Central Library, University Of Rajasthan
Rajasthan Puratan Granthmala Raj Vinodmahakaviyam
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مر
राजस्थान पुरातन ग्रन्थमाला
प्रधान सम्पादक - पुरातत्वाचार्य जिनविजय मुनि
[मम्मान्य गंगालक, राजस्थान पुगतचान्वेषण मन्दिर, अपपुर ]
.
-
-ग्रन्थाङ्कः८.
महारवि उपरान रिरचितं
राजविनोदमहाकाव्यम्
प्रयागफ
राजस्थान राज्य-सन्यापित
राजस्थान पुरातत्त्वान्वेपण मन्दिर
(Rajatha Operti Resort Imprese 1
जयपुर (राजस्थान)
Re...]
[
राजस्थान पुरातन ग्रन्थमाला प्रकाशित ग्रन्थ १ प्रमाणमञ्जरी - तार्किकचूड़ामणि सर्वदेव । २ यन्त्रराजरचना महा- राजाधिराज जयसिंहदेव कारिता । ३ कान्हडदे प्रबन्ध - महाकवि पद्मनाभ । ४ क्यामखांरासा - नवाब अलफखां (कविवर जान)। ५ लावारासा- चारण कविया गोपालदान । ६ महर्पिकुलवैभवम् - विद्यावाचस्पति स्व. श्री मधुसूदनजी अोझा । ७ वृत्तिदीपिका - मौनि कृष्णभट्ट । ८ राजविनोद काव्य - कवि उदयराज । प्रेस में त्रिपुराभारतीलघुस्तव - सिद्धसारस्वत लघुपण्डित । २ वालशिक्षा व्याकरण – ठक्कुर संग्रामसिंह । ३ करुणामृतप्रपा – महाकवि ठक्कुर सोमेश्वरदेव । ४ पदार्थरत्नमञ्ज पा - पं. कृष्णमिश्र। ५ शकुनप्रदीप - पं. लावण्यशर्मा । ६ उक्ति- रत्नाकर -- पं. साधुसुन्दर गणी । ७ प्राकृतानन्द - पं. रघुनाथ कवि । ८ ईश्वर- विलासकाव्य - पं. कृष्णभट्ट | : चक्रपाणिविजयकाव्य - पं. लक्ष्मीधर भट्ट । १० काव्यप्रकाश - भट्ट सोमेश्वर । ११ तर्कसंग्रहफकिका - क्षमाकल्याण गणी । १२ कारकसंबन्धोद्योत - पं.रभसनन्दी । १३ शृगारहारावलि - हर्पकवि । १४ कृष्ण- गीतिकाव्यनि - कवि सोमनाथ । १५ नृत्यसंग्रह - अज्ञातक्तृक । १६ नृत्यरत्न कोश - महाराजाधिराज कुंभकर्णदेव । १७ नन्दोपाख्यान - अज्ञातकर्तृक । १८ चान्द्रव्याकरण - चन्द्रगोमी । १६ शब्दरत्नप्रदीप - अज्ञातकर्तृक । २० रत्नकोश अज्ञानकर्तृक । २१ कविकौस्तुम - पं. रघुनाथ मनोहर । २२ एकाक्षरकोशसंग्रह - विविधकविकर्तृक । २३ शतकत्रयम् - भर्तृहरि, धनसारकृत व्याख्यायुक्त.। २४ बसन्तविलास - अज्ञातस्तके । २५ दुर्गापुप्पाञ्जलि - म. म. पं. दुर्गाप्रसादजी द्विवेदी । २६ दशकण्ठवधम् - म. म. पं. दुर्गाप्रसादजी द्विवेदी । २७ गोरा बादल पदमिगी नऊपई - कवि हेमरतन । २८ बांकीदासरी ग्यात - महाकवि वांकीदास । २६ मुहता नेगसीरी ख्यात - मुहता नेणसी । इत्यादि। प्राप्तिन्धान – सञ्चालक, राजस्थान पुरातचान्वेपण मन्दिर, जयपुर ।
महासरि उदपराज रिरपितं
राजविनोदमहाकाव्यम्
*
मम्पादक
श्रीगोपालनारायण बहुरा, एम० ए०
MixR0
--प्रसारानां :-
श्रीगजस्थान-राज्याजानुसार
संचालक-राजस्थान पुरातत्त्वान्वेपणा मन्दिर
( Rajasthan Orkntal Rercurrintitute )
जयपुर (राजस्थान)
FREमार २०१३] अपमागि
[भिमान 01
प्रकाशकीय वक्तव्य प्रस्तुत "राजविनोद काव्य की रचना कवि उदयराज द्वारा अहमदाबाद के सुप्रसिद्ध सुलतान महमूद वेगड़ा के यशोवर्णन के रूप में हुई है। महमूद वेगड़ा गुजरात का एक महाप्रतापी, शूरवीर और कर्त्तव्यपरायण नरेश हो गया है, जिसका वर्णन सम्बन्धित इतिहासों में विस्तार से मिलता है। उदयराज महमूद बेगड़ा का आनित एक संस्कृत कवि था। तत्प्रणीत “राजविनोद " द्वारा मध्यकालीन भारतीय इतिहास के कई नवीन तथ्यों पर प्रकाश पड़ता है तथा राजस्थान की तात्कालिक स्थिति आदि के विषय में भी कितनी ही सूचना प्राप्त होती हैं। सर्व प्रथम डाक्टर बूलर ने सन १८७५ ई० में बम्बई सरकार के लिये “राजविनोद " की प्रति प्राप्त कर इसका महत्व प्रदर्शित किया था। तब से इसके प्रकाशन की आवश्यकता बनी हुई थी। भाण्डारकर रिसर्च इंस्टीट्य ट, पूना में हमारा जाना हुआ तो वहां पर सुरक्षित बम्बई सरकार के अन्य संग्रह से "राजविनोद " की प्रप्ति प्रकाशन के लिये हम अपने साथ ले पाए । राजस्थान सरकार द्वारा जयपुर में "राजस्थान पुरातत्त्व मन्दिर" की स्थापना होने पर श्री गोपालनारायण जी बहुरा हमारे सम्पर्क में आये और हमने इनकी साहित्यिक रुचि देख कर " राजविनोद " के सम्पादन का कार्य इनको सौंप दिया। इन्होंने प्रास्ताविक परिचय के साथ-साथ ऐतिहासिक ग्रन्थों के आधार पर महमृद वेगड़ा का वंश-परिचय तथा डा० एच० टी० सांकलिया के दोहाद के शिलालेख का अनुवाद और अनुक्रमणिका आदि से इसे समन्वित करके पुस्तक की उपयोगिता को संवर्धिन कर दिया है। "राजस्थान पुरातन ग्रन्थ माला" के ८ पुप्प के रूप में प्रस्तुत रचना को प्रकाशित करते हुए हमें परम प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है। इति । चं मुनि जिनविजय मम्मान्य गंचालक जयपुर, ज्येष्ठ कृपया राजस्थान पुरातत्त्वान्वेषण मंदिर, वि० सं० २०१३ जयपुर प्रास्ताविक परिचय तर मगन Ent. मगर गागारि गशित नामा पौरागिरी । म माम म जान मारपगार जोरात्र पावनnिt पर अभीगना। ari पति" (पास गापिन IITamगा। - गिनिया बाग पातमाह धीमान गुमा पनि रिगम मापा'TET बाला जीपन पनि ति मागिर frrr FIR और गमगर FTTTTTRन मगामी प्रमान गरक्षा Trira .afri. 1000-1: (भा. मा. fr...) + वारापानम ... महापा। उसरा नाम पर ग१४११०ा अगाका गुरा। गा गमागमुरारपार १-... पर। १७..और fr पर आरमत। १.पा IIT मागोगा। art मग पाrrfrता मोरदार मिना रागागार TET" पानी नाग (१४ अप.)। t..मर पर मामगाराबगा।। Practarगावरास.RATI Prett.(म) TEET तिर। १११-taramfretirnaitrint पान! from Tri ११...rnmrritratnfern .e-tTHAPA १11 ( .mar) remix सामान Berre Eurmun..... (Manfrer-IIrom IGuru 111953) P1) ने - २] गजविनोद महाकाव्य का रक्षर बतलाया है, मानो वा कोई कट्टर हिन्दू राजा हो। कवि ने क्षत्रिय राजा के समान वर्णन . करते हुए लिगा है कि वह गजन्यनूडामणि है, श्री और सरस्वती दोनों उसकी सेवा करती है, दानवीरता में वह कप में भी वट कर है और उसके पूर्वज मुजफ्फग्मां ने श्रीकृष्ण को कलिकाल के विरुद्ध महायता की थी। यह नन्त्रि मान मर्गों में वणित है। पहले सर्ग में २६ श्लोक है और इसमें मुरेन्द्र मरम्बनी-तम्वाद रूप में काव्य की भूमिका बांधते हुए यह वर्णन किया है कि ब्रह्मा इन्द्र को सरस्वती की पोज करने के लिये भेजा । इन्द्र ने उमे महमूदगाह के सभामण्डप में पाया । मरम्वती ने अपने वहां न्हने का कारण बताते हुए महमूद का कोनिगान किया। दूसरे मर्ग का नाम 'वंगानुकीनंन है। इसमें 2 ? इन्लोक है और महमूदगाह की बंगपरम्परा का वर्णन है। समें दिया हुआ बंगानुपम इतिहाग को अनुनार सही जात होता है । "सभा समागम' नामग तीसरे नर्ग में ३३ दलोकों में महमूद के सभा प्रवेग का वर्णन है । दरबार में कौन-कौन ने राजा और गभ्य उपस्थित होते थे, इसका वर्णन गर्वावसर नामक चतुर्थ नगं में ३३ श्लोकों में किया गया है । पांचवं सर्ग में मङ्गीतरन्नप्रनन का ३५ प्नोकों में वर्णन है और छठे सगं में विजययात्रोत्सव वर्णन के ३६ इन्नोर है । मानवें मर्ग का नाम 'विजय लक्ष्मीलाम है और ममें ३७ दलोकों में मह मद के गागतिः पगरम का वर्णन है । पानगाह को उदारता के अतिशयोगितपूर्ण वर्णन ने शात होता है कि यदि को उनके दरबार में प्नि दक्षिणा मिनी होगी अथवा मिलने की आगा रही होगी।" कामदाबाद के मिल मनतान महमद बंगला (१४५८ ई० १५.११६०) के दरबारी गति उपयगज विनित ऐतिहामिक काव्य को इग दुर्लभ प्रनि* पर यह टिप्पणी पर्याप्त नहीं । मामान्यन गजगत के निशान और विगंपन गुजगत के गुलवानों के इतिहास में गनि गानं वान एवं अन्य माहिन्दिर अभिनि वाले विद्वानों के परिनय के लिए यह दुष्प्राप्य अन्य प्रणामित दिया जा रहा है। उनकी प्रनि भाण्डारकर ओरियण्टल रिमनंस्टीट् घट पूना गे प्रान की गई जोरदमी गंम्मान के नग्रहा यक्ष श्री पी० की गोरे के मन्तव्यानुगार म काम को अगाया णि गरम प्रस्तुत किया गया है। गग्निाव में प्रत्येप गर्ग में भाग में निम्नलिगित पा दिया हुआ है जिनमें मुलतान - श्रीमान् नानिमदरफरः गम जनि श्रीगूगंरक्षमापति- कामाला मन्मसमभयमाहिस्ततोऽस्त्रयः गामा.म्मदोग्य तनजो गायानदीनाया भीमहमूदगारिनपति जीयानदीयागजः iff: गाम . जनग१९८१०१. पर अगर एन.पी. जा: iii.'भाकर मनमानी प्रति अगिा और HT : HC CI. 502) Amar ने भी listory of Cast Cant titerature. Madrent 1937p.271.433 में हनी प्रतिमा Fre, ift: 1.16 1240४-७५ । प प्रास्ताविक पनि ।३ गतिमा दाग गतिमान नियम १९. (10.)मा मानिस और प्रारnिtar नमा प्रसार मिसाया सामाना- गीता (५८-४१.) सामा( ...) -II HIT (Pt.....) !--my २.-माहिमाम्पत (१) ---मामा (न)। (मम्मामा) :-गा? भाग (iio...) --प्रामः (HR) नाकार गा मार (न)। ४.-गारिमा (3)पुर (नागपत्र -गार माम"n (समार गा) १.01...। भूत)। ५--भरपुरमा (तपुर नापामर (१५८.)। '-TTERY नगिmir पार पाहामा मामि मामय (या) गनिनाममा मात्रमा पागम भोरदार firrम गागा मगमरम्प पिारिता र मगाम HATI ur नगमगाना TART प्रा -ETI (१) .--'पा (IRE) (1) Tr मगर (मागः) (0) उगरा पुन (मरान प्राम) (1) भोर (6) RTI मामmani.mष । गाय 1. पनि urf मार पनि प्राप मामfrarur मनावर रिगा मनिपाती माम भागीन भागमा रranimy १५६ मfair TIRTE आगर TTRAILEnter:- TEEnार और गरfini TRIT 'm TIMEगम पानी nrrier -ाल गरल Trrrrrr Tr प्रामाnिIm RRENTrt HTTPITH Error her armuni गि-1 Re Trendinrfarir rary randu.fe TATTEN - • freitrimati.१२।
४] राजविनोद महाकाव्य पोरोजसाहे: समयेऽय जने श्रीगूर्जरत्रा भुवि पादशाहिः । मुज्जफुराहः(१)वगुणाधिचन्द्रमितेषु (१४३०) वर्षेषु च विक्रमात् ि॥१४॥ अहिमदशाहिजे (२) तत आशेवधिचन्द्रमितवर्षे (१४५४) दिप्रसवेदेन्द्र (१४६८) योऽस्थापयदहिमदाबादम् ॥१५॥ महिमुन्दः) कुतुबदीनी (८) शाहिमहिमुंद (५)वेगस्तदनु । यो जीर्णदुर्गचम्पकदुर्गा जग्राह युद्धेन ॥१६॥ उल्लास २, पृ० १३ । इतिहास की विनेगा एन यंगावलियों की छानबीन करके इन पर विशेष प्रकाश दालेंगे। गायिनोद महाराज का रनयिता उदयगग अवरूप ही महमूद का दरबारी कवि था क्योंकि उसने गकाव्य में उनकी भूरि-भूरि प्रशगा की है। यह विनारणीय है कि धार्मिक कट्टरता लि प्रमित महमद ने उत्यगा जैन हिन्दू पण्टिन को अपने आश्चय में कैसे पाया । गानो का गान का निर्माण मारने के लिये यह हा जा सकता है कि महमूद के गायन कान ११:१५११६० के बीच में ही यह लि । गया था परन्तु अवश्य ही यह उस समय रना गया होगा भव महम्द का भाग्य उदय के गियर पर पहुंच चुका था। प्रस्तुत पाक गनृथं नगं में उन गी गजाओं का वर्णन आया है जिनको महमूद ने अपने आधीन र किया था। अमर अनिति अलग अलग राजाओं के पद और सम्मान आदि का भीनमाना जाता है..- "राजोय येवरदतपसनका मानदेशाविधान सदसि फाक्षरवेशान् ।" १, स०४ नया में मालवगन और दक्षिणना का वर्णन प्रकार है: 'वे चित्रोपानि दयनादरेण हताविपसमुन्नतचामरेग । राना विराजनितरां परिहायनानो गोलोष दक्षिगतान विचमगेन ॥१०।। स० ४. पन्य नगमजदारान मेण निरोपडितरणानगीभावः । माय निजजीवितरक्षणाय वयं गमयति मानवमदनेवाः ॥११॥ स०४ FIR मान्ननलिना:-- "मा बिदेशोपियो प्रादुनमानयह वान् नाविनमायनाममना बांदायसी मारायः ॥२६॥ नामानिमामा मालवा गरमद पिलनी ने १८६२-६३६० TATERTAIR मगर (बंगाजी मालवा पिरत मैनिक महायता दी थी, माना किनारमा राजा मनाम पाहता भा-या । (यो म... 'हमार यादगार' मंगरण १९२० १० रनमा, भा.प.०५) ।
মালা ও म मभिशापागA पाप...पापाना पा। मी पर्ष गाना ERAT TITHI का ताई 'पपापित रममाण पणा पारि गाने गुण । गोरमामायrmबारिमुभा मार ॥१२॥ गार अग्पिा मारमा मभीमनगर गागि मामू और गा मा पापीन प । गा भा• REETर गा Irमा भाग नमान मगाया मातम गति पाना : म infinite :.) मामी उन नाnat fair निरागविना-IIT गति ARTY नमाaririn नाममामा मामाने पागम गति गमरमग .ग. या माfarn मा com १८...1r-ITER TrfraR #Pाम लि. Pun auमान गरम • fortu rau.4170 सना पनिदानासाममा नागा- - . माग- Trtfe..११.(..) for ar गागा friनिाम मागमापा। पनिमा T-TTE मामा (Sarmirr HTTER पर। एमाला उग समय it TFT (TRAI) न पार गा। 47 min. ११२५ (:. म. १८) Afrirm. MIT गाना:MT 11-11) Refre-arrtin 1.मि.भा. ११.५। firrf Tin. XI पर मा. *T TEL Trant अपना-Trrr Pाम भरमारगपा 34FImr. IFICER IMPROm Ponrn 141 minsft-i........... १.१ram win 1)। rrent hits 61 minTrir.ru . .
६] राजविनोद महाकाव्य उदयराजन गाजविनोद ?--काव्य पद्यात्मक है । दोहाद का मिलालेग १-लेग पद्यात्मक है। याव्य की भाषा संस्कृत है। -~-नंग संस्थान भाषा में है। :--काव्य को हलनिवित प्रनि का बूलर ने ३-- लेप बटोदा मे उत्तर-पूर्व में ७४ मोल पर गुजगत में प्राप्त की। दोहाद में प्राप्त हुआ। ४.-गजविनोद की हस्तलिगित प्रति में ८-मिलालेग विराम सम्वत् १५४५ मा गन मम्बन नहीं दिया हुआ है परन्तु नेय सम्बत् १८१० (२४ आपरेल, १४८८ न पृष्ट मात्रा के आधार पर १५०० और ई०) का लिगा हुआ है। १६०० ई० के बीन नो निपी जान होनी । -चिनीर महमूद वेगळा के गासन- 2-~-गिलालेग भी महमूद बेगडा के सामन काल (१४५८ मे १५.१०) में ही काल में ही उसके राज्यारोहण के समय रना गमापा । अयवा, जग चि. ऊपर मे लगभग ३० यां याद १४८८६० में अनुमान लगाया गया है १४.३ में लिया गया था। १४६६बीन में लिग गया था। ---गाजविनोद गम्यमी चन्दना से आरम्भ E-मिलालंग भी कामीरवामिनीदेवी अर्थात ना है। प्रम गर्ग को गुरेन्द्र सम्वती- मरस्वती की वन्दना से प्रारम्भ होता है। मम्बाद नाम दिया गया है । बाम्नव में, (मा० गांकलिया का नोट पिटिका सम्पूर्ण काव्य ही मरम्मती के द्वारा जन० १६३८१०२१३) । अभिगोन । 'मामपानगाहे: अभि- सा० साहलिया ना नायन है कि यह देयी नववर्णन प्रगाना गानी गन्मादानि ग्रामी अस्त्रा गरस्वती प्रतीक होती है। मनाना म० ।। राजविनोद में भी मरम्वती की प्रालि नाम गे सम्बोधित किया है । (पद्य २ गर्ग २) -विनोद में दिलाया येगा का गंगानुगमन प्रनार :- ---गिलाने में दियाभा यंगानुनग भी उन प्रार:- मुनाफर मांगद, (१) नमः, महागर, - म्गद, (२) ममः। गंगानगरमान निमारो आभारमि। यह जानुराग भीमग्लिामिहाग. मागे बाग दिय एवं यंगानुग में मिर गनगिनोद गजन मग में माना गोमाग -मिलाना में कुल २६ पा, जिनमें में पारंपलों में नो मामूद गोनों মাশাধ এবং उपगगनग्निाः #mil में पापग पमा (Benet.nn दाnfrman पानमौर 12.पा में मार १. म ८.परमानापानापन 1- प्रमामा पनि विगा --STARTीपना गगरा Iframमनीत पण मारामानी पिण 1" मम mar गान नही निपामरा शाममय मा गुरानो मा माननिय (गाभन ) TEPTaratी पना मा मन पापिया दो बिग विगागागा। पुरा और TREntirn गाना- मम । mirar rate Inा सार FTTAR मर (१९८ 1.) नामी नतिगमगमगिहै। १.--नार में मामूETari. .-frma म श्री RTE: विगा।(...) रिगा। () - fat गर्ग २. 01 में भारत में FRIT (मगर पापा आमसन से Preet.) nount - nिi-- "पाप मात्र "fvषा पास (f) fore सपा पा राना। प्रताप Int M virgeryनि भाम मामnanama विभाभि रिपोमिसन' Hromtammu जा (ग) रा marrium Pict गजविनोद महाकाव्य उदयगजन गविनोद दोहाद का गिलालेत १२.मदपकर के पुत्र महमद विर में १: दोहाद शिलालेग के पय १८ में पल्लिदेग वर्णन करने 7 गजविनोद (नर्ग २ का उल्लेग है । इम देग पर वेगहा गुल. प०१०) में नन्दाद और पब्लिवन पा नान के मुख्य मन्त्री मादल का गागन उल्लेग :- - "आद्याप्यहो नन्दपदाधिनाया मल्लकवत्सल्लियने नमन्ति" ॥६ फिर, नन्दार गनाओ ने विषय में "पल्लीदेशाधिकारं च पुण्यं पुण्यमतिस्तदा दुष्टारिहदये राज्य दुर्गमेनं चकार व ॥१८॥" डागलिया का मत हैरिगोधरा नानका में पाली नामक स्थानीगल्लि पल्लीवन और पब्लिोग एकही। 'विभिन्न प्राकारमोधस्फुरदेहमाला' पर विभिन्न प्राकार' पद में विदिन सोना: कि पग्लियनानगन नन्दाद में जननमय कोई जिला भी था। पहा मदपकर को पुन महम्मद के गमय में पग्निवन मे नात्यग्य है । गहीं येगा न समग के पति के में ताता है। 3-गणधिनांद में 'गामानवीन' उपालिका १३दोहारमिलालेख को पस में-"श्री बाग प्रयोग मरमाद चंगा के पिता महम्मद नं. (तीन) प्रमो अन्वये गाह श्री महमद वीर निए दुआ है:- नानिः.. ... मानः" निगा। यह भी मह- "गायामदीन दनि माहि महंमदेन्द्रः" मूद के पिता जी की आधि, मरगर की नी, जगारि पर पटनेने मनीन माना। महमूर नो मिाकों और नेगी में 'नागिर उनिगा वा-उद-दीन' (गंमार और धर्म का रक्षा) लिगा है। भरमा (१) नो पुष मगर (२) को भी मिामो में गायागउन निगाहै। (एपित जन१९३८ To ०१६) म प्रारोगामिलेग और ग्रामविनोद गारगी तुनना गाने मेमनी fit7i TTif (१) प्रभागास या पुरयगत महम: गंगा (१८५८-१५.११.) गा- मानित (B) अपगः नेपामगा गगनोर गामाया गैर मनोज । सपा मेगा मालेगी (१४५८-१४६६) में गया।
प्राम्मारिक परिचय 1 . (1) मगरनी mm मारेगार में हो और गरे पूर्व गोरगर नामों के मन में ममिविग्गा । (४) गरिनोट मार दोfininतुनना गे या पारमा मोर यह गिमागमीकि रमना गति और मां मागिमार है। "पतिपिwronमारी, गन् १९३०, मागर में पाग गरे मग पगार टर एप..गानिrTilar nा महरा है। संगको योग या टर गाnि frrनी मनुगत. भारपियो गति नी पुर में पुष्प में प्रति रिया है। मानिकार पितरिया गया है गाराम बी एपमा प्रापान fix प्रति माई गरागरी गगनिनोm + मासार टिम गि गटीट्पर में मुना प्रति पर गि गाना गमपोनि में माया गया है। दमण पर ता निरिपती हा पा र पर गि गमन E FArinterit ne रिती जागा भगाया entertfre होnar प्रार सपना firtanहै और पानी निरि frinी में मिनी मोमबार । ग) रिमी गम नामर रिति मेभान भामर पगाई विगा। यह पपन प्रनिम उमंग गे mmm तारना, तिरे अनिम 1 गति भी मन्त्र nिt प्रतिनिलिभारि गपि मिप मरेगा गि प्रा ।। पूरे TEAnt. RR रिगोपाराम सा है । गरे मागम Nिोग पर मामा नि । मामा गुगर मुभा अमिर और मार दिया है Hi frjा ममरमान :गि मम ममान गरी जामा निमी ।। मापार tfmग भी मांग पूmमागा है। माया गुणगान गातार पर पून िII am re में गुमगारगर refra fanा गरा nि the form •गो पामरी RI माटापा,free hinmatr Tara Free in mamrit RT पार Trirann free Frirm animraniग में आर पार fram. for Rोर भी form frrrrry Anामी: r rint Erre TATERT RuralTrenी । IPErrentimentarimate tree Antiriremium fram मर - १०] राजविनोद महाकाव्य फाय या । सम्भय है, उसके दरबार में भी उसे स्थान प्राप्त हो । प्रस्तुत फात्र के द्वारा कितनी हो ऐतिहासिक घटनाओं व महमूद के चरित्र पर तो प्रकार पड़ता ही है, साथ ही अपनी कृति के लिए समयानुसार विषय चुनकर संस्कृति फाग परम्परा की श्रृंखला में एक फड़ी जोड़ने का श्रेय भी कवि को अवश्य ही प्राप्त है इस कृतिके इस प्रकार संपादन और प्रकागन में राजस्यान पुरातत्त्वमन्दिर के सम्मान्य संचासक आचार्य श्रीजिनविजयजी की ही प्ररेणा और मार्ग-दर्शन मुख्यतः कारणभूत है, अतः इनके प्रति आन्तरिक तगभाव प्रकट करना अपना परम फत्तंव्य मानता हूँ। यदि मध्यकालीन इतिहास के विशेषज्ञ इस ऐतिहासिक काव्य से अपनी गवेषणा में फोई सहायता प्राप्त करके इतिहास के तथ्यों पर अधिक प्रकाश डाल सफेंगे तो इनके प्रकारान का श्रम मफल समझा जा सकेगा। गोपासनारायण A महमूदवेगड़ा का वंश-परिचय गुजरात केरामा गुमनाना समाप सिमानामय गीmfrnा नाम हार रसपाधि पनाम जोरानमारमा । बहसर (सर) लीय पूर्वी रियासीमिए गुजरात निवास में हमारे बागपून गुगतान' नाम से सोम रिया गण है। भगवान श्री रामचनो से रिततीही पोपों बार मागहमा । रसोरेम में मगे गुलम, माल भूगल, मान, भूमारन, पोसएम, रिमोर, मर, पप, हरीमन, मपाल, हरोग, पास, रिपान हरपाम मोर हरपगए । महान हरगापुत्र था और पापाग एर गांव में एतापा। गारे पोरें भाग मामा पारे रोतों भाई भमोरारी नाम ररते थे। एर पार रिस्मो के माह भएम्मा भुपमा माहारा रोह निरनिरता मोर अपने पापियों मे विणा रमहरन रेन पारामा पास गमय महारन, गारापोराभाई पाप मोर गरे रामपून एक मगरह । एरामापीरपंरम राबवित पहामियान मौरसार मापने पर गए और सारा मापत-गापिपा सागहमरे से पराम पिसाई मोर मोरो महामें कोरोने अपना परिचय सापु बहन मोर फीरोवरी होगा तर तो माई कोरोगहरे साप पिरलो बनेग मौरतलाम परोपपरमिपा हमेगहारमोनोर. गत-मुरमप्रितारियापमोर-ल-भारna मोर real मार पाएकराहीमाणे पनर मुगाकर जान माम गात गुमनामम मा । भागहरले गे महाक मारतापपुर र भारतावमा मुशाग महानिमामा पानी पी। गहारम पुर र at भोली महामाया एकति म परपरहर । सा गमप ममामा मुगारे पास जाने पारायमीरापान महापामार alको पहारमामयोहिदुणहीमापने घर से बारसे मिटमारमा मौर भोतको भोगना पारितारों में लग होकर बोरसे 'मामाहो मरर'मारामाराबस मुलाम बनाएmमाम हो गई गरमागरमसमापूजा'बोमसोरोंगे भोगा हुण गि सरकारले मुहें गा PATRIKA भारतरोरा प्रात Prime Tभयो रामोशिशीर । परमो परिमाग पीपणा ॥१॥ ग.
- १२] राजविनोद महाकाव्य हिजरी सन् ७६३ (१३६१ ई०) में यह खबर आई कि गुजरात के सूबेदार मुकरर पां ने जो रास्तो पो के नाम से प्रसिद्ध या, बलवा कर दिया। उसी वर्ष के रबीउल- अध्यन महीने की दूसरी तारीख को सुलतान मोहम्मद ने जफ़र सो को एक लाल तम्मू वरतीश किया और निजाम मुकरर सो को दण्ड देने के लिए गुजरात की तरफ़ भेजा । उसो महीने को चौयो तारोस को सुलतान मोहम्मद जफ़र सां को विदा करने के लिए होजसास पर गया और उसके पुत्र तातार सो को अपने पास रखकर पुत्रवत् पालन फरने का वचन दिया। हिजरी सन् ७६४ (१३६२ ई०) में सनहुमन नामफ ग्राम के पास जफ़र खां और मुकर्रर को मुठभेड़ हुई और इस लड़ाई में जफरसा विजयी हुआ।निजाम युस में मारा गया और जफ़र ने पाटण में प्रवेश किया। मन् ७६५ हिजरी में सान राम्भात' की तरफ़ गया और मुसलमानो रीतिक अनुसार गुजरात को अपने आधीन फर लिया। हिजरी सन् ८०६ (ई० स० १४०३) में मुजफ्फरशाह ने तातार खो को गद्दी सौंप दो और उसको नामिरउद्दीन मोहम्मद शाह की पदयो धारण फराई । यह स्वयं आशावल फागबे में आकर रहने लगा और सब मंझट छोड़ दिया। मुलतान मोहम्मदमाह इसी वर्ष के जमादिउल मारितर महीने में मातायल सर्व में तात पर बैठा । एक सप्ताह बाद ही उसने नांदोल' के हिंदुओं पर चढ़ाई फी और उनयो हापा। फिर, उसने अपने नफर को साथ लेकर दिल्ली की ओर फूच किया। यह सबर सुनकर इकबाल सां के मन में बहुत संताप उत्पन्न हुआ' । परन्तु शनवान (१) मादिगग्न कन्जमाती येन हिण्डीपापनि यमांगि गड्गः । पनियोणिनपानिनः प्रक्षालिनः परिनमाग्गिगां ।।३।। ग० वि० गर्ग २ (6) गम्य प्रमिदै दिग्दविभिन्न प्रातामोधर फुग्दट्टमालाः । अनायो नयादा धिनाया भगवत् पल्लिवन अमन्नि ।।६।। ग० वि० सर्ग २ । (३) नारीग मोगही में निगाह राजार पुर मुल्तान मगर को या ना मिली में एक बड़ा निनोट:आ । प्रत्येक विद्रोही मरदार मी चीन में दिल्लीमा गज्य साभार पर परीट (प्रनिनिधि) मानानं माप में जापा । जग गमरमालामiniirtभागी जीवन के लिए बार पानी को माना मानाकोपना मा मामान मिले में मार लिए संगार finामान निमारने पानीलानि नानकरतानार गायनमानिया नारनं गत मेलार मार दिनी Tamitarमा.मिनापान कारनामा मो मन मे दरमहा । अचान गां भी उगंगे गग । निमगापमान सामागताहै:- हमा और नारीमा মাসের ব্যথা ভয় [१३ के महीन तासारोपन एराम पिपरमोमामा रा पर भी पायरा नही मा। मन में, ताना तो मापहोगा मोर उगारपाटन में मारपत्रागा। गोल बाल पाने मोमोस एनालिलियो रे गहलोतातार मप पिना lnirमापौर मोमर. पारसनाम पारगर नही पा गया। पमा पाग एनेमाने भारला निधिरों में उसे गरपिा । गोरिए लोग गणे 'मुगा' (The Martyred Lord) गो भी प्रतीत होता परभावितरपीची। गुलाम मोहपरमपरमार नर पारिपट्टी पर हा। राप मोर परम उमर भापान गए मोर उमरें भी गरीमान रिया। प्राचीन इतिहाग गर्ग ने kिr गुमनान पोशामरको मापने ग्य मोरों और भपिशरिपोर्टर | प्रार्थना गरि बारामा सिमोनमापनरोगगासनं दामा मनोमसोम गामोर परी पर गाड़ी मोह। गमनागन अंगे बोरो गालामा मार गियर मैन्य पुष रिलाई मारेतारामत समान मामाया म रमाप गहराना र पारण मो मो मानरहोगा. गालोरोप्रासापर (1)ौतुर धाम में 2000 १० (१४.७१०) में गुगतान मोहमारीमायके तोर मोर गात माने गा कर मे पात्र पाल पर मुखापारमाम पाशि प्रसर गुमनानपा पारगरपागा मापारमाह में मारा में पार हामि ARRIA (रिलायनापुरी मापीर पर और उनमन मगात कामोर free गोषनामिनोfran गुमनाम में मिा परमतिर का कोमोनोरोभा महानि परियार मोरे पर गुमान मोहामापुरमापूरपागको मानानिए मरता. m हतोचपा । पा र गुना gm rate नाम बारा गया तापमपमा पीपा fru मार गिर भाषी रो राशETTE IT । यो मायूErretiriram net - (1) fotri Tam - १४] राजविनोद महाकाव्य राजधानी को लौट आया। उस समय यह धार के पूर्व शासक असपसां को अपने साप लेता नाया था। अलपसा एक वर्ष तक कंद में रहा। इसी बीच में उसी के एक . उमराव मूसा सोने, जो मांट फा हाकिम था, मालवे फे थोड़े से भाग पर अधिकार कर लिया । इस पर अलपता ने अपने हाय से एक अजी लिखकर मुजपफरशाह पो पास भेजो कि मेरे एक अपोनस्य उमराव ने मालवे के कुछ हिस्से पर काया फर लिया है। यदि आप मुझे इन बेड़ियों से मुक्त करके उपकार को फंद में डाल दें तो थोड़े ही समय में मालवे पर पुनः अधिकार प्राप्त करके अपनी शेप आयु आपके गुलाम फो तरह बिताऊंगा। सुलतान ने उसपर कृपा करके मुक्त हो नहीं कर दिया वरन् अपने पुत्र महमदस फो लश्कर देकर सहायता के लिए उसके साथ भी भेजा। मूसासां में सामना करने की शक्ति पाहाँ पो ? यह भाग गया और शाहजादा अलपसों को गद्दी पर बिठा फर यापस आया। मुजफ्फरशाह न हिजरी सन् ८१२ (६० १४०६) में फुम्भयोट के हिन्दुओं के विश्व सुदावन्द सां को सरदारी में फोज भेजी जो विजयी होकर वापत आई। मुजफ्फरसाह को मृत्यु के विषय में तवारीख वहादुरशाही में इतना ही लिखा है कि सुलतान फो मत्य हि० स० ८१३ (ई० स० १४१०) में हुई । फुध जानकार लोग इस वृत्तान्त पो विषय में इस प्रकार पाहते हैं कि आपायल पासवे फे फोलियों ने मुस्तान फो सता फो स्वीकार नहीं किया मोर घाट वाट पर लूट पाट करने लगे । मुजफ्फर- शाह न एक हजार सिपाही साप देकर अहमदरा को उन्हें दयाने के लिए भेजा । महमद ने शहर से बाहर निकल पार विद्वानों को बुलाया और उनसे प्रश्न पिया फि'एक दारा किसी दूसरे भारत के नाप को यिना पुसूर मार डाले तो उससे बाप के मारने पर यदता लेना पर्मानुपास हैं या नहीं ?" सभी विद्वानों ने पाहा 'चपला सेना ठोप है।" विद्वानों को यह सम्मति एक कागज पर लिसाफर अहमदरा ने अपने पास रसी। दूसरे दिन यह अपने सवारों सहित शहर में वापिसहमा और सुलतान को व फरसे मार डाला। सुलतान ने मरते समय महमपरा को गुरद शिक्षाएं वो, जो इस प्रकार है :- . "पुत्र ! गुमने इसनी जल्दी पयों की ? गुरान में लिया है कि मामलो अन्रा में आयेगी ही-एर घटी पहले या पोपे। मेरोइन शिक्षा पर या राना । इनसे गुण सान होगा। जिन लोगों ने तुगे यह काम करने के लिए साया उनमे दोसी मप्त राना परन् उनको मार शामना बोंकि सामान काम लाल (अगिर) हैं। राब पीने का मौका यिनस मत करना पयोंकि पाराय मे प्यारे में ऐ. समुद्र का महान गला । (1) गुमांग यी नागीय बनवानरी प. । मानो मानवमांशामिनि निक गर्ग महमूद पंगा कर परिचय [१५ मेर पनि और रमसिनेमाराममापरि पेसा करने रमेापान मा परि मर हो मुल गोश में गुपचन नहीं रह गया। गरीब एवंनों (i) रोपितर रमना पोहि प्रजा के सब पर ही मा ताश पारण रिए पता। प्रमा मूक मोर गुप्ता का है। हे पूर! भूम ही सेम मान होता है । गए हो तर होगा पराग से रिगा नहारमा चाहिए । है पुत्र! परिमारोगे तो तुम अमी हो मागमोगे।" इसरं पोपोहोरेर बार मुगान गभंगुर प्रसार को पोरस भा'यह पटना महर महीने भलिम लिन पाटन पहर के निमहार में शनाया गया। मुगाहर पार पौत्र गुमनाम मोहम्मा पुत्र मामा- गुमान महमर मागितार ममात मरमरगाह का पापारविरोरान् ८. नारोल मडा महोने गहो पर रेस समर सरीमा २१ मामला हो पर उरे हो सके रपेरे भाई नौरोग सामनाहरू rreira प्रभाव में मलमालो गुलतान पोतिनुपरमारने उपसमय के लिए उसने रियरिणापर गर मुमतान ने मार' पाम को समायरो भरने भए मात्र हुए होपा ११२. एर मगर जगाराम मोरे नाम पर महमगरगनापामार पाम भीमर होr frm बन गHI मामा गो समय से गुबार होग रामपानीमा माया है। १ मारनामा.गम मा. : MITRam मामा र मम पापा गोरीन. मी रम्नीमrrn पूरन र INTEthere ८१९ (int)EReignni KEEPRमापनी गम भरा। IMAnnurमागुनगया और पौराgar दिने गरि । Preet Rammatra ।
राजविनोद महाकाव्य उमी वर्ष के अन्त में फोरोज राने फिर राजगद्दी का दावा किया और मोडासा के स्थान पर अपना राण्डा सदा किया। ईर फा राव रणमत भी उसके साय हुआ परन्तु माह ने स्पनगर स्थान पर उनको परास्त कर दिया और राय य फोरोज पां प्राण बनाकर पहाड़ियों में भाग गए । योड़े दिन बाद राय में और फोरोज सां में भी अनबन हो गई और रणमल ने उसके हाथी और घोड़े छीन फर शाह पो भेंट कर दिए। मालवा के सुल्तान हुशंगशाह ने गुजरात के शत्रुओं को आश्रय दिया तथा इस देशा पर १४११ ई० व १४१८ ई० में हमने किये परन्तु माह ने उसफो हर बार पगस्त कर दिया। अहमदशाह ने भी १४१६ ई० में मालवा पर हमला किया और हुशंगगार फो भागकर मां के किले में शरण लेनी पड़ो' । १४२२ ई० में अहमदशाह ने फिर मानवा पर आभामण किया परन्तु यह मोड़ के किले पर अधिकार करने में मफल न हुआ । दि० २०८१७ (१४१५ ई०) में अहमदवार को गिरनार फा फिला देखने को इचदाई इमलिए उमने विद्रोहियोंको उमी दिशा में गदेड़ा। उस समय तक मौगष्ट्र को गिमी भी राजा ने मुसलमानों के आगे सिर नही सफाया या इसलिए मोर को गगा पर मोर मलिक को आश्रय देने का बहाना बना फर साह ने उस पर आपमण कर दिया। हिन्दू गना ने मामना तो किया परन्तु मुसलमानो फो पदप्रपाली मे अनभिज्ञ होने के कारण या. जत्ती हो हार गया और भाग पड़ा हुआ। मा ने गिरनार पं. फिल ना उगमा पोटा पिया । इसके बाद फुध पापिया कर देना ग्बीयार पग्लने पर या मागदाबाद लौट गया। रास्ते में उगने गिलपुर से देवालयो यो नाट पर बरन गा धन व जयाहगत प्राप्त पिए। गगन के बनमाली गजागी अनिम्मित पोटे मोटे मरदारी को भी वश पाने व उनमे पर यान करने में जामदार पो गय प्रयास करना पड़ा पा । ये लोग अपने अपने पितो में पनातं पं और जंगलों में भाग जाते में इसलिए इनगे पर यल ग्नि में बन पठिनाई पालो यो । अन्त में शाह ने इन पर यातिर नियार किए और जमीन य पिने इनमी वापस कर दिये । M १४२६ मं ा ने फिर पर जिय प्राप्त परनं गी चा की। पा जाना या जिई गाय पर राना उस कार गे बाहर मी या गौरासिमी भीग में गा था; इगलिए उगनं या में गयो पर HIT मार्ग के 11 मतो ना पिनारे पर विद्वान पिसा यनगना र frofमाग पर पुहिएपनीय परम्पाट रिपाई पाता था। पारमा नाम मनपर ग्यता । गागलीन र पा राया तो ! "ET RE- । Tren..
महमूद पेगड़ा का परिचय एर में पिर मर गया और उग पुत्र नामराण में तीन सापारिक सना शेरा पिणी र गोही वर्ष १४२८६० में वर पि ए गमोर मामा १४मयाबरोया मित्रोत लिया। पहो पागने पr feam मगनिर भौधराई। इस बार (१५१more एपनी गुगतान, गाममेट, काय मोर बापा गुगतान में विजय प्राप्त हो। यि पोपा चौर मात बोर भी गुमगरम गुगतान के पितारम लिनो होगा मार जिपिनी मेलामा मे गोने चारी भोर तो जगात मेरपरमोटोघो। मामाही मर जमाई गन् १tोमामार मार और मामा मारिमामने सनाया गया। गुमरा गुमानों में मापागाह हो गहन प्रमात्रिय और ग्यान गुमान प में पाररिया माझ्ने गरिह ! हेरे मारपूर्ण समय में रिलो मनप्प परिवार ने दी माता की पहो।"पहा प्रभो मोर गुमाएर पा । महमापार रामपुर मुरमागरी परापरपर पिसागोर पा मोर रामराम में पिरोय पपि मौरतला पासमार पापोर द्धि भी महीपी, परपर पा र पारगोपिर परोसोगरे। गरी पर ही उसने in पर बर्गर निोरो पर उपर पहाड़ियों में दिरामार में उसने मर्ग मपणे पिर समा मारीto में मुगलान नेपालगनेर रेरा inmar और मोरलि में भाग मानिए पास सिर पर नगाराने गार में भाग नितमो गुनपारो भनी गहाना mr frm (1) from (२) Trn Arriferent. NिIE Tiffmar " Trfme HTTAR minutkm.fa.ri (1) rigri iraniram Ter | मार TITTETमोगमारे inforit (५) Invitnपन सांप MEETTE। WRITER.Amerikrefrrent (1) ग.f..गः (१) frmila ().f.१९...
१८] गजविनोद महाकाव्य तय इन नवीन मनु को मामने मुहम्मदगाह न टिक सफा और बुरी तरह हारकर लौट गया । पोड़े हो समय बाद हि० स० ८५५ (ई० १४५१-५२)फे मोहर्रम मास को २०वों तारीख को उसकी मृत्यु हो गई ।' मुहम्मदशाह के बाद हि० स० ८५५ (१४५१ ई०) के मोहरम मास की ११ वों तारीख को उसका बड़ा शाहजादा कुतुबउद्दीन तरत पर बैठा । उसी समय उसे मालूम हुआ कि राजधानी से कुछ ही मोल फो दूरी पर मालवा के सुलतान की मेना आ पहुंची है इसलिए आगे बढ़ कर उसका मामना किया। मालवा के महमूद गिलजी को वापस लौटना पड़ा और कुतुब को जीत हुई । इसके बाद इन दोनों मुलतानों ने मिलकर हिन्दुओं के विरुद्ध युद्ध-योजना करते रहने को प्रतिज्ञा को और मेवाड़ फे राणा कुम्भा के राज्य को आपस में बांट लेने का मनसूबा फिया । मुजफ्फरगाह के भाई का वंशज शम्म यां उस समय नागौर का स्वामी या इसलिए उसने राणा के विरुद्ध सहायता करने के लिए फुतुबशाह से प्रार्थना फो। शाह ने अपनी फौज उसको महायता के लिए भेजों परन्तु राणा ने उन्हें बुरी तरह हरा दिया। इस पर फुतुबशाह फिर नागौर की तरफ स्वयं रवाना हुआ और मेवाड़ के अधीनस्थ मिरोही के राजपूतों को जीत लिया। फिर वह पहाड़ी मार्ग से फुम्भलमेर के फिले को ओर बढ़ा परन्तु बीच हो में राणा ने उस पर आक्रमण पर दिया। इसके बाद राणा में और फुतुबशाह में सन्धि हो गई। अय, मालवा के मुलतान ने फुतुबशाह को फिर भर काया और चम्पानेर पो स्थान पर राणा के राज्य को आपम में बांट लेने की संधि पर हस्ताक्षर किए। दूसरे यां, मुनुवमाह ने फिर आयूगढ़ को जीत लिया। यहां बुध फौज छोड़कर या गिरोही पहुंचा और एकबार फिर राणा से मंघिहो गई। अगले वर्ष १४५८ ई० में गपा ने फिर नागौर पर चढ़ाई पो । बहुत देर फार फुतुबशाह उराका सामना पारने के लिए रवाना हुआ और जय प्राप्त करता हुआ पुम्भलमेर की तरफ बढ़ा परन्तु उनको बौन ही में सपना पड़ा। इस घोड़े ही दिनों बाद यह अहमदाबाद नोट गया और मर गया कुनुयाउदीन के बाद हिजरी गन् ८६३ (१४५८-५६) फोरजय महीने की २३ यों तारीग को आमदार का पुत्र दाऊद गद्दी पर बंटा । परन्तु यह बिलाल अयोग्य लिए पगार जमीनों व उच्च सम्माधिकारीयों ने निपंग फिया गिरा (:) गममा (:) . उगले ना किया गया । देगी नगमाला; मोगामि नमागेगकामदासी। गाना: पायल रानीपानामन गनोनिमरिमा पनवान मेनीमा मागेर मनाया। ममताल TE: मगर मार्ग mritin: infrarl माम्मरलाई मदमूद येगदा पायंशयिय पुत्र सगरो पर रिहानायरिग बार रोने रेगुग भी पाए जाने है मोर मानि में भी मार है। पाना महमूरमारे माम मे fron.८१(१५१०१०) सामान माग पामो तारोल, पियामि भामरागार में तरल पाहा । समय उगरी भवरवा तर रोपी।पोमरसाए मार्ग चार र परमर मेगारेमाम प्रति मा और यही रामतिर पति-नायर सन पर बने पो होलि बार हम पिधारतीम गरारों में बीर fमार मार गापार उमरो मार देनेत पात्रा परन्तु गुगतान ने पौरत मारग मे एंगोरापान गरि होगा पोरगर सोगिर खाने से गिी भी गारोहमा पो। गर १४६७० में मामूर मे गोट परमाई परmar Iो मित गणता नहीं मिली लिए जान गात गे माल मोर मोरी भेंट र राप गे देने की मारे । (मरमामा माम) गोगा भाई और उमग:7 MT पाmufourम सानु Tी पीराम म पानी मुनी Tीमारी मिगती दीTR मियाची मिगुगा गुन माम गाप और मुश्मा र EIRHITT Trm भामर पापियामा परन्तु बीरपुमा भारी पीया RET wri m trent सरग Mraमारवामिनीपाशिम गया रामराम धार मुपती 17 HIT CTATE - आप writ सगरमार in भिापी बीमार मोर माप Tarframmnramme for errrrr PT.स. सिसीन न rru nara पाग पाग Irfan Kinnfrart mutna Afr पर mirrrrh पर-१९T 'YfE Imrn mm xr FIRITI पास frmirmernfrat FIRRHTTRIrrufamar दी TT पर भी PrxurneantrTH Traram पEिntrienta" (न) (1) मोnt म . २०] राजविनोद महाकाव्य परन्तु, इमसे उसको संतोष नहीं हुआ और वह फिर गिरनार पर हमला करने का बहाना दंडने लगा । दूसरे ही वर्ष उसे वहाना मिल भी गया । राय माण्डलिक राजचिन्हों को धारण किए हुए किसी मन्दिर में पूजा करने के लिए गया । जव महमूद को यह समाचार मिला तो उसे वह सहन नहीं कर सका और तुरन्त चालीस हजार फौज लेकर राव को शिक्षा देने के लिए रवाना हो गया । राव में इतनी सामथ्र्य नहीं थी कि वह मुसलमानों का सामना करता इसलिए उसने मुंहमांगा फर दे दिया और राजचिह्न भी सुलतान को भेंट कर दिए। परन्तु, यह सब व्ययं हुमा और परम शूरवीर पृथ्वीराज चौहान का यह फयन फि 'एफ बार उड़ाई हुई मरती को तरह शत्रु भी फिर फिर फर वापस आता है' उस पर ठीक ठीक लागू हो गया। उमी वर्ष के अन्त में महमूद ने सोरट पर फिर चढ़ाई कर दी। राव ने अपनी प्रजा को संबाट से बचाने के लिए फिर मुंहमांगा धन देना चाहा परन्तु महमूद ने उसे इसलाम धर्म स्वीकार करने के लिए वाच्य किया। राव ने फुल उत्तर न देकर फिले के दरवाजे बन्द कर लिए और महमूद ने घेरा डाल दिया । अन्त में, राय ने देखा कि उसके दुःखों का अन्त नहीं है तो उसने फिले को चाबियां सुलतान को सौंप दी और उसके पहने के अनुसार पालमा पा लिया। (१४७० ई०)" इग विजय के अनन्तर महमूद ने विभिन्न प्रांतों से बहुत से सय्यदों और विद्वानों तो सोरठ में बनने के लिए बुलाया और एक नगर भो बसाया । इस नगर पा नाम मुस्तफाबाद पड़ा । कहते हैं, यह नगर बहुत जल्दी हो तंपार होकर राजधानी की गमानता फरने लगा था। वर्ष फा कुछ भाग महमूद यहीं विताता था। जय या इग नए नगर भवनों का निरीक्षण फर रहा था उसी समय यह गमाचार मिनासिपा के नियामयिों ने गगरात पर आगमण कर दिया है लिए यह उपर चढ़ चना और धान जल्दी हो उनको अपनी आधीनता स्वीकार करने के लिए बाध्य कर लिया । इमफे अनतर महमदशाह ने सिन्ध मे जाटों और बाचियो पर चढ़ाई की और सिन्य नयो तक देश के अंतरंग में घुसता चला गया । पे पटनाएं ६० म० १४७२ में हुई। निधी गमाई के बाद मामद ने नगर (सारमा) और पोदार (वेट) मोर पं. गरवारों पर पड़ाई की। इसमापारमा मह सतनापा जाता है कि मौलाना मोहम्मद ममरपन्चो ने मुलगान के पाग जागरद्वारा व यंट गोपाप्रासनों को मिरापन को और मामद ने उपर हाई पर दी । उग द्वारा मी यहा मी (१) गगनलाल मीणाम मर गतिमा करारा जमायापा। होम गा मा पराम। (:) fine roनगर, मा० १ (११), 0. ।
मदमूद पंगड़ा का पंज्ञा-परिचय १२१ मानो र पूनियों को नाश रिमा गई गाली एक मनिपाने के विचार से पार महीनों तर पोर से रोरे तर, होमा डोर पर गा। रेरामा भीम में २२३ र परिण परन्तु मात्र में मामा । बेड़ा पार पर या मोर परत गेरामपूर मारे गए । एप रोगी माय में हर भागामा भीम पर मिया गया और मरमागा सार पार fru r मा १tt. रो परमाा में ,गुरान मामयागार तारा और गर तु में मृत मार एनेसमा परी भाग पागमानों में बार मिसिना पा । पहिलो र रिमामागरमा गया। ए. गार वह गिर साहमा मरमागर से न गाह भोगको दूरी पर पार मी तर जागांचा । वही उसे मार मार मग मी तभी मूट पाट र हरिए उपके मन में रिचार मापारि पान पर एर मगर बगाया जाये मोर उगरा मार पामरागरा जा । रसी गमप गार व रोगां मोर मन मोहोबर बनरतंपार होगा। हसरे पर हो ft. R. E५ (t. स. १४८.) में उप मुगापमान सतारों ने मपुर रो परचट पर उगरे पुत्र मामा (पुरएकर) रोहण पर टिने पर-पत्र रा । गुमताल में रनरी पार लिए पापार पर पाई सरे विपर में उनसे मंगा। प. बालों में रमाए । मम पापातर tsun रे लिए गित हो । गर में १४५२१० में उसने फिर चापार पर प्रारम पाक्षिरी परण, मी समर पारा प्यार मूरत रे ग में समा जागिरों भोर गग राि प्रभार सना ग ren frR AIIरी पते पान नी भोर गे उग गरय पर भी riminarn होने मी पो । मामूर RIT Prunा रिप far rem मारे तयार पानं पापं गभी मग या मागा रामा । मरेर उता और गुमान पर रित कुमार गाय मातार भोर मां पाम पाहिए । को मारमा पर ptnu। हिमरोग ८८ (१२.) में गार गार पार में पा महो। गो गर गुमानो फोर n frit मागर पति र भने नारासार पूर्ण रे पगमा नाम भी fri (1) म और fer.netton.) Freet Frt nutamfret ferrit 'मरमर लि। iranR१TT मारे | Art में Trum मारा rrrr iirifm) - २४] राजविनोद महाकाव्य अहमदाबाद के सुलतानों में महमूदगाह, यदि सबसे महान् नहीं तो अत्यन्त लोकप्रिय अवश्य हुआ है । जैसे हिन्दू समाट सिद्धराज पो विषय में कितनी हो किम्बदनियां और अद्भुत फयाएं प्रचलित हैं वैसे ही उसके विषय में भी फितनी हो बातें प्रसिद्ध है । महमूद को शारीरिक गठन, शरता, बल, न्याय, परोपकार, इसलाम पर दृढ़ आस्था, नियम पालन में दृढ़ता और विचारशक्ति को श्रेष्ठता का समानर प मे यमान हुआ है । उसको 'वेगड़ा' उपाधि के बारे में कुछ लोगों का पाहना है कि जिस बैल के सींग दाएं बाएं लम्चे (एक आदमी दूसरे से मिलते समय हाय बढाए इसतरह) हों उस बल को हिंदी में बेगड़ा फहते हैं। सुलतान की मुझे इसी तरह को घी इसलिए लोग उसे वेगड़ा कहते थे । दूसरा मत यह है कि मुलतान महमूदने जूनागढ़ और चम्पानेर के दो पिले जीते थे इसलिए यह (वे-दो; गढ़ा-फिला) बेगड़ा (दो किलों का विजेता) कहलाता था।' कहते है कि, वह बहुत साने वाला था और इतने बड़े राज्य का स्वामी और राजभव में रहनेवाला होने पर भी उसको जठराग्नि यहत प्रवत पो। यह फला प्रेमी था और इमारतों का उसे बहुत मोफ या । गुजरात को मुसलमानी इमारनों में मे अधिकांटा के साथ महमद बेगड़ा का नाम सम्बद्ध है । 'मुस्तफायाद और महमूदाबाद (चम्पानेर) फे अतिरिक्त पात्रफ नदी के किनारे उसने अपने नाम मे एक और महर बनाया था जिसने चारों ओर फोट विचवारर अपनी अच्छी इमान्ले बनवाई थी। इसी नदी फो पिनारे पर उसने एक उत्कृष्ट महल बनवाया या मिग अशिष्ट अब तक वर्तमान है। यह इन्हीं तीन नगरों में से एक में प्रायः बना गता था परन्तु गरमी प. दिनों में जब मनोरे (सरबज) पक जाते हैं सब आमाबार अपाय गाता था। मीराते आगदी के पर्ता ने आगे नतकर लिया है कि गुजरात देश में जितने शहरों, फगयों और गांवों में फलों के पेड़ है ये राव मामय गमय में लगाए हुए है।' - मीगत मिाननीनं नि: अपनी बीमागेनी अवस्था में उगने फरमाया तिमादा पापी बनायो । पन्न, यह आरपना गर्ने पाये होग...१७मबाग मनान महीने में गोमवारमोदिन दोहरी नमाज के पानीमा माननियविनोगमा। उगगगग . . । कोनिगिया मना भा. १०२० ना : ति उनी मानसपर उगमरमर नांपा। (2) ना। । -- -- (2बानो मामा- माना भमय- FTER TRam:Tr: गादिनः । -::: exiगा. माना Mfr) || ft.ri ।
महमूद गायपरिचय बहामो ना मोरे nी पूरोपीय रे. पाबी। मिरर एगि मिना nिार रिसातीय प्रभागियों नेत्रपान तिर । Bartema (मा) मोर Brbore (जामोगा) रोनों ही सरा सितारसहित न पिण। एक यात्री २ सरीरबापाविप भारत किताबमापारण मात्रा में भोजन करन मोर गरेरीर में पिहो गोरोमा हो एमन तिा भोजन करते गाने पर मातमा दिप गपापा रिपरिको मरती गती गतो बारह जाती तो तुरतमा मातो पी। लता मनुष्यों रोसो को पार रोमियह पोरिपान बार मपरपीकरिबरीमार रेता र तामसार" मिती शिग उगला निशप का भोगनोधारो मोर एकचहरी में हरिताहै। भीराने निकाली में पिता हरि सापारण भोकमरे मतिरिका.कोर केले. गुजराती मग मन रायमा सके निरप रे भोर में समिति थे। रातको सोते गपो भगो भो भूमिपों से भरे हुए रामगोनों मोर mirए जाते थे। कमाती हार पर रट र उनको माता एता पा । बीच भार तुममाने पर भी यह ग्हें गाने मता हमार हाता हि बाहर हो तो सही पति रित प्रार प्राप्त होती मोतीराम मुमतानपति एवं समय के पि में मोतिहास प्रभार - "प! यह पता है कि यह पुनसार पुरानो गुमरामों में हर उत्तम पापार में, पर्म माम में समाप धर्म नियमोंस पालमपरने घ,पारय, पोषण, मोरामा समसार गतम परिस में रह सामर्थ में और गारतातोरशरापर मोर महात मोहोलेर भी उसको परमल गत परत । (mर में)'गुगmia iएकमाई मोरिने होसपर मा पोका नुमति दी और प्रा रिस सिरिता परत ए और ANNAIKir arch मानसिपी और समय हीरातो लिएमा मामीhiran पुषबात है! Raut fontinutr font हामा माना कि मोर ग frernet पर mamifene रोपती शादीran रामविनोद महाकाव्य जाय, यदि उसको पुरन हो तो जागीर पा आधा भाग उसको पुत्री को दे दिया जाय, यदि पुत्रो भो न हो तो उसके आश्रितों के लिये ऐसा प्रबन्ध कर दिया जाय फि उनको जीवन-यापन में रिसीमनार का पास्ट न मिले । पहते है कि एक बार एक मनुष्य ने भारुर कहा कि अमर अमीर मर गया है और उसका पुत्र उस पद के योग्य नहीं है। मुततान ने कहा कि यह पद उस लड़के को अपने योग्य बना लेगा । इसके बाद ऐसी मातों में पिनी फो पुर पहने का माहम न पड़ा। इम मुलतान के समय में प्रजा सुतो थी इसका कारण यह था कि अकारण हो अत्याचार करके फि.सी जागीरदार को जागोर नहीं पोनो जाती थी और गरफार द्वारा निश्चित लगान ही ले लिया जाता था। जय सुलतान महमूद शहीद के समय में कार्यरना मन्त्रियों ने देश को उपज हो तपास को तो शात हुआ कि उस समय देश में पहले से दागनी उपज अधिक होने लगी थी और गारों में कोई भी फिसान नियंन नहीं ।। व्यापारियों को सुटेरों फी कोई चिन्ता नपी पयारि, प्यापार ये सभी मार्ग सुरक्षित ये और सुलतान पे राज्य में चोर को उत्पत्ति हो न होनो यो । माप-रात शान्ति मे रहते थे पयोंकि सुलतान स्वयं इस मान्य- पा शिप एवं भवत्त था। यह प्रनि वर्ष इनकी जागीरें पढ़ाता रहता था और इसके दातिरिवन भी मन्तों को पकानमार उन्हें अनुदान दिया करता था। यात्रियों के लिये उगने बटो-दो घमंशाणाएं बनवाई और स्वर्ग फे समान गुन्बर पाठशालामा तमा मन्दिों पर निर्माण कराया । मुलतान यदा न्यायो पा और उससे राज्य म रिमो पो हानि पहुँनाने का शिमो का साहस न होता था। उग विषय में एफ एपिता में लिया है कि "अपराधियों पर तुम्हारा ऐसा धागड पाया हा है कि कोई प्यार पाने के लिये पास नहीं छोड़ सकता है। पोर्ट पहें गभी पगों सोगों का मत है फि महमद येगड़ा जm यायशाह गरात में पहले नहीं हुभा और न्याय में तो उग के पाद भी कोई समानता न कर गा। उसने नागर पारिला, मोरठ देश, जानेर तामिला तपा मोर भागपास से प्रदेशों को जीतपर यहां पर हिन्दू रीति-रियाजों को नाट पर दिया और इगतामो रोति-रिवाजों को प्रति किया, इनिग पायामत सर जो भी पार्प इन प्रदेशों में होंगे में जमा पे भाग लि जायेंगे। उस पोर यहादुरशाह यद्यपि देश जीतने में उपमेयर परा यानि अगर में पर गुगनान सामुद को नहीं पा गरता था। गुनगान तो इन दोनों ही दरों में यह कर पा । गुमानि और माया पाऐगा पारिभा में परम और पनि प्रपपिन में प्रोया।" है मम पर गुmar राय पणा पागो ममप गुरागान में गुनगान हमेन मि गार गा पा और परमन पटौर मौरी र प्रधान मंत्री महमूद गदा पापा परिचय 1२७ रेपर पर मोतिपा मला सपा मनोहरायासिपान पर मौनाता गामी प्रतिलिपंपरीय मार्ग एवं मोटा प्रातिरे पाम मापन शान में मनुभयो । गोगमप लिसात पर PRArr frenर एपोग गोरो शिरमान में उम पीर परम डिमान और नोपान मोal मोरी । मो आप मार के तमा पर मालान महपुर जिरो पुर महान ग्यागुरोम पेरिनरे न मोर लावारिधारों मोर परहो यो । गो समपरसपनो पर मनात महमर बदमनी मानपा पप यह पाना मारता हैir तिने हलगार गुमनाम मामूर मननयोरो मारमा समान मामा पाप में अबतार मेरमा पीपारि सारंगीतने प्रनितिन जिसने गा महान लता।" "पहले सिलिगुगतान महमा गोपट मनि उपके want Ratोगाविधान और पावसा में निपुण पा गुमनानाप रोपान हास्ति पुरता रेसति प्रापनारो। ज्यों ही गुणान पुरातर सोमी मनापाग सरग मासिमिती "मरे जिगर परपरबाराही नवा माएर भोरािमने से मोरियो m. गादी समर हो।" "रा गुमान राम में भी मनाम मगा रीमा। पर जोर पाते माप पर प्रारहोगी पो। गुमलोगों सपनारमारऐमो सलामीमही रेतीको। गैरता मरो नए गे गंगा में भी भी पसमानियापाराईजिप गरी प्रापर होतो पो। तुलमान एक मारेगारी पिया पारिना मामियों में सेनगम। पर पिगरपारामा माता रितिnि पारा पा जिम में गिपाही लोग मारतानमारम पार मंते और बाग सारा रिसे। प्रसपानोपमा पमपाप मोर समिया मालोचना पापा रामे गणारारार हाला पालो पाममा मन ताना हंग पर महीना मोल परमरपा पूर निराश fireir र माप मार, राम, सागर माणि, antr man भारताला तो जो पहातो गुला MIN में भी भूमि बनमारासमोना रोगो को ।मो माग बगान गरमा गयो। ल मापा बाnt frraftोगो Ingrunार .
२८] राजविनोद महाकाव्य अपने घोड़े को रोक लेता और पेड़ लगानेवाले से पूछता कि इस वृक्ष को पानी फहीं से जाकर पिलाते हो । पदि यह पानी पा स्थान ही दूर पर बतलाता तो सुलतान कृपापूर्वक यहीं पुलिआ मुदवा देता नौर पर बड़ा होने पर लगानेवाले को इनाम देता। फिरदौस माग गो ५ सोस लम्बा और १ कोस चौड़ा है इसी सुलतान का लगवाया हुमा है । गमावान वान भी जो स्वर्ग पो समानता करता है इसी के समय में तैयार हुमा या। इसी प्रकार जर यह फिसोसाली दुकान या मकान को देखता तो वहां के अधिकारी या नोकरों से इसका कारण पूछता और तुरन्त हो उसको आबाद करने का प्रबन्ध करता पा। इस प्रकार 'जो दाखिल होता है यह सही सलामत है' इस पुरान फो मापन के अनुनार प्रजा उसके राज्य में सुतो यो।' बनेपा तहाइयों में विजयलाभ प्राप्त करने से उसको योरता व भवनों तथा पारा बगीचों ने उससे पला-प्रेम का तो परिचय मिलता ही है, परन्तु पापि उदयराज पिरचित प्रस्तुत राजयिनोद काप्य से उसके चरित्र का एक और पहल भी सामने आता है (जिगपो प्रायः हमारे इतिहासकार विशेष महत्व नहीं दिया करते है); पह यह है फि यह पापिता प्रेमी भी था । अपक्षय हो, फट्टर मुमसमान होते हुए भी, संस्कृत में निगुम्फित उसप इस यशोगान ने उस मूलतः हिन्दू हदय को परम सन्तोप प्रदान फिया होगा।
रामभ्यान पुगनन ग्रन्धमादा
मतानियोगाशनकारागारमा मोप्यायोदयरोगा Hary
निमोनियामदनगायानावण्यायाधतिमहमतिरमल याममा माजी
थानाधराधरापनरिगापेशंयमानमा कायधीमूरभूर माटिपने नाव
गानोश्रीमाननादियदपारसमसनिवारिकापनिरतामारा
महममगन मालितनोसमद जान समिमी योगायामदीना
रपयारमाधीमसूदमादिनानिहायातदीयातमनः१४॥इनिश्रीमतराना
AIजरवकापानमादिनीनल्यमुखाचरीिराजनिनादीमास्यराज
विरनिगतकात्यविजयलरपीलानानाममशमस्यामा परेका
यिनरत समयमयुतनलमयकोटिमिन्ट दस्ता
न्छ पतिःपुरतिमाय नामक नष्टांग २८
गापिनोरमा भारगंभून प्रति अन्तिम
资 कवि-उदयराजविरचितं राजविनोदमहाकाव्यम् । ।प्रथमः सर्गः॥ । नम गरगपाश्री जगाम ॥ जगत्का विजयते कम्णावग्णालयः । राजरूपेण रमते यः प्रजानुग्रहेन्छया ॥१॥ राजन्य दामणिमन्युदारमाशाम्म धीमरमुनारिम् । पलानियंग्य पर भी गरमानी श्रीब्र गमानमेव ॥२॥ एरिने का सभी पार पदं पदेन मी गाली। उदासीसमंहगाहेगायद्गुणानय गुणरोमि ॥ ३ ॥ अमुप्प गगा परमेशराय पूजोपागप ममोपनी । पणियाणापि राय गमगतामोदभर मना ॥४॥ उसगार गय माया गौभापतामामामा । उगममा गिामाय माग्यगी माप प्रामा ॥५॥ प्रष्ट पापिय मनि [.१०] पग मनमा पनतिर । विनिमगार प्रपमो दिगोता मायामदार पियाम् ॥६॥ লাল সি সিগাম শানাদি । पौगंधीमहमूदगार पाने मारे ॥ पोपोन वीपी पायांना गाना दिए । भनी गुन्डाग मोगर या मापनमा ॥८॥ गरमागनं l भागत गपुनीर मामाभागामात ॥॥ Aformirr गीमामा मग गा"। पानी mammfrical गुमायामामifभागि ||
२] कवि-उदयराजविरचितं राजविनोदमहाकाव्यम् ।
शाह्मि ! ब्रह्मसभां सुभाषितरसत्यागेन रूक्षाननां
कृत्वा भी उसि भूतले किमिति सा शक्रेण पृष्टाऽब्रवीत् ।
सुनामन् महमूदसाहिनृपतेविद्याविदां संसदि
स्वच्छन्दप्रसरतवित्वलहरी त्यातुं कथं दाक्यते ॥११॥
इन्द्रः कि कमलापतिः किमथवा किंवा रतेवल्लभः
गृङ्गारः किमु मूर्तिमानिति बुधस्सोल्लासमालोकितः ।
चञ्चच्चामरवीजितः सुमहच्छत्रेण विभाजितः
सोऽयं श्रीमहमूदसाहिनृपतिः सिंहासने राजते ॥१२॥
औदार्य परमस्य शौर्यमतुलं गाम्भीर्यमुल्यान् गुणान्
प्रेक्ष्य श्रीमहमूदसाहनपतेराश्चर्यमासेदुपाम् ।
कैपां वा विदुपां दधीनिरनि धत्ते न चित्ते निरं
कर्णः कर्णकटुत्वमेति [पृ०२B] भवति प्रायो वलिविस्मृतः ॥१३॥
पूर्णोध्न्यः नुरधेनवः फलभरं नाश्च कल्पद्रुमा-
स्ते निन्तामणयो दृगद्गुणतया योग्यास्तुलारोहणे ।
पीरप्रीमहमूदनाहनपतेः सत्पात्रकोटिम्भरे-
जतिं दानगुणेन सम्प्रति यतो याञ्चाविमुक्तं जगत् ॥१४॥
नितामणोननमाधिता श्री: करं च कल्पद्रुमदानायित्तः ।
वाणी बिलामेन न दोन्धि कामान् जिष्णोर्जगत्यां महमूदमाहेः ॥१५॥
उच्न सिगद्भवलक्षपक्षच्छेनकर्तुः शतकांटिभर्तुः ।
गनश्यते श्रीमहमूदमाहेगाटलत्वं क्षितिमण्डले पि ॥१६॥
पगोमरः श्रीमामूदनादयं मुन्धरायां कुमुदापदातैः ।
उदम्य दोपहरमनजनमा विभिलता नन्द्रमनां सहस्रम् ॥१७॥
शाच्या प्रतीच्यामपि दिग्गवार यामनन्दी [पृ०६] च्यामदयं दधानः ।
प्रतापभानुमंहमदनात पोनि नियरितमः समस्तम् ॥१८॥
श्रीगन्नानी महमदनार गजगतो तिमिमगंनि राहन् ।
सपा वगगन ममः प्रतापभानोन नव्यंगहणे रणे ।।१९।।
सोनाना किसान विनम्नाविता रणे ।
गपापष्टमयमासंग प्रणालिमाननोति ॥२०॥
पनि दक्षिणभागयोवन पग्लिक्षित गम् ।
जनामा मगदमाननागिन यता गनु जश्रियम् ॥२१॥
२.] परि-उदयगरिचितं गजयिनोदमहाकाव्यम् । पतीपमा श्रीमहमूभूभुजा हा हि ये निभिगदोहिता । विभिध से मनमनमानियो गाग्परागारदष्टगा ॥२॥ पदमा जिरि महारर गहममग्मा गहमागास गागनेत्र ! श्रीपा [१०३ B] नगाहमहमूदनाप्रमाणे रेय दिगिदिगि प्रयिम्ममाणे ॥२॥ नि भागरोन्मुदपारगमध्यवर्ती जम्मारिरामपनि मियापित । रिप यति गमन महमूदगाह दृपया पिगिष्टमनयो यरवारम् ॥२॥ दुर्नीलिदायरल निजम पारानभाममता मर गयनीयम् । एनेन मादागायुपनि पाम गणातिभिगदि पवाय भाति ॥२५॥ मुलोम्पलाभिरक्षिा निम्नधागभिग्मामाभाभि । पट्टाभिरममये ग्यपमेय रागा प्रेमा पनि महिषीय गुपाभिरिया ॥२६॥ लीना वागिरपपिप्रिपटीभयनी मामा जगन्नडायाधियोधिगिता। साह प्रागमनाःपिगारिम मोरे विद्यारिवागिरम्य गम्यमुप्प ॥२७॥ goral ही निगम गुरमोरमं गुगगि मरभूमहीपा । पामगाभिमुगी ति भाग्ली पुाग्योपरि मधुर पा ॥२८॥ श्रीमान् गाहिमुदपागमनि श्रीगग्जरमा- गामाग् माहिमहामारगमभया मारिनमः । जानरगाहिमहामनग्य नागो गापागदीनारया म्याा योमरमूदगाशिनि या दामन ॥९॥ ॥ इति श्रीमहाराजाधिराज-जग्यरगपानसार-भीमरभूदगुरबागचरित्र राजयिनोद महामाये गुरेन्गरम्यतीममादो नाम प्रथमस्सगं ॥ ॥ द्वितीयः मर्गः॥ सामागभयो जागी जागो गर्भmic । नोमो पो धीमा पुग मामि ॥१॥ नौगम्य पानी बगिया मा!िernity | गि पारको मनिform u॥ मगि नामोरयाnिitiमरा । ifafa zा मिnि:॥ (Hr-railrore - [2] कवि-उदयराजविरचितं राजविनोदमहाकायम् । विवारांनिमिक्वीन नामाभिवं हीरमगात् कगीन्द्रः । जानोगमन्चनारी मनस्वपि गलताप: ॥ ४ ॥ सुमोन यदी तमसमान मन पदीर्य बलवत्तरो यः । बगालनों माल्यगमन्दिमोजादान्य विन्दं वहन्ति ॥५॥ नम्यान्मजमाहिमहम्मदोगद् बन्च क्षमाभोगपुरन्दनस्य । औदान जगन्यजनं व्यदारि दारिद्रवमयं नमित्रम् ॥ ६ ॥ दधार मान न निं मिनं मिन् व्यन्यायुधमे गावीरे । पूर्वमन[१० Aमसमभोग्न्यत् पुनम्नत्य बलप्रतीते: ।। ७ ।। उदिवगे वा बभी जगन्यां महनभानुप्रतिमः प्रतापः । यो मनमानापमन्यूगामिन्द्रप्रयागजिनवान् विपन्नम् ।। ८ ।। TE प्रनिहिबिभिन्नप्रायान्नीगरफलमालाः । अयायो नकाराधिनाया भन्नलगायत् पलियने भ्रमन्नि ।। ९ ।। नम्मान गमावि पूर्णचन्द्र श्रीमान भत् नाहिरहम्मदेन्द्रः । निमनदीनानगोभि ज्योनोवलयन जगद् यगोभिः ॥१०॥ माहेरविवानोमानामता मण्यामागतेण । लोनांगोपले मालयमा मनत्री: ॥११॥ किन नि निमा बागा ठान् गागाति विमित्य । अगा. [To • B} मारामागी. बबन्लेयली गान् ॥१२॥ अनुनयं वयोगमाग श्रीगुगगीन्येग । जमानीमा नपरे मन्ने ।।१३।। आगन मना रनलीमा भाग्यविनां निमितम्मदपानमालेः । नागपीन : मारियम, सोनाममा माटपाटपनाविन्तः ॥१४॥ मोनानी लिनने निग निगायाम् । if नातागोगायनांग: ॥१५॥ fi" मान मनी.. श्रीमाननियोगः । REETीनमा निमी बनाः ॥१६॥ को भEA भरा गाना नभनय प्रवीण नापि गाय जगनगिनी ॥१५ २.00 परि उदयगरिचित गरिनोदमहामायम् । पग्य आमनागमन गाय पागिर निगन । प्रक्षा जन्मंगपारियुगात भन्मगगिम्भाति पियो मिनि ॥१८!! निगाग्यिधिशारोगा गम्मा मा मसि । पर प्रभो पनावग पुग्णात् मोतीमुजी. पग्गिामा FTET ॥१९॥ सम्पामा मामा भीमाना मिरपन माहागादि । गगेर गम्भुगायुगंप्यमानो पागगरमा गारो य pell प्रारमिष्टमिति fariयपो प्रगाधयि!. 52ी गापा प्रपना । दुर्गाप्पांन गरमा प्रभुता माया भग्नानि नानि व परिपुमानि ॥२१॥ पापो पनि मरमाय गदगो गो विभागाधरपट्टण । नयमिने गित गन्यमापदन्य प्रयािं भवमितानिनाय दो ॥ पापगगुमनामा मामा गाभागीयम् । अलिपि तिो पिमुगामरिमाय जात प्रमग प्रTIR In मागोट युटजेन पामगिरना या भूमय- गोगामाग II याटिरा । आशा निहिटिमाटर पा. मानेर पुति पुगतनानि नागि उदमादागानिरमाया पर यिमाद-०७AJ पीनीगारगीनि पग्गिगमवाहिनीगा । गग्ने पिगम्यानमारा गनमा गा पागाग ferfreeपाय गपागोगानंद ॥1 गोन मागणनितिनो परम पार में पालन गा भीगी बने। पायो fileemi गर्माणमीर भार मागामार बाग ।। भागदागिनोम्मिमा दत गरnaireगाम् । पोnitari HTTEr fri १] कवि-उदयराजविरचितं राजविनोदमहाकाव्यम् । [३. उच्चरगनां विति वलिनां या मव्वंदा मौलिघु प्रत्यक्षितिपालमूड पृ० ७ B] पुनर्या चक्रवद् भ्राम्यति । मान्यानां महतां न होवरपद मालेव या भ्राजते वीरश्रीमहमूदमाहनृपते राज्ञा जगद् रक्षति ॥२८॥ मादां न विनश्यनि निधयो वागमवारोम्मय- इनन्द्रात कवुियालकालनियमं नैवाप्यनिजामतः । पस्मानाबगनचन्नि पग्निस्नारा निगलम्बने । नोऽयं श्रीमहमूदनाहमवतात् कर्ता जगत्तारकः ॥२९॥ त्यागीयं ननपरम्पर नजन्नी बाग्देवी विरचितनव्यकाव्यबन्धा । पिण्याय निदागुरोः पुरोगताय व्याकर्तुं पुनरुदयुद्धात राजचर्याम् ॥३०॥ श्रीमान् माहिमुदफल्मममनि श्रीगजन्दमापति- मन्मात् नाहिमहम्मदस्ममभवत् नाहिस्नतोऽहम्मदः । जाननाहिमहम्मदोग्य तनजो गायानदीनारयया गानः श्रीमहमृदमाहिनृपनि[पृ० ८ Aर्जीयात् तदीयात्मजः ॥३१॥ ॥ इति श्रीमहाराजाधिराज-जरबनसपातसाह-श्रीमहमूदसुरत्राणचरित्रे राजबिनोदे महाकाव्ये वंगानुसडनीतनो नाम द्वितीय: सर्ग: ।। ॥ तृतीयः सर्गः॥ उपगं गुजामनेर मागो महेशितेन । गाण नादेन न दुगुनीनां प्रयध्यतंगी गमये नरेन्द्रः ॥ १ ॥ जामदगी हागि परेण वीणावगम्बदनानुगगम् । नोभायायोग्य बिकानगीनं. प्रामाशित गमानन्ति ॥२॥ आलोनी मां गिननाभ्यामनिमगुलान्याम् । मगर समानान्य प्रोबलमीमावानि ॥ ३ ॥ मानातिना पानि बीर मागं नाय । गोमत मागम मा पनि नि० ८ B]गगो ॥ ४ ॥ माhिim . भियगंम् । मान बनाम मीनिश्रीः ।।५।।
परिदयराजरिचितं विनोदमतामयम् ।
विलागिन. श्रीमहमूदगाहे. गदिः ममायामभिगोभितायाम् ।
नग्यामः पाना मुगानि साम्य योग. गुग्भी परोति ॥६॥
मुगाररिव निम्मिा पर अयं नयीन मदुर महीन्ट ।
याग. परम्पदमरीगिगौरममग्य गन्मण्टनमाविर्भात ॥७॥
पिलेप्प पूजोपंप. प्रपना पदय पूर्व पटिन मपूर्ण ।
रत्नप्रभाभूपियदिग्विमागमय महीन्द्रो मुकुट विति ॥८॥
पग्रिएरण्डापपगगप्रभारंरन्जिामाग्यमाय ।
स्मिनामुहंगतीयाई बालारणपष्टगरोजन्मीम् ॥९॥
अनं विमानं नहरेदिभार यस म्यतं श्रीमहमूरगाहे । [3. RAJ
समीयंदारिदप गदा महार मुदा नरोति प्रमदाविहारम् ॥१०॥
अप भुगाभ्यां सरदामामागिताभ्यां पारम"म्या ।
विगगते श्रीमहमूदगाहि गामाग्यमुदानिपानिपप ॥११॥
पादायिन महमूदगाहै थियोपियाग वयमानमाम ।
दारिखपगन्नारनवे सदय यातपोनिका परित्र्या ॥१२॥
आरमानमायाले गोलमालोपन मरमूदगारिम् ।
गुति गातान् मन्नाश्तारमुरीयमाणा मदिरामाय ॥१३॥
आगीनमष्टारपीटा गमागमन नपनानिगमम् ।
नौगग्य नापों नपरानशेषगाने गम्गरम पनि ॥१८॥
एर गान पुगुन्दरीभिमुंदा ममनो परिपग्यमान ।
पहिगमाम्पिागम [7. B] मोरपितोरनेटा गरी परी ॥१५॥
मितनं भीमरपुरमाई गलमागेही गमिः ।
सि. गरम् पुरग्नाग्मनस को गरमाानोति ॥१६॥
महागा एगमार सिम्युशार महमूगा ।
गुवभिशागिरि पराति गारमा मनाम् ॥१॥
तर पुगनपर पाभिन्मिोगांय मगरंमार भाभि ।
एमापारपारमारेटपट परितीति ॥१८॥
मारमा गगनालामा नीलम
मेनिमिम मोर ग गमriनि पूर्ण पाम् ॥१॥
। ८] कावि-उदयराजविरचितं राजविनोदमहाकाव्यम् । निहासनासम्म पवाविन्दं दुगन् नम-पता नन्दवृन्दम् । नगाठभूमी बिन्नुठन्यबारा तन्मीलिमाणिस्यनयनधारा ॥ १० ॥ निमगव्येन गदानिला [पृ० १०A] नोमानि ये न्वैरविहारदर्णम् । स्थिना निकिता महनगाहेर गजेन्द्रावने नरेन्द्राः ॥२१॥ नमं गमायाय नरेलवन्दया मवरं पठन्तः । वैज्ञानिका श्रीमान दमाहं छन्दोविद. गंगदि मंन्नुवन्ति ॥२०॥ आयनाकी नामोटी गगयकोटीगगे.' पुस्तात् । रामाने ग माननादा गांधानिजना लभन्ने ॥२३॥ यती तो भनिभुजोली गं प्रमादाग. सामः । नतात मनदि रत्नमालाल.मीभगते विनाला ॥२८॥ गली नगगिरवीत् नागरीन् महादगाहेः । प्रागेव मिला मनोन्यासान देदीनि नपानि न दीननन्दः ॥२५॥ सीपणा मागमाद्राति प्रमागिना हिन्द्राः । पानामा निमोनि१० १०B] नीना फिटणालंपि भानि दन्तः ।।२६।। नविन मापीनां गीनि कती महमदनाः । विका माननि मनामितोगरगावानि ॥२॥ निजामत मागि नागेनी गानोनि तेलोदिमाग विश्वम् । मग श्रानिशानयंत . नाम ॥८॥ र विनायो नमो गगनमनिं गाय पृष्य गीत -निनो rii णे विनणे नमनातः ॥२५॥ - A ना पी मरममा मनिलावार । माया भी गोगा ||३०|| म मान्न [TERATीगो मिति । यो : Firf.: मोनिकानि | :::::::::: नि: Ii | ::' या ममाला || ४१०] परि उदयगनपिरनि गरिनोदमहासयम् । श्रीमान् गारिमुपगमञनि ग्रीनंगमारि. गरमा गाहिमहम्मदग्गममया मागितामा । जााग्मास्मिहम्मरोग्य गनुजी गायागनारा स्पात श्रीमहमूदमाहिनुपनिर्जीवात् सरीयाग्मज ॥३३॥ ॥ इति श्रीमहागजाधिराज-जरयागपातमार-श्रीमहमूदपुरनामचरित राजयिनोदे महापाव्य सभासमागमो नाम तृतीय सर्ग [.११B] ॥चतुर्थः सर्गः॥ মুখযমা যুমাসিমা শ বুর্ণা রিমেম্ । राजोग्य पेपरदरापायपाशा देगापिपान् माग पप गावगान् ॥ १॥ देशम्य पम्य महिमानमिवोगातु गला विराजी गायमुगी भवन्नी । पार तरप नृपतिः प्रति विपरी प्रानीपोनिपिगमपितर नपागि ॥२॥ पुनमारगमगारगतिभानि म्यागारिलिपुटापितानि । अग्येवस्य पाया सुम्या पनाति गोरोति पुग्त प्रगिपत्य पाय ॥ ३ ॥ लोगां विपिरयापिभूगणाराम निपाप पता हलिगाम् । आगपपापमुमन मिदाम्पमतापिप गग्गनुररममुगाोगो ॥४॥ गिं माता पिता मु०१BAम्यो होदय शिनिभुना नगपट्टना। द्वारप्रगतिपमनुष्य पम्पा मान जाति ति नागपिगम ॥ ॥ भायानि मायगर परिमाप श्रीगुग्गति प्रतिशग्भूमो । उदामपापिरमहलगियानामनिरनिराशायाम् ॥ ६ ॥ अप्रामप मम नाबमा ये प्रागण गापामार मानाया। मी विजिगमग मरतो RAI प्रोत्साहन परियति ॥७॥ भरतन महरात गपवर्म पुगीमा महानि गरि पानातं माम् । गोलाय पार पातो भान प्रा लि समातिमा ॥८॥ मुसाम rift TRIYAlertram पर । ऐगरिनोमन frefer ..॥ पिर नागपारिधिापामा गया गिनियमिहापा(जे) मोडी Eिto [५१३ कवि-उदयराजविरचितं राजविनादमहाकाव्यम् । ॥पञ्चमः सर्गः॥ इनो मृदयनिना मृगीदृगो मुहुर्वहन्योऽभिनयाय विभ्रमम् । रणामापुग्गचितागमा विगन्ति सङ्गीतकरङ्गमण्डपम् ॥१॥ सुगन्धिनानाकुनुमन्त्रजांभरे. प्राप्नमुद्दिश्य बिलासमण्डपम् । समापतन्नः पग्लिो मनाना: मृजलि झारमनोहरा दिगः ॥२॥ ममीणो नभुवः नमल्टनन् विलेपिता या घनयनलाई मैः । नभाननं भाव पतीय मौन्भः कृतार्थयिप्यन्निव गन्यवाहताम् ॥३॥ समन्ततोऽपि प्रमृतं नृपालये प्रष्टकृष्णागह' थामञ्चयम् । गवासमार्गनियता मुहुर्वहिन भन्यता वामितमम्बरं महत् ।।४ा. तमो नुढत्यो निजभूषणरफन्मणिप्रभाभिः परितः पुरस्त्रयः । नाम्प नीगमनमामोत्सवं सुगन्नि नायंतनदीपमालया ।।५।। उडानमारमनोहगानिर्विभानि गमा कनकामनस्थितः । न्म[पृ० १६AJोपरि मन्त्रिपः श्रयन्मुरारेग्नम्पतामिव ।।६।। मम ममन्नात् परिवृत्य यन्लभं विभान्यमनन्द्रमियोटवः स्थिताः । गिलोनन चतविभ्रमैत्रियः गृनोपहाग विकनोपलरिख ।।७।। मा प्रत्येक पर मनोरमाः गुनविनितामण विभागिता: । ना न नत्याभिनयाचमुका: गाय न गमा रमयन्ति माननम् ।।८।। मनाया पाणिवलागि नरामोव निवद्धगगया । गन्या वन्धी गयाउनया प्रवीणया गजमनो विनोयते ।।२।। Frif वारिसननगि बंगना पर निगायाधमालवेजगा । या नगानिमन मया माण्ठमाधयमियोपनियते ॥१०॥ दिगागर नरेन्द्र मधिगद् विजनले गान्द्रमा नियनः । सामाजिदाद वामानावयन् गिनिः||१३|| [१०१६) मारा नाति या नगगनगगमनम् । निज मनोजलायालयतिमागग्यमनक्षणम् ॥१२॥ नाममापिनी विनातिनां मालितः । मनोमानी न ग गम् ॥१॥ . (OTHE ४.१०] पाधि उदरागपिचिन गपिनांदमदासयम् । [ श्रीमान् गाम्गिमन धागग्नंगमानि. गम्मा माश्मिरम्ममममदा मागिरमा । माम्मास्मिरम्मनोग्य नाजी गापामीनारया ग्या श्रीमहसूमास्तृितानि या नदीपामा ॥३॥ ॥नि श्रीमहागजाधिराज-जग्यागपातगार-धीमहमूदमुरतापचरित्र राजविनोदे मापाव्ये सभागमागमो नाम तृतीय सर्ग [.१०] ॥ चतुर्थः सर्गः॥ भूयोग्यभाषा गुभाषितमार्गा मा पूर्ण चन्द्र यदना पिगेन्द्रमेयम् । সীমে যঘনালা দ্বিাণু দমি ধন্য হ্যবান ।। देना पम्प महिमानमियोरगा गमा गिर्जा मागगी भयनी । पार नमनानि मानि पिर मारपोनिरिमपित ॥ गुपामगारसमनिमानि पोपटाशिनि । असगर गा गुमा पनि गीत पुरा नियाय ॥३॥ स्लीपिपि गाविभगाराम निपाय AT सिमानाम् । भागमप ममनानिमामि गग्गा गमलोगो ॥ ४ ॥ निगम प्रति १०१PAIPig forfryit भत्रपट्टनन । पारगमरियममार पाया मा त ति नागधिगत . . ॥ पापानि मन्यगर किनाप श्रीमति प्रतिभूमौ । आगामियानामगिरतापाम् ॥ ६ ॥ भयानमेव मम मा प्राय गावाममय मभाजपा मेसो मितिमा न हामfre" भागनमा गगंगोमा र सानाम् । मोरया पार पाजो न Trir मामि॥ मुrifण पोधिनीमामाभी.. पति। Trimiritirgin ॥९॥ infrarimire परसामग। गगि बिमान(को) गोरगति १०॥
१२] कावि-उदयराजविरचितं राजविनादमहाकाव्यम् । [५.१३ ॥ पञ्चमः सर्गः॥ इतो मृदभाव्यनिना मृगीदृगो मुहुर्वन्योऽभिनयाय विभ्रमम् । रगज्जणपुग्ननितागमा विशन्ति सङ्गीतकारङ्गमण्डपम् ॥१॥ मुगन्धिनानाकुसुमरजांभनः प्रवलुप्तमुद्दिश्य विलासमण्डपम् । ममापतन्न: पन्तिो मधुव्रता: सृजन्ति सङ्घारमनोहरा दिशः ॥२॥ समीरणो रमभुवः समुल्लमन् विलेपिता या धनयक्षकदमैः । सभाजनं भावयतीय सौरभैः कृतार्थयिष्यन्निव गन्धवाहताम् ॥३॥ समन्नतोऽपि प्रमृतं नृपालये प्रगष्टगृष्णागर धूपसञ्चयम् । गवाक्षमार्गनियता मुहुर्वहिन भस्वता वासितमम्बरं महत् ॥४॥ तमो नुदत्यो निजभूषणस्फुरन्मणिप्रभाभिः परित: पुरन्धयः । नृपस्य नीगजनम जलोत्मवं सृजन्ति मायंतनदीपमालया ॥५॥ उदारमनारमनोहराकृतिविभाति राजा कनकासनस्थितः । स्फुरन्मुगप०१६A]ोपरि ननिषेदुपः श्रयन्मुरारेरनुरूपतामिव ।।६।। नमं गमन्नात् परिवृत्य वल्लभं विभान्त्यमूश्चन्द्रमियोडवः स्थिताः । बिलोननेञ्चतविभ्रमस्त्रिय: गृतोपहारा बिकनोत्पलरिव ॥७॥ माः प्रान्येव परं मनोगमाः पुनयिनिनामग्ण विभपिताः । नया न नृत्याभिनयाय मुन्मुकाः कगं न रामा रमयन्नि मानगम् ।।८।। अमुस्तया पाणिनलादपि धणं रहस्य सत्येव निवदरागया । गलं मागन्या पग्बोणयानमा प्रवीगया राजगनो विनोधते ॥१॥ जित हि वादिषगगि बेगुना स्वयं निधागाधरपल्लवेजया । बदेश गणानिगयेन गुग्धया स्यकाण्ठमाधुगंमिवोपनियते ॥१०॥ गिलागले नरेन्द्र मन्दिगद विहाभते मान्द्रमृदभनिननः । अमं गमयति जितन्ना बा लग्नाप्टवगन् गिरा निः।।११।। [१० १६३] कमायती मग गानि ग्यारेण गंवामिनगगमन्टनम् । निजं मनो मजलसंन्यनारजन्यरितीनागपल्यनुक्षणम् ॥१२॥ सं मुगालोमोनापिनी पिलागिनीनां मापालिकाः । मनोगमालनि गीत श्री. नरोनि कामरेग पूरणम् ।।१।। ..--- (१) ५७] पाधि प्रदपरिचित गरिनोदमहामन्यम् । [१३ अनान पोरगम परिप ममप्रगमनमगावन्दिता । प्रय पगारामगाम मि गार्यात भूपत पुर ॥१॥ पकारविरद पि रपटा पाट रतिपयर्टनम् । अमृष्य राम करण्ठमापिणी पुन्हा गायनम् ॥१५॥ प्रियंग वृतं स्वयमेव निर्मिनं म्यय प पछामरणीरियम् । सिम्मिा पानि वीगया गम मनोरम गगादम्बर मुदा ॥१६॥ इप बिगनी नपरममा सप्रमू परिपूरिताञ्जरि IT. १७A] प्रिपम्य गोन्दपंचिनिनिमार स्मगा सप पहीग्यि भाग मागं ॥१७॥ गम रगती मरणयपिया मितेन तवी मुगुमानि सरती। प्रय रटामायमरोगोभिना मोमुष बलरलेप नयति ॥१८॥ विपाप पियाम्पति नृत्यमेरिरा पगागपाग च नृपति । गमारमोनालिष्टयोपोविविमो नव पगारसम ॥१९॥ गमााग चपयोविभूषा प्रगना गरययितगमगाना । इमा गुगलीराना परोति म यम्पपिधमम् ॥२०॥ अदापरयो पा गुपारिप रपट यपुप्पामुदारसानिभि । पपापण पुगंगप्रिय पिवृष्यो भारमामना ॥२१॥ पपामा लिपा शापार नय नय विमी विद्यमोश्यम् । सपाyिा पुहिमो जयाय सम्जीभवतीय ममप ॥२२१७B] पानि मोगानि निति निम्बिनी परवानगी । पर पदिगिरगायरिगानगरभिरम्यो मा | ममुपप गारोमिता एट पाा परियामुगा। मागे शिरि नागमगिरिपारिता इय भ्रमो un ममीर पो प्रमायमरारितानि । रोमिनाया गपूजना पौमितीमित ॥२५॥ दिसाय गतीमागं मनो मनास गरापागली । कर पाण्यामरपारोगा मगन्यारा गप्पोमान्ममरणागोrferपनम् । Tinforraff गाभिारम् ॥ U
कषि-उदयराजविरचितं राजविनोदमहाकाव्यम् ।
दिगि मिगि दिवसामतिदुमहो वहिलायुदयन्निज मन्दियात् ।
अभिदौनिया नदीयते दिनकर: मन्दम्बुमरादिव ॥१४॥
नग्पनेनुमानिया बिया फुटतरं बहुरूपगुणाश्रयः ।
अवनिमंदनयि नम गति नाम्बलं मकरध्वजः ॥१५॥
अब नम कर भिगोरो निविगने ननिदूतरे पुरः ।
डावनेनगनमोऽभितः पुरजनः प्रगयादुपनोभिनः ॥१६॥
अरणरागमग्निाम्बरं प्रतामिमहलमवेक्षते ।
र भयोऽविभवो नवमण्डपं दिनालेः प्रतिरूपमिवोदितम् ॥१७॥
नितात्प्रभव याम्बुदापतिमीः कटकस्य निवेगभूः ।
हिमगिरिय गानु भिमापृ० २७A] निता क्व न गजति मण्डपः ॥१८॥
विजयिनः कटनन्य महीपतेः प्रातिनिगि दीपगहनः ।
प्रनिहता विजनेस विजम्भिता निगुपुरेपु धना नमसांभराः ॥१९॥
अमृनाममिवन्ध्यमलं शितिभुजः नगगाजविगाना !
अभिगन गुरुले भूतम्मनदयावं मालिगमपितम् ।।२०।।
बोटविनिमनयनाटकको केन निद्रां मो: प्रियतमामपि वनायित्वा ।
कंगाम वीपाटन नगन्य नाग नाराजनेन रजनी लिमिप्रगल्भा ॥२१॥
प्रामाग्रिनमाबिना मगरलेन लक्षितविभावनिनाविभागाः ।
भागमयन्नि मापन गधिग नालिका. मलनियंगनां बिलानः ॥२२॥
पन्ना पुर्णगिरिमाधियानामा: न्यगम्बर्गवो न जनार्दनाय ।
सोनाममनोनिय [
TA माना गणमदिन जसियन ॥२३
मानिलिमा मिााोनामित नोजित मिणीयम् ।
मोमा नतिजामा पि. दिलनामहाग ॥२८॥
आगामिना भीममानमाता का श्रवणाभिगमम् ।
ग: मा पनि प्रानि ॥२५॥
पाकिमतीमाल. प्रिया नदि गमवावगम् ।
सामगोपनामा ॥६॥
पानीमामा पनि मायापालबमान. ।
प्रमा मार्ग तीन freगन् पहिलो ॥२॥
पार उदयगरिचिर्न गग्निोदमदाययम् । अशा पोम पग्यि गमागूटरमगानादिया । प्रथप गरयमपद विमा गापार पोपुर ॥१॥ पवारपिट म्यरंगी निरर्पयरनम् । अमप्य गा पाठमारिणी पागद गायनि संग्नम् ॥१५॥ प्रिपा पनं पयर्मर निर्मितं. म्पय प रामापीग्पिन् । मुनिमिता गायति यी गया मम मनोरम गमावर मृदा ।।१६।। र बिगनी नपरगनजना परमून परिग्निानि ०१७ प्रियग्य मौदगिनिजिता म्मगा पर प्रीग्यि नाति मागं ॥१७॥ मम्मी पराश्रिया म्मिान सन्वी युगुमानि तन्यगी । र पटाशनमरोगोभिना मनोमा रमय न पनि ॥१८॥ विधाप पियाम्यनि नयरिता पगनुगन्याग र पनि । ममानगोपिनिटयोपोविवियते नव पगारम ॥१९॥ गमान गयग्यायोविभूषणा प्रतापन गयि मा । उमा गुगनीगागातूरगत् सर्गति मन्ये यम्परिणमम् ।।२०॥ गंपन्यो यदन गुधानि पट याप्रमानान्निनि । गांपा दुगैगयश्रिय विमो भारममगाना ॥२१॥ पपारारिशणा em गा गर विनि विप्रमोदयम् । साहित्पना पुरषिो जयाय गन्जीभवतीय मन्मय [30 १७ B] गनिमी faferi निमिोना पाजानं । परामिंनिगरानिमाग्न निगम्यो मा | गनुनय गगनगिता पर पाना परिपामुग्यम् । नारी रिगति नेपामगिरगरिया र ममी ॥ गनी गोद ममतामयाम्लिनि । नाशिवाटा पात्रता परनौमिमिर | मिर गीगे तो मनार मार भगानी । प पापामापामा गगनारा ममा पमपमानारामार लम् । समा निमापिनाति frir नाम्पिमसम |
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कवि-उदयराजविरचितं राजविनोदमहाकाव्यम् । [६.२७
दिगि दिगि द्विानामनिदुस्सहो बहिरमावुदयनिजमन्दिरात् ।
अधिकदीग्निघरा समुदोश्यने दिनकरः गरदम्बुधरादिव ॥१४॥
नसतेनुकारितया बिया स्फुटत बहुरूपगुणाश्रयः ।
अवनिमदग्वि सह चलति बारुचलं मकरध्वजः ॥१५॥
अय मुमजलम्भिनगोकुरो मिवियतेऽननिदूरनरे पुरः ।
उपवनेनुगदुगोऽभिनः पुरजन: प्रणयादुपगोभितः ॥१६॥
अरुण रागभर कुरिताम्बरं प्रततरश्मिसहस्रमवेदाते ।
इह भुवोऽधिभुवो नवमण्डपं दिनकृतेः प्रतिरूपमिवोदितम् ।।१७।।
मितपटप्रभवः शरदम्बुदप्रतिगट: कटकस्य निवेगभूः ।
हिमगिरेरिव मानुभिन्न [पृ० २०A] काचिता क्व न राजति मण्डपः ॥१८॥
विजयिनः काटकोऽस्य महीने. प्रकटितनिगि दीपगहनः ।
प्रनिहता विजनेषु विम्भिता रिपुपुरेणु घना तमसांभराः ।।१९।।
अमृतकुम्भगिवन्दवमण्डलं क्षितिभुजः नुरगाजदिगगना।
अभिमु गुरुने ध्रुवमुन्न रुदयपव्वं मौलिगमर्पितम् ॥२०॥
कोठाविचित्रनयनाटकोन निद्रां दृगी. प्रियतमामपि वञ्चयित्वा ।
कंवा न वीटर रमयन्युदारा वागगनेव रजनी शिशिरप्रगल्भा ॥२१॥
प्रायां सरियागमनमान्निम्ना परतेन लक्षितविभातनिगाविभागाः ।
आगपति महमूदनगधिगजं चैतानिका मुलालितवं नगां विलागः ॥२२॥
चममा पुगिोगिरिजाविया लदम्याः स्वयम्बरवियो न जनादनस्य ।
श्रीरानमा म मनरेन्द्र निगं [पृ०२१ A] लाभात्तदन्नु गणमूदिन जयश्रियस्त ॥२३॥
माना
निलिमाग मिना दाज नमामा नोमिमितीयम् ।
व्योम्ना नागिना गोयामा गाभि. गुरद्विग्लनामप्रतारा ॥२४॥
अम्माभिरेतन नागीयमानमा गंगानिय यमः श्रवणाभिगमम् ।
नमः गुरुजमाना पनि निर्मानित प्रमितानिनी प्रगानि ॥२५॥
पानामाभिननीय मनं गन्नान. त्रियां ननि गगवाणषम्यम् ।
मानो "
ग्लोगनगनर्वग्नग्गयोरिव नामः ॥२६॥
मानी समानान् परियामाग्विाम्बरबमारवयम्यमानः ।
मगर प्रमाण मानसिनीमा ति: f गन् परिणामतोः ॥२७॥
पपि उदयपत्रविरचित पनपिनोवमाययम्। [E उमष्ठा निमिमा विरह पिपाय तोगनाए गग्ग मग रमाल । [१० २१B] रान् परमदितीगंगाना गायनानिलमियनानि ग्यानानाम् ।।२८॥ प्रामानिन पवनन हिमागःमि नप प्रबोधिामयाविरतानि । स्पोरिणामविरजंगसीर गिलिगेननरदय माय ॥२॥ श्रीमो नय नवापानाविगिष्टमाजिटमाजिनि मागायनीताम् । नित्यागगोग्भगुन मुहबंमन्नो योणारयमंधाग नृप गावदां ॥३०॥ दनावरयधिटा युधि योधमुम्यान् प्रागाय पाभिरमन् प्रायोपनि । धौरा पराभयमपि प्रणयात् गहने मागिता न नामपदमाद्रियते ॥३१॥ अन्योन्यमरमरभूतो नवमन्दुगग पुगोगगु गुग्गेमुग्लीयेव । तो हाल मपुर गापमा प्राभानिराय ययगाय हयारयीया ॥३॥ नाद गमुन् प० २२] मदमागीणो मे पागजगमारनियमानी। राजन् मुमानि पनमनाभूरिभरोभाद्वारभाजि युसुभान्निो भाति ॥३३॥ ही मपुरयगोभिर्मागधंग्ग्नूयमा शिनिपनिगनाटागनतोगजितानि । सिरर प्य भूयम्नेजमा यद्धमानो महमदनुपमून स्रा गभामगति ॥३४॥ एप निगड यपमामभियना गा गान मुलगिन्दामानहागा। पागमाजविराजा पटाशंग पिगणदादर गोयं ॥३॥ श्रीमान् माहिमुदपगगमनति श्रीगूग्जंगदमानि. गग्मार मामिहामाग्मममा गाहिनामामा । गाग्माहिमरम्मशेग्य नाजो गायागीमाया मा श्रीमानगाग्निानिग दीवामन ॥इति श्रीमहाराजाधिगज-जरयामपानमार-धीमा मृदगुरपापरित्र राजविनोरे महाराव्ये विजयपात्रोमो नाम पट मर्ग ॥ 17.00 [७. ११ पायि-उदयराजविरचितं राजविनोदमहाकाव्यम् । ॥ सप्तमः सर्गः॥ प्रसामं मुगौ सति चरितमस्य श्रुतिनु नां वेतांगेन विविति सुरेन्द्र प्रभवना । दवाना मानिन्यं मदमि महमूदाक्षितिपते: कवीनां बागुगर्मदगढयहत मा भगवती ॥१॥ ए मैन्यानमग नव पुरो पिन्ध्यं बिलयमापन पालेवाद्रिनटीन्तीय साटिनि पानी दिगं गाहने । वीर श्रीमहमदनापने धानन्ति नाई मृग- स्तनमाने पपिन्धिनो निगनिता: स्यातुं न यातुं धामा: ।।२।। दिनमापनि परम्पगणां पृष्ठानयानगनवाजिलबजानाम् । मध्ये पुरसम्भटेग्नर मन्यमाना ग्राम्गन्ति हल निर्णयह वैरिणोऽपि ॥३॥ अगन्नि यान्ति परिचय विलोक्यन्नि मनोमालिन विचटय दिगो दन्ति । मृगच वीगितममृगीदमन नेता गगां अति नापनः पुगते ।।४।। पाटे में [A] वयवगाद नित्र गनारीगनोगिनी: पगि विहाय पलायमानाः । वीर पदीयाटन पुरो निशानायव निजालया पुनगपतन्ति ।।५।। पानांतृणानि गन्ति गोपनगोपागनिकायदं त्यजन्ति । मना गामि परवेदन पितानि भागापमान माल गाणि तायरीणाम् ॥६॥ विभागीय मन मोह लिमनागमः। आगलागि यहिनि नि: निमिनमा पनि || मग मित्र प्रतिमा गादि । माग गर बीमारीनं भिनली रात्री: ।।८।। पनि मग मा "नर्वाण 38) नां श्रेणियानमेषा । शिEिET मा नग्नी ॥१॥ सामना न भायोगी गागः । निर्मिती, सपने नामानि 2011 गाभिमाना : मागिरः । मोनागमोम् ॥१३॥ -- M मो 1 ७.१८] पयि उदयगविविन गरिनोदमहामन्यम् । पौर श्रीमहमूदगानुपा सजगता पुन- निोदेर रमप्रगारनियत पूर्ण न गाना यति ॥१॥ रामा म्यन्दनमण्डपनि यहवास[go RAJगंभ्रम विमति पूग गनि कोटिगान गभटा गुनि नौचिनीम् । कोथियमावनि गुग्गा द्वीपोतमा निनों मजति द्विता गुणनि यग्निा र गन्यपाराधिौ ॥१३॥ पातायायाजिगजिगुरलीग मामी धूनीवातनिपानीगरि गद्य ग्थाय गर्ने । पौर श्रीमहमूदगारनुपा खनोगुना नोयधी भूप मैनुअपप्रपन्धरितो ही ||१४|| परो यमसिंगानभिनप परिण मेरठया योर धीमर मृदगाह मत्गा पाटी भिगवष्टिा । ऋभागारभूतोऽप मारममा गिग पापामा योरिटरभूतो नमिता निर्यालि रियाम् ॥१५॥ रगा शान्तिा द्विा परिहा पाहोलमा गया मन्जूग [१० २८D] गमुगिता गमगर मोगा मार्गले । पुर्वाभिमुग प्रीशियानो बोशिता एव नं गम्बंगागागरंगय परं ग्व जोगितम् ॥१६॥ गनिमंनिमेगगुमारित ' पिंगानं 'रयता Him भाटे पापरं । पानामि पपि प्रगापनपिगिनिरंगतो माप पग्लिपिना पुरवणे गमाम || बरे पादरमाधपति गिन्दिर मरांग रोगगनापि ममी नाग पंचाग । ग्राम्पनि यार ािमामो ग्गमिग मिमं पिया 10 आरोतिnिifraनितिन पागारमणे गालिो - BAJA यो। ( Ost (२)hrithali - H .
२० फषि-उदयराजविरचितं राजविनोदमहाकाव्यम् । [७.२८ पनन्य इयतो नजन्ति गिगयो वीर प्रतापः स्कुट नव प्रस्टीभवन् हठयनान् मन्येज्यतो धावति ।।१९।। वहिनिमुरे दाबहुतभुगज्वान्यावलो जम्भते मुनि सिनिमम्बरं हपापुनरुदलिता धूलयः । दलालकुनहलादिय नटाः कुनि कोलाहल बातमोरगगल्लिनयन्नि ते शाववा : ॥२०॥ आविला. पग्निः मिलीमुपगतं सामनोदगिर- नानामभृत. परिन्छदभगन्तरे यज्जिताः । लक्ष्यने न बनान्तरे स्वदग्यो राजेन्द्र मेनान- गुल्यानतान्तया वमन्तगमये लीनाः पलागद्रुमैः ॥२१॥ किमपि विरमदानोद्रेका. मलयवगाहनः তিহিামাসল ল শালান। कमल वनिकाय[१० २: B] या गद्य कटे निपानिना- मिा. मलिलो मारोहनि मदं महुः ॥२२॥ अनिचलतया निमंजनो हियां युमि मान् विविधनगरीलोषाहालप्रपातगमुद्यता: । उरवन नगगीगी निगगित, अमानव स्थगि गजन् मना नदन्ति न दन्तिनः ॥२३॥ मिपुजनामा मान्नो पागं गमाननियां प्रनिग जपानन्दप्रहारविधी पुनः । पण मला त गजन् परिमाणे दिनां कट गुमटन्ध्याप्यन्ते हयास्तव मण्डलीम ॥२४॥ । मलमासोले गामणिजितमा. पवनग्यमागुननरेले निवतितमुसताः । नगनय मा. श्री गावाने मदमाग वनवि मग मलामागंमलि त्वदीयारे रिगनाम् ॥२५॥ नगर मान बाटो मर न विन्दान न नायनि बहदये ग दिल्लीपतिः । नगरवागना समष्टिमय पानीति नग उम्परं न गलु गोटनूडामणिः ॥२६॥ जमा नि ममापने ग्लष्टि पुटभेन्नं गल गगिटमाष्टाभिषम् । अभिगमन मिनिमावि गगरिया नप नरवटैग्नटः ॥२७॥ के गमिमा नी मागष्टमा गा माटोदा गांधकामाम्न न नी भीमानामा मोगा निमा निजामीनः ॥२८॥ लेको निको नम: मारामार, दमादयः ।
७.३५] पापि उदयगपिगरि गरिनादमतासम्यम् । [२
83CLU 273
स्परया प्टिापू०२६ B]गरोगविषयो दाग दुग्गंमागह
राजन् जीवितमायरानमधुना बसिरदगो मार ॥२९॥
या गोगोंपा दग्धनगरवालोमप योविनमान
दोपति ही हरिणा पाति सप्पाग्य' ।
न होना मृगतृप्तिा नृप भवत्तीवप्रतापाार.
पाप्टस्य घुमनिमग्नानं सोया या गम्भूता ॥३०॥
भग्नानां ममगाणे बरपा वीर त्यया परिणा
यद् प्रामेषु पुरेणु याचरजना देने प म्यापिना ।
एरो महमूरगाह परिन ग्लोरोनर गर्वत
1712
मीतिरतम्ममिपादुगाभुगा प्यार पानि पृषी ग्यमम् ॥३॥
अगमरमरपन्लोगनमायाममागा मिनिट भटा भगनानारिपूणाम् ।
गल्पमादिदा) पनामोदयारी प्रियगृह दिय'मनाग्यममापि यदम्॥३२॥[१०२७
रएसी पिहभाना दुगहोय यमन्नराहामामनगो याणसीरोनि ।
इनिहि परभूतानां पारगारगर्भा स्परपति ना पान्यान् प्रेपनी मापंम् ॥३३॥
पारनिगरनिगमंजरोतुम्निावरियममारप्टायो ।
प्रतिक्मुिनिया गूगंगमापदमी पनि गारंगोग्णातीय पंत्र ॥३४॥
पनारमा नापिता पल्लोपं परिनियामा प्रोटिमुगयी ।
रएटमुगुमपगगं गान्दामोरगांप नयनुयारा गूग्नंगधमा ।।१५।।
अपि पहनरदूगारमय सोगाना परमिरमाई मेलापगी।
पतुरगग्य मानिशागनदेशा जाति मुददातारपा गया ॥३६॥ [पृ०२७ B]
एना प्रविश्य नगरी परमम्पूिर्ण नागयतीमिय रमारमा प्रामम् ।
मानापिपायपियमा मतिमन्दिपि गन् रमन नाणीभिरारमर्ने ॥३७॥
गाभारिता परपरिमाया गया गोभायमेनु भया नए नि ।
श्रीगगामा यि पुपार प्रेग्नापि परिमार सोरान mem
एर पिारि वगनानि योग शिपया नगारगी।
गौरधिभिरपरी गम्पधिवाभिमाया ग्मा मामा ॥३९॥
श्रोगामे:पि मुग्विरमाया freीनर या ।
मान पपगाममिला पाप मा विपिन मापा ॥४॥
२२] कवि-उदयराजविचिनं राजविनोदमहाकाव्यम् । [७.४३ प्रयागदानस्य तनद्रवेग श्रीगमदानेन क [पृ० २८ A] नाभियोगः । व्यवन काव्यं महमदगाहेः नदोदयायोदयगजनाम्ना ॥४१॥ लोकाः सप्त?] विभालि यावदनया गावच्न नप्तायो यावदीपनि मनन निगमलो यावच्च सप्नार्णवाः । यावन्नप्तागधग पुनन्मिा: पुर्वग्न गातोनमाः काव्यं श्रीमहमूदनाहनृपतेन्नावजनंर्गीयताम् ॥४२॥ श्रीमान् नाहिमुदप्फन्समज नि श्रीगज्ज रक्षमापति- ग्नमात् माहिमहम्मदग्गमभवत् गाहिन्नतोऽहम्मदः । जातन्मादिमहम्मदोग्य तन जो गागानदीनान्यगा मातः बीमहमूदनाहिनृपनि यात नदीयात्मजः ॥४३॥ ॥ इति श्रीमहाराजाधिराज-जरवक्तपातसाह-श्रीमहमूदसुरत्राणचरित्र राजविनोदे श्रीमदुदयराजविरचिते महाकाव्ये विजयलक्ष्मीलाभो नाम सप्तमः सर्गः ।। विनति मतां प्रगान. नासमयत न लामथ कोटिम् । मागमाहानि ग्याति प्रायनामेक: ।।१।। श्रीगमेणाम मानायमिदं पुनमलेपि ॥ [ पृ०२८ । । यो ॥ महमूद (वेगड़ा) का दोहाद का शिलालेख (वि० मं०१५४५ शुरु मं० १४१०) श्री' पाम् मोरगामिनी देवी नया माहि मुदा [फा रम्बादी या जगति मिन] गपातमाहीना (नाम्) ॥१॥ आनो श्री [१] रेगो नृपयुनिग्य [] प्राप्त पुषि"] यदे[] श्रीमान् गोर्यादिमा परमगिर यो विनिमाधि [न] रपो। पश्चात् सनेग्मिन् प्रहरगुण - पोतियंगवी मानी भूपारमोनियंग्मुरुटमणि वीं विधानम् इति ॥ २ ॥ श्रीमान् वीरोऽभवत् पारिमुदाफग्नुपरम् । सपो योगवि [गको मरम्मदमहीनि ॥३॥ सम्यान्वये प्रसून प्रगारमतातिमालग। योर गदा श्रीमहामन्द्रो राग महीमएमडनाय ॥४॥ य गर्यपातिग्गाग्ग- [लो नप यागत । जिला मही मायनाधिपम्म जग्राह नगपन च पश्चात् ॥५॥ गस्मारभूमिानि. प्रधानयोर [ ] सदा गा मरम्मदो ऽभूत् । दारा जगजीयनजानाति प्रमायो] विदिन पूपियाम् ॥ ६ ॥ । मारपीमरमूदयोग्नी श्रीग्या [17] प्रभो. विगा -दापनिो जागोन्यये वोयंपन् । यो गग्गादधि [] --पपली - पदामेन'. परिमपति प रिनपान गारपायंगारे गुरम् ॥ ७ ॥ गम प्राप्त निन प्रम"न [व]नो दातानियो [i] निया पागार () गिनिति मगर ग रिया रिपुम् । (१) परभरामा nिtमरे मोगरा Nirm Tr । (२) मोर हो () Trrer' है। writ तोर में Frt() मारह () र गारोको माग सोहै। (१) fert I () MARENT(८) महान गा।(6) र () (१.) रेप (t) rnरार fantोमासर (1) गामा मार - A - २४] कवि-उदयराजविरचितं राजविनोदमहाकाव्यम् । नप्नो वाई (द) मनानिमय ना दे न भूधर- नीया श्रीमामूदमातृ निन्धो मनि [३] यते ॥ ८ ॥ तनोतंगनगेन्द्रमंगलमटान् वीच्यादरेण स्वयं] गुदं वादवि तमं हम कृतवान्] भूपः स्वसेनाजनैः । जिल्या दुर्गम क्वैलिहितं यो जीर्णसं सीनिम्नमिदं नकार नगतिस्तवनं पर्वतम् ।। ९ ।। नंग पानात् नं वंग्लुिद (लो) गुदाल []! जिया पापक [दुर्ग] पिना सझं प्रतापनापू (वंम् ) ॥१०॥ नामदमहोपालप्रतापनेव पायकम् । प्रविन मालित [ग] बेन्दिं पतंगबत् ॥११॥ जीवंत ननति वा दुर्ग [नो] त्या महाबलम् । नासा रे ग महमूदमडीम्या [:] ॥१२॥ शाया गुणे [ ] मंभिपदारनं कुलीनं नृपयं गजातम् । मन नागमगृहे महीमः न मेयर [भ्योगिकमानदानः ।।१३।। पनादि [] मेवा मिचीमिमावलं कार्यकर विदिया । नदानगर नदवास्य - देशरक्षाम् ।।१४॥ [] मी पनिर [२] न (नः) मोभवतुलप्रतापः । में - इस गान (नां) गागगेन - सपने- नागमत्तिः ॥१५॥ मनिट शिनी - - -(:) मा (मी) प्रतापवान नीर (गे) दिनान [ ! पुर गाणि ॥१६॥ मगर गया मेवानीप्रतापवान् । मानवानीमाताकोमादल. ||१|| गाभिमान पुष्पानिया। सोनयनमा नमार ११८॥ • - - - मो ि: किमोमिनोनयन - मामा मानिने मोर नागनमा ॥१०॥ (2) :: (:) :(.):: नाम तो (1) .in मा । (.) (:) :::: -- - नम्मान गंवलयन - . ७,४३] महमूद पेगड़ा का दोहाद का शिलालेख [२५ अहम्मरमुर्गनग्य. कूपो यस्य विराजते । मारजीवनदानेन यगोराशिमिवोदहन् ।॥२०॥ या श्रीमन्महमू शाहपया पोचपलाम्ये पुरे ---[को निविवर्द्धन सुविपुल तापत्रयोन्मूलनम् । मानदेन चार मानमसम 'मन्युप्वर' भूतले सोय वीर इमादलेंद्रनुपतिद्गं चारोतमम् ॥२१॥ या गाधिपतिर्यम्य जयदेवो म-2. [0] मिपनिये लूपजीवगिर [6] स्वयम् ॥२२॥ तागेरा त्रि] पून् हत्या कृत्या दिग्विजयोदयम् । गयदुर्ग गमजयत् योमो वीर इमादल. ॥२३॥ (रायल) वेयनेन माल तरिवन्द त [था) लि - विमुक्त गोलवगण सहत्य चूर्णी [तम्] दुर्ग ग] यली विजिस्य सबल प्रोद्यप्रतापेन यो धम्मद रमिद प्रहाग्गदित स - . पा - दंदी' ॥२४॥ याग ] भूपलवल प्रह (न्य प्रन] पडभूनी वरमालाना । य. पायो पूर्ववि !! द भा fr ययंते चास्य जपरय वार्ता ॥२५॥ दपिप चिरतर दुर्ग य दुमह श्रीमदिमादलकुलो दान - सुदरस्चः ॥२६॥ श्रीनाविरमातांगमयातीत मवत् १५४५' व साके १८०१० वर्षे प्रश्नमा यमाय मुदि १३ मदिरा श्रीमादलमा दुग्गं उद्धरे श्रीरस्तु] जे गढ पोलि नी पारी ते वारी तिम "शुभ दिन - (२)Te111 (1) रिपो। (1) १४ और शेष में न्दुि गा दिगाई देता है । समवन परपर हो गई। (१) १४.गरिनुमाया।
महमूद वेगड़ा के समय का दोहाद का शिलालेख। (वि०म० १५८५; नाले १४१०) मल ला के मादक Ic प० बी० मालिया, पम् • • पल-पल बी०, पीएन० टी० लन्दन ) or fair प्रिग माफ - शिसम, चमई में मुर्गन । उन पनि गरक्षको ग गीजन्य में प्रान लेबो यायो एवं मूत मिला गे भी देकर म को मन अभी प्रशासन निजामा पुगतन्य विभाग के दररेटर श्री जी० मो० नाना र आमा में गाय को पान में गायना जी उता. ना ना मार मानरामियर पर या पदासारे यह पाटन सम्या गैर १५८ नो । ने दिया पर दोहाद माया गया कामी गो में हीरा रो उत्तर में ७५ मोम पर नियोग पानमामिल mpurnim नानी नगगे ..ETTE TITari उमगे जिनमे छग Timi.-:पर गिर 71 और रंगीन निगाना frieी योगम anti , परन: 7 Aftr गार वितरल Frm:7011। 'मी १५.५, . गरम ११ { :3 - ? i ic n { 7: T T T Ti : ; HTTmirti irani. : HTHExt. ri: मा) Tafim mar arfrar TET iii। Prin: गगनी AT Imiriti : -- . . - . १) 7 .
मामूट येगा या दाद का शिलालेग मही भरता गया पल उत्तरी भारत में दूसरे मेत्राममाiilm नाराया भाा में प्रात 'इमोस मिसानों पर बनविषम गाणी पाता सोनिवि देवनागरी और हग रिप पर बिना माया मही । Fसामंदी भाषा महत और आरम्भ में मनाया में. पटबारे प्रतिषित गम्पूर्ण लंच पाई। दुर्भाग्य में अन्त को तीन पग्निया गान ग्यारा गिर भार पटोर-टोर पामगाना मानव महरि संव मामर अंगहारापार में पायापा गापा अपना गरी स्वरोमामा उसाइनिग प्रशित मरने लिया गया पान पत्रिपों से जो भारनि पालना frain महमूरगामुक्ष्यमन्त्री इमादुल-माहारा दधि (रोगर) निर्गन पराए जाने से बारहोगरवाया गया था। HTER गजरात गु संपावली, उनमा और मुमपर मामू योरयो रा भी पगन प्रार। मह परमाही शिलानत है मिममें मरमदयगरा और उगपूरमारा उरो मनवाई मारतों व उनरी जोतो महार्यो विवरण रिमामार' 'दगो भाडागर, सिट आ TAपिता पार नारर (List of Inscriptions of Northen India.) +70 371 277 1173 r ":32. और ११0"," और 00 ११..और... और": १r"। i frem? 1777 Resuspeł Lust etc ? ?i-il. 4,२७,२५०.२५,०६० + गमे मा पनि प्रयोग पाठियापार में बीती 1.7 गा गा मा पा र पी। पागर प्रमातिा. पण प्र.1- f", एपी गोपियन ग्मिग बाप मोर.पी. १... पो. EिASI १२, T. Teri marr. पुगाउन RITE नाम लिगि गगन मगारदा और मश:mite १९२९... ४ में प्रगति। गाin-rrr far f..mator - Incretion Rer ling..... furt." ११.२१॥ १५...मारे गीगो में- मगर :۱۱ و دلاد , Ary - २८] मामूद गड़ा का दोहाद का शिलालेख लेन मङ्गलानरम मे आरम्भ होता है जिसमें कामोरयामिनी देयो को नमगार दिया गया है। इससे बाद मुदाफ़र पातमाह का उल्लेख है जो गुजरात के मपारकर प्रयम के अतिग्नित और कोई नहीं हो सकता। याद गुजरात के मुलतानों की शायनो इस प्रकार बी हुई है:--(१) पार मार (२) उसका पुन माम्मद (3) उसके वंश में उत्पन्न शाह अहमद (४) ननु पार गाम्मद (५) उगा यहाज माह महमद । गह बंगावती मुस्लिम इतिहासकारों द्वारा दी हई (एवं कम्प्रिन हिस्ट्री ऑफ मिा द्वारा म्योहत) वंशावली में भिन्न है। इस पर नीचे दिनार किया जाता है। पारिता. मीगर्न सिकन्दरी, मोरात अहमदी और अधिक हिस्ट्री ऑफ़ माल, पं. गणों ने नुलवानों को रात्री इस प्रकार की है:- नार गनासी ने, नो मुसलमान प्रमानकों का उल्लेख है। उनमें से प्रानुन मा गयका निगमगर्नी पानी लेग मानवाने की मोधपुर मिागत गै मानामानामिलाई । मतगत में और वि०० १७३ का प्रसार गर्भ भागधीन मोरी में अलाउद्दीन गिनती नर दिलो मे. गा नदीगो जि.10.0। ६ रनमा गोमा गयो नो पहनानने में सहायता Fri नभए माती गती देवी पति गुजगाने गत पन्द्रमगरि १११८०) ने भी अपने प्रभावकाग्नि (गलतीगगन गर्मा, नाम में देवी मामीग्वामिनी' पर पर प्रयोग frur: (nxn:-४) । गर्म पर बनाया गया किमगार ने प्रगाम रिमा और मिरगायन' हो गया। का मानी दुर्मा गली में भी नाल को माना। और नो नाम भाग्नवर्ग में गव प्रमिस गा । देगी- मा ' TH THT रानी'मा० २, पृ. । । - , गरमी में अंग्रेगनगार-न्द्रिी पाण दी गान आर.दी मागम 1.7 . ... पर परिणाम निमोतिहाग. ATMEmai frri faif मारमा परने पर किमी पिता की उपाधि प्रदान की। ht! A... इन भी विनि: नरम में Primमोनामिनमा उपापिनी की। Een:१२५.१२.७१-७२ IT !ी भर का सम (rin) T. १, :, १५.it (गोश ! fire. + मदमूद पेगा का दोहाद का शिलादेव (१) मुडपकर मार (मापार प्रथम) (२) अमरगा (मामा) (1) प्सरा पुत्र माग्मार (महम्मर), (४) उमरा पुत्र गुनगदान (गुप भामा ह). (२) गाउर (द) भौर (६) मामुर (मामा प्रथम), मामान द्वितीय पुत्र । मर्गविदित रोगामि संगको कावासों में मार (6) प (५) अर्पा मागमरमार पुत्र हनुयद्दीन और उसके भाई तया पुनरारा . माम महीं रिए पपरग्तु ममें महामर (भिगो ममतमान नियम मगर गिनते है) उम्पेन अवश्य दिया गया है। मामा मामी मातालपा मोर उमरो यह उपाधि, उसरे दिल्ली रवाना होने से पहले, उरिरा उमण ने प्रार पोधो यह पटना उस समय हिलोरेदार भोर में गुजरात में मगरहरी पा और वह पात्र शागर नहीं भा । प्रस्तुत शिमामेव में मरम्मर महोपनि' पनि म जरिया गग गम्भवत उगरे लिए म पापित प्रयोग मरम्मर उपरिवागत मन्यालीन प्रभार रामन मिए हो पिया गया । गत हपारण मे शोर भी गगत होतो उसे 'महीपनि मिलने २ अतिरिस ग लेन में मारे द्वारा विनर रित मा उल्लेग मी पिया गया। परन्तु, इन तुहीन और राम नाम मो जिताने में गिरेगे ऐसी बात नहीं हैं. दूसरे से भरको शिलापनों में भी ये माम मी मिसाएर को वि मरमा और दूसरा बाई हीरो बनपाई वा में प्राण मामामार पास गिरों और भग्य पानरों में भीरमा पता नगी पनि FOR मेमों में भी मुबार पुत्र मामा (माTMI) fm है जिगरामर्ष यह निसलाह हि गुसरात मात्र नातागों में था। गमावसो के सम्बन्ध रोग और प्यार में योग्य । (१) भामर (..) और मरमर (१०५) मा. महामार (२.२) और रामा (..) पुत्र थे परन्तु शिग प्रभार इन रोगों कोतरा Trar *देगा-आर बनाए हुए नियामराग +f-. : -... -प१t Tirem HTTE franपरािसरे मर पार हो गए.-को म में पृ. 10 गिा frarममा उगा मा पा AT TIME उगरी आदिदी। एपि.गो-मोमि E, Indo-A. 199-39P. पिन टि. भा...10 इलो-fam पार ग मरिस गर्ग नगर मुमत,१.२ मामद गंगठा का दोलाद का शिलालेन माम पुगि प्रगान बारे में पाटन निगम "उनले m" नाirani (D) गुस्सहीन गैर दाऊद के नाम मननी में नहीं दिये गए दानासन ने पोगन समल में गनानी, पोंकि उगने यान ही पोहे गाचया और वा मानपानी भी नाग बा; परन्नु दुनुवउद्दीन तो माम पेठ पुरया और उसयर गम नियामरापियां माममय शनाय ममग गाना गाना लु उमरा मसाल नगा भी नहीं माना कामानानिएन नंगों में कमरा नाम न पाये जाने का कोई कारण ममा में मी आता मागरला मामा के नमय को गभी अग्नी और . में मगर (प्रथम) रानाम जमिन्ने का और मनुवादोनय दाउद का नाम नियमितमा कामी, जो अब तामात ना सका। परन्तु. यह जनाको मंगल नगा गि लेगों नि जिन मायनों में जानकारी प्राप्त मी मने दिन में jिa frनमारों को बनाने के बोल जिनाilitiमामा में और टन शोनों में इनकी अभिर पोतों का अन्तर भी गोfriग आलेलो में मनाया जागर । वरन, ग मालेगों मनी मनोनीतीक्षा और भी अनिया जानलागेको सामग्री मनाना। मम्मत निरनिहागरा: नेगो में प्रान शानियों भिनाने पानी (frयन गुनगानो ऐ घर आनेगों पर आधारित ܪ܆ इम पेत में जो दसगजानन मानो या. पर फिइममें मापकर मारमा 'म प्र उपगे, किलो फेवावाहों मे १३१. मजा द्वारा गुजगन पे मात्र राज्य गो स्मारना ifrai । गाय माता पदपा भी जो प्रानीन काल में गजगाना (EC 2000 में अपना नाम गिद्ध भी # Riiifi मकर रात Fritri mir TET 7 पीलीयो पर foam T] नेत मप्र fram:--- " - - ५. ii-...:.............. । ::Ham-Ext.:९) - . . 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महमूद गहा का दोडाटा भिगोय "नृपाल अपि यो पिनिय अधितम्" मार पुत्र मरम्मद से रेवस 'भो नि है । बता दिलव सात प्राप्त न हो, ग उपाधि मे बोई तापप नो निरमा । वागतव में मतो मरम्मर अपन पिता उत्तराधिकारी प्रा और न निगरों में ही उसके विषय में कुछ अपिर लिग अन उगर पिप गागल पिक प्रपोग उपपात ही जान पाता। मामा पाद आम्मद हुआ | उमा विमविया fran मगेमाप समान (भूषण) भोर सय पौ पार्यों और विचारों से मानन वाया मोर गमा पाला था। उसने अपन पगरम मे मानवाधिपतिआतीन rिuarन ना और धन पर भी अधिकार कर लिया। मामागप्रतिकार rf प्रमाणित रोती । उगमा 'मी-मरस मारन पर Trir वह गुमरान र परल मोगलतानो में ग पा उमन मान गारवाया और मएमरागदपाहर पाया। यह सायना मान/frमममम मान पारे साथ साय नगर निर्माता विषय में उपशिगगर, २० पिसम नगरानाग प्रमगया आगा। जमारिमें मुसलमान :मिशागारागमे आम मानसरlt पति हरी भागो में मनाया। सन १९१३ ११८१० ग्राम में गजरात पर आरमण पिप आपद नानावार उपाय रोकगी, १४१० में उसन पर मापका पर महापौरोरर मा रे गा में पारण मनोरा पा १४२.६. मग पर मारले गया मा पा सो सहमरि मामा मारिया : पर पिसार परने में सामITAPinnr पप निकला । उगन संपत मालवा प्रात राग और सरगरा पग माने राय में मिपा सा । प्रातुन निवIIT म नि माया पामिर मापारों पर नहीं होता। *णि-fr० १.१० १५ १८ पराण प" '५ fro: १.२९६० f-f०. .. . *णि-...-५४ 12 पती-प. 'पापन परमा[-11 : Kam तलप पनगापि IITrm frrna पहप पर शिक्षिा 10 m freTtm 4 गा TRfretri AFTER है। सिपिए-ग-f३.५.१... f-." १० ११.२१, ग. १८८ ... ..
३२ मा.मृद वंगा का दोहाद का शिलालेख भी गिनानी शिमग में अहमद पो दूमरी पड़ाइयों का कोई उल्लेन गो. नि: गिरनार के माममा रामा, पानदेश के नागिर और जापानेर के पनि उनने १४२२६० में अपने आपोन फर लिया था। दक्षिण के यहमनी गा मनाउन आमद को बिश्य में भी इसमें कोई उत्तर नहीं है। आमदपुर महम्मद के सारे में इस रोष में विशेष हाल नहीं लिया और पह भी। यपि ऐगा पहले है कि ईडर के राजा पोर (बर), मेवाड़ के राणा धुम्मा और मानेर से राजा गंगादाम पर उसने विजय प्राप्त को धो परन्तु पुछ मुसलमान निगराने उमसेविय में निनाई. शि. यह फायर था और जर मातया के मुत. मान मापद पर हमला रिया नो उगने पीट दियो यो। उमसी इम फापरता कायापपुर अगरी मे परमाने में उनकी स्त्री ने जगे विध दे दिया था। बमा गुण या मा शिया. मारह वात या और इसीलिये मुसलमान रोग जोगम' गाने थे । मान्माप वाद नुरली माद में मारा परिचय होता है । जंगा रिकार मिना गरेको पूर्वाभिमारियों में नाम : दिये गये हैं। मामूद का नाम मामा पेगमा (गगनी बेगो) वि. प्रमिल। प्रस्तुत शिलालेग में उसको योर aar * FREE और पार पामीन वाजल्या पाट नहीं है जिस पार पायोग मानद लिा गया है. अगया उगरे गुग में उत्पार कियो भार महिलांना प्रयोग गमर के लिए लिया गया नो यह गान पु-शिपिरगीन पानी पनि म माधि का अर्थ (गियाम-ग्टोन) धर्म का गा, और मिश्रीराम कि नागिग्जीन या दुनिया अनि और न किया। अमर प्रथम में पुत्र महम्मद मितीय को उम frri for font . मा. जि.प.it it'. : ..? 10:....?, गि-नि० ४.१० ३५; प.गटी- * {wr-..::.:...irani ..::HT STRr मा म:' मा ....::..Timix-१६ R" . Bf : .....::-:., . !... frm::E, १०२:: .
मरम्द येगड़ा या दोहाद कामियांग 1३३ जिन पश्तियों में उसके पावन लिया गया। दुर्भाग्य मri गति हो गई है, मा इन सब घटनामा काटीर- पना सपना हिर। प्राय प में दक्षिण दिशपति और दमग ई निति र सार मामून मनावर है (३) रयत तर पप्यो पर अधिगर (1) मी तिरपा (प) भाग में पाया मरमूर बिषमो द्वारा १४६२ और १४६३ ई० में* वन लाम र पर पारित अवसर पर महमा ने जो राहापना की थी उस उनपनिया पा प्रभात होता और आर भाग में बम्मय व पाग पारस रामाधारा १tot में लिए गए माग्मनामरंगी और मनाई। रयत मर्यात जूनागा गिरनार पर्वत का उल्लेमरने से मार दाग १९६ १० में उग राम्प पर रिए पर हमने से ता है। उस समय पी के रामा गरमाना मे महमूद ने पर या दिया था और उन राजचिद्र मोने यायरि पाitri ५० में पिता है कि महमूद ने उस दुधना (जोi) को far fru पोर उमरीतियोचिरस्थायोपरने के लिये वरावनी पिजरसम्म बनाया गया उगमे भूनागर लिको पूर्णतया जोन पर गियर १४७०६० साटमार में समिति र सेनेने ओर सय रिया गराई। मुग रमान निगmin पहला हकरिनार रागारि आग्म-मांग परने माता मन नाम धर्मगे भगीगार रतिया और उसको 'पा- परान्' से आप प्रानको गई। पहोगे तलहटो में महमूर ने मातराया नामा मगर यमाया और परमार भी उपहा रामपानियों में से एक पासाय हो, वह उसने गए भागात पान भी पाई •i. दि. १०,जि०३, पृ. ३०४ ०५.पि पृ. ४८-५१, पगा... २. ग ने पृ. २०६ पर रही माईमाहार fatto." 1.हि.., जि. ३ पृ. ३०५, यो नपा को 1.1TAura है. पिम्म ने पु. ५१ पर दम तो उम्तन न पा tart. पुरात मसारण पीपाईनान या रिस? न. पर पति पर गहाई और एर महानी fanा free पाने. १८ पr (Bardu) पर विर का हान TATr FREE मोक्षमारे सामने रंगी। t • frare, f० ३.१० ३०५, nि . मग मना ९० में भा १. ५२, पर (प. ५३.१४) " mait भाम पाग हुमा बगा। राग १ frero, जि.प. २०५.०१, ५. ५ .. ... निगा। ............ पु. १......... Er में मामा गदा का दाहाद का शिलालेख . पर मंग?- सनाया गया कि मामूद ने यर (प. ?) अति माननगर) यो निया, पापर (पायामः) रोजीन पर दामासे निपानिया नीरनगर पराग्य करने लगा। जम्मानेर सौर किने पागा, TET format गमरमरमरघटनामों का पाना। मानया भोर मात्र में मांगानेर एक 'गानिक चिनि का सार बा । यहाँ पोशामक नोगतान और पानी एनान्नि राज्यपानिए जय भी मानवामि को गजगर पर आर नमाना तो गापरले नांपानेर की गोमाता था अगमा यदि उसी को गोई आनिगो को बत् म्यपं गजरान प्रदेश में लूट मार गर्ग. या गुनगानों गो नंग किया वग्ना था । रग प्रकार, गगना और गजगत में गनगानों में प्रायः पटपुट यो नहायां और कभी-कभी सही नदादा नों ही गो गो पातु मामा पाने को भी गुगतान पाया जोन कर यह मेंगना को कार में कार गाया। उस ना सम्म मा जनिर गांपानेरका गाना ना सौर मरमा उपसे पियोर- प्रजा का जागता मा पा पल गमय तक उगो गग्य पर जारमन + Trfrea११.५ मि.ग. या मागे, 4. गरमाता जि. प. १५. (गनिन्गन): गाम्ये मटिमर, .:, am.....। आजाल ना राग्मिादा। म. १११ गानमार जागा उस समय पाया दर्ग पर गाय HR: Tा भीर मामा । प्रमा niram आमा भाग में नगि il: THE ' (पिगमागमा प...१२) पोर मीगः Fri.itी नि: fia गना जमिः' को में नमो गा मालाम. किग में fary a निमार्गमाग दिशा नानी में - ममनमानमार {} fri (मोगामिनी. {: REE (गो furth. .
fet,.११.३० राग, १.२१ महमूट येगड़ा या दोहाद का शिलालेख सने कोई असर नहीं मिला। निदान, १४८२१० में जय घोगनेरएर पता धारा पदोनों प्रोदारा पूर्वेदार मलिक सूर मारा गया तो उमे मौका मिल गया । उमरेम समे नाराज होकर महमद ने चारानेर पर पढ़ाई की और उस पर अधिकारण बल ए मस्जिर यनवाई । पई ने पाक में हारण सो और मामूर ने उस किलो पर निया । यह घेरा २१ महीनोसा घसा और अन्त में पारी में रिसेपर मायान सिगा। हताश होकर राजपूतों में (जो अव यल योरे रह गये थे) स्त्रिपारो जोक्ति मगार नौहर पूर्ण किया और मरणपर्यन्त ममतमानोगे अन्तिम पर करने किये मंगन में आ गए। (इसका उन्ले पशिलाने में लिया गग मा तूम शेता) रिऔर पप राममून मारे गये परतुरा पताई और उसका एर पत्रो गरी नोकिन पर गए । महमूद उनके साहम और घोरतात पर करने पर रात प्रमानना और जब उनके पार ठोर हो गए तो उन्हें इसलाम धर्म अगीमार पर रिश।जाय मार हो पर तो उन्हें पंद कर दिया गया और पिर मोचने में गिर दिया गया। सब उन्होंने फिर मुलतान में प्रस्ताव को अस्योरार पर रिया भोर मामा न होने पर निश्चय प्राट रिया तो पांच महीने मगर उनसे पांगो देरी गई। मार मार ने महमूशयार नगर पसाया और इस धारों तरफ एP रिसा बनाया जो मारवाह पहलाया। १३.१४ पचों का तात्पर्य यहरि इस नए जीने प्रदेश पर शासन करने के हिमाल से निपरत दिया गया। मागे के कुछ पदों में मतिरामावस द्वारा पसिरोमिय मोर पहा पर एरको निर्माण कराने का वर्णन है । मादम पी आना मे भने हुए इमो रिप व वीं पा मगरए रोतालाबों का उल्लेख १६ पत्र में पिया गया प्रतीत होगा। अंसा कि मो नारा गरा है, यह पहिलरेश गोधरा जिले का हो दुध भाग पा न हि रामनाने शिमा जोम नाम मे प्रसिद्ध है। पच सत्या २० में एक पुएरावर्गन हंजो, स्पष्ट रिमाप हागामापुर मंगरगरा गया था। यहाँ महम्मदपुर से अभागा रा ताप हं न हि अहमदनगर । 'मरे इतिहागारा (ग पग्दिता, मि १०१) ने 7 नाग' सा है। पनी (पु. १५-६७) ने गयन पनाई गई (पृ. २१०) न me Tri, और बे में मोर महामेन नेम्टोर गुजगा' (१८९६ पृ. . ११), गरपाई विगा है । हम विदित हाताहि गरे 'भारमान' अपरा पोल' को गामारी तह मांगनी रे गम भी गिर ना थे । पारगन (.me६.१.२) पर अनुमान टीर है कि पता **.हि. १०.० ३. ५. ३०८.१०. गो. प. १६ from . नाम है।
मानद का दमाद का शिलालये गेम 21- मानने वालो आजा ने [चार पर (चांगना ?) ACT: दुर्ग र बाटो बनगा यह दुर्ग मे तास चांपानेर पानी से न उगवानी दोगर और विपरसोट में जिनको बनवाने के लिए नेताबी।' पा.मः २२-०५ में बागजाधिपति पा पान जिनका नाम जयदेव या (परमाल ने उमर मेगा पूर्णतः पगाना कर दिया था। पर में गण । गागर (गना) दुगं गम्मन गो (जर) गगा समा। नौग पर में फिर frai हिने पर पिर प्रान पारने यगा। परया पटना में मय पा पायाग गोपि में जिमरा नाम उपदेश मा और शिमलो पानामा पं. शिला 17 योग येव पनाग नाना मा गाभिर में जो पागगः मतानिन पिता | पघामान बने शि पर प्रश्न Eि नागर । गम्भत्र गा।विम्बिताएगहो। ति इमे अपनर भी मरान-पर गया। फिर पीएममा गिया जो स्य मा भाग में की गई र मीनार विमर Primari गौर रिHिE गरायोति २५ प में TET ~~ मी या प्रान तामर रोनासा जपता - मा.नमामि गया पर भाग का नाम जिग परमामागग गरना, पानी प्रदेश चार में भिस माम तो या ना को गजरात और arinr को गारिया मामान मारा माना #1 ཡཀ ཀf t ཀག | गोपाली नागमति (निदार) Trur fr:मालमागमा १८१० गरिएम .... १२, नया ..।' मोम'मा कार .. 31 Mari'ग मी f:.........: 25. Birh () HEAL:' मा 3; 14:.., : 1 ::..:::...:., rit नाममनमानी ११ : जिमगा Pi,?. - . . - .ܫ . . --- - -- - -- । 4 महमूद येगड़ा का दोहाद का शिलालेख [३७ मम्मत् १५४५ में बनवाया गया पासकोसणे पनि में हमाइल मतिद्वारा शिमो पाम नि जीर्णोद्धार कराए जाने का उल्लेख है । यह तिथि और दिन अब नगें पड़े जा मा सरे है। हम (२६) पद्य में हमें एक नई ही सूचना मिलती है । ग्मिी भी मुमतमान इतिहासकार ने, दधिपत्र (बोहाद) के दुर्ग निर्माग मयवा जोगों द्वार का श्रेय महमूद मवश उमरे पामियों रो जिनके कार्यों का विनर वर्गन मोराने मिशन में मिलना है. नहीं दिया है। इस शिलालेख में महमूर को १४६० ई० (जब यह उत्सो हमा पा) सर को भभी मरम्पूर्ण विगयों का उल्लेव है परन्तु इसमें सिन्ध, जगत और द्वारा (द्वारका) के हमपों को जोर दिया है जो क्रममा १७२ और १४७३ ई० में हुए थे। मन ही ११, १३, १५-१७, २० और २१वों पक्रियों में प्रमा (१) मादल (२) इसाइल मलिक (३) 'वीर' मादल, (v) इमाउल मल और (५) मादुर मनिक नामक व्यमियों का उल्नैपह। परली (११यो) पक्ति पा सन्दर्भ स्पष्ट नहीं है । (इम) ऐसा प्रतीत होता है कि गमे (मान को) देश रमा', (सम्भवत. नये जोते हुए पापानेर राम्रो रक्षा के लिए मित पिया गया था। दूसरी (१३ वी) पग्नि के अनुसार मलिक इमादम ने पल्लिन को गीत कर वहाँ एक पिता बनवाया था। तीसरे, उगने घमापुर में एक किसा मनाया पौर चौथे माहुल मुल्क ने दधिपः दुर्ण सम्बन्ध में एक दान दिया और अन्त में महामाइस ने अपने अधीनस्य उसो दुर्ग का(१) जीर्णोद्वार पराया (मतिकि?) प्रमग देखने से ये सब पापं एर हो व्यक्ति इमादुल मल द्वारा सम्पन्न हए जान पार प्रस्तुत शिसानेस में इन कार्यों का वर्णन 'देवा रक्षा पर निति से सेपर मार भारत १४१० में पिपा दुर्ग के जीर्णोद्धार तक तिथि प्रमानुसार लिखा गया है। यह इमारल मुरक और इमादुनमुम्ब एक ही हो सकता है जो कि प्रधान मन्त्री समान हो एक पद होता था। महमूद के समय में इस तरह के तीन मादुल-मर R(१) इमाम मुल्य शा' यान, (२) इमादुल मुल हाजी सुमतानो और (३) महापुर। पहले इमादुरसमुल्क ने महमूद उस परयन्त्र रेविज सहायता की जो मतमा पर मंडने समय हुआ था। वृर यह पति था जिसरी सहायता में गर मारि पानों पर विजय प्राप्त को और दधिपः (ोहार) ग्लिा बनाया पु. ७६८६ पृ० २३८ इरिहामानमार पा पनि पाईन का नाम लिगा है जिमने आईनग वगाया । यह प्रमाण " मुभर सम्रा है। परन्तु दक्षिा और दाहादप प्राइम गूमना म वित •देगिर-फरीदी रीपनमा है। +t.हि... जि. २, पृ. ३.६... मि मॉस वेग म्यूजियम में थी मानी रे मतानुगार । ..हि...जि.३.३.३०४६ - मामन गागा नसाद याशिलालग नमा नारामा पिला गुलवानां मापानेर पो गाई' पारेको माता Tr. TIT (re), नगरपिर नामा मानो, मम, मामा और शामूना के सिनियों; पावर और जोग (?) दुर्गा सपा सिर में मर का नाम साधार. नहीं है। अगि सम्भव पोform frariमाद में प्राचीन नगर सामान परम पर उनी नारेमदनगरका प्रमंग और नोमान द्वारा पा पर वाया सिमी भीमारत का Trif; fमाबाद में उमर frazरने गोवार हो ... Tri"TITI वनाईयों। मला (12) नया आयांना मानर है जियो प्रानीन गौरव मान रिया। माना हो या कितनी हो इमानों के नाम। इनमें में गः (गज प्रामाः) परसदा पाँ, मा. गार पाने, रिया । गर्म पापार मागाजिद aur iriTeri पर मारापर (गांध)। मन ल निारे आजार दrr* मामा। - . . . ..:.ft. : ...:; दिल, [.0 , +- : : गर्ग मानातिर iii:...(Arch. Surr: Wict India. Vol. VI, P. 41 .!.!.!... :: .. I. Vol. 11,612-13 I X::::. भा:, 10 S. कर :: :: rimनो नाममा s: गम नाम reer : : में PATRON हाले [:.:.::::: .:.:.....:.:-:?:: Rit' (..
मानद गदा का दोहाट यानिटरिंग [.. गोगामे जाए जरा और मारगपरेमपर पाना भोपियार प्रयोग मिसा। मुषसमान गिर रोगर में giनिमांगरे निगमानपूगंरातमी परमाणे वा पिताजाता। उदारगाय, मोराने मामीना पर जगह मित्राr दोहोरो मनको परियों में भामा Anm frमा नपारा, गरो जगा नगने मधेप मार (नियोग गया। पर, मोरात-ए-गिरना । मनिमामिोर मोर रोगा सही माननाम और रोहा सकिला मरना (प्रथम) ने बनाया गया मन पार में मालवा मा १rt में इमरानोगोंदार । पारे शिया प्रग मे जात होता है कि पिपत्र में पिता को पापी मोरया पर यह गेमा में पाराम जोगीमार मार (प्रथम) गमर में मतिर माम मेराया। सम्भवत पर पिता महमा (प्रप) ही बन गए मापा, जैसा कि मार बताए । एम पर पिपरियाला या तो परिमारान्तिकारान' भपया भर पसभाप प्रांतों के मानुसार "बागला" है। पतिता मला किया 'गरन रे पाग nan है. दूपरे मोगों का मरन और मारपसी भौर नीमादारोवामा प्रशामासागर fr"ए भाग गो बापमान महमाम पगंनो पिता है । मगपमान सामोरे मना गार पान के E Nar। मोग मौर गठिी एकही। लोगों न पापि'गानी पीओ •डिपन मागे f... पृ.१४ पु. ११. t.. २२० र पारा गिरा जोन में। करीदी.१.१७ रोटी १.१५ 1efeateratणे-१.११ :.१ ६form,f..v.. १९.. पारगे (नि.नि... Imnaye, Partley Car Vol. XVI 19 Val VII. p. 6191 ir 121 * Bawal Cover Vol X11 » Him THAAT गरर मा (ram n Fri) १. पीm .
मामद गाकाहाद का शिलालेख ---- मामी मामा जसलामो आग बराह में मिलती है। एन गो गाना में मात दुगं पे जिनमें से पलहर और मार से । ATM में बागा मोर गजगत को सामना किनारे पर चीन का मानसाली गजल में गुजगन फे अन्तिम हिन्दू शामा फर्ग ने यही ली थी। बाद भी या स्थान गुजगायो और दलिग ये सुनतालों के बोला। सोनपापका अधिकार होता था तो कभी गरे ४, और सभीनी दोनोशी.गार में निकाल कर मनन्त हो जाता था। कान में लगाये गुगतानों को तिमी मोही विजय से अभिप्राय है freTAITHE :रो र माटो from पर. विमा उन्होंने सोलापार र मतिर मागी र निमारक बाओं को १४८७ ई० को नीरप प्रान पोरगी । farm में मारट नहीं पहनना जयप विदित होता है frमान नेता बनाया या आरल पं. गोग तामाई Pramari नागगान miकि इन प्रो के प्रागीन मारामारना का नाम नया आ रहाको शिलालेसमें *fric का प्रमिल पातो मानने नियमन ही मंगात श्रीनवर पर विजय पाने ममय मापद ने उगीभरण पर अधि. माnिlinाको गोगना में अन्ना और जो उस समय पन्नो संभाग में गिर भागा में समान पोरिजयातनायो, जनमाता मोरगा गम्भ गरिमा नांगोर और मार filam Ter fromin कार्य अगा- दिना..., पनी:- ना। 'मी मागिर, भाल ?', " गर. मी तिमी पर -Month 1 : " । . 1 . ': । :: ...: ....fre, ... Frt " EEEETE : है . 1 *FFin - -- ६ . . .. - , महमूद येगड़ा का दोहार का शिलालेख ४२ मुस्क मौरसरता के मापीत किया गया था। पर इसमें सदेह है कि यह हमपारभी हमा भी पाया नहीं । इसके विपरीत यह रहा माता हि महमूर के अधिकार में भोपारा नाम एक अलग ही प्रात पा निसरा सूबेगर वाम-उस-मुल्क पापुछ भी हो, १स (मौ) में दुर्ग-निर्माण मापन इस स्थान पर हल नहीं हो सकता है। पापपुणे (१५) ही पापापा का पहामी सिाह नो बम्बई प्रान्त के पंचमहाल मिमे में गोपरा से २५ मोम दक्षिण में और साफ द्वारा महौतम २६ मास पूर्व में स्थित है यहाँ के शासकों के एक शिसालेन में इसका नाम पावागड़ भी दिया है । महपुर से पहले महमराह और उसरे पुत्र महम्मदशाह ने हरा दुगंगेलने के लिए प्रयान रिय परतु वेसम्म नहीं हुए। एक सम्बे पटेरेसार १४८४० मवम्बर मास में रिसे पर हमला करने भौर इसरे ररवाये तोर देने में सफरता मिली। परते हैं कि पहाड़ी पर मपिरार प्राप्त करने के पार महमूर ने ऊपर और नीचे दोनों निमोम सारों रेलरो मौर भी माडून पर दिया और वहां पर महमूरार नामक हर बसपा को महमूदार चौपाने भी पहनाता था । प्रातुन शिलालेख में न पायाभोरातना होगहमरमस्य पिाह किमहमूर ने उस देश पर राय पिया। जीर्ण (प) से माधुनिर जूनागमभिप्राय नहीं है बल्कि यही पर बनाये गरिमों में से एक माह जिनका रात मुसलमान इतिहासकारों में लिखा है मौर दूसरे Foमामलों में भी मिना लेत मिलता है। मापारों रिक्ति होता है रियों तामी में यहाँ पर गरिस, मौर एर हा पाहतमाम सम्भवतः गिरिनगर" भारिसरो पूजा गरी मोर मापittगियों में मिलता है। हर सरिता मोसमोर पाटरिनारे पर गिरनार (मापास पर मना •हिय.. २ मारे गटियर, जि. प. १८५ नो. १ 1वही, पृ. २१७ नो• ३,४ पाणीपी मोररिसरमा देखिये, सारे गा.वि.स. १९९. Bolrm, fr.४.१....पू. २१२. डी.प. ७... हि... पि..... गिरी, १.१२, १४. ब... .fण (from),..पु. १२, १"माया . गिरनार र (मा) गिरानीरा भी की माम पा।" turnfrnाग, जिम, शि... ५ मना (Infe..पा. १.१९) fण. f... " मामृद येगा का हाद का शिलालेख गोदुग,* तिमाजमारताना या । इमोको शायद साजरन ने । मानव का नोट में घिरा हा रागमाल या । यह मुगलों पो गठिया मामा और गभग्नः गिनार यो तालमा रागाओं ने बनवाया पा । मग frm कार के पर बना भाग और सब उमरे कोई भी गिन अय- दिन सपा प्राचीन नाम बन जमा संपन्न (जम्मपन्न) से बदत पििगर र मिनार होना और नाम जोगंदगं अथवा जनागा में बात नाना मायरः १५वासनाती पोबारी बारी नाना पन का हो गग माम प्रनोन होता है । इसी स्थान पर मिले मशिनानंग में इस पर नाम लिया । सायगान को नग में ये दोनों नाम मिला है। पनीर गान पामत है जिगिरनार को दो पहाड़ियों में से पर पानाम पर न कि राम गिनारको हाइमरी बार १३०० ईतर का कोई Inामी प्रमाण अपना नाम गारवा निनानगी में रचत HT IT नांग: ग. १९४५ ( मिनिस्ट rofim माilms... मि. FRE१. पर्मिट १. १०३ IT I मनीति feo, मा ११,प. ........... मिमि... पति "f मेरमामा PARTeri n:ri मी.; "मरा। (friमामि गोद :- ६iram,..."पर .. . . inform' . . 2-1 : (ती 11 marit . TET पर .. . म I.
महमद येगड़ा पादोहाद पा शिलालेस [४३ मोर पानपरो एक ही मनाया गया। इससे ऐमा प्रतीत होता है कि पूर्व समय में गिरनार रोरो भिन्न-भिन्न पहाड़ियों रे माम रक्त मोर उम्मपन्त पे परन्तु यार में एरही पनि माम हो गए । मत प्रस्तुन शिलालेय में उल्लिखित वितर से उम पर समभिप्राय है रिना पर मन्दिर मारि बने हुए है और नो गिरनार रे नाम से प्रसिद्ध है। +देगो नेमीनाप रे मन्दिर में प्राप्त ग म १४ (ग्विादर पिस्ट राम्चे अमि, १.३५५) और मन्तदेय का पोरवार का से। प. २५० । मालिश राना रेश लेग में दोनों नाम है परन्तु यह स्पष्ट नहीं है रिये दोनो नाम पर ही ये है भपका मित्र भिन पर्वताये। (पृ.० ३४.४८) साम्ने गटिया, भा. ८, पु. १ "जन लोग कभी भी गिरनार को ही रेतापन पहले है. परतु यह गान है।" शिलालेय या पद्य विवरण पच. १,१०,२६ ३. ११. १२. १९ से १८, २०, २२, २३ अनुष्ट विषया उपजाति २ ७ मे १. १६, २१, २४ गाईसवित्रीरित राजरिनोट महाराव्य में वर्णित प्रसिद्ध व्यक्तियों एवं म्यानों आदि की सूची महापिप .. पट ७२८, २९ माम २१. इमिग ४ सम्परा (ला), पार (पति) ४१३ भरमा १२१.२ १०.१३,१४,३१, पासमोर नामोर मासपति, ४ २० मार्या' " । बिम्परा " गप्राप २.८. परराव ऐरात. मा ४१ गापामीन साररब ४ १८. गरी २२० गरी मार्शल ૧ ૨ા ...... ....
. ४२ गजविनोद में वर्णित व्यक्ति एवं स्थान पूरनरपानगार ४. २२. महंमद (हितोप) १. २९, २. १५, १६ गारदा गोनहानि ७.२६. गोदर ७.२६. महाराष्ट्र ७.२७. दिनीपुरी ४, १८. महाराष्ट्रपति २.१२. दिनारति ७. २.. मागन्द्र ४.१४. नि४ि.७. २.११. सतिगत ४.१०; ७. २६. दिल्लीपुर (पुरी) २.२, ४. १८. मतपक्षमापति ७. २७. द्वारानो ७.३७. গান। ७.२८,२९, पारापुरी २. २०. मालपराज २. ५. বিনয় २. ६. मारयमले ४.११. नेशनमारनपति ४. १६. पनिन २ . मानसमा २.११. पनिगमगरिरात २.:. मुराफर १.२६, २.१.११ ४.१७ पारागिरि २ १८. मुद्गारापिप ४. २२० पुरणपुर १.१.. प्रमाणात ४. १५. ७.२६,२८. ७.४१. पाना ४. १५. रापुरापिराग ४. ५. २. १३. २. १७. गामास ७.४१. भीम २.२६. ७. २६. पहात .. ७. १४. मपुराधिप ७.२७. मातोप २. ४. मगपिनार ४. १७. गरमूर १.२,३,५,७,६,१०,११, १२, २६; २. २०, २, पानपति ४.२, ७. २८. २१,२२,१, ३. :, , गियराः ७. २७. . ४.२०. . . , 1 . ..., froyपनि ४.२१. निलमिवार ... Rafter७. .. RTE (मर) १.;...:: mr ४. ११. .
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