Shree Jubilee Naagari Bhandar Bikaner

Nityotsava No.xxiii

Umanandnath · 2011/07

PDF Proofread

Front matter

प्रकाशक
श्रीलाल न० जोशी
मानद मत्री
राजस्थानी भाषा साहित्य संगम (अकादमी)
रेल्वे क्रासिंग, कोटगेट
वीकानेर (राजस्थान)
भाग १: अंक २
अपरल : १९७३
वरस रो मोल १२००
मेक अंक रो मोल ३.००
मुरः
माउन प्रिन्टस, मागरा

सूचनिका
१. पृष्तीगत में प्रणाम ।
श्री मनोहर शर्मा
२. श्री मिची भरिया
श्री मण्यनारयण धामी
३. वनमार
श्री गरि
४. मोरयोग
श्रीमगेगमदागामी
५. कीटापना, माग गोग
धी उपवर्मा
६ पोदामामी
श्री सरना न
भा, माटो
श्रीगभगमन
समागा
भीमप्रसार
6.
मागm मारा।
भीनमा
है
..
भीमपनान

प्रकाशक
श्रीलाल न० जोशी
मानद मत्री
राजस्थानी भाषा साहित्य संगम (अकादमी)
रेल्वे क्रासिंग, कोटगेट
वीकानेर (राजस्थान)
भाग १: अक २
अपरंस : १९७३
वरम रोमोन १२००
येक अंक रो मोल ३.००
मुर:
महिमामं,मादा

पृथ्वीराज ने प्रणाम !
-मनोहर शर्मा-
किणी दिन
दोकानेर में
मोनै रो मूरज उग्यो,
राजमहल मे
सोन रोपाळ वाग्यो,
पृथ्वी पर
पृप्योराज रो अवतरण हुयो ।
भारतमाता रो
यो पालोसपूत
राजवथ सं गौरवान्वित मी हुयो,
जिण भात
धीरपणाही राजपून
महिमापान या।
रण महावीर
आप भुजबर
र महापरिम
भापरी ग्यान-साधनाम.
रममा

१७. ठरघोड़ो बिन्दु (अनुवादित कविता) श्री पावलो नरूदा थी नदलाल शर्मा १८. भाग भुताळी श्री शिव पांडे १६. फागण श्री सांवरमल दाधीच २०. घर मुरघर रा घोरिय श्री रामसिंह २१. वजारो वीर श्री सवाईसिंह धमोरा २२. मूमल श्री दीनदयाल ओझा २३. अक नयो मठ थी मनोहर शर्मा २४. हार को मानूनी थी रामेश्वरदयाल श्रीमाळी २५. प्यार 'मिनी'-वाता श्री भोम अरोड़ा २६. सोनलदेसोटी धी पन्नालाल पन्नल' २७. पार्ट मुग उतारसी ? थी मनुर राजस्थानी २८. मारो मोल भीमाटराबरयानी २१. दिना श्री रामान गुपार 'प्रमा .. रामार मी परताप १.माया १२. मोहीम

पृथ्वीराज नै प्रणाम !
-मनोहर शर्मा-
किणी दिन
बीकानेर मे
सोने रो मूरज ऊग्यो,
राजमहल में
सोन रोपाळ वाग्यो,
पृथ्वी पर
पृथ्वीराज रो अबतरण हुयो।
भारतमाना रो
श्रो सालो सपूत
राजवण सू गौरवानिया की यो,
जिण भान
और पणाही राजम
महिमावान या
रण मादी
भाए
एक महान
भाप रोकामगारनाम
९मन
भाषा:

घ १७. ठरघोड़ो बिन्दु (अनुवादित कविता) श्री पावलो नस्दा श्री नदलाल शर्मा १८. भाग भुवाली श्री शिव पाडे १६. फागण श्री सांवरमल दाधीच २०. घर मुरपर रा धोरिय श्री रामसिंह २१. वजारो वीर श्री सवाईसिंह धमोरा २२. मूमल श्रीदीनदयाल ओझा २३. बैंक नयो मठ श्री मनोहर शर्मा २४. हार को मानूनी श्री रामेश्वरदयाल थीमाळी २५. भारमिनी'-वाता धीमोम बरोरा २६. सोनसदे मोती धी पन्नासाम पत २७. पाई गुण वजारमी? पी मनु रारापानी २८. मारो मोल २१. निर्ग थी शामा पार 'अमर' ..मार श्री मोहन पात्रो १. २.T.INमरर

पृथ्वीराज ने प्रणाम !
-मनोहर शर्मा-
किणी दिन
बीकानेर में
सोने रो मूरज अग्यो,
राजमहल में
सोनं रो थाळ वाज्यो,
पृथ्वी पर
पृथ्वीराज रो अवतरण हुयो।
भारतमाता रो
श्रो लालो सपून
राजवश सूं गौरवान्वित मी हुयो,
जिण भात
और घणाही राजपूत
महिमामान हमा।
रण महावीर
आप भुजबर म.
रण महापान
आप रीग्यान-साधना म.
भार रीसेला-पूरा

२॥
गौरख ग्रहण करयो,
लोक-हिरदै में प्रतिष्ठा पायी,
गुण-गरिमा रो कोति-मान थापित करयो ।
इण महामनीपी
श्रीकृष्ण-चरित्र र पावन प्रकाश मे
भारत री जनता ने
गीता रो अमर सदेश
फेर दियो।
इण दिव्य
आप र मत्र-यळ सू
आरज-भोम मे आपमत
स्वाधीनता-गूरज ने
भळभळाट करतो रारयो।
राष्ट्रति पृथ्वीराज री पाणी
हिमाप रो गौरत-गान है,
गगा रो पावन गीत है,
रसनाकर रो गभीर पोर है,
भारती री वीना रोगिय मुर है।
भारती-मात पृषीराज में
प्रणाम!
वारशर माम!

राजस्थानी रा समर्थ सेवक श्री शिवचंद्रजी भरतिया -सत्यनारायण स्वामी- । दादा आधुनिक राजस्पानी साहित्य र इतिहास मे श्री शिवचद्रजी भरतिया रोनांत सोन ₹ आसरा में लिसीजसी । राजस्थानी रं आज र साहित्य ने उणा अक जबरदस्त मोड़ दियो । हिंदी-साहित्य र समुत्थान और उण री श्रीवृद्धि मे जिको काम भारतेंदु हरिश्चद्र करपो ठीक दो ही काम राजस्थानी साहित्य में भरतियाजी करयो। भरतियाजी आधुनिक राजस्थानी साहित्य रा प्रथम महत्त्वपूर्ण साहित्यकार है । श्री शिवचद्रजी भरतिया रो जन्म विक्रमी सवत १९१० री चत सुदि सातम रे दिन हुयो । 'फाटका-जजाळ' नाटक मे उणा आप रो परिचय इण भात दियो है- "म्हारो जन्म वरिष्ठ वंश्यकुल मे हूँ अग्रवशी तथा । गोत्री सिंगल, बेंक घे भरतिया, "विद्यानिवाम' प्रथा ॥ ('विद्यानिवास' जिण की पदवी थे) गगारामजी, जिण को पुण्य अपार। जाया मुत बळदेवजी, कीनो बुळ-विस्तार ॥१३॥ को मुत शिवचद्र है, कुळ मे शास्त्र प्रवीन । फुल वी रीत सुधारवा, कीनो प्रय नवीन ॥१४॥ भरतियाजी च्यार भाई हा । च्यार भाया मे व रागळा मू वहा हा । पिताजी री मृत्यु रे दाद उणा री सगळी सपत्ति छोटिया तीनू भाया आपस में बाट सी और उणा है हाय पीनही यायो । इण वारण उणा व्यापार करणो छोडने वकालत करणी मरू करी। पण पालत मे उणां रो जी नही लाग्यो और उणा इदौर मे सरकारी नौषरी कर ली। भरतियाजी भाप रे जीवण में घणा ही साता ऊना उतार-घडाप देण्या। बै मनमौजी जीव हा । पराधीन रयन विण रे हो सार्थ वाम दोनी पर मारा। ण पारण वं ना तो अक जाग्यां पूरी तर टिक्ने काम पर माया बोर ना ही उना कोई अंक ही तर रो पधा परयो । जीण मे उणारं मोटो प्रयास ग्यो । उण ३ REE TITrimlint or nari arthri. कोITHITी" भोर भी रामानी mmthman IIT गार पर मगी भोर माarihanmmm पर गे प्रमाण परपो, पामगरको। भनिपानी ही पुरा गरायो . हिमो में १७, पराठी १३ औ गाण. प्रति ' की गगाई' नाम का fri Tomरोमार:- ' गिटिरा (RIT, Et), गीतापाती (मराठी), रंगर-विमाग (गारमा)-दूगरी पारा ही नादर (मारणारी). प्राग-मुगुमामी गुमा १० (हिंदी), मुमता की गगाई गापः (पारपाटी), गोमटी (मारपारी), गुपंटर (रास्ट्रा). रामारोप-प्रगस्ति (गगर) भोपान (हिंदी)। लिराफर संपार-फाटफा जगाळ नाटक (गार पाटी), गहिरिनाग नाटक (मराठी), अनुतार तीपं शतर (मराठी), आर्या पदरी (मराठी),farन पाशुपन (ही)। संपार हो रही पं-अय पया करना पाहिए ? हिमी, मराठी, गुजराती, गाली और मारताड़ी; योधदर्पण (मारसाठी)। भरतियाजी री जापरी पप्पोटी पोयी 'गूपं पक्रयेप' मिल है गिी उर्मा द्वारा आयोजित 'विचार-दर्शन' गोत्र र अक विशाल पप रो अक अग है । उग रो विषय योग-विदया और वेदात सू सबंधित है । पुस्तक-लेखन कार्य र अतिरिक्त उणां हिंदी पत्र 'वैश्योपकारक' र सपादन में भी घणो सहयोग दियो । सामयिक समस्यानां पर उणां रा जिका विचार हा ये मोरळी कहाण्या और निबंधा रं रूप मे उण मे नियमित रूप सू प्रकाशित हुया हा । भरतियाजी री राजस्थानी रचनामां मे 'कनफ-सुदर' नान री कृति राजस्थानी भाषा रो पलो उपन्यास है और भरतियाजी री प्रतिनिधि राजस्थानी रचना मानी जा सके है । उण रो पैलो भाग ही छप सक्यो, दूसरो भाग प्रकाश में नहीं आयो। मो उपन्यास उण टेम प्रकाशित हुयो जद हिंदी मे चद्रकांता-सतति, भूतनाप जिसा तिलस्मी और जासूसी उपन्यासा रो बोलबालो हो । कनक-सुदर सामाजिक उपन्यारा है। इण मे उण टैम रे मारवाडी समाज री कथा न जिण सरस ठग सू प्रस्तुत करी है उण नं देखन लोग घणा प्रभामित हुया। कनक और सुंदर इण उपन्यास रा नायक-नायिका है जिका रो प्रारभिक जीवण ही पल भाग मे आ पायो है । उपन्यास रो प्रारभ इण भात हुने-"दोपहर को वसत । चारघां कानी लू चाल रही छे । हवा का जोर सू वाळू अठी-को-उठीने उड-उडकर वी-का नवा-नद्रा टोबा हो रघा छै, और भीजण भी रहा छ । मुह ऊंचो कर सामने चालणो मुस्कल थे। लू कपड़ा माहे वड़कर सारा सरीर ने सिकता कर रही छे । धूप इसी जोर की पड रही छे के जमी ऊपर पग देणो मुस्कल छ । रस्ता माहे दूर-दूर कठेही धाड को नाव नहीं। बाळू उडकर जगा-गंगा मदा टोबा होणे सू गरते को टिकाणो नही । आदमी तो दूर, रास्ता माहे कोई जीव. जिनामर को भी दरसण नही । इशे वसत अंक जवान आदमी जिण की उमर सोळा. सत्रा वरस की थी, माधो कपड़ा सू बंध्यो हुनो, हुग-हुश करतो-करतो अजमेर कानी चल्यो आ रहयो छ । रेती गरम होणे सूं पगा के घरका लागकर फोडा आ रहया छे, तो भी जोर सू चाल रहयो छे।" उपन्यास में आपणे देश में व्याप्त पूट री जिकी कमजोरी ही उण तरफ भी भरतियाजी राकेत करण में कोनी घूक्या-'अपणा देश माहे को नहीं जरा तो आपणी राज्यसत्ता पराया लोगा के हाथ गयी देखकर सारा हाट बोल्या के आ तो 'पूट' छ। साहेब हसकर बोल्या के ओ इशो अनोसो फळ यारा देश माहे छे जरा तो म्हां लोगा को राज हवो ; मही तो म्हांकी कोई मगदूर थी मू हजारा कोस पर आकर थांके ऊपर हकूमत करता? इण माहे कोई छूट थे। इण पूट नो सारा देश को सत्यानाश कर दीनो।" 'केसर विलाम' (प्रकाशनकाळ सवत् १९५७) भरतियाजी री पली राजस्थानी रचना और राजस्थानी रो पैलो नाटक है। इण आदर्शोन्मुनी यथार्थवादी नाटक री स्वाभाविकता और यथार्थवादिता हिंदी रे पडित महाबीरप्रसाद द्विवेदी ने भी घणा प्रभावित करपा । उणा 'सरस्वती' में लिस्यो-रचना इसकी बहुत ही स्वाभाविक है । वही-वही पढ़ते समय, स्वाभाविकता का इतना आविर्भाव हो उठता है कि इस वात की विस्मृति हो जाती है कि यह कल्पित कथा पढ रहे हैं । [सरस्वती, अक्टूबर, १९०४, पृ० ३६८] इण नाटक में अणमेल व्यान री समस्या उठायी है। अगमेळ व्याव री चुराई बतायने समाज में उण सू विमुख करणी ही इण रो उद्देश्य है । और लगभग आ ही समस्या बुढापा की सगाई नाटक (प्रकाशनकाळ सवत् १९६३) मे उटायी है । भरतियाजी इण री भूमिका में लिस्यो है-"इण माहे स्त्रिया की स्वतत्रता की हद, बी का परिणाम, बुढापा माहे ध्यान की इच्छा, पी को अविचार, गगाई, बी दोघधन और दी बधन को परिणाम, इत्यादि सरळ मारवाडी बोली माहे दरमाया छ । जगा-जगा नीति, उपदेश, बोध, शिक्षा, धर्म और विचार को दण्यो जताई उल्लेसीनो छ । मारवाटी गमाज की स्थिति, पर की और बाहर की वाता, विचार पी भिन्नता, पचायत और स्त्री-पुरुष का बरताव पर पूर्व विचार परके बयामाग एशो जमायो धे के जाणे आ इशी-वी-दशी वठे हुबोडी साची वात दे।" 'फाटवा-उगाळ' (रचना सवत् १६६४) भरतियाजी रो तीसरो नाटक है । णा दण में मारवाडी समाज में पाटवा (सट्टा) औरण मरीखा दूसरा दुगंगा गहुणपाटी हाणा रो चित्र अपित करपो है-"प्रेम अनुभव दिना बायो जा नहीं। मधुपान परा विना थी थी माधुरी मालम होने नही। शिण मू अनिर्वचनीय पार हो, बटीने हृदय पिचीजे, हिण में दास्ते प्रदा उत्पन्न होदे, और जिण का साम महदय नेहपूर्ण होवे दो ही प्रेम । यो भात परस्सर रोहर र बानी धेर ।

२॥
गौरख ग्रहण करयो,
लोक-हिरदै मे प्रतिष्ठा पायो,
गुण-गरिमा रो फोति-मान थापित करयो।
इण महामनीपी
श्रीकृष्ण-चरित्र र पावन प्रकाश में
भारत री जनता ने
गीता रो अमर सदेश
फेरू दियो।
इण दिव्य पुरुष
आप रै मत्र-बळ सू
आरज-भोम मे आथमत
स्वाधीनता-सूरज ने
भळभळाट करतो राख्यो।
राष्ट्रकवि पृथ्वीराज री वाणी
हिमाचळ रो गौरत-गान है,
गगा रो पावन गीत है,
रतनाकर रो गभीर घोप है,
भारती री वीणा रो दिव्य सुर है ।
भारती भक्त पृथ्वीराज ने
प्रणाम !
वारवार प्रणाम ।

राजस्थानी रा समर्थ सेवक थी शिवचंद्रजी भरतिया -सत्यनारायण स्वामी- (१) आधुनिक राजस्थानी साहित्य र इतिहास में श्री शिनचद्रजी भरतिया रो नांत सोने र मासरा में लिखीजसी । राजस्थानी र आज र साहित्य ने उणा अक जवरदस्त मोड दियो । हिंदी-साहित्य र समुत्थान और उण री श्रीवृद्धि मे जिको काम भारतेंदु हरिश्चद्र करयो ठीक बो ही नाम राजस्थानी साहित्य मे भरतियाजी करयो । भरतियाजी आधुनिक राजस्थानी साहित्य रा प्रथम महत्वपूर्ण साहित्यकार है । श्री शिनचद्रजी भरतिया रो जन्म विक्रमी सवत १६१० री चंत मुदि सातम रे दिन हुयो । 'फाटका-जजाळ' नाटक मे उणा आप रो परिचय इण भात दियो है- 'म्हारो जन्म वरिष्ठ वैश्यकुल मे हू अग्रवशी तथा । गोत्री सिंगल, बेंक थे भरतिया, 'विद्यानिवास' प्रथा ।। ('विद्यानिवास' जिण की पदवी छ) गगारामजी, जिण को पुण्य अपार। सुत बळदेवजी, कोनो कुळ-विस्तार ॥१३॥ उण को सुत शिवचः है, कुळ में शास्त्र-प्रवीन । रीत मुपारवा, कोनो नवीन ॥१४॥ भरतियाजी च्यार भाई हा । च्यार भाया में वैरागळा सू वहाहा। पिताजी री मृत्यु र बाद उणा री सगळी सपत्ति छोटिया तीनू भाया आपरा मे बाट ली और उणी र हाप की नही आयो। ण कारण उणा व्यापार करणो छोडने फालत करणी सरू करी । पण वकालत मे उणां रोजी नही लाग्यो और उणा इदौर में सरकारी नौकरी पर ली। भरतियाजी आप र जीवण मे घणा ही ताता-ऊना उतार-चढ़ाव देख्या। वे मनमौजी जीव हा । पराधीन रयन विण रं ही सार्थ बाम कोनी वर सपा । EM कारण घे ना तो अब जाग्या पूरी तरं रिवन काम पर मया और ना ही उना कोई अंकही तर रोपधा परपो। जीवण मे उणा र मोरटो प्रपारा रयो । ३ दादा जाया प्रथ Trm.intaman RELEE ti, tutी और frur.fmunामागे ना मोरगी. मग मोर पानी-पारो भागमा सारा और पसार ही HITTEE में Trtanात्ती मात्रा भी in. भागार मिलो- भाला मोटी, frमारवाड़ी forgiri मारी। रापमा पनि प, fers टि. प पूरगा। मा माग उगो गो गा पागनियाग । गेल्या पना पनि गाणुगोग, भीतिगोग ।। पणियागिता रोपलो ममतोमार पर भंग तर अंक मंठाहिरपार मेगादिर में प्रतिनिहा। अगर माम ही उगारीमारी येत गांगोग पुलित-तिही । प्रमोद 'माहेरी' मनुगार सारा अगाप पिमान, मराटी रानिदिदी साहित्य रा रोवर, मातृभाषा गारपाड़ी राबनिसमाद, उपप्पारा-मेगर, नारप-प्रता, शिवा- निद्वारा जिप: भरतिया या गर्म रामान विधान धौर मेरहा। पण यहुमुखी प्रतिभा र पनी री पोकप्रियता राजपान र प्रतिभागामी सपूत और हिंदी रे गुलसिर मेपर मुगी अमेरीरंग पत्र मादी सरिया जागी जा सके है- धन्य पन्य शिवापर कवि, पन्य भरतिया मुलभूषण । मरमरम के आप पंड हो नि.सदेह रहित दूपण ।। अति अज्ञान तिमिर आवेष्टित अपना जान समाज पोप पद्र! बापने काव्य-किरण से फैसा दिया प्रकाश विशेष ॥ भावपूर्ण मापुप्यं सरस ओ अति नैसगिक कृतकारी। भरी देशहित की बातें हैं जिसमें अनुपम उपकारी ॥ हे सामाजिक परित पित्रफर ! रविवर्मा के गुरु-भाई ! हे कविहर समाज-सशोधक ! करे कौन तब समताई? भरतियाजी री जीवण-सीला उणा री ६१ वरस री कमर मे सम्बत् १९७१ मे इंदौर में समाप्त हुयी। (२) भरतियाजी रे जीजण री सब सूं बड़ी उपलब्धि ही उणो द्वारा करी गयो राजस्थानी भाषा और साहित्य री सेवा । उणां साहित्य ने समाज सू रत्ती भर ही जुदो कोनी राख्यो । राजस्थानी जन-जीवण र स्तर न उणां आख्यां खोलने देख्यो, और देख्यो के राजस्थान री जन-संस्कृति, साहित्य, भापा और प्रतिष्ठा--सगळो नै लोग हीण दृष्टि सू देख है। राजस्थानी जन री ख्यिा खोलण सारू उणां कलम उठायी और लोगा न दरसायो के मापां रो समाज रसातळ न जाय रेयो है, 'मारवाडी' नांव री महत्ता घट रंयी है और आपणी भाषा री तो सुटिया ही टूब रंयी है ! गराई सूं सोचणं पर उर्णा ने राजस्थानी समाज री अपमानजनक अवस्था रो मूळ कारण अंत-पत ओ लाग्यो के समाज मे अज ताई अशिक्षा रो घोर प्रसार है। इण नै मिटाया विना समाज सुधरण रो कोनी, मारवाड़ी 'मारवाडी' ही रसी। शिक्षा रे प्रचार-प्रसार सारू उणा जनता री बोली ने ही माध्यम वणावणो ठीक समझ्यो। मातृभापा मूं आछी दूजी भाषा किण तर हुय सके है ? उणां री मीट में आ वात आयो के 'मारधाडी' रो उद्धार मारवाडी भाषा ही कर सके है- "मारवाड़ी भाषा आपणी मातृभाषा छ । मारवाडी भाषा आपणी बोधदात्री छे भोर मारवाड़ी भाषा आपणी स्त्रियों की सुधारकी छ । म्हारो तो सिद्धात छे के आप लोगों को लक्ष्य आपणी मातृभाषा मारवाडी कानी नही रहणे सू आपणो समाज हाल ताई इशी हीन दशा माहे पड़पो हुयो छ । मारवाडी भाषा विश्वविद्यालय तो दूर सपापि छोटी-मोटी पाठशाळा ताई भी पूग जाती तो घणासरा मारवाड़ी सरदार विद्वान वण जाता । आपणी मातृभाषा ने हीण समझणे सू आपणो उद्धार किण तरे हो सके ?" ('कनक-सुदर' री भूमिका) 'केसर-विलास' नाटक री भूमिका मे उणा री मातृभाषा र प्रति आ हूम इण रूप में प्रगट हुयी है- "म्हारा दिल माहे हमेशा विचार आव्रता के आपा वाल्या के कुळ माहे जनम लीनो, रुजगार-धधो मोकळो कीनो, दो-चार भापा को अभ्यास करने सैकड़ों पुस्तका वाची और सस्कृत, मरेटी, हिंदी माहे रचना भी करी, कविता मोकळी कोनी, पण आपणो जनम-भाषा मारवाड़ी तिका कानी तो नजर भी कीनी नही। छोटी-मोटी कोई पुस्तक वणाय ने सरदारा के सामने राखणी तो खरी । देखा भला, आदर होने के अनादर होते।" मातृभापा मे रपना करण री उणां री इच्छा इण कारण भी ही के अशिक्षित मारवाडी और उणां रो लुगायां तो इण रे अलावा भारत री दूजी भापानो ने जावक-ई यो जाणं ही नी, फेर उण भाषावा मे लिसण मू मारवाडी समाज नै काई फायदो? और भी सबळ कारण राजस्थानी मे लिखप रो उणां भी बतायो के उण सम इण भाषा रो साहित्य दूजी भाषामा र साहित्य मू जाबक ही पोड़ो लिस्यो जा रेयो हो । राजस्थानी रं गौरन ने भी दुनिया रसामन पावणो हो। 'वेसर-विलास' री भूमिका मे उणा लिस्यो है- "मापणो नोयोटी मारवाह और मारवाडी पोली वटी के अधेरा माहे पड़ी थे. गू आप जाणो नही पाई ? अग्रेजी तो रंबा पो पण दंगाली, गुजराती, मरेटी, हिंदी पानी तो बरा नजर बरो, विशा-दिशा अप रण भाषा माहे तयार हुवा थे और हो रपा निसरी गिणती मही। मारणी मारवाडी होली धाड इणा गुधार पाळास कार पूण्णोदी दुनिया माहे पण अधेरी गुफा के अंदर गोगा गाती रहे, इण को अभिमान आप सरदारा ने नही?" और भरतियाजी राजस्थानी समाज में अंधेरी गुफा यारं सावण साह कमर फगी और आप री फनम री जागती जोत गूं उण रो मार्ग प्रगत करण से प्रयाम फरपो, घरट प्रयास करपो। भरतियाजी री लियोडी पुस्तकां री सरया राजस्थानी में ६, हिंदी में १७, मराठी मे १३ और संस्कृत मे ३ है । सं० १९६३ में प्रकाशित 'बुढापा की सगाई नाटक र छेडल पृष्ठ र विज्ञापन में उणां री रचित कृतिया रो वितरण इण प्रकार है- "सिद्धेदुचद्रिका (संस्कृत, मराठी), गीता-पदधावळी (मराठी), केसर-विलास (मारवाड़ी)- दूसरी बार छप रही थे, कनकसुदर (मारवाड़ी), प्रवास-युगुमानली गुच्छ १० (हिंदी), बुढापा की सगाई नाटक (मारवाडी), मोत्या की कठी (मारवाड़ी), गुर्वष्टक (संस्कृत), राज्यारोहण-प्रशस्ति (संस्कृत) शोककानन (हिंदी)। लिखफर तैयार-फाटका-जजाळ नाटक (मारवाडी), मतिविलाम नाटक (मराठी), अनुताप तीर्थ शतक (मराठी), आर्या लहरी (मराठी), विज्ञान पाशुपत (हिंदी)। तैयार हो रही छ-अब क्या करना चाहिए? हिंदी, मराठी, गुजराती, वगाली और मारवाड़ी; बोधदर्पण (मारवाड़ी)। भरतियाजी री आसरी छप्योड़ी पोथी 'सूर्यचकवेध' मिले है जिकी उणा द्वारा आयोजित 'विचार-दर्शन' नाव र अक विशाल ग्रंथ रो मेक अश है । उण रो विषय योग-विदया और वेदात सू सबधित है । पुस्तक-लेखन कार्य र अतिरिक्त उणा हिंदी पत्र 'वैश्योपकारक' र सपादन में भी घणो सहयोग दियो । सामयिक समस्यावां पर उणा रा जिका विचार हा वै मोकळी कहाण्या और निबंधा रे रूप मे उण मे नियमित रूप सू प्रकाशित हुया हा । भरतियाजी री राजस्थानी रचनावां मे 'कनक-सुंदर' नाम री कृति राजस्थानी भापा रो पलो उपन्यास है और भरतियाजी री प्रतिनिधि राजस्थानी रचना मानी जा सके है । उण रो पलो भाग ही छप सक्यो, दूसरो भाग प्रकाश में नहीं आयो। ओ उपन्यास उण टैम प्रकाशित हुयो जद हिंदी मे चद्रकाता-सतति, भूतनाथ जिसा तिलस्मी और जासूसी उपन्यासां रो बोलबालो हो। कनक-सुदर सामाजिक उपन्यारा है । इण मे उण टम र मारवाडी समाज री कथा नै जिण सरस ढंग सू प्रस्तुत करी है उण में देखनं लोग घणा प्रभावित हुया। कनक और सुंदर इण उपन्यास रा नायक-नायिका है जिका रो प्रारभिक जीवण ही पल भाग मे आ पायो है । उपन्यास रो प्रारभ इण भात हुन-"दोपहर को वसत । चारयां कानी लू चाल रही छे । हन्ना का जोर सू वाळू अठी-की-उठीने उह-उडकर वी-का नन्ना-नया टोबा हो रपा ई, और भीजण भी रहया छ । मुह ऊचो कर सामने चालणो मुस्कल छ। लू कपड़ा पाहे वडकर सारा सरीर ने मिकतान कर रही थे। धूप इसी जोर की पड़ रही छे के जमी ऊपर पग देणो ....... मुस्कल छ । रस्ता माहे दूर-दूर कठेही झाड को नाव नहीं । वाळू उडकर जगा-जगां नपा टीबा होणे सूगरते को ठिकाणी नहीं । आदमी तो दूर, रास्ता माहे कोई जीव- जिनान्तर को भी दरसण नहीं । इशे वापत अंक जवान आदमी जिण की उमर सोला- सत्रा वरम की थी, माषो कपड़ा सूं बंध्यो हुओ, हुश-हुश करतो-करतो अजमेर कानी चल्यो आ रहयो छ । रेती गरम होणे सू पगों के घरका लागकर फोडा आ रहया छ, तो भी जोर सू चाल रहयो थे।" उपन्यास में आपण देश में व्याप्त पूट री जिको कमजोरी ही उण तरफ भी भरतियाजी सकेन करण में कोनो घूक्या-'भपणा देश माहे को नही जरा तो आपणो राज्यसत्ता पराया लोगा के हाथ गयी । देखकर सारा सट बोल्या के आ तो 'पूट' छ। साहेब हसकर बोल्पा के ओ इशो अनोखो पढ़ थारा देश माहे घे जरा तो म्हा लोगा को राज हवो ; नहीं तो म्हाको काई मगदूर घी सू हजारा कोस पर आकर पावे ऊपर हकूमत करता? इण माहे काई पूट छ । इण पूट तो सारा देश को सत्यानाकर दोनो।" 'केसर-विलाम' (प्रकाशनकाळ सवत् १६५७) भरतियाजी री पैली राजधानी रचना और राजस्थानी रो पैलो नाटक है। इण आदर्शोन्मुखी यपावादी नाटक री स्वाभानिकता और यथार्थवादिता हिंदी र पहित महावीरप्रसाद हिनदी नं भी घणा प्रभावित करपा । उणा 'सरस्वती' मे लिस्यो-रचना इसकी बहुत ही स्वाभाविक है। रही-वाही पढते समय, स्वाभाविकता का इतना आविर्भाव हो उठना है कि बात की विम्मृति हो जाती है कि यह पल्पित क्या पढ़ रहे है । (सरस्वती, अगदावर, १९०४, पृ. ३६८] इण नाटक में अणमेल प्याच री समस्या उठापी है। अपमेन्ट ध्याधरी पुराई वतापने समाज ने उण मू विमुरा वरणो ही प रो रहेगा। और लगभग आ ही समस्या युद्धापासी गगाई नाटक (सासमा म १९५३) मे उटायी है । भरतियाजी इण भूमिका में लिस्यो है-"ज माहे स्त्रिया की स्वतंत्रता की हद, बीमा परिणाम, टापा माहे घावोरा, बीको निधार, गगाई, सीको बधन और बी बधन को परिणाम, इत्यादि सरटमारासी बोली माहे परमाग थे। जगा-जगा मीनि, उपदेश, बोध, शिक्षा, धर्म और विचार को दादी नाई उल्लेग नीमारवादी समाज भी स्थिति, घर की और गहरी बातो, विचार भी भिन्नता, पसायन और स्त्री-पुरस बरसा पर मृग रिचार र स्यामा शो जमायो ऐ जाणे भारी-की-सी पोती सारी गर । "फाराममा' (रचना सवा १६६४) भरिपरी रोटीमगेना है। उगा रण में मारा माननं पापा (सट्टा) और रन मामी हाणातचित्र frandit-म मनुमा विमान | पुरत सपा बिना बोगी माधुरी मालम होरे मही। frr मोर .. जय भीर, श्चि पा र उपभोfrगामा र हो । यो परम्पर पोरगर पळारा कार पूग्योड़ी दुनिया माहे पण अधेरी गुफा में अंदर गोगा गाली रहे, ण को अभिमान आप सरदारा ने नहीं कोई?" और भरतियाजी राजस्थानी समाज में अधेरी गुफा ग यारं साबण गारू कमर पगी और आप री कलम री जागती जोन गुं उण रो मार्ग प्रशस्त करण रो प्रयाग करपो, परएट प्रयास करयो। (३) भरतियाजी री लिस्योती पुस्तको री सरया राजस्थानी मे ६, हिंदी में १७, मराठी मे १३ और संस्कृत मे ३ है । सं० १९६३ में प्रकाशित 'युद्धापा की सगाई' नाटक रै छेडले पृष्ठ र विज्ञापन में उणा री रचित कृतिया रो वितरण इण प्रकार है- "सिद्धेदुचद्रिका (संस्कृत, मराठी), गीतार्य-पदपावळी (मराठी), केरार-विलास (मारवाडी)- दूगरी बार छा रही छे, कनकसुदर (मारवाडी), प्रवास पुगुमानली गुच्छ १० (हिंदी), बुढापा की सगाई नाटक (मारजाडी), मोत्यां की कटी (मारताडी), गुर्वष्टक (सस्कृत), राज्यारोहण-प्रशस्ति (संस्कृत) शोककानन (हिंदी) । लिखकर तैयार-फाटका-जजाळ नाटक (मारवाड़ी), मतिविलास नाटक (मराठी), अनुताप तीर्थ शतक (मराठी), आर्या लहरी (मराठी), विज्ञान पाशुपत (हिंदी)। तैयार हो रही छ-अब क्या करना चाहिए? हिंदी, मराठी, गुजराती, बंगाली और मारवाड़ी; बोधदर्पण (मारबाडो)। भरतियाजी री आखरी छप्योड़ी पोथी 'सूर्यचक्रवेध' मिले है जिकी उणा द्वारा आयोजित 'विचार-दर्शन' नाम र क विशाल प्रथ रो मेक अश है । उण रो विषय योग-विदया और वेदात सू सबधित है । पुस्तक-लेखन कार्य र अतिरिक्त उणा हिंदी पत्र 'वंश्योपकारक' र सपादन मे भी घणो सहयोग दियो । सामयिक समस्यामा पर उणा रा जिका विचार हा वे मोकळी कहाण्या और निबधा रे रूप मे उण में नियमित रूप सू प्रकाशित हुया हा । भरतियाजी री राजस्थानी रचनावा मे 'कनक-सुदर' नांव री कृति राजस्थानी भाषा रोपलो उपन्यास है और भरतियाजी री प्रतिनिधि राजस्थानी रचना मानी जा सके है । उण रो पलो भाग ही छप सक्यो, दूसरो भाग प्रकाश में नही आयो। मो उपन्यास उण टैम प्रकाशित हुयो जद हिंदी में चद्रकांता-सतति, भूतमाय जिसा तिलस्मी और जासूसी उपन्यासा रो बोलबालो हो। कनक-सुदर सामाजिक उपन्यास है। इण मे उण टम मारवाड़ी समाज री कथा नै जिण सरस ढग सू प्रस्तुत करी है उण ने देसन लोग घणा प्रभावित हुया । कनक और सुंदर इण उपन्यास रा नायक-नायिका है जिका रो प्रारभिक जीवण ही पैले भाग मे आ पायो है । उपन्यास रो प्रारंभ इण भांत हुन्-"दोपहर को वसत । चारघा कानी लू चाल रही है। हवा का जोर सू वाळू अठी-की-उठीने उड-उडकर वी-का नवा-नना टोबा हो रया छ, और भीजण भी रहा छ । मुह ऊचो कर सामने चालणो मुस्कल छ। लू कपड़ा माहे वडकर सारा सरीर ने सिकताय कर रही थे। धूप इसी पोर की पड़ रही छे के जमी कार पग देणो वंदनमाल -रामसिंह- (१) प्रेम रो दृष्टिकोण म्हारो हृदय हू थारे आगे सोलन रासतां डरूहू-कठई ये आ नी के बंठो के इण नै तो मैं कदैई देव चूको है। म्हारं गानणे मे मुरमग यो हुदै इण रो कारण पारी आखियां री कोर सूं बूझो । हूं याने म्हारो काव्य नही सुणाऊ हू; मन डर लाग है के कठई थे प्रशसा रा पुळ बाषण नी लाग जानो। पे मन ससार भर मे सगळा सू सुदर समझो इण वातर हू पारं आगे मूढो लुकाय लेऊ हूँ पण इण ने ये कदास लग्जा रो परिणाम नी समझ लेनो इण वास्त हू पार मार्ग निश्शक हुपनं आऊ है। निशीथरी नि स्तब्धता मे जद थे अकात मे म्हारे सू मिलण ने आवो तो म्हारी इच्छा भाग जाव्रण रोहवं । ये हस ने को-आयो, जातो। जण म्हार मूरे सू नीकळं-ना!हू को जाऊ नी । जे हू बामूखण सजाय नै आऊ तो थे पूछो-आज अंबाभूसण इत्ता सुखावणा यो लाग है ? और जे सादा वस्त्रां मे आऊ तो ये कंधो-ओहो ! बार ओ निष्कळक पदमा धरती मार्च कट सू ऊग प्रायो। फेर ये ही बतातो, पारं कनै क्यिा बाऊ' (२) प्रेम रो व्यवहार जद जाचक नै रोदेवण न जाऊ तो मैं भी उणां री पंगत में आ म ।

८ .... ।" ने खीचे । वीजळी का तार का ठोका के ज्यूं अक का हृदय ऊपर बेक का हृदय को आघात करे । प्रेम को भात, प्रेम को भावक और प्रेम की भावना इणा माहे सूं अंक को भी लोप हो जाने तो फिर दूजो रहे नही भरतियाजी री साहित्य-रोमा री मुरय प्रेरणा समाज-सुधार और देश रो उत्थान है । विदेशी शोषण कानी भी उणां रो ध्यान हो-"अगरेज लोगा कानी तो जरा नजर करो, अठे सू माटी के नाई पाबड़ा सूं रुपया खीचकर आपका देस ने ले जाकर इन्द्रपुरी वणा दीनो छ । आपणा देश ने भिखारी कर दीनो छ ।" समाज-सेवा री भरतियाजी री कित्ती हूंस ही, 'कनक सुदर' रो भूमिका र इण उद्धरण सू आ आछी तर जाणी जा सके है- 'हाय पैसो ! हाय पैसो!' करवाळा म्हारा सारा सरदारां ने राजा-महाराजा अर श्रीमंत वणाकर, हळका छळ-छिद्र का वेपार सूं छुड़ाकर खरा-सरा वैश्य वणा दप, उण की सारी कुरीतां मेट दधू , उणका घर को सुधार कर द , उणकी फिजूल-खरची मिटा दय, उणकी राहरीत मुधार दयू, उणका बाळविवाह रोक दधू, उण का वेजोड व्यांग नही होबा दर्ष, मोटयार ने विदया सिखाकर स्त्रिया ने शाणी कर दघ और वेश्या भी नहीं बोल सके उशा फोटा बोलां का गीत गानणा छुडा दघू ।" स्त्री-शिक्षा रा व गैरा हिमायती हा । नारी री हीण अवस्था देख-देखनै उणां रो काळजो कटीज्या करतो। नारी में उण री महानता और उण री जिम्मेवारी जतानण रो उणां जबरदस्त प्रयास करमो हो । उणा 'कनक-सुदर' री भूमिका में इण बाबत आप रा विचार प्रकट करया है। भाषा र संबंध में भी उणा रा विचार स्पष्ट ने महत्त्वपूर्ण हा । कोई भी राष्ट्र जद ही सबळ हुय सके है जद उण री भाषा अक हुदै । 'कनक-सुदर' में उणा लिख्यो है- "हर-अक देश री सवंग अक भापा होणी अत्यंत आवश्यक छ । यूरप, अमेरिका, विगेरा माहे अक भाषा होणे सूं उण लोगां की हद अकता होकर वे आज सारी दुनिया माहे श्रेष्ठ हो रया छ । थापणा हिंदुस्तान की अक भाषा होती तो आज आपणा देश की भी अवनति होती नही।" पापर्ण राष्ट्र र ण मात रे मूर्धन्य विचारक और समाजमैत्री और राजस्थान. भारती र सपूत पूत री सेनामा २ प्रति सही-राही आभार तो जर ही मान्यो जाला जद के उरी में उण सम राजा प्रवासी राजस्थानी साहित्यकारी री सारी रचनामा नै अस्तिव बाई--आई रूप में प्रभागित करायन उणां रो प्रचार करांला । राजस्थानी र इण समयं सेवक री अमर स्मृति ने पुन:पुनः प्रणाम !

वंदनमाल -रामसिंह- (१) प्रेम रो दृष्टिकोण म्हारो हृदय हू पार माग सोलन राखता हरू हू-कठई थे ा नी के बैठो के इण ने तो मैं कदंई देख चूको हू । म्हारं गानणे मे सुरभग क्यो हुन इण रो कारण पांरी आखिया री कोर सूं बूझो। हूं पान म्हारो वाव्य नहीं मुणाऊ हू; मन डर लाग है के कठई ये प्रशसा रा पुल वाषण नी साग जाहो। ये मन समार भर मे सगळा मू मुदर समझो इण सातर हू पारं मागं मूढो सुकाय लेऊ पण इण ने ये पदास लग्जा रो परिणाम नी समा लेदो इण वास्तं हूं पार बार्ग निश्शक हुयनै आऊ है। निशीथ रीनि स्तम्षता मे जद ये अंकांत में म्हारं मिलण न मानो तो म्हारी रच्या भाग जामण रोहवं । ये हम ने पंद्रो-आयो, जायो। गर्म म्हारं मू मू मीरळे- नाको जाऊ नी। भाभूरवण सजाय ने आऊ तो पृधो-आज बाभूषण मा मुशवणा यो लाये है? और जे सादा पस्ता में बाउ तो पेयो-ओहो । बार ओ निपटपमा धरती माईपू अग आयो। पर ही बतायो पार न पियां या - (२) प्रेम रो मार अारा मरी देवन में बाऊ हो भी रमा रोपस में बाम । १ 4 सीधे । योजळी का सार या टोका के ज्यूं मेश का हृदय पर अफ का हृदय को आपात करे । प्रेम को भात, प्रेम को भावक और प्रेम की भावना इणा माहे सूं अंक को भी सोप हो जाते तो फिर दूजो रहे नहीं 1" भरतियामी री साहित्य-रोमा री गुम्य प्रेरणा समाज-गुपार और देश रो उत्पान है । विदेशी शोपण गानी भी उणां रो प्यान हो-"अगरेज सोगा कानी तो जरा नजर करो, अठे तूं माटी के गाई पातड़ा सूपया पीपकर आपका देश ने ले जाकर इन्द्रपुरी वणा दीनो घे। आपणा देश ने भिखारी कर दीनो थे।" समाज-सेता री भरतियाजी री फित्ती हूस हो, 'कनक सुदर' री भूमिका र इण उतरण सूं आ आधी तर जाणी जा सके है- " "हाय पंसो! हाय पैसो!' करवाळा म्हारा सारा सरदाराने राजा-महाराजा अर श्रीमत वणाकर, हळा पळ-छिद्र का वेपार सूं छुढाकर सरा-रारा वैश्य पणा दम, उण की सारी पुरीता मेट दपूं, उणका पर को सुधार कर दपूं, उणकी फिजूल-सरवी मिटा दप, उणको राहरीत मुधार दपूं, उणका बालविवाह रोक द५, उण का वेजोड़ ध्यान नही होवा ६, मोटधारां ने विदया सिसाकर स्त्रियां ने शाणी कर द और वेश्या भी नही बोल सके उशा फीटा बोला का गीत गाणा छुडा दपूं।" स्त्री-शिक्षा रा बै गैरा हिमायती हा। नारी रोहीण अवस्था देख-देखनै उणां रो काळजो कटीज्या करतो। नारी ने उण री महानता और उण रो जिम्मेवारी जतानण रो उणा जबरदस्त प्रयास करघो हो । उणा 'कनक-सुदर' री भूमिका मे इण बाबत आप रा विचार प्रकट करघा है। भाषा र सबध में भी उणा रा विचार स्पष्ट ने महत्त्वपूर्ण हा । कोई भी राष्ट्र जद ही सबळ हुम सके है जद उण री भाषा अक हुने । 'कनक-सुंदर' मे उणा लिख्यो है- "हर-क देश री सर्वत्र अक भापा होणी अत्यत आवश्यक छ । यूरप, अमेरिका, विगेरा माहे मेक भाषा होणे सू उण लोगा की दृढ अकता होकर ये आज सारी दुनिया माहे श्रेष्ठ हो रया छ । थापणा हिंदुस्तान को अक भाषा होती तो आज आपणा देश की इशी भवनति होती नहीं।" आपण राष्ट्र रे इण भात र मूर्धन्य विचारक और समाजसेवी और राजस्थान. भारती र सपूत पूत री सेवाहा र प्रति सही-सही आभार तो जद ही मान्यो जाला जद के उण री ने उण र समै रा दूजा प्रवासी राजस्थानी साहित्यकारां री सारी रचनावां ने अश्लिब आई-सू-आधे रूप में प्रकाशित करायन उणा रो प्रचार कराला । राजस्थानी र इण समर्थ सेवक री अमर स्मृति ने पुन:पुन. प्रणाम !

(४) दरिद्र रो दान
?
जे जावणो ही हो तो आया क्यो हा?
जद-कदई थे आतो तो विदा मांगता ही आनो हो।
याचक ! मैं तो पारी दान-बीरता री घणी प्रशंसा सुण रासी ही, फेर आ
उलटी रीत बयो?
जे जाणो ही हो तो आया क्यो हा
म्हारो और थारो कोई पेला रो संबध है काई और जे नही, तो वस म्हार हो
वनं मागण ने क्यो आनो हो?
हूँ दरिद्र, दरिद्र सूं भी दरिद्र, हूँ और ये हो म्हारा सर्वस्व । लो, देखो । इण वार
याने हो त्यागर्न त्याग रो यादर्श देसाक हूँ।
जे जावणो ही हो तो पाया पो हा
7

माकाय पारं मिलाने, और निगारति पारी निमीलित पापियां नै, घूमण नै पर उग यारनं पारंकोमन सोरानमार,जात मदी पिना मार्थ १०। बै हाय आगं कर और हूं उणां रै कानी देसू भी नहीं हूं। सगळा जणा दान लेयन जानै परा जद हूं उणा ने कंऊ हूं-थे आप दे सको हो उण ने मागण ने आनो हो । हूं थानं जाणूं हू । बै चोखा-चोखा उपहार लेयनं आटे और म्हारै आगे हाथ जोडियां ऊभा रहे । हूं व्यंगपूर्ण हसी हसन कैऊहू आप दे सक हूं उण न थे मने देवण नै आवो हो । हूं थांन जाणूं हूँ। ढळतोड़ी रात मे ओस सू भौजियोडे शिरीप र पूलां री सुगघ लेयनं समोर म्हार पर आततो हो । म्हारी आंख लागगी और मैं सपने में उणा ने कंत्रता सुणिया-काई तूं मनं प्यार कर है। थे इसो प्रश्न पूछो हो जिण रो उत्तर थे ही जाणो हो-मैं झुझळायन उथळो दियो। फेर भी पार देवण-लेषण में और केवण-सुणण मे अक अपूर्व आनंद है-इयां कैय- ने वै म्हारी नीद र साग-साग कुण जाणे कठीने रम जाने । (३) तूं और थारी बना तूं चिणा चूट जद यारी छोटी-छोटो बैनां नोब री नान्ही-नान्ही डाळियां माथ बैठी-बैठी गीत गाये । उणा रो गीत बंद हुसी जद ही थारो काम समाप्त हुसी और तू उणारे साग-साग यावा रे कुंज कानी उड जासी। वेला सूं छायोडी पारी इंपड़ी रे द्वार माथ गाय ढोक है और पारी वाछी ऊपर लटकतै पूल में जीम सू पकड़णो चा । धान माय पहती यकी गूरज री बासरी स्वर्ण-रश्मिया पार केसा और कपोला मार्य, योर पारी बैना र कठां और पायां मार्य, पहें। रान में प्रकृति यो गगळां री आरमा में विश्राम करें और वा ही पारे दिमाग में बा। तारा पारं अधिस पुपराठा गां में आगमीवनी रम दूर देगा रा सपना मरं। . मंग मोर भरं।

(४) दरिद्र रो दान
?
में बाधनो ही हो तो आया क्यो हा
अदबई ये आवो तो विदा मांगता ही आनो हो।
माचक । मैं तो पारी दान-तीरता री घणी प्रशंगा मुण रागी ही, पर आ
उल्टो रीत यों?
जे जावणो ही हो तो आया क्यों हा?
म्हारो और थारो कोई पला रो संबंध है काई ? बौर जे नहीं, तो वम म्हार ही
क्न मागण नं क्यों आनो हो?
हूँ दरिख, दरिद्र सू भी दरिद्र, हूं और ये हो म्हारा सबस्म । लो, देखो ! इण वार
पान ही त्यागनं त्याग रो दशादर्श देखाक हूं।
जे जाणो ही हो तो पाया क्यो हा
.

मोत : नयो जीवण
:
-रोत्तमदाग स्वामी-
पांद आय
पण दूरी दिन भळे कांगपा ।
यादळ वरस जा
पण भळं भरीजन
पृरती ने हरी-भरी वणातण नं आ पूगं ।
डाळी रा पूळ कुमळायोज जावं
पण या भळे फूला सू सदीज जावें।
दियो दिनूंग वुझ जान
पण रात हुतां ही भळं प्रकाश देवण लागे ।
मौत जीवण रो अंत नही,
घा हीज तो जीवण ने नयो जीक्षण देने ।
भरीजण में वरस है मेघ
फूल कुमळा विगसण ने
जगायीजण ने दीपक बुझे
आंधनं चांदो ऊगण नै
मौत नहिं जीवण रो अवसान
करै वा ही ना-जीवण दान

मीठा सपना, खारा गीत -उदयवीर शर्मा- बदक ग्यारवी कक्षा र परच मे नई शैली रा निबंध आया। पांच शीर्षका माय सू क मार्थ निबध लिखणो हो । मेक शीर्षक हो 'भोटा सपना, खारा गीत ।' बेक विदयार्थी घ्यार निबधा ने छोडने इण ने ही इण भत्ति लिखिपो- (२) माय मोटा सपना विना जीवण सूरखो है। इस बार सू हरियाळो लागता पको भी पोपोह या जिया ही मीठा सपना विना मिनरा बार सू सजीवतो लागतो एका भी भीतर मूभिदियोडो रखें। मोटा सपना री रस-गगा मे मिनरा म्हातो रवं पणा ही मुरग घरा मार्थ उतरियोहो लागं, नही तो नरकोही ही समाो । मोटा सपना देखणा जीवण रो आनर है, मार है पर आशावादी मारग है पण मीटा सपना मे जे विझोक पर ज्या तो जीवण बोस है। गुह मे रिबिर या ग्यान तो मयो हो जातो र जियो ही जीवण में खारा गीत गायीजण लाग ज्या तो जमारो गयो। मोटा सपना जिदगी है तो सारा मीत मौन है। रण प्रसग मे धेरपा पार थायमी जिपी बर्ट वांचो- अंग शेखचिल्ली हो । बाप रं गांव मारग वर्ग हो। पारडा-पलासपी रोप्यापारी आप मापी पोलियां उन मिनियो। सागरी मयमा यो हो। भै मरिय मामी ने टालो बरगे दम गार्ग दोलिया-भाया । जेतू म्हारे दी चीन भामर्न माग ने पगे मान ग पमा मरी राखिचिल्लो मुणता हा भाम। पो थापा उमाविली र हिर मा भादग्यो । दोन पाया।

. - अय शेरगिल्ली सोपण सागियो-कान री का मुरगी सरीदनं मासु । मुरगी ईटा देसी । योळी मुरगियां ह ज्यागी । योळा ईटा देसी । बोळा वेवसू । बोळा पईसा आसी। पईमा जोड़ने पर पिणारां । यठक, पौवारा, पोत, चौपरा में उप हेली र हुसी । फेर धाप रो व्यान फरसू । टावर इसी । फेर हूं मजूरी करणो छोड देसू । बैठक मे यंठो-बैठो होको टरमास । टायरियां री मा म्हारं सातर तीवण तीस-वत्तीस दणासी । म्हारलो छोरो रुहियो मनं जीमण ने युसावण मासी । होकरी मौज मे मतो हूं पती नट जासू । यो फेरू यासी । हू फेरू के देसू-तू पाल, हं आऊ हूं। थोड़ी देर उडीकन छोरै री मा आप बुलातण आसी। जगा हूं थोड़ी-सी दिसावटी रीस करने नाड़ से लटको करतो कसू- -अयार कोनी याऊ, होक मे पान आ रयो है ; तू घाल, हूं आऊं हूं। शेखचिल्ली रो लटको करणो हो के घी रो पड़ो हट धरती पर आयो और फूटग्यो। घी धरती माथ फंलग्यो । व्यापारी देखतो-रो-देखतो रेग्यो। योडो सानचेत हुयनं पूछियो-अरे ! ओ पाई करयो ? घडो फोड दियो । पी रा पईमा कुण देसी ? शेखचिल्ली बोलियो- पार पईसा री लाग रयी है । म्हारो तो निठ वणियो घर ढहीजग्यो । अब म्हारो घर कुण बांधसी ? दोनू अक-दूसर सू लड़ता-झगड़ता आप-आप रं मारग लागा। इयाल शेखचिल्ली रा मीठा सपना सारा गीता मे बदळ ग्या। मीठा सपना सेतो उण रो मनडो कठे और ही जागा घूमती हो । माथ पर राखियोई बोझ रो उण ने भान ही को हो नी । नाड कद हाली, कद के हुयो, उण न काई ठा? मीठा सपना री वाडी में यो तो फळ तोड हो अर खाने हो । इयाल ही भारत री आजादी र पैली लोग राम-राज रा सपना लेयन मोद मनाया करता पण बै से हवा हुम्या। . इण प्रसग में अक कथा और लिखने विषय में की गभीरता सू सुलासा करणो घाऊ हूं- अक गाव में दो भाई रखता हा। वहोड़ो य्यायोटो हो, छोटकियो कतारो। वोर्ड र सात छोरा हा । पण सं कमारा । भाई भी मायल कारण सूं कतारो रंयग्यो । चाणचको वोडो भाई से ने अनाय यणायनं चालतो यो। अब घर मे रेयग्यो छोरा रोवारो काको, मा, यर व सातू भाई। अंक दिन छोरा री मा बोली-बेटा ! पे तो ययं वरा-वहा हयग्या, घरी को पा सको नी पन होट्रिय भाई ने परणार सो सो पर में नई रोराणी या जावं, पीठी पातिाक दिनारी हूँ ? पाने भी रोटियां रो पाराम गाय, म्हारा दिन भोप म बोल-यना र सावट पट जात्र, या मागी तो घर में मार पीज भासी, म्हार परणीनं आप रे बाद आज नमक कोई यह इस पर गै देवी ने लांघने को आयी मी ; म्हारी मनग्या है के होरिये ने घ्यावी : यार हमी , मगळा गजन-गनेही मेळ-मिनापी, पावणा-यही घर में आगी : मंगळ-गान हुमी , घर-री इंट-इंट पुगिया मनाभी, ह भी ध्यान में कमोग-बारा न दे-रेयन मन गै कादगू ; अपार ताई मेरो ले-लेयन हो पाता रंया हा, नो महानणो भी पापोजे , इण वास्न होडिय रो ध्यान पर दो; रोल में याडी-मनीरा, गिट्टा-कटी हा पण कुण साव पड़िया ही रहे, वेचणा पह, टावर हु तो पाय ले। यह तो डोलती ही चोखी लागे, ये तो म्हारो कंणो मानो पर पोर होदिय भाई ने लपैट दो । पली तो से भायो इण वात रो विरोध परियो पण मा री जिद भी मानणी पर्ड । घोरी दूदन य्यान रच दियो । काको इण वात सू रूमग्यो के मन पूछियो क्यों कोनी । घणो मनायो पण फाको मानियो नही अर आ जिद कर ली के प्यान सू पेली मने घर मे पांनी दो। सर ध्यान तो करणो ही हो । पाती भी करणी पड़ी। घर रा दो टुकड़ा हुयाया। काको न्यारो हुयग्यो । ध्यान मे वरात कोनी गयो । व्याप हुयग्यो। घर पर बायगी। यह नूई रोसणी री ही। आता ही घर में चानणो हुयग्यो ; चहल-पल-सी हुपगी । आती-जाती री पायल छम-छम वाजे लागी । सातू भाया नै घणी खुसी हुयी। एऊ जेठ बहू रा लाइ लडाण चोग्बी-चोखी चीजा ला लागा । उण री सुख-सुविधा रो से ध्यान राखता । मा र मोद रो तो ठिकाणी ही कोनी रयो, नित उठ मंगळ- वारणा लेती । दास-गळी रा भी इण वात सू घणा राजी हुया। सुणता जिका ही ३ण वान ने आधी अर टेम-सारू बतावता । नूई चीज से ते चोखी लागे । धीरे धीरे भान यढिया । सातू भाई लड मरिया । बोलणो वद कर दियो । यात के ? अकबर-मैं घ्याव करियो । दूजो कंम्हारी हिम्मत विना ध्यान हुतो ही पोनी । साता रा सात मता । माता री सात पारटियो यणगी। गांव रा लोग भी कानी-कानी साता रा सोरी हुयग्या । राड बघगी । पण पाई हवं? मा बैठी-बैठी से पातां देखें भर सोच के जे वह नही लाती तो ही ठीक हो। क्यों तो लालजी न्यारा मातू भाई आपसपरी मे पडता, क्यो ग्यारा हुता, क्यों सातो रो मात पारटिया वणती, पयो गाव मे भाता घलता पण अब पछताया काई ? अव सो मोटा सपना रुळग्या। घर में पारा गीत गायीजण लागापा । बूढली मा बेटी दिन-दिन पिसताना पण पाणी रं लिपर्ण रो सार भी भो ही है के मोटा सपना सारा पीता में दळा दारासमानी। आज भारत-मा रो हाल भी ओ हीन है । भारत भागारीनं पमारी टुक्रा हया एपहा बरदास परिया तो घर-घर में पारटी वणगी। वैर बधा-यात में क्यो - १४| अयं गेपचिल्ली सोषण सागियो-अक आन री येक मुरगी सरोदनं सासू । मुस ईंटा देसी । योळी मुरगियां हु ज्यासी । योळा इंडा देसी । बोळा वेचतूं । बोळा पई आसी । पईमा जोडने पर विणासू । बैटफ, पोवारा, चौक, चोपरा से उण हेली इसी । फेर आप रो व्यांग करसू । टायर हुसी । फेर हूं मजूरी करणो छोड देसू । बैंड मे बैठो बैठो होको ठरहासू । रावरिया रीमा म्हार सातर तीनण तीस-बत्तीस वणार्स म्हारलो छोरो रूड़ियो मन जीमण ने धुलामण मासी । होकरी मौज में झूमतो हूं, नट जासू । यो फेरू आसी। हूं फेरू के देसू-तू चाल, हूं आऊं हूँ। थोड़ी देर उडी छोरे री मा आप बुलाबण आसी। जणांहूँ थोड़ी-सी दिसाइटी रीस करने नाड लटको करतो कसू-अवार कोनी आऊं, हो मे पान आ रयो है । तूं चाल, हूं आक शेखचिल्ली रो लटको करणो हो के धी रो पड़ो झट धरती पर आयो और फूटग्य धी धरती माथ फैलग्यो। व्यापारी देखतो-रो-देखतो रेग्यो। थोड़ो सातचेत हुयनं पूछियो-अरे ! काई करयो ? घडो फोड़ दियो । घी रा पईमा कुण देसी? शेखचिल्ली बोलियो- थारं पईसी री लाग रयी है । म्हारो तो निठ वणियो घर ढहीजग्यो । अर्व म्हारो कुण बाँधसी ? दोनू अक-दूसरे सू लड़ता-झगडता आप-आप र मारग लागा । इयाल शेखचिल्ली रा मोठा सपना सारा गीता मे बदळ ग्या। मीठा सपनां से उण रो मनडो कठं और ही जागा घूमतो हो । माथे पर राखियोई बोझ रो उण भान ही को हो नी । नाड कद हाली, कद के हुयो, उण नै काई ठा? मीठा सपना वाड़ी मे यो तो फळ तोड़े हो थर खाई हो। इयाल ही भारत री आजादी र पं- लोग राम-राज रा सपना लेयन मोद मनाया करता पण ब से हवा हुग्या। (३) इस प्रसग में अगषया और लिसन विपय ने की गंभीरता सं खुलासा कर घाऊ हूं- येक गान में दो भाई रमता हा । वडोडो प्यायोड़ी हो. घोटकियो कमारो पोरं मात धोरा हा । पण से पधारा । भाई भी मायलं पारण मू कवारो रंयम पापी दरोही माई से में अनाय यणायनं चालतो रंयो। अयं घर में रयग्यो यो रोपवारोबारी, मा. अर वं मातू भाई। घर दिन धोरां रीमा बोली-बेटा 'थे तो मयं वरा-पहा हयग्या, पदरी . धागो नी पर हास्य माई ने परमार मो तो घर में नई रोराणी मा पा, पी पातिर निारी ? पान भी रोरिया गे भाराम जा, म्हारा fr- र मंपवार मार गय; या मागी तो घर में मापार मार्ग ..

योगानंदजी -अजनारायण पुरोहित- ! कचेडी मे भगवी अलफी परियोड़ा बैंक महाराज आया करता हा। रंग मुरुकी, भूतो गोळ, नाक लावो, पैरो चमकतो, ओसिया चमकदार और शरीर गठियोडो । अम्सी री उमर में ही रोज च्यार-पांच पील रोपंहो करता । कचेही आवण से शौक हो इण वास्तं पणी दार उपा रा दरसण हुवा । हां ! हाथ में छड़ी री जाग्यां लो रो पोटो राखता, कोई दम दार सैर रो। उणां रो नाम हो योगानदनी । "मग ने आदेम हैं पण उणा ने सोग सिर नांदता वंदगी रा पुतळा समझने । ण यात मूबै पुर दाकफ हा । कया करता-मैं भगवां लेयन भीष मागणी सरू गर्ग, कि पार झेक जण मोमो मारियो के मोटो-तगड़ो जवान है और मांगन सावं, पदार मू सीप लो और उस दिन मू ही भीख मूं पिंटो छुटायो । हूं निठलो इंटणमाळी पोहो ही हो । इण दास्तं वंदगी रो हुनर सीखन इण शरीर ने पोसण लागो। पाट पर बात घी कानती। वे विचारक हा । उणारा विचार पणा मुश्यिोरा हा । दे वयन हा। औडा विचारा र दायर सू निसरन वै विशाल क्षेत्र में भूमणमाळा दोरहा । हरेक मप्रदाय रं माधु-मता मू उपा रा भेटा हता। मावदगीरदार मे दैवता-द और सागर म्हारी वात काट । इण पारने म्हारं ररिस्ट्रेशन में सवाल बायो जद मन इणा मूं टपकर सेवणी पड़ी। म दी साम' में रावणो पादता पण में शुगर सामने उणा में कयो के हूं जगारी पोर शाण पोरी माई नही साऊं ,म्हारी दवत में काम चलाऊ हूँ। मांग रणारं बार में माई बागरी मिलान वा संखियो फूकने दे है । करो उपहार दिया लाटा गयो नही मगादीको कोई देऊ, पण थेक मारtण धार में मारण री सपना नही हु उन में जीवण री साली

भैप HITamnna से
inी। भली-Tharur Aur warria माली
है. माना HIMIRITTEN रामगर कई?
गाभा हाप और
हागा। मीरा ना, गारा गोरा गाया।
नियंप पूरो हुयो । पिदपापी री गूस नही माना ही । अभिव्यक्ति नई
ही । विषय री मोमिषता आप र दंग हो। मिगन रोग पो हो। विषार्थी
री नई गूण गापै परीक्षाजी पणा राजीपा ।

furरमाचrtraitrint डी मे भगवी अलफी परियोडा अंक महाराज आया करता हो। रंग मुसकी, उमर मे ही रोज च्यार-पाच मीत रोपंटो करता । कचेही आवण रोशोक दास्तै घणी वार उणा रादरसण हुता ।हा! हाप में घडी री जाग्या लोरो -गवं ने आदेम पण उणां में लोग मिर नद्रविता वंदगी रा पूनळा समझने । नमूदपुदवाकफहा।से कंया करता-मैं भगद्रो मेयने भीय मांगणी महरू कदार अंक जणे मोसो मारियो के मोटो-तगडो जवान है और मागर्न मात्र में सीवमी और उण दिन ही भीष म रिसोरायो। निरनो पळोपोहोहीहो। रणदार वंदगी ऐहुनर सीपन गरन पोमण लागो। Bणामबाग पर वान पणी करतती विचारपहा। उपांग पिचार पगा योहाहा। ये बहूपता ओधा विचार दायर निमरन विमान नणआळा बीच राप्रदाय र साधुनाउणभरासा। आपनीदगीबार मेता-औरादर म्हारी चार म्हारं गिन रोमहाल बायो मन रामसारमानी पी ने 'बीबपाग' में कारणो वादनाप में सामने से रोग पोमबाणापाकमाई महीभागसमपर सोग रामारोशी मिनो मापनमा रोपोरियामा-- टामीमा योगानंदजी -व्रजनारायण पुरोहित- छ, नाक लांबो, चरो चमकतो, आखिया चमकदार और शरीर गठियोडो रवता, पोई दम बार मेर रो। उणो रो नाम हो योगानदजी। ।

भेद पण लागो । भारत रा यासी रो भाई है पण वरी ज्या व्यवहार करता देर को लगाने नी । 'अपणी-अपणी डफली पर अपणो अपणो राग अलापी जाने नागी। आ के आजादी आयो । भारतमा सना मरा देस हा पण रामराज करें। जनता र राज से नारा देखणा भी ढोंगो लागसी आजादी ने सं हाय जोर्ड लागा । स इण ने 'मीठा रापना, सारा गीत' रता लागा । (४) निबंध पूरी हुयो । विदयार्थी री सूझ नूई ही । फल्पना नूंई ही । अभिव्यक्ति नूई ही । विषय री मौलिकता आप र ढग से हो । लिसणे रो ढंग नमो हो । विदधार्थी री नूई सूझ माथे परीक्षकजी घणा राजी हुया ।

वारदार हरिण चीज मे मारण री सगती नहीं हुई उण मे जीशान री माती गटारी पोल जाणूहहूँघोहरी कमाई नहीसाऊ, म्हारी उरत मूकाम पलाऊ। योगानंदजी -व्रजनारायण पुरोहित- ग्वेडो में भगवी अलफी परियोहा मेक महाराज आया करता हा । रंग मुसकी, मूरो गोळ, नाक लांदो, घेरो चमकतो, आखियां चमकदार और शरीर गठियोडो । अस्सी री उमर में ही रोज च्यार-पाच मोल रो पडो करता । कचेडी आवण रो शोक हो इण वास्त धमो वार उणां रा दरमण हुवा । हो । हाथ में छड़ी री जाया लो रो पोटो राखता, कोई दम बार सैर रो । उणां रो नाम हो योगानदजी । 'भगवे ने यादेस है" पण उणां न लोग सिर नवांतता वैदगी रा पूतळा समझने । इस दात सू व पुद वाकफ हा । वे कैया करता-मैं भगनां लेयन भीप मागणी सरू परी, मेक दार मेक जण मोसो मारियो के मोटो-तगड़ो जवान है और मागर्न सात; दात म मैं सोख ली और उस दिन सू ही भीख सू पिडो छुडायो । हूं निटलो बटपाटो पोहो ही हो । इण वास्तं वदगी रो हुनर सीखनं इण शरीर नै पोसण लागौ। उगाने धार पर वात भणी कातती । वे विचारक हा । उणा रा विचार पणा मुलमियोहा हा । वं बहुप्त हो । ओहाविचारा र दायर निसरन व विशाल दोष मे घूमणआळा जीव हा । हरेक सप्रदाय र साधु-संता गू उणों रा भेटा हुता । आपरी बंदगी रंवार मे वे कंदता-अवंद और अगदर म्हारी वात काटे । का दान म्हार रजिस्ट्रेशन ने माल आयो जद मन इणां मू टवकर पेवणी पही। वै मनै दो कलाम' में रावणो नाम सामने उणा में कयो के सोग उणा र दार में कनवा के वादोत्री भिलामो अथवा सहियो पूरन है। पिरो रपळो दे दिया करता-टायो नही लगा के हूंबाई देकर. पण येक ? दवाई देवणी गरूपरण मं कलावंफीगर ना थेक लोट मेशता, मगो-धम्म उनहाप में महो।रोगी ने दवावगीतरी गमनाप्रतादित्राई गाई मायमापोटीने पंसा गुर गायन जाता, गई उगवता। १८॥ किण तरं हर ? हां ! मूरण-गाटा और जुकाम ठीक फरणाळा गोळी-गुटका हूं नही घणाऊं। उणां री कई वाता अजीब लागती । उणां रो दवाई देवण रो तरीको तीन लोक सूं न्यारो हो । उणो री प्रैक्टिस दुनिया सू न्यारो हो। कोई रोगी उणा कनै पूगतो और इलाज करानण री वात कैवतो तो ये उण री तरफ गौर सु देखनं पूछता-क्यों! सगळी जाग्या आ आयो ? सर ! हूँ थारो इलाज करतूं । फेर वे उण सू पोड़ी देर वातचीत करता र आसर मे पूछता-दवाई ऊपर घी सेसी क तेल ? धो लेबपो हुवे तो घो-हो-पी लेनणो पड़सी और तेल री इछपा हुने तो तेल-हो-तेल । आ वात सुणन रोगी सकपकीज जातो पण तो अपना तेल ने गळे सूं हे उतारण रो जिम्मेदारी थारो और पूठो बार नही मानण देवण री ग्रांटी म्हारी। जद कोई पूछतो के घी कीकर खातणो तो वे कंत्रता के खीचडी में, लापसी में, रोटी में, दाळ मे, मीठ में और थारी मरजी हु तो गुटक-गुटक; पण अक शर्त है के जीमत वखत, जीमण र बेक घटो पैला ताई और जीमण र तीन घंटो बाद तोई पाणी पीत्रण री सक्त मनाई है; इण वात रोपाळण करणो घणो जरूरी है। अक बार अक रोगी पूछियो | तेल किसो लेऊ? उणा उथळो दियो के घासलेट और मोनिल-आयल ने छोडन हरेक तेत चले जिण सू कपडो चीकणो हुप आने । कारण भी है के आपा ने तो कपडो (शरीर रो मायली भाग जिको कपड़ो ही है अंक तर सू) चीकणो करणो है । थोड़ी देर बाद उण रोगी पूधियो के दूध पियो जाय तो? इण यात पर वंसद बोलिया-तने ठा हुनेला के गर्न सू चाये जित्तो दूध घाण लां पण गळनो चीकणो नहीं हु और जे पी पात्रानो ही घाणा तो वो झट चीकणो हुय जान पण वास्तं पी लेवणो चापीजे। उपरी दवाई पर मानपान मार लिसियोड़ी याता रै सिताय, की परेज नी हो । गुह-सटाई री मनाई ये को करता नी । ये कंत्रता के म्हारी दवाई ऊपर कैरी रोअपार ईभनाई सानो। विस्त पापोहो (मो रपियांचाळो)। रे

1१६
क धार उणां बदहजमी र क रोगी रो इलाज करियो। दवाई देवण सू पलो उण
ने पूछियो के घी री किसी मिठाई से शौक है ? उण उथळो दियो के सान्त्रण रो शोक
तो घणो हो मोतीपाक रो है पण हणे कुण सज्ञान आ सुणनै उणा कयो के अक वडो
खूमचो मोतीपाक रो ढळवाय तं, समाय धी रो, म्हारी दवाई मोतीपाक साग ही
दिरीजमी।
बै काता के रोगी ने जिण चीज रो शौक हवं उण चीज साग ही दमाई देनणी
चायोग; कारण ओ है के ठीक हुयां पर्छ बो उण चीज ने पावण री इदया फरसी
होज, और जे कदास पर्छ खायां नुकसाण हुय जाय तो? इण वारते पैला सू ही बा
चीज खतावणी।
बीमती रैम और जीमन बाद मे पाणी नही पीवण रं वार मे वै तर्क देवता के
पदम गिटण न जितं पाणी री जरूरत हुने उत्तै रो जुगाड तो प्रकृति आप-ई कर
देकर नं धावण मू गिटण लायक कर दे और देखो तो सही के इण वात रो
ग्यान तो जिनावरा तक नै हुवं, पानती वेळो व पाणी नहीं पीत्रं ।
2 पंया परता के मिनग आप मरे, बेमारी-मेमारी मे वर्ण जिरा साई मुंशो
चलानता ही रब हती अपल तो डाटा में ही है के पोरी-गीत वेमारी हता ही
चार-पाणी में मूरो ही नही मारं, गाय में जे मुबाढो इय जाये तो मा यादो गावो
हीबारदे, परणो हो बंद कर ही।
चापला आदमी मांध में जाने और ऐर मा बापी।
पणी वारयातामामी उण वखत attीबिमा दास
मन माण नही पा । जिण रोगी मन मे परण समास
उण में कोई टोर मही पाई। पारमही रोमन
सोनईदिना बेमार होउनै उदा रामबागदरी-
पासाबण-पीवण री मन में भाव
१ महाराज ! म्हारी तो पानी।
-ओपरी'
.
nt समारोह

रंगाळ मांय सुं अक गोळी करनं पलासुद सायन वतापता, पछ उण में देवता। १०॥ पिता रण-गाटा मोटी परमा21 गोटी-गुटा हूं नहीं पगा। (२) उपारी वीर तानी । Tो रोपाई देवर से सरीरी सीन सोक P ग्यारो हो । उगा रो रिट दुनिया पारी हो। कोई रोगी उना रन पूगतो और इसान करातण री यारा कवतो तो उन रो तरफ गौर गं देवनं पूमा-कों ! रागळी जाग्या या आयो ? साग फर। फेर में उण म थोड़ी देर यातचीत करता पर भागर में पूना-दमाई र पी गेमी क तेम ? पो सेनगो हुत सो घो-ही-पी सेग्रणो परमी और सेन रोपा हु तो वेन-ही-तेन । आ पा. गुणनं रोगी सकपकी जातो पापी अपना सेस ने गळं [ हे उतारण री जिम्मेदारी पारी और पूठो यार नहीं मावण देवण री प्रोटी म्हारी । जद कोई पूछतो के पी फीकर सावणो तो ये कंत्रता के सीवडी में, सापसी मे, रोटी मे, दाळ में, मीठे में और थारी मरजी ह तो गुटके-गुटफो; पण अक भत है के जीमत वखत, जीमण र क पटो पलाताई और जीमण र तीन घंटा बाद ताई पाणी पीवण री सकत मनाई है। इण वात रोपाळण करणो घणो जरूरी है। अक बार अक रोगी पूदियो के तेल किसो लेऊ ? उणां उपळो दियो के घासलेट और मोबिल आयल ने छोडने हरेक तेत पलं जिण सू कपडो चीकणो हुप जान । कारण ओ है के आपां न तो कपड़ो (शरीर रो मायलो भाग जिको कपड़ो ही है अक तर सू) चीकणो पारणो है । थोडी देर बाद उण रोगी पूछियो के दूध पियो जाब तो? इण वात पर बै झट बोलिया-तने ठा हुनेला के गळनै सू चाय जितो दूध छाण ला पण गळनो चीकणो नही हुन्न और जे पी पाबानो ही छाणा तो वो झट चीकणो हुप जान; इण वास्तै घी लेवणो चापोज । उणां री दवाई ऊपर खानपान मे, ऊपर लिसियोड़ी वाता ₹ सिवाय, की परेज नी हो । गुड़-खटाई री मनाई ये को करता नी। ये कंतता के म्हारी दवाई ऊपर करी रो अचार ई भलाई सानो। दवाई देवणी सरू करण सू पैला ये फीस रं मान बेक लोट लेनता, मूगो-धम्म विच्छू सायोडो (सौ रुपियाआळो)। (३) उणां रं हाय में जम हो । बै रोगी ने दवाई लेहण री तरकीर ई समझाता। दवाई 1१६ अक वार उणां बदहजमी र क रोगी रो इलाज करियो। दवाई देवण सूं पलो उण ने पूछियो के घी रो किसी मिठाई रो शौक है ? उण उथळो दियो के खावण रो शोक तो घणो ही मोतीपाक रो है पण हण कुण खना? आ सुणनै उणां कयो के अंक वडो गुमचो मोतीपाक रो ठळवाय लं, सनाय घो रो; म्हारी दवाई मोतीपाक साग ही दिरोजसी। बैं कंप्रता के रोगी ने जिण चीज रो शोक हुदै उण चीज साग ही दमाई देखणी चायोजे; कारण ओ है के ठीक हुया पर्छ दो उण चीज ने साबण री इंछया करसी होज, और जे कदास पर्छ खायां नुकसाण हुप जाय तो? इण वारत पैला सू ही बा पीज समावणी। जोमनी टंम और जीमन बाद मे पाणी नही पीवण रं वारं मे वै तर्क देवता के एवं ने गिटण न जित्तं पाणी री जरूरत हुने उत्तं रो जुगाड़ तो प्रकृति आपै-ई कर देकर न चादण { गिटण लायक कर देव और देखो तो सही के इण वात रो ग्यान तो जिनावरा तक नै हुवं, पावती वेळा दं पाणी नही पीने । बैया करता के मिनस आप मर; बेमारी-सेमारी मे वर्ण जित साई मुंगे पलामता ही रंग; इत्ती अफल तो ढोढी में ही है के पोटी-सीक बेमारी हुता ही में पारं पाणी में भूरो ही नहीं मार; गाय ने जे मुताळो हुय जान तो या वाटी सावणो ही पद पर दे, चरणो तो बंद कर ही। प्रतापला आदमी मापनशान और पेरमापो बादमी ने पर। पणी वारया परताबादमी उण दखत ताजी जिन at मन मे मरण रीमही बाद । जिण रोगी मन मे मरण री बात बम बा. फेर उणपोई टीम नहीं स! धेग वारस ही रोगी ने देगा नेपा। पोरनदिना मार हो । उण बने रश और शरीरमासाला पूदियों- सताण-पीद्रण री मन में पाये। १ महाराज मारी तोरपा रोग।' 'नही महारार" nta-समासोरेस और?' attt....." सामा।'

१८॥ किण तर हुमं ? हो ! पूरण-साटा और जु वणाऊ । (: उणां री कई वातां अजीव लागती। सूं न्यारो हो । उणां री प्रैक्टिस दुनियो सू । इलाज करानणरी वात कैवतो तो उण सगळी जाग्यो जा यायो? खैर ! है पारो वातचीत करता घर बासर में पूछना-दक्षा हुवे तो घो-ही-घी लेखणो पड़सी और तेल री सुणनं रोगी सकपकोज जातो पण वै काता उतारण री जिम्मेदारी थारी और पूठो बार जद कोई पूछतो के घी कीकर खामणो रोटी मे, दाळ मे, मीठे मे और थारी मरजी जीमत वखत, जीमण रै अंक घटो पैला ताई पीवण री सकत मनाई है। इण वात री पाठ अक वार अक रोगी पूछियो के तेल कि और मोपिल-आयल ने छोडन हरेक तेल चलं कारण ओ है के आपां न तो कपड़ो (शरीर तर मू) चीणो करणो है। थोड़ी देर बाद इण वात पर बै झट बोलिया--तनै ठा हुने । पण गळनो चीकणो नही हु और जे घी पार जान; पण वास्तं घी लेव्रणो चायी। उणारी दवाई ऊपर स्त्रानपान मे, ऊपर नी हो । गुह-राटाई री मनाई को करता रो अपार ईभलाई सानो। दवाई देवणी गरू करण मूं पंजा बैंक विष्णू सापोडो (मो रपियााळो)। (. उगा रं हाय में जगहो। रोगी । रंगा मार मंगोटी तना सुख ? मैं भगवा लिया है ससार रा दुप छोडण नै; इण वास्तै दुस-दुख छोड दिया, अब मुख भोगसू । वहरता किण सू ही कोनी । सरो कंत्रण मे , अनूक हा। वे कम बोलता पण बोलता जद मुणिया उणा सू प्रभावित हुया विना नी रखता । अंक वार किणी उणा नै पूदियो के घोळा क्यो आने हंसिया और कयो के मार्य नै घणो रगडियां सू घोडा आय; जिको माथै सू काम ही नी लेने उण र घोळा मी दीर्स ! और घोळा सूं किमी बुढापो गिणीजे ? भेड र जलम सू ही धोळा हु और बकरी रे मर जिस काळा- रा-काळा ही र, धोळा नी हुने । जीवण र आखरी दिनां मे वै सर्वपा निरळेप हुयनं रेवण लागन्या । आप री जायदाद सू मोह हटायने में निजोसमा हुयग्या और दो अंक दिना री साधारण हरारत मू ही इस समार मू विदा हयग्या ।

२०] ओ उथळो सुणनै बै उठे सूं उठन पाघरा बार गया परा। उण रे घरआळा साग गया और दवाई री वात पूछी । जद उणां झट कयो-म्हारी दवाई की काम नी कर सकं अबै; जिण ने ससार री कई चीज में आसक्ति ही कोयनी और जिको आ वात झाल बैठियो है के अब मनै मरणो है, उण ने कुण वचाय सके ? आ कय ने व आप रे थान-मुकाने गया । सुद की विशेष जीमता और कैलता के ओ शरीर तो बोरी है, इण न तो भरता जानो ढूंस-ठूसन; फेर बोरी विना सायर ही ऊभी रसी; और खाली बोरी ? वा कभी नहीं हुय सके। साक्षण-पीव्रण र विषय री उणां अक घटना सुणायी-हू जवान हो जद मने घमण रो शौक हो; रोटी सायन अक गान सूं दरतो अर दूसरे गांव मे पाणी पीवतो। अक दिन घणी खोटी हुयी। सदा ज्यो रियो पण गांव नही आयो सो नही आयो । पर-यूचा, पर मजला करता-करतां सूरज विसूजग्यो । सिंभया पड़गी। आसर ओक धूपड़ो निज़र आयो। हूं खायो-साथो उठ गयो और झूपड़े र बार ऊभ घेली कन पाणी मागियो पीवण सातर । यो मांय सू गणियो लायो अर पाणी पावण लागो । हू डकळ मळ पोव्रतो गयो अर मूणियो साली। वो दूजो भरने लायो और दूजो ही साली। आ देश नं यो रोळा करतो गान कानी भाजियो । हूं ही लार नाठो । इण वास्त यो गिळाण सागो। इस मे ही गांवआळा कई जणा भेला हुयाया। पात किण रे ही समा में कोनी आयी। आसर मैं उणां ने समझाया के ओ म्हार सूं डरतो भाजियो है पदाग । मनं भूत समलियो है इण वेली। हूं भूत-पतीत नही हूं, मिनरा हू । तिरा पणी ही वास्त पाणी की विशेष मापो । आ सुणनं उण बेसी र सांस मे सांस मायो । उनै म्हारे हाप मगायो-या देखण ने केहूं मिनरा हूँ अपना नहीं । - (५) पोगाननी दुनिया पनी देगी ही। ना करे ग्याम में पूरण दमणो न तो टी-मोर' में पिरो । गीता से पूरो प्यान रग मोर में मिमी पोट-कधेड़ी-आळा नोनि सामोभमा मोगी पर भाग गेरारा । पोरगी और मागापा भाभी । मग!"Th!x..." मा ! ..... लिमे..गी। मोती Entern 4 1 २१ मुख ? मैं भगवा लिया है संसार रा दुप्प घोडण ने इण वास्तै दुम-दुग छोड दिया, अर्व सुख भोग। चं डरता किण तूं हो कोनी । सरी कंत्रण मे वे अनूक हा । वै कम बोरता पर बोनता जद सुणणिया उणां सू प्रभावित हुया विना नी रखता। अंक वार किणी उणा ने पूरियो के घोळा क्यों आवं? ब हमिया और कयो के मार्य ने घणो रगडिया सू घोळा आन; जिको माथै सू काम हो नी लेन उण र घोळा नी दीसै ! और घोळा सूं किमो बुढापो गिणोजे ? भेड र जलम तूं ही पोळा हु और बकरी रे मर जित्तै काळा. रा-काळा ही , घोळा नी हुन्न । जीवण र आखरी दिनां मे वै सतया निरळेप हयने रेवण लागन्या। आप री जायदाद सू मोह हटायन व निजोसमा हुयाया और दो-अक दिना री साधारण हरारत म ही इण ससार मूं विदा हयग्या तानो मारियो जद उगा उपळो दियो के भगता सेयन संगार राय छोरोज अपना २०1 यो उपळो गुणनं ये उठ सूं उठनं पाघरा पारं गया परा। उण र परआळा साग गया और दवाई री यात पूछी । जव उणां सट कयो-'हारी दवाई को काम नी कर सके अवै जिण ने संसार री कई पीज में आसक्ति ही कोयनी और जिको आ वारा शाल वैठियो है के अवै मन मरणो है, उग ने पुण बचाय राम ? आ केय ने 4 आप रे थान मुकाने गया । चे खुद की विशेष जीमता और कंतता के ओ शरीर तो योरी है, इण ने तो भरता जातो ढूंस-ठूसन; फेर बोरी विना सायर ही कभी रसी; और साली बोरी? बा कभी नहीं हुय सके। खानण-पीद्रण र विषय री उणां बेक घटना सुणायी-हू जवान हो जद मन घूमण रो शोक हो; रोटी खायन अक गान सू टुरतो अर दूसर गांव में पाणी पौनतो। अक दिन घणी खोटी हुयी। सदा ज्यों दरियो पण गांश नही आयो सो नहीं आयो । धर-कूचा, घर मजला करता-करता मूरज विसूजग्यो । सिंभया पड़गी । आखर ओक झुपड़ो निज़र आयो। हूं साथो-खायो उठ गयो और झूपड़े र वारै ऊर्भ वेली कन पाणी मागियो पीलण खातर । वो माय सू गणियो लायो अर पाणी पातण लागो । हूं डकळ. डकळ पीवतो गयो अर गूणियो खाली। बो दूजो भरने लायो और दूजो ही खाली । आ देख ने बो रोळा करतो गान कानी भाजियो । हूं ही लार नाठो। इण वास्त दो गिरळावण लागो । इत्त मे ही गावआळा कई जणा भेळा हुयग्या । वात किण र ही समझ मे कोनी आयी । आखर मैं उणा ने समझाया के ओ म्हार सू डरतो भाजियो है कदास । मने भूत समझियो है इण बेली । हूं भूत-पलीत नहीं हूं, मिनख हूँ । तिस घणी ही इण वास्तै पाणी की विशेष भायो । आ सुणनै उण बेली रे सास मे सास आयो । बै उठने म्हारे हाय लगायो-या देखण नै के हूं मिनख हू अथना नहीं । (५) योगानदजी दुनिया घणी देखी ही । व कड़ता के जे ग्यान मे पूरण हुन्नणो हुवे तो 'कचेड़ी-लोक' में विचरो। गीता रो पूरी ग्यान इण लोक मे मिल । कोट-कचेड़ी-आळा तो निरळेप हुने । नकवता के जिकी भाषा भणनं सीखी उण र भूलण रो हर हर वखत रन । इण वास्त उण ने घोसणी पड़े और अभ्यास करणो प? पण मातृभाषा कई नी भूलोज 1 "..."ऊं लोटो!"थाली ! 3..." मा ! ..... चाय कित्ता ही दरसा वाद पूछ लो, याद ही रमी। योगानदी बेक हरेली मोल ली और उण में रवण सागा। येक वार बेकार कालो चसमो -~दामोदरप्रसाद- पूरोप और उत्तरी अमरीका र उत्तरी देशों में दरस में ना महीनां जमीन बरफ री सफेदी सूं ढकियोड़ो र । अबर घुघ और मीणा वादळा सू दूधिया सखा । सूरज री हळकी रोसपी भर शळके 1 पण सूरज उत्तरी गोळापं में प्रवेश कर तो यूरोप रा बर्फाणी देशो मे गरमी री मुखदायी मौसम आन। हिमसडा री बरफ हरणा र मिस ढाळ मे दळं । इणी गळी-अवगळी घरफ रे कार मूरज री तेज रोशनी पड़े तो मोगम- बहार रा सैलानिया री आखियां पर 'चमचमाट' करती बरफ रो पळको पढ़ भर यूरोप रा सेनानी काळा घममा धारण कर धूमण ने निकळे । आस्ट्रेलिया और न्यूजीसह रा तटवासी समुद्र-स्नान र खातर भरी-दोपारी मे निषळ तो काळा चरामा मगायन निकळे जिण म पापियां री धूप सू रमा हुने और समंदर रो परसाव भी सुहावणो लखाई। यूरोप दगैरा देश मे काला चसमा साग जरूरत र कारण यापरी गरम देगा मे सा'ब लोग धूप र घंचात ताणी इण रौ उपयोग करें। पण हिरवान री मर माया है। घट कोई नई पात फंगन वणर्न आय और ति वणनं जहा जमा है। विलायती दादुना रे मुखई अर फिल्म जगत रा अभिनेतामा र दीवार पर कार्य पसय री सजावट देखने भारत रा मौजवानार भी ग पात रोजगून मारपी पर कालेज र विपापी-प्रगं ने सरीर पनीरी मसीब दी। बार महासरा पर, गांव की मृतारा में, होटला और होटमा वामना नंगाषणहार पाटा चरामाधारी पंचन-परान बापू मोनीमार गोलि भारी रोष रमापार मयूरी की 'सलाम' मेन परमारे 'देव' तारापूर । प्यार-महीमा वीर पेट पनि। सेयन संबपारी मरती रही-साताधारी पारिकालाई रो पE. निधारी, पांमारा रिया पुरा स मेन मासा वीला ता बदन मारपीटारोप.inf] चेढा रोपो, मत बूंट उपाड़ो -सौभाग्यसिंह शेखावत- घेढा रोपो, मत बूंट उपाड़ो राली सीनो, मत गुदड़ी फाडो बाग लगाणो अत घण दोरो विधूस मचाणो सरळो सोरो सीब-नीत काकड़ मत फोड़ो गाठो, साधो, चायो, जोड़ो कण-कण जुड़ियां मण वण जाग्ने तिणको सिंह धौगदो हुए जान उनण दीठा मत घड़ियो ढोळो फरट्रो रांग फार भोळो टग-सादी रो गयो जमारो मोपा होकर मत-ना धारो कर में नियमी यारा पता पो-मापी मोटो पपरावं पुरो तोपो, मर रस्मा मारो शेगम पोगा मत मिणगारो गिता मौगो रियगा ५ बाप का होतो सापरदो, सग सगे

No text on this page.

ATMARATTEREmitr/ गामी पूपी तो गुरबाडू गोसार नही है। पायाभरपूर देव गार पापं पानती मुगाई PATREETTEN TO गालगा पre से फिनित टकर मार माग में कोई पू पाया तो करना देर भी नी गगा! पारा, गो पा ! थाप मागे भए: हारत हरित पति-आदित्य धर्मकारोक्ति में कया तो पाडा पगमापारी पायुवा में गगई मगर आगार हो निकर आई । सापरत में पाभीपन में सादगमा गरम-गधार सिपी में भी गुपनी देगमपा मे भी रूपना कोरं । उनी ने सफेद पत्र भीवाली, रंगार भी पदरग, मगा। प्रकाश में भी अधकारसो मालूम पड़े। और रात रोईमतो "अग रामराात' रीजति परिताप । उणी पर कलर जाई' रो थाप भी सजागट र साह काम ले तो कई रोव दिसाबण वास्त इणरीदवार समझें। काटो विभक्ति अपर्ण-आप चाली आर्व इयाई 'मेकाक्षी सातर काळो घसमो भी। समाज मे लगामो जा सके है। कई लोग काळी घरामो आदत र मुजय सगाने तो कई फैशन र सातर । कई घसमो व्यक्तित्व धमकाण में मददगार है तो नेत्र-दोषा ने छिपाण में सहायक भी। काण: भी अग-विकाराHIARPATRITTEAM में संस्कृत व्याकरण री तृतीया नेत्र-रोगा र प्रति तो माळी समो को लाभकारी है। पादेन सजः' री भात 'चक्षुषा आपो मिनस तो दया और सहानुभूति रोपाप है, सूरदास र मिस सादर और श्रद्धा रो पात्र भी, पण याण र प्रति समाज में करता और कुटिलता त भान निहित है। 'मूण-सास्तर' में भी काण रो पोतो ना मान्या वास्त काणा आदी उपहास और व्यंग रा पात्र रंया है। इसीrai Tओखद है काळो चसमो। तुर्की रो क्रातिकारी कमालपाशा काळे यसमै रो प्रेमी हो । मुसोलिनी अर तोजो जिसड़ा डिक्टेटर भी काळी चसमो धारण करमा करता हा । मौलाना आजाद, राजाजी और जाकिर हुसेन भी इण रा प्रेमी हुमा है। ओस र काळे चसमं रो आविष्कार यूरोप मे हुयो और भाजनामा रे काले घसम रो ईजादकर्ता भारत है । इण साधारण काळ घसमै सू ज्यादा प्रासकारी है भानामा रोकालो चसमो । इण मे साधारण काळ चसमै रा अंय तो सगळा है पण गुण का भी कोनी । इस रो परिणाम भी दूरगामी हुने और पीढ़ी-दर-पीढी विकसित हो । भारत देश रो इतिहास इण वात रो साक्षी है। स्वामी दयानंद सरस्वती मूर्तिपूजा, बाढविवाह, मान गिराठी सामाजिक रो विरोध करने स्त्री-शिक्षा आदि र समर्थन में सुधारवादी कदम उठाया तो चुराया 1 २५ पुराण-पपो लोग इणी काळ चमर्म ने चढाय ने आर्यसमाज ऍटकार ली और राजा राममोहन राय रो भी इणी वान विरोध हुयो। प्रार्थनासमाज, ब्रह्मसमाज और वेदातममाज ने इण का चसम कारण याफर्ता उठाणी पही। महारमाजी रे सत्याग्रह और स्वराज्य रो भी अक अरस ताई विरोध हयो। जिन्ना सा'च और उणा री सस्था मुस्लिम लीग इणी 'द्विराष्ट्रवादी' काळ चप्सम ने लगायनै पाकिस्तान री माग करो और अत में भारत रो विभाजन हुयो और दगा-फसाद हुया । मैं सब भावनात्मक काळे चसम री काळी करतूता हो । आज भी अनेक लोग अंग्रेजी र मद में भूलिया थका देशी भाषावा री हंसी उडाद्र और राजस्थानी रो विरोध कर। माज रुढिवादी, पुराणपथी लोगा री ओख सूं उठनं काळे घसम री करतूर्ता नदी रोमणी रो औलादा, तथाकथित सुधारवादिया और समाजवादी नेतातो पर भी उतर आयी है । पुगणपथी रूढ़िवादी समाजमुधार री हर वात रो विरोध करता, उणी तरं आज समाजवादी सुधारक हर पुराणी वात रो विरोध काळो घसमो लगाप ने आस मोचन पर । भारत री हर दात ने इगलैड, अमरीका रूस अपना चीण री निगर म देखें । इण दास्त काळ चममं रा रग-रूप भी बदळग्या है। अब लाल और पीळ रग रा चममा भी आयग्या है। विदेशा र प्रति आपां री अघ-भक्ति इण कदर वगी है के मेह भलाई मास्को में वरमो, छत्तो आपा भारत मे ताणां, भलाई ठे असाग माफ क्यो नी हदो। काळ चसम रे पाण बबई नै हालीवुड, दिल्ली ने लंदन, पपत्तं न मास्त्रोदणायन देखा और भारत ने यूरोप रो मुलक समझा ! जरा महमानी राखो भाई सा'बाप का चमर्म र यसकंदार चक्कर में हो बाप में यथार्थ रो ठानी है। जरा अनक उतारनं कोरी यांपियां सू इण देश में देवी-ओगह पोनी, अमरीमा पानी, रूम बोनी, पीण पोनी ; यो भारत है ।

सजावट र सारू काम लेने तो कई रोब दिखावण वास्त इणरी दरकार ममी काळो "मूण-सास्तर' में भी काण रोदरसण चोखो मान्यो है, इण वास्त काणा आदमी कर्मचारी भी हैरान है । सफेद में स्याह देखणआळा साइकल-सवार किणी सूं काळा चसमाधारी बाबुनाने सगळं 'असंगति' अलंकार ही निजर माझे । बै सापरत में भी सुपनो देखें । यथार्थ मे भी कल्पना कोरे । उणा नै सफेद चीज भी काळी, रपदार भी बदरग, लसावे । प्रकाश में भी अंधकार-सो मालूम पड़े। और रात रीटम तो 'अंधेन तमसावृत' री उक्ति चरितार्य हुन् । उणा पर 'कलर ब्लाइंड' रो आक्षेप भी २४। यषणा नेता र पास भी इस रो कई इलाज नहीं है। साची पूछो तो खुद बाबू मोगोर मन भी इण रो कोई जवाब नहीं है। काळा परामापारी यात्रु र पूर-पूरनं देखणं तूं सड़क मार्य चालती लुगाया परेशान है और काळा पसमापारी गाइकल-सतारा सू चौपड रो ट्रैफिक पुलिस टफराज अपना दा र मारग में कोई बूढो-चाळक आ जान तो कंत्रता देर भी नी लगा-अये ! अंधा है क्या, देखके चल ) धानणे मासे अंधः हरितं हरितं पश्यति-साहित्य री अलंकारोक्ति में कैसा तो 1 लगायो जा सके है। कई लोग कालो चसमो आदत र मुजब लगानं तो कई फैशन र खातर । कई चसमो व्यक्तित्व चमकानण में मददगार है तो नेत्र-दोषां ने छिपाक्षण में सहायक भी। नेत्र-रोगा र प्रति तो काळी समो - लाभकारी है । पादेन खजः' री भांत 'चक्षुषा काणः' भी अग-विकारा मे आव। विकार योग में संस्कृत व्याकरण री तृतीया विभक्ति अपर्ण-आप चाली आय का खतरा समो भी । समाज में आषो मिनख तो दया और सहानुभूति रो पात्र है, 'सूरदास' मिस आदर और प्रभारी पात्र भी, पण काणे र प्रति समाज में क्रूरता और कुटिलता स भाग निहित है। उपहास और व्यंग रा पात्र या रामबाण औखद है काळो सुरी रो क्रातिकारी कमालपाशा फाळं चसमै रो प्रेमी हो । मुसोलिनी अर तोजो निराडा डिस्टेटर भी काळो चरामो धारण करपा करता हो । मौलाना आजाद, राजाजी और जाकिर हुमेन भी दण रा प्रेमी हुया है। यांग बाट पमर्म रो याविष्कार यूगो में हो और भाजनाना काळ परम रोबार भारत है। ण मापारण पाळ धमर्म गूज्मादा पागधारी भावनामा रोपाटी धामो ।ग में गापारण कार्ड पार्भ राव तो गगळा पण गुण मेक भी पोनी । तरो परिणाम भी दूरगामी हो और पोतो दर-नीती सिमित हो । भारत देन रोपतिराम इन वात रोगासी है। पानी सानागपती मागा, बवितरमा गिी मायाधिश युग पिस स्त्री-fe मा गमन में गुगारवाही परम उठाया तो चममो।

| २७ कपडा राखण री काच री अलमारी में गोरकी रो ओवरकोट और अपडा अंक छप- पुटं तकड़े फौजी रो पोमाक जिमा हो । अलमारी मे नीचं अंक जोड़ो ऊंचा बूट रासियोहा हा और चूटियां माथै फन्ट री नाइट-कैप और रेलबाबू रे जिसा दो टोप हा। पुणे में अक कची वैन हो। मामल पासी अलमारी मे गोरको न भेट मे मिली मामग्री मे हिंदुस्तानी मूर्तियां और पीतळ री कला रा पूलदान हा । इपा र अला हाथीदाल, चमडो, रेमम, लाही, चांदी, गौर आदि से अनेक पूठी चीत्रां राषियोडी हो जिका चीण, फाम, जर्मनी, इटली, अमरीका, ब्रिटेन, यूनान और जापान देशारी हो। मोवण रो कमरो और रवण रो कमरो अंक हो हो, वारण लिपना-लिखता थाकेतो आता ही सारली आराम-बुरगी और छोटी मेज-कुरमी माथै उणा नै नोंद में उटनं लिपण री आदत हो । कमर मे अंक बाठ-पुटो पलग हो जिको माओ और राफेट नो. मूनी धादा मूवियोहो हो । मेज र मिराण पन छोटी-गीक मेज मार्थ गोली र पुत्र मंदिगम री तमवीर हो । आ पात मेणा मे जर मरता उमा री जोडायन म्हान विशेष रुप मूवतायी। पोरगी बावरी परमां में नीची मजल मार्थ बिता, कारण मन रो दोर और दमरी शिलापन प्रण मू कारली मजल मार्थ जानको मा हलो हो । बाग-ही. पानी में मदाग्दा पेश्वोमा म्हान गायो पोरगी दिन भर मोगादिमी पारा पानाना, mat, मेला में पापमोट किसान और मिनी रगा मोट मे मागापन लिना माना। 5 IT प्रमाण माता, भौर गिलाई वाम पूगेना हो:00ant देना और दीवार मार दाग बीवीप mma:: हास A और दोरता में इलावता और betnmore and मगाता औरटा-मीरता | artner: परता । मापही मी Tamil होप सरना करमतामा : साहित्यकारां रो तीरथ : गोरकी रो घर ( म्हारो मास्को री साहित्य-यामा रो उत्तरापं ) -रामनाथ व्यास 'परिकर'- मैक्सिम गोरकी से नाव ससार रा मोटा साहित्यकारां में सिर गिणोज । म्हे म्हारी जिग्मासा ने पूरी करण साह गोरकी-विश्व-साहित्य सत्यान मे उणां रो पोती सू मिलण ने गया। म्हारा गुजराती भायला धी अतुल सवानी साग हा । सोनियत्स्काया कल्तूरा (सोवियत संस्कृति) समाचार-पत्र री समाददाता कुमारी लेविना इण आयोजन री सगळी व्यवस्था करी । मैक्सिम गोरकी र नाजिमो अवो और ओपतो उणारी पर रूस र सगळा चूं वडे रईस रो महल हो । घर में वडता ही मैक्सिम गोरकी रं वेट री बहू नदाग्दा मसिम पेश्कोवा और गोरकी री पोती धर्ण आदर सूं म्हा लोगा री अगवाणी करी पूरी पर अक स्मारक रो रूप है, जिण रो देखभाळ क संग्रहालय रे रूप में करीज। गाय बदता ही घर र आंगण में खुलता दो हाल (वडा कमरा) है, अंक में गोरकी रो साधना-स्पढ़ और दूज मे उणो रो निजी पुस्तकालय है । गोरको री साधना क मोटी और ऊची मेज मा हुनी, फारण वे अक फेफई रा मिनस हा और राजयदमा रा रोगी हा । उणारे व फुट कद र माफक जमी सू तीन फुट ऊची कुरसी माय सीर्घ चटारो हाफ्टरी मलाह मुजव आ रचना ही । मेन री कोई सास साज-सजावट नहीं हो, मेर कतम राम री साड़ी री दे, दो पंह पाना रा, अक दो खणा रोदनातदान, गविरंगी मला पण पातर पकड़ी माय लार र करमरी गिलाम-पस आ ही ऊची मेरी मामी हो । मेरा हाप मार्थ कई पोथियां अर नोट हा मर अंक है रामिपोही हो। मंजरेनी मोटी टोकरी रही सार हो । दुरगी रे पार अंक मापी बार रो नमारी में रिता रोगहारी मागियोड़ी ही! म हाप पाणी ओ पनी मोटीवार hिi बाग में आरती हो, विग मार्य पाटीनी हमरर दो दरमागं मार म्शे रवन र मरं मैं मृतं । जी हाप यागी मोटी माटी २६ रोपावरम दिनारकोविनावि-सम्मान गवितात स्वारसदाहा। भला भारम-साधी,ni.टोरगिगा रोरा रीपुरता महात्मा दाभीमरमिर गिरा, निसर्ग | २७ कपडा राखण रोकाच री अलमारी में गोरकी रो ओवरकोट और कपडा अक छप- फुट तकर्ड फौजी री पोसाक जिसा हा । अलमारी मे नीचे अंक जोडो ऊंचा बूंट राखियोडा हा और सूटिया मार्य फेल्ट री नाइट-कैप और रेलबाबू र जिसा दो टोप हा। सुण मे अक ऊची वैन हो । सामल पासी अलमारी मे गोरको ने भेट मे मिली सामग्री में हिंदुस्तानी मूर्तियां और पीतळ री कळा रा पूलदान हा । इणां रै अला हाथीदांत, चमडो, रेमम, लाड़ी, चादी, सीप आदि री अनेक पूठरी चीजो रासियोडी ही जिका चीण, फाम, जर्मनी, इटली, अमरीका, ब्रिटेन, यूनान और जापान देशांरी हो । सोत्रण रो कमरो और रंक्षण रो कमरो अक ही हो, कारण लिखता-लिखता थाकेलो आता ही सारली याराम-कुरमी और छोटी मेज-कुरसी माथै उणो नै नीद मे उठन लिषण री आदत ही। कमर मे अक आठ-फुटो पलग हो जिको सादो और सफेद ऊनी. मूती चादरा सू ढकियोडो हो । सेज र सिराण कन छोटी-सीक मेज माथै गोरकी रे पुत्र मैक्मिम री तसवीर ही । आ पात नैणा मे जळ भरता उणा री जोडायत म्हान विशेष रूप सू बतायो। मोरको आखरी दरसा में नीचली मजल मार्थ रेवता, कारण खून रो दौर और दर्भ री शिकायत हुषण सू कारली मजल मार्थ जानगो मना हुयायो हो । वाता-ही. दाता में नदादा पेश्कोमा म्हांन बनायो के गोरकी दिन भर लोगो सू मिलती वसत पारपानी, गामा, मेला में याप रा नोट ले लिया करता और लिसण री वयत मगळा नोट मेज मार्थ रापने लियता जावता । कर्ण-गणेई नोटा माय लाल-लीला मंनाण करता, और लिखाई रो काम पूरो हुना ही सगळा नोट रही री टोरी मे भर देता, और अदीतबार में बार, बाग रे धीमूवीच. उणा री होळी जगावता । सगळा टादरा ने और दोरता ने गुलाब्ता और मेवा रा पत्ता सार्ग मोटी कंपपायरसी लगावला और टट्टा-मरावरी परता । बगीचे में गेनो ग पोपो री समाल परता । आप री हाही मू मजीक ग जगत में हम पाटन रोजोक उt ने पो हो।रफ रा सेल मेलता और पूममा प्रना। भागण ९ पार मीयं री मजल मे गोरगी रो निजी पुस्तुराय हो, जिग मे प्यार मेर भीतरी जागा नाच रीअलमारिया पोषित बी-टीहो। बीच बराबार भावनूम री मोटी मेर हो रिण र परमेर मोहनी रमिया ही। बोरी घणपरी पोपियां माथ गोपीर हाथ रा नाण और पिना राहारिमा मायं टीपा लिखिपोटी मिल । घणो तुती री बात का है इन पोपिला गे n मा मो दिमाग और सिमरी मोघ सारमा होस परम्प म गोबर र गी है। भारत चोदनाच सापुर भोर गाधीमोरमोरोबर में निरिणामा : साहित्यकारी रोतीरथ : गोरकी रो घर (हारो मार पियारा रोगारा) ~रामनायनाम परिर- मगि गोरो रो मा पार से मोटा माहिका ये गिरं गिधोये । हे म्हारो नियागाने पूरी TIER-A-TIER-स्थान में उगा री पोती गूमिमण ने गया। म्हारा गुजराती भायमा धी अल सबानी साग हा। गोमियरकाया कल्लूरा (मोतिपत तापार-वाददाता कुमारी सविना दण आयोजन री सगळी ध्यतस्पा करी । मंतिम गोरकी र नानिमी को और भोपतो उणा रो पर हा सगळा हूं घडे रईस रो महल हो । पर मे पहना हो मैमिराम गोरको २ थेट री बहू नदाग्दा मैक्सिम पेशकोमा और गौरकी री पोती पण आदर सम्हा सोगा री अगाणो करी । पूरो पर भेक स्मारक रो रूप है, जिण री देखभाळ क संग्रहालय रे रूप में करीजे । माय पदता ही घर र आगणे में खुलता दो हाल (बडा कमरा) है, बैंक मे गोरकी रो साधना-स्थळ और दूजे मे उणा रो निजी पुस्तकालय है। गोरको री साधना क मोटी और ऊची मेज मार्थ हुती, कारण वे अक फेफडे रा मिनख हा और राजमक्ष्मा रा रोगी हा । उणारे छप फुट कद रै माफक जमी सू तीन फुट ऊची कुरसी माय सो) बैठण रो डाक्टरी सलाह मुजव आ रचना ही । मेज री कोई पास साज-सजावट नहीं ही, बेक कलम राखण री लकडी री दे, दो पैड पानां रा, मेक दो सणां रो दातदान, रंगविरंगी पेन्सला राखण खातर लकड़ी माथे लाख र काम री गिलास-बस आ ही कची मेज री सामग्री ही । मेग र डार्य हाथ माथै कई पोथियां अर नोट हा अर अक ट्रे राखियोडी ही। मेज रे नीचे अंक मोटी टोकरी रही सारू हो। कुरसी रे लार अक लांबी काच री अलमारी में किताबो री कतारा लागियोड़ी हो। डासं हाप पासी बैंक घणी मोठी काच री खिड़की बाग मे झाकती हो, जिण मा पदी नो हो। कमरे र दो दरवाजा माय सू दुजो रेवण र कमरे में खुले । जीवणं हाथ पासी मोटी आठ-कुटी | २७ कपडा राखण री काच री अलमारी मे गोरफी रो ओवरकोट और कपडा अंक घा. फुट तकर्ड फौजी री पोसाक जिसा हा । अलमारी में नौचं अंक जोडो कचा बूट रासियोड़ा हा और खूटिया मायं फैल्ट री नाइट-कैप और रेलबाबू र जिसा दो टोप हा । पुणे में अक ऊची वैन हो । सामल पासी अलमारी मे गोरको ने भेंट में मिली सामग्री मे हिंदुस्तानी मूर्तिया और पीतळ री कळा रा फूलदान हा । इणां र अलात हापीदात, चमडो, रेसम, लाडी, चादी, सौर आदि रो अनेक पूठरी चीजो रासियोडी ही जिका चीण, फ्रांस, जर्मनी, इटली, अमरीका, ब्रिटेन, यूनान और जापान देशा री ही। सोनण रो कमरो और रवण रो कमरो अंक ही हो, कारण तिसता-लिग्वता याकेलो यामता ही सारली आराम-कुरसी और छोटो मेज-कुरसी माथै उणा नै नीद मे उठने लिपण री आदत ही। कमर मे श्रेक आठ-फुटो पलंग हो जिको सादो और सफेद ऊनी- सूती चादरा मू ढकियोडो हो । सेज र सिराण कन छोटी-सीक मेज माथै गोरकी रे पुष मनिमम री तसवीर हो । आ वात नेणा में जळ भरता उणां री जोडायत म्हान विशेष रूप मू बतायी। गोरकी आखरी वरसा में नौचली मजल मार्य रवता, कारण ग्यून रो दौरे और दम री शिकायत हरण सू ऊपरलो मगल मार्थ जानगो मना हुपग्यो हो । वाता-ही- दाता में मदान्दा पेश्कोवा म्हाने बतायो के गोरकी दिन भर लोगा सू मिलती वसत पारखाना, गावा, मेता में बाप रा नोट ने लिया करता और लिखण री वयता सगढ़ा नोट मेज मा रापन लिखता जानता। कर्णपणेई मोटो मा लाल-तीसा मनाण परता, और लिसाई रो काम पूरो हुता ही सगळा नोट रही री टोकरी में भर देता, और अदीतवार नै बार, वाग र पोचूवीच, उणा री होळी जगावता । सगळा टाबरा ने और दोस्त ने बुलापता और मेनो रा पत्ता सार्ग मोरी पकायरी लगानता और टट्टा-मसकरी करता । बगीच में रोमा ग पोपी री ममाळ 2 गुर परता । आप री गुहारी म मजीक राजगढा मे पाटन रोसो उt पों हो । परफ रा खेल पेलता और पूमता रखता। भागण र पार नीयं री मजल में पोरगी रो निजी पुरणपाप हो, रिण में थारू मेर भीतरी जागो बार री बलमारिया पोधिमा म अटो-रटीही। बीच में बंडापार वासनूसरी मोटी मे हो निणरं पारमेर मोहमी पियाही । म पणारी पोथिया माथ गोरी राघरा नाण और रिना राहारिया मा टर लिखिपोटी मिल । घणी भी री बात बाहन पोपिया रोगमा गोल दिमाग और सिनरीशोप लामा कोस परमोमबगेररी है। भारत र रवीनाथ टापुर और गापीशीबार करीबनम में मिन मि पोप उग दिमागेती-वियाहिप-पान रा दिन हार मा गला भारत-मरचीसरी मायारा, Katrinोमा रोग पर महात्मा गाधी की मृर प्रति और सिरसा गोरको ने भेंट में मिली ही, म्हांनै दिमायोजी । शोध रो दूजो विषय देश-विदेश र हजारां साहित्यकारा, राजनेतान्नां भर कलाकारा सूं हुयोडो गोरकी रो पत्रव्यवहार है। इण विषय मे रूसी, अग्रेजी और दूजी भाषावां मे गोरकी रा पत्र छप चूका है । लेनिन ₹ सागै गोरकी रो दोस्तानो हो । ओ पत्र-व्यवहार भी गोरकी-साहित्य रो क प्रमुख अग है। সাল सू ऊपर जादण रो रस्तो रूस री भवन-निर्माण-कळा रो जीवती-जागतो चितराम है । भनन रो मालक रूस रो मोटो रईस हो जिकं इटली रा कारीगरां सू पगोथियारी नाळ और हाथ धरण रो लरदार सायरो वणवाया हा। हर रंग र मकराणं में रगविरंगी धारियां री समुद्री लर रो ओ कटकड़ो म्हार जीवण में जोयोड़ी अदभुत कळानिधि हो । आजकाल इण नाळ नं काम में नहीं लायोज, जिण सू बारलं पासी लोव री नाळ मार्थकर म्हे ऊपरली मंजल मे गया, जठ खाणं री मेज म्हार स्वागत में सजी-सजायी त्यार ही । भात-भात रा पदारयां मे रूस री चेरी, सेवा और फळा रा मुरब्बा, चटणियां, अर मोठी-नमकीन डबल-रोटियां, गोरकी री मनभावण, म्हारी भी भाषण वणगी ही। 'समोवर' मे राखियोड़ी चाय और मनभावता फळा रा रस पाणी री ठौड़ । दही, दूध, माखण, पनीर, सूका मेवा, संत, साप री छतरिया, भालू री पापड़िया और कासा (दलियो) भारतीय मैमानों से विशेष भोजन पली सू ही त्यार हो। कपरली मजल में अक वडो कमरो साहित्यकारी र चितरामा सू च्यारू मेर सजियोड़ो हो । भारत र प्रेमचदजी रो साधारण-सो फोटू वतावता श्रीमती पेश्कोना म्हानं कयो के अमृतरायजी वादो तो करियो पण आ सौगात भेजी। प्रेमचद रो सोनियत संघ में विशेष सनमान है,-कारण 4 जन-समस्यामा रा लेखक और जनवादी इप्टा गिणीजिया है । चतुर्वेदीजी इण वात रो कौल करियो के चोरी कनवास माय रंगीन चित्र संग्रहालय सातर अमृतरायजी ने कैयनै भिजनासी। जनवादी साहित्यकारी मे तमिळ और तेलुगू रा सोनियत काति रा दिनां मे छपियोड़ा ट्रैक्ट और पुस्तिकाबो अठ घणा संभाळने राषियोहा है । हरेक मुलक री पोथियो, जिकी गोरकी ₹ हापा मांयकर निरळी और जिणा रा अनुवाद गोरकी करताया, असार-समाळ सू रागियोड़ी है। सौगरी वमत गोरकीम री इण नागीणी सुगाया रे सागे म्हा गोरकी रे साहित्पार ने सीस मनायो। ।

घणो हेत टूटण ने -नरेंद्र भानावत- मिनख रो हिरदो भात भात री भाननाता सूं रगियोडो है । उण मे रस भी है और रीस भी, लाह भी है और लडाई भी । समय पायन से भावनावां आपणो रूप और शक्ति प्रगट करें। सब सू जबरो और रूपाळो रूप प्रेम-भावना रो है, सब र सार्य हेताळू वणण री मनोभावना रो है । हेत मे जादू भरियोही ताकत छिपी रखें। दा थाकियोड़ा मना मे दोहण री हूंस भर दे, निराशा री अधेरी गलियो मे आशा रो सूरज धमकाय है । ससार रा से प्राणी हेत रीबूद सू भीजियोडा है। पापणी गृहस्थी रो काई रूप है ? धणी-धणियाणी हेतरी होर सू बधियोहा है। टाबरां री किलकारी उण डोर ने और पणी रूपाळी अर मजबूत वणावं । मा-बाप, भाई-चैन से मिलने गृहस्थी री फुलवाडी न गरी सोच और हरी-भरी वणाय । सगळो २ हिरदं मे हेत रो रेळो वं । हेत रे कारण हीन बेटी ने विदा देती वसत मा रो हिवडो भरीज भावं, हेतरं कारण होज भाई रे परदेस जानती वरात बन री बामियो गीली हय जाने, हेत रे कारण होज मरपण दोले री प्रतीक्षा मे बाग उराय-हाय ने पाकशव- हाड़ियां वे पसिया बाग उहादसा। हेत हीज सीता नै राम रं मागं वन में भेजी और दशरप नं तरफासपाप ने मुरग पुगायो।हेत रीलो लागण रंपारण-हीज मीण मागी- मेरे तो गिरधर गोपाळ इसरो नई और पीर अमरता री अनुभूति परण मागिया- हरिन पर, हम पारेको मरि।

1 प्रेम मे वा शक्ति छिपियोड़ी है जिको मिनर ने देवता वणाय दे। नामी कति मलिक मुहम्मद जायसी प्रेम रो वसाण करतां कयो- मानुस पेम मये वैकुंठी । नाह त काह, धार अक मूठो । प्रेम र प्रभाव सूं ही मिनख दिच्य वणग्यो अन्यथा भेक मूठी खाक झू पत्ती उण री कीमत कोनी। रेती नै रूपो वणायण री ताकत प्रेम में है। प्रेम लोहे में मोम वणाय दे। जिका तरतार बस मे नी हुय सके वं प्रेम री मार सू वशवर्ती वण जानें । प्रेम र गूंद सूं सं मिनख आपस में जुड़ जाये। प्रेम नी हु तो से मिनख आपस में लड़ने कट-मरे । कौरव और पाड प्रेम री कमी रै कारण आपस में लड़िया और सतम हुया। पृथ्वीराज और जयचद री फूट भारत री दुर्गति रो कारण वणी । प्रेम री आ सारी महमा कद है ? जद प्रेम आपणी सोमा और मर्यादा में ; वो धीरे-धीरं बघतो-वधतो दृढ़ और स्थायी वर्ण । जिको प्रेम अकदम वधनं गरो रूप ले लेखें उण रे उतरण रो सतरो उत्तो ही वध जाये। 'ढोला-मारू रा दूहा' मैं इण भाव रा घणा सटीक दहा है- डूंगर केरा वाहळा ओछा केरा नेह । वहता वहइ उतासळा, शटक दिखायद येह ॥ पहाडी नाळा अर ओछा पुरपा रो प्रेम बंता तो धणी तेजी सू वै पर तुरंत ही मा रो अंत दिसाय है। दूजो दूहो है-- प्रिय सोटा रा अहवा, जेहा काती मेह। आडवर अति दासबइ, बासन पूरइ तेह। भागहोणां रा प्रियतम काली मास र मेप रे जिसा हु जिका माइवर नो धणा दिसावं पण वरमनं आगा पूरी कोनी करें। यापमा परेरा यार र औद्रण र अनुभवा ने सोकोक्तिया और कहावता में गूपन अमर वाया है । अकवत है-पणो हेत टूटण ने, मोटी बात पूटण ने, अर्यात पपो प्रेम दटप पातर हु। जिण में सीमा म पणो हेत हु यो कद-न-कदै विरोध में बराबरण मात्र ने हीन दरमाणमाळो और पंप्रत अंग्रेजी भाषा में है- friendship that hames, goes out in a flash. Azत भाषा रीमोरोक्ति है- अनि मयंत्र वन। माद ने प्राट पराठी रानम्थानी भाषा में बात है- पनीररी पर गुग नी बापी। समोरोति में आप ने प्रेम रो सारा परम गमागो पादौ । हामोगी रोमो मोती सिाल करो पारदो र, पग मागर में नो ।

|३१ दुम हीज देखणा पई। कई अवसर ताकणिया लोग भला मिनसा सू सबध जोड़न उणा रा मित्र वर्ण, माहो-माय घणो हेत वधान, आपणो काम सारं और पर्छ मूढो पेर देवं तक कोनी । अंडा लोगा सू सचेत रवण री जरूरत है । उणा री जाळमाजी और नकली विवहार सू समाज में अविश्वास और अशाति वर्ध । हूं अंडो दो लुगाया न जाणू हूं जकी आम-साम रंजती हो । दोना मे घणो हेत हो। अक-दूजी ने देखियो वगर उणारं गळं पाणी तफ नी उतरतो । बै सदा साथ रंगती। उठणो बैठणो, खानणो-पीवणो, सीवणो-पिरोतणो सौ साथ-साथ चालतो । दोनू सहेलियां बना ज्यो रखती । आपस मे आपो खोल वाता करती । मेक दिन छोटी सहेली वाता-ही-बातो मे वडी वैननं आप घर गणा-गाठा रो सगो भेद बता दियो। रात पढ़िया दोनू रोजीन री भात कन-कन सूती। रात रो पैलो पोर वाना मे वीतियो । पर्छ छोटी मै तो नीद आयगी पण वही री ओविया आर्ग तो बो चमचमाट करतो गणो तिरतो हो । या धुपक-सी उठी, छोटी र सिराण सू कचिया रो झूमको उठायो, पेटिया रो सभाळो लियो और सगळो गणो गाठो काढ आप रे परै जाय सूर्ण मे पहियोड़े पिगर र पाय लुकाय दियो । परभात हुता-हुतां दोन सहेलिया र पर्ण हेत से ओ फल हुयो ! पणो हेर लोभ रं रूप में बदळ जान जद घणो दुरादायी घण जाने । धन र प्रति घणो हेन मिनस नं जिनावर वाय देव । दूर रो सरति हहपर्ण री कोसीमा मे उपा नं जेळ री हा सामणी पई । पेटू मिनख ने मुफतियो साणो मिल जाये तो यो ठूम- टूसन पेट न पिटारी दणाय दं और मादो पह-पड अकाळ-मौत रो भागीदार वर्ण । रम रेखातर पणो हेन भनर ने कवळ माय बाप राम, रूप सू पणा लियो पनगा न बळवळती लोभ वळणो पई, मगी। री माधुरी में दूविरोई हिरणा नै तीर रो पातक वार सहणो परे । फेर मिनरा रोकाई कंगो' हो तो सबद, रग, , गप, परस बादिसगळी रो घणी है। हेरो उचित उपयोग दिवेर विगर बोनी वरीब सब । विवेक ने घोर बिना हेत पर सपळ बोनी हुय सई। काची उमर मे पणो देन रनिया पोसो सार, भाप र अमोल जीवण ने बरदार पर देखें, आप र जीवग-नध्य म दूर पाय पर। अंक जवान पोरी म्हारं पाहोसी रं पोरं ने बापालापा परतो। भावी पर उण पग मे घोर पती, मुसमुस पणी वाहा परतो। पायं बरस राखी साधनी । घराला रोना नै माईन सो समझना । पण माद रामोप रचा हेत रोहोरो बरप माना और तरंगां ही गठा दण सामसा दोन बनाम पण मागिया । जे दोन है री सीमा और मरजादा में पता तो वा दशा ३२] मिनरा नै हर पात री अपिता सूं यपणो पाहीजें । संवत है-पण जायर्या धुळ- हाण, पण यूटो कण-हाण । मणी संतान हुमण सू यंग री हाण हुवे और पणे परगण सू फसल ने हाण पूगं । पणी संतान और पणी पिररा किणी काम री कोनी । प्रेम रो क्षेत्र भी अहो हीन है। घणो लाड-प्यार करण सू टावर विगह जावं, पणा झूठा आश्वासन देवण सू राजनेता रो क्षेत्र हाय सू निकळ जाने, पर्ण पकण सूं आया सड़ जावं, पणी पण सूंडोरी टूट जान-पणी सांची टूट। हणी मति भणो हेत दुसमणी मोल लाव-घणो हेत सड़ाई रो मूळ । हेत सू स्वारपनी जुड़णो चायोज । स्वारथ रो सिपाही हेत रो हद नं उळांघ ले जद उण री मरजादा दट जाने । हेत रं नाळ नं आप री हद में हीज वैव्रणो पायी।

सह-अस्तित्व -~-अन्नाराम सुदामा- गाय, भैम, घोडा और गया सात अणसंधी, अकदम ओपरी और अजाण घरती पर उधळ-उचळ अठमेल करता, मस्ती मे चरता रोज देखो। मूध तो सूघ री जागा, सुखी और सोरा किसाक । स्वतत्रता-सुस री इण सुगध सू ही तो आ धरती आनदमयी और अर्थव्रती वर्ण । अ ही नही, मौको पडयां मोर और साप, हिरण और वाघ जिमा जलमजात विरोधी वर्ग आप सभावन दीपर'र सार्ग ₹ सके ।* याथमा मे तो इमी मगळ-छवि दारू मास ही विराजमान ही । वाकई या रूपछवि मिनख री सगळा सूं ऊची साधना-भूमि सू जलमी और जुडी ही, उण मे पशुझा री विशेषता को ही नी। 'फळाहारी दावा आश्रम', 'मानव सेवा याश्रम' और हरिजन हितकारी याश्रम' रागियोडा सा साइनबोर्ड तो अवार भी महानगरां रै काळज में, जठे सिनेमाघर, दारू रा ठेका और मर्यादा री हत्या पर मचळता मीनाबजार मर्ड, नेता, बादा और समाज सुधारका री निजर नीचे कट-कट ही नहीं, पणा ही, चिलके पण उणा र मायली मैसनाई रा विप्राड नही सुलै तो ही ठीक है। सिंप और बकरी बारू मास अंक पाट पाणी पीवता, रामराज री इसी कळपना तो अवार किताबा री वाया मे ही जीवती लाघ--- रहहिं अक सग गम पचानन' और 'सग मृग महज वयर विमराई-इतिहास रो इसो खुलो खजानो मिनस ने विवेक रे हाया सू लूटणो धामीज। पण आज रो मसीन-प्रेमी ओ दुषगो गिनावर उप अस्तिस्वर पीर-गागर ने सदेह री दृष्टि सू ही नहीं देख पण कूडो और पोल-कल्पित समा उण नै पूरण मे मागियोड़ो है और आप र बह री मैली, मूगली और मर सरिताने . पहलाने औरत वरात, अहि मयूर मृग बाप । जगत तपोधन सो रियो, दीरघ दाब निदाघ ।।-विहारी १३ मिनरा नै हर पात री अपिकता ग्यपणो पाहीनं । कंग्रत है-पग जायां मुळ हाण, पण पूटो कण-हाण । पणी संतान हुपण गू पगरी हाण हु और पर्ग दरमण सूं फसल ने हाण पूगं । पणी संतान और पणी विरसा रिणी काम री कोनी । प्रेम रो क्षेत्र भी अंडो हीज है । घणो लाड-प्यार करण सू टावर विगह जावं, पणा भूटा आश्वासन देवण सू राजनेता रो क्षेत्र हाय निकळ जाने, पर्ण पकण सू आंबा सड़ जावं, पणी साचण सूं मेरी टूट जात-पणी गांधी टूट । इणी भात पणो हेत दुसमणी मोल लाने-पणो हेत सहाई रो मूळ । हेत तूं स्वारय नी जुड़णो चायी। मारप रो सिपाही हेत री हद नं उळांप ले जद उण री मरजादा टूट जाने । हेत रं नाळ नं आप री। में हीज वैव्रणो पायी।

हवं. वे समर्ष है तो जान मुम वर्म; पण बळ मिरकं ही कठे। फेर तो घरती री आबादी री समस्या गुळती ही पड़ी है। भगवान ने आ ही माळा फेरो के धणखरा समर्थ और सीग ऊगियोहा पांद पर जावं परा और गरीब सपूता री जमानी मुक्त हुय'र सोरा मास लेवे। (२) सह-अस्तित्व गू म्हारो मुतलव बैंक पर-धरमी जात दूमरी साग, अक काळो मेक गोरं साग, क आदिवासी अक नवं मार्ग, थेक साम्यवादी थेक गैर-साम्यवादी सार्ग सावळ वास कर माण सू क-सं हक-हकूका री छाया मे वस, साधं सू खाधो मिला' र चाल मकं । सोवण री वात है के धरती पर आयोडो आदमी परती छोड'र कठे जावें । दूवो-साह कर का फासी खा'र मर घरती पर रवण ने दो पानडा जागा पान का नी ? और चा सोरं सास कोई देखणो को चाने नी, सह-अस्तित्व रा कोरा प्रस्ताव पास करपा तो की वट नहीं । लका ससार र नक्स मे अंगूठो टिक जित्तो देश है, वो आये दिन भारतीया ने गोदाम सू विकी री बोरया निकाळ ज्यो निकाळ । बोरपा तो बापडी निर्जीव है, अठे तो सजीव रो हाल ही बेहाल है । वर्मा काल ताई आपण घर रो ही अक मूदो हो, भाज उण भारतीयाने, कोई हरप मेत सू गधा ने काट जिया, काढ दिया । धन-माल जबत, वो पडयो रस्तो, दूकोज जितो कूको कठ ही। किसीक वात है । जर्मनी यहूदिया ने, पर अगरेजा दक्षिणी अफ्रीका में इमीराफडलीला पाली के जाणं धरती माथ गोरा काळा रागान ही न्यारा वसता हु । कबीर र शब्दा मे* जागं गोरा रं आवण रो रस्तो ही न्यारो हुदै । काला री खाल वासती हुन और गोरा कोई सोने री मीगणी करता हुई ! नीग्रो अमरोकन नं ऊभो ही को सुबाई नी, आननी कठे हो छिया पड़गी और कोढ लागग्यो सो किसीक हुमी ? आयी तो ही छाछ नै, घणगी धिरियाणी । इगलंडरी रक्षा खातर लटो, कटो, मरो हिंदुस्तानी, मौज लूटो और मजा करो अगरेज ! सारण ने सूर फूटीजण ने पाहा ! जोर धीगाणो और मोघापणो किसोक ? ससार र इतिहास में क्ठ मिल सो अनूठो उदाहरण ? ओ सह-अस्तित्व रिता दिन नि ? पंला पूर्व जिक री गाय, गाय हुदो भलो ही विण री हो। अफ्रीका, आस्ट्रेलिया, बनाहा, अमरीका, जट पोल लाधी, पम दंग्या । अगरेज उणां रा दूसरा भाईबध । ब? २ मूळवास्या न पूट-पीटर काढ दिया, खण दिया तो डागरां मू मादा कर परोदेपा और अर्ज उण सापण ही लाटी सू बियाई परा जाणे व सं वह रोहा वे हाम्हण तू बामणी जाया, बान बाट बाहे नहिं पाया । ये तुरष तूं तुरपणी वाया, भीतर खाना क्यू न पराया।

मी गुर पर रम। आगी पना गोरी गोसावी और मागी fir RAM त, उनसे पाया rigरमापा TEM भी पार पर, प्राची दशा INE.inनावर सपा कमान समोना और गरगहार नागपातमार, मोरगा। इस तर ही वो भगाय, अंकप मा, म राम राम साप, अंक पार्टी श्री mm. inा (गाविस पा राणीfr) दूर्गा पास गाय साळ गुगा for मोगा हमला पिरता या मे गे मात्र रोपाई भरोगो, ही पोर्टनी रमा रो भार पायो, पुरी रोटीन मिला म माग्यो (Intcret clash) तो ग ग भंग मारता ना fri' ा समस्या गनित री नही, मा जुग री पर उन में नम्य मार्ग मानगरी इसे देगे,मं मोग, माप रामाय पूर्व, मोतीरा कम रोशो पलो हो । पनी दाया बापो पागड़ो मना ही, गुपरणकट, जुग री यात पालगी र कंगो पर्द, जुग तो जुग ही है: रितो मरानो थोड़ो, हितो युपारो नासो यम, यस, करार इत्ती ही है आपो, बाकी पमत्कार ने नमस्कार तो करणो ही पडे । सिनेमा में साग यक्ष्मा जित तो पर वस्योडो, पार नोकळपा पर्छ माही-सी एणगी, तलाक, पर तो साफडो हुयग्यो के दोनू दोरा-दोरा ही को मात नो पण मौको पड़यां भाषण तो सह-अस्तित्व रा ही छाटसी। टम ही लैक्चर री है अवार। इण जुग में आदमी जद चाद पर आप-रा गोरा, गधहीण चरणारनिंद राख दिया और वठं बसण री वात करण लागग्यो तो मा वात अचभरी तो काई ठा है क नहीं पण आशका री जरूर हैं। हू सोचू, जिको आदमी अठं सिपळो को वस सक नी वो चाद पर जानतो ही सूधो देवता वण जासी, आ कम ही जच; कम काई, डोळियो देखतां तो जवण ने जाग्यां ही कठ ? महल री वीडी पर बैठयो कागलो हस हुयो आज ताई तो किण ही को सुण्यो नी, माग ठाकुरजी जाण । बठं पूगणआळा मे हुसी तो कोई अमरीकी सिरदार ही, का कोई रूसी, का कोई अगरेज मावड़ी रो जायो हो। धरती पर, मेक-दूज नै देख्या तो जिका री आख्या मे खूण वरस और वठ पग धरता। उणां रै नैणा मे नेह री नदी ऊमड पड़सी, भा किया वर्ण? बढ़ भी तो अठली कमाई रा पुद्गळ ही काम करसी । अमरीका आप री वाड़ वधासी और रूस आप रो। अगरेज रा बानी पग तो इण कामा मे धरती पर नामी रयोडा है। वाड वधाणी सावळ ताब नी आयी तो दोना में लड़ाई रा लाडू तो वाट ही देसी । केव्रण रो मुतलब, बठ गया पछै ऊगियोड़ा सीग और वधसी और ब आपस मे अळूभया विना को रौ नी । फेर का तो ऊपर फैक्य काकर-सा से पाछा ही नीचे, और का सारं साथ रा राजी- खुसी रा समचार आवणा हो ओखा, वठ ही पापो पाप समोसमा । राम कर इसी नही - [३७ द्रोपदी र चीर-सी सांवटीज ही नही । लिप्सा री साय समझ री धाड़ मे लाग्यो पई मारं स्वर अणसमझा री रास, या नागाई री पून में भला ही धाप'र उडायो । वाता घरम-करम रो। इण सू काई ? लाभ तो भाव में है और वो घर में ही वीगडग्यो। पख्तून कंत, स्वतंत्र हयग्या, अब म्हांन ही म्हारी पून मे सोरो सास सेगण दो। मा सुर्ण जर भाईजी चमकं । वाडियां में भळ पाड़ियां । इण मे अचूभै री काई वात ? खो हुसी ही, नीव ही इमी लागियोडी है । फिटोळा रं वर्ण सू कर वगाल (पूर्वी) नं ही मसागियो वैराग पड़पो, मजब रा भगवां पर वादोजी वण बंठयो । आप रो पर वळण लागियो जद चेतो हृयो, पूर फंक्या । टडे मा सू सोच्या ही सारो को छूटपो नो, चोईस-पच्चीस साला रोखायो पीयो सो नीवळग्यो । नीवळग्यो जिको तो नीवळग्यो, पराळो और उनाड बंटयो। समझे तो है लोग पण कूट खायो पर्छ । धौण बूट तिम्दतिया ने, उमा रे ही देश में । हजारू ही आय-आयन हिंदुस्तान में वसग्या । आ ही कोई बात हुयो ' लका, वर्मा, कांगो, येनिया, युगांग, स्पेन, पुर्तगात मगळो न हिंदुस्तान मोने रो चिही दोस, पस्त्यिा सुमगी तोई मारो को धोनी । पण दूर्जा ने दोपही काई देवा, घराला ही को समाई नी, सिरतान, जाटस्तान, पाई टा वाई-नई तान ईई। आसाम येक रा तीन हयग्या, पजार अंक रादो, आप सवाल करण न रयार । प्राना र पून बल । यो तमामो है. नीदरमी तो जुन जागे विमाक ? माइया और विदेशी बूटनीनिक मुफत रो र पण री दुपानी प्यारी. ग्यारी पोल राखी है। गह-अस्तित्व ने मार करण पातर । तान गादी, समर irst देवा, कियां ता भाव । आरट्रेलिया मे सिवा अगरेजो कोई दम हीमोगर मी, ना ग ती अगरेजणीही जण्यो हो । गह-अस्तित्व र स्तित्व में विगोषलोग रो रोपाट रह पाल्यो रहेंगू पणखरो पश्चिम र माप्रासादी Thiruin देशी रो बल्दो गो पालियोटो है सालदी-सीर मुरांना पर पाको हो । कोरिया दो, वियतनाम दो, भारत दो-मीन, जर्मनी औरtatसनी। पतामणो तामही था तो विचाभीर पाल रही मही। बिरानो विदाई माय ? दलिय रागृटना मोर की हार मी आई तो धान रोमारोह पृट पालो और रामरो-मोटो और मूर मा मरेगा परीमि दियो । उ रो गुण रिया ली। पूरा हो गरी उगे हो। rt नही मानं का बातम्यारी है । उदाररिगना तुप टाप र पर भाम-वापरावरियापरनीrittणा गेट सहारा ही लिपर IT REE ताला में १६ मुरम को दियो नी पर मोरम मा ? ' परबत पिरो गयो। बाटा ते r Tiri. - ३॥ दान ग मोडमा, गोई को भाभी नी। गाई पारी ही आमरो। गंगुल राना, निम्माननारपा विगी दोगा री मूळरी संपादा सोल पोयी-पौड़ी पात दमन, माग पिरो परमार गिरी प्रतिमा रै भोग गगा । पियधर्म-सम्मेगन, नारी, सौटी और युग जाणे किता-fry का रच! गह-रिसर और मार पोर मोगा में स्वस्य मोर राबद्ध यणाप्रण रा दिन पास कर, पोषणापत्र स्यार करे, मिगन भेन, मुमाराम बाप ने एगमा-गरी वाटं और पर में प्रणाली मार नायी शिसो फिर । सद-यपार रोमेरो हो टोल पर हर किसी पोल पड़ी है । यहा-हा शेळ-गोकनीयसो यागण दमो थेगोसिसमा के मर जिका तो मर, धम्मी और मोतं । पर्छ उर्जा सोग-दिसा रा होळसी युवकारं न्यारा होवो, लागी सो को नौ ? आप में मौवरपा ताई, पण दुजो ने समझा 'दमा पाळी' ! आ राजनीति है, साप और स्नेह र वली लगानी। कागजी काम पक्को हुमणो पायोज; जमान री मांग है, आपो जुग आ हो पाई। जमानो आपो, हना बोळी, जोड़ी मिली रे जोगिया ! मांगी र सायो। पाकिस्तान काल तोई मिनरा री पूछ-तो कट हो को दीसतो हो नी। आग भारत में उण भारत रा वादा कर' र प्रजा सागण पण पजा नवी धारण कर ली । सार्ग रेषतां पीढपी गळगी; काका, बाया, केय कयर कित्ती ही सदियां गुजार दी, अबार इसा कोई सुर वधग्या हा के साथ उठणो-बसणो मुसकल हयग्यो। घरम खतरे में है, सह- अस्तित्व को निभनी- आग-लगाऊ सुर कठ मूं निकळया, जिका करो मिनसा रो समझ री ढिगली मे चिणख नाख दी और आप योग सू परिया तमासो देखण ने दूर जा बैठया । सकीर्णता इयोई कम को हो नी, परम र नांव पर और साकडी हुयगी नहीं, कर दी। कोई बात नी, थारो अस्तित्व रखको चाहीजे, पण अकर कोई पूछ तो सरी उणां न के अब सोरा हो का पैला हा ? दो जुगां सू पणा हुयग्या, आजादी ग मोटियार जबान लुगाई अजै चुनाल र टाबर रो मूढो को देख्यो नी, थे वात करो सोराई री चालो, वाड़िया मिलग्या, पण उगा सू पाप कठे ? भळे वधाऊ चावे, लड़ परार, कूफ परा'र-जियां ही ताबै आर्य । गुड दे नही तो छोरी हुय जासू-~-आ किताक दिन निभै? काचर रा बीज जागो-जागां सुक्या ऊभा थापी देव, वन मे समझाने के अस्त्र- शस्त्र म्हे देसा, लाय समावण से सगळो सामान म्हारं कनै है, पईसो ही को सेवा नी। गूगा रे गूगा ! गान मत बाळी, भलो चेतायो । यस, गूगसाड नै इतो हो चामोज । म्हारी अंक पूट तो फूटो भला ही, सामल री दोनू नही रैनणी चाहीजें । रोटी, कपड़ो और रणने जागा, इणारी चिंता नहीं, शस्त्र-पाती भेळा करो; मगद, उधार और मांगर किया हो। इसी समझ सोधी ही को साय नो। आम दिन भारतीयां न ही नहीं, अशियानासिया ने भी कोई-न-कोई करभूण में देय र कादर्द, कोई की करें तो करो देखा । समझा बो फस्दू और पड़े। मोहा पणा और भही साकड़ी। आगला ही पीचोजे, तोई सरकार यापड़ी यसा हो। पण समस्या

-
प्रौपदी चीर-मी मावटीज ही नहीं। लिप्मा री माय रामा री बार में लाग्यो पाई
पारं उबरं ममममान गै राष, वा नागाई री पून में भला ही धाप'र हाम्रो । बात
परम-बरम री।म् पाई? माम तो भाव में है और दो पर ही बीमायो।
पप्न पत्र, ग्वार पाया, अब म्हान हो म्हारी पून में मोरो माम पेशा दो। बा
गुजद भाईनी धमत्र । पारिया में भनें घाटिया । इण में अचूभरी बात
तो हो ही नीत ही मी नागियोती है । किटोटार वर्ष मू मेकर कपाल (पूर्ण)
ही ममागियो राग कारची, मजब ग भगवा पर वायोजी वन दरपो। बारी
घर बळण दागियो जद घेतो हुयो. पूर फैला । टर्ड मा मू गोन्को ही मागे को
घटयो मी, भोईग-गाचीम माला रोपायो पोयो मोनीपवग्यो । यो विगोगे
मोपळग्यो, घामानो और बार बटयो । मोनोगट।
चीण पूरस्थिनियम. देश में होr-f
में पाया । साहो कोई antपी मका, कर्मा, मोनि
"ळ महिपान पोनं गे मागं, पायो ।
पसमा मदnntert,
पामोrt fourrt -17
iteratt-att nान I MIT Print."
माम पण पार | प्रातमा ।"
विगार गारी और
निजीfary trrrrrr"."
पानोपनी-मा..."
देगा, पर्या
-

Piratmlesinita anti Writ.lmitTarifmirmirent गोल RelianR. ANILatinian मोर HTTAR. और Trtfelem In ! HP-ItatterEET AIR मकर, wirmir rat furt #s. Knight और घर में Humanilfsttartimrailो पोल है। हर माama famit कर राि को Ri. vitraraite TALA refeni ni-गौर मुसार यारा 14, गातो sini TREER SI HAI का मामा Arift. गाय और राकानीमा पसोहको पापी, नया रोमmt. मामो गुग मा मानो पापो. हवा मोडी, ओही मिमी ओगिरी 'मायो mpो। पाfrom antमिनगरी गोहीको दौरतो हो नी। पार মন ম ণ ম্যতা ধা + ম ল গুণ নারী যা দী। पता पीपा गगी, कापा, मामा, पेपरही सस्या गुजार दी, अवारमा काई र गाया हाक मा उटगो-राणो मुरारम पग्यो। परम शतरे में है, सह- अन्तिम को निभनी- भाग-सगा गुर कठे म निस्कया, वित करो, मिनको री रामा रीटिंगली में पिणा नारा दी और आप ओग र परिमा तमासो देसम ने दूर जा मंदपाशकोणता इपाई का को ही नो, परम र नाम पर और सांकड़ो हुपगी; नहीं, कर दी। कोई बात नी, पारो अस्तित्व रंगणी पाहीजे, पण हर कोई पूर्व तो सरी उणा में के अयं गोरा हो का पैसा हा ? दो जुगां सू पणा हयग्या, आजादी ग मोटियार जबान लुगाई अर्ज धुनाव र टावर से यूढो को देख्यो नी, थे दात करो सोराई रो! चालो, वाडिया मिलग्या, पण उणा सू पार करें? भळं बघाज चाये, लड़ परार, कूक परा'रजिया ही ताव आ । गुड दे नहीं तो छोरी हुय जाम-आ कित्ताक दिन निभं ? काचर रा बीज जागा-जागी सुक्या ऊभा यापी देव, नान मे समझा के अस्त्र- शस्त्र म्हे देसा, साय लगामण से सगळो सामान म्हारं कन है, पईसो ही को सेना नी । गूंगा रे गूगा ! गांव मत बाळी, भलो घेतायो । बस, गूगसाड नै इत्तो ही चायी। म्हारी बैंक फूट तो फूटो भला ही, सामल री दोनू नहीं रंक्षणी चाहीजै । रोटी, कपड़ो और रणने जागा, इणा री चिंता नहीं, शस्त्र पाली भेळा करो, नगद, उधार और मांगर किया हो। इसी समझ सोधी ही को लाघे नी। आये दिन भारतीयां न हो नहीं, अंशियानासियों ने भी कोई-न-कोई करचूर्ण में देयर काढदै, कोई की करें तो करो देश । समझा बो फाद और पड़े। मोडा घणा और मढी साकड़ी। मागला ही पीचीजे, तोई सरकार बापड़ी वसाने हो। पण या - । 1 ३७ पदो र चीर-सी सोबटीज ही नही। लिप्सा री लाप समझ री याड मे लाग्यां पर्छ तर बरं अणसमझ री राख, वा नागाई री पून में भला ही धाप'र उडानो। वाता -रम-करम रो। इण सं काई ? लाभ तो भाव में है और वो घर मे ही वीगडग्यो। तून कंत्र, स्वतंत्र हयग्या. अब म्हांने ही म्हारी पून में सोरो सास सेवण दो। आ पूर्ण जद भाईजी धमकं । वाडियां मे भळं वाड़ियां । इण मे अचूंभ री काई वात ? मैं को हमी ही, नीव ही हमी लागियोडी है । फिटोळा र कैवर्ण सू कर बंगाल (पूर्वी) में ही मसागियो वैराग कपड़यो, मजद रा भगतो पैर र वायोजी वण बैठयो । आप रो घर वळण लागियो जद चेतो हुयो, पूर फैक्या । ठडे मार्थ सूं सोच्या ही सारी को टूटपो नी, चोईम-पच्चीम साता रोखायो-पीयो हो नीळग्यो । नोकळग्यो जिको तो मोपळग्यो, घरमाको योर उजाड बंटयो । समझे तो है लोग पण कूट खायां पर्छ । घीण पूर्ट तिम्यतिया ने, उणार ही देश में हजारू ही आय-आयन हिंदुस्तान में पमन्या । आ ही पोई दात हुयी? लदा, बर्मा, कागो, केनिया, युगाडा, स्पेन, पुर्तगाल गगो ने हिदम्तान मोर्न री विटी दोस, पास्यो पुसगी तोई लारो को धो नी । पण तोप ही पाई देवो, घरआटा ही को समझं नी, सिक्खस्तान, जाटस्तान, पीईटा पाई-पाई तान येई। मामाम येक रा तीन हयग्या, पजाब क रा दो, आंध्र समान रण में रपार । प्राता र पून जलमं । वो तमासो है. नीवड़सी तो कुण जाणे निमार माया और विदेशी कूटनीतिक मुफत रोबर देवण री दुकानां न्यारी- पारी पोल राणी है गह-अस्तिरमन मार करण सातर । तान साधी, समझ साकडी। देखो, रिया ताव था। बादलिया में विधा गरेजा मोई पस ही मो सके नी, जाणे उण ने किणी मगरेजणीही अग्यो र सहअस्तित्व रं यस्तित्व में विजोक्लो करण रो उळटो पाठ देर पाल्पो र पतरो पश्चिम रे साप्राज्यवादी देगा। उपनिवेशवादी गे भोगो पालियोसरी पली-सीर मुळा जर फेर पाल्मो ही काई ? पौरिया हो, वियतनाम दी, भारत दो-मीन, अमंनी दो और बताई लिन दो। बामणो तार्य नही पाई तो पिचा भीत पाल रही मही। विगाहणो कि रोकाई मारला मौरीलाई नो बान तो धान रोमबार तो विगाद ही। पृट पामो और राज परो-को मोटो और भूमर अगरेजा धरती ने विशेष रूप म feels रोयिनी? पूजा एवणी पापीरे उपारी दो। साई नही बाबा बाग म्हारी है। दशरपरिकार तु सामु गम्' री राग परणिया तो मशाला परमो समय ही साई? उगा रो तो TEmलो पर रा रा र पारस खातर ही पार पत्र में सरोदिनी पर मोसन ने मम्मा पर्व ता कितीर हो ? गहिरो गोरा हो कारता ही पर, मोहा-बंगा द.

३८ (३) आप री भाषा री भाग सी पायी फलोगो परमाळी ठगईरी उळदी करणी सरू फर दी। जुगां गूं द-यीसू भाषा जिके उपमहादीप में तीजणी-सी पूटरी सह-अस्तित्व री आस्था रो इमरत पीर हराती-मुळाती हो, अगरेजी अकली उणां रो साग बसणो मुसकल कर दियो । गप रो पूछ पढ़ायो तो इसो के मूट पर लातां कित्ती ही पड़ो, सोरं सारा घोडां जद झाल्यो हो काई ? आप र स्वार्थ सातर आदमी रो 'स्व' कित्तो साकडो हुने ! 'Fa' जित्तो ही सकीणं, सह-अस्तित्व नै बित्तो हो हर । 'स्व' रो विस्तार सह-अस्तित्ल रो आधार । हू कंऊ जिकी साच, म्हारी पार्टी सो जिकी ठीक--बस, में विचार ही पनपणा चायोजे, याकी नहीं । सह-अस्तित्व नै फेर आसरो कठ ? अबार आ ही अवस्था नागी हुय'र धरती पर नाच घाल; देखा, किया पार पड़े ? दनाई जद ताई उळटी, वेमारी वधसी ही। तो, धरती छकड़ चान काई ? विनिय वर्गा रो सह-अस्तित्व, उणां रो सागं विकास-वैभन्न, और साची पूछो तो इण चाव और सदभान सूं ही उण विधाता: बागवान आप री कळा रो विस्तार फरयो है ओ 'विश्व-बन' । पण जद सगळां तूं स्याणो, समझदार मिनख-विरतो आप जिस वर्ग सार्थ को रय सके नी, उण वेळा आह और उसासो री पून इण वाग सूं अक दुरगंध लेयर ऊपर उठती सरमान, बागरी सार्थकता इण मे कंठं ? मिनस रो मोल ही दूजा ने सुख पूगावण मे है, आप रो पेट तो कागला-कुत्ता ही भर है । The glory of human life is to serve others and not to be served—सास जचती है। कोसीस तो आ हुनणी चायीज के देवता मिनल री परती पर उतरण ने मूढो धोने, और हुआ है के मिनखां ने देख'र डागरा ई चमक । फेर तो वाजो किया पार पड ? 'सर्वे भवन्तु सुखिन:'-धरती सूं मिनख र इस पारमार्थिक प्रयास री अक दिव्य गध जद-कद उठ'र अनत मे फैल जणा ही सह-अस्तित्व री वाजरी रे माननी वैभव रा सिट्टा नोकळ; गंधनती थरा रो अर्थ फेर ही समझ में आग्नं और फेर ही हुने मिनस रो मोल ।

जीवण रो सूरज, दुख रा वादल
-दीनदयाल ओझा-
सावण रं वादळां ज्यू
कद-कद
जीवणरे
सूरज
मार्च
दुसरी पटाना बाद।
मदमाती घटाना
बाप साग
पण हेन सू
पाधियारं
पुलाय लार्व,
गळं लगा।
पण समरं वापरं रो
सपेरो सामजद
जीवण रो मूरज तो
हेमा न्यू
पिर भार
अयि उभो लार्य।
एसा सवारिया
मार मीची रिसा
हमा ग्य
पोरा भाई

२८
Anthemurariantीपानीमा
सामाdimaratreeni-गोपा-अस्टिार
Maral arm.garm kitrination
मुning Tiaritmanो हो ,
minnir eitt ** first mitt #ritorit t antal zit pe perett
मारको nिintri, RMITTrifmire रो विस्तार
गह भापार Irfanाप, पागे पार्टी गो सिौ और बम,
पार ही TIME भारी, मागही | गह-re र भागरो? अगर
भाही भरा गाना पती पर नाम नाम, मो, freपार प? दाना
atी, पेमारी पपगी।
तो, परती र
पारिप पा रो ग-प्रतिर, उना रो मार्ग
विकाग-भा, और गाणी पो तो इस पास और गदमात्र ही ग पिता-
थागमाग आप री मया रो frEETर फरपो है-भोपासना सगळा सं
म्याणी, समादार मिना-पिरमो धार जिस वर्ग गाय को रस ग नी, उन धेठा आह
और उसासा री पून पण याग सू अंक दुरगम प'र कार उठतो सरमान, बागरी
सायंकता इण में कटे ? मिगत रो गोल हो जाने मुग प्रगावण में है. आप रो पेट को
फागला-युत्ता ही भर है । The glory of human life is to serve others and
not to be served—गात जचती है। कोमोस तो मा हुनणी पायौज के देवता
मिनस री धरती पर उतरण नै भूढो घोन, और हुआ है के मिनखां ने देख रहागरा
ई धमकं । फेर तो वाजो किया पार पड़े? सर्वे भवन्तु सुखिनः'-परती सू मिनस ।
इस पारमार्थिक प्रयास री अक दिव्य गध जद-कर उठ'र अनत में फेलं जणा ही
मह-अस्तिल री बाजरी रं मानती वभा रा सिट्टा नोकळ, गधनती धरा रो अर्थ फेर
ही समझ में आग्नं और फेर ही हु मिनस रो मोल ।

जीवण रो सूरज, दुख रा वादल -दीनदयाल ओझा- सावण रं वादळां ज्यू जीवण रं मूरज मार्य दुसरी घटाया था। मदमाती पटाना बाप रे साग पणं हेलम् पार्टअधियारं न पुराय लान, गलगा। पण रामरे वापरं रो पेटो लागंजद जीवण रो भूरज तो हेमा ज्यू पिर भाव स मग मी माघ । दृता रावारिसा मार नीरी रिया हमा ज्य बर- राई मार्य ३० । आप री भाषा री मांग इसी पापी लोगां परमाळी ठंबाई री उळटी करणी सरू कर दी। जुगा सू द-यीसू भाषा जिके उपमहादीप मे तीजणी-सी पूठरी सह-अस्तित्व री आस्था रो इमरत पीर हंसती-मुळाती हो, अगरेजी अकली उणां रो साग बसणी मुमकल कर दियो । गप रो पूछ पकड़ायो तो इमो के मूढ पर लाता कित्ती ही पड़ो, सोरं सांस छोडा जद झाल्यो ही काई ? आप र स्वार्थ पातर आदमी रो 'स्व' कित्तो साकडो हुने ! 'स्त' जित्तो ही संकीणं, सह-अस्तित्व में वित्तो ही डर । 'रन' रो विस्तार सह-अस्तित्व रो आधार । हू केऊ जिको साच, म्हारी पार्टी सोचं जिकी ठीक-बस, में विचार ही पनपणा पायीज, याकी नहीं । सह-अस्तित्व नै फेर आसरो कठ ? अबार आ ही अवस्था नागी हुय'र धरती पर नाच पाल; देखा, किया पार पड़े ? दनाई जद तांई उळटी, वेमारी वधसी ही। तो, धरती छेकड चाने काई ? विविध वर्गी रो सह-अस्तित्व, उणां रो साग विकास-वैभव, और साची पूछो तो इण चान और सदभार सू ही उण विधाता: बागवान आप री कळा रो विस्तार करयो है-ओ विश्त-बन' । पण जद सगळां सूं स्याणो, समझदार मिनख-विरतो आप जिस वर्ग सार्थ को रेय सके नी, उण वेळा आह और उसासा री पून इण बाग सूं अक दुरगध लेयर ऊपर उठती सरमान, बाग री सार्थकता इण में कई मिनख रो मोल ही दूजा ने सुख पूगावण मे है, आप रो पेट तो फागला-कुत्ता ही भर है । The glory of human life is to serve others and not to be served—सान जचती है। कोसीस तो आ हुमणी चायीज के देखता मिनख री धरती पर उतरण नै मूंढो घोते, और हुम्नं आ है के मिनखा ने देख'र डांगरा ई चमक । फेर तो वाजो किया पार पडे ? 'सर्वे भवन्तु सुखिनः'-धरती सूं मिनख २ इस पारमार्थिक प्रयास री अक दिव्य गध जद-कद उठ'र अनत मे फैलं जणा ही सह-अस्तित्व री बाजरी रे माननी वैभन्न रा सिट्टा नोकळ; गधनती धरा रो अर्थ फेर ही समझ मे आने और फेर ही हमें मिनस रो मोल ।

जीवण रो सूरज, दुख रा वादल
-दीनदयाल ओझा-
सावण रं वादळां ज्यू
कर्द-कर्द
जीवण रे मूरज माय
दुसरी घटाना आवं।
मदमाती पटावां
बाप रे साग
पण हेत स्
पार्टअधियार नै
मुटाय लावं,
ग. लगा।
पण सम र वापर रो
पेटो मार्ग पद
जीवण रो मूरज तो
हमाळ ज्यू
पिर भाषम
पिभोमा।
हमारा बाडिया
मामीची रित
रमा ग्य
toममा

•|
और
जीवण रो गूरज
तपियोर्ट हेग ज्यूं
दूर्ण भारा गू
घरती मा
फेरू चमक
फेरूदग।

सांसां रो सूत
-पुरुषोत्तम छंगाणी
समें रं अरटिये
मामा रो मून कातू-
जाडो हुन्नं भला हीणो,
घटेरण अटेर सोज,
म्हारी देनगी दे दी,
ज्यो-ज्योपा
अटेरती जा,
म्हार सात महिती ,
मलमप मीतो
विदोहीपणामीजा
बानी
थापामगाराम
म्हारोमानियोn pr
बायां गएपमारको
in मीमो
भगमो HTRam
उ
...,
....
९...
1

४०।
और
जीवण रो सूरज
तपियोड़े हेग ज्यू
दूर्ण भात सू
धरती माथै
फेरू' चमक
फेरू दमक।
.

अणजाणियो-सो गांव -गोरधनसिंह शेखावत- मारमं माम घणे दिनां पाईग्गियों सदरम होरो गोद। पीठ बायोडपाणरा मीटर माद पनि दृसती धातो मा। गांव महारगा अंक मिनमबर पवार मरागप-गी। मेंziहो पोहोशिययो-मो। गे। सखारामागेपरमात, भागारीमा दीपा करमी tी राम पिना tam बसमापनी मस

४२|
पापड़ो पापो मत
पुण जाणे के टूट जासी-
फ
अश
जासी-
पेरो कोनी
पण ठा है,
जे टूटियो तो
सांधतो फिरूला उण नं;
अर फेर काई गारंटी-
तद ताणी पलां री भांत
म्हारो अरटियो चालतो रैसी?
आ नी हुने के
इण राफारोळ मे
विना कातियोड़ी पूणी मनै
धूड मे नाखणी पड़े,
अळूझियोडै सूत रो कोइयो
सिळगानण मे वापरणो पड़े,
अर मनै खाली हाथा
घर जातणो पई।

अणजाणियो-सो गांव -गोरधनसिंह शेखावत- लारस साल घणे दिनां पाछ देखियो बदरग हुयोडो गान। चीठ जानं ओळखाण रा मीठा सबद गांव री दुखती छाती साथ। गार अनाज लगाई अंक बूट मिनख ग्यू, अर अवाज लड जावं सरप-सी। मैं खुद मे दाबळियोड़ो थोड़ो भिघू झाल्यो-मो। रोज ऊग सखारा मारतो मैलो परभात; अर पृग उत्यिोड़ी सावळी पाना मार्थ धीमे-धीम उतरती बड़ीती रात चितार सात टरबतीतरी पभपा मारती मस ने। धेर साल नदी गांड पर पुनार र दोर पुपपराप म्हारे होटो मेग पोर रोजगबर

४२|
बापड़ो काचो सूत
कुण जाणे के टूट जासी-
क
अळूझ जाती-
वेरो कोनी;
पण ठा है,
जे टूटियो तो
साधतो फिरू ला उण ने
अर फेर काई गारटी-
तद ताणी पलां री भांत
म्हारो अरटियो चालतो रसी?
आ नी हुने के
इण रांफारोळ मे
विना कातियोडी पूणी मनै
धूड़ मे नाखणी पडे,
अळूझियोड़े मूत रो कोइयो
सिळगावण मे यापरणो पड़े,
अर मनै साली हायां
पर जाणो पड़े।

म्हारो देश -करणीदान बारहट- म्हारो देश- बाजरी री रोटी पर मिरवा रो बीज । म्हारो देश- टींगरा री लगाटेर, सैरल-ही-सरले छोरं रो टामकी-मो पेट। म्हारो देश- काळ रोवामो, मेजरंछोहा रोगार, टीद थोल नागी भूखी लुगाई॥ मेरी पीठी सांगा। महागेश- बूसंहा मिनता रोटा-रण, बीयरोगगरी भाग, मन मार मोरपारा गे रिकी रहतार, हरिया. रा सारोगांद्र परळ जाये, गूनै देवरो-को। फुमूणी गोपी गुणं योदा कुता री गुंसाई सू भरियोटो गळी रे कंठा न पीरती लोग बैठा है आप परां में धागळ सगाया। आय दिसाय सुरजी गांव रं माय ताबड़ो अकलो सोयो र डूंगर रै उजाड पोळं में; उगाळी लेते मुरझायोडा पाना रा रूखां री चिकदा लागियोड़ी-सी धियां हे नाड़ पसारियोड़ी बूढी गाय अर भैस । घोती रा पायचा टागिया घूमै सूनी हेली र अड़े-गई कई ठाला-भूला बदमास; घरां रै माय मोसा मार बूढी-डैण लुगायां जमान री तसवीर झांकती, ऊची मेडी में बैठी उदास ध्यार साल री मुसाफरी सू आबाळा घर रापणी री सतपती बीनणी। दूर अक रोळो सुर्ण अर सो जा कर अकास रेपीदं मे; बैंक सुण मे चमके आस सगळं दिन दारू री भट्टी र सार्म तपतं मिनस्सरी। मओ गांव मात्र बूढो सागै, सारला कई परां पंसा देखियोदो, ना यो पिधाण ना मैं पिया।

म्हारो देश -करणोदान वारहट- म्हारो देग- दारी से रोटी पर मिरवां रोबीन। म्हारो देश- सैगरी री मगाटेर, मंग्व-दी-नरल घोर रो रामगी-मो पेट। म्हागे देश- मागे दामो, itizो रोमात्र, टोन मापी मधी गाई मेरी पीजी का पहागे- द्वारा मिनमा रोटाप, पीगगहाग, मन मार मोरपाराशे, संसार firs, मममा.

सारो गांव बदळ जाने, सून देवरो-सो। कुसूणी बोली सुणे बोदा कुत्ता री सूंसाई सूं भरियोड़ी गळी रे कंठां ने चीरती; लोग बैठा है आप र घरां मे थागळ लगाया। आख दिसाय सुरजी गाव रे माथ; ताबड़ो अकलो सोयो र डूंगर र उजाड खोळे में; उगाळी लेने मुरझायोडा पाना रा रूखां री चिकदा लागियोड़ी-सी छियां हे नाड़ पसारियोड़ी बूढी गाय अर भैस । घोती रा पायचा टागिया धर्म सूनी हेली रं अई-गड़े कई ठाला-मूला बदमास; परी रं मांय मौसा मार बूती डण लुगायां उमान रीतसवीरमांकती, ऊंची मेरी में बैठी उदारा प्यार माल री मुमाफरी सू भाबाटा घर रापणीरी मनावीनणी। दूर अंगी मुगं पर गोआ मरागरंपर मेर पुणे में पम माग मामिट्टी गार्म बोरनामा, मारमागासपोडी, from After म्हारो देश -वरणादान दाद- म्हागर- मागीपरमिरगी। म्हागं देश- टोगरा नस्टर, रन-ही-मन पर टी- मोट। म्हार- पालगंदा, ight_रागमार, टीदार दान मारी या सगाई पीजीटता मागे- मिनमा गं मनाया दादी याब, कर भारद मोरया गेमरी, एर दादा, राममा Y

No text on this page.

No text on this page.

भारी मातारी मांगनी पापी.गोगा परमाटी टाईरी पा। जुगा गूदानी भाषt fr+ उपमहानी में तीरगी-गी रीमामा रोमरत पाहगी मुदतीतोअंगरेजी अकती उपा मुगार कर दियो। गर्ष पूंच पदामो तो गोमू पर साता मि सोरं मांग पोजन शाली हो कई 7 मारे स्वायं मातर आदमी : माकडी ! 'रनो ही गंगीण, गह-अस्तित्व में पितो हो ।' गह-अस्तिरण रो आपार हूं के जिकी साय, म्हारी पार्टी सोपं जिकी दिपार हो पनपणा पापोज, याकी नहीं । सह-अस्तित्व नै फेर बामरो भाही अवस्था नागी हम' र धरती पर नाच धानं; देशां, किया पार पड़े साउन्टी, चेमारी यपसी ही। तो, परती दोर पायंकाई विविध यो रो सह-अस्तित्व, उ. विकास-भव, और सापी पूछो तो इण पान और सदभाव तूं ही उण बागमान आपरी कळा रो विस्तार करपी है-ओ'विपन-वन' पण जद स्यापो, समादार मिनव-विरतो आप जिस वर्ग सार्थ को रेप सकेनी, उण और उमरगा री पून इण वाग सूं अक दुरगंध लेयर पर उठतो सरमा, गायंकता इण में कटे ? मिनस रो मोल ही दूगां ने सुख पूगाव्रण में है, आप फागला-कुत्ता ही भर है । The glory of human life is to serve oth not to be served-~सान जचती है। कोसीस तो आ हुमणी पायीज में मिनपरी परती पर उतरण ने मूंढो धोतं, और हुन्न या है के मिनखां ने देख ई धमके। फेर ती वाजो किया पार पडं ? 'सर्वे भवन्तु सुखिन:'-धरती सूं इस पारमार्थिक प्रयास री भेक दिव्य गध जद-कद उठ'र अनंत मे फैलं ज सह-अस्तित्व री बाजरी रे मानती वैभव रा सट्टा नोकळे; गधनती धरा री अ ही समझ मे आने और फेर ही हुवं मिनस रो मोल ।

No text on this page.

1.मोर प्रागनियो तारो अग्लो, पीपः पिगगी मुगारा हा रोटर गुणा पापाम दीनी पण पर री पारी गयो चिरी मोर्छ हिम पाती में दाउ रमूळ मागो। ५. गुण मान? पाता भोत कर मा दुनिया राम-पासणी संमें धा पण गुलाय री रूप-सुपा ने पागल भवर विना कुण जाणे? ५. कुरसी : आवमो पोथ्या में पढी ही 'अर वडा-चूहां सूं सुणी ही के भगवान री सृष्टि में आदमी सब सू वडो है, पण कुरसी सामं आदमी भोत ओछो लाग- बावनियो

७. पारतो
गोवर पापती विरहण
अर कूरिय सू उठतो धूवं रो गोट
जाणू हिण्ड र माप लाग री वास्ती री
सांप्रत ओपमा हुने ।
८. याव-ठगोरी
चाणक पीव्र री याद मे
नैणा मूं टपटप आंसूडा टपकावती
मिरगानणी पणिहारी
घडो भरणो भूलर
घड़ो रिता लागो,
भूण रोक्तो-मो यमग्यो।
६. सूक्ष्यो जावं माफ पy
नई वाटेर' पर
वे-हजगार रामूक बार तो हरपो हुपायो
जाणं मूसेई परसणे पर पाणी धरणग्यो ,
पण पेरू
चौमास मे बावई ग्यू
पीटो पर लाया।
१.. फेर
मुक्तीगलियारो
मितोबोवन
बरसत बाद ज्यू
बरायो-रवरायो,
1

ठरयोड़ो विंदु गुस-पालो नस्दा भापौतर-नदलाल शर्मा मैं की नी जाणूला, नी कल्पना करूसा पुण मेरी अ-सत्ता नै मिसाला कोशिश विना सत्तावान हुव्रणो? पाणी किया ओबरदास कर सके? भाठा किण अकास रो सपनो देख्यो है ? ठरघोडा, जद ताई ये लोग अळगोई देस जानण न ठरया आप र तीरा मार्य चढ'र ठाई दीपा कानी उडनी जाव। आप र ढक्योई जीमण मे थिर जमीदोट नगरी री भात दिन ऊतरता चल्या जाने पकड़ में नी आवण-आळी ओसरी तरिया की खतम नी हुबेला, नी बेकाम हुनेला, जद ताई म्हे पाछो जलम नी लेवा, जद ताई आज दिन लूटपोड़ी जमीन पाछी पुराणं वसत सू भरीज नी जान- अकल रूप सूं चुपचाप खुद ने अ-सत्ता सूं वारं काढता, अजे भी फूला नदी डाळी हुवर्ण वास्तै ।

भाग- वाली -शिव पाडे- देव है जद उरटी राता भाग भुवानी लागे काळी हर-की ने कर दे चकचूधो सूत्रो वाम करा ६ को मौर्य मारग सू भटवा भाया थाख्या सरका मीठी बोनी विस पुरावा दे सड़ाया देवता पुरवा दे पण रिण ही प्रीत न पाळी भाग भुवाली जुलमी जागण पेर रात पिरचय. मनड़ो टिक ना पा रो परो वैरी वणग्या' दुख मिर तबू रणकं तणमा' चिणतोहा मार्ग मीर पिनी-सी उपा' उची पुलमी राजार बरारी भाग भवानी धूची पण सरिया मारं एप्पर सोधो रहार 'र असर १ माटी मुटपा भरा रं

५२।
दयान सा गोरा टिकवाद
अस्तीफो
हायां लिखवा दै
दुनिया सूं बजता है ताळी
देव है जद भाग मुंबाळी
आंखडल्यां करता दं घोळी
अइयां जिंदगी लागे मोळी
मिनस होयज्या' हक्को-बक्को
मे दिरता दे धक्को
खरच सू चाचर
भगा-भगा जूत्या
राजा नै वणवा दै हाळी
देने है जद
भाग भुवाळी
पडता दै
फड़ता है

फागण -सांवरमल दाधीच- स्याळं में जद खाई काळ चाल मघरी-मधरी बाळ धम्म-धिनक धिन वा चग झाझ मजीरा छम्मक-धम्म बोल-बोलकर मस्त धमाल छूम-छमाछम नाचं यार इन्नं गीता रो रमझोल फागण में मस्ती रो घोळ खूब जवानी कर किलोळ गैर माच री घूवाधार छूट रग-भरी पिचकार के टाबर, के नर, के नार तन-मन भी रस री धार रग गळपा मे, रग बजार रग-रे मे उठे मलार कर मसखरी भाई होळ फागण मे मस्ती रो घोळ खूब जवानी करं किलोळ रग-रगीलो पोक सजाय भात-भान रा मागवणाय मृम-झूमकर मोदड पाल घूम-घूमकर गीदह पाल रसियाळमिल कर कमाल मनहो नापं नौनी हाल 'वा भई ! वा भई ! गूर्ज बोल फागण में मस्ती रो घोट सूद जवानी पर रिलोड धर मुरधर रा धोरिया -रामसिंह- १ घड सोती २ घर मुरधुर ३ ४ घर मुरधर रा घोरिया सोने घणा सरूप छोळ हिलोळ किळोळ मय सायर रूप अनूप. लांग धणी लुभावणी टीवा री टोळी जाणक जोवण री प्रकृति घड री सूर-किरण सोनल कर चाद-किरण चांदी रा घोरियां वांकी घज बांधी केसर कण रज-रजणी कोमळ काया जाळ धर मुरधर धोरिया कोमळ वण्या कमाल धोळा-धोळा घोरिया चाद तण उजास हाह-भाष हुळस-हस रम रसीला निस पूनम धोरा निरख वालभ बोल्यो वाम--- सुरग रच्यो सागर-सहित घोळो किण मरु-धाम ? ६ रात पड़यां रमणीक दिन में दीपं दोगणा प्रेम तणा परतीक धोळा-पोळा धोरिया रात पड्यां मन रजणा रुत वरखा रमणीक धर पर दोम घोरिया नेहा भरथा नमीक पापस पुतक घणो हिरई मिट हृवाड़ नही घोरिया पेम तणा पाहाह ६ मुरघर करण महप घारपो जीवन घोरियां राजपान स्प वीर त्याग वण सम दण्या धूड धोरा औ रे जीवधर जाणे सो जाण मेनहला तन ऊमग आंधी उकळाण ११ आधी आयां धोरिया उड-उड कर पड़ाव रच, विगाई, फिर रच विधना सरिस वणाम १२ लोल वेवळू-लहरिया विखर-वर्ण सुरेस पतन धोरिया प्रेम रा लिख नव-नवा लेख भात-भात रा माडणा बाळू पर्च विचित्र पवन घोरिया प्रेम रा चितर चोखा चित्र १४ जीव-जत रमै ठडी बाळू म मोडणा जाण मरु रा मोड १५ तीखा तिरदा तणतणा ऊचा अडिग अनेक 'बहु दिस जीतण में चढया दळ धोरा रा, देस १६ साया कोट र कागरा दुरा-धार सु-घाट मुरपर राखण माडिया घोरा दिद इ.ग-टाट १७ घरो गरब मत धोरियो । ऊचो सीस उठाय आधी सू उड लासी तन साय १८ रात्यू ठोड बानमो सू घुखाप बर-अबर पार पवन भर जप मौन जप धोरा धूप रमार जगल मे मपट वर १६ ताप तप तपसी तरण रेती रमाय धर मुरषर रा घोरिया धूणी २. अलख लस धूणी सपं हर टीर न टोच धोरिया बोगश भत लियो दाहा दिए हर टीर न टाम धोरा पावन राम २२ मुरघर मिरमोड २१ . . हिमपळ-सायर हरिया जाममीर पिाम धन रे पांग धोरिया ! मिस्यों नहीं मापर-हिमप सोधिया राममोर मेर पुती नहिं नेह ग परपट घोरा हिमपरसापर हरिया सासर पारो परिपा! नेह पापो नः मम .

१॥ २१ पक्ष गो पिर धोनी पर मार ! पा, मोर नही भोग । ₹ min पोग" पगार मही भोरिक्षा रियो गोरा माय सर्ग म पोरा २८ में गूठी २६ पर सीन कोमल मागेमा विहार पर्ट पाजू-रा घर-बार में मेल हिसमिल रोल रासा मीठो मिटियो पोरा तरस मन टायर टोला पाळू साडू पाळर पाळू गुरग पोर माया गुएं पूरा ३०

वजावै रो वीर
-सवाईसिंह धमोरा-
(१)
मेसाटी मे गाव बेक है, बजे बजानो उण रो नांव
रातको री च्यार कोटडी, च्यारा रो गावो में नाव
भ सिंघजी कंबर लाडलो व्यापण गयो वुहाणे गाव
तरीका सू च्याय वीनणी आयो पाछो कोकड माय
गयो सवास गळ ले हरियल, छटो री दी गोडी ढाळ
पाकड मोय डाजमो विछगी, बारी रयो फमूमो गाळ
दी खधाम राबळे बघाई-जान पूगगी काकड आय
सामळो साधो मांतर मू काकड सामा जाप पधाय
माजी बोल्यामुणो नेवगी । जान चाया पाया गमपार
मांडण में भेळा से हो रहा दुटम कवीळं रा सिरदार
पकड़ पर सामा कुण जात्र, पोटरल्यो मे पोइन आज
महिण र गई रो नूतो, सगळा पूग्या रजपट दाज
पैसारा रो देण दुलावो, वारणी भी भाग्या पाय
चौर पुराणो राठिय मे नुको बीनणी खातर बाय
गाय नेगी पादो पहियो-सिरदाग! में मुण लो बात
सामेटाने मती उसको, देगा पासो बवरी स्थान
मारण मे हामी मरियो है, यारी सा पूठी जाय
तीन पोटापा से टावर पूरक्षा है कई र मार

५८ तो सदासजी ! हे भी चारपा-~-कह काई सूंतो तरवार दराडो दिवस फेर कद आसी, इण काया रो करण उवार सालमसिंघजी हा यह भाई, जा पकडपो पीरा रोहाप--- पंसारो करणो है भामा ! व्याय वीनणी ल्याया साथ दादाभाई ! किया विमरया पाबूजी री गौर गाय' पाचू ज्यू पंसारो हुयसी, नंचो कर मेलो सिर हाथ सोढी ज्यू ताराणी जासी मुरगां मांय वधेड़ी मोड़ रासत रो भैरू भी समझो पायू ज्यूं दौड़ामी घोड़ (३) काकड़ पर ही लियो कसूमो, वाथोबाथ मिल्या सिरदार घोडारे झट बेड लगा दी, जा पूग्या मांडण र धार झगड़े भै जा जूझ्या भाई, धणी मचायी मारो-मार वीर-गती ली भैरू वनई, पाग लेय फिरियो असमार पाग पूपता तेवराणी भी साध्यो सोही-सो आचार गुनागार ही इथले री गुणागार सतियों री सार गात पजा घसरी वण री आज पुनापारी उण ठोड़ भैडमिघ वनड़ा री वनडी काठ चदी बांध्या सिर मोड देश न धोकीजे जिण दिन सू, सती धुके जूझारी साथ ध्याय चीनणी घरा पधार, पगत्यां मार्थ मेले माय पावू ज्यू पूजोजे भैरू, सोढी सम ताराणी और गान बजानो कोळूमंड ज्यू जण-जण री आता रो घेर जीत तो भरू रात रो आज हुयो जण-जण आराप जालझाडूला जई चढीज, जण जण री पूरी साध जांगड़ जान चढ़ता चदायी भरजी वनाही भैरू हुयो, राबत काकड़ मूं सोयो गयो, मांदण झगड़े इंत आज गाज भल रो रजपूत मूमल -दीनदयाल ओझा- दृश्य १ [ मूमल री मैडी रो सजियोडो कमरो। कमरे मे दो रूपाळी लुगाया बैठी है-अंक २५ वरस और दूजी १७ वरस र अड़े-गडे । छोटी रे मूढे माय अचरज और उत्सुकता री झलक, मोटोडी रे मार्य सुशी, पण कर्ण-कर्णई चिता री रेखावा उभरे और मिटं । ] सूमल-(हठ-मरी वाणी मे) नहीं | आ वात तो म्हारी मानणी ही पड़सी । मने टलावतो पणा दिन हुयग्या । अब आप री बात नहीं मानू । हू तो आज महदरं राणं न देखूला 'र अवस कर देखूला । ममल-(नम्रता री वाणी मे) मूमल | हर बात मे हठ चोसो नही हुने। उण दिन जद सगळी वात जिवो नही कंत्रण री हो बा भी तने वताय दी तो अब हठ विण वात रो? सूमल--(उतावळी बोली मे) नही । अवै हू आप री वात नहीं मानू । न उण बेळा दूजो आदमी नही रेय सके, जणं आरव मरासी किण तर रं- घतातो-बोलो क्यो नी? मगळी वात मम हू. आप रं मन मे ... मूमल-(क्टोर वाणी मे)--साची कंवें । सोट तो म्हारे मन मे हीज है, जर्ण तनं आज इण तर पाळ-पोसनं मोटी करी । मगळी वात जाणती परी बणजाण वण भात-भात रा प्रान करणा चोखा नही। गूमल ! काल तनै दूज टिवाणं जाणो पडमी; अब तू पोरी नहीं है। हर पात माप छ नही परणी, मूमल । ['बाईसा-चाईमा री अवाज बाई । ) जाऊ सूमाम ! देखू, काई साम है। समाल-(बाळ-मुलभ पचळवापरता मूमन रोहाय झाले; पेरू याही उभं पेर हाथ पसारनं रस्तो रोक पाई मे बोल) म्हारी बात मानने पई बाप भीतर पपारो; नही जणं हूं नही जावण दूहूं कमी हूं । देयूं, आप मन मापी करल किण तर माय पधारसो। जे नहीं मानसो तो हूं सायं पालम् । प्रमल-(तिरस्कार-गरी याणी में) कद जासी ओ पारो टावरपणो ? चाल, साग चाल। ( दोनू जावं है) [ पडदो पडे है।] दृश्य २ [ साधारण पर रो अंक कमरो। सूट मार्थ सारगी टागियोड़ी है । अके कानी दो ढोलिया ढालियोडा है। दोनू ढोलिया मार्थ दो आदमी बैठा है । अकरी वेशभूषा सिंघ री है, दीसण मे गनाइयो दीसं। आपस मे सगीत री वाता चाल रयी है । अचाणचक बारणो खड़काण री अवाज आन । अक आदमी कमर मे आतं, व्यारू कानी देख, फेर आरव कानी देखने आदर-भरी वाणी मे की। अजनवी-दाता फरमायो है के बाप र अठ सिंध रा नामी गाइया खान साब पधारियोडा है, उणा ने साग लेयने आप वेगा पधारो। कई दूजा महमान पण पधारियोड़ा है। बस आप री उडीक है। आरव-ठीक है ! अरज करायद के म्हे आता हो । [आदमी पायो जानं है। खान साय-(धणी यदा-भावना सू) धन है मरुधरा ! धन है लोनो! जठं इण तरं रा कळाकार और कळा-पारखी विराज । हू आज भोर मे आयो हूं। सिंझ्या सू पली-पली दाता ने खबर भी मिलगी, उमरामा ने बुलाय भी लिया और मजलस री त्यारी भी हुगो ! कळा रे जाणीकारी विना इण भात कुण सोचं यारव साव ! मारव-(आदर रं भाव सू) कळा रा साधा तो कळाकारा ने उडीकता रखें। मनं याद है लोदवं ग यावणआळो कोई कळाकार सो नही गयो जिण रो मान-संमान दाता नहीं करियो हु। फेरू आप री सोरम तो सिंघ सू लेपनं इण दिस ताई घरसा सू आय रेयो है सान साव ! पान साव-(धदा भाव सं) आरव गाव ! बाज म्हारं मन री मुराद पूरी हुयी। क आप रा दरसण करने और दूचं लोन कळापूर्ण नगर में देखन-इण भात रा भवन, सजियोड़ी दुकाना, वैमन, मान-आदर मैं तो कठई नहीं देखिया पिळा और सस्कृति रो अनूटो केंद्र भोसोदयो आर री स्यानि उणियार होन है आरव साव!

आरव-(मुळकन) सान साब ! यो आप रो वरपण है कि इस मांग कंय रया हो । आप रो मान-संपान करण रो म्हांन आज अगर मिळियो। ओ इण घरती रो वडो भाग है । आप जिमा कलाकार मिघ और दू देशों में है विताक ? पधागे अब, दाता उहीरता हुला। ( दोनू जावं है) [ पडदो पडे है। दृश्य ३ - [ राजसी ठाठ सू सजियोडो मोटो कमरो। रेशम रा गलीचा विष्टियोदो। सरदार के कानी गादी माथै बैठा है। विचाळ गाजणआळगार रेशम रो गलीवो विधियोडो। कई जणा उठीक रेया है, मालम पई है। वै आरब रा चेला है । धीरे-धीरे आरव और खान साब राभा महप मे आये । ऊर्च रोखा मे मुमल और सूमल तथा दासिया बंटी है। "पधारो-पधारो' री अवाज मुणीजे । यारव और पान साव थाप रे स्थान मार्य छ । थारब सान साव रो परिचय देव सगळा लोग ध्यान म सुणे । खान साब गावणो सरू करें। क गीत खान साव गाव फेर अंक आरब । सगळा वाह-वाह फै। सहसा क चाकर नीचे आद्र अर अक ढकियोडो थाळ आरब र हाथा मे राख और मूमल री ओर सू खान साव ने भेंट देव्रण री कन।] मारव-धन है बाईसा और धन है खान साव ! जिकी सुरावट सान साबर कठी में है या मैं तो बाज ताई नही सुणी। बाईसा री तरफ सू खान साब न आ भेट देवता मने घणो हरप हुने है। [भेट देव है । सगळा उमराव भी थाप-आप रो भेट पाळ में घरं है। ] -(कृतज्ञता र स्वर मे) हू बाप रे गुणां और दाता री महरपानी री किण शब्दों में प्रशसा बरू । म्हारं न कोई बोल नहीं। हूं आप री गुरगुजार हू के बाप मन इत्तो मान दियो। द्दण इमाम ने पावण रा हकदार आरव माब है। (सभा री ममाप्ति हु, सगळा वान है) [ पदो पर है। खान साब- हाय४ [ राजसी टाट म मजियोटो कमरो। वर्ग में मूमल और मूमल दोन बना बंटी है । भूमत रो मुष-माट उदाम है। लिलार माय चिता रेखाता है. पसीनो है । मूमन र मदै मार्य पाई ग भाव ।

पीरीमा मोर मारrti) सी-(40) IELो गानो मार मार in मा प्रमा--(भाग-itaria) मारमा पर दी है। प्रमा-(440ो गागाभाग मार मार नहीं RTI मारोगार पल मrtri ज्मा और महें। गर्ग रानरमारं मन रोगाप पूरी परूमा। मार ही तो ताहानिनि प्रायन आनि पार करा। यो अगर मामायायो । पोतो. arr रोपाईहरम है पाई-मा! [ मा म मा मेरो पिता रंगावा उमर मा । मन री पगार मोमा गाप-गारु । पाकर पाई मौकर-सरं री रिपन या गूगन कोनो पाइण सरं रा भार दी। मोशियो गूमस कानी गहापन देग।। मूमल-(सहायती वोमी में) गूगल It या तू म्हारं मन री नहीं जाण रा? राणोगी पधारगी या नहीं-ओfrनं पतो' आज हट ना कर । म्हारी जीप्रणी आग दिनूगं सू फरक रंयी है। मन अमूम-सो रयो है । तू को हठ कर ? बैन । वुण जाणे बाज काई हुसी ! [ गूमल गरी चिता मे पट जावें । ओकर मूदै री हनायो उड जादूई राण मूढ़ मार्य पंला गरसी रोना दोग। पोही गभीरता सू बोले ।] सूमल-बाईसा ! वाईसा ! आ नही हुय सके के महेंद्र राणोजी नहीं पधारें। पधारगी अर मारा कर पधारसी । देखानो-आज पूनम री जळी चादणी किण तर काक-नय माय अमी वरसा रयी है, नदी री धीमी. धीमी स्वर-लहरी किण भात मीठा रस-भरिया गीत सुणा रयी है। हूं जाणू हू जद ओ चाद आभै र विचाळं आ ऊभसी जद महेद्र राणो-सा पधारसी, अजस पधारसी। मूमल-(उदास मन सू बोले) सूमल ! तू दासी कन सू आरय रा पाचू कपड़ा मगायले, कर ले थारी मन-चायी, जा। [ सूमल जा है । मूमल अकली बैठी है। गैरी चिंता री रेखान मन री उथळ-पुथळ न दरसाय रंयी है। पसीनं री बूदा लिलाड माय झलक रयो है । अकली बोल है।] सूमल-आज मन रो इण भात अमूझणो, जोगणी आंख रो फरूकणो, पतो नही किण अणहोणी री सूचना देवं है। जी मे आने के कांत मे जायन जी भरने रोऊ; पग पासा करू । कुण है म्हारो जिक म्हारं मन री वेदना न समझे ? सूमल, पण सूमल अज नही समझे - । -- |६३ प्रेम काई हुने । उण नै काई पतो? दोना विचाळ दिलो भी जागतो नही रखें । बा तो अक हठ ने समझे। सर ! जो हुणी है हुय रेसी। खुण टाळ सक? [कमरं रे वारण मार्थ अवाज आवं। अंक दासी आमने कैव-बाईमा ! पाळ त्यार है, आरोगण पधारो। मूमल-(आदेश री अवाज मे) जा, त्यारी कर, हू आऊ हूं। ( दासी जान है) [ पडदो पडं है।] दृश्य ५ - [ राजसी ठाठ सू सजियोडो बोई कमरो। कमर में अंक पलग जिण मापं मूमल थारद रा कपडा परियां गूती है। कमरे रे बारण आदमी रा जूना पडिया है। काकनय री कळकळ री अवाज आय रंयी है । वमर मे दिलं रो मद-मद परगारा है । मूमल रै मूढ माय गरी चिता-रेखाना है । आखिया मे नीद पुटण लाग रयी है । मत नीद मे मूती है। भूपल उण रे कनं बैठी है। बैठी-चंठी नोंक आ । दूजी तरफ अकादमी री पर-नाप मेही रे पगोपिया यां ज्यों थाय यो है । अचाणघा वा अनाज रो। कोई चीज घरी ज्यो अवाजपेस गोपियां मू नीचं उत्तर री पात्र मात्र । दूर-दूर करणी री अवाज मात्र । अचाचा मूमल जागं और रोमै मे राम पालन देयं । गरो निमासो वा पेस क्रोप म भरने बारणे पानी जानीची निजाकरता मिनखा रीतीन पगलिया बानी ध्यान जावं । मूमल तीन पूतिया मेपनं पाधी बमरं मे मा और जोर-जोर सूहेला पाई। मूमल-मन । मूमल ! देखने, महेंः राणोसा नं पापिया कोपन दंग में देख ले पदमा री पारी मे रह ग मोर। माम मारी ही पण और नहीं मानी । न मूमन fण ने 3 देन, निरी सो मायं ओ पतगो बह पोहै। र रापोगरी पारिया पण हण पगलिया ने देवहीनी आप पपरमी उनीzा मा माथं पर पाछा मुराण उप में मना + लिने मोई ? मूमन ममन मन' सुमन-हर में सरनं मर जा)लना! आमा । मोहरामोशी सारसी रोमा

६४|
[ मूमल री आंसियां सू आसूड़ा पड़े है । नस नीची है। अंक हाय
महेंद्र राणं री अक जूती माय है, दूजो धरती माथै टिकियोड़ो है । मूल
माय गरी चितारी रेषा और पसीनो है। होळं-होळं गरदन उठान।]
मूमल-सूमल ! देखले राणा र पगां री ओक छाप । वे आया वारण ताई और
मायनं पाछा मुड़ग्या । हिजड़े री वाता हिनई मे रेयगी। ना की
कैय सकिया, ना हई । मन याद है उणा रा पण हा-चौथो कोई
मानप्री म्हारी बात नहीं सुण सके ! थार छोट-मं हठ म्हार जुगां री
प्रीत तोड़ दी। सूमल ! तू म्हारी बैन नही
समल-(भरियोड़े कंठा लूं) साच बाई-सा ! बन नही, वरण वणी वाई-सा !
वरण (सहसा बेहोश हुए जा)
मूमल-(जोर-जोर सू हेला मारे) सूमरा । सूमल । सूमल
(नेपथ्य मे विरह-गीत री पुन उठ)
[पड़दो पड़े है।]

अक नयो मठ
मनोहर शर्मा-
[ चाय-होटल मे समीक्षकजी बंठा चाय उडीक है और कविवर आ'र उणारे
बने बैठे है।]
समो०-कविवर । आज ढीला-ढाना किया दोखो हो।
वि०-चाई बताता ? आज कोई कविता कोनी सूक्षी । और तूं जाणं ही है के
कविता रं पाण हो तो म्हाग चाय-कलेवा चाल है। ( उवासी सेवं है)
समो०-इसी काई बात है ' आपणो आज री बातचीत हो किणी ससारी मासिक
₹ सपादक ने लिख भेजो । पारिथमिक स्यार है । ( मुटके है )
पपिक-अर जे इण रचना ने मपादकडो रही री टोकरी मे फंदे सो'
समी०-(जोश मे आ'र) पर उप सपादक रो मिजाज म्हार सेष में पूप से ।
म्हारं हाय में भी तो कलम है।
राषि-जद तो खेल पण मकं है । ( मुळकं है)
समी०-सो आयो, आज पाय म्हारी तरफ सू पीप्रो । और पारियमित माया पर्य
अर्घम-अर्या।
कवि-मन मजूर है । ( मुळक है)
समी०-हाथ मिलाया हाप धुपे है । प्राग रचना रोती देवी, रचरा र मार हिलो
जोर है, बा चीर देखोज है।
दि-जद तो साहित्य-ससार भी पूरो राजनीति रो अस्वासो बणग्यो समतों ।
समो.-चोरो राजनीति रो बसारो ही नहीं, बो अर्थनीति गे मार भी है। बा
पटानी गीली तो पारिश्रमिक मत रहीशरोजिी धारण' में
जा'र सबद पाणी गाया परो । उटपुन और बाप दो मिनपी।
वि-पण म्हारे गढ़ में होपावरा मुर है।
समी.-हानिरा मुरतो धोखा पर गडी भी सीमो का ही मुर निर। मरे
पार ना तिरा मुर निजामा पनि रा।

। कवि-खर, इण विषय माय पर्छ वात करमां। पली चाय मंगना । (उबासी क्षेत्र है) समो०-कोरी चाय ही क्यों, सार्ग भुजिया भी लो। पण जबान पर कायम रेया । हाथ में पईसा आया जबान नै मत भूल जाया । आप रो भूलणो सभान है । कपि-तो साग क्षोड़ो मीठो भी भगवा ले । आदमी मीठो खायोड़ो कोनी भूल । ( मुळक है) समो०- मीठो तो कविवर ! म्हारी जीभ है। जिसा आप कति, जिसा हो म्हे समीक्षक । बाप 'काफी हाउस रा कति' हो तो म्हे 'चाय-होटळ रा समीक्षा' हो । आव माई हरसा ! आपां दोन सरखा । कवि-तू काणो हूं सोडी, राम मिलायी जोड़ी। ( मुळके है ) समो०-आयगी ना बासर गाडी लंण पर ! कवि०-(गभीरता सूं) के वेरो गाडी लंण पर आयगी के लंण सूं उतरगी । म्हे तो आज पारी चाप पीया पर्यई कविता करणी घोडा हो । रामी०-हूँ जाणू हूं-आप पेली भी इणी-ज भांत कई धार करिता करणी घोड पुक्या हो । ( मुळा है) रवि०-पण फेर भी सकोच तो मन मे जरूर पंदा हुतो र है। समो०-गाधी बात है । थापा देशां हां के पत्र-पत्रिकामा मासर रही मे विक है। पण प्रो घमानो ही सकोप रो है । अणु-युग में गगळी पीओ छोटी हुती जा है। गाहिय-गमार पे दी देगो-कविता गोप गार गुद मिनी कविता' हरगी। वि.-पनी-तारीतो कोई बात ही गोनी, या 'प्रापिता' हपगी। पारमी समी भी मममीणगी। समो.र! पोहाटेरो। 'विष' मा अप्रिय'मी मर 'प्रसागित' में मोग wifeमी ( मुट) efr.-(0) मी पोर तो सान पोनीना गई। पर नो मन रिमोहोपामी। मो.- रोहोमोमगार गा मानो पारपी। Truttr पार माय बार भी पार।। 6. Arrafar भोग arr. DR: पाप iframmaritainmti rtertair) १.xxximridri FEATrrrrrrrrrritt... ।

. समो०- पण आज ताई आप रो कोई करामात तो नजर आयो कोनी ; मा कवि- सम्मेलनां मे ही वाहवाही मिली भरमा पत्र-पत्रिकावां मे ही समान सार्थ छाया। कवि-जदई तो कद-कदै साहित्य-ससार न छोडण री तरंग मन में उठे है । समो०-ओ पलायनवाद है । क्रांति कवि न पलायनवाद शोभा कोनी दे । कवि-तो पर्छ करा काई ? साहित्य-ससार मे जमा किण उपाय सू समो०-उपेक्षित साहित्यकारा रो सगठण वणावो और मठाधीशा रो विरोध करो। कवित--राम भजो । साहित्यकार तो अक-न-अंक देख र बळं है। इण बळोटियां रो भी कदं सगठण हुप सक है । बसभन्न । समो०-तो पर्छ म्हारो कवणो मानो-आज मू आपा भी अक नये मठ री थापना करो और चेला मूडा । आप गादी पर विराजो अर प्रचार विभाग सभाळू। देर-सबेर आपण मठ ने भी प्रतिष्ठा मिलसी, आपणी भी पूजा शरू हुसी । कवि०-म्हारो तरफ सूं तन पूरो अधिकार है । तू कहसी जियाई करसो । समो०-तो मिलानो हाथ । आज सू ही अक नये मठ री परपना हयगी समझो। ( हाथ मिलानं है ) हार को मानू नी! -रामेश्वरदयाल श्रीमाली- । (३) भो तो को के सनी के मास्टर छोरा नै रितरो भगा सके, पण ओ नहचे यह गफ हूं के कोई-कोई छोरो इतरो सिसास के जिंदगी बदळीज जान । अंडो होज अक छोरो। नात हरिभजन । राज री स्कूल री छठी किताब में भणी । पीपरा जड़ा पूर-पूर हुयोटा कपड़ा। जट वधियोड़ी। मैं उण नै कदई हसतो को देखियो नो पण उण रा सिरसा साईना सता-पको कुचमादी, पषको हंसोड़। देखत में तो मूढ मायं सदाई बारं वजियोडी रेती, पण कमजोर कोनी हो । हणमानजी जैडो-हाडकी वधियोड़ो मूढो, अक पग सूं खोडो, जात रो ब्राह्मण । चैत भरिया रो हो जद बाप भगवान ने वालो हुग्यो । विखं सू दूवळी मा पाणी-पीसणो कर धणो दोरो दोनूं वेळा रो टुकडो जोई, टक टाळे । हरिभजन म्हार कोळे रो पाडोसी । अकर मैं सुगियो, मा-बेट मे राड चाल । मा बापड़ी अणवस सूं रोनती जा और रीस-खारी बकती जाने-म्हार आखी ऊमर मजूरी करण रो ठेको कोनी, बामण र बेटे ने मामण रो किसो मणो लागे ? भला. भला लखपति हो माग, हाथी रे होद चढिया ही हाथ पमार, हाय मे ब्रह्माजी रो दियोडो सोने रो सप्पर, मागण में किण री लाज? हरिभजन रो योदड़ो चढियोडो । खार खायो आखिया सू मा न देखें । जाणे आखियां-ई-आखियां में कातो हुने- -मागण मरण समान है। जिदगाणी किताब रो भणेतर कोनी, उण सू की वेसी है-इण तत्त्वज्ञान रा जागणहार 'घर ढूं' बोलिया-डोकरी वापडी भल ने रोन, जाग्यां न कोई जमीन, है जिको धन जिजमान-विरत रो होज है; अठीने आ मैंगाई में बठीनं आ स्कूला री ६८

पाळना-सा भगाई ! आज किताव लानो, बाज कापी लातो; आर आ फीस भरो
काल वा फोम भरो!
वात म्हारे ही हियं बटो । होकरी वापडो साची रोव। पण हूँ
हूँ हरिभजनम
नं मागरी सीप किया देऊ?
ओ देव मन म्हारो हो टावरसणी याद आयो। यादगीला वादळी रोप्रीमो
परदी; दरद-भीनं गीत री टाळ | विषो, जिदगाणी ने मरी मत्रि, मिनगरी मोर
अविण री बसणी; लागियो, जाणं जिंदगानी जुट है, हरिभजन मिपाई है-मार
रणरी मदद करगू.
पोई पाच-पन दिना पाई तणा मिली । मतो वियोनि कोम भारत
हरिभजन गै माग में महारोही पायापारी-
भरदी?
भर दी, गा|-उण तालियो।
मनं अचभो यो । यो चानो ~i..
भणादण मागो।
भणाant-मणाना हो......
एस्तो माग पदार) Enो ............
पोधियो नी ।।
घागरमा माया ...irani.
मी बायो । अनावशाm+wn ritir..
THI - प.itri...
mtazो- माt rrr. ...
मागियो । एपम यो पोm thri,rti..
cिket:... .i
माल.tattr.rat
..
A
.
.mt.:'ti.

७.1 (४) वार-री-बात में कर उणा फेर मनं यो- गुणियो जी थे ? ओ हरिभजन तो वडो उस्ताद निकळियो। उस्ताद ?-मैं प्रश्नचिह्न ज्यू उण गामो देखियो । 'हां ! छोर विरत रो काम सरू नी कीपो जिको नहील कोयो।' इण ने कोई मा री दया माया थोड़ी-ज है-मैं चौथ मे ही कयो-डोकरी रा पईसा नी हुने जठसू बिल्ल मिळा। 'नही मा ! ओ आप कोई फरमायो ? छोरी तो माने जोर सारो दें।' सारो ! -- म्हारं बात समझ में नी आयो, हूं वगनो हुदै ज्यों उणां गाम देखतो रयो । 'और पर्छ कांई ? छोरो लाई आपाळो निकळियो। मा घणो कंत्रणो सरू करियो जणे घोर भरी करणी चालू कर दी। मजूरी ! मन ओज् अचभी हुयो-पण यो ती सोड़ो है। टोट भरियो छोरो, में खौड़ी न्यारो; यो काई मजूरी करतो हुला' 'अरे सा बो तो अड़ो दीड-दौड़ ने काम कर के अचभी हील आनं। मूड़ करण मे अंडो हसियार के भल-भल चौधरी ने ही लार राख । सवार गांल घेतर आनं ने दोपार रा स्कूल - म्हार साम हरिभजन रो रो दोडण लाग्यो-फीस, किताया, वर्दी । उण री वाटका जड़ो आपियां, और आंगिया मे चमकता डोळा जाणं मनै केनता हुने-आप मन दान देखणो पात्रता हा नी ? पण हूँ को हारू नों; कोनी लू दान-मागण भरण समान है येक कपूर री गांठ बाण म्हारे मापं पड़ी। अंतस मे घणो रंग हृयो । उण निदोर टापर ताणी कोई-कोई होणो वाला विचारी। दिन, जब ह स्कूल गयो, मनत म मातरो पड़ियोड़ो हरिभजन मनै म्हार सू ही कंचो नितर आयो।

च्यार 'मिनी'बातां १. पुरातत्व री सोच रिम रिलीरवी निर्माताजीननं बंटरनलीमापा ममाचार्ग" -ओम अरोड़ा- सद १९७२ मे पुरातत्त्व-दिमागमाळा येक गुदाई गरी योर पावन बैंक हज़ार वरम पुराणी (कई विद्वाना र विचार में मात हजार वग्म पुरानी ) बैंक नगर सभ्यता सोदर काही । पुरातत्व-विकारदार माम और तो में वार्ता पार में आयगो पण बेक दात रोटा नहीं लायो-इश नगर-मन्यता २ नट हुन २ कारण री लाघ नहीं मिली। ना तो किमी ममदररंपार छौडन ग निमान माया अर ना कोई परमाणु बम फूटप रा; ना घरती हाल'र दराह मावा रो मुवी हो और नातूरान रोमनियामेट रो। यत मे येक विद्यान, डिको उगा मगदी में मिरंकार हो, कियाई भिर मान. परास्त आ पुरी पोर हो नागी । म दिशान री नई-नई भनीना मूप में यायोड़ी हारपारी परीक्षा परी पर श्री तुमार पाइयों के टमा मिनपा से मौत गल ग नही मोद्रण म यो हो । उण व परी या शोष चानू रामी बोर घोड़ा ही दिना में हजारी-न-हमारा लारस्पीकरा रा दादा-दीना मौदरबाट नाश्या । सगळा र साम सम्पदा र नष्ट हुनप रो कारण माफ हुग्यो । २. पुरस्कार फिलम मागिय टाप व रो सिम वायी । उग यार घर पर तमामो देपो रिहो तो देव्यों हो पण दार फाइनेंमर रो घर पर उप में भी नमासो दिमाय दियो । नीन हीरो योर यहाई हिगोदना (श्रेक हो पाटरी टोटी हो) मी उणा राम भरिया । बटरमनी-गटरमी " गीत टोक्यो । हामी रमा आरोहोत ही। माउ पहाटी प्राग मानगिया रे पान अपर्णमा पर पुगेर र पाच देश में मातम मूटिग की। टाहो दिमुद्रास भयो र स्लिम रिलीज हुदा ही दरको माघ बागी । में हीरोन ना ही योग स्वामी या नाटी यो मान देकर rienी दवाई?

७२1 डागदर री तीन घंटा री योगीग गुफळ हुयो । निर्माता ने की होश आयो । परताळी रोती-कळपती यूशियो-फिण रो फोन हो? काई अणूती हुगी हो ? की तो यतायो। निर्माता कियाई आस्यो टिमटिमा'र ड्वता-सा इतरा ही बोल्या-म्हारी फिलम नं राष्ट्रपति-पुरमगार दिरीजग्यो । आ कहर ब फेर वेहोश हग्या । ३. प्रसिद्ध लेखक सपादक मेक मानीजतं लेखक ने गिड़गिड़ा'र कागद लिख्यो-पत्रिका रो विशेषांक फाढण रो विचार है अंक गे सफलता सारू आप री अक रचना हुवणी जरूरी है, नहीं तो विशेषाक ने कोई रद्दी र भाव भी नहीं पूछला, सो आप कोई दो हजार शब्दा री कोई रचना भेजण री किरपा करोला। लेखक मानीजतो की ज्यादा ही हो । उण सपादक र कागद ने फाडर रद्दी री टोकरी मे नाख दियो। कई दिना रै आंतर सूं लेखक ने उणी कागद री कारवन कापी मिली। लेखक उण साथै भी ये ही कारवन-वरताव करियो । छेकड़ लेखक ने अक दिन अक तार मिल्यो । लिख्यो हो-मैं विशेषांक में आप री रचना री घोषणा कर चुक्यो हूं; जे थांरी रचना नहीं मिली तो पाठक मन जीमतो नही छोडैला; सो पाप लौटती डाक सू घणी नही तो अंक हजार शब्दां री रचना तो बिलजरूर ही भिजवावोला; आप रो गुण हू जिंदगाणी भर नहीं भूलूला। लेखक संपादक र इण चिपकूपणं सूं तंग आयग्यो हो । उण खीजां मरत डिक्शनरी उठायी और उण माय सू लगोलग अंक हजार शब्द टाइप कर'र सपादक ₹ नांव भेज दिया। रचना घणं मान सू स्वीकार हुयी। छपी। और उण री प्रशसा में पाठका रा अंक हजार पत्र सपादक न मिल्या । ४, येनांव अंक पत्रिका रं सपादक री गोगन खायोड़ी ही के बो फकत मानीजता लेखकाने ही छापसी । सपादक ने अक नूनं लेखक अक फूठरी-सी रचना भेजी। सपादक पढ'र तो निहाल हुग्यो पण कर काई ? लेखक जायक नूयो। उठीनं देखें तो रचना भी वा येक ही वद के कांड कंत्रण री वात ? संपादक र धर्मसंकट हुपायो। ईन-ऊन मगज- पच्ची कर'र उण विना लाठी टूटयां साप मारण रो मारग कार ही लियो। संपादक वा रचना लेखक रो नाव दिया विना ही चार नामी। रचना है नीर दो ओळयां दी-जे किणी पाठक ने लेगक रो नांव जाणणो हु सो मपाल टिकटा लामोडो, पतो-ठिकाणो मायोड़ो, लिफो भेजर जाण सके। लेसक रो नाव बापण वगां मादक पनं फात अप निशाको पूग्यो। fफो उन लेबर रोहोर हो जिरीमा रचना ही। - सोनलदे सोढी --पन्नालाल शर्मा 'पन्नल'- मुगला रा मतर ढीला पडग्या हा । अगरेज भी हाल पूरी तर सू भारत माथ श्री नी हया हा। पारमेर जिलं रो मीयाणी गात । वासोटी वेळा । गांव रा कईक मिनस ऊप में रहाटा करै, पईक जागे । बारं गवाड़ मे पडिया डोकरिया सासी सू वापा भरता ।। ढोरा रं वाडा मे हळचळ हुप री हो । गाया रे दूध रो धमको पड़तो हो। परी परटियां रा पम्माट हुन । अचाणचा गळिया मे दौड-भाग । ऊप मे मूतोडा टावरिया नै लेय सं मा-बाप, करा-रोकरी माप-आप री मुआड भागर कानी भाजे हा । गार्या रो दूप, परटी रो गटो, वाडे रा जीन रा जहा ढोर और परां री पूटिया में दगियोड़ा हारता से उटै- ज पहिया हा। गांव मे जाणं घाटो परग्यो । घोटा-मोटा मिनग पर मुगायो, साना मादा, बस रोवता-विलसता टावरिया ने ताणता भागर में वह रंया हा । पोई-गोई पूर्व हा-अरे । या वियो नामी होकाई भीड पही' पण जबाव पुणवं? आप-आप रोजीत पचासण सारू सपना भान ।। तोहार बदूरी रा टंगा पहा । मारो, माल मो, भाषच मत दो बेलिया ! दम. थीग सराई गावर पाणी पानी सू मात्र में पाया । बापू, मुटारा, मिनखमार, पार रातार सीमा सराईपरा में रोटीवियोहा मिनत पूरा एक मुकुन? पास में मिनय पर हा । लुगापा बाप री मार परापन देर में रासही पा, पण मार्ग पुष डावण हाय राम हायर ! मुटेरा रोपियो मलान (मस्लो) भनी रण होय रस हिरो मुटी और मारो। रीमा यस्तो रोमागि, । ७४॥ पष्टिगो हो । उ री पोर पोर पणी पटरी गुगाई गौना, वा सोने री पूनळी! रसपूलाणी पनी कोरिया दाद मावसी ? दरपा मा नागी तरवार मेयनं 'गस' यूं भी हो। मस्मो सोनार र रपरी यारा नापता हो गयर सागी-सोनस पर है। मल्ल रा परता विपरग्या । सीपी मोगरा रंग पूयो। देगे तो पलो येमारी धियोड़ो टोलिय गाणं सूती है । कोमसांगी सोनल फमळ जं. हापां में तरबार काठी तासिया कभी है। योनंग पास । सुगाई पग रजपूतापी । मल्लो आ वात जाग हो। मस्लो मागं वयतो हो और सोनस सावधान कभी ही, निधडक । कवळ काळरी सोनल और काठ दिल रो मल्लो । कदी बरोबरी ? सोनल ने देराता ही महतो ढीलो पटग्यो । योलियोसोनल ! सुगन शुभ होता माज मग माहे, तोरं कारण आयो सुंदरी ! तू म्हारी मान सं। सोनल तो जाणं मू मे मूग पालिया हुने । हिरण जड़ी आसियां पर पापणी जड़ो तेज । बोल न चाल । मल्लो और नेहो आयो । सोनल में पानी देष कल्लं ने मारण सारू कमर मे बड़ण नेपग उठायो । जितेक तो जाणं वीजळी पळको कर जियां सोनल री तरखार चमकी। पळ मे परळ जिसी लाय लपकती वीसी । मल्लो धणी मीठी-मीठी वात करें- सोनल ! तूं म्हारं सार्थ चाल, रोगल ने छोड दे । घणा लालच दिया । पण रजपूताणी नी डिगी । सिंघणी स्याळां लारै कद चाली? मल्लो हिम्मत करने माय बड़ण लागो जितेक तो सोनल री तरवार रो बार हुयो । रीठ उडी । अबळा कोमळ नारी और दुष्ट भारी रो मुकाबलो। तरतारा रा तटका चार्ज । दोनू अक दूजे नै दबानणो चा। खडके सू कल्लं रो आस खुलो-लुगाई मदं सू जबरी मुकाबलो कर रयी है । राजपूत ने जोश आयो । सिराणे हाथ पडियो । तरबार हाथ मे आयी। येमारी करें हो परी गयो । लुगाई लई अर वीर पड़, अंडा तो पापी रामजी । मत पड़े। छानो- मानो कल्लो रण-भीम मे पूगो । मल्ल दौठो, सोनल दीठो पण सोनल लडती जावं और विचार-जे म्हार धणी इण असुर नै मारियो तो म्हारो मैनत फजूल जासी । धणी ताना देसी मनं रोज । मल्लो कल्लं सामं लपकियो जितेक तो सोनल रो अंक सांगोपाग हाथ मल्ल री गरदन मार्थ पड़ियो अर माथो कल्ले रे पगा मे । कल्लो पणो राजी हुयो । बहादर वीर 'सगत' सोनल रो धणी वडाई करी पण सोनल तो नोची धुण करनं इतरो ज कैयो के यो संग आप रो परताप है ; आप नी आमता तो .... खतरो मिटण रो ढोल वाज्यो। मिनस भासरा सू पाछा परा मे आया । धन है सीमाई री 'सगत' सोनल !

- पाट कुण उतारसी? -मनुज राजस्थानी- (१) नो-कूटी मारवाड र माय नागौर रो इलाको, जठे अमरसिंह राठौड हुया जिका री वीरता रा गीत अजे गाव-गांव मे गायी। नागौर सू पनर-वीस कोम दूर मेक गाव; नाव तरणाऊ। इण गांव में देखणियां ने दिन माय ही हर लागे । कडे साडे माय वसियोड़ी वस्ती । गान र च्यांरू मेर बायाँ मूवाच मिलायो कर ऊभा । तरणाकरं सारं क नाडी। चौमेर ऊची-ऊची पाळ । पाळ मार छोटो मिदर जिको अब कद-बाद ही सुलं । पचमुखी बालाजी महाराज विदा माय बेटा तप करें । पर्द-ई इण मिदर री सोभा, क्यू वार्ता करो ; सुणतो. मुणता नो थाको । जमानो पळट ग्यो, मिनसा नै पेट-लिवाडी सू ही फुरसत कोनी। पारती जद इण मारग सू गुजरता तो दरसण फरियां विना मागं नी बघता। धारो मारन आव्रता जद सात बदूषा री मिलामी देवता अर परसाद पदावता। कई बार फौजा र साग भिरत हुयो पण घाईतिया रोपनी विड़ियो । (२) अव धार तरणाऊ सू पनर-योम कटा रोटोटो मिश्या री वेळा परणारबर भारती हो । साम सू गायों रो पापो गाव पानी बाबतो हो। पायो विघर नी जाय रण पातर उटी रागद्वारा बता में धीमा परणं ताई राम संचमीमाया तुरी मूअण. मिणती रा गोधूळी रागोट उरता ।। पूरो मारम नियर नी भापतो हो। सारे १ सारं सार बळा रागाहो हो । उग में दरोर मुगाया बटीही। सिभिया र सारं में मार गिरकानती श्रेष जणी होली-तो अनीगड, टारिया परमाय-पाय दिया. माप-आप री खायो भरमोडी, सोनकरी रं मार माय माई हार भाई मागे रियो महो तो स्थान बनी जानी। उन सोही भाईरोनार मसारंटी सीरीण मागदी। माया-सारने मार्यो मासो मरिससरगमगर र ....... """"आखातीज न फेरा ....... ७६.! फांधे यंदू लटकायां ऊँटा रा सार धीमा-धीमा यत्र । उ माय । येक रोर्ण री समाज गुणीजी । टगपाड़ा जोर-जोर सू वोचल समार दाफल परी । रोगां आप-आपरवंतान पाम लिया। दोय जणा मद अंटी सूं हेट उतरिया पर पन यायन गाही ने गायी अर चोलिया-धार काई ददं है ? दोनूं जणियो बाफी-वाको हुगी-ही जठ-री-जठ रंगी-योती न चाली! उणां फेरू पीरज सूं पूधियो-योलो, यतानो पार काई दुस है ? जकी लुगाई रोब ही वा हिम्मत करने बोली-~म्हारं मंगली रो ध्यान"" है पनर दिनां पर्छ, म्हार कोई भाई नी है, म्हारी छोरी नै पार्ट कुण उतारसी ? उण रो मायरो कुण भरसी? या मामो नार लेयन किण में बतळासी? सवार बोलिया-बम आ ही वात है ! जा, आज सू नू म्हारी बैन और म्हे थारा भाई । तू चिंता ना कर । म्हे पार्ट उतारसां म्हारी भाणजी ने । पण इण वात रो वेरो किणी ने नी चाल, इण रो वचन दे । मंगली री मा बोली-~-म्हारे गरीबणी रे कुण आवं? काई ठा, थे कठे रा हो ? कोई जाण नी, पिछाण नी दोनू जणां उण ने धीरज बधायन कौल करियो और बोलिया-तूं म्हाने अबार ही टीक दे । मंगली री मा कने रोळी कठे हो? फेर सोचने उणारी कटार लेयनै अगूठो वादियो अर टीक दिया। दोनू सहारा रा नेण भर आया। सोनकी री मा रा काता चिपग्या। असमारा ऊंटो ने जंकायने अट रास खेची, अडी मारी, और ऊंट सरणार हुग्या, पून री चाल, अर घणा आग नीसरग्या । मंगली री मा आमूड़ा पूछिया भर वळपां ने टोरिया । तरणाऊ आयग्यो । सोनकी रीमा सू कोल करायो-तूं आ वात कई नै ना कयी, तूं म्हारी परम री बैन गांव आयो । मंगली रीमा हरसीहरखी जायने मगली रा लाड करिया । आज कोई बात है मा ! इती राजी यूं कर हुय रयो है~~-मगली बोली। बस वैटी ! म्हार हिनई रो बोझ उतरग्यो ..... - - । माप-तौज रे पांच दिना पली मगली रा हायपान लिरीज्या । रोजीना मगली रे पोटी हुने ! छोरी रो रंग ऊघडग्यो । आयातीज रो दिन आयो । जान आयो । तनहत- सूप-तूम नू तू तू "" तुरही वाजी । वागले वेट मा वोद रामा सारं सारं जानेती। ओटोई मापन वयाई दी । गोधूलो रा फैरा हा । नापण बनड़ी ने न्हवा-धमायन पाट कमायो । जताई मापरी लेयनं कोई नी आयो। लोगा में पाना हमण सागी- पाटे दुण उतारसी ? मगली री मा भगवान ने पराएकरी-गोरिया ! म्हार कोल ... नमो गं मागूहा दर। मुंपर में हाप जोहिमा दी। सुगामां आरमरो में पान-धान वा परी~मा मापन पर येटी दार रो सग्या तूं रागो ढोला रा ढमका । अगूणी काकड गूजी । बंदूको रा पड़का गुणीज्या । मगली री मा चेतो परियो अर उठन बार आयो । यावळी-सी पारणं सू नीसरी । वागळ मे कटां पर बळां-गाडिया री भीड-गाहियां सामानां सूं भरियोड़ी। लोग आका-याका रंग्या । मेक-दूज कानो सांक, बोल नी नौसर, मूंढ पाटी बघगी । इतरो सामान तो राजा-रजवाडा ही नौं दे सके । पेटियां माय तारा-फूल-सलम-सितारा सू जडियोडा बोढणा पर लूगडां रा देस पळपळाट कर । मंगली रा मा ताई तारां रै जाळ री घूनही । इमा गाभा तो उण आप री जिदगानी मांय ना परिया ना देखिया। चौखळ माय चरचा हुव्रण लागी। गाव माय छोर्ट सू मोट ताई आयनै मायरो देखियो । घूघट माय सू लुगाया झांक नै वातां कर होगळू र पागां री साट, ऊचा-ऊवा टोवणा-धुद्वारा-कांसी रा वरतण, पीतळ रा न्यारा ........ पाळ मे वाटकै माय अक हजार रपिया चांदी रा; सगां ने मिलणी रा न्यारा; पीळा पेचा अर पाच-पाच रुपिया जानेतिया ताई। लुगाया वयात्रा गाया। इत्त मे दस-पनर मदन कटा रा सवार आया । दोय जणां आयनं मगली ने पार्ट उतारी। मगली री मा नै चूनडी ओढायी। गोरा, गोळ चाद-सै मूढो मार्य यावी मूछा। पूनही रा फेटा बाधिया पका । दोनू मामा सूरज-चाद- सा थागण मे कभा । लुगायां घूघट सू झाकै अर मन-ही-मन मराग्ने । मगली री मा गुड़ सू मूढो मोटो करायो । दोनू माया बैन र माय हाय फेरियो । मगली री मा रो हियो भरीज आयो । नणा सू आमूडा टळकण लागा। भाया ने टीको करने सोख दी। दोनू सदार साथिया सा विदा हया । अटो रा पंकडा खणकिया। नेवरिया वाजी । धूंधी- घूधी अवाज पणी दाळ ताई मुणीजती रयो । घर पगली र मायेरं री घात प्यारू बूट में फैलगी। पूटरा, माथै रो मोल -गोपाल 'राजस्थानी पुलिस नै हरेक धानियो भगानियो भला-मुंडा सबद कययो कर, मनचाया हळका और थोछा सबद वापर, कळक और काळस रो टोको काढता धाप ही कोनी, मनघड़त किस्सा और असली वारदातों में चात्र जड़ो तानो-बानो वुणणो आम बात है । वात-बात मे लालफीताशाही और पुलिस री ज्यादतिया रो कच्चो चिट्ठो सोलियो जाने चाय उण में कोई तुक हुनो मत हुयो । जनता र साम तो पुलिस री काळी तसबीर ही पेस करीजियोडी हु जिकी ने चिलकावणी हरेक र वस री बात कोनी । जुलम हुई है, करायीज है, पर अणजाण में भी हुय जान है, आ वात न्यारी है पण दोपारोपण हर वखत बापड़ी पुलिस र मायं करीज है। (२) कड़ाके री सरद रात, सू-सू करती सोतळ हवा काळजो चोर, लोग-बाग आप- आप रा घरों में ज्ञाय लुकिया है, मूढो ही बार काढण री हिम्मत नही हुने । घातिया सूं हारियोई इण इलाके रो मेक थाणो; पुलिस रा फास्टेवल पोरो दे रया हा, केईक सीया मरता गूदड़ा रो सरण जा चूका हा; पण इस्पैक्टर राज मेहरा और सहायक पटवर्धन किणी अळूशियोई मामल री तफतीस री योजना वणाय रया हा । इत्त में ही पड़ी साढी इग्यारे रो ठोको दियो। मिस्टर मेहरा री मीट पड़ी पर पूगी और अवै दोन याप-आप र यमगं कानी जामणो पाहा। इते में ही पाण र वार और ग्रंक री चीस मुणीजी और वे दोन जणा सानचेत हुपर चौका पापा । यार भीत रो दिया में दो यादमाद मूरतियां निग आयो; दो लावा, तगडा, मुस्ट, तमलो मारियोग,हा-वहा उणां पन आया, दुआ-गलाम परी थोर फेर देकन गुलाबी रंग रा दो मनीयंग इवान पाणदार र हाप में पलाया और मुळकत कमलाम करियो ! यर जोड़ो दौनियो~ममाळी पाप रो भेट-पूरा पाणाजी | ७६ मिनपदीठ पचास-पचास हजार रा नोट; म्हे यामू थोडी मदत लेक्षण अठं हाजर हुया हा, म्हारो मकसद है मदलो, आपणी आवरू रो; म्हे दोन भाई हा शैग अर जमीन; म्हे म्हारं काक र बेटे र सोही रा तिरस्या हा, उण ने मारणो चावा, यानी खून ! तफतीम तो पे ही करोला, कारण के ओ पारो ही इलाको है पण हे लोग इण मामल मे साफ वचनो चापा, इस कारण म्हां सोचियो के हालो, आप ने पला ही मवर दे देवा, अयं म्हारी विगत सुण लो- रुपिया घे रासो। इत्ता रुपिया तो घार ताजिदगी नहीं गूटना और ये इण तणसारे भरोसे इत्ती रकम तो जीवण में भी भेळी नो कर सकोला । म्हारी अरज आ है, कान खोल'र सुण लो। काल दिन रा ठीक बार वजिया म्हे उण चकोआळं सुरेंदरसिंघ सू राड कराला; बो रपट देवण ने यां कने आवला होज और ये तफतीस करो ही, म्हांन दोषी अथवा जुलमी रायन हथकडी पालन संर री आम सडक सू म्हारो जुलम दरसालता पाळा-पाळा ही ले जायीजो और पंदमान में बंद कर दीजो, सर रा स्यातीणा पैठदार मिनस भी जे जमानत देवण आवं तो भी जमानत मत लोजो, अळमा-मळसा टाळमटोळ करता रयीजो, मजिस्ट्रेट अ है कोनी, दो-तीन दिन धुळाय दीजो और काल रात रा म्हाने याम पूरो करण सार फगत आघ घट र सातर छोड दीजो, म्हे उण ने मारने आपोआप ईमानदारी सूं भाप री हाजरी मे हाजर हुय जावाला, थारं-म्हारे विच्चे राम-धरम है; आगे जिमी हुवला. देखी आदला, रजो मतो, धवरावण री जरूरत कोनी; की योनी चला, इती पटो रकम सिरफ अपघट री मौलत वातर दे रंया हा, बोलो मजूर है ? जे मही तो पो दोना रो भी परवार भमेत सातमो कर दियो जाप्रेला, पापणं टावरी भेटी जे जीवण वितावणो शादो तो म्हारो बलाण गुण लो और म्हार के मुजव पालो। । दोन ही इम्पेकटरा रे पगा हेट सू जमी धराण लागी । मीपारी त में भी पसीनो भाययों और दोन-ही गूगा वणग्या, सास पृनगी और अप-पूर्व कानी जोरता रंपाया । इन दो तो उन पाई। हत्या करण म मिडीभगतार में तो यहारण सरी, गिर पर दून से, और गुम्दो च गुलशो सो बदनामी भट पारी, बारा, मोरग म छथी और अणदीटी कानूनी पेचीदगिया मे उरणो पर। मेर ! अबोनों रंशी बोसो, भलाई हसार रोलराम यो। दोन पलार व स बोर हाया । पन सारं पाभार्ग राग एल हा नियोनी र पिया। पटना उमा रं मगर में धानावर निमामलों रंगी। निबारबारमासमोरगे in foolमोहीम काम । पुलिस रोसोमार्य में सियो धौर नगीनगार उपोरं परो गा। दोनू जगा यहिमा मौर पररियां गात दो यौर गिरं बार र म उमा पाला दो पुमिगनरेगन रोमाया । गहर में माता री बजार गरम हुग्यो । सहर बिरा हो गुगदिया जमानत रामायणानिग तो उगा ने घोडिया हो कोनी । दिन गर होनू भाई वेळ में मंटारमा और रात तयार मुजर यागंदार उणानं आपपर्ट या पोया मापा मारोत गया और फरमी सेयने र पान पडिया पगा पास याप मी ज पा रा निगाग नी वर्ण और भापणे सागो कार पेट भाईरो तल फर दिपो और पापा जायन वेळ में बनाया। इदरीरा नहरमाळे गेत मे अकलो ही सोवतो । रात भर तो किणी न ही ठा कोनो लागियो इस कारण कोई कोगी बोलियो । ससार राजद उप रा सुगाई-टावर रोत गया तो इदरीस री लारा रा माता-काता करियोहा, विसरियोड़ा देसिया । संग जणा धूकण किया। सगळं इलाके मे हाको सो फूट पड़ियो । पुलिस में रपट करीजो। तपतीम हुयो पण मांस-मात्र री । जनता में अणूतो भो लग्यो। कई जणा मूं पूछताछ करीजी, सूर्य मे घर-पकड हुयी पण कठेई सुराक कोनो लागी जण राज-सरकार जनता रो जी जमावण ने ओ मामलो सी० बी० आई० ने सूप दियो । मजिस्ट्रेट र आवां पर चौथे दिन शेख-अमीन री जमानतां हुगी। पुलिस-विभाग और सी० पी० आई० अकास-पताळ भेक कर दीना, पण हा कोनी पड़ी । कतल करणिय इत्ती हुसियारी वरती के लार कोई सक-सूबो अपना प्रमाण कोनी रंक्षण दियो। अब सी० बी० आई० री गुप्त जांघ चाली । सी० बी० आई० रा सीनियर अस० पो. मिस्टर अग्निहोत्री इण नतीजे पर पूगिया के असली हत्यारा तो शेख-अमीन ही है, इण मामले में पुलिग रा पजा भी भेळा है, पण सबूत विना किणी ने ही दोपी अपना जुलमी ठरावणो उणा र वस रो रोग कोनी । इण कारण , जुलम करणिया ने सगा करावण में कामयाब कोनी हुया।

: दिनचर्या -भंवरलाल सुथार 'भ्रमर'- (१) पसवाडो बदळता-ददळता उथपग्यो जण उण हाथ लावा करने पडधां-पढ़यां ही जोर सू आळस मोडघोऔर उण र मूदै सू निकळग्यो-हाय राम । फेर सोच्यो, अबै तो उठणो हीज पडसी ; सात वणआळी है, अब जे नी उठ्यो तो अवार जी-गा री हेलो मुणीजमी-अरे । टमगर उटीज वळोज कोनी ? धोळ दुपार ताई पड़यो र है, लाट मार । यौर दो भचक म उठ'र विद्यावणे मार्थ बैठो हुयग्यो । पोडो'व मोच्यो, लिलाड मे मळ पढग्या । फेर उठ'र सीधी लोटो भर'र होळंगीक निमटण नै टुरग्यो । यारण मू बारे निरळण लाग्यो'र का मा रो हेलो गुणोग्यो- अरे ! चाय तो पी'र जा, में पारो वाई विगारपो है जिको तू आजकाल में मू ही परोपरडी रवण लागग्यो । हेलो मुण र दो टरयो । र पोहो मुळक र बोल्यो- नही मासी कोई यात पोनी, पेट में पोटा मरोडा पाले है ण सातर पाय तो हूं पाहो थायर ही पीसू, तपेनी पीरा में घर , गरम ज्यो। निमटण जातो दो सगळे रस्न आप रो स्थिति मार्य मोचनी रंयो-बसी पाम पालणो दोरो है । तो पोती तरं उपपयो । पट-न-बटई नो नाम-पो जोधणोही परसी। जी- सान-चीन सुकी रपिया-गईमा रातो दुरान मोमर बंट जापू । दुसान री बात भावना ही हो पा मोरण में मस्त हुप शा* पुन किसी टीम रेसो । रटपीस री दुपरान हुई तो टोबरं नही. टपोम नाम मनियारी पान रोक रंगी । अथवा तेल-मूगरी पसारी गेदुरान सोर म्। एमओ मोदी तो बाणो मुरावल हीमो यो रण में पईसा दोन मार्ग । इना रिश होजीमा म सामी श्राप रे तो सग समस्तो रोबोहोर टमी पाय , पानही मोपर बंद जाना । पर जी-को-ओन रोटाई मागे पण सार भगाया गुणदो' बो..पस करारी पोलोगी। बससी..लग पाय गमतीला मोरीऐटमारप पोस-गोर योनि में समय पाच-सरपर att परे। 4 * If री पोड़ो गुग से जीओ' ऊठा ले और पढण में मस्त हुय जा। उण में पता-पाना १२ फसग्यो । विजनिस आपा र वस री रोग कोनी । जी-सा ने कई जणा धकार र देख लियो । उणां तो हाथ झड़का दिया। जद आपां कनै पईसा ही कोनी तो क्यों वे फालतू इत्तो वातां सोचा । क बात तो हुय सके है के वंक सू आपा रुपिया उठा ला। बंक आजकाल काम-धंधे और बिजनिस सारू लोन देव है नी। पण लोग-बाग की है, वो ही हरेक ने को मिल नी । घर री प्रापटी हु जण मिले अथवा कोई चोली पोंचआळी सिफारस हुन मिल सके। कई लोग का है इण में भी घूसखोरी चान है । आपां कनै तो की चीज कोनी । और जे सिफारस ही हुई तो नौकरी ही हाथ आ जायनी। (२) निमट' र पायो आततो वो साधा-साया पग उठाने । सोच-जे मोडो हुयग्यो तो अवार जी-सा लहसी । कसी के जा जिको आगडो हाल जाने, कठेई जातो पायो टमार आ पा किसी पोल पडी है, कोई घंधी, कोरी वळप हुन ज्यो दिन भर ईन-यीने रळतो फिर । पानी पर आपरमोहाय मूढो घोर पाप पीर और थाप र कमरे में जा'र कोई उपन्यास हाथ में लेने । रोटी हमण ने उडीक : पोम्या फिरोळता-फिरोळता यो उपन्याग न तो ईनास और स्टेट माउँन री पोपी धित पोरी ताट प ध्यान आने के पेट मार्डन रोक और पोपी नी आपां बन । और यो पाली पोया इन-योनं करण माग जात कह उण न क दूगी पोथी साप ना~मलता को प्राप्त करें ?' उटायरमा माय आहो हुय'र पडण माग मात्र । हो गई वाता पो ज्योल्यापट यनिय, चिता का निभा पनिये आदि। इस में भी पा टापू में गा की हो" ने यो यो मान म बाचे ifrता टरप्पू दे गयी है पण रट सरेक्ट को हरायो मी। उप को भेतीपापो भीतरी गमायो। कोसी पास में मातमा दो-तीन हेला गुणीतं, पण पोथी न बोहण दरमा गुः मार-त्रीम में नीतिी तारगी Entी। यो गुना मग-गुगी । न मा 1- नी !!rluts'पानीम? 4 Infirmationीपोपीसा और Amt: 02 : बीमा ransfer tat TM sexi me । army.tent unt 1८३ वो जीमता-जीमता ही सोच-जीवणो विरपा 1 रोटी ही दंग री को मिले नी । ओ ही जे कमावतो व तो चोपडघोडी रोटी मिलं, और वा ही दो नोरा काद'र । अवार तो कोरो टंक टाळणो है। आ ही मिल तो है । मनं तो गुद न ही गरम याने । पण और काई करू ? नौकरी तो मिलता-मिलता मिलमी । तो ई अब आप कीन. की तो काम करणो पडमी । इया रिताक दिन पार पडगी। सोचतो-मोचतो वो दुमी हुप पावं । इत्त में मा दूजी रोटी पाळी में नाप दी । पण रोटी पतम हुयगी, टा ही को पही नो । रोटी पाळी मे पड़ता ही चेतो हुयो । सोच्यो-मना कर दू पण को कर सक्यो नी क्यो के मदार मना करता ही मा उपदेश झाडणा सरू कर देसी। कैसी- पाम तो हाथ थावतो-मो आसी, रोटी खानणी छोडया पार थोईई पड़सी। दूजोडी रोटी किया ही करने चिगळी । और हाथ धो लिया। मा केनती ही रंगी-मळं ले ल, भूसो तो ना उठ। यो प्रट आ फेयर कभी हुयग्यो के आज मन दो-तीन ठौड जाणो है । ऊनावळ में हूं। वेगो उठण रो खास कारण तो ओ है के दो आजकाल मा र उपदेशा और गाळया सू डरे । सोच के अवार कवणो सरू नी कर दे के यब तो कोई काम-धो देव । तू अकलो तो है कोनी । लुगाई है, टाबर है। थार घोटा-छोटा बेन-भाई है । पर मे दम-बार जीव हा । थारो बाप ही लाई कियाई चला है । तने ही पदवी ताई पढा दियो। परणा दियो। अब कांई सारी कमर रायो परला हो रेसी ? वूदा तो हुयग्या । तू सुद पढ्यो-लिस्यो है, कठे ही कोई चोदी-मी नोकरी ठानी कर ले । करपा विना किया चलसी? बैन परणावणी है, धाप गे तो सरधा टूटगी अब । वं जे कई रीसा वळता की कय देव तो तू रीस ना परपावर, यीज ही जावें । मा वाता घणी लाह सू ही केंद्र पण उण नै अ वाता मुदाय बोनी । सुणता-मुणता कान पकग्या । अब जदई मा मीठी-मीठी हुप'र बोलणो मह र सोहर लागण लाग जावं । हय सके उपदेश नी तो गाळपा ही सरू कर देखें। अचार पंसी-ना तो तू पमा और ना हो पारी बीनणी काम करने पाती ठारं । इण माम चोखो मे थे पार न्यारा-जुदा एप जावो । मानो और सानो। म्हाने तो पारी पमाई चानना कोनी । धापगी है तो पासू । इण वास्न घो आजकाल मापन घणो को बटनी । वेगो-सोक पिड छुहार भागण री कोसीम बरं । । पमा मजायर पायोगायो गामा-सदा पर और आपरी परीममा । उण में सपोरा भार साहरणआळा राम देस्या और हाईग्बूस रो प्रमागपत्र, मा विार और दी.. रीगिरी बरसा में मानी मगर मोट सी और भाप रामाई मानीटरी मोटरेवर निमारो नाचको पर भू बार निसायोनार मा रोहेलो गी-मारं मम ही मामाची गत पालनाबार्य । at farzाही उपम साहारी पनि - । हुयर भी तो छोटो काम कर लेसो? बो उथळो देव-मजबूरी है साब ! करणो ही ४] काको देवी- देवामानामा मात्र तो पारामा गमका देगाati Raiant REET-पागोही कट कर Freो भौर जमी TTA TREAMIN मा भादो परमो ग उपरोपोरो पूरी टीम भाठागा सोरायो ना शेकर मानी। सार करणो पार नी माग माटा गाना गा गगी हर रंगी है। पालीगण उप-पारी ये Ramitीर ! मना को को नी ? यो गुण र गुदा और टुर बा। परनिराळt हो पग पुरतपासय कानो मुर ना। 3 पूगर को ताजा अपयार देणं और ग तोर गरिमा स्थान अपना कशीसा पासम ने पासपळा अपयार फिरोळ सं I या उण में अगरेजी स हि पण येसो यो अंगरेजी। अपवार में भी देग से । दो-तीन जागा सिगियोहो देश के अंगटा री जरूरत है । पण * पणी-शोरु जागावा तो दिल्ली में है। पैला भी कई दफ अप्लाई करयो हो और इटरव्यू भी काल यो हो पण दिल्ली जामर किरायो समायर कप सूं देयोन इटरव्यू ? खाली गाडीभाई सू ही तो पार को पढ़नी। की सावण-पौत्रण ने और सण सारू भी चायोज । सीघो अपोइटमेट लटर तो बायोनी । इण विज्ञापनों ने फालतू समझ' र यो आगे पढ़ तो देख के कई ट्रेंड अध्यापकों से जरूरत है। अनुभवी अपना लडकी हुसी उण ने पंल । मेकर तो देस'र राजी हतं पण आगली संग पडतो ही माथो शाल'र बैठ जाने । यो ना तो ट्रेंड है और ना ही लहकी है। और जागावा भी दिल्ली, कानपुर और जयपुर में है । वे भी प्राइसेंट स्कूलों मे। अनुभव करें सू आजै? कोई नौकरी देव जण अनुभा हुने ! (४) उण स्थानीय अखबार मे अक जागां लिख्योड़ो देख्यो-काम सोसणो चा उण नवयुवकां री जरूरत है। वेतन योग्यता सारू । पढतां ही उण ठिकाणो लिख लियो । आज इण तूं पकायत हो मिलणो है । अक-आघ ठिकाणो और उतार र बो सौषो स्थानीय अखबार-आळं र अठं जाय पूर्ण । जार घटी बजाने । घटी सुण' र प्रकाशकजी बार आया । प्रकाशकजी ने देख'र घो नमस्ते कर और उणां र लार हो माय बड़ जाने । उण नै पुरसी मा बैठण रो इसारो कर बै पूछ-फरमायो, कियां पधारणी हुयो ? वो कहूं आप रो विज्ञापन पढ'र आयी है। नौकरी री जरूरत है। इस माल हो बी० अ० पास करी है । बी० ० पास गुणता हो कर तो यं विदकग्या । पण पायो की सोच'र वोल्याठीक ! तो थे काम सीखणी चालो हो? इत्ता पक्ष्या-लिख्या पडसी । प्रकाशकजी सोच के मुरगो ठीक हाथ आप रयो है, फासो। मजबूरी से फापदो उठाणो चायोज।

तो बाल सू ही आ जानो आप। दिनूग-दिनूग तो आप ने गहर में असवार वाटगा पड़ला । साइकल तो हवला ही आप कन ? यो ? और दिन में आप ने हूं मशीन रो काम सिसा देसू । कई दिन कपोज करणो सोख लो और मसीन री सफाई किया करोज, किसा-किसा पाट हुने इण वाता री जाणकारी कर लो। साल-अप महीनो में हूं आप ने ट्रेंड कर देसू । थे तो पढ़या लिख्या हो वेगा हीज सीस आसो । वाम रोकाई छोटो और काई मोटो ? भोत-सा वडा आदमी हुया जिकां बूंट-पालम करी और अखबार वेच्या हा । आप तो धीरे-धीरे पत्रकारिता करणी सीख जाया । दो साल सू पक्की रयी, क्यो ? हूं काल पनि उढीकू हू, भलो ! चो मन मे राजी हुयो के याज कुण हो वा तो केयी ६ काम है। पण खास बात तो रेय हो गी । उण झिझकत-झिझकतं पूछयो-पईसा और कित्ता काई देसो ? प्रकाशकजी, जिका पत्रकार भी हा, उण र सामने देखण लागग्या । बोल्या-पईसारी भाई फिकर है पान ? केई दिन काम सीसो ; आप ही दे देसां । वाजबी हुमो जिता देदेमा। राव को नी । फेरू हिम्मत करने को पूछ-तो ई किता देसो ? बतायो तो सरी। --अबार तो आपने तीस रुपिया महीन रा दे दंसा और काम आप ने मुफत में सिलामा -तीस हीज तो भोत कमती है। -गमती किया है ? अगवार तो मुसकात सू पवास परा में वाटर आनणो है। दूजो काम जियो यांनं यावदोनो। यो तो मीसमो जर्ग पार पडसी । तो ये पदया-लिस्या हो जण मसीना रं हाय लगावण दूहू और काम सिखाऊ हू । अण ने तपाई ही देनाळ योनी । उण पने गू अरावार मुफत वटप्राप्रतो जणे ममीन रे हाप लगावण देवतो । चिता ना रो, कई दिन पाम सीस सो, माही पारा पमा पधा दे। दोनो मे पोती-भोत संचा-ताणी ह और देकर पचाम रपिया महीन । हिमाव म् पात संप जा । और दो बार मुहर आ काल म्हार बी-गाने गरबा जासू। निकरना ही उप रा पर सरारी मादन २ मुतागि मोरा गेगा. नरपानी गुजार में पता तो पार Air मार मही मासू तो पास ही पोसा ।वीन-तोगमाग Mirm होमस और नको तिmine गौर भाप टोहीमोरंग भादो।मेरोगे..रा - मारे माईनानंहीरणा है।नौrnो पी रंगी, Art तोशन ही २६ सर्वं हूं। यण उण सारू तो ट्रेनिंग करघोही हुमणी जरूरी है। और प्राइवेट स्कूल में तो हालत सस्ता हुय जावं । काम ही डोढो और पईसा घोड़ा 1 ठीक है, काल सूं ओ हीज काम करसू। विचारां-ही-विचारा में यो कण रोजगार-दफतर पूग जाई और कर्ण नोटिस- बोर्ड र आगे कभ जाव, उण नै ठा हो नी पड़े। नोटिस-बोर्ड र मायं कई आर्डर पढे । सदा ही वो आ सोच र अठं था जाड़े के हुप सके कोई नती नौकरी री जागा निकली हुने और बो विना अनुभन्न और विना सिफारस ही ले लियो जानै । और यो सोच ही काई सके है? सहसा उण रो ध्यान आप री डायरी र उण पान माय जान जिक में आज र कामा री लिस्ट है । हा ! काल तो अक इंटरव्यू है नी । इण वास्त डिगरी और प्रमाणपत्रा रो मही प्रतिलिपिया करावणी भी तो जरूरी है। टाइप कुण र कर्न कराऊं, मोल 'स करा को सकूनी 1-~-आ सोच-सोचा'र यो पाछो पुस्तकालय कानी टुर जा । रस्ते मे बो अंक थियेटर मे वड जाई । किसो सेल लाग्यो है, खेल नही देख सकू तो पोस्टर तो देख हो लू । 'उपकार' फिल्म लाग्योड़ी दी है। जे कोई भायलो चेत तो देखीज जास नहीं तो मुसकल ही है । पैला पढतो जितं तो भळं ही कई देसीज जानती । अब तो खाली पोस्टर देख'र ही जो प्रयासमो पड़े। पोस्टर देखर बो पुस्तकालय आय र शाति सू बैठ'र हाथ सू ट्र कापी वणावै । वो सीधो पी० डब्ल्यू० डी० पूर्ग और आप रे भायल ने ले जा'र देखें के अ० ई० अन० रा दसकत तो करार सा दे। और को फट-सू दसकत करा'र ला देखें। आज तो उण रो ओ काम सोर- सारा वणग्यो । नहीं तो कापी पातर ही कित्तं दफतरा रा चक्कर काटणा पड़ है। उण रो जो जाण है। यदी कोही तर पकायो । पीडमा दूसण लागगी। पाळी हीज है नी । अब मिया पड़गी जाण'र वो थोड़ी ताळ बाग मे जाय'र बैठ जा। फाटोडा गेटर छेई नगर दूध मा आठो हुयग्यो । ओकर तो आस्था बाहो अपारो हुग्यो । पछ भोत ही आराम मंमूम हुई। कई गरी-गरी सामा लय र यो ईन-बीनं निजर गाम तो इका. दुमा लोग-मुगाई पाग पूमता दीग । यो आ सोगा ने देरा'र मूंढो मकोड़े और पला गं दे । अं ही सोई इनगान है ? इणा हीन भ्रष्टाचार फैला राख्यो है। गगळा रिगलगोर है माटा ! हराम कमाईबाटा न हो इसी फत्तन गर्म है। मैं पा तो मन राई म्हार जिम पित्त ही होगा नै नौकरी मगा मर्क है । तो मोमिन नोमा मार में हरेक आदमी पाय मोकंप गई है कहा नमपामो है।

100 - । विचार भुंवाळी साय । सर्व तो समाजवाद आयां विना देश रो भलो को एय सके नी । समाजयाद बासी, अक दिन पकायत आमी । जर्ण इणा री हालत सस्ता हप जासी । जी चा के आ सगळा री सपत्ति सोम तूं और इणां ने पीडित करू । पई हो नौकरी सातर दर-दर भटक जणं इणों में ही पड़े के म्हे लोग भी इनसान हो । जठे जावं जठं हो पईसो और सिफारस दो ही चीजां चालं है । और आ डिगरी? साली की कार री कोनी । इण ने प्राप्त करण सारू धनदै वरमा ताई झष मारी । पण हाय काई आयो? आ पडाई काई काम री जिकी रोजी-रोटी रो प्रबध नी कर सके । हूं तो कत्र हू असं विश्वविदपालय बद करन ताला ठोक देवणा पायो । अथवा इणा मे कारखाना खुल जातणा चायोजे जठे काम-धधो मिखायो जाने । सोचता-मोचता उण न रीस आ जाने और रीसा वळतो बो डिगरी ने मसळ नारी । पण तुरत चेतो हुय जाने के बार फाड़ देतो, चनदै बरसा री मैनत कमायोडी उण हिगरी ने। कालेज र दिना री याद आ जाये । कित्ती मौज ही कालेज में । कई भायला हो । मोहन सिंघ तो अपरफोर्म मे सलेक्ट हुयायो । बाबूलाल कलेक्टरेट में भावू वणग्यो । सं घघंसर लागग्या । लका में दाळदी बो हीज रेयो है। केई आगे पढ रया है और बी० ० री ट्रेनिंग कर रपा है । काई करू ? जी-सा जे हा गर लेता तो हू ही ट्रेनिंग कर लेनतो । नौकरी री तो गारटी है , मिली चाय पडं ग्रेड मे ही। काई पराच हो । पण अपार तो हू बक मे चपडासी तक लाग जामणो चालू हू । पण ओ भी रिसो सोरो काम है ? इण रे लायक ही को रेयो नी । बढ़ ही आठनो पास नै । तो पी० ० सामनी । धणी योग्यता भी योग्यता सावित हुप जा । था अवंटा लागी है । आ मोचता ही यो देश री शासन-प्रणाली और शिक्षा प्रणाली माथ गभीरता र सोचण लाग जाय । रण शिक्षा प्रणाली में तो परिवर्तन हुप्रणी निनात जरूरी है। इण गे परिणाम है नबमलवाद । ८ बादमी में राम-धो ही मही मिले तो हो और पाई र? सहमा विधारा ने इस्टको मार्ग। बरे ! काल पररप्यू में भी तो जायणो है। बाई टा रिता हीटरप्पू दे दिया हमी और ग्तिा . देवणा परसी? ही शादी वाला पूपीसी नाच ... पिना रोनार ....... घो? हीयो पृथ्वी साठा । अब पता पधो ही रोबो नाईट सारण न मानो माग पूधमी मनुमा "" अनुभा पर परतो? थभरण रोगकोई मौरी उणे! 1 मारे पंट में ही मार पृदणी हम जिन .. मार रिना पामेआग......पानी यो पो.. ATIोई सानोमोसिमित रानीपारी। मान राम बाबोहोर परमही र मिस हा गर न सीएससी।

८६। सपग उण गारो ट्रेनिंग करपाटी हानी जारी है। और मारपट सूम तो हासरा सताइप मा । कामही टोरी यौर पईमा पोदा । टीक है, पाल मूओ हीन काम करा विचारा-ही-विचारों में पो फर्ण रोजगार-दपार पूग जाये और कर्म नोटिस- यो र आग कम जाने, उग ने टाही नी पड़े। नोटिस-चो मायं कई आर पडं । रादा ही यो आ सोच र अट मा जाम हुप गर्क कोई गनी नौकरी री जागा निकळी हुने और यो विना अनुभव और विना सिफारस ही से लियो जाये । और यो सोच ही फाई सर है? सहसा उण रो ध्यान आप री शायरी र उण पान मा जान जिम में आज र कामांरी लिस्ट । हा ! काल तो येक इटरव्यू है नी । इण वास्तं डिगरी और प्रमाणपत्रा री सही प्रतिलिपियां फराणी भी तो जरूरी है। राप कुण २ कर्न कराऊ, मोल 'स करा को सकूनी-मा सोच-सोचा'र वो पाछो पुस्तकालय कानी टुर जा । रस्त मे यो अक थियेटर में पड़ जात । किसो सेल लाग्यो है, खेल नहीं देख राकू तो पोस्टर तो देख ही लू । 'उपकार' फिल्म लाग्योड़ी दौस है । जे कोई भायलो चेते तो देखीज जाने नहीं तो मुमकल ही है । पैतां पढतो चित्तं तो भळं ही कई देसीज जानती । अब तो खाली पोस्टर देस'र ही जी धपावणो पड़े। पोस्टर देख'र बो पुस्तकालय आय'र शाति सू बैठ'र हाथ सूट कापी वणान। बो सीधो पी० डब्ल्यू डी. पूर्ग और आप रं भायल ने ले जा'र देने के अ० ई० अन० रा दसकत तो करार ला दें। और बो फट-सूं दसकत करा'र ला देने । आज तो उण रो ओ काम सोर- सास वणग्यो । नहीं तो टू कापी खातर ही कित्तं दफतरां रा चक्कर काटणा पड़े है । उण रोजी जाणं है। (६) अब वो कोझी तर थकग्यो । पीडयो दुखण लागगी। पाळी हीज है नी । अब सिझ्या पड़गी जाण र बो थोड़ी ताळ बाग मे जाय'र बैठ जाने। फाटोड़ा शेटर छई नासर दूब माथै आडो हुयग्यो । अकर तो आस्या आडो अधारो हुग्यो । पर्छ भोत ही आराम मंसूस हुन्छ । कई गैरी-गरी सासां लेयर यो ईन-वीन निजर नास तो इक्का- दुवका लोग-लुगाई बाग मे घूमता दीख । वो आ लोगा न देस र मूंढो मचकोड़े और घृणा सूं थूक देव । अ ही कोई इनसान है ? इणा हीज भ्रष्टाचार फैला राख्यो है। सगळा रिसद्वतखोर है साळा ! हराम री कमाईआळा न हो इत्ती फैसन सूझ है। * चाय तो मनै काई म्हार जिसे कित्त हो लोगों ने नौकरी लगना सके है। पण आप र भाई-भतीजां ने ही रखा है। नौकरी तो अळपो रेयो, आपा ने तो टूगन हो मिल नी । इणा माय सूं हरेक आदमी चान तो कय सके है के म्हारं छोरी-छोरा न भणावणो है। - - अनुमापाई मौरीगणे! मार देर हो कर खतो? फेर भरी हो विचार मुंडाळी गावं । एवं तो ममानदाद आग विना देश नी । ममाजगद मामी, येक दिन पायन आमी। जो गे हार ! पजामी। जी चावं के मगढ़ा री सपत्ति सोम म्योर इशो में पीहिन । नई में ही नौकरी खातर दर-दर भटक जप इणां ने टा पई के म्हे लोग भी समान हा । बढ़ जावं जठ ही पदमो और मिफारम दो ही चोजो चाले है । और आडिगगे? साली पो बार री कोनी।ण ने प्राप्त करण सारू च वरा ताई म मारी। पण हाय बाई आयो? या पडाईकाई काम रो जिकी रोजी-रोटी रो प्रवध नौ। सके ? हू दो मंदू हूं में से विश्वविदघालय वद वरनं ताळा ठोक देवणा पायो । अथवा इणां में कारगाना पुल जामणा चायोज ८ काम-पपो मियायो ना। सोचता-मोचता उप न रीस आ जाये और रोसा वळतो दो डिगरी में ममळ नाग। पण तुरत चेडी हुप जायक मवार फाड देतो, चनदं वरसा री मनत सू कमायोड़ी उग हिमरीन। वालेजर दिना री याद बा जाई । किती मोज ही कालेज में ! कई भायला हा । मोहनसिप तो अपरफोर्म मे सलेक्ट हुयग्यो। बाबूलाल कलेक्टरेट में बाबू धमन्यो । से घसर लागग्या । लका में दाळदी बो हीज रेयो है। कई आगे पढ रंया है और दो० ३र० री ट्रेनिंग कर रया है । काई करू ? जो-सा जे हा गर लेता तो हूं ही ट्रेनिंग पर नवतो । नौकरी से तो गारटी है ; मिलो चार्य पर्ड ग्रेड मे ही। काई सराब हो । पण अवार तो हवक में चाहासी तक लाग जागो चाव है। पण ओ भी विमो मोरो काम है। इस र नायक ही को रयो नी । बढ़ ही आठयो पाम ने लो। तो दी० ० पाम हू नी । पणो योग्यता भी अयोग्यता सादित हुय जावं । था अब टा लागी है । बा गोचता ही वो देश री शासन प्रणाली और शिक्षा-प्रणाली माथ गभीरता मू मोचण लाग सारण शिक्षा-प्रणाली में तो परिवर्तन हुनगो नितात जारी है। रण गे परिणाम है नवमलवाद ! ३१ आदमी ने काम-यो ही मही मिल तो हो और बाईपरं? महमा विचारा में इटको लाग । अरे हा काल पटरव्यू में भी तो जाणो है। सरयू ... ... हाईटा दित्ता हो इटरव्यू दे दिया हमी और कित्ता भळे सणासी होज सागी दाता पृद्दीजसी । नाव ... रिता रोना ........ होयो पृटपा १ माटा गे । अब पाई पार ये पो ही करतो हतो तो THE मान ने भारतो? मार्ग पूक्ष्मी अनुभए: बनुमा पर्छ कद करतो? हाईम्न में विन... यो दो - छोरी साराम बाईपोहो? इह ! राई का रास्कामी। - घंधो? पृदगी नंबर रिना परमें: माया?........पणी ....! बाई महान है ? पोगायोरिनी पत लियो । पोसाद HAT ने सरयू ऐड और नाम हुसार घरं गगह पर्ग। इन

८८
REETHEmattra? min?
Punerimmitment forit
Animirm rai
होगी। नोhिtmnरोमरोमन
गोदाn for TET पा रोमन हो।
raw attirin हो । जागा भर में
पाप
होमr frimar? Antin!
निगाह farm कर है । गा देगू और मार गंगा के सामने
ही को होगी।
पणी तर सूविपारा से भटियो पातको यो। में दो टायर गरेर
हंसता हसता दोस्ता निकळ जावं । अंक दूर मार भगतो हुई। उनाने यो देपर
लाग नातं । विपार पम जावं में उण न गारी परी रा टपका गुणोजे । बो
गिणप लाग जावं ... अक......."दो....."तीन .... 'पार.... "पोर......."Erसात
और आठ । अरे ! आठ यजगी ? उसने मारी भोळात याद मा जान और यो
भक सू भो हुय जातं । टुरती टंम ओ निसर्च कर सेनं क ने पालमा इंटरव्यू में
सलेक्ट हुपग्यो तो ठीक, नही तो परसू सू उण प्रकाशक र अठ ही सरू कर देवपो है
फाम ! रारम किण वात री' हुसी निसो देती जासी । फेर यो सोपल के पेला जी-सा
मैं लेखणो ही ठीक है । उणा रे जची री बात है । काल तो यो उपन्याग ही जमा
करावणो है लाइमेरी में।
इत्त मे क साइकलमाळो उण र माय आ पड़े जण उण में ठा पई के बो
के० ई० अम० रोड मार्य चाल रयो है।
और बो च्यारांखानी देसतो खायो-सायो पग उठावणा सरू कर दे जिण सूं
टैमसर घर तो पूग जान।

Citणपाठापारा सगन-मुनु रामेzोसारनी। तबसमाग्योहामारीपादी!बोताटोम्हार और मंत्री मो-म महारार!टा नही दिया हो, चिनी-मीक Grnादी,औरतराज का दो रसम पाटटी पगामी गिरामागीदारीपरमी नीर ॥"," Ant.1 41.Errrinागलपाईनाम उप अंतरात्मा री अवाज -मोहन आलोक- उरमीजी कनं मरवार री दियोड़ी कार, कोठी, आदर-मान सौ की हो पण भगवान उणा ने बम री वेल वधावण वेगो कोई भल सिरसो नही दियो हो। मंत्री दातरी हादी उचाट व्रती । अंक दिन किणी उप ने आर बतायो के शहर म अंक भोत मोटा महात्माजी आयोग है. ये हवनी-दुबै उणा कनं जा'र आप रो गेवणो रोद्रो तो जरूर की हुय कं, उपो री अतरारमा जिकी वात के देखें पर पूरी कार है, महात्मा या पूग्योता है । मत्री बा मला मानो और महात्माजी बन जा'मारगरणा रचा। महामाभी बोत्या-देटा 'तनं पनान री माती तो हप म है पण इण री पारसन व माटा त्याग करणो परगी। उरमी पापड़ो तो पैला ही पणो हो गगी धार धार योरी हो । बोल्यो-महाराज ! हम परो, है मोट-मू मोटो त्याग पाण येई. त्यार १ . थेको तोरण उग्मयोभाली पुरमही र टोकर मार । महामानी पानी पर पाग भू राम पालण ऐ नहीं है, तन पारी! रण मतमो या मरणा परमी, तन पारी दरणी परसी । म्हारी पतरात्मा SHEHEAPart पर मटर मात्र पर बैन है । बाब ही सो Marathi । dav ८८। फालआळं इटरव्यू गावर कैद ने कंपू माई ? रिण न कंत्र ? यसरीजी ने कंत्र? पण काई कर सेसी ? ये सो उण आदम्या मांय सूं है जिका टम निळयो पई को को पला तो मंतणो हो ! फलाणो तो म्हारी जाण-पंचाण से ही हो । पलक कंप'रदेश्यो हो नी । मने तो कैप दियो के में पारी सिफारस कर दी धौर यठ जिको मैं तूं कम पढपोदा दूजा गिफारसी आदमी चुणीजग्या । इयां ही पालण दो अयं भाग मरोम हो। वठीनं गोरधन महाराज र सार किसो कम पूम्यो हो । उणां रे साथ येम० अल० : साव सू ही कई दफ मिल्यो हो पण नौकरी किसी हाथ आ जाने ? नेता है नेता ! किसा हरेक री सिफारस करें है । साम कदह के देसूं और लारं गू जाणे ही को हो नी। आयो - मे (७) इणी तर सू विधारा रो भतूळियो चालतो रयो । इत्त मे दो टावर उण रे फन हंसता-हसता दौडता निकळ जाई । अक दूज र लार भागतो हुई। उणा न यो देखण लाग जान । विचार थम जात । इत्त मे उण ने गढ री घड़ी रा टणका सुणीजे । वो गिणण लाग जा..."अक ......"दो....... तीन ... • •च्यार........पांच......."छन "सात और आठ। अरे ! आठ वजगी? उण नै मा री भोळावण याद आ जाने और वो भचक सू ऊभो हुप जान । टुरती टंम ओ निसर्च कर लेने के जे कालआळे इटरव्यू सलेक्ट हुपग्यो तो ठीक, नही तो परसू सू उण प्रकाशक र अ ही सरू कर देशणो है काम ! सरम किण वात री? हुसी जिसी देखी जासी । फेर बोसोच लो के पला जी-सा ने पूछ लेखणो ही ठीक है । उणा रे जची री वात है । काल तो वो उपन्यास ही जमा करावणो है लाइब्रेरी मे। इत्त में अक साइकलमाळो उण र माय आ पड़ जण उण नं ठा पड़े के बो के० ई० अम० रोड भाय चाल रयो है । और बो च्यारांसानी देसतो खाथो-खायो पग उठानणा सरू कर देव जिण तूं मसर पर तो पूग जानें।

अंतरात्मा री अवाज -मोहन आलोक- उपमत्रीजी कन सरकार री दियोडी फार, कोठी, आदर-मान सौ की हो पण बान उणा नै धस री वेल वधाद्रण वेगो कोई भलं सिरखो नही दियो हो। मंत्री दण दात री हाटी उचाट रवती। अक दिन किणी उण नै आ'र बतायो के शहर अंक भोत मोटा महात्माजी आयोहा है, थे हुव-नी-हवं उणा कनं जा'र आप रो प्रणो रोबो तो जरूर की हुय सकं, उणा री अंतरात्मा जिकी बात के देव जर पूरी ऊतरं है। महात्मा पहा पूग्योडा है । मत्री आ सला मानी और महात्माजी ने जार भाप रा सूरणा भरपा । महात्माजी बोल्या-बेटा । तने सनान री प्रारती तो हुय सकं है पण इण री दातर सन व मोटो त्याग परणो पसी। उपमत्री वापढो तो पलो सूही पणो ही पागी थारू धार योटो हो । दोस्यो-महाराज । हवम करो, हू मोट-ग-मोटो त्याग परण वेई स्यार हूँ. वो तो हूण उपमत्रीआळी कुरमही रं ठोकर मार । महात्माजी बोल्पा-नही । इतर स्याम गू वाम पासण रो नहीं है. तन मारी! ण ही मोटो त्यागपरणों परसी, तनं पाटी बदळणी परसी। म्हारी बतरात्मा करण पाटी र हा सू पारा सतान-गुस राह मेट सेता नी। मात्री इसपर बोल्यो-इस हारारा तो मनै रा ही दियो हो, रिनी-मीर तो बार मोजाण्यो, बेटा राई स्यामरणोपसी? ओतो उzटो म्हार और पाप काम हसी । भय जिला पमापारी मुख्यममी है उगा री दुमी र नीर और पहारीलगायोरी और हामार कार मूहा बम पाटी बाटामने उपमनीममी पारगमारामारीको पुपमीमामा पनि महामारी रकबानमा गरी और उनलाई म दर -भावासम' रिपोरतोगी ने ''- Mat Raftaपिन ।

Manamain- . पाTHEIR REMIfTips? it ? पर intinnitute for iti मोनोपानीमो मार्गमा जान होगी। मतोगकिरदार मरम पापीहा गा founो प्रादमी पुनीमाही पागदोमा मरोगे ही। पटी गोरपन गहागन र पार frगो नापी मापं भैम० अंक : गाय ही नित्यो हो पण नोr friआ जा ? Antim! किया हरेक गिफारण कर । गाम कर देगू और सारंगू जान प्रापी ही को होगी। - - (७) दणी तर पू विपारा रो भळियो पानतो रेपो । मे दो टायर उग र कर्न हराता-हंसता दोपता निफळ जाने । क दूर सार भागती हु। उसो न यो देश साग जाने । विचार थम जावं । इत्त में उण ने गारी प्रही रा टणा मुणीनं । वो गिणण लाग जा... मेक......."दो........तीन ""पार...."एच......""सात और आठ । अरे ! आठ वजगी ? उग ने मारी भोळातण पाद आ जातं और यो भचक सू भो हुप जानें । टुरती टंम ओ निसर्च कर लेने के जे कालमाळ इंटरव्यू में सलेक्ट हुषग्यो तो ठीक, नही तो परसू सू उण प्रकाशक र अठ ही सरू कर देवपो है काम ! सरस किण वातरी इसी जिमी देसी जासी। फेर बोसोव ने क पैला जी-सा नं पूछ लेग्रणी ही ठीक है । उणां रै जची री यात है । काल तो वो उपन्याम ही जमा करामणो है लाइबेरी में। इत्त में अक साइकलआळो उण माय आ पड जर्ष उण नै ठा पई के बो के० ई० अम० रोड़ मायं चाल रयो है। और वो च्याराखानी देखतो खायो-खायो पग उठावणा सरू कर देवं जिण हूँ टमसर घर तो पूग जाने।

ह/साहित्यकार ह. -दीनानाथ खत्री- हूं माहित्यकार हूँ । वडो नामी साहित्यकार । म्हारी बढी पूछ है । पण आ पूचचा के माहित्य मे म्हारी कितीक पूच है । आज तो हूँ साहित्यकार है। न साहित्यकार। छोटे-थरा घर रा लोग बुद्ध समझता। स्कूल मे मारटर भगण में माठो वतावता । पर मू दारं भायेला-माथेला दम्बू समझता । पण आज है साहित्यकार हू । नामी साहित्यकार । जियां-तिया दगती पास परी। घरवाला जाण्यो बेट हम रपियो गजेबो भरी। पाम-धं धास्त फिरपो गळो-गळी । पण किस्मत रावळी । नौरीपट नही मिली। पण आज साहित्यकार हू । नामी साहित्यकार । हूँ हुयो वह निरास । रहण पायो घणो उदास । माईता छोडीमाई री मारा। जीवण मे अधारी ही अधारो, कटई नहीं दीस्यो उजाम । पण मात्र साहित्यकार। मामी साहित्यकार। भेद मिटाई गिटपिट । पतर में बाबू वणग्यो मटपट । पंटयो गागं दिन बमम गह। रोद जमावण नं चपरासी गूगए । तणना में प पोनी पार। पर में दरिनारायण रो प्रसार करण माग्यो सौर-विचार जिदगीरी रिया चासंगार। बीरमाऊ नाम । भर घर मे भी आवं दाम । बाज, साहित्यशा। नामी साहित्यकार। क्षेष दिन पईसा सारू घर मे पगी राइसोषण माग्यो कि जगा । भायेल मार्ग जिपर चलायो । उण र भेर सारसायो। रीवाला माई मगेवार । तू तो बण जा साहिपसार । बाय माहितारनामी माहिसार। यो freigर सगसर । मारं मामर मारि गराठो मागरम घराबर। उन मन पुर-मसर दोनो। उगे पान र मोनो। रामायनी सार, बो र परिवार सहिपसारनामो समसार । ११ १०| जप उपमत्री आ'र आप र गुस्यमंत्री ने आप रो पाटी पळटप रो समंचार दियो तो मुल्यमयी देश्यो गर उपमत्री मं पूरी मंत्री यणण ने तुझातो हुला। मो उा उण ने पूरो मत्री यणा देवण गे यायदो करपो । उपमत्री ने इण वात सू हाडी झळ आयी । बोल्यो-ये काई जाणो हो ये है उपमत्री र मत्री वणण र सालच मे पाळी बदलू हूं ? हू तो यस, काई बात है. फात पाळटी ही यदळणी है । ओ लो म्हारो अस्तीफो। अस्तीफो दे'र उपमंत्री चालतो हुयो। मुख्यमंत्री देख्यो-या तो आधी हुयी ! जाणूजाण हो, सोच्यो-जरूर खिलाफ पाळटीआळो रो मरपोड़ो है। आसर उण राज री सी० आई० डी० बाळां ने बुला'र हुकम दियो के से काम छोडर पला इण वात रीठा पाडो के फलाणो उपमा पाळटी बदळणी क्यो चान है। हुकम ते'र सी० आई० डी० आळा उपमत्री रीतारोलियो और करता-करायता असल वात रो वेरो पाड लियो । सी० आई० डी० आळा इण वात रो वम भी मुख्यमत्री ₹ बैठायो के औ आदमी जरूर खिलाफ पाळटीआळा स मिल्योड़ो है । अब सा ! गोली के री और गहणा के रा ! मुरयमत्री उणी रात महात्माजी सू क्यों जा'र मिलनी। उपमत्री स बापडो वाचा रो बध्योडो हो । दूजे दिन जार महाराज सू नारायण करी के मैं अस्तीको दे दियो है और खिलाफ पाळटीआळास वातचीत भी कर ली है । महात्माजी आ सुण' र थोडी ताळ तो समाधि मे बैठ्या हा ज्यों-रा-ज्यों बैठा रया । फेर होळ-सी वोल्या-उपमत्रीजी ! इणी पगाजार अस्तीफो पाछो ले लो। अब पनि पाळी धदळण री जरूरत कोनी रयो । म्हारी अतरात्मा री अवाज है के यान इणी पाळटी मे रक्षण सू 'ताळी ही पुत्र-रतन री प्रापती हुमणआळी है। न करें नारायण पाळटी वदळण सूं थे निपूता र जानो। पण महाराज ! परसू ही तो थे मन सतान री प्रापती वेई पाळटी वदळण रो कयो हो-उपमंत्री हाक-हाके हुयर बूझ्यो । आम्हारी अंतरारमा री अमाज है-~-महात्माजी गभीर बोल्या 'पण महाराज ! आप री अतरारमा मे आ चाण बदळाप्रट क्यो ?' म्हारी अंतरारमा पाळटी बदळ ली है-महाराज वियाई गभीरता सू उथळी दियो। नमो इधर

अणोर् अणीयान्, महतो महीयान्
-नरोत्तमदास स्वामी-
उपनिषद मे परमात्मा ने अपोर अणीयान् और महतो महीगत यो है-
सू भी छोटो और दई मू भी वहो। पण परमारमा ही नहीं, जिपमा में परम
याप्त है बो जगत भी, परमात्माआटो दाईही थप गू I महानग
महान है।
२
पंती थापा घणु मू भी अणुन सेना-
गत गरगळा पदार्थ तासागणियोमा १२
मास सदमपोर्ट माग नं परमाण। पापनाम
रागगन पदार्थ वर्ण । बबई भाग-tirth
गवणं, नई अंबही नाव बना परमामा मकर at ar l
पामापुद्रा मू वर्ष । अनेक Ratan म.
भी गाने से पशु मे पामाण समिini, in y .
परमाणबागवार सानी रोज 4
परमाणुबा 2
म
मी farmfat मानो
यो मारafrat.in
Th विभा । परi rranty
महhistiriturer RT -
Lic: artict-rt-40" for Ir.
१९२rina Iri. kren ...ri.r
-

- 2th AfrHiratisthan ressnointrivine Party Rurineerintinaari Rahul Emaitrinterior TER! niket Teamin और मा। पारने fur aimittarrintlemg गामो गfearl पा मोर nainamita ki frerit ! मारने बाप mmxmments मुमार। मारो न गीप र भा xnimum पूर्ण महानामा माहिर पागासी मारि पंप मानो गारमें भी पर गाहार । प्रो रामोसो कोनी ! पर्ण itin भी मोर मोनी । गोमा । राणग्यो म न पाते। पोटी-मोमिनार पांगो पा भी पोर। मारह साहिबार हूँ। गामी साहित्यार। मौलिकता हरी बोनी। पंचोरो भी या पानी प्रयोगमा रो महारोसे। जियो पात ज्यू मिग देव । पाप रण गर्न पाई सरोकार ? आज है साहित्यकार हूं। मामी साहित्यकार। सेप-कवितामा रीही सगा दू । कहाण्या और उपन्यारा भी छापा चित्रो रो कमी न रापू । पण थारा तो पूरा नहीं भानू । आ सगळी धोसं री टट्टी। माय सू है पोल-पट्टी । इसी याता रो कोई विचार । राम लगा वेडो पार । आज है साहित्यकार हू । नामी साहित्यकार । अक लेण अठं सू लेणी । अक लंग बढ़ सू नेणी । अक भाव कठं मूं लेणो । दूजो जचे जठे सू लेणो । अनुमाद री तो कोई फैणी। नही वर्ण तो नकल कर लेगी। इण विध करणी रचना त्यार । जद चाजोला साहित्यकार । आज हूं साहित्यकार है । नामी साहित्यकार । अजूं अधूरो है साहित्यकार । दूजे गुणा रो भी हुमणो भडार । पुराण साहित्यकारा रो प्रतिशत थोड़ो । उणा रो थाज चाल नही घोड़ो। उणा सू मेळ राखणो थोड़ो। पणी-घणो अटकाणो रोड़ो । उणां सू मदा रंणो हुशियार । नहीं तो डूबोला मझधार । आज हूं साहित्यकार हूं । नामी साहित्यकार । संस्थादा रो सिरजण करणो । गुटबाजी रो गणो पैरणो। भूद पर प्रशसा करणी। चमचागिरी जोर री करणी । अ हथकडा जे अपणावो । पूरा साहित्यकार दण जालो। थांरी हु जय-जयकार । आज हूं साहित्यकार हूँ । नामी साहित्यकार । । रेसा- vi- अणोर् अणीयान्, महतो महीयान् नरोत्तमदास स्वामी- उपनिषद मे परमात्मा नं अशोर वीरान और महतो मगर दी। बाप्त है बो जगत मी, परमात्मामाटोदाईही बन भी परमातम अपतरा मगाटा पदार्थ ताम्वनियोजनाममा २॥ ग सगळा पदाचं वर्ण । भाग-१२ । पामाकाब वारदा- मणं,पर हीनतमंद पामाधाम पत्र, और दिल परमाणुयामवर्ण अनेर मनगरपदामपकोयला शीमा अपर परमान मोरीti, सागरामद तोपरमाणकाम वर्ण और पानीमा ६मी जिनविदा मागका दाम बोपनीयऔर featgarmilar महापामामागम विन infrare sirffa. 3 मूभी छोटो और वह महान है। सत्वरं बम धोर्ट माग में भी दी। पम परमात्मा ही नहीं, निजात (२) पनी भागवणुम भी अप मंत्रा- परमानना iz antriti mera latest timm.inutrimestiint am-मोत imitectimatalaunaireration ktm netatement are नानी । ERE targettar Pr t.tit: miti iram मही है it frr Amrit और कान में frest गर प्राrminaram I में टोन और में माग गायि भार ARRETAम तय र परमा में नाभि कोमोरोग भोर को तारो गोरो पररमा करे। मिपम गे पागापुमा पार होन गुमाई पोगो । सोने तत्व में गानिक में प्रोटोन और ११८ दोन पार कर सलोन । पक्षा में पाकमा कर । ग ग भारी सम पूरेनियम है xिT ₹ परमाणु में १२ प्रोटोग और १४६ म्यूदोन ह और १२ इसरदान ७ rat में परफमा ! उप रो भार २३८४ । परमाणु से समग सगळी भार नाभि में लो इनेस्ट्रोन में सो गार न मात्र से ही हु । प्रोटोन इमेनट्रोन । १८३६ गुणो भारी हुई। ग्याराग्यारा तस्मो में ये ही मूळ कण हुन पण हरेक तत्व में प्रोटीन, न्यूट्रोन और इलेक्ट्रोन री सस्या में फरक हुने । परमाणु में जिला प्रोटोन हवं उता हो इलेक्ट्रोन हत । इलेक्ट्रोनो मे प्राण योजळो रो मावेश हवं, प्रोटोना में धन वीजळी रो और न्यूट्रोन आवेश-रहित हुदै। अणु, परमाणु अर भूळ-कण कित्ता छोटा हो ? पाणी र मेक अणु रो अर्धव्यास १० अर्थात् १/१०००००० सेंटीमीटर अर्थात् बैंक सेंटीमीटर रो दस लापनों भाग हुदै । दरा लारा अणुता ने कनै-कन अक कतार राखी तो इण कतार री लगाई मामूली कागद रो जाड़ाई रे बराबर हुने । पृथ्वी रा सगळा समदरा, नदियां और सरोगरा में जिता गिलास पाणी है उणां सूं दो हजार गुणा अणु भेक गिलास भर पाणी मे हुने । पाणी रो अंक बूंद ने पृथ्वी जित्तो बडो कर देवो तो पाणी र अरु अणु रो आकार मेक छोटी गेंद रं बरावर हुसी। अक परमाणु रो अर्धव्यास मोटे तौर तूं १९ अर्थात् १/१०,००,००,००० सेंटी- मीटर अर्थात् अंक सेंटीमीटर र कोई दस करोड़ में भाग २ बराबर हुदै (अक इस र : १ उबारोप और चंपर्मन : डिक्शनरी आफ सायम, पृष्ठ २५ [६५ कोई २५ करोहा भाग र घराबर) । इण रो मतलय सो हुयो के पचीस करोड़ पर. माणमा नै बराबर-दरावर येक कतार में जमापन रासा तो वतार री बाई कोई दो इच हुमी । 'पैनी' नामक अगरेजी सिकरी जाडाई कोई दस करोड परमाणुमारी रतार रे बराबर हुने । पाणी हाइड्रोजन अर बागीजन २ मेळ सूं वर्ण । आधी घटाक पाणी में आगीजन रा कोई १०" अर्थात् अक करोड शस परमाणु हुने । प्रोटोन रो अर्धव्यास १० 'अर्थात् १/१०००,००,००,००,००० सेंटीमीटर हुस अर्थात अक मेंटीमीटर रो दम महतो भाग' । इलेपदोन तो और ही छोटो हुदै । उण रो अघंच्यास कोई १०-" अर्थात् १,००,००,००,००,००,००० सेंटीमीटर हुने अर्थात अंक सेंटीमीटर रो अंक नोलवो भाग। बराबर-बरावर जमाया सू अंक इंच मे कोई सन्ना नील इलेक्ट्रान हुई। (२) महतो महीयान् पृथ्नी ने मही, भूमि और अनन्ता के कारण वा वडी है, लावी-चौडी है, धणी दिगाळ है और उण रो अत निज़र मे नही आने । पण पृथ्वी, मही, भूमि और अनन्ता कंयोजणवाळी इण पृथ्वी री आकाश में दीपगवाळा ज्योतिपिण्डां में कोई गिणती नहीं है। रात र वपत आकाश में अणगिणती ज्योतिपिण्ड चमकता दी । ज्योतिपिपष्ट दो भात रा है-(१) नक्षत्र और (२) ग्रह और उपग्रह । मक्ष पणा वडा हुने और आप री धमक सू चमक । ग्रह और उपग्रह छोटा हुने और नदात्र री चमक गू धमकं । सूरज, न.प. रोहिणी, व्याध, अगस्त्य और रेष्ठा नक्षत्र है और बुध, शुक्र, पृथ्यो, मगळ, पृहम्पति, शनि, अरुण (युरेनस), वरुण और यम (प्लूटो) अ ना यह है বি गूरज र धारकर परकमा दरला रवं । चन्द्रमा उपग्रह है। वो पृथ्वी रे वारकर परकमा करं । पहा मे दुध मगढा सू छोटो और वृहस्पन गढ मू घशो है। चुप रो ध्यास पोई तीन हजार मील है और बृहस्पत रो कोई प्यासी हजार मील । मूरज पृषी मू १३ लाख गुणो वही है। पृथ्वी जिता-जिता १३ पास पिंड हुदै जद कई नापन गूरज रे घरादर एवं। पूरब हो गू पणो वगे? पण घणा सारा नक्षत्र गूरज भी बड़ा है। सूरज धेब भोसत पाई रो मात्र है. वह ना में उण गेोई गिनी होनी । गूरज मू पहा मात्रा मेपई-पण भान- २ उहागेप और पर्मन : विहन आए गायस पृष्ठ २५ -सारी- १

Ritam
* Mishram
Kuntil fatty
SRITI MEHTE:
Html...
Alt tent
मा
गगोपरमानाडोमा
समोन। जगेनामा भार
नाभिर दोन मोर दोन
मिपम परगा:भार मात
मानिस में ७६ मोटो और ११८ टोन
पास मे परकमा रंग भारी
प्रोटोन और १४८ म्यूटीन और ६२१
रो भार २३८ । परमाणु रो पगभग
मे तो गार गा-गात्र रोही हु । प्रोटोग
न्याराग्मारा तस्बो मे यही मूळ पर
इलेक्ट्रोन री सस्या मे फरक हु । परमार
हु । इलेक्ट्रोना में ऋण योजळी रो आने.
न्यूट्रोन आनेश-रहित हुत्र ।
अणु, परमाणु अर मूळ-कण कित्ता।
१० अर्थात १/१०००००० सेंटीमीटर
भाग हुने । दस लास अणुवा नै कन-कन
लबाई मामूली कागद री जाडाई २ बराः
और सरोवरां मे जित्ता गिलास पाणी है
पाणी मे हुवं । पाणी री अक बूंद नं पृथ्वं
रो आकार अक छोटी गेंद रं बरायर हुर्स
अक परमाणु रो अर्घव्यास मोटे तो.
मीटर अर्थात् अक सेंटीमीटर र कोई द'
१ उतारोप और चंपर्मन : डिक्शनर

। देवयानी (अट्टोमी) रो नीहारिका आकाशगगा र निकट री नीहारिका उठसू बताई यातां रोमणी न कोई १५ साय धरम लागे । उण सं यागं दुरी ताई करो नीहारिकाला आकाश विरारियोडी है । मगार री मब मू वही दूरवीण अमरीका मे पलोमार पहाड़ी पर है। लागियोह पाच रो घ्याम दो सौ इंच है । बा मिनय री वाख री तुलना मे तीन नाम गुणो रोमणी वटोरं । उण मू दो अडव प्रकाश-वर्ष ताई री दूरी पर मो नीहारिकामा देखी जा सके है । इण नोहारिकानां रे आगं काई है इण वात जाणण रो मौजूदा हालत में कोई साधन नहीं है। कित्तो विशाल है आपणो ओ ब्रह्माण्ड 1 और कुण जाणं इसा-इसा विशाल कित्त बहाण्ड है इण जगत् में, इण मसार मे, परमारमा री इण सृष्टि मे ! णमांत आपा देखियो के ओ जगतु भी, आप र नियामक परमात्माआळी दाई हो, मेक ही साथ अगोर् अणीयान् और महतो महीयान् दोनू है । सापी, पृष्ठ ७० गुप्त irmil पण हितो को पाप-- गुणी समिति १३ गुणो गपा १२५ गुणो ग्राहदय-- १७२८ गुणों स्वाति रोहिणी १हबार गुगों २७ हजार गुनो x মাং যুগ २ करोड गुणो ११ करोड़ गुणो' भाद्र ज्येष्दा नावां मे ज्येष्ठा, आप र मान र मुजय, राव सू यडी है। यो अकलो ही ११ करोड़ मूरजा र बराबर है। यो तो हो है मग प्रहरी भ्रमण-कभा समेत सगळी सौर-परिवार उप में सोरो-शोरो समाय गावे। भूरज पृथ्ती सू कोई ६३० लारा मीत दूर है। रोसणी का सेकंड मे १,८६,००० अक लाख छयासी हजार मील (कोई तीन साख किलोमीटर) पाल । सूरज री रोसणी न पृथ्वी ताई आवता कोई ६ मिनट लागे । पण पृथ्वी और सूरज र जिको नेडला-ई- नेड़तो नक्षम है (प्रोक्जीमा सेंटारी) उण रो रोसणी ने अ आदतां पार वरसां सू ऊपर वखत लागे । इण रो मतलब ओ हुयो के ओ नक्षत्र अठं सू कोई श्रदाई नील मील दूर है । सूरज और इण नक्षत्र में बीच में दुजो कोई न कोनी । वीच री सगळी जागा खाली जागा (असकाश अथवा योय यात्र) है । सगळा नक्षत्र इणी भात अक दूजे सू घणा-घणा आधा है। अक-दूजे मू अड़बा-खड़बा मोला री दूरी मार्थ विसरियोड़ा औ सगळा नक्षत्र आकाशगंगा नामक विश्व रे मोयने है । आकाशगगा में कोई क खडब नक्षत्र है। आकाशगंगा रो विस्तार घणो मोटो । उण र अक सिर सू दूजे तिर ताई रोसणी में कोई क लास प्रकाश-वर्ष लागे' (भेक प्रकाश-वर्ष कोई ५८ सड़ब मीला ₹ बराबर हुवं)। पूर्णण इण ब्रह्माण्ड में आकाश-गंगा जिसा-जिसा ताखानलाख विश्ा है। विश्व नीहारिकाना रे रूप मे दोस । इण विश्वा रे बीच में अपार साली जागा अर्थात् अवकाश पा याकाश है । अप्रकाश जाणे क विशाल समदर है। रामदर में जियो अनेक टापू तरता र जियाई अमकारा में विश्न जाणं रिता । ४ गोलीकरे : जर्नी प्र.रि युनीवर्स ५ गोल्डन युक बार अस्दानामी, पृष्ठ ७४ सागो, पृष्ठ ७४ ६

देवयानी (अडोमीरा) गे नीहारिका थापामगारपिट ",
उठेमू बताई यावा रोमती न कोई १५ माग वाम मार्ग
दूरी ताई करो नीहारिकाना बाग में नियरियोरी।।
मसार री मब पू वही दूरवी अमरीका में पनीमार पहाडी
मागियो नाच रोप्याम दो मौ च है । दा मिनन गै अगिरी
तीन साम गुणी रोगी वटोरं । उस मू दो बहव प्राव ताई गर्ग
नौहारिकावा देगो जागर्क है। इन नोहारिमाया र आगं बाई है इन
जागण रो मौजूदा हालत में कोई गाधन नहीं है ।
रित्तो विशाल है यागो ओ ब्रह्मा । बोर वुण जाणं गा-इमा
ब्रह्माण्ड है इस जगत में, इन ममार मे, परमात्मा री इण मष्टि में ।
इश मान आपा देपियो के ओ जगत् भी, आप र नियामक परमारमायाळी दाई
हो, अंक ही मार्य अगोर अणीयान् और महतो महीयान् दोनूं है ।
.
सापी, पृष्ठ ७०

No text on this page.

संपादकीय जागतो मोत रो दूजो अंक आप रं हाथा मे सूपता म्हानं घणो हरख है। राज- स्थानी साहित्यकारा अर विद्वानां पत्रिका र पल अकरी सामग्री अर साज-सज्जा में पसद करी, जिण मू सपादवा रो उत्साह यध्यो । इसो अनुभव हुने के राजस्थानी भाषा रा कति-कोविद जागती जोत न आप री निजी पवित्रा मानी और आप से स्वाभाविक स्नेह परगट करयो। इण वात पर जागती जोत रा सपादक अर प्रकाशक हर्ष अर कृतज्ञता परगट करें हक अक अर मे ही पत्रिका इत्ती लोकप्रियता पानण में समर्थ हुयी अर कग्नि-लेसका भी इण में भरपूर सहयोग देवणो सरू कर दियो । फेर भी निवेदन करणो जरूरी लसान है के आप सगळा इण वान सू तो सहमत हुमो के आपणी आ पत्रिका भारत री किणी दूजी भाषा री पत्रिका मू हळकी नी उतरं, इण वास्त पत्रिका रो स्तर और भी ऊनो दणावपो पडसी । परिवार स्तर रा निर्माता आप सगळा साहित्यकार ही हो। जिण भात दोई चितेरो चित्रम माई, मिटा र फेर माई; बो मिटावतो पर माइतो ही जात्र जद साई उण नं पूरो सतोप मी हुरः उणी भात लेखक रो परम भी विणी कलाकार मू न्यारो कोनी । कळाकार ज्यू लेखक भी चित्राम भाई पण समाज रे बाग उण न जई मेल के जद खुद पेगक री निजर मे उण री कृति मे फठ कोई करार, कोई भूल-चूक, नी रचे । जे लेखक र इण धरम ने सगळा साहित्यकार आपरे आग राखं तो लेखक अर उण रीति नऊची उटण में मोकळी मदद मिले। जागती जोत र सामने दो मारग रे-क तो ओ के आवं जिसी ही रचना छाप दी जावं भर दूजो ओ के प्राप्त रचनामा न मावळ परसने दाखप तो जदई राजी वं जद दा री भेग्योड़ी हरेव रचना ज्यूरो-ग्यू ही पर, अगदपी नी पड़ी रखें अपना पाधी नी पावं । पण पत्रिका स्तर ऊची उटावण साह लेसारी धीरर अर उदारतारी सपादला न घणी जारत । आ राजस्थानी लेगा रे आगे अनेक पुरस्कार प्रतियोगिताको भी है । पुरसार राजस्थानी भाषा साहित्य गगम, केन्द्रीय साहित्य प्रसादमी पर कई राजस्थानी-प्रेमी नी.ानी मारी तरएस हर माल दिया जामीरमी स्थिति में रारम्यानी RE

No text on this page.

संगम-समाचार
मिगसर वदी १, स० २०२१ वि०, दिनाक २१ नवघर, १६७२ सस्था री
{ राजस्थानी महाकवि राठोड पृथ्वीराजजी री वरस-गाठ ज्ञानोदय पारीक सावंज
समिति भवन, बीकानेर, मे राजस्थानी साहित्य वाचस्पति श्री मुरळीधरजी ध्यास
अध्यक्षता में मनायीजी जिण रो सयोजन श्री श्रीलाल मपमलजी जोशो करपो।
इण अवसर मा प्रमुख वक्ताा में सर्वथी सत्यनारायणजी पारीक, ग
मनोहरजी शर्मा, अबालाननी मापुर, मोहनलालजी पुरोहित, प्रल्हादजी व्यास,
दीनानायजी पत्री अर दीनदयालजी ओझा हा ।
मरथा री तरफ मू श्री सूर्यमल्ल-पुरवा, राजस्थानी-गपगुरवार, राजस्थानी.
पच-पुरस्वार पर राजस्थानी-अकरूपता पुरस्कार, पुष मार पुररसार सारू पोप्यो
श्रामवित करोजी जिण मे पंले तीन पुरस्कारा मारू ग भारी पोम्पा क्षेत्री है।
सस्पा री तरफ भू धरणातर भी मोपटी पोपा पापी है। प्रशासन-गायनागार
भी पणो सारी बिताया पूगी है। रण बादल गिरा निर्णय मेपोरगी उगावागा
आपलर मदिरीजसी ।
रागमारिणी सभा राजी बंटर पीनगेनमहामरी स्वामी मम
मे दिनार २४-१२-७२ नं पोरण सभा मे . मनोहरती एमो माया
पारण मानद सरिर पद त्याग-पत्र उपस्थित करो,
रिसोरो
पौर निर्णय लिमो गोराय रासायीन मारोपबरामी बप्पा
न और मध्य तीना मला माय मन मानसी गे विनिमय
द्वारा बनला आग म पलो होwws 'T मनी गिरसेरिणम
सगम मभापति भी नरोत्तमहामनी मामी भीरप गेला आमी-अप
एपपुर रियो । मादमी मोगकर-पत्र मार
भरपायी तौर पर भी मुखमयोrm.

. ARE ARMYTH:12. ruth Intik untain territten ver! E * ! " TH: "NET Hindi anti xer पर REATimitraman intra Hin fukeint.frrr karnit get x ful Puri Armer : HINERIT ATNE KRT. Fina n में योग भापनि ratheritो पो-TITो भार अंगी ही गया I am - FRIENT. Fan पाम मंजरागीभी होरा Ofmmar: कारण मानो मौत मारो भारपार मारपना स्पाररती-जागतो मोत नाttर भर पान- गती तातर! सीहोर वाल Rato संगम-समाचार मिगसर वदी १, स० २०२६ वि०, दिनाक २१ नवबर, १९७२ ने संस्था री तरफ सू राजस्थानी महाकनि राठोड पृथ्वीराजजी री वरसगाठ ज्ञानोदय पारीक सार्वजनिक समिति भवन, बीकानेर, मे राजस्थानी-साहित्य-वाचस्पति श्री मुरळीधरजी व्यास री अध्यक्षता मे मनायीजी जिण रो सयोजन थीथीलाल नथमलजी जोशी करघो। इण अवसर मार्य प्रमुख वक्तामा मे सर्वश्री सत्यनारायणजी पारीक, डा० मनोहरजी शर्मा, अबालालजी माथुर, मोहनलालजी पुरोहित, प्रह्लादजो व्यास, दीनानायजी पत्री अर दीनदयालजी ओझा हा । सरथा री तरफ मू श्री सूर्यमल्ल-पुरस्कार, राजस्थानी गद्य-पुरस्कार, राजस्थानी पद्य-पुरस्कार पर राजस्थानी-अकरूपता-पुरस्कार, कुल ध्यार पुरस्कारा सारू पोया आमत्रित करीजी जिण में पले तीन पुरस्कारा सारू लेखको आप री पोयो भेजी है। सस्था री तरफ मू एपण पातर भी मोकळी पोयो पापी है । प्रकाशन-गायता सातर भी पणी सारी किताबा पूगी है। रण बावन विमा निर्णय सेयीजमी उणारी जाणकारी आपले र मदिरीजसी। सगम रामारिणी सभा रीदूजी घंटर श्री नरोत्तमदामजी स्वामी रंगभापतित मे दिनार २४-१२-७२ नै हुयी। रण सभा में स. मनोहरवी शर्मा बाबापता है पारण मानद गरिसर पर सू त्याग-पत्र उपस्थित सरो, रिहो खीर करीम्यो और निर्णय लियो गयो ममरा सभापति हीन नाका रो पैरमरकामी मध्यस में भे और मध्य तीना Rit माय मू नभानमत्री गे निर्वाचनममाति दारा परम भग्य जागलोरो अध्यक्ष माना जी री मिनि कालिम भीगरोनमरासनी मत भीमाप रो वाम-पत्र मामी-अप्पस उपपुर भेज दियो । प्रारमोसमक्ष सामोसी गे पाप-पत्र पर मार र भस्थायी तौर पर मीचे मुगा नही रिगोपन Lt. रागमन

Are Artnet.12 1: mart
Hutur titi timrtm; tere:
Hitment in 10th rrr पो
Rakeste... TET
Arrangel : htttt Tiger FREE
Print Printinent
fuktint.fkrt. Furumigati fntal
murt maintenar Aur
गार NR ARE RELETEr inatnोदी
आपुनित in maratTER-Teी m4
गोही गाnिt REnframen frrert. Funr
काम जरा-गी भीतनराम:
साल भागतो मोत मारामासी माग
रपार करो-माता anninर र
रातो
तर! बग, सीहोर पान
म.रा.

संगम-समाचार मिगसर वदी १, स० २०२६ वि०, दिनाक २१ नवबर, १९७२ ने संस्था री तरफ सूं राजस्थानी महाकवि राठोड पृथ्वीराजजी री वरस-गाठ ज्ञानोदय पारीक सार्वजनिक समिति भवन, बीकानेर, मे राजस्थानी साहित्य-वाचस्पति श्री मुरळीधरजी व्यास री अध्यक्षता मे मनायीजी जिण रो सयोजन श्री श्रीलाल नथमलजी जोशीकरघो। इण अद्रसर माथे प्रमुख वक्तानो में सर्वश्री सत्यनारायणजी पारीक, डा० मनोहरजी शर्मा, अबालालजी माथुर, मोहनलालजी पुरोहित, प्रह्लादजी व्यास, दीनानापजी मत्री अर दीनदयालजी ओझा हा । सरथा री तरफ मू श्री सूर्यमल्ल-पुरस्कार, राजस्थानी-गद्य-पुरस्कार, राजस्थानी- पद्य-पुरस्कार पर राजस्थानी-अकरूपता-पुरस्कार, धुल ध्यार पुरस्कारा सारू पोप्या आमचिन रोजी जिण में पले तीन पुरस्कारा मारू लेसको आप रो पोयो भेजी है। सस्था री तरफ मू परण पातर भी मोकळी पोथ्यो आयी है। प्रकाशन-सायता सातर भी पणी सारी पितादां पूगी है। एक बारत विका निर्णय मेयीजमी उगोरीजाणकारी आपलं मक मेदिरीजसी। सगमरी कार्यकारिणी सभा रीजी वंटक थी नरोत्तमदामजी स्वामी रैमभापनित मे दिनाक २४-१२-७२ मै हपी। रण सभा मे • मनोहरजी शर्मा बारपना रे पारण मानद सचिव पद सूत्राम-पत्र उपरिधन परपो, शिरो स्वीचार रीग्यो और निर्णय लियो गयो साम रा सभापति तीन नमारोनल बादभीमप्यरा में और अध्यक्ष तीनो मti माय सूनां मानद मयी गे रिन रामभापति द्वारा पैनल भय मारण मसीहरी अध्यक्ष मानर मनी गनिनि कारी नियम समयमभापति श्री भरोतमा रामो श्रीनार स्मार-पत्र बरारपीसम्परा उदयपुर मे दियो । बरामीमा सामोरी पर यत्र सराय भापायी तौर पर नी मा सोनामरिकन पोन 1.

१०२/
१. श्री गुरमीपरजो म्याग, रामापति
२. मा० मनोदरी गर्मा, सदाय
३. ० नारायणसिंहजी भाटी, सदस्य
४. श्री रावतजी सारस्पत, सदस्य
५. श्री वेदव्यासजी, सदस्य
६. श्री विजयदानजी देथा, सदस्य
७. श्री सीतारामजी महपि, सदस्य
८. श्री रामनाथजी ययास 'परिकर', सदस्य
६. श्री सिंहजी राजपुरोहित, सदस्य
१०. श्री मूळचदजी प्राणेश, सदस्य
२१. श्रीमती लक्ष्मीकुमारीजी घडायरा, सदस्य
१२. श्री श्रीलाल नथमलजी जोशी, मानद सचिरा
१३. अध्यक्ष, राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर (पदेन सदस्य)
१४. निदेशक, राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर (पदेन सदस्य)
संगम
सू
प्रकाशित सहयोग रोती-प्रकाशन संख्या २२ जबाव में सगमः
कार्यालय मे इसा मोकळा कागद आया, अर आ है, जिणां में सगम र कामा में पूरी
सहयोग देवण रा वचन है । ओ क घणो शुभ लक्षण है, अर राजस्थानी साहित्यकारा
रो इणी तर जे संगम ने सहयोग मिलतो रयो तो सगम निश्चित रूप सू अक घणी
उपयोगी सस्था वणने साहित्यकारा अर साहित्य री स्थायी सेवा कर सकसी।

'जागती जोत' रै लेखकां सू निवेदन १ जागतो जोत' मे छापण-सारू अप्रकाशित, मौलिक अर स्तरीय रचना ही भेजी जावं। २. रचना कागद र क कानी हासियो छोड'र साफ-साफ आसरा मे लिखियोडी, अपना साफ कित, हुणी चायो । ३. दापण-सारू स्वीकृत रचना री सूचना लेखक ने रचना-प्राप्ति सू अंक महीने ₹ भीतर देदी जासी। ४. अस्वीकृत रचना पाट्री मंगानणी हुन तो उचित डाक-टिकट लगायोड़ो लिफाफो रचना र मायावणो चायी। ५. स्वीकृत रचना कद और किस अंक मे छपसी ओ बलावणो सभव नही हुसी । इण विषय मे बायोडा पत्रा रो उत्तर नही दियो जासी । स्वीकृत रचना र प्रकाशन खातर ताकीद न करी जान। ६. पत्रिका मे एपियोडी हरेक रचवा मायं पारिश्रमिक देवण री व्यवस्था है। रचना र प्रकाशित हुया पार्छ अक महीने रे भीतर पारिश्रमिक री राशि लेखक ने भेज दी जासी। ७. पण नंदी पावणवाळी रचना मे सशोधन करण रो अधिकार सपादर. महळ ने हुमी। ८. पत्रिका रो संपादन-सबधी मगढो पत्रव्यवहार सादर, जागती बोत, रेटिवाणे सू और ध्यवस्था-सम्बन्धी सगळी पत्र-व्यवहार मानद मची ₹ दिकाण म परपो जात्र। राजस्थानी भाषा साहित्य संगम (अकादमी), बीकानेर (राजस्पान) Trimur, nunta २. - HTHEIRNE 1. -nemlingilrh, RIT rist.ntri १. यो राशन १. विनामारेगा, हार ७. श्री गोपि. राम ..धी रामनापी का परिणाम ९. भी मिनी रामपुरोहित, गाय १०. पी पी माग, ससर ११. धोती मोरमारी पूरा, गाय १२. श्री श्रीराम नपमाजी जोगी, गाना पिय १५. अमा, राजस्थान साहिप बादिमी, उमपुर (पदेन गार) १४. निदेशक, रासपान साहित्य अकादगी, उम्पपुर (पदेन गदम्य) संगम प्रकाशित गहयोग रो नूती-प्रकाशन संख्या २९ जयाय में संगम- पार्यालय में गा मोकळा कागद आपा, अर आणिो में सगम मामो मे पूरो सहयोग देवण रायपन है । प्रो क पणो शुभ साण है, अर रामरयानी माहित्यकारा रोहणी तर जे संगम ने सहयोग मिजतो रेयो तो रागम निश्चित रूप सू अंक पणी उपयोगी संस्था वणने साहित्यकारी अर साहित्य री स्वामी रोता कर सकसी।

'जागती जोत' र लेखकां सू निवेदन
१. 'जागती जोत' मे छापण-सारू अप्रकाशित, मौलिक अर स्तरीय
.
भेजी जावी
२. रचना कागद र क कानी हासियो छोड'र साफ-साफ आखरां में
अथवा साफ टकित, हुणी चायोजे ।
३. दापण सारू स्वीकृत रचना से सूचना लेखक मैं रचना-प्राप्ति सूं अक
₹ भीतर दे दी जासी।
४. अस्वीकृत रचना पाछी मंगावणी हु तो उचित हाफ-टिकट सगापोड़ो
लिफाफो रचना र साथै वणो चायी।
५. स्वीकृत रचना पर और विरा अंक मे दासी को बतावणो राभव नहीं हुसी।
इण विषय मे बायोडा पो रो उत्तर नहीं दियो बासी । स्वीकृत रचना र प्रकाशन
खातर तावीदनकरी जाने।
६. पत्रिका में प्रपियोरी हरेक रचवा मार्य पारिश्रमिक देशण री त्रस्या है।
रचना प्रकाशित हुयां पाई और महीन र भीतर पारिश्रमिक री रामि मा में
भेज दी जामी।
७ पण नंदीजावणवाळी रपना मे समोधन रण रो अधिकार गा.
मरळ मसी।
८. परिसरो संपादन-सरधी सगडो पस्याहार माहर, जागती बोत,
हिमाणे सूऔर व्यवस्था-राम्बम्धी सगरो पत्र-पार पाना मी १ टिम,
परपो जाता
राजस्थानी भाषा साहित्य संगम (अरारमो), पोरानेर (परस्पान)

'जागती जोत र स्वामित्व रो विवरण अर दूजी सूचनावां १. प्रकाशन रो स्थान -बीकानेर २. प्रकाशन री अवधि -~-तिमाही ३. मुद्रक रो नांव --रपि अग्रवाळ राष्ट्रीयता --भारतीय पतो -माइन प्रिन्टस ११५३, बाग मुजफ्फरमान आगरा-२ ४. प्रकाशक रोनाम श्रीलाल न० जोशी राष्ट्रीयता --भारतीय पतो -राजस्थानी भाषा साहित्य संगम (अकादमी), बीकानेर ५. संपादक रोनांत --नरोत्तमदास स्वामी राष्ट्रीयता -भारतीय पतो --राजस्थानी भाषा साहित्य संगम (अकादमी), बीकानेर ६. उण व्यक्तियां रा नान -~-राजस्थानी भाषा साहित्य संगम भर पता जिका समाचार- (अकादमी), बीकानेर पन रा अधिकारी है हूं, श्रीलाल न० जोशी, पोषित करू हूं के ऊपर लिपियोड़ो विवरण म्हारी जाण- कारी बर विश्वास मुजब सरो है। धोलाल न० जोशी मानद मंत्री राजस्थानी भाषा साहित्य संगम (अकादमी), वीकानेर

No text on this page.

Amittimulanाप्रपा - ११११. मुरार राष्ट्रीयता पतो ५. संपादक रोमांद्र राष्ट्रीयता पतो -योगा मोदी -मालोर -राजापानी भाषा साहिार संगम (मरासी), बीकानेर नरोतमास स्वामी -भारतीय -राजस्थानी भाषा साहित्य सम्म (अकादमी), वोकानेर -राजस्थानी भाषा साहित्य संगम (अकादमी), बीकानेर ६. उण व्यक्तियां रा नान अर पता जिका समाचार. पत्र रा अधिकारी है है, श्रीलाल न० जोशी, घोषित करूं हू के ऊपर लिखिमोडो विवरण म्हारी जाण- कारी अर विश्वास मुजब खरो है। श्रीलाल न. जोशी मानद मत्री राजस्थानी भाषा साहित्य सगम (अकादमी), बीकानेर

No text on this page.

Nityotsava No.xxiii

Author
Umanandnath
Title
Nityotsava No.xxiii
File name
Nityotsava No.xxiii
Text
OCR done
Citation
1930
Published
2011/07
Publisher
Baroda,oriental Institute
Language
Sanskrit
Pages
166
Library
Shree Jubilee Naagari Bhandar Bikaner
DLI number
310936
Barcode
99999990314375.00
Scanning centre
Banasthali University
Digital publisher
Digital Library Of India
VMLT id
KWc9HfL73yx
Download PDF

Nityotsava No.xxiii