Bhartiya Vidya Mandir Shoudh Pratisthan,bikaner
Shikhroka Setu
Front matter
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शिखरोंका सेतु
शिवप्रसाद सिंह
भारतीय ज्ञानपीठ काशी
सामपाठ लोप ममामाहिन्दी प्रबा-१३
समाळा मारमिषामका
SHIKHARON KASETU
[tarn+Daleemsys)
D. SHIVA PRASAD BIAGR
Prhlation
hontiya Juoput Kaulu
First Editiog1002
Pance RL250
प्रमसह
मारतीपापहामी
मम्मति मुरबार वाराणसी
प्रपम सहरम १९६२
मूल बीन रुपये पपास नय पैसे
स प्रत्यः फुटबलसमैः कश्मिताय तस्मै
प्रीत प्रीतप्रमुरूपचन स्वागते म्याबहार
ललिअ णिवघहँ सैति महँ, कल्पलसा विचार किय
कम हाल मग मम्मडहि, जिण असोय कह फूल दिय
गुस्वाहि दुवेइ कत, गेह गमिय मावेन
कुटय यव समप्पियछ, सिंह सिउ पस्सायन
ललित निबन्योंके क्षेत्रमें 'कल्पलता का विस्तार स्मिा
फाय-विदग्ध पोंके मन-मोरोको चिनोंने 'भशोकके फूल' दिया
उनी गुरुवर दिवेदीको नेह भमित मावसे
फुटव फूलोंका यह स्तपक शिवप्रसाद सिंहने समर्पित किमा
मामपीठ लोग्रेदम प्रथमाला हिन्दी प्रग्या-१३
प्रग्बमाका सम्पादक-निवामका
जमीन
SHIKHAROV KA SITU
(Storwe & Bellater)
DI SHIVA PRASAD SINGH
Publication
Bhantry Japeth has
First Edition 1902
Patr Rs. 3.50
प्रामक
मारवीच हावीरकाशी
सम्मवि मुरमाय बारापसी
प्रथम सस्करण १९६२
मस्य पीन रुपये पचास नये पैसे
स प्रत्पः फुटगकुसुमैः कल्पिताय तस्मै
प्रीता प्रीतपमुस्तान स्वागत मामहार
ममत
ललिअ णिवघहँ स्पेति मह कल्पलता विध्यार किय
कम्प छाल मण मम्मडहिं, जिण असोय कर्ह फूल दिय
तिहि गुस्वरहिं दुवेइ कहं गेह गमिय मावेन
कुटय थवक समप्पियष्ठ, सिंह सिष्ठ पस्सावेन
ललित निबन्यों में कल्पलता विस्तार किया
काम-विदग्प जोंके मन मोरोको पिनहोंने भयोक्के फूल दिया
उनी गुलर द्विवेदीको ना
ममित भाषसे
फुटव फूलोका यह सतपक शिवप्रसाद सिंहने समर्पित किया
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प्राशावन्ध अपने कपात्मक कति पाचित पचारिक रमभोप निबन्योंका यह संकलन बाप हामि सौपते हुए में एक हरे वाचावन्मका बम्मन कर रहा है। एक सावनिक बाप मोर दूसरा व्यक्तिगत मान्तरिक । साहि त्पका मर्मस सुपी पाठक मेस पु माशा करता है कुछ सम्भावमाएँ रखता है - प्राप्पको मौर प्रमोम्मकी मान्यकी । उसकी यह माधा साय मौर स्वाभाविक है। किन्तु मेहको अन्तर्मनमें भी एक आसावन्ध है उसकी कमन मोर बाप्पता मी होती है जिसके भीतर बह पाठपके मानक बाग स्तरको बचनेका मनबानम ही सही प्रयत्न करता है। रचना प्रश्मिा मौर सूजनके बोरसे पुरारा हमा सातो तिके प्रति अपनी वरिप बारमीपवाके कारण मोहसे और कुछ अपने प्रयत्न मोर पीड़ाके प्रतिदानम न सही दो स्पीतिमे भाग्रहसे पारमसे सहचिन्तन या मामुक्ति की मासा करता है। इस संफनमें मेरी छोटी-बड़ी बाईस गव-कतियां संगृहित है। हतियां इसमा कि इन्हें मैन गद-विवाओंकी शीबाई परिपाटीमें सामनेका सचेत प्रमत्त मही दिया है। इस विषयपर मै सोपम बाये मिसेवन कमेया। इन प्रतियोको विषयकी पुस्सेि मौर कप्यकी परिषिको रेखते हुए पार मोमें उपस्थित किया गया है जीवके पोरन मोने मोके पुमके ममामम तवा निबन्ध चिन्तन । ये वृत्त परस्पर स्वतन है, किन्तु में एक मरेको सायम्पसे पाटठे ए मी रिसामी पट्टेये मौर यह मन्मा ही है, पोषितमी बनेक पटामो धौर मप्पनाबोंगा पन्म होता है। मतीत दोरम' बह बाट फल है मिस गबामास प्राचीन अपनी समस्त गप-विरुप मावियों मार रंग-वरप पम्मोके साथ दिसायी परवा 1
1
बीत मेरे ममपर एक पापाम-कभाके अपमें भक्ति नहीं है।
समरे गितम्यापी माविम मोर भले नवसपर सहमो हो।
तम् सपहर मोर मनापपई मिमी काह-सरित कामापर
वराह-सपके अपाय अक्षरोके पुरामेस पक्षिमारे पर-विहोकी तय
पर-उपर विपरे पो है कि यह सब कुछ मवीतका बाघ स्पून
कमेवर है उसकी पीवम-सुमन्य भरो मामा को सके मात्र है
महामि महो ममन्त निबुध पानी हरें वायू मोर मामके साथ
किनारोमे निगतर टकराती रहती है। में अतीव वारस इसी सिम्युका
उ म दिवाना चाहता है इसके नएमति का संगीत बापरे
निपट से माना चाहता हूँ किन्तु मा मह इनमें संकोच मी काहि
में इस बार पारारिक वटपर एक पन कार बमी ताबमधीमी
मीपियाँ वीर उपेक्षित बाल और को ही बीन मका। हो सकता है
मेरे ममका मबाप शिन इसे ही एलमि मानकर प-विज्ञान हो ममा
हो मितु पर निभप भी तो मापको ही करना है. पर वम भापको पुर
बयोग मान्यता पिण-बाम्मै बसम रहना परेगा तटस्म होना पड़ेगा।
बार नगेना का रनमाते प्रामने हमारे सामने मनुप्प
मौर बनत समा परीर और मात्मा सम्मवाक विपरम भए ममे पान
सा कर दिये है। विनामकी मिरन्तर विकासपोम पक्ति हमारे जीवनक
नामानिम प्रस्ताको मुम्माम समस्यामा समायाम करने सरा मागेमों
की मिरामेम मामा हो ही है। विज्ञान मनुमकी मपूर्ण मैपा-पक्ति
भोर गरा बुद्धिका परिणाम है। प्राति और मनुष्य के बीच समर्पको
मिटाकर एक सन्तुति समवोच-समबार स्थिति सानमें विज्ञामका
मोपशान मतुम्नीय है किन्तु विमानकी भागरिक प्रमिला मही मान
और समरे बारा होनेवाम परिलमा वास्तविक सापकी जानकारी
गभावम हम जीशारे परी पर होगबामे बोषि-विमरोही सत्प
स्वीकार कर देते है। विमानके नामपर मापुनियन परिमिक
सिनरीमत
मामपर परम्परा मोह सपा सन्तुस्नके नामपर मतिबाविताको स्वीकार परमा स्पापा मासान है। इसी कारण पर हमारे जीवनम एक भगीय तहकी विषमता मकरता अपवा दिमताकी प्रधानता विलापी पाती है। मानिक प्रक्रिया ही मधीनी पक्तिक मूममे निहित ता है किन्तु मशीनामे उत्पन हर बस्तु उपयोगी सत्य ही नहीं है । परम्पराणी तर विज्ञानक भी कुछ मन्पनिवास है कुछ सरिया है । बमसम समापनकी पसरत है त्रा- निश्यिाको।बो मस्ति विज्ञानकी सही प्रक्रियाको समानता है यह कमी मी मानवताक विकासकी एतिहासिक प्रवाह पेठनाको झुठका नही सकता। मानिक दृष्टिकोन इसीलिए परम्परा-मोहमा पर्याय मही है । भाम निकता वामकी परिस्पितिम इमारी दृष्टिला बह परिमाप है जो हम मपनी साम्प्रत भौतिक सीमाम अतीत वीर भविष्य रोोंगो मधिसे मचिक बनुमपगम्य बनामम सहायक हो। मामुनिकता एक प्रथम प्रश्न बिज है बो हमारे हर मनुभयको मान-विकासके बेठना-प्रवाहसे संयुक्त हानेका सकेत करता है। बामुनिक म्पति यह है या हानिक रीतिम ( यानी किमी वस्तुको सही या गलत तबतक नही माना जाये अबतक बह ऐमा प्रमाभित न हो जाये ) बीरनम मिटित हारे परिगतित होते मौर निर्मित होते मूम्पोतो समम सके मौर उन्हें चरिताप का सके। हम माधुनिकवाके मामपर हानिकर विदेशी मामले मापातकी भावण्यकता नहीं है। तक बुनि मौर प्रमावशी तुसापर सही तरनमा तस्लोंको एक ऐविहासिक साया प्रमाातनाम पोड़ते हुए सम्पूष प्रतिक मान पताकी उपलबिरे प्रकारमे पक्ति और समायको मफ्ना सर्वोत्तम देते हप पोवनको भावना प्रान करमही बेष्टा ही माधुनिकता भोर इस प्रचारक बाब मौर म्पपिनो सन्तुलित समन्व-योपस प्रस्फुटित दृष्टिकोन से ही हम भामुनिक या नया मानना चाहिए। मैने सबा इसी दृष्टिकोनस ही प्राचीन मोर नवीन मनुप्य बौर समान भूत और मषिप्य मम्नि मोर मागि' को देखाई ऐमा रावा करना सापब भाताच बफ नहीं मेरा यह मेरारिक प्रपात परर हा है कि में मनी सौमित पुटि भगायको ना पारवी पौर निमनित (Condition Teedो मवस्य यमाई मेरी माक्वाके पुमत नहीं वोकाटी बन मान हो सके। इसी कारण प्रतीक मन्द मने टस्थ परम्पप मुक्त हो रमम ( Ritesh) अपविम्बाम और टोने टोटके ( Tubcon and toterms) को मी माययता म स्पन्दनतीत बीमित मत पनिहोके गमका प्रबल रिमा को भाग पो रापित प्रसासेपोहे ममप मीरे रानमें निमारीको रुप पेि पोहए है। सम्पूष मुमप धर्मकायको चौती देते हुए प्रकरणी मारमाना वर्ष समस्त गर्म पोटामीसरोके बम्पायको ममरती हुई नारा बन्तम्की मायू-पीमा मारमा तमे नी मानवाबो ममीन सबके पारम्पस मोरित करते पका कर्म-कौषत तथा अपने पूरे जीवनको नियंप मापसे रेम-देवता भरोम मापकर मी पेशिता रही रामाती बाकी बनीभूत नरामी ने सभी हमारी विम्वापाराक अविस्मरपीय मोदीकी उपना देखे है। ये सभी प्रति सामातिक मूरोलो विवर। गितु मक्तियति कम महत्वपूर्ण विचारमाराएँ और सामना नही होतो निमकी मात्रा भट्टीम बेगह पातु चट्टाने पा-विगतमा भिय-सुबकी मुगल मूर्णिमा का निर्माण करती है । सम्पूर्ण विषम प्रबस्ति पिपरिप मान-बत्ति पूजाका मनोमानिक इतिहास में नये सिरे से सबक लिए विप करता गि भारी मा सर्पपूर्व परिस्थिठियोका मूल कारण यह है कि हमम पुस्म मित्तिका मनायता प्रमानवारपीमारीकी मुनि और सममै मन पक्लिकी मनम्न मम्मायमाबादी मोरसे इमने गा फेर की है। बार हम नारी-सी (Femnind Arctreatype) मा विमेव मार की अपार प्रतिमा परिचित होनेको मालमस्या माणे समान भारतम एक मिशिाम्मान पर है। किन्तु यह मारना सबका समाधि परातकपर सिवालही मनमी ही नही ही मी मिलकर सेतु मामकी मु-मुममा बोर महत् गस्यमे परमात मी हुई है किन्तु मनधिकारी पतिपत पायोको ही दृष्टिमें रखकर सम्पून उसको गैरमा कहना रचित नहीं है। मैविक मौर मन कि मूर्योकी विजेचना 'बेहि मम पवन न मंचर में मिलेगी। 'देवी मेरी प्रामसम्ममा' कहनेवासा तान्त्रिक सस्य पिक सुन्दरी एकत्र बनविपहको अपनी पतमा मानकर बिस एकान्त समपनमौर बनन्म रामास्मिकताका परिपय देता है यह समूचे स्था विश्वको स्पचनसीप निवारमा बम देती है। यही इस सापनाका इस्प था। इसी उम्मादिनी बचिमाय स्थितिको माषामे बापनेका यत्किषित प्रपल उस निवाव किया गया है। इसमें मायावेस विधायी पोगा' किन्तु महतो पटापत्ति ही है। मवषिप्यास बार भीमोके पेटमे कमी कमी बदमुत सत्य मि एते है। इस परीकी कपार्योम मा बागका इशिवारी का रियास करेगा किन्तु संसारफे प्रत्यक प्राचीन कबीपम प्रचमित ये पहानियां स्या सिर्फ हमारे मानस पटल्पर कम्पनाको उरही छाराएँ ही है? महीं इनके भीतर हमारी मारम्भिक सामाजिक स्थितिका पसलियो मन्तवमाम मौर मिश्रणका किस्मयकारी इतिहास छिपा है। 'पशु-प्रेम मानुपनार' इसी इतिहासको पुननिमिति है। प्रम ममम्त स्प है किन्तु माई-बहनो उत्सर्ग-मूम प्रमका कोई समाब नही । इस बद्धितीय राब-भावनाके विकासबीकमा तीन और एक लिपि में परिए । यहाँ यहका सखमी पा सकती है कि क्या प्राचीन सास्कृमि पस्तु- तत्त्वका विलेपम करते समय बाप्यात्मिक महममें पड़ना मावस्पक है। मम्यारम पर कुछ बना सहो या है कि हम बचानक इसमे पौरा चिकताकी मन्द माने भगदी है। ममीनका वाम भी इस सम्बक प्रति हमे माकोसी भर देता है। किन्तु इस तरह की स्थिति मौरो लिए स्विनी मी स्पृहणीम हो साहित्यकारक थिए तो कमी भी पानीय नहीं क्योंकि उसकी रचना-प्रश्मिाका महत या बंप मायास्मिक नही तो और पाई ! स्ल मौतिक पदार्थों तक तो भारका विशाल भी सीमित मापापन्य । मही रह गया है। इसमें उपसलियो निरन्तर मृति बाह हमेमरको मेरफर गहराम सोमी परिचयोंके मापसे और सनक बायत्तीकरणमे भास्या होती जा रही है। कौर याने एक दिन मात्रामा पाके मस्प बो हमें भाग नितान्त बाम्पनिकोर मनमा प्रतीक मानम हो मानिक प्रक्षिश विपन नाट्य प्रमाप बन बैठे। और घिर पाहित्यकार तो मनोबमक्षा प्रामा होमके कारण सिई स्यूत निय जाए तमको ही सत्प मही मामता उसके मरय मैतिक गनुभवी मौ कम पभाषित नहीं दबा करते । अस्तु । 'बोते गोते इत्मा सतिया विशिष्ट स्थानो होम सीमित होती हर मी पेस्लिामिक मापनिक प्रबाइक्वनाकी महत्मारासे संगोषित करने का एमाल करती है। कापी जयपुर मामा भौगोलिक काममा भर माही है। पापा-सेबामे मतीत और भविष्यको परसरयरोपी विधानाम मम्बाबमान प्रयाओंका एका समूगर-मगोयन मी पिलायी गोपाको पन्हें माल ऐतिहासिक मामिला मन्म ही मही गमावा कि सारित भ्यक्तिव परान करता है। मौ मसान तो मानो मरमुने काम पटापर मनुष्पमातिकी पूर्वापर, मामत-बनायव बस्ति-आदिको विकास याणा का चिट्ठा हो कि रिये रे रहा है। तीमाल पाहिरिपक भूपासक पिता-पिउरो पनि सरकी बम्ममताब्दीपर लिवे 'ग्यास पवारका पाकार' मीर्मक औसको प्रेकर बम्प मिरव सम्बन्धित साहित्यकाराही मचानक मृत्युकी या मुमार मोकोमारक स्पर्म सिसे यो। शिसे तीन-चार मि एक बार एक सम्म यो ऐ मे निषतिको बिमको बार-बार मिरा भासभमे टूट टूटकर भा-ममिको इन अनुपम तियोमे गोली रही। और मेग यह दुर्भाग्य 4 मतिया में ही दूरी वा मेरमाधर्मगमे पापा और प्रसार पाठपर बासीम भी। मोम का महिमापको और पत्तिवादी महपूर्व पर्दामो मसिनोम ही माम्बा करों है। सिगरी मनु मैं कुर भी इस प्रस्नपर मपने मौतरको कुरेरता या है। इनमै कुछ ऐसा जरूर होमा यो मेरे रमत-मोसके घरीरके मीवर सरित पेनासे सायुम्प पा पावा होमा । साय मेरे इन सवारों में इसका इस्म भी मिस गाये। भी मिगे तो कोई नहीं । किन्तु एक पीर माप भवस्य चोचेंगे कि इन म्मक्तियोंके निर्माणमे वामिक्या प्राचीनता प्रमोम मौर परम्परा म्पक्ति मौर समाम तमा र बौर मास्वाना ऐसा अमृत समानय हसि पापा ? तप भापको ऐतिहासिक प्रवाह-वेतमाकी विपुत् शक्तिको प्रक्रिया का म्यावहारिक दोष हो जायेगा ऐसा मेरा निवास है। निबाव चिन्तनकी रचनाएँ पारावाहिक स्पसे बन १९५८से प्रकाशित होना माग्म्म हुई थी। इस वा समसामयिक हिन्दी नबनेसनकी समस्याला पर सहबिन्तम । एक स्नेही बन्नुके सौहाई मौर मानहपर यह काम उपमा पा। पर मा मे इसे म्पगित कर देना पा छतो इसमिण किये बक्षिसे बपिक सीरियस' होचमी बोर कुछ इसलिए कि मने मित्रों बोर बन्पुट्टै को इनसे परेशानी होने लगी। इकिल मियति सिलसिनेमे इनको रचनाका कुछ बाए उपचार भी म्यतामा है इसलिए यही यह भी पता कि इस संग्रहके भनेक निबन्माके पीछे दो यत्पुबोके बापही प्ररमा भी रही है। इनमें से एक बन्दु मुमसे असन्तु इसपिए हुए कि मै उनकी मम्मावनाओं ममुपम उत्तय मानी में शिल्पमैं उनकमावसको नपा पा। पूसरे बडी माध्यात्मिकता मुझे भारी कमी। माहास पाह मय होने हुए भी मैं सबका स्तह-पात्र बना पा मोर इसके लिए मै सभी पापामारी। पिस्पकी बात धापी इमणि दुछ पमान रचनामोके सिपपर भी निवरित है। सम्पापटीप मालोचनाके मोरार मेरे सहामी भरस्म हो बसन्तुाहोंगे कि मम हाती बम-काम्प सेष पश्चि-नक नियम संस्मरम मा यात्रा-बनोंमें से किसीकी मी म्पदा परविका मासे पान नहीं किया गया है। यही इसमें भी पोपपन है कहीं बारिक एकाप (एटीरिपर मोनोगय) ही मुमुप्त वना-प्रवाह (स्ट्रीम मार कान्मसनेस) भी स्मृति पुमरापन (मेमरी प्रस-4) तो कहीं सांस्कृतिक सन्दर्भमता और कहीं ऐतिहासिक बाबा (हिस्टो- रिका प्रावि) कही नाटकीय परविका अनुसरण कोयाँ मुक्त गर्मवीय विधान । बाहिर यह सब क्या है? यह मेरी विषमता है। कापारी मै श्रमीको परीरका पमहा मला कोट एस भी नहीं मान पम्वा । पायब धापनहाबरका यह मेरी बीके बादका संकेत FE 'मठी मार पुपमही मन-पति ममा बम मस्तिककी विचार मानमामोंकी मार माजति मात्र h The style is the phywognomy of the mind और मेरे निकट पसकी माषना मस्तित्वका निमन है एक बाप्मारिमा प्रश्मिा । और मैं यहां सहायता के लिए मम्मू मानस्रकी पे परितमा पदत करमा style is a peculiar recasting and heightemng. under a certain condition of spiritual cratement, of what man has to my in such a way us to add diese nity and distinction to it. - (On the sodes of Celtic Literature ] या मामारिमका पौराणिक माध्यास्मिाता नही है। यह प्रम मापि नही होना चाहिए कि माम्मास्मिक माबेस पूजा-पाठ या ममाधिमे किसी भी प्रकार सम्बन्धित मान्तरिक सम्माता और गर्म बस्तुमें गम्की ऐकान्तिक एकापता हीको यह विशेषम रिमा गया है। मेरे निपट रहती हुई वस्तु और उसकी ऐतिहासिक परिमाप्तिको मीमिन चम-शक्तिम समाहित करमेका प्रश्न पाई मौर यह अनुमति बिस प्रकारको विपा सहजपमे पर हो सके रमीम मे सामने प्रपत्ल किया गया है। ये सपना बोका बिमि टीमे बैटरी है मामही यह मन मेरे निष्ट को वाम महत्व नहीं रखता। मोम पिसका सन
चारिकता है, भाषात्मकता है वात, विपम मौर म्याच्या मा
में सभी काम पस्तु के समायके भनुम्म अपना समय प्रहप करते
रहे। मौर मैने विषय विधामककी तरह इन्हें कभी भी वाहित करनेका
प्रयत्न नहीं यिा है। मेरा पप्प बपनी पूरी क्षमता साप इनमें गमि
मत हो सका है या नही इसपर प्रबुद्ध पाटा सयं ही विचार करे।
स निरनके साथ ही मै बापको पिवरोका यह सेतु समर्पित कखा
है। मानवता विश्वासमय मास्वापूम पचित पक्तियों मोर निधार
पाराबों घटनाओं पर सामकि पितरोंपर पित"मैने इन्हें अपनी
सीमित सक्तिसे येसनका प्रयत्न किया है, बाप भी इन देशो मा हे
हपि अपने पसे इस बार मेरे साथ इस यात्रापर पहें यही मेरी
प्रापना है। बीवन-यापामें कनी बाप को टोल सिसरोका एक
साकर सहारा मौबिएमा रास्ते परमोका सोवत बम मापकी काम
हर-बापका पथ मंगमय हो" । बस ।
मार्ग ताक्पस मस्तस्त्वप्रमाणानुस्म
सम्देरों मे तदम् बलद भोप्पसि मोरपेयम् ।
सिलिका शिखरिषु पद न्यस्म गन्तासि यत्र
सीमा पीपा परितपुपमा सोतसा चोपमुम्म ।
प्रशी
बिमस ९१
}
-शिवप्रसादसिंह
।
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अनुक्रम
१
स्तोतके तारण
मगन मिमी गवरी
पमिमेस्वरम का
वाराका पाप
गी। मेरी प्रारूमा
पठ-पम मानुषमारे
रारान मारम
मेदि मन पणन संचर
तीमधेरे । एक नितिन
11
५५
44
.1
--
१
भबोले बोले
महायमस्वममें मी
पमहान
गइमारतानामगर
माससकी बाई सीप
पुष्पके प्रमावम
पात्मविसर्जनकी पुष गाथा
निराशा
दास पवरप्रसाचार
-
-
मामी दुस गयो
पास्वरनाक
मागी बीवनम सामिमानीमाकार
H
.
बोनम-मरी निमागीम'मावादार'
मिम्बे
निबन्ध चिन्तन
मुदाय और साहित्यमा
संभपुन बनाम मनास्माको
१५९
में और हम
अतीतके तोरण
*
*
*
*
मपटन मिमकी गरी
* दक्षिणवरने कहा
ताराका पाप
देवी । मेरी प्राणवसमा
पशु-प्रेम मानुफ्-दारे
* टेराकोटामा सास
बेहि मन पान म सपरे
* तीन परे : एक तितिक
पारपरम
*
*
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मटन मिप्रकी डायरी बीस दिन बीत युके थे। महाकाहाके विरार बिहगके पन-गुस फ्लोके बीस पिक कम्पन । समयकी ममन्त पाराम इस पर बीपि मिलासका मूल्य भी क्या ! फितु बीस पिनकी यह मासी राम पाने पो मेरे एि पर्वतकी तरह तुप प्रतीत होने सगी । भानतानि प्रस्यूप होने पर नहीं है । एक परे बाद ही उपाकी मीम सोहित मामा पूर्वयि क्षितिम-ठोरको ने लेगी। मपन मिपके द्वारपर पिबर-बर सारिकाएं अपने बम्पस्त सम्बोम 'सात प्रमाणे परत पमान का पाठ बारम्भ कर देगी । माहिमतीको धरु अट्टातिकाजोपर स्निकरकी सारसमी किरणे मर्मस्प मर-नारियोंको प्रभावीका पर सुनायेगी। अपनी सत्यास भरी पानीमें ये कहनी 'मादिप्मतीके बियन पपिस नागर बोर देवियो । क्या तुम्ह मालूम नहीं कि पक्षिणापथके मन्यासी कर और सम्पूम विदम्ममाझीके भकरण माघार महमके महा पास्माषका यह समीसमा रन है ? रा तुर्म माझम मही कि सम्पूण भारत रोष बाग का न तो इस प्रकारका विपित्र प्रास्माम कमी हा मौर मभी होमा ? क्या तुम नहीं जानते कि इस शास्साबमे नियमके भासनपर बाचार्य मगन मिभी नियुपी परनी सरस्वतीरुपा देवी मारतो समय मिराबमान है? और मै पर एक बार इन बीम निति बारेमें सोचता है पो माने कैसी वितिक्षा सीमाबारे हाय भर सता है। उस रिन मेरे पिता का पार पा । ठीक प्रत्पूप वेगमें लिसीने पुराना। गर्ममा साकी भी । सारिकाएँ कर पंड मारने सगी पी। भयापित मम्यानिके मगम मिमी परी कोरेगी यह बह्मचारी मायममें गुम मावा पा। प्रारम संभातीका माना डाव- नियन मो मेरे संसारी मनमें प्रमलकरमेपर भी काप उमादी गाया मा । ममें रसकी गौर हीरम मेनासे देखोए रहा मंयम और मनुगामाया बापारी के लिए स्वाम्म हो कुछ है ? उसने कुछ कहा नहीं । वता-पुमा सरीर पाम मना मेरे मामा कोनमे पूपित कपिकार सग है। उसके चेहरपर न मोम कान माह 'जो क्या भाविक यार इस पुण्य परंपर प्रभारी नाभाव नपान मिक र सामापकोटबारे विवापिव हुमा है? मस्कारी सरके गलयको मप्पम मिश्रमे कमी भम्पाकार मही किया है । मैने पास बार पूल पारी अतिरिक्षको सब मा करावाहिए। 'साया उसयपीहा । गाव रामपा भी मेरे सपरोपर हसी फूट पड़ी थी। नारी- की निर मानस पीसकी तरह निावेष्ट प्रावी गरेफर अपन भो मियर ससका राम करते र हापा 'मान मियो बारसे पारमा- कामी कमी रिक्तात नही कोटा, बाप मेरी तिमिमताम पंच- मानिकी वह पूति होकर विमाम करें कम सूर्पको पहली बरबरे माम ही माफको मनोसामना पूरी करने लिए में तत्पर एगा। 'स्वावमा समचारी समाची बरोपर भी एक धीच रेरा सिपी और मिनीपी बोर राषिक अपसापर प्राचामे अपवरित प्रथम मोतिनताकी उप विज्ञासा मोर विषयको इस रेखामे मया मिलने of मारस देवा बहे बह गफ पनि बरेपा । मोम पिषी दोमवारी पहा पमा पा-साम्बा-बामी निम्मको मिति समम मानापने मन करमया ममम मिमी समय मुनिको माविकरके। मितममा 'मसार पिप्या ह । ब्रह्म एकमेव सत्य है! कम पीपो मृत्यु मौर बम बबनम पांबते हैं। शाम इस बबनका सर करता है प्रम पारीने गम्भीर मग्नमें कहा नाचाय यही मेरी स्माफ्ना है। मै इसपी पुष्टि के लिए मब प्रकारसे तत्पर है। देवी मारठी स्वय निम्पिक है। मिचिए मुमकराकर भारतीने ब्रह्मचारीकी मोर देखा । पारिपातका रंग उमरसे पितमा भी ठहो स्पससे मेपटियां हो पाती है से कौन नही बानता । एकरपे बहरेपर हमकी मणिमा दौड़ गयी पी। समचारी कह रहा बा 'माचार्य मवि मै इस धास्त्रापर्मे परारित हुआ तो पापाय प्रेम मेड़कर गृहस्वका स्वेत वस्त्र धारण कर मा मौर यदि बाप परारित हुए पो भापको इन स्पेठ पस्मोले स्थानपर कापाय पारप करना होगा। पास्त्राव भनी विश्वाम-भरी वामी इतनी मगि उपपत्ति और प्रतिद्वन्दीको ऐसी कठोर सकारता मापदही कमी सामना करना पाहो। 'सम्पासो' उत्तरापथके सम्पून माम्बिवाय माचार्योको मंत्रस्त करने पासी पापीमें बचानक मन्द्र मेष-मनिकी परिमा समाहित हो ममी बी 'बम् मस्प है। मत प्रामाम्य है। बीष और सह कभी एक नही हो सकते। बीबके कम समापन है। पेरविहित कम ही उसे सुख प्रदान कर सकते है-यह मेरी स्थापना है। यदि मै पराजित हुमा ठो संन्यासी- का कापाम एनमरे लिए प्यार मीर परिमाप पराजित ए दो ऋपि मिनिको कम-मीमामापर युगरापात भग्नेमा म मतमा के सन्मान मिए माप गृहस्प होकर मेरी मिप्यता सीकार करें में। -और मान वीस दिन बीत गये। मजे कर्म-मीमांसाकी महत्ताको प्रमाबित करनेके लिए भी ला म रखा। इतिहास पुराण स्मृति पग-कोई भी ऐमा मन न अटा बिमझे निगूर बतराम्ने पाकर मैने गफ्नी मान्यताकी पुष्टि लिए प्रमार्यो सम्बान न म्पिा ! मपन मिभकी माय मिप्रसीबो बारारिता पुषि पतिपरामणा मारीकी तप निरन्तर एक पैरपर खड़ी रही। किन्तु माह, गाने बामपारीकी बानोम कौन-सी ज्योति है को कमी भूमिम नहीं होती! उसके मपरोपर मन्दार पुष्पकी तरह तीन मन्यमाम मह कमी मुसकराहट है बो भी सुप्त नही होती ! पूर्व नियों और बारवामिती तय मारिधिको सम्म करनेवाले सौयतको विस माया गमे पुटने टेकने के लिए विषय म्यिा वा बह भाग एक मामूली बाल- शिगुमे टकराकर शिव-भिन्न हो रही है। बमबारीकी वर्कभारा अमर पसस्विमीकी तरह कभी प्रतिहत-गति होनेका माम नही मेठी। मैं बानत मार गास्वापका मन्तिम दिम है। मान मिनय होकर ही ऐना। 'मान मेरी मस्तरारमा काठी तुम एमाले नर पापान-समोसे प्रपचारीकी इस पाबायला गेमही सकते। वार तुम्ह ममी सम्पूर्ण कायाको इस जम-मरे सम्मुत टिका देना होमा । में उसके मिए भी तत्पर रेविजमिनीय माग्यवानोको प्रवियो लिय में कुछ भी उठा न पगा। मम्बादो पहा पा । वाम्मुरका पर मन्तिम दिन पिठना उप- मूप किरामा माथापा विधाएं विनी शान्त । पिचरस्म सारिता मि शम्प सौम गे से इस परम परिपतिमा मनमन कर रही थी। माधापकाने हा बाप मेरे प्रत्यक बत्तरमबहीर हे है कि प्रविमानकी पुष्टि नहीं होती। यपि मै पर मानता है on स्पानाम मत्प है। बस उनो समझनमे हि मेर। और यह मेरा मापसे अन्तिम प्रम है यति मारतीमा निपय माप पामें वो अपनी पगप बीमार कामको तैयार है। मै मारमे उत्तरको मापना करता है। मम्मामी पृठे मैंने कहा। माप बदो विषयम मरी मारो भाषा भापम पहनकर पितु शिवरोग सेतु १ सैकडों युति-स्मृति एक साप कह कि बनि समुप्प है वो इसे प्रमाण मानाबायेमा? मेरी बातोंके सामने से सहस्रों सूर्म एक साप प्रमाणित हो गये। पम और प्रारसिक सत्य सम्बम्ममे यह एक मधुवपूर्ण तक पा। माम मुझे अपनी सारी मान्यताएँ मपन पाराम पा रही थी। मवि कहाँ हो 'ममत् सत्य' का विरोध होता है, कई ना वो बेद परत प्रमाणे' सिर होठे है। मौनका एक मिविष पी मरा मात्र मेरे मपरोंको कार बैठ गया। मेरे ममेकी मयती माता मेरे मन्तहसे उद्भूत वाससि सूब गयी। मारती मासनसे उठी। बह निर्धायक ही मही बातिया भी दी। मोसी सम्पामी माप दोना भिक्षा प्रहमपरें। निषम सुना दिया गया था। मेरी पत्नीने प्रति दिनकी ठाए 'सग्यासी माप मिक्षा और भाचार्य माप मोबम प्रहम कर' नही कहा । नवयुवक बह्मचारीके सामने मावा मुकाकर मैने कहा स्वामी में हारा किमतु मग मी एक छका मनमें है। माप कह कि मेरी हार मानकी मक्तिगत हार बीपि मिनिकी मान्यताएँ जमल्प नही है। करने को ममत्वसे कहा अपिकी मान्यताएं भी मस्त मही हो सकती । कर्म मन परिके साबम है। उन्हें साम्प मामनेस हानि होती है। कर्मस र पिसम ही वो शामका उदय होता है। पिने कर्मको सीमितपक्षिके लिए मायापक बदामा पा उसके बाद बारम्बर म पसनेके लिए नहीं। पापाय दूसरे दिन बाचार्य कर मानेबारे में रितु उन्हे भारतीने रोक लिपारपर उमड़ते हुए जन-समूहको देखकर मैने समझा कि ये वाचाय- को निराकरने बामे है पर उनकी मां एकविविध गोयस परपरा ही पी। वो क्या पो मैने सुना वह सत्य है ? हाँ सत्य है। मगम मिमी गवरी मारतीकाही को 'सन्मामी मापसे मगन मिथ पगमिठाए- रितु यह ममत्य है। मारी समा बाबयंसे पक एनपी। बापमे मपन मिपके बरंगको ही परारित किया है, मुझे परामिव परमेरे पास ही ये बापरे शिष्य हो सकते है। 'देवी में मारीसे धारमाय नहीं करता करने कहा। मारठी एक दुटिक हमीम माराको तिर्यक करके बोली 'मह में पानती हैं। बापने अपने शास्त्रार्थमे एक बमह कहा था कि नारी मदिरा है।बाचार्य या मापका सर्व-स्थापी बहा नाराम विधमान नहीं ? मरि है तो माप एक ममान प्रतितोकी सालापाचमानो स्वीकार करें, मौर परिमही पनी मिया माम्पतासे विरत हो। करमे सिर मुकाछिया बा। शास्त्रार्थ करके बिए विषय । पूरे पाय दिन बीत पये है। और मामको मा भीमा रजनी मझे अपम शास्त्रार्यकी उस मन्तिम राषिकी माप दिवा रही है। भाहिमतीम इस पारमाधमे बमुक्त शासकी मुष्टि कर दी रिपूरसे कोम एक पार राभि प रहे हो किमी भास्पषमे सिंपल मा रहे है। पास्माको सिए प्रथिनी मामनेभामने बैठ गये। भारती बोली भाचार्य भापकी तई और मुनिमे पार पाना कठिन है। मैं आपकी पिया कमको मारबत एक प्रश्न है और अन्तिम । 'देवो पू। भारती अपरोपरी चिरपरिचित कुटिम ईमी ज ममी। माग्य- किरण-सी कोप रटमामि स हमीसे में परिचित है। बह मोसी भाषा कामकी कितनी कमाएँ। रमको विमिप्र स्थितिमांध परिषय वीगिए । एप मार गुगल पपम म सितिमि कोई मार होता है ? परि हो तो बुबती और पूरा भर मपी पृषा मिपा सेतु २ प्रविधिमाएँ बताए मारी समा स्तम्भ । ब्रह्मचारीका चेहरा हायसे मारस्त हो गया। उन्होंने गरदन मुका की। देर मौन बैठे रहे। मार्स मसीव करुगासे मर बापी।पीरे-धीरे बोमे 'रेबी मैने पराबय स्वीकार कर ली । मेरा ज्ञान बराई। मुकदाराकी तरह प्रभावित मासे भूमिमें विदित हो गयी थी। भारती फिर मुमारापी । यह भाषाकि पास मुटन टमकर बैठ गयी। 'माचार्य मापकी हारम ही मापकी जीत है। मापने इस प्रश्नका उत्तर न देकर व संभ्यासकी मर्माको वन्य का। मात दिन बीत गये। मै मब मपन मिभन हा। पोत बोके स्थानपर कापाय पहनकर सुरेम्पराचार्य हो गया है। सम्पासी। सांसारिक प्रपंचमे माम । किन्तु मनको सान्ति नहीं। बार-बार कोई पूछता है, क्या मिनिक सिमान्त ठने निराधार है? 'भाषाम' पातमाकर एक शिष्य बोमा 'सुना मापने' "क्या हुवा ? मैने उसे बावस्त किया। वह धीरे-धीरे गोमा 'बाराय पुष संकराचार्मने तो बड़ा बलम्प काम किया। पर-परते कहा ससने बाचायकी माता-भीमा येहान्त हो गया । पासोने नरें बम-मोही कहकर समकी अम्त्पेरिमें मम्मिलित होनेसे इनकार कर दिया। बन्दमें करने मपनी मकि मृत-भरीरके तीन टुपले कर दिये । वो हर एकोलोवारीपारीसे प्मानमें से पाकर गह-कर्म किया। काका चुप हो गया था। मर मममे मोदकी कामिन गयी थी। रिने अपनी मृत मकि सबके टूको मझें किये में उन्होने बर्मनापकी सारी बर्बर समाव-विरोधी मिप्या मीमामाको सिम-मित कर दिया था! मै हार बहुत पहले ममा रा किन्तु मनम समय में पम्म पो भान ही पटे। बज्ञानतिमिराबस्य बनायनसाध्या । पघुम्भीमित मेन तस्मै श्रीपुरये नम ॥ भगप मिमी गवरी दक्षिमेश्वरने कहा रमियर-नगीन भारतकी ममता परामामा माकासमामी-केन । पामे किस पडीम इस मपूष गुम्बकीय माकपनसे पूष स्थानको रेजनकी बमपी इच्छाहरणको मब पी पी।बाने कासे मरम्प माससाका अपमान पुन मेरी सारी बेतनाको परित किये गलता बारबार सब सामने दकि- मेश्वर है वो पाने पयो बह हरूप धान्त हो ममी है। मरीकी बचत पारा भी स्थिर है पाने मुफी मा सुस्त बत्तखोकी दर बझी ती पर मतिहीन-सी पड़ी है। उत्तरकी बाटिकाके हरे पृष्ठ-पटासपर मौ पम- पमा केरासि मगित काली मन्दिर भी रामायकी बात माराम्पाका विधात मदिर कम दुफिी सालार सम्मिलित प्रतिमाका पुगीभूत पन बिहा मामने नटमगखम्भेसे पीठ टिकामे एक सबके लिए खाई वो पाने पिवनी मिश्री-सी भाषा कहे संघसके भो स्वर मना हत नारकी तरह अपने बमुष्टममें समेटते है । मन पर इस बीच स्परमपम बनाता है। मी मटमापके पास एक दिन पनि मीमा मिसने सत्य पुकारको प्रायन महापा। मादूगरी कहा पापोताहा था। रोवे हुए रामप्पो परप हापको अपने मिरसे हटाकर मरेगने कहा 'मेरे प्रति मारी यह मामलि तुम अपने गमसे नीचे गिरा देगा और तब रोग-रोगी दीसो मासोचना अपने मान्तरिक स्नेहकी विएपना मन मम पालापको निनागे परेशान होकर रामानमे कहा गएर शितरोध सेतु में बब मपिर न सुन सगा। मां कहती है कि मैं तुम्हे प्यार करता है क्योकि मै तुममें ईश्वर देखता है और अब तुममे मै ईसर न देनमा उस विनसे तुम्हारा मुंह देखना भी मुझे पसव म होगा । माफी सक्तिके सामने नरेनने परमे टेक रिये । सामना धौर पर प्रमको नमस्कार मानमेवाण तक मनामे दूध मया ।पम-समाजमें दीमित विवा काग्रीकी मूतिके सामने प्रमत-मिर मा र मया। म्पमसायारिमका इपि महामाबमे निमग्न हो गयी। किन्तु, विस्फानन्दने पदि मुटने टेक दिये तो टेक दिये उन्हें पूषयम- का योमी पापा प्यारा पा बो रामहम्मकी प्रार्थनापर स्मके मिशन का रंग-रेशान्तरमे प्रचार करनेके लिए नरेनके स्पर्म मातरिशमा पा मौर मान मस्मी पप गीत चुके है। अस्सी वपमे पृमीने दर्जनों बार ममा भावरण पारण किया है । मस्सी वम मानव-टिने पीसियों मंजिसे पार पी है बीसियों सोम उसन पुरानी सीमार्मोको योग नय पीर्तिमान बनाये है। मात्र मानव-इशिकी चपन्ती सुदूर नमत्रोंमे फहरा रही 'मान या प्रतिकी एमेच सीमार्मोको तोड़कर अपनी सत्ताकी मणि बेयताकी निरन्तर मोपमा पर रहा है। इसलिए, माय बर मासानीके साम वाम्मारिमा बमत्कारोके सामने घुटने टेकने के लिए मजबूर नहीं है। माय उसके गर्योत मस्ततो मुका देना पसना मासान नही है। मुगुप्सासे मुहको गित कर हाइनरिक शिमर पता 'यह भारत है, जिसने देवीको कुरतम सपमें उपस्पित किया है कासी बसीम-मय करा कामकाय नारी बोसोपड़ियोके धमे निवास करती है। (Dic Indanche Wellnutter page 190) स्टमट फिगर इस भयंकर देवीके प्राचीनठम सर्पोका सन्मान करते हुए कहता है, 'उत्तरी जिम्मे चिस्तानकी पोब नदीको बाटोमें प्राप्त में बेटी मूर्तियां बिनके सिरपर पहिरने का पमा मा कम्पसका ट है, वृत्ताकार पशु-मूषक वाके कमर पोका समार है, मालकी पोचकी तरह नाक मौर बन्द सिके मुँह है निषय ही उस देगी सम्म है मो मतोंकी सरमिकमही भावी मिसके लिए मि मायके साथ गाने भी रखे गाते थे। (प्रीहिस्टारिक इपिमा पुरा १२५-२५) मृतकाती सरक्षिका देवीके माधुनिक स्पमें भारत दुर्माकी पूजा होती है, मो हाइनरित सिमरके मनुवार हिमाम्पकी कमाई विनाटिका है, जिन्हे पारंटी भी पहा है। एक परम मिसने १८.१ में इस बोकी पूना पेशी को मिलता है कि प्रतिदिन बीस मैम बाई सौगारे, मोर ने ही सूबर मन्दिरमें काटे बाद में। बहिनीके नीचेग मुप वारे भूमसे भरा पता बामौर दिनमें का बार बार बार इस सुबामा बावा बामौर बहन-सना पास समान मौतर परमार बहामा लिए गा रिया जाता था। कालीपार ममताका मन्दिर प्रतिदिन होन- मासी भयंकर सिके लिए मपहर है। निसन्दाबोपारा मादर विश्वका सबसे बड़ा खूनी मन्दिर है। दुर्गा पूबारे रिगेम सिफ तीन बिना बदर ही करीब पाठ-सी बकरोंकी बमि होती है। कि गोपन सीने दिया है, इसलिए उसे प्रापकी बडि भी देनी चाहिए। (रिमा पूण् १.१) विवेपिया महसे ऐसी बातें सुनकर हम बामसे ठिसमिमा मत है कि हमें अपने को भी स्टोना चाहिए, किमया हमममे बहुवा मनमें भी गा का नहीं है'मा हम अपनेमे ही बार-बार महनही पुण्ठे किमो समग्माता है यह पुोंकी बहि मे मेती है! मनोमानिकप किइसमें नाराणया गुस्ण होने की बात नहीं है। हम भाविक नारी-मेवनारे विकासमा मुटम बम्मेपण करना चाहिए। पातक हम मागवितो विपतका निप्पल मनोमानिक अप्पपन नहीं करते हमारे मनकी समकाओंका कोई ममामान नही मिस मरता में भी हम पिपा दिमाफ्ता भार पिसमें परिमानिका मिना सनु है, संप है। इसे मुसमानेमे हम मसमर्म है क्योंकि हमने पुरुप-बेतनाके पप्पपनम ही अपनी सारी फ्ति महकर दो है। हमें बाब मारो-तना के मप्पयनकी विस्पणको मावस्यकता है। मिसमापी मापूजाका महौ भान हमे भाभि मारी-बेवनाके विपणने सबसे अधिक सहायता पहुँमा सकता है। इसीलिए मायके मनोवैज्ञानिक मातृसक्ति-तना (The great mother Arthetype) के वामपनको गहत मरिक महत्वरेने ममे है। संसार मरम प्रचलित मातगाके विभिन्न स्तरों भानामों एवं पर तिमोको दृष्मेिं रखकर पदि हम समष्टिनारी मूर्तिपर पिचार करें तो हमें जपेया कि नारी पुगाके मुमतया दो ऐविहासिक स्तर है १ मयकारी माया २ उभयनारीमाता । प्रागैतिहासिक मुगसे मायले विभिन्न किय प्रस्तरसफो टूटी मूर्तियों गया पट्टानोंपर बकिन मोड म्पमे मिठे है कि मनुष्य बाम ठे हो माताकी गोदमें माता है, इसरिए ससके हायपर माव-पेवमाला प्रमाण पाना सामाविक है। पुम्पुस्म परिवार पब मावृसत्तात्मक से वो मह प्रमाय मीर मी पहरा और व्यापक सधारण करता गया यपि बाब मावसत्तात्मक मुगले सही सपको समानानेवाली मस्तुओंका नमार है। मह पूरी सामग्री महाकालने पेटमें समा पुत्र है पर यो कुरा प्राप्त है, र भी इसके पनि सपका वारस दिखानेके लिए पर्याप्त है। पापान युगकी मूर्षिया प्रस्तरसों अथवा गुम-विटोंमें नारी मूर्तिकी समप्रताका मोल नहीं होगा। प्रमानका प्राय पर सपा बय-अत्रकी सिर ही नही मुगाएं सिर्फ क्रोिति मन की पयी है। उभरे ए मानो रेकर मनोशानिनि अनुमाम मामा हिमा पच मला सुचन-शक्तिका मूषक है। इस मूर्तियो मे पप्पांसे संयुक्त विजापा गया है मानी मान-मस्ति पुप्पीसे अनिष्ट स्पो सम्बर दी। बाप, पशिखरमा मुनियोके लिए बामनकी सोग और मनुष्यको परतते चाबीरमा बाम्न मिझता । इसी कारण पबतके साप मी मतमूतिकी मम्मति से मनी । मिसन गेई मष्टा मेमपुरन मालिका मेनम मुखियां इस मारम्भिक पूगती प्रतीक है। श्रीक मोर पाहाम प्रदेशाको पापाणयुपीन मूर्तियमि मोरे-वारे धागरिक मटन विकासका पता चलता है। इस काम्मे मन. मृतियां भी मिती है। मिस सीरिमा मेसोपोटामिया ईरान वया पधिपा माइमरके वालोम प्राप्त नमी मूर्तियोम मारी-असोको उमारकर विधामा गया है को उसकी समन-मस्तिो सूचक है। (पेस्टेराकोटा प्रीमोलम्बियन साइप्रसकी मूतियाँ २५ है पूष मादि) मही वापमान गिनी मूर्तियां भी मिली है बोगत मकर मौर भयकारी है जिमम मार्म गोबो मेरे ममें दिखायी पनी है। ये 'अनुभूतियाँ प्राप मों पा सचिोंके साथ मिली है कोइन बानी मूषक है कि मातृपूगामे मया रोग होने मा त । बह मृत्युकी देवी मानी जाने ममी की। चूना-पत्थरकी बनी मलम्सकी मियोमिषिक मूविपीमे मह मय मेलाबासस्वाई। मध्यकाम करीब-कब सभी रेमि भपकारी मानमूनिगाको पूजा प्रविन पिायी पावा। ताना माइमिम हमोर मौर काकी भामा मम सबसे अधिक ममानक स्प। न मूर्तिपोक ताप माहना पर्म सिंह हिमाल हिप्पोर्टमसकी सासमा बस्दी है। पार तपर कुग म मा मरो ठहो रमामात्र उनके साप भनेक पा मम्मत है। मिमकी रेपी मेकामा प्रतीक पुर। यूनान के पूर्व निकालि हसमें ममा ऐमी हो। मनोवैज्ञानिकता मा नारी मागम साप सप सिंह पहिमाल त मृत्यु मारिज गिरण प्राप्त होता है, बोम बवा सूबा ममी म्न मातस्विा मम हो बहरामि पाएमा मा। इस मपा कारण क्या है? मालमत्ता पुगने स पुष्प वपमै सम्म सिरसमस पाम्न मौर रमाके दिए मारी-मुसापेली पा तो यह सायर वना भयभीत म पा । यह भय उसके मनमें बाइमें अममा और भिन्न-भिन्न कारमसि निरन्तर गाता गया। एरिष्ठ म्यूमन-वैसे प्रसिर मनोहानिका कहना है कि मा मानवीय चेतनाके संचपकी एक नाक कहानी है। चेतना पुम्स पक्ति है कमसे-कम नसभा मनुमय पुरप-सक्ति के रपम ही सममा बावा है । माक्पूगाके विकास के विभिन्न स्तर बताते है कि पिस प्रकार मानव-वेचना बारम्भमें मास्तिपर मवम्बित मौर उसके माभित भी से वह प्रिय पुरके स्पमे स्नेहका बासम्बन पी मौर से बह बाबमें पुष्पके रूपमें मान-सक्तिके वापिपरपसे मुक्त होने के लिए संभप करती रही । कि पुम्प-नेतनाफे मातृसक्ति मौर उसके प्रभावसे मुक्त होनेका मंगप हमेशा दुखवामी होता है, इसलिए इस मपम भी मय मृत्यु पोलका प्रादुर्भाव बावस्यक बा । भयकारी मातृ-स्ति मवेतनाका प्रतीक है इसी कारण उसके साथ मन्मकार अप्पम मासी गुफाएँ, इत्प रामस मृत्यु-सूचक पक्षी उगमने पशु सर्प सिह मारिका संयोग दिसायी पड़ता है। उस युगमे शक्ति बस भारीमे प्रविष्टिय मानी पाठी पी इसी कारण उन प्रतिके बेग मोर भाषात बी विपत्तिमा बीमारी मरम् पुरनपप बादि समी सपोमे रयाने लिए मनुष्य मातृ-क्तिको पुकारता पा मोर रसान होनेपर प्रतिको उसीके कोपका परिणाम समाने गा। किन्तु, मातृ शक्तिका सिफ भपकारी रूप ही हमारे सामने न पा । मारीका एक रनयनकारी रुप मी पो हमेशा हमारी मामबगातिको माये पानेकी प्ररना रवा पा है। बास्तबम परिवर्तन (ट्रम्फर्मेघन) उपस्पित करनेकी एपित मारीमें बन्मगात स्पसे वर्तमान है। नारीकी धारोरिक नम ही परिपतन गपितसे बोतप्रोत है। यह मपनेम और सपनेसे बाहर पड़ी पीमतसे परिपतन पस्थित करती है। यह बपिनेशरम मा यो खुनको एप पुकको शिमुमें बस सम्वो है, ममुपके मन और मारमामे परिवर्तन क्यों मही से मा सक्ती ? मारके परीरमे 'रक्त चमत्कार (मा मिस्टरीर का सम्पयन करमेवाणका कहना है कि उसकाचा पुस्पसे बहुत भिन्न है। तु-माल मर्मावान वीर मर्म-मारण की अवस्थाबोम न सिफ बह पर बदल्यो है पति बपने भीतर के सिमुझे भी बरतने का कारम और भाषार बनती है। पुपोत्पत्तिके बार उसकी उन्नयनकारी अधिक प्रभाव उसके पावावरणपर सामा परिसमित होता है। यह पुस्पको प्रेरित करती है कमरत करती है। गाहिक बीवनमे मानके पहले भी मा पुरपको बाहर करती है। एक रामकुमारी के लिए सैकड़ों राजकुमारोका संपर्प और मोम्पदमके लिए परीक्षामा विधान उसकी शक्ति परिचायक है। यह प्रसम सहानुभूविपूर्ण है, समर्पित है तो शान्ति , सुख है, एस्लम है और मरि महर है, निरोगी है वो भीवनमे सर्मपता पतन निधिकमवा बभान्ति और पुसमा राम्म बता है। पुरुष-मस्तित्वमे परिवर्तन बह दोनों ही अस्मामि है माती है। मारीने इस रममनकारी आपको दृष्टिमैं रखकर मानव बाउिन माद-पतिको सामना मस्ती पहा प्रस्फुटन भी किया है। देवीकी सिर्ड भपकारी मतिमोसे हो हमारे पर मबीवट मन्दिर पुमएं, में मारिनहीं भरी पति हमने अपने मनो सामग्रम बासनपर एमी मूर्विया भी प्रतिक्षित कीबो सौदर्य सौस मोर पतिकी अनुपम अभिमत्री है। उन्नयनकारी विमोंकी पूजा भी अमित विकास हुमा। भपकारी कासी मूर्तियोंके पेरसे म्योति ऐश्वर और पक्तिकी नयी किर फूटी है। पनि नीला राषमा मामास और काठी राव सरकारी मात-विध प्रतीक मा यो मुरब चार सितारे उसके रो फूल बनकर तिल रहे। इसी कारण प्राम लिसो पमी बारिम धर्म-विसमानाम से प्रामन काम मदिवार पुरेप रिणामे बसे । मान-गतिमापार पमों- भिव - को गिरीग करनामी बतायी ममी । बम्निमौर तापको उत्तप्त करनेवालो सी ममी। मिनको सेडमेत भनिदेगी। मौर मास्त पम्नरेगी। मका प्रमाण मिमको सीमाको फाप मामा पो स्टाप (Plutarch) के पनामें यह सब है बो पा बोधौर को होमा । गिमका मावरम किसी मस्पम म हटाई, म हट सम्वाई। बहन देवा प्रकाशकी देवी है गति सारी बीष-मुष्टिकी माम्य-विधामी है। उसकी साके बिना एक पत्ता भो नहीं कि सकता । वह भापके बामो बुनती है। मेम माइसिस इपिमा ऐसा मारिसमी भाम्पकी स्वामिनी है मुटिसी बन्मात्री माम्यविधात्री । पैसा रामाप्यने पहा था A 'बह मकरीको तप मामे- को उदरसे उत्पन्न परती मौर ममता कारन उसीमे म पाती है। ये समी रेबिया बाराबनासे प्रसन्न होकर रामों सरकप रेनेगानी किन्तु उनके उत्पातकी अति रेजकर उनका दिनाप करमेवामी । राक्षस मौर बता दोनों ही इनके पर है पर ये हमेपा रेष-मृप्टिकी रक्षा करती बारिम समा बम्पकार मा मालिनी कपासे प्रकाश पा राममोमे प्रकासको का सेना पाहा देवाबोने मांफी प्रापना की। देबीने राक्षसों का पिनाम किमा “यह कया सभी देशोंमे बोरे उष्ट-फेरफे साप मतमाम है। मदुम पपका प्रसंग इसी विनम्पापी पतिहासका प्रकारामान बर है। मागक्ति बाबकार है प्रकार है। साथ ही वह है पृमी है बम स्पति है । इसी कारण उसकी बन्दना पृषीके मम और बनस्पतिविपोके पम विस-मरमें मनारिकालम म्याप्त है। देवीको समस्पति और पोकी स्वामिनी कहा गया है । मनु पके लिए मा मौर 'मप्रवर्गाोनों चाहिए, इमी काग्य मिन-मित रेपोम मित-मिन समर्योपर नपान उत्सरि माप रेपी पूगार विमान है। मिमम पनहेगी बो पीनाके पालन के लिए फल देती है अपूरके पे पर निवास करती है। मोर मार दूर ऐसी ही रेविया । बिनो मुसि मृपका पात मिला है। मोदी यह दिग्प पस्पना भी पिसनी म्यापक है। बीवारे महत्व वृषकी प्रप प्राप सकी रसिमेवरमेकमा २ पर समम विस्तार पृषीपर है। ईमाई और हिम्नुमि यह विश्वास बहुत प्रबल पमें पाया जाता है। देवीका प्रमार वृक्षो तक ही सीमित नहीं है। ममता पुष्प देवीका मर्मप्रिय फूल है। बसिसके रमा पहिया कमत- का है। देमेतेर मौर मेडोमाके हापम कममका फूल है। वाराका नामम कमसका है। श्वेत-पपामना हमारे लिए अपरिचित नही है। राम मामरा ईश्वर सेरेस और स्पेस समीके हामोर्म येह मा गोषी वालिया है। बमपूषकि हम मनपात्र है और वह विम-प्रयापम अपना सब कुछ दाम देनेवाले शिषको भी बम-दान करके अपने विश्वपापी रुपमा प्रमाप देवी है। मवेविमोम सायद सर्वाधिक सात स्प प्राकम्मरीका है। मा दुफाल मगमा पा। मौ सपके सूखके कारण बम-प्रोत पूल गये। पीप मरने मे तब ममतामयीकी मालोसे मातार मांमुमोकी मग मसी। रात शत मत्रों स परसाया मा लिन सकपपिरल बल। मुसे गायों को गिया भामत फल फूल साफ द.॥ वृक्षों की तरह रेषी पशुमाकी भी मां है। पट्टामाती भी पताको भी। परमार हावाम पौकी बालिया है और यह मेहमि पिरो है। मिह बया बैंक मान-पक्तिका मर्मप्रिम माहन है। साइब (रोम) परना (इटली) और दुर्गा मिह पर पाती है। पत्तिम दो मिनि बीचमसरीको मिमि सेती है, मेडोना गम बह मिहामनपर बैठी है। लना ही नहीं बीके लिए मम्मी पर सवपा अमेट पमु-पनी सबारीके काममे कामे गावे है। बहुत-मी रेबियोके सरीर मी गानवम मिस्ते गुमने है। पहनेका उपर्य यह है कि मनुष्यन समी रुपाम समी भाभा देवीको पूषनेका प्रपरन यिा है। मूर्ति स्थापत्य विसरमा संपात सम्म साम मात-किसके प्रतीकोरी प्रमता है। बह का और मानकी देवी है। सौन्दरका पुगीभूत विपद है। पर मोमे पर मन्दिरके हमाप प्रेम मेकर मनिरपभयह ममोग-प्रम्मामे सेकर ममाषिके स्थान परमर्वत्र सिस्मोका 4 उसका आपिफ्स्प है। कपो गुननेसे कर माग-सक्तिकी विभिन्न मतियां के लिए पटाम्बर मार परमे तक मानव जातिने मपने मन मोर धिमे पाने कितनी उमति की है। विश्वम गो गुण भी सुनर है पक्तिपूम है उपचारमय है यह मर माव-गतिका ही त्प है। माप्पास्मिा तनमन मा परितकी पूगाली मर्वोत्तम उपकम्मि है । मह मनुम्पके परिणको पूर्वतया बरस देती है। मातृत्वको मावस्ता पुत्रको बग्म देने में है। माग पतित प्रकाध पुको गम्म देती है। रममा बाग्मा रिमक उत्कप मनुमनीय है योकि यह राम कृष महावीर पुर ईमा मुहम्मद ममा मुबकी बमनी है। इस प्रकापा-पुत्रोके मम्मका एक मात्र प्रय ससौको है इसीलिए ईसाई फोग उसे 'पासत कुमारी भी पहते है। मातृ पक्ति अपने विकासकी परम स्थितिम पुरा विचा या ज्ञानका रुप पारण कर लेती है। मोफिया फिडोमोझिया तारा (मिमि) होपमा (मान) मावि मानकी देवियां हैं। प्रकीना मययनका ही दूसरा प है मौर रामेम मपने पुणेरे लिए इमेमा अथ बहाती रहती है। माप्पास्मिक धनयन बराम्पर उपस्थित मात-मूतिमामे भारतीय रेमियोंका मपूर्ण स्थान है । एरिए म्यूमन पता है कामान्तरम मारतीय माव-परितने प्रकाप उनबनकारी पके परम उत्कपको प्राप्त कर सिया। केवलोकी शक्ति के स्पम ही नहीं काली स्पर्म यो भयकारी मूर्ति भी समयनकारी माम्पारिमक स्तरपर स्वतन्त्रता मोर मुग्लाकी महान् रेबी बम गयो जिसकी तुम्नामें पश्चिमकी कोई देवी ठहर नहीं सकती। और मोत्तम रपमें 'तारा' का रश्य हुआ विसदेवी प्रकाशकी दोई सीमा नदी । प्रज्ञापारमिताके रुपमें यह बोनिसत्त्वोकी भी मननी है। (विपर मदर पृ १२) पस्तुत भारपोय पाइमपमें परासक्ति बमा देवीके गप मम वोर गापितका पो सिरप मिलता है, पपई टिपॉम अनुपम है। देवीका स्वाप सम्पूप मारतीय मापनाको मनोन परिगति है। संसारमें हो मो । पिनेश्वरमा
मत्य है मिव है, सुन्दर है वह मब यहां एक समन्वित है। मह देवनितम
का ममगाम है पर उमझी जननी मी । मेनारमें वहाँ नही मी
मुनिता
पवित्रता करया उदारता मा बेठना बुद्धि को कुछ भी है, एब उसी
मंगहै वह मभी बोकी ममटि सबसे अलग पर सयम परिम्माप्त है।
वह ममी गतिमान पत्रयोके भीतर मम्तनिहित शक्ति है। बाम शनिक
सुगम मी 'सक्ति' नाम पिसमा सापक है। पर जान गुरको पानोर्मे
ममारकी किसी भी भाषाम एना मवान् कोई पब नही है, हा
संसटका 'भक्ति। क्यालिमके पमें सक्ति ही विमा कारण है और
लिम्बके स्पम कार को उमके पर उसाप्त होता है। पही कारण है,
बहीबाप । हमी कारण योगिमी इथय-सव उसकी बदनाम कहता
प्रणाम है उम मत्-चिद मानद सपिनो महाशक्तिको बोकला और काम
(Time and Space) म सबर स्थित है और यो समस्त पीयोमे पाठ
प्रमाणी तय विधमान है। (शक्ति और पाठ पृष्ठ २०)
शिवमी मापक है यह माद-विवागी पूगार कितना विपुल है इस
एम्बय । तिमी ममाविसकी पना। स्तिमा परिमामय है, इसकी
मानना इतिहास। मारे भूमपम कपकपम इसके प्रति निवरित
पानि पिपमान है। यहाँ मी मा मुटि है वहाँ सत्र मागति
मी
पूग है। जो लोग इस पूनाके बारे रिक-प्ररित शास्त्रीप
अपाम्पीय मारिल-बमारित मिराव रसाने स्विनी समुषित
पिक विमा
इन मनोवैज्ञानिक विश्पषसे ए ऐस सप्प सामने माते है कि
मपमी मामति कारम मनोमानिक सामने से माना नहीं चाहते। एक
यह विसपनाम की मोर चिनहीं करता कि अमरिकामो
मार र ममुप्प पिगी विष्ट सत्ता प्रति शिामु पा रखने उमे
पूगाई पार शिकभी भयस कमी प्रयास कमी मनकी पारी
पोमय भावनामा रिमपिसाप । भार हमारा विशाम एक ऐती
मितिम फोन गया है वहां पर पहले की अपेक्षा रबादा नम्र है बिनत है, उसमें बह वापसाफ्न उग्रता बोर याक्रोश मही मो सत्रही धम्बी वा चिसकेपटीभूत होकर बह धर्मकी हर मान्यताको चुनौमी देना मपना परम्प समानता था। भाग मानय मा-म्मों मयी पक्तियाकी बोर कर रहा है पोनों प्रकृतिके रहस्यको ममानेमे सफल हो रहा है पोरयो बहस त्रिपुरसुन्दरी प्रतिषी असीम शक्तियोस पमिमूत होवा पा रहा है। माच मह पृप्पी कितमी तुन हो मपी ईमारे सामने बनम्त प्रकास बोकी परिपिमे को हुए मसंख्य नमन प्रह देतु, तारापुंग ति नये विपके पाप उदित हो रहे है। ब्रह्माणम मार इस बनन्त चेतना-शक्तिरे हम यदि पिरोपी है तो हम कितने तुच्छ है कितने मसात कितने पं है । यदि हम हम विराट मन्तपतिनी भक्तिकी पास्वत पाराम मम्पृष्ठ है पहायकी भोर मप्रसर है तो हम पिने महान् । तिने अनिवासी है। माल जगसेना हानिक महाग पाप्त अनिवचनीप प्रत (order); सामने नतमस्तक है। १९१ मे बकिनकी यह सन्या किसे मुसेगो बम विस-ज्ञानिक मास्टीन में विसति रवि गुरसे पूछा कषि क्या मानव सृष्टिक सम्म हो पाने बाप प्राकृतिक नियम मी मष्ट हो बामे। से क्या यह सत्प कि चिमुरके तीनों कोनोंका योग बो समकोषके बराबर है पर्व हो पायेगा ?' मानवतावादी कपिले मा 'हो क्योकि ये नियम मानव-मूहिक किसी-न-किसी स्तरकी उपभि फिर मानव-पक्केि विलय के बार सका मन ही क्या पेगा? मानिस हो मया। रफार मोठा 'यपि माप मारवस मा रहे है तचापि मै मापसे कही मषिक मास्ति। फिर मनुप्प क्या करे? विराटसे विरम् मस्तिक उन्नतम मेपाके लिए भी बो मगम्प , अनिवचनीय है, उसो तईम सौमित मे कर म्मे मुनि, म बाँचे उमे अपने शाम-पाप मारय कामके लिए यह भवारिसमोसे परेशान पर उसम तुन्टतम बिन्दु भी उमकी समाधम महाँ अभिमसरनेमा व पाया। बहन होकर सिर पटकता है, पबाकर मामा मामबरठ पाता है-ति मेति मेठि मेति । तभी सिमेवर मे ठसार हसता है 'पागल कमी पठेने पुटम समुत्र भेटवा है कमी कमजोर भुगमोम हिमाम्म पठा है भी पर बानेसे महानदीको माग राती है। कभी पंछीके परोसे मापनपदा । मुनो सुनो देतो वह मा हारेम-मारतीय मेपाका अप्रतिम म्फुमिम प्रयमित तनपुर । मुमो काल-मी भावार है यह। पामार दे मा पागल कोर (मधमनी) भार पर मामान विचार तोमार प्रेमेर सुरा पाने करो मातो भारा भो मा मक पितारा दुवामा प्रेम सागर मा मुम पायम कर मानविचार- तकी मुझे कोई सरत नही । मै ता तुम्हारे प्रमको मुराका पान करक मतबामा होमा चाहता है। मा भक्तोरे चित्तको भूगनेवाली मुझे प्रमके माम सारे या पसापन नही है। ई-तिक मारपरी बुटिको सम्पाट है।मिमाम म हो तो रामप्पके चिकित्मक ग सरकारले पुणे पो सनापागसपनसे भरी मावीके सामने सारा शामिक और मान निय पमकर पोए पो । मिन्होंने बाठ इममिए सी सिमे से कि मेशानियको गिार होकर माघमा पोभा नहीं देता । परमार बहमपानरें? रनियर फिर हंसता है। तुम्हे करना कुछ नहीं है। करेगी हो सब वही पड़ी मापा महामाया । को सारे प्रागकी सूमपारिधी तुम तो मिफ उसके हापकी पाप हो हो उस्ते बामा हो उन्ने पोपमीमहे कोई मर न पातवम को धर्म नमामे , तुमारी मान भागवान रामेकी मति पटिया प्रम भी स्पून महो। पोलो पावागारके पौराहेर टार पप गणी है। अस्प शिवग
प-विरगो पदमे । मायके पक्षमम मायाकी गरीसे पी पल्प। कभी
एमोको एकान देती है। पटी पर्त पर हवामे मारती सिद्
मनम्तम मीन होती है तो यह कमो बुगोसे शामिरी पीटकर हमवा है।
स्पामा माँ उड़ापकोड़ी (भप संसार भागार मामे)
भाशा मामु मरे उस गाँमा साहे माया दही
फरक गरी मंडी गामा परादि नाना नाही
पुदी सगुण निर्माण भरा कारिगरी माहापाड़ी
पिपये मवेयो मंगा कशा होयेद दारी
पहिलर पुटा एन्ग काटे हेमे दाभो मा हाम भापरि
प्रसाद बोले दतिमा वातारो परिवार उप
मम संसार समुद्र पार पाडे गिप तालाई
रस मारे गठमे निफ कार्य रमा र मनसे निमसे
किये भाभो । महाशति तुम्हें रोग मार-मारकर बाती
Arite my child and go for the man Bear man
fully what is thy lot to bear that which comes to the
hand to be dotse do mth full strength and ſcar not.
Forget not that the giver of manhood the giver of
korte-bood the holder of victory
am thy Sother
Thank not life s mnom. Wat 19 destiny but my
molbet s play Come be my playlellion while meet
at happiness merily" (hah the mother)
'सो, पन्चे को मौकी वए मामे बहो । यो तुम करना है
। मुमतिर माती पनकषि रामप्रमार पिसकेपणमापाच कों
पास कोमोर कष्टहार मने है।
दनिमेशारने या
११
बहादुरी साप करो। मे कमी मन मुसो कि नारीख और पुरपत्त
प्रदान करनेवाली में तुम्हारी मा विनयात्री तुम्हारे साथ है। मत
सोचो कि रिनपी मुस्मित है। भाम्म कुछ नही मिफ मां बेट है।
कुछ देरके लिए मेरे साप को और ममी मुधिोको पुषीसे
-~-पादिन निवेदिता
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ताराका पाप
पोहो चुका
पूम्प परमोमे पतिताका मतप प्रनाम
यह तीसरा दिन सब मनको बार-बार सम्माकर हार एकी है कि
उसे
मूस बाये समूचे मार्यावर्तक ऋपियों-मुनियों मोर रेवताओं
मे सरप बोर म्याय समझकर बोम्पवस्वारी उसे मापा पर स्वीकार
करने पर यह मास्वस्त नहीं हो पा। दुठि सिकी तए मपनी
बापाको ही विधान मागनेकी हासे यह उपरत नहीं होता। इसीलिए
हारकर पह पर लिखने मेठी है। सम्भव है इस मनमें बाप्पकने तर तो
मित मानुस भावनामोंगो एक बार म्यान कर देनेसे भाका सन्तोप मिले
मारे समिम बल्को बहा वेनेसे किनारे पुए चपराम पा सः।
भाप मे कि फिर यह पम मोरकि नाम न मिनार में माफको ही
पपों मिस ही है। में बानती! मर्यादा मार मायरमही मुस्ताके
बमिमानी बसिष्टमे परमा पौर सहानुभूति पालेकी मामा म्पक है। सुनाम
की पुषमा नब भबरने वपहरण किया तो मापने बिमामि रिम
पसा यनेम चमार भी मदोष नहीं किया था। धगियसीके लिए राम
'रास पुर-वैसा होमहपक काण मापने ही उपस्पित किया पा। बाबती
सी अगि पतोलबासी मारीके पति होकर माप कभी मी मुम-बसो
पंचमस्वभागा नारीपर क्या नहीं रेंगे। यह सब जानकर भी म पर
बापो हो हिनदी है। क्योकि मनोति त्यापकी भाषा का मै
मिलने भी मे।
मेरे लिए पाय मोर मचायका मेद महाँ एममा है। मै पिपिरमे
दिम-सपमि सिभित रस कममिनीकी तरह। जिसमें पत्त बौर फूल मा
ताराम पार
नही बापपे। पुषहे नियुक्त मौर पतिसे तिरसत होर मै मिस ममायाम पड़ी ससे पिक अपमानपूम और पर बोर पसा हो सकता है। सीमिए मार-पैसे महिनावी और और मान-नियामक पक्तिको यस पर लिखते समय म मरा भी यात्रित नहीं है। मवि न्यायक र स्तर हाम्पर पीस पटककर मुझ वपन म्यक्तितकी बलि होती है तो मृदुवा दौर कठोरताका विवे मा? हो मा निवेदन प्रवास सम्मी किस पूरा पाकर मेरे प्रश्नांना उत्तर देनेकी कृपा करें। देवमुष्की पत्नी मिमा पौरपसे भाकित करके मेरे हारेकायको कुचमकर रेखायो और पापियाही मरी सभाम मापन मेरे मस्तनको मण्या और हानिमे पिया पा। किन्तु मा तपापित मारावीची मतमस्तक कर देनमासी सम्माको हो पाप-म्पीति मानकर बाप सन्तृष्ट हो मार्यम् ? भासाम सवा एक बार भी यह कामही पटी कि पियों समवंत वियपर तापको भी कुछ कहनका ? या एक बार भी मण-नयाकी - स्थगिनी पुष्टि धारा मपित इसकी पीएम ममम मा एक पार भी माषपूत रिवापर 'तारा सा तुम भी एकहना है ?" मह बाप म्यूरिख महुवा बाप पूर्णेमे रेषपुरकी पत्नी होकर ऐना पतित पावरम तुम भी भिमा ! में मी मपने मनसे बार-बार मही प्रम पूण्वी है। मारिसका सप विष पर सभी कुछ स्मृहपीर वा रेवमुरकी पानीका मौरब पुनोमगा एपीमे भी मार मा सिर ऐसे परकी मधिमे पवा ठिरसात करो परपुरुप भासत होरा पतित बाबरप है, इसे मैं बार करती। पा मेरे हम पता देवताओं और का भी कम हा महीपा। में माननी भित्रिपुर मनमाको प्रथम मार देनते ही में मिमप-निमय एमसी भी । उन दिप पारी मोकी ना समापी पी दी। प्रया पपिन नममातो निध गपप और परियोल सामी बनाया पापन मारेर रस निम्मा ऐमसनिक सम्मोहन मा उनले वापरयों AL कुछ ऐसा माकपनं पा कि मैं सुप-पुष होकर उसे एकटक देखती रह पयी । राबसूप यशसे संसारको पसीभूत तो उसने बाबमें किया पर इन्द्र मरद्गम विवापर छ धादिस्प वापि तो सब उसमे देसके सम्मत उसी बिन मसिम मा रहे थे। उस दिन चन्द्रमाके म्पस्तित्वम कुछ ऐसा पाबो मेरे मनकी रिक्तता दो और मधिक गहन बना रहा पा मै पुष्पहीन बारीकी तरह अपने ही नियुक्त पुष्प-गन्यके लिए जैसे हाच फेम ही बी अपने हरयकी पुष्प-स्पनाको पहली बार साकार देख रही थी मौर कोम-पास भाहत मपिगीही तय रुपकी उस अमृत पृष्टिमे मै प्रमस होरर मूमने बीबी। 'तारा साम्प-यूम्मका समय हो गया। मांगिरसन कहा था। भौर मै पप्णकी रेप्तमी बीमारोंको घोड़कर बाहर मा चुकी थी। मैने अपनेको बहुत मैंमाछा मापमके कामि दिनरात लगी रही। मैने प्रतिज्ञा कर ही बी कि चन्द्रमाको भव मापने हमसे सबा-सा के लिए निकाय मी । इसी हिए फिर बब भी चन्द्रमा मेरे मामने माता म किमी मी कार्यक बहाने महमि हट पाती थी। किन्तु देवपुरीका बिठाए और बासनामय वातावरण निरस्ठर पना होता पा रहा था । प्रयापति का मोर नारायण दक उससे मुक्त न ए मके। इनमौर उसके सम्म मियोंकी तो बात मा। तिमोत्तमारे स्पर भासक्त होकर प्रगापतिका पतन उमके बीवनकी पहली पाना तो मपी। समा-मननके समय मोहिनी रपके पीछे काम-विमिप्त करका अमुवावम हमीकी बस्तु नहीं करमाका विपय पा! पत्नीके सतीत्वक कारण वरम्प बामपरकी पत्नीका पातित नष्ट करके उसे पम्म किसी बोरने नहीं सत्य नारायणने बनाया 1 के अस्व ठो पराकाशपर पहुंच रहे थे। ममममोके नृत्य मौर सुर-पानमे प्रमत्त होकर उसने क्या नहीं किया । मितु मपने सी शिष्यने न पाको रोम्नो पिए माबिरसने का पाप
विस्तार है महाँ समाग्ने एक भी हराकुर महाँ यने विमा । मैं अपने
पापके थिए, उस पतनके पिए, सभी गण सह संपी। पर मुनियर, मेरे
सत्यके लिए मा रवित है? मेरे पयोष मिएको मेरी गोरसे मन
कर ममागको क्या सुख मिष्म ?
विनीता
बमागिनी वारा
इतिहासको माक्षी कि मुनि बमिष्टो वायके इस पसका कोई उतर
रिया नहीं।
देवी मेरी प्राम वल्लमा [हमार रेपमे रमेसरी प्रमय सापनाका बमा एक विशेष महत्व है। सापक मफ्नी परेयवाका सम्पूर्ण परिमाप्त अनुमग करते हुए उसके परमोमे अपना सब कुछ सौप देता है। बमोम्म मैरबकी गपरीके अस सापाकी उस अनिर्वचनीय तन्मयताको पोम बांधनका एक प्रयल मात्र है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा संपत् २०१६ उमस है, माम म होकर मतको तोर देना चाहती है। पुक्त प्रति पवाका पार कभी भी हमारी बाबोके मामने नही मावा पीस नाखूनी निष्पकबारको रेखमके लिए हमने पिया ही गया है? रावमापीमे मषिक बीत चुकी है, मैं पवित्रमा वाकायकी कालिमामे मिसमिक्षावे तारों- को रेख हाहाकी मीठे रमकी टपरी बामम मन्ते हए निस्पनर वारे। मौर वमी माता है कि सामनेका बह निकम्प ज्योतिपूर्ण तारा सिमट कर छोटा और तीसवर होवामा पहा है वैसे भूमिग उगले प्रकार के वृत्तम मब सा तब दूपा और रम वृत्ताभर प्रकापम किसकी विराट काही आया है वह, वापर मोराते हुए बसंस्म नौरोंडी तयहरबते हुए रेस मीठा मीत बसनसे मामापाव परीर और यह वाय? कुछ नहीं किसीके विराट् नौले उन्नत माली पिपुटीपर का कौस्तुभमपि है। मैं भागार मोक्ष दवा है। एक सरसराहट से वाकाग मिमटकर नीचे रतर या है, अपने विपद् पंचोंको मरोकर मेरे पीसपर बैठ गाने देवी । मेरी प्राप-महमा कोमातुर । मै भावारसे पाकर बाबोस देता है। कामी छापा बहुत पास मा चुकी है, क्योकि परेमे मी मै उसके मुखको रेत सस्वा दरसे देखनके कारण हो तुम काछी समठी विमा पास बालपर सुरीस मोग भरा मरा कान्तिपून मुम प्रात कात मोस-पसे स्वयकमम-मा पिचित झुका हुमा वैसे मामायो पत्तियां सुबहकी पैरिफ किरपको सारी मामा अपनी सीमा पार सेना चाहती है। गए, तुम्हारे मुसपर रिखनी म है।हरूकी पुती रकि रेशे सेमहकी विन्नी स्पष-पौतुरीमे उरुम परे। इस मामाके समामे गोरोचनका तिलक समेत कमलकोपको सर-चना को वह एमक रहा है। मैं विनम्ति चित्तरेसवाही पपाता है। तुम्हारी मीठी बोलकी तरह पारदर्शी मांखामें कितनी साम्ति स्थिरता मन महराईका ममाह ममता भरा जा । और ठमी एक मया पर अपनी माझावकारी मधुरिमामे मरी खेतमा कोबार मेवा है। किसकी है यह माना तम्हारे बक्षपर भूम इए ममि- मम ईकलको तुम्हारे रेसमी नाचतो कोरोमे पुरे कुर फूलकी ठप गोम-मोकामा-मापुल्मोंकी 'तुम्हारे टि-भरेष्तपर अमित सोपी हुई करमलाकी? तुम्हारे स्पेठ बाममम कोमस परमातो चूमती हर पायको माह सा सम्मोहन है इस स्पर-समवेतमै । कोई मनके को सरोके मासूमसे एटक देता है। तीसा मनाता व सारे मगर भ माता है। में एक मन मयत विगुत्को वर मूर्तिमान् तुम्हारे परीरको मापार मस्ता मौसमि भरकर पहले बन्द कर मता है। 'बमोम मात मिना मिस कर नबाली पनि कमपाकी हप्पर-सी मरती पाहबादू भरीमापार | सारा परिसिहावा है, मपरमती केपुर कपको की उस विपर-विपरकर तुम्हारे मा-माउ पारे जारोंपर प्रगाते है। बहसमाइट-सा मस्ट सम्बोष रियायतीमार . मिराराम तु बनामे ममाफूल-मा शिल उठता है। मैं देखता पहर्म बार नीसी झीलम सम मम्मी-सा कुछ पिकाता है। चांदनीसे बोमी गौच मुस्कराती है। मीस मम्मे पत्त गुपकी पाराम महराते है । विसाह किम महे परा-सी विष माती है कोमम करारी पममें हीरे-सी स्वच्छ कनीनिकाको परा-सी मसकाती है। तुम मपने रेसमा मयस्वासित बालाकी मिसरीष्टको वपनो सुरकिरण-सी परकी चमनार मैगुणमें उसमा रही हो। उमा रहो हो बौर मुसकग दी हो। मै पुटनके बस बह गाता हूँ मार्म मप जाती है मौसुमोको मरम पारासे मेरे गार भीग जाते हैं। मैं फिर रेमू गा मनस्प-भवन फिन्तु मेरी बाँचे पुल नहीं पातीं । माह मेरी बासे जान तक मैठा रहा निस्भेष्ट, विपक्षित-गिक । गौर बम वा नहीं तो सामने मापा-सा काम भासमान पा भिमक्षी बासमान जिसन तुमारे पदचिह्नोंकी कोई रेखा भी नही छोड़ी तुम्हारे पपका कोई निशान भी न रहने रिया । पो तुम पी गयो। बिना कुछ को बिना पुच बताये । मोर मै मपाप किंचन उस एक धमके मानन्दमे ही गि होकर तुम्हें कोठा । हा माप बमोम्प अमावस्या मापार सेवत् २०१६ अमावस्याकी काठी एत । बाप पिरे है। बोयो ररावने पारम । बमानम मासमान तक कारत काबत हायक । क्यों तुम्हारारा मेरी बाडमि मा बसा । मो मसात मपरिचिते ! वो तुमने मालपमे परे जनपनो के माममे यफ्नी पूनम-माया विरो? माह मायामिनि म चा प्रामों- को मुम-सायकसे क्यों भेज दिया ? बामप मम्मी से ठरफ्ते प्राच तुम्हारी पोषिके सहारे कमतर चियमें। माँ हो ? पर हो? तुम मिती हो? माह प्राणान्तक प्रसंचना निमम मना! देवी। मरी मान-हमा १
से देरो ए देरो अनेक भन्सर
बानए साल लोके
से देरो ए देरो मिशामिशि भावे
पकमा कमो नायक
इस देश और उम देममें बहुत असर है यह ममी बानते है किन्तु
इन कमीन मिसनमान देयोंका उब मिसन होता है तो इस अमित
अपनीयपर कौन मियाम करेगा।
तुम्हारी
भाषण प्ण अष्टमी २०१६
तुम मुझे पागम पो मही कर रेती। मेगे सारी चेतमाया महाम
को नहीं कर रेती । मै तुम कहाँ पायो एक सपनाको
मत्म मानकर पागा हिरक-मा बम-बन गम्ता नि उठे-बैठते
बेकसगरीब मेरे ममको हारोबाभोमे पापड का देती है। मांग
ठिनारी प्रेमियोम बमबती बौर #स हजारो-हमार पायमोम
निरन्तर बग्मती है। बीवी मांध त रमारी मांगे पाने महारा
एस्म मप है तुम्हारी उन मौवाम । बाकी कालो गरम हाराहगर
गर्मि मर पाग मोर माती है। स्नेह ममता प्यार प्रेष शिपिलसे
भरीमायें
पिस्तु तुम्हारी मामामे भामू' पापानमे उसी पारा? फिर किसी
मा मे नौने मामानको उप विराट यानी-माती पनि मै मोच
मोष का पागल हो गारंगा। मुझे कुछ नही मालूम। मुझे कुछ नही
तुम कौम हो मुझे नहीं चाहिए। पेलमाफी पौर
से मेरे विषाको पुष्टि कर रो मेरे गर्मोप्रत मौषको बहोगी।
वा दि
गुरारो
शिपाप से
मा निष्ठुर विश्वमोहिनि
धोरगपी मदतरंगी
अनादय को हिरण नामीगंध से पागल करो
तुम भकिपन सूलते से तृण विटप में
नवल किसलय तानिये मोषर मरो।
सिन्म सेकत में भोले
गर्न उक्त परिंग बलते
दीप के मामे तिमिर का भार उक्त ला परो ।
विष पता
गर्म एह टूटें गिरे
उम्मुक्त नम में नरल भामा की गरवती
अनगिनत-सी सर्प लारोंको परो
शृंग मनके प गामें
पौदनी अतल तल
पारद शिरारे शान्त होकर
फेतना को मूल पैर
तक पीड़ित पुदि में बड़ता मरो
भमुताप पूरित तप्स जलते
दाह पीड़ा में लहरते
इस तिरसत शीश पर तुम
भगर पासित मलव शांतल
सप्तपणी केरा की समा परो
भाः मायाविनि
मचलते हिरण शावक से पदयको
नमन पकिम पिपम शर घायल को
देवी : मरी मानपामा
भारिपन नपराध २०१६
हाँ तुम्ही हो बह, यही स्पराणि बही मील कारी नही जगमगाठे
मनपाकी कुमुम-माका । वही मिस्मता-सी रेप-पष्टि । पमरे पर मार
पर हमाकी महरमे कापते हुए केशर । बही भमा अनि यही कुन
गुनाते भार ! सब कुछ नही । तो तुम गार मिस ही यपी। कि तुम्हारे
मालापर म्पदके मोम-का पो? तुम्हारी सुरमित सांसोंमे मह रवठा
पसी' तुम्हार नपुश्मे भूमिका कहाँसे 'दो तुम पौवी माँ हो । सो ?
पड़ी हो जाजो म!
महोम्म
'किपर हो तुम कहाँ छिप यमी ? महातमी सी।
जो तुम मामने मुरमुटमे सो बाना चाहती हो। तिनी र
मागव तुम । हो यहगे वो तुम मेरी मालार मही सुस्ती । मै
पाकर पेट मावा विमा बरा बाह रेपिस्वान है यह । हास
मामकी म मोर मामिम नाम अया। एकाकी पमता हूँ पर
रमममा है। बाम भर माती प्राण पतकमा पाले है। इस विधात
मरेसम बनगारे-या प्यामा gा कोई ग बटोही विमाना।
पुसमरित पीड़ामे पटाते हुए, कम्मित दम पर उनमवाते हुए, गम्हण
फो निग्मा ए"मलता। निरन्तर पूर"उस र
नितिनके पाम एक विशात माती पामे मपमरीचिका कोठामा का
कोमि पिथम-पिपार भी अपने अस्तित्वको समामे हुए बारी-सा
अमावा एक मन्दिर गिसके स्पषमापकी पमा मौके पासाप्रमे
नियमी-सी बमवी निमकी समिरमी पगाएँ एनबनुप-सी मराठी
है। यही नही म्मिी कोनेमे तुम गिनी हो तुम यो मुझे ऐसार मामाकी
लरको पलीमे उसमार सोपी-पक बये या ईफ्त मुमकराकर
पूणेमी रितु र मदिरता कभी न पर पामा उस स्नेह-माण
पिलीम सेतु
कभी न महामा। मेरे पाग उस मादी बातम ताफड़ाते है सौसके पंगे
पाया हो पंस फाफरते है।
किशोरी परणे पराण पिषि
मायते सदय मारा
देखो हे किशोरी भमुगत पने
करो मचरण बारा
मैने बा किसोरी मां तरे परममि प्रान सौप दिया है। तेरे प्रेमम
इवय मरा है। बो फिम्खोरी भनुमत बनके कांपते हामि पनी बग्गा
ममना । इति शमम् ।
देबी। मेरी प्राण-हमा
1.
पशु-प्रेम मानुष द्वारे बचपनर रिनोम जब हमइल परी की कहानी सुनता था तो मन एक विविध प्रकार सम्मोहनसे मर जाता था। एम-कामि परी हुई तेर भूप नाही बारिश मोर काकी कि माममा करते हुए परमार अपन मोरेपर मबार डिसीके नयन-चतुर्क- म मिचाइमा बस्ता मया और तव उमकी कपन-नियम रीमकर देख तामोन उम बारह बकि लिए उसी प्रियतमा मीप दी। विछोहरे दिन पहार-मे ममगते और गर्ने मामिनकी तए । परन्तु मिलके रिन तते बेबत बीत बात है। बारह बप बीत गये। और विछोहसी उम मन्तिम गवको पाईम-परीके मापसपा रागामार नि-मन पापा समी रिमाल तमकी प्रियतमाको बागके लिए मा पहुंचे। मगर सोने गमारमा छारा ईम-पग बाना नही चाहती थी पर रेषाने या पर मौनी बाचा काटा गया राममुमार सोता ही रहा और सबेरै बर बह उठा तो मोषको सस टुकोको सीनसे भगाये विमापान मसमें रोठा फिग उमरेपर्रम बनकी पत्तियां पिर पसी पर देतामोकाम मपमीगा। मनप्यन गरी पानी पखीम प्रेम कस किया? मह प्रश्न सब मी ममम पुमन्ता पा मार मार भी। पर दोनोंके स्पर्म पर फ्रक है। मुम यह नही मासूम बा कि ईस-परीका यह माम्मान न मास हिमुस्तान में कि पिता ममी हिस्मोमें रिमौनपिसी रपसे प्रक्षित है। युरोपीय माम माम तोरम उन इमाम पहा मान भी पायापरीष बमा ममम यौमे राते है हम-परीकी महामी मोकारो मह पिरोत मनु में नमी दर और पोशाक साथ मनायी पाती है। भी एन. एम पेन्चर में कपासरित्सागर (Ocean of the stories) माठ भामके परिमिष्ट- में ईम-परीके स सिम्पापी मास्मानगर काडी विस्तारमे विचार किया है। इस परी (Ban mmsden)को पे रंगबिरंगी कहानियाँ भित्र भिम सौमें विविध पाम पाती है। इनकी पटनामि पात्रोंमें बाताबरगमे स्थिति- विपके कारण काठी अन्तर मा गया है परन्तु एक वात प्राय सभी कहानियोंमे ममान पसे पायी जाती है यानी मनुष्यका मेवामी परी प्रेम। पौराणिक प्रेमापानको उबधी और पुरमापी प्रेमकथा मफ्न तयको मली। यह पहानी नवस प्रेमकी वाचा विछोहके पर और प्रेमाम्परक प्रति मपुर निहाकी हिम मनुपम है बल्कि यह पहली पहानी निमम समप्रपम मनुप्य मौर रनमाती परीक प्रेमका पित्रण किया गया। इस कमाकी प्राचीनवा इमी पावस मिड हो जाती है जिम्मेवम मी मरा नमन मिलता है। समर (१ १५)में यपि कबाका पूष म्प मही रिलाई पता परन्तु इतना समेत समस्प मिठा है कि रामा पुररमा उमणीमे प्रम करता था। रोनोम पिसमा पुष छ मते स्वीकार की पी मिनका पासन म हा सकनेसी बहस उबटी उस ठोकर चमी ममी । विजा-मन्तप्त रामा रसपीम फिर मोट बामेको महा। इस कहानी मा विकसित रप वपन बाह्मण (९१)मे प्राप्त होता है। मधीने गिह-गोकस पीड़ित रामा कुपोष, पागकी तरह पूमता हा । बही उमन एक पप-मरावरम कीमा रोइ तीन मनिमाको देगा । उनम से एक उबपी पी और पेष पो की सहेनिया । उबदीको पहचानकर गरा उसके पास पहुँचामार वमने कातर सग्में कहा प्रियतमे क्या तुझे मुम एसीपर बरा भी रया मी माती एप बार बामा तो सही? रखपाने मे प्रमत्तको माति प्रसार करनस गेका बौर मपनी मरममता म्पनर रस कोट गानेको महा। इन दोनों पिरमोमे मामम होवा पमु प्रेम मामुप-वार है कि मसी मार पुरवाकी प्रेम-पामा गहुत पुरानी है। पेग्गरका वो महातक कहना है कि भामर यह मानी इस प्रकारको कयामोमे सर्वाधिक पुरामी है और मुरोपीय पदमे इमोटारकी दूसरी कहानी नवमी कौम भी पुरा कौन पायोगाने कौम-मी प स्वीकार की भी मिनके टूट गानसे रामाको यह विमोहनुष मोयना पड़ा। इस प्रश्न का उत्तर इस कहानीके परबी पोको देखने मिल सकता है। इस माका यात स्पष्ट और विकसित म्प विष्पपुराणमे मिमता है। मित्रा परम धापसे एमित पीने मरमतो रामा पुररमाकोशी रामाने सौरपको देखकर अप्पराको ममा कि पाप भी कभी-कमी परामबन पाते है । मृत्युमोकके मनुष्य के माकपबसे निची रेषतोत्रकी मुबरी उसके पाम माकर की हो गयी। 'मुभ' रागा बोला मैं तुम्हारे इम रिम सपको रेकर गिह होकर प्रपत्की याचना करता हूँ। रानाको मामस्त भरती हुई अप्सराने हा 'रामन् मेरी त है भरि माप म्ह मिमा सके तो मैं मापकी फ्ली हो सकती है। रामान भवे मपी बोली 'मार मेरे पुत्रनप इन दो मेप- विमुमोको कभी भी मेरी सम्यासे मगर सोये। मैमी मी पापको नमनदेवले पाउँ और मेवात एकही मरा बाहार होमा। बहुत दिनों बार सी और पुरमारे इस प्रसपसे पिस पापोंने त पूरा एकको एक ममना अपहरण पर लिया। उबधीपी माता पुकारसे अबराया हुमा राग या सोपारक मधेरेम संधी मुझे मम नही देग पायेमी दाम्पामे उभर सभी पीछे पौवभौमिवावमुन मायापम विचतको तएर गंगनी करकरी और ममी गगाको मम देकर नबन हो मोर वयी। पानिपतुनो मन्तप्त रामा पानतमी वरा बम-बम पूमता रहा। दिन पमने पत्रो कमा मऐवा सम्म बार अपरामा माप विहार ती मी रेखा। रामा प्रसारमे दुमी होकर मिसरीका मेनु चबमीन पहा 'राबन् । मामियों की तरह वापरम मरें। मे गभ पती। एक बपके बार माप यही मापे मै मापको पुत्र-रान मेंट एंगी। रामा प्रसन्नचित्त नगर टा। उर्वशीने पुरुषाको मासु नामक बासक दिया। बनन्तर रागाने मावाली इसा मम्निस्माती प्राप्त की और या- हाग सबके दिए पपीको प्राप्त करने में सफल हुमा। इस विवरणसे मलम होता है हि यत्वा उपगी मोर पुरुरवाफे विवाह के विखये। गबन मारत उत्तरी प्रदेसम बास तौरसे हिमालयकी तरामि हनेगासी एक पाति पी। भारतीय बाइमपम इस बात को सम्मेवा मिस्टे है उनसे समवा है कि मन्मन कोग बत्पन्त भव-सम्पन्न मौर मुससात थे। पुष्प प कर्पूर वा सौमन्दिरका मापार करना एनका पेला पा। रत्नों मौर बाभूपोंगा भी इन बहा कि मा। ये होग रासापनिक मौषधियोके भी निर्माता के । पुत्रदा मोपपके पिए लोग इनकी ज्यामना करते थे। गम्पोंका कोण मृत्व और संगीतका प्रेमो पा। स्त्रियाँ प्राय स्परती बोर सव माघरमकी होठी पी। पचत प्रदेशकी गौरमि सफ्वती सुमसत मौर काप्रिय मारियोको इसोकी तरह कहना उचित ही है। इस प्रकारके यायावरीय जन प्राय ही मपनी पापियोंकी पादी कबीदे भीतर करना पसबपरते है। पुरुरवा मार स्मशीका प्रेम सामागिक परम्पराका प्रथम बिरोष पा। दो प्रकारको कतिमोरे इस मिकममे म पाने कितनी करियां दीगारकी तरह माममे बड़ी हॉपी। इस प्रकारक परम्पराविरोधी प्रणयकी कहानियाँ पर जस चारों तरफ बैठ पाती है और बनता मानसमें ये नाना रंगाम कर सिभित्र पाकार धारण कर लेती है। यामापरीम बन होनेके पारण गयोता समझ कभी एक स्थानपर नहीं पता होगा पन्ह इम प्रकार गविधीक कर रहें 'उनबाली पाति' की संज्ञा प्राप्त हो गयी। इनके रीति-नीबाग रहन-सहनके विषयमे कोमोके मनमें यस्य मौर माक पनका जमना स्वाभाविक वा । पबशीके साथ दो मेमने के मिन्हें एक पा-प्रेम मानुष-वारे 1 को वह प्यार करती थी। इससे इस बाविक पातीय होनेका अनुमान किया गा सकता है। यो विभिन्न जातिके सोरोंका निम्न तह-एक अभिप्रार्योम म्पस है। कमी मनुष्यका प्रेम पनीमे कभी पशुम और कभी पार्यो (मौन-परी) से विधामा मया । वस्तुत स कहानियम जिवना भी बन यम गौर अतिमानवीय क्रिया म्यापार है मह मनुष्यकी मतिपय मत्सना प्रियताका नतीजा है।कसपको सिमानेके लिए रमीम मागरमा निर्माण मानयी सहर प्रवृत्ति है। मारि-मानम् समाव ( totenic cha) कपोलों के नाम उनके पूमामिला ( मातापि ) कभी-कभी पन-संतों ( माय मुपन ) मारिफ मापारपर हुमा करते थे। बारम पौराणिक मा. सेवकों ने इन बातियोका वर्षम करते यात नामको समूह सत्पमें परिणत कर दिया । नाप-कन्याएँ सापकी तरह बनेगी मार पप्पराएँ पनि मोपी तरह साले पगी। मनुष्य मोर पशुपक्षीक प्रमपर एक दूसरी दृष्टिसे भी बचार रमा पा ममता है। कहा जाता है कि प्रेम-पप पानकी पारक समान है। मनुप्पमे मुक्षिारिसे मामक न बान कितने प्रयत्न निमे अपनी सारी शक्ति पाकर अपने प्रषयके रेस्ताको रिझाने के लिए ससका उत्मग कर दिया परन्तु भागता भी बह प्रेमके पूरे एस्पको समझ म सका । मनरी इम पिम्प भावनाके मुंगाग्म उसमे कुछ म ग्य रण फिर भी उसकी नाकामा मतप्त हो रही। हो म्पक्तिया प मिन महत्तम न बस ममाय बर्म मार पाठिनी पिया बापा पनी परम् उम प्रेमने भी सम भोला रिया। जिम मूर्तिपर उसने अपना सब कुरा म्यौछावर कर रिवा बही पापानी प्रतिमा बन मयी। बम प्रेम माम्मे न माने तिन दुरापरिण उसके सामन मास । विगागीक मितरीका सेतु निर्मम म्पबहारोंपर वह भारपाठ मामू रोता रहा । प्रेमके इस निवास पातन चसके बीवनसे मानन्द छीम ख्यिा। बिसे यह बपना समानता मा मही पराया निका। मारी-पुपरे इस विषय प्रेमने दोनो मनको माना प्रकारपी प्रतियिास भर पिया। मसफल प्रणयसे ही होकर मनुम्प कमी महरि या गोपीचन्दकी ठप पर-बार मेपर मोमी बन गया कभी इस सोफसे या भात्महन्ता बना । पर कई मममरोपर समन इस विस्प प्रमयसे चिाकर मट्टहास भी प्रमाया । मनुष्य मोर पसुलीका प्रम इसी बस्यका परिणाम है। पण और पक्षियोमे प्रेम करके वह सन्तुष्मा ! क्याफि यह प्रतिकार था । यह कहना चाहता था कि पमुका प्रम मनुप्यक प्रेमसे बम है क्योकि इसम छाप नहीं है विस्माममात नहीं है, म्वाब मोर संकुचित सीमाएँ नही है। तमाकथित ममय बोपन मिवानकामी माग गातियाँ यो मुसस्त मनुष्पके समानमे पशु समानी बाठी पी कमसे कम एक बात में प्राह हैा यह कि उनमें कपट और मिप्याचरम नही है। मै यहाँ चबाहरबके लिए केवल एक कहानीका मिल करना चाहता है। 'वोग कथाएँ बीनी साहित्यकी अमाप निषियों है। इन कमायोपर भारतीय कपा-माहित्यका बहुत पहरा प्रभाष है। बौस मोर हिन्दू कपामोरे बभिप्रायों (raobf) या मोन इनमें प्रपुर प्रयोग मिलता है। १९५४ साली साहित्यक दूसरे कम कई कहानियाँक गरेगी मनुवा दिये हुए है । 'बेमकी प्रेम पामा इनमें सर्वोत्तम मानी है मिमम एक पनु-परी (far fry), प्रमोत्सगको मार्मिक पटमाका बर्मन है। मेनन अंग नामक पक्तिमे प्रेम किया यो न तो बुद्धिमान् वा न रपयात् । अमके स्पस माझा होकर गाने मितने मामात पुनामे उसे अपनाना चाहा पर बह रीमार महुई। चेंगरे सम्बन्धी और सरपक पद्य-प्रेम मानुप-चार माइले बलपूर्वक नको अपनी बनाना चाहा । बेन मेहोश होकर मिर पड़ी उसने कहा 'माप पमी सुन्दर है समानमें बापका बार। अंग गरीब है, मैं ही उसका सहारा । माप पर्यो हमारे मोटे-से परको उगाना बाहरे है यह बापका दिया पता है पहमता है, इसीसे पापत्र माप ऐसा करनका साहस करते है। काम पम अपने परोपर सा हो पाता! कालान्तरमे मार-से इत्तोन उसे पानसे मार गला परन्तु पनु-परी अमन अपने प्रेमको कमी कसमिस न होने दिया। उसने फको गौरकी शक्ति दी। अपने रोंपर करा होने म रिका। परामलम्बिवासे पुटकारा दिलाया । वह पम्पी पर उम मेको माम बिसि मन्त्री पी गो बार-चपसे भासत होकर अफ्नको तमा बन प्रेमको बेच देती है। इप माके महत्वको मोर भक्ति करतेए सम्पारकने मिना कि परमाम मार-मामवासी मारिमा पोषन अपमान और दुबमे भय हमामा । मनीत मौर मृत्पमे पस्नबाली में माश्मिा बाक्पटु सम्म मौर मुन्दर होती थी परन्तु समागम इनका मार महीपा। परिये किसी पनी-मानी पक्तिको माहटी दो उसकी पत्नी मही डेस ही बनार पना परवाजेनको कमाइम प्रकारकी धनति प्रथाका बिरोष है। एक मापने नाममातीसाषी भी मैतिक और सुखी जीवन म्पतीत कर भरती है। पम धमनी पानवाली में सम्मिा उन्न परिवारोंकी औरतामे हात परम मिन लिए मतिषता मम्मान या भापरपका कोई महत्व पामार मनुष्य के प्रेमकी परमूमिमें न जाने शिवना पा शिम छिपा । मामरि मिपुत्र अन्तमम पान रितने तत्प मिले। पो में तत्कालीन ममान और उनके रीति-रिवारको गमभनम महायता मिलम मेनु रे साते है । पुस्पा और मशीतो प्रम-कामे पशु-तत्वका प्रदेश को संसतियोके मिन्नका सूचक है। यही ममिप्राय या मरि बमकर काका म्तरमे विस्वकी सहमो कपामोमें तरह-तरस उपस्थित हमा। मनुष्यके प्रेमको काम बनाने के लिए पशु-मनी न केवल घटकके स्पमे सहाया हए बस्कि सम्होने अपनी कायाका बाबरण भी ये रिया। रतनसन मौर पपिनीने प्रेमको परि हीरामन सुग्गेन साकार पिया तो दूसरी मोर माने फिटन मुप्त प्रेमियोंको मफ्नी कामाके परम पियर इस बातिक पधियाने र समाम मौर रासासे बचाया भी। पणु उपेक्षित है, विरसाव हम समे रेबना तक नही चाहते । पर पड़ने विरस्कारफे इसी मावरममे उन प्रेमियों को सुरमित रखा मो समानमें बने सरि-विरोधी प्रेमके लिए मपमानित हो रहे थे। पाने परि गर मनुष्यको इराणी मुरातारा नया सम्बेस रिया। मा भप कपट स्पाम पसे मोगोरे पामने पनु-बमकी मुरवा मुम्बाई बौर निगमताका प्रमाण पेश किया। सबबी मोर पुस्रपाको प्रेममा मानव-प्रेमके इसी मये भभिमानका विजय-पर। पार-प्रेम माबुप-नारे
टेराकोटाका साक्ष्य
[ उम दिन पुस्मृषिमा बी मोर पसी दिन कप्पो सोमा निकम
मोगवनकी परिक्रमा होती पी। कहते है कि पीदमकी पौरनीमे मानसी
मंगामें स्नान करके पोषपनको परिमा करनसे मनुष्यो ममी मनोरम
पुष होते है । मोमबनका मापम मपन भष्म रेहमी सुतस गान मे
बीच माया मह तो मुझे मालम नही किन्तु मनमें कोई मनोरम मे
तो महुवनपर भी में बात न सका। इसीलिए तमाम माधिपाँतो
उनकी मनोकामनाकी भरण्य-पात्रापर विवाद में पुपचाप ना रह गया।
सबेरा मा तो मनने परिरमा निमा मही मारोहमके लिए रोमें पति
भरी। सीधे पपठो सबमे पाही मोर गाता मा रहा पा तो सामने
कुछ सर चिकनी पटरियोको रेखकर दिया गया। पितमी किती
रिवनी सस्त है में पटग्गिा-जमीन अमुवपूष टेराकोग'
पर गुण मिला यह मानकर मुझे ना हम नहीं हुमा विना
जानकर कि यह मारत पूरी विट्ठी ई-रामेमरी रामाला पण
पायनके नाम परकी सर्वाधिक महत्वपूर्ण मारीका पर सामने
सबसेबो करिके नाम ।सा कहा हमा बप्रियाने रम पिना
मनापीको सम्मोपित करके एक माष सन प्रश्न? मही नही बोड़ा
पपिए और इसे परत मागिए।]
पुग्प परामप्प पापन परमोमें
मानेकी वामाचा पाला मतमोरि प्रधाम
माप ए पापो पापर बार पोधि मापने या मोषा भी
महोपा रिमामेकी यह प मोपा एमति निशी परि ममीपी
इन पटग्मि
शिपमा मनु
म्यामसे उनके सारे तित्व लिए जमावलेही मदिमी। मप में ऐसा पृष्ठ करनकी मासे यह पत्र नहीं मिल रही। क्योंकि मेरे लिए अपन पीपन या म्पमितत्वका भी कोई महत्व ा ही पर फिर उमरे लिए बाफ्से कोई प्रश्न कर ऐसा तो सपा कमी र म पायेगी । बसे भापका 'भागवत' पहा ए-हा यह प्रश्न मेरे मनको मामता रहा है कि मापने ऐसा क्यो पिमा' बापने इतने विस्तृत माम्ममें एक बार भी रामाका नाम मेना मावस्पक म ममता मापन कही भी बरमानकी इन तुच्छ नारीका स्मरणम किया क्यों मा एमारनेमे मापके ममता पुष्पोत्तमकी कीतिम मोई कमी मा बाती क्या गपापा नाम मनिसके ममुग्बर पृनो धूमिल कर देता' या उसके माम मागम भागरत-रचनाम भनित बानी पी-शान्तिको टेम रूप पाती । फिर क्या था ऐमा मिलने मापको उनकी विस्तृत पीडामों के अपनमेरे नामको मकागमके लिए, विम किया? मच महाकषि मै मापकी प्रतिमा मौर उम्मेपमामिनी प्रचाके किचित भी बनाररके भाषम यह सब मही कर रही क्योकिएमा तो वहीं मोचेमा निमन माफक ममृत मारोफे अनिर्वचनीय रस ऐपवर्यका पान, छिया हा। म बाई मी तो क्या भूल पाउंगी कि मापन यमुनाके तटयनीं सुनारम्प में पटित रामका को गमन दिया है उसने एक बार फिर मेरे मनम सोये करोफर जगा दिया है। ऐसा बर्मसी भोर मन मुपन्मित पुष्पों- रा मान्ठान्ति यमुनाका मह म मपनी मपूर्व विम्यताम वगत हो रहा पा उमी समय परमाने प्राधीक सौबले मुखपर मपनी ममम जोमस फिरोम ग्रार और रोगी ममी। बाह, बसपका यह पत्र माम बौर मी बमूतपूर पीप पूर्णिमाकी रानि । माका गम मून सरके ममान पीव-स्ताम वा गौर सी मत संकोचमिमित अमिसापा. मे पमा पापा यह मुका मारायन-पाव चांदनीम भाप्फारित होग हिपर रन मारकी मार प्रसारको अपनी ऐसगारिक मासाती राम ताप मपेटमें ममेटती हुई और हो उटी। पुष और मन्दारकी मापस पागस बनी हवा उम मांसुराकी पनिम इमदए विशिष्ठ हो पमो किस मार्कोपर लूनकी गरमी प्रसमा गायी । गोपियोम मफ्नो मम्म पुस्कान विकासपूष चितवम और तिरो माहोस श्यामका सम्मान किया। मौर तब मारम्म हुमा कोमा-पुरपका यह महारास जिसकी एक-एक पनि एक-एक मति एक-एक तान इम बमापिनीन अपन हृदयमे पारसमविकी संबोकर रतोपि हम तो उस महापिति अपूर्ण मानायके भोक्ता पहना चाहे भी वो क्या कह पापमे किन्तु बर मग तुम्हारी सिकासे पिषित पसक मनोहर इम्म देखे तो मेरी माले बासुमोम मा बामी सब कपा एसा पा सौम्पस उस महारासका कहात देखा पा तुमने पर एस ? मुरधन पक्रकी महामपलाकार उपपतिको बलमे सुरक्षित स माप हा एक पिपीमिका भी बिना बामा प्रवेशमकर सच्ची की फिरको समुपनाम किमा पा माका यह अनिवचनीय सौम्म' कहाँसे मिडीबी तुम्हे बह बम्पाय-मनोहर मतमम्पपिनी कला-हि ? माह पर मैं तुम्हारे हम समाको पाती! तो रोम-रोममें जैम पंछ म गाते है। सरीरके मनुबा महापाका मनुष्ट नृत्य साकार हो वा है। मृत्प मारम्ममा माश्या कमन परति पामबीर करपनी- के मेटेबाटे मुम्मोकी समस्त पनिसे रिसाएँ बरौ। समुनाको रममता बीच पौरावनाओंम वरूपित माम ऐन प्रतीत हो ये मानो पाची पीसी (मकती हुई सुगममियोंकि बाप नीए मणि अपनी गोप्तो पाहो पा कोठ मना रेपमी होगा तीन भामुषन मोहोडा सस्मित 4किम बिताए बापतका बमापास स्थान कालके गोका विपनुपी विधान स्तन-मगकी अनुपम चिरकन । अमने मानेकी र माटपर FORT ठी भारी विषित हो परी मायाको गुरु पनी। मपरिमेय पतिम नापते हुए म परत स्टी मोपियों बीपी मिशागतकामे बारमि पिठ विट की कारें मापी प्रितमतु पूषममाये हो किसीकी परीस ( विवरफर पृषीपर मा यये सासकी मरमा मिसा मनपर लगा बतानका मेप सूब गया। मौर इस प्रकार पर राम-जीमा प्रमस समूचा युबतिबन्द बफ मया जाम हो गया तो नन्हें साथ मेकर प्रवेन्द्र मीस यमुनामे इस तर पुसे से इविमिमेकि भूपके साप भवरार सरोवरमें प्रवेश करता है। उनके गहेमें पड़ी मापार पधमामा मोपियोके ममोती रमसे पुषह गयी पी विमपर शो सुप काहे मरि मग्रा रहे थे। वह बानत्व बह उम्सास पामाहाप-1 से उस पूर्णिमाको रातमें मनेक राकाएँ बपने निहस सम्मावको कर पुषीमूठ हो पपी पी। सच हवी है करि । मै रासका मह भित्रन पाकर पनेको स्वाय मानने ममी मुझ भगा कि मोहनके रासकी सारी मारकता कुमारी बापामें समाहित हो गयी है। किसना विद्याप होगा तुम्हारा हम जिसमें प्रकृति पुरपकी मिरार मीठाका यह मतीनिय सौम्बम समा सका। निसनी मपूर होगी तुमारी पवर्ग किमत सरस्वतीले मन्त्र र तुम्हारी गिजाको मावास बनाकर बस गये। फिवमा राम रससिक्त होगा तुम्हाप मानस कि सम बहुविध पोके इवने भाषा एक साप बहरा चठे। किन्तु, मपूर्ण मीनिय मानन्दकी पह बारा क्या एक पपके लिए भी तुम्हार मनम विमति नही हुई ? रह-रहकर बमाम मुभा-सियुमे सन्त- रम करतो तुम्हारी बुधिमा एक बार भी प्रदित महो? क्या वृन्दा-विपिनकी कौगोके धमाफ्नक समब रामाका माम तुम्हारी गिहापर माकर तु ममिमूत नही कर प्या? इसके उत्तरम तुम पाई बो भी कहो पर तुम्हारे मनकी पौग किसी न रह सकी। पेश करके भी सत्पकी बस्ती ई चिनगारीको पक्षपोकी रेरमें छिपा न सके । मदु राष्ट्र मनमें गोपियोंकी सारी कातरताका विषण कर समय बन-बीपिका पर रमरे पदचिहाँको रेखकर सहम क्यों गले पनि ? रामोत्सुरु गोपियोंकि मामेनका मान ४ सामनेस मोहम अम्तमान हो नये और मिप- विम्ब मोपिया -MOF- परध्यसे उनका पता पूछठी प्रमा-धाएँ करती बन सनस विणानों को निमस्मितारवी प्रचारप्पमें पासी सहमती हीरामम्तिकायह निमम मबहार पुषवियनोके हायको कमम्मिी-पपर पिरे करका-पाकी तरह विरोध करमे समा। बेसम -बिगस्ति पम हा महाम! करती हुई पुररी पसीको वप मितसमे सपा । वमी साममके तापले पास पुन बानुकाके बमपर स्तिो पो पर निल देसार ठिर पर्यो । उन परमिलोम एक तो पहनाना पर मानहाय पथ और मम को रेखामोंमे बनत मोहनका किस्तु दूसरा पनि ? सिके। परष ? मपु-भु परम-विलोमे एका अंश अपेमात पपिक पहरा और स्पष्ट पा-निवम्बिनीकी विलम्बित पति-हार बह बसम्म ही कोई सुबती होगो मोपियोन सोपा मार प्रेम-मिमित ईमि प्रमत्त होकर बोड पो बसे हपिनी बपन प्रामसखा मगरायके साथ ममी हो सही मारनवन मामसुनारके साथ उनके कम्मेपर हाथ रखकर मनमानी किस पामायिमीके ये परन-विह? माह कनि पोपियोके इस स- समाप विना परेपाम ए। भापको मा किवही सारा रहस्य सुतम माय । मीठापुस्पोत्तमकी एक ममापिनी गोपीके साप विप प्रीतिको कमानी जन-प्रबार बनकर मामुमगमको र के मीलिए आपने हम हतको वामके लिए अपनी पूरी पत्तिो साप छ नबोलनका नियम पर लिया तुनी सावपानीके मार भी माप उस सत्यको जिा सके क्या? अचानक वापके पुखस निकाममा अमयाऽऽपितो मून मगवान् हरिरीसर । यो विहाय गोविन्दा प्रीतो सामनपद ह॥ (मायठ १३१२८) और गाय माप मानम हा महारामिम मोर पदमे जाम हटात रापारा नाम प्रवेश कर पग। मेरे मामती समूची गुम ? नियमसात प्रीति अपनी बदाम्पताकी शक्तिकर उपस्थित हो गयी। भाराभिकाही पपा हान गोहे भापके सामने पड़ी हो गयी। मै इसनेसे भी भपनको कम माम्पमासिनी नहीं मानती कि महापपिके सम्बोमें मनायास इस तुम प्रामीनाका नाम मुशित हो मया। मोहनकी उन माषमा छौभयोको मधममि मेरा माम न पा न सही मैने अपनेको उनके मुबकी सामोदार माना ही का? भिन्तु महाकषि स तो मेरा अपना मा उसकी मभिव्यक्तिका अधिकार भी मापने क्यो जीन म्पिाएमके प्रति मम ममागिनीका प्रम सा ना बा गुस्वर अपएप पा कि उसके लिए बांसू बहानका भी मेरा हक म रहा । रास नीय सरके सुबकी मन्तिम परिमति पी। कौन पामता पाकि उस गकारी मप्र उगलत पानी के मूमें मूतछम्मापिनी अमावस्याकी काही छाया मी हुई है। किम माइम पा महाकमि कि ककमका वामन रोका रपम मारका पन दौर करबनीका बागियन म्मपाकी ऐमी तान ममाने जा हा विसकी सास्ती सकस इलयका मनु-बगु पिरफास तक कराता रहेगा। रुष्ण परहनुको प्रम पारे-वारे माता गया इपकी पीस हॉट पिएह-पीत बनकर ष्टने सभी । दिम तो बंध-तम दररेट पाता पत्र मयस्य नागिमकी तय गफ मारकर बैठ जाती पर मदराषि बीतते- बीतने गोपियां अम्मा जेहकर उठ पम्ती रोप बसाकर मास्तुदेवका पूजन करती परको बार-बहार कर साफ करती और फिर वही सिमोन बैठ बाती। उनकी फसामोके पकान पीपली ज्योतिर्म पम मामूपों मणि प्रीप्त हो उठते । काोक कुगर शुभ-ये कपोऊपर अपनी पमा भूप-महा प्रशासकी मृष्टि करते और उनके काम केहए विएनीत पगली गम्पिोको ममीब पौरासे भर मे। ऐसे ही दुर-मरे समपमें सब माये । गोपियोंके धीरजका बाप टूट पुमा पा। सबको देखते ही मनकी बीम ग्थनि पोपमा एक साप हो यह पसी । पास वाये एक प्रमरको सम्बोधित कर मोफ्पिोने मोहनको रागा साल कपा-मपा नही कहा । सो विधा सम्पद ! निसीन मनुफको मालिनी मारियों के परमोंपर प्रषिपात करनेका साना बिमा पिसीमे स्मार्षी हा विपीने पुष्प-रस-कोभी किसीने कपट मरी मनोहर मुसकानको कोसा किसोर विर मोठी बागरीपर मप्प किये। किसीमे गर्ने निर्मम मी निर्मोही कहा किसीने माता पासमार और सिपाकी पानि री। पर महापति उस भीरम एक ऐसी भी दो मोपी पी जिसन गुम महा। क्या मापको पाद महाकिम एक ऐसी संतप्ता भी की पो प्राय कास उठकर बीप तो माती पी वास्तुरेमकी पूषा दो करती भी की हो बितोती पी पर कभी उसके होटोपर लिप-पीतकी करियों नही उठ पाती- पी कई बार ममको म्पमा पूरे पोरके साम उमरी पर पीच होठोंपर पपड़ी बनकर मूब गये । यह सिर्फ रोती रही सिर्फ रोती और उस लिपी गोपिकी सारीबाप्रेध-परी बायोके समाप्त होगामेपर सब बातमें अब जब उन् समझामके लिए मोबन बरे वो उसने सिई एक प्रश्न किया पारमापने बह प्रान दो मिना पर प्रश्न करणमासीका नाम नहीं दिया अपि पत मधुपुर्यामापुमोऽभुनाऽऽस्ते स्मरति स पितृगहान् साम पन्धुप गोपान् । पषिदपिस कमा म बिकरीम मीते मुगमगलमुग, मर्मधास्पत् दा मु ।। (माक्यत १ २१) 'प्रियके इन मकर मुझे यह वो बवामोड बायपुष मापुरीम मुलसे तो है? क्या गमवावा मधोरामाता मित्र-सहामोमीकमी मारावी? बना हम रासियोकी भी कभी बाठ पमम् t? माह, माप क्या फिर भी इम पीपममे ऐसा नबसर मायेमा कि वे अपनी ममी पपमे सुवासित भुगा हमारे सिरपर रमे महारपि क्या इस प्रश्नम भी औरों-सा ही माधवा या इममें भीमहीप पा उसपना पा मा पा विधासपालीमा पी। यदि ५१ भिपन सेतु . मही तो इस प्रस्नको मी मापन उनी प्रलकि साय मर्यो रम दिया । किसी ने उन्हें मायपुत्र का पा? किसीने उनकी भुमामि पान्विशयक अमुम्की गन्ध पापी बी ? रापा उन भुवायोको पठेमें धारण करनेकी मपेक्षा शीप्स पर मचाय करनमें ही शान्ति पाती थी। माह महाकषि राधा चन मुमामोमें मावक कस्तूरोकी सुगन्म नहीं ली थी इसीलिए उसके मनसे सके लिए नमानेके पोस मही ठे। यहाँ भी मापने राबाके कपनको बनामा ही रहने दिया। मामिर क्यों ? क्या मपनी पिए-पीडाको कर स्कमेका भी मधिकार मेरान पा? किम्तु, मै इससे भी एसी क्यों हो । बिसने समूचे तन मन प्रानको बस्ति हासाकी तह निधोरफर उन परमि समर्पित कर रिया वह म्यक्तिलकी सुरक्षा नामपर मह सब कुछ क्यों पहने बगी। मेरे पपका यह अभिप्राय विमुकम पा । मैं तो उनकी सुख-शान्ति मौर कीति के लिए सब फर्मक सिर-माये हर मनात मोलमें को पाना चाहती है। मेरे जीवनकी परिवायता सिफ इसमें भी कि मै उनके हरयम नारी-समर्पणकी यह प्योति बहाकर निर्मागको प्राप्त हो बाबो गो-युगों तक उनके पका प्रकाच बनी थे, किन्तु यह भी पायव मेरी बहम्मता ही होगी। मै न्योति प्रकार कुछ न बन सकी मैं तो उन पैरोंपर परोके फूपकी तरह सिर्फ पा भर गपौ। प्रकास मा न्योति उन्होंने माना यह भी उनकी साली मठा ही थी। मेरा प्रेम परि महासमरमें उनके पिरका करप भी बन सफा तो मेरे मिए यही बहुत है। एरी उपमुत्र कहो तो कपि मै इसटिएबी कि तुमने मेरे प्रेम- को मोपनीय समझा से म्पिानेकी कोमिन की। फिर इसमे भी तुम्हे पोपी क्यों? मै गाह पारई मी दो मा पुनिया मानेगी कि रामा और प्रमका प्रेम बारमास मारमाका मिनपाउममें परीपादवर्य नही अपयका रसतत्व पा। तुम्हारा मामवत ऐवसकी कहानी कहता है। उपडी पट्ट महारामिति विवाहकी पाया। परिमनी और सरसमामागे पामेमप्रसाश्य प्रमयकी कहानी महौवा सिमका साप देमी पविक मनुप्मकी परि सरीर, कम मौर ऐलयकी सीमाको माहिरी मषित मानकर बैठ पामेवी पर पर विष्प मालयकी महामाया मुसहोपी पो वह सीमा पसम्म ही प्रस्थान-णिमा बनेमी और तब मनुष्पकी मानस-पापा नेतृत्व करेगी प्रशा। उस प्रमाके सोकम कृष्णप्रिमा परिमपी नही "पपा होमी । बापनका माय ऐपम महमानम होमा "रसोस । महाकमि में बदमें एक बार फिर मामय-सी ममृत-बाकी रचनाके लिए तुमाए सामुपाद करती है। थीम परमं मम । इति ।। -पा गिता जेहि मन पवन न संचर मतिकता ! बाचार्य पिरतिमेरमने होठोतो किचित् पक करके ऐसा मुंह मनाया जैसे किसी कमकाबीके सामने मम्म देते समय किसीने मदिरा का माम किया हो। ममी मोबनी दरहको वास हुदयकी किसी उस्मास- मयी मिहरनसे सजग हए, मुगडानेको बफो को पारमें सोचते मात सिंहकी गांव से एक मबीब विरक्ति उपेक्षा मोर पफ्नी तारक मान्त- रिक एहसासधै सम्पन्न प्रसमतासे चमक उठवी विरतिमैरमकी मुरियों- मेसीबीचमकी 'मविकता पाबपियोका कमल है, जनताको मूर्स बनाकर अपना उम्त पोषा करनेवागेका पनित टट्टर, मिसकी मोटसे में निर्मोप मोर मामूम होतोंका सिकार करते है ! तुमने यह पन से ही सीमा है से बचत शिशुको निरपेप्ट बनाने के मिए मूस माताएँ भूत-प्रेत- की बात किया करती है। नम भूममेसे मषि मुक्ति मिले तो मुत्ते और सियार भी मुक्त है । मयूरपक्ष पान करनेसे ही मुक्ति मिमे तो मसूर और चमरी मार्च मी मुक्त है ! सिका चुनकर बानेसे ही मोम मिलता हो तो करि मोर तुम क्यों मुक्त नहीं है ? रामकुमार बाचार-विचार पुष्प-पापके बारेमें ये सारी मिप्पा मारणाएँ तुम्हें तुम्हारे संस्कारोने भट्टीमे पिसायी है। इसीलिए पर जीवन तुमारे लिए बनैतिक है प्राति तुमारे लिए बगम्प तुम मामाके मोहक मापरनम लिप मार हो" किन्तु माचार सहब बीबनके नामपर तानिने भो भत्पाधार फैमा रमाई भैरपीके सन्मानके नामपर निरपराध सुन्दरियाका मफहरम पक्किी प्रसमताके लिए नियपि मपियोंकी बठि बनसको पास कर माक नमानेकी प्रक्रिया सुज म्पभिचार और मम्म मैथुम की मब पबन मम - स्प शाहा! बस करो बस ! तुम्हारे समा-पति समनि भो मानका उपरेप तुम्हें दिया है उसे मितिमैरपके सामने कौशियोके मोड क्यों रुयते हो? तुम अपने मुद्र बमर, तामसिक महंधारको विराट् । कर अपनेको सारे मिलके मादरणका नियम्ता मामठे हो एमसुमार निसको भूस्टिकी मात्र तिमलिसे पत-मत सिन्दुमामोम्ति होते है पसको पायको रोनेका बासिय प्रमलहाहाहाहा! तुम सारे विश्वको सही रास्पर बायोमे ? सही रास्ता मानी मोनसे विरक्ति! तुम मापसे कर सकते हो कि यह मसाना मादे पचमसे तुम कहोये कि बह पति छोर । मम्मिका धर्म है बमामा और परिवाता प्रकाध । तुम उसके सहन वर्मको नष्ट करके प्रकार पाना पाहवे हो। पामो जागो अपनी पी बहारदीवारीके बन्दर बर उस महकमें बैठकर अपने हम कुफ्ति ब्रह्मचारी समा-पपिताती बाटुकारिताको भामकी पराशय समझकर पमपर बननेका शेप रपायो। मह सब तो तुम्हारी बुधि बामेसे यहा। प्राचार्य! अपमान और सानिसे रामकुमारकी माने भर मामी 'पामर पनपर कोष नही स्नेह पाना चाहिए । पमा मह सही नही। कि मोपके प्रति इस प्रकारकी मासक्ति हम पा-मुरूम पसम्पर वारती है ? हमारे ऋषियों-मुनियोंने सामों वोको सागमारे बाप मनुप्प मनसे नित्ति मारे मनुसरपक बापारपर पायनिक प्रवृत्तियाँको दूर करनेका जो प्रयत्न किया। उसे मापका सहर माप नष्ट कर रहा इससे इनिम शिप्यारो माया मिह पा है। 'पगमार हम महानोको उसकी विषयता मानकर आमा करते है पर अपापरेशानकी विवाई हमसे पराप्त नहीं होती। बरसे कर बार तक बारममिका परेप रिमा गाया। मामा परिणाम ? सुमोपे? कुन सने तुम्हारे कार' भविषारित रमनीय सुनने मम्मत म्हारे पान मूति पाप नही सह सये। पास्त्र-माबारे समय अपनी मिमांग से बांग्मे एक ममात पिके साथ पुनमें गाते देख पि मामा कराह उदय वा मुमती पत्नीको सन्तुष्ट करनेके लिए अपनन सापनाका अपठेह बनाया पम्मा गरेकार भागोंकी गुरुमाता काम-मोहित हई, माताका पिरमर करक भी गातारी ऋपि-पुत्र काम-पासनाका ममा बाट म सका । अपनी मुक्ती सम्पाती मनस्तुष्टिके लिए मसूर पुरोहित सुकवायने बपने जामावको पुषसे यौवनका शान मांगने के लिए प्रेरित किया बीबर पम्याकेमके विस मार्यपर पाराप्तरका ममतेन फिसह मया । तपस्यासे बडीमत परीपाठा अषि गंग नागरिकामोके पटाम-वस्तुसि बेकार पिवापारा निर्धारित बायकी सीमा म पगा। 'माचार्य- हा हा हा ! मै पहले से बानता पा रामकुमार कि तुम्हारे काम यह सब मुन म सगे कोंकि तुम उस धाराको मानते हो यो विपन्न मूग परती- में नहीं बाकाधम पता है, तुम मसको पोमूत करने के लिए उसे पकाना ही पाहते यस्माको मजबूत करना चाहते हो। मनको बीभूत करना है तो उसे उसीपर छोर से भुवनविमोहिनी प्रतिके मिस मा मंशमें पहरमा है उसीमे रमने रो। तुम उस ऐकोकी कोशिश करोगे-प्यान- से पारपासे समाघिसे-तो पानते हो पा हामत होगी? बोट सिस सरहपापके मम्मोमें यह मात्म-बचना है। चित्तकी कम्पित एकापता तुम्हे अपने मनसे उत्पन स्पेमि मरमाती है। गौर भूलर गुम बनेका रोग करते यात तुम अपने चिरासे उत्पप समाएको देखते । यह मारम भौय मित यभिचार।" ' मार्य रामकुमार मुमकरापा 'बार बापळे मावरा है यह पान पर प्रसपता हुई।" 'पुम्हारी मुसकराहट नातान मोटी हसी है यह मुझे मोठी मनी । में यहाँ विभिन्न सम्प्रदायोके बर्मनकी म्यास्या करने नही 4ठा है। प्रश्न के मविकता। तुम्हारी मापत्ति रगतमाम मटॉपरो भोपका मेति मम पवन संभ इससे साममा अनिवाम सामन माम है। इसे मोम कहो प्रवृत्ति कहो त. सामना मोबो मी बाहो कालो पर एक बात मार रखो इससे मार तक कोईवधा नहीं है। मन और शात वैप्पय कोई भी नहीं। विमास नहो तो 'महामुद्रोपदेश पयसपाति' या मवरणनीतियो। तुम्हें महामुद्रा साप पर सापक रमपकी साधनाम शान हो जायेगा। पायर व तो इसके लिए मानाम हो हो। पर जमा मुक्त है ? रस-सानाको दो पनि 'रावावलम पराकाष्य- पर पहुंचा दिया। भी इससे बन सके। उन्होंने भी परस्परीन उपासना की और संयममी तपा निर्वाष-कामिनीके मालिमाके गीत पाये 'पर परिणाम क्या मा बापापम्मभिधारमारतोनिमसमापतिको साधना माननेवासामे कौन-सा ऐसा कार्य नही किया जो गहें पसु परेबानेसे रोक सके । इनिमविप्मा और गरीर-चरणको ही पुस्पार्ष मानना थामद धिमानी नहीं है। कौन करता है कि इनिप-लिप्सा पुरिमानी है। पपी सारी प्रथा तिबा मनुष्यको प्रतिसे बाप स्पर्मे मिली। इसीएि वो हम हो । किबो कुछ तुम्हारा से उत्सग करके अपने वास्तविक स्वस्फको पह पानो । तुम मरि मानकी मूल प्रवृत्तिको ही पापमोपे तो भारम्भ होगत हो बापेगा। मन मा बासमा पुबका नाम नहीं है, वह मत देनेवाली सिर-मुटिका भी है। पित बह पर भूमि है क्सिम मनुप्यको म्यान बनानेवानी भोके दर उपते है। उसे पुरत पर तुम क्या पामोसे । कुषम सकोसे भी इसमें सन्देह है। इसीलिए पगमार हम कहते है कि तुम बने हो उसीकोन मुठमानो । मोरोकी माता भी मटक पर कोषसे अधिक पुण्मही होती। चाह कर भी तुम 'म मार 'तुम' का मेर महीं भूल सये। मूम सकते हो तुम? मारी और पुण्यात मन्तर क्या सरा तुम्हारे पित्तम मिनेप नही करता? और बबरूप font तुम निकाम नहीं हो सकते । सम्सेबल पित्त कर तुम में है जिसमे शि प्राप्ति करोगे HER! रामार पो मै और 'तुम' के बापरकी गम माला मार और शममें विसे सामरस्य निचापी देता है उसके लिए मारोगों और साना-पीठम कोई मन्दर नही है। 'नारी भाप सापना-पीठ भावार्म पर एक सय वराहाको पुष्मिठ पछि जमकर अपनी तपाकषित पतिका धापन बनाना या नारी सस्प मन्याय नहीं है? महामुरा मैरपी प्रकृति शक्ति अक्षिता मादि सम्बोधन र नारीका ही पक्तिम पतिविमि बताकर उम मा बनाकर अपना TEE कम सीपा रहा विश्वावादी पावणी पात्रकार या मोमबायो वानि" सुमारले यकी पठाको हायकी पतासे प्रचमित कप्पे हुए हर पोलीपारी परिपत गरिमाको समान में मारी मार फूटी मही समापी पर इस बारम- रचनाको मानक समयी? "माम विकसमे मागमा दुरी नहीं है परमार | 'नारी यहाँ पूलित है यहाँ रेकर सियाम करते है यह मास किसी वानिकन नहीं पदापा। तुमारे देवताओं के निवार से ही भागार हे बोर तुम्हारी पूम्प नारी-प्रतिमाए पाटमिन और बम्प दो नपरेमि डौकरकि भार वितीया। नारीको पम्म तुम्हारी मतियाने बनाया। पुमित पानि पासमारीको हमने कभी नहीबामा। पासामोंकी बरनाला रोग हममे नहीं किया पती मनिका गुमनाम हमने नहीं गामा पातिपस्य- की मागको संस्थापित करनेवाली मारीकी ममि परीक्षा हमने नहीं की। स्वरबरका अपहरण हमलमहीमा। मुन्दरी मारी किए महान् पर हमने महीने बारीका बहामनकर हरकी बापाबा हमने नहीं माता शास्त्राव को सव रिशासाकी धर्म माननेपाच पाक मिरकोपटगेकी एमफी हम नहीं दी। वाहमने सनही मिा म्पभिचार मौर ममताको प्रपप दिया जो विया' पर यह तुम्हें मानना रहेगा कि बार भोगासी मापने मारीने पविता प्रतिनिधि मातार से एक मयी भूमिका प्रधान की। वरेत पापापीको परोकी प्रतिसे नहीं ममकी यासे समीप बनाया तुमने जिसे मरिहापा पापका सोपान कहा था पतनके कूपमें मियमेवासीहा पा से निम्ननिमोहिनी प्रतिको सर्वाधिक महत्वपूर्ण अभियक्ति हार सिरिमायिनी देवी म्पमें हमने प्रतिष्ठिा किया। हिपमा-मोक्में भाषा | म्पमिचारसे नारी शक्तिपूर्ण नहीं कान्तिहीन होती है। रामछुमार ठीचे पाकी कार बमी मन्दिरके गर्भ-गहमें पोपी हो पी कि पपी-मपपका मुम भाग कपूर-दीपोती प- भारसे महा उम। मरिक-पंचरमे बोहए कपास-दीर्पोको बमिपके पास सार एक मुबतीने पपीकी मूर्तिको प्रणाम किया। बस्तपत सूपकी मेरिफ मामा करी पीप बगामुमो की वह पराने पे। अनगिनत पीपति कम्पमान प्रकाममें राबमारने रेखा एक मपूर्व सुन्दरी पापयसि सप्तकापन बम उपत प्रशस्त मारपर मोरोपनका भैरवी पारिक सिन्दुरी साड़ी में लिपटी मुश्लिम देहयष्टि हापोती मीस रक्त पिराएं पित्प्रवाहिमी ममिकामोती तह उमासित भारत नमि मणिपर सप पैशी नमक पत होठ बिठीया पनकी एकिम मास्वस्त भाष" 'तारा" विरतिभैरवको मावार करका रिकी पामार की 'यहाँ बायो। पुरती सिंहमविसे पस्ती हुई पम-महमें पहुंची। पाते समय पिण सिमोसी नसें पाटक समीकी तप पिटर उठी। मारे भाषा! 'रामकुमार, मेरे सपना-कोरकी यह मारी तुम्हारे सामने पड़ी। ममता भोपोपकरण पुति पनि भमित भारमामाको होनेवारी मारी । तुम इसमा मामिमन करोगे? तुम पुस्यो माहो और पर अनैतिक सापनाथ मन्दिर पपिचार स्थान-बोसो ? रायमारके सरेपर दीपापारसी छाया सोट ही की। उमने मापन शिता सेतु न म मुकाही लिपर मांस उसने युवती के चेहरेपर रेखा न ममा सिभक र म माको । होठोंपर विचित् क स्मितिरेखा पर बी पर उसमें उपहास है दप्य , या उपेक्षा है- यह बामना कठिन पा। बह ऐसे देख रही बी से माता शिशुको रेखती है रामकुमारकी वा जमीनमें यह मयीं। उसमे बबटकनारीकी मांगोंमें विवसताक्षी पी समपग मार निरीहताका मात्र रेखा वा सायासे मारक्त कपोकोपर बाबासकी छापा रेसो पी। 'राबट्ठमार तुमारे तामसिक महमारका सपमणि मोविसे बगायों हो बमा को उठो परो मामिन ताकि तुम्हें मानम हो बाये कि उमरेतम्की सचित बनिमे पानि पयत बहमर मार सिहोते है ताकि तुम बान सफोकि अरसे मसूम दिखायी पड़नेमा मनिपर सर्पकी मुसा में मोहा से टू पाता है, ताकि तुम्हें मनुमय हो कि विपकी धाराके मस्पासि रक्तपिराएं पड़ीमत से हो पाती है 'बापाय ममा ।वाय मैने केया मिशासाके मसीमूत होकर कड़ी मामी दी। मा बनोले तारा म्मभिधारको पूक्ति होते रेख मन संका हो गया था। 'पमुझे तुम सा नासा करते हो रायमार ? मान केला अधिकारी- को बिया पाता है। बहानी माहारम्बरको ग्रहण करखे है वापस मर भी मामा मौग करता । स्मृतिकाएँगेसाबा बहाँ बेबस पास्त्रसे माररासि धर्मका विचार न हो सके यहाँ 'वात्मनस्तुष्टि को पम मानना क्यों कहा मा ऐमा ? प्रत्येक मत मभिकारीकी स्पस्था करता है । मणि कारिपोर प्रदेशसे मतको परिमा ना होती है। पात्रता मनुसार पुरा बम्पास भी हम सोमित मौर मगर बम प्राप्त करते है। इसके लिए फिसको ोपी पहोये? वैष्णनि हापा ममुप्पो प्राप्प दो-ऐमय और रन । मिममी रूपमका ऐश्वप, पपा रसवात । लिममी प्राप्त गर्म फा प्रपा प्राप्य । तुम कर्मफको मोमे बिना रस्तत्वको पा नहीं बाहि मन पबममांची सकते । सांसारिक मायम तुम्हारा प्राप्त है, नहीं। पपु प्रत्येक सुनको प्राय मानता है, परीर सुसको ही इE मानार पो गर्व पिरता है। रस परीक्षा नहीं मामाका धर्म है। परीर सुबको ही पनिर मोमको ही परम मुख मानकर पशु प्रम भटवा । पाप रसो मनको काममार्मोका दिनास ही महामुराई । बोस सिरने महापालिस मनमें पान तमो गति मारी होती पहा मुरप और परिका भी प्रय मही उस स्थिति पर ऐ चित्त विधाम कर ! पेहिमम पाम म संचरह, रवि ससि पाहि सस । सहिद पिच पिसाम रु, सरें कहा उस ॥ शियरीडा मेनु
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कासे के लोटि भायी अम्मा हो---
अम्मा पारिभम्मा मलि हो सासू हमार
मश्या दूर गपी
मैं इस एनको सुनकर को पा कोपिस करनेपर भी
वामे को पाना मुश्किल है। सारी ससरमोहिनी मेरे मनके एक से
टूट जाती है । भाई-बहना मार गाने सि विस्मृत पुनके ना-प्रष्ट
इतिहासका पन्ना है यह ! नये भाव मानेके लिए नौरो पापी
है। मामान बानिक पके नये मकान और मारमें यह पाया
रामसे टकराकर हरीका एक सम्मा-पीड़ा का बाहर था बाम
है।मान किस धमाका मणिरायबा सरियाकी रेत नीचे
पा-बापा बमी भी वाहना।
सब क्या था पता नहीं समा वाम पा पारों तरफ। डिमें
एबसे विस्तृत प उसीका पायो ती असावी एमकेमधीभूप
होकर विक बोनेपर मी यमीको पमुरको सम्बनीमीने नाकार
के मारे मीत पहराधिका पार पारावार मा ती सो पुषाम
गिर रसपर हिरमपर्मका एक नया साबरमती रिसको
घम्समें सब कुछ मुन्धरा नमानीत-पात पापक पृषीपर पने
बकरे। मनुष्य मनपरका जीवन पतीव करता था। तब सभी मात
साएँ सानो मागरम मिटती नहीपी मीर गर्म पात करने
बहरमी समोरका अनुभव ही पवा बामपु गात और मधुमको शेष
पली ममी एक दिन प्रति अपम्प सोनसि पिमुम्ब तिी नयी भासमा
से माधव हो पमै । उसने अपने माई यमगे 'प्राों मनाए
मम्मोषित किया और इसकी समरसती टीपासे रेरित होकर
बोलपटो
हैब में हम विणात सके सम्म गुमसे मिलना गमतीन
माताको कोखले रसन्न मेरे पामा सणा हो।
("
पिता सेतु
बमुतकार्य मह नमा रल पा इसी कारण इपिनि से भोकी मर-मरपाम प्रतिष्टित कर दिया। माननीय कम्यान सुरषि पौर परिक्षा गस्पम पमने बो ममि प्रम्पति को उसमे सपियाँसे हमारे मनमें व्याप्त बायकारको दर मिया है। इस उपाधमि तप कर समाप कुन्दपको पद नमक उठा। मोर यम-ममीस यम-यममा तक फंसी हुई विकसित भारतीम संसति सानी है कि ममीने यमुना म्पर्मे अपमे भाति प्रारको रमा करने पूराश्मिा। यमुनाफा भैया दूर दिवसको एक नयी घटना बन गया । मम-समीके मतपक्ति सम्बयो एक निगूडबर्ष ाि है। पम तो ममीका भाई है। उसके प्रति उसके मनमे स्नेह, ममता प्रेम का होना नैसपिक है। किन्तु मम्पिनीत्वको परीक्षा तो इमरोफे प्रति मर्पित मेवा है।बोसको सपना परिवार बना के बही गान है। मोर पो वितने बड़े समूहको अपमी नि स्माष सपा पम्ता और प्रमो बन्यनमें बार सके ह उवमी ही महान है। भगिनी ममा सिस्टर एपके पीछे महेशुफ निस्वार्थ सिमानकी यही मसुत भावना बम्तनिहित है। भारतीय पारिवारिक बीचमी बन्मानमुपका वनुमान लगाना हो तो इस भमिनी अपना नाम एमके माप पू गोंकी प्यास्पा पण है। भारतीय परिपारप बहन' मेमण है। यह मर्यादा सौरर्म और पी प्रेम-सानाही जीवित प्रतिनिधि है। हो सम्वा है कि पूरिक मारिष में मातृसत्ता परिवारमे स्पा और शक्ति परीक्षाके दोरम बह एक उम प्रतिशती पी हो किन्तु सत्ता हस्तगत करनेकी पन मारी बेटमोग पागल पहले की है समार और परिवारको स्वस्तिके मामपर एक परमै बाम लेना पसना पाना और फिर पिसी सामाजिक नियमको मानर इमरे स्थानपर माह का पले बाना यह एक बहुत कम मिशान है।मनी ममता बाबर कम्पि-परापताके असामरे परिवार भारर और स्कदम भाग पाने भरम पस बमिरानका महाप कम नहीं हो मिततंभ मेन
बलिदान देनेमे पुरा सा है ? इसलाम धर्म परिसदको पातर प्रसन
होता है तो बसाधारप मका सिए नसे ने बाहर है ? एक
रामपुपरीको ऐठा मिपार माया । पुदमाती प्रगामी मार समिकी
मारकाटको ममेरे लिए मरि कोई रासुमा विवाम पार पामरे
तो साप उसकी प्रशंसा करते है पिर परपर्मी के हाप सारसे होने
बाबा मन मधम्म क्यों है! ऐसा सम भी दो स प्रारम अनि
स्मान होगा मुसिम कामर रममताल सानि भहार
' अपमासमे बोपाराति नियनको समर्षि मम्मर्षमा की है।
नस्यार और सौमापकी यह पारिवारिक सच्मि सर्वस्व बलिदान
कर देनेवाली 'मनिमी म्पमे मूर्तिमान हो रही। सिस्टर' एमी बार
यो मी तुमति हो ससके महमें विम्यापी कमानको एक बाप भवत्ता
लिपी हुई है। बार सिस्टर बर्षपतिका मतिरहीन पत्तका मातरम
कर पा है किन्तु मारमा प्रषित होममा उसके पवित्र बरकी ममि-
ज्यापी रती? माप दो बहसार सेवा 'सिस्टर सम
ससारकी सभी भाषामि सी-म किसी रूपम विपान है। पुरानो मेगोजी
पे Srrorter, मापामे Zaester, शर्मनमें Schweta मम्बासीन
परेशीम Suster पवियन SyHir, सीमेनकी बापामे STHor
EिRT Soxer और न स्वार मुसहसासोरिया निका
लिए भार मूक पर हो पाया । मूममें है पन पर मस् । जिसका
मर्ष अमरमिह मिए । मुस्पति अस्पते । पोष्टम । स्वस्ति।
बर्षार सिसक पर पाप हो सोप्या हो।
बार एक निदमा भी माना पारिवारिक पार पर-बलरा
सापान ममेरे थिए मम पग । मुख की प्रोप समय-समयपरमपतो
तारी सर साप उपरिपत हुने समे बार इसम पहम बममेत
पसार मियामोसमप प्रारहा। गा पापको पोलारस
बानमान बर मया। पलाम विपि रवा मानी हिनी इरपर्ट पुर
मिरमान
पप उसके साये दीपालों पर फिसलते है
तब पीड़ा से प्याइत
अमोल पायल उसे थमने को
रपटे पदलते है।
-मान्य पिलोमाना
यह है दुनियाँका बगेर परिवार और मह है उस परिवारको स्वामिनी
मिसर सिरानको मपभी मनन्य पदाहिए बमापाने अपाहिमोंने
समीने एक सरमे पुकारा 'सिस्टर ।
मितसिमेनु
पि मूति मास्तु-भास्प या स्थापत्य कमामा पापमप सौम्द-सृष्टियों का निर्माण किया है। प्रथम मासकीयवस्मामें मरनवे बोट बार को प्रथम मंगीत फूय यो प्रम मामल-मृत्य मा गो प्रम मोड मावारिसमा पो प्रथम रेना मुम-मारपर मणि हुई, पो प्रथम पुत्र मनुष्य के लिए निर्मित ई उन सबमें इसी कामशक्तिको उत्तवना पाप्य भी। विस्म संस्कृति सासी है कि संसारका सर्वोत्तम मगाउ काम्म षि मूति वास्तुसिस इसी कामक्सिसी प्रेरणा ही देन है। यही कामक्ति चिपका सागर है पापीका पास्य है, की पाई साम होम मही मन्दिरकि मममूहमें स्थापित मूति है, मगन्ता एकोण मुबनेश्वर मुराहो के प्रस्तर इसीको मचिरम डाको पत्तीप मिस है वार सीकी प्रतिभागि है, पिरामिा साकी नापाई रोम कीट बरटेको मनावप इसीके प्रमाण है पानसेनकी रापनियो, बिहेपीमती कमा इमीका पर है। किन्तु बमकी पतित सिफ म्यगामी ही नहीं वमोपामी भी होती है। समपति निम्न स्पमे प्ररित होकर पासमा बमती , पाएँ बम्ल साहित्य बनती है मोम सुरा बन जाता है, मदिर पाने और पेश्यासमोर स्प पहन कर ठहै। मह सम उपमुग्री प्रभपके मासमते पिरकर दौद्रिय ममापत्ति मषित हो जाता है त होकर विधिको प्राप्त होता है तब से काम नहीं 'मीक काम' माबोर परिमापामें मिला पार' है। इसकी प्रक्रियामे उस्लाम नही भय होता है पप नहीं रोग होता है, मुक्ति ही बत्पन होवाट उत्पान नहीं पतन हाला है। हमारी मंसति विहाममें एक एसा ही कात माया पाया पूगाम बब मम बा। उस समय हमने पर अपने हममे ग्यानिहित होकर मारको मनिरम मा कामको सारे सपना कारप पा । राम तृप्या मुठा परिराह ािमा एमकेम्प बताये मये। सबने गमा निरोप किया मीने पाम तमा विनायका परेम रिया। मूल प्रमिला गितराम सेतु ..
बममें गासना (सेक्स) का। सर उठनेपर बोरिक पराम्पर मही पछाति (विक पावर ) और वाम्मात्मिक पदमें अपने मार पूर्ण विजय करके पूष शान्ति मानन्द अगमा मुक्तिका भाग बन भाती है। प्राण मन परिमोर प्रथाके ये पार स्तर प्रमाणित बारकीसान है। प्रापके लिए मप्र मनके लिए बासना परिसिौर प्रमाके लिए बालबका पेम पुर्मिधार है। कामपक्तिको स्ममुखी मात्रा एही पारों मोका एसके-बाद-एक शोवन । मिस म्पत्तिके पास जितनी बड़ी भूख है पासना हा है मानव-कामना बह खना हो कि अक्तिसम्मम है किन्तु यह भक्ति सम्म एकप और महत् दम्पसे परि पारित होनेपर ही बीयके भाष-वनतम पूर्पनाम मामा बार U सकती है । पत गम्य या क्षुद्र मासिाएं इसे उतने ही बेबसे मनोमुखी भी बना सकती है। कामशक्ति पारों स्तरोंपर उसकी उपमुसी सामनका मय । उत्सम । प्रत्येक प्रधिमा बहका निसनमा सामिपी बरविल। 'पासना (Dare) पिम्पनीवनके सिगावकी रियामपित है बोलिने भारमनिष्ट बनाती है। इसे पानपिमा'मामपर मुसमानाat रिम्प बीवनकी प्रक्रियाको मुमनाम या वासना विरोधात मी होमा अब पमनात समाती इम पापी मार स बह न मनन्त सर्पमिष्ठ बालपमें अपनी प्रासत मनात पूषामाको प्राप्त का बेगी । बता मित्रमे स्वरकी मुसाले कर उपमे स्वरको नाममा पूषकामता तक पारस्परिक सहयोम और उत्सर्मक इमर हो बति देना होगा एक म्पमित सरे पतिको निम्न उसको न निम्मको मनुष्य मिरको और ईमर मनुमको अपना सर्वस्व देता है ताकि प्रत्येक इसके बारा पूमपाम बम त। अधाका प्रमम रिमा समवयमें मरामस्व कम हो जाना चाहिए पाहि मही सृष्टिो मूममें निहित माना बया कामावि माप यही सही सामवा मोरही - शिता सन
१९२५-२६ की रिपोर्ट में स्पष्ट किरा दिया है कि पीपी प्राचीन
दम मुर्वियो मोसन मारनी है। एक मधुरामें मिही है दूसरी महावधि-
पुरम्म को दोनों पाया घाती पूर्णकी है। मोवन पूरा हमारे सामना
पविहानका प्रतिभरी मोष है, मस्पूना स्थानपर प्रीतिपूरा हिमपों
समय पूजा करें गोपने पपपादसे हमें निरन्तर रस्त करता है। इस
रस पर बोकुकोबार बेनेगा मैयतकारी पोपर्यनको माग पूर्व
और तर मामा बाट। मुर मौर बस। मर और प्रौति । स और
मास्ट । पुष बोम एक पिण्टाम्ब बरस पया सभी परिवारों
का एकीकरण हो वा । मावरचोरी सी मात्मनिस्तारका सरस प्रस्म
है। इसी मारमविस्तारने निम बमन तमान मोक्न पत्यार पर
मुर रेनुकातुर-प मुंगामा पानी ठान्तिकी ममी कहा पित
की । महमा दुम और पाल्पर होनेवाले उत्पातीपर नियम पाल ।
बयमय कोममें समर्मपम महापरिव प्रपरमाही भाषिक पापा।
रात मनामय कोपमैं शासनाकी अपना पदा-बर्षित मत्ला
जिसकी रेखाएं एक और सौन्दर्यको मूर्त करता है वो दूसरी मोर बलपो
राम नृत्य संमोक्न । राम नारी और पुस्पक महामिम्मका गिरह पर्व
है। प्राण और पिम मनात मपूर्व पर प्रपना है। मुष्टि गामम
परमान माहीम मिमुनमतिका यह महाकाय है, जिसमें गएपरिम
पर और पका मात्र मूर्तिमान हो रम है। कामरामवाका रमयन
दोस्पा सम्भव है। उसे नौवर्णमाक्निी मम समिहित कार्य
भाष परिवर्जन (Transformationापमपमा रसके पाप सामारिक
प्रकारपसायाकामनामनाको रत्तजना माम पररा प्रचारपारण तप
बदमे विनापरतो है। स. 'माएन माया
एष इस दो एसामारो' पाएकमिव निमर्म पहाने मिया
विपिस ममाम रिमा गति परसा मेम छिपाने रिकार उममें
पामयाममा पनी ही पौनियाई पोशाम को प्राय बन
-
मिताभ सेनु
सम्मको यो समस्या बड़ी भी हम सबमे उन्होंने स्वनो दुनमताने
अपना कर्तव्य पूरा किया सम्मेसरसे मामसे विख्यात हो यो ।
पनी स्वीकार मिा हि काम-वेगये विमुख होकर मनरे बाप
मोसमें बड़ीभूत हो पाना मोय नही है भोप वर्मादम्। इसी कारण
महाभारतको पावन तीसरा मोर मानता वा मुसि पर
में मामर कोप, महापालिका विकास होता है। यहां बाहर काप
पति समी नियने मला मकामवारे समा मिलीन हो जाते
है। हमने अपने बीवनडे इतबके मनुमबार नियोको एक सोक्में
यो रख दिया
भापूर्वमाणमस्तपति समुद्रमा प्रसिमित महत् ।
तरकामा में परिणनिस स स सानिमाप्नोति मकाममी ।।
(पाग.)
चारों बोरके वाले मारेरे पी पिस समुरको मर्यास माग
होती से धमा निध प्रकार सब प्रकार म मा urant से ही
जिस मस्तिो पित्तम समी प्रसाद विवय सामाकिये बिया
ही प्रमेय करते है पही पान्तिको प्राप्त करता है।
महामारवामी सी पानिध-सामनाका कम हो गया
अपने परीरको सभी प्रकार वाममोर यम्मुस रस पिया पसन्दी
हरपायों? ऐसो पनिट ऐसा विश्वास उनके रिसमे हरिभाश'
पविणारा बीर बह परिवरपमुमो प्रथम प्रानको माग बीचमा
मरेप कार बन सका।बार यह सब गुरहाने पिसमयताको अपना
बाप बमस कर दिया मोम्साए सत्ताकी कामना।
सी प्रकार कि नीता अपने को पूरा करोबार
गरपानिपात सारे बाष ही भीतर, पर महरोसे परेकी की
पर पीपनकी मन्तिम मिति है।रकाम्पी पियवा भावान
है वहां सभी नाम से एक ऐसे मारा इन प्ले है शिम
शिवरी से
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पित पुम्म
गबने कपातिमा महौ हैन मापकी काशे महाक विना
मपरी!"
महतो नरागसी स्कराहटकी हरहबा कर सामूर्वि मह
हास कर रमे। सारेसम्म मरे मोटोंमे तनमनाली बहसी फ
देर ना समान-सटपा टकराती रही ।
'आरस सोपर कापी ऐमी ही सभी बसो तुमने से वाई
पर कापी र परपरमेने पर नील मगरका नाम नहीं है। कापीम
प्रमामा मापार वो हम यम यमपित धूमापन गरी मापात
भारमाम मरम्मा गया। काभी भारतीय तिहासका मापनार्म
विभिम समातिरोफ मनरावमम्मी पापाम-कया है। सी भारतीय
मनापाकी ममनूपा कापो पुमप्रयता पाकापुरला मनस-मन्दिर
से बाहरस मही प्रमारमे नही तिरस्कार नही भोगरते पर
प्रेमसे देतो हा यह बाणी तुम्हारे सामने अपना मोफ्नीय एस्स पर करवा
जो मामा मर्पोने हमारी मानताको मनोरम प्रवियोंको मोती हो
'मा बोरपात हो महामेरप एचईसे पारित व विपास
की मामा तुम्हारी पास ही सर हो सकती है महाकाली असुन
शनि-पोतिम पापांग र मारी जाहिमे हो रमोमिन के
माते है।
सपाति और विजन दो पो । बासी गतिको कानिमामे -
की भूमिम पाग मन्बर विमै बदही दी। मुझे सपा 41 ममतार
बहती रह रसम्म पाप कपमुत्तो होश एक पारपर्टी मितिमात्रकोप
भपत हो पयो । रस एपर्व परपर वयको बतियां रमा यो
दी। मपषम ग्याट ममिपा मा होम मोट। ममपठायोती
पिनियो नकमुत उपस मधु / पाकिस्मसमभुमत् । यता मधु
तारने मिसा माहन्तिाम मोपपी: माप्पी सर उपमपुर
दृषिका मदर परन मपुर मतिने पारियो जुन माप का
"
मियम
ममुक्त है। मयी है उसी प्रकार तुम्हारा म्मबहार मौ । समाम उपस्थित मण मामालिका प्रतिवाद करन के लिए सोम मालमेरठे पर बगावपाने या समझाकर पाटकर दिया। मपराप ममा करेंगन, बापमे अपनी उपस्थितिसे बगाठणगो याय किया है। मामा करे माय गमावण मापके सम्मानके लिए सर प्रगारमे 'गगन, मै तुम्हारे लिए ब्रह्मवत्तका उपरेप कम्मा। मभासद विद्वानोडी मोर देखते हुए पाम्प बातानिने पहा। 'ठानबागमन् मापने बनाक समान हो मेरा मी गौरवमान मै बापको एक महस मौएं प्रदान करता हूँ और मापा उपरेप मुनने लिए ममुपए। इतमा सुनकर बह- विपरित गमे समा पग्मितीको तमबत् समझता माग्य बामाकियोमा राजन्, यह गो मूबमा बन्तर्यामी पुस्प है, ममीको बाधिमे उपासना करता है। 'मी नही माप उमफी परें पामो सभी मूर्वो मस्तक मौर वीप्यमान पुस्प है। उसकी उपासनामे मनुप गाप्तिमान् बनता है, प इन मेयोन 'तोपानी ममासका प्रमाणात पुस्प है 'नही महीपन, हवा वनस्पतियाँका मामी परमाना तो वह मो मेपममम मममी पुस्प है बहीबम है। मही नही पाठोपमकी मारमा बामही है। 'वो बहनो मनिगममें सम्ममी पाप है नही बन है।" 'मही सायम् बह हो मनका देवताह बम नहीं है। पहाताष पाप्म चुप हो पपा। उनके तणमामि उमर हामी मात्ममगित ग्यम्ती माता मकर पृमिम हो गयी। सन ग्याम बरन ima उक्लिप लग्गमतिहल सुदारुणन्त धापन्ति बोवन पर्व मुलि मालपत। दी मिसलत मनो पिता मुनिन्दो त सेगसा मक्त ते अपमालानि ।। कमायको निमौपिनयम प्रणा माहि-वाह कर उठी । मूक पागो- के मासे मानवताका मापन मौक-मोहित हो गया। मौष-पके विरो हमारे विमो कुहान कर दिया। बम मिष्या बार-कम प्रभा रहा ममी । पर्माच गुलिमालकी तरह नर-मालको माला पहनकर पतुरित मा त्पा करमे कये। मामा-मोह और स्मार्पको मार-मेना नामो करोमें मानुष मेकर मीति और मपका मिराछेर करमे कमी । पमुमाके पात्तनारसे पसुपतिका मामन गेम उठा । महाकालमा त्रिमूक पोतापमान हो उठा । मौर तब निसने और पृषा अगुप्सा रियाणा हिता और करता को अपमी मैत्री करमा मनवा पपा और महिमामे उपसमित कर दिया केही मनोन तुम्हारा मपाठ करें. को पता है कि इसने गरबेताके बोषिके नीचे ज्ञानको प्राप्ति की? तपापयदि बीच अनित्य वापरकी रक्षाके होभम जिमने बन हम किया यह पम्मी नही हो सस्ता । संमारकेभाजनाको प्रममे मसार पह महात्मा ममे बन बैठे ब्रह्मगावी पगितको पहकमी भी टम मही सरवा। पुमे पूणे इस गासपुष सियाबसे किया रमने का साधा तार किया है ?" गमगारो मकानो ममी ए हार मामले लिए पुरको समपारने भने। मुनो सुमो मतामी यानिमे रत्पन्न हानेवाले प्रत्यक म्पनिको में बालन नहीं मानता है। मामन यह को लोमहीन मोर बारिही है। जयरामेमोरम जग्मम पापन होता है निमम सत्य है पुषिता है वही पाप है। 'मह मब प्रमाप मुनने हम महा मही मामे। बता पर महो • शिरोभमत
की सकी वय तरापको बिरि-संक्टषि यस्ता बनाठी अस्पस्याममा
भारतभूमिपर एट परीसर बामपने मनरा की प्रोस पहले
ही वम भार हो गये। लिमा और मापानिस्तान मम सप
हमे इस विनाधारियोंकी गुर्मत मापा बाल भी मिल
बार निरन्तर मामाँग कम बारी पर । व्यतीमें बरसमे सिरे
पहा स्वम हुमा बहक्तिक बता भी सापक धर्म परिसर
निम्बाम करता था । मुहम्मरकी मामीन मोह-पचार मित्राने हमारे साथ
पश्चिममे मुरोप और पूर्व में भारतकी और मार वा। सर हेनाएं
अपमानौर की साए मेकर उत्तर भारत्मे कमाया।
मुकी गाही मित्तिपारमे यह सब बाते निकी परना
किसी पदमरता या कामका बासिर मदिर टूट
गुफा का goपि विम विरेमियोंका प्रिपा बनी। कम
मामपन्पूि और मुमामामो आप पर निर ममर-बायको
मसिनोमा सा का पाप बमसपिठ मम
भर गया। मपकी मेगा पछि प्रतिमाका कोई म मा मो
और मोहवियन मिपा कर्माने में काम की और रोन
जनताको पीना का RITE
कामल सिरा उका निर्मल पर।
मिति पियारी मिट गमी पायेमनार मर ।
कौर बादल प्रेममा परस्पा भार।
अंतरि मांगी मात्मा, मई रा॥
मोर पुरु गले मित्तो, रहि गोटि लाम।
पाति पतिल सबमिटा नॉग परागण
Nessems in Berthood & string o tam ta
पति सी किस प्रभासले मधु
को बबर मेमा मिसागस अपना मोबिमारी ही।
शिक सेतु
प्लावनमें कोई भी ऐमा म मा यो सतहसे सर सिर मिया मके को
मही मर्यन समनको बह मटिगे देख सके। पर उस महाममुद्रम
प्रताप मलने फूलकी वरह बिसे रहे। दुरसागाके पनाम
अपर समद भमाह तिबा हिन्दू रक।
मेवारी तिह माह पोक्ण फूल प्रतापसी ॥
प्रसारिये इक पार, दागली सारी दुमी ।
भदागल प्रसपार, रहियो राण प्रतापप्ती ।।
सुसहित स्वास समाज,हिन्दू कवर वसामा।
रोसीलो मुगराव परे न राम प्रतापसी ॥
प्रतापी रेशमति स्याप सहममीठा मी मुमप रेपमे मप सतका
संचार मकर सकी पोंकि सोनोंको विश्वास ही नही होता मासिनी
परी दुर्रम सामाग्म-मत्ता विम मावनहीन मझवहीन प्रताप पुष्कर
पायेंगे। तो क्या हम ऐसे संस्टपे ममम हायपर-हाग रप बैट गाना
पाहिए या हमें अपनी रामलामी महरपमे मौन भाषरे मा गाना
होपा? क्या न्याय और मायकी कमी पिसम म होगी? का मामारिष
मन मोर पारीरिक पति बापर हमेमा वत्पापारीकी ही गीत होती
रहेगी “मे प्रश्न के उम बोर तमिमापूर्ण महारागिरी गिसे पोरकर पानीमे
एक नयी पोटिइन प्रस्नोरा समानाम मेकर उपस्थित हुई
पारे तल मा पोर उभारा।
समट पर धन पर दारा॥
मामहि मातु पिता महिदेसा।
सापुन सन परमापहि सेवा ॥
निग के यह प्रापरन मपानी।
से पाना मिसिपर सम पानी ।।
भतिसर देसि परमग्लानी।
परम समीत पराभलामी ।।
मिसन मनु
श्मशान सम्माकी वय का परपर समग समाहियोंकी वह ऐठहर कतिबाट रमने बीमत्त मुखम विताकी मा पासोबपटकी तरह स्पर्षी बीम पम परत पैरोधी नसें बोमती से हरियो पिटा रही होपही में। मै मानी ममान गिसे एक मामामा समाप गशिप पानी मटे बोहोबाते भरीरसे पसीना सूटमे समताt मगर क्यो? ऐसा ही पातो फिर बगामा यो मेरा माम क्यो पूण मुझे मिनिहारों मासप्त तरको तय कामी इस सम्म मतो यह भाग हिमाये है जिसमें पहा पिर तो बस तार बम गायें मिने पा कमी रफक की राह पम्तेको रेग कमी दुपा मुनानेगी को भागापी मा हार मारकर कमी काकी भोप मापी विधवा बहरेपर उमारकर मानुभूतिके लिए मोतो मैने नही मानी" कमी नही या तो तुम करते हो तुम यानी मारमी यानी इनसान । बिम मपनी राय पर गम है, बाप्पाका मोहमोमपनको मार भरका नियामा मानना हैमौर को मेरी मायोकी ममाना गाता सूबे विमरेकी तरह उस- र पुरु हो जाता है । मेनि सुनो रो नहीं मेरे पाम मामी। एक बार मुधे मासीकसे रेवो उस मसमें जिसमे तुम अपने पूरे पापो देखते हो या जन्म देनेवाली माको देखते हो। निसान मानो मै सब परवाह भीतर मे तरको तप गलनेगी यह मतो तुम सोतह मातम होपीएकाम नौवम बाकी पौरकी वह पाने और कोरिपामे मागा म पीपकको गामें 8 माओ। भरे मही यह भूत कापाती भागार हो, तो रम दरो पापहरे पत्ते हिल है। परमादेराठेश' मितरीन मनु श्मशान पूण मुरे संगमूसाकी उप कारे सरीरपर अपनी समिती पण ऐन तिबाट राममे बीमत्त मुखमपिताकीकात कापाठीमपटकी वरा रक्तवर्षी गौम पन्चे बात परॉकी नसें बोमती वस हरिमा चिटन पी हो-यही में। मैमानी मचान गिसे एक समसाममे बारे तुम्हारी मा मप पाती है रोपटे बो होगाते है मगरसे पमोना यूटमे लगता है मपर क्यों ? ऐसा ही पावो फिर बगामा बों मेरा नाम क्यों हा चिसपिए ? हवारों पास वोकी तरह मासी इस समय तो यह माप स्मिाई जिसमें पहार पिरें तो पहार बाम पामें किन्तु मैन क्या कभी तक को? गह पब्लेको रेत कमी उसका मुनानेकी पोर समापी माहाप पसारकर कमी पपाठी मौत मापी र विपन्नताको सरेपर उमारकर सहानुभूतिके लिए होती ममे नही हामी कमी नहीं मा वो तुम करते हो तुम मानी मामी मानी इलमान । गिम अपनी परम्स पर बर्ग है गाप्पा मोह है, जो अपनेहो ममार भरका निपामा माता है और जो मेरी म मातोली मयाना ज्यालाम भूपे तिनकेकी बरा जक- पर पूछ हो पाया है। मेक्नि मुनो रोनही मेरे पास मानी। एक बार मुझे मरने रेवो उस बोबसे निमसे तुम अपने पूरे मापको देखते हो या अम्मामी माको पेवते हो। विनाम मानो मे सपा नीवर मे की तप गमनेराको या अतो तुर्मे भोट मागम होमीरम पौवा मांफी पोरकी वह पाली मोर मोरिनामे भरी हुई। हो त्रैक रस पीपककी गामें बैठ गामो । मरेमही यह भूतों कामाको भावार नहीं है, तो रन दूरी पोपतो पत्त दिन है। सरका देठे हो' शितपसनु - मात्राका पालन करमेके लिए तैयार हो जाती मार कर रहे हो! सोक्ते होपे क्या ममृत मव-शक्ति है, मरेको निमा समेडी सी बात ई तुम्हारी गातिम महीन 'किन्तु यह सब बयास है। तुमने अपसे मा माके मरनकी बात तो पर सुनी होगी रि भयको पीसकर पर शक्ति प्राप्त करनेमे मारपय क्यों? ऐवत इति यह रिसे प्राविको मिनित करके कोई भी पा समता है किन्तु तुम्हारी पाति में महामविपाठी कापामिक पमुझे भी दुरे । गती साना ना सापन मी । सुन्दरियोस अपहरण प्रविशनी यसवी कापासिकी हत्या बनवा अपनी पक्विमा सान बिए किसी निदोष बासकको पति पही हम सबो काम पे । एक दिन विमिव प्रतिमे उनमे बरमा सिमा । मुरो को मर्मुखी बनानेवाले ये इमापारी कागतिक जीवित हामी तप ममोमुखी हो गये। सर को भी यह सम पाने में क्या तुम्ह बीते दिन की बा रवान साहबगे पूरा पोचा है कहने म्मू तो मच मिले । फिर मसे ना बकाईबार कि पुराने पमानेकी बात सुनकर पर पाया करे। पर कर क्या? या पार ही ऐसी है कि इपको मा बाची केवल एक सीके लिए सारे सवीतो पापा करता है। सोया भी निकाली गाठला पाहीराम पो पाये । समयको काई उस होने को कम से । मुना बह राणा पा सके यसमेपके मोगेकी सूमसे सारी पृषी मारित हो पुपरी दी। मामडी निम्म्बना ही हो इमे पर मै ठो इसे अपनी किस्मत की जीत पाहता है। यह दिन ए मेरे पाम पहने या राणा मयानका पहरेदार हो गया। एक दिन उसी रानीमने इसी बेटेकी नाप मिमे इसी बपहभाभी बी पाकिवदनपर पूरा भीमपा । पतिको रेल रामाष्टकर रोन्टो 'मह प्रम मी मैं तुम्हारा नाव नहीं इस इमपाना पहरेपर यह बोमा 'निएपके मुताबिक तुम्हारे सारे का एक हिस्मा पाने म बोडसा परदन कानी। मिरीम सेतु उसके पोलो मैने अपने पोरडी तह समझा है उसके बाद मनको माइमापा है उसके बामुमाको मोतोको वय संगोया है। तुम मा समावे हो किनिहाय विवरासत केटेको मकात मनपर मोरनही होता मग चिताकी परपर ससे मिर पुनले रेख मेग रोकसम भयो मारे काप सस्ता है। माही पलीकी मृत्यूपर पार-बार सासू पहा नौजवानो बडो में समझता है। सम्पर पो बामेबारे माहवाम बपाहिब मिपर्मपेको मेगी भाको प्रयो पापा मावारित असले सिपार पुत्त बीच-सीपार मोनो भापता है। सामाजिक मर्यादाको रमा लिए, बिनम्मदी बेटी सारापकी बास्महत्पाती महानिपा मुना आपको तातील मृत्व के लिए रामी समर जापानी बटीकी बाप मी मुझ मानेके पास ही बाती है। 'कभी-कभी ऐमे भी मौक मत है मुझे ही मालूम होता हिराई मान । पारी सम्पतिक कामम अपने स्वीय भारिल मात्र किनार पुषको लिागाला मेटा भाई या पनीम पेहरा बनाये गाई, से मतीने मरमेक इनको सहन सवा । पिसा-EिENT मपात कोकोवण है। भाई छीन लिया जब इस होटी लिपानीको मीन- कामे मा मिसाएमा निर्मायो प्रसे हो गया? बाली ती पोटकोमे बना देतापास नामकर संवामी बन गामा पा है। मसी कम पुरर या समुन्दर बीमा यम पोटकरी सायको हक अषक भूत प्रयेरको पेपर सो बामुयोंकी पेमा रमाने ममता है। बफले मनग्य प्रममा हार र सारी दुनिया बपने पोपले नि भर देता है। पप्पर मिरपाट-पोट र बहें पोक्ताहै।पती शिवाको तपको मानुमि भिगो देता है। गर्मप प्रोडबपये बचोकी गिनती सुधारको लिए, मोरेमपाकाको पौना देकर भात्महत्या करता है। या सब तुम्हारी गावि करती है वृष्णिा मह पाहि । नि घन मरोमो में मापौर नगरपोक नमामा करना . निगम
वरह हैमता या पिना गाँठो विकी तप पवित्र और UिRI
उसके लिए मस गयर मा मान-अपमान यदा-अपए। तुम बसे
गली मार पी पी पाकि तुम वसपि सस्प रते थे मयोदि चम्पी
मामूम मागे मया तुम्हारे हरप मि मिहको पूरती पड़ती की
पसको पिता भी इसी दौर में इस पपका भी सामी तुमारी
मातिक उम मनुपी हड़िों मार पप-यो पो लिए मेरी पाखिम
होस नयी पी उसको पिताके पद फूम हो तो मुझे मिले थे यो
उपक्रम राबाकी कहानीकी त पवित्र है । सब कावा है, उस
माम ऐमा लगा कि मृत्यू किमी दूतीक बीवनका बस नही होती। यह
दिन तो समझे मममी बीवनमा परिणवा समातिय विस्तार
काममा दिम।
'तुम्हारी भाति म मामले भीतर ही दुराको यति
समन मुमकिनकी इस मेलाकी पी रोमें बाँट मा पहा
केवल राम भर मतेपे पगिता थियो । महों पूरा हो इसके
पही उम। सब करता। यह सब एकर बीमे होता है मामी
करबट त गिसम गिन्ने होय प्रमकी तप महा विर पर्ने।
लिका के जीव निम्हें मपनी पीटीके रामान रिपा नाच!
भोपेकी तरह अपनी कामाको स्टापे रोगको ही मुभिमानी ।।
मसी में सम्मम गुण पाते। मृत्युने सीसते है । रागोने पर
तुम्ने । भर तो और पान हीरोपी गिर भी। सम्मो
मंदा मानेवारीसेको पर अपडीमठी पाठापरणा मारण
गरा बापाएँ । मनुहामि पडिया मा भावे । पानी पीठों
मार रूपये- ऐम सुनारे जाते मानी मायने इसार, नवा होम
रहेगी। मभिपी गेम मेहतर ममी मावि गरोगो संसाग
मपुस्लिपाती पण मनाते हो पप गाये भूप ता
मिश्री पार वलकर पंकी माया मलम पर होते
भित्तमम
लाल इमारतोंका नगर
मिनी मारपीने सापक विनोमें काले बाकी माम सप्ती हरी
हरी नीली भाता मोर पर-मा बामन्योता मनाती सामान पुगलियोंको
दे रहा ना कि मा रानमे ही सबसे बपित महाका मासूम
भर मीली, पम परी भरि गागाही गमारि ।
मारूदेस महामन सापन सामीदार !
किन्तु उस पुरान सामगम रस हालापी मिग-रचाका 'मामीपार,
बाया मम्पी दीसे पीवसे पीरों को पा रेनेशाती मिनी
सातसतसे बचा माले समरि मौतर त सद सोपियां मम्मटम पर हो
मानि-रेर जम कर मोटी हो पाती है। माप पाहें विभिी मारपी-
स पास एक बार नी म सिार शितु सीप तमु म्यावि-पर गौर
मोतीर माममे सो काप अयम्य ही पारे । ऐटीगतोउम गरि
मपन कोमापकी मुरधाम समद दो या तीमाबाप!
शिणि रित मोती नोपयगा सीप समुद्रों मोति।
तिम रिय टोला येउ, म कौमार म गाइ॥
बमामा पुगरा पाएं बहा रागवारे यो बिगो दुनिया माते माग
मौर ममते मापा मारणेसकी ये तुपारमग्मित निरी
रमाचा साकार रो। और भाई पर प्रपन स्पा
का जिममे इन भयर में सुबह गो-सीम बरे मुझे सरपरदे यापन
पर तार दिया। मानराम शनवाली न पाटी रास्ते भर बम रिम
और मायम भरे गारियादी सामीसमरपीन पर पापन भाषामा
FAmti
मोटियाका मा दो मोटी विगोरोका बनुमान सहन सम्माम है। मामामेरी मेट । एक हितसे बरे सिरोमें प्रवेश करनेका र । बो बरता देखाई नही बग, या बोमा हाई बह? सौपानेरी मेर समाधिपुस्पकी तरह पटमा नो वरपको दुनियाको स्क्तिप्रमको तरह निहारता पता है। उसके लिए या और यह दोनों बना है, वह सबका स्वागत करता है एक ही तपसे। हारोंकी संसाम भूरे मटमने अंमली कार को इस विशाल रके मोमें मावायोंमें पुम्बकी दरारों और सेबो में अपना पर किये है एक सरके साब फापारगावे है मीन पतंगांकी तप मासे बासमानमें बिने हुए मे पहर सप पाने किस भूतकी वापसे विचार इसी सम्मेपर सोट माते है सुबह-पाय होरे-छोरिया पावत और माते! पामे गत मा है और मांगानेरी पेट में स्वामत-परिवे अपनी मस्तानी मुटरमुसि इस मुनमान प्रमो भागार किये हते है। पौड़ा रास्ता । जीह महबरपुरका मपहर पौराहा है। यही नदी की विधान पाराको वरह मोही-बारी पार पर मिलती है बीच एक बहुतापूषोमे एका हुमा पावरा है बो पारा याकोको अपनी अपनी सौमागोमें बापता है। मिसनको नियमित बनानेवासे इस नुमा पतरे पर अजीबो-गरीब स्मिके होम बमे हुए रिमापी पाते है। एक- हाट यहाँ भेटी-बसी बीमिर्पो टोकरिया वयाको मासाएं समाये निता मारमी कम औरतें चारा पीपुकाम-कामी मारिन पारे रमोंमें रपी मोडनियों और टके महमोमें सिपर्टी। मेरे फॉकी टोरिया यारा की। पीमे-सात पिके देके फूलोंडी मोठी पनकी इस पारीवारीके अपम्म हमामत बनाने के लिए बनायोगी मम्मी तार माताको मामार देवी पियोंकीका रासार सिरपर मागेम मिनसते पुरेको रगत देयते मामे बलिए दो हपम्मिों यूठे माति पारेकाले भूरे मस्ये माये पविके लिए छोटी स्मेर और मिस लिमे मोटे चुमयुक्त Gm
विपकेहए। प्राचीन पमानमें एक दिन ऐसे हो पर कासीकालो मुस
पहाडी कपर बासा मा भुमर माथे एकही परेर
चिस्ताना मा भागा-यापरं बो बम ने गो पारदो निपत
माने लिए मुकाममा बा का है यह मला मेरी मेटी-सी 'मन को
मेमा
मम्मा सग्गा गरिति, पहिउ र पार
वे हागिरि गित मा साहिपणा भाई॥
निम्तु मह । मोती परी गिसकी नुकीली पोटी बम्तमानको भरती
सोना वाने बोहै। मार देबारे पास विमटर मार विपकी।
इस सौन्वर्म-धमत्ता परीपर पाधारण पनका मारोहन यम है।
मुझे निराम मोटा रेसका रिकाम्प दोषण 'हम तो पहलेश
कि ऊपर पापा मुशि है। महाराणी मात्रा मास ।
में रिपोमानेकी और बता रह यमा न सका। मी
गोधाम हमारी पराम्पका कोई भूस्व न पापही निम पित
बातें पपने कभी मोपा मी म होमा इस परीपर 'रामी नाका
महत सोहै, रीमती पालिकासी पद में बरी इन बमापी
परीके मम्मम्पर वसीम यह परमपुर कों' पेड़ो मुरमुर्मक
बीप बोहा पर रहकर मरने अस्तित्वका बोष करमपानी इस
पहा के लिए सनी पड़ी मग सिथिए । हगारों पहामिदीय
दाकी महरपर गरी महराते हुए पांगती हमें एक परिमाम
करमेकी कार भी इसमे क्यों पीनौपसी मैरा मन जान पोंगा
निमहोपमा वा रिस्पर सर पक्षा दो अनमें जाने मिना खान
भरापा। प्राविकप दुर्पम पहम मापीर परामकी मम
को को पापित कर मामा-सणे हिमपिरागी र
पोटियोपर मानवीम माटी तासाप विस मनो मनको भागमा म
भाती ? विमाने को छोटी-मी मर मिरपर रने में पर
गिपरीसमेत
मौर मप्रतिहस पनि होमेकी या मानको कासना भी बनी है।
बनारसयाको बयपुरमें विस सबसपी लिम्वन धामना करमा
पावा है, वह पामकी एन एला। ऐसा नहीं कि पर्ने मही मिलती
मिती पर मम माफिक कान पाना बाई मुश्किल है। सम्मे-
सबसेपर पचासों पत्ते मूब हे है बिमपर भूने और माता मेप तमा है।
में पूरे पत्ते विमुक कई कारकी तरह मालूम होते है। कई बार
मनको सम्मामा माई रेप-रेणकी बात है, किन्तु यह समझ म मा
मोर रस कापणी पामको मुंहसे ममाना नवारा नमा। एक नमे
मापे पत्तेपर कला मा यानेको रातो पनवादीने पूरकर देगा
परम्मत-विरोगीको सामने गा रेस ए मत भुन रहा हो पा लि
मैने पम्मच-मर मुपालकी उमह दो-एक टको मनेको कहकर इसरा
माझमन किमा चिकर बोमा 'पत्तो कामो मा? मै क्या स्तर
देवा दुस्ती मना की मौकी मुटकी रोकी मिसीमा पानकारप बना
वो एक ममा हिस्सा मा पया। एक मग्यत म पगापारी पार्मिक
पनमागसे बोले 'भाई कीपाम है?
पनाही पसेको पार कष्टी पाही परपनको पुमार मार्न
मासकर गोमा 'साहब मह रिकी पान है?'
माइक सकपाया तबतको सरम पनागवारा पान
पूधामपर कबाब सबाब माप रहे है मोन्।
मम मममम जो बात मामी दो सौ रोना मुश्किल हो गया तो
कि में इम परतासे परपुरक ममी पनगाडिमोफी मुखिपर भबिस्यामा
कारण नहीं समाता।
दूसरे रिन माठ बजे होटसोरवारपरमाया ताला महरा परि
पित लिमामाला माई बही पगड़ी बही पकी मेहरा बही कारण
बोला 'मामेर बासेठली।
-
है
लिए इस मापनामें भी मयका मामिपरम पा क्या।
मे चूमते-घूमते एक पुका बा । एक मेगड़ी पाके पास माकर बड़ा
हो गया । सूना-सूला मह पेड़ इसस अभिक पारों मोर और कुछ भी न
पा पीला रा-भग यह रे ! मै मन मारे इस बार प्रान्तको देखता
रहा। मुझे ज्या से मन मन्दिरको बिसी सम्पसे कोई सिर कापातिक
मेरे सामने बाहर सग हो पया है। एम्मा व मी मुश्यि भौहे
सहसा माकर मोठा
'पों बेटे क्या देखता है । इबरमा पर। हो
पीर तेरी तो कुपचिनी बापत मौर फिर यह मपने अंगठेमे मेरी
भौहरिबीचके मायको छ देता
'दखता कि बाकास काम-कामे बारतोस मर गया है। बार
मानो पिपत पनकी भूछि दौड़ रही है उसके माये मेरे-गोरे साप
पत्रिोंका बम्ता हुमा मागा गा रहा है।
हमाके पेडॉसे उपपुरके मुहावी मकानोंपर में बबरम औपरेसी
पोस्टर फाफड़ा कर सर ये है मर बमवृष्टिसे पुरु कर साफ हो गयी
है मपाहियों का कही नामोनिमान नहीं मोवी परीरी छातीपर-म
पभी साके महरूको स्वार कर किसीने मोनपर परियाई बामेरक
मनावरेप म्तिमे सुन्दर और प्रसन्न साते हैं। बेशी मुमने पर
मुमकराये।।
'या यह सच है बाबा ? मै पूछता है।
'भविष्य बतायेगा। बाराका काठ पिपसार यूपमें विमान से
पाता है।
भितरो मन
बाहरएक पटको इस विधि संयोगपर मारपर्सस्तम ए पाना पाता है। अपमुरमें रहते एक पबगए पिता मा पा कुमारी इमारतसि नगरका वाक्पप परम रेखमा गोरियोकी परह निम बाता कारीवाली सर्व बौड़ा रास्ता सामानेरी पोस मिपोमिया बागार हवा मामा मसार हम समी एक मोर मकारको मानसिक पिउनाका मामूर्तम या इसे छोड़कर या इससे मनाकर मख्य ए पाना गया मुस्किल मातम होता। कमड-कोषमै बर पिमुग्ध मदरसे मकरक- पानको भानन्दकी परिपरि पानेवाले वो मान मिलेंगे पितु समर गयो भरपोर्म पिसे चामेबार गोरकी इमिर न तरस जाता है ? इसीलिए एक दिन बाय मुर्त सब कि मनुष्यही मुसि मोहनारित नही रहती मैने इस मगरको बिवाई से क्योंकि बिहाकर मावा हुमा वो मगर हो वा नहीं। जयपुर मनसे फुरारामें मार फिर माहीरनी होती है। मुझे मेग्वारो पाना था। पहसिप मीमर मेताका पहर 1, मीराका नपर अपनी निमूर पम माना पिसमे सदियों तक माप गुण स्नेह-मुगाचे पावित किया उसके मारमें परम जास्प होगा इसरा मनुमान तो मागका हिस्सा पन बार राजस्थानी शिम मका पनि हुमा उनमे कर्मठ यस्ता प्रति भयाकी भावना वो पैराशे सती है किन्तु नमन-मुसरे मी मनको रिरपिता बोप भी हो तो मार नहो। तारा रस एक पटे पस्तेमाही सामर की यह मनोरप मास रियापी पाठीशी अपनी तरलता सम्मा मौर मातासे इस मा मूमि अभिनय TO चार करती है। कमी-कमी यो पापका भी एक मीब मान होता है। कॉt पान न पहनेपर भी पम-मब मान नहीं एवा । मौर ऐमा भास्थामें मानसिन परकी मम्मो पालोमे साधे पर मालूम होता है। मिसराम सेतु
एक मारगी दोगे। रे मेरे मात्र यापुरसे मा ऐ पे मोर रिममें बैठे
बटे पातचीतको योगनमे यह पान चुके थे कि मैं मेरवा पा रहाई
मरामोशी बार मैन प्यान नही रियामा एसी बात नहीं। राफेर पुरता
पारामा और मर पाली में सपा पादीबासे मारपीपी मार में कई
पार देख पुका मोरा भीमा किन मासूम और गरम सरकार
मान तप मुझे क्यों नहीं रिलायी पो। बीती ही मुप मागे मोर
रंगीन पोरकी पगहावा हर मरवाके मन्दर को भवत्यम्माषी
स्थितिको मै सहम गुन मानता माया है। कहीं एसे चार मारार भी हाने
मी स्पना मन ही मुहेत की। रास्ते-मा 'पामताम को माप्ती
ने ना रहे थे वनपोर गाती किन्तु मा बनावट पी ग बहरेला कि
गालोको पानी मममनको बी न करता । जैसे कोई बना मिट्टी ऐ
नितीनामे बात कर रहा हो कि तुम इतनी बाबी दूर क्या गम या कि
कोई सा-हाग गही यमके पर पुण्ता हो कि तुम बहमरे पेट की
। बरसाए क्यों न हुए। महमर बमपुर मनिग्म विगमम' के
मिममिमम भाषा करते।
'
मारा दो गोई हम मही मी गावी जामणी मीर बनात
मापसे मार में भी लीक रेप मागकी बात पर मुझे मारबप नमी
हमा । समा किम हरेषाला म्यक्ति पनि जोम ऐपमा पाठो
कोई नही । समयमा प्रतिषी इन तम्म बस्तुको ऐनमेरी पण
अपना सामापिनो तीन भाई बाबी एकाची मभी पासवान
अग्निकागको भेट पर पुरे पे बाग परिवार कामपाती भागमा
होपरापा।
भीनबरा भी
एकरीपरेपर पाकर मररानीबोने
प्रारम्बार लागी मामा पौन वामे है श्री मा पानमा
मानीत माराको बांपाम पीसी हारो पावरी रा.
गिरीमा मत
भास्यायेदमनपथमते मदुर
विधापर प्रसपितास्ति शामरा मे ।
अस्यामरम्पमुवि तस्प यो तपोमि
देषी हिमाद्रिमनया नयनासिमितम् ॥
बिचापाने माप महा गगत् में तुम करा दूं। एक तुच्छ भेंट स्वी
भार करा । मपनी सनाको यही रो। प्रात सास अपना मुम्त पृषीमें
मापर तुम अपमी रापपानीपी मोर पोरा दावे बहे गामो पपरवार
पीर मुफर मत देखना। पुम्त गाकर प्पा ही गमा पहा कि पही
सबमा विपाक मिप उपस पा । भाप्रपम्मी दहा फूट परी कारो
की गवना मुनदर गमा मपमेको रोकन सका मोर पिचापरकी मामी
क पीछे देरमे मा कहाँ छाम्त हो गयी। विधायरमे कहा
'गगन, मापन मा नही लिया। पैर पर या एक मोह मात्र रह
पायमा । पापियामा सुरक्षा पर पांच पोमनसो पवित्र करता है
उगमा पुष काम कातर फल प्रान करता है किन्तु यपियोगी पर
मीसरामा मोमा फारामकरबी
इन्दोः फलस्य परासा यसतिः कुरूप
तन पविश्पति योगनपत्रक तत् ।
लाघ्रम्स फलति तसलपामनेन
लाकदयेऽपि मश्तिा सपिवस्तु पराः ।।
पातिपिषि याम भी ममीयो पिावर्ग मामने लिए
विषय हुमा पा। उममे एक बार मीरगमसपाही हाद यह
यहीम राहोरम भी 'फस रेबी शायर ममर दर भी इस प्रीतम
बनाया जाता था।
भीत गामाग मा मरबारगी कहने हमे पानीठो देगार
भान्मी गामा हो ही पाता है।
मे बामे सरसरी ओर देगता रह गया बिहीही को
शिरमोग मनु
विविध प्रकारका सम्मोहन बिबरकर हामि बहण हमा का गापा
पा । इसम बचकर मा साना मुरिझम बा । सरकारको अपने काम
ही हा पा मुझे बाहरी पानी की।
सरगरपी कोर्ट मैने कहा।
'एक मिनिट गो मैने रेसा मररार पहाड़ी होमेमे गौके साथ मी
स्वर रहा में भी मार-साथ समो पास तक पहुँचा । सवारीने एक
पुल पानी मिमा और रमे मुहम गलत ए योने इसरारे हामा
नमा पार कौम गिमे याद मही परे है पी। एकदमी टूनमें इमा
तो भूतमेम कुछ मुरिकम होगी।
में सरदारकी मोर देवता हा बह चुपचास हा पा।
शिवम सन
विचित्र प्रकारका सम्मोहन बिजाकर हामि यहवा हमा पकाया रहा
मा । इमम बचकर मा सामा मुस्लिम बा । सरकारको अपने काममा हर्ष
हो पा मा मुझे माही पानी भी।
सरदारनी कोर्ट मैनकहा।
'एक मिनिट भी' मैन देना मररार पहाड़ी से देगी सामना
उतर रहा। ममी मार-साय यसो पास तक पहुँचा । सरदारगीन एक
पुम्त पानी सिमा और उस मुहम सहने हुए होम इमराने हाता
नमा पोलिने मार मही कर है श्री। एक भी खून हेमा
तो मुभमेम कुछ मुश्किल होगा।
में साधारको मोर रेलता रहा यह चुपचाप सहा था।
मिनाडा मेनु
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मुहूर भविष्यमै सोया है मिमको सुमहरी सपना रन पूती मालमि हमेणा यी पी । भविप्पम पम निरागरे बारमें प्रचमित पाएँ मा हो जायेगी मस्मरम विस्मृतिक गर्ममेको पार्यो मित्राने 'माची-गम निस्तेग उठेंगे तब मानवामी पीती निराला विषयमें मिक नियतामे पूछेपी उनकी छवियोस पूण्पी उम महापारिक म्पक्तित्व विपपमें उस मावा बरपर विपपम उसके बीवनरे संबपमय दामात विपममें पिरोपीसे विगेषी परिस्पितिमि मी निति दीपकसी तरह मरिय पाती हई उम नाम्प-साधना विषयमें । मौर मुझे यह कहने में तनिक भी संकोच नहीं किमपिप्यके इन प्रोता जितमा म्पाट सत्तर निराकी कृतिया बनी उतना स्पष्ट पापर ही उनके ममसामयिक या बार किमी कनिकी विया १स। निरापाका अमितत्व मपनी वाइका बोला है। बने तो प्रत्येक कवि मोर माहित्पकारो सिए विशिष्ट व्यक्तित्व मनिवायव मोशित है किन्तु मिमिता विपिरता नही है सा पार मेलोम मममते है। प्रत्येक फदिम पश्चिमकी मिमिटताका एक ही माना, बोर मह । उमरे भारमरिसबनरी पश्चि। चियिता इस बात है कि किमी कापिने अपने मापनाप्राप्त पक्तित्वको अपने बाहरफी पस्तुमि ति हर तक नियमित कर दिया। हरा कर अपने परिवारको अपने महको पीपामें विमपित करके हमरा हुमा है। मईको विहति और मनुषित पिम्फीति परिका हमेषा ही सपु बनाती है। इसी पस्तुको मोर काय करकरी पन मियाम मिया है कि कपिकनिए अपने पतितकी बहुमून सेबामप्प पस्नुका स्पाम मनिशाप है। यह सपना मब मामा बहु भूपातर कमा लिए विममितरता। कपिणी गति सतरमात्मा त्पाद है सवा मारमविनयनमें है। पिस्तु इस प्रकार मारमायाम मोर भारमविमर्गन हीरा गिमा पात महदम्पपिनत्व हो। तपष भारने मान भागो सम्में दुगना व सात मही है। म सिरोप मेनु
रात शुर पोष-मूत्म से सूक्ष्म मन प्रतिक
जिन में है शात्र धर्म व प्रतामिक
गए प्रयापतियों के संयम से रचित
गर हो गये भाव रणमे मीहत समित
गमका अस सम्पूण विश्वको विनित रममा बानाक पीठ
बानका उतना ममीस नहीं है जितना उम 'वी विमान' पारि
पापित सबमरह रामगो माप है।
निय सार रूप में संमत होवानी-माण
पोले, भाया न समझ में यह देवी मिपान
राषण प्रपरत मी अपना मैं मा भपर
यह रहा राति का येल समर रोकर-राकर।
पर राम बीवनकी और भाग्यको यह बिना देशार मो रिमित
म हुए। उन्होन अपनी मारमाने फ्लिके मम्मन बिनति करता
संसम्म निमा। किन्तु इस मात् गम्पने भी उन्हें मिडिसी मोर पहरी
प्ररिव दिया पूरा अन्तिम दिन इनीवर अपदव हो "मका
सारा पिकाकोप व्य
घिर जीवम मा पाता ही भामा निरोप
पिक साधन पिसके लिए सदा ही किया शोष
मोर राम गिनाने कभी न प गाना पसायन माता मापने
महाफ मम्मूष मागारका विमति कामेरा पित हुए पनि मिहो
गयो । पाई गमी राशि ! किन्तु निगमाकी मरमती-पूग तो
इसमें भी पिटमा भी अपि संरट और जोगिमम मग
पपा गम निकोपी पिान पा बद निरामा सिमारे
गमानी रिपमवा पी। गमचो बीस मामले मर्माण करना
पा पर निगाको मार्य शिव मौर मुनग्न सपो प्रतिमा जोगनमें
माना प्रभाकी उकाली म्पिनियो ममिति पाता है। मो मही
भिपमा मनु
-
देसमा बरवा | सरोकी असामयिक मृत्यु पार कवि अपनी स्थिति
पर बार-बार मोचता है। अपने सारे कमको दमिर मालट
है और अपने पितृत्वका निकाह मानता पिन से मापा बात
है किन्तु गाव देसमें किसी न किसीके मुखका मन होमकर हो पम भाव
है इसलिए पविका इमरे मुमा बाम छीन सेनेकी मपेक्षा बामुमोम
ही अपने म्हानि-भरे मुहको चित्रित देख फेमा स्पापा पमाद मापा
पन्ने मे पिता निरर्थक पा
भाभी मेरे हित न कर सध
पाना
मांगमोपाय
पर सदा रहा किषित काम
लतार अनर्थ भाषिक पम पर
हारता रहा मैं स्वाग समर
सुषिो पहनाकर पीनापुर
रस साम तमे मतादभिमुस
सीण प्र म मीना कमी अष
मेलसन सघ ग पिच
अपने मासुभो भता विम्बित
दले है अपने मुन पिस
पिस्वपित्री गार्ण पीठ मोर मगित होनका पाही रोप निराश
की क्या इन पंक्तिमा प्यनित नहीं होता
यह हिन्दी स्नेहालहार
यह महीबार मेरी मासर
या रस्नहार लाचर पर
भन्या पाहाँ है मास शुभ
साहित्य मला काराल प्रपुर
।
मह है 'मराम-स्मृति बिसने कवि बन्तमनरे 'वयकोर को पूरी
तह समसोर कर गप दिया । इस मारा गर्मविपाकी इस पृभूमि
निरामाकी कवितामोश मिश्मपग मिमा गाये तो सारे काम्परे रिही
सरका सही भर मममम मा सस्ता है। यह सानि मौर विविधाता
माग ही उनके काग्यम माना पार्म प्रस्टिव हना है। कभी मामेम
बनकर कमी मरपाचाराके लिए पुरम्प हमार बनकर कमी पासगियों
विश्व मा कारीगर बनारा भी यह मात्र 'बादल राम' में भावा
चाकी मिटानेवाडी पक्तियोरे लिए बागान बनकर माता है कमी
अंगना ममे मिपटे भी बार मम्म कांपनमाम बनिकयापकाने गिर
प्रलयंकरका विजय-मान बाहर माता है। यह माय अपरमे शिम म्पमें
माये इसके मूबम बारम-बाहेमनाका ससाठी पा हो । 'बनयम म इस
परफा हो विगगन है। 'वनका से बिक जीवनका मया प्रभात बनकर
बिस उठी । पपि मोvat कि भार पर्यागमक पपा बम रिनार
गा-पत पाम पुलकित रोम रमा , मुबी चूम रहा है उसका
पाताम अग्निपर पुरंग निभूम प्रसार मारे रिमन्नका अपन प्रतापसे
भस्मीभूत कर दाउम ममय में क्या कर रहा है ।
हो गया पर्यवीपन मै रण में गया हार
सोपान कमी
अपने मविप्य की रपना पर पल रह समी
पर्न सोषणा है कि कार में कोई रामपुर होता तो मर ही में
मममम पूमहाठा ािन् माग मो मनुषर होने मरे नमार गि
मधिर और उर होते। ममगारोमै मेरे पण मान होता
भातरा रिप गाने चित्र पते । गगमन रोकर किमी परवीना
पटा ही हता तो सात समुद्र पार गिनारे सिर गाता । मेरे फिनारसी
गरनीतिक पार हो मनपर एसारित होकर भी साम्पासा
पा माले पमता ग्रह भरना राष्ट्रपति बनानी । हिन्दी सम्मान सभी
शिमरीका मन
समी समय पुगारो मापा मार बेसाडो तोरकर का I में प्रियो घरोंमें गोपनका रिसन करने वापी-बार बेमा पसी मवी कविको सस्पके लिए सब परेनेडा नपा सरेप रेकर पा सरसता स्प मानो कपि पुष्योत्तमको नयका ममा सन्देश देने मामी दी और पामिने उस मेराको मानकर सत्यको सापनाम बिना प्राप्तिको भाकासाके सब पुण् विसरित कर दिया। इसी मामविसमनको पुण्य गापा निराशा का पक्तित्व । मानो साहित्यकार यशसिप्मा टेप स्वार्ष एक मरेको मी मिराने प्रपलमें ही मफ्ना पिताल नियोमिट करहे है उन पास अपने सरपके लिए पति और समायको रेनेके लिए पु षा ही नहीं है। वस्तुत गौरवाम्बित भ्यक्तित्व वही है जो बारम-विमर्थन करे पर यह मामूली स्यक्तित्व के बयकी गाव विमुक्त मही है।
-
पर हानी पावर पेश्याम बामा तारकर पारिपारिक परोपकी
प्रतिप्य पा सकी।
वर उस समय बन्माय सामन्ती संसति और सम्पदामोपडी
साहीन पार्से ममे मुगके बपेडॉकी पोटसे महरा ध्ये। भगत यो मष्ठ
पा बरेम पौर स्तुत्य पा यह देखते ही देखते इसमें टोने सगा क्योकि
उसकी उमरी बमक-धमाका बुत बन्नयम हिरे पहरको मिा म
सका। चारों तरफ विनाशी मुमी साहकोषमै वाएं, टूटी हुई
परम्मराके जीर्ण बन्यनिस्पद सम्पता मन तोरम "इस विनर
दीप पो मपा मम्पवर्ष पम्म मे पापा बहमपम निर्वस सौर ममहाप
बा बसिरह अब भी बहरोपीवितके सामने विश्वासे मापा मुगा
देने के लिए हमेष्ठा तत्पर था। चेतमको इस नियावा और अपमानकी
प्रतिष्ठा मानकर मईटको तप मापनाते मस्पर्मक तपामित बुषि
पीबियोंसे सन्त नफरत पो। पारफे सासनम ताफा हुए मसका उसन
प्रमावाने पारन में रिवाया वीर सावर गौर पापसाम पुदि
बीलियोनकाय कहानोर्मेब पर सो। एसस्सम उस दिन पंचन
पोपणम् अवधनका उत्सम पारियो एक कमरमें बहुत-से मुहिनीषी 48
मापन रानीति बादि मम्भीर मसकॉपरीधी बाकर है। सभी
एक वादी हाममें परमी बोला और साधर्मेबपान सध्या सिम्ये
चेहरेपर मकब से कमरेमें रातिहमा चौर गावे ही उसने ममरा
जोरकर बाहर निकल बामका हुक्म दिया। दुरिगरीबी सोग तपम मा
गये । पिलाकर बोले कौत हो तुम इस वही बना पा करमेवार ?
मठा यह भी कोई पराब पीनकी पगह है।" उधबादमीने और भी कमाई
की मासी नौबत मा बसी । मगर मौर एक मुरमा-पितारी परेर्मे
मापे और उन डोगोंने भी सतनावपोमको यहाँ परम पानी मगर
से भी नकाबपोपने अपनी मडाव हा "गि देतर समी पाने
एमये। क्योंकि मायके मौवर एक सफ्नी बरतमानिकि मि
शिवराम सेतु
1
परकिताबह पीड़ात न होकर इमरॉकी नहीं मनी ही राति
परवाह
पेयका बि बोरसे मुझमे अभिपो यह ससुष्ठ य
चार । मादमी अब मपनको कुछ ऐसा विजाना चाहता है वैसा नही।
तो उसका सारा पस्तित्प महापाके पेरोमें मार यबोध पुतमेकी मस्त
अख्तियार र मताई। मह बनाबटन मेरठ हमारे बाद सफको जित
करती है कि हमारी भौतरी निवास भी नए करती है।
अब भी ऐसे पोगोसे मिमवा पा यह उनके मायको फार उनके
हपममें सामने कोशिश करता था। मम्मर कोप समिप कि एक
को रमाकारपर हमारे पस्तित्वका भी दुस प्रभाव पड़े नाना प्रकारको
कृत्रिम बेधाएं करते थे। गोपनि इम दएको भार बहुत ही सुन्दर
संस्मरण किये।
एक बार एक सम्पाप जसपिने बायेवर समप्यापक
के पिपय बावणे मोर लिवित रहा करत पे । रनके रहन-सहनको
चारठा लिए पनि उप-उप पा सोचा करते। उस
बयापकने पेवरम मिलते ही कार भिम तत्सम बाल भाषामें बात
पीठ गुरुर परेर तक तो सब इस मेमते पे पर या
सहलकी सीमा पार हो गयी तो उम्हान सम्पारकको मोर देखते हुए पूण
'क्या यह सब कि भाप रिमे मिी मप्पापको एक पुरी
वह पीटा
इतना सुमना पा मिसन अपनी कुरमीमे 388 पो पा
भापका मवाय कि मै बन्योंको निरयतामे पीया है।"
'नहीं नहीं मेरा मतलब सिर्फ इतना था कि वह पटना माकेही
सिकी, मनमा पलि परके बनगारमें पापा बेगरी
हरेपर का गुस्सा न पा। मध्यापर सात हार बैठ गये और महान
बड़ी संगीरपात बतला पुल निमा किनि तहमानी पारिवारिक
शितभा
H बन कर ए गयी है। चारों तरफदास मूरा माममान मी परवी पारंप बाताबरम यहाँ तक कि मुचे फूल भी महीन रिमाई पाते है। मपता है वैसे मरे जीवनको कोई रोम सम पया है 'समता नहीं मैडम यह मार्ग एक रोग है, इसका इसागराए । इस पीक मापा 'प्रपना व रोप (Hurls Pretenaali) कहते है। गनीमत पो कि इस बार रन महिठाने यह प्रबंचना नहीं रिलायो दिन ग्रीक भाषा माठीह। ईसी-एपी म्य-विनायका मह बातापामरस बेसको मारम्भिक हानिमि ही मार माता है। बाकी कहानियां तो से साफ मसपर मासूके रंगीसे रंगी हुई तस्वीरें । चिनको एक-एक कपर करना पौण मौर मबसारफी ममूत भावनाएं मूढमाधी वह पुमा पठती । और एलका पाव पेसाको मसीम मौर कटुवासे नहीं मरता था। इस मद एक रेतन प्रामीकी वह मनुष्य मनम सोये बनविनत सरोका सारे पेपर मान बणा और सबने अपमे पीड़ासे मरे हवयम जिस नस्पको रेवा बह बोपी रिमादिता कभी भी प्राप्त नहीं हो सरवा पा। गरहिए इत्तेवाली महिला कोरम पर्स सेयर फस ममी बासुमो और उनके बीष पानेगान सस्पकी पाचारी मापी रमेवस्स्यारे मौसुमि उम पनि और पी पीढीको मापा है जो समयपर मर म सो भौर मर इस पृप्तीपर कुछ म गमलते हए- जीवित है। 'म लामा सपास पीनाम क्या मामान है। इस हम से विरोधी' (मन्टापोनिष्टस) पहानीम बड़ी मन्छी तरारेड पाते। फिरिसोरा हरीर होता बेटा मर गया। मां-बाप रोना बटेली साप पाम है। योगा रेहपर मवेतनवाम रसप्त पौड़ाके मौन्दयकी एक पापा एक भाम्पर मामिफ ऐमी पापा रिम मनुप्प भासानीने नहीं उपक्ष पाते रमे कह पाना हो गौर भी मुश्किल है। समस्या मातमें ही मत प्रिया का सन्तान मौन मन पाहता सौर उसी समय शिवम सानु
ममतापून नमोस
एमपने संतम सन माम नापक पापा मार रमा पाहता गो
सेतीको मुलपान पहुंचा है। वह इस मनुष्यता प्रत्येक रोगको समाता
है उसका इसार करता है यहाँकही रोग बसाम्य है हो मी पनिया
नहीं होगा बस्कि कमीकमी मागेम्प होगा म माणस निरन्तर उपचार
में क्या पता है। धयके ममम मनुष्प पातिक प्रति मसौम प्रगार सहान
भूति भी है। वह ममुध्यो एपके हसरेसे-हमारे मुगम सित पाता है,
उसके ममें रो पता है। वह मममम मनुष्यको मारामारे सौबा
सिपी है । उस बबसूरतीस सात कि और उद हमेपारे लिए मामर
चौरमसे हटा ने लिए यह निरन्तर प्रयलमीत रहा। तमाम सबको
मनी तहागरोनसार मोपोरो उमय दमनपार भी पाम मग
पहचता है और अपनी मप्रेप मामयत्तार
साप मह सनक ममतको कामना करता है।
हर मपनी ममा प्रति भी मामुनी समत और जावरक नही पा ।
तामस्वायने पुर पसके मुंहपर रमकी 'गरसिंह कहानीकी तारीफ की।
उन्होंने कहा कि सरकी पहानियोकी कसावरिता उसी तारीफ
और मानसपर हमारे रेएकी मालियां दो परियमन मामी
मिा करती पी। पेपरने या कोषक साप पो पोरसे महा हेनिन
रसम तो यात-सी मुरिमा वर्तमान है।
पसरफी निरा भी कम महुई। मातोपात उमे बनी चिनी।
पसने लिया कि में पाठोपौंको रग मस्बियाकी तप माल्या पो
हम पुते परतीको बोटनेका काम करनमा पारि पदोपर पाठी
और पोरसेक मारती है पारि यह समय के किस संसारमा मणियों-
का भी अस्तित्व जोमपनी पोड़ने के लिए है। मैं पचोम
वर्षों तक अपनीमानिया पारने माहोपकाकी मीभाई पाताभाका
पर पलमें मुझे चमार भी सस्य रिवायोमही पाता। बस यही कहते
। 'लो में मनाना मम्ता इवना मनमना मरलाई जिवना में
मितरामा
मोमबत्ती बुझ गयी
पास्तरनाक
मुझे पपासे परेकोमम रखी एक मेर रिजाली पाती है। मेर
पर एक नम मिपटा पब है । महो मेरी जिसपर उसनपोते रिनोम
अपनी रचनाए मिसी पी। समाएँ पागण मा परामम रख दिये
गये है मौरमान पर मेकर मुबपेटिका मचानकम दस्यको रेकर
पास्तरनाक ही पक्वि बुनामा उनामो मियामोमें बोपन पर्व
पूमामि हमेषा ही हयाको कापर हैरती हुई विपर मामा की दी।
"मेशपर रस्सी गफ रामा है जो जल रही जमती रही
भोर भाग पर घमा बुध गयी। बिगपो मान सम्म हो
वैसे उसने अपने प्रमुख पापको मरते रेसनेकी प्रपना की थी।
यूरीको पुन हुमा पापी भवनात मन्को स्तनसे चिपकाम सोपी पली
ऐसो कमी भी मानो पनगान सोपान्तराफी यात्रा का मा...मृत्यु
के समुद्रक पोहोस हावामा कोई महार किनारे मार मा हो
जिसके भीतरसे मावत नवामान बोम रतार हिपा पपा होपास्वर
मार मागसे सत्तरपर्व प एक एसे ही पहारसे तरी मारमा पा
जितके मरमें मना बाम-नाम पशि मपुरनमतिया की मार समे
मरपुरेपोसि मामेको मर गम भरी पी। पसका मन और बम
औरधिभिप्रपा पह मसो सि मरको मासूम हो गया पर मी
मेगा संपने बापू -मगरी गोणपर एक निषित परिपाटीम पूप
मि तप्पडो झिहराम बरहोर फ्धन किया कि पास्सरणार
गिता सेतु
और जाति मपना मदेश्य भूहार मनुप्रयास हो ममन मगर
सवार हो पाती। दोबारान्ति हो पाती हैराजसोनुप बन पाती
है। पास्तरनाकने पेमी मन्कि बारित मदद बापपी अपनी बम
स्पितिसे मना हो। पास्वरमामा बीवन घुरो बन्नका एक सोय
भाव-विसामान विहात है। रते पुरस्पर मिया साहित्य सापना
सिए, पर प्रचार मिला पसनीतिको । उममै बस्यक लिए दास
पर बिय पस नहीं पमें मिडीयो पुरा क्षेत्रमे बहुत दूर। रपती
डापना लिए पसे पुरस्कार महो मपमान मिडा। मिली ऐसी कि
पहमने समाचम ही शिव-सा हो गया। पिपिरवारी राजनीति
सारिकारी धापना तप और ईमानपरीपरा टिक मम्म
करती से पास्तरमास समामा का पता।बह सब होते हुए
मोबह मन्तवक अपन सायपरमपनी भाममूमि और समारोह
विमुबारह यह मामला मममता बासि पुरस्कार पौडे
पस* साहिरिपक मम्मोकी पम्पमारा बसमा प्रपल भी गिना
वसीप और साम्यवादक निम प्रचारके स्वापका। मिया तिक
अभिप्राय पिठ प्रचार-गुणापर रसने अपमै पहिलो पन मया।
पता पो पपा पर उभर्न अफ दी। सत्य होगरीति मा से
स्वीरममा
भार पास्तरनाक मारिसके मनम निरपर प्रान्त पनेवाती
ममा गुम शिरापोपी मोर' रविवादारी और
पावरमाफको भी मार मार का पास्तरनाक नहीं है तो हम भी 'मटेड'
की बार-बार पारपती"ने क्या?
भागबन्द है और मेरंग र सहा हूँ
दरसाने के सम्मे के सहारे मुन्नाभा।
दूरागत पनि प्रतिपनि में दहता है
क उपर
बेमानी जीवनका स्वामिमानी कलाकार
अठवेयर काम
फामू मही हामि एक समाचार मा किवी १९५)
पेरिसके पिषमूर्ष सित सेग्स एक मोटरनुपरमाय कामूकी मायू
हो गयी । 'जनि पुत' वार बालम रे फलनको उप सपने हमेशा
इस प्रानपर कि क्या सपमुलाम समारसे सन्तुष्ट नहीं है। अपने हर
को शारीमानसरीके साथ एक ही सत्तर दिया नहीं इससार मुम
बिहक बेमानी प्रतीत होता है। और किम मानम पाहिबेमानी
शिम्बनीका बना पा चाक मामर अस्तितारी विचारणाराष
सामारण मस्तिष्क मीर बीसी सवार गुरु मानसिकता
हमाा पारवी 'एक बेमानी वाहको एटनाका शिकार हो जायेगा।
भको हम विपकी रिसी भी पटना मी तर मी कोई विप
कारण कामपा तुझ नहीं मिला । पैसा बीवनमें पैसा ही पसकी
मरममै भी इस मामी नियविकाहापापितमा परिप्पा होनेाती
इम परमा एकपकोही पीण पाया हा दो से मिपूर्ण
Tuमकी सत्तम कमी मातारणारी होती।
भाकपटे गोगनम सबसे महत्वपूर्ण पनगरिन भाया बरा
मोसम साहित्य पुरस्कार प्राप्ति सरपरमा सरस्पो और मत
राष्ट्रीय विसरमा सम्मुख मपनी मा प्रर करने के लिए यहाग
पार से मोहमी भाव पहा याममा मिरेपरमा मातरित
ही पाEिTO समातम महीमा पापा हूँ। मैं पहारे
शिरापत
मामयता के लिए पुनहपार की बात है। उसने बामाको भावारी बसत्पका मुन्दर मौर सम्मानित स्प"सत्पनी बेपर्वमो नविश्वाय दुर्योध मर्ष बर्ष त सम्दम मानकि मनुचित प्रयोग पिसे सही मार्ने फिसे गमतयह सारा प्रमाण मारमी मनमें एक अद्भुत मनि चिस्ताको ममता है। 'बजनबी' में नापक कहता मी मार मरी प्रायद इस पता महीं मुझे अंक मानम नही । मीरमास मापीरियासे सवाया है। माकी मत्पुपर पसे भारमें शामिक होने के लिए एट्री पाहिए । यह अपने माकिसे पता है लमा रेसे इनमें मेरा कुछ होप नहीं। बारम से मरवाt कि यह सब करने की क्या पत पी मामिल परिसरमा वो सहान- भूति रिवाय उसके लिए में बातों को इस दुनिपामें मांफी मृत्युका व मी उमापा' होगा पा रहा अनुमय पीड़ा सहानुभूति समीक समम मोर मा पर मामी इस निरापा-बादिलाका सबसे दुभर नमूना 'सिसिफसी कपा में प्रमरता है। देवतानि सिसिकपकोण दिया कि यह निरन्तर एक मिपात पट्टानको पहाडोको बोटी तक पहुंचाप बसि बट्टार बपने भारसे तुर निकर पिर माया करती थी। उन्नीक हो सोपा पाकिमिरर्पक गौर करके मसे मार दूसरी पो बकर मरा हो ही नारी सप्तो । घिसिमको बहसमा पो मिती! होमरको परिसरी मानती सिसिफस परीपारिपाम सबसे मपिक धिमान् और बार बार पहा पाता है हि रतने एसोपसरी म एचिमा एप मेर बताया था। जुपिटरने परिनाम महारण हिपाt"यह बात पसने सत्तो नामर एजिना पिताको बवाद। और दम भरपा णमिमा बन्पपासा काराबासीरमर परिममको बी-टोर समा।बीपमें अपनी पत्नी प्रेमको परीमा ऐना बह्मन पसने पोसे एक महीने ही मामी । 1. मितरॉम मेनु
पा सामान्य स्तर कोय पक्केि मियादा होकर हgoरले स्थिति
मते हो हम ही रास्ता नहीं दिया तो परिका नई मा पन हो
पुषा हो कि पूषा मार बस्यापारको है अपना बरेम मान के दो
हम बात्मनिपेकिनर हो ही अपन बीवन मौर मरमकी प्रतिष्ठा
पचामेका प्रयत्न करना होगा। इसलिए मैं के प्रायमे भी समसवा
है।पह प्राप्य, पोट भाबर मी मगि अन्याय पीमिय पर पूरे बोपो
सापयामिए प्रपलीस बिना में मौरीपन इतित्व पति
बारापान वा पी और सौनकि बीम विदीर्म-एक सम्पर्षे पये
मपित पतितके बीच भी ऐठी इतिक सुमनके पि-प्रतिनि
यह मकिनाप बपने सुपकी बिनाधात्मक प्रतिकि बीच लडाबर सके।'
कामून या पनि-साठी रक्षा डिएसपमा दिमि
बनवरत प्रयत्न किया कि उसने मुर भी नागीबारे वियाने रसकी
मागी रवा लिए ध्याईपकी मामी कहर पनुमति
गये हुए स्वये बाबात्मा प्राप्त किया रखीके प्राव इमिर
पिन परियम मानताको एजार मूपम
पारमा म पनि तपस्या और बसप हमेशा बसमाय
परावरटेक से हमारा कभी समानता नही हो सवा । इस
लिए हर को पहरो प्रतिभाएं गार बनी चाहिए कि सपा विप
भी पान लिए मूठ बोस बिल इनकार करमा
बोर अत्याचार तिचाहे वह किसी भी तरहका दो शेरपर
काम अपनी इस प्रतिमासे एकगर अपाय पिर मया बस में
मापारिमाई नवालीसा का पाप छान र मरने
सम्पत अभिप्रायॉडी मिाया हमने एक सामान लिए
हतर स्पाको विकिर रिपाटी बसी प्रय
की ममम हमेण पुमती पेमा।
सिलपमेत
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पोसम-मरी जिन्दगीका 'मातादोर' हेमिंग्वे किसीने कहा है कि मुरम् जिम्गीका बाईना है। मामात मे पी मसे पावरही पिसी बम्प प्यक्तिक बारेमें पस्सा होती है जितना कि हेमिमोके कठोर परिप्रमो तपाइमा परीर समयबा को-को तोडे बामासे मरा रा चौड़ा कला भूरे मातोसे घिरा मीना "मृत्तसे मेलमेवाका एक ऐसा हानी उसके तमाम उपन्यासोंका नाया है। और कौन कहता है कि कहानोकार अपने पाहों नहीं बोता। कभी उसनेमा पाकि प्रत्येक कहानी बो मोतते अविकीपी पाती है मौसमें समाप्त होती है मौरबाग हेमिप्येकी पिरलोकी रंगीन पार्यपूर्व साहसिक मामि भरी कहानी को पिक पांच-सात मोठे बनायापक रूपमें उसके बाद हुए मौसमी काहीवी मौतम समाप्त हो गयी। २१ घुमाई १८१८. में इलिनोइया एसर पर बह परा हुमा । पिया मरीजको विनिमामे बरे हुए पमपको पिकार मार मण्मी पाने काय गुजारा करता पा मार रखने पर वार पिताही वय अपने पृषकी भी बीवनड़ी कठिनाइयाँसे चूमने और मृत्युम तिमी महामेकी पूरी मिया रो। प्रथम विरपुर में मान सदाशिमगठी पाव मनिषकी शिमगोको समाना वापर की पो मोबम कमजोरी दुरि बनकर उसो परसि हिट पी। पर मामलामा पा माषा टनेलिए पराहीमा पा! उखन रेशतिको परन की मोरइटमीको सारिक मुस्मिार बा पहुंचा। हामि रमै दो महम् पुरस्कार मिएका शितरीममत समसकर साफ कसे समय कारतूस ए बानेसे उसकी मृत्यु हो पपी। 4से विममीमें बसे हो मृत्यु समेठा बोसम-प्रियता मोर मायावान उसका साधन होगा १९२६मा हनिम्मेका पाका पम्माप मिसेस्ट प्रभाषित मा तो उसने मपमी रमहीम राधार को माहामा मापा और मम्मोर देनेवाडी माम्यतामोके पर रिसमें माधुर्यका एक भी पहें देना यह गुनाह पममता पा बासोपोंडो मानो से मार-मारकर मम्मी मोर माइडिया। पुटके परिणम किसे उपम्पास 'ए फेयर किएर मार्म ने तो ससकी मुरम्पर मीका सिता ही बमा रिया । जीवन पिसना का परोक्षा-स्मर। इसमें वही मोक्ता को तो मर मिया ममता प्रसन चम्पा मोर एसके चमक परेको पाकर वह विधमान पास्तविकता र पाता है। पिपिट म्पति उमार मौर राष्ट्र दोनों ही अपनो सामूतिके लिए इस सामाग्य पति-पताको एक प्राचीन मधीमको पर इस्तेमाल करना चाहते है। इस बोक्नको कार-तीती बनुभूति से निरन्तर तोबा बनाती नयीं । यह एक निमोदी म्मनितकी तरह समागा मीतर पते हुए भी ममारके बाहर होता मया । माकि राममें उसे मा सिम-बसी पदो पीर दुनिया नहीं है। गितु विने बापधर्मको मात्र किस बसाईको पापर हपने हिए म्यस्त्र मभिप्रातिकोष पोपी है इसे भाई सम्ममा भौर पानताको रक्षाके मामपर भनिदाम वस्तु मानते । उपन्यास परिवारिक हेनरोकी कायाम से तुरठार हेमियी चिम्म ग्ठा मिान पण महत्ताप बोपन पम बिलपुर मबहीन । फरक बोका "मे पुरमें मारे बापाले मनुष्योहोर्डि हमनेटमा भिमे पाते महरबान हए मोबा पुरमें मौका नहीं गया. मगर उसकी बोहम-प्रिया से बगद यहाँ जीरकर पयो गार पर पम पमाणे पप भी यह सब मितरीडा बबवे बम्पकारमें गिरावर सोबता पा पारी मोसो पालिा"मेरे एम पान केटा मार मारोपमा मान्य नही। हम पेनकि महमासका मह समिम है तुम मा एक परेको प्यार परमेषगहो परिणाम होता है। सपा-बहन मापुन हो गया है। उसकी मृत्यु वो 8 सबै पापडही करती। किन्तु यही प्रेम से एक दिन पहत गन्दी चीर मातम पठा।। 'मार नार में पसी प्रेमपर बीमार पौबम पड़ा 'म प्रेम मगर पड़ी पीरी की ? मैं तुमारा रोस्त प्रिय वा परोया प्रेम भी सी होमती बोगहरे। या प्रेम पुन tatrint मन है। मैं इसते ही पाराम हो बाई! इम सोपीममाइटसे विकर पसे बहुत कर, निर्मम बसम्म का कर सकते है। यही कहा भी गवति ममर किलोमे घायर उसके मार जन पारोको बनेकी कोपिए ही नहीं की। २ फेयर सदरमामा' में उस प्रेमपरिका मा पा इमारे बीवयका सूनापन सराके लिए हमसे गिरा ही गुफा . एक मनोखा मामन और BAT दूसरी मुबह स्टार सनेरेसा पा निमकी किरनिकी कमरमें मारपीरीने रास्ते पृयो भतार और होस मारे एक पत्थरकी पर भी इस मोर एक दुसरेसे पीs- गंगवार और होगे नीते पहपर विस्तार पूर्व-रमियो र वा-या मुग्भमापसे निहारता एन । म्पी हो मुसोहि मॉरी"और या नसे ही एपी-हीमतिमा चौमामा तलपी हो गया कि उसने प्रेमकोवापारपोरेर पररेकी तर पदासा। नरीमना, "मनुम्म विना एमपी है विना ग्यमान एकाच । मनुम्म हम अपनेपन रिम परिमपमी निर्माता परिचय देवा और ससकी निर्ममता सिर पडती दुनिया से पौने नहीं - भिग्रास
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पोलाएँ सापके पेटको तप काब पी है पर पिपणे पाप पनि पूण
ऐसा नहीं हवा पितो पायाने मुली बनवा मेदारोडी अपारसे
माका हिलाती हो। म प्रापार मोटो तमसा और ममे भते ।
मिपा पापना अपरेशम और जनता र कार-काररमाणे मागे
बर्षाका निर्माम रिया मा पा पालिसा हा पढे पाबानेसे
फिपी समय सारे सामान छम बामसे शिलो पये-पाक मि।
पहलापत्र नहीं है उसकी चादरके लिये बोरोग मी
संस्थामें नी-बापुनी पति करते आ रहे हैं। ये छिद्र अपने ही सोगाने
बनाये है पाकिसई बमता पर कोई मसरन उन्हें दो
भरतर चाहिए और ऐसा अबसर पाप ही कभी मामे। पाविप पो
परिवारम भरके पनसे जो बीत ऐमासी बानी बह सस्म पी
पागेम कभी दिखायी नहीं पाती।
लिटर मे रिस्ठीपर एक कविता लिखी है मुस्दे । रेशमी
नगरपी बोरली रानि गमनकी चोरमारें नहीं करती। उन्होंने मन्तम
मलते है तो ये गाँव देश के बला करें
बाराम मवी दिशी अपना कर चोदेगी
पारसेगी मरमट में मा रेशमी महम
या भारी साखरपेट पकोड़ेगी
यह मालके उपरान्द्रको पाहट है. मारोती मा हा
होपी!
मला मिले वोये इतिहासही भोर वायो एकमनीष
र पात्मनानिमारपसे विक र बालिका
कौमाग बो मम पिपरिमपटियाराबाय पिस
दिमा हामहो । धारा ऐमा मर जाकर पनि
हापर्व सम्पूर्व रेप सिमटकर हमपा है। और भित्र पस प्रकारका
पिता सेतु
गये। पराट और वनडेबससे कई मधोकी विविवि पासे महगांधी बांधी नहीं पस भूमिका । मैं मपम सापक मिया के गाने सबसे पना पहा कि मित्रो इस बाम बस रोबर बार बारमात दम हो नहीं समाय बनीम-मनीषा बबरले पैटमें बानेवाला है। यमनमें बार बाबा मनपा । पर मनुष्य मही रहेगा तो रस्म की बात कोरी मास है। इस बारका पूरा महामाप्त जिसम हारनेवाला ताना हीपाको बोमवा मोबको नमे विना मी पेमा। शासनिक सेठ इस बीपी रिहाको रेकर पिमितत हो गया । '' मेनगेनमें एक latest तिम रसेशन का स्तर प्रधानमन्त्री नितिन और पमरीकी राशि पेड दोमा ही पारा प्रतिनी गिई बपमा मिप्या कौतिक मारे मही रिसायो पठा। पेोनों महानुभाव प्रफ्नो मोठिपोंकी सीमासि गर पठार मनुष्यवार विनापरे पतरेको नहीं करते। बोराम पनुपतिक शान्तिमय प्रयोपोंपर होमवारी शानिक परिपो रिष राहा गया और सम्मेमनीषही मेंबर हो गया। अारोपपये उत्पन परेकी बारके लिए मियुपर राष्ट्रसंघीय मा निक परिषदने बो पैम्फलेट पापा समने मातम होता हरिपोकि- पार रिमरिमग रहा है और पापुमपात बोलतसे पपास पित होम। बाप ये पह तो तुना पर गका भूगन और सारिपारमा सम्म भी पूना ! इसका पूधन मोर मावियपरते या समय मेरो मनले समान है और पर पहरा है। नरामी उप- योरितापर विचार नहीं करना चाहता। मानता है हिली गोरे साहित्यकारगि मनमें न बायोसामने कई बार नही मामा है। हमें समारोहमी मानहारिवापर पूरा भरोसा नहीं। frit एक नित्यमेव का उपास्याम बावा है। बानभूति गणा इतना महारी हो पया कि उसने सोचा कि सारा सि रसोके सहारे कायम है। बसन्न प्रताप पुगेकी तरह पम्ने मा। एक बार निके पाससे अगरते एको बानिमि-से एक बोला 'परा र एकर पो । बिते मी बामविका देव मनिकी तरह प्रसित हैकहीं तुम इससे यह नमामो। ससका साधी बोया 'क्या बामति का ग पाडीवान सबसे मी पणा तमतमाया रेप पाम पहुँचा। उसन भतुमित सम्पत्ति और बमको सामने रखकर म्हा बाप से स्वीकार करें और बतायें कि बापका प्रताप इतना प्रहर से है? रक्सने समरे मनपर कर मारी और बोका मा वा तू मुमे भपनी सम्पत्तिसे बरीरमा । सममता है किही विसका नियात्रा है। मुख सभी मूनार्म प्याप्त उस एक शक्तिको गो नहीं पापामता ससका रिमास मरयम्माषी है। मेगस से पुरस्कार मिला है जिनोमाको कम्युनिस्ट मिमों को इसम पबहानको मारस्यकता मही है। विनोबा सम्पत्तिसे माहौवरी पा सकते। देबिक मी बायें तब मौ भूदान नहीं मिलेगा। उनके पोका पर्पन में बपि बारे में कुछ मना नही चाहता। बिनोगामें मापाचो भी सकती है नहीं मौ हो सकती। मै तो रन हगरों विलोमा बारेम कह पामो विस्तो प्रत्येकीनेमें है पर गिमको बार कोई नही सुनता । क्यों ? बोरिलो बपर बह पनि प्रस्फुटित नही हुई मिनी बावरयकता है। बा मि बनता सती है। पवित परमरकी मूर्तिम नहीं होती। पुगारीकी प्रणाम होती है। रिनोबा तो निमित्त मात्र सराहरम है। साहित्यकार रस सक्तिका ऋषि मगराता। सारिप पार बस इस प्रसारक म्पपिसके बारेमें सोचेगा मनुप्मता बाप सामन्न ममसे ससकी रमा करने लिए बब यह कटिबर होगा को ऐमे पितरीन मन
शेकापुत्र वनाम अनास्थाके बेटे
बाम तौरसे समूचे नपे साहित्यके विषय और सास तौरसे मयी
काषिताय विषयमें एक बात या सुनायी पड़ती का बनाया और
पृष्ठाका साहित्य । मरम्मा तो तब होता पर प्राय निश्चित परि
पाटोको प्रवृत्तिमूड बाडोचनाका सृजन करनेवाले बागोषक बिरारी.
केनन रपनाकापर मो इस पावन प्रयोग करते नहीं हिचकते जिन
ममी कविताको प्रेमीको मौ समाकर अपना लिया है। वे समीप
नये सारियो विषयम मपना फैसला सुनाकर इस बनारसे परपन
घटकार मुसकरावे । पोया न हो बरिया , माने मी
माविरको पाना ही पड़ा। दुर्भाग्यास दिम्दोका जा ऐसा दिसा-
पारी बार किया ऐसे सिगर जनपते ए मास्मन्बानिसे परत
सुमाता।
मम्मी पापा कठिनाई, समकि नमन इस्तेमाल या कि ठीक
अपन बानने भरपाई है। ग मौरजनास्थाको नरम समाप
बोधक बना लिया पपा पति के विभिन्न पार्मों और स्पर्मानुसारी
मई-मेरको मो भुमनेडी कीपिपी मोहै। एकम्पति परिमी
पाप या मावस्थितिक प्रविका रखता है तो इसका मप नही किबह
मनास्थाको प्रमय देता है। इस जि स्वितिक कारन साहित्य में एक
मोर मन्या समीपाको रापि एक होती बार इस बार मा स्वस्थ
और बास्पापानका पिवान पान निमित्त पेटेए समाधानको मनी
रचना मातम में वरण पोड़ना भाराम करते है।मार समार
पारिशेपन दिनपर-दिन पिक समानास पिता वा हा मित
पितरांचा सात
। नहीं करते किहम सम्देह रहे । पाशस्तित्व बिस्विस्थ का परिपाम है। इसलिए कि में सम्परता समिए में है। मैं सोचता हूँ इसलिए मैं हूँ। मैं मितना ही पकाकरता ना हो सोषवा हूँ और शिवना बपिक पोषपा हूँ पठना ही अपन मस्तित्व के बारेमें मरा निम्नास पाता बाता है (pense doneje ans) देशाने पालो बार रनको प्राचीन भाचार्यो मांसारिक घाम और मध्यकामानार्थ निक नीति-शास्त्रीय बातावरपसे निकालकर मापारिक पपपर प्रतिष्ठित किमा। एक कसित महत्तम मम (सिर )से व्यक्ति उत्पको मोर नहीं बकिपक्ति सत्यसे मार मार महत्तर सत्तम प्राप्तिको बोर प्रेरित यिा। सस्म मवि प्राप्य है वो पक्तिको सीमित प्राहिम-पक्किने माम्पमसे ही प्राप्म हो सकता है हाकि वह सस्प में पक्तिसीमित महीं होता । बस्तु अपने सम्मको यो निवना अधिक व्यापक सत्पपास २ सके यह मायम सत्यके उसने म्पापबंधो समधने में समय होता है। मनास्था इस ठीक विपरीत है। पिटी भोरमै बास्माममहोना बनास्माका अनिवार्य मात्र है।कोई मक्ति समाज मास्वानही रखता पुपनी परम्पराममि बास्मा ही रखता पर मार सिप विधान भास्मा नहीं रखवासही इठने मात्रसे से मनास्थावान् कहना रषित मही होपा । पाको सापनके पर्मे निमोभित करके बहम्से परमी मोर प्रेरित सत्यावेपो भी रिसोर्म मास्मानही पता परमात्मा एक निश्चित मापारकी सोवनीरा से बास्पा एक बोर में होती है यानी 4 में अपनम । मनास्था ग्सेसे पर अपने भो बास्पान पेबमास्तावान् म्पतिमा मिसे पर हमें विश्वास नहीं । और यह मिति निस्तावित गौर निम्नी । सलिए मास पुष बनारवा या निराश-मृषा परिस्थितियों भापारपर किसी पक्तिको FUषापारी या मामाहीनामा ठीक नहीं । साहित्यमे तो और भी प्यारा पाठोपाता क्योंकि बार अपनी रपमा बस सितम सेतु भारगर भनू यह मानते रोमन माविक मोर भनिरिक्तता मिए । सामाईको बार बार मनुष्य अपने लिए मारता पा करता है और मन्वने अपने माम्म र निर्माता र पाता। कामू पिस परिस्थितिम इस सप वा तम्पको स्वीकार किया पहनने 'मोयेस गार पापप स्पष्ट पाता। मन ममजोरीपूर- में रो मापनका अपरेसी अवारमा। अमू निपामापीना और बास्मापाय दर योकि अपयेपर शिसपनी महापर विलास है। इसका हरसको रचनाएँ र परमयी बासीऔर सिधिसकी कमा म पनि मूषक है । शिवोम ऐरे मन बावे वर मम्मको बास्तपि पाठी, विस्वास भइरहमा १ र मनुप्पी मरम्म जिजीविषा से निरन्तर रम मावी एबी है। विपिम मा बाम या को संगामें सिवाय विकी गिरयो पक्तिमायके परमार सिना बगर । समाच पामा-पार्टी पचराष्ट्रीय म भासी मगन हाप किसी भक्ति पा सही से लिया बाते और इमरमही पावे। ममुप सर गिनी पिए वर्ष पर मर बावा उसकी मावार तुमार भी कोई नहीं कर पाता । सिरिफाकोरेवामा गएि रिमा कियामा काम था। दम भी क्या? सबथा। बताया कि पर्ष अमरे और कोई दोमन-बाटीमें भारी बट्टानको संसार बोरी तक बापोटी वापरलेले पोपट्टाममा पाणी और 'सिमित पसे फिर सामापुरता है। बीचमैं एक मासी मौका स्लो प्रेम पाया तो पळोजीमा मे पप, हर अंगहरेमि ऐसा रहा बिहारियमनिहीत स्टोर ने पापकर पुन रसो अव-बाय करिया। मामा मिमिनी पर हमारवर्षे वा से परवाते से बिलापन -
जम्मेबर कामू मह मानते है कि यह बोवन मताकि और अनिश्चितता
हुए है। इस सम्बाको बाम के बार मनुप्म बपने लिए सार्थकता
पारा और ममें अपने भाम्बका गुर निमांठा बन पाता।
भमूने किस परिस्थितिमें इस सत्य मा तप्पको स्वीमर पिया या के
'मोबेस प्रार' मापनसे स्पष्ट हो जाता है। सदन मैपनीमा
में उनके भाषषका अपरेसी नुसार पा है।
कामू निरापावापी महो। और नमनास्माबादी ही क्योंकि उसे
भरनेपर
शिबपनी कापर विमास है। इसका सबूत उसकी
बनाएँ । मनमी वापी मार सिसिफसकी कमा कामूणे पति-
सूचक है। शिरपीम ऐसे सप बाते है सब मनुष्यको बारपनि
बाती है, विश्वास महपार पाते। पर मनुष्यही बाम्म भिगोरिपा
उसे निरस्तराम बातो राती है। सिसिपाबा समागमें हा
को समाम मिल जायेंगे जिनकी शिपयो पक्तिशालीकापनापौर
बिसौना बनकर एपमी है। समाज सायन-पार्टी अन्तर्राष्ट्रीम -
बाजार मत साप किसी म्पक्सि मा रेपको ते निकस बाने और
हम कुछ कर नहीं पाते । ममुप मेहतार रिमपीके लिए पर्प करते-करते
पर बावा उसकी बागार सुनकर मी कोई नहीं कर पाता ।
सिसिमकोरेक्वानिए इसलिए रिमा हिमाम्पायक पया समर्षक
बाप भी क्या? म्पब मम। बता पामते कि पर्व असे नाम
मौर कोहीबान-पाटीमें भारोपट्टानको मरोग का
पाना । बोटी तक पहुंचने के पान बट्टान नार बाती और मिति'
से फिर पर लेखमा पुस्करता है। बीपम एक बाहकी पट्टी मेयर
मापनी पलोप प्रेम बांधने गया तोपरतीकी पब की मुण्ण, समर
की कारोंमे ऐसा मानिहारिका लिही भूम पमा स्तम्और
पंने टेषकर पुष दो माल-बाटीद दिया। सापपरा
सिसिका महीनम्पिायके पक्ष वा परी परतीमे से
होना ही पाता है उनको गावी एक गम्बर दिवारको मन्म देतो
है कमि पूरनेकी तामाती है। बात है, हम बारीक
मन्तर समसामावा और मास्थामा और निपा
का मन्दर महामा। धोतामे माप ऐसे पाहित्यका मामानित करने
मपीबन बाय दो सालों पीय मामिलाके ममें मगरको
सामूहिक साथ समाप्त हुए गले मोपनी पिसि बोरना manti
विज्ञासा
-वरूपी हितधबा का हो। इस प्रसार समि
सबसे सिमेस पार्टी सम्पक शनी एक होमपाडी पारिइभस्म
होना हाबा पठा। मदिरोहबानो मी मृतानुगत मानी परे
अमर रहते है। इस तपाहरार पनि बटिया पतामोडी
पद पसी बनारसे दो पाती है जिस भावाब मिकी बोरोके हाथों
मी को पायको। पाबात वह अपने घर में ही नहीं है। समन
मैपनी मा ५८ एम म एक मेहमाt('पो मेसकों
से पस भी मरने इस पिरोहगी और उसके मार परिवार
मिए का पिता मन को। एमने सिसा झान्ध मोर
समानता है और बहोम भी पता बापारपर मेयोंक
समूहको बाबामही रखामा सजा । इमीलिए एक सम्प्रथम बात
पसावे और 'म यस बार पार्टी है। मोकि यह
नही मानवे का साहिल मा सौगारंप कोई बाप बस्तित्वमा
कि ( साहित्यमादि) र भरपर मी बपना मापन काम र
सकते। इसीलिए किसी भसका पुमकी नाप-बोट उसके मानव
मस्म (सारमा सौन्दर्य ) मायाय संवेदना पाभरपर भी
नही दी जाती यामारपस विरोष पाया पानी बाहर
प्रतिमेनकाबाम्बार महिला
इस प्रारी स्विभिरब साहित्यकारके मन में और इसके
और बहुवारिपि रा हो पाता है। पिछले रिमो बिन्दी र
भोतिक कार नि प्रकार दामोनाएँ पायो माये
इतका गत महापस उपम्यामोगा ही एक मारली ती
सम्मान मिनारस-बोप्टोन गायोलमा पुरन्त यसरी पाको मेरी
इसमे भी गरी मामेरर सायरनमायह हमा। इन समारोप
पमापी या प्रतिपदा मत करना नहीं था इस (वाम)
पानी पासपर रिजागा प्रपलवार को मोरसमा
तिसमेतु
से किमी और दोषमें बाना पाहिए पारदरहो बामोपको
पर्व मानी गुम हो । बरये मिला है साहित्य सबसे बो
मामाचा बोगस्पा किमही रमले। इनके भी कई प्रकार
है बरोरकी सत्माम्यहारो और मस्सरी। बरोरको समापये है
चिमचमे मन्धी रचना भी दी। सामाषिक रोषमता
सेरो संस्कारपि मौ पूर महीं की जा सकती। ति प्रभाकि किमी
बार मोपरिवार पर लिये पानेपर मी मी काबिमाननी
मिटती । सभामाहारीमानोपा मो नामुक होते बस्तार
चाहे यह भी हो पा परी सह-मरठवे है। इस प्रभारी
भागोषमा प्रार पोष्ठियमि हाम्रो माया पी। मत्वरी
बातोपानीमे-पी रवाने की परम मी करते। प्रिाम्परही
मातोष कोई बाहरते बामा मा पानी नही है। पामारे दोष
t, पानी हमी है। इस बार मालोषक रमेसी रमाएँt
पयवे निन्दो पेपर मालोपोने किया प्रतिवमी माशा
गामा तर रेले बिर या सम्मानमा दुई साहित्यिकामे
मडियाया नही पमी नमानिमित माहार बासोपा
बामा पारप करता है। सपनामर सिसी सी बाहोषमाकिरिषमै
सरो कुरा का पया है। एएमाम लिखना पूरा नाय
हरप लिए, परिकोई उपनामस मा पास एक पत्र मिकिप
पापा पासप्प पा पिर पपा है पारा पिरत मानस महिला
देख पाती. बारकोमोरोपमा से मेवामा
पर कर पिएपा मार बसम्पतिसे आरमारास होये
योजिममा गित माप cिt बात पारAR
एपमुष उसकी जानीरसे भाप स्वस्थ होवे। दोपस बारमारने
की पावरसे सो विमानही हो ! बिरि पनाम
प्रितमंद
पाय करने प्रगल करते है किसी एकति परोपी
बम सापक साल हमारी सापारिक दोस्ती कायम हो जाती है।
बयावृत्ति प्रेमी साहित्यकार मदु मौके-बेमौके प्रत्येक सम्बनी विकार
विमई वाकिमी कप सेमिनारमादि अनेमात अभिप्रायी मुकम्मा
पहार प्रस्तुत करते रहते है। कभी-कभी पा (सरासमते).
पोय पलमे मसो लिए कालाप मापारमें है।
एक मानीगार यो नियी कहानीकारीको हटा नार करके मनसूबेसे
पो पैतरेबाजी करता। एक्स मियोपर करेगा "माई तुमने तो दो
पार मास्टरपीस पी सियो पौरपर दो तुमारे 1 बार
भरोस्पो सरकी बातोंकीरा रोडावर का
कदवा भी तुम्हारी तो मुलपा, मोरवी पर न बाहको वा
सन
दए हानि।"
मेरी समझ बह सारी पारी में और इस भयंकर
विपर्यास कारण है। पानोकी स्वाइपर रखी हुई माराम गिना
बार-बग है अवमा सब बही। क्यों । पानीमारी साह,
नहर पहने है पानी बार। परोपर पानी नहीं हवा पानीकार
होती है। सबइपर शामिक लिए रास्ता पर क्षेत्र सीमित है,
माय बरसाती इसीलिए सब परह पतिरोपन
बोरसे ससी बोरगर समय रास्ता गिरने या
भगानुमत बाल पम्बि बाप हो भरोष
नहीं है पविरोषन मतिरोम । इस धपणे रिपतिय पानीम
मर्यादा रिमीर हम पीवर ती एम्मा गर्माग
समामिला होनी चाहिए।
मा नये या सव बाब पाप कम पोरी
पोप यह पाप मुनारे बसे है। परापोर महीलिए,
बस मिपा पीक में बोर हब'। तुम मा बाप नहीं।
रिहानामा
-
मादा करने का प्रपल जाते हैं। किसी एक व्यक्तिम भितिरोपी
सबमेन साप हमारी स्मारिक रोस्ती प्राममो पाती है।
मसूणधिोपी साहित्यमा बन्दु मोहे-मीले प्रत्येक सदमम विचार
विमा पासोमन्य सेमिनार मारिमें बपने पासबमिमाहिम मुहम्मा
बझार प्रस्तुत करते है। मीनभी बहु (सारे सम
पसीन पल पल लिए मापार भावे ।।
एक शोधार दो मिनी मानीकारको सट मष्टाने ममसूडेसे
को पैतरवारीपरता है। एक मिकमेपर पहेगा 'मा तुमने टोरो-
पार 'मास्टरपीस पार्षे मिली भी है पर दो मा दोस्त और
पदोस्त मिले हो म्सरको बायोडावों पोइरहेमा 'सग
कहतामा पुम्हारोवो कुण पाए और ईवी पर बम साहयको वा
राहाता"
मेरी समा मह सारी बड़ी में और हम इस बकर
विपर्यासके बारमहा है। पामोडी पवापर टाटी हुई गमि विवना
शोर-पराग रसमा सही। क्योपोंकि पाना गरी कार,
माहरे पर है पाली मा में। हारका पानी नहीं होना पानी में लहरें
होती है। सहपर रवाने सिए यता बघ सोमat
मार्य बायपात्र-पुती मोर माह पहिरोपन्तु
यो एवारे उसकी बोर गमव उनका रास्ता भित्र पूरा मजा
बहरा बनुमा मत समय है। धर्म को मरण
महोपतिरोपन पतिरोग रस तपी रिपतिय पायी
मारा सागर । मोरम मौतर रखी राजकी मांग
समाममिता होनी चाहिए।
भाप नायब हो पर मार मार कौन बसेको
पापसे यह परेप माने पसे । दूपरा पोग बी सम्मि
बग्नु सनि घोपा A और 'हम है। तुम बाबा नहीं।
मित्तम
में क्या है
और ससे एक रिन ससक निमने पूम “बाप बार कमी
मामा परिण नही मिा बाहिर मास कम है
'म क्या और गमारा मकर मोठया से ही
कामस ट पनी हो।
मित्र पर एमा हाप पर बोला 'क्या बात है. पह
परेशानीपी
रानिक की बार हतारम जामठा पबया खबर बोस
'बी पवार वो भी अपने पापा मपर भार वा मुझे कोई
एत्तर मित्रा।
मैं मी पर दो रस वापर इसी पास होने का अभिनय
कराई तो मरनेको पर परेशान कर, पर मचाना
कि मुकारा मिलने नहीं। क्योकि में नियम
और मेरे लिए इस उपाय बभिनय करना ई सम्पर।
मोहबजाना ना । अपने लिए मी को समबने होपरि
हिए जिनकी बोरसे मानधनमा म सानो हार दिया गया
है। जिनके बारे मेने कमी पाये हा उप-कप, पहा
भान्मार पूरी बातिर हमारी बोरसे बार बाबा योगी
मित सो मापने इमाम बो मनमें पाया या रिश
बरबर बोडेर पार लामाको स्वपमे र पौमी
पर मरी बाग पिकरा पनि हिमर-बरी मामा समोर
सरापीका एक बार बारेस्ट्रा में सपनुष पाहा
मितत्मसे
14.
परतु मानता और इसकी दोपर पाकी भूष और प्यासको राम
परका परेप देता है। मे मीभाना महो, प्रेम और परीरको
भूय एमरेले विरोधी आत नहीं। ममो कम हो तो सिम मामग
रिझाती रिपर एकविनका प्रेम-रन पर मापक सुना था
महान को मानने से कम बादि कि रिपोर्ट-से सानिक
शिखरमम प्रेम नामक किसी पमाडौ पर्चा भी नहीं है बाकि पोरोलिक
मायास्मिर बादमप प्रेम पर्मि सस मामूमी " किया
परा है। अवर सविणी काठी कोर पर मालिप्रेम और ऐनिक
मापार पोप सही मान हाना बीमह समाना परावर
जती ऐनिर प्रेम किसी भी प्रभार नि स्वामी वीर
पकमी भूख्यामही चाहिए किसी ऐमिक मेमने पनुपकोरबतर कसम्म
मोर रेवम साइविहार्यो लिए प्रति किमाना प्रेम समि
एकठा है, पोस-बी माममता मोर मनुष्यवा सो
arti"तु मी इसिसि पोरको सममना-साना र पास
बोरसे पीपल पाम सही कप रेला सिप। या
प्रेम विसत मुनम मोर पारा पानी बार पूप। किन्तु न्या
हो मनुमपानके लिए हर सावा है धमे पतामह प्रम
मही पानीको बवापर माती एक प्रा से इस सममें जमा
मनवा और निमाविको नही पूषा स्वार्म और इवानियत के तत्व रिवायो
पहो। और नकों पर में प्रेमो ऐसे रगड़ो परमाडौंको
रपटाप रेसवार दोपुर पायम हो बाता। मकोया
नहीं को निराशा में प्रमो माड़ो मेडल पारकर समापूर
परला पाहत पर प्रमो दुनियामा इबार
पुपको माया हो रही पाहार भी पानी पर पाकि
मोर मी पम पुनिया माम्मत सिमा पोंकि मेनो प्रेमको
पसमा मारी और पारीरिक मारणा कर भर नही मार
सिस सेन
मी मारमाको निरमोद दी। बता पसे मार मिकी इस
रितिक मूत्रम पमपम बह से प्यार करके भी अपनापी षष्ठी
माशापरोपी चम्पाकी पदमशीपमै सिई बिसुलेको हो बपना
कम्प माल मो सासह बायो।
'चिर माप और मन मेशों में कई पराइमा बाप एकाग्रीफ्नको
पौहान से असम कहो।।
'मोर धर्म मी परेगुन भारती इरान सी है।
बोपनका कभी जिमपाटनहीं लिया। मपरको परियो
वयोमा वस्तु मानता पर यह गई लामाविको बोमन बीप
मराहो मी में इस परपा तापा तु प्रपूस
बहा कि मैं पाम प्रेमी स्यों हूँ समिए कि परिणाम एमपन
मेमाषI am बिमरा वीरवी बापी प्रदीप्त। मुझे
क्सेना नही मूवी माविम की नहीं। किन्तु यहाँ एपोपत नारी
रेम्प या पावाप्रपाबत र सिगरेट पुगे बघ भावान
नाका पाटन होगा। मुझे मेरा बन
देवा (किर एमने पात्र और परम सन को नीवा है बनो
एकाको परिवीको मनमाको धुनही है।
मनों पूरा हो पपी। और उस मौर्य एक पर किए और ग्रामीरोग
पररा पारितु सरीजमहेम रस पणे निर्मपते पौर
बोम्पत्ति बामे माया रहम मार गुपमासमे मिता-वामा
पितु परीर पर एरमा-पतला हो मरा और माफ गोडी बाये
बायो को भिमपर मोटे पीपेकी एम मोदी। पवार
परेको माये माये और बाते रमापर कराये पुस्कररिये 4
तो बनाम भापको सोया-वागमन समनवा पा। मगरबापतोपरा
निका यह सरम माप निगरानी पियामे
राम और साहित्यकारभार एक नगन सि ममी.
सिरममा मन
को बाप कम्युनिस्ट है यही " मास्टर मुखमत बोम परम पो।
और मुझे एक कमरे लिए परेच उम्होंने बस सीमा र मौरी
पोराचा मेरा धारा परपप्रप हो मा हो। म नरम
ही पीकि समोठक र स्यिा पर कोई निस्तार नहीं।
* पोषा मा म्युनिष्ट
'बह ऐरेबियाप अपनी पहानियो गरीबों मारी।
ग्मीकारोनिका ने मिमी और मर्म Art शेयों-
की पमड़ी रखो। यो पिरोए करने है पुरावे पोंको मिन्ध
कर। पाकिस्मती सिस्मै गमवे
'बस बस हम मोदीभिए । मापकी सिस्टम मपी ही पुणे
सम माइलिए मार मा बाम बह बार बार
महीम गरे सोप अपनी बुद्धि पार नीति किला
भापारपर पामे गए विषय है। मनुषवाको इमाम
बोटकर बना दो। पावर के मूल बाते है कि साहिस्पिक
सत्य और राजनीतिक सत्व मानव वापसे होनही भागमै रानीति
की सबसे बड़ी रिपनी है कि साहिर पनी मरिमा पनि
मोर मीन पाना बीवरसे मनुष्यको बोर बस्तुको वा पुर
राको पामे कामोर शिाम उपधार र पर
बब यही पामे सभी सानिया मापार किये जाते है, वो और
मात्र है। किमी भी राजनीतिक संस्थाका विरोधी नहीबार
में पनिर नहीं माना: बिना परमीको सीम
नहीं सकता। मैमनुम्बाको उमको एमस्याला अपने समाधान
है। उदाहुए अमित समापीको को पसे बोला पाया
हूँ।म बिधार्म भरते हुए मुझे कोई मनिस कमिमी सरोदी
सरममा बाहे राम पर अप बीपी पीप साप
तिसामने मनुपरेपी कोरिपाई महो। मनुष्यवाई का कोई
मिनमा
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जाल । बापको सुनकर बयामा होमा हिमाम मोतिक वा मास्तिर पाउनका योंमें टेमैया पर मोम किराये। मिहोपको पुराना प्रकार ससे खानेकी कोपिस करना पमपम है। बार बार तो हम बानिक बनने मोह बमारम पर, परसोक वापि पर्योस परले बमो मो मारमा मूक मोहोचा"मोर, प्रारसे रहर परप्रामामा पर्दा ऐरोझासत परापति पर मम मारिका नाम हमें पुरानी परी होने समा है। मिस इस पार्टीको समाडी पारिप बोरिए, हम भाप और गते पौरमा-या मव सिदि। मन्या गोषन गावापा है। सगरमौर वनकी एक्विमा सात बारसकी कानि मित शाम निशान पाप-बमारकी गारंगी भनेक दिगन्तबाप बनात पतिर्योपी करना चाहिमपरम परम धर्म है। पONTS वही शानिमाबुनिस्वार है। बानिया ए पाया नाम लिना ने मरते नहीं मानी मानिकता निरन्तर साल माम- लाई प्रदेश सररिसेपमेथी-सही प्रममाने पहिलो गी समयका रामरिक पसे माधुनिया आप वा अपमा हत्यामाया से प्रभावित होकर माइनिक मनेरस पान tीलिए में विहारको मामा स्तम्भ | सीकी ऐपनी दर पीरो नमानेन प्रल सानप रागावास में ही का परम रिममित बद मानेको मापि पारपाच पूछिए तो सिमित मागको भारतीय रामनी और को होगस भयको बामा हार र पोनपर मिएम बासि सिविल सर्मित को ऐसे ही गोंकी मारता माप भारतीय वनसंपको और एट्रीयनारे नाममे राष्ट्रीय स्मारी मारमा पाठो बोप पानेको मन्त्राष्ट्रिीयवादा।। मिनोग सेतु