Shri Jain Swetamber Khartargacch Sangh, Jaipur

Kaivalya Shamapan Divas Ke Avsar Per Prakashika Smarika

Bhanwat, Narendra · 2011/03

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कैला 4hd Haporn + -- क्षमापना दिवस के अवसर पर प्रकाशित स्मारिका गम्पादक मानत ; : डॉ. नरेन्द्र भानावत श्रीमती सन्तोष पटना । श्री सुधील मावन [ श्री प्रवीण लोटा F: श्री सुनील मुरगोत । श्री उत्तमचन्द चपताका विज्ञापन मग श्री कृष्णकान्त मेहता | श्री जयकुमार लोहा श्री मिनाप पर जैन । श्री गुरेन्द्र कुमार जैन श्री मुगाल मूमन्न श्री फतेहसिंह घटिया श्री स्नेह मार नमागे '! श्री सुशीलचन्द निपी श्री शरद चौररिया श्री सुरेश कुमारजन (CA } श्रीमती मंजु पगलिया " श्री जैन भवताम्बर संघ (संस्था) { པ༑ སྐབསམ PAN win -~- Mayanti Horoline -Mew 1992 P- ------Hair Na Iranior and- Watranay karwa

विकास सराहनीय
धर्मनाभ
।
मह विदित हो नि पापा पर मिना ।
ममाचार जाने।
महानोर माधना गन्द्र में विभिन जैन मप्रदाय एकता के
मून
मे पाग घट रहे हैं। तमान समय मे पाप धीमर जो विमाग
दिया है। मगहनीय है।
अपनी 2 मारना लि हानी यदि मगठन मजब्त कर,
मिन-जुन र हिमा, अनवान ग्रो अपरियह मा प्रचार हो तो
जैन धर्म की जय-जमारहा मातीह।
आचार्य विजय इन्द्रदिन्न सूरि

animaesarmer RAN weduIRENatashante htratimama ६ 1 अनेकान्त दर्शन दर्शन का का साक्षात् प्रतिबिम्ब HTw teevr * का L । 9 . rapan At Pres नीर मामा महाबोर का गलना, गहना न कमाय-मनि, काही मोक्ष का माधन बनाया है। बाय किया मारयदर की गति का उपाय है। उनका यही उडेट-पानी मागचा विनागही! कगाय-भावों की उपस्थिति में मिला नगात गावान नहीं करना । यह नाविनित्र जगना-- महावीर प्रभाकर में बात ही या क्रियामा लोकरकपाय-त्रा उपार्जन करते हैं। अनेक पथो, गानो, मरदायों में बना कर-गानन अनेकानका उपदेश देना. वय उनके आचरण नया नियम हो गया। पर नेता के जागीलं नारे लगाने वादा आमा- वर्ग भी अन्दर में गच्छ-मनाग्रह की नानां फलाकर दिन का निर्माण करना है। यह अन्यन्न दृखद परिश्रति है । जी बिगता में जवाहरनगर का जन चे या नगद मन्यनाः उमग. जहा किमी भी श्रपिता नपदाय मा गगनी है. जिन निरा मान्यनामाचरण में तो यह आपकी पागबना नाचान करने में बिना पर से महावीर नान्नजना गा मालान .. महिनी वादामी::ति को . madmava avireate न " o- MAMA TV htnepal J है 1 - m N wroad 27 नी M + Jhar A . . । - . Srry + 1 , Mait +++ Jer . d- N . 2 स जैन समाज के लिये आदर्श श्री जैन श्वेताम्बर मघ जवाहर नगर, जयपुर सम्पूर्ण जैन ममाज को एक ही स्थान पर पूजा, अचना, माधना, मामापि, म्वाध्याय उपासना, अाधना की पृष्ठ भूमि नैयार कर जन एकता का जो मम्बार मूलक वातावरण निर्माण कर रहा है, वह वतमान युग की आवश्यक्ता तो है ही, आने वाली पीटी की अनिवार्यता भी है। हम जैन के नाम पर एकत्व की अनुभूति करें और एक माथ बैठकर सामायिक स्वायाय करे तो मचमुच ही हमारे हृदय एय सूत्र में वध मकेंगे। श्री जैन पवेताम्बर मघ की एक्त्व मूना दष्टि ग्रार कार्य विधि ग्राज ममम्त नगरी, महानगगे के जैन समाज के लिये आदर्श है । मप्रेरक है। मैं हृदय से कामना करता हु कि भगवान महावीर का समताप्रधान जैन मघ, "ममत्व" को जीवन व्यापी बनायें और एकत्व को राष्ट्रीय शक्ति के म्प मे प्रस्तुत करें। भविष्य की अनेक शुभ मभावनायो की अपक्षा के माथ श्री चन्द सुराना 'सरस' देखना, मम्पादय, परमार ग्रागग सम्प्रदाय को एक जुट करने मे अग्रसर मुझे यह जानकर बदी प्रमानना हुई कि श्री जैन श्वेताम्बर संघ, जवाहर नगर, जयपुर अपनी म्मारिका का नीमरा प्रय प्रकाशित कर रहा है। मुझे यह जानकर पार भी प्रमाता हुई कि जैन श्वेताम्बर मघ के अन्तर्गत दम केन्द्र मे जैन श्वेताम्बर मतावलम्बियो के विभिन्न मम्प्रदाय अपने-अपने तरीके से पूजा अर्चना, मामयिक, स्वाध्याय करने है । मैं आशा करता ह निमघ जैन मम्प्रदाय को एकजुट करने में अपने प्रयत्नो मे अगमर होना रहेगा। मैं मघ के प्रयामो की मफनता की कामना पिता हूँ । चन्दनमल बैद मदम्य राजस्थान विधानसभा दलीय जैन धर्म विश्व के प्राचीनतम धर्मों में से है । प्रकृति के नियमों के अनुसार इसके सिद्धान्त विकसित हुए है । जैन परम्पग में यात्मा के बनाव को ही धर्म कहा गया है। प्रात्मा का स्वभाव है-क्षमा, विनय, भारल्य, मन्तोष, सहिष्णता. करुणा आदि । इन गवृत्तियों को विकसित करने के लिए ही धर्म की माधना है । जैन शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि सरलना और शुद्धना में ही धर्म टिकता है । पर विडम्बना यह है गि विज्ञान और तकनीकी विकास के साथ-साथ जीवनयापन की सुख- सुविधाएं तो बढी हैं, कला-काजल, वाणिज्य-व्यवसाय और रहन-सहन के नीर-नीकों में युगान्तकारी परिवर्तन आया है । वस्तु और पदार्थ की गुगायजा को निखारने में आज की तकनीक लगी हुई है । पर अात्मा का वभाव प्रदूषित न हो, विकार और विभावग्रस्त न हो, इस दिशा में कोई मार्यजनीन तकनीक विकसित नहीं हो पाई है । परिणामस्वरूप मनुष्य शारीरिक स्टि से मन्द्रिय-स्तर पर सुखानुभूति भले ही करता हो, पर आत्मियः ग्टि में मानसिक स्तर पर वह कुण्ठित, निराश, हताग और मनायगान है । बन्नु की गुणवत्ता का निवारने में तो वह दिन-गत एक किये जा रहा है, पर व्यक्तित्व की गुणवत्ता बनाने के लिए उसके पास कोई टार योजनावनायकम नही है। धगंगानों में मनाय जीवन की 'दुलंग पहा गया है। पर या बनी जनमत्या के विरोट ने मनुष्य जीवन भी लगता पर प्रानfreमा किमा। अयंगाती. नमारमात्री घोर अन्य विक मानिक मोनिन कर उगला को मारने मेधा ना समोर नरनिरागीमा - है A 出逃逃逃出此贴出出出出出出出出逃西路 , 2YYYMYHUbebytbattee आज यह दिव्यता सुषुप्त है । दैहिकता मे ही मनुष्य उलमा हुमा है । उसे आडम्बर प्रिय है, आत्मीयता नही । उसने पदार्थ-ज्ञान के क्षेत्र में विस्फोटक स्थिति पैदा कर दी है, पर आत्म-ज्ञान से वह शून्य होता जा रहा है । स्थिति इतनी भयावह और विकट बन गई है कि मनुष्य की स्वार्थलिप्सा ने उसे उपभोक्ता सस्कृति का दाम बनाकर उसकी सवेदनायो को कुण्ठित कर दिया है । उसकी लोभ, सग्रह और भोगवृत्ति के अतिरेक ने पृथ्वी, जल, वायु सम्बन्धी बाह्य पर्यावरण को ही प्रदूषित नहीं किया है वरन् उसके अन्तर में निहित धैर्य, तितिक्षा, प्रेम, दया, करुणा जैसी आतरिक सद्वृत्तियो को भी जड बना दिया है। वह सवेदनारहित और क्रूर बन गया है। उसका तथाकथित ज्ञान अहिंसा, सयम और तप से न जुडकर हिंसा, भय, आतक, शोषण, उत्पीडन का बाहक बन गया है। परिणामस्वरूप मनुष्य बाहरी चमक-दमक, आडम्बर-प्रदर्शन, नीति- नियमो प्रादि मे तो महान् बनने का दिखावा करता है, पर प्रातरिक रूप मे वह अपने आपमे वोना और भावशून्य होकर रह गया है। महानगरीय सभ्यता के विकास, प्रौद्योगीकरण, वढती हुई जनसख्या के दबाव और आर्थिक तगी के कारण आज सयुक्त परिवार छिन्न-भिन्न हो रहे है । परिवार वालक की प्रथम पाठशाला कहे गये है। यहां बालको को जीवन की गुणवत्ता पनपाने के सस्कार मिलते है । स्नेह, सद्भाव, सहयोग, सहनशीलता, आत्मानुशासन जैसे गुणो का विकास परिवारो से ही मिलता है। परिवारो के विघटित होने के कारण आज का व्यक्ति बचपन से ही उच्छृह्वल, चिडाचिडा, स्वार्थी, सवेदन-शून्य और आक्रामक देखा जाता है। यही नहीं, वह एकाकी, उदासीन, विक्षिप्त और नानाविध दबावो से ग्रस्त रहता है । इन परिस्थितियो मे उसका लालन पालन होते रहने से उसमे मानवीय मवृत्तियो का पूर्ण विकास नही हो पाता और वह भारी भीड मे भी अपने को अकेला पाता है । उपभोग्य सामग्रियो से भरे-पूरे भण्डारो मे भी वह अपने को अतृप्त और असन्तुष्ट महसूस करता है। इस विकृत विपम स्थिति से ऋण पाने के लिए कभी वह सस्ती मनो- रजकता प्रदान करने वाले क्लबो की शरण लेता है तो कभी मादक द्रव्यो के सेवन का शिकार हो जाता है । इस मायावी ससार मे भटकते-भटकते उसका दुर्लभ मानव जीवन निरर्थक और निस्सार बन जाता है । अपने आपसे उसे घृणा होने लगती है और उसका हीरे सा अनमोल जीवन दो कोडी का भी नहीं रहता। यह स्थिति अाज किसी एक देश तक सीमित न होकर सम्पूर्ण विश्व की बन गई है । इमका निस्तारण सही अर्थों में वास्तविक धम के - VI - 出出出出出乎必出出出出逃出进出出出 HENDEN पालन में है। यहां धर्म का अर्थ किसो मत या सम्प्रदाय से न होकर उन यादों और सद्कर्तव्यों ने है जिनसे आत्म-कल्याण के साथ-साथ लोक- पल्याण होता है । जैन धर्म आदर्श नागरिक के कर्तव्यों की विवेकपूर्ण परिपालना पर बल देता है । उसका बल अहिंसा, सत्य, अस्तेय, अस्तेय, इन्द्रिय- मयम और इच्छा-नियन्त्रण पर है। भगवान महावीर ने लगभग साढे बारह वर्षों की कठोर तपस्या और मौन साधना के बाद जो उपदेश दिया. उसका सार यही है कि प्राणी मात्र को प्रात्मतुल्य समझो, किसी को भी मनस्य, वाचा, कर्मणा दुःख न दो, सन्ताप न दो. सबसे प्रेम करो। दुखियों की सेवा करने और दुराग्रही मत बनो । विविधता में एकता के दर्शन करो। भगवान महावीर को हुए आज ढाई हजार वर्षों से अधिक समय हो गया है, फिर भी जैन धर्म, जिसे उन्होने 'श्रमण धर्म', 'निर्गन्थ धर्म' और 'ग्रहंत चम' कहा है, वह आज भी अनवरत रूप से चला आ रहा है । स अनवरण का एक प्रमुख कारण है भगवान महावीर द्वारा चतुर्विध संघ की स्थापना । इसके अंग है-साधु, साध्वी, श्रावक और श्राविका । धर्म तो संघबद्ध करने के कारण, भले ही जिनशासन में कई उतार-चढाव आये, गगा-गच्छ-भेद बने, पर वह विलुप्त नहीं हुआ । उसकी विकास- यात्रा बराबर चलती रही । धर्म की इस जीवन्तता का बहुत कुछ श्रेय गंध को है । 'नन्दीमूत्र' में संघ की स्तुति करते हुए उसे नगर, रथ, चक्र, मामल, सूर्य, चन्द्र, पर्वत और समुद्र से उपमित किया गया है । संघबद्ध होने से व्यक्ति को अपनी आस्था का केन्द्र मिल जाता है, वह अकेला नहीं रहता । उसको समष्टिगत चित्तवृत्ति को फलने-फूलने का उचित अवमर मिल जाना है। प्राज के विघटित होते हए परिवार और समाज में धर्म मंघों को गहती अावश्यकता है । श्री जैन श्वेताम्बर गंध, जवाहर नगर, जयपुर महानगर पाएका fire मध है. जो धामिर. एमता, मागाजिया मोहाई और आमिर मान निमपित है। यहा 'महावीर माधना केन्द्र में जो भनी विग की जा नही है उनमें नाकार-निगमार-पागना और नकी भागधना लिए समान विधार मोर प्रवाः प्राम! , दमका निर्माण किया जानाको बम aft: या मोगा शादिनिए पाना मी कमा। . १ . पालको रममा for Pा , र है * . FM r क सहिष्णुता को सघ अपने कार्यक्रमो को माध्यम से मूर्त रूप देता रहा है । विभिन्न धर्मों के प्राचार्यों, मुनियो, साध्वियो, श्रावको, श्राविकानो के लिए सघ का द्वार सदा गुला हुआ है । यहां की साधना-स्थली पर सरका स्वागत है। 'कैवल्य' स्मारिका का यह तृतीय अफ पाठको के हाथो मे मीपते हुए हमे परम प्रमन्नता है । इसमें जैन धर्म दशन सस्कृति, इतिहाम एव कला से सम्बन्धित रचनाएं प्रकाशित की गई है, साथ ही श्री जैन श्वे. सघ, जवाहर नगर के सदस्यो को पारिवारिक परिचय-भाकी भी विस्तार से दी गई है, जिमका सामाजिक-सौहार्द्र-भाव विकसित करने में अपना विशेप महत्त्व है । पृष्ठो की सीमा क कारण कई रचनाएं प्रकाशित होने से रह गई हैं। इसके लिए हम क्षमाप्रार्थी है । स्मारिका को उपयोगी एव समृद्ध बनाने मे प्रमुख जन प्राचार्यों, मुनियो, साध्वियो, विद्वान् लेखको और विज्ञापनदाताओं से उदारतापूर्वक जो सहयोग मिला है, उन सबके प्रति हम हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं । सघ के पदाधिकारियो, सम्पादक मण्डल तथा विज्ञापन मण्डल के सभी सदस्यो का मै अनुगृहीत हू कि उन्होने मुझे स्मारिका के साथ जुड़ने या न केवल अवमर दिया, वरन् हर सम्भव सहयोग भी प्रदान किया । उनके सहयोग एव मागदर्शन के कारण ही स्मारिका मूर्त म्प ले सकी है । स्मारिका के सम्बन्ध में आप सनकी मम्मति व मुभान प्राम- - वित है। -डॉ० नरेन्द्र भानावत सम्पादक VIII

प्रतिष्टाचार्य पूज्य श्री मणिप्रस
माताजी म. सा. की कलम से
- नगर मे सुचना मिली कि एक मारि ग
सामना कर रहे है और मुलेग भेजना है वैगे मै लेख के लिए काम ही समय
निकास
पासोकि बिहार की स्थिति की समय से चल रही है परन्तु
कार गम के नमाज के बारह गरे अनुरोध बो टालने का गाहस भी नहीं
२२ : गीर देखो देने का की भावनाएं शब्दो की बाहों में बंधने
whapa
-
जगार में गत चातुर्माग चल रहा था और उग अवधि में मुझे जयपुर
है, गनगर बाहर नगर के शावकों से परिचित होने का अवसर भी मिला।
में उनके मन गारन्यय मुरचिसम्पर विचारों की गम्भीरता और कार्यक्षमता
के माबिन मा और संयोग ना बना दिन गभी गूगगों को मने उनमें
गारो हानी देव।।
का र नगर की अनमोल योर अनुकरणीय है समन्वय-बारा जिम
मना समाज एक धागे में विनोया हआ है। वहीं न गन्ना की
नाता पर पारि ती दानमा ! मनी अपनी-अपनी
iran m. पार
पानी लाने हा पर मेरे
नायर करने और सही उनी पूर्व मानि ।
या र दिर का निर्माणमा (विरान गामि
- दामाजी विमान में निधन।
11 "I'नि:।
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को भने प्रदेश में देना उगमी तो मुझे ल्पना भी नहीं थी। गा लग रहा गाति जवाहर नगर पा प्रत्येक पगा उस प्रायोजन पर उल्लमित ही नही है पार्य के प्रनि निष्ठा और नगन में भग भी। चारो यो मभी कोई कार्य में चम्न ही दिम हे ये । लगता था रह प्रतिष्ठा नातावाटी मे दादागुरी नहीं उनकी अपनी कार्य क्षमता गौर गुम्देश के प्रति अटूट आस्था की गेम-गेम मे अभिव्यक्ति है । उनकी लान, उनरे व्यवस्थित प्रापोजन में मैं भी अभिभूत था और उम प्रवेश ममारोह से ती मैने जिमे एक मामा य मा प्रायोजन ही मममा था विशिष्ट समभने हुए अपूर्व पी ल्पना करती। पही कोई विमाद या मतभेद की हल्ली मी मगेच भी नजर नहीं पा रही थी । मुझे भी उनने साथ कार्य करते हुए अनिर्वचनीय प्रानन्द या रहा या क्योकि मारे युवा कायार्ता टिवाद या परम्पगवाद के न तो पोपर थे न मिताफ । उचिन प्रग्नाव चाहे यह परम्परा के मिलाफ होता परन्तु प्रम और जनोपयोगी होता तो स्वीकार करते पार युपा हदय होो हा भी उनित परम्पग के प्रति पूण निष्ठा सम्पन भी। आज अनेको म्यान पर परिभ्रमगा रते हुए पाते हैं नि पर्म TT मर्म पौर उमकी प्राचारनिष्ठा दिन-प्रतिदिन क्षीण होती जा रही है प जब बात पद या मना की पाती है तो अपने आप नोकता के प्रथम म्यान प. पद पर ने ? दूसरी ओर गन्छ निप्ठा तो न्यन हो जाती है पर गच्छवाद जाता है। मै पच्छ निप्ठा चुरी नहीं मानना क्यारि रह जीया का एक मरागत्मा पहलू है पर म गन्यवाद का ममग्न गइया की जर मानता है । आज हम गच्छनिष्ठा पार गन्यार की मद या का भूलार इन दोनो को एक ममक देते हैं में उम भेर TT पट TVा चाहता हूँ तारि पनपती विपवेत को उबाट मके और समाज का नयी दिणा प्रदान कग्य को मजीव, मनिय पौर धर्ममय ना मो। टिनिता मे तात्रय है अनेको पिचारयाग और प्राचार-परम्पी विधि या मम्मान करत हुए अपनी पूर पम्परा मे च ती पा रही प्राचार-पद्धति मे प्रति ममपण मार गच्चाद वा अय है मान अपनी मान्यता पोपण करत हा अय की प्राचारपद्धति की आलोचना । प्रयम मा या म्याद्वाद का पोषण करनी है दमगे मा यता एकान्तवादका । महाबीर रा उ स्याद्वाद पायर रेम्प मे और बान्तवाद को माया के विगेर म हना था और ग्राज समाज में चाय चितन का कैमा योगा गया जिमको करते महावीर के मिटातही पार पट हो गए। X

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राजार की पडिया ममाप्न दुई प्रतिष्ठा मा दिन भी जा पहुँचा । दादा गुरुदेव की भव्य और निगट् प्रतिमा जमे मानान् आशीर्वाद की मुद्रा मे अभिवृष्टि कर रही थी । उम प्रतिमा को इम क्लात्मकता से निमारा गया था कि वह गुन्देव की उम्र और उनके व्यक्तित्व का स्पष्ट प्रतिनिधित्व करती थी। प्रतिमा का पारपण अनूठा था उमकी भव्यता ग्रोर कलात्मनता हजारो-हजारो हृदयो को श्रद्वामय बना रही थी। निर्धारित समय मे सम्पूर्ण विधिविधान और पवित्र अनुप्टानो सहित उस प्रतिमा को स्थापित किया गया और उम क्षण ऐसी तीन अनुभूति हुई कि आज यह प्रतिमा दम म्यान पर नहीं हजारो लाग्यो हृदय सिंहासनो पर अधिष्ठिन हुई है साथ ही प्रस्तुत प्रतिष्ठा ममारोह मेरे लिए एक विशिष्ट और गहरी अनुभूति के माघ मरंदा के लिए स्मृति का अनमोल उपहार बन गया। आज भी जवाहर नगर की माप्रदायिर एकना और गुणात्मक आत्मीयता हजारो कि नमीटर की दूरी मे भी मुझे भावाभिभूत करती है । गुरदेव उनके मघ ममाज यो निरतर आध्यात्मिा मम्बन प्रदान करो हा उनी भावनात्मक एकता को निरन्तर बढाते रहे । ही शुभाशाग्रो के माथ । munity XII

MARRAR
-
प्रस्तावित निर्माणाधीन योजना
@ भगवान महावीर का शिखरबन्द मन्दिर
@ स्थानक
पुस्तकालय
@ औषधालय
ARRRRRR
@ भोजनशाला
@ आयटिवलशाला
ऊपरी भाग में यात्रियों के ठहरने
के लिए कमरे
महावी उद्यान का विकास
सदायिक भवन का
नि
पडलवाना

विपय लेखक पृष्ठ मन्या 77 जैन धम मे करुणा का सूक्ष्म भाव -~-श्री मधु श्री कावरा 58 अनेकात दर्शन -टा० नरेंद्र मानावत 62 ले जिनवर का नाम -गणिवय मणिप्रम मागर 65 मणिधारी-श्री जिनचद्र सूरीजी •-श्री नथमल लाढा 'सेवर 66 विचक्षण उवाच -प्रवतिनी विचक्षण श्री जी 71 श्रद्धा-सुमन कु० यविना जूनीवाल 72 फर्म-शत्रु पर विजय से? -श्री सरदारमल दाजेट 73 मुझे मुक्ति दो। -श्री पदमचद सिंघी 75 मुक्तक -श्री शशिकर 'सटका' राजस्थानी 76 विदेशो में जैन सिद्धान्त का प्रचार-प्रमार -डॉ० धनराज चौधरी नर ! तेरा चोला रतन अमोला -~-साध्वी मणिप्रमा श्री जी 80 शाकाहार क्रान्ति मे महिलापो की भूमिका ---डॉ० श्रीमती शाता मानावत 81 यापु समान जगत जस चीहा -माध्वी मणिप्रमा श्री जी 84 जैन इतिहास के पनो मे -श्री सुशीलचन्द्र सिंधी 85 महावीर का अहिंसा दशन एव पर्यावरण मरक्षण -~श्री चिमय भट्ट 87 जैन धम सिद्धान्त और व्यवहार -थी मुघीन्द्र गेमावत 90 क्थनी-करनी एक -गणिवय मणिप्रम सागर 91 व्यवहार और परमाथ -~-डॉ० महावीर राज गेलडा 92 गडबड रेडियो -श्री हेमत मेहता 94 वही ज्ञान भण्डार --णिवय मणिप्रभ सागर 95 The Jain Declaration on Nature -Dr L M Singhvi 96 Jain Community Some Sailent Features - Dr Vilas Sangave 103 Income & Expenditure Account 1989 106 1990 110 1991 114 1992 118 खण्ड द्वितीय स्मतिया जो शेप रह गई सण्ड तृतीय पारिवारिक परिचय-विवरण (1) से (62) - , " XVi গী ঢীন হনo tঘ, ঢ f6e to, ২ का লিমoিীন ‘মাত্র সাধনা চog -------- - ক এ এ এ 4 - *** ---- s } s } } } । s {iiiiiiii ক wr * * == -~- [] [] ** , . * * +++ ৮ ৯ * - - খ / { স ৭ স - - * * গ।

FERE
श्रद्धांजलि
प्रिय स्य पकज सिधवी IAS (चयलित)
झाप सभी को सवेदना एव सहानुभूति के लिए
हम हृदय से आभारी है।
धनपनराज मेहता
सवाईसिंह सिंघवी
0 उत्तम आनन्द डेरी एन्टरप्राइजेज
20 आनन्द एजेन्सी
DCO उत्तम आनन्द एक्सपोर्ट
[000 आनन्द मोटर्स
D-35 पत्रकार कॉलोनी राजापार्क,जयपुर-302 004
ग्राम "अमिलापा"
जयपुर
फोन 40726,43163,515489

वन्दना
अरिहन्तों को नमस्कार
श्री सिद्धों को नमस्कार
प्राचार्यो को नमस्कार
उपाध्यायों को नमस्कार
जग में जितने साधुगण हैं
में सबको वन्दूं बार-बार । अरिहन्तों को........
नापन अजित सम्भव अभिनन्दन योऽ
मुमति पा सुपार्श्व जिनराय।
चन्द्र पुहुप शीतल श्रेयांस नमि
बासुपूज्य पूजित मुरराय ।।
विमल अनन्न धर्म जस उज्ज्वल
गान्ति कुन्थु अर महिल मनाय ।
मुनिमयत नमि नेमि पाचप्रभु
वर्षमान पद पुष्प नहाय ।।
नाबोगों के चरण कमन्न
मेन बाचन बार-मार अरिहालों को......
में
जिमो मागग-सामादि भो, नीनं मद जग मान किया।
सर बोगों मोक्षमागं फा, निको उपदेश !ि
पर मोर जिन घर :: गा गिन्दरी प्रकार
१-
Name
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श्री जैन श्वेताम्बर संघ, जवाहर नगर, जयपुर 卐 प्रतिवेदन ( वर्ष 1989-92) जवाहर नगर, जयपुर गुलाबी नगरी गया जिसमे सघ की विविध प्रवृत्तियों का जयपुर का एक उप नगर है जिसमे लगभग संचालन किया जा रहा है। द्वितीय चरण तीन सौ जैन श्वेताम्बर परिवार हैं । सभी मे स्थानक के कमरो का निर्माण कराया परिवार सम्प्रदाय की सकीर्ण भावनायो से गया है। यहां 3 शिसर का भगवान महावीर ऊपर उठकर महावीर साधना केन्द्र पर का मन्दिर भी निर्मित किया जा रहा है आयोजित धार्मिक, आध्यात्मिक एव सामा- जिसकी ऊँचाई करीब 16 फीट हो गयी है। जिक कार्यक्रमो मे मक्रिय रूप से भाग लेते इसी चरण में 4600 वर्ग मीटर क्षेत्रफल मे रहते है। महावीर उद्यान भी विकसित किया जा रहा श्री जैन श्वेताम्बर सघ सोसायटीज एक्ट के अन्तर्गत पजीकृत सस्था है जिसकी स्था अागामी चरण मे ऊपरी तल पर स्थानक पना 5 अप्रैल, 1981 को की गयी है । गत का हाल, मन्दिर का निर्माण, भोजनशाला, 11 वपो से यह सघ धार्मिक, आध्यात्मिक, प्रायम्बिलशाला तथा ठहरने के लिए कमरो सामाजिक आदि विविध क्षेत्रो में महत्त्वपूर्ण का निर्माण, प्रौपधालय एव पुस्तकालय कार्य कर रहा है । मघ की प्रवृत्तियो के आदि निर्माण प्रस्तावित हैं जो संघ के सचालन हेतु जवाहर नगर के सेक्टर 4 मे वित्तीय ससाधनो पर निर्भर करेगा । जैसे- आवासन मण्डल से 1530 वर्ग मीटर भूखण्ड जैसे उक्त कार्यों के लिए धन राशि एकम 385 लाख रुपये के मूल्य पर लिया गया होती रहेगी, उसी के अनुसार निर्माण कार्य था । यह राशि जवाहर नगर में निवास करा दिया जायेगा। कर रहे परिवागे ने ही एकत्रित करके सघ के विधान के अनुसार 23 जुलाई, 1989 की माधारण सभा मे वर्तमान कार्य- इस विस्तृत भूखण्ड पर प्रथम चरण मे कारिणी का चुनाव किया गया । कार्य- दादावाटी तथा प्रवचन हाल तैयार कराया कारिणी के सदस्य इस प्रकार है- - दी थी। 2 वर्तमान कार्यकारिणी :---- गुवा प्रकोष्ट तथा महिला प्रमोग मंघ के घटक है तथा वर्तमान में गुवा प्रकोष्ट 1. श्री उमरावचन्द राचेती, अध्यक्ष के अध्यक्ष श्री जितेन्द्र मूथा तथा मंत्री श्री 2. श्री सुधीन्द्र गेनावत, उपाध्यक्ष विनोद सचेती हैं । युवा प्रकोष्ठ के परामर्श- 3. श्री सुरेन्द्र पोखरना, महामंत्री दाता कार्यकारिणी समिति के सदस्य श्री 4. श्री उत्तमचन्द जैन, संयुक्त मंत्री सुरेन्द्रकुमार जैन (प्रोसवाल सोप) हैं । 5. श्री दौलतचन्द चपलावन, गोपाध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ की वर्तमान अध्यक्षा श्रीगती पदमा चपलावत तथा मंत्री निर्मला लोहा है। 6. श्री राजेन्द्रकुमार पंसारी, सांस्कृतिक मंत्री युवा प्रकोष्ठ के 89-90 में अध्यक्ष 7, डॉ. संजीव भानावत, शिक्षा एवं श्री प्रवीण लोढा तथा मंत्री श्री जितेन्द्र मुश्रा साहित्य मंत्री व सत्र 90-91 मे अध्यक्ष श्री सुनील मुणोत 8. श्री फहमिह बरड़िया, निर्माण मंत्री तथा मंत्री श्री संजय पंमारी रहे। इसी प्रकार सत्र 89-90 में महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्षा 9. श्री सुरेन्द्रकुमार जैन, निदे., युवा प्रकोष्ठ श्रीमती पार्श्वकुमारी कोठारी च मंत्री 10. श्री प्रेमचन्द्र जैन. पूर्व अध्यक्ष (पदेन) श्रीमती अनु भण्डारी व 90-91 में अध्यक्षा 11. श्री जीतेन्द्र मूधा, अध्यक्ष, युवा प्रकोष्ठ श्रीमती सुशीला जैन तथा मंत्री श्रीमती 12. श्रीमती पद्मा चपलावत, अध्यक्षा निर्मला सचेती रही। महिला प्रकोष्ठ 1989-90, 1990-91 व 1991-92 में 13. श्री सिंह जैन, सदस्य सम्पन्न हुए कार्यक्रमों का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है :--- 14. श्री सुनीलचन्द्र सिंधी, सदस्य 15 .. पदमनन्द मुणोत. मदरय भूमि पूजन अर्थात् मनन् गुन 23-7-8" 16. डॉ. गर्गसंह जैन, मदस्य तथा मिलानाग 25-8-99 के माला 17. श्री पनपनमाज मेहता. सदस्य 8 फरवरी. 90 गुरुवार माप मुनी नौवन को 18. भीमाद गंगा, मदम्य प्रजाप, प्राचार्य नगएका श्री जिन कांनिनागर गयी महारा: मान 10. श्री राजेन्द्रनमारमा, सदस्य जिर नांगावणानिया 2), श्री माता मदन में यहाईमन में 61' 21. श्री. मे काम गरी प्रमिला में दिन मार्गी लागली . प्रदागिना !" १४. . । B A १ .. Cate te REE AT: r ::::: . भ * स + . M F 1 मे लाई गई प्रतिमा को प्रतिष्ठा करवाई महावीर जयन्ती समारोह गई। इम दिन जल यात्रा निकाली गई तथा श्री जैन श्वेताम्बर सघ की ओर से प्रति स्वामी वात्सत्य किया गया। वर्ष महावीर जयन्ती समारोह अत्यन्त उत्साह दादा गुरुदेव को जन्म जयन्ती 27 अगस्त, व भक्ति-भाव से मनाया जाता है। सन् 1990 मे महावीर जयन्ती पर श्री शीतल मुनिजी 91 की पूर्व सध्या पर भक्ति मगीत का आयोजन किया गया । महावीर स्वामीजी म सा का प्रवचन, 1991 मे न्यायमूर्ति गण- के मन्दिर के मूल गम्भारे की नीव का प्रथम पतचन्द सिंघवी के मुख्य आतिथ्य एव डॉ रामचन्द्र द्विवेदी कीअध्यक्षता मे भक्ति सध्या भट्ट 6-12-90 को श्रीमान् जीवनमलजी सा तथा 1992 मे श्री सज्जन श्रीजी म सा की बोहरा द्वारा रसा गया। स्मृति मे जैन भजन प्रतियोगिता आयोजित 29 व 30 जनवरी, 91 को दादावाडी की गयी। इस प्रतियोगिता का आयोजन श्री का प्रथम वार्षिकोत्सव प्रायोजित किया गया पुखराज-रत्ना लूनिया के सौजन्य से किया जिसे श्री मगनजी कोचर, बीकानेर तथा गया। जिसमे सामूहिक भजन मे श्री विजय जैन नवयुवक मण्डल, जयपुर ने अपनी स्वर मूसल व श्री अनिल श्रीमाल एव पार्टी ने लहरियो से गुजायमान किया। शील्ड जीती। 1151 रु, का प्रथम पुरस्कार कु सुनीता श्रीमाली,551 रु का द्वितीय पुरस्कार द्वितीय वापिक महोत्सव 18 फरवरी, 1992 को प्रायोजित किया गया जिसमें कु नीना मेहता, 251 रु का तृतीय पुरस्कार किशोर सेठिया तथा 151 रु का विशेष श्री मगन कोचर, बीकानेर तथा जैन नव- प्रोत्साहन पुरस्कार गौरवजन को दिया गया। युवक मण्डल, जयपुर ने अपने मधुर भक्ति इस भक्ति सध्या में प्रसिद्ध उद्योगपति श्री रस से परिपूर्ण भजनो से जन-समूह को भक्ति तेजराज भण्डारी मुख्य अतिथि थे तथा श्रुति रस मे डुबो दिया। मण्डल के अध्यक्ष श्री प्रकाशचन्द सुराणा ने महावीर साधना केन्द्र पर ही दस दिव- समारोह की अध्यक्षता की। सीय प्रेक्षाध्यान तथा योग साधना शिविर श्री विनयचन्द दौलतचन्द चपलावत का आयोजन आचार्य तुलसी के अनुयायियो (जैन पुस्तक मन्दिर, जयपुर) के सौजन्य से ने प्रायोजित किया। आयोजित अखिल राजस्थान अन्तर्महा- होली एव दीपावली मिलन समारोह विद्यालय निवन्ध प्रतियोगिता का 501 रु सदा की भाति तीनो वप ही होली एव का प्रथम पुरस्कार राजकीय महाविद्यालय, दीपावली पर स्नेह मिलन के कायक्रम वासवाडा के श्री चिन्मय भट्ट को, 251 रु का आयोजित किए गए । होली के अवस पर द्वितीय पुरस्कार बी एन कॉलेज, ग्रायोजित कार्यक्रमो मे आकाशवाणी के श्री मुकेश नाहर को तथा 101 रु का तृतीय कलाकारो ने भी रगारग कार्यक्रम प्रस्तुत की कु सीमा पहूजा को दिया गया। पुरस्कार मीरा कन्या महाविद्यालय, उदयपुर किए। 1992 मे होली स्नेह मिलन कार्यक्रम मे प्रख्यात कवि श्री मेघराज मुकुल मुख्य क्षमायाचना समारोह अतिथि के रूप मे पधारे थे। क्षमायाचना समारोह हर वर्ष प्रायोजित उदयपुर के . 4 किए लेकिन गत वर्ष (1991) पळूपण पर्व पर सामायिका, स्वाध्याय, प्रतिक्रमण, प्रवचन नया सामूहिक पारणा का आयोजन किया गया । पूजार्य सम्पन्न कराई गई तथा रात्रि में भगवान एवं गुरुदेव की अंगरचनाएँ की गई। II. आचार्य प्रानन्द नपि के शिष्य रमेश मुनि । 12. विचक्षण श्री सज्जन श्रीजी म. सा. की शिप्या विनीता श्री चन्द्रकला श्रीजी, सुदर्शना श्रीजी एवं प्रियदर्शना श्रीजी। - विशेष प्रागन्तुक विशेष प्रवचन 13. साध्वी श्री पद्मलता श्रीजी, यजकीति इन वर्षों में अनेक प्रमुख एवं शीर्षस्थ श्रीजी म. सा. । आचार्यों एवं साधु-साध्वी मण्डल के विशेष 14. प्राचार्या श्री चन्दना श्रीजी, प्रवचन श्रायोजित किए गये :- विरायतन। 1. युग प्रधान अनुप्ठगता एवं अणुव्रत आन्दोलन के प्रवर्तक प्राचार्य तुलसी । 15. आचार्य तुलसी के सन्त सुमेर मुनिजी 16. प्राचार्य प्रानन्द पीजी म. सा. की 2. प्राचार्य सम्राट श्रीमद् विजय इन्द्रदिन्न साध्वी रमेश कंवरजी एवं कन्चन सूरीश्वरजी म. सा. कवरजी। 3. श्री जयानन्दजी म. सा. (सामूहिक भत्ताम्बर पाठ)। 4. प्राचार्य नानेश के प्रपर शिप्य श्री विजय 1. कल्याणजी आनन्दजी पेड़ी के अध्यक्ष मुनिजी। श्री श्रेणिक भाई। 5. राष्ट्र सन्त स्व. अमर मुनिजी म. सा. 2. नाकोड़ा तीर्थ के अध्यक्ष श्री पारग- मनजी भंगाली। (वीरायतन) के शिष्य ईश्वर मुनि एवं रंग मुनि जी। साधारण सभा, स्वामी वात्सल्य, (1 गणिव मगिप्रम नागरजी म. मा.। सामूहिक गोठ 7. गणिवर्य श्री महिमापन मागरगी, वर्ष 1989 में पदमपूराजी, वर्ष 1990 में मोपाध्याय ननितप्रभ गागरजी एवं (नो नागोरीयान) पानाच मभिर एवं मारोपाचारामागरजी म.ना.। 1991 में बोला जैन ती पर उन, कायम आयोजित किए गए जिमर्म गुया माम मोटी म. मा. जी प्रमा प्रमोद कायंत्रमाग गामा पुरा पीमितग्नि नियन। + 9. निजाममा, पानाम: है। iframe : 1. रानी, मशिने ::

-- श्री जिन चन्द्रसूरिजी के 849 वें जन्म जिममे जवाहर नगर में निवास कर रहे दिवम ममारोह पर महगेली यात्रा। श्री जैन श्वेताम्बर मघ के सदस्यो का पारि- वारिक विवरण, प्राचार्यों एवं विद्वानो के 2 जोधपुर प्राचार्य श्री हस्तीमलजी म के लेख, वर्ष 1989-90 व 1990 91 तक के दर्शनार्थ यात्रा। सघ के अकेक्षित लेसे तथा वर्तमान कार्य- कारिणी द्वारा आयोजित कार्यक्रम प्रकाशित 3 मालपुरा मे उपधान पर यात्रा की गई। किये जा रहे हैं। सक्रान्ति समारोह एव स्वामी वात्सल्य हम इस प्रतिवेदन के माध्यम से उन आचार्य सम्राट विजय इन्द्रदिन्न सूरी- सभी सस्थानो, दानदातामो, विज्ञापन- श्वरजी म सा के सानिध्य मे सक्रान्ति दातागो के प्रति अपना अाभार प्रदर्शित समारोह आयोजित किया गया तथा लगभग करते हैं जिन्होंने हमे समय-समय पर 2500 व्यक्तियो ने इसका लाभ लिया । आर्थिक सहयोग दिया है । सभी आचार्यों वाहर से पधारने वालो की व्यवस्था भी तथा साधु-साध्वी मण्डल के प्रति प्रादर की गई। भावना प्रकट करते हैं जिन्होंने इस स्थान पर पधार कर ज्ञान बोध करवाया है, सस्थाओ गुणानुवाद सभा के प्रतिनिधियो तथा सभी समाज के सदस्यो 3 जून, 1992 को राष्ट्र सन्त उपाध्याय के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं जिन्होंने अमरमुनि के परलोक सिधार जाने पर उन्हे हमारे निमन्त्रण पर समय-समय पर पधार सार्वजनिक गुणानुवाद सभा में श्रद्धाजलि कर कार्यक्रमो को सफल बनाया है। अपित की गई । सान्निध्य मिला-साध्वी उपरोक्त सभी गतिविधियां आप सभी के रमेशकँवरजी का। सह्योग, उपस्थिति तथा सम्बल से ही सम्भव विविध कार्यक्रम हो पाई है और आप सभी इस आध्यात्मिक यज्ञ के भागीदार है। अगर फिर भी कुछ 1 शरद पूर्णिमा पर भक्ति सध्या का कमिया रह गई हैं तो इसकी जिम्मेदारी हम आयोजन । अपनी मानते हुए पुन आप सभी के प्रति 2 नये वर्ष पर मास्कृतिक कार्यम्म। कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए समाज की 3 हर पूर्णिमा को रात्रि जागरण । नि स्वार्थ भाव से सेवा करते रहे, इमी पाशा के साथ---- 4 प्रत्येक चतुर्दशी को प्रतिक्रमण । कैवल्य म्मारिका का यह तीसरा वि. उमरावचन्द सचेती वार्षिक प्रक प्रकाशित किया जा रहा है अध्यक्ष सुरेन्द्र पोखरना महामन्त्री 6 श्रीसंघों एवं चेरीटेबल ट्रस्टों द्वारा संस्था को दिया गया आर्थिक सहयोग 3,00,001 1,00,001 51,001 31,001 21,001 21,001 21,001 15,001 15,001 11,001 11,001 11,001 11,001 11,001 11,001 11,001 5,001 5,001 5,001 5,101 5,001 5,001 5,0)! नाम श्री जैन श्वेताम्बर नाकोड़ा पार्श्वनाथ तीर्थ ट्रस्ट, नाकोड़ा मोकलसर श्रीसंघ, मोकलसर मंदिर श्री आदिनाथ श्वेताम्बर संघ, हाडेचा " जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ, पेढ़ी, सांचोर शंखेश्वर पार्श्वनाथ जैन मंदिर, राजेन्द्र जैन ट्रस्ट, वम्बई रुकमणी शंखेश्वर पार्श्वनाथ मन्दिर, पाली , जैन श्वेताम्बर श्री मन्दिर, रानीवाड़ा जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ, सिवाना " जवेरी फेमिली चेरीटेबिल ट्रस्ट, देहली जोगीचन्द ज्ञानचन्द महता चेरीटेबिल ट्रस्ट, जयपुर रतन चम्पा चेरीटेविल ट्रस्ट, जयपुर जोधाराम मिलापचन्द वैद चेरीटेबिल ट्रस्ट, जयपुर , तपागच्छ श्वेताम्बर मन्दिर, चौमुखी जैन मन्दिर ट्रस्ट, मालीवाड़ा चन्दाप्रभु महाराज जैन जूना मन्दिर, मद्रास सेट मोती शाह रिलीजियस एन्ड चेरीटेबिल ट्रस्ट, बम्बई श्री अजितनाथ मन्दिर, सिरोही सेठ कल्याणमलजी परमानन्दजी मन्दिर ट्रस्ट, मिरोही श्री शंयेश्वर पार्श्वनाथ मन्दिर, पाली उम्मेदपुरा श्रीमंघ, मियाना मोहनलाल गौतम महावीर चौधरी चेरीटेबिल ट्रस्ट, अहमदाबाद मनिमुदत स्वामी जैन श्वेताम्बर मन्दिर दृस्ट, कोल्हापुर गोडी पाश्वनाथ दन्ट, मिरोही पारसना जैन विनाम्बर मन्दिन, रोटी जन ताम्बर प्रादिनाथ मन्दिरगान नन नाम मूर्तिपूजा मंज, मनोर मोटारी मेगन म. जयपुर मनाली मेमोरियन दृम्म र ALL "मा मनोनित गर बाद मग TRAFTERE: + tha " . * T A श्री जैन श्वेताम्बर संघ, जवाहर नगर, जयपुर दादावाडी के निर्माण में सहयोग देने वाले भाग्यशालियों को नामावली . . - दादाबाडी का सम्पूर्ण हाल का निर्माण- स्वर्गीय श्री मागीलालजी पसागे एव स्व श्रीमती पुखराज देवी की स्मृति मे श्री पारमचन्दजी सुरेशचन्दजी जैन (पमारी) बम्बई वाली द्वारा मणीधारी श्री जिनचन्द्र सूरीश्वरजी को छत्री का निर्माण- स्व श्रीमती कश्मीरीवाई की स्मृति मे श्री अमरचन्दजी, मेहरचन्दजी, ज्ञानचन्दजी पाधिया जयपुर वालो द्वारा दादावाडी के सम्पूर्ण फर्श का निर्माण- स्व सेठ थी महतावचन्दजी गोलछा की स्मृति मे श्री राजेन्द्रकुमारजी, सुरेन्द्रकुमारजी गोलेछा जयपुर वालो द्वारा श्री जिनदत्त सूरीजी की छत्री का निर्माण- श्री ज्ञानचन्दजी सुनीलकुमारजी शैलेन्द्रकुमारजी सचेती, जयपुर वालो द्वारा श्री जिनकुशल सूरीजी की छत्री का निर्माण- स्व श्रीमती जतनवाई धर्मपत्नी श्री रतनचन्दजी के पुत्र श्री सुशीलचन्दजी अनिल कुमारजी काष्टिया जयपुर वालो द्वारा श्री नाकोडा भैरवजी की छत्री का निर्माण- श्री पारसमलजी भन्साली के पुन श्री प्रकाशराजजी भन्साली जोवपुर वालो द्वारा दादावाडी के प्रवेश द्वार का निर्माण- म्व श्री घूकलमलजी सा भण्डारी एव धर्मपत्नी श्रीमती पदमादेवी भण्डारी (अजमेर वालो) की स्मृति में स्थानक के कमरे एव दीर्घातों प्रादि के निर्माण मे सहयोग प्रदान करने वाले महानुभाव श्रीमती मुन्नीदेवी चपलावत -जयपुर श्री माणकराजजी मदनराजजी वोहरा --बम्बई श्रीमती अचरजवाई सचेती (अलवरवाले) थी नथमलजी लोढा -जयपुर जौहरीमलजी पटवा -~-जयपुर , विनयचन्दजी चोरडिया -जयपुर जगदीशचन्दजी भन्माली विनयच दजी दौलतचन्दजी चपलावत -जयपुर -जयपुर . . -~~-जयपुर " 8

श्री जैन श्वेताम्बर संघ, जवाहर नगर, जयपुर
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परम पू. प्राचार्य श्री जिनकान्ति सूरीश्वरजी म. सा. के प्रधान शिष्य प. पूज्य गुरुदेव
श्री मणिप्रभसागरजी म. सा. के कर कमलों द्वारा
माए मुदी 14. संवत् 2046, तदनुसार 8 फरवरी, 1990 को सम्पन्न हुई
प्रतिष्ठा
भाग्यशालियों को नामावली
मणिधारी श्री जिनचन्द्र सूरीश्वरजी की प्रतिष्ठा
श्री पारसचन्दजी सुरेशचन्दजी जैन, बम्बई
श्री जिनदत्त सूरीजी की प्रतिष्ठा
श्रीमती सोहनरंवर, श्रीमती निर्मला महता, जोधपुर
श्री जिन कुशल सूरीजी को प्रतिष्ठा
श्री निहालचन्दजी, श्रीपालजी, अमोनकचन्दजी महता, जोधपुर
श्री नाकोड़ा भैरवजी की प्रतिष्ठा
श्री भंवरलालजी, भीमराजजी, योभराजजी बोरा, वाटर
मणिपारी श्री जिनचन्द्र सूरीश्वरजी की मूर्ति प्रदाता
श्री भैरामिहजी परणाकुमारजी चौधरी, जयपुर
श्री जिनदत्त सूरीजी की मूर्ति प्रदाता
धीमनी टोरमबाई धर्मपत्नी स्व. श्री जोगीलालजी गरिमा
जयपुर
श्री भिमकुशल गरीजी को मूर्ति प्रदाता
भोपलो मगर श्रीश्रीमाल, गोपनीयोनीमनमा भौधीमान र
श्री सामोरा भैरबीको मृति प्रदाता
की मनमानी पर
+

गरिणवर्य मणिप्रभ सागरजी म. सा. की निश्रा में मणिधारी दादा गुरुदेव की प्रतिष्ठा पर अन्य प्रमुख बोलियां लेने वाले महानुभाव मुनीमजी ध्वजा चढाना झालर बजाना -श्री कीमतीलालजी मिलापचन्दजी जैन, जयपुर तिलक लगाना --श्री मानसिंहजी मुनीलकुमारजी श्रीमाल, जयपुर --श्री ज्ञानचन्दजी करमचन्दजी फोफलिया, जयपुर माला पहनाना भगवान महावीर की वेदी विराजमान --श्री भैरूदानजी हरकचन्दजी नाहटा, जयपुर --श्री अमरचन्दजी महरचन्दजी धाधिया, जयपुर द्वार खुलवाना --श्री हरकचन्दजी नाहटा, दिल्ली कलश चढाना (दादा गुरुदेव) -~-श्री धनपतमलजी राजेन्द्रकुमारजी पवा, जयपुर नाकोडा भैरव वेदी पर कलश चढाना --श्री माशूलालजी डोसी, बाडमेर -श्री उत्तमचन्दजी चपलावत श्री जिनदत्त सूरीजी की प्रतिमा पर कलश चढाना -श्री महेन्द्रकुमारजी गोलेछा श्री जिनकुशल सूरीजी की प्रतिमा पर कलश चढाना -श्री सौभागमलजी बोरदिया दादा गुरुदेव की पक्षाल -~-श्री कुशलचन्दजी विमलचन्दजी सुराना, जयपुर दादा गुरुदेव को चन्दन व पुष्प चढाना ~श्री विमलचन्दजी पसारी, जयपुर नाकोडा भैरूजी की पक्षाल -श्री देवराजजी जितेन्द्रकुमारजी मूथा, जयपुर नाकोडा भैरूजी को चन्दन व पुष्प -श्री पकाशचन्दजी सुभाषचन्दजी गोलेधा, जयपुर दादा गुरुदेव की प्रारती ---श्री पन्नालालजी विजयकुमारजी वरडिया, जयपुर मगल दीया चारो जगह -श्री वसन्तकुमारजी राजेन्द्रकुमारजी पुगलिया, जयपुर नाकोडा भैरवजी की प्रारती -श्री पारसमलजी भन्साली, जोधपुर सवा लाख अखण्ड चावलो का सातिया ~~धी धनश्यामदासजी राजकुमारजी, दिल्ली (उपरोक्त नामावली 3,000 रु एव अधिक की बोली लेने वाले महानुभावो की है।) 10

संस्था को विशेष आर्थिक सहायता
प्रदान करने वाले महानुभाव
श्री पारसचन्दजी सुरेशचन्दजी जैन (पंसारी), बम्बई
श्रीमती नेम कंवर श्रीश्रीमाल
श्री सरदारमलजी प्रेमचन्दजी छाजेड़,
जयपुर
., फतेहसिंहजी बरडिया, जयपुर
दौलतसिंहजी उमरावचन्दजी सचेती, जयपुर
इन्दरचन्दजी प्रकाशचन्दजी पदमचन्दजी सचेती, अजमेर
मंगसं अशोका फाउन्ड्री एण्ट मैटल वर्स, जयपुर
श्रीमती सुमन गर्ग धर्मपत्नी श्री बी. के. गर्ग, जयपुर
भेमस एलाइट जेम्स कारपोरेगन. जयपुर
श्री उत्तमचन्दजी सेठिया, जयपुर
विमलचन्दजी मुराना, जयपुर
•, गमनचन्दजी मुंराना, जगपुर
धर्मचन्दजी मेहता, जयपुर
भीमगजजी (गारमेंट एक्सपोर्ट), जयपुर
ग्गिवचन्दजी नुमका (गाह ट्रेडिंग कम्पनी), गंदर
मनन्दजी गोलहा, जयपुर
गजेन्द्रमारजी जैन (गारी), जयपुर
" m. पनागरमलजी दूगा. जयपुर
भी गुरेनमारती देन, जयपुर
मलादीमा
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उन्तजार की घड़ियां समाप्त हुई पनिप्टा मा दिल भी आ पहुंचा
दादा गुरुदेव की भव्य और गिट् प्रतिमा जैसे मावात् पाशीर्वाद को मुद्रा
में अभिवृष्टि कर रही थी । उम प्रतिमा को इम कलात्मयता से निवारा
गया था कि वह गुरदेव की उम और उनके व्यक्तित्व का स्पष्ट प्रतिनिधित्व
करती थी। प्रतिमा का प्रारूपण अन्छा या उसकी भव्यता गोर कनात्मकता
हजारो-हजारो हृदयो को श्रद्धामय बना रही थी।
निर्धारित समय में सम्पूर्ण विधिविधान और पवित्र अनुष्ठानो सहित
उस प्रतिमा को स्थापित किया गया और उस क्षण ऐसी तीन अनुभूति हुई
कि आज यह प्रतिमा इस स्थान पर नही हजारो लाग्यो हृदय सिंहासनो पर
अधिष्ठित हुई है साथ ही प्रस्तुत प्रतिष्ठा ममागेह मेरे लिए एक विशिष्ट
और गहरी अनुभूति के साथ सर्वदा के लिए स्मृति का अनमोल उपहार
बन गया।
आज भी
जवाहर गर यी साप्रदायिक एक्ता और गुणात्मक आत्मीयता
हजारो किलमीटर की दूरी से भी मुझे भावाभिभूत करती है ।
गुग्देव उनके मघ ममाज को निरतर आध्यात्मिा मम्बन प्रदाा करते
उावी भावनात्मक एक्ता यो निरनर पढाते रहें।
टन्ही शुभाशायो के माध
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प्रस्तावित निर्माणाधीन योजना
@ भगवान महावीर का शिखरबन्द मन्दिर
स्थानक
Q पुस्तकालय
@ औषधालय
@ भोजनशाला
@ आयम्बिलशाला
@ ऊपरी भाग में यात्रियों के ठहरने
के लिए कमरे
महावीर उद्यान का विकास
कसानुदायिक भवन का
निर्माण
लिलवाना

विपय लेसव पृष्ठ सम्या जैन धम मे करुणा का सूक्ष्म माव -श्री मयु श्री कावरा 58 अनेकात दशन -डा० नरेद्र भानावत 62 ले जिनवर का नाम गणिवयं मणिप्रभ सागर 65 मणिधारी-श्री जिनचद्र सूरीजी -श्री नथमल लोढा 'सेवक' 66 विचक्षण उवाच --प्रवतिनी विचक्षण श्री जी 71 श्रद्धा-सुमन -~-कु० पविता जूनीवाल 72 क्म-शत्रु पर विजय कसे? -~-श्री सरदारमल छाजेड 73 मुझे मुक्ति दो। -श्री पदमपद सिंघी 75 मुक्तक -श्री शशिर 'सटका' राजस्थानी 76 विदेशो में जैन सिद्धान्त का प्रचार-प्रमार -डॉ० धनराज चौधरी 77 नर । तेरा चोला रतन अमोला साध्वी मणिप्रभा श्री जी 80 शाकाहार क्रान्ति मे महिलाओं की भूमिका -डॉ० श्रीमती शाता भानावत 81 प्रापु समान जगत जस चीहा -साध्वी मणिप्रभा श्री जी 84 जैन इतिहास के पनो मे -थी सुशीलचद्र सिंग 85 महावीर का अहिंसा दशन एव पर्यावरण सरक्षण -थी चिन्मय भट्ट 87 जैन घम सिद्धान्त और व्यवहार --श्री सुधीद्र गेमावत 90 क्थनी-करनी एक -गणिवय मणिप्रम सागर 91 व्यवहार और परमाथ --डॉ० महावीर राज गेलडा 92 गडबड रेडियो -थी हेमत मेहता 94 वही ज्ञान भण्डार । -गणिवय मणिप्रम सागर 95 The Jain Declaration on Nature -Dr L M Singhva 96 Jain Community Some Sailent Features --Dr Vilas Sangave 103 Income & Expenditure Account 1989 106 1990 110 1991 114 1992 118 खण्ड द्वितीय स्मृतिया जो शेप रह गई खण्ड तृतीय पारिवारिक परिचय-विवरण (1) से (62) । " " . 11 " " " " XY থী তীন না ঘ, to, of का লিখিীন ‘সন্তা@te Ergoা কতটু’ r ৫ * . : == • * 'কক ? । ৫ [[_ [] [] ল + F = , *** - *Me : L ULITHIU t * --- **** L ক - ৪ . - .... { " ? - - + + . - ১ ৮ ** *** *

श्रद्धांजलि
प्रिय स्व पकज सिघवी IAS (चयनित)
आप सभी को सवेदना एव सहानुभूति के लिए
हम हृदय से आभारी है।
घनपतराज मेहता
सवाईसिंह सिंघवी
0 उन्म आनन्द डेरी एन्टरप्राइजेज
20 आनन्द एजेन्सी
LED उत्तम आनन्द एकरूपोर्टस्
0--0न्द मोटर्स
D-35 पत्रकार का जी राजाजा जयपुर-302 004
ग्राम "अभिलापा जयपुर
फोन 40726,43163, 515489

Kaivalya Shamapan Divas Ke Avsar Per Prakashika Smarika

Author
Bhanwat, Narendra
Title
Kaivalya Shamapan Divas Ke Avsar Per Prakashika Smarika
File name
Kaivalya Shamapan Divas Ke Avsar Per Prakashika Smarika
Text
OCR done
Citation
1992
Published
2011/03
Publisher
Jaipur, Shri Jain Swetamber Sthanakvasi Shiksha Samiti
Language
Sanskrit
Pages
33
Library
Shri Jain Swetamber Khartargacch Sangh, Jaipur
Classification
Devotional
DLI number
550631
Barcode
4990010031451.00
Scanning centre
C-DAK, Kolkata
Digital publisher
Digital Library Of India
VMLT id
K3cX6wl9mnT
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Kaivalya Shamapan Divas Ke Avsar Per Prakashika Smarika