल्या जावे है। सो भन्लाई असे बो बेसी जलो।
कधा करें है-"कुतिया पुछ र्यु हिलाती है, इसको पात
जलती है।" सुणा हां लैर में लोग मेरी खोटी खरी बी मोत
कवें है, सो कोई बात ना, हाथियाको नैर कुत्ता युई दूसबो
करें है। मु पर कहा तो छठ्ठो को दुद निकलवाल्ये।।
(ऊपरसे) मुनीमजी' देख्यो का
मोतीलान-फरमावो। के ?
घमडीलाल-देख्यो सोन्या। रंगनो कितणी २ यडकर
कर थो। छोटासा मुसे बडी सी बात। इब वो' म्हारी
.
-
"
ढलती फिरतो छाया नाटक ।
सो रुई सगलो आपणा तीन फारमा के नाम से ले लेणी
और ऊंने चाये जणा ससे मूमाग्या दाम लोणां चाये । सो
आपई ढीलो हो न्यायगो।
भोलाराम-ठीक है। इसा में तो इसोई होगी चाये।
मन्त्र तो आपलोगा का काम में कोई उजर है नई।
गोपीराम-बसतो, जावो । इव देरी को काम नई है।
चुपचाप जाकर नितणु इष्टाक रुईको होय खरीद ल्यो। कोई
बी पादमीने वेरो नई पटण पाव ।
रंगलाल, भोलाराम-भीत ठोक है। 'जावा हा, याई
करागा। दुब म्हारे के ढोल है ( दोनों जावे है)
गोपीराम-(मोजीरामने) बोलो। आज थाने भूख
कोनी लागो के
मोजीराम-भूखको वारण्ट आया तो एक घन्टा पूरी
होगई पम्प क्या के बटका भरण लाग ज्यावा? भीतर की
कडाई गरम होकर, स्टीम एक दम तेज हो रियो है।
सो धरा चालो तो अन ठडों करा।
गोपीराम-- (मुलककर) चालो। आत्मा परमात्मा है,
यों ने बी कष्ट दौणु ठोक नई
(दोन नावे है)
।
,
--
।
1
।
दलतो फिरतो छाया नाटक ।
वात 8 से जरूर करणी चाये। बने मसकरिया में खुब
ऊडावण चाये। (भुगताण लेकर) सेठजी। पूजडी की के
बात कही? सुणी कोनी के ? गावमे रवो हो क उजाड
में भाजकाल म्हारै सेठा कने इतणौं रकम होगई है कि,
थाने मोल लेकर छोड दी।
घमडीलाल-जाणा
काल ताई तो वो
मुटिया मजुरी करतो, पाज म्हाने मोल ली गवाली
होगयो।
मोजीराम-सेठा को सकल तो देखो, नाण्य, गोवर पर
पाणी बरस गयो होय। थारे बडका के और यार तो निझमी
जी सागे जलम्याई होगी।
घमडोलाल-म्हारी क्यु बात करो हो।
म्हारा।
सुलफा गाजाको दम लगाई है। बगीचियाको हवा खाई है।
थाने के येरो पालको के भाव है।
मोजीराम-प्रोक्षो! सगलो बात जाणने को ठेको थार
नाम होगयो दी है।
मोतीलाल- (मोजीरामने) म्हाराज। क्य, बक बाद
नगावो हो। पार गेले क्यु जायो ना ?
मोजीराम-गेने सो जापाईगा। अठे बैठकर म्हाने के
सेतरपान धोका
रे। यामा
.
मऊत
८'
ढलती फिरती छाया नाटक ।
घमंडीलाल-नंई। आजकाल वो क्यु बड बोलो
गयो है। ऊ कौसी अक्कन तो मे घंटी में लिया डोलु हु
मोतीलाल- बात ने वो के जाणे । धे पगासें
लगायो, जिकी ऊ से हाथा से तो खोलोई कोनी न
वो मुरख है, गवार हैं। गवार होय जिका अयाई
ध्याथा करें है। महाराज तुलसौदामजी बी तो कही हे
"तुलसो बुरा न मानिये, जो गवार काइ ज्याय ।
जैसे घरका नरदहा, भला बुरा वह ज्याय ॥"
(इतणामें मोजोराम पावे है)
धमडोलाल-म्हाराज, कैया आयो है ?
मोजीराम-सेठ। भुगताण नींणने पाया हा ।।
घमडीलाल-(नाड इलाकर) आजकाल तो ते
बाणिया कवे बी पूजडी होगई।
मोजीराम-(मनमें) यो तो आदमी 'साच्चाई धम
हो वा कया करें है- "बोल्योर लाद्यो ।' अवो तो वो
मैंई बारा पाना है। रगलालजी साची कवे था न्हा सु
आदमो है, सो मूरख के स्यामने बकबाद करणो ठोक
खुप रेणु ठीक है।
कह्या कारें हैं-
"मूरम को मुख बम्बई, निकसत बचन विहग ।
ताको पौषध मौन है, विप नही ब्यापत अग।"
पण या बात यो ठोका नई ।, चुप रिचा आपणु पापो
.
ढलतो फिरतो छाया नाटक ।
वात में से जकर करणी चाये। सने मसकरिया में खुद
जडावणु चाये। (भुगताप लेकर) सेठजी। पूजडी की के
बात कही? सुपी कोनी के? गावमें रखो हो क ऊजाड
में भाजकाल म्हारै सेठा कन्ने इतणों रकम होगई है कि,
थाने मोल लेकर छोड दी।
धमडीलाल-जाणा
काल ताई
तो वो
मुटिया मजुरी करतो, पाज म्हाने मोल लोणवानी
होगयो।
मोजीराम-सेठा की सकल तो देखो, नावं गोवर पर
पाणी बरस-गयो होय। थारे बड़का के और थार तो लिछमी
जो सागे जलम्याई होगी।
धमडोलाल-म्हारी क्यु बात करो हो। महाराज।
सुलफा गाजाको दम लगाई है। बगीचियांकी हवा खाई है।
थाने के घेरो भालको के भाव है।
मोजीराम-ओहो! मगलो बात जाणने को ठेको थाई
नाम होगयो दीखें है।
मोतीलाल-(मोजीरामने) म्हाराज । क्युबक बाद
नगावो हो। थारै मैले क्यु नायो ना ?
मोजोराम-गेले तो जापार्षगा। पठे बैठकर म्हाने के
खेतरपाल धोकणु है।
घमडोलान-(मोतीरामने) अपान के दोस है। यामण
मजत होई है।
F८
-
-
M
दलती फिरती छाया नाटक।
मोजौराम-के कजणु है। भैया बोले है जाय फुल
भडता होय। सेठको सकल तो देखो।
मोतीलाल-(भाग्नुकाडकर) महाराज । थे बस्बड बाजई
हो के ? जावो चल्या जावो। बस, भोत होगई।
मोजोराम-श्राप काजी हो क सुला ?
मोतीलाल-ह कोई हा, थाने के मुतवल ?
मोनोराम-(जठकर ) न्यो । महाने के बारे में सगारथ
करणुहै। या ल्यो म्हे तो चाल्या (दोहो बोले है)
"उज, मिल्या गुमस्ता, भूरस मिलगा सेठ ।
सेठाणी ऐसो मिली, छाती ढके न पेट ॥"
मोतीलाल-साची बात है-"काल बागड से ऊपजे, दुरी
यामण से छोय।"
मोजीराम-बामण में साचो काम कोनो पद्यो है। नई
तो भला बुरा को चोखो तरा बेरो पट च्याती (फुडती में
चल्यो जवि है)
धमडौलाल-देख्याक । "भैस आपका गने तो कोनो देखे -
दूसरा ने देखकर बिदकण लाग घ्यावे।" बामण्डी आपकी
सकलने तो कोनी देखे, दूसराको हासौ ऊडाव है।
मोतीलाल-बामण भागयो, नई तो बने मसकरियाको
चोखो तरा बेरो पटा देता।
पण वा कया करें:-"गायां,
भायो बामणा भाजताई भला।' बामणा से तो नाको देश
--- ढलतो फिरती छाया नाटक। घाडीलान (नाक चढाकर ) पाज तो चित्त भोत पराव होगयो। पापगी मोटर नीचे डोई है, चालो "मैदानको हवा खायावा। मोतीतान-प्रापकी मरजी। चालो भला। (दोनों जाव है), - * प्रवेश चोथो ठिवाणी गोपीराम मुरली परकी टुकान । - সিধাৰীৰ ঐ মুনাযা E- (मोजीराम प्राव है) गोपीराम-(मोजोरामने ) प्राज कठे जा पाया १ कैया नसापता फिर किरा हो रिया है? मोजौराम-घमडोनाल ज्यावण गयो थो। गोपौराम-आज थे भुगताण ल्यायण कया गया था। मोजीराम-रूपया पचास हजारको हुडी थी, नणा रामप्रसादजी मने भेज दियो। गोपीराम-जणा तो आप आज बडै ठिकाणे जा पाया ! मोजीराम-बस, बडा ठिकाणाको बात मतना पूछो। पझो मूमनचन्द है। बडो बजजत है। ,
ढनती फिरती छाया नाटका ।
.
', गोपोराम-क्य। थासियो सुठ भेड होगई के ?
। मोजोराम-के वतावा। जाताई मेरो मदो जट पटोग
बात करगा लाग गयो। एकवर तो मनमें आई या नूडा
पर थप्पड लगायु ! पण गैछे में ई हाँसिया, टालकर चल्यो
पायो।
1
1
गोपीराम-के पाट है। सोलोलोह तातालोइने काव्या
कर है। को बदनो तो असे घणु ई लेलियो नायगो।
में बात कानोसे तो निस फिकर रखो।
(इतणाम भोलाराम रगलाल श्राव है)
गोपीराम-(रगलालने ) आज तो मोजीरामजी थारी
ज्य बडा बाबुवासे भिखाया है।
रगनान-बसके। प्राज ये ऊठे कैया गया था ?
मोजीराम-मैं तो भुगताण ल्यावण गयो यो जिको वो
जातको घस्यो खोटो सरौ मतेई बोलण लागगयो । मारे
गूमानक टेडोई होगयो।
रगलान-जिको तो वो आजकाल बटोकै ,घोडे सवार
हो रियो है। पाया गया भडवेटी लेबी की है। नारकी-
खाल पर, रामो ।
भोलागम- घमडीडाकै जसै फारमको काम धाधर्म,
आयो है, जदसें बदनामी "सिवाय मग कागामी कदेई
कोनो गई। पेला को भाई दयाराम मानिधा थो जिको
एक लम्बरको दयालु मनोमांस घो। गयोडाकी मोत भारो
1
"
1 ८१ - ढलतो फिरतो काया नाटक। न्यातरी कसा करतो। वो मया पीछे या लीला हुई है। इन नो वा हुए- "हंसा रहें सो जडगये, काग भये परधान । जावो विप्र घर थापने, हम किसके जजमान " मोजोराम-साची बात है। अाज काल ऊठे दयाधर्म को देश निकालो हो रिह्यो है। भादर मानने तिलाजली दे राखो है। जठे तो वा होरही है- { "पातीको नाम शहजा. जातीको नाम गुलसफा।" । ' गोपीराम-(भोलाराम रंगलालने ) बोलो! थे लोग के न्यायाया वो काम बापाया ना? रगलान-काम बणानेमें घोडीई कसर रासे घा1 प्रमो काम जडाज कम्याया हा कि, पूत कद दिना ताई याट - , राजसी। भोलाराम-दमी गाठ लगा दई है जिको ऊ का बाप कोई खोल्योडी कोनो खुलै । गोपीराम-चोखो काम करो। रूपया पोसा चाये जितगा और लेज्यायो। रोकाडियाने को दियो मागोगा जितणा दे देवेगी। रगलाल-सोके पाट है। वाम पातरियो । चाये घा जिवा लेवी गया हा। और चायेगा तो घोर लेण्यावागा। देगियो एक पाट दिन में घी धार पगाई पापडगी। गोपीराम-पापणे प्रगा पउनेको के काम * । पगा पडनू प 1 - - - - ढलती फिरती छाया नाटक। होय तो मोजीरामजी महाराज मोजुद है। मोजीराम-इसा टुष्ट धादमोने मेरा पग छुवाकर किसा घग अपवित्र करणा है। रंगलाल-(मुलककर ) वो किसी भगी है ? बाणियुना है। मोजीराम-जिको प्रादमी आपका मनमें आपने -बडो समजे, दूसराने छोटो समजे, निको भगोसे वो वेसो होय है। भोलाराम-साची बात है। में के सक है। रगलाल-(गोपीरामने) पब तो म्ह लोग जावा हा। कुबदकी जड तो रोपई दई है। इव पेड होय, फल लागें जिका देखलियो। पण देखियो, फल तोडो, जणा'म्हाने बी नौगा जरूर करा दियो। गोपीराम-जरूर ! जरूर।। भोलाराम-(जठकर ) अच्च्या तो, जयगोपाल । { रगलाल भोलाराम जाये है। मोजीराम-मे वो मकान जाज हु । गोपोराम-क्यु । के जलदी है ? मोजीराम मुरलीने 'अजबघर, अलीपुर को बगीचे दिसावार ल्यावणु है। गोपीगम-चालो, जीमणे को बपत् होगयो। मैथी घालस्य । मोजीराम-भोत ठीक है, चानो। गाडी त्यार खडी है। (दोन जावे ) - । + t
28
१
दलतो फिरतो छाया नाटक।
प्रवेश पांचवो
.
.
ठिकाणी गोपीराम मुरलीधर को मकान ।
-
(गोपीराम निझमी बैठ्या है)
गोपीराम-देखले । विपता का दिन वो नौसर गया है।
पोरन रास्यां सो प्यु छोय है। या याद्या कारें है
"धीरे धीरे धीरिया, धीरे मब कुछ होय।
मानी सीचे केवडा, रितू पाया फल होय ॥"
लिझमी-रामाया कदे पोन्डा दिन वो पावता क कोनी
धानता। मैं तो घणोंई तकलीफ भोगी है। थारे भाया
पीछे घणाई दोरा दिन काया है। थारे प्रास्ता थोडा भोत.
कोई बोन्नता वतनावला, प्राता जाता, जिका बो भावण से,
बसन्नावणसे', गया था।
गोपीराम वायली। शादमो पर थोडी भोत विपत वो
जरूर पड़गी चाये। विपतामई वेरो पय्या करे है कि,
हाण पापणु है और कुरा पगयो है। वा कया करें है-
"विपत बराबर सम नहीं, जो थोड़े दिन होय ।
माई बन्द घोर मित्रवर, परखि प. सब कोय"
लिझमी~या तो ठीक है। पण विपता तो सगलौ
रिया न्याई है। विपताका दिन बरस बराबर होज्याया
फर है। चार पाया पोछे दिन भोत दोरा पाया है। मेरी
Y
। दानती फिरती छाया नाटका। जीवई जागो है। ज बखत के जाणा के होगयो रामायो मन लाग्योई कोनी। रात दिन पडौ २ सस मारवो करतौ। - 1 गोपीराम-या तो साची बात है। मोट्यार बिना लुगाई को कैया मन लागै। पण यो पापी पेट रा या श्रादमो ने रेणु पड़े। लिछमी-थे देशमें इतणा २ परमोद लागवे था कि, देशमें रुजगार हो ज्याय तो, देशका श्रादमियाको, तवालीफ मिट ज्याय। सो खालो कैण कोई बात थी के ? दूसरोंनेई सोख सिम्बावे था के ? घे बी वाई करे था के-"याय गरजी कातरा मारें, लोगाने परमोद सिखावें।" । गोपीराम-के समजे है। हे वै पादमी नई हा, जो कह्या करें है-“पर ऊपदेश कुशल बहु तेरे।" 'म्हे बी से देशमें इशा २ काम चल्लु कर दिया है जिका ठीक साथ चल ज्यावेंगा तो, देशका प्रादमी-देशमई बैंठ्या मोजकरबो A करो। लिझमौ-चोखी बात है। जिको , लुगायाका धणे परदेशमें रवे है, जाणका पती देशमई रैण लाग ज्यावगा तो वै बिचारी घणीई पासीस देवेंगो। गोपीराम-" मे के सक है। म्हारी समज में लुगायाने दिसायर बुलावणु बी महा मूल है, क्यु कि, लुगाया परदेशमें आवताई निकम्मी हो ज्यावे हे। काम काज अण्णा में - ५ . ॥
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८.४ - ढालती फिरती छाया नाटका। जीवई जाग है। ऊ बखत के जाणा के होगयो रामाग्यो मन लाग्योई कोनी। रात दिन पडौ २ सास मारवों करतो। गोपीराम-या तो साची बात है। मोट्यार विना लुगाई को कैंयां मन लागे । पण यो पापी पेट राख्ने जया श्रादमो ने रेणु पडे। लिछमौ~-थे देशमे इतणा २ परमोद लागवे था कि, देशमै रुजगार हो ज्याय तो, देशका श्रादमियाको तकलीफ मिट ज्याय । सो खालो कैणे कोई बात थी के १. दूसरोंनेई सोख सिखावे था के ? थे बी वाई करे थाके-"माय गरूजी कातरा मारें, लोगाने परमोद सिखावे।" गोपीराम-के समज है। म्ह वै बादमी नई हा, जो कद्या करें है-"पर उपदेश कुशल बहु तेर।" म्हे अधी सें देशमें इशा २ काम चल्ल कर दिया है जिवा ठीक साथ चल ज्यावेंगा तो, देशका श्रादमी देशमई बैठ्या, मोज धारबो , वारी। . । . । . लिछमी-चोखी बात है। जियो लुगायाका धनी परदेशमें रवे है, उणका पती देशमई रेण लाग ज्यावेगा तो वैविचारी घणीई पासीस देवेंगो।। गोपीराम, अमे के सक है। म्हागै समन में लुगायाने दिसावर बुखावणु बौ महा मूल है, क्यु कि, लुगाया परदेशी श्रावता निकम्मी हो ज्यावे है। काम काज जणा सेन १ +
-
"
ढलती फिरतो छाया नाटका।
कराणसे मन्दाग्नी में पीडित होकर वे अापको अमून्य जीवन
नाग कर लेवे है। आवे है पाराम के ताई, उलटो को
लेश हो ज्यावे है। वा हो ज्याय है-“चो गयो घो
छब्वे उगने, होगयो दुब्वे। दो गाठका ओर खो बैठ्यो ।”
जिकी बात होच्याव है।
(इतणाम मोनोराम मुरली भावे है)
मोलीराम-(मुरली कानी हाय करकर) आज तो मैंने
भोत भोत तमाशा दिसालाया। कालीघाट, अजवघर, अली
पुरको बगीचो, दुलौचन्दको बगीचो खूब अशेतरा दिखा-
च्याया हा।
मुरनी-(नाड हलाकर) श्रा-हा-रे। अाज तो
खुब तमाशा देया। भोत मजो पायो ( मोजोरामने ) वावा
इब तो राधाकिशन बोन। (गाकर)
"दमडीका नेल कढेपयामें, गदाकिशन अटेयामें ।"
मोजीराम-बसो ? देखा, मागेने के के मार्ग जायगो।
सुरनी-पाच्यो २ इव कोनी कऊ ।
मोजोराम-(गोपीरामने) आज तो घमडौडाने गाडीमें
व्यो देग्यो थो, जिको जुतिया मासो सो मूडो छोरियो घो।
गोपीराम-कच्या कर है-“देशवाली टारडी पूर्वीचाल ।
चन पाकर गर्व करण सोस्योई है। घणुई बैरो पटग्यासी।
को को तोन् फारमायो तिगरी नागोई है। सो सगलो धमंड
मम पापई उडन्यासी।
ॐ.
-
ढलती फिरती छाया नाटक।
मोजोराम-हा।
या वात जरूर है। गरम करें नको
तिकबो जरूर चोडे आज्यावे है। ऊने या लीछमौजी
प्राप्पई छोडकर चली जावे है। कह्या बो करें है-
"अभिमानीसे माया बोलो, में रासे चाली।
खाट गूदडा सिरपर धरले, हेलो करदे खाली ॥"
पगा इसी करो जिको ऊ'को नाग धनासो ऊड़ती फिरै।
गोपीराम-धापातो कोईको बौ बुराई नई चावा हा।
पगा ऊ का किरतब इसाई हैं जणां के छोय। ओर
आपण बुरो कम्योडो वो के होय है। आछी न्याऊ करणियु
तो परमात्मा है। वा कथाकरे है-
"कोन किसीको मारता, कोन कर वहाल ।
सब बातीका करणिया, दीनानाथ दयाल ॥"
मोजोराम-सेठजी। यो कन्नजुग है जिको करजुग है,
"एक हाथ करो एक हाथ भोगी।" सतकाल परचो मिले
है। इलया ओर ठाडा कखोडाको फल तो भोगाई
.
गोपीराम-अच्छया इब तो पापणे वी चालो गंगाजीका
ओर पचमुखी हनुमानजीका दरशण करवावा ।
मोनोराम-चालो जठौनई बाबा भूतनाथका दरशष्य
--
घी कारखावागा।...
+
गोपीराम-ठोक है। (दोनू जावे)
--
।
ढलती फिरतो शया नाटक।
* प्रवेश छटो
ठिकाणो घमडीलाल गिरधारीलाल की
टुकान
-
(घमडीलाल बैव्यो है)
-
गयो।
घमडौलाल-(मनमें ) देखो। कारमको बात है। क्यु
गलाल में तकरार करता ओर क्यु ये हाल होता। साची
बात है-गरब गूमान आजताई धरती, पर भगवान कोई
को राख्यो नई। देख ल्यो, हाध को हाथ परचो मिल
धन पाकर दूसरा की आत्मा दुःखाणी, दूसराने भाप
से छोटो समजकर णाकी निगासे देखण, महा मूरजा को
काम है। पण धन मिलगो में मूढ घडी श्रावे जणां पादमी
सो क्यु भूल ज्यावे है। ऊनको माफिक सुजण से रै ज्यावे
है (मोतीलालने ) बोलो, मुनोमजो। इन के कारगी चाये।
मोतीलाल-पी बतावा! भोत मुस्कान हो गई। में
तो थाने पैलाई वाही थी-फाटका कावाडा मत यारो।
फाटका का तो येई हाल हैं। कहा करें है-
"करो बेटा फाटका, घरका रिह्या न घाटका।"
धमहीलाल-या तो कोई बात ना। गोपीराम फाटका
में या किरोडपती हो गयो।
मोतोलान- की क्य बात दारी हो। ऊ की मा तो
.
ढलती फिरती छाया नाटक। -- - - । । मोजोराम-हा। या वात जरूर है। गरम दारे जेको तिकंबो जरूर चोडे आया है। जने या, लोछमौनी प्राप्प ई छोडकर चली जावे है। कहा बी करें- "अभिमानीसे माया बोलो, मैं रासे चाली। खाट गूदडा सिरपर धरले, हेलो करदे खाली॥". पण इसी करो जिको को लांग धजारो ऊड़ती फिरें। गोपीराम-आपातो कोईको बो बुराई नई चावा हा । पण ज का किरतब इसाई है जणा के होय। ओर प्रापणु बुरो कग्योडो बी के होय है। श्राछी न्याऊ कारणियु तो परमात्मा है। वा कह्यावार है- "कोन किसीको मारता, कोन करे वेहाल । सब बातोंका करणिया, दीनानाथ दयाल ॥" मोजोराम-सेठजी) यो कलजुग है जिको करजुग है, "एक हाथ करो एक हाथ भोगो।" ततकाल परचो मिले है। हलवा ओर ठाडा कग्योडाको फल तो भोगणुई पड़े है। गोपीरामे-अच्छया इब तो आपणे बी चालो गगाजीका और पचमुखी हनुमानजौका दरशण करयावा। मोनोराम-चालो आठौनई बाबा भूतनाथका दरशण : बी कस्यावागा। गोपीराम-ठोक है। (दोनू जावे है) 1 , । 1
।
.
ढलतो फिरती काया नाटक।
कि इव के रूई में भोत घाटो है। जगाई सगला जगा
जट गया।
मोतोलाल-मालम होगी के बाकी रवे थी। या तो
डकै को चोट बात हो रही है।
धमडीलाल-(मास लेकर ) ईश्वर तेरी माया । इव तो
तुइ रिछा करण वालो है। पूब या भाबरू राखणी और
खोणों तेरेई हाथ है। भागेने तो मैं भोत ममज २ कर
चालगो। फाटको कदे बी नई करू गो। सबने एक समान
पक नजर से देख्नुगो। गरोब को सदा ऊपकार कारु गो
कदेबो कोई को तिरस्कार नई का गो।
मोतीलाल-या साम माया तो काम चाले कोनी।
। काम तो चालसो रुपया सें। सो, रुपया की ऊपाय कारो।
नई तो या मोतीको सो श्राव अतरता बार कोनी नागगी।
पीछे गई बातने घोडाई कोनो नाव. गा। हाय मसलताई
रह व्यावोगा। बेरो है क ना?
घमंडीलालमोतोलालजी! या मोतीको सो प्राव राखणो
पूव चारई हाथ है। मै तो सेंग बैंग हो रिहो हु । .
बखत मरेतो क्य ई बात कोनी ऊपजे । धेई म्याणा को
कोई ऊपाय सोचो।
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I - " । । " वा ढनती फिरती छाया नाटका। अनेई जायो है। ज को प्राप्याम सौल कितणी है। कितणा २ परोपकार का काम वारे है। रात दिन टूमराको भलाई मैं लाग्यो रवे है। धमंडीलाल-या भलाई कवो। असल बात या है कि, पापणे लोगाको फाटका कबाडा करने को काम नई है। वा कह्या करें है-"किसबी किसब करे तो छाजे, नई मुड घेसली बाजे।" अ में प्रस्मानो सुलतानी होता बार कोनो नाग। ये तो घर ज्यागो मर ज्याणी या खेल है। मोतीलाल-फाटका कबाडा को तो येई बात है कह्या करें है-"अहो चुको धार मारो।" जरासो ध्यान जक चुक होणेई से अमें खराबी' पेदा हो ज्याय है। पण खैर। बखत सिरपर श्राफत मंड रही है जैकी पैला उपाय होणी चाये। घमडौलान-ऊपाय बी होईसो। मोतोलाल-पौधे के जपाय होसो। वा कया करें है - "घोडी चाये निकासोने, बावडतो सो आये । “फांसी चढ ज्याको, अपोन्नमें छुटा ल्यु गा।" थे बी बोई सांग करो हो। धमडोनाल-एक काम करा। दो च्यार जगासें रुपया पैंचा (सुदारा)मगा ज्यो ।। मोतीगाल-बैंचा ल्यावाने तो आदमी मगले भेज दियो मो सब जगासे फिरतो जबाब आगयो। 1 शाहीन सौ के, सगनाने मालम होगई दोसे है, - 2 - ।
11 ढलतो फिरती छाया नाटक । कान कटाया करे " सो मोको इसोई है वे लोग जितणा पेंड भरावेंगा जितगणा पेंड भर देवागा। मोतोलाम-ठोकाई है। वा कया करे है- "अड गावमें रंणु जट बिलाई लेगई हाजी २ करो।" पानी बग्नत वै घरपरई मिलेगा। सो भगवान चाये तो पापण काम शिद होज्यायगो । घमडीलाल-चालो, मैं त्यार हु । (दोन जावे है) . , - 4 ® प्रवेश सातवों ठिकाणो गोपीराम मुरलीधरकी बैठक। . ।" (गोपीराम मोनीराम बैठा है) - - - - गोपीराम-धोनो, मोजोरामजी म्हाराज ! प्रान' कैया भणमया हो रिया हो। मोनोराम-के बता! पाज तो वा हुई- "भूनगई रागरग, भूनगर्दै जकडो।,, सोन चोन याद रहो, तन्न स्तुण लकडी" । -
पा
१००
ढलती फिरती छाया नाटक।
।
कर न्यो। वो दयावान आदमी है। रगलाल, भोलाराम
बी ऊका काह्या में है सो वो जणाने बी समजा लेवेगो। गोर
पापण सगली रस्तो आपई ठीक कर देवेगो। आपा वाणिया
हा। कदे मुछ नीचेने, कदे ऊपर ने बयाई होती
रखें है।
घमडोलालल्या बात होणेसे गाव तो श्रापान भागलियां
सें बतावण लाग ज्यावेगी।
मोतीलाल-अब्बलमें तो गावने बेरो कोनी पटै। अगर
पटे वो तो के पाट है। आपणु काम पार ऊतरण, चाये,
कोई ना कोई सुरत स वे लोग राजी होणा चाये। पीछे तो
कह्या करें है-"दोयको दिन राजौ, तो के करेगो वानी।"
पापाने समार को चिरचा स के मतलब है।
घमडोलाल-पापणे चालणे सें मानेगा या नई
मानमा अबातको के निसचे।
मोतोलाल-निसचे क्याकी है।
या तो जएको खुशी
को बात है। चल्या चानो देखी जासी पीछे तो या वात है-
“हाकोम करे सो न्याव और पासो बडे सो डाव।" जो कुछ
होणो मोहोज्यायगौ ।
घमडोलाल-खेर। थारे जचगई तो चल्या चालो।
कहा करें है-"पढो बेटा फारसो, तले पडसी सो हारसी।"
आपां में बरात सगलौ बाता के नीचे दब रिशा हा
सो प्रागला की कुशामद कर लेवागा, क्य, कि "दवी धुती
ढलती फिरती छाया नाटक ।
है सो अन्तम यो सोदा पगा हो ज्यावेगो तो फेर बी बत्त
ज्यावेगो।
रगलालयाई बात तो मजेदार होगई। इब नोल
आपणा हाथमे आगई। मनमें भावेगो नठोने घुमावागा।
मोजीराम-घूमाणु फिराण के है। बैरीसें तो बदलो
लोए ई ठीक है। इसो मारो च्यारू हाथ पग ऊपरने करकर
चौत्त जापर्ड। हेकडो सगली चोडे आल्याय । काच
बातोसो पापडे।
भोलाराम-फिकर मनावारी! इसीई ख्यो, पूब ततका
दाव पा भिधा है।
मोजीराम-फिकर क्याको है। फिवार तो घणा खाया
को है। म्हे तो आजकाल कुल तीनसो तोलामें पा रिया हा।
भीन्नाराम-बाबाजी। पूणो यार सेर तो खावो हो
और के पीछे हाथी घोडा खाय था ?
मोजोराम-म्हाने वेरो कोनी बादमी बी हाथी घोडा
खाया करें हैं। या बात तो थारौई जबानी मालुम हुई।
कोड जगा काम पडगयो दीखे है ? जणाई या मोटी २
खायोडोसौ होरही
-मावाज, के ऊटपटाग बात करण लाग गया।
राधेश्याम !! कही।
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ढलती फिरती छाया नाटका।
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गोपीराम-या कैया। धार मस्त पादमियाकै फिकर
को को काम?
मोजीराम-(चिट्ठी दिखाकर) या देखो। देशको चिट्ठी
अाह है जिको लिस्यो है-छोरो बडी सारो होगई सो फेरा
जरूर करणा पड़ेगा। रुपयाको बन्दोबस्त कर लीयो।
व्यामें रुपया एक हजार चायेंगा।
गोपीराम-जणा के आट है (एक हजारका लोट
निकालकर) ये स्यो। छोरीका फेरा करदियो और चाये तो
ओर ले लियो।
मोजीराम-(रुपया लेकर) बस।
आनन्द होगया।
भोर चायेंगा तो थे मालिक वैव्याई हो। मने के फिकर है।
(इतमामें रगलाल भोलाराम पावें है)
रगन्नाल-देख लियोना। घमडौलालको रो घमड नोसर
गयो है। इसो जथलवार माग्यो है जिको पूत ऊठायोडोई
जठसी।
भोलाराम-बोतो जठ लियो। ऊंका बडका सात
ओतार धारण करकर पान्याय तो ऊठणु ई नई।
मोजीराम-(मुलककार) भरम २ में चोखो काम,वणायो।
थारे लोगा विना ये काम कुण करतो। साची कही है-
"खेल खिलाराका, घोडा असवाराका ।
दुकानदारी भरमकी, हाकमी गरमको।"
गोपीराम-एक बात है-काम आपणे हाथमें भागयो
-
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1
दलतो फिरती छाया नाटक ।
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है सो अन्तमें,यो सौदा पगा हो ज्यावेगो तो फेर बी बच
ज्यावेगी।
रंगलाल-याई बात तो मजेदार होगई। इव नकेल
आपणा हाधमें पागई। मनमें भावेगो जठोने घुमावागा ।
मोजीराम-घूमाण' फिराण के है। बैरीसें तो बदलो
लोणु ई ठीक है। इसी मारी थारू हाय पग ऊपरने करकर
चौत्त जापडे। टेकडी सगली चोडे भाज्याय । काच
बातोसी पापड़े।
भोलाराम-फिकर मनाकारो। इसीई न्यो, य ततका
दावा भिधा है।
मोजीराम-फिकर क्याको है। फिकर तो धया खाया
को है। म्ह तो आजकाल कुल तौनसो तोलामें आ रिया हा
भोलाराम-बाबाजी। पूणो च्यार सेर तो खावो हो
पोर के पीछे हाथी घोडा खाय था ?
मोजोराम-म्हाने वैरो कोनी थादमी बी हाथी घोडा
खाया करें है। या बात तो थारौई जवानी मालुम हुई।
कोई जगा काम पड़गयो दोखे है? जग्गाई या मोटी
देई मूसा खायोडोसो होरही है।
। रगलात-वाबाज, के ऊट पटाग बास कारण लाग गया।
राधेशाम। राधेश्याम !! कहो।
'मोजोराम-क्युज चोरटानी बापको क्य, दो' आवे है
के ? सीताराम सीताराम !! बोलो!
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१०४
ढलती फिरतो छाया नाटक ।
गोपौराम-वाह।
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या खुब हुई।। वा कथाकरें है--
"कोई गावे होलीका, कोई गावे दिवालीका" ये राधेश्याम
राधेश्याम कवे है, थे सीताराम सीताराम बोलो हो।
(इतगामें सुरली प्राव है)
मुरली-(नाड़ इलाकर) बाबा, राधाकिशना बोल तेरा
क्या लगेगा मोल।
रगलाल-(मोजीरामने) बोलो। म्हे के करा । टाबराई
थारो खिज काड राखा है। जैको के ऊपाय ।
भोलाराम-वे के करें! अण में तो बा हुई “एक पेठो
नो लगवाल, गधोने ले गयो कोटवाल।" सगलाई जणा
अपने खिजावे हैं।
गोपीराम-(मोजोरामने ) थाने कोई खिजावे जमा थे
चुप हो ज्याया करो। क्यु ई मत बोल्या करो।
मोजोराम-म्हे किसा चोर हा जिको चुप हो ज्यावा।
चुप चाप तो चोरई रिह्या करें है। वैई कोनो बोल्या
चावें। कही बो तो है-
"माली चाहे बरसणां, धोबी चाहे धुप।
साह जो चाहे बोलणा, चोर जो चाहे धुप ॥"
म्हे तो साह हा, चोर को नाम तो लेवाई कोनो, बोन्या
विना कया रवा।
(तणाम घमडोलाल मोतीलाल पावें है)
घमंडोलाल-(मोतीलालने) भीको तो चोखो मित्त
दलती फिरतो छाया नाटक ।
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गयो। अबखत मगला जग्या मोजुद है। चोकडी को
चोकडो भेलो हो रही है।
मोतीलाल-वस, भगवान चाये तो दूब काम बण
ज्यामो। थे तो अ बखत जितणी नीची खी चणे सको
खीच ज्यायो क्य की मोको ईसोई है ।
मोजोराम-(मनमें ) आज तो मुनीम मालिक दोन
आवे है। पूताके पोखाला होगया, काच भारो दीण लाग
गई, गड़वा में भेर होगइ (कपरमे ) “देखो मरदाको इथ
फेरो, या मा तेरो का मेरी।'
घमडोलाल-(गोपौराम का पगामें पगडी धरकर) या
लाज राखगी थारे हाथ है।
गोपीराम-है। है। ! धमडीलालजी यो के। थे बडेरा
हो ( पगडी ऊठाकर धमडीलालने दें देव है)
धमडीम्नान-- बखत दुनियामें या सिवाय कोई नई
है ( रगलालने ) मेरे से जो कुछ कसुर हुयो होय माफ करो।
में काग्या को फल चोखो तरा पागयो।
मोजोराम-क्य ! बाकी होती भोर कर कर देखल्यो।
अपका पगामें पगडो के धगे हो, मेरा पगामें धरी ज्यु पर
लोया में मोच होज्याय ।
भोलाराम-बाबाजी! पेला लोकको तो मोध
हु गणयो। परनोक को वात पोछे परियो
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- ! । - । । दसतो फिरलो छाया नाटक। घमडोलान-(हाथ जोड़कर) मैं तो धारो सब को दास हु । कोई सरत में मेरो उद्धार करो। गोपीराम-(रंगलालने) बोलो। इव के करणों चाये ! रंगलाल-देख ल्यो। पाप मालिक हो। जचे जैया करो। म्हे तो थे करोगा जैया त्यार हा । मोतीलाल-(सबने ) आपलोग बावु हो, बडा पादमी हो। दया करकर यो वेडो पार लघावो। गोपीराम-(धमडोलालने) अच्च्या तो म्हे लोग अब हाई पर कोई रकम को जोर कोनी देवागा। थाने जितणु माल डिलेवर दौणु होय आपणो गुदाम पर प्राडर काट दियो सो सगना जण आपेई ढीला हो ज्यावेंगा। सगलो सोदो सेटल होता बारई कानी लागेगा। घमडोलाल-या तो ठीक । पण याजका भावामें बो सगलो सोदो सेटल हो ज्यावेगो तो सो क्यु देय लेय कर, रुपया दश लाख डिफरेन्सका दीणने चायेगा। पोछे, दश पाच लाख र होणे से आगेने को काम चल होगी। गोपीराम-खैर कोई बात ना। आगने प्रतिज्ञा करो मैं गरब गुमान नहीं कारू गो, गरौबा पर दया राखु'गो! किसी को अपमान नही करू गो। (घमडोलान्न प्रतिज्ञा कार लेवे है। गोपीराम बोस लाख को चौका काटकर दे देव है) घमडोलान्त-(चौक लेकर ) भगवान धारो भलो करी। - +
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ढनतो फिरसी छाया नाटक ।
मचे हुबताने जवार नियो में जलम भर थारो गुण नई
भूलगो।
गोपीराम-देखो, यो बेर बिरोदई मोक्याने खराब करे
है। प्रादमीने सब से मिलकर रेणु। यो नदी नाव सजोग
हो गयो है सो मिल जुनकरई रैणेमें भलाई है। कलो
बो है-
"तुलसी या ससार मे, भाति भाति के लोग।
सबमें रल मिन्न चालिये, नदी नाव सजोग।"
धमडीलाल-मेरी तो भागने कोई रकम को
सिकायत सुयों तो एक कानो को मेरी मूछ काट
लियो।
रगलाल-बम तो। सुख पावोगा।
भोलाराम इव तो थार फारम श्रापणा पका होगया।
सगला काम मिल जुलकर होता रहेगा।
मोतीलाल-च्यारवाका नाम तो म्हाने बी बतायो । ज्यु
भागने नोगे तो बणों रखें।
मोजीराम-ल्यो म्हे बतावां। सो-
(१) बाबु गोपीरामजो मुरलीधर ।
(२) बाबु रगलालजी रामगोयाल ।
(३) बाबु भोलारामजो भीवराज ।
(४) बावु धमडोलालजी गिरधारीलाल ।
मोतीनाल-भीत ठौक।
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ढलती फिरती छाया नाटक !
मोजोराम-जो हुकम (त्यारी करे है)
(इतग्गामें हरीप्रसाद घाव है)
गोपोराम-हरीप्रसाद एक काम कर।' म्हे आज देश
जागोको मन सुबो कर लियो है, सो हबडे 'जाकर श्रापणु
सगलो असबाब बिरगतम लगायाव और एक सिकन को
डब्बो नारनोल को रिजाब कगयाव ।
हरीप्रसाद-बसी के। चाण चुकोई के ध्यान में पागई।
पाच्च्यो मैं असबाब लेकर जाऊ' हु । श्रने बिरखमें लगा
कर, गाडी रिनवं कराकर बी आऊ हु ! दो जमादाराने
साथ ले ज्याऊ' हुँ जिको माल' लगाता रहेंगा मै, झटपट
गाडी रिजाब कराकर पौछो प्रान्चाज गो ।
गोपीराम-ठीक है।
(इरोप्रमाद,जमादाराने तथा असबाब लेकर प्रष्टेशनपर जावें है)
लिछमी-(गोपोगमने) चालो में बखत दो एक काम
वो आपाने करणां है, जिका बो हो ज्यायगा। पीछे मजेमें
बठेई रवागा। अठे तो रामारी मादगी सेई पीडी, कोनी
.
.
छुटै।
गोपीराम-या बात ठीक है। पापणी नई हेलीको
नागल बौ हो न्यायगो। और जसरापुर का सकट मोचन
श्रीहनुमानजो के एकबर चालणु है जिको मैलो योह सुदी
१५ को नजोक पागयो सो जठे बी चाल्यावागा।
कि
पेला पोत कलकत्ते जिके टिन पाया जणा मनमें या प्रतिमा
टलती फिरती छाया नाटक ।
करी थी कि आपणु भाग परताप चोखो हो ज्यावेगो तो
महाराज के मेले में जरूर सामिल होवागा सो वा प्रतिज्ञा
यो पूरी हो ज्यावेगो।
मुरली-काकोनौ। जसरापुर को मेलो किसोकधीय
है। मन बी बतावो?
गोपीराम-बेटा! भोत चोखो होय है। भोत र
रकम का तमाशा हुया करें है। कई किसम को दुकानां
लग्या करे है। भोतसा आदमो मैला हुया करें है। बालाजौको
मूर्ती भोत सोवणो, नडो सारा है, जैका दरशण से भोत
प्रानन्द पाया करे है।
मोजौराम-पोर देखी है क ना? मन्दर में एक कानो
बाबा भोलासिभूकी मूर्ति किसीक सागो पाग है, जाण्य
साच्चाई म से बोल पडेगो ।
मुरली -जणा तो इव के मेलामें जसरापुर में बी चालु गो।
गोपाराम-तने तो जरूरईले चालागा।
कह्या करें
है-"गुड बिना किसो चोथ।"
( इताणांमें हरीप्रसाद पावें है)
हरीप्रसाद-इस्टेशन को काम ती सगलो त्यार है। इन
थारी बोली के सेक्षा है।
गोपीराम-म्हे बी त्यार हा ।
मोनौराम-महारो मौतारामजी बी त्यार है।
गोपौराम-ब मगला लगा जीम जुठ कर व्यार हो
--
मारवाड़ी बोली में अपूर्व पुस्तक ।
कालविकाह-नाटक
मारवाडी समाजमें बालविवाहको बडी कुचाल है।
कितनेही महा पुरुष अपनी बडी लडको का विवाह धनवानो
शेटे लडके के साथ कर देते है। बर पिता भी धनवान की
नडकी समझ कर कुपरिणामको न देखता हुआ इस अन्ध
कूपमें गिर पडता है। इस अनमेल विवाहका वौसा बुरा
नतीजा होता है सो इस पुस्तकमें भलि प्रकारसे दिखाया
गया है। हम इमकी ज्यादा तारौफ न करके सिर्फ इतनाही
कहदेते है कि यह पुस्तक मारवाडी भाषाके विख्यात सुलेखक
बाबू भगवतोप्रसादजो दारूकाको खाश लेखनौसे निकली
है। पुस्तक शिक्षाप्रद होनेके मिवाय दिलगीका भी भराडार है।
मुख्य डा."
पुस्तक मिलनेका पता -रामलाल नेमाणी,
अध्यक्ष रामप्रेस कार्यालय,
५८, काटन ट्रीट, (अफीम चौरस्ता) कलकत्ता।
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