Bhartiya Vidya Mandir Shoudh Pratisthan,bikaner

Sarat-sahitya (xxv)

Dr.mhadev Shah · 2010/12

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सुसम-साहित्य माला
परीसर्षों पुष्प
शरत्-साहित्य
शरत्-पत्रावली
मनुबारक
डॉ. महादेष साहा
हिन्दी अन्य-रत्लाफर (प्राइवेट लिमिटेड, वम्बई-४

पीपीपार मार्च १९६१
मूस्य । एक पपा पचास नये पैसे
प्रामपणेपर मोरी, मैनेगि समोर,
हिम-अम्ब-एनार (मार सिमिटेर, हीपमाग बमई-४
भराभोम्मा कपूर, डानमा लिमिटर पाएषसी (फ्नारत) ५७० -१५

पपपनसाथी
'पनश्याम'को
समर्पित

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भूमिका
(प्रथम संसारमा)
परिस्प बलियत पॉश एक विप स्पान है। भारतीय पत्र-साहित्पमें
प्रेममा पा-सारित मागे बदर भा है। सभीसी और बीसवी सदी किसने
करिमा पच-पर प्रकाशित हो पुरे पन-साहित्यको संस्मरणका
राबाता।
१५-मासिनराम जितनी ही करिनाइयों है। पत्र सेल मगर
मोराळ भपने पास नहीं जेवामा बिन पत्र लिखा गया है
समाळपर नही रस हो या काम नहीं किया जा सयाली
कारबठे कितने ही महान् साहिपकारी तथा दूसरों पोका समय हुन्छ
मसम्मा-चा हो गया है।
पालक परम्पर्कका प्रश्न है पापोरकीपावन सोने
RAT उनाने उसे समाहरबा और मिमि भाठयपर पत्रिकामा
पते मौके। परिकामे व परकन कतिपम मियों की सहायतासे गग
बरिस्पर मप गरेप भी द्रनाथ पन्योपाध्यायने उनी पोंका समान
को मिाया उन्होंने मस्तक एकापिय पम-मन प्रशस्ति
पीरुपए।
घरपद्रो पो संकलनकाममि में उनके मित्रों क्या कामको
शाबवासे हम्मा हुमा या। प्रपनाया सभोंने मेरा काम साब
बना दिया।
पान मिती माद मनाने बाद मुझे ने ही मोर पत्र मिले।
बिन भागसे संसरगम की पारे।
ल परेको पपने मता पा रचन्द्र माने पकिमय औरनमें
कितने महान् पे | बौने स्तिने हो नर सादिपवारोको पार स्पिा, पत्रिकामों
पनिम्ता माबसे मपर परिभाम्पिा और बीपन-पपमें भामेप्री विमिन
करिनारोमोजानाय स्यमना किया।

६
नए पुपने वाहितमा सीमने मपक इन पाँम गुव-सी बाते
मिोपी । भापत्रावलीसे पूरा फायदा गया भ सकेगा।
हिम्मी-मम्प रानाकरने परत-साहिरका पाचाप्य प्रामाणिक मनुवार
मापिवार हिसी मनुवार-साहित्यको समूह बनाग। घरपके कई
मसमाप्त उपन्यास, कई दबन निबम्ब-उसमन ममीवर हिन्दी में नहीं माए
है। मैं उनके मनुवार, गा हुमा मौर शीघ्र ही उगहन्दी-जगत के सामने
उपस्थित करनेडी माया रसा। इसके महावा मुझे रकमको बीपनी
मोर एक-साहिस्सपर एक-एक पुरुष लिनेकी इच्छा है। मामय
पतक पाकाम हमातदोबायगा।
महादेप सादा
स्वाधीनता कायाम्प,
यून, १९५२
प्रकाशकका निवेदन
पहले तरण समास हो बानेपर बहुत बीम या दूसरा
संस्करण निकामना पर। और माया तीसरा निकाया। मनु
पार महाशय पारमै मिलेर पोका मनुवार नहीं भेगको।
उ पुराने पसेपर पर खिा गया परन्तु कोई उत्तर मही मिग ।
स्थानान्तरित होबाने कारण घावर उमें पर ही नहीं मिम । इस
बीच 'गण निषधापी भोर मसमास अपम्पास (अगरण मारि)
माति से जुबा और परत् बाकी एक मत्पम्त प्रामाभिक
बावनी भी विष्णु प्रमाकर हारा बहीबायीहै।
पिस सररणमें कुछ पर मोर पप सी और दुसराय
छप गये, उमें पधारपान और कर दिया गया है।

पत्र-सूची १ ३२ ३९ ४२ ५२ ૦૨ १ भी उफेमनाप गंगोपाप्यारको लिखित २प्रमपनाथ महाचारको ३ मीनाव पामको मेन्द्रकुमार पपको ५ हरिदात पोपाप्पारको ६ मपिसाब गयोपापानको मुपीरपन्द्र सरकारको ८ भी मुरामपर रसुको ९ ममप घोररीको १गरानी गंगोपापापको ११ भी हरिदास धामीको १२ श्री महामन्द्र सरकारको ११ भी पिमपामार राय १४ श्री भूपेन्द्ररिपर रपित रायको १५ भी रणेन्दुनारापर मौभित्रको २६ भीमाभनन्द गपको २. भपिनाराचा पोषाखको सभी मस्सिाब रापको १ श्री पशुपति पछेपारपारको २ बानमाय पोरीको २१ भारी बरको २२ की उमाप्रसाद मुबोगप्पापको २३ रवीन्द्रनाथ ठाकुरको १२१

१४८
२४ारनाप बम्योपाध्यायको
२५ पाश्चम् मन्योपाप्यायको
२६ भाम्मछकि सम्पारकको
२७ भी मपीम्दनाप रामको
२८ भी पुरदेव मधमाकी
१९१३ अन्तम
३
-
.

परिचय
[मिन-मिन हों और मित्रों को पत्र मिले मये, उनका]
१ उपेन्द्रनाय गोपाभ्याय-पद्रो मप्लेट मामा | गार
मसिर उपम्पायकार | 'मिरिमा' नामक मानिक प्रधिकारसम्पादक । गिनाप,
पवय, समूत-पर अत्यग सिधूळ मादि उपबाट नबमा, गिरिका भारि
करानी-संत्रा तय 'मारममा नकी मुस्प रबनाएं।
२ प्रमयमाप माश्यार्य-रत्पन्द्र मित्र-मोर साहिस्पतिक ।
पणीम्नमाप पाल-'यमुना' पत्रिका सम्पादक । इसी परिकामे
पसे पार पाबन्द्रकी रचनाएँ प्रकाशित हुई मौर ६ मारिस्म अगदमें
प्रसिया
मेरामार यायावादी उम्यास भोर कहानियों मान्यता
रहोंने कितनी ही रोमांचकारी नसूसी कहानियाँ मी किती है। पठण, मधुपर्क
सिरखपती, माग-पन्दन पारि इन बानो सरल । भाछेपार भागे,
अछेर मापना, काम-वैशाली पायेर पुटो मादिपीकानिकों और उपमान
हैं।पोरनेर रान' नामक इनका कविता-संमा यी सोमनीय है।
५परिवास थापाण्याप-मन्त्र पत्रोपाप्पाप मुस्स प्रमाण
गुरास महापाम्पार एप सपने मामिला
६ मप्पियाल गंगोपाध्याप-'मारती पत्रिका सम्पाका विदेशी
पानियों अनुवादमें दया कराया, मामा, भाग, महुवा पापड़ी भोर
समापि मादिनीठमा पसिर। मुकार मुक्ति नामने एक नारक
इनाने खिा पा
७सुपीरप सरकार-पवार साहिरियक मित्र | शि-
नापि । 'मौवार (मपुराड) नामक पि-पत्रिका हमारक।
८ मुठीपर षा-शिव-साहिलपर मोर मया मित्र ।
९प्रथममाप घोपरी-गात नुप्रसिद्ध कवि परानी, उसम्पाठ और
निस्वार 'तुम समारला पोरबसेर हार साप, नाना था,

वीरपर रिप्पणी, नाना पर्चा, रे माहिर, मादि इन नियन्म-समारे। नीब
मेशिर मारि प्रेम पारकारीरूपा भादि उन किसने ही कशानी-संपा।
दान, संगीत, किसानों की समस्या, वियस मादि पर पहोंने विदनी हो
पुस्तकरिसी हैं। इनकी संप एपनाएँ माम वीरपर वीरपाई नामसे म्पा
करती दी। भाप ग्बीननाकोपनोईये।
१० सीसापनी गंगोपाध्याय-परस्पद्रकी साहिस्पिक विमा और
मानी-मा
११ परिवास शाखीमपन्द्र मित्र ।
१२ ममयचन्द्र सरकार-माहिस्परसिप और पल्पक मनुपा
माबन।
दिलीपकुमार पय-सुप्रसिब नाम्पकार दिन्द्रमा यः पुष ।
उपम्पासकार, निबग्यकार संपीवर भौर भरविन्द मक । मनेर परस रंगेर
परत रस्म दुपारा राम मादि न लिए उपप्पाम। बकर
मादि कितने ही नियममा म्प ।। ममप संगीत माविपर मी
मोने का है। पचाकी निकाका लाने मेंप्रेरी मनुवार
१४ भूपेन्द्रकिशोर रमितराप मान्तिकारी कार्यमा मौर शहबम्ब
मिर बेणु' नामक पत्रिम सम्पाएका
१५रुणेनारापण भौमिक-~'मोरय' नामक हास्सरतका परिकार
सम्गत भोर पाचन मक।
१मलानर पय-पराधम मक भौर साहिस्सरविता
२७ मधिनाशवम् पापाम-रत्पन्द्र मित्र । 'पाठापन' पनि
सम्पारका
१४ मतिसार क्य-मविन्द पोपः मक भौर गामा । प्रतक संप
(बम्वननगर, बया) तिने ही योग-बन्धे, पौमारमनी सपारक।
मतः मामा मासिक पत्रिका सम्पारण और रानि सेना।
१९पशुपति पत्रोपाप्पायनास्पकार, पत्रकार भौर परबत मछ।
२० मसानपारा पीपरी-'पापी' और 'गमपी पम्पारिका ।

२१ कामी मादुम परकोपकार, निमपकार, उपम्पासकार मौर बोम्नीकार । मीरपरिवार, रिन्यू-मुसम्मान गेरे, श्रीपरिष-गाय मादि इनकी रबनाएं हैं। २२ समाप्रसाद मुखोपाध्याय-स्वर्गीय मातोप मुन्नोपाप्पायक पुत्र, तादिस्प-रसिक और 'बगवामी समादक । इसी पत्रिकामे पाहे पास पाराम स्यमै पपेर राबी (एक सवार) नामक एरस्चन्द्रका उपन्यास प्रकाशित भा । २३ रवीन्द्रनाप व्यकर-परिचम मनायापक । २४ केदारनाप पम्पोपाम्पाप-सुप्रसिद्ध उपनासकार और पानी- कार। गग-साहित्पम 'परा मोशाय नामसे प्रसिर हमोंने पखमा, भमपनि भोक पति पापेन दुम्सेर दिवाली स्पारिनो उपम्पास मोर पानियों मिली है। पीनर पात्रीमोंने बस्तर-विद्रो समयकी मपनी पीन-यात्राका विवरण दिया। २५ यादवन्द्र पम्योपाध्याय-मौकिक मौर विरोधी गया मेर कई दबन उपन्यास मेला। यमुना पुगिने मिहारिनि, रोयना, बोर, कांग, रेरफेर, राईफेन, मारिइनकी प्रसिप रपनाएँ। 'विपरिम' पामते नोंने रवीनापार एक पुस्तक डिसी है। २५ महेनाप करण-गारकी व्यक्ति अयूब 'पोर पतिक काप । 'प्रोन्यु त्रिपर परिप' पुस्तक रेलर और शरदचन्द्र के मक्क । २७ ममल होम-प्रसिद्ध पत्रकार, साहित्परसिक और घरदचन्द्रक मनम्पमा २८ सुरेन्द्रमाय गंगोपाप्पाय-सादिस्वरसिक पौर प्रत्पन्द्र रिफ्लेम मामा। २९ मणौम्द्रनाप पप-पाहिस्पति मौर परवन्द्र मियो पुष । ३०-पुरदेव-गादिवरसिक और मस्चन्द्रो मच । बनस्पतिण मप्पापका

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शरत्-पत्रावली ~ [ भी उपेन्द्रनाय गंगोपाध्यायको लिखित] - सीएबी का दफ्ठ, रगून १०-१-१९९५ प्रिय ठरीन तुम्हारा पा पार भिन्ता दूर हुए । दो दिन पहिले फणीन्द्रकीदी मोर परिषदीन' मिले। तुम गौपर अपित दिनोंकष परमा सम्मर नरी, इसलिए भोप नही है। स्वपन कुछ नि पासे सपमुच ही बहुत श्रेप और पुल मा पा । मैं पापपरबम सोरठा पा किया करते क्या है। एक मादीमा नहीं दे दो बार ही इनकी मति-गति पर मा। तुमते एक पातका उपेन मुममे एक बड़ी दुर्य पदत है कि यम हो सोच उठा। किरोग बोपुरते पन मकर री करता है । एम्ण न होते हुए भी कोई कोई भारवर कारप पिता मरो चराका बताव करते है। स्नर्विरण (संघदन) नामक एक बात है। मुझम या भम्पषिक माधमे है। सुनको भाग दो फठे हुए एकदिी चिली सी। माम्वक उसका बार नहीं मिथ। ये बेगमों ताdि भोर को भिखाना बर। तुमने समाबपतिको कामनाप' देकर मा काम नहीं किया । पर बोय काबारीयरपफ्नमें पम्पात पहिली मां पानी है। माना तो दूर या भाको दिखाना मी उचित नरी मेरी हारिकाजकिदामो मोर मेरे नामको मिही न मिद्यपा बाप । मोजोस्म'का गया। ।

२ । शारत् पत्रावटी में 'पमुना प्रति स्लेाहीन नहीं है। पपाताण सहायता करेगा। पर जायसानिया मिखनेकी मरम्प नहीं होती दमागी रिसो। निम्न रिमा भार मेगंगा । 'परिमान र पूरा होगा या नहीं कर सका। भाषा ही हुआ है। पूरा होनपर समाविको की मेगा पकाना और महीना। तुम मगर सकते में होते तो हमारे पास मेमया । इसीरोप म समावि विस देना कि काशीनाम'को न । भगर छाप देगे दो पसे गरारमा । तुमने दो-एक कहानिया मिलनेकपा और मेमनेको fret। मगर मिल सा हो किसे दूंगा में या फीको । इस बावका गुप्त रूपसे तुम्हाको मिला है। गिरीन सोय या तमी में परिवारस बार पा मावा पाइने बाद अगर से मेरी पादमी न। उपीन तुम पर बात भोर भई । एक दिन उवधी एक पुस्तक पारीदनी पाही की तुमने मना करते हुए कहा पाउनपर ठठे पुल होगा। उसी पाठक पार रह रही मैंने नही सरीदी । साफ-साफ एक पुस्तक मांगी माथी किन उसने नीमेशा बरन भने पेश का छोपन रिपा करता पामेसिनता पा इसलिए उन भागने म्पै मिसना पकाया। रत मकान धारद मैंने ही पाठे उपर पान दिया। इसके बाद वे लोग करते मिनार एक समिक्षित माविष्पविका निभावे । माक्टर उसने एक मी प्रति गुप्त पदने नहीं मानतालिमेर ऐसा मूल भारम्य उसकी पागेको ना समझ सकता । जाने दो, दुलारना देकार है। नारकी गति ही प्रवर नही है। मय सास्म माग र भम्हा।। पबित मी हो गई। मायका पदना पर तपसे पर किया है। मेय मतमास ' भाव' (पत्र) फिर समाप्त होनकी भोर परि-बारे पदगा । नर उपासको तुमारे हिनेका परान अगर नावावर सुरागत मी करा और से भी न छोयो । मग बाचा आना-नस देशको लाकर पद पम्मपन होगा | समझ स्वारम भी ठोनहारेगा मेधिन र नरामा दो मकान पर बहाना नही। ऐसी साहै। मेरी उपनपेन समारे राम मश्य 01 36 पाने बहुत-सी पोजिी । प्रम मेनपर भोर मा मरगी।

शारद पप्रापरी ३ मार पहा । भगर 'चन्दनाय मेग्ना सम्मर हो भौर मुरेम गरी हो तोतक होगा शोषन करके फणाकी मे एप चिनीका यार दना । 1 । - १४ोभर पोपटंग गउन स्ट्रार रगून २६४१ १३ भीचरमेषु । नारी चिनी पावर मिना भररमा ठसस सौगुना म्पपित पुमा । मुझस गरोगे इस बाठो भयर में सपना मा म विश्वास रोम १ बहात्ती स्मृति भाग मी मेर मनमें बीठी-गगी है। मैं बहुत- मा मूख्वा सही । येशन इन गया इतनबादी कदापि नहीं। पर कभी ना मूगया । बोपुछ। इसकी बिमारी में नही दंगा। मैं भी व्य पानता कि यदि नियसमे दम एक बार मर और मेरी बायको पाद पर रेलो तो समझ सकागे तुम मुतस सा ग, मापात मरे र नही निकासमती । मैं तो टपीन इस बातकी कमानारी नही कर सश्या । त्रि मी पाता है कि तुमारीको रस दो मरे सम्भबमें सोच-समझ जाते हो । म मे भना टटना मग्न्याधी मुहद् भारमीप और रिम्तेम मान्म पति समवंगा मोर यही हमेशा किपा । माय भापधर्म भगा पिसार सकता है, इसलिए पपा में उठकबीच पाँगा ! मुमने विमान मिा कि मैंने कहा है। म मुझसे गापरतो । मेरे समय तुमने एसी बातपर ये रिशासरिया मौर उसे मुसलिसा स्पान किया। बुरा होनर कारण क्या मैं इतना भयम है। में मन शान इसकी पातकी परम्ना राय याम्य पारी बार मुन सा । मुझ तुमने गहरी पोर पहुंचाई है। मगर अधिक दिनोंठक पवित्र नगई तो यह अगदारे मन मी एकमा कारण बना दगा जिम्ने पर्व ही मुसान पहुंचाया । हमारी चिकौ पान असे बार-पार मोरवा सार तुम मुझ न बान कितना नीच मत दो। र मेरे नीच और ममरान कारण तुम मेरे बारेमें (सीप इटनी पनिता मोर इतनी गाव पीत दो मानी बार मौ) इस बातम पिपास पर मई। नमो नहीं । - शरत् पजापती करखे। सोरते कि ऐप हो ही नहीं समता । मेरी सोगन्म उपौन पण पावे ही मिलना कि तुम इस बा०पर मर विश्वास नमें करते। मैंने कुछ दिन पारी सायद सुरेनको बिताया कि मुमसे बिय परक ही मानों में बीजेपसी।। इसका कारण पा! कि मैंने मी समा बपतिको हिला कि उसे मान , पर मी मुझ कोई उत्तर न देकर उनकी पाईपती पी। जो कुछ भी हो भर मीतरी बात मी मासूम दुई। तुमने मी पो पात समाग्पतिको कती थी। उसबारेमे सब भोर मानकर सारा मामला समझ सका । म मरे विख्ने मंगयका हो पर मी मगर म समझता उपीन यो भाव इसकी करानिपों न त सकता । मैं मनुमा एपको समानता है। म बिस प्रकार अपने भन्तर्यामी सामने निसरोलिना सप्रेमीका से होक घरतको सचमुच ही प्यार करता है मैं मी विमुख से हरी चामता है और उसी क्षण विचार करता है। बाने दो इस पावो। बस एक चन्द्रनापको गरी इन्ना गाम्य । यपि या सममम नही भाकिया पपीपा पर से पंगा । तुम भोगौने सारी बातेन समझकर पारी भोरस न समबर मचानक विज्ञापन देकर काफी मात्र काम किया। मोर उसका पभोय यो। पाप तुम मोगोषकी भोर दूसरे किसीका महाँ। फपाप तुम कुछ पापणम पर हो इस पग-पयपर रेल पाई। मैं और मी मुमीक्त १४ गया। एक भोर मेय मम नही किचानाम' साहसा ही पे । पथपि पारम्प मी गया है और माको रिस्मा मुक्त नहीं मिम। सुन पास ररता किसीमा पीर लो नभये । रे मेरी बागको एप प्यार करते है। शायद चौथिए उनकी इतनी छ। एकपाठ मोर ठपीन 'भारतवर्ष बिए ममप बार-बार परिषदीन' मांग रहा था। मम्वम इस तरहसे मिथकर पालिसा का पा मेरा बहुव दिनष पुराना रोती.और दास्तानेसे रिस रातका बोर होता है बाराबमुप बही है। उनने गर्न साप सबसे काम 'मरिवीन' या ही भोर ती बापामै पदिक चार-पांच उपपाको पमपमै भाकर . शब्द-पभाषसी पेय पुका है। वही मारतपर्प' का मुखिया है।भव दिनमा मारि (रिवार गुम्यास पुष) मे उसे पर पाया है। पर 'यमुना में भी विज्ञापन मा किन परिणाम परिवीन' स्पेया । समाबपति मी बराबर रमिस्ट्री-चिनियाँ मितपे । किपर क्या कुछ मी समक्षम नहीं भा था। ममी ममी प्रेमनापकी बम्मी रोने-पोरेकी पिट्टी मिली। पाकिमह उसे नहीं मिटा तो बा म रिलाने भयक नहीं देगा। पहत किसे पुराने एए- मित्र र बगेप छोड़ना पाया क्या मण्य मेषकर मार देना। जमाप व्यय पाहिये । पोंकि एकमात्र तुम ही एस्से इसका इतिहास धनतेरो। बहुत मला नी । सात-भाठ दिनोंसे मर मा या। अमर बम्पनी समाना तो तुरेनका यह पत्र रिता देना । म मापदम बिना पाहो यो मेकिन मैं तुम बागोकाकसी समय पिया, कमसे कम उम्रा सम्मान होना ही (फनी मानू पर पत्र माप फार उफ्नो मेवर) 4.१४, पोपाठंग गम्न स्ट्रीय रंगून १-५-१९९३ पिम उमेर, माब तुपाये भी पिसी मिन्ने भोर प्रमोमा । दम मरे बारेमें बिखर स्वरप से गये से इसने लिखनी हसिका मनुमप र या, रिसर महरनकी पेश पागमन बगी। दम भर पसे नही हो रहा १ या दुख नही हो या नीते समम गवा अस्पन्त पर मारत मेरे ग्यका निपारपर दिया है। मैंने अपनेको मूर्त का पा-क्या वर मिप्पा तुम न्यौरखमने में अपनेको पनि समगा क्या मैं इतना बड़ा महमक ताल बनाएर शानियों दस साताप इसमें पारिस्प कोपी.ए., एम.ए इन रिमियौको में भसन्त मय प्रता हैं पारिमा प्य । प्रमप दिला पानियोको उसकी चान्प्प मदरसमे पत्पम्व सम्मान मिममियर गपने इल्नी प्रदिवास शरद-पभावमी होता। रोबा 'नारी स्म' मा बता ममूस' हुआ है। बरबादा पाना है कि ऐसी कहानी हामद रवि बापूजी मी नहीं है और सा निषष मंगा मापामै उमोन पास कमी नहीं पा पा । मिप्पा सपास पाने । पदीदी परिक्षा परीसदी पर देसी भी परिका पद गचकर एक मो नही निरुती है। ईश्वर करे, फापी इसी तरा परिश्रम कर सपनी पत्रिकाका समादन परे। दो दिन बाद या दम दिन बार मीदि निवार्य है। पर पेश करनी चाहिये-परिभम करना पाहिये । भौर मेरी बात। । उसे होरे भाईकी ही तर देखता हूँ। उसची पत्रिकासे भगर कुछ पर चाय तब दूसरी पत्रिण पायेगी | मन बार इसने मनुरोप मा ये रे दस बाप होते दो मी काम पूरा कर सकता ऐसा नहीं मावा । 'परिवहीन' सकी पत्रिम नहीं प्रशापित होगा पापात किसने कही। प्रमको बनेए दिया है।कन अगर बाप बेटवा किसी प्रकाशित करेगा | समता है कि मुझ सम्मति देनी पड़ती लेकिन पाोग ऐसी मौंग नहीं रते । शायद पागुम्धिपि पदार कर गये है। उनोने स्ववित्रीको नौमानी प्पम ही देना मार माल होती भौर सानो परिणका कहाँ किस तय पिहोवाबिसकोबडेती कानमे रिम्ना भमूम्म हीरा नि तयार भयर सपातको समाने तो इतनी भाहानीसे उसे छोड़ना नहीं चाहते। भन्तम हो वा कि एक दिन भरसोत कर कि दाब मानेपर भीसे रलका नौने स्पाग कर दिया है। मुझसे उसने पूम है कि उपहार क्या होगा । रेसपर निया भरोसा नही भाषीपम उपका पाका वस्त्राप्त एसी पत्रिकामा प्रकाशित में भागा पीछा करेगा पर कोई भाभयकी गाव दीनि स्वयंरोगका १ कि बरिषदीना मन्तिमय मपात हम छोट्रेने सिना पड़ा है उसी पार उतना और) रवि वाम मी हुत मठा हुा । (शैली मौर परिम-विश्रेपब में)1 पर छोकि मन्तिम रंगको में ही गाद न । उनोंने इस मासको नी सोपा किबो भावमी पामूलर मेसी र नौकरानीको प्रारम्भमे ही सौर पर मोगरामने बिर रनेकी हिम्मत करवा वामपनी पमताको समस-तार ती ऐप रखा है। भपर इतना भी नहीं पागा तो छ ही उखनी उम्तक तुम शरत्पमावरी मोगली ग्राभाई रण सा । और एक बात । प्रमय पाकि'मारतवर्षको मैं अपनी ही पत्रिका मम और वैसा परता भी। मैने प्रमपको बचन दिया यासाप्प नंगा सेकिन साप्य विसनाया नहीं कहा। और भी एक पाठये पाम देकर व सरीदेगे-सा नम्मी नहीं होगी। मेकिन दाम देनेमे ही सबसनही मिलते। मेरे बारे में घायद था नोंने इस बातको एमता है। बहरहाल 'परित्रहीन' मेरे हार्पोम भावे ही पत्रीको मेन गा । भने पास महारगा। पर ममप फनीरामे उसे नहीं देगा मोलि पम्मी कपर रेनारामा पेशा ही होता है। बोलि मानिक पोसपामर पक- दूसरे को नहीं देख पाते। मोर १ नहीं । पर प्रमप बस मेय वाम्प पती नही या मेरा परम बन्यु मोर बहुत ही सब भारमी है। तमुच ही सबन म्पत्ति है। मैं उसे पाठ प्यार करता है। इसीभिए भप पा कि उसकी बोर पारदस्तीसे में पर नहीं पाउँगा । इस विषय में और सार बादमे दूंगा। तुम मि हो कि तुम ग्रेग 'यमुना को बड़ी करोगे। तुम मोय कौन ? तुम 'यमुना' परम पर हो पौर निस्वा बभूव करने पर मामा मोग करनी पड़ी। इसे विशेष रूपसे पनी कारण ही तुमार विपपमै बोल मना है वम रचमान मी विपास ना किया। दो सारनीतिक पासपो हो-मलारी किया है। बिने पार कसा उस से ही सहायता करना । जीको तुम ही पार रहे हो। किन रमममा तुम ढोग पदका मर्प और नही समझ काठ बार समक्षा का दिलना। पथका निर' मोर 'यम्की सुमति बारेमें मेरा मत पिप निरच भिण्ड पर पा पानी मा कठिन है। ममी मी वयना समत पायेगे। मैंने मी मनेटोसे मनेक मारके मत मुने बोस पानी विते १२ समानते हैं 'रामधी सुमति'को तो भिमा भी बात पर पनि सिनेमै दुख भाषिक पोशनी उठानी पड़गी। शायर सभी तिमी नी ममे ! इस तरात्री गालीगी परिझितिम टीकमोर एक मित्रहो एका गरगरता है पैदा कमाईगरम समाप्त हने पहले हीबर पर। और अपनी माहोचवा तुदानिमा और इस देश योगी गपमै दोनों दीपनियों मुमटेखि विमाम एक्सटेप।

८
शरत् पापसी
दिपा पानानियों भावजीको पत्रिका प्रति मासास
हपकी कोई पौब प्रकाशित हो, इसको रिमेय वा करनी पाहिये। पर मा
बहुत मे पानि हिलने की हम वही परत काहीही तो है।
तुममेगाकी वयानोरी मानो बिल ही नहीं पाता। इसमाप एक
पात और पर्स मुझे कानी है। मैं तो पापको दिन ये सब भाग्ने
की । कानी (पार) मोरी स्पो ऐमी। बारमा सो
'परमान' भौर नही है तो उससे भी कोई भी पौर ममुच में ममाप्ति
होगी पारिसे । और निगम सकी मी मपन्त मापसका है। मनिष
लिपेपम्पसे मावास। येन नर्सोवासनानियोंसे निको
पपापम बोभेग बरी नही मागे। मुझ मगर तुम होय पानी मिलने
परिणम पुरनगरेसाते हो, तो म RAPE A HOT और धापर
पानीपीकाकरम और पाया । इसपिपमै मापी यस टिममा।
भगर कहानी मिलने का प्रयम मेयपमरो दो मह उपमास
और निरा। नीचे विषवा है पतA में परिभम बरन्य
पोया । मै बस ठी महा। पवर्म मामिल का भोर पदाईम मी
मुकसानवा मावना निसय उपपाच, कहानी लगनेस
लोग सपनीमार मगर उपायंगे और दूमी पवित्र म
देना होगा।
'रेरात' और 'पापाप मेब देना । मैं पिर लाने की रेप कर देगा।
ममा मो पापियों अप कर मरा मो बरवार पर पास
की संभामा पुदी ११ में पेश नहीं हमशया पर इस बासन
भाषा मपेठा मग बा उपकी मिटर परिहार्मी पदिम बम
पोपपगी।
पनीको जमावार भाषा में शापद उसे जेपर मरम
मिल्ने मर्गमा । भन्न त माग रसा। पर हारे माई
गल बापम यो विपास नहीं पर महोबा। मैंन
maसानो समुपदीरमा। लेकिन और पुरी

शरत् पत्रावली
होनी चाहिये थी। और शेपको सचमुष ही शेष परना उचित पा । ऐसी
पानीको तुमने इवनी बसवाची सो जाम की नी पनवा । एकपात
पाद रसना पानी मटकम १२ १४ पनेकी होनी चाहिने भोर नदीमा
पात स्पा होना चाहिये।
हुरेनने मे बिहीमा बमार मों नहीं दिया । उसे अपने आपकी कसम दी
, पोति उससे भी बाब मेरे पास देने यि ना। पा उता पा
स्वापार रसा। पूरना । मेरी ममका मसम्मान म होने
पाये। और पार पामे देना बाकी। पोगेध मसूमदार कदपूरी
और मौरीन नबोगो बिम मी मपनी सम्म ठीक र रती है। किस दिन
मेय गा।
गिरीन पायोसीपुर या पाप है पानही मास्म होने कारण
उसे बार ना सका। मेरे पास ये ना, कमी या गाव बाद नई
ईपा, भाव नहीवक।
ते, एक बात भौर । उपाय बागाने एकक्षित पान मेय। या
पता है कि पारी मा छ। ममी बात है। मवाना कौन-सी
पात ।। मारमी पब मस्तीकार करा ही नाम देना उचिव
सराहा मारो ।। फणीन्द्र बाद, भापका तार पार भी माप
मा दिपा कारण बाप रेनेकी पख में हापसे बार। पर यण करण
बिस्य राम मायेगी।
भगवी मंसे भामेरना और 'नारीका मूम्प' मेगा । उसके बारमा
गते 'सद्रनाथ और एक कोई बीच । 'पारत्रहीन' 'यमुना में प्रति हो,
पही मेरो भान्तरिक परकीयासे यही होगा। निपिम्त ।
पर नया कि उसमें मेसी नौकरानी पर रविको सेपरमा पस-पक्ष
मगो । मरने दीजिये। मेगस्तिनी ही मिन्दा क्यो न करें। बोयेग दिना
निम्दा रंगे, उन्ना ही अधिक पड़गे । या महा या इरा, एक बार
पदना शुरू करनेपर पाना ही होगा। ये समझ नहीबा मममी
गरते देणपर निन्दा परेंगे। पर निन्दा करपेपर मी काम बनेगा चिन्नु पर
बाये और एलिसिसो सम्बन गाव मम्म। इसमें सगा नहीं।

शरद-पप्रापरी और पा एक पूर्ण देशानिए नैतिक उपसाध (माफिक एपिकर नारे) है, इस बकरसन्न पता न पाया है। - १४ पोमलंग गठन स्ट्रीर रंगुन २२ भगस्त १९११ प्रिम उपीन बहुत दिनों बाद तुम चिनी मिलने पेठा । तुमने भी बहुत रिनीसे अपनी का तार नहीं दी। मत मिलो, इसलिए कुल नही परवा मोर ठगना मी नही देठा। रोचीन महीनौकरार समक्ता फिर पासातार रोगा । तर नगरी बायो। इस मीनकी 'बमुना मिम, तुमारी 'पमा-माम पदो। इस समय धम मेरी रायका विधास रागे पा नही मारे दी धम्म प्रारकर या:- पाप मुस्से मेरेको प्रसा सुनने से कोई अपना ही मेरी यथार्थ राय पारे इस तरहकी मधुर पानी बहुत दिनीसे नही पड़ी। पर पा मारी सबसे अप कहानी है। मनावमाडबर नहीं है। गोगोका रोप दिलाना संसार ककको जमने रखना, इस्पादि कुछ नहीं है। बस एक मुन्दर प्रवीण निर्मक और पवित्र है। मपुर मति मधुर । यही मैं चाहता है। पदार भान अतिरेकस मौत पदि गोही न होय तो पापानी पैटौं । पट भी बन पी है। उन माम्तारक मभिप्राय मार कर पाई। बीप-मीवमें ऐसी ही पानी पम्नेको मिनी पाहिले। हो, मुझ पुष करना कठिन काम है। मेकिन ऐसी घीय मिस बार तो मैं और कुछ ना पाता । मेरी ना प्रनाले तुर्ग गापर बय संबोच होगा भौर पदमी मेरे साथ एकमत मी नाहोगे । मेरिन मुझमे पण मर्मम मा पुगौ एक रवि पाजो मेर भौर कोई नया मव सोचना कि में गर्व कर पा सेमिन पारे मेरो मारम-निमरता को चार गर्व ही कहो मेरी पारमा पही। ऐसी कहानी बाहुन दिनोंमे नही पड़ी थी। सुना। इमारी एसपी और भप पानी मारतवर्ष में प्रकाशित हुई। 'मारतवर्ष भी पहुंचा मही न कर सकता

शरत्-पप्रायसी
पर बनी किन पदि माव और मामुरमें ऐसी बन पड़ी हो तो पा
मी निश्पर हो गए मम्मे पानी सेगी।
कमवावा तुमारे बनेकी बहुत सुन्दर है। मैं यदि ऐसी मुन्र
मापा पाग मापापर मो तगा परिवार पाता तो शायद मेरी पानी
और मी मणी होती। मैं मम्ने खप हमारी गुम्ना नहीं कर रहा है।
इससे पार में सोय होया। लेकिन पं होनेपर मैं उसे पार नही रख
सस्ता।
भारत देश हो। मैं गुरु मानी। पापांका मेरे लिए
पर ही कुममा। १ १२ दिन सर दुमा पप दो दिनठे मम्ण है।
मेरा प्यार।
२
[प्रमथनाथ महापार्यो लिखित ]
से प.बी का दफ्टर
रंगून २१-१-१२
प्रमब, तुमारो सिटी मिली। माय ही बार देगा। पंखा वो नहीं
होता। मेरे समावको मानता है, उसके सामने मरने सम्मपर्म इवनी मधिल
*रिपवनाकारtr
मरे समयमै कुछ बनना चाहते हो। संक्षेपमै या कुप रस
१ शारीमार एक ठारे से मकान नसन्निारे यठा है।
२ नोपरख ९८ कसन मिसा मोर १ + मच्च । पर
ओपेक्षान मा है। सापेस किती तप प्रम नि पता है। ये कुछ
भी नही।
३ मिडीयोमरी समिती मी पण

शरत्-पनापसी
४ पहागठ । रिसा प्राया कुछ भी नहीं। पि १ वाम पर
विशन कीबमिशन, मनोविमान मौर कुछ विहान पड़ा। णाम मी
.
५.भागसे मेय सकुछ दीप गया है। पुस्तकाम भोर चरित्रहीन'
उपम्पासको पामिपि मी। मारी किस करीब पार-पाँच सौ पर मिला
पा, या मीम गया ।
इहा बी इस मनाउँगा। मेरे पय कुरा हो परापर होनेका
नहीं इसीलिए वर-कुरु स्वाए हो गया । फिर शुरु पर्स, पेमा उत्या नहीं
हो । 'चरित्रहीन' ५ प्रम नया सम्पत हो पा पा | साकुल
गया।
तुम एक भौर सार देना बाकी है। तीनेक सापाले बरसकी
बीमारी से पहिले पण रिसाई पर मैंने पहना मेकर चिम भान
एक किपा । पिछले तीन पोम माम् चित्र एकठे हुए थे। वे भी मरमी
भूत हो गये । बानका यह सामान भर पप गया है।
अब मुझे मा करना चाहिये भगर पर पवा पो तुमारी पपर
मुताबिक कुछ दिनोतर पेश गरे। उपबास, विन, बिकारी, कौन
ग! विषको फिर धुरुकहं बक्समो वो!
सुमारे स्नका
४ मप्रैछ १९११ रंगून
प्रमप, तगारी पारेपानी विपीका भमौवक बाब नहीं दिया। सोच रहा
पा दम रा मुझे यो पटना प्यार परखे हो। मैं व बाको पात दिसे
सोता हूँr प्रमप एक मकार मंगा मार करोगे।
पार माफ करो तोक। मुझसे भम्म उपनात मा हानी एक रनि
बापूसिवा और कोई नही मिल सकेगा। बसपा पाव मनते और शनसे
मी प्रतीत रोमी उसी दिन निबन्ध या पानी पा उपपासके लिए मनुरोप

शात्पपापसी
करनाल पामे नहीं। तुमसे मेरा बापका मनुरोप रहा। इस विषयम
में हालातिरणरी नही पाहता 1 मैं सस्प पारवा
१७ मा १९१५ रंगून
प्रमय, उपाय पर मिध भाम बबावरे या tr परिणाीन'
कातिना पिस्ता रिसे रिला सा (और बहुत दिनोंते नीला) कमसे कम
मुरे पहले रिए मेग्नेरी पात सोपी। भाटी मेर नपा इसी स्मारक
मौतर ती मेगा । किन पोर कुछ भी नहीं कर सकता । पदार बापिठ मेग
देना । सफा पाय कारण कि सिनेसी पी नुय रोगीयो रिरी
मी परत भी नहीगंगी। पसन्द करोगे या नहीं इस विषय में मुझे पार
समोसटिए ठमे डापना मठ । ममावरति माम्पने भवन्त मामले
धाप से मागा पा मोरिग सपमुप अठा गा मेरी ये सब
पाहियात रबनाएँ । यसमार्प मायको पर उठाकर फोन समझेगा और
कौन इसे मनाया तुम मगर सचमुची समझते हो कि या तुमारी
पत्रिका (परत) में अपने नाम वो होता है किनपने रिए
भनुमति नही तो तुम पर मेरे मगरकी मार हरि रानकर मिससे मेरी
बीब करे पेमी देश रिमी मी शारदमे नही कर सकते । निरश सत्य-सारिस्पमें
मैं पीपाराम में रियायत नहीं पाता। इसमयमा मुमारे
दियदा (द्रिया गर)समत नहीं पा नहाप सकता। भयर
कोई भौशिक परबटन बस्य समस्या दो पा नहीं होगा। उसकी एक मी
मान न छोरने दूंगा। पर एक पाव का नाम और प्रारम्मको
देसारी परिज हीन' मत समझ बैठना । में नीमियमा एक विधार्थ है
रूपापिणा नीति अस्त्र समस्या है और रिसीम कम पमम् मेरा
ऐना तपासना को कुछ मी दो पहरोय रेना और मारकर अपनी
पपलिना मारी पपड़ी बीमत। सेभिन राम के समय मेरे गम्भीर
रोपको पार रहना । पर कोई बातम्मेत्री रिवन नगर
सपनगपा समझना तो पाना मैं माखिरी हिम्मको रिसमा । उम में

शागत् पत्रावळी
बानता ही है। में उसा-सोश मा एम मोकपर भापा मालिता।
छम्से ही दरेप करता है और पा पठनावाने बदल नई पख।
फैशालकी 'पमुना' सी गी! पप-निदेश का प्रमश मा। मनपर
२४ मा ११५ रंगून
प्रमद, रंगन-माँ हिनदादी मा समाचार पत्र मारपर्यपपित
हो गया। सो में कम बनता था ऐसी बात मी तुम्बरी व्य
पाना बहर मही मिहापामिना बाबा मेरे लिए बहुत
कम नहीं था।
उनसम्मान ए मुहासे दो कुछ बन पाता पा मापही
बरवा। या साहिस्पिा मोर पोगा । पर मेय मूम्प समझ पे मोर
मही समहनेपर उनहामने मी मुरमा नही दी। इसलिए सोपा
मि मेगा । मम होनेपर ये प्रकाशित करेंगे नही होनेपर मही करेगा।
इसमें प्रसा-अमिमाना कारण नी पा। मेदिन मा गैर-नाएर
मेरा दाम गारंग से सराबोले प्रभाविबरनेक ना।
होता किरदो या प्रकर दो। असपर माई
मुमपमा करो। तुम मेरे पिसने गो मारो इसे मानवासातको
पए मीनही भूगा। तुमने मुझ गत समहा मुहपर कप किया
वो भी मेरे मनका माष भरत पाल । न वापूसरी बात । मेका
परि लिए में अपनी मर्यादाको नए नहीं स्मा। में मेमै परिणाम
लमाई नी मेरे लिए है। मुझे पा सम्मान मिrat मा
मिली हस्से भषिक और मिनी बौसी माण नही बरवा | परगट
भोर 'बाराीन तम्मच हिप है बापूने मी ६ एपित किया
1-पापापना मनैतिक पती पनि प्रमण्ठि
मही । सध-पर पेखी होगा क्योकि तुम मग मेरे मरी
किमिमा पोपा पिच कोगा में मौ सार या सोग बहुप समर
इसी ए पासे प्रारगे।
।

घरद-पपापली
मैं भने नाम लिए पय मी व सोपा मेगौडी जैनी रणरो
मेरे सपने मोपपने दो हम पातको कामही मेरा विचार करेगा । मनुष्य
दुविचार-मविचार दानों करेगा इम लिए चिन्ता करना भूल
में पप ही नहीं मिल पाय बाकी साकुछ मिल सकता है मैं
सम्बदनिकर मानी हिलो चौमौको पर्वधा नहीं करा सकता । पर मेरे
ए भाप है। हमें रवि पाको छोगार।
३
[ फीन्द्रनाथ पालको लिखित ]
से ए.पी का दफ्तर
एग्न, बनबरो १९९५
फणीचा भाप मेग से हैं । बराबर विटी देना न मू। मेरे लिए को
छ मनमा। उपीन को ! मानापुर र मापेमा । मुझे
'पन्द्रनार मेगा ! मुझे कश करना होगा भाप बटमय । नहों बताने
पर मुसमे विधप काम-काबनी रोगा। भाने वारसे में पेचिस भार पुलार
मुगव या है। नहरी भरता शापा सरिसव | फिर मी एक विधी
रिसे । सारनको मेरी बात याद दिया।
रगून, (माप) १९९५
पिप फ्षीन्द्रपाम् 'पमडी तुमन्दि' पानीका मंतिम स्मिा मे गा।
ठममम मापस कुरा काना बम्ये ममहाकानी कुछ को हो गई
है। शायद एक बारमें प्रकाशित नही सम्गो। किन होता मला
होगा | जरा जारी गर्म पाप से मौर रोक पर मकि रनेम सती है।
छोरी पानीको कम आफ्नेस उठना मन नहीं पाता। रियेत भापकी
पारा मामय प्रचार होना चाहिये। पपपि मेरी जारी करानी रहनेकी

१५ शात्पमापी भारत भाषामो गई। पर भास मला एक मानिन मम्बासीको अगा। मैं प्रतिमानमरी प्रानो १०, १२ को मार निय मेगा। यानी मषम हो, सोकि बाबासा स्पावर मग पार बिहमें कराना हो पर पान रसूया । पराव मोर। भाप समाजपविर मेसरा। उन पत्रिकामबगर मात्र पत्रिकी पारी बहुव भामरा पे पो ममा होगा। इस बार साहित्य में मेरे मामले नपने पा साकर पापा। समा मेय मिला है। मुझे तो पनि मी मार नही और भगर। मी हो उसे मपालो । भारमी बचपन में बहुत कमवा वो क्या से प्रकाशित करना चाहिये। भाग्ने पाहा आपकर मुझे मानोठ कर दिया है। उसे प्य मायाविने मी मानो ते अपर मुझे धम्बित किया है। अगर सपीनको बिमिल हो पर मनुष मास र मेरी पर बगैर भी न छा। मापस होनेपर मकानों पात नित wat-~भापी पत्रिका नाग। उस यी विगुनी-बोगुनी पत्रिकाको पास हो म दे सका। समय मेरे लिए समय और पानी ममता मी प्रकारपियों पर निबम्ब बिस ह| मगर भापको पस्त होको कोई भी सिब हो म तपार है। मी मुमति' का बार अपने वा पर पार, मुझे fai तोपि मोर लिनेकी भापता नहीं होगी। चरित्रान' मा समासपर है। पर प्राताकाको जोर पवने में मित पा । एक मरर पठा। एक बात और भाप मुना में प्रकाशनार्थ उमपास, मानो और निय अपने पहरे मुझ पर बार बाग मपम । यी सममिति पैरामिए नि भौगोग है, उस समय भात महानेमर परिस गरि मुझ मेतो मग भैर दिया हैं। पकी 'यमुना बहुत मष्ठी का। मन्वम कानो मी नही बनी है। इससे मपम सई पर आयेगा ( सर) मेशिन पाना मी से रळेगी। इमरते बापत परका वर्ष में । किन निकदी मेब देनेपर में बरेल, ऐसी

शरत् पत्रावाटी
इम होती है। पास ही दुध देशानियों की नहीं मिलता,
साताका मिलता है। मैं कपिय नही पाता | मन भार
रीन शारिए या ठपीन सुरेम गिरीन कारनिमारकाची रचना---
seी पेश को नहीं रो! उन पर माई विभूतियो पर माप
मी पहिचानते। उनको सिनेम निरमा निल मा पिता को मिठ
होती है। से उनकी परिक्षा और निगन्य मोहोवे।।
मुझसे उना उपभर हो तरेगा, पवस ही स्म । पन दिया।
उसके मनुहार काम मी कामगा। धारिस्पर मदर बिनी मानीबासीन
प्रारे, हसर या मोबामा माई है। या या म फेशा महा।
में पेपर मेवक महो। और कमी होना भी नही पाता।
में यमबलता, तो पापको मुभीता हो सकता की शिनास
रेणको में शायद सी तराना रगा। में म ।। मामबार
मुश्किल नही पा पारवा, और गऊँगा में नहीं। मनी बात यह ।
अगले व मार मार पत्रिपको कुटीरका सबदार
तो प्रदेशमा पनेरेसा पी रोगी इस स्पर बरसी-
र परमानीको एक दो कर्म मना सम्म होगा। कुछ
की सटान में उतमे बहुम्पा विशापन वैध होगा।
उपेनने मुझे कई बार हिला का पना' मेव पाहै। मान्न
पता नही मिन्य । प्रायद उसे नहीं लिया है। मगर बार परमारको
मना बारे में इसे नये सिरे दिस या। महावापुरते सौऐना मासे मैंने
नमसी बीच। पुछारपार महै। मवर तिरेखे
मला मास नहीं है। अमर भापको इस तराको नई स्पना चाहिसे
होमो सपित करें।-एबम बहोणम्पाव
-
रंगूर १२-२-१५
प्रिय पाप भो-मी मापा जमिम । स्यगाव-नगा में
कोरपत्र मादि निकाल रिमाया मरें। आप भी न
२

भारत् पत्रावरी परदारें। मापकी परिकामे मगर मपी बीज पी तो मात्र हो पाए दिनांमार हो परमात मपने भाप प्रचारित हो जायेगी। कोई ये ना सांगा। भापका कोईर नही। प्रचार पर माफ करना पत्र देकर अपया बरबाद करनेसे शोभाया। दूसरी बाव-'यमको समति को मेरे यापम एक ही बारमें अपना अच्छा होगा। इस पराकी कोरी मानियों को प्रमशा अपना मण नहीं होता। को कुछ भी हो, बस नही दुमा पो उसकी भावना पाए। मैं दो दिनों मदर ही एक मानी मोर मेमा । मेयै राममे 'यमकी सुमति से यह भी होगी पर दुमकी बात पर विप्राया ठत्ती तापसी हो गई है। बड़ी बोभिध करनेपर मी भेरी नहीं हो सकी। मपिम्पमें पेश कर देगा किसा होगी। तीसरी पात-चन्द्रनापको मेकर शायद कुछ बलेम है। इसीमिय करता है कि उसे कोई फापरा नहीं। 'चरित्रहीन प्रकाशित किया प सगा। मैं उसके लिए पत्रिका कुछ बड़ी परनी चाहिये मेरिन मूल विसमा रोगा और कपसे मागे पा) मूम्प पाये बगैर पत्रिका की करपरका भाम गीडा करना ठीक नही होगा। चौथी बात-समाजपदिसे मनान नरें यही का है। उनकी सुधार करने लिए नहीं कहा । फनीषा, मापकी पूना माठ भमर लो वो पासोमा चार दिन बाद सौदवार ममा ऐगे हो। मा मन नहीं होने परमार पोष्टिय करनेपर मी दूकान नहीं पगी। रो-चार दिनमै दो का मदीन, दिवाय पिट दायेगा। मेरे स्वफ्नकी सम-समरपनाआको अपर मुझे पिटना सम्मित पिया बापामौर मेरे मम विना अपाय किया जा रहा है इसे मैं हिसार म्पक नही कर सकता । समावतिने समझदार होनेपर मी तरहकी रचना समपरी यह चरमको पात है। परी बाव-गोरीन माइस भाप मेहबोलता। उनाने मा मेरी 'दीदीदी माम्मेबना देती है। सायद तूप गुस्ता हुए होंगे म! मेकिन मेरा रोप मानिने म्पिनिम्मेदार हैं। समभाइन सपनाको समोने मेटे यापम मापन !

शरद-पमापी
की पाती या पानी (म्से में दो दिन की मेगा) ति
महीनेमे अपगे। चैत महीने रामी सुमति सदम होगी। अतएव उस
महान महाशानदारपिन / माहीनेमे मीरे गाम अपनेपर
अगर कम होगी। पप ग्रााका पदनेको बीम मषिक मिलेगी।
जन्मी बास-माखसे पविका योगमुन्दर होनी चाहिये । विष पीठे
कामी पपा बार यहाँ कर उन सो सिी भौर सी पिसमें
भगाया बातो मा होगा। मनही मानवामिल किया
मानी । मगर फैशन गहरी निरपरेना रोगा। भाप मुझे निकाय,
कानी मादिर चुनाव मरा सा स्थान है, तो अपनो में देत मुन बिमा
कई । मुभदिने प्रारमा नाम देसार हा करार देना पहै।
माउरी पाठ-श्रीमती निरुपम्य देवो मगर मा पर मपनी रचना
मापोती वो भाप की गठी वावहै। उनकी कामवासनाल
मपूर्ण है। मीमती भमुम्पा देवीको रसना पाना धायद नुस्खामा भारती
में किसी।मापर यहो सगी कि नहीं पहकाराम सच्चा ।रिने
पर भी खासद मामी किनार ऐसा-सा मिलेंगी। --
काशन शायद यभुमा ती अट परिकामे मिलान मचीनी
रोमी। साबिर देते। मिस बार तो मला मोर नामको
मी पर । मरे चैन नाम
मामेरा निरपवादि-अनिय देखी
मेरी निर्मात्पन्द्रपटापाय
बहीनिशअनुरमा
साकुराको नाम पेपर येग समगे कि न पाच इस परमार
लिमोर गाई नहा।
यहां मेरे एक मिशा उनका नाम है प्रा परिसीपी ए भो
रानिक Rब रात म है। नाम नी रिमिती
मासिक पत्रिका देतानी है। मने हमस मनुराग सिमपली 'समुन्यम
खिन थिए । मिस्म को मेव मा ।
बारिग हकपमुना' का भाकार छोयो। हलमै मरिक पास

२० शरद पभावी नही चम सप्ता, दाम मी कम है। मचानक दाम बहानेकी पावर सफर होगी या नहीं कहा गया । मगर नितान्त की सम्भव न हो तो पिनों के बाद पार महीनेसे प्रारको मत मेकर और या सिम कि अधिक वाम देकर रे पाटेम नहीं रहेगे मूस मोर माघारम सा नदि नहीं की जा सकती। भाप समर वीमे मारमी ।। ऐकिन ऐश करनेसे नहीं रहेगा। मापने बब और दूधग नहीं करनेश फैल्या किया, तो इसी बीचको बरा विशेष भयाकी नमते रेलनेकी पेश कर मौर से सतारिक पुषि' काये। उसकी मी मोना नरें। 'प्रवासी मारि किसी समसकी मेरी पत्रिकाएँ पर कितनी बड़ी हो गई है। बापने मुझे पुम्बनको भामाचना मिलने को कहा है। मेकिन मेरे पास मंगा पुष्ट नहीं है। मासिक पत्रिका एक मी नहीं पता । मुझे करें सा मिमेगा भाडोचना । रिलनेसे बोगों की धरि मनमो भाकपिठ शेयी और एक पास हिानेका उफम बावा। मैं ना मानता है। मगर नही होता है मी चिन्ताकी कोई बात नहीं। मेरी मापनाम भार गन्ती पती भौर मगर उसे कोई सिर कर स (कर सकना पचपि कठिन है, तो वह मी भन्भपात है। यो मुझे एक मात्र भोर कानी है। मे मिलाई-पदामि विकोपी पूरा पफ किती दिन पाप पि भोर किती दिन चरित्रान'' लिए नम हो रहा हो, भनेको रात मिती है। मेकिन नोट करना इस्पारि नहीं हो पाया। कई दिनों से एक भौर बात सोच रहा 1 कमी कमी राम होठी किर्ट सरके पूरे समन्वयात्मक रन (Synthetic Philosophy) की एक पंगम समाचना-नही मारापना-और सूप भम्मान्म राई- निको समर पशु-मित्र । उनी रचनार्मोपर एक बड़ा पारावाहिक निबन्ध लि। मरे देयकी पत्रिकाममा भम्ने सम और मेगन्त, रेत और भारत मापा भौर विसी तरको भामेचना नहीं गती । इमीलिए बीच-बीचम पाइला होती है। पाक वारसे। मगर भापछी पत्रिकामे स्पन महो (रोना समानह) तो इस तरको कोई पत्रिका व समते हैं बचेगप सकती।

शरत् पभावमी
भाप मुझे पराम विदी दिखा करें । महानिकनेसे मुझमें मानों हम नहीं
एमी । इसे मी एक काम समई। रचनाएं रजिस्ट्री की मेम। सर्च
भाप स्वो रंगे । मेरी ऐसी दुरी रणामोकिए सई ना पड़े। ये
बारिन मिया
भाधीर देख आपकी दिनदिन भीपाद हो-सी मेय पारितोषिक हो।
'पन्द्रना' मा न मांगे। अमर भावसको मरि किस गा।
पर रखना मपी मेवार दुरीन रोमी ।
मेरे बौन व्य नामो बारेम भापको राप मेप स्था, इसमे
मुम्मेवा मंगा ! एक नाम किरा भय नहीं । क्यों ?
उपेनमा पराया तो विपत्री सिने ना पनेते
पास सीवा थ, नहाँ पनेसेस मनी होती है। इस महिला माफ
प्रति अमापक रनेदया । उमसे काम रातको खसे बाबमा।
को मोह भोर समाहर, पारानत मौर पिन्दित र है। मैं
मापकीर पीपईग्य या किसी भी बनेकी घरमा इस वय
की बात कमी मनमें मौ मम मेयर कुलदीपो भयो।
माप पहले इस विषयमै मुझे सामने किए पामे बिसवे पेकसl
पत्रिकामा मुमते मनुष रंगे। मोदी करे, सैरात पर पुरु दी।
(Chunty bayms at home), न! मी नागर। मेय
मादि ।
-
पिए फीरा, माप नियमित मे हैं। दोनों निगम से महा।
दिने का ठेगम का मम्म।
चम्बनापडी र बडी मारहो हो रही है। माने और एप पाये
बगैर बिशन दि रेवा परमे मिकी मादानी है। जापानाप' मही
रमे ।
उसकार पेय मरें।
समय पर मेमो। मेरी
तस मी पण नहीं है कि मेरी पुरानी रचनाएं पोको वो प्रति।

शरत्यारमी गाव गावियों है। में सुधारने मौका मि हो । सस्ती, भमण गिक नीं। एक नायर में समिम मित्रोसे रिस उपयामि, यह मैं यहाँ पाता। उनने भवास मग- कामना की। मन मेए म मोडी भाने पदस गपाहै। रन्द्रनामको पर रक्त परिवहीनको र ममीने में और वय साबसे हो गया हो ( उप हाश्वमे दूमा पारा नो) सो मुझे बाकी हिस्से परिवन-परिवबन इत्यारि करना ही होगा। पिसना मा त ने. पर मुझे बाकी हिस्सा न मिल दो मी पोहा मोगा मा भमर पैसासम न दो दो बरिचाहान' म्पेगा। मैं चरित्रहीन सिए परी चिठियों पाया है। कोई पक्का मेम, कोई सम्मानम कोई दोनो ही कोई मिया मनुष भी थे। मुझे कुछ भी नहीं पाहिये । भापहामापा तिम मंगोमा परी पगा। मपात नीरस्वा । पर इच ठे पर पामगुन पेत्र मौर मालकी 'यमुना' मे- पी प्रमपनाप मधवार्य, १९, मुगलियोबास मेम साचा । पेग मर्यात् गुम्वास पाईपुत्र मनी नई पत्रिकाम मेरी रचना बिग शरए मेर श्मितम मिम प्रयपकी हालि। मेफिन पा मेवाबो मी हो अगुन बाकी 'बमुना' उनका। सीने और नरदने पाणीपसमाग्यमे पुछ गुप्त समागचना दी। और एक पाक 'यमुना को गोगर में मोर रिसी परिधर्म नियमित स्पले नापा । इस मी एक काम बनेगा। मरी बनामांकीमादेना करने की हिम्मत उन मी मी दोगी। में मन नही सशसको प्रमप । - निपमाकी भरने में सीनेषी पेशा करना। समुपी मम रिलती है। और पामार नाम मा है। बहुपा मोर भरिकांत माने मी एपमारे गप्पी दीपेली मेरी मारना है। इस बीपमें 'मानसी मुस और बापू मगर मुनापाको बोका किन पर मिल और पोम उचर एंगा। मुझे भी गुमार है। इसपि पत्र नही पापा-मम दूगा।

शरद-पापी २३ का भाप एक बात परवा और किसने दिनोंता स्' परिणाम मैप भार व ऐगा। पेग पर सोचगे कि मुझमें सिनेकी समता सीनाय से अधिक नहीं है। इससे नाम बिगड़ता है। उपीन चारको प्पर त मावका बाट मीना। फिर मी उसने मेरी भरिक रिक- समय बिए ही ऐसा किया है, इसलिए सी वरदरिया । और दूसरा चारा नही । पर पूमता है पा र पाए उस व्यकी मानिर्या मोर है। नगरपोरेता मुसोक्त पगा। मापसे एक बार मौर परत दिन गिरीनशी पिझै मिय। चननायक कर उन लोगो उपलको पा मनी गई। डोग पदपि माप विम नही है तम्यपि इस घटनाते गौर पाचौनापालिम प्रबर रोनक कारन होम 'चन्द्रनाय' ने भए पार नसोग मेरो रचनामेको त पाहवे।। उमेर मा यसो किमान बार और किसी दूसरी पत्रिकामा हाम न पाम काय, इसलिम मरेनने पोड़ा-योम रिस्पना कर मेग्नेका रादा किया। मगर साथ पहनाया गया। दो मुहे बिहोते या बारव पाना रा मे। हम में सनसे एक बार रि ममुरोप र रेनगा। पार अनुरोप गाल पारा महा है, देना ही होगा | भगर मा नहीं है ममतपेटिरियरचनहीन पगा। मुझेरान और नियमेकी चो मापी रेखदे। सी देसी कहानियाँ कमसेकम मेप पर राम मही मेरा भाममा । बार सम्म मिट्टी लिन पा (मर पीपी) गए बरी या गाणसे न पार प रस मेहन में इस बिल पाउडे र समहें। बापो हमारा पगार बड़ी पम्प सप हरिरात बार पत्रिका निकास पात है। सपा देगे एक रचना मी भी मिगी । इस मा यहाँकी मदद ने दिए सम हमार रहते हैं मही संरी विमो एि वोपने- विरारको अवस्था नहीं है। मोमिएस मेमा है उसे देखता फले पर भवर से मेर (चमनाक बारेमें विचित पा। यह कैसी प्रानी है श्री - २४ शरत् पत्रावली सीपने बगैर अपना उचित नहीं इस बातका रम्य पारे। बोपुर मी से पाव माद ही इस विषपमै सूचना पानेको मायाम है। बीमत ठीक नहीं है। गवसे दी मुसार- सायो न मी महा। मापकी वीरत सीमार ठीक दुभा र इदि । भाप मेगा स्नेहका-या १४ गोमर पोबागपाठन सीम प्रिय फसीवा, भापका पर मिण भौर पेपित मासिकपा मर्कात् 'भपाम', 'मानसी मारती' 'साहित्य' इलादि सा मिले। पत्रमा में बोल परिर्वन उक्ति समझा दिया और मरिम्पमें भी ऐसा ही परगा। पानी तौरपर चमनाय' याव मपुर कानो मेरिन मारेकसे पूर्वाफ्न भषणा मौरपानीमै तपसी रचना सामारित होने कारण पापर ऐसा माहै। वो कुछ मी हो मादाय मा गया है, तोते पण उपन्यास बना गम्ना री उचित है। कमसे कम ना बव पना ही समय है। प्रतिमास पीव पर नेते घरी पाम समाप्त होगा कि नहीं इसम समेत। इसका की विशेषता पालिसी प्रकारको मातम्या पस नही। सभी पर सकेंगे। चरित्रहीन मरे परपर और परिज निर्माण पौरपर भारी पणन इस सपा नहीं। पारगाए प्रमप गातार तयार पाया। बिन भासिर गारेस पदो गए R माम्मकी मित्रा भव बार किसन। इसी ररसे उस पाने एपरिमदीन' भेज दिया है। यह मैं नहीनता कि उन मन भाव मा पनि मस्ने मनई मार्गाने से जप-साफ बिल दिया। उनका पार मभीतक नही मिन्य है। मेरी अहो गई। इस उम्र में हुए बनता है उसे मी ममुमार नए मही परम । भाप मेरे बारेम मी क्यो पिन्ति होवे । मुना'की रपतिकी भोर मेरा सबसे भक्ति प्यान, इस पार और एक चरित्रहीन' पहा मारा सिहा पदा। सागपा २५ शरद पत्रावली मीना परवा । बसमात हम यह भी नहीं बता सछ। 'बनना जिसमें मम पनन्न इस वर्ष प्रशस्ति हो, इतकी पंश मते मागास। इस बार भांद मागमेमरी भाकार और भी बढ़ा देना होमा) इस वर्ष मा तिने। पिसनेम या नापित, या दिलें । भमर में दूरी प्रमियामोम बिर नामको अधिक प्रसारित कर सम्मो 'यमुना'का उपहार जिला भरचार नहीं हो सकता । रेपिर बीमारी पारष रिली नहीं पाता मौर पर होगा मी नई पारवानी परोसे नही मेगा फबीवार, पान्त होकर विवाद रहार मागे बदना होगा। मैं मगर मापदाममै व्य पंगा। लेकिन मेरी ति गाठ ही कम हो गई। परिमम नमो र समता । एक पारोशना भोर दिल हा ऐ-तीन दिनमै ही समाम होमी, कोम अरविमा (पायर बर मरिक परी हो गई है।)गुन 'पाहिम्स' में उनाने उड़ाया पति समयमै एक नियब पिता या पाएस्से माखिरता यत । पुगतको बारेमें (माम कमानेए) -मासूम पसिनाशीप मापनात यही मेव। नहीं जाना नेमा महरले बमुना'का सम्वचि है। ति सम अप, नहीं तो मार पोरदेशमा मापानी भाग मी मही मिनिसमा देवीको कोई सपना मिटीमा सिकिसी बीनी जिम्मेरातोपाट मन्ज। बैगन मगर मेरी भनुपस्थितिम मेरा मार मारणपर निम्ममा मी माता माग में उठी ।। मरेन सिन उपीन म। र, योग नियतिगेम, पासा बनवा लिए भारमी मगर बरा पर मिला तो सपा होवा पोलिमसे मनको है। किसानी मगर ये दसे में नियमित पर पं। पानी दिलना च मामा मामी और सिल सना मपम भी न । उसोय। मग बरा विचारपूर्ण उसनेकी पोती है। मेापानीमा गुलामती कितन्य है। बोस्वादस्ती से काम देवा मुमपम माँ शोज । प्रमपत्री मतिम अप मेन पा । मेय माम मनिपरेको पाई र समने पाये। मैं समनुमान र ममपने में. एक पप का दिलना।

२६
श-पत्रायसो
भापकी पत्रिकाको में भपनी ही पविभ समय। इसको सति पहुंभ
कर कोई काम नही करेगा । प्रमपी मेकर ही में सकरम पावर
परिविहीनही परम बन्पु, सदाका मवि स्नोका पात्र है। इसमयन्तित
होता मी मोसा ) प्रमपी विधीसे गुत-सी बाते समा सकेंगे। इस समय
बर १ २५१। बर रणूनम नहीं होता है किन मुझे पर होता है पूसरे
कारणोंसद दरसे परिपत है। इस रेशम सापरम स्वारम्प बम
मेकिन मुझे परदात नही हो रहा है। इति ।
मापका-
२८ मार्च १९९३
प्रिय पपीता सम्म-ममी थापा रभिट्टा पैर मिय। मगर रजिष्ट्री
परततो पो पवेपर में मेन्ते । माफिला पता और पाकि
यष्मिा वा परपर बावा में नारिसमे राणा । मयर गैर-रजिस्ट्रीने मेब्वे
तोपरक पतपर मे। दोनों निगन्याको रहर पात्र मेवगा। सारी
किए परी गाड़ी दिया पासबो कुछ भी हो इस महीनेको सवय
बम-(1) पनि। (२) नारीका मूग और ममाम निगम मारि।
पमानापम अ। मोति मगर अपने ही योग्य दो वो श्रमशा अपना
होया । ठ महीनसे परिवान' वा नाप मोर मी और मम्मम
समय हारत् सुरेन गिरीसको सा कसाब देवा ।। Net
सास परत निकम्ती नगर मही माती । तं मापा मेरे अमर रामा अपम
है इसमें समा नहीं। मैं बठक बीवित है भापको मपिए नही पाना
पागा। मन मा मेरा स्वास्प ठीक नही।मे प्रमालिनी
बिसने की प्राति न होती । मानी मुसीबठमें पान मुझे पानी मिलनी पाटी
है। फिर भी माम सम मापस सबमुन की इस बार मारी
सिस मेसिए पहुत-से मनुष मायेन मैं माया निम्मान है।
सनी शनि लिने हो मेप दिलना पड़ना पद हो बाप । म प्रविरम
रोपपते माल को नमी रसमाग पर पता । पर मेरी

शरत् पचावनी
मम्नी है। पर मैं इगम नगा मी हो मापडाहास गडपती-
सेसी र निपसप । रसक वादबाजे मी रेस समय । नये,
पाइने माप माया पावे। उस मार मार काम करना ोगा।
मेय महा माल मापकी माल भी मेरी यह ती है। मारे,
मैं भी रामाण करवासी । खसप्र म मगर
खना महामही होता, तो परिकामय इस बावा उस्मेल कर कि मेरी
एकसानी पाया प्रतिमास येगी।
(मरा पा माप कि-विसे मार देते हैं।) मुझे बझे येग कमी पनि
कामोम मिलने र करते हैं, मौषि उमले नाम अधिक सेय। आपत्री
पनि मेरिने मामी पावे में भी इस बात स्वीकार परवा
है। मम माना रिचार किया बर, को उनकी बात है और साथ
रस्ता सम्प्रे रेख करते है। लेकिन हम माम-प्रम मी है भोर कर
भास्म-निर्भरता मी। साबिएल सि राखेको प्रमीतेप समाते में उसे
मुमोवाका समानेपर मी पी मेए एकमात्र भवसम्मान मा भयर में पेय
से पविकासोपार मई वो उसीम धम समय इस
भरा भापको गाल-इक भास्न दिना' मा मौरी ठरा उसे मना
मरंगा । मुहम बहुत से पोरवा, पर मैं सोयो भाने
दोप
नहीं है। मैं बहुधा भाना आवर मटिग एनेक पेग का माप लिखित
मो। मे यह
विसीको पढ्ने थिएन। मगर मेमाल रिस्पर पो
माम रसिद वो भाजपनी पारियेमागे मोर मी
बर्दगे। 'पकनिए पूरा एक होगा । माया न म । एकपात
मौर। नापाले लेतमें छपाईको बहुत गलतिया है। एक मनुस्पारे बदले
मामादिनी नाम हा गया है। भूफी संग भूमिका मादि मनुस्पाका,
मामोदिनीपन । निरम्माको समए रखर उसनी मति बनाएँ पाने
वेगमा बमुम हो मा मिली है। पर मैरी मेये बान मी मौर
Bअमी।
-रत्

२८
शरद पनापसी
(मो० १९४५)
मिस मोबा, मेरी म भापको एक प्रम करना होगा। में प्रभावित
मासिक परिमांड पारेमें एक प्रकार कुछ मी माीबान पा, सिभिल
भावना नहीं पाया । मैं उसना पनि माओवक मरी। मत्रबार
रणमा पेय कमा-भसार मुनाए । इसलिए मापते अनुष
मेरे लिए ऐ-तीन म्पसिक पत्रिकाएं भी पी पी से मेनेडी पेटारें।
में पुकाम । 'प्रवासी साहिस्प', 'भारती' 'मारती' । बनाएं देकर पात्र
कामीको स्वम मेनेकी रम महा। और रखनी रमाएं पाई मौका
एक पत्रिकाएँ परियारीम मियालेनिस साम्वरध भाप
कला म । तिमत दो पाकिमे मेव अपनी पारन मेरो भोर
परिवर्तनम में मही २ पापा। महोबकर इहे पषित करने में भी प
होगी। नपाको सोपहरी नाप र ममुरोम कर पा । पा-
१४, अमर पोचावेग सार । देवाय मा वो बहुत मारो। मेयमे
पपिका भाये। दिन नमै पो मनुर। भापको ममेक प्रकारक
मनुरास बोप-दीपम तम कमा । मे स्वभाव हो पेय है। पुरा न माने ।
आप उसमे मुमते मात करे। सोय मार-सा ही समझा। इसमयेकर
सम्परागसे शिमी और पाएं मेगा । इति ।
१४ोमर पोबालंग-पटर दीद
गून (A११२)
fRT फाराम् पिपैगम्से 'पमानाका परिस्मा मय है। भयम
मक कुरा और मेण । मापात पीकि को बना सिम
विशेष चिम्तिव निधरना अधिक किको काम नहीं कर पाया
है। सरोकी भोर निर्माता है। पाप होनाका हितमाया
सम्पत्ति र धेगन मापूजे मेरा माम्तरिक स्नेहाचीवार पर।
इस महीने में ही र पमएँ। या ऐनेस मापा पिता

शरत्-पत्रापी नरोगी में मेगनको मिट्ठी नहीं मिल सका।म्मने मुके से मिला है छने पर सरमुच ही मुझे यही पुष । मुते निषट गुमरा-है। जिसके ऐ मित्रामा सोमम्पछा है। चारवडीको बसभित भवत्वामी प्रमफको पढ़नेए मेवा। बार-बार बिद करने के कारण में उसो अनुरोपकी उपेशा नहर का पापित मिानेपर पात्र हिस्से मिगा। हामी म माने नहीं मिल पगा। क्योंकि समर नहीं है। एक मागोवना सिनेमे पापम्मापा था समान न सका। समाप्त हो मापा मैं परनेम २५ वारीस हो गएग्मे | मपपल हर महीने में काम मही मामे | सपमुच ही बहुत चितित है। बहुतेरी पेश करनेर मी नहीं मिल पाया। भगर पोलिस नेदराम होय दो बोस देवा । वैसा कोई नही मिमता । सालकी यमुना' यमुष हो मोर। पेनानी जामोर निगम मी मम्म। रंगून १४१ १९९५ पिपरा, पापी माया मेरे बारेमें वास करती है, मेरे रिपो अमाम्प- पास है। उनसे प में विलकर हे मया। मेरे बारे में पूछताछ पराम पवारम एक प्रकार कोई महासय पर ई बारेम मन्मनुप बनना पाकर रख समता मामला है। मेरे वैसे तमाम सारमै मात दीपम । 'उपकार कर या, पण, मान, स्पर्क स्पाग रया प्रत्यारियोनो माप मेरे एसमें कमी ना भावे। कमी बी और भारी महा।से पहाव दो मही। ममत्र भूमा जो उसके लिए पर पहले ही पेश खा, हरे रिनोवा पुर महो राम मोर एक बार एमाणे पीठ ने मुझे प्य मी मारी। एक शिकामे नियमित मिश्राम, पर प्रधा मेरी रपनाएं पसम्म रखाची परिभको पगरा, ही मेरमा है। इस नया होमिमोपैथी मममम इसमें पाड़ा उतम पोश, sy ममबारे ऐस-बेटे, हाईसर, खरे मायने दुपार-वर्ष १० शरत् पभाषनरी परम्नमे ही मुझमें नहीं है। और इसना बिसने वा यो पढ़ना सन्द करना पगा और पढ़ना मुस्मुर मिया में मेरा नहीं पाउँगा' [ मेरी छोरीपा नियाँ बाने कैसे वही दो बाठी 1, पारी मुकिसकी बात है। एक बात मौर । में कोई उदेस्य कर एक पानी मिला और उस पर हुए बिना नहीर पाता । मैने समता या पिम्दोका म्म्म मापको पसन्द नहीं भायेगा। थापाकापनेमे भागा-पी करियेगा । इसधिए कहाँ मेरे मुम्मामे भाष्य, भपनी गति पर भी प्राण्तिर इस भाका भापको पासेही साब- पान किपरेरा पा । भात् विश्वस्त होना चाहिये । भगर एपमुप ही मम्म भगी हो तो पपकर ठीक ही लिया है। इससे पाठ भी सोन। 'नारीका मूम्म भगी बार समाप्त पर कुछ भोर शास्गा । 'नागका मूम्स की बहुत इस्पात दुई। मैंने उस पय पौवा 'मम्म' मिलना तय किया है। इस बार पाठो प्रेमका मूल्य' वा 'ममपाना मूम्प निंगा । उसके मार म्ममा धर्मग्र मूस उमाका मूम्स भारमाका मूमन तस्पका मून साम्पका मूम मौर मेदान्तका मृम्म सिगा । परिवहीन बौदापना मधाम रिसे है। बाकी दूसरी वाोि पा रही भागधेपर मिले। नकर करना होगा । इस मन्तिम कर ममार्योको पार्यौ grand बनाऊँगा । कोग पहले बो पाहेमा किन मन्तमें उनका मत बदलेगा है। मैंछी नमाई पसमा नहीं करता भीर मफ्ना बन समय बगैर बात नहीं करता । इसीटिय पाता कि मन्तिम हिला सपमुर से मना होगा। नैतिक हो मा भनेटिक यमित को मैं एक बीम।' भौर इसमें भापणे पदनामीकार मा ! परनामी ऐगी वो मेरी । इस मन्ममा कौन काणकि मैं पीताकी कालिमहापरित्रहीन इसका नाम है।-पाठकको पासे ही इसका भामातदेरिया । बा मुनीतिरचारिणी समाहिए मी नहीं और सा- पाय भी नहीं है। मगर येयम्पयरक 'रिमोसन'को एक बार मी पदव। वो परिणशीन के विपरमे पानेको कुछ भी नहीं देगा। इस मगाये फमर औरफ्र, मनासिवान के तौरपर महान् पुस्तको उतमें दुपरिषकी भय वारमा रोगीलीमा पावसीयतनाममै ना। समपातील मी, सा काम करनेकी बमव है। पांच भारमिपोको पार बर्षम

शरम्पपापी
सितापा-पसायाचसो भनुशरण मत्याचार पारित विम सर ऊँचा
किया बाप तो इनमे बनकर मानकी बात मोर सा! मान लोग ऐसे
सुद्धपकिरीबात न मी सुन, न एक दिन मुबगे। री सामो
डेर मैने एमप साहिर-समा बनाई थी। मार मेगासमा मी नही
मोर पाकिमी नहा।।-(मुगान्वय, ५ माघ, १५४)
गंगून १.१
प्रकार उमारी मेकी हुई 'गी से मिल दुरी नहीं हुई, मा
पामारी रपना।।म उम्दी हो पायद मारा।
भाषल मानिए पोम को भरी शानियों प्राप्ति होती है उनमें पन्द्रा
यामागारेमें माम्चना ही नहीं हो सकती। नोमानियाभोर न
सारिप ही स्पाही मोर मी फिल्ममपी और पाउराधार ।
एलबार में हनी पानिया पी। येन एक मौसी मही है।
अमियो असनीय। किनी में तत्व नहीं मार नही सोंग
मामय पाना भी मारेय, और बारम्ती Pathor soवेश्याको मुस्ता
सयार बाग्मेको मुगम बासनेती पेशा देखने मनमे एक किग्गा सम्य
माया तीनसकी ऐसी मानि हिलीय पर
सचमुरी मेरे मन में इस बसा एक मात्र सम्म होता है बो और एमी
कोनो सत्य ज्यापि रहा। सोये कहानियोधा रेड
पुरण
दोगा पाते 'परिशीन सपब समपमें मैन क्य
कानुनी मुझे कितना । पुखर विषम भौम रखने प्रकार
भभिप्रावि सम्पत्यम क पारपा रवाना मोटिन है। मदिर
(Immoral) तो होग र रो। सेन मी साहिपमें बो कुछ
प्रक्षर महाठठम इसे पशि मनसिक बना पायता यी
गई।मिमी बाहित्यप्रेमी गप मुझे चमित पररार
(युगाम्बर १ मा, १५४)

१२
शरत् पत्रापर्य
४
[ भी हेमेन्द्रकुमार रापको लिखित ]
१४ ओभर पोगगन स्ट्रीट,
रंगून वा २.१४
प्रिय हेमेनमा बोयमें बहुत दिनोंवा रंगूनमै नही कुछ दिन पहिले
गैरनेपर मापको चिट्ठी मिली। पिसीनासे हो उसका बाप देना विध
या। मेरिन सबक एयरकी सदनी हुरी वीकिकहाँ कुछ गत म
बिल हूँ इस भाप्रसे ठप नहीं मिला। पुरा न माने। परीर कारण
मेरे लिए सर्वए साय माताको रक्षा करना कठिन हो याहै। पर
माता इस बातका है कि मैं पूठा भावमी, भाप मोगा सामने ही
एमाला पाच
परिषहीन' सम्मपता भगवई मम्पमागवा समाप्त होगा। पाक
बात किमान होनेठकाधारण पाठासपीबको बिस मा प्राण
करेंगे कामदास नहीं हगामा पम्य अपनी रचनाभीपर मापकी
पा रेलकर उसमुच ही मानन्दित हुमा । गुरे कसा करते। नी पर
मेरी रचनाएँ नितान्त साधारण स्मिकी। उनम ऐसी कौन-सी मोस्वाद।
पर, मसको ठोक रमताकि मजद बनास ऐस बना रे मोर
को सोक्तारित सई। पासा सोपेग वासा करेगा उपर एक
प्रकारसे देखता ही नहीं। हायर इसीलिए ही बीचमै मेगोको मात्र मी समाव
कमी नही मी भगवा है। फिर मी पस्त् िकिम लोग
अरमान महापरना चाहते हैं। भापकी रचनामै विफल है। मुझे बहुत मन्त्री
भगती है। बहु दिन पहिसे फपीको दिल मेध या किपा मापको सप
अधिक मास करने की रिपवेश करे। पास कि गाय
मापार मेग विमल मविकार नहीं है-मममार बहुत ही पोड़ा।
इसीलिए मेसी रमना कवी-मेरे लिए कठिन मसना ही मम्मत।
मेमूला ही मेरे मम बिदुई। मपम, मारवपमें हरियार भारित

शरत् पनापसी
अमन-पान्तमै यो मेलाप पशि माम या, पापा भाप होस
मापारकर दे।
पीसी समय मिटनेपर समाचार रिसा में मापकी चिट्ट परख
दौरे, सिनेम मी सहा मध यही कारण किसी पर भेव या।।
सागर सायबाय बाय नहीं है और व कमोर म पारे।
भाव नहीवक रत-अगसे परम पूरी गावे म्य। मुझे बहुत-से वे
मी मोर 'पमुना बा देवा करें। आप भमर समुचि।
तो मेरी सिम्ता मापी दोभायी। यह मेरी बारिक बात है-मन रसनका
बात नारी । मन रखनेडी व व्यक्ति दी करवा -माप स्पष
श्रीमत्पन्न पोपापाय
[ भी हरिदास पट्टोपाध्यायको लिखित]
रंगून, १५-२११५
भिपर, भीचा प्रमन-बारी सपमुष अपने योम्पपेक्षा
मैंने नहीं समझा पा-मामी मही समय मधेश सभाबाई अप
पसर उ मरम्ममें ही कोय येरे हम किसी एणय अपी
पत्रिकामे सपन नहरों प सादे पर पेची हुरहरीमान है। दूसरी ती
पत्रिका धारमा मापत्ति म उठे, इसीध मरोष पार पाए अपडी
माव मेध । अगर को और बस । और बहुत-सी रा हानेको र
मचियता परिद्रय रीतका प्रतिमा अगावै सरकीपर्मयो।
मे मरिसी महान्टम प्रकरम होने पाएयह कौन कानी
मायामा धमायो रोग्य री, इस समय पर अमनमानी
है, पर मैं मैं सारा अमुक पर मिया ममुरते तर रस

शरद-पमावठी
-पहल नहीं है। रविवाने मफ्नी मायक्या रिलो पी, मन मानेको
किस प्रकार सबसे पीछे रखनेकी सफर पेश की। बोरिसना नई बानते;
भात् किनकी रचनामांकी परस नही पाहे चिने यो भादमी पों
न, भने बगैर उनकी कमी बनाएँ अपनेमै निराधाको सीमा नहीं।
गोग समझते हैं कि सारी बातें करना ही चाहिए। बो देखते हैं, मक्ते है,
गोवा, समझते हैं सब- गोको दिवाना-मुनाना पाहिए । यो
चित्र बनाना नहीं मानते है जिस तपसे हायम टिममेटे ही सोचते हैं कि
कमाई पर ग्राम पिभित पर गई। किन हम्मे मनुमसे
अन्तम समबकि बात ऐसी नीं। बहुत-सी बड़ी बी मेहनी
भी बहुत-बोस्नेक गेमका संघरप करना परा। तर पित्र बनवा
है।बोच्ने मा फन करनेसे न योगना पान न करना अत्यन्त कठिन है।
पाव भाममम करना मार मेमा बमन करना पड़ा। सभी चमुच
बोलना और मान करना होता है।
बार बातो भालोदी मेश्वर देनेभामापरें-पासपो मेरी
भपेशा बाप ही खूब ममी वरा बामते। बोकुल मा हो भीडन्त पर
ग्रेगरियो-करते मार मुझे हम तब मौकान्तकी एक
मी पकिमही बिगा।
मैं रि पानी रिस पाभात् समाप्त करने से मिस या
रामफी होगी | comedy होगी, tragedy मही। रेल विवनी माली
समास होता।
इसमानी माग गोरा परेमासेमा गया है। अत अपने गाने
लिए 'मनुरप' पर पदोनही बाबी| सामाबिक पारिवारिकानी
है। मेरे मनमें बड़ा उस्तार मा किमुन्दर देगी। पर क्या क्या अबगा,
करानीगाठा!
रंगून ७-१९-१५
प्रिमर- माणदिनई कहानी और सम्पपर ही भेव तमा।
भगर मही मेब साबो एपणेरी पानी मेगपा।

शरद पत्रावली ३५ मापको मसमाप्त पानी नही मेन समय मोर उसे समाप्त करनेकी मायने पने लिए म नहीं कर सकता। पर चन्द्रकान्तकी कानी स्वता है। मगर ममय दें तो इस समयमै एक बात करें। सम्पादक महोदयगण पा कर इस पानीका नितान्त वापिस नरें। मुझे माणा है कि कमसे कम हो रचनाएँ प्राप्ति होती मोर पुर, या उनसे बहुत नीचे भान पाने योम्प नरी है। मनेक सामाजिक विकास इक मषिप गर्म प्रम। मेरी मातेरी पेण भौर परकी मस्तु कमसे कम मित्रों से तो कुछ कर पाने गोम्प होगी ही। हाँ प्रारम्म सयप पर पचम मपी पीचका परम्म खराब होता है ऐला दिसाई भी दो पदोपही मेरी पसत है।पा माडी पार सेगी ! रापको बिठको मे मम देखनेवी भागते ही उसे भेगा, पर मात भूमिकामै बिसी है। --मापका जो स्टीर, रंगन २२ २ १९ पत रिनोंते मापका पत्र नहीं मिम । भाण सर ठी। मार में इस मार दुरी तय गिय है। मुदूरसे प्रमप माईकी हवा जी कि पा एमा कुछ समय नहीं पाया। इस बार राव और मी जरा है। मुनवाई पर रमाकी बीमारी है। देश नहीगेरनेसे पा मी नहीं रोपटी । इस लिए पोम एक पर मनिवार्य हो या है। मैं कुछ नहीं बनता भगवान् ही अनते १ । र माता रे पापा दिग्दैमर दिए, पंगु रोबाउँगा। मानसिक पंचम्टा पारम छ मी काय करनेषी पण ना हुई पर दादाको पर पार 'सम्पब धर्मका मस्स' पानेको । इसका सर कॉपी प्रब पार र सकाए । पाकी हिस्सा पेपर र बादमें मेवया है। इस बार को कुछ लिने विचार गि, या दूसरे देणेलामगिक नियमोंते माने देणे मायकी एक मुमनामा मालोचना सिवा और कुछ मी महा। इसलिए उमर किसी प्रकार मटिगत मान्यताका

शरत्-पावली
एन। न ममता, समोर अपनी प्रापि
होगी या महा भिमर यहाँ हाचणे मारपिट मेव। मैसूर
कर एक पुल पार कर रहूँगा और भक्मिय मक्रियत नयम
परवानेगमा। पपुषहीमा पर मालको मेहर गुरु दिन
विवार 14व-सी बातें मिलने दिए निभाना सार भर्त
पोप मन मासेमार पालमप यहाँ राम!
र येत नापरवाई का मेन पारी मानसपूर्ण
रूप मानसिकरवारविर परसागर मेण मापEAL
मट सपा और इसे और करो परि-पर ममतोमर
नग्य होणता नपरा होलेको मात्रामा पस्य
और लिराम शरईया । मेront परम की
माहिम बीमारी से सम्म रोगी, इसे भी पाया और अमर यही
दो से पारमन्त्री रोजी मुझे मामाची मालमें पर
बहुत पार किया है। बोरम प्रारम्पूर्ण काले मत गया पर फिर मन्तिम
कारोबर्थवरेने मावोस |
-
[मार्च १९९५
भाभास मिया निवासस्टम पर एकमाब
कारप पर मे पवनी रे ।
मेरी बीमारीमा मकर अपने स्वारे, पारद उसे
पराकाने मी शम्मद नराठे भाव रखा।
पियवा और विरमुनी। मापन मापको कोई विशेष पुरान।
बह महारानी मायनोसर हो मेकरलर
पर मुहे पशु सेनेमेही रुप दे। वो बहरायोप-बाप
सोषण र मेरे पाने पिमने इससे गहिये प्रेमी
को बम्हरगा। मम बरपाते। पर इसमें
दोप
मामी प्रमो माप होय प्रय। चलो
सारपसारमै पार गैरना होगा।

पाल्पावासी
मापने मुझे कह देना पारा ही मेरे लिए योगासपी मदर
मर मी बाबा से कहा कि सर-पैसेका पर मोचाप। र
सता सर दो भा रा ते वा । "में बड़ी दुगर
माग । विपास रिमिक सहेगा उसरे को मानेभी मानवारिक
एप्प माप मुझे वीर रस में, वो ममें भाग्य।
रव मनात स्पानो मे देने पार पाएकी या मारीतिरिक्ष मार्षिक
पति मगर म र सई वो इस एकजम खत्री मेधया।
मनमम । सूक्ष्म कु०म। परी देह मायदेश
मामा का मुरा। ममी पूर्णिमाता पदम हो पगा। मेरे
करोगों मारास प्रारम मशीद पर भापको बहुत कम
भोगने दिया है। पुष्टी दफ्तरसे सा मिया, नहरी पनसा । पले बारे
Rपमसातून पो खासको मीर चो मी मिह माय । माप मुझे में
एछ मी देंगे, वही मे थिए ममाम मा सेया।
[मा १५१]
भासेडान सौ सपने मि। ११ ममी
राम करन महा।
२१६, स्पिवल्य, पनारस सिटी
परम पस्यापीप, मापा पर मिख। पाँबाव ममी पापा।
पैसा पामिर लिए ये नहीं पा । कामरपने पोती
पना । त्रामात्य, सपा नहाँ इसकता है। तो एक प्रव पान
परता।
ठो दुरी बयाए म पदि नरसापटी सिधार
पाँच
मिनीव गातार हम लेकर बैठा और दो परे र उपर सरपटा है।
ऐसा thम विदो नहीं लगा। बोलप मरणपद
सम्पत हरी से समापौर भने । एकपदी मगर माटोको भावा-

शरद पत्रापाठी एक नामी पपित। पर मेरी मम्मकुप दिपार कर हैरान ये और मैं मी पन य गया ! मेरे मतीव-वाचनको (बिहे भाव मी कोई नहीं बनता) भयर इस सामने भो किसे सिर नीचा मया। और मविपा जीवन तो और मी मापण। देबारमारपस्नेभो किया किसी महायोगी मोर नही तो रामगुम्म किसी म्पतिकी कुणाम है। मैंने अपना परिचर गुप्त ही रसा गा ।इस मादमौकी बड़ी स्मावि मामानी मी कामाली भेग पेठे ये भौर पमितमी मेरी दुपसी रेसने गे। पारिममिको बिमामा पारमार पूज्नेगे कि ये कौन मौर को पते पक्षानमें शासनिक खना पूर्ण संसान करते हैं उनोंने प्रो कमी महा देशा याममा माई, भगर पर सब वो मेरे से नातिका माम्पम मासी विडमना माता पयिामपताइये तो। मासु किन्तु ४८ पा अधिकते कि ५६ | मोने सम्मम मतिरेकमै मृत्यु नही बताई, उम्पारण ही नाराकाने से किनका भगर ४८ में मोस नही होता है तो उसके बाद संवार स्पाय मपरीर त्याग करेंगे। रही बात पापाय माँ होगा, इसे में माय मौति मानवा । मेकिन मवीतको इस वय मारय पप से पा , मैं समीते गातार इस बातको सोष पासा गर्ने सोमवे-सोको मापेमें पिन न कहीं यमामि । ---सत्य भबसे मेरा भापोग 'सम्मान'कप भवास हो ऐसा कोई नहीं लाप रेकर मरम र एक और नामी गप-मुपार माही। उनीने गिनार मनपा कि मैं एक सख पार्मिक मारमीमा मविकार उनाने भी किया। देखता हूँ मुझे पार ठही बममे मिहाय 11-('सेपा मारमाप्तिन १५५२) साताक, पानिधार, पापा मापाद, १५४ स्मानीय, गत पुषधारको मुझे भर मापा । माग पाठ दिनाप भी नहीं उठण, मापने रचाई भमिनपा भक्तिकार मांगा पार मतएव में

शरद पत्रावस्टी
सत्र देने वए राजी हुमा पा । मेकिन माम्पमै विधिको विम्बा माई नहीं
तो '
रिया' नाटयको भव समाप्तगण।
भाप उसे दू से रिताना पाते हैं। लेकिन मा पा मुमसे नदी पर
सकेगा । उता यि रेखा भनेक असुविधाएँ । बीपमै रेको सपन
गमेसे वे सा स्पन पूर्ण र ना कठिन ही समझता है और मिनपको पाते
मीबापत मम्म शेगा इसकी मौ भाषा नही रजया । मेपनपना म्लिा
होने पापामा नीयले भौर में मी एक नारक या माम् प्राधित
रगाः यूपरेका मिला शेनेते तो नहीं पर गा । सिनेमा माम तो
मेरी कोई मरवाही नही
प्रथम प्रमोष गुरु देखने गये, सो दिसा नहीं। कापी मोदी
सेमिनमोपयोगी विलना बारम्भ किया या किसी समरविण
पर भाप लोगों को निकम होनेसे-(मबार 'विमाकी भाणाम)-तुत
क्षति होगी। पर्व ही मिनेार्मोको मेटन रेना पड़ा। इस बात पर
कम समझ नहीं भाता है। पर एक वयसे पूर्व पुखक गार है।
मोहा-शुत योगद मोर गेडा-च बिल कर कापी करवाना है। अगर इस
पीच मैं मम हो गपाटो भररममा। कुछ दिन पहले मापने पर
देशमाकपा सेवा कोई पास ही नहाँबी।
पुनश्च । देखने के लिए पहले हिस्से को साय मेव यासे देखकर
नगर समविपाकी हिस्सेका माप मिला सगे तो मुझे पाना ।-
६
मणिलाल गंगोम्पापको लिखित)
रंगून, 0-१-१४
प्रिय मापकाए, हुत दिन हो गये भापकी पीप बगर नही दिया।
तरिभिर भीमत पर माप और कुछ म प ।

शरत्-पमावली
अपनी रचनाकी भावना मुनकर भाप दुसित नहीं हुए। इस बात
मापतौलानी मुनम पैनकी त मे कमी-कभी सोचा करब पाकि मेय
वो पही पापियम दूसरो बोर्पोको रिला। लेकिन उन्होंने सा सोचा
ऐगा। मेदिए इन मार्योको-गुरदुलीमा।
इसके बाद मी मैने मापसी
पुस्तक एक बार एस्से मालिखक पदी
पी, सचमुपही बात भीमा--समार मानो मुख भषिक म का
महरपना सौ पूतको मेरी वर मणी मही अगदी है। पार्षद
भापकी रचनाका tone कवि मैसा है। निराकार (abstnet) मावी व
बिम मपी नहाँमाती उनको भापकोरपना मन्ती महावत
पातको निस्यिय रूप का सकया है।
निस्विों या यानियों भनेर सम्म, पम्ना। मान
के सारे सोसारक है मैंने देखा है मारकर गोको वही पछी
माती पोजिसमें मी समाये हैं उसमाना मी भाधान है।
पा और एक पाव को पात दिन पहले बनुमती पत्रिका मापी मनुश्री
माओपना करते हुए लिखा था -"रिन् विपाशा यमै मोरो पर माना
सा गपि इत्यादि इस्पादि।" (मेरे एक मित्रने इस मायेषनाको मात मुले
एपित की-ने पर उसकी मावी नहीं देती है। इस भावको जानकर
एफपार मुझे ऐसा किस भारमौकी हिमाकतकी ठर में मी एक मोर
प्रतिबार किसी पत्रिनमें सवा-मुझेगा कि मौर का कोमोमें
- मि बहुत महो। सिम हो भनुरार और बेगम
हो इसीलिए इतम प दिखाई पड़ा। किन्दुने कौन-सा अपरा विमा
पा मेरी समझमें किसी भी तय नहाँ भाषामा देबारी एक और निसाय
भमागे पापीको पठ, मार देखने गई थी अगर परत हुई वो हमें एक
र पानी देने या एसी वरान कोई काम भने थिए-वस बही ना इतनेहीसे
महामारत मय हो गया | माकि मन ही मन भने मौनी
रोमालिया उसका लेहका अभी पा। सामारोपको मा पपिरिम
पावरपर AN-मात दिसू विमा साम्ने मगर कोई
मरबाना, और भमर उसकी गयेसे सूनेसे मी बर मिस हो सम्मा

शरत् पत्रावठी
हिन्दू लगवाहो मा मी नहीं करना चाहिए | मोतिर विषया मोर को
बारमी म पाया परपुरुप है। यही इसकी रितु विश्वास मार!
गता है कि मंग ना गार्म मनार सौप दोर रिसानेको
दिमा पदे और दिखाते हैं और लोग उस भाोपाको कार पाते
है पाठ हो । कही हो मिसा"
में या न मानता किमाना सामने मित्रसे
बता मुना बैठा दीरता। माम्ने छापर यह मामेवना देने सेगी।
पाग पर मौसम गो-या बसप पाटी और छिन्
धमकीपीपरी पाकन ने पानी पा उपन्यास किती मीरणम बम
नहीं माना
बार भाप दिन किसी विषयका पारमारि भाप व्यरंगे
-मागे-मायेर नगर पड़ेंगे। और ये मेम विमा पाया
देने पिप पर होठे। पही इसका पt-भात में पीकार और
परमसे बीठनेरी पेश और समीबाटे।
निगरिन इसाप भारिप मानी सब एक ही साप उम-सा होता
अपाधिरिन सपनि संकाप्पतर होगा, (AMTA कमी-पी मुझे
सयल उस एपनाएँ गुमर फ गुस्से में मार लामा
बने मैने पूछ दिन पर मफ्नी का मामते 'नाका मूल्य' पीपट
एक निबनियाने, दिौम मुख मेय भौर उसीको मने बाबर
सपा समनिपरी मोर मिने मुसार विनाओष प्रार
विमा पानी पाप का विलीविठीने पेसा मी पप में मा-
भाषा-सी-गडहिलू नीति पर मने कम मी कटान नरा
बिवास की मनुराखापर ममप मा। किसने लोगों ने
पामेमना (ममानक प्रतिवार)रनेपर रिसापा, पर भारत सीने
का मीनपा। समी समर मेरे एक सामाने में से दो
माप मोर पारसे हिम्। पपपि मेरे गम मौकी पमप्पा
मगर मैं प्रा नवा रखा, तिरे सिवा प्रपते पनी नप।
(पुरा न मनें मपि पान, भापळे ये बातें मरा मापार है।) मा

शारद-पपापसी 40 भापको लिव इन जगावेडे होते हुए भी गमीने मुझे कितनी माम्पिों मौर में बाहर गैंग रचन, पार माया, सेकसि । बाद ही बीमार हो यरा, नह हो एम पी किसी व्यवसाय मूम्म' भोर रित पाक मूम्म मात्र निस्सिना गर पानीसीमावेशि मरदी-वैसे है।वीयत ठीक हुईमा ! समा कुर सिता!, पण गाव है, कुछ म भितम मपीर (impattent) रोकर उमास नरें। अपर यही माप गयी परते हैं। मापा भी घरवद्रपदोयम्बाए पर मनुरोध छ मिमि को मोसो न मिला दो बुरा मान- अगर कोई गैर पाशिवाय भी किसी से दो मी। पुनम मापकी भाषाको एसटी-मोरी दुरियाँ कर आपको गोर-गुम मचावे देलवा ।। मैं मैं दुर भापको (उन मुठियों) वय माँ Paभान पर मी न देलवा । माप घर-पूसर ही देवी ममपा और farm-मीरबित पातको जम्न वमय है उसे का दूसरो करनेते न मेरे। पर मगर दुर कल उनें बदना मापदादोप [भी सुधीरचन्द्र सरकारको लिखित मिस सुपार, गाम मार पत्र मिला। बोरियम हो या और इम्बो प्रति हो यी है, उसे सा में नहीं पता ! समय भनिने Kota ना पारा। भगर ये एक महीने रेरावी है, तो बस बप्प पर इस वपसे शुरू होकर मरे गते रोष हा सीप हे। पर मापना पद नही होगा । जगभगाने सना मेवया से प्रापर मणिरोग्य। एक बात और रिसे सिनेमे पारा प्रबो एक बार उठे रिमना म उसको

शरद पवारसी
४३
बहुत-सी कापियों मुझन मी। बिना छपा है उसे अगर रजिस्ट्री करक
मेवदेवो मेय गोपाई परिश्रम कम हो गए। मपास ही एस्से मेव।
बदनामी करनेसे तो पुरुस्वर दिन होता है। पिन ऐसा करना
पा मन होगा। पर मौर बिना मी विखम , माष महोने मक
भिकाय पाई धमाप्त होती भएगी। मेरे हागेकी पाठ कसी हो।
पादकमी नहा लेंगे। प्रसगुन मानेकी रफा। मेरा स्लेशाशीर्वाद
a-(भानरामार पत्रिका, ८ माघ, १m)
{१४ माघ १११६]
पद सुना होगा में प्रयागु हो गस0मातीपत-फिर
नहीं पाता, रमिलने पड़ने का काम परसे देता ही करना है। लेकिन मन
रखना स्वयं कि किसी काम राप मानेकी रणनई वीगाने
पर मी पापा नई हवामा बो परे से एप मे--मपाए
आप-विवा-पौम्य, इस तरी मेरी बहुत-सी रमनाएं -उनाको रिसी
तयर-सोपार सफार वा । चरिकी पारेमें ऐसा नही
मीरला पारा इसीलिए बने दिनॉकरो-रो ममाप भेज या पार नही
होमोमा दम मेरे पास बैठकर ठोक र ना! मैं मालिसा
म पता भार्प रांगा। ११ बसको पाना घेऊँगा,
समोसा किसी वय टिकर नहा भावास साइम एक,
कमी-कमी दशामें एक मार रहा है। मफी बात है। मानेको
मा वीवो माना, लेकिन साटिकर मिमगा। (मानन्द अमर पत्रिका,
८ मार (५४)
यो सोर रंगन
परम सापीप। मैं प माफको भागोबार रेता। मुमते
परिपतन होनेपर मी आपने मुझे पत्र या इसे परम समाप्प न समार
पत्ता समगा, में रखने से मना नीं।

शरद-पभावसी,
लिए भम्पन यमा पाया। पापबन पाया सा में
पसेपर नहीं मार कार की इस या उन व्य
मेरा पोते गए ये सखी वय अन नये। मयपि मा यात
रसी भाररसाता अमद मा माफको माहोमी ।
न त पावधेयमे। मेरा मारने की है
मेरे परिमका पुरत्पर है। मासको र सो तुवीमा
६ इलिया पमपाद खापार वा माप म्गज क्या
सुसी।
मपवानी मापी श्रमा करण है।
प्रति-पत्र कोषमाप
९
[प्रमम धौपरीको लिखित ]
कमान, पाने-रायपुर
साप निगरर feat मा भरते भासी
भाषा की महा की। अब ममी मी एक मि
पर पैर महीने सेक्स में रेप मामा । भानही पाते मापसे
मम्नेको यकीन मिना भON सम्म म मा । : यस्ये
पाएमा पहुँमा कामदा मामा । समयकोच
मी पा-सामोरपगार भापका मन नए हैं। माममाफ्ने
पुरममा पो भनाउँगाल, पर उपचारको मगर मापी
परम दारिदोई। मस्सो सनियरको मापः पानामे मनपर
बार मे मुबाका एक विशेष परब रही नामांप
में भी एक मत। कमसे म मषित पारिप बारक
मेगनापत्र नित्यबारे पो मुझे मी
परोपको परामको
--
.

पार पापी
में मानते पाया है। मेरे ए कम्निाई या कि उनके पके कारण नही
समझ पाया, और माप मी मा मध्यवे। यामी मेरी समझ नहीं भाता।
परमपरस मबाप ही सच कोटिकी होती है इसमें मुझे सन्देर नहीं। परस
रूपमै गर मावि होती है उसे नहीं समझ पाण। मेरी म मोम खटिए
बिसी मी बावको में टोस रूपमे ही माना धारामापसे मिस्ने कारण
पही सोचाशत्थर करनेपर सारी पीयको बिशेप रुपले समन्च एंगा।
भी वारपर पपित मापते एक दिन पदो प्रफर किया था। उसने
समक्षा मी दिपा पारमपने मामलबसे मी पूजा! सनाने मी समय दिवा
था। अपमापको बारी।
भीमुहू पोरोरसा (नासकार) ने एक दिन मुझसे कहा था मैं
गहा सारिका परम । इसका कारण पाA मैं मापा लिया
antart पिन 'तपुर पत्र में उन्होंने मापाकी मिट्टी पद पर दी
है। उनकी माय मापा भी है।
में इस बावका भाषिकार नहीं कर पकि मेरी मापा मोर 'तुज
परको मापा प्रथम है। इसीको पापले मन्त्री र पमस गा । मेरो
फोर रचना मापने परी है या नहीं पा नी । पदिमीरे वो कोई मनिषा
पर होगी।
परित मापने उस दिन का पाकिबंगा मण स्वनि हानी
पाहिये, और दीको र भगा। सो मत लिया पतिकोनी
पाहिये, इसे सर नहाँ बानते और भाप गेम मी नही धनवे । देन का
सय माप पास चार रोखपा न।
-भी भरवद्रोगप्पाय
नीमहेन,
बामेषपुर, ३१-६५२
नप दिन
समापने मुझे एक पुस्ता दीपो । एतापना मेरे लिए एक मादत
पन गई है और इसी भाव एक दुरी मारवर य पी है। उस पुसाको

४
शरत् पत्रावली
थिए मम्पत्र बाना पाया है। मापसमाप व पापेगासस में
पोपर नही रगा। मगर हमार मी इस पना उपर वो ब्ति
मौनध पसे अवगत हुए पे उसी कप पान सकेंगे। पयपि हम या कि
इसकी भाषामा असर भब भापको नही होगी।
मेकिन इस बावको रहने हूँ। मेरी रमना मापको मची मी सही
मेरे परिप्रमका पुरतार है। मापने इस पावको मुक्ति कर मुझे मुख्य किया
है इसलिए सर्दिक कमवार रे । मायरि देवा माप मी इसी तर
मुली।
भगवान्से मापको सम्माबिए प्रार्थना रखा।
माछीबारक-भी मतपत्र पोपप्पान
९
[प्रमय चौधरीको लिखित]
मौमामान पामे-यपुर
बबिनय निोदन । किसी मी भरपसे भापकी ज़िी मिलती है।
भाण मेने कमी नहीपी। भाव मंटूही मी एक मिमिना
व पांच महीने दो पसे में इस देशमै माया है। मानेही पादते मापसे
मिस्नेकी पेशकी किन मिना मान सम्मान नहीं हुमा। किस पस्ते
भनेसे भापकर पापा नहीं बनवा । इसममया काय
मी पापा बेमौर पपकर भापका समन न ना करें। समापने
बुद ही मुभावो मास ही भावेगा। रेनू समुषवारको मगर भारी
दफ्तरम गरि हो। म पनिपारको प्रापः पागसगाछे ममनपर
पउँपा। मेरी मुभावका एक विशेष प्ररण या मारनामोग
मैं भी एक मक। मते कम भपिक पापा। नोमिए पार
होग भापकी निम्दा करते हैं वो मुझे मी सस्ता है। दोनों पनीरपनाको

शारत् पाठी
में पानसे पदवा है। मेरे ठिनाई मा कि उनके प्रेषके कारण ना
समाह प्रता, और भार मी मा समावे। मामी मेरी समझ नहीं पाता।
पर सब पर मपास ही उपयोटिकी होती है, इसमें मुझे सो नहीं पर
रुपम या प्रकाशित होती है उसे नहीं समझ पाय । मेम मोय, इसीलिए
किची मी मातको में ठोस स्पर्मी मसना | आफ्ट मिलेका कारण
कीमोधा साधापर रनेपर सारी पीयको विशेष समठे तमाएंगा।
श्रीयुत् मारपर पति मायमसे एक दिन पही पान किया था। उसने
HARI मी दिसा था । भने मापमासे मी पूजा था। उन्होंने मी समसा दिपा
पामा मापारी।
श्रीमत् रोद वाम् (नारयार) ने एक दिन मुस्से करा में
अंगमा स्पा एक माइका कारण पर बिम म्ापामे लिखा
ही औरष्न स्तुब पत्र में सनाने मायाको मित्री पद कर दी
है।उनी भाग म्पपानी है।
में स्वयं इस बात मारिकार नहीं कर समरि मेरी माप और 'मनुज
पर की मापा पारस पाँ। सौरमापते सटी वय महदंगा।
कई रचना मापने पीनही पानी परिकी वो मनिषा
नाम
परत मापने दिनमा शकिगम मापा खनिशनी
पाहिये, और इसीधे हेर हगए। मत प्रति मिन बाँदद ऐनी
पाहिये, सेरेसन पानवे और माप मेग मी नहीं बरते। देत का
सत्य माप पातबारवा पा नहा।
-श्री भरतपद पागणाम
।
नीममा सेन,
बामे-पिपुर, ३१६५२
सपनप निदर
माग्ने मुझे एक पुवार दो यो । पुस्तकमा पदय मेरे लिए एक मादत
पनमा और रठे भावह एक पूरी मातार चपापी है। रत पुरी

शरल्पमापसी पोवा न पो, पर प्राप्ति-स्वीकार करना एक महता है, या म मानों पाद नहीं पता। इस बातमै दम्मकी पनि निकम्मेपर मी पान है। भए मापकी पुस्तकाने पर गत दिनों बाद प्राप्ति-स्सीकारकी गाय रिमरी भापको कम्पबार दिये-बिना नहीं रह सका। एक बार इस ए मी मनपाद और पूसौ बार पम्पबार पत्र मातम (गा। काही पतको पुस्तक समाप्त की। परना नहीं होगा कि कसानों पानेमे पात दिनोंसे ऐसा मानन्द नहीं मिग मा। इसकी विशेष मा करने प्रभ है इसकी समाओपना करना ! इसे करने ए बी भाषको दिन पव पमपिरों दिया करते हैं, इसका समेत मी कसभाप परमै मुन माना। मतपब यार काम में नगा । और वे डोग मी मा परेंगे,-शिम बनायेंगे मा कमरी पानी । उमग्रीमती पाएक पाव । किन भए रचनामें कितनी रवानी सम्म कारीगरी, हवा निग्ये सौन्दर्य यो। मपुर कामरत माँ है, सबसे मपिक इसे रिस साना कितना कठिन है, यानेही भेग समांगे कि मपने हाँस मिहनेका रोग है। और कहना नहीं होगा किस प्रकारको कुण्ड पाको पानेका रोग देश होम है। पर इसे दिये । वास्तविक पाव बाकि रवि बाकी रचना फक्नेपर मुस पेखमा पाकिया करनेपर मी में ऐब नहीं बिलकवा । और का भापी कहानि पुस्तक पपनेपर भी मुझे लगा कि परनेपर मी में इस मासे न त समय । इसी बाको पति र पिपा पत्र कर शामको अपत् माप पहति निमा कर 'मारतवर्ष कमलपमें माया और यही सोमनापको पानी समाप्त करनेपर परवा भारिपर स्मधिपास उसकोबर पास पड़ी। मैंने अपना मव दिया कि पहरपना उपप्प परनी चाहिये, बो काम स्वयं पुस्तक लिखते हैं। इसकी निमा रचनायेची साम्भर पोसफ्न, सका ऐसा परिपाक, मनोमामाकी भाममतिका ऐसा मनारिम मुफ-पप बोम विना समम और तीस साये, बोलकर रखना साधारण मग मही। बधारप गोंको समपी दोकगेगी पर ग्रम्पको ये मी मी हगंगी और उपयोगी मी होगी।

शरदपावती
४१
प भाफ्ले एक मनुरोप बगा किपा माप पान सोचा कि वह
सित प्रनाम समान मी अस्पुटि है-मो काग लिन पाम ते ।
पोधिमे बनी बीच बिठनो प्रचना आरध 'पारगारी
उपस मिळवत उर्मुक धामद मी या मापने सप अनुया
विगामा म म मैं सोमो अनुमय परख । मोहिमेत
पावको निश्चित कम समझताहिर पुस्तक हाधरण पाठ सिए नहीं
है। साधारण प्रेस से समझ ही नहीं।'
अमेगी एकावा हा माई अर्थात् पत्य सिमाने किए
कप। इसे न समझ पाने कारण ये मान बैठते हैं किस मरे हुए सोन्दर्भ
सौन्दर्य ही मा। मारवारी मेम मकान बनाते हैं और पास कर
उसमे कार्य करवाते।
मराकी बुद्धि और संत (latelligence and Culturt) बता
एक सीमा नही गुंग व्यती है, वो इस पुस्तकमी नहीं
प्रते दिन रात में बनाकर नहापया। मगर शिमो मुमत्रत
पुई दोशम पा सँगी। भापको ये पार देबर भागिरावा
हैं। ऐन्म मोदो wati मुझे म छगनेकी भाप र मी
कौमारी।
श्री पदमम् पोपप्पाप
समितीप्रभव सरानीमा यसमा
नोमा मेसा मामा
बार-Amanगणित होनेर मी नेमै पगिना।
पानी पिनाक कामो नमशाना हो पाये गनमा
मार महासराव नापूर्ण शिक्षा पर महान पर
मोमो पायो गोली मार रात्र भर गुमान
मे नियति मात्र या औषा और मावनेमे पारप पराम,
रेखमा।
पाणीपब
४

शरत् पानावळी
विपुर
भाषममा-ममी मापका १ मिनउस रिल भापको को पत्र मिला
पा-पातु मेवा नहीपीजे अचानक माप समझ सीए बाब
उसे मेरिया। दिन कोटीपर भावेगा।
(मीलन
बाजे-शिवपुरा
,
सविनय निबेदन दिन हुए मापा पार मान देनेम सिम
कारण रिबाना मी नही हो पा र मन ही मनमै स्पा
भनुम कर रहा है। परम्पै भवत् पारविवारको मगर भाप परमो
छामको आगानिमानेमोमा ऐछ समय बोभारमी
पर भनेसी पात पार भावे ही वितरिता कोठे सिन्नाग है।
दीपि बाते पये मी गाना नहीं होता है।
इस मकोयमे पर उठा तो परखें मिरवरी मापन मिर
ऊँगा | भोर भगर नहीं हो सका, तो फारम भापको बहामना महा पोमा।
सैबिन जाने बिदेसवाको।
मापी हम पुत्वाकी दिने सामोचना मिल्य सी रेपति उपासक
परोपकारको परिकाबाको प्रमप्रमही र सई शायर बात ऐसी नहीं।
भापको तो मादम म्पये पवित्रोंमें 'ग्रमा मार मोवो कोई
सम्मारक धारको (पुसिकी वीसी) बार नहीं भेगा। मेरी माटोबना,
मवाय तीमठी मार दोगी मोटिल सिम मेरी धक्ति गार कम है।
मी नाम मत देने ली मी पनिकाम उन सान / पगा । मगर
मगले महीने में मानावना , पान, होरया । वायो 'मारतवर्ष
में मदत 'मासी में। पर मामला दमिया पीता भोग माग्यो
भारतीय मार्ग पर नमूने मैन न हो, इसीश मोर। और भापो

शरत् पत्रावली
विए तो बात ही नही-माहादको रसमेन और ही नहीं येगा । म समय
माफ्की 'पदो पापुर बड़ो दिन (को वापूधमा दिन) में भोमुक
पोपरी बापू सिमे 'मुधियाना' पावे। उसकी पपरि कोई कमी नहीं
(म गनेकी ही बात है) पर पर मुझे मला नागा। मैं जानता है
किस विषपर्म भापर दुम्मे कदमों और मेरे मतभेदको माप साही
मनुभव कर सकता है कि उमाने मापसे कहा कि किसी पात्रो
बन्दर बना नेत्री मापफी समय मखपारण है। मैं मी या नहीका प्रेमी
बात नहीं छिप पापी मापसे ममुपकी किसी विशेष पनर जैसी प्राधिका
पाठोरे सामने लिही उपनेमें भाप पारगत है। कन मैं बलवा कि
मनुपोको मनुप्प में दिखानको धमता माप इससे कही मषिलोर
कोई मत्पन्त गम्भीर समारोग से मफ्ने सो मापने समय एक ऐसे
ताम्पिका पुर देते कि मानक मावा किया किसी और इसकी
पानी परे। मानों इसमे उनका कोई समय तीनो। माप मी
टीर उनी वयाते। पुमा-पियार काठयेति का भी नहीं पर
बीवनरानबाने कितनी सी रेमेडी पाठ र पार करो।। मापसी
रचनाको पानाम अम्त मैगेर बिपने मागमा ही मुझ सबसे पिक
मुग्पाइसीलिए उस दिन सा था कि 'भारपारी मानिो टोक
समझने र पाठकोप शिा और सतह पर सरपर पहुँम्ना
भावमानही वो इस ग सौम्म उनले सामने निरफा हो अपगा।
रेरिन 'बदर नावे समय बरखा दुमा ताम्पिका सर रपनाम
पिठी मी रणमै राना सम्मत नही भोर राणा मी नही। पदाची
पिपरा दिन मुझे मम न बगा। उसने पिसाबमाको नहीं
पापापा।
ऐता मी दो पता किमलपुर ही समझ नहीं डा। अपद पही
पातदो। मटएर मेरे ए मा गने नधानेरी कोई बात नहीं मारो
सासरतास्मे मामिरता मपिधारवर्या की है। मार
ऐसा मा तो मारें। मलपिकार-पचाकी पातम मत दिनपत गरी

शरद पवापसी
नामोकि मैंने पदवा मिलना नहीं पाता है। अंग्रेजीमा मग्न
शान नही बने रपना मोबुरे विचारको समवा नही माती। पापमवा
भी पिपासापेक्ष है। बावोगोंको दीनही मान्येपना मिमांने ना पदो
सामायिक ममियताले यौदी एक प्रकारसे नहीं समा प्रवे। ऐसा गाव
नामकिन को पोग उनके प्रत्यक्ष मनुमबई बाहर, उप मोल पासण मी
में प्रवेश नही कर पाते हैं । पारखा दुभा क्म दिवारकी मार सभी
गा रेलया। परा पर मी समय नही पातारासी
पिता सभो भी में समी भाषा। समझते कि शो मम
समाम मावासमत ये है। मेमेबोकी बात लिए कि
जंगम मापामें भामेरनाकी पुस्तक मी नहीं और सासनेसी रम मोनी।
से मी पापामा शागिर्द मर खाना पान, पामारणा मीना है।
मुखमै मारमा, सीरि नी पाउँ दिन बाको मेने विद्वानो
मुंबसे मना मत भागने नमानेशम इसी मक्ते माये।
मैं जानता है कि मैं ऐसी ही भारोपना र ापन एि मेय पो
परसबागो भार र मापकी बनुमति नेकी मो मागसम्या नही,
पर मापकी रचनामोम मुझे क्या होने कारण ही मपनी ममता
पितमापको ग बनना पार पाई। बमर मापति महो तो इ
पानेको खामिय। मेरो परिभरा लीकार करें।
-मी घरफ्नोपामाम
-
[ भीमती लीलारानी गगोपाम्पापको लिखित ]
पासपुर (ग)
परम पानीपातु। माप पत्र मौर मिलम गुस्से मालिका
ममा । मेरो पुस्तक पपगी। प्रबार भिएस पर दूसरा पुरस्कार
और माता।

शरत् पत्राममी
मापने मलिकी माँग है। मचियाँ पिनप महा है, सच्ची पस्नु
माँ बाप भालो। म माकि किसी कार, इसपर मौनय
रिगर करना भावापा।
मापसे मेय परिसनही रखीय भषि प्रन करना पोमा नहीं देता।
पिरम पूज्नेवीपम्म होती है। भाप बाप्रम-समावड़ी नहीं मिला
विवादमौकरना चाहती है।
पाका रुपमरको रंग पा हेम मोर गुपौकी हात लरमा
उरमा दुई। इसमें सा मापो वासनिक भापचि नही है। मगर बाद,
और मार सिन' हो गते विस प्रक्षम होता है मिना कर विपेप
मम्स है ऐसा में यही समस्या ।
पर रखना तोरसर मळत ना मोरेक विचारसे इस रपनास मूम
निभित करना एक प्रेस गिगा काम नहीं।
माफ्ने मेरी मार्ग पुस्तक महिनही मी पावना। अपर पड़ी है
कमसे कम सापाव निमन बी रेती दागी करितने ही और सुन्दर बन
वमान नपामानवारण हौदाए पप और विमा
ये गये है। इससे कि मस्ने बारेमें कुछ महीना।
-श्री ज्याम्द्र पापा
पाणिपुर, सा
-
परम करमाणीपाम् । बापता पा मिध्य । मुझे पर सिर उवरी माय
करना भान्त पुराण । मेरो व सदर मारतको सार मापन से लग यां
पोलामा मोहित रानी सोकसघ पहिबार करना मेरे
मिस मनम्व है। सचमुच ही मेगोको मुसले नमिता-
में ना पा मारी है।
रिपो दानोठिमी किसी पर बनेर देखणालमापने
बोलिका दावा किमाउने इस महम्मदहोसम्म पापा

५४ शरद-पनामी पस्तु ममुम्पसे चबाने कितने विचित्र काम करवा सेती है। मुझे गो माफी स्य मक्ति करती है उसीचे पत्र विस रहा। उसकी पान बचाव रेया इसके मन्दर विना विक गर्न प्रमान! भापो कुण सिनापानी मौलोंमे कमी देखा नहीं। किसकी कन्या, किसकी गा का परिचय है, इस मी नाही बानता । पर मपनेको मेरी कोम पहन कर सोपा सौम्मग्प कदाचित् ही किसीको मिलता है- मर जिस माग्य होता है उसपर एक प्रकारका नया मचाया है। मुझे नहीं पनते हुए और एक हिन्दू परफी या होकर मी व्यपने मुझे निकोच पत्र मिला है। पाकि ऐसा एवमे नही हो सकता किन में भी मापको निासकोष पर मिल सकता हूँ प्रश्न कर सकता या मात्र मापक मनमें नहीं पी, पीसे मिल सकी। रोती तो नही मिल सकती । मेरे प्रति इना विश्वास भाप भम्बर है। समय मे इतनी पुस्तकका बिना पर्व होता। भी पात। मेरी बहन ग बायको मुझे चिनी मिना। मेरी तप्पी शिम्पा मोर सहोरराते अधिक एक मति । उन्का नाम । निरुपमा । बोआ सारिस-मात्म शायर भाफ्ले मपरिचित न हो। 'दीरी', 'मम्नपूर्वाका मन्दिर भोर 'विधि-लिपि भारि उसकी रचनाएँ । महो मी एक दिन म मपनी सोम सामग्री प्रम मारमात् विपना दोपर सन्न पगई तब मैंने उसे वारपार पही बात समझाई कि "निया होना ही नारी जीवनकी परम हानि भोर तपसा होना को परम सापकता। न दोनों में कोई भी सस्प नहीं तबसे उसे समप्र विचठे साहिममे निवाचि कर रिमा। उसकी सभी रचनाओंगा संगोपन करता और हाप पार हिलना सिलावा पा- इसलिए भाजपा मारमी बनी है। नारी होममा । पा मेरे यसो गर्दा परे। तुम्ने शिला-मिलने पतिको चाना नहाँ पापाना मही ऐवी पाक- रिपपारगाम करा रोष है। तुमारे मुम्भमे इतनी बातकी बात कीमत और मेरी रचनाएँ भगर एक मी पा-पिता प्रति तुम्हारे भम्बर करपा उत्पन्न कर सकी, मुझे बहुवा पुरसकार मिय।

शरत् पमाषसी
अब तुमारी रफ्ना समम्ममै कुछ करंग | आगर मनगिनत
पंपा उपम्पास निमारो। उनमें दो पीसेको मैंने एप किया है। परमे
गात या पुण्य की रचनाएं प्रायः मन्वयीन मोर माय । यही
नहीं, उनमें फादर माना एतमादी चुरार हुई मौर एसमें २ सम्मका
मनुभव नहीं पता है। पिता विक गनेको ही ऐसा समझते है।
दूसरी पाव या लोकपिरोकी रपनामों में भौर पारेरो कम
कम से दूसरों पुण नही है। उनोंने मम्ने रेसे परिवार को कुछ
रेला मने बीवन पपात्र मनुमा किया है, उसीको पस्सना गरा
प्रकार करनेकी पेशकीमतपय ठनमे त्रिमता मी अधिक नहीं।
हमारी रचनाम बोलनारत और मया । ठठन मुझे मुग्प किया।
रखना बहुत अच्छी नहीं रोनपर मो मम्नी माविमठाते ही मुन्दर बन पड़ी है।
मुसमे परिधि दिनमानमें समय ना मत करवाभो स्वत्र ससे पुस्तक लिखो।
में भागीरि देता तुमकिनीसे हीन न ग बोगी।
पहा तु एक उपदेश देना चाहता है। नारी लिए पति परम पूजनीय
म्पमिलते बड़ा गुरम्न है। सेकिन इस मान या नही कमी पुरुष
पामी है।मासंसार नारीको शिवना छाय विदना तुरन, उतना
और पुष नहीं।
परमी पुस्तक हिलना इसी बात को सबसे अधिक बार रमनेकी
मना । पवित्र रिम्स भी द्विारा स्वर मनम महरी हाना पाहिये । पेन्न
पति मी मनुपी मनुष्यको भगवान् म्पमें पूप करना का मही नहीं,
एम्से गा मानका मी भौर पतिको मी जेय बना देती है।
गुमन्ते एक प्रग्न भौर परंमा । "नि विषयाने पतिको घना नहीं,
परमाना नहीं "
किन बिमने एक बार बाना है पाराना है मथात् १५ १० पकी
उम्र मपरा उमे परा भरने मारे जीवन और किसी से प्यार करने पा
म्पारपरना मधिकार नहीं क्यों नही!म्प मोम रेमनेपर मन पर पपगा
दिइनमें रही संसार हिग मालिनी सिकी रसी नागडी
कोई सवतचा नहीं है।

शरत् पवाषणे
"म संशप मदर दिन बिता पी पी । जिसमे पण नही है, उसके पि
सामानही भया नहीm
बबनरामीम झेगा सास मानका मन्तिम निर्णमहोपावमा
किपिबा ही नारी ए सभेत मेव।
किन मने कहीं मी विपण-विशा नहापरापा, यह बात में विचित्र
मासी
इसका उचर
पारमै बहुधेरी विचित्र पी मोर पेश परनेपर
मी उनकारण नहीं मिम्बो।
तुम भैय भागीर्वाद ना-
की प्रचन् पोपामार
मंगया, ५ भमस्त, १९९९
बाजे सिपुरबड़ा
परम सम्पापीगातु । पापको कापी मौर बादरकी पूरी रचनाएँ सपासमय
मिल गई। भौर इन्नी ममी उप्र ने बैठा है गरेलकर सपने मापको दी
पूर्ण होपी है। ऐमा बग कि इस बार मापको बहुत-सी बाते कानेकी
भाषासमता है।न्नि मापकी तय सिमापार पत्र लिनेकी पति मुमम
पन्नी कमहिषी मिबयन सफ-साफ इना देते को निवास्त
जिला और सचों न किचरे हुए पोको पूरा पाने में उनके लिए पैर्य प्रपम
रहना काठन हो जाता है और भगर पारिची म्प समात होते यो भर्प
समाने गए एड़ी-भोगेका पसीना एकरना पड़ता है। ममिपोग विटकुछ
निरामार महा। भवन्त बिनरी दाई ममी इसका मतियार नहीं किया
मसाणा । भौर सोनमूनन मापको चित नहीं किया। बारको गुप्त
मापसे भर बाप भन्ने नमनाम पर कर देगी, दो मैं नायब नही
होपऊँगा
बहुदे सम-महिम मैरी मित्र है। उन पत्र लिने भोर मित्रकी
मंतिनिकोप होकर किसने में मुझे सिसक मही होती। मेकिन हमारा

शरत्पमापनी
समान भौर उक्त नियम-अमन ऐसे हैं कि छोरी पानवकको चिहिने में
का संकोपही नहाँ एका मी होती की माप अभिमापक या पति
कुछ समझ मोर उसके लिए मापको पुम्त उठाना पो। फिर मी बो
मारपोज्नो पा लिने मई ठससे भाप पत्रको पहार मुझे बारम्बार
बहोगा कि उनमें नारी भारम-मादा उसम एटी है या उसी टमकी
रिता हुई। या गाम्माय, या सारत और पम नारियोंमें पचीसके पर
पेरा रोवे रेपो ऐसा मुहे मही जगता। आपके बारेमे में यम्तो कर
खपिन गम्तो न रोनेते ही में निधिम्त पेगा। क्योकि नितान्त
वरण मयसको भारमीप रममासे पत्र-पबहार करन पो रिण मौर सोप
दोनो पर उस उनको पार कर हो भनापास ही समझ बागी।
पिन सबसे पसीवाद या किमने मुझेगा माई (पर)। बरे
मक सामने होरी मानपि प्रमाने कोई विशेष बात नही 1
सम्मान भोर मपादाको माप रखते हुए धर्म का रम रो और ये
पण सिना भोर बिना पाई पर माईपर अस्पागार उपाय करना,
मुस मानन्द होगा!
दुपारी विडोका मोर न किसनेम रंग उपा पंगिमा तार मुझे
पारम्पार (निम्ममा) की पार माटी है। तुम मेयोंसी रिसापरवा मानों
पानीम मंगोमारवसपार-पाँच दिनसि मर-सा हो गया। जी
महीमा पाने परम तुमारी कापीरप्पानठे पदनामबाप मिला।
पढ़ते पढ़ते रे गा बानठी । पर कीमती सीको मन मिति
सिनरी पो पारेकार उन पीयेंकी कीमत बाबानता है उसे जैना का
होय मेक पेसा । जी हाब्दमै एकदिन परि (निरपया)ी
रचनाएँ भी मिगे पी।
राध हमारे पास पहुत बीमची मान-माम मौर। पर एक
वित है। मेप पेय पी लो बारमार महो म उसी तर
दरें मी दाप पाएर साइमर मी सिना सध्या ता हमर पासे मैंने तुम
बोमाधीर्वाद दिया था, उसकी गायक -येसे भर उठनेमें भक्ति देर

शर-पापरी
नही माती और 'दीपी पी कोरिकी एक मोर पुरोगीको नमक सामने
माने में बहुत बम होता | धरा पर होनेशा नहीं हो पान करते
सा शेगा। मनमें दोषण, इस व्यासको मका योग-सा सिसा
ने ममापकारच मारो।। कौन हार ऐठा। बोm
फरकर निनमें पोय तो सिप भोर कोई शक नहीं बही रोपरिमा
गंदगीस बम सालियको पूपित भोर मायामन्त कर। पर मोने
संखरम सती उपनि, भग्ने बोलते विनाने स्नेर और प्रेमीसम्म
का मनुमा बिारे मन्तब ही पोपवे है। दुतकी भागमें पर
गिनी मनुद्धि र भोर सत् मही पाई, महीपर बा AR
सना मार मा पहार अमिय भाग- इस वयनीपेकी मोर
पडा परपमै भनुमापने ही किसी बातो मापाम मकमा
किसाबसा | समी बीमा इम्न- दीनना पडता है और यह
जोगना सा अपने भाप मही होगा कि क्या कर दी, तुर्ग लाकर
निष्पमापी स्याना ई मा भरधना और सनी उरिए
नरोध करनेटसा होगा।
बो गुरु मी हो म मोरे पम एक उपदेश देतानाको भपायों में
निमक धाहिये और सपना चीरा माना मग रेस मासे न
कसारावर पाय-याविषमरते पालना पाहिसे। हाँ ऐख मा पिास
समय पानी मेरी मासे पाठोपपीरस गरी पर।
और परमात या पिक -मोरी पायो र मनको और
पाठीको पुवन ना पालि। एवेरी गावे मी पस्पना पररा
मेनी चाहिए किम कुकरेता को मौर मुहका पाठक पूर्ण कर मा
पए गिधा-सापेठ मी मोर इमि-बातमी।
भर तुम्ाय स्या पर है। मप्पापोम पोरडर मे पुरंगम
मिलना भारग्म परो भोर दो मापार सर मेरे पास मेये, में घर-पूरकर
(मम्ना नाम्पम्प पर मनुवार) में अपत पर गा मोर उमरखर

शत्-पचापली माग्नेका भरण मी रित गा। या परिश्रम में माँ पगा बनवी दो मेमा तुमारे द्वारा सचमुच ही सरिस्पर मदिरमे पूजाको सामना गुयने Pए भोर या माण करता है कि यह चीम पहुस तुम मम्पकी म होगी। परि मारे मन्दर इस बस्तुका मूल स्थ नहीं देलता तो तुम सिर्फ एबीपस्नबाली मरवाका मा म एणमाकी बाते मिलकर मपना मोर प्रमाण नौका समय मर नहाकरता । मेरी इस बावको पार रखना, मेरे मागीदिसे तुम किसीसे कम भी न होगी। ठमारी कापी ऐ पार दिन बाद वापस कर देगा। 'काडोकानी मेय परिनीता वय मौर एक पार भन्मार्पोमें पौरपर नहीं सकती हो। दीरी पहले मात दुम पहुच कर उठाना पाताहै भरिन्गु होनेसे काम नहीं पाता। यह बस्तु इसने दुल और इज्ने परिश्रमकी रोने कारण ही इसका इना मूल है। पासे ऐसा मावा है बत-सा परिभम म्पर्य मा पारे। लेकिन कोई परिभम कमी पपाप नर नहीं होता -विधी-न-किनी मम उसका मिता ही है। पत त हो गई। कार पने लिए पापात मित-पो मा रहीइसलिए भाग यहाँ समाप्त करता हूँ। भाव मी फेरमै मम नहीं पाने र निम गरी यगई। कर उठा कर पाना मोर की भगर कोई पात सितम्बार नहीं है वोपरापा' गाने कारण मुझे माफ करना । मेरा भाचोदना । रात पदे पाय पसे । तुमारारावा। पर ठीकमगेगा तब स्वप दी मासिक पत्रमें अपने लिए मेवगा। मेरे मेग्नेसे भी कोई सम्पादक 'ना' नहीं परम । पायनते कि उपपुरुन होनेपर में नहीं भेगा। परपीडो कारण तुर्म गुरु कम समय मिता पर मेर। फिर मी या सब कि मनवाई भरर दोपपर कमी समप मिन बावरे, किन भपका भार को काम करनेका माय मी मिता।

शरद पत्रावली पाये बिपुर, सप परम स्पापीरा । पर मोर भाव तुमारीपी मौर शेयरोनी पिदियों मिर्च। पहले माना समाचार रे। में हमेण सारे दरवामे भौर सिर्गि लोसार सोता है। उस दिन चार रमे नीर स्नेपर लामो बिसर पिया भौर सरपोते इस तरह मीग गये किमड़ा गया है और दुर्भाम्प कौगाताकि उस दिन प्रमको मी पस्तम कम नहीं मांगा था। सोको मिलाकर कुलर-सा हो गया। लेकिन एक दिनम टीक नहीं हुमा, परवाही या। भर पा स्वर मा इमर्गबात भोर मी मजेदार है। दिन पाहिने पैर पुग्ने कुछ नीये इरानी कान भौर बुली हुरहो गया। चार दिन पहले मेरे उठकर देखा कि एक बार होकर एमिमा स्म हो गया। कुछ कुछ सम्न माहै। कुछ दिनों से सुन पा पाकिस तरफ शिरी-बेरा रोगसूपहाता है पर पापा भात मी रेसने मौका नहीं मिम्म । सेवा प्रबर उसीने पगा। उतक मारे गुरा हामगा। रिपर भावोगन गाना एकररिया। किनबार बयावार गानेसे उल्ने पेखर भरण दिया कि सबमुप रो-रीका होना की माता। सरने मार दुरी टरा करारना गुरुवा-आपमें क्या किसी विपरमें पनि मौसम नहीं है। मा कास्टिक पा एडिर-पेरियार ये कुछ बारें बरें में पाया जो बारम ठगे होकर वा मोर मासिकसमस्या करने रा गरे-दोनो को तकियेपर रखकर पुरचाप पो पाये। गरीरी, इसलिए पा भा है। तीसरी भाप रोगी नहाँगा इतना कम वावरिया मी पात महापरता किती उठे मी भूत नहीं मरना प। उस दिन परपर बनाये गये पारस्ती लिम दिपे। पर मामी उनकी कार भा रही है। मैं इस देश मगहर मानी है। पाने से किसी बीपका भातानी मुहम नहीं गाता मुसवे या मापार देने सदा बार ! मा करतो होरी, ठीक- परमेग नहीं समझते। पासापते कम सानेवारण ही में पुरम गया है। मतएप साने ही उनकी र मोय होकर पपी होगा। कुछ समे शरत् पत्रावरी सीप गिरीश पाने माने माइसन में मस्त बातडी एक पास भी है- माधवी भाची होठी, मरनेपर मो लाती।" भोरखकी बातिको उनाने पाचान दिया था ! मायबीस वर्ष पहले से हम अपने कोही पर गठी पामते मा । नौने नौ सपा और न खार दुषले हो गये । पर-पास्ती भोर रसोई पिस सिगो रोनों मौत पर्वगी पो बार रागिनी हो बागी इवादि कितनी ही पाते। मैं कारण है-~मो माई, गिनी होना भी हो मायो । म पो मुझे र दिखा कर रेकी व्य मुख्य रही हो। याम मेरे दुलको पिसीने नहा रेला । मैं मम्मर सोचा कि मगर समुपदी sd वर्ग, तो यहाँ एक मारमा पूसोको स्मने मिय इवनी बबईसी नहीं करवा होया भोर भयर है तो में नरकसपना ही पसन्द काँगा। २, पर बात और है। कोई बीस दिन पहले से गा मियने गया, ठोकासे एक लौये कुख्ने भाकर मे रीमै दाँत मा रिपा । ममागा पुछा किचना मा। उसे अपने मे पंगुरते बचाने गया था। मारे स्तिी का ना । सूना गया था किन फससे फिर पर होगा। किन्न मा नी । पिपास यहीं मानी पारिफ शादी तालिकाको एक प्रकारसे समाप्त करता है। किन सुसकी बात है कि मेरो गया है। मासे एन-एक बराना कर पाना रोगा। न पने रितने प्रदुतरेप और भापत-विपतकबीच ४ वर्ष काटेमुना मेरे रशम भावक ४ का कोई नहीं पहुंचा। मसे कम इस बात को मैने भन्ने बापदाको हराया है। भोर चाहिये हो सका। बाने पूरे मरने बौनेको कर प्रम मोगको पहिम नहीं करना चारा । पिन दो तुम मी जेमकी नही हो परका पतन रामना। परिश्रम करनेसरी भागस्पना नहीं, पी कर पर और भाभी तसा होन। मारी कापीपी सारी रचनामोको पान पठ गया। इसमें नोकिन शिक्षा मदी । बारिस सम्म करने का मी मापच फरना चाहिए माई, नही दोपस मपनी मनुभूतिक सम्पबमे काम नही मनवा ! पर मैं इसी पेमे है और पना कितना सिन्ध मेनेमें मुझे भाषिक देर नही मोगी।

पारपत्रापरी किसना मिलना चाहिए, कि बीबको छोड़ देना पारिप, सिपी बागचाहिए- "माधान नब कवितब मन मूमि रमेर नमस्थान भयोभार देवे देर सत्पनी।" इतनी ही स्प बात दूसरी नहीं है। दोरी तिनी पनाएँ पम्वा । उनसे सारी मी मिलनी पारिये। सो साफ-साफ पाना पाप, रणरेसे पो पाठी मुंबसे पावा सेना चाहिये।, पुमारी मिनी जामता पर सवा पाप पर किनार, कार-सम्प, रगर उनी महारोगी निम्मे पेश करनी दोबागी । और इस बार मी परम निर सका हो तुमारे हिन्दुस्तानियो देशमै १०~१५Rमरपा नदी मकान मेकर पोड़ी सी बायता करनेकी पेशकस्मा। और मगर मेरे बनाउन माससने उस पर लिया तो वह पाहता मरिमा १ वियफर में उनसे बात सामने त भनेको पार मुझे माचिरी नहीं होती है। एक बात साप पर ये पूरते सुनने में ही मी गई। उप विwिart! रोबारको छोरर मन-दी-मन मा पाव परती है। उर्म निरन्तर ताकि उन भमरको मापति सानीलिए मेरे सामने मन नही मिस्तीहै। उनमा मात्र बना मकीहाते पेख मराठा इनों मे कार्य मको बंगाममैं मोर नही । दीदी मैंने कमी मी साने एवेश मेद नही किमान मरिबार मी नमी साता ! सा! TIनि म प दोनों मा भौर शा मी वापस हुमा है। सयानी ने एक बनण विगाव महा मेरिन उस माती मिही- तुम्सा पुष में नहा लाय। बात परत्वाम् रहीही बाते हिनने पर पर पपापम मत पार।मारनी मीमा बन्न र गुनार इन दामोदर मी ! और वापर मा मरेगा। परम सारे कामाने कुमपा दम्बी है। सर्व जन हरर और पा बीते और मानुनारि गले यातक एक बार सवार परिमारियाँ शरत् पनापटी को रेसाबोसचमुपही मदाडी पाटी।बी ए पार होनेपर भी हमारीपान में और उनमें मन्दर नहीं मिा बसकता। इतनो भाटीवि स्मता भाग मी हिन्दू परियो हो। माथिोकी निन्दा रहा। इसलिए शायद में बात कोष हो या होगा । नि बनी तो दोदी सदर मन्दर तुम सोगों प्रति मुझमें तिनी प्रदा विवना स्नेहै। उनका बनना बयाका प्रान मौर सरकारपति रोशनीका रम्म, और बोरुपमही उमा मान हमी पाने ऐसार मुझे इवनी भनि। उबरे सामने तुम ममारसी पात्र बनोगी १ मा गई इनसे एकाप दर्षन को गारीमें भरार भयर तुमारे कानपुरको भायन कर सकता । मोर कुन रो, माइमाम मा सस्ती । 'साकी मर्याशा बानोमी, हमारे साई दादा नहीं है। हमारे पतिक उपर विरोधी पाठ सुनकर ही बुर्ण हु। मेरो करें भाशीर्वाद देता। मन दीदी उनै एक पाठ पानेगरम हाती है। मैंने स्वयं पापनमें एक बार प्रसाद तो त्यागिनो पयाम्निोंका रविदास पर दिया था। पात समर बहुत स्पपे इस्ये ना हुए थे।किन उससे मुझे एक पिता भी मिली थी। परनामी रंग-मरम फैल गई पर इस बात भारिप म अन हा साग भाती। उनमें भस्मी प्रतिमत प्राया समवाय। विपाएँ बहुत कम है। पति कीविव गनेसे । स्पा मोर को पारेम रखनेते दो सा! भोर विषया होनसे मोक्या! दरा, भनेकसे ही नारी भरना धर्म नर करनेए सेपार रोटी भोर लिस लिए होगी। पापर-पुरणका कामही मोर रिमी बीमस प्राधिका येम भी नीमनी इनी बड़ी बस्तुको नए करती। वो बार बार रिसी माम पस्नुको पाने प्रेमवे मही, नि किसी ने भनेको मुक्त करने लिए री इस स्वको सिरपर उठा लेती हैं। इन ना पाती तुम पायद नही समझोमी भौर मैप पाना मी पायर मा रही रेवा। दिन सबसे बड़ी बात पाकिम यो सब नारो ही नहीं है मेरी ये बहन मी ऐन ! मोर संसारमें यह पल निवान्वष्ठ मही।

६४ शरत् पत्रावठी कहानी के भीतर कितना सब और बितनो अस्पना नहीं बना। मेश्मि भार कस्मना वो माग ही पहादुरीकी बात है। रेलग सारा ये ठिकाना नहीं। बाकौन है। मत्र परिवारेमे जाना चाहिये । उसे भधिक चिर्नोसे नहीं बनवा सही सामान किया निर्मचरित्र और सचमुच ही बात भगागा है। तुम छयद 'दीरीका मी के पोकि उम्रम घापर दो-चार महाने मेयही हापा । उससे कभी किसी मारी मर्यादा नहीं होगी मेरा तो यहो विश्वास है । उसे तुम मि बिन हमळी, कोई नुरुगन नहीं। भोर रस भन्मया तुम मी तो विशुन कर्म हो न । किकाता सम्मानी मरा मेरीद पारमा किया तुमारे निकर सुरमित रोगी । सुनता कि इसी बीच या प्रचार कर कि घोड़े ही दिनों में बगला-साहित्पमें एक ऐसी सिका रिसाई पानेवाली। बोकिती मीचे नीलोगो । म एक मारमो उस 'मिसन'को भनेए मेरी सवामद करने भाषा था । मन नही रिला । पारि पत्रिम उपयुक्त नहीं है। बस्दपायकी बरत महा। मुझे बहुत मम रहेंगे, बानता है। निमा परनेबानी भी कमी नबोगी, या मागता है। मैं पीरब सकर एक बन्ना इन्तयर कर बर मासिक पत्रिकामे उरने लिए दूंगा वा सम्पर बागा येया। मैंन तो तुम सिमा बनाना स्वीकार कर लिया है। पर देखना बान, मतम पूरी गुरको मारनेकी विषण नहीं हासिक पर मेना ! मासो मुमते बड़ी तेहगई। माता! तुम मी की हो ब्यमो। सारमै AT कुछ मी मही कुछ मी नदी का भया । मेन इसे स्वीकार गाना गुमसन हरित रोगी कम अंगी दी गई हो भन कोई रोग नहाँ।। नहाँ यो रिकी बीमारीमामे भारमी को प्रगिर्द नही बनाउँगा। उसे पाये गरका प्रमाणपत्र पेश करना होगा, इस बातको सवारी देता है। मैं परिभम पर सिताउंगा मोर तुम मचानक पर बोगी मेरे परममा रेशर रागी गानो रोनेन। हमने एक बार बिना पा मापन परिपित भौरामपुर। और 'समरामपुर स्सा मारिचित है। ठठ मरिया मोर परोकी रामगोपाल मामानी।

शरत् पप्रायसी मन बार ऐसे भावमी तो शायद ही मि। रिछपे पैमान महीनेम इमी से याम्पत (लिमहो) का मामवण नर्स स्वीपर पर सच । बषयमपुरको पक थोर साली मुझे सदा पाती है मौर में दावा है उसे सारी दी। गरी जा रही हो। बर मारा बम मी महा मा पा सर मैं उस हरी नरकन्निारे पकी सिमियों बरोरवा पा और फन्दा गवार गिरगर परवा पा । भोर, खिने दिनों की बात परेक नहीं बनी थी वम पटे स्वीमरपर पर मापसे चाना पाता था। मारे गलेको मी में शायद भोलोंसे देत रहा। बा दमारे परसे निकरते ही दारिने र सूरय नही निvat! उन दिनों सती-वाय या मी तय किसी नामका पार पा। उमारे पसे शायर रोमी रोगा। सामना गर पठा करता था। मही बानता उस पारका मस्तिम भावमापा महो। 'पुमकाको माने-बानमें कोई पापा मही दिखाई पड़ती | मा, बर्मा कोहनी बाते से मान बहका मजिस्ट्रेर (स्पिी) म्पूफ था, पर किसने बताया। मोरसे बाने माना पस्ता मा बिसस मना । सचमुच ही पमि पो हो, सो गयी। उठ का कोई मा स्थान नही, मिसे किसी दिन इन पोनों परोने न नाप हो, फिर मी मेरे से मर्मसमीर वारणा गरम कमी। 'रामटरमी' मिलेगी ! पर धारी मनगढन्त कहानी है। मौकान्त उपमा सिरा मोर कुछ नहीं है। उन निराधार मामाहोपर प्पान महीना पादिमा पानी काम की जानी ! तुम बोबो यो दोषी पनी पारम्बार यस भापदि देखा है। मेरे कानेपर मी मी साम्प प्रति मूबर मी परवा नहीं करना । मरता नहीं कि मी न बने पो मारे प्रति कसा ले सम हो गरा है। पर पार मारे नतीर पाव। मुस ऐसा ग गाकि भगर ऐसा मानमो नहाँ हावा तागामे कम तुममा रेलए श्रमपुर मावा । मेन कभी पाहानेका नो पामी पनवाई। गारे दोनों पणे को बहुत-पात पापकार देता है। उगे माँ-बापम गुण मिल गया दो बार जप म । मेकिन तुमोक्ति पर में अरब ५ मार शारत् पत्रावली बनाना होगा। मर बानेसे काम नहीं चपेगा। ऐसा होनेपर मुझे मी प्रयर एपमुप ही बार होगा।पारा सच ता किम्मरी सितम्रो मिलो चिनी सामने मुझे इस बेतरतीय छिी भेम्नेमप भावी है। पाजे शिवपुर • मार, १३२५ परमकमानीयानु । उमारी पिनी मिमी ! कामदी पाते ।। बीते मुझे पसे मामा पी। जिन पर रीदी जमवा मोर कुछ नही समय। को बानवी ! बार- बर-सप रसादिक परोकी भामम उसे सम्बर बो मधुर वा वा उम्रपान ही सून गवा । हो मनिकन सेतो मारे पगैकी कौन स्वीबोन पार्टीको कुछ कुछ नहीं करती। बने रो। तुमसे मुझे शितीर माण। तुमारीबो उस पी मनुमक रचना होनेकी उस है। सोए मैं तुम सिखा मेना पाया है। भोर यदी समारी किसी रपनाको भने ने सि बार नहीं हुभा । मैं मम ठप बानता किमपनी रचना मपने नामसे ये मोम स्नेकी साप बोचे होती है। मेरन पामी बानता कि तुम एक साम सर करोगी। मनमानेकपा मुरिषा नहीं है। ना मी सम्भा नहीं। रिमी एक बार छापर उपर मारूंगा। वहाँगा भी तुमसे एक पर मुकाव होना मना सकता किनीकी किताये तो परती में पदवर मी मगर सौत नही सती दो से दो दिन भिया र ऐना गया पणा बना रेगे । मापात लिन सब।पपामा सिमानेडी पीन भी नही ।रि मी "पही जैन मुनीने मृापुरे उमर उसका 'इसाद पारि" मैं उपम्पित होता तो किसने पहले तुम पर कर देता किबो हुन्नी मर गया १ को पूर्ण कपनीमें भरकर न माया उस समय पहले दो प्रोग इठिनास पाठपात कर देता है। मैं बता तो काम पुरा या काने पापे बहीबाना पाहत्य भिारम्भ करना ही मसे कठिन रोग है। इसोपर प्रायानगरो पुस्तक निभा परती है। - 1 शरद पवापसी ६७ मान मे मगर इस तरासे पुरू होता-एक दिन तुल्सीकी मृत देश रमणनमें, राममें परिणत हो रही थी। उसी देह मारकी नागी मरी निकरी सम्प साथी । उस पर निर्वाणाम्मुन बिन्यत्री दीप्त गरम न माने सिनी देरसे विविध रेलामो बन्नेह पी पी किसीने ध्यान नहीं दिया। मानक एक समय उौपर पाय ठकुरानीकी मिपावे ही मानो या फित हो गई। लपास मापा कि नश्वर गेली मी प्रमी समाप्ति हुई। वही मानों महम्मात् मरने बानकी मूर्ति पारण किये कही। उमा तराका मनुसनीय रूप उती वा अन्त माधुर्य र मानों गहरे विचारकी छापा पड़ी हुई है। और इस सपा मावपिनाकी ओर देखरेखकर उनकी चिन्ताका दक्ष प्रतीत कितने ही तुम्न-मनौकी कानिपो मदरसे अरा-चित्रकी मवि संपरण करने हया । उमे पाद माई उस दिनको पात, बा मुझसीने पतिको लोकर कुल निगहोकर पापा उस परम पैर रखा था। उस पार किस प्रकारसे उसने भग्ने पूर्ण विकसित मवण्यको बेगी मम्से विखा गुप्त , उसकी परी सो पाम्पीमें सोलहों माने एक पर दिया इस्पारि इस मवीत टिएसको मिलने पर समाप्त किरा पा सरना माप सापोंकि इस भावको ध्यान रखना ही होगा कि पुस्तकम बाहिर नदी जायेगा भवएप उस परिषको निवारजेडी मधिसभापता नही होती। इस बार हानी लिखने में पहले से भरपते। उस प्रति भति- रित पान देने की भावसकता नही। बोबो योग तुमारी पुस्तकमे रोये पाले उन परिवो मम्ने मन्दर सरना चाहिये। पैसे मान पनि गुम मी मौति बनतीको पारे मिसाया मारे पनि । मबार ये रान परिष मरने गुण-गोको किये हुए गितमाम में निकर सकते हैं उठीको निमित पर सेना चाहिये। मान तुमारे पिक भरने फार्मो भनर, मपने मामय मुख्दो में, नगारे पति मम्ने मित्रकी नौकरी, उारवा, या मायमै, मी हर पूर्णता प्राप्त र मह वमी पानी नही करनेडी चा करनी पारिपेनहाँका परिदीपनी पार र मापा-पम्बोपरनेत्री भावाप पवनावी । मिली है उसडी कानी मपरोपटी है। मौर मी पर्य-मोमै पौर, दिन रिसन य-परमानी परे

शारत् पत्रापसी
बिना चिट्टी करताना कठिन है। इनॉएम किसी दिन या मागा।
मेकिन या रिना मारेगा, इसे मेरे माता दो बानते tr
मिनत भाशीर्वाद ना। -मारा द्वारा भी शरणम् शेपापाब
'मेरा मन
पावे मिपुर,
२४-११-२५
परम कम्पामागास । पम पर सारस बजे दीरी परसे मैग्नपर भाब
मेरे तुमारी मोर सरोजली बिही मिली। उसकी चिटी भनेनीम है। ती
भागी नहीं जानता इसलिए भी जरा समझ नहीं पाया। किसी पिन् ।
मित्र मानेपर पड़ाकर पारमै बगाव दंगा ।
दीदीको सका क्रियाकर्म रोप्मचाममे किया गया। में बने कामम
मस्त था । उनी मा में इनफारम्य दुरुपर बहुत पास है गरीब तुली
कुलबम नही मगे। सामोती दुगना पा, पुर यसको
मार का और कुछ टार सम्ता वो भौर मही वो दो-तीन पिर बाते।
बदकिस्मतीसे पम्त होगा। (पा और सात रोपपत्री कमीम ही तुमारे
मसान्त बराम में तेरी भाभव मिसपा) फिर मी वापस मा
गया पा गुरु वा मादि मना करने सए । मार ऐसा ग पाकिस
समेत माना ही दुलार कारी स्पारो बारगा। भाव किसी ससा
दुमा । भोर इसी तरह दवा पापो परखें रिचईगा।
महागरात।
पाबे विषपुर (का)
परम फस्पानीण " बारिणकाफैनम बानेडी मेरी बड़ी इप्स भी।
पर भग्नी नई पाठशाला काममै इन्ना मस्त था कि मानेका समर नही
मिला। मरनेको मन पासे परिचित समीकामा पार पाँचभनेकी पेश

शरपप्रावटी
पर पाई। इसमें मनेक सामरिक धुरियों भनेक प्रकार सकारों की बाते
पति गी-माने लिए भर दुमपा मापा है। इस मापका रस
पीपर मम्मे पितनी ही गाँटे पा । पर इतमीनानमे बैठकर उन
साम्नेकी उन भन महा। इसलिए पुण्याची परपी।
पायर मारे पिताजी पायव भाव मम्मे है। रोजी चिट्ठीसे
पेमा होगा।
मेरी बार पपा देने मि तुम ठोग मिरी बागे। भतएकरव
विप में निमित दायका स्नेह और भाजीमार मेना । दमबाग पर
इस बात पर मापना पनि निखिम नगई।
मागे शिवपुर (ग)
परमझम्माजीमामु,-मेगा भाव तुमारी बिट्टी मिल्ये। तुमवार नहीं
सा, पाक समीकमी कारपरी । दीरी पपायम सरस समय
मुहेपरा मी फर्मत नहा। कमिसन पाम गर्यमा तो फिर पद
समय मिले । मावस मुझे निरन्तर ये पर्व परमासे महात्मा गाम्भीर
जामा दिन पार भावे।।
में एक पारिपर था | मेरे बगारा भादमी मौर सामने मत बन
सप'चान गरेर गोरीला पिरकर मर गये। उस बम में मामानी,
मुसे को नहीं पी। दिनी री पार मामी होगा उस नि मनिगमकी
पोलीसी नीगी। मामगा। उसने मी भाषापटा पोr 'घर
बाने शिवपुर सपा
१नवरी १९२१
परम पावसामु । यपाते और मागा। कवि समास पाने पारी

शरद-पप्रापली पग भाया था, तबीयत APK सराप हो जाने कारण । सोपा या घले पावत विही सिगा, पर मिल नहीं सका | गपा पहुंचकर वहाँ जिसनेकी सोची परवा मी नहीं हुमा । मब पेटार बाप रहा। याबोमा र बलि सोचता है पर रिमय नहीं रुकी मी एक कीमत, नितान्त तुप बात नहीं है। लेकिन इस बावको कितने प्रेग समम 11 कामपनी कीमत अपने ही पास रखो, हमारी ममूस्त छिी पाच देना उसासे मारा काम पम पपगा। किसी समय मेरे बारेमें समीपाते कि उसका परीर बनी रमा-मामाका है।और भारतमा सने भाई मामिो बन्नुपान्वय काग। कि उसकी दोको दमा-माया पूतक नर्स गई। कागतकी मी कीमत है। परते समतसे हम वास्ता नहीं तुम्हारी पालेकी गैरीमती पस्त हो पादिम । परको परिचीताने उस सरम स्वर मिपा। घर उनका स्तर और समी स्वरोंसे ऊँचा-गरा पामे शिवपुर, रग, २ मई, १९९५ पग्मकस्पानीपासुई शिव हुए मेरे ऊपर एक दुर्मग्ना भरी।। एचसंत पम्म बचतर्वस पा भवानको अपने भगवास हमा । मकाम कसम हुमा। हालाप सम्म मोदुमा । सोचा था इस साल कुल भी नहीं रख छोगा, पर कुछ समाप्त करेगा। पर पूरे सम्पप्त होने से मकुछ स्थगित गा । मेकिन यह भी तो कुछ कम विपत्ति नहीं कितनी होने में मार्फत भरना पपासर्वस्व मेरे ही कर्म इस विश्वासमै बमा रखा था कि मैं मी उन पोता नहीं दूंगा। माइले पाई-गई पुस्ता र देना रोमा । पाहुतेरे परिवाका मार मेरे हो कर पा | समझमें नहीं पता उनमा पांगा । मेपिन पाठ निमित है कि मे बन्द करनेसे उनका चूमा मर्म बनेगा । मगवान् मगर देते हैं तो पाएमरी बात है। सोप रहा। दो-तीन तबार दिन-रात परिभम कर देस बिकम म पौर-उपयर परे

शरपनावटी
मा मई। सम्योपण या सरे, धिया परिपागडोरी
तुम्हारारारा
गाजे पिपुर (मा)
१. मई १९२५
परमपरानीवाम । इस समप यहाँ नहाया । वीनेक परे दुए बारिमामले
पर येरने पर तुम्सप पोस्ट-कार मित्र, रसीबिए ठीक समपपर दिौका पवार
नरेसका।
हुम्ली मेड हमारे कपि काय नमम हत्यम मनमन कर मरणासन
है। एक बड़ी पारीसे व्या है, मगर मुपारपरने दें और ने-
पर मेरे मनुरोपते भार या मिर खानेके लिए पसी हो। न दोन नदिए
माया नही रेलवा । एक सम्बे पनि है। बापूको छोड़कर शायद इस
पकना या कपि दूसरा नहीं।
सामताने, पानिवास पोस्ट
गिरदा, १३ कार्तिक १३५
परमसापीपाला टीश कुमार विही मिरी। इसी ठप पाप-बीच में
मपना कुम समाचार ना।
मे #ससे म्प प्रम्पत सन्यासी थे, पापर तुमने सुना होगा।पर पुनदिन
पाने पास मौरसर मंगळवारी रावको कीमार पो। निरन्तर पाने मगे-
पारमार बीमारी पर पर जिपिट हो गया, इस छोड़ देनकी दी भावास
पता है। मगरे रिन एक बडे पर मोर विचर होरर पुर मार मार भोर
मेनी जोपर सिर रतार शरीर साय कर दिवा, दीली, मैं बह और प्रकाप
मर पे

शरत्पमापनी ११ [ श्री हरिदास शासीको लिक्षित] पा-शिवपुर हमा हमारी रिनी पड़ी। इस पाराशीकी ने बोगीली मीरम एवळ माँ भारमाय से मगे। पर तुम्हारे बारे में कुछ मी नही मनवा । रत पत्रको पढ़ने में समय नए मरस्म हुमा । पर समर स्पा मार, दर पम, निक मिमिला मोर की उतने धर्म स स प बने और मेरे पढ़ने 10 सापने में 50 मी ना ना मा, परिसर मेमा । नारियों लिए २२ से ३५ पीपली सगरमा होती है। मोंकि २१२३ बारा एबमुबका प्रेम बात होता है माम्यात्मक प्पारसे इसकी लाश नहीं मिटती । सकिन पापुमा एक पर-हारी रिक पारितु एक लय पर मी मोर पी रिकारको मीमालाविहीन समला। समागम वापर ऐसा नवा पर मिन दरोबार पबियोt यापम होता है उन समान मागतान् मी नहा मोर मागे मी मान तुर्मापस ही काम्प-नगा साय माधुर्य सभित हो मरे पर या बड़ा मप या इमाय नही है- 'मुन दुमदुरी माई- मुपेर व्यगिया मेरे पीरिति दुम भाप लार टीई।" समाम्म गौरव प्रदान ना शिस्या सम हमके पण मुभी मसाबा नम्व। माहान प्रेमका मार होते सिरोपा ! 'एला मामा भानी ही बात नही भाषी स्वारीत सबन परी है। उन पर नरेश राय पर धमा मुद को प्रेम भी नही है। एक पापपप प्यार करनेते विणे पकि और साल पुगसे पते मषित। मो मा मानी 1 पुण बमा लिहावे , मिर्ग बसर मा उम्पत्तरसे सौपना करने

शरत्-पत्रावरी
इविधा नहीं करती। उमार मरिचार प्रस्पापारका बो पसे प्रतिवाद करता
है उसको दुत मोगना पाया।
पहा पाता सम्पे पार बिए परम पुन मोगना पड़ता है।
कोई न करे तो उमाबो तुरे मन्यामा प्रतिकार कैसे होगा। पमा बिस्द
प्रना और धर्म बना एक पद नहीं है। इस बावको ही लेग मूब
बते।।
-(साना, स्पस १९)
१२
[भी भक्षपचन्द्र सरकारको लिखित
विषय, हमारे उपम्पानको नारा बनाकर भमिनप मने समयमै
पारण निगम इवना पा मारक हपापा नाही वा सोया और कोई
माग पिपेटरवाब उससे मपान नहीं कर सहेगा । परि पा न हो तो
सोडते भमिनप परने और उसए रिप्रदेखने में मेरी कोई मनाई नहीं है।
मुझे 'दचा' उम्पासका एक नारस नेमे मिहा। स्वयं ही मक
रोपदम सिरा' नाम उते 'स्पर पिपेर को देना बेमा है। मेरे
उपम्याना में बाप पारिमारक बनाने लिए उने भनेक स्पानोपर नये
विस मिलना पाय है।
पारिबोयरे लिए प्रठिनाई
पाये नये मिते तो पुरे नहीं
सच्चे। पुम्तम्म गोपा नाँच उर-रे र एक सहारने
सिपाप होते हैं। इसीलिए प्रासा रेलवण भणे नहीं होते।
भापका-सत्ग (मासिक पमुमठी माप १३४)

शरद-पापडी
[श्री दिलीपलमार रायफो लिखित
सामवापेक, पो पानित्राम,
बिहावका
२२ मात्र, १९५२
मष्ट्रगम, इमारी पुरुष मोर रमेटी विद मिम्मे । रात दिनमें पुस्तकको
पर व्यास किया । अगुव मी थी। मन रोयिों मी है।
मारतकवायो गाने नमानेकाम भरना नाम न रेलकर यु सिनामा ।
बेकिन निमिव मते अमवा या गाठी तुमारी कायमही है। मयावधनी-
कारण दीदो गई। भौर सबिम्पमतेम सुधार दोमे इबारेमें मुझे
मात्र सो नहीं है। सुपार देना भूम्मा म | गपवार मममसर महापर
'एमासमा मये मूगे मूमें' का उम्मकार मी पाहिये । पारि मेरा
विधात पाकिन दुर करतोई पुखार्म हरिकी बाते । एक मत
मेरा विशप है। तुम्ने पूग्नीप रविवायूध एक कपन दात किया है कि
"पोम मममा परम्प रस निमन्त्रण-ठमा पार
मोगनमै उनका पूरा-धोडी म्पबस्पा पर 1, भौर 'सम्देशों को परा
एसट उनए रिको भादमी करते।" पात सुनमे मी
भौर मिनाने रिता उनकी मानसिक सगरम मोर निरपेक्षता मी पपाम
प्रपाटी । चिपास्तवम बना पा गयन तप नही । शिक्षा,
पम्पता और पर ए मेरी पाहिपे मार धूम-मा सिन्धते हो,
तो परली पाहाते या परेशान रामा । भोर सर्वधारपर मान 1ोरे मेग
और देसामाईरही बाधे हैं। एक उदारम गे। पीसे स्वतापरण
पैमाने तुम तेरापारम्पर्शिका पार पाकर भारत रेगा सीसरे
कोर मचानक तरे में पदना गुर (या है। मपम सिरम
इनमेरो-वीन नोको तीरमार पसे विन ररानेपर रख पा पमाण

शरत्-पमापसी
०५
दोबारविमुकी हिम्मत मौर मचि होगे उस कमरेका म्पबहार
। एक टोकरी मिहीछे मेकर पनेत्री भुपनी, पको ससार सीमें-
ति सपको मिलने देता है, वह पा भी मूल समारोबात पर
मदर सोने में बैठकर स्न्देश सानेगी मी एक पोग्पद्य उसे मन
परना शेताबावको सवारसमी देयोपो चिन्तासम्पतियोंने
परम मी सीकार किया करते हो। नही हो भन्दरका बाप मुभ
पाकर भारीभमन' बोस सहा मगर जो पुस पो तो हम पा न्दिा
यसकम, भतएप इस व्यती लवरनाक मति उदार बात फिर मी नही
तुम्हारे में नहीं पा पोंकि शरीर बरा भतरप पा। दूसरा
कारण पाकिमेदिनीपुरमै प्रतिवर्ष हो नाही बार मापगी ही। माना
अनिवार्य है। सरकारने कोई प्रतिकार नहीं किया भोर न करेगी । पर पाब
पर एक स्थायी रेम्स बन गया है। इस प्रकार र पार पीषिणेकी
वहायता करनेमे कौन-सी सार्यता । मारको एक पात पारसे नही
काँगे, एक चमहा मिनी सोराय, की हार परकर पानी नहीं निकाल
गे,कहा साप परम मे बनते कि मद्र
भगौशया महार पम्पिको सपना-कपड़ा ।पौरि उन परमार
पानी मा धुमास भयमा पमा दिसारेमे मो 'मेग समय होकर
सोपवे जानते हो।मीडिए किया उन पर-परसपनेपर
पभिम बंगई मद मोग पॉपपा रंगे। पापान करने दिया ऐसा
मरर मा बारमे । लोभमा और कोई रेस महा है। मैं निर्मित
रूपसे बनास निवपमें तुमारे भगर किसी प्रकार मतमेली भात
नारितुम दुरिमान् बोनी पाउने समझोगेती।
भनार नुम रिखापतग मेरो। मावि देवक
तुमारी यात्रा निरिण भौर उरोप न । मेरो उम हो गई। परमेपर
मपर मुभाव न हो तो इस बातको पाद रखना कि मैं तुमा पियरन एम
कामना करत या माणमि कुण्डहो।
भी ज्यमा परयेगप्पास

४४
शरद पापली
१३
[थी दिलीपकपार रायको लिखित
बमठायो पो. पानिपाव
२२ मा १५३
मदाम, इमारी पुत्वा और कोच पद मियत रित पुलको
पर समास किया। पर मम्मी सी। देकिन रोए मिों मी ।
मारक बोबो गाने-बगावेगा पाना नाम म देनार पुण् सिना
पिन निमिठ स्मसे मानता रगती तमायणाय मी है। वरपनी-
कारण ही हो गईधौर मरियम इसे तुम मुपार दोगे इस बारे में gu
प्रास नहीं है। सुप्यर रेना भूम्या मन। परमादुर मगम्दार मार
'पशबरा ये पूरी मू' का उम्मेलो।।मो भाहिये ।पोरमेय
(Tataबिन हुएई पुखको मुरिकी बातें । एक म्य
भेवर पिप है। तुम्ने पनीर पिया एकचन किमा
"ततापावरम भरवा परते, महिए रसको निमवन-समामे बाहर
गनमें उपहारी मरपा रहे। भौर करेणोपन
रस्ते अनगिए कि किबो मारमा करते है।" बात नुननेम भी।
और मिनोन रिण उन मानसिक उदारता और निरपेस्वा भी पपी
मगर लेती है। मिल पास्तवम इतना मा गत सपन दूर नहीं ।
सम्पता और रसाए देश से बारसे मार मग ते दो,
वो पेरी माया पोखन रागा। और सतापाप माने मेय
और ये पागाईम दो पद है। एक उदाहरण 1 मोमवाधारम
पैमेवाने तुम रो-मार मदिरोग पर पापामास रेग्मी
दोमपानको म पदना गुरु लिया है। अपनी स्म
इनमरो-तीन बरोबो तीन पर पपे बिठा रखनेर ता पा धमाध

शरत्पत्रापली दोबारिमा हिमत भोर प्राप्ति होती है कि उस कमरेका मबहार रे। एक येरी मिहीसे मेकर, पनेडी पुंपनी पको बनार तीर्थ- पति उम को बिसने देखापा वा कमी मूड सवाबात पर मदर होने पर बैठकर सन्देश मानेकी मी एक पोम्पठा। उने भयन करना सेवा। इस बातको सवार समी रेणके बोबडे निम्तासीय पतियोंने पाम मी स्वीकार किया करते हो। नहीं तो मन्दरका दरमा तुण पाकर 'बारी भीगन मेग रग मराफर की धुध पो कोम मा मिरा रागे माप इस व्यकी सतरनाक मति उदार बात फिर कमी नहीं पाना। तुम्हारे में नहीं जा सका क्योंकि शरीर बरा मस्वस्थ पा । दूसरा कारपाकमेदिनीपुरमै प्रतिवर्ष ही नहीं पाप भावगौ दी। माना मानमा । तरकारने कोई प्रतिकार नहीं किया मौर न करेगी 1 पर बार पर एक स्वामी रेक्स बन गयी है। इस प्रकारसे हर सापार पीदिवेकी महारता परनेमें कौन-सी सार्थकता है। सरपरको एक पाव बबरसे नहीं पाँगे, पर प्रपण मिरी तोरकर, रेसकी सह परम पानी नहीं निकाल रंग-श्री साहस पारख म मेव । देबानमा मेगोका पा महान् परम्प किन खना-पढ़ा है। क्योंकि उनके पर-बारमें पनी मा कुमा। इसके मनमा पसा दिखारेमें भी मेग रखपद पर पौरमतेबानते हो। यह स्पेखिए किमयमै उन पर बापनेपर पभिम गरे मन मेग ठमें स्पा रंगे। यह परेशान करनेटिएपा ऐसी मकर बमा बदमे हैं। इनके मम्मा मौर कोई ठोस नहीं है। निश्रित पसे बनवास विश्पमें तुमारे मन्दर किसी प्रकार मधमेश्की माता नीरोमि दुरिमान् हो । मोसमी पास है उसे मांगे। मनारम रे कि तुम बिगपत बसेरो। माणर्वाद देता है कि तुम्हारी यात्रा निरिप भौर ठरेप मा हो । मेरो उम हो गई है। टनेपर मगर मुम्भपात न हो तो इस पातको याद रखना कि मैं नुमा पिरदिन प्रम- पामन्य परख या भायम रहो। भी रखसम्म ।

शारदपत्रावरी
पुनमल्सय ३१ मारो ५ ऐ आउँगा । परमपातिकम
मेवे मिनेटियपईया ।
ताम्साह, पानित्रास पोस्ट (mm)
सन १५५
परमस्यापीयु । मन तुमारी पिछी मौर रिस्ट रोनी मिल गये।
कातरम गएि समय नहीं था। क्योकि जर तुमारी चिली मिर्च,
बाबा महामाया। रविवारको मारे
रित्तपम मम्मि-
ति होनेकीरीज भी मदिन पर पल-नागपुर में स्वाल पर
पी। गादिषा पर तयने पता ही नहीं है। मी? सात माठ पटेते
कमर्म मग नहीं पहुँठी। और न म गया कोपा मा मान्यतेने
और कानों से मुननेकी पेती और सी बात है। वापसे माधव वा
माप पच मिपि हो भोर तुमारी पापा को।
मैं एत ममा मही। मीर निरन्तर क्षीप मोर चिपिट दोष पापा
मारी दोनों पुन्त पानस पदो। मनर का अन्तिम दिन
बतही मपुर सीसामु मिस संसारको बिना असा उन
बारेम तिन मन्दर सिनी म्ममा पिना मानन्द पति बावा उसे
इच पुस्लीपरमेसेबानाबार।
म मला सोन्यात पते सेतुमारे पान समासी कमी रही।सन
हम भार पर मिलने की मोर अरा पान देना होगा। मेलाम
जो शियोमा भौर पाउनबरा भोर मनसे नौ मापचरमा रोगा।
समरितना दमही पई नमिलेपी विधाको मी सकना चाहिये। हा
हवासित एरपति रातको समरठे पाना भावारी शस्त वेठ
पर बामे गमोर धारने की सम्पूर्ण हो गया। पीप-दीयम पर पैनना
तर मा भोरवीरबाबमें तुम मारम-सित हो गये हो। भगत पाठी
समूर ना मातो कि तोमड़ी सौदी पार पलगं मीनही गाना

शरद पवापसी पाहता भगर उते बरा-सी पापाजी की नरक पहुँच अनेक रासा मिम यय । हम बाठको याद रमाना रबनाईए सस्ते गड़ा कोड है। मेय स्नेह आशीवारना । सहाय मी शचन् पापप्पाप सामवायेह पानिबार पोस्ट परमसापरेषु । मष्ट्र मारी चिली पाकर पिनी युपी हुई याम मी तम्मना कठिन है। तुम मुझे भरा करते हो प्यार करते हो इसे मी भयर नही समांगा तो इस स्मारम और सा मगा ! समारे विरामपिनम्नमें ये दोग सम्मित हुए थे उन मासेमा करा मा म सुना है। तुम विदेश गारो हो मगर क्या सीमेना। तुम निकर नहीं हो पा माद भावे ही मनको का पांचवा है। 'मनेर पर मन्तिम मत तीनरा हिस्सा मुझम्विना भया गा पा पर नहीं बन सकता। मन्त्री मा जोर दुबई मदरसे सरे समारोग पक-दूसरे किन्ने भाने । यह म बाने कितने सार माबसे तुमारी पुस्ता हमन्तम निन्र उठा है। इसीलिए मुझे निरन्मगा कि तुम पर बिनोई पपार्य बाचन गुमय पानी पिपरर गये । लेकिन इसे मीर करने प्रेशको मेरा मोर पनने जाना होगा। उमारे मिताको नही पनठा पा पर उनके अन्तरंग मिसे सुनवाई किरनमें मनुम्पी मदना एमानेकी भनुभूति पो उम्म मोरित्री पी। छापर यही में उचपिपरमें मिगो। तुमे इन वस्तुपारपर्म दिनरात मन से पूर्व ममुप बनाना रोम । ठी तो ठीक होया। भाडो बाट मेरो मसे मिलना हो प्रकाशित कर सकते हो। मनुमति देता है। तुम मेरे भवियर हो। मायने नहीं बहुत दिनों से हर-मित्रों के साम मेरे पर भाकर घोरगुल मगाइरस पूड़ी सच ये ताते ।

७८
शरत्-पनायमी
में समम पसे मापीर ता कि इस मौवन सफा बनो मोरोम
पनो, दीपं सीधी बनो।
—भागरिक घरचन पोपाप्मार
-
सामताड़ प्रनिवास पोस
मात्र १११५
परमम्मानीयेषु । मष्ट बहुत दिनासे तमाये निधीका नाम नहीं है
सत्र । तुम बहुत कम हुए हागे। उस दिन तुमारे पिपेरर रोमासे परफर यमा
पा। म वो तुम पे मोर म तुमारे मामा तक हो । सफा पर है, इन्तगर
करना विविमोकिमही पानिमय नही कर सका। मेरे साप मो समन
मेरे म्पष्टिमी काम सिम्स में गा पाँचमा
करते हैं। मोने का रिकार्ड रत बानेच ही कामरामा बाकर ठे
पनेसे ये कुन होते हैं। मन कारं न राने वारप हम पुरबाप तोर भाए।
कत मी बहुत गर तुमारी 'रो पाराक कितने मोरि पर
गया । मामें पुस्तक बहुत महै। भगोना पर मे पद बनेकी
पख न । मन गार पढने के योग । मेन बनते तो हो, भागार
प्रमा-पत्रम मूल्य नहीं है। मोतिमिलिए पातकी कीमत है वही इसकी
ममयंदा परखे। इसीलिए मचानक बात नहीं करता । न बोम्म मेरी
पावर मात करते है उन सभी का है हिमपूत इस पुस्तकको भार
मप पुम्से भाखिरता पद देखो। मेय भम्ना तो पेण दो पा, फिर इसमें
पेसी बहुत-सी बाते मिरगारमें मैंने मी इमर प्रले सोकर नहीं देता है।
'भारत' (छ, १५) म समारी पार पानी पर देती।
करानी गिरमे पर उठनी भम्ही नहीं बमोहै सकिन रेसादमारे
भन्दा एक पीगल मुन्दर मनन हुभा है मौर बागपगग।हानी
रिसने कोपल या पावि भोर गपागको परा दागे -तुमारे मदर स्ति
रिन एक हो अपगी उन दिन तुम सचमुच दी पोसाहिस्पिकको बाभागे । एक
पाठ मत भूबना मन्। पनाम दिन बाना जितना कठिन है उतना
उत्तम न दिपार सपना भी कठिन है। ना बात किवीको सिरमा

। शारद पवायसी महापसी अपने भाप सोमानी पाती है। मैं निमित रूपसे बानता दसे मोकने में तुर्म है। नहीं होगी। मारो माग द्वमारी सिस्टी उड़ाते हैं, पड़ी एक दिन मेश्राम न हो, मन ही मन इन सबो स्वीकार करेंगे। मेरे परिन निकर मरे, मेन रखने रिनों बाद मी मगर मुझे भूष नहाँ गए दो मेरी या पावतुम पार मा बापणी। मिन्यको पदावान विदुर । इन ममेरे विचार परनेच समप मी भाना है। वो अब बारम्मर भावियो र होमेम दाहिना शायर मष्ण ही होगा। पानघ एकपड़ा मारी दोष मारे कि-ठी पुष्टक पद पनेच ममिमान इन योगीपर वार ही व्यता. लिए अपनी एपनाम भाना कमी महीं पता सती है गरी मापैकी मा। भोर यतो । कारक-जारव गांगो मुदी दुई विपाकी वाचता । कालीको प्रमहनी दी मिलने ठिय मना करना बिसनेमे डीमा मुछी- की पोम्पा मेलाकी नहीं, गा पात मूगना नही चाहिये । म उसमे पानी लिना मावि सना मोर मी अमा। किन्तु समागपना रियाने पेठना मना है। सारे उपन्यासमो पाईनारी सम। 'म भी गास्तरा निम्य पदा) Ana नाम दो मुना है, उनकी कोई पुवा नो पदी । भवएप उनमें और मुह शो सम्पनवा मोर कम कुछ मी महीबाना । निकधम मेरी पपई और यास्म देकर उसलाइन में कुछ मी न समझ सकस पर समय मा ने उनी पुस्तक दी रे मोर गास महामन को मेयों न हो पाक- पीपली-अपनी पास गए। भोर उमें पानते हान अम्न होता है। गनम मुश्री दी। इस रातको सुनकर पण होता है। अन्न इस समाज जारी बया ऐसा ममियाप है कि इससे छुरमरिता यादी मारपनाएं पावर मावा एव पुरिमवीरे। किन्तु अपनर्म उसाय-नाप को वस्तु मिलती है उस नाम है मनुवा पुस्ता पर पर से नहीं पाया गया। और न पानेता मम मूस नही मावम होवा। सेनिल रातको पे पार रनमा मी मम, वरदसिंध प्रादि मा हिमपन हो नाम पालता हरण मी पखे। इमए कम उमएवे ८४ शरद-पप्रावली भम्मए मच्छा न हुमा । मारे राम'का मामग मी विमायतका है। उस दिनई अभ्यार परे। उत्तम म्पर्पको मति- पिता बकारण भरत विमरममा पाटोप नहीं है। गरमी यो विडायत गया । मनवा मी गम्छ। ऐरिन बम्मनबिए बेचैनी नहीं है। इतना-सा भरा ही सार रम्लो मछु । मैं भाशीर्वाद देवाकिएकदिन तुम बाहोगे। मिसेसमय भगर कोई सुनौती कर काल रखनाम चैनो कहाँ है विनाभी सो भयर राम उचरम यही काना होगा कि इन बीमेको बता नहीं दिखाया जा सकता, सिक पाठा मन मफ्न माप भनुमस करता है। भीमती मरी उप म्पासम योगे पद-गम्त, उपनिषत् पुराम, काश्विास, भवभूति समी पुसने विमे रेसम मचा रे।।रेक पठिम प्रबकारका मा मनोमाष परम भात किम सब ग रेनो में पिस्नी बिपी कितनी पड़ी मिली, कितना जानती है। इन मतिरेकको किसी भी तरा प्रभप न मिलना चाहिए। मेकिन बीमाब, पोतला भारडिया, बडी मन्ना इन कर मम्ना होया कीबनम मी और साहितम मी। पानी बरसता है पत्ता मिart मा और काबा बास, देवरानी-जेठानीमें मगहा नाहमें मनामाभिन्दा प्रभाव मुख्यममनकी नपुणता -परम पिस्नो पक्षमा रियो कितने साफे, दीपमें कितनी पत्तियों और मगनीपर शिकनी भौर किस नारकी चुनी हुई सादियों इन सात दिन बीत गए प्रपोगन भी एमाप्त हो गया। पास हलक पहाने मारिलको ठगना है। तुम पा सब मही करते हो इसे मन मय किया है। इसने पोर दूसरे बहुत से कारपोस तुम्हारी रचनामे भाडा मुसबात माण ती और बल मिला है परन्तु मनम बरना-बाप मी परवाइसे तुमने मेररिया। भाभम पार इन पीयको कमी नहीं किया जाय। वनम जिमने पार नही या पसर मोड नही मिपा दुसरा मोम मही तापा सदी भनुभूतिका मनुमन भादरण नहीं किया उती दूर से किये गये सार-मी पाना सणे परिपकी मामी कबतक बनेगी ! नार-बामे प्राणायाम मोगवन और पुण्मी पो न रोगबल नहीं हो सकी। बिसय भपना हो अपन नीरमगामी वामावादी ए पत्र या प्रथम अपनी भागसे सिना मी , परिनम सब कुछ माभूमिको माफ भारीन हो शत्पापती उठया । मब होताहै भीरे-धीरे पापा मारी एबनाम मी मसंगति रिसाई पागी से बिन्दा एपना की बिसे पाने को क प्रत्यकार सपने मन्तर से सब को बाहर क्षध मान लिम रहा है। देला नौ है मेरी सारी पुरा नायक नायिका मौको रोग समझते पार पही प्रम्पकारका माना बीवन मानी बात है। सीए समन-समागम में पाप है। छोगों की पानी न गाने पिनी नाविकों का पी है। अपनी बात यने । कम्पप पात एक दिन मोबी पी मिः परिस्म बन नहीं भागा पा मनमानी भा। उसने टेरों रुपए नहीं कमाए, मोररकारपर नहीं पढ़ा पारा स्वम्म नहीं बना वो स्पा हुमा । की कमी नहीं। बिना उसनेमे पर बामगा,- साहित्य और संगीत मेरए मप्ट् देशको गाम्-कुछ देनायगा । पा निरामद किए मानवा मौरी-पही हमारे पि बहुत है। में और एक बात सागा परवा मा । मरेपरेशम घूमा करवा पामने पतियो भनेक समागे भनेक मेरे खव गाबा एक स्नेह और भदाका पत्थन प्रस्तुत कर साहै। उते मी पापाते । ती पार करते हैं। मान्छे साप बानेसे ही मी माघरकी कमी नहीं होगी । सेरिन उसमाधा उस भानन्द पर पानी पर गया । जिसरीरको मनो भाननी धमामिस्वाकी लत नवापीमा नहीं थी उतने माग राख्रा ऐठा परिक्षा दिया कि एक पैर मदानेर मी उसे अनुमति पाहिये । ही सी मुक्तिी साधना ! देश मपा र गपा उसका कापनि सार्य और ही उसके लिए पापो गरा। मैंने भो पात पहा है, बहुत देना बहु-विनस पाको में भी तो नहीं भूल पाता । इसीलिए यो पाई रा है उसे मान में दिया है। ग्नि इस बातको मेल पास निम्मत है। मेरे पबपनची एक मात ए मार रोमी। मामाईसा सर गुमासरे पर रेप मोठा स्पने गरा मा । बार देखा गुम्यतो प्ररमोपकारण उनतिरे पायो र फल उठे।। सुननमै माया कि एक माने का रिमा सिंगा स्नान करने पाप पुन्या है हम पातम मा रिचान नहीं रखा । गुमा गित होडर मिन सितार कर रोये कि स्नान प्रनेत्री मी भाषम्पाय नही, खातीरम तो मेगा-मैगा पार न करने नसोसि उमड़ी

शरद पधापठो
सात पुसे पापमुक रोष्ट मभर वर्गम निवास परवी 1, हम सो सिम
गुंगारा कहाँ है। कौन पावकी इस शाम पाक्सको मावीकार र सम्वाद।
करते-गाते गुस्से में वा मनन भएर चले गए। मारक उस वपनम ही
मैने मन ही मन का था कि वही गुमराव ! उन पुगई एम ए गनितम
फर्स पोरोरिस, गोबर विषविणाप पारस पाता।
पार्मिक भौर ल्पबारी-उन्ने दौंग नही रचा पा, रित चीनकोष
मानते थे वही करते थे, तामिए इन्ने म हुर। रेलता है, इस पावको
र वर मालियर बाम्मे भी पास कौसठी और अपने मलामी गौर
मापासे भी नहीं। इसीको मध-विधाम पवे है। इसीको नाना तक,
पाठपातकी नाना प्राबिसि न मान सेना । पिया पियानो अप
पीतम रंगरोगन गा सता, ना वो सीमा में काम
नाही। पीसर गुपदाव! तुमारे सामने इन बागाने पर
पाटावोदिसमी बान कि भामम-मासी गाधी होते।
माम मामी-गुफ्ता करते। सरकर मारने भाते हैं। किसी मी भाममपर
प्रत नहीं। मगर किसी पास थाममपर मेरे रिम्म मपमा शिपया
भास मी नहीं है। मानव सभी समान है। स एपगर्म ।
परोपको भास तो तुम हो। पस्त रह करवा
या नही रेसनेही महीना होती है। गाना सुनने मोर गप्प करने
की मी । गाव हा हो गया। भा और कितने रिन मिना रहूंगा । क्या
पर एक पार मा माभागे । मेरा स्नेपर सेना
भी परत्पन परपापाप
सामठारेर पनिाम पोस्ट
३. देशात, १२१८
रस्पापीया । माद, देशांसर ने लिए मुमापनर रम्ने मुझे भाई
स्वी भूमिस्म पाहाम र रिसा या। रास्ते में एक रम्ने रोम रोम' मारा

शरत्पमापली जगापा ममेकी सिाकोसे कोयमका चूरा हिर-बदनपर बिखरकर मीति लापन की और दूसरे दमे पार पोहो गरीपर पटाकर और रे मोकाममा पुरम निकासार दिसा दिया कि कोयमेका पूरा कुछ मी नहीं है-माया है। को भी रो फिर मनायपन (मा-मेदिनीपुर मिकी सीमाकी एक नरी)' सीरपर भा गरा। मुक्त मनुम्प पि कोई महिपत माण नहीं होठी--- इस सबकी उपाश्मि करने में मेरे लिए कुछ भी बाकी नहीं है बस हो कोप म्यूरेकी 1 पर दो गाय पोझेकी गारीकी । 'धेप मम्न' पदम खुश हुए. से यापनकर बड़ा मानन्द हुमा । पोषि, एपदोना तो तुम सोमौका नियम नहीं है। प्राक सप (पन्दनगरकी एक सांस्कृतिक सस्था) मे इस बम भएप स्टीवापर मुझे फिर नहीं बुधया । उनने मनुरोप किया पाकि इस पुस्तकमै मतकी और माममा बसगान हैं। भपन साप देखा गया कि मुमत पर नहीं हो सका । 'शेप मरन'म पति- माधुनिक साहिल बैठा होना चाहिए, इसीका मामात देनेको पेश की है। "सूर गा, गर्दन पर गन्दी बात की मिग्म" पी मनोमाय भति- भाधुनिक साहिस्पका कन्द्रीय भाषर नही १-रसीका पोहा-सा नमूनामर रिया है किन दा हो गया है, पहि-सामर्थ पश्चिमकी भोर एक गए १-मार माबोगोर इसका रायित या । उमारी सरोरपनामाको मैं गो हो प्यानते परवा। रवीन्द्रनापने मारे मारेम पत्र को रितामा पहुट रमात स्पररी रिस्खई पड़ती है। मन परसार किसी भी पसे नही,-तुमागे मपनी दीप सापनासे और खून, उत्पषिकारसे को पाया है उस स्वरूप । पापपेरी में न कर पाम पेठकर मी ठर ऐसा दी से समाया। तुमने सिमा भी माविम पाते हैं कि हम पौरिक मुगको सन्तान बात रहुत ही सप है। जारी रखनाम इस सस्पका बहुत कुछ प्रकार मा उपमहर रोताच पाहै। न मब तुमारे लिए सागपान होना उमर माया गपमय मय होना चाहिए, मीन होना पाहिए। रिस मी हाटम या नही हगना पाहिए कि प्रबोम्मई रिछ एक भी (मरमपितामही मार्यिटक धर्मका मीतरी है। पाले शामर

८८
पारद-पमापी
छोरिमनी सारोबावे नही रहा, मगर यहाँ लेखा सबसे बड़ी भूब
करता है। पामी बार अपम कि पाठक न समों पर भपिक समझाने
गरम सेसकी भोरसे पर नहीं होनी चाहिए । समन! सरिए पद
काय डामिएकी रपनामि गई विवर्ष बीच-बीच मा भर
पारण र मैठे हैं। बो परवानगर दवे टोचकर समानेका मौसा मा
मिता हो या अपनी पुरका प्रमाग नहीं पाता । ऐखरणाम शेष भाष्य
है। मैं मानता हूँ सिरिजनसे रखा। लेकिन भार तुम मजदीक होते
वो तुमारी रचना ऐसे स्पार्यको दिसा देता । कितनी ही पार तुमारी रपमा-
को सवे पदये गम हि मगर मड़ने वाइन मा समास किया होता-
मेरी उम्र हो गई। भौर रवीन्द्रनापकी मी ( म कमी-मी मात्रा होती
पार गय उपन्यास-साहित्पना मान पार दुलमीचे पण
बापमा।
तुम्से मुझे बहुत परी माधमिए । मोकि गमगीकोरीबाग हारक
परिपप मकर सो मा खेम उनसे महामारी पिय
भौर समावि उनसे मि।
दुगारी नावितामोको पानसे पठा। बड़ी मार पनी हैं । मडा या
तो बताभो किस्सा भी भापिम्द गहा बद मेवे ११ 'शेप प्रश्न' पदनेटिए
देनेरा गुमाये । धनता इन पाग्यको पदने थिए उनई पास समर
ना। मगर पाने के लिए बार सोभा भरमान समझगे ! संसर
महो गया। रतीको देनर र नहीं तो उनके असे यमीर परितकी
रापमानमेमे मेरी सपनाली पारा छापर का इसरा रास्ता दिदी । उपपासक
मरर मनुम्पको बाबरी पाते मुननः लिए पाप किया था सता र
पाठक पश भी परमिन्द तीसर नही पर सारिप पर।
उसके पति सापेमपन्त उदानान
पोपी रम्म, रिलामो या ! मेरा स्नागार ऐना ।
परपन्द्र परोपाप्पाप

चार-पत्रावटी साम्तायो पानिमास पोस्ट - ६ मारों १५१८ परमम्मानीयेषु । म उचर म ने कारण पान समतना किम बोकुए मेब दो उसे प्यानसे मही पड़ता। श्री भरविर बो छोटे-मारे संदेश यम बोगो नौरा उत्तर नितम पानसे मेरे पास मेम्से दो उन परता सोचवा । मौर पर पड़ता है। हो यह मानवाल मषिक- को नहीं समझ पाता । कमी-कमी ये मन पेवना मा कानम्सनेताराने भिर- मिप मौर सम्मातिनाम पनि मा स्वर पयते कि मेरी पुदि से परे है। कवितार सम्मन्य मी उनसे विवागेदो बंदा नहीं मान पावापान्तस्वरूप पा सकता है कि तुमारी बिम पराको पिताको उनोंने सबसे मम्म बतागापामारी दूसरी कविता मोते निम्न कोरिकी । मेकिन यह भी काना पारी कविताएं वास्तव सभी मारमें भापामें और एममे । उनले पुनार नमर विये सर्प तो किसीकी गप कमी नहा मियो । मसे हो न मिठे। रेलवा दिनौसे भूत मन म्माकर साहित्य साधना र पेसे। इसमी मी विरमकी पेग मारे, मैसे-तैसे मार भिए प नमन तुमारी सफलता मुनिमित है। मम्मरिन उमपमें तुमने से गीत मेरेर कविता और इसकी रिते मुन्दर बना है। उन मतिशयोकि दोपमे दुरासमोर होता है। उस दिन इसोको सेर ममिनी सकारमे (गाको पम्नीशि मोर भवसामी) का पाक-मटकाया भगर तुम गाभा छ भन्डा हा सर-म्पिक थिए तुम नि । तारो मषिकारी है कि कम-दिवस मौरपर रे इस गोलभे तुमार नामले प्रताखि बरेये। मागे मानी। मष्टा मागे पतामो, मेरी पोरनी मारि पुखः हरिमाई (पिदार होगप्पाय) ने मेबी ने बिधी गित है। में कुछ भोर पाते बम्मना पार पा मगर मा समप नारे पाखानाबदोपपण। उमारे उन पुपने पागम्पोंडो का पासप्रति

शरत् पत्रावली
रो, सुनो --एक परिपरी' नामकी ममियतवर्गकी त्रैमासिक पत्रिका
निकी उसमें हमारे मित्र नी' (मीरेन्द्रनाप पब-मंगाको आमोचक मोर
पंगवासी काम्मिी मेरे ममापक)ने ऐप प्रश्नको मागेपना की है। शायद
परी होगी। उन कपनका वास बाहेक गोय (रवीन्द्रनायके इसी नामक
उपम्बासका नाप) बारागाहै। इसीलिए कमका परिष गोराको
नकार दिया और कुछ मई। भात् नी की भार्स भी होने के कारण
उसकी इति विमल मिस्सी भैसी है। बासकी बात तो पाकिसे भी सम
पमते । भौर इनका मिला पता मी पोकि मपनी पनि । पमप इस
पावभीकि मामोसी पनवे । बर्मन मानते हैं। भोर मन्दकी भोर मनुपातका
कारम ना मो भगवान् | मकार न होकर उपभर परना-स
यसी कोई बात।
मेकिन अब एमिवर मी उमप नहीं है। भारत ।
-भी घरकन बोपापाय
सामताक, पानिजात पा
विववादशमी ४ार्दिक १३१८
मन्टू -मेरा विजारमीज प्रभागीर्वाद मेना। बहुत दिनों रिटी न
हिमसभ ए मनुक्म है।
पारेकामी बाते करम कर । 'दोम' (रिपामारका एक उपपाठ)
कु. पर इसी साप मेवगा। पमनेका या भारमर रेलकर
शायर पमोचर बांगे कि '
मएप मापडी मेरो बाब भापा मम्ने कुचे
बुध
भीबिए । मेरी मात्रै पागुलिपि भापतरबिये। मुझे इसकी परी
भारप्रशिरिन मेरी तरफसे मी वैशियत भी है ऐमी बात नहीं 1 से-
कुतुमारी दी तय में भी उन माग्दो नही मानधन से कम
पथके लिए, धर्म धर्म ए, सप सो लिए भारि। मप्र उमम्मि
साधी पर प्रकारची नही होती । पर मन्त्री सुरे। उनकी समानदेय
परने मना और उसके बाद दी एलोरा देना भोग। धर्म, जप,

शरद पपाषष्टी
अादि सपा ही नही। टनसे में पुरु भपिइस बासको सदा सार
सना पाहिये । पानीज ठरेस मयर रिचरम करना ही मी पाठप
रापिरो गोका समा-पित और रामार मिनेन्द्र
नामशर एम से और मष्ट्राम रोग पिच एक बता नही। एक पिप
र अतमे चुसे अपनी समाता सम्मेको उहमें कोई भी
मान न मिळे । एक मिश्ति म्पतिको देखो, ये दो पाराक पन्द्रा
पर अधिक नहीं पर सका। मगर में सिर पुसा तमाम कर
पापा या उमझ म तप।कानी सिने निपमा रहम करता
रापन किया गया मैं परता और परोपी रमा म नराई।
पसम एभा प नि पाई थी, या एकम। फिर मी मगर ई या
बमय माता उसे मैं नाचना नहीं समझा, यसप
पाऊँगा । टेन्नि इस सप्पन साह रमते मनोवियर राजीसी
प्रवगा। मतएव हि मापने के लिए 2 मे 8 नन पार्वोको
अमने रख खोर निमा है उनकी उपयात निबनेमें भाग ना
मानहानि मेरे मन में उपन्यास रितनेकीबो पारपा उससे गा
स्पन परिवर विचार करनेते वह भान्टम हिस्सप प्रारम्भ
हिस्टेरा मनमा बर्ममय नरा। इस ममा पुस्ता रोग करने
मारता मरम्मकी भोर। वापर महिलेको पदम
गरिमे पवन को मार । एकपात मौरो मम । हिमने बैठकर हमने
सेमरिसरा बहुत पठिन काम स्वोयमाव सबमुच ही मासेमा।
मगर न मिलने परेको नहीं समझ पाते हैं। कालपातको तुमने उनकी
पुल नही देता है। उनकी पुखः पदवे समर पाप मुझ र गाव
मोन पामगर सप्रेको गते । सो पाते।
मिलनेका रम कानेगे विपर-वस मिमे भारेयडी प्रसरता कारण
प्रोमो एक पग मी भक्तिमय, बस एक पग पीछे येतो
मण । म मगर इतना छोरना पनमन करो हो भन्ने यी
तिमि दिन्प्रकर उनकी गप देना , ऐन मौरखी
विनिमको समय पर मिार्ग पुखको मत परिमापते

१२ शरद पडायरी मैं फिर बोराबो मी हो तुमारी राम बान सेना मम होगा। 1 बात पर ही सकार-झंटकर पुरस्त कर देनेमे भषिक देर नहीं जमेगी। तुममारे नी की चिड़ियाँको बहुव च्यानसे पापा। तुम मुसार भवा रखते हो प्यार करो इसीटिए नमबहुत कम है। गेबिन (ससे र काम तो होगा नहीं। उन मेोष पवप्रमाण पम्भ इससे रचमात्र मी कम होग्य, मुझे इमम विपास नौ । भौर टस भी की बात मा बमी कितना भषम ही कम्पना मी नी की सक्ती । ततिकमे मी मेरे मामा रंग उसका नाम पुरू होगा यह मार माते ही समम मन पसे असीत हो उठवा है। उस मादमी पारेम इससे अधिक नही पाना पाया। पापर एक दिन म ग मी देखोगे कि विरेण शाकाहा मिन खरेशी मुद्गरोने दिपक कम्पाणपर सबसे बड़ा मापात बिमाबाडोकरा उनकी बालिका है।पाने रो। से ही एक दिन मुगनतया । पानही तमगा कि तुमने उसोपारे में मुझे 58 हिप है। सचिन तमने मुझ को सूचित किया उसी भाभारपर विरार सवाभाविकार करने की कगा। दे पा करता है। भी भाबि समयमै की मी तो मैंने बाबाव मानी। दे सारे मेग उनपर गहरी महा रखो। पास में नारी रखवा । स्नि भाभमवासियों के प्रति मेरा मन पद प्रम्न मही है। परम कुन की बातें भोर कुछ दूझे भाप्रम-चारियों सम्बन्धम मेरी अपनी पारी भममा तुमय पमपमा मुम बहुत ही सरका। जब भाई ये एक या प्रमून नहीं पड़ा पदुम हुमा ममर का गाने वमने और उसकेचप ही साहित्यको मुम्ने मनाया तब बर सोम दूर हो गया पा। पापा समी नोकरी करमे भोर भम्ने । गौरी पारिममा रिम्प नरमे मेवा'-ऐन्न पो हो । महा मानेगाननेकी चिन्ता नहीं है, या मगर मारता मणिको विदेशियों की नौ का बना हुरिने इस मिरेनीयये पयसे एक नपा मार्ग निकालत, ये पा बस्ने देसी ममम होगा कम गौरख होमा! तुमीस एक बार मुना पर विरोधियों पास सिमानी मामा एकसरोवमुपदी हो और शरत् पत्रावली म्से तुम एक संगीतको रेना चाहते हो। इसपर एक दिन दुना कि तुम सब-समाकर पयो पनने बसे गये हो । म भयानक सगा कि मेरी अपनी ही काई पर पका पति हो गई। इस बीवनम तुम शायर पिन नहीं देत पाऊँगा । या तुम समाते हा कि यह मेरे ए काई भेग दुलहै! भोर कोई ममेरी विश्वास रे मगर तुम तो बनते हो। यह बात मुझे चिर दिन पोरम देगी इसमे मुतो नहीं। एक मनेकी बात तुनो मष्ट । उस दिन एक बी कामसेफ गपापा। मार बगावी । । मुना कि एक नामी पाठिगी । बोनस मेरा काम- कानकर पुम्नेपर उनौने मेरी मम-फुगली देखनी पाी। बोम, शालीको मा मगर राधिका नाम किया है। उसे उसी समय उौने मित सिपा, मेरो परेनाप्रेमपसे की। इस बार भागे उनका काम था। मेबसे पंच निमार गपनामै जुर गये। या पाचन हो। कहा एक साम मन्दर माप वनरा यस्ता फागे। पूण पूरे पस्केका कमा मम ! बाजे, माप्यास्मिक। मैंने मार दिया कि रमेम देसी बात यह मुझे काही भगु-सरियामा ने भी बताई थी। मगर मैं खुद इमार पाई भर में विकास नहीं करता । मौखि मापारिमाका मा त मेरे ममरना है। बामे, एक साबरपाद भगर फिर मुम्पकात हुई, तो हमका याबगा। मैंने का एक बाद मो मेरे महसे यही सुनेंगे। उन्होंने र गर्दन हिम्म। उनका विश्वास किनमेका फसाफ पिवना पाने वो ना मिम्पा ना होता । मम् एकमात पर हमने पहले मी मुझसे मुनी होगी | मेरे 40 का एक शिलान। इस देश मेरे महले माई (पभात) सर्गीय सामी बेवानन्को मेपर भाठ पीमिते मार पायम मनाती होवे रे मदीपोर नासिक हुमा । सागुनत बाव मेरे सूतमें उम्पी वाने मी । भवपप बीयन पपम्न पर्प पार र रेनेगर किसीको नया पिम्प बना पानेको आग नहीं करनी चाहिए। मेम्न मर्मसी महापर AAP निकम 18 में गयी होगा दी। मुना है हितमारा भनिहरम को पीनी बना समयमा पटा मामको गरी श्रीनी बस प्या पणा पासबमें ।

शरद-पनापनी मेवपाशारिपिक मम्मरम विना रस सुबन बिमा मालवावी परीक्षा स्गा । उपरान या उपकरप प्रापुर्वते नहीं परनाकी मनपारणताते नहीं मिल मति समपारप ग्रामीण अपनी रोजमर्राशी परनामोफोहोर पा पुन समाप्त होगी। विनार न होगा ग्रेगो गम्भीरता पुतानपुन विपरम नही देगा मारादेगा। ख मिॉक मारकर मा हुमा नागना । पर उपन्यास-वारिप बारेमे बिना समता , उससे पा भाणा र मोर म पाम बना हो तो कमसे कम मग शेप उसम्मान सम्म प्रारमहाकर बैठा है। किन तुमारी पर पाहिए। दुमी राव है उस माममम बानेर बाद तुमारे बारेमें इस बातो में से पानन्दसे माप करता मा सागर तुमारी पदार-बिताई तिनी प्पाप, सर नारी उतनी ही गारी और मन्ती सी। भोर यमुम हो। गाय मन भौर पारिप मैसा दिनयो, मेना ही शास्त भी। खुद पर पापाठ पामे वापरा भरने परिवठी तुमने किमीपर प्रतिपात नही किया। इस रिसे मारो तिनो परीक्षा मेगा उसका मष्ट्र मेरे गा। नामप्यराते मो पुपचाप पर्याप्त रामेश्य परता है। किन महरनाम मनुषा मपमान करने, मुसार भारमारनेए और नही पाता । उनी विपकर नी भोर उमामि पिता रणनी। मरठे बिर दिन उमसी पार्ष माता उमे मीचे अनेसे वाटी आयेगी। मष्ट्र में उनसे बात रखामो सप प्रतिपनी होकर मी मरने पौडी पुरे भाय माना करते रिते। इस बातको बा किमी मी जरा मी मत पाते कि धमाको तुष्ठ सिद्ध करनवे हो पाना पाम सिद नीरो बावा। इसके लिए कुछ मौर मी पादिरापा स्ना सौण रासावी। उन दिन पुष पार मासिक पविराम दमा एपना पदी। उधर्म गुरुप चिनीपार मदर इमने सुपरसपर नारी-सिरोपा प्रविवार दिया है वाग्मका भनुमपान दिया । तुम उस पार करते हो तुम्हारे पारमै कही मापाव पाने, इन थिए मेरे मनमैं काफी दक्षिण भौर सोप। र मुग्म होता है कि शरत् पत्रापाठी मीगार्ग मीठरकी कुछ पाते पन सेनी चाहिए बिमीन विखारे बिहिस्स-सम्मो मन्तगरम बो सय यता यदि पाय दुमा तो उसकी सरि मी बरे होने में बड़ी पापा पाती है। इस मातपर में भी विश्वास करता है। ने सिताकि सावित्री भैसी मेलकी नौकरानी मिठी तो में मेसदी पदा पता। लेकिन मैतम पा रानते ही नही रोवा-वाय मी मनना अरिए नहीं तो सावित्रीदयो नीबीद्य मामा माम भियगी मेसमें रिवानेर मी नही। इस भाषा परका बरा भी नहीं समझता कि सावित्रीन मुन ही नौकरानी कोटिकी तो नहाँ। पुयोम विवाकिमी देवीको म् मुमीक्त पाकर एक बार प्रामण पर वाधीका काम करना पड़ा था। पांच पानम्मि मान उत्तराको बा नाचना-गाना सिमाते थे, दर टनकी बात मुनार पान काम सवा कि इस व्यका उमादजी मिमानेपर समीरदरियों नाचना-गाना सीखने के लिए प्रायड होगा। परे सम्प्रदायोकी सयदेमा मी ऊँचा-नीची होती । बसाई निरको पेसा एसी शेकर से उता और उसकी मालिदिनका पालन एक नहीं मी ॥ सकता । इनमें बारेमें मनुमन मुयने थिए स्पपा-भपेटी भी मप परनेसे काम पाड पाठा रेनि उनको बानने दिए बहुत कुछ सई परना रोपा। मामनीसे नही मिमता रंग पाटकर बयम में मोपर नहरीमा बैठी। मन जिम मिर-मारिणी सुशीय पारगी (पममी) का उस्सेल किया है, उसे क्या सभी देत पाठे। उमबिर भनेर उपकरण भनेक भावाबन न हों तो नहीं कर सकता। या का माम्ने एत पपे या किसी रामुमार मित्रो बहुत पम्पे कम हुए बिना कररी म्वर प्रणाविकार नहीं मिला। यस्तेवरस भारमी पार परमपरमें चा पुख्ती । उनका परिचप मिण्य है। गरीका अनुमान नीय स्तरम ही सीमित रानासहिए या भोचवली रगर मोर नाही बायपोहो परिपानता। सारे उदाहरण मनापारा मोर सिनेमें भी मनाम्ना । मकिन को मोय अन्धाधुष नारी-जामिप्रति मानिई प्रचारको हो पपावार ममझते हैं उनमें मारणबार तो रोनही पपार्यपार मी नही सह मभनप मैर स्ट्री सपा ने गनने मकार । प्रिपोनिम करनेत्री पिरिरसे सारिस सम्न कभी नही रोवार ७ शरद पत्रावली मेरा भान्तरिक स्नेह भोर गुभेमा मेना। नानासे मुमनात होवोपा देवा में उसे मारीदि देता। -परवा सामता पानित्रात पापा, पस्थानीयेषु । म मा चि मि | भोप्रानु पापर मारा मेबाहुमा निकम्प पारे ही मिल गया था। पप बगा था कि निकाय बहुत पा। यद काम्ने मैग्नेसी बसव। पिन दो बार पो पानसे पाने पाप मुझे समानही या किस रपनामें कुछ काय-प्रेम महोबा वा । मेय पुस्तार पारे RATसीलिए मुझे इना सपा माल नही पा मात मेरे मन में बार-बार माई। मगर गुरु सोचनेर मी करने में स्कोप नतम समायेचना तुमने किसी मी पुस्तकबारेमगी हाती, मुझे इतनी से भी भगवी । इसका कारण मुलपया मोजावी पाये १ मा परे। पर साहिल पिारको बिस पाराकी तुमने इतने मापुर भोर सहस्पत्तास माणेबनाको मुन्दर ही नहीं बन पड़ी है उसम निरपेक्ष पाप मी हुमा है। इसलिए कोई मे सहादप पाठक इसे सौहार करेगा । इस पया पोषना पोपकानडी में की गई। मन, नुमने पर पड़ी भी पतिरामापिन्कार किया है। इस से नहीं बिसनेसे इस्ने निकायको पारेमा जिवना मी महा क्यों न हो पाने लिए या बोगोंमें पौरख नही रानी पदनमें एक मुमा पानी जैसा गठा) से किसी भण्डी मासिक परिकाम पएि भेगा और अनुषगा किस रपनाकी कोई भी पौरान बाप । मेन तम् पूर भेन्ना तम्मर दरोगा नीं, पर ठीक टोक नही बता सकवा । र मगर समय हुमा से पहरी लेगा। मौत चतुर्प पर्व में इतना पफा सगा है बनानी प्रमा पर मरा मन ताता । लका कारण परमल पुना मैने उपमुर हीमा मल मन बगाकर स्पषाम् पाटाको भण्डागलिएRAT शरत् पनापनी है। मुमारे ता एक पाठक मी भीकास्तको भाम्पस मिला है, मी मेरे रिए परम मानन्दकी बात है। मज दूसरा पाठक नहीं चाहिए । कमसे कम न मिले तो मी पुल नही भोर मन ही मन सोचा था किन आने कियनी मापा की कितनी री पुस्तः तुमने इन राम पढ़ी फिर भी उनके पांच मरे पैसे मूर्ख मादमी को रखना पदने मि तुम समन माह क्या कम माधयकी बात है। पानवासना तु किसना माम्प मेन। न विपा और न पहिस्य । देहाती भावमी पो मनमै भाव मिल बाता है। इसीलिए मायके समानेमें पमित मोफतर मंग बर गाडी-गमेव करते है तो पर मारे पुप र ब्यता है । मोपवा कि इनके मन में कितना नगण्य मिल्ना साधारण है। लेकिन इस मन्दर ममारे से मिकी मा मिसी के इस पातको गर्दक साप वार करता कि पामिल मष्ट्र इनसे छोय नहीं है। फिर भी टसे मी सो पा गा है। यह मेरे लिए बहुत बड़ा मपेस है, बहुत बड़ी पासना। बहुव रिनौस नई नहीं देता है। देखनकी बाछ रष्ठा होती है। वरम मगर पानिरी माई तो क्या पो-एक रिन मिप गनेकी परक्षा र समय से। भाभममै बनेका निमय नहा है, पर मैं मानता है। पर परों सा कोर रोगहना। मगर वो मिलना । इति । -गुमाय निस्य उम्पनुप्पापी भी परस्पन्द्र पोपाप्पाव सामवायर, पानिमाकपा "माप, १३४ परमसम्पाणीपु । मष्ट्र, पात रिनीसे गुर्ग नही रिक्षा | भाव सो मवाना में दिखनेकी पण स्वनी प्रबकसी दो स्टी परी सोचता है। शायद फरीदपुर पौनेश वाडी माम्तरिक बाते ऐंगी 1 दान दिन हुए पपैदपुरस मेय है। सादिम्प सम्मेलन था और म्युनिसिध्यि-पोस। मंचपर मरमा और घरगर्म निग्ध पदा पया पा र नेपप्यम 'भनामी की भावना पर रो पी। ,मस्सी पोरी विरोपी मत था। इस बीच पवार एक पारद-पत्रापसी समन सीफार फरक भनामो पुस्तक उन्होंने एहसे मामिरवर बार पार पामौर बार बार भोर पानेकी पन्ना है। वन का म्यादीनेग बापू भाप पैदपुर बारके मिति रानप्रचणवाहिकीकरआपमें पर पुर्रता सी।' 'नेय बाबू भापका दिमाग मा सराप हो गया है। 'दोनेए बाम् देखता हूँ माप संसार भरम भाम है।' मादि भादि । माम्य ही में उप पा-मोन गमारकी । एक बार मुझे मना पाकर इमादीने बापूने पहा 'परत् पा जारी पुस्तकें संसारमै समीरिए नहीं । तदार बाबाजीस शिप –णा । भगवान् विपाठ करता है। रिखी मान्ने सि मारकी प्रेरणाले कविताये किती संसारमै उतकी तुलना कम ही है। जब मी समय मिलता है मुग्न होकर सरितामाको पड़वा है। चिनी मी मगती १, सर दूसरेको मारमहा समता । मुनकर मन ही मन सोचा इससे पदारनपर सवा भागेपना भोर क्या हो सकतीसितारको तुमने मार गिरे उनका बदी तार गुनगुनाकर पब उग।। मेरिन पिसा वार नहीं बन पा विती पार-बार पार पाने की बात सुनकर भाधर्ष पर न करो, हो पा करगे। और को मेग बसविस्मन प्रफर करनेको दी का महा समाते । बगाम-गोजपर र भाते । माना मिनी बदती माती , मरनेको उतना ही निार भोर पार मालोष समतवे है। ऐसा हो तो देखता आ या है। उत्त रिन हरिन नामरे एक गाने मुझे एक ठिी मिपी किया 'मनामी टिप एक माओबना-समा भग्ना पारखा। भौर मुझे एमापति बनाना पाहता है। मैंने उस विटीयो पाने म मिनर मौतर से बाबर रिसा-राग है। मन रिघर परना मोर ग मिनर मादर समाप देना 1 में पवार ने बापूरचार-पार पार मनाया पानसे भी पर पात विस्मपबना है। मामामी तमाम इस माता उसोपगा। कुछ दिनोंसे तुमसे एक मनुरोध करनेकी बात तोर रहा बारेमा कोरपनारे समय पर नरेभा परम है, तुमारे कानेट मुन मी माता है। उसमे काना कि गिने वापरा सपत रो। रों, संपम पर एक प्रभारी - -- शरल्पभापटी वय मुन्दि (सरिम)। भरने में अपर न हो तो पूतरेको उममाया नहीं मा सरिर मौकाना कि मो-यहाँ मारप ही ती रचनाओं सरप देना इससे बदर मसुमर बस पूसरी नही। ममुरारकी ...' इन मार्शसे मैं एकमा मौर स भारपाय - से किया मी भर मेवाती इन कियाँने गोदी मुन्दर रग कर लिया मापि भादि । मे बावे मापत ते दपस पाठासे पाना पाती। तुमग देखो कणेरी-सी तरमै मन कितना तमसा है, पिनी पुस्ख पड़ी है। म प्रम मनी रपयोक उदरपोको रस एक बार पपने लिए मना बिना किसुमारे परिस्त मौर गहरे मप्पयनमें पर रिवान्त भागमका कारण मा पदी है। भारत ही नहीं बाई और पारिस लानेकी पम्मितासे भी नहीं। मा गरे ममीसे उसे इस विषय वापपान र देने माया प्रभारी होगा। पायद न मानतामा मामी मारा अनुसरण कर पाना नाम काम नही। पाती करिन। तरे गये महारो भगोकी बात नही उद्योगा। मोहि मगर र उसका साहिपक मारण (री) १ वा से हमारा नहीं बा होगा। गहरी पौड़ा सापही ये बावै गुमसे करी । म मनपन किनी पार पाने भरम-शमनासो दूसरी कठिन सामना भौर नौ। जिसे मनापासोरिस सम्छा पा रसे नरसना । रसित पाटका मन सिसे परिपूर्ण हो मातापापमो रस पिलदा है। बाने थे। मेरी पर ही बोसदेय मा प्रचार में प्रकातिर पो रकबारेम गरिने मुझे एक ली थी। यह मतम रिक्षा पा “मने बार-बार मुझ सोलहोर माम व्यकमबरान मैंने कमी से माम पा गुम असे निन्दादमा नादिरा। रमान उस रिम एक और मौर बाद मदिरा" उस दिन उमाप्रपर (ग सामाप्रसार मुनमाई) ने मुम्बा पविमोनिसार ने प्रत्याय लिया है। मौकरी प्रत्येक पहिम पर फैल गया। पिन क्ग को प्रचार हूँ। बोटित यया पर मा पारित नहीं हयाप तया । भर परिस मेय विपद पायद उम्पून

१०२
शरद पत्रावळी
हो गया इस विपप तुमने 'सोश बो विर्स लिी पाठ
भी बनी है। इस प्रकरमा, परम्प नहीं। मुझसे यही पुरिया
है। मेकिन नमाने पसा हो गया परिषयपी उस रखनादो परतेरी खारे
बरन भागमा गां। बागम-सामरी मिगी।
मीरात पर्व पत्री भाडोचना विरिणा' में एक बार पर पड़ी।
मगर मा मौकात नोकर और का होता तो मुकाप्टो प्रान
की सोमवारबना सपमुच ही गुन्दर है। बिकने उपमुपदी का मौर
समझाई उन्मानन्दकी ममिम्बदिए।
मम्म, पाच-बीपी पिटी दिलना, भाष मिले पारे म मिले। हमारी
बिही पाना मेरे ए परम कृषिकी बात है। एक बाव भोर । न मरेन मैत्र
(Aधनका गए सिर गंगोमो जिबपुर रंगीनिरिंग कामेवा नियम
पते )ी परमिन्दयो मम है। उनोंने मुमने मनुयेव किया किमान
व तपने मेरे बारे में मिनी रबनाये येसी । (भोर जिसने वापर गि
मैंने कभी पापित नही किया उपक पार पहनाए माया। मैंने करा
पा। मेरिल गुम्ना नरो पना। नुरेन ग्राम होनेपर मी मारमी
महादति।
तुमाय नित्य प्रमाकांडी-श्री प्रवद्रोपाध्याय
सामवारे, पानिवास, सा
२ माघ १२४
मद, ममी ममो नम्बरी बिस्ती निमित्य । प्रमकी बात पर
है। (१) रंगेर पा मेमना । ऐश मे मो दुरुन पागा बगा।
पिन कर पाना उपम्पासरे सिवा में मोर ५० मी न मिल पाता ।
Rो मापाको दनिवारपारन सिमपुर मपनीरता। मेरी
सिरितकी माग हो रेल हीरो हो। यस समम्म 'सरे मिनी
देवी महरा गई। सिर मी भानी सोची-नदी गाती मापा मानन्द मार
करने मरण पारा पाटन है। मतपय सिंगाही कोई मुहेरो
मरीमा।

शरत् पपापठी
(२) हीरेनकी बात उस मिमि पिसी है। 'अनामी की मातोधनान्तमाम
समिति होगा।
(0 मीकान्त पार्य पर्वकी विचित्रा में प्राधित भामेवनाको किसी
मी तयों न पामो मोग पहेंगे ही। किन 'रंगेर परश साम देना धारर
माया । बलिमोर विसीकी पर मीना।
एक पाव भोर । पपई रामेदारको भामेकना या उससन करनारी
अमानक मानकर भाईन-कानन इवना कठोर हो गया कि
उतामिपदी सरकार शासर सारी पुस्ताको तरसे।
जित उफ्रमासको तुम मिलाये (बो दीन-पार महीने में समास रोगा)
भायाया और मी मया रोगा। कमोपकपन गरे भी माये, साब मापा
कामम मना । पास छोटी होनी चाहिए । भात एक ग देर-सी नहीं । एक
भपापम कुछ, सरे अपारमै बाकी हिस्सा-सी वय। उपमा, उदाहरण
कोई भी वोग रवीन्द्रनापकी वय निरर्पक और मसमर न हो उठे । मनुष्यको
भारत सबनेकी सर और सुनारको दुशन; भोकाएँ'योस
सपनेकी पिक नहीं है। इस बावको सदा बार रखना होगा । भरत
पासका बाम कितना पीडादायक होता है इस बातको गड पाठ मारते
है। रिन भरपन, बहुत देर-सा उपरेप बिना मूस्यमय । पमका पाठ
पहावे तुर रेलवा परी से भापक ममय हो गया। भाीमार मोर
प्यार सेना।
-घरचन्द्र पापाग
की ५५५, मनोहर पायाीपाद पराचा
ठ, १५४१
परमासाचीयेषु । पाते भपनी बार देहूँ। परसों परसे म्युम्ने पादते
रिमे दर्द।। बुरदेव मापार, ग पानाई गांगुष्य पेठे हुए हैं। एक गण
साने रेसोन रिसा माया मोर मर हाइपरसे पाया किपा

शरपनापसी मोटर निकाले समर्थात् मनका सार दिखाने गाउँगा। मगर साप अधिक म हुमा यो मा ही है, भयर हुमा यो विस्तरपर पाकर परम भानम्बते समय सितासँगा । मेर मि से बदबर भानन्द मोर मापमकी दूरी सनी । मी मामाम् यही करें।ाने रो। पुररेय तुमारी मिठी मामी रहा है। किसी मान्सीसी बाननेवाले मित्रसभाको माधोका पदागा। मर, इस मति तु निपति' को कर धमगिन कर पाना और नया सागर मेशेको काग्ने बाना एक ही बात है। तपमुप हो भने भनर विशेष पस नहीं पाया या मही एक बार बार माती है कि तुम्हार गुरदेवका मापारि । मोर तुमारा मकप्रिय स्तरमौर पहा । लेकिन मार, ऐसा माता मेरी भारमे कुछ भी नहीं है। प्रम भीकान्तका भनुवार रने को कोष पर रो। मगर मनुवार होना।वो तुम्हार होगा। मवानाको मार भीकान्त पाप पर रेकर कमी अपारा अमुवारकरने लिए पापारमाउनटरिनादार तो भापा नही बिटी दिवार सुचित कर ला हिम्मत नही रोती मार मैती मीम उमने पिट्स हिनी सेनामकी बाव गटत नही है। उसने मप है उससे नहीं होगा। पदि रोगावा या मतारी माया होगी । सोमनार मिल दुसरे पर्षा भनुसार परमिए उपयोग १, सशको मैं तुप मी नही जानता । बारा उपेनने मगर पुरा परस्पा की हो, तो बाद पूरी है। पवा गाउँगा। मैं तो पुरोष भी नहीं पापा मारे सिला रस नामको भोर न होम में सवा । पनि बोमबार तुमने किया है उसे भष्मा कौन रखा १ मदिन उमस भोपासका प्रमुबाद करने के लिए मनेगी दा नहीं होती। बोरि अपने परिममा बाम दाम मगाने सहारे कार्यको पनि पानेगी। 'निमरत' में हुई विस उपकी परवा परोकी र करता। पजेरोमानियो भनुसार रानी पेश करना है। मया मामी मी मिले। 'परित महारापा भनुपर मरे 10 पाव है मगर उसे रेननस

शरद पवापसी
१०५
पद में इस होगा । मापाई थप मेरो ममीतक मुभकात न हुए।
माण करता है कि वो एक-दिनमै हो बापगी । मेरा स्नेहाशीर्वाद सेना । इति ।
-परत दादा
पुनाव-पाकी समाचार युदर ही में देगा।
14
।
पी ५६६, मनोहर पुपुर, सरचा
माघ १३४१
परमपाणीयेषु । मष्ट, 6 यवको गायक परसे माँ भा गया है।
माय मिीियों मिमे । एक-एक करो कामकी बातो बबाव है।
(१) मारी निशिकान्तकी समीर ममी बनी है। बहुत दिनों बार
फिर माय र देना पडो प्रसमा हुई। मा सचमुची देसनेकी बी
र रोती है। मेकिन भाया है। सोचा है, इस जीवन भर नही
देन गा।
(२) यापणार सही-सलामत पहुँच गा रा संतापी पात है। र
पा कहाँ बिहाग रोकर तुम्हारे माझमम वा पहुंचे। उठरिन हीरेनने भाकर
का कि मन पराका माना यापपारर पुराना हो गया है तो एक ना
मगीन चाहिये । ए बा रोपभूपकर मे दो न हरिन | यी हुमा ।
परसा कुछ उसीने रिया है। मैं मा बस्तु है। मुमते कुछ भी नहीं पता।
नमल पपेडा लिन रिया था। मुमें पम्म भापा। इससे पदार
मेरेर मानन्दको पाव नी । बिल भादमाने अपना सब कुछ दे दिया, उसे
देना नहीं है पाना है। मुझे पात-पु मिन्म, मते बहुत अधिक।
(१) भी मरनिन्दा रापकी लिपी चिसो समानार नदीहै। या एक
रान
() निमति का मम मनुसार करने के लिए तुम पपपप्प करोगे, इसे
में मानध पा। तुम मुझे सपमुप प्यार करत हो इसलिए नहीं। बापमान

शरण पत्रापानी
सापुतान करते हैं। उनका समान है। इसको किये बगैर उनसे नम
या गया । या तो करते नही र करनेपर देग्घर नदी पर।
(A)पर भी मरमिदने सारे देनेडा समावो मनुसार
मादी दरोगा । लेकिन मट्र, पुसाम माना भेन-सा गुम है। श्री भएकि
को पो मष्ठी भी नही बनता। मयेकम भीमही मगठी ठो
भबरस न घेणा सिममी मी दोवा । तुम बस भीकान्तका प्रचार कर सकोगे,
वमीमा मारिए रंगाकानीकारको पभिमपामे करमाकी
रमिला। तुमारा उपम और भी मनिन्दका भाषीवार याने या
मतमा मी एक दिन सम्म होगा की मुझे उम्मीर है।
(4) मनुवारले मामयमै तुम्ारी पूछ सकता मैंने स्वीकार को इसका
कारण पर तुम तो हमादक ही नही हो पर भी हो।
वर्ग मरिपिदार पारित करनेवास मेगीधी कमी नहीं, उनमें पाया और
भापपणायकी मी सीमा नाम दोने रो। उनकी समय यतमा प्रतिमा
और एम पनाती है। इम्बर गुरु धमाकता यो र
पर उनकी सारी जय होगो मोर गारे भतरको मात
पति मानते दोनो, पख हो ही न सम्वा म।
(७) रवीन्द्रनाप मुझे मोपूत राम पाई इसका मन ना करता ।
मेरे प्रतिमाम नहीं । इसममा मनोमा समय दी है।
सारस्पना कामबारेमें यामेरे गुरुपरम, उमा भर में कमी पुष
मी नईग्ध । ममाही मन उनार एनी भय महि पण हूँ। मेरिन मापने
गादो नाम प्रति उनकी पिताका मन्त मा । भएकाकी
परना पेडार।
(८) हीरेन पद पाव हो म मदर मारेगा। उसे मारे कागज
भेदेने एमा।
(१) बाबी पी नुमाये गत } मैं तुमार राव हा सम्,
मधिक पसिी सिनेकी बात सदा मी लिएर थी। मानी
सदासर नहीनदी पाख। रसए मुझे जो बाते करनी चाहिए पीप

शरद पत्रावली नही सका था। पर मेरी बनता है, मनिम्ण कमी नहीं। इसर पिस्वास करना। मेय स्नेरापीबाद सेना मौर सोनिको पाना । काकी पात पार नीं मा यी । स्वर्गीय दारा मापन यो मा त यहाँ पर देला रोगा। () भी भरविम्यको नवपकी प्रपना सचमुच ही बहुत ही मप्ती गी। पपाम पर एक बोलागि। एमालाची मो धरनयन्द्र रोगप्पाप पी ५१६ मनोहर पुकुर, काटीपाय, कपाचा ० पैक, १५४१ परमसम्पापबरेषु । मन्न, हुव रिनोवे तुर्म का मही रित सका। पना ईमन्याप हुमा है। इसकी सब इसे मी सार नाँ। मेकिन परमी रेल् मा राकिमहम सागोही पक्षमता भगर महनिम वो। वो उसे पूरा करने लिए मगवान मारमी मी दुम देव । म रगवम्मे नहा भेज दे। इसव मावा ममै या मादमी मुझे मिल में बो कुछ करना पारवा है उसके मात करता। भोर पो सार मीरे गाता है।मारी तरह दरका नो मी प्रति सपमुरी भान्तरिक। सचमुप पाए मेरा मम हो, मेरे पथ, मेरी प्रतिराम की कोई कमी माय गये। उस दिन उसने मुझे पारदस्ती पकरबार नमरे सामने देगार तस्वीर टवरपामे सर होगा। ए रिहोपकुमारकी माँग। मर- एन्ना नहीं कर सम्मा। उमाने को परिश्रम किया है उनकी पुसाया परनी चाहिये, मचात् मानतम हाय पपना चाहिये। सब कुछ स्पा ये मोगे परें । पुरेर मममता में बहुत बड़ा देना हैमवरण याताया नम्मान मुसमिम्ना री चाहिये। में पतेरा काम कि मैं । पोस मुझकोर सम्बन नही प्रदान करेगा। इसलिए मम्न मन्दर कोई माना ना पाता। दरवरिया दिराम्पर पटना परिमम पर दे! पानी रिस मेहनत नहाँ रखे। मौ मरम्दिन निमय दो उ माण दिलाई। मैं पपवाकिसो भबिन्द गर्ने । जोगतक

शरद पवापसी
वो वही म। अपना मन तो बनता है किया सम्प, पाम
विभाग मोर एक माह से कौन पहा, भौन होय, म
पर पथम मेरे मन में कोई भाईप कोई देनी नदी है। भगरपावे
कि मेरी कोई मी पुस्खा उम्पाट कामने योग्य नहीं हो पर उसमे मी
वामयिक बना लिया और कुछ ना होता | शायर विश्वास परना पाठन
होगा और ऐसा कि मैं सस्पषिक दीनता प्रथर र यानि की
ती बापना मैंने भावन की है। इसीपि किसी माफमा प्राठिबार नहा
करवा । पानी में एक माप पार पोमनात विम्य किमा पाणीमनपा
मेरी प्रावि नपो ! नाना कारनों से हरी पामर गाठी र पेठा पा ।
साल्प पार हो गया है। ऐसा नही सपना मन मषित दिनातक
पना पागा । (त पोते समय इसी तया मन कर पाना पाया।
जपानीकी कुछ भूमि पाराचार होता है। मेरी एक पात पार बना
मयू मला मी कारणले विचीको ममा म देना। तमारा काम तुम
सवा देगा।
अपने मनमोपोहो न साहसकी कोई स्वाइस
दे परे सम्मको तुम मिहिने रेपेरो, खेपने पर सा प रोया है।
मेरा पिझेविसना नरा भतमस्त ऐसा, विशेष पर इस पीडित
दाम | मगर कही कोई मषम्न गात भिववी दो दो समान करना । मगर
कामापातो मारी दोनों पुम्हारे पानसे परमा। इति
प्रम्पकी--श्री मद्रशेपाप्यार।
.
के (१) १५
म भीवाल पनुप सम्पय कुए मानी पाव पवमा। मेरी
गज पीलापरण कर पानाभीकी मेकर पो समातगा और
मानारियों पोड़ी-सी बातों का उपयरे सदरमे कितने रसायन शाठा
उसी परीक्षा पगा। उपापन या उपकरण प्रापुर्व महाँ पटना

शरत्-पभापती मसाधारणता नही बरिक मन्यन्त साधरण ग्राम्य बीवन प्रत्येक दैनन्दिन मामको डेकर या पुस्तक समाप्त होगी। विकार नही रागा गापा रहेगा। पिस्वव विवरण नहों पर रणय रामा, बो सिको उनके मानदरिए । उपपार साहिसको मिना समझता उससे इतनी माण रखताबगर मौर कुछ मपा नहीं बन पड़ा ऐतो कमसे कम मसंपठ होर उपाध्याका स्वस्त मही र परमेठा । सावित्री समन्यमें 'पुष्पर(सात- ११४) पुसदेव मोर पयार्य पौर सीपक निरम बो कुछ किया है उसे पहा । तुमने टीक होना है। लेकिन बहुतेरे इस पावको को भूठ बवे सावित्री मपाम नौकरानी किस्मकी भी नहीं है। पुराणमे मिला एक गर मामी देवाने मी मुमौषतमें पाकर एक समय परम वीरा काम किया था ।समी सम्प्रदायोसी पर गपिकाओंमें ऊँच-नीची है। गमिका निकर नो गपिका दासी बनी हुई उसका भीर उसकी माडिदिनका चार-पटन एक मही मी से सरण है। रसफोरेल पाना सानो अग्न नको बानन राखम मनापामार है। तुमारी या बात बहुत टीकको नविकार रोकर मौतिकी प्यनिके मबार रनेकोमपापपार समझते हैं। उनमें भापराबाद वोनी पपापपाद भी नहीं है। पर गुस्सागोन मानत हुए मार । महिला विम्द पड़ी-सीप रिना गादुरी हो सम्वीटेकिन उस पभर पार सम्मे साहित्यका समन नही रो सम्वा । (पटण, भाद्रपद १३५ ) १४ [ भी भूपेन्द्रकिशोर रक्षित रायको लिखित] १ म्मेण, १११९ मुम्न एक मलित पत्रिका प्रम गदा | Catchmords मोरपी व नरोकि इस रावो नरापि नही माना पाहिसे कपिल मौर विदाह एक सुनहरीमा पारिस शरद पवावठी परान रेप स्वाधीन हुमा है। इतिहासमै सी नगीर है। बिपी मदरसे सत्र देश से सरकारका रूप मपया सामाजिक नीवि परिवस्तिकामा कमी मेटिन में नहीं समझा कि पिलबसे परापान को सापीन पिया प सकता है। इसका कारण स्मारे बानते हो। शिवम बगपुर, विश्वमे गा पुर-मास्मकम मौर गाषिच्छेद है। भात्मय और पारिपोरसे भौर कुछ मी को न विपास देश परम एजुको पपचित मी किमाना समय । विस वा विरोपी। (बणु, मापाव १५११) हामवार पापिनास भीन-चाव की पूचनामे दमारे बेगुको महदपसे आप देता है। मिस माविस सहिप नहीं है उन्ली दलिता सिवनी पड़ी त पुराने सत्प को बतमान नाना उत्तेजना कारण प्रापा हम बाते₹। उसका पाहुमानित बपकार आतीय बीपनमै मरम्वर पाटीका या। सम्पबमें पहात मा हो गया है। इसकी पीमा ना इस बार- को हम सपी पनवे ।। सेछिन म मोर ग व छोरी-सी परिकाको केन्द्रनार पहुए तुम होगोंने नर-नारीकी पौन समस्याको सारी बेदना पर नही मानही मेरे लिए सबसे अधिक मानन्दका कारण है। परापीनणका दुस्तही हमारी तो मेदनाममा रोपर गारी इस पत्रिम बार-बार पापा । मापना परसात पत्रिकामे रन नीतिका कोर पटियम न हो। (पेणु, श्रीमाप १३०) सामताड, पापियार पामसम्पापीये। भूम्न पूछ दिन पासे तुमारी विही मिरी सकिन इस बार मिस्म बामा पड़ा इमरिए बबाल देने में देर हो गई। कुछ सोचना शरद पत्रावली मन तुम योग मेगे मोर निम प्लेगौसे मुगाव रोगी इस मन परसी भवनमें बैठा मासर सोरण पासाहित्यको पेपर तुम होगते परिचय हुमा । मौर मफ्ने देशको तुम मम्तरसे प्यार करते हो यही पानता लेकिन किस भपयम बन्द हो एमसमें नहीं माता । प्रार्थना करता यम रिहा शेकर फिर साहिशपमें मेर सको। 'थेष प्रस्न उपन्यास में इदना माणानकर पी बुण। इसमें बहुतेरे सामाजिक प्रश्नोंकी भावना है पर समाधानका भार तुम गौपर है । भविपकी इस कठिन जिम्मेदारीको सम्माननाने ही प्रायद तुम होगको बहुत भानन्द दिया है। मगर मेरी धारणा है कि या पिताप बर्वोको नियप करेगी उन किसी भी सराका मानन्द नहीं मिलेगा। एक तो गस्सा बहुत कम है बड़ी देये समप भाग्ना या नौदकी पुपरी तरा निमित्त हो पाराम मपर्मुदी भोसीस मानम्मानमव करना मासिकता है। इस भो खानेकी बात नही। फिर मी नही सोकार दिला पाकिछमेग तो समझेंगे मौर मेरा काम सौसे पत गरगा । समो प्रकार रस समय लिए नाते । अधिकारी-मेवो मैं मानता है। और एकाव याद पीलिया मति मानिक हिस्प है। योगा पास विणाम एक संत हर बाऊँगा । पद्म हो गया। सिनेडी पछि पर्वतप्राय कर मी सोचता हूँ विभागामी काम मामोंगो पायद इस मामाव मि बामगालि गन्दा पिये पगैर ही मति मानिए-साहित्य निवाब पाता है। यह कोमल-पेर रसानुमति ही नहीं पुरा टिए पकारक मोबन उपस्थित करना भी भनि-माधुनिक-हित्यका पक्षमा काम है। इस बार तुम मेगमलोगे तो हमें भी बहुत पाना पोगा पाव सोचना पागा। देशक मनोरंजन मोजको ऐनेसे री पुरा नहीं मिलेगा। में हो तुम्हारे पास बहुव समप है। दुर्गे मेरा नसी मारेगक छ समारोगा नए न करना पर निर्यन-पान भिम सुमारे पाद बीवनमें पस्यापा पर लोब। बादेरे डोर्गोई बीच मनुपको पापानना सीखना । मनुपरसम्पको परमानना हो साहिपको पयर्थ मनी है। इस सायको कमी न भूलना। । ८ शरत्पमापसी मापेमें मेरे घरीरको मेमा यना पाहिए पैदा हो। मोमें रहो, निय यो, पही भाशीर्वाद देता हूँ इति । (केड, ११३८) गुमानुप्यापी भी घरबद्र पधेरा १५ [ भी कपणे दुनारायण मौमिकको लिखित ] कस्याणीपेषु । परिष संपास्नोबारेमें मेरी राय अनना चाहते हो मन मैंने तो कमी पत्रिका संपादन किया नहीं, भवएक वास्तविक अनुमय मुझे नही। पर मतिपत पारी पत्रिकाएँ पदया। इससे पही बगवा tie मासिक पत्रिकाको पाबनाम पिप करनेके लिए सबसे बड़ी आबापता होती। एपनाशस्निग्मता मौर संपमकी । उपतामे भमित करने कम्पको मेकर को पुछारसा बाताबय प्वानसे देखने पर पता पर वायगा कि उसकी पोणा तपा बारा मतिरेक ससकारि पठकर पिचको बिल पर देनेर मीमा स्थानी वो होता नहीं बरिक प्रतिकिपास भणयप्रत कर रखा है। पानी में हो या भौर बिसी पीयम, मगर देखते पाठे मेबाकी अपनी मनुमतिक रस एप मौर गिर होकर रचनामें नहीं आई समस सेना कि उन्माष भोर माया मारपर पार दिने पीपा देनेवाले और मनुप्पकी स्किो भाति परनेबामे मौन , मम्तमारपम्प में रिक मस्सगे। इनमेगामा (हरिपारी) पानी नामक एक बात मान प्रायः मुनता, सेकिन उसका स्वरूप कभी नही सापालनेपर भी पहचान नहीं | उस दिन भचानक एक कहानी पड़ी पी समाप्त करनपर ऐडगापा मानो सेगा पागि पोम रसना पीपी मुकर पिर पड़ी। सपस्तुप पवित्रा कमी मा मत देना। पर ऐसी गात मी न होपमा

शरद पनापळी
कहानीम बुद्धि पछिकी छाप पना पपीय है, हदय सि मारिमित
माहुस्पवे रेलपा भामक बनना हरी गस्ती है।
(सदे' माधिन १५४)
[भी बतुलानन्द रायको लिखित]
स्थानीयेषु । भावय (१५४ ) की 'पारस' पत्रिकामै श्रीमान् रिमीप
इमार रापको लिक्षित रबीमनापक 'पत्र-साहित्यकी मात्रा विषयमै तुमने मेरी
राब पननी पारीहै। पा पत्र म्पविगत होनेपर मी बर, बनसाधारणम
प्रकाशित हुभा है तब एसा मनुरोप शायर पिया प सकता है लेकिन कितनी
हीबार पकी सपी रिहिसौदा मन्तिम पंक 1 पमे मेम्ने की सरा
मन्तिय कई पहिलोज पास्तविक पन मगर यहीयेप मफ्नो
मनो-पन
--सोपवलूक मान-माल की मेगा तो भासम्म
परिठापसाप यही समझेगा कि उमठो मुहुन पु, उस पखको क्या मौतों
रेशमानेका मौका मिल सकेगा।
पर इनमयमा पिने और भी मिन मे बारेमे माण छोर 01,
नुम स्मोको सदर होता है उनमें एक में मोर पसम्म ना।
इसनिय ती जिलापता विपन है कि २'मतवाले पापी
मागास पर पालवानी ठे, कसरत करामात दिखाते है, 'मान्छेम
यस पखे है, भवपण उनको इतादिनस्पादि।
पे पाते निस रियेको यो नाब, मुम्पर भी नर और कानोको
प्रिय मी म । सेप विपा मामेव मनमें एक प्रकारका इरिटेपन (पिए
विकाफ्न) भगा। उससे साफा ऐस मर्प दोबागो मोवाका मन
मी विप्र होता है। परम प्रार करना जित हार मनायापक
प्रविवाद भी उसी प्रकार पर्य। रिन पार्कोको दोषी कर पुरारी,
प मामीन-च 'सेव दिसल्पमा अररिसे इन समारो
-

शरद पवापसी
पूजा मप्रासंगिक है। मेरे रमकी रात बार भाती है। पर मेवारी
किसीने पर मर दिया कि ममुफ मैम्म गया है। फिनमा पना को
Jलने का किसने देखा पा का नहीं है गोवर है--- पथ
र मानेपर माताएँ बगैर नामए, सिरपर बगैर गंगा-हिरे परमे पुख्ने
नहाती पारिए मैना गया है ! महो मी इमारी बोध ।
कसा साहित्यको मामा' मा दूतमे सिप इस बातो मत्वीकार नहीं
करता कि इस प्रकारका मपिक बनाभौगो मानेकी हम मुममें
मी। उन पमा उदाराम -पु यावेपर-पाय, हापी पोरे
भन्नु-अनपर भावे ।। धमममै मही माता मनुष्यको समाति समस्याभोम
नर-नारी पारस्परिक सम्मायक बिपारमेरे पो आवे हैं और भाकर रिक
भावको सिखे मनन मोगनपर हीमो मे नही बन बावे ।
एयन्त। कुछ दिन पारे परिवार प्रति मायठे मषित शेर
मन मड-परम्प यापूको एक पत्र मिला उतम शिकायत की सी
रिप्रमपीसी पासी हुई समूठे मर उडी गाव ग पेठठी हो
इससे उसको पवित्रता नर मही होछ पर भारचि मावी । शुत सम्भार
वहार हो रन से हारनोंको बौन-सी सुविधा हुई। न-सीमा
मिली तसे अम्पायगे पर ये मया करवा सम्वा विस्टी
सो भति-निकापीर मारी गोवर्म बारेठी यो दमने भापचि नहीको मक
पर महि खयर सीब में मी दुपारी मोबम गा तुम भापति नार
सनिलीवो गारमें देती है पीर्थ का पारीपर पदोनो
मनुमा प्रति मनुष्प म्याप सम्पायर फैया मदी पियार
सम्म उम्मा पुरने पर रेसनेमे पाप गा रेती।
रन परतने पर बोराम भगवा मा मरिबितर होता है। यह निरीकी
मनगिनिव बस्तुभी अपारनदी पारिता दिनार मोम उपम्मान पी
अत्यन्त पर, दर मात मिद नदीकोमा।
भाधुनिक वाह कारनानी माग कारपोते बहुवर थेग निमा
पाठे? रवीन्द्रनाने मी भी इसमें दोष ना सलमही रेपन से मा
-निमित पारे संतम कामगाते या निम्मा मा गये ।

शरदपत्रापस्टी उनारामी मुम-गुमरे कारण मोबदरटो ग्ये-बन-पात्रा मनामी मी बदर गह। गत सिानोंसे उनका पिन न मिष्टा है। व पाटको सेर म किया गया तीन रिमां मारनी नाना विष परनामा कर पानी रितशोर धारिस पो नहरी रोगाकरि भी नहीं करनी रोग। उनकी पारस साहित्य ये स्पाई उनमें । विन्टल मात्रामा निमर सि रहसे हो । हयान पाको पातचीतसे ! नपा-निमय दोन म चिरन्टर मून नीतिमा पर मून नीति' हेमासी दुधिर भनुमष और सीय रोप मग भयविदा मेर ! पिरम्वनको राप र परते रायसी मेरठा नारा मृगला। पदिन का "ठन्यास यतिमी नही दरा। मनु माघ सरिमा के भारत पाहै। बस्न पुक्षरम मार फोरपाटा है उस्मार-साहित्यको पादा नहीं है ममुपपरा समाचार सूर नीपे दर नहीं गया, जिसके रस टायर ।उटा तो उसे पौन-मी नसीर पर किया अपग्य ! भैरसोरेसप एक प्रभाव सामोर मुनाराजी वोपनापने मी उना या परमापयारे कि 'भार म्मुपासमामे माठा' वाकानी हो मुनना पाया मारामारप। पासपर परदे दुर पार पाटst- माठिस्य । सन समप यो मर न मी सी। मतारण गबामार तप मेनर मेरो रानौवे मारा मननी माता। दो उन उपर हुरिनोवप देना में नमश्टा । मनापानीnata पालीम रिपर चर्म पाप राने हा रायाम की दो पा र पानी स्पिनर सेनाको विरार पति निरंत करी माप रटा नहीं। बन्ने मामारत तपा यमा राशि पर मरेर गोपरि को मापनास दिलाया पाउनों परत्र मिस HTT। हम पटरी में अरोरना नपरेमा बेरोनों प्रय पर पानी न पनप रही है। दोनों १९८ शरद पवापरी परिष सापारप उफम्पास बनावट परिषमात्र नहीं मी ऐसते, मान, सासरप काम-उपप्पात माप-रपसे नापने में मुझे शिक्षक होती है। परम पिकर धमके कितने ही प्रयोग है। ऐसा लगता है मानो करिने रिया वा वि दोनों मोम इस पदका प्रयोग किया है। प्राकम प्राप्य मी पैसा उपमासमें कितने ही प्रकार पाम्म यवे, पविगत, नीतिगत गमा वि, सांसारित इसमटावापानीका मपना मामोम, बोपारसे सम्मम्म रलता है। इसकी गाँउ सबसे कठिन होती है। कुमारसम्मका माम्म उचकागमे रामपका माम्म सम्म हालतमै नोएका प्राप्टेम भपया मोगायोगमै मुका माम्म एकही माठि नहाँ। 'योगायोग' पुरावा मचित्रा में प्रकाशित दोगोपी मोर मापारपार मापापम कुमने बोइंगामा बम विपाबा मैं सा समझदी नहीं पाया था कि सत पुरी मस पपस्यम्व मधुसूदनसे उसकी रस्सी स्मात से होमी । किनकीन बानता था कि समस्या नी मग श्री मोरगर भार एपमा उठा सहार देगी। हमारे बापर दाय मी माोम परदाय महार पावे। समयदे। उनकी एक पुसकर्म इस्प व्या एक मारमीने की समस्या पैदा रापी मेकिन उनका फैमध्य हो तरसे हो गया। पुफकार र एक मात्रा प निषाहा और से पार स्मिा। पारा पूजा पा लियामा हुमा । सम्ने उचर दिया पाक, स्पो, मा साँप किसी नहीं काय! आम्हमें भौर पर बावानी पान्द्रनाने मिसा है पसेनके नारों पटने रिलीis म भार नही हुमा १ सेरिन्न मा म उनका एमपीस मी गपापुछ दिनों बाद क्या पर दिखाई पोगा ! नही पाहता,दिन पिर मी या भनुमान प्रमाण नही। बार रिची समय ऐसा मी समताकि बसेना पुराना भावर रमेर जाये। पवमानातही साहिरपा परम शोर मदी है।

शरत्-पत्रावती [अविनाशचन्द्र पोपालको लिखित] २५ भाषण १२४१ कस्साधीयेषु । पावापन प्रत्येक को मैंने प्पानसे पदा है। मास पा उपशासेपी पर नहीं रखा। समी वियपाम एकमत हो सका ऐसा नहीं मेकिन मकारण विदेप पा माफिगत ई भाममनसे किसी भारोपनाको कमी किव होते देखी ऐसा नहीं माय । मा मानन्दकी पावलेकिन अगर ऐसा कमी हो मी गया सेबो मेरी नगरी में नहीं मापा तो उसके समन्वमे मार यही पर पहूँगा किये गया सोहो गया लेकिन मूतन वर्ष प्रारम्मसे तुम स्थगाँको सश या पार रखना चापि कि रचनामें मपहिष्णुवा तो परवाप्त की मी पा सकती है, पर पता नीचता, मतस्प निरारी मनुपको दीन सिद्ध करने प्रपासको पाटक-समास भपिक रिनोतक मान मही पर या उसकी नबम भेला सपी पीर पर छोय होवा पण है, उसी पर पुष्पाती। पत्रिका की मांग मर होती है उस शिपिक दो बावा है, भागेचना निष्पना- परिभम दो बाठी-समी प्रकारसे उसापका सामण सीमो पाता है। इससे पदार पत्रिकाकी कोई दूसरी भवनात नहीं । स मसम्म मा मनापरी नहा रस पावको निश्चित पनना कि कुरुपता कमी दीप बीपी नहीं होती । (गावापन' २५ भाषण १५४१) सापीयेषु । रस्पर या रेकी साप्ताहिक पत्रिकाओं ममशः मोगोंकी अनुष और उत्तष्ठ Hि प्राप्त हो यो। भपात् मनुष्प दैनिक प्रयोजनमनकी मागसपता मी मा मनुमक रहा। मानन्दकी पाव है। लेकिन इव प्रदिरा भातनको रसमा परनेस ही नहीं बसेगा, काम मदरसे मनी मादा प्रतिदिन सिम करनी होगी निरन्तर याद रखना होगा किमारी माता नपारण भेगक माम्प भौर पसापको समाना

शरद पत्रावली
पोहै। और किसी दूसरे उपायसे मान मस्तित्वको कापम रमना पत्र लिए
बापता ही नहीं बिपना मी है।
तुम्न जानता। तुमने अपने बादर्ण, मरने भनुभएकी मरे सामने
न बाने कितनी बार परीकी डोरे माईली ठग उपदेस मांगा। बीपन
मानाम न सका दम भूबन चामो वही मेरी रहा।
परिकारचनेका काम सिफ दायिनका नर नाना प्रकार किसय
है, मिप-मिन प्रकारकी प्रमिताभ का सामना रना पाता है। निस्सो
समर भपिकांचीपमपिका पापि स्पम और तानशीलताकी भस्मत
मावस्यकता है। ममता निरर मामोचना सातादिका मान! कत्तम्म
बिमुमता भपराप है। फिर भी पाता कि इससे मी ती मपिक मम्पवान्
माय अपना परित्र और मादा है। मसौम्म्पसे मोर पुरी बातों मपन
बचम्मको कमी कापित न करना । किमीको सारा बनाने के लिए नही, पण
बनाने उपमारी प्राप कि निरसी ये यही प्रार्थना परता
प्रगति पयरर मुमारी ममति वियर होकर ही येगी । इति ।
भाषण, ११४२
एमाफांधी-
भी परम्प पडोपाप्पाय
१८
[श्री मतिलाल रायका लिखित]
१० भाधिन, १३४१
परम भदायरा 'भाचार्याने पाणी सापनाका मूक सूत्र है सम्प,
शिव, मार मुम्बर । भात नापना पत्पपर भापाखिस, मुन्दरपर पारित
भौर उनका पम स्पापमप हो । बा विहानरे मापा १ (सवान नरी
कारा-साधारण गारिक मर्प परमा) भपात, गनिक
मरापमान मात्र है। पापना पह मुन्दर ममुरमापार

शरत् पवापसी भासपार-मोमें उनकी भाक्ति नही हो तो पापा नही रोतो भी बाइपास किन साहित-सेमा मत रिनौसे प्रती यार निरन्तर मनुमन करता है कि यो सव मौर मुन्दरमें पग-पगार विशेष उपसा होता है। मारमै यो परनाम सरव हैमारिसम या मुनर नहीं भी हो सकता है, और को मुन्दर है यह सरासादिस्पमै तोमो भाने मिप्यारे। सेि स्पट स्पर्म बाना हूँ उसे साकार भूच स्म ऐन वाकर देतवा पर बीमान पक्षाकार रोखावा है दूसरी भार असरका बसन करनेपर भी मुम्बरका रूप नहीं मिझता है। मत ममंगम मी इसी प्रकारका है। जाहिरप पर प्रश्न मप्रासंगिक इसे स्वीकार किये बगैर भी हानी गावा। पूजता है मय भगर मुम्बरका विरोधी रोगा। स्पाम भाग्याष गोप सा, मारिस्प-सापनाम इस समस्याका समाधान पिस पकापसे होगा। भवदीय-भी परम्झन्द्र पछपाण्याप (परचक प्रागुन ११४) १९ [थी पशुपति पहोपाध्यापको लिखित] वगापमान है-मैं मार पो न सिता । खबर नुमारे मन में या स्सिग कारपोते आई। प्रपम नारपकार और एमरे मम्मकाणु शय रिठ उपम्पार्टी माटपम्पयवा भीयुक्त मोगेश पोपरीने में बतान परिधर्मे बंगष्य मारोहमय बो मन्तम प्रकार किया। टसे गुम पूरी तर महा मान सई और दूसय बात है गुम निरन्तर गिन नारोंच मिनप दाना पर उनके मार माण परिवहन सादिको रिपारकर एमपर तुमारे मनमें यह बात मारो सम्द्र नारस हिसे हो पापद रंगमरमेहरेमें पुह परिसचन से माता।

शरत्-पशावली रही है। मौर किसी दूसरे उपापसे मान महिपको कायम रखना पत्र दिए समर्पता ही नही मिना मीहै। हम पपनसे सना ।। तुमने अपने मारणं, मपने भनुमबछी मेरे सामने न जाने कितनी बार पर्वा की मेरे मा की सय उपदेश माँगा। बीवन- मानाम इन सबको तुम भूल न बामो यही मेरी म है। परिक भनेका काम सिर्फ वापिस्वका ना नाना पकारसे रिममप है, मिर-मिम प्रकारकी मविपता का सामना करना पड़ा है। निस्सन्देर इससे भपिकाचही सामरिकसपापि सरम भोर सानपाडी भास्पद भावसकता है। जानता है निटर माखोचना साविकका प्राम' पम्प पिमुसता मपरामहै। फिर मौका है कि इस मी ही मषिक मूसरान् प्रमाप अपना परिष भौर मर्यादा है। मतोबम्पटे और बुरी बातों नपने परम्पको मा कपिल न करना । किवीको कोरा पनाने स्पि नही, पण नानक उधम सीमारी प्रदाट निरन्तर मगी ये वही प्रापना करता । प्रगतिरे पर तुम्हारो भातित नियम होकर ही पेगो । ति । • भाषण १५४२ धमाका- भी धरणम् पोपाप्पाम । [श्री पतिसाल रायफा लिखित १. माधिन, १९४१ परम भगसरा भाषानि का मकी सपनाका मूड गुम है सस्प शिष भोर मुन्दर | अपात् सारना सत्पर भापारिख हो मुन्दरपर भाषारित हो मोर उनका पल यापमपाबा पिणन वारी (तापमान नही पापा-मारण मारिए अपारा) मपात् मेगानिक उनए परमात्र मात्र सरप। साधना र मुम्भमुन्दर कल्यामर

शारद-पप्रापटी
भरो-उन मानिरी10सासनी
मीरा
सरन मादिर सेवाने एक दिन मेरी रहार निरन्टर मनुमा करें
पिनर मुम्हरमें पग पर निरोप उरमाया। स्मरमर
- मीप पर मुटर नो मोसो भागमुन्दर है
परम्पारमारिपने मोखो मन मिपा है। रिमे सपा में गन्ग
हटने सफार मच सदेन र दनानापरण
Tप भार ममता पम्नानार मी मुटरकास्ना मित्र
मर्मत मारामार या प्रश्न मी से संपर
रिमोटानागारवा
पुण्यार कर मुभरा दिया। पापापा न
रोटा मारिस-यप एउमाका समापन समार!
भारी-
भीन्द्र राम्र
(मरक्षक स्न, १५४०)
[भी पशुपति चहापाप्यायो रिसिठ]
दुगमनार को मन्दिा! पर नार मन पर
मोसारले भार। प्रपा नाट्यार और दून पाय
ररित रसन्या मानपाटा भीयुड या रान में 'पहास
पराम का नारको समम गटारर पिार से दस पूर्ण नगर
नही पान र ग म निरन्टर नि नराम्नरम्भ
स, उनके मार मार परियटन परिस्तिार करनारे
मन पर बात मारहै कि पद नारकरिगेटोगहमरशन
परिसदन पर।

१२२ शरत् पत्रापरी हमारे प्रश्न उत्तरमै मेरी पहली बात याकमें नारक नहीं मिलता। इसका कारण है मेरी मममता । दूसरी इस असमताको मस्वीकार कर मगर नाटक शिवा तो मेरी मम्मी नहीं पोसामगी। पर मत समझना वह परकी स्पेिही रसिया । संसारमै उसकी भावस्पकता पेकिन एकमात्र मावस्यकता नहीं इस सत्पो एक दिन भी नहीं भूता है। उपन्यास बनेपर गासिक पत्रिकामा सम्पादक सापा उसे से बायेंगे उपन्यास पने टिप माशों की कमी नहीं होती कमसे कम भारतक नहीं है और उस उपम्पासको पदनबाझे भी मिस्ते से है। कहानी हिलने निवौको मैंबानवा है कमसे कम सिता रीचिये पाकर किसीका दरवाप हरसगनेको दुर्गधि नहीं हुई है। लेकिन नारक ! रगर्मचारी अधिकारी हरी इसके मन्तिम हाईकोर्ट हैं। सिर गिर मगर कास है कि इस बार ऐमान कम-रक नहीं सीकार करेंगे या पर नाम नहीं पल सकता तो उसे पानेकी कोई सूरत न । उदीकी गर इस लिपपमै मन्तिम है। कोकि विपेपर। देनेवाले दागोंदी एक-एक पावको बानते हैं। मवएप इस मुठीनतम साम एवार पुत पाने दिपा होती है। नारक प्रपद में मिल सका कारण नाटकीबो मत्यन्त प्रयोगनीर मानिसमणी नहीं होनेसे नाराका प्रतिपापली मीराst हदपमै प्रवेश नरी परख -उस कपोपफफ्नो रिसने भम्पास मुझे है। पात पानी पारिए, मिनी मरा बना पानेसे पर मनपर गहरा मसर परती इसकोस्पको नहीं बानवा ऐग नही। इसके भतिरिक मगर परिशमा परमा निमापकी बात करते हो, तो उसे मीर कता है ऐसा मुझे विसास है। मारम पम्ना मा सिएन पार करना पड़गी परिम-सम्म लिए हो। परिण-समन रो सरास हो सकता है-एक प्रकाश भपात् पात्र पात्रीमो, उसीको पटना-परम्पराकी सहायता के सम्मुख उपस्पिद परना । भौर दूसप -चरित्रका विकात भात् परना-परम्पराई भदरसे उसबीवनमें परिवर्तन दिनाना । पर मपाईप ओर से सम्मान और दुईसी मोर मी । मान हो कोई भारमी गोद ल पहले विलसन होय में पाना लाता था, हट मोगब पा और मे दुरे प्रम भी परवा पा! भाव

शरत्-पाषटी
परमिकमा परिमाराम पत्तकर मार गिराया
सो उसे सपने पछि देता है। फिर भी हो सकता है या उनमा दिनापर्य
फन न रो सम्मा भान्तरिक परिवर्तन हो। होता है देरी परनाम्
भावधर्म पर दस-पांच मठे भारमिनों समाम मार टनसे प्रसारित
र मार पर सबनुषी बदल गया हो। मतपमा बीस पर पात को
या बा मी सस्प है और भारो रोगमा कामी सर।किन म सेन
करने काम ना पडेगा-नारको भारदे, रमनार मदरसे पाठापा
दय सम्मुख इसे पपार्प बचना होगा। टोला नी गाना पाहिए कि
रचनामें इस परिपतनका कारपीनर मी नही मिया। म कठिन
है। मोर एप-यात उपम्पासही तर नाराम बीमपनमा नारको
एप निश्चित समय बाद भाये नही बढ़ने दिया सहावा । एपबार
इनरी परनाको सम्पर नारो सर्पो या मै निमाग्टि करना,-पा
मी पेश करने र पद धप्प ना होगा। रन मोरटा है पा
होगा ! नारयेगा उसे मरस्य रोग कौन ! मिति समसार
मिनेठा-ममिनेनी करों! नारकी माविका बनगी, लीपीवो
मम्नेित्री नमन भाटी है। प्रकार नाना पार साहित्यको इस
रियम पम रमन रफा न होठी। भाषा परटाईपिसी दिन वर्तमान
रंगमंच पर समीर रोगो मेमन शायद म उठे नसे ना देख सकेंगे।
भारती मगर मासकरपा मार टोणपर कमी रिण मी में। मेरिन
मपिक माण नही रखना । ('नार ५५१. मास्विन १५४१)
२०
[जहानपारा पौधुरीको लिखित
१२ माघ, ११
नुमन ममी बारिक पत्रिकामे पेन-यण हिन ने लिए मनुरोप
जिाहै। मेरो बसमान भवत्पमें शायद पड़ा की लिहाय समता है।

शरद पवादसी
वस्त्र मित्राचा विकास हो उस बोसे सा तब इसी तराका भोग
(Non-co-operation) चिरकास पगा।
बोम, नही, चिरकात नहीं पमेगा बॉकि, को साहिस्प सेवक उनकी
पति उनका सम्प्रदाय मध्य नहीं मूटमें, एबम एक। उसी सत्यकी
उपम्पिकमवासि सामरिक मन्तरको मात्र मी होगौने सरम
करना होगा।
मिबने करा, मक्ते इटीकी पेच काँगा । योग करना । मपनी बेशर्ष
पार भगवान् भाषारिका प्रतिदिन भनुम करोगे ।
[चर्पवानी' गुठीय वर्ष ११४२]]
२१
[मबी बद्दको लिखित
बाजे शियपुर, वारा
पिम्प दिन है कि दो दिन पाई मापका पत्र और मित्र परिवार'
मिले । मन्तिम पानी 'मोर'को होकर बाकी तीनों कानों पर भी।
भाव-कसकरानी पद पर भानन्द पाना भौर प्रशंसा करताना दोनों ही मामो
कठिन हो गया है। पुस्तक उपहार पाकर बजारको रोमम्ही बावेपने भौर
सन्दारपसे उधार देनेका मोशन पाने मरण मविप इष्टिय यय है।
मापने मुसेपर समपम दिया। इसए पम्पबार । सममुच ही में
पहुव प्रसम हुमा । भार पर मापकी पामै पेन। ये मविप्प मापसे
बहुत अधिक भाण मानती है इसे कानेकी भाषमाया नहीं।
मनी रमना मापने उई माँगा मार रहे भा ही किया है।
मम्पपा मुसलमान पाड-पाठिका कमी से अपनी मातृ-मापा समसार
निसंप पसीकार नहीं कर पाये। उपारमार यही गगरियर

शप्पमापसी
१७
हिन्दुओंडी मापा, उनकी नहीं। इन मगह-जगह बसनेगरी मासपोमें
स्पपिपिक मिखन म्पास्ति भरने मापद मदी सबसे मग तरीका।
, सर गहिरिया इस मसले पर नहीं, पर मैं ही हरकी रचना
पभावी है।
पर मापको एक बात स्मरण करा लेकी सरत मान्म करता है।
बहुत दिनोंत पार पापार राहो सwant मोहालात मनुमन भो
स्वप किया ।माण रवा है सपोचित उपदेश देने कारण मुम्म नहीं
हंगे। पात पाकिटमी बाहिरीमें मपे-पुरे मादमी । रिमुभीम भी,
मुसलमानों की है। इस सापको कमी न भूम और एक भाव पार र कि
प्रमार सिी रिप बावि-सम्प्रराय या बम नहीं होता । पारि
मुसम्मान, इसा पहरी सम्पुण।
मरदीप--
भी परपम्द्र पौगम्याय
२२
[भी उमाप्रसाद मुखोपाग्यायको लिसिस
सामान पो पानित्रास
२. भगद १९५५
परमकस्मात्रीषु। उम्पसार पर नमारी बिही मि। मरी
सबमुबीड़ी का ऐटी है जिसको यस बार भी मोर पसल इस
बारीमती बरे मविरम तुम सबसे मागे-मागे परो। मप्ययन भन्दा नहीं
हुमाया में बानध, मि मी मा किमोई मातानीले तुमसे मागे
नहीं बदलेगा।
उम्मेबाद मैं कराधना गया। पर कार्य परिधिमे बैठेरोम दिन
कट वेरिन एक मार परका मुंह देख मानेतर समाने पाच-सात
रिन हग गये।

भारत-पापली
बीकोठी। मषित न होनेपर मी ५ वार रूपये मानवपर।
सोपा मारत समीम शामिलशार इस युग (गा। मुझे चौपाई
हिस्सा दगे। मन सामारिक भुमिया जैसा माचरण करते में भी पैठणी
कम्गा । भात् ठगा माँ बाढ़गा। दशहरे पारी सारी बातें तरोबर
साप वपन्न इसी बीप साहिपिक परिषित-अपरिमित पारे भेग
सियेकि उनी रखना मेर पेगी रूपये मे । आप इसकी धदि भगर
पोटी । विमनु मी मिकी मुझे परम भाषस्यकता है।
पर रिनो तुम नहारता है। तुम भोगौरी बीमारी भगर मम्रो
गई वा एक बार पसी नहा भाठे। मेरा लेपसोबाप सेना ।
-दादा
२४ मस्विनीदचपेट कार्यपार,
१२ कार्तिक, १५४५
कम्मापीयेषु । बिस् का गोदने पर्स मानेपर तुमारी चिली मिर्च । बाम
और माना पहा पोलियो खबर पहुंचीही या म्यूमानिया तेनार पर
दुर। मन्नि मामाप बहुत आये नही पहा है। भारी मडी
पर्यगी। नहीं तो गरी भादमी चा मारा पर राय
नीरगा।
मेर ६१ प प्रारम्मपर स्नेि मायाद दिया --मरण म्प्रपाम
दिल लोहार मंगाकामना की है। पानन्दसाबार पविराम दिना प्रकाशित
हुमा पापा में भेज रिला, मग्न राव सिम्मा (मागीय) मुजारिता
है। हमारे मानेपर वन बनो पोको वरद हसे मी मने ए नरेगा ।
परम पालो मुसमोयना। मेगा नहीी र पदमाम बात
मग दो मा।नार नहीं है। उम मेरा भागीर मेना भोर तुमार या
मार्यो में काई होता उमें मेरी प्रभेगा पाना।
-प्रभाथी भीमपन्द्र पोपापाय

शरत् पत्रापछी
२३
रवीन्द्रनाथ ठाकुरको लिखिस]
पाणिपुर, पिपुर
९९ प १५२४
श्रीपरमेषु । भान हम भाप पासबारे थे। लेकिन रास्ते में प्रामुक प्रथम
मापूरी सीमेन करनेपर पता पमक भार पुरम है। मास्तबम
पदभापगे । भग्न उस बक मुहमा करना कठिन है।
मेरे मुहम्मे कम-सी साहित-समा। एक-दो महीनेम विपर
पर उसका पिता है। बहुत ही नगप का मामय। मिमी
मिस बार हमने प्रमप बार पाना पा मोर मा रूपा कर समापति बने ।
कई दिनो हम गातार पास कर सप नही कर
पाबमाम
अपनी परपूल पानेकी का सम्माना माना।
इस बारगर घरी हो ममर अनुमति ,हम भाकर माप निमेश्व
वकीपरचन्द्र पछपापाय
बाने शिवपुर, हरस
२५ धाम, १९९९
भोपरपे। इसे मना बाकि भाप मुसमे प्राविण्य प्रसन्न हुए है।
उपनाम भार गुस्से में हो रहा भाप बारेमे का मिमा पानी
। मेनो माह की सपा-सपकी बार करने भारत मए थे
माने मा कम भाराप यहाँ दिया है। इससे माप सुम्म दुए
और एकही पंजाबी दिए। उसोन सिनेसे पालना
- बाडो मैने उस समय ठीक हे पाच मुझे मार
नी। भान तोरसे में बनायर नही बोग्य, पर ग्रेना एकदम
भवम्मा ऐसा मानहाँ। म कम इन मायका ये मार दी मार

११२
शरद पवापी
इस पार स्थितने हौटकर माप बहुए पा गये। मौर मंगा भोगोंपाद
भापरा पाग ने मार ममत्व पर नहीं है। परला मकरसोग मारिसर
भापनिक मी मास्पा पा पिसास नही , सादि।
भाप पारस एक दिन गुस्तेमकी में पसा माया पा। सवारी
मापदण्य बातो प्रचार किया होगा। शायद मेरे मनमे परम्परा
किसाग गत तमहतो समझे।
भापति मैंने बहुत कम मफ्यम किया है पर प्रपम अपराध होने कारण
मुझे समा रगे। भाप सिमा मार रिती व मारमी यही में
कभी नही गया। पर मरे थिए उमप्र रास्ता भी मेरे अपनी साप बन्द से
गया है। साचन पर गुस्सा होता है।
भाप मनज गियर्पोम पर भी है। उनकी तय रतने दिनो तक मैंने
भी कमी भापकी निदा नदी।मेन्नि दरवारों प्रमय भाई, मरी
मेरा नाम सोबार करें।
-बाश्री परम्पत पापापाय
पापपुपम
२५ णात ११
भीमाशु । भुव स्पापी लिए भाप देश नम रेगे इतनी नदी
निना प्रारीही ठो उस पार चिरी मिलर मापसे धमा मौगने
बाना रिसाना दोनों मानिए परनामी है। मारप भाप
पपा सरहना दिन गारम भाभी कोई बात नही।
मारो आप पाठ बिन बागाने मापतक पहुँनाई। उन्होंने
इसकी सीमा नहीं रखी।
मोर मेका। मेरा प्रमाम सीमा।
सेवक,
भी परतन्द्र पोपाध्याय

शरद पत्रापटी
पापिषपुर पप
२ माघ, ११५
भीररहबार प्रकार काम सिर भाप नि मोरक्षत
मातोशसभी मन। तिर मन यर सागर रिसा पा
कि माप लिए बात करने जैसी नमो समाष सीबोरसे
मेरे मारकरी पुरिया दरबारी ।
सपम्पलतो भापकी इस पिटीको दिखाकर भाच मासानी
उस गीत रिसागसता पा। उसलिए यह पिट्टी मादेश सी बाली।
लेकिन परकम और दूसरा कोई नयी बिनस मारा।
का भानेमो भारको पम मारनको मी पुरत नहीं मिली। ठप
समरसावला सेम में उत्पात नहीं करूंगा। मेरा मशेष पाम स्वीकार
-सरप
मी परतन्द्र धाम
हामाया पानास पण
२५मान, २५६
मीचरनेर। मेरा परेका मोप प्रयाम स्वीकार है। इस बीच माप
नाना गुगवा राम दुए में और अति दिन मी मरीभरका
रम्सए ममाम निषेदन करने में खिम्म यिा।
उमरखी गति साथ-माप मापका बासीवाद मिय मेरे पाभेट
पुरत्पर है | भापका पठम घन मी संसारमै किसी भी तासिर
समय दानतिर माये है।
सीहार भो।३१ भाद्रपरको भापता परमसा भाय सम्म
यस हुन । भाते तो खरना मनागार देनार मपरत माप्ति एदे और
साले पारसको बा कि मेरे प्रायः समवयस्क मापने दोस
उखमा सूत्रपात रिक्षा पा साबनाकी बात दर परीसरो पर
मेय पद पर मैं उपासमा समरिपिरो हान्य उत्तपमें
-

शरत् पनापासी
इनौने काम दुख देनेडी योग नहीको पी। में एक दिन स्वयं भापको
मनाम पर माना पाणपळ संकोचारण मी मा पाता का
कोई कुछ समझ न बैठे।
मापकी तबीयत भर सोसल गिरे स्वास्प्पकोबार मापना
भविमरीरिक परिभम पर पावेपदी भयरबकी बात इति ।
भी घरचन्द्र पोपाप्याय
२४
केदारनाथ पयोपाध्यायको लिखित]
पाने मिपुर, सरा
भमाए । धार मानू मापा मुन लिया भासगरीर
हाल मुनिये।
FU दिन गोदाम पोनपात र मबारे पापा, मसे रिस्क
सायबाम गुरुनान ना पा । म मुश मोर न गरियो। मम्मात् परन
गतम र नींद एसपने देना कि सात सना भनमय है। साठ राक-साफ
माए बगैर करनेपर उसे १७ मा परिसाई मी पाम तक
ऐमा पाकिटरा पुरामा भनिधार होगा । र भुगद सा।
प्रकार एरिन मोर स्विप पर मरमै बोयाबवागा
पर ममा रोना है। मगर इनमें भरिग मटि पुरे दिन दूर
होमे दी। भगान्धी शादिदेपने एमरे रिए पर दिया है सिमकावून
पामेर ममी मा नहीं यमुये। उमरामाराम बना
दाता बता क्या मैं और मा पाप निमित रा सकते , किसी प्रकार
दुमिन्धकार नहीं।
सए मुरेणको मापार नीसामी भारले मापार

भारत-पायरी
२३५
मोरो पीटा। हो मुनर और उसमोन बन
पाये परामी
मी भानामतीर। पास ममी मारा। मुग्यकी मतमात पानी
संप अब मोकाने मार नहीं माना। दो-बार सपनाएं भारतूं।
सबाठको मुनहर पारिना या उससे कहीं अधिक न समह पठे । पत्र
चित्र पारिको रिती मी वर मानाबा हवापर मनम्मम
मपा होगा इसी माण करना होता है।
मोहिरने बैठ या है। बस से मेकर निास पागा जिपर मी
रोनी मोपमा बीमारी कारण इस पार 'मारतबालिए 'मन
देन नही कि सका।
मापत्र-भोपप गापम्पार
मापर मरे हुए राणे पतचर ाता और कुछ भी सौ न हो
'प्रचारपोस हुनेको समापना नही। मुहे सगास गुस्समपमें
भापको धमकी मात्रा मी पुण्यदा रेय परम्प है। और करम्प-पानी
कीपन मारमै दूसरी नहा।
पाये धियपुर,
महासदेषु । मेयरमा मापड गिट्टी बेठकर मागापुरम मिथी। भाप
साप मेरा सपहार परी निन्दनीय से गया। अंजन मगर र हो एपण
दुमा । भाई मरिमर कमो ऐम ना होगा। पाये बात बीमारीम
रिस्तरपर पर पारमा मन नहाँसम राया। इसके बाद शरीर
स्वस्थ मा यो गमे उपमग रिताई पा। माप दिए रम्ना समान मे।
उता पा पर मारत में न मेने पारष भाप मेगा मी न मेर
साउन म र पाप गर्यो को देनेवे उरको मसीय म्यादी मही
पषी मरमान मी हाय
इस मीने मिसा-कुण पास होगा। मुझे मेकर मोमीको कारवार
परवे ने हो रा मुमतमा पारे। मैं औरत बुर अम्पाय नहीं
परता और परियारमियोर ममित परता से भाप होप नि।
गुपते पमारें।समार।

शरत्पमापसी
मासेमो-कमो मार दिया। मैं गिनी गादी ो सरेगा मेन
पात्। स पिपमै हम पार निभित पसरते है।
दूसर मिकी मेरा नमस्कार मोर खुद भी है। आप मोगका-
एस्पन्द्र पोपाप्याय
पाने शिवपुर, सफा
१ भम, १९९४
मिश्योपुरवार पाडू मरे भापरपठे, मेरी बाघ मेमनही ठेगा।
इसलिए अपर तिनी ही बार मन ही मन साधा है कि मानक
मुगात हो पाए तो दानोकोही न बान कितनी पमप्रता होगी। इस मातपर
पर आपको विश्वास न हो। भापामा विहीनी सिता एमबरसे
दिमागे नही मिलता। किन भाप मुश रखना स्नेपरवर सपातको
एक दिन लिए भी नहीं भूम्म ।
अबरामनार पार मेरे लिए रोपवनकी कामना की सरगन्दर
की बस्तु मूख्नेकी नही।
मेकिन गरीबनको प्राप्ना री ! आपने सपा मगरकर
और मानेमर दुसया मा गए ठो 'मेरा र भानाप दिन बाद
बाउंगा'मनदीगा।
बहुत दिनींवर विमा । भर बीरे धीरे बल देना की रेलने मुनने में सामन
होगा । का शोमन नही होमा ! मेरी नीम ताकि पूरा हान:
पारे बचना मि मी दया ना रागा। में पारा दिल
हर मागीरदा! माय पानेकी विधि तो भेदी कम भी है। पुरु
पूररेदो।
देसरा में माम्त हागराइम मावा बाईपास पग-पाधि
रथ नहीं है।ग से निरन्तर बतिना दो पारले।
मापनी मार करों नी गमरमें एक मुम्रता
पर पिनिगमोसमीप रेगनेको पिडामहै।

भारत-पापरी
कमी-कमी पो ही भरना समाचार। मेरो भन्दा मोर नमस्कार।
माप -भी शरमन्द्र पापाप्पाप
माधिवपुर, बदा
विश्वरपु । मममोर मापको बिरोमियी। नाना कामामे मुन्ध गवा
। प्रति दिन पहलेरी पिटिपी मिरती है। पर कमीकमा भारी मिली एक
पति मुझे मो मानत तो है पर सबमुम ही दुसम है। प्रीति मन्दरसे
भावे दए पर मानो बहुत-० पप साचो है। दार बार भाइमी सन्ये
प्यार में समससम में मधिक मा-भूप नहीं करता है। का पर
न। माना बप बाद पाप हो गया। किसी नि मगर र
पोस टोने कार र रेतो मैं आपस नहीगा। पर पपा पहुंगे।
साना रबनाई बाप-शाप निरन्तर सही धोगारिक ऐख पादमी मी
सामिम इस रचनाको प्रामबरनका रस पा दमी। भानी नीयो
रचनामो समन्पमें मास्ने कभी ३० मी नही था। मेन्नि पागोबा
प्रशिव कुमा। तब पूछ पा है। प्रसार बदले मना करनेमें मुसे
बनाकार होता था। निरन्टर पहोवा वा माप विपास न करें
सीमाप मारमसम्मानमें सनगे।
पमी धागा दशग मी मापगा-पकदिन पर भाप मो नही मागे
और में भी नहीं भार उम्रम मुसा। माप मुन्न भावाद देगे। मरे
निए वा दिन दूर न हो। मैं गुल भाव है। मुग मुम गुण कमी
सना कभी पार yि Artष पुराना हा गगरे। ४८ सारकी उम्र
पुर-गवर्न। मेरी बड़ी रा है तो गाद भर सा पाना गीर
ययापही अधिक रिसा भावापामा नी सम्म । माप मुझे
भावारदा ससममम हो मगर भा यये पर सपना माची-
बार मेरएवरगा। -भारत मोरन्न्न्द्र पोगप्पास

१३८
शप-पधायष्ठी
सामवाये
पानिवास पोस्ट, मिना या
८ णत, १११
प्रियदरेषु । दार वा कई दिन हुए मापा एक पोस्टकार्ड मिथ । पत्र
मेय हानेपर भी स्नेहसे भरा हुमा ।। नहाँ बान कि मापने मुमसे प्यार
सो ािमिन गुणों के कारण मनुम्प मनुष्पको प्यार करता है उनमेंसे मेरे
पात कोई भी नहीं है। कमसे कम बुर्याि इक्नी अधिक कि उनकी
गिनती नहीं।
उप दिन दिीपकुमार पपको रवि पाने विमा या "मुना छन्
भग्ने कानून भनुमार भनेको किसी दीपाम्तरमै पामान र निस्संग गम्।
मत पर हुए उनका पता नहीं बनता तुम मवश्य ही मानते
होगे। मतपब मुम्मकार करया पर मिलना किमाही मी पोनर
चाम्तरणमे उन कामकी कामना करता है।"
पेदारमान् बबरी-तीया है। पारमै "पा गोयम रहूँ, म संसार
मार मासे दूर हो गया है।
सास्प्प दिन प्रक्निदिन-गिरवा बा रहा है। भाप शापर पार दरोगा कि
मेरी कामे ५१२ सपमै बानेकी बात डिसी । भर उतम मभिर नही
हैपीर।बर येसा ही कर । मरबा मेरी शान्तिको भागे
नबना।
कानपुर जाने एक दिन पहले भाकपारो बानसे पेटम इतना
रहने भगा गिरकानेपर ५ दिन रिस्वरपर पड़ा रहा। मरमी
राय मत।मर पार्थ से भापते पर पार मुनापार परनकी बहुत ही
पाठी | गर्मा यदि इसनी भपिन पानी तो मैं कापी गाने लिए
भापरिमेर मान नए मनुराप परखा।
पर कुछ नही रण है। रूपनारायण वरपर पर बनाया है। इसी
पेपरपर दिन-राव पगारवाई।
हरियस माठि मुरांबात दो, हो मेरा माम्तरिक स्ने मापद।

परत पभाषी
मिपाल मा है। सामाम्प शिकायत बममा विशेर भमियोग नही है।
मेय मापूर्ण नमस्कार है। इदि मोमपन्द्र पापाप्याप ।
जमठारे पावित्रास
२२ कार्तिक १५३३
पिपरे । आपकी पिढी मिली । देदार पार पाने लिए मर इस
नीं। पर एक पापोका मामी बिसन सही भी जाती उपाय
काने सिएमा माप होगा पास चार उनीही इम्ण होती है।
मौर सोपवामिवरती भन्दर मैं इवना पुर्पर था, पर वो नही गनवा
पा । (त म्रप (भातृनिपोग) को कैसे मईया !
-~भापता प्रद
समसायक, पानिधार
१-२-११२७
पमभवासरे । पर माम् मे तो मामी निन्दा । मेरा नमस्कार
है।मोर थापना रोल्मापार नहीं मारेंगे।
सामठबाप न मिनपर मुझेष नहीं बायेगा। वायद मेरा मन
हना उसर भीर धमाक हो गया है। पहिलो मा पानी पी गई।
--मापका
पामता पानिमास
पियको । नमस्कार करने मप हो गया है। इसीलिए योगना
एक प्रकारसे ठप | fee चिझै मिस देगा। बस, हर किसी
पिन माप न देखो माया विनायकमन भनुपस्ति रहने से भी
में भापति नागा, भगन मापको भारतिविम कायम समिन मी

शरत्पमापी
मेरे लिए पोतोचपगा। मग पर मेरे निवेदनको भविशयोतिषी प्रेटिम
गमकर निधिम्त न । मैं धनता कि मुह भाप समझते हैं । इति ।
-भापका शरद
सामसायो पानित्रास पोस्ट
१ जून, १९२८
रिपु | म माने कितने दिनों बार मापमै पिसावर रेलनेस
मिरी। सबसे पहसे बरबाट मनमै माई रिप्पार का सच्चाहाँ
भाम्तरिक भस्तु १ पदोकाई भ्रम नही है। मन सबसिरसी वरा म्पन
रेता। हमारे बाहर भामरणका सार काई नही साथ सवा कि
एममेस बार एक-चूमरेको पार करता है। पर मानी भार अनता किमा
कमी भापकी रखना पड़ी। समी पाणीकी बात पाद मा मा । भम्तिम
बीवन में इतना दी पायपर गया | पासे बसर का होती थी किकापी
बाढ़-मापा रा नही हाती। क्योकि भाप काशीम नही।मा
पारगार कापीबात या मापने छोर दिसा ! मम्तमे का पुपियार
बान्नुममै दागबानता कि भापको पूर्षिया इनमें बहुवरो पापाय है।
पिर मी भाप उसी जगह परा- भानर मुरा भगता है। साप भीनी
बता किमही वा काशी है। हाते ती सर सर नाप्ने मुडाकात की
बासन्ती।
मागताणमवावा मेरा मारुन गिा। मा मपम नहीं
जाता। मप प मोबानेर टी. भा लगेगा, पर मी निर्णय नार
दाता । दशरकाई पैनन्य काँगा।
मापने पारी की बात कितने मुनी! शिशिरका ममिनप ना।
देमा मुम्दर ममिन करता है। नारस मेरे उम्पात 'मनन'स Anा गया
है। मनोमा पर पुनः (नार) मा ।पा। मारना भी
को न मिना बहुत मण होता है।
भापतीपत मा मोवार गा ! भार मरी तो हैं। प्रापना

घर-पधापरी
परताकि मार रिन भौर विमा रारानियों मिले। मैं मापी
र एक पंकि पटा ।। मपुर रमना दाई कारण नही पार्यसाहिति
मारमीकी रपना साने कारप पाता है।
मैं मम दुप बिन्दा। परम बिमा राना पुराना होगा। प्रतिदिन
इस बातम भनुमा कर रहा है। -मापा परस्पन्द्र परामप्पाय
शिबाव देना न भूखें।
सामठारो पानिवास पोस्ट
२७ कुर्भार, १११
प्रिपरेषु । मात्र विमा रामोशी स्मापा है। मेरा भाप नमसार ।
सोनम बिन इन-गिने मागका पचाप स्नेह पाकर पव दुभा माप
उमामेसे एक है। मेकिन स्नेहसी मपादा पवावा भार मारूमकारपती
नही रस समायर पेसा एक मो महीना महा बीता पर भापको पाद
महोरखा भोर गारका माराम सिना पड़वा बाल उपना सापता हूँ
रिमाप मुझे कमा गय न समझगे ।
१ कार्तिक
का पर माम सवेरे समाप्त हुमा। मण मेरे जैत मामूली
भादमीडा सा समर इतना गौरव प्रशन पर बैठे। पवना वो
साहित्पिपासा खायेगा।
पडत भी पी। रोन-दुलो किरानियाँको कोई मात्र मी तटर
भन्तरमे भग्नावर मालनीसे सुनार, प्रारनहारता। परनामे कसे
एक येस-सोध्यो । मापा भर ये मानी मगवान्न आपर निछावर पर
दी। इस पुस्तकसे एक हिताप य मी समर किया है। मातरम-नि
कमबारी बारवकदिनमें एक बार पापी हामी डर नही टनेसे
कि सारा दिन पर गा। रिच सई पा न हिज सई सोच मेला
किमाने बीवन में इस परम सत्प पापको भाबसे प्रतिदिन पानगा।
मीनेर महीने बीत जाते. कापी बाबाठाहमापते एनेका मी बी नही
भारता। भाप माशीर्वाद मितने दिनतक विमा मुठने दिनकर प्रति
दिन इस बात पाद रखई।

૧૨
शरत् पभावठी
पुस्तकको एकमात्र मुरिका डालेगा। लेकिन भाप नापन में,
परी अनुपम है। मगवान्न मापको जिसनेकी गति पर दीपर इस बातको
भूमनेत काम न बमेगा कि ऐश्वरवाना मितम्पपी होना पाहिये । कगाको
इसकी बात नहीं पाती। पिवे बाना ही नहीं। पकनेकी पातका मी
भूबना नही चाहिये।
हम बार पारी काया। बस मा वो मुझे दो मवर मिल है।
भाव विमीकाममा मगछे दिन ही गा । मम्पधा नहाँगा । नमस्कार ।
-आपका पद
पुनम । ममी भमी विमाडी करपाच-कामना -साप पिको
मापने मितीपरमिटी । मेय भवामुक ममस्कार भोर कम्पपार।
बम्ता पावित्राव
२५ कार्षिक १५५६
प्रियवर । नरिन हुए भापका मतोम स्ने र चिनी माई। योषा
पाप पावर बारगा। उनी बिर मोका ना मिला।
भन्न रा मपरी कौनरों फिर मी भापडी चिदी बाब गा।
पहुने रियों हो गई। जागाभा मागे नहीं बताऊंगा। मदएप बिल
गौम राने माने पपपोप पत्रपोग भारम्म हो गया है।नी भोर
फोजदारी मुदो फेनार मरगामे रो र पुरा है।
इन तीनों पर निसि भौर निसिंगर भाषबहुत मायमसे पहा पर
गोप सवा मा नहीं गा निरपर मबार हो गया। सीमा पार
पाया गसता पसानीप पट जार पत्ताधारका साप माम। बाद
रिनामी विकोपारापार पोपा बमीन पी बासरी दान
निम्नु दो-पार म नए पत्तीरारने नहीं समा गया । गरीष प्रग पन पोने
यो मैं मी मग पप। तार मे मैं बिन कामको दापम मेता। उसे
आता मही। सो बाद मोबदारी हुई। थाने दीपि, इस पाता।

शरत् पधायली
ाट पद गा है। ठगेच सा इस विधी दय समास होनेपर
भागा । एक प्रकार पर ही मुनर है।
मुरा विवरण दिया पारिती भी राम भरिसनीय नही है।
सुस्परका एक नण-भा होता है। पोम्हारी माममेकी दर सना मशिनही
होनेस मी उनकी उच्चबना तुपा बल महा। कुमारम सम्पनेस ऐमा हो
होमात होने कीजिये । इ बाद न मोर सम्म होकर उसकोमो हुए
हिम्को पार कर निकाल देना होगा। पाकाम माना है। मेग विशवास है
इस पूना नहर तरंगा ।
उस पुस्तम माने न सने तिनी गहरी और बिन्नी मपुर पारी
| पुष्ता मेरे पदने कमरे में विस्तरपर गया है। पीपगार यो पनि उम्ट
पते हैं, वहाँ १-१ मिनट पर मेठा।
मादुरी मदारको परानो मन की पदो। 'बमुमती मातेरी रूपर
बी , मार पापत नाही माती । किन परमे गती है। पानमें पठि
नया नहीं होगी।
पानेको सार मौर किलो दिन गा । लेकिन पानी मापकी पटीने
विकी गुस्पोडो में से मुम्मा पानी विधाक भयपर
सपर पारवाई करनेमे मग सदावरेंगे। मेकिन मगर भारत
तो पपामामानोपासना करना ही होगा। बनपये महीनमें पानी पर्य
होमोर अपम उतर गा । नमसार | भापका-
परवा पोपप्पार
स्मता पानिमार, पौष, १५१५
प्रिपोपु । साते समपके दौत बानेर की रोग मापा! इसीलिए इस
श्रीमती माय मानुएँ हामी निकट माइ किन मुहीमें नहीं मा सकी।
पारम्बार निधी हिलनी पाही बार-बार दिन पप बीत गये। परिभाष
हिमा गां पर उसनम मिय। मुबारारा गया। मुझे
असम मा मेरी तादीर कला , इसे पyग से पार पर

१४१
शारत्-पत्रापरी
मा नियम नी मनापाहै। भापको या सिना बम्प समझता। कोई
किपनी रफ्तरमे देरसे माया करता था। गारफिकरनेपर उसने कहा
पास सर भाई कम ग, परमाई भाग मोम ऐसा मी पण
भापका ध्या
दार पाए।
२५
[चारचन्द्र बन्योपाध्यायको लिखित
दबाये स्टेशन
१ भप्रेस, १९५०
मापार भामदारे लिए साना रोटर मी पर सारा।
भारसा गाडीवानीपता और सम्पामा परमेस भाव मी पर
पी सी एमपिरियो पिम्दयामा कारण एक मीरण परना
पये, परमेमोसे मारपीर दुई-रिमस गोरोने भाकर गोली गई । मुनता।
पार भारमी मरे ।
परतो साडी बाट । मेशिन बरा शरम मी सी एम पी सी प.
है और मैं उन तमापनि है। पाम् १८ हा पिम्पय है। भावना
मापसेट और पुलिस गुपरिटेन किली तर सड़ाम दंगा रोका। पर पर
मही गा सकता कि.पा होगा। मरिमा गा भपितारी पाने पर
इस समर मुराम रहीमरा मी आता है, इसीबिर पस्त पेय
वा सामोरे दी रिमेरना पगा।
बनाम पविश्य नामी होगे पर पाम माना मेरे पि निवान्त
दैविक पाना।
गारमा रामे, भरने सरका सम्पम । न तुमसे मुगडावर
माउंगा। माण पर मारागे । बारा-पन्

शप्प पत्रापली
बामेनपुर, हवस
२१ मौक, १९९५
माई फर, भभी भी हमारी मिमी। भारपिठी पत्री तिने
गया मेरी मानसिक वा नहीं। फिर मी उस बातको मिठ किये
बगैरम सामानमा योमे एक मृवमायनमा पपा की
पाठदुर्ग वापर पार होगी। इसके बाद री पनि किपा मा मुरमा
दिवार पदर । तुमम पाता है कि माग पवे पमए रखनी मार्वे को दिखाई
पारसीमने का कि गोहमी यो पा मैंने मालिक मैंनेगे
ग्री देना।
इस पार मध्येग स्टेशन पसे गर, गाडी पूने पावरी देवा एलेके
किनार रिकामा भोर पर जा मय पड़ा है। मेरा अपना कुचा
मत्स्वाना--मेम्प मन बिना सयर ोया या नहीं बन सकता
मैग्रेम बिबाह पवे मुश नहाँ पर धन-धीन मालकी
सबने मुझे रास्ते ममरमिधान्ति महो।
पर मार पुना मेहमान और मत्स्वाठिी मिली।
२०१५
पापविमारको पर मारा मगरस्पति उमेरे बये मे मर गया।
मेरा पानी भर गौ मा नई या! ससारमै पनी पीड़ादी बात भी,
इसे मैं और नहीं समस्ता पर इसीलिए मुझे इसी मारता
की। पार, और एक मा समत का, मघरमै objective Tv
subjective दी सकस।नी को एक कर लिया और इसका ना!
पम मरतकी कहानी कभी हो नरा।।
-
२८ माफ, १९४२
परदारेषु । माई चार ती पाच मैं पर गया था। मौका मिहीन पर
और सनारामन मद-दनकी मारे कारण मैं मषिक दि!सकी नहीं
यपाब। मेगन मामी सच है कि इस मागाओ वापर हे अपने

૧૪૮ शरत्-पत्रापसी मर भषिक देर नहीं है। पुराने इए मिन बहुतेरे भागे पछे गये है। उमें मैं निरन्तर स्मरण करता है। अभी ममी रिवंगत भप्पा निपिन गुम भार पनप निमबम मिला । शिवपुर में न जाने कितनी ही पामें हमर साप बहममें बोती है। तुम पुगने मित्रों में दो भागमस कम तुमसे पासे बा सईगा। निरन्तर पारेकी वे सोचता है भागेकी भोर एक बार भी निगारन गये है। मेशिन बाने दो इन बातोको हमारा मन सरार कानेस माम नहीं। दुपारी दोनो हो चिदिव्या मि मियोंने मुझे उपाधि देनेका प्रस्ताप दिपा पा उनकी भया मार प्पार ही मबसे बड़ी उपापिहै। इस बासको मार परनसे रिक र माता। दारा भगर म ममा तो तुमार ही पौंगा पमईगा तुमने म्पावा मले न दिया । भग्नी गस्तीका मेप असायुक्ष नमस्कार रेकर पाना कि उनमामानकी माकना नही रंगा । दुपारा-घर २६ ['आत्मशक्ति' सम्पादकको लिखित] ५ मारिवन १५ श्रीयुत भारमशामिनपात्र महारापी सेवाये। भारी। भाद्रपदरी 'आरमानि कामे मुमारि दिमित मारिया मा महा पग। किमी ममप नगर मारियम मुनीति नीतिडी भामापनासे पत्रिकामों में रिसनी पठार माने गरी गई। भोर भाग भस्मात् साहित्यमें 'रमा मागेपनाम परत दो मारोगा। ऐमा दो रोग है। मगर मदिर, मवारी बमा मापनों की नका बाते गनेने देगी। मांगी मात्रा याने बरसे परती ही रहती है। मोर मामरा वो रहता ही है। मापुनिर तालि रियो पिम्म सम्प्रति बहुत पवियों परनाई गई

सारस्पनापली
१४१
शरमाने पुवामे बोयेगमग हुए है मैं भी उनाम एक । शनि
पारकीरी में उसका प्रमाण है।
मुमाभिलिखित साहित्यका मामहाफ अधिकांश मन्तम्पोंसे में सामठ
हैं ना पर पारिरिक मतमेश है।
खानापपात सोन्द्रनाथ बन पर पानी ममी बात मिनी पानसा
उनमे अन्द्र rnो बम' या बंगामी भी परको नही
पदवी या पानको फस्व नहीं पाते। मुसाफिरका यह मनुमान सही नही है।
किन इस बात मानवा हिपहार मी सारी बाते नहीं समझता । पर
बिना पो दो सारी मा ममततामा दावा नहीं करता ।
परवा मेये मम्नी बाट । मेकिन श्मि पातको मेकर समरा टठ सा
हुभा मा पा मोर टाकर रिस मारते उसका निपटारा होगा पर मेरो
मुदिसे परे है।
वीखनापने साहित्य धर्मका निरूपण कर दिया भार नरमपन्द्रने त
धमकी सीमा निश्चित रही। हा पागिपरे पैसा कमी। परकर
मुगपगपा । काचा बळ इमपर भोर कमाया at! मनका
बात-कुछ गया । तर कोन बानता था कि तिकी सीमा सिने पर दामा
है और सीमाश्री पोदोका सेकर इतने बाम पार हो जायेगे। कुमारको
मित्रा में पोमुक दिवेन्द्रनारायण बागो मापने 'सीमानेएर बिमार पर
यानी राप है। बीस र हामी टोस बिनाका मामग। तिनी पाd,
खिने भाषामो गम्पोरवा वा ही विस्तार पैसा ही पाप मी।
पेद परान्त पाप गीवा विधापति, पभीरात कारिदासभा, उस
नीम्ममि मय साबर मधिकरम कारवः । बापरे बाप! मनुम्प
रना पड़ता है और न बाने से बार नवा!
ली मुशवपेमामहित मासायनिर्मित वडा-गाणीवारी सेयरम
पिल मर्म हो गए हैं। हमारे मनिक नव-नाय-ममारो ममिनेवा
नरनिरापे। गम का, या कहो हरिपन्द्रह सापर उतारा
या। भगाना एक और सम्म्न मा पमरे, ग्नप नाम था-पम-नानिय
बार। भोर मो गई ममिनेता से मुह सरसे पुकारते थे, इस्त-पद-संबाम्नमें

१४८ शरस्-पत्रापक्षी मा भषिक देर नहीं है। पुराने ए मित्र बहुतेरे आगे बसे गये हैं। उसे में निरन्तर रमरण करता है। ममी मपी दिवंगत मायापर विपिन गुनक भारम गाने निमबर मिका | शिवपुरमें न जाने कितनी ही घामें इनके साप बाममै पीवी। तुम पुगने मित्रोममे हो भाशा मसे कम उसे पासे या सगा। निरन्तर पीछेत्री बावे सोचता हूँ मागेकी भोर एक पार मी निगाह नही गती है। लेनि पाने दो इन मायेको, तुमारा मन तराष करनेसेडाम नहीं। तुमारी दोनो हो पिरिठयाँ मिी किमोंने मुझे उपाधि देनेका प्रस्ताव किया था उनकी भया और प्पार ही सपसे बड़ी उपाधि है। इस बातको याद करनेस रिहमा माता। दाका भगर गागका तो तुमारे ही यहाँ च पम गा तुमने बाता माळे होम रिसात मानी पापीका मेरा भायुत नमस्कार कर पाना कि उनमाहानी भाबना नहीं करता। तुमारा-घर २६ ['आत्मशक्ति' सम्पादफको लिखित) ५ भास्थिम १५ भीमुक्त भारमशतिमम्पादक महापडी सेवा में । भापकी। मारपरी मारमादि' पनि मुमारिर मिलिस नारिया माममा' पाकिमी समर मेगा माहिरपी मुनीति दुर्नीतिकी मामयनागे पत्रिकाओं में कितनी ही कटार पासे पर दी गई। भोर भास मारमात् साहित्यमें 'रत की भागेसनामें नरस दो प्रयोगा। ऐमा सीता। देखता ममिर समाती बगा मेवापता की ममा पदवे गनेठे रखी मोगड़ी मात्रा पर बरसे परटी गती । भौर मामबा तो रहवा दी है। माधुनिक साहिप-सरिया रिम्म सम्प्रति बहुतेरी सिषों परमाई गई

शरद-पसायटी
६१ रमाने पुसा बा सोयगए मैं मी उममि । उनि
पारको स्पृिशे में उसका प्रमाण है।
मुमारिरिस्पद ल साहित्पप मामबाप मतिर भन्सार महामत
एक बाउसे रिन् मतपेद है।
रबन्दनापीकावरबीन्द्रनापन पर मानी निजी जिनी बनवा
उम अवन्द्र 'म या परासी मी पो रही
परतेपा पानी नही पाठे, मुमारिका या अनुमान मी नही है।
सेकिन इस बात मानवामी समर्थ पार्वे वही उमरा । पर
बिना पानी धारी पा समसाम या ना करता।
पर मेरी मम्मी का किन मिकाको र म उसला
rtant भार शरमिनारस उप निराधागा नाम
दिसे परे है।
रवीन्द्रनामे साहिल मका निम्पम र दिपा मोर नरेशपने म
परी सामा शिबिर दी। पैसा पागि थमा दी मी। पर
मुपदा गया। साया समर मरागसता देना
बहस-50 गर । सरफोन बानता था किरिडी सीम्म ने पैर काम
भोर मोमा कार ने बाम पार बसा भारको
रिमोहनाराम गरी मापने मौपानपर पिबार पर
मनी रामरोहै। बोन परसादी टाल रिनारस मामना
टिने मायनी गम्मोरवा देवा ही विस्तार ऐसा हो भी ।
बेद देगन, पार गीता बिधापति पीदात विदा उम्मन
नौमामले ममावरम अपिहरण भरकटा। बापरे पाप! मरम्प
इसना सकता है और न माने २ पार रखा है।
सामुगापरे भएपरिश-मानिमितधा-पाणीवारीपन्द्र
वि मा एमए हैं। हमारे मनिक ना-नास्य-समास भमिनेता
रनिरापे । राम को रारा रिपद्रो सरस उनीसदमा
मपान पर भौर सागर या भई उनका नाम श~एम नामह
मोर मी यो मापनेवारी मुक ससे पुधारते थे, स-पर-सपा

शरद पवापसी
मी उनका पणाम अप्रतिहस पा । मानौ मतबामापी। नवागत पम्
ननिर बार से सामने हमारे 40 मरमिह वान् एतीयाको गि-हाकी
मोति मदिम पर गए । मरेशान नहीं ता! परसनाम उनका पारा
देसर ऐप मग या मानी पाइप र पतुराननसे पाये?-प्रमु!
मए बनमें बाबर यना इससे मम।
हमेशाधानको बी मैमी वगधे परमी मेवी ही पुरे-सी फैनौ ।
ने पत। मानो पेनमे ममोदेमें सरी एक भयरका भी अन्दर न
माने पारे । मानो पाप गसे मेएर पेण-सीपवर न गनेर
जय-परिसरा
सावरे बापरे साहित्पारव! मत-मफ्ते मानो सृप्ति महीती
रवीन्द्रनाय भोर नरेशचन्द्रका राहिने बाप रहार अपमान्तबमा रिक्तनाय
निरपेक्ष नमान गतिरो मानो र कुन रे।
किन हताकिम
पर बिम्ब निस्तापी बात है। परेगषम भएका मन्त्रनाम
योग मारिस्पर पकि इन मारविनिमप मोर प्रीति-समापण समझमें
मातानिइन मार-सागर सून पार पा पारनामे मार
में योगदान रखे , तर उनलार पो न रोका।
एक मारपसी और प्रामोम पोम मम दाम्प नामक
एकातिने रस मोर रिसी भालोपना की। इन माध्मपम्प
उम्पोासमोर अन्य पवित परिवप देते हुए काठे - 'म समय
मिनार समीति पपा fun और हम सा भीर कार म्पति
नितर वन! उनो प्रसार परार्थना लिए इन पर नारिसमोरादा
अपरनामें गामा है। भोर 84 परिभामा पर पुपरी
पाराम पाने बोका होना चाहिए पही दुमा।"
इन सिने पुरोगारीमा बम्प किया। भोर मामन्म गुममारा
पुरातार पीयन मी से ननौर। मीनिए परिप-सरिया निर
विवादिपा उपाय पाने में हमे कोष मही सपा मारमी मानवा
मी व मिसिए मम्पम नहीं। मोर हमी देणे भौर समो पुम इनों ने

घरत् पत्रावली
मरन पर पाम रिसा। निर पहिसको भाग इसना गा गोरस
मिय।
जयराम समपे ही न गर्ने पर 'प्रवाहीप्रीप मोर सहरसादसे
वो यह बात नहीं हुई वाया मारे बायेपना और दरिद्र
पाहित्यिक पता न सपनेडी मायेपना एक ही पता नहीं है । मग विमान
कि नबने से बनी सी दि उनकी पत्रिकाम प गई। मोर
सिर पर पीडाका हो भनुपम रंगे मोर जायद माने हेवको बुलाकर
पानी का रंगे, भैषा मनुषही गरीबीकी मी मानेमें बो र मार सेवा
वा मा समाधी वह और मेन पुग्ने समे पिस्त होनेसे नारियो
रपिार र प्रतिकार नगे तर हता। इन बानो मार
परपमा समाते है।
२७
[मी मणीन्द्रनाप रायको लिखित
अमदारे पावित्रास का सहा
परमहस्सामी । पपीता, पुमा शिी सभासमर मर गई थी, मेकिन
कुठ मास और शायरिक मतभरपसार नेमे रे हो गई।
तुर हमारे यहाँ मामाये इस दातको सनम मुझे पपी होगी साम्
मालूम है | मर में कर रोया । यी पापी गरमा, बोर मान्य
दोबसे मेसोपारको माना मी मात्र पाठ है। पानी-मानी साप
हो और जिम्मे पर पाना | इन ममय इस परीक्षा में सरपुरमें
रांगा नाम भी है और एक-दो लि पर मीटिरम
पोरयाग देगा।
(year मारठी में प्रकाशित दमा शिवपम कार्याने मारमै

शरत् पत्रावली
सच है। दिन मुझे या परुन्द नही। नौसी-पापरी होगटर या अस्वस्थ
धरीर मेकर खानापराध पनना बिल पद मद । मौर, सी पास पर
गगना-पाठो एकदम मामय है। मैं मार माँगा पर किसी भी
रासतमै इस पारित परीरको रिसी परम मन्तिम बार महाँ मंगा । इस्ले में
माया हूँ । मेो बहुतेरे समन्धी और मित्र है, इसे जाना जानेपर
पुदिनीताल-मार नहीं होगी ऐना नही समझता । फिन में स्वामलार
पर नहीं देना चाय । भगर गया तो मम्नी की पान पहो ही गंगा एक
प्रकारसे यही मेरा पहार है। उसकी राय मी बहुर भणीने पि
बारनार सयारा भी बरसी। मेरिन मम्वस्थ शरीर मेरी बना
नहीं पाता । मुझे पारम्पार हमी रातका
सामरान मरकर
उगे परेशान मारमा व्ययर मापका रिकाम्प महीनुरा
घम मेरे सिप र करिन है। बातो मास हुई। भर भाषा
बरि परि पगारोगगा । मम्ने दुवमरमें भयर परिमदान' समास नही पर
सई वो पूनम फोन र सपना से किसी पार पृटा या वा उत्तर
रेर निधितरना।
पर पाठ मोर जानने का है। 'नारीका मूल समाप्त हो गया Im
वनी der दोगो से सोपा भी नही मन मब परिचित-परिचित
भासे मनी मायपनाएं भोर पर पारस्य पालन
गोकी म पति की है। पूरी तरह सत्य होवा दो पेन पा सकस
किया यशापर पैना ही होगा।
पर एक बात पर मीकिमी प्रविवार सपो मार निवास माहारी
रफ्ना पारप भोला म परे । मम्रो पाव है या मेरो सिनी ।
परपात मनियर २१ माम। मानती, मामी, सादिए ने से
देताना पने दो प्रकार नररिया!बो मेरी बनाम
परिपसे परिचित समझ बायेंगे। मिनराव सापारम बोगी।
समहमे मानेमही।
(पुगान्तर, पप ११४)

शरद पवापसी
३०
[ ? ]
५४ सार, रंगून
१२१५
सपनप निवेदन । परिपपासेमाम्प न होनेसे मी मापन भागीर्वाद
और माता पर अपनेको पारमार अन्य समझ रहा। मापने अपनेको र
बिना में मां को एक परसे की है। मेरी उम्र (१९) उक्ताम्मत, फिर
मी मगर उसमे कुछ छोरा हो वो मेरा प्रमाम स्वीकार करें।
पर मापने नाम्नागेवाका परिचय दिया उसी कम्तीमा पाया
समामिम-मिन तमया न्योको मरनी माते रेस माने कारण
ही बत्मभूमि प्रति मापकी ममता कमाना तो रहा सियार गई
है। या पागात मो शायद ठीक नहीं है। रिपन मार मनुमा मापार
परामममि माम-मनी प्रति स्नेह उत्म्न रोण पेस भी नहीं। मैं
-मचाती रेरो भारमियो स्पस्थान मपनी बातों से देख भाषा
है। मेकिन उन दुईकाई सीमा नहीं। उनमे मितना साम उस
Uty मी मार से उत्त विद्यम दान देते, जर कुसी गोकोमाम्पका
पारापार नीरावा
मेरे पास मप और समय ऐनों इतने कम 8 उन सेन्ो भाने
गिन न नेसे मी बिसीका पनहीं दिसा बातम्या । रिम में
यही शकताकि एक मी मारमीको समापने गांव मोर
भापति परासीलिए मत्पन्ध अमिन और लेसदायकोने मी गांव
समयमै मापी पाd सनेही पंग करता रोग कस्मना मागर
पर गौपीडी प्रयता परते! भपिश बापयाम नहोठी बार गांव
परि पोरे भवनावकोही और परहे। इमपाको 'कामाल हमार मामा
पुस्तम्मै साने पेश की थी। लेकिन देश रने और काम को भर
मेयरवनामें मी उखना हुभा है।

१५१
शरत्-पमापी
मापने इसे नाटसमाकार प्रापित करनेका उपमेश पाहै। पावर
करनेसे अफा हो होगा। मेधिन मुझमें तो पापमय नहीं है। कमसे कम है
पा नहीं, इसकी कमी परीक्षा नहीं की। मार दूसरा कोई
करता है
स्सिम पमता है वो शायर मा मी हो सकता है। मेरिन मेप करना धागद
म परिमममात्र होगा। और कोई नापमंच सपने समन भीर मामा
अपामय पर उस मेवस्य मी नहीं करना चाहेगा। पर भाप उपरेशको
मानमें रखकर मनिमम मगर पुण् कर सका तो पेटमा । पहसे गोपर
सम्बन्धमे मेरी 'परित महाम्म पुस्ताको भी किसी-किसीने 'नाटपरनेकी
बात उठाई पी पर हो नही सका।बा प्रापद और मी मा पन सकता था।
बो कुछ मो से इस उपवेधको में भूसंगा नहरी गौर इस टिए भापको
प्रनाम परवा।
-भी प्रत्यन् परोपाप्यार
समाप्त

Sarat-sahitya (xxv)

Author
Dr.mhadev Shah
Title
Sarat-sahitya (xxv)
File name
Sarat-sahitya (xxv)
Text
OCR done
Citation
1961
Published
2010/12
Publisher
Bumbai,hindi Granth Ratnakar P.ltd.
Language
Sanskrit
Pages
159
Library
Bhartiya Vidya Mandir Shoudh Pratisthan,bikaner
Classification
Literature
DLI number
514693
Barcode
4990010022386.00
Scanning centre
C-DAK, Kolkata
Digital publisher
Digital Library Of India
VMLT id
MEQjtOb9d5Y
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Sarat-sahitya (xxv)