Bharatiya Vidya Bhavan Library, Mumbai
Mangala Kosha
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मङ्गलकोष की भूमिका ॥ " " ५ १० बन्दि प्रथम परमामा कारण फरना नाय । अन्धकारकै अर्थमधि को अनुग्रह सोय ॥ सिंधिदाता गुणगण विमल सुमति वढावनहार । परता हरता पालका तामचरण अाधार ॥२॥. गुरुजाता पाणी विशद मुमनि समृद्धि सदाहि । करिमणामननमनवचनकरोगोषचितचाहि३॥ शासन, विधु मनि नयन धरा फरवरीमास । संवनविक्रमनपानभमहिनपसविलास॥४ आनंद महल सदमन पतेपुर चशाल । कोपरयोलखिनन्धर्षदृशमनशब्दजंजाल॥५॥ जानना चाहिये कि ग्रह-आधीन मतिमन्द मङ्गलीलाल को यस्थ श्रीवास्तव सरहीग्राम जिलग्न शाहजहाँपुर का निवासी .१५ मई सन् १८५४ ई० सरिश्तहतालीम में कि २३ वर्षके अनु- मान हुये नौकर है और अब मुख्य पारक अर्थात् अक्सर मुद- रिस मदर्सह पेंतेपुर प्रदेश सीतापुर का है कुछकालसे हिन्दीभाषा के कोप के खोज में यत्न करताथा और वहुधा कोष फारसीभाषा आदि मिलित दृष्टिाये जिनसे कुछ प्रयोजन हिन्दीभाषा के विद्यार्थियों का नहीं निकलसक्का कोई अन्य हिन्दीभाषा का ऐसा दृष्टिगोचर न हुआ जिसकी सहायता से हिन्दी भाषानु- रागी विद्यार्थी रामायण आदि ग्रन्थों में संस्कृत भाषादि शब्दों का अर्थ शिक्षककी कृपा विना विचार करलेते, यद्यपि बहुतेरे ग्रन्थ नाममाला आदि भापापद्य में पायेगये तथापि वे सब निरनुप्रास अर्थात् वेरदीफ हैं उनमें भी शब्दार्थ शीघ्रता से नहीं मिलता है “जवतक समस्त पुस्तक मुखांन न हो, इसलिये आधीन ने निम्न लिखित पुस्तकों और बहुत अन्य भाषाग्रन्थों के शब्द जो देखे और स्मृतथे इकट्ठा करना प्रारम्भकिया कि जिसमें सामान्य भाषा विद्यार्थियों को लाभ हो और जब बहुत से शब्द सार्थ इकट्टा..
२ मङ्गलकोप। होगये तब श्रीमन्निखिलसुखसमान विराजमान विमल धार्मिका- नेकसुरसमाज समाम सामन्तोपहारीकृत कनकमय गजाश्व शब्दायित धारदेश प्रोदण्ड प्रचण्डाखण्ड विपक्षवल प्रोटभटस- मूहसंकर्त्तन निईयातिशय तीक्ष्णधार सहायीकृत खड्ग दिग्वि- जयी विनोदानन्दित महाभूताधिप शिव श्रीयुत कालिन बौनिंग साहव एम.ए. अवधदेशीय पाठशालाध्यक्ष वीरेशकी आज्ञानुकूल वर्णमाला के अक्षरानुहारि निज शिष्य सीताराम और हरदेववश की सहायता पाकर सानुप्रास करके मंगलकोप नाम रख-रक्त साहब वीरेश साहसी की प्रतिक्षित प्रतिा में निवेदन किया, तब साहव सुजान गुणखानने दृष्टिगोचरकर आज्ञादी कि यह पुस्तक -और अधिक कीजावे और सहायता के निमित्त हिन्दीकोप कृपा कियां और एक ग्रन्थ तसलीसुल्लुगात द्वितीयभाग जिसमें भाषा शब्दोंकी फ़ारसीभापा लिखी है हस्तामलक हुग्रा फ़िरसन् १८७२ • "ईसवी में यह कोप और अधिक कियागया परन्तु इसी अवसर में उक्त पाठशालाध्यक्ष वीरेश की नागपुर प्रदेश यात्रा से ग्रन्थकार के मनोस्थ हृदय के हृदयमेंही रहगये थे कि देवयोग से हमलोगों के आनन्ददायी स्वस्ति श्रीमदुद्दाम गुणगणग्राम विस्फुरत्कमल मुख भरत विशदीतानेक संगीत प्रकारास्मदीय विद्याप्रचाराग्र- णीय गुणिजनजेगीयमान यशोदानन्दकन्दकर्म पराक्रम श्रवण "रसास्वादानन्दार्थि मनोमिलपित विविध पदार्य दानसंसक्त मा- नस श्रीयुत जानसी, न्यस्फील्ड साह एम. ए. पूर्वोक्त, नाग- "पुरगामी के स्थानपर अवधदेशीय पाठशालाओं के डैरेक्टर पव- लिक इन्स्ट्रक्शन वीरेश नियत होय ब्रह्मलोक से सुशोभित हुये “और ग्रन्थ को कृपाकटान से अवलोकन करतेही आधीन के' -- भूमिका। परिश्रमसफल करनेके हेतु सकलकलाध्यक्ष मुन्शी नवलकिशोर वर्मा के मुद्रालय में सीसाक्षरों से मुद्रित होने के लिये आज्ञादी अब यह ग्रन्थ अतिसावधानता से छपकर श्रीमहाशय की अनु- मति से तय्यार हुआ इस कारण सम्पूर्ण विद्वानों की उत्तम सेवा में निवेदन है कि जिस शब्दको लिपि वा अर्थ आदि में रंचक विभेद वा अशुद्धता पायें उसको कृपादृष्टि से शुद्ध करलेवें मेरी मूर्खतापर ध्यान न देवें क्योंकि इस अज्ञानमूर्त्तिने पूर्वोक्त साहन वीरेश पराक्रमी की अभिज्ञता देख अपनी मूढता विदित की ।। यथा सोरठा ॥ साहव पाय प्रवीन सब जनारत विज्ञता । पानी कमांधीन मब पान मसार मह ॥१॥ नाकर गुणगण चक्र लखि भागत भयमुदता । यपादेखि मागिता नम नहिं पावत वयही ॥२॥ दोहा॥ अतिप्रभाग गाय चतुर नितप्रति परत समोद । वापिसर विज्ञानमय एयश छयो चकोद ॥ ३ ॥ सवैया छन्द॥ कोरनि सोहत देश विदेश प्रसिद्ध महागुण ज्ञान बहाई । साहस कालिा नौनिंगधी रवि देखिगई पिनि पाई ॥ मृदखगाम अवृम निशावर मद रहे मर ठाम दिया। ज्ञान गुणादि मरोज प्रफुल्लित वक्ष सरोवर देन दिवाः ॥ ४ ॥ दोहा॥ विद्यमान कीरति विमल कति परिइन मनुहार । ध याद भाषत सबै आदरदानि बिचारि ॥ ५ ॥ सुनि अभिज्ञना स्वामिनी चितउधार "अपियान 1 रच्योोषमगलमुमचि निजमलललिस मान॥ ६ ॥ श्रीरालिन्नौनिंग जू गमन गमपुरहि कार । यो छानवी पास तब मनसा म तनिदान ॥ ७ ॥ मय रचत जो श्रम विहीं जायहु भा बैगन । देवयोग में तुरतही सनी तासु पुनि सान ॥ ८ ॥ करुणालय ताही समय विद्याचय गुणराशि । नैसफाल्टसाहब यहा पाये सुयशप्रकाशि ॥ ६ ॥ में डैरेक्टर अवध ये विद्यारि प्रचारि । पातवीचननु उपिसा सररहँ लीन उवारि ॥१०॥ गुमागास धनदायक हिरो में निज योश । जायदिखायहनिमप्रभुहि नामुशरणारिपेश ॥११॥ 3 ALS ४ ४ मङ्गलकोप। ता, की शाही पता कर दीन । यन्त्रित सा अब यह भया जाम लमित पान ॥ १२ ॥ निनसामा सो पिनय यह करत ग्रहों मनलाइ । राईमा यदि कार को देशदा पसिना ॥ १३ ॥ बार परिश्रम में बहत परत ताहि निम । सहोपाटोपिया यहीबार प्रमाय ॥ १८॥ गुपी याचिई श्रम अधिक तुर पचिहै भूल । दादार दान का बरे हुयन गर॥ १५॥ ग्रन्थनामानि । 4. ३ । . - - ") श्रीरामायण भगा नुलसा दारात ॥ 11) मनविसास मनवागादागत । (2) अनवा नददासकृत। (७) सप्तशनिफा विहारीलालकृन । (6) अथ माश समता ।। (११) अन्य भाषा बहुप्र प ।। (२) राम दमा कंगवासकृत ।। (४) नाममाला दाद ।। (६) तयसता सनीकृत ॥ (८) वनि मदन महकृत ॥ (.) हिदीप पाद दमाः । C । चिह्न। नम पालग= TI• पु. गाम सालिग • सी. । गुणवावा. । सकर्मक क्रियाका अकमक क्रिया-प्र. कि. अय-अया। सर्वनाम-मई । प्रकर हा कि वन स शन्न पत्रचालत इस प्रा में निगय उना उपहाण प्रमादि सरकृत और भाग प्रभा में स दिये हैं और जहा २ गचत हाव बह र कविलाग और उगाहरप ददवें । स पुस्तक से विद्यानुरागिया का बहुत लान हुआ पर उनकी गणमाहाता से FIR हाई पाक पचनारा पाता है अाशा है इसका गुणग्राहक अगाकार को 11 है मङ्गलकोप - 4 ६ m अ अन्य देवनागरी वर्णमाला । प्रथम अंशुमाली ना० ९० सूर्य, चमा। अतर निस शब्द र प्रथम में इसका स-अंस ना.पु धा । गन्ध होता है उसका अर्थ उलटा होजाता हे असत० मा. पुनिवेशी, विन न्याहा । यथा अकारण अर्थात् कारणरहित र स्वरादि अनृण गु० उद्धार, संसार । शब्द के पहिले जर पारे तय अन् होजाता अफगुनगा, मेहरा, बसर हेत। যথা অন খাঁ গল্প । प्रकरटक० गु० बेतरक, वेधड़ा। अकवार० ना. स्त्री. गोदी, कोला। प्रकथा अकथनीय अंगरखाना पु० पहिरने का रिशेषा गुजी कहना योग्य न हो जो वर्णनरहित होवे । - अंगिया गा. स्त्री. चोली, वसविशेष । अकथ्य अंगीठी ना. बी. पाम, जिसमे भाग रखने है। अकनि० अ० मि. सुनि, रामायणे यथ अंगूठी 'स्त्री० ना प्राभूषण अगुली में (तुरग नचावहि दुर वर अानि मुदग पहिनते हैं। शि) अगोछा० ना. पु. देह पाचोका वध, रूमाल । अकम्पनना . तसविरोष, महान । अत. ना. पु. प्रत. समाप्ति, पग। अकर्कश० गु० यामल, गरम । अंतर०प०अतर, परत । अकर्म० गा. पु. अपराध, कुर्म। अंतर्गसिगा० सी० भीतरी चाल । अकर्मक गु० कमरहिन धातु ना० किया अंतरिक्षना, पु० छन । अर्थात् जी वी की शक्ति म हो । अंत ऊपर की जगह। अकर्मण्य. • गु० किम्मा, काप। अंतर्यामी गु. अतर्मामी, जो दिलम रहे यह अवलंकर गुरुशिदोर, बेदार राद ईयर लिग है। अकलंशिता ক্ষয়ান যু, গল্প, বিমান, যুৱী। অন্যান্য যা যাঘবনি, শশব। अंत पर ना. पु. भीतर का वध । अकयार० ना० स्त्री असार । अंधाया० १० पु. कुना, नौ ग्रादि अकमल गा० मा वैर, यदावत । अंधकृप० से भरगया। अकस्मात् श्रन्य. अचान, निमित्तहान अन्धर० गा.पु. प्रयार, उपदार। मकाजTO पु. पामका विनाश, सरा। अन्धकारमु.अधेरा। अकाम ना पु० व्यथं, निगल, कामहीन । अम्याना० पु. प्राम। अकारण पुलमित्तहीन, बेमतलब अम्बरना.पु. पाकारा । बेसरन। अंधारी नामी सदा ना हाथीपर रखते हैं। अकारथ गुरु व्यर्थीरत। अशा ना० पु. भा. हिम दो नो अकारान्त गुनिस शब्द प्रतम अकारहो। मॉल का होता है। अकालगापु० भित, दुसमय, बहठ । अंशी० गु० मा अन् हिरदार । अकालफल ना. पु. कुममय के फलाम अंशुरु गा..हिरण मामि हा वसु, भित्र की वस्तु वा पल। . अंशुमती ना० सी० शालरी। अशावमृत्युलना- पु. वृत्मय में मरनाथ अंशुमान ना पु. पूर्ग, काशीराना वि। में मारे मन मरना। 1 - A " ३ .
मङ्गलकोप। - } 4. अकाशना०पु०याकाश, प्राशहान। अगवानी ना. सी. श्राग जाकर लेना, अकिञ्चन गु० गाल, कद पाम नहीं, केवल पेशलाई। भगवान भरोसे। अगहन ना. पु० 'नवये महीना का नाम । अक्रिय गु०कुछ नहाकरता,वरनके योग्य न होवे । अगाऊ अय. पहिले से, बागे। अकुण्ठ० गु० तीक्ष्ण तेज, विनाशरहिन । अगाध गु० अथाह, अयत गम्भीर । अकुताना० अ०नि० उपना, घबहाना ! अंगार० पु. घर, भागे। याताही गु० उ, धरावे।। अकुल• गु० यह जानि नहीं, नीचपराना, ना० अंगास० ना. पु० अपरा, दोष, नाममालाया, अप अगास हैलन अहित श्रीगुण जो बहु पीय । पु. विशेष ईश्वर । अगुवा ना० पु. मार्ग दिखानेवाला, सदेशी, मुलाना. य. नि. व्याकुल होना, घबड़ाना। श्राग चलनहारा, प्रधान, चौधरी। अकुलीन अकुलीना गुरु धारर, कुलहीन, नीच । अगुण ग० अवगुण, गुणहनि, ना. पु.सिर । गुरु० ना. पु. जिसका पुरु नहीं, नीच, इस्त्र । अकेल. अकेली गु० दुखी, एकही। अगूद. गु० मुगम, जो गूद नहीं । अकर. ना. पु. श्रीकृष्णच द्वनी के चचा, घगढ़गन्धा ना.सी. हींग । गु.निराका अत वरण कोमल हो। अगोचर० गु० अदृश्य, अलख, अध्ययं । अखराड० गु, समस्त, सपूर्ण, खदीन । अगोटना० अखर्य गुः समस्त, पहुन । म. कि. चौकोना रस्ताना । यगारना० अगल गु० अखिल, ना० पु. देवता, मुर। भगौनी ना. सी. अगवानी। अखाड़ा० ना० पु. जहा मल्लयुद्ध होता है, अग्नि० ना० पु. अागि गुया । अखारा० | अग्निकार ना० स्त्री० पलिहारी। अखिल गु- समस्त, सम्पूर्ण, बिल्कुल । अग्निजिहा० मा पु० देवा। अखेट ना स्त्री. मृगया, शिमगर । . अग्निपाली ना० स्त्री० चीता, वृरी. अस्सयवटर अग्निमन्य • पु० धरणी। नागपु. अक्षयवृक्ष । अखयवृक्ष 1. अग्निमुखी ना. पु० भिलवा वृक्ष। अख्याति गा० सी० अपयश, अयश मामी अग्निवकका मगर नापु० पर्वत, अगम्य, नहा ना न सके। याग्निवहभ० ना. १० राल, रार । अगम०१ गुजहा गाय न सक, जोझो के अग्निशिखा० ना. सौ. केशर, नाफरारा। अगम्य योग्य नहीं। मगर गा.पु. मुगधिप्रसिद्ध । जलाना का टम हेतु क्रियाविशेष । अगस्त. ना. पु. वृतविशेष । अगस्तिला. पु० मुनिविशेष निहोंने समुद्र अगस्याको मुसा दिया था अगणित गु०पहत, अगाई। M अग्निसंस्कार ना० पु० दाद देना, मृतक की अग्निहोत्री ना. पु. अनि पूजोहारा, माह्मण जाति विशेष अपना. पु० मान्य, मागे, प्रथमभाग । जोशना ननावे, दिमार। अग्रगण्य गु० जो दिले होते, या गिनानाले । .
मङ्गलेकोप। . १ . m YU अग्रगामी गु० आगे चलनेहारा, पेशा। अङ्कित गु. चिद किया गया, लिग्विन, अग्रज गुरु जो पहिले प्रकट हुया होवे, मड़ा। परीदिन। ना० स्त्री० पु० श्राश्न, नाक अंकुर० ना पु० बीज बोने से नो अनुता अग्रता अग्रत्व.पु. पेशवाई। पहिले क्लिता है। अप्रोची ना० पु० गु० पहिले शोचोगाला, प्रश० ना. पुर आकुड़ी जिस से महावत हाथी को मारता है। प्रथमही समझनेहारा, दूर प्रदेश अबोल ना. पु. अधिवप्रसिद्ध । अग्रसर० गु० वा. पु. मुखिया, प्रधान, पेशना, अनार पु० अायव, शरीर, देह । आगे चलनहारा, सरदार। -अगद० ना० पु. बालिरा पुन भूपण, वाजूपद अग्रहायण ना० पु० अगहन । श्रगदा स्त्रीय नाम च द्रमा की एक अघ. ना. पु. पाप, दोष, गुनाह,अघासुर देय । क्ला वा, वा शरीर की दाता । अघटित गु० अयाय, ना ग न पौ। अगन० ना.पु० धागा, सहन। अघाई० गु० पूरी, भरी। अगना गा० स्त्री पत्नी, 'नोग्य, स्त्री, श्रागन । अगवना०वि० सहना, गँवारा करना। अधाना० अ० वि० असा, आमदह होना अंगरला ना० पु. उबग्न, केसर चदनादि गु० सतुष्ट, धनवान् । का शरीर विषे मर्दन । अघारि० ० पु. श्री एच द्रजी। अंगारक ना० पु. मगल, भारा, पोदा।" अघासुर० ना० पु० देत्यविशप, निमा श्री अंगाङ्गिभाव ना० पु० शरीर के अरयों कृष्णच द्रने वध किया था। या सम्ब। अघी० गु० पापी, दोषी। अगिरा०प० पु. मुनिविशेष, हरपति अघोर० ना. पु० भैयााप, अगा, शिवकृत जी के पिता। मत्र, धर्मविशेष, श्रीमहादेवनी । अगीकार ग. पु० स्वार, बल, मजर। अघोरपन्थ० पु. धर्मविशेष । • मगुलर ना० पु. बागुल । अगुली० ना० सी० हाप का प्रायन । अघोरपन्थी नापुरजो अघोरप या सेपन की, मलादिसयुक्त, नापु० यगृया अघोरी सर्वभक्षी। अगुष्ठा० अनगुमारनेहारा, ना० यु: मारण, हनना अगूठा० गा० पु० अगुष्ठ । अंक पु. श्रदर, गोदी कनिया, चिद, अंगूठी ना० सा अमूली, मुदरी। सख्या, गिता के र अक्षर, निशाती। अंगठी ना. श्री. पाटी। अंकदुन १० पु. दुस, पीड़ा, जममाला, अचगरी० मा स्रा० अनुचित, अर्म, (निथुरक्दै 7 अर अक्टुन गहन जिन वनपिलासे, यथा-सुको महरि निन मुनकी अपनाउ। करनी 1 करत प्रची जात न वानी। मना० अ० वि मोल ठहरना,परीक्षित होना नवम्भव 712 पु. पाश्रयं, तब डर अहाना स० कि. मोल टहराना, सोना। अचरज. स . " क १ . अचम्भाश ४ मङ्गलकोप। और न्यजन । अचल गु० जा चल नहीं सक्ता ना. पु. प्रजात. गु० जमरहित, जा 1 उपन । परताद। प्रजातपरि० अचला. ना. सौ. पृमी धरती । अमातरिपु०३ ना० पु. राना युधिष्ठिर। अचानक अन्य परमात् एकाएक ना. अजान• गु० प्रज्ञाा, मध, नादान। पुस्तकत्ता केशीकरणगरामेशेष । अजामिल.ना.पु. शाम एक मनय पा अचानचका अय. धम्माद, नागदान । अजामाल पिष्ठका जो गरायण सहक अचाना० स० कि० भोजन करके मुधोना । मरा और बुद्धि पाई। अचार ना. पु० आम इयादि का जो बन अजित ता है और प्राचार । अजात.? गु० जो जीता 7 जासक, श्वर । अचिन्त. गु.चितारहित, निधड़क । अजिन ना. पु० सिंहहयादि का चर्म ना अचूक गु० जान नई टीक । प्रचारालाग विवाते हैं। अवत. गु० सज्ञारहित बहोश, मूचित्र । अजिर० ना.पु. अगन सहन । अच्छत ना. पु. अदत पावरहित । अच्छा गु. भला सुडौल सुन्दर । अजी. ना. पु. कुपच, बाई वान , अच्युत० गु० स्थिर, अचलविशा इश्वर । अर्ज ० यय० थरतक, थमा। अच्युतापजना० पु. श्रीवलदानी। अज्झल... पुअन् और हल अधात् म्वर अछेह० गु० बहुत, बिहारीलालसप्तशतिकाया धरे रूप गुणको गरव फिर वह उदाह । अयाना० पु.थाचलअचला वसका अत। अन० यय० पान, श्रव, ना० पु. बम बारा ईश्वर, शिव, यौवन और अजन. ना.पु. वाजल,सुरमा। ग्राभरण गु. जो पैदा न होने वा उपना अजलि. T• सी०द हाथा सपुर। फिसीसे ना। अजली अगर० ना० पु. बड़ा सर, अजदहा सार। अजि विक बनन लगाकर। अमगुत० गु० अदभुत अनायन। अजित गु० अजा अर्थ मुरमा लगाये अजगन्धा. ना. सी. वरीपौधा। अटक ना स्त्री० राक, प्रतिवध सिधुनदी। अजमगु० जिसका नमन हाव। अटकना०प०कि.रुकना, लगना। अजय गु. जयरहित जा जीता 7 नावे 11. सी. वीरभूमि जिले की नदीविशेष। अटहलनाचा अनुमान, प्रमाए श्रदान प्रजया 10वी. अजा । अटकखना० स० कि. वादा बूझना नाचना। अजर० गु० जागरित अर्थात् जो वृतान अका..पु. भाजगन्नाथ जन्म प्रसाद हा ना.पु. देवता। पकान रा पान पाप्रसाद । अजलोक ना.पु. पायानी ब्रह्मला । अजयीधी • सी. सपदी जो भार घटकाना० स० कि. राक्ना ठहराना । घने तारागणा की प्राकारामें दोपड़ती है। यटकाय ना० पु० राम, प्रतिमध। भजह अन्य अभी अभी। अजाना. सी. रात्री माया ! . . HOM म अटखेला गुल खिलाड पचल। अटखेलीमी तिलाइपा, घसारा मङ्गलकोप mar अटा० . अटन किरिना ना ना. पु०ऊपर अडोल • जो न हले,ल); की कोठरी। 15 अणि ना. स्त्री मोनी, धनी, नौका अटना० अ० कि० समाना, भरजागा, फिरना। अणिमा ना मी अन्तन होने की शक्ति अटपट० गु० उलट, पुलट गोल बात ! सिद्धिविशेर। अटपटी० गु: अशोच, अनरोति ।। अणु ना० अत्यन्त सूक्ष्म बस्तु। अटल गु० पूरा, द, अचल, जो न टर। अएड. ना.पु. अंडा, प्रांडा ।। अटवी०मा० पु. वन, जंगल। अण्डकोप ना० पु० अण्डकटाह ना०सी० उपरकी कोदरी, अण्डज नापु० गु० जो अण्ड से उपज । . भटारी० कोठा। अएडाना.पु०.थएड. रण्ड । 27 अटालाना पुटेर, सामग्री। अण्डाकार गुः अण्डे के ढील अब गुजो टूट न सके। अटेक सुनो टेकराहत हो सहाराविना अतनु० ना० पु० कामदेव, शरीरहित ! 2017 अटेरन ना फै चरखी, घाई चकर अतर्क गु० जो तर्करहित है, मैदलील...- देनेका स्थान । अतक्य० गु० जो लैपान जावे, बंदलील घटेरना० स० कि० केटी बनाना, घोड़े को. अतल ना० पु० सात पातालों में से एक 1 अतलस्पर्श गु० अथाद, अगाध 1. :- 'चकर देना। अतसी. ना. सी. अलसी, निसका तेल नि.. अटेरि० ना. पु० नगरविशेष । कालते हैं। अटोक गु० टोक विन, अछेड़। अट्टहास० गा० पु० ठडा मार के हँसना। अतिः श्रव्य जिम शब्द के प्रथम इसका मेल होताई उसका अर्थ अधिक लिया जाता है यथा- अहालिका ना० सी० पटारी । अठतालीस गु• चालीस और पाठ ४८ । अतिमुन्दर अर्धान अधिकसुन्दर। ... अठतीस० गु० तास और पाठ ३६१. अतिकराटक ना० पु० जवासा । अउवारा ना ५० पाठवां दिन, संतोह । अतिकाल गा.पु. अखेर। अठसठ० गु० साटि और पाठ । अतिकाय ना० पु. रावणका पुत्र अठहत्तर गु० सत्तर और बाट । अतिकुचै० अ० कि० समिट, सकुचे झूले, राम- अठाईस० गु० वी और पाठ २६॥ चन्द्रिकायां, यथा कप घर वाणी गैः उर हीटि... স্ক্যানন ? নল গীয় স্থান। तचा तिकुचे सकुचै मतिवली । अठारह गुरु दश और प्रद८ । प्रतिगुहा ना० सी शालपणी औषध । अठासी गुरु अरसी और पाठ प्रतिचंचुल ना. पु० लाल पाण्डम..." भठेलगु, जो देला जाये। अतिजिहाना स्त्री० कलिहारी MET अड. ना. स्त्री झगडा, विरोध, इट। प्रतिथा अडंग ना. पु मंडी अर्थात् दिसावरकी वस्तु अतिथिः । ना०-पु० यात्री, पाहुन, संन्यात का उतार, गु० झगडालू टरी अतिपराक्रम नोक पुं० वा प्रताप । अड़ना प्रक्रि० रुकना, इठकरना । प्रतिपाना अधिक मदिराका पाना। महसार ना० पु. वांसा अर्थात् औषति। अतिपाव. गु० बहुत निक्र। HTTA मङ्गलकोप। . . . 'अतिरंडिका ना० मी. ऊधाहोली, ग्रीधा यथाहागु गम्भार, अगार,गहराना पुस्खोह। अतिरसा. ना. श्री. रारना, औषध । अदत्त गुरुजी नहीं दिया गया, देने योग्य . अतिरिक्ष गु० अतिशय पार्फ। नहीं है । ..." अतियता गु० बरूवादी, जो बहुत बके। मदत्ता गु. यो. अविवाहिना । अतियला सीलका श्रीपय ।। अदर्शन ना पु० दशांना भार गु० लुम, अतिविकट० गु० बहन, दुर्गम, जिस हाथी में श्रगोचर। अवगुण हो। श्रदवायन. ना. पांइनी दी ररमी। अतिवृष्टि ना० मी० बहुन यौ । श्रदाता अतिव्ययक गु० उहाऊ, बहुत खर्च कती। गु• लीचड़, अनदेना। अतिव्याप्ति गुरु यी• अलक्ष्य में लक्षण का यदितिः ना. सी. कश्यप की सी, देवमाता गमन। अतिशय गु• बहुन, अधिक। । अदिष्टर ना.प. विपत्ति,भाग्य, कर्म । अतिशात गु.बहुत शनि । :--.-, अदृश्य • जो देखा न जाने, अगोचर। थतिसार ना.पु. पेसा, संग्रहणी। अदेय गु० जो देने के योग्य नहीं । अदेय गुरु दैत्य को देने के योग्य न होवे ।' अतिस्थूल गु० बहुत भारी । श्रद्धी ना. सी. दमड़ी का बायां, कपड़ा अतीत. गु० होचका, व्यतीन, रहित : विशेष अतीस ना. पु. औषपविशेष। अतीसार० ना. पु. अनिमार । अदभुत गु० अनोबा मनाया।। अद्य० अन्य. थाज । अतुल गुः जो तोला नही गया, जो सद्यापि भव्य ग्रंचना । अतोल. अद्रक० ना. श्री. अदाक, कन्दविशेष । अत्यंशु ना.पु. सरन । अद्रि. ना.पु. पर्वत। अत्यन्त० गु• अतिशया रहुन् । अद्वितीयः । ग. निमके ममान दुमरा नहीं, अद्वैत (गु. एकता-लासानी, भेदरहिट अत्यन्तसुन्दर० गुरु बहुत सुन्दर । अध० अव्य० नीचे ना. सी. उगा पाप अत्यल्पतर० गु०मनही घोड़ा। अधकपाली ना. सी. बागशेशी अर्थात अत्यावश्यक गु• बहुत चावश्यक रहुनजरूरी, जिसके शिना निबाह न होसके। पारोशर की पीड़ा! अन्युन गु• महुन पठिन. ना. पु. होंग। अघगो ना सी. गुदा, गंध करने की इन्द्रि अत्युत्तम गु. बहुत अच्छः ।। अधन अत्युत्तमा० ना०सी० मुख्यबसरा ।। अधमी. गु• बंगाल, गी! अथ० अन्य. अनन्नर, बारम्भ, उपरन्त ।... अधवर य, आधी दूर अथां मय। अथर्वण गा• पु. नाम चनुर्यवेदका अधम गु० नीच, कुत्सित, धर्मरहित । अथवा बच्चा, वा, या प्रकारान्वर, किंवा अधमाधम गु: अनिनीच । अथाई ना. सी. बेटकका रपान, समूह, चौपाई। अधर ना० पु. नीचे का हॉट, थोष्ठ, अन्तर प्रधान० गु० अचार वटाई, बेठिकाने गु. मया १ अतुलित तोलने के याम्य नहीं, बहुन । .17, ग T मङ्गलकोप। ria है ₹ ar अधखुद्धिक गु० नासमझ नादात 1 अधीर गु० उतारल, धारतरहित, ब्याकुल, अधरामृताना पु० होटा की मिठास । चचल।. अधर्म ना. पु. पाप, अपेर, अ याय ,अपरा अधीरता० ना० स्त्री० उतावली, व्याकुलना । धर्मरहिन। अधीश ना० पु० स्वामी, मालिक । अधर्मी गु० अयाया, पारी। अधूम० गु० अधना श्रावना। श्रधिः अय. जिस शब्द ५ प्रथम म दराका अधेड़० गु० श्रागा पापुदीय व्यतीत भई । सयोग होताह उत्तमा अर्थ सादिव या मालिक | अधेला ना० पुपसेका थापा । वा हाकिम या हाता है यया दरावि अर्थात् अधेली० ना. स्त्री० रुपया या मुदरका अाधा । नरा या मालिक अधो० ना० पु. नरक, नीचे । अधिक गु० बरत। अधोवन्धन ना. पु० जेरबद गीचा ब. अधिकता ना० मा न्धनविशेष। अधिकत्वना पु. पु. रहतात । अधोमुस० गु० शिर झुगणे वा शिर नीचे श्रधिकरएक ना० पु० सातवां कारकरिशेष । और पार ऊपर कियेहुय । अधिक कोण ना. पु. कान जो समरीण से अधोयोनि० गु० नीचयानि । अधिर हो। अधोलोक० ना० पु० पाताल, नरर । अधिकाई० ना० सी० पढ़नी, सरसाई, बहुतान । अध्ययनजामुपाठ पढ़ना, सीमना । अधिकाना० स० मि. धिमारना, यड़ाना। अध्यक्ष ना. पु. स्वामी, प्रधान, मालिक। अधिकार ना. पु० पदी, बोहदा, योग्यता, अध्यात्म. ना. पु० श्रामशान, साविचार! वामित्व, राय, पाती। अध्यापफ ना. पु. पाठपदनिहारा, शिहर। अधिकारी गु० पो व यो य सामी, पुजारी, अध्यापन ना. पु० पट पडा। पएडा। अध्याय. ना. पु. पाठ, प, प्रय, अधिकादि गुरु बटुन सम्पदा । डा, वार, हिस्सा। अधिकृत ना० पु० नियुक्त, देखनेवाला । अध्याहार ना. पु. वाय कोरन नाचनेवाला, पदादिगार। निमित्त बाहर से गद चन। अधिप.ना. पु. नायक, मालिक, राजनीति | श्रध्याहत चाटा मागन्द। प्रतिपालक वा प्रजापालक । अध्वगा। २० दाग, का, मुनकिना अपनी अधिपतिना: पु० अपिए । अधिवास. ना. पु. निगारा सहनन । श्रवाहमान, वा अधिभूल ना० पु. नाया, सामी, मालिए । अनलोड गन्दी। अधिमास. T० पु० तार, मलमास ! अनमुना.गा अधियाना० स० कि० अाधारमा! अनसाईमा रामनगा। अधिराज. ना. पु. महारान रानारियन । अनसाना है. ग्रेषित होना उग अधिरूदल ना. पु० सवार, अमार। अधीन गुं० वर्गान, प्रामारा। अनगढ़ः ग्रन्, अन्नीला, जो वस्तु अधीनता ना० वीग्राधीनता, पराम, दुरे से निगार में रहना। "" - h .
मङ्गलकोप। १ अनगढ़ी ना. स्त्री अनगद । मनरी निग. सी. दुचालि, असन्मान, सनगरिएन गु० जो गिना नहीं का गिना न अनादर। काम पा दिमाग में न पारे। अनर्गल निधि, स्वैग्छर । • अनघ गु. निष्पाप, निर्दो, गुनाह । मनक गुअपूय, अमूल । अनंग. ना. पु. पापद्व, रामाजनक, अनर्थ गु• अर्थहीन, धनुदिन, मत्ला । देहरहिन जो नन में न हो। अनर्थक गु० नियोजन, निष्कारण, भूटा । अनजाना गुता पहिचाना । अगषः ना.पु.पावस, अग्नि, प्राग । अनट ना.स्सी गाठि। मनलपक्षला. पु. पती विशेष जो सदा श्रमत अय. अन्यत्र, और स्थान में। गर भाग में, उदा करता है और जब अनधन० ना० पु० मम्पत्ति या लक्ष्मी अर्थात् ! विरेच्छा मे उमरे में होता है तो एडे यमनामा लक्ष्मी। यो प्राकाश से मोड़ देता है और वह परमा अनंत गु० निरूका अन्न नहीं वा भाद्र पृथ्वी पर पहुँचने के पहिनही मार्ग में पाक शुल चतुर्दशी को जो मूत्र में ४ प्रधि देकर फूटकर बडा न जाता है चोर बस्ने पूजते हैं और बाहुपर बाधने है बहुन ना. लगता है और अपने माता पिता का स्मरण पु. प्रमा, पातारा, विणु जी मेष जी, कर ऊपर लौट जाता है, (यथा विधार- लक्ष्मण जी। मालायाम् ) चनस पक्ष को चेटुवा बिउ अनंतकाल गु० बहुत दिन। धरणि परराय । बहु अलीन यह लीन है मि- अनंतर. ना. पु. बयान, ममीप, पीछे, ल्यो तासु को धाय। दूमरा, अयादिन। अनवकाशना.पु. चरकाशरहिन । अनन्ता० ना. सी. धरती, जवामा । अनयट ना० पु. भूषयविशेष जो निया पार के गठे में पहनती है। अनन्य गु० एम भाव, एक भरोसे । अनपदा० गु• मूर्ख, पुपदा, अजानी । अनवस्थित गु ठिगाने, रग रग दी अनपायन०गुरु यचल, हद । अनशत० मा पु. उपवास, लघन । अनश्वर० गु• जिसका नाश न हो, जो न मिरे । अनयुझ० गु• जो समझा न नारे अनसीखा गु० घनपदा, अज्ञानी । अनमन० गु० धारा, उदास, दिल। अनसुनीकरना.नि. पानाकानी करना । यनमना० अनमिल० गु. मेलरहिन, नादरसा अनसूया. न. सा• अनिमुनि की पनी । अनमिप० गु० समय, रिना मिम, नेउजर । अनहित० गु० स्नेहरहित, शत्रु, र, युराई । अनमेल गु० अनमिल। अनहोना गु० असम्भव, जो होनहार नहीं। अनमैल. 50 गुरु मैलरहित, उनल, माफ। अनाकुद: ना. पु. वृत्त, पेड़। अनमोब. गु० जिमका मोल नहीं अर्थात् जो अनाज ना. पु. अन्न, गला । अनाचार० ना. पु. कुचाल, श्राचाररहित । बहुन अपूर्व है। अनाजक० ना. पु. कालागर । अनायास० गु• पिना परिश्रम, रेमिहनत । अनाड़ी० गु• भदेमल, निर्गुणी, नासिना । अनरसा ना• पु. रमरहित, झगा, भीकाअनाथ गु• दुःती. निसवा कोई रक्षक मियों में अनबनाव। 'हो, यथा रिश्ता, पिताहीन पुत्र । । - मङ्गलकोप। . अनादर० ना. पु० अपमान, निरवार । अनुकारी० ना. पु० नोकर, सेवा। अनादि० गु० निमयी आदि ग हो, यथा ईश्वर । अनुकूल० गुः प्रसन्न, सहायक, व्याधिहीन । अनामय० गु० रोगरहिन, निदों। अनुस्व. ना. पु. भालस, पुराई । अनामिका ना. मी तामरी अंगुली । अनुखाल ना. पु. किसी नदी या एक भान अनायास. ना. पु० यमपिना, निम्पार । किसी देश में प्रविष्ट हो थोड़ी दूर और भेद न अनावृष्टि शा० मी. मृवा, पानी न बरसे। कर उसरा नाम अर्थात् घोरखाल । मनाश्रम गु० पिनमाा, विशा टिगो और अनुग गु० सेरस वा सेररिन, पीछे चलेगा। चारों प्रायमरहिन । भनुगत० ना.पु. प्राधित । प्रनाहन गु. वह श गो ममाण्ड में पदण्ड अनुग्रह ना. पु. कृपा, दया, मेहरबानी । होता है, ना. पु. चनविशेष । अनुगामी० गु० सेवक, पीछे चलनहारा । अनिरुद्ध ना. पु. श्रीकृष्णचन्द्र सापोता। अनुचर० ना० पु० साथी सहचर, दाम, मेर। श्रीनर्वचनीय। गु, जो कहने के योग्य अनुचरी ना. नी. दासी, सेरिन । अनिर्याच्या नहीं है। अनुचित० गु• अयोग्य, जो वाजिर न हो। अनिल गा० पु. पप, वायु, हा ।. अनुजा ना. पु० छोटाभाई। अनिश्चित० पु. जो निश्चय नहीं कियागया । अनुजा० ना. स्त्री. छोटीवहिन । अनिश्चितता. ना. सी. जिसमा निश्चय अनुचर० गु० उत्तरहीन, महजन, श्रेष्ठ । नहीं है उनकी स्थिति। अनुताप० ना. पु० पश्चात्ताप, शोच । अनिष्ट गु० अप्रिय, अरुचि । अनुतारा० ना० पु. तारे के पादेका नारा अनी ना० मी. मेा, बरही और वाग्ण श्रादि अनुदिन० ० पु. प्रतिदिन, नितप्रति । की नोक । अनुनासिक ना० पु. जो नासिकासे निकले । अनीक. ना. पु० मत्या, नास्त्री० सेन, ममूह । अनुपल० ना. पु० पलका साठिवा अश। अनीकिनी ना. स्त्री० सेना, शोज । अनुपस्थित गु• जो उपस्थित न होवे । अनीतिक ना. सी. दुचाल, अयाय । अनुपान ना. पु. औषध आदि के साथ ओर •अनीश ना. पु. ईशरहित, जीव " जो कुछ मिलाय के पीते हैं। अनीह गु० चेष्टारहित, तृष्णारहित । अनुप्रास ना.पु. समान जाति के वर्षों में अनु०पय यह निम शद के प्रथम म सयुस रचितपद, समूह, रदीफ। होता है उसका अर्थ, कभी पुरा भी सादश्य, अनुभव० ना० पु० मानसज्ञा, श्रदकल, विचार, कभी निषेध, कभी सग, कभी पीछे, कभी समीप का होता है। अनुभूति ना. व्याकरण के प्राचार्य का नाम अनुकम्पा० ना. स्त्री कृपा, दया रहम, मेह है जिहोंने सारस्वत बनाई और अपने चित्त के रवाती। स्थिर निश्चय को भी कहते हैं, जिसरा पर्याय अनुकरण ना.पु.रिमी के पीछे काम कर. अनुभव है। ना, किमीसी प्रति वा नकल करना। अनुमाव० ना. पु० महिमाबड़ाई। अनुक्त गु० नो उक्त नहीं, ना० पु. दृष्टात । | अनुभूत० गु० बीता, जो मनमे जानागया है । अनुफम० मा पु० क्रमसे, परिपाटी, रीति। अनुमति ना० सी० अनुज्ञा, आज्ञा, सम्मान, भनुकोश. ना. स्त्री० दया, कृपा, रइम । सलाइ . ध्यान ।
'मङ्गलकोप। श्चय हो 6 07 अनुमरण पु. एक चिना म पिपिपुरव अनूठा० गु० अपूर्व निराला, या धनाराम शरीर का दहन सनी हाना । अन्यू१० गु• मर बिलयल। अनुमान T० पु. अग्रल यति स जानि अनुते . पु. भूट मिथ्या । अनेक गु. बढ़त एक से अधिक। अनुमति० गु० विचार गया ! अनेकरामर गु. निग शब्द में एकग अनुमोदन ना० ५० प्रशसा का बड़ा फरा। अधि वर्ण हो। अनुयायी. गु. पाद जानवाला समय। अनेसी स्त्री. अनुचिन कुष्टि । अनुरत० गु० मग्न रत मस्त । अनैसे० गु• र प्राधष्टि रामायणे या अनुराग० ना. पु० स्नह प्राति थाहा लहार। (अजहुँ अनुन तर चिता औस) अनुरागी० शु• प्रियतम दास्त । अनीपधिक गु. निसरी प्राधि हा लामा अनुराधा० ना. वा. सत्रहवा नक्षत्र अन्त० पु. समाप्ति गाभाग सामा दुमरा अनुरूप० गु० सश समान तुय। जाहा अय. निदान। अनुरूप०. समान बरनेगाला प्रतिमा। अन्तक. ० पु. काल, यमरान । अनुरोध० गु० अपेक्षा उपमा राक मतक अन्तकाल. ना. पु० मरा का समय। अनुरूप हाना। अत करण 1. पु. मन बुद्धि चित्त और अनुरोधी० गु• विरारी अहकार। अनुलापना.ए. दुखित वार्ता। अन्त कोण..पु. भातर का योग। अनुवह ना.पु.मुग्यपान । मत पाती० गु० अतगत भातर । अनुवाद० ना. पु. पन मा बानी परे श्रन्त पुर० ना. पु• घर निसम राना पारि लिया रहता है। करना हठ करना। अनुशयना० ना. स्त्री. नापिकारिया। अन्त सम्पात ना. पु. भीतर छूना । अनुशाखा ना. मा. विकी गली प्रमाण । अतदील ना. सा. यात । अनुशासन० पु. पाना हम। अन्तर०अयबीच पा ना. पु. भातर, अनुसधान० ना.पु. वामना पीये लगाना। समय भर हत्य। अनुसरना था कि पीछे चलना पा पाना। अतरग० ना. पु. प्रामाय अपना । अनुसार० T• पु• सरश नुल्य धनम्प होना अन्तर्हित० गु• छुपना। गायत्र हाना । अधया अनुरूप मुवापिक। अतरा० ना. पु. गीत क पहिले पदका चाके अनुस्वार० ना.पु. नितुजा अहर के मरतर नो पद है य मध्य बाहिर । तरापत्तिः ना. पु० गम । अनुहर० ना. पु.तुन अनुसार। अन्तरित० गु• छुपना गाया हाना। अनुहरण ना.पु. उरामा उठालना। अन्तरिया- ना. पु० तिवारी रविशा । अनुहार गु• तुम सश समान, अन्तरीप० १० सा. रास धरती की जा अनुहारि०य । समुद्र में चलागई हा। अनुपम अतवेद. १० पु. दश ना गर्गा यमुना र अनुपमा भला एक्ता बानीर। अनूप अन्तस्थल ग बोच में दूरवाला अता। पर रते हैं। d गुः उपमारहिन चान् सन समय में है।
मङ्गलकोप. इनि निघो। } गु० अयोग्य, अधमा, जालिम। । . थाली! श्रतावली. ना. सी. अत। श्रन्यरत ना० पु. लालऊगा। अंतिम गु. अन्तका। यथा, (श्रयरह वृत्तालारसिर कापपिप्पली) अंतवासी ना.पु. पीछे रहनेवाला, दूररहने वाला शिया श्रन्याय० ना. पु० अनीति, उपर । अन्त्य० गु० यता, पिछला । अन्याय अन्त्यज. ना. पु. धोवी, चमार, नट, बरट, अन्यायी पिरात, मेद, मिल, पीछे उपना, नीच जाति । अन्यत्र० अन्य और कहीं। अंत्याक्षर० ना. पु. पता चतर । | अन्योन्य० गु० परस्पर । अध०गु० श्रधा। अन्वयः ना. पु० एक्का एक साथ अंधक. ना. पु० देत्यविशेष जो सदाशिव सम्य, कृल। से लड़ा था और मारागना । अन्वहंगुरितर, सयकर । अंधकरन्ध० ना. प० देत्यविशेष । अन्वित गु० सयुक्त, मिलित । अधकरिपु० ना. पु० श्रीमहादेवजी। अन्वेपण ना. पु. अनस धार, खान । अधकार० १० पु. अधेरा। अन्येषिणी शास्त्री० सौजनेयाला, दूदन अधकारि० पु० श्रीमहादवनी। अंचला गु० अधा। अप० अन्य जिस शब्द के प्रथम में यह सयुक्त अधसुतः ना. पु. दुर्गास्नादि सो १। होता है उसरा अर्थ, कु. निपिद्धता, विरुद्धता, अंधा० गु० नेत्रहीन । भिन्नता, अासन्नता इयादि हाताहै सर्व० श्राप । अन्न ना. पु. पर प्रोदनादि, अनान । अपकर्म० ना. पु. दुर्भि, खुराकाम । अन्नकूट ना. पु. अनरा टेर लगाना। अनपर्वत हिदुधा त्याहार दीवाली के दूसरे अपकार० ना• पु० अनिष्ट, विगाड, द्वेष, अधर्म। दिन होता है। अपकारी गु० देषी, दुश्मी। अन्नप्राशन ना० पु. बालक को पाच या छठेमास खीर चटाना, माड चाटना ।। अपकृष्ट गु० अधम, यून, छोगा। अपक्क० गु. जा पकानहान। श्रनाक ना. स्त्री. दाया, दाई, धाय । अपघात ना० पु. निज परसों आप को मारना। अन्य मु. दूसरा, मिन, कोई पोर । अन्यञ्च० गु० श्रय भी, और भी। अपचय० ना० पु० टोटा, घारा, हानि । अन्यथा अन्यग्रोर प्रकार, प्रसारान्तर, अपजसना०पु० क्लक, अपमान, अपयश अपड० गु० जो काम करने में प्रवीण नहीं, अन्यथाचरण 1. पु. उलया यवहार। निर्गुद्धि । अन्यथासिद्धि० ना. सी. और 'प्रकार से | अपना ना० पु. भटडर,निजोर से दर अपत० गु० पापी, बेरजत । अन्यदेश ना० पु. भोर देश, गेरमुल्क। अपतिक ना० सी० अनादर, अपमान । अन्यदेशीय गु० परदशी, विदेशी। अपत्य ना० पु. सतान, श्रीलाद । अन्यपुरप० गु० जो परोक्ष में है, अाननर । अपथ ना० पु. कुमार्ग, मार्गरहित । . अन्नाः } - ठहराना।
१२. मङ्गलकोप। पानी। * अपहप्ता अपथ्य गु. जिसके खाने से रोग अधिक हो।यपवित्र गु० अशुद्ध, दुतहरा, नापाकः । अर्थात् जठरानस निमे न पचा सर श्रपधिनता० ना. सी. अशुद्धता, इत, ना. अपना र निनका, स्ववीय । अपनाहत ना० सी० घराना, कुटुम्ब, समन्य अपशकुन ना. पु. रासगुत। अपवस० गु. स्वाधीन, अपनेरश में। अपशन्द ना पु. शश्द जो अशुद्ध है। अपभय० गा• पु० भूटा, अपडर। अपश्य गु० जो देखा न जाये। अपभाषा ना. स्त्री. गॅसारीचोली, वा अपसव्य गु. दाहिना भाग श्रगरा वादा यवनादिको की बोली, पारसीयादि। हिना हाय वा पाया वा जतदान में अंगावर अपभ्रंश. ना. पु. अरशद, अशुद्धशब्द । दाहिने कारेपर रखना, विरुद्ध । अपमान ना. पु. अनादर, इ-जन घटाना। अपस्मार.ना. पु. रोगशिप, जिसको मि अपमानी गु. जो थपमान के याम्य है। रगी कहते हैं। अपमृत्यु. ना. सौ. धनमात, रोगहान, म. श्रप्सरा. ना. स्त्री सश्या, परी। रना, यकालमृत्यु। अपहरण ना. पु. हरलेना, लूरलेगा, लूटगा। अपर० ना० पु. तगर थापर, गु९ दूसरा, अय,विरुद्ध। अपरम्पार गु• जिसका पार नहीं है, अनन्त । अपहरता गु. चोर, डा, लुटेरा । अपहारीका (अपरा ना• खी० जूही। अपह्नव. पु. दिपार, नकार। अपराजय० ना• पु• पराभन, हीनता, हारि। अपराजित गु० जो जीता न जा ना.पु. अपक्ष गु० पहरक्ति। श्रीसदाशिवनी, श्रीविपशुनारायण । अपाकर गु• नो पचा नहीं है। अपांग ना.पु. नेत्रया अन भाग पटाद। अपराजिताना सी देवीविशेष, पुष्प अपादान.ना.पु. पाचपाकारक । रोष, निसने पिन्कान्ता या दोया गोड़ी कहते हैं। अपान ना० पु. गुदा, नीचेची वायु, पाद- प्राणविशेष, सर्व, अपना। अपराध ना. पु. दोष, पार, पात, अधर्म । अपाप गु. पापरहित । अपराधी गु. पापी, दोती थी। अपरा. ना. पु. तीसरापहर। अपरिचित गु० जातिवाचकशब्द, जिससे अपार० गु० जिसका पारावार नहीं है, अन त । परिचय न हो, निसमे पहिचान न हो। अपाचन० गु. शुद्ध, नापा । अपरिमित गु• जो नापा नहीं गया, बहुत । अपूत गु० निर्वश, कुपुत्र, कप्ता अपणी ना. सी. पानी। अपूर्ण गु० जो अभी पूरा नहीं भया है । अपलक्षण ना.पु. अपशकुन, युरेचिह। अपूर्णभूत गु० अभी व्यती नहीं भवा । अपलोक गा.पु. अपयश, बदनामी । अपूरव० गु० जो पदिले कभी नहीं देता अपवर्ग ना. पु. मुहि मोर, निनात। अनूठा। अपवाद ना• पु० जिन्दा अयश, उलइना, अपि अन्य निश्चय, ठीक, भी। चुरीपात धानको कहना, अनियमान्दार' अपिधान जा. तु.पोशाक, पर। अपयादी गु० अथा, जो अपवाद करे अपीहाना पु. शिखा, भूषण । |अगामार्ग० ना. पु. ऊगा। अपूर्व . . 2 मङ्गलकोप। V . ५ . r अपेय गुरु जी पीने के याग्य नहा है। अवस• गु० निर्बल, यशरहित । अपेल. गु० अचल, जो टल न सके। श्रशार• ना स्त्री० विलम्म, देर, कुप्समय । श्रपेक्षक गुरु अपना करनेहारा, निमवतारने- अबुध गु० मर्स, मद, अदमा, दय। हारा, अनुरोध अझ गु• नासमझ, नादात । अपेक्षा ना. सी. अनुराम, ग्राशी, भरोसा, अयूझा गु• पिना समझा, अनजाना । रिश्तह, स्पिन। प्रवृशित० गु० जो असा नहीं गया । अपेक्षित गु. पाश्रत, अपना कियागया । श्रयर० ना. स्त्री० प्रकार । अपौरूप० गुं० निती सा यता नहा है, ना अवै० अन्य० अभी० गु० अनिश्चित । अन्ज. ना. पु० रमल, अर्थ, च द्रमा, देव. ताति। यद्य, शख, वृक्षविशेष अप्रकाश ना. पु. अधरा, जा प्रस्ट नहा है। अमतिहत० गु० जिसको रोग नहीं है। अब्द० ना. पु. वर्ष, साल, सरन् । अधिनास्त्री० मडूकी, सीपी, समुद्र । अप्रतीत० गु० प्रतातिरहिन अर्थात् जाति अमन गु० जा भछ नहा, भक्तिहान, ना श्वास के याप नहीं है। हिरसह नहा हुआ है। अप्रत्ययः ना. पु० विश्वास । अभंग गु० निराका नाश हो। अप्रत्यक्ष० गु० जो देखा न जां । श्रमय गु० निर्भय, निडर । अप्रधान० गु० मुग्यनहीं है, जो सरदार नहीं है। अमया ना. स्त्री. हरै। अप्रवन्ध ना० पु देशदौरस्त, प्राधहीन । नभरण ना० पु. गहना, प्रामाण, जगर। अप्रमाण गु० बहुत, प्रमाणरहित, असस्य । अप्रसन्ना गु. जो प्रसन नहीं है, गदला, अमरम मु. पतिहीन, निडर। 7 नाखुश। श्रभाग०। ना० पु. दुर्गति, विपत्तिम अभाग्य अप्रसिद्ध शु. निसरो कोई नहीं जानता है, गुप्त । अभागा ना०प० अभागी० नासा. गु भाग्यहीन,निपहा अनारत गु० जो प्राकृत नहा है। प्रभाय ना० पु० अनहोगा। थप्राप्तयौवन ना. पु. राइका, नाबालिग। प्रभार.गु. हलका। अप्रिय गु० यहित, जो निय नहीं है। अभाव. ना.पु. अविवमार, नाग, मयु। यफरना०.क्रि. ऋषिकभोजन से पेट अनहोना। पूला, अरिस धनवान होना। यभास. ना. पु० माया, प्रतिविद । । अफराना. स.वि. अधिक भोजन कराना। अभिअय. मद दिगिों, यह निस राय अफल० गु.नि कन, व्यर्ष, वैफायदह । प्रथममें समुल होताई उसका अर्थ यथा, भाग, अय० अव्य. इसममय, इनानी, ना पानी प्रपैक इत्यादि होवाद । अपतका अवतलक अय. अभीनक,इससस्यता। अभिगम्य० अ० कि. आपुनारर! . अभिचार ना.गु. मात्र नितस वरिया अम्भरण ना.पु. पानी भरना । भयल गु. निल, पौरुपरहित । ... भयला नाही. नारी, श्री गुरु बलदाया। अभिजित् गा. पु० मुहूर्त शिश, इसीसवाँ र नएन। 4 . १ 7 . 1 मङ्गलकोपा अभदः । गु० ऐक्य, परस्पर सम्बन्ध, प्रकट । . . अभिधान ना.पु. नाम, कोष। अभिनवगु• नया, नूदन, नवीन।। नाभनन्दन ना. पु० सराहे, मम्मति, सलाइ अभ्यन्तर ना.पु. भीतरी भीतरका। अभिप्राय ना. पु. मतनकसारार्थ, धर्म, श्रभ्यासना. पु० साधन, चिनन, कर्त्तन्य । अन्न ना. पु. प्राकारा, मेघ । माशय, कारण। थम्रक ना० पु. भवरक, धातुविशेष। अभिभूत गु• पराजित, वाहीन । अभिमत गु० याचिन, धानुमार, सम्मत । यमंगल • मालरहित, अशोभा । अनिमान. ना.. यहकार, पमएड, गरूर । अमत्त गु• सीमा, मावधान, होशमें। अनिमानी अमर० गु० जो नर, ना.पु. देवता, निर- तु.च.करी, मगर। अभिमान्य पार, रिनाशा। अभिमुख गु• सन्मुस, सामने, वर्तमान । यमरपुर० ना.पु. मादेशका नगरविशेष, अभिरत गु. सयुक्त, मिलिना ह, विष्णु, शिर, लोक, स्वर्ग। यभिराम गु. सदर, एसद रमय । अमरस० ना. सा. आमकारस। अभिरामी गु.रमोवाला। | अमरारती० ना. सी.इन्द्रपुरी। अभिलाप ना.सी.मा, मनोरथ, यमरीहत. ना.पु. पचनार वृत। अभिलापातमा अमर्याद ना. सी. घनीति, परशा, अभियन्दन ना.पु. नमसार परना। अमर्यादास मान । अभियाद ना• पु. दुवंचन, याचा और अमल गु.र्मित, उनला, मादशासु, राज्य। पुरातमहार। अमलतास. ना.पु. पदर, लारी पीपय अभिवादन. ना. पु. चरप महापर्वक नमस्कार। श्रमात्य. ना.पु.म.श्रीशन । अभिवित गु.निसमा पाभोर भयो। अमान गुसीरिवभाव, मानरहिन । अभिषेक.ना.पु. जल दिपकना, शान्ति श्रमानात. समाना, भरना, सपना । सार, परप्रानि के लिये पहिसी दिया समान्य गुजो मानने के योग्य नहीं है। सिरानि। अमानुप० गु• मनुस्यतारहित, विरा मनुष्य । अभिसार०ा.पु.नारस, रदि। थमायस० अभिसारिश.ना. सी. नायिचा नाई। अमावस्या ना.मी. परकी समाति की तिथि पदी १५॥ अभिसारिजी.ना.मी.नाधिका । थमायास्या अभि.प्रवीय बरदान, गुणगाइक । अमर अभीचर.कौसमय। अमाप १ गु• तिरिरित, अबोध । अभीतर, अभय । अमिट गुजो मिटन नारे पा मेटा न अभीसितमुरियादितामनभावित। अमीश मा.पु.जीर, पाय। अमित. अभीए.पियन्दिन, मनमावित। भभूत० • नो मन नहीं भया प्रमाव । अमियमूरि० ना. सी. सनीवन वृटी। अभूगारिपु गु गरहित अमिल.गु. सहामो न मिले । विशेष r 1 जासका जो नारा नहीं गरा, रहुन । अमिय ना.पु. अपन, पारड्यात । है मङ्गलकोप। अभी० गा.पु. अमृत । अम्बुधिलगा. पु० समुद्र । अमुक १० कोई, वह, अपुरा, पलाना ! अम्बुपतिः ना. पु. वरुणदर। अमूख० गु• जिसकी जड़ नहीं है। |अम्युचल्लरोकना. सी. जलपिपल । अमृत० ना० पु. पीयूष, सुधा, मिष, पानी, देव.अम्बुबह ना० पु० मेघ । ता, गु० जान मेरे। अम्धुवासिनी ना. रती० मदली, कुम्भी। अमृतफल० ना..पु. प्रारला । म्युभृत् ना. पू. मेघ । । अमृतवल्लरी ना.सा. गुरच, गिलोर । अन्य ना.पु. मल। अमृता ना. स्त्री हर, गुरच, पटपरी, नाम अम्भफल ना यु. भावीमय, यथा (अम्भ चन्द्रमा वा एक कला का। फल चाप ) इति निघः । अमृताद्ध गा• पु० प्ररतूता, यथा ( अमृताही सम्भोजा ना.पु. यमल। दशांगुली ) इति सीपट । अम्भोरहा अमृतश० ना. १० दाता, इस अम्मा.ना. सी. माता, मा, चची, यह अमेध्य ना. १० मिष्ठा, मल। शन्द अरवी का अमेय गु० अप्रमाण, यथा आभगमन निसा धम्र० ना.पु० ग्रम्प, ग्राम। प्रमाण कोई न जानसके। अम्ल गु. खट्टा, सटाई। अमोघ गु० जो व्यर्थ नहा, साल, अचूस, अम्लानः गु.निर्मला फलदाता, नावीन. गापिरो। अमोघा० ना० सी० हरै। श्रमिलकाना- रती. इमिलीकृत । अमोल गुमालरहित, अपूरिस्तु, बरमत । अम्लिकेतस. ना. पु. अमलवत । अम्बत गु० सहा। श्रयमा पु. लोहा, गमाया यथा यसमय श्रम्यक ना.पु.मेर, पाख, यथा स्यम्बक, सण्डा जामय अजहूँ म अझ). অর্থল হিৰ। भयं० अन्य ) सर, यह। अम्बर० ना. पु. पादर, आगरा, रस। अयन ना. पु. वर्षमा प्राश अर्थाद उनपर अम्बरमणि ना. गु. सूर्य । वा दक्षिणायन, मार्ग, घर। अम्बरा० ना. स्त्री पृथ्वी, धरती । अयथार्थ० ना० पु. पगार पर। अम्बरी. ना. पु. राजाविशार। अयमामा.ना.पु. यह जत। श्रम्पष्ट की. ना. स्त्री० माई घोषध । अम्बा० ना. स्त्री माता, महतारी। अधारी० ना० या हाथी परका आसन अयुत ना-पुरुशराय ..... अम्बिका ना. स्त्री. माई औपचमाता, देवी, अयोग्य , दत, अमर्य, पंचा। पार्वती। अयोध्या ना. सी. बार कामनार. अम्बिष्ठा ना. श्री रायलना । धानी महाश्रममावतार भगा - अम्यु० ना. पु. जल, पानी। अयोनिकन... अम्बुजनापु. कमल । मरगटना.पु. पर। अम्बुद ना० पु. मेष। भरणागु अलग, मिन। . १ अपान विशेष। ययुकर ग.दित, किमाने। M 1 मङ्गलकोप। . है ए श्ररगाना म. वि. असगाना, प.नि. अलग अयप्फ ना. पु० पला । हाना, ना.पु. गुरलाना। अरे अन्य नीच नर या सम्बोपन, गु.या, अरगानी० ना.प्रा. गुर, घुपरी। हटा। चरगे० कि. हठ किया। अरेव०मा० पु. पारा अरझना० प.नि. उलमना, फसना । घरोग० गु. भरसराचगा, रोगरहिन । भरणता० ना.पु. देशमशेर। घरोग्यशिधी ना. सी. रयाली । श्ररणी मा. अग्निप्रचार काष्ठविशा। अर्क० ना. पु. सय, मदारवृक्ष, रपरक। घरएड. ना.पु. दीया वृत अण्डत । श्रपुप्पी० ना. रवीउधाहोली। थरएय० ना पु.जंगल, या। प्रविशदाग सी. दही कटाई । अरना ना.पु. जगली भेमा । अर्गज्ञाना.प.सुध द्रयविशेष थानी ना.सी. जगली भैम । धर्गमा गुनगेन से रगा गया। अरयराना... घराहरवराना। अर्य० ० पु. पूना करने की एक ति, ग्राउ अरराना अनिशिक गिरनकाशद। वस्तु को मिलायो र हेतु चर्पण, का अररायग.बिमाराम विनासहारा। पूजा पर जल दना माल। भारल्लू • पु० स्पानावृत्त । अर्घा० ना. पु. पत्रपिशप मिसमें दयना को अरविन्द • कमल । सान कराते है या जल दते है। अराजक गु• राना पिना दश । अर्चक०ग पजा । अरि० 1. पु. रा शत्रु, दुश्मन । अर्चन अरिल... इरिश। स .. धाराधना, पूजाकरता। अरिष्ट • पु. पशु, मयुदायस, रोग प्रचा०... पूजा वृत्त। अर्चि० ना.पु.च, टेम यानि चमक। अरिष्टक० १.पु.11 अर्चित०१.पूजित। अरिहा. ना. पु. रात्रुगशक, शत्रुन्न । अर्जन न. पु. पाना, यमा, प्राधि । थरी०पन्य. स्त्रीका सम्बोधन । अर्जना० स० कि० कमाना, उपार्जन पराा। अ० अपर, पु ना. पु. कुम्हड़ा। अर्जुन ना० पु. वृक्षविशष, सादा एवर्ष, अरुचिकनाची. मनन , अनिदा। सट्सवाद, पाडका तीसरा पुत्र, ककुभवप अरण: ना. पु. लालस, सूर्य, लालबररड, धवल। सूप का सारया। अर्णव० ० पु. का?, समुद्र । अर्थ नार पु. प्रमिनार, निमित्त, तापर्य, ग.पु.गुग। भरुणाशक्षा धन, दौलन मा , मतलन। अरण ना. स. नपाएप्प गुड़हसका पूल गर्थशास्त्र. ग. पु० धन उपान करने अरणाई. ना. वा. लात पाशात्र, नीनिशार। অং যু• ভাল । कि अरुणोदयः • पृ० सूर्य देव के पहिले दा करना। सहन, सूर्योदय । मात्० ययनाना प्रथ, यह, यानी । M अरुप यूट . अर्थसाधन ना. पु. रीना, अर्थ का १ म मङ्गलकोप। "१७ तान्त, टिकी। - - मर्थानुरोध ना. पु. नाम के अनुरूप होना, अलगर्द० ना. पु. परिहासाप, यथा-अलगदों अर्थ के अनुरूप जलव्याल इत्यमरः। अर्थान्तर० ना० पु. दरार्थ। , अगा० गु० भिर, निई। अर्थी० गु० धा यादी, श्रवक्ता, प्रयोजनयुक्त, अलगाना० स० कि. जदारमा, अ. fre ना. पु. याचरू, श्रयों, ना. घो. साग, जुदा ही अलग होगा। अलंकृत ० अलङ्कारयुत, याभूषित । ावाना. पु. मोरपिसान । अराकार. ना. पु. भृश्य, गहा और शाम श्री गु• श्राधा । । अड़चन्द्र० ना. पु० श्रापाच-द्रमा । अलंगना. श्री. और, पार । अर्द्धचन्द्रिका गु० यालानिसौत,याधीचोदता। अलभ्य० गु० जो मिलन के योग्य ना हो। सर्द्धजल गु: याधारानी, मरणयाल । अलम्० २० बहुन, ढेर।. अर्द्धरात्रि ना. बी. याधीरानि। भलम्बुपा० ना. स. शामा जो मुन्न से अर्भात ना. पु. प्राधाशरीर, शीताग ! निरलती है, ज्ञानसारापल्ल्या यथा-(मुखपति अगी गु० शीनागी ना. सी. पती। भालग्नुपा शामिन, फुलिंग के देश अर्पण ना. पृ० दान, देवता को भेटदेना। हिरमित )। अर्पना० स० कि० अर्पणपरना। अलवाई गुरु पौडेदिका पानी, रामचन्द्रका श्रर्य ना. पु. सौ स्रोि १०००००.०० या यथा-(न्यो सुनको पुरभी चलाई)। अर्युद० ना• पु० दशरिरोड़, पर्वतशित । अरलेश० गु. बहुतायत, अतिरासानेगा - अमेय गा० पु. पुन, शिशुगर्भ। भिमान । श्रर्यमा ना.पु. सूर्य। थलश० ना.पु. बालस्य । अाक् गु. नीच, अन्य पहिली । अलसाना० ५.शि. प्रीपाना। मर्शपर्श ना. पु. शुद्ध करने के लिये नन दिइ- नवसी० सी तीसी, पतसी। का इना. श्रलक्षग० ना.पु. दुसरह । जलात.ना.सी.बनेटी। महन्त गा.पु० जेना। अल० च यअय, समर्थ, पूग्ण, ना. पु. अजान ना दी. हाथीनापने को सार । भाभरण, बालस, बहुतायन । निराको प्राद कहते हैं। अलापपु. थालार, उम्ररण। अलक. ना. नी. यानों पी लर, दूधर । शखापनाकिनासारना। अलत्ताना. पु. कुमुम्भ, महापरयुत ।। बलार. ना.ए. धूनी, परा। अलमारली ना० ची० एवीर बालो अनि मा. पु. रि, अमर, वृश्चिम लग, की ल। सी सही। प्रख० गु० अगोचर, अनदेता, मोन पहिचास प्रलिक ना. ६. माया, मउ । जारे, यथा ईश्वर अलिन ना० पु. भमर, गा० सी घिरा । अलग एक मिम, जुदा, लगार नहीं। अलिनी ना.मी. अमरी, भारी अखगनी ना. सो मी मितराई अलीगा की सी, ती, ची। अलीकरना मत मिथ्या - 1 घरते हैं।
मङ्गलकोप। . 4 अलीन गु० अयोग्य, अनुचित, बस .. रामायणे यथा { पर है शिव गती नाही अलीह गुरु ययाग्य, भूत। पुनि अांदरि मरादनि ताही)। अलप० गु• अयत, प्रगचितबहुत ।।। असंतसा ना. पता शिरोमपि। अलयावलैया ना. सी. निधार और दीवाली असताना प्र.मि. उतरना, प्रार होना । मैं पूला जलायरे माना। अवतार० ना. पु. रिसर का मनुष्यादि के अलोन रूपस पृथ्वातलपर प्रकाशित होना,नम। अलोना ६० लानरहित, पीका | असतारिका गु. परमामा, ईश्वर परतार अलोप गु० छुपा, विगाड़ा, नष्ट, प्रका। अवतारी लेनहारा, यया राम, कृष्य। अलोपना० स० कि. हुपासा, गुप्तकरना। अवदात० गु.उ. वल, उत्तम, सुदर। अलोल० गु• पाल, घिर, ना० स्त्री. सलकूद। श्रपदीच. ना. पु. गुजराती प्राणी जाति । अलौकिक गु• जा लरिक नहीं है अर्थात् ना. वा. पचन, मर्याद, सामा, श्राधा परलाक का लारानीता. समय वा श्रीश्याच्याजी था उस अवधि अल्प गु० भाडा, किचन J के पार पासरा.दश प्रसिद्ध । अल्पतर गु• बहुनथोड़ा। সুখন गु० चौरस, सावधान, ना.. अल्पना गु० लतुयुद्धा, नाममझ । दाम्साई, वचन । अल्पनिद्रा गु. सा. घोडास। अरध्या गु• जो यधारने के योग्य नहीं है। अल्पन गुरुकमसमझा घोडानानगर। अग्धूत न० गागी, शिवाय ! अल्नुकर ना० पु. पालूतरकारी । अधूतनी० ना० सी० यागिन । अन्य जिप्त शद के प्रथन में यह अपनी ना सी. पृना, धरती, शमान । सयत हाता है उसका अर्थ कभी भिगना, अपनीश ना• पु. राना, पादशाह । कभा पैला का हाना है कभा नास्ति, या अपन्तिकारमा सा. उन्ननगरी, अवन्ती नदीविशेष। अनादर। अधफाश ना.. श्रीमर, सावकाश। अवम् ना. पु. तिथिकाक्षर, गु० नीच । अवयव० ना.पु. पग वा शरीर का भाग। अधफेशी गु• बाम। अगनिना. वा. ज्ञान, वा नरीदशा। अपराधक गु. सेवमायाना। अपराधित. गु. सेवित, ध्यान कियगय । अबगाहना.पु. अथाह । अवराधना सकि. सेवाकरना। अवगाहन ना. पु. स्नान. तैरना, पाइ अवरुद्ध बंधाया। अपरखना सकि. लिवना, लकीरकरना अघमाहि • कि थाइलगा। अपगीत गुनिदित, दुरा, ना. गु० निदा, अवरोध ना. पु. बध, रोक, अग्य । अक्तीस कि लिखी, लरीर को। दा अवलम्य० ना.पु० यायय, घासरा, सहारा। अवगुण ना.. सो, दाप। अपि ना. पु. पर्वत, शेष, सूर्य, रहर । -(मरघट गु• कुधार। | अस्लिम्वित गु० आश्रित, लकम, अवचट गु• एकाटि, एकाए। अविलम्बी थी। अयंडरि० प्र. वि. बहकाय, धोखा देवर, अविरलिक ना. सी. पाति, पति, कतार । . . लगाना। . .
मङ्गलकोप। १ - ८. . . - अवलोक्न ना. पु. दर्शन, दृष्टि, देवा । अविचारी० गु• विचाररहित, ययायो । श्रयलोकना स० कि. दसना, ताकना । अविदृरिक गु० एस, निकट' । अवश० गु० पराधीन, असमर्थ । अविद्या ना खा. भूल, रग्रज्ञानता, माया अवशिष्ट गु० शेष, उच्छिष्ट, बाम। विगाहान । अवशेष ना. पु. शेषवचा, बासरहा । अविनय मुदिठाई, चलाहट, गुस्ताखी। अशिपित० गु० जी वाफा रहगया । अविनाश ना० पु. नागरहित, कुशल । अवश्य अयः चाहिये, निश्चय, वर्तय, अविनाशी गु० कुशल, जिसका नाश न होवे । जरूरी। अचिनीति गु० चञ्चल, ढीट । अवसर ना० ए० सावकारा, धाते, समय, अविन्दु गुः विदुरहित । मौनय, इत्तिपाला अविरल गु० निरन्तर, अभेद । अक्सानमा पुल अत, समाति, यासिर । अविरोध ना.पु. चैन, मुग्न ग्रानद, गु. अयमेरिकगा. सा. दर, राहदैनना, बाट विरीधरहित। अविरोधनी ना. बी. गु० सुरती, देख- अविरोधीना. पु. टक। । अवस्था ना० सी० दशा, उमर, हालत पार अविलम्सन • पु० शीघ्रता, जल्दी, यन्न । दुर्दशा। प्रशाना स्त्री० अपमान, निन्दा, श्रनादर अविलम्वित गुरु शीघ्र, जल्द। तुम्बारा, बरू उतारना । अविवादी० गु• जो विवाद न करे, शान। 'नाई ना मी जागा, प्रामद । अविवेक 3. पु. विचार, अमानता, गु. अनाकलना पु• गुगा, मर, मानी। जो विवररहित हा। श्रमाच्या गु० अभ्य, मौनी, निरर्थ, पाच अविवेकी विचारहर, अज्ञानी । अवाधीक गु० सा० मुलगी, नाधारहित । विशेष समान जा विशेष नहा । भयाध्य गु० मिना वाध, अतयं । अविश्वास गु० ना० पु. अप्रतीत, एतबार । अयानोपम गु• बापारहितकर्म, प्रार्फ अविश्वासी गु० जिसकी प्रताति नहीं था जो फिसोनी प्रीति न मान। श्रारी ना. स्व. दु, पति, रामायणे नविक्षीण गु० निर तर, अखएड, पूरा । गया चार मनात विचित्र अगारी, माणमय अवेगी. ना. पु० विधाराग्रीषधि गु० । गिरननु खकर सेंचारी) अम्पारा। बेगना रहितहो। मनासाना घर, मवान। .) श्रयर० ना. सी. टील, विलम्ब, उसमय । अवेला ना. स्वा. कुसमय, पेवा । স্বাতন अध्यक्त गु० जो व्यक्त नहीं अर्थान् मान्न अधिकार.ना. पु.शिकाररहित । अधिकारी मु. जामानिविपररहित । अन्यय: ना. ३० वर्ग, अदर, गु. जो व्यय अयिात गु०व्यापक। न हो, जिस सन्दको कारक न हो, कार । अधिगति ना सी. ज्ञान । अव्यवस्था ना.सा. जोरात्र में ममत । अविचल गु० अदल. पिर, वायम् । अरिचार: ना.पु. भूल, गाय, नादानी । अन्यवस्थित गुरु जी टीर नहीं है। . धर्म। र 41 अधिकालू- 3 गु० मिश्चि त, पाई। 4 मङ्गलकोप। अव्यवहारित० गु• पागित, छोहाना। अश्रद्धा० ना. मी पिन, चिद, पसिन । अव्यवहित० गु० मिला, व्याधान रहित । अ० ना.प. प्राम् । अम्माप्ति ना० श्री. लक्ष्य में लसयंका नौ नहीं अनुपात. ना. पु. भामुखों श गिरना। जाना, प्रकट में प्रकटताहिन । अश्लेपा० ना. सी. शेषा, नमान। अन्याइत गुविनरोष, मायानित, रामायणे भर ना.पु. पोहा । यथा-(अयाझ गति शम्भु प्रसादा)। थरगन्धा. ना. अमरवीरवि।- अशान ना.. अपशकुन, [राराउन । यश्चतर० ना.पु. स्वघर। अशकुनी गु• अपशकुनी, घरे लक्षणयुन । अश्वत्थाना०प० पीपलवृय । अशा गु.निल, साचार, अममर्थ । प्रश्नपतिक ना.पु. यह राना जिसके पास अशकि. गु.निल, 'यसमर्थता, शक्तिरहित घोड़े या घुइचदेहीं । देव । अश्वमेध ना. पु० जागा यह यस ) अशक्य. ग. असायशक्यतारहित । पिरान करमळा है, जो जगत् जीवहो । খs मशका ए• निर्भय, निडर, श्यपुज० ना. पु. कुपारमास । श्रशन ना० पु. भजन, खाना। श्ररररक्षक ना. प. सास । अशनिक ना.पु. पत्र। अश्यबार० गा.पु. प्रसार, सवार, घुडर' अश्मशालागासी सला, घोइलान। अशरण ग. रतारहित, पनाइनहीं । श्रश्यहा ना.सी. कनेरवृत्त। भशास्त्र.गु.जो शास्त्र से बाहर है। अश्क..नाही. असगन्या अशास्त्रीय गु. जो शास्त्र में उतनहीं है। प्रश्वासद गा.पु.पशवार, समार, शिव गु. मगन हित, अशुभ। घुड़चढ़ा। शशि गु० निता व्यवहार निर्मदत है। अश्विनी ना ग्री. प्रसनशन । अनुक० गु. प्रशोर, अदुस। श्रम.गु.विस र नहीं, अनिर। शुचिग. अपवित्र, अशुद्ध, नाराक। अपयघट गा.प. वह बरगद जो अशु० गु• अपवित्र, जो टीम नहीं है, गनदी। अशुद्धता ना. स्त्री. अपवित्रता, नूक, मूल । श्रगड़ ना• पु. चतुर्थमाम, अषाद, श्रमाः अशुभ.ग. यमगल, जो प्रधान है, गा. अट ना.पु. पाट । पु. पाप, दोष। अष्टहरीस० ग. पु. पाटपुरी सारों अशेप गु. सपूर्ण, सारा, सनरतु, सर । धात् अनन् । सामकि २, ३ ३ को अशोक ना. पु. वृतविरोष, सुख, चन। अशोमा० . प्रनगर, कुरूप, ना. सी.पोण ना.पु. पाटौने । रास ५ दुलिक ६ पदक ७मझाया मुदरतरहिन, शोभाहीन। अटच चारिश गु. अठनालीम ४८। अशीच. गु० नापाक, अशुद्ध । अदिशाग्रह ग० पु. पाटी दिशा अश्म. ना.दु.प पर ।। प्रात् सूर्य, शुक्र, 'मान, राहु, शन अश्मरी गा० मी. पथरी का प्रोग। चन्द्रमा, युस, गुरू अश्मभेद० नाप. पारायभेद । अधातु गा० पुपाटधातु अर्थात् माना . . .
मङ्गलकोपा 4 १ रूपा, ताया, पीतल, रागा, फासा, सीमा, लोहा । पर ४ धर्मरस दलिग १७ गत ११ अष्टपञ्चाशत् गु अट्ठारा। अष्टादशस्मृति बासी अठारह स्मृति । एप्रहर० गु० श्रादपहर, दिनरात। अर्थात् मनु १ अत्रि २ विशु ३ याज्ञवलय ४ अष्टभैरव ना.पु. पाठ-भैरव अर्थात् अति हारी ५ उशना ६ अगिरा ७ 'यापस्तम्ब ८ ताग रुरु, चण्ड, उमत्तक्रोध, कपाली, भीषण, सपत यम १० वागायन ११ हराति १२ फाल। पाराशर १३ व्यास १४ शझलिखित १५ गो अष्टमगुरु थाठरा। सम १. वशिष्ठ १७ दक्ष १८। अष्टमांश ना. पु. अटवाभाग है। श्रयापद ना.पु. पचा, मुर्ग, पशु । अमी० ना. सी० श्रादी तिमि, पाठे। . अशीति गुअमी। अटयसू० पु. पाटरम् अर्थात् नाप, ध्रुर, असख्या सोम, धर, अनिल, पाल, प्रयूप, प्रभाव त । असंख्यान गु० अगणित, पशुसार पटुत । अविशवक्षग० ना. पु. अट्टाईगान असंशय ना. पु. निश्वर, निरपदह । पण अर्थात् पान कार २ क्रियाहत ३ दुया असकति० ना. श्री. अलस्य । द ४ लोभ ५. लम्परता ६ अन जा ७ पविया साती गु० थाली । ८ अशोभा है प्रानम्य १. प्रतिनिठा" असगन्ध ना.. योगाशेप । दुगना अदया १३ कृरका १४ दरिता १५ असगन० गु० मिथ्या, नचित, पार्थ :- राग १६ मलिनना १७ छुरातदान १६ असजन गु. कुपान, नीच, दुष्ट । कना १६ भोग्यता २. अयाहार २१ घरकार असन्० गु० यमायु, अधमा। २२ अदना २३ कुदाा२४ दुर्भात श्रम तीति २६ मोह २७ ०ग्य राक्यता २८ । असन० ना.पु. भाना, खाप, पविगेर। श्रसनि. ना. पुरयन। अष्टशितिक गु. पहाईस २८ । अष्टसिद्धि० मा. श्री. पाठ सिद्धि प्रर्थान् श्र असन्तान गु० पुत्रहीन विश । हिमा १ महिमा २ गरिमा ३ लघिमा ४ मातिए असन्तुष्ट० गु० अप्रमन, धरनरहित । असन्तोष गु. श्रीरजता । प्रायम्य ६ वशीकरण ७ ईशना ८ । असभ्य गु. जो सभाक योग्य नदी, मकर, प्रधानप्रणाम साठशाला वादण्डवत प्रणाम अर्थात् उर, शिर, असभ्यना. ना. सी. मन्द्र रस, मन, यवन, पद, पर, जाम नमस्कार गवारपन, बशत। परना। असम गु• जोगदान दोन। पटांगयोग • पु• योगरे पाटअग अर्थात् | असमजम • • दुरित, दह, लि, यम१सयम २ यामन ३ मामायाम४मया लगाय। हार ५ धाग्या ६ पान ७ समाधि असमय गुरु ग्रस्त, नियमित समादश ना.पु. घटारह १८ । असमर्थ गुलामर्थन दो, निजी अष्टादशपुराण. T• पु. अगरहे पुराण अत्तमशरक ना. पु. काम। अर्थात् भागवत १ भविष्य २ मारडेय ३ में असम्पूर्व गुनाहान हो । स्य ४ ब्रह्माड । ब्रस ६ ब्रह्मौवन विशु असम्बन्ध ३ नमन, अन । वायु वामन वगह ११ अग्नि २ गाद'३ असम्भर ग नहोगा, न । - .
मङ्गलकोप। है - . असम्मत गु• विरुद्ध, बसलाह । असोयरा यह। श्रसह असोधन सी० कुवास, वदवू ।' गु० जा सहीं न जार, करिन । असह्य अस्त..पु. दिपार, टुपगा। असमाधि गु० जा दूर 7 होसद रामायण अस्तव्यस्त गुमित भिन्न, उनग पुना यथा (दतीप्यापि असा ये वड़ेि)। बमेल। असाधुगु• थधामी, दुग्मति, कमीना। अस्ताचल .पु. वह पात पिरेशन असाध्य० गु० जा कामसिद्धि न हामा, रागी सूर्यनारायण अस्त होते हैं। जो जीवे नहीं। अस्तित्व • पु• माजूदगा! असामथ०१ ना• पु० बुध सामध्य नहालाचार अस्थि ना० पु० हाइ, हड्डौ । असामगु. कुछ सामाध्य हा रमता । अस्थिमात्र गुरु हभिर। असार गु० लूला पाग सम्बा, पन्ना काठ, अस्थिर गु० नचल, चलायमान । विनापौष, निर्बल। अस्थिरता ना• सा० चचला त्यस्ताहीन असि. ना. स्त्री- तलवार, अन्य है, एस । अस्थिरशाला प्रसिद्ध गुरु अनरा, धनपा,ना सिद्ध THअस्थिसहार ना. स्त्री. हरसिंगा। प्रसिधेनुकर ना स्त्री० उरी। अस्थूल 13 सूम, एन । असिनिल ना. सी० तलवार अस्थूलभरा ना. सी. बड़ीकार। अलिपात्री नायी. सहुड । अस्मसार • पु. लहा। असिपुत्री ना. स्वा. धुरी कगरी। अस्वछन्द गु• प्रधान, अपराधीन जे अप असिदपक गा.पु. मगर, मच। अस्वतन्त्र राम कहा है। असीम गु• सीमारहित अथात् प्रात अस्वथामा ना० पु. द्रोणाचार्य का पुत्र। अशीश गु. शिररहित । अस्वीकार •• मजा, मोगर नहीं। असीस ना. श्राीपाद दुधा। अस्सी० गु• असा ८० थसु. 1. पु. पचपाए जीव, शच ।' अरमानाः पु. निसरा फेंक मारत है या असुग. किरण, वाय । बापयादि। असुरा.पु.गराक्षस । ग्रह ना• पु० दिन, ग्रहकार, का। असुरविनायक न• • नापामुर । अाह गर, में, fr चोधक। असुरारिक १० पु. वता, श्रीरामकृष्णा दे। अहकारखना. पु. गर्व, मद धमएड । असुहर० गु• मणहर, मारनवाला । अहहारी श्रसूम गु• याश्य निरूप। प्रता ससूया. ना. सी. कला दार। अहमित गुग्रहहारयुक्त, मगरूर । असा याय. यह वध, इस वर्ष । अहरेणुका ना. सी. रशुका, वाल। असोक ना. पु. अशक। अहर्निश ना. पु. रातदिन । असोजी गु. चत, ना विद्या वा विचार से प्रहलाद. ना. प० प्रम, अनुराग । न है सके, जा पवितान य याग्य नहीं । महल्या ना. सा-गीतमनासी। असाचा गु• निर्मादा प्रमादी। अहह अय. पार्न शब्द यया हाय हाय । असोस.. सी० पुखी दी। महार० पु. पाहार, क्लऊ, ल । हम, - . गु. अभिगा| दम्भा, मराफर मङ्गलकोप। 1 More . . हारना० स. कि. मड़ियाना, चिपकाना, लेई अक्षिसंकेत. ना. पु. श्रातिसे इशरह फरना लगाता, जमाना। पटास, हारभाव । हारी गुखापाला, छारीईई लड़ी, योई अतुध० गु० सिर, शत। वस्तु जा महिगाई गई गा० सी० कोयल पक्षी। श्रतीहिणी गा• स्त्री से प्रमाण, इसका दि० ना• पुसा, पिर, देत्यविशेष । स्था कई प्रकार का है। यथा (वनागसह हिंसक गु० भाला, सायु ना हिंसा 7 परे । सपि नाग नागेशा रथा, रथ रथे शतचाया हित ना० पु. शव, पेर, राघुना। शश्वेअश्व शतनरा ) मा दश पाही पहिफेन० २ ता. अफ्यून, असीम । अथरा १०९३५० पैदल, ६५६१० सयार, अहिमाली ना. पु. श्रीमहादेवनी । २१८०. रथ, २१८७० हाथी । अहिर० ना. पु० मारपर्व, जातिशेष । अन अच. यहा, इस जगह । अहिवल्लरी - ती• गालि, पातग्रादि । अधि० ना. पु० च दमा के पिता,मुनिविशेष । यहिवान ना.पु. सुहास्दीका । अभिजा ना० १० च द्रमा, दुर्वासा, दत्तात्रेय अहिवेलि. ना० श्री. नागलि, पानश्रादि । नश० गु० मूर्ख० घमान, नादान । अहीर० ना. पु. माला, श्रामीर । श्रशता ना० स्त्रा० मृर्वता, तादाती। अहीरणी ना. स्त्री० ग्वालिा। अज्ञात० गु० याजान, नामालूम । अहीला गु० साहसी,निडर, वहादुर । अज्ञाता० गुः मूर्ख, भोला, नादान । बिहीश० ना. पु० शादि, सादि । अज्ञान० गु० मूर्स, मूर्तता। अहे अय सम्बोधन, थे। नशानता० ना० स्त्री० मूर्खता, नादानी ! अहेर० ना. सा. पाखर शिफार । (ना) महेरिया० अहेरी १ गु० आखेटी, शिकारी। श्रा० अनिस० शब्द के प्रथम में यह सयुक्त अहो. अव्य. सम्बोधा वा आश्चर्य वा हर्ष म होता है उसरा अर्थ न्यून वा उलग होनाता है बोला जाता है, यथा अहोभाग्य । पार कभी प्रिया के अापि का ज्ञापन होताहै । ० अव्य. सदोक्तिका सूचर शब्द । अरोहात्र ना. पु० दिनराति । श्रही अन्य ग्रहो। नांक. ना. पु० ग्रा, चिद, मदार । श्रांकना० स० क्रि० लखा, माना। अक्ष. ना. पु. नेर. बहेरावृक्ष, पासा। श्रांख. ना. सी. चतु, नेन । अक्षत. ना. पु० चारल, जर पूनायादित आंग ना. पु. अग। गु० घाररहित, फोडारहित । आंगन अक्षर० ना० पु. कारादि वर्ण, गु० सूक्ष्म, प्रांगना ना. पु. भगना, सहा। अपिनाशी। आंचा स्त्री० अग्निकी ताप। अवविद्या० ० सी० रमल । आंचर० ना० पु. चला। अांचल अक्षविद्वान् गु० रम्माल, पासासाला । अक्षांस ना. पु. रेखा, भूमिके उत्तर वाद आंझुना पु० पासू । विण केद्रत नचे २ प्रश। आंट० ना. स्त्री० गाठि, विरुद्धता,ताक । अक्षिः ना० पु. नेत्र, याति। आंटना अ.क्रि. समाना, पहुँचना। . - । .
मङ्गलकोप। । श्रांटी. स्त्राग, पोटया। थानमा ना.पु. बलरा प्रसारा परफ विका श्रांड ना.पु. पण, अण्ड। पार म दूसर से पापा हाना, चदार । अात. ना. रत्री पानी श्रावएडराना• पुदद। प्राची०.स. झाड़, कामापु । प्रास्त्रएडलपुर • पु. द्रलारु, स्वर्ग । श्राव. ना.पु. अाम्र। श्रारात्त०.१० यक्षत । ना.६. परमें राग विशप, ग्राम, श्रासार • पु. बारा, गठया, चलनी। थांय. ग्रामारया प्रासात.70• खान। बाखु यायला ना.प. क्ष वा पल विशष। ना. मृश, नूगा। प्रांसूना. पु. पाखाका पानी । श्रापेट..पु. अदर, शिसार, मृगया। श्रा० ना•० अर, मदार । आर० ना० स्त्र ० खानि अर्थात् धातु वा रगादि बासेटकी गु० गिकारा, श्रहरी । पारपा ना. ना. सहा, म । व उत्सम हानशास्था। प्राग ना• पु० अगि। आपरीय० गुरुजा सान स उत्सनहा । थागतगु० उपस्थित आकर्षण. ना.पु. ल स खाच।। नांगम ना० पु. वद व शिवारशान विशप आकर्षित गु. जो खाचागया। भविष्यत् वा ६ श्रवाई। नाकाक्षात स्त्री. वाला, पधा, चाह । श्रागमन • पु. अाई, श्रा। आकाक्षित. गु. बाधित, चाहिना । प्रागम्यता ना. पु. शिव, गु• जापागाई श्राकांक्षी गु० च्छारनपाला चाहक । बात १६ वा यागम का पाढरहान। आकारक ना.. रारुप डाल, सैन, सूरनि । भागमविद्या ना० सी० ग्राम कहने पी आकारान्त गु.निस त म अाकारहाव । पद्या। धाकाशना.पु. गंगा, धारमान, अम्बर । आगमशानी ना. पु० तारिक ना अगमके आकाशपयन ना.पु. सताशप, पाराश जानता हार। बाल वा ग्रामशरापना। श्रागरः ना.. अाधक वावर । आकाशवाणी 110 सा• वाणा जा भागश आगरा० ना०३० नगर विशप । श्रागरी 10 सा. काउ।। प्रागलान्ता अन्य गललग। शाकाशविलासी गा.पु. दवता, नक्षत्र, गु० "आगा ना. पु० सामना अगवाड़ा। जा श्राकाशमें वितासरर यथा पहा । आगामी गु० मानहारा, अवैया । आकाशयलिया. वीअमरयास । प्रागार० • पु० घर, मरान । आकाशी० गु• चाकाशका, सगीय । भागिल गु. पहिला। आकुलगु• मल, कातर। आगुण आगे। अप सामने, बदिक, प्रमा आरति ना. स्वा. रूप, आकार, सूरनि, पागोट० नास्त्री० चौरसी, दद। आग्रह ना० पु. उपकार, निहालत, प्रहण । आरए गु. सींचाहुगा । प्राघात ना.पु. चार मारपीर । से हाता है। सील। .
मङ्गतकांप।। २५ । , . प्राधारना • घृत, घी, विकार। श्राडी ना.. रसर, ना. सी गान म सर प्राघु. ना. पु० मोल, मर्याद, यथा विहारीलारा पिशर टदा निरचा, बड़ो। सप्तशतिराया । दाहा (जम जलापि पाप (आडे आना अ. रक्षा करना, बचाहा। चिनल भाजग पार अरार, रह गपात गरपर श्राव्य गु० धनाय, धना, खामी। भला न मुसाहार)। नात..पु. भयभान, दस टार उर, प्रताप ग्रागिरस०१० पु. वृहस्पति । दवरत । आचमन ना.पु. पाचमन अत् भाना या आततायो गुरु उक्त, रक्षा, परसीह रक। मना करने पहिले भाडानल इथली ग रसरश्रानप० ना• पु. घाम, प । पाना वा कुप्सीपरना। श्रातपत्र ना० पु. हन। प्राचर • पु• करतूत, चात, व्याहा, भातपी० ० प स विश्न। अचार, गलात किया। याताल गा.पु. सातारल। माचार 7. पु० विचारकरना, पास,परहन पानिय०१ गु• अनिधि सगर करना, साई,शारा श्रातिथ्यातथिपाला, मनमानी । प्राचारी० गु० ना मनच सामोस क्रिया या आतुर गु० दु खा राणी याफ्ल, पावरा । समत पर। आतनाघा गुरुयायिन । श्राचार्य ना. पु० बदरा उपदशन गुरु। श्रारमघात: ना. पु० अपनीहया, तिनधान । पाच्छादन ना० पु. यस, टकना, गोची, आमघाती गुरु निन जारहता, अश्मा, जात पशाच । कासदाता। पाच्छादित गु० वसयुत, काभया । आत्मज . पुन, लहरा। श्रादे० अप्पका बहुवस्य । आमनामी गु० जा पारस प्रसिद्ध है। श्राजा अन्य अध, इमरोज। आत्मपालक आपरमार्थी, अपकाना। आजनेय ना.पु. घोडायया ( अाजनैया उली आत्मभू० ना. पु० ग्रमा । न' स्थापनीता सायुगाहिन यमर )। आत्ममात्र ना. पु. समरसनीक, जारभर । बाजा गा.पु. दादा,पिता पिता। आमरक्षा ना. सीजीपी रसाया- प्राजाना .कि. प्रचारमा, पड़ना। ग्णाश्रामाधा थानिक ना. पु० पुर, समर, लड़ाई । श्रात्माक्षक गु० निजीपशनक। प्राजीव... प्रात्मश्लाघा ना० सा निज मन रा अपनी आजीविका मी. } नीतिशानिर्वाह, मनाश ।। वाद। पाटना साकि' भरना। आत्महा गुनिनावपाती, धमहिन। पाटा.पु. चौस, गना, पिसान। मात्मा ना.पु. सा. जात, म, राध, दह, पाठकीत जिनमें सतल रि स्वभार, धा, अन्तर, माहवार, श्राप । लता है। श्रामिक गु• मनशाप्राना। आई० ग्रा. प्रार, पादा। श्रामिक्ता ना.सी. पानाहत । आहा स० कि. प्रवरा, थाइदेना। प्रात्मीय गुः पामिर, परा। आडम्पर ना.. उयाग, आभमान, हौ। श्रादर.पु. सार, समान, मिस पना। यादा गु• निरमा, रहा। भादराय गुनिसम पर पाना है। ।
सौगन्द। . कि लाउगा। यापस०सर अपने, भारद। प्रापस्तम्या ना.श्री.रमृति रिश। ग्राम. जो विश्वात योग्य है, प्राप्त, सच्चा माफियो.नि. दिया, नशा, यह शब्द २६. मङ्गलकोप। बादर्श ना.पु. दर्परागा आन०० और अन्य, ना० सी० श्राज्ञा; मोच श्रादर्शन श्राद्रक ना. नी.चदरक। प्रानक० ना.30मी, दया। थादान० ना.पु.लना। आनदेव ना.पु. और देना। श्रादि० गु. पहिला, जड़ वगेरह, शुभश्च । श्रानन० ना.पु. मुग्व, अयः अोर नहीं। अादियन्त गुः परम्म से समामि क मा आदि मानना० स० वि • लाना । और अन, श्राधान। आनन्द० ना.पु. श्रादिक पर इत्यादि और मत्र । धानन्दनारपी. हर्ष, सुम्प, सुशी श्रादित श्रानन्दित० गु• खुश, हपित, हाल । धादित्यः ना.पु.मर्थ। श्रा नदी यु. सुमी, सुश। श्रादित्यवार० ना• पु० प्रथमदिन इतार । यानव थानिहीं अादित्यहृदय० ना. पु. अथ पिशप । श्रादितय० ना.पु. देवता, अदितिनात् । यानुफूल्य० ना० पु. सहायता । आदेश ना. पु० ग्राम, अनमति, योगीलोगों मानुपूर्वाना• स्त्री. मलायरि, कम : का प्रणाम, व्याकरण में एक अवर को दूसरे यागुमानिक० गु? युति, सिद्ध अदर से बदलने यो पहते है। प्रान्ध्र० ना. पु• तेलगदेश । श्राप० ना• पु. पानी, सर्व स्वकीय, निन । प्रादौ प्रय. प्रथम, पहिल। प्रापसाज. ना.पु. अपनाराम । याच गु० पहिसा, प्रथमा । प्रायोपान्त गु• पूरा, मत्र, समरत । आधुनिक गु• इमरालया। प्रापण ना. श्री. प्रण, शन। पायर्प ना.पु. भय, टर, फठिन। प्राधा गु .॥ यापद श्रानान ना.पु.ग, गर्म का धारण । यापदा श्राधार० ना.पु. प्रतिपाला, अधिकरण,सहारा, यागमें एक चमका नाम । आधारी गु• महाग पानेवाला । प्राधासीसी ना. ग्री. अकाली। प्राधिक ना. श्री. मनकी पाहा, उदामी। प्राधिक्य ना.पु.नदवी, अतिशयता। आधिपत्य. ना.. ऐश्वर्ण, सामित्र । श्राधीन: 0 घरी, नारदार आधी थाफ० प्राफर श्रापाजी० गु० जो अपने काम में लगा । रहता है। आपत्ति ना० स्त्री विपत्ति, वास्तु दोष । ना. सी. विपत्ति, श्रमाग, कटि- नता। यापन गुरु प्रात, शरण्य, प्रस्त, प्रभा। आपपत्ति० ना. पु• वरुणदाना । यापरूप० गु• पार, पिशष शर। प्रापाधान.ना.पु.पुर, समर । प्राप्नुत . ना नहाएगा। भावार। भार्थ नाची वायुन, प्राम मङ्गलकोप। २७ . श्रापाल ना. पु. लड़वापन, पालकता । प्रायुदा० आमरण० ना० पु. भूषण, गहना, जेवर। आयुष्य मा.स्त्रीजीरा, काल, उमर, प्रामा.ना. सी. भड़क, शोमा, चमक । आयुर्घल. हयात। आमार० गा० पु. बोम। आयुष्० आभास० ० पु० अभिप्राय, थोडायश, क्षेत्र आयुस्। विशेष। प्रारक गु० लाल, मुख। श्रामीर० ना. पु० भोलादि, गोप, ग्रहार । आरपध० बी० रिवाली। श्राभूपण ना. पु. अलकार, गहना । आरज. ना. पु. मर्यादक, मानी, उत्तम जन, साम० ना. पु. कन्या, प्रामफल । श्रेष्ठ, प्रार्य। यामय० ना. पुरोग। श्रारण्ड० ना. पु. रण्ड, अण्डी का वृक्ष । श्रामपं० ना. पु. क्रोध, गुरसा, टाह । भारति० मा. स्त्री० दख, अतिप्रेम, इश्क श्रामर्पण ना. पु. क्रोध करना। वा पूजा प्रसिद्ध। आमर्पि० अ० किलोधयुक्त होकर। आरती० ता. स्त्री. दीपक जलाय रे दरता को दिखाना। आमलक० T० पु० यारलाफलविशेष । श्रामला० श्रारम्भः ना.पु. प्रारम्भ, उपक्रम, उत्था, आमान ना. पु० बोरा अनाज, सीधा। शुरूध, लगा लगाना। आमाशय० ना० स्त्री० पेटी थैली जिसम (आरा० ना० पु० ताक, पाला, लकड़ी चीरने खाना रहता है वा इकट्ठा होरर पचता है । का अनाविशप । आमिप० ना. पु० मास, गोश्त । श्राराति अराति ना० पु० शत्रु, वेरी। थामिपाहार० ना० पु० मासखाना। श्रामिपाहारी० गु० मासखानवाला । आराधक० गु० सेवक, भजन करनेहारा । आमोद ना. पु० अानद, हर्ष, सुग ध, सु- | आराधन० ना• पु० पूना, भजन, सेवा । वास। वाराधना० स० वि० पूजा करना, अर्चना । आंम्बर० ना. स्त्री. वस्तु विशेष अर्थात् र श्राराम ना० पु. उपसन, बगीचह, चेन। श्रारि० ना. ना. झगड़ा, जिद्द, हठ, व्रम- आन० ना० पु. श्रावका फल वा वृतविशेष । विलासे यथा ( देखत रहो सिलोना चदा, आय. ना. पु० लाभ, धनागम । पारि न कीजिये बालगोविदा)। आयत गु० लवा, दीर्घ, घर, चौडा, ना• पु० श्रारण्य ना० पु० जगल, वन, पुस्तकविशेष । अरण्य०१ धाम, धूप। আছি। आयतन० ना.पु. घर, मकान। गु० कठिन, दुखद, पुरा। अरिष्ट मायत्त० गु० नम्र, अधीन, साज । प्रारुक० ना०पू० श्राइका फल या वृक्ष । (आयसु० ना• पु० श्राज्ञा, हुक्म । आरुष्क० ना. पु० भिलावावृक्ष । (आया० ना० सी० लडकों को खिलानेवाली । थायास ना. पु० परिश्रम, मिहनत । | आरूढ़. ना. पु० सवार, गु० जो चाहो । श्रायु० ना० स्त्री जीवन, काल, उमर। पारे० ना. पु. पाराका बहुवचन । आयुध ना. पु. इपियार, असशस्त्र । प्रारोग्य ना० पु. चेम, कुशल, नीरोग। .
२८ मङ्गलकोप। আনে} आरोपित गु० क्ल्पना दियागया, नाग आलु ना. पु० विलायती कदविशेष । गया, सोपागया। आलू आरोप. ना. पु. कल्पना, बनावट। वालोक ना. पु.योति, टि, चापलोसी । भालोकन गा. पु० टि देकर देवना। 'आरोह ना• बी०१ ऊपर चढना, साड़ी, (श्रावमा ना० पु० वानाविशेष। पारोहण ना० पु.जोगा। यावरण. ना. पु. टाल, आच्छादन, विरूप, আs गुरु पीडित दुखित, व्याल । भँवर, घेरा। भावतः ना. पु० भंवर जो पानीमें होता है। आई० गु० गीला, साला। (धावा० ना. सी. यायुर्दार, उमर । आ ना. सी. छटानवत्र । आपनो य० कि० पाना । आर्य. गु. उत्तमकुलोपन, कुलीन, उत्तम, (श्रावभक्तिः श्रेष्ठ। आवमग्रतः मा०सी० मान,ममान, यादर। आर्यावर्चः ना० पु. वह पविदेश जो पूर्व श्रारमगतिक समुद्रतट से पश्चिम सि युनट तक और हिमालय पावलिना० सी० पानि, पक्ति। ते विध्याचल तक है। श्रावश्यक गु.निश्चय कर्तव्य, चरूरी काम । आसी० ना० सी० भूषयविषेप नो रिसर्या गृठे आवश्यक्ता ना० सी० जरूरत । में पहिननी है, दर्पण। याचा ना.पु. ब्रभा देगी राजधानी। आल० ना. पु. वृक्ष वा उसका विशेष, कुम्हार निसम वर्तन पकाताहै, अ.कि.चाया। पीला, हरताल । (आवाई ना० सी० चर्चा, रामाचार । आलम्घा ना.पु० सहारा, मदद। आवागमन श्रालम्बन ना. पु० थाश्रयअवलम्न। प्रागरागवन ना० पु यानानाना। प्रालय० ना.पु.धर,मरान । पावाजाईः ना. बी. पबिपड़ना, ग्राना श्रालवाल०मा० पु. भाला, थाला। जाना। आलस:ना. पुढील, मुरती, मिथिलता। शावाती ना० सी० अगाई। यालसी गु०टीला, सुम्त, शिपिल । प्रायाचा ना. सी. भूमिखएड। प्रालस्याना० पु. बालस। यावासा ना.पु० घर । (आला गा• गु० पारा, ताक, तास जिसमें भागाइन गा• पु० सादर बुलाना, बुलाना । चिराग यादि रखते हैं। आमान ना. पु० सूग जिसमें हाथी काया | माचिर्भूतः गु० प्राटवस्तु । जाताहै, वही, जनौर। आलाप ना. पु० बातचीत करना, स्वरमिलाप आवृत० पु. घिराहुया, वैष्टिन । आलिगा. सी. ससी, पति। आलिंगन ना. पुपरम्पर गलेलगा। दुहराना, टर। सालिंगित. गु. प्रसगित, भागीहुई। आली. सी. ससी। पासता गुमोहित, गटपर, लीन और प्रापिभीर ना. पु. प्रकहोना। आविष्ट गु० जो भूतादिक करके प्रस्त हैं। इ प्रावृत्तिका ना० सी० उद्धारेगी, पदाहुयां, प्रतिरत।
मगलकापा २६ In ~ - . श्राशक्ति० ना० पु० चाह, प्यार । प्रासनगत० गु० बैठाया। श्राशंका ना० स्त्री० भय, डर, सदंह, शक । आसनी० ना. ना. ऊन वनादि विधीना। श्राशय ना० पु० अभिप्राय, आश्रय, मतलब, आसन्न गु० निकर, पास। मजमूना श्रासन्नकोण ना. पु० पास का कोना । प्राशर० ना. पु० निशाचर, दैत्य । श्रासन्नभूत० ना० पु० निकाही व्यतीतभया । आशा ना०सी० यासरा, भरोसा। आसपास. गु० लगभग। श्राशावन्तःगु० श्रासरिका, उम्मेदवार । आसमुद्र० मा० पु० समुद्रपर्यत । श्राशावसन० गु० नगा, तृष्णा रहित । श्रासय० ना० पु. भाशय । आशावान्गुरु आशारत । आसर० ना. पु. श्राशर, दैत्य । नाशिप. ना. पु० श्रासवाना० सी० मदिरा पिशेप, शराब । दुया, भला मनाना, याशिपा. स्त्री. अच्छा चाहना। 'श्रासा० ना. स्त्री० आशा। आशीर्वाद. पु० श्रासाम० ना० पु० देशविशेष । आश्चर्य० ग० अद्भुत, ना० पु० अचम्भा, प्रासापरी ना० सी० रागिनी विशप, कपात विस्मय। विशेष, कपड़ा विशेष। पाश्चर्य्यवन्त गु० तजुन म, अचम्भित । পাহাৰ না? • আবির। आभक ना० पु० रुधिर, लोह, यून । यासीन गु. 4ठाहुया। श्राश्रम ना० पु. हिंदू लोगों म चारि अाश्रम श्रासीविष० ना. पु. साप । अर्थात् ब्रह्मचारी १ गृहस्थ २ वानप्रस्थ ३ श्रासीस. ना. सी० याशीर्वाद । सयासी ४ पार ऋषियोंर रहनेकास्थान,घर। श्रासु० गु० शीघ्र, शितावी। श्राधमी० गु० याश्रम धरनेवाला। पासुग० गु० वाण, वायु, सूर्य । आश्रय ना० पु० यासरा, समीपता, गु० अधी प्रास्ताप गु० शाघ्र प्रसन्न हानवाला। न, शरण, छल। आसुर० ना० पु० असुर या कोई अमुर। आश्रित० गु० प्राधान, या परवश! . पासुरी० ना. सी. रातसीमाया, निशाचरी। आएमास. ना. पु. भरोसा, समाप्ति, याय। आरकत ना. सी. बालस्य । प्राचिन: नापु० कुवार सातवामास । प्रास्कती गु० ग्रालसी। आपत. ना. पु० अक्षत चावलादि। आस्ति. ना. पु. वेदधर्मोंकाफ्ल, साधुता, श्रापर.ना.पु. अत्तर वर्ण । धर्मशक्ति, हस्ती। आपाढ० ना० पु. पापाढ चौधामहीना । नास्तिक ना० पु. धद में धर्मों के फलक श्रासना० स्त्री. आशा, भरोसा । विश्वासी, सायु। आशंसाः गु० मिससे इच्छा का बोध आस्था ना० स्त्री० टक, सभा, परिश्रम । प्रास्पद ना. पु० स्थान, पद, सिताब । आसन० गु० श्रारात, परेफ्नह । पास्पोत ना० पु. कचनारवृक्ष । आसक्ति ना० स्वी० पाशक्ति, प्रीति प्रेम । श्राश्रप. ना. पु० असुर, दैत्य । प्रासन ना० पु० बिस्तर, सेन, योगासन, बैठने आस्वाद. ना. पु. रसका अनुभव । ने लिये कुशावा काष्ठ वा ऊनकी वस्तु वेठक, आह. ना० सी० साहस,वीरता, धीरन । जाप के भीतरी पोर। आहट ना० पु० घग, शब्द, यासाज। . होता है। M मङ्गलकोप। 44 आहा० अव्य. खेदका सूचक शब्द। प्रादार० ना० पु. भोमन, खाना । इक०गु० एक 1 आहारी. गु. भाजन करनेवाला, भोजन के एकटक ना. पु. एक ताक से देखना। याध्य । इकट्ठा आहि भव्य है। इकट्टी० गु० जो एक जगह में जमाहोवे । आहुतः ना० सौर देवताओं के लिये होमने | इकठौरा० आहुति के लिये जो वसु घृतादि । इकठोरी आहवनीय. ना. पु. अग्निविशेष इकसार० गु० सरीसा, सश, समान । माहुक गा.पु० उमसेन रानाश पिता । इकारान्त० गु० निस शब्दके प्रतमें इकार है। इका गु० अकेला, यद्वितीय, एका। आहुतदान ना० पु. प्राह्मणो बुलाकर घर इंगलएड० ना. पु० देशविदेश, जिसमें लएडा पर दानदेना इसको मध्यम दान कहते हैं । नगर प्रसिद्ध है। प्रानिक ना० पु. प्रतिक्षित धर्मका कार्य। इंगलण्डीय गुजो इगलएइका है। श्राह्निकगति० ना. सी. एक दिनको चारा, | इंगितज्ञा पु० इच्छा, समान, चलनेवाला । प्रतिएकाह का नित्यभचक। इंगित. ना. पु० सेन, सकेत, बागमन, सोन । पाहाना. पु० जलार्णव । इच्छा० ना. स्त्री. मनोरथ, चाह । आहाद. ना. पु. हर्ष, शानद। इच्छाचारी गु० मनौवगामी, बन्धरहित । माहादित. गु० हपित, यानदित । इच्छित शु० इया समाना, चाहा हुथा। | इच्छितफल. ना. पु. चाहाहुया फल वा आह्वान० ना० पु० धावाहन, पुगरना। चर्य। आक्षेप. ना. पु. दुर्वचन, निदा। इच्छानुसार० ना. पुइच्छादन, चाहना । सातोदनः ना० पु. याखेट । (एछन० ना.पु. नेत्र, रधि। यात्रेय ना. पु. अत्रिसरा पुन । इडा० ना० सी० धरती, देवी, माई श्वास । आयो० ना. सी. नदी विशेष जो बगालेमें है। इन आशा ना. सी. धादेश, हुक्म । अव्य. यहा। इधर । आज्ञाकार० १० जो याज्ञारर चले, सेवर, इतना० गु० यह शब्द परिमाण या अपि का आमाकारीतावेदार। ज्ञापर है। आशाद० ना० पु० जो याज्ञा देवे, हामि । इतनी ना. सी. सैन्य, गु० इस प्रमाण । साझानुयायी गु० य झावद् वर्तनेहारा । | इतर० गु० अय, रहित नीच । माशानुसार० ना.पु. हुक्म के निर। इतरलोग ना. पु० छोरीजानि, लोकातर । माशानुर्ति० गु० तानेदार, सेवक । इति० अम. समाप्तिा नोधक है, परिक, आशामिलापी० गु० अाज्ञाचाहनेवाला। इसप्रकार। मानार्थ० गु० प्राज्ञा का बोध निससे होता है । इत्यादि० ना. पु० श्रादिर, वगैरद । हिन्याल ना. पु० मिलान,सामा, मुहारिलह। भाशालंघन. ना. पु० उलहुक्मी, हुक्म न | इतिहास. ना. सी. वृत्तात, प्राचीन कथा. मानना। पुराणादिको वातातारीख । ' (Rdo मङ्गलकोप। ३ श्मम् सर्व हैं पाच कौद्रिय अर्थात् हाथ, पाव, गुदा लिंग,TERPREET इतो गु० इतना। इम ना०३. हाथी। इतौल इमपालफ० गु. महावत पीलयान । इदम्० सर्व. • यह। इभ्य ना.पु. स्वामी। इदानीम्० अन्य यहाइराजगह । यह गु० ऐसा, इसप्रकार। इधर० अव्य. यहां, इसठौर । मि० गु० इसप्रकार। . इन्दारा ना. सी. बदापका एमा। इला० ना० सी० धरती, नारी, भवानी, देश, इन्दिरा गा० सी० लक्ष्मी। युद्धि, सरपती। इन्दीवर ना० पु. नील कमल, पौधा विशेष । इलायची ना. सी. पलविशेष, एला। दु० ना० पु० चद्रमा । इलावृत० ना.पु. पृथ्वी के नवसएज में से इन्दुर० नाक पु० उदुर, नूहा । इन्दौर ना० पु० नगरविशेष इल्ला. ना. पु० मसा। इन्द्र० ना. पु० देवताओं का राजा, प्रभार। इच० अव्य. तह, प्रकार, जैसे। इन्द्रगोपनर युवीररहूरी। इट गुरु पूनिन, प्यारा, वादिन ना. पु. इन्द्रगित ना० पु० मेषादगु• जी को देवना, मनुष्य, चही वस्तुचहीती। इष्टदेव ना. पु• पनित दवता, निस देवकी इन्द्रपुरी० ना० प्री इन्द्रका नगर । सवावर वा घ्याव । इन्द्रमस्थल ना.पु. दिलीनगर । इष्टाना०सी० प्रिय, प्यारा। इन्द्रयधू० ना. सी. बीरबहटी कीदा, इटित गु० विचारित, जो माणगया । इन्द्रयधूटी० एलाल रहमा वर्षा में हाताई, इण्यासन० ना.पु. धनुष, मिटा, कमान । इद्र की पसी। इपु० पु. वाण, तीर, पाशिनमास, रुद्रयर० ना० पु. कुटज का फल, इद्र जी, थार गणित में ५॥ औषधि विशेष इपुधी० मा. श्री. पु. धनुष, कमान, कमगा। इन्द्रवार० ना० पु० इयुधीपति० ना. पु. धनुर्द्धर अर्जुनाई। इन्दवारुणी स्त्री ग्रौषधिषिश इस्त्री० ना.पु. लोहे का यत्र निस्से धमा इन्द्रविपादिनी कड़ सभालता है। ना. सी. शची, इद्रकी पत्नी इस्पात ना.पु. पशह। इह सर्व. यह। इन्द्रायन ना.पु. वृतविशेष या उसकाफल इहलोकर जो अतिसुन्दर और कड़वा होताहे। इन्द्रासन०मा० पु०का सिंहासन । इन्द्रिय ना. सी. जिसे रूप रणादिका इनुवली ज्ञान होताहै वह दोप्रकार की दश जीते। इन्द्रायणी इ० ना. उत, मुस धार पाच सानेन्द्रिय अर्थात् प्राड, नाक, कान, जीभ, बचा। इन्धन ना• पु. नलानेकी पन्ही दियो । मदन म ३२ मङ्गलकोप। देवना। . ईडया० ना० पु. शिरपर बोझ रखने या टेका उचाना सकि. ऊँचाकरना, उटाना । “जो कपड़ा वा सन मृनयादित होता है। उडेलना० स० कि. धक्कादेकर गिराना, डा. ईकारान्त गु.निस शब्द अन्तमें ईकार है। तना। ख. ना. सी. उख, उसारी, इतु । उकठा० गु० सखाकाष्ठ या वृद। ईठ गुट, प्रिय, मित्र, ना० पु. गगन, (उकत ना. सी. उक्ति, रहा। उकताना.छ.क्रि. घबराना, भकनायुद्धा इठि. ना. स्त्रा दोली, प्रीति, तखी। इदि० ना. स्त्री. पानेको अधिकनानना, हठ । उकतारू० ना.पु. उपनाउ पसी । ति० ना. सी. बाधा, दुख । उकतारना. स.क्रि. सँभालना, पतारना । द० ना. सी. मुमल्मानों और यदियो में उकसना अ.नि. उटना, उपरको चदना, एक पर्चहोता है रमज्ञान के पीछे, परनी वा नदना। 1. शब्द है। उकसाना सकि..उटाना, चढाना। ईदृश गु० ऐना। उकासना ई. ना.सी. हिसक, प, डाह, इसद । उक्त० गु० कथिन, कहाहुया । श० ना०पु० ईश्वर, प्रमु, स्वामीविरोध, शिवज्। उक्ति ना. ग्रा० क्थन, भाषा, चतुराई, विष्णु, नारायण। कहना। ईशना ना० स्त्री प्रधानता, महत्व, माया, सिद्धिविशप। उखड़ाना . कि. उजड़ा, निनस्थान से ईश्चर. ना. पु. प्रभु स्वामीविशेष, परमामा, शिवनी, विन्शु, नारायण उखड़हा० गु० उखहाभया । ईश्वरताना. स्त्री. १ मायायोगमाया, कु उसड़ना० १ स.क्रि. उजाइना, निनस्थान ईश्वरत्व. ना.पु. उलाहना दरत। लाना। ईश्वराराधन ना. पु. परमेश्वरका भनन । उगनाए पनि उसनहीना, जमना, 4. ईशान० मा-पु. सदाशिव, ईशानकोय । दना। शानकोण ना. पु. पूर्व उत्तर का कोना । उगलना० स० कि. मुन्ब में पाई वस्तु डाल पित कर फिर निकालना। पद उगाल. ना. पु. जो चबाय के मुख में से इस. ना.पु.श, मालिक। फेंगा। ना. सी. चेष्टा, इच्छा, उत्पन। रहा. उगाहना. स. लि. नमकरना, तहसीलना। ईक्षण. ना. पु• चतु, प्रालि, दृष्टि । उगाही. ना. वी. भ्यानलेना वा वह रूप जो महाजन श्रादके ना वा नव के दश दरावे ग्यारह प्रतिमास एक २ काया पर उचाई ना. सी. उचान ना.पु.उचारा, उन्नति, •उचायना.पु. उप्र गु• क्रोधी, स्टोर, भयकर, तेग, ना. उचाटनी पु. धाराहरनी। . म. घोहा, २, अन्य। (उ. लेना है। बलदी।
मङ्गलकोप। उधरना कि० वदना, उठाना । पैरान करना। उनगन्धा ना० स्त्री० अनगायन, मच और उच्छास. ना. पु० सास, पाशा। लहसुन० गु.निसको गन्ध यठिन है। उछंग० ना० मी. गोद, पनिया । उग्रसेन गा. पु० राना कस श.पिता। उघटना० स० मि० क्सिी पर उपकार करते | उछलना कहना या बात मारना, ताना देना। उछालना० स० वि बुदाना, उपर को उघडना य० कि. नगा होना, गुला। पा। उघरे० गु० बुले, प्रगटे। उछाह० ना. स्त्री. श्रानद, खुशी । उधादना० उजड़ना०प० मि. नाश होता, मिटना, स०कि. नगापरना, सोलना। उघारना भगना, वैरान होगा। उधारी० गु• नगी, सुली। उजला गु० उनल, मफेद,निर्मल । उचकना० अ० कि० दिये उठाना, उघसना। उजागर गु• यशान्त, चटनीला, सुन्दर । उचकाना० स० मि. उपर यो उठाना वा उजाद० गु. सूना, यनखएड, वैरान । चढाना। | उजड़ना० स० वि० सूनाररना, नाशकरना, उचका गु० चौर, उठाईगीर । उचटना० अ० कि० अलगर होना, विछुडाना, उजालना० स० मि. उमाला करना। न लगना, उलटा, फिसलना। उजाला. ना. पु. योनि, तेन, प्रकाश । उचर ना० पु० पनगा। उजाली ना. मी. चादनी। उचरना.किरात निगलना; उतड़ना उजास. ना. पु० उजेला । उचाट गु० उदासी, जी न लगना। उज्जल गु.निर्मल, चौसा, चमकीला, उचाटना० स० कि. उदासकरना, उखाडा || उज्यल० साफ, मुदर । उचारना० स० कि० उच्चारण करना, निग्लना। उझकति गु. झापति, ताक्त । उचित० गु० योग्य, ठीक, मुनासिर । उमाकना० अ० मि. देखना, स.नि.नि- उचिलना ० कि. पटना, छुटिजाना। झाना। एचेलना० स० कि. मिलीहुई वस्तु या अलग २ रटंगन ना. सी. पोधा विशेष, और नदी जो करना, उधेड़ना। गालियर के पास है उच्च० गु• उचा। उठंगन० ना० पु. टेक्न । उच्चाटन. ना. पु. जी मड़कना, जी का न उठना श्र. वि. खडाहोना। उठवैठ. नाची घबराहट, साधन विशेष । उचार० ना० पु० पुरीष, मल, पाखाना । उठ्चैया० ना० पु. उठानेवाला । उशारण ना. पु. शब्दबहा! वा निक्लना। उठाना० ना. पु० उत्थान, दिसाई । उच्चारना० स० कि० उचारना, बात कहना।। उठाना० स० कि. सारना, ऊपर लेजाना। उच्चैःश्रवा ना पु० सूर्य का घोड़ा। उड़ना अनि भागना । उच्छिन्न गु० निर्मल, उखड़ा, खराब । उड़ान० ना० सी० उड़ने की चाल । उच्छलित गु० उचलता भया । उड़ाना० स० कि• उड़ादेना, भगादेना। उच्छिष्ट ना. पु. जुदनि या जूटा, भोजन | उड़ाऊ ना. पु. लुरेरा, यहुन सर्च करवेया ! उ० गा.पु. पती, नहान, मेघ, मह । लगना। अवशेष।
मङ्गलकोप। पुत्रा उड्डगण -पु. तारागण । उत्तमाशा ना. सा. अपिता के दक्षिण उडुप. ना. पु. घरनई, बेड़ा। की यातरीपकंपगुडहोर। उड़िया ना. स्वा० उड़सादेशी भाषा। उत्तर ना• पु. प्रश्न श बोरक जगार उड़ी० ना. सी. नाव। दक्षिण के स मुख की दिशा, राजाविराट का 'उहेसा गा.पु. देशपिशेष जहा भीगगनाय पुस्पोत्तम विराजमान है। उत्तरकेन्द्र ना. पु. निस की भास्कराचार्य • उडान ना. स्त्री• उड़N, सस्कृत में नपुसक। शास्त्री ने निज प्रमति में मुमेर लिखा है, यह उदना० स० कि. यौदा, ना. पु. ओदने स्थान अयन्त शीत के कारण अगम्य है। कास। उत्तरकोरल उदाना स.नि. योड़ा, टापना । उत्तरकोशला ना. पु. अवघदेश। उत. अन्य उपर, उधर, निस शब्द के प्रथम उत्तरखएड. ना. पु. उत्तर का देश । में यह युक् हो उसका अर्थ अधिक लिया उत्तरार गा. सी. रानाविराट् की कमानो जाना है। अभिम यु को विवाही थी। उग गु• ऊचा, पामायणे यथा ( पति उत्तराधिकारी ना. पु. मरो के पीच जो उतुंग उतग जलनिषि चहुपासा)। धनाधिकारी। उतरना अ.नि. नीचेचा।। उत्तराफाल्गुनी ना. सा. बारहवानता । उतला.गु. उनावल । उताना गु. उलग, ऊपर को पार किये। उत्तराभाद्रपद.ना.पु. बन्नीसवा नवन। उत्तरायण ना. पु. माघादि द मास । उतार० गा.पु.नीचेवाना, नीचला। उतारना. स.नि. नीचेलासा, दूरि करना । उत्तराई० गु• पिदिला बाधा । उतारा गा• पु• टालू, अपमा, ठुलोती, उत्तराषाढ ना. सी. इक्कीसरा नात्र । उत्तपहा गु० जो उत्तर दिशा का है। पारजाना। उतावल. ना. वी. शीघ्रता, जल्दी। उत्तरी गु० उत्तर का। उतावला गु• देगी, शीघ्र, पुतीता। उत्तरीय: ना. सी. प्रौढनी, रामचन्द्रिकाया उतावली ना. मो. शामता, पुती, गु० पु. यथा (पदपन की शुभ घूधरी, मषि नीलहा. टक सा जरी, पुन उत्तरीय विचारिक, भुव- उताहिल. गु० शोध, जल्द। आरि दो पग टारिक) गु. उत्तर देश कर उत्कट गु. परजस्त , उसी समय, तेनअधिक । पदार्प व मनुयादि। उत्कएठा ना• स्त्री. अभिलाषा, चाहना । उत्तरोत्तर प्रय० आगे आगे उत्कर्ष. ना. सी. बाई । उत्तानपत्र ना. पु. दाना आरएड । उत्वल. ना. पु. उडैसा देश, उसा के उत्तानपाद० ना० पु. रामा विशेष, ध्रुव का पिना। उत्क्रम० ना.पु. उपर चढ़ना। उत्ताल गु• शीघ, जल्दी, वेग। उत्रए गु• अदा, भेष्ठ, उत्तम । | उत्तीर्ण गु० पार पहुंचा, निर्मुक्त । उत्तमगन्या ना.सी. मालनी। उत्तः ना.पु. नुन्नति, उनाई वसादिकी। उत्तमांगा.पु. शिर, शश। उत्थान.ना.पु. उठान, उद्याग। . ताली। । यामान मङ्गलकोप। 2 उत्थापन नापू० उठाना, न अपना। उरवृद्धि० ना. पु. जलधर रोग विशेष । अस्थित गु० उठा हुआ। उदरे गु. पट। उत्पत्ति ना. स्त्री. जम, पैदाया। उदात्त गा.पु. ऊचा स्पर। उत्पन्न गु० जमा, प्रकटा । उदान ना० पु. पच माणसे एक । उत्पल ना० पु. कमल, कोई। उदार० गु० पु० दातापसी। उत्पाटन० ना.पु. जसमंत उखाडना। उदारता ना• खी० दातापन, दातव्यता। उत्पात. ना. पु. अशुभ या इनक, उपद्रव उदास ना० पु० एशत, गु. निराला, नि, उत्पादन ना० पु. जमावना, पेदारना। मोह, दुसमरखसमाननाता, मनमलिन । उत्प्रेक्षा. ना. सी. दील, सदृशता । उदासी० ना० ० एका ती, ना. सी० मलि- उत्सर्ग ना. पु० देवतादि के लिये द्रव्य का नता, गु० मनमलिन, एक प्रकार के सतों स्याग, वितरण, किसी प्रकार की आना। का धर्म यथा नानक्यथी, जो मनुष्य शमित उत्सवाना० पृ. गाद, यश, अधीग्ज । रहित ससार मे विचरै। उत्साह ना. पु. उद्योग, आनन्द। उदासीन० गु० जिसका कुल शील नहीं जाना उधपनाना० पु. उसाइना, उटा। अर्थात् पाहुन, समानवती, गृहस्थाश्रमरहित । उधपना० स० कि० उठादना, उसाइ डा उदाहरण ना. पु. दृष्टान्त, मिसरन । लना। उदित आविर्भूत, प्राशित, रोशा। उथपित गु० उटाया गया। उदीची ना. सी. उत्तर दिशा । उथलना० अ० मि. उलग्ना। उदीच्या० गा० पृ. एरावती नदी के उत्तर उथलपुथल शु० उलट पुलट । और पश्चिम का दशा उथला गुरु विछला, थाड़ा गहिरा। उदुम्बर० ना. पु. गलरवृद, वाराधातु । उदफ० ना० पु. जल, पानी । उदूसल ना.पु. गव। (उदघाटी० ना० सी० उदयता, उदयाचलयी उद्गार० ना० पु० ढकार, यमन, आदि । घारी। उद्गारवाची गु० हादसा न उदधि० ना० पु. सधुद्र। हारा। उधिनन्द: ना० पु० चन्द्रमा । उद्घाटन ना.९० से करने उदनपाक्य ना० पु० पियावासा, पाया। लिप दान रग्मी, दमा मुगा। उदन्वान्ना पु० समुह, सागर। उद्दानागपुरुचनार । (उदमाते गु० मत्त, मस्त, मखमर । उद्दालकर ना० पु. पकनिया नाम । उदय ना० पु० प्रकरना, रोशा, न्याति। उद्दिष्टलाहित ना. पु० सालचदन । उदयगिरि उद्दीत गु०प्रवलिन, अनिमागिन । उदयाचल सरोदय होता है। उद्देश्य मित्त, रामनिसा समा- उदयास्त ना ३० सूर्योदर से पतितर, उदयाचलसे अस्ताचलना। चार वहाना। उदत. गु० कचाप, अमिमा, नारपु. उदर ना पु०पेट। रानामह। उदरनि० गा० पु० पंग्या बहुवचन भाषा में। रदार नाए० ग्राम, याम, रहा, पुट्टी। मा० पु० पर्वत विशेष महा उद्देश नापु० अन्वेषण, प्रीतिकी कामना मंगलकोप। m उद्धारण ना. पु० छोड़ना, छुटना । उन्मादन ना. पु० रोगविशेष जिसमें चित्त उद्धारना० स० कि० छुड़ाना, प्राण देना। नम होकर सिङ्गपन होनाता है। उद्भय ना.पु. जन्म, पैदायश । उन्मुख० ना० पु० ऊर्वमुत, ऊपर देना। जगजरना. पु. वृततृणादि जो पृथ्वी पर उन्मेप. ना.पु. पलक, पक । उद्भिद उगते हैं उन्हार० ना. श्री. दाल, गु. रूप, समान, उद्यत: ना. पु. गुरू परिश्रमी, तैयार । सहरा. उद्यम. ना. पु. उद्योग, उपाय रोजगार । उप० अव्य० समीप, यह निस शब्द के प्रथम उद्यान.ना.पु.राजारा उपवन, चाल निमित्ता मे सयुक्त होता है उसका थर्य कभी परिकाई उद्योग. ना. पु. उद्यम, उत्थान । कभी समीपता कभी न्यूनना अधिक हो उद्योत० ना. पु. प्रकाश, चमः । जाता है। उवाह. ना. पु० विवाह । उपकराठ० ना. पु. किनारा, तट । उद्विग्न गु० यारजी व्याकुल । उपकरण ना.पु० सामग्री, मामान । उद्योग० ना० पु०च्या लता, घबराहट, गहरह, । उपुकानन ना. पु. कृतिमवन, वाग। उपकार० ना.पु. कृपा, सहायता, अहसान । उपकारी० गु. कृपावत, सहायक, मुमिर, लाभ उद्योध० ना.पु. स्मरण । युत, फायदमद। उधर०यय. वहा। उपकालिका उधार० ना.पु. बरज। ना. सी. क्लीनी। उपयुचिका उधारन ना. पु. हुडाने हारा । उपक्रम ना.पु. प्रारम्भ, धोखा । उधारना० स० कि. हुड़ाना, मुनिदेना। उपगति० गु• निमास्तु के लिये याचदिया । उधेड़ना० म० दि• सुलझाना, सोलना । उपग्रह. ना. पु. वया, हा, सहायता, उनचास गुरु चालीस थोर नी ४६ । प्रहसतधी तारा। उनतालीस गु. तीस और नी । ३६ उपचार ना. पु. उपाय, मेवा, वैद्यकाई, उनतीस गुरुपीस चोर नी २६ । व्यवहार, घूम। उनये० गु० घया दरियाये । उपज. ना. सी. जो तत्काल में कहानावे उनसठ गु० पचाम और नो ५१ । अथवा पायाजावे। उनासी गु० सत्तर और नी ७६ । उनीदे० गु० नींदभरे । उपजाना० य.मि. उगना, बदना, जन्मना उनीस.गु. दश और नी । उपजा गुज-मा, उगा, पैदाहुया । उपजाऊ० गु० उपजनहारा । उन्ठुर.ना.पु. चूहा, मुम । उपजान० म०कि. उपसकरना, सिरजना । उन्मत० गु. ऊचा, बलद। उन्नति ना. सी. उचाई, बदली। उपजित गु० जो उत्सन भया, जमिन । उपजीविका ना• स्त्री जीविका, वृत्ति । उन्मत्त गु० मतवाला, विछिप्त, सिड़ा और उपहना ० वि० उखड़ना । उन्मद अष्टभैरव में एक उमननामा है। उपताप० ना. पु. रोग, पुर्त, उम्मना, पीड़ा। उन्माद ना. पु० चित्तभ्रम, सिदान। उपदंशा ना. पु. सबाद, मुनाक । 4 मङ्गलकोप। गोरख। मह, बखेडा। } उपदा० ना० सीमेंट। उपराला ना० पु. सहायता, मदद, अधिक। उपदेश. ना. पु० शिक्षा, मान, दान । उपरिक अन्य. ऊपर। उपदेशक उपरोध. ना. पु० सकोच, सहायना, बड़ाई, उपदेशी० गु० जो उपदेश देव, गुरु। उपद्रव० ना० पु० उत्पात, अयाय श्रोर वि उपर्ना० ना० पु० अगौटी, एक्पट्टा, श्रोदनी । उपल० ना०पू० पत्थर। उपद्रवी० गु० बखेडिया, उत्पाती । उपलक्षण ना० पु० थोड़ा जिसस समृचा सम- उपद्रीप० ना० पु. द्वीप समीप, छोगा। झाजा, गु० जिससे गुणी जागाजारे। उपधान०मा० घी तरिया, रजाई। उपलाना.पु. क्एडा। उपधि गु० साधी राहका, धोखा। उपवन ना० पु. कृतिम वन, पाराम, याग । उपनन्द० ना० पु. नदकी सतान वा उनके उपयई सम्बधी। उपयर्हण. ना० पु० तरिया, सिरहाना। उपनयन ना० पु० ब्राह्मणादि तीन वर्णों का उपचास T० पु. प्रत, लपन, रोजह । यज्ञोपवीत अर्थात् जनउ धरण हेतु सरैशर । उपर्यात ना० पु० यज्ञोपवीत, जनेउ । उपनाम ना० पु. पदवी, खिताब वा एकही उपवेद ना० पु० जो विद्या वेदों से निकली है मनुष्य का हितीयनाम अथवा कुटुम्बी यथा । और चारि उपवेद हैं अर्थात् अायुप्, गर्व, ध- लाला, साह, तिवारी। नुप्, धर्मशान। उपनिषद् ना० स्त्री. वेदका रहस्यभाग । उपशम० ० पु. शाति, ममाई। उपनेत्रना. पु० चश्मह, ऐक । उपशास्त्र ना० पु० विद्या जो शानसे शिकलीहै । उपपति० ना० पु० जार, द्वितीय र त स्वीकार उपस० ना० स्त्री० दुर्गन्धि, साहिंद । उपपत्ति० ना. सी. मुख्यता, सबूत । उपसना श्र.नि. उपसना, सड़ना। उपपातक ना० पु० महापाप, यथा गोधादि । उपसर्ग० ना० पु. क्रिया के साथ सयुक्त जो उपमाना० स्त्री० समानता, दृष्टात, मनीर । प्र, पर, अप, सम् इत्यादि। उपमान.ना.पु० साटश्य, निसम उपमा दीनारे उपस्थ० ना. पु. स्त्रीलिंग, योनि। गया कमलनयन यहा कमल उपमान और उपस्थित गु० समुतागत, प्राप्त, नयार । नयन उपमेय है। उपसागर. ना. पु० छोग समूह, समुद्रा उपमेय०० पु० निमको उपमादीनाती है। उपयुक्त० गु० योग्य। उपहार० ना. पु. भैर, नगर, पूना । उपयोगी गुरु अनुकूल, लाभकारी, मुाद । उपहारन ना. पु. दहा, हँसी। उपराग ना० पु. चद्रमा मूर्य का महरा वा उपाख्यान. ना. पु. पुराण पी श्या । विषयभोग। उपाटना स० कि० उखाड़ा। उपराजा० ना० पु. युवरान, राना का नायर । उपादान ना.पु. विभेदरूप, निमित्त कारण । उपरान्त अन्य पारे, पश्चात् । उपाधि.ना.स्त्री० उपद्रा, अयाय, समीप, मा उपराम. ना. पु० समारी सुम की निवृत्ति । म, माया, बाया, ना० पु. स्वामी, मालिक, प. मकी चिता, गु• छल, कपट । भाग। ame. उपरी।
३८ मङ्गलकोप। - . उपाधी० ० अधमी, उपद्रवी, अन्यायी। उयसाना० स० मि. सड़ना। उपाध्या० ना• पु० वामपजाति विशेष । उबारना. स. कि. बचाना, घुडाना। उपाध्याय ना. पु. अप्यार, पदानेहाग । उयारु० ना० पु. बचाव, छुटकारा । उपाना० स० कि. सिरजना, उत्पन्न करना, उ-उपलाना. स. क्रि० पकाना, उसीजना। पार्जन करना। उभक० ना० पु. राव, भालू । उपानत् ना. पु० जूता। उमया सर्व गु० दो। उपान्त्य ना. पु. अत्य अक्षर का वर्णादि। उभरना० . कि. उटना, निक्ला, उमाना । उपाय ना.पु. उद्योग, यन, रीति तदवीर । उभार०ना० पु० उठान, पुलापट, गुमड़ा। उपायी० गु• उद्योगी, यनी। उभारना० स० वि० पूला० उठाना । उपार्जन ना० पु. पिया वा धनादिका सग्रह, उभौ० ना० पु० दोती। कमाई, प्राप्त उमगा० गु• पूला, उठा। उपार्जित गु० जो प्राप्त भया, कमाया। उमगारा० स० कि० पुलाना, उटाना, मन उपालम्भ० ना.पु. उलाहना । नाग उपास ना.पु. प्रत, उपवास । उमंग ना. सी. मग्नता, धुन, तृष्णा, चाह । उमंगना.मि. उमगसे यांगजाना। उपासक० गु. जी उपासना करे, सेंधक। उपासा उमंगी- गु• धुना, अभिलागी। उपासना ना. सी० सेवा, टहल, अनुवृत्ति देवा । उमण्डनार अ.क्रि. उभरना, घिरना । दिविषय भावना विशेष उमड़ना उपास्य गु० उपासना के योग्य, याराध्य। उमरी ना. सी. गूलरवृक्ष उपेक्षाना. सी. धोरता, त्याग ! उमदाना० ५० निउमड़ना। उमा.ना. सी. पार्वती, भवानी। उफनाक य०कि. उबलना, जोशसाना । उफलाना उमानाथ ना. पु. श्रीमहादेव जी । उफाल ना. पु. कूर्दन, कुदनि, कूदना । उर० ना.पु. छावी, गांदी, हृदय । उयकना०प०वि० वमन होना, जीमलकनाती। उरग ना.पु. मार, सर्प । उयका० ना० सी० वमन नीकी मवर । उरगना० स० कि. सहना, जोगवना, राम- उघकाई०प० वि० यमन, वरना, उधालवरा। चटिकायां यथा (बाद भरत्य कहा धो कर जिय उपटन. ना. पु० वस्तु बागा वा सन वा सर भाय गुनौ जो दुख देय तो लै उरगी बातमुनी)। सों निमसे देहका मैल हुाते है। उरप्र० ना. स्त्री. भेंड़ी। उयटना० स.वि. उबटन लगाना। उरगाद० गा. Y. गरुड, मयूर और न्याला। उपरना.अ.वि.बचना। उपरा.गुपचा। उरमना प्र.मि. अटकना, लगना। उबजना श्र०कि. सलपलाII, खोजना। उरला० गु• धरना। उयाल गा.पु. सलबलाइट के पीदै उफनाना । उरु० गा० स्त्री. नपका ऊपरीसाग, गु० बस । उयसना कि० साना, कुविदरना। उर्ण गा. स्त्री. भो। . रे मङ्गलकोप। ३६ . णि ना रखी० लहरी, बाँची। उल्था० ना. पु. उल्या, तर्जुमा, नृत्यविशेष । पर्द० ना. पु० माष, अभविशेष । उन्मुक ना० पुं० लूग, कोयल, जलीलकड़ी, राना सं.. उपजाऊ धरती, सेती के उल्लंघन ना. पु. अन्यथा, या भंग करना योग्य । या न मानना, लापिनाया। इजि. ना. पु. जो धरतीमें उपनाहै, मंगल । उल्लाला० ना.पु. छन्दविशेष । पिंजाना.सी. श्रीजानकी नी। उल्लास. ना. पु. मेले, लेश। उर्वशी० ना० सी० मुख्यअप्सरा, मनवसी, धुके उल्लू ना पु० पहीविशेष, मूर्ख, अहमक । धुकी, याभरण। उल्लूपन० ना. पु• मूर्खता, श्रमकी । उर्वी० ना० स्त्री पृथ्वी, धरती। उशीर० ना० पु० तृणविशेष की जद मित उरमण्डन ना. पु. कुच, स्तन, ची। में गन्धि होती है बस। उरहन ना० पु. गिला, शिकायन ।' उशना० ना० यु० शुक्राचार्य, रमृतिविशेष । उरोजाना. पु. कुच, स्तन । उप्पू० ना. पु० ऊंट।. उलझनि० ना० सी० फँसाव, अटकार । उष्ण ना. पु. गर्म, तप, तपन, गरमी। उलमना० अ० कि० फंसना, लपटना, स० उष्णकटिबन्ध ना० पु. पृथ्वी का मध्यस्थान कि० झगड़ना। अर्थात् मध्यरेखा के उत्तर २३३ अंश और उलझाना. स. कि० फँसाना, अटफाना, दक्षिण २३२ अंशतक । मिडाना, लपटाना) उष्णज० ना० पु. वनस्पति जो पृथी पर उ- उलझेडा० ना० पु. उलझन, फॅसाव । गते हैं। उलटना० स० क्रि० पलटना, फेरना, श्र० उष्णीप० ना. पु. पगड़ी, मुकुट । कि श्रीधा होना, उलटिजाना। उसमा थ० कि० उबलना, पकना उलटा० गु० श्रीधा, पलटी। उसरना० अ० कि० टलना, पीठदेना । उलटाना० स० कि० औंधाना, पलटना। उसाना० स० क्रि० उबालना, घुरकाना। उलूटापुलटा० गु० गटपट, नीचऊपर ।। जिसारा. ना. पु. श्रोसारा, डेवदी। उलथना०प० कि० लहराना । उसास० ना० पु. श्वास, दम । उलथा ना. पु. उल्या, तर्जुमा, रागिनी वि. उसासी ना. सी. फुरसत, कल । शेष, नृत्यभेद। (उसाहि० गु• कुसमय, मौसम उलाहना ना. पु० दोप, निन्दा, गिला, अ० कि. उसीजना० स० कि. उबलना। उगना, लहलहाना उसीसा० ना. पु० सिरहाना, तकिया। उलाहना० ना. पु० गिल्ला, शिकायत । उस्तर० गु० सेंत विनमोल । उलूक० ना० पु० उल्लू, दिवान्ध, घूधुपती । बहरना० कि० बैठना, दबना। उलूखलाना० १० अोखरी। उलूपी० ना० सी० मवली, र वाहनकी माता। ऊंघ ना. सी. सोवना, झापी, नींद । उस्का० ना० पुं० लूका, अग्नि या तारा जो ऊंधना श्र० दि० नोंदयाना, झाकी पाना । आकाश से गिरता है वा दीपक का फूल । ऊंघाई ना. सी. ऊप। उल्कापात ना० पु० 'ताराटना, लूका गिरना, . ऊंचा गु. उच्च, बलद । "उपद्रवीय कारण होना, पाश्चर्य ऊंट ना पु० पशुविशेष ३ 3 .
मङ्गलकोप। A m . (ऊटक्टाग ना. पु. मरभाड़ । ऊर्धरेता. ना. पु. सन्यासी, ऋषि और नि- (ऊटक्टीसा नापु. पोधा विशेष! तेन्द्रिय, निसमा योप्रसग में काम पतन न हो। ऊकारान्त गु० निस शब्द के अत में ऊ. | ऊर्वश्वास ऊसास ना. पु० ऊपरकी स्वासा। यार है। 'ऊख. ना. सी. गर्मा वा गन्नाका सेत । ऊर्च अन्य ऊपर । ऊसल० ना.पु. बड़ी ऊसली। ऊर्मिला ना. स्वी• सना विशेष । ऊसादी ना० पु. गनी पा लेन । ऊल्या ना.पु० तृण विशेष। ऊत० ना• पु• मनुष्य को सतानहीन मरे, ऊपण ना• पु० पालीमिरच और पीपरामूल । विरोध, अविहिन, अतिदुष्ट वा मूर्स। ऊष्मा. ना. सी. गर्मी, मोर, रोष । ऊपर० ना.पु. ऊसर । ऊतर० ना• • उत्तर, जवार । ऊपरपा० ना.पु. स रीलोन । ऊत्तम गु० विपरीत क्रम, मिना मिलान, ऊपाना.मी. वाणासुर की न्या। बेमिलसिल । ऊपाकाल. ना. पु. प्रात काल, तड़का। 'ऊदबिलावल न. पु. जलजतु विशेष । ऊसर० ना.पु. वह धरती जिसमें अन प्रादि .ऊदा० गु० भूरा। उत्पन्न नहीं होता है। ऊदाई नास्त्री कपिल भूरापन । ऊह. ना. पु. तक। ऊदाहट (३) ऊधौ ना. पु. श्रीकृष्ण का एक ससा । ऊन ना. सी. भेड़ी चादि बाल, थोड़ा, ना.पु. प्रथम वेद। नागक ऋकारान्त गु• जिस शब्द के अत मे - ऊनविंश ना.पु. उनीस। कार हो। ऊनविंशति अचाना. सी. वेदक मत्र । ऊना ना.पु. सारिशेष, धोप। ऋजु गु• सरल, सीधा। ऊनी गु० जो उनसे बना है। ऋजुभुज० गु० सीधीरेसा वा भुना मेंड़ । ऊपर० ना.पु. उपरि। ऊपरिस्थ० गु• उपर टहरा भया । ऋजुभुजक्षेत्र ना. पु. वह क्षेत्र जो कई ऊबट गु. औघर, अगम्य, कुमार्ग। मधी रेसानों ने धिगहो। ऊमरिना. सी. मूलरिका वृक्ष ! अण. ना.पु. उधार, कह । ऊर्जना.पु. कात्तिकमास । शृणक० गु० बर्जदार। अर्ण ना.पु. मेशादि के लोम, उन। ऋणिया० गु• धरता, करती। ऊर्णनाभि ना. सी. मकड़ी। ऋणी० पु. परजदार। ऊर्णायु ना. सी. भेडी। ऋतु० ना. सी. वरातादि छ , अर्थात् वसन १, ऊर्च गु. ऊपर। प्रीम २, वर्षा ३, शरद् ४, हेमन्त ५, शिशिर६, कर्यकएका. ना. स्त्री. रड़ी सतावरि । और रन, समय, मौसम । ऊपतिक ना•• चिरायता । ऋतुमती ना० सी० रजस्वला, कपड़ों से। ऊर्वपुएड० ना. पु. वैवातिलक । तुराज. ना. पु. वसत नहार । .
मङ्गलकाप। . - ऋद्धि ना० स्त्री पार्वतीजी, औरधि, पो एफवर्णात्मक गु० जिस शब्दम एक अतरह । ऋधिधा विशेष, धन, सम्पदा । एकसर० गु० एमति, दुविधारहित । ऋषि० ना. पु. वेदर, पुनि यार तपरखी। एकसा गु० समान, थरार । पिपतिक ना. पु. ऋषियो में जो प्रधान, एकसार० समान, एकरस । बहु विद्यानिधान, भागवतधर्मी । एकक्षत्र० ना. पु. पिनावटके, हीराज्य । ऋपिमित्र० ० पु. शातप्रिय, 'फकारों का एक अन्य एकटार, एकस्थान । दास्त, रामचन्द्रिका में विश्वामिन बाधर । एकत्रता. ना. बी. एकठोर होगा। पिराज एकाई ना० सी० एक्ता। ऋषीश ना. पु. ऋषिपति। एकाएकी० थव्य. अचाना, एक्वार म । पीश्वर एकाकार गु० समान रूप, कलिधर्म,एक्जाति, पमा ना० ० राग, खर, विशेष, श्रेष्ठ । एकाचार, मामयादि का रिशप वर धर्मोत्या ऋक्ष ना० पु० भालू, राध, तरा। गिक पश्वादि समान रहना । : ऋक्षपति एकाकी गु० श्रोला। नापु० जाम्बवत बार । ऋक्षराज चन्द्रमा। पकान गु• एमिन, एक्मति, दविधारहित । ऋदेश एकांक गु० निश्चयकरि, सत्य । [५] एकादशी ना. स्त्रा० पचयी ग्यारहवातिथि । ए० चव्य. ग्यारहवा अहर, सम्बोधनका सूचक । एकाधिपति० ना.पु. अनेकदेशीका एवराजा। एक गु० गिनती का प्रथम यक, अद्वितीय । एकान्त गु० निराला, निपट, सिर्जनस्थान । एककात गु० समान समय, और एक्समय । एकान्तर० १० पु. एकवार । एककालीन गु० समानाल में उपक भया, एकान्तरकोण ना. पु. एरुपारा पाना। हम उमर। एकायन गु० एकमति, एकमार्ग। एफटक० ना. पु. एर ताक्से देखना। एकारान्त गु० जिस शन्दके अतम एकारही। एकट्टा० गु० जो एक स्थान म जमाच्यिा वा एकाक्ष ना. पु. कार, वाना। भया है। (एकैनांक अव्य. निश्चयारि, स्य । एकतराज्यर० ना० पु० अतरिया, तिजरा वा (एक गु० प्रयक, हरएक । तिनारी। ए० ना. स्त्रा० घोडेका दोडान वा चलाने के एकतही ना पु. एक जगह, ना. स. निमित्त पाव पिछले भागरी ठोपरमारना। पड़ी ना० स्त्री० पावका पिछलाभाग । पकता० ना.पी. एकाई, मेल, समानता । पण ना. पु. पाप, हानि, मुग, हरिण, घर एकतानगु० एकमति, दुविधारहित । पकदा० अव्यः एक्समय । एणी ना. स्त्री हरिणा। पकरस० गु० पदभाव विकाररहित । एणीन. ना० सी० एणीरा बहुवाक्य । पकरूप० ना० समभान। पणमद० ना० पु० क्लूरी, मुश्च । एकलोटा गु० जो लड़का अपने मातापिता एतदर्त्यः अन्य० दसालिये। पिकलोता है या अकेलाहोरे। पतना गु० इतना दसरदर । ६पकवचनगुरु बात एक मुरय नर । एतान० गु० इतुने, इसरदर, इसप्रकार । रजाई । काट। ।
मङ्गलकोप। . धने हैं। । .. पतादृश गु. ऐसे, इसप्रकार । [ो] एतावता अन्य० ईसकरके, इसकारण । ओ अन्य सम्बोपन, करुणा, स्मृति । पतावन्मात्र० गुइतनाही, यही येवल । 'ओठ. ना. पु. श्रोष्ठ, होंठ । एरएड. ना. पु. अरण्ड, रह । ओंडा० गु० गम्भीर । आंघा गु० श्रीधा, रस्मी जो सपर में या- पलवा० पु. थोषधि विशेष पलवालुका अर्थात मुसबर। पलयालु प्योक ना. पु० घर, श्राश्रय ठिकाना, ना. एताना० सी० इलायची । खी. उपकाई। एलोई ना० पु. हे हमारे ईश्वर । श्रोकनाअ. नि. यमन फरना, उधात एच. वरना. एयं० अव्य. इसप्रकार, और। योकापन्त. गु.निम अतम पोशार है। एवम् (ोखली. ना. सी. गाली, उलूग्वल । एवमस्तु० अय. ऐसाही हो। श्रोश- ना. पु. समृद, बहुतायत । ओछा० गु• छिपोरा, हला, घोटा। ऐच. ना. पु. सकोच, सच । पोज. ना. पु. प्रताप, बल, तेन । पंचनास दिखेचना । (श्रीम. ना. पु० पचौनी, झाझ, पेट । ऐंठ. ना. स्त्री० बल, मझोड़। श्रोमड़ ना• स्त्री. झोंक, धका । ऐठना० स० कि. मरोड़ना, बलदेना, अ./ ओझडी ना. सी. पचीनी, घात । बलसारा मगड़िजाना। ओझल ना. सी. , छुपार, • जो छुपा है। ऐकाधिपत्य गा.पु. अदितीय देशाधिपत्य, मोमा. ना. पु. भोरस, दोनहा, यत्री या पदवी। शाक्तधमी। ऐकाहिक ना. पु. अतरिया । ओट ना. सी. पाडपक्ष । ऐक्य० गा.पु. एकता, समानता। श्रोटना० स० कि० श्राइ करना, मचाना, रेतनी, (पेगुन० गु• ओगुण । से रिनोला निकालना, रोकना। ऐनमैन गुप्योंकायों। ओरा. ना. पु. बाह, बैठन। पेन्द्रजालिक ना• पु. नटवर, दिटरध । ोड़न० ना. सी. दाल, परी। ऐरावताना. पु. का पी। नोडना० स० वि० सहना रोकना। ऐरावती ना. स्त्री. नदी विशेष । योहानापु. साचा, रा टोपरा । 1 ऐपकाना स्त्रीकक्रासिंगी । मोढ़ना सक्रि० पहिरना, ना० पु. रनाई, ऐश्वर्य ना.पु. विभय, मादाय, सम्पत्ति, पहा लोई त्रादि। प्रताप, बदती। प्रोदनो० ना. स्त्री० स्त्रियों का प्रोदना । ऐश्वर्यवान् गु. सम्पत्ति करके इशोमोत ना. मी. पदोतरी, रचती, हीनता ऐश्वर्यशालीमित। मोतप्रोत. ना. पु. तानाबाना. चौदाई, ऐसा गु• इसप्रकार, इसने समान ।' लम्बाई में अधिन, पलो पर विवाह । पेदिक गु. इसलोक के भो नीदा ही पै। मोदन. ना. पु. भात, चाल परे ।
मङ्गलको। औचकः न है M योदा गु० गोला, भीगा। औकारान्त गु. निसर अतमें श्रीरारहै । ओधे० गु• अरिकारी, लाग । औघट गु० अगम्य, जहा जाय न सके। ओप. ना. सी० सुदरता, चमचमार, घोर । यन्या अचानक, नागहान । मोपना० स० कि० धारना, साफकरना। ओपनी मा० सी० यह किसान जिस पर जिला यौछ. ना० पु० जइविशेष । औटन ना. पु. जलाव । करते हैं। श्रौटना सक्रि० जवाना, सुखाना । ओपी० श्रय० उधर, वि, गु० साफ की। श्रौत्तानपादि० ना• पु० धूप, भात प्रसिद्ध । ओर० ना० स्त्री० गर, मार्ग, अलैंग। मौकर्य० • पु. श्रेष्टता, उत्तमता । योरी० गु० पद, पक्षा, मदद, ना० स्वा० औत्सुक्य ना• पु• चिता, व्याकुलता, योलती। पछितामा। श्रोल पु० तरण, निमरिन्द, मनाती, बदले। श्रीथरो० गु• उथला कम गहरा । बोलती ना. स्त्री. आरौनी, पोरी। श्रौदात गु• अवदान, श्वत । श्रोला ना• पु० जलमय पथर और चीनी शकर औदार्य • पु-दानापन, उदारना। का जो बनता है। औदासीन्य पु० विषयों म वैराग्य । श्रोपधि० ना० स्त्री० जो पोधा फल मरजान के और अन्य पुन , फिर, गु० अधिक, दूसरा । पाले पिर से उत्पनहो। औरस ना. पु० व्याहितारा पुत्र । ओष्ठ ना० पु० दातों का ढरना, हाद । और्धदैहिक ना० पु० मृतक्या क्रिया । मोस. मा श्री. जो रानि समय छोटी २ फुहार औपध० ना. स्त्री रोगनाशक दय, दया, पड़ती है, शत। औषधि० इलाज। ओसर० मा. श्री. क्लोर भैंस । श्रीपधिपतिः श्रीपांश ना. पु.चद्रमा। ओसरा ना. पु. श्रोसरी ना. स्त्री पारी, चारी, पती [क] क० अन्य ना० पु. जल, मुख, अग्नि, शिर, घोसीसा ना. पु. उसीसा, सिहानी। ओहो. अय० वाहवाह, आहा । काम, मुरर्ण। ककड़ी० ना० सा० पल वा तरकारी विशेष । [] ककरहा औ० अय. धार। ना.पु. बारहखड़ा वर्ण । ककहरा० औंगी ना. स्त्री. चुप्पी, झुगापन, सुपड़ीहई (ककार० ना.४०३। ककुमा० ना. स्त्री० दिशा थोर छन्दविशेष । आँधाना० अ० कि. झपकी पाना । ककुष्ट ना- पु० नौववृक्ष । भाँडा पु. बेलदार। ककुस्त० ना. पु. धनिया मसाला कशाजा श्रीडा गु० गम्भीर। ककोरना० स० कि. खोदना, खराचना । औधना अ. कि. उलटना, उमण्डना । कसरी ना० सी० कास, मगल । औंधा गुरु उलग। आँधाना० स० कि०'उलटाना। किखौरी ना. स्त्री. काखा फोड़ा। ना गाड़ी। 7 मङ्गलकोप। -ri -- Y १ तेन्द्रिय द्विनि। 4 . कगर. ना. वी. छोर, यन, किनारा।। कच्छी० गु० जो कच्छदेश का घोड़ा प्रादिहो। कक. ना. पु. कुहीपही। कला ना. सी. काद।. कंकण ना० पु० हाथका भूपए विशेष। कछना. स. कि. धोना, पोदना, 'ना: पु काघ। कंकर ना० पु० निस से चूना बनता है, बहुन बड़ी मिट्टी, नाच। कछनी ना. सौ. कादवापना। कंकाली ना. सी. डाकिनी कछलम्पट. कुकर्मा व्यभिचारी, अनि- कंगनी ना. स्त्री पौी विशेष, मालक्गुनी। कंगरोड़ ना० पु. रोड़, पतीविशेष। कछवाहा० ना० पु. गजपुर का वर्ग जो श्री रामचन्द्र के पुत्र कुशनामी से उत्सम भया ।।। कंगाल गु. अधनी, भिखारी, दरिद्री। कंगालताना स्त्री० दरिद्रता, निर्धनता । | कछार ना० स्त्री. नदी की तराई वा किनारा। कंगालिन ना. स्त्री. डाकिनी, डायन, दरि- फ्छारना० स० कि० घारना, धोना। फछु सर्ज• कुछ, किञ्चित् । पछुरा ना.पु. जवासा। कंगनीमा सो क्गन। कछू०.सर्व० कुद किश्चित् । कंगराना.पु० गुग्मद, मठादिक, पास्वारः। कजाना० पु. कज, कमल । कंघा ना. पु. बाल झाइने के लिये जायादि कजरा. ना. पु. कानल, गु• काजल लगाय। फंघी ना. सी. की वस्तु । कजरारे० गु. काजललगाये हुये । कचंना. पु० बाल, पेश। | कजला० गु. काला, काजल लगाये। कचकना य.कि. मुरवा, पिराना। फज्जल ना. पु. कानल, घनन,सरमा । कचकचाना अनि किरकिराना, भिनभिः कज्जलगिरि० ना. पु. काजल्का पर्वत । नाना। कञ्चन० ना. पु. सुवर्षे, धनर, जातिविशेष । कचकाना० स.कि.मुरकाना। कञ्चमकर ना. पु. कचनार मैनफल। कचनार ना. स्त्री- मृतपिशेष। कचपचियाः ना• पु• गुग्दा तारोका,कृत्तिम। कञ्चनी ना. सी. कचन जातिकी स्त्री, नौची, पतुरिया, सनिकी पुतली। कचरा.मा.पु. पूस विशेष कचरी ना. सी. कञ्चु० पचहरी गा० सी० सभा, समाज, मनलिस। | फन्चुको ना. रनी चोली, अगिया। कचा ना. सी. अभीर्ण, चापन । क.ना.पु. कमल। कचालू० ना.पु. कन्दविशेष। कजर० ना० पु० जातिविशेष जो रस्सी घाँ कचियाहट ना•सी• पिनपिनाना। मिरची रेचते हैं। कचूर० ना. पु. पर विशेष का गु- जिसकी भारतकी पुतली नाली पासी कचारी ना. सी० पीपीटी या धोभरी। है ना. पु वृक्ष वा उसका फल। कथा गुयामा अनाही, अनपका । कनिया० ना. स्त्री. श्रावकी पुड़िया, छोरी । कच्छु-ना. पु. कछुवा व द्वितीय विशुनी का पुड़िया। पवनार, देश जो गुजरात के पासद वचनी । कन्जूस गु. सूम, कृपय, खालची।" कच्छप ना. पु. कूर्म, कछुवा! कजूसी ना स्त्री कृपपता। . .
४५ मङ्गलकोप। ३ T विशेष। कटक० ना. पु० सैन, फौज,..दल, नगर 'कटुं० - विशेष जो उड़सादेश में है। .', कटुक० गु० कडवा, कड़ा, पुरा । फटफट० ना• पु० झगड़ा, दांतों से दांतलाना कटुकी ना. सी. कटकी औरपि । फटकटाना० स० कि. चराना किसी वस्तुका कटुग्नन्य० ना स्त्री पिपरामूल । . कटकटेरि ना० सी० दामहल्दी । | कटुत्कटेग ना. सी. साठि। कटकना० ना. पु. बांधना, उपाय, ठेका 1." कटुभद्र • फटकाद्या० नाश्री. सेमरवृत । .n: कटुमी० ना. सी. मालकंगुनी। कटुरोहिणी ना० स्त्री० कुटकी औषधि । कटघरा० ना. पु० कटहरा। कटकटी० ना० सी० दारुहल्दी कटोरा ना. पु. १ भोजन करने . का पात्र कटैया ना० स्त्री० पौधा कांटोंवाला विशेष ।- कटना० अ० कि०' कटिजाना, ललितहोना, घायल कटोरी. ना. वा. विशेष । होना, मोहित होना। कट्टा० ना. पु० काठका जिसपर कपड़ा पति है । कटनी ना० सी० कटाई, अनर्मान काटने की कव्यानी गु० रोमांगित; रोमख हुये ।' समय वा काटने की वस्तु यंथा कैंची। फठन्दर० ना. पु. पाठोदर, रोगविशंप। कटफल० ना. पु. कायफल । कठड़ा. ना. पु. कटम्भरी ना. स्त्री स्यौना वृक्ष । कठड़ीलना सी. काठकी थाली ना कटरा० ना० पु. हार, चौक । कठरा. ना.पु. फटहरा० ना. पु. कटहरा, बडापिगडा । कठरी ना. सी. कटह० गु० काटनेवाला। कठवत ना. स्त्री० काठका बर्तन , विशा, कटा० ना० सी० मारानाना बहुत लोगोश। | कठारी ना. सी. काठगा वतन, फारउनु !, फटाफ मा. श्री. जो दस्त दर्दहोकर वै । कठिन० गुं. निष्ठुर, कठोर, कडा, मरिन्। फटाना० स० कि. किसी पदार्थ के टुकड़ेकराना। कठिनता. ना. सी. रवा - निहत्तर फटार ना० पु. संजर। कठिनत्य ना. पु. कापुन, रहती फटारा ना• पु० औषधि, पौधा विशेष । कठिया. ना. सी. दादरी दोन टन फटारी० ना० ग्री. संजर, मुरी। दोगमा पार फटाह ना.पु. कड़ाह, कड़ाही ! फठिल्ल ना करता दरबारी । फटाक्षाना पु• पानरावशेष, नामी निरधी कठेठी ना. स. कड़ी कठिन। चितवन। कठोर गुड़ा, असद, ना. पु० कटिना. सी. तक कमर । दृष्ट वा टायर कटित गु० सपत। कठोरता नामो निठुरता, निडराई ।' कटौतिया ना. सी. काटका छोटासा पात्र । फटियन्ध ना० पु. पृषी के लघुझा करने के कड़ाता ना० । लिये उसके पांच पटिन्ध नियत किये कद कटोती. ना. सी. । काउका महापात्र। शीत कटिनन्ध दो, धीर राम कटिपन्य दो, कड़कर ना स्त्री धडाका, 'चटक गर्ननि, 4 . फर्टीला ना पु. पासाविस बोटॉन्टा कड़कना ० कि चटकना भरना सनीला, सारन्त ।... गरजना।
मङ्गलकोप। . - y , ) 11 फसा० ना. पु० युद्धमें वदावा दनेडी मान करटारिका ना० रसी• छोटो सफेद कगई। कहना। फरिटया० ना. स्त्री. पारड़ी। करखैत. गु. भाट जो बड़ाव देना है। फएठ ना.पु. गला, घाटी, उपस्थित, मुबान । फडुश्रा० मुता, तीक्ष्ण, निठुर, योद्धा फएटगत गु० गल में जान पा लगा। कडुवाहट० ना. स्त्री तीक्ष्णता। पएठमाल ना. सी. गलेतीमाला, मुख्य कहा० गु० क्टोर, मगरा, ठीठ, निठर कण्ठमाला० रोग जिसमें गला सड़गाता है । पु. लोहेवा वा चादीयादि का भूषण जो हाथमें कण्ठला ना. पु. माला जो लडकों के लिये पहिरात हैं। चयन युत बनाते है। फड़ादा.ना.पु. नदी उचा किनारा। कण्ठस्थ० ना.पु. मुखाम। कड़ाहना. पु. दुग्धादि यौग्ने के लिये लोहे | फराठा० ना. पु. यही गुरियों का माला । पा पान, गुम्नानक का भोग । फएटान गुमुखान, जवानी। कड़ाही ना. सी. छोटा कड़ाह । फएठाभरण ना. पु. गलका भूषय । फड़ी० ना. स्त्रीपाड़ी, धरनी, धनी ! फएठी० ना. स्त्री. छोगमाला तुलसीयादि की कडु० ० स्त्री. खुजली, सारिश्त। फएटीरव. ना. पु० सिंह, व्याघ, शेर ।..- फदाना०प० कि. निक्लना, उठना, चिकना । एव्य० गु• जिन घरों का उच्चारण कठ से पठिल्लक० • पु. लालपुनर्नवा। होरे। कढी नास्त्री भोना विशेष जो बेसन श्री फण्डा० ना• पु० उपला । दही से माता कएडी ना. सी. घाटाउपला । कदुया० ना. पु. उधार, कर्ज । परडुपुप्पी० ना० स्त्री. शवाहला । कण ना.पु. पाय, अनान, रायमाघद्रग्य, कराडू० ना• पु. रोगविशेष, स्त्री. जमुहाई । जरी । कराडून ना. स्त्री. पार, थोपधि । कणाना स्त्री.पीपरी। कण्डेरा. ना. पु. धुनिया, जाति विशेष जो फणामूल• • पु. पीपसमूल । तीर गाते हैं, क्मानगर । करणासुफल० ना. पु. चकोल घोषधि कएप० ना. पु. मुनिविशेष । मणिका गा. स्त्री० सोनजुही, अणु, लेश, क्त अन्य पहा, क्योंकर, किसलिये । एकदा, जर। कतना० . कि. काताजाना। कणी ना. स्त्री०चिएक, टुकड़ा, जई । कतरन० ना. पु० कारना। कएटफ. ना. पु. काय, गोखुरूशत्रु, कृपण, कतरा पित्तपापड़ा। कतरनाक स.क्रि. काटना । फएटकलता० ना. स्त्री- खीरा फलविरोष !- फतरनी० ना. सी. कटनी, कैंची। फएटफारि० ना. एपी छोरीकाई, सफेद कप्तराना सकि० कटवाना। फएटकिनी० १ घीकुवारि । | कतहु० व्य. कमी। कएटकिफल ना. पु. कटहल । कताई ना. सी. कातने का काम, कातने कराट की ना. पु. रित्व, बेलु । पैसा । कएटफल० ना. पु० गोलुरू। कतीरा.ना.पु. गोंदविशेष। कएटार गुकरीला। कत्त० अव्य रहा बार। , मङ्गलकोपी का आद्ध। i कहना। 6 कने कत्था० नागपु. खदिर सैर कनागत ना. पु आश्विन कृष्णपर्व में पितरों कत्सायलाना.पु. कालाहरिण : 'कथक गु० पौराणिक, पवारिया कथिक। कनिक' ना..'चून, पिसान, बाट कथन० ना. पु. कहना, वाय' का प्रयोग फनियाना सं० किल संकोच से कतरायजानी, खि छुपाना । कथना०प० क्रि• कहना।' कनियाइट० ना. खी खींच, संकोच । कथनीय गु० कहने के योग्य । | कनिष्ठ गु छोय। कथा'मा नी कहानी, वृत्तांत, पारा। कनिष्ठा ना. सी. पांचवीं अंगुली, नाचनी । कथित गु० फहाहा। कनिष्ठिका ना० स्त्री. पांचों अंगुली । फथोपकथन ना० पु० बालाप पररपर बात कनिहा गु० घूना । चांत । अव्यः पास, साथ। कथ्य ना. स्त्री० हरे, गु. कहने योग्य कनेर ना. पु. करवीरवृत गिमका. फूल •कद० श्रव्य० कर। फनलं. देवतों को चढ़ता है। कदघ्या ना० सी० प्रतिमार्ग, फठिनमार्ग र कनैया ना• पु० कर्णवधन, ना. सी० दावी कदन० ना• पु० नाशक, यधिक 10 कनौजः ना० पु. प्राचीन गगर, विशेषदेश, कदम्य ना. पु० समृर, वृक्षविशेष, कदम, कनौजिया गु० कनौन देशका वासी । कदम्यक ना० पु. समूह, गिरोह । 'फन्त ना० पु. स्वामी, भत्तार, “निर्वाचन कदर्य्य. गु• लोभी, कंजूस। मालिक। कदली० ना० पु. केलातृक्ष । कन्या ना. स्त्री० कपड़ी, 'ग्दही, नदीको फदतर० ना.पु. कुत्सित वर्ण। ( शनैःकन्या शनैःपन्या गुनन्द कदा० श्रव्य० कर। शनविद्या शनैर्वित्तमंते पंचरान । कदाचार० गु• शस्त्र से विपरीत व्यवहार : कन्द० ना. पु० जड़ विशेष सहक- कदाचित् ग्रव्य. जो कभी होता हो, लता है यथा, मुग, पुर, ह .
४६ मङ्गलेकोप। : . है L । म भगल। जमान। कन्धेली ना० सी० सोगीर, जो घोड़ों को कपिभूत ना• पु. पारस, पीपल । 'उदाते है। कपिल० नाव पु० मुनि विशेष, साल्पशान्य कम्यका० ना. सी. कुमारी कन्या । . वक्ता, पीतलधानु। कन्या० ना. सी० पेटी, छटी राशि, दश वर्मतक कपिला. ना. सी. पिंगसवर्षकीगाय, रेणुका। की तहदी। कपिलदेव ना.पु. श्रादिश्रवतार ।.. कंस. ना. पु०धीका मामू । कपिल्य. ना. स्त्री. पाला चौरधि.. कन्हाई०१ ना. पुल पीपरन्द्रजीका एक कपीश० ना. पु. मुनीर वानरोंका राना। कन्हैया नाम। कपूर० ना. पु० मुगन्धि विशेष, कापूर ।। कपना.कि.परथराना। कपोत. ना.पु. क्यूवर परेवा । कपकपी गा० सी. थरथराहट, पुरफुरी।। कपोतवर्णा ना. सी. छोटीइलायची। कपट ना. पु० छल, परेप, सोदाई, और कपोताक्ष ना० पु. नद विशेष । फपोतिकार ना. रवी• मूली तरकारी। कपटभू. ना• स्त्री. मायाभूमि, तिलसमाती | कपोल ना. पु. गाल। कफ ना. पु. खरवार, श्लप्मा. पलयम ।। कपटी० गु० छली, सोटा, महुरूपिया। फफोधिज.ना.पु. समुद्रफेन । कपड़ा० ना.पु. वरना कब० अप.पहा, पदा.. कपड़ोसेहोना . कि. रजोधर्म होना, कयही ना• स्त्री. गदी रोल विरो। नुमती होना। कपन्ध ना. पु. पिनामरतक की देह और कपदी ना.पु. श्रीमहादेवनी, परगद । पानी, भेष, राह ( उभेपूर्वावरेस निस्य कपाट० ना.पु.किमाइपर। पश्यामिमारत, उदयारतमयेसूर्य पसन्ध-परि कपार० यारित) इनिमहाभारते। गा.पु. माथा, ललाट, भाग्य । कराल.) फपरा गु• कर, चितला, अलक ।। कपालभृतः ना.पु. श्रीमहादेवनी। कयास ना. पु. कास, उद्यम, तरकारी कंपारी ना. पु. श्रीमहादेपनी चौर •या- ! कमी ना पु. घर. कभी, कदातरी भैरपनी। कपास. ना. सी. ईका वृह, कांस । कमठ.ना.पु. का। कपिल ना.पु. वानर, चन्दर। फमठा० ना.पु. धनु, कमान! - करिकुमार ना.पु. येउ वानर । कमठी ना. स्त्री. कई, धनही । कपितन गा.पु. पारम, पीपल । कमण्डलु० गा.पु. रएिडयों का कपित्य. ना.पु. देशाग वृत। करिष्यज्ञाना-पु.ईन, पाएहपुर । कमनीय० गु० सुन्दर, मनौवन् । पपिन्द०१ ना• पु• मुन्य वानर और श्रेष्ठ कमन्दर मा. स्त्री. सानी यया ( मुक्ता कपीन्द्र वानर । कपिपतिः ना.पु. मोर, गु.जो वानरों का रोगन्धि मी शक्ति मौक्षिक मन्दरः) राना हो। कमरस ना. पु. फल विशेष और फाशी . परया। निपी। - T कपिपिप्पत्ती गावी सालगा। विशेष .
। मङ्गलकोप BIR -- . 1440 € RY कमल० ना.पु. पन। फरक० नासी. पीड़ा दर्द कमलज करकस गु० कर्कश, लड़ाकू । ना०पू० ब्रह्मा। कमलमव करका० ना. पु० बाला, हिमोपल । फमलवायुना पु० काबर रोगविशेष जिसमें कर्कशा ना की लड़ाती। देह और बासी पीली होजाती हैं । "करज ना० सी० गुलनिस । कमला० ना. सी. लक्ष्मी, श्री। करट० ना. पु. फौगा। कमलाकर० ना. पु० तालार । करटी० ना० पु. रागा, शास्त्रा. कापनी। कमवासन० ना०पू० ब्रह्मा। करण ना. पु० साधन, करवरिश । कमलासिनी० ना. ली. सरस्वती। करणी० ० सी० यम, निया, थाई का एक कमलान० ता. कमलनयन। हथियार कररा सम्बधी। कमलिनीना श्री पभिनी। करणीय गु० अवश्य वर्तन्य । कमाई० ना. सी. उपानी, प्राप्ति, पैदायश । करतल ना. पु. हथेला । कमाऊ० गु• उद्यमी, यनी, देशविशेष पु०। करतलगत० गु. हायमें । कमाना० स० कि. उपार्जन करना, पदा करताल ना० सी० बाना विशेष पाठा करना। फरताली) हथेला की ताल । कमेरा गु० परिश्मी, मेहनती। फरतूति ० सी० पतंय, चाल, करणी। कमोदिनी ना. स्त्री. कमलविशा जो रातो करतोया ना. स्नी नदी विशेष जो बाले खिलता हे अर्थात् फूल। कमोरी० ना० स्त्री. मटकी, हडी, दुग्धादि । करना० स० कि. बगाना, रचना। कम्प० पु. पपरपा, थरपराहर। करनी ना. सी. मरथी, तय !.. कम्पना० अ०कि. कापना, परथराना। करपल्लघा ना.पु. यगुली वा उमका होर। कम्पवाय० ना० पु. रोगविशेष निसमें सारा करपृष्ट ना० मी. हापट्टी पाट शरीर कम्पा करता है। करी ना. मी. जारका पीरा। कम्पाहा० गु० थरथराहा। करम ना.पु. हासी। कम्पित० गु० कापता भया । करमप्रिय ना.पु. सहिद । कम्पनी० ना० स्त्री. साहिब लोगों के बहुता का करभूपमा .पु. मादिश्रामग्ण। मेल या साझा, अगरेजी शब्द । करमपु. कमा कम्बल० ना. पु. उनस वल। फरमी न.पु. बड़ाकरीदा। कम्यु० ना. पु० शख, हाथी, सम्बाधर । मूल ना.पु.कया। कम्युज ना स्त्री हरसिंघाड़ा, करपार गु. प्रत्तनानादि पिम प्रभावलाम कम्बुमालिनी ना. स्त्री० शखहोली। सया, नन्द यशोमति माग रोरी, मुनका रखर कम्बोज ना० पु. घोड़ा, रामाविश! ग्रा की। कम्मारी० ना० स्त्री० औषपि विशेष बावालाना.पु. देवरा। कम्बल० ना. पु० रोम वस्त्र, काम ! करवीर ना.सु. कनखप किए। कर नापु० हाथ, रानधन, महमूल किर, करवीरक. ना. पु. नद। पुष्पर, विषया। करपद ना.पु.गज, नाना . m मंगलकोप- -- SETTE । - है औषधि । . . करसम्पुट० ना• पु• हायनोइन , फर्की ना. पु० चौधाराशिं विशेष बैंकहा, कर्फट गॅगय। करहाट ना. पु० सिफारन्द, मैनपल ! " कर्कटङ्गिका गा० मा ककरोसिगा। करहाटक० ना. पु० सिपाकन्द ।। कर्कटा ना. पु० देरफलविशेष । करान्त ना.पु. पारा करान्ती० गु० पारसे चारनेहारे । कर्कटारया ना. सी० कारासिंगी । कर्कटी ना. सी० ककड़ी, पिंडसजूर। कराना सकि. बनाना, रचना।। करायल. ना.पु. भाजनविशेष जस ।' कर्कन्धु० ना. पु. वरका वृक्ष वा पती करार० ना. पु० किनारा, गु० भयर, करील : कर्फल ना• पु. अजमोद, सूदमवायु । करारा. ना. कडारा, किनारा । - कर्कश गु. कड़ा, कठोर, लड़ाका, अराह । कराल गु० भयङ्कर, टंडा, ना. सी. विडग कर्कशछदा ना० स्त्री केत कार० ना. पु. कुम्हड़ा, खमहा। कराली ना. सा. भयङ्कर, कठिन। कोजा ना. पु. घोड़ा। करावलि ना० सी किरणों का समूह । काँटफ० ना० पु. मुख्य सर्प । कोटिका ना. खा. यही पौषधि ।। कराना०० कि. सासभरना, दुखकरना। करिया० ना. पु० केवट, मप्लाइ ।। | कर० ना. पु. कनूर। फरिल० ना• पु. मटौर जिसका शिर टाही, कर्चुरिफा० ना० मी• हाथको चूड़ी, दरी - की ना.पु. पगार, चमचा । बासका नया पौधा। पछीलना सी० छोरो पर्वा । करी. ना. पु. हाथी। करीर० कर्ण० ना• पु. वान, पतवार, पर्यसन, कमान या रोद वतर। करीरक० ना० पु. वृक्षु विशेष जो बाटो वाला होता है। कर्णधार० ना. पु. मामी, पदनदार । फरोप० ना• पु० गावर या मादि वा सरोपा कर्णकला ना• पु० कनका भूषणविशेष । कर्णवध ना. पु. कानरा पेदना, स्नछेदन। और कोई २ योयला बनाने हैं। कर्णवेष्टन ना.पु. कुडल जो कानमें पदिनते हैं। करणा० ना. स्त्री. दया, बीमलती। करुणाकर० गुरु दयार, दयाशी राशि, यो कर्णाटक एक भाग विख्यात । ना. पु. दक्षिण भरतगण्डका मलता की सानि। फरुणाकरना० स० वि० गुण कहिकर रोगा कर्णिकार ना. पु. दिवाली औषधि कोलम्चितगु. कानतक सींचना । दया करना। करणी ना. सी. बिया, पर्म, करण, पात करेरा० शुरद, कहा, तवान् । • वर्तव्यः ना० पु. परन्ति, करने के योग । पररीना.की.१६, कही। कर्तव्यता गु. सी चाल, वस्तूनि । करेला ना.. तरगरी विशेष । करत ना.पु. साप विशेष करना. पु. क्रिया में प्रधान होता है। कार० एयरनेवाला, मिरजनहार, प्रभु, मता करोद गु० सानास १.......। करोडा नापु. उगाइनेवासा, प्रधा!" करोंदा ना. पु. वृक्ष या उसका फलविशेष। कर्तृकर्मभाव. ना. पु. कर्ता और “कर्म का करील कर्णाट , विशेष बझा।
मङ्गलकोप। . ८ विशे। 1 +- - . कर्तृत्व ना. पु. काका धर्म । करते हैं, यह पाच है अर्थान् गुदा, लिंग, हाथ, फर्तृप्रधान ना० पु. गु. जिस अदमें कर्ता पाव, मुख। प्रधान है। करीना० अ० कि. कड़ापड़ना। फर्तृवाचक गु: जिस पदमें का पायानावे । कवुक कर्दम० न० पु. कीचड़, कादा, सपा और शी फर्याद ना० गु• निशाचर, मन्याद। कर्युर० ना• पु० सुवर्ण, राक्षस। कर्दमक० मा. पु. कीचड़ । कर्ष० ना. पु. प्रमाण, की, पैर।। कर्धनी 10 ना० पु पटिवपन, सूत जो कमर में कर्पण ना. पु. खैच । बाधते हैं। कर्षफल. ना. पु० बहेड़ा। कपर्दी ना सी. कोडी, यथा क्पदी च बराक ना स्त्री० ईसी, उसाह । रिक इति निएघट । कर्षित गु०सीचागया। कोस. स्त्री. कपास, चपासका धून। कन० ना० स्त्री० चन, मुख, यन्त्र गु० अव्यक्त कर्पूर० मा• पु० कपूर, कापूर । मुदर, मीठा, मधुरशब्द, अाजका पहिला या कर्म ना. पु. द्वितायकारक, काम, भाग्य, प्रारम पिछला दिन। शास्त्रविहित जप यज्ञादि। . कलकण्ठ ना. श्री. वायुल पती, कर्मफर० गु. सेवक, नोकर। फलकत्ता. ना. पु० नगर विशष । कर्मकाण्ड० ना० पु. जप यमादि । फलकल० ना.पु. यालाहल, शार, मगडा । कर्मकारक ना. पु. कारक विशेष। कलकाची ना. स्त्री गिर विशष । कर्मच्युत गु० काम से भ्रष्ट, किराभ्रष्ट । कलक ना• गु० अपवाद, चिड, दाल कर्मनाशा. ना. सी. नदीविशर जा काशी फलकी गु० दापी पापा ।' ओर गया ये मध्य में है। कलकिनी ना• स्त्री० दूषिता, अपनादिनी कर्मप्रधान गु• कर्म पुरय, विक्षिप्त कर्ता । जिसका क्ला लगा। कर्मभोग मा० पु. प्रारब्ध . का भाग और क्लधौत० ना• पु० साना, चादा तपस्या, पक्षी शेष। पलप ना० पु० रंग, जिसमें वास) रंगनाते है धर्मरह. ना. पु. कमरन। वसमा माड़ी। कर्मकाव्य गुनिस क्रिया पददा कर्म उद्दे श्यहो। कलपना० कि. कुदना, दुवितहाना, कल पररना, माड़ा लगाना। कर्मधाचक गु. कर्मच। कर्मविपाक- ना. पु. माँ का फल, अय कर पाना स० कि. कुदाना दुसारना कल पिरोप। पक्राना, माहालवाना। कर्मसाक्षी • पु० एन । कलम ना. पु. हाथी, स्तुर, उत्तालमा सार कर्माधौगुनपर पिया, भाग्यवान, देयागत । कलम ना लेतना यह बग्वा शब्द है कार० ० यु. नास। कलमलाना० अनि. कुलरलाना । कमिणी ना. स्त्री कामय, जघा । कलरय ना. पु. कबूतर, कोरिला । भी गु० कर्भीका कर वाला। कलयल ना.पु. कालवाल, तावरी वान। कमेन्द्रिय सी इन्द्रिया निनस कर्म । फलनिक ना. पु० गरगया पदी। T . 8 T ५२ मङ्गलकोप। -- . M - कलश ना. पु० घट जो विवाह यादिमें स्थापित | कलिन्द० ना.. तस्वृत पर्वत विशेष । करते हैं, घडा, गगरा। कविमल ना.पु. पाप, दोष।। कलस० ना. पु. शल, ग्लश । कलिमलसरि० ना. स्त्री. मनाशानदी। कलसी ना. पु. घोगकलश, गगरी --- कलियाना.नि. क्लो निक्लना पूलना। कलह ना० पु. विरोध, लड़ाई झगड़ा (-- फलिल ना.पु. लेश, सकट, दुस। कलहंस० ना. पु. रानहस, मैलाहस । कली. ना. सी. कलिका, वरी। कलहा० कलुप० ना.पु. पाप, टोर, गुनाह । गु० लड़का, भगगलू। कलहारा | फलेऊ. ना. पु. नामी रमोई, प्रात काल में कही नास्त्री. कांगा, लड़ाकी। योहाभोजन । कलत्र ना० स्त्री• पनी, स्त्र विवाहिता।, कलेजा. ना. पु. अंग विशेष, सूर्भाग्न, सा फलाना. स्त्री. सोलहसा अरा, बाम। इस, कला ना• स्त्री पहुंचा, रंगामूत । फलेवर ना. पु० देह, तन । कलावत. ना. पुगया, गायर । कलेया ना. पु. क्लेऊ यह जो विवाह में फलाद० ना.पु• सुनार जानि, यथा नाडीधम । दूलह को दिलाते हैं। स्वर्णकार क्लादोरमकारक त्यमरः । कलेश. ना.पु. सश। कलाघर० ना• पु० चद्रमा, नृयक, बहुरूपी कलोर० ना.पु. श्रीमर, नई गाय । कलाना० स० कि. भुनाना । कलोल ना. सी. खेल, मगनता। कलानिधि ना. पु. च द्रमा। फरकी०मा० पु. दरावा अवतार, म्लेमात कलाप ना. पु. समूह, व्याकरण विशेष गुण. जो कलि के अत में सम्मल में होगा। तर्कश, पामरण, चद्रमा, दुख, हरिदर मनन, कल्पना.पु. ब्रह्माका दिन रान, प्रलय, भोग का समृह, ग्राम विशेष। कल्पवृत, सामर्थ, विचार, रचना, बदलना, फलापी ना.पु. मयूर, मोर । शारय रिशेष। कलापशाक ना.पु. मदरका साग। कल्पतरू० ना.पु. पल्लवृत्त । कल्पना पनि खेदित होना, मान लेन्द्र, फलाल ना. पु. कलवार, सूडी। पर्ज करना, तक, लालसा, पप्ट । जालना. पु. चोथायुगनी ४६४०० वर्ष शकल्पान्त. ना. पु. कल्पका यात, कयामती होता है वेदोक्त समय का नाशर, समय बलि कलित० गु० रचित, पिचारिन, मानाया। युरा, युद्ध, पाप, सेश, सूर्मा, तर्कश । कल्याण 1. पु. कुशल, मगल, पदनी। कलिकवि० ना.पु. सलिदासादि। कल्लर० गु० ऊमर । फलिका ना. स्त्री. सरपोंका, कली. बिना पृ फल्लाना० अ० कि. जलनि पा, पिराना । लाल। कलिफारी० ना• स्वा० कलिहारी ! | कल्लोलिनी ना रखी दरगयुत । । । - कलिंग ना.पु. इयर, तरबून, कटकरजका फवनी. पु. झिलप, बलर, रक्षक मेल पौधा, देश विशेष, राना विश। फलित० गु• बदवामया, सुदूर। | काव्य ना.पु. इन्द्र विरोष। कलिद्रुम ना• . बहेरा। क्वर्ग० ना. पु. ककारादि पर अक्षर । कवरी ना. स्त्री केशाग, वेशी मारी। २ कलारक .. प विशेष 1 D .
५३ मङ्गलकोप। कविताई. कासगर, कविराज० मा ना० पु० वडापति, उत्तमयति । कसैला० 3 गु० दपाय, - } - -- . कक्ष ना. पु. माम लुपमा । कसान ना. पु. वह पदार्य जिससे कजिायें। कवि० ना० पु० भाट, श्लोक य छदकर्ता,शायर। कसुभिक्त ना० पु. नीववृत्त । कवित. ना. पु. छद, पछ । . कसेरू० ना.. जलका कन्द विशेष कसेरुक ना. पु. कमेरू । ना. स्त्री पय, श्लोक, छद! कसेरुका० ना. स्त्री० पीटकी हवी । कविमाता ना. स्त्री० शुमाचार्यकी माता । कसेरा. ना. पु. कासकार, जाति विमेष, यती बनानेवाला। फविपुंगव ना. पु० बड़ा पति, श्रेष्ठकवि । कसेला। फपीश्वर फसया गु० क्सनेवाला। कशर० ना० पु. कचनार । कसौटी० ना. सी० वर्णादिपरीदकपाषाण । कशेरू কাহী ना० पु. सेरू । कस्तूरी० ना. स्त्री० मृगमद, मुश्क । कस्मल ना० पु. पाप, मूर्छा। कश्मीर० ना. पु. काश्मीर । कस्मो० ना. स्त्री० कम्भार । कश्यप० ना• पु० मुनि, मरीचि, भजापति कस्मिन् सर्गः कोन । का पुरा कस्य सर्वपिसको। कश्यपी० ना. स्त्री पृथ्वी, धरती, तीन जो कस्यप० ना. पु० श्यपनि विशेष ! कश्यपसे सम्बध रक्ते। कहतूति० ना० स्त्री• यहावत, मसल । कपाय गु० सेला रस । कहना० स० कि० बोलना, जताना, याज्ञा फट० ना० पु. दुख, पीडा, दर्द। करना, वर्णन करना। कटनाश० ना० पु. नीलकण्ठ पती निस यो कक्ष. ना. स्त्री० काख, यगल । कटनाश कहते हैं। कक्षा० ना. स्त्री• ग्रहों की चालका मडलाकार कटित. कटी गु० दुखित, पीडित, रजाद । कहलाना. म. वि. पलपाना जलाना, कस. अय० पेसा, किसप्रकार। भुनाना। कसक० ना० पु. पीडा, दुख । कहा० सर्व० क्या. ना. पु. श्राशा। कसफना० अ० कि० दुःखभोगना, दु खहोना। कहानी. ना. रवी० कथा, निरमा, वृत्तात । कसकसा० गु० बालू मिलाहुया पदार्थ । कहार० ना. पु० जातिविशेष धीमर । कसन० ना. पु. दृट्ठा, यन्त्रणा। कहावत० मा० स्त्री० बात, दृष्टात, मसल । कसना० स कि० खेंचना, जाचना, धीमेभूनना, या सर्व विसी, क्य, संबधाची 'तलना, श्राजमृदाकरना । कांक.. ना. पु० कार । कसा० गु० खोंचाहुश्रा। 7कांखना. स्त्री० कक्ष, बगल, कराह । कसाई ना. स्त्री सिंचाइट। कासना कि क्लाहना, घुरनाना, से. कसाना० स० क्रि० सिंचाना, जचाना, घी में क्रि० छेदना, दवाना। उनवाना तलना। कांगनी ना. रवी पौधा मिशेर, वीन उसका। पन्थ। . .
मङ्गलकोपः। 4. " ." " कांच०,गु• कच्चा, ना. पु. गुदा में रोग विशेष रिणीताश्चपपश्चतासः, देपोहरादरमहाभिगन्यो ना. स्त्री. शीशा । .. द्रम्मैरतगापोडशभिश्चनिन्धः। कांजी ना. पु. जल विरोष, भात यो सहाय | काकी ना. स्त्री. काका की पत्नी, चाची । के बनता है। काकू० ना. पु. व्यग्यरचन, दीवान। कांरा ना• पु• यश, स्वर्गादिक तोलनेका यत्र काकोदर० ना.पु. सर्प, कोवाका पेटा तुला, जलमें गिरीहुई वस्तु निकालने का यन्य। काकोल ना. पु. विष, हलाहल । कांठा गु० किनारा, बत, छोर, समीप । कास्त्र. ना. स्त्री. वात, कक्षा कांड ना. पु० खण्ड, तार विशेष । काखमलाई ना. स्त्री० क्लोरी। कांडी ना. स्त्री. पड़ी, धरन । काग० ना. पु. काक, पौया । निसको कांदू० ना• पु० चीनी पकानेका कड़ाह, भूजानाति | कागासुर० ना• पु० कारूपी दैत्य, विशेष, भुर्जी। जीम श्रीकृष्णच द्रन ने तोड्दीशे । कांदी ना. सी. कीन, कीचड, कादौ। काच ना. पु. काच, गु० क्या. कांधना अनि मानना स्वीकार करना काचक. ना.पु. बास । कांधा ना.पु० क्या। काचा गु० कच्चा, अज्ञानी । कांपमा अ.क्रि. दलदलानां, थरथराना। काठ ना. स्त्री. धोतीका दूसरा सिरा जो कांस. ना. पु• तृण विशेष । पीछे को सींचत हैं, कमर, जधाका ऊपरभाग । कांसार काछना० स० कि० कायमारना, चदाना, पो कांस्य ना.पु. धातुविशेष। छा, नगरना। कांक्षा ना. स्त्री इछा, मनोरथ । काछनी ना. स्त्री. काय विशेष । पाई० ना. नी. हरी वस्तु जो तालादि में काडी० ना. पु. मुराऊ जाति विशा। लगती है। | याजना. पु. कार्य, फाम । काऊ. सर्मनिसको, किसी को। काजल ना. पु. कजल, अजन, सुरमा । काक ना.पु. पीया, पसी विशेष । काजी गु० कार्य कर्ता, कामी । काफजया ना. स्त्री-पौधा विशेष ।। कांचन ना. पु० सुवर्ण, सानाधातु । काकटम्यपुप्पी० ना• स्त्री. महामुण्डी। कांचनपुष्पिका ना० स्त्री. मूसली । - . काकतिका कांचनार. ना. पु. कचनार वृक्ष । ना. स्त्री. वागना। काफपदी | कांचनी ना. स्त्री. हल्दी, सोनेकी पुतली काकपक्ष ना• • जुल्प, नावरी, काकुल, कीया के पख। कांची ना० स्त्री० पुरीविरोप, मिसके दो काकभुशुण्डि ना. पु. प्रसिद्ध पी श्रीरामा भाग है एक विष्णुकाची दूसरी शिवकाची । गप वत्ता फार ना० स्त्री• चारा, मैल, तीक्ष्णता, तेजी काकर० सर्व.विसका काटना स.नि. क्तरना, टुकड़े करना, का पाका ना.पु. पिताका भाई, चचा।। काकिणी ना. रत्री०, २० कौड़ी को कहते है, टमाना, लवना, अयान, लोनी, पाराकरना, लीलापन्या पपा वसटिशनादराकमय परसाका रहना, बिनाना, रोक्ना, लन्जित होना। T है S पर्वती वेश्या । Fr - दालना, लातुकरना। 1.
मङ्गलकोप। - . काणा . m काटमाण्डु० ना. पु० नेपालदेशवीरानभानी । कानि ना. स्त्री० मर्यादसपोच, अदर, लान । काठ. ना. पु. पाठ, सूखीलपड़ी। . काना० ना. पु०. अक्षर की खड़ी लकीर, का. काठिन्य गा.पु. पठिनता, कठोरपन । णा, कड़ाही आदि का गहना। गठियावा. ना. पु. देशविशेष । फानी० ना• पी० नो एक श्राख यो हौवे । काठी ना. स्त्री. घोड़े के उपरका पाष्ठा श्रासन, मिया निसमें तलवार रखते हैं, सा, कानीन० गु. नीच, तुद्र, सी० लड़की, रामच देह, डौल, लकड़ी। द्रिकाया श्रदापि पानी नरे दिकानीन । . कादना० स.नि. निकालना, चमड़ा उधेड़ः कान्त० ना० ए० पति, खामी, सदर । कान्तानासी० पक्षी, प्यारी। ना, कपड़े में पूल बूरा बा, चालमिरताना । कान्ताहा० ना. स्त्री प्रियगु थोपरि। काढ़ा ना०प० छाथ। फान्ति ना. स्त्री. शोभा, चमक और नम काण गु० एकात, एकनयन । चन्द्रमा की एक कला का। काणी ना.स्त्री० एष प्रातिवाला। कान्तिपापाण ना.४० चुम्बक । काण्ड० ना० पु० खण्ड, प्रकरण। कान्दा० ना.पु. जलका पद, क्लंकदरा। काण्डरहा. ना. स्त्री० कुटकी। कान्यकृजना. पु० दश विशेष, ब्राह्मण कातना० स० किल सूत गई से बनाना रहँटा के. फान्ह० ना० पु. श्रीकृष्ण जी का एफ्नाम । कान्हर कातर० गु० डरपोक्ना, व्याकुल, ना. पु० जगल कापट्य० गु० शठता, पट । दुर्भित, कोल्हू की पाटि। कापथ० ना. पु. अनिमार्ग, मदिनमार्ग। कातिक० ना० पु. पाठवा महीना । यापुरुष० गु• दुसित, मनुष्य, बुरा श्रादमी कातिकी० ना० सी० कातिक की वस्तुयादि, कुजन, कुक्मी, नर । कातिककी पूर्णमासी। काम १० पु. भोगकार्य, अभिलाए । कामदेव, कातील नाघी छोटी तलवार, कत्ती । लान, विषय, यथावा, सदर । कात्यायन० ना० पु. मुनिविशेष, स्मृतिति कामक० ना. पु. मेघ । शेष। कामकेलि ना० स्त्री० दुलार, प्यार, सगम, प्रसग। कात्यायनी० ना. सी. देवीविशेष, स्मृति विशेष, कात्यायन बशी। कामचम्चुका० ना. स्त्री• धुपची। कादम्बिनी ना. स्लो मेघमाला । कामत. ना.पु. कल्पवृक्ष । कादर गु० डरपोरुना, न्याकुल । कामद० गु• कामना दाता । कादरताः ना० सी० भय, डा, डरपोकना कामदगो० ना स्त्री० इन्द्रकी गाय । कादाई कामदूती ना० स्वी• नस तऋतु, कृमी काधना० स० कि. काधना, काथे धरना। कामदेव. ना. पु. मदन, म मय । कान ना पु० कर्य, श्रवण, खान, अदाफामधेनु० ना. स्त्री० इद्रकी गो, देवगौ। 1- ‘कानन पृ. वन, जगल, नझारामुख। कामना० ना० स्त्रीदृष्टा, कामामिलाप, मदन। 7 .
- - कामगु. मदनमत, कामी, पल-कात्तिक ना.पु. कातिक । ५६ मङ्गलकोप। कामपाल ना. पु. बलदेवजी। कारणी गु. कारण, कर्ता । कामयन० ना० पु. निस बनमें भी सदाशिव कारयल्ली. ना. पु. करेला, तरकारी।। ने कामदेव का जलाया था। कामरी ना. वा. इग्मत। फारधी ना. सी. अजमोट, क्तोगी। कामरूप ना. पु० इच्छाचारी, सुन्दर, देश कारागारमा० पु. वन्दीघर, जेलखाना । विशेष कारागृह कामरूपी० गु० बहुमपिरा, सुदर, कामम्प का ना० पु. शिल्परार, पवई कारकर० कारुणिक गु० दयालु, कृपालु। कामसखा० ना.पु.६८, सन्तानु। कामांग ना. पु. श्रामवृत्र । कार्तस्वर० ना. पृ. सुपर्ण, काचनू । वासी। - । हारा। " कार्तिोयना. पुः स्वामिकातिक । कामिनी ना० रती उत्तम, मुदरी, ना० पुष फार्पण्या ना• पु० दरिद्रता, इग्नता। कापास ना. रवी. कपाम। तृत विशेष, कामातुर रती। कामी० गु. कामातुर, बहुप धी, मतलवी माधवी कार्मुक० ना• पु० धनुष, महानांत्र वृत्त । वृत। कार्य.. पु. प्रयोजन, काम । फामुफ० ना• पु. स्त्री के सुख में ग्रामह, कापण ना. पु. वो के सोलहपण का माप या तोल । कामातुर। कामोद० ना. रत्री. राणीनी विशेष । काल ना. पु. मृयु, दुर्भिस, समय, क्ल काम्बोज. ना. पु. देग जो वगाते के दरिय काला, धर्मरान, सर्प, सुदर, यमराज ३ । कालका ना• पुकृमाता, बीजगणित में प्रमा का बोधरा काम्य० गु.सदर, यहा। काम्यकर्म मा० पु. सादि पला के लिये फालकृष्० ० पु. विष, हलाइत । जो फर्म करना। कालपोनुक० ना० पु. तेंदुबाहर ।, काय. ना. सी. देह, नन ।। फालपणी ना. स्त्री. कालानिसात । वायक.देही। फालमेपिकाना. सी. मनीठ, याची । पर विशेष कायफल ना.पु. कालमेषी ना. सी. कालानिमोत। कायर० गु• भयमान, सोर, हे । कालयमन ना. पुं. नाम एक ग्लैग्छ कायस्थ ना.पु.जातिविशेष, गुजो निन । निसका श्रीकृष्णचन्द्र ने भरम किया था। काया में रिपतही अर्थात् सन्तुष्ट कालराति०१ ना. सी. प्रलयकाल कारा कायस्था ना रखी हर, अमोली। कालराधिक प्रधेरीगति, देवी विशेष फाया ना. सी. देह, तन । कालबाहन: ना. पु. भंसा।। कायाकल्प ना. पु. दहका पदलना। कालवृत्तिका ना० स्त्री. भी जापानी कारक ना.पु. कियारा लहान सिमित्त । होता है। फारजग.पु. कार्य, काम। कारण ना. पु. निमिन, लिये, सर, मतितापालसार ना.प. तदा वृद ।। कालवाकर ना. पु. सरकाश। । 1 मङ्गलकोप। ५७ Fr , " - 4. ३ है 7 - N कालसूत्र ना० पु. नरुक भेद । काष्ठान्तर० ना. पु. काठके भीतर । कालस्रुन्ध० ना.पु. तमालवृत ।' काष्ठी ना० स्त्री करकरी। कालक्षेप ना. १० समय कारना, उस भोग कासार० ना. पु० तालाब, भैसा । परना, गुजरान वरना। कानु० सर्च विसरो। कालज्ञ० गु० ज्यातिषी, परिगन, यागाशर, माता, काहन० ना० पु. पापन । मुर्गापदी, शृगाल! काहे० सई क्यों। काला० २० कृष्णवर्ण, श्यामरग। काक्षी ना. स्त्री पारी कालिका. ना. वा. धनिया, मसाला, काला कि० अन्य. प्रथमवाक्य का द्वितीयवाक्य स तारा, दीविशेष सम्म धारक कालिग्यात. ना. मी किन्दवाली। किंशुक० ना. पु० पलाश, टाख, स् । कालिन्दी ना स्त्री० यमनानदा विशेष। किंकर ना• पु० टहलुआ। कालिन्द्री कालिया ना. ३० मलय, चदन । किंकरी० ना० स्त्री० दासी, टहलुइन । कालिया ना. पु. कालीनाग गु० काला । किंकिणी नास्त्रा० मटियध घग समत, काली० गा. स्त्री० मसी, देवीविशेष, पाईवृत। मिसर देशी नदी 7. पु. कालीनाग ला यमुना म किंफ्यान०मा० ५० घाड़ा। ' रहा करता था। शिचकिचाना० अ० कि० दातपीसना । फालीदह ना• पृ० यमुनाजीम रिशेषरधान । किचहाना. १० कि० श्रास्ता में कानयाना। काल्पनिक गु. पारोपित, पल्पना रियागया, किचपिचाना०प० कि. गड़बड़ाना । ना० सी० दी विशेष जो दक्षिण में है। किंचित् अत्य. थोड़ा, अल्प, कुछ । कावेरी ना.सी. नदी विशेष किचिन्मात्र० गु• कुछ, अतिग्रल्प । फास्य ना० पु. पद, श्लीय, पद, पुस्तक, किंचुक ना.पु. सनाविशेष । जिसमें कविताई हो, शुक्र । किंचुकी० ना. सी. चाला पांगया । किंजरका ना. पु० सिफावन्द । कास ना.पु. सासी, सोग्या। कासनी० ना. सी. भारगी औपनि। किटिना पुसुअर, सकर, यथा, बराइ-रको काश्मद ना० पु. कलोनी का साम। घृष्टि कालपोनी सिरिकिरि इत्यमर । मोर० ना० पु. देश० विशेष जो पनार ये विफिडाना प्र० कि० क्रोधसै दावीसन किदहा ना.पु. ऊगा, गुरु घुना। श्मीरी० ना• स्त्रा० कसर, भारी, का कितः अन्य पहा, फिर । श्मीरदेशवासी। कितना कितनी काश्यप ना.पु. कश्यपली मता। गु०प्रमाग का प्रश्नकारक किती काश्यपी गु. परन का स्पवान। काशी ना.पु. नगर विशेष कितेफ गु. बहुन । HTge ना. पु. पार, साता क्ति अगावियर एमेता ना. पु. की कित्तिा कत्ति, यग, रामचदिकाया , शिदना ना सीकुम्भी। पक्षा, अतएउपानि लय ममि देयमान ऐतिरे उत्तर है, पुकरमूल + : - -- मङ्गलकोप। ५८ १ ८ 1 न . किधर श्रव्य. पड़ा। फिलिम. ना. स्त्री. देवदार। किनारा. ना. पु. तर, वल । किलकारी.ना. या प्रसमता म हँसना । किनारी ना. सी. गाटा, मराती। किलकारीमारना कि प्रमनहोके जर किन्ना. पु० घार, अन्य योन्हीं। जयार करना, खूब हसना । न्तिय ना.पु.धनूरा। 'किलकिलाना अ. कि. चिचिाहाना । किन्तु० यय. परन्तु निमपरभी। किल्ली. ना. स्त्री. गनी दीला। किन्नरल ना. पु. यादवता। किरियप ना. पु. पाप, दार, गुनाह । किनरी ना. स्त्री. सारगी, यक्षिणी । किसलय. ना. पु. नीनपत्ता। विपलता. ना.पु.पा का वृक्ष । किशार० ना. पु. तरुणामारथा अथात् १६ किम् सर्व• क्यों किसप्रकार । वपतक का लटका। किमपि० सर्व. क्योभी, किसप्रकार । किसनई० ना. सी. सताका काम । किमर्थः सम्व. किसलिये। किसान. ना. पु. सातार, मन करोहारा, किमाञ्च० ना. पुनखजुहा, वींच । जान पिशेष। किमि० सर्च क्यों सिमप्रकार । कीचड० ० पु. बसूल । किम्पुरुप ना. पु. नवखण्ड धरातल में स कीव कीचड ना.पु. कादा, चला। एक नाम, कुछेक पौरपी। किंवा अन्य. अपवा। कीट. ना. पु. कीड़ा। किरकिरी ना. सी. द्वारी तकड़ी। कीटनारी कीग्सारी ना. स्त्री. हसपादी पौधा। किरकिरा० गु० रतीला बालुया। किरकिराना० . लि. विचविचाना, बन्न कीडा० ना.पु. कीर, कृमि, रिम। डाना। कीतनक० ना. पु. मुलहटी । किरण.. स्त्री. रश्मि, शुथा। कीमा० स० कि. करना। किरातः ना. पु. भील जानिविशेष, चिरायता ।। फार ना. प. तोतापती यथा फारशुको सम किरातक. ना.पु. चिरायता । स्त्यमर । किराना० स० कि० साफ करना, ना• पु. कीरत० श्रीपति वगैरह। मसाला, फीरति ना. स्त्री. कार्ति, बी, तारीफ किरि० ना.पु. किरि एकर । कीर्तन ना. पु. गाना, कीर्तन, पहना। किरिच. ना. स्त्री. तलवार टुकड़ा। कीर्ति ना. स्त्री. यश, सुनि, नेकनामी। किरिया. ना. स्वी० गपष, सौगद, सीह कील ना. स्त्री० लाहेका काम। किया। कीलना० स० कि. मन ककर रोक्ना । किरीट. ना.पु. मुकुर, तान। foटी ना. पु. अर्जुन ना० सी० शता] फीलाल ना. पु. जल, पानी। कोला० ना• पु. लाहका का। इली याधि, गु• मुकूटधारी। पिलायच्य निश्चित । कु० प्रत्यक यह अदर जिस शब्द के प्रथम किलनी० ना. सौ. की विशा। किलाविल ना.पु. यानरों का शन्द । सयुक्त होता है उसका अर्थ कभी पुरी, निदित, कभी न्यून होताहै, पृमी, . M हकीश० ना. पु. वानर, पदर। Abro - मङ्गलकोप। . 7. 4. C+3.1 উপct FREथुची ना. स्त्री० कलोजी । ना०पुः कुनार। जवारा नारजना पुरवततादि रचित रमणीय कुवारी ना०, स्त्री कुमारी :- " स्थान, तंगगली, पतीविशेष।" मुबारा ना० पु० विनान्याहा लड़का।। जिर० ना होथी, मुख्यप्रधान, रामाणे सुधारी ना. श्री कन्या निना रिवाही 'यथा, कपि कुजरहि बोलिलैपाय कुकन्या ना-रा० 'पृथ्वीकी कन्या विशेष श्री इंजिका सीता, गु, दुष्ट कन्या ।" :., कुंजी० १.ना. स्त्री० ताली चा15T- कुकर्म० ना० पु० युराकान-!' . | कुटकी ना स्त्री० श्रीपधि विरोप, फीटविशेष । कुकर्मीक ० कुकर्म करनेहारा । कुटज ना० पु० इन्द्रयव । कुमशुद० ना. पुं० मुरगा।" .. युटनामा पुभंडा, अ० कि फुटारड ना० पु सफेदभांटा, कुटका कुटनाना० स० कि० सलाना । "गए। फुटनी ना. रंगी दूती, गायिका। 51 कुटाना स० कि पिटना ।... 4RT मोटी गास्त्री० मुरसिया, मुरगी कुटित गु० टेढा, कर । करन्दना. पुं० जंगली करीदा। .45 कुटिलता झुक्रिया ना० पी० निन्दितांचरणं, तुच्छकर्म । टिलाई ना. स्त्री टेढ़ापन, पूरताना कुगृह० ना० पु. लयापर, बुराधर । फुदी घाट गा० पु. वेडौल, पदसूरत, कुत्सित्वांट, कुटीर० ना० सी०. मदी, , झोपड़ी, एकान्त जहा घाट न हो। स्थान, समिया हीर घातना स्त्री० कुत्तमय मारता, युरीयात् । शुटुम० ना० पु. कुटुम्य । कुमक ना. पु. केसर, जाफरान । मुटुमी० ना० कुटम्बी। मा० ना. प० गुलाल भरने के लिये जो कुटुम्ब ना० पु० कुना, घराना लाखका बनता है कुटुम्बो० ना० पु. गृहस्य, परवाला Fort अटेवा ना० सी० कुभाष, कुचालि, घुरो सो। शुच० ना० पु० रतन, चूची, उरोज ! (1jr, नी ना. ची० कुटनी। कुचन्दन ना० पु० पतंग निससे कपड़ा रँगते हैं। कुछारमा पु० फरसा, कुल्हाडी, तर कुचलना० स० कि० यूरकरना, मसलना कुठारी ना. श्री. कुल्हाड़ो, टांकी र फुचला ना• पु० अौषधि विशेष । भार कुठाहर ना० पु. कुसमय, ये मौका फुचिया० ना० ग्री० तोलकी, कानका अशोभाग । पुचैला? गु० मैला । . : .. कुरुकना थ० कि० कोयुक्त होकर के कुचना गु० ,दुःख, अप्रसन्नता कुड़कुड़ाना इना; रिसाय के बोलना ॐछस थोड़ा, रचक। इंदना . किदिलापकना, कलपना - कुज ना पु: मंगल, शाई, भामासरत कुजाति: गुनाचजाति, या नीच । बुढ़ाना स० किल, सताना, देना। ञ्चित बल्लेदारंवाल, गवारेवाल कुराटनना. पु०रयोनावृत। फुचिका ना०सी० मुनी,ताली कुण्ठित यु. लाजा, गटी, अंतिम अंदीरा० . . क- हकरना,हसदकरना। .
मङ्गलकोप। . कुण्ड० ना. पु. यागिरखनेके लिय कृतिमकुण्ड, | कुनवा ना० पु. कुणबा, घराना, खानदान । जतका विशेष स्थान, पति विद्यमान होते जार-कुनीति० ना० स्त्री० कुचाल, कुरीति, अन्याय । जपुर, गडहा, तालाच । कुन्त० ना० पु. पानी, पवन, कमल, भाला, कुण्डल ना० पु. वर्णभूषण, घेरा, मडला मोती। कराल, राना विशेष कुण्डलिया ना. पीगोलाई, पदविशेष। कुन्तल ना० पु० बाल, केश, पधार, नहीं, खुण्डलित० गु० गोलाशर, कुडलयुत । हल, सेनजीतने का, राजा विशेष, वानर कुण्डली ना• पु० कचनार, गुरच । विशेष, कपटी। कुएडी० ना. स्त्री. पोदी। कुन्तलीग्ना० पु. चिरपोय। कुतुप . पु० दिनका पाटका मुहूर्त । कुन्तिजा ना० पु० युधिष्ठिरादि पांडव । कुतर्क० ना० स्त्री० नीच विचार, बुरीदलाल । | कुन्ती० ना० स्त्रा० पाडवॉकी माता। कुतकी० गु० कुतर्क करनेहारा। कुन्द ना० पु० श्वेतवर्ण, पुरा विशेष, उज्ज्वल । कुतना० स० कि.दातों से काटना । कुन्दन०.ना. पु. उत्तमवर्ण, अच्छासोना । कुत्तल. ना. पु• धरातल, रूयजमीन । कुपति० गु० दुष्टपति, दुष्टस्वामी, बुरामालिक । कुतिया ना. सी• कुत्ताकीस्त्री गु० कूतनेहारा । कुपथ ना. पु. कुमार्ग, कुराह, बुरीराह । कुतुक० ना० पु. कौतुक । कुपथ्य० गु० जो पदार्थ पाचक न हो वा रोगी कुतूहल ना० पु. कौतुक, चौप, उतारली का उपकारी न होवे, बदहजम । खेल, हँसी। कुपरामर्श ना. पु. वुमन्त्रण। कुत्ता ना.पु.कुर । कुपात्र गु० अयोग्य, नालायक । पुत्सा० ना. सी. निन्दा, अवज्ञा। कुत्सित गुनिन्दित, नीच, पुरा, खराव, कुपुरुष० गुः पुरुषार्थ रहित, बुरा । निषेधित । | कुपत० ना० पु. कपूत, नालायक लड़ा। कुदकना०० कि. उछलना, कूदना । कुप्या ना.पु. चादी, रूपा । कुदरा. ना. पु. अन्न विशेष, मितसे लकड़ी कुप्पा० ना.पु. चर्मवा, बडापान चमड़े का चीरते हैं। जिसमे घी श्रादि रखते हैं। बुदाना० अ० कि. उछलना, कृदना। कुप्पी० ना. सी. धोयकुप्पा । कुदाना० स० कि. उदलाना, फंदाना। कुया ना.पु. कुरड़ा। कुदारि० ना० सी० मिट्टी खोदने का अस कुषजाना. पु. पुज। कुदला. विशेष । कुबड़ ना० पु. टेदा। कुरष्टि० ना० स्त्री. पापष्टि, बदनजर । कुबड़ा० गु• दुम्जा। कुदालना०पु० वचनार । कुजा गु. कुरड़ा, क्रपृष्ठ । कुधातु. ना. पु. लोहा रामयणे यथा, पारस कुब्जा ना. स्त्री० कूबड़ा, टंदी पूरी प्रसिद्ध । परस कुधातु सौहाई। कुवतः ना. स्त्री. निकृटवार्ता, बुरीनात । कुधि कुमण्डला ना.पु. धरामडल, राज्य। गु निदि, पुरागनि, तीन । कुमति ना० सा पूर्तता, ग्रहमकी गु• उ. बुनही ना. पु. मनसिल। ग्मत्त, मूर्स।
मङ्गलकोप। कुमद् ना• पुकुमुद। कुम्हारी ना. स्त्री. मातुविशेष जो अपना घर कुमदिन ना• पु. फाल। मागसे बनाता है। कुमार० ना• पु• बालक, रामपुत्र, स्वामि कुयोग० गा० पु. दुष्टयोग, दुखदायक प्रह पड़ कातिर, यामरहित। जाना, बुरामयोग, युराउपाय। कुमारिका गा० सी० क या, निसरी रजो कुयोगी० गु. विषय मागी रामायणे यथा पुरुष कुमारी धर्म नहीं भया, साधारण सुना, फुयागी ज्यों उरगारी, मोहरिप नहिं सस्त पीकुमारिपीधा। उतारी। कुमार्ग० ना. पु. कुपथ, युरीराह । कुरङ्ग गा.पु. हरिण, मृग। कुमुद: ना. पु. पाल जो रानि को सिलता कुरएटक. ना. पु. पियाबासा। है और दिनको सम्पुटित होताई उसको श्वत कुरयक कमलभी यहते है और रामदल में यार विशेष कुरमा मा० पु. यापा, घराना। कुरारिक ना. बी. सारसपती। था, चादनी, मुदरहित। कुरी ना. सी. समूह, घराना। कुमुदयन्धु० ना० पु. चद्रमा । कुरीति. ना. सी. कुचालि। कुमुदिनी ना• स्त्री० यमलिना । कुरीर० ना खी० युटी, मदा। कुम्भ० ना.पु. पहा, पलश, क्लशा। कुर० ना. पु० राना विशेष निसको सतान में कुम्भक० ना० पु. कुम्हार, योगक्रिया पवन, कौरव और पाएइव थे, नासएर पृथ्वी में पेट या ब्रह्माण्डमें रोनेसे कहते हैं। से एक। कुम्भकर्ण० ना. पु. रावणमा छोटाभाई । कुरुकेतु. ना. पु. दुर्योधन, युधिष्ठिर, राना फुम्मकार. ना. पु. कुम्हार, कुलाल । परीतिता कुम्भज० कुरुचि० ना. सी. नीचपासना, बदहनमी। नापु० अगस्त्यमुनि। कुम्भजात दुरुपति ना० पु. दुर्योधन, पुधिष्ठिर, कुम्भयोनिका ना. सी. गोमापीम। कुरराय परीक्षित। पुम्भवीर्य्य० ना• पु. रीटा। फुरुषका ना. पु• पूलविशेष। कुम्मा० ना.पु. घोगाम्म । कुरुयश ना० पु० रामापुरीसतान । कुम्भिका ना. सी० पुग्भी। फुरुक्षेत्र ना. पु• पुण्यत्र जहाभारतभरापा । कुम्भिनी ना. सी. परती भी। कुरूप० गु० भोंडा, पदमूरत । पुम्भी० ना. सी. पौधा जो तासाला में पानी कुटी० ना• पु० सेमर गए। पर जमनाद, ना. पु. हाथी, पायाल, कुा ना.. कुन्न। अगस्यमुनि । कुर्याल ना० सी० पी जर बाद में पाकर कुम्मीनस. ना. पु. सार । पर माताहै। कुम्भीपाक. ना. पु. नरकविशा। फुल ना.पु० वश, यरी, पराना। पुम्मार ना.पु. मगरमच। पुलटाना.सी.मनिचारिणी, नोभी परपति कुम्मायणा ना. स्थी. निसौत। रमप को भयांत् पनियता नहीं । कुम्हलाना... परमाना, सना। कुलचार ना०पु. या सम्पदामी भरवाडी पुम्हार० ना३० नोसिटी के रन नाताई। से रायो कद्वारे, नी. था। . ..
मङ्गलकोपः। -- " TL " . +7 कुलतारण ना• • पुन गा कुलसी यान पुरहाड़ी T० सी० पटारी मिसस लकड़ी रकर रासन र पुमा यातार । यादि कारन है। युलतिय० ना० स्ना० पनिना, सता यथा पुन्हिया ना. स्त्री० मारी का गं पात्र, चिनारीला सप्तशाताया, दाहा, रदत पदार भुररी। की कुरत कुलनिय दिडराय, तिर दिगम मुयलय. पु. कमल । जारराति गुरु लो सूखात जाय। सादी० गु० टए, कुराचारसी पुद्रोही गु० ॥ मनुष्य कर्म पर। यश का यन्दु० ना. पु० नीचरीर, बदनुतका । लाग्नतारे या जानकादरीदाव माविहंग• • पु. जुर्रा, श्येन, पास दुराधर्म ना० पु० वश यरहार, कुन्दाधर्म। घेरा. पु. यहरान, ममय । .77 फुलपून TET• कुलवादिरता या माय एश. ना. पु. तशीशेष गो पनि पनि गिना दुरापू-१० पापु हित । माना माताना या पुर, दविशेष, पाणी, कुलयमू० ० कुलर ता, तिर || . पपी के सात ीपों में से एक । युगलाना० अ० समला, पुलपुरणारा, যমুনা না না হয়। এ मुगलाना। पती जा यज्ञाद में पहिनते है। . मुलबती स्त्री० तुलानरनी, पतिव्रता । कुशल • पु. भलाई, कल्याण, चतुर - पुरन्त गुरू जो अचशन उपनाया। 'कुशलता ना. स्त्री. भलाई। युलवान् शलत्व: पु० कल्याए । पुलक्षए T र चित, दुरास्वभाव । उशवक्षमा सी. कुलक्षणा पी. दुलक्षणी० गु० निराके लहरा चुम्हों या है। कुशवान पराली गु० सुवा, प्रसन, निपुण । कुलाना. सी. मनमिल। कुशासमा ना.पु. दशा वासा मुलांच. ना. सी • कृद, भादनि, जत।' पुशीत गु० शीरा रहित, नेमुरवन । फुलांगना गारीफुनवान् रनों अथााग। कुशेशर्यता पु. कमल! पुलाचारा० पु. यशा धर्म, अपने घरात | उठा पु० ये द तोही। दृष्टान्तन० ना० १० पार, या पुलाल०० पु. कुम्हार । | युपेय० १० पु० तङ्ग, तलवार । एलाहल • पु० सोलाइल। ki | रुसूदन ना. पु० रियाली। पुलिश ग. पु. वम, होरा। एष्ठी० कोर्दी। मुली . सी. वीरयई। युसा पु० धुरे लोगों का साथ । कुलीन ना. पु० अन्वेपर या वश मनोउप |एसमय० ना० पु० पठिा समय, पुरे द पुतीनता. ना. सी. भलशरा अाधार कुसरात ना. सी. दुशलान ।.. पुरीनाई या पप्पा वा उत्पत्ति धर्म। इसीद ना. पु० चाभके लियेरा देना फुलोरएंगी. सी. रावती सुदाना.पु.कायाला एला ना.. मुख में जलकोसिव के | कुसुम ना० पु* पुशुम पूल, कुम : सानारथी कुसुमशर० ना. पु. कामदये । खैरनापियन } ग १ समया। प्राप्त - -- मङ्गलकोप! कृतज्ञता ना. सी. गुणवाद, उपकार मानना, कृष्णपक्ष. ना.पु. बदी, प्रवरा पास। यहसान मानना। कृष्णफला. ना. स्त्री० बाकुची, बहारीदा। कृतान्त ना.पु० यमरान, सिद्धान्त । कृष्णभद्रा ना• रसी• कुटकी । कृतार्थ गु० कृतगर्य, निहाल, अशधारी, मुक्त। कृष्णवीर्य ना. पु. तरबूत । कृति ना स्त्री काम परना । कृष्णवृत्तिका ना. सी. फम्भारी। कृष्णसार० ना.पु. कालाहरिण । कृत्तिका० ना० स्त्री. तीतरा नहर । कृतिमरला ना. पु. काचा | कृष्णा ना. स्त्री. नदी विशेष, जो दक्षिण भरतखण्ड में है, पापरी, यमुनानी। कृतिमतात ना. पु० रसौत । कृष्णाग्रज ना.पु. श्रीवलदेवनी। कृतिघासा ना.. श्रीमहादेवजी। कृष्णागर० ना.पु. काला गुरु। कृत्तिवासा कृष्णाफल. ना. प. स्याइमिर्च । कृत्या. ना. स्त्री. देवी, विशेष राक्षसी । कृष्णार्पण० गु० भगवानहेत । कृत्स्न० गु. अशेष। | कृष्णोपकुल्या० ना. सी. पीपरी । कृदन्त० ना• पु० जो शब्द धातु से बना है । कृस्मरी ना. स्त्री पम्भारी। कृपण गु० सूम, जूम, अदाता। कृत्रिम गु• बनायाहुया रचित । कृपणता ना. स्त्री. सूमी, जूसी, थदातृत्त । के अन्य सबन्धबोधक । कृपा० ना.नी. दया, मेहरवानी, रहम । केकयी ना. स्त्री० भरतजी की माता । रूपाणना.पु. सह, तलवार । केकड़ा. ना. कर्कट, गेंगटा। रुपालु० गु० दया शील, दयारत, रहीम । केकय० ना• पु. राना वा देश विशेष । कृमि ना. पु. कीड़ा। फेकरा. ना. पु. केकड़ा। कृमिन ना. पु. रिडङ्ग पोषधि । केका० ना. स्त्री• मोरपनि, मोरोंका शन्द । कृमिजम्घा ना. पु. काला यगुरु । केकी ना.पु. मोर, मयूर । रुश गु. तुरील, तीण, ला। केतकी गा. स्त्री वेवड़ा वृक्ष वा पुष्प विशेष । फराता ना• स्त्री• दुलता, पीयता। केतिक गु• थोड़े, दोचार, किनना। कृशाली गु.निसके घग सिंचेहुये हैं। केतु. ना. पु• नवमग्रह, पुष्पलतारा, पताका कृशानु० ना.पु. अग्नि, पागि। झण्डा वा झएड़ी। पाण केतुकि ना• पु० अाकाश, पुपरिशेष, सूर्य, चन्द्रमा, वापदेश, छन्द । कृषिकर्म ना. पु. हलभातना, सैनी करना। केतुमाल ना. पु. पृथ्वी नवसरडों में से एक कृग ना.सी. सेनी, किसनई। का नाम। कृपोयल ना.पु. किसान, कृपाण । केन्द्र ना. पु. मरस्ज, गोलाकार वा वृत्त- कृष्ण ना.पु. श्रीकृष्ण, श्याममुदरजी, माला, तेरका वह मध्यस्थान जहा से परिधि तक नीरा, कालातीतर, कालाहरिण, गु. श्याम, जितनी रेखा खींची जावें वह सन पररपर कालारग. दुन्यहों। कृष्णगन्धा ना.पु. सर्दिनन वृक्ष। केयूर ना• पु• चाभूषय तेवर। कृष्णता० ना• स्थी• पची, श्यामना। 'करि० ना.पु. केला वृक्ष, ना. सी. वेलि । . कृषिका (गा. पृ. किमान खेतीपाला । 1 मङ्गलकोप। केलि. ना. श्री. क्रीडा, विहार, ऐश | कैव० ना. पु. कदम वृक्ष । केली थाराम। कैवत. ना. मल्लाह, कहार, धीमर, रेवर । केघटना. पु. मलाह, खवा । कैवल्य ना.. मौत, मुक्ति । केवड़ा ना० पु. पुप वा वृहविशेष। कैशिक ना० स्त्री. बालों की लट । केवल अन्य मान, फकत गु० एरही। कैसा० सर्व किस प्रकार। केषली ना० स्त्री. जमपनी । केही भवि० कि०करूगा वा कहूगा । केवा० स० कोई। को यय० कर्मणिसच द्वितीयाका, सर्भ कौन। केश ना० सी० बाल । को सर्च० श्रश्चिय, एक, ना. पु० यमल केशफलाना स्त्री० बेरी वृक्ष या उसका फल | विशेष । यया स्निग्धच्छदा केशफला सौवीरिका, इति कोऊ. सर्व० कोई जोहो । निघण्ट । कोचना०स० क्रि० पेदना, घुमाना । केशर०मा० पु. केसर, नागकेसर । कोपल. ना. पु. नयेपत्ते, गुग्धा । केशरजनना. पु० भगरा पोषा। कोक. ना. पु. मय विशेष जिस में स्त्री प्र- केशरी ना. पु• हनुमाननी के पिता, सिंह। सग की प्रतिपादकता का वर्णन है, पपूल । केशव ना० पु. श्रीकृष्णचन्द्ररा एक नाम । कोकनद० ना० पु. लाल कमल । केशवेणी ना० सी० बालोरी ल । कोकर्ण ना.पु. असगध । केशाकेशी ना० पु० परस्पर बाला को पकड कोका ना• पु० चई चक्या, दूधगाई, फफूल के लड़ना वा लहाना। पिण्डखजूर । केशी ना. पु. दैत्यविशेष जिसको श्रीकृष्ण कोकिल चद्र ने वध कियाथा गुरु बालोंपाला। कोकिला ना. स्त्री. पहीविशेष कोयल । केशरिया० गु० केशरसे रगामया, पीला । कोकी ना. सी. चकई । केहरि ना० पु. सिंह, शेर, प्यान । कै० सर्च स्तिना, अनेक । कोखाधगु० बाझ, अभ्या। कैचली ना० सी०सापका खोल । कोख. ना. स्त्री. योख, कुति । केटमा ना. पु. दैत्यविशेष । कोला । ना० पी० गोदी, श्रोटो झौली। कैत. ना. पु. येथाका वृक्ष । कैतव. ना. पु.चिरायता, छल । कोट.ना.पु. गद, पिलश, नगर । कोटर० ना. पु. वृक्षको सोह। मा० पु. वृतविशप । कोटवी गुरुनगी सी०, ना. सी. काणाहरकी महतारी। कधी ना. सी. नागरीका एक प्रयास लेख जो मायरपों ने कल्पना किया है। कोटा. ना. पु. रानाताने का नगर विशेष । फोटिक ० ना. सी. एक घोरकी भुन, पहिला कैरप. ना. पु. काल, श्वेतस्मल । फिरोड, सी लारस । केल. ना. सी. अथर, गाभा कैलाशना. पु. पर्वतविशेष, जहा शिवजी कोठरी ना. सी० छोटा कोठा । कैलास और कुरेर धादि यहगप रहने हैं। कोठा. ना. पु. पाहा एक बड़ा पर । . कोखा ना० सी० कुति। कथाः पर, P मजलकोप 4 कोडिना. ता. कस्। कोर्थः सर्च किस हनु, किस स्यिा कोठी कारवा० महा ना पा रानामा मा फोता. पु० शार, नाचर ने विशेष, सान टकरा गया था। गरी ग लम्बी सरहा। कोदना० स० वि० सदा पोल्पलि. ना. ची रैथान कोहाना. पु. चार। वोलाना. मी पापरि । कोट ना. पु. का रंगशा। कोलाफल ना. पु० माद । होगा कि दु कोलाहताना पु.ल, रोला। शर कोही ना. पु. कहा। कोलिशाना. कार मरच।। कोरा पु. IT दिन पृया। कालिदास.नि.टी में रे| ma फादना, खा. अर पर तरफ । कोल्हर . पु. मित्र तेत निरन हैं या फादराड० ना० पु०माधना धना। उज परत है। कोन्या० पु. पाटी, अन 17। कोचिद: गु० परित खी कोना० ना १० जाटा सा रसायों, भकाराः ना. पु० फमम, मध्यगर । मिलन स बनना है परन्तु व रसा एक मूध कोशल ना. पु. कुशन दशावर। मन हा कोशलपी गा• पु. दररथ, श्रीरामचन्द्र, कापे० ना पु० मध, गुरह। अवध भूप फोफ्ना श्र० प्रापा हान्ग, गुरम्हारना, पेशलपुर० ना• पु० श्री अयायाजी। कोरतपुर स्त्री. कोपर कोरालाधीश .पु. दागलपति घी ना.पु० पावरा। নামায় रामचन्द्रजा। कापावित गुमान, सभा दोप० ना. पु. भाना, भएR भएड, कोपी गु. ५सात पाहा। खामद की गाट, लुसराना उजामा कापान० ना. सी. ला, ली। कोष्ठा पु० खान, छग अक। कोमा गु० नद्र, नया भाटा, नरम । काष्टकाना-पु. तख्ता। कोनरता. ना. सी. नरमा कालापन - कोत ना• पु० २ मा पा या २००० दरम पोयस० ० सी० पसा, वरण, पुश्य एत- कोशना० स० ० शप्पदना, ६ रामानना काइ . पु. क्रोध दुमदार, परमें भाग कोयला ना• पु० पार पुभाम।। लाना, दिसनता फोर० ना. सी. मगर, घर धार । दाहनी ना.स्वा.का र १ यसरी गार* कारप. पु. कली। दोहय 1. पु. डासना। दोपडी .पी. योग सपा काही प्राणी रामायण यथा, पर कुटार दोरा गु० मिनाई का काम सिर में अकरए वादा 187 पर या गुलाहा ।। वापस मिट्टी का नया पात्र नो काममा वीर अन्याया। पया हो। यार• • भोशिरड़। पोना..पु. ६.ग। पोरी । नीना,गा पु० जातिविनयापना. पु. प्रकारा, मद्रप । ना० रा.रा . । - शा. T का- अय० । 14 ।
मङ्गलकोप। खचितः । लिए फर० गु० कटोर, निठुर, परी, टंदा । स्वगमाला ना. पु. पक्षियों का समूह, तारा- परफर्मा० ना० सी० उधाहोल। जरी। फरवार० ना. पु. शनैश्चर, मगल, धादियवार खगहा० ना० पु. गेंडा, बाज, खगेन्द्र ना.पु. गरुड़, चद्रमा। शोध० ना० पु. कोप, गुस्सह, भेरवविशेष । खगेश मोधातुर० । गु० फोपी, क्रोधमें अध, क्रोधर्म सगोल० ना० पु. पाराशमण्डल । क्रोधान्धः मस्त। खग्ग ना.पु. वीर, बहादुर । शोधा० गु० कोपी, गुस्सा भराभया । स्वचनास.कि. रेखा परना, जाना। क्रोश. ना. पु. कोस, दामील, दो हजार ६ खपर० ना. पु. खच्चर, पशुविशेष, मेघ, ण्डकी माप । प्रहादि। कोटा ना० पु. गीदड़, भाल । खचा० गु० जडाऊ, खिंचाया। क्लिशित गु. दुखित, पीडित, रजीद । खजुरिया क्लीय. ना. पु. नपुसक, हिजड़ा। खजूर० ना. स्त्री. वृतविशेष। क्लेद ना.पु. गीलापन । खजूरि० लेदित गु• भीगाभया, तर । खज० गु० लगहा, ना.पु० खनन । क्लेश. ना. पु. दुस, पीडा, रज । खअन० ना. पु. पक्षीविशेष निसे सहेचा लेशित० गु• दुग्वित, पीहिन । वा सिसि दा भी रहते हैं। क्वचित् अन्य. कहीं। खञ्जनक० ना० पु. ममोला, सनन । छटिना. सी. पिण्डखजूर । सञ्जरिट. ना.पु. खजन। काण ना.पु. कौया। स्वारीट. काय ना. पु. काहानोरोगीकोपिलायानाता है । सट ना० सी० वाट । [ख] खटकल ना.पु. सवा। खटका० प्र० कि. शन्द होना, झगहना, ना. पु० पाराश, वर्ग, घर, शूय, रन लगना, शावरता ख. इंद्रिय। खंखारना०प० कि. खासना । खटफा० ना.पु. सदेह, शका, पावकीबाट । खगना० . दि. महाना, घटना। सटकाना० स० वि पाटदेना, शन्दवरना। खटखटाना० अ० कि. ठक्टकाना। खगालना० स.वि. धोना, अनवासना । खटछपर० ना. पु. ६प्परखट । खघारमा० सग० ना० पु० पक्षी, प्रह, सूर्यादि, मेघ, पवन, खटमल ना• पु. खारका पीड़ा । सरपर० ना.पु. मगडा, लड़ाई । देवता धीर तारागण। | वटाई ना. सी. अम्ल, सट्टापन, अचार । खगकेतु खगनाथ० खटाका. ना.पु. शब्द, चटारा। खगनाय ना.पु. सूर्य, चद्रमा, गरह। खटास० ना.पु सद्यापन, जन्तु विशेष । खगनाद खटिका ना. स्त्री. सेलखडी। खगपति० सटिया. ना. स्व. छोटी खाट ।
मङ्गलकोप। पैठना, समाना। । . , -- MA खटीक. ना. पु० जाति विशेष । खन० ना.पु. सण्ड। खट्टा गु० अम्ल, यम्बन्। खनक० ना.पु. मुश, चूहा। खटिकल ना. पु. सटीक, आखेटकी। खनकना० अकि बनना, शब्दहोना । खट्ट ना.प. पनिहार । खनन० मा.पु. खोदना। खरा० ना० सी० खाट । खनना० स० कि. खोदना खड़क० ना. श्री. गोशाला। खपत० गु० जो विक्गया, स्त्री. विकार । खड़कना० प्र.नि. मनझनाना। खपना० अ० कि. विकना, सूखना, ठहरना खड़खड़ाना० स० क्रि० टकटकाना, खर्राटा, मारना, झनझनाना। खपरा० ना.पु. घरछावने लिये जो मिट्टी, खड्यराहर० ना.५० शब्द होना, आहट । के बनते हैं। खड़सान ना० स्त्री० फिसान जिसपर बादि खपरी ना. स्त्री. शिरका ऊपरी भाग। बनाते हैं। खपरैल ना० सी० घर जो खपरों से छायाहो । खड़ा० गु• उठा, सीधा अडर, उचा, ठादा । खपाच० ना. सी० वाटा टुकड़ा। सड़ाऊँ० ना० पु. पादुका, कठनई । खपाना० स० कि. विश्वाना, पैठाना, भराना । खड़िया० ना० सी० होमिट्टी, दूधिय मिही। खपित० पु. जो विकगया, स्त्री. विसा । खड्ग ना. पु. तलवार, गैंडा, अमरे यथा । सपुर० ना० पु० स्वर्ग, अाकाश । गण्डके खड्गखड्गिनी। खप्पर० ना० पु. खोपड़ी, माटी का पान जिसमें खएड० ना• पु० टुकड़ा, खाद, अध्याय, दिशा। योगी जलादि पीते हैं, अंगठी। खएडन० ना. पु० दूषय, मिटाना, काटना । खम्पा ना० पु. बाया हाथ । खएडना० स० कि. दूपणदेना, तोड़ना, काटना। स्वभारू. ना. पु० पेटमें घागि पड़ना, घबराहट सण्डनार्थ गु० काटने के लिये । खम्बा ना. पु. स्तम्भ, धूनी, खण्डिनी० ना सी. काटनेवाली। खम्म० खण्डपरशु० ना. पु. श्रीमहादेव । खम्भा० ना० पु० सम्म, यूनी। खएडर० ना.पु. ऊन, वीराना। खर० ना.पु. सराम, गधा, घाम, कुत्ता खएडरना० स० कि० काटना, टुकड़े करना । अच्छा, तीक्ष्ण। खएडहल० ना.पु. उनड़ मरान, वीराना । खरक० ना० पु. सड़क, गोशाला । खण्डित गु० कारागया, कभी, अपूर्ण । खरखरा० ना.पु. खरहरा। पण्डितकरना० स० कि. बावकाटना, खपडना। सरपत्र ना० पु० मरुवा, सुगात पोधा । सतिल. ना. पु. पोल या उसरा सिरसा। सरवर ना. सी० घोड़े के दोड्नेका शब्द सत्ता० ना.पु. स्वरमर सलपली, शोरगुल, सह, कोम। खत्ती ना. सी. गइहा निसर्मेश भरते हैं । खरमरीना सी० अग। खदिर० ना. पु. सैर, कत्था । स्वरयटिका० ना. खोखिरहटी। खदेड. ना. सी. रगेद, अहेर । खरल. ना. पु. पौषध घिसने का पार। खदेना० स० कि० रंगेदना, भगाना । खरहरा ना० पु. घोडायादि मलनेकी यनु खयोत. ना.पु. सूर्य, तारागण और जगुन् । विशेष कीट विशेष खरदार० ना. स. कि. मारना, बुहारना।
७३ महलकोप हना। " . - सांसना अर खरा गु, चोवा, ठ, या।। ससाना० पुर जातिविशा। • • सराई मा० सी सचाई उत्तमता, सूर खसकना • कि. मिरपना, सरकार, सगरि ना० ० रामचन्द्रनी। rem सरिक ना० सी० राइक, गोशाला I Cखसमाना स० वि० सराना खरी ना० सी० सम्जोका पाना, गनी, अन्चीसससस. ना. स्त्री. सुगन्धित तृनिशाक तडा। सना० ५० कि' धसना, निरपना, निम्न खरे ४० सद, अंद, अच्छे ।। पड़ना खरोट ना. स्त्री० कोट, खतोर।. पसरा. ना. पु. यही, सरी, चुत खरोचना । स० किं नाचगा समरिना ससाना० स० मि. मिरान', विगाडा खरोटना ससीमाल'ना. पु. पत्थर विशेसनमा सई० ना० १० रागोचारणा विशेष स्थान, खांचा ना. पु-टोरडा, निरा विशार खर्जर ना. सी. चांदी खजूरन । खांना स्त्री. शरा, शरर । सर्जूरिका ना० रवी पिएड, संदूर । खांना० स० कि. छाना, फूटना।.0 खजूरी ना. सी. मराली। खांढा नापु० सड्गविशेष।"TI रापर. ना. पु० पीठ, शिर। xि० स खना, टांठा करना सर्च ना. पु. तुच्छ, हाटा, वामा, भाषा म सा श्री कहते हैं १०.......... खांसी ना स्त्री० ससा । न सांग ना. पु. गडे साग। खगेना. पु० मताद , रहर, परसरा, चिय, साजना रती० बुनली । ग्नसरा। साना ना पु० मिठाई पिशा। सरमा० ना० पु. सोने में पूर्ण। खादा ता. चारपाई। सन गु. दुष्ट, नीच, तुच्छ । खात ना. पु० गर्न, गदा, हार...- खतताना. स्त्री. दुष्टतात. खात ना. पु० गोजगुमा, लेखदी गना: खतवल ना. सी. हतबल ! रतनवा सत्ता। रातचलाना० अकि जलना । सारनपु० वर्ड', खरादी। सलयली. ना. सी० मलभर, दुला। साद. ना. पुरादि, घरा)Larry राला ना. सी० पनुरिया, दृष्टिनि। साद्य गु० साने व योग्य जो परतु । सहान गु० वरा बटुवचन / खाना स० कि. भगा करना. अ.-: खखारिक ना. पु. श्रीनारा। सलाब ना. पु.निचान, परती। रामाग, उपार्जन का भोग करना ना १९ सहिया गा० ३. सलिहान, सदा खानि ना० सं० पाई, अहोग, वाति भोजन। खलियाना सकि० छीलना, उधेड़ना । खलिहान ना० पुपन माइने वा मुद्ने सानिक गु० सानो पो जो वस्तु । - स्थाना का स्थान विशेष परू खारफा० ना.पुछदाता। सली. ना. सी. निजादि की गद। ..सारा र साना । रालीताना.पु. मेस, पारसी शब्दह। । सयामा साल ना. सी. बम, धोपनी । . 13 " . . खारीक गु० जना गमा, सौदाला । ।
७२ मङ्गलकोप। खेटकर ना० पु. अहेर, शिकर और अस. खोसना स० कि. टासना, पुतहना ! खोखला गु. चांगला, साती। विशेष। खेटिक. ना. पु. वधिक, शिकारी। स्खोखली ना. सी. उपरकामदार, जो ठोस नहीं है। सेत. ना. पु० देर, समरभूमि, पुष्पदेन, यह खोज: ना. पु. इद, यन, चिह, पहिचान । भूमि जहा अनादि उपनता है। खोजना स.कि.दना । खेतल. ना. पु. कामरइल । सोटना. सी. दोष, अवगुप। खेती ना. सी. सिनई, गु जोताउ । | खोटा गु• भगली, दोषी, भूटा, अरी। सेद० ना. पु. शोक, दुस, पश्चात्तार। खेदना स० कि. सदेदना, सदाना और पोचा सोटाई० ना. सी. भगलपन दोष । स्रोदना. स. दि. गोड़ना, करकोलना। करना। खोना. स.शि. गंवाना, उड़ाना। खदित गु.दुनिन, पादित, सतायागया । सरा. ना. पु. ऊजड़पुर, ई ह । खोपडा ना. पु. लला के ऊपर का अग सरी ना. सी. लोहाविशेष, हल । नारियल की दी। खेल. ना. पु० कोड़ा, जीवदलार । खोपड़ी ना. सी. मस्तक ऊपरका भाग दिलका। खलना. स. कि. क्रीडाकरना, जनहलाना सेवक खोपर० ना. पु. शिर। ना. पु० नाविक, ढाडी और मलाह, 'स्रोपरा. ना. पु. सोरगा। सेवट सेवनारस. कि. डाइमारना, नारचलाना। सोपरी ना. सी. सोपड़ी। सेपा० ना० पु. उतराई, भाडा, पाटीदना, सोपा ना.पु. नारियल का मोला, जुड़ा । उतारा। खोरि ना. नी. दोर, ग्लानि । खोरी ना. सी. गती, मार्ग, दोष, ग्लानि । सेह. ना. सी. रास, धूलि, साक। खोल ना. सी. काटी, ढकना, दौहर, गदा । संच. ना. सी. उसाद । संचना. स. कि. ऐचना, कसना, दानना। खोलना० स० वि० प्रकट करना, विधाना, उना, लगर उठाना। सैचाच. ना.सी. ऍचा ऍची, सैचा सैंबार्सची संधी खोह ना.पु० गुफा, गड़हा, कन्दरा। सर० ना. पु. कया। स्वाहा सौरि० सैलाना.पु. दोहान, नयाल वा घड़ा। ना. स्त्री० तिलक। सोमा. ना. पु. लेट, सुरसी, दूध जो उबालक खौलना०प० वि० उबलना । गादा कियानाता है। ख्यात गु० प्रसिद्ध, प्रतिष्ठित, मराडूर । ख्याति खोसना 5. कि. खासना। ० ना. सी. यरा, भारु, शुहरद। साखी ना. सी. सामी। ख्यात्यापन गु. कीर्तिमान, नामी। सोच.ना. सौ. चीर । ख्याल ना.पु. कीड़ा सेल । सोचना सकि• घुसेड़ना। (ग) वाचा ना.पु. भार, मोक। गाना स.शि. सोना, उदाना, बहाना । खादकल ना• पु. गाहा। गंयार.ना.पु. गावापासी, कुपदा । खोता. ना.प. घोसड़ा। गगन ना.पु. पाकाश, प्रासमान । r मङ्गलकोप। " . गगनचर० ना.पु. पड़ी, देवता, महादि। गजबुसाना० पु० लावृक्ष । गगरी० ना. वी. कलशी घडा। गजानन ना. यु० गयेशजी, हाथी का मुख । गंगा. ना. स्त्री. भागीरथी नदी प्रसिद्ध । गजाशन ना.पु. पीपल, पीपरि । गंगायमुनी ना. स्त्री कर्णभूषण विशेष ! गा० ना. पु. रोगविशेष जो शिरमें होता है । गंगाद्वार० ना.पु. गगोत्तरी, हरदार । गला गुनिसकै शिरमं गज रोग होवे, ना. पु. गंगाधर० ना. पु. श्रीमहादेवनी । गाजा, भाग, रोगविशेष। गंगासागर० ना• पु० गगा और समुद्र या गजित० गु• नशायागया। सगम जहा कपिलदेव का स्थान है। गटपट० ना० स्त्री. उलट, पुलट, मिलित । गंगेरुकी नास्त्री गगेरुया । गटी० ना० स्त्री० समूह, रामचद्रिकाया यथा गंगोत्तरी० ना. स्त्री. गगानी के प्रकाश का सब जात फटी दुख की दुपटी कपटी न रहै स्थान जो बद्रीनाथ के आसन है। जहें एक घटी, निघी रचि मीच घटीहू घरी गंगोदक० ना० पु. गगाजल । जगजीर यतीन की छूटी चटी, अघ श्रोष गच ना. सी० चूना, लेट । कि वैरी कटी विर्टी निटी प्रकटी गुण ज्ञान गचपच० ना० स्त्री. उलट पलट । गटी, चहुँ ओर न नाचत मुक्ति नही गुण धून गच्छ० ना.पु. मुकाम, चाल । जटी जटि पचवरी। गजल ना. पु. हाथी, दो हाथ की माप । गट्टा० ना० पु. क्लाई, मिठाई प्रसिद्ध । गजकेसर. ना. स्त्री. नागकेसर । गट्ठा० ना० पु. बड़ागठरी। गजकृष्णा ना. स्त्री. गजपीपरित गठना०प०कि. जुड़ना, मिलना। गजगामिनी० गु• जिसकी हाथीकीसी चालहो । गठरी ना. स्त्री. मोर, मोटरी, मुण्ट । गजगाह० ना० पु० झन्वेसहित हारा भूमण । गठाना० स० कि० सिलवाना, पैर दलगवाना। गजगौनी गुरु गनरमनी। गठिया ना० पु. गोन, गु- गाँठावाला। 'गजचिमटी ना. स्त्री इन्द्रवारणी। गठीला गजही अ.कि. गरजता है। गठिहा० गु० गाठोवाला, गठाहुया । गजदन्त ना. पु. हाथी को दात । गड़कना सौ. मछली वा मधली वि. गजपति० ना० पु० हाथियों का स्वामी अर्थात् गष्का शेष । रामा वा निसके हाथी हों। गड़गड़ाना० स० कि. गरजना । गहरिया० ना. पु० जाति विशेष जो भेड़ें गजपाटल० ना. पु. कन्जल। पालते हैं। गजपाल ना.पु. महावत, पीलवान् । गड़न ना. सी. धसन, दलदल । गजपिप्पली० ना. श्री. गजपीपरि । गड़ना • कि धसना, पैठना, विदना । गजभिषक् ना. पु० साठि । गड़बड़ ना० पु० गटपर, उलट पलट, गजमुख० ना. पु० गणेशनी, हार्म का मुंह। गजमोती ना. पु० मोती जो हाथी के मस्तक गड़यड़ा. ना. पु० सलवली, मरोड़ा, गु० सद. में होता है। रहा घबराया भगा। गजरा० ना.पु. गानरकापत्ता, फूलोंकी माला। गड़यडाना • कि घबराना, सलबसाना । गजवदन ना. पु. गणेशजी। गरपडाहट ना. स्त्री० हजार, भय । हस चल।
मङ्गलकोप। ७५ - T स - गदेला ना. पु. मोग विछोना वा निसर्म बहुत गन्धिकार ना० स्त्री आहोर । रर्द भरसर पहिनते हैं। गान्धकारिणी ना. स्त्री• लनान्। गद्गद गु० हर्षान, शोर वा थानन्दमें मग्न । गन्धिलुब्ध० गु० जो सुगन्धि ये लालच में हो। गद्दर० गु० अधपका। गन्धी ना० पु. अत्तार, माथित तेल बेचने गद्दी १० सी० तकिया या विछोना वा असिन हारा। या राजा का सिंहासन, जातिविशेष गन्नार ना० पु. ऊस, गाडा, खड। गद्य ना० पु. प्रदविना मान्य, वार्तिक । गप गधा० ना.पु. गदहा। गपशप ना. श्री. , बरबर। गन०मा० पु. गण। गप्पी गु० वषादी। गनना० स० कि० गिनना, शुमारकरना । गमस्तिना० स्त्री. विरण, ज्योति । गन्ध. ना. पु. कदमवृक्ष, श्री. वास, बृय । गभीर० गु• गम्भीर। गन्धक० ना. पु. श्रीपथविशेष । गभुआरे० गु० घलेदार वाल, पैदायशीवाल । गन्धगर्म ना. पु. बेलहरु । गमन ना० पु. चलन । गन्धमादन० ना० पु० पर्चतविशेष । गमनागमन नाकपु. जाना श्राना। गन्धमूलक ना. पु० रचूर । गमनी नानी चलनेवाली। गन्धमूलिनी० ना. स्त्री० यमूर भेद । गमनीय गु• चलने के योग्य, चलनेवाला । गन्धमूली० ना रखी० रासना । गम्भीर० गु० गहिरा, परमाह। गन्धराज ना पु० चदन मुगधित, विशिष्ट गम्भीरता ना० स्त्री० गहराई । गम्य गु० जानेके योग्य, मिलनहार । गन्धर्व ना० पु० देयता, सर्ग के गायक । गय० गन्धर्चनगर ना. पु. सामा य गधर्वलोम गयन्दर ना० पु. हाथी । विशेष मुख्य प्रायशमें जो चित्र विचित्र की गयाना. स्त्री नगर या तीर्थविशेष जहा मृत दृष्टि श्राती है जब देरतक देखने से भारत हिदूलोग पुरुषों को पिण्ड देते हैं। निरमिरा जाती है। गयाली ना० पु. गयानाल, गया ब्राह्मण । गन्धर्वहस्तकल ना. पु. बेला । ग्यारसना- स्त्री. एसदशी। गन्धरद नापु. वायु, परन, हा ग्यारह गु० दश और एक ११ ॥ गन्धसार० ना. पु० चदन । गर० ना.पु. रोग, शिष, गला । गन्धा. ना. पु. नागदोन, पदमवृक्ष । गरगराना० अ.क्रि. कहीरना, गरजना । गन्धान० ना. पु० सुवर्ण, सोना । गरजना ० कि. घड्यडाना, शब्दकरना। गधायूश्मा० ना- पृ० गधक। गरल०मा० पु. विष, हलाहल । गन्धार० ना० पु. रागका स्वरविशेष । गरह ना. पु० गठियावायु । गन्यारी ना० सी० दुर्योधनवी माता, श्वास गरागरी ना० बी० देवदाली। "जो वामान में प्रकाशित होती हे ज्ञानंतरगे गरारी० ना. वा. ररसी वा सत मटनेकार्यन, यथा, गधारी वामाद निवासी, हल निड्डा पसे जल निकालनेकी गोल काटको तो दक्षिण दिग्यासी । गरिमामा यी. 'गुरुता, गम्बई, अहङ्कार गन्त्रिक ना० सी० बाम, धूर्य, गायक । पाठ सिद्धि में से एका नाम । पुप। 17 - 1 मङ्गलकोप। -- . . . . . गरी ना. सी. नारियल का गूदा, गुठली। गलफटाकी ना. स्त्री. नहाई, धमएड । गर.ना.पु. गला। गलफड़ ना. गरड़ ना० पु० पती जो श्रोणुिका वाइन है। गलफड़ा गलगाहाना स्त्री. गोदी।। गरुड़ाग्रज ना. पु० सूर्य का रथवान । 'गरता स्त्री. गुरुता, बडापन ! गलसुई. ना. स्त्री• तकिया, सिराहना । गलस्तनी० ना. स्वी०श्वरी । गरत्मान् ना• पु० गरड, सफेद हस1 - गला ना.पु. कठ, शब्द । गरव० गु• भारी, बोछिल। गर्ग ना.-पु० मुनिविशेष जो यदुवैशियों के गलाघोटना० स० कि० नही दयाना, बट तो ड़ना। पुरोहित थे। गलाना० स० कि. पिपलाना। गर्गज गा. पु. दीना, बढ़। गला. ना.पु. पिघलाव । गर्ज ना. पु. उत्तर शब्द, गडगडा गलित० गु० पतित, द्रवाभूत, मग। মলন हट। गलियाना स. कि. धुरारहना, गालादेना, गत ना. पु. गढा। बरबस भोजन कराना वा श्रौषध धूमना । गईभ 1. पु० गदहा। गली. ना. स्त्री. छोटामार्ग। गर्भ ना. पु. पेर, आधात, हमल । गरना स्वी• दाव, धात, मौकश, लाभ । गर्भकएटक. ना. पु. कटहरू । पवन ना० पु० गमन । गर्भकर ना. पु० पनिनिया यथा पुत्रनीर गवरि० गर्भकर इति निघण्टु गु. गर्भारक । गवरी ना० रवी पार्वती । गर्मदास० ना. पु० मोलका दासी वा बे।। गवलद. ना. पु. भैसा। गर्मपात गु० पेटका गिरना, हमलगिरना। गवादिनी• ना सी० इवारणी । गर्भपाताना. पुरीठा । | गपाश ना. पु. कसाई, म्लेच्छ । गर्भवताना. वी. पेरसे गर्भिणी, गाभिन । गयाक्ष ना. पु. झरोखा, मुख्य वानर। गर्भस्राव ना. गु. गर्भपात । गयेधुका० ना० सा. गगेल्या । गर्भित गर्म अर्थात् पैर म रहनेवाला। गया. ना. पु. गायक, गानेवाला ! गव्य गु० जो गाय से सम्बप रसता हो यथा गर्व गा. पु० यहवार, दम्भ, गर । गर्ववती गु. स्त्री• यहारिन । दुग्ध धादि। गसना० य०कि. वचना, घिरना, रुकना। गर्वित गु० अहहारी, मगरूरी। गहगह गु० धना, जोरसे। गर्हित. गु. निदित । गहन ना. पु. भारी, ग्रहण, परड़ना, दुस गल ना.पु. गता, फासी । निपल, पन। गलकना० म.कि. गलना। गहना सकि• पकड़ना, महणकरना,ना.पु. गलका ना. सी. पोड़ा विशेष, साइविशेष। गलगएड. ना. पु. गण्डमाला। गलगल. ना. पु. चकोतरा, पशिष। गजना प.कि. पिपलना, घुलना। गहरा ना.पु. गम्भीर । गहरु ना.पु. हील, देर। . जेवर, गिरवा, भूपण। गहनी ना. स्त्री सनपरास कालोपत्ती। .
मङ्गलकोप। गु पना। । + + म गाधिसुतः । हवर० गु० धारा,रोयासा, घना, पठिन । गाण्डीव. ना. पु० नाम उसपनुषका है जो अग्निदय ने अर्जनको दिया । [अव्य. गया। गाण्डीवधरना. पु• अर्जुन, पाण्डुपुर । जाना. पुवृतविशेष की पत्ती या रसगात. ना. पु० शरीर, तनु, देह । मा०यादि। ठमा साकि वाधना, वशमें लाना, सी गाता T० गु० कागज निस स पुस्तकको जिल्द बनाते है। ठिना० रनी. यि, गिरह । गाता० नासी० एकरसर की चादरा वाचना: पट्ट, ऊर्णवस। डे० ना. स्त्री गुदा, फूल, पुट्टी मिट्टी की जा गात्र ना० पु. शरीर, दह । कृप म लगाते हैं। गाथक० ना. पु. गायक। गांडर० ना. सी. तृणविशेष । गाथना० स० कि. गूधना, गाना। गाड़ा. ना. पु० इच, गा, ऊख । गाथा.ना. स्ना०क्था, समाचार । गाडू० ना.पु. मलेसिया, लतिया, कुली । गाद०० स्त्री. रघर, गोंद। गांव० ना. पु. ग्राम, पुर । गादी० ना. स्त्री. गद्दी। गावना० स० कि. गाना । गाधिक ना. पु० विश्वामिन के पिता । गांसना० स० कि० निरमाना, घेरा, बरमाना, गाधिनन्द ना० पु. विश्वामिनमुनि । पिरोना। गांसी० ना. पु. तीरका फल, लोहा जो तीर म गाधेयः ना.पु. विश्वामित्र मुनि। लगाते हैं। गान० ना. पु० गीत, राग, भजन । गागर ना० सा. गगरी, बलशा, घड़ा। गाना० स० कि० अलापना, तानभरना । गागेय ना० पु. भीम, सुवर्ण । गान्धार० ना० पु. राजाविशेष, रागरा स्वर गाछ० ना० पु० वृक्ष विशप । गाज० ना० सी० झाग, पेना, बिजुली, गामना. पु. गर्भ। वा गामा० ना. पु० केल के वृक्षरा नयापत्र, ग्या, गाजना० कि० हषितहाना, गरजना । पत्ता। गाजर० मा. खी० मूल, विशेष । गाभिन ना. स्त्री० गभिणी। गाजावाजा ना० पु. नानाप्रकार से बाजा गाम ना. पु. गाव । या शब्द। गामी० गु० चलनेवाला, रमनेवाला। गाड़. ना. पु. गदहा, गडदा, गर्त । गाम्भीर्य० ना. पु० गम्भीरता । गाड़ना स.क्रि. तापना, समाधि देना, मिट्टा गाय. ना. स्त्री गौ। देना, लगा। गायक. ना. पु० गपया, गानेवाला। गाड़ा० ना० पु० घात, गडहा, गौडया गायनी ना. स्त्री मात्र विशेष, छद, सभा, गाड़ी० ना०बी० बरड़ा, लदी, रथ् ! " महासिद्धि। गाढ नारा जमात, विपति। गायन ना० पु. गवया गानेवाला tr गाढ़ा० गु० मोगा। चतुर, कठिन, ना पु० गार० ना. सी. गाली। . कपड़ा विशेष गारना० स० कि. निचोड़ना, धोना। . 4 Tot -- 7 मङ्गलकोप। . का गाला। माइना. . गाहपत्य ना. पु. अग्नभद । गिरि० ना• पु. अदि, पर्वत, पहाड़ । गारा. ना. पु. भीति बनाने के लिये बनाई | गिरिकद्रक ना० पु. महा नीर । हुई मिट्टी। गिरिजा ना.पु. शिलाजित ! गिरिजा ना. सी. पारनी। गारी ना. सी. गाली। 'गारहि साप, सापस विष झारनेवाला, सूर गिरिजानन्द ना. पु. गणेशनी । कान्य यथा, हार मार गारुडो पुकारत श्रावत गिरिधर० १ गु. पर्वत उटानेवाला ना• पु. गिरिधारी पाणचटनी, श्रीहनुमान् । तहरि न जान कहीरी गिरिनाथ ना.पु. श्रीशिवनी, मुमेर, गाएत्मत० पु. पन्ना। हिमाचल, हिमानय। गाल० ना. पु. कोल, खसार, बात । गिरिर० ना. पु. लदा। गालव ना.पु. मुनि विशेष । गाला. ना. पु. गइ या पली, धुरी हुई रुई गिरिराज० ना. ५. श्रीशिवजी, हिमालय । गावन, सुमेर, श्रीकृष्णजी। गाली ना. मी. अपमान का बोरर वाक्य, गिरिवर० ना. पु० पर्वत, पहाड़। उखली। | गिरिसृष्ट ना. स्त्री० गेम्स। गाह. ना. पु०माह । गिरिसाह्वय० ना. पु. शिलाजीत । गाहक गा.पु. खरादार। गिरीश ना. पु० श्रासदाशिन, समर, गाहना० स० कि. इदना, दारना, थाह लगाना, हिमालय। गिलटारसी० नसों की गाठ । माहा गु० गाथा, अवगाह क्या ना• पु. गिलहरी ना. स्त्री जीव विशेष जो वृक्षोंपर, छादविशष । रहता है। गाहिगाहि० गु• दृदि दवे । गिलोय ना. स्त्री. गुरुच । गाही ना. स्त्री. पाव, माड़ी, थाहा हुई। गीजना० स० कि. मलना । गिंजाई. ना. सी. कीरविशष । गीत. ना. पु० राग, गान । मिचिपिचिया ना. पु. क्चपिचिया। गीता. ना. पु. रथा, अभ्यामशान, घा जिस गिडगिड़ाना० स० कि. विधियाना, खुशामद पुस्तक म अप्यामज्ञान होते, यथा भगवद्गीना, गिद्ध ना.पु. पक्षी विशेष, विरगिस । गिनती.ना. स्त्री. गणित, गीदड़ ना. पु. भृगाल, सियार । गिन्ती० मिचो, शुमार । गिन्दुक० ना. पु. गेंद। गीला. गु• प्रोदा। गिना स.वि. गथन, गिन्तीकरना। गिरगिट ना.पु. सरय, कलाम । | হাত দ• • যন্ত। गिरना..कि पाना। गरपडना कि यूपना, अकपड़ना। गुगागु० गूगा, द वला । निरा. स्त्री सरस्वती, पायदेवता पापी गुच्छा. ना. पु० घौर, पोचा, बाल, पो । गिराना स.वि. औधाना,पटकना पलकाता। गुजरात. ना. पु० देशविरोध । . करना। रामगीना। A गीर्वाण ना.पु. अमर, देवता। गीपति. पु. हस्पनि । edTOM मङ्गलकोपा ७६ गुडा गु• छिपा, पोशादः। गुणकाना सी. विशेष खमाव; प्रवीणता, गुह्यक. ना. पु. यन, कुवेर के दूत ।' विद्या, डोलं, मा, रसी, धनुषकी 'पंचचरित्र गुह्यकपतिः ना० पु० कुवेर ।' यहसान। गुह्यस्थल ना.. पु. एकान्तस्थान वा लिया गुणकर ना० पु. निस अंक से गुणन करें। अंग, यथा, भग।। • गुणद० गु, गुणदाता, लाभकारी। गुंजा नास्त्री० गुंजा धुवुची गुएन ना. पु. गुणाकुरना, जरब , गुजरना० ० कि० दहाड़ना, गूलना। गुणना० स० कि. विचारना, गुणन करना, गुमान० गु० गादा, मोटा घना, फारस' का गुणवता. ग. माला गुणवान् । गुणवांचफर गु० गुण बतानेवाला। गुंजार० ना पुः शब्द, दहाई, गर्न । गुणवान् गु० प्रवीण, पुण्यवान् । गुंजारना था कि हूँ।ना, गुंजना, शब्द गुणदा० गु० गुणो, ज्ञाना, चतुर । करना। गुणी गुरु.प्रवीण, पुग्यवान् , विद्वान् विचारी: गुटकनाश• कि क क करना, कपात का ना. पु० संपरा। बोलना, निगलना। गुण्य. ना.पु. निस अंक पो गुणा करे ।। गुटका ना. पु. ' पुस्तक विशेष, वस्तुविशेष गुथना० अ० कि. पिरोगा । "निसको योगी मुख में रखकर लोप होनाते हैं गुथयां गुथाहुया। मिठाईविशेष, चांदी की वस्तुविशेष जो मृतक गुदना० सी० मलस्थान, गांड, गुदा । की क्रिया में लगताहै, छोटी पोथी। गुदगुदाना० स० कि.० सहलाना, चुतचुदाना । गुटकाना स० कि. कपोतका बुलाना । गुटको ना. सी. पाथ पांव समेटना । गुदगुदाहट ना. सी. सहलाहट सरसरी।। गुटिका ना० स्त्री० गोली। गुदगुदी गुठली० ना. स्त्री. फलको बीन । गुदड़ी. ना. सी. तागाहुया वस्र, गुजरी, गुड़ ना. पु. ईपका-जमाया रस मिष्टान । चौक, बाजार । गुड़गुड़ाना • क्रि० गड़गड़ाना। ", . गुदा ना० सी० मलस्थान, गाड़। गुदगुदी० ना०सी० घाटा हुका। गुदामंजन ना. पु. गांड मारना इरा. गुडपुत्रक० ना० पु. उस्त, गना। गुदमर्दन गन० ना.पु. गुण। गुडपुष्प ना. गुनगाहक ना. पु. गुनका चाहने वा.जानने वाला, विद्याका प्रतिपालक । गुडा० ना०प०अंगर, दाख। गुनगुनाना० अ० कि. थोड़ा गरमहोना और गुड़ाकेश ना. पु. अर्जुन, सदाशिननी। ' नामसे वोलना। गुड़ाना० स० कि० खुदाना खुदवाना। गुनवन्त गुड़िया ना० सी० सिलोना, कपड़ोकी पुतलो। गुनयान्० “गुगुखवाना खी० गुरच । गुनह ना० ३० दोर, पाए, कसूर, रामायणे गुडी० ना स्त्री कनकौत्रा।। यथा, गुनह लषणकर हमपर रोष, कतहुँ सुधाई ते गुदीना पु. छिपनेका स्थान। रड़ दो। गुदगुदाई } F लाम। गुईल. ना. पु० महुअा। *.54 } गुडूची ना० ।
20 मङ्गलकोप। . - गुनानि ना. स्त्री मनमें कला करना । गुलिक ना. पु. मोती। गुनी० गु० गुणी। गुलिया ना. नी. शिरके पावे या गड्ढा । गुन्यनिक ना. सी. म्पनी, पोहाइट। गुलेल ना. सी. धनुष निसमें गुल्ला चलाते हैं । गुप्त गु० लुवा, विपा। गुल्याल० ना. पु० गलेल । गुल्फ० ना. स्त्री० पीली, एडीरे ऊपरका भाग। गुप्तार० ना. पु० विपनी, लुरुना, लुकाव । गुप्तारघाट० ना. पुल अयोध्यानी में स्थान गुल्म० ना. पु. रोग विशेष, गुलाल, पाह। गुल्ला ना. पु. गुलेला, माका छोरागोला।। विशेष गुल्लाला ना• पु० फूटविशेष यह शन्द गुप्ती० ना. सी. साविशेष जो साँटे में पारसी काहे। रखने हैं। गुयाक० ना.पु. सुपारी का दृत । गुफा ना० सी० खोह, कन्दरा। गुवालियर० गा. पु. देश वा नगरविशेर । गुमाना० स० कि. घुमाना, गाड़ना । गुष्टि ना० सी० सम्मति, सलाद, मिनता । गुमटी ना. सा. कपड़ा विशेष, ग्लशा । गुह. ना. पु० सामिकर्तिक, तिपाद, मल । गुराई ना• स्त्री० बडापन, गोरापन । गुहना० स० कि. गूशना । गुरु० ना. पु. प्राचार्य, शिक्षक, वृहस्पति, पुरो | गुहा ना. सी. गुफा, कदरा। हित, द्विमाविक अक्षर, गु• भारी, बडागरुया। गुहाना० स० कि० गुपवाना। गुरुतर० गु• अयतभारी, थय दमाय । गुहारि० ना..पु. ताड़कासुर, ना. सी. सहा गुरता० ना. सी. रडापन, प्राचार्यता। यता, सहाय, मदद। गुरपाफ ना. पु. जो वस्तु बहुत दरम पचेगू० ना०प० गृह, रिष्ठा। गुरमुख० ना. पु० जिसने गुरु कियाहो, शिक्षा | गंगा० गु० मूत्र, जो बात न करसकै, ना.पु. वा इष्टदेवका मार गुरुसे लिया, चेला । तृणादि या टार, मिटाई विशेष । गुरुमुखहोना० १० लि. चेलाहोना, गुरु म गूज ना सी० शब्द, भिनभिनाहट । इष्टदेवता का मन्त्र पाना। गूजना 20 कि० गूजरहना, भिनभिनाना । गुरुवाइन० ना• स्वी• गुरुकी पली । गुथना० गूदना० स० कि. पिरो, लदिया। गुरुवार० ना.पु. बृहस्पतिवार जुमभरात । गुर्जर० ना• पु. गुजराती या गुनरातदेश विरोप गंदनी ना. सी. वृक्षविशेष या फत जोप गुदित्य ना• पु. जर सूर्य और बृहस्पति एक श्चिम में ग्रीष्मकाल में होताहै। राशि के होनाते हैं वह समय। गूधना स• वि• सानना, गूथना, बिनना। गुर्विणी ना. सी. गर्भवती, हामित । गूजर० ना.पु. नीचजाति विशेष । गुल• युझाना, दोपस्या उदाहोनाना। | गूजरी० ना सी• गूजरकी स्त्री, गहना विशेष गुलगुखा० ना. पु. पकवान विशेष । जो पाव में पदिनाजाता है। गुलाई ना. सी. गोला, गोलाई । गूढ़ गु० सूक्ष्म, कठिन, गुप्त, भीतर ।' गुलाप० • पुः पृरु वा उसके फूलों का रस,तत्य। गूदगिरा० ना• स्त्री. गुप्तवाणी गोलपात, गुलाल. ना. पु० प्रचार का नोप्रियतमके ऊपर मलते है। गूढता० ना. स्त्री० सूक्ष्मता, पठिनता, विपाव । । कठिन वदन। - मङ्गलकोप। . . 3 गाठि । C . . * गूढ़पन० ना. पु. करील, नागफली ) गेरुई नी० रनो जो गेहुओं में सरदोके कारण गूढ़पा० ना. पु० साप, यथा, कुडलीगूढया, गेरूरग का या होनाता हे गु० गेरूवा रंग। गूढ़पात् गूढार्थ० गु० गुप्तअर्थ, पटिनयर्थ । गेहना. पु०प्रतिशत गुड़गा.पु. पुराना पड़ा। गेमा गु० गेहके रंग, पु० घास विशेष । गूदा ना. पु. भेजा लगा साराश । गैडा० नापु० जन्तु विशेष निसी हसी अति गूप० गु.गुप्त, लिए पवित्र होती है उसरी थी, छल्ले, और तर्पण गूमड़ी ना. सी. करने र पवित्र अ का पात्र बनता है। गूमड़ा० ना०पू० गयाना स्त्रीगाय। गृजन ना. पु. प्यान, लहसुन, गाजा, गाजर गैरिक ना० सा गेरू, पीता लालामही। चा गानरका साग यथा, लशुनगृजनारिष्टपहा गैरेय० ना० पु. शिलाजीत । कदरसोना इत्यमर पलाइदिवराहचचना गैल० ना० स्त्री० बाद मार्ग । मामकुक्कुटलशुनगृजनचेवमुक्त्वाचाद्रायणचरैद, गो० ना. पु० पद, यूप, जल, यश, स्वर्ग, खग, इति सरोजसुदरे । गृध्र० ना० पु. गिद्ध । छद, ना० सी० गाय, रिण, इन्द्रियादा गृहिक ना० सी० वाराहीकद । गोंडली० ना० स्त्री० वृक्ष विशेष गृह पृ० घर। गोंद. ना. पु० लासा, चप। गृहकन्या. ना. श्री. धीमारि। गोदनी ना स्त्री नरकट निशेष। गृहगोधिका ना० खी वितुझ्या, पिपली / गोंदा. ना. पु. मिट्टी या गिलापा, चिड़िया ये गृहस्थ. ना. पु. दूसरा श्राश्रम, घरवाला । बुलानचे लिय लोई वा पड़ा। गोई० स० वि० भू, दिपाई, छिपी, ना. स्त्री-दो गृहस्थाश्रम ना० पु. गृहस्थका व्यवहार । गृहस्थी ना. सी. गृहस्थ या धये । बेलादि के जोड़ वो कहत है। गृहिणी या खी. घरणी, भार्या,जोरू,चौखट । गोकण्डी० ना० सी० देरीवर वा पल । गृही . पु. गृहस्थ । गोकर्ण ना. पु. वितरित, मृगविशेष, खबर, गृह गुरु को ग्रहणपरने के योग्य है। गो का शान, साप धार शिरनीका स्थान प्रसिद। गेंदफ० ना० पु. गेंदा। गेंद० ना० सी० खेलने के लिये कपड़े या सन आदि गोकर्णनाथ ना. पु. भाशिनीय तीर्थ का गोला। विशेष। गंगटा० ना. पु. देकड़ा, करतात गोल. ना. पु. गरीशिप, गाल । गेगली. ना. सी. बोदली । गोकुलेश. ना. पु. श्री मद्र। गेडुआ नापु०, तरिया, मिरहा, और टोटी गोखुरुक ना• पु० गोचर, भूषग्य विशेष । दारलोटा। गोचना. स.वि. पर लेना, गेहू च । गेरूल नाश्री गरिक, लाल मिट्टी। गोचर •• समझ, इद्रियशन, गु. गेरमा गुमेरूवा रामया। समान - , ।
मङ्गलकोप। huma . .. → T गोता. गा• पु० गान। गोवरी ना. स्त्री. दशा, प्रकट। गोपाचल. ना. पु. ग्वालियर। गोजर० ना. पु. कनखजरा। -गोपाल० ना• पु० पात, बहर, श्रीकृचन्द्र । गोजिका गोपालपुररु ना० पु. मधुरानी या जहा गगा ना.स्त्री. गाभी। गोजिहार जी और गोमती का सगम भया है। गोठ. ना. सी. चौपइयादि सेलनेका गुटिका गोपिकार ना० घमलपत्ती, किनारी। गोटा० ना.पु. किनारी। गोपीनाथ ना. पु. श्रीपच द्रजी। गोटी ना• स्लीशीतला, माता चेचक । गोयर ना.पु. गायकी निष्ठा, गोमल । गोड़. ना. पु. पाव पिडली, गु• मुदार। गोरगनेश गु. मोटा, भदा, भोंड़ा।.. गोड़ना रा. कि. सौदना, सुरचना । गोवरी ना. स्त्री. मिट्टी और गोवर मिला गोहिया ना.पु. पहार, नाति विशेष। हुआ लापने के लिये बनाते हैं। गोही ना० सी० चौरी। | गोभी० ना. पु. की, नईशारता । गोण ना.. सोपा, पाता, गोरा । गोभी० ना. स्त्री. पाषा विशेष, तरकारी विशेष। गोमका ना. पु. पुम्हता, यथा,,पुरामला गोती. ना. पु. गौर, गोमल, मु. गौरवाला। 'महाफला गोमा रानति निघरे । .. गोदना. स्त्री• कानया, गोदी, सारी । | गोमती न.पी. नदीविशेष । गोदना. स.वि. चोंकना, चिदना । गोमय. गोदा.ना.पु. निशान, चिह, दसा। गोमल. ना.पु. गोवर। गोदायरी ना. स. नदीविरोष ना दक्षिण गोस्टी० ना. स्त्री• गोरोची, मुन्दरी। गोरमदायन० ना. पुद्रधनुष जो वर्ग में गोदी ना. सी. प्रकार, कला, कनिया । निकला करता है और सूर्य के स मुग होता गोदोदनी ना. सी. दोहनी । है, रामद्रिकायाम, धनु है यह गोरमदायन गोधन ना.. गौचर, गायका धन, गाम की नाहीं शरधार वह जलधार वृथाही । । गोरमः ना. पु. इंद्रियों का साद, दूध, दही, प्रतिमा नी दीवाली दो बनाते है। गोधूमः मा. पु. गेह, गेह। महा, छायादि। गोधूलिक गोरसदायन ना• गोरमदाया। मा. खा. सायशाल, सन्या। गोरसी ना. स्त्री. दोहनी । गोम गोरक्षना.पु. नारगी। ना.सी. गानी गोरा गुरु गौर, बल गोप ना.पु. पान, या प्राण, विश! गोरी ना. श्री. उत्तम रनी, मुदरी । गोपाल. ना.पु.पहार । गोमा ना. पु. गाय मेल । गोपद गा..गरगा। |गोरोचन ना. पु. गाय के स्त्र से उन पनि पोपन ना. पु. निपान, सुमार। वस्तु, गाय के शिर में से उन औषध वि. गोपनीय गु.नि के ग्य। गोव० गु. गौर, चारीला, ना.पु. मया। - w मंगलकोप । 4 • 4 धराने का। 16 - एकप्रकरण। " स्थान। गोलफ पु. पंति के मरने के उपरान्त गौत्र ना. पु० वंश, परांना संज्ञा, पर्वत जारजात, पुत्र, बांसकां । गोप्रघात गांपु० निजकुण का मनुष्य गोलकुण्डा ना० १० नगर विशष दहिए में है। गोत्रय० । मारना। गोलताना स्त्री गोलाई । गोत्रज ना. पु. "गोत्री, सम्बन्धी, अपन, गोलरूप गु० गोलाकार। गोला ना० पु. गोल यस्तु, साता, धरन, लोहे गोत्रा ना. सी. धरती। का पिण्डा, जंगली कस्तर और नारियलका गुदीं। गोत्री ना स्त्री गोगन ! गोला ना स्त्री परिधि, घेरा, गोलापन । गौ० ना. स्त्री० गाय गोलाकार गु० गोलरूप। गॉ० ना. स्त्री. दार, पात, ऑसर, लाभ: गोलाध्याय ना पु० सिद्धान्तशिरोमणि को गांगीर० गु० घाती, दाव खेलनेहारा गोगोई ना पु० जब गाय ध्यानी दूध नहीं: - गोलिका नावी पति के मरने के उपरान्त देती है तब ग्वाल उसकी योनि में हाथ डालकर . जारमात कन्यका, गोली। खड़ी करते हैं। गोली० ना. सी. बोटागोला।, गौड़ ना पु• देशतिरोध, बामण विशेष, कर . गोलोका ना० पु. श्रीकृष्णचन्द्रका विशेष / मरथ जाति विशेष । गौड़िया ना० पु. गोहदेशवासी, चैतन्य का गोलोमा नास्ती च औषध । शिभ्य। गोधना० स० कि० छिपाना, भूत, किया, गाई । गोडी ना. स्त्री० गुइको मदिरों, जहाँ गायों गोवईन ना. पु० पर्वत विशेष जो ब्रज में है। सड़ी होती हो। गोविन्द ना० पु. कृष्णचन्द्र, वेदलभ्य !" गौण गु० जो मुख्य नहीं, अर्थात् अप्रधान । गोविन्दचन्द्रिका ना० स्त्री पुस्तक विशेष गौतम ना. पु. पुनि विशेष, पर्णत विशेष । गोशाला ना स्त्री• गाय वैल रहनेका घर । गौथन ना पु गायका स्तन । गोष्ट ? ना० स्त्री० बांधनु, मल, सम्मत, गोदन्ती ना. पु. हरताल वा प्रौपथ विशेष । गोष्ठी सलाह । गौदान ना. पु. गाया दान । गोष्पद० ना. पु. गायका सुर । गोसाई ना. Y०श्वर, तपी, सन्तीका मार्ग । गौना ना. ५० विवाह करके थोड़े दिनों में गोसैयां ना. पु. ईश्वर, परमात्मा : it स्त्री० को अपने घर लाना ।। गोस्तनी.ना. नी. दास, अंगूर ।' cr: "गौनहार ना. पु. गाने में दूलह के साी। गोहना रथी विसखारा के डौलका जीव गौनहार गोहरा ना.. उपता :- गौमली ना. गोरोचन'! .. गोहार० मा० स्त्री हुल्लड, रौला, सहायता, गौर० ना० पु. धववृशा माति विशेष, चिहान सुबवर्ग। गोह. ना. पु. गेहू, गोधूम, श्रम विशेष! गौरक. ना.पुतीतरपक्षी, गैरूं । गोमन ना. पु० स विरो।" गौरगड ना. पु. गोरा। गोतुर ना. पु० गोन्बुरू, पाषा विशेष। गौा ना. स्त्री भशनी, पर्वती। . - n मङ्गलकोप। । गौरव मा. पु० रापन, गुरुताई । ग्राही गु. ग्राहक, लेनवाला, थी. नास्ति । गौरा० ना. पु. चटर, चिहा, स्त्री पार्वती ! - प्राहा गु• जो ग्रहण करने के योग्य है। गौरिया ना. सी. चिड़िया । ग्रीया ना. सी. गला, गर्दन, गला पृष्टगाग। गौरिला ना. स्त्री. पृथ्वी, धरती। प्रीम. ना. सी. तपन, गरमी । गौरी ना. स्त्री. रागिनीरिशेष, हल्दी, रात, चेय. ना. पु० गलक: गहना, हमली,, माला पार्वती, तुलसी, गोरोचन । श्रादि। गौशाला ना० स्त्री. गाइयों का स्थान । ग्लानि० ना. मी घृणा, लान, पाई। ग्रथित गु• बधाहुया, पिरोयाहुया । ग्याला अन्य ना. पु० पुस्तक, पोथी, शास्त्र । ना.पु. पशुपालक, ग्रहीर । शाला ग्रन्थकार० ना० पु. प्रथरता, कवि । | ग्वालिनि ना• खी० ग्रहारिनि । ग्रन्थनि० ना. पु. महामुण्डी, वेला । वडर अन्य० समीप, पास। प्रन्थिना.स्त्री० गाठि । वडा० ना. पु. नगर व गावका श्रासपास । अयिक ना. पु० पीपरामृल। अन्यिमान्० ना. पु. हरसिंघाड । (घ) ग्रन्थिल० ना• पु० कावईवृत्त, करील । यंघोरना प्रस्त० गु० शब्द जो चाय के कहा गया, खाग, घघोलना० स० कि० मधन, मिलाना, धीना गया, घिराहुया। घंघरी ना. बी. लहगा। ग्रह ना० पु. सूर्यादि नवग्रह, घर । घटना.पु. देह, मन । ग्रहण ना. पु. हाथ में लेगा, गीगर, चद्रमा, घटक० ना. पु. मप्यस्थ, विचवैया, सदशी । सूर्य का गहन। घटज० ना.पु० अगस्त्यमुनि । ग्रहस्थापन० ना. पु. नवग्रहों यो बैटाय के | घटना य०किम दाहीना, पमहीना,योग्यहोना । उनको थावान करना। | घटनीय गु० जो घटने के योग्य है ग्रहीता गु० ग्रहण करनेहारा । घटयोजि० ना. पु• अगरय मुनि । ग्राम ना• पु. गाव, पुर, रूपीनात, समूह, घटा ना० सी० मेघौना उमड़ना, मेघ, भीर। रामचन्द्रिकाया, गिरिनाम ले ले हरिग्राम मारे, टाग, मधुकरड़ी। मनोपधिनी पसंदती विदार। घटाटोप.ना.पु. पालकी वा रथका पारद्वादन, ग्रामनर० ना.पु. गवार गावरासी। गिलाफ, चारों ओर से घिरना। ग्राम्य गु. गाव में जो उसनमया। घटाना० स० कि. यम करना । ग्रामीण ना. पु. गांव में वसनहारा, गवार । घटाव. ना.पु. क्मती। नाव. ना.पु. पत्थर, पन। घटायना०स०कि. घाना। ग्रास. ना. पु० चौर, लुस्मा। घटिकारना स्वीघड़ी, मुहूर्न, ऍड़ी के उपर: प्रासक० गु• घेरनराला, रोनहार । प्रासना० स० कि. घेरना, रोरना। ग्रासित गु. घेरागया, नाम । घटिया गु० थोडे मोला, सस्ता, घाटिदेनेहारा, ग्राहक ना.पु. मगर । ग्राहक गु• महकरनेदार, वनीकारवा । घटी गा. सी. दानि, हानि, कमी पड़ी। 1 - का भाग। घटित गु० योग, गन्य । धोखा देनेहारा, परी। :- + १ . होना। . घडीच० ना० पु. घध्यादि. ना. स्त्री० घडा आदि । घमण्ड० ना० पु. गणे, अहकार, गरूर।। घघड़ाना पनि गरजहा। घमण्डी० गु० अहवारी, मगरूर । घा ना. पु. कुम्भ, घर, कलश मिट्टापा घमरौल ना. स्त्री रोला भीड़। घड़िया० ना. सी. कुल्हिया, मधुमक्खी का घमसान० ना. पु० युद्ध, लड़ाई । छत्ता, पास, पियाली। धमाधम गुरू कचाक्च । घडियाख. ना. पु० मगर, माह, घण्टा । घमाना० स० वि० धूप विवाना, धूप में खड़ा घड़ियाली गु० घण्टा बनानेहारा । घड़ी ना. सी० साठिपल, समय मापो का घमासान ना० पु० घमसान । यविशेष। घमोई० ना० पु. वृहविशेष । तिकठी, तिपाई, पाणी घर० ना. पु० गृह, मकाा। का घड़ा रखा के लिये घरलई० ना० सी० चाषदा, बैडा । घडीची स्त्री पाठ रचित वस्तु । घरना० स० कि. गदना। घरनी० ना. स्त्री० रखी। घणा० गु० । घण्टा० ना. वा. बागा विशेष, श्रदाईदण्ड । घरघार.ना.पु. घराना। घण्टालिक ना नी. मधुकर पी। घरधारी ना. स्त्री० गृहरथ । घण्टाली ना. ना. छोटा घण्ण। घराना० ना० पु. पुष्टुम्ब, घर के लोग। धनः ना० पु. घग, मेघ, गु० मा, दृढ, घरामी० ना. पु० इवेया। विस्तार, मनि ना. पु. लोहार का बड़ा घरी० ना० स्त्री० लपटे हुय कपड़ा की गठरी, हथौड़ा। तह लगे हुये कपड़े, घड़ी। घरेला गु० घर का पालतू । धनकल ना यु• सभालू पोधा। धनगरज ना. पु. गर्जन, गु० ऊचा शब्द। घरोदा० ना.पु. छोग घर जा लड़के. घनघनाना० अ० कि. झनझनाना, महराना। घरीर खलन के लिय बनात हैं वा निस घनघोर० ना. पु. घा, घेरा, घा गहन । धरौशरा में खिलोना रखत हैं। घनतनवर्ण० गु• निसका वर्ण मध क समान घर्घर० ना. पु० चषा आदि का शब्द । हो, ना पु० श्रीकृष्णच द्रनी। घरा. ना. स्त्री. घाघरा। धनरस० ना. पु. जल, पानी । धर्म ना. पु. प्रवद, जलन, धूप, धाम, घनश्याम ना.पु श्रीकृष्णच द्गजीगु० या याल। घर्षण ना. पु. घिसना, रगड़ना । घनस० ना. पु० पदी निशा । घलप्रा० ना. पु० रूप वा पाता जो तोल से घनसार ना.पु. कपूर, जल, चदन। अधिक लिया जाता है। घना गु.पिचपिच, बहुत । घचरि० ना . स्त्री० गुच्छ, गुचा। धनासन० ना० पु. भैंसा । घसन ना.पु. पर्षय। बनास ना. पु. नागरमोथा। घसना स.वि घिसना, रगड़ना चनेरा. गु० बहुत, अधिक । घसियारा० ना० यु० घास काटनहारा । घघराना य. कि. व्याकुल होग, हडबडाना। घसियारिन. ना. स्त्री० घसियारे वी घबराहट. ना. श्री. व्यावुलता, हडपड़ी। १ पा।
मङ्गलकोप। 4 7 ८ ३ 4 घसीटना० सजि. सोचना, देलना । घाल ना. सी. पुराई, विगाह । घसीटा० स० के.जो बदेली गया। घालक गु० नाविक, हन्तक, मारनेवाला। घसीला गु० तृणस्थान, जहा घास हो । घालन० ना. पु. हनन, बधन, मारणं घहराना ० कि. गरजना। घालना. स. • त्रि. विगाइना, उजाइना घाई ना. स्त्री० घात, अगुली या मयस्थान घुसेड़ना, मारना, पटना। तठ वा सहका चीरा। घालित गु० माराहा, उजाशहुआ। घाई ना. सा. और, पद। घाय. ना. पु. चारा, जम्म। घाय ना. पु. प्राचीन, चतुर, गु• बाजीगर, घास मा० बी० तृण, सर । इन्द्रजालिन । घासीर गु० पासमाना। घाघरा ना० पु. लहंगा, पौधाविशेष, नद घासू० विशेष । घिवित्रामा अ. वि. वाशना करना, लइ. खड़ाना, जिगजिगी वरना। घाट ना. पु. नदी या तालाब म उतरने वा स्नान करनेका स्थान, वर्णाग्रदेशापति, घिचपिच गु० घना, श्रासपाम् । डौल, धर्ग, गु• न्यून। घिन ना. वा. घृणा, असहा तशान । घिनाना य. दि. मुदना, असह, देस में घाटा० ना. पु० चढ़ाव, घरी। घटिया ना. पु. घाट परका बामण, जो स्नान उपना।। परनेवाले के कपड़े बचात है। घिनौनाए. जिस पो दतर विन नावे । घाटी ना. स्थी. पर्वतों में संत मार्ग। घिया ना. मी तुरई, तरकारा विशेष घात० ना. स्त्री. दा, मार, दान, हत्या, घिरनाय. दि. घर म पना, उमएन्ना । श्रोट। घिरनी ना. सीर गरारी, गिर्रा, कपोत विरणी०विशेष, धरसी। घातक गु• हत्यारा, शत्रु, मारनेवाला । घाता. ना. पु. रूक, मोल वा तोल से अधिक घिराना० स० कि० घरा करवाए। घिसना स.शि. रगड़ना, खिया, स. घातिनी ना. रची. इत्यारिन, मारनेवाली। घाती गु० दाव लेनेवाला, मारनेवाला। घिसाना० स० कि. रगड़ना, मलाना । धातुक० गु• अपकारी, निठुर, हत्यारा । रगड़ रगडावर घान० ना• पु. उसली वा ची यादि में घिसायद स्त्री. नितना एक बार डालते हैं, विवाह में कर्म घिसियान० स० वि० घसीना । विशेष । | धीचार ना. ली. औषध पौधा विशेष धानो० ना. वा. तिल श्रादि, पोन्ह, ची। घुघुची ना० को वेलिाशेपकांफल वा बौन । घायड़ा गुरु व्याकुल, हैरान। घुघुरू० ना• पु० चौरासी, पौगा। घायरा घुटुआ० ना. पु. जानु गाठि पार की। घाम ना.पु. धूप। घुण्डी नाक स्त्री वस्त्र आदि की गोन रस्तु घामड़ गुरु भोला, उरलू, अमर ।' यथा अंगरने में होती है। घायल. गु• हथियार लगो से जिसे थे पाप घुटना ना• पु. ठेवना, जानु, घ. कि भया। सना, सास सजाना। लेना। कि. मलना। घिसावना पु. । Lu . 1 . ܝ ܝ मङ्गलकोप। ८७ . - 9 घुटाना० स० [मुडांना, चिकना करना। घूघू० नागपु. पनीविशेष, पाहा । घुड़. • ना० पु. घोडा। यूट ना पु० पानी का लिलावट । घुड़कना म. कि. दबकाना, धमकाना, घटना० स० कि० घूरना । झिडकना। घून० ना. पु. द्वेष, कपट, द्रोह। लाग । ' घुड़की० ना० स्त्री• धमकी, मिडकी। घूना गु० कपटी, द्रोही। घुड़चढ़ा. ना. पु० असार, सबार ।... धूमना० अ० कि. फिरना, चकरदेना, लौटना। घुड़चहल ना. वा. चोपहिया गाडा जिस में धूर० ना० पु० साद, हा, तार ! घोडे मचने हैं। धूरची० ना० स्त्री. उलझेदा। घुन ना. पु. कीर विशेष, ढोला। घूरना० स० कि तारना, कोप से देखना । घुना० गु• जिस में घुन लग गया। घूस० ना. ती धृस, अमेर, रिशरत । घुनाक्षर० ना. पु. चुन कृत अक्षर । घूसत ना. पु° उल्लू का बचा। घुनिया० गु० घना, कपटी। घूसा० ना० पु० थापड, मुघा, मुकी । घुमरी० ना० सी० तिमिरी घृणा० ना० बी० घिन, ग्लानि । पृणिक ना० सी० किरण। घुमानाम० कि फिराना, परना, बझाना। रकना० स० मि. घुडस्ना । घृत. ना. पु. घी। घुरूका ना० पु. भीमसेन या पुत्र भो हिडताल गु० चिकना । घृताची ना स्त्री मुख्य श्र सरा। मी से उत्पन्न था जिस पा घटोत्कच भी टिक ना• पु० शकर, याराह । कहते हैं। घुलना अ० कि. गलना, पिंघलना, नम्र हो घंटी स्त्री० शकर का बच्चा नाना, दुर्वल होना। घुलाना० स० कि० विघलाना, गलाना। ना.पु गले में रोगविशेष । घेघा धुलावट. ना. स्त्री० पिघलावर । घेतला. ना. पु० जूती विशेष । घुसना० कि० पैठना। घेर० गु० रूया, घूमधुमाव, गोलाकार, ना. घुसपैठना स्त्री पहुच । घुसाना० स० क्रि० पिलाना, पैठाना घेरना० स० कि. रूपना, गासना। घुसेड़ना० स० मि. ठासना, खोसना। घेरा. गु० जो रोका गया, ना. पु. कुडल, म. यूगनी० ना० स्त्री. उसना, चना, गेहू । डल, दाना। शृंगर ना० पु. लहराये हुये बाल । येवर० ना० पु० मिटाई विशेष । शृंगी० ना० स्त्री० घाँधी, छोटया घोंपा। घोगा० ना. पु० शख वा घोषा जतु वि० ज- चूंघट० ना. पु० प्रौढ़ना, ननाव।। न्तु का घर विशेष । घूघर० ना. पु० घूगर। घोसला ना.पु. पती का घर, खोता।- घुघरू ना• पु नूपुर । घोकना स० कि. एना, याद करना। घूटना० स० कि० निगलना, लीलना। घोसना धूस ना० सी० बड़ा चूहा घोघी ना. स्त्री. वर विशेष जो कम्बल चूंसा० ना०प० घसा, थपड़, मूका। श्रादि से बनाते हैं। पु० पर। १ - ८८ मङ्गलकापा 4 . घोणा ना. स्त्री. नार, मासिका, यथा (सोवे चक्ती ना. वा. फार थगला, परद। प्राण गमवहाघाणा नासा च नासिका) इत्यमर । चकनाचूर० मा. पु. परन, छीला, दूर, घोट० ना स्त्री. चिकनाहह, आप । चूर्ण। घोटक ना. पु० घाड़ा, यथा (घार वीति | चकल्लस. ना. वा. चकवा, मानना, तमाश।। तुरगतुरगाश्वतुरमा ) इयमर । चकल्लसी० गुरु चावावाना, मग्न । घोटना० स० कि. मलर चिकना करना, मु चरला ना. पु. वश्या का घर, वस्त्रविशा । एन्ना ना. पु. पाषाणयादिका वस्तु निस स जा पार और सूत से बनता ह, देश का खण्ड चिकनात है। जिसमें कई परगना हात है, गु० चौड़ा। घोटा० ना पु. काष्टादिका वस्तु जिसस घा | चकलाई० ना. सा. चौडाई । टन है ना. स्त्री. सुपारी। चकवा० ना० पु. राजहस जाति के पर्दा घाडाना.पु.यश्व तुरग । विशष । घोर० ना• पु० शब्द, भय धडका गु• भया | चकवी ना. स्त्री० चक्वा की स्त्री। नक, कठिन, कहा। चका. ना.पु. पहिया, चक्र, दुलाल जिसपर घोरनिद्रा ना. स्वी• सुखनाद, बड़ानाद । वर्तन बनाता है। घोरफग० • नी• गाह। चकाचौंधा स्ना• दृष्टिका तिरमिराना । घोल ना.पु. मट्टा, दाद। |चकावू० ना० पु. चक्रव्यूह । घाजना० स०कि.मिलाना। घोप.ना.पु. बहीरा वा गाव, गाप, ग्वाल। चक्ति गु.अचम्भित भूलाभया वशम्जुवमें। घोषणा स० वि० थम्यास करना, याद परना, चरता प्रसिद्ध रूप से जनाना। | चकोतरा ना• पु, गलगल पलविशेष । घोपा ना. सी.सीफ, विडग । चकोर ना.पु. पता विशेष। घोस. ना. पु. पाप चम० ना. पु. राजा चक्राती । घोसी ना.पु. ग्वाल पहीर । चकर ना. पु. दही, गाड़ी का पहिया । घौद्धि चकान० गु. गादा जमाया। घवास. ना.पु. मुगियों का घर । घ्राण ना.पु. नाक गधिका ग्रहण । चकी ना. सा. दलैनी, जिससे बारा पीमते हैं। प्राणेन्द्रिय० ना. सी. नासिका, नार। चपकू ना. पु• हुरी चार । [व] चरना.पु. घरनविशेष, पहिया, गोल भ्र मण, सदरान, कुम्हार का चार । चयर० ना.पु. चमर । चमा ना. पु. तगर औषध । चक- ना.पु. चकवा पनी, निस भूमि पर चक्रधर० पा अधिकार हा। ना. पु. श्रीकृष्णच द्रजी, गु. पाचका गु० वष्य निर्मल, देनीमय । चमवर्ती० ना.पु. चारोंमण्डल का राजा, चकमाल ना.पु. चक्लस, प्रानन्द। चक्ता.ना.पु. विह, निशान।। चका यह धौरि० ना. सी. गुग्धा, पवार । . चक्रपाणिजो चत्र वापता हा । सावभीमराना। चम्याक० ना. पु. चश्वा। AN मङ्गलकोप। ८६ - चक्रमदन० ना.पु. पवार, कोच, बीन । चटकना गा.पु. पक्षा, श्र.मि. फरना, चव्यूह. ना. पु० चरागार सेया गड़ धड़कना, तड़कना। बनाकर समर परना। चटगा.पु. भौरा, गरगाया पती, पनी चमरक्षणाना.सा.गुरच। याग, चहा, दरका। चक्रा० ना० सी० समूह, गिरोह, टाली । चटकाना० राकि. मुथी बजाना, पकारना, चक्राकार० गु० पहिया के डोल । पाइना, चारना। चकित गु० चरित, भ्रमित । चटकारन० स० लि. पशुपादि के चता में ची ना. सी. चक्ला, गायों की माली मुमसे कि पिप करना। TIOपु० माप, कुम्हार । चरकाहट ना की चमक, भडक, ना.पु. चख० ना. पु. चन, रेय । चिड़ियों का शब्द। चपना स० कि० नाचना, सादले , खाना। चटकीला T• पु. १चमकीला, भइकाला, चसाचसो ना० सी० विगाइ, लड़ाई,गा। चटकीली गा० सी० (नमकार। चगाना. सी. गुडी, बाजा, पतग। चटगांव० ना० पु. नगर जो बगाले के पहि। चंगा.गु. भला, अच्छा, पुरती। चटनी ना० सी० खाने के लिये वही बनाई चंगेर० ना० सी० फूल रखने का पात्र, कठरी । हुई वस्तु, चादने की वस्तु । चटपट.व्य. तुरत, उसी समय । चंगेरा. ना. पु. साचा, खाची, कटरा, -चंगरी. ना. सी. पटरी। घटपटाना० अ० कि० व्याकुलहोना, पड़फड़ाना, किसी वस्तु क लिय जी चलाना। चचा ना. पु. पिता का भाई, चाचा । चटपटाहट० ना. सी. व्याकुलता। चवी ना. सी. चचारी ली। चटपटिया० गु० पुतीला, चावार । चचुलार्ड ना० पु० चचडा, तरकारी । चटपटी ना. सी. उतावली, हडपड़ी। चचोरना० स० कि० सूती वस्तुरा चूसना । चटवाना० स.वि. चटाने खिलाना। चचनाना० स० कि.टीसना, बोधित होना, चटसार० ना० सी० पाठशाला, मदर्सह । मुझलाना। चटसाल. चचनाहर० ना. सी.टीस, मुझलाहट । चटाई ना. सी. विद्याना विशेष । चचरीका ना० पु० भौरा। चटाक ना• पु० धडाक, भड़ाका, एकाएक । चंचल गु• अस्थिर, चपल, कम्पाहा, खिलाइ, चटाकार ना० पु. धारा, चूमा लनेका शब्द । नाशा। चटाचट गु० दोहराय तिहराय के जो शब्द । चचलता. ना. स्त्री. अस्थिरता, चपलता। चटाना० स० वि० चटवाना ! चंवला ना॰ स्त्री. विजली, काँधा, लक्ष्मी। चटिया० ना.पु. शिष्य, चला, गु• चाटने चचलाई० ना० स्त्री दिलाई। वाला। चंचलाइट ना. स्त्रीपस्थिरता, टिठाई। चटीना स्त्री ध्यान, स्थिरता, गताडी, राम- चंचु० पु. चोच, शुक् पी । पद्रिया यश (सर जात ही दुरस की चट अन्य तुरत, उसी समय । दुपरी कपटी न रहे नह एक धर्म । निघरी चटक ना. स्त्री चमक, धडाका, चिड़ा, गु. रुचि मीच घटीहु धरी जगजीव यतीन कि बुद्धिमान चालाय वगी। छूटी चटी)। 1 - चतु० गुरू चारि। : 27 1. चढ़ना० पु. वृंतकी डाली तोइन का शरद चतुरातता ।। ६० मङ्गलकोप। चटोरा गु. रसिया, पेट, अधीरन । चण्डोल०,ना. पु. पालीस्शिा, पदार चहा ना.पु. चरमाली गलक । सिलीना विशेष चट्टान. ना. पु. पसरका छोटामाग-या चतुर० गु० निपुण, सुनारी, प्रवीण, राना, धूर्त, चट्टापट्टा० ना. पु० लिसीना विशेष : नाः पु. कीया। ना• स्त्री. युद्धिमानी, स्यानान, चढ़यड़ गु० चमचर, विकी। चतुरता चहचहाना य० कि. फटना, तहाना। चतुरंग ना. पु. चारिश्रंग की। चयड़िया ना० पु० बी। .. चतुरंगसैन्य ना. सी. चारिप्रसारवी फोन चड़ईना० स्त्री० पश्चिम में तैयारी को कहते | अर्थात् हामी १ घौडा २ रथ ३ पदाति ४ ) हैं और अगर में कूप गहिगने को। चतुरंगुला गु० चारित्रगुल, स्त्री. हिरराली । चढ़ता. ना.पु. लाभ, यदती । चतुरस्र० गु• चीयूट । चढ़ताहोना था कि निकलता होना, सरस चतुरा० गु० चतुर । होना। चतुह. ना. मी. चतुरना । चढ़ना० स० कि. पारोहण करना, रिलैंगना, चतुरानन ना. पु. ब्रह्मा । उठना, धागा करना, समारहोना चतुरवस्था ना. मी. चारियवस्था, पर्या चढ़वैया गु० चदनेवाला, यथा घुइचदा । जाग्रन्, स्वप्न, सुगुप्ति, तुरीय, अथवा कल्य चढ़ाई ना. स्त्री० चढ़ाव, धावा । प्रौद, युगा, वृद्ध । चढ़ाना० स० कि. पारोहण करना, बलिदान चतुराश्रमः नो• पु. चारि प्राथम, श्री परना, उठाना, टोल वा धनुष का तानना वा भयचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ, सयामी । चतुरास ना० सी० चारों और ...-: चढ़ाव. ना. पु० चदाई, भाटा। चतुराती गु० अरसी और चार ८४ । चदेता ना. पु. चदया। चतुरासीयोनि० गु० चौरासी योनि श्री ('दोहा ) नव र जलचर दश १. व्योमचर कृ चढ़ीया ना० पु. जूता नो एंडी से चढ़ा ग्यारह ११ वनबीम २०, येचौरामा "नानि रहता है। मनुन चारि ४ पशु तीस ३०)। चणका चणाo. ना.पु. चना, अन्नविशेष । चतुरुपयेद. ना. पु. चारि उपवेद, म चण्ड० गु० प्ररल, प्रचण्ड, भैरव विशेष धनुर्वेद, गधर्ववेद, यायुर्वेद और धर्मशास्त्र । चरहांशु ना. पु. सूर्य। चतुर्थ गु० चौपा। चएडागुप्त ना• स्त्री. कोंच बीना, चतुर्थावस्था ना० सी: युगापा, मृत्युकाल • :चण्डाल ना. पु. चांगल, प्रतिनीच, छुकमा। चतुर्थी० ना. सी. चौथ, चौथी तिथि चएडालिन. ..चण्डाली ना. सी. चांडालकी स्त्री। चतुर्दश गुः चौदह १४ ॥ चौदहाविद्या चरिडका ब्रह्ममान १ रसायन, २ वैद्यक योनि । चएडी करण ५ धनुर्विद्या ६ कोक,७ कसना। चतुर्दशविद्या ना स्त्री .." ना. सी० दुर्गादेवी।
मङ्गलकोप। . इसी ४ । । नाड़ाज्ञान ६ वाहन पेरन १० पन्य ११ चतुर्वाध ना. पु० चारिप्रकार का पाना, अ जूप १२ तस्करी १३ स्वरज्ञान १४ ॥ थीत् तत १ वितत २ घन३ शिवर ४.. चतुर्दशरत ना• पु• चोदहरन, अर्थात् अ चतुर्याहु ना पु० चतुर्भुन । मृत १ चन्द्रमा २ लक्ष्मी ३ धनुष्ध चतुर्विश० गु० चोवीसमा । तरि ५ एरावत ६ कौस्तुभमणि ७ उच्चै श्रवा चतुर्विशति० गु० चालीस २४ । शव ° अप्सरा १० कामवैन ११ म्ल्पद्रुम "चतुर्विवाह ना० पु. चारिप्रकार व विवाह, मदिरा १३ विष १४। अर्थात् पानापय १ आर्ष २ गाधरे ३ रा. चतुर्दशमनु० ना. पु० चौदहमनु, अर्थात् सा- यम्भुव १ स्वारोचिष • उत्तम ३ तामस ४ चतुष्कोण गु० चोकोन, चोकाना । खेन ५ चाचप ६ वैवस्वन ७ सावणि ६ दर चतुष्पदधर्म ना० पु० चारिप- धर्म क, सामणि ६ ब्रह्ममारणि १० धर्मसाणि:२१ अर्थात् विद्या १ सय २ तपस्या ३ दाा ४ । भद्रसावर्षि १२ दवमावणि १३.६द्रमा चतुष्फल ना० पु० चारिफरा, या अर्थ । णि १४॥ धर्म २ काम ३ मोल ४ ! चतुर्दशलोक ना० पु. चारह लाक, अर्थात् चतुष्पाद ना० पु० पशु चारिपदवाला सप्तरवर्ग श्रोर सप्त पाताल, भृ १ भुव चतुस्सहस्र० गु० चारिहजार ४०००। व ३ मह जन ५ तप ६ सन्य ७ धत चतुस्सहिता० ना० स्ना० चारिसहिता, अथात् लपिनल सुतल १०रमातल १ तला- ग्रामी १ भागरनी २ वैष्णवी ३ सोरि । तल १२ महातल १३ पाताल १४ चना० ना० पु. अनविशप । चतुर्दशी ना० सा० चोदहवा तिथि, चादस । चन्द० ना० पु. चन्द्रमा । चतुर्भुज० ना० पु० विष्णु, नागयण, गु० चारि चन्दन० ० पु० गधसार, 7 वगन, म भुजावाला, या चारिमडों का खत । चतुर्भुजक्षेत्र ना० ० चामेड़ा सेत । चन्दवा पु० मघम्बर । चतुर्भुजी० ना. स्त्री. देशाविशेष । चन्दा० ० पु. चद्रमा प्रगपिलास या चतुर्भोजन १० पु. चारिप्रसारमा भाना, (दग्दति रही विलौना चदा, पारि त कीजिय अर्थात् भोय १ भक्ष्य र लय ३ चौथ्य ।। बालगोरिदा). चतुर्मुख. ना. पु. प्रया। चन्दिया० ० वी० टयरी, चादि, छोरी चतुमुल ना० साल चारमुक्ति, अधात् सा लोक्य १ सामीप्य २ समिप्य ३ सायु य ४। चन्द्र० ना• पु० चन्द्रमा, चाद । चतुर्यानि० ना० सी० चारियोनि, अर्थात् स्खेद चन्द्रका ना• पु० कपर, मयूर, नथ मला न १ अण्डज २ उद्भिज ३ जरायुज वस्तु । चतुवंद ना० पु. चारियेद, अर्थात् अत् १ चन्द्रकला० ना. ना. चन्द्रमा का सोलहवा यज्ञ २ माम ३ अथर्वण ४ । भाग, रियों की धोती विशेष । चतुदी १० पु० चौवे, चारिपेदवक्ता !... चन्द्रकान्त० ना. वी. मणिपिशा। चतुर्वर्ग० ना० पु० चारिवर्ग अर्थात् चारिफल । चन्द्रग्रहण ना. पु. चत्रमा का गहन । चतुर्वर्ण ना. पु. चारिवर्ण यात् ब्राह्मण, चन्द्रघण्टा ना० सी० देवीविशेष । क्षत्रिय, वेश्य, शट। चन्द्रचूड़ ना.पु. श्रीमहादवनी। दल। रस्सी। .
६२ मङ्गलकोप। शनात पीचे दव। चन्द्रभागा ना० सी० चित्र नदी जा पजाव चपकाना० स० कि. मिलाना, बगना, चिए टाना। चन्द्रभाल ना. पु. श्रीमहाभजी, गपशना। चपटना कि० चपरा होना, लग्ना। चन्द्रमल्लिका ना खो० इलायची। चपटा गु. बैठवा, लपग। चन्द्रमा ना. पु. चाद, मुनिविशन। चपटाना० स० वि बैठाना, मिलाना। चन्द्रमुखी० गु• जिसका मुख चन्द्रमा सराखा है | चपटी० मा० स्त्री० दो स्त्रिया परस्पर प्रसग्नि, अर्थात् प्रतिसादरी।. मिलाई वस्तु। चन्द्रमौलि. ना. पु० श्रामहादेवजी, गचपचपड़ ना. पु० सात समय मुस्त में श शब्द। चन्द्रवधू ना. सा. वीरवड्री कीड़ा जो चपड़ा मा० पु. लातविशेष । चन्द्रय टो० लालमकरोसा होता है, राहिणी चपडा: गुनिर्ल न, टीठ, ना० पु० जूते चन्द्रयशी गु० जा चन्द्रमा से उपन्न भये पात्रियकी जातिविशेष अर्थान् सामवशी। चपडान० स० क्रि० साग करना, ढीटवरना। चन्द्रयाला. सा. जारी गई, बड़ी इला |चपना० अ० कि. लजित होग, पाधीन यची। होना, मसतनाना, दवनाम। चन्द्रसिता० ० खी. कपूर । चपनी० ना. स्त्री. दृक्ना, टपा, छाग। चन्द्रशेपर० १० पु. श्रीमहादानी, पर्वत । चपरास ना० सी० पैदल क लिय स्वामीका चन्द्रहार०न. पु. ग्लका गहना रिशर । चिका चन्द्रहास. ना. पु. सद्ग तल पार, राजादि चपरासी • पु. चपरास बाधोहारा, रो।। चन्द्रहासा ना.सी. गुरच। चपल गु० पचल, उज्वल, सदर, ना.पु. चन्द्रहासी० ना. स्त्री. छोरी का। चन्द्रा गु० मुएइला, गुना, युद्धिमान् । चपखाना. सी. पीधा, विजली। चन्द्रातप. पु. चादनी, चन्द्रिका । चपाती ना. स्त्री पुलका, यह शब्दा चन्द्राना०५.नि. सूखना मुरझा।। रसा है। चन्द्रायण ना० पु. प्रत चादायक ना एक चपाना० अ० कि. थापना, लग्नित की। महीने १ एक प्राम भोजन में शुरूपत्र कृष्णपक्ष चपेट० ना• स्त्री. १ धा थप्पड़, धाखेसे जो में बढ़ाने घराने की रीति से होता है। चपेटा० ना. पु. विपत्ति पानाव । चन्द्रिका ना• स्त्री चादना, वाची औषध, चप्पा गु• चार अंगुली का प्रमाण । पुरतपिरोप, योर। चप्पी ना. स्त्री. देह ववना या मलना। चन्द्रोदय- ना. पु० चन्द्रमा या उदय, औषध चयाई० रापी. कुचला, चर्वण, गु० निदए, विशेष पान ना. सी• अगरसा विशेष, पारसी चवाउ ना. पु० वतयहाउ, कहानी । दूषक, दीक, नकली। चधानास. कि. कुचिलना, चारना। चपकना प्र.मि. मिलनाना, इंगिका चयायिनः ना. स्त्री० निन्दायुत, निदक । सग्ना विपरजाना, लमिनाना। . । पारा॥ . - चविखना. सी. चार पारध । H4 स Harta मङ्गलकोप। TF १ प F - . 1 . चपेना. ना. पु. चमू० ० सी० सेय, कोज । चपनी ना. सी. मनाया अन्न ] चमूपः चव्य } नाक स्त्री० नार, औषध चमूपतिः ना० पु० सेनापति, सिपहदर चयन चम्पाला चमक०० पु. उफ! चमेटा. पु. चपेगम चमक० ना. स्त्री. चरक, झलक, भड़का चमोटा० ना. पु. जमदा जिसपर ना तुरा चमोटी 110 सी. किराते हैं । चमकता०गु० उजागर, उजता। चम्पई० गु० नारजी रग। चमकना० १० कि० झलकना, लाता, भाग्य उदयहोगा, क्रोधितहोना। चम्पक० मा पु. वृत्तरिशेर जिसका पूरा पाला सुगधित होता है। चमकाना० स० कि० झलाना, तुराना, घुमा चम्पत ना. पु. भागना । ना, नचाग, खाना। चम्पतहोना था कि भाग, छुपा चमकाव० ० पु०३ चमक, भड़का चम्पा० ना.पु. चम्पक । चमुकाद० ता० सी. चमकीला० गु• चमकन हारा, चमरदार ।। चम्पावलीरात्री चम्पाको रसीक समान चमकीना ना० पु. चमकाो याला । गहा विशेष गले में पहिनत है। चम्बू० ना० पु० जलपान पिशप जिसस देवता चमगादा०1० पु. । को जल चदाते हैं। चमगादर.ना.पु. राति का उड़नेवाला | चम्बेली ना० स्त्री. वृत या उसरा पूल । चमगुदड़ी० ना. सी. पक्षी दिवाध जो वृर्ता चमगुदरी० ० सी० में उलया टॅगता है। चय गा० पु० समूह टैर, घश । चमगोद०० पु. चयन ना.पु. ग्रााद, पुशल, क्षेम। चमगोदरीना सी. चर० ना० पु. चारा, थाहा दूत, गु० जिस को चमचमात. ना.पु. चमक्ति। चलने की शलिहा. या नो चलने य उटन के चमचमाना अनि चमकना, सुन नाना। योग्य हो यथा Tर गरि पशु पसी धादि, चारा । चमचमाइट ० रखी चमसार! चरक० ० पु. वैद्य पिया का प्रथ रोष पाद। चमदार ना० पु. धर्म, साल। चरफटा० ना.पु. चारा पाग्नेवाला। चमत्कार. पु. अचम्मा, भदर, बदनी, ऐश्वर्य। चरफार ना० पु० श्वेतकृष्ठ विशप, सरद केद। चरज गु. पोदी। चमत्कारी गु० महशीला, माग्यशाली। चमर. ना. पु. चवर, पुराभि गायकी पूछ। चरचना स० कि० दह में चन्दन दना, অম १० ना. रवी चमारपन, चमार का। चमरीकासी पुरभि। चरचर० ना.पु. पर। चमार ना.पु. चर्मकार, नीचनाति पिरो चरचराना . कि. चरपना, मरमाना। चमारिन्। चरचेला गुपधी, मम्मादी। चमारी। .. घमार की भो। चरण ना. पु. पान, श्लोर प्राक्सिा एकदर . ३ चर्चना। 4 - मङ्गलकोप! M - भूसा खाते हैं। । चरणपीठ ना. पु. गाउ । चर्चरी मा. पी. पदविशेष, वटी, चिनी। ना. पु• तृल, जिमगे देवता | चर्चा० ना. सी. परताव, बतकहाव । चरणामृत वा गुरु वा ब्राह्मणादि के पार चर्चित गु० लगाया हया, कहा था। चरणोदकर हो। चर्म. ना.पु. चमझा। चरती० गु• जो व्रत नही करता, प्रती नही । चर्मकार० गा० पु. चमार । चरन ना.पु. चरण । चर्मपान ना. पु. चमड़ा का डोल, मरा। चरना० ० निचुर्गना, पिरना। चर्मयस्त्रा० पु. चमहा या वस अांद चरनी. ना. मी० थान या कठरा निम में बैल ग्रोदा। च-०ना मां• तपस्या करने में धुत . चरनी ना. सी. चीनी । शवा रही। घरपरा० गु० तीता, परया, ताण, पुनीता। चर्षण. ना. पु. दोतों से पीमा, चरना। चरपराना अ.क्रि. परपरा।। चर्स०'ना.पु. चरमा। चरपराहट १० श्री परपराहट । चल० गु० जो स्थिर न हो। चरपरिया गु• मनचला, सुघद । चलत० गु० चलनि। चमर० गुपिदला। चलदल० ना पु. पीपल । चरवाई. ना. सी. चराई। चलन ना.पु. चालि, व्यवहार । चरवाहा० ना. सी. रसबारा, चरानेहारा। चलनता० ना. श्री. रिक्नहार, सपती । चरस ना० पु. मादक वस्तु, मोठ, पुरयः । चलना०० कि. जा, विदाहोना, बहना। चरसा० ना. पु. अथोड़ी, खाल । चलनी ना. स्त्री. हागी, गु. चलती। चराई. ना. सी. चराने के दाम, चराने का चलबिचल० ना० पु. चूक, मूल, अम। वाम । चखविधरा गु० अहियल, मचला। चराकर गु० चरनहारा, पशु । चलयीवन० ना. पु. चलायमान यौवन । चराचर ना• पु• चल अचल राजीव निजीर चलसुगन्धा० गा० स्त्री० शौचर लोन । ज. चरान० ना. पु. तराई। चराना० स.कि.चुगाना। चलान ना. सी. भेनाय । चराव ना.पु. सेतु या धरनी जा चरने के चलाना० स० कि० दौड़ाना, भगाना, छोहना, बढ़ाना, थम्यास डालना, सिसलाना। घरावना० स० निचराना। चलायमान गु० जो स्थिर न हो, लोल । चरित० ना.पु. चरिय। चलाप.ना.पु. चलन । चरितार्थ ना. पु. कृनाई। चलित गु० जो चलता है। चरित्र. ना. पु. सभाव, शील, वृत्तात । चरुमा.ना.पु. भाड़ा। चलू० ना.पु. याचमन । चर्चक गु. चर्चा करनहारा, वादी। चप० ना.पु.नेत्र, पाखि चर्चना० स० कि. विचारना, समझना, नना, चपका ना. पु. पियाला, जिसमें जलादिः पहिचानना। , चलाचल० ना० ३१ } दो धृप। योग्य । चलित्री० गु० खिलाड़ी, चपल । - 2 पाते हैं।
मङ्गलकोप। ६५ जाली । H धार्ता। चसका ना. स्त्री० पीडा, टीस् । चाकी ना. स्त्री० चकी। चसकना अ.नि.टीसा, गड़ना । चाखना० स० कि० स्वादलेना मजालना। चसका ना० पु. लालसा, प्रेम, चाट । चाचा ना. पु० पिताकामाई, चाचा! चसना अ.कि. मसरना, क्सकना, गडना। चाची ना. स्त्री० चाचा की चहकना० अ० कि. चहचहाना । चाञ्चल्य० ना. पु. अस्थिरता। चहकार० ना० सी० चहचहाहट । चार ना. खा. चसका, लालच, पदार्य। चहकारना० अ० कि. चहचहाना। चाटक ना० पु. भगर विद्या तिलरम, इंद्र- चहचहाना अ.कि पहिया वा-बोलना। चहचहाहटना स्त्री पक्षियों का शन्द । चाटकी गु• चाटक जाननहारे।। चही ना. सी० दो नखा से दवाना अर्थात् चाटना० स० कि. जीमसे रसवाचना, चमड चुप्पी कारना। चभड करना। चहला० ना० पु. कीचड़। घाटी.वी. मथानिया । चहिये० अव्य० चाहिये। चाणक. ना.पु. परवा, महरावमाधारक चहु० गु० चारि, ८ अन्य चाहा । चहुधा० ना० पु० चारोंपोर । चाणक्य ना. पु. रानाविशेष का मंत्री नीतिमध। चहुचक० गुरुचाराधार लग भग । चहुदिशा चारणूड. T० पु. राजाक्सका मल। चाणूर० चहुयुग • पु. चारोंयुग। चाण्डाल गु० निर्दया, अनिनाचजानि । चतु. ना. पु० नेत्र, प्रालि । चक्षुधवा० ना० पु० साप, नाग चाण्डूल मा० पु. पती विशा। चाण्डोल चनुप० ना. पु. भरवभिशा। चा० ना० सी० पोधारिश । चातक. ना. पु० पपाहा पही। चाउ० ना० पु० ग्राा द, मगल खुशा ! चातर० ना.पु. महानाल । चाऊ गु• याद म लाभपुन। चातुर • चतुर, चारि, द्धिमान । चांड. ना. सी. टर, पम्भ । चातुरी ना. मी. वृतना, चालासरी, यदि चांद ना० पु० च द्रमा। मानी। चांदनी ना• पु० उजाला, याति । चातुय्यं० ना० पु. चनुरा। चांदना ना खा. चादरी याति, साद चातुर्वण्यदेश ना. पुरंग, जहा चार्गवर्ण नाग, वत्रिय, वन, पद रहन है। चांदनीचौफ 1. पु. चौडामा चातकः ना० पु. पपीहा। चांदा... विही, पती, पदा चान्द्रमास ना. पु. कृष्णपन्न प्रतिपदा से चांदो ना० सी० रूपा, रजत । पूनमापर्थत। चांप० ना. सी. पदून की फस, बाट । चान्द्रायण ना.पु० ग्रत निमम भौजा प्र चापना ग.नि. ठासा जोगा। विदिन एकमाग घति है यया चद्रमा प्रतिदिा चाक० । ना• : चहानिन र हाम्न घम्वा है। चाका नाता है, पदिया। चाप ना० धनु, माा, प्रायसिन । विप्रेना। " क मङ्गलकोप। 1 -- and चापकर्ण ना० पु. रादा, पनच कमान की। दि इत्यमर ) रामायणे । चारा चाप वाग चापन ना. पु. दाबन, रामायण यथा दिशि लेई, मना सरल मगल यदि देई)। (मुनिवर शयन पाहतव नाई, लो चरण चास. ना. सी. हलचसाना । चापन दोउ भा)। चासना० स० कि. हलचलाना । चापक्षनः ना. पु.,धनुषाकार क्षत चासा ना० सी० इतवाहा । चाप्य ना.पु. दूर। चाह० न० स्त्री० इग्दा, प्रेम, रीम, छोह । चायना० स० कि० दातसे कुचलना, कुचलना चाहक ना.पु. सी. धाही, हितकारी। चाची ना. मा० युना। चाहत ना. सी. चाइ। चामल ना.पु.चम। चाहना० स० कि. प्रेम करना, इच्छा करना, चामर ना.पु. चमर, इन्दविशेष : प्रार्थना परना, मागना। चामीकर० मा पु० सुवण, साना । चाहिये. अय. अवश्य । चामुण्डा ना० स्त्री. योरेनीमद, दा विशए। चादिरा गु० प्यारा, मन भारित । चाम्पेय. ना. पु. चम्पवृक्ष । चाहिती ना. सी० प्यारी। चाय. नापु. चार, हर्ष, साद। चाहो अन्य अथवा चार० गु० गिती ४ ना.पु. दूत, पदानि । चिफ. ० सी० पाड़ारिराष, परदह । चारिखानि 1 सी वेदनादि । | चिफ्टा ना. पु. टसर का फपटा निगेष । चारण • पु० चवैया भर, भाट, शिकठा गुविकर । আন प्रचा चिकना ना. पु. तेल वा घृत गु. उनला चारा ना.पु. पारसति, पशुभोमन, पारसी सुदर, लिहा, यजितद्रिय, चचला, और सद है। चिकनिया। चारी गुचसनेवाला ना. सी. इगली, चिकनाई० ००भा० वा. चचलाइट घर', चार थप, नलक। चार शु. सुदर, अग्या, ना• पु. पदमाक। विपनाना० स. कि. उ वत करा चारपर्णा ना. स्त्री. गपसारा। चोपना। चारपतना.पु. अगूर, दात। विधाहट. ना. स्वी• उचलता, औ चार गु० वदवास, आस्तिक विशेष । चाल. ना. सी. गति, चला, रीति । चिम्चा ना. पु. जाति पिशा ना मा चामा स.नि. माड़ना, पाता वरना। रचता है। कालनी sी. पाटा सना का पात्र । चियार ना. पु. शार, चिराइट, चें। चाला. ना.पु. गौना, सर, सायत । चिधारना च. कि. चें करना, नाकादन चाची ना.पु.निसकारी, हालागत। शार करना, चिल्लाना। चाय.. पु. चाय, चारघगल की मास चिकारा पु० मृग विशा, चोरी सारगा २स विशेष चिकित्सक ० पु. वैद्य, तबीच । चापला ना.पु.दण्डलाज। चिकित्सा. ना. स्त्री० वैदई तिवारत । चापर ना.पु. नाकात पती, सहावा, यया | चिकुर० पु. बाल, करा । । साहपृष्ठतु कक सादा चार किदि|चिकोरमा० म.नि. चिन्दौरा, बाचियाना r m -- मङ्गलकोप। २ । . 3 झींगा। 7 चिकोरा० गु० तरल, चचल । चिण्डि० ना. स्त्री० नृत्य विशेष । चिक ना० सी० बरी, अना, काव्ये यया चित. ना. पुकचित्त, चैत य, गु० सूधालेटना (पाही खेती विक धा अर रिटियन बढेवारि, चितकबरा० गु० चितला, क्वरा, अबलक । येते पर जो नहिं नशे जाइ कर अधवारि) चितना० य. क्रि० रगा जाना । चिकट० गु० चिवटा, मलिन । चितला गु० क्वरा, चितकबरा । चिकरण गु० चिक्ना। चितवन ना. सी.टे, दीठि । चिकहा. ना. पु. चिया, बुनकरसाब । चितवना श्र.मि. देखना। चिकार० ना. पु० शोर, चिल्लाहट । | चितहट ना. स्त्री० खींच, चित्त हट चिंगडा० ना० पु. चिता । ना. सी. सरा, मृतर के दाह चिंगड़ी० ना. स्त्री. चिताखा० देने का स्थान । चिंगनी ना० स्त्री० चिताना० स० मि. जताना, सुचेत करता। मुरगी का बच्छ । चिंगा. ना. पु. चिताभस्म. ना. स्त्री. चिता की राख ! चिघाइ० ना० स्त्री० क्लिपार, वृक । चितावना० स० वि० जूताना, सचैन करना। चिंघाड़ना० अ० कि० रिलकारना। P: चितावनी० ना० स्त्री• जतापनी, चिह्न । चिंघाड़ा ना० पु. चिंघाड़ । । चितेरा. ना. पु० चित्रकार, मुसविर । चिंचड़ी० ना० स्त्री० क्लिनी। चितौना० स० कि. देखना, विलोकग । चिचियाना० अ० कि० चिल्लाना, मिमिया । चित्त० ना० पु० मन, हृदय, सार। चिश्चा० ना. स्त्री० प्रमिलावृत । चित्ता० ना. पु० अौषध, पापारिसर । चिट० ना. स्त्री० लीर, धनी। चित्ती० ना० सी० दिन, तहसन, विरोप, चिटकारा. ना. पु० छीटा, चिद । कोड़ी जो रगड़ के चिकनी हो। चिट्टा गु० गौरा, सफेद, ना. पु. एक रुपया। चिन० ना. पु. नि, रूप, अनि, मित्र, दोनों चिट्ठा० ना० पु० दिन दिनका लेखा वा कमाई पा अरण्ड, गुरु, बय पक्षी। रोजनामा। चित्रका ना पीना, पतु दिमाग चिट्ठी० ना० स्त्री० पर, पाती। चिघकन्दक- ना. पु. रिमीकन्द ।। चित्रकार ग.पु. ममन्विर, चितेरा । चिड़ना. स्त्री० ग्लानि, खिजापट । चित्रकारीन.ली. चित्रकार पापाम, मुम चिड़चिड़ा० गु० खुसाहा, झनझना, ना० पू० पोधाविशेष । चित्रकाय ना० पु. १५, शेर, गुखरपा । चिड़ना० अ० कि० अँझलाना, सिजनाविनस्ट पा० पु० पर्वत विशेष । या। चिकेतु ना. पु० राना गिरी। चिपड़ा. गु० वरपरा, तीता, ताम्य, शा चित्रगुन ना. पु. यमराम भेद, यमर या चिड़ा. ना. पु० कटुक । वरे भलेमा लेखक। चिड़ाना० स० कि. विनाना, सवाना, हे चित्रदेवी ना. स्त्री रानी। चित्रपक्ष. नापुरतीवर पसी। चिड़िया ना० सा. गौरिया, पड़ा। चित्रभानु ना. पु. गर्य, अग्नि चिड़ीमार० ना. पु० नदिया, मषिक चित्रभपत ना० पु. हमार। . 3 . 4 om .
मङ्गलकोप। - काशमा चित्रविचित्र गु० अनेक रग का है। चिपराना० स०मि लगा सगना चिपगना। বিষয়াবা । ना. सी. जिस स्थान में चिपचिपा गु. लसलसा, लिनलिना । बहुत चित्र हावे, नगाइखाना, चिपचिपाना . कि. लसलसाना । चित्रसारी नकारवाना। चिपटनाय. दि. चिपरा, लिपग्ना । चित्रा. ना. स्त्री० चौदहया नक्षत्र, इटवारगी। चिपटा गु. लगाहा, चिपचिपा । चित्रांगद ना. पु. राजा विशः । चिपटाना० स.वि. चपगना, चिणी लगाना, चित्राफल० ० पु. द्रवाणी । लपगा। चित्रित गु० चित्रपुत, चिर कियागया। चिपड़ी. ना. स्त्री गौहरी। चित्रिणी ना० खी• चिनविचित्र, भगवती चिप्पक गु० विघलाना, ना० पु• पति का नाम है। चित्री. ना. स्वा० चिनसारी TI पु० चातापगुचिप्पा ना.पु. चीप । विषडा ना. पु० गुदा, तत्ता। चिप्पी ना. खो. हा कागत यादि पण चिडिया. 7. गुदाया। होता है वहा लगाई जाता है, छारी चाप । चिथाह ० पु. पाइ चार, तथाई । चियुका ना० स्त्री• ठगदी। विधाड़ना० स० कि. पाना, चारना, निमटना प्र.नि. चिपकना, लपना । लथाइना चिमटा. ना. पु. स्यूटा, लाहे की वस्तु जो चिदाकाश ना• पु० परमामा चनय या मार और लाहार प्रादि रखते हैं । चिमटाना स.विलिपाना । चिनग० ना.ची मृतन म जलन पड़ा। चिमठा० गु० लचीला कडा विनगाना अ.कि. यसना, चिल्लाना । चिमड़ा. चिनगारी ना० स्त्री० लूका, अागि का चिमड़ाई 10 स्त्री. वडापन, एठ । चिनगी बाग सा फूल। चिमहाना० स० कि० बड़ा परना, प्र० कि. चिनचिनाना० अ.कि चिल्लाना, गारवरना । कड़ा होना, ऎउनाना। चिन्ता ना.सा. चिता। चिमड़ाहट ना स्त्री. चिमाई, एटाई। चिन्तन ना.पु. अभ्यास, चितवन । चिमड़ी ना. वा. चिमग। चिन्तना०दि. अभ्यास परना। चिमसा० ना• पु• सरेस पानी का। विना ना. सं . शोच, डर, जोखिम, स दह, चिर० अय. बहुत, बात काल । चिन्ताना. स.कि. अभ्यास कराए। ना. पु. वाशीवाद विशप अ चिरजीव र्थात् बहुन जीवन हाव । चिन्तामणि ना. सा. मणि विशा। चिरजीपी गु० बहुतदिपि, ना. पु. कात्रा। चिन्तित० गु• शाचा, भारिन, पिचारित । चिरकाल. अन्य नित्य, सदा । चिहाना पु. लक्षण पहिचार। विरकुट० ना. पु. चिर। चिन्हार० ना.पु. चिहारी ना. सी. चिरचिरा. ना. पु. श्रीस व पौधाविशेष । चिह्नित गु० जो पहिचान ग्या, चियुन । चिरचिराहट सी० झनझनाहर । 3 भावना चिरजी चाहा, पहिचा। चिरकुटिया गु• गुडिया। चिरचिराना प. वि. चरचराना । चिपकना यदि लगना, ना। म मङ्गलकोप। .६ . चिरना० अ० कि. परना। चीतल ना० पु. जगला जविराष, गु० सिरन्तन० गु० पुराना, प्राचीन !" चित्तना। चिरयाना स.के. फड़वाना, चिराना। चीता ना. पु० सेंदुया, व्याघ, चाह, पद्धि । चिरांद. मा० वा जलतहुए चमड़ की दुचौथना० स० कि० चिपाड़ना, फाइना । सना। चीन ना. पु. दश विशेष ना उत्तर पूर्व में हे चिराना स० कि. फड़वाए। चीनी ना० सा० साइपशप गु• चानदशा। चिरायु गु० बहुत जीवन। चीनीय गुरु चीनक मनायादि । चिर गु० पहुन । चीन्ह ना० सा० पहिचान, चिद । चिरुकाल गु० बहुत दिन, चिरकाल । चौहना० स० कि० पहिचानना। चिरकालीन गु० बहुतदिनी। चीन्हा ना० पु८ पहिचान, चिहार । चिरोंजी. ना. सा. शुष्कफल वशव । चीरनाक स्त्री वस्त्रका टका सारा, साना चिरौरी ना. ना. निता, खुशामद । श्रादना चिलक० ना० खा. चमक, भडक, दद। चीरना. स. कि० पाइना । चिलकना० अ० कि. चमकना, झलकना और चीरम० ० स्वा० चरीजा। फाड़ा यादिका पिराना। चौरामपु० फाड, धार मुग्धापन, पगडी। चिबचिमा ना.पु. मछला । चीरी० ॥ स्त्रा० भागुर । चिलचिलाना अ० कि. चीखना-निवाईनचील ना० सा• चाल्द, पता जिसका मकाा पर बैटक चिल्ला अशुभ है। चिलम ना० सा. तमा प्राग भेरन का। पान। चीलड़. चौलर० ना. पु. टाल, बाजुरा, चील्ह । युनाना० स० नि पर हाथ धान का पानी रहता है, चिलम के नाच चुआन ना. ती० जल के निकलनी भूमि । रखनका वस्तु। टपकना कृप में जल चिलवन सा. चिक, झभरा। निकालना। चिलवल. ना. पु. वृदावशप । चुकती ना० स्त्री. निपगरा। चिल्लड ना. पु. चालड़, चिलुा । चुकना० अ० कि० समाप्तहोना, निपग्ना, विमानाकि. युकारना, चिंघाड़ना। ठहरना। चिल्लाहट ना० स्त्रा. पुकार, चिंधार । चुकाई ना० स्त्री० कोता। चिल्ली० ना० स्त्री. भोजनविशष जा अण्डे से चुकाना० स० कि० निपगना, ठहरा।। बनात हैं, उल्लू चुकौता० ना. पु० निपारा, दहाव । चिहटना० अचिपटना, लगना चुनिका ना० सा. अमिलीद। चिहुर० ना. पु. वाल, केश। चुगना० १० क्रियाना, चुना। चोटी ना. श्री. चावगै, पाविशेष। चुगी ना स्त्री अत्रका का महश्त । } चीकना स्त्री बीच। चुचकारना. स. कि. चोचलारना और चौखुर० ना. पु. गिलहरी। मकारना। चीतना० स० कि. चाहना । चुचकारी ना. सा. नृमार्ग। प .
१०० मङ्गलकोप। चुप. } T 3 मीनता यामशा। उमपारी । - चुञ्च० ना० पु. मुानारशा । चुश्चकनावी भेंडी चुचर ऊपायू हातानिपट । चुपका. गु• मौनी, श्रवाल। चुपचाप चुञ्चड० ना. पु० चूचा, बड़ी सूची। युपचुपाना था कि गुपचाप रहना। चुटकी ना. ना० नीच, चुमटो, मुट्ठीमर यन, चुपहना० स० कि० चिकाना, मला पावा अगुलाका महना। घुपडी० गु० चिकना, चिकना। चुटकुला ना. पु०ठाली मजाम। चुप्प. ना. पुरू चुरला ना. सी. चर्ण। चुप्पी० ना. मा. चुप्पा० गु० मीन, चुपका, प्रनाल । चुटाना स० कि० घावयरना दूध पिला चुमकी ना• सा० डुक्की, गोतामारना। चुटालना० गाय गादिया चुगवना चुमना० अ० कि० गहना, इसना, विधा, चुडया० • पु. ना नो धान कृपये बनाते हैं। विदना, पैना। चुडैल० , ना. स्त्रा० प्रतिनी फू चुभाना० स० कि० घुसेड़ा। इदा, पाना । चुटैखिया० , हड़। चुमाना० स० कि. चूमादेना वा दिलाना। सुनत० चुम्कार० ना. पु. मा० सा० परत, तह ताडू चुनन० चुम्कारी ना. मा. चुन10 स• कि कपड़ोंग ताडावा पट्टा चुम्बारना० स० कि. चुचारना। चुम्बफल ना. पु. ला पा पार्षक पपर । करना, चारना, गना वानना। चुम्यन० ० पु० चूमा राहवरा हार यग चुनरी0 शास्त्री० लालरगीहुई श्रादनी। में पाठ सश करना। चुनवाना० स० कि. गाना,विनवाना, इट चुनाना वाना कपड़का तह लगवाना। चुरकुट० ना• पु• घुस्नी पूण । चुरगना० अ० कि० चै च परा। चुनापर० ना. ना. धुनत । चुनी ना० सी० चूनी। चुराना० स० कि. चारा करना। चुनौगा० ना० पु. १ पान जिप्सम पान तम्या घुरुगन्म० अ० क्रि० का वरदाना । चुनौती सौ. उसाने लिय चूनारसत है घुल० ना. सी. खुगतान यो इच्छा। युद्ध, र यो धादसा-ना, प्रोनम से बलवानों चुलचुख० ना० पु. चचलाइट । यो धावा क लिये घाटना, नेटमुली एकादशी यो चुलचुलाना० स० [१० सुनला गुदगुदाना। पैरके पारजा जा पाशीनीमें प्रचलिनरीति है। सुनचुली० ना० सी• चचलाहा । उनीरिया गु० पश्चिम में गारग को कहते हैं। चुलबुला गु० चचल रंगाला। घुगौती ना० सा• तलाद रात बदनी बात चुलधुलाना० अ० कि० चचल होगा। निशानी, चिहारी, स्मारकवस्तु । चुलबुखाइट० ना. स्त्रा० उलगुलापन । चुलबुलिया० ३० घुलनुला। चुन्धलागु. यास, नयनरोग। चुलहाइ ना० सी० कामातुरी । चुन्धखाना० य.क्रि. साधाहोना! सुखदारा० १० पु. कामातुर । चुन्धा० गु० -योधा, चिमधा। चुल्लू० ना.पु० एपहाथ का सम्पुर, मुट्ठीभर । चुना० स० कि. चुनना। चुनी ना० स्त्री. घोटामाणिक चुसपर० ना.पु. पिवर। चुसनी ना० रनी चूचनी 1 ८ मङ्गलकोप। १०१ . . । चुहचुहा० गु० जो गहिरा रंगागया। चूमा० ना.पु. मोठी, मच्ची । चुहचुहाना० अ० कि. गहिरा गानाना, चूर० ना० स्त्री० युनी, चूर्ण । वियों का शब्द जामात काल होता है। चूरन ना. पु. चूर्ण चुहल ना० सी० चर्चा, चहलपहल । -चूरना० स० कि० चूर्ण करना। चुहला० गु० ठटोल, इसोहा। चूरा ना पु० रेतन, धूम, चूहा। चूंगी ना. स्त्री० चूगी। ! "चूरी० ना० स्त्री० बहुत घी पड़ीहुई रोटी, नही । चूंची ना० स्त्री० कुच, भिटनी, धन । चूर्ण० ना० पु० रेणु, पुरती। चूंटा ना• पु० पृथ्वीमें रहनेहरा न तु विशेष । चूल० ना० सी० एवं लकड़ी या सिरा जो दूसरी छूटी० ना० सी० छोटा च्या पा उसकी सी। लकडीमें डालते हैं, किवाड़ के खूट नाचे ऊपरके । चूक० १० ना० सी० भूल, भ्रम, पोधा विशेष गु० चूहागा. पु.] श्राग रखने वा रोग पकाने खट्टारिशेष ना. पु० औषध विशेष । - चून्ही ना० स्त्री० की वस्तु । चूकना० २० कि० भूलना, धोखा देना। चूसना० स० कि० पीलेना, सुड़पना । चूफा० ना.पु. सहा साग। चूहड़ा० पु. ना. मेहतर, भगी। चूची० पा० रपी० सूची। चूहड़ी ना. बी० भगिी। चूड़ ना० सी० सोने वा चादी की वस्तु जो चूदा० ना• पु० मूश, मूगा । विधया पहिनती हैं, ना. पृ० कड़ा विशेष जो चूदी ना० सी० घोटा मूश, उगकी सी। हाथी के दावों में पदिनात हैं, वट यी पहीची ना० सी० यस्तु जिसमें सुई रखते हैं। या मिरा या नौर। करना० १० वि० उक्ना। चूडा० ना• पु० सरकार की ति से प्रथम पुप ना० पु. वृतरा पल या तासा । चंदा० ना. पु० योरन, बोटा। एडन, लाख पा रही, ललाट ५ ऊपर बँधेहुय चेटफ ना. पु० सेपर, नोकर, भगरविद्या । केरा, चर्पण विशष चेटकी० ना० पु.नाल, ख्याल दिनानेहारा, प्यूडाकरण ना.पु. मुण्डन । ना० सी० दासीरोयकिता चूडामणि ना. सी. करण को मणि। चेरी ना. स्त्री. दासी, घोड़ी। ही ना. मी लियोरे हाथमे पहिनोंके लिये। वेत. ना. पु. समरस होरा, याद, छवि। जो चादर मा सास या याचरी पाती हैं। चेतक० गु• चेत करनहारा, चैत में हो। चतका० ना. सी. सरा, चिवा, रामराया, चूत ना० सी० योनि, याम। मनी चेतमा में सती सत्त पागे। चूतमूना पुनितम्ब, नयारा उपरिभाग, महा। चितको चूतिया० मा पु० उल्ल, अहमद । ना. सी. । चून० ना० पु. भाग पिसान। चेतना मार करना, पानगाना, चूना ना • पूर्ण, या नोपान में लगाते है, बिना मुरि में शाला र सीपुरद । मिट्टी का पत्थर या यर या सीप नली घेता मु० चेत बग्नहारा ! म.मि. टपरा, रमियाना, धनना। चराः ना० पु० चला, चार, सहल चूनी मा० सी० दसामा रहदशादि, सुती राई ना० सी० दाल, तेल, चमफपत्थर० ना.पु. पुत चूमना० स० कि० लेना, मादी लेना। ना. पु० राम बापान . - hd चरी ना. स्त्री की दाती EN.. 27 १०४ मङ्गलकोप। 0 3 - , * . चौर० ० पु. चतुर्वेदी, जातिविशेष, मथुरा छरहा ना. पु० गाड़ी, शफ्ट । तीर्थक पुरोहित । चमड़ाना० स० मि. चौधियाना, चकराए। चौमासा ना० पु० वरसात, परहिल ।। छकना. क्रि० स तृष्ट होग, मरना हमहीना, चौमुरा० ना०पु० ब्रह्मा,चौमुखा दीवट, चारापोर। खित, याउल। चौमुसा ना० पु० सयविशेष, चारमुखकी दीवट । छकाई ना• स्त्री० तृप्ति, सन्तुरता । चौमुखी ना० स्त्री० रुद्राक्ष का फल । छुकाना० स० कि. रतुए वरना, तृप्तरना। चौर० ना० १० चोर। पेटमर भेजा कराना। चौरकर्मः ना. पु. चोरी। छकाइ० ना० सी० पप्पड़, गु० मदत का चौरग० ० पु० दावरिशेप, बैलबादि के चारों पशु आदि। पाव एक चपेट में काम। छ० पु.६ का समूह, खेल विशेष, जाल चौरभय ना. पु० चोरोंका डर। सहित पिंजरा। चौरस गु० रामान, एक्सा। छगरी ना. सी. बरी। चौरसाना० स० क्रि० समान करना । छगल० ना.पु. वरी। चौरसाई ना. स्त्री. सापाई, समाना। छगुली • सी. कनिष्ठिका, पाचवी यगुली। चौरा. ना. पु. चतरा, चोतरा। छछुन्दर ना० सी० मूश जो रातिको निक चौरानरे गु० नये अोर चार १४ । छछूदर० लन है चार वासित होताहै। चौरासी गु० अरसी पार चार ८४ । छज. गु० झाडखण्ड । चौराहा ना.पु० मार्ग चारों ओर जाने। छजा. पु० बरामदह । चौरी ना. पु० चौतार धोई लाख । ० ना. ना. सजी। चौलडा० ना० पु. चारि लड़की माला वा छज्जन० ना. पु. दातुविशेष । चौलली नारी. १ कोई वस्तु । छञ्छनाना श्र० कि: सत्स गनी, सर्रागदेना, चौला० ना० पु० अभविशेष । चौलाद ना. स्त्री० रागविशेष । छटना ना. पु. चलनाविशेष, अनि चौवा ना. पु० पशु चतुष्पाद ।। घना, विछुइना, भिन्नाभिन होना। चौवाई ना. सी. आधी, भकः । घटा ना. स्त्री० उजाला, चमचमाहट, बिज़ला चौसठ गु. साठि और चार ६ ।। पौधा गु० जुनाहुआ, छगया। चौसर • • चार लड़काहार, चौपड़ा, छटांक० ना० रत्री० सेरया सोलहयाभाग ! चौहट १ ना० पु. चौराहा, चौसरका वा छटाना० स० कि. घुनवाना । चौहट्टा जार। - छटे० ना० पु० उनेले का बहुवाक्य गुः पनेहुये, चौहत्तर० गु• सत्तर और चार ७४ । . चुनेहुये अलगमये। चाहान० ना० पु० रजपूत जातिविशेष :-छह ना स्त्री० षष्ठी, छ । च्युत गु० पतित, मरिना बदला। छट्ठी ना० रठी. घटी. षष्ठी, नमन के पीछे च्युतता ना० स्त्री० पवन बदल । च्युतिक ना. स्त्री• योनि, गुदा । छठ. ना. सी. पष्ठी, बट्टा। छठी ना. सी. घट्टी। छड़ ना० पु. भालेकी लकड़ी, उठा बादी श्रे द चरपराना। " - 4 छठे दिनका व्यवहार। mi मङ्गलकोपा - विकुनी। •" IT घर, अांख में राफेद दाग। छनना मग्न निवांना मानहाना। छड़ना० स० कि० चावलों का छांटना। छनाशन, माया मांडा टने छड़ा० गु० अकेला ना. पु० यान वा परिमेंअगदा, पहिरन का भूषण।, दनाका ना० पु. तुरन्तु जयगाना पानी का छहाना० स० कि.. चारल साफकरनार ग्राममें। छड़िया ना० पु० बोड़ीवाल, प्रासादार छनिक ना पु० पिका ना. सी. बोटींगली, कोलिया। छन्द- ना. पु० पय, रचना, गायपादि। छडियाना० स० कि०. छड़ीसे मारना । ददगतिः ना० सीछन्दों को चारा छड़ी० ना० स्त्री वेत, यांसको सूती मुम्ही, बन्दना अ.न्टना, काना' छन्दवन्द: युवाल, इल। छड़ीला ना० स्त्री० 'जटामांसी। यदीदी की। छण ना. पु. क्षण। धन्लान का दूध प्रादि पारनेको । छण्टना० अ० नि दुर्बलहीन्याया। छन्दी की अंग दन्ना, भूगिरिश। छराटयाना० स० नि. दिलदार छन्न धान्नेहा छण्टाई० ना० स्त्री. घाटक मा। छपक ना० पु० नख, युवंरतु गिरनेका राम। छण्टाप ना. पु. दही, पनाला छएडना० स० कि० अन, दवा दलाना । छपकली ना० स्थी नाशेिष। छएडना० स० कि० जुन, उपकाना० स० कि० पानी डालना। छुण्डित० गु० छोड़ागगा। छपती ना. श्री. जन्तुविरोध। छएडवाना. पु..पूर। छपना० . छण्डौती० ना० रखी० गुना अपरा० ना० पु० छप्पर। । कि. धापाहोना, तुरुगा। उत० ना० सी० परके आरडी पर या पाटन । छपरिया० गा० स्त्री. योटा लप्पर । ' छतकुम्भका ना० की , इन्देल, यया छपरी गा० रत्री० सपरा । सुपा० ना० सी० छः पदका पन्द। .. करवीरा शेतपुष्पा, मरद हम्द इति छपाई० गा० सी० पाने का काम या सा।
मङ्गलकोप। सा . ar . छममानाव्य. नि. चमकना कलमनालगना, छांह० ना नी किनारा, नदी का भगवादी छय.ना.पु. क्षय। या मोता। छयरोगना० पु. छोड़नाम० कि० घार ना। छर० ना मा. जगमानी, गड़, एइ, मन्दी, छांद ना० स्त्री. पगहा, पैकड़ा। शिनारी। छांदना समिनाधना । छरछोयी नानी मारिने का स्था। छांदा. ना. पु. भाग, प्रश, हिरमह । छरसा ना.पु. परस । छांव० ना. स्था• घाया, परहा। छरी. ना. सी. एड़ी। छाह छर्दायन ना० पु. लोग। छांहारा गु. छायावान । दार्दिक ना० मी० यमन, प्रोकना । बा. सी. वनवा। रांना. पु. लाहेबादिकी द्वारी हारी गोली। छाकना० स० नि• कृपा जल पाना, पेटभ छल ना. पु० पर, टगाई, पासा, धारल,मिमा भृजन वा कोई वस्तुगवाना। छुलवना० अनि निक्लजान', दलकना। छाग० ना रनावकरा। छलकाना० स०नि० गिरादेना। छागल ना० पु. दुपी,वकरी पायरीपादान छलकारी गु० कपरी, टग दगाबाज । छागी गा. स्त्री० बरी। छलांगना १० वि० कुदरना। छागलांगी ना.सी. विधारा । छलचिद्र० ना० पु. कपर, छल । छाछु छलदिनी गु• कपटी, दली। छलना० स० कि. दलबरसा, टगना, भटकाना। छाज.ग. पु० सूप । छलनी ना. स्त्री. चलनी। छाजना० अ० कि. घाना, फपना, सजना। छलांग० मा० मी. तुदशा, फ्लाग । छाजित गु० पापित, लाभकारी। छलाया. ना. पु. लूना, प्राग रोतानी। छात० ना. सी. धन। छुखिया छाना० पु. दत्र, छतुरी। गुरुवपरी, टग, प्रपची। छाती ना. रची० हाराहाता, उर, चूची। एल्ला ना• पु० अगुली म पहिग्ने फा गहना। छात्र ना० पु० विद्यार्थी, शिष्य, चेला । क्या ना. सी. एंडी पाती। छादन० ना.पु. कपाम। उथिना. पी. शोभा, चमक, मुदरता । छान ना. स्त्री. दारी, टाट, चपर, विचार दयिभीर० ना. पु० यान । छानना.म.नि. निर्वारना, खछ करन पीला गु सुन्दर, शोभायमान । हना, रिचारना। दवया ना. पु. छानेहारा। छानयान ना. स्त्री. विचार, जाच । यो ना• र छोर। चानये ना.स्त्री. छाया। छानस ना.१० चौपर, भूसी, पूरा। 'छांट० ना. स्वी• गूद, मादी छीलन । छाना. स.वि. दाजना प्रयाकरना, पार- छोरन • कहा, पानी । छथर बनाना हराना। छोटन. स.नि. वमन करना, कतरना, अलग छानी० नाचीघर । परना। दापना. स्त्री मुद्रा, मुहर अाता चिक छाला ना०पु० मट्टा, मथा दही दली. नम्बे और छ १६। ० मङ्गलकोप। A । छिति० छिती० } पूना। छापना० स० मि. बापाचरना, चिवदना । छिटकनी गा. सी. विल्ली जा स्विादों में छापा० ना.पु. वेणा तिलक, मुद्रा। लगती है। छापाविद्या० ० स्त्री. जिसके द्वारा अनक छिटकाना० सकि.पेलाना, विथराना । पुस्तक छापी जाती हैं, सब वस्तु जानी छिटकी ना. स्त्री० घरी, छाट । जाती हैं। छिडकना० स० वि० छींना विधराना। छाम० गु० दुरला, हलका। छिडकाना० स० मि. लिंग्याना, सिंचाना। छाया० ० स्त्री० परधाई, धाह, पिशाच मूत । छिड़काव ना. पु० साँच, सिंचाय । छायानट० ना० पु. रागिनीविशए । छिड़ना० अ० कि० चिदना, दुवा होना। छायाधर ना.३० वृक्षादि । लिडाना० स० कि० चिदाना, चिदाना, छायापाद. ना. पु. छाया के परिमाय से दुखाना। समयका स्थिरकरना। छितनिया छितनी ना०मा० दलिया। छार० ना. स्त्री० क्षार, ढला जो बड़ा है। छारछ्यीला० ना. पु. सुगधिवस्तु विशेष । वितरना० अ० वि० विधरना, फलना । छारी ना० पु. क्षारी, श्रीमहादेवनी। छितराना० स० कि० विथराना, फैलाना । चारू ना० पु. निनावा। ना. स्त्री० तिति, धरती, जमीन । छालना० स्त्री० बक्ला, दिलका। कि. चमड़ा खाल, छिदना० अ० मि० विधना, गहना, स० छाला ना० पु० फफाला, राक्ना, रोक्न का काम करना। छालियां० ना. स्त्री. सुपारीविशष । | छिदनी० ना० स्त्री० छदने की वस्तु । छावना सकि. छाना। छिदाना० स० कि० छदकराना, राकाना। छावनी० ना० सी० पलक रहनेका स्थान, छिद्र० ना. पु. छद । लनचानका काम। छिन० ना० पु. क्षण, लहमा । छिनकना० स० कि० नाक व घररना । छाह. ना. स्त्री. 'बाह। छिकुनी० ना० सी० हड़ी, मची। छिनला० ना• पु० व्यभिचारा, परस्त्रीगामी। छिका० ना. स्त्री० चीक । छिनवाना० स० कि० और रिसी स खिंचवाना । छिकिका० ना० सी० नकटिक्नी, पोधा । छिनाल. ना. स्त्री० व्यभिचारिणा, कुलटा । छिगुनी० छिनाला. ना. पु० व्यभिचार, कुलटारन । छिंगुली० T० वी० कनिष्ठिका,नगुरिया। छिनेक ना० पु० सणै। छिचडा० ना० पु० घावरा नया चमड़ा। छिन्न गु• खण्डित, क्षाण, दुर्वल । छिचड़ेला० ना. पु० दुवला, चमचिच्चड़ । छिन्नभिन्न गु० अलग २, तितर बितर । छिछड़ा० ना. पु. खलबी, छपर। : छिन्ना० ना. स्त्री० गुरच, महामुण्डी। छिछला गु० उथला। | छिपकली. ना. स्त्री० गृहगाधिका, रिपटियी। छिछलाई ना० स्त्री० उथलाई । छिपका० ना० पु षड़काव । छिछली० ना. स्त्री० खेलविशेष, थाडीगहरा छिपना ० कि. लुफ्ना; गुप्तहोना ।। छिछोड़ा गु० पोशा, हलका, नीच । 17 छिपा० गु० लुका, गुप्त, अप्रकट । छिटकना० अनि फैलाना, विपरना। छिपाना० स० कि० गुप्तकरना, लुकाना । . ... । म . . - मङ्गलकोप। . र . 1 म - - . छिपाय ना० पु. लुावर पुकार, पन । छुछकारना० स० कि. तुच कर निकालना, छिप ना.स्वा. शात्र, शिनावा। दुलरारना। चिमोद्या ना ना• गई। छुट्याना० म०TRO गाइना, पूषना। छिमा० ना० स्त्रा• क्षमा छुटकारा० ना.पु. सुडान, उद्धार । छिमाजोग० गुहमारग्य। छुटसेलना ० कि० लुच्चापन फरारा । छियालीस गु. चालीग और : ४६ } | छुटखेला० गु० नुच्चा, बदमाश । छियासठ गु साट बार छ । | छुटना० अ० कि० उद्धारहाना, निकलना । छियासी गु० अरमी और छ ८६ । | छुगन छिलका ना० पु. काला, फलादक ऊपरी छुटानी ना० ना. मुर्माना, छुट्टी त्वचाविशष। छुटापा ना० पु. उग, धारापन । दिलना० अ० वि० रगडनाना, उधनाना छुट्टी ना. स्त्री० उग्कारा, उद्धार, रम्मत ! छिलाना. स. कि० पाना, रंगड़ाना । छुड्याना० स० कि. हुग्रारा राना । छिलैया ना. पु. ईलनहारा । छुतहरा गु० जा अपवित्र हागया, । छिलौरा. ना. स्त्री० अगली शरपर 'गड़िया छुद्र० गु० तुद्र नाच, दलका, नकटिस्नी। पिनहीं। | छुद्घण्टिका ना. ती• सुपरिरा, ता छो० अन्य तु दारने का वाकर। छुद्रमेसला गड़ी परधनी। छोक ना. वा. मिनक, प्रमिड, अतम । छुद्रा ना० सी० पतुरिया, घाहाग, घर, काई छींकना प्र.कि. ब्रसाएइम पवन उतरना। पाथा, नाच स्त्री, नटा। छींकार ना पु• रस्सी का नाम निमम वसु छुधा ना• श्री. भूग । तके लाका दते है। छुपना० ० कि. 'लुमना, गप्तहाना । छोछडा ना• पु. चमड़ क ममान अमक्ष्य माम। छुपाना० स० कि० लुकाना, दिपाना । छीनना० अ० कि० घना, गिरना। छुपा गुरु लुरा, गुप्त, दिपा, अपर। छोट: ना. स्त्रा० दिया, दार। छुरा • पु. वाहुरी बालमृडनेका घरन । चौटना० म० 2. घिराना, पाना दिडकना । | छुरियर TT० सा• पालक का साग हुरी। छीनना स० कि० झकलना, वाचना। छोप. ना. स्त्री पाई, लहसुन, निम तक ही में छुलकनार थाना "गोडा पहिराका प्त नायने है, साग स ढकेलना । छुलठुलानामृतना। छीपना० स० लि. पानी विहरु दना, वीर निका | हुलाना० स० वि० युवाना त्रिला छुहाना० स० कि० उजलाना । सना, वसदार छुहारा० ना.पु. वृष वा उसका फलविशेष छोपी ना. पु. वस्त्र, घाग्नेहारा। छामी ना० स्त्री० पला, दिलका। छुहारट. ना. सी. लगावट । छीनन .पु.मारना, उतरना । माना स० वि० स्पर्शराना ठुलाना। छुई० ना० स्त्री• दूपिया मट्टी, सरियामही उदारना, दालना। मुगलिया ना. वा. गनी। छछला गु• बौदला, बावला । दूदा गु० श्य, सोम्बला, साली - 1 छुरी न • स्त्री. चाकू, लत्रा चाकू। A T . m - पालना० स० वि० याना, कतरना, दिल छकी ना० सो मच्छर । त मङ्गलकोप। 8 O y 7F . , T छूछी ना०सी० कुस्मित,अपमानी, नीच साली। छोछो० ना० स्त्री० अग्नी, गादा । छूट 1० सी० बट्टा, छुड़ाम, भूषणको चम। छोटा गु० कनिष्ठ, राउ, अल्प। छूटना० अनि छुग्ना, निकलना। छोटाई० नाश्री. थोडाई, छे यापा। छूत ना० सी० अपरिनता, 'नोपानी। छोड़ना० स० कि० त्यागना, धमारना । ना० स० कि- सर्श परना। छोडा छेक ना. सी. रोक। छोड़ा.ना.पु. छुग्यारा, तुद्री, उद्धार । छेकना० स० कि० रोंग्ना। छाडावा छेकवैया ना० पु० रोस्त्रया। छोडावना० स० कि. छुटकारा कराना, उद्धार कराना। छकार० ना० पु० सार। छेड़ ना स्त्री. खिनासर, दुग्वाय । छोडौती ना. स्त्री• छुट्टा, छूट । छनार स० वि० खिना दुखाना । छानी० ना. सी. पृथ्या, धरती, छोणि " छेद- ना. पु. चिद्र, मुख, सूराख । छोप० ना• पु० एक्वार, रगभरन, मिरना छेदक ना० पु. वेदर्ता, वधा। छोपन० स० कि भैरदना, रगदेना।। वेदन ना• पु० छद, वैधन । छोर० ना० पु० किनारा, कगर, सिरा । छेदना० स० कि. धना, बरमाना । छोरना० स० कि० छोडा।। छ.० ना. पु. सिरसा, छाना । छोरा ना० पु० लड़का छनी० ना. स्त्री• छेक्नी, छदनी (क छोराछोरी० ना० पु. लडका, लडा. म. ना. स्त्री० छैम, कुशल । छोरी ना० स्त्री. लड़ी, पुत्रा। मङ्करी० ० स्ली• छेमकरी, भला चाहने छोलना० स० कि. छीलना। छोलनी० ना. स्त्री० दौलनेका अन्न, सुरी - छोह० ना० पु. स्नह, प्रेम, दया। छेरी ना० सी० बरी। छोहरा ना• 'पु. खङ्गमा छेल ना.पु. बकरा। छीदा० गु० स्नेही, प्रेमी, चाइक । छेलका छेय. ना. पु० पाछ, फगर चिराव । छोकन ना० ० चार। छेवना० स० कि० छैना, कारना, फाइनाचोकना म० किमान। देवनी० ना. स्त्री० 'कानी, टारी। छोकनः ना० ० साभारी कर हारा छेवाना०पु० पुस्तकोंमें ठहराव के स्थानवा चिट चौकना म०कि.ग माग करना । छेत्र० ना• पुत्र, खेत। दाना ना. पु. जन्तुका सा, वया । छेत्रफला ना.पु. क्षेत्रभल । धौनी ना० सी० धावनी, उपनदी करना। छैया ना. पु० चौरा। छोरा ना. पु० मुण्डन । छल. गु. बाका, चिनिया औरक ना.पु. नाई, नाऊ। "छलचिकनिया० । अकड़त। चौरकर्म० ना. पु. मुरडना, बालमुएलाना, छैला इजामन बनवाना। छोमा० ना• पु. भी। छोकडा ना ना. पु. सईया। जो अन्य शब्द के अन्वंम सयुत होकर उत्पत्ति छोकरा का बोधक होताहै। याला। । - । ।
मङ्गलकोप। 7 ईश्वर । जकड़ना० स० क्रि० क्सना बाधना। चलने की सामर्थ्य रखता है, चैरागी। जकड़यन्द० ना. पु. पाडवाई । जगल ना.पु.1, ग्राएयत जगन्ना पु०जगत्,ससार,यश,नौर जहा जासके। जंगला ना १० रागिनाविशेष। जगश्चनु. ना. पु. सूर्य। जंगली ना• पु० बगैला, वनवासा । जगजगा० ना.पु. पालकी पनी । जंघा ना. पु. जाध, रान । जगजगाहट० ना. स्त्री. चमचमाहट । जंघा • स्त्री. जाप, जानु । जगजीवन० मा० पु. पानी, ईश्वर । जचना० अ० कि. अटकलाजाना, परीवाहोना। जगण ना. पु. गणविशेष । जचाना० स० कि. चाकल राना, फसवाना, परीक्षा कराना। जगत् ना.पु. ससार, दुनिया, टर। जगता गु० जा साता नहीं, धनींदा । जचावट. रसी. परीक्षा, नाच। जगती ना० स्त्री. धरती, पृथ्वी, सोग। जजाल० ना. पु. उलझेका, दुख, सश। जगत्प्राण ना.पु. पवन, जंजाली० गु० लशी, सदाता । जगदम्बा ना० स्त्री० आंदिश के,देवी, भवानी, जट० ना. स्त्री० जटा। जगत्की माता। जटना० स० कि. चिप'जाना, मूड़ना । जगदादि० ना.पु. पृषीरा प्रारम्भ।. | जटा० ना. स्त्री० बिगड़े हुये बाल, भूप्रौरा। जगदाधारना.पु.शेर,दिग्गन,गौयादि ईश्वरा जटाधारी० गु० जग रखनेवाला । जगदीरा ना० पु. परमामा, विष्णु, शिव जटामांसी० ना० स्त्री० औषपि । राजाधिराज। जटायु० नाकपु. गृशिष । जटित गु० जड़ाहुया, जहाऊ। जगधर० ना. पु. शेषजी। जटिल० गु० पुराना, जगधारी। जगना०प० कि. नींदस उठना, चेतना। जटी० ना.पु. बरगद वृक्ष, शिवजी। जगन्नाथ ना• पु० पुरुषोत्तम, उड़ेसा देश में जठर० ना० पु. पेट, उदर । श्रीकृष्णपद्रनी। जठरानल गा.पु.पेयी यान। जगन्मित्र० गु. सबका दोस्त, सबका पित्र । जेठरा. बड़ा, जेठा। जगन्मित्रता० ना. सी. सबळ मित्रतारखना। जठेरी० ना० रवी० बी, बूदी । जगमगा गु० चमकीला। जड़ ना. स्त्री० मूल, गु• मूर्स, स्थावर, नि- जगमगानाथ. कि. चमकना, झमकना। जीप दुष्ट, निशाचर। जगयोनि.ना.पु. ब्रह्मा । जहन० ना० स्त्री. ज़डने का काम। जगवल्लभा० ना० सी० वश्या, पतुरिया । जहना० स० वि• लगाना, जोड़ना ! - जगह मा० रत्री टौर, धरती, समाई,गुनायश। जड़पेड़ ना० स्त्री० समूचापेड़, अर्थात् सन। जगाजोति. ना. सी. चाक, भड़क । जड़वटना स्त्री० स्तम्भ । जगाना० स.शि. सोनेसे उठाना। जगेसर० ना.पु. जसेश्वर । जड़हन ना० पु० धान जो शातिक अगहन में - साया जाता है। जघनना.पु. उरस्थल । जड़ाई० ना० स्त्री. नड़ने का काम वा जड़ने जघन्य गु• नीच। जाम ना• पु. चलनेपाला, वेषधारी, गुनो जहाज मणिमुक्तादि से जहाभया, जडाहा। . 1 का पैसा। *- मङ्गलकोप। 7- T जहाना० सकि. जवाना, नाड़ा खाना । जनयित्री ना. स्त्री माता, जननी जड़ाव० ना. पु. जइनेका काम ।। जनवासा ना एजहां बरात दहाती है। जड़ायराना स्त्री. जाड़े के कपड़े जनश्रुतिः ना० स्त्री० सन्देशा, समाचार । जडित गु० जास्ति, जड़ाया। जनहाई अव्यं मनुष्ण मनुष्यसहित, प्रत्येक जहिनी० गु. स्त्री जड़ स्त्री, दुष्टिनी। जनहार० हरएक। जड़िया ना. पु. जड़नेवाला, जौहरी, सुनार । जना ना. पु०'लोग, मनुष्य, गु० पुत्र उत्पन्न जड़ी ना. सी० पौषधि, पौधेको जड़ हुया, भया। जतना स्त्री रीति, दौल ।' - जनाईना मी जो स्त्री लड़का जन्मातीहै दिखाई। जतन ना. स्त्री० यत, सदवार ....... जनाजात व्य० जनहाई । जतनी० ना०.स्त्री० यी तदबीर परनवाला जनाती गुः कन्या औरफै बराती,बराती लोग । • जताना० सकियुझाना, चिताना, पतानो। जनाना स० क्रि० उत्पा राना, जनाना, जतारा० ना पुरवंश, पराना, पादौ । चिताना, दिखाना। जती ना. गु० यती, सन्यासी, शान्ती जनार्दनना पु० श्रीकृपानी। जतु ना० सी० लाख । जनाव. ना. पु० जतारलखाव । जतुप्रा० ना. पु. लंदीका सुंग। जनिका गा.पु० 'द्रयर्थ जिसका दीप्रकारअर्थहोता. जथा अन्य व्यथा, गा.पु. समूह । जनित० गु० उत्पन्न भया, उपना । जथार्थ अध्य० यथार्य, सच ठीक। जनी ना० सी० दासी, बहू, ध्यानी । जद. पण यदा, जन । जनु० ना• 'पु. जन्म, उत्पत्ति, अन्य माना। जदु० ना. पु० यदु। জনক স্ব গান। जदुनाथ. जनेऊ० ना. पु. पशोपवीत । जदुनायक मा. पु. श्रीकृष्णचन्द्रजी। जनेत० ना. पु. रात । अदुपतिः जनेवा० ना. स्त्री. तृणविशेष, कांधासोही। जदुयंशी० गु० यदुवंशी। जनेश. ना. पु. राना। जद्यपि अन्य. यद्यपि। जनो नापु. जनेऊ जन ना. पु. मनुष्यलोग, नौकर । जन्ता ना.पु. ताररतींचने का यन्त्र जनक ना.पु. पिता, यामीनानी के पिता। जन्तानार स. कि. दराना, निचाइना। जनकपुर० ना. पु. पिताका गांव या नगरतिर जन्तार० ना० पु. यत्र । जन्तु० ना० पु० जीवधारी, जुद्रनी जनता मा. सी. लोग वा लोगों का समूह, जन्तु ना. पु. होग। मनुष्यता प्रादमियत । जन्तुदननः ना.प. पिइंग गधि । जनन. ना. जन्म, उशांतर जन्म० गा. ० उत्पत्ति, पैदायश।' .:".. जननाय. मि. जन्महोना। जन्मदाता ना. पु. पिता- जननी ना.सी.माता, महतारी। जन्मदिनः नवबन्धन, वर्षगांठ । जनरप० ना.पु. लोगोंका शब्द। जन्मनाय. ०ि उपनना, पैदाहोना। जनलोक ना.पु. लोक विशा, निम साधु जन्मपीना सौजन्मवृएडली, लग्नकुण्डली लाग मरने के बाद मास करते है। सायकह। .. .
मङ्गलकोप। t. 7 - T . न TH १ जम्बीर० } ना० पु. नीबू । जन्मभूमि० ना. स्त्री० उसत्तिमा घर वा जमहाई० ना. स्त्री. ग्रालस्यारा हार मा जन्मस्थान.. पु. स्थान। का पसारा जन्माना० स० [R० उपनाना, पैदाराना । जमहाना०प० कि. जमहाई ला। जन्मातर० ना. पु. और जम्। जमाई० ना. सी. जामाता, दामाद । जन्मान्तरीय गु. अगल जमका उपानंत। - जमाना स. शि. उगाना, वाघTI, Tu. जन्मान्ध० गु. जमका श्रा। वरना, मारना, बैठाना । जन्मोसव. ना० पु. महान का धान, जमालगोटा ना.पु. औषपि विशए । जमोमा। जमाव. पु. भीड़, बहुताता जन्यजनकमान 1. पु. उत्पन कियाहृया जमावट ना. स्त्री० धावर । और उपर कीहुई वस्तु इनरा सम्बध । जमी० ना. स्त्री. रात यमी यमुनानी r जप० ना.पु. पाठ मापदरा उच्चारण। जमोगना० स० वि० सहजाना । जपन० ना.पु. मउचारण पाठ। जमोघ. 'ना.पु. जमनिशाना लड़योंका जपना. स.वि. मनादिका उच्चारण । जमोघा लगता है। जपन्तागुजापक। जमना० अनि बदना, पनरना। जपमाना. स्त्री. जपनकी माला। जम्बाश० ना.पु. सियाल, बालू । जपा० ना. पु. हुडहुड का पृल। जवी गु० जापर जम्बारक० जीतपी. ना. पु. यचक भजनीक । जम्मु ना. पृदिह, भृगाल यमुनावृत्त । जब० व्य. या। जम्वुक. ना.पु. गीदड़ भृगाल । जरहाना. पु. ज।। जम्बुमाली0 71.पु० प्रहस्तका पुत्र राक्षमावशप । जबहा० ग. थड़ा, अनारी। जम्बूद्वीप० ना. पु. पृथ्वा के सात. दीपा मम जयहिया • कुरूप। एकका नाम। जभा० ना. पु. जबड़ा । जम्मभेदी०मा० गु० रद्र। जम० ना.पु. यम मृगण । जम्मल. जमअनुजा ना० स्त्री• यमुनाना! जमक० ना.पु. यमक पहिला शम्दछदवा। जय. ना. स्त्री पराभव करना, उन्नति, गु. जमकना० य.नि. वाना निमना ठहरना। जिना जयति बाशित। जमकाना. स. वि. बनाना ठहराना गाना । जयजयकार० ना• पु• पराभव हाना, शत्रमा जमयटना.पु.मएडना माइ। जमजम चन्य निरन्तर मा। जयजयवन्ती ना. स्त्री. रागनी विशेष । जमदग्नि ना• पु. परशुराम र पिना। जयटाफ पु. दालविशेष। जमत ना.प. यमदूत । जयतना• पु० वृद्धाविशा। जमघर० ना.पु. कार । जयान० मि. ज निहो। जमनाय.शि. उगा टर, जमनाना। जयागर० ना. पु. रानपूनाने का राजधानी- जमरात.ना.पु. यमरान। जयन्त०० पु० इद्रका पुत्र। जल.गु .. जयन्ती नानी दुगादवी, वृक्षारशेष। r C जम्मार } ना० पु० नम्भारी नांदू । 1 वाई का वा जीतिका बाधकः । r . . ३ मङ्गलकोप। जयमान . लाना। -- 1. जलधार जयन्तीपुर० ना. पु. शिलहट से दुश कोमपर जलज ना० पु. कमत,गु० जो मुछजलमापने का देश मिसको जयन्ता कहते हैं। जलजन्तु न: पु० जल में रहनेहारे जीव ।। जयवर गु०, नितने बार I .... जलजन्त्र० ना पु० बम्बा माचारह, जलया। ... जलजला गुरु महाकोधी 101 TREE. जयवन्तःगु जयेकग्नहारा, जीतनेवाला.1. जलजलाना य०, क्रियाग, हो जाना, मुंभा- जयवान् जयवती ना सी अग्नि 'की निहाविशेष जलजलाहटनास्त्री योप, क्रोध,झंझलाहरः। गु० जीतनहारी। जया ना० स्त्री० हर विष्णुकान्ताभांग, देवीविशेष जलजान० ना.पु०. गाव, जहाज। 17: जलजात ना. पु०कमलादि । जयी० गु० जय करनेहारा । जलामधु० ना. स्त्री० मुलहटी। जर० ना० पु. नड़ उपर विशेष। - जलतरंग मा०, पु० बानाविशेष जलकीलहरि । जरण ना पु० जारा सुफेद, जलन । • जलतरंगी ना० स्थी यानाविशेषवनानेवाला । जरन० य.कि जलन । जलतरण गा• पु० तैरना, नान या जहान जरना पनि जलना। चलाने की विद्या। जरा. ना. सी. युदाता, वृद्धावस्था । जलथल ना. पु. जल योर रथल ..... जरांस ना. पु० स्वरांश जलद ना० पु. मेघ। जराना म. कि. जलाना।' जलधर. ना. पु. मेघ, समुद्र । जरायजरी गुरु स्त्री. नाम- जरायु. ना. पी. कोष, पेट, इति । ना. सी. पानी की धारा!:: जरायुज० ना• पु० जो कोष मे उत्पनहो, जो जलधि ना. पु. समुद्र । झिल्ली में उत्पन्न हो अर्थात् मनुष्यादि । जलनः ना. पु. गलन, तप, क्रोध । :,...' जरासन्ध ना. पु. मगधका राजा जरानाम जलना०प० मि.० बरना, दहकना । रावसी मे जोडागया। जलनिधि ना. पु. समुद्र । जर्जर० गु० निर्दल, नांगर, नार्ण । जलनीम. ना. पु. औपनि विशेष जर्जरी ना.पु. लहसुन । जलन्धर. ना. पु. गिरिरोग निमें मनी जल ना.पु० पानी। पानी बहुत पीता है, राना विशेष । जखमलिक ना. पु. पानीका भवर । - অন্ত না মা বুঝি। जलकन्द० ना० पु.पिा। जलपान ना• पु० पानी पीना, कला ।.;; जलकामाना स्थी. उंचाहोली। जलपुटः ना• पु• पानी का वर्चन । जलक्रीडा० ना. स्त्री. पानी में का मेल । जलवलगु नौ जलन से नारोगा ना.. जलकुफदमा पु० पनडम्पी, मु. पान, केवल । जवकुफ्फुट गावी। जलमानि० ना. पु. मेघ, ममुद्र, नदी जलमय ना. ३० दलाणा, प्रत्य। जसगोजकल ना.पु. चिलगाना, जलमानुप० ना• मनुयम्मी नल नन्!.. जलचर गुरु नल मन्नु, पनिया, जस के चरने जलमार ना० पु.सि, रहर । समाल ना. सी. दी। जलचरेश ना. पु. मगर, , ... जलराशिक, ना. पु. i जलधारा - . ... -- wh prT मङ्गलकोपा H 5 . जसी मा स जसोदा . जयानिक जलरुहाना.पु. कमल । ना.पु. अजवाइन्। जलवैया० ना. पु० जलानेहाया। जलशायी ना. पु० विशु, नारायणा जवाखारु० ना.पु. औपनि, तपशि 4 जलशयनी ना० स्त्री जल में सोना, जल में जवासा ना. पु. काटोलारिंशत रहना, तपस्यापि मम्य। जस० ना. पु. यश। जसत जलसूत० ना. पु. नरूया। मा.पु. धातु विशा। जसता. जला ना० स्त्री० झील । जसयत. जलाकार. ना. पु० जलका अाकार। जसयति० जलाना. स.कि. वालना, दाहना। जसवन्त गु• कीर्तिमान प्रतिष्ठित, पशी जलवला जसस्वीर गु० चिचिड़ा, वापी यशस्वी। जलामुना जलार्णव. ना. जल प्रलय, जलका समुद्र । जसुमति जलावन ना. पु. इंधन। ना. ती गहराना, यशोदा जसोमति जलाशय ना. पु. तालाब, पेसर।। जहर्षमी ना. स्त्री० पौंच बीज । जलाश्रम जनक अव्य, जहा, यन। जलाश्रयः ना.पु. जल के भरोसे। जलिया ना. पु. कहार, धीमर, मछुया । जगु० ना. प. मुनि विशेष। जलेरोकना. स्त्री. मिठाई विशेष । जह्वसुता नाना० गगानी । जलेश ना. पु. वरुणदव, समुद्र । जहां अय० जत्र, या, जिसरथान में निधर । जही अन्य० निसकी जगह । जलोद० ना. पु.धीरोद, मेघ । जा सर्व निस। जलोदर ना• पु० जलघर । जलौकार ना. स्त्री. जोर। जाई. गु..ननी, ना. स्त्री अंगे। जल्पना ० वि० सक्ना, निन नाई करना। जांघ ना. सी० जघा, जानु । जांगर १० पु० पिएइली समेत नाघ, घुरना । चस्वार्थ बात कहना।। | जांघिया. ना. पु. कछना। जल्पाप गु० रकवादी, निजरड़ाई करनेहारा। जांच ना. सी. अवल, परत, क्स। जब ना.पु. यर, जी, जल्दी । | जांचना० स० कि. क्सना, परसना, देखना जवन ना.पु० यता, घोड़ा। दुहराना, टीकरना, परीक्षाकरना। जवस्या० ना स्त्री. हरं। : T | जांता. ना. पु. पापाएका यजिसमें गहू जयनष्टे १० ना.पु. लहा। जवा. ना. पु. अगुली की गाड़ेि में चिह पुप | जाकड़ ना पु० जाकर, बभक, शहना । पीसत है, चकी। विशा जाकर० ना.पु. जिसहाय में सर जिसका। जयाहार नानी. धनवान् । जाग ना.पु. निद्राका त्याग, यज्ञ, जवाद ना स्वी• केसर। जागत ना. स्त्री. चौरसाई। जयाधिक ना.पु. घाड़ा। जागतीज्योति गु• पद्भुत पराक्रमी। जवानी ना• स्त्री. अजवाइन, सुरासानी । जागना० स० कि. नादसे उठनी, चतना। . . . है .
मङ्गत्तकोप। - - . T T जागरण. ना. पु. नींदसायाग, रातिको जातिभ्रष्ट० गु• पापा के कारण ना जाति से प्रतादि में जागना। निकालागया वा निकलगया। जातिवाचक • जिस सज्ञा से जातिमात्रका जागल० ना० पु० श्याम, गरू। जागा ना. पु० जातिविशेष बाधहो। यथा पशु, पक्षी।" जाग ना. पु० जागने हारा। जातिरजा ना.पु. जायफल । जानत० ना छीसन और संधि से मिल जाती ना० स्त्री० मालता, जापित्री, पुपविशेष जात्यायत गु० मिस क्षेत्रमी थामनेसामना, यवस्था । भुना तुल्य और चारों काण सम हैं । जांगली ना. पु० विधारा ।' जात्यत्रिभुज० ना. पु० निवाण निसग एक जाचक० ना.पु. याचक, मागनहारा । कोण समकाण।। आचना सक्रि० मागना चाहना । जाना ना.सी. यानाचलना। जाचा गु० मागा, चाहा। जानी ना. पु० यानी, जानेवाला। जाच्यमान गु० मागा या चाहाभया, अधमदाना जान० ना० पु. रिमान, सवारी, वाहनादि डीठ, जाज० ना. पु. झाक या ढालकरजानहारा। जाजा ना. श्री. क्लीजी। युद, ज्ञान, सब गु० ज्ञानी । जानकीना. सी. सीताजी।' जाजामन्ती ना. सी. जयजयवती। जानपहिचान ना. पु. चि हार, मुलाकात ! जाट० पु. राजपूतों में जातिविशेष । जाना.अ.कि. चलना। जाठ० मा रवी० कानी धुरी । जाइना. स्त्री. मसूड़ा। जानु० ना.पु. धुरना, गाठि । जानो अव्य० समझा, अ.कि. जाना। जाडार ना. पु. शीत, उढ, शीतराल । जानना० स० कि० पहिचानना, समझना। जादी ना. ना. दाताची पाति । जाप० मा पु. जप, पाठ। जाक्ष्य ना० पु. जड़ता, शीतलता, मूदता जापक जात ना. सी० जानि, याना, मेला, गुइजना। जापी० गु• जप रोहारा। जातफ० गु• पुन, क्या। जातकर्म० ना० पु० जाम सस्कारविशप यथा जायः ना० पु. टा!! जायी ना० स्त्री. दाटी साठी। छटी प्रादि। जाम. ना.पु. पहर। जातना ० सी० पीडा, इस दण्ड, पदण। जामदग्न्य० पु. परशुराम, जमदग्निकपुर । जातपांत. ना. स्त्री. पोदी, वशावली। जामन० पु. तृय या उसका फलविशष, जातरूप ना.पु. सुवर्ण, वाचा । जाइन, जमावा। जातवेदा• पु. अग्निदर। जामवन्तः ना. पु. प्राहाका प्रधान विराम । जाति वा वर्ग, कीम, एक रूप से बहुत जामवन्ती. ना. सी. कृष्णच द्रा नी । स पिएडा में समानधर्म, यथा पगुन, मनुष्यत्स; जामा ना.पु. एकीत पहिरोगवन शिष। जामाता जातिकोष ना. सी. जावित्री। ना. गुरुवरी को पति। जामातु जातिपश्री ना. स्त्री० जावित्री पिरादरी की जामिनी ना. सी० राति, यापिनी जान देशी भाषा वा पम्नु । उतराना + चिडी।
मङ्गलकोप " ++p न 1 1 w जायपत्री ना. स्त्री जाविती । -जिगना ना.पु. वृक्षविगए। जायफल ना. पु. पलविशेष । जिगीपा० ना माझम, जयनी पत्रा। जाया. ना. स्त्री. पी, मी, भायी, गु. जनी जिगणी ना. पु. निाना। T जार० ना.पु. उपपति. यार, दूमरापति । जिजिया ना० सी० ददारहा, चूची । जारज ना. पु० दिनमा, सकरवणी । जिठनिया ना.स्वा. जेटदी नी। जारजातक उपपनिजात, यारकान माया । जिठानी जारन० ना.पु० जलावन । जितमा. ना. पु.१ परिमाण वा अाधि वा जारना म.क्रि. जगना, फूलना, दाइना । जितनी स्त्री मन्या पावाधा। जारल. ना. पु. कावरिश । जितयोनि. ना. पु० हरिण । डाल. ना. पु० निमम मछलीग्रादि पात है | जिता० गु० परिमाण या अपि या झमरा, माया, पावर, भर, पासा । जित वास। जातगि प्रय० निम लिय, म. निसके जितेन्द्रिय ना• पु. निमन इन्द्रियों को जितेन्द्री पश किया है। जालरन्ध्र. पु. भराला, नालवा जिधर० यय० यत्र जहा। जागा ना. पु. निममा मकड़ी बनाता है, पा, जिन० ना• पु. प्राशप । मोतियाविन्दु । जिभारा गु० ती जा रटार बात रहता है। जालिका ना.सा. झझरी। जिम० अ० जिमि, यम, ज्म । जालिनी ना० खा० मुरहरा, दवदाला। जालिया ना.पु. इलिया, जालना जिमाना माहि. खिलाना। जिमि अय. यथा जेम। जाल. ना. सी. वहन दिनों की विही या काड़ा यादि। जिया जियरा 710 पु० मा, प्राण, जान। जालौन. ना. पु. उदल वण्डका नारविशेष। जियान स.नि. निलाना प्राणदान देना। जायषना.पु. बालता, महावर, मदर । जायका ना.पु. बी. साग । जियावना.म.नि. जियाना। जावनी. ना. सी. अनवान जियो 10 गु० स्था• शता, गैर, योद्धा जाराना.पु. उपापावशेष । | जिलाना मा. प्राणान दना जीना करना। जापा.पु. पापुर ना एफहीमाय टरगे। जिवाना. म. वि. निमा जिलाना। जावालि.ना.पु. मनिरिश । जिष्णु. ना. पु. अजन, इद्र। जावित्री ना. मा. वृहापराप की हाल। जिम म नमध म भाता है। जासु० मन.निसम, निमको। जिहि निम। जादयी ना.मी. गगानी जिह्मा.पु. कपए, मृदता । जाहि सर्वजिसका। जिहाफर० गु० रूपरी, परती । जाही ना. सी. जी जाती। जिगजिगिया गु० चारमी करामाला । जिगजिगी ना. सी. ना', मपर, चावलूमी। जिह्नता पासी अपित वार्ता की शति । N * " F है जिमग ना. पु. बाण, नार । जिद्दग: • पु० सप, गाप। - ३ मङ्गलकोप १-१.७ नहाना मो. रमना, जीभ,I, FATEH जोरखानि ना०,पु० ईश्वर, अनादि पुरुष जीवट०. . . . शासाना. सी. जानने की इच्छा। nz शासी०१ गु० ,अभिलाषी, जानने की इच्छा जीवड़ा ना. पु. प्राण, प्रियतम । अशासु रसनेहारी । जीवत गु० जीते। . शास्य गु० जानने के योग्य है। जीवदान ना० पु. रक्षाकरता पण चाना... to ना. पु० जीव, प्राण, मर्यादा का सूचक ! जीवधारी ना० पु० पासी, हैवान् । का ना०, स्त्री जीविका । जीवन० ना०,पु० जीविका, जन्म से मृत्युतफ. गुराना० स० कि.सिकोड़ना । ... का काल, जल । inod ना० सी० जय, फनइ ।। " जीवनमूल ना. बीजीविका मूल हयात तिनी० स० कि. जय करना, हराना 16 की जड़। तव ना. पुढे श्रान्मा, हिया, जिन्दगी।। जीवना० अनिल जीतारहना । गतवन्तः ना० पु०' जिसकी" जय हुई। जीवनिक नाः स्त्री. १ सनी- तवैया जयमान। ...) जीवनिया० ना. सी. वनबूटी। रिता गु० प्राणधारी अर्थात मरानही ।। जीवन्त गुः जीता। ति. ना. सी. जय, जान । । Baf जीवन्तीना. श्री. सजीवनयूटी, गुरच. तिया ना० स्त्री. लड़कों के जाने के लिये जीयभार २ ना. सी. समीयन स्त्रियों का व्रतविशेष। जीवर्दिनीटा। तू० ना. पु. जयबन्त, जीतवया ।। - जीया ना० रत्री० जीवन्ती, जो पापक एकामे, ना० ० कि जीता रहना। भाना स्त्री. निहा, रसना, जवान । जीविका. ना. स्त्री० वृत्ति, निर्वाह का उपाय मारा० गुरु गप्पी, वकी। जीह ना० सी० जीभ, रसना । भी ना. श्री. जीभ का मैल उतारने की जीहारना अ० कि० निराश होना, दर में दर परंतु । रहना। सरका एक विल खाना भानन करना। जुश्रा०० पृ० छल गर्म, पोटावशेष, माची !, मार० गु० जो हनने के योग्य है, 'निन इच्छा जुआरि० ना स्त्री० अन्न विशेष । मारनहारा । " जुन्धारी ना. पु० अवकर्मा, दलकारी, दुष्ट - जुगनापुयुग।. मूत० ना.पु. मेघ, देवदाली। रिक० ना पु० जीरा मफेद ।।। . मा जुगति ना० स्त्री० याक्त, श्लेषद्व्यर्थ । रन गु० जीर्ण, पुराना 1 जुगती गु० दलीः चतुर, टटोल; द्रव्यार्थ बाल- No ना. पु० प्रौपाव विशेष का बीन् । नेहारा, उपायी । ,, .ir णि ० गुरु युइट्टा, पुराना, रूड़ा, जाजर जुगनी ना. स्त्री० मक्खी जो रातको चमके- ल० ना० सी० गाने में यति तीरावर जुगनूना० पु. तीहै, गलेका भूषण विशेष। वना पु. प्राण शरीरादि श धारक, ह- जगधना० स० कि०.रक्षाकरना, बचाना सति, चन्द्रमा सदानियो in .. .:. जगवैया ना... उगानेदार -- द्वितीयाप्रतक। क ... . M मंगलकोप। १ T - F जुगाना. स. कि. यम करना, किसी के उप-जाना . कि. मिलना, प्रामहोना, सरना- कार हेतु उपकार करना। भिड़ना, एकट्ठा होना। जुगालना० स० कि. पागुराना, पामुरकरना। जुला ना• पुल। जुगाली ना. सी. पागुर ।' जुवती गा० सीयुवती, नपान औरतों जुगुप्सा ना. सी. निदा, कुन्सा । जुवराज. ना. पु० युवरान, बलीग्रहद । जुगुप्सित. गुनिदिन, कुन्सित । जुवा गु० युगा. ना. पु० जूप, जुत्रों। जुझावट० ना. पु• युद्ध वा समरभार। जुगार० ना. पु. अन्न विशेष । जुझावना० स• वि. युद्धमें मरवाडालना। जुवारी १० पु०' जुधारी, जूपी । जुटना० अ० कि. भिड़ना, मिलना, सटना। जुहार० ना.पु. सलाम, प्रपाम । जुटाना० स० कि. भिड़ाना, मिताना। जू. व्य. जी। जुटैया ना• पु. भि.या, लड़ाका। जूप्रा० ना पु. गाड़ी या हलका पाठ जिस जुठारना० सकि. जूठा, गुरना। बल मचते हैं, माची, घृत, जूप । जुड़ना०प०कि. मिलजाना, सग्जिाना। जूबाट० ना.पु. जूया। जुदाई ना. सी. जोड़ने का पैसा, जोड़ने का प्रारी ना० पु. जुवा खेलने में चतुर । पाम और जुगाम, श्लप्मा, उद। जूना. नी. चीलद। जुड़ाना० स० कि. मिलाना, पिलवाना, 'य० जूझ ना.पु. युद्ध, सपर । कि. ठटाना, सुस्वाना, दम लेना। जूमना० अ० कि० लड़ना, लड़ाई में कर धर्थात् लड़मरना। ना. पु. दो लड़के जो एक जुदिहा साथ उपर्ने। जूट ना.पु.एड। जुताई ना. स्त्री० सेत जोतने का काम वा जो जूठ ना० पु. सापाभया । तने पैसा। जूठन ना० स्ली• भोजन के पोचे शारहता जुताना० स० कि० हल चला के सेत दुरुस जुहा० गु० जूठ, सायाहुया । जू? गु० उदा, शीतल, ना. पु. शीत । कराना। जुतियाना० स० कि० जूतों से मारना। जूड़ा. ना. पु. उदा, शीत, शिरके पाने ग जुद्ध ना.पु. युद्ध। जूड़ी ना. सी• अन्तरिया, जाड़ का रोग । जुधिष्ठिर० ना.पु. युधिष्ठिर । जूता जुन्दरी ना. स्त्री० जुबार । जूतो. जुन्हाई. ना.पु. च द्रमा, स्वी० चादनी । जून ना.पु. समय, काल, वक्त। जुन्हार० ना. सी० ग्रन विरोष जुवार । जुन्हैया ना.रवी० चादनी, चद्रमा । जूना ना. पु० तृणकी, रस्सी, ऐठीहुई घाम जुरादेनास० कि० पाना। जूप. ना.पु. जूधा। जुराना० प्रकि० धीरज होना, स० के० ए-जूरा ना. पु० बालों की गादि, चोरी। जूपी गु• जुआरी पहा हाना, पाना। जुरायना गु० जो पाने के योग्य है, मिलनहार। जूस ना. पु० परेह, रोगी का पय, जूरी ना. सी. समृह, जुरी। सुषमा ना. वी. नाक, पनी। जूह. ना. पु. समृद, जूषा H . दियेहुये वाल। M १ पनहीं, चमड़े की पादुका। M है - मङ्गलकोपः। . M .... S - हो० ना० सी० पुप का वृत विशेष ... जोक. ना. स्त्री. जलौका, रसपा, जलजंतु!-. • सर्व० जो, सब। जोकर अन्य निसप्रकार । टना. नी. देर। जोही अव्य. निससमय । उ० ना० पु. पतिका यहाभाई, ज्येष्ठ । जोख० ना० स्त्री० तोल। ठरा. गु० पहिलीठा, पतिका बहामाई । जोसना स० कि० तोलना 1 ठा० गु०पहिलौटा, यड़ा, कुसुम का पहिलारंग जोखिम ना० सी० चिन्तां, शंका, घटी.. ठानी० ना. सी. जेटकी स्त्री। जोखिमीना पु• जोखिम उठानेहारा! ठी गु० बड़ी। जोखो० ना० सी० जोखिम। ठीमधु० ना. पु० मुलहठी । जोग ना. पु० योग! जेठीत० ना० पु. जेटका पुत्र । जोगमाया० ना. स्त्री० मायारूपीशक्ति जो यो- जेता गियों में है जिसकरके ये कहते हैं कि हम अपना गु० जितना। जेतिक- खरूप अपने वश रारों। जेव. ना. पु० खलीता, पाकट, फारसी शब्द है। जोगवत० क्रि० परखत, राखत, रक्षत।, जेयमान गु० जीतनेवाला, जयमान'। जोगा. गु० योग्य । जेर० ना. पु. खेरी। जोगाभ्यास ना. पु. जोग का अभ्यास । जेबड़ा० ना. पु० ररसा, डोर । जोगिन्० ना. स्त्री. जोगन्, जोगी की सी। जिवना० स० कि० साना, भोजन करना। जॉगिनी नास्त्री देवी की सहचरी. तेवनार० ना. सी. खाना, भोजन, यश जोगिया ना० पु. जोगी. गु. रंग विशेष जेवरी० ना० स्त्री रस्सी, डोरि । ना. स्त्री. रागिनी विशेष । जेहर० ना. पु० स्त्रियों का भूषणं विशेष । जोगी ना. पु० योगी, शान्त । जैत० ना• पु० वृक्ष विशेष, रागिनीविशेष । जोगेश्यर० ना० पु० योगेश्वर, तपस्वी, पुजारी जैन० ना. पु. नास्तिकों का मत विशेष । विशेष श्री महादेवजी, श्रीविष्णुनारायण । जैनी गुजैन मतवाला, सरावक, सरोगी जोग्य० गु० योग्य, उत्तम, अच्छा। जैमाला. ना. स्त्री० जयमाला, जीति की जोजन ना. पु० योजन, चारकोम !. जैमिनि ना० पु. मुनि विशेष । जोटा० ना० पु. जोड़ा ।। जैमिनी गु० ब्रह्मवादी। जोड़ ना० पु. मेल, गांट, गली, मीतान । जैसा'अन्य० यथा । जोड़ती० ना० स्त्री० लेखा, गिनती जैह०प० कि. जायेंगे। जोड़न. ना. पु. सोहागा, सांटग, जामन । जो सर्व० यह शब्द सम्बन्ध का बोधक है अन्य। जोड़ना० स० कि० मिलाना, एकट्ठा करना, ल- यथा, यदि। गाना, संकलन करना, धन बटोरना, मनाना, जोप्रारभाराना"पु० समुद्र के जलको च. दाव उतार जोड़ा-ना,प: युग्म, दूसरा, जता, धोती, एक जोइ० ना. सी. जोरू, दुलहन । बार पहिनने के कपड़े। जो अव्या जो, यदि, जैसा, ज्यों जोड़ाई ना. सी. जोड़ने का काम वा पैसा 1 जोट ना. पु० साय, जोड़ी गु१ सम सम। माला। गांठना। " १२० मङ्गलको। . ८ वान् का है। " 3 Y ९ जोडी ना. वी. युग्म, दूमरा । जोतुब ना• पु० यातुर, दायगा । जोत. ना. स्त्री. उजाला, प्रकाशल्याने, हल जोन सा जा। प्रवाह, रिरण, टम, डोट । जालो० अय गवता । जोतना० स० कि. नापना जये में लगाना, ज्या० ना. सा. माता, वा, कमानकारादह । ज्याना सा कि पातना, जिलाना। इलाई करना, सन बनाना । ज्येष्ठ ना. पु. जरका महाना, वाभाई, जोनमान्० गु० -यानिमान, चमकदार । अष्ट उत्तम। जोतार. ना. पु. हलवाहा, किमान । जोति० ना. वा. जात, प्राश, तारा, शुनि, ज्येष्टा ना० स्त्री १- अगरहवा नता। ज्योत. ना. सी. जैनि, लालचन्दन। पाखियादि की ईश्वर। ज्योतिर्गण. ना. पु. तारागण । जोतिप० मा० पु. ये तिष, नम्रम। योतिष 1. पु० विद्या विशेष:- जोतिषी गुयातिपी, जमी। ल्मनजम। जोति स्वरूप गु० तजवी एस नाम सामग ज्योतिपी. ना. पु. यातपशास्त्र का हाताने जमी, पण्डित । जोती. ना. खा. तगज़ क पव का रसा, ख डाऊवीररसी। योतिष्मतीसाना• सी० मालपगा। ज्योतिष्मान गुरु प्रतापी, तेनस्वी। जोत्स्ना० ना. नी. चठिया, चक्ला। ज्योत्स्ना ना० सा• चादनी। जोत्स्मीना. स्त्री० राति, रेरा, निशा ! ज्योनार या स्त्री, साना पार, भाजन । जोधन ना• पु. लड़ाई, ममर ।, ज्वर.ना.पु. तप, ताप, दुतार ! जोधा. ना.पु. याडा। ज्वरविनाशिनी ना. स्त्री• गुरच, मनीर । जोन ना.सी.यानित | ज्वरा० ना० सी० मृयु, मौत। जोन्ह० ना.पु. च द्रमा, चारनी। ज्यरान्तक. ना.पु० चिरायता। जोयन 1. पु. योनि, छाती स्तन । जान ना० या जलन, प्रागनी जीभविशेष । जोबनवती गु० यौवनवती । ज्जार० ना० पु. बन्न विशप । जोवनमा० ज्वारी० ना. पु. जुधारी। ना. पु. जापन, यौवन । सोयना० जाला. ना. सी. याच, ली, लपक, चाग । जोय. ना. सी. पत्नी, भार्या, नार। ज्वालामुखी ना० स्त्री० स्थान विशेष निस में जायसी० गु० -योनि । अग्नि सदैव प्रवलित रहती है। जोहाना. सी. पी, भाया बाया। जोला० ना.पु. दल, घोसा। भखाह० ना• पु. पिना पत्त के वृक्ष । जोयत कि चाहत, देसत । जोयमा स.वि. देखना ताकना । जासी० ना. पु. ग्यौतिकी, जाति विशेष जोहना स.वि. बार देखा। ददना ! मंझना गु० चिड़चिड़ा। जो ना पुः अन्नविशेष, यव,अयाजव, पदि।। पडभड़ाना । - an- Thy जोनि - S -- 4 झमट ना० पु. झगडा, घुनराइट। ममटी गु० वठिन, झगडालू । 4 झमनाना कि उनष्टनाना, बनना और मङ्गलकोपः कल। बौछार । झड़वेर० ना० पुरु झंझनाहट ना० सी० चिंचिडाइट, झनकार झटका गु० जो झटकंसे मारागया, फाड़ागया, झंझावायुनाः पु० प्रचण्डपवन, अांधी । ना पुःखाच, खसोट । झवाना अ०,क्रि०पने कृष्णवर्ण होना, म० झटकाना० स० कि. झका लगानी कि. झामे से गांवधोना,, सुखाना । झटपट अन्य तुरंत,'शीघ्र भक० ना. पु. क्रोष। झटास ना पु० झड़ाक, वाचार। भकझोरी ना. सी० छानाधानी , झटिति श्रव्य० तुरन्त, शीघ्र । झकमा० अ० वि० बकना, वकवाकरना, हाय झड़ ना सी. झही, तोलाविशेष, तालको हाय करना। झकरी ना स्त्री॰ दोहनी। 1-2 | झड़न ना स्त्री. टपकन, जैसे फल पका झकाझक गु० झलामला गिरते हैं, बत्तीकी टेम का फूल । झकोर० ना. स्त्री टोग, विपत्ति, बौछार । झड़ना अ कि टपकना, गिरना, पन्नहोदा, भ.कोरना० स० कि. चलाना, जैसे आंधीमें झड़ी। निकलना, छनना, नौवंतवजना। भकोरा० ना. गुः झपास, वायुममैतझड़ी। झडप० ना० स्त्री कंडाहट, हमला झड़पना० अ० कि. 'लड़ना, हमलावरना भकोलनास कि ईलाना। ३, झड़पाझड़पी० ना० रत्री लाई, दृश्य" | झड़पाना स० कि० लाना। झकहना ० अाभी, चावायी। झकी ना. पु० विना प्रयोजन बकवादी। झड़येरी० ना. सी. झवना० अ० कि.. भखना। झड़याना० स० क्रिडा झगड़ना० अ० कि० लड़ना, भिरना । भड़ाक. झगड़ा० ना० पु. लड़ाई, रगड़ा । झड़ाका बड़ी। झगड़ाना० स० कि.गड़ा करना, लड़ाना। भड़ाझड़ अब म झगड़ालिन् गु० लडाकाली । झड़ाना नाम झगड़ालू ना० पु. लड़का । झगा० ना० पु० झंगा। भडीमार अंगुला० ना. पु. कुर्ता। " महाड झझ० ना. पु. लम्बीदादी। झझकारना० स० किदवाना, दवाना। नान्नदन वृहन झझला ना० पु० मिटाईविशेष । ' ; मम्झर ना. पु० मझर । ना तु य को उन्नु दिनका 'झम्झरी ना. सी. झरोखा। भन्मा. ना. सी. मीसमेत.यांश मरना ना भा.. मार गु० उतावली ययधिक नकारी दी। झटकांसौ ससार, भाद! इनकारना है बनाना। झटकना स० कि समोरना, मिंगमरवां- नापु. कानावगप। कि दुबला होनाना। मग प्रयास, तुरन्न, शांत्र। .
- १२२ मङ्गलकोप। - " १ 8 . झपकना स० वि० झलना, परसा हिलाना, भल० ना० स्त्री. क्रोध, जलजलाहट, या अ०वि० लपकना, झालना, पलम्मारना। उन्यता। भपकाना० स० कि० पलङ्गमारना, मवाना। झलक. ना. श्री. चमक, उजाला। झपकी ना. सी. लपक, मटकी, नोंद 1 भलफना अ.कि. चमाना। भपर० ना. स्त्री. लपक, चढाई, बार। मलका० ना० पु० फफोला, फाला। झपटना० अ० नि लपकना, चदि दौड़ना । झपकाना० स० कि० चमझाना, उरवल झपट्टा ना. पु. धावा, दौड, लए । करना। झपट्टामारना० स० वि० झपटलना। भलकी ना. स्त्री० टि। भपलाना० स० कि० खगालना, धाना! - झलमलना० पु० चमक, लहक । भपाझपी० ना० स्त्री० उतारली, इड़बड़ी। भलझलाना० अ० मि. चमकना, प्राधित भपात ना० स्त्री० त्ति, जल्दी । होना। झपाना० अ० कि० झसीलना, दपाना । भलरुलाहट ना०सी० चमर, परपराहटा झपास. ना. स्त्री. गृही, झासी । झलना० सनि माकना,य०शि०सुधरना। भपासिया गु० दली, अधी। मजमल० ना. पु० चमक। भवकानास.वि. घारा करता। भलहाया० गु० वसपासी, वालिन । भविया. ना. पु. भूषणविशेष । भवुमा गु० मिस पत्ते वा बकरे ये बाल बड़े झलावोर० गु० चमकीला, झड्कीला, ना० पु० झलाझल गु० ज्यानि मान्, स्त्री० झलक । बड़े हों, झुकाया। चमकर। झव्या० ना.पु. लगना। झलाना० स० क्रि० सुधारना, जोडना ।। झमक० ना. स्त्री. चमक। भलार० ना.पु. झाड़ी। झमकदार ना.पु. चरकीला, भाक। झर० ना.पु. मधली, मत्स्य । झमकनाथ.वि. चमाना, नाचना। भपकेतु० ना० पु. कामदेव, प्रयुम्ननी । -- झमका ना.पु. प्रतार, ज्ञान ! झमकी ना. सी. झमक, मलक, चमक । भमभमाचव्या लगातार। झमझमाना०प०शि० चमकना। भाक० ना. पु० ताक्ना, हिरण वा पक्षियों भमरममर अय० बूद बूद से। का झण्ड। ममाका ना० पु. झड़ी, रेगता। मांकड़ ना. पु. झाड़ी। ममाममायच्य. झममम। झम्पा० गु० झपाहुअा, दकामया, ना०पु० चगुल। माकाझांकी ना० स्त्री० देखादासी, ताका भर० ना.पु. सोता, भरना, झड़ी, जलन । तासी। भरना ना.पु. सोता, झरना, मारनेवाला। झरोखा ना.पु. झंझरी, खिड़सी।- झमर० ना.पु. झमर। H भाई ना० स्त्री० परधाई, लहसून, मुम्बपर श्यामता होनाना । S झांकना० स० वि० झपकैदेखना, ताकता। 1 मांख. ना. पु. हिरणविशेष । ' भामा नास्वी० या मनाश, झगड़ा | झांमट ना. पु. भगड़ा, रगड़ा। भर्ना ना• पु० सोता माइनेका करड़ाबडून | मांझा ना. पु० कापिरोप, झगा । छेदका पूप विशेष, प्र. वि. झड़ना, गिरना । माझिया गु० बोधी, बसडिया। ५ . 1 11 A मङ्गलकोप। १२३ 1 . ६ - मांझी ना. स्त्री सेल विशेष झालर० ना. सी. पाचल, गुग्छ । झांपना. स. क्रि० दापना, छुपाना । झालप ना० पु. सोता, गु० बढाया। मांवरा० गु० वाला। भिमक. ना. सी. चीर, भड़क, डर भय । भांवली. ना. स्त्री. चोचला, हावभाव । झिझकना० २० कि० चौंकना, भड़ाना, डरना। मांया ना० पु. प्रयत पकी ईट । झिझका गु० चौराहुया, भयवान् । झांसना स० कि० उभारना। | झिमकाना० स० कि० भड़काना, हराना, ची- झांसा ता. पु० पुसलारा, धोखा । काना, भवराना। भांसी० ना. पु० युदेलखण्ड में नगर विशेष । झिझकी० ना० सी० भड़की, चौक, टर। झांसूर ना० पु० पुसलाऊ, धोखाबान । झिन्मा. ना. पु. जिगनार, पृटाकोड़ी। भाऊ ना. पु० छोटा वृत विशेष । झिन्काणी ना० सी० जिगनावृत । झाग ना. पु० पेना। झिन्मा. ना. सी. पूर्वीड़ी। झाझा ना० पु० मादय वस्तु। | भिड़क० ना. स्त्री० धमकी, भवती, गटकी। भाइ० ना. पु० छागत जो पीतलबादि या झिड़कना० स० कि. घुडका, दरपाना, धम- बनता है। काना, झटकादना। झाइसण्डा ना• पु० वा, वननाथ पे पास | झिटकाझिड़की ना. ना. झगड़ा, मिगही। का या विशेष, गु० झण्डूला, छन । झिड़की० ना. सी. घुड़की। झाइन ना• पु० बहारन, कचरा, कर्कर, बड़ा, मिनहट्टा गु. सुखग। पोदन । झिनहट्टा भाहना० स० मि. युहारना, फ करना, पर | झिरझिर० गु० जो पनलाधार से बहता, पतला । पना, निकालना। झिरझिरा गु० तरहु पतला । झिरझिराना प०नि० बहना, निरतिराना। झान्त अन्य सभी। भिलगा ना० पु. सारनी पुरानी और ट्टी भाडा० ना.पु० गुह, मलरायाग, हगना । भाड़ी० ० ग्री. धना, वन, जगल रस्मा की निगर, गु० पुरानीखा। झाडू० ० स्त्री० नदनी, बुहारी। झिलंगा ना.पु. पदाति विशेष । मापा.. पु. टोकरी विशेष । झिलम. ना. स्त्री० युद्धमें पहिरने के लिये लोहे झाया ना० पु. चमड़ का पात्र, तेल, पी मापने की कुती, टोपपर लोहे का कोरा, रस्सर । के लिय। झिलमिल ना.पु. दार विशेष । झिलमिलाना०प० मि. लहराना, चिनगी भामा ना.पु. भावा। भार० ना. पु.भागकी लगानासर, धन्य. निकलना। करमाहट। | झिलिका० ना. सी. झोंगर । भारि अन्य सर, दमाम, कमाल । | झिल्ली० ना० ची झीगर, अति सूक्ष्म चमा, भारी पी. थाती, माड़ी, दो सरका खेड़ी। नसार विशेष मांकना० घ० • पदिनाना, शोकित होना, भावना. पु० पधादर, वही टोकरी, भातुमा पीनक में माना। सगरना। भांगट ना.पु. मामी, पटनी : मावना समिरिकाना, मोना, नोना। भीगा ना. पु. जपचीर प्रसिद्ध । . ।
-- मङ्गलकोप। . द + 7 झींगुर० ना. पु. कीट विशेष, धुरधुरा । । झुल्ला ना. पु. पहिरने का वध शिष । मीण झुंझल. ना. पु. क्रोध का पारेश। मीन: गु० सूक्ष्म, पनला, बारीक। झूटर० ना. म भूमि निम में वर्षा में दो बार झीना० अन्न बौने है। झीरका ना. सी. झींगुर कीट। झंठनझांठन नापु० ग, वचा । झील ना. सी. बहुत बड़ा जलाशय, बड़ा झूठ० गु० मिथ्या, अशुद्ध। ताल। झुठा गु. मिथ्य वादी, इतहुश्रा, ना.' पु. झांसी नास्त्री पूही, फुहार, छोरी २ हें। उच्छिष्ट खाना खायके रहगया। झुकना० अ. कि. निहुरना, चलना, क्रोधित झूना ना० पु• पकानारियल, महीन वस्त्र, नूल्हे होना, व्याकुल होना। में देधन और आग रखना। झुकाना स.कि. निहुराना, लचाना, कोधित करना, अनि क्रोषित हाना। झूमक० ना. स्त्री. भुमर । झूमझम० ना० पु. घन, लटक लटर । झुकावट० ना. स्त्री• चलाइट, निहुराई। भुंझलाना० . शि. चिड़चिड़ाना, जल झूमना० २० त्रि• लहरना, हिलाना, ऊधना, उमडना, घिरना। जलाना। झुठलाना स. कि. भूठा परना, मिया झरना० स० वि० टना, पेइसे फल झडना, झुठालना० बतलाना, यशुद्ध करना। सतना। मुएड. ना. पु. मडल, समूह, अंसाहा। झरा० गुसूखा, मुरझाया हुया । झुण्डा ना.पु. पताका, मदा। झल० ना. स्त्री० बलादि पशुओं का श्रोदना । झुण्डी ना० सी० झाड़ी, वृहोंग समूह । झुलना० अ०नि० डोलना, हिलना, लटक्ना, झुनक ना. पु. घोडी समानता। ना. पु.६द विशेष झुनभुनाना. ना. पु.सिलोना विशेष । झूला ना० पु० हिंडोला, टाख वृक्ष । झुनझुनी० ना. सी. पैजनी । झोक ना० स्त्री० टकेल, धका, झकोड़। फलका गुच्छा, पूल विशेष । भुरमुट ना. पु. भाइ, मंडला, भूमक। मुराना० अ० कि. सूखना स० नि सुखाना । | झोटाना० पु. भुराने गु० सूते। मुरियाना० स० कि० सिर्वाना, सोहना पोदना, उजवल करना । मदी छप्परका छोटा झुरी ना. स्त्री. शरीरके मासका सिकोड़। झोपड़ी० ना. स्त्री० अर्ना० अनि• कुम्हलाना, सूराना। शुलकाना० स० कि. जलादना, मुलसाना । शुखना च.कि. लाकना, इलना। शुलमुली. ना. स्त्री. कानापान ।। मुससना .जि० भुमलना, जनाना। झुलसाना स.वि. मुलसाना, जसादना। मुमका ना० पु. कानका भूपण विशेष, पूल वा झोकना स• वि० टकेलना, फेरना, ईधन भाइ में डालना। शिरकै पाछे के बाल मृले का झोटीना. सी. हिलाना। झोपड़ा ना• पु. झापा ता. पु. पलका गुच्या, बाल, घिरीष । झोरा० ना. पु० गुग्दा। झोका ना० स्त्री. झोंक। झोका ना.पु. झाम, टोकर, टेस, झोरा । झोझ ना. पु. खाता, श्रीम, बडापेर । झोझा ना. पु, श्रीमा, वर्षग, बहापैट।
मङ्गलकोप। १२५ बच्चे। पुतारा। झोटिंग ना० पु० प्रतभद। टघलाना० स०कि. पिघलाना। झोटी० ना. स्त्री. चोरी। टक० ना. पु०चार माश की ताल, सङ्ग । भोल. ना. स्त्री कपड़े की सकोड वा चुन्नत, टकण ना० पु० सोहागा। टकोर० ना. वा. धनुष । राद का शब्द । मोखा० ना० पु. थेला, अद्धोग। टकोरना० स० कि. धनुष की पनच माडना। भोली ना. स्त्री० पला । टगना० अ.वि. लकुना। झोरा० गु० साँरला, पीला। टगड़ी ना० स्त्री. टाग, गाड़। झाँसना० अ० क्रि० बहुत जल जाना। टच गु० सूम, कृपण । मौसा गु० जो बहुत जलगया । टटका० गु• नया, नवान ना०पू० उतारा भौढ० ० पु. झगड़ा। मौरी ना० स्त्री० सेनका घास । टटकी ना. स्त्रा• न, नवीन, ताजा । टटवानी ना. स्वा. छोरी घारी। टकना. नी. स्वभान ताक, दृष्ट। टटिया • स्त्री० रट्टा झाप द्वार बद करन टकटकी० ना. सी. धूर, ताक ! का जो तृणादि की बनती ह । टकना० अ० कि. सिलना सिनजाना। टकराना० स० कि० टकर खिलपाना टकर टटीहरी } सी. पतीपिशप । मारना, अ.क्रि. टगालना। टुश्रा ना. पु. छोटा घोड़ा। टकवाना० स० पक्र० सिलवाना, मिलाना। | टुई० ना. स्त्री० छारी घाडी। टकसाल T० पु. स्थान, जहा रुपया आदि टटोलना स० कि. टायगई करना, अगाल बनाया जाता है। यों से दवाना। टकसालिया० ना० पु. दक्साल का काम टकसाली परनहारा। टड़ी० 1. स्वा• चादी बाड । टका० ना० पु० दा पस । ना. पु० बडी रही। टकाई ना. सी. सिलाई, कर। टट्टा० टकी० 11. स्त्री. ताक, टुक्का । | टट्टी० ना. स्वा० टारया, फरकिया। टकुत्रा० ना. पु. तकला, तकुआ। यह ना• पु० छाग घाडा। टएटा० ना. पु० पखड़ा, लड़ाई, सर परी। टप० ना० पु० वूद फाद बूद । टपक ना० स्त्री० पीड़ा टपक्न या शब्द । छोग कच्चा श्राव, ढोल बजाने की टकोरा टपकना अ. क्रि० टपरपाना, चूना, चना, गति वा शन्द। रिसना, टीसना। टकोरना० स० कि० सेंकना, ततारना। टकोना ना. पु० टका। टपका० ना० पु. पानी पी वृद, फलजा वृद्ध स पर गिरता है यथा आव । टकर० ना. सी. टोकर, टलाठली शिरसे शिर लहाना, जैसे मद लड़ाते हैं। | टपकाना स.वि. घुयाना, बनना स्मना। टखना० ना. पु. गुलक, घुरना। टपजाना० अ० कि भूलनाना चूदनाना । - संघलना वि.पिघलना। } उपपड़ना० स० वि० और के काममें हापदना। - टकताः ? गु० धनवान् मालदार। टकोर० ना. पु० चुचकारी, चुमकारी,प्रति r an मङ्गलेकोप। १२६ - . h टपना० अनि मूलना, यूदना । टहल. ना. स्त्री. गृहस्थी, सेवा, काम । टपाना० मकि. भुलाना, पदवाना, दुर्द टहलना. स. शि. हवाखाना, नाहर रिना। वाना। टहलनी ना सी गृहस्थिनि, दासी, लौटी। टप्पा ना० पु० डाक्भर, दाम्पर, मैदान, जहाँ टहलाना० स० कि. चलाना, पिराना, इवा- तक गोली जाती है, रागिनीविरोष । खिलाना। टभका ना• स्त्री० नोलन्द पानी गिरने से किसी टहलुश्रा० ना.पु. सेक, दास, परिश्रमी गढे पा रतन में होता है। टहलुई० ना. स्त्री दासी, लाही । टमकना अ.कि. चूना, टभरदोना,गालना। रहो ना. पु. जन्मते पुरका शब्द । टर० ना० स्त्री० शेखी, ऐंठ गु० मतवाला, टहोका. ना. पु० धृमा, चपेटा। अचेत। टांक ना. पु. टक। टरटरनास्त्री० वरक। टांकनास• कि० सीवना, लिखना। टांका० ना. पु० लपकी, तेपची साटन,जोइन । टरटराना० स०कि.बक करना । टांकी ना. स्त्री० चट, खसरा,कुदरा,कुल्हाड़ी। टरटरी. ना. रवी. वरकी। टांकू. गु० टाक्नेहारा। टरना य. क्रि० हुलना, टलना, हटना। टांग ना. स्त्री. एंटीसे घुटने तक का नाम, टराना. स. कि० टलवाना, इटाना। लटकाव। टरी गु. मगरा, दुष्ट, नफी, बलवान् । टरांना० स० वि० मक्वक करना, मगराना, ऐ. टांगन ना० पु० पहाडी घोडाविशेष । टांगना० स० कि० लटकाना, हिलगाना। ठक यात करना। टांगी ना. स्त्री टाकी। टलजाना कि. हटजाना जाता टांच. गु• हठीला टेद कुनाति, ऊजहा टलप. ना. सी. टुकड़ा, दाट । टोट० ना. स्त्री. चादी। टलमलाना० प० कि० डगमगाना, ललचाना । टांठा०६. पोटा, रहा, टोस, फ्म । टलाटली ना. सी० मिप, होलाबाजी। टांठाई ना० स्त्री. पोदाई, पाई टलाना० स० कि. इटाना, दिपाना । टांड ना. पु. मचान। रवर्ग ना.पु. टकारादि पाचप्रतर । टांडा० ना. पु० सेप, बानेनार की वस्तु । टसक. ना. सी. चमक, टीस। टाट० ना० पु. सनका विनाहुा विबीना, टसकना ५० कि० हिलना, चसकना, चटना । धनाइ। टसकाना स० कि. हिलाना, चसकाना। . टाटक०गु० टटका। टसना०प० कि. मसकना, घटना। टाटाकला. पु. टाटा, बड़ी टट्टी। रहकना.सी. गाठकी पीड़ा। टाटी.ना.सी० रही। रहकना प. वि. दुराना, पीडापाना। . टाड़ी ना. सी० छोरी कुल्हाड़ी। इटह ना.पु. सुदरता, नवीन । टानना० स.वि. तानना, सूचना । रहटदा० 'टहमा० ना. पु. शासा, दाल। टहनी ना. स्त्री• शाखा डाली। थ. टलना० 1 " टापन. सी. घोड़े के सुरका सन्द, घोड़े की अगले सुरों को मार। टापना. वियपमारना, दना ।
मालका - } माजी . टापा० ना.पु. साचा । टिटकारी ना. सी. रिकरिक करना । टापू० ० पु. दीप, जनारह । टिटीहरी टापर० ना.पु. छारी झाल । टिट्टिमा ना. सी. पनाविशा। टारना० स० कि० टाला। टिडा ना० पु. टाला. साटासमगल, छलकर काल का दिडी स्त्री. उड़ना कीड़ा। टा, अभयालरडी ग्रादिका टर, टाल, मल्लयुद्ध करन मछल। टिपका० ना० पु. रंगका चिह जो अंगुली स टालटोल..पु. टालमगल । लगा है। टालना० स० वि० छल करके वात फग्ना या टिप्प१० ० पु. टीपा रिवर्ण । बदलना वा उड़ाना, हटाना । टिप्पस ना. स्त्री. अभिमान, दार। टालमटोल• श्री. चरमकर, होला टिभाना० स० वि० प्रातदिन पीता जीवि का दना । टाला० ० पृ. टाल । टिभाय. ना. पु. प्रातदिन थोई सो जातिका । टिकटिकी स्त्री. दिपकला । टिमटिम • पु. सर्राग, शब्द । टिकठी० ० सी० कारकी तिपाई या चापाई, टिमटिमाना० अ० वि० झलझलाना, जगम प्ररथी। गाना। टिकना०प० कि० रहना टहरा।। टिकली ना० स्त्री० विदी जिसरी निया | टिहरा० ना. पु. घोणगाव, पुरका । टिकुली (माधपर लगाता है। टिहरी ना. स्त्री. मार्गसी बरती। टिकाऊ गु. ठहराऊ, चलाऊ । टीट. ना. सी. करील कापल। टिकाना. स. शि. रखना, टहरा, पाटी गा० स्त्री. शिर वा ग्लश दिनार टीकारा. पु. तिलक, एपन, मध गहना टिकाय०० पु० टहरार, प्रका पशप, अर्थ पहावा लिप्सना, मह में का टिकासर० ना• पु० किनकी जगह, कार । यो योरसे लग्नाचन क दिन प्रसन टिकासा गु• सिहारा, ठहरापाला। जाता है, राया। टिकिया. सी. वण, अगाडी घागरोगे, टोटली. नाई। पिसी यस्तुको गार गानाकार चपरी यस्तु बगा। टीडी ना. ए. टिकोर० 1. पु. लाउदा, खोपड़ी। टोपनार, र, तमतमा टिका.पु. पगारवा, की गोलगेग सदना, स्वर रडा, दार। टिप्पर विशेष टीपार नी. दादर, मगर। टिकली.सी. कली। पना है. सा, टोना, निदाइ दिको ना. सी. किया। नगरिदा दाना, दिनना। टिपलना.प.वि पिसना, पदना। टीला ना.पु. दात, पड़ी। टिचलाना स.•ि पिपसास, गलना। टीस.न.-मस, घड़क। रिटकारना • विकिपर पशुको टोउना 3. दि. धनमारना, यमन, पसा या होकना। al- पासा।
१२८ मङ्गलकोप क 1 Vir टुक० गु• थोड़ा, अप, तरा। टंगरा० ना० पु. मालविशेष टॅगरी स्त्री. टुकड़ा ना.पु. एक सण्ड, चिट। टेंट ना. पु. करील वा पास का पधपत, टुकसा० गुल थोडासा। पुसी। टुगा ना. पु० छोग छ । टर० ना० पु. पलविशेष, ग्रासका दीदा रही हुँचा० } ना• पु० लुगा, पेरडा, लॅपरा,नुच्छ । हुआ अर्थात् प्राखा निकाम होजाना । टेंटा.ना. पु. करीलका बड़ा पफाफल, टुंजा ना० पु. नहा। टेटी० स्त्री. व्यर्षभाषय, यारो। टुएटुक० ना. पु• स्योनावृत्त । विशेष, कटि, बेलका काया। टुएटुनाना. घ. कि० गुनगुना, धीरज से टेंटुश्रा० ना.पु. नरी, साती, नोटी गलेकी अलापना, धीरे धीरे रजाना। पागली, दी। टुण्ड० ना० पु. हाप वटा, डालो का वृत्त । टे. ना. चेंचें, किलकिलाहट । टुण्डा० गु• हाथ परा, लूला, थपाम। टेई ना० सी० श्राइ, धूनी वि.० पैनी करी । टुण्डियाचढ़ाना० स० कि० हाथ पीढ़ बाधना। टेक ना. सी० यूनी, पड़, टेक्नी, प्रतिज्ञा। टुण्डी ना ली • नाभि, र. निस स्त्रीका हाथ टेकन ना. सी. घाइ, थाम । का था टाहो। टेकना. स.नि. पाडना, थामना, सहारा टुसकना लगाना। थ.पि. राका, कृफ्ना । हुहुकना टेकनीक ना स्त्री टेक्न, थूनी । टूं ना• पु. वायु सहने का शब्द अर्थात् पादन टेकर का शब्द। टेरा ना• पु: टीला, उंचा। टूगना० स० कि० चींचियाना, चिचोरन्ग, सुट टेद ना. स्त्री• वरना, कन्न । टेदा० गु० वर जो सूरा नहीं है। हूंडी० नास्त्री० नाभि, ट्छ । टेढ़ाई हा• स्त्री० वक्रता, वाकपन, कज । . टूक. पा• पु• टुकडा, टे तक का एक टेदो० ना. रवी० गर्व, अहकार, हट, बाकी है।" हेका० टेनी ना. स्त्री. छोग दण्डा नो बहीर रसते हैं। टूट: ना. सी. सएन, पूना, येग, लिखने में टेम ना• रसी० दीपक की जलन वा लावा जो भूलके उपर लिखादया, युधि। टूटना . कि. हुमकना, दौड़ना, चदाई, करना, टेरस नास्त्री० स्वर, लय, पुकार । पूटना, फटना, तहहोना, गंदेशाटना,पतीका टेरना० . कि. पुकारना, ललकारना, . उपरस नीचे उतरना। लारना। दृटा गु• स्य, टुकड़े भया, ना. पु. गाया, रेलना स.हि. पेलना, घुसड़ना। गुनना। टेव. ना. स्त्री. चात, चाट, समार। हम ना० सी० थोड़ी बात, भूषणविशेष, तरी : देशकिया ना. स्त्री. घोटी रेवती । मट म ना. पु. कुछ धौड़ी बात । टेवफी० ना. स्त्री यूनी, सम्मा थाम्भल । सा० ना.पु. प्राकका रत, मदारका पन। टेयना० म० कि. दैना, बाद रसना लो दृसी० गा. सी. ओरल, फली । कना। - . L न रहाना।
मङ्गलकोप। १२६ 1 T . टोक० C टेवा० ना. पु० नमपत्री का देखना वाकाटोली ना० स्त्री० टोल, समूह । लना, चार। टोहना सकि दूदना, गलना। टेहरा० ना.पु. छोगगार, पुरवा । टोना. ना. पु० टानहा । टेहला० १० पु. विवाह की रीति । टोआई. ना. स्त्री० छुधाई। [3] टाटा ना० पृ. पाका, मुर्रा, पोड़, बाम्त की ठई० ० वि० टहराई, मुकर्ररया । पुड़िया, वासका पोद। ठकठक० ० पु. बहुत परिश्रम का याग्य, रोटी० ० सी० पीला, मारी। गूदता शद विशा। ना० सी० प्रकार, राव ठठकाना० स० कि. टारना, खरखाना। टोकटाक घड़वाड़। ठकठरिया० ना० पु. बखेडिया, भगड़ालू । टोकना० स० कि० पूछना, रोयना, डाहलगाना, ठकठेला ना० पु. धापी, झगड़ा बखडा युरा दृष्टि स दखना। ठकठीमाना. सा. पनसोई । नोकरा. ना. पु. सोरा, डलिया, झाया। पुरसोहाती० गु० मुखदेखी मातरहा, श्रोता होकरी ना. रमी० डारी, डलिया। क मनमारित वानी करना। टोकाटोकी० ना० स्त्री• रुपाव, पूछपराध, घड ठकुराई० ० सी० ईश्वरता, प्रधानता, राय। ठकुरायन० गा० पी० टाकुरती स्त्रा, रानी! टोटका ना० पु. मोहनी लगा, वशीररण । ठग० ना० पु० गरिका, चार, प्रतारक, धाखा टोटय० • पु० धूपू विशेष । दाहारा। टोटा० ना. पु. घटी, हानि, यूनता । ठगई० ना. श्री. प्रतारण, चारी टगाई। टोडी ना. सी. रागिनी विशप । ठगना० स० मि. छलना, चोराना,धासादेगा। टोना० ना. पु. जादू वशीररण, स० त्रि.2 ठगनी ना० सी० टगकी स्त्री, चोही। टालना। उगाई. ना. सा. प्रतारण, चारी, बल । टोनहा० ० पु. पा, पाका, महानादूगर। ठगाना० स० कि० छलाना, चारीकरयाना। टोनहाई० ठगिन ना. स्त्री० टशिनी। रोनही ना. सी. टिगी जादूगरती। ठगिया ना० पु. टग, प्रतारण, चार, ली। टोनहया० गौरी ना. मा. टाई। टोप०१ ना• पु० पाननक शिरटक्ने या वन टचरा ना. पु० बबद्या, भाडा । टोगविशा। टठला.पु. मीह, मडली। रोपी० ० मी. शिर टको या पसमिशेष, ठठक. ना. श्री. रुकाव, प्रकार, दर निगार। कुलाह। टउपना प. कि. रमना, प्राकना, पाश्चर्य रोराना. पु. भीतिमें पानी के बचाव के लिये में हनाना, गिना । पारसगार या अन् पम्ना निमदो ही उठना सरि बनाा, सजाना, दारतकगना, प.किरिना, मारेजाना। टोल. ना. सी० सभा, माति। टकरा. पु. भाइ, घेरा। रोखा पु. गड, रती का मुरडा । ठटरी १० पी०टार, पी, पल शरीर । 44 यस्त, यहा।
मङ्गलकोप। स ठठेरिन ना० स्त्री० ठठेरेदी खी। 3 - - ठठाना अकि पीना, मारा, यूटना, दुख | ठस्सा० ना० पु. अहकार, साचा, दाचार में अपना शिर पौटना, समाना । | ठहरठहर० गु. सहना । ठठेरा ना. पु० शेरा, मातिविशेष । ठहरना प्र.कि. रुकना, रहना, ठोरहोना, निटपना। ठहराव. ना.पु. सकार, निपटार। ठठोर०॥ गु० हँसोड, इट्टाबाज। ठहराना० स० कि० रखना, रोक्ना, निर्गता। ठठोला ठहाका. ना. पु० धमारा, भदाका, भड़ाका। ठठोली० ना० स्त्री. परिहास, हासी। ठां० ठटुना०पु० टठ। ठांव ना० पु० स्थान, जगह । ठट्ठा ना० पु० परिहास, खिती। ठट्ठाना पु० गुट्टी के बीचका काठ, मुदा । ठांसना० स० कि० ठूसना, घुसेडना । ठएढ ना. स्त्री० शीत, जाडा, हिम। ठाई मा० सी० ठाव, टौर। ठण्ढक. ना. स्त्री. शीतलता, सरदी। | ठाउ० ना.पु. टांव टौर। ठएदा० गु० शीतल, सर्द। ठाकुर० ना० पु. ईश्वर, देवता, शालग्राम, ठण्ढाई. ना. स्त्री• शीतलता, ठण्टी औषधि, मूर्तिदश, पति, राजा, नाई । जुदाई, ननाईहुई भग। ठाकुरद्वारा० ना० पु. देवालय. घोहरा । ठएढी ना. स्त्री० शीतल । | ठाठ १ ना. पु० ठटरी, सैंतार, चुकाता, भड़ा, ठरढा० गु. जाड़ा। ठाट भीड़भाड़, समृह रचना । ठनकना० अ.कि.टीसना, टपकना, झनम्ना। ठनठनाना अनि झनझनाना, झनकना । ठाडा० गु• खड़ा, सीधा जो बेड़ा नहीं। टनाक० ना० पु. झनक, मनगर ठाढ० गु• उचा, श्रीघर, सड़ा। ठन्ना.प.विठहरना, जचना। उपना.नि. छपना, धपजाना, भरजाना। ठादा गु. खड़ा खड़ी। ठप्पा.ना.पु. धापनका यत्र, साचा, सिका, ठानना० स० कि० मन लगाना, 'ठहराना, नि ठमकना.प.दि. माड़ाकर चलना। श्चय करना। ठरन ना. स्त्री. बहुतजादा नहीं सदीं। ठाला गु० साली, कार्य्यरहित समय । ठरिया ना. पु. माटीका हुकाविशेष । । ठाहर० ना. पु० ठिकाना, जगह । ठरला. ना. पु० मादक वस्तुविशेष, अ.क्रि.ठिकरा. ना. पु० फूटे वर्तना पड़ा, टीवर ठट्ठरजाना। ठिकाना ना. पु० स्थान, वास, घोर सिवाना। ठबनाना. सी. चाल, उठनेकी रीति। ठिकानी गु० ठिकानवाला, ठिद्दारा । ठसका ना० स्त्री. महल, पति, दसाव,सनाव। ठिंगना मु. नाग, चोटा नासन बोठा ।। उसकना प.नि. सकना.स. वि. पटकना। ठिठक ना स्त्री. पाश्चर्य में होना, भयरश उसफा० ना. पु. परकी, अहकार । होना। ठसनी ना. सी. टॉसने की वस्तु । ठिठकना पनि भयवश होरर वा आश्च- ठसाठस • कचाका मचामच, गचाग । १ + पित होकर खड़ा होना।
मङ्गलकोप। th- - त - " -- ठिठरना० अ० कि० जमना, ठढ होना, अकढूंठा० गु० तुएडा वृत जिसकी डालिया ठूठियार कागिइ, सखावृक्ष । ठिठरा० गु० प्राड़ा, श्य, जड़ाया हुअा। हूंठी ना० स्त्री० यूटी, अनाजयी । ठिठराहट ठेवुना० ना. पु० टमना। ठिठुर० ना. स्त्री० ठण्डक, अशाहट । ठेगानापु. लाठी, अगुष्ठ, लिंग। ठिठुरना० अ० कि० रिटरना। ठेगावाजना० स० कि० बिगाडना । ठिठुरा गु० ठिठरा। उठ० गु० निपट, चोखा विल, निरा। * ठिलिया० ना. स्त्री० घड़ा, गगरी। ठेठी ना. स्त्री० कानका मेल, डट्टा, धोती, ठीक गु० शुद्ध, पूग, याग्य, सत्य, उचित ठेक० ना० स्त्री० उफ्नी, श्राड, बहावोरा जो श्रदाता, लीचड़, ना० पु० जोड। अन्न से भरा है। ठेका० ना. पु. दहा, टीका, इजारह 10, ठीकठाक० गु. शुद्ध, योग्य, दुरुस्त । ठेकीर नास्त्री शिरस बोझ उतारफे मुस्तानका ठीकमठाक० श्रव्य शुद्धता से। किरा. ना. पु० ठिक्रा । स्थान, जहा अम वा लकडीरा गज है। ठेई० ना. स्त्री रहा। ठीकरी ना. स्वा. छाटा ठिरा, गिटकी योनि ठेलना० स० वि० ढवेलना, रलना, झोकना, में स्थानविशेष ठीकरना. पु. भादर, बुऔता, इजारह । ठेला ना० १० धका। ठुकराना० स० कि. टोर मारना ! ठेलाठेली. ना. रती. धकाधकी। ठुड्डी ना० सी० ठोड़ी, जोदरी का मखाना टेवना० ना० पु• घुटना, जान । जो भूनने से खिला नहीं अर्थान् लावा नहीं | ठेस० ना. स्त्री० ठाकर, चपेट, भार। देसना सकि. छदना, ठाकरलगाना, ठासना हुनुक० ना० स्त्री सिसक । ठेसरा. ना. पु. नारचढी। उनुकना०प० कि सिसरना। ठोकना. स० वि० मारना, गाइना, अगली स ठुमक०मा० स्त्री सुदरचालसे चलन, मटक। ठुमकना० श्रा. नि. सुडौल से चला, अकड़ ठोग ना० स्त्री० चाँच वा अशुली से मारना । से चलना। ठोगना ठुमका गु० छटा, नाग, भाठा। চীনা स. कि. चचियाना चि हारना । ठुमकी गु० पालसी, लिंगनी, ना. सी. पतग ठोका ना० सी० चाच, टोर । को उड़ाके हिला ठोफ ना. रता० मार पूर, ठोग्नै का शब्द । सकना अ० कि० हया छोड़ना, पारमधीमे ठोकर ना. स्त्री० उस, सलगनका पर्स, पा धीमे रोना। उसकी मासी० शब्दहित वायुसे छोडना। ठोदी० ना० स्त्री० सा । इसाना • मि. टमाना, टासना। ठोल. ना. स्त्री. चोंच। हूंठ ना• पु० पररहित तोड़ी हुई डाली वा बाल ठोला ना० यु. शुकादिके, निमित्तपात निसमें पातरहित वृत, टुण्ड। दानापानी रखत है अगुलियों की गाठm भया) बजाना। -- P वकी इल। M + r मङ्गलकोप। । स . टोस० गु० टाटा, जो सोसला नहीं है। डदुथा. ठोसना० स० कि० टासना। गु० जलाया, जलगया। डढाई ठोसाई० ना. सी. टाटाई, दृढ़ता । डएड. ना.पु. बाह, मुना, व्यायाम करना, ठौर. ना. स्त्री० स्थान, जगह । साधनविशेष, ढएट। [3] डएडपत ना• स्त्री. दण्डवत् प्रराम विशेष, डकराना च.क्रि. पूर्वमार के रोना। पायलागी। डकार ना. स्त्री. मार, आरोग्य : डएडा० ना० पु० सोंग, सौदीमा पाया, दराज डकारना था कि विकारना, हुकारना और डण्डिया० ना. पु. नियों के पहिरनका दल पचानाना। विशेष और बाजारवा कर उगाइनेहारा । डकैत १० पु. डार, चोर, वरमार। डण्डी० ना. सी. बेटी, बेट, तराजूपलहोंमें डकैती. ना. सा. चोरी, वरमारी, डामा । लगानेका काट, सयासी, हरसिंघाइ प्रादि की डकौत ना.पु. वर्णसकरको जातिविशेष नलीडरही। डोतियानिसका बाप मायण और महतारी डण्डीर० ना. स्त्री. धारी, लदार, लीस । ग्वालिनि थी। डपटना प० कि. पुकारना, टाटना, सरपट डग० ना.पु. चलावा,काल, पद, डग। दोड़ना डगडगाना० अ० कि० हिलना, चमचमाइट सउफ. ना. पु० नाना विशष । चलना। डफारना० अनि. कमारना, विलसना। डगना० २० कि. हिलना, डिगना। डफाली. पु. ३५ बजानेहारा। डगमग० गु.चचल, चलायमान । डय. ना. पु० बल, पराक्रम, जन, चमहा डगमगाना०प० कि० खड़खड़ाना, हिलना। निससे कुणा बनाते हैं। हुगर ना. स्त्रा मार्ग, सड़क, पैड़ा। डपका० ना०पु० टटका कूपगनल, गु० मोटा। डगरना०प०कि. हिलना, फिरना। डपडयाना अ.क्रि. भरना, जैस पास या डगरा. ना. पु. बासश बनायाहुया पान स भाती है। विशेष डयराना पु० सीलाभूमि, लिवार, छपरा। खग्गा० ना० पु. दुर्बल घोड़ा शेष। डयरिया गु० खब्बा, बायाहाथ, वामद था। सङ्क० ना. पु. चेमक, विच, आदि का विषयुन डवोना० स० कि० डुबाना । काग। डा० ना.पु. बडी डिविया । हवा. ना. पु० टका, धीमा, नकारह । डन्० ना० पु० साईका की। डदिनी ना० सी० आकिनी । डमरुमा० ना.पु. घुटना की गाठि । इलियाना० स.वि. हमारना, चमकना। डमय० ना. पु० राजा विशेष डबीला गु० जिस जतुके डकहो । डमरमध्य. ना. पु. उमरूका मध्यभाग, उटना० अ.शि. अहना भिड़नातिका बनना। साक्नाय जो अपन से दो हे शलके भागों डटैया ना. पु. टग्नेवाला। का मिलावे। ददना० .नि. जसनाना, भुननाना । डर० ना.पु. मय, मीत, शका । डमुण्डा गु० दादीरहित ।। डरना० डदियल-३० दादीवाला। डरपना - य०वि० भयखाना।
मङ्गलकोप टेला। डरपोक गु० डरनेवाला, भगवान् । डांड० ना० पु. बदला, दड, ताइना, नारखेचूने डरवैया गुरु भयवान्, हेठा, डरपार । का प्रस्त्र, चापू रोद डण्डीर । बराऊ गु० भयकर । डाइना स० कि० बदला लना, दण्डलना । डराक० गु• भयवान्। डांडा० पु. मेंड, सिपाना धूरा। डराना 'स• क्रि० भय दना, भय सिडाही ना. सी. सेयोहारा, सेक्या। डरावना लाना। डामाडोल ना.पु. इधर स उधर रसड़ना । दुरी ना. सी. मासयी बोरी, छोगटुकड़ा, डांवरून ना. पु. शरका बच्चा। डांस पु. डर, मग्छ । डरीला गु. मांस पारियोराला। डाक० ना. सी. टप्पा, अतररहित मन,डाकिनी डरौना० गु० डराऊ। का पति, डाका, डाक। डलया० ना०पू० टाररा। डाकना० स० कि. वमनकरना, उबालस्रना। डलवाना०स०वि० भाग्याना गिरवाना। डाका ना० पु. चारोंका धाता। सड़ाना। डाकिन् । ना. स्त्री. डायन, गुडैल, यर डला. ना. पु. बड़ा टुकड़ा वा टला टावर। डाफिनी० गिना भेद। डलियाना. स्त्री. पाटी टापरी । डाकिया. ना. पु. डा, डाफ लजानवाला । डली ना. स्त्री० घारा टुकड़ा वा ढला. डाको गुर साज, पट्ट । सुपारी। डाकृ० ना. पु. डरेत, चार, स्टमार । डस. ना. श्री. तराजूपी ररसी दशा, डाट. ना. सी. धुडक, धमर, दी। डसना० स० कि० काटना, चभरना दारु | डाटना० स० कि. टारना, मापसे दखना । याना। डाद ना० स्था. पिछल दान । डसीना ० ना. पु० विछीना। डाढ़ी ना. सी. टोपर क माल । उहरु या पु० गुमा, साह चौरगहा, लालच, डाय. ना. पु. परतला क्या नारियल, तृण विगाइ, डी। डहकनाक SR० टकना लालच औरना | डायरल • पु० हाथ धोका पान, गाल तालाब, विगड़ना। डहफाना स० मि. निराशकरा, बलवाना, डामा.पु. वुशा, डार दर्म । बिगाड़ना। डाभर० ना.पु. धूना, लि। डहडहा गु० प्रफुल्लित, खिलाहुपा, चैत या डायन्. ना. सा. डामिना । डडहाना० अ० कि० खिलना, पूलना। डार० ना. सी. डाली, डाल । डाक० ना० पु. जगजगा, बिच्छूया देवा डक । डारना० स०कि. डालना। दाग० ना० स्त्रा० लादी, पहाइकी चोरी डारिम. ना. पु. दाडिम, धनारफल । डागर० गु० दल, ना० पु० दुबैलपशु मूला डाhe Te स्त्रा० डाली, शाखा, टहनी ! डालना स.कि. म्ना, धुसहना, मोना। काफूलाहुधा पत्ता। डादना० स० वि० ताहित करना घुडकना। डाला० ना० पु. डोला, बड़ीडाली। डाली ना० स्त्री० टहनी, शाखा फलादिका भेद, ठण्डी, बो। डादा ना. स्त्री पुपादि रखने के लिये वासरा पार विशेष । 4 . ar डॉठलना० ० 14 !
१३५ मङ्गलकोप। दुलाना ढाक. ना.पु. पलाशान,शुइरत दुपात सादील. ना. सी. यासक्त, मिलम्ब, दर, घट। का विप उतारने में एक सहारका बाना । दीलाई. ना. सा. शिथिलना, पालस्य । ढाका. ना. पु० बगालेश नगर विशेष। 7-दीक्षा नारपु. टोला। ढाटा० ना० पु. डादीवधन, रवा । दुकना यानि मुक्ना, शिरझराना । ढार्टी ना० सी० क्सन, यत्रणा, फादा ना घोड़े दुकील ना० सी० ता । १ मुसपर मारते है। दुरना० अ० कि. फिरना, लुढकना। ढाढसा नास्त्री. धीरन, सूरमापन, दिलासा दुलना० अ० वि० इलना. दरना मरना । शाति भरोमा। दुलाई ना• स्त्री. उटगार का पैमा वा काम । ढादिना ना० स्त्री० ढादी का स्त्रा। स०कि. उटवाना छलकाना। ढाढी ना. पु० जातिविशा जा चना और दुलाना गाते हैं। प्रा० ना. पु. तुदा, मेंड, मिट्टीश पिण्ड । दाना स.कि.गिराना, उजाडना। | ढढ० ना• पु० खान, माडा भूड़ा । ढावर० गु० मैला, गदला। | ढूढ़ना ना० पु. खोन। ढावा. ना. पु. जाल, आरी, थालता। दूदना स• कि सोजना, तलाशकरना। दार० ना० स्त्री० भाति, कानका गहना विशाहदार० ना. पु. देशविशेष । ढारना स.नि.ढालना। | दूदिया ना. पु. जैनलागों में भिखारी, गु० दारी० गु० भरीहुई। दनेवाला, दटाव। ढारू० गु० दालू । दूक. ना. सी. दुकी, ताक, पद । ढाल. ना. पु० उतारू, ना. सी. फरी। दूकना० अ० वि पद परना,सूचना, पिक दालना० स० कि० साचे में उतारना, प्रौधाना, पाम थाना पैठना। विगाहना। | इसर० ना० पु० जातिविशेष । ढालवा गु० उतरू, जो साचे में उतारागया। टेकली ना० स्त्री० फूपसे जन निराउन का ढालू० गु. उतारू, बेंडा, विगाहू, साचेका उता या रना। दाहना० स.नि.गिराना, उजाइना । की नासाकूने का यन। दाहा. ना. पु. नदीका कराना। दंडस ना.पु. तरकारी विशेष । ढिग.ना.सी. पास, समीर ! टेंडी ना. स्त्री-पोस्तारापूल । दिठाई ना. स्त्री. चचलता, गुस्सात्री। | देंदा० ना. पु. गर्भ, गर्भता, बहारेर, दानपैरों दिहिमा ना.पु. टीहरा, पक्षी। का बीच, गदरा। दियका० पु. उभार, गुमा। टेक.पु. पतीविशेष। दिमदिमी ना.स्त्री० सनरी विशेष । दली ना० स्त्री० रही, चरती । देद ना. पु. चमारकीजातिविरोए, कौया । -- दिल्लर० गु. पालसी, मुस्त। टेदी • स्त्री० कानका गहनाविशेष । दीड गुपचल, निडर, दवा धीताल देर० ना. पु. रात, गल, बहुतात । मगरा देरा ना. पु. भेगा, जिससे वाधी ऍते हैं। बिठादे० गु• धौवानी या चचलता से । देरी० ना. सी. बोगटेर । . का ना० पु. 7 . दिल्लइ० दी । ७ Jaa .
मङ्गलकोप। - तसरी } ॥ . स देला० ना. पु० माटीम लोदा। तकली०-ना. रती० श्रटेन, परेता ! देलाचौथ ना. सी. भादोंकी चोय । तकयाहा ना.पू. रक्षक, चौकीदार, पहरू। या ना. स्त्री. अया। तकानास० कि० दुको लगाना, लखाना । याटेकर गु जो उमड़गया । तकिया. ना. स्त्री. सिरहाने की यस्तु ढोया ना. पु. पर्व वा यौहारमें फल पा फूल जो विशेष। छोटे लोग लाते हैं। तकुमा० ना पु० सूत काता के लिये लोहेकी दोक ना० सी० दण्डवत्, रियास । शलाका जो चरखे में लगती है। ढोकना० स० कि० पीना, घटना। तक ना.पु. महा, घाछ । ढोका. ना. पु. पत्थर आदिका टुकडा, हेर । तखही ना. स्त्री. तुला तराजू ढोटा ना० पु. लगा। ढोना स.कि. लेजाना, उटाना । तसान० ना. स्त्री० वर्दई । ढोर० गा.पु. गायगोरू। तगण ना० पु. जिसके अतरा अवर लपहोता ढोरा. ना. पु० ताजिया जो मुसल्मान बनाते हैं। है, गण विशेष। तगना० स० कि० तागा डालना । ढोरी ना. सी. टीरी चाप । ढोल ना. पु. बाजा विशेष । तगाई ना. सी. सिलाई, सिराईका पैसा । ढोलक० ना० पु. छोटा ढोल । तगाना० स० कि० तागा इलाना, सिलाना। तग्गा ना. पु० सीने के लिये बनाया हुआ ढोलकिया ना. पु० टोलवनानेहारा । ढोलकी ना. सी. घोराटोल । ढोलन ना. पु० प्यारा, रसिया। तगड़ी० ना० सी० करधनी।। ढोलना० ना. पु. टोल के समानयत्र पिरोष । तंगा० ना० पु. दो पैसा। ढोला ना.पु. छोकरा, रागविशेष । तचना० अ० कि. गर्म होना। तचाना स० कि. गर्म करना या कराना। | तच्छरीर० ना. पु. उसका शरीर । ढोली ना० पी० दोसो पानका परिमारा। तज. ना. पु. पौषषि, वृक्ष विशेष। दीचा गु० सादेचार ४२॥ तजन ना० स्त्री० छोड़न, त्यागन । दौरी ना. सी. डोरी, दहक, चोप । तजना० स० कि. यागना, घोड़ना । तजिय० व्य. छोडिया [त] तज्जन० ना.पु. उसका मनुष्य। तान्य. तलक, लग, ना. सी. टि, तार । तट. ना.पु, तीर, पास, किनारा त० अध्य. तीमी, तथापि, तदपि । I "तटस्थ० गु. वीरवासी। सक प्रध्य तलक, राग, गा० सी० ति ताक, तटिनी ना. स्त्री नदी। तराजू, तसड़ी। तहीका० ना. पु. उसकारा। तकतकर ना.पु. पशु आदि चखान का राम्दा तह. ना. पु. पर । सशना सा कि ताक लगाना, घ• वि०ष्टि तहक० ना० सी० तई, ई, पाई। तड़कना प्रकि० फटना, घटना। যখত্তা না তু । तड़का ना० पु. भात राल, भोर । 4 दोलिया 3 मा० पु० ढोल बनानेदार ग २ । देना।
मङ्गलकोप] .. -- तड़के अव्य० सेंबरे। तत्व मा. पु. सार, प्रकृति, यथार्थ, मूल, सद तड़तड़ाना ० कि० रिसाना, भिरझिराना, भाव जो किसी स बना नहो । पटने का शन्द। तत्त्ववल्का ना• खी• मुरही। तड़प. ना. स्त्री. चटक, झपट, उचर, तत्त्वज्ञ गु० मनुम्यादि जो लिसके, वातकरे, तावली। तत्व वस्तु जाननेहारा, यथा मह्मवेत्ता। तड़पना य० कि० तलकाना, धड़कना, कुद तत्त्वज्ञान० ना. पु. ब्रह्मज्ञान, यायामशान । क्ना, फरफगाना, हाथ पार पटेफना। तत्क्षण यय. उसी समय, तुरत, उसीरए। तड़पाना० स.वि. तलपाना, धड़काना। तर०व्या तहा। तड़पीला० गु० पुत्तीला, चटपटिया। तथा अन्य निसी प्रकार, तेसा, पैसाही। तडफ. ना. सी. व्याकुलता, घड़ा । तथाच० श्रय जमे, पुनाचि । तड़फड़ाना०प० कि० धड़कना, घबराना। तड़फड़ाहट ना. स्त्री. प्यारलता,घराहट । तथाकि अन्य तौभी। तड़फना० अनि० व्याकुल होना, पटपटाना। तद० यन्य तत्र निससमय । तड़फाना० स० कि० तड़पाना। तदनन्तर० अन्य तिसके पीछे। तड़ाना.पु. टापू, दीप। तदनु० यया तेहि अनुसार, निसपीले। तड़ाक० गु० भड़कीला, चमकीला। तदा अन्यततहा। तड़ाका० ना. पु. मारेना का शब्द, चटाका। तदपि अय-तौभी। तड़ाग० ना० पु. वालाव, पोखरा । तद्गत गु• उस में गयाहुा । तड़ाहा. ना. पु. जलकी धारा, तरेड़ा। तद्गति: ना. सो० उसकी तदायाना० पु० चटक, भडक । । तद्गुणविशिष्ट गु• वहगुण निसमें है । तड़ावाना. पु.इहा, बनार। तविक ना.पु. उस यज्ञका हव्य । तहित ना. स्त्री. विनली। तडित्वान् ना. पु. मेध। तद्भय ना. पु. उसके डर । तद्भाधक० गु० उसमावका बोधक । तण्डुल ना.पु.दुल, चावल। तधी० अव्य. तिसी समय, तभी। तत् अन्य• यह सो, तीन, समूह ना• पु. ईश्वर। तन० ना. पु. शरीर, देह, पुत्र, और पिरवार । तताना० स.वि. गर्म करना। तनक० गु० थोड़ा, अल्प । ततेदा० ना. पु. पानी गर्म करने का पात्र तनय० ना० पु. पुष, लड़का, सुन् । विशेष तनया० ना. स्त्री पुत्री, कन्या, सुना। तत्कन्द० ना. पु• अदरक, बाराहीकन्द । तनापा० ना. पु. जवानी, तरुपाई । तत्काल अन्य. उसी समय । तत कार्य० ना. पु. उसी उसी काम में। तनु. ना. पु. शरीर, देह । तत्ता. गु. गर्म, यलिन, क्रोधी।। तनुक० गु० थोड़ा, पल्प। तत्पर गु• पासक्त, चतुर, निपुर, समेत । तनुजा ना० सी० तनया, पुत्री। तत्फल ना.पु. पीर वृत, गनपीरि, जामुन तनुत्राण ना. पु० बस्नर, क्वच । वृष, उसका फल। तनूदरी० ना स्त्री० स्त्री, नारी, अनला। दशा, उसकी माया 2 |तनी ना सी० अंगरखे का बधन, तनया ।
मङ्गलकोप। १३६ धृप। . तनूरुह. ना. पु. शरीर क बाल । तपस्विनी ना. स्त्री तपस्या करनेहारी स्त्री। तनोति० अ० कि० पिस्तारसर । तपस्वी ना. १० तपस्या करनेहारा यागी। तन्त० ना० पु. तार, सुप सिद्धि, तुरत, सतान, तपा० ना० पु. अचक, योगी, जोगी। श्रौषधि, तदवीर। तपाना०स०कि. गर्म करना तताना, अरपना! तन्तनाना० अ० कि. पिनपिनाना, मनाना । तपास ना० स्त्री. किरण, धूप, पारश्रम दोड तन्तनाहट० ना० सी० नमनाहट, जलन स जो पीहा। तपिच्छ० ना. पु० तापिच्छ, तमाल वृक्ष । तन्तु० ना.पु. सून, पार। तपी० ना. पु० तपा, मुनि । तन्तुना० ना० पु. ततुना, तार । तपेश्वर०) तन्न० मा पु० तोरमा, लटका, शाम्रोक्त मात्र तपेश्वरी०४० पु० तपी, मुनि। शिवकृत प्रथ पिशप, वीणा । तपोवन" तन्त्री० गु० तनया करनेवाला, गानेवाला । तपोधना. ना. स्त्री मुण्डी, पार तपादन की तन्नीनाद ना० पु. वीणाका शब्द । स्त्री, तपश्वरिन था। तन्द्रा० ना. स्त्री. थकाई, श्रम, मूळ । तपोमय० गु० तपस्यायुक्त। तन्द्री ना. स्त्री. भीह, भृकटी। तप्त० गु० तत्ता, गरम, तपत । तन्दुल ना.पु. चावल । तप्तांग ना. पु. वर विशेष, दहगरम । तमा० अ० कि. खिचना, पेलना । तब० अव्य.तिससमय । तनाना० अ०वि० पिनपिनाना,रोधितहोना । तयी० तन्नेन ना. पु. उसकी प्राखि । अय. तिसीसमय। तन्मय गु० उसमें भराहुया। तम नापु० अधारका गुण, अरेरा तमो तन्मात्र. अय. वेवल, यह । तम गुण, राहुग्रह, काय, अज्ञान, अति, प. तप० ना. खा. नाप, उप्ण, ना. पु. तपस्या दात में बहुतातका बाधक। माघका महीना। तमक. ना. स्त्री० गई, घमण्ड, मुखका लाल तपत० ना. मा. उप्ण, गु, गर्म, तत्ता। होना, मुन्नाहट, टर। तपन० ना. पु० उप्प, ला, सूर्य, और मि तमकना० स० कि. मुखलाल हाना, दहकना, लावावृक्ष रापना श्र• क्रि० ऐश्वर्यवान होता, उम्णहाना, दगदगाना, निसारणकाध । अतितेगयुतहोना। तमका० ना. पु. धृपकीमार, बहुतगर्मी । तपनीय० ना. पु० सूर्य। तमचुर० ना. पु. कुक्कुर, मुरगा। तपलोक ना० पु. खर्गविशप, लोक विशेष । तमतमाना० अ० कि० मुख में लाली होना, तपसी० पु. तपस्वी। दगदगाना। तपस्य. ना. पु. पागुनमास, या मधुरतथा | तमस ना.पु. तम, मनु शिष । माधव सज्ञक च शुक शुचिश्चाथनमो नमस्यो | तमस्विनी० ना० सी० रानि, रन । तयेषु ऊर्जश्च सहस्महस्यौ तपस्तपस्याविति तमारि० ना. पु. सूयं । तक्रमेण । तमाल ना० पु. वृक्ष विशेष, तिलक जो तपस्या मा. श्री. तुप, याग, ईश्वरभजन । ‘दन से बनाते हैं। तभी०।
'मालकापा . तमालपत्र० ना० पु. तमास्। तरचर० ना.पु. बड़ा वृक्ष। तमिस्र ना.पु.तम, अन्धरार। तरसना.पु. शीघ्र, जल्दी, सालच, दय तमी० ना. सी. रात, कृपा, कल्ल। तमीचर० ना. पु. निशाचर चोर, उल्लू, तरसना य. निजी लगाकर रहना, ललचः चमगादड। ना, दयालुहाना, पतीजना। तमोगुण ना० पु० मनोवृत्ति विशेर वा दोष तराई ना. स्त्री• दलदल, चरायो, नाचान निससे कान पोधादि उपजते हैं। तरान्० ना. पु. उगाही, प्राप्त । तमोल ना. पु. ताम्बूल, पान । तराना० स० क्रि० पारपराना, पैराना, रचाना तमोलिन् ना. स्त्री तमोली की खी। तरि० तमोली ना० पु० जाति विशेष जो पान तरी ना. स्त्री. नार, नौका। बेचते हैं। तरीन ना. सी. तरी बहुवचन, ना। तम्बू० ना. पु०राटी, पाल, कपड़े का बौटा। तरुना• पु• वृद्ध । तम्यूल० ना० पु. ताम्बूल । तरण गु• युगा, जवान । तम्बरम. ना. पु. स्तम्बरम, हाथी । तरुपताना. मी०, योपन, किशोर तरः अव्य० तल. पदात में अधिकता का चिद, तरुणाई (नवानी । तरुणी ना० सी० युवती, जवान की। बहुतात का सूचना तरेड़ा. ना. पु. सेंटी से पानी वा गिरना । तरई ना० सी० तारा, नतय । तरया० ना.पु. तारागप, तारा, कविवार तरकारी० ना. स्त्री० भानी। यथा ( दोहा. यथा तरेया पान के सब नृपर तरंग.ना.पु. लहर, उमग, ललर । उदास, लखिदिनमषि कर राम छवि सकुच तरंगिनि चहुयास)। 'तरंगी ना.पु. बहुरगी, लहरी। तरोसा ना. पु. किनारा, विहारीलाल स तरण. ना.पु. मुनिमय, पारहोना, उद्धार । शनिकाया (श्यामसरति करि राधिका तब होना। तरजातीर, अशुनकरत तरीस को सिनक तरणि ना.पु. सूरज, नाव । रोहीनीर)। तरपी० ना. सी. नार, तरनी । कर्प भूषण विशेष पिहारील तरना ना.पु.तरण । सप्तसतिकाया (ससत चैत सारी टप्यो त तरफनाय. कि. तदपमाना। तरौनाकान, पयो मनी सुरसरि सलिल रवि तरबूज़० ना.पु.हिन्दवाना, फल विशेष। तरल गु. चञ्चल, तीक्ष्ण गोधा, ना० पु०धतूरा तर्क० ना. स्त्री० बुद्धिसे विवेचना, अनुमान न्यायशान, दलील। तरलताना.स्त्री० चञ्चलता, तेजी। तरला. ना.पु. नाम विशेष, गुजो सब से वरना। नीचला वा दूसरे से नीचला। तर्फित गु. सङ्कित, लघित, तर्क दियागया तरलाई ना. स्त्री वरतना। तरच ना.पु. वृक्ष। कानका भूपप विशा। तरगिनी ना• स्त्री. नदी। तरीमा ना. पु. . विम्ब विहान)। तर्फण ना. पु. यूदन, नई दान बनाना, ' ती० ना. सी. तरपतिया, नाइपत्र । .
। मङ्गलकोप। - चोरी। तर्कुल ना. पु० ताडका पल। तलया० ना. स्त्री. द्वागतालार। तर्या गु० धारा जो बहुत शीघ्र बहती है। तल्पना०सी० शय्या, सज, बिस्तर । तर्जन. ना. पु. कोप। तरीला ना. स्त्री० उसरी लीला । तर्जना० अ० क्रि० कोपरना, कूदना । तवर्ग० ना० पु. तकारादि पाच थवर । तर्जनी ना. धी• अगुष्ट के पामकी अगली । तक्रार 710 ० हतर तरालिसाहुया । तराना० गु. जो बहुत पिकना गोलाई म जो तटना० रा ० कि० भागदना, पाटना । टपरता है, अ.लि. समाग भरना,गलफा तष्टित गु० भाजित, वागगया। कीरता। तसला. ना. पु. खानापसोकापात्र विशष । तर्तरादट० ना. सी. सन्नाग, गीदड़भवकी, तस्कर० ०ना पु. चौर । गलफ्टानी। तस्करना० न.सी. तर्पण ना० पु० पिनादिके निमित्त जलदाउदना तस्करत्व० ना० पु. मगल, हुलास। तस्करी० ना० रनार तरीना० अ० कि. बड़यडाना, सुनसाना, कुड़ तस्मिन् सर्व तानमें, उसमें । तस्य सर्वउसका। तर्रारा. ना. पु. शीघ्रता । तस्म्० ना० पु० माप विशष, पारसी शब्द है। तरिया. ना. पु. खा, तलवार बाधने, तहा अव्य. तिसस्थान, उस जगह । तहियां गु० पहिले। हारा। तर्स० ना. स्त्री० दया, कृपा, रहम् । तहीं० श्रव्य तिसी वा उस स्थान । तसौ. अन्य. परसों के आगे का दिन । तक्षक डा. पु० मुरयसाप । तल० ना. पु. अधोभाग, पाताल विशेष, रष्टि । तश० गु० ज्ञाता, ज्ञानी, स्वरूप साजा। ता० स० उससे। तलक० अन्य तक,लग। तलछट० ना.स्त्री० नेचोड़, मल, खूद। ताश्त ना०पु० यत्र गएडा। ताई ना० स्त्री. चाची। तलतखाना० स० कि० हिलाना। तलना० स. क्रि० घी या तेलमें भूनना । ताऊ० ना० पु. बड़ा चचा। तागा० ना० पु. गाड़ी विशष जो सजी तलपट० १० मलमेट, चोपार । तखफना० अ० कि० तरफ्ना । तलमलाना.. क्रि० ललचाना। तांत. ना. स्त्री. चमड का रसी। तलवरिया ना० पु० तरिया । ततयांधना० स० वि. वका का चुपाना । सांता० ना० पु. पानि, पक्ति, तार । उलवार० ना.पु. खा, तरवार । तला. ना. पु. पेंदा, थाह, जूतीके नीचे का तांती० ना० पु० धुनिया, विहना, पटकार । भाग, पस, देवता। तांवड़ा० ना० पु. तात्रेका वर्ण, माणिक्य ने समान मूटापत्पर। तलातल० ना.पु. पाताल विशेष । तली. ना. रती० तला, बुक्नी, निस्पी। तांचा ना.पु. धातु विशेष । बलुश्री ताक० ना.पु. दृष्टि, दुका । ना.पु. पार के नीचे का भाग। तलमा ताकना० स० वि. देखना, झारना, पूरना। तले. व्य. नीचे। ताकयाफ ना. सी. ठीक समय दृष्टिरखना मङ्गलकोप। ताप० ना. रथी. उपना,तर, वर,मनका इस ताग ना.पु. सून, धागा। तागना० स० कि. सीवना, सूब गाउना। तागा.ना.पु. सूत, धाना। तापती ना. 6. नदी पिशेष। ताजक० ना. पुन्योतिष का अन्य विशेष। तापना० स.शि. याच लेना, घमारा। ताजनक ना.पु. कोड़ा। सापस मा० ५. तपसी, शान्त । ताटंक० ना. पु. कर्णभूरए विशेष।। तापिच्छ. ना. पु. तेंदुवा वृस, तमाल । ताद ना० पु. वृक्ष विशप, ना• नी• पहिताक्षिा चान। तारी ना. सी. नदी विशेष जो दिन्थ्यो ताइफ. ना. पु. तारक, वाइने हारा । ददिध पार है। ताड़ना ना.पु. झिड़की, दड, डाट । | तापीय ना० पु. सोनामक्खी। ताना स० वि० पहिचानना,यूमना, अटकल तासः ना.पु. तमालपत्र ना, दण्डदेना, मारना। ताप्य० ना. प. सेनामक्रती । ताइनीय गु० ताड़ना करो के योग्य । ताफता० ना. पु० रेशमी, कपड़ा निसको धूप ताड़का० ना० सी० सुराहुकी माता, राक्षसी । बाइ कहते है। तादित गु• ताइन दियागया, मारागया। तामचीनी ना. स्त्री. तावा निममें और ध तादी० ना. स्त्री० ताइकारस । भी जदाहोवे। ताएडव. ना.पु. तारस्व, न्यविशेष।' तामड़ा० ना. पु० ताके रगकी मयि । तात. ना. पु. पिता, गुरु,मित्र,पुर, भाई, रानु, तामपुप्प० ना० पु. कुम्भी। सेवकादिशा बोधर, गुरु तत्ता, गरम, तामरस ना० पुं० कमत। तामल ना. पुरे देशविशेष। तातनी सर्व उसकी, उसका । वामलकी ना. स्त्री० भूधरा । साते. सर्व तिसमे, उससे, तिसकारण । तामस ना० पु. तमोगुणका कार्य,काम, फोध । ताते गु• तमोगुण युक्त, कोपी । तामसी तात्कालिक गु. उसी ममयका । तात्पर्य ना. पु. चभिप्राय, प्रयोजन, मतलर तामसी० ना. सी. रान, मोपी। हामिल। तामहः सर्च. उसमें। तामा० ना.पु. दावा । तादात्म्य. ना. स्त्री तन्यम्पता। तामिली० ना० स्त्री. भाषा विशेष । तान० ना.स्त्री० रागा जो उच्चारण, स्वर । तामेश्वर ना० पु. ताकी नग। तानसेन. ना. पु० रागी विशेष । ताम्बूल ना.पु. पान । ताना० ना.पु. वन्नका लम्बास्त । ताम्र० ना.पु.वावा। तानी गु० रागी, गवैया, ना. सी. तानी ।। तांत्रिका ना० पु. सिद्धान्तका नानने हारा। तानचूद. ना. पु० मुरगा, करांदा । ताम्रवर्ण० ना. पु. हरिन, तावकारग ! विधान, दव साम्रज। ताना.कि. कमना, मोचना, नाना । ताम्रयल्ली० ना. सी. मनोठ । तानसार० ना. पु. लाबचन्दन । . ताइस० गु. वैसाही।
मङ्गलकोप। १४३' ताम्राक्ष० ना० पु. पोयल। तालवृन्त० ना. पु० ताड़का पसा । तार० ना. पु. वानर विशेष, मोतीमाला, निर्मल तालव्य ना. पु. जो अपर तालुसे उच्चारण मोता, उच्चस्वर, ताई। किये जायें यथा त, थ, द, ध, न, ल, श । तारका ना.पु. मुत्तिदाता, रागाधातु, गुरू, ताला० ना. पु० कुफल, मार दद करने का उद्धारकरनेहारा, जा पारलगाव,मान विशप दैत्य यत्र। विशेष तालाक.ना.पु. श्रीसलदेवजी। तारकारि० ना०पू० स्वामिकात्तिक । ताली० मा स्त्री. कुजी, चारी, दोनों हाथों को तारको ना० स्त्री. देवदाली। श्रापरा में मारने से जो शब्द होताहे। तारकूट० ना० पु० रूपा, पीतल । तालील ना• पु० वृस विशर । तारकेश्वर ना० पु. साशिवजी । तारण मा० पु० उद्धार वरनहारा, उद्धार का तालू है नापु० मुखमें ऊपरपा भाग । करना, मुक्तिदाता, तारनेहारा। ताय ना० पु. ताप, द्राध, पल चटक, एठ, तारणीय गुरु तारोहारा, योग्य, उद्धार करने काशका तरखता, कस। लायक। तावत्० अन्य० इत्ता, यहातक, तसतक । तारतम्य ना.५० गूनाधिक, थाड़ा बहुत । तायना० स० कि० गरमफरना, क्सना, ऐंठना। तार्थ. पु. उसका अर्थ, उसके लिये। ताशक ना. पु. गजीफह, लपा, पारसीहै । तारना० स० कि० उतारना, पारकरना, मुक्त तास देता। तासु० । तारा० ना० पु० नएन, १० स्त्री० वर्ष पुततासुको० } रम० उससे उसका । - ला, अगदी महतारी। ताहि सर्व उसदा। तारागण TT• गु० नक्षों का समूह । ताहिरी० ना. स्त्री• भोजन शिष। तारापथना.पु. धावाश। तिकातिक. ना.पु. गाड़ी आदि के बल चलाने तारिफ ना. स्त्री० पुतला, नक्षत्र ।। में यह शब्द बोलानाताहै। तारिणी ना. खा. उद्धार करनहारी। तिरी ना० सी० तिहाई, तसरा । ताररय०० स्त्री• तस्यता, जरान, पुरा । तिकोनिया गु० तीन कोया पदार्थ । ताम० ना.पु. तालू तिघा ना.पु. मागका योग टुरहा। तार्किकाना पु. नैयायित यायशाममानहा। तिल गुतीता चरपरा, ना. पु. चिराया। तार्य ना. पु. रसोत, गमपा (पविताश्यो तिहका ना. या० बिरपाया। गरमती शकुताभासपक्षिणा इत्यमर । तिचका ना० स्त्री. कमी। ताल० ना• पु. तात, तालार, इरसाल, ना. तिला ना० सी• वालीमिरच, सारा । नी• करताल, रागरा परिमार, मयुर म तिसरा.गु.नितारा, निरा। बाहुपर बार पापना । तिसराकरना माहितीनबर जैना। तालपजूही ना. श्री. दुपहरिया वृक्ष । तिखारना०० मि. टहराग, सारना, पहन तालध्वज ना. पु. भारतरामना। पूछना तीनवर जोतना। तालपक्षी तिगुण ना. मा. ममली औषधि। तालमलिका तिगुना A १४ मङ्गलकोप। {" याना। 1 . m न तिम्मना.सु. पीरी। तिय ना० स्त्री योषिता, तिजरा ना० पु. ) अतरिके तीसरे दिन तिया० । स्री, गारि । तिजरी ना. स्त्री जाडा पार विषमका तिरकोना गु. तीनकोनवाला पदार्थ । तिजारी नानी तिरखूटी ना. स्त्री० तीनकाने का प्रस्त्र वि. तिणुका ना• पु० धाम, घामरा टुकड़ा। शेष। तित अरनियर, नन। तिरछा गु० टंडा, पाहा, हटीला । तितना ना.पु. गुः प्रमाण वा अवपि तिरचाना० स० कि. टेदा करना, पनि तितनी ना. सी.वा निश्चय गोधक । हटीला होना, हठकरना। तितरथितर गुमिस मिल, मगाट नाना। तितरी ना. सी. नीट विशेष जो उतिरछी गुटेदी, बापी। सिनलीहता है। तिरतिराना अनि रिसाना, शिरशिराना। तिथि० ना. सी. चन्द्रकला की क्रिया से उपल तिरना० ५० वि० पेरना, तैरना । गितकाल, दिन, तारीख । तिरपद ना. पु. विपाई, तीनपद । तिथिपत्र ना. प. पना, जनी । तिरपदीना. ग्री- तिथिक्षय ना. पु. निथिका प्रबम, हानि । तिरपन गु. पचास और तीन, ५३ । तिट्रा गा.पु. मिरपौलिया ना.पु. धनुषागार के तनहार तीनहार का स्थान। तिदरी ना. सी. •वा रथान। तिधारा ना.पु. पारा विशा, तीन धारका तिरफल गा.पु. विफला, तीन पल का अर्थात् बारला, हर्र, बहेड़ा। तिनकना० • जि. परा, पहाड़ाना, तिरभंगा० गु० तिरषा खड़ाहोता । टीमना। तिरभंगी ना• श्री. छन्द विशेष ना. पु. तिनका गा.पु. डाही या टहनी वा घासका औरणच द्रनी का एक नाम । योगका तिरस्कार ना• पु. निदा, गगन, प्राज्ञा, तिन्तिी ना.स्वा. पमिली वृक्ष । तिन्दुक ना.पु. तेंदुरा, तमालवृद । तिरसठ गु० साटि और तीन, ६३ । तिन्दुला ना. स्त्री० पीपरि । तिरहुत ना. पु. देश विशेष, नगर विशेष । निम्नीक ना. पी. पावस या उसका पीस तिरोधान ना. पु. पोगार, पाप्यादा, परन । तिरोहित गु० दुपाइया, गुप्ता ना० पु. मि. तियारा गुतीनिर ना. पु. तान दरका । शिला देश। तिम्पत ना. पु. दश गिए जो हिमालय ये तिमिरी गा० पु. तेलकी बुद् जो पानी पर पहनी उनर में है। तिमि. ना. सी. मदली, य. नेमे, उनी तिमिराना • कि. झलना, लहरना, पर विवि घराना, चमकना यथा नेलकी बुर पानीपर ! तिमिगि..पु. मन्य, मछली । तिमिराहट० ना. सी. परथराहट, पर तिमिर० ना.पु. पवार, यज्ञान । पराहट। तिमिरी गा. सी० पुमड़ी। माम। সদা शिष। १ घर परा निमिरहर. ना.. मन + मङ्गलकोप। तिर्यगपतिमा पु• शार्दूल, मिह । in ना. पु० तीनोलोक - गु० समसर, पनी । तिर्यपति तिहरायट० ना. स्त्री० तिगुण करने का वाम ! तिहरे० सर्व तिहारे। निज १० पु. पोगा विशेष जिसके बीन से तिहाई० ना० स्त्री० तीसरा भाग। तेल निकालने हैं, शरीर में पाला चिंद्र शिष, तिहायत. ग. स्त्री० तिमरायत । तिहारी ना. सी० तिला० ना. पु. ललाट में पिहिन चदादि तिहारे० ना० पु. मर्य. तेरी, तेरे । का टीका, पीना, सली, अर्थ करना, अर्थ, वृह तिहारो० ना. पु. विशेष गु०शिरोमणि। तिहु० गु• तीनो, तीन। 'तिलकुट ना. पु. निल भोर मिटाई विशेष । तिलंगा ना. पु० तेलगा, सिपाही । तिहुपुर० तिहुलोक० तिलगी ना. स्त्री. गुहा, पनग। तिलचट्टा 1. पु. की विशेष । तीखा० गु० तीक्ष्ण, चरपरा । तिलचावली. सा.तिल और चावला यी तीखी० मिलानी, पाले घोर सफेद बालों की तीखुर० ० पु० शेत वस्तु, निसरा ना के मिला। दिन फलाहार करते है। तीन गु० ताक्ष्ण, तीन, तेग। तिलचूरी० ना. सी० मिटाई पिशेष । तिलहाना० पु. तीन लड़का, भूषण नितीज. ना० स्त्री० नृतीया । तिवसोना. स्त्री. शेष। तीजा- गु० तीमरा, मृता के तीमरे दिन का तिलपर्णी ना. स्त्री चदा। काम व तीमरा दिन। तितपिटक ना. पु० पीना, तिलयी सतः । तौजिया ना. श्री. श्रवण सुदी तीन या तीजे स्याहार । तिलयर० ना० पु. पक्षी विशेष । तीत गु० तीता। तिलभेद. ना. पु. पोम्त का पिरया । तिलहा० गु० तेलिया। तीतर० ना० पु० पाविशप । तीतरी० ना. स्त्री० तिनरी, पतगारिशेष । तिलुमा० ना. वा. पिलई । तिलोत्तमा ना. सी. मुरय अप्सरा । तीना गु० रहुआ, पपडा, तीग्वा । तीन० गु० ति, ३। तिष्ठना० .नि. टहरना, स्पिरहोना, ति तीनतेरह १० गु.नित्तर रित्तर। तीय. ना. मा. घडला, स्त्री। तिष्ठित गु० टहराहुधा। तोयल ना. सी. स्त्री क पहिरने के तिए ना. सी. श्राटरा नरान पुय । यन। तिसका सर्ष उमका, निससा तीर० ना. मन्द्र या नदी कार, 70- विसरायत. ना. पु. मन्यवनी गायन, देना गी, पारगायतरहिन । तीरथ ना. पु० पुरपस्थान, याना। तिस्ता ना.पु. योग्ध विशेष । तीरथराज. ना.पु.गा। तिहत्तर० गु० सत्तर और तीन, ७३ । तीर्घ० ना० पु. नागए। विदरा गु० लिगुणा, तिखा। तीली नास्त्री निहाकी यामी । निहराना स० कि. लिहरा करना। तीन गु० अन्यन कड़वा, तीता, पैना। राजना। A दिग, पाम ।
मङ्गलकोप। . पर्वत । . दीसरा० गु• तृतीय । तुम्या० ना. पु. लोकश, का। तीसी ना. सा. आलसी, जिसका तेल निका तुम्यिका ना. स्त्री० लोकी, कर, बनाने लने हैं। तुम्पी० की ताबी जो मदारी लोग रह- "तीक्षण ना० पु. मरा, मिरच, गु० पपा, तत्ता, शेरा, झाझिया, पैना, ताता। तुरई० ना. सी. तरकारी विशेष। तुक ना स्त्री• पद, रायप। तुरक० ना० पु. नुरक, देशविशेष । तुषलाना. पु. तुरग) तुकली० ना. सी. छोरी पतग विशेष तुरंग ना. पु० घोड़ा। नुकसानापुर तुरंगम) नुका० ना• पु० वाण जिसकी नोक नहीं है, चोग तुरंगाहा ना० श्री. असगध । तुरत तुरंत अन्य. शीय, अभी। तुगावंशी तुकातीरी० ना. पु. रशरोचन। तुरपना० म. वि. सोना, सकना विशेष । तुरही० नासी. माना पिशा नरमिघा। तुग० गु० ऊचा, लम्बा, समूह । तुराई ना. स्त्रा० ताशक, रजाई । तुंगवृक्ष ना. पु. नारियल । तुराना० ५० जि. नाना, दुकाना, मर्यादा रे तुच्छ• गु• शत्य, कुसित, अंपमापी। । बाहिर चलना, बहिचलना। नुदाना० स.क्रि. तोडना । तुरापाट. ना. पु. इन्द्रा तुएड. ना. पु. चाँच, मुलं । तुरिय० ना. पु० घोड़ा। तुतरा० गु० जो तुतलाता हो। तुरी ना. पु० घोड़ा ना स्त्री. तुरही ।, तुतराना० य. कि. यधूरा बोला जैसे पालक बोलते हैं। तुरीय० ना. पु० मुक्तसरया,मुक्ति, मौत चीय तुतला. गु.नुतरा। तुरुक० तुरुकर ना• पु० यवन, देश विशेष। तुतलाना य. दि. तुतराना। तुर्त० तुत्थिक ना.पु. नीलायोया। तुर्तफुर्त तुर्ताव तुनतुनाना० य० कि. सरांग देना।.. -अन्य तुगत, शीघ्र। तुन ना. पु० नृतविशेष | तुर्तीफुर्ती तुन्दिल गु० तोदेस, बड़ी तादका । तुल० गु• तुल्य। तुलना० पु.तुन, टा। तुलना० य. वितुलापरचदना, तुल्यहोना । तुपक.ना.पु.न्दूक । तुलसाना० स्त्री. छोटा वृश निराकी प तुपकिया. ना. नी• छोरी बन्दूक । तुलसी०० पिशु वा शालग्राम को चढ़ाते हैं। तुम० सर्च० मध्यमपुरुष का सूचक वा वाचा | तुलसीदास ना.पु. प्रसिद्ध भक्त भीरामार तुमतनी सर्व तुम्हारा भाषा बनानहारे। नुमाई० नासी. तुमाने का पैसा । नुमाना० स० वि० धुनवाना। अपनी देह रा तुमुल ना. पु. रोला, हुल्लड़ । दान देना, सातवी राशि विशेष । तुलाना० स० कि० तौलाना, तुलापर चदा। । 7 तुत्या : तुला० ना. स्त्री तराज, - मङ्गलकोप। है 1 - तया ठीक कराना। तूबर० ना० . राजपूतों में जातिविशेष । तुलित० गु० तुलाहुश्रा, तुलापर चदाया गया । तृण ना. पु. था। तुली० ना. स्त्री. मोगसीक, चित्र लिखने की तृणराज. ना. पु. नारियल, उख, तरवृक्ष । कलम। तृणवत्० गु० घास ये समान निकम्मा । तुत्य ना० पु समान, वरार, सहरा। तृणावर्त० ० ० दैल्यविशेर, मोरा, यास तुल्यता० ना० स्त्री समानता, वरावरी। का भवर। तुवर० ना. पु• तिल । तृणोदफ० गा. पु० घास पानी। तुवरी० ना• स्त्री० फरवरी । तृतीय० गु० तीसरा। नुए ना. पु. धानादि का मिला। तृतीया ना. स्त्री तीन, तीसरीतिथि, तीरी। तुपार० ना० पु. शात, पाला, हिम । तृतीयान्त गु० निस के अन में तृतीया क । तुए० गु० प्रसन, तृष, सतोगी। चिड है। तुष्टता० ना. स्त्री प्रसनता, तुप्ति, सतोष । तृतीयांश ना. पु. तीमरा भार। तुष्टित गु० सनिन, सतौषित । तृप्त० गु० सप्ट। तुसार० ना.पु. तुपार । तृप्ति० ना. स्ना० भागनादि करके सतौर । तुहिन ना० पु. तुसार तुषार, हिम । तृवृता० गा. स्त्री निमाउ। तुही० सर्व• तुझसे। तृवृत् तु. सर्च मध्यमपुरुष या एक वचन । वृपा० ना. श्री. प्यास । तूतांकरना० स० कि० तुकारना । तृपा गु• पिपामारके व्याकुल । तूकार्ना० स० क्रि० अप तो करना । रुपान्त० तूट्यो० ए० रातोषित। ना. पु०. गाय रखने का घर, तृष्णा ना. सौ.न. तरक्श। ते अव्य से, म तनई० ० सी. टीदार मिट्टी का बन । ते. सर्व व तूतियाना • नीलाधोया । तैतालीसा तृवरि० ना० स्त्री. तुम्मी। ततीस..... तेंदुवा... सकि० रुई का हाय शबाना । तूना तूर० ना. पु. तूर्य, नमारह । तूरक. ना. पु. जलपिप्पल । तूरना० स० हि तोड़ना। देवी तूरी ना० पु० धतू।। टेमाटरगा तूर्ण ना. पु. शोध, जल्द । तूर्य ना. पु. नकारह, उगाहा । तूला ना स्त्री निवीन कपास दिरंदला देवर तुलनीय. ना. पु. कदम दृष्ट। दा तूलिनी ना० पु० सेमर दृछ। तृपित १ २० पिपार राम, ए, तूणीर * ठेवन्द - 'तेउवहीर देगा मङ्गलकोप। . कडा करना। का रस। तेजस्कर० ना• पु० वार्य बहानेहारा, द्रव्य, तोंदेल. गु.निसका पैट रहा है। पुषई। तादला ताही अव्य तर्धा, उसी समय में । तेजस्वी गु० प्रतानी, दीधिमान, तंज वा तेजोमय प्रकाश से युक्त । तोकह० सर्व तुझको। तेवा. गु० तितना। तोड़ ना.पु. पृट, नदी की धारा का बल, तेमन गु• आदा, गीलाई, व्यजन । दही का पानी। तेरस. ना. स्त्री. प्रयोदशी । तोडजोड ना० स्त्री० गत बनाना। तेरह गु० दश और तीन, १३ । तोड़ना. स. कि. फोड़ना, रुपया, उनाना, ई- तेरस. ना. पु. दीमरा वर्ष, सोरस । तेल ना. पु. चिकना, चिकनाहट, शिलादि तोइल. ना. पु. कहा, सगौरा हाय के। तोड़वाना० स० कि. पोड़वाना, नई कराना, तेलिन्० ना. स्त्री. तली की सी। रुपया भुनसाना वा भुनाना। तेलिया ना. पु. तेलकासा रंगविशेष । तोडा० ना. पु. चटका, सहस रुपयों की थैली, तेली. ना. पु. तलकार जाति विशेष । रजक में धागि लगानेकौरस्तु, चरची, गलेकी तेवर ना० स्त्री• घुमनी, घुमही गु• तातड़ा। साकर, धनीदा कडा तेयराना . कि. घुमट्टी में होना, गिर- तोहाना. स. नि तोड़वाना। पहना। तोतला. शु. हरला । तेवरी. ना. नी. घुमड़ी, धुमनी पति। तोतलाना प.नि. हकलाना । तेवहार० ना• पु०प, त्योहार । तोता ना. पु. शुक, सुगा । तह मा.पु.कोप, माझ, बहादुरी, साहस । तोपना... हापना, गाडना । तेहर० ना. श्री. पीके पापका गहनाविशेष । तोपाना स.वि. गहाना । तेहा ना. पु. नेह। तोयड़ा ना• पु. थैली निममें घोड़े का दाता तेही अन्य घभी, रात्र, उगतो। दिया जाता है। नैतिल ना.पु. करपविशेष । तोमर ना. पु. वाम तार, छन्द विशेष । सरना० स. कि. परना। तोय. ना.पु. जल, पानी। तेल ना. पु. तेल। तेलकार० ना. पु. तेली। | सोपनिधि ना.पु. ममुद्र, जसपि । तोयपिप्पली. ना. सी. नलपीपल । तैलंग ना. पु. कारक देश वा उसके तोर ना. पु. ल. शिष, मक नए । वामी। तोरण. ना. पु. पूर्ताको माला नो मानद तेलगा- ना. पु. नलगदश के लोग, और वा त्योहारके दिवसाधत है। चगरेजों के प्यादे। तोरो नानी कवरी विशेष तैसा गुतिमके ममान, अय. त्याकर। तोल ना. सी. तौल। तोरपन्य तर, ना, निम्नदेव, मन तुम। तोजक सॉक अन्य. याकर। गां पुबाट नौ बारहमांश भर तोमा हाताई वा सोडह मारो भर । तोद ना.पू. सात |तोय ना• पु. हर्ष, तृप्ति, धरिन । तादी गा.की नामि। तोपर गु. हर्षदाता, धाग्जदाना।
मङ्गलकोप। । होना। तोलिया। + तोपित गु० हपिन, धीरजमान । प्रयताप० ना. स्त्री० नीनताप अर्थात् देहिए, तोहि सर्व तुझको। देविक, भौतिक । सौ. अश्य. तर, तो। प्रयपावक० ना० पु. तीन अनि अर्थात् श्राह- तोसना . विपके कारण से शिथिल वनीय, दक्षिणाग्नि, गाईप य अथवा जटरानल, दावानल, वदवानल। तील. १० ना० पु. जात, परिमाण की रिया। प्रयरेखा. ना. सी. नानग्या अर्थात् निर लना रा.नि. जोखना, परिमाण करना। चादि, तीन लकीर । तालयाई ना. स्त्री० तोलो का काम या प्रयरोग. ना. पु. तान रोग अर्थात् बात, . तोलाई पैसा। पित्त, कफ। तौलाना सहि जासवाना। प्रयोतनु० ना० पु० सूर्य त्रयोदशी० ना० स्त्री० तेरस । ना. सी. पात्र विशेष। यम्यक ना० पु. श्रीशिवजी। प्रसित गु० डरता हुश्रा, भयवान् । सोही० श्रव्य भी। प्रस्त० गु• रायर, डरपाक, नामर्द । सह अन्य. तथापि । प्राण ना. पु० रदा, निस्तार, उद्धार । त्य गु० जिसका त्यागदिया । प्राणकत्ती गु० रक्षक । त्याग ना. गु० छुड़ा, वैराग्य । प्राणी गु० वाणपत्नी रक्षा । त्यागन गा.पु. तजन, पिराग, छोडन । प्रातःगुरु बचायागया, रक्षित । त्यागना स.वि.पाड़ना, तजना । घाता०रतक, पालक । त्यागी गु० वैरागी, घाझेहुये। त्रास० ना.पु. भय,दुस। त्याज्य गु० जा त्यागने के योग्य है। त्रासक० गु• भयदायम, दुखदाता । त्यो प्रयतम, इस प्रकार, एकही समय में। प्रासा त्योधा गु.. पला। गु० भयान, गहुधा। प्रासित रियोनार. ना. सी. चतुराई, चाला। पाह। अय. दया चाहा वाशद, पश्ना योनारी गा० सी० नी जा अपा काम की त्राहिक तारा शन्द। चतुरता से सध बनाती है। नि० गु. तीन, ३ परतु यह शब्द पिशा त्योयस. ना. पु. दो वर्ष पहिले । भागे योगहोता है यथा, निमुवन, त्रिपुर । त्योरी स्त्री. मधे की समोड, घुमनी । प्रिंश गु. तीमा न्योरोचदाना प.नि. ग्रोधित हाना । त्रिशति गु० तीस, ३. न्योहार० ना• पु० पर्व, परी, श्रादिकादिन । निक प.पु. गानुरू। प्रपा० ० श्री. लाम, इया । त्रिय गु.नि,३॥ निफाल. ना.३० तीनरालयर्थात् भूत, मये प्रयपा० ना. सी. द्वारा पा अर्थात् पुष, प, वर्तमान अथवा प्रात का, मप्यार, मया सम्पति, पी। मिटर ना. पु० मिला। प्रयगगा ना. मी तीनगगा घर्षात् मदाग्निी, घिवुटार गा. पु. गौर, मिरथ पर मारपी. प्रभारनी। प्रिकट गा.१० पात पिगप निमपर एकदि । निकट .
मङ्गलकोप। - पारसा m तेजस्कर० ना. पु. वार्य रदानहारा, द्रव्य, तौदैल. तादला पुष्टई । १ गु० निसरा पेंट रहा है। । ताही अन्य ती, उसी समय में । तेजस्वीप्रतापी, टांतिमान, तन वा तेजोमय प्रकाश से युक्त । तोकह सर्व तुमको तोड़ ना.पु. पूर, नदी की धारा का बल, तेता गुतिनना। दही का पानी। तेमन गु० श्रादा, गीलाई, व्यनन । तेरस ना. स्त्री. योदशी। तोडजोड ना. रवी० गत बनाना । तेरह गु० दश और तीन, १३ । तोड़ना. स. कि. फोहना, मरमा, मुनाना, - तेरसना.पु. सीमरा पर्श, सोरस । यड़ा करना। के तेल. ना. १० चिकना, चिकनाट्ट, तिलादि तोड़ल. ना. पु. कहा, सगोरा हाय तोड़वाना० स० कि. फोड़वाना, टर राना, तेलिन्० ना. स्त्री. तेली की स्त्री। रुपया पुनराना वा भुनाना। तेलिया ना.पु. तेलकाहा रगविशेष । तोड़ा. ना. पु. चटका, सहस गायों को थली, तेली. ना. पु. लकार जाति विशेष। रजा में शागि लगानेशीरम्नु, चरची, गलेली तेवर. ना. स्त्री• घुमनी, घुमड़ी गु• तीलड़ा। माकर, धनीका पड़ा। तेवराना . कि. घुमट्टी में होना, गिर- तोहाना० म० कि० तोयाना। पहना तोतला. गु• हमला। तेपरी ना.सी. घुमड़ी, धुमनी टि। तोतलाना अनि हल्लाना । तेवहार० ना. पु. पर्व, स्योहार । तोता. ना. पु. शुक, मुगा। तह ना• पु. बोध, झाझ, नहाइगे, साहस । तोपना. स.कि.पना, गाड़ना। तेहर० ना. सी. पीके पारका गहनाविशेष । तोपाना स.नि. गड़वाना। तहा ना. पु. नेह। तोवड़ा नापु• थैली निसमें घोड़े की दाता तेही पन्य. अभी, सई, उगको। दिया जाता है। नैतिल ना.पु. रविशेष । तोमर० ना. पु. वाण, वार, बन्द विरोप। तेरना. स.कि परना। तोय. ना. पु० जल, पानी। तेल. ना. पु• नेल । तोपनिधिक ना.पु. समुद्र, जलदि।' तेलकारना. पु. नैती। तोयपिप्पली ना. सी. जलपीपल । तैलंग ना. पु. फर्पटक देश वा उसके तो ना. पु. दद्दल गए, मई० देरर ! वामी। तोरण. ना. पु. पूलाकी माला जो भान तेलगा. ना. पु. लगदेश के लोग, ओर वा त्योहार के दिन मारते हैं। घगरेशा प्यादे। तोरोनारसी. कारी विगए। तसा गु.निगममान, य-य-योकर । तोल ना. स्त्री. नील। सो पन्न. तक, तदा निम्मदह मर्च, नुम । तोचकनापु. काट जो बारह मारा भर सान्या दारा तोला होताई पासोबदमाशे भर । तोद० ना.पु. रहाट तोपः ना. पु. हर्ष, नृति, धरिन । नादी नाही. नामित तोरा गुः हर्षदाता, धीरजदाता - मङ्गलकोप। १४६ पैसा। तोपित गु० हर्षित, धीरजवान् । प्रयताप० ना. सी. तीननाप अर्थात् दहिय, तोहि० स० तुझको। दैविक, भौतिक । सौ. अय. तर, तो। प्रयपावक ना० पु. तान अग्नि अर्थान् ग्राह- तासना०प० कि. धूपके कारण से शिथिल वनीय, दक्षिणाग्नि, गाई पत्य अथवा जटरानल, होना। दावानल, बड़वाल। तौल ना० पु. जाख, परिमाण की रिया। प्रयरेखा० ना० स्त्री. तीनोग्वा अर्थात् त्रि- तौलना. स.नि. जोखना, परिमाण परना । चादि, तीन लपीर । तोलवाई। ना. सी. तौलने का काम या प्रयरोग. ना. पु. तीन रोग अर्थात् बान, . तोलाई पित्त, कप। मोलाना सकि. जोखवाना। प्रयोतनु० ना० पु० सूर्य। त्रयोदशी० ना० सी० तेरस । ना. स्त्री. पात्रविशेष। व्यम्बक० ना.पु. श्रीशिवजी । तौली० सितगुरु डरता हुशा अरवान् । नही० श्रव्य अभी। प्रस्त० गु. पायर, उरपार, नामद । ह. अव्य० तथापि । प्राण ना० पु. रता, निम्तार, उद्धार । व्यक्त गु० जिसको त्यागदिया । घणकत्ती गु० रदक। म्याग ना. गु० छुडार, राम्य । वाणी गु० जाणकर्ता, रक्षा । स्यागन ना. पु० तजन, निराग, छोडन । प्रातःगु० बचायागया, रक्षित। त्यागना सकि. छाडना, तजना । भ्राता रक्षक, पालक । त्यागी गु० बेरागी, छाडेहुये । प्रास० ना. पु. भय, दुख। त्याज्य० गु० जो त्यागने के योग्य है। त्रासक० गु० भयदायर, दुखदाता । त्यो अव्य तैसे, इस प्रकार, एकदा समय में । पासा त्योधा गु• चुपला। त्रासित गु० भयनान्, डराहुया। त्योनार ना. स्त्री० चतुराई, चालाकी । त्राहक अव्य. दया चाहा वा शन्द, पश्चा स्योनारी ना. स्त्री. सी जो अपना काम बड़ी त्राहि त्ताप का शन्द । चतुरता से स्वच्छ बनाती है। नि० गु. तीन, ३ परतु यह शब्द विशप के त्योयस ना. पु. दो वर्ष पहिले । प्रागे योगहोता है यथा, त्रिभुवन, त्रिपुर । त्योरी ना. सी. मत्थे का सकोड, थुमनी। निश० गु० तीसवा । त्योरोचढ़ाना० अ० कि० मोधित हाना । त्रिशति० गु० तीस, ३०। त्योहार ना• पु० पर्व, पवनी, अानकादिन । त्रिका त्रिपा० ना. श्री. लाज, हया । निकटु मा० पु० गोखुरू। प्रय० गु० कि,३ निकाल ना० ५० तीनगालअर्थात् भूत, भत्रि प्रियईपा० ना. सी. तो ईपी अर्थात् पुन, प्य, वर्तमान अथवा प्रात काल, मध्यार, मध्या । सम्पत्ति, पत्नी । त्रिकुट ना० पु० सिघाड़ा। प्रयगगा ना. श्री. तीनगगा अर्थात् मदाकिनी, त्रिकुटा ना• पु० साट, मिरच, पापर ।।। भागीरथी, प्रभारती। | त्रिकूट० ना. पु. पर्वन निरोप निसपर लाहै। : । + मङ्गलकोप। हन, रहेड़ा। " योर पत्ता त्रिकोण ना. पु० तीनकान, तीनकोनेवाला | त्रिपुर० ना• पु० त्रिलाक, दयविशेष । सिपाड़ा। | त्रिपुरारि० ना. पु. श्रीमहादव जी। त्रिगुण ना• पु. तीनपैर, तीनगुण यर्थात् सा | त्रिपुस ना० पु० सारा । निपौलिया. ना. पु. तीनि दारका मार्ग । त्विक, राजस, नामस। त्रिफला ना.पु. तीनफल अर्थात् प्राबला, त्रिजग ना.पु. तीनलोक, तिर्यर। त्रिजगयोनि० ना.पु. पशु पता आदि। त्रिभगा गु• तिरदा खड़ाहोना । त्रिज्या ना० सा० न्यासाई, प्रामाविस्तार । त्रिभगी० ना• पु.बदपिशेष श्रीहष्णचटनी त्रिदन्ता ना. पु० महामदा । का एक नाम । विदश ना. पु. दवता, गु• तरह, १३ । त्रिदशकश्यपत्री ना. स्त्री० तेरहकश्यप की त्रिभुज गु० तीन भुजाका, त्रिकोना । स्त्री प्रथात् दिति, यदिति, पद, विता, श्रीधा त्रिभुवन ना० पु० तान लार अर्थात् स्वर्ग, मर्य, पाताल । मा भानुपागेश्वरी, भापतिलका, पएनत्रिका, घिमुहानी० ना. सी. निवेणा । पारा, मघावी, कतकदश्या, गच्या व पिय० रमाला १३. पिया ० ० थरला, पनी नारी ।। निदोष ना. पुतीनदार अधात् फ, वात त्रिलोक ना. पु० त्रिभुवन, और ऊर्भ मध्य अध वा उत्तम मध्यम और नीच । दिशाराय ना• पु. सर्ग। प्रिलोकी ना. पु. तीनलाग्दा सरदार । त्रिदिच ना.पु. सा। निलाह ना. पु. पीतल । विधा गु. तीनटाम, तीनप्रकार। 'त्रिशकु. ना. पु. राजा विशर । विध्वनि ना. रवीतीनवनि अथात् मपुर, त्रिशूल० ना० पु. महादेवका अन्न विशेष । मद, गम्भार । त्रिसन्ध्या. ना. स्त्री• तीन सध्या अर्थात् धिनयन त्रिनेत्र ना.पु. श्रीसदाशिव । मातृकाल, मध्याह, सया। निसन्यास्वरूप ना. पु. रक्त,शुक्ल, श्याम प्रिनेमा.ना. स्त्री. भवानी विशेष त्रिसोता. त्रिपथगाना.स्था. श्रीगगानी । त्रिस्नोता. ना.सी. श्रीगगाजी। त्रुटि० ना. रवीश, न्यूनता। त्रिपर्णी ना. मा. शालपणी। प्रेता. ना. पु• युग विशेष । त्रियादिका. ना. नी. इसपादी। राशिक गु• तीनराशि का गणित । त्रिपु. ना. पु• सासा, धातु सिप। प्रोटक ना. छद निशा । त्रिपुसी ना. स्त्री-पद्रवामणी । प्रोणबा• पु. लूण, तरक्श । त्व. स.तु। त्रिपुरा मो. हसपादी। त्वक ना. स्त्री• माल, पद्रिय, खाल । त्रिपुटी ना. स्त्री निसात । स्पचा ना. स्त्री. छिलका, वक्ला, साल विपुण्डा ना• पु. शाहमनका तिला जो भाड़ा त्वची० ना. पु. नास, गु खचाधारी । हाता है, वैशामतका रिसर का दादा होता है। त्वदनि० ना. पु. तुम्हारे चरण ! . त्रिपद ना . तिपाई। 1 मङ्गलकोप। w घ. कि० कांपना.. कम्पना, थिं० त्वदीयः सर्वक तुम्हारी, रामायणे यथा (व. थरथराहट थरथरी नाक रथी दीपभाक्सिंयुनं)। कपकपी, कम्पाइट। घरा० ना० सी० उतारली। গছো । थरहराना धरांना हलहलाना। ई० ना० रनी० वस्त्रादि का टेर। थल० ना.पु. भूमि, स्थल । र्थया० ना. पु० खम्भ, थूनी, सम्भ । थलकना० कि० थपकना, तलपना । थंभ० थरथलकरना अ.मि. हिसना, यथा धभना० अ० किटहरना, रुफना, संभलना । थलथलाना स्थूल मनुष्य का मांस हि. लता है। था.ना.पु. का। चकचक गु० लथपथ । थलचर थकना० अ० कि० मादा होन, हारना । गु• मनुयादि। थजचारी थफा० गु० मादा, हारा। थलिया ना. स्त्री० भोजन करनेका पातलादि थकाना० स० कि. माँदा करना, इराना। का पात्र। थकित? गु० थका, जो रकगया, अचम्मित । थली ना. ली. घर, पांडर। थका ना.पु. चकान । घई ना. पु. रान, मीमार, घरकारी। थन. ना. पु. गौ आदि का रतन । थहराना १०कि. कांपना। थनी ना० स्त्री० घोड़े का दोष विशेष । थांग ना. स्त्री. चोरों की मांदि। थनैला ना० . पनका रोगविशेष । थांगी० ना. पु० चौर, धनिक । थनेसरो० ना. पु. कुरुतंत्र के ब्राह्मण। थांम० ना. पु० स्तम्भ । थपक० ना. पु० थापा थांमना० स० कि० टेकना, थाइना, अटकाना, थपडा० ना. पु. थप्पड़, चपेटा। रोकना, सहायता करना। थएटी का घी नाली। थांवखा० ना. पु. वृत यादि का थाला। थपना० स० कि० स्थापना, बैठाना, कि भाकना श्र० कि. थकना। स्थापित होना, बैठनाना। थाका० गु• थका। थपा गुरु स्थापित, बेटायाहा। थाती० थपाना० स० कि० स्थापित कराना, बैठाना। ना. स्त्री. धरोहर, अमानत; सौंपा। थायी थपेदा० थान ना. सारा कपड़ा, यश्वादि के रहने का थप्पड़ स्थान, मुद्रा. कन, मकान, ठिकाना। 'थमनाथ.क्रि. रुकना। थाना ना० पु. रक्षकों का स्थान, नांसों का ढेर। थिम्पना थानी ना.पु० स्थान का स्वामी, थांगी यमना० मकि रुकना। थापना स्त्री० धौल, थप्पड़, पशु कां पाय, मर्याद, बैटके। थर० ना० पु. सिंह और शेरका खोह । थरथर० गु. कम्पा। थापना० स० कि. थोपना, धौलियाना ना. घरघराना अ.क्रि. कांपना, कम्पाना। पु. व्यवहार विशेष स्थापन करनाrina : ना. पु० चपेट। t । मङ्गलकाप थापा० ना० पु. पशुवै पावका चिह, थपा । थथाना स.वि. भाई दी करना। थापित गु० बैटायागया स्थापित, नियत भया, यूक्० ना० पु. माबमें फा पानी। मुकर हुआ। थूकना० स० वि. मुग्दमें से पानी फेकना। थापी० न ० स्त्री० थाने का गन्द, काठ पलु थूणी ना० रत्री धूनी । विशेष निसमे छत पारने हैं। थूतहा ना.गु.) थूथन ना. पु. थामा ना० पु. थम्भ, यूनी। गरादि वा मुस। थूथना० ना• पु. थामना सरिराम्ना, पकड़ना । यूयनी० ना. सी. थार० थूनी ना. सा० धरन, टेक्न ! ना. पु. बडी थाली। थूहर० ना.पु. तृपिशेष । थिई० ना० सी० चहलबहत । थाला ना.पु. थारला, थाल । थाली ना० स्त्री. भाना करने का पानीशेष। थेगली ना० सी० कपड़े में जोड़ पाद । थेवार ना. पु० नग। थावर० ना.पु. स्थावर, दृहादि, अचल । थाह. ना. सी. नदी की तली, नदी में वह थैला० ना. पु. स्थान जहा पेदल उतर जावे। थैलिया ना०सी० बटा, दुलमियान । थैली. ना. मी. थाहा० ना• पु. नदीश स्थान जो गहिरा न हो। थाही ना० सा० थाहपना गु० जो गहरी न हा। थोक० ना० पु० समृह, देर, एभाग, टोला, थिति ना. सी० स्थिति, घिरतापालन । महला. थिर० गु० स्थिर, अचल कायम । थोड़० ना० पु. फ्ले केले के गी । थिरकना० अ० वि० चमत्तार करके नाचना । थोड़ा गु० थल्प, कम । थिरकाना स• कि. चमकार से नचाना । थोथला गु. भोला, मोग। थिरकी ना० सा० चमकार, घुमाव । थोथा. ना. पु. विपिशेष, फलरहित, गु० थिरताना. स्त्री. ठूछा, पोपला, बदसूरत, कुभएडा। स्थिरता, अचलता। धिरत्व. ना. पु. योप० ना. पु. पालकी के वास. क अतव थिरा. ना. वा. पृथ्वी, धरती । थिराना० स० वि• बैठाना, टहराना, अ० कि. थोपना० स० कि० टेकना, होपना, गाना, बैठना, ठहरना, पानी की मिट्टी का बैठजाना। थीर० गु• मुलित, स्थिर, मदा। थोपियाना १० कि० बुदियाना, झिरझिराना युकथुकाना प्र.नि. कुवासनादि विनको वस्तु थोपी० ना. सी. धप्पा। देखकर मना वा कुदृष्टि दूर करने के लिये थोपा भूकना। थोम ना.सी. सदी का टेकन थुकाना० स० कि. थूक पिरवाना और निन्दा योहर ना• पु. थूहर । . थौना ना• पु० गौने के पीछे खी की विदा पुथुकारना० स० कि. तुच्छ करने किमको बाहर [द] पुथुनी ना. स्त्री० शवरादि का मुख । द. अन्य. यह अदर जब शब्द के घर में भूषण, धाप । . बटोरना। * कराना। करना।
मङ्गलकोप। १५३ । गा पाना है तब उमा अर्थ देनेहारा होनाता है ! दण्डादण्डी ना.पु पारस में लाठीसे लड़ना। यथा सुखद अर्यात् सुग्न देनेहारा । दण्डायमान.ना. पु. दण्डारी नाई सदा । दई नापु. देव, भगवान्, ब्रह्मा, स्त्री, मिठाई दण्डित गु० दण्ड लियागया, सताया गया, विशेष। पीडित, शिता कियागया। दंश. ना. पु. या की मकड़ी, दात । दण्डी० ना.पु. तपेश्वरी,गु० दुखरूपी,डाई । दंशन ना. पु. दातों से काटन । दएश्या गु• दण्ड दो योग्य। दंष्ट्री० ना० पु. शहर, सर्प। दतवन दंस. ना. पु० कुत्ता, सिंह, डास । दतून गा. पु० दन्तधावन, मिसबार । दखना ना० पु० दक्षिण। दतूना म.पु. पारिशे। दगर गा० पु० धा, फा, उदा) राह । दतूली ना. स्त्रा० बाटे २ दात । दगड़ा ना. पु० दनौन० मा० पु. दतून । दगड़ाना रा०कि. चला, दौडा, टग- दत्त गु० जो दियागया। राना। दत्तात्रेय० ना. पु. हरि परतार, मुनितिशप । दगद्गा० गु० चमसीला । ददरीक्षेन. ना. पु. भृगुमुनि का स्थान पट- दगदगाना० अ० कि. चमकना, चहकना, तम ना के पास है। तमाना। ददियात० गा• पु० दादाकार, पुरुषे । 'ददियाला० दगद्गाहर.ना.स्त्री० चमक । दगधना० स० कि. जला, छड़ना, सता, ददोपा० ना• पु० मच्छड़ आदि के काटगे की डापना, थूथमारना। पूजा। दगलर० ना. पु० रुई भरा अगरखा । | दद्ग ना.पु. दादुरोग। दग्ध गुरु जो जलगया। दधि० ना. पु. दही, रामुद्र। दग्धा० गु० जला, तिथिविशेष, वारविशेष, मास दधिकांदो० ना• पु. न माष्टमी के दूसरे दिन युक्त तिथि। का पानन्द। दंगल. ना. पु. चोरीविशेष, बहुतात। दधिमुख. ना. पु० लड़का बहुत कम उमर दंगा० ना० पु. बावड़ा, रौला। वाल्य, वानर विशेष जो रामदल में था । दंगैत गुरौला या बखेड़ा करनेहारा । दधिरिपु. ना. पु० अगरत्याशि। दटना. कि० अइना, सामना करना। दधिबल. ना. पु० सुग्रीव का पुत्रविशेष । दण्ड० ना० पु. लाठी, शासन, ढाट, घड़ी, छु. दधिसुत ना० पु० चन्द्रमा प्रादिक । डौती,जुर्माना। दधीचि ना. पु. मुख्यराना, मुनिविशेष । दण्डक नापु० रानाविशेष, गु• दण्डक्र्ता । दनुज. ना. पु. दैत्य, राक्षस । दण्डधर नाः १० यमराज, ग० दण्ड | दनुजपतिः दण्डधारी बाधनेहारा । दनुजराज ना. पु० देत्याका राजा। दण्डमान० गु० दुखदाता, दण्डदाता, ना. पु. दनुजाधिप० यमराज। दनुजारि० ना० पु० देवता, श्रीनारायण । दण्डवत् ना, स्त्री० दण्ड के समान पक्के दनुज्ञेशर. ..मा० ४० दैत्यों का रानी। है प्रणाम करना।
मङ्गलकोप। १५४ हरडा, हविला। ता . दन्त० ना.पु० दात, दशन । दोपांव. अत्य. होले, धीमे । दन्तकाष्ठ ना.पु.दतून करना, दनुन । दवेल० ना• पु० प्रमा, प्राधीन । दन्तधानी ना. पु० धनिया । दबोचना० स० वि० दवायडालना। दन्तवीज ना. पु. अनार । दम० ना. पु. मनको निन वशरसना अर्थात् दन्तशठ ना. पु. माई औषधि, नीरी । इन्द्रियों को रोकना, दौना मुगन्धि । दन्तशूल ना.पु. दाताकी पीड़ा। दमक ना. स्वीचमक, दइक, झलक, दाइ। दन्तिका० ना० स्त्री. बड़ी छतावर । दमकना०प०कि. मचकना, चमकना) दन्ती. ना. पु. हाथी। दमड़ा० ना• पु० सम्पत्ति, दौला। दन्तीफल० ना. पु. पिस्ता । दमड़ी० ना० सी० पैसे का श्राठया भाग। दन्तुर० गु० जिसके दात होठ से न हो वा दमदमाना० स० कि. हिलाना। दन्तेमा० जिस जन्तु धादि के बड़े र दातहों दमन ना. पु० सूरमा, नागदौन, पुप दिशा, दन्तैल० अधीनता, नाशन, दमयन्ती। दन्त्य गु: मिन अतरों का उच्चारण दाँतसे हो दमनीय गु० दमन के योग्य, दमन कारक, ता है यथा, त प द ध न ल स । टनेहारा, रामायणे, (कुँवार मनोहरि विजय दन्दनाना प्र. कि. विराजना, निडर बैठना ।। पदि कारनि धनि कमनीय, पावनदार पिराधि दना ना. पु. इन्द्रिय, लिंग, गु.निहर। ननु रच्यो न धनु दमनीय)। दनापेल गु० व्यभिचारी, प्रतिनिश्शक । दमयन्ती० ना. श्री. राना नल की भार्या । दपट० ना. स्त्री. दौड, झपट, डाट । दमाना० स० कि० लचकाना, निहुराना, सुद- दपटना०प० कि० दौड़ना, दारना। दयटाना० स० कि० दौहाना, डाट दिखाना । दमामा० ना. पु. डंगाधौंसा । दयकना य. क्रि० विपना, पात में बैठना । दम्पति ना.४० सो पुरुष। दम्पती दपकर ना.सी. कल । दयकाना० स० कि० धमकाना, भटना, लु- दम्भ ना० ३० ग्रहशार, घमएड, पाखए,चल, काना। दयकी ना. स्त्री. दास, दिपकी। दम्भी० गु• अहङ्कारी घमएडी,पाखरही, चली। दम्प० गु० शारय, ना. पु. सैला। दया ना. स्त्री. कृपा, कमणा, दान, वितरण । दयंग गु. कुशील, सुरगा। दयायुतर दवंगा दयालु दयना १० कि० नीचे होना, कुचिलय, कानि दयावन्तः गु कृपान्त, मिलनसार दाता, मायावन्त, मेहरवान | करना, मानना। दयावान् दया. ना. पु• दाव, धान। दयाशील दबाना स.वि. दापना, निचोड़ना, डारना। दरस ना. पु०मौल, मात्र,राख, वेद, डर, पीडा । दवाय ना. पु. पराक्रम, प्राधीनता, में, दरफना० . कि. चिरजाना, पटना था। दवीला ना. पु. औषधिविशेष, पैरा, चप्पू । दरका ना• पु. दरार पगा। दरकाना० स० कि० पाईना, चीरना। पाना। " वस। दयफैल गु• पुमा, द्राक्नेहारा । - " .
मङ्गलकोप। 1 AT ६ w दरकी० २० रनी• फटी। दर्शनी० ना० खो० हुण्डी विशेष जिसको देखते दरदर० ना० पु० ईयुरे, सिदर । ही रुपया दिया जावे। दरदरा०२० अधा, अधपिसा । दर्शी गु० देखनेवाला। दरश० दल० ना० पु. पत्ता, बड़ी फ्रोन, ढेर, मोर- ना. पु. दर्श, देखा पस। दरी गा. स्त्री० मछली विशेष । दलक० ना स्मा० झलक। दरांता० ना. स्त्री० हसिया, करनी ।। दलकना० अ० कि० झलकना । दलदख० ना. पु० धसाव, पाक, चर। दरार० ना. पु. दरका, चीर । दरारा दलदलाना श्र.नि. कापना, थरथरा दरि० ना. स्त्री मोल भाव । दलदलाहट० ना० स्वी० थरथराहट, यम्म । दलन. ना. पु. नाशन, दो टूक करनेका काम दरिद्र ना० पु. दीनता, गालता नि- विशेष दरिदता० स्त्री० ईनता। दलना० स० कि० दो टूक करना । दरिद्री गु० दान, कगाल। दलवादल० ना• पु० मेघों का समूह । दरी० ना० स्त्री• सोह, गुफा, विछोना विशेष । दलवाना० स० कि० दो टूक कराना। दरीभृत् ना. पु० पर्वत, पहाड । दूलवैया ना० पु० दलनेहारा। दरीन० ना. स्त्री० दरका बहुवचन । दखाना० स० क्रि० दलवाना । दुर्दुर. ना. पु. मेंढक। दलिद्र० ० ०१ = दर्प० ना० पु. अहङ्कार, अभिमान, मान । लिद्रता० स्त्री. दरिद्र । दपक ना. पु. कामदेव । दलिद्री० गु• दरिद्री। दर्पण ना० पु. आदर्श, मुकुर, शीशा। दलित० गु० दो टूक कियावा, पा। दर्पणी ना. स्त्री. दर्पण। दलिया० ना. पु. अपका, बीड। ।' दर्पणीय गु. सुदर, सिनौर, सुथरा, अन्धा । दलिहन ना.पु. जो प्रनाक कारना दर्पणोदर ना० पु. चौरस दर्पण का । है यथा पदयादि। दी० गु० अमिमानी, मानी। दली० गुरुगरकका नाता। दर्मना. पु० कुश, पारा । दलना २०० दर्रा० १० पु. दरारा। दर्राना० अनि. निडर, आगे बदना, वेधडक दमसकीन्द्र, धागे चलना।।। वागिः दकिा० ना. सी. गोमी। दर्वी ना. स्त्री० कछौं। ..दन दी। देशान दाकार ना० पु. साप । दर्श ना. पु० दृष्टि. परिवा, प्रतिपदा । दर्शक० गु० दिसनीट, देसनेमाला दगुदन,.1 दर्शकता ना० स्त्री. दर्शन, दिसा । दशकण्ठ ना.पु. पर। वर्णन० ना पुष्ट्रि, भैर दशगाव ग युवा गंनधारी सन्दर। ददिक्पा ना गोमन अन् . 4 दवानि वारिक मङ्गलकोप। + 7.7 - इन्द्र, १ अग्नि, १ यम, ३ नैति, ४ यरुण,५/ दहन० ना.पु. अग्नि । यायु, ६ कुबेर, ७ ईशान, ब्रह्मा, १ . दहन नन्त,१०॥ दद्दनाक प्र.कि. जसना, वरना। दशदिशा (नाः स्त्री० दशथोर अर्थात् पूर्व, दर्शदारा भाग्नेय, दक्षिण, न य पश्चिम, दहनो वायव्य, उत्तर, ईशान, अध, ऊर्भ,.1 दहताना० कि. दनना, कामना। दशन. ना. पु. दान। दहलाना०स.कि.दनाना, कम्पाना । दशम० गु० दसरा दहसेरा. ना. पु० दससेर का तील । दशमांश० ना. पु. दसवा भाग । दहा गु० जलगया वा जलाहुश्रा। दशमी० स्त्री० दसवीं तिथि। दहाड़ना० अ० कि० गर्नना, यथा सरकाश। दशरथ० ना• पु० धीरामचद्रजी के पिता। दहाना० स० कि. जलाना। दशहरा. ना. पु. ज्येष्ठ वा याश्विन शुक्लपक्ष महिना० गु• दहिप, सीमा, सहायक । की दसवीं तिथि। दही ना० पु. गौरस, दधि, गु. नखगई। दशाना• स्नी• अवस्था, व्यवस्था, गति । दरडी० ना० स्त्री. दहीकी हाडी। दशांश ना• पु. दमवाभाग, । दहेड० ना. पु. पसी विशेष । दांगुल० ना• पु० फलावशेष अर्थात् सरसूता दल. ना. पु० पदी विशेष: दश गु० दस, १.. दयो० ना. पु. दही, स० कि. जलाया ।.. दसन० ना.पु. दशन, दान। दक्ष ना. पु. निपुण, चतुर, ब्रह्मा का पुत्र दसम गु० दशम, दसवा। जिसको ब्रह्माने दतियागुष्ठम उत्पम दिया.था, दशरथ० ना.पु. दशरय । दसहराना पु० दसहरा। दर्शन ना• पु. रघका बहुवचन भाषा में दसी० ना० स्त्री० सर्म, दर्शा, गाही की फड़। प्रचलित है यथा देव देवन और लोक लाग्न दसीला० गु० एखकी दशा में रहनेहारा । दसोसा. ना. पु. पतका झाड़ना । दक्षसुत ना. पु० प्रचेता। दसोद्वार० ना. पु. शरीर के दशधर अर्धात् दक्षसुता ना- स्त्री० दशमी कन्याविशेष,सती । पाख, कान, नाक, मुरा, लिंग, गुदा, चादि, दक्षिण गु• सरा, उदित, सूर्य का वामभाग परनु चादिरहित रेल नवदार ठीक हैं। दहिना, दखिन। दसौंधी० ना० पु. भाट वरदैत । दक्षिणअक्षांश ना. पु. रेखाभूमि के दक्षिण दस्यु. ना. पु. वैर, चोर । दस्युति,ना० सी चोरी। दक्षिणकेंद्र नापु. निसके चारोंचोर हिम दह. ना. पु. गहराव । समुद्र है वा निमको हिन्द शासन रहवानल क. दहक ना.सी. दाद, पमक। दहकना घ० कि० जलना, पदिताना, सत्यानारा दक्षिणखपट ना. पु. विन्ध्याचल के दरिष हो। दहकाना स० कि० पत्ताना, रिगाइना,प- दक्षिणा ना• मी• कर्म भयाने के निमित्त श्चिात्तापरानी, गाना। जामत को दान देना, कार्य का वेदन स्मृति विशेष । . केन्द्रतक जो माप है। हते हैं। का देश विशेष मलकापन T रात। " W . । दक्षिणालि ना• पु०, अग्नि विशेष। दादु० ना० पु० दादरोग विशेष ददु । दक्षिणायन ना• पु. कर्ष सक्राति से धनु दादुर० ना० पु. मेटक । सक्राति तक का काल। दादू० ना. पु. महापुरुष विशेष जिसने नि. दक्षिणीय० गु. दक्षिण देशकै मनुप्यादि।। पना पथ चलाया जो जातिका विहना था ! वा अन्य पदान्त में दाताका अर्थ मूचक यथा दाधना० स० वि० दग्धना । सुखदा अर्थात् सुखदाता। दान ना० पु. पुण्यार्थ धनका त्याग, भूर, से दाई० ना. सी. दूध पिलाने हारी। T दाऊ० ना. पु. बडा चचा, श्रीवलदेवनी का दानपत्र० ना• पु० पुण्यार्थ धनादि का दान- एक नाम। पत्र, माफीनामा। दांड़ ना० पु. एड, चम्पू । दानव० ना. पु० दत्य, धार । दांडा० ना. पु. रीति, धूरा, सिवाना । दानवारि० ना. पु० देवता, आविष्णुनी । दांडामडा. ना. पु० मिवाना, छोर, धूरा । दाना० ना० पु. अश्यादिके खाने का अन्न डी० ना• पु. नाविष, नाव चलाने हारा, दानी० गु० दाता, सखी । ना. स्त्री• दरग तुलाग्रादि की। दाप० ना. पु.लोध, अभिमान । म. ना. पु. दात, दशन । दापक गु० लोधी अभिमानी। तन. ना.पु. दतधावा, काष्ठ, दतून । दायना० स० वि० दवाना। तपीसना० य. कि० किचकिचाता। दामना पु. रुपया, पैसा, ना. मी० मासा, ताकिलकिल० ना० सी० झगड़ा, बखेड़ा। रसी, गु० पेमे का चोवीसया भाग, मोल । सांनी० ना० स्त्री० पाराके दात । दामवती ना० स्त्री० माला । , हय० ना० पु० घात, अवसर, होड, बारी । दामासाही ना० सी० यथार्थ भाग को पत' हास ना० पु. अगूर, मुर्नका । व्यता। राय नापु. चिद यह शब्द फारसीका हे।. शगना० स कि चिरना, मेडना यह दामिनी० ना० सी० विजुली, कौधा । शब्द यामिनी भाषा का है। | दामी० ना० सी० यथार्थ रिहारी। दामोदर० ना० पु. श्रीकृष्णच द्रजी स एवं दाडिम. ना. पु. अनार । नाम, बईमान देशका एक नद,' जिसबै दाढ़ी ना. स्त्री०, टोदीपरके बाल । पटतक माला हो। दानन० ना० पु० दनून । दाम्मिक गु० दम्भी, पाखण्डी, अभिमानी। दातव्य० गु० देने योग्य, दातापन । दातव्यता० ना० स्त्री. दातापन, देनहारी। दाय ना० पु. पेतृक धन । दाता० गु• पु• धर्मात्मा, देनेहारा, दयालु दायक ना. पु० देनेहारा । दातार० गु० दाता। दायजा ना० पु. व्याहका दान, यौतुक : दान० ना. पु. दराती विशेष । दाया. ना. स्त्री० दाना, कृपा। दाद० ना० पु. रोग विशेष दह। दार० ना. नी. दारा, काष्ठ, दार। दामर्दन० ना दवा मर्दन, श्रीषधि विशेष । दारचीनी० ना. स्त्री० काष्ठ विशेष । दादा० ना. पुः पिताका पिता, बड़ा भाई ।" | दारा ना. सी. स्त्री, पहली, जोरू 1 - आली. स्त्री० पिताकी माना। दारिका ना बी० लड़की, ली। , 5 * 1 मगलकोप। -- . me N दाधिति ना० सी० शिरण। दीर्घपुष्पक० ० ० मदार, ग्राri- दी गु० कगाल, यधीन, दादी। वीर्घपृष्ट १० पु• साप । दीनता । ना० सी० दरिद्रता प्राधीना दीर्घम्ल. ना. पु. नपामा गालपणीं । दानताई ग़रीनी। दीर्घमूलक ना० पु. विधारा । - दीनदयालु गु• दानगानिपालक, गराउपरवर, दीर्घसूत्री० पा० पु० जापिनम्बसे कामकारे । दोनॉपर दया परनहारा। दीवट ना. स्त्री. दापक रतने का आधार । दीनपाल , गु० सादय लु, दोनों का दीपली ना० स्त्री० घाा दिया। दीनप्रतिपालकर पालन हारा। दीनयन्धु दीना० ना.पु. दपक दिया। |दीसना स० कि. देखना। दीना० स० कि० दना दानमहा। दीसा० स० क्रि० भू दता देराता। दीनानाथ गु० दानपाल दीनदयालु । दीप० ना. पु• दिया, चिराग टीप। दीह • पु. बड़ा, रामचन्द्रिकायायथा (दीह दीद दिग्गजा क शव मनाकुमार, दीन्हें रोन दीपक ना• पु. दीप [दया, राग पिशर, य दशरथहि दिग्पालन उपहार) जादा दीक्षा०'ग. स्वा. मात्र का प्राय उपदेश ।, दीपदान • पु. िजलाना । दीक्षित० गु. दीदा कियागया. ना०.५० मा दीपनी ना. स्वा० पी। झण जाति विशेष दीपनीवा ना० स्त्री. धनवान दीय दु पन्य शका आदि दीपमाला दीपमालिका • स्त्री पदराला। का सूचक। दु की ना. ना. कि दीपसुत ना० पु. काजल। दुघ ना. पु..पीहा ले दीपि० स० कि० दप दकर । दुखड़ा ना.पु. श्राप दीपिका० ना. स्त्री- दापारा प्रकाश। दुखदाई गु० दुसदार दीपित गुरु नापदिया गया। दुखदाता गु० दुस दीत गु• प्रालित, प्रकाशित । दुखना.नि. पीड़ा दीप्ति • मा० चम, प्रकाश । दु सा० रा. कि. दुस- दीर्घ० • लम्बा गुरु निमाविक अमर । दीर्घक. ना.पु. सतनीरा सफदनारा । दीर्घकालमा ना. पु. अकोल। दीर्घजय ना. पु. ऊ। दुखियारागु० पाहिन, र कंगाला दीजिहार ना. स्था• राना निरोचन वा दुखियारी J दुसशील दीर्घदएड० ना. पु• परएड एरण्ड, रएड। दुमयपिए दीर्घदशी गु० अप्रशाची, दूरदेशी। दुसमय ना दीपताका ना• पु. लहसुन पुनर्नवा । दीर्घपना ना. स्त्री घिरपाय। दु स्पर्शा० मा दुकर ना. दुखित. दुनिया -- दुखी मङ्गलकोप। तट । . -- r . r ra दुकाम पु. दोनों कान, हा दतियन्त.१ना गुरु मडकीला, चर्मक्दार, दुकाब ३० मा०० विपातकाल दुर्भित ! " दुतिधानहर, सूरा बद्राद गाह, राम पद्रिायां यथा (दुतिपन्तन को विपदा प्रति दुकला ना. दु. रेशमी पर निशा दोनों कोही, धरणी फह, इदु बध गहि दीही), दुस ना.पु.दुस। दुही ना० स्त्री० प्रापधे पौधा विशेष दुरादा दुधार ना० सी. दागगह, दाप्रकर। दुखदाई गु० दुखदाई, पटादनाला दुधारक दुखदाता दुधारक गु• दूध दनहार, दाधार का। दुखमय ना ० तान दुर थान् देविर, यौल गु दूध देतहारी। दैहिक, भोतिक, वा कफ, पित्त'पार'वात। दुन्दुभिर ना० स्त्री कार, निशा, देत्य दुसारी विशारामा बाल न माराया। दुखित दुपट्टा० ना० पु. यादा का वम रिश। दुनिया दुखियारा गु दुखिया, पीडित दुपदा० पु. दा पानाला अर्थात् म पुष्य । दुखियारी दुपहरिया ना खी० पुष्प विशा। दुखी दुयधा० ० स्वा० स दह, अधड़ । दुखेन ना• पु. दुसयुन, खरके। दुपला गु० दुर्वल । दुगई० ना. मा. चियारा, मेची जा छपर में दुपाई। ना० स्ना० दुबलता। लगाते हैं। दुयखापा० दुगन दुविधा • रत्री० सदेह, पाच, शर। दुगना गु० द्विगुण दोहरा, दूना। दुनिधि० ना. स्त्री. दातरह, दामगार । दुग्ध० ना.पु. दूध दुमुख • पु. राक्षस पिशर, दामसगाला। दुग्धिकी ना. सी. दूधिया, पोशा: दुमाय० ना० पु. विसा दुम्धिनी ना. सी. कहुई बोनी । दुभाषिया गु० दो भाषा का जाननेहा दुग्धी० ० स्त्री. दूधिया पोथा, सहुए । दुचिताः १ यनिसका मन दा थोर सगाहा। दुर० अन्य २९ क प्रथम म सोतिष अध्याय जिसका अर्थ दु. पति, T• स्त्री. दाना दुचिताई ना सौ. पिता, दुविधा, भ्रम । भूपर ना बारे पहाते हैं। दुचिता • दुचित। दुरतिनग गु० काति, मुश्किान । दुरा० अव्य. दर। दुरद० ना.. हासी। दुतकार. पु. उदामि। दुरध्या सी• युमार्ग, राह। इतकारना • कि सासना, कोको डारदुरना० अ० कि. एप 1, लुना । तपारी ग.मी. मासा तापन। दुर680 ना.पु. मदभाग्य । दुताना..किदवाना, हा दुरन्त पु. शान, सरिन, यतहत। दुति० ना. मी. परक, मइफ, पदरता । दुराचार निमका यरहार निदित है ।
मङ्गलकोपा T गति। दुराचारी गु० गिसका व्यवहार लिन्दित है । दुर्नीतिक ना. स्थी कुचान्द, धनीति, पन्याय । दुरात्मा०२० पापी, दुष्ट । दुर्यल३. दुर्दल, निर्गल, असमर्ष . दुराधर्ष० गु. अडर, अभय, अशक । दुर्यलता० ना. स्त्री निर्मलता, असामर्थ्य दुर्भगा० गु० श्रमागिनी स्त्री. निसका स्वामी दुराना० स० कि. दुपाना, लुफाना। प्यार नहीं करता है। दुराराध्य गु• कष्टसे सेवन क पोय,। दुरारोहाना• पु. पाच । दुर्भाग्य गु० प्रारम्भहीन, अमागी। दुर्भाव ना. पु० युरास्तभाव । दुरालमा ना. स्त्री.जवासा । दुर्भिक्ष ना. पु. यशल, काल, कुममय । दुरालम्मा दुर्मति ना• सी• कुद्धि, मूर्खता । दुराष० ना. पु• छुपाक, दल। दुर्मद० गु• मस, मदगलिन मत्त, सिड़ी । दुराशा०मा० सा• कुन्मिनयाशा, दुष्टतृप्या। दुर्मनी ना. स्त्रीदूनपास। दुरिता पु• पाप दोष । दुर्मुखना.पु. नागविशेष वानरों का एक राक दुरी ना. स्त्री. खलमें दो पड़ना वा द्या । गु. कठार भाषी। दुरुस्खा गु० जिसकी दोना ग्रेर एकसा हार, दुर्मूल्य० गु० मईया । यह शब्द पारसी का है। दुर्योग ना. पु० बहुतर बाथरों का समूह कुस दुरेफ० ना. पु. भारा। दुर्ग० ना• पु. गद, पार, स्लिभ, यगम् । दुर्योधन ना. पु. राना, पारवा(श । दुर्गति ना• स्त्री० बुगनि, परीश्वरपा, नरस, दुर्लभ गु. जो दु ससे मिले, पनाता। दरिद्रता। दुर्लक्षण. ना. पु. अशुभ चिरु । दुर्गन्ध० मा. स्त्री०१ दुर्गधि, नाय, क दुर्घचन. ना. पु• पुरोगात, गाली । दुर्गन्धि० ना-स्त्री. दुर्वर्ण० ना• पु. पुरारूप, कुवर्ण, चादी । दुर्गन्या० ना. स्त्री० पियाम, ए• कुवासित । दुर्णता० ना० स्त्री. कुरूपता, चादी । दुर्गम गु. ग्राघर, गम्भीर, अगम्य, पटिन। दुर्धाक्यूट दुर्गमता० ना• खी• गम्भीरतां श्रौपटवा । दुर्याच्या ना• पु• युरीलात, गाली। दुर्गा ना. स्त्री• भगवती विशा। दुर्याद. ना. पु० कुत्सितवार्ता, युरोपाते। दुगांमी० गु• कुगामी कुमागा, बदचला । दुर्घासा. ना. पु• मनिविशेष । दुर्यट० गु• जो फट से हामके, कुमार, चौघट । धुद्धि० ना. श्री. मूर्तता, कुयुद्धि, नादानी । दुर्जन ना. पु० गा, गु. दर, पाकारी। दुर्युची० गु० नादान, कुशुद्धि, मूतं । पुर्जनता ना. स्त्री• शत्रुना, र दुलकी ना. स्त्री• कर चाल, घोडेको एकम- दुनताई दुष्टता। कारकी चाल रशय। दुर्जय० गु. बलवान शनुना परायप न होम | दुण्डी ना० स्त्री. दुलहानापु. दुर्दशार ना. सी. वर्गति, विपत्ति । दुसत्ती नारनी• पशुका पिमल दारोंकामा- दुर्नाम० ना. पु. बदनाम, अपयश । रना। दुर्नामी० ए. बदाम अपयशी, अपवीता। दुलहा० ना.पु. बर, पारा, इलहा। दुर्नाद ना. पु. रावस विशेष, इसिवनार । । दुलहिन ना. सी. ईशा, मध, मना बनरी । नासा । al - दोलहा. दूगुन । - .
मङ्गलकोप। . - दुलाई ना० मा० घोदनेका पत्र विशेष । दूतता० ना. सी. छालाकी, तोडफोड चौर दुलार० ना.पु. पार, स्लेह । दूतका काम। दुलारा ना.पु.गु०प्यारस्त, प्यार, दुलारी श्री. दुती० ना. सी. फुटनी। प्यारा लाडिल,लाहिती दुवार० ना० पु० जार। दूध० ना. पु. दुग्ध, गोरस, कार । दुविद ना० पु. पानर विशेष । दूधिया० गु दूधकासा, ना. पु. अनेक पौयों दुवे० ना.५० साह्मएजाति विशेष। का नाप जिनका रस दूध कासा होता है। दुशाला० ना. पु० पाटवन विशेष। दूधी गु• दूधका, दुधेला, ना. पु. अाहार, माही, दुधिया पाशा दुकर० गु० जोकरसे पियाजाय । ना. पु० कुकर्म, पाए। दूना० गु• दिगुण, दोहरा। दुष्कृत दूघ० ० स्त्री॰ दूर्वा, धास विशष । दुष्कर्मी गु० पुक्मी, पापी। दूयर० गु० रठिी दुर्वल। दृष्ट० गु० बुरा, उत्पाती, नीच, काठिन । दूपिया ना० सी० तृण ही हरियाई । दुएता० ना० सी० नीचता, पाप, बुराई। दूर० ना० नी. अतर, नीच, दूर, व्यवधान,... दुष्टजन्तु० ना. पु० सादि, मूनी जानवर । यव्य परे। • दुष्टा ना० सी० चिनाल, सापिन, पापित। दूरगम० ना. पु० गदहा। दुस्तर० गु• जोतरने के योग्य न होवे, पठिन, पूरतर० गु० बहुत दूर । थगम्य। दूरदर्शक० ना० पु. दुरवनि, य र, ए दुरमा दुस्पर्शा० ना. बी. चोटी कटाई । दखने वाला, श्रमशोची। दुसह दूरदर्शी० मा० पु. शिवकी, दूरथदश । जो सहा न जावे, प्रसन्न । दुस्सद्द० दूरग० ना. पु. गिद्ध । इहना० स० कि० दूधनिकालना, निचोड।। दूरयीन० ना० स्त्री• दूरी वस्तु देखने का यात्रा । दुहनी जा. स्त्री० पार जिसमें दूधदुहने हैं। गु• दूरा देखन हारा शब्दफारसी का हे। दुहाईना स्त्री० न्याय के लिये पुकार हाय हाय, दूरमूब० ना० पु० जवासा । शपथ, किरिया, सम। दूर्वा० ना० स्त्री० तृण, विशप, दूरघास । दुहाईतिहाई० ना. स्त्री. फईनार हाईकरना । दूपक० गु० दोष लगानेहारा, दूषयपत्ती, टोकन दुहाना० स० कि० दूध निकलवाना।. पाला, विठोक्नेहारा। दुहार० ना. पु. दूध दाहने वाला। दूपए ना. पु. निशाचर विशेष, दाप । दुहिता ना• स्त्री० पया, पुती । दूपित० गु• दोष लगायागया, दाप युत । । दुहेला गु० पठिन, भारी। दूम्य० शुनिदित, कुत्सित । दुआ. ना. पु. दीका अङ्ग । दूसरा० ए० दूना, अय। दूज० नानी द्वितीया लिपि । उगानातु० नयन, नन, श्राख । इजावर० ना. पु० जिसने दो विवाह किये । हगल ना.पु. नयनकोर, पलकी चाल। दूजा गु० दूसरा। ढ० पोदा, अचल, कड़ा, मजबूत । दूत० ना० पु. समाचार पहुँचानहारा, सदेशिया, दृढ़ता ना० स्त्री०१ पोदाई, पौरुस, पायदारी। साहशैवान, पैगम्बर। दत्व. ना.पु. . --- m 7 मङ्गलकोप। 1 बढाता० स० कि. पादा करना। देपदारु 'ना० पु. तृप्त या काठ विशर । दृश्य० गु• जा देखने क या हे, ना देखानाव। देवधुनि० ना. स्त्री. श्रागगाने । दृगु, जो दसागया, प्रार। दरनागरी०० मी० दिदी र यसाय दर टपिट ना०प० पहली। देवनारिक ना. स्वारता कानी। दृष्टान्त ना. पु० उपमा उदाहरण, मिसाए। देवपूजफ. ना. पु० देवता की पूजा करना, इष्टि० ० सी० दशन ननर, दाठि, पास। पौत्तलक, मूर्तिपूजक। रसिगोचर: गुजा यार के सामोहा। देवपूजा ना. स्त्री. दाता का पूजन । दृपझेद० ना० पु. पारा भद । देववधू० ना. सी. गवना का पनी राजरानी दृपद्गर्भपा पु. पभा रन । रातानी रामचद्रियाया वधू जवहीं हरिल्यायो याट ना. पु. दीमकका बनायाहुयाघर । क्यों तरही तनि ताहि न पाया। देखना रागिनखा दृष्टिकरना 1 देवगुनि० 10 'ना• • गरदनी। पना। दखवैया • पु. दसनहारा देपर० न० पु० पतिका छोगमा । देनन ना. पु. यवहार देवगणी०१० रनी. दार क' स्त्री दवाओं दे० स० वि० दडालना सोपना । देवरानीएको राना अधात् इदाणा राम पछि याया।दरानानिय दराना मनापुत्र सयुक दमार ए० स० कि पकना फादना देय भूलोक म सादिया। गुनो योग्य। दयमान देवरिपु. ना. पु० देय निशाचर । देवर्षि ना• पु. गरदमुनि । देरी०३० सी० विलम्म दील। वृ० ना० पु. दवर। दव ना.पु. दवना मेघ दे। देवल १० पु. मयि, ठाकुरद्वारा घोहरा, दवपि ना. पु. देवर्षि नारदमनि । पपा तुलसी दपले देवका लाग लातकरि, देवक. ना. पु. इतकी का रिना दवता गु. कागरम गहागभयो महमाई न पोरी।। दनेहारा। देवघळभा - श्री. कसर जाकराा। टेयकाडर. ना.पु. चनपुर । देषवाणी० ना• नी• सस्कृत। देवकीग सी० श्रीकृष्ण की पाता। देवरक्ष ना० पु. कल्पत। देउकुसुमा० ना. स्वा. लोग। देवसर० ० पु. मासरोवर। देवगरी. ना. स्त्री. रागिणी वगा। देवणी ना• खा. मुरहरी दमतों का देवगृह. ना. पु. दवाउय द्यौहरा । । देवठान ना. सी. दवोपानी कार्तिरुमली एका यस्त्री या सी देवता की पनी । दशी का ये योहार हाताई। देशस्थान पु. देशालय देववा का घरे। यतरु • पल्पवृक्ष कारहवृप । देवस्थ० ना. पु. दोता का रन । देवता ना.पु. एर फरिश्ता । देपा ना.पु. ६वता दोहारा। दवत एड. ना. पु. देवदाली। देवागना. ना. स्त्री० दवी देववामा। देवदत्त ना. पु. सज्ञारिशेष, गु. जो देवत्ता देयारि० ना. पु. देय, निशाचर। का दिया हुआ है। दयान ना. पु• देनेहार - है है मङ्गलकोप। १६५ दत्यपुरोधा . औषधि। देयालय० ना पु. देवरपान, देवता पा घर दैत्यगुरु देयाला ना.पु. दिवाला। देवालिया गु० जिसका दिवाला निकलगया। दैत्यपुरोहितनी पु० शुक्राचार्य देगाची ना. स्त्री० दिवाली, 'दिवारी । दैत्यपूज्य देघालेई० ना० स्त्री० देनलेन । ' -ii दैत्याचार्यः देवी० ना. 'स्त्री देवता का स्त्री, भगवती,मुरहरी दैत्यारि० ना० पु० देवता, मीविष्णुजी दैदीप्य गु• प्रकाशित, रोशन। देवेन्द्र ग. पु. देवाधिराज अर्थात् इन्द्र। . दैदीप्यमान गु० प्रकाशित, चमकीला । देयोत्धान ना० स्त्री० कार्तिक शुरूपढ़- की दैन्य० ना. पु. दीनता । तिथि जिस में विष्णु नोंद से उठने वा कार्तिक पैय० गा• पु० देव, ईश्वर । शुक्ल एकादशी। दया. ना. सी. माता देघ. ना. पु. प्रारम्ध, ब्रह्मा, देव के प्राधीन। पाखय० गा९ पु० देवी का मन्दिर ! वैवगति ना० ला० कर्मकीचाल, अमानीगति देव्याश्रय ना० पु० देवी की सहायता देवतामाण० महामेदा! . . . . . . देश ना. पु. पृथ्वी का खण्ड विशेष, लोक रा- गिनी विशेष, मुल्क, विलायत ।। . देवयोग ना. पु. कर्मप्रभाव, इत्तिफाकन . देशपति ना. पु० राना, पादशाह। देववादी० गु० बालसी, भाग्याधीन! ... देशमाषा ना० सी० देशकी बोली :- देश. ना. पु. गणक, ज्योतिषी। देवात् देशमा गु. सर्वत्र, सर देश। देवी अन्य. अरमा, नागहाल।,. देशाचार ना. पु. देशकी रीति । देशाटन. ना. पु. देश में रिना। दैविक० गु० जो देवता करके होवे । दो० गु० दूसरी संख्या २॥ देशाधिक दोऊ गु. दोनों। देशाधिप ना.पु. राना, वादगाह । दोक० ना० पु० बोका, दविका घोशा देशाधिपति दोचर० गु० दुहरा, दूसरा । देशाधीश देशाध्यक्ष ना. पु० देशमा रहक या राना। दोजीवा० ना० स्त्री० गभिपी। दोमा ना०'पु. दिमवर। देशान्तर० ना. पु. दूसरा देश । दोदना० स० कि. मुकरना देशपर० ना. पु. परदेश, अन्यदेश । दोबारमा• पु. दीना, पत्तों का पात्र पुर्ण देशी गु० जो देशका है। रिशेष। देह. ना. सी. उन, शरीर । दोनाली० ना० सी० बन्दूरे दोनालकी, देवरा ना. पु० घोहरा, देवालय दोयर० ३० दौर, दुहुरा। देहती ना. सी० चौसर, न्यौदी। दोमुहा० ना. पु० दो मुखका सार । देदो गुशरीर, ना.पु. जीर, प्राण । दोयःगु दो।' वैशा ना. पु. कन्यादान, यौतुक । .' दोलना.पु. दौल। दत्य ना.प. अधर, दितिनात। दोष ना. पु. निन्दा, यवाप, नक, अपराध, - मङ्गलकोप। ४ 6 साम मोधादि, फलक । यौ० घ. शि. दया करो। दोपक० गु० निदक, अपगुणी, पाती। द्रय दोपता० से.शि. दोपदना पा दोपलगाना। द्रव्यजन्यमाय० गु० यस्तु धौर यस्तु चिया दोपित०१ गु० क्लग्नि, पापा, अपपगी, अ. पदार्थका सम्बध। दोपी० पराधी। द्रा० ना.पु. देखोवाला। दोहत्तड़ ना० पु. दोनों हायाका देमारना। द्रावक गु० धुलारन हारा, पातु। दोहता० ना. पु० नती। द्राश्न० मा.पु.निर्मली। दोहता. ना. स्त्री. नातिनी, नातिन । द्राविड . पु. फचर, द्रवित देशका मान दोहद० ना. पु० स्नद, प्रीति, हित, गर्भ । पापा लांग। दोहन ना. पु. रसका साचा।। द्राविड़ी० ना. सी. बोटी इलायची, दारिद दोहन देशकी भाषा वा यासी वा वस्तु । दोहना० स० वि० दूहना, गारना । द्रापी ना.पु. सुहागा। दोहना० ना. स्त्री. दुहने का पात्र । द्राक्षा० ना. सी. अगूर, दान । दोहरा० गु. दिगुण, दोलङ्ग । दुत० ना.पु. जल्द, शीघ्र । दोहराव ना० पु. दोहराने का काम । दुपर० ना. पु. राजा विशेष । दोहा. ना. पु. छन्द विशेष । दुपदो० ना• स्त्री. द्रौपदी, पाण्डवोंकी ची। दोहाई. ना. सी. दुहाई । दुम० ना. पु० धृत, पेड़। दोहान० ना० पु० दो वर्ष का गोमा बच्चा, सैला। इमलिक ना• पु. राक्षस विशेष।' दुहिए. ना.पु. प्रना। दौड़ ४० ना. रस्त्री० बहुत शीत्र चलने की चाल, द्रोण ना. पु. कालाकाग, पारिन, पर्वतपिशा, धावा। द्रोणाचार्य। दौडधूप० ना. स्त्री० जनन, परिश्रम । दौड़ना० अ० कि. यहुन शीघचलना, धावा । द्रोणपुप्पी० ना सा० ग्मा, पौधा । दौडाफ ना. पु० दौड़नेहारा। द्रोणाचार्य० ना० पु. कौरव और पारडयोमा दौडादौड़ी० ना. स्त्री० गावेगी । दौडाना० स० कि० शीघ्र चलाना । द्रौपदी ना• सी• पाण्डकारती, द्रुपदपन्या। दीदाहा. ना. पु. सदाशया, श्रगुणा । द्रोह ना पु० वैर, शत्रुता, अदावत ।। दौहित्र ना. पु. नाती, वामा। दौहित्री० ना. सी. नातिनी, नदामा। ना. पु. शनु, री, मुद्दई। द्रोही द्वन्द० ना.पु. युगल, जोहा, रागदोषादि, क घुमणि ना. पु. सूर्य। लहा देखभार। घत० ना०पु० जूथा, नूप । चौरानी ना. सी० देवरको सी। द्वादश गु. पारह १२ । द्वादशउपयन० ना. पु. बारह उपयन अर्थात द्रम्म. ना. पु. १६ पणना। शा तनुकुएड, राधापण्ड, गोवर्द्धन, परमन्दर द्रव० गु. बहता हुया, घुला। बरसाना, सफेद, गदघाट, चौरपाट, बलराम द्रषिद ना. पु. देश विशेष । स्थल, नन्दगाव, गोक्त, च दनान १२ । द्रवित गुरु बहताहुया, मायुवा नमतामय । द्वादशभानु० ना० पु. बारह सूर्यनाम । -- F मङ्गलकोप। , अर्थात् विष्णु, शक, अर्थमा, धाता, पाय, द्विजाति ना० पु० दिन, ब्राह्मण । त्वष्टा, विवस्वान, सविता, मग, वरण, अशु-द्वितीय० गु• दूसरा । मणि, तेनाने। द्वितीया ना० सी• दून, दूसरीतिथि, दूसरी। द्वादशभानुकला ना० स्त्री. बारह सूर्य की द्वितीयान्त गु० जिसके अंत में द्वितीयाका कला अर्थात् तरिनि, तापिनी, धून, मराची, प्रयय होते। बलिनी, मान, सचिनिन, भोगदा, विश्वायो शित्व० अभ्यः दोहरा भरना। रिया शारिकी हमा विधा० श्रन्य. दोपकार। द्वादशयन ना. पु० पारवा अजई अर्थात् छिपद ना.पु. मनुष्य । मधुवा तालवन, वृदारन, कुमुदान, यामबर, दिरसन० ना. पु. साप । कोटवन, च दनान, लोहा, महापा, खदिर विरागमन ना. पु. गौना, चलोया । वन, बेला, भापीर। द्विरुक्ति ना० सी० पुनरुक्ति, फेरसेररहना । द्वापर० गा० पु. तीसरायुग जो ८६४००० व हिरेफ. ना. पु० मारा। या होता है। द्विवचन ना० पु. दित राग्न्यायुक्त, जोगन्द, छार. ना. पु० घरपामुख, दरवाजा। निसका भाषा में प्रयोग नहीं है । ক্লান্ত । • আর্কীপান, মাতা द्विविद० ना० पु. वानर विशेष । बारपाल। विपट् गु० सदश वा श्रष्ट । द्वारा अव्य. कारण से वसाला, मारफत । द्विस्वभाष ना० पु. दुविधा। द्वारावती० ना. स्त्री. द्वारिका । द्वारिका ना. सी. नगर प्रसिद्ध जो गुन विनिशलक्षप. ना. पु. रजीस लक्षण अ. रात में है। नि सुकृत सरूप, शील, सत्य, पराक्रम, शु. च्यामा, अग्यास, वविद्या, समान, परमशान, ঙ্কৈায়া द्वारिकानाथ गा. पु. श्री पच द्रनी। शास्त्रज्ञान, पररीत्याग, पूर्णता, लोरेश, दास द्वारी ना. पु. द्वारपाल। विभाग, पुष्टविद्या, प्रियवाद, ससग, काम दिगुण • दू, दोहरा गुणपूर्ण, मातृभक्ति, पितृभक्ति, गुरुभति, नित. दिग, दातृत्व, धर्मामा. देशपजन, अल्पनिद्रा. शिज. पु. पक्षी, दात, बामण, मदन, खल्पाहार, खग्छता, पुष्टता, धीरज ३२ । निजदीप गा.पु. प्रयहत्या। दीप ना. पु. टाए पृथ्वी का खण्ड जी जनसे दिजनायक ना.पु. ब्रामय। विराहा है, पृभी के गसरसण्डों में से एक । गरम चन्द्रमा मिह । द्वीपयती ना. सी नदी। दिसन्मा. ना. पु. माझए। द्वीपशत्रु० ना. पु. पतार, सतापर। द्विसपतिमा. पु. दिननायक । द्रोपसम्भया ना. स्त्री.दिएड राजूर । हिजपती ना. सी. प्रामी। द्वीपिका ना. सी. सतार, दादर दिप्रियागा. सी. सोमरही, मानपी। गोपी ना. पु० मिह, शेर । विजराज. ना. पु. हिजनायक । दिप० ना. पु. रे, हसा ! मिजा. सी चोरीलामी विपी. गा.पु. शत्रु, रे, हिंसक। रिजांगिका. सी. पटकी। . कांपा। A .
मङ्गलकोप। 5. 1. A 1 1 . शुक। . , -- द्वैत. ना. पु० सदह, भेद, दुगुनाहट । धड़ाका ना.पु० धायापार, हवाइट गम बैतवादा. ना. पु. भदवादी । वैध ना. पु० सदह, दोसएड । घट्टी० ना. सी. लगेर, पावर' की तौल वा द्वैधीकरण ना. पु० कैदन । नितना एक्चार तोलाजावे। द्वैमातुर ना- पु. श्रीगरोशनी । घत. ना. पु. हाथी चलाने का गन्द। द्वैमधुक. ना. पु. मुलहटी । धतूरा ना. पु० पौधा विशेष । द्वैष० पा• पृ० देष। धक्रिया० गु० दलिया, बहुपिया। द्वयर्थ० गु० निस में दो प्रकारके अर्थही । घधकना० घ. मि. ममाना, पायचा द्वपतर० ० निस में दो अक्षरहों। तना। [ध] धन० ना० पु. द्रव्य, अर्थ, सम्पत्ति, लसी, पघलाना० स० कि. घलना, धोवादेना। धंधक गु. बहुचिलक, पयवाला, धधक। धन० ना. स्त्री० गारसे पनीबम्नु नो टोपी घघा • पु. वाम, धधा। श्रादि में लगा है। धधार० गु• उदास, एवाती। धनक्टी० ना. स्त्री० कपड़ा विशेर, धान कारने भचारी. ना. स्त्री. उदासी, अकलापन । का समय। धंसना०प० कि० घमना, गहना, बैठजाना । चनअय. T• पु• अग्नि, अर्जुन, पायपत्र, धकधक ना० पु. पड़ा, भयसे वलना का. पर। घनन्तर० ना.पु. धन्वतर। घका० ना. पु० टकेल, भोक, टैला । घनद० ना.पु.कुर, धनका दाना। धकाधकी ना. सी. टैलाली । धनपति ना० पु• दुर, गु• धनी। धगड़ा धनवन्त ना.पु. यार, लगृथा। गु• द्रभ्यपान, लक्ष्मीपान् । घग्गड़ धनवान्, भजना• . चाल, ग्रासन, डोल, रूप, टा, धना० ना ती नी, नारी, ना• पुगभन सामान, साजगार भजभंग.ना. पु. नपुसकी। धनाखाना. सी. रासना। घमा. ना. सी. पताका, पना। धनाढय.गु. धनवान, मालदार। धजीला गु. धन से चलने वाला, सनीला। थनाध्यक्ष ना. पु. धाका स्वामी, कुरेर । भज्जी ना. सी. पुराने पड़े का टुकड़ा। धनान्ध० गु. नो धनकै कारण अंधा अयात् । भाना.पु. देह, शिरसे नीचेका तन । पदमारी होरहाहो। भड़क ना. सी. फडक, भय, धड़धार । घनार्जन'ना. पु. द्रन्य का उपार्जन भएकना० . कि. फड़कना, दिलना, धक घनाशानन सी. अर्थ की चाशा। धमाना। भड़का नापु. भय, सदै, दुनिया, धड़क । धनासरी० ना. सी० रागिनी विशेष । घरकाना० स.नि. राना, पायदाना, धनिफ. ना. पु० महानन, ऋणकाता। धनिया नाम चीन विशेष, ना• स्यो । पहा ना. पु० या पद, दील, जोग्य । पना। . विशेष। T • नारि।
मङ्गलकोपः। गिरने का शन्द। । .... भनुपातिना पु० धनुष के डील . गान् । 2.. भनिष्टा० ना. स्त्री. तेईसवां नक्षत्र । | धमका ना०.०वडाधूप, सोस, भारी वस्तु - अमी० गु० लक्ष्मीवान, मालदार, ना. पु० मा, लिक, रवामी । धमकाना० स० क्रि० भिड़कना, डांग्ना ! - अनुः ना. पु० धनुष और नवी राशि चारि धमफाइट नास्त्री 'घुड़की, दाट । धमकी हायका प्रमाण, मिलावी. भनुपटना पुचिरौनी ।। .:-धमधूसर गु० मोटा, रथूल । .. धनुर्द्धर० ना० ३०' जिस मनुष्य के माम:धनुष धमन० ना• पु० नहकुल 1. रहताहो, विशेष अर्शन। • धमनी ना. नी. गारी, नली। धनुर्विद्या ना. रती० , युद्धविद्या और माण धमाका ना• पु० तोप विशेष जो हापी पर शान, तीरन्दाजी रखते हैं भारी यतु गिरनेका शन्द ।। धनुप० ना० पु. कमान, मिटा । धमाचौकड़ी० ना० रत्री• रौला, बखेड़ा। " धमाधम ना० पु० पविपीटनेका शम्द, लगातार धनुषाकार पीटना। धनुषी ना. स्त्री. छोटा धनुष, धनु की अनुही कमठी। धमार०१ ना० पु. तालविशेष पा गीतविशेष। भनेश ना० पु० पता निशेप, कुनैर गु: धन- धमाज० जो होली में गाते हैं। पमिना ना• पु० सांप विशेष । धमोका ना० पु. खंजरी विशेष । धन्प० गु० प्रशमाके योग्य, गुणी। धमिल्ल० ना० पु. केशपाश, नेणी । धन्ययासका ना• पु० जवासा । धन्यवाद. ना. पु० स्तुति, कृतज्ञता, गुणमा- घर ना० सी० धरती, ना. पु० धड़। बरफ० ना. स्त्री. धड़क। नना। भम्यवादी धरका० ना० पु. घड़का । कृतज्ञ, सन, गुणगायक। भरणिं०१ धन्या० ना. नी० नदी विशेष। धरणी गा. स्त्री० पुची, धरती. जमीन । धन्याक.ना.पु० धनिया। घणीघर० ना. पु. शेषादि, सांप, भन्यन्तरि० ना. पु. वैयविशेष जो स्वर्ग बा- धरती ना० सी० पृथ्वी, पामीन । सियों के वेध है। धरधरा० ना.पु. पडाका । धन्यायानो रत्री. जवाना। घरना नानी पड़ी। धन्यी० गु. धनुर। धरना० स० कि० रखना, सौंपना, पकडलेना ना० पु० चपेटा, थप्पा, मलाया। ना.पु. किसी के मारपर पड़ना। अप्पा भाना. ना. पु०,कपड़े में जो लीस, कपः का धरनी० ना. सी. धरणी, धरन । दारा। धरनैत? गा.पु० धरना, देनेवाला समक० ना. सी. भयका सूचक शब्द, पैरों का घरपना० स० मि. दवाना, साल माना। राम्द विशेष । धररहना पुए, पाटेवर उगे। धमकनाथ.किसना, परना, जगमा घरपना कातिलान्य गाना, स.कि. पटना। 18 -- धप० .. घरहर० ना.., स. सहनरम १७० मङ्गलकोप। ३ कुन प्रह्लाद चरिने यथा ( यहि ससार प्रसार धर्मिष्ठ १ गु० धर्ममेजिनकी ष्टिाहै,पुण्यवान् । १ पकडा। पैठना। मह राम नाम श्रुतिसार, रामन पुर घरहरकरे धर्मी० घर्षण ना• पु० धासन, रगड़ा। नरहरि नान उदार)। घर्पना. स.वि. कोपना, रगहा। घरा नाम्बी• धरती, पृथ्वी, कि.मू. रक्खा, धवल ना. पु. शुक्तवर्य। घवलाल्य० ना. पु. पिराम। घरातल. ना. पु. पृवानल, रूप, समीन। धवलागिरि० ना. पु. पति विशेष। धराधर ना. पु० शेषा दे। धसकनाय.कि. गडना, धसजाना। घराना० अ० कि. ऋणी होना, सेरित घसन० ना० पु. वसान, धसने की प्रस्था। वाना, पकड़ना, सदाना। घसना०प० कि. एमडना, चुभना, बिदना, घरासुर० ना० पु. प्राम। धरित्री० ना० स्त्री पृथ्वी, भूमि । घाताना ना.पु. दलदल गइन, धमन । घाहर० ना. स्त्री० थानी, सौर, अमानत । घसाना० स० कि. घुमेना, घुसेड़नाना, पैठा धरौना पु. पुनर्विवाह । सना, पैठवाना, पिनाना। धर्तव्य गु० ग्राम। धत्ता० ना• पु. ऋणी, धारथिक । घसायना० पु.घसान । धर० ना३० धतूरा, जिम के फल में विष धांधल० ना• पु० नटखरी, फरफद, भगा। होताहै। घांधली गु. झगडाल्, नटसट । धांगर • पु• जाति विशेष। धर्म ना. पु. याय, दीर्ति, पुण्य, न्यवहार, घांयधांय ना रखी तोपोंका शब्द धारा। चाल, गुण, काम, मजहर। घांसना० स० कि० सासना, सोरखना। धर्मकूप ना. पु. काशी में स्थान विशप । धांसी० ना. सी० सामी, सोती। धर्ममूल ना• पु. वेद शास, गुरु । घाई ना. सी० दूध पिलाने हारी। धर्मराज. ना. पु० यमरान, नीतियुन राय, धाकरा. मी. ठा, प्रताप, पीर्ति, भय, राजा युधिष्ठिर । डर, दीका धर्मशाला ना. मी. धर्म विचारने का स्थान। धागाना.पु. सून, दोरा। धर्मशील. ना• गु• मक्किमान्, पीर्तिमान, घाता० ना. पु. ब्रह्मा, सूर्य । धातु० ना. पु. ताना यादि, वीर्ण, क्रियावाचक धर्माधिकारपा. पु. पुण्यकर्म की पदा शन्द मसदर। भएडार का दाम। धर्माधिकारी गुरु नौ पुण्यकर्म या सिर-धातुमाक्षिक ना• पु० सानामासी । धातुसाधित० गु० ना धातु से बनायागया तान हो। धमामा० गु० कार्तिमान, साधु, ना• पु. श्व- धान ना० पु. अन विशष । धास्थितर गु० धातु से रहित । रत में जो तौमरा है उसका नाम । घाना अ० वि० दौड़ना, दलकरना, स० कि. धर्माध्यक्ष गु. पाणी, रिचारकर्ता। पूजना, पर्चना धर्मायतार० ना. पु. धर्मका पववार । धानी ना.सौ. पान विरो, धान के सरा, धर्माशा ना रखी. धर्मको पाता । रंग विशेष . .
मङ्गलकोप। १७१ पड़ना, अर्चना।' ८ नत। - धानुक० मा• पु० धनुहार, कमानदार और धावना अ० किदौड़ना,फिराकरना, चढ़ना, जातिविशेष। धनिय० ना. पु० धनिया। धावनी ना० सी० दूती, छोटी कटी, श्वेतः। धान्य ना० पु. धनिया.धान, धन, माल। धायमान गुदौड़तामया। धान्यक० ना. पु० धनिया । धावा. ना. पु० दौड़, चदाई, वृक्षविशेष : धापं० ना० सी० हाय' से दो तिहाई का माप, धाहरु ना० स्त्री. शरादा, कूक। धात्री ना. स्त्री० धरती, सरस्वती, धाई, ना, जहांतक मनुष्य एक सांस में दौइसके पु. यांवला। धाम० ना. पुं० पर, स्थान, तेग, तन, किरण, धिक् अय्य० निन्दा का बोधक शब्द फिट, ला. ज्योति, वैकुण्ठ, ब्रह्म । नत, कुछ न भये। धामा ना. पु. बेतका टोकरा । धिकार० ना० पु० फिटकार, निन्दा, शाप, ला: "धामिन्० ना० पु. सूर्य । धायक ना० सी० धाई। धिकारना० स.क्रि. निन्दाकरना, रिटकारना, धायमारना य० कि० पुकार के रोना, दौड़के लानत करना। मारना। धिकारी० गु० शापित, निन्दित, फिटकारी। भार० ना० खी• लकीर, वहाय, अस्त्र की बाद धिम् अत्र्य. धिक् । धारक ना. पु० ऋणी। धिया. ना. स्त्री. बेटी, पुत्री। धारण ना. पु० धारने की अवस्था, मानलेना, धिरयो० कि० धमकाया, डांग । स० कि. धारना, मंजूर करना। घिराना० स० कि० धमकाना, डांटना। धारणा० स० क्रि० रखना, संभालना, धराना, धिषण ना. पु० ब्रह्मा, वृहस्पति । ना. सी० योगकर्मविशेष । धिपणा. ना. श्री. युद्धि । धारना० स० कि० धारणा। धी० ना. सी. घुद्धि, की। धीति. ना. स्त्री. प्रीति, निरवान, कोदाको धारसना. मी दाहस, धीरज । - मोहिवारदापन्दि इंटरोदर धारा० ना० सी० प्रवाह, बहार, रीति । धोतिलालदेगेहा दमिशनर सन्ता। धारावाहिक गु० विच्छेद बिनु । | धीमा ना- टॉर, डा धारि० ना. स्त्री० डाकूकी सेना । घीमाना महारा, धारित गु० जो धारण कियागया। घामाला राममा धारी ना. स्त्री• लकीर, पौधा विशेष ! पीना यकी टीडी.. धार्तराष्ट्र ना• पु० ,कालाइंस, यथा-नान दाद, इदर ।। हंसास्तुतेचंचुचरणैलोहितःसिताः । मलिन चामे यदिई । स्यारतेधार्तराष्ट्रःसितेतरैः १. इत्यमरः कोपरे । का पुत्र सुयोधन। धाय० ना• पु० पौधाविशेष, दौड । । धावशा ना. पु० दौडनेकरोड RTH, धावन० ना० पु० सन्देशिक हस्दा । + म यथा- । मङ्गलकोप। r धीरजी गुल हद स तापी, स्थिर । धुरमा चहुँ पासा, समुझि परे नहि अनि धारता ना. सी. धर्य, स्थिरता, साहस । यसमा। धीरा गु• कामल, सतोषी साहसी, विचार धुरव्य० ना.पु. मेष। शाल। | धुरियाना० म०वि० मरियाना,धूललगाना, धूल धीरिया० ना. सा. वर्ग। पंकना। धीरी ना० स्त्रा० नत्र पुनला । धुरी० ना० सी० काष्ट या लाहे की यनु निसार धीर गु० हृद, धीरजी, वहादुर । पहिया हिरता है। धीवर ना. पु. ध मर, ५वर्त । धुल ना० अ० कि. सध्याना, पाहोना, धुगार० ना. पु. बोक्न, बधार । धोजाना। धुगारना० स० लि. वधारना, बोरना। धुलवाना स.क. धुलाना। धुंधरार ना• पु० अरा। धुलाई० ना० स्त्री बन्न धाने का काम वा धुधकारना थक्रि• धुवा समेत प्राग का पैसा जलना। धुलाना० स० वि० मल निग्लाना, व वस यो स्वछ करवाना। धुधारना कि० अ वादोना। धुधला गु० अभा अधला, ना.पु. अधरा । धुलेंडी ना. सी. हालाका दूसरा दिन । धुधलाई ना रखी• अधेरा, उघलाई । धुस्सा ना० पु. लो, उपवस्त्रविरोष। धुधेला गुरू दली, टग। धूनांग ना.पु. बुवा, धूमा धुकडी ना. स्त्री० दाग धना पैमा रखने की धूना० हाती है। धूवारा ना• पु० धुया निकलने का स्थान । धुकधुकी ना. स्त्री० रठका भूपविशेष, घद (धुधरा ना० पु. अधरा । राहर सदह, ध्यान। धूत गु० धूर्त । धुत्ता० ना. पु.धूत्तना। घूति ना• स्त्री• टग, छली यथा-तुलसी रघु धुन • स्त्री० चमका, ला अभ्यास, परिश्रम, वर सकाहि सके न कलियुग धृति । रहस, उमग। |धूना ना. पु. राल। धुवना० स० कि० नूमा, धुनना । | धूनी ना. स्त्री• धुवा, याग जो साधु लोग धुनना० स० मि तूमना, पीना, मारा। तापते हैं गु स्थिर। धुनिया० ना. पु० विहना तूमनेवाला। धूप० ना. सी० धाम, सुगन्धि, द्रव्य जो पूजा धुन्ना० स० कि. पुनना। में जला के चढ़ात है, वृदविशर या उसका घुमला.गुउथा, अधा अवरा। धुमलाई ना. स्त्री अधियारा । धूपना० स० कि० राललगाना, धृपजलाना। धुर० ना• पु० प्रारम्भ, प्राधि पास, बोझ। धूपित गु• धूप दियागया। धुरपद ना.पु.गीतविशेष। धूम ना• पु• धुवा ना० सी० रौला, बसेड़ा, घुरसांम० ना. स्त्री० गोली, सायकाळ । उपात, भीड़। धुरधर० गु० घुरी धरनवाला, ना• पु० घर धूमकेतु. ना. पु. अग्नि । धुरवार ना• पु. मन, कायेयधा, धुपारे ! बना। धूमधाम ना. पु. धुवास घर, हहा, रोना, 1 . वाष्टविशा T मङ्गलकोप। १७३ रंग। है धूमल धूमपुप्पा ना. सी. अग्नि निता विशेष। धृष्ट गु. पिशाहद,चतुर,परिपूर्ण पण्डित, शाला। धूमयोनि ना० पु. मेघ, बादल धंगामुष्टी० ना० स्त्री घूसमध्सा । धूमर० | धेनु ना. श्री. गाय या वखड़ासमेत गाय, धूमरा गु० भदमला, धमैला, वा का दुधार गाय। धूमल धेनुफा ना. पु. खरम्पी दैत्य विशेष । | धेनमतिः ना. स्त्री गोमती नदी । धूमशिखा ना. पु. अग्नि । धेला ना० पु० अपला । धूमशी ना० सी० अग्निनिहा पिशा। धेली ना. स्त्री. अधेली, पाधा रुपया । - धूमा० गधूमला। धैर्य ना. पु० धीरता, धीरज । धूमी० गु० उत्पाती निसगी धूम होरही। धैर्यवान् गु० धीरजी, सतोषा । धूम्र० ना० १० धुना, ऊर। धैवत. ना. पु. रागरा सर विशेष । धूम्रपान ना. पु० धुवा वा पाना। धोश्रा० ना. पु. फलकी भेंडाली । धूम्रपानयंत्र० ना० पु. हुका। धौई. ० ना. स्त्री. भिगोई हुई दाल । धूम्रयोनि मा. पु. मेघ, बादल । धोगला. ना. पु० धुवानिकलने का मार्ग । धोक. ना. सी० देवता के आगे झुरना, बाद धूम्राक्ष० ना० पु. राक्षस विशेष । तदिया। धूर० ना• स्त्री० धूल। धूरा० ना. पु० जो रोगी के हाथ पाव आदि में धोकड़ गु० महावली । रगडते है । घोखा० ना० पु० भ्रम, छल, धाधल । धूरि० ना० स्त्री० धूलि । धोता० ना० पु. धूर्त, पाखण्डी।। धूरी० ना० स्त्री० पुरी। धोती ना० स्त्री० कटि में पहिरने का यन. विशेष । धूर्ति गु० नटखट, शठ, ठग, ना. पु धतूरा । धूर्तता ना. स्त्री० ठग, शठता। धोना० स० कि० पसारना, पचना। धोप० ना० सी० खड्ग विशेष । ना० सी० रन, रेणु, खारु । धूलिक धोय. ना. सी. पचालन, धोनेका काम। धूसना० स० वि० ठासना, भरना, दाना । घोविन० ना० स्त्री. धोबीकी स्त्री। धूसर० गु० मिट्टी लगाये हुये ना• पु० जाति धोयी ना• पु. कपडा धोनेवाला।। विशेष धौरी ना. स्नी० पुरगवेल जो गाडी में सन धूसरि० ना० स्त्री. धृति। से पहिले मचाया जाता है। धूहा ना० पु. धोखा, पक्षी श्रादि क दराने धौ. ना. पु० वृक्ष रिशेष । के लिये खेतमें गाडते हैं, तूदा । धौ अन्य अथवा, वा, मानौ, या। धृक् धोका १० ना. स्त्री हाइट, बारा, श्राश। ग्रव्य.धिक। धृग धोकना स० वि० धौम्नी से यागिकना। धृत गु० जो धारण कियाजाय, रक्सागया। धोकनीक ना सी. धादी सती नसते धृतराष्ट्र ना. पु० दुर्योधन का पिता।' श्रागिको प्रचण्ड करते हैं, निगाली धृतिः नास्त्री. दृढ़ता कामों में धीरज । घाँका ना.सी. धारनी। धूल. . N मङ्गलकोप। . धांताल० गु० धनमान, बलवान, मरमा, दुनी। ध्वनित. गु० सहप से पथित । घौताली ना० सी० धन, बल, सरमन, दुधनी. ना. स्त्री० नटी, गुरु शान्दय । ध्वन्यात्मर० गु शब्दविशेष, निसमवर्ण नि धोन० ना• पु० चारि पसरी का परिमाय । वरय हो। धीस. ना. पु. दौड, धी। ध्यस्तगु० प्रष्ट, सराव। धोसा ना.पु. वाडा। घान तो पुशब्दा धौसिया ना. पु० दौड़करनेहारों का प्रधान । धात ना० पु. अधियारा, काव्ययथा, या धौर० ना. पु० पात की जाति विशा। भात विध्वस प्रादिय कारा, तथा दैरिति धौरा गु० धोला। ग्नीष शोरणहारी। धौल. ना. सी. टोप, थप्पड़ । () धोलधप्पा.ना.पु. धापाधप्पी। न० अन्य १० नहीं। नरना.स्त्री धौला० गु• श्वत, सफद। धालाई ना० स्त्री. उसता, गोराई। नकचढ़ा० गु० ग्रोधा, चिड़चिड़ा। धौलाना स० वि० थप्पड़ मारना, मुनकछिकना० ना. ही पाश विशेष धौलियाना०रियाना। नक्टा० गुनाक कटा। मकड़ा ना.पु. नायमें रोग विशेष । ध्यान० ना० पु० विचार, सोच, चिता। नकतोडा० गु० हँसोड, धूर्त । ध्यानी० गु० विचारवान्, सोचा। नकसीर० ना.स्त्री. नाक की शिरा । ध्याना० स० कि० सोचना, विचारना, मा नकार० अव्य. ना.पु. अस्वीकार । यावना० नना, भजना, गाना यशपा। धूच० ना० पु० धुरी, योग राग विशेप, दैत्य वि नकारना० स० वि० नकार परता, मुकरना । शेप, उत्तर दक्षिण द्र स्थान में प्रारस्थिर एक नकुल ना० पु० यौला सापका वैरी, बगुला, पाइका पाचवा पुर। तारा उत्तानपादवर पुष मत विशेष, गु.स्विर, नकुमार ना० पु० नाक, अणि । अचल, सनातन, निश्चय । नकेल ना० स्त्री० काट की वस्तु विशेष नो अघतारा०11- पु. उत्तर दक्षिण पद्र में प्राय ऊटको नास्में पहिनात हैं। स्थिर एकतारा। नका. ना. पु० पासे या तासका इका । ध्रुवनन्दा ना. श्री. श्रीगगानी । नली. ना. सी० नाश्मे बोलना, जूप में एक ध्रुवपद् न० पृ० धुरपद गीत विशेष । बदना गएडे से। ध्रुधमत्ययंध० ना० पु. कुतुबनुमा । नकीमूठ ना. सी. धूतविशेष, जुयापिरोष । धुवा० ना• नी• शालपी, पील, लगाव । नक्कू०ए० अपयशी, बदनाम । पसना०प.नाश। नक नागपु. चुम्भीर, मगर, नाका। ध्यक्षोली० ना. मा. काकोली। ना. पु. ग्रेगुलियों के प्रसार का ध्वज. ना. श्री. भएमा, पताका, बना। नखर० अरिषभाग, नानून, नह। ध्यजिनी ना. सी. सेना, फोन । नखरेखा० मा० पी० संसार, कोट । ध्वजालना. सी. पताम। नखियाना० स० कि० खसोटना, कोटना ज्यनि. ना. वी. शद, पानां शन्द। नखी० गु० नसधारी, नस्वाला, पशु । . F - नव० १ मङ्गलकोप। १७५ नटिनीना सी० गटको स्त्री। } नपुना। नग ना. पु.. ग्रेट्री का पापापविशेष, मणि, नटिन पर्वत वृक्ष, धाम. नगचाइ ना. सी. पाई। नटी ना..सौ. वश्या, नाचनेहारी। नगचाना०५.कि.पास थाना। नटुमा० नगचाहट ना० टी. नगचाई । ना.पु. नरया। नटुवाल नगदीना० ना०.पु. पौधा विशेष। नठमा० . कि नशना, निराइना, सकि- नगन० ना० पु०.हाथी, गु० नग्न । नाशना, रिगाइना। नगभित्रक० ना० पु. पापा भद् । मत० गु० नम्र० ना. पु० तगर, पौषधि, अन्य नगर ना०५० शहर, पुरी, ग्राम । मतरु, नहीं तो। नगरकोट ना० पु० कोटकांगड़ा । नतरच्या नहीं तो। नगरनारी जाधी गतिका मेश्या।.. मतांगी ना. सी. फारासिंगी। नगरपती ना. पु० नगरवासी । . नति. ना. स्त्री प्रणाम, नमस्कार... नगरवासी० गुपुरी वा शहरका वासी । नतिनी० गा० सी० नातिन, दहिग्री । नगरी ना. सी० छोरानगर, परती। नतेत. ना. पु. नातेदार, सम्बन्धी, गाती : नगा ना.स्त्री नारीखी। नथ नारखी नामें या गहनाविशेष नधुनी। नग्न नयना • क्रि० छिदना, फसना, ना पु. नंग गु० दिगम्बर, वरत्रहीन। नंगा नथनी ना स्त्री० नायने का परम -विशेष, नंगी ना. सी. नग्न थी। नधुनी। नचधानासकिनचाना, नाच कराना। नधी गु० विदी, फॅसी। नया ना० पु. नाचो हारा। नचाना० स० वि० नाचकराना। नथुश्रा०मा० पु. विदुधा। नथुई ना रखी दिदुई। नद० बा० पु. डीटबन्दों पा नाचनारोंकी जाति | नथुना० ना. पु. नाकका मार्ग। विशेष, कौतुकी, स्वांगी। नद० ना. पु. ब्रह्मपुत्रादि जलपना दिया। नटखट० गु• धूर्त, कपटी, पली, फरफन्दिगा । नदिया० ना० पी० छोटी नदी, ना.पु. नटसी ना कि पूर्तता, सय, ला र नदी ना० सी० जो जलकी में नटत. कि. अस्वीकार करता है, नाचता है। निकलकर देशान्तरों में होर में 'नटना ० कि नमानना, असागरकरना। गंगा और मिन्यु अादि। नदनागर०ना. पु० चतुर गट, डीटबन्द, नदीकान्ता ना कर नदोला ना. पु. ननद० नरभूपग ना. पु. हरताल, नाकाभूषण.13 नटवर ना. पु. डीठबन्द, टोनहा। ननदी दिन। नसालना० पुट्टाकांटा। ननिहाल न.प.नारका पाना। : टोनहा। ननदिया। हवा मटया मङ्गलकोप। नन्द ना. पु. थापच द्र के कथित पिता, नमस्य गु० नमस्कार के योग्य । बरा, नो है। नमामि कि नमस्कार करता है। नन्दन ना० पु. दव उपपन, दवान, च दन, नमित० गु० जाच शिर किय, शिरमाय नम स्कार करता लड़रा, गु० ग्रानन्ददाना। नन्दलाल ना. पु० श्राकृष्णच द्रनी। नमोलना.पु. नमस्कार या प्रणाम परता है, नन्दिग्राम ना. पु. बस्तीविशर जहा भरत दाहा, नमानमो शुरुदाना रोप्रणाम अनत जी तपस्या करत थे। तुर प्रसाद खग्भेद या चरणदास बारात १० नन्दिनी नारी पात्रता, पुत्री, पनी की इनिस्वरोदय । नाहिन प्रियगु, सोटि, हर। नम्र० गु० विनयी, मिलनसार, आधारा, मि। नन्दी ना० पु. शिवना का वाहन । नम्रत. ना. सी० श्राधानता, विनय, नर्मी । नन्दीगण ना• पु. शिवनी का गरा। नय. ना. पु० नाति, कानून । मन्दीघाप ता. पु० रय जो अग्निदवने अर्जुन नयन ना. पु. `त्र, पास। या दियाथा। नयनामिय. ना. पु. नोंग अमृत, यथा, नन्दोई. पु. पत्रिका ददिन का स्वामा, श्रीगुरुपदरजमलपना, नयन श्रमियगदारवि ननद वा पनि। भजन । इतिरामारण। मन्दोला ग. पु. नाद । नया० गु०नगीन, ताजा । नन्दोसी० ना• पु० नदाई। नर० ना.पु. मनु र, पुरण, पुस । नन्हा गु० घाटा ल। नरक ना.पु. पापों क भाग पल का स्थान, दैत्य विशा निसे भामासुर मा कहत है।" नपुरक ना.पु. लार, हीजड़ा मार । नपुसकलिंगग. पु. तासरातिग । नरकट० ना० पु. सरकण्डा तृणविशप, निन वी चटाई बनती है। नभ ना.पु.यागरा वाथय भार थावण नरफसी० ना० सी० हलक, गला । मास। नभग गु. पही तर ग्रह, देवता। मरयुल०० पु. नरवट । नरपति ना. पु. मनुष्यों का रक्षक, रामा । नभगनाथ ना.पु. गरुड़ चद्रमा। निमगामी गु. पतीयादि, नभग। | नरपुर० ना.पु. मयलाक । नभगेश ना. पु• मानाय, गरुड़, चद्रमा नरवाहन नभश्चर० ना.पु. अाकाश में उड़न हार, ना.पु. कुबेर, यत्तरान। नरयानाक यथा पक्षी, तारागण, ग्रह दाता। नरसिंग ना. पु. बाना विशप तुरही। ५।। ममस्य० ना. पु. भाद्रपद । नरसिंगिया ना• पु. नरसिंगावनानहारा ।। नभस्वन०० पु. पान वायु । नरसिंहाना० पु. विष्णुका चौथावतार । नम ना० पु. नमस्कार, या नरसो० अरीनाहुत्रा चावादिन, चोयादिन नमत० गु. प्रणाम करत। नमन गु• मदरा, ममा।। नरहह. ग. पु. पिएडली की हही। नमस्कार ना. पु० प्रणाम, समा का नरहरि० ना. पु० नरसिहनी, कवि विशेष । पाध1 नरहरिदास ना. पु. गोमाई, तुलसीदास नमस्कारी ना.पु. सजा। कसदगुरु . भानेवाला।
मङ्गलकोप। W नरेट० नापु. नरेटा० ना० पु 4 - T - नरान्तक० नापु० नरांगाल, देत्यापशेष । नवधा गु० नोपकार । नरिया० ना. सी. छोटी नाली, खपरा । नवधाभक्ति न० मा० नो प्रकार या मक्ति नरी० ना. सी. चर्म विशेष लाहे का यत्र अर्थान् समग, हरिकथा, गुरुमेवा , हरिगुण विशेष, जिसमें पीने का सत रखते हैं। गान, वेदपाठ, सजनधर्म, समभाव, लामा नरूख० गुरु पुलिंग। लाभसम, हरिशरण । नवधामजन. ना. प. नो प्रकारका भेजन सासी नली, नई अर्थात् हरिगुण श्रवण, हरिगुण कीर्तन, हरि- स्मरण, हरिपदसेका, हरिश्रर्चन, हरिपादन, नरेन्द्र ना. पु. राजा, बहुतदेश काम नरेश तिपालक । दास्यभार, मिनभाव, ग्रामज्ञान है । नरोत्तम गुच्छामनु य ना० पु० श्रीणनी। नयनाटिका ना. स्त्री. नोश्वासा अर्थात् नर्तक ना० पु. नाचनेहारा । इडा, पिंगला, सुपुग्णा, पयस्विनी, वृद्ध, र नर्तकी ना. स्त्री. नीच, नाचनेपाली । गधारी, शखिनी, पा, अलम्बुपा । नर्तन० ना० पु. नाच, नय । नवनिक ना० प्रा० अनि, प्रणाम ! नर्मदा० ना० स्त्री. नदी विशेष । नवनिधि ना० सी० पुवेर का धन । नल० ना. पु० मुन्य वानर, पुरुयरामा, कुरेर नवनीत० ना• पु० मसन, नेनू, मम । या पुन, नकुल, पोकी, खोवल । नववधू० ना० स्त्री० नरम, नई दुतदिन । नवनाला. ना. ली. नरयावना। नबकूपर० ना० पु. कुबेर के बालक । नलपुरष्टिक ना. पु. कलिहारी । नवम० गु० ना नला० ना० पु. उदर में स्थान विशेष । नवमांश भा.पु. नवभार। नलिका ना. स्त्री० नली, नाही। नवमी ना.मी. नईदिन्। नलिन ना. पु. कमल। नवरंग ना. पु. कान, नारा नलिनी० ना० स्त्री० बहुत नलिना सयोग नवरत्नन पग्नेि दिशा स्थान या कमलिनी। नवी ना. स्त्री. नरटी, पोपी, ब, नरहर, नर.. पु. नाम का काम लाहे का यत्र निसमें सन रखकर विनते हैं। ननुमा० ना० पु. भारी वासका एक पार पा आदि रखन के काम भाताहे। जय गु० गिरती विशप, ६ नया। JEET ना. श्री. नाना नाम: नयखण्ड • पु० पृषी पे नौ भासद नवाग० गु० नया । भरतखण्ड, लापत, किंपुष, श्यन्नन्याना. . नार पिया । हिरण्य, रम्य, हरि, कुमाए। नशाना कि० माना, भाना, इरा. नयजल • पु. मपम यां, ना पनी- शानिहराना। नययौवनार ना० पी० सेवनबर्ग। निशा अफिमना, माकना । नवद्वार ना. पु० शरीर के नरी10 श्री० पुष विगए उमराए। पास २ लान २ नाक मुन्नमानवासी गु, गर्म और नी । ।
१७८ मङ्गलकोप। । म नवी ना. सी. ररसी निसस गय क पात्र दूध नाई यस प्रकार, सदश, समान। दुइते समय बाधते है नाइन.ना. वी. नाइकी जारू। नगीन गु० नया, ताजा। नाई ना.पुनापित, जातिविशेष, क्षौरका' नवीनता. ना. स्त्री० नयापन । नाऊ नवोदा. ना. स्त्रा• नई खो, नदयावना । नाका ना. पु. श्रानाश, स्तर्ग, स्त्री नामिका। नयोनिद. ना. पु० अकुर, अखुना। नाकडाना पु० नाक में विभा । नव्य० गु. नया, नवीन, उपरा। नारुपतिक ना. पु० इद्र। नन्य गु० नवदहाई १०। नाकनटी० ग. स्त्री० यासरा परी । नश्चर० गु० नाशवान् विनासी, झूठ। नाका ना• पु० मार्ग का पैड़े का यत, सईका नशावा० कि. मिगया, नाश दिया। चेद, गला, नक, जलन तु पिशप । नखत ना.पु. नतर तारागए, तारा । नाकिन० ना० स्त्री० नारी स्त्री। नष्ट गु० निमसा नाश हापसा, भ्रष्ट । मागा.पु. साप, पत्र, हाथी दुष्टनर, सूक्ष्म नष्टताना. स्त्री भ्रष्टता। वायुभेद । नटा० ना. स्त्रा. व्यभिचारपी। नागउरग ना.पु० सीसा, धातु । नसाना. सी.गाड़ी, रग। नागकन्या ना. सा० कया जो पावालम नसाना० स० कि. नाराकरना, बिगाडना । रहती है मुलाचना, मघनादका बीना। नसी० ना. ना. पालका अग्रभाग पा पाला नागकेसर० ना. पु. पुप पिशप । जो लाहे का हल में लगता है नागगर्म • पु• सिन्दूर वादन । नागचाम्पेय. ना. पु. नागफसर । नस्य-गु• सानुनासिक हुलास जा नासिरा स सूचते है। नागजल ना.पु.मिदूर यदा। नागदन्ती ना. स्त्री. हरयार । मह. ना.पु. नत, नाम्बून । नागदमनी० ना० सी० नागदौन । नहफ० • दुबला, पतला, सुमा। नागदौनता. पु. पौधा, माया । नहहा .पु. और ससार। नागन ना० स्त्री० सापिनी। महनी0 71.सी.नहनी खानी शिरे । नागनी ना. स्त्री० पान गरीस्त्रा। नहरया..पु. विशेष। नागपवमी ना. स्त्री० श्रावणशुलपचमी का नहनी नल दाने का श्रम विशा। पर्व विशा। नहलामा स.कि. स्नान कराना नहाना । नागपली नारी सापिन, नागिन । नदान ना.पु. स्नान । नागपाशा ना. पु. पासा या बचन नहाना०प०कि.. स्नान करना। नागपास० नदारदमुह अन्य विनासार। नागपुर०० पु. नगर विशेष, नागलोक । नहादपु.चमड़ का टुकड़ा। नागफासला. सी. फोमी विशेष । महिपर० पु. सीसी ससुराल या मैका। नागपवा०० स्त्री. गगया । नहीं अन्य नियन नागवली. ना. सी. गलि। नक्षत्र ना..तारा ताराग्य। नागरलि. ना. सी. पानयादि । नाः अगा नहीं। नागमारा०प० वी प्राकृत भाश नोपा- विशा मङ्गलकोप। . - . सालके रहने हार बोलते हैं। नाडीतिका ना. पु. चिरायता । नागमाता T० सी० का मनसिल । नाड़ीधम ना. पु. सानार, स्वर्णकारों नागर० ना. पु. गुजराती ब्राह्मणकी जाति वि नाडीमण्डल ना. पु. नाडियों का समूह । शेष, नागरोपन्न अर्थात् चतुर, ओर पानी, नाहीशान ना. पु० रोगपरीक्षा, आर सासा' औरा, सोठि। का ज्ञान । नागरंग पु. नारगी। नातक ना.पु. सम्बत, रिश्तह, बिरादरी । नागरमोथा ना० पु० मुगाध तृण विशेष का | नातर० अन्य नायथा, नहा ता। मूल । नात६० नागरिक ना. स्त्री० चतुर स्त्री, नागरकी नाता० ना० पु. सम्बध । नागरिन खी। नातिन ना. स्त्री० या को क्या, बग की नागरिपु० ना० पु० याला, मार, गरुड, सिंह । बटी। नागरी स्त्री० सस्कृत के अक्षर, चतुर स्त्री ! माती ना. पु० बेशरा पुन, बा का पुत्र, नागल. ना. पु० हल खत जोतने का। रामायणे यथा, उत्तमकुल पुलस्ति के नाती नागा TO पु० स यासी, नम्बर । शिविरचि पूजेनहुभाती। नागाहा • खी. नागदौन । नागारिक ना० पु. नागरिपु। नाथ ना. पु० सामी, प्रभु, ना. स्त्री० पैल की नारकीरस्सी, धार की रत्ती। नागार्जुन ना० पु० सहस्रबाहु राजाविशप । नाथना० सकि. छेदना, वैत ये नारररमी १ नागिन नागिनी ना. खा. सापका स्त्री। डालना। नाधित गुजो नायागया। नागौर. ना. पु० मारवाड़ दरार पासा प्रदेश। नाद ना. पु. शद, गरज, गीत, गा। नाधना नांपना स. ० 'लापना, पारजाना। नादना० स० कि. प्रारम्भ करना। नादिया मा० पु० नदी, पशु विशेष जो जा- नाच० ना पुन्य। गियों के पास होता है। नाचना. ध कि. नाधारना, दूदना । नाधना० स० कि. जुये म लगाना, प्रारम्भ नाज ना० पु. अन, यनान । करना। नाट० पु. वासा । नाधा ना० पु. वालाव, वा नदी में सपानी नाटक० ना० पु. प्राशा। मिलने का गढ़ा। नाटा० गु० टिंगना, टेनी नाटिका० ना. सी. नाड़ी। नानक ना. प. रास्तों या गुरु विशेष। नाटा छोरी, दिंगनी । नाना. ना.पु. माराम पिना, गु. अनर, नाठिनायी. नाश, विनाश । बद, समूह । माठी गुरु नाशई। नानाशार मु• बहुत परे, अनेमकारके। गाड़. ए. सी. ग्रीनानाला। नानासारख ना.पु. अनेन्यकारक कारण। नादिका. ना. सी. एकपड़ी। नानाप्रकार ग. ना प्रशर माड़ी 7 सी- पेमेकी रा, रोगारोहा के नानामांतिक लिय हाय में की एवरग) साता, नस, नली। नानारूप. ना. पु. अनरु भए। १ . म १८० मङ्गलकोप। विशेष . . नानार्य ना• पु० अनक अर्थ । नाराच. ना.पु. वाय, तीर । नानाविधि० गु• अनक प्रकार। नारायण ना.यु. यामगरान् । मानी० ना. सी. माना की माता। नारायणी या स्त्री लक्ष्मी, नायर, मान्द० ना. सी. नाद, मिट्टी का बड़ा बत्ती नारायण मम्मधीयोति गिष। नारि० ना. वा. अबला, नाड़ी, जिस म बान नान्दिया. T० पु. शिरका वाहन, वृषभ । का सूत रखकर युनते हैं, बन्दूर पिना काट, नान्दीमुख० ना. पु० श्राद्ध विशा, जा पुष वासरा पार निसम लीन पानी ग्रादि भरकै नाम क पाये हाता हे वा विवाहादि में ।। बल गाय आदिश रिलाते है। नान्धना. स. कि. प्रारम्भ करना । नारिकेर० नारिकेला 10 पु० पल विश नान्यतर० यय. अयथा नहीं, उसयनहीं। नारियल नान्यथा नारियली. ना. पु. नारियल का हुक्का । नाप० .सा. माप, परिमाण । नारी० ना स्त्री. यवला, स्त्री, नाडीसागर नापना० स० कि.मापना, परिमाण करता। शप, जिम करमुथा कहत है। नापित. ना. पु. ना, ह जाम । नाल० ० पु. कमलाद भी दएडानाल, नाभि ना. सी. पाय मध्यका रथान, होदा, पामा नल, नती। तोंदी, ना.पु. राजारिश । नालकी ना. सी. पालकी दिशा। नान. ना. पु० कार्ति, गश मिस्याति, सज्ञा । नाला० ना. १० नल निक्लन का भाग 1 - नामकरण. ना. पु० सरसार विशा, नाम नालिसिंदुक ना. पु० सभाल् । रखना नामानि०मा.पु. नामका परचन । नाली 10 स्त्री. मुहरी दाग नाला, निसाद नामी गुरु ममिद्ध, यीत्तिमान विग्यात, यशी, में दण्डे वरत है, जिसकाटा उड़ाते हैं । नाव. ना. सा. नौका, तरनी । मशहर। नायक स.शि. भुलाना, डाल, नवा नायक ना. ३० मखिया, प्रधान, स्वामी, सुदर नावरि० ना• पु० निवारा, जलनाडा । रीति स गाया या नर्तक बनजारों का प्रधान । नाविक ना.पु. मामी, न व ना जहाज च नायका.ना.श्री.नायिका। नायिन ना. स्त्री को मेरू। राने हारा मल्लाह, कृपतान। नायकी ना. स्त्री नायक कीवी, धर्मा, पिया नाशक गुरु नाशपराहारा, मिगनेहारा । नाशन ना पु० मिटावन, मान । कुहनी नाशना० स०किमिटाना ध्वसकरना, पाशना नार० स्त्री. नारि, नाल, झण्ड, माना। नाशपाती नार स्त्री. फ्ल शेिष । नारक०मा० पु. नरक। नाशाना. स्त्री नासिका। नारकी गु० रप निवासी, नरसी। नाशासभेदन ना. पु. कीरना पीयो । नाशिका. स्त्री. नासिम, नाय । नारगी ना. स्त्री नाश० ना. १० सुधनी, हुलास । नारद ना.पु.मृति विशष । नाशना० .नि. भागा, स. नि.माश नारा० ना. पु. नाला कमरवाद। करना। - नारगप ना प. पल विशष । न 2 मगत्तकोप। 7 - नासा ना० वा. नार, नारहा। निकलना अकिरिसना, बहना, पाग नासिका. ना. सी. नाक । जागा, भागना, उठाना, उखड़ना। नास्ति० यया जा नहीं है। निकलपड़ना अ.वि. बाहर, थाना । नास्तिक पा.पु.निनये मत में पर निकसना .नि. निकालना । नास्तिकी.लोर की मान को नहीं मानते निकाना स० कि. खतकी घास निकालना। है, जेनी। निकाम गु० अनि पामना रहित, वफाम । नाह ना. पु. नाथ, स्वामी । निकाय ना. पु. सब समस्त, समूह । नाहर० ना.पु. शर, व्याघ । निकारना० स० क्रि० निकालना, धरती परि नाही अव्या नहीं। करना। नि ० शव्य० यह शन्द निसशन क पहिल स निकाल ना. पु. उभार, निकास, जाइताड़ यागी हार उसका अधरहितकरे, यथा, नि शव निकालना० स० कि• उतारना, बिनना, अर्थात् गहारहित, निषेध । चुनना, उटाना उसाड़ना। ने पाप.गु.ग्रदोष निकासा ना० पु. कगर, नगरके अासपास, ने शक.गु.निडर, अभय । मार्ग निफ्लनेरा, चुकौता, मूल । ने शेष० गु० शेररहित अर्थात् सम्पूर्ण । निकासना० स० कि. निकालना । २ पट० गु० यति मूर्ख। निकासी० ना. स्त्री० पर, महसूल, बर। ने सग• गु० सग रहित अथान् अग्ला । निकासू० गु० जा निकालागया।। ते शरण ना० पु. शरणहान, अर्थात् मृयु | नित ना. पु० घर । उपाय, विदा। निकुच० ना० पु. बड़हल । स्व० गु. दरिका, अधन । निज० ना. पु• वृज, मडगा। ने य-य० में भातर, ऊपण, र हत । निपुटी ना० पी० छारा इलायची। नेष्टक० गु० मुगम देखक निद्वेष, सार निकुम्भिला० ना. स्त्री• रातोंग थाहरा। सुखी, पदक। निकृष्ट गुरु धाम, नीच, खरा। नेकन्द गु० सद रहित, अर्थात् उखड़, निषग. ना. पु० तूणीर, तरक्श । मिल। निखट्ट गु• पालसी, उड़ाऊ, लुगऊ । नेकन्दन निमसरी, उखाड़नहारा । निखण्ड० गु० मध्य। नेकट० श्रय पारा, समीप कराव। निखरना० अनि. दिलश उतारना, उनला नेक्टवती ना. पु० पासहा, समीप म। हाना चमड़ा उधड़ना। नेकटी ना. स्त्री० घाटी तराजू । निखरामा सकि. उनलारामा, फनी । नफम्मा गु. निशी जो निसीकामा नहीं निखप.ग. १० सर्व, १००००००००००००। है, शिथिल। निसारना० स० वि० उजला परना, अशी निकर. पु. समृह, भुण्ड, सार, सब । माडी निकालना। निफरना० अ.कि. निक्लना। निखारा गु० स्वच्छ, उ पल । निफरम्प ना. पु० समूह, गिरोह । निखिल गु० सर्व, सम्पूर्ण, मिलल । निक्लचसना • क्रि• भागनाना बदके निसार ना. पु० सार रहिन मनुय। बालना अधिक होजाना। निखोड़ना० स० वि० सालना, उपग्ना। - १८२ . मङ्गलकोप। वच। . निगड़ ना. पु. कटिबधन, वेडी पैकड़ी काठ। निचोलनिक ना० सी० चौलनी, कपड़ा, निगत गु• नगा। निगन्दना० स० कि० तागना । | निछावर ना. स्त्री० उतारा, बलि । निगन्दा ना. पु. निज गु० श्राप निश्चय, उत्कृष्ट । तागने का काम निगन्दाई ना. सी. निजका गु० अपना। निगम ना. पु० वद, नीचे, जहाना न सके। निजगति ना. स्त्री. अपनी दशा वा चात। निगमनदी नावी० श्रीगगानी । निजगुरु० ना० पु. अपना गुरु । निजतन्त्र गुनिजइच्छा, स्वरश'। निगमनिवासी० ना. पु० ब्रह्मा वेदनिवासी । निजपतिक ना. सी. अपनी प्रतिष्ठा, ना. पु.. निगर० ना.पु. दी बडा ठाम । अपना स्वामी निगलना स.लि. लीलना, घटना । निगाली. ना. सी. हुका पीने की नली, निजघी० गु. निनाश्रित, सतन। निजसन्धि. ना. सी. यासर, निजप्समय । पुनी। निजस्थान ना० पु. अपना घर वा स्थान । निगुण गु० निर्गुग। निगूढ० अविश्रगम, दुर्गम, प्रतिकठिन, अप्रकट, निजानन्द ना• पु० पा सुख में, निज म मग्न । निजाश्रित० गु० स्वपश, निजवश, अपवा निगोहाना. पु. का चाण्डाल । निज भरासे । निगार गु. ठोस। | निभाना स.वि. निरेखना, मारना। निग्रह ना० पु. याग, रोक, पिा, चिद, दुपय निझोटना० स० कि० खमाटना, मटर निझोल० गु• झोलरहित, अर्थात् सुडाल, चल. निग्रही गु० ताइनहारा, रोक्ने हारा । न हारा। निघटतः कि. घटतेही। निठुर० गु० कठोर, निर्दय, स्नही विनप्रीति । निपटना य०कि. घग्ना। निरताः निघटाना० स० लि. पटवाना। निठुराई ना. सी. कठोरता, निर्दयता । निघदी०वि० भ० घरी वा बहुत घग्गई। निडर० गु. निर्भय, अशा निघण्ट. पु. औषधि वर्णन, रागरीक्षा । निघरघटा ना. पु. दुलखना, दा करना, निढोल निढाल गु० स्थार, अचल। हिदाई करना। नित अन्य नित्य, प्रतिदिन । मिचय. ना.पु. समूह निचिन्त० गु. चिता रहित, अचित, प्रशोच । निवप्रति म नित्य, प्रतिदिन । नितनय गु.नितनया। निचिन्ताई० ना. सी. प्रेमाद, मुभीना, नितम्य ना• पु० जूता, करिये पीछे का भी निचोड़० ना• ५० काम का पूरा होना या कुछ नितम्धिनी ना० सी० पुरती, सी, औरव । शेषरहना। नितान्त चन्य. अायत, अधिक। निचोदना. स.शि.दराना गारना, नमलेगा। नित्य० अव्य. निवप्रति, सदा, सत्य, निचोडू० पु. लुगरा, गाउयप। दण्ड। . " चला भाग। . प धमरा मङ्गलकोप। अधिक, बहुत, सरासर, सर्व। . . नित्यकर्म० ना० पु. स्नानपूनादि वर्तव्य पर्म निनायो० ना० पु० विशेष, रोगविरोष । शुलव। निन्दक० गु० निदो वरनहारा, नादनहारा । नित्यता. ना. श्री. सदापन, सदैव । निन्दकाई ना० सी० निदाता, निदा । नित्यदान० ना. पु. प्रतिदिनदेना, सत्यदान, निन्दना स• कि दोपदेना, पलकलगाना । साविरदान । निन्दनीय० निदा के योग्य । नित्यानन्द० ना० पु. सर्वदाकाल आनद । निन्दा० ना. स्त्री. दोष, कलर, युरा यहा । निधम्म- ना. पु० स्तम्भ, पीलपाया । निन्द्य गुनिदा के योग्य । निथराल गु० पर्चा, पर्छ । निनावा० ना० पु. रागतिशए । निधारना० स० कि. उड़ेलना, पर्वा करना। निन्नानघेगु. एकोनशत, १६ 1 निद का ना० स्त्री. श्वेत घोरी काई । निपट० श्रन्य. निरानिर, अति, निदरहि० कि० निन्दार, नामाने । निदरना० स० कि. निदा करना। निपटना० अ० कि० चुक्ना, पूराकरना। निदरि० अ० मि. निरादरकर, अपमानकर । निपटाना० स० दि• चुकाना, पूराकरना, टह निदाघ० ना० पु. भीम, गर्मी। राना, निवड़ना। निदान घयायत,पीचे, पूरा, निपट ना०पु. निपटारा. ना. पु. निवेडा, पसला। रोगपरीक्षा, योपरि कथन, अतरिचार, कारण। निपटारू० ना. . निवेरू । निदेश ना० पु० ग्राज्ञा, अनुशासन, पान्हसित कि नाश रिया, मिटाया । निपात. ना. पु• मृत्यु, नाश, गिरना । मोरिनिदेशनिमेट, देउदवायनागतरपैटू, इतिम निपान ना. पु. जलाशय, दोहनी । द्वादच र सहजरामकाव्ये। निपुण गु० प्रवाण, चतुर, दाना । निद्रा० ना० पी० बीघाई, नोंद । निपूता० गु० जिसरे स तान नहीं । निद्रारि० ना. पु० चिरीयता । निफल० गु० निरर्थ, फलरहित । निद्रालु० गु० सभापश, जो अधिक सोवे । नियटेरा० ना.पु. निरतोक, छुटानी । निद्रित० गुरु निंदासा, सोनासा । नियहना० . कि. निपरना, होच्पना । निधड़क० गु० निर्भय, अन्य० यचाना । निवन्ध. ना. पु० व धेन, इकरार गुरुजी निधन० ना.पु. मयु, नाश, धनहीन । ठहर गया। निधरफ० गु.निधड़क । निधन्धन ना० पु. वधन, दहाप । निधान० ना. पु० स्थान, पर, धन, आधार, नियन्धित गुरु जो टहरगया, वाचित । भाड़ा। नियल गु.निर्वल, लाचार युद्दा । निधि० ना० ग्री• कुवेरका एक रत, सम्पत्ति, मा० नियाह. ना. पु० समाप्त, निबड़ा, निर्वाह, मात पु. समुद्र, गु. नी । का पूरा करना। निधिज्ञात मा.पु. च द्रमा आदि। नियात गु• रिकाऊ ना. पु. निपटाम्म । निधिसुता ना० सी० श्रीलक्ष्मी नी। निधेड़ना० स० •ि निपटाना । निनन्द निवडा. ना. पु. शिवटेरा, निपटारा ! निनाद ना. पु. रामद, पा, प्वनि। नियेहि गु० निबाद। निनाया ना.पु० सम्मल । निम.ना.पु. नुस्य, रावर । 1 १८४ मङ्गलकोप। . , H निमना अ. क्रि० निवाहहोना, पारहोना। नियोगः ना.पु. प्राण, श्राशा, तथा मुर निभाना स• कि निवासा, पारसरना । करता निमकी ना. बी. लोनका निम्बू । नियोजन. ना. पु० स्थापन, पाता। निमकौड़ी ना० सी० नीरस फल । नियाजित गुरु स्थारित, रक्ता। निमन गु. ठोस, पादा, सदर । निर० अन्य। निमनाई० ना. स्त्री० पादाई। निरसनास हि दसा, पिलोकना । निमनाना स० कि. पादाकरना, सभालना। निरकार गु० निराकार । निमत्रः निरंकुश गु.सेच्छाचारी,डर। निमनण. ना. पु. न्योता। निरंजन गु. निर्मल, राग रहित, अविद्या निमाना गु० भोला, मैदान । रहित, ना. पु. ईश्वर। निमि. ना. पु. रानाविशेष । निरत गु० प्रति प्रीतिमय, ली।। निमित्त ना. पु. कारण, लिये, भाग, हेतु । निरसक०० पु० मचाया निमिप. ना. पु. थाहादेर, पलक, चाल । निरर्थक गु० झूठ, निष्प्रयोजन, पायदह । निमिपमान ना. पु. अत्यात थोडाकाल । निरन्त: गु० अनरहित, अपरम्पार, ना. पु० निमीलन ना. पु. मृत्यु, झरी, पलक । याराश, ईश्वर। निमेप० मा. पु. पलक, विपल । निरन्तर अन्य नित्यप्रति, जिसमें वियाग नहीं, निम्न गु० नाचास्थान, नीचान, प्रधा। सय, अवर विन। निम्नगा. सी. नदी। निरन्ध० गुरु द्रष्टा, देखने वाला। निम्य ना• पु० नींव वृत्त । निरपराध निम्यक. ना. पुणीम्बू । निरपराधी गु० अपराध रहित, निदान निम्बरफ ना.पु.नीच, चा महानोर । निरम्वु० गु० जलरहिस। निम्बू० ना.पु.नी। निरय ना. पु. नरक, दोजक । निम्बूक० निरर्थक गु० दीला, प्रमादी, अमरीति, अर्ष नियत० गु. जो कागया, सबरी, कायम । रहित, नियोजन । नियन्ता ना० पु. स्वामी, श्रयद, सारथी, नि. निरवग्रह गु० सद, स्वतन्त्र । यतमता। निरवद्य० गु• धानन्दित, यथ्य । नियम. ना.पु. प्रप, वचा, अगीकार, जो निरवारण ना० पु. उभारन, बचान, सुल बुध धर्म का नियाकरे, यथावत । नियमित 'गु• निश्चित, अपविया गया । निरवारना० स० कि. सोला, छोड़ना। नियमन ना.पु. नीम मृद, रोक। निरस गुरसहीन, फीका, बदमशह । नियर० नियरे० अन्य समीप, पास। निरस्त गु० त्यागित, निसका परत न हो। निरस्त्र गु• असहीन । नियराई ना ही समीपवा, निकटता। निरस्प० गु० त्यागने के योग्य, त्यागकिये। नियामक ना.पु. नाविक, नियन्ता। निय गु. के यल, मारा, टेट, रूखा। नियुक्त गु• नियोरित, स्पारित । निराकांक्षी ना० पु. निरपृह, पापादारहित । नियुत० गु० दगलात '......। निराकार० गु• अगरहान, यथा ईश्वर। - मङ्गलकोप। -- निर्दय० । निरादर० गु० अादरहित, अाज्ञायुत, वा अनिर्घात ना. पु० वन, शब्द ! वज्ञा परो हारा। निघृणा० गु० निर्दषा यदौर। निराधार गु० सहारा रहित, अाधार हीन । नि?प. ना. पु० पनि, शब्दा निरामिप० गु. मासरहित भानन । निर्जर. ना. पु. देवता, ना बूदा न हो । निरालम्ब० गु० अालम्बरहित, अवलम्बहीन । निर्जन गु० मनुष्य हीन, जनरहित । निरालस्य गु० श्रालस्य हात, यामानी, मि निर्जननदी ना० सा० श्रागगाना। हनती, उपायी। निजल गु० नलहान, सूखा, पायाव । निराश गु. भरासाररित, पाशा टूगई। निर्जीव० गु० जिसमें जीर नहीं है यथा मिट्टी निराहारः गु० भाजनहीन, विनकुश्साये । पत्थर आदि, मृतर। निरिच्छा गु० इच्छारहित विश इन्चा, निजीस० गु० सार, सिद्धात । नेरिच्छित. निसका युछ चाह नहीं। निर्भर० ना. पु० झरना। नरीश गु० स्वामीरहित, जिरारा मासिक न निरिणी ना. सी. नदा । हो पतिहीन, ना० पु. जीर अर्थात् ईश नहीं । निर्णय ना० पु. निश्चय, ठिकाना, याय, निरीह गु० चेष्टारहित यथा ईश्वर । झगड़ा मिगना। निरीक्षण ना. पु• ताक, दृष्टि । निर्णात गु० निश्चित, निर्णय कियागया। निरत्तर० गु० उत्तरही, लानधार । निर्दई । निरुपधिक गु० निष्प्रयानन । गु० जिसमें दया नहीं है, पटौर - निरुपम बेरहम । निरुपमा० १ गु• उपमा हीन दृष्टा त रहित । निर्दया निर्दयी निरुपाधि० गु० उपाधि रहित, वैतर। निर्दिष्ट गु० जो याची विधि दसा गया या निरुपाय० गु० उपायहीन, सिना उपायरिये । निरूपित हुश्रा या वर्णन हुआ। निरूप० गु० रूपहीन, रािपार । निर्दोप. निरुपण • पु० दृष्टि, निर्पर, जगाप, पिस्तार निदोपी गु• दोषहीन, अक्लकी, प्रदो।' कि कथा। निर्द्वन्दु गु० मिना झगड़ा, येसरक। निरूपित गु० जो पिरतारपूर्वक यहागया या निर्धन गु• धनहान, दरिटी । निर्णय कियागया, निश्चयपुत, स्थापित । निरेपना.म.नि. पिलाना, झामना । प.पु. निश्चय, निपय। निरोग गु० निरोग, मला चगा, रोग निर्धारित गु० निश्चन, निसींत । निरोगी रहित । नियंश गु. शरहित, अमृतान, लारल्द । निरोध. ना. पु. घेरना, पॉमना । नियन्धु गु० बधु रहित, अकेला । निर्गता गु० किलकर, ना. स्त्री निकली। निर्यल• गु० साचार, युझ्दा, निमको सामर्थ निर्गम • पु. जहा नाय ग सके, प्राम। नहीं है। निर्गुण गु• गुग हीन, निकम्मा, मूर्स। | नियंश गु. परा रहित, असमर्थ । (निर्गुण्डी ना० सी० सभात् । नियोज० गुनान रहित, पुपहीन । १ निघण्ट• • पुमापत्र। निर्बुद्धि० गु बुद्धिहीन, मू। निर्धारण mhe निर्गत गु.
मङ्गलकोप। , निम० गु जो समझ में न पाव, मूर्स । निर्विधार गु० सिरहान, निवार, रोग। निर्भय गु० अभय, निडर निर्विघ्न० गु० पिनरहित, मानद निर्वाधा। निभर० गु० पूर्ण, पूरा। निवृत्ति ना. स्त्री मुक्ति, मृयुधानन्द, इल निर्मम गु• ममता रहित । मार्ग तरीक, पथ। निर्मल गु० मलहीन, खद, शुद्ध, माफ, निधर० गु. वर माव हहा। पर्धा। नियाज गु. अचल, घरवारथ । निर्मलता. ना. सी. पवित्रता, सच्छता, नियामिक गु. व्याधि हात, पराग, अकरा । साई। निदर० ना. पु. हरनेवाला। निर्मली०मा० पु. नीन निशा जिससे पाना या निलज गु० निलज, समादीन । स्वछ करते हैं। निलय ना.पु० घर । निर्माण. ना. पु. बनावट, रचना, बनाना, निवान गु० नीचा। क्त्तव, सार। निवानी स.शि. नाना। निर्माल्य. ना. पु. प्रसाद, निवेदित वस्तु, निवार० ना. सी. कार, पट्टी मूनकी। खवता, शुद्धता। निवारक गु० पचानेवाला, रामनघाला। निर्मित० गु० रचित, बनाया गया, निर्माण किया निवारण ना. पु. निषध, राक, पचार। गया। निचारना० स० कि. रोना, बचाना, बरना निर्मूल० गु० हीन मूल, विना नह। निवारत. वि. वचावत, रोत, वर्नत । निवारि० कि. चाय बर, रोकि, नरनि । निवारितः निर्यास. ना. पु. शिलानीत, वृक्षका रस गु• बचायागया, वर्ना गया। निवाचनात.कि.नवाना। अर्थात् गोंद, छाय। निर्याण. ना. पु. यात्रा, प्रस्थान । निवास. ना. पु० बरीने का स्थान, पास, घर । निर्लज गु. ल जा रहित बया Tक्या । निवासी० ना• पु. बसनेहारा, रहनेवाला। निलिप्त० गु• रपर्शहीन, जा लिप्त नहीं है। निविड गु० अधिक, सघन, निहायन । निलेप० १ गु. निसका विह नहीं का लेश नियुकि० अ० कि० झारि, कूदि । निलेश नहीं, विना लाग, सर्व । निवृत्ति० ना० स्त्री० रहाव, रुकार, विधामा मिलामा गु० लाम रहित, दाता । चैन। निर्धन्य गु० दूयाहुया। निवेदन ना. पु. प्रार्थना विनती, अज । निर्वाण ना. पु. मौस, अपवर्ग, लय, गु० निवेदनपत्र ना. पु. थी, नयपत्र । वैकुठवासी, मात्र होगया। नियेदित गु• अस्ति, विनय किया गया । निर्याणसुस ना.पु. मोह, मुद्धि, वैकुठवास । निवेशनः ना. पु० विवाद, शादी। निर्याघार गु. नाथा रहित, अटक १ निशक गुनहर, निस्मदह, विन प्रयास । निर्वाह गु० निगाह। निशा. ना. श्री. रानि। निर्याहक० गु• निराह करनेदारा। निशाकर० ना.पु. चन्द्रमा । निर्षिकल्प १० भेद रहित, अनर्य, कल्पना निशागम. ना. पु. राविका प्राम, सन्प्या हीन। साम, शाम निर्माही ? गु० मादरहित, उदासी। had " मङ्गलकोप। . - } M ८ निशाचर० ना• पु. रातस, चोर, उलूकादि, निष्ट० गु० स्थापित, तपर, उत्तम, उत्कर्ष । चद्रमा धादि नक्षत्र । निष्टमति ना. स्त्री० उत्तमबुद्धि, उत्तमज्ञान् । निशाटन ना० पु. निशाचर। निष्टा० ना. श्री विश्वास, भरोसा। निशि० ना. स्त्री निशा । निष्ठुर० गु० निदर, निर्दय, कठार, अप्रीति । निशिचर० ना. पु. निशाचर । निष्ठुरता० ना. रा. कठोरता, निर्दयता निशिनाथ ना० पु० चद्रमा, चाद। निष्ठुरत्व. ना. पु. निठुरता। निशिमुख० ना० पु. सध्या, साझ । निष्पत्ति ना० ग्री० सिद्धि, समाप्ति । निशिभानु० ना पु० चद्रमा। निष्पन्न गु० कृत, वना, सिद्ध । निशीथ ना. पु. श्राधारात । निप्पादन० ना० पु० सम्पादन । निशीश० ना० पु० चद्रमा, चाद । निप्पाप० गु• पापरहित, निदोष। निश्चय ना. पु० निर्णय, विश्वास, गु० टीम । निष्पापी० निल गु० स्थिर, अचल । निप्रपञ्च० गु० छलहीन । निश्चित० गु० निीत । निष्प्रयोजन • व्यर्थ, मिनाप्रयोान । निश्चिन्त गु० चितारहित, विनाखाये । निष्फल गु० फलहीन, पृथा, पायदह । निश्चेट गु० चेप्टारहित, मृति । निस ना. स्त्री० शिशा। निश्छिद्र गु निदोष छेदरहित । निसक० गु० असत, पोमपरहित । नि श्रेणी ना. स्त्री० निसेनी, सीटी, जीना । निसक० गु० निश्शर । निश्श्वास ना.पु. श्वास, प्राणवायु । निसकट गु० सरररहित । निश्शेप० गु अशप, समस्त, सब । निसन्धि० गु० टोस, सधिरहित । निपाद ना० पु० गाने में पहिला स्वर, चाण्डा निसरना० अ० कि. निक्सना । ल सवरवर्णी, देवर,मलाह । निसांस. ग. ग्राहभरना। निषिद्ध गुरु जी तव्यनहा यजित । निसांसी० गु० तग, हेरान । निपिद्धता ना० सी० निवारण, क्त्तम रहित, निसान० ना० पु. तूर्य, नकारह । निसास ना० पु. पिशास । निसि. ना. स्त्री निशि। निपेद० ना. पु० अदुस, दविया । निसित पैनी • तन, यादिदार। निषेध ना० पु. इयार, निवारण, पनय निसनी ना सी० सादी, नीना । रहित । निसोन ना.पु. औषधि विशेष, गुरु टोत्त निपेधित गुरु यनित, निवारित । निस्तार० ना पु० मुक्ति, मोर, उद्धार । निष्क०० पु. हीरा, १६ ट्रम्मका प्रमाय ! निस्तारा. ना. पु. निषगरा। निष्कएटफ. ना. पु० उपाधिरहित, बेधड़क । निस्तारना० स० कि. निरंतार करना। निस्कपट गु० सय, सपा, बलहीन, भोला। निस्तेज. गु० प्रतापहान, तैनरहित । निएफपं० पु.निश्चय । निस्तोक० ना.पु. पीता, निपगरा। निधारण गु० मिना प्रयोजन, पे सर । निस्पद. ना.पु. निश्चैट, दिसार निफेवल गु. एकही, सयकर। निस्पृह० गु० लालसाहीन । निषमण ना.. सरकार विशेष! निस्प गु० निर्धन, दरिछी। १ .
“१८ मङ्गलकोप। है . म निस्वना गु० पनि, शब्दा | नीतिशा गु० धार्मिक, न्यायो । निस्सन्देह० गु० सदेहरहित, तर । नीद ना० सी० नदि। निग गु० नगा, अचित । नीदना सकि. नामानना, मुकरजाना । निहत्था० गु० प्रौया, अन्य रहित, तुला, हाथ नीप० ना० पु. कदमवृक्ष । रहित। नीपुर० ना० पु. निह। निहाई० ना० सी० लोहेको वस्तु विशेष निरूपर नीयो० ना० रा बोडी, जो स्त्रियागौवापनी है। सोना आदि गढने हैं। नीबू ना० पु. गम्बू । नीम. ना.पु. नीं। निहानी ना. स्त्री रज, कपड़े। नीमनगुनिमन । निहार ना• पु० अधकार, कुहिरा, रामायणे नीमायत नारी• मामानन्दस यासीका पप । यथा, निमिनिहार में दिनारदुरा, दृष्टि । नीर ना.पु. जल, पानी । निहारना० सकि देखना, तिलोकना,कफना। नीरजा ना० ५० कमल, जो जलजातहो । निहारा.स.नि. देसा । नीरथ गुरिर्थ, निपल । निहुरना • कि लचना, साना, दवना। नीरद० ना० पु. मेष । निहुराना स० कि० लच'ना, झुकाना, दवाना। नीरधर ना० पु. मेष, समुद्र । निहोर० । ना० पु० कृपा, उपरार, विनता, नीरस गु० निरस रमहीन, पांगा। निहोरापुमलाइट, मुशामद । नीरोग गु. निरोग, यारोग्य । नितिम गु० जो नि देप, क्यिाना, त्यागित। नोरोगी गु० चगा, भला, रोहनि । निक्षेप ना. पु. परित्याग, धराहर। नील गु. कृचार्य विशेष, काला, न. पु. नींद ना. स्त्री. श्रीधाई, निठा। वस्तु विशेष जो वृनके पत्तों से बनाते हैं मुर नीदना . नि. सौना, स०कि. मुकरना। वानर सौ सर, १००००००००००... । नींदू गा.पु. सोया। | नीला गु० नाला, ना.पु. नालाग का हरिण नींय ना. पु• वृत विशेष, निम्न । विशा, बीनगणित में विशेष प्रमाण । नीबू ना० पु. लाभू , फल निशा नीक गु० भला, अच्छा। नीलकण्ठ ना.पु० पक्षी विशेष, मोर, अग्नि योर श्रीशकरजी। नीका नीको गु० सुन्दर, भला, प्रधा। नीलगवय. ना. पु. नीतगार, रोक। नीलगार ना.पु. रोक। नीच. गु० घोग, कमीना,हीन, मित,निकम्मा। नीलता. ना. स्त्री० तले, हेठ) नीलत्व. ना. पु. नीचगामी गु० जो नाचनाता है, यथानल । नीलपर्वता ना.पु.पियका एकभाग, नीचा गु• ऊचे के विरुद, नमेर। उड़ीग के ददिषहै, हरिद्वार के समीप तीर्य नीचाईना. सी. हे गई, नीचापन । नोचे अन्य. ढले। | नीलपुष्पी० ना. सी. विशुक्रान्ता, अजसी। नीठ. गु नुहाग। नीलमड़ी ना. सी. नीलकी बट्टी। नीति. नार स्त्री. उति, व्यवहार, रीति, नीलम नीलमणि ना. पु-मपि विशेष श्यामना, पालापन। . विशेष 4 .
. मङ्गलकोप। है . नेनाम्बु. ना. पु. श्रा नौखएड. ना. पु. पृथ्वी के नौ सरड नेत्रोपमा. नासौ. वादाम, मासाकी उपमा नौगरी ना. सी. नागरी । नेत्या ० ना. पु. पश्चिम और दादेव का नौछापर ना. पु. निद्यावार । कोण, राक्षस नौदना प्र० कि० भुकना, निहुरना, प्राधीन मैकट्य. ना. पु. निपटता। होना। नेक गु. थोड़ा, अल्प। नौदाना० स० कि० फुकाना, निहुराना । नैजाना अ.मि. झुकना, निहुरना । नौतना० स० कि. नेवाना। नैना ना. पु. नन, पमहा। नीता ना. पु० नेवता। नेपाल ना. पु. ताना, देश विशेष, नीति का नौमासा ना• पु. गर्भ से न मास का प्रतिपाल। नेपाली ना. पु. मनसिल, नेपालवासी । नौमिकमि नमसार परताइ । नपुण गु० निपुण । नौमी० सी० नवमी, नवी निषि । नेपुण्य० ना. पु. निपुणता । नीरतन ना. पु. नवरत। नैमित्तिक० गु. समया निमित्तका । नौल. ना. पु. नवरा। नैमिचिकदान ना. पु. समयपाय देना । नौसादर ना० पु. पौषधि विशेष । नैया ना. स्त्री० नावडोटी, सेवर, हाही। न्यधार० ना. पु. कुत्सा। नैयायिक. ना. पु. •यायशाम दा शाता, न्यग्रोध ना• पु० नर्गद या वृक्ष । ताकि। न्यस्त० गु• सोपाभया, कोपित । मैमष्यना. पु. निर्मलता। न्याय. ना.पु. भ, विचार, तर्कशाप, विशा नैव. ना. पु. देवता के भोजन की सासमी, प्रेसला। কন্সয न्यायक. ना. पु न्याय परनेहारा । नौष्ठिक गु• विश्वासी, निष्टात । न्यायशास्त्र ना. • तर्यशास्त्र ! मेहर० ना. पु. सी. का मेगा । न्यायी. ना. पु. न्यायम्, न्यायशाम्न । मा. मोपच्या नहीं। नहारा। नोखा न्यार.ना.पु. चारा। पाप गु.लग, निराधा घना। मोब.ना.पु. कोर, पुटकी न्यारिवा- गु० सचेता, पोकस । गौचना. स.कि. फोटना, मुटकी लेना। न्यून० गु• छोय, पार, होन, मा. नोन.ना.पु. लोन । न्यनकोण ना. पु. दोटा कोना। नोना० स० कि.दुहने के समय गाय के न्यूनता ना. सी. घटती, मी। म्यूनत्य ना.पु. बाधा ना.पु. सीतात विशेष न्यूनपय० शु• पम उमर । मोनापानी ना. पुः सवपा, राप्रदका जत। न्यूनाधिक ना. पु• होगा । मोनिया ना.पु. सोलिया। पीतनाविनेगाना। नोय कि.स्ते समय गायक पानाना। न्यौता० ना.पु. नेवता। नोमी गु० घन्टा, अनारमा F १६२ मङ्गलकोप। पचौतरा ना : सैरदा पौथे पाच लेना, । पच्छिमा ११० पश्चिम । 3 साल ग्रोदना पंखा ना० पु. ना, विजना। पचोतर पंखिया० गु० बखेड़िया, झगाल। पसी ना० पु. पता होगा, छोय पती, पचौनी ना. स्त्री० श्रोझ, झोम । परन्द। पचर० ना. स्त्री. फणी, ठेक पंगता पच्छम० मा० स्त्री पक्ति, श्रेणी, घरी। पंगति पंगुला गु० लँगड़ा। पछड़ना या कि गिरजाना, हटगाना, पचक० ना० स्त्री०सूस । | पछरना श्राधीन होना। पचकना० अ० वि० खना, सूना उतरना पडताना० स० कि० पश्चात्ताप करना, पीने को पचखना०. पाचसएड वाला। सोचना, अपसोस करना। पचघरा० ना.पु. पर विशेष जिस में पाच पछतावा ना० पु. पश्चाताप. शोच। घर हों। पछना ना.पु. गोंटी, सोदवाई, चारा, अन्न पचतोरिया ना० ५० यसविरोष अर्थात् विशेष । पचतोलिया पछनी० ना. सी. शरीर के चमड़े में चौरा पचना०० कि० सडना, गलना, भरमहाना, परिश्रम करना। पहरा० गु• गिरपसा पीद को हटा । पचपचाना च० कि. गोला वा ढीला वा भीगा पछवा. ना. पु. पवन जो पश्चिम से पाताहै । होना, पसीनाग, सड़ना। पछाड़ ना० स्थी. पटकन, परने का काम। पचपन- गु० पचास और पाच, ५५ । पड़ाहना स. नि. गिरादेना, आशा पचमिल गु.निधित, मिलित । पछारना करना, परपना। पचमेल. गु. पचमिल । पलाह ना. पु० पश्चिम । पचम्पचा ना. श्री. दामहल्दी । पछ्याना० स० वि० पीछा करना। पचलड़ाना.पु. पदाइ ना. सी० फटपना पटकाव, फटकने पचलोना ना. पु. पौषधि विशेष। का दम पचाडालना० स० कि० पचाना, सहाना और पडोड़ना० स० कि. फटकना, यूपमें डालके सापनाना, हद्धमाजाना। पोरनाक उचालना। पचानवे गुनले यौर पाच १५ ॥ पजोड़ा गु. निकम्मा, पानी। पचाना स. कि० पकाना, सहाना, हजम ! पंच० गु• पाच ५ ना. पु० जाति के चौधरी, पार्यादि के विचारफ, सभा, ५ मनुप्ण, कमान करना। पचास गु. पाच दहाई,५०। कारोदा। पचासी गुपस्सी और पाच, पंचका. सी. चिप्ता, रोदर पाचकरना। पचीस० गु. नाम और पाच, २५ । पंचकोश. ना. पु. पाचीश अयोन, अश्मय, पचीसी०मा० रखी. सस विशेष प्रापमय, मनोमय, विज्ञानमया यानद । पचका० ना.पु.पिचकारी। पंचगव्या ना• पु. पाच पदार्थ नो गाय से प्राध पचनदि पदाहि. दुसराता है, पवाहै।, होते हैं यदि इध, दही, घी, गौमूत्र, गोमल । पचलड़ी नामा: गु• जिसमें पापलड़े हो । पछियाय ना• g० पश्चिम का पवन । A ८ TA + मङ्गलकोप। १६३ H 1 . पंचज्योनार ना० पु. पाचप्रकार की ज्योनार पालस्य, दौडना, चलना, पसारना, समेटना,. अर्थात् मो य, भक्ष्य, लेख,चौर्य, पेय, कूदना, राग, देश, लान, भय, मोह, २५ ।, पंचतत्व. ना. पु. पाचतत्व अर्थान् श्राकाश, | पंचनन ना. . सिह, व्याभ । वायु, अग्नि, जल, मिट्टी, ५ । पंचविरोधी० गु० सयका बेरी, दुष्ट । पंचतन्त्र० ना. पु. पाचतर अर्थान् वशीकरण, परशर० कामदेर । मारण, उच्चाटन, मोहन, श्रावण । | पंचशाखा० ना. पु. हाय । पंचत्व० गु० मृत्यु । पंचसूक्ष्मवायुना पु० पाचसूक्ष्म वायु अधीन पंचदश० गु० पद्रह, १५ । नाग, पूर्म, कृरल, दादत्त, धनजय । पंचदशानर्थ ना० पु. पद्रह अनर्थ अर्थात् पचांगुल० ना० पु० दोनों अरगट, पाचनशुल । चोरी, हिंसा, मिथ्या, दम्भ,काम, क्रोध,विरम | पचांगुली० ना० स्त्री० पाच अगुली अर्थात् रण, येर, अप्रतीति, भेद, भय, खेद, चिता, अगुष्ट, तर्जनी,मध्यमा, अनामिका, कनिष्ठिा। सोम, सर्वस्पी, १५॥ पचाध्यायी० ना. सी. श्रीमद्भागवत ये रास- पचनखील ना० स्त्री. गोह । मण्डल के पाच अध्याय या समुदाय । पंचपल्लवाना०पु०पाँच वृक्षों की पत्ती वाडाली। पचानन० ना० पु. श्रीमहादेवजी, सिंह । पंचपात्र ना. पु. पूजाका पात्रविशेष । पंचामृत ना० पु० दही, दूध, घी, मधु, शकर पंचपुराणलक्षण ना. पु. पुराण क पाच ल की मिलोनी जा दवता हेतु बनाते हैं। जण अधत् सर्ग:प्रनिसर्ग,पश,मन्वतरमशानु' चरित। पवायत ना. सी. बहुत मनुष्यों को मनिवा पंचमाण ना पु० पाचप्राण अर्थात् प्राण, थ मनुष्या का समूह, जिसमें झगडा निपटायानाला है, वा जातिकी सभा वा समुदाय । पान, उदान, समान, व्यान, ५ . पचाल. ना. पु. देश विशेष । पचभूत० ना. पुपचत । पंचालिका० ना० स्त्री. वैश्या, पतुरिया । पंचम० गु० पाचवा, रागका सरविशेष । पचाली ना० स्त्री० वैश्या, द्रोपदी। पचमांश० गु० पाचवाभाग। पंचावन गु० पचपन, ५५ । पचमी० ना० सी० पाचवीं तिथि, व्याकरण में पचास गु० पचास, ५.। पाचवाकारक। पचास्य ना. पु. श्रीमहादेव जी, सिंह, गु. पंचमुख० ना. पु० श्रीमहादेवनी । पाच मुमवाला। पंचम्यन्त गुजिसरे अतमें पचमीका प्रययहे। पंचीकरण-1 गु. पाचकाफियाहुश्रा, पा पाद पंचवक्ता ना" पु. श्रीमहादेव जी। पंचीकृत पाच रियागया। पञ्चविंशति । गुरु पच्चीस, २५ पछी ना० पु. पती, चिड़िया । पंजर० ना. पु० पासली, पामर, पिनरा। पंचविंशतितम गु० पच्चीसा। एजरगत पिजरे में। पंचविंशप्रति ना० सी० पञ्चीम प्रवृति पंजायना पु० देशविशेष जिसमें पाच नदि- अर्थात् अस्थि, मास, क, रोम, नारिया,वार्य, या है अर्थात् सतलज, व्यासा, रातो, चिनार, मूर, रक्त रसालार भुस, प्यास, नींद काति, निलम् । प P - . २ मङ्गलकोप। - + . पंजापी० गु. पगाव देशका मृनुप्य वा वस्तु । पटा० ना० पु. गदा, पीडा, पौदी, पलिया । पंजी ना. सी. ओषधिा कोष, जो ना पटाफ ना• पु. धड़ाक, शराट । खाता है। पटाका. ना. पु. घनदर, पातशबाजी पटना. पु० स्पडापद्धति, गिरने वा मारने का। विशेष, घड़ाया। शब्द,दार का रिवाड यादि टका, गु० उलग पटाना० स० कि. भराना, चोग गौवर से पुलग पर। लगाना, मिट्टी से लीपना। पटकन ना. सी. पदाइ चोर। पटपटना पु. चराचर। पटकना स०नि० देमारना, पटादेना, अ. पटाय० गा.पु. सींचात, भरार, पररा जो कि० चरचराना, परना, ना. पु० कोड़ा। द्वार वा छतपर डालते है। पटकाना० पु. वर्धनी, कमर बापने का क पटिया. ना. स्त्री० पटरी। पटीना ना० पु. पतीविशेष । पटफाजाना० अ० कि० दवा, पतितहोना, पटीमा ना. पु. वस छापने का बड़ा परा। गिरना। पटीजना० स० कि० मारना, पीटा, बाधा पटकाना पटकारना स० कि० पटकमा, देमारना। करना। पटकीदेना पटु० गु० चतुर, नियुप, ना पु० वस्तु, ना पटश्चर.ना.पु. पुरग्ना वरना यथा पच्चर चिकनी, गु• सुन्दर। जीर्णवस्वमित्यमर । पटुता ना० सी० चतुराई, निपुणता,सदरता । पटड़ा ना. पु. सिली वेटने के लिये काटा | पटुमा० ना.पु. पार, सन । श्रासन, चीनी, पोदी, पीडा, तरना। पटेर० ना. पु. पौधाविशेष, गोंदी । पटतर० ना.पु. तुल्स सदरा, नरारर । पटेत. ना. पु. धूदाधिशेष । पटनल ना.पु. पटने का काम। पटेल ना. पु. लठियाने या घाम, प्रभुता, कु. पटना. स.वि. चाका बनना, दपना, भर. रमी, जातिमें प्रधान,महाराष्ट्र की पदपी। जाना, भरना, भरपाना, ना. पु. नगर पटेला०२० पु. नावविशेप,ना मी० सरावन । विशेष। पटेली नाबी.छोग परेसा। पटनी. ना. पु. नगा। पटेखा ना• पु• पटरा। पटपट० ना. पु. भुनने का वा मारते वा या पटोतन. ना. पु. पर। • पीटने या शम्दविगैर, चटचट । |पटोर० ना.पु. रेशमीवल, पाट। पटराना.पु. पटड़ा, ऊना। पटोल० ना•• पलवल । पटरानी ना. स्त्रा रानी, शहजादी। पटोहिया. ना. पु. उल्लू।। पटरी ना. सी. घोटापटरा, पदीया, सपरा 1 पटोनी ना. स्त्री नैया, पटनी । टल० ना.पु. अभ्रक, अपरादक, सहापट्ट ना.३० पर, पत्र । पटवा. ना.पु.जातिविशेष, पटना। पट्टन० ना. पु. नगर, पुर । पटवाना स.कि. पारना, भरसाना । पवन ना. पु. रेशमी कपड़ा। पटवारा ना. पु. धरती का लेखा/ पट्टा गा० पु० घोड़ेगी पनी कुत्ते के गले में वा. पटवारी तगानेहारा। धनका चमड़ा, कानों पर रसायेहुरे बाल, 4 + . 10 or मङ्गलकोप। १६५ . L मान। पठाना० पठौना ना. पुर लिखतग अर्थात् सन आदि की सनद । पट्टी गा० सी० पारी, बधनी, पापड़ा । पढ़न्तिमा पदन्त ना० अध्याय, सस्था, विद्या, किसी स्थाा प्रादिका भाग, शाराकाण्ड । पढ़ा गु० चतुर, पण्डित, बुद्धिमान । पटू ना. पु• बनान की चादर, ऊर्गवस पढ़ाना० स० कि० शिक्षा देनी, मितलाना, न विशष । ताए। पट्ठ० ० स्त्री. यौना, थाढ़े दिन की पढिन० ना० पु० मत्स्यविशेष, मछलीविशप । बकरी। पढ़या गुरु पदा १ याग्य । पट्टा० ना. पु नपयावा, पारा, पुरती लड़ा पढयमान०॥ हारा, रागविशेष, निसका लापत्ताहो । पण..पु. प्रतिज्ञा, अवस्था, कमाई, माल पठ० ना.पु. पढ़त । चार कारिणी अर्थात् बीसगण्डा कोटी। पठकायन्० ना० स्त्री. पाटक की पसी। पएडा०1० पु० पुजारी, दवालय का प्रधान । पठन ना.सी पढन। परिडत. गु० विद्वान, गुणवान, पदा, चद्धि पठचाना सकि. भजनाना। पण्डिताई १० वी, पडितकाकाम वा दिया । पठिया० . स्त्रा० गयौपना खी, नई परिडतायन: ० पु० पडितक्षा जोस । बरी। पण्डियायन्० नासी. पाड़ का नारू। पडुब्धी० ना० स्त्री. जलपा, पुर्माना । पडसी० ० सी० कपाताहति पनाविशप, पड़ना० अ० कि० गिरना, देश करना, चारनी फाखतह । करता, लटना। पंडुरो० ना. सी. पतीविशष । पड़पड़ाना अ० कि. बडवाना, सना । पतग० ० पु. पती, चिड़िया । पदाना० स.नि. गिराना, लिगना। पतग० ना० पु. बाग उड़नवाला जतु तुक्ल पडापड़ अन्य. बारवार मार। विशेष लरडीविशप, रगविशप, सूर्य पसी, पडापाना० स० वि० सहन से पाना, काई अग्नि, वृतविशेष । वस्तु मार्ग श्रादि में पाता। पतंगा० ना० पु. चिंगारी, जतु पतगविशेष । पड़ाव ना. पु० टहरार, पवार, टिकासर, पतझड़ गु. पत्तोरा गिरजाना, ना सी. रिकने का स्थान, सना, भीड़। ऋतुविशष। पडायना० स० कि० पड़ाना । पतग ना० पु. पटरन, पचाइ, गिरन । पढ़िया शास्त्री० मैस की पदिया। पतना० ० कि० पड़ना गिरपड़ना । पडोस. ना. पु० समापता, निस्टता। पतला गु० दुवला, मीना, जो गाढ़ा न हो। पोसिन्० ना० स्त्री० पामिनी स्त्री, ममाप पतलाई० ना० स्त्री० दुर्वलता दुबलापन् । वासी सी। पतयार ना.पु. वनहर नाव के पिछाड़ा पड़ोसी. ना. पु. निफ्यासी, पास रहने पतवात का डाड़ीपशष। हारा। पतत्रिपु. पक्षा, चिड़िया । पढ़नः ना० बी० पढ़ने का मार्ग । पताना. पु. चिह, निशा पदना० स० कि० बाचना, पाटकरना, जपना। पताका ना. सी. वजा, छोटी मी पठौनीना. सी. } पठाना। 2 4 ।
१६६. मङ्गलकोप। .पतिदेव० . पताल० ना.पु. पाताल । पररथा ना.पु. पती, चिड़िया । पति ना• स्त्री प्रभु, स्वामी, रजत, मुख्याति।) पना ना० पु. तिपिपत्र, यत्री। पतित गु० भ्रष्ट, दोषी, जो गिरगया । पत्रांक ना.पु. पत्रकी सख्या । नाः स्त्री० पतिव्रता श्री, राम पनिका० ना. सी. चिट्ठी, पनी । पतिदेवता चद्रियाया, तू पतिदेवनका गुरु पत्री ना. सी. चिट्ठी, पक्षी, वृक्ष, वाय, बेटी, तेरी यम् मृत्यु कहारत चेटी। कमला पतिमा ना.स्त्री प्रतिमा। पथ० ना. पु. मार्ग, बार, राह । पतिया० ना. सी. पी, चिट्ठी । पथरकला. ना. पु. पन्दूपविशेष । पतियाना० स० कि० प्रतीति यसा, भरोसा पथरचटा गा.पु. पोधाविशेष । रखना। पथराना० अ० लि. पत्थर होजाना, पड़ा पतियारा. ना. पु. भरेसा, प्रनीति, विश्वाम । हाना। पतिवता० ना. सी. सापी, कुलाती और पथरी ना. नी. किरकिर, श्राकर, करी सुधर्म स्त्री चकमका पत्थर ना मुनरी बदकरता पतीरी ना. स्त्री. चाई विशश । है, मटीविशेष, पता भीतरीयग विशष । पतील.गु. पनला। पथरीला गु० भूमि जिसमें बहुत पत्थरहों । पतीला० ना. पु. मी मलाई, तोली, तसला पथिक गु• पु० शाही, मुसाफिर, राही । पतीलीना. स्त्री. छोग पतीला। पथ्य ना० पु. रोगाका पाहार, सातारा, उप पतुकी ना. वी. छोटी पाही, पत्तों का कारी पस्तु, मुफीद। पात्र पथ्या० ० स्त्री०६८। पतुरिया० ना. सी. वेश्या, गरिसरा। पद० मा. पु. चरण, पार, अधिकार, महिमा, पतुहिया ना० स्त्री० पताह, बह । पनि, स्थान, शब्द मरूप, पलिमा । पतोह ना० सी० सह, पुनकी स्त्री। पदग० पतौरा. ना. पु० सेंटाकी पत्ती । पदच्युत गु• महिमासे जो भ्रष्ट अधिकार से पतौवा० ना.पु. पत्ती बदलजाना, बदला। पत्तन० ना.पु. नगर । पदज. पु. पावकी अगुली। पत्तर० ना. पु० पत्र, कर्क। पदना. ना. पु.१ पदपर, पद, डरपोक- पत्तल ना. सी. पकापात्र भौजा लिये। पदनी ना. सी.ना। पत्ता ना० पु० पात, दल, भगली, गहनारिराष पदपटी० ना. स्त्री• एकमकारका स्य। पत्ती ना. सी. पाती, भंग। पदपत्र० ० पु. पहारमल, यमल ये पत्ता, अधिकारका पत्र । पत्थर०ना पु० पाय शिला पत्नी ना. सी. भाग्यो, विवाहानारी । पदपीठ ना.पु. साऊ, जूता। पत्यारोना' पु. पतियारा!, पदम गा.पु.पा पत्र. ना. पु० पता, चिट्टी, पत्ता, बादी सोने पदयी ना. सी. पति, पराकम, पारपद श्रादि का पख। माग, अधिकार । - पदचुर० २० पैदल, पियादा। ८ + . । .
मङ्गलकोप। T है । लोनी। पदवृत्त० ना• पु० शब्द, जो दो शब्दोंसे मिलि पधारना० अ०० विदाहोना, नाना, स्थिर त हो। करना। पदस्थ ना० गु० जो अपनी पदवीपर स्थिरहै। पन० ना० पु. पण, अपरधामोधर यथा वाल- पदनाण. ना. पु० जूता। पन, पानी। पदात० ना. पु. पैरवीमास, चरणका पात । पनघट० ना• पु. पानी भरनेका पाट । पदाति ना. पु. पैदल, पियादह, सेवर । पनय० ना० सी० रोदह, चिल्ला । पदाना० स० कि. वायु छोड़ाना, डराना, खेल पनची ना. सी. यह की जो पानी से में हराना। चलाते हैं। पदाभिपित नापु० रा यरधान में नो अपनचोरा. ना. पु० पारपिशप । भिक्ति हो। पनपनापक्रि• मोटा होना, प्रफुल्लित पदार्थ० ना. पु० वस्तु, अनूप वस्तु और शन्द होना। पा थर्थ, द्रय १ गुण २ कम ३ सामा य ४ पनपनाहट ना. सी. सनसनाहट । विशेष ५ समवाय ६ अमार ७, ये सात । पनभत्ता० ना. सी. पानी धार भानपी मि- पदिक. ना. पु० जड़ाऊ चौकी, हीरा । पदुत्तमा ना• पु० सेंधरली, उत्तमपदवी। पनव० ना० पु. टोल। पदोडा० गु० पादू, पदफड़, डरपोक । पनवार० ना० पु. पोधाविशेष, राजपूता में पहराग० ना०पू० पतगवृक्ष । जातिविशष पहली० ना० सी० पाडरवृत्त । पनवारा० ना.पु० पत्तल । पद्धति० ना० स्त्री० पदवी, मार्ग, दस्तूर, रीति । पनवारी ना. सी. जिस स्थान में पान उप- पद्म० ना. पु. कमल, चिह जो चरणादि में होता है, विष्णु का अस्त्रविशेष, सोनील, पनस० ना०पू० वटहल । २...०.००००००००००। पनसल्ला० ना० पु. पियाऊ, जहा पधिकादि पद्मक भा. पु. पदमाक मुख्य साम। यो पानी पिलाते है। पनकर्कटी० ना० पु. यमलगहा। पनसा गु० पास, अलोना, ना.पु. छालादा। पद्मनाभि. ना.पु. श्रीकृष्णच द्रका एक नाम | पनसाप ना. पु. औषधि, वियना चादि। पद्मराग० ना० पु. लालमणि, माणिक । पनसारी ना. पु० किराना पेचाता। पमा ना० स्त्री. लक्ष्मी, माही नदीविशेष। पनसाल० गा.पु. पनसम्ला। पद्माकर ना. पु. कमलयुक्त तालार, समुद्र पनसोई० ना. सी. छोटी गारविशेष । धनवान्। पनहा० ना.पु. पता, चिद, एराग, चोहार पनाह ना.पु. कमलगट्टा । वलया। पद्मावती० ० सी० पुस्तक विशा, पमिनी, पनहाना०प० कि० दूध उतरना, पहा । छदविशेष, नदीविशेष। पद्मिनी ना. सी. कमलिनी, उत्तम श्री। पनदारा० ना. पु० पनमरा । पनहारिन्०१ ना० सी० पान भरनेहारी पद्मी० ना० पु० हाधी। • पनहारी स्त्री! पच. ना. पु० श्लोक, छद, नाम । "पनही गा.की. जती ।
मङ्गलकाप। - . प पनारा० ना. पु० । मोर नावान, पद पयोदधिः ना. पु. क्षीरसमुद्र अर्थात् पनाला पयोनिधि० दूध या जलपा समुद्र। पनाली ना.खी मोटा पनाला पयस्विनी ना. सी. विदारीपन्द, दुधारगाय पनिया ना. पु० पानी, जलका साप । श्रादि, श्वास जो राय काम प्रशशिन है। 'पनियाना० स० कि. सींचना, भिगामा, अ. पयान. कि पानी भर याना। ना.पु. चाला, विदा। पयाना पनियाला. ना. पु० फलविशष । पयार० ना० पु. तृपविशेष । पनीहागा. पु. जलजन्तु । पयोधर० ना. पु. स्तन, चूची, मेघ, तणविशा, पन्ध० ना. पु० मार्ग, मत, धर्म, अर्जन । मदारवृत्त, पर्वत, समद्र, राना। पन्या० ना० पु. पन्थ। पर० गु. दूसरा, दूर, पराया, शिरोमणि पर, यस्य. पन्यान० ना. पु० मार्ग, पार, सड़क । उपर, डारा, उपरात, त पर। पन्धी० १० पु. हरनी, माया, जीव ईश्वर, परकना या कि० सधना, अभ्यामा होना। अभिमन्यु पथिर, मतावलम्बी। परफाज. ना. पु. पायाकार्य, घर का पन्नग० ना.पु. साप । काम। पनगपति ना० पु. शेष, सर्पराज । परवाजी० गु. पराया काम करनवाला वा पपगारि० ना. पु० गरुड, मोर, नेवला । शाचनेवाला, परार्थी। पत्रा० ना.पु. रलविशेष, पर । पन्नी० ना० सा• सुवर्ष इत्यादि का बहुत सूक्ष्म परकाना० स० वि० सधाना, मिसा।। परकाय० गु० दूसरेका, पानया। परकीया० . स्त्री० पाई स्त्री वा परपुरुष पपडाना० पुटुकड़ा, नर । रत स्त्री। पपड़िया० ना. सी० भाग पपडा। पपड़ियाकथ० ना. पु. श्वेत कया। परस्त्र.ना. स्त्री. परीक्षा तराया। पपड़ी० • सी० देवली, बिलका, परत, पा: परसना स• कि परीक्षा करा, नाचना । विशेष। परसाई गा० घी• परसनेका पाम पा उसका पपड़ीला गु० परतीला, पपड़ादार । परखाना० स० कि० परीक्षाराग, नावाना, पपनी ना.स्त्री० वरना । परखा. पपराना.पु. पपडा। परवैया गु• परीदर, परसोदारा। पपरी ना. सी. पपड़ी। पपीहा ना० पु. चूहेमार, तुर्मती, पदी शिष परचा ना० पु. परीक्षा, इनहान । जो कभी पानी न यादिका नहीं पीता है ।। | परचून० २० पु. भाग दालि अदि। पपैया ना० पु० खिलोना विशेष, वृशेष परचूनिया गा• पु० बनिया, परचून बेचने वा उसका फल। ना०पु. दूध, पानी, अमृत, दोष अव्यः परची० ना० पु. परीक्षा, परसयरा, महान। पय ऊपर, तौभी। परछिद्र ना.पु. पराया वेद, पराया मेर। पयद ना.पु. मेध, गाय ।। परजंकना पु० साप, सेन । पयोधि० .पु. समुद्र। परजाना. श्री. प्रना। पत्र। . पैसा । 4 h हारा पय० . -- मङ्गलकोप। १६४ . ? परत ना० पु. लह, पपड़ा, तह । परमविरत० गुः योोसर, सिद्ध, अतिली। परतंत्र० ० पु. पराधीन जो और के प्राव है। परमहस० ना. पु. योगी विशेष । परतल० ना० पु. डैराउण्डा। परमझान० ना० पु. शुद्ध विज्ञान । परतवा० ना० पु. डार, निसम तलवार रस परमा० ना० स्त्री० शोभा, माति। परमाणु. ना. पु० अत्यत पूरमवस्तु । परताना. पुपरेता, चरखी, पाव । परमात्मा० ना. पु० परमझ, भगवान, ईसर । परती ना. श्री. पनर, पहाई धरती या क परमानना पु० पायस, सार। पड़े स पवन करके पर साफ करना । परमायु ना. पी. जीवनराल, समल, परमायुप० थायु। परतीत ना० सी० प्रनीत, निश्चय । परमार्थ ना० पु. कार्य वा व्यवहार जो सब परदादा० ना० पु.दादारा वाप। से उत्तम है, कौत्ति, पुण्यत्तत्त्व वस्तु । परदादी० ० श्री. दादे की माता परमाया गु० भक्त, वीतिमान् उत्तमफाप्यों। परदार० ना. सी. पराई स्त्री। परमीश मा० पु. परमामा, सोप परदारा० परमेश्वर रिस्थ, ईश्वर । परदेश. ना. पु० ग्रानदेश, विदेश । परमेष्ठी० ना. पु. ब्रह्मा । परदेशी० गु० अायदेशी, अनजान, विदेशी। परमोधु० मृर्छना, बेहोशी। परद्रोह० ना० पु. परायावर, पानका विरोध । परम्परा. ना. स्त्री० क्रमागत, प्राचीन । परद्रव्यग्ना० पु० परायापन । परलोक ना० पु० वर्ग, मग्ने के पीछ जो परधन ना० पु० पराया द्रव्य, परायाधन । लाक। परन० ना० पु० प्रण, प्रतिज्ञा, परण । परचर० परनाना० ना० पु० नाना का बाप, प्रमातामह । परवल. परनाला० ना.पु० मोरी, नारदा, परवश परनामी स्त्री नाला। परवस० वितु, लेकिन। पखह्मा ना. पु. परमेसर। परपंच. ना. पु० अपच, छल, धोखा, फपर । परशाद ना.पु० प्रमाद। परपंची गु० प्रपची, छली, कपटी, लपारी परशुरु ना.पु० परसा। परपराना० अ० कि. चरपराना । परशुधर० परपराहट ना० सी० चरपराहट ! | परशुरामठा प्रातार । परश्या अन्य परसों। परपुष्टा० ना० स्त्री० कोयल पक्षी। परस. ना. सश, हुआदर। परपूरन० १० परिपूर्ण, भरपूर । परसना० स० वि० गुना, परोसना।। परपठ० ना० पु. हुएदीका उतारा।। परयाना पु० पर्च, उमा, अप्याय, त्योहार। परसी० ना० पु० मच्छी मार, रामद्रिकाया परसिया० ना. पू. इसिया। परवल० गु० प्रपल । यथा, वंक हिये न ममा सरसीसी, कर्दम याम परम गु० उत्कृष्ट, श्रेष्ठ, ग्रंयुत्तम, बड़ा। फ्लू परसीसी, कामा कामिनि होरि गसीसी, परमल ना० पु. पर्वस विशेष मौनमनुष्यन की वासीसी, कि. मुई, मिली। ना० पु० पलाल, तरकारी विशेष । ४० प्रवाधीन, पराधीन। ram 1 परन्तु अव्य० ना० पु. विष्णु नारायण पा P " मङ्गलकोप। . २०० m - भोग। 7 विशेष। :: - . 7 परस्त० ना.पु० रोग विशेष पराया गु. चौर रा, दिवाय का। परसूतिया परारा गु० पराया। परस्ती गुनिसको परसूतरोगहो। परालब्धि ना. सी. भाग्य, दैवगति, दि. परसा अन्य अगिला वा पिवला, तीसरादिन । तीय जन्म अर्थात् पिछले जन्म कर्म का फल परस्पर० अन्य. श्रास में । परहित ना.पु. परायाराम, परवार्थ, परावती. ना. सी. पारनपा की। परत्र० अन्य. परलोक में। परावह ना.पु. मुख्य पान । परा. अध्य० मिस शब्द के प्रथम में यह मिलता पराशर ना• पु. वेदव्यातनी के पिता मुनि है उसका अर्थ कभी प्रभुता, कभी उनाई, कभी अहकार, कभी अधिकाई प्रादि होता है, ना. परास ना.पु. पलास वा रस्मी उसकी पु. श्रेणी, पक्ति, क्रवार। छाल से बनती है। पराक्रम. ना. पु० सामर्थ्य, पौरुष । परासर० ना.पु. पराशर । पराक्रमी गु० सामथीं, बलवान् । परास्त गु० खराव, नष्ट, तहवाला। पराग ना. पु० फूलगी रन वा धृति। पराह. ना. सी. भागाभाग, देशयाग । परामुसाना० पु.विमुख, मुखफिरा। परादना.पु. दोपहर दिन चदे के उप- पराजय ना. पु. पराभव, भगेल, हार। रान्त। पराजयी गु० पराजय करनेवाला । परि० अन्य अति, पान, जिस शब्द की वादि पराजित गु० निसका पराजय हुया, जो हार में यह युक्तहोता है उसका अर्थ कभीर चौशि गया। कभी भाग, कभी त्याग, कभी अवधि, और पराजिता ना. सी. मिणुकान्ता, पौधा । कभी अधिक श्रादि होनाता है। पराठा० ना. पु. एकप्रकार की रोग विशेष। परिफर० ना• पु० कमरट। परात ना० पु. वहीथाली, प्रातं । परातिका ना.पु. लाल पुनर्नवा । परिक्षमा० ना. सी• प्रददिया। परिवा० ना. सी. साई। पराती ना. सी० परात, पाल । | परिगणन० ना. पु. मापना, गिनना । पराधीन गु० जो निनवश में नहीं है, अस्वतत्र । परिग्रह ना० पु. पड़ोसी, निकटवामी । पराना च० कि. भागना, पज़रियाना। परिय. ना. पु. वन, पर्वत, पाय, सूर्य, चांद, परानी ना. पु. प्रापी, जीवधारी। शेष, जल और न्योहा। परान ना० पु. और का अन्न अर्थात् दूसरे की परिचय० मा. पु. मेल मिलाप, जान पहि- कमाई वा लागत का भोजन । परामव. ना. पु. परानय, निरादर, हार। परिचर ना• पु० परिधिरथ, परिसेवक ।।। पराभूत गु• जो पराजय होगया, जो हारगया। परिचर्या ना० सी० सेवा, खिदमत । परामर्श ना. पु. विचार, मत्र, उपदेश । परिचारक ना.पु.सेवक, टटोरिया, जमादार। परामोधना. ना.पु. दुसलाहः । परिचारी ना. नी. दासी, सेपकिन । .. परायण ना-पु. किसी काममें मनकी सगा-परिच्छिन० ना० पु. परिमित, दीन, पीप । पट होनी, गु. गारपर, तत्पर । परिच्छेदः ना- पु. विभाग, अप्याय, पर्व । . " चान।
m मङ्गलकोप। '२०१ - परिजन ना.पु० परिवार के लोग,क्टिवासी । यथा, वनप्रियाँ परिभृत पोस्लिापिइयपि परिणाम. ना. पु. अत, समप्ति, अास्था तर इत्यमर रामचन्द्रिकाया, देखो शुभगिरिवर स की प्राप्ति। क्ल शोभावर फूलवरण यहु फरनिफरे, सगसरम परिणाइ० गु० विशाल, मोग, स्थून । क्ष जन शिरिकेनन मनहु धरनि सुग्रीव धर, परित ० अव्य० चारों बार सर्वन । सगशिना तिराने गज मुखगाजे परिभृतबोले चित्त परिताप ना० पु० सताप, दुख, शार, पीडा । हरे, शिरशुभच द्रक्चर परम दिगम्बर मानोहर परितोपना० पु. सताप, प्रसनता । अहिराज धरे, इस छद मे श्लेष हे इस लिये परिमाण ० पु० रदा, रखवाली, पालना। परिभृत क दोनों अर्थ सिद्ध है। परिनाता गु० रक्षा, पालनेवाला। परिमाल ना. पु० सुगधित, सुवास । परित्यक्त गु० णा सर्वप्रकारत्यागित । परिमाण. ना. पु. परिच्छेद करना, बार, परित्याग ना० पु. जो भलीभाति त्याग। बरखरा। परिदेवन ना. पु. विलप, शोक, रोना । परिमित गु० जो नापागया, मिलाहुआ। परिधर ना. पु० कपडापहिरनेक, रामायणे, परिवत ना० पु० बदल, एराफेरी, भागाभाग। परिधानजटा मुकुट परिधन मुनि चीरा । परिवर्तन ना. पु० बदला, एराफरी करना। परिधि० ना. स्त्री० वैप्टनसीमाप, मण्डल, घरा। परिवाद. ना. पु. गाली, उलहा, निदा। परिधेय० गु० पहिरायागया। परिवार० ना. पु. घराने के लाग, पाप्यजन, परिन ना पु. विवाह, नाम माला, परि वश। परिनेन ननिवेशन, परिनैन, उदाह, जून, परिदृढ़ ना• पु० स्वामी, नायक, मालिक । विवाह । परिवृत्त गु० चारों ओर से पिराहुआ। परिपक० गु• पका, पटु। परिवेप. ना. पु. घरा, गालाई, पारधि । परिपन्थी गु० वरी, रानु । परिवेपण. ना. पु. लपटना, भानन का परिपाक गु० पका, ना० पु. समाप्ति और परोसना। परिपाटी० ना० स्त्रा० अनुक्रम, उत्तम, रीति, परिवेष्टित० गु० जा लपेटागया, परागया। परिव्राजक० ना. पु० सयासी । परिपिटक ना० पु० सीसा धातु । परिव्राजी० ना० रनी• म्योड़ा, पौधा मुण्डी । বি परिशोध. ना. पु. मणको चुरायदेना। परिपूरन गु. समस्त, सम्पूर्ण, सर्ब, सम। परिश्रम ता. पु० आयास, श्रम, थकान, लश, परिपूर्ण मिहनत । परिवाह. ना. पु. मुख्य पवन । परिश्रमी० गु० कामकानी, धुनी, मिहनती। परिभद्र० ना. पु. नववृत। परिकार० ना. पु० शोभा, आभूषण । परिभव. ना.पु. पराभव, आदर, बदनामी। परिष्कृत गु• शोभित, आभूषित । परिभाषा. ना. स्त्री. व्याकरणादि शान का सकेत । परिहरना स क्रि० स्यांगना, छोड़ना, लेलेना। परिभ्रमण ना. पु. फिरना, घूमना । परिहार ना. पु. अवज्ञा, अपमान, और परिभृत. ना. पु. कोकिला, अच्छा सेवर, राजपूतों में जाति विशेष । अत।' दलूर। * २०२ मङ्गलकोप। . + न परिहास ना• पु० व्या सात्य, इसी टहा, परोक्ष • पु० पनपासी, वानप्रस्थ, ३० गुम, सिल्ली, पौतुरु। अगोचर। परी ना. सी. तेल मादसे निमनन का पात्र पर्धा ना. सी. परीदा। विशेष, पारसा भाषा में अमरा पा कट्त हैं। पर्चाना० स० वि भानवाना, बातचीत करना, परीच्छित गु• दूसर की इच्छानुमार । ला, जलाना। परीक्षक. ना.गु. परीक्षा करनहारा। पनिया० ना. पु. प्रागदाल, रचनाता । परीक्षा० ना. स्त्री जाच, खाज, इम्तहान । पर्चानी. नाना. पाटादाल बचाया। परीक्षित० गु० जाजाचा गया, पराक्षा रिया पर्छती० १० सी० छोरी छपरिया नौ मार्गी गया, ना. पु. थर्जुनका पाता, राजा विशष । भाविपर जलन है। पह० ना.पु. पार, गाठ। पर्छ परप० गु० कठोर ना. पु. कुवचन, गाली, पीई० ना.खी प्रतिविम्प प्रतिरूप, अक्स। निरसवचन, असह वचन। पर्जना० स्त्रीदालका हथकड़ा, रानाविशेष । परपाक्षर० पु. कुवचन, असहवचन । पर्ण ना. पु० पता, पान, प्रतिज्ञा, प्रस। परपा ना.पु. पालमा वृक्ष । पर्णकुटी ना. वी. पत्तोंसे छाया हुया, पक्पक० | पर्णशाला झोंपड़ा। परे० अय. उधर । पर्दादा० ना. पु. दादाका बाप, प्रपितामह । परेखा० ना.पु. पदितावा । परदादी ना. श्री. दादा की माता, पिता परेतना सकि० अरेरना । मही। परेतराट् पु० जमरान । पर्पट० परेता. ना. पु. घटेरन, चरती । पर्पटक ना. पु. पित्तपापड़ा। परेवा. ना. पु. यस्तर, प्रतिपत्तिथि। परेश. ना.पु. श्रीभगवान् । परेह. ना.पु. पलेव। पर्यटन० ना• पु० भ्रमण । परो ना.पु. पराया स्वारथ करना पर्य्यटित गु• भ्रमित, घूमाभया । परोपकारी गु.जो पराया उपकार परे । पर्यन्त अव्य तक, लग, ना. पु. श्रत्य ने परोस. ना. पु. निकट, पास, समीप, पड़ोस । की सीमा। परोसना० स० कि. भागन पानी आदि म पर्यवसान० 1. पु. चरम, समाति । पर्याय ना. पु० क्रम, डील, असर, टीर परला० गु०पालमा, उसपारका। परोसा. ना. पु. पाक जो किसी का भेजें या पर्प ना.पु. त्योहार, उसक, महादिन, नहान, परोसी० ना. पु. निरवासी, पड़ोसी । अपाय, मणि, होरा, कुसमय । परोसैया ना. पु. परोसनेवाला । पर्वत० ० ० पहाड, तरकारीविशेष, मुनि वि।। परोहन० ना. पु. पाहन, रथ, बहल, घोड़ा पर्वतनन्दिनी TI• स्त्री. श्रीपार्वतीनी । पर्वतारिख ना. पु. इन्द्र। परोहा ना. प. चरस, मोठ । पर्वतिया ना. पु लीकी, लोवा, पर्यनवास। w पर्यनापु. सेज, तार, पसँग। . रखना। . 7 २०१ मङ्गलकोप। । ३ . . वाहना। पसार पत्चगना.पु० प्लग, बार। पसा० ना. पु. दोमुट्ठीभर। पवन ना. पु. वायु, वाय तोप का सामी। पसाई ना. सी. चारल शिष, तृपविशा, पवनसखा ना० पु अग्नि, भाग । निसमाल धान के सदृश होता है। पवनावतील ना० सी० पश्यप पी एवं स्त्री पसाउ० ना• पु० दया, कृपा, मेहरवानी। पसाऊ नाम। पवमान० ना. पु० पाा, वाय, या । पसाना० स० कि० भातरा मार ला, पाई. ना. पु. घोड़े के पैरवी सार, पकडी, पसार जूते का एर पला । TO पु० पलार, विधान। पवाज . पु० नीच सोग । पसारी गा.पु. पनसारी। पवॉर० ना. पु. रानपूा, नातिपिशेष। पवारना० स.नि. चताना, पास । पसारना० स० वि० पेलागा, विद्याना । पसीजना अ० वि० सेद छ्टना, सितली, पनिक ना.पु. यज। पविपात . पु. रपट, नीमलीपड़ना । दुगा, दयालु हो। पत्तीनाना. पु० सेद, सितली । पविन ना० पु० शुद्ध, पान, मिल, यदोप। परिनता ना० सी० शुद्धता, पाकी, निर्भलता। पसूज० ० सी० साना, तुप।। पवित्रागा पु. यज्ञोपवीत, श । परजना म०० सीता,तुगा, तागानुपांग पवित्री ना. सी. मुद्रिका कुश जो सम पादि पूजा के ममय पदिाने हैं चा पदधातु पह० । पु० तहरा, भोर, यय० पाम । पहचान नासी शान, विहारी। पशु० ना. पु• जतु, जीवधारी, चतुपदादि। | पहचानना० स. नि. नाना, चीहना। पशुपति ना० पु० बीमहादेवनी, बालादि। पहनना स० वि० पहिरता, योगा। पहनावा ना.पु. वह पड़ा। पशुपालक० पहर० ना.पु. समयका परिमाण जो तीनघटे पश्चात् थप पीछे, पातर । का होका है, एक दित या रातरा चर्थाश । पश्वात्ताप० ० पु. पचताना, अफसोस । पहरा० ना. पु. चोरी। पश्चात्तापी० गु. पनावाला । पहराना० स० वि० पहिराना, बौदाना । पश्चिम ना. पु. पवाद । | पदरापनी ना. रसी० जो हवाई अादि में पश्यति . पसी० गा. पु० पमी । पशुपालना. पु. ग्पाल, अहीर । 1 पश्यन्ति कि देखता । लोगों को कपडा पहाते है। पहरिया। ना० पु. भगोरिया, चौरीदार, पश्यलोदर ना० पु० सामो चौरी यरनेहारा, पहरायाः पार, रखवारा । सुनार । पहरूः पान न. पु. पपाय, दाहा, ज्यो पनिहारी पहरनाम कि पहनना। मेरी सेचत कातरपान, तुलसी रसना रामकहु पहल TI पु० रुई का पर्त, चदाय, तिकोनाद पारितिक अनुमान। की एक चौर। पसरना था कि पेलना। पहला गु० प्रथम, प्रगल । पसली. ना. सी. पानर की हरी। पहाड़ ना.पु. पर्वत। १ २०६ मङ्गलकोप। 1 . 4 पाख० ना. पु० पत, १५ दिनमा, भीति, विशेष | पाटा गाई पु० पट्टा । जिसपर वरही रसते हैं। + पाटी ना घी० सार में दा लम्बा काट, पारखएड० ना० पु० घल, धूर्तवा, बनाव । परिया, मिटाई विशेष, चटाई विशेष, तम्ती: पाखर० ना.पु. घोड़े, वा हाथी के बोदन को लितो की। भृल विशेष, जो लामय होती है। पाटीर० गा.पु. चदा। पाखानापु. ग्रोसरा, पारस । पाट० ना० पु. स था, अध्याय, अध्ययन, सपन । पाग ना. स्त्री पगड़ी, रस, चासी, मिलित। पाठक गु० शिक्षक,ना० पु० विपनाति विशेष। पागना अ.कि. रसमिलित होना,सनना मिल- पाठशाला ना. सी. पड़ने पढ़ाने का घर, ना, स० कि० पाना। चटशाना पागल. गु० उन्मत्त, मिड़ा। पाटा ना० पु० युवान तु, मलयुद्ध परनहारा । पागा० ना. पु० घोड़ों का झुण्ड । पाठी ना० सी० युवापरी, ना.पु. ब्रह्मा, पागुर पुचबाई, तुग ली। पाटण पागुराना० स० वि• चावना, जुगाली करना। पाठीन० ना. पु. सहस दादा मच्छ विशेष । पाग० ना. गु० रसोइया, स्वच्छ, अग्नि पाठ्यगु० जो पदो के योग्यहे। पाचन कारक श्रोषधि, हाजिम । पाइ ना. सी. गरगन, डौना । पाच ना० पु. टीका, गाटी खुदाई । पाइना० स० कि. गिराना, काजल निकालना। पाइना०२० कि. टीका देना, गारी सादना। पाड़ा ना० पु. भैसका बच्चा, टोला। पाढा. ना. पु. मृग विशेष। अन्य पीछे। पाछे पाढी० ना. सी. नदी के पारजाना। पाञ्चाल० ना. पु. देश विशप । पाण. गा.पु. पीस, पत्ता, नये कपड़े की पाञ्चाली. ना. स्त्री. द्रौपदी । माडी। पाणि ना. पु० हाथ। पाट. ना. पु. सासी जाति विशेष, पटवा, चाडाई, टसर, रेशम, सिंहासन । पाणिग्रहण ना• पु० सिाह, पयादान पाटमि० ना. पु. रेशमका पीडा । ले पाटन ना. सी. घा, छन, पटना। पाशिनि० मा० पु. व्याकरणशासपती, मुगी पाटना० स० शि. दतबगाना, भरदैता, पारा, विशेष। रिसा वस्तुको बहुतायत करा, यापना। पाणिनीय गु. पापिणी मुगिरा व्यारण या पाटमहिषी० ना. सी. परा। उसका पढ़ाो या पदोहारा। पारम्पर० ना.पु. चपली, रेशमी कपड़ा। पाएडय. ना.पु. पाडराना के पाचपुर अपार पाटल. ना. पु. वर्ष विशेष, पृलगाले वृत, युधिष्ठिर, भीम, अर्जुा, नकुल, सहदन । साल साद घी गुलाब। पाएहु० नापु. रामा युधिष्ठिर का पता। पाटला. पु. गुप विशेष, ना. वा. पाण्डुपुत्री ना. सी. रेणुमा अषधि । कुम्भा। पांडुर० १० पु. वर्ण विशा, अर्थात् उत, पाटलिपुत्र T F शाणभद्र क पास एक पडलो पदी, मृस विशप, पीला, सटा । प्राचीनगर। पाण्डुराना. सी. मधुराण, पक्षी विशर । .
मङ्गलकोप। * " ४ A पाण्डे १० ना. पु. माझण की जाति वा पदवी पाधा ना.पु.शिवक, लाल । विशेष पान ना. पु० ताम्मल, ताम्बोल, पत्ता, पाण पात. ना. पु. पतन, पर, पत्ता, कानका गहना पाणि। विशेष । | पानदान० ना• पु० पान रखनेका पात्र विशेष । पातक ना• पु. पाप, पापा । पाना० स० वि० उपार्जन करना, मिलना। पातकी गु० पापी, दोषी। पानिर० ना. स्त्री. शोभा, काति, सुदरता। पातर ना. सी. वेश्या, गु० पतला, दुर्वल ।। पानी ना. पु. जल, वीर्य, धातु, भड़क, पातजल ना० पु. शास्त्र विशेष । पानीय पति, इज्जत, यावरू। पाता ना० पु० पत्ता, रचिता । पान्य ना० 'पु० पषिक, मुसाफिर । पाताल० ना० पु. नागलोक, नरक । पाप० ना. पु० अधर्म, कुर्म, अपराध, दोष । पातालाय० गु० पाताल वामी। पापखण्डन ना० पु. पापनाशन। पाती ना. स्त्री० पी, चिट्ठी पत्ती । पात्र ना० पु० बर्तन, भाड़ा, गु० उचित,योग्य, पापहा ना. पु० पोधाविशेष । पापड़ ना. पु० बहुत पतले फुलरा भूग। उत्तम। पापड़ाखार० ना.पु. केले के वृक्षो जलाय के पाथ० गा.पु. मल, पानी। क्षार को जो पापड़ों में लगाते हैं। पाथना० स० वि० गोवरसे कएडे वरजी बनाT, पापरूपी० गु० पापकी मृत्ति, अधम शरीर । थोपना, जोडलगाना। पापरोग ना. पु० कोद, माता विशेष, शीतला पाथर० ना.पु. पत्थर । विशेष । पाथेय. ना. पु. पथम व्ययरोगी सामग्री। पाथोज. ना. पु. कमल । पापा मा० गु० पापिष्ठ, यधर्मी, कापिर । पाथोद० ना. पु. मेध।. पापिन ना. स्त्री. दोपिनी, पाप परी पाथोधि ना. पु. समुद्र। पापिनी हारी। पाद० ना• पद, चरण, चोथाभाग, गुदशब्द, पापिया० ना. पु० एरण्ड, नृत विशेष, जिसके टुमकी। पलको वगाली रगते हैं। पापिष्ट गु० पापामा, अधर्म की मृत्ति, हिंसक । पादकटक०० पु. पिछुया। पादना० अ०कि. रीमारना,पादमारना, दुसरना, पापी गु० अपराधी, गुनहगार । पामर० गु० नाच, धम, तुछ। गुदा स शब्द मार। पामरी ना. सी. नीची स्त्री, रेशम, यस पादप० ना. पु० दृश, पेड । पिशेष। पादांगद० ना. पु. बिछुआ, पापा भूषण । पादानोन० ना. पु. लो विशेष । पायक० ना.पु. पदल, सेवक, पैदल योहा। पादाघ • पु० जागार, मायो। पायद ना. पु. डोना। पादार्पण ना. पु. पैरद।। पायन्त० ना.पु. खामा रह और मिधर पायन्ती सी. परवरत हैं। पादुका ना० पु. सड़ाऊ, जूती। पादूछताना.पु. चमार, माची। पायल० ना. सी. पावसायपण, अर्थात् पायनेर पादोदक. ना. पु. पारका धारा। थादि गु• सुचाल। पाय. ना.पु. पारगोर पानी। पायसना• पु० सीर। - २०८ 'मङ्गलकोप। - . ३ । M - - 8 जाना। 4 पाय. ना. पु. सार प्रादि का पैर, पारसी पारिजात ना. पु. कलावृत्त, मल, हर- सिंहार। पार० ना• पु. नद्यादि का परला तीर । |पारिजाती ना. स्त्री जयल। पारख. ना. पु. परीक्षक, नाचनेहारा, परख । पारितोषिक गु.निस से सन्तुष्ट हो, इनाम पारखी गु• परीक्षा, परखनेहारा । पारिभद्रका पारग० ना.पु. पारजाना। पारिभव. ना० पु. कृट औरपि। पारण ना• पु० उपवास फे पीछे भोजन मेथ । पारिभाषिक गु० शास्त्र में संगमता के लिये पारथ.. पु. अर्ड, काव्ये यथा, पारथ के सज्ञा मानली है। सारथ दियो वा सारथ भगवान पारिपद ना. पु० सहचर, देसवैया। पारथी ना. सी. पालथी। पारिएपदा० ना• पु० श्रीमहादेवजी । पारद ना.पु. पारा। पारिहार्थना. पु. कूट। पारदारिक० गा० पु० परस्त्रीगामी, व्यभि- पारी TI• सी० गुड़की भेली, दारी पन्ती । चारी। पार्थिव ना. पु. श्रीशिवजी, उद्भिद लोग पारन..पु. पारण । राना, मृत्तिका से निर्मित। पारना ना.पु. उपनाम का सोला,स० कि.पार्वण ना० पु० पर्व में श्राद्ध पिरोर। निडा, गिराना, पालना। पार्वती ना. स्त्री. श्रीभवानी, हिमालय पारलर ना• पु० पोधाविशेष। पारबौकिक गु• जा परलोक काहै। पार्श्वना. पु. वाया वा दाहिना पानर, गन्य। पारब्रह्म ना० पु. परब्रह्म, परमामा। पास, समीर। पारस० पु. लहवा आकर्षक पथर विशेष, निसमो युद्धलोग लोहा एक प्रकार का पायवर्ती ना: पु० निकम्यती। कहते हैं। पाल ना. पु. नाव दौझो के लिये से पारसपीपल..पु. वृक्षमिशा बाहुई वस्तु, दाग तम्, घास वा पारा पर्स जिसमें श्रयादि पाते हैं, सिरसी की बनी वस्तु पारसाल ना० पु. अगला या पिछला वर्ष, यह शब्द फारसी का है। पारसी० मा० स्त्री. पारसिक देशी भाषा, पालक ना• पु० साग विरोध, पारनेहारा । ना. पु० वा उग देश के हवामी, नाते पालकजूही - रसी० थोपाधि, वृत विशष विशेष पालकता ना. सी. पालरा, पालो रा पारसीकर.पु. पारमो, थोड़ा। काम। पारा ना.पु. पारद, धातु विशेष। पाली. ना. सी. शिपिका, दोली विशेष । पारायण ना.पु. पुराण आदिवा सकल्प पूर्वक पालक्य. ना. पु. पालाका साग । पाठ, पूर्वता। पालन. ना. पु० पोषण, पर, रक्षा, परवाशा पारावत: ना.पु. वानर, पात । पाउना मा. पु० हिंडोला, स० कि. पालन पारावार. पु. नदी के दागेवर, समुद्र । पारिक ना. सी. पाह, जगत की। पालन० पु. दृरी चोरी वा शाला। . ८ विशेष । 4 १ M कर।।
मङ्गलकोप। २०६ - । - , पालाना० पु० शीत, जाड़ा, यौहर, हिम । पाहि० अव्य० दयाहाहना, बाहि, रतारो। पालागन ना० पु० पापना, प्रधाम । पाही ना. स्त्री० पानगार में खेती वा भानगार पालाशना. पु. टार का वृक्ष, गु० हरित । की आसामी, अव्य. पास । पालिकना. स्त्री० मागधी, प्राकृत भाषा निस पाहुन० ना.पु. को स्याम आदि देशके परिउत सीसते हैं। पाहुना० ना० पु. अतिथि, महिमान । पालिक० ना. पु० पालक, खार । पाहुनी० स्त्री पालिकोण ना० पु. परिधि का योगा। पिंड १० गु० प्रिय, ना० पु. सामी, प्रीतम । पालित गु० पाला गया, रहित । पिक० ० पु० कारिल, पोयल । पालिन्द्रो० ना. पु० गामा, गूमा, पोगा। पिकप्रिय ना. पु. ग्रामवृक्ष, ग्राम । पाखी ना० स्त्री० बगाल देशम तौलने यादि पिकायगी ? गु० निसस्त्री का सर पिकके या यन, जिस रयान म पनी लड़ते हैं। पिकधैनी० समार हो। पाल्य० ना. पु• पालने से योग्य । पिकवल्लभ० ना० पु० यामवृक्ष । पावक० 1. पु. अगि, सुम्भ ।। पिघलना० अ०नि० विघलना, गलना। पिघलाना० स० वि० रिघलाना, गलाना। पावड़ा० ना. पु० पावड़ा। पाचन० ना० पु. पाक, पवित्र, जल । पिंगल. ना. पु० छ द शास्त्रमा नाम, नाग वि. पावना० स० कि. पाना। शेर, योला, काच, गुरुवर्ण विशेष । पावरी० ना. सी. सड़ाउ । पिाला १० स्त्री. शास विशेष जो दहिी 'पुट पावस. ना. स्त्री. वर्षातु, परसात । में TIसिका के प्रमाशित होती है। पाश० ना.पु० पासा, पास। पिगरा० ना. पु. पालना, दिडोला । पाशा ना.पु. पामा । पिचकना० अ० कि० दवा, निउड़ना, सिम- पशुभन १ पु० तारी, लेन । टा। पापण ना० पु० पाषाणभेद । पिचकारना० स० वि० दवा, समेटना, पापण्ड० ना. पु. वेदविरुद्ध, अतिदुरामा, पपटवाक्पटी। पिचकारी ना० स्त्री० पन्ना, बदमकला, निरा में गाद भरके छोड़ते हैं। पापण्डता०० सी० अपनि दा, कपट । पापण्डी गु० कपी, वैदविरुद्धी, दुरामा पिचपिचा गुरिलपिला, ढीला । पिचिका पापाण. ना. पु० पत्थर । पिचुका ना. पु० पिचकारी। पास अन्य सभीप, निकट, ना ५० पाश1 पिचुमन्द ना. पु. नीरस वृक्ष । पासपतिना० पु. वरुण देव । पिछलन. ना. पु. सिलना, सिसलना। पासी० ना० सी० फासी, ना. पुवरुणदेव, पिछलना० अ० कि० हटना, फिसलना। नींचजाति विशेष, पासी दालने हारा, पिछला गु० पिबाड़ी वा पाटेका। पाहन ना० पु० पथर । पिछलाना० स० क्रि० पीछे करना वा पीछ पाइनरुमिल ना.पु. एक कीड़ा होता है, जो परना। पत्पर में अपना घरबनाता है। पिछवाडा० ना. पु. पाहरू-गा. प. चौदार, पहाया। पिछवाड़ी० सा. १ पादा, पीवगरपात पोरना। . ww 7 - २१० . मंगलकोप। . होते। पिडाही ना. सी० पीछे के पैर वारने की पितराई० मा. श्री. पिन के तीनि पापा के ररमा पश्चात पीदे।। सम्पपी पीनलवा मुना पिछान० ना. सी. परिचार। पितरोना. पु०माना, पिता। पिठाने गु० जानेहुये, पहिचान भये । पितरौला ना. पु० पितृ पूजने अपार । पिछूतः श्रन्यः पीछे, उपरात ना. पु० परका पितलाना . निरास विगहना । पिसाड़ा। पिताना. पु० जनक, वाप। पिछेत. ना.पु. परका पिछाड़ा। पितामह ना. पु. ब्रह्मा, पिता का पिता, पिछौरा ना. पु. चहर, दुपा। दादा, थाजा। पिछोरी ना. सी. छाप पिदीरा । पितामही ना. सी० पिनारी माता, दादी । पिंजर ना. पु. पदी आदि रखने का घर पितिया ना. प. चाचा, पापका माई । पिंजरानो काठ या लाहादिका बनता है । पितु ना. पु. पिना, बाप । पिंजल ना. पु० तीतर, पक्षी । पितृ. ना. पु. पिता, देवता, पुरुषा । पिंजपा० ना.पु. कानका मेल । पितृयातक ना० पु. जो पुत्र पिता का री पिट. ना. पु. नहकुल । पिटना था कि मारताना । पितृपति. ना. पु० धर्मरान । पिटारा ना. ५० स्पडा बादि रसने का पितृपक्ष ना. पु० प्राचिन मासका कृष्णपद, टना जो तृणादि का होता है। कनागत । पिटारिया ना. सी. छोग पिगरा। पितृव्य. ना. पु. पाचचा, पिता का पिटारी भाई। पिंड गा.पु. तन, देह, गोलवस्तु, बाद का गोलाकार अस, जो चालादि वे मृतक हेतु पित्त ना• पु• शरीरवी धातु विशेष, सफरा । पितृमृण ना० पु. पिताका ऋण । देते हैं, क्षेत्र, सेन, गाव। पित्तलोह ना० पु. पीतल । पिंडफला ना. नी. पहुई तोमड़ी। पित्ता ना. पु. शरीर का भीतरी अंग निस में पिंडाली. ना. स्त्री. पाली। पित्त रहताहै, क्रोध, क्लेना, जहरा। पिंडा० ना. पु. पिण्डा, टुकडा, मैनपल । पित्तिनी ना. सी. शालपणीं । पिडारा गा.पु. लुरेरा, चालाक। पित्तपापड़ा. ना. पु. ग्रीपति, पौधाविशेष । पिंडारावर ना.पु. मेनाल। पिधान ना.पु. प्राधादन, टस्ना, पोशाक पिंडालुका गा. पु. पिण्डाल । पिन ना. पु० शरांग, शब्द। पिंडालू ना• पु. फलविशेष, प्रोपधि जड़। पिनकी ना. रत्री० पीनवाला। पिंडी ना. सी० महादेवजी क लिगका ऊपरी पिनपिनाना० अ० वि० टकोरना, नटुना।। माग, पिण्डली, बालू रो बनाई हुई, चोरी दी। पिनहाना. स. दि० पहिराना। पिंडीमुस्त० गा.पु. गागरमोथा । पिंडक ना. पु. धू । बाजा विशेषा पिएडोल. ना. पु० मा विशेष पोतना । पिनाकी ना.पु. श्रीमहादेवगी। पिण्याक. ना. पु. पीना सली। पिताना.पु. पीना सली। पितर० ना.पु. पूर्वज, पितृ । । - 'पिनाक. ना. पु. श्रीमहादेवजी का धनुष, पिनी ना. स्त्री चारल यादि का तहह ।
मङ्गलकोप। २११ - 1 - . A , " पिपासा.ना. सी० प्यास, तृषा । पिशाचग्नस्त० गु०नस को पिशाच लगा है ।। पिपासित० गुप्यासा, तषित । पिशाची० ना. सी. प्रेतिनी, पिशाचकी पत्नी पिपील. ना. सी. चींटी, रामायणे यथा पिशितोदन ना. स्त्री केसर । जिमि पिपील चह सागर थाहा । | पिशुन गु०दुष्ट, कटोर, चुगल । पिपीलक० ना.पु. चींग। पिशुनता. ना. श्री. दाता, कठोरता, ५ पिपीतकार गली। गा०सी० चौग। पिपीलिका पिसाई ना. सी. पीसने या कामा पैसा । विप्पल ना.पु. पीपल वृक्ष । पिसान० ना• पु० ग्राम, नून । पिप्पली० ना. सी. पीपली। पिसाना० स० कि. पिसवाना, बुक्वाना।। पीय. ना. पु० निय, प्रीतम, सामी, पति । पिसू० ना. पु. पिश, चोटा जन्तु विशेष । पियाना० स.बि पिलाया। पी० गु• पिय, ना.पु. स्वामी, प्रीतम । पियार० ना० पु. प्यार, साड़, दुलार । पीक ना. सी० पान के रसयुक्त थूक । पियारा गु० प्यारा, लाइला, दुलारा। पीच. ना. स्त्री० माड़। पियाल. ना. पु० चिरीजी, धान वा योदी को पीचू० गा• पु. फल विशेष । घास। | पीछ. ना. स्त्री० माइ। पियासी० गा. स्त्री० मछली विशेष, तृषि-पीछा ना पु. पिछला भाग, पिछाड़ी पडना । त स्त्री। | पीछे० अन्य पश्चात, निदान । पिरकी ना. स्त्री० पुड़िया। पीटना० स० कि० यूटना, मारना । पिराना० अ० क्रि• दुखना, दर्द होना। पीठ ना० पु० पृष्ठ, देहका पिदला भाग, श्रा पिरोना• स० कि० गृपना, तागना, वेदगा। सा विशेष पिल ई० ना. स्त्री. तापतिती। पीठसार० ना. पु. अकोल । पिलचना प.नि. चिपटना, लिपटा। पीठा० ना. पु. भोजन विशेष। पिलना० स० नि• धावाकरना, घुसड़ना, प्र. पीठी गा. स्त्री. धोई और पीसीईन्दी पिना। दाल, पीठ। पिलपिला गुरुचिपचिपा, दीला, नम्र । पीठौता ना.पु. पत्रम पिलपिलाना स० कि. टीलापरना, नन कर-पीड़० ना. वी. दुम, इन, दया : |पीडका मु.पोड पिबपिलाइट गार स्त्री कोमलता, दीलापनपीड़ना. लि. पीडित होना, सादिक पिलाई. ना. स्त्री० पीने के बदले देना वा दरड देना। पीने का पाम। पाहा नारी दुःख, वेदन, दर्द।' पिलाना० स.शि. पानकराना, धुडवानां । पीडाकर गु० पौद्यदायक । पिलुमा ना. पु. पिल्लू, यार। पीडित माइनित, लेशित, रंजीदह । पिल्ला. ना. पु. कुत्ते का पचा। पीडा न.पु. पटग, मचिया। पिल्ली० नास्त्री कुत्ते की रची। पीडावन्य ना० पु. पुस्तों को प्रादि का से.. पिरलू० गा.पु. सारण माचार विगंगा वाचद । पिशाच ना. पुतविगा, मृतु । पौदी ना. सी. बोयोडा, राय परम ५ JArea . - । वाना। . T - २१२ मङ्गलकोप। - . 1 . पीत गु० पीला,गा स्त्री प्रीति कुसुम, ना०प० पीयूप. ना. पु. पेउस, अमृत । मलय चन्दन, पियावासा | परि० ना० सी० पीड़ा, दर्द, दुःस -Trint पीतक० ना० पु. सुवर्ष, सोना । पीरा० गु.पाया। पीतद्रुमा० ना० स्त्री० दामहल्दी। पीराई० ना. पु. टोल बनानेहारा ।। पीतपुष्पा० ना पी० ककोड़ी, सिसादा । पीलपर्णिका ना. बी. सुरहरी। : । पीतपुष्पिका० ना० स्त्री० सहदेवी । पीलाम. ना. पु. रेशमी वस विशेष पीतफेनु० ना. पु. रीठा।..', . पीली ना. सी. मोहरः सुवर्ण, मुद्रां। पीतम गु० प्रियतम, मित्र, प्यारा । • ".., पीलीभीत ना' पु. मांसपरेली के उत्तर नगर पीतरत ना. पु० पदमाक ।। विशेष। पीतरस ना.पु. हल्दी ।.. ना. पु. वृत विशेष। पीतल.ना.पु. धातु विशेष । पील पीतला० गुपीतलका। पीवर गु० मोर, भारी, स्थूल। पीतसार० ना.पु. मलयचन्दन ।' पीसना० स० कि. श्राटाकरना, किचकिचाना, पीता ना.मी. हल्दी, जूही।'' ना० पु० पासने या अन । पीताम्बर० ना०पु० रेशमा पालायल,श्रीरामचन्द्र पीहर० ना० पु० स्त्री की ससुराल, मैका । जी, श्रीकृष्णचन्द्रजी। पुं० ना० पु. गर, मनु-य, पुरुष । पीन० गु• मोटा, स्थूल, पुष्ट, भारी। पुंलिंग ना. पु० पुरुष का चिह । पीनक. ना. सी. अफीम की योग । पुंश्चली० २१० सी० पतुरिया, वेश्या । पीनना० स० कि० रुई के अवयवों को पृथर पुंस० ना० पु० मनुष्य, पुरुष, नर । पुंसयन ना. पु० सरकार विशेष । पीनपयोधर० ना. पु० भारीस्ता, कटोर पुंस्त्व. ना. Y• पुल । पुकार० ना. स्त्री. गोहारि, हाम।। पीनस ना० पु. नाकारोग विशेष, ना० सी० पुकारना० म० कि० गुहराना, टेरना, हाफमा पालरी विशेष, नार, विशेष । पीना० सकि० सुड़कना, पान करना, ना. पु. पुसराज० ना. पु० मणि विशेष । .. खली। पुंग ना. पु० समूह, युन्य, पूग । 1...... पीपल ना.पु. वृह विशेष । पुंगव ना. पु. श्रेष्ठ, बड़ा, उत्तम ।' पीपला. ना० पु. सद्गी नौक,वा अणि यापुंगीफल गा.पु. पूग, सुपारी। पुचकारा ना० पु. भाति लोपने के लिये पीपलामूज० ना. पु.,पिप्पली का मूल ...पुचारा० गीली मिट्टी। पीपलि. ना. सी. पिपली, पीपरी। पुच्छ ना० सी• पूंछ, दुम । पीपा ना० पु०, मद्यादि रसने के लिये काठगा.पुच्छकना० पु. भेदी । बर्तन विशेष:-". पुच्छल गु. धवाला निसके पूंबहो । पीय० ना स्त्री०मान, राह! ... पुच्चलतारा. ना. पु. केतु, दुमदारसितारा।'; पीधियाना अ.कि.घकन । पुछवैया ना० पु., सोननेहारा । 'पीरियाहट नाघी पकाव, पानि ।।, पुजवाना• स.कि पूनाकराना । पृथर करना। . - रना, युलाना। 4 . । .
२१३ मगलकोप। पुटली. , ना० सी० गरी खाड़। ८ -- . हैं पुजाना० स० मि० भरना, भराना, पराकरना, पुतली० ॥ स्त्री० याखका तारा, काटादि नि- पूना कराना। मित मृत्ति, प्रतिमा। पुजापा०1० पु० पूजा की सामग्री। पुताई ॥० ला पोतने का काम चा पसाप पुजारी पुत्तलिका० ना. स्त्री० पुतली। गुरु पूजा करने हारा। पुजाम पुन० ना.पु. पूत, लड़का, बेगा। पुनक० १० पु. दाना, सुगावित, पाधा । पुज० ना० पु. समूह, टर, गज । पुट० ० पु• पला, दोना, मिलार, घुलाव । पुत्रजीपी० ना०सी० जीतापति, पतिनिया। पुत्रिका० ना० स्त्री० क या, यी, पुतली । - पुत्री० स्ली० क्या, बरी, पाखका द्वारा । पुन ० अव्य फेर, पिरि महरि । पुटी० ना० पु० पत्ता का दोश, अजली। पुन पुन ० अव्य. फेर फर, पुनि पुनि । पुट्ठा० ना० पु० पशु श्रादि का चूतड़ । पुाराय० १० ना. पु. दूसरीवार । पुडा० ना० पु० भारी या पड़ी पुरिया । पुनरारम्भ० ता. पु० दूसरीवार पारम्भकरना । पुडिया ना० स्त्री० पत्तों की वा कागज की दानी पुनरुक्ति T० वी० पुस कसा, दुबारा, फिर जिस में कुछ प्रापधि इत्यादि बाधत हैं। से कहना। पुडी० ० सी० खाल निसस दाल मदत हैं। पुनरुत्थान० ० पु० फिरस उठना । पुण्डरीफ० TI• पु. कमल विशेष, श्राराश, पुनर्जन्म पु. दूसरी छम, द्वितीमनमे ।.. माण, सिंह। पुनर्नवा ना• पु० पौवा विशेष । पुण्डरीकाक्ष० ० पु० श्रीपचन्द्र, परायण । पुनर्नव० ० पु. ख, नानून, नह । पुण्डूक. ना. पु. ऊस गन्ना । पुनर्वसु ० पु० सातवा नत्य । पुराष्ट्रका ना० पु० सर विशेष सज्ञा पिशेष । पुनि० अय. फिर, पति। पुण्य० ना. पु० सुकृतर्म, कीत, परिवदा। पुनिपुनि० अ य पुT पुन । पुण्यप्राम० ० पु. पूनानगर, पुण्यवंद समूह। पुनीत गुगामल, पात्र पार । पुण्यग्रामीय गु० पा रे सम्मवी। पुमान्० ० पु. तर, पुरुष, मनुज । पुरयजन 710 पु. निशाचर, राइस, रानिचरारा पुर० १० पु. नगर या ग्राम र य पिशप । पिचर विरोनिक्पामन , यातुमा पुण्यननो पुरस्न 1 स्त्री० कमल बलि । तोयानुराजसी, यमर । पुर सर० स० पु. अप्रगामा पश। पुण्यभूमि TI० सा. आय्य उत्त दश । पुरट० ना० पु. सुरण, सण, साना । पुण्ययोषिता ना० स्त्री० वश्या पतुरिया । पुरनिया गु० प्राचान, बृदा, मगध देश म पुण्यवान् ना. पु• सरनी धर्मामा पुण्याई पा० स्त्री• सुतकर्म, ना पूर्व पिया पुरयासी गु० नगर का वसा हारा पुरन्दर० 1. पु.द्रा है, गु० पुण्यामा, दाता। पुरविल० १ ना. पु. पिछला वा अगला पुण्यामागु. दाता, सती, धमापा। पुरविला० नमः पुतला ना• पु० तप या पाष्ठ या धातु या पुरवाईला या पूर्वमा परा। तिमा की पनीहुई मूर्ति । पुरवैया N । . गर। .
मङ्गलकोप। . " - A पुलाक० ना• पु० ३ माह शन्द फारसी या है। पुरश्चरण ना. पु. जपाठादिकपूर्णतामण पुर्याई ना. सी. पूर्वी पवन। . पुरस्कार ना.पु. सरकार, चादर, समान । पुर्वाना० स. वि. भरवाना, पूरा करना । पुरा• गा.पु० जागान, पहिले । | पुयया ना. धी-पुरलाई । पुपरत. ना.पु. पिछले नमका कर्म पुर्सा० ना. पु. चारहायकी माप । पुराण ना• पु• इतिहास विद्या नो व्यास पुख० ना• पृ• सेतु, याध यह सन्द फारमी , रचित है। का है। पुराणपुरु५० ना० पु. थी भगवान् । पुलका मा. श्री. रोमाच, पानद" पुरातन पुलकायनिक गा.पु. प्राचीन, पिघला, पुरता। वा शोर में मग्न हाना। पुरातम० पुराना० स० कि. भरदेना, खिचवाना, कदवाना, पुलकित० गु० हषित, रोमाचित । गु• कालीन, पानि, जीर्छ । पुलपुला गु• पिलपिला। पुरारि० ना• पु. श्रीमहादेवनी । पुलपुलाना०प० कि० डरना, पिलपिलाना। पुरी० ना० स्त्री. नगर, गाव या प्रयोप्यादि सात | पुलपुलाहट० ना. स्त्री. दर, भय, नरमी । नगर विशेष पुलस्ति ना.पु. निविशेष, रावपके पितामह । पुरीष० ना. पु• मल, विर. मूत्र पुलहाना० स० कि० मनाना, राजीकरना। पुरखाना-पु. बुहता, यहा। पुरले. ना.. अगले पुल। पुलाय. पुरुप. ना.पु. मनुष्य, नर । पुलिक० ना० पु. मुख्य सार । पुरपत्य ना० पु. मनु यता, मनुमाई। पुलिन० ना. पु० बालूका था, नदी में कि पुरुषा० ना. पु. प्राचार वा पिछले साग । पुरुषाधम गु० जो मनुष्यों में निदितहावे । पुरुषान० ना• पु० प्रदिया, शास, पुसे, पुरुष पुलिन्द० ना. पु० ग्ल छ भेद । पुलिन्दा० ० पु. बस्ता, पारसी शब्द है। याबहुवचन । पुलोमा० ना० पी० इद्राणा, देवरानी, पुलो पुरुषारथ० ० पु० पुरुषार्थ । मजाशची द्राणी इत्यमर । पुरुषोत्तम ना. पु. मनु यों में जो श्रेष्ठ या प्रमान श्रीविष्णु, नारायण। हितग ना. पु. पुलिंग, गर, मुजार । पुरुहूत. ना. पु०३२। पुपाल० ना० पु. पिपाल । पुरैन० ना. सी. कमलवनि । पुष्कर० ना. पु. भागश, जल, कमल, तालाब, पुरोडास. ना. पु. यसका इव्य, रोग, यज्ञ हाथी पीसद तार्थ विशेष। का शेष भाग। पुष्करजंटा पुरोधाना• T• कुलगुरु, वंश पूया पुरोहित०मण! पुस्कराहु पुरोहितानी ना. सी. पुरोहित की सी। पुष्कराहयः ना० पु. सारस । पुखा० ना० पु. पुरातन, युझ्दा । पुष्परिणार ना. सी. जलाशय, तलेया। पु. TI• स्त्री० एल, दावा।। पुष्कल ना. पु. भरतनी सा पुन, पूर्ण, अष्ट । पुर्वा० ना. सी. पूर्वमा परन । पुए गुपासा, स्थूल, पोदा, कड़ा। नारा। ₹ प M क F ना• पु• पुरफरमृल। ।
मङ्गलकोप। . है . 1 TV 1 . + पूज्यमान् ? गु० पूनाक योग्य माय 1 ६ - पुष्टई० गु० पुष्टि 'पा प्रोपरि वा भान पूजी ० स्त्री० मूल, धन, सम्पत्ति । पुष्टक.नादि।- पूग० ना.पु. समूह, सुपारी वा सुपारीमा वृक्षा पुएता० ना. सी० मोगई, स्थूलता, पायदारी । पूगीफल सुपारी । पुष्टि ना. सी० पुष्टता, पुषनीवा, चद्रपला पूच ना० पु. खोन । पिशा नाम पूछना० स० कि. खोजना, प्रशारता। पुष्टिकर० गु० पृष्ट । पूछी० ना० स्त्री. मच्छी की पूछ । पुष्प० पु. पूल, प्रसून । पूजक० गु० पूना करनहार ।। पुष्पक. ना. पु० कुवरका सिमार। पूजन० ना० पु. पूजा का व्यापार । पुष्पगन्धा ना. सी. जूही। पूजना० स० वि० अर्चना, मनना, म्याना, प. पुपचाप ना. पु. कामदेव, मदन। त्रि • भरता, पूरा होगा। पुष्पजम्बुका ना. पु. केतकी। पूजनीयःगु पूजा के योग्य, माय। पुप्पधनु० ना० पु० फामदेव, मनोज । पूजा० ना. स्त्री० अर्चा, आदर, सत्कार । पुष्पनीलक ना. पु. सभालू । पूजित गु० जो पूनागया। ওবা 7t • ধূলা স্বামী। पुष्पफ्ला० ना स्त्री० बुम्हड़ा । • पुष्पमृत्यु १० पु. नकुल । पूठ० ० पु. पुट्ठा। पुष्परस० ना० पु. पूल जिस म मधु व अमृत निकलता है, पूलकारस। पूठा० ० पु० पुस्तक वा गाता। | पूड़ा० ना. पु० थेसनका पावशेष । पुष्परती० ना० सी० रनररला, कपड़ा स । पूडी० ० सी० पान विशप । पुष्पसंबरी० ० सी० मलिहारी । पूणी ना० ० २२ जा कातने के लिय ब पुप्पाथलि० ना. रा. फूलों से भरी हुई पाते हैं। पूत० ० पु० पुष, पवित्र । पुष्पित० गु० पूला या वृक्ष । | पूतना T० सी० हड, निशाचरा शिप । पुष्पा ० स्त्री० ऊगा। पूतला० ना.पु.पुरला, पुप्पेश० ना. पु० माधवा । पूतरी 11. स्त्री० पुतला। पुष्य T•Y० पाठना नक्षत्र | पुस्तक ना० पु. मय, पाथा, कितार । पूति. ना. सा. जमाद, पवित्र, छोरा, अवयव। पूर्तिचर्चिका० ना• स्त्री. चवरी, पौधा । पूश्रा० ना.५० मीठापूरी। पूतिफला० ना. स्त्री० वाकुची।' J० मा० पु. पादने का शद । पनियो० ना. स्त्री पूर्णमामी। .." पूगी. सा. बासली विशेष । पूनी० ना. सी. पोनी, पूणा । पूछ० ना० स्त्री पुग्छ, दुम् । पूनौ० ना. सा• पूर्णमासी। पूछना० स० कि० पहना पूछना। पूप० ना. पु.पुथा। . ५छार गुपुछवान् पूछाला। पूय० ना. पु० राद, माज क श्रजली। पुहमिः ना० सी० पृथ्वी, धरती । - . . ५ on मङ्गलकोप। +M . फैलाना। पूर० गु• सब कुख मरा, पराइ, धारा। पूर्वपक्ष ना.पु. पहला पर चरचा करने में पूरक गु. पूरा करनेहारा, पूरा होने वाला, नो स्थापन वा निरोध किया जाता है। पु. रिनीरा, शाम शिष को निस किया स पूर्ववत् अय. उसी प्रकार, वैसाही ।। पूर्वगयु. ना. पु. पूर्वका पवन, पुरवाई पूरए० गु० मरापूरा, सब, सारा। पूर्या० ना. पु. पुरवा, घोग गाद । বুবো ना. ग्री० चद्रमा की कला पूर्वाफाल्गुणी ना. सी. ग्यारहता नन्न । पूरणामृता विशेष । पूर्वाभाद्रपद ना. ५. सम्बोसवा नपत्र । पूरना. स. कि. भरना, पूरा करना, पूर्वाभिमुख० ना• पु. पूर्व दिशाके सामने । पूर्वार्द्ध० गु० पहिला, पाया। पूरय ना.पु. पूर्व। पूर्वापाद ना. सी. बीमवा गहन । पूरा० गु• पूरण, सब, समस्त। पूर्वाद ना• पु० दिनका पहला भाग । पूराई ना. रवी० भराई, पूणता । पूर्वी० गु० पूर्व देशीय ना.स्सा रागिनाविशेष। पूरिया ना. स्त्री. रागिनी विशेष । | पूर्वोक्त गु• प्रथम यहा है, प्रथम यहाहु ग्रा। पूरी ना. स्त्री. पक्यान विशेष । पूला० ना• पु० तृण वा यन्न की छोरी २ पूर्ण० गु० पूरण, समस्त, सारा, भरा। पूली. ना. . गट्टी। पूर्णज्या० ना. श्री. पूरारोदा, स्थी रैला । पूपण ना.पु. सूर्य। पूर्णता० ना० सी० पूरणता. पुराई । पूषा ना. सी. सूजन, चद्राला विशप, श्वास पूर्णपात्र ना. पु. पार विशेष, निम म २५६ विशा, जो दतिण कान में प्रकाशित है। मुष्टिका चावल भरके सकल्प करे, गु० पार पूस० ना• पृ० पाप मास, दरारा मास । भरपूर, पूरारावा पृच्छा. ना.पु. निझामा, प्रश्न । पूर्णभूत ना• पु. समस्त बीतगया। पृतना० ना. स्त्री० सैय, पौन, दल । पूर्णमासी० ना. सी• शुभपन की समाप्ति की पृथक् अन्य भिन्न, अलग। तिपि, पूनो। पृथकरण ना.पु. लग २ वरना । पूर्णाहुति० ना• स्त्री• होम पूरा होने पर जो पृथक्छद० ना. पु. अस्तरा। पाहुति दते है उसका नाम । पृथक ना• पु. भिन्नता, जुदाई। पूर्णिमा० ना. सी. पूर्णमासी। पृथवी ना. स्त्री० मुरहरी । पूर्व० गु. पहला, पिछा, अगला, ना: पु. पृथग अप. पृथक् । निस दिशा में सूर्योदय होता है। पृथपृथग अन्य• अलग १ जुदा । पूर्वक गु• विस्तार युत, भराहुया, साप । पृथवी ना. स्त्री पृथिवी। पूर्षकृत ना. पु. पहले का काम । पृथीनाथ ना० पु. राजा, बादशाह । पूर्वतकर्मा० ना• पु. पूर्व नमक म्यि कर्म । पृथिवी ना. स्त्री धरती, जमीन । पूर्वज. ना. पु. प्रज, बहामाई । पृथु० गु• बड़ा, भारी, ना. पु. राजा विरोष।। पूर्वयाम ना.पु. पहला पहर । पृथुरोमा० ना. स्वा. मझला । पूर्वदेश ना• पु• मय देश के पूर्व का देश। पृथुल० गु• रड़ा, मारी, मोटा, स्थूल । या निन स्थान से पूर्व का देश । 'पृथुशिरा ना. पु० सौनाच । न ३ है . - मङ्गलकोप। ३ . 1 . पृथदर ना. पु. मेदा, भंडा। पैटू० गु. पेटाधीं। पृथ्याक० ना० पु. पुनर्नवा । | पेटौखा. ना. पु. पेंटचटने का रोग'। .. पृथ्वी०.ना. सी. धरती।।' पेठा० ना० : पु० लौकी वा का, पा कुम्हा पृथ्वीका ना• स्त्री० कलौनी। विशेष । पृथ्वीनाथ पेड़० ना. पु. वृक्ष, यूटा । पृथ्वीपति ना. पु. राजा, बादशाह। पेड़ा ना• पु० मिठाई विशेष, लोई । ., पृथ्वीपाल पेडी० ना. स्त्री. पेड़ा. सुपारी, नील आदि पृष्ए०.गु० पूछागया। . का वृक्ष जो एकवार जो कटगया, और पेड़का: पृष्ठ ना० पु. पाठ, पिछलाभाग, पत्रका एक स्तम्भ योर। पेडू ना. पु० नाभिके नीचे का अंग । पृटा ना• पु० पित्तपापड़ा, पूछनेवाला । पेम. ना. पु. प्रेम। पृष्ठास्थि. ना. स्त्री.पाठकी हड़ी। पेमी० ना० पु. प्रेमी। पृष्ठि ना० पु० पीठ, पृष्ट । पेय. ना. पु. पानी, दूध, शरबत, गु० जो; पृष्ठिस्थोरी० ना० पु. घोड़ा । पीने के योग्य हो। पेई० ना० पी० पिटारी। पेरना० स० कि० प्रेरणा, कोल्हू में कुचल के पेंग० ना० पु. झूलेका हिलाना, पक्षी विशेष । रस वा तेल निकालना। पंगना०प० कि. भूलेको बढ़ाकर भूलना। पेरू० ना. पु. कुक्कुट विशेष । पैठ० ना. सी. हाट, मण्डी, बाजार । पेलड़ | पेलड़ा० ना. पु. प्रांड, कौड़ी, कोच । पेंड़ ना. सी. डग, चलावा, टीला वृक्ष । पेलन०मा० पु. पालन, भूलना। पंदा ना.पु. पेलना० स० कि० टेलना, रेलना, टांसना, पेसक० गु० यथोचित दूत भेजनेवाला। दवाना, भरना, घुसेड़ना, श्र०कि. पिलजाना, पेखना ना० पु. वांग, खिलौना, स्त्रियों का घुसड़जाना। छल, सं० कि. देखना। पेला० ना. पु. गाड़, दोष, उपद्रव, टेकन । पेखनिया० ना.पु. स्वागी। पेलू ना. पु० ढकेलू, घुसेह।,, पेखित गु. भेजागया। पेवड़ी ना. स्त्री. पोतरंग विशेष। पेच. ना. पु. मरोरी, घुमाव, फेर । पेवसी० ना. सी. पीयूष जो दूध ,फटे को पेचक पकाते हैं। पेचा० ना० पु. उलूक । पेषण ना. पु. दलेती, किसी वस्तु को दो पेंट ना. पु० उदर, गर्म । । पत्थरों से घिसना। पेटक० ना० पु. पिटारा।। पेषणीय गु: पीसने के योग्य । । पै० ना. पु. पय, दूध, जल, ना. स्त्री.. दोष, अव्य ऊपरं, तौभी, परन्तु । .. पटिया. ना. सी. प्रतिदिनका खाना, सीधा । पैंचना० स० कि० पछोड़ना,फटकना, बदलना। पेटी ना. स्त्री कमरबन्द, पेटका बन्धन, मि पंचा ना. पु. बदला, पलटा । टारी, सन्दूक, छाती। पंजनी ना. सी. पत्रिका गहना विशेष । पेदी० ना० सी० तला, निचानका खण्ड । 1 . पेटाधी० } १० पेटपाल, खाऊ, भक्षक ।
मङ्गलेकोप। 1 . . - पड़ पैसा. ना. पु० तारे का मुद्रा ।। मा.पु. मार्ग, बाट वा बाट देखना। पैसार. ना. पु. पेट, पहुँच, प्रवेश । पैंतालीस० गु० चालीस और पाच, ४५१ पैसारना० स० कि. पैठाना, पहुँचाना, प्रवेश पैतीस गु० तीस ओर पाच,-३५ ।। कराना, घुसेड़ना। सठ गु० साठ ओर पाच, ६५ । । पोआ० ना० पु. पोपा, दूधपीनेहारा नमा, साप पैकड़ा ना पु. १ बेड़ी, पैर का गहना या रचा थोडे दिलों का। पैकड़ी ना०ची पिशर : पोआना० स० कि० धमाता । पैग ना. पु. नझा देशमा प्रदेश । पोईस० अव्य. घरे, बचो, पोश शुद्धहे, पारसी पैज. ना. श्री. प्रतिज्ञा, प्रण, पराक्रम । शब्द है। पेठ. ना. पु. एडी की पतिया, पहुँच, प्रदेश पोस्ना० अनि पेट चलना । पैठना यकिघुसना. धस। पोका ना० पु. कीड़ा विशेष। पैठालना० स० कि. प्रोश करा, घुसा पोंगा ना. पु० उल्लू , मृर्स, टीला विशेष, पोर, पैह ना. पु० पावोंग चिर। गु० टूछा पेड़ा गापु. ऊची सहाऊ । पांगी० ० सी. गली, सूबी, खोखली,मर्ससी। पैड़ी ना. सी. सौदी। गांछन ना. पु. झाइना, गृह । पैतला गु० उपसा, विदला । पांछना० स० कि. झा, सग्छ वरना । पैतृक० गु० पोती, पनों से जो धा वा पोखना० स० लि. पाला। व्यवहार प्राप्त हो। पैदल चन्य. परों से ना• पु० मियादे । पोसरा० ना. पु. जल, ताग, तालाव ।। पैन० ना. पु. गाली, पोखरा । पोच० गु• नीच, लगा, यह शन्द पारसीकाहै । पैना० ना० पु. पशु टाकने या धन गु० तीव, पोट T० सी० मो', पाठ, गटरी । तीक्ष्ण, तेन। पाटला.ना.पु. बड़ी गठगे। पैनाना. स. कि. ताण करना, वादिदे।। पोटली ना. मी गठरी, साई विशेष । पैनाला ना० पु. परनाला, पहरी। पोटा० ना. पु. गेंदा, पलर, पक्षी का झांझ, पैथा. ना.पु. पहिया, पक। घोंग, रंग गु. पोटनेहारा। पैर० मा 'पु. पार, सलिया, गु० जो परने के योग्य है। पोदा गु. कड़ा, बलपान, टोस, हैद । पैरनाघ.मि. हेलना, निरना, परना। पोदाई ना. सी. यापन, ठोसाई,दता । पैराई ना. श्री. पैरने का काम । 15पोत० ना. सी. काचकी सम गुरिया, गाव, पैराफर ना.पु. पैरोहारा । सभा, प्रकृतिममा, एका। पैराकी ना. सी. परीहारी। | पोयकी ना. श्री. पोय, बेलि । पैराना बिराना, हिलानर । पोतदागा. पु. छाटे लड़कों का रिवाना, पैराप गु० जो परने के योग्य है । गुदड़ी। पैरी ना. सी. पावश्य गहना विशेष! पोतड़ी ना. श्री. सरी, हस । पेला ना.पु. चम मापने का पार, दला। पोतना १०मि. लीपना, परपोतना, ना.पु. पंचाय० मा.पु. दुष्टता, विमा, पुपी पिंचर, मृत्तिका विशेष पोखर० - . r :
मङ्गलकोप। २१६ पोता. ना. पु. पुरमा पुन, पोत्र । पौढ़ा० गु० पोदा, लगाया। पोती. ना. स्त्री पुत्रकी कन्या, पौत्री ।। पौढ़ाई० ना० सी० पोदाई, लेटास । पौधा ना० पु० बड़ा माथ। | पोएट्रक० ना. पु. ऊत, गना, पीड़ा पोथी ना० स्त्री० छोगा प्रथ। पौत्तलिक ना. पु. मृतिपूजक । पोदना० ना० पु. पही विशेष । पौत्र० ० पु. पुरा पुन, पोता । पोदनी० ना० सी० पोदना की थी। पौत्री ना. सी० पुत्रा क्या, पोती। पोना० स० कि० पकाना, पिराना, ना. पु./पौधार नापु० वृक्ष जा तमण हैं, विरवा एक वर्षा। झरना। पोनी० ना. स्त्री० पूर्णी। पौन० गु० तीन चौथाई, ना० पु० पान । पोपनी ना. पु० बाना विशेष । पौनचक्र ना. पु० नै डरा, प्रवाथि । पोपला गु. दातों से रहित । पौना. ना. पु. झरना, पोनका पहाड़ा। पोमचा ना. पु. जय नगरी, वन पिशष । पौने गु० चतुर्थाश रहित । पोय ना. सी. साग विशेष, वेलि विशेष ! पौर. ना. सी. फाटक, द्वार । पोयाना० पु० साग विशेष । पौराणिक ना. पु. श्रीपेदव्यास, एतनी पु. पोर० ना. पु० दो गाठियों का मध्यभाग । राण का वक्ता। पोरी ना. स्त्री. बासकीगाठ, टाटा। पौरो ना० सी० पीर। पोला० गु• छूछा, कोमल, खोखला, खाली । पौरप० ना. पु. मनुष्यत्व, बल । पोली० ना० स्त्रा० लूबी, खोखली, अनाड़ी। पौरोहित्य० ना. श्री. पुरोहिताई । पोपकर ना. पु० पालनेहारा । | पौलस्त्या ना० पु. रावण, कुबेर । पोपण ना.पु. पालन, पालना । पौलिया० ना० स्त्री० पौग्या, छोग खार। पोपना स.नि. पाला। पौली ना० वी० पारि, खड़ाऊ । पोषित गु. पालागया, पालाहुा । पौलोमी० ना. सा० इन्द्राणी, देवरानी। पोष्य गु• पालने व योग्य । | पौवा० ना० पु० सेर का चापा मारा। पोप्यपुन० ना. पु. ले पालक ! पौप० ना० पु. नत्रामास, पून । पोप्यवर्ग ना० पु. कुटुम्ब । पौष्कराह्वय • पु० पुहकरमृत । पोपना० स० लि. पालना । पौष्टिक गु• पुकिरक। पोसे० कि० पाले। पौसरा० ना. पु. पिया। पोह० ना. सी० पार, तड़का, भोर । पोह. ना. पु. न पिलाने का स्थान । पोहना० स० क्रि० पिरोना, पेड़ा बनाना। | पोहदा. ना. पु. पोगा। पोत्री ना.पु. सुपर, गर । पौ० ना. पु. जल पिलाने की शाला, पासेमेंका पौहा० ना० पु. नार बलादि पशु । प्यार० ना• पुः प्रेस, इवार । पौड़ा. ना. पु० मोटा इक्षु विशेष गन्ना । प्यारागु.मिया, इलारा, लाहिला। पौरि० ना० सी० यादी। प्यारी ना.की. प्रिया, दुलारी, लाहिली । पारिया ना. पु. ड्यादीवान, द्वारपाल । प्यायनासकिरिलाना। पौढ़ना० स० कि० लेटना, सोना । प्यास. ना स्वी• तृपा २२० मङ्गलकोप। १० तुंपापन, तृपिते । 1 www राल। t - m । " . . सादृश्य, दाल। कारी। - पर। प्यासा प्रखर० पु. पातर गु० तीरण । प्यासी० प्रख्यात गु. प्रतिष्टित, प्रसिद्ध असम, श्रा प्योसार ना.पु. पतिका घर स्त्री० सम दित। प्यौहर प्रगर० गु० यता साचा प्रयत, प्रकाश, प्र०यय०निस शदका आदि म यह मिलितहा प्रसिद्ध । उसका अर्थ भागो भा अधेिरह । प्रगटना०प०शि० प्रहो।। प्र० प्रकटित गु. प्रकर, पमिद। प्रगल्भ० गु• शाय ग निया श्रभय योडा, प्रतिष्टान्, सामर्था । प्रकम्पन T०० अाधी झकड़। प्रगाढ ० पु. पाडा, तपम्या, गु. बहुत प्रकर० पु० समृह, गराइ । गादा, कठी प्रकरण : पु० एक विषयमा प्रस्ताप, पाठम प्रग्रह० ना.पु.विरवाली । विश्राम स्थान अध्याय, समूह । प्रघट गु० प्रगा। प्रकाम० ० पु. सिद्धि विशेष । प्रघटी नारधी सुवर्ण वारीप्प रे लिये साला। प्रकार • पु. राति तरह विशेष, गेट, प्रचण्ड० गु० यलगन् तज्ञ, अनसहा, भयङ्कर, प्रकारान्तर गु० दूसरे मार दूसरा प्रकार । प्रचलित गु० जा चलनाह, जारी ।। प्रकाश ना• पु० योति उनाला राश। गु" प्रचार ना• पु० विस्तार, पलार, ज्वला, म. वाश जारा होना, प्रता। प्रशाशक ना० पु. प्राशर्मा। प्रचारक० गु० प्रचार परनहारा। प्रकाशयान्० गु० प्राशयुत, प्रकाशिन से प्रचारना० स० कि. चलाता, बाद देता उम हाना। प्रकाशित गु० प्रयाश कियागगा, रोशन । प्रचारित गु० पिलारित चनिन थोर प्रकाशित । प्रकाश्य० गुप्रराशके याग्य । प्रचुर०० बहुन । प्रकीरा ना.पु० चौरी अन्याय गु० प्रस्ट प्रचता . पु० घरण देवता । च्याप्त। प्रचोदित० गु० पौरत, जो याज्ञा दियागया । प्रकीन ना. पु. कथा, भाषण ! प्रच्चा ना. पु. चोर, खिइयो, गु• गुप्त, प्रकीर्तित गु० परित, भाषित । बाघ दित। प्रस्त० ० स्त्री सभाष, गुण गु० जो पाया | प्रजरण. ना. पु. 17, जलन । प्रारना० अ० कि. जलना, बरना। प्रस्तार्थ पु० प्रकृतका जो र्य। प्रारित गु० स्वलित जलना भया । प्रति० ० श्री. सभात मृल, माया, प्रजा० ० रत्री० सतान, सत्रक, राज्य के वासी ससार। अरष्ट० गु० उत्तम, थर, मुरर अधा। प्रजाताना. स्त्री० जननी, जथा। मक्रम ना. पु. चला, गमा, प्रवाश। प्रजापति नापु• राना,ममा, दद, कुम्हार । प्रमिया० . श्री. व्याारण में प्रयाश प्रजारक०गु जलाहारा । सावनिका प्रजारए ना.पु. जलावन ददवार। . गया। F यता + गङ्गलकोप। २२.१ मृत्ति। . प्रजारना० स० कि० जलाना, दहकाना। प्रतिच्छाया, ना० सी० प्रतिविम्ब सुश, प्रजाशन० २० प्रजामक। T-27 प्रजेश ना.पु. राना, ब्रह्मा, युम्हार ।। प्रतिछाह० ना. स्त्री० प्रतिबिम्ब, .यायाम प्रज्वलता० ना. सी., योनि,-उन्नलता प्रतिदान ना० पू० धरोहर, फेरदेना।। और जलाव । प्रतिदिन अय० दिन दिन। प्रज्वलित० गु० प्योतिष्मान्, उज्ज्वल, जला। प्रतिधार पाया बार, यार, हपार, हरदया। प्रतिनिधि ना सी० सदृश, तदनुरूप प्रतिभा प्रण० ना० पु० प्रतिज्ञा, दारा। प्रणऊं० कि० प्रणाम करों। पेशकार। प्रगत शु० अतिदीन, अतिनय, शरणागत! , मतिपत्० गा० सी० परेया,पक्षी प्रथगतिथि । प्रणति गा० सी० नमरकार, प्रणाम ।। 1.अतिपत्ति ना. सी. यश, ज्ञा। प्रणय० ना० रवी० प्रीति, प्रेम, मुक्ति, भरोसा, प्रतिपद० ना० स्वा० प्रतिपन, परेवा अपनापन। प्रतिनिमा० ना. सी गन्धपसारन !! प्रतिपन्न गु० जानागया, निधित। प्रणव०मा० पु. यवर, मन्त्रराज, श्राद्याधर । प्रतिपक्ष गा. पु. प्रणवा० कि० प्रणाम करो। श, बेरी। प्रतिपक्षी० रनो. प्रणामपु० नमस्कार, सलाम । प्रतिपादन ना० पु. 1,झारना । प्रणायली ना. स्त्री. नाली । प्रणिधान. ना. पु. मनोयोग, उद्योग । 'प्रतिपादित० गु० जिसका प्रतिपादन होगया । प्रतिपाद्य गु. वो य, वर्णन योग्य। प्रगिपात ना० पु० दण्डवत्, प्रणाम । प्रणी० गु. प्रण करनेहारा, मनचला। . प्रतिशत ना. पु० पालन, पोपण प्रतिशत ना० पु० पावा करनेद्वारी ! प्रतन० गु० पुराना, प्रन । মণিবাতান • • অনিয়া যায়। 'प्रताप० ना. पु० ऐवर्थ, तेन, सूरमापन । प्रतिपाराना स० कि० पालो करना, যাব। प्रतापवान् गु. तेजवान, तेजस्वी, तेज प्रतापी० धारी। प्रतिननव० ना. पु. जो बात और पान, से सिद्ध हो। प्रतारक.ना.पु० टग, चवत, प्रतिफल ना• पु० सम्पूर्ण फल, इनाम । মরা ना० गु० चा, ठगई। प्रतारणा मनियन्य ना. पु. मान का पिनारा। प्रतारिता गु० ठगाया, वनिन । प्रतिवन्धमा नादु० बाधक रोनिहाग प्रतिक नाती नाल, अव्य. यह राद जिरा श्रागरा शम्द से पादि में होता है, उसका अर्थ यी प्रतिभट ना० पु० रामान योहा, तुत्यकार । और भी सते कभी एक एम। प्रतिमा ना. स्त्री युद्धि, यो ते, समझ । प्रतिउपकार ना. पु० मृत्युपगारे, प्राचार । प्रतिभाग ना. ० अश, अंशपरं, हरहिराई । प्रतिकार का पु० बदला, पला । प्रतिभूतपु. मनाती. जामिन, दरमियाना। प्रतिकूल गुदा उनटा प्रतिपत्र प्रतिमा ना. सी. मुक्ति, तसवीर, पुतला। प्रतिमहा ना. पु० दार, जो न दगो दायादो प्रतिमास० ना०. ४० महो, ३ मान, या ऐगा दाा लेना, महताये। प्रनिघत ना. पु• माग -, प्रतिमूर० मा पुः परवाही, माया, प्रतिक्षित M ८ -- L बचा २२२ मङ्गलकोप। " प्रतिमूर्ति ना. सी एक प्रतिमा के तुल्य प्रतीक ना• पु. अवयव, अङ्ग । द्वितीय। प्रतीकार० ना.पु० पला, बदला। प्रतियोग. ना. पु. शगुना, विरोध, वैर । प्रतीची ना.स्त्री-पश्चिम दिशा, पधारा प्रतियोगी गु. शत्रु, वैरी, विरोधी । प्रतीत. गु. प्रतिष्ठित, प्रकट । प्रतिरूप० गा.पु. सदृश, चित्र, मृत्ति। प्रतीति. ना. स्त्री विश्वास, सदा, भरोसा, प्रतिरोध ना. पु. घटकावर, रोज। समझा प्रतिरोधक ना. पु• चोर, रोकने राला । प्रतीक्षा ना. सी. और या मार्ग देखा, प्रतिलोम० गु० पाया, श्रीधा, उतटा, दुष्ट, प्रत्याशा। नीच। प्रतोली ना. सी. मार्ग, बाट, राह । प्रतिवचन ना.पु. उत्तरपीछे वचा,वचार: प्रतोप० ना. पु. रातोर, धीरज, सनर । प्रतिवर्ष ना.पु. वर्ष यर्प, हरसाल । प्रतःगु० पुराग प्रतिवाक्य. ना. पु. प्रति वचन, गु० जो प्रत्यर्क ना. पु. ऊगा। उत्तर देने के योग्य है। | प्रत्यय० ना. पु० विश्वास, समझ, चिरु, प्रतिवाद. ना. पु. रियाद, भगड़ा, पिरोध । निशान । प्रतिवादी० ना. पु. विवादी, विरोधी, प्रत्ययाय ना०० वियोग। प्रत्यर्थी। प्रत्यह० चय. प्रतिदिन, हररोग। प्रतिवास. ना.पु. पड़ोस । प्रत्यक्ष गु. प्रसिद्ध, साताद, दटि गोचर, प्रतिघासीर ना.पु. पहासी। देखो के योग्य, अव्य. चागे। प्रतिविम्य ना• • जो दर्पयादि दसने में प्रत्याशा० ना. सी. यासरा, भरोसा, उम्मेद। रूा देत पाता है, यास, प्रतिरूप । प्रत्याहार० ना. पु. खल्प भेजन। प्रतिशम्द० ना.पु. शमपीदे, राम्द के साथही प्रत्युत्तर ना० पु. उत्तरका उत्तर, जगार। प्रत्युत्थान० ना. पु० उटपर जो समान । प्रतिशदक ना• पु० झाई शब्द, गो शन्द प्रत्युपकारक नापु० उपगार पे पटे उपचार, पे साथही यूपादि से राम सुनाई देता है। पलटादेना, नाम। प्रतिपिद्ध० पु.द्धि, वनित । प्रत्येक गु. एका एक, एक, एक, हरएर। प्रतिषेधः ना. पु.निध, ना० सी० मगाई। प्रथम० गु० पाला, यादि, पलल, पुरुष । प्रतिष्ठा ना. सी. मृत्ति स्थापन, मान, प्रघमा • बी. पहली। पीति, य करू प्रथमान्त गु.जा गार वा सो नाम प्रथम प्रतिष्ठित गु. स्थापित, पंतिमान्, यशा, विभक्ति में हो। सुरूपातियुत, रजनदार । प्रधान. सी. मुग्यानि, यश, नि । प्रतिहत गु• जो राशमया, रोकागया, भ्रष्ट, प्रथितय. यशत, प्रसिद्ध, कीर्तिमान । प्र० गु• दानाका चिह शब्दात में, दाता। प्रतिहार. ना.पु.गदीवान, चोरदार । प्रतिहिंसकर गुमाता का पानी, कातर : प्रदक्षिणा के चारोंगोर पर मनात प्रतिशा ना.सी. वचन, प्रय, पराश्य पर पाना, रिना। काकासार प्रदीप ना. पु. दीपक, दिया । प्रदक्षिणा ना. सी० प्रश्पको दाहिनेकर उस मङ्गलकोप। २२३ रता r A 1 प्रदेश ना० पु० भूमिसण्ड, देश, स्थान पर प्रयोध. ना. पु. ज्ञान उपदेश, सुर्ता उजगता, दरा, चारी वितरित ।। तसष्ठी, सबर। प्रदोष ना० पु. सूर्यास्त स दोदण्ड, शियगत प्रपोधक गुरू प्राध करने हारा । विशप, दार। मभद्र० ना.पु. नींव वृक्ष । प्रदोपा० ना० स्त्री० रात, रात्रि । प्रभजन ना. पु० पवन, गु० विनाशन Ar! प्रद्युम्न ना० पु. श्रीकृष्णच द्रनीरापुत्र, काम प्रभव० ना० पु. उत्पत्ति, उपन, उत्पत्तिकारी । देव। प्रमा० ना. स्त्री. शामा, काति, दीक्षि, प्रद्योतन ना० पु० सूर्य । चमक। प्रधान० ना० पु. मुरयमत्री, श्रेष्ठ, गु० पहला। प्रभाकर ना० पू० सूर्य, च द्रमा । प्रधानता० ना. ली. मुरयता, थष्ठता, वजा प्रभाव. ना. पु० माहाम्य, सामर्थ, फल । प्रभात. ना. पु०प्रात राल, भार, तड़ा। प्रधाननगर० ना. पु. प्रसिद्ध नगर, बड़ा प्रभाती ना. मा. रागिनी विशेष । नगर। प्रभावती ना. स्त्री० पातालगगा। प्रनाम. ना. पु० प्रणाम । प्रभास ना. पु. तीर्थ विशेष । प्रनाशी. गु० नाशनेवाला, मिटानेवाला। प्रभिन्न ना. पु० हाथी, (प्रभिन्ने गनितामत्त मगच० ना० ५० घल, पिरोध, ढेर, धोखा, चूक : इत्यमर )। ससार, बातों का विस्तार । प्रभु. ना. पु. नाथ, सामी, राजा, सिर अपचित० गु० जो विस्तारयुत वर्णाश्रा, जा प्रतिपालक, गुरु। चला गया। प्रभुता० ना. धी. रायादि अधिकार, ध प्रपंची. ता. पु. प्रपचपत पाती, ली। प्रभुताई० ना० स्त्री० नान्पना, स्वामित्व प्रपितामह० ना• . पितामह का पिता, प्रभुत्व. ना. पु. ईश्वरता। परदादा। प्रभुतालयना. पु• नीतिगृह) कचहरी, प्रपितामही ना. स्त्री० पितामह की माता अदालत। परदादी। प्रभृति अय. इयादि। प्रमदा० ना० स्त्री. सुलक्षणा स्त्री। प्रपौत्र० ना. पु० पौत्रका पुन, परपाता। प्रमदी० ना० स्त्री• कलिहारी । प्रपौत्री ना. वा. पौरकी पुी, परपाती। प्रमथा० ना. स्त्रा० हड शिवा। प्रमथ्या प्रफुला० ना० पु० फफूल बाल । प्रफुल्ल गु० विकसित, पूला, खश । प्रमयान० ना. पु. श्रीमहादवनी, यथा मकुल्लित गु० विकस्ति, पूलामया, आनन्द, प्रमथाधि० (मृयुजय वृत्तिासा पिना प्रमथाधिप की प्रमथाधिप इत्यमर )। मग्न, खुश। प्रयन्यना. पु म स वाक्य की बनावर, प्रमा० ना० स्त्री० यथार्थ का ज्ञान, अनुभव। रचना विश, क्या वृत्तात, दावस्त । प्रमागाना० पु. निश्चय का कारण साक्षी, प्रयन्धाधीन गुप्ररथ राधीन। श्राधि प्रयद, निश्चय, सच्चा, प्रा । प्रमाणिक गु• योग्य, निश्चयकारक, ग्राह्य प्रवल० गु० बलवान्। पहलान् । प्रबलता० ना. सी. बलालारी, परवस। रूप प्रमाण क योग्य 1- - -- प्रपन्ना० ना.पु. पवार पोधा। } २२४ मङ्गलकोप। स + . -- न 2 . पन। प्रमातामह ना. पु. मातामह या पिता, प्रयर० मा• पुरसतान, यश, गोत्र, बखर परना।। वान्, अष्ट, बदादर।। प्रमातामही ना.मी. मादामकी माता, मयतंक० मा. पु. नरक, उतारतेहारा। परनानी। प्रवर्पण ना.पु. परिशेष। प्रमाद० ना.पु. मूल, , 'परलत, थाना प्रवाल ना.पु. मृगा। पानी। प्रवास. ना. पु. विदेश, देशावर, परदेश। प्रमादी गु० पचन, अशोच, भुलइ । प्रसा ना० स्त्री. मधुगरा। प्रवासी० गु० विदेगी। परदशी । प्रमीलिका ना. सी. भौह, पुरी। प्रमीला प्रयाह. ना. पु. नरीकी धरा, बहार, साथ पवन। प्रमुसः ना. पु. निशाचर मिशेर, प्रधान । प्रमुदित० ० हर्षित, यानदिन । प्रविण गु० ना प्रवेश हुआ, घुमा, पैा । प्रमेह. ना. पु. वीर्य रोग, कीपरोग। प्रवीण गु० निपुण, सुचनुर, स्याना । प्रमोद ना० पु. हर्म, धान। प्रवीणता० ना रती• निपुणता, चतुरा', स्यान प्रमोदित गु• हर्षित, पानन्दित, खुश । प्रयन्त श्रव्य. पर्यन्त । प्रवृत्तकर्ता गु० विश्वासी, मजूर, ननर । प्रयाग ना.पु. तीर्थरान, इलाहाबाद। प्रवृत्ति ना. श्री. पान, समाचार, धारा, प्रयाग ना.पु. धावा, गमन । इदा, किसी काम में लगना या लगाना प्रयान्ति कि० पाता है। यस. प्रयुक्त गु• मिलाहुआ, भराहुया । प्रवेक गु• प्रधान, सरदार । प्रयोग ना• पु• अनुष्ठग्न, दृष्टान्त, फल, उपाय, प्रमेणी ना० सी० वणी शारा। प्रवेश. ना. पु. पैठ पहुच, पुसाव । R प्रयोगी गु. उपायी, चलानेवाला । प्रराक् गु. लीन, लगाया, थस्ति । प्रयोजक ना• पु. परक, उठाने हारा । प्रशसंक गु• स्तुतिकर्ता, कड़ाई करनहाँग प्रयोजन० ना. पु. कारण, तात्सर्थ, गरन, प्रशसनीय० गु० प्ररामा क योग्य । मतलन। प्रशसार ना. सी. सुनि, बड़ाइ। प्रयोजनी गुः वर, मतलबी, गरजी। प्रशमन ना.पु. वध प्रयोज्य गु• पुरुष, ना. पु० सेरक, पेला।। प्रशस्त गु० ग्रानदा, याग्य, भला। प्ररम्य. ना. पु. प्रलम्बासुर, लम्मा । प्रशस्तिता. मा. लुाते, बड़ा, योग्य, प्रलम्यान ना. पु. बलदानी प्रजय ना. पु. कल्पात, सर्वनाश, सका। प्रश्न ना. पु. निजाता, राराल पूछना। मलयाल.ना.पु. नाराम समय। प्रश्नोत्तर० ना• पु० प्रश्न का उत्तर, रुपाल प्रलाप ना.पु. अज्ञानता समय कायायनि- राय। प्रपद ना.पु. मृग, हरिण । प्रलेप. ना.पु. श्रीपरि आदि लगन ।। प्रष्टा० ना.पु. पूछनेहारा। मरश्चना . सी. प्रतारए, टगी, चोगे। प्रसक्ता यम. सदा, गु० सादा प्राध . तदवीर, प्रयोजन।। 1 . ह 4 1 थी। M . N जवाब।
२२५ मङ्गलकोप। + कृपा 7 , 1 । 4 . . रण, पोगा। प्रसग ना. पु० प्रस्ता, मेल, सगम, सयाग, प्रस्थान ना. पु० गमन निदा, धारा करने सम्बध, चर्चा, साथ, स्य, यस्त। हारेका गमन, पायतुराव नकल मान । प्रसन्न गु० हर्षित, श्रादित, दयालु, खुश। प्रस्थापित गु० प्रेरित, भजा गया। प्रसरता० . स्त्री प्रसाद, हम। श्रानाद, प्रस्थित ना. सी. कीर्ति, नेकनामी। प्रस्फुटित० गु. विकसित । प्रसन्नित. गु• हर्षित, आनदिा, दयालु, राजा। प्रहर० ना. पु० पहर, याम, दिर वा रातक। प्रसमित गु. रहित, दान, विहून बिन चाया भाग। प्रसव. ना. पु० गर्भ से बालर का निरला, प्रहरण ना० पु. अग्न, मारण । जनाया, पदायश, उपत्ति ।, ! महस्त० मा० पु. राक्षस विशप । प्रसवताकि उपजते, जमते। प्रहार ना• पु० चाट, ठोकर, मार। प्रसय २० माया प्रतिकूल उपजने के योग्य । प्रहारित गुरु मारागया वा माराहुया। प्रसाद० ना. पु० देवताओंकी वा गुरुवी जूठन, प्रहारी गु० मारोदारा कृपा, दास, भोजन। प्रहन 'ना. १० पु. विनय, प्रणाम । प्रसादी० ० सी० जो कुछ दाताओं को प्रहेलिया० ० सी० पहेली, दृष्टियूट । चिदायागया, भोगा, खाना । प्रहट० गु• सन्तुए। प्रसारण ना. पु० फेलार, पसराव, ग धपसा प्रहाद० ना. पु. भात पिशष । प्रहादिनी १० H • इसपादी यूटी। प्रसादक० ना० पु. भागी बथुया या साग । प्रक्षालन० ना० पु० धालाई । प्रसारित गुरु रिसारित, ना पलायागया । प्रक्षालित गु० जा धोयागया। प्रसिद्गु० प्रकाशित, विख्यात, मशहूर । प्रशा० ना. स्त्री० सरसती, निर्मलनि। प्रसिद्धता० ना० सी० अक्टता, मुख्याति,शहूर । महात्मा गु० आमज्ञाता यामप्यानी । प्रसीद० कि० दयालुहो, पारो। प्राक् अन्य अाग, पहल, पूर्व । प्रसूत० ना पु० जात, नामा, प्रसूति ।' प्राकार० ० पु. गढ़। प्रसूति ना. स्त्री० सा पिशेष, पानीबहने का प्राकृतावि० ० पु० सूरदामदे। रोग विशेष। | माटतभाषा० . सी० रखनमायरिए। प्रसूतिका० प्राकनगु० पुराना। गु० सी० जाना जचा, माता। प्रसूता प्रागल्भ्य ना. पु०मन्मना, टि, गम प्रसून० ना. पु० पु.प, फूल फल माची ना. सी. पूर्व दिशा। प्रसौती पानी प्रस्ती । प्राचीन पुराना प्रस्ता। प्रस्तर० ना० पु० पथर, पापाय। प्राचीना नानी बाला। प्रस्तरमय० गु० पाशाणमय, पथरीला प्राइविशकर नारामारी ग्राम से दिनार प्रस्ताव ना• पु० अवसर, चर्चा। करने के FORT पुण, गायक। प्रस्ताविक गु० समयपर, सामरिक । प्रासन पुस्तामा पु, जोर, प्रियतम । प्रस्तुत गु० केषित, सिद्ध स्तुत किया गया। मारदानाशी जोरदाता। प्रस्थ ना. पु. परिमा विशेष मापप्रतिष्टा ना. पु मन्य से देश में प्रस्थर.ना.पु. पथर।' - T MA . - है मङ्गलकोप। राना। 1.A. . फफसाना सदादि। फणपति ना. पु. शानी फरफन्दामा पुछल, कपट, धोसी फणा ना'पुं० फणं। फरफरिदयाल गुः उली, धूर्त, ठग, कपी । फणिना० पु सोपं वा उसको मणि". फरसगा पुफरमा फणिक ना.पु. सांग । फरसा गा.पु. पावशा पुल्हाड़ा, "दबर, फणिज्जका नामुमत्या सुगन्धितपाया। अन विशेष फणी० ना.पु. पि, गांप। 'फरहाना पु पंगा, पढावा, गु. *फणीन्द्र ना० पु. सापाका राना, शेषनो। फरहरी ना० ० अधरहा ।। फणीश फरहा ना• पु० खोखला, फाला, निदर्शन। फदकना १० कि० दालयादिका.चुरना । फरिया गाना - त्रियों के प्रोदने का परंत्र .फदफदाना०,०कि..,पलवलाना, छोटे २ विशेष, लड़कियों के पहरने का वशिष। 4 दाने पड़ना ।। फरी ना. सोटाल,गली फल समेत 1 •'फन नाफ फरा ।.., . फर्राटा० ना. पु. बांसग टुकड़ा, वजाक हिलने फनगा ना. पु० दिवा, प्रांसफोड़ा। घा घोड़े को श्वासका जोशद होताहै। फनफनाना अंकि. • फर सोलगाः पुस- फरीना कि० हिलना वा उदना । कारना" .. फल का. पु. वृतांदिश सरप, पलटा मोती, फन्दा ना पु० पासी, पेंच, उलझार । फौका भोग, सन्तान, वाणक ग्रागे का लोहा पु. फूलाटुया। फदो गा रवी गीलापन के कारण से जो फलकना० अ० कि 'पड़ाना । सफेदी प्रचार प्रादि मे लगनाती है, सङ्गत । फलचारि० ना.पु. अर्थ, धर्म, काम, मोद। फफोलाना• पु० फुला, छाला । फलजगक० ना. पु० जो फलनमा। फन ना. सी. शोगा। फलताड. ना.गु० ताड़का फल । फयाना० अ० कि० पनपना, डाल निकलना। फलु५० ना० पु. गृह गु० पलक दाना । फयता ना: पु० योग्य, ठीक, धनता। फलदाता० फ़यती० मा० रवी शोभा, किसीको यत्र पहिने फलदानि गु० फेल देनेहारा । देखकर कहना यह किस जातिम है। फलना ० कि. फललाना भाग्यवानहोना । सी. शोभा,छानन फलमूल ना. पुः फूल की दण्डी । फवना० ३०कि. सोहना, धानना, रानगा। फलराज ना.पु. सरयूजह, दशांगुलं, फपीला गुमित, सनीला, शोभायमांन । | फलवर्तुल० ना० पु. तरबूज, हिंदूवाना ।। फर० ना•पु०. फल, तीरोगांसी, पला । , फलवान् गु० जो फल युक्त हो। फरकमा प्रक,कि कना। फलाई ना. पु. संयुत्ताहर, समरतसर, गु. फरचा ना. पु. मेत्रोंका पटनाना अमला । फलित। : फरचानास रियायकरना, ग्राजा देना। फलांग ना० सी०, कुदन, संपुन, देग, जरत फरछा मु. निर्मल, स्वप्न, सरा फरहाना० सवि० खण्य वा निर्गल; पराना, फलाश ना० सी० फलांग । फलित० गु• फलाहुया, फलों समेत । . N - 21 फचन ना . फलाशिना मा०.५. सिरनी। सराना।
मङ्गलकोप २२६. जाल में रात -- L 2 -- C . r V फलितार्थ ना० पु० तात्पर्य्या, टीर अर्थ! पांफड़ ना० पु०६द, मुइ। फलिना मा पु० नियगु । फांस० नो. स्त्री सूक्ष्म दाग। फलिया० मा. सी० बीमा तुकमा । फासना० स० कि. वाधना, रोकना, पदारता, फली ना० सी० Writ, तुरमा, ना ३ वृक्ष, गु०सी० पलित। फासा०प० पु. डोसा उपका। फलीरा० ना.पु. पारमापन । फासी० ० सी० पदी, पसर्ग, पद, कण्ठंग, फलोदय • पु. पलापत्ति, प्रामसराम, स्वर्ग ग्रााद। फाग० ० पु० गुलाल या उराश डालापा फलोपम० पु. साद बैंगन, श्वेत भाए। उड़ाना, होला का समय। फसकद० ० सी० बठा विशेष । फागुन ० पू० पाना। फसकना० अनि पपना । फाटक० पु० या दार, अपार । फसकाना० स• मि• पापा ताड़ा, पाडा फाटना० अ० कि. परना। पाडसाना स.नि. भभारता, भभोर। फसकाऊ १० पु. पाहू तोह पाहू । पाढनारा०लि. चीरता पाला तोड़ा फसना० य. दि. मा उलझा, जालमें मसका। पड़ा, वीषा में पड़ा, मा, पदम थाना, स में श्रा। फादा० गु• चाराहुया। फाल. ० सी. हलरे अागका लाहा, चौकडी फसफसा० पु. पिलपिला अलगा। सुपारी या हा, डग चो। ग फसफसाना अ.कि.गिपिता, डरना । पारासा० • पु. पन या वृद्ध पिशप । फसवाना स० कि, उल, असमाना, फागुन करताना, पदास TI० पु० पाया मास, या फागुन पसाना स.नि. यभाना, उलभाना, म, फारनिझा० ० स्त्री० पगुः हाला। असा जाल में डानना, और वदीशाला में पाया• पु० घलूया रूखा। रसमाना। फवडा० ०५० मारी सोदो का अध, फा, फहरना० य.नि. पर। बड़ा पार नाड़ी दाल फहराना अनि० पर्सना, उETI, दा। फाघडी • श्री. परागा बरागा, फाक ना. सी. पलसहरहा। फायना अ.कि. साइना, गाभाद।। फाफना स.मि. फसा मारता ! फारित गु० शाभिा। पांकी० ० सी० पार, पकिका, पूर्णपक्ष । फावी० गु० शाभितभई, शामा दा। फाटना० म० कि. वाटना, सिमाग करना। फाहा T० पु. मरहम से भीगाहमा कपा फाट० ना. पु० चाडार, हिरसह, विभाग। दाटारड़ा नसी। पाद० ना. पु. पद, "दा। फिकारना०रा०कि. शिर TII रसा। पादना० स० नि ल पा, दजा।। फिट० ना. पु० फिटकारा। फादार ना० पु० फाद, गूमा क्टिकार. ना. सी. विधार लान। फादी० ० ० गनों का एक वाम । फिटकरी मं• पररा! 1 . - . 1 २३० मङ्गलकोप। P - m रमना। फिटकारना० स० कि विकार करना, वासना, फुकनी० ना. सी. धोकनी, निगाली, याग शापना। फूकने की जो वास वा पावलादि की होती है। फिटाना स.कि. पेंटना, फिनाना । फुट० गु• अयुग्म फिर अय. पुनि, पुन , फेर । फुटकर गु० अलग, मिन भिन्न, ययुग्म । फिरकचाहनी० ना० स्त्री. सेनगाड़ी। फुटकी ना. स्त्री०ीर, दिटकी, गु. अयुग्म । फिरकी० ना० सी० नंगी, भौरा, चर्क, फिगो फुड़िया गा री- फुसी घोगा फोदा । को वस्तु निसको लड़के हिराते है। फुदकना य. कि. दुदकना, भाडा घोड़ा फिरजाना .कि. पलटना, फिर।। उचलना। फिरत. ना. पु. वस्तु जो अप्रसन्नता से फुदकी ना० खी• पनी विशेष । लौगदी। फुनगी ना०सी० क्ली, वोपल, वृत्तकी चोरी फिरता० गु० रमता, फेरोका पैसा । फुनंग ना० स्री. शिखर, चारी। फिरतारहना० अ० कि. रमना, पैरा करना, फुनसी० ना• नी• मुहामा, पुडिया, पिरती । भटकता रहना। फुनिया फिराना० स.मि. घुमाना, भटवाना, रमाना। फुन्नी ना. सी. लोलो। फिरावा. ना. पु. धुमार, पेर। फुनो किन प. कि. घूमना, लौटना, भटकना, फुपकार० ना. सी० पुकार । फुप्फाना पु० फूफान फिनी. ना. स्त्री.फिरकी। फुप्फो० ना. सी. फूफ, पूया। फिली ना. वी. रियडली। फिसफिला गु• डरपोक, फसफसा । फुफेरा० ना० पु. १ गु• नो प्रसे उत्तम मिसफिसाना० . कि. भयभीत होना । फुफेरी० ना०सी० 3 भया या जो पूपूका सम्मपी होवे। फुर० गु० सच, ठीक, सत्य। फिसलन. ना. स्त्री. खिसलन, दिलना। फिसलना० प० कि. सिमलना, विधनना, फुरफुराना० अ० कि. कापना, दिलना। फुरति ना. सी. पुर्न। रपटपड़ना। फुरफुरीन • घी० पाहट, थरथराहट । फिसला० रु. कि. खिसलाना, विदलाना, ना. सी. वेगना, शीघ्रता, चालाकी मूकना। फुर्ती चटपट, गल्दी। फिसलाहट ना. स्त्री लिसलाहट, चिक्ना फुतीला गु• वेगी, चालाक, चटपरिया। फुलका० गु० पूलाहुया, इलका, ना. पु. फीचना० कि. ना. संचालना, धौना । फोका गु. स्वा रहित, सीटा, सावला, बदरग, फफाला, पतली छोटा रोग। मजे। फुजारनाथ.कि.पूला, फण, उठा।। फुकार० ना. स्वी० सापकी फायनाट । फुलकारी ना. सी. कपड़ा निसमें पूलहों। फुकारला. प्र. दि. नानाना । फुलकिया नधी रोग विशेष फुहार० ना. श्री. भासी, पी। पुलका फुकना ० कि० जसना, ना• पु. पैसा। | फुलझड़ी० मा. स्त्री. भातशवाजी विशेष । . डराना. फुर्तः मंगलकोप। २३१ 7 छना। फुलवाई० ना० सी० पुलवाडी, रामायणे यया, फूलना० अ. कि. खिलना, विगसना, थान एक सखी सियसग विहाई, गई रहै देखन, दितहोना, सूजना, अभिमानी होना। फुलपाई। फूला० गु० सूजा, ना. पु० धानोंके लारा। फुलवाडी० ना. सी. फूलोकी वाही या बाग । फूलाव. ना. पु० सूजन । फुलाना० स० कि. सुजाना, मोगकरना। फूली० ना० स्त्री० पुल्ली जो ग्राख में होती है फुलासराना. पु. लल्लोपत्तो, फुसलाहट । फूस० ना. पु० पुरानी घास, तृण, पूसमास । फुलेल ना० पु० चवली का तेल । फ़सड़ा० ना. पु. गूदड । फुलौरी ना. स्त्री० पपौड़ी। फूसी० ना० सी० भूसी। फुल्ल गु० पूला, लिला । फूहड़ ना० स्त्री० फूहर। फुल्ल गु० बोला, पूलसे थोडे दिये पल फहड़ा गु० कुवचा कहोहारा । फुल्ली० ना. स्त्री० पाखकी फूली । फहर० ना० सी० अनसीखी, घामह, कुचाल, फुसफुसाना० अ० कि० धीरे धीरे वाताहना, चलोहारी, ना. स्त्री. भिष्टल । झीसी पड़ा। हा ना. पु. स्तनो सदश रुई गोढ़ा । फुहार० ना० बी० पाना कण छारे २ पडना। फूहार० ना० रत्री० पूहर, पुहा । फुहारा ना० पु० पचारह छारी २ बूदें फूही० ० सी० भीसी। फैका ना० स्त्री. फेरने का काम वा चाल। फूश्रा० नाक रत्री० पूर, बापकी बहा। फैकना० स० कि० डालना, झोरना । फुक० ना• पु. फूषन का काम वा चाल । फेकाव० गु० फेंकन के योग्य ! फूकना० स० कि० मुख से वायु छोड़ा, एल- फैट० ना. स्त्री० डव, कवि ध, पटग । गना, मुख से बजाना, उड़ाना, जलाना। फेंटन० स० कि० मिलाना, सारा, लतपत फुकारना० अ० कि. पनपनाना। करना। फूही ना० सी• झीसी, फूहा । फैटा० नापु० बाटा पगड़ा, परमा। फूकना० स० वि० पूछना। फैटी ना. ना. पाटी। फर० ना० सा० काडीविशेष, अयुग्म, लिंगाइ, फेट० ० सी० फेंट । मिाता, स्वार। फेटना० स० वि० फेरना। फूटना ना० स्ना० अनबनार, निरोप। फेटा ना.पु. फटा। फुटना० अ० कि० टूटना, पटा, भिन्न भिन फेणु ना० पु• पेना। होना, प्रकट होना दुर्गध निकला। फेणोयारि० ना. पु० समुद्र फेणु । ८ फूटा गु• दया। फैन. फेना ना. पु. भाग, पशु फुटी ना. स्त्री विरोर, विगाड़, गुस्स। दृफा० ना पु.श्ता पति । फेनाना० अ. दि. फेना उठना । फनी ना. छौ० पश्यान विशेष । फफा ना. स्त्री वापकी बहिन । नुस० ना० पु० पीयूष । फल• I० पु० पुप, वली,हिानी, सूज, जले फेफडा० ना. पु० अग विशप जिसके द्वारा हुए मृतकवी ही। स्वास लत है। . . 4. h . • -- 1 मङ्गलकोप! २३२ -- --- . यशकार ना.. याम या मागला। + 7 ८ यागमा । -- 1 मार होगा। फेफड़ी ना. सी: चलोकी ग्राशक्ति । १ पटरीया ना. पु. भागकर्ता, बाटनेहा ! । फेर० अन्य पुन । घटाना सकि० बागा वा बटवाना। फेर० ना• पु० याक, टेदाई,, घुमार, घेरा, टेत. मा० पु० वटवैया । कुराहली, घोल, घुमार। यडोहा० ना० पु० वाण्डर, बोहरा । फेरना. स.नि. घुमाना। घंश ना.पु. वारा। फेरा ना० पु० घुमार, फैलाव । " फेरीफेरी ना. सी. इधर उधर जा, ओ-शक्षारी ना• पु. वशरोचन । यंशरोचन० पु. वरालोचन ।' फेरी. ना. स्त्री प्रदक्षिणा । वंशावरती० ना. बी. वसाईली। फेरीवाला ना० पु. फेरनेवाला, निशानी घशी पा० सी० बसी । धादि। यक ना० पु. का नाती. झर, गप । फेर० ना. पु. भृगाल, गीदड, धौसा, अतर, पकुची० गा• सी० पौधा विशेष निसके वीन से फेर। सुन्ली जाती है। फैटा. पु. गा बकझक. ना. सी. बकवाद । फलना०पकि. पिछना, पसरना, विधरना, यकना थ० वि० वड्बड़ाना, झालगा। यस्यकल ना. सी. बावह, गपशप । FITS IN विद्याना, चौडाा, पसार यां, यकवकाना० स० वि० वया करना। पिथरापाट कर।।" घकरा० ना. पु० अज, चार्ग । फैलाव ना० पुरियान, पहराम, प्रकटता, यकरी० ना. श्री. श्रना, छरी छाग। प्रचार, भरपूर। यक्लाग. पु. विलग, बाल । फोर गु० चौरसल, पाला, ना. सी. वाणी यावाद० ना० सी० सावक । एक पोर निधरमे पेंच में लगान है। यादी० ना. पु. परकिया । फोकी ना. सी. नली, दूबी । घरास० ना• पु० सम्वाद। फोहार ना. रवी० पुहार । स्वादा० ० पु. फोक. ना. पु. तरछर, सोठी, गु० सोसला चकवाही सी. बड़वाडिया। वस्त्र का गवा, बाखा ए यार।। यकसा० गु० समेट बधेना । फोकटमा.पु. क्गाल । यकसुराग ना. पु० चपहास, चपरास। फोकड़ ना. पु० यूद, तरका, पूड़ा। फोड़ना० स० कि. ताड़ना, फाइना। बकायन ना. बी. वृत विशेष। फोड़ा० पु. सोटक, बालताइ, पिरती। | यारा ना० पु० अगुवा, पथिर, बोदी, फोला गा.पु० पफोला, छोला। यकारी ना० ग्रीक टदीलीर। [] पंझोटी ना. स्त्री "वास होने की घौषधि याला गा• पुल बगला। घकनी ना. सी. बहुत दिनको ध्यानी गाय घंटयानास हि भागकरवाना, हिस्महरू यमा भैंस यफेलू नापु० पलाश अर्थात् दान्त्री जेइ । है । चकलेला. गु० बक्सा। . घटिया ना० या छुरी, ना । १ . विशेष - खाना।
मङ्गलकोप। १२३३ . . ... - । . . 1 " यो झूटरर बनाते हैं निसको रसी प्रादि मन- यगराना स. किस विटवाना, फैलाना, यि, राना। वकोटना स. समोरना नोचना । पगला. ना. पु. क, गुला, पी विशेष। यंगलामगत गु० परी, धृत्त,'पली ।" यामाना.पु. रंगने का काट। घकल ना पु० यकला। यगहंसनापुस विशेष ' पगिया ना०पी० १ फुलगाड़ी, चौटा उपयुन, घका गा.पु. 'चीना श्री. 'गुरु की गणी, नम्यादी। यगीचा ना० पु. घोगयाग, फारसी शब्द है। वक्षरी ना० श्री. झोपड़ी, घर, मकान । यगुवा० ना. पु. बक, पड़ी मिशेष घसानी पु० यतीरा, मोना। गूला गा० . दाण्डर, मोहरा थधान ना. पु० वर्णन, सुनि । यमनदा ना.. संगन्धि विशेष, जाविरोष। घखाननास कि वर्गकरना, सुस्किरना, यघना० ना.पु.नार के रस या दोन जो नाला को पहिनाते है। यखारना पु० साता, भगार, चनान पधारा गा०० साउर, 'यगला, पसनन्धि । 'पंखारी नापी रसने की कोठीमा घघार ना.पु. पीक । 11 पोटरी। पधारना स० कि. छोकगा।" i...: "पखेदार ना. पु. गगहा, राई, रोगा। धग्री० ना. सी. धांस, घुड़माली।'' यग्नदिया ग. गडालू, लदारा। योल. ना. पु० रानात, नाति रोप। यघेलमएड ना० पु. देश शिा, रीताका बखेरना० स० वि० विघगना, सिएटानी। घनोर० ना. सी. टोर, राफ, अाशान। प्रदेश। चपोरना० स० कि. होना, पृथगा । बघेला. ना. पु. वल, नाप सादामरू। एसौरा० न० पु. कन्धा, मोदा । यंक गा० पु. गा। यंकाई ना० स्पी० पंट, रेदाई। चग.ना.गु. या गुला, बाग। यगछूट ना.पु. सरपट । देश। वगपांति० ना. स्त्री गुला की पांति। घगपांती यंगरी ना. स्त्री. गहना शिष। . पगला. ना. पु. पपर. या सारैल का पर घगड़ा ना पु० छल, दुरा। रिशर, पान विशेष, वगाले फे अएर वा भाषा। घगड़िया गु० छली, टग! गसेन ना. पु. अगस्य वृप । घगदना अ० कि, फिरना, निगड़ना, भूलना, पंगा गा० पु सांसको नाम पर, गु० उल्लू, फलना नासमझ, रामायये गधा, तीरप रान प्रयाग नदी थगदाना० स० कि० किराना, रिंगाइना, मुलाना, पुनि गंगा, राममनुन कमरे शटरंगा ।' फैलाना। ना. वगमेलना "अति निकट, बाग में शार्ग का यंगाला से पूर्व में है। मिलनाना। यंगालि० मा स्त्री. बंगाली की रसी यगर. ना.पु. घर आंगन, सहनी यंगालीगु.गांल का मांगी । HEET ne अंग ना.पु. धातु शिष, उल्लूपगा: पंगाला । वगहना०,१० बाल शिर ! पंगाल देश शिप जी गयानी २६६ मङ्गलकोप। . - 4 , । . 1 बत्तीसी० ना. सी. सर दांत, • मिसम | वधश० ना० पु. यंशका वध । बत्तीस वस्तुपा समुदाय हो। बधस्थान० गु.निस स्थान में वध कियागय । घ.सा.पु. चापल विशेष बधाई ना० स्वी. जयकार मानना, यानन्द, बधाना० ना.पु. महलाचार मा धनी यदि यथुया० ना० पु. शाक शिष भानी। ६ वर्र० ना. सी. को लड़के के घर पूफी खेनाता है। • यद पारसी राग विशेष नाश " चधिक गु.पु. सेटकी हयारा, पमियारा यदना० स० कि,दारलगाना, मानता अंगीकार बहेलिया, कसार । करना। १४वधियारा सा पशुओं में जो पण्डहीन हुया। पदर० ना० पु. सब मेरा एक सहय मद्राची थली धर्थात् तोड़ा यह शब्द घरवी माशुद्ध पदर है- वधिर० गु० बहिरा । परतु अयोध्या काएड में, यो, लिसाहै, यया, बघूः विश्व बदर जनु तुम्हरे हाथा. वटी ना. धी० बइ, पुत्रकी सी। वध्य० गु० जो वध करन के योग्यहे । - यदल..पु. मेघ, प्रतीकारत अश्य. सन्ते । यन० ना० पु. वन, पाणी पदलना, स० वि पराना, पीथना ! वनज० ना.पु. वपिन, व्योपार, रमल । पदया० ना.पु. सता ताडात, पलग याजा पु. धमका योपारी जामलों r पौया। पर या लादकर लेनाता है। पदलाई० स० 'स्त्री० तोलाई, पलगई, यनजारी ना. स्त्री० नजारा की रत्री, तम्पू पौधारे। विशेष अघसीमा जो न। बदलाना० स० कि. परडालना ताड़ाना पनठन गु० हारयुत, सवारी, सनधन से । पौयांनी यनत • पु. गारसे चुनौहुई वस्तु विशष जो पदबाना स्त्री० अपरा धारा मघ । । गाभार लिये टापी धाद म लगात है। चदा गु• जा पार र में लिसिनहै। वानरा. ना. श्री. पाधारिशर, यदायदो० अन्य• हिराका समन लाइ स बनना अ० लि. रूपपकड़ना तैयार हाना, झगड़े से। यदि० TI. घी कृष्णपद, इनु, लिये यनपटना ० कि० मारना यदी वनप्रियन ग्री. पापल । घदल..पु. मय। यनमञ्जरी ना० स्त्री सभालू घद्ध गु० जो वाधागया। बामाल० पद्धी ना. सी गल में पहरोकी तस्तु विशेष यन्माला ॥ और लम्बा पार तक समा चमका होती है। यद्रीनन ना. बडीगा का वा) । वनमालिका ना. सी. राहामन्द, वन यथ ना. पु. हत्या, हिंसा, इतन! माला। पधन ना.पु. हवन, हनन । . amrr|यनमाली 110 पु. भीकृष्णच या एकनामा घधनासकि मारदालना, यावरना ! यनरा. ना. पु. दुला। ना.पु. पानी पीने का पारविशेष । यनरी ना. सी• दुलइन् । R बना। 1 m "* । 1 ६ M - t 3 ।
"२३८ मङ्गलकोप। . क बफाराना० पु. वाफ, भारी परनाना• पु. वृत विशेष, स.कि विवाह । यथा० ना.पु. लाका बालक । करना . कि. जलना, धपकना, नदी विशेष। बबूल ना.पु. वृष विशेष, कोरड़- बम. ना. वी. सोता, पुस । पानी ना. सी. पपनी। बमकना य०कि. उभरना, सूनना फूलना। घरयस ना.पु. बल ग्लासार, प्रबलता। पम्बई ना. पु० देश पा नगर विशेष । घरय० ना. पुपक्षी विशेष । पम्पा० ना. पु• कूप विशेष, सोता, यत्र यरवट० ना. पु० रोग विशेष, सर्प विशेष, विशेष। बरवस, गरियाई। बया० ना.पु. पतीविशेष, निरखी। घरया न.पु. धन्द विशेष, काग मवलीमारने बयार० ना.ए.वायु, पवन, हवा । का ना. सी. रागिनीवशेष निससे हरिण और बयाला. ना. पु. रोशनदान, धुधुका, गु. सर्प मोहता है। जिस वस्तु में बाई रहती है। परस.. पु. वर्ग, मोदक वस्तु विशेष जो बयालीस गु. चालीस और दो, ४२ । थीम से बनती है। ययासी०य. अरसी और दो, ८२। यरसगाठ. ना. स्त्री. जमदिन, जमदिन में घर ना.पु. चाशीर्वाद पदार्थ, दुलहा, थान सर्वदा गाठ साधने का व्यवहार । की चौड़ाई काई वृप वरदान, ना. स्त्री०यरसना० . कि. पानी पहना। निरनी, ५. श्रेष्ठ, सदर, अभिराम । परसवान० गु. वर्षी सवती, वार्षिक । परर.ना.पु. तम्बोली। | परसौड़ी ना० स्त्री वर्ष का माड़ा या कर, परखना०प०कि. बरसना। परगत परहा० ना.पु. खेत जिसमें गौचराते हैं, ररसा ना.पु., वृष विशेष परगद चमोग, सेतमें पानी लहाने का मार्ग, पुत्रनाम परजना. स.कि. निषेध कसा, हटफना, के बारहवें दिन का व्यवहार । बारना, रोकना। | यरा ० पु. वड़ा, भोजन में व्यका विशेष, परताना.पु. प्रत रत, चमोटी, चमड़े की श्री. बाकुची, गु. प्रदी रत्री। रस्सी जिस से पुलका पानी खींचते हैं, गु. पराक० ना• पु० पराक, दवता । जलत, धधकता यरात ना. स्त्री. दूलह और उसके साथी। परतना०स.किशाचना, विचार। पराती० ० पु० विवाह क यौतहारी। परतनी० ना..शी. घरीग, वर्षमाला। बरा. जि. परे रहना, अलग होना, घरदैत. ना. पु.भार, दसौपी वानावाले । याचार करना तजना, मोहना। परध. ना. पुरैल, वृषभ । पराय० ना. पु. सयम, यलगार। घरधना० स० कि० गौ और चैलकाप्रसंगहोना । | बरिया ना० स्त्री. बड़ाई, उमग, खस । घरघाना० स० कि. गौम त्रैल से प्रसग के परिपाय ना. पु. परट, जबरदस्ती । राना। शरियार० गु० रजवान, प्रबल, तेजस्ती। परन० ना• पु. वर्षन, अव्वय वो भी, किंवा, परियारा० ना ५० पौधा विशेष, बोरा। यरी. ना. ची• कली, बड़ी प्रीपधि की परमन ना.पु. पर्य। गला वर्ग, वियाही। वार्षिक।
मङ्गलकोप। २३६ * - या मेल का चलाने या चराने ३ 6 घरोठा०१ ना. पु. डथोदी। . परीक्षा . क - घरीस० गु० वर्ष, साव्ये यथा, भावस्था | यलकना० कि. खोलना, निर्नवाई। घरीसापाच परीसा, जर राधिका प्रथम करना। दिन दीसा। चलताइ० ना.पु. वृक्ष विशेष।। यह० भन्य. चाहो, अगर्षि । यलतोड़० गा• पु० पुडिया जो बाल के टने बरेठन० ना. सी. धोचिन् । से होती है। घरेठा० ना. पु. धोवी। पलद० ना० पु. बैल जो बोझा दोता है घरेरा ना० पु. विरवा विशेष, दिरनी। बलदाऊ० ना० पु० श्रीवलदेवनी ।। यौ० ना. मी तम्बोली। | पलदिया० १ ना० पु. बेल का लादने हारा धौना ना० सी० तम्बोलिन् । बलदी हारा। यलदेव० ना० पु. श्रीकृष्णचन्द्र के ज्येष्ठ भ्राता। यी० ० पु. भाला विशेष । पी० ना. सी. चलना.नि.जलना। पर्चत० मा० पु. भालेत, भाला मारोपाला । यलियारा ना० पु० मलिका सारा पैस में वर्त० ना. पु० काम, अग्यास, परत । जो विना लड़े मारा जारे। यतन० ना.पु. वारान, भाई, पात्र । | यलपलाना० • कि. उपलना, सामातुर पर्तना० स.वि. काममें लाना । होना। पर्माना. पु. येधक, पई का श्रम विशेष घलवीर० ना. पु. धीवलदेवजी या परिणा धाना० स० कि. वेधना, घेदना । यलमन्द्र ना० पु. श्रीवलदेवजी। पहा ना० पु. देशविशेष जो भरतखण्ड ५ यलम० ना० पु. पौतम, सामी, पति । बलमा० ना. पु. पीतम, स्वामी, पति, प्रियता राग विशष नो होली में गाते हैं। चरै० ना• पु. कुसुम का बीन, द्रादारकाटा विशेष बलराम ना पु० श्रीरलदेशनी।। धर्व० ना० पु० भाषाम छदविशेष । चलन्त गु० पराक्रमी, सामी योद्धा. यर्स० ना. पु. । बलवर्धक गु० रलका बढ़ाने हारा । बलवान् गु० बलात। १ पीत. ना. नी० वर्षा, प्रावृट् । यलही ना० स्त्री. ग्रारी, भार । पाती. ना. पु• घोड़े के पैर में रोगविशेष यलाईलेना० स.वि. और पी दुर्गति के गु. जो वर्सातमें उपजता वा सबपरसताहो । चार चाहना। घाना० स० कि. पनी गिराता, ना.प. यलात्कार० ना० पु. बरनस, अनिष्धा से काम, मनमें नगर विशेष । कराना, जबरदस्ती। यी ना. स्त्री० बरसर्वेदिन का श्राद्ध। यलाराति० ना.पु.पद्रदेवराज यह ना. पु. मारपख । यलि० ना० पु. भोजन,' भाग, अंश, पूनो, यही ना. पु• मोर, मयूर । गधक, सदरह राना विशेष मा. श्री. पल० ना• पु• सामर्थ, पीवलदेवजी, वली, याचार, लहरी। ऐंठन, दल, वीर्य, धीरज, देत्य विशेष। बरत गु• भरा, परा, पल सयुक्त । * W - h C स - . 3 २४० मङ्गलकोप। T चर्पण। पलिपुए ना० पु० पौर्या, काग । 7 ग F पलिदान ना. पु. दवता के हतु पशु व्यवसाना० स० कि. श्राबाद पराना था कि गधदना। | यसूला ना.पु. बढ़ई का अस्व विशप । घलिमुक | यसूली० नानी दान के लिये अस्त्र.मि. चलिरसा. ताश्रीगधक । যথ জী বলা । यलिष्ट गु. बलवान पहलवान । | घसंधा. गु• सग, उवसा । बलिहारी ना. स्त्री. न्योदावर, दुर्वान् । घसेरा ना.पु. चकस, सायकाल, पसना ।। चली गु० बलव न, पहलवान, वीर। यसोवास. ना. पु. रसगति । यलीमुप ना० पु० वानर, कपि, बदर ! या ना. स्त्री. वस्तु, चीज । घलीवई ना• पु. व नद् । यस्ती ना. श्री. प्राम, गाव, गर, वदावा । बलुश्रा० गु• बालमय । यस्मा० ना.पु. रटन। पलूला० ना० पु. युल्नुला। यहकना० थ• •ि निराश होगा भाका, घलेंडा० ना.पु. बबण्डर, बौडरा, बडीलड़ा। भूलना। चलेंडी ना. रसी० लम्बी धरनि, जा दो छप्परों यहफाना • •ि 'निराश करना, भटकाना, के बीच में रखत हैं। मुलाना, डहकाना। बलि कि बवादकर निज बड़ाई कर।. घहगी ना.. जिसमें रहार बाम लच- यरगुजा T• बी.कची। लते हैं। थल्पा० ना. स्त्री. घसगध । | यहाजाना कि बहुना, विगा, उनका।। पल्लक ना.पु. मोठ घन् । यहत्तर० गु• स्तर और दा, ७२ । 7 यालकी ना. मा. बीय, तम्बूरा । यल्लमपुभाला, सेल । घदना श्र• कि• चलना, भता, उमझाना, मर्याद स बाहर जाना, भूलनाना । चल्लरी वी. वेल, एरच । घहनेऊ० ना• पु० बहिनफारसामी, बहनोई । बल्लरीकोष्ठ. ना. पु. हरसिंघाइ । | यह लीन • खी० ल पालक, यहन । पल्ला. ना.पु. लट्ठा दरा, एम्मा नास यहाई. ना. पु. पहनका पति । जिस से नाव चलाते हैं गोरर की बनी वस्तु वह्मनेटा ना० पु. ब्राह्मणका बालक । मोहाली में डालने हैं। यहर० 1. स्त्री. अनेक मौका। पयडर० ना.पु. बएनाहा, गला, हरा, प पहरा० गु. पिर, निराको सुनाई नहीं देता है। पानी माथ। यहरिया गु• अनान, पाहापा । पयासीर० ना• रत्री गदा में रागावशे । यहरी० ना• सीन पाविरोष जो सबूतर को पवेसिया० ना• पु. गाद, गहिया । पकड़ लता है। यस.ना.पु. यश) पहल ना.सा.चलन की गाड़ी। घसन० ना.पु. कपड़ा। यहला० . दि. माराम रहा था असनाप.दि. रहाण, भराहाना, TIपु. - काहाविशा निसमें पान लपेटत है। बहलाना० स० कि. तिलाना, हिरामा यसनी नानी सरिया, थेली। प्रसन्न करना। A म करना।
मङ्गलकोप। घहलिया ना. पु० श्राखेटको अधिक धनुर्धर; पहुपत्राना०पु, भोरा, भ्रमर. नीचजाति विशेष ! पहुपुट० ना० पु• भोजपत्र । यहली ना. सी. छोटी बहल': | यहुपुधिकारी ना० : स्त्री, बड़ी शतावर।' घहाना० स० कि० चलाना, भसाना, उमड़ाना यहुपुत्री० बहुतवंटी। भुलाना मर्यादा वाम चलाना । यहुयाहु०१ ना.पु. वाणासुर नागार्जुन रावया, यहाव. ना. पु० अहिला, बाद ददाव।।:- बहुभुज गु. जिसके बहुत भुनाहों। यहि अव्य बाहर | यहुभुजक्षेत्र ना. पु० बहुतमेड़ों को खेत ।.. घहिःकोण नागपुनाहरका कोना | बहुमजरी ना. स्त्री तुलसी । यहिजाना० अ० कि० पतित होना, बहना, विग- यहुमूल्य०? गु० महंगा वा निराका वहन .इनाना, खराव होना ।:: ... भा; बहुमोल्य मोल है, कीमती । यहिन ना. सी. भगिनी अनुजा बहुर० अव्य० फेर, पुगि। पहिरन्तर० श्रव्य वाइर, भीतर।।..." बहुरंगी गु..अनेक रंग का अस्थिर । यहिरा गु: यधिरे, बहरा iTIT: | यहुरना० अ० कि. फिरना, फिरथाना । घहिराना० स० कि. बहलाना, 'यकि. नि-यहुराना स. कि फेरलाना, फिराना । कलना। | यहुरि० अन्य पुनः फेर। यहिर्देश ना. पु. बाह्यस्थान, गाइरकादेश । यहुरिया० ना० स्त्री० वधू, बहू । बहिर्मुख० मा पु० धर्मकरने में अचेत, अभगत । पहुंरूपाय ना. पुशरट। वही ना० स्नी• महाजनों के हिसाब की पोथी, बहुरूपिया०, बहुरूपी० ना. पु. भांडवांगी। " बहुरूप्य० ना• पु० भांईती। यहीर० ना. रत्री • सेना के संग जो भीडादि साममी। 2. बहुल० बहुलता० गु०पहुतायत, अधिकता, इफरतितर- याहु० गु. बहुत, ढेर, अनेक।। बहुकाल ना- पु० अनेक दिन) बहुत दिन बहुलच्छद० गा० पु० सहिजनवृक्ष । बहुकालीन० गु• बहुत दिनों का।। बहुला ना० स्त्री० छोटी कटाई । बहुत० गु. अधिक देर, बड़ा। वहुवचन ना० पु० अधिकल, संख्या का बोर धक, प्रत्यय, बहुतबातें। पहुतात. ना स्त्री अधिकता, सरसाई। यहुतायत०विस्तार, शियादती। यहुविध : अनेक प्रकार, बहुधा । Nir | बहुविधि बहुतेरा गु.अनेक अधिक ।। ।', orma बहुत्व ना ० महुतायत ATM ययाहिना०प० समासविशेष MEEN यहुदी० ना• पु. निसने बहुत देखा है। . यहुशः श्रन्य• बारम्बार, बार बार । i बहू ना. स्त्री० बधू, दुलहन ! ;- यहुधा अन्य अनेक प्रकारसे, बहुत प्रकार; ईवार, अक्सर TEETE बहेडार ना०,पु. फलविशेष । पहेतू ना लुच्चा, फिरन्ता, गु• उहाँहुआ। यहुनयन० यहुनेत्रा ना० पु० इन्द्र!! in citr बहेलिया ना• पु० बधिक, चिड़ीमार ।। बहुनैन०: Nirm. a यहोरना० स० कि फिराना, लौटाना in - यहुपद० ना० पु० बरगदवृश 1 F JI | यहोरि० अन्य फिर, नहरिCHSS खसरह, साता। ... . .
२४.२ मङ्गलेकोष। . m . . रस्सी। n योहिया गु०पती, चोरी तरफदार ।- * . यांक ना० पु.मा विशेष कटारविशेष फैर, टेदाई, घुमाव, दोप। याई ना. सी. महाराष्ट्रों में स्त्रियों था नाम, पांकपन ना. पु.टेदापा, बछोड़पन, सुच. कंचनी बात अव्य. नार्य। वाईस. गुरु बीस ,और दो, २२ । पन । याँका ना० पु वैला, अकै?ते, मोसंकाट्ने का वाईसी० ना० सी० राजा की कौग नाईस हजार पलटन प्रधानता। अस्त्र विशेष,गु: टेदा। नाबी० ना. वा. सांप का विल । याकला. ना.पु. तरकारी विशेष । पीले वाकस ना. पु. झाड़ी निसके. कोयलों से पांगा० नासी. विनीला समेत सरसों। र सारूत बनाते है। यांचना० स० कि. पदना । यावर ना. पु. अंगनाई, कई एकघर पांजर० ना.. पु. वनर, पिना नाती बाई वासला जो एक हाते के भीतर ही , वाग ना.स्त्री० लगाम ।.. धरती। यांभ. ना. स्त्री• च्या । पागडोर० ना० सी०. लम्पी नाग, लगामको यांटना पु. भाग, अंश, बंटखरा । पांटना० स० क्रि० भागकरना, पीसना । बागा० ना० पु. जोड़ा, खिलत, पहिरने का पांडा० गु• पूछ विना पशु, मनुष्य जिसके कोई यस्त्र विशेष । नहीं रहा, सर्प पूछरहित । बागी ना. पु० यश्वर, चुपचदा। - चांदी गा• स्त्री• लठ, लकड । बाधा ना. पु. च्यान, शेर । । यांदा ना० पु. अाकाशलता जो वृक्षपर होती है। यायन ना. सी० व्याधी, शेरनी। वाघनी. घांदी ना. स्त्री० लीडी, दासी । यांध ना०प० मेह, कन्य, पुल । याघम्यर० ना. पु० बाघकी खाल ।। यांधना स. कि. जकड़ना, गांढना, लगाना, वाघा ना. पु० बाघ । : बन्दकरना, बनाना, लगना, लपेटना, उटा- या नाव स्त्री० चुनार, घांट,दहस्सह, लगान ना, तवाना। होंठके दोनोधोरके कोने, गु० निकम्मा । मधिन ना पु० रंगनेकौरीतिरिशर, कलेक, पाछना. स. कि. पुनना, छांटना उपाय, रेशमी कपडाविशेष, तोताविशेष । याजगाजल ना पु. अनेक वानों का बहा यांस. ना. पु. वृक्षविरोष, तालावयादिनापने लिये मापकविरोष। याजन ना. पु..कई एक नाना। 11, यांसफोदा० मा पु० जातिविशेष जो बांसे की बाजना० अ० कि०, बनना, प्रकट होना, मि- वस्तु बनाना है। हना। घांसली ना स्त्री मुरली, पंशी। घांसा० ना. पु. नासिका की ही घाजा ना० पु. पाय, टोल आदि गुरु याजमा गापुवाय, टोल बादि, गु. मिड घासाना स्त्री मुरली,चोरोस,गौस से बनी हुई वस्तु बांस का फल । याजी ना. पु.घोड़ा। पांसुरीना' वी. मुरली | ram, पाजू० ना.पु. बांदमें पहिरने का गहना विशेष पांह. ना. स्त्री राई याध० मध्य० बाहर।... . . F गया।
मङ्गलकोप। २४३ . जो घर। याधालय० ना• पु० मदिर के बाहर । बाध० ना. पु. निवारण, रोक, खाट युनने घाट. ना. स्त्री. मार्ग, राह, पथ । की रस्सी। घाट ना० पु० बाट जो पत्थर आदि ये होत हैं । वाधक ना. पु. जो बाधकरे, प्रतिरथक, घाइ० ० स्त्री. धार, पार, सिपाहियों की दुखदाता। पति। घाधा ना० स्त्री. दुस, पीड़ा, घटकार, घाड़व० ना० पु. प्राह्मण । सकाव, मिथ्या, थाफत । याड़वाग्नि वाध्य० गु• बापने के योग्य । ना. पु० जल में की अग्नि । बाइपानल वान ना. वा. सभार, प्रकृति, चाल, यथा, वादा ना० पु. हाता, धेर, मदिर, भूर, न ! तुलसी यमन तजत नहिं पुरविनिया की नान, वाडिया० ना० पु. बाड बनाने हारा । ना० पु. गाण, खागुनने की रस्सी । वाड़ी • पु० उपवा विशेष, उपमा समेत वानगी 1० सी० नमूना, सरीखा, दृष्टात । यानवे गु• नने और दो, १२ । पाढ० ना० स्त्री. धार, बदती, अधिकाई, सरसई, याना० ना० पु. स्वभाव, व्यवहार, अस्त्र विशेष, जलान, अहिला, बहिया। कपडे की योत, भनी, भैप, निशानी, प्रतिज्ञा, वादना० फैलाना। वादनो ग्र.नि. बदना, उमएडना । यानि० ना० सी० सभा, प्रकृति, चाल । याण० ० पु. शर, पाथ, खाटकी ररसी। यानिक ना. पु० शार, चलाव, सनार । वानप्रस्थ० ना० पु० तृतीयाश्रमी अर्थात् नो यानी 11० सी० वाणी। स्त्री प्रसग रहित हो पर तु स्त्री के साथरहे। चानीगोली० ना. स्त्री० बिनवाई। वारणा ना.पु. मुंज । यानूप्रा० ना. पु. जलपक्षी विशेष । याणासुर० ना० पु. वैयविशेष, रानावलि का वानूसा० ना• पु. वरू विशेष । पुर। यानूसी० ना० सी० याणिज्य गी० पु० व्योपार, तिजारत, साक्षगरी। वानत• गु० पानावाले, पानधारी, और धनुर्धर । पाणी ना० सी० सरस्वती, यावाज । यान्धय ना. पु० भाई, नतैत, सम्बधी ! याता. स्त्रीवार्ता, वाणी, पचन, वारण, याप० ना. पु. पिता, जनक । कारज, समाचार, पवन । चापड़ा ना० पृ० रापुरो। यातकीयातमें अन्य० अभी, तुरत । यापरो० गु• तुम्छ, नीच, दीन, गाल, याती० ना. सी० बत्ती, दीपक की वत्ती, छप्पर घापुरी० । असमर्थ । की बत्ती याफ ना. सी. माफ, बारा । घातूनिया १ गु• दिया, चर्चेत, बड़ा चार ना• पु० मिटाईपिरोष । यातूनी० बताहा, बकवादी। यायाना.पु. नानक, दादा, यूदा, रामक यादल ना.पु. मेघ । सयासी। यादला ना० पु. सोनेरूपे का तारविशेषता या ना० पु० बालक, रामा, स्वामी । यादली० ना० सालपा। याम ना. श्री. वामा, औरत । पादुर० ना.पु. चमगीदा। यामन० ना.पु. प्रामए। " ब 1 २४४ गङ्गलकोप] 7 २ ८ मला। 7 +- धारन - . याहानी० • ग्री. श्रीषधि पौधा विशेष, बाबछड़ ना. सी. औषधि वा मुगरियार । ।पनिया मापा, यमाहारी, गौरा, पिय पतोट० गा• पु० पलताइ । यालर.पु. कल्या, सैर। चायन० नापु० भारी, मिठाई ग्रादि ना वालदशा पी० वाजता। मित्रों के घर भेनते हैं। याचना.म.मि. जला11, मुलगाए। पाययगु"दूसरा अलग, T० पु. वायुगोस । यारपत्र • पु० नामा। वायव्य.. पु. पायुकोण यातयचे. पु. तक्बाले । वाया• वामा, देनिशा रे विपरीन अंग वालमा T० पु. गाई, बालकदा । यायोनि. पताया, पगारा। यालभोग ग. पु. प्रात हात जो श्रीकृषा पार० 10 पु.दार, दिस, बालक, वल, 10 च ट्रेजीक सीमित्त भोग लगाते हैं। सी. रोमा, पति, वागा, सी। चारम० पु. प्रियतम, पनि, पहाविशेष। धारण TH० पु. हाथा, पारण, राना । घाबमुल० • पु. मूला । रंगगार, बचाना, 'योछार । यालराड़० ० रा. जो बालपन से याला य. विविएना, पिलगा, स .. विषया है। "परा नला घाला ना० सी० सालह वर्षतक की कन्या, यु यारनारि 110 सी. वेश्या, पतुरिया । वी, पाधा विशेष, जूही, .. बारम्बार०यय. वारवार, प्रतिवण, पडी। पहले या भूपण, पाला। धारह गु० दारश, १२ । वारापन० "० पुलइक्पा, पारामा। पारसडी I सी. द्वादश माना जो वालिक्य०० पु० मा ग्राधि । वारापरी पनों में मिलाकर सालों की वाली TV सी० एटकी, गेइ श्रादिकापली, पदाते हैं। कााम पहरो का भूगण दिशा । चारासिंगापुदिसार, मृगविशेष । पालुक० ० पु. एलुगा, मुसध्यर। वाराह. ना. पु० शार। चाराहीर० ना.पु.पराला। व तुझा ना० सी० पाल, रेत घलुगमय० गु० रेतीला, रतला, विपिरा। धारी नागासी. बाड़ी, झरोखा, विशम्याही | यालू० ना. सी. रेत, शु। क या, श्रीसरी, नारताना पु० जाति विशेष चालूचर० ० पु. गाना रिशी दार, बाला, I. सी. वासी। पारमीक० ० पु० मत विशेष, रामायगरगा। थारूत० ना०सी० गारून निसराव पदुक चलाते हैं। यारे गा.पु. बच्चे, लडक । थल्या वाल्यावस्था थाल० ना• पुः सिरोह, वाला, बाला, मूर्स, ग्गा, बाला,'दरार, चार, रामायण का प्रथम यादिइकर ना. पु० पालना.पु. लईका, नाला योपधि । या० ना० पु० यायु । यापग० १० पु. बोवाई, बोधारा । पा. सौ.लाई । - यालकपन पालका ६.योगी वा से यारागा पैसा यायझत गु. गप्पी, को। T । 6 है या ना. सीक लड़ाई, नाल... वता। घोड़ा! यालहकर ना० पू० हाँग दश विशेष 1 वाएड } चावकता } पावगीलो ना.पु. वायुशल । +M ३६ मङ्गलकोप। । , प्रवल। यावड़ी०'ना. पु यड़ा कप । HIT याहुमुखना पुल हाथी operati धावयतासना मी देवमरत दुर्गति आपदा घायुद्ध का पु० मल्लयुद्ध, कुश्ती यावन' गुपचारा और दो, १२ वोटा नागपु० बाहुलेयाना० पु० खामिकार्तिक । ? श्रीविष्णुनारायण का पोर्चयों अवतार बाहुल्य० ना० पु. याधिय, अथियाट्री यावर० गुं: बावला, अंगाही, पकंपादी, अंधा बाहुल्यताना स्त्री० बहुतायत शाम यावरि नी. मी मृगाधनी, गिरि, विभारी नास्त्री० पयाल,सार्यकालका मोनन । सिड़नः ....... श्री विजननी व्यंजन 40. CIPES यावला गु० पिपिस, सिडी । विक० ना? पु० हुएडार, भेड़िया यावली ना० सी० बड़ाकृप, धोवी - विकट गुः कठिग, भयानकी भयंकर, देदी, सिइन। tipo RT Kari विकना प्रक्रि० सपना. विकजाना वावसड़ना श्र० कि. पादुना, गुदा से बिफरार' भयानक, भोंडामा का निकलना। SE विकराल टेदा, डरौना, कठिन पाचशूल ना. पु. वायुशल, पेटमें रोगविशेष । विकलागु०. व्याकुल, निस्थिर, धावा. यास ना.पु.वसने का स्थान, टांव, नाती विकलता रवी । व्याकुलता, घबड़ाहट, मैचै- गन्धि, महक। विकलत्व पुनी, निरिधरता : बासन० ना० पु. वरतन, पान-1 विलित० गु० न्याकुल, पावडा वेचैन बासना. रा. किसोंधाना,महकाना, नाक सीन विकल्प न. पु. विचार, मन्सूपाती अभिलापा, इन्द्रा, सुगन्धि । विकसन नापु० प्रकाश, हर्ग, प्लran यासन्ती ना. स्त्री० औषधिरिशेष। . विकसना ० दिन खिलना, फलना इति यासाना० पु० घूर्ती प्रसिद्ध, रहनेकारयाने । यासित 'गु० मुंगन्धित कपड़े पहनेहुये। विकसित गुरु प्रफुल्लित, हर्षित, फूलाहुयात घासी० गुरुगोननादि जो क्लरापका, मह-घिकसोभगडा ना० पु० मैंनीठ ।। कीला, नासयुत । यिकाऊ गुपिकोहारा थाह ना० गु० घोडा यिकाना अ० कि. किनाना, ग० किपैन- चाहना पु० बहनेहारा। जी पाहन ना. पु० यादन, सवारी। विकावर ना. स्त्री. विकी। याहना ० कि. अग्रंचलागा वो फेकना, भरा विकास ना.सु प्रकाश, फलामे, दिसलावा, का गर्मित या प्रसंगित होता! Creal हर्ष, आनन्द । याहर० अन्य बहिः, परदेश। विक्री नासा खान, पटनी, चाहिनी ना० सी मना। चर्चित, पटिन। पाहु ना सी भुना, बाद 3 विखरना, अति. विरल, फैलना पाहुदा ना.स्त्री. नदीविरोष जो हिमालय से होना। FREE: निकलती है। विगढ़ना किनारा या भूटानामगरमा याटुदेना'या कि हाप पकना विगही नारी हद, लहा। होना। . घाना।" . 11 २४६ मङ्गलकोप। मगहा। . विगसन ना. पु. विकसन, खिलना। पिझ्याना० स० कि. फैलाना, पतराना । विगसना. म. वि. रिस्सना, लिखना, विद्याना. स.दि० फेलाना, पसारना। पूलना। विछुपा० ना. पु. कटारविशष, पैरोंगभूषण। विगहा ना. पु. नीषा। विछुड़ना प. क्रि० विदला। विगाह. ना. पु. भगता, तोड़, लड़ाई | विदुरन. ना. पु. वियाग, बुदायगी। बिछुरना० ३. कि. प्रियागहोना, जुदाहोना। विगाहना. स. कि. नसाना, टाटा दना, मित्रों विछोना० स० कि. मिन्नकरना, लिगाना। में लड़ाई कराना। बिडोह ना.पु० वियोग, जुदायगी, विरह । थिगोना० स० कि. भुलाना, पाना, भ्रष्ट करना। विछोहार बिधन ना.पु.विन बिछौना ना.पु. रिस्तर, सन । विच० अन्य पाच । रिजना ना. पु० पसा, बना। विचकना घ० कि. निराशहोना, भागजाना, विमला ना सी. विद्युत्, चचला, वत्र । अगीकार करके बदलजाना। विजान० गु. अज्ञान, मूर्ख, ना कुछ नहीं विचकाना० स० कि. निराशकरना न मानना, जानता। वचन ताइना। विजायठ० ना. पु. वाहका गहनाविशेष। विचल.गु. चलायमान, मचल । विजार | पु. साइल । विचलना : वि. फिरना, घूमना, चलना, विजाला गु• धान मयुक्त । विजया. ना. सी. भग, चू।। रिचलीय. भागी, पूमी, परड़ानी। झिकना० अ० कि. चौकना, दरना, भा। विचई ना.मु. रिचवानी, जामिन । जाप बदलना। रिचार० ना• पु. विचार, सोच, बूझ, प्यान । विझका गु• चौंग, चौरेल, भागा, दराभया । - विचारक. ना. पु. विचारी, सोचा, वुझन रिझकाना० स० कि. चौकाना, दरवाना, म गाग, न मानना, बदलना। विचारना. स. कि. साचना, प्यानकरना, घिटना. पु. बीर, मि याचना, समझना। विटचर० ० पु. शकर, परेला । विचारिता गु० सौचाहुया, विचाराहुथा, बूझा, पिटना घ• कि विधुरा, विपना, र समझा। विचारी गु-विचारी, विचारक । विचाली ना. स्त्री० पाधारवाल। विचौलिया ना.. मध्यस्य, विसरैत । विष्ट ना.पु वृश्चिक, जन्तुविशेष । विद्यनार. कि. फैलना, पसरना । बिछरना प.कि. भिमहीना, उदाहोना । घिराहट ना. रत्री• भिन्नता। विचार .कि. सिसलना, फिसलना, पिदलना मित्र भिमहोना, विलगना। 17 हारा यायक। जाना। विटप. ना. पु. वृक्ष का नया बैल, पक्षत्र, पसराव, गुच्छा. चिगनास. कि० दिएकाना, विपराना, गिराना। विठाना० स.वि. बैठाना। विडकम. ना. पु. बटेरादि पती, रामचन्द्र विडानधन पूरे भति के नान पायों यथा, जीवे। घिडरना० कि. भागनाग डरनाना ।
मङ्गलकोष। २४७ ८ , 1 ३ सनौटी। T * मार्ग से बरमताहै। M ३ - 7 विपत० पिडार० ना. पु. वनरिलात, भगौड़ा। पिनसना० ० कि नशाना, बिगड़ना। विडारना. स. कि. भगाना, चिलाना, विना अन्य रहित, दिन।। डराणा १. विनाई. ना. सी.निने का काम या पैसा। बिडारी • भगाई। विनानास. कि. विनयाना, उटाना।- विडोजा. ना. पु० इन्द्र। शिनावट ना. सी. विनने का काम । यि ना० सी० कमाई, फायदा उठाया, कि बिनु० अव्यका रहित, छोड़ि। पिनौना० स० कि. विनती करना परचा वित्त० ना.पु. धन, द्रव्य, वस्तु, सामर्थ । पूजना, भजना, मारना। यितना० प्र० कि० व्यतीत होना, गु० घोग | बिनौला ना० पु० रुईका बीन । ना. पु० वितरित, वालिश्त । दिनौली ना० मी. छोटायोला जो धाशश मिततानी गु० घरानी, लिलानी। बितरना० स० कि० देअलना, दान करना । विन्द यिताना० स० कि० गॅराना, काटना, व्यतीत विन्दी ना०सी० विद्ध । करना। विन्धना० स० कि.सराना, दकियाना, नि. बितीत० ना.पु. ध्यतीत । दिदना, पसना। यित्त० ना० पु. वित्त, धन, द्रव्य । खिन्ना० स० मि.• युगा, जाली नगलना, वित्ता. ना. पु. वितरित, पालिश्त । गुमना। वित्तिया ना. पु० वीना, पाटा, द्रुमका। विधरना०० कि.टिकना, बिखरना। विपता. ना.श्री.विपति यात। विपनि विधराना स० कि. तिराहाता, बिटाना, लिकाना, सिराना। पिफनी कि.चिइना, दुखित होग।" पिथा ना. सी. पीडा, पापदा । मगरा, हठीला या दीटहोगा। पियुरना० ० कि० रिपरना, पसरना ।। विया ना० पु० बीन। विथुरा. ना. पु. दुःस, पीड़ा गु० सिपाहुा। मियारी०१ ना० सी० सायकाल का भोगा, पियालू पश्न न का भोजन । ग्दिरना० . कि. परना, चिरना। बियाह ना• पुगिवाह । चिदाना• सी० रुतसत करना। चिरकट ना. पु. ये गी विशेष, गु. निका पिदारन० ना० पु. फाइना, तोडना । मा उद्यरित है। पिदारना० स: कि० पाहना, चीरना। विधाना. सी. विधि। विरचन० ना• पु०रसा यार। विधना. ना. पु. पिता, ब्रह्मा । विरद ना. पु• यश, स्तुति, बोरगा। धीर, विधाघटना. सीसासवेद । हथियार। पिन अव्य-निा। विरदारलि. ना. ग्री० सुपरा, सुनि । यिनती० ना. सी. विनय, प्रार्थना, आई चिरमना ग. दि. रहना, रिलमरना। रिमाना. स.पि. सदराना, पाना पाने विनमा पनि निना।। रामे करण पिनया ना. सी.ई। 'पिरवार गा.. म होगा यूग, पापा। . .
८ . + है . M - - श्रापन्दित हा हमान । (२४८ मङ्गलकोप। बिरह. ना. पु. रियोग। विलगना० स० कि. चढावपरना, बदनाम विरहा. पुन वियोग धोचियों का गीत | विलनी ना. सी. अमनहारी । विशेष विलपना०प०बि० रोना, शिलापरना। विरहित गु० वियोगिता car बिलपाना० स० कि. रौलाना, लापरता।। पिरहिनी० गु० विरहिनी, वियोगिनी। बिलयन्द० ना० पु. निपारा, निस्ताए । चिरहियारा. स्वा. विरहिनी । पिलयिखाना अ.नि. च्यारलहोना, पीधरो विरही गु० जो पुरुष अपनी सननी से मिनहे। दुखितहोना, हायहायस्रना, तहपना । बिराजना० प्र० कि. प्रकाशित या प्रचलित बिलम्ब० ना. पु. दरा, टोल, दाल मटोरा, शिथिलता। हाना, स्वाधीन होके मुख भोग करना, शामित यिलम्वना श्र०कि. दीलकरना, पाकना। होना, बैठना। विराट् ना• पु० जगदूप, ईश्वर, जगद,राजा विलम्भः ना. पु. विलम्ब । विलम्मना अनि निलम्बना । धिराम, देशविशेष, राजाविशेष । | पिरलाना० अ.कि.रिलविलाना। विराना गु० पराया, स.वि. चिदाना,, "संता। श्र... भागा, तृपहोना, विलसना० घिराम० गु० व्याकुल, स्थिर, मादा । बिलस्त. ना. पु. पित्ता, पिरत । विरिया • स्त्री० समय, जूता बिलहरा ना.पु. पार रखाका पार । पिनी ना० सी० वर। विलहरी ना. सी. पला, घाटा विलहरा। विल. ना. स्त्री. सपदि न तुरी माछिद्र | विलाई० ना. श्री. विली, कद्दूरकड़ी धादि वा भट्टा वा भारत रगड़ने की लाह की वसु विकलना थ० कि. सिसझना, पाना, किसी | बिलाईफद. ० पु. त्यापि वार । यस्तुपर जी लगना। पिलाना ० दि० अलापा मिटा भाकना, बिलम्ब ना. पु. दुस, अप्रसन्नता । स० जी० अप पराग उमा, वारा, दिलखना० रा.नि. दसा, निरेता, विला खाना। कना, अ.पि.सिसरा, यासन हो। विलाप० । पु.लाप, हाहाकार । रिलापना० अ. राI, TI, हाहाकार, बिलखाय० घ. •ि अप्रसनहाय दुस चिलखि बिलग० गु० यलग भिन्न, ना• सौ. मित्रता, विलार या पुमानार, पशुविशप, विलोग। पिलाय० ना. पु. पिलार । पिलगना चलग २ हाना, पर्प पी, विलास ना. पु. विलास याद । विलाय ना० पु. रागिनी शिर पूरना, जमना, दुरखना। विलास गु विनासी । चिलगाना० रा. वि. गिम २ यर N, "ls | विरा स ० पु. लस, हर्म, तृप्ति, मामा, विचाइना सुसमाग। बिलगा ना.पु. मिमता, सिराहा पाहता। विज्ञासीक गुमुम्वभागी, पानी, सर्प। पिलगाहीय. दि. घसग हानार। 10 वर फ्ट, सा, बुराई। 1 चिलोपनामा कि दवाखा र मङ्गलकांपा २४३ गिस्तुड्या } T० स्त्री• पिपला । -- . है T दिलोना० विस्तर ना. पु. विस्तार, बदाय के स० किमया महना। विलोवना विस्तार० कहना,व्यारेवाल चोड़ाव, कासार, चिलौटा. ना. पु. विलार । रिलोटिया० सी० बनी। पिल्ला० ना० पु. विलार, तिलार । रिहन या पु० बोग। विरती० ० स्त्री. विलाई, विल्ली । रिहवलः 'गु० व्याकुल, भयभीत, निहल । विश्लीलोटन ता० पु. विलास द, औषधि बिहरना० अ० कि. रीझना, हुलसना, स०शि० विशेष। भाग करा, रिमाना, पटना। पिस० ता. पु. विष। विहरी० ० सी० च दा, दामशाहा । बिसखपरा. ना. पु. श्रौषधि पौधाविशेष, विहसना० अ० कि. हँसा।। जापशप जो गौहर सरश होती है । विसखोपरा. ना. पु० ज तुबिशेष गा गोह विहाग० ना० पु० रागविशेष जो पाडी रातररे पर गाया जाता है। क सदृश होता है। विसन० ० पु० दोष, पाप, युराई, मामा विहाना अनि० पाल याना, रिता बिहान ना० पु. प्रात काल, तड़का, पीतगया.. कामना। तजना, छोड़ना। विसनपना० पु० घरापा, लुचपा। विसनी० ना० पु० नुचा, लम्पट, गु,सुपड, विहाने अव्य० सरे । विहार० 1. पु. श्रीडा, लीला, श्राद देशविशेष । विसरिसाना० अ० कि० यजवना, सड़ी विहारस्थल. हुई बस्तु से शब्द क्लिना। काड़ा का घर, लीलाभर विहारस्थली न, थानदगृह। यिसमार० ना० पु. भोपरि पौधाविशेष । विसर० ० पु० चूक, भूल । विहारी० गु० खिलाड़ा, क्रीडापर, ना. पुष 1) श्राप्णचद्र जीया एक नाम । पिसरा० गु० भूलाहुश्रा, न्याया। विसराना० स. कि. भुला), नहपाना बिहारीलाल ना. पु० श्रीकृष्णचन्द्रनी शतसई. विसर्ना० अ.कि भूला भानों 1.1.2 पत्ता कविपिशप। विसात० ० स्त्री• मूल, पूजी । चिन अन्य रहित, बिन, विदून। बिहा० विसाध. विसायध चा० अय. भी। विसासीर नापु. विश्वासपाती। पीडा ना.पु. लपेाहुया, कागत, गट्ठा । कि०, मोललना, चलना पारुष चींधना० स० कि० ना, घेदना। फा, वश, बाबू। | वीघा० ना पु. २. सिंसा, निगहा। विसान स• कि• भुला चय मध्य में, चतर। बिसाहा स्त्री. यस्तु जो मोलली, हरदा बोछी ना.पु. विष्ट । बिसाइना० स० कि०मोल लना । मिसुरना० ० कि०, सिसकाना, हमा। योजक ना० पु. योर्य, अमर, नई, मी, का: पिसेला गुघर, जहरीला । रए, रर, पिया छल, विछोर। 1 1 - ना० सा० कुनास, दुर्गध। M पिसानास . R 11 न ३ ।
२५० मङ्गलकोप। घीजक० ना. पु० चलाउ, पिट्टी, लता, विनय युकटा० 1.पु. व मीमर।। सार, मिहरिस्त। युकट्टा पीजना० .पु. पस्ता, 11। | युकनी • सी• पूर्ण, धूरा। घजार गु० विजेला। बुकलाना य. दि. मापीयप नका, धीजी ० म्री. नातुविशेष, पुल । घुकाना.पु. युक्या धीमना. म.लि. टेल, रलना सादगा। घुकी ना. स्त्री• गाती, भूटाभर । यीट. ना. सी पन्टा, गुह । युजना पुoहानी के कारण सजा परत स्त्रिया पहाता है। धीटना०प०वि० राना, टलना विथर।। घाट. ना. स्त्री०पातया काटा। | युजहरा०० पु. पागम करनेशन। वीठा ना.पु. विड्ता, एडरा। युझना० श्र.नि. टग होना। बीहाना. पु. लगायाहया पान । वुझाना० स० किलठटाकर,सममाना सुझाना पीतना.नि. व्यतीत हा, पूराहाजाना | बुडाना० स० मि. पाना। गुजरना, होचुक्ना। बुड्ढा गु• बूदा प्राचान मनुष्य । बोना० गु• गुजरगया, व्यतीतहोगया, ना.पु. बुढ़मस० गु० जो यूटा तरुणको चालचले। वितरित। बुढ़वा० गु० पदया। धीन. ना. श्री. वीणा, विद्या पिशप । बुढापा० १० पु. वृद्धावस्था । वुढिया० गु० चूदी स्त्री। वीनना० स० वि• बुनना उठाना। वीमा ना. पु० वस्तु वो टाटे समेत पहुचान के बुडा . पु. काका भूषणविशेष । लिये जो पसा दियाजाता है टीमा हुडा, भाड़ा | धुत ना० पु० जुना वा पचीमा खलने में नि यह शब्द शरसी है। सपर पामा पंक्त है धूमा। वीर० ना. पु. भाई पार पाना भूषण । | बुताना० स० कि. युझीना । वारता. ना. स्त्री. वीरता मईमी, शरता। | चुत्ता ना० पु. ठगाई, छल । वीरवहुट्टी ना. सी. लालरगका कड़ा बुबुद. ना. पु. बुलबुला। बीरबहूटी० विशेष । चुदबुदाना० अ० कि. बहरड़ा। यीय. ना. पु. भीडा, भाई। बुद्ध ना० पु. परिडत, चौथामह, चौथावार, वीरी रात्री० बीड़ा। नवम अवतार । वीर्य ना.पु. वार्ग, पराम । धुद्धि० ना• स्त्री• ज्ञान, समझ, यूझ, सोच, थील. ना. पु. रिलाल। घरल। यास गु० दा दहा, २०॥ घुद्धिमान्० गु० मानपान, समझदार, चतुर, घीसा. ना.पु.बास नखका कुत्ता! परेडत । पीसी ना. स्त्री• अनमापनेरा परिमाए विशेष, युद्धिहा ना. स्त्री• मदिरा, शरीर । गु. बीसकी। युद्धी ग० चतुर, समझदार, बुद्धिमान् । धुन्दा ना.पु. विद। | बुध ना. पु. चौपामह, चद्रपुत्र, चौथादिन पुन्दिया ना स्त्री० मिठाई वा भाजनविशेष नवम चइतार नो गया में भया,' पण्डित, युन्देला. ना. पु. पुदलसएडका राजपूत . - है . m T क 7 देवता।
मङ्गलकोप। २५१ . F युधयार ना• पु. चोधातार । पूझना ० कि० समझना, जानना। बुधि० ना. सी. बुद्धि। चूट० ना.पु. इराचना, तरकारी। युन्द० ना. पु.विद् शय, कतरह । | पूटा० ना.पु. पोधा, वृत्त, फूल कपड़े का । चुना० स०मि. विना। यूटीना. सी. वनस्पति, श्रीषधि, घोटा बूय, बुभुक्षित० गु० भूखा। निरवा, भग विजया। बुरभसिया० गु० युदभस । चूड़ना या क्रि• इदना। चुरा० गु० दुप, लया सराव, प्रार। वूडमरना०प० कि. इनमरना। बुराई ना० स्त्री. दुष्टता, खोट। चूडिया० ना. पु. नेहारा । धुर्ज० ना. पु. ररसा, लासा । धूत० 1. पु. रल, सामर्थ्य, पौरुप, धुर्जरा० ० सी० स्त्रियों की गाली। बूता तायत। वुर्जारी. ना. ना. पुरी। ० ना० स्त्री० पहन, बारी । बुलबुला० ना० पु. थुला । दूर० ० स्त्री. भूसी, दिलया। घुलाक० ना• पु० नाक में का भूपविशेष । पूरा० ० ग्री• खाइ, लकड़ी की युक्नी, युलाना० स० कि० पुकारना, हाक देना, तलर पूर्ण, यह शब्द फारसा का है। वे० श्रव्य घर करना। वेट. ना. पु० हथपड़ा, दस्ता। वुलाहट० ना. स्त्री० अ याहन । हनी० ० सी० प्रगानी, पहिलीविक्रौरा यधना० स० कि० गूधना, उनना । पंडापु. गु० टेदा, बाका। नाम, बयान । वेग० ना. पु. वेग, जार । युहरी ना. श्री. भुनेहुये जी। धेगवान् गु. वेगवान, जोरवाला। बुहारन ना० श्री झाइन । चेगार० ना. पु. बरवस काम कराना । चुहारना० . कि० माइना । | वेगारी ना. स्त्री. मोटिया, वगारका । चुहारी० ० सी० झाड़। वेगी० गु. वेगी। चुहारू ना पु० भगी। चंग ना.पु. मेदक, भक। चूमा० ना. सी. बहिन, फूफा माता। वनास किं० विकाना, मोल लेकरदेना । पूई० ना० स्ना लड़कों पे डराने का शब्द । घेचू० गु• बचनेवाला। यून्द० ना० स्त्री० विद्ध, टपका, गु० भला, वेजू० ना. पु० न तुविशेष । ऊचा, लड़ा। मा० ना• पु. निशाना, निसपर तौर पा घून्दा० ना.पु. बाबूद। गाली का प्रयास करते हैं। बून्दी ना० स्त्री० टपा पर्षा की बूद, मिठाई | येटा० ना• पु० पुत्र, लड़का । विशेष। बेटी० नारनी पुत्री कन्या। चूफना० स क्रि० पीसना, युक्नी करना। घठन. ना. पु. चेष्टन, लपेटन । चूका० ना.पु. चूर्ण, घोगमोती, युक्नी। घड. ना. पु. सादा, लियावर, घरका । चूचा गा.पु. जिसके कान नहीं, क्नकया। घिडिया० ना. पु० जातिविशेष । चूची गु० स्त्री० स्नफ्टी। वेडी नाची० पैरसी, निसोकरी से खा घूझ० ना० स्त्री समझ, पद्धि । सीचत है।
२५२ मगतकोप। . ३ की C A ६ D घेड़ना० स० कि. वाडाधिना, देवना का बेसरा० • पु. पतीविशेष रना, लाभउठाना, धीनसेना, कमानी, सवा ना. सी. वश्या। चुराना येहा पु० छिद्र, साल। येत ना० पु. पत्र, छड़ी, धापाश । चहड़ • स्त्री• पृमी जहाउची नीचीहो। वेद० ना० पु. वेद । बैंगन० मा. पु. भाग, तरकारी विशेष। वेदगिरा० ० पु. वेदवाया। बैंगनी गु• रग जा बैंगन के समान हो, _जनीपिंगल। वेध. ना. पु.छद, सूराख । वेधक गु० भदोवाला। चैदी ना. सी. पिकुली। वेधडक गुडिक बैठक ना. स्त्री०१ बैठनगरमान,चोपाइ, मठ बैठका० ना.पु.ने की चाल वा रीति। बेघना० स.वि. घदना । बैठना० अ.कि. ग्रासन मारा। घेधमुरया. ना. सी. कस्त्री। बैटवार गु• चपटा, चौपर। येधा ना० पु. ब्रह्मा, खराल । बैठा ना. पु० चप्पू, हाड़। वेधी ता. पु. वेपर। घेन. ना. सी. यापुरी, वशी।। বান बैठालना स० वि० स्थापन कराना । घेना०० पु. पसा, सस सस । येनी० गा. स्री० अङ्गा, चारो, क्वाइकाएक येतरा० ए० स्वी० साठिपिशप । वैतरणी ना. श्री. रक्मार्ग की नदी। काउविशेष घेर. ना. पु. वृक्ष वा उसग फ्लविशेष, ना. वैदिक० • पु० वेदिर, वेदका जानेवाला। स्त्री. पार, विलम्प, बेला। पैन० ० पु. वडा, वापी, बनसी। येरवेर अय. पारंवार । वैनतेय. ना. पु. जनताक पुत्र गरुड, परण । थेरभयानक० ना पु० प्रलयको रात, मृतक । वैना० ना• पु. माथेपरका भूषणविशेष, पक कीरात। वा जो विवाह आदि में मारते हैं, व्याहारी, घेरी स्त्री० वरका वृत्त । थेरे० ना० पु. नावं जेहान । वैपरि० ना. पु. व्यापार, तिजारत । येल: ना. पु० मिल्वाल, पु-पविशेष वोले । पारो० ना. पु. सौदागर, तानिर, न्यौपारी । घेलन. ना. पु. सरी बलने की परंतु । बैर ना. पु. वर, दुशमन । बेलना स.नि. पैला ना. पु. नेतन। पैरस० नारवी० मती, घना, पतामा येलनी ना. पु. दी। पैरागी० ना. पु. पैरागी, जिसको वैराग्यहा । घेलबुटा ०. झही, लताविशेष। घेल. ना. पु. वृपम, वरध ।', येला० ना. पु. पुप विशेष, बारा, रेला । पैस० ना• पु. श्रायुर्दा, वय , वैश्य, राजपूतों में येलिना स्त्री लि, लता जो पौधा भाप से जातिविशा। घेसन्दर० ना• पु. भाग । सड़ा न हासफे। बेसन गा.पु. चनेरा योग। पैसाहु० गु., आसक्ती, मतीमार, घर में घेसनी ना. सी. वैसनसे बनाई। बटनहारा। येसनोटी० मा. सौ. वैरानको रोग। योआई० ना. सी. पान का काम, पान का येसर. ना. सी. नथनी। 1 - - - . . - समय। 1 tr मङ्गलकोप। २५३ P +rd बोक 4 है प T योमाना० स० कि. बीनडलगाना, बसाना 1 चौही. नास्त्री. बलि, लता ! वोधारा. ना. पु० वोने का समय। चौछार० ना. सी. वायुसहित हा वृष्टि या जा बोट० ना• पु० डाट, डटा, डाली। वायु क झकाई से दें परम चली थाती है। चौद्ध. ना. पु० बुधका मतावलम्बी। वोकड़ा ना० पु० बकर।, यज। बौना गु० जेय, वाय, नाय । बोकरा० बौनी नारनी ठिंगनी,नाने का समय वा काम । चोकरी ना. स्त्री० बरी। वोरहा. गु० बाराहा। चोच. ना. पु. मगर, कुम्भीर । चौरा गुगूगा, मा। बोचा. ना. पु० पालकी विशेष रूचा । बौराना० अ.नि. बारला होना 1h it. योझ. ना. पु. भार, लादी। चौरापन: ना. पु. सिझपन । बोझना स.कि. लादना । धौराहा. गु० मावला, सिकी। घोझलक बौला० गु० पोपला, मुर्ला। गु. लदा, भरा। चोझेल बौहा० गु० पधरीला। बोटी. सीमासा छोटा टुकड़ा। चौहाई. ना. स्त्री० जिस स्त्री को गागरोगहै। वोतू० ना० पु० परा। ब्यान पु० पश्यादि का प्रसव । बोदली० ० स्त्री. भाली, गेगली। व्याना० अ० वि० जमा, उपाहाना। वोदा गु• निर्बल, यासत, भोला, गेगलार! योद्धा गु० बुद्धिमान । ब्याह० ना० पु० विगाह। चोध. ना. पु० ज्ञान, मत, मनौती, धारन । व्याहता गुविवाहिता । बोधक. T• पु० निससे ज्ञानहो बाधकर्ता। याहनयोग० गु० जो व्याहने थे योग्य है ! योधना. स. नि. पुसल'ना, समझाना। ब्याहना स० किमिाद वरना । धोना स. बीनड लना। व्याहा गु० सिसहित, निसमा विवाह हागया । चोनीलामा बान का समय । व्योगापा.पु.॥ चमढ़ा दीलने का प्रस्य। व्योगी स्त्री घोर० ना. पु० पान के उपरू । बोरा० पु. गान, गरिया, लाथा, टार का व्योत. ना. पु. गदन, डौल, रीनि, दव । थला। व्यातना० स० कि. पई का लिया। घोरी ना० पु० रामधनुग चावल विशेष। योल 10 पु. राष्ट गीतका शब्द, वात । व्यौरा: पु० भद, वृत्तात, खान, तर । घोलचाल • स्त्री. वात चीत । व्यापारला. यापार,तिनारत सौदीगरी। बोलता० ० पु. प्राण,नीर, बालो की शक्ति गौपारी गु० व्यापारा तानिर, सौदागर, चोलना. अ.शि. यातकरा, पहना, बगा। दशारा योलबालाना. पु. ग्राशीसदविशेष घेली० ना. सा. वार्ण, भाषा बात। ब्रह्म परमेश्वर, जगत् का कारण ब्रह्मा, पौड०० पु० लि, लता। वर, देवता नीर कुता प० •ि लिपा, धूमा, ब्रह्मपत्र० ना• ५० बानी या प्रस्तुविशेष । चाहियाना० मार, रसाए। प्रासापक [.पु.शहतूत,न्त । 1 बताता - यौहना ६५४ गङ्गलकोप। औषधि। - ब्रह्मगिरा. ना. स्त्री. थाकाशवाणी, ब्रह्मवायी। ब्रह्माएड० ना.पु. नगद, ससार,शिरकीराह । प्रक्षघोप० ना.पु. जहां वेद पदाया वा पदा | ब्रह्मानन्द० ना. पु. निन स्वरूपानद, प्रा. जाता है, वेदपाठशाला। त्मानन्द ब्रह्मचर्य० ना• पु. ब्रह्मचारी का व्यवहार । | ग्रह्माणी ना. स्त्री. सरस्वती। ब्रह्मचारी ना. पु. प्रथमाश्रमी, ईश्वरप् ग्राह्मण ना. पु. प्रथम वर्ण । ब्राह्मणी ना. स्त्री० ब्राह्मण की ली। प्रमदारु० ना.पु.शहतूत । ग्रामएय० ना.पु. माझण का धर्म, प्रासयों की ग्रह्मदैत्य ना• पु० ब्रह्मराक्षस । समा, सानवा ग्रह। ब्रह्मन० ना.पु. ब्राह्मण । | ग्रामी० नास्त्री• सहिताविरोप, सरस्वती पासा ग्रह्मपादप० ०पु• दाखका दृए। ब्रह्मपुत्र. ना.पु. नविशष, मझारा पुत्र । ग्रामयः ना. पु० अचम्भा, पाश्चर्य, ग्रामों महायान ना.पु. ब्रह्मास्त्र । की सभा। ग्रह्मभवन० ना.पु. ब्रह्माका स्थान । ब्राह्मयमुहर्त० ना• पु. सूर्योदय से पहले चार ग्रभुवन ना.पु. ब्रह्माका लाऊ। घड़ी पोह, पह। ब्रह्मभोज. ना० पु. ब्राह्मयों को भोजनदेगा। [भ] ब्रह्ममेखला • स्त्री• मून । म. ना. पु. नवन, सारी । ब्रह्मरन्ध्र० ना.पु. मस्तक्का मध्यस्थान। भंवर. ना. पु. भौरा, चकर । नारात्रिन'स्त्री० ब्रह्माकी रात ना सहस । भवर० ना० पु. चलि, लता, भ्रमर । चतुर्युगी हाता है। भवरा० ब्रह्मराक्षस ना.पु. पेत विशप, लूका । भरी प्रहावादना.पु. वेदान्त कथन । भवारी ना० स्नी. तीतरी, पवगाविशेष । ब्रह्मवादी० ना. पु. वेदान्ती। भबोरना० स० कि. काटना, काटताना । ग्रह्मविचार० ना• पु० यदा तरिया, अध्याम भकसी० पा० स्त्री पृथ्वी में गुफा यधरी । ज्ञान। मचा गु• निदि, मूर्ख, अहमक । ब्रह्मलोक ना० पु. लोगविशेर जहा ब्रह्माजी भयाना० अ० निर्बुद्धि हाना, उल्लू हो का वितरपार है। जाता। मह्माश्रय ना.पु.वेद। भकोसना० स० वि० सालेग, दुसना । ब्रह्मसूत्र० • पु० यज्ञोपवीत, जनऊ। भत ना.पु. चक, रायक, उपासक, भात, प्रह्महत्या. ना. स्व. भामणकी दया। गु• धर्मा, चाहक । प्रधान नापु. ईश्वर ज्ञाा, परमशान, मतवत्सल पु. भातप्रिय, श्रीभगवान् । प्रमशान, चप्यामज्ञान। भक्ताना० पु. भत। ब्रह्मा ना• पु. दराविशा ना पूर्व में है वा उस मनाई० ना० स्त्री० भगताई, मनकाई, गति, देश के राजा की जाविदिशा विशाता, सृष्टि महि ना. स्त्री. मन, धर्म, भशाप्रीति, सेया। ब्रह्माचारी ना. पु. विरपूजक, ब्रह्मावि भग० ना. स्वी. याी, युर, सुभाग, एश्वर्ण दि गुण, पु. पर्य, भागवते यथा, पाता r धर्म। चारी।
मङ्गलकोप। २५५ . । जाति । ना पर्यत । २ विधाता वरुणोपर्यमा सविता भग । भगी० ना.पु. मगही, मिहतर, पूइडा, गु. भगण ना.पु. यसरीगणविशेष, जिसमें नाशप, मेटनेवाला। धादिका थतर दीर्घ होता है यथा, राघव । भगरन ना. स्त्री. भग की वेचनेहारी। भगत० ना.पु. भत्त । भगेरा. ना. पु. भग बेचनहार।। भगतन. ना. स्त्री. मगतकीली या वेश्या । भगेला . पु. भग के सचाओं का बरत्र भगताई ना. नी. भगतपा। विशेष! भगतिया. ना. पु. भौया, यषिक, राधा, चफ गु० घावा, विस्मित, अचम्भित । भचक्ना० . वि. अचम्भित वा सिस्मितू भगन्दर० ना. पु. गुदा में रोग विशेष । होगा। भगन्धर० भच० ना० पु. दौरह, चालभर निगति भगनी ना. सी. महा, भागती। भगर० ना.पु. भगल । भजन गा पु० अर्चा, पूना, सेवन और भगल. ना० पु० छल, कपर, परेव, इद्रजाल । गोपिपि ईश्वर का यशगाना । भगवत० ना. वा. भागवत । भगवती ना. स्त्री० माया, थादिशत्ति, ईश्वरी। मजना० स० कि० चर्चा या पूना या सेवा, जप करना थ.नि. भाग। भगवन्त० ना पु० भगवान् । अजनी• गु० भजन करनेहारा ।" मगधा० ना. पु० गसरा पस्न । भजनीक. ना. पु० अर्चक, मान वरनेहारा भगवान० ना० पु. ऐश्वर्यादि गुणसयुक्त, तेजस्वी, भजामि स० वि० भजताइ, ध्यावताडू । प्रतापमान, ईश्वर । भजजाना० य०कि. भागजानो। भगाना० स० वि० हँका, चलाना, दूरसरना। भन्जि. अ.नि. भागकर । भगीरथ पु. राजा विशेष जो श्रीगगानी का स्वर्ग स लाया। भज्य० अ० मि. भागके बाटके । भगेल स्त्रा० परानय, ना० पु० मा डा। भजन ना० पु० खण्डन, मारन तोड़ा। भगोडा० ना. पु. भागने हारा । भब्जाना० स० वि० तोड़ान, भुनाना, बर्द लाना। भगल ना• पु० दृत, हरकारह. भगू। भग्गू० ना. पु. भगोड़ा। भट० प. पु. साधा, शरवीर, भग्न गु० पराजित, नाशित, या पूया। तनूर। भकार० ना० पु० शब्द करना, धादिया शब्द। मटई० ना. स्त्री० भाट की स्तुति, भाट का भग. ना. पु० खण्डन, तोड़, लहर, पराजय । काम। भाग गु० भग्न। भटकना० अ. वि. भूलजाता, भ्रमना चू भगड़ा. ना. पु. जड़ी विशेष, भृगरान। 1 कना, टपना। भगडी गु. भाग पीनेहारा। भटका० गु• भूलाहुया भूला, चूका, अमित । भगनना स्त्री.गी की स्था। भटमेरान:पु० मिलाप, मिलान, मुलाकात । भगनाना स्नामधली विशेष । भरवान ० स०लि. वहकार भुलाना, मा भगाना स्त्री० भाग, पती विशेष । पाना। भटकीलाग• जिसमें भटका पायाये । मगार० ना.पु. भगरा, भगड़ा। 1 - . धिकार, H 7 r २५६ मङ्गलकोप। . 1 - है . T- भटाई० ना. सी. बहादुरी, लड़ाई, मई। भडुवाई० ना० सी० पुटनापन । भटू ना• स्त्री• सस्ती, निधासिंह प्रभास, दखिके महेत. T• पु. भाडादनेहार प्रनाशि पटू अग बालदादी है। भणना ना.पु. कथन । भट्ट० ना. पु• विद्यावान्, पण्डित, दक्षिणी ब्राझ भणित० गु• कषित, यहाहुश्रा, कविता :-- यों का ग्रास्पद, मा। भएिटका. ना. श्री. भाग, बैंगन । भट्टाचार्य ना. पु. पण्डितों में जो सब से भएड० ना० पु. भाड, भ्रष्टता । बड़ा ज्ञानवान वगाले के ब्राह्मयों का उपनाम या भण्डा० ना. पु० मा मागे, धरई। | भण्डार० ० पु. पोटा, साता वसार । धारपद। भट्ट ना. स्त्री. चूल्हा विशेष । भएडारा० ना.पु. योगी, वा सन्यासी, या भठियारपन० ना. पु. भठियार का काम। उदासियों का योनार या निमाना, भोजन । भठियारा. ना. पु. सराय का भाड़ा उगाइने भएडा० ना० पु० भएडारे का रक्षक, रोक हारा, जाति विशेष । दिया, रसोया। भठियारन्० ० सा• भठियारे की स्त्री। भएडेरिया ना-पुभारिया । भठियाल गु. जो नदा की धारापर से वहे। भएडेला. पा. पु. भाछ। भष्ठ ना. पु. बड़ी नार विशेष । भएडौना • पु. निन्दा, पकड़। भटकना• स्वी• चटक, झलक, घबराहट, भतरा० ना० पु. भतार, पति झझक, चीक। मतरीह० ना. पु० मधुरा वृदावन के मण भटकना प. कि. झिमकना, चौंकना, याच स्थान विश। भतार० ना. पु. भर्तार, पति, सामी, कन्न। भटकाना स• वि. राना, भका। श्राच | भतीजा. ना. पु. भाई का था। करना, लूका लगाना, चौंकाना । भतीजी० ना. सी. भाई की कया। भडकी० न० स्त्री• चाकी चमक, अच, चौक। मत्ता • पु० मात । भडकीला गुचराला, चमकाला, चौरेल । भद० ना० सी० धणा, धडाका, कुयश । भटकेल गु० जगला, अनपहिचान, च केला । भदभद. ना.पु.पृथके फल गिरो का पार भडभडिया० गु० निष्कप', साधा। मनुष्य के चलनेका शब्द। भाभूजन • स्त्री. भुजन । भदभदाना सक्रिमारने स जो शब्द नि- भडभूजा० ना• पु. भुनी, भुनवा । मलता है, वारवार मारना। महरिया • पु• टग, भद्रा, नासी । भदमदाट० ना. सी० भदभद। महसना.पु. भाई। . भदाक. पु. घड़ाक, फया । महिला गु० चोर, चाग्ने हारा, पिनीना, नि ! भदाका ना• • धडाका शब्द लग्ज। मरिहा. ना. या भडिहापन, रामायणे यथा, भदेसखा मनाली रामायने गया, भशित भ- सो दशशीरा श्वान की नाति उत चिनै चला दमनस्तु भलिबरगे। भडहाई। | महा गु.निर्बुद्धि, उल्लू, मोड़ा। मडपा० . पु. दुपा, वेश्याना माता पितादि। भद्र० गा.पु. भागमा, मध सहिन शिरमा P उठना, जल उठना। " . . . CT .
मङ्गलकोप। २५७ . गु० भयानके, टरौनी मूर्ति । भयद. । मुण्डन, कल्याण, वदती, नवखण्डों में से एक मभराना०.० किसटका होना, सूनना 11- का नाम गुमला, श्रेष्ठ, भाग्यवान् ।।.. भमरिंक्रि. डरकर, घबड़ाकर । '. भद्रक ना० स्त्री प्राप्त, लाभ, खभाव, मुन्द: भभूका० ना० पु. ज्योति, धांचा एकाएक पाग रता, मलाई। जलउठना, गु• लाल, सुन्दर, भड़कीला, भद्रकाली मा० स्त्री० दुर्गादेवी भभूत ना• स्त्री० भरमा विभूति ।। भद्रकाष्ठ ना• पु. देवदार। भय ना० पु. डर, शङ्का, खोक । भद्रचन्दन० ना० पु० जयासा भयकार०.१ भद्रजयव. ना. पु० इन्द्रजौ। भयंकर भद्रपर्णिका ना० स्त्री. कम्भारी, गन्धपसार । भयचकर गु० भेयकरके जो व्याकुल हो । भद्रपर्णी ना० सी० गंधासारंग। भयदायक गुः भयानक, भयंकर। भद्गमस्त० ना. पु. नागरमोथा। भद्रवती० ना० सी; कायफल । | भयभीत गु० शक्ति, डराक, डराया। मंद्रवृक्ष ना० पु गोखुरू भया ना० पु० भाई, फि. हुग्रा।' भयमान गु. डरपोक, शकित '. भद्रश्रिय ना० पु० चन्दन । मंद्रहोना० अ० कि० बसहित शिरमुंडाना । भयातुर० गु. भयक, भयमस्त । भद्रा० ना० स्त्री• अशकुन समय, पतंकी दूसरी भयानक गु० भयंकर, निसको देखकर हर 'सातवीं बारहवीं तिथि, कम्भारी, गन्धपसा- • लगे, डरौना, रस विशेष । रन, कुघड़ी, कल्याणकारिणी, ना. पु. पक्षी भयापा० ना० पु. अपनाहत, भापिन । विशेष भद्राक्ष ना. पु० कृत्रिमरुद्रात । भद्रिका ना०सी० दशाविशेष, कल्याणी । भर० गु० पूर्ण, पूरा, सव । भद्री ना. पु१ छकौत, सामुद्रिकी, कायफल ! . भरका ना० पु. जब वरीपर पानी दिया उस भद्रोदनी ना. स्त्री. खिरहटी।। भवाना ..क्रि. क्रोधित होके दोहना, मरकाना० स० कि. वरीपर पानी डालना। माग लगना, लोटे यादि से पानी गिरने का भरण ना० पु. पोपण, पालन, धारण । भरणी ना. स्त्री. दूसरा नरूप, सांपमएक, भयका गां. पु. बड़े मुसका पात्र विशेष । जीव विशेष । भवकाना० स० कि० मुलगाना, जलनिा, उक-भरत. ना. पु. अनेक धातु का मेल, राजा. साना, तिनाना, एइमारना। .. • विशेष निसके नाम से हिन्दुरतान भरतराएट भवकीर ना. सी. धमकी । प्रसिद्ध है, रामचन्द्रजी के भाई । मम्मद नाडर, सटकामभराभरतपण्ड० ना. पु. हिन्दुस्तान । भक० ना० स्त्री अचानक नो पांच आदि की भरतपुर० ना. रामसेन देशका' एक नगरः खुदास भाजारे।TI.. विशा...:.. भभकना • कि सनसनाना, युलयुला उभरद्वाज ना. पु. पुनि विशेष, संजनी उना, सलमखाना, भरद्वाजसुत ना... मोराचार्य । . cine मभर ना. सर, सरक.in: भरनः पयतम तक, भयावहा०] गु० 'भयंकर, मयानक । का नाम २५८ मङ्गलकोप। " C । . भरना० स०,•ि पूर्ण करना, मोपना, ससा, भार० मा० पु. भर्ता, सामी। धार चगा होना, निकालTI, फटे उसमें एव | मतिया. ना. पु. ठठेरा, कोरा । डालना, दाना। मती ना. स्त्री समाप्ति, भराउट, बहार। भरनी ना. सी. वाना, मरपी। मार्सना ना. स्त्री० तिरस्कार । भरिपाना .मि. दामा, पलपाना । भर्म. ना.पु. सुपरी, यशा, तरनायशावकुमगा- भरिपूर्ण गु० महामह । गंयमर्मयुरम्, यमर । भरमराना० य.वि. सूना, एकाएर उडना । भवर० ना. पु. नदी का भँवर, भीरा । भरभरी ना.सी.यूज, पुलाव । भख० गु० भला, ना.पु. और। भरभाइ० गा० पुकागला, घोग पौधा भलका० ना० पु. सोने की टिकली जो मय में विशेष। लगती है। भरम० ना.पु. भर, मन, साख । | भलमसाई भरमगमाना०प० कि० असारसहोना, अपयशी भलमनसाता ना. सी. सद्गुण,प्रच्याई । होजाना। भलमनसी भरमाना० स० कि० पुसलाना. व्याकुलकरना | भला गु० अच्छा शीलवन्त, चगा, धर्मी,यमुत, फिराना, घुमा गुहला. भरवाना० स०नि० पूर्पकराना । मलाई ना. पी० च्चापन, रोग, कुशल,स भरा० गु० पूरा यश, सुकृत। भरागा० स० कि. भरवानी, घोडाघोडीलगाना। भलाचगा० गु. अच्छा। भरायट'ना० स्त्री. वस्तु निससे दूसरी वस्तु भलूक. ना. पु. भालु, रीव । भराते हैं। भल्ज०मा० पु. मलूक, भालु। भरित गु. पालाहुया, मराया। भल्लक ना. पु. लम्बै, पैने, तेज। भरिता गु० भरीहुई। भल्लात भरी ना० सी० तोला, बारह माशेका परिमाण । मल्ली ना. पु• भालु, रोच भरु. मा.पु. बोझा भल्लुक भरत ना. पु. भहेत। भल्लू ना. पु. रीछ, याल, तरकारी। भरोटा पु. तृणादि पा रोमा । मरोसा. ना.पु. पाशा, प्राशरा, प्रतीन । मल्लूकप्रिय ना• पु• स्योना वृत ।। भगर्ग ना ५० श्रीमहादेवनी, रामचन्द्रिकाया भवः ना• पु• संगार, शिवनी, कल्याण, भय, मार्गः यथा, प्रदेवदेव जयभीतरमा लेस जमहीना। ये, प्रमेयतेन भर्मभक्त मार्गवेश देखिये। भवद्दर्शन० ना• पुः प्रापका दी। भर्जन पूनने का काम । •भवन ना.पु० घर, मकान ।। भर्तः ना. पु. निनपति, भर्ता, स्वामी, विवाहि भवा० ना. स्त्री पार्वती। 2 भवानीगा. स्त्री पार्वती । भा० ना पु० पति, समी, मालक, प्रतिपा भाषापयर्ग ना• ए मोर, जीवन्मुक्ति । सक, तरकारी नो भागयादि भूनके माते हैं। भवार्णय ना० पु• ससारसागर । .... । -- तपति, ० . ܒܫܩܢ मङ्गलकोप। २५६ शान होनहारमा } - भवार्पण. ना. पु. शिवहेतु देना । मांजना० स० कि. फिराना, घुमाना, ऐठना, भविक ना स्त्री० कुशल, क्षेम, कल्याण । हिलाना, चमराना। भवितव्य गु० होनहार, जो होगा। भांजा. ना.पु. बहारा पुत्र । भवितव्यता० ना. स्त्री प्रारन्य, होनहार । भांजी मा. श्री. बहन की कन्या, हरन, भवर० ना. पु० पाणी की गाठि, मारा। नुकसान। भवावत ना. पु. ससार का भँवर, जगत् मांट० ना.पु. पोषधि, पौधा विशेष । भर। मांटा ना.पु. बैंगन, तरकारी विशेष । भविष्य गु० होनहार, जो कुछ होवंगा, मांड० ना० पु. हण्डा, महुरूपिया, स्वागी । भविष्यत् मांदना० स.वि. गालीदेना, विगाड़।। भविष्यत्वप्ना ना. पु० भविष्यत् कहने मांडा० ना. पु० मारीश बड़ा वर्तन, सामग्री, भविष्यवक्ता हारा, बागमज्ञानी। जो रुपया किसी को पृथ्वी म गडाहा मिले, भधैया ना. पु. क्थक, राधा नर्तर। भव्य० गु० भाग्यवान, योग्य, कल्याण, होनी, भांडीर ना० पु. अभीर का वृत, स्थानविशेष । परुया, दफीनह । ना. पु. कमरख वृक्ष । भांडेती ना० पी० बहुरूप, स्वाग। भपा ना. पु. भौना, भतण, खाना। भपण | भांति० ना. सी. रीति, डौल, टर, जाति, शोभा, प्रकार। भसा ना.पु. रास, खाक । मसकना प्रक्रि० गिरना पड़ा, फाक्ना। भांवर० भांवरि० ना. स्त्री. फेर, घुमारा। भसना० .नि. तेरा, नहना। मांवरी० भसभसा गु.पिलपिला। भा० ना. पु. भ्राता, विरादर । भसम. ना. पु. भरम, रास । भाईचारा ना० पु. मयापा, पापस । भसाना० स० वि० बहाना, चला। माईयन्द० ना. पु० जाति के लोग । भस्म० ना. स्त्री विभूति, रास । मान ना. पु. परवश, पिदलगा। भस्मी० ना• पु.शिवनी, गु० खारी। भासना० स० वि० बोलना, कहना । भस्मीभूत० गु० जलगया, भरमहागया। भहराना प.नि. कापना, लहसडाना, ढग भाग० ना. पु. यश, प्रारम्प, कर्म, हिस्सह । भागज्ञाना० अ०कि. टला, पीयादेगा। मगा। मागड़ ना० स्त्री० बरार, देशत्याग, पाया। भक्ष. ना. पु. भोना, चर्वण । भागना० .कि. भागनाना, टलना। भक्षक० गु• सानेहारा। भागमान्० गु• भाग्यवान् । मक्षण ना.पु. भोजन, चर्प। भागमानी ना. सी. मुभाग, धनान्मता। भक्षी० गु० भरक। नगरशिप मागलपुर० ना. पु. भदयय जो खाने के योग्य है, साथ। भाना. सी. शोभा, वादि। भागयतना• पु. पुराणपिरोप, भगवन्धमा मांग ना. स्त्री० पूरी, विनया, भग। मागयती ना.पु. श्रीमगपान, भागवतराठक, भांज० ना.सी एंठ, नत ररसी बनानेका काम। ना. रत्री. सदिसा विरोष, मुमागिन । 1 मङ्गलकोप। भागवान 3 गु० भाग्यवान् । है माग। " . . भागवन्त भात ना० पु. पादा, राहुये चावल । भाता० ना.पु. भत्ता! मागाभाग० • पु. भागइ, चिन ठहरे चला भाथा गा० पु. चूण, तरफ्श । जाना। माथेना.पु. बहुभाषा ।। भागनेय. ना. पु. भा जा, बहन या पुत्र । भादवा ] भागी० ० .पु. साझी, अशी, चौत, मु० भादी० ना.. 'छठामहीना, वो वा भाग्यशारा भाद्र भागीरथ ना. पु. भगीरथ । भाद्रपद भागीरथी ना. सी. श्रीगगाजी। भाद्रमास भ ग्य० ० पु. प्रारम्प, पर्म, तादार गु. भान गा.पु. रमरस, सूर्य, भानु । जो भाग करने के योग्य है। भानजा ना. पु• महारा पुन । भाग्यवन्त गु०पारधी, लक्ष्मीनारतिरगत भानजी० गा० सी० वहाकी पुत्री। भाग्यवान् वर, प्रतापी, धनान्य। भानना० स० कि. हनना मारता, पाहना.. भाग्यहीन गु० मदभाग्य, दरिद्री, कम्बख्त । ताड़ा, भाजना। भाजक० गु. निसपर बाटामार, भोगकारी। भानमती० ग. स्त्री. पटनी। गाजग ना पु. गासने, वर्ना। भाना० अ ०० माला लगाना, सजना। भाजना० अ० कि० भागा, स० कि० भागा, | भानु० गा.पु. सूर्य। तलना। भानुज ना० पु० शनेश्वर, राग और भाजी० ना. सी. तरकारी, शाक, मधुथा, यमरान ना० श्री. श्रीयाणी, याव्ये यथा, गाउनसरि प्रणाम हरि श्राम, कृष्परथल विहार तट जाम्। भाग्य० गु• जो भाग किया जावे, विभाग किया भानुमति० गु• सुदर, ना० सी० राजा नि-- भाट० ना• पु. परदैत, रतिपिरोप, जाति | भानुरिपु० गा• पु. राहु, पेतु । मालित्य वा राना दुर्योधनसरी राम नाम ।' विशेष | भानुयोगेश्वरी ना. मी. पश्यपसी पनी भाटन० ना. स्त्रा. भारपीसी। विशेष भाना पु० धारा समुद्र घा उतार, भट्टा! भाफ ना स ० वाप, या भाठियाल पु. भठियाल । भाकना० स० क्रि० समझना, अटलना । माठी० ना. स्त्री भट्टी, धौकसी, भठियाल । भाभी० ना० सी० भोगाई, भाईको सी। भाइ० ना. पु. धन्न भूनने के तिो अप्रियुक्त भा० ० ० श्रीमहादेवगी, यथा, दोहा, ". गाफ हर शलघर शशिधर शहर याम ।। शम्भु शिव भीम मा गर्नु भाम रिपुनाम । भाएड. ना. पुः वामन, बर्न। भामरि० ना. सी. मारी। भाएडार० नौ.पु. भरझर। भामा . सी. पार्वती, सामाय स्त्री। माएडारी 11. पु. भएदार या रियति । भामिनि०१ ना. स्त्री० त्रिय या शास्त्री, भारडार० ना. पु० अनमें वनशिप । भामिनी ना। - . जाये। . १ स्थान। A । भाडा ना.पु. गिया ! भ - लहाना मङ्गलकोप। २६१ - 1 M -- . । . -- - . माय ना. पु. भाव, स्वभाव, भाई । भातुनाथ ना. पु. जामात, भालुवाला। भायप० ना. पु. भाईबदी, भाइयों का परस्पर भालुपति० रोच पालनेवाला। स्नेह। भाय० ० पु. प्रति, सभान, सम्मति, मो भायमान्० ल, चसका, शाच, चूम चौचरा, भेद, द्रव्य, भायचन्तक गु० सुशोभित, अच्छा, याग्य । उद्दश, स्वाग झावली, मनीलहर, जन्तु । माययान्० भावक गु० शोची, मिन, सज्जन । ८ } on मार. ना. पु. मामा, पाटी, परही, गितमा एक भावज. ना. सी० भाई की रवी । मनुष्य लेचतता है। भावता० गु. प्रिय, चाहता। भारक. ना. पु० गमा, उख, यथा भार तुम भावती० ना. स्त्री० घाइती, प्रिया । हारस इति निघण्टु । भावना. पु सुहान, दिसनोट। भारगी या रसी० पोषधि विशेष । भावना० ना• स्त्री० यागना, वासना, या भारत० ना.पु. व्यासरचित इतिहास वा पुराण चिता, मुहारमा, शमा। विशेष, कोरव पाडव का समर । भाववाचा ना०पु० यह सरण विरारो उसका भारतवर्प० पा.पु. जम्मूदीपके नखडा म से वा शब्द का धर्म वा भार जातामारे । एक शाम, हिदुस्ता मापह० १० स्त्री० छारे भाई की जोरू । भारतवर्षीय० गु• जो भारतका सम्बधीहो । भावान्तर० ० पु० प्रारा तर, दूसरेप्रपार भारती० ना. स्वी० वाग्देवता, सरस्वती।। भावित० गु० चिन्तित, शक्ति । भारय० गु० भारदाता, परतु सतसई पव्य में भायी० पा० सी० भारयन्, हो रहार, बदा। भाषा अर्थ हुआ पोर रद पारसीशब्द का अर्थ | भाषुफ० ० पु. भय, फ्ल्याण । तोड़ा लियाद अर्थात् तोडागया, शहा। माय. वाछित, जो गार के यार, गुदर । भारद्वाजी० ० सी०सापास, Tमा । भापण70 पु० था।" भारवाह०० पु० गधा, सर । माया T० स्थी० येली, यागी, र रसती, जो भारवाहकर गुलजा गार ले चाहा, सरहन्द नहीं है। यथा मारिया, हम्मा भापित गु० परित, सहाया। भारा०० पु. बाग, भाड़ा, किराया। भाष्य०० पु. गारपादि सूची का प्रथम भारी० गु० गा, बड़ा, मगा, भाटा, भारत सिरण। पादा, टेदा, न.पु. मारिया। मास० T० पु. प्रकाश, चमत्कार, दौति। भार्गय०11०. शुक, जगदी। मासना०प्र.मि. प्राट होना, सूझा 1 भार्गयी. ना. सी. दूव, घास । भापित गुरुप्रकाशिन, समझाया। भार्गवेश०.पु. परशुरम । मासुर० ना. पु. पतिका साम। .. मा० ना. सी. पनी, नार। भास्कर ना.पु .। भाश० पु. तीर श्रादिम छ, सवार, भास्थाTo .पु. सूर्य, प्रारित । सपा भाखा TY.पर्धा गराए । मास्वर० ० पु. सूर भिसरा.. याचा, मितुर, प्रकार, माल. ना.पु. री। भाल मेंगना, मगा। 6 - - -- .
.२६२ मङ्गलकोप। . १ - - .. } भिगाना मीठ. ना. सी. उदी धरती पानिस स्थान म. भिगोना. स. कि गीला या बोदाकरना। पान उसन होते हैं। मोड़ ना. स्त्री मण्डली, ठट, बहुतात, हेरा भिटनी ना. स्त्री. कुच के ऊपर नोक पुनी। भीड़ा. ना. पु. सकीर्ण। भिड़नार य. कि. मिलना, सटना, लड़ना । भीत० गु• डरा, भययुक्ता, ना. सी० दीवार । भिड़ाना० स० कि. मिलाना, सयाना, लहाना। भीतर० अन्य अन्तर, बांच में । भिण्डपाल ना. पु. गोफना, धनवासी, निस भातरिया० ना० पु. भीतर रहनेवाला वा जो में देला रखकर धुमाय के चलाने है। मनुष्य देवालयका प्रधानता से कामकरताहै अर्थात् मिएडी. ना. स्त्री० तरकारी विशेष । भण्डारी, रसोइया, पुनारी ।। भित्ती ना. स्त्री. भीत, दीवार । भीतरी ना.पु. भीतरिया, गु० भीतर पा । भिनकना स. क्रि० मक्खी उड़ने से भौति ना० सी० भय, शंका, दीवार । भिनभिनाना जो शब्द निकले। भीम. ना. पु. भय, अमलोव वृत्त, युधिष्ठिर का भाई, गु० भयानक, भयंकर । मिनसार० ना. पु. तड़का। भीमसेन. ना.पु. पाडका दूमरा पुर। भिन्न गु.पृथक् अलग, क्सर । भीमसेनी ना.पु. कपूरविशेष । भिन्नता० ना. सी. बलगाहर । भीर० ना.सी. भीड़। भिमाना० ० कि० शिरघूमनाना, पकराना। भिन्सार० ना.पु. भोर, प्रात, तड़का, सरा। भीरक० गु० कायर, डरपोक। भिरना०प० कि. भिड़ना। भील ना• पु. नातिविशेष । भिरत ना. स. चरट, लड़ाई। | भीलन मिलायां ना. पु. वृत वा उसका फलविशेष, भोलिना गात्री भीलकी जोरू। नो देहमें लगने से पाला पदयादा है। भीलुक० गु. भीरुक । मिसाजी ना. स्त्री भिलावाका बीन । | भीषण. ना. पु. भर, गुभगानक,भयार। मिपर ना. पु. वैद्य, हकीम, तवीर। भीम. ना. पु. शिरनी, कौरतों का दादा। भिपज भीष्माष्टमी० गा० सी० मासी शुलाटमी । भिक्षा ना. स्त्री. मोरस, रात । भुदार गा• पुराना। भिक्षाटन. ना. पु. भारतमागना वा भीख माग- भुश्रान ने के लिये गिरना। मुरु' गु० भोता, भागी सानदारा। मिना• देण्डी, संन्यासी, म्योड़ी पौगा। मुक्त गु• नो भोगन किया गया है। मुक्ति ना. सी• भोगास्तु, भोगनादि। भिक्षुक० ना.पु. भिसारी । मुगतना० अ० कि० सुख या दुखको भोगना, भी अन्य च है और। पुएर वा पार का उठाना, व्यतीतहोना । भ.प. ना. पी. मिता, मैंगनई। भुगतमान् गु० जो भुगतने के योग्य है । भीगना.ए. कि. गीला या घोदादोना, मुगतागा सके. भोगकराना, निपटाना। भीजनासी होना। भुम्मा गु० सीधा, भोला। भीजगुरु गोसा, भीगा भया । भुचः अनगद, पूस, जो पीला नहीं गया। H - मङ्गलकोप। २ - - भुचम्पा० ना.पुदृन विशेष भुशुण्डी० नासी० तोप, रदूक रामायण भुजा ना० सी० वाहु, दण्ड, मेंड, भौनपर। विशेष । भुजग ना. पु. साप । भुसूडा० ना. पु. भुशुण्ड, रमल की जड़ें। भुजंग ना. पु. कालासर्प विशेष, गु० मुसरा० ना. पु. भुजंगम पाला। भुसला ना पु. स्थान विशेष जिस में भुजंगपर्णिनी० ना० स्त्री. नागदौन । भुसौरा० ना० पु. भूसा रसने हैं । भुजंगिनि० ना. स्त्री. सर्पिणी। भुसौरी ना. स्त्री०) मुजा० ना० सी० भुन, याहु । भूना० स्त्री० पृथ्वी, धरती। भुजाभूपण ना० पु० वाजूबद। भूईडोल ना. पु० भूरम्प, हालाचाला भुजाली० ना• स्त्री० तलगार विशेष, वारदा : भुजिया ना० सी० भाजी। - ना० मी० भूमि। मुहा० ना० ए० बाली ज्वारकी बहीवार । भूजा० ना• पु० भड़भूना । भएडली ना० पु. पीड़ा विशेष । भूसना० अ० नि• ही हो परना। भुतना० ना० पु. छोटा भूत, भोक्स । भूकम्प० ना पु• भौचाल, हालाडोला । भुतनी० ना स्त्री० भुतने की नी। भूखा ना० बी० तुधा। भुतवा० ना० पु. भुतना। भूखा० गु० तुमित । भुताहा गु• जो भूतरे समानहै। भूगोल ना. पु. धरामण्डल । भुतियाना० अ० कि० भुताहा होना। भूवर० ना० पु० पृष्मीपर चलनेहारे जनु।। भुनि० अन्य० मानो, गोया, सी। भूजन० ना० पु. पृथीपर के मनुष्य, भोगना।. भुना० .मि. पहलना, भुनना, परना। भुरमुरा० गु• सूखी युती। भूइ० ना. सी. रेतली धरती। भुरमुराना० स० फि० यो श्रादि सोका भूतना पु० यतीतगाल, पृथिव्यादि पंचतत्प वसुपर दिइर । युरका । अर्थात् पृथ्वी, जल, अगि, यायु, नग, और प्रतिशर, जी। भुलसना० नलनाना। भुलाना० स० मि. भूलकरा, पुनला।। भूतनी० ना. रसी• तुलसी बहना भूतनया० ना० स्त्री. श्रीमातानी । भूतनाथ० ना• पु• श्रीमहादेवनी। भुलारा० ना.पु. धोरस, टगा। भुय० ना. पु० सर्ग, पारगरा, अम्बर, धरती। भूननाशन० ना० पु. हींग। भूतनी ना. सी. नना। भूतंदुला० ना. सी. गि। भुवन ना. पु. नगर, ससार, साक, मदिर, भूतपतिक नापु. भूताप, शिवनी, भैरव । बारा, पानी, भांग, १४ लोक। भूतभक्षी ना• पु० समुद्रलान । ना. पु. रानाविराज, मादशाह, भूतत ना.. भी, घरातल। भुयानु राना, भूमिगशाला भूतयास ना.पु. वहा। भूतरता ना.. सोना । मुशुण्ड ना. पु. मापा, शिरगे। - भूति १२ सी विनि, सम्पदा, राम,मलि। ग्रेशि. मुलसना, -- भुधगमः . ना. पु० भुनग, सार। भुवाल मुस गा.पु. चोरा मङ्गलकोप। . भूलाथिसरा गु० जो भटकगया। - N . भूतिफ० ना. पु. यपूर । भूलना० ५० कि. विसरना, नूकना, भटकना, भूतेश ना• पु० भूतनाथ । खोजाना, लोपहोना।' भूदेव ना० पु. ब्राह्मण । भूधर ना० पु. पर्वत, राजा, हाथी, मेष, साप, भूलामटका० शेष, गो, सूर्य, पच्छप। भूलोक ना० पु० मनुष्यलोर। भूधात्री० ना• पु. भूयावला! |भूपण ना० पु. ग्रामरण, गह। शोभा। भूनना स. वि. पकाना, कहलाना, तलना। भूपित० गु. अलकृत, भूपणयुत, शोभित । भूनिम्ब० ना. पु. चिरायता। भूसा० ना० पु. गेह पोर जो यादिका पूसा भूप० भूपति ना. पु० राजा, महीपति। भूसिता ना. सी. पोल। भूपपद. ना. पु० राय, बादशाहत ।' भूसी० ना. सी. छिलका, धाा प्रादिका चाकर, थरा। भूपाल ना० पु. भूपति, राजा, महीपति । | भूसुता ना. श्री. धासीवानी भूभल० ना. पु. गरम राख। भूसुर० ना० पु. प्रामा। भूभृत् ना.पु. पर्वत, पहाड़। भूस्वामी० ना• पु. भूपति । भूमण्डली० ना. स्त्री. विल्य, धरामण्डल ! भूमध्यस्थ० ना. पु. जो समुद्र यरुप चोरटी ना• यो• भौंह, भू, पुका। चपिके मध्यकता है। भृगु० ना.पु. मुनिविशेष, वासना । भूमि० गा• स्त्री० धरती, पृथ्वी, जमी। भृगुनन्दन भूमिका० ना• स्त्री. दीपाचह, सारा । भृगुनाथ भृगुनायक ना•• परशुराम। भूमिज० ना० पु. मगल, भौमासर, उदिन, भृगुपति भूमिनाग० गा. पु. साधारण साप । भृगुबन्धु० ना० यु. दुन्दप्प। भूमिपतिक भृगुभसा ना० स्त्री• भारगी प्रोपरी। भूमेपाल ना०पु० राना, महीपनि । मुंग० ना. पु. भ्रमर, भोरा, काविशेष। भूमिया ना. पु. भूमिका देवता । भंगराम ना० पु. झाडीपिशेष, पतीविशेष, भूमीशना: पु० भूपाल, राना । भंगरा, बूटी। भूय भृगाह ना० ५० भँगरा यूटी। भूयोभूया अश्य पुरा पुन , किरकिर। शृंगारि० ना-पु. झीगुर। गा० सी० दक्षिणा, पाड़ा, दा, भुंगी ना. सी• युम्हारी, पीर, पादापसिद भूरसी० भीख । जो झींगुरको लाकर निजरूप करताहै, शिवगण भूरा गुसरा, कपिल, पिंगल । भूरि० १० रहत अधिक। भृत्य ना.पु. दास, सेवक, गुलाम । भूर्ज. ना. प. भोजपर। भृत्यगण गा• पु. सेवयों का समूह । भूर्जह. ना. पु. में नपत्र वा उसका वृद्ध । भृत्या ना. स्त्री. दासी, लोड़ी। भूर्जपत्र • पु. भोनपत्र । भेउ० पु. प्रकार, खमार, भेद, मर्म। भूल गा• • विस्मरण, म, धाता। ला. . पेर। । स -- भंगा गु० सपाली, देस।
मङ्गलकोप। २६५ सौगा, . ८ भेट. ना. सी. भट। मेप० ० पु. रूप,चाल, सूरत । भेंटना० स० लि. भटगा। भेषज. ना. पु० ओषधि, दवा । भेक. ना.पु. मेदा, मेघा । भेपरज०० पु. भगरा। मेज. ना. स्त्री० लगान, धरताका पटारा। भैस० सी० माहीत भेजना रा.नि. पठा, पचाग । भैसा० ना. पु० महिप, जामूश । मसिया ता० मी. छारी भैरा । भेजा 1. पु. गूदा मस्तामा भीतरी मास । मेसियादाद० ना. पु० दादु रोग विशेष । भेट० ० स्त्री० दशा, मुलाकात, भैचक० गुरु भयचक । अर्पण उपाया, उपहार, पर। भैमी० ० सी० माघ शुक्ल एकादशी, दमयन्ती, भेटना० स० मि. मिला, उपायन वरी।। लसी स्त्री। भेटी० ० सी० १ बोर, डटा, भेगा, मि | भैया • पु. भाई । भेटू० ज० पु. लेया। भैरव ता. पु० र गरिशष, शियनी वा उनका भेड़ पा स्त्री. मद, मेषकी नाति विशेष सहचर, घृणा, पराल । भेडा० १० पु. मेदा। भैरवी० ना० स्त्री रागिनी विशेष, भैरवको सी, भेदिया. • पु. विक, हुएडार । दुर्गा। भेडियाधसान ना. पु० गचपच र भैहः मेहा ना० रनी चाट भाई की रसी। मण्डनी। मोकना० स० कि० टोकना, इलना । भेडी गा० स्त्री० मेदा, मर । मोडा गु० फुडौल, पुरूप । भेद T० पु० भि भान, वाचविशेष, गुप्त भाँद गु० सीधा, माग। बात, मर्म, छद, अतर, फर्क, किस्म । गोप० ना. पु० रसिंहा। भेदक गु० भेदकरानेद्वारा, पाणिभद । भोई. ना० पु० पहार, मि. भिगाई । भेदकिया० ना० पु० भेदलगाोहारा, सोनी। मोकस० गा.पु. श्रामा, माना। भेदन० पु. भेद करने का काम 1. | मोसा गु• भान में ना पिपुरा, अया साहारा भेदिका पा.पु. मेदयरनहारा, सानी, भेदिया जासूस, घातयामर्म जागो भोग० मा पु• सुववादु सफा उठावा, भेदी सुख, साना, नैवय, बिहारसिलास । भोगना०य वि० सुख दुखका उमदा वा पा., भेदू० ना. पु. भेदरखनेहारा । भेद्य गु० भेदके याग्य । सुख, विलास करना मोगरती० ना. स्त्री. शेपका पिवासस्था।। भेगा. सी. बहन । भोगा ना० पु. द्रल, टाई, पासा। भोगी० गु• भोग करनेवाला, श्रादी .. भेरि० ना. स्त्री याजा विशेष, क्य। भेरी सार। भोग्य तु जो भाग करावे याग्य है। मेला० ना. पु० भिलारा। मोज. ना. पु० -यौार, राना विशेषरावशेष गेली ना. स्त्री. गुपका दसा। मेय. ना. पु. मात्र, प्रति, स्वभार, गर्म, जो पटा और भागलपुर को प्रदेशहै।। भेद। भोग्न. ना. पु. प्रादार, साना । हारा। । १ २६६ मङ्गलकोप। . . भौतिक गु० जो भूत - भोजनचार० ना.पु. चारप्रसार का याहार मांसनाय. क्रि० भोकना । अर्थात् भान्य, मदरा, लेद्य, चोप्य । भौ० ना. पु. भय, दर भोजपत्र ना.पुं० वृतविशेष गरी छाल । भौचक० गु० भयचक। भौजाईल भोजपुर० ना. नगर विशेष भौजी ना. मी. व भाई की रसी। गोज्या ना• पु० जो खाने के योग्य है, भौनास. ना. पु. बड़ा बूग निस म हाथी सीधा। बापत है। भोट ना. पु. भोट देशके वन, देश निशेप,नो करके हान, शरीरराग। तिम्बत का एक देशहे। भौतिकदेह ना. सी. पञ्चतत्वकृतशरीर । भोटन्त० ना. पु. देश विशेष जो नेपाल के भौम० मा० पु. मगल, उद्भिन, लोन, भौमा. सर भोटिया० ना. पु. भोट देश के लोग। भौमयार० ना. पु० मगलवार । भोडर० भौमासुर० ना० पु. दैत्यरिशा निसको नरका. ना. पु. अभ्रक अवरक। सुर भी कहते हैं। भोता० गु० जो अस्त्र तेज नहीं है, मद। भ्रंस ना.पु. प्वस। भोपा. ना. गु० टोनहा, उला, याना विशेष भ्रम. ना. पु० भूल, चूक, सन्देह, मशय । भ्रमण ना. पु. पर्यटा, भानर, फिरना। भोपाल. ना.पु. देश वा नगरविशेष । भोर० ना. पु० प्रात काल, पौड़। भ्रमणा ना• खी० भ्रम, भूल, सदेह, गिरना। भोरा० ना. पु. धोखा, गु० भोला, सौधा, भ्रमभीर० गा० पु० भूलका समूह वा नोक। भ्रमर० ना. पु. भौरा, अलि । भोरे० गु० धोखे, भूले, रामायणे यथा, का पति भ्रमरो० ना. श्री० भ्रमरपी सी, भारी । लाभ जीर्ण धनु तारे । देखा राम नये के भौरे । भ्रमरका ना० सी० बावरी, जल्फ्रें। भ्रष्ट गु० पतित, सधर्महीन, छुटखेला। भोला गु० छलहीन, सीधा, ना० पु. शिनी। भ्रष्टा० ना. स्त्री. व्यभिचारिणी, पुलग। भोलानाथ ना. पु. श्रीमहादेवनी । भोली- गुस्सी. सीधी। म्रप्टाचार० ना. पु. अधर्म, स्वधर्महीन, सच. भक्षी। भी ना. स्त्री० मृकुटी, धू, भूमि । भौकना कि. हो ही करना, मूसंता से भ्राजमान गु० शोभित, सुशोभित, या। माता ना. पु० माई।. बोलना, कुत्रा शब्द भीचालना. पु. भूमिरम्प, हालाचाला। भ्रातृज. ना. पु० भतीना, माईग लड़का । मान्तर गु० जो घुमायागया । भार. ना. पु. भेवर। भ्रान्तिक ना• स्त्री० भूल, चूक, भ्रम, मति. भौंरा ना०.पु. भ्रमर, अलि, पदपद ।, मारियाना स? वि. पिराना, घुमाना। भ्रामक गु० भमदाता, ठग, धोखा देनेवाला। मौरी ना. स्त्री घोड़े के देष विशेष, भारी धुव० ५० दयालु। . J. 1 www ना० मी० मीह, पंक्ति, घुड़कना। रसी, धदी रोगी, पर। .
मङ्गलकोप। २६७ - 1 विशेष भ्रूणहत्या० ना० नी० गर्भपातन वा पिनाशन। मगधमाषा० ना. सी. प्राकृत भाषाविशेष जो समग ना. पु० भूपिदेप, घुड़की। ब्रह्मा और श्याम में प्रचलित है जिसको वहां [म] पालिक कहते है। मडुना० ना.पु. अन विशेष । मगण ना० पु. गणविशेष निस में तीन अक्षर मकड़ा ना.पु. कीट विशेष जो जाला बना. दीर्घ हाते हैं। मगन गु. मग्न। मकड़ना० अ० वि० टेदाचलना, नीवुराना । मगनता० ना. स्त्री. मग्नता, प्रसनता। मकड़ी० ना० स्त्री० छोटा मकड़ा, सूत्रक । मगर 3 मवर, आह, पुम्भीर । मकर ना० पु० दशौं राशि, मगर, मृग, मगरमच्छ, मच्छ। मगरा० गु० ढीठ, घमण्डी, हठीला, मचला। मकरध्वज. नापु. कामदेव, श्रीरलदेवनी, मगराई० गा० सी. विठाई, एमएछ, मच- श्रीहनुमाननी का पुत्र । मगरापन लाइट। मकरन्द ना पु० पुग्यका रस, कोक्लिा। मगरेला० ना. पु. कालेरग का छोटा बीज मकरन्दी० ना. पु. कमल । मकराकृत गु• मबली के डोल। मगसिर० ना.पु. मगसिर, अगहन महीना । मकराक्ष ना.पु. खरापुर का पुन। मगही० गु. मगध देश की वस्तु । मकरी० ना० सी० मधली, मार यो ना, मगहेया ना• पु. मगध देश के वासी । माड़ी। मगुरी० ना. स्त्री० मछलीविशेष । मग्न गु० दूना, प्रसन्न, हर्पित, मुदित, गलित । मकुष्ट० ना.पु. मोठ अन । मग्नता० ना. सी. प्रसन्नता, हर्ष, मुद। मकुएक० मकोड़ा० ना० पु• बड़ा चूरा। मघवा ना. पु० इद्र। मकोयना पुफर वा पोपा वा झाड़ी मघयास्त्र ना० पु० वज्र । विशेष । मघा ना. स्त्री. दशवा नक्षत्र । मकपन ना पु० नवनीत, मासन, नैपस मघोनी० ना० सी०३द्राणी । कह। मंका० ना. पु० जापी माला, समिरन, गुदी। मक्खी ना० सी० माबी, दूक या मासा । मंगत मंगता ना० पु. भिखारी। मख० ना.पु० यज्ञ । मखन० ना०पू० माता। मंगन० ना. पु० भितुक, भिखारी, वर्षि। मपना० ना.पु. हाथीविशेष निसके दात न मंगनी ना. मी सगाई, उधार । हो, मुर्गनिस के साग न हों। मंगरा० गु. पलवान, टीट, मगरा। मखनिया० ना.पु. मासा बनानेहारा। मगल ना पु० कुशल, प्रानन्द, तीसरा प्रहा मनाना० ना. पु. पौधाविशेष। तातार देश के लोगों की तीनजाति में से एक मसी० ना.सी.मरती।। और तीमरा बार, रागविशेष जो विवाहादिया- मग ना.पु. मार्ग, पसरट, मगध देश। नन्द में गायानाता है। मगध ना. पु. देशाशित, निरा में गयातीर्थ भंगलकोटी ना स्त्री चटाई विशेष है या पटनादि नगर है। मंगलघटना० पु. विवाहादि का कलरा Ir .
मङ्गलकोप। +4 सूगा। . ८ मंगपद्रव्य पुलपादि। मचज हा गु हदीसा। मंगराचार TT पु. तीसरा यार । मचान० 1... म । मचामच-गु० लदानद। मगलसमाचार.ना. पु. शुसमाचार, अच्छा मचिया T.ग्रा. दीनी, चारा, पलगिया । सर। मचोदना. म. फ्रि निचाना, ऐ के तोड़ना मगला. • • पारी शार,r मच्६० १० पुमरस, मछला । मच्छर 7. पु.मा छोटा कार र नेद्दारा । मगलाचार० • • वारा,सिराह पा रन । मली T. • मछली, मका। गगलाचरण 1. पु. शुभ यमों में गणेशादि मछ, ता. पु० मरस, मली। हवना को पिनय या पूजा या नमरपसार। मछ दर० 105. चूहा, गु० मगलामुखी सा० सजना, गवैया वश्या! मछलीना मी जलशयनी जलतुर मत्य । भगी गु . मगल शारर, जपात । मछम ना० ५० धामर, कहार, म बीमार । माल्या ना. स्त्री० सजीमा, गगचना । मछी न० सी० मदली। मंगवाना० स• कि. युला मनना। 7 मछुवा० ना.पु. मदना धामर। भगशिर० ० पु० माशाप, जगह ।। मजीठ ना. पु. योगशिरोग निमस लावरग माना० स० कि. चलाभाना, वाला त ५नता है। लवकरना। मजीत गु• एता जा रस्तु काम में साजरे भगूखा ना.पु. पायाभन्दा । और फिर बचानावे । मगतर० ग. स्त्री. सग। मगरा T• पु. मनार वाजा निशा झाझ। मच ना. स्त्री. गार की पाडा मरमराद मजूर० ना• पु० कमरा, टीक शब्द मनदूर ह, दवा। यह शन्द शारसो का हे। मन ता० अ० कि.गाा में पाठाहाना चरचरा मजा ना० सी. हा के भातर का गूदा ना, मरमराना। भचकाना० स.वि. चरचराना, झाम्ना पल मझला गु• मझता, पाचगाना, मयवर्ती । फमरगा मझार..पु. पीच, माम्। मचना अ.कि. लाग, उटना, हाना र ममेची न स्वा. ममाली। मचमचाना० अ० कि० चरचरा, मरमाना। मभोला गु० जो 7 दाग 1 पड़ा अश्वान मचलना० . कि हटारा, मचलाहाना । अाधार 7 युरा, थथा मरम। मचलपन. ना।पु० हठ, मगराफ्न, गिनाई। मझोली ना. सी• छागगाड़ा या बहल । मचला. गु. इटीला, मगरा, दाट । मश ना. पु.गरान, डाना सिंहासन विशेश, मचलाई १० स्थामचतापन, मचताहर । सार, वेदी, मचान, तम्व, तस्तपारा । मचलान • • कि. हठ करना, मतलाना, मजन ना० पु० दात पार का पूर्ण विराम, हाना करना माजन, स्ला, झान। मचलाहट ना. साहट, दिगई। । मजना० अ०f.उजता दाना, सामोना, . ज .
मङ्गलकोप। २६६ TP : ताऊ व्यापा 4 1 Gr c" . एडप. 1 मंजरी स्त्री पृलोका गुच्छा पली समूह । मटियागा० स० कि० मिट्टीसे माजा, अनि मंजख ना.. अजीरवृत् । । एन, सींचना, पारा छुपाना होने देना, शिथि मंजा गा.पु. नये वर्षेपानी या पेन अर्थात् प्र त हो गाना ! -330 धम बापाद में वर्षनेवापानी मछली को विष पटियार ना. पु० एप्रकारको धरती विशेष होता है, रामायणे यथा, मजा मनहु मीन यह जो रेतली नहीं है। मटियारा० गु० जो किसी कामकान हो जाता मंजार 10 पु० विलार, विला। मंजारी ना. स्त्री पिसी। सती के योग्य। मंजित० गु० मजन कियााया वा रिय हुये, मटियाय ना.पु. पानाकानी, श्राखापार । धोयाया। मट्टी T० सा० मिट्टी, मृत्तिका । मंजिष्ठ ना. पु० मनीठ ।' गट्ठा ना० पु० छाछ, मटा । मठ० ना० पुशिवालय, गोसाइया का घर, मात्र मजीर० ० पु. बिछुरा, पोरका भूषण । मजीरा गा.पु. मजीरा । मजु गु० सुदर, ममोहर, चाहता। मठड़ी, ना. सी० एक्वात विशप । मजुघोप० ता. पु. कबूतर, परेवा ।। मठपति। ना. पु० गोसाई, अतिथि वा जो मंजुघोपा० ना० पु. पतरी, पोयल, कोकिला। मठपती मनुष्य शिनार्पितवस्तु लेताहा मंजुल गु० सुदर, मनोहर, चाहता था। मठोर० स० पु० मटा । मठा० ना० पु. मट्ठा, गु० ढोला धीमा.धीराः मंजुला० ना० स्त्री. मठ । मडियाना० स०नि० चपकाना, मोडालगाया जमाना। मटक. ना. सी. चोचला, भारती. अ. मटकगाठिलानपन, चमान। | मडोडा स्त्री० एठ, बल, पंच मटकना० मा पु० पुग्वा, यधनी, मृतिगका मोहना० स० वि एटा देखदेना, पेच छोटापान । डालना। मटकना० अ० मि० पराक या झापला मरता, महोडा • पु० पैर में पीपाड़ा, पचिरा । मडोटी0 • सा मुरस, एका जोडा मटपा० ना० पु० मठोर मृत्तिकाकाबाती। मदन १० पु मदो का वस्तु या काम। मटकाना० स० वि० श्रास पुमाना, चमग मढना० स० वि० लेरामा, लगा निपटीना। मदा गु० जो मदागया, 11. पु."निमारको मटकी० गा री० छ या मका, मनी, राधी, मएडप, बड़ी मड़ी। घगुनी, मापकी, से।। मा.या० ना. वा. घारीमदी । मटकोठा० ना. पु० मिट्टीमा घर । -मदी शा० ग्री० फुटी, झापी गरL 15 मटर० 110 पु० पिशेष, किराठा मपि TI० मा अप के लिए पापा नियम, पटरा०० पु. मटरशिप, रेशमीरस विशेष। हीरा मोना गाद चमकदार, शिरामणि र मटरीना की मार शिरा मिद्ध है कि सुनिशा राप के पार हाती है मटरीला गु• जिसमें मर मिलाहो। जो रात्रिको प्रागिा रहता है। - मजूपा० ० स्नीक टोकरा। . चमा दूसरेको विराना। f २७० मङ्गलकोप। . दूसरा धर्म। . मणिकर्णिका० ना. श्री. काशीजी में स्पान मतंग गा.पु. हाथी, मुनि विशेष । विशेष जहा देवीनी के शान यी मणि गिरीथी। मतना० ना. पु० उस विशेष । मणिका. ना. स्त्री. छोटी मणि, गुरिया । मतभेद० ना. पु. मतावर, अभिप्रार का मणिपूर० ना. पु. चक्र विरोष, देश विशेष, जो बगाल देश के पूर्व में है। मणियां ना.पु. मालाको गुरिया वा दाना । मतरागार स. कि. मनाना । मणियार० ना.पु. सर्प विशेष जिसके माथि मतलाना प्र.नि. जी पिनाना, उवकाना। होती है, जाति विशप जो चूड़ी बनाता है। मतवाला गु० मत, मदमाना। मएड ना. पु० जूम, माद, पोच वा साता मतहीन० गु० मतरहित, बुद्धि रहित । निसमें शारा मरामाता है। |मता. ना. पु. उपदेश, सलाह, परामर्श । मएडन ना. पु. भूषण विरोष, मिलान । मतानुसार० ना.प. अभिप्राय के अनुयल, मण्डप० ना.पु• तृयादि से रचित देवतारापर, मजहर के मुवापिका, सलाह के मुवापिक। मदा मड़वा। मतान्तर० ना० पु. द्वितीयमत, मतके विपरीत, मण्डल. ना. पु० स्थान, देश, गोला, छुडल, याकाश, तल। मत न्तराचार० ना. पु. दितीय धर्म का मण्डला ना. श्री. धीकुवार । व्यवहार। मण्डलाकार० गु० गोलाकार। मतावलम्बी० ना.पु. मताथयी, पथी। मएडलाप्र० ना.पु. सा, तलवार । मण्डलाना० १. दि. किरना, उड़ना, यया मताश्रयी० ना• पु० मत के बाधित, मनके पपी उहते हैं। याधीन, पी. मएडलिपा० ना. पु. कपोत विशेष । मतिमी• बुद्धि, सम्मति, रीति, राय । मएडली ना. सी. समूह, सभा, बैठक, घर । मतिमा० मती मण्डलीक० ना.पु. राना, महत, चाधरी। गु• बुद्धिमान् । मण्डलेश्वर. ना. पु. राना, मढलपति । मतीर० ना. पु. तरबूज, हिवाना, सठश मण्डवाना.पु. कुन ना. स्त्री. मडवी। निकाया यथा, गरुधर पाइ मतीर हो मारक है मण्डयी. ना. स्त्री. यन्न मिशेष । मएडा.ना.पु. पेड़ा विशेष । मतोल ना.पु. मत, सम्मत । मैहित गु. जहित, रोमित, भूषित, मद मत्त गु. मामाता, मरत, मनासादायी हुधा मण्डियाना०प० कि. फलपदना वा लगा। मसर० ना० पु० डाह, जलन, ईर्मा, गु• नवनी मत्तयत् तु. मधुमाता, मधुमाने के समान । मएडी० ना. • हार, गोला, गन । मत्स्य ना.पु. महली, देश विशेष। माइकल ना.पु. मेटक, भेक। मत्स्यन्नी ना. सी. रहिरा, जिससे मण्दना०. मदना। मत्स्यवेधन (मदला मारते है। मतान • धर्म दी1, स्लाइ, मम्मत रौनि मत्स्यपित्ता ना० सौ. कुटकी। पनिमात्र, मु, अन्य नि म स्याक्षी ना. सी. मादी, श्वेतदूर । धार्थ अर्थात् नही, जनि । मधन ना. पुरविलापन, पपोरन, टाय । । पयोधि। १ एस, मङ्गलकोप। २७१ , , . r नधना. स.वि. महना, लोवना, मघोना, मद्य ना• स्त्री. सुरा, मदिरा, शराब। मा.पु. मथनी, पार विशेष मद्यगन्धाना• स्त्री• मौलसिरी ।। मथनियां ना. सी. मथा। मद्यप० ना. पु. अधिक मदिरा पानराला। मथनी ना० स्त्री. विलोणी, महानी, रई ।। मद्या. ना. श्री. बरी। मथा ना• पु० माथा, गु• मथाया। मधुमाता० गु० मतवाला। मथानी ना. सी० दूधहाड़ी, मटकी, चाटी। मधुवोपित ना• पु० पोल, मिरच । मथित० गु० छाड, महा जो मयागया। मधु ना पु० मदिरा, पुष्प का रस: राहदा मथुरा० ना. पु. नगर विशेष, जहा श्रीकृष्ण पानी, चैत्रमास, यसतप्रस्तु, वृक्ष, दूध, अमृत, चन्द्र जमे थे। दैत्य विशेष। मथुरिया ना.पु. मधुराके बाह्मण । मधुक० ना• पु• महुया वृक्ष । मयुरनी० ना. स्त्री मथुरिया की जोर। मधुकर० ना. पु० भ्रमर, भौरा। मथौट० ना. पु. चदा, पिहरी, पाच । मधुकरी ना. श्री. भ्रमरी, भौरा, रोटीविशेष। मधौरा० ना. पु. सूर्यमुखी, छाता, धतुरी। मधुकर्कटिका० ना• स्त्री. मधुकर्ष। मद० ना. पु. गर्व, अहकार, पस्तूरी, मादक मधुकोप० ना० पु० मधुमाती का पत्ता । यस्तु, मदिरा प्रादि। मधुकोप० ना• पु• महुया वृक्ष । मदकल० ना.पु. हाथी। मधुग० गा•• महुया भेद । मदकारिती ना. सी. सुरासानी अनाइन । मधुण ना. पु. ऊस, गना।' मदन ना• पु. पौषधि, पौधाविशेष, मैफल, मधुतिका० ना. सी. गोयल । कामदव, प्रयुम्ननी, दीना। मधुनुमा • मधूपए, चेत्रके वृध। मदनांकुश ना. पु. लिंग। मधुप० ना० पु. भौरा, अमर। मनाहा ना. स्त्री सिरहटी। मधुपर्क | पु• पूनाकी सामग्री, मधु और मदनारि० ना.५० श्रीमहादानी । दही यादि मिलाकर साना। मदमाता ना.. गु० मताला, मत-मधुपर्णी गा• स्त्री. दूधिया, पोग। मदमाती ना. धो. वाली। मधुपर्श० ना० पु. पहा रसीला पत्र । मदमालक मा. पु.मिछुया, पादागद । मधुपुर० ना. पु. मथुरागी। मदयन्तिका ना. श्री. मालती। मधुपुरी ना. सी. मदान्ध० गु० अभिमानी, मदिरा में गलित। मधुफबा ना. पु. पर, दास । मदार० ना. पु. प्रार, धर्क । मधुमट० ना.पु. मोम । मदारिया० ना. पु. मदारका फूल । मधुमपी 11 सी० शहदी मक्ती, ममाता मदारी ना.पु. सपरा, नटपर, सारसना । मधुमाता ना.पु. रागिनी विशेष। मदिक गु. झारी, मदाय । मधुमास० ना•5. चैत्रमा । मदिरा. ना. सी. शराब, दारू, गा.पु.मधुयष्टी ना. स्त्री मुसही। मधुपोनिः +5. अगर दास । मदोत्कट गा.पु. कोन, इतर । मधुर० गु• मोटा, पाहता, गदरं, पाया। मदो. ना. पु. हाला। मधुरम. गा.पु.माम । मागुर ना• पुमोगग मशिन, पुदगर। मधुरसा ना. सी. मुरही, पर, दाग। है २७२ मॉलकोप। . . m " T P4 - 1.M . मधूनका ना. सी. मुलहटी। मधुरा ना. स्त्री काोली। मध्वा० ना. चार मदिरा, शराब ! FORE मधुरी० गु• सी० मीटी, रसीली,मन० ना• पु. चित्त, हृदय, यात्मा, ४ सैरका। मधुराम ना० पु० मीटा भोजन यथा रसातर मनकामना गा. स्त्री. मनोयोग ।। मधुलिइ. मनघटाना पु. धुनाको जगर्न । मधुलिहा ना• पु• भोरा, भमर । मनचला गु० घरफरा, श्रगमना, सूरमा मधुधन ना.पु. मथुरा नगर । मनात ना. पु० कामदेव । मधुवत ना• पु. मधुकर, भौरा, भ्रमर । मनत. ना. ही मनौता, स्वीबार । मधुशिन ना• पु० अगरस्य वृक्ष । मनन० ना० पु. चिन्तन, मनसूवा । मधुश्रवा० ना. स्त्री• गुड़हर, सजीवन घटी। मनभावन मधुष्ठीली० ना० पु० महुआ वृत। मनभावना गु० माघ, भला, चाहता । मधुष्ठीय ना. पु० गुड़हर। मनमाना.पु. वामदेव । मधुसूदन० ना० पु. श्रीकृष्णचन्द्र । मनमारना० रा. कि अपनी इच्छाको रोकना। मधूक० ना.पु. महया वृत्त । मनमोहन गा.पु. सजन, प्यारा, भीकृया:: मधुकरी० ना. सी. पपाये अन्नरी भिसा जो चन्द्रका एक नाम जो मगो मोहलेवे। अतिथि को देते हैं, भौरी, रोटी। मनस्विनी० ना. स्त्री. पवित्रता की। मगसा० ना० स्त्री० इच्छा, अर्थ विचार, इरादह मधूप. ना. पु• गुगहर। मनसिजा ना-पु. कामदेर। मधोदन्ती० ना. सी. कुम्भी तालान की। मनसी ना.सी. सत्यकी देने की इच्छानी। मध्य प्रत्यअन्तराल, नीच, विषय । मनसेधू० ना० पु० मनु य । मध्यदिवस ना• पु. दुपहर। मनस्ताप. ना. पु. गपी पीड़ा । मध्यदेश ना• पु० मुख्य पातर, नीच का देश मनहु० अव्य० मानो, मो. अर्थात् हिमालय और विध्य और प्रयाग और मनहारी० गु० मा का हरण करनहारा । कुरुवार के मध्यका देश, अवध यादि। मगानी स. कि. अगीर परवाना, प्राकर मध्यभाग ना.पु० मध्यस्था।। रोगा, बहल 'प, मनको धामनगा, कृपालपरगा। मध्यम गुन भना न युरा, समासन, धीरे, मनायना० स.गिना।। न्यूनाधिक रहित, रागी स्वर विशेष । मनि० ना. रत्री मणि। मध्यमपुरुष ना• पु. मध्यमार्गानर, सामो. मनिका गा• स्वी• मारका, दाना, गुरिया वाला, मुखानिव, हाजिर मनिहार० ना. पु. चूहीगल, जाति पिरो।।. मध्यमा० ना. स्त्री अनामिका घऔर तननी के मनिहारी ना. स्त्री० चूड़ी देरनेवाली वाचकी अगला। मनीपाल नारसी• बुद्धि । मध्यलोक ना. पु. मनुष्यलोक। मनीपी ना. गु. युद्धिमान, चतुर । - मध्यवर्ती ना• पु० विचवैया, चिवई. मनु म पु रसायभुव धादि १४ नो प्रोक श्य में होते हैं, सायभुषमनु विरचित स्मृति, मध्यस्थ समानवनी। मध्यस्थल गा. पु. ६, मनीचा मना, मझा का पुन, प्रथम मनुष्य। मायस्थान स्थान । मनुभा. ना.पु. मन, लार, ना. सोनई मम्पादक ना• पु. टीकदोपहर, दिनराव । निरी । - , PT म 1- टिगा। प २ ३ . मनुज० ना. पु० मनुष्य, प्रादमी। मन्दतर० गु० अनिमद, अतिनीच । मनुजाद० ना. पु. थमर, देय, रावस । मन्दर० ना. पु. पर्वत विशेष । मनुष्य • पु० माना, मर्य, पादमी। मन्दरा० ना. पु० गचगीना, गु. Pा. मनुष्यता स्त्री. १ मनुसाई, पुरुषार्थ, भल मनुष्यत्व० पु. मनसाता मन्दराचल ना पु• मदर । मनुसाई० 11 घी० पुरषार्थ, मनुष्यता, भल मन्दराज ना पुसमुद्र के तट पर गर मासी। विशष । मनुहार० ना० सा• माहनीसदरी। मन्दा० गु० धारा, कोमल, नग्र, सस्ता, हलका। मनो० अन्य माना, जाना। मन्दाकिनी • रती• भोगगानी, सगीर । मनोगुप्ता०० सी० मासिरा । मदार० पु. एमल, मदार, कल्पवृक्ष । मनोज पु. वामदेव । मन्दिर० ना. पु• घर, दवालय । मनोभव० ० पु• कामदर । मन्दिरा गा.पु. मगौरा। मनोयोगा.पु. भाका योग। मन्दोदरी० ० श्री. गण की सी, पचिनी मनोरया. पु. इछा कामग, पास, मतलब मन्मथ 7. पु. कामदेव । मनोरम. ना. पु. ग. मोर, सदर, मन्वन्तर० • पु• एक मनुका रा य, अर्थात् मनोहर० गु० मनका दोहारा, मोश । कहतरि युगमा परिमाण या दो मनुवों के मध्य मनोन० गु. सदर, स्वरूप, चाहता, मनभावित, पाकाल। मा जाननेहारा। मपान० पु. परिमारा। मनौती 17. श्री. पानि I TI• पु० विचई, मपाना सनि. मात्र परवाना, पाना। और मध्यर।। मफेनक० ता. पु. अफ्यून, अफाम । मन्त्र. पु. टोखा, शीररणी, लकी, मम. सा. मेरा, में, 3. पी. गमता, एकात या गुप्त उपदेश, रम्मति, सलह । दी। मन्मणान. सी० परमर्श, विचार, अदश। ममतापी घमण्ड, दम्भ, मनमीन, माया, मन्त्रराज पु० तारकादि मत | ममत्व.पु. माह, दरा, प्यार। मन्त्री पु.निस के साथ परापर्शपी नाव, ममासी011 सीमधुमासी । शीर, रम्मी, सलाही, गुः मन्त्रनायो ममियासाRO TI मा पनि या पली 47 ममानी। मन्थन पु० मा । ममियाप्तसुर० ना.पु. पति वा पती का मन्यराना स्वी. पेरी वो दासी शिगा। मन्धित गुप, मह, मस्ति । ममेरा गु• मामृपा- यया, मामा- मन्थी गा.पु. पत्रमा, कासदर, ना, सममेराभाई. T• पु. मामूगा पुर । भानु या राह, शनैश्चर। मी -पु. मेरिस, मेराशमी। गन्द. २. अन्य, पारा शिपिल, प, दुष्ट, मय. पु. कार्य, प्रशान, रूप,गा, मोच, प्रभागी, परा, मसान, ना. पु. पार, रानरचर, प्रशान। मयार०० मा.पु. पन राि ! माम्। .
२७४ मङ्गलकापा 4 . मयंक. ना. पु. चन्द्रमा 17 मराल. ना. पु. इस, बतक। मयन ना. पु. कामदेव । मराली ना. सी. मराल की घी, वाचाल । मयना० ना• स्त्री पार्वती की माता, मैना । मरिच ना. सी. मिरच, कालीमिरच । मयसुता ना. स्त्री. मदोदरी। |मरीचि० ना. स्त्री किरण, लहरी, ना. पु. मया. ना. स्त्री मात्रा, दया। मुनि विशेष मयूर ना. पु. मोर, पती विशेष हस । मरीचिका० ना. सी. मृगतृप्या, शराब । मयूरक ना० पु. ऊगा। महल ना० पु. रेता, बालू । मयूरग्रीचक ना. पु. नीलाधोया, नूतिया । मरुत्रा० ना. पु. पाधा शिष, जिसमें मुगधि मयूरचोख० ना. पु. खोना। होती है। मयूख. ना.पु. किरण । मरक० मा.पु. मया। मरक० ना. पु• सर्वव्यापक रोग महामारी। मरूप्रिय ना.पु. ऊर। मरकत ना. पु. नीलम, नीलमयि, प्रवाल । मरुना० ना. सी. इन्द्रवारणी, नवासा । मरकन्दा गु० मारनेहारा। मरुभूमि० ना. स्त्रीमारवाडकीपरती, रेतली । मरकहा० मरल ना. पु. मया । मरगजी ना. पु. मुरझाया हुया मरगशन्द मरुत्० ना• पु. वायु, पवन । फारसीका अर्थात् मौत और जो नार यर्थात् मरोड़ ना० सी० मरोड़। मुया जीव यह शब्द सतसई में है। मरोड़ना० स० कि. महोड़ना।' मरघट० ना० पु. मृतका के जलाने का स्थान । मरोडफली ना. सी. पाधाविशेष यो फली। मरजाना था कि मरना। मरोहा ना. पु. मडोड़ा। मरजिया ना० पु. समुद्र से मौता निकालने मरोड़ी० ना. स्त्री० मोडी, एंठन, मुरही। हारेका नाम । मरोर० ना. स्त्री. मरोड़। मग्ण ना.पु. प्राणवियोग, मृत्यु । मरोरना. स.कि.मरना। मरदनिया ना. ५० मर्दनी। मरोह. ना. सी. दोह, पार, माया, मलम मरना० प्रक्रि• प्राप निकलना! नसान मरपच० • गु० सरा, गन्दा, जार्य मरोही० गु० छोही, मागावत, दयाशील । मरपचना० अ० कि. दुख वा शोरका भोग मर्कट० ना.पु. वानर, कपि । करना, अत्यन्त उद्यम करना, बहुन परिश्रम मटो० ना. सी. बोचवीन, नाल, माड़ी, अर्थात् मिहनत करना। वानरी, गणित मी जो पिंगल में है। मरभूखा० गु० उपासा, लघा, खाऊ, नहपेटा। मर्त्य ना.पु. मनुष्य । मरमर. ना. पु. पाषाय विशेष, रिठौर । मर्तलोक मरमराना स•ि घरचराना, यथा नई मर्त्यलोक गा.पु. मनुस्यलोक। ती बालती है। | मर्दाना पु. पवार पोधा, गु० मलने-- मरचैया ना. गु• मरनेहारा वा मारनेहारा, द्वारा। मदन ना. पु• शरीर का मलना, रगड़ना, मरहट्टा० नापु• छन्द मिशेर, जाति विशेष । घिसार, नारान । मरागुमरगया, मृतक। मदना. स.शि. मसना, नारामा मिटाना । - ८ ran मङ्गलकोप। २७५ 7 म . मैलापन । - मर्दनछईन ना० पु० मैनफल । | मलयुत० गु• मैला। मर्दनी० गु० मलनेहारा। मलवाई • श्री. मलवाने का पैसा वा काम। मर्दित गु० जो मलागया, मारागया। | मलविका. ना. वा. कालानिशोत । मर्म ना. पु. भेद, समाचार, ज्ञान, योर, मलया० ना. पु० मलोहारा । ठार हृदयादि अग। मलाई० गा. सीसादी, वालाई, मलने वा मर्मर० ना. पु. एक पत्थर का नामहे यह शब्द काम वा पैसा। फारसी का है। मतान० ना. पु.दुस, उदास, दुखी। - मर्मस्थान० ना• पु. शरीरक जिस स्थान का मलाना० स० मि. मर्दन वरा, घिसाना, मि. घाव राघातिक है, भेदका स्थान । जाना। मर्मश. T० पु. ना मर्म को जा, ज्ञानी । मलार० पु. शेष। मर्मी० गु० भेदू, भेदशाता, मर्मज्ञ । मलिच्छ. गु. म्ले छ। मर्याद ना. सी. महत, पति, समान, मलिन गु० मलीन, मेला, उदास, ना. सी. मर्यादा सीमा, हद्द, यादा, प्रमाण । कालीमिरच । मल. ना. पु० मल विष्ठा, सी की रज, पार। मलिनता० ना० स्त्री. मालिय, अपरिग्रता, मलक० ना० पु० पानी, पारला, जी पिनाना । मलफना अनि यहार समा7 चलनानी मतिनमुग० गु• उदास, कठोर, लिहाशा, दुष्ट । चिया उबरा। मलिनी० ना. मा. पुष्पवती, रजस्वला । मलग० ना.पु. पहाविशेष । मलिन्द • पु. भ्रमर, भौरा मतिया. ना. श्री. काष्ठ या नारियल वा मिट्टी मलगी० पु. लो बनानहारा । मरात० ० पु. रुपया वा पेसा जो पिसगया का पान, जिसमें तेल रखते हैं, हडिया । हो, सिलपर। मली गु० मैला। मलथना. सी. कटवरि । मलीन गु० मैला, अपवित्रा भूधला, उदास, मलन० ना. पु. ना, लोक, मलो या का। दुखित, म्याकुल। मना० स० कि मर्दना, सिना, मीनना । मलीनता १० सी० मलिनता। मलया० ना.पु. कूदा, मैल, वर्तन विशेष । मलेपा० गु० पोड़ा निसी बायुदशवर्ष से मलमल ना.पु. कपड़ा विरोष। मलमास • पु. लोद, अधिमास । मलेच्छ.. म्लम्छ। मलमेट 1. पु. उजाइ, सत्यानारा, होयुका मल० ना. पु. बालू, जो साहयुद म निपुण, जसे पर। योद्धा, पहलबार। मलय. ना. पु. पर्वतपिरो, 'जो दक्षिपमें है। मलयुद्ध० • पु• बाहुपुर,करती । मलयज० ना.पु.चदन। मल्लार० ना.पु. मसार। मरयगिरि० .पु. पतविरोग, नहा चन्दन मलिक नग.पु. पांत निराशा पधिकतासे उपनताहै। मलिक मो. मासनी, पता, पुष मलया० . सी. पदमाक, शिक्ष। मल्लूर ना. पु. पेल, रिल। मलपागिरि०.पु. बादी का रंग मपास.ना.पु. शरण पासा, ग्रासरा। , * " . है 4 - 7 . १ . [यत, मा । मङ्गलकोप। मश. ना. पु० मसक, चमडारूपी जलपान मसै० ना० पु० छोटी र मृद जो नई जानी में मशहरी नाः सी० मच्छड़ो के निवारणार्थ नो निकलती है। आवरण पतग के ऊपर रहेनाहे । मसोसना सकि. मोड़नानिचोड़ना। मटणा ना.सी. अलसी।। मसोसा गु० मडोहा, निचोड़ा, ना पु• दुग्य, मपी०,ना खीयाही, रोशनाई। व्यथा, परतावा। मट गु० ग्रुप, मोन, ना. मा. मौनी। मस्तक गा.पु० माथा, शिर, खोपड़ी।' मटताना. स्त्री० युपकी, मोता। मस्तूल ना० पु. थम्भ जो नार के बीच पाल मसकता.पु. मच्छड़, रिलार, मसा । चदारे लिये गाइते हैं। मसकना० अ० कि. पटना, चिरना, चसना, मस्या ना. स्त्रीकुटरी, पुटुकी। बोलना। मस्याघारपु. रंखो को मसकाना. स.नि. फाइना, चौरना, तोड़ा, घुलाना। मस्सालना.पु. मसा। मसकी ना. सी. दाई, फरी, बोली। मह ययमध्य, में, बीच । गसमसाना • कि किम के उरसे मना महंगा गु० बड़ेमोला, काल. दुर्भिक्ष । बात हुशना, पाहोनाना । महंगी ना. सी. कोल,, दुर्भिद, सहत । . मसलनाय. कि. बुचरा, मांजा ओर महरना. स्त्री० सुगधि, सुवाग । महवना० अ.कि. मुरास कलना या उटना महकाना० रा. कि. बासना, सांधाना । मसहरी गा० रवी मशहरी। महकीला गु० सुगन्रित, सौंपा।' मसा गा० पु. मेन्या, इला, शरीर में काला महत्० गु० बड़ा, तेनरमी, श्रेष्ठ, ना. सी. ऊचा चिह विशेष राई, मर्यादा, मान। मसान० ना. पु. श्मशा, मरघट । मसानिया० ना. पु. जो मृतर की वस्तु ला! महमा ना० पृ० महती। मसि. सी. शाही, रोशनाई। महति ना० सी० बड़ी कटाई, गु० बड़ी, महतिया. ना. पु० महतो। मसिपात्र ना. पु. दवायत, दरात मसिपिन्दुक ना. पु० गनसा, कानलमा टीका महतो मा. . जो मनुष्य गाव में प्रधान महतो जो निया पालक के माय में लगाती हैं। मंसी ना० सी० ममि, रात, बोली। महत्फला ना. सी. शेतुरई । महत्व ना. पु० टना, पहाई, बडापन । मसीन ना. पु.निन् । मद्भाग्य ना.. नहाभाग्य । .. मसीना महा० स० कि०मथना।। महार ना.पु. दातों के ऊपर का मांस ।। महन्त गा. ३. सन्तों में जा प्रधानjra बम विसी महन्ताई० ना. सी. महन्तमा काम ।। मसूरावेदखाना. सी. कालानिसोत । महर० ना...प्रधान मा उसकी जोरगर “मसूरिया नायी. माना विशेष यतला का उपनाम। विशेष महरा गा.पु. बहार, भोई 1 पीमना। । . ८ M . , ८ T होता है, मुकदम, महतिया: . है . . . A २७७ मङ्गलकोप। . T महलोंक० गापुः स्वर्ग विशेष ! ... ..... - महोगत ... - माहराई० . ना. सी०. कहरई, गोपों का रागे महानिद्रा० ना रखीमंडी नादा मुत्यु विशेष। महापद्मफना पु० सर्प विशेष ery महरि० ना० सी०सी०, पक्षीविशेष महरकीरत्री। महापातक ना पु महाइत्यादि, बडापापा महापातकी गु० वडापापी, हत्यारी जो ब्रह्म महर्षि ना. पु०. महासपि, महामुनि इत्या वा गोहत्या करें महा० गु९ पड़ा, कुलीन, निपद, प्रति ! महापुरुष ना पुः साधु मनुष्य सिद्धपेरंगमा महाउनत ना. पु. कदमवृक्ष, गुरु माऊंचा, श्रीनागयण, बड़ी दनावर! REMIT महाप्रतापी र बड़ा वनस्सी, ऐश्वर्यवान् । महाकन्द ना पु० लहसुन 117. महाप्रबंय ना. पु. जगत् का नाश जो प्रवि महाकती गु. बहाकर्ता, निरीक्षक कल्पान्त में होता है या जिसमें ब्रह्मा सृष्टिसमेत महाकाजमा पु, शिवजी का नाम, मूर्ति नशता है। 70 विशेष, जो उखैन में है। 02 Ti,महाफल नानारियल,। .. महाकुम्मी० ना. पु. कायफल । | महाफला ना० वी० लौका, कुम्हड़ा- महापालनपु० समुद्रका गल जो चौड़े मुख महावित्र ना० पु. श्राकाश ! : से स्थल में लगा है। in महाभारत? ना. पु. कौरव और पागृहब का. महाघोल ना कमसिंहो । - युद्ध या उसके वृत्तान्त का एकपुराण ! : महाजन. ना. पु उत्तमलोग, साहूकार, रोटा महाभोगी गु, वडा भोगी, मिरियाभोगी महाजनी ना. सी. महाजन का काम ! महामणि मा.पु., जहामुरा । Tira महाजम्० गापु जान, फलेंद । .73 | महामाया ना० स्त्री. भगवती, जगजननी महाजालना० पु. चातर। महामुण्डी० गा० स्त्री पौधाविशेष। महातम गा० पु. माहात्म्य, बड़ाग्रंयकार । महामेदा. ना. सी. मेदा, औषधि । महात६० ना पु० सेड। महामोद० ना. पु..पन्तज्ञानता, पट्टीभून । महातल० गा.पु. पातालपिशेर। महारजत ना. पु० सुतर्ग, कांचन--131 महातीर्थ ना. पु. धतीर्य । .महारसना पु० जस, गना।। महातुम्बी० नाक स्त्री वड़ी तोपड़ी। महाराज ना पु०. राजाधिरान, श्रेष्ठगना महारमा० गु० महाशय अतिशिष्ट. साधारण वजों का सम्बोधन । महात्म्य ना. पु० महात्म्य, वश, यहाई। महारानी ना. सी. महाराजा रानी महात्यागी० गु० संसार को भूठ जाननेहारा। महाराष्ट्रा० पु.. 'देशविशा, जातिविशेष। महादेव ना० पु. देवदेव, श्रीशिवजी महावद गापु० मेप नो मान मास में व्यता महन्म ना० पु.महुना, ताईशी है, राहोटी द्वार प्रादि में सगाते हैं। rji.r महावा पु. 'साधीन, TE महानन्दा ना सी. गो भीगंगानीमैमिसाई ! MEITलाना मोसहदेवी बटी महावर ना० पुरंग लात की, लाmire महानवमी ना. सी. याश्विनशुद्धनगी। महाशत मा पुल बांधी, Term महांगा ना. सी. इन्द्रसारही। .., महाधिपागा गोदाम ५ ८ महान गु० बहुत बड़ा ।
२७८ मङ्गलकोप। + N महोपाः । Y ~ महावृक्षा ना० पु. मूसली। महेर० ना कर महादाय० ना.पु. महात्मा, दाना। | मरीना. या भोजनविशेष महाशिरा. ना. सी. मछली। | महेला० ना. पु. पके लिये पायाचा महाश्यामा० ना. स्त्री. विधारा । अदावा । महाररेता० ना. सी. विदारीकन्द । महेश ना. पु. भीमहादेवनी। महाष्टमी० ना• खी• अाश्विनशुजारमी। महेश्वरी०मा० सी० पार्वती, पीतल धातु । महासागर.ना.पु. समुद्र। महैश्चर्य ना.पु. बड़ा ऐश्वर्य । महासिद्धि. ना. स्त्री• मोच, मुक्ति । महोप ना. पु. पतीविशेष, महास्न्धा० ना. श्री. जामुन, फ्लेंद। महि० ना० सी० पृची। महोटिका० ना. स्त्री. बड़ी कटाई। महिदेव ना. पु. नाम। महोत्सर. ना. पु० वा उत्सव, यत्यानद ।। महिपाल ना• पु. राजा, बादशाह । महोदर. ना. पु. शिशाचर विशप, बड़ापेट.। महिमा. ना. नी• महत्व, पहाई, बेष्टता । महोसा० ना.प. जो तरुणावरथा में मुंह में नेग्नामी, सिद्धिविशेष। मम्दे निपलते हैं। मदिरहना. पु. वृत, वचीयादि। महोत ना० पु. बड़ा बैल, मूर्ख । महिला ना. सी. नार, सी, धौरत । महाँजसी० ना. सी• तन, पल । महिपर ना.पु. भैसा, त्यविशेष । महौभवान्धरा ना- नी• मेदा औषधि । महिषयजा ना. पु. यमराज। महौषध ता पु० जो अपाधि शाम रोगहरे,' महिपासुर० ना.पु. दैत्यरिशेर। लहसुन, यतीरा। महिपात. ना. पु. गुग्गुल, गूगल । महावधिक ना. सी. सोहिमहौष । महिषी मा. सी. सी, परासी, राजरानी । महो० ना. पु. मही, पाक, गट्ठा । महिपेश० ना. पु० यमरान । | मक्षिका. ना. सी. मरती, मावी, मारी। महीन. सी. पृथ्वी, ना. पु. दही, महा। मा० ० सी० सदमी, माता, सर्प, मुझको, महाधर० मा० पु. पर्वत, रोनादि, राना, गे, हो। दिग्गन, पाप। माई ना. स्त्री माता। महीना ना.पु. मास, मामिक दरमाहा। माई० ना. रवी ममानी, योषधी शिंप। महीन्द्र मांग में भीतर, पतर। ना.पु. राजा, पृपिति। महीप मांग ना. स्त्री. शिरके वाला बीचकी लकीर महाति 1. पु. रामा, पृथ्वीपति । या वचनदत्त हुई। महीपते कि प्राप्तदाताह, जाता है। मांगचिकमी० मा पु. पाविशेष । मही ना.पु. महिला । मांगनेला रा• कि किसी के लिये उधारल।। महीना.. राना, बादशाह । | मांगना स.शि. चाहा, तलवकरना । मदीश्यर० मांगलेना. स० कि० उधारले, संतलेना। r1 ना.पु.जामण। महीनुर० मदुमा ना.पु. वृक्षावा। मासना. पु. राद पवि। महेन्दा..पने द्र, प्रधान राना। ग A . -- मांगी ना. स्त्री. उधर, संत, पचनदत ।" मांजन रा.कि.मला, उमा वरण।
मङ्गलकोप।. २७६ २ T ८ - द 1 . A । . 17 . - मांझा ना० पु० रागिनी शेष, अन्य मध्यमाजाई. ना. पु० बया बेटी नो एमासे # पीच । उपने हों। मांगत. ना. सी. ठाठ। माजू..पु. माजफल । मामा पु. पतगकी डोर में शीशा और माझ ना. पु० मा । भातका लगाना, नवर। मामधार० ना० पु. वीच शरा। मामी ना. पु. नाविक, कर्णधार, विचमा मार० ना. पु. बड़ा मन्या । मध्यवर्ती) माटी ना. सी. मृत्तिका, मिट्टी। मांड० ना० पु. पीच, कानी । माठा० ना. पु. मगरा, नटखट, महा। मारना० स० कि. मलना, मीना, साना माह ना. पु० टटोल : परना, क्लपचढाना। मादना० स० कि० माहना। माड़ा ना पु० फ्लीविशेष, रोगविशेषु । माइनि० स्त्री- माइ। माडी ना सी. वलपविशेष जो चावों को मादिया० गु पतला, दुर्बल । पास या पो पाते है। माडौ०० पु० मण्डप, मस्या ! माणयक० ना. पु० यज्ञोपनीत से योग्य जो मांढा ना. पु. मदा मांद. ना० पु. गुफा, भार, गोनर । यालाहो वा निसकी अवस्था सालई र्या से मांस. ना. पुं. मास, गाश्त, पलिया । क्गह।। माणिक मासभक्षी० ना.. देश विशेष, रमाए मांसाद ना. पु• गु• मास खानदारा। माणिक्य० । सेन, होरा, साल, रमा विशेष । मांसाहारी मात० ना० सी० मात्रा, माता, मतवालपन । मातग.. पु. हारी। माहि प्रय मप्य में प्रातर, मातर। मातना प्र.नि. मावाला होना। माकन्द पु. धारा पवा पल । मातलि. ० प.पा रयान् । मापटाममूर्स, निर्वृद्धि, उल्लू । .. माता० TA. जा, शीतला, पौवारि, मापन TY• मरखा, नैनू, दही, मसरह । गु. मत्त, मरता माखी० ना. स्त्री माता, शहद । मानामह 11. पु. Ti, माता का बाप । मागध ना.पु. भाग, पहलेत, यशाणन करत मातामही सी० नानी, माan मया। हारा पुरुषों का प्रशसा। मातुल० १० पु माम माता का भाई। मातुरानी 70 सी. ममाना, मग । मागधा ना सी बाराही सोक । माग०सी० पीपली सोच। मातुली मा की• मम ! माघ १० पु. ग्यारहरा महीना, माशाशे। मातुलग० TI• पु. पिनारा माघी ना. सी. जो मार में उपन हो । मातृ रा. सीमाता, महतारी। मात्र० गुअर, किंचित, पाय सरुवा माचा पुमच, पलग। माचित सा० गई दया।' माघ पीयश फ उपरकी रेस सर, परिमाए। मागची-हेगा सगा। मासयं ना भाइ, प्रार, नसामद मादक पु.म.मराा मराक। माली सीमा माया० .. मतक, तला, गरही। T N H - -- २८० मङ्गलकोप। मानुप TH० पु० मनुष्य, पादमी "? ८ -- ७ r माघीलेना. स. एकसा बनाना । माथुर० ना. पुमथुराका यामी, माह्मण और मानुष्य यायस्थी जाति विशेष। मानोर अन्य जानो। -मादक गु० मत्त करनेदारी वतु, नशा बढ़ाने मान्यता ना.पु. रामाविशा। वाली चाश। माना० स० कि. पतिरसना, पूना महणकरना, अगीकार करा. नालाया। मादकता० ना. धी• Tशा पाल हितति मान्य ना गु० जा पूनने वा मानने के याम्य, विचारहान मरती, बहाशी। पूज्य। माद्री ना० स्त्री० सहदर और कुली माता। मान्यता ना० सी० पूना, बनाई। माधव. पु. वैशासमास, मधूपत, श्रीर मा० . पु. 1प, पैमाश। प्णच द्रजी एक नाम। मापक • गापनवाला, अमीन । माधी० ना. ना. वाराहीकन्द, खाद बार | मापना स० कि० नापना, पेमारश परा खताविशेष माराप ०० पु. माता पिता । माधुरीना. स्त्री० मटी सुटर । मामा० १.५० मातुल, मामू। माधुर्य० पु. सुदरता, मिठारा । मामीन सी. ममानी माई, मामाची जीम्। माया ना.स्त्री. मायाकी मारा। मामीशना० स० कि. पक्षकरना, घरीभरना । मान. ना. पु. नामपति,मर्याा, घमड,अहहार | मामू० ना० पु. मामा सर्प । परिमाण, 'यभिमान नाश। माया) TI• ख० कृपा, माइ. दया, करुणा, मम, मानकच्चू । पु. पन्दविशेष ना नगॉल में छल, घाखा, सम्पत्ति धन भूल, योगमाया, हाता है। पारशक्ति विगुण इद्रनाल विद्या।। मानता०ा स्त्री. प्रण, प्रतिज्ञा, पूना, दाा मायारत ना. पु० सरश इदगाली गु० जी पाई। माया से पाया गया। मानदार ना० सी० मानवी दाता, चन्द्रमाको मायापतिक ना० पु० ला माया'त सामी हार विशप परमामा। एक कलासमा मायावी गु० दली कपरी, राक्षस वश । मानव. ना. पु. मनुष्य, प्रादमी। मायिक• • पु० माशीपर, एद्रनालिर, मानमा ना.पु० मन, मनसा, मनुष्य, मान सरार यनहा। मार० पु. कामय, विप, पि, अमृतः मानसमूल ना.पु. सरयूनद । मानसिक. ग. 'मनकी पासा, मनोवृत्ति, मनस। ना• स्त्रीप्रहार धपा, लाई मारव० ना. पु. मारनहारा। मानहु० यय. मानो। मानाम न • पु. मार और अपमान मारग 1. पु. भाग। मानिक. पु. माणिक्य । मारडालनास.नि. यधारना। म निकजोद० ० पु. पतीविशेष । मारण 1. पु. वध, इत। मानिनी 1.40 अभिमानवती स्त्री। मारना स० वि० पीटा, वृदना, ताड़ना गाना गु• गय्यारिक, थभिमानी। वरना वपकरा, विगाहना, टठा, रति - - - -- मङ्गलकोप। २८१ . 0 पोधारिशर । m . . विशेष । ne 1 . . F ~ . T याना, दाना, रोना, थामना, मर्दनकरना । मालकोशः मारवा०मा० पु. रागविशेष । मालकौल ना.पु. रागविशेष।' मारना ना. पु० देश विशेष । मालती० ना. वी. दो तीन जाति के मारवाड़ी.. पुमारवाइदेशका वासी वा उस देशरी वस्तु। मालनीजात..पु.मुहागा ।" मारा गु० वधाहुया, जो बगया, ना० पु. मालतीपत्रिका. ना. ना. नापिता । वारा, विचार मालद्वीप० ना• पु. सिंहलदीप य समीप दीर माराजाना अनि कर पाना, डूबनाना, या 1 धाहोना, वधहाना। मालपया मालपूप० मारो० ना. सी. मरक, महामारी, यवा। ना० पु. पकराविशेष । मारी ना. धु० कोल, दैत्यविशेष मालव० मारचपत्रा०० ० शालयद । ना. पु. देश विशेष, सजल । मालना मारुत० ना.पु. वायु, पान । माता ना० सी० पुप्पादिका हार पोथी पक्ति, कठी, तसबाह, रुद्राक्षादिकी। मायतसुत० मारुति 'ना.पु. श्रीहनुमाननी,भीमसेन । मालाकार० ना० पु. माली। मारू० ० पु. वेगनाशा, रागपिशेष, डका, मालिन् ना० सी० माली स्त्री। मारनेहारा, मरदेश। मालिनी ना. श्री. विशेष मारे थप स, कारण, निमित्त । मालिन्य ना. पु. मलिता। मार्कण्डी० ना. स्त्री• मदली । माली० ना• पु• वागसींचाहारा धा लगाने मार्कण्डेय. ना. पु. कालीन, मुनि वश ! हारा, जाति विशेष मालाधारा । मार्फव. पु. मगरान, भगरा, पोर मालूर० ना. पु० रिल्य, बैल । मार्ग• IT.पु० सडक, वार, राह, अगहन, माल्या ना० पु० फूलको माला • अजुन। माल्यवान् ॥०प० राक्षस विशेष मार्गण ना. पु० घाए, तीर। मारस नार स्त्री अमावरा, कृष्णपनी १५ मार्गशीर्ष-ना० पु. अगहन । मावा ना.पु. आहार, गती पिलाई, खोता, मागिता गु० मार्गदेखता, वारहेगा। गादा दूध । मार्जन० ना• पु• फर्का करने का काम, घाई, माप ना• पु० उरद, अन्नशिप, पा,दस ।' मानना। मापमान०० पु. एक उरदभर । माजीरा पु. विलार, बिलोग। मापा० ना. पु० तोलेशबारहवामाग, रत' मातिएड० ० पु० सूर्य। मास० ना. पु. महीना, सगै ती, मासे। मार्तण्डमण्डन गा• पु., सूमिएडल, सीसका मासा ना• पु० माला ! rमार्गविशेष मासान्त० ना पु० महीने का प्रत वा पती की तिथि। माल..पु. मल, माला, समूह । मालकंगनी १ ना. रो० अौषधि, पौधा मासिक० गु. महाँनेवा, माहवारी, दरमही नारे मालकानी० विशर ! . पु. श्रार जो प्रानमारा वियानाता है । - -- J vam । 'CTI २८२ मङ्गलकोप। ८ । . ना• पु• सुयश, मुकीति, बड़ाई, मिथलेश . मासिकविभाग ना: पु० नौकरी का पैसा | मिनद्रोही. ना. पु. जो मित्र के साथ येरकरे । वाटना। मित्रपोपी० गु० मिया पालनहारा, दोल. मासिकविभागी गु० रखशी, नौकरीशमाया पर। पारनेहारा। मिथः अन्य पररपर ।' मासी नारची• मासी, माताकी वहन । मिथिला. ना. पु० जनरपुर. तिरहुत । माह..पु. माष, अव्य. मध्य, बीच, से! मिथिलारति ना. ५. राना जाक, या मिथिलाका राना। माहात्मा माहात्म्य बड़प्पन, महातमा | मिथुनः ना. पु. पुका स्त्री, युग्म, दो, और माही यया, वाच,म, T• स्त्री माघी । राशि तीसरी। मिथ्या अप. श्रयाना. पु. मृट, वृथा। माहुर० ना० पु. पि, हलाहल । मिथ्यादृष्टि ना. स्त्री. नास्तिक्ता, कुकर, माहू • पु. कीटविशेष, कासलाई। माक्षिक ना• पी० सोमारती। भूठी मेंजर। मित्रकारना. स. कि• खबालना, अनवासना, मिथ्यामति० ना. स्त्री० भ्रम, भूल । मिध्यागद गा. पु. झूठ, पृथा वाती धोना । मिवना० प्र० कि० मूदा, लगा, वदहोता! | मिथ्यायादी गु० भूटा, वृशावादी । मिचोलना० स० कि० पासमूदना । मिनती ना. सी-बिनता। मिटना अनिविगाइग, मतमिहोना । मिमियाना श्र.नि. दिल्ली या वरीशब्द मिटाना० स० कि० विगाइ 1, मेटना, मल करना। मिमियाहट ना• पु०पिल्ली या वकरीकाशन्द। मिटिया० ना. सी. मिट्टी की इंडी विगेप। मिरा ना. सी मदिरा, शराः । मिटियाना स.क्रि. मिट्टी से माना। मिर्गा ना. सी. रानरो विशेष मिटियामेट गु० मिटगया, निश्शेषहोगया । मिर्गीहा० गु• निसी मिगी रोगहो। मिटेलना० स० कि. मिटाना । मिर्च का स्त्री. मरिचं । मिटेला गु० मिटायागया, मियाया। मिचा ना० पु. लालमिर्च । मिट्टी० ना० सी० मार्ग, मृत्तिमा, धूल, भूमि । मिदंग ना. पु. मृदग । मिठरी ना. स्त्री० पम्या पिशेष । मिदंगिया० ना. पु. मृदगारमानेदारा। मिठाई० ना• स्त्री• निधन, मिपान, गुड़, | मिर्देगी। मिर्दा ना. पु. करोड़ा जो गाव में रहता है।' मिठास गुः मधुरता, मिष्टता। मिलन० गा.पु. मेल, मुलागत । मिताक्षराना० सा न्यायप्रयविशेष न मिलनसार० गु०' मिसारी, मेली। मिलनाय. कि. मिथित हिोना, भेंटना, ए. कट्ठा होना, बैठना, समापान मितिमाता स्त्री. अर, मर्शद, वादह,ममाण। मिलयाना० स० कि. मिश्रित करवाना, भेंट मिती ना. स्त्री तिथि, तारीख, न्यान, द । परवाना। मित्राना• हितू, बा दौरत, सूर्य, अग्नि । मिना स्त्री बना, हितकार, प्रीति मिलान० ना. पु. मिलाप, मेंट।। मित्रता दोस्तो, यारी मिलना सकि.' मिश्रित पती, जोड़ना, मट करना। + . - - 20 छन्द विशेष। १ मङ्गलकोप। २५३ मौत। ८ मीठिया न्यसी० चूमा, मी, मची ! , लगाना, सादर्श करना, मिलाप कराना। मोजना० स० कि. मानना, मलना, मसलना। मिलाप ना. पु. मल, नाव, भेंट, एस्ता। मीच ना स्त्री० मिलापी० गु• मिलनसार। माचना मिलावा.पु. मिला ल । (मीना० १ स० कि० मूदना, दद करना। मिलित० गु० मिला हुआ, मिमित । मोजना सकि.मलना, रगहना, मसलना। मिलोनी ना. सी. मिलाव, मेल । मौजूक नारसी० मार। मिशि० ना. पु. सोया का साग । मीठा० गुमपुर, धीमा, सुरत, नामर्द, .. मिन० गु० मिलाहुया, मिलित, बालों,म जाति विप विशेष, फल विशेष। विशेष, वैद्य। मिधानी ना सी. मिश्र की सी बदई । मीना० स० कि. मीना । मिथित गु. मिलित, मिलाहुा । मीडे गु• मलेगये, मलेहुए। मिश्री ना. सी.मिठाई प्रसिद्ध, मिली। मीणा 10 पु. जाति विशेष । मिय० ना.पु. साया या साग। (मीत. ना. पु. मित्र, सज्जन, मीता, दोस्त । मिप० ना० पु. मनापर, पेसना, धाधल, पोसा, मीतन० ना० रवी सनामीस्त्री, सली, सहेली। होला बहाना। मीता० ना. पु. सनाम, इमनाम । मिष्ट ना• यु० मीटा मधुर । मीन नाक स्त्री• मदती, बारहवीं राशि, . मिष्ठा • स्त्री० मिठाई, गुड। पु. श्रीविष्णुनीरा प्रथमावतार । मिष्टान मिटाना मा. पु. मिठाई मिला अन । मीनकेतु • पु. कामदव, प्रधुम्ननी । मीराहा - पु. बनसी, बहिरा, परवा। मिस • पु. मिष । मीना ना.पु. हिनाति विशेष नो चौर मिसना .कि.सिना। मिसर ना. पु. मिम, दश विशेष जो पूनार मीमासका ना• पुमलवादी, विरवत्ता । के दक्षिण में है। मीमासा. ना. श्री. रिद का मत विशेष, मिसी० ना. स्त्री. मिरसी। शास विश। मिसु० ना.. मिर मीमियाना प.कि.मिमियाना। मिस्सी. 10. स्त्री- दातों मनाविरोष। मीसना० स० कि. पीराना, मलय, ऐठना, मिददी. ना. सी. मेंहदी। रेरना, राना। मिदना. ना. पु. शैली वाली। मुकतई० ना रखी छुट्टी, जुदाई। मिहरा ना.. पुसा जो नीका पथरता है। मुकरना. स. कि. नकार करना, 7 मानना ! मुकरी ना. सी. प्रजमाा में पन्दरिया। मिहरिया ना. पी. ना, औरत, नारि। मुकुट ० पु. मटक, ताना पत्र । मुकुन्द ना- पु. भोपचारे का एक मिहाना. छील, गीला हो। मुक्तिदाता। मिहानी. ना. सी. मपानी, माया, बादी मुसुर ना. पु. दर्पस, पाहना। मिहिर ना.पु.। मुकुल मा.पु. कली जो मुलनाती है, । मिरी T + - गङ्गलकोप। . TH है ११ in धूमा, मुफी० ना. सी. . 5 . । . . है . प मुलित गु. पोलिलीहुई कती, फूला. मुबीना सी० हाप, युक्या । मोरयुत, पाप यदि बौर समेत । मुटभर गु० अति निकट, बहुतपास ।। मुकुन्दक १ पु० पिरतां मनाई मुठिया • पु. हायभर, दरखा, नह मुकेल. T० सी० नोल। मुठोरिया ना० पु. मठौलिया, ठट्टहा। मुका० ना.पु. मुठोली पानी टेढा, मोली । गुम्मा। गुडना० . कि. उदाहो, रलखाना। मुक्त गुनिसो मुक्तिपाई, पर पत। गुढ पु. प्रधान । मुक्तरमा ना ती राण मुठिया कि मुड़ना। मुहार ना.पु. मोती, गुबहत । मुराड. पु.शर, मस्तक मुद। मुक्कामणि • पु. मोती। rg मुण्डधारी० ना० पु. श्रीमहावनी, अघोरी। मुक्तास्फार० नागपु०सीपी। गएका पु० बालकके पहिले पारमन मुत्ताहत. ना. पु. मोती, शब्द न के यमा, मुएनने का काम। गुलाहल निपे चोंच लुभाव, मौनरहे को | मुण्डना • कि० बालबनाना, ठगनाना। हरियशगाव। भामुण्डला० गु. मृडागया, मुड़ियो।' मुहिक नारी-मार, पार से उधार, निस्तार, मुण्डाना० स० कि० बालबापाना टगा। 'माण दुवारा जान। गुण्डा ना. पु. पतग का शिर गुद, गुणों मुक्तिदाता ना. Y० मुक्तिदनहारा, उद्धारक । मूडागा च दला। मा.पु"पदा है। मुपदार मुण्डाना० स० कि. मुड्याए। मुखपर० • पु० पियान पलाइ, पान । मुण्डासा • पु० दुध कपड़ा नौ'मूह में मुखमएडन० पु. तिलस्दृत। मुपर० गु. पावाटी दुष्ट । मुरिडत गु• पुग्ला, मुडागया । मुपागर ना. पु० स्मृत, गवानी याद । मुण्डिया ना: पु० शिर, एकप्रकार के साधू । मुक्टिभित ना• स्त्री० न्यौडी का गुजाना मुसान • पु० पुराना बाचन) मुण्ड ० ० ०.योही पा.पु. तुझियां, मुखिया १० पु. मधा! गु: पहिला, बड़ा, साधू । मुख्य० खास असन, सरी मुण्डू १० पु० र यासी, गासाई or: मुगदर ग..पु, मोगरा, काएकी मोगरी मुण्डेर० ना. 'सापतपरा घोगंभीन, रिया निरागे फिराते हैं। मुण्डरी भीत पा सिरा ] . मुग्घर गु० जानी, मूर्स भाभार मुतना गु० बड़ा मृतो हारा, समुतवीर मुग्धा ना सी० कुवारी या 'प्रातियो नी, मुताल० ना• रत्री० मृतो कोदा मुतामा० गु. निसंगा मूतो को इग्याही मुकुन्द ना० पु० राना विशेष का प्रयोग गुद नापु. प्राद, प्रसन्नता, शी। में हुआ है। 7 मुद्रा . सी. मार, मयूर मुजरा मा. पु. प्रशाम दरहा, भा। मुदित गु. दोन धानदित निहाल । T मुटापा.पु. मोगर, मोगपन । मुदिर० ना.. मप, बादल मुख०।" । पाधते हैं, अम्मामा । 4 है -- । -- - मङ्गलकोप। पितारा बालक ८ . - Y T मुदिरनाथ० गा• पु. इछ। २१. मुरभाना यानि सूसना, पुम्हलाना। मुद्र० ना• पु. मूग अन्न। मुण्डाकरना. स.कि जकड़ना, पाया। मुद्गर ना० पु. मुदगर, मोगर । मुरमुरा० गा० पु. चर्वणविशेष, । हा मुद्रा० ना० सी० छाप, सुवर्ण वा चादी का रुपया | मुरला० गु० पोपखालदात, T० पु• मोर वा मोहर, छाला, यन, अगूटी। मुरली० गा० स्त्री० वनसी, वशी, मासरी) मुद्रांकित० गु० जो चापागया। .! - मुरलीधर० ना० पु० यशीधर, भीष्णजी। मुद्रिका० ना. स्त्री 'गुदरी, अगृटी।" मुरवा ना० पु० पार पी कलाई, मोर.। मुद्रित० गुरु अनखिला, गुँदा नो छापा गया, सुरक्षा ना० पु० जान, ऐंट, यूर, विमाता सिफा जारी कियागया। मुनमुन ना. पु० विल्ली रे पुकारों का शब्दा मुरही० ० स्त्री. ऐंठन, गरोड़, ।। पारा विशेष मुराई० १'ना. पु. पाचो, तरकारी बेचने मुनमुनाना० अ० कि० विली 'या पुकारना, मुरार० ना. रत्री० कमल की।न । 17: मुराऊ. याला वा बोहारा, कायरी ।। घोडा पदरे सूखजाना। | मुरारि ना. पु० श्रीकृष्णच द्रनी। मुनि ना. पुंप्रापि, तपेश्वरी, विद्वान् । मुरेला T० पु. मोरका पञ्चा। मुनिद्रुम०1० पु अगस्त्य वृक्ष । मुर्रा० मुनिपट० ना. पु. वकला, भोजपत्रादिके वस्त्र । io ना. पु० पेटोखा, पेचिश, पादर।' मुसकना० अ० कि मुसकाना ।। मुनिपति० ० पु. मुख्य मुसि। गुलतान० ना० पु० देश या नगरविशेष: मुनिपद० ० पु० शातपदवी, मुनिया पेर मुलतानी० ० सी० रागिनीशिष, गो, मुनिया ना सी. लालपसी की स्त्री। +7 मुलतानव सी है। मुनिवल्लभ पु. चिरींनी। मुलतानीमिट्टी रत्रा० पीलामी मुनीन्त्र० पु. गनियों या प्रधा, मुनीश मुलहट्टी ना० स्त्री० जेटीमधु । मुन्था ० रना० ज्योतिष में प्रसिद्ध । | मुलाई० १० स्त्री० श्राय। मुन्दना० अ० कि० बहोता, मिचना । मुलाना० रा. वि. मौलटहराना, चुका sm मुन्दरी ना० स्त्री० घगठी, दरी । मुक ना. पु. पण्डेकोश। मुमासी० ना• रत्रा• मधुमास्त्री। गुणमुष्टि • पु. पप्समधूमा 1 मुमुक्षु० गु० मुक्ति सोनोवाला, मुष्टि ० सा'मुट्टी, घसा, मुपा। मुमूर्षु० १० पु. जो मनुष्य मरा पर है। मुष्टिक ० ० पु० पुसा, या मुर० ना.पु. दयविशेष। • •iमुसकाना ० वि प्राके मुरई० ना. सी. मूली। गुसराई० 1 रखी? हसा । मुरफना० अ० कि०, ऐंटा, बलपड़ना । मुसथुराना कि मुरावा । मुरपानार• कि. एठना, बलदेना। मुसल० • गुरास । मुरफी० नाग रसीया या भूपरिशप । सल्माग गापुरगया मतालाब ! मुरचंग ना. पु. पानारिशए । गुसाना स• Ix• चोरी परवाना ! - . . प्रसिद्ध । ऋपाशा . . 1 + - . म - मङ्गलकोप। भर। है कपन। घरना। मुंगची छोड़ना। Dr मुस्तवारिधर नाः मुछारा पु. नागरमोथा। मुस्ता० मुलेल. गु• बड़ी मूबवाला। मुहरा० ना.पु. हरावल, गाड़ी, दरवाजह । मूठना. पु.ट, दस्ता, कन्ता, हाय, हाप , मुद्दरी ना. स्त्री. कोप्स, घोगपनाला । मुहाना ना. पु. नदी का यह स्पान नह' भूठा० ना. पु. बेंट, पट्टी ! समुद्र से मिलती है। मूठी० ना. स्त्री• मुट्टा। मुहासा० ना. पु. नसी, मुँहरसा, महोसा। | म्ह० गु० मूर्ख, नादान, ग्रहमा । मुही० सर्व. मोहि, मुझगे। मूदता० नास्ती मूर्खता, उल्लूपन, अहमकी । मुहुर्मापा० ना. स्त्री० दुखित वाक्य, पुन. मूत. ना.पु. मूत्र, लपशंका, पेशान, कारूरह । | मूतना० य. कि. लघुशका करना, पेशार मुहुर्मुहुः० थव्य. पुन. पुन वारवार । मुहर्त ना• पु. दोपड़ी। মুন্স पु. मूत। मुमा० . मरा। मूत्रफला० ना.पु. वारा। मंग० ना. पु. अनविशेष मूना ५० कि. मरना, देह तनना, शरीर ना. सी. मूगकी रही। भूगा. ना. पु. प्रवाल विगुम । •मूनू० गु• लघु, घोटा, थोड़ा। मंगिया. ना.पु. मूगकै रगके तुल्य रग। मर० ना.पु. मूल। मूंछ ना. रवी• मृब होटके ऊपर ये बाल । मूरख० गु• मूर्स। भूज. ना. स्त्री. तृणविशा निसकी रसी मूरत० ना० स्त्री• मूर्ति। बनाते हैं। मरि० ना• स्त्री० नड़ी, मृटी, पौधा । मूड़ ना.प.एड, शिर। मरिसजीवन० ना• ररी. श्रीपर्षि, पीधा विशेष । मुना० स० कि. बाल नाना, घोटना, शिय करना, पुसलाके लूटना। मूरी०मा० सी० मृली। म्हला० • मुएटली, निसका शिर महागया। मूर्ख० गु• मूद, अमानी, बोदला। म्ही ना• पी• शिर सिरमुण्ड । ना. स्त्री यज्ञानता, दुर्मति, मूर्खताई०१ नादानी, उल्लूपन । मूदा० ना.पु. मौदा। मंदना० स.वि. पदारना, दाना, मीचना । म ना० ना• स्त्री० रागभेद, मृति मुंदरी ना. एवी पुरी, थेग्दी। मूर्खा. ना. सी. प्रचंत होना, तेवर, मोह, परा। म्ह. ना.पु.मुस, बदन । म्हा ना.पु. मुसका रौंगविशेष। मुगावात गु० नो मछित होगया। म्ह० गु• गूगा. नो सात चीत न करसके। मुछित• जो मृग्दों में पड़ाद, मोहित । मा. ना.पु. भूमा, मोसा झरोसा, हार्थ । मत्ति ना. सी. प्रतिमा, प्राकार, पतली, मूकी ना. सी. धूमा, मी। मुछ ना• स्वी• भूब! पूर्तिपूजक गु. देवपूनक, चातुर्य खोग । मूषाका मा मूर्तिमन्त गु. प्राकाररत, शरीरधारी ।। - . । तसर्वर। alwy पु. सीमा मङ्गलकोप। २६७ . -- . मूर्द्धज. ना. पु. केश बोल सूर्य की किरणों में जो जले' को क्रान्ति देस मूर्धन्य जिसे अदरका उच्चारण मूझे से ही पड़ती है । यथा ऋ ऋट ठ ड पर मृगदंशका ना. पु• कुत्ता। मुद्धा ना० पु०, मस्तक; तालुसे ऊपर । मृगद्विप० नासिंह, न्यो मूर्द्धनि० ना. पु. तालु से कुछेक ऊपर मृगध्वंस० मू० 'ना स्त्री० मुरही। मृगनाभि ना० स्त्री० कस्तूरी, मृगकीनानि । मूल० ना 'पु० जद, वंश, कुल, पूनी, असल, मृगनाभिरेसा ना० सी फस्सूरी, सरक। दिना टीका की पुरतंक, उन्नीसवां नसत्र मृगनयनी ना. सी. गु०. निस, सी को. पारण । मृगनैनी, अखि मृगको अखिों के सदृश हों। मूलक ना• पु० मूली। मूलवार० ना• पु• गुदा । मृगपति० ना..पु० सिंह, शेर, व्याध ! .. मूलचीर० ना० पु. पुहंकरमूल । मृगवन्धनी० ना सी० यागरि, नाल, दो मूलस्थिति० ना. स्त्री पहिली स्थिति । मृगमद० ना.पु. कस्तूरी, मुश्क.। मूलिया० गु० 'निसका मूलं नहर में जन्म | मृगया० ना० स्त्री० श्रासेट, अहेर, शिकार हुया। | मृगराज. ना. पु० सिंह. व्याघ । ... मृगशिर० मूली० ना• पी० तरकारी विशेष, मूल विशेष । | मृगशिरा० नाः पु. पांचया नवत्र । : .. मूल्य. ना. पु. मौल। मुसख ना. पुसिल । मृगांक ना०,१० चन्द्रमा । मृगाण्डज० ना. पु. कस्तूरी, मुश्क मूसली. ना. पु. श्रीवलदेवनी । | मृगाधीश० मूप० ना.पु. सिंह शेर। मृगाशन मूषक ना.पु. मूश, चूहा। भूपिक० मृगाक्षी ना. ग्री० इन्द्रवारुणी । मृगी ना• स्नी. रोगविशेष, हरियो। मूषकवाहन० ना• पुश्रीगणेशनी। मृगेन्द्र० ना• पु. सिंह, मृगपति। मूसना० स० कि. चुराना, झपटलेना। मृह. ना. पु. थीमहादेवनी । भूसरा ना. पु. चूहा। मृदानी ना. सी. भोपार्वती। मूसरी० ना- स्त्री० हिया। ch | मृणाल ना..पु. इंस, कमलनाल । मूसल० ना. पु. निरासे प्रमादिक फूटते है । मृणालका०मा० ग्री• कमल की जा। म्सलधर० ना पु० थोरलदेवनी । मृणाली० ना। स्त्री हंसिनी। मूसलधार०ा.पु. झड़ी, अति दृष्टि । मृत्० ना. सी. मिट्टी। मूसली ना. पु. श्रीपलदेवजी, ना. घ.. मृत मरा, मुगा, मुदी। चौपपि। .. मृतक ना. पु. शा, लोथ, मद। मृग ना. पु. हरिण, ननके जीवननु।। मृतकपट ना.पु. कान देके लिये वमा मृत्तिका नापी मिट्टी :: मृगछाला. ना.पु..मृगाचमदा। मृगजब ना.पु. मृगतृप्या का पानी.. मृत्यु माया मौत, काले, मरप। MAITा. सी. बोधादि ग्रीष्मकाल मृयुमना. पु. मृतक . . .
२८८ मङ्गलकोप। मृदंगिया .74 S मृदुच्छद ना० पु. करीदा। . मृदुफल.ना.पु. पालसा। मृदुल० गु० कोमल, दु । A मृत्युगग ना: पु० यमदूत, मलङ्गमौत ! :, मेघाध्या ना: पु. भामाश . मृत्युञ्जय ना. पु० श्रीमहादेवनी, और मत्र - मेघनाद ना. पु. मेपको शन्द, मेवाराष्ट्र! विशेष। रापका विशेष।।... . . मृत्ता 3.पा. रवी: मिट्टी, माटी I मेघना ना० पु. इन्द्र, मेधपति । मृत्स्ना मृदंग ना. पु. वानाशेष। HARE मेघागम० ना• पु० वर्याकाल, बरसात । मंदंगी। नाः पु..मृदंग बनानेहारा । मेघामा ना: पु० जनामन, फलेंद । मृदु० ना• 'पु. गुनग्र, कुन्द, कोमल, मीठा। मेचक० गु० काला, श्याम । मृदुकन्दक० ना• पुपियांचासो । मेटना० स० कि. धोडालना, गारान, मलट, विश्करना। मृदुका० ना. सी० यमूर, दात । 5 | मेरा गु• मिरायागया। , मृदुपत्रक.ना. पु. उस, गया। मेढ़ा ना० पु. भेड़ा। " : मेथिका मा• स्त्री• मेथी।...... '- मेथी० ना० स्त्री सागतिशेष । मृद्वीका० ना• खी• अंगूर, दास्त । मद० ना. पु. मेध, बड़ामोटाई । मृपा अन्य • मिथ्या वृधा, झूल। मेदनाद. ना. पु. मोर । मैं सर्व, मुझको, मेरा। मेदा० ना• ची• पौधाविशेष में अव्य, अधिकरण का बोधक। मेदिनी० ना• स्त्री. धरती, पृमी, मालती' मैंगनी ना. सी० सेंडी, जादिनी विधा। मेदिनीपुर ना० पु. नगरविशेष मेड़ ना की खेती सीमा। मेधा ना० पु० यज्ञ, बलिदान । मेंडक ना० पु. भेक, महक । मेधा ना.स्वी अनुभव,बूम, बुद्धि, निपुणता। मेंडकी नारखी. भकी, मंडूकी । मेवाण्या० ना. स्त्री. नागरमोथा। मेडा० ना. • कुरा मुख । मेधार्यती ना. सी. कश्यप की पत्नी विशेष मैडियाया० ० कि रिना। मेधावी गु. मेधारान्, बुद्धिमान, निगम मैदा० ना० पु. भेड़ा। मेच्या ना.पं. शंताहोली। मेह० ना. पु० दृष्टि । मनना पु. मोम ।। मेहंदी० ना० स्त्री० मिहँदी, पौधाविशेष: मेनका ना० सी० - गुस्यअपाग, हिमालय मेखना पु. मणिपुर और बंगाल के बीच एक प्रकार के पर्वतीयलोग, पौल। मेमना ना पु० एकरी पा पा : 11, मेपला ना: सीनियोको धनी, ब्राह्मण मेरीकरी ना. सी. संगीर, गंगामा का यज्ञोपवीत जोगदाला से बनताहै, तीनाणे 'पिपामिनीयं गंगा प्रसिद्ध है। यह शन्दरीमत्र न्द्रिका में विवामिन का वाक्यहै, हितीपरथ मेखली ना• स्त्री. प., पट्टी। प्रसिद्ध है। मेघ ना.पु. पग, मादल, अभ्र, रागावशेष । मेघडम्पर ना• पु. रायका विशा। मेल'ना: पु० संगोग, मेंट, मिलाप, संबन्ध . की.सी. का यज्ञोपवीत मेहा ना.पु. पर्वतविरोष, एमेगा मङ्गलकोप। . विशेष ।। - विशेष: मेलना० स० किटासना, पुरोईना, चालना । मेलामा गु. मलीन, अपवित्र मेला ना० पु० तपादिपर किसी देवता की | मैला कुचैला० "नाहेतु बहुतनों का इकट्ठा होना या किसी महिका ना• पु: महिष, 'भो । ' "प्रकार पहुँत मनुष्यों को इफहीं होना । मैहिकी० ना० सी० महगी, साamin मेखी सांझी, मुं. मिलापी।" मो. सर्व, मैं। मेव ना. पु. मेवात, पर्वत, ये निमोकना सकि. शगन, छोड़ना नोना मोढ़ा ना. पु. कंघा, कूपर, मौदा । मेयदा मेवाती tos वासी ............ | मोखा. ना. पु० रोशनदान, म्याला।। मेप. ना. पु. मेदा, मधमराशि, पारवृक्ष । मोगरा. ना. पु. पुद्गर, वी मोगरी पुनः मेपघालीना सी मेदासिंह।। 1 370 मेपलाना. स्त्री० मसला। मोगरी ना. सी० फूटने यो 'काटरचित पस्तु । मेपश्री ना. सी. मेदासिंही।" महना पुमेप, 'मूत्र प पार्य में रोगविशेष मोघ० १० था। निरर्थ, निष्फल ।'.. chair मेहतर० ना.पु. भंगी धान, चौधरी MIn | मोच० ना० पु. लचक, कचक, झटका. मेहतरानी ना भंगिन ।' मेहनहाना टटोली करनेहारी। मोचफ० पु. मोचरस, गु"दुकानेहोरी मोचन ना. पु. चोरी, मोरना, त्याग मेहना ना. पु० टटोली। मोचना० स० कि० त्यागना; घोड़ना, भाना मेसर्वा सर्वनामयाचा उत्तम पुरुष का एक बुझाना, मियना, गा. पु. बाल उसदिन के लिये चिमगा। मेकलमुता० ना. रमी नर्मदानदी। मोचरस० गा.पु. समल तृपका गोंद।" मैका. ना. पु. ती मा बाप का घर या मोचनावी ना.पु. मोचरस । मोचा गा.पु रोमरमृरा, ये साया उसागामा) भैत्री नारसी मित्रता, मधुता । गोची. ना. पु. चर्मकार मैथिल ना. विरहत के बराने हारे, भादाण | मोट० ना. रथी गठरी, मौट । पो जाति विशेष मोटक० ना. पु. छन्द विशेष । मैथिली गा०.रथी• श्रीरातानी, मिथिला की मोटी गा० रवी• कुदारी, मोदी की भाषा विशेष । मोटरा ना. पुणे गठरी । म मैथुन मा. पु. प्रसंग, ति;" पुर्यागादनाय मोटा ना. सी. गठरा, गहा, . दणानि को दियो। : गादा, महा!!....: मैगफल मा. पु. दीपपि, पल पिरो मोटाई: ना २वी. घुटना, गाला, गुमना। मैना ना. यी पोशिष पार्वतीको माता भेनाक मा पनि निरोप! मोटिया ना पु• मोर उमेहागा मैमाना वा सतिसीमावा- crimमोठमा सी गरा, , परा, पुला, मनविरो... भैया ना मी माता महतारी मलना मत दो, मग माग || मोना या पर, साना ' वचना . घराना। Hits " मङ्गलकोप। . यसत हैं। 7 मौली ना स्त्री. नारा । | यथावत् अन्य सम्पूर्ण। मौल्य ना• पु• मोल, कीमत । यथास्थित श्रव्य. प्योंकात्यों, गु० स्थिर । मौला० ना. पु० मातारी बहा का पति । यथाशनि ना. सी. जेसा सामर्थ । मौसी० ना. स्त्री. माताकी बहा । यथाशास्त्र अध्य. शास्त्र के अनुसार, शास्त्र मौसेरा गुरु जो मोसी काहै, यथा,मौसेरा भाई। सम्मत, ना.पु. जैसा शास्त्र । म्लान० गु० मैला, मद। | यथासम्भव०,गु. जैसा दोहार । म्लेच्छ० ना० पु. जो लोग वेद और शास्त्र से | यथेच्छा ना० स्त्री जैसी इछा। विपरीत चलते हैं। यथोक गुः जैसा कहागया। म्लेच्छदेश० ना. पु. देश निस ग म्लेच्छ यथोचित गु० यथायोग्य, जैसा, उचितहार । यदवधिक अव्य. जबसे । यदपि० अन्य जाभी, अर्चि । यदा० श्रय. जव, जहा। यक० गु० एक,१॥ यदि० अन्य जो, कदाचित् । यांक अय. निश्चय करके। यजमान ना० पु. जो दक्षिणादि देवे धर्म या यदु० ना• पु० सोमाशी, पाचवा राजा । कर्म करयारे। यदुजात. ना.पु. यदवशी । यदुनाथ यजु ० ना. पु. द्वितीय वेद, यजर्वेद । | यदुपति यतन० 1. पु. यन। ना पु. श्रीकृष्णचन्द्र। यति गा. पु. यती, सयासी, भिखारी वा | यदुवर० मतरा भिखारी। यदुराय० यदुवंश पु• राना यदुवी स तान । यत् अव्य० जा, जन । यदुवी TI पु. यदु से जो उत्सम भया यत्किञ्चित् अव्य. जो कुछ। श्रीकृष्णच द्रादि। यता ना. जतन, उपाय, उद्योगतार । यद्यपि अव्य नोभी, यदपि, श्रगचि । यलमान गु० गत करोहारा। यद्वातद्वा० अन्य. एसा पैसा, भलातुरा। यली यत्र० ना. पु. क्ल, समाज, वाय, यटका, यत्रा अव्य. जहा, निरा गगह। तसीज, ताला। यत्रतत्रायच्य. जहां तहा। यत्रणा ना० स्त्री-पीड़ा, मेरा । यथा अव्य. जैसा, जिस प्रकार । यंत्रित गु. गत्र कियागया, तालालगायाहुघा, यथाकथञ्चित् अय. निसकिसी प्रगरसे । ययायाल. ना. पु. नेसा समय । यंत्री ना पु. यत्रदोहारा, तारखीचन का यन, यथाक्रम ना. पु. कमसे, परिपारी से, नंती सनानेहारा कलसान। रीति, सिलसिलेवार । यम. ना. पु. यमराज, यमन, साधन या यथापि० अन्य. यद्यपि, जोभी, अगदि । नियम विरोष, गु. दो। ययायोग ना.पु. जैसा उचित पा चाहिये, यमक ना.पु. पन्दमें यार सग या प्रथम अन्य नसा चाहिये वैसा। का राम्द, तुक, जेडिया, जो दो बालक एक यथार्थ अय.'ठीर, सब, सरा। सापही उपभहों। - । ययुक्त।
मङ्गलकोप। २६२ 4 . - . T न . यमयातना०० मी. मरणसमयका दुस। यष्टिक यष्टिका Tो. लारी यमदग्नि ना. पु. मुनि विशप, परशुराम के रिता। | यष्ट्रा० ० सी. मुलहटी। यसक० ना.पु. जवासा। यमदूत० • पु० यमरान दून या गण यस्मिन्० स० जिसम । पिशप । यस्य सा.निसरा। यमद्वितीया. ना. स्त्री० रातिकशुल दूने २। यह सर्वश्चियमाचा, सर्वनाम । यमनीना गु० जो यमा देशकाहे । यहा० या इस स्थाामें धर। यमराज } •पु० यम, धर्मराज, अतक। यहीं अन्य गोरया में । यमरा यक्ष पु. देवताकी जाति विशप । यमल० गु० दा, जाड़ा युग्म । यक्षकर्दम ना• पु. यसका अगमर्दन अर्थात् यमी० गु• यम यरनहारा, यमुनाना। वस्तू, कपूर, अंगर, कालकी मिलोना का यमुना ना• स्त्री. श्रीयमुनानी। उबग। यमुनाभेदी • पु. श्रीपलदेवजी । यक्षधूप० ना. श्री. राल । यमुनाम्राता० ना• • यमरान । | यक्षपति ययाति पु. द्राशा राजा रिश। यक्षराज ना.पु.कुर। ययु • ना• पु० घ ड़ा, यथा यपुरवाश्चमीयो यक्षिणी TI• स्त्री० यसवी सा। , जानस्तुजवाधिर, यमर । यक्षेश० ना. पु• कुबेर। यव० गा.पु.जा अन रिशेष। यज्ञ० ० पु. याग, म, यलिदान मह- यवना पु. दश विशेष वा ययन दश । भाना। वासा, म्लेच्छ। यज्ञदत्त०० पु० सज्ञा विशप । यवनपुर० ० पु. यवना का देश वा नगर यशपुरुप० • पु० श्रीनारायण, विशेष। यवनिका स्त्री० मनात, श्रा। याता० ना० स्वा० सामवहीं । यज्ञसूत्र० पु. जनऊ। यवसूक० मा० पु. जवारसार। यशस्थल..पु. यज्ञमा घर) यवक्षार० पु. शारा, जवाखार । यशेश्वर०० पु. याशिवनी वा श्रीविष्णु । यवाग्रज. पु. जवारसार लेन । योपवीत. पु. उपायन, जनेऊ । यवास. प.पु.पुष्प पिशष जवासा! या सर्प, यह। वासक. ना. पु० जरासा। याग-पु. पर। यवासा याचक..पु. जाचर भसुरु । यश .पुवीति, रयाति, पति, मुक्त) याचना० स. नि. चाहना,, मागा, दिन गु० कार्तिमान, प्रतिष्ठित,सुकृती। यशोगन्त करना, भिक्षा मागना। यशस्विनी १० स्त्री जीव ती बूटी। याचित. गु० मागाया। पशवी याजक० ना. ० पुरोहित ना आमए दक्षिण गुपशवत, पुरती, प्रतिष्ठिन् । लेकर यज्ञादि पर्भ करावे। पशोदा गा. स्त्री जसोदा, नंदरानी । याजन. प. पु. याजका कामा - , यश पनि यशी मङ्गलकोप २६३ . पु० पायागमन विशेष " . 7 . याज्य ना'पु० यज्ञादिर्मकी दक्षिणा युत्यनाथ ना० पु० सेनानी, सेनापति, हौंपी. यातना० ना० सी अत्यन्त पीड़ा, गरकका कर । युत्थपर ना. पु. युत्यनाथ, सिपहसा. यातायात ना युत्थपतिः लार, हाथी ! .com .. यात्रा० मा० स्त्री तीर्थ, रयान, कूच, पर्व। युत्थी० ना. सी. सेना, कौन ? यात्रिक ना पु० मलाह, राही, पन्धी ।' युद्ध० ना. पु. संग्राम, समर, लाई... यात्री ना. पु. ताकती, राही, पन्थी। युद्धभूमि ना स्त्री. संग्रामस्थल, लड़ाई की। याधाधिक० मा पु० जो टोक कर्म करे। भूमि । । याथार्थ्य० ना• पुयथार्थता, रांचाई ! युधि - ना. पु० संग्राम समर, युद्ध! यादयः ना. पु० यदुको सन्तान, कृष्ण । युधिष्ठिर ना० पादुका येष्ठपुर mins यादवपतिक ना० पु. श्रीकृष्णचन्द्रजी । युवती ना. स्त्री० यौवावती सी थर्यादामा यान ना. पु. वाहन, सवारी। लह वर्ष से तीस वर्षतकको 16". CIT यामिनी ना० सी० रात, जो यवनकी है। युवराज. ना. पु. रानाका प्रधान पुत्र'नो यामिनीभापा० ना. स्त्री० यवन लोगोंकी भाषा राना के पीछे राजा होयेगा। 1. युया० गु० यौवनंयुक्त तरुण मनुष्य सौलह य में यावक० ना० पू० लात। सत्तर वर्षका यावज्जीव । अव्य. जबतक जीतन है युधारस्था० ना० सी० तरुणता । यावज्जीवनया जीवन कालभर । यूं० श्रव्य • इसप्रकार यावत्० श्रव्य जवनक । " - यूंही० अव्य इसीपकार । याता ना. स्त्री० दुःस, पासा । र यूका ना० सी० जूया। याज्ञवल्क्य ना० पु० पनि विशेष ! यूथ० ना. पु० अण्ड, युत्थ, समूह गिरोह याशिक. ना. पु. यश करने हारा । | यूयनाथ ना: पु० सेनानी, रोनापति युत गु• रचित, योग, लगा, मिलाहुभ। यूथप० दापी। युक्तायुक्त० गु• योग्यायोग्य। यूथिका ना० सी० सोनजुही। युक्ति ना रसी० प्रवीणता, हथौटी, तर्क, गुण, यूप० ना. पु० यज्ञया लाभ । उपाय, तरकार। युग ना. पुछ रल्या प्रेता, दापर, कलि, लया- योग ना. पु. मेल, लगन, मिलन, भलासमय, रों में से एक, युग्म, जोड़ा, गु. दो, २ । तपस्या रोष, जोई, सत्ताईसगोग जोज्योतिर युगपतिः धन्य: एक भर में। में प्रचलित हैं। युगल० गु० युग्म, दो, योगगम्य गुः योगमार्ग से योगगता । युगान्त: ना.. युग अन्त, प्रलका योगमायार ना सोपा शांक निममे शिर युगलकिशोर० मा. पु. दो पुत्र तरुणताप्राप्तः | यार वार्य करता है। राम यल्प पा रामलपण ... योगशक्लिक ना स्त्री. योगमाया ... युग्म गुदो, २, जोड़ा। योगसारक ना• पु. नारंगी। * et. युक्त० गु• युक्त, मिलाया, 'यथा, धर्मयुत । योगिनी गा• मा तनी विशेष जो. दुर्गाही युत्प. ना.पु. समूह । सहचरी है। CM युप० ना: पु० जूग, परेह, शोरया , ti " २६ मङ्गलकोप। . - बासा। योगी ना. पु. जो योग साधन वर, तपस्वी, रनक० ना. पु० पानी, पावला, दुपहरिया -- गु. मिलाया। पुप पिशेष। योगेश्वर ना• पु. श्रीकृष्णचन्द्रजी, श्रीमहा-रक्तफन्दक० ना० पु• रतालू । देनी, तपस्ती। राकाष्ठ० ना.पु. पनगवृत। योग्य.. उपयुक्त, सम्भव, उचित । रतकोद ना. पु. कुछ विशेष । योग्यता. ना. घी० उचिताई, सम्भवता । रह चन्दनना.पु. लाखचदन। योजन ना.पु. पारिकोस परिमाय । राग ना. पु. कोकिला। योजनगन्धा ना. स्त्री वेदन्यासकी माता। रक्तपदाननम्ना• पु० शुरु हैस । योजना० ना. सी. मेल, मिलाप, जोहा रयष्टीना. पु. मेजा। योटा.ना. पु. जोड़ा। पापा ना. स्त्री.जोंक । योद्धा० ना-पु. बहादुर, युद्धरनहारा, रपात ना.पु. रुचिर का निकालना। रमादिका ना. सी. बनार, पौधा सावन्त। योधनः ना. पु. युद्ध, समर, लड़ाई। विशेष योधापन० ना. पु. वीरता, सावन्ती। रक्तपादी० ना. सी० हसपदी, पौधाविशेष । योनि० ना. सी. उत्पत्तिका अगविशेष, योख रक्तपापाण. ना. पु. गेरू । निसमें बच्चा रहता है रक्तपित्त ना. पु. रोग विशेष। योनिज ना.पु. मनु यादि। रक्तपुष्प ना. पु. अना', कचनार, पिया. योपन० ना.पु. तरुणता, जवानी। रतपुष्पिका० ना. सी. सेमल वृक्ष । योग योपित नारसी पनी,नी,नारि दुलहिन । फख ना.पु. भालू, बरगद, 'लालपल । योषिता रफला० ना. स्त्री. दूरीलना चाकारा, याव्य. इसप्रकार। बेल, अमरवल। यौगिक गु• यागमे वा, योगकारक, सयागा, रफमु० ना० पु० शुक, मछली, लालमुस ।.. जो दो आदि शब्दों से बना। रक्तम् . ना. पु. सारस पती। यौतुक० ना • गु० दापना, दोज । रकरज ना० पु. सिंदूर जो चिया माथे में पौरन ना. पु. बाल्यावस्था से ऊपरी वय । [२] रक्तनर्णिका ना. सी. अग्निकी निहा. १० ना. वी. कथनी विसोनी, हनी, यूरा । रहट ना. पु. पसे पानी किालने का या रलायोज० ना• • अनार, रोठा, दैत्यविशा। विशेष मार० ना• दु. लालचदन, सैर, क्त्या। रेहटाना-पु० चरता सूतकातो का । रनसिन्धिका ना० पु. लालवमल । रंटी ना. स्वी• पानी भरनेका यस रोष। रा० ना. सी. रासना, मजीठ । रंस ना. स्त्री. रश्मि, पिर राजी० ना. पु. मनीठ । रकत ना.पु. रक्ता ग्लालू. ना. पु. रतालू तरकारी। रक० गु’ ला, अरुण, ना.पु. सचिर या रक्तिम ना. सी. लाती! सिंदूर। रगर ना० पु. लाल अरएड। , - लगानाई। विशेष। १ ।
मङ्गलकोप। २६५ F - r फोदर० ना. पु० मछली। रक० ना. पु० दरिद्री, गाल, गरीर । रखछोड़ना० स० कि. धरना, सौंपना,रखना। रग० ना• पु० यण, डौल, रीति, पीड़ा, योहार, रखदेना० स० वि० रखना धरना । सेल, रगनेकी वस्तु। रखना० स० कि० धरता, त्यागना, बचाना, दाब रंगत रंगति रखना। ना. सी० वर्ण । रपलेना० सकि. धरलेगा। रगना स.क्रि. रग चढ़ाना । रमाई 10 ना० सी० धरोहरक। व्यान वा भाड़ा, रंगपुर० ना० पु० दशविशष रगाले के उत्तर । रखपाला, रचा। | रंगभंग १० पु. प्रीडा या पिनाश । रखवाना० स० कि. धरयाना, सौपना रंगभवन० ना. पु० क्रीड़ा का स्थान, बिहार रखवाल ना.पु. रक्षक, रखनहार, हा. स्थल, श्रादभरना रखवाला पिन, तथा गहरिया जो भेड़ों का रंगभूमि० ना० सी० प्रीधारा रथा, घर, रखताहै। यज्ञस्थल, तमाशे का घर । रखवाली ना• स्त्री, रवा, चरा का काम, रंगमहल ना• पुरंगभवन । बचाने का काम हिफाजत । रगमारना० स० रि• चौंसर के खेलमें जीतना रखा० गु. जो बचाया गयाथा, घास रसाईहुई। या किसी के रगडालना। रखाना० स० वि० रखवाना,रचाकरना,बचाना। पारस० ० पु. हर्ग, पान द, विहार । रखिया० ना. सी. रक्षा, बचाव, रखवाई । रगरातना० • बि. पिसीका हारहना, किसी रखैया० . पु. रता, धरनहारा । से अधिक्जी लगाना। रंग ना. श्री. शिरा, गाड़ी। | रंगरूप. ना. पु. पर्ण, याकार । रगह०० स्वा. 17सा, घिसार। रगवैया ना. पु. रंगोहारा । रगदना० स० कि. घिमा, घाना, मल।। गाई पा. स्त्री. रंगने पा भाड़ा। रगड़ा पु झगड़ा, अमिशा, घिमातारगाना सकि० रगदिलाया। रगेद. ना. रथी खद। रगाघट० ॥सी गापा पाग। रगेदना० रा. कि. सदा., पछि दा । ग्गी गु.तिला., चमकीला, रसीला, सुडाल, रंगदार। रघु • पु० अयो यात्रा प्राचार सूर्यशी राजा रगीला निशेष। रचना अनि व्यापा, मातगना, किसी वाम ग सगा, तालसमत गाप, पैठना, पदना रघुनन्दन० पु. श्रीराम च दना। स. •ि बाना, प, सिरन, ना. सा. रघुनाथ रघुनाया ना. पु. खुशियों में राजा उपी, शारी, सष्टि, नगर रघुपति शिर, दशरथ, यारतमचन्द्र रचाना स० विना, पराना, सिरजना, जी। चला, याद कर्ना, लगा, मिहती से हाथ पैर रगना। रघुराज रघुयश ना. पु. रामा रघु र वरा, कान्ग, रचित गु. रचाटना, निराधा। रचितग्रन्य. ना. पु. बना हुई पुस्तक, इगा। शिष। रघुवंशी ... राजा रतुझे सला, रान! रच्छक • • रए । पूतों में जातिविशर। 1रच्छा • स्यौ• रमा। T - घुयर० T and *- .
२६६ मङ्गलकोप। 3 T रज० ना. पु. रजोगुण, लास, ना. खा. लि. रणवीभत्स० ना. पु. युद्धमें कुशल, समर अग्नि, रस्सी, पराग, निहानी, कपड़, ना.पु० प्रीय, विराप पडा मनुष्यका दूसरा गुण रणवास. नापु० राथियों के रहनेवास्था । रजक. ना. पु० धोती। रएड. ना.पु. अरण्ड, रहे। रजत. ना. पु. चादी, रूपा। रएडा० ना. स्त्री. राह, विधा। राजधानी ना. स्त्री. राजधानी, रामायणे। रएडापा० ना.पु.विधवापन। यथा, राजाराम अवध रनधानी। रण्डिया ना० स्त्री. विधवा थी। रजनका ना. पु. काला योरपि । रएडी • सी० नारी, सी, पतुरिया । रजनी. ना. सी. रात, हल्दी। | रएडुश्रा० ना. पु० निरस्ती, निस मनुष्यको रजनीगन्धा० ना. स्त्री० सुगधरा,गुप्परिशेष। रण्डवा० स्त्री मरगई हा। रजवाडा. ना. पु. रोय, देश जो राना के रत० ना० पु. मेथुन, रात, नीतिमय, लग्न, वशमें है। लवलीन । रतकेला. पु. मैथुन। रजस्सला. ना. सी. ऋतुमती, कपड़ों से। रजाई. ना० सी० शीतकालमें पादने का वस, रतजगा ना० पु. उत्सव में रानका नागना । रतन ना.पु.रत जाहिरात । राजल, पाशा रतनार० ना. वी. लालवर्ण । रजाय. पा.पु. थाहा, अनुशासन । रजायश ना• पु. पाहा वा रानाका श्राज्ञा। रतनिया ना• पु. चावलविशेष। रजोगुण ना. पु० मनुष्य का द्वितीय गुप जिस ग्तवादी० ना• सी० धाता, रातका, मुरैतिनुको में बोधयादि बसता है। सात पुरुष पास पाता है। रजोरती ना. सी. पुपवती, जो स्त्री कपड़ा | रताना० स० कि० कामातुर हाना। से हावे। रतालू० ना. पु. अनिशा । रज्जु. ना. स्त्री• सून रस्सी। रति ना. सी० प्यार, मैथुरा, वामदवकी स्त्री। स्व गु० थल्प, थाड़ा तथ छा। रतिनाथ रक० रतिमाह ना०पू० पायदद। रखक. ना. पु. जाप्रीतको उपनाव रग दने रविशतिः हारा, चित्रकार, तापयादि जलाने की रस्त। रती रवी. पाठनी का तोल, रत्ती, भाग, रखना ना.पु० रगाव, चित्रगरी, प्रसनता, था। जन्मारना, सुखदना, मुरतद। रतीयत. रञ्जिव गु० रगामया, चित्रित, प्रसवित, उपना, रतीयन्त सुसी। | रतीधा० १ ना. पु० चपलाई, ना. स्वी: रताधा जिसके कारण से रातको दिखाई रट. ना. श्री. दुहराव, रक। स्टनारस.कि. दादराना, विहराना, बदना नहीं देता है। लगातार रहना। रत्ती ना. मा. पार या या पाठ चावल का रण ना.पु. समर, युद्ध, साई। तोल, भाग्य, भाग। रणभूमि ना. सी. समरभूमि, युमभूमि । रन ना. पु. मणि मुत्ताधादि, पुरखी। 4 'गु• भाग्यवान। J मङ्गलकोप। २६७ +4 + हौड़ धूप। . -- 1 . रनगर्भार ना. सी. पृथ्वी, धरती। रपट० ना० स्त्री. खड, लिसलाइट, रगेद । रतजोत. ना. स्त्री पौधा विशेष, पालका रपटना य०नि०,फिसलना, तिसलना। ग्रौषध, योपपिविशेष। | रपटाना० स० कि० रगेदना, फिसलाना, दो- रत्नमालाना स्त्री मालानो रखासे ननी है। दाना। रतसिंहासन ना. पु. यह सिंहासन जो रबी रवड़ना स्त्री परिश्रम, थाई, व्यर्थ, से जड़ित है। रताकरता. पु. समुद्र, रतों की माTI, रबड़ना अ० कि. धरना, व्यर्थ दौड़ धूप में रथ० ना. पु० चारपहियों की गाड़ीविशेष। पड़ना। स्थान० ना. पु. सारथी, गाडीमान् । रबड़ा गु० पदा, थकित रथवानी ना. सी. रथवा का नाम । स्यद्वाना सकि थाना, पर्थ दौडधूप रथयोदा० कराना। रथसिज०, ना.पु. पोड़ा। | रवड़ी. ना. स्त्री. गादादूध । रथांग ना. पु. चकरा पी, चक्र, पहिया । रमचेरा ना० पु. गुलाम, किंकर, लोहा। रयाना गा.पु. रथके प्रागे। | रमण ना• पु. भोग, रिलास, मा मैथुन, रथी ना. पु. रथ सपार, तीस्ठी निसार व्यापक, रािना, घटन। मृता को श्मशान को लेनाते है। रमणक० ना.पु. दीपविशेष । रथ्याना. सी. मार्ग, सड़क, वीथी, गली। रमणी० गायी• उत्तमानी। रद० ना.पु.दान। रमणीक गु. गुदर, मनमानित । रदछद.ना.पु. पोच, हॉटे। | रमणीय गु• मनोहर, घरखा, पुन्दर । रदन० ना.पु.दाता रमना० स० कि. भोग करना, मैथुन करना, रदनछद० नागु० चौष्ठ, होठ। रिना, विचरा। रपट रमा० ना. स्त्री. लक्ष्मी वैरावी। रहा ना.पु. भीति का परत । रही ना. श्री. जो कागज रिसी कमी नहीं रमाना० स० •ि पुगलाना, बदाम, कि- परनी शन्दा राना, मोगरराना। रमानाथ रना ना.पु० रण। रमापति ना. पु. धीपिथ, नारायण। रनगद० गा.पु.,पारनी, सगर। | रमेश रनयना गा.पु. महारा। रम्भा गा.पी. गाय, वेश्या, फेला पीर रनयाममा पु. पााग, निराम राना की मुग्य पसरा। मियां रहती है, पत रे। रम्भाना प्र.वि.गीका बीता। तिदेवा. पु. रानाशि। रम्य ना.पु. पृमी के गगराणों में मे एक रंदना. पुर। का नाम गु.सदरमा। रंघ. ना.पु., दिद। रम्यक ना. पु. महार।। रंधना.प.दि० पाना, पुरना, उपसना। रम्पाना. सी. पापा प्र.ना.पु.पिर पर। -रये 1 रन, मिले, मो, रामचत्रिमा रंधीर ना.पु. ना. 1 - . M ८ २४ मङ्गलकोप। . . . ररनाल सकि. रटना । रसमसाना० अ० कि० पसीने वा सुगधि वस्तु" रलना० स० कि.मिलना, रिसा, मिमना। से मीगजाना । रखाना स.वि. मांसना, मींचना, पिसाए। रसमसीला गु० जोरसमस यागया, भोगा! प ०० पु. शन्द, पी। रसमार० ना. पु. विष, इलाइव । रखताई ना० सी० रावतपा, वीरता युद्ध । रसभेद. ना. पु. कचनार । रवाना. पु. पति, प्रियतम, प्यारा, यार । रसरा० १० पु. टोरा, मोरी रस्मी, बरारा । रचनोल ना. रती• पना, प्यारी, वियतमा । रसराज. ना. पु. भृगाररस, पुस्तकविशेष । पा० ना. पु. रणवासका सेवक जो स्त्रियों के रसरी० ना० सा• डोरी, रस्मी। लिये सौदा लाना है, रवाना। रसयत. ना. पु. रसौन। रवा. ना. पु० चादी वा सानेरा रेता, पार, रसवती० ० मी. रसीली। बलू, धूलि आदिशा या। रसधार. ना. पु. भ्रमर, भारा । रवि० ना. पु. सूर्य । रसगु० रसका ज्ञाना, यथा, रसिया, कपि, रविकरना.पु. नाँव वृक्ष। पण्डित, सातु, रसधातु का माहारा । । रविज्ञाना.सी. यमुनी। रसज्ञा० ना. बी. जीभ, निहा। रविजात • पु. शोश्चर, यमराज, वर्ण, | रसा० ना० सी०पृथिवी, रासना। समीर । रसान 1. पु. रसौन। रसाजन रविनामक पु० तार । रसातल ना.पु. पातालविशेष। रविमणि ना. सी. सूर्यमणि । रनिरार ना• पु. श्रादियवार, पहिला दिन, रसाना० स० मि. जोड़ना, मिलाना। विधामा दिन, इतरार। रसायन० ना.पु.विद्याविरोष, जिसमें ताम्रा दिधातुको सुवर्यादि करते हैं कीमिया, विपघटत रवितनिध. ना. पु. विपक्ष । चिकि साविशेष रासक० गु• रसिक। रसायली० गु. रसायनशाता, स. स्त्री. रशिम . स्त्री. रस्मि, विरण। कुवार। रस. ना. पु. नीभ्में निसका महणहोवे, यथा, रसाल 710 पु. शाल उन्च, गधा गु० मीठा, घी, दूध, अमन, विष, पानी धादि भंगारादि ना. श्रार। नारस वा स्यादि षटरप्स और विषम, साद, रसीरा गु० जो रससे पूर्ण, 'व्यसनी, फामी रार प्रम, धारा, पारा, का धातु मरहुये की रसीली गु. सी. यौनिवती, ना. पु. अगर । रास, यथा, रूपरस, ताम्ररा । रसिक गु. रसश. रसिया। रसकर० ना.पु. रस पारितिशेष। रसिकाई० ना. श्री. रयामपा, धूर्तताई, रसद ना. पु• रसदाता अर्थात् ऊस, गन्ना, कामातुरता। नायिका, याव्य। रसिया. ना. पु. कामी, मागी, लुचा । रसधातु.ना.पु. पारा। रसियान प्र.वि. गोला वा रसीला शेना, रसना ना. स्त्रीजम, जवान् । पसीनना, रिसा रसनाग ना.पुरासना। |रसे० अश्य धीरे, होते । रसममुना-पु. पारा। रसेन्द्रयमिक ना• गु. पारा ।। . 1 ६ 1 मङ्गलकोप। २६ ma बोलना। रसोइया. ना. पु. भोजन पकानेहारा । रक्षावीर्य्य. ना. पु. रीठा । रसोई १० ना. स्त्री० पाक, भानन, पारस्थान । राई ना० नी. सरसा विशेष, गु. थोड़ा । रसोद्भव० ना.पु. रसौत। নৌদুমুর गंगा० ना. पु. धातु विशेष । | रांझन रसोनक० ना०प० वृक्ष विशेष । रामना० ना०पू० सजन, प्रियतम । रसोत. ना. पु० औषधि विशेष । रामा० रस्सा० ना. पु० जेरड़ा, रारा, बड़ीररसी । राड़ा स्त्री० विधवा बेरह । रस्सी० ना. स्त्री नेवडी छोग ररसा । रादपड़ोस० ०. पड़ोस पडोस, समापता । रहकल. पा.पु.मोटी तोप, छोगीगाडी, राधना० स० कि० पाना, रांधना, घराना। रहकला छक्का गंपा० ना० सा० खुरपी० चमारायन विशेष। रहवंटे० थव्य• मनोरथ चाह में । रामना० अ० कि. विरियाना, डकारना, गोका रहचोला ना.पु. लोपत्तो, मीठी बातें। रहजाना० ० कि. धीरज करना, सतोष राकस० पु. रातस । परना, थम्भना, पार जोहना । राका ना. स्त्री० पूर्णमासी, पूनो। रहट० ना. स्त्री. गरारी। राकेश ना. पु० चद्रमा। रहटा० पु. चरसा। रहरी ना. स्त्री. चरखी, गरारी । राख० ना० स्त्री. भस्म, लि, खाक । रहते० अन्य होते, सामने, यागे। राखना० स.वि. रखना। रहन ना• की गति, चलन, चाल । राखी० ० स्त्री० यत्र जो धावणकी पूर्णिमाको रहना० अ० कि. एका, ठहरना, बसना, हिंदूलोग वाहु में राधते हैं। चजाए। राग ना. पु. गायकों में प्रसिद्ध, जैरो मलार रहला० पुचा अन्न। सिहागादि, कोर, प्यार, मोह विषयभोग। रहदैया ना. पु० बसनहारा । रागना० अनि अलापना। रहस० ० पुठठोलपन, नाच विशेष,ना स्त्री० रागमाला १० स्था. रागकी पुस्तक । लीला, क्रीडा, गु० एकात, निर्जन । रागसागर ना. पु. गीत जिस में कई एक रहसना अ.कि. प्रसनहाना हुलसना, एकात राग निकलते हैं। होना, छुपा पगिनी रागही स्त्री। रहसि . पु. एकात। रागी स्त्री. गायक, प्रिया, गु. प्राणी, रहस्य. ना. पु. रहस, गुप्त एकात। रहायस ना. सी. परिवार, ठहरा, गा, मोही, लालवर्ण। रहाध० ना. पु. राघर० पु. समुद्र का मस्य विशा, रहित गु. अमित, ही, वि। भीरामचद्रजी। रक्षक ना.पु. रबारनेहारा। राघवेंद्र ना. पु. श्रीरामचदिनी। रक्षण ना. पु०मचाव पर, उदार, रक्षा नावी. रासी, पालन, रसवाली। रावना प्र. कि. प्यारमें, घरफना या खान, रक्षायन्धनः ना. पु. प्रावपशुपरिमा। H हाना।
मङ्गलकोप। ir . . - राचा० गु. प्यारमें अपरगया। -1 राजभोग. नागपुरायागोग, मध्याद में राछर ता.पु. दारोगरों का अस्त्र ।, देवता के लिये नैवद्य। राजा ना० पु. राय, घरदनानेहारा पारी राजमन्दिर ना• पु० रानभाय । थई। राजमार्ग ना.पु. राजपथ, सड़क, चैड़ा। राजअंश० मापु. कर, महल, रीना या राजयोग० ना• पु० नमकुडली में उच्च गहों । भाग। का होना यथा बृहस्पति मूत्तिमें इत्यादि । राजकर० ना.पु. राजयश। राजयोग्य. गु. जो राजा के योग्य है।' राजकर्कटी ना. स्त्री० कुम्हला कद्दू । राजराज. ना.पु. यक्षपति, और, रामा । राजकीय गु. राजा का, राजाऊ । विराज । यजमार० ना० पु राना का पुर। राजराणी राजगृह ना• पु. राजाकापर, नगर विशा। राजरानी ना. सी. रानापी श्री। राजजम्यू० ना. स्त्री. नामा, फ्लेंद । राजरोग ना. पु. वह रोग जिससे बचने की राजत्व० ना. पु० रानाका काग। थाशा न हो, यया तयरोग, मृगी। राजद्वार० ना. पु. रानभवा का फक। राजला. ना. सी. मीटौतुम्बी, लौकी। राजघर० ना० पु. राजा यांमत्री। राजतोक० ना. पु० राजभरा। राजधानी ना. सी. जिस नगर में रागां । राजवंश० मा पु• रानाको सतार। य पनसै, यया धार में एसनऊ । राजवशी ना. पु. राजामी सतान, राजपूतों राजन् ना.पु. सजा। म जाति विशेष राजगय० ना. पु० राजनीति राजयचा ना. मी. गंधासारा। राजना०प० लि. चमरना, शोभित हाना। राजवल्ली गा. सी. रारलता । राजनिभः ना.पु. गोह। राजनीति ना• स्त्री. राज्यवरने की चाल, राजशाली नास्त्री• सभा, कचरी । राजवृक्ष. ना.पु. शिरवाली। दर, कानून । राजशासन ना. पु. राना की धाज्ञा और राजपति. ना. पु. राना, हिन्दूलोगो की राज यादए । पदयो। राजश्री. ना. पी. रामासी सम्पत्ति । राजपद ना. पु० राय, प्रभुता, मादशाही ! राजस' ना. पु. नो काम र नागुण परके होते, राजपुताना ना. पु. देश विशेष निमें रजोगुरा। राजपुत्थान ए जयपुर जोध र आदि है। राजसिंहासन ना. पु. राजा पा सिंहासन । राजपुत्र ना• पु० रानाकात, जाति विशेष राजपुनिकाना स्त्री• रागावी कन्या और राजसू ? ना. पु०; यज्ञ विशेष निसको | राजसूर्य काल राजाधिराम करसके हैं। रायलता और पीस राजस्य ना.पु. रानाकाश, कर, महसूल । राजपुत्री० ना रत्री• रानारी क्या, यदुई राजहंस० गा• पु० इस विशप, नतम् । तुम्नी। राजा. ना. पु. भूपति, देशपति, बादशाह I... राजपूत ना. पु. रानीकात्र, जाति विशेष राजादन० मा पु. सिरनी विशेष । राजमवन. ना. पु. रानाका मदिर। राजाहा ना. स्त्री. जिरनी। r F 7 27114 मङ्गलकोप। . - - । . 1 , राजाधिराज. ना. पु० रानायोंमें जो बड़ा | राधानगरी ना० स्वीकारेशमीपत्र ना राधा (राजा। नगरमें बनता है। राजिका ना. स्त्री. पाति, अवशी, समूह -राधिका० ना. स्त्री० वृषभ नुसुता, कृष्णप्रिया । राजिन० ना. पु. साप यथा राजिल हिंडिभी राना ना• पु• राय । इयमर ।। रानी ना. स्त्री- राजा की सील पी; राजी० ना० सी० पक्ति, पाति । राय • सा जूसी पिशष, वस्तु दिशा- जिससे शकर बनती है। राजीव० ना. पु. कमल, मछली, पानी, च राबड़ी ना. स्त्री. रबड़ी भाना विशेष । "द्रमा, मोती। | राम . पु. परशुराम, श्रीरामचन्द्र जी.. राजीवगण ना० पु. कमलोंका समूह । श्रीवलरामजी, गु. ३ । राजेश्वर ना० पु. महीपति, बादशाह । रामकहानी. ना० स्त्री. रामायण, लम्बा राज्य. ना. पु. अधिकार देश, रान वृत्तात। राज्यपद. पान, प्रभुताई, बादशाहत । रामकली ना० सी० रागिनी विशष । राटो. ना. ना. चोरको बाली देलखण्ड मा रामचद् ना. पु. श्रीराम, दशरथपुर ।। राठेर० पु. शरसेन देश । रामजनी0 710 सी. नोची, पेश्या, वश्या राठौर० ना. पु० राजपूतोंगी नाति विशष । पशेष । राड़ा ना. पु. हरियों में जाति विशेष । रामट० ना.पु. हाग। राढ T० पु० गोइदश का एसड जो गगाक रामतुरई ना० स्त्री. लौकी, तरकारी विशष। पश्चिमहै, कहा। रामदुहाई. ना० सा० राम की शपथ ! - राढी० ना० पु. राह दश का प्राह्मण, बड़ी | रामदूत. ना. पु. श्रीहनुमानजी आदि । तरकारी। रामफल०० पु. कमरख । रामराम०० पु. प्रणाम या सलाम शिष। राणा० ० पु० राजपूत या जाति विशेष । राणीत्रा रानी । रामसर० ० पु. पाधा शिष, परकर विशेष रात ना. स्त्री रात्रि | रामसेनक० पु. चिरायता । रातमा सक्रि० रगदेना, अ.कि रचना। रामानन्दीर ना. पु. वरागा, रामानद के राता गु० रक्त, लान जो रँगागया, जौ राना रात्रि० ० सी. रजनी, नि, रिशा। रामायण ना. पु० रामधाम, राममार्ग, राग रानिचरा पु.शिाचर, भूत प्रेत, नार, यानी, प्रय विशेष। उलूकादि। रामारत. T० पु. वैरागी, नाति विशप का राध्यन्ध० गु० जो रात्रि में नहीं देखता है यथा मत। रायपुराजा, राया। राद० रायता 71 Y० वा पा रामतुई का दही ना.पु. पीच, मजा में डात क जा बनात हैं। राधा 10 मी. वृषभानमुता, नीति, गाति राययांना. पु० बर्दा पिशप । विशा। | रायवेलि सा. पुष्पविराम । २ सरक। A उलून। राधा मङ्गलकोप। 4 . रायरायान् ना.पु. रानाधिरान । राक्षसीला. ना. श्री. संध्या उपरतीन रायलता० ना. सी. पुण, वृद्ध विशेष । मुहूर्त। परि० ना. सी. विरोध, लड़ाई, झगड़ा । रिक्त गु० साली, सत्य। राल. ना. श्री. धूना। रिचा ना. सी. अचा, वेदमन्त्रका नाम! - राय ना.पु. रानकुमार, राना, राय । रिझया. ना. पु. रीमने हारे । । विचार ना.पु.विलास, पानद। रिझाना. स. कि. प्रसन्न करना. खुशकरना, - राषटी० ना •त्री'तम्बू विशेष सताना, दुखदेना। रावण ना.पु. लकेश, रावसपति विशेष । रिताना० स० कि. रीता राना, धा कराना যাই ० ना.पु. श्रीरामचद्रजी। दुर्गंध दूर कराना। रावणी गु. जो रावण से सम्बध रखता है, रितु. ना. स्त्री. ऋतु । ना.पु. मेघनाद । रितुराज. ना. पु. ऋानुरान, वसत । रारत. ना. पु. शर्मा, वीर, सर्दार । रित्तम. ना. पु. मनु विशेष । राघरा रिद्वि० ना. सी. सम्पत्ति, बदती, वृद्धि, ऋद्धि। रावरो० 3 सर्व• तुम्हारा, अापका। रिपु० नापु. वैरी, शन, मुदई । पी. ना. सी. नदी विशेष जा पनार में है। रिपुता. ना. सी० शत्रुता, पर, अदावत । राशि: ना. सी. दर, समूह, मेषादि १२ । | रिपुंजय० गु. शनिन्, अतिशर्मा। राश्यंतर • पु. एकराशि से दूसरी राशि रिपुपाक० ना. पु. इन्द्र। तम्का समय। रिपुहा० ना• पु• शत्रुम, गु• शनिन् । राएकी ना. श्री. रही कटाई । रिपि. ना.पु. ऋषि । राष्ट्र० ना. पु. रसाहा देश। रिपिमित्र.ना.पु. ऋषिभित्र । रास ना. पु. गोषियों के साथ श्रीकृष्णचन्द्रनी रिष्ट ना. पु. सा, गु जो निकृत है। को बीड़ा पविशेष, राशि ना सी. पाय | रिष्टपुए गु. मोग, स्कूल । रिसा• स्त्री. कोप, कोध, रिसियाहट । रासचक्र० ना.पु. लग्नमण्डल। रिसनाथ.शि. धीमें टपकना। रासधारी ना.पु. रासारनेहारे । रिसहा गु• बोधी। रामम.ना.पु. गधा, सर । रिसाते. गु. प्राधयुत, काय करते । रासमी ना. स्त्री. गदही, सरकी श्री। रिसाना श्र.कि. ग्रप्रसन्न या दोपित राप्ती० गु- घोडा इत्यादि जो न मला हो न विसयाना होना, चिदना, दुखित होना । रिक्ष. ना.पु. सूद, राछ । रासना० ना. मा. जो वृतपर जमताहै यया रिक्षराज ! ना० पु. ऋरान, जानन रास्ता रितेश तादि राहना. स.पि. एसी में दान बनाना। री० अन्यारे। राहु ना. पु. पाठवा प्रह. दैन्य विशेष जो संगना प्र. दि. केटचाल, रेंगना । चद्रमा और सूर्य को प्रासता है। धिना. स.वि. पकाना । रक्षस ना पु• अपर विशेष ई पर। रांछु. ना. पु० ऋत, भालु । रक्षसीना मो. राक्षसी की। म. ना. सी. चाइ, इदा, मत, तृप्ति। -and सन्दराा लेपाला। पुरा मध्यम, ऐमा वैमा। The बादा।
मङ्गलकोप। १ 1 १ T- - < ८ ܫܢ S . रीझना० ५० कि. प्रसन्न वा तृप्तहोना । रज० गा. पु० रोग विकार , रीठा० ना० पु० पल विशेष । रुट ना• पु० बोध, गुस्सा। रीठी ना. स्त्री छोग रीटा। राणि नापु०'शद। रीढ० ना. श्री. पीठयी हही। रुणित. गुगुजारित, शब्द करता भर्या । रीता गु० साली, शाय। रुएड. ना. पु० शिर रहित शरीर । रीति ना० स्त्री० चाल, चलन, प्रकार, प्रानून, रुदन० नार पु० रोदन, रोना । दरवायदह । रुदित०,गु० रोताहुआ। रीर० नारीद, र। रद्ध० गु.का, का, बथा। रिरियाना० अ० कि० बालकवी रीति से रोना, रुद्र. ना. पु. श्रीमहादेवनी। हुइकुडाना, स० वि० गिडगिडाना, खुशामद रुद्राणी ना. स्त्री० पार्वती। करना। रुद्रावतार० ना० पु. श्रीहनुमाननी।" रीस. ना. स्त्री. मोध । रद्री ना. स्त्री० ११ बेलपन, ११ शोशीमा रुक० ना• पु. रोक, उपियाहट ।। रुधिर० ना. पु. रस, लोह, खूनें । रुकना' अ० कि० अटकना, बदहोना, ठहरना। रुधिरा. ना. स्त्री केसर, जाफरान । रुकवैया ना• पु० घटकाऊ। रपना० ० कि. डटना, अड़ा। रुकाना स.कि घटकाना, ठहराना, स्वाग! रपया ना. पु. रुपेया। रुकार० ना. पु.] अटका, पाव । रपहरा रफावट० स्त्री गु० रूपया, नो रूपैसे नना है। रुपहला रुपमा ना. पु० सुपर्ण, चादी, रुक्मिीरा भाई। रुपी० गु. हरीहुई, पड़ी। समिमणी ना. स्त्री. श्रीकृष्णच द्रनीकी पट स्पैया० ना.पु. चादीसमुद्रा, १६ पानेगा। राग विशेष। राक ० ना. श्री. खुरासानी अनराहा। रुपमफेश० ना. पु. रुक्मिणीजीका भाई, रोलाना० रा.नि. रोषना, दुसदेना। रख० ना. पु० सवेत इशारह, प्राज्ञा, मुह । रनाई. ना. स्त्री० पुड़की, तिखाई । रुए गु•पुद्ध, मोधिन। रुखान० गा.पु. पर्दई का अस्त्र विशेष । रुसन० अ.गिरिस।। रखाना० . कि० पहापन होना, मुसाना, रुह. ना. पु• उपन, जमित । रहा. ना. ही• कुम्भी तालार को। रखानी० ना. स्त्री याग रसान, गु.सूसीहुई। रही० ना• स्त्री. दूर पास । रग्न० गु० टेदा, रोगी। रक्षा गुस्सा, रुदा, सरसरा। रच. ना. स्त्री० रुचि। रशिगन्ध ना. पु. सौचरलोन । रचना कि. भाव, अण्डालगना। राया गा.पु. रुईका व्यापारी। रवि. ना. स्त्री• मनोमिलाप, भोन में प्रकृति, सं० मी. नो पास से निरलती है। रूघट ना.पु. मैत, मल, दाल, रेम। ना. सादरलान, सौचरसार। रुपनारम.शिरले.शि. प्यालता। " सूखा "H चाहत, शौर, गोरोचा।
मङ्गलकोप। t । " + r 7 AN रुख. ना.पु. वृत्त, पेड़, व्या। रूपा०० पु. चांदी, रजत, मा. स्त्री पैश्या,, रूखड़० ना.पु. योगी विशप । रूपवती। रूखडा. ना. पु. छोय वृक्ष । रूपान्तर० ना.पु. दूसरारूप। रूखन० ना. पु. पलूया, खान । रूपी० गु. याकारवान । रूखा० गु० सूखा, निरा, रुच, स्नेहरहित । रूमी ना.पु. रूमदेशाय मनुप्यादि। रूम्बाई. ना. श्री. सरखराहट, सराई । रूमीमस्तगी ना. सी. गोपरि विशेष रूखानी० ना० स्त्री० टाकी, छनी । रूरा० गु० थच्छा, सुन्दर। रूखा. ना. ना. खाचर, गु. सूखी। रूसना. अ.नि. रासना, रुटना । रुख० गु. सूसे, विनारस, उदास । रूसी० . स्त्री. शिरपा मैल, ना.पु. रूस रुचना य.वि.रुचना । देशीय । रूच्य० गु. मनभावित, चाहता। रुक्षक० ना.पु. बासा ग्रौषधि विशेष । रुछ गु• रुत। २०य. अरे, हो। रुज. ना.पु. कीट विशप । रंक. १. स्त्री. गदहे का शब्द । रूझा गु० जतु वा पक्षी जिसको रुग स | रेकना० अ.शि. रेक्फरना। तात. | रंगना अ.कि० चलना, बीर चाल । रूठना०प०कि विगड़ना, झगहना, रिसाना, | रेट ना. पु० रट रेंटा। मानकरना। | रेटा० ना. पु. पोटा, सिाक, नटा। रूठनी० ना. स्त्री० सनरू, गु• मानवती, ना ३०० 3 एरण्ड या उसपा कीन । झगड़ालू रदा० ना० स्त्री० घारीमाड़ी। रूठा० गु• रिसा बिगड़ाहुया। रूठारूठी ना. स्त्री० परस्पर विगाड़। रेदी० ना• स्त्री. घोग पर पूजह ।" रेस. पा. रा. लकार चिद, प्रारध, ललाट । रूद1. पु. का, भरड़ा, कठोर । रूदि० न० पु. वह सना ना मिश्रित न हो। रेसना० स० वि० लारकरना, चिट बनाना । रेखा० . स्त्री. रस, लकार । रूप. ना. पु. याकार, मुख, चित्र टर, चाल, रेखागणित ना.पु. गरिएत विशष । सदरता, तुल्य, शामा। रेखागति० ० स्थीर पर्मगतिः पारन्धरी रूपक० ना.पु. सश, तुल्य समान। रूपजस्त० ना. पु० रागा। रूपमञ्जरी ना. सी. अप्सरा, सदा सुहाल रेचक० ना• पु• वह ग्रोपरि निराम दरत पाते हैं, याग में वह श्यिा निसस पाया रूप गु• सरूपवश्य उतारत हैं। रूपरस० ० पु० रूपा जो जलायागया, रूपरेचनी0 71० रखी• रपत्री नादरत उपगा। रेचा पाला। रूपराशिकरना पी. सुदर स्त्री, प्रयत रेट पारसी. चित, निशा रुपवता. सदरी। रेणु ना. रघी• धूलि प्रार। रूपयान्गु• सदर स्वरूप, अक्ष। रेणुवा • स्त्री० परशुराम पी गावा गगा रूपहला० गुना मा राया है। । --- चाल। फूल विशा। घार रस जीका रेता, धुलि) मालू।
मङ्गलकोप। " . प ka - . रेणुपित्तहा ना. पु०, पित्तपापडा। । रैनियर० ना. पु. निशाचर । रेत ना० पु. वीर्य, चीन, नाल, पीला, निवर्ण गु“ माला, श्याम । रेत . ना. १० वीर्य, कामदेव । रैवत मा. पु० मनु० विशेष । रेतना स० किसोहनकरना, धीलना, ओरोमाई. ना. स्त्री पिलाप, हाहाकार । रोजाना० स० कि० रोलाना, सताना, फुदाना, रेतला रेतला गु० जहा बहुत रैतहोते. अ० कि० बुदना, खिसिया।। रोआं० ना. पु. रोम। रेता० ना. पु. बालू, रेत, गु० छालाभया । रेताई. ना. स्त्री. रेतने या राम या दाम । रोंगटी० ना. सी. झगड़ा, दल, ठग'पद्या! रोटगा० १०कि. मुरा। रोनियाना स.वि. रेता, चिया करना। रेती० गा० स्त्री. नहा अधिक रेतहो, तो या रोपना० स० कि० लगाता. नमाठा, गाइना । इथियार। रोक पा सी. टोक, अटक, पिम, नकद । रेतीला गुरु नालूया, विरकिरा । | रोका. ना. स्त्री• जो रुपया अपने पाम रेतुमा० ना० पु. रेताहारा । जमा है। रेफ..पु. यमार से थागे का वर्ष । रोकड़िया0 11. पु. रोपड़ रखनहारा । रेर० १० पु. शोर, दला। राकन नास्त्री. प्रोट, श्रा, डा। रेखना० स० कि. टेलना, ढल, पेलना। रोषना० स० कि० घेरता, यामा, का, रेलपेव० ० स्त्री. बहुतात, सरसाई, भीड़। प्रपा, नानकारना। रेला ना० १२ अहिला, वार, पशुओं की रोफू ना• पु० रोमहारा। पाति, ढकाल, पला, झपट, ठला । रोग ना. पु० व्याधि दुस, विकार, बीमारी। रेवड़ी ना. स्त्री० तिलपिलित मिटाई विगए। रोगरिपु० ना• . वैय, धपतीर, श्रीपरि । रेवत ना. पु. राना विशेष, रेवती का बाप । रेवती ना. स्त्री. सत्ताईसरा नाम, रोगदा देशजी की पगी। रेवतीरमण 1. पु. श्रीरलदेाजी। रोगाइय ना.पु. ट श्रौषधि । रोगिया रोमी गु• घ्याधी, द सी, बीमार, मरीन । रेवा. ना. पु. नर्मदानद. T० सी० दी | रोच० पु. पुरी, रोचक... पानक, जा रुचि उपना। रोचन ना.पु.लिक, गोरापा, मनभार।। रोह. ना. सी. रे। रोचारा. ना. . कपाला। रेडू ना• पु. लदिया। रेही ना. श्री. रह। रोचना ना.पु. गौरीचना, सिसा, प.पि... रह. ना. स्त्री. उसर मभिकी मिट्टी। रचना, मावना। रंकना. घ.मि. फना। रोचिप पु• मनु पिशा। रोज ना. श्री. रात, निसा रोजा ना-पु. पिला, रोना। रोगहारा० १ २० वैद्य, चौरपि । रेवन्दवाना ना सी० श्रोपथि विशेष रिशर ।
मङ्गलकोप। 014 . रोट ना० पु. मोटी रोटी, भीनुमाननी रोहण ना• पु० राजा विशेष, रोहिणी का रोटा०का मोटी रोटीका नैवेद्य !: 273 पिता।" रोटोर ना. स्त्री भोजन विशेष । ! रोहिणी ना. सी. श्रीवलदेवनी को माता, रोदा. ना. पु. बड़ा कंकर । चौर्या नत्र, बुधको माता, हर, कुटको । रोड़ी ना. स्त्री• छोटा कंकर। रोहित. ना. पु. मत्स्य विशेषत: रोदनना पु. रोवाई, यांसू निकलना, रोहिताश्व० ना• पु• राना हरिश्चन्द्रका पुत्र । रोदसी ना. स्त्री भूमि, आकाशं । रोहित्थ. ना. प० मेथी। रोध ना. पु. तीर, तट, रोक, घिराच । रोहिये० कि० धारण करिये। रोधी गु० रोकनेहारा, घेरनहारा, तटवालों रोही. ना. पु० बरंगद। रोना० अ० वि० पासूडालना, विलापना, उदा- रोहना पुः मत्स्य विशेष । सहोना, ना. पु० विलाप, रोदन, शोक । रोल एंड ना. पु'नांसबरेली के बारा रोपका ना० गु.जो रोपणकरे । पासका देश। रोपण ना.पु. वृदादि का लगाना। स.शि. पावसे खूदना वा पांद रोपना० स० कि० रोपना, रोकना, अटकाना राधना रोना शरीर के भाल, ऊन । रीताई ना सी• लड़ाई, समर, युद्ध ! रोमकर्ण ना०,पु-चौगहा, खरगोश ::. रौद्र ना. पु. झांझ, पोष, धूप, गु भयानक, रोमप० ना. पु० रोमकी जड़। पठिन, ना. पु. शृंगारादि नवरस में से एक रोमपट. मा. पु. रोमीरस, यथा, यम्मल, रोमवनराला इत्यादि। रौप्य ना.पु. चांदी, रजत रोमस ना: पु. डाइस, तमालपन, पुअर । रौर० ना• पु० रोली, जस। रोमसफलो०.ना. सी. डीडस ! रोमहर्षण | गा.पु. रोम सड़ होना, रोरय० ना० पु. मरकका खण्ड विशेष । रोमान्च रोमा सर्व. तुम्हारा । 'गद्गद। रोरो ना. सी. निसग शिरमें योग लगाते रोवा नापु० धूम धाम, बखेड़ा, दुलह । है, रोली। रीव्य. ना. पु. मनु विशेष । रोलना० स• कि रन्दारना, चिकनाना, युमा । रोहिणीय रोहणेय. ना. पु. श्रीबलदेवनी, बुध । रोली० ना. सी. रोरी, चावल और हल्दी और फटकरी की मिलौनी निसका 'लाल तिलक . माधेपरलगाते हैं। लकड़ ना. पु. काष्ठ, काट, लट । रोचना० अ० कि. रोना, गु निहोरा । सरदाराना• पु. लकड़ी पंचनेहारा ! रोशः खफादा० ना.पु. गिरर, लकड़ीका पाटकका। रोष. ना.पु. क्रोध, दुःख, गुरसह कड़ी ना. पी• लाटी, काष्ठ, इन्धन, पु. रोपण ना.पु.कालसा, पारा, क्रोध । कहा, कठिन ।। रोष. ना. पु. vi.:- लकीर० ना. मी रेसा, धारी, डी रोसना ० कि रूटना लकुर० ना. पु० घड़ी, लाठी। रोहट ना. सी. रोहन । लकुच० ना.पु. नाइल । का नाम । . . [ल] TO मङ्गलकोप। ३०७ लाखो रुपया हो। लख० ना.५० मायारा पसार, गु. जो देता वाल, प्रेम, मित्रता, विवाह का दिन, मुहूर्त । जावे मौजूदात, लाख। लग्नेष्ट ना.पु. लग्नया ठीक । लखन० ना० पु. लपण, लक्ष्मण । लग्नेष्टित गु. लग्न विचारित । लखनऊ. पु. अवधदेश की राजधानी । लग्नोत्सब १० पु. विवाहमा प्रानन्द । लखना सकि० देखना, समझना । लधिमा० ना. स्त्री सिद्धिविशेष । जखपति० १ गु० धनी, भाग्यमान, निस के पास लधिष्ठ० गु० पास, पासवाला, लगाया। लखपती | लघुता० ना० पी० छोटाई, हलकापन और लखलुर० गु• उड़ाऊ । शीघ्रता, जल्दी, रामचन्द्रिकाया यथा (कोटि खपा० ना० पु. लाखों। भाति पौनते मनते महालघुता लसे, बैठके लखाऊ० गु० जनाऊ, दिखाऊ। ध्वज अन श्रीहनुमत अतक ज्यों से)। लखिया ना• पु. दसनहारा । लक०० पु. कटि, लका, गु० देर, बहुत । लखेरा० . लहेरा, लाख चदानेहारा । लंकना ना. पु० लम्बा, चौगड़ा, शशा। लखौटा गु.निसमें लाख लगाई गई। लकनायक० ना.पु० लावा राना, राम लग० अव्य• तक, पर्यत, सीप, ना. स्त्री० लकप० पद्रिकाया यथा (लकनायक छड़ी। विभीषण देवदूषणको दहै)। लगचलना य. कि. साथ साथ चलना, लंका० ना. श्री. उपदीप विशेष । जल्दचलना। लफाधि० .पु. रावण, लकालाराजा। लगद ना० पु. पक्षी विशेष लगन ना. मी. लग्न । लकिमी० ना. श्री. निशाचरी विशेष । लगना • कि. होना, साहना, पवना, लकेश ना.पु. रावण, लेका का स्पर्शहोना, भिड़ना, मिलना, जलना, गु. लकेश्वर राना। लगा ना.पु. लगा। लग० गु. पग, पाइन । लगभग० अन्य. यास पास, निरूर। | लगड़ाना० .नि. लगकरना। लगातार०गु. एकपर एक ताबड़ताड़। बगाना० स० वि. उतराना, वासासा, मिलगर० ना. पु. नौकादि के ठहराने के लिय बहामारी लोह, लगड़ाटीठ । काना, मिलाना, रन्दकरना, लेसना, नाता, लगरी ना. पी. पाली। चिपगना, पहासुनी करना। लगूचा० ना• पु. खाने की वस्तुविशेष । लगाय. १० पु. गदार, मेल, सम्म । लगूर० पु. वानरपिरोष, हनुमाननी। वगाव ना. स्त्री. मिसान, गटावर । लगोद .. काम बापने का घोग गुरु ना.पु. साठी। लगोटा परत्र, कोपान ! ভয়মা लगोटिया ना. पु. जो लाकाशि यार है। ना.पु. यार, धग्ग। जगूया० संगोटी नार स्त्री. लगो। लगा ना.पु. स्नेह, मारा, बड़ा मांस । लंघन J. उपास, काम, उपसेन, में लग्गी ना. स्त्रीबोगरस, लाटो। मानना, नोपनमा सात सौ. निपिन, पस, रामिका उदय संघना प्र.जि.ना, पाइना बाना । संगहा .
३० मङ्गलकोप। ह M . 7 , होना। T लहान A . लर्धनी ना सी० उपाशी, गु+ उपामा, मृता । लटकाना०स० कि. हिलगाना, टागना । " लचक ना. सी. चिमहार। . myलटपाय..पु. गार। लचश्तायकि. टेदा होगा। राटपटा० मु. चचल, सिलाइ, पगड़ी जो अनरीति से नायी है। पचका ना. पु० धा, झोंक, ना विशेष । खचकाना० स० कि. टेदारना, धवा देना, छटपटाना० अ. वि. लपनहाना, टाकरखा। अगा। E Mटरटी० ० रा. टोकरही, लहरी लचाय० कि. टेदाहोना । राटा० गु० दुर्वल, दाला, पतला, सश, लुच्चा । लोचराचामा अ..ि लजलनहोना, चिमहा हागाई० ना. स्त्री० परेती घी, गु• दुबलापना लटापटा० गु० ऐसा पैसा । लचर० १० पु. ग्रा। खरिया १ ता. रवी० छार केश निन में खचाना० स० विदा वसा । लर पहनानी है। खच्छा 10 पु० फेरी। राटोरा० • पु० पती विशा। तच्छा ना.पु. लक्षण लट्ट ना• पु• भौरा, बगी, मोहित । लजलजा० गुपसलसा, विपाचपा। लट्टहोना था •ि मिसापर मोहित होना। लजबाना० अ० कि० पिलपिला होता। | लठ ना. पु० सोंटा, लाटी। लजवाना० स० क्रि० सकोच कराना, शरमा | लठालठी० ० सी० पररपरलाई की लडाई । राजाना० . वि. सोचना खनितदोना- लठियाना सकि. लगलती परना, लाठी खजारू० ना. श्री. ल नाव ती, पौषा से पीना । लजालू० विशेष, गु• सराची, लनीला । खट्टर० ना. पु.गु० दाला, ठा। लजियाना अनि लजाना । सद ना. श्री. परपति, लड़ी, या परत । तजीला गु० लाजवत सरोची। लटकपन० ना. पु. शैशव, बालकता, खज्जा ० श्री. लाज, सत्राचं हया ।।। लजाधा गु. समोचित लानयुक्त । लडफयुद्धि ना० स्त्री• चिविलापन, लड़के लनि अहि. लमायार!" जिसका ना. श्री. लजालू वश्या । लदका० पु. बालक, पुत्र, बचा। लज्जित. साचित, लाजयुक्त । लदकाई ना. सी. लड़कपन, पालकता, सहकापन० ना.पु. शिशुता । लट० चा सारा जो उसकगया है। | सहखड़ांना सटफना स्त्री हिसग,झारलाशप्रसार विशेष। प्र. कि• टगमगाना, ला बडाना। खटकन पड़ता है, फल विशेष, पक्षी विशेष, घरोनी। लड़यटाना० अकि लखशाना खटकना अ. वि. हिलगना लटका. ना. पु० टोना । झापाक, लड़ाक घरकुलो। . वीसी युद्धि। 1 मा० पु. गहना विशेष जो वर्ष में लटना० स० कि० झगड़ना, युद्ध करना । -- 8 M टोटका, लहाई ना० सी० युद्ध, समर, झगया। गु झगडाल सुद्धज्ञाता, वीर लडाका मङ्गलकोप। ३०४ + M "3 P r . का लडाना० स० मि. लहार वा युद्ध रयाना, बथेडना० सं० कि. याचट से भिगादेना ।। और लाड़ करना। बदना० अ.कि बाझिल वा भराहाना। लहियाना स. कि. पिराना, गूमा सदनिया मा. पु० सादनहारा, लदनहारा, लट्टी ना. स्त्रा. मोतियों की सर्ला। लदाय। बता गु• दुलार, बहुतप्यारा, दाट । बदान० ना.पु. बोझ, भराप, लदार।। खइ. ना. पु. मोदक जा मोटश्रादिरे बनते हैं, लदाना० स० कि० बोकना, भरना, लाद। मिठाई विशा। बदायक ना.पु. लदान, बोझ । | लदुश्रा०० पुजो लादाजाता है। लढा ना०पू० शकड़ा, तहह । लप० पु• मुख, मुट्ठी हवेली, पसर । । खड़िया स्त्री लपर स्त्री० चटक, भभक झलक पर। लढी ना० स्त्रा० धागडकडा, लदिया । लपकना य.कि लहकना भभक्ना में पएठ 110 पु० मूर्ख । वन, मपटना झपकरण। लण्ड० ना. पु. लिंग, लौड़ी लपका० ना० पु. झपट पुर्न, पुरीचाल । खण्डूरा० ० लुएडा बाड़ा, पहीन, अनाथ। लपमाना० स० वि० पिसी वस्तु के तने को लत. ना. स्त्री० धुरीचाल, पादत । हाथ बदामा लतना० स० कि० घाड़ी का घाईके साथ प्रसग उपकी० ० स्त्री० तपची रिटाया, मस्र विशप । होना। लपची स्त्री. मछली विशप रातरी ना. स्व. पुरानी जूता, दालहनविशेष । लपझप गु• पुतीला, चचल । खता. सी. बल, प्रियग, दाखवा पाया। लपटना स्त्रा० सुगध महक दहक, लनाडना० स० कि० दौरधृत राना, हल । भिडारा परना, तुच्छ करना। लपटना० अ० कि. चिपटा एना, सिमटमा, लताना० स० कि० घाडी स घाडेसासग लप० ० पु० जूगी पशा घास पिशर, लतिकान.सी. लता। लतिया गु• जिसका चालकुरी है, मुकम्मी। लपगना० स० मि. भिड़ाना, चपणा , खतियाना स.मि. लात से मारना । लगाना वलदा लती गु० लतिया। स्पर्ग ना. सा. तुपुरा। लतुश्रा०० पु. पापड़ा। लिपलप ग० भरझप। लता . पु. पुरातापिड़ा, चीया, पाव, गुरु मिथ्यावादी, महाभार लात, रामचन्द्रवाया (हनूमत सत्ता हवा देह लपादिया। भूल्या, त्या कणनाशाहिल इद्र पूल्या)। लपानी प्र.मिध्या, मृत मठ । सत्ती ना. धो. समरथी डोरी, तरन में जा लगाटु० गुरु लपारिया। लात, घोड़े की रात पटना का पर्न लड़, लपटा। जथाना पनि पाचड़ आतिम भोगनारपेाना. साबर । कराना। राम्रथा h लपाट० । - - मङ्गलकोप। T उपेटना स० कि. बांधना, बैठन लगाना, लम्मा. ना. पु. चौगड़ा, शशा । लीपना। लय० ना. पु. प्रलय, नारा, टेर, ताल, स्वर, खपेटवा० गु० लपेगगया। विनाश, अत्य तस्नेह, ना. सी. चितवन ! - खप्पार ना. पु. कपड़ा जोपादले से बिना है। सद्या ना. पु. फेंगे, बारी। खचड़सवड़ ना.पु. बकझक, भूल सच । ललक० ना. सी. लहर, तरंग, नम्रता । खयदा ना.पु. भूठा, की। बलकना. अ.कि. चदना, धावाकरना, न. जयनी ना० स्त्री. मिट्टी का पान जिसमें ताड़ी म्रता करना। चुनाते हैं। ललकाना० स.वि. झगडा उटाना, लहान्य, जयलय० ना.पु० पथरी, दसष्ठ, उल्लू । नम्ररना। खपलमा गुरुचिपचिपा, लनलना। ललकार ना० पी. हाक, पुकार । खयार० ना.पु.कवादी, मूदा, गप्पी। खलकारमा सकि. पुकारना, हाकना और लयोनास्त्री.साड वा जलाव जन चीनी लड़ाई मागना, प्रचारना। बनाने को पकाते हैं। ललगएडा० ना. पु. वानर, कपि । लपेदा ना.पु. सोया, लठ विशेष । ललचाना० अ० कि० तरसना, जीलगारहना, सपेरा. ना.पु. फल वा वृक्ष विशेष, लभरा। स.वि. तरसाना। खग्धगु• प्राप्त, उपानित । लरना ना. सी. खिलाइ नारि । खब्धि गु. प्राप्ति । लला ना.पु. छोकरा, लौंडा। सभेप ना.पु. वृक्ष चा उसका फल विशेष । ललाट ना पु. माषा, कपाल, प्रारब्ध, खम्प० गु.मिलनहारा, मिलने के योग्य । ललार पेशा। खमछड़ा० गु० उचा, लम्बा । ललित. ना. धी. रागिनी विशेष, ग. लम्पट गु. झा, यसग, सेरण, दुटखेल, मुदर, घरदा, लौकता भया । परस्त्रीगामी, व्यभिचारी। ललिता ना. स्त्री०सी, धरलेल, देवी प्रसिद्ध खम्य. ना. पु. अमूद, धीरेता, ऊचाव । थोराधिका की ससी विशेष । खम्बकर्ण ना० पु. शशा, चौगड़ा, खरगोश । ललिया ना. सी. र ली। लम्या गु• ऊचा, दीर्घ, बड़ा। ललियानास• वि० फुसलाना, बहलाना, श्र. लम्बाई स्त्री. दि० गिडगिडाना, तमतमाना। लम्यान० ना.पु. लली ना. सी. छोरी, लौड़ी, लड़की, गु. लम्चना स.नि. लम्बाकरना, दाना । दौला, नपुसक मनुष्य । सन्धित० पु. नो लटकायागया । लल्लोपत्तो ना• पु• चावलोसी, सुशामद । पश्यियाकरना. घ. कि. कलोल करना, लघ० ना• पु. अश, हण, पीसीवानी कायोग पुत्र विशेष। लम्या ना. स्त्री. गु. ऊची बड़ी। लग ना. पु. लोग, वृत विशेष खग्यासासभरना . पि. रोना, विलाय | लषण ना. पु. लो, नमक। करना नवणसिन्धु. ना. पु. सारी समुद्र । लम्. एम्मा । खरगाम्यु० पुल समुद्र, सारीपानी। सम्शेदर० ना. पु. योगणेश जी। लयमुर० 11- पु. लवनामुर, दैत्यवानामहै। 3 उचाई, दीपन ।
मङ्गलकोप। . + । . - - पवणोद० ना.पु. समुद्र सारीनला। लहना० स० कि.पाना, खाना, य.शि. लघमात्र० गु. अन्य. थोड़ीदेर, सयभर । पला, काम धागा, ना.पु. उधार, धर्ता, लवा० ना. पु. पर पड़ी। प्रारब्ध। लवाई ना. स्त्री-थोड़े दिनकी म्यानीगाय । लहयर० ना० पु. तोता विशेष। लश्टम्पश्टम्० गु• उलयापलग। | खहयेरा ना० पु. पौधा विशेष । लशुना ना० पु. लहसुन । लहर० ना० पी० तरग, हिलोर, साप विकी खपण ना० पु. श्रीलक्ष्मणनी। जो तरग पाती है। लपणपुर.ना.पु. लखनऊ नगर विशेष । लहरयहर० ना. श्री. सुभाग, सम्पत्ति । लस० गा. सी• चिपचिपाहट । | लहराना० अ० कि. ललचाना, हिलकोरना। खसकरा. कि० लजलजा होजाना, गीला लहरालगाना० स० कि. टाला, उड़ाा पाई होना। परसात लसना० अनि सोहना, सजना, फवना, लहरिया० गु० जो लहरको रीतिपर हो । चमका। लहरी गु• तरगी, तरल, योगा । खसलसा गु.पिचरिचा, लसवाला। लहलहा० गु• विकसित, प्रफुखित, हरा । रासलसाना०प० कि० लसलसाहो। लहलहाना० ५. कि. सिलना, पूलना, तसित गु• लक्षित, साहा । हराहाना। लसियाना प. किपिचपिचाहोना, लस खहबोट० गु. जो उधार लेकर फिर न देये । लसा होगा। | खहसुन० ना. पु० फन्द विरोष। खसी० ना. नी. लस। खहसुनिया ना. पु. रन विशेष । पसीलार गु. निसमें लसहोव । लहावेह. ना. स्त्री. शंघना, जल्दी। लसोडा० ना. पु• पल विशेष निरा में लस लहास० ना.सी. र नापनेपारसी। EGIAIO लस्सी. ना. लसी, दूध पार पाई। | लाहियत. नि. पाता है या पाते हैं। लहंगा० ना. पु. फंपरा, परया। लहुर० ना० पु० सीधता, जल्दी। लहाना. सी. चमा, मनुक। रह ० पु. लाइ, गपिर, गन । पहकना प.नि. हिलना, चमाना, मन बहुधा० न० पु. पौधा । पना, मिटकरी सा सहौर० ना. पु. कादर सहकाना० स० कि. गिरकरी से गाना, चम-लहौरी गु• गा लाहौर का। रक्षा• पु. सौहवार, १....., सारा, पाना, दहमा दरकारा। लाहकारना० स• कि गुफकारना, परदाय यह सास निराकी नही पाती है। सदाए ना. पु. चिक, मुगलसरानी। सहकारट 71.सी. मरदहसार। लताकिलोक्त, दंगत। लहीलाग. चमकीला, मासा। सक्षित गु•प्रमाशित, ना देख पाता। राहकार ना. सी.मार जी दहा सदमए ना.पु. रामवीर माई। राहीर दुलन सा । , दहा तारा नाम010 T• सी० रारम पदी, मौकृप्य हिसार में सिलाते है। पदी पणानी निगर, मोरीगई।
मङ्गलकोप। " 24 * . - A F लक्ष्मी ना. श्री. सम्पत्ति या धन, फमला, बाइला गुरू प्यारा, दुलारा । । रमा। | लाडलीना. सी. प्यारी, दुलारी 1."-" वक्ष्मीफल ना.पु. भीफल, पित्त, वेल । लाडू० ना.पु. ल । लक्ष्य० गु० नो देतानावे, ना. सी. लक्ष्मी, लात. ना. स्त्री० पाकी मार, टेग, पाव । निशाना। लातिन्० ना. सी. माता विशेष । :) लाई ना. श्री. धान र लारा, रिजराई। लाद ना. सी. बोझो खांधना स.नि. फादना, वूदना । पादना० स.कि.बोमना। लारति. ना. स्त्री-रदा प्राकार, रूप । सादिया ना. पु० बोननहारा । लाख ना.पु. लद, लाइ, खासा निसी चूसी लादी० ना. रपी० घोटीलाद, धोनी के कपड़े बनती हैं। गठरी। लाखनास.शि. लाख लगा जादू० गु• जो सादो के योग्य या लादागया। लाखो ना. स्त्री. लालरंग नो लाख स निकालाना स• दिले याना, जनाना, उपनाना, लते हैं। न्याना। लाग ना० पु. भैर, शत्रुवा, देश, स्नेह, घोह, लापाक. ना. पु. भूगाल, गीदड़। भाव, मोल, नगाई, सौर, प्रसूर, भेद।। लाफना० अ० कि. बूदना, उचकना ।' लागत ना. स्त्री० दाम, मोल । लाभ० ना० ५० प्राधि, उपानी, फल, नफर लागनाथ.शि. लगना। लायना.पु. अगि। लागी० ना. सी. बाद, स्नेह, छोह । खार० ना• स्त्री० थक, पुरसका पानी, राल। खागू० गु. चाइनेहारा, पिछलगा। लारी ना. मी० लार" लाय ना. पु. ग्रारोग्य, शेमकुशल, हलाई, लाल गु• दुलारा, प्रिय, रसवर्ण, ना० पु. सूदमता, उभीसमय, जल्दी, शीय । यालक, रत्न विशेष, पती विशेष । लांगत ना.पु. हल । खालच० ना• पु० लोभ, तृष्णा, अदेव । लांगली० ना० पु० किसान, नारियल, श्रीनल लालजी० गु• लोभी, शाका देव जी। लालड़ी ना० नी• माीक चुनी । लांगूल ना. पु. लोम, पुच्छ, पूत्र । बालन ना. पु. बालक, ना० सी० तलना। लांगूली. ना. पु. कौंचवीन, व नर । | लाराममह ना० पु० मर्स-जो अपने तई लाज. ना. स्त्री. लग्ना, सोच, हया । ज्ञानवान् जानता है। बाजना०.शि.लान करना। लालमधु गा.पु. सहिनना वृक्ष! लाजवन्तःगु• लनाला, सरोची, वुलवत । लालसा ना० ख० इच्छा, चार, तीक्ष्ण, खाजा नास्त्री.सोला। चाहत। खामा ना.पु. लस) लाला ना• पु. वैश्यादियों को पदली, यावरण लाञ्छन० ना.पु.दोप, पार, चिड, क्सक। बिशप जो बााक पदाता है। सार० गा. स्त्री. स्तम्भ, खम्भा। लाठी ना. स्त्री लाड़ी, घो। राना.. प्यार, इखार । राधना.पु. रस्सी, लहास । . । 3 ~ " J लालादिक ना• पु• माराधीन । खाचित्य० ना० पु. मोहरता, मोमलता। लठ चमा मङ्गलकोपः। * टना। लस, डाली। टाना। : लावण्य० मा पुगी सुन्दरता, लग्न, निहोना सी टिकिया अंगाकमी, माटी पापण्यता का स्त्री० बढ़ाई। लावलाव. ना. पु. लालच, अधीर। नियना० किलथना लाया० ना. पु० सील पूला। बिधाइना० स० किलपना लासाना पु० चेप, महादेव, रेलिपटना निविपासा, चिपटना, रा. लसदार, तिब्बत देशमा वाह. ना. पु. कपड़ा विरहान नगर, लिपटाना० स० किसटाना) लगाना । चिप लाहा गा.पु. लाम।। खाहीमारतीपीया विश कवि मा विपक्षी गात्री बहुत दिनों की पगड़ी विशेष । लिगवाना० १.स. कि गोमग मादिरो पो लिपान तवान ना० पु. लास, घनद्ध खाह० দিবিনা বাধে, রিবোথর, ধরেন खाहौर० ना० पु. पंजाया गया। लिपिफर० ना. पु. लेखक :, ". लाक्षा ना. सी. सार, इन वित गु० लीपागया, सीन, मशगूल: लिये० अन्य निमित्त कारण, रान्ते । लिखतं. ना. पुलियाना न माया करपाना । लियाना० स० कि० ग्रहण करवाना। लिखना० स० विना मगा। लियावाना० स० वि० लेके याना. यशाताया। जिधयाना पु० रेपिया। लिखनी 'ना. सी देशों लिखनीदास देवर, दामगा। | लिसीदा० ०५. लसीका। लिखा० ना. २०, या विहादा गु०प, गित । लिखाई नाशि प्रदान यापमा । लीतना. श्री. गायका गार्ग, पगदी, लिखाना० से.रि. मंदिरा मर्याद, पतंक, लकार। बीमा गा०, २० घोटाकापफीट, प्रधान न्या। लिखाय ना.. लिपायटना 'दीची ना. सी. विशेष । लिपिसारा लोमी० गा. जी मारि, रण.. लिंगा ना. मश, गोरग को वोलीनाग ना. • पुगो मा पन्द्रिय, गन्न राशि देन रिंग अंधात रसी, खाद० ना. रा. भाई की fat I am पुर, नमक लीन तमया साधा मिमाया Imm. प्रपा, योग्य। लिवुनै परिश लीम गा.प्राध, मलमिare it है . या काम। लीचा गु, गाय, मंजस, एम 1 5. Fif; 11 . लिंगी र मन्दिर, मेदनाशा सिमडी मा० १० का , पानी ? सारी सिटमामी! लिम्य ना. पु. हनुया धादि भोजन | लीना मुनास, iiient विमानापन सीखना 1 ३१४ मङ्गलकोप। ~ T विरोष। लीला०, ना. सी. कीड़ा, विहार, खेल, चरित्र, लुहका नावानरा भूषपशेिष।' गु• नीलवर्ण । लुइसना० १ . कि. 'मान, नील लीलाइव लुदरना जाग। .लीलावत् गु० ख्यालहीमें लीलाके प्रकार। लुदना० अ० कि. लुढ़का। लीलावतो. ना. स्त्री. गणित की पुस्तक नुदाना. स.नि. मिरादना, उगराना । लुदिया० ना. रथी दाग लोद । लुक० ना० पु. गिरनहारा, तारा, लूक । लुदियाना: स. नि० पपड़े को खड़ा करने लुकना .शि.पि। दूसरे बार सी। लुका गु. गुप्त। लुण्डा० गु• बाड़ा, पुच्छहीन । लुकाजन ना० पु. थननविशेष निमक | लुनरा० ना.पु. बहरड़िया, उधर का घर लगाने से मनुष्य अदृश्यहा जाता है। और इधर की उधर करन हारा। लुकान० गु• गुप्तहुश्रा, छुपा, ना, स्त्री लुपरी ना. सी. भोजनाशेिष । दिपावर लुपलुप. ना. पु. चमाचमड़। लुबाना कि विपना, स. कि. दिपाना, लुप्त गु० गुप्त, लूर, नारा । गुप्त करवाना। तुम्ध गु. लालची, लोभी। लुकापना० स० वि० विपावना, गुप्तकरवाना ! लुन्धक० ना• 'पु. परिक, लुवा, लम्पट । लुगाई ना. सी. औरत, खी। लुभ मा० स० वि० ललचाना, नीचगाना। लुंगा ना. स्त्री. मधुककड़ी। लुम्पक० ना. पु. राजाविशेष, नाशक । ... लुगी ना. सी. धोती विशा। लुम्पित० गु• मिरायागया, नाशित । लुच० गु. निरा नन। लुहएडा० ना• पु. लोहेका पात्रविरोष। लुई० ना. रवी पूरी विशेष । लुहराना. पु. छोग। लुचपर० ना• पु० नष्टता, अधाई, शुहर लुहांगी ना. स्त्री० बी निममें लोहालगा -- R - . पन। लुई० 11. स्त्री• लुचपन, कुकर्म । लुहार ना• पु. लाहकार, नातिविशेष । लुधा ना. पु. कुक्मी, लुचपन करनेहारा । लुहारिन ना• स्त्री• लुहार को नौरू । लुजलुजा गु• जलजा। लू० ना. स्त्री. ज्येष्ठ वैशात की गरम वायु । लुंज. लूघाट गु. लूट। गु० अपाहिन, लूला, हाथोंसे होन। लुंजा लूक० ० पु. अग्निकी लुकेटी, पतिततारा। लुटना य० कि. लूटहोनाना, लूनाना। लूकट० गु• अधनला। सुटवैया १० पु. लु। ल्क टी ना० रत्री• दुल्नी, घोगलूकर। लुटामा० स० कि० गशना, उड़ाना, लूट लूकनो अविसू से जलना । लूकयानास्त्री. अगवाही, यही दी लुटिया ना. सी. बागलागी पालीको जलाकर परके बाहर डालते हैं। लुटरा० लूका ना० पु. जलनी हुई चिनगारी। लुटेरू. ना. पु. लू करनहारा, उपाऊ लूख ना स्त्री. नोच, सूका । लुइस ना.पु. लूट, बिगाड़, सयानारा। लूट० ना. स्त्री वस्तु का मरनस छीनना । करवाना। -- .
मङ्गलकाप। म M लूटना० स.दि० बरनस पीनलना, उदाना, पपड़ना० स० कि. सगाना, मैलन करना, गवाना। अपने क्लास दूसरे का फंसाना । लूटालूट० ना० सी० लूया का काम । लेपना. स.कि. पातना, सुपड़ना । लून० ता.पु. लाप, सान, मक। लेपालका ना.पु. धर्मका पुत्र, पोन्यपुत्र । लूनिया० १० पु. लाा बनाोहारा, नाति | लेपालना स० कि. मग करक लेना, पाप विशेष पौधारिशेप, गु. लोना । पुर करना। लूनी ना. सा• मक्सन, सोगा। मरना. कि. दलङ्क लगाना, दापदना। लूताना. सी. मरही, व्याधिविशेष। लेयमान गु. जो लोवाला है। लम. ना. खा० पुग्छ, पूद, दुम । लूखा० गु० दृरणा | लेका T.पु. पदरा लूह० ०ी. लू । | लेला० . पु. भड़ी का कच्चा । लूदर • पु. लुकग, लूक, पतिताछ । लेलिह. ना.पु. सार, सर्प । खे० अन्य, रो, तक, दलक। ई. ना. स्त्री. प्रहार, ना पहा आदि में लेट गु० तया लूट, लहल्ट । लेलीतिक० १० पु. गर । लते हैं। बेखना. स.कि. ग्रहणासा, धान लेना। लेडी. ना. रत्री• मंगनी, गरी प्रादि की लेख ना. पु. भरत की पपकी जो गिरने योग्य विष्ठा। है, एक बारवा फराव। बैंदा० ना० पु. गेह। खेवा. ना. पु. छोटा पाखरा, लनहारा, पन, देखा. पु. लिखना, लिखित, तहरीर । सीरी, रोग पकाने के पर्तनों पर नो मिट्टी लेखका. पु. लिरिकर, लिखनेहारा । लगाते है। देखन० । पु० लिपि, लिखाई। लेयादेई ना. ना. सनदेन, बहामनी । लेखनी० ता. २० प्रलम, लिसनी । लेयार० ना० पु. गालीमिट्टी का दीवार में लेखपमा ना.पु. इद्र, दवरान । लगाने । लेखा. ना. पु. दवता, पती, साव, लेवा पु० तवा में लौटना । चीनक। रेवास. ना. पु. ल लेप ता. पु. पत्र, विट्टी, लिसागया, तिखने | लेवैया० ना. पु. लनहारा । के योग्य। लेश. गु० दोग, थोड़ा, ना. सी. पाई। लेख्यपत्र न.पु. भोजपत्र । बस ना० पु. भूसा मिला मिद्या की भीनमें खेजाना० स० कि. टा, लेभाग्ना, नातना। लगाट, तीप पात। हेट. ना. स्त्री. नादि वस्तु भीतपर लगाने के लेसना स. कि. लीना, पातना, सुलगाना, लिय। पालना, झगड़ा उठाना। खेमा० . कि. पोदना रोना पड़ा। लेसालेस ना.पु. लीपाली लसौश्रा० लेनदेन ना० पु. व्यवहार, व्यापार । लेना स० कि. ग्रहण करना, पकड़ना, इना। लेह. ना. स्वा. शाप्रता, उतावला, घटावद। खेप. ना. पु. लर, सड़न, शरार में पाने लेहन . पु. चाटना। की रविश लेहना० ना• पु• चारा। 0 .
मङ्गलकोप। ५. . लोई ना ली औरत, कम्मल, स्पा, पुरषकी खोघरी ना. सी. लेध • पु० अमृत,गु जो चाग्ने के योग्य । लोदियासी० छोर लोदा। वैस० गु० सिट, मोललिया, ना. पु० तुवा, लोथ० ना० सी० मृाशरीर, मृतर, शा। सिरकाशिष। मासरा टकहा। काति, थारेका पेड़ा। पोथा ना.पु. बोरा, गो। लोकयन्य. तर, तलक । लोथी. स्त्री• लोहमदी लाटी, लोहपी । लोदा. ना. पु. देला, पिंडा। | लोदी० ना. पु० जातिविशेष । लोक० ना. पु. लोग, मनुष्य भुया, दीप, लोध० . पु. जातिविशेष, वृक्षारोप, चौपपिविशेष घ्यावरण, यम, यश, नाम, कति, सती कादि। लोधा ना० पु० जानिविशेष, रिसान । लोकना० स० दि परना, गोचना। लोधिया .पु. जातिविशेष । लोकनाथ • पु. लोय का स्वामी यथा लोन: ० पु. लपण, THE ! द्रादिक । लोना० गु० सारा, सदर, नमकीन, १० पु. लोकप ना० पु. राना, दिक्षाल, लोक पलविशष, पौधाविशेष, लवण नो भीति प्रादि खोकपाल का पालनहारा । से गिरता है। लोकसंख्या सा० मनुष्यों की गिती! लोनाईना स्त्री• सुदरता, लावण्यता, रामायणे लोकालोक ना• पु. पर्वतविशेष जो जगत् यथा ( जातसराहत सीयलोनाई)। की सीमा है। लोनार० ना. पु. खारामि, खेलाडी, स्थान लोकेश. ना. पु. ब्रह्मा, लेक्निाथ । निसमें लवणबनाते हैं, जानिविशेष । लोखर० ना• पु० हथियार, लोहे का पुराना लोप० गु• अश्य, चम्पत, अगोचर,गुप, नाश । लोरडी० ना. सी गली वस्तु का गोंदा, लप लोखरी ना. सी. लामड़ी। लोखा ना. पु. प्रात काल, ऊपाकाल । खोपी० गु० अदृश्य पत्ता, अंगाचर करनहारा, लोग ना. पु. मनुष्य, जन । गुप्त हुया। लोगाई ना. स्त्री नारी, स्त्री, औरत । लोचा ना. स्त्री. लामड़ी। खोचन ना• पु. नेत्र, घाख । लोबान ना.पु. सुगधि द्रव्येपिशप । लोचनता. ना. स्त्री. रष्टि, नजर। लधिया. ना. पु. अनविशप जिसमी फली बोचना० ना० ची मुन्दर स्त्री । वी तरारी बनाते हैं। लोटन० ० पु. पटकन्, मडलिया, भाइ विशेष लोम. ग. पु. लालच, कृपणत, परीक्षा, घोटना क्रि० पटकना, तल पर होना, मोह । तलफना, घरपटाना। लोभना० अ० कि. मोहित होना, लालच लोटपोट ना. गु० नो लोग्ता, चैनरहित, जो करना। तखफगया। रोमनीया० ना. सी. महामुरडी । लोग ना• पु० जलपान विशेष । लोमीर गु. लालची, मोही, राम, कृपण, शोदा० ना• पु. सिलपरकारहा। श्रदाता। पात्र। विशेष पगा। -- मङ्गलकोप। . -- पाक . ना पौगा। ८ M बोम. ना. स्त्री० रोम, पूत । लो० अन्य लों, तक। खोमड़ी ना० पु० जगली जतुविशेष । लोग ना. पु. लवगा लोमश ना.पु. मुनिविशष, चिरजीवी। लोगी ना. सी. पालतू कुतिया गम । लोमसी० ना. सी० ककड़ी, वच प्रोषवि । लौडा० ना. पु. चेला, छोकला, लिंग । खोयन ना.पु. लोचन, नेत्र, ग्राख । लौंडिया स्वा. छोरी चेली। लोर० ना.पु. लोलक, पास् । लाँडी० लड़की। बोल० ना०पु. भासू प्रातकापानी, गु० अधिर, लोद. ० पु. अधिक्मास, मलमास :- चलायमान) लोकना श्र.नि. चमकना। लोलक ना० पु. पानका भूषणविशेष । लौका० ना० पु. कुम्हड़ा, विनी, चमक, लोलिनी ना० स्त्री. गटनी, चलायमानत्री। खोलुप० गु• अत्यन्त लोभी, व्यभिचारी । लौकिक गु० लास्कायवहार, जो लोकहो। लोट ना. पु० देला, लाहा । लौकी ना. स्त्री. पर्वती लोकी, रामतुरई। लोह. ना. पु. लोहा। लोहकर्पण 1. पु. चुम्बक । लौटना० अ० कि. फिरना, पलना, धूमना। लोहकार० ना. पु. लाहार, नातिविशेष, जो लौटाना० स० कि. किराना, पलटाना, माना। लोहेका का काम बनाताहै। लोहा० ना. पु. लिंग, मदनाकश । लौह ना• पु० लहा। लोहचून ना. पु. लाहकाचूरण । लोहचूरे० ल्यारी ना. पु. भेड़िया, हुण्डार । खोहएडा. ना. पु. लाहकासात्र, वडाह । [4] लोहएडी ना० वी० लोहे की कड़ाही । लोहपूरे० गु० वीरतायुक्त, हथियार वाथे या घश ना० पु. स तान, घराना, सुल। जजीर पहन। घशकार १० पु. वासफाइ, डोम, भगी। लोहसार०१० पु. लोहे की खानि, गुमा। यशज० यशराचन T० पु. यस्तुविशेष जा बास योहा० ना० पु. धातुविशेष। घशलोचन में से निकलती है। योहान गु• सोडूभरा। यशक्षीरी लोहानी ना पु० पठानों की जातिविशेष । वशारली. ना. स्त्रा. पीदी, पशकी परिपार्ग, लोहार० ० पु. लोहार। शजरह। लोहारिन० ० स्त्री. लोहारपी जारू । घंशी. ना. स्त्रा० मुरली, नारा। लोहिस० गु• लालवर्ण, रक्त । घंशीधर ना • पु. श्रीकृष्णचन्द्रमा एकनाम । लोहिनांग ना. पु. मगल तारा । घंशीवट ना. पु० निसस्थान श्रीकृष्णाचार लोहिसरत ना. पु. पानााषि! लोहिया गु. ना लाहे से यह जा लोहा पशा वनाग करत थ। यपु. गुला, अगस्ति सोही. ना. सी. कम्मल, वाला, पाह, परण, यकहंसना पदाशि रेशमी बारिश वकासुर० ना० पु• बगुलाम्पादेशिप सोहर गा.पु. रुधिर, रहा। विकी ना.मी. नगली यगुलामी। . H , - 1 ne 1 मङ्गलकोप। . . है पाल ना.पु. मौलसिरी दृष्ट । पत्रक० ना. पु. भूगाल, प्रनार, गु०"उग, वक्तव्य गु• करने के योग्य। घली, कपटी। पता० ना पु. कहनेहारा ।। पशकता. ना. स्त्री. दसर्म, टगई, चोरी। यक.ना.पु.मुख, मुह । पश्चन T• पु. ठमविद्या, पल, धीरसा।। घमा गुरंदा। | पचना० ना. स्त्री• प्रतारण, टाई। परसुतक ना.पु. ऊर। यशित गु• प्रतारित, मलित, टगागपा। पागति. ना. सी. बाकी चाल, रदीचात, घची गु• प्रतारक, उग। शके वा रेदेकी चाल। घजुल० पु. पशोक्त। पाणीव. ना. पु. ऊर। घटना.पु. परगद, पण्डित, प्रामण। घाला. श्री. नाकापन, टेदाई, निर्दया, परिका० ना. सी. बरा, बट्टी। धादि कर्म। घटु ना.पु. बालक, ब्रह्मचारी। याना• पु• द्वारा, तरुण, भरतविशेष। करागी ना.पु. तारा शुरू। |वश्वाग्नि पक्री.गुरेदा चलनेहारा । ना. पु.समुदकी मग्नि । घड्यानल घमोक्ति नाही. टेदी बात, कटवाद । घडिस. न. सी. नसी, मक्ष पकाने का एफ. ना. पु. नारा, टेदा। कागविशेष। पपता ना.सी. बादापन, दाई । घणिक प. पु. गनिया, व्यापारी। धकी. ग. स्त्री. हुरी। | वणिज. ना. पु. व्यापार विनारत । पगसेन ना.पु.गस्तिदृप। यत्० प्र०य निरा शब्द परे इसका प्रयोग हाये यच ना• • औषिविशेष। उसका अर्थ रा रा रामझामाता है यथा देववत् पचन ना.पु. बावरा, मनिवास, पा, म अथात् व सहना | यत्स० न • ५० शिशु बक्षदा,वर्ष छाती, हृदय । पच्च ना.पु.बपड़ा। यसताना श्री. बचिया। पदजगु. पमल। घसर० ० पु. दाहाल, सला,वो साल । पन्न ना. पु. रिजली, इद्रा अमपिरोष पसराय गु. वर्षा, बरसोही । गु• पतिकरिता पसरायगमन • पु. मू के चारोंबार पाकग्द. मा. पु.तिमीरन्द। प्रहांग रमा ययतुगष्ट १० पु. सेहवृक्ष । पसल० गु• प्रिय, धाही, दयावत, याप्त । यसवाष्ट्रक. ना. पु. हुसहर । पत्सवता० ना. बी. प्यार, दया, पोह। पघा यत्साद.ना.पु.गुरच। ना. घसासुर० ना. पु• बाली देशविरो! पनाग ना. पु. कटितवन । यदा ना.पु. मुत, रूप । पांगीर न. पु. हसिंघा क्ल, अतिकटी पदना ना. सी. मुरती, रूपी। सनविगा, तुमाननी। पदनिकिकहते हैं। यस्ता बदरीना.पु. भातखएर उत्तर में तीर्थ । यमी पुगे। पदरा ATपु. तीविराम । पार, पी .
मङ्गलकोप। . 3 पन्दीजनपु• भार, दिसोधी । . ह - पदरीपा० ना.पु. वनविशप, यदरीदे समीप यन्दनीय० गु• सुति के योग्य, मस्सार के पा जहा पदरीनाथ है। योग्य । पदरी० ना० स्त्री. परीक्षा। प्राचन्दा ना. पु. पौधाविशेष, याकाशलता) बघ ना.पु. हत्या, मारामारी। .. धन्दी०१- चधनः ना.पु. मारपहतन। बधश० ना• पु• पशी इत्या, वन्ध० • पूज्य, सेवायाग्य, स्तुति योग्य ।। घधिफ ना० पु. खेकी, हत्यारा शिकारी। चन्धुजीर० ना. पु..दुपहरिया या पुष्प पन० ना.पु. परण्य, जगल, पानी, मेघनास । यन्धूक वा वृक्ष। चनचर० मा. पु. जो या चरे, यथा वातर यन्धूप मवली पादि। धन्य० गु० जो वनम पाया में हो वनवागी, चनम० ना. पु. कमल । बोला, मूर्ख । घनप्रिय. 7. स्त्री० फोयल । पन्या० गु. स्त्री० वनी वा जलको बहुतात।' घनमअरी • स्त्री. सँगालू । | पहि० ना. पु. अग्नि, भाग । वनमानुप० पु० जगली मनुष्य, वारनाति पहिमुखी० ०सी० पलिहारी। विशेष। यहिरुचि० ना. स्त्री. मालगुंगी। घनमाला 1. स्त्री. पामाला। घनिशिस्त्रा० ना० स्त्री० लिहारी । पनमालिकाना स्त्री. वाराहीकद, मामाला। पपग० ना० पु० मुण्डा, बोना वीर्य । घनमाली गा.पु. श्री पचद्रका एक गाम, यपुःना• पु० शरार, देह वनमाली। घनयाना० ना. स. ग्रन के चोरासावा | यपुरा० गु• तु छ, च । यी यात्रा। घपुप० गा.पु. शरीर, देह, ता। घनघारी • पु० श्री पनी, वामाली ।। पता० ना. पु. पिता बीजवानहारा । चनवास ना.मु. या में वारा। | वz० ० पु. ये ला। पनवासी गुबना पसनेझरा । चम० ना. पु. महादेवजा का स्तुति बोक धनविलासिनी ना. स्त्री. शसाली । वनस्पतिक ना० स्त्री० वृत, मिस वृक्ष म फूल यमन० ० पु. / पर्दि, उछाल । पिना फल हा। घमायुज० ना० पु. घोड़ा। घय० ना• पृ. विहग, रामय, निश्चय, आयु । पनिता ना. सी. प्यारी, स्त्री, त्रिया। चय • ना० पु. वय, जो घायु बीती हो। पनी०. सी. छोटा जंगल । वयसा० ना• 'स्त्री. सती, दूती। घat० गु. वा। ययस्था० ना. गुरच । घन्त० अन्य निस शब्द के परे यह श्रावे उस का घयस्थ ना० पु. निकी आयु समान है, अर्थ रत्तो या एचक होता है, यथा दयार त हमजोली। अर्थत् दया कारक। घर० ना. पु. आशिष, पदार्थ, दूल्हा, कालो दृत, गु. सुदर, अभिराम, श्रेष्ठ । चन्दन०, • पु. लुति, उमसार, घरपएिठका० न • स्वा. संतावर, घतावर ।" पन्दना ना. सी.णाम । १ . - TO . " P प्र मङ्गलकोप। H घरटा० ना. श्री. हसिनी। | वरेपी० नासी. वरटहराना, मॉमी पर घरतिक ना.पु. पित्तपापड़ा। कन्या का होना। घरदा० ना. श्री. असगध, वरदाता। घरोहका ना.पु. अमगध । घरदान० ना.पु. बाधितदान, ' विषाह या घर्ग० ना. पु. एकनाति का समूह, एकोच्चारण दान। चतर, किसी प्रक को उसा में घात करनस नो घरदाम्परी० ना. सी. बड़ी सवावर ! गुणन पल। घरदायन ना. स्त्री० वरदान देनेहारी। चर्गक्षेत्र. ना. पु. निस उनकी चारों मुगा घरपीतक ना. पु. पवरफ, अभ्रक । समान और चारों फोण समकोण हों। परलोक. ना. पु. स्वर्गविशष । धर्जन ना. पु. त्याग, निषेध । घरवएड० ना. पु. तेजखी, वलवान्, जबर | पर्जना० स० वि. त्यागना, रोकना, रहित करना। घरवर्णिनी० ना. स्त्री. हल्दी । घर्जनीय गु० जो त्याग के योग्य है, अयोग्य, घरवर्णी ना. स्त्री. सदर, सी, रूपवती। कुपात्र। घरस्त्री ना. स्त्री. वेश्या, पुश्चली, पतुरिया। पर्जित गु० रहित, निपेरित, जो बन गया। - घरह. ना.पु. पत्ता। वर्ण०० पु० रक्त पीत परयादि, थहर, घरा० ना. सी. बकुची औषषि, ना. पु. द्विजादिक चारि, स्तुति । न्यजन। वर्णन. ना. पु. बसान, क्थन, लिसाई, स्तुति, पराक.ग.पु. देवता। रंग, देन। वराकट ना० पु. गौदी, हिकी कोलिखित । पर्णमा ना. स्त्री स्तुति अ० कि. कपाता। यराट घणमाला ना.स्वा. मस सब थहर, ककहरा, पराटिक ना. स्त्री कौड़ी। वर्णपती ना. स्त्री हल्दा। पराह० ना• पु• शकर, श्राविष्णुनारायण का पर्णशङ्कर०१ ना. पु. जो दावर्गास उत्पन्न तृतीय अवतार। घणसकर हुआ, दो। वराहकणी ना. स्त्री. असग। पर्णात्मक T• पु. निस शब्दप पदर अलग घराहाख्याना.पु. नागरमोथा। अलग सुनपड़ें। घरिष्ठ ना• गु. अतिश्रेष्ठ । चर्णि ना. सी. कसर । घरू० अन्य. पाहो, प्रगधि । वर्णित. गु.जिसका वर्णन होचुका है, कथित । घरुण ना. पु. वृतविशेष, जलका दवता यर्तनना. पु. जीविका, गासन । मुस्य, जल का सामी , जल । वर्तमान ना.पु.गु.इसीसमय का बास । पदपा० ना. श्री. वरुणी स्त्री। पर्तलोह० ना• पु. पीतल । घरुणावती ना. सी. वरुपलोक । ना. पदस्थ ना. पु. समूह, राह, यूथ । फ्लम घरची ना.की. सना, फौन । घरे० अन्य इसपार, घर, समूह । घरची • स्त्री• अकोल.. यहरों का समृद। - पराटिका R या परेपर लिसन के लिये काठको घतार ना• पु. बटरपही। वत्तिर. ना. पु. पटरपक्षी। घातिका ना. स्त्री. बत्ती, पारपती । 4 मगलकोप। ३२१ घर्ती गुरुवर्तनकरनेहारा। घलाट. ना. पु. मूगा । पर्तुल० गु• गोल, गोलाकार, मार, बन्न । घलावा० ना० सी० सिरहटी । वर्द्धन०मा० पु. वृद्धि, बढ़ती । पताहक० ना.पु० मप। वर्द्धमानक ना० पु. दोनों अरण्ड । चलिना. पु. भेंट, बलिदान । घ ० ० पु. देल, वृषभ । यलित गु• भरा पूरा संयुक्त। पति गु० भदाहुया, फैलाहुया, अधिक । चशिपुष्ट धर्म० ना. स्त्री० मास्तर, सच । वलिभुक ना० पु. वोया, काग। पा० ना. पु. क्षत्रियों के नाम या उपपद, घलिरसा ना० स्त्री गधक । काठ में छेद करने का हरियार । वलिष्ठ० गु. बलवान, पहलगाा। वर्य 0 गु० श्रेष्ठ, उत्तम, अया। चलून 7. पु. अाकाश में उड़ने की वस्तु, पली नापु. नदीका इसपार । गुब्बारह। पर्वर० गु. अधर्म, यमाही, पावला। . वल्कल ना० पु. वृती छाल, भोनपत्रादि वर्प० ना.पु. वृष्टि, पृथिवी का सरडविशा,साल, चपला। बारहमासका समय। यल्लकी ना. सी.ईगा, तम्बूरा। घर्षण ना० पु. परसा, बरसात । घल्लभ गु. प्रिया, महलगा, स्वामी, दिखवैया । घा० ना० स्त्री० घल्लमा० . स्त्री प्रिय, प्रियतमा । धातु० स्त्री. घश. ना. पु. श्राधीन, पराक्रम, इच्छा, चाह, घर्त० स्त्री. -वृष्टि, परसात, चौमास। जावू. वर्षाकाल पु. वशक्ती० गु० श्राधान, काबू में । घकाली. ना. पु. श्यामजीरा, गु० जो धशिर० ना. पु. समुद्रलोन, लालऊगा। वर्षाकालमें हो। वशिष्ठ ना. पु. मुनिविशेष दूत, वकील । वर्षाभू • पु. भेक, महक। वशीकरण ना• पु० अाधान करने की रीति, वर्गाशन पुस्तकविशव, सिद्धितिशेष। वर्षासन ना० पु. बरसकी जीविका घशीभूत० गु• जो यशमें होगया, तावेदार, चर्हिचूड० ना. पु० थुनेरा। हिला। चर्हिण ना० पु. तगर, मयूर, मोर । | वशूरोदा० ना. स्त्री०सी। घहिर्मुख० ना. पु. देवता। वहीं ना. स्त्री. मयूर, मोर । वश्य० गु• जो वशमें होगया, तावेदार, हिला पाला। घलय वसति. ना. स्त्री वरती, नसने कास्पान, माम वसतिस्थान ना. पु. वामस्थान । घलयाकार० ना. पु० गोलाकार । चला० अव्य० वर, ना. सी. सैय, धरता, चसन ना.पु. दक्ष, कपड़ा। घसन्त ना पु० रागविरोष, ना. सी. मन घलाक० मा. पु० बगुला, रामायण यथा ऋतु भो र बैंग्स म होती है। ( कामी पाफ बलाक रिचरे)। वसन्तुजाना स्त्री. वामती। घलाका ना. स्त्री. गुलों को पाति । वसन्तान न.पु. यतयाः ना० सी० गोल, चूड़ी। - चचला, लक्ष्मी, औषधि ।
मङ्गलेकोप। झापीवी चाश, . १ २. . . 1 - C पायुजात. गा• पु० श्रीहनुमान् भीमसी पारुणी ना० सी० मदिरा विशेष पश्चिम घायुपूत... दिशा, गगानीमा पमिशा, दूतधाम विशेष, बाय्यग्नि ना. पु. पत्रा और अग्नि । पधीसन1212 धार० ना. पु० टोर, पार, इसपार, दिन 11 पारे० अन्या सागे, बौ।। द्वार, मा. श्री. अवकाश, विलम्ब समय, वार्तामा स्त्री. वृत्तन्त, पात, मानचीत्र । धीरजता। वार्ताको ना स्त्री० बड़ी कटीई । धारण ना. पु० वर्जन, निषिद्धता, शंका, वार्तिक ना० पु० मूलमय का पूरमध, नो ""यादापर होती। छन्दीतिरहित, गा, गाता मा पारद ना. पु. कपास। वार्निया ना. ली. भाग, बंगा। वारन० स.पि, भंट, बलि, हाया। वार्द्धक्य ना. पु. बदाय, वृद्धावस्था । पारना स• त्रि• घेर ले, अर्पण पर बार्षिः गु० सपती, वर्षका, जो बरसातमें उप मेर चदा जमा है, जो रमान के योग्य है। चारवधू० ना. सी. वेश्या, 'पतुरिया, याल्य ना० पु० बालकपन, मालकता। धारस्त्री मुश्चली। वावदूक० ना. पु. बहावक्ता, वारझक, गपी। धारा मा० . सरताई, बचाय, निघावर, गु. चाप ना. पु. वा. भाका सस्ता, लाभ,। वापिका ना. सी. कालाजारा। धारापार अन्य. इधर से उधर तक। वास. ना.सु. घर, बनो का रयान, बास । पाराणसी० ना. स्त्री. काशी, बनारगी वासना • सी० अभिलाषा, इच्छा, . पारिक ना.पु. जर्न, पाती। चारिचर ना• पु. मदली आदि। यासन्ती ना० सी० लता विशेष, चैत्रमास म वारिचरतु पा०, पु. कामत, श्रीवल- कामदेवका पर्व विशेए। • देव जी।। यासर० ना० पु. दिश, दिवस । पारिज. ना. पु. कमल, समुंद्र लवरा, गु० वार्मव० ना. पु.द्र, देवरान । जो जल से उपय हो। - यासांसि. ना. पु० वरन, कपडे।।। धारिदमा-पु. मेप। पासा० ना.पु. वासो। धारिदनाद गा• पु. मेघनाद, रामाप यथा यासित० गु० । सयुक्त, वस्त्रयुन । (वारिद नाद जेठ मत ताम्, भामहे । प्रथम वासी० 100 पु० वसनेहारा, रहनेहारा । रेख ना नार)। "पाकिना० पु• पुग्न्यसर्ग, प्रधान साप धारिधर ना. पु. मेघ । . यासुदेवर ना• पु. श्रीकृष्णच द्रना। घारिधि ना.पु. समुद्रा वास्लंघ. पन्य यथार्थ, तात्पर्य, घसल । यारिवल्ली T० पी. कोला, तरकारी वास्तव्य गुरसने के योग्य । पारिविहग ना. पु. जतके पत। " पास्तिका ना. स्त्री. मेथीका शाक या मेथी। पारिशुना. पु. कीड़। पास्तुका ना• पु० वथुधा का साग!, पारिसमव० नाः पु. साग। घास्तुकाकार० ना.पु. पाराक का साग । पारीश ना• पु० समुद्र'' TET पास्तूक० ना• पु• मधुचा का शकर . कि. महरना। . ३ . । + । + मङ्गलकोप ३२५ प- --- . Law " C . वास्तो पति मा. पु० इद्र, अमर का विक्रमादित्य ना. पु. राजाधीशष निसन वास्तोप्पति यथा (वास्ताप्पतिरझरपतिर्व सबत् चलाया है। बारातिश्शचीपनि विक्रय पा.पु. विकी It at ATTA बाह ना. पु. पाडा, वाजी ।। विनीत गुजा निगया। घाहक ना०पू० घुड़चढ़ा। विक्रेता TT पु० चचया, बेचनहारा 1 घाहन० ना• पु. घ ड़ा, जिसपरचंदके जाया विख्यात गु० प्रस्ट, प्रसिद्ध, प्रकाशित जाव, सवारी। विगत गु. रहित, ना, विदून 10 वाहपैरी ना. पु. भंसा । चिगतिक ना० सी० विगाइ, युराई, पिराध ! चाहि० सौ. उसको। १... विगन्ध० ना० पी० पुपास, पदबू । वाहिनी ना रत्री० याहि , सरी ! विगुण ना. पु. श्रोगुण, अवगुण । । । पाहु० 710 पु० भुजा विग्रह ना. पु० शरीर, फेलार, पैर, युद्ध घाह विघटन० ना० पु. तोइन, सम्पूर्ण पर घाहमुख० ना० पु० हाथ । विघटित,गु० पूरादियागया, घायागया । चाहगुवाहर या. विनना० पु. अटकाव, सावन भूल चूक, वाद्यालय. ना. ३० मदिर के बाहर का धोखा, शुभकर्म म जावाधा। बाहर का। वि० अन्य० यह शब्द उपसर्ग है उसका अर्थ विनापिदारण দ্বিাৰ Tr ना.पु श्रीगणशजा। कभी निणय कभी भिन्नता भी विरोध कभी विघ्नहरण विशेषण कभी होन इत्यादि होता है। विचरण 1. पु. पर्यटन, सेर, तिहारण विकट गु.विवट। किराया विकरारा गु० विकराल, भयकर । विफल गुरू व्याकुल, अपूरा । विचरित० गु० विहारित । . . •TER पिकलित गुरुविकन, व्यावल । विचल० गु• चलायमान, चचल, परिधर ।। विप ना. पु. नूर, तदेह, विचार । विचलित० गु० चलायमान, चचल, अस्थिर । विवक्षण गु चतुर, निपुण, प्रवीण, स्थाना। विकशित गु० प्रक्षित, Vलाहुरे विचार ना पुoयान, शोष बूझ, विकसित विकार० ना० पु. बदल र ग, स्वभार की विचारक. • पु. चार वरनहारानी विचारित गु० ना विचारांगया,पीता विकाल०० पु. गाधूलि, सायकाल । विकाश पु. काश! विचारी पुरवचर। विचार्य नोरिचारा, योग्य हो। रिकीरणमा पु० मदार वृक्ष, याक, विकीर्ण० गु० पलाया गया। विचिन मुरगारग, नागार काम विरत गुः पिराधी,मलान, ना० पु. हणा। नोर। विरति नारी विचार वा भाव धादि विच्छदा० पु. वियोग, निवारण । विजय ना• पु० प्रय, नाता पर्वह, मनीला विक्रम० १० १० पराक्रम राना, वीरता पाषद निरोप जा हिरण्यकश्यप हुआ था। m . P पल शाा। + ग बदल। . " का बदला ३२६ मङ्गलकोप। . h- १ 4 . ar W . . विजयदशमी ना. स्त्री. याश्विन शुल्क १०, विदग्ध प.पु. लम्पट, चतुर, विचरण । छार सदी १.. विदग्धा ना स्त्री. लम्पर ना, चतुर सौ । विजयनर० ना. पु. अर्शन । विदारण ना. पु. पाटन । विजया ना. सी. भग, चूर्व विदारना० स.नि. पाड़ना, चोरना। विजयी गुजपचन्त, जीतनेहारा । निदारिका ना. सी. विदारीकन्द । विजाती० विदारिगन्धा ना. सी. शालपों। गु- भिमजाविका, अनमानि। विजातीय विदिक- ना. पी. आग्नेयादियोण, विदिश । विजान ना• पु. धनान, अज्ञान, प्रथम, विदित० गु० प्रकट, जो जागगया, प्रसिद्ध । मृत । विदिशा ना. श्री. विदिछ । विदिश विट् ना• पु. नी। विट्चर० मा• पु. शबर, धेरैला। विदीर्ण० गु० झाड़ा, चीरा, पटापू ।' विरप० ना पु. वृए, पल्लव, पेड़, रामायण विदुर० ना. पु० दासीसुत, हरिभक्त पिरोप। यथा (पुपकुयारी यो उरगारी, मोह टिप विदुप० गु• पण्डित, गुणा। माहि सकत उपारी) विदूपरु० . पु० भाइ, दिक। डिम्य. ना.पु.दुस, श, इतना । विदेश. ना. पु० चादरी, परदेश, विलायत । विडम्बना • नी. दुसदायक, निनच विदेशी0 T० पु. परदेशी, तिलायनी । काई मान्दिायत बचा विदेह० ० पु. राजा जनक, कामदव । विम्बित गु.दुखित, पतित, निदिन। विदेहजा० नारवी सीतागा। पिहाल. ना. पु. मारि, बिलार । विदौता ना. पु. देवता। पितएडा • सी. सारडताई। विद्यमान० गु- वर्तमान, चहत, मौजूद । । घितन न.पु. कामदा। | पिया ना रवी शना शान, यथार्थ सान, वितरण. ना. पु. दान, सागना..पार का इल्म, हुनर, गुण, शिक्षादिक १४ ॥ | विद्याधर पु० देवता विश, गु.पशित, पिताना पु. पाताल विशेष। मुली, कारीगर। वितस्ता ना. स्त्री. न्यासानी विशा जो विद्यावान् गु. ज्ञानवान् पन्त, शालिम । पनार में है। विद्यार्थी ना. पु. दार, शिष्य, गुरु पढ्ने वितस्ति ना.पु. बारदयाल, मलिश्त । हारा। पिताम. ना. पु. निस्वार, पदरा, दम, विद्यालय ना० पु. पाटगाला. विद्या या मण्डप वितुम ना. पु. धनिया यित् खी• रिनली, कादान । पिताजी ना. • निराश, परम्प तय विस्तार ना सी• कलिहारी । अगरि। | यिरलता० ना. स्त्री. विजली, पौंधा। पित्त० ना. पु• धन, दौलत, न्य, सानिमा नापु० भूगा । विधक शियक्ति नाचत पवाया। विद्विनोद ना• पु. शास्त्रार्थ, रस विद्याने नची पारदनों म विद गु• जानना। विद्वान् गु.विद्यावान, परिदत, पदार उतरना।
मङ्गलकोप। ૨૭ स . याचार। F G १ । - - . . विद्वप० ना. पु० वेर, निरोप, अदावत । निती नाक स्त्री प्रार्थमिदा, खुशामदनी विपिनी नाची. पिरोधिनी, निदक, श्रोर विनय ना. पु० शिष्टाचार, लान, ममता, दुःखदाता श्रादर खभात सुशामद । विद्वेपी० ना. पु. वरी शत्रु । पिनयी० गु. विनयशील, शिष्टाचारी, मन, विध नाव स्त्री. प्रकार, रीति ।। नीतिज्ञा विधवा ना. स्त्री. रोड, वह । पिनष्ट गु० जिसका विनाश होगा। विधर्म ना पुर निज वर्णाश्रमसे विपरीत धर्म विना० श्रव्य त्याग के, छोड़, रहित । विधाता० मा पु०, ब्रह्मा । ' विनायक० मा पुमागणशनी। विधान० ० पु. शायोक्त व्यवहार, विधि, विनाशा० घर, श । विनिमय. ना. पु. अदलबदत, एरपेर। विधायक ना. पु. जो विधानसरे, सौंपन विनीत गु० पिनयी, नम्र, T• पु. मांसा हारा। विनीता 10 स्त्री. उत्तमा । विधानी ना० सी० सरस्वती। शिन अव्य. विना। विधि. ना. सी. प्रारब्ध, ना० पु० ब्रह्मा, विनोद० ना० पु० चोप, पद, पीडा, खेल।' दवता, गर्म, भाग्य, विधा, फार प्रकार, विन्दक० गु० लाभयुत । शास्त्रात व्यपहार विन्दु० ० पु० चूद, अनुस्वार, सना, शय, विधिनराड ना. पु. नहाए ।, मणि, वर्ग, रत। विधिकर० ५० सवर, भृया गुलाम । विन्ध्य ना. पु. पिण्याचल । विधिगति गा० स्त्री० कर्म की चाव, ब्रह्मा का विन्ध्यगिरि० ना० पु. मिथ्याचल। दशा वा लिसी या चाल वा वर्ग-प। विन्ध्यवासिनी० ना. स्त्री. (ध्याचल की विधिपिता ना. पु. कमल । देवी विशेष जो मिर्जापुरके समाप है। विधिवत् अव्य • यथा याग्य, पिहित । विन्ध्याचल ना. पु० पर्वत विशेष ना भर विधु. T10 पुर चद्रमा । तखएड ये मध्य में है। विधुन्तुद० ना• पु. राहु, पाठवा ग्रह । चिन्यास. ना. पु. समूह समह, समह विधुवदनी 10 सी. च द्रवदना, अतिसुदर, या स्था। निसका मुख चन्द्रमा के समारहा विपत्न विधुर० ना० पु. पियोग, व्याकुलता। विपति ना. श्री. पापा, समान विधेय० गु• सपाऊ, शिष्ट, होनहार, समाचार विपतिदुर्गति, प्राश्न। विशेषयभेद। विपथना.पु. दूरपर, " विधेयार्थईक ग. विधाय या अर्थ दो विपद् ना. पु० विपरि । विषग्रस्त • अमी, दुईती। वियंसपुरा, नाविपरीन. दु. टलय, बिरामी, नाना दिन । विरोर, दाई, विनत. गु. नम, प्राचीन, गुफा, रमा। विषय्यंय ना. पु. विग्ता, पिता, विनत ना. स. रहमोकी माता, फश्या विपल ना. पु० पसत्रा मावा भगा" विपन्न पु० शत्र, वरी । 1 और - हारा। ६ - . 4 ३२८ मङ्गलकोप। पकाना। " . - सन्देह । भाग। विपक्षता ना. सी. शत्रुना, वैर, अदायत । पिभु० ना. पु. स्वामी, श्रीविष्णुनी, धाराका विपक्षी ना. पु. रातु, मुई। , मझा, गु. सर्वव्यापी, सर्वत्र । विपाक० ना० पु० प्रारब्ध का हेतु, भोजन या विभूति ना० सी० यशी भरम, ऐश्वर्य भरम, अष्टसिद्धि प्रभुता। चिपाट. ना• स्त्री० व्यासानदी पजार विभूपण ना• पु• पाभरण, अलवार शोमा। विपाशा की। विभूपित० गु• शोभित, पाभूपित, अलत विपिन ना• पु. वन, जंगल। विभेद ना • अन्तर, घट, विशेषमैद। पिपुल० गु० बहुत, बहुतात. पिस्तार । | विभ्रम ना. पु. मावली, चूक, मूल धोखा, विपुलता० ना. सी. बहुतायत, विस्तारित । विपुला ना० स्त्री• धरती, एमरुना पश्चिम विमात ना. सी. विशेष युधि, ना.पु. मारिष जो जनक रामास दिसौंधी था। विपुपा० ना० सी० पारेर । विमल गु. उजला, निर्मल, सच्च, माफ । विना ना.पु. प्रामण । विप्रचरण ना. पु० ब्राह्मए या पाव, विशेष विमलनयन० ना. पु. शादृष्टि, दिव्या : निर्मल भारत ।" भगुलता का चिरू जो धीविष्णुनारायण के हदय विमला ना. सी. श्रीपार्वती भी। । में चिहित है। विमाता ना. सी. सौतेली माता,दूसरीमाता । विप्रलाप ना• पु० अनर्थवाक्य, मृतक गुणवपन, विमातृ० ना. श्री. विमाता, साधारण लोग। विलाप समय वार्ता। इसरा उच्चारण रिमापिनर रथान में करने है। विफल गुनि फल, व्यर्थ । विभक्त गु. जो भागवियागया, पृधर, यलग। निमातृजागा. पु• सौतेली मातारापुत्र, सी-1 तेग भाई। विभक्तिः ना. सी. यश, भग, बाँट, सुरादि विमान० ना. पु. स्वर्ग का सिंहासन, देवनों और लिङ्यादि योर पारर बोधक । om विभक्त्यात. ना. पु. निस शब्द वा सर्वनाम से अत में विभक्ति का प्रत्यय है। विमुख० गु० विरोधी, प्रतिकूल, निसका ब' पिरगया है, यह शब्द सम्मुख का निराधी है। विभजका गु० भजन करने हार!, नारान । निमन्जन ना. पु• मारण, भजन, नाशर ! विमोचन ना. पु. त्याग, तमन। विभय० ना. पु० द्रव्य, राय, सम्पत्ति, एसय, विमोक्षगः । प्रताप, मुक्ति। विम्य० ना. पु० परचाही, प्रतिबिम्ब पन्दुमा विभाकर ना. पु. सूर्ण ।। तरमाराविशेष, चद्र और सूर्य का मडल ! विभाफरी ना. सी. रात, रानि । विभ्वार ना... फ्लपिशेष जो, प्रतिकट, विभाग. ना. पु.श, विभक्ति । होता है और पका पर प्रतिलाल वर्षे होनाता। विभावसुर ना.पु. सर्प, अपि ,विम्बीर० ना• पुः क दूरी लता, अमर बेल- विभिस० गा.पु. सोम। विम्युफ ना. पु. लाल, भभूता। विभीतर ना.पु. बहेका बियो गु• दरारा। विमीपण ना. पु. रावणका सिमान भाई, गु० | वियोग मा० पु. लोह,विराट, विद घापदा, जुदाई। 1 कायान। क . - .
-मङ्गलकोप। ३.२४ । 7 म . 'कथन। वियोगित० गुनी बिछुड़ गया, भिन्नभयो । विरंज. j० प्रारोग्य, तन्दुररत। घियोगिनी ना स्त्री. भिन्न, विदुरी, जुदी विरुद्ध गुं० विरोधी, विपरीत, नो रोकागयों वियोगी० ग विरही, जुदा, विछुरा, भिन्न वैर, पदारत । चिरफार गु० वैराग्य शील, कोमनिन्, उदासी विरुद्धता. ना. स्त्री विरोध, चिंद पिन, पिनचनना '० बनाने, रचन, पैदा करना। शगुंता विरचना० स० कि० बनाना, रचना, उपजाना। विरूप० गु. कुरूप, भोडो विरंचित गु० चना, रचा। का विरूपाक्ष ना. पुश्री महादेवनी, राक्षस विरजा ना. सी. पौधाविशेष, तृणविशेष, विशेष । विरेक ना " पु० पेंटींसा, दस्त की विरञ्चिनपु० ब्रह्मा । गोग विरेचन नापुः पटौखा होना, दरतनारी विरअ० गु० निर्मल, खुश। | होना।' विरत० गु० निवृत्ति, संगहीन । । विरोचन ना०' पूर्व सूर्य, अग्नि, देव, गरी विरति ना स्त्री निवृत्त, वैराग्य बलिका पिता, रामाविशेर विरथ गु० रथहीन, पदाति । विरोधानापुर, झगडा, दार! विरद० ना. पु. पिरद, 'गु० निदन्त । " विरोधी गुः विरोधकार, मागे यिरल गु० सूक्ष्म, 'टीला, प्रकट, प्रसिद्ध । विरोधोति नारसी नियnिd विरलछदा ना. स्त्री. पालक का शार्क । विरखा० गु० कोई, अनूठा, अनूप, सूदर्म, दोल! बिल ना पुति चिरस. गुरसहीन । विलग गु.निन, 'पंछ ! विरह. ना. पु. पियोग। :..:विजन मुलिन्न, नईया । विरहित गु. वियोगित । विलम्ब ना. पु. देर अवर, यसमटोली विरहिनी गु० सी० "त्रियोगिनी । विजयनार रहना, टहरनी, 'दर विरही गु. मियोगी। विराग० ना. पु. मन की इच्ण का त्याग, विलयः गा• '० प्रख्या गर्ने का नाश । जुदाई, विषय भोग का परित्याग, मुन्न दुःख विलक्षण० गु० अजयं प्रारया, अद्भुन । हीन । पिलाप ना... सन्ताप, शोर यापन, विरागी. गु. ,उदासी, मनको इच्छा मारने रोना। विलायत ना स्त्री परदेश, अन्य शा। विलाश ना. विलास । विराजमाम १० शोभायमान विराजित विवास गापुः एप, अानन्द, पुरा, मावा, विराट ना• पु० विराट राजा का नाम है । सिलाईपन, भोग, कार्य। विराम ना. पं देरे, विश्राम, इसका वि, विलिका मात्र विलिंगा प्रीपधि गुः अस्थिर, प्याड, मामा पिगलियाना र विदाकद ।। विलुप्त गु. जो नारी को प्राप्तमयो, मिटगया.' पिलेप० ना. पु. लेप, चन्दन अपना . । हास। विराजना य० कि. निराजना विलासी० ए० भौगी, श्रीदाकारक, ना.पुर मङ्गलकोपा प - D ४ . " विलेशय ना. पु. शशा, चौगहा, खरगोरा । विवेकी० ग• विचारी, जानी। विलोकन ना. नी. दृष्टि, तार । - विचक ना ..असम और सायका विलोकना. म. मि. देखना, ताम्ना, नि चारी। विधेचन० ना• पु. विचार । र1 पिलोचन ना.पु. नेक, नयन, आत । विवेचनार ना० सी. सयासत्य का रिचार, बिलोड़ना • कि० म्याग, महा।।। परखना, जानना। विलोम ना.पु. उलटा, रिपरीत। विशद गु. उ तल, सद, साम टीक। पिलो स. कि. तिलोड़ना । विशदण्ड० ना० पु. अतिनगदपी, दगड की बिल्व ना. पु. वेल दृत वा उसका फल । निन्दा, कमलनाल। विवकिल ना.पु. पित, वेल।." विशदवाणी ना. सी. इलराती, रव नियर ना. पु. दिन,छद, बिल, घर, भु'हरा। पदभाषा, सागपात। विवरण ना. पु. व्याख्या, वखान, पिरतार, विशल्या. ना. स्त्री. लिहारी ।। टीका, वर्णहीन। विशाख० ना• पु• पुनर्नवा पीथा। विधर्ण ना. पु. नीचनानिशमनुष्य, कुनाति विशाखा ना. सी. स्त्री, मोलहवा नतत्र ।। विवर्द्धक० गु० वृद्धिकारक, वहाहारा । विशार० ना० १० मछली । विवर्द्धन ना. पु० बढती, इद्धि । | विशारद ना. पु. मोलसिरीक्ष, • चतुर, विवदित० गु• वृद्धि प्राप्तभया, बदायागया। प्राज्ञ, ज्ञाना। विवश वहीं, वशाभून, पश्य, पराधीन, विशाल गु० वडा, चोड़ा, सुदर, दुसरहित । मृयुसमय जो धारा वा अरिधर हो। विशाला० ना. स्त्री. १ वाणी । विवस्त्र गु. वबद्दीन, नगा। पिशिखा ना.पु. बाण, वीर। पियस्वान् ना.पु.गे। विशिखासन ना. पु• धनुष, कमान 17-- विवक्षा ना. सी० बाबा, रहनका इच्छा। विशिष्ट गु• सयुक्त। पिवक्षितःगुवादित, ह । पिशुद्ध गु० परिन, पाक, साप, चविशेष, पिवाद ना.पु. क्लह, भगड़ा । जा अशगयागमें वर्णित ह । निवादी गु० जा विवादकर । विशूचिका ना. स्त्री. हदि, हुलकी, हैतह । विवाह० पु. च्याह, गदाधन । विशेष ना० पु. जाति, दव, भेद, गुण, नाग रिवाहित गु० मा विवाहागया। कर, गु. बहुन, अधिक, एक। विवाहिता ना. स्त्री जो विवाहीगई। विशेषण गु. गाएको दूमरे से पृथा विपि गु. दो, २। गुणगावक, तागा, सिफ्न। चिनिक ना. पु. एका त रहिन् । विशेषता ना स्त्री. अपिता, सतियते ।। विविध गु० नानाप्रकार, अनेक, यहुरूपी । विशेष्य. ना. पु० गुण, निमकी तारीफ की विवुध० ना. पु. देवता, पण्डिन । जा, गु• जो विशेषण के योग्य है, पुतिया पियुधयन ना. पु वर्ग, नन्दनपन । पहला। वियुधवैद्य ना० पुर अश्विनीकुमार। विशोक गु० शोकरहिन, देशहीन, श्रद । वियुधारि० ना. पु० राक्षस, दैत्य 1. - विश्रान्त गु निसो विधाम किया, मा.पु. विवेक ना.पु. पोरय, विचार, ज्ञान 15. मथुरापुरामें स्थानाविशुप। - T * .
मङ्गलकोप। ३३१ -- विधामना. पु० सुस, ची, पल । विषमत्रिभुज. ना. पु. निसनी भुजा तुल्य विधाविगंधा. श्री. पाहूवेर । न हों। विश्लेष० ना. पु. वियोग। विपमान ना० पु. औषधि पा विषविशेष । विश्व० ना. पु० जगन्, देवोंकी जाति जिसमें विषमुटक० ना• पु० महान।। दशवम इत्यादि हैं, सोंट, सत्र । | विषय. ना. पु. इन्द्रिया निन वस्तुओंको ग्रहण विश्वकर्मा० ना. पु० देवतों का थाई । फरती हैं यथा साद, रंग, रूप, रस, भोगादि, विश्वगन्धिका० ना• स्त्री. बाहूबेर । याम, बात, अर्थ, अव्य० लिये, मध्ये। । विश्वदेवा० ना० पु. गगेम्या । थिपयक० गु. ससारी जगत् के । विश्वनाथ ना. पु. काशी में प्रधााशिर । | घिपयी गु• जो विषयों में ग्रासक्त । विश्यमेषज. ना.पु. सोठ । विपवैद्य० ना. पु० जागलिक,गागा जो सर्पादि विश्वम्भर० ना.पु. परमामा, ईशर । कामा विप उतारता है। विश्वम्भरा० मा. सी. पृथी, धरती । विपहा० गु० जो विपसे भरा है । विश्वकप ना. पु० सरूप, ईश्वर, 'विराद विपाण० ना० पु० पशु साग । विषाद० ना• पु० थाई, उदासी, दुख । विसरूपक • पु. काला अगर । विषादी गु. उदासी, थका, दुखी। विश्वविमोहन० ना. पु. कामदेव । विषानिका० ना. सी. मेदासिंही। विश्वसर्ग० ना. पु. ब्रह्मा, पर्ता, विधाता। विपुवत् । होता है उसीका नाम । विश्वामित्र० ना० पु• मुनिरिशेष, धनुर्वेद विपुवत्काल ना. पु० जिस समय सूर्य पिशु- यन् रेसापर रहते हैं। विश्वास. ना.पु. प्रतीत, भरोसा, प्रयप। पिपुवनेखा० ना० सी० रेखा, भूमि के ऊपर विश्वासघात ना पु० विश्वास पा इना। शख्य में समान सूत डालने से जो रेता क. विश्वासघाती० ना० पु. विश्वास या घत लित है। कर्ता, मित्रतामें घलकरे। विप० अव्य में, बीच, मध्य । विशासी० गु० प्रतीत वा भरोसा रसनेहारा। विष्फर० ० ० मुर्गा। विश्वेश्वर० ना० पु. विश्वनाथ, भगरान् । विष्ठा० ना. स्त्री० बीर, मल, ह । विश्वोपधि० • नी• सोंठ । विष्ठारमि. ना. पु. विष्ठा या योज। पि. ना. पु. गरल, इलाइल । विष्टि० ना. स्त्री, भद्रा, कुयोग । निष्टर० ना. पु. आसनविशेष । विपण ना• पु. ब्रह्मा, सूर्य। विष्टरश्रया ना. पु. विशु, नारायण । विपद गु० शिद, शैत, गोरा, ठेठ । विपघर ना• पुसार, सा, श्रीमहादेव । विष्णु ना. पु. सापु, मनुश, सूर्य, पान, विषयसी० ना.पु. नागरमोथा । यम, श्रीनारायण विषपुप्पकर गा• पु. मेनपस विष्णुकान्ता. ना. खा. पौधारोष, को. विपम गु. अयुग्म गिनती यया ३।५।७ जो बरार न हो, असम, कठिन भयान, ना• | विष्णुपद ना० पु. धाकारा, बन्नविशेष गीतविशेष। पती। प्रागोड़ी। पु.मरतिशेष।
३३० मङ्गलकोप। ८ . 1 - + M . द . पिलेशय • पु. शशा, चौगदा, सरगारा । धियेकी गु. पिचारी, मानी। विलोपन ना. सी. टि, तार । विषचक 31 पु.. असग और सर ,या विनोकना. स. कि. देवा, ताकना, नि विचारी। .: विवेचन० ना. पिचार । विरोचन. प.पु.न, Tयन, यात । विवेचना. ना. स्त्री. मयारास का विचार, विनोड़ना स• कि० मथा, महना । परखना, जान। पिलोम० ना. पु. उलग, विपरीत । विशद गु• उ बल, सच्छ, साप, ठीक! विलोमा सकिपिलाडना । विशदण्ड० ना० पु. प्रतिनगदगडी, दण्ड की पित्यक ना. पु० बल वृक्ष या उसका फल निदा, कमलनाल। चिनकिल ना.पु. पिल्ल, बेल । विशदवाणी ना. सी. इजलाता र विवर० ना. पु.दिद,घर, बिल, घर, भुहरा। भाषा सापान । घियर पु. च्याख्या बखान, विस्तार, विशल्पा० ना. स्त्री• कलिहारी। टारा वर्णहान । विशाख० ग. पु. पुननका पीना। विवर्ण० पु. नीच नातिनामसभ्य, वनाति विशाखा० ना. रवी० नी, सालहवा नमन । विवर्द्धक० ० वृद्धिवार, पटानेहारा 14 विशार० ना.पु. ममली। निवर्द्धन.ना. पु. वृद्धती, वृद्धि । विशारद • पु. मालसिरीवृक्ष, गु. चतुर, विवर्द्धित. गु• वृद्धिमा प्राप्तभया, बदायागया। प्राज्ञ, ज्ञाता। विवश० वशही, यशीभूत, वश्य, पराधीन, विशाल गु० नहा, चौड़ा, सुदर, दुसरहित । मृयुसमय जा घावरा वा अस्थिर छ । | विशाला० ० सी. वारणा । विवस्त्र गु. वस्त्रदान, नगा। विशिख० ना.पु. पाण, तार । विवस्वान्० ० पु. सूर्य । चिशिखासन • पु० धनुष, कमान 12 विवक्षा ना० सी० वादा, रहना इच्छा। विशिष्ट गु• सयुत्त । ७ चियक्षित. गु. वाचित । पिशुद्ध गु० परिन, पार, गाप, चनविशेष विवाद ना. पु. क्लह, भगड़ा । नाशगयागमें वणित है। निवादी गु० जा विवादकर । विशूचिमा ना. सी० पदि, हलका, हेतह । विवाह प.पु. न्याह, गदाचन । विशेष ना० • जाति, य, भद गुए राग विवाहित गु० जासिहागया । वर, गु. बहुत, थधिक, एक । विवादिता० ना. सी. जा पियाहीगई। विशेषण गु० जाएगो दूसरे से पृथकारे, पिनिगु दो, २ । गुग्णवाचक तारा सिफ्त । विविका ना• पु० एका त रहिन् । | विशेषता स्त्री. धारका, समलियन । विविध: गु. सार अोर बहुरूपी! विशेष्य • पु० गुण, निमकी तारीफ की पिघल ना• • देवता, परित! . जा, गु. जो विशेषण के याम्य है। मुखिया वियुधया पु. सर्ग, नदनवन । विवुधवैद्य ना० पुल अशिनीकुमार। विशोक गु० शाररहित, लेशहान, अदए। विबुधारि० ना• पु० राइस, दैय । विश्रान्त गु निसो याम किया, पु. घि ना. पु. ग्यार, चार, शान मथुरापुरामें स्थानातरा। ६ है। - t -- २ । हैं मङ्गलकोप। विश्राम पु. सुम्प, चा, ल । विषमत्रिभुजाना.. निसको भुना तुल्य विधाविगंधा घी. यावेर । न हों। विश्लेप. ना. पु. वियोग। विषमान ना पु० प्रौषधि वा रिपविशप । विश्व० ना. पु० जगन, देवतोंकी जाति जिसमें विपमुटक० ना. पु० महार्नर । दशाम इत्यादि हैं, सॉट, सत्र। विषय० ना• पु० इन्द्रिया निन वस्तुओंको महण विश्वकर्मा० ० पु. देवतों का थाई । परती हैं यथा साद, रंग रूप, रस, भोगादि, विश्वगन्धिका स्त्री. श्रावेर । काम, नात, अर्थ, अव्य० लिये, मणे। विश्वदेवा० ० पु. गंगेश्या । विषयक गु० ससारी नगद के । विश्वनाथ ना० पु. काशी में प्रधाशिव । विषयी गु• जो विषयों में धासक्त । विश्वभेषज० ना• पु० साठ । विपवैद्य० ना० पु. नागलिक,गाडि नो सपोन्दि विश्वम्भर० . पु. परमामा, ईशर । फामा रिए उतारता है। विश्वम्भरा. मा. स्त्री• पृथी, धरती1 विपहा० गु० जो विषसे भरा है। विश्वरूप. ना. पु० रूप, ईश्यर, 'विराट विपाण ना० पु. पशुवै साग । विपाद. ना. पु. पाई, उदासी, दुस। ता। विश्वरूपक० TI• पु. शाला अगर । | विषादी गु. उदासी, थका, दुखी । विश्वविमोहन • पु. कामदा। विपानिका. सी. मेदासिंही। विश्वसर्ग ना. पु. ब्रह्मा, पा, निपाता। विपुव० ना. पु. जर दिन रात समाग विपुषत् (हाता है उसी नाम । विश्वामित्र० पा० पु• मुनिपिशा, धनोंद विपुत्काल ना. पु. निस समय सूर्य विपु पत् रसापर रहते हैं। विश्रास. ना.पु. प्रतीत, भरोसा, भयय । विपुयदेखा० ना० स्त्री• रेखा, भूमि र ऊपर विश्वासघात० नापु० विश्वास का हनन । राय म समान सूत डालने से जा रेसा क विश्वासघाती० ना० पु. शास का पत लित है। पा, नो मित्रतामें घसारे। विप० अन्य• म, नाच, मध्य । विशासी गु० प्रतीत या भरोसा रतनहारा । विफर • पुपुगी । विश्वेश्वर० ० पु. विश्वनाप, भगरान् । विष्ठा० सी० बीर, मल, गुह। विश्वीपधि० ता. सी. सोंठ। विष्ठारमि० • पु. विष्ठा पा पाग विप. पु. गरल, हलाहल । विपि • स्त्री. भद्रा, कुयोग । विपण गा.पु. नहा, सूर्य । विष्टर० १० पु. आसनरिश। विपद० गु.विशदशैत, गरा, टेठ । विएरथवा 7-पु. विष्णु, नारायण । विषधर • पु• सार, सा, यामहादेत । विष्णु ना. पु. सापु, मनुष्य, सूर्य, अग्नि, घिपध्यसी० पु. नागरमापा। य, मीनारायण विपपुष्पक ना• पु. मैनास । विष्णुकाता. • • पौधारोप, की चिपम गु• प्रमुग्म गिनती यथा ३।५।७ प्रागादी ना परार 1 हो, अमम, करिन,भयानक, ना. विष्णुपद ना० पु. धाकारा, बन्दविरोष, गीतविगार। पत्ती। . , पु. पीरो ૨૩૨ मङ्गलकोप। R Pr . F रिधान -- - -- . विष्णुपदी० मा सो• श्रीगगानी! विहारी गु. बीडापारक, पचड, चपल । विष्णुपद्य० ० पु. विष्णु का मना ! विहित गु० उचित । विष्णुवलमा० मा स्वीकालसी, तुलस।। | विहीन गु. त्यागिन, रहित, अतिवीन,' पिसा स० उस चितर। विसर्ग • पु० दो पिन्दुमात्र, वर्णशे विदल गु० व्याल, पावरा । रिसर्जग ना. पु. पिदा, त्याग, दाा, पूग । पिक्षित गु० र मत्त, उपा। पिसारन० पु. पिरमरण । विक्षेप० ० पु. च्यालना, यागा चूक, विसूतिः नि• पिता, दुविधा । निश० गु. चतुर, निपुण विद्वान् । विस्तर पा.पु. पनार पसरास, 'यारा, पिस्तर० वात, चौड़ार, प्रामार विधता • ग्रीक लिपुणता, चातुर्ण, जान कारी। विस्तीर्ण गु० रा लाट्या, फैला । विस्तृत० गु० फलाया, पसारा, पिरतारयुत । विज्ञप्ति ० स० विगती, विनय ।। विशेषतान, अनेकविधि, विस्फोटक ना० पु० फोडा, चेचक, माना। विज्ञान • पु. ग्राश्चर्थ रस। विस्मय ना• पु. पाश्चर्थ, अचम्भा, शोक, विज्ञाननिधान • पु. महागावी, ब्रह्मज्ञानी रादेइ, शा श्रध्यामराता, ब्रह्मगादी। विस्मरण 70 पु.ल, चूक, भुलाइ । | विज्ञानी गुरु परमरगी, अतिचतुर, महा विस्मिता गु. पाश्चयित, अचम्मित, चक्ति, परिटन। चितित। विज्ञापन / पु० जनावना, चिताना। विस्मृत • • भूल भुलाहा । विस्वादु० गु• खादही, }n० स्त्री० लहरी, मोत्र । नीरस । वीचिका विहग ना.पु. पदी, विहा, चिडिया। चीज ना. पु० मृल, कारण, रिया, पानी । विहगेश ना• पु. गह। | वीणा स्त्रा तम्बूरह, बाराविशेष । विहगल ना० पु. पता, चिदिया। वीतराग ना. पु. विरागयुक्त, वैरागी। विहङ्गपति० ना० पु. गरुड़ । विहगमना.पु.पदी. विहग ।। विहगराज . पु. गरुड, वैनतेया- विहाडन पु० चारन, घेदन, मदन । वीर. ना. पु० शर, समर्मा, महादुर, माई । विहरण. ना.पु. गमन । वीरता. ना. स्त्री- विहरना०कि परना, सड़कना ! # सूरमापन,वहादुरी विहसना • वि. इसना, खितना। धीरपुप्पा ना. सी. सहदवी पौधा ।। विहाय अत्य. याग, घोड, सिवार । वीरभद्र ना. पु. शिवगणविराम । पिहायस. ना. पुः श्राकारा । -वीरभाय ना० पु. सामH, घोरता, बहा. रिहायसी० ना. पु. पक्षी, चिड़िया। दुरी। बिहार० 1. पु. बाइपानद, एश। -१ पौरभूमि ना० सी० युद्धरपान, ना• पु. विहारस्थली ना. वो कासार । बगालदरा में एक जिलया। घोधि.. ។ योपिया ना री गली, मार्ग बार राहा चीय० गु० दा, २॥ 1 77 चीरत्व. ना. पु. । - स वृषभानु० ना. पुराधानारा पता . है " पान। का अभी। - वीररस. ना.५० काव्यरसपिशा, वीरता !! वृद्धापन.ना.पु. वृद्धता' बुढ़ापा 14 घोरक्षना. पु० भिलारा वृक्ष । वृद्धावस्था० ना. सी. बुदापा, वृद्धीXT धीरसेन० ना. पु. आहू। वृद्धि० ना. स्त्री यदती, वाई, अधिकता।" धीरा० पु० कला ( पदली अपनी मीचा वृन्तफला ना० सी० अखरो ? रम्भानीरापरण्यदा, इति घिटे) यापोली, वृन्ता वृन्ताको गा• पु. भाग,गा। धीर्य ना० पु. चीन, सामर्थ, पल ।। वृन्द पु० समृह, पृथ, झण्ड, देर । घीयंकर० ना. पु० उड़द अन्न । वृन्दा० ना. सी. तुलसी, देशविरोए जा घुही० अन्य• उसी समय वा • उसी स्थााम, वृदा में है। iporn वृन्दारक. ना. पु. देवता, सुर । पुरला नाः सी० मीटा तुम्बी, लोसी, राम वृन्दावन । पु. तीर्थ या नगरविशषITE खुसी तुरई ( तुम्मिमिण महानुम्त्री राजला वृश्चिक ना० पु० पिम्स, पावी राशि । ", युरला यूसी इति निघणे)। वृक० ना० पु. भाड्या, हुएडार, पपीहा पही, वृश्चिकाला ना० सी० मेदासिंही | TER वृप० ना पु० पल, दूसरीराशे, 'वर्ण का पुष, देत्यविशेष। इद्र कामदव, धर्म, वासोचा। वृत्त० ० पु० गोल, गोलाकार, देयरिश वृपकेतु० १० पु. श्रीमहादयनी, कर्मा पुत्र । घृत्तपण्ड० ना० पु० जा दा नियात्रों बार- • पु. शिलापशु, बिलार वृपदश मध्यस्थ चापसे घिराहो, वृत्तका पता वृपदशक महाभारते भीमपाणि यया वृत्तफल ना. पु० सालऊगा। (पतारसपराहररा वृपदशस्यचोभयो, प्रणादयुद्ध' घृतांश T० पु. गेला श्रश। ताराना रागीयमरालय), वृत्तान्त 100 पु० समाचार, यर्ता, कथा, वृषभ • पु० बल, धर्म, दस्यविशप । पहानी। सृपमध्वज. पु. महादरनी। वृत्ताच ना. पु. गालाद, गाता अाधा। पृत्ति ना० पी० याचरण, सगर, पपा | वृपमाक्षी० • श्री. इवारणी । जीरिया, व्यवहार, सूनसा अर्थ, टीका। वृपा या. यमगध । पृथा सय० पर्थ, भूठ, , भगतबर।। तृपादित पु• पराशरपूर्ण । वृद्ध गुरु वृहा। 'वृष्टि रखा. महवा नरमा पद्धक० गु• नृद्धिकारव, पढ़ा हिाग। घृष्टीरांची ना. नी० मा श्रामि। दतम० गु. बापून। पृष्यगन्या. पीडित वृद्धतासीबुदारा, मूढ़ पम । गृह. पु. चला, वह।। पृथप्रपितामहरु II Y० प्रमद का गृहती ना. सी. बड़ी का पिता। गृहत् गु० बड़ा, चीन पृष्मपितामही • • प्रीन गइ यो वृहत्गएड० ० पु. या दुकटा, प्य . -- ८ . * ६ सए माता हरफला . पी. नायर, पदासा यहा। गृथयागा.. पृद्धारा सी• यादगा, पुसा ।
मङ्गतकोप। साम। पाठक m . हाला० ना. सी. सहदेवी पौधा । घेदनयी ना.पु. विवा पर्याद ऋग, पर, बृहद्राज.ना.पु. कसेरू। वृहद्भानु० ना.पु. सर्य, अग्नि । घेदन T-स्त्री. पीहा, इस दर्द। " बृहस्पति० ना.पु. पाचवा प्रह, देसपुरोहित । घेदना बृहस्पतिवार० ना. पु. पाचवावार, विहफ। घेदविदू० गु• वंदवादी, वेदवता चौर वैद वृक्ष. ना. पु. पैक, तरवर । वृक्षकादा. ना. सी. विदारीकद, मूसली। वेदव्यास ना• पु• मनिविशेष निहोंने वेदका सग्रह किया। वृक्षमूल ना.पु. वृत्तकी नह। पृक्षम्लस्थली० ना. सी. बाला, थांवला । घेदात ना• पु• वदया थग अर्थात् शिक्षा १ वृक्षवल्ली० ना. सी. विदारीकद । वल्प २ च्यावरण ३ ६ ४ ज्यातिष ५ वृक्षसारक. ना. पु. गूमा, पौधाविशेष । निरक। घेग० ना.पु. उतावली, पुर्त, अव्य० शीम । वेदान्त • पु. ईश्वर के विषयमें नो याता वेगगामी वेगवती गु• उजावला, शीघ्रगामी,जल्द । पद में निर्णतहै उसका धनों उपनिषदो सग्रह कियागया। घेगवान ना० पु. पवन, चातापशु, गु• पेग घेदान्तविद्या० ना• स्त्री. जो वैदान में है, गामी। श्रामज्ञान, ब्रह्मविचार। घेगि चव्य. शीघ्र, जल्द। घेगी घेदान्ती० गु० वेदात मतका ज्ञाता, प्रामवादी। घेणी ना. पी. त्रिवेणी अर्थात् प्रयाग म गगा बेदिकार धंदी ना०सी० अग्निहोत्राचौर वेदी। यमुना सरस्वती का सगम, नियों की चाटी। घेणु. ना. पु. वंशी, मुरली, नास रानावश घेध. ना. पु. विद्र। घेणुधर० ना.पु. श्रीकृष्णच द्र, रानीगर । येधक ना• पु. विदवया, वेकार। धना. स. कि. छदना । घेणुवा० ना.पु. वशरोचन, बानीगर, ठगे, घेधमुख्यानारसी• कस्तूरी। चालाक। घेधी ना. पु. वर्मा, वैधत । घेतस. ना.पु. उनरत, मिहनताना । घरमयानक ना.पु. प्रलयरात, मृतकरात । येतम. ना.पु. अम्लवत । घेला ना. सी. समय, सायत, काल । घेताल. ना. पु• पिशाचविशेष,निन । वेशर० ना. सा• मर । घेत्ता ना.पु.झाता, शानी, जाननेहारा । घेश्म. ना.पु. घर, मकान । घेत्र. ना. पु. घेत। घेश्या० ना. सी. गणिका, पनुरिया, बिनाल । घेत्रवती ना स्त्री. नदीविशेष । घेएकसी ना.पु. मोचरस । त्रयन्ती ना. स्त्री. नदीविशेष। येष्टन ना. हु. बठन, लपटन । घेद० ना. पु. हिन्दूलोगों में पापाशीयपुस्तक जो घटित गु० ना चारों पारसे ढका पूरा। चार हैं घर्षात् अग, यजु, साम, अक्षण । दगिरा. ना. वाव दवाणी ना. ५. पुनि- धै० असा निश्चय । विश चैकल. गु. शकुल, रिफल । } घेम. ना. पु. वश्म।
मङ्गलकोप। ३३५ Pr - T + . N - - करता है। + वैकुण्ठ० ना. पु. विष्णुधाम, पिर, नारायण वैश्य नापु० तृतीय वर्ण, राजपूत, जाति (विष्णुनारायण कृष्णो वैकुण्ठोविष्टरभवा । विशेष, वैम। इयमर )। वैश्यका ना. स्त्री० युइटी, ही 1 " वैकुण्ठनाथ ना पु० श्रीविष्णुनारायण । पैश्यनी० ना. स्त्री वश्यकी स्त्री। धैगन्ध ना. पु० गधक। चैश्रवण ना: पु० कुवर, यवराज । चैचित्रता ना. सी. चित्रविचित्र, रगारग। वैषम्य ना. पु. असमता, विषमता, एकात । वैजनाथ ना. पु० वैद्यनाथ । चैपानस० ना. पु. वेरागी, उदासी। वैजयन्तिका ना. स्त्री• अरणी । वैष्णय 'ना: पु. विष्णुका उपासक, गु० जो धैजयन्ती ना. सी. पताका, झएडा । विष्णुरहैि। वैडूर्य ना० पु. नीलमणि, नीलम । धैतरणी ना० सी० यमपुरी की नदी । वैष्णवी० ना० स्त्री लक्ष्मा जो विष्णुको हे वैसा गु• उसके समान, उसीप्रकार । चैताल ना. पु० वितल, वेताल, पिशाच भाद, पैसे अव्य० सेंत, विनामाल, मुफ्त ।' वदी। वैज्ञानिक ना.पु. विज्ञान, ज्ञाता, परमज्ञानी । वैदिक. ना. पु. वेदपाठी, जो वेदात्त कर्म वोहित ना० पु. जहाज, बडीनात् । वैदेही ना. स्त्री० पीपरी, श्रीसीताजी। व्यक्त गु० ज्ञात, मालूम, खुला, स्पष्ट, ज्ञानी, वैद्य. ना. पु. चिक्सिर, तब, हकीम । पढा, एक वैद्यक ना पु० वद्य वद्या की पुस्तक, वैद्य व्यक्ति पा स्नी• एकता, पृथगामा, एकाई, विद्या। वैद्यनाथ • पु. पय तरि, झारखण्ड में व्यग्र० गु० भूला, भटका, व्याकुल, पावरा । श्रीमहादेवनी। व्यनित. गु• चितायुत, विवलित । वैभव. ना. पु० रा य, विभवता, ऐश्वर्य । व्यग. ना. पु. लाहा, कुरिला । पैर० ना. पु. शत्रुता, अदावत । व्यगता. ना. स्त्रा० मुरलता। घेरागी ना० पु. जो वैराग्य धारण करे। व्यजन० ना० पु. एखा, बना। वैराग्य. ना. पु. विषय त्याग, उदासपन । व्यजक०गु० प्राशक। औराद ना. पु. जगरूप सर्वरूप । व्यञ्जन० ना. पु. सरराहत समस्त वण, शाक धैरिन् ना. स्त्री. शत्रु स्त्री, वेरी की सी। श्रादे तरकारा, चटनी। धैरी ना. पु० शन, दुश्मन । व्यतिक्रम. ना. पु० उल्गपन, अयथा, घेलक्षण न • पु० विलक्षणता, भाषातर । विरुद्धता। वैलापत्रक 1. पु० मुरय सर्प । व्यतिरिक्त गु० अलग, मिन, अय। चैवस्वत T० पु. धर्मरान, मनापशप । व्यतिरेक० ना. पु. भिन्नता, भेद । घेसाप • पुवैशात, दूसरा महीना। पैशाखी ना. सी. हयाशा, भूनी विशप । व्यतीत. गु.जा बीतगया, गुजरगया। बैशारण ना. पु. मरय, मबला । व्यतापात ना. पु० योगशिश। पैशेष : ना. पु. शारशिप । व्यत्यय. ना. पु. उलगर, वराप, सिस्ना। प्रकटता, विमक्ति। - -- मङ्गलकोप। . कहा, दर्पन, 4 - . व्यथा ना. स्त्री० पीड़ा, नाया, इस दर्द। व्याख्याना.पु. अर्षदा व्यापार व्यथित गु• दुखित, पाड़ित ।। घ्याख्यान.ना.श्री. व्यभिचार० गा.पु. परस्त्रीगमन, सुवर्म। , बखान। व्यभिचारिणी ना. स्त्री० दुष्टाम्री, इलया, व्याधात ना.पु. घटकार, योगविशेष सैरिणी, दिनाल। व्य प्र.ना.पु. बाप, शेर ।। व्यभिचारी ना० पु. दिनला, वैरण, बदकार, व्याघ्रपाद ना. पु. काई, मायका प्राव । जो व्यभिचार करे। व्याघ्रपुच्छ. ना. पु. दोनों घरएड ।' व्यय० ना. पु. लागत, उय, नाश, खर्च ।। | व्याघ्री. ना. सी. बाग कई पापिनी- व्ययक गु० सर्च करनेहारा, नाशक । व्याज० ना• पु० इल, ठगई, मिष, प्यान, यंद, व्यर्य० गु• वृथा, निकम्मा। थाड़ा, बहाना। व्यजीक० ना.पु. कपर,घल, मठ। प्याजक गु• दली, ग्याज, ऋण । व्यवच्छेद. ना. पु. थलग करना । | व्याजी ना.पु. म्याज लेनेहारा, छली व्यवधान ना. पु० श्राद्वादन, अतर, नीच, | व्याजू ना० पु. च्यानके लिये जो ऋणहा। वाचविचार। व्याध नागपु. श्रावकी, हिंसर, शि. व्यवधायक ना.पु. जापवधान करे । व्याधावारी ना पनर पशु मारतावे । व्यवसाय० गा.पु. उद्योग, परिश्रम, वन, | व्याधि ना. सा. राग, पाड़ा ना ताप'पादि उपाय, तदवीर, बल। से हावे। व्यवसायी० गु. जो व्यवसाय करे। व्याधियात ना.पु. रिवाली। व्यवस्था. ना. स्त्री. धर्मशास्त्रका याज्ञा वा व्याधित वाक्य, अलग करना, दशा, रीति । व्याधी गु. रागी, पाङ्गित, दु तिन व्यवस्थापर० गु० व्यवस्था का दनेहारा । व्यवस्थित गुजा भिनश्यिागया,जो व्यवस्था, व्यान० ना.पु.मस्त शरार मयारक वायु: प्राणविशेष। कियागया, अचल । व्यवहार.ना.पु. उद्यम,धधा, काम,टएण, न्यापार, अम्पास, झगड़ा, चाल, रोते, माते, व्यापक गु० फैलाहुया, विभु। देनले।। व्यापकता ना. स्त्री• फैला, विना व्यवहार्य० गु• ना व्यवहार के योग्य है । वैभा। व्यवहित गु. सयुक्त, टकाया, छुरा । व्यापना अ.वि. सर्वत्र फैलना । व्यसन० ना.पु. जूण्यादि कुकर्म व्यापादकतापु. गारितस्ता, कुफर । ध्यसनीगु.कारी आदि कुकी । व्यापार० ना. पु. काम पधा, चाली, धर्म व्यस्त गु० व्याकुल, पैला। ध्याकरण ना• पु• सन्दक सापुत्रका उपयागा व्यापारार्थ० गु. निराका अर्थ व्यापार है।। शान, जिस से पदनोध होते। व्यापी गु. रिभु, सर्वत्र पैलनहारा । फरणी ना. पु. व्यापरपजाता। व्यास गु। जो पैटगया, सर्वगत । व्यांएल. गु० घारा, परिषर चित्त, है। व्याप्ति ना. घी सर्वत्रगति, माति लाभ। व्याकुलता. 1० सी० घबराहट, हैरानी व्यामोहन. पुपीडा, दुस। -- 1 - । ८ याप. ना. पु. रचा। . । + लक्षण, चिह।। ८ 1, 'मङ्गलकोप। व्यायाम ना० पु.. परिश्रम, थकाई, मयः प्रत० ना. पु.. पुण्यकर्मविशेष यथा तपस्या उपवास। दिन, फरमनुष्य । 1M " 12 शाक। .. याब ना पु• सांप, सर्प, चीतापशु हाथी, प्रती० गुः जो अतकरे । व्रात्य ना. पु. वह ब्राह्मण निसका यज्ञोपवीत व्यालदंष्ट्रक० ना• पु० गोलुरू।। नहीं भया। व्यालपत्री ना. स्त्री. काड़ी। :- बीड़ा ना. स्वी. लाग, लन्ना, हया-17 व्याला ना०' पु० झरोखा, धुहेरां, गा० स्त्री; ग्रीहि ना• पु० अनेक प्रकार या धान्य । सांगिन। [] व्यालारि०' ना.पु गरड, मोर, ज्याला शक ना०,पु. संपत् चलानेहारा, राना, यथा सिंह। शालिवाइन, नातिविरोप, देशविशेष, संवन्, व्याली ना.पु. श्रीमहादेवनी, गु० सपेरा। व्यावहारिक ना. पु० मंत्री, परीमशी। शककर्ता० ना० पु. शाका चलानेहारा, व्यास० गा० ... कुतर, विस्तार, फैलाव, शककारक०९ यथा' कलियुग में युधिष्ठिर श्रीवेदव्यास । विक्रमादित्य, शालिवाहन, विनयाभिनन्दन व्यासाई ना ५० प्राधापिरतार । गागार्जुग, बलिं। व्यासेश्वर० ना. पु. काशीके पार रामनगर शकट ना.'पु० एकड़ा । में व्यासस्थापित महादेव । शकुंन० ना० पु० शुभाशुभ या पंचकपि, घ्युत्कमना. पु. उलटाक्रम । परी, सगुन, चिडिया। शकुनी ना• पु० जो मनुष्य शकुनको जानता व्युत्पत्तिा ना. श्री. शास्त्रीय ज्ञान, विद्या, शब्दको मिन करने का ज्ञान, उत्पत्ति दता, हो, पही, चिहिया, कौरवों का मन्त्री। विद्याकी। शकुन्त शकुन्तिः ना. पु० पला, चिड़िया ? ; :: व्युत्पन्न ना. पु० व्युत्पत्तिमान, विद्यावान् । 1 शफुल ना• पु• कुटकी, मस्यविशेष यूह ना० पु. युद्धहेतु सैनाकी रचनाविशष, | शक गु० सामर्थी, बलान् । सेनाका कोटीिशेष, समूह, मुण्ड । 11:शकालना. पु. इन्द्रजौ । व्योमना.पु..आकाश, पारामान । शक्ति का स्त्री. सामर्थ्य, मल, परधी, सांग, व्योमकेशमा..पु. धीमहादेवनी । देवताका पराक्रम जो अपनी सीरूपी टहराया व्योमचरना. पु. पती, देवता, ग्रह, गया, माया देवी, भगवती। SETTE नत्र .. .. शक्तिमान्० गु, बलवान, सामी, व्योमातुर०ना पुदैत्यविशेष । ... शक्य. गु. होने के योग्य, करने के योग्य-1.... व्यौरनाम... 'मुलमाना। शक्यता ना स्त्री होने और करने की योग्यत 'मज. ना. गु: देशविशेष। प्रतिकि. प्राप्त होताहै, पाता है। शझरनापुर इन्द्रा ... प्रजवासी ना. गुरु,मन के लोग RE:: शक्रधनु०१ मा पु..इन्द्रा..नुप जो मजेश ना. पु० भागिन्द्र , शक्रधनुप० वर्षामें निकलता है या इन्द्रका धनुषा 6 . 'वासम्भव।
३३८ मङ्गलकोप। . शत में है। 1 । H -- शक: ना.पु. भय, र्डर, मुख्यसर्प । "शरडी ना. ना. साडिनी। शकर 1० पु. श्रीमहादेवनी, कल्याण, गु. शत: T• पु० सौ, शत, १०० । सन, नग, परिन, दुरगा जिसमें दूसरा शतखएड० ना• पु• सौटुकड़ा। मिलगया। शतनी TI Zी तोप, वडीमुशुएड़ी। शङ्करदेव० • पु. श्रीशिव, शङ्कराचार्य । | शत ना०सी० सतलज नदा जो पजार शङ्करराव ना. रागिनीविशेष । शङ्कराचारी ना. पु. शङ्कराचार्य का मता शतधन्या. 7. पु. यादवविशेष । शतपत्र ना.पु. सफेद कपल । बलची। शतपदा० . स्त्री० सत्तावर, धनावर । शङ्कराचार्य ना• पु० यागेश्वरविरोष निन्हीं शतपञ्च गु• सात पाच १२ या ५०० । जनमतका सएडन किया। शतपत्रिका रानी दूर्वा, दूवयास । शङ्कराभरण ना. पु. रागिनी विशेष । शाना सी सतावर, तारा। शङ्करी ना. सी. पाती। शतयुप्पा० ग. स्त्री. सौक। शशा ना• स्त्री० भय, डर, खका, नानरू, शतभिपाता. सौ. पचीसवा नक्षत्र । जायजरूर, हगास । शतभेदक० ना.पु. अम्लवेत । रहित गु• भयभीत, दराभया । शतमत. ना. पु० सयधर्म, सञ्चामत । शा० • पु० छ, मत्स्यविशेष, बदीपील शतमन्यु० ० पु. इद्र । विशेष। शतमूली० ना० पी० सनाविशेष। शल • पु• जलन विशेष, या उसका घर, शतश अव्य सैकड़ों। बड़ा घोषा। शता ना. सी. सौंफ। शहचूड० • • रामाविशेष । शतारि० ना. पी. शतावर, पतावर । হয়না • सा. शशाहोली। | शत्रु० ना. पु. वैरी, रिपु, दुश्मन । रामपुप्पी शहलिसित मा० पु० स्मृनिविशेष । शत्रमा ना• पु. सुमित्रास्ता रामचन्द्र महासुर ना.पु. दैयविरोप । शाहोली स्त्री-पौधातिशा। शघुता० ना-स्त्री. वर दुमनताई । पाहिनी • स्वी• विशेष लक्षणयुत सोशनक० ना. पु. विनयसार, मििवशेष । स्वासविशेष ना गुदा से निश्लती है। | शनि० ना. पु. सातवा मेह, शनैश्चर। शोद्धार ना पुः मारिकामी और काशीनी शनिवार T• पु० सातवावार, शनीचर । में ताई देश शुनै शनै अन्य हीले ३, सहन २, धीरे ३ राधान.पु. बान, शिारा। शनैश्वर मा. पु. सातवां मह ! - शटी.पु. पर कामद। सपथ • किरिया मोह, रोगद । राठ गु• पूर्त, ठग, पलिया पूर्व । शुद० ना. पु. घनि, माताज, शराय वा शठता ना रखी धूनता टगः, सूर्सदा । सभा यादि। गण.पु. सन। शब्दप्रही ना. पु. कान, अक्षण। शणसूत्र ना.पु. सुनसी, सनी नाल । शम. ना. पु. बाम इन्द्रियों का निमद एड.ना.पु. सदा अर्थात् त्याग। २ . 1 *- मङ्गलकोप शम्बूक शंख। शम्भुनार श्रीमहादेवनी। शयतः बापु सोना PE" . क्रियाका एक - । पनाह। - शमन न०१० शन्ति, सलिदान, यमराज, शासन० ना० . धनुष, कमान । कपाला योषधि र L, PREVशरासुर०ना पुलापासर, शमी० गास्त्री, वृतविशेष, फली छीमा शरीर० ना. देह, तुन । शम्याक ना पु, किरयाली! शरीरील गुन्देही, प्राणी शम्बुका ना.पु.; कौड़ी, घोपासोपी, शरण ना. ३: बायोसे, वीरोंसे, नागकरके। शर्करा. ना. स्त्री साह 4. THI शर्मा० ना. पु. बामणके नामका उपप लेटना, शर्वरी० ना. श्रीरात.। बिछोना। शलभ ना. पु.रिवी। शय्या० ना. स्त्री जिसपर शयन करत है। शलाका० ना. स्त्री. सलाई, नंदवलपट्टी, शर० ना० पु.याण, तीर, सरकण्डा, जाति, रूलर :, ... ! . . . . . airine तालाप, गणित में ५। शलादिनी ना. सी. फुटकी• Ins •सरजन्माना स्वामिकार्तिक । शलीत. ना. पु० थैला, मौरा 13 of शरट० ना. पु. गिरगिट कृकलास।" on शल्यना. पु. रानाविशेष, ऊंगा, माया वैय शरण गापुर, जो रक्षाकरे, श्राश्रया अंग शल्यक० ना: पु::मैनफल, शरणागत० गु. पाश्रित, जो शरणचाहे, जो |शष० ना ५० खारीलोन लोया भूता, ,पना मांगे। s" anशयर० ना. पु. भील । शरण्य ना० पु० शरण, गु० सरपके गोग्य । शवरी० ना. स्त्री भीलनविशेष, भीलनी; शरत्०. सी। प्रतुविशेष, जिसमें. .कार, धीकुवारि । भी शरत्काल० पुकातिक है. सामन्य शी- शप० गा० स्त्री० दूवादि नवीन ग्यास र शरिर ब लणं घास, इत्यमरः:)jomire शरपुष्प ना ० दुपहरीफूल या उसका वृक्ष शशक (ना.५: 33 चौगड़ा। शरदऋतु० स्त्रीरत्काल যয়া For: शशांक शरद ० स्त्री. शशि ना. पु. चन्द्रमा शरपुंला ना० पु. शरफोका पौधारिशेष ), शशिवर्ण या शेत, वन्द्ररूप, सो टाना पुः शब्द, निनाद, व्यनिगः शशिरसा ना पुगे अमृत, पीयूष ! शराभ्यास: ना. पु० निशाना, या चि,निसे शस्र नागपु हथियार जो विनाके मारते हैं। वाणादिः स येधते है अर्थात् माया मारना | यथा सङ्गादि ।। : pres सीखते हैंVinti :: Wशलमय ना यु. लोहाor cा शराय० ना सकोरा ? शस्त्री हथियारबन्द संधारी - HITS शरावती ना. सी. नदीविशेष| शाफ ना• पु साग, मौनी पी ,सात भारावलि कालीकानया की पशि तीरों का समूह। शाकटुम्मुखी नाली माई औषधि । . तकाला २ शश शरद शरत्काल दीपोंमें से एकका नाम 1 KARE मलकोपे। शाकचीज मा पुरुची ORIशारद नावी सरस्वती, शोरदो, सदा शाकम्भरी ना.पु. दुर्गादेवी, नगरशिष शारदाना स्त्री सरस्वती, चातु।।.. नातिल जी चावल पीसी, शारदीगु नौशेरंदमें उत्पन्न होnefirs शाकल. शालक वेदनेहारा प. शाकंचणिक्ना पु० मुरीउपचड़िया कहो कि एक पंडी होताहै 'जो हाधीका पन । शाकश्रेष्ट ना० पुसमानी other* में दार लेनाता है। शाकानी पुश .griite शाल ना. शालस, चिरोजी का शाकिनी ना० सी० देवोनिशेष जो देगा। मंन्स्यविशेष, छंद,' शृगाल, शोमा, उर्वरः विशेष, धन । Feminine शाक ना.पु. शक्तिका उपासक, देवीपूजक । शाक्ती ना. पुरेशाता भगवतीका डिपाराका शाला BAnirh शुःख० ना. रवीगडाली पेक्षकी FRE: शालपर्णी नाही. योपरिविरोHESE शामिनावी माली की, 'बहुतक, बहु शाला नारी स्थान पर E FACTS शालिक, हेमन्त ऋतु के धान ! शार विचार । शालिनी ना. नी. दन्दविशेष, वेदनेहारी, शाखामृग ना 'पुः वानर बन्दै ; दुःसद FREE शासाविलासीना बन्दर शासाशन ना. पु. For SITE शालिवाहन ना• पु० राजाविशेषाशा Priciparators प्रचारक । RITE OF or are: शाखी ना. स्त्री० वृक्ष, शास्त्री । शालीमा शालि, पंसी पी बहन, गुर शांकाला चीन, पार्वती, शंकरी !: Eng वेदी, वान्, वन्त, युक्त, स्वामी शाटिका०१ नारीकसारी,,त्रियों के पहरने शालीना. शाटीका वनविशेष शालीशता शाय ना.सु. शटता, ठगई। शालूर० ना० पु. मेक ( भेके मईको शाए ना.पु. सहसान्, निसपर हायार,चाकू शालूरलवराः, ईराः इत्यमरः)। ATTER ग्रादि तेज करते हैं।' शाल्मल ना० पु. दीपविशेष ओपृधाई सात दीपमें से है। शांडियन विल्ल, बेला निविरेको शाल्मलि। घातकुम्मानार पुग्-सुवर्ण, सोना snxri शाल्मली ०.३ सेमर साताप भी धर्मसोम का प्रवर्तकमुनि । शासन ना पुरा गाशी, करारनामा15 शानपाकी ना.पु. सिरटी शासनांना प्रत्रविाना ताड़ना। शान्त गु• रियर, मुनि लंदा, मृत IRRITE शासनीय गु. श्राशाके योग्य, ताईनीय । शान्ति ना. स्त्री रिपरता, कल, इंढाई राहत, शास्ति ना. स्त्रोः प्रांश, ज्य't Crime पवाद आदि में प्रसिद्ध कर्म tr more शास्त्र ना.' याज्ञा, हिन्दू लोगों मित शाप ना.पु. सराई, पिनर, दी। आकाशीय पुनविशेष, योनिविदावधा शान्दिक.गु शशांती, तिला . IFE am लार,सी. सोयाका सागर CTE की पुस्तकें।
या है। शास्त्रार्थ ना.पं० मुवाद ली, बहुशिलाजित ,श रस or or oris का दाम - शिगरिडनी ना० सी०जही BoP.. शिल्पीकर पर्व, राज, मेमार। . शिखि ना० पु. मयूर, मोरः अनिशियाहन० ० पु. नन्दीगण । शास्त्रविहित० गु• शास्त्रकी विधिसे, जो शाख ! शिल. शिला गा चुगन, पथरी IAS OF Tit शास्त्रश० नाला शान हो जानृवाहे, शिलागोती ना० स्त्री० मनशिल Tri शिलाजीताना? शिलाजीत गिला. शास्त्रीगु शास्त्रज्ञ, धर्म- R शास्त्रीय गुन्शानसम्बधी, जो शास्त्रका शिलाह ना में शिलाजीत | Tool शास्य० गु० शासन के योग्य । O शिलायन्त्र ना० पु. पत्थरका छापागा शिशपा० ना० स्त्री वृतविशेष, शीशमन्द । शिल्प का पुश-चित्रादिका, कारीगरी थर्क शिखण्डिज ना० पु० बृहस्पति । or OPEN ani शिल्पकार शिखण्डी ना. पु. मयूर, मोर, राजा द्रुपद शिल्पी शिस ना पु. पर्वती धारया दोगाड़ शिव ना. पु. शुभा कल्याण, ललित,अविला लोग * •Treate भूयायला, गादड़, श्रीमहादेवजी। शिखरी० ना० पु पर्वत, ऊगा। or: शिखा ना० नीचौरी-टमा फन Irrit- शिवरात्रि मोरबी फागुन' कर्ण चतुदशी शिवगिरि० मा 'पुलीसपर्वत । CHAT शिखाचूड़ ना पू: पशपाशजटाज शिम दिनको त शिखिवाला पा० सी० मथर मार । शिखिवाहन ना० पु० स्वाभित्तिक ।' शिवशैल० ना पु. कैलास पर्वत शिवी० ना. पु. मयूर, मार, श्रीन, गु० शिवसुत ना० पुः श्री गणना, सामिया Fri Toir शिपु ना शिथिल 'गु: 'टीला, या, संस, अट, शिवा ना० सी० श्रीपार्वतीजी, हमाल मद। ParmTH OParents शिथिलता० ना० सा• ढालापन, धान थकान, शिवालय ना० पु० शिवाका मदिर शिवाला शियि नाम जारिश का प्रयास पर शिम्धि ना. सी. सेम तरकारी शियिका स्त्री पाली शिर० ना. पु० सिर, मस्तक, मृड़े। शिवेश सदाशिवनी, भृगाल। शिरा TI• स्त्री० टोपी, नुस, नाम लिसा शिशिर नापुः जागे, पीला, हेमन्त शित द्वारा रुधिर सार शरीर म पिरत है AT 'विशप नी माय फाउन में हैं तो हैं |Panit शिरीप० ० पु वृक्ष वशेष, सिरसी का शिशुपाली चा tir शिरोधी ना सी गलागी T शिशुता ना० सौ. TITTER शिरोमणि नावापु० मपिनहित,मांधा माण शिशुत्य ना• Farmie शिष, गु० सर्दार बिष्ट, उत्तम ! ८.गर शिशुपाल ना राना शिव-निएको ... त्तिका पनला। सहिनी शिवसुतवाहन, ना पु. मूषक, मयूर ला, सायाका शाम् । वामठ पुस्ती, मादगी। शिम्बिका मङ्गलकोप । - हारा। J पाएडर के यज्ञ में चन्दनी ने वर्ष शीतल० गु० टटा, दिया था। शीतलता ना. सी. टर, टा। | शीतांशु ना. पु. चन्द्रमा शिशुमार० ना . मगरमच्या ঘীনা না • গম, যদি शिप० ना• पु० शिता, उपदेश, शीस, पोतात ना या तेजवल परिसर शिर ग. प्राधीन, पाशकारी, जो पानादीगई गातात . जो टटर गया, जो ना सयपि उत्तम, श्रेष्ठ। शीतोष्ण गु.सरद गरम । शिटता ना. मी बाधीनता, उत्तमतां । शीर्ष १० पतला, पाप-Pri शिष्टाचार ना• • चादर, सरकार, समान, शीर्ष ना.सु. मस्तक, शिर, चाँदी, उपर। मिलसारी, चढाई देना। शीर्षकोण ना. पु. ऊपर का कोना ।।। शिधावारी गु• समानी, नौ शिष्टाचार को शोपिणी ना. सी. केशपारा, बालाकी देशी शिष्य ना.पु. चेला, मवावलम्बी, स्प्रेसने शील ना• पु• सभाव, सुभाव, मुरबुद । । शीलवान् ना• गु• मुगील, मिल सार, नम्र । शिक्षक ना • गुरु यप्पापक, उपदराम शीश० ना• पु. सिर, मूत शिक्षा नी सोकसीख, उपदेश, मन्त्र । शीशमा ना.पु. वृतविशेष। शिक्षित गुनो सिसाया वा पायागया, जो शु. ना. पु. तोता, स्या। पदरा कियागया। शुकछद ना. ५. धुने।' शीकर० ना. पु. भासी, पहार। गुकदेव ना. पु. शुधाचा, मागयते शोमा धन्य तुरत दुत, उतावल, जल्द । । शीनंग ना. पु. सच्चर, गधा । शुक्रमिया ना• पु. अनार। शीघ्रगामी १० शीम, चलनहारा। शुकवर्ण० ना• पु• धुनेरा। शीघ्रता' ना. सी. वेगताई, उतावला, शुक्राचार्य ना० पु. मुनितिरी, व्यासपुत्र शिवानी शुक्त मा.पु. अम्लनेत । शीत. ना• पु. हिम, नाडा, उद, पाला, पालू शुक्लचण्डिका ना० सी० मिली दुई शुक्ति ना. सी. सीरी।' शीतकरिघन्य ना. पु. पूची २३ शुक्लिन० ना. पु. मोती। प्रश उत्तर और २३३ चश दक्षिण का भू शुक्र० गा०प० छाग्रह, वीर्य, मान, ज्येष्ठमात, मिखए। घटावार, दैत्योंका गुरु। शीतकर ना. पु. चन्द्रमा । सफदार ना• पु. देवदार। शीतकालना. आहे के दिन, हेमाद। शुश्माता मारतो. मा शीमग्यर ना. पु. तपसनद विषमवर के दि. शुक्रवार० ना०,१० हावार । परीत अर्थात् जाड़ा। शुक्ल गु. शेषवर्ण, मामों में उपपदा शिश, शीतमोर ना. पु० संभस् । ना.पु.ग्द, सदानीरा। शांतरज ना• • फार। गुड ना.पु.उमेलापाग। F वधा। . है . १ . V - स मङ्गलकोपः। Fo800315 हित० गु० शास्त्रकी विधिदे, हो र शिलाना हक दृष्टान पत्थरक,127 है | Hirst at OF OTISis ना जो शाम को जानता । शिलागोली० ना० स्त्री० मनशिल ।' यसनापु९ संवादाची, बहु शिलाजीतना पुशिलाजीत शिशी I शास्त्रज्ञ, धर्मश - om sialz शिलाज़िम बारसमे aor OR: प० गुम शाससम्बन्धी, जो शास्त्रका है। शिलाह नगनशिलाजीत | EOIN. ० गु० शासन के योग्य शिलायन्त्र ना. पु. पत्थरका दीपा मगर IT० ना० स्त्री विशेष, शीशमवृत्त शिल्पना पुलियादिौ, कारीगरीबई ऐडज ना पु० बृहस्पति । एिडनी ना स्त्री नहीं। HEAmasti.काम MTS OF THIS शिल्पकार एडी. ना. पु०. मयूर, मोर, राजा द्रुपद शिल्पी थई, रान, मेमार। हनीपुपर्वतकी पारवा चोरी शिव नपुगशुभा'कल्याण, ललित,विली, गrion of Troris भूयांवला, गीदड़, श्रीमहादेवजी। रोना० पु पर्वत ऊँगा) aiicrefगिरिमा फैलासपर्वत। 10 गा० सी चोटी,टमा फन Irrite शिवरात्रि महिला फागुन ऋदिश चूड० ना० पुल केशपाश, जाजर को शिवजन्म दिनको प्रती 10 Tara ना० ना. पु., मयूर, मोर, अति शिववाहन० ना० पु०. नन्दीगण । ग्याला ना स्त्री मयूर, मोर ग्वाहन ना. पु० स्वामिकात्तिक , . 1. HTesi शिवशैल० नाग कलास पर्वत। io ना. पु. मयूर, मोर, अग्नि, गु० शिवसुत पुश्री पराना, सीमिका- - FATE तिक । VIPI POTar नला। Pyari OF OTHRAir अनार शिवसुतवाहन नायर मूषकमयूर सुश, द, शिवा ना० सी० श्रीपार्वतीजी, हा मालकी स्त्री, सोयावा शारू। Prayer कार पेलताना स्त्री. टीलापन, थकना यमन, शिवालयः ना. पु. शिवजीको मन्दिर स्ती, मांदगी। वा मठ। ' ' ' . राजाविशेष ना अयोप्यामधी ना. सी० सेम तरकारी !: शियिकालमा पालका I ० ना. पु. सिर, मतंक, मह। To ना. सी० यती नसलमाडी गिग शिशिरना नाडी पोली, हेमन्त पितु शिवेश ना. प. सदाशिवनी, शृगाल । परा पिर सारे शरीरा में किरना है विशेष जो भाव फागुन में होती है पगापु वृतवि, सिरसीश शिना पालक, वा errerita रोधी ना चीक गागर्दन र शिशुना ना० ख०TTE रोमाणिक नामरिनहितमा काम्परा-शिशुत्व नाsairics पि, सु० सरकार, उचम 1 शिशुपालक, ना14राना विशेष- निको ३४४ मङ्गलकोपः। -- लाप। . " V ग. ना. सांग शिरसर, पदाइ की शैशव नाम :-सिगुता मालवा दोरी । THE.. काई Trafire *गनाम्नी० ना. सी. ककरासिंगी; शोक अंगयेर ना पु..सोंठ यदरक tam ITEET झंगाट. ना. पु. निंघाड़ा। शोकार्णय ना. पु. दुःखका सागर, महा ! श्रृंगार० ना.मु.प्रथम रस १६ प्रकारका दुःख। सिंगार, संवार, सनधन... शोकात गुः शोकमत, शोक्से व्याकुल । शृंगारिता गु. संवारीहई अंगारयुत् । शोच० ना• चिन्ता, यकसीस, चन्दैहि । शृंगिका० ना० स्त्री. महासिंगी ! शोचन ना.सुविचारन, मनपूर्व गाव अंगी ना. पु. निस पशुके, सांगहों, कुकरा तनही EE सिंगी, भैसा, पर्वतमनिविशेष शोचना कि विचारना। अन्देहकरना। शृणु० कि सुनो। अफसोस्करना पश्चात्ताप करना नर शेखर ना• पु० शिरमें बांधने की फूलों की शोचनीय गुनो शौचने के योग्य है। माला, 'मस्तामरण, शिर1. शोण ना• पु• पुष्पविशेष, लोलामा, लाल, शेफालिका,ना. स्त्री. हरसिंघार मगधदेशका नद! •rt शेल. ना.पु. पन विशेष । शोपमद्रना.पु. मगधदेश में नशियन शली० ना. सी., साग, तालों की लट-1 शोणित० ना• पु. पिर, तोद केसर ।। नु नापु. मेधी । ...: शोध ना. . मंज, फलाव ! LATEST शेलमुख० ना० पुन तिव, बेल! शोध ना• पु. प्राणवा मरेदेना, पता, नवर, शेश ना- पु सापोंकाराना घरपीयर ! ना तलारा। शेष ना• पु• अवशिष्ट समाधि, नाही नाग शोधन ना. 'दोषी नितिमा अर्थात राविशेष, निसके सहस शिर हैं, जिनपर गशुई करना। विशुनारायण सोते हैं, थोड़ा। २... शोधारे गुजो होनागया-सा, इंदापया शुद्ध शेपावस्था० नात्री वृद्धावस्था, जारी कयागया। शोय. शैसरिक ना० : ऊँगा। शोभन गुः मनोरम, मनोहर, सुन्दर शोभा० Dir सुन्दरता, गार, चमक शैथिल्य. ना. पु. शिथिलता TET: कानि शल ना पु. पने, पहा । शोभायमान गु विमापत, चमनासा, शैलराज ना• पु• हिमारल, 'पर्वत का शोभित महीला tram राना! ..........FERS शोला ना० पुविशेष PIRTIES शैली नाही. ति, वानिक, गुपितो शोषक गु• नूमनेहारा, मुखानेवाला, घटाने शेय: ना. शिवका उपासक । माहारा Ritika HiTTA शैवाल. ना. पु. जलका पौधाविरोप, शोषण० मा पु• मुताना साप, घटागार * माशीच ना : स्नान, स्नानादि कर्तव्यकर्म । शैषी ना.पु. सेवा, शौचकर्म ना. पु. रनमादिशुचि दिया का उमर। जो शोधने के योग्य Iegine शैत्य गुम्दी मङ्गलकोपी 1 . . . बददया। . शौनका पु• मुनि विशेष EFit धैरती नासी दी । शौरिजनी पु. भगवा शनैश्चर धाचूक ना. 'पु० अर्जुन ? errits शौरिप्रिये ना पुविजयसार । FIFF श्राद्ध०० पु. पितरों को शान राति सण्डिा शौर्य 1. सूमीपन, बहादुरी । "FREEदा देगा, यज्ञ १ . श्मशान गा पु.मरंधर, "मृतक जलीया श्राद्धदेव० ० पु० धर्मराज यमराज । IRधानविशेष । श्राद्ध पक्षाना-पु. कागत, पारिवाया श्याम TI• पु० कोरिला, पाम्बौन से पश्चिम श्रान्त० गु० मुखित, जो. थक गया, अमित । देशविशेष, श्रीकृष्णच ट्रेजीकोलावर्ण । श्रान्ति ना० स्त्री. श्रम, परिश्रम | श्यामकर्णना• पु. पह 'धोड़ा जिसका एक श्राप ना. पु• शाप, पाशीर्वाद से विपरीत, का श्याम और केश पीत 'ओर सर्वशिरीर मद्रवर्ण होवे। 17 •g of cापित गु० शापित, धाप दियागया कि श्यामल गु• कालावर्णविशेष, गु. पीपरी श्रावक० ना• पु० जातिविशप जो 'नास्तियों श्यामली०मा धीर पोलीतीली| osp अर्थात् जेनियों में चले है, नास्तिET. sis श्यामसुन्दर० १० पु. श्रीकृष्णजी ! श्रावण 1. पु. साग, चौथो मही श्यामा सी० श्यामरंग पापी, पडिर, श्री० • सी. सम्पत्ति, शोभा, '-दरता। पीपला, श्यामस्त्री, संदरग्री, अनिखी, प्रिय गु. लक्ष्मी, शद वे पहले बडाईका शोधक'। । रात, प्रीति, पालिकादेवी TrnjTT श्रीकण्ठ ना.मुं० सदाशिव ।। in श्यामाका ना•"पु. सामानको OTHER श्रीकान्त. ना. पुॐ श्रीविष्णुनारायण श्यालक० ना० स० साला, पक्षी का भाई श्रीयएड० ० पु० चदन। श्रीगेह० ना० पु० शेतकमल, शामाका घर, श्येन० । पु० पविशेष, वानी • TH लक्ष्मी का घर, खजाना। prrit धान गु० अंडायुक्त। श्रीदामा० ना० १०. श्रीकृष्णच द्रजी या एक श्रद्धा ना० स्त्री यादर, इच्छा, विश्वास, सती श्रीपति० ना. पु. श्रीविष्णुनारायण,ofmore श्रीपणी नसी'कम्भारी [s Fost श्रम • T० धार्गा, दौडधुप, उद्यमकष्ट । श्रीपुष्प० ना० पु. लोग, लोग yyE श्रम परो में जो पसी श्रीफल. ना. पु. नारियल, बेल, धारला । श्रमित गु० था, मादी भ्रमी अमरनहारा, उद्यमी श्रीमत् गुरु भाग्यवान या शोभा संयुकवाना हय, दौलतवर। श्रव० ना. पु. का, महन, चलन PF अव पान, गार और बाईसवी श्रीधराचार्य ना. प्राचार्यविशेष जिहां श्रीधर - श्रीवि सुनारायण । ने में मद्भागवत का तिला किया। ric प्रवणशीर्षका लाग्यौडी, मुरडी श्रीनगर ना.पु. नदीनाय के मार्ग में पत्र श्रवणा ना. स्त्री. बोईसवी नत्र पर नगरपिशेष, कश्मीर में नगरविशेष श्रयणीय गु० जानिने योग्य है। श्रीमन्ता भाग्यवान, धना, शोभारी युवा प्रयतापत, महा। + Feri FIUामा धनाग दौलतर्वर । TISH + . श्याला . . । सखा। . CIE p com ति, शुभेग्धा । श्रद्धालु० गुः श्रद्धासयुक। थमन्द० ना० पु. सत्र । BEST मङ्गलकोपकार ... श्रीयुक्त गु. यशवन्त, 'मुख्याती धनी, श्रोध ना. पु. कान, रोमरम्भ, पननेहाराज श्रीयुत । भाग्यवान्। नाभी। मा. श्लाघनीस या उड़ाई के योग्य, मर्यादिका श्रीरंग ना.पु. श्रीनारायण,विष्णुनी श्लाघार गा. सी: तुति, मर्यादा मिलती श्रीरंगपट्टन ना. पु. महाश्वर यात् मैसूर श्लाघ्य ना.पु. श्लाघनीय. sar देश की राजधानी. ... श्लीपद नाप:: धाम, पीलपाय TEE श्रीपण ना० पु० गावेरोष, HE राग श्लेष गा० पु. निसपद के, दो यर्थ या श्रीपणार ना भी गोली, पुण्डीपीधा) C. श्लेषा ना. मी नयांनक्षत्र, अश्लेश श्रीवत्स .पु. श्रीवियनारायण, लक्ष्मी मा श्लेष्मा ना. सी. कफ नाश्टपकना काम कर लोक०.ना.पु.पद्य, बन्द । ८ सय हृदय में पास। श्रीहा-पु. सिलहट नगरविशालो श्यशुर० ना० पु. पही वा पति का पिता, धीहिंडोल० ना• प; रागविशेष श्वभ० नाक स्त्री सास, पली वा पतिको श्रत गुनो एना गया। माता । SERITY श्रुतेि ना.पु. वेद, कर्ण, शान, समाचार श्वसन ता-पु: पवन, वायु, यथा (प्रचना - वरुपःपाशी यादसांपतिरपति श्वसनः सर्शनी ना. स्त्री मुनाइट। थतिमणि ना? मु, कुरइल, कर्णफूलगी पायुर्मातरिश्वासदागतिः सत्यमरः ।... श्रुतियुक्ति नारी. थे. पि. श्वसनक ना० पु० मा पौधा | CRITE शास्त्रोक्ता श्वान ना.पु.कुत्ता। श्रुतीदगला पालन श्यास ना.प. प्राणवायु, सौम [ भेगीना. सी. पंकि, लकीर, कतार, समद, श्वेत० गु• शुरू, धौला, सफेद। श्वेतता. ना. स्त्री. सुरता, गलता धेय. ना. पु. कल्याण, वीति । सफेदी । धेयसी० ना रवी..६, गजपोपर, रामना। श्यतेदंडी ना. सी. दूर, पास। श्रेष्ठ गु. उत्तम, अच्छा, सबसे मला, प्रभात । श्वेतपुप्पा० ना. इन्द्रयारणी, नैर. श्रेष्ठता गा तो उत्तमता, प्रधानता तान! श्वेतमूली० ना. वा. पुनर्ना। श्रोणतिलका ना. सी. कश्यप की पती! श्रोणिना स्त्री कटि, कमर । श्वेतसर्पप९ ना. OTHE सफ़ेद सरस श्रोणित ना. घ. रुधिर, रक, दूर पाम। श्रोत ना , पान,कर्य, नदी वी पारा, मर- श्येतिका ना स्त्री सौफ। m श्रोतारमा जो सुनने के योग्य । श्रोतस्वाती ना पो नदी पटकोप ना. पु. इन्द्रका वाकोनेका । भोताना पट्चक ना..वाचक प्रसाद पाधार, खा. E भः नाप धि, रस, तो मनायतराजी वा स्त्री चर्चा तरकारी । येतफला बाइरेर । श्रो श्वेता नार म SC सोता। [s].. criter EDIF पर नाग मङ्गलकाप 1 ..एकामचित्त । 1 फाम. ..... विष्ठान, मणिपूर, अनाहत, विशुद्ध, प्रशा: शिक्षा, कल्प व्याकरण, निरुक्ति, ज्योतिष, पट्पद० न० पु. भोरा, मधुमासी । छन्द्र छन्दःप्रवन्ध। विशेष। पडंगसमाधि नाही. समाधि के छः अंग पट्पदी ना. स्त्री भ्रमरी अर्थात् राम, दम, उपराम, विषय, ,एख, दाल, पशान ना पु० छः शास्त्र अर्थात् न्याय, रामान, वेद याचार्य, का, याताकारी होना। वैशेषिक, मीमांसा, पातंजल, सांख्य, वेदान्त । पहनन्ध ना सी. पीपरामूल 1-पडाग ना. पू. सामिकार्तिक । पएढ० ना. पु. नपुंसक। पइन्तु० ना० पु. ६ ऋतु अर्थात् ' वसन्त, "मीम, वा, शरद, हेमन्त, शिशिर । परमास ना.पु.का.मास । ५. . पहऊर्मी० ना० स्त्री० : उमा अर्थात् 'शीत, परमुख० ना. पु. खोमिकौतिकी पष्ठ० गु• छः, ६, पटवा। अभ्य, दुःख,एख,मान, अपमान । पटि गुः साठ, ६... पइलोक ना..पु. : लोक पष्ठी ना०सी० दुर्गानी; पठीतिषि, कोरकर, अन्तरिक्ष, स्वर्ग, पित, सूर्य, ब्रह्मलोक पष्टयन्त० गु. जिसके अन्त में पता . पगुण ना० पु. ६ः गुण अर्थात् निभदा नि सय है। मात्सर्य, निर्मोह,, निर्लोभ, निष्फोधनि. पोदश० गु• सोलह, १६ ! ... पोदाराचन्द्रकला ना.सी. चन्द्रमा की १५ परस० मा पुः यः रा थर्थात् फ्रा, कला अर्थात् अमृता, मानदी, 'पंप पुष्टि, खट्टा, भीठा, चर्परा, कसेला सारा...:;: तुष्टि, रति, धृति, शशिनी, चन्द्रिको पान्ति पमन्या. ना. स्त्री• कनूर मेद । जोस्ना, श्री, प्रीति, युगदी,"प्रणा, पूर्व पराग०, ना. पु. ५. राग अर्थात् मेघ, भैरव, मलार, दीपक, भीहिंदोल, मालकोश पोदशयिधपूजा० ना. रवी० सोलह प्रकार और झगड़ा खेड़ा। से पूना अर्थात् अावाहनों स्थापना-पाय, पपदन० ना० पु. स्वामिकार्तिको सिंहासन, अर्प, प्राचमन, स्नान, चन्दन, इल, पयिफारमा पु. ६ः 'विकार अर्थात्, उ. धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, प्रतिषों नमः सति, शरीरवृद्धिा पालकता, प्रौदता, वृद्धता। स्कार, भारती १६ ।। Prof पड़ेग ना. पु. शरीर' के पंः अंग ग्रंथ "गुचि, स्नान, निर्मलपट, महापर, जीवधा, पोशाना पुसोलह शृगार योन् हाय, पांर, फाटे, शिर, वेदके छः अंग अर्थात् । मांगसिनूर, भाससौरि, निलकपोलकैसर ज्योतिष, व्यारेगादि; गानुरू। मईन, महेंदीरग, कुसुमामाय, हेमांगरण, इंगादि प्राम, दातोंमें मिरसती, ताम्मूती; पएनेत्रिकामा सो करपती पना प्रांतों में पुरमा १६ :::: पापियति गुदमास २६ । पविशतितम गुदमी पारशी ना. सी. मृतका मर्म विशेष::. पविधिनाः सी या प्रकार पडंगद ना. पु. पैदः अंग अर्थात् समय निसन्द आदि में इसका . अमृता १६ ८ - पगुयाना नीच श्री a.: Periy मङ्गलकोप। है करता। . । नियम, वराव, 17 सगती। T - प्रयोग हो उससा अर्थ सहित, समान, से संवार नारी सगाव, बना, शोमा ! होता है। संवारना सरिक सजाना, बनाना, HERE सई० ना. स्त्री नदी विशेष से अन्य सम, सहित, से। संशय ना० पु. चिन्ता, सन्देह, भय 1; - : संपन्दन ना पुशय्या, द्रो सशयापन० गु; सदेही, चितायुरू, भयभीत, | संसह गु० समाप, मिला, युझं। सयम. ना. पु. यागादि 1410 संसर्ग० ना० पु सगति, भेद, दर्शन, -- मेल, परहेज । । पड़ोस, समीप । संयमनी नारसी यमपुरी IIT संसर्गी गु० मिलनसार, चिहारी, पड़ोसी, संयमनीपतिक ना. पु.,यमरान संयमी गु० नियमी, मध्यम । ससवा ना० सी० परी। सयुक्त गु० मिलाहुया, सलग्ना खा- जुक| संसार ना.पु. गगन, गृहाथम, दुनिया । सयुग० ना० पु० युद्ध, समर, रण, प्रडई संसारी गु० तौकिक, जो ससारका है।" संयुत० गु०सयुक्त • error|संहत० गु• संसारी, दुनियनी । संयोग० ना० पु० मिलान, व्यका मेल, संगठ, संसार० ना• • रमरण का हेतु, व्यवहार देशागत इतिधाजन् । . यथा गर्भाधानादि १. पवित्रता . संयोगी ना. पू. शिलिन मिलनसार, सगी संस्थत ना• पु. दासाती। संरफ्त गुयरुप, लालपर्ण। | सस्टतानुयायी गुरु देवाणी के अनुगार सम्म० गार पु. कोपा मोध, अहङ्कार ।। सस्रताभिज्ञ० गु• सरकृत मापा जाननेपाले संलग्नर गुरु, सयुक्त, सगत । संलग्नी० गु. मिलित, लगाहुया, सगी, संस्थान ना पु• टप, रूप,बनायर, चतुपथ। सयोगी ।। संस्पर्श० ना. पु. आपट, सत, लगार। संलापला पु.,परस्पर बातचीत। संहत० गु० टोस, पहा ।। संरत्ना• प०,व शाका, साल-एन । सहति ना. स्त्री. समूह, र सवत्सर० मा. पू. ११, साल। संहरण ना• पु. वध, हनन, मायहरन । सवत्सरी० ना. पु. वर्षका व्यवहार।। संहरना०. वि. वधहोना, हतहोना मारा- खवरण ना, यावरण पानादन ! संबरना० प्र. वि. सनना, गौमित होना,समा संहार ना• पु० माश, वध, इया, गु: मारा, संयतः ना. पु. स्मृति प्रथविशेष संवर्तक - नदेवा। संहारका ग. नाशक, नपिर। संबलपु. दैत्यविशेषज मार्गका। सहारना० स० वि० वरना, नाश करना। संघलारि० गा.पु. कामदेष म्नजी। संक्षेपा• ० सार, विशेष कथन, ग पोहा संवह ना • मुख्यपंदन ! of संक्षिप्त गुध, दिपा, अप्रकट । साराश, मुनामा, मुलसर । सवाद. ना. पु. तिचीत प्रश्नोत्तर, चर्चा। समका नापु. नामी, नाम । संशया मा० सी० विपत्ति रा, प्राश्न संझा ना• सी० नाम, शद शुमिगन . - , . 1 जाना। ।- ३ - --- 1-1-7 मङ्गलकोप। NO करना। सकट ना पुछका लदो, गणेश झा, सकोचनापुर मंदिर सन्मान । जन्मोत्सव दिन - Riसकोरजा साकि समैंटना संकोचनासंग -. संकटाख्य ना. | सकोराजापु स्टोग, मिट्टी बारकादका सकटासुर नापुर दैत्यविशेष निसको भी छोटा वर्तन । Tir perity कृष्णजी ने मारा था। सफोरी ना. स्त्री० धाली पिरिचrrrry: सकटी ना० सी० सदी, गाड़ी समोध गुपोपसमेत TEFirs. सकतना पु:शक्ति Enhiसखर अधिक खरयुतAP SEEIN सफना०प० ािसामार्थ होना teri सखा० ना० पु. मित्र बन्धुः प्रियतमममी सफरा गुसंकेत, छोटा, तग १ सखी० लाखौ मिनी, सहेली, संगित सकराई "नार स्त्री सती, तंगी, घोटामा सल्य० ना० सी०मित्रता, प्रीति सकराना० स० कि सरत करना, सपोरनी संग ना० पुठाराकटेंशष्ट खाकार करना कबूल करना सगर० ना० पु. अयोध्या कोरोनी सकरुणा० गु० दयापुत, दीनता से vिi | सगरे० गुरे सप, समल TI सकर्मक गु० फर्म सहित किया। सगर्भ० गुगभिवाजी सकल गु० सारा, रोमरत, सप, सर्गरी । - संगपहिता० ना.. मा समान अक उदाराहीना, थकना, ना सगा गु०का एक कार बम सफानीगु सी. "उदास होगई, लज्जित, सगाईपतला, दवगई। मैंगनी गरेको यो रिसाहारता है। सकामना: पु० काम वा कामना सहित । सकारना० स: कि. एडी को लेलेना, प्रहण | 'समानगोष, शEATE सनानन्त्री मांस करना, सरोकार करना, कबूलना! जानि मुनिरादरे, गितpiys सफारे०'ना० .पु. प्रातःकाल, रोवरे । गुगा, I jFT | SUPER सकिखनाअ० कि० समिटना, हटनासाची 'सीराणी महेस.ori 'सकिलाना स. 12 समिटाना, हटानी संकट मा० पुपति, दात, गहाण पता । सकुचना अ०कि. डरना,रांशयफरना, एक संकटान दशाविशपोशी . लिनाना, उगारमा मशिशिर ain , kirit सकुचाना स. सकुचित गु लन्जिन संकर का गुरु दाग पमितता सकुल नौ पः पी, कुलसमठे, सातकर्षण मा०,१० मावसदसभी Ni सकुलादानीना शो गंदा सफर 10 ए. राणा, देर सोकर को भोर । सोता राकरा, तंग, छोय, गः नीरमा संकलन गा. जोरतायोग : TARAMnt winni सकतना० स० कि० करना | साखिरानी, लोहागरा नएRATE सफेलना०कि या स्नदना, वीरना भिलायागपागा, गणित irritating सकेला.ना.पु. संकल्प० मा० . गा, लिपा शा. ७ •rh प्रापदा, दुनित।
२५.० मङ्गलकोप। .. " । स्त्रीप फर्म में प्रतिशाविरोष दान महानासंगोपन ना. पुलिपात, गोपन । सिंकल्पना० स० कि. दानदेना, नियम पम-संग्रह ना० पु. योर, राक्षेपन, सारार्थ लेना। तिज्ञा करना। संग्रहण ना• पु० सीकार करना, लेलेना, संकाशनापु तुम्य, प्रशाशयुत 1,31-संग्रहणी ना. स्त्री. प्रतीसाररोगविशेष । संकीर्ण १० मचामच, घना। } }. संगृहीत० गु जो संग्रह कियागया नौ ईका संकीर्तन गोपु. गुणोंका गान / किया गया। संकुचित गु. सकुचाया, लग्नित ... संग्राम ना युर, समर, रण। संकुल० गु• मचामच, घना, मराहुया पूरा 1, संघ० ना• पु० झण्ड, समूह मेला, देर सँग। संकुलित० गु. भरा, युक्त) : -1 संघट० ना• पु. प्रयोग, मिखान रग 1-", संकेत ना: पु. यचन, अवधि, सैन, नित, संघटन ना० पु० रगइन, विसन्त सलाद, इशारद, एकाद। संघातक ना.पु. मारना, समूह, नरकविरोष। संकोच० ना.पु. खान, लस्ना, केसर, कानि, संघार० ना. पु• सपार। चिलगोजा, सिमट । संघारक० ना• पु. संघारक, काल, भैरव । संकोचन ना. पु. सेंच, सिमटाइट। संघारना० स० कि. सहारना । 7 संकोचना० स० कि. बोरना, रामैटना, नाना, सच० • सत्य, साँच, अन्य हा, टीका कानिकरना। 62 सचमुच० धन्य. सचकर । संकोची लजीला, लाजवन्त । सचल ना० पु. चलनेको शक्ति समेत, गु. संफमा गा.पु. सचार, यमन । जो चत फिरसके यथा मनुष्य, पशुपए संकान्त गुजो नीद्वगया, जो एकसे दूसरे को सचाई ना. सी. सत्यता । सापागया। सचिव ना.पु. मग्री, पनीर । शान्ति सी. एक राशि से दूसरी. रशि में सचिज ना. पु० मनीषा पुत्र, 'वीरतादही सूर्यका माना।। ..,सचु० ना. पु. श्रानद, सत्य, सामा संखिया ना. सी. विषविशेष |सरेत. संख्या ना• स्त्री. एकदो चादिगिन्ती, शुमार । सचेतन०९गु सुचेत, चौकस,चेतन्य मुत्ती । संग नागपु. सयोग, मेल, लीलागोपा, अन्य सचेट० गु० चेष्टायुत, उद्युक्त। ..., साप, सहित । सचौटी ना स्त्री० सवाई, राचकहनेकीचात , संगपिछना. पु. मोचरस। . सध संगतिना. सी. मैथुन, मेंट, मेस, मिलाए । गु• सत्य, ठीर, सौपा। सञ्चा० Tr- संगम मा. गु. मेल, मिलाप मैथुन । सचाई ना• स्त्री साई । संगर० मा पु• पुर, सजाई, यापदा, यण, संचिदानन्दु ना• पु० ब्रह्म, ईर । धावनी, लश्कर। सच्छास्त्र ना• पु० अधाशास- संगसीना स्वीसकसी। सज ना. सी. डौल, टर, सिंगार शोमा.. मंगी ना.पु. साथी, हमराही, मिलापी। संगीत ना.पु. रागभेद, गन, गानेको विद्या। ससकना यु-गयाना! ५ संगीतदर्पण ना... रागविद्या का प्रयासजग • होशियार खबरदार उनादी, विशेष चोकस, चैत य । A + 1 +r 17 मईलकोप। । I . . - . सजधज ना स्त्री. बनावट, रूपारामा सजात० कि० उत्पन्न पैदा। सजन० मा. पु० पति, प्रियतम । “सफट० • पु. लचीली ही, भगारामत्र सजना अ. कि. मनना, परना, साइना, मान हुकारी नय। पहिरना, सुधरना, ना• पु० सज़न, सेजन सटकना० अ० कि. भागनाना, प्रिपनायलग. सजनीना स्त्री सखी, सहेली ।। होना। सजल गुरु जो जल से भरा सटकाई० ० स्त्री० उतार चुदाय । सजवा. ना. पु. सझिला- भाई, चारभाइयों सटकाना० स० कि. निरस करना, छिपाना, में से जो तीमरा माई हो उसका उपनाम । भगाना, मालाना 1970 सजाई ना स्त्री० वावाई, बनावट समाय, सटना० कि० मिलना जुड़ना, निकर रामायणे यथा तो विधिदेइहि माहिं सनाई । सटपटाना० ऋ० कि० घबड़ाना, टना - सजातीय० २०, समान सम नातिया, एक | सटा ना ना० गलक वाल, जा। जाति का U सटाना० स० कि. चिपकाना, जोहना, लगाना। सजाना० स.कि. बनाना, रचाना। सटासट ना. ती लगालग। सजायट० ना• स्त्री बनावट रचार सटिया ना० स्त्री० दडी । सजीला गुमुहाल सुदन, सुदर । सटीक गु• टीकासमेत, तिलक्सयुक्त । सजीव . नीवन, जीवधारी, जान समेत, |सरियाना ग्रस कि? साठ वर्ष अायुसे धाद में। अरिक हाना बुद्धिवल पाना। सजीवनिक ना. सी. बूटाविशेष । सोडा० ० पु. पुष्टः पिशा लामाका सजोयल गु० बरतर समेत, हथियारवद । दिया जाता है सज्जन० गु- फुलवत, पादरी, साधु, और सडक पा० स्वा०राजमार्ग पथपिडा। थका मनुष्य ना०प० प्रियतम, प्याग। सडन० ना. स. सनथ, गरन-1.५/21 सज्जना० श्र.क. सजना। सहना० १० गलना-बदना सज्जी पासा. सारविशेष । --- सडागुगला, उबसा। सझिया. ना. ना. साझेगा सतयादि । सभियार० ना• पु० साझी, शरीक । सहाध. ना. सी. सहनेको छ। सझियारा. ना. पु. सामा, शरारत IF सहाना सकि० गला, साना । सचप० ना. पु. सग्रह, टर, समूह सडियल गुल निक्क, सहाहा. " सची गु• सचय करनेहारा । संघा गु० सहित । सचा मा. पु सैरमण, गूदतां स जो चलन, संडसी ना रखी गहना, रसगमी समti मार्ग, राह, बार, चलन, निशान । सडा गु० पोदा माग। सचारिकाना० जी० कुरा.. संहासका पुर्व गायताना, पायाभ सचारिणी गु० स्त्री० चलानेवाली - सहासा ना. दु. बड़ी मसी। सञ्चित गु० जा बारागया, पूर्वकृत धर्मा सदासी ना० . , सुगडसी ।, 17सद गु, स्य, ना माहीर, स्त्र सचेत गु० सचेत । मनमान, रस,बीन, न्दा) . सक्षित गु• विपा, गुप्त । सतमामा. ना. पुर में । । . . T , +3 " ३ - है 1 ।
३५३ मङ्गलकोप MP ८ - ar T F की पूजा विशेष वा ज्योनार । सत्ताईस० गु०पीस चौर सात, २७ सतमी ना.स्त्री. सप्तमी। सत्तानवे गुन चौर सात, १७१८ सतर० ना. स्त्री० तिदी, टेदी। सवारन गु० पचास और सात, ५७ सतराना घोषित होना, इदना । सत्तासी गुरु अरमी और सात, ७॥ सतरीही ना. स्त्र दी, तिची । सत्त० ० पु. भूनेयर यादिका चून। सतर्क० गु० सावधान। सत्पथ ना.प.समार्ग, अछामार्ग। सतलज- T० सी० पगारकी नदी विशेष । सत्पुनः ना. पु. सपूत, भलापुर सतलहा गु० सतगुना, निसमें सातलड है। सत्य-गु० ययार्थ, टीक, निश्चय, साच । सतसठ गु० साठि और सात, ६० । सत्यकेतु. ना. पु० रानाविशेष, सयकी सतसया ना. स्त्री. विहारीलाल काश्त पताका प्रय विशेष | सत्यता ना. श्री. भलाई, सचाई। सतहत्तर गु० सत्तर घोर सात, ७७ ॥ सत्ययुग० ना.पु. प्रयपयुग जो सरह लास सताना० स० दि० दुस्स देना, धेना। अट्टईस सहसर्म का प्रमाण है।' सती ना. स्त्री जोत्री पति के साथ अग्नि में | सत्यभामा० ना. स्त्री० श्रीकृष्णका ती शिरी जलती है, पतिव्रता, ददमुता। सत्यभा० ना. पु• सीधा समान।' सतीमठ. ना. मु. रयान जहा सती के परिप सत्यलोक ना० पु० ब्रह्मलोक सर्गविशेष17 पादिरयापन करते है। सत्यवचन. ना. पु. ययर्थ कहना, टीम। सतीर्थ ना• पु. जिन्होंने एक गुरु से अप्ययन सत्यरती० ना० ची वेदव्यास जी माता, पति- किया है, गुरुभाई, सायायी, एक साथ के व्रता स्त्री। पदनेहारे। सत्यवाद. ना. पु. सत्यवचन, ठौरवाती।। सतीला गु. पराकमी। सत्यवादी गु• सञ्चा, सच कहनेहारा । सतीगाड पु. रथात निसमें सनीहुई है। सत्यसिन्धु० गुबडासच्चा । . सत्यानाश ना. पु. सम्पूर्यनारा, विगाना ।। सतुवा ना. पु० सत्त। सतूचा सत्यानाशी ली वटीला पौधाविशेष, गु. सत्कर्म ना.पु. मलाकर्म, ठीक कापरी' जा विगगया, नर । सत्कार० ना. पु रामान लोपका जसाना । सत्यानृत० ना• पु० चाप य, व्यापार । - सकारी ना. पु. मुर्देका जलानाला, सम्मान सत्ययुग०० पु. मयुत, सत्ययुग। Err वा चादर परोहारा। स० सरिया नाय रखी। मृतककी सुगनि, उत्तमर्म, सत्वगुण. धारमगति। 17 सत्यन्ता गु० भला कीर्तिमान । सत्तम गु. श्रेष्ठ, बड़ा, मर्यादिक, साधुयों में सत्वर अच्य. तुरन्त, शीघ, मस्दा जो सर सबका सशरा३० ना. पु. युद्ध में जो मरिगय उनके सत्तर० गु० साउदहाई, .। सत्तरह मु. दश घोर साव, १७॥ सथिया. ना. पु. अस्त वैद्य, नरीह, निक सत्ता. ना. सी. देव पराश्म, गनीका में जो विरा जो महानन लोग साते.के. प्रथमपत्र में सात, पाचार, मदार वरत है। । 7 F गापुभलाई का गुण।। - . *। L- .
मङ्गलकोप। ३५३ सद्यः } , प्र . M सदा० ३ अव्य० सर्वदा, निय, हमशहा , । 1 सद अन्य सद्य, तरवण गु• श्रेष्ठ, अव्य तुरत, तक्षण । सदनः ना. पु० स्थान, घर, मकान Irf सध सदय गु० दयायुत, दयासहित । सद्वक्ता गु० सत्य कहनेहारा। सदया ना स्त्री० धमदवत्, पची की सी। सद्विवेकरना• पु० सयविवेक, उत्तमज्ञान- सदस्य० मा पु० बर्म करो में जो न्यूनाधिक | सद्विवेचक ना• पु० जो यथार्थ का विचारे । का विचार करे या सुधारे, देखरेया। 1 - सधन० ० पु. धन समैत । सदा० सधना० अ० कि० बना, हिलना, ठहरना, धभा। सदाकार० पु. पाव का वृक्ष यान्यम्ब सधवा ना० स्त्री. सुहागिर, पतिवती स्त्री । सदागति० पु. पवन, वायु । ८५१ सधानास० कि. मिखाना, बनाना, हिलाना, सदाचार० ना. पु. सर्वदाकाल वाचार करना, पूराकरना, ठहराना, थभागा। श्रेष्ठाचार, पपन, वायु, हवा । सधी० गु• बुद्धिममेत, 'रयासमेत, हिली, सदानन्द० ना. पु. सर्वत्र वा सर्वदासाल ठहरीहुई, सीखीहुई। प्रसन्न, धागुरु । सन'नापु. पौधाविशेष जिसकी स्वधाकों सदापुष्प० ना० पु. मेंदारवृर, कुदवृक्ष, नृत, रस्सी बनाते हैं, अन्य से। जिसमें सर्वदाकाल पूल लगने हो । सनकार० न० पु. सेन, इशारह । सदाफल०, ना• पु; नारियलच, पेलवृक्ष सनकारना सं. किसैनदेना इशारद गूलरवृत्त, कटहल, गु० "वृत जिसमें सदाफल करना। मिलत हो। सनकारा गु० इशारहदिया गया, जा सैन सदावत पुअतियों और सतादि को दिया हुआ। नित्य भोजनदना। " | सनत० ना.पु. मुनि विशेष । सदाशिव ना. पु० श्रीशिवजी का एनामा सनत्कुमार० ना. पु० ब्रह्मा के चार पुत्रा में से- एक जो श्रादि पुरुषथा। सदासुहागन० ० श्री. पक्षीविशेष, मुल विशेष, फकीर या भिक्षुक, ना सी का भेष सनना था कि गर्भणा होता, भरना, मला, संदेह गु० देहसमेत। | सन्निपात ना. पु. रोगविशेष, जो.फ पित्त यात के बिगड़ने से होता है। सहश परावर, तुल्य, समान! संदेश गुर समीप, पास। सना ना० पुस्त्री प्रोषधि विशेष, साय । सदैव अन्य सदा सर्वदा। सनाव्य. ना. पु० ब्राह्मण नाति विशेष । सनातन० गु० जिसका प्रारम्भ गौर अतनहीं है सदैविक गु० सनदिनरा, त्यिक जो नित्य रहेगा। सदोष गु दोषसमेत। सनाथ गु० नाथ सहित, निहाल, माया सद्गतिक ना. स्त्री निस्तार, मुक्ति, त्राण । सनाह. ना. पु० बस्तर, गु• पतिसमेत । सगन्द० ना. श्री. सुगधा सनिया० ना• पुः टसरका वस्त्र विशेष । सनीचर ना० पु. शनैश्चर। सदल० ना० पुसमूह गिरोह । ' सम्भा ना० पु० घर, स्थान, मका | F. सनीचरा गु' प्रभागा, अपयशी, ना पु. G T . 3 करता है। गुधना। .. , । - r द ८ .
३५४ मङ्गतकोप। . दरार, मिला। - समिक्षप० ना. पु. समीप समीपो, निक- ग्वालियर क निकपर्वत विशेष निसपर सनीचर सन्देसी ना० पुछ दूत, पगम्बर।। की मूर्ति है। सन्देह • पु. मशर, शरा, पिता, रारुप सनेह ना. पु० तेल, गु. स्नेह । सन्देहिक गुरुनिसमें मन्देहहो ।। सन्त ना० पु. 'सावी, ईशरवन, गु.सन्देही० ना पु० सरायो, चिताय ।। अदाधनी, मला। 7सन्दोह. ना. पु. समूह, बहुतायत ।। सन्तत अनिल, निरतर। सन्धान० ना. पु. थन्वेषण, सान, नाक, ल. गान, लगावर मितान । सन्नतिका स्था• सतान, वशे, पुनादि ची सन्धानना० सं० मि. जोड़ना,तगाता,ताना।' लाद। सन्धाना ना. पु. भाचार । सन्तप्त • पाटिन, दुखित, सतायागया, से सन्धि - श्री. मेल, सयोग मिला तारसहित । सन्तरण • पु. तरणा, महाना। सन्या. ना. सी. सायंकाल,ौलि, साझ, सन्ता गु० रिगड़ा। विशाल म उपाRT समय नाम, प्यथा स्यों सन्तान० मा.१० या, लाकरल कपट्टए। दर, मध्याह, सूर्याला सन्ताप पु• राय, पीडा, दुःख । सन्नाटा० ना. पु. जलमी लहरोका जो शन्द, सन्तापितर गु• सनप्ता सताया गया, पीहित । वापु या झही, म जा शन्द हाताहै। सन्तापी० गु० शोरसयुक्त, उद स, दुसी। सन्ती ना. पु. बदला, अन्य बदल, पल, सन्निधान ना-पु.. लिया सन्निधिला. सो. एना, समीपहोना। सन्तुष्ट० गु० धीरनी सतापी, तृप्त, मनमरा सन्निपात ना. पु. रागविशेष, साम । हर्षिता सन्निहित गु. निकर, समीर, पाम् । सत्तोप ना. पु. अान्द, धीरजा हेप, मुप्ता सम्मान ना. पु• अदर, सत्कार, मर्यादा । सन्ताप गुपरजवान् अान्दो, हपित । समानार्थ गु• जिस शुन्द से प्रविष्टापाई, सन्यासी-43 सर. सन्दर्श ना. सी. सरडसी, ससा ।। सन्मानी० गु• शिष्टाचारी, प्रादरी, सन्कारी। सन्दर्शन० ना. पु. सामाधारTheसन्मुद० ० पु. १५, प्रीति, अानदा, सुह! सदान • पुः दानदना, रस्सी जा पा सन्शस ना. पु. चौथा पाश्रम, दिगम्बर । पादकपा में बंधते है, मुनारों या हथियार सन्न्यासी० मा पु. चौथा पाश्रमा, दिमिरी विशेष सपदि० माय. तरुण, तुरन्त, Tom सन्दिग्ध गु• सन्दरयुत, भरमीला 7 सपना ना. पु. स्वामी सपल माहित पडर, पत्तेसहित। सन्दिग्धभून ना• पु० निसके नीनन में स , सप६० 7. पु. सहायय, सगी पसर सन्देश ITriसपीतक 11. पु. पायातुर । . सन्देशा० प. पु. चार, पैगम, ... सपुत्रः ना.पु. प्राके सहित । }सपुरा • सी सती न ८ - ." ८ - M . - f समेत . . सन्देस पर सन्दसा . - मङ्गलकोप। सपूत० ना.पु. सपूत । नगरसम्मा ३ उर्वसी ४ तिलोत्तमा ५ सुफेशी सपूताई मजुघोरा । सपूती ना. सी. सरसुत्रता, सपूती। सप्तमुपवायु० ना. पु. सानपुरयपयन अर्थात् सपेला सापाचा, छोग ग्रावाह, प्रसाद अनुवह, सवह, दिवह, परावद, सपोला. ना. पु. साप, ममता साप परिवाह ७) सपोलिया. सी. फा बचा। सप्तयुद्ध० ० पु. सात प्रकारकासमर चांद सप्तगु. सात ७॥ धनुष, चक्र, कुत, खा, गदा, पुरिका, मत । lao ना. स्त्री • सातईति अर्थात् अनावृष्टि सप्तराज्यांग TI पु• राज्य के सात श्रग श्र- १ प्रतिवृष्टि २ टीदी ३ मूषक ४ शुरु ५ स्वसे य ६ परसैय ॥ धान स्वामी, मत्री, देश, पाश, मित्र, गदा सप्तऋषि ना.पु. सातऋषि अर्थात् पश्यप । सप्तविंशनि शु० सत्ताईस २ । अनि २ भरदान ३ विश्वामित्र ४ नम ५ जमदग्नि ६ वशिष्ठ । सप्तविंशतितम गु सत्ताईसवा । सप्तशितानि ना० पु. अग्नियी सातनिहा सप्तसिंधु० ना० पु० सात समुद्र अर्थात् लवण द, रसोद, सुरारिधि, घृतनिधि, दधिनिषि, पार. अर्थात् काली १ पराली २ नययती ३ रक्षय निधि, जलनिधि । विका ४ खलनी ५ धृपया द धूमशीर्षा ७ ॥ सप्तस्वर० ना. पु. सातस्वर अर्थात् पहन, ऋ सप्तति० गु. सत्तर ७०। पभोभूधार, मप्यम, धैवत, निषाद, पचम ७ । सप्तदशःगु. सत्तरह १७। सप्तस्वर्ग 7. पु. सातरवर्ग अर्थात् भूलोंक, सप्तदेयपुरी० ना. स्त्री० सात देवपुरी अर्थात् भुवर्लोक, स्वलोक, महर्लोक, जनलोक, तपलोक, विष्णुपुरी १ शिवपुरी २ ब्रह्मपुरी ३ अमरावती ४ सत्यलोक 1 अलपावती ५ वरुणपती ६ प्रोर यमपुरी ७ । सप्ताश्व. ना. पु० सूर्य। सप्तद्वीप नाश• सातदीप अर्थात् नम्बू १ सप्ताह ना• पु. अठवारा, हफतह । सप २ कृश ३ कोच ४ शाय ५ शाल्माल ६ सप्ति ना. पु० घोड़ा, यया पानियाहार्य गर्व यह सेघर सप्तय इयमर । सप्तपाताल. ना.पु. सात पाताल अर्थात् अत सफरी ना. स्त्री० मस्य, मछली । ल, वितल, रसातल, तलातल महातल, पाताल, सय० गु० सर्प, सारा, ना. स्त्री० रात । सुतल, ७॥ सयरस० ० पु. जल पाती। सप्तपुरी TI स्त्री० अयोध्या, मथुरा, माया, सबल गु० बलवान, प्रौद, पहलवान ।। पाशी, काची, अपत्तिका, दारका ७ ।. सयरता । ना. स्त्री० बल, प्रौदता, पहल सप्तम.गु. सातवा। सपलाई पानी। सप्तमी ना. सी. सतवीं तिथि, अधिकरण । सबेर० गु० समय से पहले, ठीक वा अग्छ सप्तम्यन्त गु.निसके प्रत, सप्तमी काम त्यय है। सवेरा० ना• पु० भोर, भात काल, सा! सप्तमुख्यअप्सरा ना स्त्री घृताची १ में सयेरे० अध्य• तड़के, भोरहे। पुस्कर ॥
१३५६ मङ्गलकोप . . - " है, गु• ना सभा के योग्य है 1 २ सरीतर शु. सत्र। समन्त० ना० पु. हुवृत्त । सभय गुरु भयसमेत, भयभीत । समन्यय० ना० पु. आपस में बहुतों का मेल । सभव० ० पु. न.म, गु• हिमय मुमत । समन्त्रित गुः प्रापस म मिलित सयुक्त ।। समार ना० स्त्री. कचहरी, मण्डली। समभाव. ना. पु० समता, बराबरी ।। सभासद ना • पु० दरबारी, सभा में बैग्नेहारा समय० ० पु० यार, जा, असर, दत्त, या विचारपरनेहारा। साररास, श्रदेदिन। समीत गु० डराभया, भययुत । समर० ० पु. युद्ध, लहा, रण, कामदेव । सभ्य० ० पु. सभा के कार्य में जा रहायक समररस. ग. पु. चार म, बहादुरी । समर्थ गुबलवान, याग्य, हिग्मतार । सम्रम ना. पु. भून, गु. भून से मम स समर्थी० गु० सामथी, तातार । हित। सम० गु० तुल्या सव, पराया, व सना स्यागेहुये । समर्पण गा० पु० सौपणा, अर्पण, त्याग, दो' समर्पित गुः सोपांगया, अपित, त्यागित । समकटिबन्ध ना.पु. पृषी यह भाग समज० गु०पापी, मैला । जो शीतयारिमपोर म यरेना म बीच सगवाया ना. पु.भाद, समृहत ग्यायशास • ४१३ यश है। म सम्बन्धविशप। समग्र गु• समस्त, सारा। समशील० गु• तुल्यभाव, सममार, समता। सममता ना• स्त्री० सम्पूर्णता,। समगा० ना. स्त्री. खिरहरा। समसूत्र गु० सीधामूत। समगी स्त्री० मीठ लनारू। समसूत्रपात . पु. सीमासूतका पहनाया 'समझ' ना. सा• यूझ का विचार समझना • कि पूझा, विचारना । समस्त गु० सकल, सारा, सर । समझयारगु• विचारदार ध्यानी ज्ञानी। समस्या० ० र • समासार्थ, श्लोक क समझामा० स.सि. वुझाा, जाना बताना पूर्णा एग्दशा कहा। समझाती पारसी• रुममान का नाम समक्ष गु• सालान, साम्हो। समविबाहु० गु. निस विभुत यी तीनों भुजारें समजस० ना. पु. याग्यता, उचितता गु. समान हो। समा १० पु. रामय, बहुतात, दिशा, समता पी. रामभार एएता परावर । मिलाप। समदर्शी गु• मध्यभनी तुल्यद्रण, सबका | समाई० ० मा. सतार, धप्य, शति । समनाने। समद्विबा गु• निसनी दो भुना तुल्यहाँ । समारतपु. पितामवा । समधिन ना० स्त्री. प्रो पुष या पुत्री समागत ना• पु० सयाग, था, पहुँच । समागम • पु• संगाग, मिलाप समधियाना मा. पु• समधी का घर घराना। समधी० ना. पु० ग्रएन पुत्र व पुत्रीका रासुर, समाचार ना.पु० सदेशा, वृत्ता त, चर्चा । ग. सम द्धि । समाचारपय० ना. पु. चिट्टी यातनार । । दालना। . . सममाया यम1 की स्वस। . ८ वाई।
३५८ मङ्गलकोप। H } ना. सम्पूर्ण परिपूर्ण, सारा, समस्त । सम्पन्न गु. परिपूर्ण, जो पूरा होदुका, भाग्य- सम्भया ना. सी. गोरोचन । वान, भराहुया। सम्मारक सम्पर्क ना• पु. सम्बध, मिलाव, सयोग, सम्मान ना• पु. थमार, मान, रसा सम्भालना० स० वि० थामना, सुधारना, रा • सम्पास ना पु• छुधावर, गिरना, सर्श। करना। सानाति नापु. गिदविशेष सम्मायना ना. स्त्री होने की योग्यता, सम्पादक० ना. पु• सम्पादन करने हारा। किया के राक्यर्थ नियमका अभिप्राय, इछा। सम्पादनः ना.पु० माति। सम्भायनीय गु. होनहार । सम्पादित गु. प्राद। सम्मावित गु० रहामान्य। सम्पुट० ना.पु. डम्बा, जुड़ाव, धार । सम्माषण ना. पु० बोलचाल, गावचीत । सम्पूरण | सम्भूत० ना. पु. उत्पन्न, पैदा । सम्मोग ना. पु. सुख, हर्ष, छी प्रसग । सम्प्रति अन्य. अभी। सम्प्रदान ना. पु. चतुर्थी, कारकविशेष नि- सम्भ्रम० ना• पु० श्रादर, समान, उतावली, डर, हडनाइट। सके लिये का किया सिद्धकरे। सम्मत सम्प्रदाय० ना.पु. परम्परा का धर्म । ना. नी. इदा, स्वाकार, मि. सम्मति० घार, समानता, सलाह, राप । सम्फुल० गु.पूला विकसा । सम्बद्ध गु. सयुत्त, जो नापागया, जो घेरा सम्मोक ना• पु. समर, पुस । गया। सम्यक अन्यसन, योग्यता से, ठीक रीतिसे, सम्पन्ध. ना. पु. सम्पर्प, नाता, लगाव, अच्छीतरह। तुक, शारद, कारकविरोष, षष्ठी। सयन० ना.पु. शयन, सारह, सकेत । सम्बन्धी० गु० नावेदार, रिश्तेदार, ना. पु. सपान० ना. पु. चतुराई, प्रवीणता, छल । गोत्री, समर्थ । | सपानाईन गु• चतुर, प्रवीण, बाली, पक्ष । सम्पर० ना. पु. दैत्य शेप, सम्मल, पानीमैत। सर० ना. पु. ताल, कुण्ड, शर। 'सम्पपरि० ना. पु. कामदेव, प्रद्युमनी। HO ना. पु. जानना मार्ग का, दैत्य सरकना कि हटना, भागना । सरकपडा० ना० पु. नरकटविशेष । शप। सरकाना स.सि. सिसाना, भगाना ।। सम्युक ना. पु. घोंपा, पौत्री, रात । सरयू ना स्त्री. नदीविशेष । सम्यूक० सरट० ना. पु. गिरिगिट, गिरगिदाना। सम्वोधन न.पु. सन्मुख करने के लिये जो सरद. ना. पु. शरद ऋतु । राष्ट्र या ई, भी, धीरजकरना। सरद ना मु. फलामशेष। सम्भलना० . कि. पथना, मुधरना, सदा सरन ना. सी. शरण । होना। सरनाप्र. वि. बनना, चलना, निकलना, सम्मय ना. पु. ये ग्यता होनहार उदर, गु. सड़ना शरण। हाने क योग्य । सरनागतगा.पु. शरलागत । m मङ्गलकोप। ३५६ है F सरणागतवत्सल गु० शरणागतों पर जो सरिस० गु० बराबर, तुल्य । दयाल अर्थात् ईश्वर। सरी ना० स्त्री. विनापसका शर, सरपएडा। सरपट० ना० पु. वगळूर । जिससे तीर वनात हैं। सरपत. ना. पु. पतलो पतावर, सेंठा, सरीखा गु० सदृश, समान, तुल्य । यएडा। सरुज गु. रोगी, मरीज। सरमा ना० पु० बन्दर विशेष, धन्य शीघ्रता । सस्ट० गु० क्रोधयुत, प्रोधसमेत । सरल गु• सीधा, साझा, साधारण, वासती | सरुप० पौधा विशेष। सरूप० ना० पु. स्वरूप । सरला० गु• सीधा, ऊचा, दीर्घ । सरूप्या ना.पु. सारूप्य । सरलाशिता ना. स्त्री. निसोत । सरेखा.ना.मा. श्लेषा । सरवरि० ना. स्त्री. बरापरी। सरेश न. पु. काठ यादि नोदने क लिये लासा। सरस० गु• श्रेष्ठ, अधिक, बहुत, रससमेत । सरसई० ना. श्री. सरस्वती नदी । सरोज ना पु. कमल। सरसाई० ना• स्त्री. अधिकाई, बहुतात । सरोता. ना. पु० सुपारी पाटने का हथियार । सरसाना० अ० वि० बदना, अधिकहोना । सरोवर० ना• पु• तालार, तहाग । सरसी० ना. स्त्री. तालाव । सरोप० गु० क्रोधयुत, रोप सहित । सरसों० ना. सी० सर्पप, राई विशेष । सरोही० ० स्त्री० खड्ग विशेष । सरस्वती ना० स्त्री० नदी पिशेष, वाणी को सर्करा० ना• स्त्री० खाइ, शकर, बाल, धूलि । देवता और राग और विद्या को प्रतिपालर, सर्ग० ना० पु० स्वभाव, मोर, उपत्ति । सर्ज सरसृत भाषा की बनाने हारी। सर्जरस० ना.पु. राल। सरा० ना.पु. शराब, चिंता सराई० ना. स्त्रीलायसरा। सज्जिका ना० सी० सजा। सराप० ना. पु० शाप, थाप । सर्प ना. पु• साप । सरापना० स०शि० शापदना । सर्पदष्ट्रा० ना• स्त्रा० मदासिंगी। सरारक० ना० पु. जाति विशेष, जनी । सर्पपति ना• पु. शिवजी नागरान। सरावन ना. पु. हेगा, पटेला, जिसका फि साराज राकर सेत क ढले तोड़त है। सपारि० ० पु. योला, गरुड, मयूर । सराहा ना. मा. स्तुति पहाई, महिमा । सर्व गु० सब, समरत ना. पु. वृत विशप । सराहना सकिस्तुति करना, बड़ाईवरना । सर्वकाल० पु. निय, सदा, हमेशह । सरिगम० ना• पुरु गान विद्या में सर बताने क सर्वगत० गु० सर्वन, व्याप्त, सबजगह मोजूद । लिये पहिलापद। सर्वतोभद्रा पु. नाववृत्त, मण्डल विशप । सरिणी ना. स्त्री० गधपसारन । चारों काण का मदर वा राजघर जिस में सरित. ना. स्त्री. नदी। चार दार हों। सरिता० ना० स्त्री० नदा । संयंत्र अन्य सबटार, सबजगह । सरित्पति. ना. पु. समुद्र। सर्वथा अप सब विधि, सब प्रकार.स । । :- ३६० मङ्गलकोप। - १ . n र 1 - सवक्ष । सर्पदा अन्य. सदा, इमेशहनियाnt सलिल ना.१० जल, पानी । सर्वनाम ना. पु. सई विश्वग्रादि पैतीम शन्दा सलूनो० ना. सी. सावन की पूनो निम में वह शब्द को सज़ारा श्रादेशहो। रावी नापत है। सर्वनाश ना. पु. सत्यानास । सलूप० ना.पु. थोडासा । सर्चनाशक गु. सबका नाश करनेहारा । ", सलूपी ना. पु. किल्ल, रेल । सर्वभक्षक० १ ना. पु० सब कुछ सानेपाला सलोन० गु० लोन सहित, कटीला, देशखरड, सर्वभक्षी सौगी, धर्महीन, भ्रष्ट।। विशेष, नमरीन । सर्वमक्ष ना. सी. करी।। सलोना गु० सारा, सावला, स्वादिक । सर्वमंगला ना. सी. भवानी, पार्वती, दुर्गा सलोनी० गु० रुचक, स्वादिष्ट, सदर।। सर्वमय० गु• जो सवपेलगपाहो, सम्पूर्ण । सिमको ना० स्त्री० पशु विशेष निसके सारे, सर्वव्यापक शरीर में कांटे होते हैं, साही, सेही । सर्वव्यापी० गु• सर्वत्र पहुचनहार।। सल्लभ० ना० पु. मोग का विशेष । सर्वस० - सल्लू ना• पु• चमड़े का बड़ा निसने जता ना• पु० सम्पूर्णद्रव्य, सर्वसम्पदा । धादि सोते हैं, सर्प निशा सर्वस्व० सल्लो० गु• धी० बादली की। ना. पु. श्रीविष्णुनारायण, सवति० ना० सी० एक मनुष्यकी दो मीवियों में से एक दूसर की सवति बहाती है। सवर० ना.पु. भील, कौल । सर्या ना.पु. रारा शरीर, मन विशेष, सब सवरस० पु० नल, पानी। मनोका सारार्थ धर्म । सबरी. ना. श्री. भीसिनी विशेष मिस के सर्वाती गु० सर्वोग का ज्ञाता वा कारक । फल रामचद्रने सारे थे। सर्याणी. ना. सी. धीपार्वती। सपूर्ण० ग एक जातिकर एक गया, मादृश्य, सर्यामीट गपु० सर मनोवृत्ति और सकल समानवर्ण। सवल.गु. सक्त। सर्वोपरिक अन्य सब क ऊपर। सवा गु. निस गिनती के प्रथम में रोयुक्त होने सर्वोषध ना. सी. जगमानी, मुरा इत्यादि उसमें चोथाईरदावे यथा संसदो, २१। सवाई ना पु. जयपुर राजाजी पदवी ।” सर्पप० ना. पु. सरसों। सवाचना० स० वि नाचना, परतना। सलकी श्री. मलकी जड़ । सथाया गु. एक ओर एवी चीयाई । सज्ज गु: लानयुक्त, सन्नासहित । संवारना.पु. अश्ववार, इचदा । संतनाना . मौनी, बाहुवाहुकी हामी, सघारी. ना. सी. ईती, पाहन । थ•ि दिदना, गड़ना। सविकार गु- जिसमें कुछ बदल हुई। सलम ना• पु• पनगा, टोड़ो, Pी, शलभ । सविता ना.पु.मूर्य । सखसलामा अ.दि. सरसराना। सीय्यं गुज समेत । सला मा० रा. शलारा। सबैया गु• सवाया, ना. पु. सदविशेष बाट जो एक्मेर पार पावभर का होता है। . T - . 14 देगापध । - सम्राका -- 'मङ्गलकोप। म . } ४ गु० सहनहार। - M २ . - सम्यक गुरुनाया। 1 सहलाना पनि गुदगुदाना, पुलपुला सशंक० गु० सभय । सहलाहट० ना. स्त्री• गुदगदाहर, चुलबुला सशब्दयोगिक गु० शन्दय गी अव्यय सहित ।। सशोक गुदाखित भयभीत । सहयास ना० पु. पड़ास । ससफ०० पु० परगोश, चोगहा।। सहवासी गु०पड़ोसी। ससता गु. जो महगा नहीं है। सहवैया ससताई ना: सी• ससतापन । सहस० गु० सहस, हजार, १०२० । ससा ० पु. शश, चौगड़ा, सरगोश । सहसकर० ० पु. सूर्य, वाणासर, नागार्नु।। ससापत्री० मा० स्त्री० लजारू। सहसघदन० ना• पु० शाजी, सहसमदन ।, ससुर० पु० शुर। सहसयाहु० ना. पु. सहस्रबाहु, रानाविरा ससुराल. ना. ची• श्वशुरका घर। सहसनयन ना.पु० सहसनयन, । ससुराली गु० जो श्वशुरणाहै, जो ससुराल | सहसा अय. रितापिचार किये, उता- वली से। सस्य • पु• फल, अर्ग, धार। सहसांखी० • पु० सहसयासी, द्रा सह अन्य० साथ, सहित, गु• जो सही के सहसाखी० गु• गहासमेत, सातारादित । योग्य है। सहमानन० ० पु. शेषनी। सरकार० 110 पु० श्रामविशेष, सहायता। सहन्न गु• हजार, १०००। सहकारी० गु० सहायक। IIसहन्ननयन ना.पु.इद्र। सहगामिनी • सी. सती स्था। सहस्रमुसी० ना. श्री. श्रीगगानी। सहचर० ० पु. पियानासा, साधी, सगी। सहन्नवदन गा.पु. शेषनी। सहचरी० सी० सखी, राहेली, अनुगा सहस्रबाहु०० पु. साणासुर, गाडी। मिली। सहज गु० सामाय बिल, स्पष्ट, सगम् ! सहनशिर० ० पु. राज्य विशेष निसरी सहस्रवीर्य० पु. नही सनातर) 1, सहजना० ना.पु.गृम मिशेष । श्रीसीतानो वरिया था। सहदेवी० • श्री. पौराविशेर, शहतरह । सहत्रा सहन 1. पु. पहा विशेष सहोराशक्ति । ना० स्त्री. पीलूदत। = सहनहार० गु• सप्ता, सहया। सहना प्र.नि. पाहा, सतोपारा, सहाई ना. सी. सहाग, यटक, TT Y.. गुनले, सरदाश्त पर। सहायर। सहमता अ. नि. दा, भयमीत होना। सहाऊ गु. जा सहन के योग्य है। सहमरण ना० पु० मृतस्पति साप जल। सहाना० ना• • रागविराम, म. वि.नि. सहराना प.नि. धरारा, गहा।' बादकराना, सन्तापाराना, बरदाश्त कराना। सहरापन. ना. सी. गुदगुदी, मुरमरी। सहाय ना. सी. सहारा, सैन, मदद, साथ। सहरी० ना. सी. पास दूधणी, मयती, सहायक ना. पु० मित्र, सहाय बनिहारा । दिशा, भूर मधी। सहरोप गारो सहित, और से। सहायताना ना सहारा० ना. उपराना, परमरह। 11 . - 1 7 - महनांगी A- ' मङ्गलकोप। वास। 1 . स. 1 . सहित अन्य. सग, सीप, समेव, गु० हित सांटा० ना. पु. कोड़ा, ऍड़, वापरकी कमरका समेत। सही० ना• स्त्री. खाताविशेष, वही अव्य. सांटी० गा. स्त्री. छड़ी, लग। निश्चयबोधक। सांटो० ना. पु. बदला, पलगा रामद्रिका- सहेजना स• वि० नाचना, परसा, संत ग, या (यहसाटोलयकृष्णावतार, तर ही तुम बनाना, बनावा, वहरा, रखना। ससारपार )। सहेली ना. सी० सखी, पाली, सगकी सी। सांठ. ना. स्त्री० योग, सयोग, गट, अन पी सहोद्र० गु. जो एक माता से उसन्न भया, टने के लिये लम्बा लवेदा। यथा सगाभाई। सांठगांठ० ना० पु• साट बाट, मेले सयोग। सहोदरमाई. ना.पु. सगाभाई। | सांठमा० सहोदरम्राता मि. सटाना, लगाना, जुटाना। सहीटी० ना. रत्री• महोटी, चौखट, विशेष । सांना. पु. शण्ड। सगु. सहने के योग्य। सक्षत गु० सरित, पारयुक्त । सांनी० ना० मी. उँटनी, राण्डी ली। सा. पन्या सादृश्योक' यथा घोटासा, सांडा० ना• पु. विपकली के तुल्पजन्तुतिशेष। पीलासा। सांती अन्य. सती। साऊ गु० सीवनहार, शिष्ट । सांप. ना.पु० सर्प। साऊंगीना.पी. सागी । सांपन ना. स्त्री• साप वीसी । साई ना.पु. खामी, भगवान् । सामर ना• पु. लत्रणविरोष, नगरविशेष, सांक. ना. स्त्री. शका, कासवास । झीलविशेष जो जयपुर और नोधपुर के म सीकर, ना. सी. सारत, गु० गाद, पिपत्ति, ध्य में है। कठिाता। | सायला गु• कृष्ण सदश जो वर्ण । सांकरी ना. श्री. सकल, सिकली. भूषण । सांपा० ना• पु. अन्नविशेष । सांकल विशेर, जनार। सायिक गु• संदेहयुत, चिन्तायुत । सांखू०१ ना. पुल, सेन, साथ, काठ सांस० ना• मी० श्यास, दम । सांखो विशेष । सांगा ना. स्त्री. गादी में स्थान विशेष निस सासना स० कि. गटा, पुष्टि देखना ! में गठरी अादि रखते हैं, नीं। सांसभरना० प्र. नि. ग्राहभरना । सांसा• T० पु० सराय। सांगूस० ना• स्त्री• मदली विशेष, राक । सांघर० ना. पु. अगिलेतिका पुत्र) सांसारिक गु• जो ससारका है । सांच गु• सय, सच, सच्चा । साफ. ना.पु. शार, साग। सांचा ना.पु. दालने वा भरने का घर, साक्यणिक० ना. पु० मुराऊ, पनदिया। प्रगती, गुसचा, सयवता । साका. ना.पु. शाका. सांझरना.भी. सया, सापकास। साकार अन्य प्राकार सहित । सांमार ना.पु.मोती जो पितृपक्ष में सारल्या ना.पु. साकल्य, शाल । सांझी ना. स्त्री. मनाते हैं पुतलिया ना सायन्ध ना. पु. रामा निसो शाका खाके पितृपक्ष में वाते हैं। माया है। Pa mm , मङ्गलकोप। - " -- M , . सागपात ना० पु० शा। - साना नानी धाफ, भरम, नाम, सात्विक गु० सतोगुणी, उत्तमदान । साविक मर्याद, धीति, प्रतीति, पुरुषान् । साथ अव्य. सग। सासो ना. सी. सारी, गवाही ना. पु० सायरी० ना० सी० पासनी, विधीना !" वृक्षगवाह। साथील ग. सगी, सगाला। साखोचार० ना. पु० यशवर्णन । सादर० गु० अादरसमेत। साखोटक. ना. पु. राहोरावृत्त । सादरा ना.पु.गीतविशेष सास्य. ना.पु. साक्षात् । सारश्य०० पु० समानता, उपमा, तुल्यता, टाता साधना स्त्री० इच्छा, चाह, चोप गु. साथ, सागर. ना. पु० समुद्र, पहातापार, भरत श्रधामगुण। सएडका नगरविशेष। लावकरना. पु० तपस्वी, साधु, साधन करने सागरा० ना० सी० पृषी, परती। . द्वारा। सागून पु. याविशेष या उसमाग । साधन० ० पु० अभ्यास, चितन, परमार्थ सारय. ना. पु. शासविशेष । का अनुष्ठान, बनावट, उपायनित्यक्रिया सांग गु० समाप्त, सहितअंग । शाधनम्यिा ना. स्त्री. रूपचनानेमा पाम । सांगोपांग गु० सम्पूर्ण, सगरत, ज्योग त्यों। साधना० स० कि० हिल , सितलाना, सी. साजना० पु. अश्यादि वे पदरो को सामग्री, सम, हमारना, गम्यास करता सानी समर्थ, रागार, शाता। शाहना, ना रखी. अभ्यास, वाद, यनार, साजन० ना. पु. राजा पति, रयामी। उपाय, नित्यकिया, तदनीर । साजना०रा०f7. पाहा बारा, राजा साधनिका० ० सी० सपा, उपाय, तद गा, साया साजी० ना साजा पूरी नहीं है। साधस० १०० र, भय, शा। सामा० ना व्यापारादि ग क मा माया साधारण गु० सामा य, साया । साधी गु० भाभीहुई, उदय भई। मल, शक्ति। सागीय नापु. पाया, भागी, प्रशिा । धु गु० निगा व्यरहार उत्तम है, या साठ गु. दहाई ६० । गदर • पु. रात, साकार। साठी ना.पु. धार वाल सायु T10 स्त्री. साफा कम वा चाल- सादसाती गु० शौसर गो सादेगासाधुमत TI पु• शिक्षाार, श्रादर, गु० यामत। तर रहता है। सादा० गु. पा. साधुसाधु गु. पर धय । साद०० ५.जोगसी बाहा का पति। साधृ० ना. पु. गा! गु. पाणी, गिमार, साद गु. निस गिती यी मादि में यह लगात है उस पर एक! पाया कि गनिन ही साध्या गु० जान राजा होग, राधना के योग्य, रोगी, ना पप गांप है। सात रा. साधी. पमिमा यो। सायकि प. मनीराम, साहसारसान • • शाय, धार । है . - ताई, ३॥ . ५ m ३६४ मङ्गलकोप। सानना० स. कि. मिलना, रिलाना, गंधना। सामुहे० प्रायः सामने, समुहे । सानन्द गु. भानन्द सहित । सालमा पु० समुख । सानपुझाना० स० कि. सैन से समझाना । सान्ने अन्य समुत, प्रागे । सानी ना. स्त्री• भूसा सलीकी मिलौनी साम्हनायच्य. सामना। सानुकूल० गु. प्रसन, राजी, कृपालु । सायक. ना.पु.बाण, तीर। सान्त्वन० ना. पु. मिलाप । सायंकाल ना.पु. सभ्यासमय । सानिध्य ना.पु. सामीप्य, समीपी । | सायुज्या ना• पु• मुक्तिविशेष जिसमें शिवर सापन ना.पु. रोगविशेष जिससे बालकम लीन होता है। प्रम से गिरजाते हैं। सार० ना. पु. खाद, लोहा, गूदा, हीर, मोल, सापराघ० गु.जो दण्ड के योग्य कामकरे। सर, वीर्य, धीरज, धर्म, वन, घर, मन, . साबर० ना.पु. बारहसिंगा वा उसाचमसि. पाठका सार। दमत्र, चोरोंका हथियार जिससे सेंध लगात हैं, सारफ ना.पु. माँस, मापदी । शिवकृत मराज। सारंग ना. पु. रागविशेष, मयूर, मेष, सर्प। सायरमन्त्र० गा.पु. भाषा में मनाविशेष । मोर का शन्दा मृग, सूर्य, घोड़ा, चन्द्रमा, साम० ना.पु. वीसरा वैद, जो मसल वा लाटी हाथी, आकाश, पर्वत, सिंह, पुन, पपीहा, था त चादि के अन्त में पीतल मादि ल मेटक, दीपक, ज्योति, कोयल, चामर, गाल, गाते है। हरा, दुप, सजन, कमल, वामदेव, धरती, सामग्री ना. वी. वस्तु, सामान। तालार, सुदर, पती, पानी, विशु फा पत्रुप, सामज.ना.पु. समय, वाल । कपा, राति, जी, भ्रमर, मथुमारती, देश- सामध. ना. पु. रामधारा, सपरियों का विशेष मिराना। सारगिया ना.पु. सारगी बनानेहारा। सामर० ना.पु. लपविशेष। सारंगी ना. स्थी नानाविशेष, गिरी। साम• बलवान, शक्तिमान् । सारथी ना. पु. रपवाद । सामर्य. ना. दी० सामर्थ, तक्त, शत्ति । सारदा नास्त्रीशारदा, सेवती, वाग्दे- सामा. ना. सी. नानाप्रकार का भाजा, बता। सामग्री। सारना स. कि० करना, निवारा, बिना, सामाजिर ना.पु. सभाधादिक काम में नो सुधारना, पासना, पूराकरना । धनुर व दिसवैया का सहायक। सारस. ना. . पाविशेष, कमल । सामान्य. सधारप, जनिवाचका सारसजात ना.पु. ग्रहा। सामान्यतः ना. सी. सामायन। सारस्वत ना० पु. देशपिशा, माझए नाति. सामी. ना.पु. साम, सामने, सामवेदी। शिप। सामीप्य० ना. पु० पार के योग्य, इति विशा सारा गु० सम्पूर्ण, समस्त, साला । निरू इष्टदेव के प म रमता है। सापर्य ना. पु० सदए । सामुदिना.. समुद्रमान । सारासार० गु. सत्यासय, साप ठ। सामुदिर. ना. स्त्री. विवापिरोप, मारी सारिया० नारथी मैरापती। विधा निमम हतादिरसा धारते हैं। सारी ना. सी. मलाई, मैं, पही, , मङ्गलकोप। ३६५ * जोरू की बहा। सावयव० गु० साग, अवयव सहित । साक० ना.पु. पतीविशेष । सावर० ना.पु० सावर। सारूप्य० ना० पु. इष्ट का रूप बाजाना, मुक्ति | सावर्णि० ना० पु. दूसरामनु विशेष । विशेष सावित्री ना. सी. माता, महतारी । सार्थ गुनिसमें अर्थ पाया जावे, ना अर्थ सास. ना. सी. पती या पतिकी माता। समतहो। सासन० ना.पु. शासना। सार्थक० गु० सफल, अर्थवाला । सासना० स० कि० ताड़ना, डाटना। सार्वभौम • पु. सर्वपृथ्वी का राजा, वुर | सासु० ना० स्त्री० सास । का हस्तीविशेष । साह. ना. पु• बनिया, महाजन, साधु । साल० ना• पु० पाठविशप, कोरा, छद, शाला, साहचर्य ना० पु० सगति, साथ । सियार। साहन० ना० स्त्री० साहकी ची। सालतीसुत ना. पु. नायफल । साहनी० ना. स्त्री० सा, फोन । साखन ना.पु० तरकारी, छदन । साहस० ना० पु. परवस, नलागर, वरद्र', सालनियास ० पु. राल, गुग्गुल । दादस, विशाविचार। सालना० स० कि० वेदना, धना, प.कि. | साहसी० गु• बरससिया, निडर, दर। दु सना, पाड़ित होना। साहाय्य० ना• पु० मित्रता । सालसा० ० पु. श्रीपधारशेष । साहित्य • पु० तगटर, ना साला . पु. पलीका भाई,शाला, नास्त्री पिप्पली। साही ना. पु. जन्दुरो र सालिग्राम गा• पु. विष्णुरूपी पापाणविशेष । में पारा होते है। साली० ना. स्त्री० बीतीकी बहा। साहू सालू० १० पु. लालवर्ष वशेिष । साकार सालूक० नाम पु. साहकारकहारगे। सालोक्य० • पु• पुत्तिविशेष, इष्टदेव के सामान, का में। लाक में बास पास सालोतरी ना.पु. पाडौं वा वैद्य । सावं. गवादी, माई, ना.पु. सावक० ना.पु. पालक, पचा। सावकाश ना• पु. अवकाश, दुईटा सिन्द गमवृक्ष । सावकास पात, अन्तर, छुट्टी, पुरम् । सिंचितिका मानना सायज गु० सनेला, नगलानीप, मृग, रमिला। सानधान गु. चौकम, सुना, हो। मि.:., सावधानी ना० स्त्री. चौर। सावन- ना.पु. मामा सावन्त गु०स, योगा। सारन्ती ना. नामसम्म निदाद • जायफल। . सासनकोना। m -- गङ्गलकोप। . . ~ । सिकली. } ना. स्त्री० पुण्डनी, सन्तु। - सन्दा निहा शब्द बैग के सींगार भूगरिसर सिंहनी ना सी. मिंकी सी। सिंघाहा ना.सु. पोरा जो जल में होवाद या मिहपौर० मीरा ख मागविशेष .सिंहपारिक ना. सी. मिदमार, लदी। सिंघागु • • I मैन । सिंहपौवा सिंघी ना.मी. नदी गई। सिंहमुखी ना. पु० याम । सिमाना स.नि. पाना। सिंहता. पु. सिंदहार सिद. मा. रवी बोगदए, पीडा सिंहलक. ना.पु. पीतल । सिदन ना. सी. पानी, वादही। सिंहलद्वीप २० पु. भरतराग १ दाय में सिपन० ना. पु. पोहापन । उपदीपशिश सिमा सिंहासन TI पु० देतों और रागायों पा सिहा गु• पारा, बौददा । यारान, पार, धेठासा, तशाही । सितारात, राजद, उल्ला । सिदिका ना. स्त्री निशाचरीगिा। सितकण्ठ ना.पु. मद देवनी । सिकटा० ना.पु. टिकरा। सितरी मा. सी. मेद, परी । सिकता ना. सी. मिक्ता, बालू, रंत । सिताम्भोज. . पु. सफ़ेदवमल, श्वेन- कन. सिद्ध. ना. पु. दातान निविशेष नाह सिस..पु. शिष्य, गानकशाही, ना. सी. सोक में नराते है, सा अर्थात् नो पटासद्धि के सीत। वश हैं ग. महात्मा, पटना, मृतार्थ, पक, सिखनास्ट ना. स्त्री शिक्षा, मिलावर। बना, लस, पूर्ण, कामिल, का। सिखर० ना. पु. बोरा, शिखर । सिवरूपना. पु. प्रथमट्टी से निसका रूप सिसरना ना. पु. दही और ही मिलानी।। वाहै, जो दुमरे से नहीं था। सिसताना. स. कि. पदाता, दिसला, सिद्धान्त ना० पु० वादी प्रहगी से निपात द्वारना, ताइनकरना। जो अर्थ, बौद्धीविशेष। सिखाना. स्त्री. चारी। सिद्धान्तशिपमणि ना. सी. ज्योतिष का सिमाना मय विशेष। स.कि.सितारा सिखचना सिद्धान्ती ना. पु. मीनामा मनावलग्त्री । सिसिकराठ. ना. पु. नानाथाश । सिद्धि० ना. सी. दादिना पो प्राप्त, देवता सिगरो गु• सन, सारा, सपस। की पूना वा तसा का पल, मुनादि नपने से सिंगरौर० ना.पु. हवेरपुर । जो पराक्रम, सुर्त, शुद्धता, अपिमादिक अष्ट, सिंगा. ना. पु० तुरही। फल, कारत, करामन। सिंगार० ना.पु. सामा, सनावद, धामरण, सिद्धिदा. ग. सो. भावती, गु० सिद्धि- दाना। भूगार। सिंगारना० स० वि० साना, भगार कराया। सिद्धिदाता • पु० योगरानी, गु• सिद्धि सिंगारिया गु. देवता हा गार करनेहारा । देनेहारा। सिंगोटी ना. सी. सींगस बनाइया' ना, सिद्धिरूपी गु० जो थापही शिद्धि हो । - - -- मङ्गलकोप। ३६७ + बनाना। . सिधाना० अ० लि. दोडा, जा11 चरा सिया० ना० सी० श्रीसीतानी । जाना। | सियार सिधारना श्र.मि. चला TITI, उटजाना, ना. पु. शृगाल, गीदड़। सियाल. सिधार्ना० स० कि. सुपारा, टीय परा। सिर० पु. शिर मस्तक । सिनक नापु० रेंटा, पोग, नेग।। सिरकी 10 पु० सट्टीवस्तु विशेष जो मीठे सिनकना० सनि भाइ।। से बनती है। सिन्दुर० ० पु. सभालू पीधा । सिरकी १० सी. सरपएडाविशेष, सेंठाका सिन्दुवारका पु० सभालूपोपा । उपरी माग या उसीकी बनीवरतु जो पानी सिन्दूरक. To वृत विशेष। राको के लिए होती है। सिन्दूर ना• पु. लातार्य पूर्णरिशेप ने सिरसप० गु० माचला ! लिया गागमें लगाती है। सिरसपी०1० सी० जोसिम, दादरा । सिन्धु० ० पु० समुद्र दश विशेष, नदी सिरजन • पु० रचाप, उपनि, यार। विशेष सिरजाहार • पु. ईश्वर, रचनेहारा, सिन्धुज ना० पु० सेंधरलोत, १४ रन । उपजानेहारा। सिन्धुर० मा पु० हाथी। सिरजना० स.नि. रचना, उपभ पता सिन्धुरगामी गु० गनगामी। सिपाह० ० स्त्री० सेना, यह शनारसी का सिरजा० गुमाया था. उपनाया गया। सिरसींग० गु० गुष्ठर रोहारा, दगेत ।" मिपाहसालार • पु. से गपति, पारसी सिरहाना ना• पु• तस्बिया, साटया निधर सिराहो। सिरात २० टदा, बीता। सिपाही० ० पु० पैदव, चपरासी, यह भी सिराना स•ि टग, यहाा, पठाण, शब्द फारसा का है। व्यतात परना। सिम.. पु. मबली। सिरानी गु.सी.पीताई, राती भई। सिमट०० सी० सोच, सिमोर । सिरिस० ० पु. वृतविशा, गिरी। मिमटजाना अ. मिसिकुरना, बहरा। सिरोधी • पुकठ, गला, गर्दन । -सिमटना सिल. ना. पु. शिला। सिमाना ना.पु. शिसाना, धृरा। सिलपट० गु० चीपर। सिम्पला. पु. समानहर। सिलपट्टा 7. पु. गिलका रहा। सिय. सी. श्रीसीतानी । सिवाना स.वि शिलाना। सियनिक सी.सेकसी। सिरा. सा. शिला, पाए विशेष रा लियाीन्दका ना. पु• रजक विशेष नो यो पर मसाना पामते है। पापुरा में सता था चौर मौसीनानी को सिलाई ना. घ. सिलाने का काम या सम्बन लगाया था। सियरा देश, पया। सिला जीत ना. पु. सश्मन, पौष सियरी. पी. नदी, का। पिरो। - - 3- पसा। १ महलकोप। " शब्द, मिहना शब्द। वैल के सागर भूमगारोप। सिंहनी रखी. सिंह ग्री, सिंघाड़ा ना.पु. पौधा जो नल में होता है या मिहपौर० उमीरा फस, पपरिसप। सिंहपौरिक T० सी. निवार, सादा। सिंघाण • पु. रा मैंल । सिंहपौव० सिंघी श्री. वही का। सिंहमुखी • पु० याम। सिमाना रा०शि० पराना। सिंहव. पु. सिंहलदीप । | सिह 1. सा. चौराहा, चौटाया। सिंहतका पु. पीतन । सिडन तास वारली, वाहही। सिंहलद्वीप • पु. भरतमए में दानयम सिपम० ० पु. न्हापन । उपद्रीपरिशेष। | लिहा . + । तिहास पु० दवतों और रातार्या या सिदा} गु० यापला नौदहा । -- यारान, पार, ठासन, तलशाद।। सिता. शन, गाद, उगला । सिंदिका ना. सा.निशाचरापिशा। सितकराठ० ना• पु० मह दाना। सिकटा०,.पु. किरा। सितरीमा स्त्री० रोद, पमा । सिकता. सी. सिक्का, पालू, रत । सिताम्भोजपु. सकतवमल, शेत सिकरार सिली } ना. वा. पुण्डना, सक्छ । सिद्ध ना. पु. देतानातिविशा ना दूर सिस..पु.शिष्य, नकशाही ना.ची. तार में बसने है, साधु अर्थात् ना अटासद्धि क रीत। पशों हैं ग. महामा, अष्टना, कृतार्थ, पर, सिखनाट० ना. सा. शिवा, सितार। बना, लस, पूर्ण, कामिल, कार्या। सिसर० ना.पु.दीमा, शिखर । सिद्धरूप० ना० पु. प्रथमदा से निराका रूप सिमरन ना. पु. दही और गुड़ा मिलाना । । बाहैि, तो दूमर से नहा गया। सिपलाना स.का पदाा दिसत ना, सिद्धान्त ना० पु. वादा प्ररिजादी से निणीत डाना, ताइनका। मो अर्थ, कौदीपिशा। सिजा ना. सी. चाला सिद्धान्तशिरामणि ना० सी० यातिए का सियाना प्रय रिश। सिखवना स. कि. सिरसारना। सिद्धाती. ना. पु. मामामारा मालम्बी। सिखिकण्ठ ना.पु. नाल थाया। सिद्धि० ना. सी. वा धनार्थ को प्राप्त, दवतों सिगरो गु. सत्र, HTरा, समस्त । की पूना वा तारया या फल, मनादि जपन स सिंगरौर० ना• पु. गावरपुर । जो पराक्रम, मुत्त, शुद्धता, अपिमादिक पट, सिंगार ना.पु. तुरहा। पल कारित, राम । सिंगार. ना. पु. शामा, सनया, श्रामरय, सिद्धिदा. साः भगवती, गु• सिद्धि गार। दाना। सिंगारना० स० मि. सारना, भार घराना । सिद्धिदाता ना• पु. योगणरामी, गुसिद्धि सिंगारिया गु• दवदा का पारकरनेहरा। सिंगोटी ना.सी. सागरा बनाया घंटा, सिरुपी गु० जाध पी सिद्धि होरे । } दनेदारा। १ . H १ सिधारनामक्रि० सुधारता, टीय करना। सिर १० पु. शिर मस्तप । मङ्गलकोप। ३६७ सिधाना० अ० मि. दोड़ना, जा, च| सिया० नाघी० श्रीसीताजी। जाना। सियार ना. पु० शृगाल, गीदड। या कि चला, उठजाना, सियाल. सिधान ० सिनक० • पु० रेटा, पोग, नेग। सिरकी० ० पु० सट्टीपस्तु विशेष जो माठे सिनकना० स.वि. र भाइ । सिन्दुक • पु० सभानू पाया । सिरवी | सी. सरफराविशेष, सेंटाका सिन्दुवारक. [ पु० सभालूपीधा । ऊपरी भाग वा उसाकी बनीपतु जो पानी सिन्दुरक० ० पु० वृक्ष पिशेष । सो के लिये होती है। सिन्दूर० • पु० लानार्थ पूर्णविशेष को सिरपप० गु० माचला। लिया गागमें लगाती है। | सिरसपी० ० स० जाखिम, दादरा । सिन्धु० ० पु० रामुद्र दश शेिष, दी सिरजन II पुरचाय, उपनि, या, विशेष । सिरजनहार० ० पु. ईशर, रचनेहारा, सिन्धुज० ना० पु० सैपालोत, १४ रन । उपाहारा। सि.बुर. ना. पु० हाथी। सिरजना० स.नि. रचना, उपन , करना 71 सिन्धुरगामी गु० गागामी। सिरजा गु० बाया हुथा, उपाया गया। सिपाह ना स्त्रा० रोना, यह शान पारसी का सिरसींग० गु० गुष्ठरोहारा, दगेत । सिपाहसार ना. पु० सापति, पारसी सिरहाना ना० पु० तरिया, साटका निधर सिराहो। सिरात गु. दहा, वता। सिपाही० ० पु० पदन, चपरासी, यह भी सिरा० स० वि० ठा, यहा। पटा, शब्द कारसी का है। व्यतीत करना। सिमा ना• पु० मछली। सिरानी गु.सी.पीतर्ग, राटी भई । सिमट T० स्त्री० सोच, सिहोर । सिरिस० ना. पु. वृहरिशर, शिरी। सिमटजाना० अ० कि० सितुरना, नटरना । तिरोधी० ० पू० मठ, गला, गर्दैन । . - सिमटना० सिमाना ना• पु. सियास, धुरा । सिलपट गु० चीपर। सिम्यता. पु. रामावृत। | सिल गट्टा० ना. पु० सिलका रहा। सियासी. श्रीसीताजी। सिवाना स.नि. सिलाना। सिनिस्त्री. संगी। सिलाना सी० शिला, पापाए विशेष निरा सियनिन्दका० पु. रजक विशेष नो अयो पर मसाला पामते है। पापुरा म बसता था र यौसीतानी को सिलाई० ना. सी. मिलाने का कान या ताम्दन लगाया था। पैसा। सियरा..हा, क्या। सिलाजीत- ना. पु. अश्मन, चौथ लियरी. रवी टटी, रची। विगा।
मङ्गलकोप। ३६६ . बरना, - सीमती । ना० स्त्री० स्त्री, बरला . - बीनना। सीपी के समान होती है, सीपी। सुकना० अ० मि. सिकुड़ना, सीपसुत. ना. पु• मोती। समिटना। सीपी० ना. स्त्री० जलन तुविशेष । सुकण्टक० ना० पु. पिण्डखजूर । सुकंठ० ना.पु. मुग्रीव, गुअच्छागला । सीमा ना. स्त्री. हद्द, डाहा, धूरा, मर्याद, सुकर गु• सहज, करनै क याग्य । सुकनारा. ना. पु० स्थानावृक्ष । सिमाना, अवपि। सुकवार० गु० कोमल, निर्मल । सिय० सिया ना. पी.श्रीजानकी जी। सुकसारण० ना० पु. रावण दूत । सुकाल. ना.पु. अच्छीमतु, बहुतात, अचा सीर० ना• पु० हल, खेती निनकी । समय दर सीरपाणि ना. पु. श्रीवलदवनी । सुकांटक० ना. पु. करेला तरकारी । सीरा० गु० शीतल, ना. पु. मोहाभोग,सीरा। सुकुचना० अ० कि सक्चाना । सील गा.पु. शील । सुकुमार० गु• सुस्वार, नर्म, ममिहात, सीला गु० गीला, शीतल, ना. पु. अन्न या मा० पु. चम्पा, केला, गना, बालक । सुस्त. ना. पु. भलाई, पुण्य, पीर्ति, सवान, सीध० ना. पु० सीर, मर्याद, सीम । गु. अच्छी रीति रा किया गया, अग्धा कम। सीपली. पु. जातिविशेष! सुरती० गु: पुण्यवान, भाग्यवान, धर्मामा, सीस. ना. पु. शीर्ष, शिर, शिला । दावा। सीसक० सुकेत० ना.५० दरजातिका देवताविशेष । सीसा T• पु० धातुविशेष सुकेतसुता० ना० सी० ताडका निशाचरी। सीसौ. ना. पु. शीशम वृत्तविशेष । सुशी० ना. सी० अप्सरापिशप । सु० अव्य • इसका प्रयाग निस शब्द क प्रथम में सुना ० पु० चैन, फल, रातार, बाद। हा उसके अर्थ में अधिकाई वा भलाई वा सुखचैन० ना० पु० विश्राम, सापकाश । उत्तमता समझी जाती है यया सुबुद्धि मुक्म सुपतला० ना. पु• जूत म दूसरावला । थादि. और स यया जासु अर्थात् निरा | सुखद गु० सुखदायर, अया। से, सो। सुखदर्शन० ना० पु. पाधारिशा निराका रस सुंघाना० स० कि. महकाना । पाम पीडा र समय डालते हैं। सुधायट० ना. पु. महरू, गधि, वास। सुखदाता० गु० पुरा दनहारा। सुप्रअन० ना.पु. चच्चा घना, सुखदान० ना. पु. सुखका दा।। सुपर० गा.पु. शबर। सुयदानी सुमार० ना' पु. रसोइया, बावची, सटा सुखदायर गु. सुराका दनहारा । फराहारा सुखदास ना० पु० धानकी एक जाति। सुम सिन० मा. सी. माय, नातदारकी मौ। सुखदंय० ना• पु० दरवारा मुस । सुक्याना०. कि. डरना, सावितहाना। सुपपाव. ना.पु. पालकी शि। मुष्टा गु. एस. दुपला। सुपपूर्वक पन्या सुरास। सुक्टी० गु.सी. दुर्वल, दुबमा, सूसी। सुखमा० ना० सी० साभा, कानि, चारू। .
मङ्गलकोप। . सिलाना० स० लि. सिल राना, तगाना । सीपना. स. नि. विगका उपार्नर सिलारस.ना. पु. शिलाजीत । पाता। सिली ना. सी० पारी, शाण । सौचना० स०० साचना, पान देना। : सिलीमुख० ना• पु. बाण, भ्रमर । सीज० ना०५. पापानिशेर सिवाना.मी. पु० सीमा, डा, धूरा, हह । सीजना ० मि. रिसना, निकला, उपमा, सिविका० ना. स्त्री. पालकी विशेष । उबलना। सिष्ट० गु• बुद्धिमान, अच्छा । सीटी० ना. स्त्री० पुग्न से बनावट । सिसकना० अ० दि० विसुरना। सीठ० ना. सी. फोग, म्यूद, छानम । सिसकी ना. स्त्री० पुष । सीठना० ना. पु.१ विवाह में गाली गमत गीत सिस्न ना० पु. लिंग, मदनाश। सीटनी० ना. सी. स्त्रिया गाती हैं। सिहरा ना.पु. मौर। सीटा० ए• नीरस, रराहीन, पीला, असार, रोगहा। सिहराऊ गु० याऊ, उचा। सिहराना० स० कि. धना, उचाट करना, सीठी ना. स्त्री० सीठ, सीरी। सीढ़ी ना. सी. नसेनी, सोपा, ग्रारोहण, सहलाया जीना। सिहर्ना० य. दि. पापा। सिहाना प... प्रानहोना, खुशहोगा. सीत. ना. पु. शीत, ग्रोस । सीक. ना. खो• तृणविशेष निराका माइसीतरस ना• पु• मुहपटका रोग। मनती है। सीतलचीनी० ना० श्री. योषधाविशेष । सीकर ना.पु. सीकरा फूल। सीततपाटी ना.सी. चटाईविशेष । सीका ना.पु. घर, बीका। साकिया० गु० हएडीरवान्, धारीदार, सहरिया, सताना स्त्री निधि, क्षमा, गगा, श्रीमान सीतला ना. स्त्री. माता, गोटी, चेचक । डोरिया। हींग ना. पु• शृङ्ग। सींगड़ा. ना. पु. बारूद रखन का सींग । सीताण्ड० ना. पु. मुगेर के पाप्त तार्म सींगा ना.पु. नरसिंगा। सांगिया० ना.पु. विश विशेष । सीतांग ना. पु. सीताग, सकुना। सींगी ना रसी. घोटानरसिंगा, मछली विशेष, सीताफल ना० पु० अाता, तोग, पद् । तोमड़ी। सीताश्रम ना.पु. सीवाका वाथय । सींच. ना. स्त्री. पानी की चाह । सीदना . नि. दुखी हाना, ६ स्वपाना । सोंचना सवि. सींचना, पाटना, पान देना । सीधा० गु० सोझा, निवल, भाला, खरा, सूधा, सींचाई ना. स्त्री. सचिन का पैसा वा काम। ना. पु. भोजन की सामग्री। सींची ना. सी. सींचने का समय। सीधाई नास्त्री. सोझ, भोलापन, सराई, सीव. पु. सीमा, मर्यादा। सीकर ना० पु. १ दविशष । सीना. स.शि. तगना, तागना, सका, सीप ना.स्त्री• शिक्षा, पाट, विघा दाइना, तुरपना । मिताना। सीप० ना. रथी पात्र विशष निसको गुटली - . . की जी। विशेष सुधाई।
मङ्गलकोप। ३६६ . . " मर्याद, सिय० । -सीपी के समान होती है, सोपी... सुकहना० अ० कि० . सिकुड़ना, वरना, सीपसुत ना• पुल मोती... समिटना। सीपी० ना. स्त्री. जलजन्तुविशेष सुकएटक. ना. पु. पिएसजूर। सीमती ना. स्त्री स्त्री, पाला सुकंठ ना• पु• मुनीव, गु• अच्छागला ... सुकनाश० ना. पु० सोनावृक्ष । सीमाना स्त्री. हद्द, डाहा धूरा, सुफर० गु• सहन, करने के योग्य । ... “सिवाना, अवधि।.. सुकचार० गु० कोमल, निर्मल। ना. घ. श्रीजानकी जी सुकसारण ना० पु. रावण के सिया० सुकाल. ना. पु० अच्छीमतु, वहुवात, अच्छा सीर० ना. पु. हल, सती निजकी। समय ढेर। सीरपाणि ना. पु. श्रीवलदेवजी। सुकांटक ना• पु. करेला तरकारी । 'सीरा० गु० शीतल, ना० पु० मोहनभोग, सीरा। सुकुचना० अ० कि सुकचाना । सील० ना. पु० शील । सुकुमार० गु• शुकवार, नर्म, कममिहनत, सीला० गु० गीला, शीतल,ना: पु० अमका नापु० चम्पा, केला, गमा बालक। बीनना ।.. सुकृत ना० पु. भलाई, पुण्य, कीर्ति, सवाल, सीय० ना. पु. सीव, माद, सीम । गुरु अच्छी रीति से किया गया, अच्छा काम ।, सीवली. ना. पु. जातिविशेष । सुरती० गु• पुण्यवान्, भाग्यवान, धर्मात्मा, सीस. ना. पु. शीर्ष, शिर, शिखी । दाता। सीसक० सुकेत० ना. पु. दक्षजातिका देवताविशेष । सीसा ना. पु० धातुविशेष। सुकेतमुता० ना० सी० ताड़का निशाचरी। सीसो० ना. पु. शीशम वृतविशेष । सुकेगी० ना• सी० अप्सराविशेष । सु० श्रव्य • इसका प्रयाग निस शब्द के प्रथम में | सुपर ना० पु० चैन, कल, सन्तोष, यानन्द । हो उसके अर्थ में अधिकाई या भलाई या सुखचैन० ना० पु० विश्राम, सावकाश । उत्तमता समझी जाती है यथा सुनुद्धि सुक्मे सुखतला० ना० पु• जूते में दूसरातला! -श्रादि, और से यथा नासु अात्- निरा सुखद गु० सुखदायक, अच्छा। से, सो। सुखदर्शन नापु. पौधाविशेष जिसका, सुंघाना० स० कि. महकाना । कान में पीड़ा के समय डालते हैं। सुंघावट० ना.पु. महक, गन्धि, वास । सुखदाता० गु० पुस देनेहारा । :- सुप्रजन० ना.पु. बच्चा अंजन, सिद्धान्त । | सुखदान ना. पु. सुखका दान। सुर० ना०.पु. शकर। सुखदानी उधार० ना' पु० रसोइयां, यायची, रोटी सुखदायक० गु• सुखका देनेहारा । फरनेहारा। सुखदास ना० पुः धानको एक जाति । उन सिन० मा ली. मान्य, नातेदारकी सी। सुखदेव० ना• पु० देवताका सुत । १. सुकचाना० . कि. डरना, संकोचितहाना। सुखपाल ना. पु. पालकी विशेष उकटा० गु• सूखा दुक्ला। सुखपूर्वक अव्यः सुख से। तुकटी० गु० स्त्री० दुर्घल, दुबली, सूखी। सुखमा० ना० स्त्री० शोभा, शान्ति, समक। :
३७० मङ्गलकोप। Hyat म * सन्तोष वहुत अधिक। । ८ सुखलाना० स० वि• सुखाना, जलाना । सुचिन्तित गु० प्रति विचार, पन्या मगाइ । सुखवता गु• मुसदेसी कहनेहारा। सुचत गु०. सत्ता, चोरस, होगियार ।' सुखाना.म.कि.मुसलाना। सुजन गु० सजन, मना, पादरी, मा : सुखारी गु• धानद, सुश, थानन्दित।। सुनसी० गुरुप्रतिष्टित, कीर्तिमन्न। सुखाला गु• सहन। सुजान गु. प्रदीप, शान, चतुर, बुद्धिमान् । सुखासन ना० पु. सुखपाल। सुजाना० सवि० पुलाना । सुखित गु० यानदित, चैन स युक्तों। सुझाना० रा.शि.दिखला, समझाना। लुधियागु धानदित, चैनी, सुशी, सुटयुना नामी तट, पडी। सुखी सुठाम गु• दामना। सुखेन० २० पु. सुख से, वैद्यविशेष नो लग सुठि ना० स्वी• सोरि, थव्य. अति, निहायत, में पवतरिका पूतथा। सुनी० ना. स्त्री• काला निसोत थोर वहा सुपी० ना० सी० गुशी की डोरी, अचानक से वरोदा। टोलना। सुगज. ना. पु. वातर विशेष जो रामदत में सुडप० ना. स्त्री. उमकी, घोंट। पा, ग. यदाहापी। सुडपना० . वि० सुराकना, चाटना चराना । सुगन्धक० ना.पु. पुइकरमूल । सुडुक्ना० स० वि० सुटुक्ना, ली। सुगन्धयन्धु० ना० पु. होम, यज्ञ। सुडौल. सुगन्धि • खी• मली वास महक, गु.सुदया गु० सुदर, सुथरा। पदवीला। सुगन्धिका ना. पु. कालानीरा। सुण्डि. ना. श्री. हाथी की सह, प्ड। सुगम गु० जाने के योग्य, चदन के योग्य,सहल, सुण्डी ना. श्री. पिप्पली, पिपरी । सहन, वरने के याम्य, मला। सुतः ना.पु. लहान, वेग। सुगरी ना. सी. रागिनीविशेष । सनरा. ना. पु. पहली हाथ में पहनत है। सुगाना० . हि शक्करना, चिनदादा, सुता० ना• रसी० पी, पुत्री। साकि लगाना। सुतान० ना. पु० मुनका बहुता। सुप्रीधर ना• पु. वाराका राजाविराष, श्रीकृष्ण सुतार० ना० पु० वई, समय, पात, दार। करयका एकघौडा पिरोप, गु• अक्षा कण्ठ । सुतारी • सी. सूग्रा, सूमा । सुघटित गु० अछा बनायागया, परामया । सुतीक्ष्ण ना. पु. पुनिशेिष। सुघद गु• सुडौल, मुशाल, सुदर। | सुतुष्टि ना. सी. कला चन्द्रमामी विशप । सुघडई ना. सी० सुशीलवा, पुदरता । सुमामा ना.पु. इद्र। सुघाट ना. पु० भलाघार, अच्छाहौल, गरूप। स्थन० ना. पु. तम्बान, पायनामा । सुध० गु.गुच, की, गर्मत। सुधनी गा. सी. कन्दरिया। सुबक गु. गाजी, मुचता, चौरस ।, सुथरा० गु• यदा, सदर, अन्ना गा.पु. सुचरित्रा ना. सी. पनिवना । बाबानान का एक शिष्य। ५ मुचिन गु. चौकस, चिनारहित, धधै स सुधराई० ० सी० गुदरता, मलाई । । सुचित राहत, पिर, नारतक। सुथरासाही. ना. पु.भिक्षुकस्रोि। 3 - 1 . * ।
मङ्गलकोप। . . क सुथानः ना० पु० अण्डा रथान, सूपमकान । सुनयना० गु० अच्छी श्राखोवाली ना० सी० धोगानकीजीवी माता। सुदतीना स्त्री. यह सी निस फे दात सुनसर० ना• पु० भूषणविशेष । सुदन्ती अध्छ होवें, अच्छा हाथी। सुनसान० गु० चुपचाप, उमाइ । सुदर्शन ना. पु. श्री विष्णु पे चक्र का नाम, सुनहरा गु० सुनहला, सोनेका । वृतविशेष जिसको गुलाबजामुन कहते हैं, नाम सुनाना० स० कि० जताना, बतलाना, पहना, एकचूर्ण का है, गु• दिखनौट । समझाना। सुदक्षिणा० ना. स्त्री. रागादिलीपनी सी का | सुनाट ना० स्त्री• सुनाइट, मोन । नाम, अच्छी प्रदक्षिणा वा दाा। | सुनार०ना पु. वर्णकार, सोनार ।। सुदामा० ना. पु० श्रीकृष्णचन्द्र का गुरुप धु। सुनारिन्० ना. सी. सुनार की सी। सुदी० ना० स्त्री. उजियाला पाख । सुनारी ना० स्त्री. सोनार का काम, रूपवती, सुदुर्लभ० गु• अत्यन्त दुर्लभ । गु० प्रवीण, चतुर । सुदृश्य० गु• सुदर, दिखनौट । सुनावनि० } ना० स्त्री० विदेश में मरे का सुदृष्टि गा० सी० अच्छीदृष्टि ना• 'पु० गिद्ध | सुनावनी० } समाचार । पदी, गु• पिज्ञानी। सुनियाल ना. पु० जिगनावृक्ष । सुदेश० ना० पु० अच्छादेश, गु० अग, सुदर, सुमीति ना० स्त्री० भली रीति, शिष्टाचार । नेक। | सुन्दर० गु० सुरूप, सुडोल, अच्छा, भला ।, सुन्दरता. ना. सी. सुघराई, मलाई । सुध ना• स्त्री० स्मरण, चेत, सुधि, गु० शुद्ध । सुन्दरी० ना० सी० स्त्री, गुदर स्त्री, श्रछी। सुधबुध ना स्त्री० चैत, पहिचान, बूझ । सुन्ना० स० कि० कान धरना, श्ररण करना । सुधरना० अ० नियनना, सभलना, सजना। सुपच० गु• जो अच्छी विधि से पचना। सुधर्म० ना. पु० सत्य धर्म, अच्चाधर्म । सुपट० ना० पु. अच्छा पत्र। सुधर्मा० ना. दिवसभा, सुरसमाज ।। | सुपंथ० ना. पु० अच्छामार्ग । सुधा० ना. श्री. अमृत, जल । सुपर्व० ना० पु० गगादि का नहान । सुधा० अन्य० समेत, सहित । सुपत ना० पु० सच्चापत, शुक्लपक्ष। सुधांशु० सुपक्षी गु० का पक्ष करनहारा, सराहा- सुधाकर ना.पु. चन्द्रमा। यक। सुधाधर० सुपात्र गु० योग्य, भलामानस । सुधाना० सनि चिताना, स्मरण देना । सुपारी ना• स्त्री. पूगीफ्ल, डाली। सुधारना० स० क्रि० सवारना, बनाना, सतना। सुपास. ना. पु० श्राराम, सुनीता, सुख । सुधागास ना• पु० चद्रमा, सौरफल | सुपुत्र गु० योग्य पुत्र, भला पुत्र, पुन, सुधि० ना. स्त्री. स्मरण, चत, याद, सवर । ৪র্টুন } স্মারাস্কা অঙ্গ। सुधी० गु० सुसुदि पण्डित । सुप्त ना० पु. निद्रा, गुःसूता, निदित 10, सुन० गु० शल्य | सुप्तोत्थित गु० नीद से समझायर उठा। सुनकातर ना.पु. सर्पविशष । सुप्रभा० ना. सी० पदमाक । सुनवहरी ना. सी. रोगविशेष सुप्रलाप ना.पु. सुवचन, अचीवावचीत। .
३७२ मङ्गलकोप। . - सुफल० गु० जो अच्छापल देता है, वाम पा सुमेल. गु. योग्यमिलागर, अछामेल । उपानी, पू, ना. पु० अच्छााल, मिद्धि । सुयश ना० पु. सुम्याति, नेकनामी। मुयश सुफला० ना.सी. पिण्डत जर । : सुपट. ना. पु. सड़क, यया मार्ग। मुयोग गु• अच्छा योग। सुरखना. पु. देवता, खर । सुमग० गु० सुदर, श्रच्या भाग्य । सुभगा ना. सी. निस की रा पति बहुत सुरापगा० ना.सी. श्रीगगानी, रामचन्द्रि प्रेमरे, जो स्त्री बहुन पुत्र न मारे, सुहागिा। पाया यथा (उपमीन उपवलशाभिने उर दतियोरनसथै, सुग्यापगातपसिंध में जन श्वेत सुमट०१ गा० पु. योगा, नीर, बहादुर, बल श्रीदर्शिअब) सुभट्ट वान्, शर। सुमार्गी गु० ग्यान्, नेकासी । सुरऋपि० न० पु. गुरपि, नारनी। सुभाग्य ना.पु० अच्छाभाग, नेक्सस्ती। सुरफ्ना स० xि सुहाना । सुमीता० न० पु. सुबीता, सारकाश । सुर तक ना. पु० माणिक । सुरगन्धज. ना.पु. पतग वृत् । सुभुज. ना. पु. सुवाल, देत्यपिशेष। सुमति ना. नी. भलमनसी, सत्त्वगुण, सुन्दर सुरगन्धनी ना. सी. खणेफेना। बुद्धि, मा. पु. दीविशेष, राना जाका सुरगुरु० ना.पु. वृहसति । दिसौंपी। सुरंग ना. पु. सेंध, पद, ईगुर, अचारग । सुमनः ना• पु. गद्गुन, धतूरा, पुपविशेष | पुरचाप ना० पु० इन्द्रधनुष जो मेघकी ब्दों पर सूर्य की किरणें पड़ने से प्रकटता है । गु.जिसका मन शुद्धहो, शीलरान् । सुरत० ना. स्त्री. सुधि, स्मृति, मैथुन । सुमनस० ना. पु. देवता, फूल, यसात । सुरता गु० सुरतीला। सुमना० ना. स्त्री० माती, मुदिता, सी, रति, अनेकार्थे यथा ( एमना कहिये मालती सुमना सुरतीला गु• विचारएन प्यानी, चोरस । सुरती ना० सी० तमाकू खान की। मुदिता तीय) सुरथ ना. पु. रानानिशी, अच्छारय। सुमनासुतक ना• पु० फुलेल आदि उबग्न । सुररमा ना० पु. देवदार, पल्पर । सुमन्त ना० पु. रानादशरथका मन्त्रीविशेष । सुरपति ना. पु० इन्छ । सुमन्त्र० ना० पु. अगमत्र, नक्सलाइ, अच्छा | सुरभि० ना. स्त्री० सुगधि, महक, वस तऋतु, गाय, ना• पु० जायात, मृग, बेल, केला । सुमरना. स. दि. स्मरण करना, नामलेना। सुरभोग ना. पु• अमृत । सुमरन ना. पु. रमरण, चत, सधि, समझौती, सुरमणि ना० पु० चिंतामणि, द्र। मुपरनी। सुरमा ला• पु• अनन, यहशब्दकारसीका है। सुमिना ना.पु. सूर्य, अध्यामिर । सुरमुनि ना• पु. नारदमुनि । सुमित्रा ना. सी. लक्ष्मणनी की माता । सुरमृत्तिका ना० स्त्री० पटकरी । सुमिल.गु. चिनी, चिकन । सुरराज. ना.पु.१द्र। सुमृतिक ना. स्त्री स्मृति । सुररूप० ना.प. मदारवृद, कल्पवृक्ष । सुमेश ना. पु. देवताओं के बराने का पर्वत सुरपिं० ना• पु. नारदनी । पिरोष ज्योतिष में उत्तर ध्रुव । सुरवायी ना. स्त्री. देवमार्ग। मता। . . M .. मङ्गलकोप। ३७३ करना।" -- ६ . । . सुरसर० ना.पु. मानसरोवर। सुलाना० स० कि० शयन कराना, पौड़ाना, यध. सुरसरि० । सुरसरिता ना. सी० श्रीगंगानी | सुलोक ना. नकनामी, रायश, अच्छा, सुरश्रेष्ठ ना• पु• ब्रह्मा, इन्द्र। लोक, अच्छा मनुष्य । सुरस०१० सुस्वाद। सुलोचना नानी. चकोरपती, मेघनाद की सुरसी० ना०, स्त्री. तुलसी पौधा । i. सी, अच्छी.अखिोवाली। सुरसुराना थ० कि० सरसराना,,गुदगुदाना । सुलोमण ना. रसी० काक जंघा बूटी 1. सुरसुराहट० ना० स्त्री० सरसराहट, गुदगुदी । | सुयक्ता गु० भला कहनेहारी, अच्छापाठक सुरसुरी० ना० सी० गुदगुदी, चींटीविशेष । सुवचन ना. पु० विरादवाणी, अरवीता। सुरसेनप० ना. पु: स्वामिकार्तिक । सुवन गा. पु. पुन, लड़का सुरा० ना० सी० मदिरा, दारू, शराब। सुवर्चि ना. स्त्री० सन्नी लवक्ष मुराई० ना. सी. बहादुरी । .सुरात ना० पु. देवदारु । सुवर्ण० ना० पु. कनक, सोना, सुजाति, मुरंग। सुराहा ना० घी हीरकाकोली। | सुवर्णद्रुमा० ना० सी० फिरवाली । सुरापान० ना.पु. मदिरा पीना। सुवर्ण ना• पु० अाकाश, नाममालायां (- सुरारि० ना. पु. दैत्य, राक्षस । म्बर पुषर कहतनभ अन्तरित धनवास, व्योम सुरालय० ना० पु. सुमेर, स्वर्ग, देवालय, 'अनन्त रिहायसी सं सुवर्त पारास). सुरभवन। सुवल. ना. पु. श्रीकृष्णचन्द्र का एक सखा। सुराष्ट्र ना. पु. गुजरात के समीप देश सुयाना० स० कि. सुलाना। विशेष सुधार० ना-पु. रसोइया, मावी, रमायो- सुरुकना० स.शि. मुड़कना । यथा (विविध पांति बैठी व्यवनारा, लगे परी, सुरूप० गु० सुन्दर, दिरागीट, अचारूप । सन चतुर सुमारा) सुरेन्द्र ना० पु पूरण, जिमीकन्द, इन्द्रन सुबाहु ना० पु. दैन्यविशेष। सुरेश ना. पु. इन्द्र। सुविस्तरा गा० सी० गन्धपसारन । सुरैत० ना. सी० अप्रियाहिता, उडली, सुवेल ना० पु० समुद्रतट पर्वतविशेष 17 सुरतिन० सनी, घरपैठी, उदरी। सुवेला ना० सीग्रन्थीमायत, अच्छाकाला! सुलगना० अ० कि. वरना, जलना, पांच उ. सुपैया ना. पु. सोनेहार । टना, धीरे धीरे जलना। सुशिक्षा० ना. सी. भली शिक्षा, अच्छी सुलगाना० स० कि. सरना, लूगालगाना, जलाना, परचाना। सुशिक्षित गु• प्रयोग, पछी शिवापाप हुये। सुलझना १० वि० सुलना, निरहना। सुशील गु० जिसरा शोज अच्छा है। सुस्व: सुलझाना स• शि• उमेाना, उकेलना, भार, मासु, शिष्टाचारी। सालना। सुशीलताना स्त्री शिष्टाचार, स्वभाव में मुलभ गु• सहनसे जो पायाजारे, साधारण । सुलक्षण ना.. गुम * सूचक चिह, सुधीर ना. सी. शोमा ।.. सुभूपा गा० सी०सता, आदर, खिदमत।। राति... . नप्रना।
३७४ मङ्गलकोप। . . . १ ५ सुप्रैणी ना० सी० मार्ग, नाट, राह स्व. ना. स्त्री. परत्र सीपीपीवशा' मुपुप्ति ना.पी. गुपनदि, पारपारिशा। {गराना.पु. भरणा का, पाता। सुसमारना..कि नगा।। रंगा० ना..mti मुमतामा पकि पियाम करता, शाम इंघ नाग्रीगय, बाग। लगा। सूचन० ना. सी. एपने पर। सुसमय. ना. पु. अम्मा समय, रदती का संघना० स० कि. वामना, गधिमदा। | धनी गा. सी. नाम, सस । सुसम्बद्ध मुनिगडी पधे प्रकार रचनाकी सूंट० ना. सी. Trt, मार। एड. ना. स्वीहापी की नाक । सुसर० एंजा. ना. पु. विशेष, वाला। ना.पु. सार। सुसरा रांडी ना. सी. कलार, कखबार । सुसराल. ना. सी. साराख । सनी १ रा. लि. कांदा, संसा, टही सुस्थ० गु. घरोगी, भला, चगा। सूंथना० से पत्नी को निकाला या भिग सुस्थिर० गु.श्चिस, पटल । परना। सुस्मृतिः ना. सी. चैत यता, अधीरमृति । सूम० गा.पु. एम। सुस्तवा० ना. श्री. चलोगी। सूफटा ग. दुरला, निस, एमा। सुस्वाद० गु. सरस, रसीला। सूकर० ना.पु.शकार। सुहाग ना. पु. सौमाग्य, गलाभाग्य, पतिता सूकया ना० पु. किमारी, शुक। प्यार, श्री का विशेष, जो पति के जीरने सूकरारक ना.पु. गुरुवार । का चित, अस्मिाता सुहागन ना. सी. विवाहिता की, निस सी | सूकी ना. सी. का पति नीता हो। सूक्यपाक्य ना.५५ जवाखार । सुहागा ना• पु. श्रीपपिरिशेष, निमसे सुपर्ण सूपधड़ी ना रती भोग, सतीशी। यादि गलता है। सूसना . पि. सूना होना, गलना, सिक सुहाता गु० सोहना, चाहता, मला । इना, मुरझाना। सुहाना गु• भावित, अच्छा, सोहना, स्मा० गु शुक्र, रसहीन । सुहावना चाहता, कि• अच्छा लगना, सूग० ना. रवी• दुविधा, चिता, राक। रचना, मारना। सूगा० ना. पु• तोता। सुहास. ना.पु. सुदाली ना. सी. पक्वानविशेष सूचक गु• शार, बोरम, शिक्षक, प्रकाशक । | सूचना० ना. स्त्री जनावना । सुहौटी० ना. सी. जो पटरी चौतर वा पन्ने सूचनिया० ना. स्त्रीचीनक, फेहरिस्त । " क ऊपर लगाते हैं। सूर्चवार ना. सी. केतका। मुरद० ना. पु. मित्र, प्रियतम । सूचित० गु० बाधित, सूचना रियागया। सूभर. ना. पु. भरी ना. स्त्री. शकर, राह। चिमुखी० ना• स्त्री माई दवा।। सूत्री ना. सी. सूई, दी। सूत्रा० ना.पु. तोता, सूना। सूचीपत्र गा• पु. पत्र निराम पुरता समानाः पु. 3 चौबनी। } .- - मङ्गलकोप। ३७५ . । Tr . : : ध्याय या प्रकरण लिखेजाते हैं। सूना० गु० छूछा, उजाड, जहा पोई न हो। सूच्याकार० ना. पु. सूई के डौल । सूनु० ना• पु० पुन, बेटा सुजा सूनो० गु० शय। ना० पु० पुलाव, शोष। सूजन सूप० ना. पु. शूर्प, छान। सूजना० अ० वि• पूलना। सूपकार० ना. पु. रोग करने हारा, यावची। सूजा० ना० पु. वर्मा, वैधी, सुतारी। सूपारेना० ना.पु. पशीविशेष सूजी० ना० पु. सीनेहारा, दर्जी, दरदरापाटा, सूपार० ना. पु० सुपारा ।। सूपियारी ना० स्त्री० सुपारी। सूझ० ना. सी. दृष्टि। स्म० ना० पु शस, कृपय, जूस । सूझना० अ० कि० गौचरीहोता, देखपड़ना। सूर० ना० पु० वीर, हगास, सूर्य, सूरदात, . अधा। सूतक ना• पु० धागा, तागा, रथवान्, भार, वई, पाराणिक, व्यासनी का शिष्य जा नेमि | सूरज ना० पु. सूर्य सुमीव, राम पारएय में शोनकादिकन को पुराण सुनाता था, नेश्चर, यमन । पारा, व्यवहार, रीति, प्रीति । सूरजगहन ना. पुसदहरू। सूतक० रा. प. अशोच, अपवित्रता नो प्रसव | सूरजमुखी० नग. सी. इतका वा मृत्यु के दिा से दश दिनतर मानते है सूरजपलमानपुर। उसके दो नाम है वृद्धिस्तर, मृत्युसूतक । । सूटिशनासमेटे। सरकारचन्द।। सूतना० अ० कि. सोगा, नोंदलेगा, स० कि. स्टार...मही। - तारना, उपायकरा, मृतलगा ताड़ा। दान, रमार सूतली० • पी. डोती, पती रस्सी । सूतिका न • स्त्री जया, प्रगतिका प्रमशः या पु० वार, मात्र त रात । स्तो० गु० जो मही पा, मृतिका का नम्बरः ना. पु० गतिशीविशेष । सोतीहुई। सम्माःगु वर, मारत, मनचला। सूत्० गु• दि। सन्मान. ना. पु. वारता, सस्ती, सूत्र 1. पु. तागा सोपम अनाक का बदहन। पा नीरव ऋथा। सूरसुतर गा. पृ• मुनीर, सनश्चर, करप, सूत्रधर० ना. पु. 71, राजा। सूत्रनाभिक ग. श्री.मही सूराना पु• मावत, बलवान् , rity सुधा मुरी ना. स्त्री- सरी, सती! सूचन० • पु. का पारवाला। १० मा पुगीइप। त स्थनी० ना रखी ना पायजामह, मुगनी। सूर्पनखा' ना. स्त्री० शासा, राग की सूध. गु. मन ए कप रस, गाड], सुधानि सूर्य० ना• पु० सुवर्णधा, दिनमणि, रति, सुधाई. ना. • शर्मा, मानापा सून गुना . 1 यमरान। . रहा। । R -- । सूर्यक० ना. पु० नाव।
३७६ मङ्गलकोप। पूजका पौधा। करना। सूय्यकान्ति: ना. सी. सूर्यमणि । | सेक्ना० स.वि. तताना, गर्माना। सूर्यग्रहण ना. पु. सूर्ण का महए । संगरी ना. श्री. फली, ६ मी। सूर्यमणि ना. सी० मणि विशेष। मिठा० ना.पु. सरकण्डा निससे मौदा सूर्यमुखी. ना. सी० पुप्पविशेष । सेठी ना. सी. बनाते हैं, सरपत, पतली सूर्यप्रिय ना• पु० ताबाधातु । सूर्य्यवशी ना० पु• सूर्य वश का छत्री। | संत श्रय विनामोल, मुक्त, संतमत । सूर्यवल्लभ० ना. पु० भृगरान, भगरा पौधा । | संतना० स० कि०' सुधारना, बनाना, स्पध सूर्यारय० ना. पु. सूर्य्यमणि । सूर्याय ना. पु० मदारच । संद. ना. पु. सौराविशेष । सूर्यास्त ना• पु. सध्या, साभ, सूर्य का संदुर० ना. पु. गुर। यस्त अर्थात् सुपना। संघ ना. पु० चोरी करने के लिये चोरलोग सूर्येन्दुसंगमा ना• पु० अमावस । नौ भीत में देद करते हैं सुरग । सूर्योदय ना. पु. सूर्य का उदय, ता, संघना० स० कि. सोदना, दाना । सरा। संघा ना. पु. लवपविशेष निसको लाहारी सूल० ना• पु० रल, पुरपुरी, मालाको मुनि, लोन कहते हैं। काग, अस्सविशेष। संधिया ना.पु. विष, जातिविशेष, चौर जो सेंध में पेटता हे। सूली० ना. पु. शली, ना. सी. फासी। संधी ना. स्त्री. सजूरका रस, ताहीविशेष । सूवा. न. पु• ताता, मोटी सई । सहुनांक ना. पु. दादविशेष, दिनाई। सूस० ना.पु. जल जतुविशेष। सूसमार. सेगुन० ना. पु. वाष्टविशेष जो पैर देश से सूसी ना. स्त्री. वनविशष । पाता हे। सूहा• • लाल, अरुण, ना० पु. रागविशेष । सेचन० ना• पु. बिहाव । सूक्ष्म ना• पु. जो वस्तु अरण्ल पर्थात् हली सेज ना० सी० शय्या, स्तर, पलंग, मना । पतली बारीक हो। स्जदेन्द० ना. पु. सनपर दिौना बाधने के सूक्ष्मता ना. रवी. हलापन, पतलाई, लिये टोरीविशप। पारीकी। संठ. ना.पु. बड़ा साहूकार । सूक्ष्मदर्शी गु. चतुर, सत्ता, प्रवीण, ज्ञानी। सेठन्० ना० सी० सेठी स्त्री। सूक्ष्मपत्र. ना. पु. करीदा। सेत. ना. पु० पुल, सेतु, गु. श्वेत । सृजना स.वि.सिरजना। सेतना० स० कि. जुगाना, सनना । सुजित. . जो सिरजागया। सेतु. ना. पु. पुल, नाथ, मर्यादा । एटि. ना. सीउत्पत्ति, जगन, वृद्धि। | सेतुश्च ना• पु० तीविशेष, पुल जो लका सृष्टिकर्ता ना• पु. ब्रह्मा, परमात्मा । पार परतरतण्ड के मण समुद्र में हनुमान् सादि- से अन्य• अपादान कारक वा करण का को या चित, हार, सग। सेदना स. मि. सेंकना, ततारना !! से ना• पु. सेंकने का काम, कतार । संकटा गु० सी, शत, १००।, सेन ना. सी: १ कटक, फोन, नाम एक कनने पाया था।
मङ्गलकोप। " १ यार्तिक - सेनानी० १ ना. पु. चमपाल, दलपति, सै० गु० सौ. ना. सी. भागवानी, बरस्त, सेनारति० स्वामिकार्तिक । लहर नहर । सेव० ना० पु० पलविशेष । सैकड़ा गु• सो, शन। सेम. ना. सी. तरकारी विशेष का पोपा या संगर० ना. स्त्री. शमीन की फली, बबूल. उसकी पली। की फ्ली। सेमर० ना. पु. सेमल वृत विशेष वा उसकी संतालीस गु० चालीम और सात ४७ ॥ संतीस गु० तास और सात ३० । सेर० ना. पु० तोल विशेष १६ छक्की। सैहिकेय० ना• पुर, नु। सेराना० अ० कि० टढा होना, स० वि० टना सेन ना. सी. से, प्रद, मेरी, रान, सा, पहा, मसाना। चिद, इशारद, नाम कम। सेल. पु. पी। | सैनप० ना.पुर, नादि, सामे- सेलखड़ी ना. सी० पर्वतकी मिट्टीपिशप । सेला. ना.पु. परत मिशेष, वाघ विशेष । सैना ना..स्न, इल,ौन । सेलिया ना. पु. मार्मार, सेलीवाला । मैनापति.पु. सेनापति, मिपद- सेली. ना. सी. वहीं, रामायणे यथा सनापाना। (तुरत विभीषण पाये मली, समुस सही सेनानी सील परसर सैन करना । राम सा सली) सूतकी नगी माला जो उनामा सैन्य पु. हिरेश का घोड़ा या पहाते हैं, जालपड़ी। सेघा ना.पु. पाशिंप, सर गा• ना समस्ती सेना, दल, कटा । रोपा, सुथा। सेघई ना. सा. साकी वस्तु शिष। संसान अन्य स झथे प्रारम्भ में । सेवक०मा० पु. और पुनारा, स्वाक नह सेहग्नः ना० सी० समाई । खिदमतगार ६ सहरनी • मदया। सेवकाई० ना० स्त्री० नोकरी, पूना, मवा, दत, सो मर्व० सम्ममाचक सर्वनाम । खिदमतगारी। सोनर ना. पु० निगमें प्रपती रहती है। सेवटि ० मी. नदीमा स्त, ददन । सोया ना.पागाशिप। सेवदार • पु० जनमानी सौमित्र दा, बारा सेयती ना• ग्रा. पुरा विशेष वाटा मात्र में। सेघना ना• पु० पालन, पता, वाहाना साटार ना. पु. गाया, ममत्र, जागा सेघना सकिरी अनारसाट नायी गुमा मला का घटेपर टा। सेगा • N • नाय, दाना, बिग्मत गारी। सेयवीर० ना० पु. शासन। सेस० ना.पु. रोग। सेसर ग. पु. रा में सष्ट शिश। पु. मेमा। . * प मांगना मजि. पनि Eिl मका मदना, माना गाना। सांघा ना. पु. नाना या मसाणा, नो गतिका पार मिगी भी गाय, मुगपिता। सांघाइट ना० मी मगर सोह० मा नोकिया राणा " ।
३७८ 'मङ्गलकोप। - . - सोही अव्य० सामने, सम्मुम्ब । सोमरजन ना• पु. लालच दन । सोखनार स० वि० सोचना, चूसना, पीलेना। सोमराज. ना. पु. ग्रीषधि, पौधाविशेष । सोमराजी ना. स्त्री. बाकुची । सोच ना. पु० प्याा, यूझ, शौच । सोमवल्लक ना० पु. पायाल । सोचना० स० कि० प्यानकरना, चूमना, शो सोमयली ना० बी० काकुची । चना। सोमयार० ना. पु० चदार, दूसरा दिन ।। सोजना. पु० सूझ । सोमवारी ना. स्त्री. सोमारी अमावस । सोझा ना. सी. मीधाई। सोमतीरी ना. स्त्री. सोनाली। सौरट० ना. सी. रागिनीविशेष। सोमा गु• सीधा सोरठा० ना. स्त्री. छदविशेष । सोत. ना. पु. भूर, पुण्ड, जलका निवारा, सोता० वेद, धारा, झरना, समुद्रका सात सोहना. रवी शाभा । सोहना. पु. मन्त्रविशा। सोत्साह. गु• उत्साह समेत, पान दयुत्त । साहम० गु. शामादनेहारा, प्यारा, चाहता, सोध. ना. स्त्री० सूज। ना.पु. स जन, रेती/ ना. स्त्री. मिठाई सोदर० ना. पु. सहोदर, सगाभाई।। विशेष सोदरा० ना• स्त्री. सगौरहा, रामचन्द्रिकाया (सुधा सोदरा यद्यपि प्राप, सबहीते अतित सोहना०प० कि० सनता, शोभादेना। सौदागा. पु० मुहागा । प्रताप)। सोहिल ना• पु• रागविशेष। सोध. ना. सी. साथ, सान। सोही अव्य सोही, स मुख । सोधना० स० [• शोधन करना, श भरना, | सौ० गु० शत, १० । मिलना, निर्मल करना, शुद्ध करना। सौ. ना. पु० शपथ, सौह, सोगद, अव्य से। सोन ना. पु. शारण, पर्ण पुप्प वैशेष । सौकरी ना. सी. वानहीकन्द । सोनहरा ? गु० साने का, सोने का सा साँवा अ० कि० शानौट गल से गुदा सौमहला रंग। सोना ना. पु० स्वर्ण, कनक लिंग, अ. वि. सौंपा ना. सी० धरोहर, थानी, सुपुर्दगी । नौदलेना, मरना। सौपना० स० कि. पहचारा, सुपुर्द करना, सोनार ना.पु० जातिावशा, रार्णकार । , धरना, रखना। सोनिया ना• • राख से सोना भिन्न को सौंफ पी. औषधिविशए । हारा, न्यारिया, दागलिंग नालन का। सौरा. ना. पु. कालस, कानल : सारला। सोपान ना.पु. सौदी, जानह । सौर ना• पु. मवलीविशेष । लोकालिका गा• स्त्री० सभालूपीधा : सरि ना. स्त्री० वृद्धिस्तक । सोमनाया• सोहना, सनना। सोमा ना. स्त्री शामा। साह ना. स्त्री क्रिया, शाथ, सौगद । सोमना• पु. चश्मा। सोमनाय ना. पु. महादेव जो गुजरात में है। सौगन्द नास्त्री० शपथ, दिशा, सीह, यह सोमपादप० ना. पु. कारक। शब्द फारसी का है मा में प्रचलित है। धोना। + 1 . . - सौरी ना. सी. जवा, प्रस्ती ।। -- सौख्य ना. मुस, माराम ।
मङ्गलकोप। ३७६ - 1 . 1 - १ सौच० ता. पु. सौच, जो किया करने से प-स्तम्भन० गा• पु. काव, भार, एक, टोक । वित्रहो। स्तम्मित० गु• जो रोका वा पाभागया। सोचती. ना. सी. रता, बचाव । स्तव० ना• पु• सुनि, विजयकी पोपी। सौजन्य 10 ना.पु. सुजनता । स्तायक. ना. पुरतुति करोहारा । सौत | स्तुतिः ना. सी. सराहतमा मना, मिनय । सौतन स्त्रिया चापस में एक दूसरे की स्तुतिपाठ-० ना० पु० सूत, भन्दीनन । सौतिक सौत कहलाती है। स्तेन ना. पु. चौर। सौतिन. स्तेय. ना. पु. चोरी। सौतिया. ना. सी. सौति । स्तोत्र ना० पु. स्तर, स्तुति । सौतियादाह० ना. पु० सौति का दाह । स्त्री० ना• स्त्री. नारी, लुगाई, धीरत । सौतेला गु० जो सौतिका जाया है। सैण ना. सी. के परा या पीके सौध० ना• पु• महल, ऊचा मान । खभावनर। सौन्दर्य ना० पु. सुन्दरता । स्था गुरि, टहरा, बायम। सामाग्य० ना पु. सुभाग, भाग्यमानी, सुहाग । स्थगित गु० पका, या । सौभाग्यवती ना. स्त्री. सुहागिन । स्थल ना.पु. सार, भूमि, नगर, पर, भूमि सौमित्र ना• पु० मिना सुत, लदमयनी । • जो मला है निगपर मनुम्यादि यसन है। सौम्य ना.पु. युधग्रह, बुधवार, चद्रपुर, गु. स्थाणुरु ना. पु. भीमारिनी। उजला, सुदर। स्थान ना.पु. ठौर टिकास, पर, गम ।' सौम्या ना. स्त्री. शालपणी। सौर० ना• पु० शनैश्चर, सूर्य सपी ना. যালাব বা সাহা, ভাই, বিরা के स्थानपर प्रतिष्ठिन होगा। स्त्री. मछली विशेष सौरभ० ना० पु पसर, सुगध, अनार स्थानी० गुः परपाखा, गुजरामी। सौरमास ना० पु० सूर्यका एक राशि रहन स्थापनः गा. पू. रमता, पर, Farmi का काल, एक सक्राति से दूसरी वक। स्थापनामा.मी. प्रनियापारना। सौरवर्ष० ना० पु. बारह सकातों का समय । स्थापित गु० प्रतिषित, रसागया, निगर, सौरि ना• पु. शनैश्चर, महिना विशेष । Pr, अनय, सापन दियागया। सौरेया स्थानी की साली, येना! सौरेयक 'ना. पु. पियारमा। न्यावर गुरु अनल मा पारिना। सौहार्द० ना. पु० मिनल, मित्रता । स्कन्दना• पु. सामिकार्तिक। स्कन्ध ना.पु.का. कार. स्खलन ना. पु. पतन। स्तन० ना. पु. कुच, उरोन, धन । म्यूस. मग, मही, बा, काम। स्तब्ध गु० रुता। स्यूनदर्म: ? • मन, सेटा, पार। स्तम्मना.पु. सग्मा, सदा म्यूलस्ता समयमा । मियत गुगया। स्थिति: ना. स्त्री टिका, टरगा। स्थिर गु. अयोध, अपत, शान। नियता ना. सी. गाव, धीमारना। - .
मङ्गलकोप। - TA र . स्थूलैला. ना. स्त्री० बड़ी इलायची स्मृति० ना. ग्री. शाम्र विशेष, स्मरण, चैत, स्थैर्य० ना.पु. रिधरता। याद! स्थौल्य ना. पु. मोटापा, मारा। स्मृतीहिता० ना• स्त्री. शस्साहली 16 स्मृद्धि० ग. स्त्री. बढ़ती, अधिक, चाहना । • • स्नान०मा० पुनहान । स्नानीय ना. पु० जल जो नहाने के योग्य है। स्यन्दन ना० पुरय,पानी, चित्ततरग, वृत स्यान स्नुही. ना. पु. सेंहुए। ना. पु. चतुराई, चालाकी। स्यानपन० स्नेह ना. पु. प्रेम प्रीति, प्यार, तेल । स्थाना गु० चतुर, चाला। स्नेहवृक्ष ना० पु० देवदारु । स्पर्धा ना. स्त्री० देप, दाह, अयो,' स्यार० ना. पु. शृगाल, गीदड़ । গণমা स्योना करनेकी इच्छा। स्योनाक० ना. पु. वृतविशेष। स्पर्श ना० पु. छुआर, छने का काम । स्निग्धददा. ना. 'स्त्री रीवृत। स्पर्शन्द्रिय ना. सा० लचा, चर्म । निग्धपणी ना. सी. मुरदरी ।' स्पष्ट ना० पु. खुला, सहन, टीक, दुमरत खुप ना.पु. भुया। स्पष्टीकरणार्य० अय० सष्ट वरने के लिये । स्रोतक ना. पु० सोत, सौता। स्पिरा. ना. स्त्री. शालपणा स्रोत.. ना.पु. सोता। स्पृश्य गु. पर्श करने के योग्य । स्रोतस्वती ना. स्त्री. नदी ।। स्पृष्ट० यु.यागया। |स्व० सर्व अपना, निनका बोधक, ना.पु.धन, स्पृहा. ना. सी. इच्छा, चाह। स्फटका ना० पु. सच्छ पाराणपिशेष, स्व. ना. पु. वर्ग। स्फटिक विलार पत्थर, चन्द्रयातमणि, स्वकीय. ना. पु. अपना, संगा। | स्वकीया० ना. सी० दिनस्त्री, अपनी । स्फटिकाक्षा ना. सी. परकरी । स्फटिकोपल. ना. पु. चद्रका तमणि, स्वच्छता० नास्त्री निर्मलता, पवित्रता, | स्वप गु० निर्मल, सा, परिष।' चिल्लोर। स्फुट० गु. पिला, खुला, मक्त, प्रकट । स्वच्छन्द० गु० अपनी इच्छा के अनुसार, सरी स्फुरत्० अ. वि. प्रकाशित, शोभित, डोरात । साधान, ना. पु. ईसरा स्कृति ना० स्त्री. टीस पड़घड़ाहट, डोल, स्वच्छन्दचारी ना• पु० सयाप्ती, भगवान् । दिलाव।। स्वच्छफल० ना. पु० नारियल। स्फोटक ना. पु. फोड़ा। स्वजन. ना. पु०' अपनेलोग, नतैन । स्मय ना. पु. अभिमान, अहङ्कार, गरूर । स्वजातीय० गु० एक्वर्ण, निजगात्री। स्मर० ना.पु. श्रीमहादेवनी, कामदेर । स्पत० अन्य प्रापसे। मरण ना. पु. सरि, चेत, स्मृति, याद, सतन्त्र गु. स्वाधीन, निनवश । स्वतन्त्रना० ना. सी. स्वाधीनता। स्मारफ० गुना स्मरण कराव। स्वधर्म० ना. पु. अपना धर्म 1 1 2 स्मा. ना. पु स्मृतिश झाता 1 स्वम ना.पु. निद्रावस्था, द्वितीयावस्था,नींद में ग्राम। धीर कपूर। सफाई। 1 . T . है * मङ्गलकोप.। ३८१ - , . । ६ - जो कुछ दिखाई देता है। स्ववर्ण० ना. पु. निनगोत्र, अपनापणं ।' स्वमकथा० ना. स्त्री० स्वप्नका वृत्तात, ससार स्ववर्णी० गु• निजगोनी, एक जातिका । स्वश ना० पु० स्वाधीन, स्तन, निजवश । स्वप्नफल० ना० पुःताचीर रूपाव, सप्तकाधर्म स्वसेवक ना० पु. अपना सेवक । स्वसेव्य० गु० श्रात्मपूजक ।।.. स्वप्नवल्कला ना. स्त्री तेजवल । स्वस्तिक अन्य• मगल, कल्याण, तथास्तु । स्वप्रकाश गु० जो पापही प्रकाश वा प्रका | स्वस्तिवाचन० ना• पु. शास्रोत वर्मकेनादि शित है। में व्यवहार विशेष । स्वभाव. ना. पु• चरित्र, प्रकृति, पादत । स्वस्वामिभाव० गु० सामी पोर उसकी वस्तु स्वयंसिद्ध ना० स्त्री सिद्धरूपी, जो पापही का सम्बन्ध वा फल। । t . । । . सिद्ध। स्वयम्पर० ना० पु० ग्रीका, निम इच्चापत्र स्वाई०पना० पु० स्वामी, मालिक । , । 3 वर्म० गुः सर्ग पा है। परलेना, समाज विशेष जहा कया जबर स्वांग ना. पु. भाडेती, तमाशा । हृढ़ती है। स्वांगी० ना.पु. स्वाग बनानेहारा । स्वयम्भू० ना• पु० ब्रह्मा । स्वागत० ना. पु० कुशल, क्षेम, मिगागपूछना, स्वर० ना• पु० शब्द, धुनि, श्वास और अका | स्वाति रादि १६ वर्ष। स्वाती ना० सी० पद्रवा नचन । स्परपणिनी ना. स्त्री० गोभी, पौधा । स्वाद ना• पु० रावाद, रस, मगह मधुक- पड़ी। स्पराह्वया० ना. स्त्री. अजमोद । स्वरूप० ना० पु. अपनारूप, समानता, व्यक्ति । | स्वादष्ट ना. पु० गोसुरू।' स्वर्गपताली ना. पु. भंगा, देश । स्थादक० ग. निस में साद' होमाटी स्वादि० खाद। स्मादी० गु० साद रोहारा, जिसमें सादहों। स्वर्ण० ना० पु. सुवर्ण, क्नक, सोर।। [पु० अंगूर । स्वर्णपणी ना. श्री. शिरवाली। स्वादु गुरु मीठी सादिष्ट, स्वाद। स्वर्णमुद्रा० TI° पु० अशरसी, मुहर । स्वादुकरटक ना० पु० गोगुरू । वर्णवर्ण० ना. पु. गेरू। स्वादुपुषिका० ना० स्त्री० दुदी पौधा ।। स्वर्णवर्णा ना. स्त्री. दारुहल्दी। ; स्वादुमा ना० मी. काकोली 11 स्वर्गसौ० ना.स्वी रिवाली। स्वाधिष्ठान ना. पु० चं विशेष । स्वाधीन: गु० सतना रिजाश, सुद मुख. स्वल्प गु. प्रत्य त छोग, थोडा, ना. पु. गीदड़। स्वाधीनता स्वल्पान्द. ०.पु. सरू । स्वाधीनी० ना• पी. सतना स्पाहार० ना. पु० थोड़ा पाहार, कमलामा सामारिक० गु० जा साभाव स है, प्रती स्वर्ग गा.पु. अपनावर्ग। स्वर्गात गु• अपनेवर्गमा कवितस्थान । स्वामिकार्तिक मा. शिवनी पशिष। + २ तार। ary . } । । ।
मङ्गलकोप। इग्दा, 1 स्वामित्व० गा० पु. थरिकार, प्रभुता, मा हंसक० ना.पु. रिछुया, जो स्त्रिया पात्र में विकी। पहनती हैं। स्वामी ना.पु. प्रभु, राना, मालिक, गुरुदेव हंसध्वजा ना.पु. प्रमा, राना विशेष, गु. पति। निस प्वना में इस बना हो । स्वाराम ना• पु. निन, उपवन, अपीयारा । हंसना० स० कि. हास्य करना, टट्टामारना। स्वार्थ पु. ससारिक काम, संसार की हंसपद. ना. पु. इसका चरणं, विह पिरोप, निजे यर्थ वा लाम, प्रात्मपाला। जो लेखक लोग भूलवे स्थान पर लगाते है । स्वार्थिक . जो अपो को पूराकरे शाम पा इंसपदी ना. स्त्री० पौधा विशेष। कृतार्य। हसपादी स्वार्थी० गु• यात्मपालक, अपनामतलबी हंसमुख० गु० ग्रानन्दी, मगन, हसौड़। स्वास० ना.सी. श्वास। हंसा पु• हास्य । स्वासा ईसाई ना. स्त्री• हँसी, टटोली। स्याहा० ना. स्त्री अग्निदेवकी स्त्री, जोहवनादि हंसाना० स० कि. हास्यवराना, रिमाना। में म व पूरे होने के पीछे बोलते हैं। इंसिनी. ना. सी. इसकी स्त्री। स्वीकार • पु० अंगीकार, फतूल, मयूर । हसिया० ना० पु. इसया । स्वीरत. स्वेच्छक गु० स्वारीन, हठीला । • हसी ना• स्त्री• हास्य, ठठोली। स्वैच्छा० ना. स्त्री. स्वाधीनता, हठ, निन्दा। इंस्था ना• पु• अनादिकाटने का इथियार । स्वेच्छाचारी० गु. साधीन पत्ती, जिच्या हंसेश ना• पु• मझा । समान वारक। | हंसोड़ गु• ठठाल, हँसमुख । स्वेत. गु. खेत, सद। हसोड़पन ना.पु. टठोली ।। स्वद० ना.प.प्र वेद, पसीना, तप। हकयकाना० अ० विक घड़ाना, व्याकुल स्वेदज. ना. पु. जो पसr से उपने यया जूना, पीलादि। हकलो गु० जो गल से अटक बोले, जिसकी स्वैरण ना• गु० साधीन, परदारिक । जीम जल्दी न चले। स्वैरिणी ना. सी. कुलग, विनाल । हवखाना० ... जीभ का इसरहाना नात स्वैरी गु• सालीन, सरिन, खुदमुलार । वायदना। स्वोपकारी गु.निन उपकारी, स्वाधी। हकलाहागु• लड़बड़ाहा। [ह] कारना रा०शि० लादि का घुमाना । शान स. कि. निकालना,हाम्ना, चलाना । |हकायका गु• घबड़ा, व्याल । हमार० ना• • हार, पुरार, चिलाइर। हगना. वि. गुहकरना, जगल फिरना इकारना० म. वि. हावा, पुकार , पाल झाड़े जाना। हगनेटी ना. श्री. हगने की इन्द्रिय व इंफैरा० गु• हाम्नेहारा। इस गा.पु.पही विशेष, धामा जीव, रामा, हगमरना० घ. कि. गुहकरना, विधाकर धर्म, पोहा सूरज, परमहम। होता। . चढ़ाना। . हमनीटी राप, गदा, गाइ ।
मङ्गलकोप। th 1. , M 7 काना। A am जाना. स. कि. बीटकराना, ग्रहकराना। हड्डी० ना• स्त्री. टेकार । गास. ना. स्त्री• इगने की इच्छा, शल। हडा. ना. पु. सरावान इत्यादि इस शन्दको चकोला ना.पु. पा, झोंको पहार चिहिया उदाते हैं। ट० ना. सी. हठ हड़ाना स.नि. चिड़िया उड़ा इटकना ५० कि० अटकाना, रोकना, मने हहाहड़ी० ना. स्त्री. हहहही। = "इटकाना , रोजाना, मारा। .हडा० ना० पु. मोगहाड, विर्ना, मोपरा। इटना० अ० कि. अलगहोना, चलेगाना,टल II, | हडी० ना. स्त्री. अस्थि, हाड़। पीछे वा धागे को बदना। हडीला० गु• अस्थिवान् । इटया. ना. पु० अनादि मापने के लिये हाटमें हण्डनी मा. नी• कुचला वा कुलटा स्त्री। बैठनेहारा। हराडा० ना. पु० तारे या पीतल वा मिट्टी का घटवाई ना स्त्री. हारका काम । रहावर्तन । हटाना. स. कि. यालदेना, रोकदेना, पाइ- | हंडाना० सकि. देश या रागरस निकालदे, मुह कालायरमें गधेपर चदार घुमा।। हट व ना. स्त्री अधर में कारण दूकानमद इंडिका ना. सी. हादी। परना। हंडी हटिया ना. सी. हाट । हत० च्या दुद, नाश । इतना ना.पु. मारण, वधा। हट्टाकट्टा० गु० पोदा, चर्फ अच्छा। हतना० स० वि. वधकरना, मारदालना। हठ ना० पु. मगराई, रार, मचलाई, ग्रह। हतादर० ना० पु. समानहीन, निरादर । हठना० अ० कि. हठीला वा मचला वाटेदाहो हती. अव्य० थी, रहै, ना. मी० मारीगई। ना, जिदरग। हत्था ना.पु. हाथ। हठात् अन्य अपरम हत्था० ना. पु. हाथी । हठी गुरु "ट परनहारा, मसा, हत्या० ना. स्त्री० वध, हिंसा, यधदोष । इटीजा मगरा। हत्यारा० ना. पु. हिंसर, मधिक, बधदोषी। हड़ा. ना. स्त्री. फ्लरिशेष ना० १० काट । हत्यारिन हरक्त० पु. पौधारिश। हत्यारी ना. नी. हिंसनी। - 'हगोला. ना. पु० पनाविशेष। हथ० ना.पु. हाथ । हड़जोड़ा० ना पु० पौराविशेष । हथकड़ा गा.पु. पकड़, हाथ से पकड़ने की हफूटन० ना. पु. हशी में पीड़ा। यस्तु। हदयाना० अ० लि. घराा, व्याकुलहोना, | हथकड़ी० ना. स्त्री० हाथ में डालोमा बेहो। हलवला। हथकंडा 'हमयड़िया० गु० चिद पड़ा। हथखेडा ना० पु. टेव, दव, रोया। छड़वड़ी गा• स्त्री. खलबली, हुलह । हथचपूजा. ना. पुं० भाड़ा, अशा हाडाना० . कि थर्थराना, पापना, घड़. हथछुट घड़ाना, वखारा। ना० पु. पाटोहारा,लड़ाया। हथछूट हड़ाहट ना• स्त्री. कडाका, चटाया। हयनाल १० ची हाथी परपी तोपोरी। .
३८४ मङ्गलकोप। . -- है -- . हथनी ना स्त्री• हरितगी। हप. ना. पु. मासे मुह में अल के हडफेर० ना.पु. रुपया परखने में ठगदिया, निगलना। उधारलेना। हपभप० गु० पुतीला, चरा, अव्य. सपाट हथरस० ना०पू० हफहफाना.वि. हाफना। चूमाचाटी, मठोली। हथरसी० स्त्री हवडा० गुपूरस, इपिला । हहरी ना. सी. रहटेका इसकता । हपिला गु• जिसके आगे के दातर २ हो। हथल. ना. पु० पीतलका पड़ा। हमारा सर्व• उत्तम पुरुष बहुवाक्यसम्म ध इथवास० हमारो बोधर शब्द। हथा ना.पु. चकोरा हथकड़ा। हमेव ना. पु. अहकार, हमार । हथिया ना. स्त्री० हस्त नक्षत्र, वर्षाकालका | हय. ना. पु. घोदा । अन्त, धरहा। हयमेध० ना. पु० अश्वमेध । हथियाना० स० कि. पाड़ना, मदणकरना। हयशाला० ना० स्त्री• घुड़साल, तोला । हथियार० ना.पु. लाहसर, कलकाग, अख । हयहया ना० पु. नागार्जुन । हो. ना. स्त्री० पोरके मलने की वस्तु बालों । हये कि नारो, मारे, मिटायै । की बनी। हर • पु. श्रीमहादेवनी, हल, सीर, अन्य। हथेला. ना. पु. चोर। यह जिस शब्दके अवमें हो उसका, अर्थ दरप हथेली ना• स्त्री• हाथ के नीचका स्थान । का माना जाने यथा,पापहर, तापहर । हथौटी० ना० स्त्री० बचत, विद्या, प्रवीणता । हरगिरि० ना. पु. कैलास । हथौड़ी ना. स्त्री. छोटा पन । हरण. ना. पु. बरचस वा चार से किसी हदियाना अ० कि. ग्रागा दा, छ पाचरना, की वस्तुका लेना, चोरी, लूट, शादा, पराना, स. शि. हुलसाना, पुसलाना, चाप हरिण । दिलाना, नाचना, परवस क्रा। हरता० ना० पु. चोर लुरा शक हदियाहट ना• स्त्री० भोलान, मुहचेरी, घरद न • पु• हल्दी घराबर, बरबसाव, चाक, चार । हरदत्त० गु• जो शिवनी का दियाहुआ है। हरियाहा गु. भोला, मुइचोर, स देही । हरना० स० कि० बरबस लेलेना, चोरी करना, हनन ना. पु. वराहता। तू'ना, उठालेना, हरिण। हनना. स.वि. वधकरना, मारडाला, मारना, हरनौट .ना.पु० हरियका पचा। हरफारेवडी० [. पु. फलविशेष । जादना। हना गु• मारीग, दवाई। हरवराना० . कि. हड़बड़ास, घराना। हनु० गा.पु.४, हनुमान्की । | हनिघाइ ना. पु. वृत्त वा उसका पूल हरसिंगारं विशष या विशेष हनुमत् ना. पु. वायुपुत्र, रातार हनुमन्त श्रीरामसेवक, महार। हनुमान हरहार० ना.पु. सा, शिरकी माला । छन्तक० हरा गुवर्णविशेष, यथा घाराको सम्सी। दन्ता 1. पु. वरकारी, मारहरा। हराई ना. सी. हरियाली इन्तीक.ची. नाशक या वधकारी सी। हराना सकिमतलेगा, थकाम।। - हरपाय० । पृ. पारा। . है मङ्गलकोप। ३८५ T वेष्णव । हरावल० ना० पु० दलो अगाडी चलनेवाला । हरीमा० ना० पु. तोतानिशए। हरि० ना. पु० ईश्वर, पानी, अग्नि, वायु मार्ग, | हरु० गु० हलका । हाथी, पर्वत, सर्प, सिंह, इ द्र, वानर, सूर्य, हरये० अ य• धारे धीरे, हाले प्रमविलास धा, श्राफाश मनु, हरिण, पपाहा कोयल, यथा, दाहा, लै पौगय सेनपर हरुय यशुमति प्राण, मोती, अमर, अमृत, च द्रमा, कमल, माय, अति विरुझानो आज हरि यह कहि कहि सुवर्ण, कामदेव, खड, घोडा। पछिताय । हरिजन ना. पु० साधु भक्त, स त । हरव. गु० हलका, समायण यथा, निजजड़ता हरित० गु• हरा, डहडहा, चौरायागया। लोगन पर डारी, हाहु हरुव रघुपतिहि हरिताल० ना. पु० उपधातुविशष। तिहारी। हरितालिका० 7. सी. भाती सुदी तान हरेरा० गु० हरा । का नत। हरौटी० ना. श्री. घडा रत, इलचलाने का हरिद्रा० ० सी० हल्दी। समय। हरिद्वार० ना. पु. तीविशेष । |हर्ष ना. पु० अानद, सुख, श्राह्लाद, खुशा ! हरिन्मणि 1. पु. पन्ना । हर्पण ना. पु. योग, विशेष, मुखमार । हरिप्रिया० ना० स्त्री. लक्ष्मी, तुलसी। हर्षना० अ० कि. पूलना, खिलना, पानद हरिभक्त ना. पु० विष्णुका उपासक, हाना। हरिभजन ना. पु. भगवान् का भजन या हपित० गु० आनदित, प्रसन्नत, मग्न । भ्यान करना। हल. ना. पु. लागल, खेत जोतने का यन, हरिभद्रक० ना० पु. दूर। अछुतर वा उसका चिह। हरियल ना. पु० पर्व विशेष पोतविशप । हलका गु० पुलसा, नीच, विचारा, प्रौला, हरियाणा पु. दिल्ली रा पश्चिम देश पोला, सस्ता, अगुरु । विशेष हलफाई ना स्त्री• हलकान, निर्मलता। हरियान० ना. पु० गम्ड़ । P | हराकाना० स० कि० सहायदेना, सहारा हरियाना० अ० लि. जमा, बदना, उहाहा करना। होना, शास निकला। | हलकोरना० स० कि० बगेरना, समरीना, हरियाला गु• हरा, सम्सी । हिलाना। हरियाली ना. सा. हराई । हलचल ना० पु. हलबडी, घबराहट, रौला, हरिव लुक. ना. पु. एलुवा, मुसर। श्रधर। परिवास..पु. पीपलवृत्त । हलदिया. ना. पु. विषविशेष, प्रबल हरियासर० • पु० एकादशी, जमाष्टमी । रोग, गु० पीला। हरिश्चन्द्र पु० राजा विरोए जो श्योच्या हलधर० ना• पु० बलदेव, किसान। भ महादानी हुया है। हलन्त गु० जिस सन्दके अंतमें हल का T1. स्त्री. हरे, हह हलपना अ. वि० लोपोर हो। हरीरा०१० हरा, भगादा... भानन | हलफल० ना. सी. शिष्टाचार । हरीता० नो नशाको प्रथम सिल ते है । हलरा. ना. पु० तरंग, लहर, हिलकोर । asp out - . चिह है। - हरीतील '३८६ मङ्गलकोप। A हलरापना० स• कि बहलाना, सलाना, दि. | हस्तिनापुर० ना. पु. प्राचीनदिसी, बारको लाना। री रानधानी। हलपर्ण ना• पु० व्यनन, सररहित प्रहर। | हस्तिनी. ना. सी. इपिनी, सारा, स्त्री- दलयाहा० गा० पु० जोतहा, किसान। विशेष। वाहल० ना.पु. हलाहल । हस्तिपाल० ना. पु. हाधीमान, पीलवार । हलहलाहट ना. पु० घर वा डासेक्पपी। हस्तिमागधी० ना. सी. गनपीपर । हसहलाना० अ० कि. ज्वरादि से कापना, सहस्ती ना. पु.दायी। कि. हिलाना, पाना हमली. ना. पी. गले के पामी एक ही हलहलिया. ना. पु. विष । गले का हगनाविशेष । हलहली० गा. स्त्री रोग, व्यारि, जूड़ी। हहरना० अ०नि० घराना । हला सी• ना० मदिरा, शराम । हहराना० अ० कि. परन प्रचण्ड का शन्द । इलाह. ना. सी. जीताई। हालय• दुखका सूचक्शन्द। हलायुध० ना. पु. श्रीबलरामजी। हाऊ. ना. पु. पोरतें नालक के डराने को प हलानाहु० ना. सी. नदीविशेष। श्चिममें बोलतीहै, बनविलासे यथा, कहत भानु इलाहला. पु. महाविप । बनहाऊयायो। हलिया० ० पु. बैलोका झुएड । ६० यय. स्वीकारा सूचक शब्द । इलियाना० अ.लि. जीमतताना । हांकना• स्वीपुकार, निकाल, टेर । हली ना० पु. श्रीवलदेवजी, गु.किसान । हांकना० स० कि० किालना, पुगरना, च- हलोरणा० स० कि. बोरगा। लrun इलफ० ना० पु. लालम्मल, यथा सोगधि हांकी ना० स्त्री० पत्र निसपर रोमई बनाते है पातुकहार हसक रक्तस धम्म समर । हांगर. ना. पु. समुद्रकी मदलाविशेष। हल्ला० ना• पु• रोला, हुलह, धाता, यह | हांडना० अ.. शरद पारसी का है। एडी० ना० रत्री० मिट्टोज पारिशेष । हनन ना० पु. होम, अग्नि प्रसिद्धकरना । अ० कि० हफहफाना और हाम। इवि. ना. सी. यशविशेष, खीरयज्ञकी। वि. ना. पु. होमकी सामग्री । हांस. ना. पु. हस, हसी। षिपाठी ना.पु. चीता। हासी ना.स्त्री: हारय । हविष्य. ना. पु० घृत, घासमिलित भात । हाँही व्य• हासही। हवुषा. ना. स्त्री. श्राइवर । हाजालिनी ना. स्त्री. पारोली। हन्य. ना. पु० दवतानों के हेतु भर, इति । हाट० ना. स्त्री० दुकान, प्रयविश्यया साा व्ययाहन ना.पु. अग्नि । चौक, कटरा, पर, पर्ण। हस्त० ना. पु. हाय, तेरहवा नदन सूह। हाटक. ना. पु. सुवर्ण, काय । इस्तकरण ना. पु. रण्ड दानों। हस्ताक्षर ना.पु. हायका लिता, दस्तपत । | हार ना• • जोहार में प्रयविश्य करे। इस्थिघोपा ना. ली. वडीतुरई । हा ना.पु.सी हस्तिदन्तक. ना. पु. मूली, मलातरकारी। हात ना. पु. कर, हल, माशा, दायक हॉफनाः ६ .
मङ्गलकोप। - m हायखंचना श्र०मि. अपसमता म मुह फेरना हारू. १० पु. इवया । या छोड़देना। हाई० ना. पु० स्नेह, छोह, माया । हाथचाटना० स० कि. सादिष्ट भोजन को | हार्य० गु० हरण करने के योग्य, • पु. बहुत प्रसन्नतासे खाना। नहेड़ा। हाथजोड़ना० स० कि० विनती करना, लिपि हाल गु० उतारला, फुताला । याना, दोनों हाथ मिलाना। हालना अ.क्रि. हिला। दाथडालना स० कि. किसी काम में घुसना हाला० ना. श्री. मदिरा, मथ, शराब। वा पैठगा, अपनाना। हालाडोला. मा. पु. हिलार, डगमगाय, हाथपसारना० स. कि. किसी से कुछ भूचाल, भूकम्प हालि ना. सी. पतसार। माग हाथ फेरना० स० कि प्यारकरना, कृपाकरना, हाप० ना० पु. स्त्री लोगाती भारिशप, झावला। फुसलाना। हाथमलमा० . कि० पश्चात्ताप करना, लिहायमाय० गा.पु. पार्ष, खिंचाय, प्रादर लाप करना। भान, क्यान, मान समान, बनावट। हाथमारना० स० वि० वा देना, लूटना, हास्य ना० पु० श्रान दसमय, मुराती एक सद से घायलकरना। अवस्था, हँसी, रसविशेष । हाथां ना. पु. हाथ युदिया गौ का यत्र। हाहा० अन्य. हायहाय, वातवाणी । हाथी ना. पु० गन, मतग । हाहाकार० ना.पु. युद्धमें गौशन्द, बराहट, दाथीपान ना० पु. पीलवान, महारा। दुसयुत, पुकार, शोर। हान० T० स्त्री० टोग, घटी, विगार, हाहाखामा० अ० कि. गिडगिडाना, पिरि. दानि. अधेर । याना। हि० अभ्य हो। छाय. अदुख या शोक का सूचर हायहायक नगद, स्त्री. सास। हिंडोला .पु. पाला, भला, गीतविशेष हायनलगापु० वर्ष। हिंसफ० ना• पु० वधिक गु० हार० पु. मक्ता आदिकी माला, नग, अपकारी, दुर्जन, कोर। वालों का झुण्ड, चरी,चराऊ सैत,नगलामा हिंसा ना० स्त्री० हत्या, वध, मुरारा का हारक ना. पु. निससे हरिये, हरनेहारा । चिदा, अपार, गाली, दुर्जना, मार।। हारजीत ना० पु• जूया, पून हिंन्त्र गु० हिंसा। पारना० अ० कि० परानित होना, अवार्थ हिका ना. सी. वीक, हिची। होग, UTII, स० वि० सा, हारनाना हिन ना० सी० हाँग । ..कुछ वस्तु। हिचरना था कि हटना, दरना, यागा दारमानना सकि निराश हाके लौड़ना, विवाद को मोडा हिचकाना० स० कि. धकांदना, झोका, हारा० धन्य यागद दूसरे शन्द के अत में दवाना। 'आर का का वा वालाग सूना है। हिचकिचाना० . कि. सदेह में होता, धारीता.पु. स्मृतिविशेष। डगमगाना, हकलाना। हिंसाकरे भूना, । 2 पीचा करना। M , स .
A १३५ मङ्गलकोप। हियो । * 1 हिचकिची • रसीदुरिमा, पिता, शका। हिमालय 110 प० पर्यंत शिष, पाखापार । हिडम्य ना• पु. सिलहट से टच देिश, स हिमोपम० ना. ५० कपूर, फार । पसविशेष हिमोपरा० पु. चौला, पापर) हित० ना• पु० प्रेम, मित्रता, माया, उपसर, हिय० ना.पु.६दय । यच्या निमित्त, अर्थ,शारण,लिय, गु. उचित, हिया हियाव गा.पु. सूरमापन, वीरता, बाह। याग्य, मिन, मागारत। हितकार० ना. पु. मित्र, उपकारी, सज्जा । ना• पु. गार भंग बुलाने या रोकने हियोग या शन्द, हृदय। हितकारी मा० पु. मित्र, उपकारी। हितु हिरम्मय० गु.जो सोने से पना, ना.पु. T० पु. मित्र, यार, सहायक । हित हिरण्यमय एमझा। हितैपी० पु. मियारा की इछा निमुद | हिरण्य० ना•• काम, सुपर्ण, नाखण्डपी होने, हितकारी। में गएर का नाम । हितोपदेश० ना. पु• येग्य वा उचित उपदेश, हिरण्यवाह• • पु• सोनभद्र नदी 1, नीतिमा एक प्रयविशेष। हिरण्याक्ष ना. पु. प्रसाद का चचा। हिनहिनाना था रि० पुकारना घाईचा.. हिरद० ० पु. हृदय । हिनौती ना० स्त्री. विनती, प्राधीनता । हिरन ना. पु० हरिण, मृग। हिन्ताल० ना. पु. खजूरपिशेष । हिरनोटा० ना. पु. हरिणका गया । हिन्दी ना• सी. हिंदुस्तान की बाली वा हिराना० रा. वि• खोना, रखकर भूलनाना, यतर। अ.क्रि. सोनाता, गुमहोता। दिन्दू० ना० पृ० लाग जो वेदादि शास्त्रानुसार हिकी ना• स्त्री• धाई, माली। चलते हैं, चातुर्वर्यलोग। | दिलकना० अ० मि. ऐंठगा, मोहना। हिन्दूस्थान० ना० पु. देश विशेष जो उत्तर दिलकोर० गा• वीर हिलाय, लहुरा, । ६ अश से पैतीस ग्रहाशता और पूर्व पश्चिम लिोर । में ६७ प्रज्ञाश स १३ तक पेला है, हिरवीरना० स• •ि लहराना, हिलाना, भरतसएड। अ.नि. हिलना, पाहा।। हिम० ना० पु. पखा, ति, तुपार, ऋतु हिलकोरा • पु. लहर, तरह। विशेप। हिलगना ० कि० ल'कना, उलझा, चिप- हिमउपल' ना• ० ग्रोला, पयर, रमियणे पना, थाना। यथा, निमि हिम उपल कृषीदलि गरहीं, पर य | दिलगाना० स० मि. लटकाना, उलझाना, पाग लगि तनु परिहरहीं। चिपाना, अमाना। हिमकर०ा पु० च द्रमा, कपूर । .. हिलना .नि. ढालना, टलना। हिमरोमा ना. पु. चन्द्रमा विधु, चाद। हिजमिल अव्य मिलकर । हिमांशु हिलमिवजाना श्र.नि. मिक्षित होना, हिमाचल मिलाजुला रहना। हिमाचल ; पु० हिमालय पर्वत । दिलमे चिका. ना. पु. शापविशेष । हिमाद्वय ना. पु. कपूर, कई कार । हिलसा स्त्री मबलीविशेष । -- L १ । . . . . " मङ्गलकोप : करना। . "1 करना। हृदय। हिला० गु० पाला पोसवा ... होबना स्त्री चहला, कीचड़ । हिलाना०स० कि. -डोलाना, अपने वश में । होला • कारना..पुपुकार, डरवाने के लिये हिलोरना प्र. क्रि लहराना । हुंकारा, इ,शब्दका पुकारना । दिलोरा ना० पु० तरंग, लहर। .: हुड़दंगा० गु. दंगैत । हिलोरामारना कि लहर मारना ! : हुड़दंगी० ना० स्त्री० दंगा दंगेत । हिश्त० अव्य युपेचप, दुत। हुडहुड़ाना० य० कि० टकोरना। हिसका ना० पु., उतराइट, अनुकार, रिस, हुहुही ना० सी० टयोर। हुडंक ना पु० वाजाविशेष हिसकाहिसकी ना० सी० परस्पर. दिसका ९डवी० ना० सी० हुंडी। हुंडामाडा गा. पु० किराया। हिसाय० ना० पु. गणित, लेखा, यह शब्द य. हुंडार० ना पु० मेडियाविशेष । रबीका भाग में अतिप्रचलित है 11.17 हुंडविन ना० पु. हुण्डीका पट्टा । ही० अव्य० निश्चय करनेका बोधक, ना०-पु. हुंदी० ना सी जिसपर्व में प्रदेश से रुपया लिखावे उसका नाम । ही० श्रव्य निश्चय करने का बोधक हुंडीयाव० ना• पु० साहूकार, जो हुण्डीलिसे हींग० ना. स्त्री. औषधविशेष । हुत गु० जो होम कियागया।... हींगहगना था कि इच्छारहित हगना और हुतना० स० कि. होमकरना, होममें जलानां दुःख भोगना। हुतभु }ना• पु० अग्नि । दीसना० अ० कि.हिनहिनाना । हुताशन इति० अन्यपलटे, वदले, औरसै । . . . हीक ना स्त्री० उबकाई, मतलाई, घृणा, ढकलं, दुर्गन्धि । हुतो० पु.मि. हुया, अव्य० थी, था, रहै हीजड़ाना पुहिजड़ा। हुतो० पु. हीन० गु० रहित, विना, छोग, नीच । हुमकना • कि कृदना, मारने के रीमे हीनजाति ना स्त्री० नीचजाति । हीनता० ना० सी० न्यूनता, घटी। हुमे० कि० जलाये। हीननिमेष ना० पु. एकटक । हुरगुंडा० ना० पु• तरकारीविशेष दीना० गुनीचा, छोटा, नीच हुरमई० ना. सी नृत्यभेद। हीरना पु. रांझा, शार, गूदा, गु० चौखा ना. पु० पौधाविशेष हीरका ना० पु. होरा। हुरहुरा हीरशुक्तिका नास्त्री० काकोली। हुरुकनी ना. सी. कननी, वेश्या। हो ना. पु० रनविरोप, कम्भारी हुर्रा० ना. पु. फूट, फर्ट, सिपा हीरामन ना० पु तोताविशेष, छोटासपे- हुर्साः नापृ. चन्दन पिसनेश पारा विशेष जो पाटासा होती है। हीरावल ना० पुकम्पल जो योगी यो- हुलकारना सा कि हीरायलिए दो है। थ. हुती स्त्री० हुकारना। . ST लड़ाना।
. . . ३६० मङ्गलकोप। हुक्षसना० ५० किनिदित होता, मुदित इटा० गु० घाउसी, नीच, दरपोकना। होगा। देटापन० ना. पु. नपुंसकता, नीचता, शिपाई। हुलसाना० स० दि. रिझाना, प्रसपकरना। इतना.पु. अर्थकारण, परप, प्रयोजन, हेतु निमित्त, नीति, म । हुलास ना.पु. संपनी, भाद, पिलास । देतिक अन्य. हानि । दुलह ना० पु. रौला, बसेड़ा। हेम. ना. पु० वर्ष, पचा, सोना। है. चव्य. हा, भी, हो । हेमनिधि ना. पु. पारा, सर्वकी सानि । इफ० ना. सी. शन्द विशेष । ईकरना० स० कि. क्रोध रो वा भय से या झाड़ ऐमन्त० ना. ५० ऋरिशेष, जिसमें भगदन चौर पीरमास गिनानाता है। फूक से हू शब्द बोलना। टूठ० ना. पु० सादेतीन ३॥। हेमपुष्पा हमपुष्पिका ना• रसी० पम्पादछ। हठा० ना.पु. सादतीन का पहाड़ा । इहां ना• पु• धूमधाम, गोलमोल उत्तरदेना। हेमला ना. स्त्री० सोडती । हूक ना०सी० पीड़ा, टसक, झटक । | हेमवती ना. स्त्री० दर, हड़ । हूचना० स० लि. पकना, भूलना। हेममता० ना. स्त्री० रच औषध । इठना० स० वि० धका देना। हमाचल ना.पु. मेरु पर्वत। | हेमाद्रि० हेरना० स० कि. निरेखा, देखना, हण 1. पु. कठार मनुष्य । रंगेदना खदेड़ना। इन० ना.पु. मदरानी, मुद्राविशेष । | रम्य ना.पु. श्रीगणेशनी। इल० ना. सी. भोंक, सोचा। हेरी ना स्त्री. रागिनीविशेष, जो अहीरगाते हैं । हलना० स० कि. भोरना, खोंसना। हेलना० स्त्री. नौझ, भार, टोकरामरगार। हा ना. पु० पर्चा, आधी, धूमधाम, यमयाम । हेलना० अ० कि. पैरना, निरना, स• कि. हृदय ना० पु. वन स्थल, घावी, यात करण, धम्टेना, इयाना। हेला. ना. सी. अवज्ञा, प्रवाह, रेला, नीडा हदयनिकेत. ना. पु. कामदेव । संगा, सहन। हपीक ना० पु. इन्द्रिया। हेलमारना० स० कि. ढकेलना, टेल।। हपोफेश. ना. पु• इद्रियपति पेशेप, भी हैराज ना० पु. इसहय, सदसबाहु । हेका पु• हय । कृष्णच द्रा एक नाम । हो० व्या सम्बोधन का चिह। दृष्ट गु• इपित, प्रसन्न । होनाना० ग्र.नि. होकर पाना । हेयर सम्मानका सूचक, यथा हे भगवन, होकना० . वि. दामना । हे नारायण होठ० ना. पु. योष्ठ, सन। हंगा० ना. पु. सरावा, परेला, देगा। होठा ना० वी लगाम, दहाना। हेठ० अपनीचे स्त्री० फाच जो गुदा में निक हो. अन्य धारा से । कती है। होचुरगा ग.नि. सम्पूर्ण होना, निपटना । हड़ हाडी ना० स्त्री संचासेंची। मन।
मङ्गलकोप। इति०, २० लग्नित, शरमायाहुना। . M r ६ . - ० . होजाना य. कि. होना, पढ़ना । इस्व. गु० यदीर्घ, मोटा, एक मात्रिकाहर। होठ. ना. पु. होंठ। इस्चमूल ना 'पु. ऊस, गमा, गति होइ० ना० सी० प्रणा, वचन, दाब, शर्त । इदिनी ना. सी. नदी। होइल. ना. पु. अभ्रक, पररक। ही० ना. स्त्री. लग्ना. दया । होडाचक्र ना. पु० निसके द्वारा ज्योतिषी लोग राशि विचारते है। होत. ना. स्त्री. यश, शप्ति । है.क्रि. होकर। होत ना• पु. बदा, पारधी। हैहै कि होगा। दोतव्य ना• पु. भवितव्य, रोनहार ।' [] होतष्यता ना.मी. भवितव्यता, होनहार। क्षई० ना. स्त्री क्षयरोग निसमें फफ और रक्त होता. ना. पु. होमकरनहा।।। मुखस गिरता है और खासी भी पाती है। होते. अन्य रहते, में। क्षण मा० पु०स कपास एकसम होताहै, होतेहोते. अव्य क्रम कम से थोड़ीदेर, तिल । होत ना• पु. पूजन, हुतन । क्षणक.ना.पु. पण, राल । होत्री० गु० पूनक । क्षणप्रति० अव्य. वारवार। । होनहार० ना. गु० जो होसके, सम्भव । क्षषरुवि० ना. सी. विनली, कौंधा । क्षणिक गु० अस्थिर, सत्यानाशी । होना • मि. रहना, राना, जो कुछहोगा। क्षणेकर अन्य. थोडेकाल में 1. होम. ना. पु. अग्यारी, घृतादि अग्नि में क्षत. ना. पु. पोहा, घाव । होम ।। क्षतज.ना.पु. रुधिर, लोह, रक्त । होमना० स.वि. होमका यज्ञरना, जलाता। क्षति० ना• स्त्रा• हानि, घटी। होला० ना• पु. नाविष, बूर, मनीपली । सम० ना. पु• सुकुट, ताज, छाता, सतुरी, होलाएकना-पु. होला का समय । 5 पत्रियवश । होबिका ना. सी. ली। क्षनका ना.. भुफाहा, मिस वरमृत्ता हालिहा० गा.पु. होली वसनहार । होली • स्त्री. पाल्यापी पूर्णमासी का समधारी ना. पु. राना, नुपति, महीपति ।' उत्सर। सधयाधु० ना० पु.मा सवियों में नाचहा। होमा. ना. पु० हाऊ, हौवा।। क्षत्रिय: ना.पु. दितीयवर्ण, लिरनी। छानि., सर्प में, इम । क्षपा० ना.बी. रात। Electioye लोभ, लालच, वायुसमैदानी क्षपान } ना.पु.पद्रमा । हौले. व्य. ध धारे। क्षम ना.पु. योग्यता, गु• समर्प, योग्य। होलहौले धन्य० रथारे । क्षमता ना. सी. योग्यता। होया. ना. पु. भोम्स, मा। क्षमना स.शि. घमारना, छोड़ना। इदा.. मिशासीदा, वानसाराम, राजार, क्षमा दी. मोरा, मल, मोचा, तसी, भील, प्रगपता। . कहत हैं। रा, परती।
ka ३६० मङ्गलकोप। 1 L - हडाही ना. रत्री खेचाखेची । हुषसना० अ० कि. मौनन्दित होगा, मुदित इटा० ४० घालुनी, नीप, दरपोकना होना । ठापन० ना० पु. नपुसकता, नाचता, निचाई। हुलसाना० स० वि. रिझाना, प्रसगपरना। देत०१ ना. पु. अर्थ,शारण, प्रकरण, प्रपोजन, हेतु निमित्त, प्रतिम हुमास ना.पु. संपनी, पाादा विखास । देति० चन्य. हा इति । फुलह ना० पु. रौला, बरोका। हेम० ना.पु. सर्प, पचर, सोा है. चव्य.हा, भी, हो। हेमनिधि ना. पु. पारा, सर्पकी सानि । दफ० ना. सी० शब्द विशेष । हैकरना० स० कि. बोध से या भय से या झाइ हेमन्त० गा• पु० ऋतुनिरोप, जिसमें चगहन चौर पीपमाग मिनानाता है। फूक से ह शब्द बोलना। {ठ० ना० पु० सादेवीन ३॥। हमपुष्पिका० ना. स्वा० पम्पावृत। इंटा० ना० पु. सादतीन का पहाड़ा । हंहां० ना• पु. धूमधाम, गोलमोल उत्तरदेना । ऐमला ना० स्त्री. सोनवती।' हक० ना० स्त्री० पीडा, टसक, झटक । हेमवती ना. स्त्री. हर, हम । इचना० स० कि. पूकना, भूलना। हमवता० ना० रथी बच पोषध । इठना० स० कि० धका देना। हेमादिक ना.पु. सुमेरु पर्वत। हेरना० स० दि० निरेखना, देखना, दना, हण ना. पु. कटौर मनुष्य । रंगेदना, खदेडना । हन० ना.पु. मदरानी, मृद्राविशेष । दरम्ब० ना. पु. श्रीगणेशनी। इल . स्त्री० भोक, खोंचा। हरी ना.रती• रागिनीविशेष, जो अहीरगातेहैं। लना० स० कि. मोक्ना, सोसना। हेल ना. स्त्री. नोझ, भार, टोरामरगोर । हा ना० पु० 'वर्चा, पापी, धूमधाम, टीमयाम । हेलना० अ० कि. पैरना तिरना, स• कि. हृदय ना० पु. वह स्थल, घानी, अत करण, धम देना, इटाना। हेला. ना. सी. अवज्ञा, प्रवाह, रेला, जीता। हदयनिकेत. ना. पु. कामदेव । संगा, सहन । हपीक ना० पु. इद्रिया। | हेलमारना० स० वि दरेलना, टेलना। एपीकेश० ना. पु. इंद्रियपति पेशेप, श्री देहराज० ना० पु. इयय, सदसराहु । हैक० ना. पु. च्य। कृष्णचद्रका एक नाम। दृष्पगु.रपितप्रसन्न हो. व्य. सम्बोधन का चिह। होनाना० घ.मि. होकर पाना । हेयर सम्बोधनका सूचक, यथा हे भगवन्, होकना. नि. दामना । हे नारायण होट ना• पु. ओठ, लन्। हंगा० ना. पु. सरावा, परेला, रंगा। होठा ना. सी० लगाम, दहाना । ठ० चपनीचे स्त्री काच जो गुदा में निकोल अन्य द्वारा से । सती है। होचुर नाग० कि. सम्पूर्ण होना, पटना । मन। - . .
-: . . क्षत्रक० ना० पु. भुईगाडा, जिसे पुकरमुत्ता.. होली०.ना. स्त्री. फाल्गुन की, पूर्णमासी का क्षत्रधारी० ना. पु• राना नृपति, महीपतिः | क्षत्रवन्धु० ना० पु. जो हतियों में नारदो। क्षम मा.पु. 'योग्यता, गु० समर्थ, योग्य। | क्षमना स.लि. आमाकरना, घोड़ना। हद ना०३० विनाखोदा, बड़ामलाशय, तालाब, जमाना स्त्री मोत, मुक्ति मोचन, अलमी मङ्गलकोप। होजाना०प० कि. होना, पदना। इस्य गुरु पदार्थ, छोय, एक मात्रिका होठ. ना. पु. होट। हस्वमूल ना• 'पु. उरस, गमा, गांग. होड़ ना० सी० प्रणं, वचन, दान, शर्त :इदिनी गा. सी. नदी। होहल० ना• पु० यमक, घरक। ही ना. स्त्री सना, हया । छोडाचक्र० ना. पु० निसके द्वारा ज्योतिषी लोग हीशः } गु० ललित, शरमायाहुना। “राशि विचारते हैं। होत ना.सी. पश, शक्ति । है० कि. होकर । "होत ना. पु. बदा, पारधी । है किक होगा। दोतव्य ना• पु. भवितन्य, होनहार । होतव्यता ना. मी. भवितव्यता, होनहार क्षई० ना. श्री एयरोग निसमें फफ और र होता. ना..पु. होमकरनेहाए ! मुखसे गिरता है और सांसी भी आती है। होते. व्य. रहते, में। क्षण ना• 'पु. तीत कसाका एकरण होताहै, होतेहोते. अव्य• कम क्रम से थोड़ीदेर, तिल । होत्र. ना. पु. पूजन, इतन। क्षणकर ना• पु० सण, राल। होत्री० गु. पूजक । क्षणप्रति श्रव्य. वारंवार । होनहार० ना. गु. जो होसके, सम्भव । क्षएरुचि० ना० स्त्री० निजली, काँधा होना अ. कि० रहना, नना, जो कुछहोगा। क्षणिक गु० अस्थिर; सत्यानाशी क्षणैक अव्य. थोडेकाल में होम नाः पु• अग्यारी, घृतादि अग्नि में क्षित ना• पु. फोड़ा, घाव। - होमना। क्षतज० ना• पु. रुधिर, लोह, रक्त। 'होमना० स० कि. होमका यज्ञकरना, जलाना। क्षति० ना. स्त्री हानि, घटी। होला० ना• पु. नावविह्या, यूट, भूनीफली। क्षत्र ना० पु. मुफुर, तान, धाता, छतुरी, होलाष्टक. ना. पु. होली का समय । क्षत्रियवंश। होलिका० ना. सी. होली। होलिहा. ना. पु. होली खेलनेहारे । कहते हैं।' होआ ना, पु. हाऊ, हौवा । । क्षत्रिय ना• द्वितीपवर्ण, खिरनी । है। कि- ई, सर्व • मैं, हम- क्षपा० ना.ली. रात। होस ना० स्त्री० इच्छा, चाह । 1 क्षवाकर :पु० चन्द्रमा । होका० ना.पु. लोम, लालच, वायुसमेतमी क्षपानाथ हौले० थव्य धीमें धारे। :- होलेहीले अन्य० धीरेधीरे । क्षमता ना स्त्री योग्यता होया. ना. पु. भोरुस, भुतना । 1 उत्सव। . ना. 4 ..झील, अगाधता। दया, धरती।
३६० मङ्गलकोप। हुयसना० अ० कि. नादित दोष, प्रदित देटा० ४० घासी, १५, दरपोकना। होना। देठापन० ना. पु. पुमुना, नीचता, निधाई । हुलसाना० स० दि. रिझाना, प्रसमा । हेत. ना. पु. वर्ष,कारण, प्रफरण, प्रयोगन, हुलास ना.पु. सुंपनी, माद, विसास । हेतु निमित्त, प्रीति, प्रेम। हुल९० ना० पु. रौला, रसड़ा। देति० घन्य. हा इनि। है. व्य. हा, मी, हा। हेम. ना. पु० वर्ण, पचा, सोना। एक० ना. सी. शम्द रिशेष। हेमनिधि ना. पु. पारा, सर्पकी सादि। करना० स० कि. मोध से या भय से पा झार मन्त० ना. पु. अधिशेष, जिसमें धगदन फूक से हू शम्द बोलना। चौर पौषमास गिनानाता है। बैठ० ना.पु. सादेनीन ३॥ । हठा०० पु. सादतीन का पहाड़ा। हहां० ना• पु• धूमधाम, गालमोल उत्तरदना। हेमलदाना स्त्री. सोनहतो।। एक नावी० पीड़ा, टसर, मरक। हेमवती ना. स्त्री० दरं, हह । हूचना० स. नि. पूकना, भूलना। हेमवता० ना० सी० रच औषध । हठना० स.नि. धका देना। हमाचल --- इमपुष्पिका० ना. पीएम्पाव। हाही ना० स्त्री संचालैंची हेमादि० ना• पु• गुमेर पर्वत । मन। हरना० स० कि. निरेखा, देखना, दूदना, कृपा० ना.पु. कटार मनुष्य । रंगेदना सदेना। एन० ना. पु. मदरानी, मुद्राविशेष । दरम्य ना. पु. श्रीगणेशनी। इल. ना. स्त्री. भोक, खोंचा। हरी ना स्त्री. रागिनीविशेष, जो ग्रहोरगातेहैं। हलना० स० कि. भोकना, खोसना । हेल ना. स्त्री० नोझ, मार, टोपरामरगावर । इहा० ना० पु० पर्चा, आधी, धूमधाम, टीमयाम । | हेलना० अ० नि. पैरना तिरना, स० कि. हृदय ना० पु. वत स्थल, छाती, पन करप, घटेना, इयना। हेला. ना. श्री. प्राज्ञा, प्रवाह, रेला, मीता हृदयनिकेत. ना. पु. कामदव । सैगा, सहन। हपीक. ना. पु. इन्द्रिया। हेलमारना० स० कि. ढकेलना, ठेला । हैक • पु• दय। पोकेश. ना. पु. इंद्रियपति शेर, श्री राज. ना. पु. यहय, सहसबाहु । कृष्णच द्रका एक नाम। हो. व्य. सम्बाधन का चिहा ए० गु• हात, प्रसन्न । होनाना. कि. होकर पाना । हे अन्य सम्मानका सूचक, या हे भगवन, होकना. म. विदामना । हे नारायण होठ. ना. पु. पाठ, लन् । हंगा ना.पु. सरावा, परेला, ईंगा। होठा ना. सी. लपाम, दहाना । 3. अपनीचे स्त्री काच जो गुदा में निको भव्य द्वारा, से। होचुवमा १० मि. सम्पूर्ण होना, पिना। . .
मङ्गलकोप। ३६१. * A है ६ . । होजाना०प० कि. होना, पढ़ना । इस्व गु० पदीर्घ, योग, एक भाविकार।" होठ. ना. पु. होंठ। इस्वमूल ना० पु. ऊस, गा, गांड़ा। होड़. ना. स्त्री० प्रय, वचन, दास, शर्त । इदिनी ना. श्री. नदी। होइल. ना. पु० यमक, पपरक । ही ना. सी. लग्ना, हया । होडाचक्र. ना. पु० जिसके द्वारा ज्योतिषी लोग हीण हीत. गु० लग्निता शरमायाहा। राशि विचारते है। है० कि. हाकर । होत. ना. स्त्री. पश, शप्ति । हैहै. किव होगा। होतव. ना.पु. बदा, पारधी । होतष्य ना• पु०,भवितव्य, होनहार ।। [] होतध्यता० ना. सीभवितव्यता, होनहार । क्षई० ना. श्री सयरोग जिसमें कफ और रत होता. ना. पु. होमकरनहाय।। मुखसे गिरता है और सासी भी पाती है। होते अव्य रहते, में। क्षण ना० पु०स पयाका एक्शय होताहै, होतेहोते. अध्य• क्रम मम से थोड़ोदेर, तिल । होत्र. ना. पु. पूजन, हुतन । क्षणका ना.पु. सण, राल । होत्री० गु. पूनर । क्षणप्रति० अव्य• वारवार । होनहार० ना. गु. जो होसरे, सम्भर । क्षणचि० ० स्त्री पिनली, कौंधा । होगा० प्र. वि. रहना, दाना, जो कुछहोगा। क्षणिक गु० अस्थिर, सत्यानाशी । क्षणैक अय. थोडेकाख में।. होम ना? पुअग्यारी, घृतादि पग्नि में क्षत ना• पु० पोहा, पार। क्षतज. ना.पु० रुधिर, लोह, रत्त । होमना० स.शि. होमरा यज्ञारना, जलाना। क्षति० ता. स्त्रा• दानि, पटी। होला० गा• पु. नावविधा, पू, भूनीली । होलाएक. ना. पु. होली का समय । क्षय नापु. मुकुर, तान, छाता, धतुरी, परियवश । दोबिका. ना. सी. होली। क्षत्रकर ना• • मुशाहा, निसे कुकुरमुत्ता।। छोलिहा. ना. पु. होली खलनहारे। होली० . स्त्री. पाल्या की पूर्णमासी या क्षत्रधारी. ना. पु. राना, नपति, महीपति । उत्सव। क्षत्रपन्धु० ना० पु. मा पनियों में नाचहो । होया. ना.पु. हाऊ, हौवा । क्षत्रियः ना. पु. द्वितीयवर्ण, खिरनी।। ह० कि .. मैं रम। क्षपा० ना. श्री. रात। होस ना. रा. ग्या, चार। क्षपाकर० होका ना.पु. लोम, सालच, वायुम तम् । ना.पु.पद्रमा। क्षपानाथ होले० अन्य धीमें धीरे। क्षम ना. पु. योग्यता, गु० समर्थ, योग्य ।। होलहोले अन्य स्थीरे। क्षमतामा स्वी. योग्यता। होचा ना. पु. भोम्स, भुव क्षमना स.वि. समारना, छोड़ना। इद • गिरोदर, नानलाशय, तालाव, मा० ना स्त्री. मोर, मुक्ति, मोचा, अलसी, दरा, धरता। होमगा। - ( ल, गमापना।
२६२. मङ्गलकोप । प . . 11 f क्षमापन. ना. आमा परनका स्वभाव । सुद्रजम्बू० ना० पु. जामन, फलंद ।। , क्षमायोग्य गु. नो शमा के योग्य होते। क्षुद्रतन्दुला ना स्त्री० रिइंग। क्षमियः क्रि• हमारीजिये। . शुदता ना. सी० नीचता, नीचपन । क्षमित गु० समा कियागया। शुद्रपनसना• पु. पहल । क्षय ना. पु. इयरोग, विनाश, प्रलय । सुद्रफला ना० श्री इन्द्रवारणी, जामन। सयमास. ना• पु. निस चाद्रमास में सूर्यका क्षुद्रया, ना. सी. तालपुनर्नवा, धाई दो राशि में सचारहो। बरसात। क्षयरोग ना• पु: सूखा, शोष, गयी। क्षर० ना.पु. भारी, स्थूल.।। ना. खा. छोरी कराई। सुद्री क्षान्त ना• पु• सन्तोमो, धैर्यवान् । सुधा ना. श्री. भूत। क्षान्ति. ना. स्त्री. सतीष, धीरज । सुधा क्षार० ना.पु. सार, रास, भरम, धूलि । सुधावन्तः गु• भूखा, बहुत भूसा। क्षारपत्र० ना.पु. मधुघा, भाजीविशेष । सुधित० गु• भूसा। सारश्रेष्ठ ना. पु• दासवृक्ष । सुर० ना.पु. दुरा, उस्तरा, मूज क्षारी ना.पु. भीमहादेवनी। सुरक० ना.पु. गोखुरू, तिलकवृत । क्षिणवत नापु. मेदासिंगी। सुल्लक. ना. पु. कौड़ी। क्षिति. ना. सी. पृमी, धरती । क्षेत्र ना• पु. भूमिपुण्य, सेव, तीर्थ शरीर । क्षितिज ना. पु. भौमासर, मगल । क्षेत्रज. ना. पु. जो क्षेत्रमें उत्पभयो । क्षितिनाथ क्षेत्रक्ष ना.पु. यात्मा, जीव, गु: किसान क्षितिपाल ना. पु• राना, महीपति। मापक। क्षितिमएडन ना. पु. प्रसा।। क्षेत्रफल ना• पु. ता फल, अर्थात् नि: क्षितीश. गा.पु. राना, गहीश । गहटी। ' क्षिप गु. शोम, उतावल । क्षितीव. ना. पु. किसान, खेतीपाला । क्षीण गु. दुषला, पतला, ना. पु. प्रमेहरोपसम ना. स्त्री• कुशल ।' शीर० ना.पु. दूध, वीर, पानी, खारीलोन । क्षेमकरी० ना. सी० पीविशेष । क्षीरगन्धा ना. रथी-विदारीकन्द । क्षेमकुशल ना स्त्री- पारोग्य, मलाई कल्याण, क्षीरदा ना.पु. मेघ, गाय । इरालना, खैरयायत । क्षीरपना ना. सी. जामन, प्लेद। क्षोणिज. ना. पु. दिनिन, मालादि । सीरवृक्ष • पु. पौर, दलवृक्ष । क्षोणिप. ना. पु. राना, महापति' क्षीराना स्त्री सरसा। क्षोणिदेव ना.पु. मामण । शारिणी नाही. दुदी, ही। .. क्षोणी ना. पी. चिति, पृथ्वी, धरनी। शोरी ना. पु. वरारोचन,तिरनी, साग, पक्षोम. ना. पु. दोर, मात्र, सभार, अपि क्षीरोदना.पु. समुद्रीरोष । सुम्पिासा ना. सी. भरत, पारा । शुद मु. मा. नीच, इता, ना. गु०ौर नापु० पुएटन, नाई का काम। नादिकनी पाया। शारक गाः पु. दुरावा नाई 1 +M. ३ 1 + 1 C . * चोदना. पु. मधु, शहद ।
मङ्गलकोप।
३६३
३
.
क्ष्मा० . स्त्री पृथ्वी, धरती, भूमि । होता है।
आमापति ना• पुर राना, भूपाल । | शानत ० ना.पु. समझ, टीस्युद्धि।
[]
ज्ञानवान्०१ गु• बुद्धिमान, पण्डित, समझ.
शा०अयः शब्दातम वर्ता या पारक का चिह, शानी
यथा, धर्मश, कृतज्ञ।
शापक० गु० जाननेहारा ।
शाता गु० जाननेहारा, शास्रवक्ता ।
शाति० ना. स्त्री. पिता, असपिएड, वर्णजाति। शेय० गुः जो जानो के योग्य ।
ज्ञापन० ना.पु. जताता।
शान ना. पु० समझ, बुद्धि, व्यक्त और धर्मका या नास्त्री० मदा।
यद्धि गिसकसे प्रात्मा श्रापागमन से रहित
दो । श्रीपरमामा जगतगुरु कृपाखानिविभु एफ् । जासुदयापूरणभयो मङ्गलकोष पिक १ ॥
विविधदेशभापामिलित भाषामा पनिमाहि । यथासरकृतफारसी आदिक्पदश्रवगाहि २ ॥
अर्थलिखेनिनबुद्धिसम पिपुलप्रथमतधारि । कोषकारीमूदता तनिधपदेविचारि ३ ॥
शब्द समूह समुद्रवत नोका कोषप्रमाए । पारनाहिचदिनालबुषि विनस देहसुनार ४ ॥
वर्षातु गुरु रेवती भाद्रग्रसिततिषियारि । ग्रहचपनामहिंसहितशुभसवतविकमधरि ५ ॥
पोष भयो पूरण तरै पैतेपुर शुचि ठाम । योभार सान दलिख कापसमझलनाम ६ ॥
जोगुणगाहक सुजनजन विद्याशील प्रवीन । ते लखि कोष सराहिहैं हसिह युद्धिमलीन ७ ॥
इति ।।