Acharya Shri Vinaychandra Gyan Bhandar, Jaipur
Shri Prakaran Sangrah Bhag Beejo Gujarati
Front matter
प्रस्तावना मीमत्पावजिन नरवा, स्मृत्वा ए गुरुरेवताम् । मकरणानि सराम, मन्थोऽय सिरयते भुदा॥ स्वगस्य परित माराम श्री चपचंमी स्वामीए मारण संग्रहना यीमा भागना सेस्सनफापनो प्रारम करना उपर भापमा लोडस मंगताधरण फरेछ हत, परन्तु एमा मैगमापरणपरे गरमेसा अपने प्रकाशमा मापलो वेभो श्री भोई न पक्ष्या आय वेमना मगर अपने प्रकार की नो साम लेगाछनारा समुनुमोनो समीपे देने रजरी, स्वर्गरम परित महारानभीर्नु स्मरण करमामु मकानकने मारे मरशिष्ट र, ३ फालनी गवि गान छ. उचराप्मपन बना २८ मा मध्यपनमा मोक्षना चार अंग कोला । (१) झान, (.) दर्जन, (1) चारिम मने (५) ए मा सरे पोसमार्गना हेतुनोमा टनरकालिक सूममा " पदम ना तो दया 'ए मोरे मानने मपम पंक्तियां मनामा मान्य से, मने से ययाय न हानाठे मरेप सेप उपादेय पदार्थोनी समम मनुप्पयों भागी धके थे, मने ए रोवे के पारिशील पनी जीपन साधाय फरे में जानने मारले पधु माहात्म्य के इम्पएमपर्यस्ना मानपरे करीने मनुष्य एसोक्मां तया परलोकमा पोगानी परिस्थितिमु भान भाप्त रे के ग्पांमुभी मन वैराग्यपी गिम पर्नु नपो स्पासपी मोसनी भेणीपर मास्मा पो भयो नयो भने ग्याँसुपी उपाणपपर्नु मान मनुष्यने प्राप्त यतुं नया स्पामुपी रैराग्पनी स्फुरणा पग पनी नगी ट्रम्प गुणपर्यानो विस्तार नैन सिवान्दो मोग प्रमाणपा मापनामा आफ्नो है, परन्तु पपा सिदामा, सन्या पेना न्हा जूदा सम्रो मसिद यया के एसी न रीते मा एक मधु समा पम प्रपिद करवामा माछ स्वपरित माराममो उपमहमी साथीए मैयार करेसा भने स्त्र पूज्य महाराम पोसापानी स्वामोर सपारेको मारप मप्रानो पोको पाग पापों अगाउ प्रसिद्ध क्यो हलो मने स्पारपणे सुपारारपारा साये सनी पाप मारीचमो मसिदप थापा समझोनी सोकप्रियता प सपरपी पास पसे आये मा सरस पण मारामभीए ससारी सुपारीने पार करो राखेसो रतो; परन्तु वेमना असानी से मसाट वाम रको को.१९७९ ना पातुर्मासर्मा परित महारामधी गुसापानी वायी, मुनि श्री गोरमी स्वामी, परित भो रत्नपदमी स्वामी स्यादि सागोनो दर्शनायें ममदाबाद मामे मां मने मा सैनासनि भो खुशालपरभी पासे मोसमा आगा प्रसिद्ध करीने मुसलमोने वेनो लाम भापमानो उस्का पने पई आगी, परन्तु ए प्रपनी इस्वल छापमानामा मोकसी आपका पेटसौ शुद्ध भने सगामो नहोतो, पटसे वैनी नगी नफस परापी देने भारी मापरा में महाराज श्री गुरुपद्रमो स्वामी ने पिनवि करी माराममोए पोतानी नादुरस्त पीपा पा सघारी मापवानी अने पटनो मुको पासी आपानी पारी में, वे माथीमो मारा पर परम पार पपो के पनी एटफी रूपाने परिमामे नाले माप वारसा सारा सम्पमा पार पायो छे. माम संपाना प्रपम भाग करवां मा मागमा सेखनशैली पारे समम्प रासी . बेषसते हे मथप प्रसिद 763 यो त पसत करता मस्दारे मापा-पाकरगया गुजराती पापा मामस मयी से मने नूनी सनां लखामो आधुनिक वापसोने पेटसीक पार दुर्गम पम सागे है. आ सग्रामा पण नैन परिमापा सो पापरी , परन्तु सपरपना मादिमा मने मपवासामा पनी वेटसी पपारे स्पष्टता करी के मने ए कार्यनो धम पं समिराम भी सावर्षमी सामीए की पुस्तकने सारा कागमा अने मोटा मारमा छापमानो हेतु वेना पाचनमा सरममा पाय ए प्रकारनो के. पां मानना उपकरणो वो प्रेप पने वेम विनामपे पाधाय नेमा म साम रोलो छे, परन्तु गिनामूल्ये पाती तुमो रेलीपार मनपिकारीना राय पण माप छ भने वेपी शाननी भाशावना याय मा कारणपी मा सानु मूस्प राम सरं परन्तु वे पटनर करता पम भोग राज्यु छे अने ते इम्प ज्ञानप्रषारमा म पापरवामां पशे मियानुभो नो यपोपित साम से सो मारा मा.प्रपासने , सफर पएला मानीश परित महारान भी उपद्रमी स्वामीना पदोमा म पुरस्तुति करीने मा प्रस्तावना पूरी करुं पास ॥ वैये सद्गुरूवर्यमेनमधुना लापाजिसस मुदा । सबिधार्णवमार्यशीलसरसं सोजन्यरत्नाकरम् ।। यत्पादानतोजगप्पलमहो जातोऽस्मि वियां पुषो। ततुं शक्तिवरोपमुत्तमपुरमंद्रामिषाना मुनिः॥ भैरोंदान जेठमल the म्य मुनि महाराज श्री उत्तमचद्रजी स्वामीनो जीवनपरिचय BHEEMBER ॥ शाईल । उत्सर्ट पियर्स निकास विपर शने यदीय स्पर्ट। तस्वव्याप्तपथो विपापरहिला रूपातो पदीयागमः ॥ मन्याऽयम्पमनिगरिष्ठपहिया म्याप्ताहि सोकरये। चन्द्रौम्म्यश्यररिष्ठश्वासनपतिनसपास मदका ५ स. मुनि महाराज श्री उत्तमचंद्रमी लामोए 'मकरण संग्रा' ना प्रथम मागमा पे स्तुविनो शोक रपीने अवापिकामों पोताना नामनो रचना करी रसी, ते अप्लोररे ममस्तुति करीने वैमनो संक्षिप्त मोचन परिपम अन पाहूं . कुईवपरिचय. श्री उमापदमीना पिता भी मगनीसन स्यनाथ न्याते मावसार मुरतमा सगरामरामो मुठोपाला पासेना पोमानमा रोषा श्री रपमचंद्रमीनो मन्म विक्रम संवत् १९१० पो पपो हतो वेममी मातार्नु नाम दिनानीपाई हई. पारपारस्यामां गुजरातो सातपोरण मने अंग्रेजी पांच धोरणनो मम्पास सेमणे कर्यो हो- मना पिता रंगारानो पो - परमाला, परन्तु भी उगमचंद्रभी तो विधाभ्यासमायो निश्च याने मोनागीरीनी नोकरीमा नौगगया हसा ईमे- नो फज समार अने हुदपनी सरसवा वेमने साघुसमागममां मेरती भने वेपी साघुभोनो परिपैय वैमने इमेशों पपाररान म गमतृ तेमने बहनोहती मनां नाम माणेकमाई वपा नकोरपाई दवा येउ मेन वेपना सम पया पार गुजरी गयो ता तेमनी एक मोटा भाइ फानीदास तो केवन नानी पपमा गुजरी गया ता मनापितामी संपन् १९२३ मा गुमरी गया, जे रस्ते भी पचमपदमीनी रय मात्र १३ पर्पनी लो साधुत्व साधुसमागमनी विशेषतापी श्री उत्तमचंदनीना अजुस्समारमा पराम्पों पीन मेगा दो, ते पीनना महारो। सरत् १९२८ मा फूटपा से पलते पेपना मानुश्री उद एवो तयापि पर्मपरायण अने पुषना फल्याणनी गार्ग गायो विन न पाता दीला कराने मात्रा मापी पी पूज्य श्री सापानी सामी पासे र सपना पैम मासनी माएपी ने मंगलबार थी उत्तमचंदमीए मुरनमा पोवानी फोईना दिपरा वसीद माणेकपैदने घेरपी दीका प्राण करो ए दोसामहोत्सप परस्ते सुरतमा सारो उत्साह म्याप्यो हतो भने मुंबई, कठोर बगेरे गामना संघो मुरतमा आम्या या तस्सामेर सारा नममरारो पण यया ला श्री पसमपनीनी दीक्षा तिपि-क्षेत्र सुद ८-नी पाली पाळरानो उरास ते पसात म मारसारमातिमा क्यो लो से अस्पारसपी पगय के एषु मामरामा आग्य के दीक्षा पीनु पोल न पातुर्मास श्री सपमचंद्रमी सामीप पोताना एमहारान भी छापानी सामीनी सापे मुरत पासना फठोर गाममा र्य + अभ्यास क्षा प्राण फर्या पछी मो चमचंद्रमी स्वामीर प्रमान, तेमन सस्कम भापाना अभ्यासको मारम फों भ्यापरण, पाय, मर्मपार पाय आदिनो मनो मम्पास सारो हो भने तेपी मा पारंगत पया पणी सस्ता भापार्या श्लोको सया गप रिसरणा समपापां व बहु उत्साह दाखवता मा प्रकारचें वमनुं लेखन केरल मकीर्ण हनु योर ग्रमी सया चद् मापानु पान पग तयणे माप्त फ्यु इसे पेटसाफ सूमो प्रेममे मुखपाठ कयौं हां वेमनी उच्चर अपस्पामा रसाफ नादीक्षित साघुभो स्प्रज्ञान तेमनी पासेपी पण प्राण फरसा अनवर मतमलावरोनो अम्पास पण तेमणे सारो पर्यो पना एम तेमना पेटलाफ प्रकीर्ण लेखलो उपरयी बाजे मालूम परे के पूग्य श्री श्रीसासनी महाराजे यारे पारीयारमा पहेसी न बार विहार फर्यों वो, त्यारे भी उत्तमचद्रनी महाराम मना परिचयमा आम्पा मा तेमना स्त्रज्ञानना सपमा पूज्यश्री श्रीलालमी महारान नणारखा के सेमर्नु सूत्रमान उचम प्रकाग्नु रतु भने फेसी पापना स्म सबपी सुसामा तेमने भी उत्तमचंद्रमी माहारान पासेपी मेनबीने सतोप पयो एला मना ए शाननी पूश्यमी भीलासजी महाराम अनेक मसम प्रभेसा पण करता लेखनप्रवृत्ति खेखनमपि तेपने भरपर एपिफर जगातो लो उयार ग्यारे समय मळे पारे स्पार ते कोईफ ने कारक सत्वानु काम परवा तेमना मसिद यपसा प्रेयोमा मफरण संग्राना पे रिमागो सिराय पोर्छ काई नमी परन्तु देमना ससाणोनो भासिद संग्रह मोटो डे, फेरसाफ नाना मोग प्रपो धेगा के ज्योतिप करंडक पान्नानुं गुमराती VIITE ENTERSTATEMES भापाठर, तेरापंपी पर्मा (समर झोफोर्मा ), चार दोनों एमराती भापावर, इस्पादि वेपमे पूरी मसेसों में वे उपरांत स्प्रोमांपो करयामा भावेसा टलांक दोहन, शंकासमाधानो, प्रकोणे उतारा, नया रचेसा फेरसार प्रकी संस्कृत सोको इत्यादि सपा सम्पपस्थित स्थितिमा पोमो, मा संग्राने तपासोने, मने विपपगार वर्गमा परोने जा म्यवस्थित रसामो मावे सो सेमापी पेटमार मोटा अंपो बने नमो समय के सेतनमाचिना ही रस्माइन मीपे तेपणे पे का समय से वेमार्नु पर्मुसर्व कागनना नाना- मोटा गम तेयो कामो उपर सम्सेरल के. परसपानो नसा स्करे वे बसते पोवानी निन्टमा नानो कागळनो उमा रोप, निरा एक बालए गपेलं अने पीमा बाजुए काम को निपीत होय भयवावो पाना माकारना कोई सारी मावना कागजोना कारा पाला होय तो पेरी पळपो तेको कागल सईने ससा मेसी मई एरा सेमनी नियम हलो मा म कारणयी वेपना प्रकीर्ण सलोनो सग्रा कोई निषित मकारनो पपसमुदाय रोय एवं मणाप के. मा संप्रदमांनी सौपी पपारे उपयोगी भाम (टी काडीने प्रसिद् करवामां भावे वो पपा समवमोने साम या पामे एपो समय के. पातुर्मासो महाराम भी उत्पनी सामीए से १९२८ मा टीला प्राण करीने वे पर पहोरमा पूरप श्री सापामी स्वामीनो साये म पातुर्मास यं नई सं १९२९र्नु घातुर्मास तेमणे पोवाना एमयंनी साये लीवरीमा स्यं स्यार- परी ९१० मा मासी, १११ या पोराली, १९१२ मा ममदापार, १९१३ मो शम (करण), १९१४ पाया - (छ), १९३५ मा अमदावाद, १९३६ मा सरन, १९३७ मां बेनपुर, १९३८मा सीपो, १९३९ मां नामनगर, १९४० मा पकिनेर, १०४१ नया ४२ मा सुरन, १९४३ पो अमदावाद, १९४४ मा माग्री (क), १९९५ मामा, १९४३ मा रापर (कम मागह),१९४७ पो सुग्म,१९४८ मा बेनपुर,१९४९ मो अनार (55),१९५० पोमा, ९५१ मा सबाग शहर, १९५२ मा सोपगे, १९५१ मां मोग्बी, १९५४ मा सायसा, १९५५ मो अंगार (), १९५३ या मांरपी (प्ण, १९५७ मा मोरगी, १९५८ मां गुशासा (क), १९५९ मा पापाप फेम्प, ५३० मा सुरव, १९९१ मो मुगई, १९९२ मा लीपरो, १९६१ मा ममदावाद, १९९४ मा सीपदो, १९५५ मा वाराण केम्प, १९३६ मा वाम शोर, १९३७ मा लीवरी, १९६८ मो घेतपुर, १९६९ मा मरिसी (फ), १.७० मा गुदाला (कर), १९७१ मा रापर (कच्च-वागर), १९७२ मा मोरया, १९७३ यो सुरत, १९७४ मा नापनगर भने उल्ले १९७ नी सासनु चातुर्मास अमदारादमा पर्यु संपत् १०७॥ चातुर्मास फरता मापनगर मना ला, स्पा रस्सामा रामकोट मुकामे तमन सकार्नु ददें लाए परपु व पण तेनी महु मसर होती बेपी उपसार फग्लो उपस्थी माराम जणायो इनो तेपी रामकोटयो विहार करी नामनगर पोपार्टी पॉप्या पोमास माी रोते पसार ययु मोके दर्दनी भंदरखाने असा तो वेयो अशक्ति अपती जमो वी पण पोते उत्साहो हिम्मतमान् भने धैर्यरमाळा ला यो शारीरिक मशक्ति नणावा न देता पोमासे नये मामनगरयो विहार करो सीबसी पहाच्या लोंबडीना भावकोए परीरनी अभक्ति मागी लीपरी रोकाया पणो आग्रह फों पण पोताना मन्मवे-नरात तरफ एक पखन पोपा करी बापानी वेमने उमेद ली देयी सुरत RAMETERMERECER ममदानादनु पोमा उसम्म सीबडोपी विहार करो ममदाबाद मारा रस्सामा फरी के दर्दनो हुमसो यपो भने मामगना शिरमा हरकत मापरा मारी दोपण मनोपळने परिणामे पोरसादरामपी पॉप्या त्या पारो बसन रोगई सारगारपूरक उपचार करता र तीक ययु एटसे मपदापाद पोपा महपानी मसर मगन उपर तरी रोपर बोराममाई सपा फेशवलालमाई नगरे सरी सागणीपी चार फरता ता पण एकंदर रीवे दर्द पपा मारधु वेपना एक सिप्प माईचंद्रमा सनि बने पोमा प्रण साघुमो वेपनो सारगार परसामा सारी मोनत साधा. वेमना एक भिप्य सुशासनवमी मनि फोर पोमास इसा वेपने मौदगो पाना सरर मा मगराम भी शिपमी स्वामीनी सापे सांगा मात्रा विहार करो योग दिवसमा ठोरयो यमदाराद मारी पहाच्या भने योग दिवस एम्सेरानो साम सीघो फेटर एक पिणे उपरपी प भी उचमछमी महारानने जणायु क एप था मादगी मटपानी नयी एल पोवे माहार पाणी कमी संपारानो विचार नणाम्यो मेरा सबर लोगो गेरे सपळे पोचतां पेटसाक मामिक मागको ठोर सुरत सोरटी पगेरे स्पळेपी आपी पहोंच्या ता भने फटसाफ मनी सारपार माटे सास रोकाया हवा मेवट मासोपी परिफपी प्रत्यारो फरी मोभो मासो पद " ने रपिरारे परोपमा मे पागवे ४८ पर्प संपम पागे एफदर ६६ पपर्मु मायुप्प मोगो कामपर्मने पाम्या गुणमीमांसा महाराम भी पचमचंद्रमी भरपत दयाल, सरख दिलना मने मानमारयी नम्र पनी गएमा दपना पापभोर साधुर्यता मनामीपनना परिचयोने कोई ने कोइ ममगे देमना ए गणोना यापोभाप अनुमर ययापिना रहेनानी TREEMATE2013 ।
HABAR सोमणे समदापनां पा साधु-साधी मनायो मोटा रोय के नाना तयापि पूर्ण मानचियो बेमने जोना तेमना समागममा सी अभ्यास करनामु पणा साघुमोने गम कारनके वेपनी विसणानिमा पारागार भरेला प्रेम मासूम पायो मन्य समदापना सापुओ पण वेमनी साये रहोने मानमाप्ति फरसाने हमेशा उत्सुक हेना सेमने एकंदरे । पिप्या पया हता तेमांना सेवधी क्या तागचटनी सपदापनो मर्यादामा सोने पमबामा शिथिल मालूम परपा एना महारामधीए वेमने फेटसीक पार शिलापणो आपी पार्या मा, परन्तु ए सरल दिलना गुरु पयनी परमा नहि करनार चिप्पोने ईमटे गुरुपये पोते म साघुषेश चतरापीने रजा मापी दीधी मी प्रोना शिप्प खुशालचंद्रनीस विधमान थे, पोया शिष्य भाईबदनीए ननिरास स्वीकार्यों के तेभोयो एकाफोपगे परतोनी कदराभोमा नसे डे अने शातियुक्त स्थानमा यथेच्छ पर्यन्न फरी कारनिर्गमन करे छ शास्त्रीय ज्ञान पनि भी उचमचदनी मारामनु शास्त्रीय ज्ञान अत्युचम र मैन भागमोनो भाग मा वेमना मगजमा श्रृंखला पद गोठमाई रमो मो, वे कारण एक एक एक पागम फट लीए यार तेमना पाचवामा आपतो ते उघमी परमा परालाक नमरा येस नो वेमने गमतु नामे कोई ना पनारशेयसो तेने पधारना अने ते नहोय तो पोते पापा करना टोकाभो पापरानो तेमने पहु सोलहतो ते परिता विभारवामने उपयोगी भाग लखी सेना सिंबटो संपदापमा तेमना समपमा मनो ग्यारम्पानौलो शास्रीय मानयो भूपिता यएस पाने सीये पर पखणातीती पणो साधुसानोमो पण पेपनु प्यास्पान सामन्याने उत्सुक रहेमाला पात्रोक्त भागा संगीतुं गणिहान पण तेपनामा उच्च BAS TELL मारलु तु + धीरस्नानी महाराम मने देमना शिप्प खुनासपदमी मुनिने गंगोपाना भांगा तेममे म शीसम्पा ला के वे पोहरा सम्मतमा पुस्तक म्प पार पायामां मावनार के. मर्माशक्ति माग सोपी पर्मा करवापी तभाषी घणा निपुण वा वेमां पण खुपी ए इसी क सामा माणस गमे मेरा मारा मरग पोईट उपर नाप सोपण पोते वपी मना नहि फिन्तु मगनने प्रांत राखी शांतियी सपनावता नेपनी पर्मा मरपापी मरेमो नही पण साफर पेरी मधुर जगाती वी घणी पार वेमनी पर्चा पानगाष्ठीरूप ज पती ती मने भानामोने तेमायो मर ज्ञानानद मळवा इनो सरन् १९.५ नी मालमा वेमाथी फा मामा पोरानता ला स्पारे कपए कोयना सीप प्रोफेसर रसत्री देवराम साये मेमने मूर्ति संबंधी पर्चा यह ती दररोन प्रणपो पार कसाफ मासीय पक्कि भने दाखमा सापे सपास नवाप पवां प्रण दिपस सुपी मधुर चर्या । तपने पसापोली सेपो प्रो रखनी देवरानमाईने पणो संतोष ययो एसो अने वेमना माननी तारीफ करी इती संपत् १९३ सालमा वेभोभी रापर पोमाम रया इसा, स्पारे रापरना रहोत्र मोटा जेषंद करमचंद के जे पर देरा पना मुप्त धारक वा अने जेमणे मैन मुमोना गहु सारो परिचय फरेस तो वेनी साये तेरापंथीनी माम्पना सरपी पर्चा पाली दररोज राफे परे कत्ताक विचारणीय मुद्दा उपर चर्चा पासो पार महिना नोकळी । गपा. र पोमासानी मास्तरे पनि परिणामे दमाई समग्या मने देरापंथीनी मान्यता विपरीत के एम .
अपुरकी देरार्पपीनी भदा तनी मषे शुद भया धारण करो, मा प्रसंगना परिचयपी पंनिभीए नेरापीनो पर्षा संबंधी एक नामुं सरखं पुस्तक संस्कृत श्लोक स्पे वैयार करेस के. , स्मारका महाराम भी उचमपंदनी स्वामीनी पप मषसान समये १६ पनी हती मनो निर्वाग महोत्सव अमदावा दना छ कोरी ठया माठ कोटी समवायना सर्व भापकसमापे संपर रीवे उनम्पो तो वेमनी पाछळ रु ५००० पेटसा पांदो प मेठ समदायोना धानको सरफपी या पाम्यो इतो अने ए रकमना न्याममापी ' सापशाळा स्थापयानो वया ने ममा 'भाविकाशाना स्थापनानी ठराप थयो हतो सैषत १९८० मा 4 मनि महाराज भी एसापचंमी स्वामी, श्री पोरनी स्वामी, प स भो रत्नपानी खामो, भी रुपयद्रमी नया स महारानथी रखमरंभी सामोना विनीत पिप भी खुशारुपनमो स्वामी चातुर्मास भमदावादमा यता आ धारिकाधालानो पारंम फरमामा माष्पो से बने पपा समायोनी श्राविकामो वेनो लाम सा शके के धार्मिक शिपण अने वे हेतुपुरसु सेसन नाचन- शन आपरानो प्राप ए श्राविकाशागमा करणार्मा आष्पो पुनीलाल वर्धमान शाह १ पनीम मिया पृष्ठ २ पोनीना पोल ३गसना पोस सामोपासना पोस जोपना १४ मेदनी पर्चा जीरना ५६१ मेदनी पर्या ७ मारक १ सोयाना बोस अनुक्रमणिका १२ पांच इंद्रिय ११ पुद्गल परावर्धन ९९-१०० ९-१२ १५ पाच धान १००-११२ १२-१४ १५ सपदेशी भरदेशी २०-१९ १६ परमापरम २१५-१२३ १९-२६ २७ घरमापरम १२१-१२९ २६-७० २८ आहारक मनाहारक , पवितक ११३-११९ २० समयसरणना पोस "०-१४५ ५८-५९ २१ सविना मोड २२ मोटी फर्मपनि १५-१६२ २३ १४ पोसनो मसाल १५२-२६३ २४ २८ पोरूनो भरपपरस ८३-८५ २५ २० दरकना मीयोनो मसब० १५५ ८५-८८ २६ १५ योगना ३० पोसनो अल्पप० २६५-१६ ८९-९२ २७ १५ मीरना मेदनो मस्सर विरद्वार ३ सिमणा दार । भग पोसनो मत्सबल ५ पुसकोसीना पोसा ६ पाप देना पोल ८ पार पान देवरंप सरप १० संख्याठा मसंस्पाता ११ पांच पर ११४ पत्रांक परोक पकि २ १२ उत्सा उत्साह ८ 4 ५ पाते २ ८-९ बौव समुदाय मछ- पोवानी मात्र पापी कागती हिप पस्तुनाव बाण यवाची पे पाम ते २९-२० अौष समुदाय पौवामा भनीत्र रपावि मळबवावी समुदाप रवादि नौपचाप यबाबी १८ गाव पंचेंद्रि पाय तिर्वच पनी योनीमा दर्शन पंचेंद्रियनी यो २३+पामे नौमा वन २३ खमे १५ लाख मनुम्पनी २२ पाक पाक पंकि भशुय शुर ર (मशुख) मारपी देपनी ८ वाम योनीमा २५ कषाय ११ मोग १२ अनत ५ मिप्यास्त्र एम ५३ देत हार्भ (शुभ) मारकोनीमार योनीमा २५ कपार १ सोग १२ जनत, ५मिप्यारव प ५१ देतु पामे देखतानी ५ राब योनीमा २५ कपाय १ मोग १२ सवत मिथ्यात्व ए५२ देव नाम ८ २ ६॥ २ सोछ ૨ १ आठ-भाट ૨ १२ में आंगनी ये पटनी १ बार मागसमी सात मांगनी ર २ । सूत्रम फेटका संती केरखा। मे बावर टपा' भसंही दिवसा १ १ असंन्यातगुणा बनवगुणा १८ १८ २ ३ मरदेवा मावानी मपेसाप २० " ७ . ८ ८ २ २ २५ भाष ३-४५ ८ माघ ५ २ तेष्ठ पत्रफ क पति अशुभ २ ८ प्रीपशी निपशी ४ भोजन २ ५ विपुलमतिपी विपुलमति एबी TN पति (मनु) २१९- विप्रवीगमी पाकर भाग (१) १९५-७रक पावर वापरा ५.पीतिबंच १५ कर्मभूमि प्रदेषक अनुचर विपान पर देवता, ए मरमा पर्यातामा लामे गार अणे ૨ २ ર १ ૧૨ १२५ ८ ८ प विपर २१५ Re पम मखी १२ पम ५२५रक पया एक पया मर्म भही १.२ देशक माणवा २२-२२ ૨૨ ૨૨ २२-४५ २१-१२ स्पर्श दिप १ स्पर्श माग सपमोग सम्पतिपय उप्दाम २ मारमठानो मोन मानसिक भोग ८ सम्मातार्नु भसम्पातार्नु " ३ ४ H २ २ ૨ १२० १४४ ५ २५८ ५ पप्रिय ७. ८८ ૨ १ १२ दाम १ सपिठणा १२ मा १ रोम संचिठणा बोए पाखाम तेजस राम ૨ २ २ ८ पा बोस . प्पमयता GEET २ २ . ५ - त ૨ वर्ण पैपनीम . ती - १ ८ १ XAXZRSEXZXXBTCLASEAase विशेप शुदि पत्रको पन्धि पत्रांक पाक पति भशुम शुद्र शुय १० (अशुख) १८ माब पोनिमा १६ ३२ ११ (अशुब)तिर्वच मने मनुष्य यां तथा ८ कपाय मामे (शुब) ५८ सात पोनिमा १५ ग्यो जाप त्यो स्पो अ० उ० मपम पांचे लेश्यानी कपाप लाम, ८ खान यामिर्मा १६ तथा १२ कपाय बैतनी सिति भाषवी कवठ बाम भाभी लाभ " साव योनिमा १५-१२-८ कपाप सामे शुम श्यानी स्थिति (शुद) तिर्यंच मामी छलेश्या ३ (अशुद) १८ माख पंचेंद्रियनी अने ममुष्य भाभी प्रयम पांच लेश्यानी स्थिति ब. पोनिमा २-1-1-4मान खाभे (शुख) ५ काय 30 अंतर्मुहर्तमी। शुल श्वानी स्थिति छपस्य योनिमा २१मान सामे, १५गाव पोनिमा २-३-1-५ ममुप्प मामी ज० उ. मतमुं०नी भने फेवळी मामी २ १५ (अशुख) पाच विकद्रियनी ७ (मशुय) ग्योतिषी (शुद) म्यो तिपी भाभी तेतु लेश्यानी ज स्थिति पस्यना पोनिमार तपा ३ दिपावादी पप्पा (शुब) मसान बाठमा मागनी अने उ० १ पस्प मे । साय पर्पनी पादो १ अप्रिपाबादो २ ए ये तमपसरण सामे २ १० माउपड़ भाउवाक २ २ ११ पकवल पंकपास २ २ ५ संपूदीप पालको पक पपरीमाथि २ २१ फेरा देश ૨ (शुभ) स्थावर नारीमा १५० . कालोवधि भेद भपक्षाये सामषा की , पण सूप मेदनी व्रता पामो मसि अपेक्षा काय ती २२ पक्रदिपमापी १ तेउकापनी सरिया पाती वर्मा २१ पानिपना भद सामे ५ ३ उन 10 सापामा २ ५ पांचमी SEENERAREERELES ४ ८ ८ ४० २ ५२ कालावधि समु ७ पर Trt पकि ૨ पाटसा स्थान पारसा भई कषित संस्थान १ २६ योमम पावन CATEVEIWASIEL 14 म पत्रांक पृष्ठक पकि मशुम सुम सुषिमा १३बो१८ मास जाय तो १ समय सुधिमा ॥८॥ ८ सम्मेशगुणा संमेषगुणा पावर पवा २ म २ ८ पद्रिय पापुकाय पत्रिप . नोपद्रिप नोवारकाप १ ९ मोपत्रिप मोबाउकाप १ पकेंद्रिय बाउकाय पद्रिय न अतरून 7 7 मतिमा भाठमा बलोकना २४ पोजना ११ मपंद्राकार त्रिकोणसिपीत HRASESATANESSPEARE ८७ २५५ २ १ २ २ ૨ २ १ (अ) पोले ममये १८ मोक्ष जाप (धुर) १ पी ३२ पर्यंत मीस जाय तो ८ समप सुपिमा । ५ वी ८ मोम सापटी ७ समय सुधिर्मा २.१पी । मास जाप तो समप मुभिमा ९पी ७२ मोस शाप ती ५ समय मुधिमा ५.७५पी मोक्ष प्रापती । समर मुधिमा ५५ पी ९५ मोम बापती ३ ममप सधिमा १० ९. पी १२ मास बापती २ समप ५१२४ २ १२५५५६२५/ ५॥१२५ ६२-२१२५ ५ भीमसयत भामसंयत नीस पतामयत २ भचरमपण घरमाचरमपर्ण ५ भागरिकवत मनाबारकबत् ૨ WAVE
श्री प्रकरण संग्रह.
माग वीजो
प्रारत्न
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भी पोतरागाय नम: पचीस क्रिया ॥ ॥ अथ श्री ठाणागसूत्रादियी पचीस क्रियाना बोल ॥ करीए ते किया तेना पचीस भेद तेमा कायाना व्यापारे करी निपनी ते कायको किया ॥१॥ तेना ये नेद-१ पापथी निवां नथी एवा श्वविरत मिथ्याष्टि तथा समदृष्टि जीवन हाखया चाखवायी जे क्रिया साग ते श्रनुपरतकाय किया २ पुष्ट रोते मन, वचन थने कायाना योग प्रवर्तायवाची खागे ते प्रयुक्तकाय क्रिया ॥२॥ श्यधिकरण (खम्गादि) शस्त्रे करी जे क्रिया सागे ते थधिकरणिका तेना ये नेद-२ पूर्वे नीपजावेल खद्गादिने विषे मुष्टि थादिनु जोगवु ते सयोजनाधिकरणिका, २ प्रथमयोज खम्ग, मुष्टपादिनु नोपजायतु ते निवर्तनाधिकरणिका ॥३॥ प्रवेषे (मत्सरे) करी नापजो ते पाठसिया-प्रापिकी तेना ये नेद-१ जीपने विषे द्वेष करवाची निपनी ते जीवप्राके पिकी, २ थजीव (स्तनादि) ने विपे क्षेप करवाथी निपनी ते अजीयप्राषिकी ॥ ४ ॥ परितापना (तामनादि ) दुख विशेपे करी निपनी ते पारितापणिया-पारितापनिका तेना घे जेद-१ पोताने हाथे करी परितापना उपजावे ते स्वहस्तपारितापनिका, २ बीजाने हाथे परितापना उपजायवे करी निपनी ते परहस्तपारितापनिका ॥५॥ प्राण (थायुष्यादि १०) नो यतिपात-नाश करणे करी निपनी से प्राणातिपात किया तेना घे नेद-१ पोताने हाथे करी को प्राणोने प्राणथो पेगळो करे ते स्वष्ठस्तप्राणातिपात किया,२ बीजाने हाथे कोश्ने प्राणथी वेगळो करावतां खागे ते परहस्तप्राणातिपात क्रिया ॥ ६ ॥ थारन (उपय) करवाथी निपनी ते थारनिका सेना ये लेद-१ जीपने उपभव करवाथ। खागे ते जीवधार निका, २ श्वजीव (जीवना कलेवर थथवा वस्त्रादि) नो थारज- थमिसस्कार वगेरे करता जे क्रिया लागे ते आजोवचारनिका ॥७॥ परिग्रह नव प्रकारना ने उपर मृा राखवाथी सागे ते परिम्गहिया क्रिया तेना चे जेद-रजीष (मनु- प्यादि) ने विपे मूळ राखवायी पागे ते जीवपरिग्गहिया, २ थजीव (सुवर्णादि) ने विपे मूष्ठा रास्ववाथी सागे ते अजीव परिम्गहिया ॥७॥ माया-कपट निमित्थी जे किया लागे ते मायावत्तिया तेना घे नेद-२ हृदयना पुष्ट थाशयने वक्रतारूपे घोजी रीते वतावधानी कोशीश करवी ते थायनावकणया, २ खोटा खेखादिफे करी परने वच वाना व्यापार त परजाववकणया ॥ ए॥ श्वविरति निमित्तथी निपनी जे किया ते अप च्चखाण प्रिया तेना वेद-१ जीवने विषे प्रत्याख्यान कर्या विना जे पधादि व्यापार ते जीच थपच्चखाण क्रिया, २ मयादि थजीवने विपेपच्चखाण न करवाथी कर्मवध थाय ते थजीव थपच्चखाण किया ॥ १० ॥ मिथ्यात्व निमित्ते कर्मषध व्यापार घाय ते मिच्छा दसणवत्तिया तेना वे जेद-१ होन-थधिक श्रात्मादि वस्तु विषय मिप्यास्वदर्शन नि मित्त व्यापार ते उणातिरिक्तमिठादसणपचिया, पूर्वोक्त उणातिरिक मिथ्यादर्शनथी जिन्न मिथ्यादर्शन जेमके श्रात्मा नथी, इत्यादिरूप मिथ्यादर्शन व्यापार ते तद्व्यति
रिक्तमिलादसणवत्तिया ॥११॥ वस्तुना देखवाधी निपनी ते दिहिया सेना चेप्नेद-१
जीवता हाथी घोमा प्रमुखने देखवाथी जे कर्म सागे ते जीवदिष्ठिया, २ चित्रामण प्रमुख
जोनाथी जे कर्म सागे ते यजीवदिहिया ॥ १२ ॥ वस्तुने स्पर्शवाथी निपनो ते पुहिया
तेना घे नेद-१ जीवने रागोप स्पर्शवाथी जे कर्म खागे ते जीवपुष्ठिया, ५ अजीवने राग
कप स्पर्शवाथी ज कर्म धागे ने यजीवपुट्ठिया ॥ १३ ॥ बाल वस्तुनु मानु धिंतवधाथी
निपनी ते पाश्चिया तेना घे नेद-२जीवने धाभिने राग-षधी निपनी ते जीवपाल
चिया, २ यजीयने याभिने राग-द्वेषधी निपनी ते थजीवपाकुच्चिया ॥ १४ ॥ सर्व
प्रकारे जनसमूहना मळवाथी निपनी ते सामतावणिवाश्या तेना घे भेद- जीव समु
दाय मळवाथी खागती क्रिया ते जीवसामतोवणिवाश्या, २ श्रजीव समुदाय स्थादि
मेळषवाथी हर्प पामे ते अजीवसामतोवणिषाश्या ॥ १५॥ हाथे करी निपनी ते साह
स्थिया तेना घे नेद-१ पोताने हाघे जीपने पकमी हणे ते जीवसाहस्थिया, ५ पोताने
हाथे (श्रजीव) खम्गादिक पकमो जीपने इथे ते अजीवसाद स्थिया ॥ १६ ॥
निसर्जन-पकवाची निपनी ते नेसस्थिया तेना घे नेद-१ पथर थादि सजीव
वस्तुनु यत्रादिवमे फेंकवु ते जीवनेसत्थिया, २ वाणा दिनु धनुष्या दिवमे फेंफवु
ते अजीवनेसस्थिया ॥ १७ ॥ स्वामीना थादेशथी निपनी ते थाणवपिण्या-याशाप
निका तेना घे नेद-१ जीवने याणवानो श्रादश करवाथी निपनी ते जीवश्चाणवणिया,
२ अजीवने श्राणवाना थादेश करवाथ निपनी ते अजीयाणवणिया ॥ १०॥ विदा-
खायी निपनी ते विदारणिका तेना घे भेद-जीवने विदारवाथो निपनी ते जीवविदा
रणिका, २ श्वजीव (स्तनकाष्ठादि)ने विदारवाथी निपनी ते अजीवधिदारणिका ॥ १५ ॥
अज्ञान निमित्तयो निपनी ते अणानोगवत्तिया तेना ये नेद-१ उपयोग विना वस्त्रादि
सेवा ते थनायुक्तादानता, ५ उपयोग विना पात्रादिनु प्रमार्जन करवु ते थनायुक्तप्र
मार्जनता ॥ २० ॥ स्वशरीरादिनी अपेक्षा न राखवाची क्रिया सागे ते अणवकखवत्तिया
तेना वे नेद-१ पोताना शरीरनी क्षति करवाथी पागे ते थारमशरीरयणवकखवत्तिया,
२ परना शरीरनी कति करवाथी खागे ते परशरीरचणवकखवत्तिया ॥ १॥
प्रेम (स्नेह) ना निमित्तथी निपनी ते पेसावचिया-प्रेमपचिका सेना घे नेद- मायाना निमित्तथी निपनी ते मायारत्तिका, २ लोचना निमित्तथी निपनी ते लोज तिका ॥२२॥ हेप (काध मान ) ना निमित्तथी निपनी ते दोसवत्तिया पत्तिका तेना व नेद-१ साधना निमित्तथी निपनी ते क्रोधचिका, २ मानना निमित्तयो निपनी ते मानपत्तिका ॥ २३ ॥ प्रयागे करी निपनी ते प्रयोग किया तेना त्रण नेद-१ मनना प्र योगे करी निपनी ते मनप्रयोगक्रिया, २ वचनना प्रयोगे करी निपनी ते वचनप्रयाग क्रिया, ३ कायाना प्रयोगे करी निपनी ते कायप्रयोगक्रिया ॥२४॥ मन थादि प्रयागे करी ग्रहण करेल कर्मवर्गणानु सम्यक् प्रकारे प्रकृचिवधादि नेदे करी थगीकार करखु ते समुदान क्रिया तेना त्रण चेद-१ थातरारहित (प्रथम समयवर्तिनी) ते श्वनतरसमु दान मिया- द्वितीयादि समयवर्तिनी ते परंपरसमुदान क्रिया, ३ प्रथम अप्रथम समयनी थपेक्षाए ते तनयसमुदान क्रिया ॥ २५ ॥ पर्थ चालवाथी जे किया लागे ते र्यापथिका तेना वे जेद-१ ११ मे तथा १५ मे गुणगणे यथास्यास चारित्रवाळाने मागे
BESYSEEG
ते उमस्यशरियावछिया क्रिया, २ फेवतीने लागे ते केवप्लोइरियाव दिया क्रिया ॥ एव मूख
क्रिया २५ थने उचर क्रिया ५५ षश् ॥
॥ इति पचीस क्रियाना बोल सपूर्ण ॥
योनिना बोल॥
गाथा ॥ जीव १ इरिय ५ गुणगाण ३, जोग ४ वेय ५ कसाय ६ खेस्सा ॥
नाण अन्नाण ए दसण १०, सरिण २१ वेयणीय १५ पहाति १३ ॥१॥
पाण १४ फाण १५ उववाग १६, दिट्ठी १७ थप्पा १७ मरण १ए समुग्घाए २० ॥
सरीर १ सठाण २२ सघयण २३, वणा२४ सपणा २५ समोसरण चेव २६ ॥२॥
जाय २७ हेच २५ कूस कोमी श्ए, पयवी ३० श्मा तिसदाराश्॥
चउरासी खख जीवाजोणो, उत्तारयन्न तस्सोवरी ॥३॥
पहेनु जीवधार कहे ठे-GU खाख योनिमा ५६३ भेद पाने तेमा ५५ लाख यो निमा एकेम्पियना २५ जेद खाने ६ लाख योनिमा विगः प्रियना ६ नेद खाने २६ लाख योनिमा ५३५ नेद खाने त १४ नारकीना, ५० तियेच पचेन्छियना, ३०३ नेद मनुष्यना, १ए भेद देवताना सव मळी ५३५ नेद थाय ॥२॥ बोजु ईजियकार-४ लाख जोया योनिमा इजिय ५ साने तेमा ५२ लाख यानिमा इघिय १ लाने वे लाख वेजियनी यानिमा इडिय २ लाने २ लाख तेइजियनी योनिमा इडिय ३ साने खाख चरिं जियनी योनिमा इप्रिय ४ पाने २६ लाख पचेन्डियनी योनिमा इघिय ५ लाने ॥२॥ त्रीजु गुणगणकार-समुच्चय योनिमा १४ गुणगणा लाने तेमा व साख योनिमा प्रथम गुणगणु पाने ३५ लाख यानि ते एकेन्डियनी वर्जितमा वीजु गुणगाणु खाने २६ । साख योनि ते विगळं जियनी ६ वर्जितमा श्रीजु चोथु वे गुणवाणा साज १७ साख योनि । त देवता नारकीनी ७ लाख वर्जितमा पाचमु गुणगणु साने १४ लाख यानि ते ४ लाख । तिर्यच पचेंशियनो वर्जितमा ६ वा गुणगणाची २४ मा गुणगणा सुधा ए गुणगणां खाने ॥३॥ चोथु जोगहार-तेमा प्रथम ३ मूख योग कहे डे ५३ लाख योनिमा र काय याग लाने ६ लाख योनिमा काया ने वचन ए ये योग लाने २६ साख योनिमा २-३ योग लाने हवे १५ उत्तर योग कहे डे खाख योनिमा समुच्चय १५ जोग लाने वायफाय पर्जिने पकेन्डियनी ४५ लाख योनिमा ३ जोग लाने वालकायनी ७ लाख योनिमा ५ जोग खाने विगोपियनी ६ लाख योनिमा ४ जोग खाने नारफी देवतानी लाख योनिमा ११ जोग खाने ४ लाख तिर्यच पचेन्डियनी योनिमा १३ जोग खाने १४ लाख मनुष्यनी योनिमा १५ जोग लाने ॥४॥ पाचमु वेदद्वार कहे जे ६५ लाख योनिमा नपुसक घेद साने ते एकेंघिय विकप्रिय थने नारकीमा पाने १० लाख यो निमा १२३ घेद खाने ४ लाख योनिमा १५ घे वेद पाने ॥५॥ नछु कषायद्यार- खाख योनिमा १६ कपाय साने तेमा २७ लाख योनिमा १६ तथा छ कयाय साने १४ साख योनिमा १६ १५७४ कपाय साने ॥६॥ सातमु लेश्याहार-0४ लाख योनिमा ६ लेश्या खाने तेमा २० लाख योनिमा ४ लेश्या साने ३७ लाख योनिमा ३ खेश्या खाने EZE २२ साख योनिमा ३४-६ खेश्या साने ॥७॥ श्याठमु ज्ञानधार-68 सास्त्र योनि तेमा ५२ लाख यानिमा ज्ञान पाने नहि ६ साख विगलेन्डियनी योनिमा ३ शान खाने । सास्त्र नारफी देवनी योनिमा ३ ज्ञान लाग्ने १७ लाख पचेन्डियनी योनिमा २३४५ झान लाने ॥७॥ नवमु अझानधार-6 लाख योनिमा अज्ञान ३ खाने तेमां ५७ साख योनिर्मा अशान २ खाने २६ लाख योनिमा २ तथा ३ श्रज्ञान साने ए॥ दसमु दर्शनकार-५६ लाख योनिमा १ अचकुदर्शन पाने २ लाख चनरिन्द्रियमा वे दर्शन वा, श्रवछ लाजे खास देवनारकीनी योनिमा ३ दर्शन पाने १८ लाख पचेन्डियनी योनिमा दर्शन २३४ लाने ॥१०॥ श्वगीधारमु सझी असबीहार-५७ लाख योनिमा १ असझी खाने २६ लाख योनिमा सझो असही र साने ॥ ११॥ वारमु वेदना छार- प लाख योनिमा निश्चयनये ५ वेदना खाने प्रत्येक प्रत्येकमां व्यवहारनये ४ लाख नार कीनी योनिमा १ श्थशाप्ता वेदनीय खाने ४ खाख दवतानी योनिमा १ शाता वेदनीय । खाने शेष ७६ लाख योनिमा र वेदना खाने ॥१५॥ तेरमु पयाप्तिहार- लाख जीया योनिमां पर्याप्ति ६ साने तेमा ५२ लाख एकेन्डियनी योनिमा पर्याप्ति ४ लाने ६ लाख विगलेशियनी योनिमा पर्याप्ति ५ लाने २६ लाख पचेन्डियनी योनिमा पर्याप्ति ५६ खाने ॥१३॥ चौदमु प्राणछार-४ लाख योनिमा प्राण दस लाने तेमा २२ लाख एके जियनी योनिमां प्राण ४ लाने ५ लाख पेशद्रियनी योनिमा प्राण ६ लाजे २ लाख ते इडियनी योनिमा प्राण ७ लाने २ लाख चरिंडियनी योनिमा प्राण ७ खाने २६ लाख पन्जियनी योनिमा प्राण ५-२० लाने ॥१४॥ पदरमु ध्यानधार-५० लाख यो निमा २ ध्यान खाने से था-ध्यान १, रोऽभ्यान २ १५ लाख योनिमा २ ३ म्यान पाने ते धर्मभ्यान वध्यु. १४ साख योनिमा २३४ ध्यान पाने ॥ १५ ॥ सोसमु उप योगहार- लाख योनि तेमा ५५ लाख योनिमा ३ उपयोग, २ थान १ अचछुए ३ खाने ४ लाख प्रिय तेइजियनी योनिमां ५ उपयोग लाने ३ खाख चरिन्डियनी योनिमा ६ उपयोग खाने, १५ लाख देव नारकी तिर्यचनी योनिमा ए उपयोग खाने १५ खास मनुष्यनी योनिमा उपयोग ६ तथा १२ खाने ॥ १६ ॥ सचरम् दृष्टिकार-५२ साख जीवायोनिमा दृष्टि १ साने ६ लाख योनिमा २ दृष्टि लाने २६ लाख पंचेन्डियनी योनिमा १-२ तथा ३ दृष्टि खाने ॥ १७ ॥ चढारमु थात्माधार-५५ लाख एफेन्जियनी योनिमा ६ थारमा खाने ज्ञान चारित्र वर्जिने १४ लाख योनिमा ७ थारमा लाने १ ज्ञान यभ्यु २७ साख तिर्यच मनुप्यनी योनिमा ७ थात्मा साने ते चारित्र यभ्यु ॥१णा ओग णीसमु मरणधार-४ साख जीवायोनिमा ५ मरण समोदिया, १, थसमोहिया ५, प्रत्येक प्ररयेफा खाने ॥१५॥ बीसमु समुद्घातकार-५१ लाख योनिमा ३ समुद्घात साने ११ खाख योनिमा ४ समुद्घात साने, वैक्रेय वधी ७ लाख योनिमा ५ समुद्घात साने १४ लाख योनिमा ३४५६७ समुद्घात साने॥२॥ एकवीसमु शरीरहार-४ लाख जीवायोनि तेमा ५१ लाख योनिमा ३ शरीर-उदारीक, तेजस थने कार्मण ए त्रण लाने ११ सास योनिमा ४ शरीर खाने ते १ बैक्रेय पप्यु ७ लाख योनिमा ३ शरीर ते वैशेय, तेजस थने फार्मण प३ साले १४ साख योनिमा ३ ४ ५ शरीर बाजे ॥२२॥वावीसमु सगण धार-४ लाख योनिमा ६ सगण खाने तेमा ६५ लाख योनिमा र हुम सगण ४ लाख योनिमा समचारस सठाण १७ लाख योनिमा १ सगण तथा ६ सगण लाने ॥२॥ तेवीसमु सघयणघार- खाख योनिमा ६ सघयण खाने सेमा ५० लाख योनिमा १ ठेवटु सघयण 4 लाख योनि सघयणी १७ लाख योनिमा १ सघयण तथा ६ सघयण खाने ॥ २३ ॥ चोवीसमु वर्णादिकार-4 लाख जीवायोनिमा ५ वर्ण, २ गध, ५ रस, स्पर्श सर्व मळी २० लाने तेमा ४ लाख नारकीनी योनिमां श्रशुन वर्ण, गध, रस, स्पर्श लाने ने ५ लाख देवनी योनिर्मा शुन्न वर्ण, गंध, रस, स्पर्श लाने शेष ७६ लाख यानिमा गुनाशुन वर्णादि २० बाल खाने ५ व्यवहारनयनो श्अपेकाये जाणवु ॥ २४ ॥ पचीसमु सझाहार-७४ लाख योनिमा ४ सझा खाने प्रत्येक प्रत्येकमां ॥ २५ ॥ उषीसमु समवसरणधार-0४ लाख जोवायोनिमा ४ समवसरण खाने तेमा ५५ लाख योनिमा समवसरण अक्रियावादी थकान लाने ६ लाख विगलेन्डियनी योनिमा २ तथा ३ ते क्रियावादी वघ्या २६ लाख पचेन्धियनी योनिमा २३४ सम खाने ॥ २६ ॥ सचाषीसमु जापधार-० लाख योनिमां नाव ३ REESEASESSINE साने, उदय, क्षयोपशम, परिणामिफ १४ लाख योनिमां नाव ५ खाने ते उपशम, क्षायक एप पाया ॥ २७ ॥थट्ठावीसमु हेतुधार-४५ लाख एकेन्द्रियमा ४१ हेतु लाजे २५ कषाय, ३ जोग, १२ थरत, पथनानागमिप्यास्व एम ४१ वानकायनी ७ लाख योनिमा २ वैके यना बघतां ४३ हेतु वाने त्रण विगजेन्सियनी छ लाख योनिमा २५ कषाय, ४ जोग, १२ थपत, अनानोगमिथ्यात्व एम ४२ हेतु खाने नारकीदेवनी लाख योनिमा २५ कषाय, ११ जोग, १२ अयत, ५ मिथ्यात्व ए ५३ हेतु पाने तियेचपचेन्डियनी ४ लाख योनिमा ५५ हेतु खाने, ते ५७ माथी थाहारकना २ वा १४ लाख मनुष्यनी योनिमा ५७ हेतु खाने ॥ २०॥ थोगणत्रीसमु कुलफोटिहार-५५ साख एकेन्डियनी योनिमा ५७ लाख कुमकोटि विगसेन्टियनी ६ लाख योनिमा २४ लाख कुसकोटि देवनारकीनी लाख योनिमा ५१ लाख कुसकोटि तिर्यंच पचेंजियनी ४ लाख योनिमा ५३ लाख कुखकोटी १४ लाख मनुष्यनो योनिमा १५ खाख कुखकोटि ए २ए७५०००० लाख थाय कुखकोटि कहेता कूळना समुदाय जाणवा ॥२॥त्रीस, पदवीधार-उलाख पृष्वीकायनी योनिमा ७ एकेन्डियनी पदवी खाने शेष ४५ लाख एकेन्धियनी योनिमा पदवी एके न खाने ६ लाख बिगोन्नियनी योनिमा पदयी एक समकीतनी साने साख नारफी तथा देवनी योनिमा १ समदृष्टिनी पदषी साने ४ लाख तियेच पचेन्डियनी योनिमा ४ पदवो- अश्व ने गज तथा आवक ने समदृष्टिनी खाने मनुष्यनी १४ लाख योनिमा ५ पचे प्रिय रत्ननी ने ए मोटी पदवी एम १४ पदवी खाने ॥३०॥ ॥इति योनिना योस सपूर्णम् ॥ गर्भावासना बोल॥ अथ श्री तलवेया खिया प्रकीरणकथी सक्षेपे ग वासना बोल लिख्यते ॥ SA स्त्रीनी नाजी नीचे ये नामी ब, से फुखनी नाषीने श्राकारे जे तेनी नीचे योनि ठे ते जीवने उपजवानु ठेकाणु ते अधोमुख कमळने थाकारेले त्यां थापानी मजरी ZAVAN सरखु मास ठे ज्यारे स्त्रीने ऋतुकाळ थावे त्यारे मजरी करे जेम रसन्यु गुमहु करे तेम ते भतुना विंषु करे त्यां वीर्यनो सजोग मिश्र थाय त्यारे चार मुहूर्चमा जीव धात्री उपजे, उस्कृष्टा नव साख जीव उपजे स्वीनी योनि पचायन वर्ष उपरांत मळी जाय-अबीज चाय पुरुप पचोतेर वर्ष पठी वीज धाय ए नियम सो वर्षना वायुष्यना प्रमाणनो समजवा उपरात पूर्व क्रोम सुधी थायुष्य होय तो नीना शर्ड थायुष्य सुधी सवीज योनि होय पुरुपना सर्व थायुष्यनो वीसमो जाग शेष रहे स्यारे अधीज होय वळी एक पुत्रने नवसें पिता हाय नवसें पुरुपनो एक पुत्र ते गर्न उत्कृष्टो धार वर्ष सुधी माताना उदरमा गेमपणे रहे पाठो एनो ए जीव पापना उदयपी फरी पाढा वीजा बार वर्ष रहे, एटसे चोवीस वर्ष थाय, त्यांसुधी रहे जमणे पासे पुत्र रहे माये पासे पुत्री रहे बच्चे नपुसक रह तियेचणीने थाउ वर्ष सुधी ठोक रहे मातानु रुधिर, पिताना शुक्रनो प्रथम थाहार से सात दिवस सुधी चोखाना धावण सरखो होय धीजा साते पाणीना परपोटा सरखो थाय श्रीजा साते नाकना पम सरखो याय चोया सासे धावानी गोटखी सरखो थाय-अथवा जुरनी पेशी सरखो थाय से जीव पहेले मासे धमतालीस मासानार थाय बीजे मासे पेशीथी कण पाय त्रीजे मासे माताने दोहद (श्वा) थाय सार श्वा पुएयवतनी माताने थाय थने खराब श्वा पापी जीवनी मा ताने थाय चोथे मासे मातानु थंग पुष्ट करे पांचमे मासे पेशी थकी पांच अकुरा नोकळे, वे हाथ, वे पग, एक गायु पम पांच बठे मासे पीत्त भने लोछी उपजे सातमे मासे सातसो शीरा-नामी उपजे पांचसें पेसी ते मांसस्थानक विशेष, नव मोटी नामी थाय, नवाणु खाख रोम गळा देठे, वे क्रोम एकावन लाख रोम गळा उपर, सर्व मळी सामो त्रणमोम राम थाय श्राठमे मासे सपूर्ण अगनी प्राप्ति होय गर्नमाहि जीव उच्चार पास वण खेल सघाण पीत्त शुक्र शोणित पटसा पानां न करे ते केम जे पुल रसहरणी नामीये थाहारे, से शरीरना थगोपांगपणे, पांच इजियपणे, हाम, मीजा, वाळ, मुब, दाढी, रोम, नखपणे परगमावे मस्तफ अवयवादि पण निपजावे गर्नमांहि जीपने कवल था हार नहि माता राजी तो गर्न राजी माता जाखी सो गर्न सुखी मातानी ने गर्जना जीवनी नाम रसहरणीने पळगी रही ठे जे माता थाहार करे ते सर्व गर्नने नामोनाम प्रगमे, फळना पीटनी परे शरीरने विपे प्रण श्रग मातानां ने मांस , सोही २, माथानु भजु ३ प्रण थग पितानां हाम र, हामनी मीजा २, दादी, मूठ, रोम, नख, प्रमुख ३ गनमाथी जीव मरीने नरकर्मा जाय तेम देवतामा पण जाय षळी गर्नमांहि माता सुवे तो गर्न सुवे माता जागे तो गर्म जाग गर्जावासमांहि थंधकार से महा थशूचि 3 गंध ठे मल मूत्रनु स्थानक ते त्यां जीव दुखी थतो रहे ठे एम 5ख जोगवतां सपा नव मास जन्मे जीव थल्प लोही ने घणा शुक्रनो थाहार करे तो पुत्र थाय १, थम्प शुक्र ने घणा खाद्दीनो थाहार करे तो पुत्री याय २, घेवरोवर थाहार करे तो नपुसक थाय ३ मस्तफेयी जन्म पामे तो सुखेधी जन्मे कोइ पापी जीव थामो घर थावे तो विनाश पण पामे वळी था शरीर केवु वे तो के महा अशुचीनो 'नमार ठे था शरीरने विषे थदार पृष्ट करम साधा ठे सोल पांसळी फरम ठे श्राप एक पासे, थाउ वीजे पासे चार थागळनु गळुठे ये थागळनी थाख ते चार थांगळनो नीलाम वे यत्रोस दांत le ठे यार थांगळनी जोन ब सामात्रण पसनु हैयु ने पचीस पलर्नु काळजु ने ये थात (कोना) नानी , वे अति माटी ले मोटी थातमा वमीनीत प्रणामे नानी यां तमा बघुनीत प्रणमे ठे थे पासा के माबु ने जमणु पासु मावे पासे सुखनो परिणाम ठे जमणे पासे उखनो परिणाम था शरीरने विषे एकसो साठ साधा दे एकसो सी चेर मर्मना स्थान न स्यां घा लागे तो सस्काळ मरण पामे वणसो दामनी मीजा ने नवसो नाणी ते सातसो शीरा ने पाचप्तो पेसी मासस्थानक ब नव नामी मोटी छे सातसो नामीनु विवरण--एकसो साठ नामी नानीथी निकजी ते उंची चाली मस्तके पहोंची ते रसदरणी नामथी शोलखाय उ पनी निरुपघाते श्राव, कान, नाफ, जीननु घळ पधे एनी उपपाते थांख, कान, नाक, जीजनु षळ घटे एकसो साठ नामी नानिधी उपनी अधोगामिनी पगतळे जश् पहोंची तेनी निरुपघाते मेत्रनु अने जघान वळ वधे तेनी उपधाते मस्तके वेदना, शूळादिक उपजे अखि श्रांधळो चाय, नेप्रनु पळ घोलु थाय एकसो साव नामि नानिमी उपनी श्रीनीजर हाथे जइ पहोंची तेनी निरुपघाते पाहुनु धळ वधे तेनी उपघाते पठवामे वेदना, पुंठवेदना, कुखवेदना, कुखे शूलादिक उपजे एकसो साठ नामि नानियो उपनी अधोगामिनी गुझे पहोंची एनी निरुपघाते वमोनीत लघुनोत, कूर्मवायु थादि रोष पुख उपजे पचीस नामि सोखमनी धरणहारी वे पचीस नामि पित्तनी धरणहारी ठे दश नामि शुक्नी धरणहारी ठे एम पुरुपने सातसें नामी शिराने नामे वे एमां उसे सीतेर नामि स्त्रीने नपुसकने ठसे एसी नामी व मोटी नव नामी तेनाथी जूदी जाणवी पुरुपना शरीरमाहे पाच कोगटे स्त्रोने ठ कोठग गर्न धरे ते कोठो शधिको ठे नव छार पुरुपने ठे वार हार स्त्रीने ठे पुरुषने पाचसे पेशी व स्त्रीने त्रीस थोठी जे जेम सोनी जतरमाथी तार खेंची बहार काढे तेम गर्नावासमाय) गर्न खेंचाइ कोटी फप्टे वहार थावे बाल्यावस्थामा मल मूत्र थशुचीमा रसवस रमो अनेक व्याधी जोगवी म्होटो थयो, वळी शरीर रस १, रुधिर ५, मांत ३, मेद ४, हाम ५, महा ६, शुक्र 9 ए सात धातुए करीने जयों ठ महा अशूची, मखमूत्रनो मार वे एघार तथा १५ घार हमेशा बढे ठे समण पमण विध्वसण खनाव ठे अनेक मल मूत्र श्रेष्मादिके सहित ठ ते शरीर स्नानादिके करी शुचि केम थाय ? ए शरीरने X शूचीपणे करी माने , से जीवनु मूर्खपणु ने शुषि-पवित्रता ता झान १, दर्शन २, चारिन ३, तप ४ ए चारथी थाय, थने तेणे करी मोक्ष पामीए, एतु जाणी उगला टाळ- वी एक स्त्रीने एक जवमा नव लाख सतान उपजे नीपजे, ए नगवतीसूत्रमा ले जोगे जोगे असख्याता जीव समुर्छिम मरण पामे , ते केम तो के, यासनी लूगळीमा रु पी जीने पर्यु होय, ते सूगळीमा लोढानो खोखो थनिर्मा तपावी रातोचोळ करी से वासनी नळीमा दाये ने जेम र विध्वस पामे-बळी जाय, तेम स्त्रीने सगे असख्यात जीव समु लिम मरण पामे थान घोख उदारीक शरीरना कहे बे-प्रणसें साठ सांधा ले १, पांचसें पेशी व २, सातसो शीरा डे ३, नवसो नारुणी ४, वहातेर कोग वे ५, एकसो थाठ नानी नामि ठे ६, नव मोटी घमण नामि ७ साडीत्रण क्रोम रोम डे , ए था वोस उदारीक शरीरना जाणवा पीच टांक ६४ ॥१॥ वीर्य टांक ३२ ॥२॥ रुधिर शेर १० ॥३॥ मूत्र शेर १०॥४॥ चरवी शेर ५॥६॥ विष्टा शेर ५ ॥६॥ ए मान निरोगी शरीरनु जाणवू ॥ इति गर्गवासना वोस सपूर्ण ॥
श्वासोश्वासना बोल ॥ अथ श्री श्वासोश्वासना घोल लिख्यते ॥ सो घर्षनी युग वीस ॥१॥ सो वर्षना सवस्सर सो ॥२॥ सो वर्षनां चयन पसो॥३॥ सो वर्पनी ऋतु उसो ॥४॥ सो वर्षना मास वारसो ॥५॥ सो वर्षनां पखवा मियां चोषीस सो ॥६॥ सो वर्पना श्वग्वामियां श्वमतालीस सो ॥७॥ सो वर्षना दिवस बत्रीस हजार ॥७॥ सो वर्षना पहोर घे लाख ने यहाशी हजार ॥॥॥ सो वर्षनां हर्च दस लाख ने एसी हजार ॥१०॥ सो वर्षनी घमी एकवीस लाख ने साठ हजार ॥११॥ सो वर्षना श्वास उश्वास चारसो सात क्रोम थमतालीस खाख ने चालीस हजार ते सख्याना थक दस पाय ४०,४७,४,100 ॥ १२॥ एक घमीना श्वास नश्वास बढारसो ने सामी व्याशो ॥१३॥ एक मुहूर्सना म्यास उश्वास साम्त्रीस सो ने सोतेर ॥१४॥ एक पहोरना h श्वास नश्वास चौद हजार एकसो ने पोणी योगणपचास ॥१५॥ एक अहोरामिना श्वास जश्वास एक लाख तेर इजार एकसो ने नेवु॥१६॥ पदर दिवसना श्वासोश्वास सोख लाख सचाणु हजार श्रावसो ने पचास ॥१७॥ एक मासना श्वासोश्वास तेत्रीस लाख पचाणु ह जार सातसो ॥१७॥ सवानव मासना श्वासोश्वास त्रण क्रोम चनद घाख दस हजार यसो ने पचास ॥१॥ एक वर्षना श्वासोश्वास चार क्रोम सात लाख अमतालीस हजार ने चा रसो ॥२०॥ ब्रह्मदत्त नामे वारमो धक्री मरीने सातमी नरके उपन्यो त्या तेत्रीस साग रनु थायुष्य ते ते शहां मनुष्यपणे एकेक श्वासोश्वासने सुखे त्या नरकमा केटलो कास सुख जोगवशे ते कहे ठे अग्यार लाख पस्योपम बप्पन हजार पस्योपम नवसो ने पचीस पस्योपम ने एक पस्योपमनो त्रीजो नाग काफेरु मुख जोगवशे ॥१॥ काकदी नगरोना धन्ना थणगारे नव मासनु चारित्र पाळ्यु,ते नव मासना श्वासोश्वास त्रण क्रोम पांच लाख एकसठ हजार ने त्रयसो ते धन्नो थणगार चवी सर्वार्थ सिह विमाने उपन्या त्यां ३३ सागरनु थायुष्य ठे तेथे श्हा मनुष्यपणामा नव मासनु चारित्र पाळ्यु, कष्ट वेठपु, ते
PRIL
एकेक श्वास नश्वासने कष्टे देवतानी गतिमा एकसो सात क्रोम सत्ताणु साख बन्नु हजार
नवसो श्रष्ठाणु पस्योपम ने एक पम्योपमनो उठो जाग माठेरु एटम्मु देवसानु मुख जोग
वशे ये सवर तथा तपना फळनु प्रमाण कहे सम्यक्दृष्टि जीव रागोषरहित,
कमा दयासहित, पोपध पमियजे ते सस्यावीससो ने सोचोतेर कोम सीतोतेर लाख सी
चोसेर हजार साप्तसो ने सीसोतेर पख्य ने एक पस्यना नव जाग करीए ते मांहिसा थाठ
जाग फारु देवतार्नु थायुष्य बांधे ॥१॥ एक पहोरवेळा सुधी सपर श्रादरे ते त्रणसो
वेंतालीस क्रोम वावीस लाख बावीस हजार यसो पाषीस पथ्य ने एक पस्यना था नाग
करीप से महिला सात नाग काळे देवतार्नु थायुष्य वांधे ॥२॥ एक मुहूर्त सुधीनो
संबर थारे ते याएं क्रोम श्योगपासात लाख पचीस हजार नवसो ने पचास पथ्य ने एक
पश्यना सात नाग करीए सेवा व जाग काफेरु देवतानु थायुष्य घांधे ॥३॥ एक घमोनो
मवर चादरे ते उतालीस क्रोम, श्रोगणत्रीस लाख बासठ हजार नयसो ने समसळ पख्य ने
एक पस्यना व नाग करोए ते माहिला चार जाग काफेरानुं देवतानु थायुष्य घांधे ॥४॥
एफ श्वासाश्वास सुधीनो सवर श्रादर ते चे साख चोपन हजार चारसो थाउ पस्य ने एफ पस्यनो चोथो जाग देवतानु थायुष्य वांधे ॥५॥ एक नमोकारसी तप करे ते योग णीस सास्त्र प्रेसव छजार पत्तो समसठ पस्य ने एक पल्सना चोथा नागनु देवतार्नु वायु प्य वाधे ॥६॥ एक अनुपूर्वि गणे तेनां जघन्य बासठ सागरनां नारकोना पाप नाश पामे, उत्कृष्ट पांचसो सागरना नारकीनां पाप नाश पामे ॥७॥ एक उपोदरी तप करे ते, सो वर्ष नारकी कर्म खपावे, तेथी अधिक खपावे ॥८॥ एक उपवास करे ते एक हजार वर्षे नारको कर्म खपाने तेघीयधिक खपावे ॥ए। एक बछ तप करे ते एक लाख वर्षेनारकी फर्म खपावे तेथी थधिक खपावे ॥ १० ॥ एक अहम तप करे ते क्रोम वर्षे नारकी कर्म स्वपावे तेथी थधिक खपावे ॥ ११ ॥ चार उपवास करे ते एक क्रोमाकोमी वर्षे नारकी कर्म खपाने तेथी अधिक खपावे ॥ १४ ॥ ॥ इति श्वासोश्वासना घोस सपूर्ण ॥
जीवना चौद भेद ।। अथ जीवना चौद जेदनी चर्चा विख्यते ॥ जीवना १४ नेद-तेमा सूक्ष्म केटला ? ने चादर फेटला ? उत्तर-घसकीना पार पहेखा सही ये ते तेरमो ने चौदमो एघे ॥१॥जीवना १४ जेद तेा त्रस केटला ने स्थावर फेटला ? उत्तर-स्थावर चार पदेखा, थने त्रसना उपला दस ॥२॥ जीवना २४ नेद तेमा पर्याप्ता केटखायने अपर्याप्ता केटला ? उत्तर-सात अपर्यासा ते १३५७ ए- १११३, थने पर्याप्ता ते २४६७१० १५ २४ ॥३॥ जीवना १४ जेद तेमां नजरे केटला थाये ? श्रने नजरे केटसा न श्रावे ? उत्तर-सात चपर्याप्ता अने एक सूक्ष्म पर्यासानो ए थाव नजर न यावे, यने पाकी ठ जेद नजरे थावे ॥४॥जीवना १४ जेद तेमा प्रस नामीमा केटसा थने स्थावर नामीमा केटला ? उत्तर-प्रस नामीमा १४ नेद खाजे, अने सात स्थावर नामीमा चार स्थावग्ना भेदनी नियमा पांच अपर्याता थने सझीनो पर्याप्तो एम ६ नंदनी नजना वखत होय अने वखते न पण होय ॥ ५ ॥ जीवना १४ जेद तेमा था हारक फेटला ? अने श्रणाहारक केटला ? उत्तर-सात अपर्याप्ता ने एक सहीनो पर्याप्तो पम श्रणाहारकमा साने, थने थाहारकमा १४ नेद खाने ॥६॥जीवना १५ जेद तेमा मनसहित केटला? अन मनरहित केटला ? उत्तर-मन सहित तो एक १४ मो थने मनरहित मछि १४ नेद खाने॥॥जीवना १४ नेद तेमा गर्नज केटला ? थने श्यणगर्नज केटला ? उत्तर- गर्नज घे तेरमो ने चौदमो, थनेचणगर्नजमां तो चौद खाने।जीवना १४ जेद तेमा साश्वता केटला ? चने श्वसाश्वता केटला ? उत्तर-साश्वता तेर नेद साजे, ते एक १३ मो जेद वर्जिने, श्रने श्रसाश्वतो पक १३ मोज नेद लाने ॥ ॥ जीवना १४ नेद् तेमा प्रत्येक केटला ? ने साधारण केटला ? उत्तर-साधारणमा चार नेद पहेवा खाने, श्वने प्रत्येकमा १४ जेद पाने ॥१०॥ए दस प्रभ ॥ वाटे वेहेता जीवने शरीर केटला लाने ? उत्तर-तेजस १, कामण १, प घे शरीर लाने ॥१॥ वाटे वेहेता जीवने जोग केटमा खाने ? उत्तर-एक कार्मण काय जोग ॥२॥ वादे रहेता जीवने उपयोग केटला लाने ? उत्तर-मन पर्यवहान र, चतुदर्शन २, ए ये यर्जिने घाफी १० उपयोग खाने ॥ ३॥ वाटे वेहेता जीवने गुणगणां केटसां लाने ? उत्तर-पहेसु, बोजु थने चोयु ए प्रण लाने ॥४॥ वाटे वेहेता जीवने प्राण फेटला ? उत्तर- एक थायुप्यप्राण ॥५॥ एक भागळीना टेरवामां जीवना जेद केटसा? उत्तर-त्रण पफेन्डियना घेद, एक सझीनो पर्याप्तो एम ३नी नियमा वीजा थपर्याप्तानी भजना जाणवी ॥६॥ हायनी मुट्ठीमा जीपना भेद केटला ? उत्तर-पांच नेद चार स्थावरना द, एक सझीना पर्याप्तो एम ५ नेद खाने ए ५नी नियमा थने शप अपर्याप्तानी जजना ।। ७ ॥ चार जापामा सत्य १, थसत्य २, ए वे पर्याप्ति (पूरी नापा ) मिश्र, व्यवहार २, वे यपर्याप्ति (अधूरी जापा)॥ ७ ॥ सौधर्म देवखोके जीवना १४ नेद तेमा केटसा नेद खाने ? उचर- नेद चार पहेला अने सज्ञीना २, ए उ लाने ॥ ए॥ एमज रयण प्रनामा उ द लाने ॥ १०॥ ए प्रभ १०॥ एक थागळीना टेरयामा प्रदेश केटखा खाने? उत्तर-पफ पोताना जीवना यसख्याता प्रदेश लाने एम शनसा जीवना प्रदश खाने ते जीययो प्रदेश सग्यातगुणा व्यधिक लाने ॥॥ याफाशप्रदश उपर यजीयना रुपमा नेद खान ? उनर-नर नद धर्मास्तिफायनो देश १, प्रदश २, यधर्मास्तिकायना २. गुदगणना ४ यने एक थयाप्तमयना गम ए नेद खाने ॥२॥ थखोकमा थजोगना पद फटामा पान? उत्तर-याफाशास्तिफायनो देशर, प्रदेश २, लाने ॥३॥ जीयन मानायटली? यने पिनाक्टला उत्तर-मातापकथने पिता घणापाचमेश्रारेनिय ठामादिय। फेदमा पान? उत्तर-जो, पीजो अन चोयो पत्रण लाने ॥५॥ नियगमा नियो गए पुमायनु साहरण न याय,गामी पाचनु मादरण याय ॥६॥ पद सघयागनो धणी मराने टरतामा जाय ता परेमा चार दरसोक सुधी जाय पाचम, नह पहला ५ सयानो पणो जाय सानम यातम पदेखा ४ सघयानो भणी जाय नरमे, रसमे, यग्यारमे थने पारम दरग्नाके पहामा ३ सयानो वणी जाय नर प्रेपेयके पद्देना घे मश्यणनो भणी जाय राम यनुत्तर रिमाने तथा मोगमा एक पहना सधयानो धणी जाय ॥ ॥ पधे 74 ने शु? ना १ ॥ घट पण यधे नदि ते शु? थायुप्य ॥ घटे पण बम ने वधे .
पण खरु ते गु? मनना परिणाम ॥ ३॥ न वधे न घटे ते शु? तीर्थको भाव दीवा ते ॥४॥ पळी यौजा चार नागा-वधे पण घट नहि ते शु? सिद्ध जगवत ॥१॥ घटे पण वधे नहि ते शु? जव्यजीव ॥ २ ॥ घटे ने वधे ते शु? पभिवाइ समदृष्टि ॥३॥ न वधे न घटे ते शु? यत्नव्य जीव ॥ ४॥ पाच इपियना सगण ॥ श्रोनेडियनु सगण कलबु फुलनु ॥१॥ पशु नियनु सगण मसुरनी दाळनु ॥२॥ रसेप्रियनु सगण ठरपसानु ॥३॥ घाणप्रियनु सण नाविनी कोपळीनु ॥४॥ स्पशजियनु सगण नाना प्रकारनु ॥५॥ पाच इंजियना विपय कहे ते ॥ श्रोत्रंपियनो विषय १२ जोजननो ॥१॥ चजियनो विपय खाख जोजननो ॥२॥ नासिका ॥ ३ ॥ जीन ॥४॥ स्पर्शघिय एप्रणेनो विपय नघ जोजननो ॥ ५ ॥ जीवतत्व चौद राजखोकमाहे साने ॥ १॥ श्रजोवतत्व लोक थ खोक मांहि लाने ॥ २ ॥ पाप १, थाश्रव २, वध ३, ए खोफ थाखामांदि खाने ॥ ५॥ पुण्यतत्त्व देशे उणा चौद राजलोकमांहि खाने, 'सोगदेसेय घायरा' इति वचनात् ॥ ६॥ सवर 3, नीर्जरा ७, ए वे त्रिग खोकमां खाने ॥ ७॥ मोक्तत्त्व थढी छोपमाहि लाने ॥ए ॥ समकितनु जाजन जीव ॥ १॥ जीवनु नाजन श्रजीव ॥२॥ अजीवनु नाजन खोफ ॥ ३॥ लोफनु नाजन थलाफ ॥४॥श्रलोकनु भाजन केवलज्ञान, केवखदर्शन ॥५॥ उगी उगीने जग्या ते परत महाराजा ॥१॥ उगीने श्राथम्या ते बह्मदत्त चक्रवर्ति ॥२॥ थायमीने उग्या ते हरकेशी अणगार ॥३॥श्वाथमीने थाथम्या ते कालसूरीया कसा ॥४॥ ए चोनगी गणांगे वे ॥ पापनु कुटुव कहे ॥ पापनी माता हिंसा ॥१॥ पापनो घाप खोज ॥ २॥ पापनो नाइ जूठो ॥ ३ ॥ पापनी पेन तृष्णा ॥४॥ पापनी स्त्री माया ॥५॥ पापनो दोफरो साखच ॥ ६ ॥ पापनी दीकरी कुबुद्धि ॥ ७ ॥ पापनु मूळ क्रोध ना॥ हवे जुदा जुदां अन्योनां सठाण कहे ते तमकानु सठाण गामानी उधनु ॥ १ ॥ छायानु सगण पेटीनु ॥२॥ अलोकनु सगण पोसा गोळानु ॥३॥ अधोलोकनु सगण त्रापानु ॥ ४॥ प्रिठा खोफनु सगण झालरनु ॥५॥ नर्सलोफनु सगण मृदगनु ॥ ६ ॥ दिवसनु सठाण मोतोनी खटनु ॥ ७॥ दिशानु सगण गामानी उधनु ॥ ७॥ पृथ्वीनु सगण मसुरनी दाळनु ॥ ए॥ पाणीनु सगण पाणीना घिउनु ॥ १० ॥ थग्निनु सगण सुश्ना जारानु ॥ ११॥ वायुनु सगण वजापताकानु ॥ १२॥ वनस्पतिनु सगण नाना प्रका रनु ।। १३ । प्रसकापनु सठाण नाना प्रकारतु ॥ २४ ॥ थविधीप माहिला घममा, सूर्यनु सगण असामवानु ॥ १५ ॥श्रदि छीपघाहिरसा चञ्जमा सूर्यनु सगण पाकी श्टनु ॥ १६ ॥ पाठ फरस काया उपर फई ठे ॥ खरखरो फरस ते पगना तळा ॥१॥ सुहाळु ते ताळवु ॥ २ ॥ नारे ते हामका ॥ ३ ॥ इळवो ते केश ॥ ४॥ टाही ते काननी बुट ॥ ५॥ उनी ते ताती ॥ ६ ॥ चौगटो ते नाकनी मांमी ॥ ७॥ सूखो ते जीननो फरस ।। ॥ नारकीनो जीन काळ करीने जघन्य उत्कृष्ठो केटले थातरे जश्नपजे ? उत्तर- जघन्य हजार जोजन झाझेराने थोतर उपजे ते फेम? पछेषी नरफनो जीव काल करीने-महा पाताल कमशा साख जोजनना खोया पदोळा ठे, ने इजार जोजननी ठीकरी जामी लेतेने देदीने पाताल कमशामा जळचरपणे उपजे, उत्प्टो मिठो स्वयरमणसमुनमा यने उचो मेरुनी वावमीमां उपजे ॥ ७॥ नवनपतिथी वीजा देषखोकना देवता काम करीने जघन्प उकृष्ट केटले वातरे उपजे ? उत्तर-जघन्य तो श्रोगुखना असण्यातमा मागे पोतानी शय्याना थानूपणमांहि पृषीकायपणे उपजे, उत्कृष्टो नीचो सातमी नरकना देवला चरिम प्रदेशमा निठो स्वयजूरमणसमुपनी वेदोकामा श्चने उचो इसोपनारामा उपजे ॥२॥ त्रीजा देवखोकथी चाउमा देवलोकना देवता काल करीने जघन्य उस्कृष्टा केटले थांतरे उपजे ? उत्तर, जघन्य यांगुक्षना असख्यातमे जागे उपजे ज्यारे पमगवननी वावमीमा याउमा देवलोक सुधीना देवता जल अवगाहीने क्रीमा करता थाउखु श्रुटे तेयारे समय पुरो यये माउलीना गर्जपणे उपजे, अथवा पूर्वनयनी मनुष्यपणानो स्वीथो घणो स्नेह करी, थतिरागे करीने ते नोनो स्पर्श करे, त्यारे प्रदेश प्रवेशतो काल करे ते गर्नमाहि पुरपनु वीर्य इतु ते त्यां उपजे नीचो तो महापाताल कलशा लाख जोजनना , तेना प्रण जाग करीए तेना सडथी नीचेना भागमा मच्छपणे उपजे विठो स्त्रयनूरमण समु जमा उपजे ॥३॥ नवमा देवखोकधी सर्वार्थसिजना देवता कळ करीने जघन्य उस्कृष्टा केटखे थातरे उपजे ? उत्तर-जघन्य तो विद्याधरनी श्रेणीमां नीचो हजार जोजननी विजय चमी ठे तेमा थने त्रीबो मनुष्यक्षेत्रने थते उपजे ॥ ४ ॥ श्री साधुजीनी अवगाहना उस्कृष्टी ५०० धनुष्यनी, थायुष्य देशे उणु पूर्व क्रोमनु देशवती श्रावकनी अवगाहना १००० जोजननी मानखानी अपेकाप, थायुष्य देशे उणु पूर्व मोमनु मरुदेवा मातानी अपेक्षाए ॥ ५ ॥ केवलीनी शवगाइना त्रण लोक प्रमाये केवल समुदघातनी थपेक्षाए थायुष्य देशे उणु पूर्व क्रोमनु ॥ ६ ॥ थाखा लोकमां हि थजी बना भेद केटला ? उत्तर-श्वम्यार नेद खाने धर्मास्तिफायनो देश १, प्रदेश २, अधर्मा स्तिफायनो दश १, प्रदेश २, थाफाशास्तिकायनो देश १, प्रदेश ५ कासनो १, पुद्गपना ४, एम ११ जेद खाने ॥ ७ ॥ थलोकमां थजीवना वे जेद लाने देश १ प्रदेश २, प'चे साल ॥ ॥थदिछीप घाहिर काल वर्जिने वजीवना २० जेद लाने ॥ ॥ अव्य १, देघ २, काल ३, नाव ४ ए चारमा सूक्ष्म घणो कोण ? ने थोमो कोण ? उत्तर-सर्वथ) योमो सूक्ष्म काल १, तेथी क्षेत्र सूक्ष्म २, तेथी अन्य सूक्ष्म ३, तेथी नाव सूदम ले ॥ १० ॥ परमाणुनु परमाणुपणे जो पुद्गल रहे तो कटलो काळ रह ? उत्तर-श्रसन्यासो काळ रहे ॥ ११ ॥ जे श्राकाश प्रदशे परमाणुथो इता ते फरीने तेज थाकाश प्रदेशे पाग याये तो फेटसे काळे आवे? उत्तर-श्वसख्याते काखे ॥ १५ ॥ श्वजोगी घणा ? के श्रणा हारक घया? उत्तर-थणाहारक घणा ते वाटे वेहेता थशाहारफ ले माट ॥ १३ ॥ वाटे वेहता जीव घणा ? के सिद्ध घणा ? उत्तर-वाटे वेहेता जीव घणा निगोद ले माटे ॥१४॥ ॥ इति जीवना चौद नेदनी चर्या सपूर्णा ॥ जीवना ५६३ मेद ॥ ॥ श्रथ श्री ५६३ नेद जीवना के सेनी चर्चा ॥ गाया-वेय १ दिग्यि ५ पक्षाचे ३, सासए ४ सन्नि ५ चवणे ६ खेस्सा ७॥ जोगे सरीरे ए मणसहीए १०, दिविगोयरे ११ गनला १५ नाखिए चेव १३ ॥१॥ आया १४ मरणे १५ समुग्घाए १६, पजा १७ विलग श्रणाये २७ हिनाणेय १५॥
८२ नदिसण २० परिच २१ सावग श्र, गुणगणे २३ खोया २४ ऽसोए २५ ष ॥२॥ जीवना ५६३ नेद माहि १४ नेद नारकीना, ४0 नेद तिर्यपना, ३०३ नेद मनुष्यना, रए नेद देवताना ए सर्व मळी ५१३ नेद पाय स्त्रीवेदमा ३४० नेद लाने, ते ५ सही तिर्यवना थप्रजाप्ता ने प्राप्ता ए १०, तथा मनुष्यना १०१ गर्नज मनुष्यना अप्रजाप्ता ने प्रजाप्ता ए २०२ मनुष्यना धने देवताना ६४ जेद प्रथम जातिना वीजा देवलोक सु धीना थप्रजाप्ता ने प्रजाप्ता ए १२७ देवताना सर्व मळी ३४० नेद खाने ॥१॥ पुरुष वेदर्मा ४१० नेद खाने, तेसशी तिर्यचना १० जेद, गर्नज मनुष्यना २०५ नेद, देवताना १९८ भेद सर्व मळी ४१०द खाने ॥२॥ नपुंसक वेदमा १५३ नेद लाने ते १४ नेद नारकीना, ४ जेद तिर्यंचना, मनुष्यना जुगलीया वर्जिने १३१ नेद, सर्व मळी १७३ जेद लाने ॥ ३ ॥त्रणे वेदमा ४ नेद साने ते सझी सिर्यचना १० नेद, १५ कर्ममि मनुष्यना थप्रजाप्ता ने प्रजाप्ता ३५, सर्व मळी ४० नेद खाने ॥४॥ समकित एकसामा पाच अनुत्तर विमानना थप्रजाप्ता ने प्रजाप्ता ए १७. नेद खाने ॥ ५॥ समुच्चय समकितीमा सो २३ नेद लाने SERIES ते १५ नेद नारकीनामाथी सातमो नरकनो अप्रजाप्तो वज्यों, शेष १३ नेद नारकीना, ५ सझी तियेच पचेंधियना अप्रजाप्ता ने प्रजाप्ता ए १० नेद, ५ असंझी तिचना श्वप्र जाप्ता, ३ विगछियनाथप्रजाप्ता ए २० नेद तियेचना, २५ कर्मचूमिना अधजाप्ता ने प्रजाप्ता ३० ने त्रीस कर्मभूमिना अप्रजाप्ता ने प्रजाप्ता ए एच मनुष्यना ने देवतामाहि १५ परमाधामी ने त्रण किस विपी ए १७ वर्जिने शेष १ जाति दवताना श्वप्रजाप्ता ने प्र जाप्ता ए १६५ जेद दवताना सर्व मळी २७३ जेद पाने ॥ ६॥ मिथ्याष्टिमा २७० लेद खाने ते मी नरकनो अप्रजाप्तो ने तियेचना ३० जेद ते २५ एकेन्धियना भने ५ श्वसझी तिर्यंच पचेन्नियना, ३ विगन्नियना ए ७ ना प्रजाप्ता ने मनुप्यना २१३ नेद ते १०१ समुर्विम मनुष्यना थप्रजाप्ता ने ५६ अतरछीपाना थप्रजाप्ता न प्रजाप्ता ११५, ए सर्व मळी २१३ नेद मनुष्पना, ने देवताना ३६ नेद ते १५ परमाधामी, ३ किस विपी ए १० ना थप्रजाप्ता ने प्रजाप्ता ए ३६. एम सर्व मळी ७० नेद खाने ॥७॥ समामिथ्यास्वष्टि मां एव जेद ते ७ नरफना प्रजाप्ता, ५ सझो तिर्यच, १५ कर्मजू मिना मनुष्य, देवतामाहि १५ परमाधामी, ३ किस विषी, ए ग्रेयेयक, ५ अनुचर विमानना ए ३५ वर्जिने शेप ६७ जा तिना देवता ए सर्य मळी ए४ जेद प्रजाप्ताना खाने ॥ ७॥ घे दृष्टि ते समकित दृष्टि ने मिथ्यात्वदृष्टि, ए २ दृष्टिमा १७ए नेद खाने ते पहेखी ६ नरकना अप्रजाप्ता ने ५ सझी तिर्यच, ५ असो तिर्यच, ३ विगखेन्द्रिय ए १३ ना थप्रजाप्ता, १५ कर्मभूमि मनुप्यना थप्रजाप्ता ३० कर्मचूमिना प्रजाता थप्रजाप्ता मळी ६० अकर्मनूमि ए ७५ जेद मनुप्यना, देवतामा १० जवनपति, १६ वाणव्यतर, १० जनका, २० ज्योतिषि, १२ देवलोक, ए खोकातिक ए ६७ दना थप्रजाप्ता ने ए अवेयकना प्रजाप्ता अप्रजाप्ता ए ए लेद देवताना सर्व मळी १७ए नेद खाने ॥ ए ॥ प्रणे दृष्टिमा ए नेद खाने ते समामिण्या सीनो माफक जाणवु ॥ १७ ॥ प्रजाप्तामा ५३१ नेद खाने ते ७ नरकना, २४ सिर्यचना, १०१ सही मनुप्यना ए एए चेद देवताना सर्व मळी २३१ भेद प्रजाप्ताना खाने ॥११॥ थप्रजाप्तामा ३३५ नेद खाने ते २३१ तो एना अप्रजाप्ता ने १०१ समुमि मनुष्यना अप जाप्ता ए ३३२ साने ॥ १५ ॥ साश्वतामा २५० नेद लाने ते ७ नारकीना प्रजाता, तिर्य
घमा दमाथी ५ सझी तियेचना श्वप्रजाप्ता पर्जिने शेष ४३ नेद तिर्यचना ने
सही तेना १०१ नेदना प्रजाप्ता, एए जातिना देवताना प्रजाप्ता ए सर्व मळी २५० नेद
खाने ॥ १३ ॥ अशाश्वतामाठि ३१३ जेद खाने ते ७ नरकना थप्रजाप्ता, ५ सझी तियें
चरा अप्रजाप्ता, १०१ समुर्विम मनुष्यना थप्रजाप्ता, १०१ सही मनुष्यना थप्रजाप्ता ए
२०२ मनुष्यना, एए जातिना देवताना थप्रजाप्ता, सर्व मळी ३१३ नेद खाने ॥१४॥
सज्ञीमा ४२४ जेद खाने ते १५ नेद नारकीना, ५ सझी तियेचना थप्रजाप्ता ने प्रजाप्ता
प १० तियेचना सझी मनुष्य १०१ ना थप्रजाप्ता ने प्रजाप्ता ए २०२ मनुष्यना ने ए नेद
दवताना सर्व मळी ४२४ नेद लाने ॥ १५ ॥ थसझीमाहि १३ए नेद लाने ते १०१
समुर्तिम मनुष्यना अप्रजाप्ता, ३० नेद तियेचना, ते 80 माथी १० नेद सझीना पर्ष्या,
शेप ३० जेद तियेचना, सर्व मळो १३ए जेद खाने॥१६॥पांचसे प्रेसवमादि पवे तो ३७१
जेद चवे नरकना प्रजाप्ता, एए दवताना प्रजाप्ता, ४ नेद तियेचना, ७६ जातिना
जुगलियाना थप्रजाप्ता वर्जिने शेष १७ नेद मनुष्यना, सर्व मळी ३७१ जेद साजे ॥१७॥
न चव तेमा १ए। भेद खाने ते ७ नरकना श्वप्रजाप्ता, एए देवताना अप्रजाप्ता, ६ जुगलियाना थप्रजाप्ता, सर्व १एर जेद न पवे तेमां खाने ॥ १०॥ घागली३ खेश्या तेमा प्रत्यक २ मा ४५ए नेद खाने ते नारकीना ६ द, ते एकेकी खेश्या प्रण त्रण नरके खाने तेथी, ४० नेद तियेचना, ३०३ जेद मनुष्यना,५१ जाति देवतानाथप्रजाप्ता प्रजाप्ता १०२, सर्प मळी ४एए भेद खाने ॥ १ए ॥ तेजुधेश्यामां ३४३ नेद खाने से चादर, पृथ्वी, पाणी, वनस्पति ए ३ ना थप्रजाप्ता, सज्ञी तिर्यंचना रनेद,सझी मनुष्यना २०५ नेद,६वजातिना दवताना श्रग्रजाप्ता प्रजाप्ता १२७,सर्व मळी ३४३ नेदखानेरा पनवेश्यामादि ६६ नेद खाने तेसज्ञी तियेचना १० नेद, १५ कर्ममूमिना थप्रजाप्ता प्रजाप्ता ३०, देवतामां घीजो किलविषी, प्रोजो, चोयो, पांचमो देवलोक ने ए खोकातिक ए १३ ना थप्रजाप्ता प्रजाप्ता २६ सव मळी ६६ जेद खाने ॥ २१॥ शुकल लेश्यामा ७ जेद खाने ते सझी तिर्यचना १० चेद, १५ कर्मऋमिना श्रप्रजाप्ता प्रजाप्ता ३०, ने देवतामाठि श्रीजो किस विषी १, बढयो ते घारमा देवसोक सुधी ७ देवसोक, ए अवेयक, ५ धनुचर विमान ए ना अप्रजाप्ता प्रजाप्ता ४, सर्व मळी ४ नेद साजे ॥ १२॥ ए श्यामा ४० जेद ते १० जेद सझी तिर्यचना ने ३० नेद मनुष्यना ते १५ कर्मचूमिना अप्रजाता ने प्रजाप्ता ३०, सर्व मळी ४ जेद खाने ॥ २३ ॥ श्यागली ४ वेश्यामा २७७ जेद खाने ते प्रथम ५१ जातिना देवताना थप जाप्ता ने प्रजाप्ता १०२, ने जुगलीयाना ७६ जेदना थप्रजाप्ता ने प्रजाप्ता २७२ ने बादर, पृथ्वी, पाणी, वनस्पति ए ३ ना थप्रजाप्ता ए सर्व मळी ५७ नेद खान ॥ १५ ॥ उदा रिक फाययोगमा ३५१ जेद खाने ते ३०३ जेद मनुष्यना, ४ जेद तिर्यचना ए ३५१ नेद खाने ॥ २५ ॥ उदारिक मिश्रयोगमाश्यप नेद खाने ते १५१ समुमि मनुष्य, २०१ सझी मनुष्यना थप्रजाप्ता, १५ कर्ममिना प्रजाप्ता, तिर्यचना २४ जेद अप्रजाप्ता बादर वायु कायना प्रजाप्तो ५ सझी तिर्यंचना प्रजाप्ता सर्वे मळी २५७ नेद खाने ॥ २६ ॥ पेक्रेय योगमा २३३ जेद खाने ते रए देवताना, १४ नेद नारकीना, ५ सझी तियेचना प्रजाप्ता, वादर वायुफायनो प्रजातो, २५ कर्म मिना प्रजाता, सर्व मळी १३३ जेद बाजे ॥ २७ ॥ येक्रेयना मिश्रमा २२ए नेद खाने ते पूर्वे २३३ नेद कमा तेमांधी ए प्रैवेयक, ५ थनुत्तर TV न च तेमा १ए। नेद खाने ते ७ नरकना थप्रजाप्ता, एए देवताना श्वप्रजाता, ६ जुगलियाना थप्रजाप्ता, सर्व रए द न च तेमां जाने ॥ १७॥ अागली३ खेश्या सेमा प्रत्येक २ मा एए जेद खाने ते नारकीना ६ नंद, से एकेको लेश्या त्रण प्रण नरके खाने तेथी, ७ जेद तियेचना, ३०३ लेद मनुष्यना, ५१ जाति देवताना थप्रजाप्ता प्रजाप्ता १०२, सर्व मळी ४५५ नेद पाने ॥ १५ ॥ तेजुखेश्यामा ३४३ नेद खाने ते बादर, पृषी, पाणी, वनस्पति ए ३ ना थप्रजाप्ता, सझी तिर्यंचना १०चेद,सही मनुष्यना२०२ नेद,६४ जातिना दवतानाथप्रजासा प्रजाप्ता १२,सर्व मळी ३४३ नेद खाने ॥३०॥पनवेश्यामा हि ६६ जेद माने तेसझी तिर्यंचना १० नेद, १५ कर्ममूमिना थप्रजाप्ताप्रजाप्ता ३०, देवतामां घीजो किलविषी, प्रोजो, चोथो, पाचमो देवताक ने ए खोकांतिक प १३ ना अप्रजाप्ता प्रजाप्ता १६ सव मळी ६६ नेद खाने ॥ २१ ॥ शुकस लेश्यामा नेद खाने ते सहो तिर्यचना १० नेद, १५ कर्मऋमिना थप्रजाप्ता प्रजाप्ता ३०, ने देवसामांहि श्रीजो किस विषार, उठ्यो ते चारमा देवलोक सुघी देवमोक, ए ग्रेवेयक, ५ अनुत्तर विमान ए ५५ ना अप्रजाप्ता प्रजाप्ता ४४ सर्व मळी ४ चेद खाने ॥ २२ ॥ ए वेश्यामा ४० द ते १० नेद सही तियेचना ने ३० जेद मनुप्यना ते १५ कर्मचुमिना थप्रजाता ने प्रजाप्ता ३७, सर्व मळी ४० नेद खाने ॥ २३ ॥ धागली ४ खेश्यामा २७ जेद खाने ते प्रथम ५१ जातिना देवताना श्रम जाप्ता ने प्रजाप्ता १०२, ने जुगलीयाना ६ भेदना थप्रजाप्ता ने प्रजाप्ता ११२ ने बादर, गुप्पी, पाणी, वनस्पति ए ३ ना थप्रजाप्ता ए सर्व मळी ५७७ जेद खान ॥ २४ ॥ उदा रिक काययोगमा ३५१ नेद साने ते ३०३ नेद मनुष्यना, जेद तिर्यचना ए ३५१ नेद खाने ॥ २५ ॥ उदारिक मिश्रयोगमाश्व नेद खाने ते १०१ समुर्दिम मनुष्य, १०१ सही मनुप्यना थप्रजाप्ता, १५ कर्मनुमिना प्रजाप्ता, तिर्यचना २४ जेद श्वप्रजाप्ता बादर वायु कायना प्रजातो ५ सझी तिर्यंचना प्रजाप्ता सर्वे मळी २४७ नेद खाने ॥ २६ ॥ वैक्रेय योगमा २३३ नेद खाने ते १ए७ देवताना, १४ नेद नारकीना, ५ सज्ञो तियेचना प्रजाप्ता, पादर वायुफायनो प्रजातो, १५ कर्मनूमिना प्रजाप्ता, सर्व मळी २३३ नेद पाने ॥ २७ ।। वैकेयना मिश्रमा २१ए जेद पाने ते पूर्वे ३३३ नेद कसा तेमाथी ए ग्रेवेयक, ५ धनुत्तर विमान, ए १४ ना प्रजाता? ते ७ नरफना थप्रजाप्ता, एए देवताना थप्रजाता, पद मित्रमा १५ कर्म मिना प्रजा एर भेद न पवे तेमा साजे ॥ १७॥ यागली३ वेश्या तेमां नेद खाने ते ३३२ थप्रजाप्ता नो नारकीना ६ जेद, ते एकेकी वेश्या प्रण प्रण नरके खाने सत्य मनादि ४ ने सत्य वचनादि मनुष्यना, ५१ जाति देवतानाश्चप्रजाप्ता प्रजाप्ता १०५, सर्व नारकी, १०१ सही मनुष्य, ५ सेजुखेश्यामा ३४३ भेद खाने ते वादर, पृथ्वी, पाणी, योगमा साजे ॥ ३१ ॥ व्यवहार कर तियेचना रनेद,सझी मनुष्यनाश्० नेद, ६४ जातिना फरा तेज ने ५ थसंझो तियेच ने मळी ३४३ नेद खाने ॥३०॥ पनवेश्यामा हि ६६ जेद साने खाने ॥ ३२ ॥ उदारिक शरीरमा ३५मेनाथप्रजाप्ता प्रजाप्ता ३०, देवतामा वीजो किलवियो, रए नेद देवताना वर्जिने शेप ३५१ लोकांतिक ए १३ ना थप्रजाप्ता प्रजाप्ता २६ सर्व मळी ते १एन नेद देवताना, १४ जेद नारणमा व जेद बाजे ते सही तियेचना १० जेद, १५ प्रजाप्ता, पादर वाठकायनो प्रजाप्तो ए। देवतामाहि प्रोजो किस विषो १, बठेथी ते धारमा मिना प्रजाताना खाने ॥३५॥ तेजस ५ थनुचर विमान ए १५ ना थप्रजाप्ता प्रजाप्ता ४४ ने ३४७ जेद खाने ते कार्मण काययोगनी खेश्यामा ४ जेद ते १० जेद सझी तिर्यचना ने ॥३०॥ मनसहितमा १२ नेद खाने ते थप्रजात ने प्रजाप्ता ३०, सर्व मळी ४ जेद खाने ३५१ जद खाने ते ७ नरकना अप्रजापनेद खाने ते प्रथम ५१ जातिना देवताना थप यर्जिन शेप ४३ नेद तिर्यचना, १०१ द नेदना अप्रजाप्ता ने प्रजाप्ता २७५ बादर, थप्रजाप्ता ए २०२, एए जातिना दवर, 'प्रजाप्ता ए सर्व मळी २७७ नेद खान ॥ २४ ॥ उदा नजरे थावे तेमा २२५ भेद साने तेते ३०३ नेद मनुष्यना, ४ नेद तियेचना ए ३५१ नेद ५ सझी तिर्यच, ५ असही तियेच, मा नेद खाने ते १०१ समुर्बिम मनुष्य, २०१ सही एम २२५ द लाने ॥४१॥ नजरे ना प्रजाप्ता, तिर्यचना २४ जेद थप्रजाप्ता धादर वायु सूक्ष्म एकेन्द्रिय ने साधारण वा. " प्रजाप्ता सर्वे मळी २४ नेद खाने ॥ १६ ॥ येक्रेय ॥ ४२ ॥ गर्नजमा २१२ नेद साने, देवताना, १४ भेद नारकीना, ५ सझी तिर्येचना प्रजाप्ता, ए सर्व मळी २२५ भेद साने " कर्मजू मिना प्रजाप्ता, सर्व मळी ५३३ जेद पाने ॥ २७ ॥ १एनेद देवताना, ३७ नेद खाने ते पूर्वे २३३ नेद कझा तेमाथी ए ग्रैवेयक, ५ श्रनुत्तर ठिम मनुष्य ए सर्वे मळी ३५१ नेद खाजे॥४४॥ त्रस नामोमांहि ५६३ जेद खाने ॥४॥ स्थावर नामीमा १५० नेद खाने ते १०१ समुर्बिम मनुष्य, १५ कर्ममिना थप्रजाप्ता प ११६ ने ३४ लेद तिर्यचना ते २५ एफेन्डियमाषी एक चादर वायुकायनो प्रजाप्तर वर्जिने १ एकेन्धियना, ३ विगलेन्द्रियना थप्रजाप्ता, ५ सझो तिर्यंचना थप्रजाप्ता, ५ असझी तिर्यचना थप्रजाप्ता ए ३४ तिर्यचना ए १५० नेद लाने ॥५६॥ ज्ञान थात्मामां २७३ जेद खाने ते सातमी नरकना थप्रजाप्तो वर्जिने १३ जेद नारकीना, ५ सझी तिर्य चना थप्रजाप्ता प्रजाप्ता ए १० ने ५ असझी तिर्यंचना थप्रजाप्ता ने ३ विगले मियनाथ प्रजाप्ता ए १० तियेचना, ने १५ कर्मचूमिना श्रप्रजाप्ता ने प्रजाप्ता ३०, ने ६० यफर्ममिना ने प्रजाप्ता ए ए मनुष्यना ने १५ परमाषामी, ३ किल विपी ए १० ना प्रजाप्ता ने अप्रजाप्ता ए ३६ नेद वर्जिने शेष १६५ नेद देवताना ए सर्व मळी २०३ वेद खाने ॥ ४ ॥ चारित्र थारमामा १५ फर्ममिना प्रजाप्ता लाने ॥ ४ ॥ शेष ६ यात्मामांदि ५६३ नेद खाने ॥४ए ॥ अप्रजाप्ता मरीने १७ए जेदमा जाय ते १०१ समुर्विम मनुष्य, शप्रजाप्ता नेद तिर्यचना, १५ कर्मचूमिना थप्रजाप्ता ने प्रजाप्ता ३०, ए २१ए नेदमाहि जाय ॥ ५० ॥ स्त्री मरीने ५६१ जेदमा जाय ते ५६३ मांधी सातमी नरकनो अप्रजाप्ता ने प्रजातो यर्जिने शेप ५६१ मा जाय ॥ ५१ ॥ पुरुप मरीने ५६३ जेदमांहि जाय ॥ ५५ ॥ नपुसक मरीने ५६३ दमाहि जाय ॥ ५३॥ वेदनीय समुद्घातमा ५६३ नेद खाने ॥५४॥कपाय समुद्घातमा ५६३ नेद खाने ॥ ५५ ॥ मारणातिक समुद्घातमा ३७१ जेद साने ते च व्यानी माफक जाणवु ॥५६॥ चैकेय समुद्धातमा शए खेद साने, ते पैकेय मिश्रयोगनी माफक जाणतु ॥ ५ ॥ तेजस समुद्घातमा १०५ जेद ते ५ जातिना देवताना प्रजाप्ता ने १५ कर्मनूमिना प्रजाप्ता, ५ सझी तियेचना प्रजाप्ता ए २०५ नेद लाने ॥५०॥ थाहारक समुद्घात्तमा १५ कर्मभूमिना प्रजाप्ता लाने ॥ ५ए ॥ केवल समुद्घातमा १५ कर्मनूमिना प्रजाप्ता लाने ॥६० ॥ वागली ३ पर्यायमा ५६३ नेद खाने ॥६५॥ श्वासो- पास पर्यायमा ५५२ द लाने ते एकेन्धियना ११ अप्रजाप्ता वर्ष्या, शेष ५५२ नेद साचे ॥६५॥ नापा पर्यायमा ३५६ जेद पाने ते ७ नरकना ने ५ सझी तिर्यचना अन जाता ने प्रजाप्ता १०, असही तिर्यंचना ५ नंद ने ३ विगन्धियना ए ना प्रजाप्ता ने सझी मनुष्यगा २०५ जेदने एए जासिना देवताना प्रजासा एम ३२६ जेद खाने ॥ ६३ ॥ मनः पर्यायमा १२ जेद माने ते ७ नारफीना, ५ सही तिर्यच ने १७१ सझी मनुष्य, एए जा तिना देवता, ए सर्वना प्रजाप्ता १२ मा मन पर्याय खाने ॥ ६४ विजग ज्ञानमा २२२ चेद खाने ते ५ अनुचर विमानना थप्रजाप्ता ने प्रजाप्ता ए २० जेट पा, पाकी १७ जेद देवताना ने २४ खेद नारकीना, २५ कर्मचूमिना मनुष्यना प्रजाप्ता ने ५ सझो तिर्य चना प्रजाप्ता ए १२ घेद खाने ॥६५॥ श्रय विज्ञानमा १० द लाने ते १५ परमा धामी, ३ किस विपी ए १७ वर्जिने शेप ०१ जातिना देवताना अप्रजाप्ता ने प्रजाप्ता १६५ ने १३ नारकीना ते १५ मांधी सासमी नरकलो शप्रजाप्ता पजिने १३ नेद ने १५ कर्मचू मिना थप्रजाधा ने प्रजाप्ता ए ३० ने ५ सझी तिर्थचना प्रजाप्ता ए १७ जेद पाने ॥६६॥ अवधिदर्शनमांहि २७ जेद खाने तेमा रए जेद देवताना, २४ नेद नारकीना, २५ कर्मचामिना अप्रजाप्ता ने प्रजाप्ता ३० ने ५ सझी तिर्यचना प्रजाप्ता ए सर्वे मळी २४७ द साजे ॥६॥ परितमांहि ५६३ नेद जीवना लाने ॥ ६७ ॥अपरितमा५५३ नेदजीवना खाने ते ५६३ माथी ५ अनुत्तर विमानना थप्रजाप्ता ने प्रजाप्ता १० नेद पा, शेष ५५३ जेद खाने ॥ ६ए । सजतिमा १५ कर्मचूमिना प्रजाप्ता बाने,॥ ७० ॥ सजतासजतिमा १५ कर्मभूमिना प्रजाप्ता ने ५ सही तियेचना प्रजाप्ता ए २० द लाने ॥ ३१॥ असजतिमा ५६३ जेद खाने ॥ ७५ ॥ पछेखा गुणगाणामा ५५३ नेद लाने ते ५ अनुत्तर विमानना थप्रजासाने प्रजाप्ता १० दवा, शेष५५३ जेद खाने॥ ३३ ॥सास्वादान गुणगणामा १३ नेद खाने ते १३ जेद नारकीना, ते २५ माथी मी नरकनो अप्रजातो पज्यों ने १० नेद तिर्यचना, ३ विगछिय ने ५ श्वसज्ञी तियेच पचेन्द्रिय ए ७ ना अप्रजाप्ता ने ५ सझी तियेच पचेन्धियना अप्रजाप्ता ने प्रजाप्ता ए १० ने पूर्व कमा ते ए १७ ने १५ कर्मचू मिना अप्रजाप्ता ने प्रजाप्ता ए ३० ने देवता एए जातिमाहिथी ५ परमाधामी, ३ किस विपी, ५ अनुचर विमान ए २३ वर्जिने शेष पद जातिना थप्रजाप्ता ने प्रजाप्ता ए १५५ भेद देवताना, ए सर्व मळीने २१३ नेद खाने ॥ ७ ॥ मिश्र गुणवाणामा ए४ नेद खाने ते ७ नारकीना प्रजाप्ता, ५ सझी तियेचना प्रजाप्ता, १५ कर्मनूमिना प्रजाप्ता ए २७ ने६७ नेद देवताना ते एए नेदमाथी १५ परमाधामी, ३ किस विपी, ए प्रेषयक, ५ अनुत्तर वि मान ए ३२ जेद वर्जिने शेप ६७ भेदना प्रजाप्ता ए सर्व मळी एजेद साले ॥ ५ ॥ चौधे गुणवाणे २४५ नेद खाने ते पूर्वे समकितमा २५३ जेद कमा डे, तेमांची ५ थमझी तिर्यंच पचेन्जिय ने ३ विगछिय ए पद वर्जिने शेष ५४५ जेद खाने ॥७६ ॥ पांचमे गुणवाणे २० नेद पाने ते १५ कर्मचूमिना, ५ सझी तिर्यंच पंचेन्द्रिय ए २० ना प्रजाप्ता साजे ॥ ७ ॥ वठे गुणगणेधी चौदमा गुणवरणा सुधी १५ कर्मनमिना मनुष्यना प्रजाप्ता खाने ।। उ ॥ श्रजीवना ५६० जेद तेमा छोफमा ५५७ लाने ते धर्मास्तिकाय अधर्मास्ति काय ए वना देश अने थाकाशास्तिकायनो स्कध ए ३ नेद वा, शेप ५५७ नेद खाने ॥ ॥ अखाकमा जीवना ५६० जेद माहिला ६ जेद लाने, ते श्राकाशास्तिकायना देश १, प्रदेश २, धन व्यादि ४ नेद, ए ६ द लान ७ ॥ धर्मास्तिकायना स्कधमा थजीवना ११ नेद खाने ते धर्मास्तिकायनो स्कप , प्रदेश २, अधर्मास्तिफायनो स्कध ३, प्रदेश ४, श्राकाशास्तिकायनो देश ५, प्रदेश ६ ने श्रझा समयकास 5 ने पुद्गलास्ति कायनो स्कध , दश ए, प्रदेश १०, परमाणु पुद्गल ११, ए ११ भेद खाने ॥ १॥ व बीकोप बहार घजीवना १० नेद साने ते पूर्वे २१ नेद कसा तमाथो काम वज्यों ॥२॥ धर्मास्तिकायना देशमा ११ जेद, ते धर्मास्तिकायनो देश १, प्रदेश २, श्रधर्मास्तिकायनो दश ३, प्रदेश , वाकाशास्तिकायनो देश ५, प्रदेश ६, कास ७, पुद्गलना ४ नेद ए ११ जेद लाने ॥ ३ ॥ धर्मास्तिकायना प्रदेशमा नेद साने ते धर्मास्तिकायनो प्रदेश १, श्रधर्मास्तिकायनो प्रदेश २, आकाशास्तिकायनो प्रदेश ३, काल ४, पुद्गलना ४ जेद पश्चात द लाने ॥ ॥ श्रधमास्तिकायना स्कधमा ११ नेद साने ते धर्मास्तिकायनी माफक जाणवु ॥ ५ ॥थाकाशास्तिकायना स्कधर्मा ११ नेद खाने ते धर्मास्तिकायनो स्कध २, प्रदेश २, अधर्मास्तिकायनो स्कध ३, प्रदेश ४, आकाशास्तिकायनो स्कध ५, प्रदेश ६, कास , पुद्गलना ४ नेद, सर्व मळी ११ नेद खाने ॥ ६ ॥ श्राकाशा स्तिकायना २ नेद, खोकाकाश १, खोकाकाश २ ते खोकाकाशना र नेद, सपूर्ण र, अधुरो २ ते स पमा ११ जेट बाज त धर्मास्तिकायनो देश र, अधर्मास्तिकायनो देश २, आकाशास्ति कायनो स्कघ ३ ए ३ जता पाकी ११ खाने ॥ ॥ अधुरामा ११ नेद लाने ते धर्मा स्तिकायनो स्कध १, थधर्मास्तिकायनो स्कघ २, श्वाकाशास्तिकायनो स्कष ३, ए ३ जतां घाफी ११ नेद खाने ॥ ७ ॥ थलोकाकाशमा जेद खाने, ते श्थाकाशास्तिफायनो देश १, प्रदश २, ए २ सान ॥ए ॥ श्राकाशास्तिकायना प्रदेशमा नेद ते धर्मास्तिकायना प्रदशनी माफक जाणवु एR ॥ इति जीयना ५६३ नेदनी चर्चा सपूर्णा ॥ महादडक॥ 0232 ॥ थय धो जीवाजीवा निगमादिसूबधी महादमकना बोल लिख्यते ॥ गाथा-दमग १ खेस्सा २ हि ३, उग्गाइण ४ विरहकालए ५ घेव नवण ६ गयाग, सघयण ७ सगण ए वेदे १० य ॥१॥ जोगु ११ वयोग १५ सरीरं १३, गुणगण २४ दिही १५ य पजाची १६ ॥ पाणे १७ नाण थनाणे १७, सजश् १ए माश्ण थाहारे २० ॥२॥ थाहार २१ श्याहारे २५, कायलिश् २३ समुग्धाय २४ कुलकोमी २५ ॥ बाउ २६ देव २७ जराय २७, परिग्गठ्य श्ए सतर ३० चेव ॥३॥ ए ३० द्वार ते २४ दमक उपर उतारवा ते कहे जे ते मध्ये प्रथम दमकछार कहे वे साते नरफना दमक १ तेना नाम-घमा १, वसा २, शिखा ३, श्रजना ४, रिग ५, मघा ६, माघव हवे तेनां गोत्र कहे डे रत्नप्रना १, शर्फरप्रना २, वासुप्रना ३, पफ प्रना ४, धूमप्रना ५, तमप्रना ६, तमतमाप्रना ७ ॥१॥ दस दमक नवनपतिना कहे डे असुरकुमार , नागकुमार २, सुवनकुमार ३, विज्जुकुमार , थनिकुमार ५, छीपकुमार ६, उदधिकुमार , दिशाकुमार , पवनकुमार ए, स्तनितकुमार १० ॥११॥ पृथ्वी काय १५, थपकाय १३, तेउकाय १४, वायुकाय १५, वनस्पतिकाय १६॥ सत्तरमो दमक घे इजियनो ते कोमा, पोरा, खसीया, फरमियां, सरमिया, जलो, बीप, शख प्रमुख ॥१७॥ तईडियनो १० मो दमक ते कोमी, कयवा, ज, कीमा, मकोमा, धीमेष, चांचर प्रमुख ॥ १७ ॥ चरिंजियनो दमक रए मा ते नमरा जमरी, माखी, मास, टीम, वगा प्रमुख ॥ १५ ॥ तिर्यच पन्छियना दमक २० मो तेमा जलचरना ५ जेद मच्छ कच्छ गाहा मगर सुसमार प्रमुख स्थलघरना ४ जेद-एगखुरा १, दोखुरा , गमीपया ३, सणहपया ४॥ खेचरना ४ नेद-चर्मपखी १, रोमपखी २, विततपस्वी ३, समुगपखी ४ ॥ उरपरना ४ जेद-सर्प १, थजगर २, महोरग ३, आसालीया ४ ॥ तुजपरना अनेक नेद ते घो । उदर खीसकोसी प्रमुख ॥ २०॥ मनुष्यनो दमक २१ मो ॥ ते मनुष्यने उपजवानां ठाम पदर फर्मनूमि ते थसि मसि फसि पहधी याजीविका करे, श्रने मोकमार्गने साधे ते ५ जरत,५ एरवत, ५ महाविदेह ए१५॥१॥ अफर्मजुमिते असि,मसि, कसि ए त्रण प्रकारनो व्यापार नथी भने १० प्रकारना कल्पवृक्ष करी जीवे ते ५ हेमवय, ५ एरणवय, ५ हरि वास, ५ रमफवास, ५ देवकुरु, ५ उत्तरफुरु ए ३० अकर्मतिमि ॥" उप्पन धतरहीपा CERIXBEEEEEE ते जबूद्वीप मध्ये हेमवत पर्वत थने शिपरी पर्वत थकी पूर्व शने पश्चिमनी दिशिए स मुज मध्ये व घे दाता नोकळी , ते एकेकी दाढाए सात सात छीपा ले तेनु मान प्रथम ३०० जोजन गया पठी पहेलो छीपा डे तिहाथकी ४ जोजन गया पठी चीजो हीपो वे तिहाथकी ५०० जोज्न गया पली बीजो छीपो वे तिहाथकी ६०० जोजन गया पठी चोथो छीपोउ तिहाथकी 300 जोजन गया पठी पाचमो छीपो ने तिहां यकी पण जोजन गया पली नछो छीपो तिहाथी ए00ोजन गया पठी सातमो छीपो ए रीते दाढाए ५६ शतरहीपा के सर्वे अढीजीप मध्ये जाणवा ॥३॥ हवे समुर्विम मनुष्य उपजवाना गम कहे जे ॥ उच्चारेसुवा ', पासवणेसुवा २, खेलेसुवा ३, सघाणेसुवा ५, वतेसुवा ५, पितेसुवा ६, सोशिपमुषा , पुपसुवा ७, सुकेसुवाए, सुक पोग्गल परिसामीयेसुवा १०, विगयजीव क्सेवरेसुवा ११, श्योपुरिससजोगेसुवा १२, नगर निधम्मणेसुवा १३, सव्वेसु चेव थमुश्ठाणेसुवा १४ ॥ ४ ॥२१॥ २५ मो वापव्यतरनो दमक तेनानाम-पिशाच १, नूत ५, यक्ष ३, राक्षस ४, किंनर ५, किंपुरुष ६, महोरग ७, गाधर्व प, थाणपनी ए,पाणपन्नी १५, इसीवाइ ११, जुयवाइ १५, कदलीय १३,महाकदीय १५, कोहन
२५ पयगदेव १६॥ ए सोलनी काय व्यतरनी जातश्चने एकेकीनी काये वे जाणवा ॥२॥
२३ मो ज्योतिषीनो दमक ते चा १, सूर्य २, ग्रह ३, नक्षत्र ४, तारा ५, ए ५ चर थठी
जीप मध्ये , न पाच थचर थढीछीपनी पाहीर डे ॥ २३ ॥ २४ मो विमानीक देव
ताना दमक ॥ सुधर्म १, शान २, सनत्कुमार ३, माहे ४, मझलोक ५, लातक ६,
महासुक ७, सहसार , आणत ए, प्राणत १७, थारण ११, थच्चुय १५ ॥ हवे नव वे
यक कहे ते ॥ नरे १, सुनदे २, सुजाए ३, सुमाणसे ४, पियदसणे ५, सुदसणे ६, थामोहे
9, सुपमिन ए, जसोधरे ए ॥ हवे पाच अनुत्तर पिमानना नाम कहे रे ॥ विजय
विजयत २, जयत ३, थपराजित ४, सर्वार्थसिरू ५॥ सर्वार्थसिक उपरे सिप्पन्नारा पृथ्या
ते सिफिशिला तना वार नाम ले ते कद ठे ॥ इसीतिवा १, इसीप्यनारा तिवा २, तणु
तिवा ३ तणुतणुतिवा ४, सिमितिबा ५, सिकालयसिषा ६, मुतीतिया , मुत्तात्रयतिषा
७, सोयगेतिवा ए, खोगयुनियातिया १०, खोगपमिबोहेतिया २१, सवपाणनुयजीव सत्त
सुहावदेतिया ॥ १२ ॥ २४ ॥
HEREPRENSAAN इसे पीजु वेश्याहार कहे ॥ गाया-नामर वरण रस३ गध४, फास५ परिणामद खक्खपण सगण॥ विश्ए ग१० चवणार बारा, एगारस स्साण णेया ॥१॥ ५ ११ घार ब वेश्या उपर उतारवा तेमा प्रथम नामद्वार कहे छे कृष्णसेश्या १, नीस लेश्या २, कापोत लेश्या ३, तेजु खेश्या ४, पग्न वेश्या ५ अने शुक खेश्या ६ ॥१॥ वीजु वेश्याना वर्णनु द्वार कहे नाव लेश्यामा एके वर्ष नथी ऽव्य वेश्यामां कृष्णादि पाचे वणे होय तेमां कृष्ण खेश्यानो वर्ण (रग)-जेवा पाणीसहित मेघ काळा, जवा पागाना शींगमां काळां, जेवा धरीठानां घीज काळो, जेवु गामानु खजन, यांखनी कीकी ए करतां अनन्तगुणो काळो॥१॥ नील खेश्यानो वर्ण-जेवु अशोक वृक्ष नीमु, जेवी चास पक्षोनी पांव, जेवु वैमुर्य रत्न पथी अनन्तगुणो नील वेश्यानो नोस्रो वर्ष ठे ॥२॥ कापोत खेश्याना वर्ण जेवा थळशीनां फूख, जेवी कोयसनी पाख, जेपी पारे वानी मोक कांश्क राती काश्क काळी ए करता अनन्तगुणो अधिक कापोत खेश्यानो FREZI वर्ण जाणवा ॥३॥ तेजु लेश्यानो वण, जेयो जगतो सूर्य रातो, जेवी सुमानी चाच, जेवी दीवानी शीखा ए करता थनन्तगुणा अधिक रातो तेजुलेश्यानो वर्ण ॥४॥ पन ले श्यानो वर्ण-जेवी हरताल, जेवी हळदर, जेवां शणना फूल, ए करता थनन्तगुणो थधिक पीळो पन खेश्याना वर्ण ॥ ५॥ शुक्ल वेश्यानो वर्ण-जेवो शख, जेवु थंक रत्न, जेवु मोगरानु फूल, जेवु गायनु दूध, जेदो रूपाना छार ए करतां अनन्तगुणो अधिक श्वत शुवल खेश्यानो वर्ण ॥ ६ ॥२॥त्रीजु खेश्याना रसनु हार कहे ने कृष्ण श्यानो रस-जेवु कमवु तुघ, जेवा कमवो खींवमानो रस, जेयो रोहीणी नामे वनस्पतिनो रस, एयो श्वनन्तगुणा अधिक कमवा रस कृष्ण वेश्यानो जाणवो ॥१॥ नील लेश्यानो रस- जेवा सुचनो तीखो रस, जेवो पीपर बने मरीना रस, एपो थनतगुणो श्चधिक तीखो रस नील वेश्यानो जाणवो ॥२॥ कापोत लेश्यानो रस-जेवा कुणी काची केरीनो रस, जेवा काचर्चा कोठनो रस, एथी थनन्तगुणो अधिक खाटो रस कापोतना जाणवो ॥३॥ तेजु खेश्यानो रस-जेवो पाका श्ांषानो रस, जेयो पाका कोठानो रस एयी अनन्तगणो काश्क खाटो ने काश्क मीठा रस सेजु खेश्यानो जापावो ॥४॥ पद्म खेश्यानो रस-जेषा धारणीनो रस, जेषा शासव (सरका)नो रप्त, जेवो मधुनो रस एथी अनन्तगुणो मधुरो रस पद्म खेश्यानो ॥५॥ शुक्स लश्यानो रस-जेवो खजुरनो रस जेवो साक्षनो रस, जेवो धना रस, जेवो साकरनो रस पथी श्वनन्तगुणा अधिक मीठो रस शुक्स सेश्यानो जाणवो ॥ ६ ॥३॥ चोथु लेश्याना गधनु छार कहे जे जेयो गायना ममानो, कुतराना मझानो, सर्पना ममानो एधी अनन्तगुणो अधिक थप्रशस्त, प्रथम त्रण माठी लेश्यानो गध जाणवो ॥१॥ कपुर, केवमो प्रमुख मुगधी पदार्थ वाटता (घुटता) जेवी सु गध नोकळे ते करतां अनन्तगुणो प्रशस्त त्रण सारी खेश्यानो गध जाणवा ॥५॥४॥ पाचमु वेश्याना स्पर्शनु द्वार कहे ठे-जेवी करवतनी धार, जेवो गायनी जीन, जेवु मुजनु तथा वासनु पान, ते करता यनन्तगुणो मागे थप्रसस्त वेश्यानो स्पर्श जाणवो ॥१॥ जेवी चूर नामे वनस्पति, जेवु माखण, जेया सरसघना फूल, जेवु मखमल ए करता यनन्तगुणो अधिक प्रसस्त खेश्यानो स्पर्श सुवाळो जाणवो ॥२॥५॥ नहु खेश्याना परिणामनु कार कहे ठे सेश्या प्रण प्रकारे परिणमे-जघन्य, मध्यम बने उत्कृष्ट, तथा नव प्रकार परिणमे ते सपर त्रण कही तेना अफेकना त्रण प्रण नेद थाय, जेमके, जघ न्यनो जघन्य, जघन्यनो मध्यम,जघन्पनो उस्कृष्ट ए रीते दरेकना त्रण त्रण जेद करतां नर नेम याय एम नवना सत्तावीस नेद थाय एम सत्तावीसना एकाशी नेद थाय एम एकाशीया यस ने तेंतालीस जेद पाय एटले नेदे लेश्या परिणमे ॥६॥ सातमु सेझ्याना लक्षणनु हार कहे ठे तेमा प्रथम कृष्णालेश्याना लक्षण कहे बे-पांच था अवनो सेधनार, प्रण थयुतिषत, काय जोवनो हिंसक, धारजनो तित्र परिणाम तथा हेपी, पाप करवामा साहसीक, निठोर परिणामी, जीवहिंसा शुग रहित कर श्थजितेन्धिय एषा जोगे करी सहित होय तेने कृष्ण वेश्यानु खरपण जाणवु ॥२॥ नील वेश्याना बाण कहे ते इयांवत, थमवत, तपरहित, मायाव। पाप करता बाजे नहीं, गृधी, धूतारो, प्रमादी, रसनो खोमुपी, मायानो गवेषी, शारजनो थत्यागी, पापने विपे साहसीक ए नीम खेश्याना पकण जाणवां ॥२॥ कापोत वेश्यानां जण फहे ठे- वांका बोसो, वांफा काम करनार, माया करोने हरखाय, सरळपणाथी रहित, मोढ जूदो श्यने पुढे जुदो, मिया-खोटा वचननो घोलनार, चोरी मरसरनो करनार, ए कापोत से श्यानो पक्षण जाणा ॥३॥ तेजु खेश्यानां खण कहे -मयादावत, मायारहित, चपळ पथाथी रहित, कुतूहळ रहित, विनयवत, दमितेंजिय, शुन जोगवत, उपध्यान तप सहित, हार्म, प्रियधर्मि, पाप थको यीहे, ए तेजुवेश्यानां लक्षण जाणवा ॥४॥ पद्म लेश्याना खक्षण कहे ठे-क्रोध, मान, माया, सोन पातळा को बे, प्रशान्त चित्त, वात्मानो दमण हार, योगउपम्यान सहित होय, थोमा योलो, उपशान्त, जितेंजिय, ए पद्मलेश्याना सकण जाणवा ॥५॥ शुक्स खेश्याना खक्षण कहे ब-वार्त्तन्यान रोऽध्यानयी सर्वथा रहित, धर्मयान शुक्सध्यानयो सहित, दश प्रफारनी चित्त समाधीए करो सहित, वात्मानो दम पहार, इत्यादिक शुक्ल खेश्यानां खदण जाणवा ॥ ७॥ वे थाउमु स्थानद्वार कहे - स्थान पटसे उत्कर्षे के अपकर्षे करी वेश्यानु परस्पर तारतम्य असख्यात उत्सर्पिणी अव सर्पिणीना समय जेटसा के असहयात खोकना थाफाश प्रदेश जेटला थाय तेटला लेश्यानां परिणामनु द्वार कहे ठे वेश्या व्रण प्रकारे परिणमे-जघन्य, मभ्यम अने उत्कृष्ट, तथा नय प्रकारे परिणमे ते उपर त्रण कही तेना केकना त्रण त्रण नेद थाय, जेमके, जघ न्यनो जघन्य, जघन्यनो मध्यम, जघन्यनो उत्कृष्ट प रीते दरेकना त्रण प्रण भेद करता नप स थाय एम नवना सत्तावीस नेद थाय एम सत्तापीसना एकाशी भेद धाय एम एकाशी-या यसे ने तेंतालीस भेद थाय एटले भेदे क्षेश्या परिणमे ॥ ६॥ सातमु वेश्यानां सक्षणनु द्वार कहे ते तेमा प्रथम कृष्णवेश्याना लक्षण कहे -पांच श्रा अपनो सेधनार, प्रण थयुप्तिवत, बफाय जोवनी हिंसक, थारजनो तित्र परिणामी तथा पी, पाप करवामा साहसीक, निठोर परिणामी, जीवहिंसा शुग रहित करनार, यजितेन्टिय एवा जोगे करी सहित होय तेने कृष्ण सेश्यानु सपण जादु ॥१॥ नीम सेश्याना लक्षण कहे ठे यावत, थमर्पवत, तपरहित, मायायो पाप करता पाजे नहीं, गृधी, धूतारो, प्रमादी, रसनो खोपी, मायानो गवेषी, शारजनो थत्यागी, पापने विपे साहसीक ए नीख पेश्यानां सण जाणा ॥ २ ॥ कापोत बेश्यानां अक्ष्य कहे - सागर पस्यन थसख्यातमे नागे अधिकनी॥२॥ कापोत वेश्यानी स्थिति जण अतर्मुहर्जनी, उत्० ३ सागर पख्यने, यसख्यासमे नागे अधिकनी॥३॥ तेजुसेश्यानी स्थिति जाश्रत मुहूर्चनी, उत्० २ सागर पख्यने असख्यातमे जागे अधिकनी॥४॥ पद्म लेश्यानो स्थिति ज० थतर्मुहूर्चनी, उ० १० सागर श्रतर्मुहर्च थधिकनी॥५॥शुक्ल लेश्यानी स्थिति जायत, हर्चनी, उ०३३ सागर शतर्मुहर्त अधिकनी॥६॥ए स्थिति लेश्यानी समुच्चय कही हवे ४ ग तिनी स्थिति कहे ठे-नरकगतिनी कापोत लेश्यानी स्थिति ज० दश हजार वर्षनी, उत्। ३ सागर पट्यने थसख्यातमे नागे अधिफनी,॥१॥नीस खेश्यान स्थिति ज०३ सागर काफेरो ने पस्यनाथसख्यातमा नाग श्यधिकनी, जग १० सागर पल्यना सख्यातमा नाग थधिक- नो ॥ २ ॥ कृष्ण वेश्यानी स्थिति ज०१० सागरनी, उत्० ३३ सागर ने अतर्मुहूर्त्ताधिकनी ॥३॥ ए नारकीनी खेश्यानी स्थिति कही ये तिर्यच मनुष्यनी खेश्यानी स्थिति कहे - तिर्यच अने मनुष्य ज्या ज्या जाय त्या त्यां जा ना प्रथम पाचे वेश्यानी अतर्मुहूर्त्तन) स्थिति जाणवी केवलज्ञान यानि शुक्ल लेश्यानी स्थिति जयन्य अतर्नुहूर्वनो, उत्० नव स्थानक वे जावले श्यामा सयिषष्ट परिणाम के विशुभ परिणामना तारतम्य प थर्स स्यात स्थानक हे अने प्रन्यवेश्यामा तेवा अन्यस्कंधो असख्यात असख्या त ने एक परिष्यामे एक वखते जेटलां प्रन्योनु महण कर्ये ते एक स्थानक अव्यक्षेश्या परस्बे फह। शकाय ते स्थानफना घे प्रकार जघन्य स्थानक अने उस्कृष्ट स्थानक जघन्यनी पासेना स्थानकोनो जघन्यमा थने उत्कृष्टनी पासेनां स्थानकोनो उत्कृष्टमा अंतर्भाव करवाथी मण्यम स्थानकोनो त्रीजो जेद थांहि गएगो नषी हवे ठ लेश्यानां स्थान कनु अस्पषहुत्व सर्वथी योमा कापोत वेश्यानां स्थानक र तेथी नीख वेश्यानां स्थानक असख्यातगुणा २ तेथी कृष्ण खेश्याना स्थानक असख्यातगुणा ३ तेथी तेजु रे वश्याना स्थानक थसख्यातगुणा ४ तेथी पद्म खेश्यानां स्थानक थसख्यातगुणा ५ तेथी शुक्र खेश्यानां स्थानक असख्यात गुणा ६ ॥ ४ ॥ नवमु वेश्या स्थितिनु द्वार कई ठे-कृष्ण वेश्यानी स्थिति जघन्य शतर्मुहूर्त्तनी, उल्टी ३३ सागर ने १ थतर्मुहूर्च अधिकनी ॥१॥ नील खेश्यानी स्थिति जा अंतर्महर्तनी, उत्ण १० का के चय तेणे करी जीव जाति पामे तेजु, पद्म, शुक्त ए प्रण धर्म क्षेश्या, तेणे करीने जोव सुग तिए जाय ॥ १० ॥ थगीथारमु सेश्याना धवननु कार कहे जे सघळी वेश्या प्रथम परिणमती वखते जीवने उपजवु नथी तथा खेश्याना लेखा समये कोश जीवन उपज चव नथी परनयने विषे कम चषे ते कदे बे-खेश्या परनवनी यावी यकी अतर्मुहूर्व गया पठी शेष अतर्मुहूर्त श्राउखा आमा रहे यके जीव परखोकने विष जाय ।। ११ ।। समुच य सखेशीमा व लेश्या साने १-श्नरके कापोत खेश्या २,त्रीजी नरके कापोत घणी नील थो मी ३, चोथी नरके नील लेश्या ४, पांचमी नरके नील घणी कृष्ण थोमी ५, उटी नरके कृष्ण खेश्या ६, सातमी नरके महाकृष्ण खेश्या ७॥ १॥ १० जवनपतिमा संध्या ४ खारे । ॥ ११ ॥ पृथ्वी, पाणी, वनस्पति ए प्रणना थपर्याप्तावस्थामा वेश्या ४, पयासावस्थाम । ३ खेश्या ॥ १४ ॥ तेच वाउ प्रण विगाजिय ए पांचों पहेली ३ वेश्या ॥ १५॥ तिरै चि पचे। अय समुर्तिममा प्रथम ३ खेश्या, गर्जजमां ६ खेश्या ॥ २०॥ मनुष्यमा पण तेज रोर जाणवी ॥२१॥ वाणव्यतरमा प्रथम ४ लेश्या ॥ ॥ ज्योतिषीमा १ वर्ष उणी पूर्व कोनीनी ए वेश्या तिर्यच मनुष्यनी कही इवे देवतानी स्थिति कहे - तेमा जवनपति व्यतर थाश्रि कृष्ण खेश्यानी स्थिति ज० दश हजार वर्षनी, उत्त पम्यना थसत्यातमा नागनी ॥१॥ जेटसी कृष्ण बेश्यानी उत्कृष्टी स्थिति तेटली १ समयाधिक नोस श्यानी ज स्थिति, सत्य पध्योपमना असख्यातमा नागनी ॥३॥ जेटली उत्० नीलनी स्थिति तेटसी १ समयाधिक कापोत खेश्यानी जण स्थिति, उत्त पस्योपमना शसस्यातमा नागनी ॥ ३ ॥ समुच्चय देव थाथि तेजुखेश्यानी स्थिति जय २० हजार वर्षनी, उ०२ सागर ने पज्यनाथसख्यातमा जाग अधिकनी ज्योतिषी, वैमानिक थाग्नि तेजुधेश्यानी स्थिति जण पस्य १ नी, उत्पश् सागर पल्यने यसख्यातमे नाग थ चिकनी ॥ ३ ॥ जेटली तेजु खेश्यानी उत्त स्थिति तेटसी १ समय अधिक पद्मवेश्यानी ज० स्थिति, उ० १० सागर यंतर्मुहर्च अधिकनी ॥५॥ जेटली पन क्षेश्यानी उत्। स्थिति तेटली १ समयाधिक शुक्क वेश्यानी जण स्थिति, उत्० ३३ सागर यतर्मुहाधिकनी ॥६॥९॥ दशमु वेश्यानो गतिनु कार कहे ठे-कृष्ण, नीम, कापोत ए अप अप्रशस्त अधम खेझ्या, जुदा जुदा विवरो कहे उ पहली नरके जा दश हजार वर्ष, उ० १ सागर ॥ पीजी नरके ज १ सागर, उ ३ सागर ॥ त्रीजी नरक जण ३ सागर, उ ७ सागर ॥ चोथी नरके ज० सागर, उ० १० सागर ॥ पाचमी नरके ज १० सागर, जग १७ सागर ॥ व्ही नरके जण १७ सागर, उ० २५ सागर ॥ सातमी नरके ज० २५ सागर, ३०३३ सागर ॥ प प्रत्येक प्रत्येक नरकना नाम थालि थायुष्य कसा हवे प्रतर नेदे थायुप्य कद्दे उ-पहेली नरके प्रतर ३ ते तेमा पहेसे प्रतरे ज० १० हजार वर्ष,उ0 एच दजार वर्प ॥वीजे ज० ए० हजार वर्ष, उ0 ए0 लाख वर्ष ॥ त्रीजे जाए लाख वर्ष, उप पूर्य कोमी १ ॥ चाथे ज० पूर्व कोमो १, उ० सागर १ तेना जाग १० करीए तेमांनो १ नाग ॥ पांचमे जा नाग १, उप नाग २ ॥ उहे ज० नाग १, उप नाग ३॥सातमे जप जाग ३, उप नाग ४ ॥ थाठमे जण जाग ४, उ० नाग ५ ॥ नवमे जा नाग ५, उ० नाग ६॥ दशमे जग जाग ६, जन जाग ७॥थग्यारमे ज० जाग , जण जाग ७ ॥ वारमे जण जाग , उ नाग ए ॥ तेरमे ज० जाग ए, जन सागर १ ॥१॥ वीजी नरके पाथमा ११ तेजु खेश्या ॥ २३ ॥ वैमानिका १-२ देवखोके तेजु लेश्या, ३-४-५ देवलोके पम खेश्या, व्हायी सर्वार्थसिह सगी शुक वेश्या ॥ २४ ॥ सिक अस्लेशी जाणवा हव ब वेश्याना जीवनु थापरहुत्व -सर्वथी थोमा शुकलेशी १ तेषी पनलशी सख्यातगुणा ५ तेथी तेजुखेशी स० ३ तेथी थलेशी अनतगुणा ४ तेथी कापोतलेशी श्रन ५ तेथी नील पेशी विसेसाहिया ६ तेथी कृष्णवेशी वि० ७ तेथी सवेशी विसेनारिया ॥ ए वेश्यानो यधिकार उतराप्ययन सूचना अध्ययन ३४ मा तथा पनवणा पद १७ मां तथा जीवा निगम सूनमा उ, त्यांथी विस्तार जाणवो ॥ इति वीजु खेश्याहार सपूर्ण ॥ थथ श्रीजु स्थितिदार कहे ठे॥ समुन्चय स्थिति थाथि जघन्य थसमुहलनी, उतफप्टी ३३ सागरनी हवे तेनो जुदा जुदो विवरो कहे ब पहली नरके ज० दश हजार वर्ष, उ १ सागर ॥ बीजो नरके ज० १ सागर, ज० ३ सागर ॥ त्रीजी नरक जण ३ सागर, 30 ७ सागर ॥ चोथी नरके जग ७ सागर, उ० १० सागर ॥ पांचमी नरके जग १० सागर, न १७ सागर ॥ उष्ठी नरके जण १७ सागर, उ० २५ सागर ॥ सातमी नरके ज० २२ सागर, उ० ३३ सागर ॥ ए प्रत्येक प्रत्येक नरकना नाम थाभि श्रायुष्य का हवे प्रतर दे आयुष्य कहे ब-पहेली नरके प्रतर १३ तेमा पहेखे प्रतरे ज० १० हजार वर्ष, न एa हजार वर्ष ॥ बीजे न० ए० हजार वर्ष, नए एक लाख वर्ष ॥ श्रीजे जब एक लाख वर्ष, उप पूर्व कोमी १ ॥ चोथे जण पूर्व कोमो र, उप सागर १ तेना नाग १० करीए तेमानो १ नाग ॥ पाचमे जग नाग १, उ० जाग ५ ॥ बढे ज० जाग २, उप नाग ३॥ सातमे जण नाग ३, उ० जाग ४ ॥ थाम्मे जग नाग ४, ० जाग ५ ॥ नवमे जा नाग ५, उ० नाग ६ ॥ दशमे जण जाग ६, ना नाग 9 ॥ अग्यारमे ज० नाग , जा नाग ७ ॥ चारमे जन नाग U, ज नाग ए ॥ तेरमे जण जाग ए, जन् सागर १ ॥१॥धीजी नरके पाथमा ११ TEXIGHEE त्यो थकेका सागरना ११ चाग फरीए, तेमांना बवे नाग वधारीए ॥ प्रथम पाथम जा सागर १, उ सागर १ नाग २॥ वीजे पाथमे जण सागर १ जाग २, उप सागर १ नाग ४ ॥ त्रीजे जण सागर १ जाग , उ० सागर १ नाग ६ ॥ घोये पाथमे जण सागर ने ६ नाग, उ०१ सागर । नाग ॥ पाचमे अण् सागर १ नाग , उ र सागर नाग १० ॥ ज० १ सागर जाग १०, न २ सागर र नाग ॥ सातमे ज०५ सागर १ नाग, उ०१ सागर ३ नाग ॥थाठमे जण ५ सागर ३ नाग, उ०१ सागर ५ नाग ॥ नवमे ज० २ सागर ५ नाग, न० २ सागर नाग ॥ दशमे ज२ सागर नाग, उ०५ सागर ए नाग ॥ श्वग्यारमे न ५ सागर ए नाग, न०३ सागर ॥२॥त्रीजी नरके पाथमा ए त्यां एकेका सागरना ए साग फरीप से प्रतर प्रतरे ४ नाग वधारीए ॥प्रथम पायमे ज० ३ सागर, ३० ३ मागर ४ नाग ॥ चीजे जण ३ सागर नाग, न० ३ सागर नाग ॥त्रीजे जप ३ सागर जाम, ज०४ सागर ३ जाग ॥ चोथे ज०४ सागर ३ नाग, उ०४ सागर नाग ॥ पांचमे ज०४ सागर ७ नाग, उ० ५ सागर २ जाग ॥ठठे जा ५ सागर २ -am------ नाग, न० ५ सागर ६ जाग ॥ सातमे जण ५ सागर ६ जाग, ब०६ सागर १ माग ॥ थाम्मे ज०६ सागर १ नाग, उ० ६ सागर ५ जाग ॥ नवमे ज०६ सागर ५ नाग, ज० सागर ॥ ३ ॥ चोथी नरके पाथमा ७ ॥ त्यां एकेका सागरना ७ नाग करीए तेमांत्रण त्रण नाग वधारीए ॥ प्रथम पाथमे ज ७ सागर, उप सागर ३ नाग ॥ वीजे जण सागर ३ नाग, ज० 9 सागर ६ नाग ॥ त्रीजे ज०७ सागर ६ नाग, न सागर र नाग॥ चोथे ज सागर नाग, 300 सागर ५ नाग ॥ पाचमे ज०७ सागर ५ जाग, जन ए, सागर १ नाग ।। ठठे जग ए सागर १ नाग, उ ए सागर ४ नाग ॥ सातमे जण ए सागर ४ जाग, उ० १० सागर ॥४॥ पांचमी नरके पाथमा ५ ॥ त्या एकेका सागरना ५ जाग करीए तेमा १ सागरन नाग प्रतरे प्रतरे वधारए ॥ प्रथम पायमे ज० १० सागर, उ०११ सागर नाग ॥ बीजे ज० ११ सागर ने २ जाग, उन १२ सागर । नाग । त्रीजे जण १२ सागर ४ नाग, उ० १४ सागर र भाग ॥ चोथ जण १४ सागर नाग, उप १५ सागर ३ नाग ॥ पाचमे जा १५ सागर ३ नाग, उ० १७ सागर ॥ ५॥ उही नरके पाथमा ३ त्यां एकेका सागरना ३ जाग करीए तेमांश नागर सागर प्रतरे प्रतरे वधारीए॥ पहेसे प्रतरे ज१७ सागर, उ० १७ सागर २ जाग ॥ वीजे जण २७ सागर ५ नाग, उ० २० सागर १ भाग ॥ त्रीजे ज० २० सागर १ नाग, उप २२ सागर ॥६॥ सातमी नरके १पाथमो ते त्या ५ नरकावासा ने तेना नाम-काल ॥१॥ महाकाल ॥ २ ॥ रोष ॥३॥ महारो ॥४॥ ए चार नरकाषासाए ज० २२ सागर, उ० ३३ सागर ॥श्वपक्ष गण पांचमा नरफावासाप ३३ सागर जघन्योस्कृष्ट ॥ इवे जवनपतिनी स्थिति कहे ठे- | तेमा दक्षिण दिशाना जवनपतिनी ज० १० हजार वर्षनी, जग १ सागरनी ॥ तेनी देवीनी ज० १० हजार वर्षनी, उप सामा प्रण पस्यनी तेना नवनीकायना देवतानी स्थिति जप १५ हजार वर्षनी, न दात पश्यनी तेनी देवीनी जण १० हजार वर्पनी, उप पोपा पख्यनी उत्तर दिशाना नवनपतिनो ज० १० हजार वर्षनी, न १ सागर झाझे। तेनी देवीना ज० १० हजार वर्षनी, उ० सामाचार पस्यनी ॥ नवनीकायनी जण १० हजार वर्षनी, 10 घे पथ्य देशे नणी तेनी देवीनी जण १७ हजार वर्षनी, उप १ पस्य देशे उणी ॥अथ धादर पृप्पीनी स्थिति सपळीनी जण अतर्मुहर्जनी॥ हवे उत्कृष्टीनो विवरो कहे बे-सन्हानी उ० हजार पर्पनी ॥ सुझानी उ० १५ हजार वर्षनी ॥ पाभुयानी उ१५ हजार वर्षनी ॥ मणोशिखानी १६ हजार वर्षनी ॥ शर्करानी न० १० हजार वर्षनी ॥ खरपृथ्वीनी १० २२ हजार वर्षनी ॥अपनी जण १ श्वतर्मुहूर्त्तनी, उपहजार वर्षनी । तेजनी जय शत- मुहर्तनी, उप ३ यहोरात्रिनी ॥ वायुनी ज० १ अतर्मुहूर्त्तनी, उ० ३ हजार वर्षनी ॥ वन स्पप्तिनी ज०१थतर्मुहर्तनी, उ० १० छजार वर्षनी ॥ सूक्ष्म ५ स्थावरनी जण १ श्वसर्मुहूर्त्तनी, व तेटली ॥प्रियनी ज०१थतर्मुहूनी, उ०१५ वर्षनी ॥ तेइजियनी ज०१थतर्मुहर्जनी, ० ४ दिवसनी ॥ चरिंजियनी १ वतर्मुहूर्तनी, उ० ६ मासनी ॥ हवे तिर्यच पचें यिनी स्थिति कहे जे-जसचर गर्नज समुर्बिमनी ज०१ वतर्मुहूर्चनी, उप १ पूर्वक्रोमन।। स्थलचर गर्नजनी जण १ थतर्मुहनी, उ० ३ पट्योपमनी ॥ समुर्बिमनी जण् १ अतर्मु हनी, न प इजार पनी ॥ खेचर गर्नजनी ज० अतर्मुहर्तनी, उप पठ्योपमना यस स्यातमा नागनी ॥ समागमनी ज०१थतर्मुनी, उ० १२ हजार वर्षनी ॥ उरपर गर्जजनो ज० १ थतर्मुहूर्त्तनी, उ० १ पूर्वकोमनी समामेनो ज० १ श्यतर्मुहूर्त्तनी, उ० ५३ हजार वर्पनी ॥ जुजपर गर्नजनी जण १ वतर्मुहूर्त्तनी, ज १ पूर्वक्रोमीनी समुर्विमनी जा ? थतर्मुहूर्त्तनो, उ० ४२ हजार वर्षनी ॥ ५ तिर्यच पजियनी स्थिति कही। इवे मनुष्पनी स्थिति कहे ठे-जे सख्याता थायुष्यना मनुष्य जे तेनी जग पस्योपमना थसख्यातमा जामनी ॥ जे मनुष्य सख्याता वर्षना थायुष्यना ठे तेनी ज०१ शतर्मुहर्जनी ॥ ए समस्तनी जघन्य स्थिति कही ॥ हवे उत्कृष्टीनो विवरो कहे ठे-देवकुरु उच्चरकुरुना मनुष्यनी स्थिति ३ पल्योपमनी ॥ इरिवास रम्पकथासे २ पठ्यनी ॥ हेमवत परणवते १ पम्पनी ॥ ठप्पन श्रतरकोप पव्योपमनाथ सस्यातमा जागनी ॥ महाविदेहे । पूर्वक्रोमनी ॥ नरत औरषते श्राराने मेळे थायुष्य तथा थारानु मानादि जाणवु ॥ प्रथम सुसमसुसम थारो ४ कोमाकोमी सागरोपमनो ॥ तेना मनुप्यनु ३ पक्ष्यनु थायुप्य अपत्यप्रतिपासणा भए दिवप्त ॥योजो सुसम धारो ३ कोमा कोमी सागरोपमनो तेना मनुष्यनु थायुष्य २ पस्योपमनु अपस्यप्रतिपालमा ६४ दिवस।
श्रीजो सुसम सुसम थारो ३ क्रोमाकोमी सागरनो तेना मनुष्यनु थायुष्य १ पट्यनु, पत्यप्रतिपाषणा ए दिवस ॥ उतरते बारे पूर्व क्रोमीनु ॥ ते थारामांहि व खाख पूर्व ३ वर्ष ७ मास शेष घाकी होय, स्यारे प्रथम तीर्थकर उपजे ॥त्रण वर्ष सामा श्राप मास शेप चाकी छोय, त्यारे ७४ लाख पूर्वनुं घायुष्य पाळीने मोक जाय ॥ पांच कम्याणीक होय ।। मुसम सुसम चोपो थारो र कोमाक्रोमी सागरमांछि ४५ हजार वर्ष योग तेने घुरे थायुष्य पूर्व क्रोमीनु ॥ उतरते २०० वर्ष काफेरानु ॥ से आरामा ५३ तीर्थकर होय, तेनु थायुप्य कठे ॥ घीजा सार्थकरनु ७२ लाख पूर्वानु थायुष्य ॥ त्रीजानु ६० लाख पूर्वानु । चोथानु ५० लाख पूर्वनुं ॥ पांचमानु ४० लाख पूर्वनु ॥ उमार्नु ३० लाख पूर्वनु ॥ सातमानु २० लाख पूर्षनु ॥ थाठमानुं १० लाख पूर्वनु ॥ नषमानु २ लाख पूर्वनु ॥ दशमानु १ लाख पूर्वनु ॥ अग्यारमानु म खाख वर्षनु ॥ घारमानु ७२ लाख वर्षनु ॥ तेरमानु ६० लाख वर्पनु ॥ चौदमार्नु ५० लाख घर्षनु ॥ ॥ पदरमानु २० लाख वर्षनु ॥ सोसमानु र खाख वर्षनु ॥ सत्तरमानु ए५ हजार वर्पनु ॥ थढारमानु ७४ हजार वर्षनु ॥ थोगणीसमानु ५५ हजार वर्षनु ॥ वीसमानु ३० हजार वर्षतुं ॥ एकवीसमानु २० हजार वर्षनु ॥ बावीसमानु एक हजार वर्पनुं ॥ वीसमानु १०० वर्षनु । चोवीसमार्नु ७२ वर्षनु थायुष्य जाणवें ॥ ए चौथा थाराना ७५ वर्ष ॥ मास शेप धाकता होय त्यारे चरम तीर्थकर उपज ॥ ३ वर्ष ७॥ मास शेप थाकता होय त्यारे मोक जाय ॥ पांच कल्याणीक होय ॥ पांचमो उसम थारो २१ हजार वर्षनो ॥ पूरे थायुष्य १०० वर्ष फाफेरानु उतरता २० वर्षनु ॥ बहो असम उसम थारो २१ हजार वर्षनो ॥ धुरे थायुष्य २० वर्षनु, उतरतां १६ वर्षतुं । समुर्लिम मनुप्यतुं वायुष्य जघन्योस्कृष्ट धतर्मुहर्त्तनु जाणवु ॥ व्यतरनी स्थिति जघन्य २० हजार वर्षनी, न १ पल्यनो तेनी देवीनी जय १० हजार वर्षनी, उप थर्ड पम्पनी ॥ ज्योति पीनी जा पस्यना श्वातमा नागनी, उ० १ पस्य झामेरी ॥ए समुच्चय थायुष्य कम छवे जुदो जुदो घिवरो कहे ठे-मानु वायुष्य ज पा पस्यनु, ज० २ पक्ष्य ने लाख वर्पनु॥सूर्यनु वायुष्य जपा पाल्पY, उ० १ पस्यने १ हजार वर्षतुं पहनु जय पापम्पनु, उप १ पल्यनु॥ नकात्रनु जप पा पस्यनु, उप थर्ड पध्यनु॥ सारानु ज० पम्पनो वाग्मो जाग, ॥
उन पस्यनो छ मो नाग काफेरु ॥ हर देवीनु थायुष्य कहे जे-चप्रमानी देवोनु थायुष्य ज० पा पस्यनु, न० थर्डपस्य ने ५० हजार वर्षनु ॥ सूर्यनी दवीनु जण पा पस्यनु, जन थर्ड पस्य ने ५०० वर्षनु ॥ प्रहनी देवीनु ज पा पल्यनु, ज थर्ड पस्यनु ॥ नकानी देवीनु ज० पस्यनो थाठमो नाग, उ० पा पस्यनु ॥ तारानी देवीनु जण पस्यनो थाठमो जाग, उप पस्यनो घाउमो नाग काळेरु ॥ हवे वैमानिकनी स्थिति कहे बे-जघन्य १ पझ्यापम, उत्० ३३ सागरनी, ए समुच्चय स्थिति जाणवी ॥ हवे तेनो जुदा विषरो कहे -प्रथम देवलोके जण १ पल्यनु, उत्० सागरनु ॥ तेनी देवीनु जण १ पस्योपमनु उन ७ पक्ष्य ते परिप्रहीतनु तथा थपरिग्रहीतर्नु ज० १ पम्यनु, उत्प ५० पल्यनु ॥ बोजे देवखोके जण १ पस्य काफेरु, उत्० ५ सागर काफेरु ॥ तेनी देवीनु ज० १ पस्य का उत् ए पस्य ते परिग्रहीतनु थने अपरिग्रहीसनु जण १ पथ्य कारु, उत् ५५ पस्यनु ॥ पीजे देवलोके जा १ सागरनु, उत् ७ सागरनु ॥ चोथे देवलोके ज० २ सागर कारु, उत्०७ सागर फाफेरु ॥ पांचमे दवखोके जा ७ सागरनु, उत्०१० सागरनु ॥ बढे देवलोके SESEXVERTERSTER ज०१० सागरनु, उत्० १४ सागरनु ॥ तमे देवखोके ज० १३ सागरनु, उत्०१७ साग रनु ॥ श्याठमे वसोक ज० १७ सागरनु, उत्० २७ सागरनु ॥ नवमे देवखोके ज०१७ सागरनु, उत्० सागरनु ॥दशमे देवलोके ज० १ए सागरनु, उत्०२० सागरच्॥ श्थग्या रमे देवलोके ज०२० सागरनु, उत्० २१ सागरनु ॥ वारमे देवखोके ज०१ सागरनु, उत् २२ सागरनु ॥ नव ग्रेवेयके पहेली त्रिके ज०२५ सागरनु गत् २३ सागरनु, ॥ एमज एकेक सागर एकेक ग्रेवेयके वधारता जq ॥ जावत् नवमी अवेयक ज० ३० सागरनु, उत्० ३१ सागरनु ॥ चार अनुचर विमाने ज० ३१ सागरनु, उत्०३३ सागरनु ॥ सर्वार्थसिके ३३ सागर जघन्योत्कृष्ट ॥ इथे प्रतरनी स्थिति कहे ते-पहेला वीजा देवलोके प्रतर १३ बे, त्यां एक्का सागरना १३ जाग करीए तेमाना चचे नाग वधारता जश्ए ॥ पहेले प्रतरे ज. १ पक्ष्य, उत्० १ पस्य ने २ जाग ॥ वीजे ज० १ पस्य, उत्० १ पस्य ने ४ जाग ॥ त्रीजे ज०१ पक्ष्य, उत्० १ पथ्य ने ६ नाग ॥ चोथे ज० १ पस्य, स्० १ पक्ष्यने । नाग ॥ पां चमे ज० १ परस्य, उत्० १ पट्य ने १० नाग॥ उठे जा १ पस्य, उत् १ पस्य ने १५ जाग ॥
सातमे जण १ पस्य, सत्य १ सागर १ नाग॥ आम्मे ज० १ पस्य, उत् १ सागर ३ जाग॥ नवमे जप १ पस्य, उत्ण १ सागर ५ जाग ॥ दशमे जण १ पम्य, उत्प १ सागर नाग ॥ अग्यारम ज० १ पल्य, उत् १ सागर ए नाग ॥ पारमे जग १ पल्य, उत् १ सागर ११ पाग ॥ तेरमे जण १ पथ्य, उत्० २ सागर ॥ त्रीजे चोथे देवखोके प्रतर १५ डे त्या एकेका सागरना १२ जाग करीए, तेमाना ५ भाग वधारता जश्ए ॥ पहेखे प्रतरे ज० सागर, उत्० २ सागर ने ५ नाग ॥ बोजे ज० २ सागर, उत्० २ सागर १० नाग ॥ त्रीजे ज० २ सागर, उत्०३ सागर ३ नाग ॥ चोपे ज०२ सागर, उत्०३ सागर नाग॥पाचमे ज०५ सागर, उत् ४ सागर १ नाग ॥ बढे ज० २ सागर, उत्॥ ४ सागर ६ नाग ॥ सातमे ज ५ सागर, उत्॥ ४ सागर ११ नाग ॥ थाम्मे जण २ सागर, उत्०५ सागर । नाग ॥ नवमे ज० २ सागर, उत् ५ सागर ए नाग ॥ दशमे ज० २ सागर, उत्० ६ सागर २ नाग ॥ अग्यारमे ज॥ २ सागर, उत्प ६ सागर ७ जाग ॥ बारमे ज० २ सागर, उत्०७ सागर ॥ ब्रह्मलोक देवलोके प्रतर ६ जे त्या एकेका सागरना ६ नाग करीए, तेमांना ३ भाग वधारोए । पदेखे प्रतरे ज० सागर, उत्ण सागर ३ नाग ॥ धीजे जण सागर, उत्0 0 सागर ॥ त्रीजे ज०७ सागर, उत्०७ सागर ३ नाग ॥ चोथे ज०७ सागर, उत्० ए सागर ॥ पांचमे ज०७ सागर, उत्० ए सागर ३ नाग ॥ बज०७ सागर, उत् १० सागर । लासक देवलोक प्रतर ५ वे स्यां एफेका सागरना ५ नाग करोए, तेमांना ४ नाग वधारीए ॥ पदेखे प्रतरे ज० १० सागर, उत्० १० सागर ४ नाग ॥ बीजे ज० १० सागर, उत्० ११ सागर ३नाग ॥त्रीजे ज०१० सागर, उत्० १२ सागर २ नाग॥ चोथे ज. १० सागर, उत्० १३ सागर १ नाग ॥ पाचमे ज०१० सागर, उत्०१४ सागर ॥ महाशुक दवसोके प्रतर ४ ते ॥ स्यां एकेका सागरना ४ नाग करीए, तेमांना ३ नाग वधारीए ॥ पहेसे प्रतरे ज० १४ सागर, उत्॥ १४ सागर ३ नाग॥बीजेज०१४ सागर, उत्॥ १५ सागर २ नाग ॥ प्रोजे ज० १४ सागर, उत्० १६ सागर र नाग ॥ चोये ज०१४ सागर, उस्० १७ सागर ॥ सहसार देवलोके प्रतर ४ ॥ त्यां एकेका सागरना ४ जाग करीप, तेमानो १ नाग वधारीए॥ पहेखे प्रतरे ज०१७ सागर, उत्। १७ सागर?नाग ॥ पीजे ज०१७ सागर, उत्० १७ सागर १ नाग ॥ त्रोजे जण १७ सागर, उत्। १७ सागर ३ नाग ॥ पोये जण १७ सागर, उत्ण १७ सागर ॥ श्राणत देवलोके प्रतर ४ ले स्यां एकेक सागरना नाग करीप, तेमानो १ नाग वधारीए ॥ पहेले प्रतरे जण १७ सागर, उत्० १७ सागर र नाग । बीजे ज० १७ सागर, उत्॥ १७ सागर २ चाग ॥त्रोजे जण १७ सागर, उत्॥ १७ सागर ३ भाग ॥ चोथे ज० १७ सागर, उत्० १ए सागर ॥ प्राणत देवखोके प्रतर ४ . त्यां एक सा गरना ४ भाग फरीए तमांना एकेको नाग वधारीए ॥ पहेले प्रतरे जण १ए सागर, उत्प १ए सागर १ नाग ॥ पीजे जा रए सागर, उत्० १ए सागर नाग॥ त्रीजे जण १ए सा गर, उत्० १ए सागर ३ जाग ॥ चोथे ज० १ए सागर, उत्॥ २० सागर ॥ थारण देवलोके प्रतर ४ व त्या एक सागरना ४ जाग करीए, तेमांनो एकको नाग पधारीए ॥ पहेले प्रतरे ज० २० सागर, उत्० २० सागर र नाग ॥बीजे ज०२० सागर, उत्०२० सागर नाग॥ प्रोजे ज० २० मागर, उत्० २० सागर ३ जाग ॥ चोथे ज०५० सागर, उत्० २१ सागर ॥ अच्युत दवलोके प्रतर ४ उ स्यां एकेका सागरना ४ नाग करीए, तेमानो एकेको नाग यधारीए ॥ पहेले प्रतरे ज० २१सागर, उत्०२१ सागर नाग ॥ बीजे ज० २१सागर, उत्० २१ सागर र नाग ॥ त्रीजे ज० २१ सागर, उत्० २१ सागर ३ नाग ॥ बोये ज०१ सा गर, उत्० २२ सागर ॥ ते उपर नव नव मेवेयके एकेक सागर षधारीए ॥ त्यां प्रतर नथी। ये देवीनो विचार कहे ठे-सौधर्म देवखोके श्वपरिमहित देवीनां ६ लाख विमान ॥ तेमा जेनु १० पम्यनु थायुष्य ठे ते सनत्कुमार सने नोग थावे ॥ २० पम्यनी ब्रह्मलोक देवलोकना देवताने जोग थावे ॥ ३० पश्यनी महाशुक्रना देवताने लोग आये ॥ ४० पल्यनी थाणतना देवताने नोग श्यावे ॥५० पख्यनी थारणना देवताने जोग याये ॥ शान देवखोके ४ लाख विमान ठे ॥ तेनु एक पध्य फाफेरानु थायुष्य ठे ते शानना देवताने नोग थावे ॥ १५ पयनी देवी माहेजना देवताने लोग थावे ॥२५ पख्यनी देवी सांतकना देवताने लोग थावे ॥ ३५ पश्यनी देवी सहसारना देवताने लोग थापे ॥ ४५ पघ्यनी देवी प्राणतना देवताने नोग श्रावे ॥५५ पख्यनी देवो श्यच्युसना देवताने नोग थाये ॥ पहेखे वीजे देवखोके नोग मनुष्यनी रोते ॥ श्रीजे चोथे तेमाषी जाय ॥ पांचमे डे॥ व्ठे स्पर्शनोग ।। सातमे श्रारमे रूपनोग ॥ नवमे दशमे शम्दनोग ॥ चम्यारमे पारमे नजर मेळानो नोग ॥ ते उपरांत अस्प विकार, असख्य सुख इति त्रीजु स्थितिहार सपूर्ण ॥ ३॥ हवे चोथु अवगाहना छार कहे जे ॥ सर्व जीवनी अवगाहना जघन्य गुलना असख्यातमा नागनी जाणवी ।। उत्कृष्टीनो विपरो कहे डे-पहेवी नरके पोणा थाट धनुष्य ने ६ थांगुल ॥ बीजीए १५॥ धनुष्य १५ थागुप्त ॥ त्रीजीए ३१॥ धनुष्य ॥ घोथीए अवगाहना ६२ ॥ धनुष्य ॥ पांचमीए १२५ मनुष्य ॥ उठीए १५० धनुष्य ॥ सातमीए ५०० धनुष्यनी काया जाणवो ॥ इवे प्रतर प्रतरनी जुदी अवगाहना कई डे-पहेलो नरके १३ प्रतर ठे तेमा प्रथम पायमे ३ हाथनी काया ते उपर २ हाथ पांग्रज वधारोपे ॥ बीजे पायमे १ धनुष्य र हाथ ॥ थागुल ॥ त्रीजे १ धनुष्य ३ हाथ १७॥ थांगुस ॥ चोये १ धनुष्य र हाथ ॥ थाणुस पंचमे ३ धनुष्य १० श्रागुप्त ॥ उष्टे ३ धनुष्य ३ साप १७॥ शागत ॥ सातमे ४ धनुष्य र हाथ ३ घांगुल ॥ थामे ४ धनुष्य ३ हाथ १२॥ थांगृक्ष ॥ नवमे ५ धनुष्य १ हाय २० थरिख । दशमे ६ धनुष्य ॥ श्रागुल ॥ श्रग्यारमे ६ धनुष्य २ हाय १३ श्वांगुप्त ॥ धारमे ७ धनुष्य ॥ धागुप्त ॥ तेरमे ७ धनुष्य ३ हाथ ६ वायुत ॥ 3 योजी नरके पाथमा ११ ते ॥ त्या ३ हाथ ३ थाग्रत पाथमे पाथमे वधारीप ॥ प्रथम पायो ७ धनुप्य ३ हाथ ६ थागुल ॥ वीजे ७ धनुष्य ५ हाथ ए श्वांगुख ॥ श्रीजे ए धनु प्य १ हाथ १२ थांगृप्त ॥ चाथे १० धनुष्य १५ थागुष्ठ ॥ पांचमे १० धनुष्य ३ हाथ १७ थागुख ॥ उढे ११ धनुष्य २ हाय १ थांगुख ॥ सातमे १५ धनुष्य २ हाथ ॥ थाठमे १३ धनुष्य १ हाथ ३ थागुप्त ॥ नवमे १४ धनुष्य ६ थांगुष्ठ ॥ दशमे १४ धनुष्य ३ हाथ ए थांगुस । अग्यारमे १५ धनुष्य २ हाथ १५ श्रागुप्त ॥ प्रोजी नरके पाथमा ए वे ॥ त्या 3 छाय, १॥ थांगुप्त पायमे पाथमे वधारीए ॥ प्रथम पाथमे १५ धनुष्य २ हाथ १५ था गुप्त ॥ चीजे १७ धनुष्य २ हाथ ॥ गुप्त ॥ त्रीजे २ए धनुष्य २ हाथ ३ थानस ।। चोथे २१ धनुष्य १ हाथ श्॥ थांगुप्त ॥ पांचमे २३ धनुष्य १ हाथ १० आंगन ॥ बछे २५ धनुष्य १ हाथ १३॥ थांगुष ॥ सातमे धनुष्य १ हाथ एश्वांगुष्ठ ॥थाउमेशए धनुध्य १ हाथ ॥ यागुल ॥ नवमे ३१ धनुष्य १ हाथ ॥ चोथी नरके पाथमा २ ॥ स्या ५ धनुष्य २० थांगुस, एफेके पाथमे पधारीए ॥ पहेले पाघमे ३१ घनुष्य १ हाथ ॥ बीजे ३६ धनुष्य १ हाथ २० थांगुख ॥ त्रीजे ४१ धनुष्य २ हाथ २६ थांगुष ॥ चोथे ४६ धनुष्य ३ हाथ १२ थांगुट ॥ पांचमे ५५ धनुष्य श्वांगुस ॥ बढे ५७ धनुष्य १ हाथ ४ वागुख ॥ सातमे ६२ धनुप्य २ हाथ पांचमी नरके पाथमा ५ ले त्यो २५ धनुष्य २ हाथ १२ थारख एकेके पाथमे वधारीप. प्रथम पापमे ६२ धनुष्य २ हाथ ॥ बोजे ७७ धनुष्य १२ थोरख । त्रीजे ए३ धनुष्य ३ हाथ ॥ चोथे १०ए धनुष्य १ हाय १५ श्यागुख ॥ पाचमे १५५ धनुष्य ॥ ग्छी नरके पाथमा ३ वे ॥ त्यां पकेके पाथमे ६५ धनुष्य २ हाय वधारीए ॥ प्रथम पायमे १२५ धनुष्य ॥ घोजे १७७ धनुष्य २ हाथ ॥ प्रोजे २५० धनुष्य ॥सातमी नरके ५०० धनु प्यनी काया ॥ ते अवधारणी काया जाणवी। केय करे तो जघन्य श्वांगुलनो सख्यातमो नाग, उत्सृष्टी घेञ्ज्य कर तो यमणी काया करे ॥ ए नारकीनी श्रयगाइना करी ॥ हवे जयनपति वाणव्यतर ज्योतिषी पेमा निफ देवलोक ये सुधो लवधारणी ७ हाथनी काया । पीजे चोये ६ हाथ ॥ पाचमे उठे ५ हाथ ॥ सातमे थाउमे ४ हाथ ॥ उपरना ४ देवलोके ३ हाधनी काया॥ ए देवता उत्तर वैकेय करे तो ज० श्यगुप्खनो सख्यातमो नाग, उत्० लाख जोजन करे एपी उपरना देवता उत्तर धैफ़ेय न करे नव थेयके २ हाथनो काया ॥ चार अनुचर विमाने १ छाथनी काया ॥ सर्वार्थसिक विमाने १ हाथ माहेरी काया ॥ एथव गाहना उच्छेद थागधे करी सर्वनी जाणयी ॥ हवे सिझनी अवगाहना ज० १ हाथ ७ थांगुप्त, मध्यम ४ हाय १६ चांगुष, उत्० ३३३ धनुष्य ३२ श्रांगुल ॥ वादर, पृष्षी, पाणी, तेल, वाउ थने सूक्ष्म एकेंधिय ए सर्वेनी ज० उ० थोगुलना थसख्या तमा नागनी थवगाहना जाणवी ॥ प्रत्येक वनस्पतिनी ज० श्रगुपनो श्रसम्म्यातमो नाग, उ० हजार जोजन काफेरी कमलाना मोमाने न्याये ॥ सूक्ष्म वनस्पसिना थसख्यात शरोरे एक सूदम वायुनु शरीर थाय॥ सूदम यायुनाश्थसख्य शरीरे एक सूक्ष्म तेउनु शरीर थाय ॥
सूक्ष्म तेउना असत्य शरीरे एक सूक्ष्म थपनु शरीर थाय ॥ सूदम अपना शर्सम्य्य शरीरे एक सूक्ष्म पृथ्वीनु शरीर थाय ॥ सूक्ष्म पृथ्वीने शसस्य शरीरे एक चादर वायुनु शरीर घाय ॥ पादर वायुने असाय शरीरे एक चादर तेउनु शरीर थाय॥ वादर तेनने थसख्य शरीर एक यादर थपनु शरीर याय ॥ पादर अपने असख्य शरीरे एक थाटर पृथ्वीनु शरीर पाय ॥ पटले फेवमो थयो ते उपर चूर्णपीसिका दासीनु दृष्टात कहे ठे-पत्रीस पनो जुपान जोध घळवत पुरुष ररनने परण उपर मुकीने गाढा घणनो प्रहार करे तो ते रत्न एरणमा खुचे पण मांगे नहि ॥ एवु रत्न ते चूर्णपोसिका दासी भागळी ने थगुना यो पापीने तेनो साथीयो काठे एवी पळवत ते रत्नने बज्रमय खरल उपर मुके, यजमय लोढारती २१ बार पीसे, पाटे तो ते जीव केटलाएक विषय जाय, केटसाएक फिसामना पामे, केटलाएके जाएयु पण नथी ।। वळो नगरने दृष्टाते-जेम कोइ नगर माटु दोय, ते नगरने क्याक पासे जुझ होय, ते जुझ करता केटलाएक वोलय जाय, केटलाएफ कोखामना पामे, केटलाके जाएयु पण नथी, एतु सूक्ष्म शरीर ठे ॥ इति PRESS.
य शख प्रमुखनु शरीर १५ जोजन- ॥ सेइज्यि स्खजुरा प्रमुखनु गाउ ३ नु ॥ चरिंजिय जमरा प्रमुखनु गाउ ४ नु ॥ जलचरनु खामीमाहिए नोजनना मन्च ॥ अषण समुषमाहि ५०० जोजनना मह ॥ कासोदधीमा ७०० जोजना मल ॥ स्वयचूरमण समुजमा १००० जोजनना म उ ॥ ए जलचर समुर्बिम अने गर्नज वन्ने जाणया ॥ स्थलचर समुर्विमर्नु शरीर पृथक् गाउनु ॥गर्चजनु ६ गाउनु ॥उरपर समुर्बिमनु पृथक् जोजननु ॥गर्नजनु १ हजार जाजननु ॥ नुजपर समुर्विमनु पृथक् धनुष्यनु ॥ गर्मजनु पृथक् गागर्नु ॥ खेचर समुर्विम ने गर्नजनु पृथक् धनुष्यनु ॥ वैकेय ज० थगृक्षनो सख्यातमो नाग करे, उत्० नवसें जोजननी काया फरे ॥ मनुप्यनी काया देवकुरु उत्तरकुरुना युगलियानी ३ गाउनी हरिषास रम्यवासे २ गाउनी ॥ हेमवय परणवये १ गाउनी ॥ठपन्न श्चतरछीपे ७०० धनुष्यनी ॥ पांच महाविदेहे ५०० धनुष्यनी ॥ जरत भैरवसे याराना प्रमाणे अवगाहनानु मान जाणवु ॥ पहेछे शारे ३ गाउ ॥ बीजे थारे २ गाठ ॥ श्रीजे थारे १ गाउ ॥ उतरते थारे ५०० ध नुप्य॥त्या तीर्थकरनी काया५०धनुष्यनी॥चोपे थारे ५०० धनुप्यनी॥उतरते थारे हाय॥
तेयार पीजातीर्थकरर्नु ४५० धनुप्यनु शरीर॥त्रीजानु४०० धनुष्यनु॥चाथानु ३५०धनुष्यनु। पाचमानु ३०० धनुष्यनु ।। महानु २५० धनुप्यनु ॥ सातमान २०० धनुष्यनु ॥थाउमानु १५० धनुप्यनु ॥ नवमानु २०० धनुप्यनु ॥ दशमानुएल धनुष्यनु॥थग्यारमानु ७० धनुष्यनु ॥ यार- मानु ७० धनुप्यनु ॥ तेरमानु ६० धनुप्यनु ॥ चौदमानु ५० धनुष्यनु ॥ पनरमानु ४५धनुष्यनु।। सोसमानु ४० धनुप्यनु ॥ सत्चरमानु ३५ धनुप्यनु ॥ थढारमानु ३० धनुष्यनु ॥ योगणीसमानु २५ धनुप्यनु ॥वीसमानु २० धनुप्यनु ॥ एकवीसमानु २५ धनुप्यनु ॥ वावीसमानु १० धनुष्यनु॥ तेवीसमानु २ धनुष्य १ हायनु ॥ चोवीसमानु १ धनुष्य ३ हाथनु॥ पाचमे थारे ७ हाथनु, उतरते थारे १ हाथनु ॥ उट्टे थारे १ हाथ, उतरते बारे मूढा दायनी ॥ सर्व जीव उप जतान थागुखना थसख्यातमा नागनी थवगाहना जाणवी, थन उत्तर वैकेय करे तो खाख जोजननी काफेरी जाणवी ॥ इति चोथु अवगाइनाहार सपूर्ण ॥ ४ ॥ Vre इवे पांचमु पिरकार कहे ॥ समुच्चय ४ गतिनो विरहकास जण १ समयनो, उ० १२ मुहूर्त्तनो सर्व जीवनो विरह ज० एक समयनो सर्वत्र जाणवो ॥ हवे उस्कृष्टो प्रत्येक् प्रत्येक्न। जुदो जुदा विरहकाल कहे -प्रथम नरके २४ मुहूर्त ॥ वीजीए ७ दिवस ॥ त्रीजीप १५ दिवस ॥ चोथीए १ मास ॥ पाचमीए ५ मास ॥ नहीए ४ मास ॥ सातमीए ६ मास ॥ चवनपतिनो २४ मुहर्च ॥ पांच एकें जिय थविरहिया समय समय उपजे अने समय समय चवे ॥ सख्याताने गमे सख्याता, असख्याताने गमे असख्याता चने बनताने गमे थनता उपजे अने चवे ॥ विगहेंजियनो थंतमुहूर्चनो विरह ॥ तिर्यच पजियसमुर्बिमनो विरह श्रतर्मुहूर्त्तनो ॥ गर्नजनो १५ मुहूर्च ॥ मनुष्य समुर्विमनो २४ मुहूत् ॥ गर्नज मनुष्यनो १५ मुहर्च ॥ व्यतर ज्योतिषी अने पहेसे वोजे देवलोके ५४ मुहूर्ख ॥ त्रीजे देवलोके ए दिवस २० मुहूर्त ॥ चोथे देवलोके १५ दिवस १० मुहूर्च ॥ पाचमे देवसोफे २५ दिवस २५ मुहूर्त ॥ ठठे देवलोके ४५ दिवस ॥ सातमे देवलोके ८० दिवस ॥ थाम्मे देवखोके १०० दिवस ॥ नयमे दशने सख्यातामास ॥ श्रग्यारमे पारमे सम्याता वर्ष ॥ पदेखी त्रिके सख्याता वर्षना सेंकमा ॥ बीजी त्रिके सख्याता वर्षनां सहस्र ॥ त्रीजी निके सख्याता वपना साखनो विरह ॥ चार धनुचर विमाने पस्यनो थसम्यातमो नाग ॥ सर्वार्थसिझे पल्यनो सख्यातमो नाग विरह ॥ मोक्ष जावानो विरह ज० १ समय, उत्० ६ मास ॥ इति पापमु विरहझार सपूर्ण ॥ ५॥ इषे उह नवनहार कहे ॥ प्रथम सात नरकनी विगत ॥ रत्नप्रना पृथ्वी केम कही ? तेमा १६ जातिना रत्नना १६ काम वे एकेको इजार जोजननो ने एटले १६ हजार जोजननो खर काम ते ॥ थाउवल काम ७० हजार जोजननो ले ॥ चोराशी हजार जोजननो पंकवस काम ते ॥१॥ शर्करप्रजा केम कही ? तेमा फकिरा ॥२॥ वासु केम कही १ तेमा वेसन ॥३॥ कपना केम कही ? तेर्मा कादव ॥ ४॥ धूम प्रना फेम कही ? तेमा धुमामो ने ॥ ५॥ तमप्रना केम कही ? तेमा अंधकार ठे॥६॥ तमतमापना केम कहो ? सेमा घधकारमा अधकार ठे॥॥ साते पृथ्वी जामी केटसी ते कई बे ॥ प्रथम पृथ्वी १ लाख ७० हजार जोजन जामी ठे॥ घोजी पृष्षी १ लाख ३५ हजार जोजन जामी ने ॥ त्रीजी पृप्वी १ लाख २० हजार जोजन जामी ॥ घोथी पृषी १ खाम्ब ५० हजार जोजन जामी ॥ पांचमी पृथ्वी १ लाख १७ हजार जोजन जामी ले ॥ बही १ साख १६ हजार जोजन जामी ने ॥ सातमी नरकनो पिंम १ खाख ७ हजार जोजन जामीना ले, ते शेने थाधारे रहो वे ? पहेलोए २० हजार जोजन घनो दघि दे, असख्याता जोजननां सहस्रनो घनधात ठे, असख्याता जोजन सहस्रनो तनुवात ते ॥ थसख्याता जोजनना सहस्रनो श्राफाश ॥ एमज साते नरके जाणवु ॥ सातमी नरके पटला विशेष जे हे श्रलोक ॥ इवे त्रीठो थलोफ केटले दूर ठे ते कई ठे ॥ पहेली नरकयो पार जोजने प्रोटो अलोक ठेवीजीए एक जोजनना प्रण नाग करीए SEPTERESTYEESEX तेमांना २ नाग पधारी ॥ठेल्खा सुधी पीजीए जोजन १२ प्रश्या नाग २॥ त्रीनोए जोजन १३ नाग १ प्रश्यो । चोथीए १४ जोजन ॥ पांचमोए १४ जोजन प्रश्या नाग॥ ठहोए १५ जोजन प्रयो नाग १ ॥ सातमीए १६ जोजन ॥ एटले थलोक ठे ॥ एकेकी नरके वामयाने याकारे ऋण वसय ठे ॥ पेली नरके ६ जोजननो घनोदधि ठे ॥ सामाचार जोज ननो घनवात ते १॥ जोजनना तनवात वे एकएक नरके एकएक तश्यो नाग वधारतो जार सातमी नरके याउ जाजननो घनोदधि ठे वळी एकेकी नरके पा पा जोजन धन पातमा धारता वधारता जार सातमी नरके उ जोजननो घनवात वेगवळी एकेको नरके एक जाजनना १२ नाग वरीप एवो एफेको जाग वधारतांजाव सातमी नरके वे जोजननो ने ॥ सात पृथ्यी कासरने सस्थाने ते साते नरके नए पाथमा तेनी विगत- पदमा नरके १३ पाथमा वे ॥ योजीए ११ ॥ त्रीजीए ए॥ चोथीए ॥ पांचमीए ५॥ उहाग ३ ॥ सातमोग १॥ ए सर्व ४ए पाथमा ठे॥ एकेको पाथको ३ हजार जोजननो जामो छ । ते मध्ये १ हजार जोजननो देठे जामो ठे ॥ एक हजार जोजननो उपर जामो प तननात ते ॥ वचे १ हजार जोजननी पोसार डे, तेमा नारकीनो वास ने ॥ एकेको पाथको अस ख्याता जोजनना सहस्रनो सांषो पहोळो ॥ हवे पायमानु थांतरो कहे ठे-प्रथम नरके १५ धातरा ॥ एकेके पाथमे शांतरो ११५७३ जोजन १ गाउ ६६६ धनुष्य २ हाथ १६ यांगळ एटलो ॥ पोजी नरके १० थांतरा बे, त्या एफेक पायमे श्रांतरो एजोज : | ननो डे nत्रीजी नरके यांतरा , स्यां एफेक पाथमे १५३७५ जोजननो थातरो ॥ चोयी नरके यांतरा ६ , त्या एकेक पाषमे थांतरो १६१६६ जोजन २ गाउ १३३३ धनुष्य ३२ थांगळनो डे ॥ पांचमी नरके थांतरा ४ डे, त्यां एफेफ पाथमे थातरो २५२५० जोजननो ॥ ही नरके यांतरा ये डे, स्यां एकेक पाथमे थांतरो ५२५०० जोजननो ॥ ए समस्त पाथमाना थांतरा कसा ॥ इवे पृथ्वीना पिंडनु मान को ठे॥ प्रथम नरके १ लाख ७० हजार जोजननो पिंम , ते माहिलो १ हजार जोजन उपर मुकोए, एक हजार जोजन ऐठे मुकीए, वच्चे १ लाख ७० हजार जोजननी पोखार ठे तेमा १३ पाथमा ने १५ थांतरा वे ए रीते तारतमपणे ठ पृथ्वी सुधी एमज जाणवु ॥
सातमी नरके सामी पावन इजार जोजन उपर मुफोए, सामी पापन हजार जोजन देव मुकीए, वच्चे ३ हजार जोजननी पोसार त्यां १ पाथमो दे ॥ साते नरके थइ उ लाख नरकावासा ठे तेनी विगत-पहेवी नरके ३० लाख नरकावाप्ता , वीजीए २५ लाख, श्रीजीप १५ लाख, चोथीए १० लाख, पाचमीप ३ लाख, नछोए १ लाख पाच मणा ॥ सातमीप पाच नरकावासा ॥ ते मध्ये एक नरकावासो सम्याता जोजननो ॥ ४ नरकासासा असख्याता जोजननावे जे सख्याता जोजनना नरकावासा ने त्यां सख्याता नारकोनो वास 8॥ ज श्रप्तख्याता जोजनना व त्या असख्याता नारकीनो वास ॥ इये सम्यातानु मान कहे ॥ को एक देवता ॥ पाख जोजननु एक मगनु जरता ६ मास सुधा चाले ॥व्हे मासे पार पामे, कोई न पामे ते असख्याता जोजनना जाणश॥जे थसग्याता जोजनना तेनो पार न पामे ॥सहयाता जोजनना ठे तेनो पार पामे ॥ पटले नानो ते साख जोजनना मोटा ते असहयाता जोजननो ठे ॥ इधे ४ए पायम मप्य मागे ए इषक नरकावासा , तेना नाम कद ठे-सीमत १, रोस्क १, रन ३, उजत ४, सघ्रात ५, असत्रात ६, विज्रात ७, नक्क ७, शीत ए, वक्रांत १०, श्रवक्रात ११, विकल १२, रौरव १३ ॥ ए १३ प्रथम नरकना क्रमे प्रतरना शक जाणवा ॥१॥ स्तनिक १, स्तनक २, मणक ३, चणक ४, घट्ट ५, सघट्ट ६, जिम्न 9, अषजिन्न U, सोल ए, सो लावच १०, घणसोमुक ११, ए बीजो नरके प्रतरना क्रमे ११ श्सक जाणवा ॥२॥ सप्त १, सपिक २, तपन ३, तापन ४, विदाय ५, प्रज्वलित ६, उज्वलित 9, सज्वलित ७, सप ज्वलित ए, ए त्रीजी नरके प्रतरना क्रमे ए इशक जाणवा ॥ ३ ॥ थार १, तार २, मार वव ४, तम ५, खामखम ६, खमखन , ए चाथी नरके प्रतरना क्रम ७ क जाणवा ॥४॥ खात १, तमस, उस ३, थप ४, तिमिस ५, ए ५मी नरके प्रतरना क्रमे ५ सक जाणवा ॥५॥ वाही १, वादल २, लालक ३ ए बी नरके प्रतरना क्रमे ३ शक जाणवा ॥ ६॥ अपश्चगण १, ए सातमी नरके प्रतर १ नो इसक (महोटो) नरकावासो जाणवा ॥७॥ व साते नरके यश् थावतीका घरू ए६५३ नरकायासा तेमा केटलाएक यश ठ, फेटलाएक चठरश , केटलाएक वाटसा ठ, पाकोना पुष्पा विकिर्ण जाणा ॥रत्नप्रना पप्पीना उपला पिंपकी ४२ हजार जोजन नीचे गया पठी समरेंनी राजधानी ने त्या कोम, १२ लाख नवनपतिनां भवन , तेनी विगत- कोम ६ लाख जवन दक्षिण दिशे उ, ३ कोम ६६ लाख नवन उत्तर दिशे ॥ दक्षिण दिशामा प्रथम थसुर कुमारना नवन ३४ लाख ठे, नागकुमारना ४४ साख डे, श्रीजाने ३० लाख, चोथाने ४० लाख, पाचमाने ४० लाख, ठगने ४० लाख, सातमाने ४० लाख, शावमाने ४० लाख, नवमाने ५० वाम्ब, दशमाने ४० लाख जवन ॥ उचर दिशामा असुर कुमारना ३० लाख नवन उ, घीजान ४० लाख, त्रीजाने ३४ खाख, चोथाने ३६ खाख, पांचमाने ३६ लाख, बठाने ३६ लाख, सातमाने ३६ लाख, थाउमाने ३६ लाख, नवमाने ४६ लाख, दशमाने ३६ लाख, एटला नवनपतिनां नवन ठे ॥ हवे १० नवनपतिना मुगटनो चिन्च करे ठे-थसुर कुमारने चुमामणीनु, पोजाने नागनी फेणनु, प्रोजाने गरुरुपखीनु, चोथाने वज्रनु, पाच माने कळसनु, ठगने सिंहनु, सातमाने घामानु, थाउमाने गजनु, नवमाने मगरमच्छनु, दशमाने सरावखा सपुष्टनु, ५ चिढ़े करी थाप थापणी जाति जा पवी ॥ हवे एनो वर्ण कहे -असुर फाळा, नागने उदहि पंसुरा, सुवन, दिशा ने स्सनिस ए त्रण सोवनवणे, विजु, अग्नि ने दीव ए प्रण रक्तवर्ण पवननो खीसो वर्ण ॥ ए दश नवनपतिना वर्ण जाणवा ॥ हवे तेनां वन कहे -असुर कुमारनां रक्त वस्त्र ॥ नाग १, जद दि १, विज्जु ३, दीप, ४, अग्नि ५ ए ५ ना लीलां वस्त्र ॥ दिशा स्तनित ने सुवन ए प्रणनां श्वेत वस्त्र ॥ वायुकुमार ने सस्याना राग सरखा घर जाणवा ॥ ए १० जयनपसिनां वा कसा ॥ एवे रत्नप्रजा पृथ्वीनो उपक्षो पिंम इजार जोजननो ने ते मध्ये १०० जोजन उपर मुकीए, १०० देठे मुफीए, तेनी बच्चे १६ व्यतरना असख्याता नगर उ उत्ण जबूझीप जेवमा ॥ मक्रिम महाविदह जेषमा ॥ जघन्य जरतक्षात्र जेयमा। पनी जाति ध्यजाने चिह्ने करी जाणवी ते कहे ते ॥ पहेलाने कलबु पृतनु, वीजान शाखी पृतनु, श्रीजाने वम पृतनु, पोधाने पामलो पकनु, पाचमाने अशोक वृक्षानु, उनाने घपक पदनु, सातमाने नागपतनु, थाउमाने टीयरु पक्षनु, ए थाप श्वापणां चिह्न कमां ॥ इवे तेनो वर्ण कहे ठे-पिशाच, यक, महोरग ने गधर्व ए ४ श्यामवर्ण ॥ फिनर नीखा ॥ राक्षस, किं पुरिस श्वेतवणे ॥ भूत कृष्ण वर्ण ॥ ए. नो वर्ण जाणवो ॥ इवे लोकनु मान पद ते ॥ त्रिवी दिशे असम्व्याती जोजननी क्रोमाकोमीनु ते ॥ तेमज उची दिशे तथा नीची दिशे असम्याता जोजननी कोमाकोमीनु च ॥ हवे असख्यात जोजननी कोमाकोमीनु मान कहे ठे ॥ जयूछीपनी ४ पोखे । देवागना ४ बलिपीम समकाळे उठा के, थने शीम गतिना धणी ६ देवता जवछीप पाखली एक चपटीमोहि २१ फेरा देश त ४ घलिपिम समकाळे अकरथी कोली ले नोंये परवा न दे, एवो शीघ्र गतिना धणी ६ देवता ६ दिशे चाल्या ॥ तेवारे को पक व्यवहारीयाने घर एक दीकरानो जन्म ययो, तेनु थायुप्य १ हजार वर्षनु, तेना ७ परिया एवे याउखे थया तोए लोकनो पार पाम्या ? नोरणहे समठे ॥ तेना नाम गोत्र क्षय गया तोपण लोकनो पार पाम्या ? नोइणहे समहे ॥ तो स्वामी केटला खगी गया ? घणु गया थने थोमु पाकी रया ॥ मेरु पर्वतनो कद त्यां रुचक प्रदेश थकी लोक्नु मान मपाय ॥ ते लाकने विषे असस्याता छोपसमुफ ते ॥ ते थसख्यातानु मान बढी उकार सागरे जेटखा रोमखम होय अथवा हवे २५ कोमाकोमो पख्योपमे जेटसा रोमखम होय तेटला कीप समुफ डे ॥ श्रथवा वारुणी कीप पठी ससारमाहि जेटली शुन वस्तुना नाम ले तेने वर अन वरावनास शब्द जोमता त्रण त्रण छीप समुपना नाम थाय तेवो रीते पण एकेके नामे असख्याता एकेक वस्तुन नामे छोपसमुष त, यावत् विनास समुअमृधी ते पण असख्यात ज गणवा ॥ पछी त्यांची एकेके नामे दय १, नाग २, जक३, नूत, अने स्वयनरमण एम पाच छोप तथा समुज छ ५॥ समस्त छोप अने समुनो मध्यतो जयूछीप ज ले ते जबूझोप पूर्ण चप्रमाने अथवा पूर्ण पुमसाने थाकारे ठे ॥ बाकी सर्व छीपसमुझ वलयाने थाकारे वे ॥ जबछीप १ लाख जाजननो ठे तेनी विगत-प्रथम दक्षिण उत्तरे पहोळानु मान कहे -५२६ जोजन ६ क्सानो नरतक्षेत्र पहोळो ठे, तेने ठेम १०५५ जोजन १५ कलानो चूलहीमवत पर्वत डे, तेने ठेके २१०५ जोजन ५ क्लानु हेमवय क्षेत्र ठे, सेने ठेके ४२१० जोजन १० कसानो महादेमवत पर्वत ठे, तेने ठेडे ४२१ जोजन १ कखानु इरिवास क्षेत्र दे, तेने बेमे १६न्धर जोजन २ कलानो निपध पर्षत , तेने ठेमे ३३६७४ जोजन ४ क्यानो महावि देदनो घिनाग ठ, तेने ठेमे १६७४२ जोजन २ फलानो नीलयत पर्वत , तेने ठेमे G४२१ जोजन १ कक्षानु रम्यग्वास देन , तेने ठेमे ४१० जोजन १० कलानो रूपी पर्वत , तने ठेमे २१०५ जोजन ५ कशानु एरणवय क्षेत्र , तेने बेमे २०५२ जोजन १२ कसानो शिखरी पर्वत ठे, तेने ठमे ५२६ जोजन ६ कसानु ऐरवतक्षेत्र बे, ए सर्वे दक्षिण उत्चर पोहोळा कसा ॥ इव पूर्व पश्चिम लाघा कहे डे ॥ १४५२८ जोजन ११ कलानो भरतक्षेत्र लावु ठे, ३१६७४ जोजन १६ कला देशे जणो हेमवय क्षेत्र लांबु जे, ७३५०१ जोजन १७॥ कक्षा इ रियास क्षेत्र लायु वे, एक लाख जोजन महाविदेह केत्र सांबु , ७३ए०१ जोजन १७॥ कला रम्यक्सास क्षेत्र साबु ठे, ३१६७४ जोजन १६ कला दशे लागु परणवय केन साबु ठे, १४५२७ जोजन ११ कला एरवत क्षेत्र खांबु छे, ए क्षेत्र खापा का ॥ हने वासधर पर्वतनु सायापणु कहे जे ॥ २४ए३५ जोजन हेमवत पर्वत खारा है, ५३५३१ जोजन महाहेमवत पर्वत खायो , ए४२५६ जोजन ५ कक्षानो निषधने नीलवत पर्वत सांवो के, ५३ए३१ जोजन काफेरो रूपी पर्वत खायो के, २४ए३२ जोजन शिखर | पर्वत खांवो बे, ए वासधर पर्वतर्नु सांघापणु कटुं ॥ इवे उंचापणु कहे वे ॥ चूल हिमवत पर्षत थने शिखरी पर्वत १५० जोजनना नचा , १५० गान नीचे धरतीमा डे महाहे मषत पर्वत बने रूपीपर्वत २०० जोजन उघा , २०० गाउ नीचे धरतीमां के निपध नीसवत पर्वत 100 जोजन उचाले, ४० गाउ नीचे धरतीमा ठे मानुष्योतर पर्वत १७२१ जोजन उंचा बे, १७२१ गाउ नीचे धरतीमा २ ॥ जबूझीप पूर्व पश्चिम साख जोजननोठे तेनुं पहोखपणु कहे जे ॥ ५४२ थे वनमुख दे, १५० जोजन ६ थंतर नदी , ४000 जोजनना G० वखारा पर्वत ठे, Y8000 जोजनना घे नसाल वन ते १०००० जोजन मेरु पर्वत जामो बे, ३५४०४ जोजन विजयनु पहोलपणु दे, ए जबछीपनु पहोलपणु कप तेनी परिधि ३१६२२७ जोजन ३ गाठ १५० धनुष्य १३॥ थागुखनी जाणयी ए जबछीपने चारे दिशे ४ दरवाजा ले तेनु थंतर पुए ५५ जोजन देशे उणु ठे जबूछीपनु क्षेत्रफल सातसें नेवु कोमी, ५६ लाख, ए हजार, १५० जोजन थने पोणा वे गाउ तथा सामी घासन हाथ थाय अर्थात् जोजन जोजनना ककमा करीए तो उपर कसा तेटखा थाय ॥
जबूझोप पदोळो १ पास जोजननो वे तेने फरतो २ लाख जोजननो लवण समुन , तेने फरता ४ साख जोजननो धासकी खम ठे, तेने फरतो ७ लाख जोजननो कालोदधि समुच ठे, तेने फरतो १६ साख जोजननो पुष्करछीप ठे ॥ मेरुपर्वत एएuad जोजन उंचो वे एक हजार जोजन धरतीमा उमो तेना मध्य नागधी दक्षिण उत्तरे पुष्कराई सुधी गणीए, एम करता ४५ साख जोजन थाय ते मनुष्यक्षेत्र जाणदुं तेनी परिधि र कोमी ४२ लाख ३० हजार २४ए जोजन थाय उपरात छीपसमुष वाम घमणा जाणवा ॥ हवे जवुछीपनी नदीयोनो विचार कहे ते ॥ जबूझीप मध्ये मेरु पर्वतनी दक्षिण दिशे ७ नदी शाश्वती ले तेनी विगत ॥ प्रथम गगा श्रने सिंधु चूल हिमवत पर्वतथी निकली ठे ॥ मूखे जामपणे ६॥ जोजन-पूर्व पश्चिम जरत मध्ये चाली, समु उमा जळी त्यां पहोळपणु ६२॥ जोजननु ले गगा नदीनो परिवार १४००० नदीनो वे सिंधु नदीनो परिवार १४००० नदीनो ॥ त्रीजी रोहितसा नदी ते पण चूषहेम पतना पनपड्थी उत्तरी, पेवे पासे हेमवय क्षेत्र मध्ये चाली मूले पहोलपणु -ad- १२॥ जोजननो ब, धते समुपमा नली, त्यां १२५ जोजन पहोखपणो ठे ॥ बोथी रोहिता नदी ते महादेमघतना प्रहथी उतरी, ते था वाजु हेमयत क्षेत्र मध्ये चाप्सी मूखे पड़ोळपणुं १॥ जोजननुं वे अते समुफ मध्ये नळी, त्यां पहो ळपणु १२५ जोजननु ले ए पन्ने नदीनो परिवार २००० नदीनो ठे ॥ पांममी हरिकांता नदी ॥ बी इ सखीला नदी ते महाहेमवतनां पह थकी उतरी ते पहेले पासे हरिवास केत्र मध्ये चसी मूले पहोलपणु २५ जोजन- ठे, श्यते समुफ मध्ये मळी पूर्व पश्चिमने पासे, स्यां २५० जोजन पहोवपणु वे ए येउनो परिवार ५६००० नदीनो वे ॥ सातमी सीता नदी से निषध पर्वसना इह थकी उसरी, ते पहेले पासे देवकुरुक्षेत्र मध्य चाषी मूझे पहोसपणु ५० जोजननु डे श्रते समुफ मध्ये जळी, त्यां ५०० जोजन पहोळी ठे तेनो परिवार ५३२००० नदीनो ठे ॥ वे मेरुनी उत्तरनी दिशाए ७ शाश्वतो नदो उ प्रथम सीसोदा नदी ते नीखवत पर्षतना हथी उतरी, उत्तर कुरुक्षेत्र मध्ये वाली मूले पछोळपणु ५० जोजननु वे, असे समुप्रमा जळी त्या ५५० जोजन पहोळी ठे, सेनो परिवार ५३२००० नदीनो ठे॥ीजी नारीकता, त्रीजी नरकता, ए ये रूपी पर्वतना प्रदथी उतरी, ते था तरफ रम्यक्वास क्षेत्र मध्ये चाली मूखे पहोळपणु २५ जोजन, थते समुजमा जळी, त्या २५० जोजन पहोळी , ए पेनो परिवार ५६००० नदीनो डे ॥ चोयी रूपकुला, पाचमी सोवन्नकुला ॥ ते मध्ये रूपकुला नदी रूपी पर्वर्तना अथकी उतरी, ते रणवय क्षेत्र मध्ये चाली, मुखे १२॥ जोजन पहोळपणु , अते समुफ मध्ये नळी, त्या १२५ जोजन पोहोळी , थने सोवनकुला नदी शिखरी पर्वतना अह थकी उतरी, तेथा तरफ ऐरणवय क्षेत्र मध्ये चाली, मूले २॥ जोजननु पहोळपणु , यते समुष मप्ये जळी, स्या १२५ जोजन पहाळी ठे, ए पेनो परिवार २७००० नदीनो ॥ बनी रचा, सातमी रतवः ॥ ते शिखरी पर्वतना प्रहथकी उतरी, ते ऐरवच क्षेत्रे पेले पासे पूर्व पश्चिम दिशे चाली, मूखे ६॥ जोजन पहोलपणु ठ, श्रते समुड मध्ये नळी, त्या ६॥ जोजन पहोळी ए ये नदीनो परिवार १४००० नदीनो ॥ सर्व मळी १४५६००० नदीना परिवार ते ॥ इथे पर्वत यात्री कहे ते ॥ सर्व मढ़ी थडी ड्रीप मध्ये १३४ए शाश्वता पर्वत च ॥ हवे ४ समुन प्रत्येक प्रत्येक रसना ले ते कई डे ॥ अषण समुछ खारो १॥ मथ सरिखो वारुणी ॥ खीर समुज दूध सरिखो ३ ॥ घय समुप घृत सरिखो ४ ॥ कालोदधि, पुष्कर आने वयतूरमण ए प्रण समुफ स्वन पाणीना, थाकी सर्व समुफ इनु रसना ते सर्व समुफ १००० जोजन उमा ॥ हवे ज्योतिषीनो विचार करे ॥ छीप समु८ मध्ये यजमा, सूर्य, गृह, नक्षत्र, तारा सघळे , तेनो विवरो ॥ जबुझीप मध्ये २ बमा २ सूर्य ने ॥ खषण समुप मध्ये ४ चममा ४ सूर्य २ ॥ धातकी खम मध्ये १५ चनमा १२ सूर्य ठे ॥ कालोदधि समुफ़ मध्ये ४५ चषमा ४२ सूर्य दे ॥ पुष्करा: मध्ये ७५ चनमा ७५ सूर्य ते ॥ पुष्करछीप मध्ये १४४ चपमा १४४ सूर्य ठे ॥ पुष्कर समुज मध्ये ४एर चप्रमा भएर सूर्य ते ॥ वारुणी दीप मध्ये १६०० चषमा १६७० सूर्य रे ॥ पारुणी समुज मध्ये ५७३६ चश्मा ५७३६ सूर्य २ ॥ कीर छीप मध्ये १ए५०४ चञ्जमा १ए। सूर्य ठे ॥कार समुफ मध्ये ६६०६४ बममा ६६७६४ सूर्य ठे ॥ घृत छीप मध्ये २२ चनमा २२२ सूर्य ठे ॥ घृत समुफ मध्ये अपए४२४ मा ए४५४ सूर्य ठे ॥ छ छीप मध्य २६६११५० चममा २६६११२० सूर्य ने ॥ इक्षु समुझ मध्ये ए०७५६३२ चश्मा ए७५६३२ सूर्य डे ॥ नदीश्वर द्वीप मध्ये ३१०२० चममा ३१०२०२७० सूर्य २ ॥ नंदीश्वर समुप मध्ये १०५एमएGuu चश्मा २०ए०एन० सूर्य २ ॥ अरुणहीप मध्ये ३६१५एमए ६ घमा ३६१५ए ए७६ सूर्य जे ॥ अरुण समुफ मध्ये २५७२३७६१० चप्रमा, २५७२३०६१७ सूर्य ॥ ते उपरात छीपसमुख, जे सख्याता जोजनना डे, त्या सख्याता चमा थने सख्याता सूर्य ठे ॥ जे छीप समुत्र थसस्याता जोजननां डे त्यां असख्याता चजमा थने असख्याता सूर्य २ ॥ ज्योतिष चक्र यति छोप मध्ये चर ॥ अढि छोप घहार ज्योतिष चक्र स्थिर ठे तेनु परिमाण थढी हिपना ज्योतिषी विमान करता थमधु व चने ज्योति पण अमधी॥ श्लई कोठाने सस्थाने ठे ते स्फाटिक रनमय ॥ प्रथम पृषी ररनप्रना थकी ए जोजन मध्ये ज्योतिष चक्र नथी, ते उपर ११० जोजन मध्ये ज्योतिष चक्र ॥ एक जोजने ताराना विमान ले ॥ Guu जोजने सूर्यनु विमान ठे ॥ Gua जोजने चप्रमानु विमान वे ॥60 जोजने नक्षत्रनां विमान ३ ॥ पण जोजने घुम्नु विमान ठे ॥ ए? जोजने शुक्रनो विमान ठे ॥ एजोजने बृहस्पतिनु विमान ठ॥ए जाजने मगळनु विमान ॥ ए जोजने शनिश्चरनु विमान ॥ एक चम मानो परिवार G गृह २७ नक्षत्र, ६६ हजार ए से ७५ एटली कोमाकोमी ताराना विमान ॥ तेटसा परिवार सूर्यनो पण जाणवो ॥ चप्रमानु विमान एक जोजनना ६१ नाग क- रोग तेमाना ५६ जागा सांगु पहोलु ने २७ नागनु उचु ने जामु उ ॥ त्रिगुणी जारी परिधि व ॥ सूर्यनु विमान ६१ या नागनु खांबु पहोल्नु ने २४ जागनु नचुने जामु ॥ त्रिगुणी काफेरी परिधि ठे ॥ गृहना विमान २ गाउ सांयां पहोळां ठे ॥ एक गाउना उचा ने जामा ठे, प्रिगुणी काफेरी परिधि ठे ॥ नक्षननां विमान १ गाउ लावा पहोळा ठे थक गाउना उचा ने जामा ठे॥ त्रिगुणी काफेरी परिधि ते ॥ तारानां विमान थर्ड गाउ खाया पहोळा ठे॥पा गाउ उचा ने जामां , त्रिगुणी काफेरी परिधि ठे ॥ चमार्नु विमान १६ हजार देवता उपाठे ॥ ते ४ हजार हाथीने रूपे दक्षिण दिशे ॥ ४ हजार सिंहने रूपे पूर्व दिशे ॥ ४ हजार घोमाने रूपे उत्तर दिशे॥ ४ हजार पृपत्नने रूपे पश्चिम दिशे उपामे ॥ तेम सूर्यने पण जाणवु ॥ एरीते दिशे ७ हजार देवता ग्रहना धिमानने उपाझे , तेमज ५ दजार देयता नफवना विमानने उपामे , तेमज २ हजार देवता तारानां घिमानने उपामे ॥ चारे दिशे चार रूपे चंपमानी माफक जाणवु ॥ चासवानी गति मानी मद गति ते, तेथी सूर्यनी गति उतावळी, तेथी प्रहनी गति उतावळी ने वी नक्षत्रनी गति उतारळी, तेथी तारानी गति उतावळी ॥चप्रमाना एक विमानयी वीजा चंद्रमाना रिमानने १ खाख जोजन काफेरानु थातर, ते ॥ एफ सूर्यणी वीजा सुर्यने १ लाख जोजन कारु थांतरु ते॥सूर्य चप्रमाने ५० हजार जोजननु यातरु ते ॥ चष्मा ने सूर्यना विमा नने ५० हजार जोजननु यांतर ठे॥हथे, ज्योतिपीना उत्कृष्ट व्याघात याश्रियातरां कहे ॥१२२५२ जोजन यांतरु ते केम ११० हजार जोजन मेरुनो कद वे यने ११२१ जोजन ज्योतिपी चफ मेरु यकी अळगु फरे ठे ॥ ते घेउ पासाना थातरा श्रने मेरुनो कद सन मकी उ० १२२५२ जोजन थातरु थाय ॥ ज० २६६ जोजन यांतर ते किम ? निपध नीसरत पर्वतना कुट २५० जोजन पदोका वे ते यकी छ जोजन ज्योतिपचक्र थळगु फरे ते ते येउ पासानु थांतरू थने कुटना कंद सर्व मळी २६६ जोजन घाय ॥ हवे निष्पापाते यातलं ॥ नियाघात ते शु ? ज्या पर्यत फुट थामु नथी ते ॥ त्या उप गात २ नु यातनं ॥ ज० ५०० धनुप्यनु यातरु जाणवु ॥ ए यांतर का ॥ हये सूर्यनु तेज गु १०० जोजन यन नीचु १७०० जोजन तपे॥ ते केम ? रत्नप्रना पृथ्वी की पश्चि मना पासानी पाचमी विजय १००० जोजन उमीठे अने रत्नप्रनापृथ्वी यकी 100 जोजन सूर्य उचो उ ॥ सर्व मळी पटषु याय ॥ ४७२६३ जोजनने एक जोजनना, ६० नाग फरीए तेमांना २१ नाग पटनु त्रीबु तेज करे ॥ एना पिमान समस्त वाटखा सस्थाने ते ॥ हने ज्योतिपचक्रयी यसग्ग्यात जोजननी कोमाकोमी उचा जश्ए त्यारे स्या बार देवलोक नर मेरेयक यने पाच थनुत्तर विमान थाने ठे ॥ ते शेने आधारे ते ? पहेगु, घीजु देवलोक धनोदधिने याधारे ठे, तेनी उपरना ३ देवलोक घन वा ने याधारे ठ, ते उपरना ३ देतोफ घनोदधि यने धनपातने याधारे ठे, ते उपर ४ देयलोक, ए ग्रेयेयफ धने ५ थनुत्तर विमान ए सर्व थाफाश प्रतिन्वित ठे ॥ पदेखा वीजा देवलोकना तक्षा २६०७ जोजनना जामा ठे ॥ ते उपरना २ देवलोकनां तळां २५०० जोजनना जानां ॥ ते उपरना २ देवलोकनां तळा २० जोजननां जामा २ ॥ ते उपरना ४ देवखोकनां तळा २३०० जोजनना जामा ले ॥ नव मैवेयकना तळा २५ सें जोजनना जामा ने ॥ पाच अनुचर विमानना तळो २१ से जोजनना जामा २ ॥ पहला वीजा देवलोकनां विमान' ५०० जोजन उचा ते ॥ ते उपरना २ देवखोकनां विमान ६०० जोजन बचाने ॥ ते उपरना २ देवलोकनां विमान 300 जोजन उचा २ ॥ ते उपरना २ देवलोकनां विमान ८०० जोजन उचां वे ॥ ते उपरना ४ देवलोकना विमान ९०० जोजन उचाने ॥ ते उपर ए ग्रेवेयकनां विमान १००० जोजन उचां ठे ॥ पाच अनुत्तर विमान ११०० जोजन उचा ठे ॥ पहेला ४ देवलोक थर्डचाकार डे ॥ ते उपरना ४ देवसोक पूर्णचनाकारे ॥ ते उपरना ४ देवलोक श्वर्डचझाकारे ठे॥ नव ग्रैवेयक येडाने श्राफारे ॥ चार श्शनुत्तर विमान थर्डचनाकारे वे ॥ पाचमु पूर्णचडाकारे ॥ पहेसा वीजा देवलोके ५ वर्ण ॥ ते उपरना २ देवलोके ४ वर्ण ठे, काळो नथी ॥ ते उपरना ५ देवलोके ३ वर्ष BULE वे, काळो नीलो नयी ॥ ते उपरना २ देवलोके घे वर्ण बे, पोळो ने घोळो ॥ ते उपरना ४ देवलोक, ए प्रेषेयके धोळो वर्ष डे ॥ पांच अनुत्तर विमाने उत्कृष्टो श्वेत वर्ण ले ॥ पार देवलोक ए मैवेयक श्यने ५ अनुत्तर विमाने १० प्रकारना मनोझलोग ॥ मनोज्ञ शब्द | १॥ मनोक्ष रूप ॥ मनोज्ञ गध ३ ॥ मनोज रस ४ ॥ मनाझ स्पर्श ५ ॥ मनोज कान्ति ६ ॥ मनोज्ञ खायएय बोखबार्नु ७ ॥ मनोज गति पासवानी ॥ मना श्वान रणनी ज्योति ए॥ मनोज थायुष्यनी स्थिति १० ॥ हवे देवखोकमा प्रतर ६५ ले तेनी विगत ॥ पहेसे बीजे थइ १३ प्रतर हे ॥त्रीजे घोषे १५ प्रतर ले ॥ पांचमे उ प्रतर छे ॥ठे ५ प्रतर ठे॥ उपसा ६ देवलोके चार चार प्रतर २ ॥ ए प्रेषयकना ए प्रतर उ॥ पांच श्वनुत्तर विमाननु १ प्रतर ते ॥ वे विमाननी सख्या कहे रे ॥ पहेला सौ धर्मे ३२ लाख विमान ठे॥ चीजे खाख विमान ठे ॥त्रीजे ११ लाख विमान ठे॥ चोथे छ लाख विमान ठे । पाँचमे ४ लाख विमान ॥ उठे ५० हजार विमान ॥ सातमे ४० हजार विमान ॥ घाउमे ६ हजार विमान ठे ॥ नवमे दशमे ४०० विमान पर ॥ थग्यारमे पारमे ३०० विमान २ ॥ पहली श्रीके १९१ विमान ॥ बीजी त्रीके १०७ विमान ठे। बिजी श्रीके १०० विमान ठे ॥ पांच अनुत्तरना ५ विमान २॥ सर्व मळी Hए०२३ विमान बे ॥ तेमा केटलांएक सख्याताने केटलाएक असख्याता जोजनना ॥ सेमा सर्व देवसोके पई २५०६ वाटसा विमान ॥२६७७ यश विमान ॥२६०४ चमरस विमान २ ॥ सर्व मळी थावलोकाषध विमान Jusa वे ॥षाकी भएरए पुष्पाविकी कि ठे। वे सर्वार्थ सिद्ध विमानयी १५ जोजन उची सिजिशिक्षा , ते ४५ लाख जोजन खायो पहोळी , थाठ जोजन मध्ये जामी डे, ठेके माखीनी पांखधी पातळी ॥ तेनी परिषि १४२३०२४ए जोजन १ गाठ १७ धनुष्य ६ हाथ १३ यांगळ जारी ॥ उज्यस जेवो शंख, अकरस्न, जेवो मचकुद, जेवु धनु फीण, जेवो रूपानो पट, जेयां चनमानां किरण, जेवु दहीनु खोट, तेथी ते अधिक उजळी ॥ से उपर एक जोजनने २४ मे थम विजागे सिक रमा डे ॥ खोकने मस्तके रमा डे ॥ शस्रोकथी ४ श्रांगळ नीचे रमा ठे ॥ ३१ गुणे करी विराजमान ॥ ते ३१ गुण कहे बे॥ पांच छानावर्णीय SEARATHI SHERE क्षय को, ए दर्शनावर्णीय दय को, घे बदनीय क्षय कर्या, समकित मोहनीय, चारित्र माइनीय क्षय की, ४ गतिना घाउखा कय कर्या, शुज नाम अशुल नाम कय कर्या, उच गान नीच गोत्र क्षय की, दानांतराय, लाजातराय, जागांतराय, उपनोगांतराय, यीयोतराय य कर्या ॥ ए ३१ गुणे करी सहित सिफले ॥ इव १५ गज कई ले ॥ सात पृथ्वी नीच ७ राज वे ॥ रत्नप्रनाथी नच सौधर्म देवलोक सुधी १ राज ॥ सोध मेथी माहेश देवलोक सुधी २ राज ॥ माहेपी सांतक सुधी ३ राज ॥ खांतकथी सह सार सुधी ४ राज ॥ सहसार यो अच्युत मुधी ५ राज ॥ श्रच्युतथी ए प्रेवेयक सुधी ६ राज । ए ग्रेयेयकथी लोकना श्रत सुधी ७ राज ॥ एटले ७ राज काफेरा नीचा ने राज माउरा उचा जाणवा ॥ इति नवनहार सपूण ॥ ६ ॥ हवे सातमु गतागतिधार कहे ॥ हवे फया दमकमायी कया दमकमां जाय, फ्यायी थावे ते कदेठे ॥ नरका तियेच पचेन्द्रिय समुचिम थन गर्नज धने मनुष्य गर्नज समाथी यावे ॥ नरकना नीका तिर्यंच पचेंजिय गन्नज ने गर्नज मनुष्यमा जाय ॥ ए समुच्चय करो ॥ हवे विस्तारथी कदे ठे ॥ नरकमा क्यानो श्रावे कर नरके जाय ? 'हेली नरके तिर्यच पचेंजिय समुर्णिम ने गर्लज जाय ॥ बीजी नरके जुजपर जाय ॥ श्रीजी सुधी खेचर जाय ॥ चोथी सुधी चठपद सिंहादिक जाय ॥ पाचमी सुधी उरपर सर्प जाय ॥ बट्ठी सुधी स्त्री जाय ॥ सातमी सुधी नर नपुसक मच्छादिक जाय ॥ इवे नरकना नीफळ्या फ्या थावे ते कद्दे ॥ सातमी नरकनो नोकळपो मनुष्य न थाय पण सिर्यच पंचेंजिय गर्नजमा जाय ॥ पाम तो समकित पामे, पण विरती कशी न पामे ॥ बनी नरकनो नी कळ्यो तियेच पर्चेजिय गर्नज अने मनुष्य गर्लजमा यावे, पामे तो देशपिरती, पण सर्व विरती न पाम ॥ पाचमी नरकनो नोकळ्यो तियेच गर्नज ने मनुष्य गर्जजमा श्रावे, पामे तो सर्व विरती, पण केवल ज्ञान 7 पामे ॥ चोथी नरफनो नीकळ्यो तियेच गर्नज ने मनुष्य गर्नजमा यावे, पामे तो केवल ज्ञान पामे पण तीर्थंकरपद न पामे ॥ त्रीजी SAXEEXSE LASSASURESU नरकनो नीकळ्यो तीर्थकरपद पामे, पण वासुदेव बलदेवनी पदवी न पामे ॥ चीजी नरफनो नीफळ्यो पासुदेवनी पदवी पामे, पण चक्रवर्तीनी पदवो न पामे ॥ पहेली नर फनो नीकल्यो चक्रवर्ती विगेरे सघळी पदवी पामे ॥ हवे नवनपतिमा तिर्यंच पचेंजिय- समुठिम थने गर्नज, मनुष्य गर्नज ए घेमाथी थावे ॥ त्यांनो नीकळ्यो चादर पृथ्वी थप ने प्रत्येक वनस्पति, तियेच पचेंघिय गर्नज, मनुष्य गर्नज एटखामा थावे॥ पृथ्वी मा नारकी वर्जी याकी २३ दमक थकी थावे, त्यांनो नोकळ्यो नारकी देवता वर्जी वाकी २० दमकमा जाय ॥ यपमा नारकी वर्जी २३ दमकनो श्रावे, त्यांनो नोकळ्यो नारकी देवता वर्जी १० दमकमा जाय ॥ वनस्पतिमा नारकी वर्जि बाकी २३ दमकमांधी थावे, त्यांनो नीकल्यो नारको देवता वर्जी १० दमकमा जाय ॥ तेल वायुमा नारको देवता धर्जी वाकी १० दमकमांथी यावे, त्यांनो नीकळ्यो नारकी देवता मनुष्य वर्जी नव दमकमा जाय ॥ विगोप्रिय प्रणे १० दमकमां जाय ॥ पां नारकी देवता वर्जी घाकी १० दमकमाथी थाये ॥ तिर्यष समुर्छिम पंचेंजियमां नौरकी दवता वर्जी बाकी १० दमकमाथी थावे, यमाथी नीकळ्या ज्योतिषी वैमानिक वर्जी बाकी २२ दमकमा जाय ॥ हवे गर्नज तिर्यघमा २४ दमकथी थावे, चोवीसे दमकमां जाय ॥ उपर थाउमा देवघोफ उपरांत न जाय ॥ हवे मनुष्य गजमा तेउवाट वर्जी २५ दमकमाथी यावे, त्यांना नोकळ्या २४ दमके जाय ॥ हवे मनुष्य समुलिममा तेउवायु नारकी देवता वर्जी पाकी ० दमकमाथी याये, त्यांना नोकळ्या देवता नारकी वर्जी घाकी १० दमको जाय ॥ वाणव्यतरमा तियेच पचेंघिय समुटिम ने गर्नज थने गर्नज मनुष्यमाथी थावे, त्याना नीकळ्या घादर पृथ्वी श्रप ने प्रत्येक वनस्पति, तिच पचंडिय गर्नज, मनुष्य गर्नज एमा जाय ॥ ज्योतिषीमा तियेच पचेंजिय गर्जज श्वने मनुष्य गर्नजमाथी वावे, त्यांना नोकळ्या यादर पृषी थप ने प्रत्येक वनस्पति तियेच पंचेंजिय गर्नज, मनुष्य गर्नजमां जाय ॥ वैमानिक पेहसा वीजा देवलोका तिर्यच पप्रिय गर्नज, मनुष्य गर्नजमांधी थावे, त्याना नीकळ्या पादर पृथ्वी अप ने प्रत्येक वनस्यति, तियेच प.प्रिय गर्नज, मनुष्य गर्नज ए पांचां जाय ॥ त्रीजा देवखोकथी मामी थाउमा सुधी तिर्यच पचेंजिय गर्नज थने मनुष्य गर्नज एमाथी थावे, त्यांना नोकळ्या तियेच गर्नज पचेंजिय थन मनुप्य गर्नजमा जाय ॥ नवमा देवलोकथी सर्वार्थ सिझ सुधी मनुष्य गर्नजमायी यावे, त्यांना नोकळ्या गर्नज मनुष्यमा जाय ॥ मनुष्य गर्नज मोक पण जाय, पण त्यांथी यावे नहि ॥ हवे १ समये मोक्ष जाय तेनी सरुया श्रने क्याथी केटला जाय ते क्हे ते ।। पहेली ३ नरकना नारकीना जीव मनुष्य गर्जजमां श्रावे ॥ एफ समये १० मोक्ष जाय ॥ ए सझा सघळे जाणवी ॥ चोथीना ४ जाय ॥ पांचमी सातमीना नोकळ्या न जाय ॥ नवनपतिना देवताना १० जाय ॥ तेनी देवीनां ५ जाय ॥ पृथ्वी थपना ४ जाय ॥ तेउ पायुना न जाय ॥ वनस्पतिना ६ जाय ॥ विगळं प्रियना ४ ज्ञान पामे, पण मोक्ष न जाय॥ तियेच पचेंजियना १० जाय। तियेचणीना २० जाय॥ मनुष्य गतिना १० जाय॥ पुरुप लिंगे १० जाय ॥स्त्रीलिंगना २० जाय ॥ नपुसकषिगना १० जाय व्यतरना १० जाय ॥ तेनी देवीना५जाय ॥ ज्योतिषीना १० जाय॥ तेनी देवीना २० जाय ॥ वैमानिकना १०७ जाय ॥तेनी देवीना २० जाय ॥उचा लोकमाथी जाय ॥नीचाखोकमाथी २० जाय ॥
त्रीठा सोकमाथी १०७ जाय ॥समुखमाथी रजाय ॥शेष जळमाथी ३ जाय ॥ उस्कृष्टी श्रवगा इनाना २ जाय ॥ मध्यम थपगाहनाना १७ जाय ॥ जघन्य अवगाहनाना ४ जाय ॥ स्वलिंगना १०७ जाय ॥ अन्यखिग १० जाय ॥ गृहलिंगे ४ जाय ॥ नदनधनमाथी जाय ।। पुस्पथी पुस्प यश्न १०७ जाय ॥ वाकी नागे १७ जाय ॥ पुरुषयी स्त्रीलिंगे थइ १० जाय ॥ पुस्पथी नपुसकलिंग यश १० जाय ॥ स्त्रीथी पुरुपलिंगे थइ २० जाय ॥ स्त्रीथी स्री यश्ने १० जाय ॥ स्त्रीथी नपुसक थर १० जाय ॥ नपुसकथी पुरुप थइ १० जाय ।। नपुसकथी स्त्री थऽ १० जाय ॥ नपुसकथी नपुसक थर १० जाय ॥ एक समये जे जे गतिना मनुष्यमा यावी उत्कृष्टा मोक्ष एक समये जाय ते कस्या ॥ हवे १५ नेदे सिक याय ते फहे ॥ तोर्थ सिका १॥ यतीर्थ सिझा २ ॥ तीयकर सिका ३ ॥ यतीर्थकर सिद्धा ४ ॥ स्वयवुझ सिझा ५ ॥ प्रत्येक घुछ सिझा ६ ॥ वोधवा हि सिझा ७ ॥ स्वलिंग सिका ७ ॥ यन्यलिग सिझा ए॥ गृहलिंग सिका १० ॥ पुरुषलिंग सिका ११ ॥ स्त्रीलिंग सिझा १२ ॥ नपुसक लिंग सिखा २३ ॥ एक सिझा १४ ॥ अनेक सिझा १५ ॥ हरे JEE स्वसिंग सिहा ते कहे ठे ॥ पहेले समये १०७ मोक जाय ॥ बीजे समये १०५ जाय ॥ श्रीजे समये ए६ जाय ॥ चोये समये ४ जाय ॥ पांचमे समये १२ जाय ॥ बठे समये ६० जाय ॥ सातमे समये ४ जाय ॥ श्राग्मे समये ३२ जाय ॥ इति गतागतिहार सपूर्ण ॥ ७ ॥ हये थाउमु सघयणकार कहे ॥ वजऋपन नाराच संघयण ॥ अषन नाराच सघयण २ ॥ नाराच संघयण ३॥ थईनाराच सघयण ४ ॥ किलकु सघयण ५ ॥ ठेवटु सघयण ६ ॥ इवे पञापन नाराच सघयण ते केने कहिये ? जे थस्थिना ठेमा परस्पर वींटाया होय वच्चे थस्थिनी खिल्ली थने उपर थस्थिनो पाटो एवी रीते देहनी सधि सर्वे हाय, ते प्रथम सघयण जाणतुं॥ अपन नाराच ते केने कहिये ? तेने पन्ने पासे थस्थिना ठेमा विंटाया होय थने उपर पाटो छोय वच्चे खिसी न होय, ए वीजु सघयण जाणतु ॥२॥त्रीजु नाराच ते केने कहिये ? तेने यन्ने पासे थस्थिना ठेगा विंटाया होय थने बच्चे खिसी पाटो न होय,
ए प्रीजु सघयण जाणवु ॥ ३॥ चोथु थर्धनाराच सघयण ते केने कहिये ? बस्थिनो
ठेमो एक घाजुनो विंटायो होय, घीजो सामो थस्थिनो ठेमो थमकी रहे, थने घोजी
पासे खांसी होय, ते चोथु सघयण जाणवु ॥ ४ ॥ पांचमु किसक सघयण ते केने कहिये?
सधिनो यस्थि पन्ने उपरना मे थावी रहे अने बच्चे खीसी होय पण उपर पाटो नहि
थने यन्ने थस्थिना प्रांत परस्पर पिटाया नहि ते पांच, सघयण जाणवु ॥ ५ ॥ ब्लु
ठेवटु सघयण ते फेने कहिये ते सघयण पञ्चे खिसी नहि पाटो नहि, बन्ने यात्रु
यस्थिना ठेका परस्पर विंटाया नहि एवा थव्यवस्थित श्चस्थिना सांधा, सामसामा श्रमकी
रहे थने थति नवल ते तु ठेवटु सघयण जाणवु ॥ ६ ॥ नारकी देवता श्रसघयणी, ५
केंघिय, ३ विगखें जिय, तिर्यंच पचेंघिय समुर्छिम ने मनुष्य समुईम एटलाने वटु
सघयण ॥ तिर्यच पर्चेप्रिय गर्नज ने मनुष्य गर्नजमा सघयण ६ खाने ॥ सिख सघ
यणी जाणवा ॥
इति सघयणधार सपूर्ण ॥७॥
हवे नवमु सगणधार कहे ॥ ममवसरस सस्थान १ ॥ निगाह परिममा सस्थान २ ॥ सादि सगण ३॥ वामन सवाण ४ ४ क ज समाप ५ । हुम समाण ६॥ इव तमचठरस्। सगण ते केने कहिये ? जे चार घाजु सरयु होय ॥ पद्मासन वेग जेटल बग्न जानुनु श्रातरु ॥ तेटस वळी याप्त नने खखाटनु थातरु ॥ वळी तेटनुज धातरु माधा जास्तुथी जमाया स्कंध सुधी, थने जमणा जानुषी माया कधसुधी, एटसे चारे वाजु सरनु ठोरु हाय ते समचरस समय जाणवु ॥ १॥ निगोह परिममा सठाण ते केडने कहिये ? जे वमक्षनी माफक उपर पूर्ण वन नानीयो नीचे हीनाग ते घीजे सगण जाणवु ॥२॥ सादि सवाण ते केड्ने कहिये? जे नानी नीचे युक्तमान प्रमाण, पग कटी जानु प्रमुख सर्व रुकु होय, चने नानीयो उपट्यो सर्प पामो होय, उयु दाथ माणु मुख प्रति सर्व थति अराकृति होय ते श्रीजु पाटो होय ॥ कुन्न सताय ते केने कहिय? ने सम्धाने हाथ पग मस्तक प्रोवा कहिये १ साळा होय, अने उदर पुन मुख प्रमुख वांछ दोष से धोत्रु सवाण जाणतुं ॥ ४ ॥ वामन संगण ते केने कहिये ? जे पूर्वना चोषापी उपरांठे होय ते पाचमु सठाण जाणवु ॥५॥ हुम ते केड्ने कहिये ? रुढ मूर मृगापुत्र लोढीयानी माफक थंगे थवयये करी श्रवक्षण होय, सांगे पामुवो ते ब्लु हुम सगण जाणवु ॥ ६ ॥ नारकी भषधारणीय बने घेक्रेय शरोर करे तोये हुम सठाण ॥ देवताने नवधारणीय सम चचरस संठाण, घेक्रेय शरीर करे तो नाना सगण सठिया, पार'देवलोक सुधी वक्रेय करे, ते उपरात न करे॥ पृथ्वीने हुम सगण पण चपाकारे तथा मसुरनी दाळने याकार ॥ थपने हुम सगण पण जळना परपोटानो थाकार वे ॥ तेउने हुन सगण पण सोयना मारानी अणीनो थाकार ॥ वायुने हुम सगण पण वजा पताकानो थाकार ॥ वन स्पतिने हुम सगण पण नाना प्रकारनो याकार ॥ विगखें जिय,समुर्छिम तिर्यच पर्चेजिय,मनु प्य समुर्छिमने हुम सगण ॥ सियेच पचेंशिय गर्नज, ने मनुष्य गर्नजने आए सगण होय॥ इति सगणकार सपूर्ण ॥ए॥ EXE हवे दसमु वेद धार कहे ठे। वेद ३, ते स्त्रीवेद १॥ पुरुपरेद २॥ नपुसकवेद ३ ॥ नारकी, एकेंडि प, विगर प्रिय, तिर्यच पजिय समुहिम, समुर्छिम मनुष्य ए सर्वने १ नपुसक वेद जाए तु ॥' तिर्यच पचेंजिय गर्नज ने मनुष्य गर्नजमा वेद ३ खाने । देवतामा वेद ५॥ स्त्रीवे 'द १ पुरुषवेद २॥ ते जवनपति थादि देश २ देवप्लोफ सुधी वेद २ खाने ॥ उपर सघरठा पुरुषवेदी जाणवा ॥ थप बहुस्स कहे ठे॥सर्वथी थोमा गनवकतिय मणुसा १॥ मनु सरबी सखेज गुणी२॥ पादर तेलकाश्या पहात्तगा असखेडगुणा ३॥ थाणुचरोववाश्या देर । असखेसा गुणा । ॥ उवरीमगेविङगादेवा थसखेडागुणा ५॥ मफिमगेविनगादेवा सर झागृणा ६॥ गमगेविलगादेवा सखेडागुणा ७ ॥ श्रचूएकप्पे देवा सखेजगुणा ॥ धारणे कप्पे देवा सखेडागुणा ए॥ पाणए कप्पे देवा सखेडागुणा २० ॥ चाणए कप्पे देवा ' सखेलगुणा ११॥ अहेसत्तमाए पुढवीए नेरश्या असखेडागुणा १२ ॥ गीतमाए पुढवीए नेरश्या थ सखेडारणा १३ ॥ सहसारे कप्पे देवा असखेडागुणा १४ ॥ महा कप्पे देवा । प्रसखेसागुणा - १५॥ पचमाएधूम्मप्पनाए पुढवीए नेरश्या असखेसाणा १६ ॥ खतए कप्पे देवा आसखेडा गुणा १७ ।। चरस्थीए पकप्पनाए पुढवीए नेरश्या असखेडागुणा १७ ॥ बंगलोए कप्पे देवा थसखेडागुणा १ए ॥ तच्चाए वासुयप्पनाए पुटवीए नेरश्या आसखेडागुणा २०॥ माहिदकप्पेदेवा थसखेसागुणा २१ ॥ ॥ सणकुमार कप्पेदेवा असखेडागुणा २२ ॥ दोच्चाए सकरप्पनाए पुटवीप नेरश्या असखेडागुणा २३ ॥ समुच्छिम मणुसा असखल्लागुणा २४ ॥ श्साणे कप्पे देवा शसखेमगुणा २५ ॥ श्साणे कप्पे देवीको सखेशागणी ५६ ॥ सुहम्मे कप्पे देवा सखेडागुणा २७ ॥ सुहम्मे कप्पे देवीयो सखेसारण) ॥ २० ॥ जयणवासी देवा श्वसखेरणा २५ ॥ जवणवासिणी देवोनो सखेडागुणी ३० ।। मोसे रयणप्पनाए पुग्योप नेरश्या श्वसखेमागृणा ३१ ॥ खयर पचिंदिय तिरिख जोणिया पुरिसा असखजगणा ३३ ॥ खष्ठयर पचिदिय तिरिख जोणिणीथो सखेळायणी ३३ ॥ थप्लयर पर्चि दिय तिरिख जोगिया पुरिसा सखेडागुणा ३४ ॥ पखयर पचि दिय तिरिख जोगिणोश्रो सखेझगुणी ३५ ॥ जखयर पचिदिय तिरिख जोणिया पुरिसा सखलागुणा ३६ ॥ जसयर पर्चिदिय तिरिख जोपिणीयो सखेसागणी ३७ ॥ वाणवतर देवा सखेलागुणा ३० ॥ वाणवतरवासि देवीथो सखेडागुणी ३५ ॥ जोशसिया देवा सखेकगुणा ० ॥ जोइसिणी देवीथो सखेजायणी ४१ ॥ खड्यर पचिंदिय तिरिख जो णिया नपुसगा सखेडागणा ४२ ॥ थखयर पपिदिय तिरिख जोणिया नपुसगा सखेझ गुणा ५३ ॥ जलयर पंचिंदिय तिरिख जोणिया नपुसगा सखेगुणा ४४ ॥ चरिं दिया पहात्ता सखेसागुणा ४५॥ पर्षिदिया पहाचाय विसेसा छिया ४६ ॥ वेशदिया पहाचा पिसे साहिया ४७ ॥ तेदिया पहाचा विसेसाछिया ४० ॥ पचिदिया अपजचा थसखे लागुणा ए ॥ चरिंदिया थपसाचा विसेसाहिया ५० ॥ ते दिया थपत्ता विसे- सादिया ५१ ॥ वेईदिया अपनाचा विससाछिया ५५ ॥ पचेय सरीर वायर वयस्सश्का श्या पहाता थसखेडागुणा ५३ ॥ वायर निगोदा पहाचा असखेडागुणा ५४ ॥ चादर पुढवी काश्या पक्षाचा थसखेसागुणा ५५ ॥धादर थाउकाश्या पक्षाचा आसखेडागुणा ५६॥ चादर वाउकाश्या पाता थसखेसागण्या ५७॥ यादर तेरकाश्या अपलचा असखेडागुणा ५७ ॥ पत्य सरीर बादर वणस्सश्काश्या अफ्झना असरखेडागुणा ५५ ।। चादर निगोदा छापागाचा थसखेडागुणा ६० ॥ घावर पुढषीकाश्या अपक्षाचा असखेडागुणा ६१ ॥ पादर धारकाश्या चपलाचा असखेडागुणा ६२ ॥ वादर वाउकाश्या थपजाचा असखेडागुणा ६३ ॥ सुहम तेउकाश्या अपहाता थसखेडागुणा ६.५ ॥ सुठुम पुढवी काश्या अपसात्ता विसे साहिया ६५ ॥ मुहम थाउमाश्या चपलात्ता रिसेसा हिया ६६ ॥ सुहम वाफाश्या थपञ्जाचा विसेसाहिया ६७ ॥ सुहुम सेठकाश्या पहाचा सखेडागुणा ६० ॥ मुहुम पुढवी काश्या पहाचा विसेसाहिया ६ए ॥ मुहूम थाउका पा पक्षचा विसेसाहिया ॥ ॥ सुठुम वाउ काश्या पद्धता विसेसाहिया ॥ १ ॥ सुहम निगोदा अपनाचा शसखेडागुणा ७२ ॥ सहमनिगोदा पहाचा सखेडागुणा ७३ ॥ जयसिद्धि पाथणतगुणा १४ ॥ पभिवाइ सम्म दिहि अणतगुणा ७५ ॥ सिह थणतगुणा ७६ ॥ पादर चणस्स काश्या पजाता थणत गुणा ७७ ॥ पजाचा विसेसादिया ७७ ॥ वादर वणस्सर काश्या थपडाचा असखेडगुणा पए । बादर थपकाचा विसेसादिया ७ ॥ समुच्चय पादर विसेसा दिया ७१ ॥ सुठुम, SEENETIES पणस्स काश्या अपक्षाचा असंखेडागुणा ७२ ॥ सुहुम थपळाचा विसेसाहिया ७३ ॥ महुम वयस्सर काश्या पक्षाचा सखेसागण्या ४ ॥ मुहुम पहाता विसेसाहिया ५॥ समुश्चय सूटुमा विसेसाहिया ६ ॥ जवसिझिया विसेसाछिया ७॥ निगोद जीवा विसे साहिया ७७ ॥ वणस्स काश्या जीवा विसेसा छिया भए । पगिदिया जीवा विसेसाहिया ए ॥ तिरिखजोणिया घिससाहिया ए१ ॥ मिडदिही विसेसाहिया ए ॥थविरया जीवा विसेसाहिया ए३ ॥ सकसाश्या घिसेसादिया ए४ ॥ नमत्थजीवा विसेसादिया ए५ ॥ सजोगी जीपा विसेसाहिया ए६॥ ससारस्थाजीवा विसेसाछिया ए । सघजीवा विसेसालिया ए॥ ए श्रमणु चोखनो थस्प पहुस्य जाणवो ॥ सर्पथी थोमा पुरुषवेद ॥ १॥ तेथी नोवेद संख्यातगुण॥२॥ तेथी नपुसकद धनतगुणा ॥३॥ मनुष्य पुरुपची मनुष्यणी नी २७ गुणी थधिक ॥ देवताची देवी ३५ गुणो थधिक ॥ तियेची तियेचणी ३ गुणी वधिक ॥ पुरुपनो विषय खमना पुळा सरिखो ॥ स्त्रीनो विषय बकरानी खिमीना ताप सरिखो । नपुसकनो विषय नगरना दाह सरिखो ॥ पनपति व्यतर ज्योतिषी वैमानिक पहेखा बीजा देवलोक सुधीमा मनुष्यनी माफक जोग ॥ ते उपरना घे देवलोके स्पर्शनो घोग ॥ ते उपरना थे देवखोके रूपनो भोग डे ॥ ते उपरना घे देवलोके शब्दनो लोग ॥ ते उपरना ४ देवलोके मनमो जोग ॥ ते उपरांत देवताने चोग नथी ॥ इति वेदछार सपूर्ण ॥ १० ॥ श्वे जोगहार कहे ॥ जोग १५, सेमा मनना ४ ते साचु मन १ ॥ जूतु मन २॥ मिश्र मन ३॥ व्यवहार मन ॥ वचनना जाग ४ ते साचु वचन १॥ जूतु वचन ॥ मिश्र वचन ३ ॥ व्यवहार वचन ४ ॥ कायाना जोग ७ ते उदारिक १ ॥ उदारिकनो मिश्र॥ वक्रेय ३॥ पैकेयनो मिश्र ४ ॥ थाहारफ ५॥ थाहारकनो मिश्र ६ ॥ कार्मण कायजोग ७॥ नारकी देवताने जाग ११ ते मनना ४ ॥ वचनना ४ ॥ कायाना ३ ते वैकेय १ वैकेयनो मिश्र २ कार्मणकाय जोग ॥ ॥ पृषी १ थप २ ते ३ वनस्पति ४ प ४ ने जोग ३॥
ब्दारिफनो १ उदारिफनोमिश्र २ कार्मण कायजोग ३॥ वायु ने जोग ५ ते उदारिक १॥ उदारिकनो मिश्र २॥ वैकेय ३ ॥ वैकेयनो मिश्र ४ ॥ कार्मिणकाय जोग ५॥ विगलें जियने जोग ४ ते उदारिक १ ॥ उदारिकनो मिश्र ॥ फार्मण काय जोग ३॥ व्यवहार नापा ४॥ तियेच पचैंपिय समुर्छिमने विगजियनी माफक जाणवु ॥ तियेच पर्चेजिय गर्नजने जोग १३ ते मनना ४ ॥ वचनना ४ ॥ उदारिक १ ॥ उदारिकनो मिश्र २ ॥ घेक्रेय ३॥ वैकेयनो मिश्रा कार्मण काय जोग ५ ॥ ए५ कायाना मषी १३ जोग जाणवा ॥ मनुष्य समुर्छिमने जोग जेम विगळं प्रियने तेम जाणवा ॥ मनुष्य गर्नजने जोग १५ जाणवा ॥ सिझ थजोगी काहीये ॥ इति जोगहार सपूर्ण ॥ ११ ॥ एवं उपयोग द्वार कहे ॥ उपयोग । १५, ते मतिज्ञान १ ॥ श्रुतज्ञान २ ॥ अवधिझान ३ ॥ मन पर्यवज्ञान ४ ॥
फेवलज्ञान ५ ॥ मतियज्ञान ६ ॥ श्रुतश्वज्ञान ७॥ विजगज्ञान ॥ चकुदर्शन ए॥ अचछु दर्शन १० ॥ अवधिदर्शन ११ ॥ केवखदर्शन १२ ॥ ए १५ उपयोग २४ दमक उपर उतारे ॥ नारकीने उपयोग ए, ते केवलज्ञान, केवलदर्शन, मन पर्यवहान ए ३ वर्जीने पाकीना ए जाणया । तेमा समदृष्टिने ६ उपयोग, ३ यज्ञान नहि ॥ मिथ्यात्वीने ६ उपयोग, ३ झान नहि ॥ देवसाने ए उपयोग समुच्चये नारकीनी परे ॥ सेमा समहष्टिने ६ उपयोग, ३ थान नहि ॥ मिप्यात्वीने ६ उपयोग, ३ ज्ञान नछि ॥ नवर थनुत्तर विमाने ६ उपयोग, त्या ३ श्रझान नहि ॥ पांच एप्रियने ३ उपयोग, ते मति श्रझान १॥ श्रुत श्वज्ञान २॥ वचतुदर्शन ३॥ प्रिय सेजियने उपयोग ५ ते मतिज्ञान १ ॥ श्रुतझान २॥ मतियज्ञान ३ ॥ श्रुत अज्ञान ४॥ अचछु दर्शन ५॥ चलरिंजियने ६ उपयोग तेमा चनुदर्शन वध्यो । तियेच पचेंजिय समुर्डिमने चउरिंजियनी माफक ॥ तिर्यंच पचेंजिय गर्नजने नेरश्यानी माफक ॥ मनुष्य समुर्जिमने उपयोग ४ ते मति अझान १ ॥ श्रुत थज्ञान २॥ चक्कुदर्शन ३ ॥ श्रचछदर्शन ४ ॥ मनुष्य गर्नज ने उपयोग १५ खाने ।
सिझने उपयोग २ ते केवसझान १, केवलदर्शन २॥
इति उपयोगहार सपूर्ण ॥ ११ ॥
हवे शरीरकार कहे ॥
शरीर ५, ते उदारिक १ ॥ वैक्रय २॥ थाहारक ३॥ तेजस् ४॥ कार्मण पादेवसाने
३ शरीर, ते वैकेय १ ॥ तेजम् ॥ कार्मण ३ ॥ नारकीने पण तेमज जाणवु॥ पुढवी, थप,
तेल, घनस्पतिने ३ शरीर, ते उदारिक १ ॥ तेजस् ५ ॥ कार्मण ३॥ वायराने शरीर ४
से वैकेय वघ्यु ॥ विगो जियने शरीर ३ से उदारिक १॥ तेजस् ॥ कार्मण ३॥ ति
येच पचेंजिय समुर्छिम तथा मनुष्य समुर्बिमने ३ शरीर, ते उदारिफ १ ॥ तेजस् ५ ॥
कार्मण ३ ॥ तियेच पजिय गर्नजने शरीर ४, ते वैकेय वन्यु ॥ मनुष्य गर्नजने शरीर
५॥ सिह थारीरी कहिये।
इति शरीरकार सपूर्ण ॥१३॥
इवे गुणगणाधार कहे ॥
गुणगणा १५ ते मिथ्यात्व १॥ साश्वादान ५ ॥समामिथ्यात्व ३ ॥ थपति समदिति
४ ॥ देशपिरति५॥ प्रमत्त ६॥ अप्रमत्त ७ ॥ निचि बादर ७ ॥ थनिवृत्ति पादर ए॥
सूक्ष्मसपराय १० ॥ उपशातमोह ११ ।। कीणमोह १२॥ सजोगी केवली १३अयोगी कवाली
१४ ॥ नारकी देवताने गुणाणा ४, ते मिथ्यात्व १॥ साश्चादान ५॥ मिश्र ३॥ श्रवि
रति समष्टि ४॥ ए अवेयके गुणगणा ३ ॥ मिथ्यात्व १॥ साश्वादान २॥'पविरति
३ ॥ श्रनुत्तर विमाने गुणगणु १ ॥ थविरति सम्यक्दृष्टि ॥ विगाजियने गुणगणा ५,
त मिथ्यात्व १॥ साश्वादान ३ ॥ तियेच प.प्रिय समुर्जिमने गुण गणा २, ते मिष्यात
१ ॥ साश्वादान २॥ तियेच पचेंजिय गर्नजने गुणगणा ५, ते मिथ्यात्व थादि यावत्
देशविरति ॥ मनुष्य समुर्तिमने गुणगणु २, मिथ्यात्व ॥ मनुष्य गर्नजने गुयगणा १४
जाणवा ॥ सिझने गुणगणु एके नहि ॥
इति गुणगणाधार सपूर्ण ॥ १४ ॥
हषे दृष्टिकार कहे ॥ दृष्टि ३, ते समकित १ ॥ मिप्यास्व ५ । मिश्रष्टि ३ ॥ नारकी देवताने ३ दृष्टि खाने ॥ नप प्रेषेयकमां दृष्टि २, ते समकित १॥ मिथ्यात्व ॥ श्वनुत्तर विमाने दृष्टि १ समकित ॥ पपियने अष्टि १ मिथ्यात्व ॥ विगळं प्रिय तियेचं पंचेंघिय समुर्विमने दृष्टि ५, से समकित १ ॥ मिप्यास्य २ ॥ मनुष्य समुर्जिमने दृष्टि १ मिग्यात्व ॥ तिर्यच पजिय गर्नज, मनुष्य गर्नजने दृष्टि ३ खाने ।। सिझमा टि १ समकिसनी खाने । इति दृष्टिंकार सपूर्ण ॥१५॥ इवे पर्याप्तिधार कहे ठे॥ पर्या ६, ते थाहार पर्या १ ॥ शरीर पर्या ५ ॥ इप्रिय पर्या ३ ॥ श्वासोश्वास पर्या ४॥ नाषा पर्या ५॥ मन पर्या ६ ॥ नारफी देवताने ५ पर्या ॥ नापा मन साथे पधेि । पजिय ५ ने मनुष्य समुर्जिमने पर्या ४ पहेखी जाणवी ॥ ३ विगछियने तिर्यंच पंचें -
REES
प्रिय समुर्विमने पर्या ५ पहेली ॥ तियेच पचेंघिय गर्नजने मनुष्य गर्नजने पर्या
जाणवी ॥ सिकने पर्या नथी॥
इति पर्याधार सपूर्ण ॥ १६ ॥
इवे प्राणहार कहे ॥
प्राण १०, ते इंजिय५, ३ जोग , श्वासोच्छास ए, धानखु १० ॥ नारको देवनाने
प्राण १० ॥ एकेंजियने प्राण ४ ॥ स्पर्शेखिय १ ॥ कायषल ३॥ श्वासोच्छास ३ ॥ था
उर्ख ॥ घेजियने प्राण ६ तेमा मुख थने वचन ए वे वया ॥ तेइंजियने प्राण
ते नासिफा वधी ॥ चरिंजियने प्राण छ ते चा वधी॥ तियेच पचेपिय समुर्बिमने
प्राण ए ते कान पम्यो।मनुष्य समुर्बिमने प्राण ७ ते मनवल पचनयल एनहि ॥ तिर्यच
पंजिय गर्नजने, मनुष्य गर्नजने प्राण १० ॥ सिद्धने अन्य प्राण नयी पण नाव प्राण ॥
इति प्राणधार सपूर्ण ॥ १७ ॥
इये नाण अनाणकार कहे ॥ ते मतिज्ञान १॥ श्रुतज्ञान २ ॥थवधिज्ञान ३ ॥ मन पर्यवझान ४॥ केरखशान ५॥ प्रण थज्ञान ते मति थज्ञान १॥ श्रुत थान २॥ विलग झान ३॥ नारकीने ज्ञान ३ प्रयम, थज्ञान ३ नीनजना ॥ नवनपति वाणव्यतरने ज्ञान प्रथम, थज्ञान ३ नी सजना ॥ ज्योतिषी पैमानिकने ज्ञान ३ प्रथम, थज्ञान ३ नियमा ॥ नवर थनुचर विमाने ज्ञान ३ प्रथम , थहान नथी ॥ एकेंजिय ५ ने मतिबझान १॥ श्रुत थकान २॥ विग जिय ने तियेच पप्रिय समुर्विमने मतिनाण श्रुतनाण ॥ मति थनाण श्रुतअनाण ॥ तियेच पचेंजिय गर्मजने ज्ञान ३ थने अडान ३ नी भजना ॥ मनुष्य समुर्तिमने मतियझान भुतथशान ॥ मनुष्य गर्नजने शान ५, अशान ३ नी नजना ॥ पहेसी नरके नारकी उत्कृष्टो । गाउ देखे, जघन्य ३॥ गाउ देखे ॥ वीजी नरके नारकी उत्॥ ३॥ गाउ देखे, जण गाउ ३ देखे ॥ त्रीजी नरके उत्० गाउ ३ देखे, जा २॥ गाउ देख ॥ चोयी नरके उत् ॥ गाठ, ज०१ गाउ देखे ॥ पांचमी नरके उत्० २ गान, जण ॥ गाउ देखे ॥ गेप उ० १॥ अने ज० १ गाउ देखे ॥ सातमीए ०१ गाउ देखे, ज० थर्फगाउ देखे ॥ एतु चारे दिशे देखे ॥ हवे असुर कुमार ज० २५ जोजन देखे, ० असख्याता कीपसमुज देखे ॥ तेना नवनिकाय ज० २५ जोजन, जप सम्याता द्वीपसमुप देखे ॥ तिर्यच प.प्रिय गर्नज ज० बांगुखनो थसख्यातमो नाग, उ० सग्याता छीपसमुह देखे ॥ मनुष्य गर्नज ज० गुखनो थसख्यातमो नाग, उप थसख्याता जीप समुड देख ॥ घसी जेवको लोक तेवमा थसस्न्याता खाज्यां थलोक मांदि देखे ॥ व्यतर ज० २५ जोजन देखे, उ० सख्याता छीपसमुज देखे । ज्योतिषी जग न सख्याता छीपसमुख देखे ॥ वैमानिक पदेखा वीजा देवलोकना देवता ज० २५ जाजन देखे, उ० नीचे पहेलो नरक सुधी देखे, प्रि थसख्याताछोप समुफ देखे, उचे पोताना पिमाननी घजा सुधी देखे ॥त्रीजा चोथानां घीजी नरक सुधी देखे । उचु नि पद्देखा २ देवलोकनो माफक जाणवु ॥ पांचमा बयाना त्रीजो नरक सुधा देखे। उचुनिनु तेमज जाणवु ॥ सातमा थाउमाना चोथी नरक सुधी देखे ॥ उचुं नितु जिम ( पढमे ॥ नवमा, दशमा, अग्यारमा, घारमाना पांचमी नरफ सुधी देखे ॥ उचु त्रिबु जिम परमे ॥ नव प्रेवेययना बनी नरफ सुधी देखे ॥ उचु विलु जिम पढमे ॥ चार अनुत्तर विमानना सातमी नरक सुधी देखे ॥ उंचु त्रिबु जिम पढमे ॥ सर्वार्थसिझना थाखी खाफनाली कांक उण देखे ॥ सिक लोकालोक समस्त देखे ॥ इतिनाण धनाणकार सपूर्ण ॥ २७ ॥ हवे १ए मु सजतिकार कहे ॥ सजति थादि शारे बोले चोवीस चेद कहे ठे ॥ सजति १ ॥ श्रसजति २ ॥ सजतासजति ३ ॥ प्रति १॥ श्रमति ॥ प्रताप्रति ३ ॥ पञ्चखाणी १॥ अपच्चखाणी २॥ पच्चखाणापच्चखाणी ३॥ पमिया १ ॥ श्रमिया २ ॥ पमियापमिया ३॥ सुचा १॥ जागरिया २ ॥ सुचाजागरिया ३॥ सतुमा १ ॥असवुमा २ ॥ संवुमास बुमा ३॥ धम्मिया १ ॥ श्रधम्मिया ॥ धम्माधम्मिया ३ ॥ धम्मवयसाश्या १॥ थध म्मववसाश्या २॥ धम्माषम्मवरसाश्या ३ ॥ ए बारे पोखना प्रणर प्रकार जाणवा ॥ नारको देवता पजिय विगळं प्रिय तिर्यच पंजिय समुर्चिम, मनुष्य समुचिम ए सर्व सजति, भयति, अपच्चखाणी, अपमिया, थजागरा, घसवुढा, अधम्मिया, श्याम म्मवयसाश्या एटला घोष जाणवा ॥ तिर्यंच पचेंजिय गर्नज सजतासंजति वादि देश यावत् धम्माधम्मयवसाश्या १६ योख जाणवा ॥ मनुष्य गर्नजमां एकेका घोलना प्रण प्रण प्रकार गणतां ५४ पोल खाने ॥ सिझने एमानो एके बोल न लाने ॥ इति तजतिहार सपूर्ण ॥रए ॥ हवे २० मु थाहारद्वार कहे ॥ थाहारना प्रण प्रकार॥ श्रोज थाहार जे समस्त जीव उपजतां करे ते कहीए।॥ जे त्वचाए करी ग्रहण करे ते कहोए २॥ कवस आहार ते फवस नरी पुदगल प्रहय करे ते कहीए.३ नाकीने शाहार २ ते थोज अने रोम ॥ चितव्या पनी अशुज ने थमनोज्ञपणे परिणम ॥ देवसाने ओहार र योज अने होम ॥ चिंतल्या पड़ी रोम शादार शुज मनोझफारिया परिणमे ॥ एप्रिय पांधने थाहार २ ते थोज थने रोम, ते शुजा शुन्नपणे परिणमे ॥ ३ विगखें जिय तियेच पचेंशिय समुर्मिम थने गर्भज, मनुष्य गर्नज एटखान थाहार ३ जाणवा ॥ मनुप्प समुर्छिमने थाहार २ ते थोज धने रोम ॥ सिक श्रणाधारी जाथवा ॥ इति थाहार हारसपूर्ण ।। २० ॥ इथे बीजे प्रकारे १ मु थाहारहार कहे ॥ थाहार ३, ते सचित्त १ ॥ थपिस ५॥ मिश्र ३ ॥ नारकी देवता थचिच थाहार खिये, पाकी सघळा प्रण थाहार खिये, सिक एके थाहार न लिये ॥ इति १ मु थाहारहार सपूर्ण ॥ १॥ एवे २५ मु रखा थाहारहार करे रे ॥ ससारी जीवने थाहार खेवानी वा उपजे ते काहे बे॥नारकोने धतर्मुहः घाहारनी हा -- उपजे ॥ थमुर कुमारने जघन्य पठस्य नके, उत्कृष्ठ सागर १ काकेरुं बाउखु , तेने १ हजार काळेरा वर्षे थाहारनी श्खा उपजे ॥ तेना नवनिकायने जा चउत्य जक्के, उप पृथक् दिषसे॥व्यप्तरने जा चनस्य लक्के, उ पृथक् दिवसे ॥ ज्योतिषोने जघनोत्कृष्ट पृथक् दियसे॥ वैमानिकने जा पृथक् दिवसे, जा ज्या जेटला सागर बायु त्यां तेटला हजार वर्षे याहार खेषानी मा उपजे । ज्यां काफेरा सागर त्यां काफेरा हार वर्षे चाहाग्नी झवा उपजे॥ एकेप्रिय पांधने समये समये थाहारनी श्ला उपजे ॥ विगळंडियने अतर्मुहचे श्ला उपजे ॥ तिर्यंच पर्चेजियने न सके थाहारनी सा उपजे ॥ मनुष्यने थठमनके खा उपजे ॥ देवकुरु उचरकुरुए थम लक्के ॥ हरिपास रम्यफवासे उनके ॥ हेमवय परथवए घटत्य जके थाहारनी इवा उपजे ॥ सिह थाहारो॥ इति १२ मुस्खा थाहारहार संपूर्ण ॥ २५ ॥ इवे २३ मु फायस्थितिकार कहे ॥ नारकी देवताने जेने जेटली थायुस्थिति बे तेने तेटली काय स्थिति जाणवी ॥ - .
पुढयी थप तेठ वायुमा गयो धको जीव कासाची असख्याती उस्सर्पिणी अवसार्पिणी काल रहे ॥ त्रयी घसख्याता खोक पुरे ॥ ते खोकर्नु मान-खोकदेत्र मांहि १ मनथी फम्पीने थांगुल देव नाग चिंतषीप, ते १ थांगुप्त केत्रमादि पटला आकाश प्रदेश ॥ ते थाकाश प्रदेश समये समये एकेको काटीए तो ते १ थांगुष क्षेत्रे असख्याती उस्स पिणी थवसर्पिणीप थवहाय कहेतां उखवाय ॥ एक हाथ सथा १ धनुष्य तथा ? गाट क्षेत्र उलयातां केटखो काल थाय ? ते असख्याती उत्सार्पिणी श्रवसर्पिणी काल उखवाता थाय ॥ एम थाखो लोक उषयातां पण पटखो काल याय, एटखे । खोके, एम थसंख्याता खोक उलपातां जेटलो काल थाए सेटली असख्याती उत्साठिणी वसप्पिणी जाणवी ॥ ए उकृष्टो काल कसो॥ जघन्य अंतर्मुहर्जनी स्थिति जाणवी ॥ पादर काय पृपिव्यादि एकेकी मांहि गयो यफो Hu कोमाफोमी सागर रहे ॥ ए उत्कृष्टो काळ जाणयो, जए थंतर्मुहर्च रहे ॥ वनस्पति कायमा गयो थको काले धनती उत्सर्पिणी थवसर्पिणी काल रहे ॥ क्षेत्रे थनता खोक पुरे॥थसंख्याता पुद्गल परावर्चन करे ॥ ते थसख्यातानु मान कहे ठे ॥ यावली १ ने थसख्यातमे जागे जेटक्षा समय चाय, तेटला पुद्गल परावर्चन करे, ज० थतर्मुहर्च ॥ १॥ एकसी सूक्ष्म निगोदमां गयो थको काले थसख्याती उत्सार्पिणी अषसर्धिणी काल रहे ॥ क्षेत्रे असख्याता खोक पुरे ॥२॥ सूक्ष्म थने घादर निगोद ए मा गयो थको, काले धनती उस्सर्पिणो अवसर्पिणी काल रहे ॥ देने थनता खोफ थठि पुद्गल परावर्चन करे ॥३॥ एकली बादर निगोदा गयो थको su कोमाकोमी सागर रहे ॥ ४ ॥ प्रत्येफमा गयो यको ७० कामाकोमो सागर रहे ॥५॥धादर निगोद प्रत्येक वनस्पतिमा गयो थको, काखे असंख्याती जस्सर्पिणीश्वव सर्पिणी कास रहे॥ क्षेत्रे थंगुलनो असख्यातमो नाग,ते सेना जेटला थाकाश प्रदेश थाय तेटला पुद्गल परापन करे ॥ येईप्रियमादि गयो थको सख्याता वर्ष रहे ॥ तेइजिय मांहि गयो यको सख्याता दिवस रद्दे ॥ चरिंजियमांदि गयो थको सख्याता मास रहे ॥ पचेंजिय तिर्यचमोहि गयो थको केटखो काल रहे ? जे असख्याता था खानां तिर्यच ते तेने तेज भव काय स्थिति ॥ जे सख्याता थारखाना तिर्यच ते उरकृष्टा सच नव
फरे ॥ मनुष्यने पण एमज तियेचनो परे जाणवु, जए समस्तने थंतर्मुहूर्त्तनी स्थिति जाणवी ॥
इति फायस्थितिहार सपूर्ण ॥२३॥
हवे २४ मु समुद्घातकार कहे ॥
समुन्यात ७, ते वेदनीय समुद्घात १ ॥ कषाय समुद्घात ५॥ मारणासिक समु ।
द्घात ३ ॥ वैत्य समुद्घात ४ ॥ तेजस् समुद्घात ५ ॥ श्राहारक समुद्घात ६ ॥ केवल
समुद्घात ७॥ नारकीने पहेली ४ ॥ दवताने पडेखी ५ ॥ पुटवी थप तेल वनस्पति
ए ४ ने पदेखी ३ ॥ वायुने पहेली ५ ॥ तियेच पर्चेप्रिय समुर्बिम थने मनुष्य समु
ठिमने पहेली ३ ॥ तियेच पचेंज्यि गर्नजने पहेली ५ ॥ मनुष्य गर्नजने 9
ममुद्घात खाने ॥ सिकमा एके समुद्घात न खाने ।
इति समुद्घातहार सपूर्ण ॥ २४ ॥
HTEN हवे २५ मु कुसकोमीकार कहे ॥ समस्त ससारी जीवनी एक कोमी सामी सत्ताणु लाख कुखकोमी ४ ॥ नारकीनी २५ लाख कुसकोमी ॥ देवतानी २६ लाख ॥ पृथ्वीनी १५ लाख ॥ अपनी ७ लाख ॥ तेउनी ३ लाख ॥ वाउनी ७ लाख ॥ वनस्पतिनी २७ लाख कुसकोमी । वेजियनी लाख ॥ तेइजियनी न लाख ॥ परिंजियनी ए लाख ॥ तियेच पऽिय जलचरनी १२॥ साख ॥ तिर्यंच पंजिय थलचरनी १० लाख ॥ खेचरनी १५ लाख ॥ उरपरनी १० लाख ॥ मुजपरनी ए लाख ।। मनुप्यनी १५ लाख कुसकोमो । कुखकोमीनो शु अर्थ? कुल से जे जोनी थकी उपजे ॥ जेम एक ठाणने पोमळे वीठीनां कुल घणों उपजे, तेम पजियने घणाय कुस उपजे ॥ ते कुखनी कोमी कहे २ ॥ गाया-एगदिपसु पचसु पार, सगति सत्त घरपीसाय ॥ विगलेसु सत्त अव नव, जस खद्द चपय उरग नूयगे ॥१॥ थझतेरस घारस, दस दस नवग नरामरे निरए ।
पारस वीस पण विस, हुँति कुखकोमी लखा ॥२॥
गफोमि सच नवर, खरवा सका कुष्माण कोमीण ॥
२२ सगहणी ग्गये, कहिता पूव्यसूरिहिं ॥ ३ ॥
सिकने कुसकोमी एके नहि ॥ इति कुखकोमीझार सपूर्ण ॥१५॥
न
RERTERSHARE
इषे २६ मु सोपकर्मी नोपकर्मी घायुष्यनु हार कहे ठे॥
घे प्रकारे वायुष्य ते ॥ एफ नोपकर्मी, वीर्जु सोपकर्मी ॥ नारकी देवता तीर्थकर
यफवी घपदेष वासुदेव थसंख्याता धर्पना थायुष्यना तियेच मनुष्य जुगलीया ए
सर्वेनुं नोपकर्मी घायुष्य जाणवू घाकी सर्वमा नोपकर्मी सोपकर्मी ए पन्ने वायुय
होय ॥ सिझमा थायुष्य घेमानु पके नहि ॥
इति नोपकर्मी सोपकी श्रायुप्पहार सपूर्ण ॥ २६ ॥
हवे २७ मु देवकार कहे ठे। गाया-नाम १ गुण उववाय ३, विश पिठ ५ घवण ६ संचिठणा॥ यतर ७ अप्पायद्वय ए, नवदारा पण देवाण घेया ॥१॥ ए ए कार तेमां प्रथम नामधार कहे ते ॥ नविय प्रव्य देव ॥१॥ नरदेव ॥ धर्मदेव ३ ॥ देवाधिदेव ४ ॥ जावदेव ५ ॥ १ ॥ हवे वीजुं गुणधार कहे जे ॥ मनुष्य तया तियेच पर्चेजिय जेने देवतामां उपजवु ठे तेने नषिय उच्य देव कहिये ॥१॥ घोदरसन नव निधान जेने होय तेने नरदेव कहिये ॥२॥ साधुना सत्या विश गुणे फरी सहित चने समणे तिवा १ ॥ माहणे तिवा २ ॥ खतीतिवा ३ ॥ दतीतिवा ४॥ गुचीतिवा ५ ॥ मुत्तीतिवा ६ ॥ इसीतिवा ७ ॥ मुणीतिवा ७॥ विरतीतिया ए ॥ विषु तिया १० ॥ मुहे तिवा ११ ॥ निक्खुतिवा १५ ॥ तीरत्योतिवा १३ ॥ ए १३ नामेयुक्त होय तेने धर्मदेव कहिये ३ ॥ अदार दोष रहित ने पारगणे करी सहित होय तेने देवाधिदेव कहिये ॥ अठार दोष ते कई ठे ॥ श्रज्ञान १॥ क्रोध २॥ मद ३ ॥ मान ४ ॥
उषो तत्काल अशोकरक पर माया ५ ॥ खोज ६॥रति ७ ॥रति ॥ निडा ए ॥ शोक १०॥ थसत्य ११ ॥ घोरी ११॥ मच्छर १३ ॥जय २४ ॥प्राणिवष १५ ॥ प्रेम १६ ॥ क्रिमाप्रसग १७ ॥ हाश्य १७॥ ए १७ दोष रहित ने १५ गुप्पे करी सहित ॥ ते १५ गुण कदे ॥ ज्या नगपत उना रहे वेसे समवसरे त्या त्या दश मोस सहित ते जगवतधी पारगुणो आवे स्वामिने बायको करे ॥१॥ जगवत ज्या ज्या समषसरे त्या त्या पायवर्णा अचेत फुसनी पष्टि पाय, लिंपण प्रमाणे डगला पाय ॥२॥ भगवतनी जोजन प्रमाणे वाणी विस्तरे, सहना मननो संशय हरे ॥३॥जगवतने घोषिस जोम चामर पिंकाय ॥४॥ स्फटिक रस्नमय पादपीठ सहित सिंहासन स्वा मिने थागळे पाप ॥५॥ नाममस योगाने ठेकाणे तेज ममक्ष विराजे, दिशो दिशनो अधकार टाळे॥॥थाकाशे सामीवार कोमागेवी वाजा वागे ॥७॥ नगवतनी उपर प्रण ठत्र उपराउपरी घिराजे ॥॥ श्रनतज्ञानातिशय पाचनत यातिशय परमपूज्यपण ॥१॥धनंत वचनाति शया१२॥ धनत भपायापगमातिशय ते सर्व दोष रहितपण॥शाए १२ गुपेकरी सहित तषा ESARI चोत्रीसथतिशय,पानिस वचनातिशय धादे दश्ने धनताणे करी सहित होय तेने देवाधिदेव कहिये ॥ ४ ॥ नावदेव ते केने कहिये ॥ नवनपति १ ॥ वाणव्यतर २॥ ज्योतिषी ३ ॥ वैमानिक ४ ॥ ए चार जातिना देवताने जावे प्रवर्ते ले तेने नावदेव कहिये ॥ ५॥२॥ हवे विजु उपवाय द्वार कहे ये ॥ नविय शव्य देयमा मनुष्य तियेच १ ॥ जुगलोया २॥ सर्वार्थ सिह ३ ॥ ५ प्रण नाम वर्जिने पाकी सर्व गमना थावी उपजे ॥१॥ नरदयमा ४ जातिना देवताने पहेली नरक, ए ५ गमना थावी उपजे ॥ ॥ धर्म देवा बठी सातमी नरक ॥ तेच वान मनुष्य तियेच जुगक्षीया, प ६ वाम वर्जिने शेष सर्व वामना थावी उपजे ॥३॥ देवाधिदेवा पदेखी घीजी त्रिजो नरक ने किस्विपी वर्जिने, पैमा- निक देषना थावी उपजे ॥ ४ ॥ नावदेवमा सझी तिर्यंच पर्षेजिय १ सझी मनुष्य ५ ए २ वामना श्रावी उपजे ॥५॥ ३॥ एवे घोषु स्थिति कार कहे ते ॥ नविय अन्य देवनी जघ० यंत, उत्० ३ पथ्यनी १॥ नरदेवनी जघा सातसें वर्षनी, उत्त घोराशीक्षाख पूर्वनो २॥ धर्मदेवनी जघ० थत, उत् देशे उणी पूर्व कोमिनी ३॥ देवाधिदेवनी जय० बहुतेर वर्पनी, उत्० ७४ लाख पूर्वनो ४॥ भाषदेवनी जघ० दशहजार वर्पनी, उत्ण ३३ सागरनी ५॥६॥ इवे पांचमु अधि तथा विकुवणा द्वार कहे ॥ नविय प्रव्य देषमा जेने वेक्रेय सन्धि उपजी होय तेनेज होय ॥ नरदेवने तो होयज ॥ धर्मदेवा जेने षधि उपजी हाय तेने होय ॥ नाव देवने तो छोयज ॥ ए ४ वैकेय रूप करे तो जप १ ॥५॥३॥ उत् सख्याता करे॥शक्ति सो घसख्याता रूप करवानी हे पण करे नहि ॥ देवाधिदेवनी शक्कि घणी ठे पण करे नहि ॥ ५॥ हवे तु चषण धार कहे ते ॥ नविय द्रव्य देव चवी देवता चाय १ ॥ नरदेव चवी नरके जाय २॥ धर्म देव चवी वैमानिक तथा मोक्षा जाय ३ ॥ देवाधिदेव तो मुक्ति जाय ४ ॥ नाव देव चपीने पादर पृषी पाणी वनस्पतिमा ने गर्नज मनुष्य सिर्यचां जाय ॥ ५॥६॥धे सातमु सचिण्णा द्वार कहे ठे ॥ सचिठपणा ते देवनो देवपणे रहे तो केटला काळ रहे ते॥ नविय ऽव्य देनी सचित्रणा जघेण्थत०, उत्० ३ पट्योपमनी १॥ नरदेवनी जघ सातसें वर्पनी, सत्य व बाख पूर्वनी २॥ धर्म देवनी जघ० १ समयनी, उत्ण् देशे गणी पूर्व क्रोमिनी ३ ॥ देवाधि 13SEE देवनी जघ० षडुचेर वर्षनी, उत्॥ ७४ साख पूर्वनी ४ ॥ जावदेवनी जघ० दश हजार वर्षनी, उत्० ३३ सागरनी ५॥७॥ हवे बाग्मु थतरकार कहे ॥ नवियपव्य देवर्नु श्रांतरु पमे तो जघ० दश हजार वर्ष ने थंतर्मुहूर्त श्रधिकर्नु, उत्० अनता काळनु श्यांतर पमे १ ॥ नरदेवनु जघ० १ सागर काकेरु, उत्ा थर्ड पुद्गल परावर्तन देशे जणुं ५॥ धर्मदेवनु जघण ५ पख्य काळेळं, उत्प थर्ड पुद्गल परावर्तन देशे उणु ३ ॥ देवाधिदेवनु थांतरं नथी ४ ॥ नावदेवनु जघा असण, उत्० थनता काळनु ॥ ५॥ ॥ इपे नवमु घल्पवहुवहार कहे जे ॥ सर्वथी षामा नरदेव १ ॥ तेषी देवाधिदेव सख्यातगुण्या २ ॥ तेथी धर्मदेव सख्यातगुणा ३ ॥ तेषी नविय व्यव असख्यात गुणा ४ ॥ तेषी नाव देव असख्यातगुणा ५ ॥ ए॥ए अधिकार जण श० १५ में उ ए में ॥ इति २७ मु देवछार सपूर्ण ॥ २७ ॥ श्वे श्छ मुं जरा सोगटार फछे ॥ जे शरीरे करी वेदे ते जरा वेदनीय॥ मने करी वेदे ते शोफ घेदनीय ॥ नारकी देवता
ने तिर्यंच गर्नज, मनुष्य गर्जजने जरावेदनीय, श्रने शोफ वेदनीय ए वे साजे॥ पांच
एफेंजियने प्रण विगोषियने तिच मनुष्य समुलिम एटवाने एफ जरा वेदनीय होय॥
सिझन एके घेदनीय नहि ॥
इति जरासोगहार सपूर्ण ॥ २० ॥
हवे श्ए मुं परिमइकार कई २ ॥
परियह ३ प्रकारे ॥ कर्म परिग्रह । ॥ शरीर परिमह २ ॥ पास जममसोवगरम्य
परिपड ३॥ नारकी, पाच पकेंशियने कर्म परिमह १ ॥ शरीर परिग्रह ॥ देवता,
प्रण विगछिय, तियेच पजिय, धने मनुष्यने प्रण परिमह ॥ कर्म परिग्रह १ ॥ शरीर
परिम २ ॥ पासचममतोषगरम परिग्रह ३ ॥ सिकने परिग्रह एके नहि ॥
इति परिमाकार संपूर्ण ॥ २५ ॥
हवे ३० मु सांतर निरंतरकार कहे ॥ पांचसें प्रेस जेद जीवना ते १४ भेद नारफीनां ॥१॥४० मेद तियेचना ॥२॥ ३०३ नेद मनुष्यना ॥ ३ ॥ १ए नेद देवतानां ॥ ४ ॥ एव सर्व मळी ५६३ नेद जीवना डे ॥ ते जीव सांतर निरतर उपजे के चवे ? उत्तर पदेखी नरके नारकी सांतर निरंतर उपजे थने निरतर उपजे सा श्रावलीकानें १ असंख्यातमे नागे ॥ जेटला समय थाय सेटसा समय खगे उपजे धने चषे ॥ श्रांतरु पमे तो २४ मुहूर्चनुं २॥ धीजी नरके सांतर निरतर एमज जाणवो ॥ थांतरु पके तो ७ दिवसर्नु ॥१॥ त्रीजी नरके सांतर निरतर एमज, थातक पमे तो १५ दिवसनु ३ ॥ पोथी नरके सांतर निरतर पमज ॥ थांतरु पमे तो मास १ नु ४ ॥ पांचमी नरके सांतर निरंतर एमज ॥श्थांतरु पमे तो मास ५ नु ५ ॥ठी नरके सांतर निरतर एमज ॥ श्रांतर पमे तो मास ४र्नु ६ ॥ सातमी नरके सांतर निरतर एमज ॥ थांसरं पमे तो मास ६ नु ७ ॥ जयनपतिने सातर निरतर एमज ॥ थांतरु पमे तो २४ मुहूर्चनु ॥ पांच पकेंघिय निरतरज उपजे ने बषे पण निरतरज, उपजवा वयामा यांतलं नथी॥त्रण विगोजियने सांतर निरतर एमज ॥ थांतर पमे सो धतर्मुहर्चनु ॥ सिर्यच समुळिमने सांतर निरंतर एमज ॥ यांतरूं पड़े तो चतर्मुहर्चनु ॥ तियेच गर्नजने सोतर निरतर एमज ॥ श्रांतरु पमे तो मुहूर्च १२ नु ॥ मनुष्य समुर्छिमने सांतर निरतर एमज ॥थांतरु पमे तो २४ मुहूर्खनु ॥ मनुष्य गर्नजने सांतर निरतर एमज,॥ थांसरु ज० थत०, उत्० १५ मुहर्चनु ॥वाणव्यतर ज्योतिषी पहेला वीजा देवलोके सांतर निर० एमज,थांत १४ मुहूर्त ॥ त्रीजे देवसोके सांतर निरसर एमज ॥थांतरु पके तो ए दिवसथने २० मुहूर्चनु ॥ चोथे देवलोके सांतर निरंतर एमज, ॥ थोतरु पमे तो १५ दिवसने १० मुहूर्नु ॥ पाचमे देवखोके सांतर निरतर एमज॥थांतरु पमे तो २२॥ दिवसर्नु ॥ठे देषखोके सांतर निरंण एमज,०४५ दिवसनु॥ सातमे देवलोके सांतर निरण एमज,वाण दिवस॥थाठमे देवलोकप्तांतर निरएमज,याण १०० दिवसनु ॥नयमे दशमे देवलोके सासर निरं० एमज, यांग सख्याता मासर्नु ॥ अग्यारमा धारमा देवलोके सातर निर एमज,व सख्यासा वर्षनु॥ नवमेधेयके पदेखी त्रिके सांतर नि- रएमज, सख्याता वर्षना सेंकमार्नु ॥बीजी त्रिके सांतर निरण्एमज,वि सख्याता वर्षनां इजारर्नु ॥ निजी त्रिके सातर निर० एमज, थातरु सख्याता वर्षनां खाखनु ॥ चार अनुत्तर विमाने सातर निर० एमज, बां० पखना असख्यासमा जागर्नु॥ सर्वार्थ सिद्ध विमाने सातर निरतर एमज ॥ उपजे तो थावलीकाने असख्यातमे जागे जेटला समय थाय तेटसा समय खगे उपजे चने चवे ॥श्रांतरु पझ्यना सख्यातमा भागनु पमे ॥ सिन्र्नु जघन्य वातरु १ समयनु, धने उत्कृष्टु थांतरु ६ मासनु ॥ चार गतिमा समुच्चय पजिय थाभि थातलं जा १ समयनु, न १२ मुहूर्चनु ॥ सस्थान- ज० १ समयनु, उ० ६ मासनु थांतर पमे॥ इति सांतर निरतरकार सपूर्ण ॥ ३० ॥ ॥ इति श्री महादमक सपूर्ण ॥
चार ध्यानना वाल॥ थप भी उबवाइ प्रमुख सिद्धांतथी ४ म्यानना घोष लिख्यते ॥ सारु मातु चिंत- पर्नु ते ध्यान ॥ ते ध्यान ४ ॥ श्वार्तम्यान १॥ रोजम्यान २ ॥ धमभ्यान ३॥ शुक्रम्यान ४॥ तेमा प्रथम थायानना ४ जेद ॥ अमनोरु शब्द रूप गप रस स्पर्शनी जोगवा थायी मळी , ते कोण जाणे माराधी क्यारे दूर थशे, ए र चाय तो सारु पवी मनने विषे धिंसा उपजे ते थाम्यानी जोय कहिये, ए पहेलो नेद ॥ १ ॥ वे धीजो भेद कहे ॥ मनोहा शम्द म्प गंध रस स्पर्श शुज जोगवाए थावी मळ्या ले ते घणा दिवस रहे तो सारुं पाय, घर न घाय तो ठीक एषो मनने विपे चिंता करे ते थार्चच्यानी जीव कहिये, ए पीजो भेद ॥२॥ शरीरने षिपे थातकादिक रोग यात्री उपल्या ते श्वास २॥ खास २॥ ज्वर ३॥ दाह ४॥ कुक्षि शूल ५॥ नगदर ६ ॥ इरस ॥थ जिरण ॥ इटिशूल ए ॥ धरुचि १० शक्वेिदना २१॥ फर्णवेदना २२ ॥ करु १३॥ उदररोग २३ ॥ XXESXSEXEEEE.
कुष्टी रोग १५ ॥ पृष्टिशूस १६ ॥ ए १६ प्रकारना रोगनी पीमा घणी थावी उपनी तियारे ते जाणे के ए क्यारे दूर थशे, पम घणो घणो विद्याप करे, ए जाय तो सारु थाय पम पितये तेने थात्तयानी जीव कहिये, ए विजो नेद ॥३॥ ५ इजियना कामनोग विषय सुख खाया पीया परवा योढवा ए थादि घणा यावी मळ्या ठे तेने एम जाणे के ते दूर न पाय तो सारु एम घणी घणी खालच मनमा थाणे तेन थायानी जीव कहिये, ए चोयो नेद ॥ ४॥ए यार्सम्यानना ४ जेद कमां ॥ हवे थाम्यानना लक्षण कहे ते ॥ कदनता कहेता गाढे गाढे शब्द करी रोवे थाकत शब्द करे प, यार्सम्याननु पद्देनु सक्षण ॥ १ ॥ शोघनता कहेता शोच करे घेतो येतो गाले हाथ दश्ने घणो शोच फरे, ए पोजु पक्षण ॥२॥ तिप्पणिया कहेता विजोग पके को वाइसी वस्तुनो अश्रुपात फरे, हा हा !! मारी वस्तु गइ पम कहीने अश्रु पाम, ए त्रीजु खकण ॥३॥ विलपनता फहेता विलाप करे, दीनपणु धरे, अनेरा थागळ दीनपणु नाख, ए चोथु लक्षण ॥४॥ 0 पोल थाम्यानना कझा ॥ इति प्रथम थाम्यानाधिकार ॥१॥ हवे घोर्जु रो च्या न तेना ४ नेद ॥ हिंसानुवधी कहेता हिंसाफारी जीवने इणयानु प्यान चिंतषे, तथा हिंसा फरीने थानद माने १ ॥ मृषानुषधी कहेता मृपावाद घोखवानुं ध्यान चितवे, तथा मृषा वाद योसीने शानद माने २॥ स्तेनानुपंधी कहेता चोरी करवानुं ध्यान चिंतये, तथा चोरी करीने थानद माने ३॥ सरक्षणानुषधी कहेसा मारवो कुटवो पाधवो बधीखाने नखाघवानो ध्यान चिंतवे, तथा पूर्वोक्त काम करी शानद माने थे राज ध्यानना । खण कहे ॥ उसणदोसे कहेता जाण। प्रिठीने उचरगुण दशविध पञ्चखाणने विषे दोप खगावे १ ॥ यहुदोसे कहेता मूलगुण ५ महायतने विषे धारधार दोष अगावे ॥ थप्नाणदोसे कईसा थज्ञान शास्त्र नणे, जणोने प्ररुपे, थज्ञान शास्त्र सांजळे, सांजळीने ते थधर्मने धर्म करी जाणे, धर्म अर्ये हिंसा करे ३ ॥ थामरणांत दोसे कहेता मरणना यंत सगे पण मिप्यात्वथी निवउँ नहि,थने हिंसा पापने विपे प्रवर्से, माठी चिंतवणानां परिणाम मरणांत खगे राखे तया ते मरणने थते पण पाप थाप्लोवे नहि, निदे नहि, प्रायश्चित्त प्रतिपर्जे नहि, मिठामिकर्म पण देवे नहि ४ ॥ ए रोपण्याननां लक्षण एम्स फला ॥ ए जेद घीजा रौजम्यानना यया ॥ इति द्वितीय रौजाधिकार ॥॥ धर्म म्यानना ४ नेद ॥ थाज्ञाविचय फहेतां समकित सहित १५ व्रत श्रावकना, ११ श्राव फनी पमिमा, ५ महायत साघुना, १२ पमिमा निकुनी, ज्ञान दर्शन चारित्र तप कायनी रक्षा, ए वीतरागनो थाहा थाराधवी, चतुर्विध तीर्थना गुण्ण कीर्चन करवा, ए प्रथम द॥ १॥अपायविचय कहेता ससारमाहि जीव मिथ्यात्व १॥ थवत २॥ प्रमाद ३॥ कपाय ४॥ यशुभ जोग५॥तथा १० पाप स्थानक, ठकायनी हिंसा एखना कारण जाणी, थाश्रव मार्ग नामी संवर मार्ग थादरवो, जेम जीव सुख न पामे, ए घीजो भेद ॥२॥ विपाकविचय कहेता जीवे जेवे रसे करी शुनाशुन कर्म उपराज्या ठे ते शुनाशुन कर्मना उदयथी सुख सुख मोगरे ते ते जोगवा राग हेप करयो नहि, समनाय राखीये जेथी परम सुख पामीए, ए श्रीजो जेद ॥ ३॥ सस्याविचय कहेता लोकना थाकारनो तथा परिममयादि सगणनो तथा ५ इजियना थाकारनो चिंतववो, ए चोथो नेद ॥ ४ ॥ हवे धर्मयानना ४ बक्षण कहे ॥ थाझारुचि १॥ निसर्गरुचि २॥ सूत्ररुचि ३ ॥ उपदेशरुचि ४ ॥ तेमा थाशालपि कहेता यीतरागनी थाझा थगीकार करवानी रुचि उपजे ॥ निसर्गरुचि कहेता स्वनायची थथा सानळपाथी तथा जातिस्मरण झाने करी श्रुत सहित चा रिन धर्म पाळवानी रुचि उपजे २॥ सूत्ररुचि कहेतां कालिक उत्कालिक तद्व्यति रिक्त सून साजळवानी-जणधानी रुचि उपजे ३॥ उपदेशरुचि कहेतां मिण्यास १॥श्व ग्रत २ ॥ प्रमाद ३ ॥ कपाय ४ ॥जोगे ५ ॥ करी उपायो फर्म, सम्यकत्ल १ ॥ यत २॥ थप्रमाद ३ ॥ थकपाय ४ ॥ थजोगे ५॥ करी खपाविये, तथा ५ भियना विपय शब्द रूप गध रस स्पर्श करी उपायो कम ते तप रूप सवरे करी खपाविये, पयो तीर्थकरनो उपदेश सांनळी तप सवर थादरिये ॥ जेम सुख न पामीए एवी धर्म करवानी रुचि उ पजे तेने उपदेशमचि कहीए ४ ॥ हवे धर्मयानना ४ थालवन कहे ॥ वाचना १ ॥ पृजना २ ॥ पर्यटना ३॥ धर्मकथा ४॥ तेमा विनय सहित झानने थर्थे निर्जराने थथें गीतार्थ गुरुनो समीपे यांचणी सश्पे ते वाचना १ ॥ श्रपूर्व ज्ञान पामघाने थर्थे विनय सहित गुपादिक्ने प्रश्न पुढोए ते पृच्छना २ ॥ पूर्व थपूर्य सूत्र नण्या ठीए त श्रस्वलित करवाने श्यर्थे उपयोग सहित सूत्रार्थनी पारवार सज्माय करीए ते पर्यटना ३॥ वीतरागे जेवा नाव प्ररुप्या ठे ते नाव महीने शंकादि रहितपणे पोतानी निर्जरा अथवा परोपकार श्य सना मध्ये तेवा प्ररुपे ते धर्मकथा ४ ॥ हवे धर्मध्याननो ४ अनुप्रेदा कहे २ ॥ एक स्वानुप्रेक्षा १ ॥ थनिस्यानुप्रेक्षा २॥ शशरणानुप्रेक्षा ३ ॥ ससारानुप्रेक्षा ४ ॥ तेमा एक त्वानुप्रेक्षा ते जीव निश्चयनये एकसो ज , घीजा पुद्गधिक पदार्थो जूदा , खावापीवा मोजमजाथो करवी ए घधी कर्मयो थाय ठे ने ते फम पुदगल डे माटे कर्म पुद्गल उप रथी प्रीति उतारी एक पोतानो थारमा बनत ज्ञानमयी उपर उपयोग राखयो एवा एक स्वपणानी नावना, त एकस्वानु प्रेक्षा १॥श्वनित्यानुप्रेक्षा ते रूपी पुद्गलना थनेक प्रकारे यत्न करीप तोपण रहे नहि ते जणी नित्य एक श्री जैनधर्म ते परम सुखदायी पोताना थारमाने माटे घारमा जाणीने समकितादिक सवरे करी पुष्ट करीए जेपी निराबाध सुख पामीए ते थनित्यानुपेका २॥ शरणानुप्रेक्षा ते श्था नवने विषे पहोंचता जोवने एक समकितपूर्वक जैन धर्म विना पोजु कोई शरण नथी एम जाणो धर्मनु शरण श्रगोकार Ritik करोए, ते थशरणानुप्रेक्षा ३ ॥ ससारानुप्रेक्षा ते था जीवने ससाररूप समुज्ने विषे परि भ्रमण करता जगतना जीवने जैन धमरूपहीपानो थाधार ठ, वीजु कोई शरण नथी ते ससारानुप्रेक्षा ४ ॥ ए धर्मध्यानना १६ नेद पधा ॥ इति तृतीय धर्मध्यानाधिकार ॥३॥ इये शुकसम्यानना ४ मेद ॥ पृथक्रयषितर्कसविचारी १॥ एकरववितर्कयविचारी ॥ सूदम क्रिय थप्रतिपाति ३॥ समुच्छिन्नक्रिया थनिवृत्ति ४॥ पृथक्त्व वितर्कसविचारी ते थनत व्यरूप था जगत ठे एमाथी एक व्यनु स्वरूप प्रहण करी एनी उत्पत्ति क्षय थने ध्रुवताना जूदा जूदा पर्यायनु थर्थथव्यजनमा थने व्यजनथी अर्थमा मने करी विचारपो ते १॥ एकत्ववितर्फ अविचारी ते उत्पत्ति थादि जे व्यना पर्याय तेनु एकस्व प्यनेदपणु थवखवीने रहेवु, परम थविचारी कहेता थर्थ व्यजननु विचाररहितपणु २॥ सूक्ष्म क्यि थप्रतिपाति कहेता मन वचननो योग रोके ते उता पण थर्डकाय योगनारोफवाथी सूक्ष्म क्रियाने नथी पयानो खनाव जेनो परिणामना वधवाधीथप्रतिपाती, ५ पायो निर्वाण जवाने काले केवतीने होय ३॥ समुचिनक्रियश्च नियति कहेसा कय करी वे क्रिया, कायिष्यादि शैलेशी अवस्थाने विष योगना रुधवाथी जेणे ते तया थपाला वळवानो खनाथ ठे जेने विपे ते ४ ॥ इवे शुक्वध्यानना ४ सय कहे जे ॥ विवेक १ ॥ व्युत्सर्ग २॥ शव ३॥ असमाहिता ४॥ तेमा विवेक कहेता जीव विवेकपणे चिंतवे-श्वरे जीव! जीव काया जूदो एम जाणीने काया उपर ममता न थाणषी, ए काया तो पुद्गम डे, विणशवानो स्वप्नाव उ, ए प्रथम पक्षण कम्नु १ ॥ व्युत्सर्ग कहेता कायाने वोसरावीने काठसग्ग करे, कायोत्सर्ग करीने निकाचित कर्मने प्रोमे अथवा देवता, मनुष्य, तिर्यच सवधि अनेक परिसह उपजे ते खमे चने धर्मथी मगाव्या मगे नहि, चळाव्या चळे नहि, सम्यक् प्रकारे ते खमे शुज परिणामे, ए चीजें वरुण कमु २ ॥ अवहे कहेता थहो । जीव रोगादिक भाषीने उपन्या थका कायरपणु वेदे नहि, मोटु घगामे नहि, जीव तारा सच्यां कर्म ते सारा उपराजेस , ते तो समनावे करीने खमे, ए त्रीजु लक्षण कम्मु ३॥ थसमोहिया कहेता को बीजानी चक्रवर्ति, पळदेव, वासुदेव तया देवसानी शकि देखीने तथा परनी सुख साझवी देखीने मूळ थाणे नहि ॥ थरे जोष ! जे चाव सवारे हता ते नाव सम्याए नहि, थने जे नाष सभ्याए इता ते भाष सपारे नहि ॥ जे जीव मुता हता ते नठपा नहि, धने जे जीष उठया से सुप्ता नहि, एम शशाश्वती छिन विपे मर्याय नहि, वांछे पण नहि, मना मझी पण जाणे नहि ॥ अरे जीव ! ५ शकि ता जीव घणी वार पाम्यो, पामे , थने पामशे पण जीवने कार पाछ शरण नथी, पम जाणीने दया, शीख, सतोप, तप, सयम धादरीए तो श्रनता मोदना सुख पामीए, ए शुक्मयाननु चोयु सक्षण कम ४ ॥ हवे शुक्सच्यानना ४ थानधन कदे ठे ॥ खति १॥ मुचि २॥ यज्जवे ३ ॥ महवे ॥ तेमा खति कहेता क्षमा करवी ॥ क्षमा उपरांत तप नयी माटे कोधनो त्याग करवो १॥ मुक्ति कदेतां निखानपण थाणषु ॥ रे जीव ! साज ते पापनु मूळ ठे ते माट सोजनो त्याग करयो २ ॥ वलवे कहेता सरतपणं था ण माया फपटनो त्याग करवो रे जीव । कपट करता नसी गति न पामे एम जाणी माया न करयो ३॥ मवे कहेता अति उत्कर्षपणु ते मान टाळतुं रे जीव । मान फरता यका विनयधर्मनो नाश करे, एम जाणी मान न कर ४॥ इथे शुक्स प्याननी ४ थणुपेहा कहे ॥थयायाणुपेहा १॥ असुनाणुपेठा २॥श्रणतवचियाणुपेहा ३ ॥ विपरिणामाणुपेहा ४ ॥ तेमा बघायाणुपेहा कहेता रे जीव ! तु पांच थाश्रये करी समये समये नारे थाय ने एतु विचार शायथी निवर्चवु तथा अहो जीव! रागद्वेषयी जीयने सुख उपजे अथवा रागोपथी बुटीने ए जीव क्यारे मुकि जाशे, एवं चिंतवे १॥ श्वसुन्नाणुपेष्ठा कहेता रे जीव ! काया तो अशुचिनो मार डे तथा थशुचिए करीने उपनी जे एम जाणीने श्वशुचि परिहरे, ए ससारनु स्वरूप एलु जाणीने जे शुन्न कर्मना थशुन पाय ठे थने अशुन्न कर्मना शुन्न थाय तेणे करीने जीव नारे याय ने ते क्यारे एवा शुन्नाशुन्न कर्मथी बूटीशु एतु ध्यान चिंतविए तो परम थानद सुख पामोए २॥ यणतयचियाणुपेहा कहेतां ए जीव ता अमर बे, श्वजर, अपक्ष ,थरूपि , मरे नहि पण थायुष्य धाश्री श्यनित्य ठे, निस्य नहि, एम जाणीने रे जीव! धर्मने विष प्रमाद न करयो तथा नव करे ले तेनुं अनित्यपणो चिंतये ॥ नरक, तियेच, मनुष्य, देवता ए ४ गतिनु सनित्यपणू चिंतवे एनु थनिरयपणु जरत चक्रवर्चिए चिंतव्यु ॥ रे जीव ! एवी SECRETES चिंतवणा चितवीप तो परमानद, चतुष्य, निराबाध उत्कृष्टा मुख पामीए ३ ॥ विपरि पामाणुपेछा कहेता ए जीव तो अनादि काळनो छे थने अनादि काळथी ज ४ गति २४ दमकने विपे परिज्रमण करे ले पण चोर्याशी लाख जीवाजोनीथी परिज्रमण कर मटयु नथी ते माटे एम जाणीने शुरू निर्मळ धर्म यादरीए, पाळीए, फरसीए ए रीते करीने जन्मे जरा मरण मटामीए जेयी परमसुख पामीए तथा विपरिणामाणुपेहा कहेता विविध प्रकारना सगपण करीने हु विचर्यो, एकेक जीव साथे ते ४ गति संसारमा मात पिता जाइ बहेन नार्या पुत्रपणे थनतिवार सगाई करी तथा राजा युवराजा शेठ सेनापतिपएं थनंति वार पाम्या तथा वैरजापपणे एफेक जीवथी ते रे जीव ! अनंति वार पेर घांच्यु तथा धनतिषार मित्रपणु एकेक जीवथो ते रे जीव ! कौघु, एतु जाणी ससारथी विरक यश शुन्न खेश्या वाणीए सो परम थानद सुख थारमा पामे ४॥ए १६ लेदे शक्क ध्यान घt विशेष विस्तार वाणांग उघवाश्सूननी चिथी जाणवो॥इति चतुर्य शुक ध्यानाधिकारः॥ इति ४ च्यानना योस सपूर्ण ॥
देशवध सर्ववधना बोल॥ SSETTERROJERE प्रथम १२ ठेकाणे उदारिक शरीर लाने ॥ समुच्चय उदारिक शरीर १ ॥ समुच्चय एकें जिय ५॥ ५ स्थावर ७ ॥ ३. विगछिय १० ॥ तिर्यच ११ ॥ मनुष्य १५ ॥ समुच्चय उदारिक उदारिफना सर्वयंधपणे रहे तो जघन उत्० १ समय, धने उदारिकना देशवधपणे रहेतो ज १ समय, ते केम ? वायु तिर्यच मनुष्य उदारिफना धणीए वैकेय कर्यु होय श्रने उदारिक प्रवेश का प्रथम समय सर्वबध करीने बळी उदारिफना देशवधर्मा श्रा वीने एक समय रहीने मरे ते माटे जा १ समय, उत्प ३ पथ्यमा १ समय उणानी स्थिति सासमुच्चय एप्रियना सर्वघधनी स्थिति जण उप १ समयनी, देशवधनी जण १ समय, उत्प २३ हजार वर्षमा १ समय उणानी २॥ पृषी पाणी तेव वनस्पति, ३ विगखें दिय एना सर्वघधनी स्थिति ज० ज० १ समयनी, देशवधनी ज० १ खुलक नवमा ३ समय उणानी, चत् पोतपोताना थायुध्यमाथी १ समय उणानी ए ॥ वाचकायना सर्वषधनी स्थिति ज० उ०१ समयनी, देशरधनी ज० १ समयनी, वाउकाय वैक्रय करीने देशषधमां थावी? समय रहीने मरे माटे, उत्० ३ हजार वर्षमा १ समय उणानी २० ॥ तिर्यच मनुष्यना सर्यरधनी स्थिति जग उन १ समयनी, देशयधनी जा १ समयनी ते वाउकायवत्, उत्॥ ३ पथ्यमा १ समय उणानी १२ ॥ इति स्थितिहार ॥ इथे थतरद्वार कहे ते ॥ समुच्चय उदारिकना सर्वयधनु थांतरु ज० खुलकनय ३ समय उणानु उत्ण ३३ सागर पूर्यकोमि ने १ समय थधिकनु, ते ये समय वाटना ठे ते पूर्वकोमिमा १ समय उणो ठे तेमा घालीए एटसे १ समय वन्यो ॥ देशयंधन श्वांतरु ज० १ समयनु, उत्० ३३ सागर ने ३ समय थधिकनु, ते १ समय सर्वयधनो ने २ समय वाटना एव ३ समय यधिक जाणवा १ ॥ समुचय एकें भियना सर्ववधनु थांतरु जण खुमाग जब ३ समय नणानु, ते केम १२ समय पाटना ने १ समय सर्वयधनो एव ३ समय, उत्त २२ हजार वर्ष ने १ समय थधिक्नु, देशवधनुं थातरु जण १ समयनु, ते सर्ववधनु टम्पु, उत्प थतर्मुहर्जनु ते केम ? उदारिफ यानकाय फ्रेय फरीने थतर्मुहूर्त रदीने वळी उदारिकनो सर्ववध करीने देशवष थाय ते कारणे २ ॥ पृष्वी पाणी तेठ वनस्पति, ३ विग जिय ए ७ ना सर्ववपन शांत जग खुमाग नव ३ समय उणानु, उत्० पोतपोताना श्रायुष्य उपर १ समय अधिकनु ॥ देशवधनु जसमयनु, उत्॥३ समयनु ते २ समय वादनाने १ समय सर्वयंधनो एव ३ समयनु ए ॥ वायराना सर्व वधनुं थांतरु ज सुमागनय ३ समय उणानु, उत्० ३ हजार वर्षने १ समय अधिकनु । देशवधनुं जा १ समय, उत्० वतर्मुहर्च- १० ॥ तिर्यच मनुष्यना सर्वषधर्नु थांतर ज० खुमागलव ३ समय उणानु, उत् पूर्व क्रोमिने १ समय थधिकनु ॥ देशयधनु थांतर ज० १ समयनु, उतप थतर्मुहूर्त्तनु १५ ॥ ए पोतपोतानी जाति मांहि श्रातरु पमे २ ॥ इवे विशेषांतर द्वार कहे ते ॥ पजिय मरीने नोपकेंजिय थाय वळी नोएजिय मरीने एके जिय थाय तेना सर्ववधनु थातरु ज२ खुमागलव ३ समय उणानु, उत्ण वे हजार सागर जाफगनु ॥ दशवधनु थांतरं जा खुमागनव १ समय थधिकनु, उत् घे हजार सागर काफेरानु । पृथ्वी पाणी तेल वाउ,३ विगो प्रिय तियच मनुष्प ए ए मरीने चनेरे | नगमे जाय, जश्ने पाठा थापणे गमे थावे ॥ ए ए ना सर्पवधर्नु ज० २ खुमागनव ३ समय उणानु, उत्॥ वनस्पति काखनु, देशवधनुं जप खुदागनव १ समय थधिकनु, उत्प वनस्पति काखनु ॥ वनस्पति मरीने नोवनस्पति थाय, वळी नोवनस्पति मरीने वनस्पति थाय तेना सर्पषधनुं जप खुमागलव ३ समय उणानु, उत्॥ पुढवीकाखनु ॥देशवधनु थांतरु जण खुमागनव १ समय थधिकर्नु, उत्त पुढयोकार्नु ॥ हवे अस्प बहुत्वछार कहे ॥ सर्वथी थोमा उदारिकना सर्वघधक, ते पहेखा समयना ठे माटे १ ॥ तेथी उदारिकनाश्रय धक विसेसाख्यिा २॥ तेथी उदारिकना देशवधक थसंख्यातगुणा ३ ॥ इति उदारिकना सबंध देशबंधनु स्वरूप सपूर्ण ॥ अथ वैकेयना सर्ववध देशवधनु स्वरूप कहे ते ॥ समुच्चय वैकेयना सर्ववधनी स्थिति ज० १ समयनी, उ०२ समयनी ते केम ? कोइ मनुष्य तथा तियेचे वैकेय माम्पु ॥ वैक्रेयनो पहेलो समय सर्ववधनो करीने तेज समये मरे, मरीने देवता तथा नारकीमो विपदगति विना उपजे तेवारे चीजे समये सर्वषंध करे ए रोते । समय जाण्या ॥ देशवधनी जण १ समयनी,उत्०३३ सागरमा १ समय उणानी॥ पजिय FESEXMA वाटकाय १ तिर्यच २ मनुष्य ३ ३ ना सर्वयंधनी ज० ० १ समयनी ॥ देशषधनी ज० १ समयनी, उ० थतर्मुहूर्तनी ॥ नारकी देवताना सर्वयधनी जण उ० १ समयनी ॥ देशवधनी जण दश हजार वर्षमा ३ समय जणानी, उप ३३ सागरमा १ समय उणानी ॥ हवे थतरछार कहे ते ॥ समुच्चय वैकेयना सर्ववधनुं थांतरु ज० १ समयनु, उत्ण वन स्पति कासनु ॥ देशवधनुं यांतरु ज १ समयनु, उत्॥ वनस्पति कासनु ॥ वाउकाय ति येच मनुष्यना येक्रेय शरीरना सर्ववधनु थातरु ज थतर्मुहूर्त्तनु, घाउकायर्नु उ० पस्योपमना थसस्पातमा नागनु थांतर, तिर्यच मनुष्यर्नु उ० प्रत्येक पूर्व क्रोमिनु ॥ एम देशबंधनु पण थतर जाणवु ॥ए पोतपोतानी जातिमा थातरुपमे ॥हषे विशेषांतर हार कहे ॥एप्रिय मरोने नोएप्रिय थाय वळी नोएकैछिय मरीने एप्रिय थाय तेना सर्वबधनु शांतलं जए अंतर्मुहर्चनु, उत् थनतकासनु ॥ देशबंधनु थातरु पण एमज जाणवु ॥ वाउकाय ? तिर्यच २ मनुष्य ३ ३ ना सर्वयध देशवधनुं थांतरु जय श्रतर्मुहूर्त्तनु, उ० वनस्पप्तिका खनु ॥ नारकी देवताना सर्वबंधनु थांतलं ज० १० हजार वर्ष ने अतर्मुहूर्त अधिकनु, उ वन स्पति कासवें ॥ देशवधन यांतर पण एमज ॥ नारकी, १० जयनपति, १६ वाणव्यतर, RAGTit. ज्योतिषी, वैमानिक ७ ऐवशोर सुषी वैकेयना सर्वषधर्नु अांतरु पोप्तपोतानी स्थिति उपरे थतर्मुहर्च थपिनु, उप थन सकाअनुं ॥ देशषधनु थात; जण असर्मुहर्चनु, उ० वनस्पति कार्नु ॥ नवमा देवलोकी नव मेवेयक सुधीना सर्वबंधनु यांतलं जा पोतपोताना था उस्सा उपर पृथक् पर्प श्या पक , उ० धनंतकाप्सर्नु ॥ देशपधर्नु थातरु ज० पृथक् वर्षनु, उ० अनंतकालनु ॥ धार व नुत्तर विमानना सर्ववधनुं थांतलं ज० ३१ सागरने पृथक् वर्प अधिकनु, उ सस्पात र सागरर्नु। देशवधनु यांतरु जए पृथक् वर्ष , उप सख्यात सा गरनु ॥ सर्वार्थ सिझना सर्वव' व देशवधनुं थांतरु नयी ॥ हवे शल्पबहुवहार कहे ॥सर्वथा योमा वैकेय शर ।रना सर्पयधक १॥ तेथी देशवधक असख्यात गुणा ॥ तेथी अवधक थनतगृणा ३ ॥२॥ इति वैकेयना देशवध सर्ववधनुं स्वरूप सपूर्ण ॥ इवे थाहारकना देशवध सर्ववधनु स्वरूप कठे २ ॥ थाहारकना सर्व घंधनी स्थिति जान १ समयनी, देशयंघकनी स्थिति जना श्वसर्मुहर्शनी ॥याहारकना सर्वचधनु थातरू जा बत मुहर्नु, उ अर्ब पुगस परा पर्जन देशे तणावें ॥ हवे अस्पषहुस्वधार करे ते ॥ सर्वप। पोमा थाहारकना सर्वपंषक १ ॥ तेपी देशबंधक सम्पातगुणा २॥ तेथी अधधक अना गुणा ३ ॥ ३ ॥ हवे तेजस् कामपनु स्वरूप कहे वे ॥ तैजस् कार्मणना सर्ववध नहि ॥ देशबंधना २ खेद ॥ थादि नहि थत नहि ते बनव्य १ ॥ थादि नहि यत ते जव्य २॥ हवे एर्नु अस्पबहुत्व कहे २ ॥ सर्वधी थोमा थनव्य १ ॥ सेथो नव्य बनत गुणा ॥ सवयी योमा तेजस् कार्मणना अषधफ १ ॥ तेथी देशवधक अनतगुणा ॥ ५॥ हवे ११ पोखनु थम्पपलुस्व कहे २ ॥ सर्वची योमा थाहारकना सर्ववधक १॥ तेथी थाहारकना देशवधक सख्यातगुणा २॥ तेथी वक्रेय शरीरना सर्ववधक सख्यात गुणा ३ ॥ तथी वेयना देशवधक असख्यातगुणा ४ ॥ तेयो तेजस् कार्मणना श्रबधक धनतगुणा ५॥ सेयी उदारिफना सपबधक बनतगुणा ६ ॥ तेथी उदारिकना श्रबधक विसेसाहिया ७॥ तेषी उदारिकना देशषधक श्वसख्यातगुणा ॥ तेथी तेजस् कार्म पना देशषधक विसेसाछिया ए ॥ तेथो वैकेयना श्रबधक विसेसाहिया १० ॥ तेषो थाहा रफना अषधक विसेसा दिया ११ ॥ इप्ति देशबंध सर्वषधना पोल संपूर्ण ॥ 528 सख्याता असख्याताना वाल ॥ BASTI अनुयोगहार सूत्र मध्ये सख्याता असख्याता अनताना २० नेद कसा ने सेनो वि स्तार किंचित् मात्र लिख्यते ॥ सख्याताना ३ वेद ॥ जघन्य सम्म्यातो १॥ मध्यम सख्यातो २॥ उत्कृष्ट सल्यासो ३॥ए ३जेद ॥ असख्याताना नव नेद ॥ जघन्य परित असख्यातो १॥ मध्यम परितश्चसख्यातो २॥ उत्कृष्ट परित असख्यातो३॥जघन्य जुच असख्यातो॥ मध्यम जुत्त असख्यातो ५॥ उत्कृष्ट जुत्त शसख्यातो ६ ॥ जघन्य थसख्यातो असख्यातो ॥ मण्यम असख्यातो असख्यातो ७ ॥ उत्कृष्ट थसख्यातो थसंख्यातो ए ॥ ए ए नेद ॥थनताना जेद ॥ जघन्य परित धनतो १ ॥ मध्यम परित बनतो॥ उस्कृष्ट परित थनंतो ३ ॥ जघन्य जुत्त धनतो ४ ॥ मध्यम जुत्त घनतो ५ ॥ उस्कृष्ट जुत्त धनतो ६ ॥ जघन्य अनतो थनतो ७ ॥'मध्यम थनंतो थनतो ॥ए नेद ॥ सल्याताना ३ नेद, थसंख्याताना ए नेद, अनंताना पद ॥ ५ सर्व मळी २० HULNAIVARE/REEEEPISEX भेद नामयो कसा ॥ इवे विस्तारे वीस दलो अर्थ समजणपूर्वक कहे डे ॥ जघन्य सहयातो ते वे १॥ मभ्यम सख्यातो ते प्रणधी मामीने उत्कृष्ठा सल्याता माहेथी। थोठो तेटला सुधो मध्यम सख्यातो फर्सए, एना सख्याता रूप धाय ५ ॥ उस्कष्टो सख्यातो कई वे ॥ जबूटीप प्रमाणे पाखो कपी सरसवने दाई सग सुधी जरीने पठी १ दाणो छोप अने एक दाणो समुझे मुकता मुकता सर्व पाखाना कण खुटी जाय, पनी जे द्वीपसमुझे वेलो दायो आख्यो तेवको मोटो चीजो पासो कम्पवो ते सरसपने दाणे जरीन पळी एक दाण्या वीपसमुसे मुकता जे छीपसमुख सुधी नेस्या दाणो पहोंचे तेरमो मोटो शेजो पाखो कल्प वो ॥ एवा पासा केटखा कस्पवा ? उत्तर-असक्षप्पा क्ता गण्या न जाय एटला पासा रए व प्रकथी थधिक शिखा सहित सरसव करी भरवा ॥ प्रवरा शिस्बर सुधी जेटला पालाना कण तेटघो उत्कृष्टो संख्यातो जाणवो ए ३ नेद स ख्याताना कझा पहवे असंख्यातानाए नेद कहे जे ॥ जे उस्कृष्ठो सरूपातो ते उपर एक दायो यधिक मुफीप त्यारे जघन्य परित २ सख्यातो पाय,ते उपरांत ज्यामुधी उत्कृष्टा परितर्थस ख्यातामांषी र श्रोतो तेने मभ्यमपरित असख्यातो कहीए॥षे उत्कृष्टो परित शसंख्या तो ते कम पाय ? उत्तर-जघन्य परित संख्याताना रूप जेटलां थयां न तेटली जपन्य परित असख्यातनी राशी मामीप, ते राशीमामीने पढ़ी माहोमादे राशी सघाते श्रन्यास कीजे ॥ ते गुणा करीप ते कमी असस्कल्पनाये ५ नी राशी मांगीए, तेने धारवार गणतो २५ पांच पंचा २५ ॥२५ पचा १२५ ॥ १२५ पचा ६३५॥ ६२५ पचा ३१२५ थाय १५५ तेम जघन्य परित असल्यातने जघन्य परित थसख्यातगुणा करीए तेटलों ६२५ रूप धाय तेमांची एक रूप उणुं करीए, एटो उत्कृष्टो परित असख्यातो पाय १३१२५ ३॥ हवे उत्कृष्टो परित थसहयातो कसो तेमा १ दापो नाखीए, एटखे जघन्य जुच असंख्यातो याय, एक थावलिकाना समय सेटसा जापवा ४॥ ते उपरांत ज्या सुधी उत्कृष्टा जुत्त असख्यातानो नो नेद वे तेमा १ रूप बोलु स्यांसुषी सर्व मध्यम जुच असख्यातो पांचमो भेद कहीए ५ ॥ इवे उत्कृष्टो जुप्त असरूपातो केम ? उत्तर-जघन्य जुस असख्यातो चोये चेदे थावखिफाना समय कमा, माहोमांदि गुणां करता जेटमा रूप याय तेमा घोढुं करीए स्यारे उत्कृष्ठो जुत्त असल्यातो कहीए ॥ एउठो नेद ६ ॥ वे उत्कृष्टो जुत्त अस ख्यातो कसो तेमा १ रूप प्रक्षेपीए पटले सातमो नेद जघन्य असख्यातो असख्यातो थाय ॥ ते उपरांत ज्यामुधी उत्कृष्टो असख्यातो असख्यातामा १ रूप घोर्बु तेने मध्यम असख्यातो असख्यातो कहीए॥ एश्वाठमो नेद ॥ हवे उत्कृष्टो श्वसख्यातो असख्यातो केम भाय ? उत्तर-जघन्य असस्न्यातो असख्यातो सातमो नेद ले तेने माहोमादि गुणा करता जेटलां रूप थाय तेमा १ रूप थोतु करीए, स्यारे उत्कृष्टो असख्यातो असख्यातो पाय ए ॥ ए ए नेद असख्याताना कमा ॥ हवे अनताना नेद कहे २ ॥ जे उत् कृष्टो यसख्यातो थसंख्यातो कसो, से उपर १ रूप अधिक करीप, स्यारे जघन्य परित थनतो थाय १ ॥ ते उपरांत ज्यासुधी उत्कृष्ट परित अनतामांहि १ थोगे तेने मध्यम परित थनतो कहीए २॥ इवे उस्कृष्टो परित थनतो केम चाय १ उत्तर-जघन्य परित बनतो पहेलो नेद कमो, नेने माहोमादि गुणा करता जेटलां रूप धाय ते मध्ये १ रूप थातु करीए, त्यारे उत्कृष्टा परित धनतो याय ३ ॥ इवे जघन्य परित अनतो - फहे ॥ तेने माहामादि गुणा करता जेटखा रूप थाय तेने जघन्य जुत्त श्रनतो चोयो जद कहीए तेटला यनव्यसिझिया जीव जाणवा ४ ॥ ते उपरांत ज्यांसुधी उत्कृष्टो जुत्न थनतामांदि १ रूप थोतु तेने मध्यम जुत्त धनतो कहीए ५॥ हवे उस्कृष्टो जुत्त यनतो केम थाय ? उत्तर-जघन्य जुच धनते थनव्य जीय कमा तेने माहोमांहि गुणा फरता जेटसा रूप धाय तेमा १ रूप श्रोतु फरीए, स्यारे उत्कृष्टो जुत्त धनतो थाय ६ ॥ हवे उत्प्टो जुत्त थनतो कसो ते मध्ये १ रूप प्रक्षेपिए, त्यारे जघन्य अनंतानतो थाय ॥ पठी सातमा थनता उपरे जेटला रूप मुकीए, ते सर्व धावमा धनता मध्ये जाणवां ॥ मध्यम थनतानतो जाणशे ॥ ॥ नवमो धनतो नयी ॥ प्रकरण मध्ये नवमो अनंतो कद्देख ठे पण सूत्र मते नथी । इति सख्याता असल्याता अनताना बोल सपूर्ण ।। us.
पांच शरीरना बोल॥ थथ पन्नवणा सूचना पद २१ थी १६ छारे ५ शरीरना घोल लिख्यते ॥ गाहा-नाम १ रथ २ सगण ३ सामी, उग्गाहणा ५ पुग्गखनयण ६ सजोयणा ॥ दव्ब पएस ए दव्यपएसम्याए १०, सुहम वायर ११ उग्गाहणा थप्पायहु १२ ॥१॥ पश्चोयण १३ विसय १४ विश् १५, यतर १६ सोमस दारा श्मे ॥ पण सरीरोवरि पए, उत्तारेयव्या निठण बुझिहि ॥२॥ ॥ १६ घार ॥ तेमा प्रथम नामझार कहे ते ॥ उदारिक शरीर १॥ वैकेय शरीर ॥
थाहारक शरीर ३ ॥ तेजस् शरीर ४ ॥ कार्मण शरीर ५ ॥१॥ वे बीजु वर्षकार कहे व ॥ उदारिक कहेता प्रधान सर्व शरीरथी ॥ तीर्घकर गणधरादिकनुं शरीर तथा मुकि जाशना स्वताव तथा उदारिक कहेता मोटु सहस्र योजनमान, अवधारणोक तेने उदारिक शरीर कहीए॥१॥ वैकेय शरीर ते केने कहीए रूप परावर्चन करवानी शक्ति तथा एफ अनेक नाना मोटा खेचर नुचर दृश्य अदृश्य इत्यादिक विविध क्रियाए नवा रूप पनावे तेने चेक्रेय शरीर कहीए ॥ ते वे प्रकारे २ ॥ जयप्रस्ययिक १॥ सम्धिप्रत्ययिक ॥ जयप्रत्ययिक नारकी देवताने होय १, अग्धिप्रत्ययिक मनुप्प तिर्यंचने होय २॥२॥था हारक शरीर त केने कहीए ? चौद पूर्वधारी साघु, तीर्थकर महाराजनी कि देखवा जणी तथा सशय टाळया निमित्त उसम पुद्गलो प्रछीने ज० मुढा हायर्नु, उ०१ हाथनु शरीर फरे तेने थाहारफ शरीर कहीए ॥ ते स्फटिफनी परे थति निर्मळ, कोइ न देखे एवु होय ३ ॥ तेजस् शरीर ते तेजना पुद्गले निष्पन्न तेने तेजस् शरीर कहीए ॥ श्रदृश्य पुत थाहारने पचावे तथा सन्धिवंत तेजुखेश्या मुके तेने तेजस् शरीर कहीए ॥
प्राप कार्मण शरीर ते केने कहीए ? कर्म पुद्गलथी निपज्यु तेने कार्मण शरीर कहीए॥ जेना उदयघी जीव पुद्गल ग्रहीने ते कर्मादिरूपपणे परिणमावे तथा थाहारने खेंचे तेने कार्मण शरीर कहीए ५॥२॥ हवे श्रीजु सगणकार कहे जे ॥ उदारिक शरीरमा सताण ६ ॥१॥ केय शरीरमा देवताने सगण एक समचारस ॥ नारकीमा सगण एक ईम ॥ मनुष्य तिर्यचा वैकेय करतां समचउरस तथा नाना प्रकारनु ॥ वायुकायनां वैकेयमा एक हुम ॥२॥ थाहारक शरीरमा संताण १ समचउरस॥३॥ तेजस् कार्मणमा ६ सगण खाने ॥४-५॥३॥ चोषु स्वामीकार कहे । उदारिक शरीरना स्वामी मनुष्य तियेच १ ॥ वैक्रेत्य शरीरना स्वामी देवता नारकी तथा खब्धिप्रत्ययिक मनुष्य तियेच २॥ थाहारक शरी रना स्वामी चनद पूर्वी साधु ३ ॥ तजस् कार्मण शरीरना स्वामी सर्व सप्तारी जीव५ ।।५ ॥४॥ हवे पांचमु थषगाहनाधार कहे डे ॥ उदारिक शरीरनी अवगाहना जघन्य थालनो असख्यातमो जाग, उत्कृष्टि इजार जोजन काफेरी१॥ वैकेय शरीरनी श्रवगा. इना नषप्रत्ययिक जघन्य श्रगुटखनो असख्यातमो नाग, उ० ५० धनुष्यनी ॥ सब्धि प्रत्ययिकनी जण थगुप्तनो सख्यातमो नाग, उ साख जोजन काफेरी ॥२॥थाहारक शरीरनी थरगाड्ना जप मुढा हाथनी, उ एक हाथनी ६ ॥ तेजस फार्मणनो अवगाहना जण् थगुपनो थसख्यातमो नाग,उ घटद राजखोक प्रमाणे ४-५॥५॥ इथे ग्तु पुद्गल- चयणधार कडे ठे ॥ उदारिक १ ॥ तेजस् २ ॥ कार्मण ३ ॥ ए ३ शरीर प्रण पार पांच दिशिनो थाहार से ॥ क्रेय थाहारक ए घे ठए दिशिनो थाहार से ५॥६॥ ये सातमु सयोजनाकार कहे ते ॥ उदारिफ शरीरमा वैकेयने थाहारकना नजना ॥ तेजस् कार्म पनी नियमा १ ॥ फेयमा उदारिफनी जजना ॥ थाहारक नयी ॥ तेजस् कार्मणनी नि यमा २॥ थाहारक शरीरमा उदारिकनी नियमा॥धेक्रेय नथी॥ तेजस् कार्मणनी नियमा ३॥तेजस् शरीरमा उदारिक बैक्रय थाहारफनी नजना ॥कार्मणनी नियमा ॥१॥कार्मण शरीरमा उदारिफ वैकेय थाहारकनी मजना ॥ तेजस्नी नियमा ४-५॥७॥हवे श्वामुं दवग्याप हार कहे ते॥सर्वथीयोमा थाहारफना दवग्या ते जघन्य १,२,३॥ उस्कृष्टा पृथक जार॥१॥तयो धेयनादवग्या असत्यातगुणा॥तेपीनदारिफना दवग्याथसख्यातगुणा ३॥ तेथी तेजस् फार्मण दव्वग्याए दोवितुसाने उदारिकथो धनंतगुणा अधिक ४॥॥इवे न वमु पएसम्याए झार कद्दे ठे॥सर्वथी योमायाहारकनाप्रदेश १॥ तेथी वैकेयना प्रदेश यस म्च्यातगुणा २॥ तेथी उदारिकना प्रदेश थसहयातगुणा३॥ तेषी तेजस्ना प्रदेश बनत गुणा ४ ॥ तेथी कार्मणना प्रदेश अनतगुणा ५ ॥ ए॥ दशमु दवपएसम्याए द्वार कहे ॥ सर्वथा योमा थाहारकना दयग्या १॥ तेथो वैकयना दवग्या थप्सम्यातगुणा ॥ तेथी उदारिकना दवठया थसख्यातगुणा ३ ॥ तेथी श्राहारकना पएसठया थसख्यात गुणा ४ ॥ तेथी चक्रेयना पपसव्या असख्यातगुणा ५ ॥ सेयो उदारिकना पएसठया थसम्यातगुणा ६ ॥ तेथी तेजस् कार्मण दोवितुला ने दवग्या श्वनतगुणा 3-७॥ तेथी तेजस्ना पएसठया धनतगुणा ए ॥ तेथी कार्मणना पण्सम्या अनत गुणा १० ॥ १० ॥ थग्यारमु सूक्ष्म चादर छार कहे ठे॥सर्वयो थोमावादर पुद्गज उदारिकना १॥ तेथी वैकेय ना पुद्गल सूक्ष्म २ ॥ तेथी थाहारकना पुद्गल सूक्ष्म ३ ॥ तेथी तेजस्ना पुद्गल सूक्ष्म ४॥ तेयो कार्मणना पुद्गल सूदम ५ ॥ ११ ॥ इवे वारम् श्ववगाइनानो अपाय हुत्व EVEALEUSIC IWAN धार फहे ॥ सर्वथा थोमी उदारिफनी जघन्य थवगाहना १॥ तेयो सेजस् कार्मणनो माहोमाहि तुष्य ने जघन्य अवगाहनां विसेसाहिया ३ ॥ तेथी वैक्रेपनी जघन्य श्रवगा- हना थसख्यातगुणी ४ ॥ तेथी थाहारफनी जघन्य अवगाहना असख्यातगुणी ५॥ तेथी थाहारकनी उत्कृष्टी श्रवगाहना विसेसाछिया ६ ॥ तेथी उदारिकनी उत्कृष्टी थवगाहना सस्यातगुणी ७ ॥ तेथी क्रेयनी उत्कृष्टी श्रवगाहना सख्यातग्रणी ॥ तेथी तेजस् कार्मणनी माहोमादि तुस्य ने उत्॥ श्रवगाहना थसख्यातगुणगी १० ॥१२॥ इवे तर# प्रयोजनकार कहे ते ॥ उदारिकनु प्रयोजन मुक्ति जावानु १ ॥ येक्रेयनु प्रयो जन थनेक रूप फरपार्नु २ ॥ थाहारकनु प्रयोजन सशय टाळवार्नु ३ ॥ तेजस्नु प्रयोजन थाहार पचायवान ४ ॥ कार्मणनु प्रयाजन थाहार खेंचवानु थने थाउ फर्म महण करीने से परिव्रमण फरषानु ५ ॥ १३ ॥ चन्दमु विषयहार कहे ठे ॥ उदा रिकनो विषय पन्नरमा रुचक छीपताई १॥ वैक्रेयनो विषय असंख्याता छोप समुताई २॥ याहारकनो विषय घनी छीपता२३॥ तेजस् फार्मणनो विषय सर्व बोकमा जवानो ४-५ ॥ १५ ॥ पंदरमु स्थितिहार कहे वे ॥ सदारिकनी स्थिति जघन्य अतर्मुहर्जनी, उत्कृष्ट ३ पस्योपमनो १ ॥ वैकेयनो जघन्य अतर्मुहूर्त्तनो, उत्कृष्टि ३३ सागरनी ॥ थाहारकनी जा न वतर्मुहर्तनी ३॥ तेजस् कार्मणनी स्थिति चे प्रकारनी ॥श्रणाश्या अपनवसीया ते अजव्य थाभि श्रादि नयी ने थत पण नयी थने श्रणाश्या सपज्जय- सोया ते जव्य श्वाभि शादि नयी ने बत ठे ॥ १५ ॥ इवे सोखमु थतरकार कहे जे ॥ उदारिकनु तरु पो तो जघन्य अतर्मुहूर्त्तनु, उत्० तेत्रीत सागरोपमनु १॥ येकेप शरीरनु थांतरु पमे तो ज० वतर्मुहूर्त्तनु, उत्। थनतो काम यावत् वणस्सईकालो ॥ थाहारकनु थातर पमे तो ज० वतर्मुहूर्खनु, उत्० थर्ड पुद्गल परावर्तन देशे उणानु३॥ तेजस् कार्मणनु वानरु नयी ४-५ ॥ तथा अतर वीजा प्रकारे ।। थाहारिक शरीर वर्जि ४ शरीर घोफमा सदा साने पण तेनु थतर पमतु नथो, भने थाहारिक शरोरनु थतर पके सो उत्कृष्ट ६ मासनु अंतर पमे ॥ १६ ॥ इति पांच शरीरना वोस सपूर्ण ॥
पाच इद्रिय ॥ थष श्री पन्नवणा सूचना पदरमा पदना पहेला उद्देशाथी पांच इजियना बोल लिख्यते ॥ गाथा ॥ नाम ? सगण २ थाइल ३, पुदत्त ४ फश्पएस ५ गाढे ६॥ थप्पायहु ७ पुह ७ पविट ए, विसय १० थणागार ११ थाहारे १२ ॥१॥ इपे प्रयम नाम छार कहे ठे॥ १ थोत्रेजिय, २ चलुइजिय, ३ घ्राणे प्रिय, ४ रसें प्रिय, ५ स्पर्शधिय ॥१॥ इये योजु सस्थान हार कहे ते ॥१श्रोत्रजियनु सस्थान कदध वृक्षना फूस सरखें, २ चा इपियनु सस्थान मसूरनी दाळ श्वथवा थर्धं घमा सरस्खु, ३ घाणे प्यनु सस्थान थतिमुक्तक पुप्प अथवा धमण सरस्खु, ४ रसेंजियनु सस्थान ठरपसानी धार सरस्खु, ५ स्पर्शेपियनु सस्थान नाना प्रकारचें ॥ २ ॥ हपे प्रोजु यानुस्य द्वार पहे ठे ॥ पाये ऽभियनु जामपणु जघन्य उत्कृष्ट थांगुलना ECEMBER थसंख्यातमा नागनु ॥ ३ ॥ इवे चोथु पृथक्त्वद्वार कहे डे ॥ श्रोत्र, २ च ने ३ घ्राण ए प्रण इजियतुं खांषपणु जघन्य उत्कृष्ट यागुतना असख्यातमा नागनु, ३ रसेजियनु सापपणु जघन्य थांगुलना थसन्यासमा नागनु, उस्कृष्ट पृथक् ते १ थी ए श्यागृलनु ॥ स्पर्शप्रियर्नु खांवपणुं जघन्य थागुमना असख्यातमा नागनु, उत्कृष्ट हजार योजन काफेरु ५॥४॥ इथे पांचमु प्रदेश द्वार कहे डे ॥ पाच इपियना अनंत धनत प्रदेश बे ॥५॥ हवे तु श्रवगाह द्वार कहे जे पाँच इप्रिय ले तेमा दरेक इंघिय थाकाशना प्रदेश श्वसम्ख्यात थसख्यातने अवगाही रहेख ले ॥ दरेक इजियना अनंत थनस कर्कश श्रने चारे स्पर्श ठे, तेम धनत थनत इसका अने मृदु स्पर्श डे, ए स्थूष दृष्टिनी अपेक्काए जाणवु ॥६॥ हवे सातमु थम्पबहुत्व छार कहे , तेमा प्रथम प्रदेशनो श्रम्पबहुत्व ॥ सर्पयो थोमा चहु इंडियना प्रदेश १ ॥ तेथ भोप्रियना प्रदेश सख्यासगुणा ॥ तेथी प्राणे जियना प्रदश सम्यातगुणा ३॥ तेथी रसेंघियना प्रदेश असंख्न्यातगुणा ४॥ तेषी स्पर्श प्रियना प्रदेश सख्यातगुणा ५॥ घोजो इपियोनो थाकाश प्रदेश अवगाही रबानो अम्पयहुत्व ॥ सर्वधी योमा चा इंजियना थवगाया थाकाश प्रदेश १ ॥ तेथी श्रोत्रेजियना शवगामा थाकाश प्रदेश स्यातगुण्या २ ॥ तेथी घ्राणेंजियना श्रषगासा आकाश प्रदेश सख्यातगुणा ३॥ तेथी रसेंजियना थवगाया थाकाश प्रदेश असख्यातगुणा ४॥ तेथी स्पर्शेजियना थवगासा थाकाश प्रदेश सख्यातगुणा ५॥ इथे मिजो इजियोना प्रदेशश्थने थाकाशप्रदेशने थवगाही रहेख इप्रियो ए बेनो साथे थपयहुर व ॥सर्पथी थोमा चपियना अवगाम थाकाश प्रदेश १ ॥ सेथो श्रोत्रंभियना थयगाय सस्यातगुणा २ ॥ तेथी घाणेपियना श्रवगास सख्यातगुणा ३॥ सेथी रसेंपियना थवगास थप्तम्यातगुणा ४ ॥ तेयो स्पर्शधियना श्रषगाम सख्यातगुणा ५ ॥ तेषी चल इभियना प्रदेश श्रनतगुणा ६ ॥ तेथी श्रोत्रंभियना प्रदेश सत्यातगुणा ॥ तेथी प्रा णेजियना प्रदेश सख्यातगुणा ॥ तेथी रसेंजियना प्रदेश असख्यातगुणा ए ॥ सेथी स्प शभियना प्रदेश सख्यातगुणा १० ॥ दय चोयो इडियोमा कर्कश नारे स्पर्शनो थम्प बहुस्व ॥ सर्वयो पोमा था इंडि यना कर्कश जारे स्पर्श १ ॥ तेयो श्रोभियना धनतगुणा ५ ॥ तेथी प्राणेजियना धनतगुणा ३ ॥ तेथी रसेंजियना धनतगुणा ॥ तेथी स्पर्शजियनाथनतगुणा ५॥ सर्व थी थोमा स्पर्शजियना खघुमृदु स्पर्श १॥ तेथी रसें प्रियना धनत गुणा २ तेथी घाणेजियना वनतगुणा ३ ॥ तेथी श्रोत्रेजियना धनतगुणा ४॥ सेयो चा इंजियना अनतगुणा ५ ॥ इवे ठगो इपियोमा कर्कश १ नारे ५ लघु ३ मृ ४ ए चारे स्पर्शनो साये अपवहुस्ख ॥ सर्वथी थोमा चकु भियना कर्कश नारे स्पर्श १ ॥ तेथी प्रोभियना कर्कश नारे स्पर्श थनत गुणा २ ॥ तेथी नाणेजियना धनतगुणा ३॥ तेथी रसेंजियना थनतगृणा ४॥ तेथी स्पर्श भियना बनतगुणा ५॥ तेथी स्पर्शेजियना सघु मृा स्पर्श धनतगुणा ६ ॥ तेथी रर्सेजियना लघु स्पर्श अनतगुणा ॥ तेथी घाणे जियना लघु मृड स्पर्श धनतगुणा ॥ तेथी प्रोग्रेजियना बघु मृड स्पश अनतगुणा ॥ ए॥ तेथी चकु इंजियना बघु मृउ स्पर्श श्चनप्तगुणा १० ॥७॥ इथे शावमु पृष्ट छार कहे जे ।। इजियोने जे पुद्गलो यावी स्पर्शे ते पुद्गलोने इजियो महे ते पृष्ट कहीए. पांच इडियोमा चक्कु इंडिय विना चार इजियोने पुद्गलो वापी स्परों ने पण चछु इंजियने थावी स्पर्शता नथ ॥७॥ हवे नषमु प्रविष्ट कार कहे ठे जे इंडियोने विपे थनिमुख (सार्मा) पुद्गलो श्याषीने प्रवेश करे तेने प्रविष्ट कहीए ॥ पाच इणियमा पछु इडिय विना चार इजिय प्रविष्ट ठे ने चक्कु इंघिय थप्रविष्ट ठे ॥ ए॥ इवे दशमु विषयहार कहे ते ॥ पाचे इजियोनो जघन्य विषय थांगुलना थस ख्यातमा जागनो, उस्कृष्ट जुदो जुदो कहे ठे ॥ एफेन्जियनो स्पर्शभियनो विषय ४०० धनुष्य, पेइजियनो रसेंशियनो ६४ धनुष्य श्रने स्पर्शनियनो 40 धनुप्यनो, तेईजियनो घाणेजियनो १०० भनुप्प, रसेंपियनो १२७ धनुप थने स्पर्शेजियनो १६०० धनुष्यनो, चरिंजियनो चाइजियनो ए५४ धनुष्यनो, घ्राणेजियनो २०० धनुष्यनो, रसेंशियनो २५६ धनुष्यनो अने स्पर्शनियनो ३२०० धनुष्यनो, श्वसही प.प्रियनो श्रोत्रंभियनो। योजनना, चकुइजियनो एए० धनुष्यनो, घाणेपियनो ४०० धनुष्यनो, रसेंजियनो ५११धनु प्यनाथन स्पर्शेजियनो ६४०० धनुष्यनो, सझी प.प्रियनाश्रोत्रजियनो १५ याजननो, चकु इपियनो १ लाख योजन काळेरानो, घ्राणेजियनो ए योजननो, रसेजियनो ए योजननो, स्पझेजियनो ए योजननो ॥ १० ॥ इव थग्यारमु थनाकार (उपयोग) हार कहे , तेमा प्रथम जघन्य उपयोगकाळनो थस्पषहुस्वाासर्वथी योमो चाइजियना जघन्य उपयोगकाळ १।। तेथी आजियनो जघन्य उपयोगफाळ विशेषाधिक २ ॥ तेथी नाणेजियनो जघन्य उपयोगकाळ विशेषाधिक ३॥ तेथी रसेंपियनो जघन्य उपयोगफाळ विशेषाधिक ४ ॥ तेथी स्पर्शधियना जघन्य उप योगकाळ विशपाधिक ५॥ हवे बीजो उस्कृष्ट उपयोगकाळना अल्पबद्दुत्व ॥ सर्वयो थोमो चाइपियना उत्कृष्ट उपयोगकाळ १॥ तेषकी भोपियनो सस्कृष्ट उपयोगकाळ विशेषाधिक २॥ तेथकी माणेजियनो उत्कृष्ट उपयोगकाळ विशेपाधिक ३ ॥ तेषकी रसेंजियनो नरकृष्ट उपयोग काळ विशपाधिक ४॥ सथकी स्पर्शयिनो उस्कृष्ट उपयोगकाळ विशेषाधिक ५ ॥ हवे जघन्य उत्कृष्ट बन्नेनो उपयोगकाळनो थम्पपहुरव नेल्लू कहे सर्वची योमो चकुर्शयनो जघन्य उपयोगकाळ १ ॥ तेथी श्रोपियनो जघन्य उपयोगकाळ विशेपाधिक २॥ तेथी घाणेपियनो जघन्य उपयोगकाळ विशेषाधिक ३ ॥ तेथी सेंपियनो जघन्य उपयोगकाळ विशेषाधिक ४ ॥ तेषी स्पर्शेडियनो जघन्य उप पोगकाळ विशेषाधिक ५ ॥ सेयो चक्षुपियनो उत्कृष्ट उपयोगकाळ विशेषाधिक ६ ॥ तेपी प्रोजियनो उरष्कृप्ट उपयोगकाळ विशेषाधिक ॥ तेथी घ्राणेजियनो उत्कृष्ट उप योगकाळ विशेपाधिक ॥ तेषी रसेजियनो उत्कृष्ट उपयोगफाळ विशेषाधिक ए॥ तेषी स्पर्शजियनो उत्कृष्ट उपयोगकाळ विशपाधिक १० ॥ ११ ॥ हवे पारमु थाहारहार कहे ठे श्रोडिय थादि पांय इप्रियो अन्यथा अनंत प्रदेशी स्कधनो थाहार फरे थर्थात् प्रहण करे १॥ त्रयी असख्यात थाकाशप्रदेशने थवगाही रहेख पुद्गलने ग्रहण करे २॥ कालथी एक समययी मामी असख्यात सम यनी स्थितिवाळा पुद्गखने ग्रहण करे ३ ॥ नावथकी वर्ण गध रस अने स्पर्शवाळा पुद्गलोने थाहारपणे ग्रहण करे ४॥ १५ ॥ इति पांच इजियना घोश संपूर्ण ॥ भ पुदगल परावर्तन ।। श्वथ धो भगवती शतक १२ माना उद्देशा चोथायो पुद्गलपरावर्चनना बोख लिख्यते॥ गाथा-नाम १ गुण ५ सखा ३ काख ४, कासोषम ५ च कालथप्पाषा ६ ॥ पुग्गल मळे पुग्गल , पुग्गल कारणे थप्पाघड ७ ॥१॥ प्रथम नामछार कहे डे ॥ पुद्गल परावर्तनना ७ नाम ॥ उदारिक पुद्गल पराव न १॥ घेय पु० २ ॥ तेजम् पु० ३॥ कार्मण पु० ४ ॥ मन पुरा ५ ॥ वचन पु० ६ ॥ स्वासो पास पु० ॥१॥ वे योजु गुणधार कहे ते ॥ जे सोका जेटला पुद्गल ते ते सर्व उदारिक शरीरपणे सस्ने मुक स्यारे एक उदारिकर्नु पुद्गल परावर्जन घाय ॥ एम ७ पुगत परावर्तन जाणा ॥२॥ इवे निगें सख्याछार कह रे ॥ ते सख्याना चार घोस प्रथम योप्न एक जीव थाथि पोजो घोल घणा जीव थाभि श्रीजो घोल एक जोर माहामा थाथि चोथो वोस घणा जीव माहोमांहे थाथि ॥ हवे तेमां सख्यानो प्रथम घोल कहे ते ॥ जे एक वचने एक नारकीने जीवे पूर्व उदारिक पुद्गल परावर्तन थनती २ घार कीधा थने थागळ कोश् फरशे, कोइ नहि फरशे ॥ जे करशे ते जप १-२-३, उत् थनता करशे ॥ एम साते कयां ॥ पम यावत् वैमानिक देवने जीवे पूर्व उदारिक पुद्गल परावर्तन थनती श्वनती वार कीधा थने थागळ को करशे, कोइ नहि करशे ॥ जे करशे ते ज० १-२-३, उत्ण थनता करशे ॥ एम साते कहेवा, पम एक पचने १६० प्रश्न थाय ॥ २ ॥ हो सयानो घोजो घोल को ठे ॥ घटुवचने सर्प नारकोने जीवे पूर्ये उदारिक पुद्गल परावर्तन बनतां कोधां बने घणा नारकी थागळ धनता करशे एम यावत् सात पुद्गल परावर्तन कड़वां ॥ एम यावत् सर्व वैमा- निक देवने जीधे फी ॥ एम १६७ प्रश्न थाय ॥ एवं ५ सल्याना यश्ने ३३६ प्रश्न पाय ॥ ए सख्याना १ बोस कसा ॥ ३॥ एवे सख्यानो त्रीजो घोल कहे २ ॥ एक नारकीने जीवे नारकोपणे पूर्वे उदारिक पुद्गल परावर्जन नथी कीधा, वागळ पण नहि करे १ ॥ श्रने एक नारकीने जीवे नारकीपणे पूर्वे चक्रेय पुद्गल परावर्तन धनतां कोधां, श्रागळे कोई करशे ने कोई नहि करशे घने जे करशे ते ज०१-५-३, उत्ण अनता करशे ॥ एम यावत् श्वासोश्वास पुद्गल परावर्तन सुधी कहेतु ॥ पम यावत् एक नारकीये वैमानिक देवपणे ॥ पनी जे जे दमके जे जे पुद्गल परावर्तन होप तेनो हा कहीए चने न होय तेनी ना कहीए, एम एक नारकोनो दमक १४ दमके उतारतां १६० प्रश्न थाय, तेम २४ दमक २४ दमके उतारवा ॥ एक वचने ४०३५ प्रश्न थाय ॥ ए सख्यानो त्रीजी घोल कयो ४ ॥ हवे सख्यानो चोथो पोल को ले ॥ बहु घचने सर्व नारकीये नारफोपणे पूर्वे उदारिक पुद्गल परावर्तन नथी की थने थागळे पण नहि कर १॥ श्रने सर्व नारकीये नारफीपणे पूर्वे वैकेय पुद्गल परावर्चन थनता कोषां धन धागळ पण घणा नारकी थ नता करशे २॥ एम यावत् श्वासोश्वास सुधी कहेवू ॥ पम यावत् सर्व नारकीये पैमानिक दयपणे १६० प्रश्न थाय ॥ एम २४ दमके २४ दमक बहु वचने उतारता ४०३२ प्रश्न याय॥ एम एक वचन ने घड वचनना जेगा करता ०६४ प्रश्न पाय ॥ ए सख्याहारनो घोषयो वोल कहा ॥चारे बोलना मळीने कुस सख्या ७४00 नांगा थया ॥ हवे एनो विशेष खु खासा कहे ॥ सर्व जीवे उदारिक पुद्गल परावन १० दमके वनती वार कीर्धा ते १० दम्फ कहे ते ॥ ५ पप्रिय ॥ ३ विगोप्रिय ॥ तियेच पचेंजिय ।। मनुष्य ॥ ए १० दम कने विप कीधा ॥ वैक्रेय पुद्गल परावर्तन १७ दंगके थनती २ वार कीधां ते २७ दमक कहे ते ॥ नारफो १ ॥ दश अपनपति १०॥ वायुनो १॥ सही तिर्यच प.प्रिय प्रजातानो १॥ सझो मनुष्य प्रजातानो १ ॥ पाणव्यतर १ ॥ ज्योतिषी १ ॥ वैमानिक १ ॥ ए १७ दमकने यिपे कोधा ॥ तेजस् १ ॥ कार्मण २ ॥ श्वासोश्वास ३॥ पुद्गल परावर्चत २४ दमके धनती चनती वार कोषां ॥ मन पुद्गल परावर्चन सझी पंचेंप्रिय प्रजाताना १६ दमकने विपे अनसी थनतीवार कीधा ।। वचन पुद्गल परावर्तन ५ एप्रिय वर्जिने शेष रए दमके थनंती बनतीवार कीधां ॥ ए सख्या द्वार चार पोखे सपूर्ण ॥३॥ हवे घोधु कालकार कहे ॥ धनंतां कासचक्र मैमस वही जाय, त्यार एक उदारिक पुद्गल परावर्तन थाय ॥ पम ७ पुद्गस परावर्तन जाणवां ॥ ४ ॥ हने पाचk कासनी उपमार्नु छार कदे ले ॥ थनत सूक्ष्म परमाणुए एक व्यवहार परमाणु नीपज १ ॥ श्रनत व्यवहार परमाणुए एक उसनसनियो नीपजे ॥ श्राव उसनसनिये एफ सन्दसनीयो नीपजे ३॥ श्राप सन्इ- सनिये एक उईरेणु नीपजे ४॥ था उईरेसुए एक त्रसरेणु नीपजे ५॥ पाठ प्रसरेणुए एक रघरेणु नीपजे ६ ॥थात रयरेणुए एक देवकुरु उत्तरकुरु केचना मनुष्यनो पाखाम नोपजे ७॥ थाव वाला एक इरिवास रम्यक्षास क्षेत्रना मनुष्यनो वाखाम नीपजे ॥ था वाखाये हेमवय एरणवय क्षेत्रना मनुष्यनो वाजाम नोपजे ए ॥ थाउ वाखाग्रे पूर्व पश्चिम महाविदेहना मनुष्यनो वालाग्र नीपजे १०॥ ७ वाला १ लिख नीपजे । तेवी खोख १ जु नीपजे ॥ ७ जुए १ जप मध्य नाग नीपजे ॥ ७ जव मध्य नागे १ उच्छित थयुस निपजे ॥ ६ मच्छित थासे १ पगर्नु पहाळपणु निपजे ॥घे पगे १ विहस्य निपजे ॥ चे विड्रये एक हाथ निपजे ॥ घे हाथे एक कुकि निपजे ॥ घे कुदिए । धनुप निपजे ॥ बे हजार धनुपे १ गाल (नपजे ॥ चार गाउए १ जोजन निपजे ॥ सेवो १ जोजन प्रमाण खायो पहोळो उमो कुवो फरूपीए, पनी १ वासामना असभ्याता खंग फल्पीने करीए, सेपे वाखाने कुयो वासी सीने जरीए ॥ पड़ी ते उपर चक्रवर्यादिकर्नु फटक पाल्यु जाय, तोपण ते वाखाम नमे नहि तया गगा नदीनो प्रवाह उपरथो चाले । तो पफ रज पण तणाय नहि तथा थग्निने दुवे पण न बळे ॥ एषो कुवो वोसीने परीए । पठी ते कुवामाथी सा सो व एक एक वालाय कारोए ॥ ते वर्षनु खक्षण तथा मान कहे । ॥जे थसख्याता समय पछि जाय त्यारे १ थावधिका थाय ॥ सख्याति श्रावलिकाये १ चश्वास याय ॥ तेम सख्याति श्रावसिकाए १ नि श्वास चाय ॥१ उश्वास १ नि श्वास नेगा पश्ने एक प्राण पाय ॥ सात प्राणे १'स्तोक घाय ॥ सात स्तोके १ लव पाय ॥
9 वे एक मुहूर्त थाय ॥ ३१७३ श्वासोश्वासे १ मुहूर्च याय ॥ ३० मुहूचें ? अहोरात्र याय ॥ १५ अहोरात्रे १ पक्ष थाय ॥ घे पढे १ मास थाय ॥ ये मासे १ अतु थाय ॥ प्रतुए १ वर्ष थाय ॥ पांच वर्षे १ जुग याय ॥ वीस जुगे १०० वर्ष थाय ॥ एवा सो सो वर्षे कुवामाथी एकेक वाळ कारीए ॥ एम काढतां फावतां ज्यारे कुवो खाखो थाय त्यारे १ पथ्योपम पाय ॥ पवा १० कोमाकोसी पख्योपमे १ सागरोपम थाय ॥वीस कोकाकोमी सागरोपमे १ कालचक्र थाय ॥ एवा श्वनतां कालचके १ उदारिक पुद्गल परावर्तन थाय ॥ ए काखनी उपमानु हार क॥५॥ वे ब्लु कासना अपवहुत्लनु फार काहे डे ॥ एषा थनत कालचक्र वहीं जाय स्यारे १ कार्मण पुद्गल परावर्त्तन थाय १॥ शनां कर्मण पुद्गल परावर्तन वही जाय, त्यारे १ तेजस् पुद्गल परावर्त्तन थाय २॥ पर्वा धनता सेजस् पुद्गल परावर्त्तन यहि जाय, स्यारे १ उदारिक पुद्गल परावर्तन घाय ३॥ एथनता उदारिक पुद्गव परावर्चन बहो जाय,त्यारे १ श्वासोश्वास पुद्गल परावर्त न पाय ४ ॥ एवा बनतां श्वासोश्वास पुद्गल परावर्जन वही जाय, त्यारे १ मन पुद्गल १ परावर्चन याय ॥ ५॥ पषा अनता मन पुद्गल परापर्जन वही जाय, त्यारे १ वचन पुन गल परावर्तन याय ६ ॥ एवा थनता वचन पुद्गल परावर्जन वही जाय, त्यारे १ वैफेय पुद्गल परावर्चन पाय ७॥ ६ ॥ इवे सातमु पुद्गल मध्ये पुद्गलनु धार कहे ते ॥ एक फार्मण पुद्गल परावर्चनमाहि धनता कालचक्र वहो जाय १ ॥ एफ तेजस् पुद्गल परावर्तनमांहि श्रनता कार्मण पुद्गल परावर्तन षही जाय॥ एक उदारिक पुद्गल पराव नमाहि थनता सजस् पुद्गल परावर्तन वही जाय ३ ॥ एक श्वासोश्वास पुद्गल परा वर्तनमाहि श्रनता उदारिक पुद्गल परावर्त्तन वही जाय ४ ॥ एक मन पुद्गल पराव “नमांहि थनतां श्वासोश्वास पुद्गल परावर्जन वही जाय ५ ॥ एक वचन पुद्गल परा वर्त्तनमांहि थनंतां मन पुद्गल परावर्तन वही जाय ६॥ एक वैफ्रेय पुद्गल परावर्चनमा छि धनसां पचन पुद्गल परावर्त्तन वही जाय ॥ ७ ॥ हवे थाउमुथम्पवहुवहार कहे ठे॥ सर्वयो योमा जीवे वैकेय पुद्गल परावर्चन कीर्धा १ ॥ तेथी थनसगुणा अधिक जीवे वचन पुगस परावर्तन की २॥ तेथी अनतगुणा अधिक जीवे मन पुद्गल परापन कीधा ३ ॥ तेथी अनतगुणा अधिक जीधे श्वासोश्वास पुद्गल परावर्चन कीर्धा ४॥ तेथी अनतगुणा अधिक जीवे उदारिक पुद्गल परावर्चन कीर्धा ५॥ तेयो धनतगुणा यधिक जीवे तेजस् पुद्गल परावर्तन कीधा ६ ॥ तेथी अनसगुणा अधिक जोवे कार्मण पुद्गल परावर्तन कीधा ७ ॥ ७ ॥ ५ ७ पुद्गल परावर्चननो विचार जापाने समकित सहित जिनाझा प्रमाण फरीने, झान दर्शन चारित्र तपनी धाराधना करीए, जेषो पुद् गह परावर्चन न करवा पसे। इति पुद्गल परापनना योख सपूर्ण ॥ पाच ज्ञानना बाल।। अथ श्री नदीसूत्रथी ५ ज्ञानना घोष खिख्यते ॥ प्रथम ज्ञान १ झेप २, ज्ञानी ३ ए ३ पोर्नु जाणुपणु करखु ॥ जेणे करी वस्तु जापीये ते ज्ञान १ ॥झय ते जाणवायोग्य वस्तु २ ॥ ज्ञानी ते जाणनार पुरुष ३ ॥ ज्ञानना ५ लेद ॥ मतिझान १॥ श्रुतझान ३॥ थपधिज्ञान ३ ॥ मन पर्यव ज्ञान ४ ॥ केवल ज्ञान ५॥ सम्यक्ष्टिनु मतिझान ॥ मिष्या रटिनुमति थझान ॥ सम्यक्दृष्टिनु श्रुत ते श्रुतझान ।। मिथ्या प्टिर्नु श्रुत ते श्रुत थकान मतिझान ने भुतझान ए २ ज्ञान माहोमांहि खीरनीरनो पेरे मळी रया ठे, जीव यत्यतर शरीरनी पेठे ॥ हवे शहां घे ज्ञानने विपे याचार्य विशेप कठे वे ॥ मतिये करी जाणे ते मतिज्ञान ॥ श्रुते करी जाणे ते श्रुतझान ॥ मतिझान वर्तमानकास माही , ने श्रुतहान त्रिकाळ पाही ठे, तेथी मति श्रुत ज्ञान ये जूदो कहां ठे ॥ मतिज्ञानना २ नेद ॥ श्रुतनिश्रित १॥ थभुत निश्रित २॥ श्वश्रुत निश्रितना ४ जेद ॥ श्रोस्पातिकी १॥धनपिकी२॥ कार्मिको३॥ पारिणामिकी ॥ तेमा थोत्पातिकी बुझि ते पण सानळी थयधारी तत्काळ युधि उपज ते १॥ नयिकों बुद्धि ते गुरुनो विनय करवाथो शाखना थर्घनो फेवायो पाय ते २ ॥ फार्मिको बुद्धि ते जोतां अवतां चितरता लणतां गणतां अनेक प्रकारे कमा प्रमुख थपास करतो थच्यासमा थरयत कुशम याय ते ३ ॥ पारि पामिको बुद्धि से जेम जेम वय परिणमे तेम तेम बहुश्रुत थाय ४ ॥ श्रुतनिश्रितना । नेद ॥ थवग्रह १ ॥ इहा ॥ बवाय ३॥ थने धारणा ४ ॥ तेमां अवग्रह त निर्देश न पर शके तेवो रीसे पदार्थना सामान्य श्वशनु प्रण करवु ते १ ॥ गृहोत अर्यनी पयोखो चना करयो ते श्हा २ ॥थवरहित बने इहित थर्थनो निश्चय करवो ते श्ववाय ॥ जेमके था घाळक ठे ॥ था गाय ले इस्यादि ३ ॥ निश्चित थर्थने धारी राखयो ते धारणा ४॥ श्वग्रहना पे नेद ॥ व्यजनावग्रह १॥ थने थर्थावग्रह ५॥ पदार्थनो प्रथम समये थ व्यक्त सवधरूप बोध थाय ते व्यंजनावग्रह १ ॥ अने व्यक्त सबधरूप षोध थाप ते अर्याव पद २॥ व्यजनावग्रह थांख चने मन सिवाय घोजी चार इजियोथथाय ठे, त्यारे - पिनह गए इजियपी चाय ठे ॥ व्यजनावमह त शन्दादि रूप परिणत अव्यनो उपकर ऐंजिययी श्रयग्रह परिच्छेद अथात् अव्यक्त वोध थाय त अथवा दीवे करी पदाथ प्रगट फरीये तेम उपकरणे प्रिये करी पोताने सबधे रमा पदार्थ शब्दादिनु मखु थव्यक्तरूपे परिच्छेद ते व्यजनामह, चाइजिय ने मन विना शेष चार इजियनो थाय ने॥ चतुथने मनने थप्राप्तकारिपागु के, तेथी थर्थावग्रह सर्व इप्रियोनो पाय ते ॥ अवग्रह १ समय ।। शहा थषाय थतर्मुहूर्त ॥ धारणा सख्याता असख्याता कासनी ॥ व्यजनावग्रह ४ प्रकारे ते रहे ॥श्रोफिय व्यजनावग्रह ते श्रापिये शब्दना पुद्गल प्रहीने शब्द सांचळयो एबु यावत् स्पर्शप्रिय व्यजनापमह ते स्पर्शप्रिये फरी खरखरादिक स्पर्शना पुद्गलनो अर्थ समुच्चय प्रहयो ४॥ हवे थर्धावग्रहना उ प्रकार ते कहे ॥श्रोग्रेजिय वर्षावग्रह ते श्रोत्रं जिये करी शब्दना समुच्चय थर्थनो परमार्थ ग्रहे एव यावत् नोजिय (मन) नी विषा रणादिफना समुच्चय थर्थना परमार्थनुं ग्रहनु ॥ हवे व्यजनावग्रह समजवाने ५ दृष्ठात फदे ठे ॥ जगामता पुरुपने दृष्टाते ॥जेम का पुरुष सुतो ठे तेने कोई जगामे, अमुक एम पोसावे, असख्यात समये पुद्गख स्पर्श, उपयोग वत्तें, ९ इति घोले, ए प्रतियोधकनु दृष्टांत २॥ योनु सरावसानु ते सरावखामा कोइ एक बिंदु नखि एम विंदु नाखतां नाखता ठेव सुधी नरे ने पाणी ठप्सी जाय, तेम कानमा पुद्गल पुरां जराय, त्यारे त सुतो पुरुष हुकारो करे पण नदि के केनो शब्द ते २॥ एघे दृष्टांत कर्या ॥ एकदर मतिज्ञानना २७ द थया ने नेद व्यजनावग्रहना, नेद थर्थावग्रहना, नेद इहाना, ६ नेद श्रषायना अनेनेद धा रणाना, एष २७ ॥षे मतिज्ञान सक्षिप्त ४ प्रकारे ॥ तेमा व्यथी मतिद्वानी सामान्य प्रकारे सर्व ऽव्यने जाणे ने दखे एव क्षेत्र काखन्नावथी पण जाणवु ॥ शब्द स्पश्यों सांच ॥जापानां पुद्गलो समश्रणीए होय ॥ पोतानो पासेनी श्रेणिमा रहेख घीजा पुद्गखोने ना पापणे परिणमावर्ता जाय॥ ते पन्ने मिप्रित पुद्गलोने सांगळे पण एकखां मुखगां पुद्गलोने न सांगळे ॥ए मतिज्ञान परोक्ष २० नेदे करो कम्म १ ॥ इवे भुतज्ञान परोक्ष कहे ॥ श्रुतझानना १४ नेद ॥ श्रदरभुत १ ॥ थनकरश्रुत ॥ सझीश्रुत ३ ॥ असझीश्रुत ॥ सम्यक् त ५॥ मिप्याश्रुत ६ ॥ सादिभुत ७ ॥ अनादिश्रुत ७॥ सपर्यवसितश्नुत ए॥ थपर्यवसितश्रुत १० ॥ गमिकश्रुत ११ ॥ थगमिकश्रुत १५ ॥ अंगप्रविष्टश्रुत १३ ॥ थगपादिश्रुत १३ ॥ हवे अक्षरश्रुतना ३ नेद ॥ सज्ञादर ॥ व्यजनादर २॥ स्वयकर ३ ॥ तमां थकारादि वर्णात्मक थकरना सगणनो थाकार ते सझाकर ते वाहयादि खिपिना नेदयी अनेक प्रकारनु १ ॥ व्यजनाकर ते व्यजन (शहर) थका रादि हस्व दीर्घ प्रमुखनु उचाखु २ ॥ सध्यदर ते थकारादि शकरोनु जाणपणुं सझी जोवान उपजे त ५ प्रकारनु श्रोत्रप्रिय सम्यकर यावत् नोजिय (मन) सन्न्य क्षर ॥ ५ तेमां श्रोत्रंजिय सन्ध्यक्षर ते काने शब्द सानळीने कहे जे ए नेरि प्रमुखनो शब्द उ, त वार तेने नेरी प्रमुख ए श्रदरना छाननी प्राप्ति थ ॥ एवं नोजिय लध्यक्षर तेमन विचारता सनिळ्यु जे फलाणु ने एथकरचें ज्ञान थयु ते ३ ॥१॥ वे थनदार श्रुतना अनेक जद ॥ श्रदरना उच्चार विना शब्द बोले ते ॥ उच्छास नि श्वास फरवा, थुकवु, खुखारो करवो, ठिकवु विगेरे ५॥ सझीश्रुतना ३ नेद ॥ कालिकोपदेश १॥ हेतूपदेश ५ ॥ दष्टिवादोपदश ३ ॥ सही से जेने हा थपोहा यावत् विमसा होय, ते सझी ॥ जेने ए नहि, ते असही ॥ कालिकोपदेश ते घणा कालनो सज्ञा ते कालिको तेनो ते उपदेश, जेम चछुवाळो दीवायमे करी स्फूट थर्थने जाणे तेम ए पंण,मनोख ब्धिये सपन मनोऽव्यना श्ववष्र्टननथी उपन्या विचारे, पूर्वापर अनुसंधान करी याच स्थित स्फुट बर्यने जाणे १॥ हेतूपदेश सज्ञा ते युक्तायुक्त विचारपूर्वक इष्ट प्रति अनिष्ट निश्त्ति करथी ते॥ तेवी सझावाळा जोव हेतूपदेश सझाए करी सझो कहेपाय २॥ दृष्टि घादोपदेश सझी ते ज्ञान सहित समकितदृष्टि जीव सूचना क्षयोपशमे करी युक्तायुक्त जाणे ते ३ ॥ यसझी श्रुत ते नावार्थरहित विचारशून्य उपयोगशून्य पूर्वापर वालोचन रहित जण जणावे इत्यादिक ५॥ सम्यक् श्रुत ते थरिहत देव केवखानी केवखदर्शनी दवाधिदेव १२ गुणे करी युक्त, १७ दोपरहिस, धनत गुणे करी सहित, देवाधिदेवना प्ररू प्या थर्थ तथा गणधरे पाठ गुप्या जांख्या १४-२३-१२--११-१० पूर्वधारिनु ररुयु ते सम- श्रुत कहीये ने तेथी उणा पूर्वसुधीना रच्या ते समश्रुत होय ने मिथ्याश्रुत पथ होय ५॥ मिप्याभुत ते जे घझानी मिथ्याटिए स्वसदबुकिए करी रच्या भारत रामायण यावत् ४ वेद अंगोपांग सहित ते मिभ्याटिने मिप्यास्वपणे ग्रया मिथ्यात्व श्रुत ॥ स म्यक् दृष्टिने सम्यक्त्वपणे प्रझा समथुत अथवा मिष्याटिने ए सम्यक्त्व श्रुत होय शामार के सम्यम्वना हेतुपणाथो मिग्या दृष्टि पोतानां शास्त्र विचारता फेटखाक ख पक्षटष्टिने त्यजे ते ६ ॥ सादि १ ॥ सपर्यवसिन २॥ श्रने थानादि ३ ॥थ पर्यवसित ॥ . BEIR ते था १२ थंग पर्यायास्तिक नयनी थपेक्षाये सादि १ सपर्यवसित २ ॥ ने व्या स्तिक नपनी थपेक्षाये थनादि । थपर्यवसित २ ॥ ते सक्षेपथी दे ॥ व्यय १॥ क्षेत्रषी २॥ फासथी ३॥ नायथी ४ ॥ व्यथी सम्यक् श्रुत एक जीप थाभि सादि, सपर्यवसित थने घणा जीप थाधी थनादि, थपर्यवसित ।। क्षेत्रथी पांच जरत थने पांच रयत थाथि सादि सपर्यवसित, पच महाघिदेद थाश्रिने अनादि थपर्य पसित ॥ फासयी वसर्पिणी उरतर्पिणीने थाभिने सादि १ सपर्यवसित २ ॥ नो यवसर्पिणी नोटरसार्पिणीने थाभिने थनादि १ थपर्यषसित २ ॥ नावषी जे जेवारे जिन प्ररप्या नाव कसा प्ररुप्या तेषारे ते नावने थाश्रिने सादि १ सपर्यवसित २ ॥ क्षयोपसम नावन यात्रिने थनादि १ थपर्यवसित २॥ अथवा नव्य सिलिकनु श्रुत सादि १ सपर्यवसित २॥ थानव्य सिजिफनु श्रुत थनादि । थपर्यवसित २ ॥ त्रीजे पोये नागे श्रुतनो थनादि नाय कहो, ते जघन्य ने मप्यमयी जागषो ॥तेनु मान सर्वा- फाश मोकाकाश तेना प्रदेश तेने थनतयार गुणोये ॥ एक थाकाश प्रदेशे धनता गुरु लघु पर्यायना जावधी पर्याय थदार निपजे ते केवल ज्ञान सेनो घनतमो भाग सदा जीवने उघामो वे ॥ जा ते श्रापरे तो जीव यजीवपणाने पामे ॥ जेम गाढ मेघनो समु- दाय उते पण पण सूर्यनी तमाम प्रजानो नाश न होय, तेम ए न्याये जीवनो पण हा नन्नाव जाणवो ॥ प रीते मतिश्रुतनो श्रनादिनाष थगीकार करो --ए-२०॥ हवे गमिकश्रुत ते जेमा सरखा गमा ठे ते दृष्टिवाद श्रुत ११ ॥ श्रगमिक श्रुत ते जेमा सर खा गमा थलावा नही तेषा याचारांगादि श्रुत १२ ॥ थगप्रविष्ट श्रुत ते १२ अग गण धरकृत मूल भूत १३ ॥ शेष जे श्रुत ते थनियमयी थनंग प्रविष्ट कहेवाय डे ॥शनग प्रविष्ट (थग वास) तेना ये भेद ॥ यावश्यक १ ॥ यावश्यक व्यतिरिक्त ॥ श्रावश्यक ते सामायकादि उ थध्ययन ॥ थावश्यक व्यतिरिकना श्लेद ॥ कालिक १॥उत्कालिक २॥कालिक उत्कालिकनो विस्तार सिहांत प्रमाणना पोखथी जाणी खेवो २४ ॥ यावत् ११ श्रग गणिपिटक बनता जीवो थाज्ञाए विराधीने बनते काशे पूर्वे ४ गति सप्तारमा जम्या ॥ वर्तमानकाचे सख्याता जीव विराधोने जमे ॥ चविष्य काले अनंता जोव विराधीने जमशे ॥ एमज ए १२ थंग थाझाये श्वाराधीने पूर्व काले धनता जीवो तर्या ॥ वर्चमान काले थाराधीने तरे ॥ नविष्य काले धाराधीने तरशे ॥ ते श्रुत ज्ञाननी स्थिति दे ॥ व्यथा १॥ क्षेत्रथी ॥कालथी ३ ॥जापथी ४॥ अन्यथा श्रुतज्ञानी उपयुक्त को सर्व व्यने जाणे देखे, एवं क्षेत्रथी १ ॥ कालधी २॥नाषयी ३ ॥ पण जाणी खेत् ॥ सूत्र ज्ञानी धनतां अव्यने जाणे देखे, ते मेरु श्रादि थदृष्ट पदार्थने पण शिष्यने थर्थे थालेखीने (चितरीने) देखामे तेनाधी, ते श्रोताने ए बुझि थाय के ए भगवान् श्वाचार्य साक्षात् देखषानी परे कहे ठे ॥ एम क्षेत्रा दिने विपे पण जाणतु ॥ इति परोक्ष श्रुत ज्ञान सिमाप्त २ ॥ प्रत्यक्ष ज्ञानना २ नेद ॥ इप्रिय प्रत्यक ते प्रोग्रेजिय यावत् स्पर्शेजिय प्रत्यक्ष १॥ नोईजिय प्रत्यदाना ३ नेद ॥ अवधिज्ञान प्रत्यक्ष १ ॥ मन पर्यवज्ञान प्रत्यक्ष २॥ केवलज्ञान प्रत्यक्ष ३ ॥ श्रयधिज्ञान प्रत्यक्षमा १ नेद॥ नव प्रत्ययिक १ ॥ क्षायोपशमिक ॥जवप्रत्ययिक देवता नारकी घेने होय ॥दायोपशमिक सझी तियेच पञ्जिय मनुष्यने होय, तेना हेतु ए वे के तदावरणीय फर्म उदय था ।
व्याना क्षये करीने; थनुदय थान्याना उपशमे करी, थवधिज्ञान उत्पन्न पाय अथवा चप्रमादी गुणवत साधुने अवधिहान उत्पन्न याय ते सकेपथो र प्रकारे कम ॥था नुगामिक १ ॥ थनानुगामिक २॥ वर्षमान ३ ॥ छायमान ४ ॥ पमिवाइ ५॥ अपमि वाश्६॥ तेमा थानुगामिक ते ज्या जाय त्यो साये थावे तेना १ नेद ॥ थत गत १॥ मम्यगत ५॥ तेमां थत गत ते थारमाना पर्यंत वर्ति प्रदेशे रमु तथा उदारिक शरीरने थते ॥शतःगतना ३ जेद ॥ पुरतो तागत १ ॥ मार्गतो श्रतःगत १ ॥ पार्श्वतो यंतागत ३ ॥ तेमा पुरतो तागत से जेम को पुरुष वळतो पुळो, बळसी दीवी, एळतु ग्वामीयु, घळतु ज्योतिर्नु नाजन,मणोररन प्रमुख एटलांवानां खस्ने थागळ करीने चासे तेनी धागळ प्रकाश थाय थने पाबळ घेउ पासेयधारु थाय तेम पुरतो थत गत अवधिज्ञाननु एq थावरण कयोपशम थयु के जेणे करी वागमु केत्र देखे, पण पुठे बेट पासे न देखे ए पुरतो यंतगत १॥मग्गयो (मार्गतो)थतम्गत ते ए पूर्वोक उ बोलने पर पाबले करी चाखे तेने थागधे घेठ पासें धंधारु ॥पानसे थजवा थाय, तेम मगधो अंतागत शवधिज्ञाननु
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जाणवा १ ॥ चणाणुगामिक ते जेम कोइक पुरुषे तापणी करी होय, दीयो करी मुक्यो होय, तेनी समीपे श्वासपास क्षेत्र देखे, पण वाघो जाय त्यारे देखे नहि, तेम ज्या वषधि उपजे ते ज क्षेत्रे रसो थको जाणे देखे, पण थाघो जाय त्यारे देखे नहि ॥३॥ हवे वर्ड मान ते प्रशस्त अध्यवसायना स्थानके करी वन्यु डे चारित्र जेने तथा विशुप्यमान चारिम जेने एषा शणगारने सर्वथी सर्व दिशे अवधिशान वधे ॥ जेटला नि समयाहारक सूक्ष्म निगोदना शरीरनी अवगाहना तेटम्मु जघन्य केत्र जाणे देखे, उत् थमिकायना जीव थजितनाथने वारे घणा होय, ते अमिकायना जीव एकेक था काश प्रदेशे एकेको मुकीये एम थांतरा रहित मुकता मुकता असंख्यात लोक नराय अखोकमां लोक जेवमा असंख्याता खांमुथा प्रमाणे क्षेत्र देखवानी शक्ति प्रगटे, पटक्षी अवधिकाननी समर्थाइ होय, पटसुं क्षेत्र जाणे देखे ॥ इवे क्षेत्र ने कालथी देखवं कदे ॥जे क्षेप्रयी थगुलना असल्यातमा जाग जाणे देखे, ते कारथी श्रावखिकाना अस ख्यातमा नागना कासनीथागली पावसी वात जाणे देखे॥जेश्ववधिज्ञानी क्षेत्रथी थगुलनो सम्पातमो जाग जाये देखे, ते कालथी थावसिकाना सख्यातमा जागनी वात जाणे देखे ।। जे थवधिज्ञानी क्षेत्रथी अगुप्त प्रमाणे जाणे दखें, त कालथी श्वावलिकानो मारी वात जाणे देखे ।। जे थवधिज्ञानी प्रत्यक अगुप्त क्षेत्र जाणे देखे, से काखथी थावलिका पुरीनी थागसी पाठली घात जाणे देखे ॥ जे शवधिज्ञानी केवथी हाथ प्रमाणे दोन जाणे देखे, ते कालथी धंतर्मुहर्च प्रमाणे कासनी थागती पानक्षी वात जाणे देखे ॥ जे थवधिज्ञानी क्षेत्रयो गाउक्षेत्रने जाणे देखे, ते कालथी एक दिवस माठेरानी वात जाणे देखे ॥ जे अवधिशानी क्षेत्रथी जोजन प्रमाणे देव जाणे देखे, ते कालथी प्रत्येक दिवसनी वात जाणे देखे ॥ जे शवधिज्ञानी क्षेत्रयी २५ जोजन जाणे देखे, ते काखथी पर मारानी वात जाणे देखे ॥ जे शवधिज्ञानी के प्रथी जरतक्षेप जाये देखे, ते कालथी पक प्रानी वाप्त जाणे देखे ॥ जे शवधिज्ञानी दोपथी जछीप जाणे देखे, ते कालपी मास काफेरानी वात जाणे देखे ॥ जे अवधि झानी देनथी यढीछोपने जाणे देखे, ते फालयी वर्षनो पात जाणे देखे ॥जे अवधिज्ञानी प्रिथी १५ मा रुषकहीपने जाणे देखे, ते काखथी प्रत्येक वर्षनी वात जाणे देखे ॥ जे श्ववधिज्ञानी देषी नाना सहयाता जोजनना हीपने जाणे देखे, ते कालथी सख्याता का खनी वास जाणे देखे ॥ जे शवधिज्ञानी क्षेत्रथा असख्याता छीपने जाणे देखे,ते काखथी थसख्याता कासनी वात जाणे देखे ॥ एम उईलोक अधोलोक त्रिगे लोक ए प्रण बोके षधां वधता असख्याताप्लाक प्रमाणे जाणे देखे। पटरी समर्थाश्प्रगटे से वर्कमान च वधिज्ञान ५ प्रकारे ते अव्यथी १ ॥ केवथी ५ ॥ कालथी ३ ॥ नावयो ४॥किती रीत कढे ॥ ज्यारे कासधी जाणवानी कि होय, त्यारे अव्ययी, देनाथी, भाषयी, जाणवानी वृद्धि होय २॥ ज्यारे क्षेत्रथी जाणवानी कि छाय, स्यारे का सथी जाणवानी नजना होय, न उव्य भावथी जाणवानी नियमा वृद्धि होय, २ ॥ ज्यारे अन्यथी जाणवानी वृद्धि होय, त्यारे देवथी काखयो जाणवानीनजना होय, थने नावनो कृषि होय ३ ॥ ज्यारे जावधी जाणवानी वृद्धि होय, त्यारे ऽव्य क्षेत्र कालथ) जाणधानी नजना होय ४ ॥ सर्वथ) काल सूक्ष्म डे ॥ थांख मिचो उघामोये तेमां 12 थसमपाता समय थाय, ते माहिलो एफ समय ले माट १॥ तेथी क्षेत्र असख्यातगणु सूपम , केमके एक थगुल प्रमाणे क्षेत्र सश्ये, तेमा थसख्याती श्रेणी मे, तेमाथी एक श्रेणी खश्ये ॥ ते श्रेणी अग्रस प्रमाणे साषी ने एक थाकाश प्रदेश प्रमाणे पहोळी तेमाथी समय २ एकेक प्रदेश छतां ५ थसख्याता कालचक्रना समय वही जाय, तोपण त खूटे नहि एवो कालथी क्षेत्र सूदम ले १ ॥ तेथी प्रव्य बनतगणु सूक्ष्म , कमके पक श्रगुप्त प्रमाणे श्रेणी पश्ये, तेमां श्वसख्यात श्रेणीयो के, त मांदखी एक श्रेणी एक थगुल प्रमाणे खांयी एक थाफाश प्रदेश प्रमाणे पदोळी, तेमा थसख्याता थाकाश प्रदेश ठे ॥ एकेक प्रदेशे बनता २ परमाणु प्र०प ठे॥श्वनतहीपप्रदेशो स्कध पर्वा ऽव्य बनता ते ते समये १ एकैको अव्य झरता थनता कालचक्रना समय वही जाय, तोपण खूटे नहि, एटसा एक प्रदेश उपर अन्य ठे, एम सर्व प्रदेश उपर ठे, एतु केत्रयी प्रव्य सूक्ष्म डे |३॥ पुत्पथी नाच अनतगुणो सूक्ष्म , केके एक थगुख प्रमाणे क्षेत्र खरए, तेमा धर्स म्स्यासी श्रेणीयो ठे, तेमायो एक श्रेयो खश्ये, ते श्रेणो एक अन प्रमाणे सांपोने एफ प्रदेशनी पहोळी, तेमा असख्याता प्रदेश २ ॥ एकेक प्रदेशमा धनता परमाणु प्रमुख अन्य ठे ॥ एकेक अन्यमा थनता पर्यव उ ॥ जेमके एक परमाणुमा, १ वर्ण ॥१ गघ ॥ १ रस॥२ स्पर्श ॥ एक वर्षमा एक गुण कालो, यावत् श्चनत गुण कालो, ए ५ घोलना थनता नेद फद्देवा, एम रिप्रदेशी स्कधर्मा, घे वर्ण, चे गध, वे रस, चार स्पर्श, ए दश जातिना अनता नेद ॥ एक विदेशी स्कधा, त्रण वर्ण, बे गध, प्रण रस, चार स्पर्श, ए घार जातिना घनता नेद ठे।। एम सर्व अव्यना पर्यव कहेवा, ते पर्याय समय समय एकेको थपहरतां अनता कालचक्रना समय वही जाय, त्यारे एक परमाणुना पर्यव थाय ॥ एम किप्रदेशी स्कंधना थनता पर्यव ॥ एम बनतानत प्रदेशी स्कधना थनत पर्यव ने ॥ एम एक प्रदेश सषधी अनता अन्यना थनतानत नेद पर्यव ॥ एम सपूर्ण खोकना अनता पर्यव ले माटे अव्यथी पर्याय (नाव) थनतगुणो सूक्ष्म ४ ॥ हवे ४ ने उपमा दक्ष यतावे ॥ काखने चणानी ? ॥ केप्रने जुपारनी २ ॥ अन्यने तसनी ३ ॥ नापने स्वसखसनी उपमा ४ ॥ ए ५ उपमाए करी समजदु ३॥ हायमान त थप्रशस्त-माता श्रभ्यवसाये करी, श्वशुन जोगे करी, शशुन खेश्याए फरी, यशुन ध्याने करी, अवधिज्ञानना पर्यष वीणा पमे तेनु थावरण थाय ॥ जेम पधतु हतु तेम घटतु जाय ४ ॥ पमिवार शवधिज्ञान ते जघन्य अगुलना थसख्यातमा भागनु क्षेत्र देखीन पनि जाय, एम सख्यातमो नाग, वासान, प्रत्येक वालाम ॥ लीख, प्रत्येक सीख ॥ जु, प्रत्यक जु॥ जत्रमध्य, प्रत्येक जवमध्य ॥ अगुप्त,प्रत्येक अगुख ॥ पग, प्रत्येक पग ॥ वेत, प्रत्येक घेत॥ हाय, प्रत्येक हाथ ॥ कुक्षि, प्रत्येक कुकि ।। धनुष, प्रत्येक धनुप ॥ गाल, प्रत्येक गाउ ।। जोजन, प्रत्येक जोजन ॥ लाख, प्रत्येक लाख ॥ क्रोम, प्रत्येक कोम ॥ सो क्रोम, प्रत्येक सो कोम ॥ हजार क्रोम, प्रत्येक हजार कोम ॥ साख क्रोम, प्रत्येक सास्व काम ॥ क्रोमामोड, प्रत्येक कोडाकोम ॥ एम यावत् सख्यात क्रोमाकोस, थसण्यात कोमाकोम, जाजन प्रमाणे क्षेत्र देवीने पमोजाय, उ० लोकने देखीने पमी जाय। जे पमे ते जेम दीवो करी मुक ते दीवो पवनने जागे करी बोलवाइ जाय, तेम पमिवार थवधिदान यान्यु जाय ५॥ थपमिया थवधिज्ञान ते जे असोकना एक पण थाकाश प्रदेशने देखे, ते थपमिवाश् एतु ज्ञान तीर्थकरने जन्मथी होय ६ ॥ हवे अवधिज्ञानी केटमु जाणे से कहे ते ॥ पहेखी नरकना नारकी जण सामात्रण गाउ, उ० ४ गाउ देखे॥ घोजीना ज०३ गाउ, उ सामानण गाउ देखे ॥ एम एकेक नरके जप उन्मांथी अधों. अर्ध जोजन घटामा सासमी नरकना नारकी ज० श्चर्ड गाउ, उप १ गाउ देखे ।। असुर कुमार जण ५५ जोजन देखे, उ० असख्याता छीपसमुख देखे ॥ नवनिकायना देव तथा व्यतर ज० २५ जोजन देखे, उप सख्याता द्वीपसमुप देखे ॥ज्योतिषी जग जा सख्याप्ता द्वीपसमुा देखे ॥ पहेखा वीजा देवखोकना देवता उचु पोताना विमाननी ध्वजा लगी देखे ॥ नीचे रत्नप्रजानो देखो चरिमोत जाणे देखे ॥ त्रिलु ज० अगुप्षनो सख्यातमो जाग जाणे देखे, उ० श्थसख्याता छीपसमुफ जाणे देखे ॥ त्रीजाथी मामी अनुत्तर विमा नना देव सुधी, उचु पोतपोताना विमाननी प्वजा सुधी देखे ॥ त्रीबु ज० श्रगुप्तनो यस स्पातमो नाग, v असख्यात छीपसमुफ जाणे देखे ॥ नीचु देखे तो त्रीजा चोषा दे वखोकना देवता धीजी नरफना देठसा चरिमांत सुधी जाणे देखे ॥ पांचमा उठा देव लोकना देवता श्रीजी नरकना देवसा चरिमात सुधी॥ सातमा घाउमा देवखोकना देवता चोषी नरफना देवता चरिमात सुधी ॥ ए-२०-२१-२१ ५ ४ देवलोकना देवता पांचमी नरकना देवखा चरिमांत सुधी ॥ पहेखीथी बनी वेयक सुधीना देवता उनी नरकना हेरखा चरिमांत सुधी ॥ सातमी मेवेयकथी मामी नवमा प्रवेयक सुधीना देवता सातमी नरकना विखा परिमांत सुधी ॥ पाप थनुत्तर विमानना देव काश्क उणो लोक देखे ॥ सझी तियेच पचेंजिय जथालनो असख्यातमो नाग, उथसख्याता छीपसमुफ देखे ॥ सझी मनुष्य पचेंछिय जप अगुखनो असख्यातमो नाग, म थलोकमध्ये लोक जेवमा यसस्याता खांद्या जाणे देखे ॥ भवधिज्ञाननु सगण (देखषानो थाकार) कहे रे ॥ नारकी प्रापाने चाकारे देखे ॥ जवनपति पाखाने श्राकारे ॥ व्यतर पमहने थाकारे ।। ज्यातिषी साखरने थाफारे ॥धार देवलोकना देव उईमुख मृदगने थाफारे ॥ नव ग्रेधेयक ना देय फूलचगेरीने शाकारे॥ पांच अनुत्तर विमानना देव जयनालिका तथा कुवारिकाना कचुवाने थाकारे ॥ सज्ञी तिर्यच पंचेंघिय तथा सही मनुष्य नाना प्रकारने याफारे देखे ॥ नारकी देवता तीर्थकरने अन्यतर अवधिहान ॥ तिर्यचने वाहिर अवधिज्ञान॥ मनुष्यने थन्यतर ने वाहिर शवधिज्ञान होय ॥ नारकी देवताने श्वष्णुगामी १॥श्वप- भिवाइ २ ॥ अवस्थित ३ ॥ ए प्रकारनु श्रवधिज्ञान होय ॥ तिर्यच ने मनुष्यने अनु गामी १॥ श्रनानुगामो २॥ वर्द्धमान ३ ॥ हायमान ४ ॥ पमिवाश् ५॥ थपमिवाश६॥ थपस्थित ॥ धनवस्थित ॥ ए प्रकारनु अवधिज्ञान होय ॥ हवे अवधिज्ञान सके पथी ४ प्रकारे कहे २ ॥ अव्यथी शवधिज्ञानी ज० अनता रूपी अन्यने जाणे देखे, उप अनता रूपी अव्यने जाणे देखे १॥ देवथो अवधिवानी जय थालनो यसरुयातमो जाग जाणे देखे, उन यसोका खोक जेषमा चतरूपाता था जाण देखे ॥ कालथी थवधिज्ञानी जा थावखिकानो असरूपातमो जाग जाणे देखे, न असख्याता उत्स पिणी थवसर्पिणी काल गयानी श्रन थापतानो पात जाणे देखे ३ ॥ जावधी अवधिझानी जण् श्वनता जावने जाणे देखे, ना अनता नावने ते सर्व जावना श्वनतमा जागने जाणे देखे ॥ ॥ इति प्रत्यक थषधिज्ञान समाप्त३॥ वे प्रत्यक्ष मन पर्यव काननु स्वरूप कहे ॥मन पर्यव ज्ञान मनुष्य रूझी,कर्मचूमि,स्याता वर्षनी स्थितिषाळा,पर्याप्ता,समदृष्टि,सयति,थप मादी,सधिवत, एटसा बोलबाळाने होय ॥मन पर्यव ज्ञाननारद॥ मजुमति ॥विपुलमति शारजुमति काइक विपुलमतिनी थपेक्षाए योबु जाणे देखे, माटे नेद जूदा पामधा॥हवे मन पर्यवज्ञान सपषी ४ प्रकारे कछेउ ॥ व्यथी चनत बनत प्रदेशी स्कधने जाणे देखे ए मजुमति विपुलमतिथी विशेष जाणे देखे १ ॥ क्षेत्रथी श्रगुप्लनो शसख्यातमो जाग, उ० हेतु स्नानाना उपसा ने हेठला हुसक प्रतर सुधी ॥ उंचु ज्योतिषीना उप खा तळा सुधी ॥ त्रिलु थढि छीप सुधी ॥ ऋजुमति थठि अगुल योबु ने विपुलमति पूर जाणे देखे २॥ काखथी पस्योपमनो असख्यावमो नाग, उप पस्योपमनो असख्यातमो जाग थतीत अनागत कालने जाणे दखे ॥ ए मजुमति विपुलमति एथी विशेप जाणे देखे ३॥ नावषी शनता नाप ते सप नावने यनतमे नागे जाणे देखे ॥ विपुलमति एपी फा विशेष जाणे देखे । ॥ इति प्रत्यक्ष मन पर्यव ज्ञान समाप्त ४॥ ये प्रत्यक्ष केवलज्ञान कहे ठे॥ सब प्रत्यक्ष निरावरण सपूर्ण ज्ञान ते केवखशान ॥ तेना र नेद ॥ नपस्य केवल झान १॥ सिझस्थ केवल ज्ञान॥ नवस्य केवल ज्ञानना घे भेद ॥ सजोगी जवस्थ केव खझान १ ॥ थजोगी जवस्य केवल ज्ञान ॥ सिझस्थ फेवल ज्ञानना नेद ॥ श्रनतर सिकस्थ केरल झान १ ॥ परपर सिकस्थ केवस झान २॥ हवे केवलझान सक्षेपथी । प्रकारे कई उ । अन्यथा सर्व प्रन्यने १ ॥ देवथी सर्व देनने ५ ॥ कालथी सर्व कालने ३ ॥ जावधी सर्प पावन जाणे देखे ४॥ केवल ज्ञाने करी तीर्थकर अर्थने जाणी प्ररूपवा योग्य थर्थने कहे ते वचनजोगे करी गणधरादि सूत्र गुथे ॥इति प्रत्यक्ष केवल ज्ञान समाप्त॥ इति पांच ज्ञानना बोल सपूर्ण ॥ सप्रदेशी अप्रदेशीना बोल ॥ REVI थय नगरती शतक ६ उमेशा ४ याथी काल थाश्री सप्रदेशी अप्रदेशीना बोल लिख्यते॥ गाथा-सपएसा १ थाहारग २ नविय ३, सन्नि ४ खेस्सा ५ दिठी ६ सजय ७ फसाए ॥
नाणे ए जागु १० योगे ११, वेएय १२ सरीर १३ पज्जती १४ ॥१॥ ॥ चोद हारनी गाया कदी॥ दय ते चौद झार उपर एक जीप थाश्री अथवा घणा जीर यात्री सदशी थप्रदेशीनो विचार कहे व ॥सप्रदेशी एटले एकथी वधारे समयनी स्थि निराळा, थप्रदशी पटले प्रथम समयवर्ती थर्थात् जीवने थमुफ नाव प्राप्त थयाने एकज समप यया होय ते थप्रदेशी थने व प्रण थादि थनेक समय थया होय ते सप्रदेशी कद्दे पाय ॥तेमा प्रथम सप्रदेशी द्वार पदे ॥ समुच्चय एक जीव काल थाश्री केम सप्रदेशी? के थप्रदेशी? उत्तर-नियमा सप्रदेशी। एक नारफी काल थाश्री केम सप्रदेशी ? के थप्रदेशी? उत्तर-मिय सप्रदशी, सिय थप्रदेशी ॥ एव यावत् वैमानिक थने सिक सुधी पचीस दमक कहया ये पणा जीन काल थानी केम सप्रदेशी ? के अप्रदेशी ? उत्तर-नियमा सप्रदे- शी॥ पणा नारका काल थाश्री केम सप्रदेशी ? के थप्रदेशी? उत्तर-प्रण नांगा ॥सर्व सप्त देशी, थथया सप्रदेशी घणा यने थप्रदेशी एफ २, थथवा सप्रदेशीघणा अने घप्रदेशी पणा ३॥ पय पञ्जिय यर्जीने पैमानिक मुधी यीश दमक कदेवा ॥पांच स्थावर काल चाभी सप्रदशी घणा थ ने थप्रदेशी घणा ॥ इति प्रथम हार सपूर्ण ॥१॥ मोजु थाहारक हार कद्दे ॥ याहारक एक जोष शाथी केम सप्रदेशी ? क थप्रदेशी ? उत्तर-सियसप्रदेशी, सिय थप्रदेशी ॥ एम नारकीथी वैमानिक सुधी चोवीश दमकना एक एक जीव कन्हेवा॥ घणा जीव थाश्री समुच्चय जीवने पाच स्थावरमा तो सप्रदेशी घणा भने थप्रदेशी घणा॥ शेप नरकादि रए दमकमां घणा जीवोमा प्रत्येक प्रत्येक दमकमा ३ चांगा उपर प्रमाणे जाणया ॥श्रणाहारिक श्वामी समुच्चय एक जीव केम सप्रदेशी ? के थप्रदेशी? उत्तर-सिय सप्रदेशी, सिय यप्रदेशो। एम नारकादि चोवोश दमक बने सिझ पचीस दमक कठेवा ॥ घणा जीव थाश्री समुच्चय जीव ने पाच पजियमा सप्रदशी घणा ने श्वप्रदेशी घणा श्यने शेप नारकादि थोगणीश दमकना घणा जीपोमा प्रत्येक प्रत्येकमा ब(२) नांगा जाणवा ॥ सर्व सप्रदशी होय १, अथवा सर्व थप्रदेशी होय, अथवा एक सप्रदेशीथने एक थप देशी ३,थथवा सप्रदेशी एक अने श्रप्रदेशी घणा , अथवा सप्रदेशी घणा भने थप देशी पक ५, थथवा सप्रदेशी घणा थने थप्रदेशी घणा ६, पना नांगा तो छ थाय पण शहा व विवर्या ॥ घणा सिह थाश्री नागा३ पूनाफ॥इति यीजु थाहारफमार सपूर्ण ॥ २ ॥ त्रीजु नव्यहार कहे ॥ नव्य समुच्चय एक जीव शाश्री नियमा सप्रदेशी ॥ शेष चोवीस दमकना एक एक जीव सिय सप्रदेशी, सिय थप्रदेशी ॥ घणा जोव वाश्री समु चय जीव तो नियमा सप्रदेशी थने नरकादिरए दमकना घणा जीपोर्मा प्रत्येको जांगा ३ पूक्ति॥पान स्थावरमा सप्रदेशी घणा श्रप्रदेशी घणा ॥ एम अन्नव्य पण समुच्चय जीवने चोवीश दमक कद्देवा ॥ नोजविनोचनषि,समुच्चय एक जीव सियसप्रदेशी,सिपथप्रदेशी ।। एम एक सिक पण कद्देवा ॥ घणाजीव यात्री समुच्चय जीवने सिघनगवानमा प्रत्येकमा ३ नांगा पूर्वोक्त ॥ इति श्रीजु भव्यहार सपूर्ण ॥३॥ चोj सज्ञीकार कहे ते ॥ सझी एक जीव फाल याथी सिय सप्रदेशी, सिय थप्रदेशी ॥ एम सोल दमक सझीना एक जीप थाश्री कहेवा ॥ घणा जीव थामी समुच्चय जीवने सोल दमकमां प्रत्येकमां प्रण नांगा पूर्वोक्त ॥ थप्सझी समुच्चय एक जीव धने पावीश दमकमां सिय सप्रदेशी, सियश्रप्रदेशी ॥ घणा जीव थानी एज्यिमांसप्रदेशी घणा, श्रप्रदेशी घणा ॥घणा नारकी असझी बाभी
मांगा ६ पूयोंक्त ॥ एम दश जवनपति, मनुष्य थने पाणव्यतर मळी यार दमक कदेवा ॥
शेप प्रण विकजिय, तियेच पचेंजिय असझी घणा जीव थानी प्रत्येकमा प्रण नांगा
पूर्वोक ॥ नोसझीनोयसझी थाश्री समुच्चय एक जीव सिय सप्रदेशी, सिय श्रप्रदेशो॥
एम मनुष्य थने सिझ एक जीवथाश्री कहेवा ॥ घणा जीव, घणा मनुष्य अने घणा सिझमा
नोसझीनोथसझी थाश्री प्रत्येकमा प्रण नांगा पूर्वोक्त ॥ इति चोथु सहीछार सपूर्ण
॥४॥ पांचमु खेश्याहार कहे ते ॥ सलेशी तो एक जीव ने घणा जीव थोधिक प्रथम हार
वत् जाणषा ॥ कृष्णलेशी, नोखखेशी थने कापोतलेशी एक जीवने घणा जीव थाश्री श्या
हारफवत् कदेवा ॥ नवर दमक वावोस कद्देवा ॥ तेजु वेश्या समुच्चय जीव धने पदर दम
फमा प्रण नांगा पूर्वोक्त ॥ पृथ्वोकाय, थप्काय अने वनस्पतिकायमा प्रत्येक प्रत्येका
६ नांगा पूर्ववत् क्या ॥ पद्मखेश्या थने शुक्खेश्यामा समुच्चय जीव, तियेच पचें
जिय, मनुष्य थन वैमानिक प्रत्येकमा ३ नांगा पूर्वोक्त ॥ थलेशी जीव अने सिझमा
३ नांगा पूर्वोक्त ।। मनुष्यमा ६ नांगा पूर्वोक्त ॥ इति पांचमु खेश्याहार सपूर्ण ॥५॥
हये ६ बु दष्टिहार कहे ते ॥ समदृष्टि, समुच्चय जीव, सोळ दम भने सिङ भगवान प्रत्येकमा ३ नांगा पूर्ववत् ॥ प्रण विकलें प्रिय प्रत्येकमा ६ नागा पूर्ववत् ॥ मिष्याष्टि, समुच्चय जीव, थोगणोश दमकमा प्रत्येकमा ३ नागा पूर्वोक्त ॥ पांच स्थावरमा सप्र- देशी घया, थप्रदेशी घणा॥ मिश्रदृष्टि, समुच्चय जीव, सोस दमक प्रत्येकमां नागा पूर्वो क ।। इति टिहार सपूर्ण ॥६॥ इथे सातमु सयसिकार कहे ठे। समुच्चय सपति, समु घय जीप थने मनुप्यमा ३ जागा पूर्वोक्त ॥ थसयति समुच्चय जोवना योगणोश दमकमा ३ नांगा ॥पांच स्थावर असयति थाश्री सप्रदेशी घणा, थप्रदेशी घणा ॥ सयता सयति, समुच्चय जीव, तियेच प.प्रिय थने मनुष्य प्रत्येकमा त्रण नांगा पूर्वोक्त ।। नोप्तय तिनोथसयतिनोसयतासति समुश्चय जीव ने सिम्मा प्रत्येका ३ नांगा पूर्वोक्त ॥ इति सयतिधार सपूर्ण ॥ ७ ॥ हये थाठमु कपायघार कहे ठेसफपाय समुच्चय जीव ने श्यो- गयीश दंगफमा प्रत्येकमा ३ जागा पृ०॥पांच स्थावरमा सप्रदेशी घणा,श्यप्रदेशी घणा ।। क्रोधकपायी भाषी समुच्चय जोय ने पांच स्थावरमा सप्रदेशी घणा, अप्रदेशी घणा ॥ देवता F थात्री तेर दमकमा प्रत्येकमा ६ जागा पूर्ववत् ॥ शेप नरकादि उ दमकमा प्रत्येकमा ३ | जागा पूर्ववत् ॥ मानकपायी, मायापायीमा समुच्चय जीव ने पांच स्थावरमा कोध कपायी माफक ॥ नारफी थने देवता थाश्री तेर दमकमा ६ नांगा पूर्वयत् ॥ शेष पाच दहकमा ३ जामा पू० ॥ खोजफपायी समुच्चय जीव थने पांच स्थावर प्रत्येकमां क्रोधवत् ॥ नार कीमा ६ जागा पूर्ववत् ॥ १० दमकमा प्रत्येकमा ३ नांगा ॥ अकपायी समुच्चय जीव, मनुष्य थने सिझमा प्रत्येकगा ३ नांगा ॥ इति कपायघार सपूर्ण ॥ ७ ॥ हवे नवमु नाणधार कहे ते ॥समुच्चय ज्ञानी, समुच्चय जीव, सोख दमक बने सिक नगवान प्रत्येकमां ३ नागा पूर्ववत् ॥ प्रण विकजिय प्रत्येकमा ६ जागा पूर्ववत् ॥ एम सिह वर्जीने मतिझानी, श्रुतज्ञानी पण १५ दमकमा कहेवा ॥ थवधिज्ञानी, समुच्चय जीव थने सोले दमक प्रत्ये फमां३ जागा ॥ मन पर्यव ज्ञानी थने केवल ज्ञानी, समुच्चय जीय थने मनुष्यमा प्रत्येकमा ३ जांगा प्यवत् ।। समुच्चय अज्ञानी, मति अझानी अने श्रुत थज्ञानी, समुच्चय जीव अने १५ दमक प्रत्येकमा ३ नांगा पूर्ववत्॥पाच स्थावरमा सप्रदेशी घणा, श्रप्रदशी घणा । विनग ज्ञानी, समुच्चय जीव चने सोख दंगक प्रत्येकमा ३ नांगा पूर्ववत् ॥ इति नाणधार सपूर्ण ॥ ए॥ इवे १० मु जोगद्वार कहे छे ॥ सजोगी, समुच्चय जीव, श्रोधिक प्रथम धारयत् ॥ मनजोगी, समुच्चय जीव श्चने सोख दमक ॥ पचन जोगी, समुच्चय जीव ने रए दमक ॥ थने फायजोगी, समुच्चय जीव ने रए दडफ ॥ प्रत्येफमा ३ नांगा पूर्ववत् ॥ पांच स्थावरा सप्रदेशी घणा,थप्रदेशी घणा॥ थजोगी, समुच्चय जीव श्रने सिझमा ३ नागा॥ मनुष्यमा ६ नांगा थेवेशीवत् ॥ इति योगहार सपूर्ण ॥१०॥ हवे ११ मु उपयोगकार कड़े ॥ सागारो पठचा श्चने श्रणागारोषउचा, समुध्मय जीव धने पाच स्यावरमा सप्रदशी घणा, अप्रदेशी घणा ॥ शेष रए दमक थन सिक यात्री प्रत्येकमा ३ जागा पूर्ववत् ॥ इति उपयोगकार सपूर्ण ॥ ११ ॥ हवे १२ मु वेदछार करे ॥ सवेदी, समुच्चय जीव ने चोवीश दमकमा सकपायवत् ॥स्त्रीवेदी,समुच्चय जीव ने पदर दमक, पुरुप वेदी, समुच्चय जोव ने १५ दमक, प्रत्येकमा ३ 'नांगा पूर्वपत् ॥ नपुंसक वेदो, समुख्यय जीव भने उ दमक प्रत्येकमा ३ जागा पूर्ववत्॥पांच स्थावरमा सप्रदेशी घणा, यप्रदेशी घणा॥ अवेदी, समुच्चय जोध, मनुष्य धने सिक थफपायवत् ॥ इति वेदधार सपूर्ण ॥ १५ ॥ इवे १३ मु शरीरद्वार कहे ॥ सश- रीरी, समुच्चय जीवने २४ दमक थोधिक प्रथम धारवत् ॥ उदारिक शरीर थाभि समुच्चय जीवने पांच स्थावरमा सप्रदेशी घणा, अप्रदेशी घणा ॥ शेष पांच दंगका प्रत्येका उदारिक शरीर याश्री३ नांगा पूर्ववत् ॥ वैकेय शरीर यात्री, समुच्चय जीवने वाल- कायमा सप्रदेशी घणा, थपदेशी घणा॥ शेप सोख दमकमा प्रत्येकमा ३ नांगा॥ थाहारक शरीर थाश्री समुच्चय जीवने मनुष्या ६ नागा पूर्ववत् ॥ तेजस कार्मण शरीर थाश्री समुच्चय जीवने चोवीश दमक श्रोधिक प्रथम हारषत् ॥अशरीरी, समुच्चय जीवने सिकमा ३ चांगा ॥ इति शरीरद्वार सपूर्ण ॥ १३ ॥ हवे १४ मु पर्याप्तिधार कहे ॥थाहारप्रजा, शरीरप्रजा, इजियप्रजा यने श्वासोच्चाप्त प्रजा ए चार प्रजाना पर्यासा यानी समुच्चय जीवने पाच स्थावरमा सप्रदेशी घणा, ने अप्रदेशी घणा ॥ शेष श्योगणीश दमकमा प्रत्येकमा ३ नांगा पूर्ववत् ॥ नापाप्रजा ने मनप्रजामा सहीयत् ॥ श्याहारप्रजाना अपर्याप्ता श्श्रणाहारक- वत् ॥ शरीरप्रजाना थपर्याता, इजिपप्रजाना अपर्याप्ता, श्वासोच्छ्वास प्रजाना अपर्याप्ता, समुच्चय जीवने पांच स्थायरमा सप्रदेशी घणा बने थप्रदेशी घणा ॥ शेप नारकी देवताना १३ दमक श्यने मनुष्यमा ६ नांगा ॥ शेप प्रत्येकमां ३ मांगा ॥ नापा मन अप्रजाप्ता थानो समुच्चय जीव, ३ विकजिय, तियेच पचेंजिय प्रत्येकमा ३ चागा ॥ शेष नारकी, तेर दमक देवता धने मनुष्य प्रत्येकमा ६ नांगा पूर्ववत् ॥ १४ ॥ इति सप्रदेशी थप देशोना घोल संपूर्ण विशेप विस्तार सूत्र श्री जगवतीजी शतक ६ उदेशा चोथाथी जा पयो ॥ पण थामा थोर्बु थधिक विपरीत थयु होय तो मिहामि का ॥ समेघ सच्च निसक ज जिणेहिं पवेश्य॥ पढमापढमना वाल॥ थष श्री भगवती शण १७ माने उदेशा १ लाथी १४ हारे पढमापतमना बोल वख्या ठे॥
गाया ॥ जीवा १ हारग २ जव ३ सपिण ४, खेस्सा ५ दिठि ६ सजय ७ कसाए ॥ नाणे ए जोगु १० वयोगे ११, वेए १५ य सरीर १३ पज्जत्ती १४ ॥१॥ जो जेणपत्त पुष्पो, जावो सो तेण अपदमो हो । सेसेसु होइ पढमो, थपत्त पुवेसु जावेसु ॥२॥ भावार्थ-जे जीप जे नाव पूर्वे पाम्यो ते जावे करी ते श्रप्रथम (अपठम) १॥जे नाव पूर्व नथो पाम्यो, ते भावने पामनु ते प्रथम (पढम)२॥ इवे पहेल जीवकार कहे ॥ एक पचन थाश्री जीव, जीवनावे अप्रथम (अपटम) केमके जीवपणु तोडे ज ॥ कांश नवु पामवु नथी, ते थपेक्षाए १॥ एवं नारकीथी मामी वैमानिकना दमक सुधी ते ते नावे थपढमपणु कहे, २५ ॥ सिक, सिझ नाघे पढम केमके सिझपणुं पूर्वे पाम्यो नथी, तेनु प्रयम पामवापणु थयु ते अपेक्षाए २६॥ए एक वचन वाभि६ दमक यया ॥ बहुवचन यानि कहे ते ॥ जीवो, जीवनावे थपदम ॥ अपेक्षा पूर्ववत् समजवी १॥ एष नारकीपी माझी मानिकना दमक सुधी, ते ते भामे थपदमपणु कठेवु श्य ॥ सिको, सिझ नावे प्रथम, तेनी थपेक्षा पूर्ववत् समजवी २६ ॥ ए ५५ दंगके फरजीवहार सपूर्ण ॥१॥ हवे वीजु थाहारकछार कहे ते ॥ एक यचन थाभि एफ थाहारक जीव, थाहारक नावे थपढम (प्रथम) केमके थाहारकपणु पूर्ये श्वनति वार पाम्या ते अपेक्षाए १ ॥ एव नारकीयो मामी वैमानिकना दमक सुधी, ते ते नावे थपढमपणु कहेतु २५ ॥ ए एक वचन थाभि २५ दमक थया ॥ यहुवचन थानि पण २५ दमक एज रीते जाणवा ।। ए ५० दमक यया ॥ सिझने थनाहा" रकपणु ते माटे एक वचने पहुवचने पुठया नहि ॥ एक वचन यानि थनाहारक जोक, श्यनाहारक नावे का प्रथम (पढम ) केमके सिद्धने अनाहारकपणानो जाव प्रथम प्राप्त थयो । ते श्यपेक्षाए ॥ कोइ थप्रथम (थपढम) केमके विग्रह गतिने विष थनाहारकपणे अनंति यार पाम्यो ते श्यपेक्षाए १ ॥ पर नारकीयो मामी,पैमानिकना दमक सुधी ते ते - जावे एक थपढमज कहेवा केमके विमहगतिने विषेध नाहारकपणु थनंति वार पामयाथी २५ ॥ सिक अनाहारकानावे प्रथम (पढम) केमके सिकने अनाहारकपणु प्रथम प्राप्त थयु ले ते थपेक्षाए ६ ॥ ए एक वचन थाभि २६ दमक धया ॥ बहुवचन थाभि १६ दमक पूर्ववत् जाणवा ॥ ए ५५ दमक थया ॥ एव थाहारक थनाहारकना सर्व मळी १०२ दमक यया ॥ इति थाहारकछार सपूर्ण ॥३॥ हवे त्रिजु जव्यहार कहे ॥ एक वचन यानि जव्यसिफिक जीप, जव्यसिफिक जावे श्वपढम (अप्रथम ) केमके जव्यनु नव्यपणु अनादि , माटे जव्यपणे प्रथम (पढम) नहि, एम अत्तव्य सिद्धिकपणु पण थपढम ज जाणवु १ ॥ एव नारकीथी मामी वैमानिकना दमक सुधी, ते ते जावे थपढम कहेवा २५ ॥ एव पहुवचने पण २५ दमक थपठम ज कडेवा ॥ एव ५० दमक थया ॥ पव ५० दंगक अनव्य सिझिकना पण कद्देवा ॥ नोजव्यसिलिकनोश्य- जव्यसिफिकना जीव नोचव्यसिफिकनोथनव्यतिक्किने नावे परम (प्रथम), नो नव्यसिडिकनोधमन्यसिक्किपणानु प्रथम पामवापणु ठे ते अपेक्षाए । ॥ एव सिझना दमकमा पण ते नापने पामवा आश्रिमा पदमपाणु कहेवु ॥ एकेफ वचने २, एव घडू पचने पण २ दमक जाणवा ॥ एवं ४ दमक थया॥ सर्व मळी ११ दमक थया ॥ इति नव्यहार सपूर्ण ॥ हवे चोथु सझीकार कहे ॥ एक वचन थाथि सही जीय, सझी नावे अपठम (प्रथम ) केमके सझीपणु पूर्वे अनंति पार पाम्यो ते थपेक्षाए१॥ एव नारकीथी मामी, ५ स्थावर, ३ विगजियना ए ७ दमक वर्जिने वैमानिकना दमक सुधी, ते ते जावे श्रपदमपणु कदेवु १७ ॥ ए एक वधन थाथि १७ दमक श्रया, एवं घडु वचन पण १७ दम्फ अपढम, एव ५३ दमक यया ॥थ सझो जीव, थसझोनावे थपढम (थप्रथम)२॥ पद नारकीची मामी वाणव्यतर सुधी, से ते जाये अपटम कद्देवा ॥ ज्योतिषी धैमानिकमा यसझी उपजे नहि, माटे असकीपा साने नहि, सेयी ए २ दमक घर्जया ।। ए एफ वचन यात्रि २३ दमक थया ॥ एवं पर पचने पण २३ दमके थपढमपणुं क्देव, ए ४६ दमक थया ॥ नोसझोनोथसझी जीव, नो सझीनोयसको पावे पदम (प्रथम) केमके प नावनुं प्रथम पामवापणु उ, ते अपेकाए १॥ मनुप्यने सिम्मा पण पढम (प्रथम) पणु ज पाने ॥ ए ३ दमक एक वचने थया ॥ पर यहु वचन थाभि पण त्रणे दमके प्रयमपणुज कहेतु ॥ ५ ६ दमक ॥ सर्व मळीने ७६ दंझक यया॥ प सझीधार सपूर्ण ॥४॥ इवे पांचमु खेश्याहार कहे ॥ एक वचन थाथि सखेशी जीव, सलेशी नावे थपदम फेमके पूर्षे सलेशीपणानुश नति वार पामबु ययु ठ, ते अपेक्षाए । ॥ नारकीयी मामी वैमानिक सुधीमा, ते ते जावे थपठमपाणु होय २५ ॥ ए एक वचन यानि २५ दंगक, एव घटु वचन थालि पण २५ दमके थपढमपएं साने॥ ए ५० दमक थया॥ एव समुच्चय कृष्णलेशी जीव, कृष्णलेशी नावे थपदम १ ॥ नारकोथी मामी वाणव्यतर सुधी, २२ दमके पण थपढम ॥ ए २३ दमक एक वचनना, पप २३ घहु वचनना दमक, सर्व मळी कृष्णवेशीना ४६ दंगक॥ एव नीखसेशीना ४६ ॥ कापातना ४६ ॥ तेजुवेशीना एक वचने रए दमक, बहु वचने १५, एष ३० दमके थपरमपाणु ॥ पनवेशीना ४ दंगफ एक वचने ५ ॥ बहु वचने ॥ एवं दमके अपदमपणु॥ शुफ्तशीना पण दमके थपदमपणु कहेतु ॥ श्यलेशी जीव, श्यलेशी जाषे पढम (प्रथम) केमके श्यलेशीपणानु प्रथम पामवापयु , ते अपेक्षाए १॥ एव मनुष्य ने सिंघमा पण पतमपणु ॥ए एक वचने ३ दमक, एष बहु वचने ३ दमके प्रथमप, ए ६ दमक थया । एव २४७ दमक सर्व मळीने थया ॥ इति वेश्याहार सपूर्ण ॥ ५ ॥ हो ब्लु हष्टिंकार कहे ठे॥ गक वचन थाथि समदृष्टि जीव, समष्टि नावे कोश् प्रथम, ते कोशसमा टिपा प्रथम पाम्पो ते थपढ़ाए ॥ कोश्वपतम, ते तेणे प्रतिपतित (पमया ) ची समदृष्टिपणु फरीची। साभ्यु ते अपेक्षाए १॥ एव नारकीथी मामी ५ स्थावर वर्जिने घेमानिफ सुधी, प्रथम सम्य पवना लाने करी, प्रथम द्वितीयादि खाने करी थपढम २०n सिक समदृष्टिनावे प्रथम १॥ ए २१ दमक एक वचनना थया॥ एव २१ दमक बहु वचनना, ते समदृष्टिंभाषे प्रथम, प४२ दमक यया ॥ मिण्यादृष्टि जीव, मिथ्याष्टिनावे थपढम १॥ एव नारकीयो वैमानिक सुधी थपढम कहेवा ५५ ॥ ए एक वचनना २५ दक, एव षटु वचन थाश्रि पण २५ दमक, एव ५० दमक यया॥ समामिप्यादृष्टि जीव, समामिथ्याष्टिनावे एक वचने, समु चय जीवने सोख दमक, सिय पढम, सिय थपदम ॥ पढमकेमके नवी दृष्टि पामवापणु ले सेयी १॥ एव नारकीया मामी, ५स्थावर, ३ विगजिय, ए ७ दमक वर्जि १६ दमके प्रथ मपणुं, ए १७ दमक एक वचनना, ने १७ दमक बहु वचनना, ए ३४ दमके सिय पढम, सिय थपढमपणु ॥ सर्व मळी १५६ दंमक यया ॥ इति दृष्टिछार सपूर्ण ॥ ६ ॥ हवे सातमु सयतद्वार कहे ॥ एक पचन थाथि सयत जीव, सयतनावे कोइ प्रथम, कोश्थपदम, अपेक्षा समष्टिवत् १॥ मनुष्य सयत नावे कोई पठम, को थपढम २॥ ए एक वचने २ दमक, एव बहुवचन वाभि ये दमके थपढमपणु कहेतु ॥ ए ४ दमक थया ॥ असयत जीव, असयत नावे थपढम, अप्सयतपणु थनती पार पाम्यो ते अपेक्षाए १॥ एव नारकीथी मामी वैमानिक सुधी, २४ दमक ते ते जावे अपठमपणु कडेवु २५ ॥ ए २५ दंगक एक वचन शाश्रि, एव २५ दमक बहुवचन थाधि थपढम जाणवा ॥ ए ५० दमक थया ॥ सयतासयति थाभी समुच्चय जीव, तियेच पचेंजिय श्थने मनुष्य ३ दमक एक जीव शाश्री, तेम प्रण दमक घणा जीव याश्री एम ए दमक यया ।सयतासयतो नाव श्राश्री, सिय प्रथम सिय थप्रथम जायना समदृष्टिवत् ॥ नासयतनोथसयत जीव, नोसयतनोश्यसयस नावे पढम फेमके एनु प्रथम पामवापण ठे ते थपेकाए । सिझमां पण एजरीते पठमपणु कहेवु ॥ए एक वचन थाभिश्दमक ॥ एव घटु पचन थाभिधे दमके प्रथमपणु कहेतु ॥ सर्व मळीने ६४ दमक यया ॥ इति सयतधार सपूर्ण ॥७॥ हवे थाग्मु कपाय धार कहे ते ॥ एक वचन शाभि सकपायी जीव, सकपाय नावे अपठम केमके सकपायपणाने थना दिपणु ने तेथी १॥ नारकीपी मामी वैमानिफ मुधी सकपाप जावे थप्रथम २५ ॥ ए एक वचनना २५ दंगक ॥ एव बहु पचन यानि पण २५ दमके ते ते नावे धपढमपणं कहे ।।
ए ५० दमक पया ॥ एव क्रोधकपायीना ५० दमक ॥ मानकपायीना ५० दमक । माया कपायीना ५० दमक । खोचकपायीना ५० दमक॥ सर्वत्र थपढमपणु कहेवु ॥ थकपायी जीय, थकपायी जाये कोई पढम, ते यथास्यास चारित्रनो प्रथम लान पामवाथी ॥ को थपढम, ते यथाख्यात चारित्रनो द्वितीया दि खान पामपाथी १॥ एव मनुष्य १॥ ते ते जाये कोई पदम, कोश्यपढम जाणवा २॥ सिक, शकपायी जाये पढम जाणवा, केमके सि अपणाने धनुगत अकपायनावनु प्रथम पामवापणुं तेथी ३॥ ए ३ दमक एक वचन थानि॥ एव वहु वचन थाभि ३ दमके पूर्वोक्त एक वचननी रीते ज्यां जे खाने स्यां ते फहेतुं ॥ एव ६ दमक यया ॥ सर्व मळी २५६ दमक यया॥ इति कपायकार सपूर्ण ॥ ७॥ हवे नयम शानद्वार कहे ॥ एक वचन थाभि ज्ञानी जीव, ज्ञाननावे कोइ पढम, केमके कोई ज्ञानीपणानो लान प्रथम पामे ते थपेक्षाए । कोइ थपढम (अप्रथम) केमके कोइ पमिनाइपणाथी छाननो खान फरीची पाम्यो ते अपेक्षाए १॥ एव नारकीथी मामी ५ स्थावर वजिने चैमानिक मुभी, ननार परम थपदमपाणु फदेवु २०॥ सिफ शाननावे पदम, फेमके प्रथम खान पामरापी २१ ॥ पचन २१ दमः ॥ पर यहु वचन २१ दमक, पण पूर्वोक्तरीत जा गया ए ४२ दफ यया। पवमतिझानना धD दमक, ते पूर्वोक्ताथो सिझना एक वचन ने यह यपन थापिना २ दमक वर्जना ॥ एव श्रुतझानना ४० दमक पण ए रीते जाणवा ॥ एप थयधिशानना एक पपने घहु वचन ३४ दमक, ते पूर्वात ४० यो, ३ विगोजियना एक पटु बनने ६ दमक या, ते दमफे पदम थपदमपणु पूर्ववत् जाणवु ॥ एव मन पर्यव ज्ञानना एक बहु वचन ४ दमके पए प्रमज जाणवू ॥ केवलज्ञानी, ते ते जावे एक यहू सने ६ दमके पूर्ववत् जाणवु ॥ अज्ञानी थज्ञानना थपदम, अपेक्षा थनादि काळयी थशाननु पामगपाणु ने ते थपक्षाए १ ॥ एव नारकीयो वैमानिक सुधी, ते ते जावे थप दमपाणु खाने २५ ।। एक वचनना २५ दमक॥ एव घटु वचन थाश्रि २५ दमक एमज जाणा॥ एय ५० दमक यया । गमज मतिथानीना एक बहु यचने ५० दमक जाण पापय श्रुतयज्ञानना पणा, एक यहु यचने ५० देमके पूर्यरत् जाण ॥ विनगज्ञानना
३४ दमके ते, ५ स्थावर, ३ विगहेंजियना एक वचनना १६ दमक वर्जिने थपढमपणु होय ॥
सर्व मळीने ३५० दडक थया ॥ इति ज्ञानधार सपूर्ण ॥ए॥
हवे दशमु जोगहार कहे ॥
एक वचन थाथि सयोगी सयोगीनावे थपढम, अनादि काळथी ए नावनु पामवा
पाणु ते ते अपेक्षाए १॥ एव नारकीथी मामी वैमानिक सुधी ते ते नावे थपढमपणु
कहेवु २५ ॥ ए एक वचने २५ दमक ॥ एव बहु वचन थाभि पण २५ दमके अपढमपणु
फहेतु ॥ ए ५० दमक थया ॥ एव मनयोगीना एक वचने १७ दमक, बहु वचने १७ दमक, ए
३५ दमके ते ते जावे अपढमपणु जाणवू ॥वचनजोगीना एक वचने २० दमक ॥ बहु वचने
२० दमक । ए ४० दमके अपढमपणु कहेतु ॥ काययोगीने ५० दमके ते ते नावे सयोगीनी
परे कडेवु ॥ अजोगी जीव अजोगीनावे प्रथम, प्रथम खाननी अपेक्षाए १॥ एव मनुष्य
सिझने नावे पढम, ए एक वचनना ३ दमक॥ एव पहु वचनना ३ दमक, ए ६ दमके
पढमपणु कहेतु ॥ ए १७ दंझक यया ॥ इति जोगहार सपूर्ण ॥ १० ॥
हवे थग्यारसु उपयोग झार कहे ॥
एक वचन थाथि सागारोषउत्ता, सागारोवनचा नावे कोइ थपढम, केमकेश्चनादि
पणु ते अपेक्षाय को पढम, केमके सागारने शणागार उपयोगे करी विशपित सिह-
पणाने प्रथम (पढम )पणानो ज नाव ठे ते अपेक्षाए । ॥ एम नारकीथी मामी वैमानिकनो
दमक सुधी थपदमपणु करेवु २५ ॥ सिझमा पदम (प्रथम ) पणु कहेतु, थोधिक अपेक्षा
दमकवत् २६॥ एव बहु वचनना २६ दमक पण पूर्षोंक रीते जाणया ।। ए ५५ दमक धया।
एव थणागारोवउत्ताना ५२ दमके एक वचने या वचने पढम-थपढम पूर्वोक्त सागारो
पउचानी रीते समजी खेत् ॥ सर्व मळी १०४ दमक थया॥ इति उपयोग झार सपूर्ण ॥११॥
हवे १२ मु वेदहार फहे ॥
एक वचन थाभिसवेदीजीप,सबेदी जावे थपढम, केमके अनादि काळथीएनो खान
पामवाय १॥ एवं नारकीयो मामी धेमानिफ मुधी ते ते नावे अपढमपण जाणवु २५॥
ए एक बचने २५ दमक ॥ एव २५ दमक बहु वचन यानि पण थपतम जाणवा ॥ ५५॥
From दमक थया॥ एव स्त्रीवेदना एक बहु वचने ३५ दमके ॥ एव पुरुषवेदना एक बहुवचने ३५ दमके॥ एष नपुसकना २४ दमके थपढमपणु कहेवु ॥ थवेदी जीव थवेदीनाव कोश पढम, केमके अवेदी नावना प्रथम लान पामवाथ ॥ कोश् श्रपटम, केमके अवेदी नावनो में द्वितीयादि खान पामपाधी १ ॥ एव मनुष्यने दमके पण ते ते नावे पदम थपढमपणु जाणवु ॥ सिझमा थवेदीजावे, पढमपणु ज लाने, द्वितीयादि साजनो अन्नाय ठे तेथी॥ ए ३ दमक एकवचनना, एव ३ दमक बहुवचनना पण जाणवा ॥ ए ६ दमक थया ॥ सर्व मळी १४४ दमक थया ॥ इति वेदद्वार संपूर्ण ॥ १५ ॥ हवे १३ मु शरीरकार कहे ॥ एक वचन थाभि सशरीर जीव, सशरीरी चाये श्वपढम, अनादिकाळपी पनो खान पामवाथी ॥ एष नारकोथी मामी वैमानिकना दमक सुधी ते ते नावे थपढमपणुं कहेतु २५॥ एएक वचनना २५ दमके ने घटुवचनना २५ दमके ते ते नावे थपठमपणु जाणवु॥ए ५० दमक थया॥ एवं उदारिक शरीरना एक बहुवचने १५ दमके॥एवं वैक्रयना एक बहु चरमाचरमना वोल॥ थय श्री भगवती शतक १७ मा ने देशा पदेखाथी घरमाचरमनी घोल लिख्यते ॥ गाया। जीया र हारग २ व ३ सपिण , खेस्सा ५ दिग य ६ सजय कसाए ७ ॥ नाणे ए जोगु १० पयोगे १५, एय १२ सरीर १३ पनची २४ ॥१॥ इय प्रथम जीवहार कहे गएकवचन थाथि जीव, जीवनावे श्वचरम, केमके जीव पणानो नाश नको ते थपेक्षाए । ॥ एवं नारकीथी मामी वैमानिक सुधी, ते ते माघे को परम, फेमके नरकादियो नीकल्याने सिझगमनथी फरी नरंकादिने विपे जाई नथी ते थपेका १n कोइ थचरम ते पूक्तियो विपरीत २ ॥ एष सिफ, सिंफनोवेशधरम, मक सिरुपयानो नाश नयी ते थपेक्षाए।ए २६ दमक एक वचनना, एवं २१ दमक बहुरपनना, पय दमक चया॥इति प्रथम जीवछार १॥ इये योजु थाहारकहार कहे ठे ।। थाहारक जीव, श्रादारक नाय कोइ परम, फेमके फरीयो आहारकपा नपामशे, सिलि गमनधी, ते अपेक्षाए ॥ कोई जीव श्वचरम १ ॥ नारकीची मामी पैमानिक सुधी, ते ते जाव कोश् चरम, केमके-नरका दिपणे फरी थाहारकपणु न पामशे, ते थक्षाए । कोश थचरम । फरीथी नरका दिपण थाहारकपणु पामवाथी २५ ॥ ए २५ दमक एकवचनना, एव बहुवचनना २५ दरक, एव ५० दंझक थया ॥ थनाहारक जीव थनाहारकपणे वच रम, केमकथनाहारकपणाने थनाशपणु जे तेथी १॥ एव नारकीथी मामी वैमानिक सुधी अनाहारकनावे कोश् चरम, केमके नरकादिपणे फरी र्थनाहारकपणु न पामशे ते अपेक्षाए, फोइ अचरम २५॥ सिक अनाहारकपणे थघरम, अनाहारकपणानो नाश नथी ते अपेक्षाए २६ ॥ ए एक वचनना २६ दडफ, एव बहु वचनना २६ दमक ॥ सर्व मळी ५२ दमक थया । इति थाहारक हार ॥२॥ हवे त्रिजु नव्यहार कहे जे ॥ नव्यसिफिक जीव, जयसिफिक नावे चरम, केमके मोक्षगमनधी ते नावनो नाश यवाथी १॥ एवं ना रकीची मामो वैमानिक सुधी, ते ते जावे कोश् चरम, सिकपणु पामये करी ॥ को अचरम २५ ॥ ए २५ दमक एकवचने, ने २५ बहुपचने, एव ५० दमक थया ॥ थंजव्यसिफिक जीव, थानव्य सिडिक नाये थचरम, थनव्यनो नव्यपण थनाव ठे तेथी १ ॥ एव नार कीची मामी रैमानिक सुधी ते ते जावे यचरम २५॥ए२५ दमक एक वचनना, ने श्५ यह वचन , ए ५० दमक थया ॥ नोजव्यसिफिकनोचनव्यसिकिक जीव, नोनव्यनो थनव्य नावे यचरम, केमके तने सिपण ते तेथ। ॥वळी सिकपणाना पर्यायनु अनप गम (थनाश) पणु ठे तेथी १॥ एव सिझने पण जाण ॥ ए २ दमक एकवचने, दमक बहुवचने, एष ४ दंभक थया ॥ सर्व मळी १०४ दमक थया ॥ इति नव्यहार ३ ॥ इवे चोथु सज्ञीद्वार कहे ॥सही जीव, सहीनावे कोश् चरम, कोइ थचरम, युक्ति थाहा रकषत् ।। एव नारकोथी मामी वैमानिक सुधी त ते ना कोइ घरम, कोइ थचरम १७॥ ए एकवचने १७ दमक, यलुवचने १७ दमक, सर्प मळी ३५ दमक थया ॥ थसही जीव, थसहीनावे कोश् चरम, कोइश्चचरम १॥ एव नारकीथी मामी वाणव्यतर सुधी जाणवु २३ ॥ ए एकवचने २३, बहुवचन २३, सर्व ४६ दमक यया ॥ नोसझीनोथसही जीव, नोसझीनोयसझीनावे थचरम १॥ मनुप्य ते ते नावे चरम, केमके मनुष्यने केवपीपणे फरी मनुष्यपणानो यखान ने तेथी ॥सिद्ध ते ते नावे अचरम, केमके ते नावना पर्या यनु (थनपगम ) थनाशपणु ने तेथी ३ ॥ ए ३ एकवचने, ३ पहुवचने, एव ६ दमक थया ॥ सर्व मळी ७६ दमक थया ॥ इति सझीद्वार ॥ ४ ॥ इवे पांचमु लेश्याहार कहे ॥सलेशी जीव, सलेशी नावे कोश् चरम, केमके जे निर्वाण पामशे ते सोशोपणाना चरम, को अचरम १॥ एव नारकीथी मामी वैमानिक सुधी कोश् चरम, कोइ अचरम २५॥ ए एकवचनना २५ ॥ बहुवचनना २५ ॥ सर्व मळी ५० दमक थया ॥ एव कृष्णलेशीना एक बहुवचने ४६ दमके ॥ नीसपेशीना ४६ दमके॥ कापोतमेशीना ४६ दमके ॥ एव तेजु शीना एक घहुषचने ३७ दमके ॥ पद्मवेशीना एक बहु वचने ७ दमके ॥ शुक्सलेशीना एक बहुषचन दमके ॥सर्वत्र काश्चरम कोइश्वचरम ॥ यक्षेशी जीव, अप्रेशीनावे अचरम १॥ मनुष्य ते ते नावे चरम, अपेक्षा नोसकीनाथसहीवत् २॥ सिझ ते ते नाव यचरम, फेमके ते नावना पर्यायनु श्रनाशपणुं तेथी॥ ए ३ एकवचने, ने ३ वहुवचने, ६ दमक यया ॥ सर्व मळी २४७ दमक यया ॥ इति श्याहार ॥ ५॥ वे तु दृष्टिद्वार कहे ॥
समदृष्टि जीव समदृष्टि नावे चरम केमके समष्टिथी पमतो ते पुनधेि थचरमपणु ॥ नारकीथी मामी वमानिक सुधी ते ते नावे थचरमपणु २१॥ सिक ते ते नाचे श्थचरम थपड्याथोज २२, ए एकवचनना २५, ने बहुवचनना २२, सर्व मळी ४४ दमक थया ॥ मिथ्याष्टि जीव ते ते नावे कोई चरम, कोश्थचरम, थपेक्षा याहारकवत् १ ॥ एव नारकीथी मामी वैमानिक सुधी ते ते नावे कोइ चरम, कोइ थचरम् २५ ॥ ए एकवचनना २५, ने बहुवचनना २५, सर्व मळी ५० दमक थया॥ समामिष्याष्टि जीप ते ते नावे कोइ चरम, कोश् थचरम १॥ एवं नारकीथी मामी वैमा निक सुधी ते ते नाव कोइ घरम, कोथचरम १७ ॥ ए एकवचनना १७ दंमक, ने १७ दमक पहुवचनना ए ३४ दमक थया ॥ सर्य मळी १२६ दमक थया ॥ इति हटिधार ॥६॥ हवे सास, सयतद्वार कहे ते ॥ सयत जीव, सयतनावे कोई सिझगमनथी चरम, कोश थचरम १ ॥ एव मनुष्य कोई चरम, कोइ अचरम २॥ ए एकवचनना २ दमक, ने घा वचनना २, एव ४ दमक ॥ यसयत जीव, अमयत नावे कोश् घरम, कोश् थचरम १॥ TASHA एष नारकीथी मामी वैमानिक सुधी ते ते नावे कोश्ने चरमपणु, कोश्ने थचरमपणु जाणवु २५ ॥ ए एक वचनना २५, ने बहुवचनना २५, ए ५० दमक थया ॥ सयतासयत जीव, सयतासयत जावे कोइ घरम, ने कोऽ अचरम १ ॥ तिर्यच ते ते नावे पूर्ववत् २॥ मनु प्य ते ते जावे पूर्ववत् ३ ॥ ए एकवचने ३, ने बहुवचने ३, एवं ६ दमक थया ॥ नोसय- तनोयसयत जीप, ते ते नावे अधरम, केमके सिझने सिझपणाना पर्यायनु अनपगम (धनाश ) पणु ते तेथी १ ॥ एष सिझपणु एमज जाणवु ३ ॥ए एकवचनना २, ने पहुवचनना २, एव ४ दमके अचरमपणु ॥ सर्व मळीने ६४ दमक थया ॥ इति सयतहार ॥७॥ हवे भावमु कपाय द्वार कहे ॥ सकपायी जीव, सकपाय नावे कोई चरम, कोश अचरम १ ॥ नारकीथी मामी चैमानिक सुधी ते ते जाये कोश् चरम, कोश् श्रचरम २५ ॥ एव एफवचने २५, ने पहुचने २५, सर्व मळी ५० दमक यया ॥ एव क्रोधकषायीने ५० दमके ॥ एवं मानकपायीने ५० दमके ॥ मायाकषायीने ५० दमके ॥ खोनकपायीने ५० दमके को चरम, कोइ अचरम ॥श्वकषायो जीव, अकषाय नावे चरम १॥ मनुष्य ते ते नावे फाइ परम, केमके अस्पायीपणे युक्त मनुष्यपणाने जेवळी फरी नहि पामे, तेथपेक्षाप फाऽ थ्यवरम, कमक जे फरीने पामशे ते अपेक्षा २॥ सिद्र ते ते जावे थघरम ३ ॥ ए गमपचने ३ दमक, बहु यचने ३ दमक, एव ६ दमक ॥ सर्व मळोने २५६ दमक यया ॥ इति पाय द्वार ॥ ७ ॥ हरे नामु ज्ञान द्वार कहे ठे ॥ ज्ञानी, ज्ञानी नाये थचरम, फेमके जनधी थपभषे पुनीषे थचरमपणु ते माटे १॥ एव नारकीची मामी वैमानिक सुध) ते ते जाये कोऽ चरम, केमके ज्ञानयुक्त नारकीपणादि पुनर्माजना वजापथी। कोऽथच रम २० ॥ सिक त ते लावे थचरम, केमके थक्षीण झानन्नाव उतोज होय ते अपेक्षाए २१ ॥ ए एफ वचनना २१, ने बहुवचनना २१, एव ४२ दमक यया ॥ एव मतिझानी ते ते नाये एक रचने, बहुपचने ४० दमके ॥ श्रुत झानी ४० दमके ॥ श्यवधिकानी ३४ दमके ॥ मन पर्यपज्ञानी ४ दमके कोइ चरम, कोश् चरम, केमके केवलज्ञानप्राप्तिए फरी मति दानादि न पामे ते थपेक्षाए परम ।। चिसहानी ६ दफे यचरम ॥ यशानी जोव थ झान नारे फोड परम, केमके यहानने फरी नदि पामे ते थपेक्षाए । तेथी विपरीत जे श्रन्तव्य ते शानने नहि पामे ते अपेक्षाए को वचरम । ॥षव नारकीची मांगी वेमा निक सुधी, ते ते नावे कोश् चरम, कोश् श्रचरम २५ ॥ए एक वचनना २५, ने बहुवच नना २५, एव ५७ दक श्रया ॥ एव मतिश्थज्ञानना एक बहुवचने ५० दमके ॥ श्रुत अज्ञानना ५० दमके ॥ विनंगशानना ३४ दमके कोई घरम, कोश्श्शचरम ॥ सर्व मळीने ३५० दमक थया ॥ इति ज्ञानहार ॥ ॥ हवे दशमु जोग द्वार कहे ॥ सजोगी जीव, सजोगनावे कोइ चरम, केमके थजोगपणु पामवानी अपेक्षाए ॥कोश्यचरम १ ॥ एव नार- कोथी मामी चैमानिक सुधी, ते ते नावे कोश् चरम, ने कोइ थचरम २५ ॥ ए एकवचने २५, ने बहुवचने २५, एव ५० दमक थया ॥ एवं मनजोगीना एफ घटुवचने ते ते नावे ३४ दमके ।। एव वधनजोगीना एक बहुपचने ते से भावे ४० दमके॥ एव काययोगीना ५० धडके कोश् चरम, कोश् अचरम ॥ श्रयोगी जीव, अयोगनावे अचरम १॥ मनुष्य ते ते जावे चरम, केमफे मनुष्यने अयोगीपणे फरी मनुष्यपणानो बलान डे, ते अपेक्षाए २॥ सिक ते ते नावे थचरम, केमके ते नावनु नाश थवापणु नथी, ते अपेक्षाए ३॥
ए एक पचननना ३, ने बहुप चनना ३, एव ६ दमक थया ॥ सर्व मळी १० दमक यया ॥ इति जोगहार ॥१०॥ हये ११ मु उपयोगद्वार कहे ते ॥ सागारोषवत्ता जीव, सागा रोवराचा जावे यचरम, केमके ते नावनु श्रनाशपणु है, ते अपेक्षाए १॥ एव नारकीथी मामी वैमानिक सुधी त ते नावे कोश् घरम, केमके नारकादिपणे फरी सागरोवउत्तापणु न पामशे, ते अपेक्षाप ॥ तेथी विपरीत को श्वचरम ॥२५॥ सिफ से ते नावे चरम, फेमके सागारोवउत्तापणानो नाश नथी, ते थपेक्षाए ५६॥ ए एकवचने २६, ने पहुवचने २६ ॥ सर्व मळी ५२ दमक थया ॥ एव श्रणागारोवउत्तानां पण ५५ दमक, ते ते जावे सागारावउत्तानी परे जाणवा ॥ सर्व मळी १०४ दंडक थया ॥ इति उपयोगधार ॥११॥ इये १२ मु वेद छार कहे ॥ सवेदी जीव, सवेदी नावे कोश् चरम, केमके सवेदपणु फरीयो न पामे, ते थपेक्षाए॥ को थचरम ते फरीथी पामे ते अपेक्षाए १॥ पव नारकीथी मामी मानिक सुधी ते ते नावे कोश् चरम, कोइ थचरम, २५ ॥ए एकयचने २५, ने बहुव चने २५, सर्व मळी ५० यया ॥ एष स्त्रीवेदना एक बहुवचने ३४ दमके ॥ पुरुषवेदना एक यछुवचने ३२ दमके । नपुसक वेदना २४ दमके ॥ ते ते नावे कोश् चरम, कोश अचरम ॥थवेदी जीव,थवेदनावे श्वचरम ॥ मनुष्य थवेदनावे कोश्चरम, केमके थवेदपणे युक्त मनुष्यपणाने जे षळी फरी नहि पामे ते अपेक्षाए ॥ कोइ थचरम, केमके को फरी पामशे से अपेक्षाए ५ ॥ सिद्ध ते ते चावे थचरम ३॥ ए एक वचने ३, ने बहु वचने ३, एव ६ दमक यया ॥ सर्व मळीने १४५ दमक थया ॥ इति वेदधार ॥ १२ ॥ हवे १३ मु शरीरधार कहे ते॥ सशरीरी जोव,सशरीरनावे कोश् चरम, केमके सिझगमनथी फरी शरीर नहि पामे, ते थपेक्षाए ॥ तेथी विपरीत कोइ थचरम १॥ एव नारकीथी मामी वैमानिक सुधी, ते ते नावे कोश् चरम, केमके नारकादिपणे फरी शरीर नदि पामे, ते अपेक्षाए ॥ तेथो विपरीत को अचरम २५ ॥ए एक वचनना २५, ने बहुवचनना २५, एव ५० दमक थया ॥ एवं उदारिफ शरीरी ते ते नावे, एक बहुवचने २२ दमके ॥ एव वैक्रेय शरीरी एक बहुवचने ते से 'नाये ३६ दमके ॥ एव थाहारक शरीरी से ते नावे एक घछुवचने ४ दमके ॥ एव तेजस् शरीरी ते ते नावे एक बहुवचने ५० दमके ॥
पप कार्मण शरीरी ते तनाव एक यहुवचने ५० दमके कोश् चरम, ने कोर थचरम। घशरीरी जीव, यशरीरजावे चरम, केमके तेने सिझपणु ने तेषी ते भापर्नु अनाशपणु ठे, त थपकाये १॥ ए एफ पचने १, ने बहुवचन १, एव २ दमक थया ॥ सर्व मळीने २१४ दमक थया ॥ इति शरीरकार ॥ १३ ॥ इथे १४ मु पज्जत्तिकार कहे ॥५ पर्या प्तिए पर्याप्तिजीव पर्याप्सिनावे कोश् चरम, कोइ अचरम १॥ एष नारकीथी मांको मानिफ सुधी, ते ते नावे कोश् घरम, ने कोई धचरम २५ ॥ ए एक वचनना २०, ने बहुवचनना २०, पर्व ४० दनक पयास एष थाहार पर्याप्सिना ते ते नावे एक पछुवचने ५० दमके ॥ एव शरीर पर्याप्तिना एक बहुपचने ५० दमके ॥ एव इजिय पर्याप्सिना ५० दमके ॥ पध श्वासोच्छास पर्याप्तिना ५० दमके ॥ एव नापा मनपर्याप्सिना ४० भुमके काइ चरम, कोश् श्वचरम जावया ॥ ए २७ दमक थया ॥ ५ थपर्यातिए थपर्याप्ति जीव, थपर्याप्तिजावे कोश् चरम, कोइ श्वचरम १ ॥ण्य नारकीधी मामो वैमानिक सुधी, ते ते भाषे फोर परम, कोइ थचरम २० ॥ ए एक वचनना २७, ने घटुपचनना २०, एवं ४० दमक यया ॥ पव थाहार थपर्याप्सिना एक बहु पचने ५० दमके ॥ एवं शरीर थपर्याप्तिना ५० दमके ॥ ण्य प्रिय अपर्याप्तिना ५० दमके ॥ एव श्वासोझास थपर्याप्तिना ५० दमके ॥ एव नापा मन अपर्याप्तिना ४० दमफे कोश् चरम, काश्यचरम ॥ सर्व मळीने ५६० दमक थया ॥ इति पर्याप्तिधार ॥ १४ ॥ सर्व मळीने दमक २५७ थया ॥ गाथा ॥ जो ज पाविहिति पुणो, नाव सो तेण श्रचरिमो हो । थच्चत विजोगो जस्स, तेण नावेण सो चरिमो ॥१॥ जावार्थ-जे जे जावने फरीने पामे, ते ते नावे करी थचरम होय ॥जे नावनो थ- रयत पियोग, ते तेणे नाषे करी चरम होय ॥१॥ ॥ इति चरमाचरमना घोल सपूर्ण ॥ आहारक अनाहारकना वोल॥ अथ श्री थाहारक थनाहारकना बोल पन्नपणा पद २७ मांथी सख्या २॥ गाथा ॥ थाहार र नविय २ सन्नी ३, खेस्सा ४ दिहि ५ सजय ६ कसाए ७॥
नाण छ जोग ए पश्नोगे १०, वेदे य ११ सरीर १२ पजति १३॥१॥ इये प्रथम थाहार द्वार कहे ॥ समुच्चय जीव एफ वचन श्राभि को थाहारक ने कोइ यनाहारक, ते विग्रह गतिने विपे तथा केवल समुद्घाते तथा १४ मे गुणगये तथा सिकपणे थनाहारक होयातेथी, पर नारकीची मनोवैमानिक सुधी एक वचने जाणवु ॥ समु अय जीव घेछु वचन थाभि थाहारक ने थनाहारक छोय ते विग्रह गतिने विषे निगोद तथा। सिझ थनाहारक घणा होवाथी॥ नारकीना बहु वचन यानि३ नांगा, तेश्याहारक घणा २॥ थाहारक घणा ने थनाहारक एक २॥ ते नारकीमा १२ मुहूर्चनो विरह पके, विमछ गतिए को वखते एक उपजथा याश्रि॥ श्वाहारक घणा ने थनाहारक घणा, ते कोश् वस्खलन विग्रह गतिए घणा जीव उपजे ते थाश्रितएव यावत् वैमानिक सुधी जाण ॥ नवर एके पिय ५, समुच्चय थोधिकनी परे जाणया ॥१॥ इयें घोजु नव्य द्वार कहे ॥ नव्यसिरिफ एक बचन याधि थाहारक अनाहारक,ते युति पूर्ववत् ॥ एव नारकीची मामी वैमानिक सुधी जाणवु ॥ यह वचन थालि नव्यसिफिकमा श्रोधिक न एजियना दमकजिने नोगा॥
एय बनव्यसिधिक एक वचन थाश्रि, बहु वचन थाश्रिने जाणवु ॥ नोजव्यनोच नव्यसिडिक एक वचन थाथि एक थनाहारक ॥ एव सिझ पण यहु वचन थाभि अना हारफ ॥२॥ हवे बिजु सझी द्वार कहे ॥एक वचन थाभि सझी जीय, कोइ थाहार क, ने फोर थनाहारक, विग्रह गतिनी थपेक्षाए ॥सझीनु थायु वेदवाथी सझी शेष काल थाहारक, यावत् वैमानिक सुधी॥ यहु वचन थाथि सझीने विपे ३ जागा, वैमानिक सुधी। थसझी जीन, एक वचन थाभि कोइ थाहारक, कोथनाहारक ॥ एष नारकी यान, वाणव्यतर सुधी॥ घहु वचन थानि श्रसझी जीव, थाहारक ने अनाहारक घणा, एक नांगा ॥ असही नारकी पछु यचन आश्री ६ नागा॥ एव १० नवनपतिमा,६ एकैडि यमा थप्नगक ॥ ३ विगसें प्रिय, तियेच पचजियमा ३ नांगा॥ मनुष्य वाणव्यतरमा ६ जांगा॥ नोसन्नीनोयसनी मनुष्य, सिकमा एक वचने थाहारक ने अनाहारक ॥ बहु वचने नो सज्ञीनोयत्तशामा थाहारक, न अनाहारक समुद्घात श्राश्री घणा ॥ मनुष्यमा ३ जागा ॥ सिको थनाहारक घणा ॥ ३॥ धे चोधु सेश्याहार कई ठे॥ ससेशी तथा सखेशी नारकी थी मांझीधैमानिक सुधी, एक वचने कोइ थाहारक, कोश्श्थनाहारक॥ बहुवचन थाची स खशी, प्ण नीन कापात वेशीमा समुच्चय ने एकेंजियना ५ दमक वर्जिने, वीजामा ३ जागा खाने॥ बहु बचन थालि तेजु खेश्यामा पृषी पाणी वनस्पतिमा ६ नांगा, वीजा दवखोक मुधीना दानु तेमा श्यागमन ठे माटे ॥ शेप जीवोमा नांगा ३ लाने ॥जेने तेजुक्षेश्या होय तेने 3 नागा, शेपने नहि ॥ पद्म शुक्स खेश्या सियेच पंचेंजिय, मनुष्य, वैमानिकने विषे हाय ॥ एक वचन यानि थाहारक, बहु वचन थाभि नांगा ३॥ यक्षेशी जीप तथा मनुप्य तथा सिरू, एक वचन बहुश्चने अनाहारक ॥४॥ये पांचमु दृष्टि द्वार कहे ते ॥ समष्टि जीव कोश्याहारक, कोथनाहारक ॥३विगप्रिय समदृष्टिमा ६ नांगा ॥ सिक थनाहारफ ॥ शेपमा नांगा ३ खाने ॥ मिप्यादृष्टिमा समुच्चयजीवने पनिय वर्जिने, शे पा ३ जागा ॥समामिप्यादृष्टि जीर, थाहारक एकेंघिय,३ विगोपिय पर्जिने, वैमानिक सुधीमा एक यह वचने थाहारक ज होय ॥५॥ हवे ठतु सयति कार कहे ॥ संजत्ति मनुष्य ने समुथय जीव कोऽ थाहारफ, फोर अनाहारक, बहु वचने ३ नांगा ॥ असजत्ति XVE एक वचने कोश् थाहारक, कोइ थनाहारक ॥ वटु वचने समुच्चय जीवने एकेंपिय वर्जिने, शेपमा ३ भागा॥ सजतासजति समुश्चय जीष, पप्रिय तियेच ने मनुष्यमा एक बहु वचने थाहारव ॥ नासयतना असयसनोसयतासयत समुच्चय जीवने सिक एक बहु वचने थनाहारक ॥ ६॥ हवे सातमु कषाय द्वार कहे जे ॥ सकषायी जीव कोइ थाहारक, कोश अनाहारक, एव वैमानिफ सुधी, बहुवचने समुच्चय जीवने एप्रिय वर्जिने, शेषमा ३ांगा। काध कषायी जीवाने विपे एमज जाणवु ॥ नपर देवमा६ नागा केमके देवमा स्वजावयी खोज घड होय, क्रोधादि यह न होय तेथी, क्रोध कषायी एक पण खाने तेथी। मान कपायी माया कपायी देव नारकीने विषे ६ जागा, शेषमा समुच्चय जीवने एप्रिय वर्जिने त्रण मांगा खाने ॥ लोन कपायी नारकीमा ६ जागा, शेषमा जीव पकेंजिय वर्जिने ३ नांगा लाने ॥ अकषायी नोसझीनोयसझीनी परे जाणवा ॥७॥ इवे थाठमु झान छार कहे जे ॥ ज्ञानी एक वचने समहष्टिनी परे, मतिझानी भुत ज्ञानी, ३ विगोपियमा ६ जांगा, शेपमा ३ नांगा ॥ अवधिज्ञानी एक वचने तेमज बहुवचने तिर्यच प.प्रिय श्वाहा BREARREEKAमकाम:
रक ते पाजिय तियेचने विग्रहगतिने विषे नहि, स्यारे तेने गुण प्रत्यययी अवधिनो संजय गुणना असजवधी नहि ॥ वळी थावति पतित थयधिदेव अथवा मनुष्य तियेचने विषे उपजे तेषी, अवधिज्ञानी तां तियेचने अनाहारफनो योग न होय, शेष स्थानकने विषे ५ प प्रिय, ३ विगछिय धर्जितने विपे एकेक प्रते जागा ३॥तियेच पचेंजिय श्रा छारक, शेष जीवादिने विषे ३ नागा, जेने अवधिझान छोय तेने विषे ॥ मन पर्यवज्ञान मनुष्यने तथा समुच्चय दंगके होय ॥ एक यछुवचने थाहारक, विग्रह गस्यादि अवस्थाने घिपे मनःपर्यवज्ञाननो सत्नय नथी माट । केवलज्ञानी, नोसझोनोथसहीवत्, केवळज्ञान चिंतषणाने विष प्रण पद, सामान्यथी जीवपद १, मनुष्य २, सिर ३, सामान्यथो जोवपदे मनु प्यपदे श्याहारक तथा धनादारफ ॥ सिळपदे थनाहारक ॥ वहुवचने सामान्यथो जीवपदे थाहारक पण थनाहारक पण ॥ मनुष्यपद ३ नांगा पूर्वे देखाव्या, ते सिझपदे अनाहारक, पण समुच्चय थज्ञानी, मति श्रुत थझानी, एकवचन पूर्ववत् ॥ बहुवचने जीवपद एकेंशिय पृथ व्यादिने विप धादारक अनाहारक, शेषने विपे ३ नागा ॥ पिनगशानीने विषे एक बहुपपने तियेच पर्चेपिय, मनुष्य आहारक, विप्नंग शान सहितन विग्रह गतिए ॥ तिर्यच पचेंजिय मनुष्यने विषे उत्पत्तिनो असन्जय ले माटे॥शेष स्थाने एप्रिय विगो प्रिय वर्जितने विपेनांगा ३ ॥ ७ ॥ हवे नवमु योग द्वार कहे ॥सयोगीने विषे समुच्चय जीवने, एप्रिय वर्जिने, शेषर्मा ३ नांगा ॥ मनयोगी वचनयोगी समामिथ्यादृष्टिनी परे, नवर वचनयोगो३ विगोपियने, कायजोगने विषे समुच्चय जीवने एप्रिय वर्जिने, शेषमा नागा ३ ॥ अजोगी जीव मनुष्य, सिक, अनाहारक ॥ए। हवे दशमु उपयोगहार कदे ले ॥सा कार थनाफार उपयोगने विषे जीव एकेजिय वर्जिने, शेषमा नांगा ३॥ सिक अनाहारक ॥ १० ॥ हवे अग्यारमु वेद द्वार कहे ॥ सवेदने विषे समुच्चय जीवने, एप्रिय वर्जिने, शेपमा ३ नांगा ॥ स्त्री पुरुषवेदने विषे एकवचने तेमज वहुवचने जोवादिने विषे एकेक प्रते ३ मांगा ॥ नपुसक वेदने विषे जीव एप्रिय वर्जिने प्रण नागा ॥जीवमा पजिय शुहारक घणा थनाहारक घणा, थवेदी जेम केवळी, एक बहुवचने, जीवपदे मनुष्य पदे एकवचने थाहारक, कोऽश्वनाहरक, पहुषचने जोत्रपदे थाहारक पण, श्वनाहारक पण, मनुष्यने विपे नांगा ३ ॥ सिझने विषे तो थनाहारक ॥ ११ ॥ हवे बारमु शरीर धार कद्दे ॥ सशरीरन विप समुच्चय जीवने एडिय वर्जि, शेषमा ३ नांगा ॥ उदारिक शरीरन विपे समुच्चय जीवने मनुप्यने विषे ३ जागा ॥ शेपने विषे थाहारक अनाहा रफ नहि ॥ वैकेय थाहारक शरीरी एक बहुवचने थाहारक थनाहारक नहि, जेने वैकेय थाहारक सन्नये तेज जाणवा, पीजा नहि ॥ नारकी, नवनपति, वानकाय, तिर्यच पचेंजिय, मनुन्य, व्यतरे, ज्योतिप, वैमानिकने विपे थाहारक नहि ॥ मनुष्यने विपे होय ॥ तेजस् फार्मण शरीरने थिपे एक यचने कोइ याहारक, कोइ थनाहारक, यहुवचने समुरचय जीवने पजियने विपे थानगक ॥ शेपमा ३ नागा ॥ अशरीरी सिझमा जीवने, सिफमा एक पहुरचने थनाहारक ॥ १२ ॥ हवे तेर# पर्याप्तिहार कहे ठे ॥ प्रथम ४ श्राहारादि पर्याप्तिने विपे समुच्चय जीवने, मनुष्यने विपे ३ जागा॥ शेष थाहारक नापा मन पर्याप्ति पचेंजियने होय, योजान न होय ॥ थाहारक पर्याप्तिए थपर्याप्त श्वनाहारक एक ने बहु वचने ॥ शरीर पर्याप्तिए थपर्याप्त कोइ थाहारक, कोइ थनाहारक ॥ उपरनी। पर्यासिए थपर्याप्त नारकी, दव मनुप्यने विपे ६ जागा ॥ समुच्चय जीपने एप्रिय वर्जिने शेपने विषे ३ जागा ।। जापा, मन पर्यातिने विप समुचय जीपने पंजिय तिवैषमा नागा ३॥ नारकी देव - मनुप्यने विपे६ जागा ॥ सर्व पदे एक बहुवचने जीवादि दमक कहेयो॥ जेने जे होय ते पुठवू, जेने जे न होय ते न पुब्वु ॥ यावत् नापा मन पर्याप्तिये अपर्याप्त नारकी देव मनुष्यने विपे ६ नांगा ॥ शेषने विष ३ जागा ॥ १३ ॥ ॥ इति थाहारक थनाहारकना बोल सपूर्ण ॥ बधिशतकना बोल ॥ श्रय श्री नगवती शतक २६ मांधी वधिशतकना बोश खिम्यते ॥ गाथा ॥ जीवा य १ खेस्स २ पक्खिय ३, दिहि य ४ नाण ५ चनाणे ६ ॥ सपणा य य उ कसाय ए, जो १० वयोग ११ एगारस ठाणा ॥१॥ ए ११ द्वारनी गाथा कही ॥ हवे ११ उद्देशानो गाथा कहे छ । थणतरोधवग्नादि चत्वारि ४, परपरोववन्नादि तदेवय ४ ॥ नहिया १ परिमा चरिमे य २, ३३ एगारस उद्देशा ॥१॥ समुच्चय दमकथी मामी चोवीसे दमकमा जे ठकाणे जेटखा षोख खाने तेनो यत्र या प्रमाणे- पल रष्टिमान | अहान सबा | वेदपाय | योमारपयो-सर्व मी २ ५ग २ २ ४ ICIA समुपप दापमा २ २ . २ ५ १ २ ४ २ ४ ४ ४ ४ २ ४ ४ ४ ज समुपप | मेश्या २५ सपना नाम मोप ८ ८ ७ नारशीना १ दरकर्मा १ ४ १. मरनपति,राणम्पवर, परफमा ५ पोतिपी, देवमोफ सपोमा ? ३ पी १२ ऐरलोक सुपीमा १ २ १ ५ अनुर पिपानां १ पृप्ती पाणी, पनस्पति ए. देरामा घेउ पाउ एकेरफा परिगलंदिपना देकमा लिया पदिपना दरममा बगप्पना दरमा ३ २ पेयकमा ३२ २ ४ ४ ०८ . ३ ० ३ ३ ४ २ है २ . २ २ १ १ । ४ २ २ ૨ . ७ . २ ४ ४ ५ ४० है प ૨ . १ ८ २ ૨ हवे बधीना ४ नांगा कहे डे ॥ घी, षषर, घधिस्सश्वधितो इयो, वांधे , बांधशे ।।। पधी, पंधर, न घिस्सइ-बांधतो वो, पांघे डे, पांधश नहि शावधी, न वधर, घधिस्स, पांधतोहयो, धाधतो नथी, बांधशे ३॥ वधी, नवधर, नवंघिस्सर-पांचसो छयो, पांघतो नयी, घांधशे नहि ५ ॥ ए वधी प्रण काल थाधिबे, तेमा प्रथम पापकर्म (अशुन कर्म) वा धया थाधि २५ दमफा जे जे घोस खाने तेमां कोण २ नांगा खाचे ते कहे ॥ समुच्चय जीवमा ७ पोल खाने, तेमा समुच्चय जीष १॥ सखेशी २॥ शुक्सखेशो ३ ॥ शुक्रपक्षी ४॥ समष्टि ५ ॥ सनाणी ६ ॥ मतिझानीयादि ज्ञानी ४ ॥१०॥ नोसन्नावाचा ११ ॥ थवेदी १५ ॥ सकपायी १३ ॥ खोज फषायी १५ ॥ सजोगी १५ ॥ मनजोगी १६ ॥ वचन जोगी २७ ॥ कायजोगी १०॥सागारोवत्ता १ए ॥श्रणागारो वउत्ता २०॥ ए २० घोलमा ४ मांगा लाने ॥ थखेशी १॥ केवधी २॥ अजोगी३॥ ए३ घोसमा एक चोथो नागो खाने ॥ थफपायीमा २ नांगा खाने ॥त्रीजो ने चोथो ॥ शेष बोस २३ रसा, तेमा पहेलो ने वीजो ए २ नागा साजे ॥ नारकोथी मामी मनुष्य पनि वैमानिक सुधी २३ दकर्मा जे जे ठेकाणे जेटला जेटला घोल बाजे, तेमो पहेलो बीजो प १ नागा खाने॥ मनुष्यमा समुच्चय जीवनी परे नागा उतारवा ॥ हने ज्ञानावरणीय १ ॥ दर्शनावरणीय २॥ नाम ३ ॥ गोत्र ४ ॥ चतराय ५॥ ए ५ कर्मनो जेगो अधिकार कहे ठे ॥ समुच्चय जीयमा २४७ वोख पाने, तेमा समुच्चय जीव १ ॥ सखेशी २॥ शुक्रवेशी३ ॥ शुक्रपती ४ ॥ सम फितरष्टि ५॥ सनाणी ६॥ मस्यादि ४ ज्ञानी १० ॥ नोसन्नापत्ता ११ ॥ थवेदी १२ ॥ सजोगी १३ ॥ प्रण जोगी १६ ॥ सागारोवउत्ता १७ ॥ थणागारो वलत्ता १७ ॥ ए १७ घो- खमा ४ नागा साजे ॥ शखशी १॥ अजोगी २॥ केवजी ३॥ ए ३ मा एक धोयो नागो खाने ॥धकपायीमांत्रीजो ने चोथो वे नांगा खाने ॥ शेप बोल २५ रमा, तेमा पहेलो ने पोजा नांगो खाचे ॥ इवे मनुष्य वर्जिने २३ दमकना सर्व वोलमा पहेलो ने बीजो ए नांगा साजे ॥ मनुष्यमा समुच्चय जीवनी परे नागा उतारवा ॥ इवे वेदनीय कर्म पापवा थानि कहे उ ॥ समुच्चय जीवमा ४७ योख बामे, तेमा समुच्चय जीव १ ॥ सखेशी २॥ शुमावेशी ३ ॥ शुक्रपती ॥ समकितष्टि ५॥ सनाणी ६॥ केवलशानी ७॥ नोसना- धनप्ता ॥ श्रवेदी ए॥धकषायी १० ॥ सागारोवत्ता ११॥ थणागारोवनचा १२ ॥ ए १२ घोलमा ३ नांगा खाने विजो नागो वर्जिने ॥ विजो नागो घेदनीय कर्मना षष थाभि मूखया ले ज नहि ॥ अशी १॥थजोगी ॥ ए २ मा १ चोथो नांगो खाने शेष ३३ याल रसा, तेमा पहेलो ने बीजो थे नांगा पाने ॥ नारकीथी मामी मनुष्य वर्जिने २३ दमकमा पहेलो ने बीजो पे नागा लान ॥ मनुष्यना दमकमा समुच्चय जीवनी परे जांगा जाणवा ॥ मोहनीय कर्मनो विस्तार शोधिक अशुन्न कर्मनी परे जाणवो ॥ हवे थायुष्य फर्म बांधवा थात्रि कहे ले॥ समुच्चय जीवमा ४७ बोस लाने, तेमां शशी१॥ केवली २॥ अजोगी ३॥ ए ३ मां एक चोयो नांगो खाने ॥ समामिप्यात्वदृष्टि १॥ श्रदी२॥ अकषायी ३॥ ए प्रणमा प्रोजो ने चोयो ए घे नागा सान्ने ॥ कृष्णपक्षीमा पहेलो ने त्रीजो ए ए नांगा खाने ॥ मनःपर्यव शानो १ ।। नोसनावळत्ता ॥५२ मां १-३-४ ए ३ जागा खान्न ॥ शेष ३० चोल रझा तेमा चार नांगा लाने ॥ नारकीमा कृष्ण पही १॥ कृष्णलेशी ॥५२ मा पहेला ने प्रोजो ए नांगा लाने ॥ समामि प्यात्व दृष्टिमा त्रीजी ने चोयो ए २ नागा खाने ॥ शेष ३२ मा ४ नांगा जाने ॥ हवे दश नयनपति ॥ वाणव्यतर ॥ ज्योतिषी ॥ वैमानिक ॥ १२ देवसोक ॥ ए अधेयकमा ॥ पप्णपक्षीमा पहेसा ने त्रीजो ए २ जांगा खाने ॥ समामिष्यात्व दृष्टिमा विजो ने चौथो प२ जागा खाने, पण एटम्मु विशेप जे ए प्रेषेयकमा समामिथ्यात्व दृष्टि नधी ॥ शेप जेटखा जेटसा योस जे जे ठेकाणे रक्षा, तेमा । नांगा खाने । चार अनुत्तर पिमानमा २६ घोल लाने, तेमा ४ नांगा लाने ॥ सर्वार्थ सिफा २-३-४ ७३ जागा खाने ॥ पृषी १ ॥ पाणी २॥ वनस्पतिमा २७ पोल खाने तेर्मा कृष्णपक्षीमा १-३ ए र जागा खाने, तेजुझेशीमा १ विजो जागो लाने, शेष २५ योलमा ॐ नागा साजे ॥ तेउ पाठमां वोष २६ लाने, तेमा पहेलो ने जिो ए जागा झांजे॥ त्रण घिगसेंपियमा योस ३१ साने, तेमा समदृष्टि १॥ ज्ञान ३॥ ए ४ घोसमा एक विजो नांगो खाने, शेप २७ योलमा १-३ ए २ नांगा साने ॥ तिर्यच पजियमा बोस ४० खाने, तेमां कृष्णपक्षीमा १-३ ० २ नागा सामे ॥ समामिप्यावष्टिमा विजो ने चोयो ए २ नांगा जाने ॥ समष्टि १॥ ज्ञान ४ ॥ ए ५ बोलमा १-३-४ ए ३ नांगा खाने, शेप वास ३३ मा ४ जांगा सामे ॥ मनुष्यमा ४७ घोल साने ॥तेमा अखेशी १॥ के- पक्षी २॥थजोगी ३ ॥ ए ३ मा एक चोथो नांगो खाने ॥ कृष्णपक्षीमा १-३ ए २ नागा बाजे ॥ समामिप्यास्वदृष्टि १॥ थवेदी २॥ अकषायो ३॥ ३ मा ३-४ ए २ जागा लाने ॥ समदृष्टि १ ॥ शान ५॥ नोसन्नावगत्ता ७॥ ए ७ पोलमा १-३-४ ए ३ जागा लाने ॥ शेप ३३ पोखमा ४ नांगा लाने ॥ इति प्रथम श्रोधिक उदेश समाप्तः ॥१॥ दवे थनतरोववन्नगादि ४ उवेशा कहे ठे ॥ अनतरोववन्नगा ते एक समय उप ज्यान थयो होय ते १ ॥ धनतरोगाढगा ते एक समय थाफाश क्षेत्र स्पर्शाने थयो होय ते २॥ अननरोहारगा ते एक समय थाहार लीधाने जेने थयो होय ते ३ ॥ श्रणतर पाचगा ते एक समय प्रजा वांग्याने जेने थयो होय से ५ ॥ ए ४ उदेशा ११ घार २५ दमक ए थधिकारे करी यताये ठे ॥ पाप कर्म (अशुज कम) घाधवा यानि समुच्चय जी वा ४७ घोल खाने, रोमाषी थलेशी १॥ समामिथ्यात्वदृष्टि २॥ मन पर्यवहान ३ ॥
क्यलझान ४ ॥ नासनावडत्ता ५ ॥ श्रयदी ६ ॥ अकपायी ॥ मनजोगी॥ वचनजोगी ॥ ॥ वजागी १० ए १० बोस प्रथम समये न होय॥ शेप ३७ वोट राय, तेमां २ नागा साले, ते पहेलो ने वोजा ॥ नारकोयो मामो १२ देवलोक सुधीमा जे जे काणे जेटला जटला घोल लाने तेमांथी समामिण्यात्वाप्ष्टि १॥ मनजोग ॥ वचनजोग ३॥ ए प्रण त्रण बोस जवा, शेप जटला जेटला घोस रमा तेमा पहेला ने बीजो नांगो लाने ॥ नव मेवयक, पाच अनुत्तर विमानमा जेटला जेटला चोल लाने, तेमाची वे घे बोल वर्जवा ॥ मनजोग १॥ वचनजोग २ ॥ शेप जेटला २ वोख रमा तेमा पदेखो ने योजो नांगो बाजे ॥ पांच स्थावरमा जटखा घास खाने, तेमां घे नांगा खाने ते पडेखो ने वीजो ॥त्रण विगलें प्रियमाथी १ वचनजोग वन्यों, शेष ३० गोल रमा तेमा वेलांगा खाने, पहेलो ने बीजो ॥ तिर्यच पनेंशियमाथी ५ पोल वा ॥ समामिथ्यात्वदृष्टि १॥ विनगझान २॥ अवधि झान ३ ॥ मनजोग ४ ॥ वचनजोग ५ ॥ शेष ३५ घोल रमा तेमा २ नांगा खाचे, पहेखो ने बीजो ॥ मनुष्यमाथी २१ योल ना ॥ अलेशी १॥ समामिप्यास्वरष्टि २॥ विजग- झान ३॥ मनापर्यवज्ञान ४ ॥ केवलकान ५॥ नोसन्नापनचा ६ ॥ अवेदी ७ ॥ अक- पायी ॥ मनजोग ए ॥ वचनजोग १०॥ शलेशी ११ ॥ शेष पोल ३६ रमा सेमा २ जागाखाने, पहेलो ने बीजो ॥एसमुच्चय अशुनकर्मचाभि कमु॥तेम ज्ञानावरणीय १॥दर्श नावरणीय २॥ वेदनीय३॥ मोहनीय ४॥ नाम ५॥ गोत्र ६॥श्रतराय ॥५७ कर्मनो विचार थोधिकनी परे जाणवो॥हये थायुप्यकर्म बांधवानो थधिकार कहे ॥मनुष्य वर्जि २३ दमक- मा जे जे बोस खाने , ते ते सर्व योलमा त्रिजो नागो खाने॥ मनुष्यमा कृष्णपक्षी एक योलमा प्रिजो नागो खाने ॥ शेष ३५ बोसमा नागा खाने ते विजो ने चोथो ॥ ए रीते शनतरोववन्नगादि ४ उद्देशा जाणवा ॥ इति पाचमो उदेशो समास ५॥ हवे पर परोवपन्नगादि ४ उदेशा कन्दे न ॥ परपरोववन्नगा ते घणा समय उपने पया हाय ते१॥ परपरोगाठगा ते घणा समय श्राफाश के स्पर्शाने थया होय ते ॥ परपरोधाहारगा ते घणा समय थाहार बीघाने थया होय ते ३ ॥ परपरोपजात्तगा ते घणा समय प्रजा घांच्याने थया होय ते ४ ॥ ए ४ नमेशाना ११ हार, २५ दमक, ए पापकर्मषधन थधि- .
कार सर्व व्यकवता प्रथम शोधिक देशानी परे जाणषी ॥ नवर पृथ्वी १॥पाणी ॥ वनस्पति ३ ॥ प ३ दमकमा २६ वोस साले कहेवा ॥ एक तेजुवेश्या वर्जि, प्रण विग- सेंजियमा २७ घोस पाने कठेवा ॥ ते ३१ योखमाथी समकितदृष्टि १॥ प्रण ज्ञान ४ ॥ ४ योल वर्जया ॥ ५ ४ उदेशा थया ॥ इति नषमो उद्देशो समाप्त' ॥ ए ॥ इव दशमो परमनो उदेशो कहे उ ॥ ए उदेशाना ११ घार, २४ दफ, ए पापकर्म वधनाधिकार सर्व व्यक्यता प्रथम थोपिफ'मेशानी परे जाणवी ॥ नवर मनुष्यपदे श्वायुषनी अपेक्षाये सामान्यधी ४ भागा कसा ठे, तेमा चरम मनुष्य थाभि चोयो नांगो सनये ॥ एम न मानीए तो चरमपणुं न संनये ॥ एम बीजे पण विशेष जाणवु ॥ इति दशमो चरम उ शो समाप्तः ॥ १० ॥ इवे ११ मो धघरमनो उदेशो करे ॥ए उदेशाना, ए पापकर्म वधननो अधिकार, २४ दमक, २१ घारथी पतावे वे ॥ पापफर्म मोहनीय फर्म बांधवा था- मि समुच्चय जीवमा ४४ चोल साने, ते ४ पोखमांधी अजेशी १॥ केवखानी॥ जोगी ३॥ ए ३ पोल वा ॥ ए ३ ने ठेखो नव फरवापणु ठे माटे, प ४४ बोलमा सम वय जीव १ ॥ सोशी २॥ शुक्रवेशी ३॥ शुक्रपक्षी ४ ॥ समकिती ५ ॥ ज्ञान ५॥ ए १० ॥ नोसन्नावनचा ११ ॥ थवेदी १५ ॥ सकषायी १३ ॥ खोज कषायी १५ ॥ सजोगी १५ ॥ मनजागी १६ ॥ वचनजोगी १७॥ कायजोगो १७॥ सागारोवनचा १ए । घणागारोवत्ता २०॥ ए २० घोलमा १-३-३ ५३ चांगा खाने थकवायीमा एक विजो नांगो खाने॥शेषश्३ घोल रखा तेमा१२ए नांगा लाने॥नारकोथी मामी मनुष्य वर्जिने वैमानिफमां ठेठ ४ अनुत्तर विमान सुधीमा जे जे ठेकाणे जेटला जटेक्षा बोस साने तेमा १-२ ए २ जागा लाने ॥ मनुष्यमा ४४ बोस खाने, तेमा समुच्चय जीवनी परे जे जे यो खमा जे जे चांगा कसा ले ते ते जागा कहेवा ॥ हवे आयुष्य वर्जिने ज्ञानावरणीयादि ५ कर्म घांधवा थामि समुच्चय जीवमा व घोल मान्ने । तेमाथी पूर्वे २० घोल वा हता तेमाथो सकपायो २ ॥ लोज कषायी २ ॥ ए २ वोख वा, शेष २७ कोष रमा तेमा १-२-३ ए ३ नांगा खाने ॥ अकपायीमा १ विजो नांगो खाने, शेष २५ वोल रक्षा तेमा २-२ ए २ नांगा साने ॥ नारकीची मामी ४ अनुत्तर विमान सुधीमा २-५ एर नागासाने ॥ मनुष्यमांसमुच्चय जीवनी परे जाणवु ॥ इधे वेदनीय कर्म यानि समुच्चय जीवथो मामो ४ थनुत्तर विमान सुधीमांजे जे ठेकाणे जेटला जेटसा वोख लाने , तेमा १-२ ए ये नागा पाने॥ हवे यायुष्य फर्म वांधा थाभि समुच्चय जीवमा ४४ योस साने तेमाथी समामिप्यास्य दृष्टि १॥ थवेदी २॥ थकपायी ३ ॥ ए ३ मा १ त्रिजो नांगो साजे, शेप १ वोल रमा तेमां १-३ ए ये जागा खाने ॥ नारकीथी मामो पृष्यो, पाणी, वनस्पति, ३ विगजिय, तथा मनुष्य वर्जिने वैमानिकमा ४ अनुत्तर विमान सुघीमा जे जे काणे जेटसा जेटला पोल खाने, तेमांची एक समामिथ्यात्व दृष्टिमा एक त्रीजो जागो खाने, शेप योख रमा तेमा १-३ ए ये जांगा लाने ॥ पृषी, पाणी, वनस्पतिमा २१ थोख खाने, तेमाथी एक तेजुखेशीमा प्रिजो नागो खाने, शेष २६ घोल रमा तेमा १-३ प वे नागा साजे ॥ प्रण विगसेंशियमा ३१ चोस साने, तेमांथी समदृष्टि । ॥ ज्ञान ३ ५४ घोसमा एफ प्रिजो नांगो साने ॥ शेप २७ चोल रहा तेमा'-३ ए २ प्नांगा खाने ॥ मनु प्यमा जे जे पोखमा जे ज नागा बाने, से समुच्चय जोपना दमकनी परे जतारवा ॥ इति अगीयारमो अचरम डोशो समास ॥११॥ इति यधिशतकना वोस सपूर्ण ॥ समवसरणना बोल ॥ --- अथ श्रीनगवती शण ३० माथी समयसरना चोख लिस्पते ॥ गाथा ॥ जीवाय १ खेस्स २ पक्खि य ३, दिहि य ४ नाण ५ थनाणे ६ ॥ समाय ७ वेय । कसाय ए, जोगु १० वयोगे ११ एगारस वगणा ॥१॥ ए २१ गया, वोष ४, दमक १४ थने समुन्वय १, ए दमक २५, उपर उतारवा, तेनो विचार कहे ।।
२५ वरना नाम निवि सिश्या पक्ष रष्टिमान महान ६ हा पेदपाय जोगाउपयोग सर्व २ 4 A ६ २ ४ समुषप नीरा ४ ४ २ २५ ४ २ ४ ३ २ १ २ २ २ و مام ||--| | ه م ) ء २८ ७ नारफी २ १० मरनपति,पणमेवरमा ? ५.२ ३४ ज्योतिपोपी,पहसारदेवसोम्सपो १२ २३ ३ मापी १२ देशको सुपो २३ ९यक्रमा २ ५ मनुपर निपानमा १२१ पृप्ती, पाणी, पनस्पतिमा तेराउमा ३ विगामेंद्रियमा निगर पद्रिया २ ४ ५ 010 १२ २६ . ४ २ २ ४ २ २ २ २६ ० २ २ ४ ૨ २ २ . ४ ४ २ ५ '७ २ ८ ૨ ४ हवे समवसरण ४ ॥ क्रियावादी १॥ थक्रियावादी र ।। श्रज्ञानवादी ३॥ धिनयवादी ४॥ ए ४ समवसरण उपर 19 योस उतारया ॥ समुच्चय जीवमा याल लाने सेमा गणपक्षी १ ॥ मिप्याटि २॥ यज्ञान ४ ॥ए ठ घोलमा क्रियावादी वर्जिने ३ समवस रण लाले, थने अखेशी १॥ समहति ॥ ज्ञान ६॥ एष ७॥ नोसनावळत्ता ए॥श्रवेदी ॥१०॥ यकपायी ११ ॥ थजोगी १२ ॥ ए १२ घोलमा समवसरण १ कियावादोन लाने ॥ समामिच्यात दृष्टिमा समवसरण र साने ते अज्ञानवादी १॥ विनयवादी ३॥ शेप चोल २७ मा समवसरण लाने ॥ ए पहेसु समुच्चयनु हार थयु ॥ १॥ हवे नारकीमा ३५ पोल खाने तेमा कृष्णपक्षी १॥ मियादृष्टि२॥ थज्ञान ४॥ ५ ६ चोलमा क्रियावादी वर्जिने ३ समवसरण खाने ॥ समष्टि १॥ ज्ञान ॥ ५ ५घोलमा समवसरण एक क्रिया पादीनु साजे । समामिथ्यात्व हटिमा समवसरण ५ झाले ते अज्ञानवादी १ ॥ विनय- वादी २ ॥ शेप योस २३ रमा तेमां समवसरण ४ लाने ॥ ए नारकीनु वीजु द्वार थयु ॥२॥ दवे नवनपति वापन्यतरमा ३७ घोल बाजे तेमा कृष्यपक्षी १ ॥ मिपाव दृष्टि ॥ श्रझान ४ ॥ए ६ योलमा क्रियावादी वर्जिने ३ समवसरण लाने ॥ समष्टि१॥ ज्ञान ४॥ए ५ घोषमा १ क्रियावादीनु समवसरण लाने ॥ समामिप्यास्व दष्टिमा समवसरण घे खाने से अज्ञानवादी १॥ विनयवादी १॥शप २५ योसमां समवसरण ४ लाने॥ए नधनपति वायव्यतरतुं पोजु घार थयु ॥ ३॥ इवे ज्योतिपीने प्रथम २ देवसोकमा ३४ पोल पाले तेमा पूर्वाक्क ६ घोलमा समवसरण ३ लाने ॥ पूर्वोक ५ चोसमां समवसरण १ खाने । सेमामिष्याप्ठिमा यज्ञानवादी १॥ विनयवादी ५॥प घे समवसरण खाने । शेष बोस १५ मां समवसरण ४ लान ॥ ए ज्योतिपीनु चौघु हार थयु ॥ वे विजा देनसोकयी पारमा देवलोकमुधीमा ३३ घोष खाने तेमा पूर्वोक्त ६ घोसमां तथा ५ वोधमा सथा समामिप्यादृष्टिमा पूर्ववत् समवसरण खाने ते उतारवा ने शेप २१ योलमा ४ समवसरण लाने ॥ ५ ५ मु धार धयु ॥ एवे ए प्रेवेयकमा ३५ बोल खाने तेमा पूर्षो क ६ वोसमा तथा ५ वोलमा पूर्ववत् समवसरण खाने ते उतारपा ॥ शेष १ घोल रक्षा सेमा ४ समवसरण खाने ॥ ए ६ ई हार घयु ॥६॥ श्वे ५ अनुत्तर विमानमा २६ घोस खाने तेमां समवसरण एक क्रियावादीनुं साने ॥ ए ७ मुहार थयु ॥ ॥ इव पृथ्वी पाणी वनस्पति ए ३ मा २७ पोल खाने ते सर्वमा वे समवसरण लाने ते थक्रिया वादी १ ॥ अज्ञानवादी २ ॥ ए ७ मु घार थयु ॥ ७ ॥ हवे तेज १ पाठ २ ए वेमा २६ वोल खाने ते सर्वमां के समवसरण साने ते पूर्ववत् ॥ ए ए मु हार थयु ॥ छधे प्रण विगहें जियमा ३१ योस खाने ते सर्वमा समवसरण साने ते पूर्ववत् ॥ ए १७ मुहार घयु ॥ १७ ॥ हवे तियेच पचेंजियमा ४० बोल साने तेमा ६ घोलमा ३ समवसरण लाने ते पूर्ववत् ॥ समदृष्टि १ ॥ ज्ञान ४ ॥ ए ५ योसमा समवसरण १ क्रियावादीनु लाने ॥ समामिष्यास्वदृष्टिमां समवसरण २ लाने ते पूर्ववत् ॥ शेष २७ बोल रझा तेमा समवसरण ४ साजे ॥ ए ११ मु घार थयु ॥ ये मनुष्य पंचेंजियमा ४७ बोल खाने तेमा पूर्वोतं ६ घोप्तमा ३ समवसरण लाने पूर्ववत्॥ अलेशी १॥ समहप्टि॥ ज्ञान ६, ए ७॥नोसन्नाव उत्चा ए ॥ अवेदी १० ॥ यकषायो ११ ॥ श्याजोगी १५ ॥ ए १५ वोलमा समवसरण क्रियावादीनु लाने ॥ समामिप्यादृष्टिमा समवसरण २ खाने ते पूर्ववत् ॥ शेष बोस श्रया तेमा समवसरण ४ लाने ॥ ए १५ मु छार थयु ॥ इथे थायुष्यना वध थाभि कहे ठे। समुच्चय जीवमा ५७ पोल खाने तेमा कृष्णपक्षी १ ॥ मिष्याष्टि२॥ वज्ञान ॥ प ६ योखमा समघसरण ३ खाने ॥ ते ४ गतिनु थायुष्य वांधे ॥ श्वश्वेशी १॥ श्रकपायी ॥ समामिथ्याष्टि ३ ॥ केवखनाणी ४॥ चपेदी ५॥श्वजोगी ६॥ ए न बोलवाळा श्रायुष्य घधि नहि ॥ समदृष्टि २ ॥ ज्ञान ४॥ ए ५ योखपाळा घे गतिनु थायुष्य घांधे तेमनुष्य ने देवनु॥ मन पर्यवज्ञानी २॥ नोसन्नाषउत्ता २॥ एश्योखवाळा १ देवगतिनु थायुष्य घांधे ॥ फूषण १ ॥ नोस २॥ कापोत ३ ॥ ए ३ वेश्यामा समवप्तरण ४ लाने तेमा क्रियावादी एक मनुष्य गतिनु आयुष्य वांधे ने शेप ३ समवसरणवाळा ४ गतिनु श्रायुष्य घांध ॥ तेजु १॥ पन २॥शुक्स ३॥ ३ खेशीमा समवसरण ४ साने॥तेमा क्रियावादी मनुष्य ने देव ए घे गतिनु थायुष्य वांधे॥ शेष ३ समवसरणपाळा एक नारकी वर्जिने प्रण गतिनु थायुष्प वधि ॥ शेष १२ बोल रहा तेमां समवसरण ४ खाने तेमा क्रियाशदी मनुष्य ने देव ए धे गतिर्नु घायुप्य बांध थने नारकी देवता क्रियावादी होय ते मनुष्यनु श्रायुष्य चाधे ॥शेष ३ समरसरणवाळा ४ गतिनुं वायुष्य यांधे ॥ हवे नारकी नवनपति वाणव्यतर || भ्योतिषी तथा पहसा देवलोकथी मामो भावमा दवसोक सुधीमा जे जे ठेकाणे जेटला जेटला योख लाने तेमा कृष्णपक्षी १ ॥ मियादृष्टि २॥ अज्ञान ४ ॥ ए ६ घालना होय ते, मनुप्य ने तियेच ॥ २ गतिनु थायुष्य घाधे ॥ समदृष्टि १॥ ज्ञान ४ ॥ ए ५ घोलना हाय ते १ मनुष्य गतिनु श्रायुष्य घधेि ॥ समामिथ्याष्टिवाळा थायुष्यना अबधक, शेष योस जेमा जेटना जेटला साने ते तेमा क्रियावादी एक मनुष्यगतिर्नु थायुष्य याधे ॥ शेष ३ समवसरणवाला मनुष्य ने तिर्यंच प ये गतिनुयायुष्य बांधे। नवमा देवलोकथी मामी सर्वार्थसिक सुधीमा जे जे ठेकाणे जेटला जटला याल लाने ते ते सर्व समवसरणवाळा Iपक मनुष्यगतिनु थायुज्य बांध ॥ समामिथ्यात्वदृष्टिबाळा थायुज्यना यवधक जाणवा ॥ ॥ द्वार थयां ॥ ७ ॥ हवे पृथ्वी १ ॥ पाणी २॥ वनस्पति ३॥ए ३ मा २७ यो साने ठे तेमा एक तेजुखेशी थायुध्यना अवधक, शेप २६ बोलबाळा मनुष्य १॥ तियेच २॥ एघे गतिनु थायुष्य वांधे ॥ ए 0 मु द्वार थयु ॥ ॥ हवे तेज १ ॥ वाउ २॥ ए वेमा २६ पोल खाने ते सर्व १ तियेच गतिनु वायुष्य घांध ॥ ए ए मुंहार थयु ॥ ॥ वे त्रण विगोप्रियमा ३१ पास लाने तेमा समकितहष्टि १॥ ज्ञान ३॥ ए४ बोलवाळा श्रा युष्य न वाधे, शेप २७ वोमवाळा मनुष्य १॥ तियेच २॥ ए घे गतिनु थायुष्य घांधे ॥ 17 १० मुहार थयु ॥ १० ॥ इये तियेच पवेजियमांहि ४ बोल लाने तेमा कृष्णपक्षी १॥ मिग्याष्टि २ ॥ थज्ञान ४ ॥ एघोषवाळा ४ गतिर्नु थायुष्य घांधे ॥ समदृष्टि १॥ ज्ञान ४ ॥ ५ बोलवाळा १ देवगसितुं वायुष्य वांधे ॥ समामिग्यात्वदृष्टि श्रायुष्य न वाघे ॥शेप २७ बोल रहा तेमा कृष्ण १॥ नील २॥ फापोत ३ ॥एत्रण खेश्यामां समवस रण ४ खाने, तेमा जे क्रियावादी होय से श्रायुष्य न बांधे ॥ शेष ३ समवसरणपाळा । गतिनु थायुष्य बांधे ॥ तेजु १॥ पद्म २॥ शुक्ल ३ ॥ ए प्रप वेश्यामां समवसरण । खाने, तेमा जे क्रियावादी ते १ देवगतिनु थायुष्य यांधे ॥ शेष ३ समवसरणपाळा १ नार कीनु थायुग्य वर्जिने ३ गतिनु थायुष्य वधि ॥ प ११ मुहार थयु ॥ हये मनुष्या ४ चोल लाने तेमा जे जे घोल वायुष्य घांधे न पांधे सेनो वर्णवसमुखय जीपनायायुष्य याधघाना द्वारनी परे जाणवा ।नवर समुच्चय जीवमा ए बोलमा मनुष्य अने देवतार्नु थायुष्य बांधते ठेकाणे मनुष्य देवगति वैमानिकनु श्रायुष्य घांधे ॥ ए १२ मु घार थयु ॥ हने जन्य थानव्यनु धार कहे ते ॥ समुच्चय जीवमा ४७ बोख लाने तेमा कृष्णपकी १॥ मिष्यादृष्टि २ ॥ थज्ञान ४ ए ६ घोलमा भव्य थनव्य ये होय ॥ अशी १॥ शुक्र पक्षी २ ॥ समष्टि ३ ॥ समामिप्यादृष्टि ॥ ज्ञान ६ ॥ एव १०॥ नोसन्नावलत्ता ११॥ थ घेदी १२ ॥ थकपायी १३ ॥ थजोगी १४ ॥ ए १४ बोलमा एकला जव्य होय ॥शेष २७ घोल रह्या तेमा जे क्रियावादी होय ते भव्य ज होय ॥ शेप ३ समवसरणवाळामा नव्य थजव्य प होय ॥ नारकीथी मामी १२ देवलोक सुधीमा कृष्णपक्षी १ ॥ मिथ्याष्टि॥ थज्ञान ४ ॥ ए ६ घोलमा भव्य अजव्य वे होय ॥ समदृष्टि १॥ शुक्लपक्षी ॥ समामिप्यादृष्टि ३ ॥ ज्ञान॥एघ ७ वोलमा एक्ला नव्य ज होय ॥शेष योख जे जे ठेका णे जेटला जेटला खाने ठ तेमा समवसरण ४ लाने, तेमां जे क्रियावादी ते निश्चये ज||E भव्य होय॥ शेप ३ समवसरणवाळामां जव्य अजव्य वे छोय ॥ नव प्रैवेयकमा ३२ वोल साने तेमा शुरूपक्षी १॥ समष्टि २॥ ज्ञान ४ ॥५६ योसमां निश्चय नव्य होय ॥ मिध्याष्टि १ ॥ कृष्णपकी २ ॥ यज्ञान ४ ॥ ए ६ योसमां जव्य बनव्य चे होय ॥ शेष २० पाल रमा तेमा समवसरण । साने, तेमा जे क्रियावादी से निश्चये नव्य होय ॥ शेष३ समवसरणवाळा ते जम्प अनन्य वे छोय ॥ पांच अनुचर विमानमा २६ घोल लाने ते सर्वे निश्चय नव्य होय ॥ पाच स्थावरमा शुक्लपक्षी एकला जव्य होय ॥ शेष २६ वोलमां जव्य यत्नव्य घे होय ॥ ३ विगखें जियमा शुपक्षी र सम्यक्ष्टि २ ज्ञान ३५ ५ पोलमा एकला नव्य होय ॥ शेप २६ बोसमा जव्य अलव्य चे होय ॥ तिर्यंच पर्चेपियमा कृष्णपक्षी १ ॥ मिष्याटि२॥ थज्ञान ॥ ए ६ योलमा नव्य थजव्य वे होय ॥समष्टि १॥समा मिष्याटि २ ॥ शुक्लपक्षी ३ ॥ ज्ञान ४ ॥ ए ७ योलमा एकेला जव्य होय ॥ शेष २७ घोस रमा तेमा समवसरण ४ लाने, तेमा क्रियावादी एकता नव्य होय ॥शेप ३ समयसर एवाळा तो नव्य अलव्य ये होय ॥ ११ ॥ इवे मनुष्यमा ४ वोल लाने तेमा जेटला जटखा योसमा जव्य अनन्यपणु जे जे ठेकाणे खाने तेनो वर्णव समुच्चय जीवनी परे जा यो । ए १५ मुं धार थयुं ॥ त समुच्चयनो प्रथम उद्देशो सपूर्ण ॥ १॥ हवे प्रथम समय उपन्या श्राभिना ४ उदेशा कहे जे ॥ श्रणतरोषवणगा ते बारारहित प्रथम समयना उपन्या १॥ थणतरोगाढगा ते प्रथम समये जे केत्र अवगासाते २ ॥ अणतर. थाहारगा ते प्रथम समय थाहार बीधाने थयो होय ३ ॥श्रणतरपज्जत्तगा ते एक समय प्रजा वांग्याने थयो होय ४ ॥ ए ४ प्रथम समयना होय तेने अणतर कहीए ॥ हवे २५ दमक १२ झार उपर उतारया, तेमा समुच्चय जीवमा ४७ थोख सान्ने तेमाथी २० बोल वर्जया ने शपेशी १ ॥ समामिप्यापि २॥ मनापर्यव ज्ञानी ३॥ केवखानी ४॥ नो सनावडत्ता ५ ॥ अवेदी ६ ॥ थकषायी ७॥ मनजोगी ॥ वचनजोगी ए॥थजोगी १०॥ ए १० घोल यर्जिन शेष ३७ बोख थनतर ४ छारमा खान ॥१॥ नारकी थादि देश वारमा देवलोक सुधी जे जे ठेकाणे जेटला जेटसा समुच्चय चोख राने ले तेमांथी समा मिथ्यात्वदृष्टि १ ॥ मनजोग २॥ वचनजोग ३॥ एत्रण त्रण वास वर्जवा केमके ए ३ पोल उपजतां प्रथम समये न होय ॥ नय गैवेयक तथा पांच अनुत्तर विमानमा समुघय घोल जेटखा जेटला लाल ते तेमाथी मनजोग १॥ वचनजोग ॥ए य पाल वर्जया ॥ पांच स्थावरमांची पके घोष वर्जयो नहि ॥ त्रण विगजियमाय) १ वचनजाग वर्जयो । तिर्यच पचजियमा ४० धोख खाने तेमांधी समामिच्याइष्टि १॥ श्रवधिज्ञान २॥ पिजगज्ञान ३॥ मनजोग ४ ॥ वचनजोग ५॥ प ५ पोल पर्जना ।। मनुष्यमा ४७ बोल खाने व तेमाथी ११ घोल वर्जवा ॥थलेशी १॥ समामियादृष्टि । ॥ मन पर्यवहान ३॥ फेरखान ४ ॥ नोसनावरचा ५ ॥ यदी ६॥थकपायी ॥ मनजोग ७॥ वध नजोग ए ॥ विनगझान १० ॥ थजोगी २२ ॥ ए ११ घोल वर्जवा ॥ हवे अनतर ४ बोल माहि जे जे काणे जेटला जेटला घोल खाने तेमा समवसरण उतारना ते समुञ्चय प्रथम उदेशामा उतार्यानी परे जाणवा ॥ अनतर ४ वोसमांहि जेटमा जेटसा योस साल तेटला श्रायुप्यनाथपकना जाण ॥ श्रनतर घोखमाहि जव्य अन्नव्यपणानो वर्णव समु यय ठरेशानी परे करयो । ५४ उदेशा भया ॥ इति पांच नरेशा सपूर्ण ॥ ५॥ वे । परंपरोवपन्नगादि ४ उदेशा कहे ठे। परपरोषवनगा ते घाणा समय उपज्याने जेने श्रया होय ते १ ॥ परपरोगाढगा से घणा समय क्षत्र शवगामाने जेने थया होय ते ॥ परपरा हारगा ते घणा समय थाहार लीधा जेने थया हाय ते ३ ॥ परपरपजचगा ते घणा समय प्रजा यांच्याने जेने थया होय ते ४ ॥ परपर उमेशे समवसरण उसारवा ॥धायुष्य वांधवानो भव्य थजव्यपणु उतारवानो वर्णव समुच्चय उद्देशानी परे जाणवो ॥ तेमा ए टसो फेर जे पृथ्वी १॥ पाणी ५॥ वनस्पति ३॥ ए ३ मा तजु वेश्या कडेवो नहि ॥३ विगछियमा समकित १ ॥ ज्ञान ३ ॥ ए ४ घोल वर्जवा, शेष तेमज॥ए ४ देशा थया ।। इति नष उदेशा समाप्त ॥ए। इवे चरम अचरमना वे उदेशा कहे २ ॥ तेमा चरमनो उदेशो समुश्चय उद्देशानी परे उतारवो ॥ श्वचरमने उद्देशे सर्वार्थसिक वर्जिने तथा मनु प्यमा थखेशी १॥ केवलज्ञानी ॥ थजोगी३॥ ए ३ योस वर्जिने ॥बीजो सर्वधधिकार समुच्चय उदेशानी परे जाणवो ॥ ए २ उदेशा च्या ॥ इति ११ उद्देशा थया । इति समवसरणना वोस सपूर्ण लडिना वाल ॥ . घष श्री महिना घोड नगवती सूत्र शतक ७ मा ना उदशा बीज यो संख्या ॥ ५ ज्ञानना जेद नदीसूत्रथी जाणवा एटखे पूर्व ज्ञान तथा अज्ञान कथा ॥ हवे ज्ञानी तथा अज्ञानी कहे ठ॥ जीवाण नसे किनाणी थन्नाणी' इत्यादि १ हारे करी वर्णवीशु ॥ गाथा ॥ जीव १ ग २ ऽदिय ३ काए ४ । मुहुम ५ पज्जति ६ नवरये य ॥ नवसिकिए य U समिए । लकि १० उपयोग ११ जोगे य १२ ॥१॥ मेस्सा १३ कसाय १४ ए २५ । थाहारे १६ नाणगोयरे १७ ॥ काले १० अंतर १ए अप्पाषाय २० । पलाया २१ चेत्र दारा ॥२॥ इवे प्रथम जीवछार कहे ते ॥ २६ ॥ १ समुच्चय जीवमा ५ ज्ञान, ३ थझाननी नजना ॥२ नारकीमा पहेली नारकीमा ३ शाननी नियमा, थज्ञान ३ नी नजना, शेष ६ नारकीर्मा प्रण झान प्रण महाननी . नियमा॥१२ दश नवनपतिमा ३ छाननी नियमा, अज्ञान ३ नी नजना ॥१७ पाच स्था वरमा २ थझानगी नियमा ॥ २० प्रण विगळं जिय यसझी तियेच पर्चेजियमा २ ज्ञान, रथज्ञाननी नियमा ॥ १ सझी तिर्यच पवेजियमा ३ ज्ञान, ३ थाननी, जजना ॥ २२ सन्नि मनुष्यमा ५ ज्ञान, ३श्वज्ञाननीनजना, श्रसज्ञी मनुष्यमा यज्ञाननी नियमा॥ २३ घाणव्यतरमा ३ ज्ञाननी नियमा, अज्ञान ३ नी नजना ॥ २५ ज्योतिषीथी मांगी नव प्रेयकसुधीमा ३ झान, ३श्यज्ञाननी नियमा॥पांच श्वनुत्तर विमानमा त्रण इाननी नियमा, थकान नथी ॥२६ सिझमा १ केवलज्ञाननी नियमा॥ इवे वी गतिहार कहे २ ॥ ५३१ ॥ १ नरकगतिमा ३ ज्ञाननी नियमा, ३ श्रझाननी लजना ॥२ तिर्यंचगतिमांश् शान, २ थकाननी नियमा॥३मनुष्यगतिमा ३ झाननी जजना, अज्ञान नी नियमा ॥४ देव गतिमा ३ झानधी नियमा,३वज्ञाननी जजना ॥५सिझगतिमा १ केवलज्ञाननी नियमा॥ VEM एवं प्रजु प्रियहार कहे डे ॥ ७-३० ।। १ सादियामा ४ ज्ञान, ३यज्ञाननी नजना ॥ २ एक नियमांश्थज्ञाननी नियमा- मति घाझान, भुत थकान ॥ ५ प्रण विगहें प्रियमा कान, २ श्रझाननी नियमा॥६ पर्चेजियमा ४ ज्ञान, ३ श्वज्ञाननीनजना ॥ अप्रिंदियामा १ केवलज्ञाननी नियमा । हवे चोथु कायकार कहे ॥४६॥ १ सकाश्यामा पांच ज्ञान, ३ घशाननी नजना ॥ ६ पांच स्थावरमा २ श्थज्ञाननी नियमा ॥ प्रसकाश्यामां ५ ज्ञान, ३ शशाननी नजना ॥ थकाच्यामा १ केवल झाननी नियमा ॥ हवे पांचमु सूक्ष्मधार कहे ॥ ३-४५ ॥ १ सूरम्मा एवज्ञाननी नियमा ॥२ बादरमा ५ झान, ३ थज्ञाननी जना ॥ ३ नोसूदमनोशदरमा १ केवलज्ञाननी नियमा ॥ हवे तु पर्याप्तिधार कहे डे ॥ ५१-२०० ।। १ समुस्थय प्रजाप्तामा ५ कान, थकाननो नजना ॥२ नारकी प्रजातामा ३झान, ३ थाननी नियमा ॥ १२ दस नवनपति प्रजाप्तामा ३ ज्ञान, ३ थज्ञाननी नियमा॥२० ५ स्थायर ने विगछिय,यसझी तिर्यचना प्रजाप्तामा २ श्यज्ञाननी नियमा॥१ तिर्यष पचेंघिय प्रजाप्तामा ३ ज्ञान, ३ अज्ञानना नजना ॥ २२ मनुष्य प्रजाप्तामा ५ ज्ञान, ३ थ झाननी जजना ॥२५ याणव्यतर ज्योतिपीथी मामी नव वेयकसुधीना प्रजाप्तामा ३ ज्ञान, ३ थझाननी नियमा ॥ पाच थनुत्तर विमानना पर्याप्तामा अण झाननो नियमा॥६ समु चय थप्रजाप्तामा ३ ज्ञान, ने ३ थज्ञाननी जना॥२७ पेडेखी नारकीना थप्रजाप्तामा ३ ज्ञाननो नियमा, ३ यज्ञाननी जजना ॥ पांच नारकीना अपयोप्तामा त्रण झान,त्रण थ झाननी नियमा।सातमीना यपयाप्तामात्रण थज्ञाननी नियभा, नाण नथी॥३० दस नवन- पति थपजाप्तामा ३ झाननी नियमा, ३ थकाननी जना॥ ४२ पाच स्थावर ने श्रसको मनुप्पन' थप्रजाप्तामा२ यशाननी नियमा ॥ ४५ विजिशने यसझी तियेचपंचेंजि- यना याजाप्तामा २ ज्ञान, २ थज्ञाननी नियमा ।। ४६ तिर्यच पजिय प्रजातामां ज्ञान, २ थज्ञान ना नियमा ॥ ४ मनुष्य अप्रजाप्तामा ३ झाननी जजना, २थशानन नियमा॥
10 वाव्यतर थप्रजाप्तामा ३ जाननी नियमा, ३ थाननी जजना ॥ ५० ज्योतिषीथी मामी नय प्रैधेयकसुधोना श्वप्रजारामा ३ ज्ञान, ३ थज्ञाननी नियमा ॥ पांच थनुत्तर विमा नना थपयाप्तामा त्रण छाननी नियमा, अज्ञान नथी। नोप्रजाप्तानोचप्रजाप्तामा १ केवलझाननी नियमा॥ इवे मु 'नवरपछार कहे ते ॥ ५-१०५॥ १ नारकी जवस्थामा ३ शाननी नियमा, ३ अझालनी नजना ॥ तिर्यच नवस्था मा ३ ज्ञान, ३ अडाननी जजना ॥ ३ मनुष्य नवस्थामा ५ ज्ञान, ३ थज्ञाननी नजना॥ ४ देव अवस्थामां ३ शाननी नियमा, ३ अज्ञाननो नजना ॥ ५ थनवरयामा १ केवल- झाननी नियमा ।। हवे मु नवसिफिककार कहे ते ॥३-१० ॥ १ नव सिरियामा ५ ज्ञान, ३ अझाननी नजना ॥२ अजबसिरियामा ३ अज्ञा ननी जना ॥ ३ नोनवसिफियानोथलवसिझियामा १ केवलज्ञाननी नियमा ॥
अम्म्म हपे एमु सज्ञीहार कहे वे ॥३-१११ ॥ १ सोमा ४ ज्ञान, ३ थझाननीनजना ॥ २ असशीमा २ शान, थाननी नि- यमा ।। 3 नोसझीनोश्वसनीमा १ केवलकाननी नियमा ॥ हवे १० मु सन्धिकार कहे रे ॥ ३०-२७१ ॥ गाथा ॥ नाणति चरित्ता चरित्ते । दाणाइ पच सकिय॥ इदिय खझि दसमा । एयासिं सत्चरि जेदाय ॥ १॥ अर्थ-ज्ञानादि ३, ज्ञानपछि १, दसण सद्धि २, चारित्र सकि, चरित्चाचरित्त सकि १, दानादि ५, इदिय सहि ५, ए १० द्वारे करी ७० घोल वर्णवे ॥ प्रथम ज्ञानधार-घोस २० ॥ १ नाण पहियामा ५ ज्ञाननी नजना, अज्ञान नथो ॥२ तस्स अलफियामा ३थ झाननी जजना, ज्ञान नयो ।। ३ मतिज्ञान पछियामा ४ ज्ञाननी भजना, ज्ञानमा थ ज्ञान हाय नहि ॥ ४ तस्स शलहियामा र केवलझाननी नियमा, ३ थकाननी नजना ॥ VALI Wited ५ श्रुत ज्ञान सझियामा ४ ज्ञाननी भजना, थहान नथी॥ ६ तस्स अपहियामा ? फेवसज्ञाननी नियमा, ३ अज्ञाननी नजना ॥ ७ अवधिज्ञान सझियामा ४ छाननी ज जना, थज्ञान नयी ॥ तस्स शसडियामां ४ शान, ३ थकाननी जजना ॥ ए मन प यय सडियामा ४ ज्ञाननी जना, थशान नथी ॥ १० तस्स ल कियामां ४ ज्ञान, ३ वहाननी नजना ॥११ केवलज्ञान सझियामां १ केवलज्ञाननी नियमा, अहान नथी ॥ १२ तस्स थसझियामा ४ ज्ञान, ने ३ थज्ञाननी नजना ॥१३ यामान सरियामा ३ थझाननी जजना, ज्ञान नयी ॥१४ तस्स अलफियामा ५ ज्ञाननी भजना,थान नथी॥ १५ मति थज्ञान लछियामा ३ थाननी जना, झान नधो ॥ १६ तस्स अलछियामा ५ ज्ञाननी नजना, यज्ञान नथी॥ १७ श्रुत थझान सद्धियामा ३ थाननी नजना, ज्ञान नयी ॥ १७ तस्स थप्पडियामा ५ ज्ञाननी भजना, श्रज्ञान नयी ॥ १ए विनग शान सहियामा ३ थज्ञाननी नियमा, ज्ञान नथी ॥ २० तस्स असझियामां ५ ज्ञाननी नजना, २ थाननी नियमा॥ है पीजु दर्शनकार-पोल ॥ २१ दसण दियामा ५ज्ञान,३वज्ञाननी जजना १॥२२ तस्स अमहियामा नस्थि कोइ जीयो २ ॥२३ समदसण बछियामा ५ ज्ञाननी जजना, अज्ञान नयी ३॥ तस्स श्रमझियामा ३ थज्ञाननी जना, शान नथी ४ ॥ २५ मिष्ठादसण सद्धियामा ३ श्रज्ञा ननी जना, ज्ञान नथी ५॥ २६ तस्स अलद्धियामा ५ज्ञान, प्रण थज्ञाननी जना ६॥ २७ समामिष्ठादसण सद्धियामां ३ थज्ञाननी जना, ज्ञान नथी ७ ॥ २७ तस्स शल द्रियामा ५ ज्ञान, ३ यज्ञाननी नजना ७ ॥ विजु चारित्रधार-वोस १२ ॥ शए चरित्त लडियामा ५ ज्ञाननी नजना, अज्ञान नथी१॥ ३० तस्स अलछियामा ४ ज्ञान, अज्ञान ३ नी नजना,मन पर्यव नथी॥३१ सामायिक चारित्र लछियामा ४ ज्ञा. ननो 'जजना, थज्ञान नथी ३ ॥ ३५ तस्स शख छियामा ५ ज्ञान, ३ अज्ञाननी जजना ४ ॥ ३३ वेदोपस्यापनीय चारित्र सद्धियामा ४ ज्ञाननी नजना, थ ५ श्रुत झान सझियामा ४ ज्ञाननी जना, यज्ञान नथी॥ ६ तस्स अमडियामा १ केसज्ञाननो नियमा, ३ थज्ञाननी नजना ॥ ७ अवधिझान लहियामां शाननी न जना, थहान नथी ।। ७ तस्स असहियामा ४ ज्ञान, ३ अज्ञाननी नजना ॥ ए मन प यर सझियामा ४ छाननी जजना, थज्ञान नथी ॥ १० तस्स अलछियामा ४ ज्ञान, ३ थझाननी नजना ॥११ केवलझान खफियामा १ केवखज्ञाननी नियमा, अज्ञान नयी ॥ १२ तस्स यसक्रियामा शान, ने ३ थज्ञाननी सजना ॥१३ थाहान पहियामा ३ थज्ञाननी नजना, शान नथी ॥१४ तस्स शस्त्रकियामा ५ छाननी जना,थकान नथी। १५ मति यज्ञान खकियामा ३ थहाननी जना, ज्ञान नथी ।। १६ तस्स अखकियामा ५ छाननी नजना, थज्ञान नथी ॥ १७ श्रुत थझान खबियामा ३ अछाननी जजना, ज्ञान नथी । १० तस्स श्रसहियामा ५ छाननी नजना, अज्ञान नथी ॥ १५ विनग झान सझियामा ३ थहाननी नियमा, झान नथी ॥ २० सस्स अखख्यिामा ५ शाननी नजना, २ थहाननी नियमा॥
दीर्जु दर्शनकार-पोल ॥ २१ दसण सद्धियामा ५ज्ञान,३थज्ञाननी नजना १॥ तस्स असहियामा नस्पि कोइ जीयो २ ॥ २३ समदसण सहियामा ५ ज्ञाननी नजना, थज्ञान नथी ३॥ तस्स थपहियामा ३ थज्ञाननी जना, ज्ञान नथी ४ ॥ २५ मिलादसण सद्धियामा ३ वझा ननी जजना, ज्ञान नथी ५ ॥ २६ तस्स अलद्धियामा ५ज्ञान, प्रण अज्ञाननी नजना ६॥ २ख समामिवादसण सद्वियामा ३ च ज्ञाननी जजना, ज्ञान नथी ७ ॥ २० तस्स शल द्वियामा ५ ज्ञान, ३ थज्ञाननी जजना ॥ प्रिजु चारित्रकार-वोस १२ ।। शए चरिच सद्वियामा ५ ज्ञाननी जजना, अज्ञान नथी१॥३० तस्स अप्लडियामा ४ ज्ञान,थज्ञान ३ नी जना,मन पर्यव नथी२॥३१ सामायिक चारित्र सद्धियामा ४ ज्ञा ननो 'नजना, थज्ञान नयी ३ ॥ ३५ तस्स अलद्धियामा ५ ज्ञान, ३ श्रज्ञाननी जजना ४ ॥ ३३ ठेदोपस्यापनीय चारित्र सद्धियामा ४ ज्ञाननी नजना, थ ज्ञान नथी ५ ॥ ३४ तस्स थसद्धियामा ५ ज्ञान, ३ घज्ञाननी नजना ६ । ३५ परिहारविशुरू चारित्र सद्धियामा ४ ज्ञाननी नजना, थकान नथो ७ ॥ ३६ तस्स थसहियामा ५ ज्ञान, ३ थशाननी जजना ८ ॥ ३७ सूक्ष्म सपराय चारित्र सक्रियामा ४ ज्ञाननी नजना, अज्ञान नथो ए ॥ ३७ तस्स असहियामा ५ ज्ञान, ३ थाननी नजना १० ॥ ३ए यथास्पात चारित्र लशियामा ५ शाननी जना, अज्ञान नथी १॥ ४० तस्स थलहियामा ५ ज्ञान, ३ श्रज्ञाननी नजना ॥ १५ ॥ चोथु चारित्राचारित्र हार-योज २॥ ४१ चरित्ताचरित मझियामा ३ छाननी जजना, यज्ञान नयी ॥ १ ॥ ४२ तस्स अलखियामा ५ ज्ञान, ३ थझाननीनजना २॥ पांचमु दानसब्धिहार-योख २॥ ४३ दाण सहियामा ५ ज्ञान, ३ श्रझाननी जना १ ॥४४ तस्स अखलियामां र केवखाननी नियमा २॥
तु खान सब्धिछार-योस ॥
४६ एष खान सधियाना २ योस पूर्ववत् २ ॥
सातमु जोग सम्धिधार-चोख ५॥
80 एव जोग पद्धियाना बोल पूर्ववत् २॥
वाग्मु उपन्नोग लब्धिछार-बोल ॥
५० एव उपजोग खझियाना २ घोस पूर्ववत् २ ॥
नव, वीर्य खब्धिछार-बोल ॥
५१ एष वीरियल द्धियाना पूर्ववत् १ ॥ ५५ तस्स अलफियामा १ केवलज्ञान ५॥
५३ घाख वीरियसद्धियामा ३ ज्ञान, चोथा गुणस्थाने समष्टि आश्रि, ३ अशाननी
नजना ३ ॥ ५४ तस्स अलछियामा ५ ज्ञाननी नजना, थकान नयी ४॥ ५५ पमित
पीरियस कियामा ५ ज्ञाननी जना, थान नयी ५ ।। ५६ वस्स चलहियामां ४
ज्ञान, मन पर्यव नहि, ३ थज्ञाननी नजना ६ ॥ ५७ पासपमित वीरिय बनियामा ३
EPISAREERIRAMPUR
ज्ञाननी चजना,थज्ञान नयी ७॥० तस्स असद्धियामा ५ ज्ञान, थिज्ञाननो नजना ॥ दशमु इपिय मधिधार-वोल १२॥ पए प्रिय सद्धियामा ४ ज्ञान, ३ अज्ञाननी जजना १ ॥ ६० तस्स'असझियामा १ फेवसाननो नियमा २॥ ६१ श्रोत्रंशिय सझियामा ४ छान, ३ श्वज्ञाननी जजना ३॥ ६२ तस्स थलक्ष्यिामा ४ हाननी जजना, २थशाननी नियमा ४ ॥६३ पनुपियना खक्रियामा ४ झान, ३ अझाननी जना ५ ॥ ६४ तस्स धमछियामां ज्ञाननीनजना ने १ केवलनी नियमा, एव ज्ञान ३ ने २ थहाननी नियमा ६॥ ६५ प्रार्थेजियना सद्धि यामा ४ ज्ञान, ३ अज्ञाननी जना ॥६६ तस्स अपछियामा ५ ज्ञाननी जना, ने १ केवखनी नियमा, एव ३ ज्ञान ने २ अज्ञाननी नियमा ७॥ ६७ जीनेजियना सम्यिामां ४ ज्ञान, ३ थज्ञाननी जजना ए॥ ६० तस्स शजछियामा १ केवलज्ञान, ने २ अडाननी नियमा १० ॥ ६ए फासिदिय सहियामा ४ ज्ञान, ३ अज्ञाननोनजना ११ ॥ ० तस्स चलकिपामा १ केवलज्ञाननी नियमा १२॥
SEERREFERE हवे ११ मु उपयोग द्वार कहे ॥ योज १४-१५॥ १ सागारोषउत्तामा ५ ज्ञान, ३ असाननी नजना ॥ ३ मति भुत सागारोपनत्तामा ४ माननी जना, थज्ञान नपी॥४ धवधिज्ञान सागारोवउचामा ४ ज्ञाननी जजना ॥ ५ मनःपर्यवज्ञान सागारोवउत्सामा ४ ज्ञाननीनजना ॥ ६ केवलज्ञान सागारोवउत्तामा १ केवलज्ञाननी नियमा ॥ मतिभुत अज्ञान सागारोवउत्तामा ३ थज्ञाननी नजना ॥ ए विनगज्ञान सागारोवलत्तामा ३ श्वज्ञाननी नियमा ।। १० वणागारोवलत्तामा ५ ज्ञान, ३ अज्ञाननी चजना ।। १२ चकु थचकुदर्शन थणागारोवउचामा ४ ज्ञान, ३ श्रज्ञाननी जजना ॥ १३ थवधिदर्शन थणागारोवउत्चामा ४ ज्ञाननी जना, ३ अज्ञाननी नियमा ॥ १४ केवल दर्शन घणागारोवटचामा १ फेवलज्ञाननी नियमा ॥ एचे १५ मु योग द्वार कहे ॥ बोल ५-२० ॥ ४ सजोगी मनजोगी षचनजोगी कायजोगीमा ५: ज्ञान, ३ थज्ञाननी नजना॥ ५ थजोगीमा १ केवलकाननी नियमा ॥
नीना २ जेद ॥ ऋजुमति १ ॥ विपुलमति ॥ऽव्य थकी मजुमति अनंत प्रदेशीया मनना पुद्गसना स्कध सामान्य प्रकारे जाणे देखे १॥ देवथा त्रिनु थदिछोपमा थस्थि गुल थोतु ॥ उषु ज्योतिषी खगे नबसें जोजन अविश्वगुल थोबु ॥ नीचु हजार जोजन थरि थगुप्त धोतु पटी क्षेत्र जाणे देखे ॥ कालथी ज० न० पस्योपमनो घसख्यातमो भाग थागोपाठलो काल जाणे देखे ३॥ नावषीश्चदिछीपना सझी पर्षेत्रिय प्रजाप्ता मनुष्य तिर्यंचना मनना पुद्गल तेनावण गध रस स्पर्श एना श्वनता नाव ठे, तेषी घनतमे जागे जाणे देखे ४ ॥ एमज विपुखमति पण जाणे देख ॥नयर एटखो विशेष यदि अंगुल अधिक पण विस्तार सहित निर्मळपणे जाणे देखे ४ ॥ केवलज्ञानी व्यथी व अन्य सर्व प्रकारे जाणे दखे ॥ क्षेत्रधी सर्व केत्र खोकालोक जाणे देखे ॥ कालची सर्व काल जाणे देखे ३ ॥ जारधी सर्व नाव जाणे देखे ॥५॥ मति धज्ञानी, श्रुतश्थज्ञानी, अव्यषी मति श्रुत थझानमा जेटला अव्य थाये तेटला जाणे देखे १ ॥एम केपी, कासथी, नावषी, पण जाणवु ॥नयर श्रुत अज्ञानीमा एटसो फेर, जेटलो ऽव्य यावे, तेटसां आगव पासवर पम्वइ, एम क्षेत्रषी, काखषी, नाषषी, पण जाणव॑ ॥ विनंग झानी अव्ययी विनंग ज्ञानमा जेटसां अव्य थावे एटला जाणे देखे १॥ एम क्षेत्रथी, काखथी, नावषी, पण जाणवु ३ ॥ इति १७ मु नाणगोयरकार समाप्त ॥ १७॥ हवे १७ मु कालकार कहे ॥ कास केहेतां ज्ञानीनु ज्ञान जेटक्षा काख रहे तेनाइजेद, साइए सपनायसिए १॥सा इप अपक्षवसिए॥ तेमाजे साइप सपञ्जयसिए सेनी ज० स्थिति थतर्मुहूर्त्तनी, उ० बासठ सागरोपम काफेरानी ॥ एम ज मति श्रुस ज्ञाननी पण जाणवी २॥ अवधिज्ञाननो जण? समयनी, उत्प बासठ सागरोपम काफेरानी ३ ॥ मनःपर्यव ज्ञाननी जप १ समयनी, उत्प देशे गणी पूर्व क्रोमनी ४ ॥ केवलज्ञान साए थपञ्जयसिए ५॥ अज्ञानना ३ नेद ॥ श्रणादिए थपञ्जयसिए ते अजव्य १॥श्रणा दिए सफ्झायसिए ते जव्य ॥ सा दिए स पझापसिए से पमिवार तेनी स्थिति ज० थंतर्मुहर्चनी, उ० थर्डपुद्गल देशे उणानो ३ ॥ एव मति भुत श्रझाननी स्थिति पण जाणवी ॥ विनगजाननी ज० समयनी, उ०३३ सागरने देशे उणी क्रोम पूष थधिकनी ३ ॥ इति १७ मु, कालछार समाप्तः ॥१॥ इव १ए मु थतरछार कहे ते ॥ ज्ञानना २ नेद ॥साइप थपञ्जावसिए १, सेनु अतर नथी१॥ साइए सपायसिप तेनु थतर ज० थतर्मुहर्त्तनु, उत् देशे उणा थर्ड पुद्गलनु ॥ एम ज ४ झाननु, पण जा णवु ॥ ५ ॥ हवे यज्ञानना ३ नेद ॥ थणाश्ए अपडाव सिए एनुः शतर नयी १॥ पाश सपकावसिपनु अतर नयी २ ॥ साए सपलपसिएनु तथा मतिश्रुत अज्ञाननु थंतर जप थतर्मुहर्चनु, न० ठासठ सागर जाफेरानु २ ॥ विजग ज्ञाननु थतर ज-थत, उप थनतकाखनु ते वनस्पति यानि ३ ॥ इति १ए मु अतर धार समाप्तः ॥ १ए । हवे २० मु थम्प यात्वछार कहे ठे॥ सर्वयी थोमा मन पर्यवज्ञानी १॥ तेथी थत्रधिज्ञानी असख्यातगुणा २॥ तेषी मति श्रुत ज्ञानी माहोमादि तुल्य ने विसेमाहिया ४ ॥ तेथी केवलज्ञानी अनतगुणा ५॥ प्रण थकाननो थम्प पठस्य-सर्वयी थोमा विजंगशानी १॥ तेपी मतिभुता अज्ञानी माहोमांहि तुम्य ने अनंतगुण ३॥हवे नो थम्प बहुस्ख कहे ॥ सर्वधी योमा मनः पर्यवज्ञानी १ ॥ तेथी अवधिज्ञानी असख्यातगुणा २ ॥ तेथी मतिश्रुत ज्ञानी माहो मांहि तुल्य ने विशपाधिक ४॥ तेथी विनगशानी थसख्यातगुणा, नारकी देवता थाश्रि ५॥ तेथ। केवलज्ञानी थनतगुण ६ ॥ तेथी मतिश्रुत थज्ञानी माहोमाहि तुल्य ने अन तगुणा ॥ इति २० मु श्रम्प बहुत्वछार समाप्त ॥ २० ॥ हवे २१ मु पर्यवहार कहे ॥ पाच ज्ञानमा एकेकना श्वनता पर्यव ठे सेनो थप बहुस्व-सर्वधी योमा मन पर्यव झानना पर्यघ १॥ तेयो अवधिज्ञानना पर्यव धनंतगुणा ॥ तेथी भुत ज्ञानना पर्यव धनसगुणा ३॥ तेथी मति ज्ञानना पर्यव धनतगुणा ४ ॥ तेथी केवलज्ञानना पर्यव धन तगुणा ५॥ त्रम यशानना पर्यय थनतानत डे, तेनो श्रम्प बहुत्व-सर्वथा थोमा विन गडानना पर्यघ १॥ तेथीश्रुत थज्ञानना पर्यव धनतगुणा ॥ तेथीमतिथज्ञानना पर्यवथन तगुणा ३॥हवे पांचज्ञान प्रण श्रझान एना पर्यवनो अस्प बहुत्व कहे ॥सर्वथी योमा मन पर्यव झामना पर्यव १॥ तेथी विनगझानना पर्यव अनतगुणा २॥ तेषी अवधिज्ञानना पर्यव थनतगुणा ३ ॥ तेथो श्रुत अज्ञानना पर्यप थनसगुणा ४ ॥ तेथी श्रुतज्ञानना पर्यव विससाहिया ५॥ तेथी मतिश्चझानना पर्यव थनतगुणा ६ ॥ तेषी मसिझानना पर्यव विसेसाहिया ७॥तेयी केवलज्ञानना पर्यव धनतगृणा ॥इति ।मुपर्यवहार समास ॥२१॥ ॥ति लझिना पोल सपूर्ण ॥ मोटी कमप्रकृतिना वोल॥ थथ श्री पन्नषणा पद २३ माथी थाव कर्मनी उत्तरप्रकृति १४७ ना षभनी जघन्योत् पृष्ट स्थितिना योख लिम्ब्यते ॥ पाच ज्ञानावरणीयनी, चार दर्शनावरणीयनी ए ए प्रकृ- तिनी जघन्य स्थिति यतर्मुहूर्तनी ते दशमा गुणगाणा थाश्रि, उत्कृष्टी त्रीस क्रोमा कोमी सागरोपमनी ॥ ए॥ पाच निका, ने १ अशातावेदनीय, ए ६ प्रकृतिनी स्थिति जघन्य १ सागरना सात जाग करीए तेवा ३ नाग पख्योपमने शसख्यासमे नागे उणानी, उत् निश क्रोमाकोमी सागरापमनी १५ ॥ शातावेदनीयना २ नेद ॥ इरियावदीना वध थाभि ज० गत् २ समयनी ॥ सपरायना घघ श्राधि ज० १२ मुहूर्त्तनी ते दशमा गुण गणा थानि, उत्त पदर क्रोमाकोमी सागरोपमनी १६॥सम्यक्त्व मोहनीयनी ज० स्थिति थतर्मुहर्चनी, उत् वासर सागरोपम काफेरानी १ ॥ मिथ्यात्व मोहनीयनी ज० १ सागरोपमनी पस्योपमना थसस्यातमा जागे उणानी, उत्त सीचेर क्रोमाकामी सागरोपमनो १७ ॥ मिश्रमोहनीयनी ज० उत्॥ यतर्मुहूर्त्तनी १ए ॥ अनतानु घधीनी ४ ॥ अप्रत्याख्यानावरणीयनी ४ ॥ प्रत्याख्यानावरणीयनी ४ ॥ ए १५ कपायनी स्थिति ज १ सागरना नाग फरीए तेवा ४ जाग ने पथ्यने थसख्यातमे जागे नणानी, उत्प चालीश कोमाक्रोमी सागरोपमनी ३१ ॥ सज्वसनना क्रोधनी जण स्थिति २ मासनी ॥ माननी ज० १ मासनी ॥ मायानी जण १५ दिननी ॥ लोजनी जण थतर्मुहूर्त्तनी ॥ ए ४ नी उत्कृष्ट स्थिति कोमाक्रोमी सागरोपमनी ३५ ।। हास्य १॥ रति २॥ ए २ प्रकृतिनी स्थिति ज० १ सागरोपमना सात जाग फरीए तेयो एक जाग परयो पमना शसख्यातमा भागे रवानी, उत्७ दश कामाकोमी सागरोपमनी ३७॥ धरति १॥ जय २ ॥ शोक ३ ॥ जगहा ४ ॥ ५५ प्रकृतिनी स्थिति ज०१ सागरना उजाग करीए तेवा ५ नाग पक्ष्योपमने अाख्यातमे जागे उणानी, जत्ण बोश कोमाकोमी सागरोपमनी ४१॥ त्रीवेदनी स्थिति जप १ सागरना 9 जाग करीप तेवा दोर नाग पस्योपमना वसायातमे जागे उणानी, उत्त पदर क्रोमाकोमी सागरोपमनी ४२ ॥ पुरुषवेदनी स्थिति जय । पर्षनी, उता १० कोमाक्रोमो सागरोपमनी ५३ ॥ नपुसफयेदनी स्थिति ज० १ सागरना ७ भाग फरीए सेषा २ भाग पल्योपमने असख्यातमे नागे वयानी, उत्त २० कोमारोमी सागरोपमनी ४४ ॥ नारकी १॥ देवसा २ ॥ ए घेना आयुष्यना वधनी स्थिति जण १० बजार वर्ष ने वतर्मुहूर्त अधिकनी, उत्० तेत्रीश सागरोपमने पूर्व क्रोमीनो अधिकनी ४६ ॥ मनुष्य १ ॥ तिर्यच॥ एश्ना श्रायुष्यना वधनी स्थिति अ० अतर्मुर्शनी, उत्व प्रद्य पस्योपम ने पूर्व कोमीनो निनो नाग अधिकनी 10 हवे विजो साग राष सघयण १ ॥ समपरंस सगण २ ॥ शुक्रवर्ण ३ ॥ मधुर रस ४ ॥ सुरनि गध ५ n सहायोस्पर्श ६॥ लघु ७ ॥ उष्ण ७ ॥ स्निग्ध ए॥ प्रशस्त विहायोगति १० ॥ स्थिर नाम ११ ।। शुज नाम १५ ॥ सौन्नाग्य नाम १३ ॥ सुस्वर नाम १४ ॥ श्रादेय नाम १५॥ ए १११ प्रतिना घधनी स्थिति ज० एक सागरना सात नाग करीए तेयो १ नाग पख्यना थ- सस्यातमे जागे उणानी, उत्० दश क्रोमानोमी सागरोपमनी १२३ ॥ऋपननाराच संघ यण १ ॥ निग्रोध परिममस सस्थान शाए वे प्रकृतिना यधनी स्थिति जा एक सागरना ३५ जागकरीप तेवा नाग पल्योपमने सख्यातमे नागे उणानी, उतम बार क्रोमाकामीसा- गरोपमनो २२५॥ नाराचसघयण १॥सादि साण २॥ए २ प्रकृतिना वधन। स्थिति जप १ सा- गरना ३५ जाग करीए तेवा ७ जाग ने पस्यने असख्यातमे जागे उसानी, उत्० १४ क्रोमा मोमी सागरोपमनी १२७॥ अर्धनाराच सघयण ॥ वामन सगण॥ए ३ नी स्थिति जण । सागरना ३५ नाग क्रीए तेवा ७ नाग पस्यना थसस्यातमे जागे जणान, उत्॥ १६ मोमाकोमो सागरोपमनी १२ए ॥ पीळो वर्ण १॥ खाटो रस २॥ ए.२नी स्थिति जण थशुन्न नाम ३ ॥ दोर्जाग्य नाम ३० ॥ 5-स्वर नाम ३ए ॥ अनादेय नाम ॥श्रयशो कीर्तिनाम ४१ ॥ निर्माण नाम ४२ ॥ ए ४२ प्रकृतिना वधनी स्थिति ज० एक साग रना सात नाग करीए तेवा घे नाग पल्योपमना थसस्यातमे नागे उणानी, उत्० २० मोमाकोमी सागरोपमनी ए६ ॥ मनुष्यगति । ॥ मनुष्यानुपूर्वि २॥ ए२ प्रष्ट तिना धनी स्थिति ज० एक सागरना सात नाग फरीए तेवो दोढ नाग पस्योपमना असख्यातमे नागे उणानी, उत्० १५ क्रोमानोमी सागरोपमनी ए ॥ देवगति १ ॥ देवानुपूर्वि २॥ ५२ प्रकृतिना वधनी स्थिति ज०१ हजार सागरोपमना सात जाग करीए तेवो एक जाग पश्योपमना थसण्यातमे जागे उणानी, उत्० १० क्रोमाक्रोमी सागरोपमनी १० ॥ पेजियनी जाति १॥ तेऽपियनी जाति २॥ चार दियनी जाति ३ ॥ फिलकृसघ यण ४ ॥ कब्ज सगण ५ ॥ सूक्ष्म नाम ६ ॥ अपर्याप्त नाम 9 ॥ साधारण नाम ॥ प्रतिना यधनी स्थिति ज एक सागरना ३५ जाग करीप तेया ए नाग पथ्योपमने असल्यातमे जागे गणानी, उत्ण थटार क्रोमाक्रोमी सागरोपमनी १७ ॥ वज्रपनना मनी ५ प्रकृति दानासरायादिनी स्थिति अण् श्रतमुहर्जनी ते दशमा गुणगणा श्राधि, उत् ३० क्रोमाकामी सागरापमनी १४७ ॥ ए फर्मनी उचर प्रष्ट चि १४० नी षष स्थिति समुच्चय थाभि कही १॥ इवे ज जे कर्मनी जे जे उत्तर प्रकृतिनी जेटखा जे टखा सागरोपमनो स्थिति कही हे तेटखा तेटला सो वर्षनो ते ते प्रकृतिनो श्रयाधाकाल जाणवो॥ ए समुच्चय प्रकृति १४७ ना यधनो थवाधाकास करो ।। हवे एप्रिय जेटली प्रकृति यांध तेना यधनी स्थिति कहे जे ॥ ५ ज्ञानावरणीय ॥ ए दर्शनावरणीय ॥१ थशाता वेदनीय ॥ ए १५ प्रकृतिना यधनी स्थिति जय १ सागरना जाग करीए तेवा ३ नाग ते पट्योपमने असख्याप्तमे जागे उणानी, उत्प्रतिपूर्ण र सागरना ! जागनी वाधे १५ ॥ शातावेदनीयना धनी स्थिति जण एक सागरना ७ जाग करीए तेवो दोड नाग ते पट्योपमना असख्यातमे नागे उपानी, उत्० प्रतिपूर्ण १ सागरना , नागनी १६ ॥ मिथ्यात्व मोहनीयना बधनी स्थिति ज एक सागरोपमन। ते पस्यन असख्या तमे जागे वणानी, उत्० प्रतिपूर्ण १ सागरोपमनी १७ ॥ सोख कषायना यधनो स्थिति एक सागरना २० नाग करीए तेवा ५ जाग ने पल्यने थसख्यातम जागे उणानी, उत्प सामाधार कामाकोमी सागरोपमनी १३१ । थाहारक शरीर १ ॥ वाहारकना अगोपांग २॥ थाहारक घधन ३ ॥ थाहारक संघातन ४ ॥ तीर्थंकर नाम कर्म ५ ॥ ५ नी स्थिति ज० श्रतो कोमाकोमी सागरोपमनी, उत्० एमज जाणवी १३६ ॥ रातो वर्ष १ ।। कपायसो रस २ ॥ ए २नी स्थिति जण एक सागरना २७ जाग करीप तेवा ६ नाग ने पस्योपमने थसख्यातमे जागे उणानी, उत्१५ कोमाक्रोमो सागरोपमनी १३०॥ नीलो वर्ष १ ॥ फमयो रस २ ॥ एनी स्थिति जग एक सागरना २७ जाग करीए तेवा सात नाग ने पस्यने असख्यातमे नागे उणानी, उत्० सामासत्तर कोमाकोमी सा- गरोपमनी १४० ॥ यशोकीर्ति नाम कर्मनी स्थिति ज० ७ मुहूर्चनी, बत् १० क्रोमाक्रोमो सागरोपमनी १४१ ॥ उघ गोपनी स्थिति ज० ७ मुहर्जनी, उ० १० क्रोमाक्रोमी सागरो पमनी १४५॥ नीच गोपनी स्थिति अ० एक सागरना 9 जाग करी तेया २ नाग ते परस्यने असक्ष्यातमे जागे उणानी, उत्प २० कोराकोमी सागरनी १४३ ॥ अतराप तिनी स्थिति ज० र सागरना नाग ते पख्यने असख्यातमे नागे उणानी, उ० प्रति पूर्ण १ सागरना दोढ सातिया भागनी ४६ ॥ यजमपत्ननाराच सघयण १॥ समचरस सठाण २ ॥ शुक्म वर्ण ३ ॥ मधुर रस ४ ॥ सुरजि गध ५ ॥ सुहाखो स्पर्श ६ ॥ लघु ७॥ ग्ण ॥ स्निग्ध ए ॥ प्रशस्त विहायोगति १० ॥ स्थिर नाम ११ ॥ शुज नाम १५ ॥ सौलाग्य नाम १३ ॥ सुस्वर नाम १४ ॥ यादेय नाम १५ ॥ यशोकीर्ति नाम १६ ॥ ए १६ प्रातिना धनी स्थिति ज० एक सागरना सात जाग करीपतेवो १ जाग ते पस्यने यस म्गातमे नागे उणानी, उत० प्रतिपूर्ण : नागनी ६॥ तिर्यचनी गति १॥ एप्रियनी जाति २॥ पचपियनो जाति ३ ॥ तिर्यचानुपूर्षि ४ ॥ उदारिक शरीर ५ ॥ उदारिकना थगोपाग ६ ॥उदारिक यधन ॥ उदारिक सघातन ७ ॥ तेजस् शरीर ए ॥ कामिण शरीर १०॥ तेजस् वधन ॥ ॥ कामण वधन १२ ॥ तेजस् सघातन १३ । कार्मण मघातन १५ ॥ ठेवटु सघयण १५ ॥ हुम सठाण १६ ॥ काला वर्ण १७ ॥ तीवो रस १० ॥ दुर्जि गध १९ ॥ रखरखरा स्पर्श २० ॥ शोत १ ॥ गुरु श् ॥ लुखो २३ ॥ थगुरुवघुनाम 1 जा १ सागरना ! नागनी ते पल्यने असख्यातमे जागे जणानी, उत्० प्रतिपूर्ण १ सागरना पागनी ३३ ॥ हाम्य १॥ रति २ ॥ ए २ प्रतिना पधनी स्थिति ज १ सागरना नागनी ते पल्यने असल्यातमे नाग उणानी, उत्० प्रतिपूर्ण र सागरना : जागनी : ३५ ॥ श्यरति १ ॥ जय ॥ शोक ३ ॥ दुगच्छा ४ ॥ ए ४ प्रकृतिना वधनी स्थिति ज० । सागरना । जागनी ते पच्यने थसख्यातमे जागे उणानी, उत्० प्रतिपूर्ण र सागरना। नागनी ३ए ॥ स्त्रीवदना वधनी स्थिति जय १ सागरना नागनी ते पख्यना श्रस म्यातमे जागे उणानी, उत्ण प्रतिपूर्ण १ सागरना नागनी ४० ॥ पुरुपवेदना पधनो स्थिति ज०१ सागरना नागनी ते पस्यने असल्यातमे जागे उणानी, उत्० प्रतिपूर्ण १ सागरना नागनी ४१॥ नपुसक वेदनी जण १ सागरना नागनी ते पस्यन अस म्यातमे जागे ठणानी, उत्० प्रतिपूर्ण र सागरना ? जागनी ४२॥ तिर्यचनु थायुष्य १ ॥ मनुष्यनु थायुप्य २॥ ए२ प्रतिनी स्थिति जाश्वतर्मुहूर्त्तनी, उत्पूर्ष क्रोमो ने २२ हजार वर्पना त्रीजा नागे अधिकनी ४ ॥ मनुष्यनी गति १ ॥ मनुष्यानुर्वि २ ॥ ए २ प्रह- ~ तिनी स्थिति ज०१ सागरना -" नाग ते पख्यने असंण्यातमे नागे सणानी, उ० प्रति पुष १ सागरना दोर सातिया भागनी ४६ ॥ यजभपतनाराच सघयण १॥ समचरंस सगण २ ॥ शुक्स वर्ण ३ ॥ मधुर रस ४ ॥ सुरनि गध ५ ॥ सुहाखो स्पर्श ६ ॥ लघु ॥ आण ॥ स्निग्ध ए ॥ प्रशस्त पिहायोगति १० ॥ स्थिर नाम ११ ॥ शुन नाम १२ ॥ तोजाग्य नाम १३ ॥ सुस्वर नाम १४ ॥ यादेय नाम १५ ॥ यशोकी िनाम १६ ॥ ए १६ प्रतिना वधनी स्थिति ज० एक सागरना सात नाग करीए तेवो १ नाग ते पस्यने यस एगातमे जागे उणानी, उता प्रतिपूर्ण नागनी ६२॥ तिर्यचनी गति १॥ एप्रियनी जाति ॥ पर्चेजियनो जाति ३ ॥ तिर्यंचानुपूर्वि ४ ॥ उदारिफ शरीर ५ ॥ उदारिकना श्रगोपाग | ॥उदारिक वधन ७ ।। उदारिक सघातन ७ ।। तेजस् शरीर ए ॥ कामण शरीर १० ॥ "जस पधन ११ । कार्मण वधन १२ ॥ तेजस् सघातन १३ ॥ कार्मण मघातन १४ ॥ यदु राघयण १५ ॥ हुम सठाण १६ ॥ कालो वर्ण १७ ॥ तीखो रस १७ ॥ तुर्ति गध २७ ॥ परखरा स्पर्श २० ॥ शोत २१ ॥ गुरु २२ ॥ सुखो ५३ ॥ धनुरुसघुनाम २४ ।। उपधात नाम २५ ॥ पराति नाम २६ ॥ उच्छास नाम २७ ॥ उद्योत नाम २७ ॥ थाताप नाम २ए । थप्रशस्त विहायोगति ३० ॥ त्रस नाम ३१ ॥ स्थावर नाम ३२ ॥ पादर नाम ३३ ॥ पर्याप्ति नाम ३४ ॥ प्रत्येक नाम ३५॥ यस्थिर नाम ३६ ॥ अशुन नाम ३७ ॥ पुर्जाग्य नाम 30 फुस्सर नाम ३ए । अनादेय नाम ४ ॥ अयशो कीर्ति नाम ४१ ॥ निर्माण नान ४२ ॥ ए ४२ प्रकृतिना बधनी स्थिति जा एक साग रना नाग करी तवा २ ना ग ते पश्यना असण्यातमे जागे उणानी, उत्० प्रतिपूर्ण एक सागरना जागनी १०४ ॥ जिय १॥ सेऽधिय ॥ चरिंघिय ३॥ किलक सघयण ४ ॥ कुज समाण ५॥ सूदम नाम ६ ॥ अपर्याप्ति नाम ॥ माधारण नाम Om प्रकृतिना वधनी स्थिति ज० एफ सागरना ३५ नाग करीए तेषा ए नाग ते पम्यने थसत्यातमे जागे जणान), उत् एक सागरना प्रतिपूर्ण नागनी ११२॥ अप जनाराच सघयण १॥ निग्रोध परिममल सवाण ॥ ५२ प्रतिना अपनी स्थिति ज० एक सागरना ३५ जाग करीए तेषा ६ नाग ते पस्यने असम्म्यातमे नागे उपानी, प्रतिपूर्ण एक सागरना । लागनी ११४ ॥ नाराच सघयण १ ॥ सादि सगण २ ॥५२ प्रकृतिना वधन स्थिति ज एक सागरना ३५ जाग करीए तेषा नाग ते पस्यने अ सख्यातमे जागे लपानी, उत्। एक सागरना प्रतिपूर्ण । नागनी ११६ ॥ अर्धनाराच सघयण १ ॥ वामन सठाण ५ ॥२ प्रकृतिना वधनी स्थिति ज० एफ सागरना ३५ भाग फरीण तेया नाग ते पस्यने असम्न्यातम नागे उपानी, उत्॥ एक सागरना प्र तिपूर्ण नागनी ११७ ॥ रातो वर्ण १ ॥ कपायमो रस २॥ ए प्रकृतिना बधनी स्थिति ज० एक सागरना २७ जाग करीण तेवा ६ नाग ते पम्य ने असम्य्यातमे जागे उणानी, उत्० एक सागरना प्रतिपूर्ण नागनी १५० ॥ पीलो वर्ण १ ॥ खाटो रस २ ॥ ए ५ प्रकृतिना अपनी स्थिति ज एक सागरना २० नाग करीप तेवा ५ नाग ते पल्यने श्र सम्यातमे नागे ठणानी, उत्। एक सागरना प्रतिपूर्ण नागनी १५२॥ नीलो वर्ण १॥ कमयो रस २ ॥ ए २ प्रकृतिना बधनी स्थिति ज० एक सागरना २७ जाग करीए तेवा नाग ते पख्यने असख्यातमे नागे उणानी, उ० एक सागरना प्रतिपूर्ण रटे नागनी १२५ ॥ यशामीति १॥ उच गोत्र॥ तेनी स्थिति ज एक सागरना ७ जाग करीए तेयो एक जाग ते पक्ष्यने यसरूयातमे नागे उणानी, उत् एक सागरना प्रतिपूर्ण : नागनी १२६ ॥ दानात्तरायादि ५ प्रष्ट तिना वधनी स्थिति एक सागरना नाग करीए तेचा ३ बाग ते पल्यन असख्यातमे जागे उणानी, उत्प्रतिपूर्ण एक सागरना 3 नागनी १३१ ॥ ७ एभियना कर्मवधनी स्थिति कही ॥ एडिय १३१ प्रकृति वाध ते १४० माथी सम्यक्त्व मोदनीय १ ॥ समामिथ्यास्त्रमोहनीय ५॥ नरकायु ३॥ देवायु ४॥ नरक गप्ति ५॥ दयगति ६॥ वैनेय शरीर ॥ पैकेयना थगोपांग ॥ पैकेयषधन ए॥ वै केय सघातन १० ॥ थाहारक शरीर ११ ॥ थाहारकनां थगोपाग १२ ॥ थाहारक बधन १३ ॥ थाहारक सघातन १४ ॥ नरकानुपूर्वि १५ ॥ देवानुपूर्वि १६ ॥ तीर्थकर नाम कर्म १७ ॥ ए वर्जि॥ण एकेजियना प्रकृतिना यधनी स्थिति कही ॥ थवाधाकास पूर्ववत् |२॥ इवे वेऽिय १॥ तेइजिय २॥ चरिधिय ३ ॥५३ विगछियना प्रष्ठतिना वधनी स्थिति कहे ठे ॥ त्रणे विगसेंद्रिय १३१ प्रकृति वाघे, तेमा घेजियना प्रकृति धनी स्थिति पजियवत् ॥ नषर पटलो फेर,जेम पडियमा एक सागग्ना नाग कीधा, तेम, येइजियमा २५ सागरना नाग करवा ३ ॥ तेशप्रियमा ५० सागरना नाग करवा, | शेष पूर्ववत् ४ ॥ चरिजियमा १०० सागरना नाग करवा शेष पूर्ववत् ५ ॥ ए ३ विगछियना प्रकृतिघधनी स्थिति कही ॥ थवाधाकाल पूर्ववत् ५ ॥ हवे असकी पंचेंजिय १४१ प्रकृति वाधे, ते १४८ माथी 9 प्रकृति वर्जि ॥ सम्य फ्त्य मोहनीय १ ॥ समामिथ्यास्व मोहनीय २ ॥ श्रादारक शरीर ३ ॥ थाहारकना अगो पाग ४ ॥थाहारक बधन ५ ॥ थाहारक सघातन ६ ॥ तीर्थंकर नाम 9 ॥ ए ७ वर्जि। हधे मिथ्यात्व मोहनीयनी जण १००० सागर ते पस्यने असख्यातमे जागे उणानी, उत्प २००० सागर प्रतिपूर्णनी ॥ नरकायु १ ॥ देवायु २ ॥ ए ५ नी ज० १०,००० वर्ष ने श्रत मुहूर्त अधिफनी, उ० पल्यनो थसहयातमो नाग ने पूर्व कोमोनो त्रीजो नाग थधिकनो॥ नरकगति १॥ तिर्यचति ॥ए नी ज० १७०० सागरना नाग करीए तेवा र जागनी ते पख्यने थसस्यातमे नागे उयानी, उप प्रतिपूर्ण ५ नागनी ॥ मनुप्यनी गतिनी जा एक हजार सागरना नाग करीए तेवो दोट नाग ते पस्यने असख्यातमे नागे जणानी, उ० प्रतिपूर्ण दोठ जागनी ॥ एव दवगतिनी पण जाणवी ॥ नवर एक नाग कदेवो, पव फ्रेय शरीरन पण जाणवी ॥ नवर घे नाग कदेवा ॥ शेष एकें जियवत् ।। नवर पटसो फेर जे एक सागरना नाग करवा, ते काणे १००० सागरना जाग फरया कमा ॥ अबाधाकास पूर्ववत् ॥ ए थसझी प.प्रियना प्रकृतिषधनी स्थिति कछ। ॥ ६॥ एषे सझो पचेंजियना प्रतिघधनी स्थिति कहे ॥ ५ ज्ञानावरणीय ॥ ४ दर्शनावरणीय ॥ ए. ए प्रतिनी स्थिति जण श्यतण, ३० क्रोमाकोमो सागरोपमनी ए ॥ शासावेदनीयनो स्थिति इरि यापहियान थाभि तथा सपरायने थाभिने श्राधिक समुच्चयवत् जाणवी ॥ थशातावे दनीयनी स्थिति जण् यतो कोमाक्रोमी सागरोपमनी, उत्० ३० कोमाकोमी सागरापमनो॥ सम्यक्त्व मोहनीय १॥ समामिप्याव मोहनीयनी स्थिति समुच्चयबत् ॥ मिथ्यात्व मोहनीयनी जण थंतो क्रोमाक्रोमी सागरोपमनी, उप सीचेर कोमाक्रोमो सागरोपमनी ॥ कपाय १५ नी स्थिति जव तो क्रोमाकोमी सागरोपमनी, चत् ४० कोमात्रोमी साग- रोपमनी ॥ सज्यखनना कपायनी थोषिक समुच्चयपत् ॥ श्रायुष्य ४ नी स्थिति श्रो धिक समुच्चयवत् ॥ थाहारक नाम १ ॥ तीर्थकर नाम २ ॥ ए ५ नी स्थिति जाप नग थतो कोठाकोमी सागरोपमनी ।। पुरुषवेदनी ज० वर्षनी, उप १० क्रोमाक्रोमी सागरो पमनी ॥ यशोकीर्ति १ ॥ उच गोत्र २ ॥ ए २ नी 70 वतर्मुहूर्त्तनी, ज० १० क्रोमा क्रोमी सागरोपमनी ॥ दानातरायादि ५ अतरायनी ज० अतर्मुहूर्त्तनी, उ० ३० क्रोमाक्रोमो सागरोपमनी ॥ शेप प्रकृतिनी स्थिति जा असो कोमाक्रोमी सागरापेमनी, उत्कृष्टी जेनो जे स्थिति थोधिक समुच्चयमा कदेख ले तेटली सेटली वाधे ॥ सकी पर्चेजिय जीवो १४७ प्रकृति वांधे ॥ ए सझी पचेंजियना प्रकृतिघधनी स्थिति कही ।। इति कर्मप्रकृ. तिवध स्थितिना घोस सपूर्ण ॥
४४ वोलनो अस्पवहुत्व ॥ थप भी जगवती शतक १ए मे उदेशा त्रीजाबी २२ एकभियना जघन्योस्कृष्ट अव. गाहना थामी ५४ योसनो अस्पयहुत्व खिम्यते ॥ सर्वयी योमा सूक्ष्म निगोदना थपर्याप्तानी जघन्य अवगाहना १॥ तेथी सूक्ष्म वाट फायना अपर्याप्तानो जरा था श्वसस्यातगुणी २॥ तेथा सूक्ष्म तेल थपर्याप्तानी जा शव थसम्यातगुणी ३ ॥ तेथ। सून अपकायना अपर्याप्तानी जण् थ० असल्यातगुण) ५॥ तेथी सूदम पृष्वी थपर्याप्तानो ज० थ० थसम्यातगुणी ५ ॥ तेथी वादर बानकाय थपर्यासानी जण या श्वसस्यातगुणी ६ ॥ तेथी। वादर तेउकाय अपर्याप्तानी ज० था असम्यातगुणी ७ ॥ तेथी वादर थपकाय थपर्याप्तानी ज० अ० थपख्याशगुणी ॥ तेथी सदर पृषी पर्याप्तानी ज० श्याथसस्यातगुणी ए ॥ तेथी घादर निगोद घने पादर प्रत्येक वनस्पति थपर्याप्तानी 7 श्रण माहोमाहि तुल्य ने असभ्यातगुण! १-२१॥
तेथी सूक्ष्मनिगोद पर्याप्तानो जप अ० असरूपातगुणी १२ ॥ तेथी सूक्ष्म निगोद श्रप र्याप्तानी उस्कृष्ट १० विसेसाहिया १३ ॥ तेषी सूक्ष्म निगोद पयातानो उ० थप विसेसा हिया १४ ॥ तेथी सूक्ष्म वानकाय पर्याप्सानो ज० अ० असख्यातगुणी १५ ॥ सेथी सूक्ष्म यासकाय अपर्यासानी न० अ० विसेसा दिया १६ ॥ तेथी सूक्ष्म वानकाय पर्या- प्तानी उ० ० विसेसाहिया १७ ॥ तेथी सूक्ष्म तेउकाय पर्याप्तानी जण थप थसत्यातगुणी २७ ॥ तेथी सूक्ष्म तेउकाय अपर्याप्तानी उठा घिसेसाहिया १५ ॥ तेथ। सूक्ष्म तेठकाय पयार्सानी उ० विसेसाहिया २० ॥ तेथो सूक्ष्म अपकाय पर्याप्तानो जा था वसम्यातगुणी २१॥ तेथी सूक्ष्म थपकाय अपर्याप्तानो उप अ० विसेसाहिया २२ ॥ तेधी सूक्ष्म थपकाय पर्याप्तानी ना अ० घिसेसादिया २३॥ तेथी सूक्ष्म पृवीकाय पर्याप्सानी ज० अअसरुपातगुणी २४ ॥ तेयी सूक्ष्म पृथ्वीकाय थपर्याप्तानी उथा विलेसा हिया २५॥तेथी सूक्ष्म पृष्वीकाय पर्याप्तानी ना था विसेसा दिया २६ ॥ तेथो बादरवाजकाय पर्याप्तानी ज० श्रम सस्यातगुणी २७ ॥ तेथी वादर वाकाय अपर्यातानी जा अ० विसे साहिया २७॥ तेथी घादर वानकाय पर्यासानी उ० अ० घिसेसादिया श्॥ तेयो बादर VIE तेउकाय पर्याप्सानी जय श्रग असख्यातगुणी ३०॥ तेथो वादर सेउकाय अपर्याप्तानी उप या पिसेसाहिया ३१ ॥ तेथी चादर तेउकाय पर्याप्तानी उ० था विसेसाख्यिा ३२ ॥ तेथी पादर यपकाय पर्याप्तानी ज० अ० सम्म्यातगुणी ३३ ॥ तेथी वादर अपकाय अपर्याप्तानी उ० था विसेसाहिया ३४ ॥ तेथो चादर धपकाय पर्याप्तानी न था विसेसाहिया ३५ ॥ तेथी यादर पृथ्वीमाय पर्याप्तानी ज० अ० थसख्यातगुणी ३६॥ तेथी वादर पृथ्यीकाय थपर्याप्तानी न० २० विसेसाहिया ३७॥ तेथी वादर पृष्वीकाय पर्याप्तानो न च विसे सादिया ३० ॥ तेयी चादर निगोद पर्याप्तानी ज० अ० असख्यातगुणी ३ए ॥ तेयो चादर निगोद थपर्याप्तानी उ० था विसेसाहिया ४० ॥ तेथी चादर निगोद पर्याप्तानी ज० अव विसेसाहिया ४१ ॥ तेथी वादर प्रत्येक वनस्पतिकाय पर्याप्तानी ज० अथसख्यातगुणी ५२ ।। तेथी यादर प्रत्येक वनस्पतिकाय अपर्याप्तानी उथप असल्यातगुणी ४३ ॥ तेयो चादर प्रत्येक घनस्पतिकाय पर्याप्तानी जा था श्वसख्यातगुणी ४४ ॥ इति ४४ घोसनो थापयत्व सपूर्ण ॥ PAN २८ वोलनो अल्पबहुत्व ॥ थथ श्री जगवती शतक २५ मा उद्देशा पहेसाथी जीवना १४ नेदना जघन्योत्कृष्ट योगना यात्री २० घोसनो अम्पघहुत्व लिख्यते ॥ सर्वथी थोमा सूक्ष्म एप्रिय थपर्याप्तानो जघन्य योग १॥ तेथी बादर एप्रिय थपर्याप्तानो ज० यो असख्यातगुणो॥ तेथी वेजिय थपर्याप्तानो ज० यो अस०३॥ तेथी तेति य थपर्याप्तानो जग यो थस० ४॥ तेथी चरिंजिय अपर्याप्तानो जण योग यस० ५॥ तेथी असही पप्रिय थपर्याप्तानो जण योण् यस०६॥ तेथी सझी प.प्रिय अप र्याप्तानो उ. यो अस० ॥ तेथी सूक्ष्म पप्रिय पर्याप्तानो ज० योग स०७॥ तेथी चादर एप्रिय पर्याप्तानो जा यो असा ए॥ तेथी सूक्ष्म एकेंजिय थपर्याप्तानो उप योग अस० १०॥ ते मी घादर पकेंशिय थपर्याप्तानो उ० योग अस० ११॥ तेथी सूक्ष्म एके प्रिय पर्या तानो जर यो असन् १॥ तेथी चादर एफपिय पर्याप्तानो उ० योग अस०१३ ॥ तेथी वे इजिय पर्याप्तानो ज० यो अस० १५॥ तेथी तेइज्यि पर्याप्तानो जण्योग असा २५॥ तेथी फ्लरिंघिय पर्याप्तानो जप यो अस०१६॥ तथी असली पचेंजिय पर्यातानो जन् यो यस १७॥ सेयी सझी पप्रिय पर्याप्तानो जग यो अस० १॥ तथी वेप्रिय थपर्याप्ताना उ० या० अस०१ए। तेथी तेशप्रिय अपयाप्तानोज योग अस०२० ॥तेथी चरिंजिय अपर्या तानो उप योग श्वस० १॥ तेथी शतको पचेंजिय अपर्याप्तानो उ यो असण्॥ तेथी सही पचेंघिय थपर्याप्तानो उ योग श्वस० २३॥ तेथो बेणिय पर्याप्सानो ज० यो० असन २४ ॥ तेथी तेइपिय पर्यासानो ज० योग श्वस० २५ ।। तेथी चरिंजिय पर्याप्साना उपयोग अस० २६ ॥ तेथी असझी पप्रिय पर्याप्तानो उ यो अस० ॥ तेथी सझी पचेंजिय पर्याप्तानो न यो श्रस्० २७ ॥ इति ७ बालनो अल्पवद्रुख,सपूर्ण ॥
२४ दडकना जीवोनो अल्पबहत्व ॥ श्वथ २४ दमकना जीवोनो थरूपवहुस्त्र खिख्यते ॥ सर्वथी योमा मनुष्य १॥ तेथी तेउकाय असख्यातगुणा २॥ तथा वैमानिक असण गु०३ ॥ तेथी १० नवनपति माहोमादि तुस्य ने असण गुण १३॥तेथी नारको यस गुण १४ ॥ तेथी वाणन्यतर असण गुणा १५॥ तेथी ज्योतिषी सख्यात गुण १६ ॥ तेथी तिर्यच प.प्रिय असल्यातगुणा १७ ॥ तेथी चरिंजिय विसेसाहिया १०॥ तेथी तेइजिय विसेसा हिया१५॥ तेथी वेजिय विसेसाहिया२०॥ तेथ। पृष्योकाय असगुण २१ ।। तेथी थपकाय थस० गुण २२ ॥ तेथी वाठकाय असा गु० २३ ॥ तेथी वनस्पति कायना के जीवो अनतगुणा २४ ॥ इति ५५ दमकना जीवोना अल्पपलुस्व सपूर्ण ॥
१५ योगना ३० वोलनो अल्पवहुत्व ॥ थथ श्री जगवती शतक २५ माना उरेशा पहेलाथी १५ योगना जघन्योस्कृष्ट योग थाश्री ३० वोसनो थल्पयहुस्व लिस्पते ।। सर्वथी योमो कार्मण कापयोगनो जघन्य योग१॥ तेथी उदारिक मिश्रनो जं० यो थसम्यातगुणो २ ॥ तेय! येक्रेय मिश्रनो जग यो० थस० ३ ॥ तेथी उदारिकनों जण यो० अस०४ ॥ तेथी वैक्रयनो ज० योग अस० ५ ॥ तेथी कार्मणनो उ० योग थस०६ ॥ तेथ। थाहारकनो मिश्र ज० यो० थसं० ७॥ तेथी थाहारकनो मिथ उ० यो० यस ॥ तेथी उदारिकनो मित्र थने फ्रेयनो मिश्र उ० यो माहोमादि तुल्य थस ए-२०॥तेथी ज्यवहारमननो ज० यो० अस०११॥ तेथी थाहारकनोज यो यस १२॥ तेथी सत्य मन र शसस्य मन २ मिश्र मन ३, वचनना, ए योगनो ज० योगमा दोमाहि तुल्य ने यस०१५॥तेथीयाहारक शरीरनो ना योस २० ॥ तेथी उदारिक १ वैक्रय र चार मन ६ चार वचन १०॥ ए १० नो उ यो माहोमाहि तुल्य ने श्वस ख्यातगुणो ३० ॥ इति योगना ३० घोसनो चम्पवठुस्स सपूर्ण ॥ जीवना १४ भेदनो अल्पबहत्व ॥ अथ श्री सूक्ष्मादि जोवोना १४ नेदनो अस्पबहुत्व विख्यते ॥ सर्वधी थोमा सक) पछिय थपर्याप्ता १ ॥ तेथी सही पचेंड्रिय पर्याप्ता असख्यात गुणा २॥ तेथचरिंजिय प० स० गुणा ३॥ तेथी थसही पचेंजिय प० विसेप्ताहिया ॥ तेथो घेइजिय प० वि० ५॥ तेथ) तेइजिय प० वि०६॥ तेथी असली पर्चेशिय थपण अस०७॥ तेथी चरि यि अपण वि०७॥ तेथी तेइजिय थप० विए ॥ तेथी घेइजिय अप० वि० १० ॥ तेथी घादर एकेंद्रिय प० अनतगुणा ११ ॥ तेथी चादर एघिय अप थस० १५॥ सेथी सूक्ष्म एप्रिय थप वस० १३॥ तेथी सूक्ष्म एकेजिय पा सख्या०१४॥ ॥ इति सूक्ष्मादि जीपोना १४ नेदनो थरूपवटुत्व सपूर्ण ॥ PHAR
ET
इति श्री प्रकरण संग्रह
माग वीजो
समाप्त
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