Acharya Shri Vinaychandra Gyan Bhandar, Jaipur

Vasturatnakosa

Muni, Jinvijay · 2011/08

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Front matter

Rajasthāna Puratana Granthamalā
Published by the Government of Rajasthan
A series devoted to the Publication of Sanskrit, Prakrit, Apabbremsba,
Old Rajasthani-Gujarati and Old Hindi works pertaining to India
in general and Rajasthan in particular
GENERAL EDITOR
Acharya JINA VIJAYA MUNI, Puratattvacharya
Honorary Director, Rajasthan Oriental Research Institute.
(Honorary Member or the German Oriental Society (Germany);
Bhandarkar Oriental Research Institute, Poona; Gujarat Sahitya
Sabha, Ahmedabad; and Vishveshvaranand Valdic Research
Institute, Hosiyarpur, Punjab.)
No. 45
VASTURATNAKOSA
(A short samskrit treatise containing one hundred and one topics
of the general culture).
EDITED BY
+
Prof. Dr. PRIYA BALA SHAH
M. A., Ph. D. (Bombay), D. Litt. (Paris)
(Head of the Department of Ancient Indian Culture,
Ramanand Arts College, Ahmedabad)
PUBLISHED BY
THE DIRECTOR
RAJASTHAN ORIENTAL RESEARCH INSTITUTE
JODHPUR (RAJASTHAN)

वस्तु रत्न कोश
(नानावस्तुप्रतिपादक - एकोत्तरशतसंख्यासमुच्चयात्मक)
बहुसंख्यक प्राचीन-आदर्शोपलब्ध-विविधपाठमेदादिसमन्वित
शब्दानुक्रमादियुक्त प्रथमवार प्रकाशित ।
सम्पादिका
डॉ.प्रियवाला शाह
एम्. ए. पीएच्. डी. (बम्बई), डि. लि. (पेरिस)
(प्राध्यापिका, रामानन्द आदर कॉलेज, अहमदाबाद)
*
प्रकाशक
राजस्थान-राज्याज्ञानुसार
संचालक, राजस्थान प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान
(Rajasthan Oriental Research Institute, Jodhpur)
जोधपुर (राजस्थान)
*
वि. सं. २०१५
-प्रथमावृत्ति
राजकीयनियमानुसार सर्वाधिकार सुरक्षित ४)
[इ.स.१९५९

-प्रकाशक - संचालक, राजस्थान प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान, जोधपुर के आदेशानुसार, गोपाल नारायण बोहरा. लक्ष्मीबाई नारायण चौधरी, निर्णयसागर प्रेस, २६-२८, कोलभाट स्ट्रीट, बम्बई, नं. २.

। । । ८ ८ ४४ ८ 6 चत्वारः पुरुषार्थाः . ८ . ''8 सप्ताङ्गं राज्यम् 9 षण्णवती राजगुणाः F- CONTENTS: 1 FIT de Pages Pages Introduction i to ? 32 चत्वारो नायकाः Text 33 द्वात्रिंशद्गुणयुतो नायकः 1 त्रीणि भुवनानि 34 त्रिविधा महानायिकाः 35 मष्टौ नायिकाः ४२ 2 त्रिविध लोकसंस्थानम् 3 त्रिविधा भूमिः 36 द्वात्रिंशन्नायिकानां गुणाः 4 विविधाः पुरुषाः 37 निविधं सौख्यम् ४३ 5 त्रयः पदार्थाः 38 चत्वारि सौख्य कारणानि 39 नवविधो गन्धोपयोयः 7 पत्रिंशद् राजवंशाः 40 दशविधं शौचम् । 41 द्विविधः कामः ४५ १० 42 दश कामावस्थाः 48 विंशती रक्तस्त्रीणां लक्षणानि 10 पट्त्रिंशद् राजपात्राणि 44 एकविंशविर्विरक्तस्त्रीणां लक्षणानि, 11 पनिशद् राजविनोदाः १५ 45 द्वाविंशतिः कामिनीनां विकारेषितानि ४८ 12 अष्टादशाविधं आस्थानम् 46 चतुर्विशतिरसतीनो लक्षणानि 13 चतस्रो राजविद्या. 14 चतस्रो राजनीतयः 47 षोडश दुष्टस्त्रीणां लक्षगानि 48 अष्टौ स्त्रीणामविश्वासकारणानि 15 पत्रिंशद् भायुधानि ।। 49 अष्टौ नार्योऽगम्याः 16 सप्तविंशतिः शास्त्राणि : 50 अष्टविधो मूर्खः ५२ 17 द्विपञ्चाशत् तत्त्वानि 51 चतुर्विंशतिविधं नागरिकवर्णनम् ५३ 18 द्विसप्ततिः कलाः २१ 52 निविध रूपम् 19 चतुरशीतिर्विज्ञानानि 53 त्रिविध स्वरूपम् 20 चतुरशीतिर्देशाः 54 द्वादशविधः प्रमदोपचारः 21 द्वात्रिंशल्लक्षणस्थानानि 55 पञ्चविधः परिचयः 22 चतुर्विशतिविधं गृहम् ३१ 56 दश पुरुषाः स्त्रीणामनिटा भवन्ति 23 अष्टोत्तरशतं मालानि 57 दशभिः कारणैः नियो विरज्यन्ते ५७ 58 विभिः कारणेः कामिन्यः संवष्यन्ते 25 पञ्चविधं यश. 59 सप्तविधाः कामुकाना सरतारम्भाः ५८ 26 सप्तविधा कीर्तिः 60 अष्टविधं विदग्धाना मुरतम् 61 नवविध मुरतावसानम् 28 एशेनपञ्चाशद् भावाः 62 नव शयनगुणाः 29 चत्वारोऽभिनया 63 दशविधः पार्थिवानो प्रमोदः 64 चतुर्विधः प्रबोधः 31 चरवारो महानायकाः 65 चतुर्विधा मुद्धिः 24 त्रिविधं दानम् 27 नव रसाः ३८ 30 चतशी वृत्तय. . ४.

Pages ६२ 66 अष्टौ पुद्धिगुणाः 67 चतुर्विध गान्धर्वम् 68 त्रिविधं गीतम् 69 पत्रिंशद् गीतगुणाः 70 चतुर्विघे वाद्यम् 71 द्विविधं( द्विप्रकार) नृत्यम् 72 षोडशविध काव्यम् 73 दशविध वक्तृत्वम् 74 पइविध भाषालक्षणम् 75 पञ्चविधं पाण्डित्यम् 76 चतुर्विशतिविध वादलक्षणम् 77 पड्विधे दर्शनम् 78 अरविधं माहेश्वरम् 79 दशविष प्राइयम् 80 चतुर्विधं सायम् 81 सप्तविधं जैनम् 82 दशविध बौद्धम् 83 चतुर्विधं चार्वाकम् 84 चतुर्विशतिविधं विचारकत्वम् 85 दशविध गुरुत्वम् Pages 86 पञ्चविधं चरितम् 87 पञ्चविघं पार्यिवानो पालनम् 88 सप्तविधा प्राप्तिः 89 चतुर्विशतिविधं शौर्यम् 90 दशविधं बलम् 91 दशविधः सह 92 दशविधो जय. 93 पश्चविधः परिच्छेदः 94 पञ्चविधं प्रभुत्वम् 95 सप्तविधमुक्तमत्वम् 96 नवविधा शकिः 97 सप्तविधा भुतिः 98 अष्टविधमभिमानलक्षणम् 99 चतुर्विधं वात्सल्यम् 100 पक्षविधी महोत्सवः 101 मौलन्धियोगः Appendix A Appendix B अकारादिकमेण शम्दानामनुक्रमणी १-६१ ७.

. , प्रधान संपादकीय किंचित् प्रास्ताविक राजस्थान पुरातन ग्रन्थमाला के ४५ वें अंकके रूपमें प्रस्तुन, वस्तुरनकोश की एक प्राचीन प्रति, हमको जेसलमेरके जैन अन्य भंडारोंका अवलोकन करते समय, सन् १९४२ में, दृष्टिगोचर हुई। उस प्रतिका केवल अन्तिम पत्र नहीं मिला था, जिसमें शायद लेखकके समय आदिका निर्देश किया गया होगा। बाकी कृतिका ग्रन्थपाठ प्रायः पूर्ण था । प्रन्यका विषय उपयोगी और नूतन मालूम दिया, इस लिये हमने उसकी प्रतिलिपि करवा ली । बादमें, जब राजस्थान पुरातत्त्व मन्दिर (अब नूतन नाम 'प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान') के लिये, राजस्थानमें प्राप्त प्राचीन हस्तलिखित प्रन्यों का संग्रह कार्य हमारे निर्देशनमें आरंभ हुआ, तो उसमें दो-तीन और हस्तलिखित पुरानी प्रतियां इसकी संग्रहीत हो गई। यह रचना अभी तक कहीं प्रकाशित नहीं ज्ञात हुई और विषयकी दृष्टिसे विद्वानोंके लिये एक विशेष अन्यसनीय रचना मालूम दी, अतः हमने, राजस्थान पुरातन ग्रन्थमाला द्वारा, इसका प्रकाशन करना निश्चित किया; और ऐसे प्रन्यों के संपादन कार्यमें पूर्ण उत्साह और प्रावीण्य रखने वाली विदुषी कुमारी डॉ. प्रियबाला शाहाको इसका संपादान कार्य दिया गया। राजस्थान प्राच्यविद्या प्रतिष्ठानके संग्रहके अतिरिक्त, अहमदाबादकी गुजरात विद्या सभाके संग्रहमें तथा डभोईके मुक्ताबाई जैन ग्रन्थ संग्रहमें भी, इसकी प्राचीन प्रतियां उपलब्ध हुई। इस तरह ७ प्राचीन प्रतियोंके आधार पर, संपादिका विदुपीने बहुत परिश्रम करके इसका उत्तम संपादन किया है जो तज्ज्ञ विद्वानोंको प्रस्तुत ग्रन्थ दृष्टिगोचर होते ही ज्ञात हो सकेगा। अन्यगत वस्तु नामसे ही ज्ञात होती है। साहित्यकारों, कथाकारों, प्रवचनकारों और उपदेशकोंको वारंवार उपयोगमें आने लायक ऐसे सौ विषयोंके मेदोपमेद और नामावलिका समुचित. संग्रह इसमें किया गया है । इस तरह वस्तुविज्ञानका यह एक संक्षिप्त कोश ही है अतः रचनाकारने इसका नाम वस्तुरनकोश ऐसा उचित नाम दिया ज्ञात होता है । पर संक्षेपमें इसका नाम रतकोश भी बहुतसी प्रतियों में लिखा हुआ मिलता है । इसका मुद्रणकार्य पूरा हो जाने पर, बादमें हमें पाटणके भंडारोंमें भी इसकी कुछ प्राचीन प्रतियां देखनेमें आई जिनमें दो प्रतियां उल्लेखनीय हैं । (१) तपागच्छवाले पाटणके भंडारमें एक ७ पन्नोंकी प्रति है जिसका अन्तिम पुष्पिकारूप लेख निम्न प्रकार है- "संवत् १५१५ वर्षे कार्तिके श्रीचित्रकूटे व्यलेखि । शुभं भूयात् ॥" (२) दूसरी प्रति भी इसी भंडारमें सुरक्षिन है जिसके १२ पने हैं और निम्न प्रकार पुप्पिकालेख है- "इति धीवस्तुविचाररतकोशसूत्रशतवस्तुविवरणं समाप्तं ॥ संवत् १५१६ वर्षे मागशीर्पयदि ७ कुजे लेखि ब्रह्मदासकेन ।"

२ इन पुष्पिकालेसोंसे ज्ञात होता है कि यह रचना ५००-६००,वर्ष जितनी प्राचीन तो अवश्य है ही; और इसके जो अनेकानेक पाठमेद मिलते हैं उनसे ज्ञात होता है कि अभ्यासियोंमें इसके पठन-पाटनका प्रचार भी बहुत ही रहा है । इसका रचयिता कौन है यह निश्चित रूपसे तो नहीं कहा जा सकता-पर केवल एक प्रतिमें, जैसा कि संपादिका विदुषीने अपने प्रास्ताविकमें सूचित किया है, कोई पृथ्वीधराचार्यका नाम लिखा मिलता है; सो अवश्य विचारणीय एवं विशेष अन्वेषणका विषय है । जबतक किसी कर्ताका निश्चय नहीं हो जाय तब तक हमने इसे अज्ञात विद्वत्कृत के विशेषणसे ही प्रसिद्ध करना उचित समझा है। इसके साय कुछ प्रतियोंके पनोंके म्लाक वनवा कर उनके प्रतिचित्र मी दिये जा रहे हैं। अन्तमें हम विदुपी संपादिका श्रीमती कुमारी डॉ. प्रियवाना शाहाके प्रति अपना आमार भाव प्रदर्शित करना चाहते हैं कि जिनने अत्यन्त परिश्रम पूर्वक इस रचनाका सुसंपादन कर, प्रस्तुत ग्रन्यमालाकी शोभावृद्धि के लिये सुन्दर पुष्प समर्पित किया । प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान, जोधपुर माघ शुक्का १५, संवत् २०१६ -११. फरवरी, १९६०.-- मुनि जिन विजय

राजस्थान पुरातन ग्रन्थमाला]
[वस्तुरत्नकोश
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राजस्थान पुरातन ग्रन्थमाला] [वस्तुर नकोश -- । 'नशक्निविशशिकानशक्तिप्रशिकिाकामशक्तिमुवानिव्यायामशालालाजनशकिपमतविभनी । सुलग झापा स्पारमागधा अतिमानादशाष्टविधतिमानानदणीकानाधमाधाकरमाबलावावधातामा मारतारिखतेवादाभवालल्यादिवानारामुलणावामवाणावरजनादनमानयनानदासलावधिमा पंचविलमहामवालानमक्षासनानममदासवांकाममहोत्सवामतविक्षयानिकिनिधमेवलेका मेवा झानयात्रमहामदावनतजानित मानिसनविधामनाएनिशानिविधागायोगबनायाप्रतापत्राथ। ' दानावदेशतिनामनामापतिपताजयमानाशा नामादमोशरणागापरिबाधाप्रमाहानामार्थ चोप्राधारावलकालालणाराणाकानामनारद शविनीवाकायबुद्धिमविश्वास्नानन्या। कानशिकानदधानतिराशनाविधवा लापपदविधोजयाझानासमेघनापिमि यामिवसुष्माननिदादारिदयाचनिाराझादवा विधोजयपदेश विधसंग्रहाशानेपानी गांसारपसायोगाबालधर्मजयोगुणेषुवतयः। पतिप्रसुवाकनवादानजसुबोल नियतवास्तयपत॥णयानिस्नकाशस्तृवातव्यारव्यानसममालालामायामार-धनसागरसनिकता Imवा अन्यमेमणगणिजापान॥श्रीश्रीराकल्याएससाबा ब बin anta 'वी' संज्ञक प्रतिका प्रथम पत्र VASTURÁTNAKOSA INTRODUCTION 1" Ratnakośa or Vasturatnakośa :- . Aufrecht in his Catalogus Catalogram has several entries referring to Ratnakosa. In the entry on page 490 he describes a mis. thus "Ratnakośa or Vastuvijñānaratnakośa-enumeration of; things supposed to exist in a definite number, written by a Jain author.” This description exactly applies to the contents of our work. : ill. There are, however, at least three other kinds of Ratnakośa's mentioned by Aufrecht from which this Ratnakośa is to be distinguished. One Ratnakośa is a work of Vaiſeșika philosophy, another is a work on Advaita philosophy bearing the name Advaita-Ratnakoša and there is a third Ratnakośa which is a lexicon. Ratnakośa literally means a treasure of jewels. In fact it is a short treatise on various subjects which a cultured man was supposed to know.in the Indian society of old times. The larger variety of such works is represented by treatises like Yuktikalpataru of Bhoja, Caturvargacintāmaņi of Hemādri and also Abhilasitarthacintamani, "of Someśvara. Bịhatsamhitā of Varāhamihira though predominently an astronomical work also discusses many miscellaneous topics. Oar Ratnakosa consists of two parts. The first part consists of Sūtras containing the topics with their aggregate numbers, while the second, Vivarana mentioning each item of the topics by name. The total number of Sūtras in different mss, varies from 100 to 104. The subject-matter of these topics is mostly secular giving general knowledge about social and political matters. If we classify those attording to the ivar Puraşartbas, we would find that must of them fall under Artha and Kama; while some are of a general literary nature. Thus, for example the following topics Tould come under Artha:- 1) phi श्रीणि भुवनानि, त्रिविधं लोकस्थानं, निविधा भूमिः, सहा राज्य, पाणवी र गुणा, प्रशिद् राजपात्राणि etc. The following fall under Kāma- दाविंशतिः कामिनीना विकारेषितानि, अष्टो नार्योऽगम्याः, दामिः कारणः नियो विरज्यन्ते, निमिः कारण कामिन्यः संबप्यन्ते, सप्तविधाः कामुकाना मुरतारम्मा:, अविधं विदग्याना 'मुरतम् , सुरतावसानम् etc. नाविध 2 VASTORATNAKOSA 17 - M .. -- HIM । । " 2 HR TV Description of the manuscripts :- The present text is based upon the following seven mss.; six of which are completo. All the seven are in a well preserved state. They are named A, B, C, D, E, F and G. Ms. A ! .Source: Muni Jinavijayaji's collection, Rajasthan, No.'57 'Material: paper. Folios: 4 Size: 101 x 51 inches .Number of lines : 19 lines per page. I, Nnmber of letters: 50 to 53 per line. Age:: not mentioned; appears to be about three hundred years old, i Author: not mentioned. 11 Script:, Devanāgari, Begins: । ॐ नमो वीराय । अथातो वस्तुविज्ञान रनकोश व्याख्यास्यामः । — सर्वशास्त्रमयं रम्यं सर्वज्ञानप्रकाशकम् । खल्पग्रंथं सुबोधार्थ रमकोर्श तमभ्यसेत् ॥१॥ तत्र शतेन सूक्षाणां संग्रहो यथा ॥ तत्रादौ त्रीणि भवनानि etc.' FEnds : पंचविध प्रभुलं फुलप्रभुत्व ज्ञानप्रमुख दानप्रभुत्वं स्थानप्रभुत्वं ॥ १०॥ Colophon: इति रनकोशसूत्रशतव्याश्यानं समाप्तम् ॥ Ms. B Source: Sri Muktābāi Jfianamandira, Dabhoi. No: Folios: 6 Material: paper. Size: 10x 4.25 inches. । Area of writing: 8 x3 inches.,' Number of lines: 15 to 16 lines. 1 Number of letters, 43 to 45 in each line, Age: not mentioned; appears to be not later than 16th cent. A.D. Author: not mentioned, Script: Devanāgari. Begins : अथातो वस्तुविज्ञानं । रत्नकोशं । व्याख्यास्यामः ।। • सर्वशास्त्रमये रम्यं सर्वज्ञानप्रकाशकम् । खल्पप्रथं सुबोधार्य रमकोर्श तमभ्यसेत् ।। तत्र शतेन सूत्राणां संग्रहो यथा । तत्रादौ त्रीणि भुवनानि etc. 1 1 ? " -- 1 15 M . .. . ।

INTRODUCTION 3 Ends : पचविधं प्रभुत्वं । कुलप्रभुत्वं । दानप्रभुत्वं । स्थानप्रमुत्पै । उभयप्रभुत्वं । १०० i Colophon : : इति रनकोशसूत्रशतव्याख्यानं समाप्तम् ॥ लोलाडापामे । पं. धनसागर मुनिक्षतम् । वा. पुन्यमंडणगणिजोग्यं । श्रीः । श्रीरस्तुः । कल्याणमस्तु । .. - : Ms. C Source: Gujarat Vidya Sabha, Ahmedabad. No.: 2165 Material: paper. Folios: 12 Size: 8x4.5 inches. Area of writing : 6.5 x 3.75 inches. Number of lines: 11 lines per page. Number of letters: 31 to 33. Age: Samrat 1755 (i. e. 1699 A.D.) Author: Prthridharācārya. Script: Devanāgari. Begins : श्रीहरिः । सर्वज्ञानमयं रम्यं सर्वबुद्धिप्रकाशकम् । स्वल्पग्रंथ सुधाय रनकोशं समभ्यसेत् ।। तत्रादौ त्रीणि भुवनानि । त्रिविधं लोकस्थानं । चविधं प्रभुत्वं ॥ १.०॥ इत्यनुकमणिका ॥ गणराजं नमस्कृत्य गजतुण्डं सुरोत्तमम् । समस्तविघ्नहंतारं रनकोश उदीयते ॥१॥ Ends: अष्टौ लब्धयोग । अणिमा । महिमा । लघिमा । गरिमा । प्राप्ति । प्रम्यं । ईशत्वं । वधित्वं । Colophon : इति श्रीपृथवीधराचार्यकृत रनकोशः संपूर्णम् । शुभं भवतु । कल्याणमस्तु । संवत् १७५५ वर्षे पाल्गुनमासे शुक्रपझे लिखित गिरिनारायणज्ञातीय भवालकृष्णमुत भट्टरामकृष्णेन लिखितं । औरस्तु । श्री । हरियति । श्री । श्री । श्री। - Ms.D Source: Muni Jinavijayaji's collection, Rajasthan. No.: ? Material: Kashmirian paper. Folios: 3 (incomplete) Size: 9.45x4.5 inches. Number of lines: 21 Number of letters: 61 Age: not mentioned; appears to be not later than 15th cent. A.D. Author: not mentioned. Script: Deranagari.

VASTORATNAKOSA . ? .. । Begins : अहं । त्रीणि भुवनानि । १॥ त्रिविधं लोकस्थानं । २ । etc.. Ends : दशविधं बौद्ध । सगता । परिमिता । पारमिता । विहार । प्रमाण ।। सौत्रांतिक । निराशक । योगोपचार । मोक्षपर्यतं ॥ १० छ ॥ चतु Ms. E Source : Muni Jinavijayaji's Collection; Rajasthani.it No: Material: paper. Folios : 9. 1 to 8a Ratnakosa; 8a to 9 Ragotpatti, Size: 10x4.5 inches. Number of lines: 15 lines, Number of letters: 38 to 40. Age: not mentioned, appears to be about 150 years old. Script: Devanāgarī. Begins : श्री गुरुभ्यो नमः। रत्नकोशं व्याख्यास्यामः। थ(वस्तुविज्ञान । सर्वशास्त्रमयं रम्यं सर्वज्ञानप्रकाशकी खल्पग्रंथ सुमेधार्थ रनकोशं समभ्यसेत् ॥ १॥ तत्र शतेन सूत्राणां कर्तव्यः संप्रदो यथा ॥२॥ अथ इति मंगलायें ॥ ग्रंथनु कर्ता श्रीवेदव्यास कहिछि etc. Ends : लघिमा । इशत्व । वशित्व । प्राप्ति । प्रकाम्यमेव । Colophon: इति श्रीरत्नकोशः संपूर्णः ॥ श्रीरस्तुः । कल्याणमस्तुः । Ms. F Source: Jesalmere Grantha Bhandara, Jesalmere. No.: 315 Material: paper. Folios: 8 Size: 97 x 47 inches. Number of lines. 14 lines. Number of letters: 48 letters, Age : Samrat 1709 (i.e. 1653 A. D.) Author: not mentioned. Script: Devanagari. Begins : ॐ साई नमः । अय रनकोशी लिख्यते । सर्वशास्त्रमय रम्यं सर्वज्ञान प्रकाशकम् । सल्पग्रन्थ मुबोधार्थ रनकोश समभ्यसेत् । तत्र सर्वत्र सूताणा कर्तव्यः संग्रहो यथा ॥ तत्रादौ प्रीणि भुवनानि । १। निविध लोकस्थानम् । २ । "etc. Ends; ...वशित्वम् । प्राराम्यम् । चेति ॥ Colophon: इति श्री रनकोश[:] ममाप्त[:] श्रीसंवत् १७०९ वर्षे यशापाऽशित पटी दिने रेवतीभवे पारे श्री महेरानगरेऽलीलिराद। धीस्तात् कल्याणं भूयात् । छेसाठठयोः ऋमितिः सदेव श्रीस्वात् मांगल्यं महोच्छवं श्री तिजिनप्रगदान भी । -- .

INTRODUCTION.' Ms. G A copy prepared under the supervision of Müni Jinávijayaji from'a ms, of Jesalmere Grantha Bhaņdāra, Jesalmere, Begins'; ॐ नमो वीतरागाय । अथातो वस्तुविज्ञान रनवेशं व्याख्यास्यामः । सर्वशास्त्रमयं रम्यं सर्वज्ञानप्रकाशकम् । खल्पप्रन्य सुबोधार्य रनकोश तमभ्यसेत् ॥ संन शतेन सूत्राणां सङ्कहो यया ॥ संत्रादौ त्रीणि भवनानि etc. Eids : पञ्चविषं प्रभुत्वं । कुलप्रमुत्वम् । ज्ञानप्रभुत्वम् । दानप्रभुत्वम् । स्थानप्रभुत्वम् । उभयप्रभुत्वम् । Colophon:, इति रनकोशसूत्रशतव्याख्यानं समाप्तम् ॥ छ । - 1 III Method of editing:- A comparative study of the seven miss, available to me showed that even thongh the main substance of the text is common it bag considerable variations. So the possibility of discovering the original text became remote. Under the circumstances, I adopted the following procedure in presenting this text. Of the seven mss. D seems to be the oldest, though incomplete, while A. B.G. seem to belong to one proto-type. I have taken D as the basis of the text upto sūtra 85 and for the remaining portion of the text I have taken ms. A, which is next in age. The readings of D and A, however, have not been adopted in the text where they were corrupt or unsatisfactory. Variants of other mss, have been noted in the footnotes. In presenting the Vivaraņa, mas, A, B and G have been adopted as the basis, because they together yield, on the whole a satisfactory test, Where, however, the readings of other mss. seemed better, they have been given in the text, As hoover, the different mss. give at several places different informations, I have thought it proper to give below the main text, the texts of other mss. in full. Thus the reader will have before him more or less complete texts of the Vivarana of all the miss. In appendix A, are given the additional Sūtras of ms. E as well as the old Gujarati Tabbo' contained in it. In appendix B similar matter gathered from some other works is given, In the Indes, I have incladed important variations from the texts of Vivarapa given in the footnote. } 6 VASTURATNĀKOŠA * . 4 IV Authorship and Age:-rails Of the soven mss. 'only one, namely C'mentions the name of the author as Pșthvīdharūcārya and one, namely E mentions: Vedavyasr as the author in its Gujarati Tabboi.. As we have seen abovo Aufrecht attributes the authorship of Ratnakosa to a Jain, though he does not mention the proper name.; It appears that Aufrecbt was led to regard this as a Jain work on account of the mention of ere etc. at thą beginning of 'his-- mánuscript. We have feen that" four, namely, A, D, F, and G, of our seven-mss, also begin in the Jain say: Bistarts directly with the text without any, mangala, C starts with eft: and E with strEA7 77', while one mg. belonging to the Oriental Institute, Baroda, not used by me being very corrupt starts with sit rüya 4: 'W6 cannot say definitely, whether - TERT? 77:1 can be taken aska Jain or Brahmanical way, of beginning. 11' We, however, cannot drave any conclusion *about the author being a Jain or non-Jain from the way in which the mss. begin because it depends upon the religion of the scribe' or the patron who got the ms. copied. The absence of reference to the name of the author in five mss. and mention of Vedavyāsa in one make us hesitate in attributing our Ratnakośa to Pșthvidharācirya on the authority of the ms. C. The only thing that we can do for the present is to accept him provisionally as the author of our work. The acceptance of Pșthvidharācārya as the author of Ratnakośa, however, does not help us in fixing the age of the work, Aufrecht has nuentioned several Prihvidharācāryas? We do not know which,pne wrote the Ratnakośa given in the ms. C. Hemādri in his Caturvargacintīmani quotes Ratnakośa, at least twice, once in the Vratakhanda and second time in the Pariseşakhanda as follows: ताम्बूलमुखवासयोर्लक्षणमुक्तं रनकोशे- महापिप्पलपत्राणि क्रमुकस्य फलानि च । शुक्तिक्षारेण संयुक्तं ताम्बूलमिति संज्ञितम् ॥ Aofrecht in addition to Ratnakośa has the following entries about the works of Pythridharācārya , - (1) मुवनेश्वरीस्तोत्र, (2) लघुसप्तशतीस्तोत्र (3) सरस्वतीस्तोत्र, (4) कातन्त्रविस्तर विवरण, (5) the commentary on Mşcchakatika. (6) Vátsesika Rathatosa, and (7) मुक्ने धर्यर्चनपद्धति. . 1 le I.

INTRODUCTION 7 वेतपत्रञ्च पूर्णच कमुकस्य फलानि च । Filtretta Argentyna II Ad. 1 (page 242) Vratakhanda, पुनक्षत्राणि च रनकोशे दर्शितानि । हस्तो मूलं प्रवणः पुनर्वमुर्मंगशिरास्वथा पुष्यः । gunay para ma fortaria 11 (page 732) Pariseşakhanda. Here it may be pointed out that from the nature of the topics, one can expect these verses 'in our Ratnakosa, but in fact we do not find them in any one of our mss. This implies that there may be other versions of the Ratnakośa which might have contained these verses. But as the verses mentioned by Hemādri do not occur in our text, his reference to Ratnakośa cannot help us to settle the date of our Ratnakośa. So the only thing that we can say is that it is older than our oldest Ms. D which appears to belong to the 15th cent. A. D. The names mentioned in the Rājavansas' vary so much that they cannot help us in settling the earlier limit of the age. The work may be supposed to belong to an age later than the 10th cent, A, D. * Before concluding, I must not omit to tender my most sincere thanks to the revered Āchārya Sri Muni Jinavijayaji, the Honorary Director of Rajasthan Puratattva Mandir, Jaipur (now Jodhpur), for not only accepting this work for publication in Rajasthan Purātana Granthamālā bat also for being kind enough to spare time to go over the greater portion of the text with me and make several important suggestions which have been mostly acted upon, I take this opportunity of expressing my sincere thanks to my painstaking teacher in Ancient Indian Culture and guide in the preparation of my thesis for the Ph. D. degree, Prof. R. C. Parikh, Director, B. J. Institute, Gujarat Vidya Sabha, Ahmedabad, for giving much of his valuable time for discussing with me several problems connected with my research work and especially the preparation of the present text. Ahmedabad, 12-4-1959. PRIYABALA SHAH

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व स्तु र त्न को शः। अथातो वस्तुविज्ञानं रनकोशं व्याख्यास्यामः । सर्वशास्त्रमयं रम्यं सर्वज्ञानप्रकाशकम् । खल्पग्रन्थं सुवोधार्थ रनकोशं समभ्यसेत् ॥१॥ तत्र शतेन' सूत्राणां कर्तव्यः 'सङ्ग्रहो यथा । तत्रादौ- १ त्रीणि भुवनानि । २ त्रिविधं लोकसंस्थानम् । ३ त्रिविधा भूमिः। ४ त्रिविधाः पुरुषाः। ५ त्रयः पदार्थाः। ६ चत्वारः पुरुषार्थाः । ७ पट्त्रिंशद् राजवंशाः"। ८ सप्ताङ्गं राज्यम् । ९ पण्णवती "राजगुणाः । १० पट्त्रिंशद् राजपात्राणि । ११ पत्रिंशद् राजबिनोदाः । १२ अष्टादशविधास्थानम् । १३ चतस्रो राजविद्याः। १४ चतस्रो राजनीतयः । 1 E puts अय(वस्तुविज्ञानं after व्याख्यास्यामः ।; Cr drop from अथातो to स्यामः !; D drops from अथातो to तनादी । 20°ज्ञानमयं । 3 0 सर्वनुद्धि'. 4 c मुदोधाय । 5AB तमभ्यगेन् । GF मान। 7 ABD drop काव्यः ।. 8 : त्रिभुव । 9 CF लोया । 10 AP) पुस्पाणामयां । 11. राजविनोदाः। 12 E"तागरा. 13 पटरिंशद् रानां गुणाः । ९ । पग्णवती राना गुणा ।... 14AG विधं स्था; 0 °विधमा (महास्थानम् । धं आ ।.

३ 17 28 वस्तुरतकोशः। १५ पत्रिंशदायुधानि । १६ सप्तविंशतिः शास्त्राणि । १७ द्विपञ्चाशत् तत्त्वानि । १८ द्विसप्ततिः कलाः १९ चतुरशीतिर्विज्ञानानि । २० चतुरशीतिर्देशाः। २१ द्वात्रिंशल्लक्षणस्थानानि । २२ चतुर्विंशतिविधं गृहम् । २३ अष्टोत्तरशतं महलानि । २४ त्रिविधं दानम् । २५ पञ्चविधं यशः । २६ सतविधा कीर्तिः। २७ नव रसाः । २८ एकोनपञ्चाशद् भावाः । २९ चत्वारोऽभिनयाः ३० चतस्रो वृत्तयः। ३१ चत्वारो महानायकाः। ३२ चत्वारो नायकाः । ३३ द्वात्रिंशद्गुणयुतो नायकः । ३४ त्रिविधा महानायिकाः" । ३५ अष्टो नायिकाः । 15 ABCLEO दण्डायुधानि । 160 तिशा;A0 तिग। सम्रा । 17 ABCD 'तिकदिमकला। 18 ABCD विपि । निशा । 19 ABCDE 'तिदे। 20 लक्षणानि । 21 ABO तम ।, D तर मतं मंगलाना Eमंगलानां स्थान । 22 °धय।. 23 C गम ईनयः । अटो रमा ।, Puritey मा upon अन्टी ; ADON अष्टी रगाः ।, 24 D'रो 25 D RETA7 *: A puts here are a fost r; a drops this sutra . 2G A pats here विविध मान्यम् ।, HD गद्गुणनायरा ।, ७ नागनायकाः । राणो नायक ।। o drops this sutra. 7 AICDE ante ya for 44: I; A onits the sotraiपा महामारिया। 28 o drops the sutra. 28 माया. - वस्तुरनकोशः। *३६ द्वात्रिंशन्नायिकानां गुणाः । ३७ त्रिविधं सौख्यम् । ३८ चत्वारि "सोख्यकारणानि । ३९ नवविधो गन्धोपयोगः। ४० दशविध" शौचम् । ४१ द्विविधः" कामः। ४२ दर्श कामावस्थाः। ४३ विंशती" रक्तस्त्रीणां लक्षणानि । ४४ एकविंशतिविरक्तस्त्रीणां लक्षणानि । ४५ द्वाविंशतिः” कामिनीनां विकारेगितानि । ४६ चतुर्विशतिरसतीनां लक्षणानि । ४७ पोडश दुष्टस्त्रीणां लक्षणानि । ४८ अष्टौ स्त्रीणामविश्वासकारणानि । ४९ अष्टौ नार्योऽगम्याः। ५० अष्टविधो मूर्खः। ५१ चतुर्विशतिविधं नागरिकवर्णनम् । ५२ त्रिविधं रूपम् । ५३ त्रिविध स्वरूपम् । ५४ द्वादशविधः प्रेमदोपचारः । * सौख्यम् । this sutra. G alone gives this sūtra but all the mss. give its Vivarana, 28 द्वात्रिंशद नायकानां गुणाः । त्रिविधं सौख्यम् । F त्रिंशद्गुणयुता नायिकाः । त्रिविधं 29 D सौप्यस्य का 1; E°यकरणानि । 30A द्विविध। 31 A omits 32 BE दशविधः कामावस्थाः।, दाविधाः कामावस्था: 1. 33 ABCDE "तिर'. 34 ABDE °शतिविर' 1; Fdrops the sutra, AB put first our sutra 46 and then give this sūtra as 43 35 ABCD शतिका ।; E drops the sutra%3; rdrops द्वा। 36 ABCD शनिअम ।, Edrops the sutra. 37 ABO अपलापानि । 38 A0"मभिचारकाणि। 39 : चतुर्विशनिलक्षणविधं । 40 ABO कलक्षणम्। 'कवर्ननम् । 41 r drops the sutra. 42 AEED प्रमोदोपचार.1; D प्रसादोपचारः।, दविषः प्रमोदविचारः।

वस्तुरनकोशः। ५५ पञ्चविधः परिचयः। ५६ दश पुरुषाः“स्त्रीणाम निष्टा भवन्ति । ५७ दशभिः कारणैः स्त्रियो विरज्यन्ते । ५८ त्रिभिः" कारणैः” कामिन्यः" संबध्यन्ते । ५९ सप्तविधाः" कामुकानां" सुरतारम्भाः"। ६० अष्टविधं विदग्धानां सुरतम् । ६१ नवविधं सुरतावसानम् । ६२ नवं शयनगुणाः। ६३ दशविधः पार्थिवानां प्रमोदः। ६४ चतुर्विधः प्रबोधः। ६५ चतुर्विधा बुद्धिः। ६६ अष्टौ बुद्धिगुणाः। ६७ चतुर्विधं गान्धर्वम् । ६८ त्रिविधं गीतम्। ६९ पत्रिंशद् गीतगुणाः। ७० चतुर्विधं वाद्यम् । ७१ द्विविधं नृत्यम् । ७२ पोडशविध काव्यम् । ७३ देशविधं वक्तृत्वम् । ७४ पड्विध भाषालक्षणम् । ७५ पञ्चविधं पाण्डित्यम् । 43 D पंचविंशतिविधः।, पंचविंशतिर्वि। 44 CTRT: 1; F drops the sūtra. 45 द्वादशभिः कारणे. स्त्रियोऽभिरजयन्ते। 46 ABG दशभिः । 47 प्रकारैः। 48 D कामिनीना; Eत्रिय. 49 ABCEF विध । 50 CE कामिना 1. 51 ABOETरम्भः।. 52 D मुरतावस्थानं विदग्धना। Eदग्धाना।; F अष्टविधो विदग्धार्ना सुरतारम्भ' । 53 ABG नवविधाः। 54 A drops पार्थिवानां ।। 55 ABa प्रयोग। 57 AM वादलक्षणं ।. 58 द्वादश ; ABO पिंशतिविधं ।, पोडशविय। 59 वशित्वं; F वचव्यत्वं । विशतिविदं वक्तृत्वं between 73 and 74. 60E पोडशनिर्ध।. 56Aनुत्तम्।। te has वस्तुरत्नकोशः। ७६ चतुर्विंशतिविधं वादलक्षणम् । ७७ पंड्विधं दर्शनम् । ७८ अष्टविधं माहेश्वरम् । ७९ दशविधं ब्राहयम् । ८० चतुर्विधं सायम् । ८१ सप्तविधं जैनम् । ८२ दशविधं वौद्धम् । ८३ चतुर्विधं चार्वाकम् । ८४ चतुर्विंशतिविधं विचारकत्वम् । ८५ दशविधं गुरुत्वम् । ८६ पञ्चविधं चरितम् । ८७ पञ्चविधं पार्थिवानों पालनम् । ८८ सप्तविधा प्राप्तिः। ८९ चतुर्विशतिविधं शौर्यम् । ९० देशविधं बलम् । ९१ दशविधः सङ्ग्रहः । ९२ दशविधो जयः। ९३ पञ्चविधः परिच्छेदः। ९४ पञ्चविधं प्रभुत्वम् । ९५ सप्तविधमुत्तमत्वम् । ९६ नवविधा शक्तिः। ९७ सप्तविधा भुक्तिः। ९८ अष्टविधमभिमानलक्षणम् । नानि । 61 A0 चतुर्विध; निवाद। 62 पइद। 63 0 दर्शनलक्षणम् ; दर्श- 64 F अष्टविधा माहेश्वरी। 65 D प्रादाम्यम् ।। B ब्राह्मणम् ।. 66 सप्त- विंशतिविध जैन्यम् । 67 ABG , चारकर; Fधं वा लक्षणम्।. 68 चतुर्विधं . 69 AB चारित्रं 1. 700 drop पार्थिवानी, . पार्थिवश । 71 0 चतुर्विध ।। 72G सप्तविध वस्तुरनकोशः। ९९ चतुर्विधं वात्सल्यम्। १०० पंचविधो महोत्सवः" । १०१ अष्टौ लब्धियोगाः। इति सूत्राणां शतमेकोत्तरम् ॥ १०१ ॥ ॥ इति वस्तुसंख्यासंग्रहः समाख्यातः ॥ 73AB १०० छ।; ०१.. इत्यनुक्रमणिका ।। D चेति १०० छ।; : १.० इति सूत्राणि समूहे समाख्यातः 1; F १०२ * Bgives चतुर्विधा गतिथ 1 after sutra १... | From इति to स्मातः is given only by E, ।

वस्तुरत्नकोश-विवरणम् । 'अथातो वस्तुविवरणं समाख्यायते । *गणराजं नमस्कृत्य गजतुण्डं सुरोत्तमम् । समस्तविघ्नहन्तारं रत्नकोशमुदीर्यते ॥१॥ यथा- १. तत्रादौ त्रीणि भुवनानि कथ्यन्ते । तद् यथा- १ सुरभुवनम् । २ नर्रभुवनम् । ३ नागभुवनम् । इति । 15 २. त्रिविधं लोकसंस्थानम् । १ देवलोकसंस्थानम्। २ दानवलोकसंस्थानम्। ३ मानवलोकसंस्थानम् । इति । २) A १ देवसंस्थानम् । २ मानवसंस्थानम् । ३ दानवसंस्थानम् B १ देवसंस्थानम् । २ दानवसंस्थानम् । ३ मानवसंस्थानम् । C१ देवलोकस्थानम् । २ मनुष्यलोकस्थानम् । ३ दानवलोकस्थानम् । D १ दानवसंस्थानम् ।२ मानवसंस्थानम् । ३ गंधर्वसंस्थान: E देवदानवमानवानां संस्थानम् । १ देवस्थानं । २ दानवस्थानं । ३ मानवस्थानं चेति। ३. त्रिविघा भूमिः। १ उन्नतप्रदेशा । २ निम्नप्रदेशा । ३ समप्रदेशा । इति । ३) AG१ उत्तमप्रदेशः।२ निम्नप्रदेशः।३ समप्रदेशः। E १ उञ्चा।२ नीचा । ३ समा। F १ उन्नतप्रदेशा।२ नीचप्रदेशा।३ समप्रदेशा। -- ६ - -- - 1 अयानो...यथा is given only by B. *g alone gives this sloka after इत्यनुक्रमणिका । 1 BCE तरी। 2G भवनानि । 3 ABOERO omit कप्यन्ते । 4 ABCETO omit नया । 5ABG माना । GABEO omit स्क। 7 Cur स्थानम् । 8 Gomats नेक।

८ वस्तुरनकोशः। ४. त्रिविधाः पुरुषाः। १ उत्तमाः । २ मध्यमाः । ३ अधमाः। इति । ABG १ उत्तम|२ मध्यम। ३ अधम । C१ उत्तम २ मध्यम ३ मधमाश्चेति । E १ उत्तमा। २ अधमा।३ मध्यमा । ५. त्रयः पदार्थाः। १ धातुपदार्थः । २ जीवपदार्थः। ३ मूलपदार्थः । इति । 0 धातुमूलजीवाचेति E१धातु । २ मूल । ३ जीवा । F १ मूलगतपदार्थाः । २ धातुगतपदार्थाः । ३ जीवगतपदार्थाः । ६. चत्वारः पुरुषार्थाः। १ धर्मः। २ अर्थः। ३ कामः । ४ मोक्षः । इति । ६) ABG १ धर्म । २ अर्थ । ३ काम । ४ मोक्ष । CF धर्मार्थः । काम मोक्षः। D १धर्म | २ अर्थ । ३ काम । ४ मोक्षरूपाः। ७. पत्रिंशद राजवंशाः। १ सूर्यवंशः। २ सोमवंशः। ३ यादववंशः। ४ कदम्बवंशः। ५ परमारवंशः। ६ इक्ष्वाकुवंशः। ७ चाहुआणवंशः। ८ चौलुक्यवंशः। ९ मौरिकवंशः। १० शिलारवंशः। ११ सैन्धववंशः। १२ छिन्दक- वंशः। १३ चापोत्कटवंशः। १४ प्रतीहारवंशः। १५ मुडुकवंशः १६ राष्ट्रकूटवंशः। १७ शकटवंशः। १८ करटवंशः । १९ करटपाल- वंशः । २० चन्दिल्लवंशः। २१ गुहिलवंशः। २२ गुहिलपुत्रवंशः । २३ पोतिकपुत्रवंशः । २४ मंकाणकवंशः । २५ धान्यपालवंशः। २६ राजपालवंशः। २७ अनङ्गवंशः। २८ निकुम्भवंशः। २९ दधि- करवंशः। ३० कलचुरवंशः । ३१ कालमुखवंशः। ३२ दायिकवंशः । ३३ हूणवंशः। ३४ हरिणवंशः। ३५ डोडिवंशः। ३६ मारववंशः। इति ।

सविवरण-वस्तुरतकोशः। । ७) A. १ ब्रह्मवंश। २ सूर्यवंश। ३ सोमवंश। ४ यादववंश । ५ कुडुम्बवंश। ६ परमारवंश। ७ इक्ष्वाकु । ८वाहीक। ९ चौलुस्य। १० छन्दिक। ११ सिलार। १२ सैन्धव । १३ डाभी। १४ चापोत्कट । १५ पडीहार । १६ लडुक । १७ राष्ट्रकूटा १८ शक । १९ करटपाल। २० कोटपाल । २१ वंदिल्ल। २२ गुहिल । २३ गुहिल- पुत्र । २४ पौतिक । २५ मोरी । २६ मंकुयाण । २७ धान्यपाल । २८ राजपाल २९ अनङ्ग । ३० निकुम्भ। ३१ दाडिम । ३२ कलिछुर। ३३ दधिमुख । ३४ हण । ३५ हरितड। ३६ डोड। ३७ परमार। ७) B १ ब्रह्मवंश । २ सूर्यवंश । ३ सोमवंश। ४यादववंश। ५ कदम्बवंश । ६ इक्ष्वाकु ७ वाहीक। ८ चौलुस्य । ९ छन्दिक। १० सिलार। ११ सैन्धव। १२ डाभी। १३ चापोत्कट । १४ पडीहार २५ लडुक। १६ राष्ट्रकूट। १७ शक । १८ करटपाल । १९ कोटपाल । २० चन्दिल्ल । २१ गुहिल । २२ गुहिलपुत्र। २३ मौदिक । २४ मोरी। २५ मंकुयाण। २६ धान्यपाल । २७ राजपाल २८ अनङ्ग । २९ निकुम्भ । ३० दाडिम । ३१ कलिछुर । ३२ दधिमुख । ३३ तृण । ३४ हरितट । ३५ डोड। ३६ परमार। ७) १ रबि । २ सोम । ३यादव । ४ कदम्ब । ५ परमार।. ६इक्ष्वाकु । ७ चहूआण । ८ रोरीच । ९सिलर । १० करण्ड । ११ चण्डिल । १२ गोहिल । १३ मकुआण। १४ पौलक। १५ राजपाल। १६धानपाल । १७ देय । १८ निकुम्भ। १९ दधिकर। २० कोकिल । २१ तरुष्का २२ दधिपक। २३ हण । २४ हरिअड २५ कोबोलिका २६ कलानुर। २७ हरित। २८ सेभट। २९ राठोऊड। ३० शोलंक। ३१ जोधिम। ३२ कलश्च । ७) E१ सूर्यवंश। २ सोमवंश। ३ यादव । ४ईक्ष्वाकुः । ५ कद्व । ६परमार। ७ चौहाण। ८चौलुक्य । ९छिंदक। १०मोरी। ११शेलारा १२सैन्धव १३चापो- त्कट । १४ प्रतीहार। १५ लकुट। १६ कराट । १७ काल । १८ पाल । १९ टाक। २० चंडेल । २१ राष्ट्रकूट । २२ शंकु। २३ फरंड। २४ गोहिलपुत्र । २५ गहिटुन । २६ पोतिक । २७ मुष्कायण । २८ मकूआणा । २९ पोलक । ३० राजपालक । ३१ धनपालक। ३२धान्यपाल । ३३ अनन। ३४ निकुम्भ। ३५घिधिम। ३६दधि- ३७ कोल। ३८ कोलानुर। ३९ दधिपकः । ४० सिंहिलंक-जातिमेद। ४१ सोलंकी। ४२ दापिक । ४३ हूंण । हरिअड । ४५ टोड । ४६ डोडीआ। ४७ राष्ट्रकूट । जातिमेद ४८ मार राडा । ४९ माखवा । ५. पातिकर। ५१ दोलार । ५२ लुइक । ५३ फराट। ५४ कोल । ५५ चिन्दिलु। ५६ मुष्का- यण । ५७ डोडीआंकाश्चेति जातिमेदाः अनेककोटिशः ॥ ३६॥ ७) F १ सूर्यवंश । २ सोमवंश । ३ याद्वयंश । ४ कदम्बवंश । ५चहुआण । ६चौलिस्य । ७ छन्दिक । ८ सिलार। ९सन्धय । १० चाउडा। ११ पडिहार। १२ तुडका १३ राठउड। १४ करटयाला १५ चन्दिल । १६गुहिल । लोत्त । १८ पामिक । १९ मोरी । २० माणा । २२.अनंग । २२ राजपाल । २३ वारड । २४ दहीया। २५ डाभी । २६ हरीयदा । २७ टाक । २८ मीशा २९ मापा । ३० हुणा । ३६ निकुन्दम । ३२ कोल । ३३ दधिपक । ३४ डेडिया। ३५ सरिमा। ३६ परिमारवंशाधेति ।

सविवरण-चस्तुरत्नकोशः। ७)G १ ब्रह्मवंश । २ सूर्यवंश । ३ सोमवंश। ४ यादववंश । ५ कुटुम्बवंश । ६परमारवंश। ७ इक्ष्वाकु। ८ याह्नीक । ९ चौलुक्य। १० छन्दिक। ११ सिलार। १२ सैन्धव । १३ डाभी। १४ चापोत्कट। १५ पडिहार। १६ लडुक। १७ १८ शक । १९ फरटपाल । २० कोटपाल । २१ चंदिल्ल । २२ गुहिल । २३ गुहिल- पुत्र । २४ पौतिक । २५ मोरी । २६ मंकुयाण । २७ धान्यपाल । २८ राजपाल। २९ अनङ्ग । ३० निकुम्भ । ३१ दाडिम। ३२ कलिच्छुर। ३३ दधिमुख। ३४ हूण । ३५ हरितड । ३६ डोड। ३७ परमार । ८. सप्ताङ्गं राज्यम् । १ स्वामि। २ अमात्य । ३ जनपद। ४ भाण्डागार । ५ दुर्ग। ६ बल । ७ मित्राङ्ग। इति । ८)G स्वामी । जनपद । अमात्य । कोश । दुर्ग। बल । मुहृदिति । F स्वामी । अमात्य । दुर्ग । राष्ट्र । भण्डार । सैन्य । मित्राझं चेति । ९. पण्णवती राजगुणाः। १ वंशगुण । २ विद्यागुण । ३ विनयगुण । ४ विजयगुण । ५ विवेक- गुण । ६ विचारगुण । ७ विस्तारगुण । ८ सदाचारगुण । ९ सत्यगुण । १० शौचगुण । ११ सन्मानगुण । १२ समाधानगुण । १३ सौख्यगुण । १४ सौजन्यगुण । १५ सौभाग्यगुण । १६ रूपगुण । १७ स्वरूपगुण । १८ संयोगगुण । १९ वियोगगुण । २० विभागगुण । २१ साङ्गत्यगुण । २२ संपूर्णत्वगुण । २३ सौम्यत्वगुण । २४ सकलत्वगुण । २५ सलज्जत्व- गुण । २६ डसनत्वगुण । २७ प्रभुत्वगुण । २८ प्राजलत्वगुण । २९ पावक- त्वगुण । ३० पाण्डित्यगुण । ३१ प्रणयिमानत्वगुण । ३२ प्रामाणिकत्वगुण । ३३ शरणप्रदत्वगुण । ३४ प्रमोदगुण । ३५ प्रतापगुण । ३६ प्रारंभगुण । ३७ परिच्छेदगुण । ३८ संग्रहगुण । ३९ विग्रहगुण । ४० सदाग्रहगुण । ४१ निग्रहगुण । ४२ अनुग्रहगुण । ४३ तुष्टिगुण । ४४ पुष्टिगुण । ४५ प्रीतिगुण। ४६ प्रशंसागुण । ४७ प्रतिष्ठागुण । ४८ स्थैर्यगुण। ४९ धैर्यगुण । ५० शौर्यगुण । ५१ चातुर्यगुण । ५२ बुद्धिगुण । ५३ बल- गुण । ५४ सामर्थ्यगुण । ५५ आक्षेपगुण । ५६ विरोधगुण । ५७ आदर- गुण । ५८ दोपगुण । ५९ विशेषगुण । ६० विनोदगुण । ६१ वृद्धिगुण । पति राज्यानि।

सविवरण-वस्तुरत्नकोशः। ६२ सिद्धिगुण । ६३ कान्तिगुण । ६४ कीर्तिगुण । ६५ विस्फूर्तिगुण । ६६ व्युत्पत्तिगुण । ६७ वात्सल्यगुण । ६८ माङ्गल्यगुण । ६९ महोत्सव- गुण । ७० मन्त्रगुण । ७१ रसिकत्वगुण । ७२ भावकत्वगुण । ७३ गुरुत्व- गुण । ७४ स्मृतिगुण । ७५ शक्तिगुण । ७६ अशक्तिगुण । ७७ युक्तिगुण । ७८ अयुक्तिगुण । ७९ अनुक्रमगुण । ८० अभिमानगुण । ८१ दानगुण । ८२ मानगुण । ८३ कारुण्यगुण । ८४ दाक्षिण्यगुण । ८५ दर्शनगुण । ८६ श्रवणगुण । ८७ घ्राणगुण । ८८ रसनगुण । ८९ मर्यादागुण। ९. मदनगुण । ९१ उदारगुण । ९२ उत्साहगुण । ९३ हर्षगुण । ९४ क्रोधगुण । ९५ लोभगुण । ९६ उत्तमगुणश्चेति । ९) A १ विद्या। २विनय । ३विवेक । ४ विस्तार। ५सदाचार । ६सत्य । ७ शौच । ८सन्मान । ९ संस्थान । १० समाधान । ११ सौख्य । १२ सौजन्य । १३ सौभाग्य । १४ रूपगुण । १५ वरूपगुण । १६ संयोग। १७ वियोग। १८ विभाग। १९ सांगत्य । २० संपूर्णत्व। २१ सोमत्व । २२ सकलत्व । २३ सल. जत्य । २४ प्रसन्नत्व । २५ प्रभुत्व। २६ प्राञ्जलन्य । २७ पालकत्व । २८ पाण्डित्य । २९ प्रणयित्व । ३० प्रमाण । ३१ शरण । ३२ प्रमोद । ३३ प्रसाद । ३४ प्रताप । ३५ प्रारंभ । ३६ प्रभाव । ३७ परिछद । ३८ संग्रह । ३९ सदाग्रह । ४० निग्रह । ४१ विग्रह । ४२ अनुग्रह । ४३ तुष्टि । ४४ पुष्टि । ४५ प्रीति । ४६ प्राप्ति । ४७ प्रशंसा । ४८ प्रतिष्ठा । ४९ प्रतिज्ञा । ५० स्थैर्य । ५१ धैर्य । ५२ शौर्य ५३ चातुर्य । ५४ गांभीर्य । ५५ बुद्धि ५६ बल । ५७ अध्यक्ष । ५८ विरोध ५९ विषय । ६० विशेष । ६१ विनोद । ६२ वृद्धि । ६३ सिद्धि । ६४ कान्ति । ६५ कीर्ति। ६६ विस्फूर्ति । ६७ व्युत्पत्ति । ६८ यात्सल्य । ६९ माङ्गल्य । ७० महो- त्सव । ७१ मन्त्र । ७२ रसिकत्व । ७३ भावकत्व । ७४ गुरुत्व । ७५ स्मृति । ७६ शक्ति। ७७ भुक्ति। ७८ युक्ति। ७९ आसक्ति । ८० अनुक्रम । ८१ अभिमान । ८२दान । ८३ कारुण्य । ८४ दर्शन । ८५ स्पर्शन । ८६ रसन । ८८ घ्राण । ८९ मर्यादा। ९० मंडन । ९१ उदात्त । ९२ उदय । ९३ उत्साह । ९४ उत्तमगुणाः। ९) B१ विद्या । २विनय । ३ विवेक । ४ विजय । ५विस्तार । ६ सदाचार । ७सत्य । ८शौच । ९ सन्मान । १० संस्थान । ११ समाधान । १२ सौख्य । १३ सौजन्य । १४ सौभाग्य । १५रूप। १६ स्वरूप। १७संयोग । १८ वियोग १९विभाग। २० सांगत्य । २१ संपूर्णत्व। २२ सोमत्व । २३सकलत्या २४सल- जत्व। २५ प्रसन्नत्व। २६प्रभुत्व । २७ प्रालित्य । २८ पालकत्व । २९.पाण्डित्य । ३० प्रणयित्व । ३१ प्रमाण । ३२ शरण | ३३ प्रमोद । ३४ प्रसाद । ३५प्रतापा ३६ प्रारंभ। ३७ प्रमाय । ३८ परिछद । ३९ संग्रह । ४० सदानह । ४१ निग्रह। ४२ विग्रह । ४३ अनुग्रह । ४४ तुष्टि । ४५ पुष्टि । ४६ प्रीति । ४७ प्राप्ति । ४८ प्रशंसा । ४९ प्रतिष्ठा । ५० प्रतिक्षा । ५१ स्थैर्य । ५२ धैर्य । ५३ शौर्य । ८७श्रवण।

सविवरण-चस्तुरतकोशः। ५४ चातुर्य । ५५ गांभीर्य । ५६ बुद्धि । ५७ चल । ५८ अघीन । ५९ विरोध । ६० विषय । ६१ विशेष । ६२ बिनोद । ६३ वृद्धि । ६४ सिद्धि । ६५ कान्ति । ६६ कीर्ति। ६७ विस्फूर्ति। ६८ व्युत्पत्ति। ६.यात्सल्य । ७० महोत्सव । ७१ मन्त्र । ७२ रसिकन्य। ७३ भावकत्व। जट गुरुत्य । ७५ स्मृति । ७६ मुनि। ७७ युक्ति । ७८ आसक्ति। ७९ अनुक्रम । ८० अनुराग। ८१ अभिमान। ८२ दान । ८३ काम- पय । ८४दर्शन । ८५ स्पर्शन। ८६ रसन । ८७थयण। ८८घ्राण। ८९ मर्यादा। ९० मण्डन । ९१ उदात्त । ९२ उदय । ९३ उत्साह । ९४ उत्तमगुणाः। ९) D१ वंश । २ विद्या । ३ विनय' । ४ विजय । ५ विवेक। ६ विचार । ७ सदाचार । विस्तार । ९सत्य। १० शौच । ११ सन्मान | १२ समाधान। १३ संस्थान । १४ सौख्य। १५ सौजन्य । १६ सौभाग्य । १७ रूप। १८ स्वरूप । १९ संयोग। २० वियोग । २१ सांगत्य । २२ संपूर्णत्व । २३ सोमत्य । २४ सक- लत्य। २५प्रसन्नत्व। २६ प्रभुत्व। २७ प्राञ्जलत्व। २८ पालकत्व। २९ पाण्डित्य। ३० प्रणयित्य । ३१. प्रसरण । ३२ प्रमोद । ३३ प्रताप 1 ३४ प्रारंभ । ३५प्रभाव। ३६ परिच्छद। ३७ संग्रह । ३८ विग्रह । ३९ अनुग्रह । ४० सदाग्रह । ४१ निग्रह । ४२ तुष्टि । ४३ पुष्टि । ४४ प्रीति । ४५ प्राप्ति । ४६ प्रशंसा । ४७ प्रतिष्ठा । ४८ प्रतिज्ञा । ४९ स्थैर्य । ५० धैर्य । ५१ शौर्य । ५२ गांभीर्य । ५३ यातुर्य । ५४ यशोवंत । ५५ सदोदित । ५६ सर्वसह । ५७ धर्मचर। ५८ बुद्धि। ५९ वल । ६० अध्यक्ष । ६१ निरोध । ६२ विनोद । ६३ वृद्धि । ६४ सिद्धि । ६५ कान्ति । ६६ कीर्ति। ६७ विस्फूर्ति। ६८ व्युत्पत्ति । ६९ वात्सल्य ७० माङ्गल्य । ७१ महो- त्सव । ७२ मन्त्र । ७३ रसिकत्व । ७४ भावकत्य । ७५ गुरुत्य । ७६ स्मृति । ७७ शक्ति । ७८ भक्ति । ७९ युक्ति। ८० अनुराग । ८१ अनुक्रम । ८२ अभिमान। ८३ दान । ८४ कारुण्य । ८५ दाक्षिण्य । ८६ दर्शन । ८७ स्पर्शन । ८८श्रवण। ८९ रसन । ९० प्राण । ९१ मर्यादा । ९२ मण्डन । ९३ उदय । ९४ उदारता। ९५ उत्साह । ९६ उत्तमत्व । गुणाश्चेति । ९) E१ वंश। २ विद्या । ३ विनय । ४ विजय । ५ विवेक । ६ विचार । ७ विस्तार । ८ सदाचार । ९ सत्य । १० शौच । ११ सन्मान । १२ संस्थान । १३ समाधान । २४ सौजन्य । १५ सौख्य । १६ सौभाग्य । १७ सावधान । २८ रूप। १९ स्वरूप । २० संयोग । २१ सांगत्य । २२ विभाग। २३ संपूर्णत्व । २४ स्वजनत्य । २५ प्रसन्नत्य । २६ प्रभुत्व । २७ प्राजलत्व । २८ पालकत्व । २९ पाण्डित्य । ३० प्रणयित्व । ३१ प्रमाणत्व। ३२शरण। ३३ प्रमोद। ३४ प्रताप । ३५ प्रारंभ । ३६ प्रभाव । ३७ परिच्छेद । ३८ संग्रह । ३९ निग्रह । ४० अनुग्रह। ४१ विग्रह । ४२ आग्रह । ४३ पुष्टि । ४४ तुष्टि । ४५ प्रीति । ४६ प्राप्ति । ४७ प्रशंसा । ४८ प्रतिष्टा । ४१ स्थैर्य । ५० धैर्य । ५१ शार्य । ५२ चातुर्य । ५३ गांभीर्य । ५४ बुद्धि । ५५ वल । ५६ आक्षेप । ५७ निरोध । ५८ विषय । ५९ विशेष्य । ६० विनोद । ६. ऋद्धि । ६२ वृद्धि । ६३ सिद्धि । ६४ कान्ति । ६५ कीर्ति। ६६ विस्फूर्ति । ६७वात्सल्य। ६८ माङ्गल्य । ९महोत्सव । ७० मन्त्र। ७१ रसिकत्व । ७२ गुरुत्व । ७३ भावुकत्य। ७ स्मृति । ७५ शक्ति । ७६ भुक्ति। ७७ युक्ति। ७८ मुक्ति ७९ अनुराग। ८०अनुवास ८१ उपकृति। ८२ अभिमान । ८३ दान । ८४ करुणा । ८५ दाक्षिण्य । ८६ दर्शन । ८७ स्पर्शन। ८८ रसन। ८९ श्रवण । ९० श्रावण । ९१ मर्यादा । ९२ मंडण । ९३ घ्राण । ९४ उदय । ९५ ग्रहण। ९६ उदात्त । ९७ उत्साह । ९८ उत्तमत्व । गुणाश्चेति । . ।

सविवरण-यस्तुरतकोशः। १३ F१ घंश । २ विद्या । ३ विजय । ४ विनय । ५ विवेक । ६ विचार! ७ विस्तार । ८ सदाचार । ९ सत्य । १० शौच । ११ सन्मान । १२.संस्थान। १३ समाधान। १४ सौख्य। १५ सौजन्य । १६ सौभाग्य १७ रूप। १८ स्वरूप। १९ संयोग । २० विभाग । २१ संगति । २२ संपूर्ण । २३ सौमत्य । २४ सल- ज्जत्य । २५ सकलत्व । २६ प्रसन्नत्व। २७ प्रासलत्य। २८ प्रागल्भ्य। २९ पालकन्य। ३० पाण्डित्य । ३१ प्रणयत्व । ३२ प्रणाम । ३३ प्रसरण। ३४ प्रमोद । ३५ प्रताप ३६ प्रारंभ,। ३७ प्रभाव । ३८ परिच्छेद ।। ३९ संग्रह। ४० सदाग्रह । ४१ आग्रह । ४२ निग्रह । ४३ विग्रह । ४४ तुष्टि । ४५ पुष्टि । ४६ प्रीति । ४७ प्राप्ति । ४८ प्रशंसा । ४९ प्रतिष्ठा । ५० प्रतिज्ञा । ५१ स्थैर्य । ५२ धैर्य ।। ५३ शौर्य । ५४ चातुर्य । ५५ गांभीर्य । ५६ बुद्धि । ५७ बल । ५८ अधिकांक्षा । ५९ निरोध । ६. विवोध । ६१ वेप । ६२ विशेष । ६३ विनोद । ६४ सिद्धि । ६५ कान्ति । ६६ कीर्ति । ६७ विस्फूर्ति । ६८ व्युत्पत्ति। ६९ वात्सल्य । ७० माइल्य । ७१ मंहो. त्सव । ७२ मन्त्र । ७३ रसिकत्व । ७४ पाचकत्व । ७५ गुरुत्व । ७६ स्मृति । ७७ शक्ति । ७८ मुक्ति। ७९ युक्ति । ८० अशक्ति । ८१ अनुक्रम । ८२ अनुवश। ८३ अनुराग। ८४ अभिमान। ८५वदान्य। ८६ कारुण्य । ८७ दाक्षिण्य । ८८दर्शन । ८९ स्पर्शन । ९० रसन । ९१ श्रवण । ९२ ग्रहण । ९३ मर्यादा । ९४ मण्डन । ९५ उदय । ९६ उदात्त। ९७ उत्साह । ९८ उत्तमत्व । गुणाश्चेति । ९) G१ विद्या । २ विनय । ३ विवेक। ४ विस्तार। ५सदाचार। ६सत्य। ७ शौच । ८ सन्मान । ९संस्थान । १० समाधान । ११ सौख्य। १२ सौजन्य। १३ सौभाग्य। १४ रूपगुण । १५ स्वरूपगुण । १६ संयोग। १७ वियोग । १८ विभाग। १९ सांगत्य । २० संपूर्णत्व। २१ सोमत्व । २२ सकलत्व । २३ सलजत्व । २४ प्रस- नत्य । २५ प्रभुत्व । २६ प्रांजलत्व । २७ पालकत्व । २८ पाण्डित्य। २९ प्रणयित्व । ३० प्रमाण । ३१ शरण । ३२ प्रमोद । ३३ प्रसाद। ३४ प्रताप। ३५ प्रारम्भ। ३६ प्रभाव। ३७ परिच्छन्द। ३८ संग्रह । ३९ सदाग्रह । ४० निग्रह । ४१ विग्रह । ४२ अनुग्रह । ४३ तुष्टि । ४४ पुष्टि । ४५ प्रीति । ४६ प्राप्ति । ४७ प्रशंसा । ४८ प्रतिष्ठा । ४९ प्रतिशा । ५० स्थैर्य । ५१ धैर्य । ५२ शौर्य । ५३ चातुर्य । ५४ गांभीर्य । ५५ बुद्धि । ५६ वल । ५७ अध्यक्ष । ५८ विरोध। ५९ विषय । ६० विशेप । ६१ विनोद। ६२ वृद्धि । ६३ सिद्धि । ६४ कान्ति । ६५ कीर्ति । ६६ विस्फूर्ति । ६७ व्युत्पत्ति । ६८ यात्सल्य । ६९ माङ्गल्य । ७० महोत्संच.। ७१ मन्त्र । ७२ रसिकत्व । ७३ भावकत्व । ७४ गुरुत्य । ७५ स्मृति। ७६ शक्ति। ७७ मुक्ति । ७८ युक्ति । ७९ आसक्ति । ८० अनुक्रम । ८१ अभिमान । ८३ कारुण्य । ८४ दर्शन । ८५ स्पर्शन । ८६ रसन । ८७श्रवण । ८८ घ्राण। ८९ मर्याद । ९० मण्डन । ९१ उदात्त । ९२ उदय । ९३ उत्साह । ९४ उत्तमगुणाः। १० पट्त्रिंशद् राजपात्राणि । १ धर्मपात्रं । २ अर्थपात्रं । ३ कामपात्रं । ४ विनोदपात्रं । ५ विद्या पात्रं । ६ विलासपात्रं । ७ विज्ञानपात्रं । ८ विचारपात्रं । ९ क्रीडापात्रं । १० हास्यपात्रं । ११ शृङ्गारपात्रं । १२ वीरपात्रं । १३ दर्शनपात्रं । १४ सत्पात्रं । ८२ दान।

१४ । सविवरण-वस्तुरतकोशः। १५ देवपात्रं । १६ राजपानं। १७ मानपात्रं । १८ मन्त्रिपात्रं । १९ संधि- पात्रं । २० महत्तमपात्रं । २१ अमात्यपानं । २२ प्रधानपात्रं । २३ अध्यक्ष- पात्रं । २४ सेनापात्रं । २५ नागरपात्रं । २६ पूज्यपानं । २७ मान्यपात्रं । २८ पदस्थपात्रं । २९ देशीपात्रं । ३० राज्ञीपात्रं । ३१ कुलपुत्रिकापात्रं । ३२ पुनर्भूपात्रं । ३३ वेश्यापात्रं । ३४ प्रतिचारिकापात्रं । ३५ गुणपात्रं । ३६ दासीपात्रं । इति । १०) A १ धर्मपात्र । २अर्थपात्र । ३ विनोदपात्र । ४ कामपात्र । ५विलासपात्र । ६ विनानपान । ७ क्रीडापात्र । ८ हास्यपात्र । ९ शृङ्गारपात्र । १०धीरपात्र । ११ देवपात्र । १२ दानवपान। १३ कर्मपान । १४ मंत्रिपात्र । १५ महत्तमपान । १६ अमात्यपात्र। १७ अध्यक्षपान । १८ सेनापालपात्र । १९ नागरपान । २०प्रधा- नपूजापान। २१ मान्यपात्र । २२ राजमान्यपान्न । २३ पदस्थपात्र । २४ देवीपात्र। २५ रानीपात्र । २६ कुलपुत्रिकापान । २७ पुनर्भूपार । २८ देशीपात्र । २९ प्रतिसा. रकपात्र । ३० दासीपार । ३१ देशपात्र । ३२ गुणपात्राणि । १०) B १ धर्मपात्र। २ अर्थपान । ३ विनोदपात्र । ४कामपात्र । ५विलासपात्र ६ विधापात्र । ७ विमानपात्र । ८ क्रीडापार । ९हास्यपात्र । १० हारपान। ११ पीरपाय । १२ देयपात्र । १३ दानवपात्र । १४ कर्मपात्र । १५ मधिपात्र । १६ संधिपाल । १७ महत्तमपान । १८ अमात्यपान । १९ अध्यक्षपात्र । २० सेना- पात्र । २१ सेनापालपात्र । २२ प्रधानपूजापान । २३ मान्यपात्र। २४ राजमान्यपात्र । २५ पदस्थपात्र । २६ देवीपात्र । २७ राशीपात्र । २८ कुलपुत्रिकापात्र । २९ पुनर्भू पात्र । ३० वेश्यापात्र । ३१ प्रतिसारकापात्र । ३२ दासीपार । ३३ देशपात्र । ३४ गुणपात्राणि । १०) १ धर्मपात्र । २ अर्धपात्र । ३ कामपान। ४ विनोदपात्र । ५ यिद्यापात्र । ६ विलासपात्र । ७विज्ञानपात्र । ८ज्ञानपान । ९क्रीडापात्र । १० हास्यपात्र । ११मारपान । १२ धीरपात्र । १३ सेहपात्र ! १४ राजमानपात्र । १५ मंत्रिपात्र । १६ संघिय । १७ महापात्र । १८ गंधपात्र । १९ अध्यक्षपात्र । २० सेनापान । २१ नागरपार। २२ पुष्पपात्रा २३ मान्यपार । २४ पदस्थपात्र। २५ फुतूदलपान । २६ सारिकापात्र । २७ सेपरुपात्र । २८ घेष्टपात्र । १०)E १ धर्मपात्र! २अर्धरात्र। ३ कामपात्र । ४ यिनोदपात्र। ५ बिलासपात्र। ६ विशालपात्र विद्यापार! ८विज्ञानपात्र । ९फ्रीदा। १.दाम्य । ११चार। १२पार। १३ अभिनय। १४ दिय। १५दानय। १६ मानय । २७धपणा १८रपा १५ कम। २०मेह । २. मंत्री । २२ सिदिस्थान । २३ मंधि । २४ महामात्य । २५ अमाय । २६ प्रधान | २७ अपक्ष। २८ मेना ! २९.नगर । ३० पूश्य । ३१ सागरी। २२ मान्य। मारपदम्या ४ गन्यमान्य । ३५ दयी। ३६ रानी। पुनपुत्रिका । ३० पुनर्भू । ३१, पेश्या । १० अभिचारिश । ४१ पासी । ४२ दाम। परिचारिका । ४४२ ४५ गुणपात्रानि । इति । ।

सवियरण यस्तुरनकोशः। १०) F१ धर्मपात्र । २ अर्थपात्र! ३ कामपान । ४ विनोदपान। ५ विद्यापात्र। ६ विशालपात्र । ७ ज्ञानपात्र । ८ विज्ञानपात्र । ९ क्रीडापात्र । १० हास्यपान । ११ शृङ्गारपात्र । १२ वीरपात्र । १३ स्नेहपात्र । १४ राजपात्र । १५ मान्यपान । १६ देवपात्र । १७ दानपान। १८ मानपात्र । १९ कर्मपात्र। २० मंत्रपात्र|२१ संधि- पात्र । २२ अमात्यपात्र । २३ प्रधानपात्र । २४ अक्षरपात्र । २५ सेनापान । २६ नागरपाना २७ पुप्फपात्र। २८ पदच्छेदिपात्र । २९ राशीपात्र। ३० पुनर्भूपात्र । ३१ वेश्यापात्र । ३२ दासीपात्र । ३३ पूज्यपात्र । ३४ अमिचारिकापाप्राणीति । १०)G १ धर्मपात्र । २ अर्थपात्र । ३ विनोदपात्र । ४ कामपात्र । ५विलासपात्र । ६ विज्ञानपात्र । ७क्रीडापात्र । ८ हास्यपान। ९ शृङ्गारपात्र । १० वीरपात्र । ११ देवपात्र । १२ दानवपात्र । १३ कर्मपात्र । १४ मंत्रिपात्र । १५ महत्तमपात्र। १६ अमात्यपात्र। १७ अध्यक्षपात्र । १८ सेनापालपात्र । १९ नागरपात्र । २० प्रधान- पूजापान । २१ मान्यपात्र । २२ राजमान्य । २३ पदस्थपान । २४ देवीपात्र । २५ राशीपान । २६ कुलपुत्रिकापात्र । २७ पुनर्भूपान। २८ वेसापान। २९प्रतिसारका पात्र । ३० दासीपात्र । ३१ देशपात्र । ३२ गुणपाचाणि । ११. पत्रिंशद् राजविनोदाः। १ दर्शनविनोदः । २ श्रवणविनोदः। ३ कृत्रिमविनोदः। ४ गीत- विनोदः। ५ वाद्यविनोदः। ६ नृत्यविनोदः । ७ शुद्धलिखितविनोदः । ८ सख्यविनोदः । ९ वक्तृत्वविनोदः । १० कवित्वविनोदः । ११ शास्त्र- विनोदः। १२ करविनोदः । १३ विबुध्यविनोदः । १४ अक्षरविनोदः । १५ गणितविनोदः। १६ शस्त्रविनोदः। १७ राजविनोदः। १८ तुरगविनोदः।' १९ पक्षिविनोदः । २० आखेटकविनोदः । २१ जलविनोदः । २२ यंत्र- विनोदः । २३ मंत्रविनोदः । २४ महोत्सव विनोदः। २५ फलविनोदः । २६ गणितविनोदः। २७ पठितविनोदः । २८ पत्रविनोदः। २९ पुष्प- विनोदः। ३. कलाविनोदः । ३१ कथाविनोदः। ३२ केशविनोदः । ३३ प्रहेलिकाविनोदः । ३४ चित्रविनोदः । ३५ चलचित्रविनोदः। ३६ स्तवविनोदः। इति । ११) A १ दर्शन । २ श्रवण । ३ गीत । ४ नृत्य । ५ वाघ । मृत्तपाठ। ७ लेख्य । ८ वतृत्व । ९ कवित्ववाद । १० शास्त्र । ११ युद्ध । १२ नियुद्ध । १३ गणित। १४ गज। १५ तुरग। १६ पक्षि। १७ आरोटक। १८ द्यूत। १९जल । २० यंत्र । २१ मंत्र । २२ महोत्सव । २३ पन। २४ फल । २५ पुष्प । २६ कला। २७ कथा । २८ प्रहेलिका । २९ पदार्थकरण । ३० तत्व । ३५ यल। ३२ चित्र । ३३ सूत्र । ६ नृत्य। सविवरण-चस्तुरतकोशः। ११). B १ दर्शन । २ गीत । ३ नृत्य । ४ वृत्त। ५पाठ। ६ लेख्य। ७ कवित्व । ८ शास्त्र । ९युद्ध । १० विनोद । ११ नियुद्ध । १२ वाजिनविनोद । १३ गज । १४ तुरग। १५ पक्षि। १६ आखेटक । १७ धूत । १८ जल। १९ यंत्र । २० महो- त्सव । २१ पत्र । २२ फल । २३ पुप्प। २४ कला। २५ कथा। २६ प्रहेलिका। २७ पदार्थकरण। २८ तत्व । २९ वल। ३०चित्र । ३१ सूचविनोद । ११) C१ गीत । २ वाद्य । ३ लिखित । ४ लेख्य । ५ वक्तव्य । ६ कवित्व । ७शास्त्र। ८ युद्ध । ९ नियुद्ध। १० गज। ११ तुरग। १२ पक्षि। १३ आखेटक । १४ चूत। १५जल। १६ यंत्र। १७ मंत्र । १८ महोत्सव । १९ फल। २० पुष्प । २१ चित्रगुण । २२ कथा। २३ प्रहेलिका। २४ सूत्रविनोदाश्चेति । ११) E १ दर्शनविनोद । २ श्रवण । ३ नृत्य । ४ गीत। ५ वाद्य । ७पाट्या ८ आख्यान। ९ वक्तव्य। १० लेख्य। ११ कवित्व। १२ वाद। १३शास्त्र। १४ शस्त्रशास्त्र। १५ युद्धकार। १६ नियुद्धकार । १७ गणित । १८ गज। १९ तुरग। २० पक्षी। २१ आखेटक । २२ द्यूत । २३ जल । २४ यंत्र। २५ मंत्र । २६ महो. त्सव। २७ पत्र । २८ पुष्प। २१ फल । ३० कला। ३१ कथा। ३२ प्रहेलिका । ३३ पदार्थ। ३४ तत्त्व। ३५ बल । ३६ चित्रसूघ । इति विनोदाः। ११) F१ गीतविनोद । २ वाद्यविनोद । ३ दर्शनविनोद । ४ श्रवणविनोद । ५ नृत्यविनोद । ६ लिखित । ७लेख्य। ८ वकृत्व । ९ कवित्व । १० वादिशास्त्र । ११ युद्ध । १२ नियुद्ध। १३ गणित । १४ गज । १५ तुरग। .१६ पक्षि। १७ आखे. टक। १८ द्यूत । १९ जलक्रीडा। २० यंत्र । २१ मंत्र । २२ महोत्सव। २३ पुष्प। २५ कला । २६ कथा । : २७ प्रहेलिका । २८ पदार्थ । २९ तत्त्व ३० यल। ३१ वित्त । ३२ सूत्र । ३३ खेलन।, ३४ चित्रविनोदश्चेति ।। ११) G १ दर्शनविनोद । २ श्रवणविनोद । ३ गीतविनोद। ४ नृत्य ।' ५ वाद्य । ६ वृत्त। ७ पाठ। ८ लेख्य। ९ वक्तृत्व। १० कवित्व । ११ वादशास्त्रा विनोद । १३ नियुद्ध । १४ गणित १५ गज । १६ तुरग १७ पक्षि । १८ आखटक १९ चूत । २० जल । २१ यंत्र। २२ मंत्र । २३ महोत्सव । २४ पन ।' २५ फल । २६ पुष्प। २७ कला । २८ कथा । २९ ग्रहेलिका । ३० पदार्थकरण ।। ३१ तत्त्व । ३२ बल । ३३ चित्र । ३४ सूत्रविनोद । १२. अष्टादशविधमास्थानम् । । १ मल्ल ।। २ आप्त । ३ हित । ४ स्निग्ध । ५ मंत्रि ।,६ महत्तम । ७ अमात्य ८ बुद्धि । ९ सुख ! १० उभयमुख ! ११, आम्नायिक। १२ देशीपुरुष । १३ धर्मपुरुष । १४ धनपुरुष । १५ धान्यपुरुष । १६ काम्यपुरुप । १७ विज्ञानपुरुष । १८ राजपुरुष । इति । ११) AB १ मल्लस्थानं । २आप्तस्थानं । ३ हितस्थानं । निग्धस्थान । ५मंत्रि। ६महत्तम । ८ वुद्धि । ९मुख । १० अभयमुस । ११ आरामिक । १२ संग्रामिक । १३ आम्नायिक । १४ देशीपुरुष । १५ धर्मपुरप। १६ धनपुरुष । १७ कामपुरुष । १८ राजपुरुष । विद्यानविनोदपात्राणि च । 1AG यिधं स्थानं । - १२ युद्ध । ७ अमात्य ।

। १२ संग्रा- सविवरण-घस्तुरनकोशः। १२).C१ मल्ल ।.२ आप्त। ३ हित । ४ स्निग्ध । ५ महत्तम। ६ अमात्य । ७ प्राधान्य । ८बुद्धिसुख । ९ विवाद । १० उभयसुख । ११ आनाइक । मिक । १३ देशीय । १४ कामिक । १५ विज्ञान । १६ विचारिक। १७ संतोष । १८ प्रशंसा चेति। १२) E १ मल्ल । २ आत। ३ हित । ४ स्निग्ध । ५ मंत्रि । ६ अमात्य । ७ मह- त्तम । ८ बुद्धि । ९ सुख । १० उभयसुख । ११ आम्नायिक। १२ संग्रामिक । १३ देशीपुरुष। १४धर्मपुरुष। १५धनपुरुष। १६ काम । १७ विज्ञान । १८ राज्य। १९ राजमान्य। २० विनोद । इति पात्र आस्थानम् । १२) F १ मल्ल । २ आप्तहित। ३ स्निग्ध। ४ मंत्रि। ५महत्तम । ६अमात्य । ७ प्रधान । ८ बुद्धिमुख । ९ उदयमुख । १० आनायिक । ११ सांग्रामिक। १२ देशीयपुरुष । १३ धर्मपुरुष। १४ अर्थपुरुष। १५ कामपुरुष। १६ ज्ञानपुरुष । १७ विज्ञानपुरुष। १८ राजपुरुपश्चेति । १२)G १ मल्लस्थानं। २ आप्तस्थानं। ३ हितस्थानं । ४ स्निग्धस्थान । ५मंत्रि। ६ महत्तम । ७ अमात्य । ८ बुद्धिसख। ९अभयसख । १० आरामिक । ११ संग्रा- मिक। १२ आम्नायिक। १३ देशीपुरुष । १४ धर्मपुरुष। १५धनपुरुष। १६ काम- पुरुष। १७ राजपुरुष । १८ विज्ञानविनोदपानाणि च । १३. चतस्रो राजविद्याः। १ आन्वीक्षिकी। २ त्रयी। ३ वार्ता । ४ दण्डनीतिश्चेति विद्याः। 1G अथ चतस्रो राजविद्याम् । १३) ABD आन्वीपिकी। E अन्वेपिकी। Fमान्चेपिकी। १४. चतस्रो राजनीतयः। १ साम । २ दान । ३ भेद। ४ दण्ड । इति । 1 E चतन राजनीतयः। १४) सामदानविधिमेदनिग्रहश्चेति । १४) D सामनीति उपप्रदाननीति भेदनीति दंडनीति । १४) F साम दानं मेदः दण्डथेति । १५. पत्रिंशद् आयुधानि । १ चक्र । २ धनुः। ३ वन । ४ खड्ग । ५ क्षुरिका । ६ तोमर । ७ कुंत । ८ शूल । ९ त्रिशूल । १० शक्ति । ११ पाश । १२ अङ्कुश । १३ मुद्गर । १६ मक्षिका । १५ भल्ल । १६ भिंडमाल । १७ मुसुंठि। 1A B E F G पटुर्भिशदंडायुधानि । * ३ सविवरण-वस्तुरनकोशः। १८ लुठि । १९ गदा । २० शंख । २१ परशु । २२ पट्टिस । २३ रिष्टि । २४ कणय। २५ संपन्न । २६ हल। २७ मुशल । २८ पुलिका। २९ कर्तरि । ३० करपत्र । ३१ तरवारि । ३२ कोदाल । ३३. दुस्फोट । ३४ गोफण । ३५ डाह । ३६ डवूस । इति । - १५) AB १ चक। २ धनुप। ३खग । ४ तोमर । ५ कुंत । त्रिशूल । ७ शक्ति । ८ पाश । ९ अंकुश । १०. मुद्गर । ११ मक्षिका । १२ भल्ल । १३ भिडिमाल। १४ मुपंडि । १५ गदा । १६ शक्ति । १७ परशु । १८ पहिसु । १९ कृष्टि । २० फरणक। २१कंपन । २२ हल । २३ मुशल । २४ कुलिका। २५ करपत्र । २६ कर्तरि । २७ कोपूल । २८ तरवारि। २९ दुस्फोट। ३० गोफणि । ३१ डाह । ३२ डवूस । ३३ लुंठि। ३४ दंडशास्त्राणि । १५)C चक। २पाश। ३ चाप। ४ वन्न। ५खग। ६ छुरिका । ७ तोमर। ८ कुंतल । ९शूल । १० शक्ति । ११ अंकुश। १२ मुद्गर । १३ भिंडिमाल । १४ मुपंडी। १५ परिघ। १६ गदा। १७ परशु। १८ पहिश । '१९ इष्टि। २० यष्टि। २१ कणय । २२ कंकण ! २३ हल । २४ मुशल । २५ करपत्र । २६ कर्तरि । २७ कोदाल । २८ डवुस । २९ नाराच । ३० खेटक । ३१ कुठार । ३२ दंड। ३३ पाश। ३४ चर्म। ३५ कुलिश। ३६ दुस्फोट । ३७ डाह ! १५) F १ चक्र । २ धनुप। ३ वज्र। ४ खग। ५छुरिका । '६ तोमर । ७ नाराच। ८ कुंत । ९ शूल । १० शक्ति । ११ पास । १२ मुडु। १३ भल्ल । १४ मक्षिक। १५ भिंडपाल । १६ मुपंडी । १७ लुंठि । १८ दंड । १९ गदा । ,२० फांकु । २१ परशु। २२ पट्टिश। २३ रिए। २४ कणय । २५ फणय। २६ कंपन। २७ हल। २८ मुशल । २९ आगलिका। ३० फर्त्तरि। ३१ करपत्र । ३२ तरवारि।. ३३ कोदाल। ३४ अंकुश। ३५ फरवाल । ३६ दुस्फोट । ३७ गोफिणि । ३८ दाहड। ३९ डमरु । इति । १५) F १ चक्र । २ धनुः। ३ यज । ४ अंकुश। ५खड्ग। ६छुरिक । ७ तोमर। ८ कुन्त । ९ शूल। १०त्रिशूल। ११ शक्तिः। १२ पाश। १३ मुद्गर। १४फुद्दाल। १५ दुस्फोट । १६ गोफण । १७ यन्त्रगोलिका। १८ मसंठि । १९ लुण्ठि । २० गदा । २१ शङ्क। २२ परशु। २३ पट्टिश । २४ रिट। २५ फणाय । २६ कंपन । २७ फर्तरी । २८ हल । २९ मुशल । ३० गुहिलका । ३१ करपत्र । ३२ तरवारि । ३३ डाय। ३४ ढाल । ३५ डस्थूर। ३६ कुठार। ३७ दण्डश्चेति । १५)G १ चका २ धनुप । ३ खन। ४ तोमर। ५ फुन्त । ६ निशूल । ७शक्ति। ८ पास। ९अकक्षा १० मुद्गर । ११ मक्षिका । १२ भल। १३ मिण्डि. माला। १४ मुपण्डि। १५गदा। १६ शक्ति । १७ परशु। १८ पट्टिमु। १९ फष्टि । २० फरणक। २१ फंपन । २२ हल । २३ मुशल । २४ हुलिका । २५ परपन । २६ फत्तरि । २७ कोपूल । २८ तरवारि । २९ दुस्कोट । ३० गोफणि। ३१ डोह। ३२ डयूस । ३३ टुण्टि। ३४ दण्डशस्त्राणि । * सविवरण-वस्तुरनकोशः। १६. सप्तविंशतिः शास्त्राणि । १ शब्दशास्त्र । २ छंदःशास्त्र । ३ अलंकारशास्त्र । ४ काव्यशास्त्र । ५ कथाशास्त्र । ६ नाटकशास्त्र । ७ वाद्यशास्त्र । ८ निर्घट । ९ धर्मशास्त्र । १० अर्थ। ११ काम । १२ मोक्षशास्त्र । १३ वाद। १४ विद्या । १५ वास्तुशास्त्र। १६ विज्ञान । १७ कलाशास्त्र । १८ कृत्यशास्त्र। १९ कल्पशास्त्र। २० शिक्षा। २१ लक्षणशास्त्रा २२ पुराणं । २३ मंत्रशास्त्र । २४ तर्कशास्त्र। २५ गणित। २६ गांधर्व । २७ सिद्धांत- शास्त्र । इति । १६) AB १ शब्दशास्त्र । २ छंदशास्त्र। ३ अलंकारशास्त्र। ४काव्यशास्त्र। ५ कथाशास्त्र। नाट्यशास्त्र। ७नाटकशास्त्र । ८ निघंट। ९धर्म । १० अर्थ। ११ काम। १२ मोक्ष। १३ तर्क। १४ गणित १५ गांध। १६ मंत्र। १७ वैद्यक । १८ वास्तु । १९ विज्ञान । २० विनोद । २१ कृत्य । २२ कला । २३ कल्प। २४ शिक्षा। २५ लक्षण | २६ पुराण। २७ सिद्धांतशास्त्राणि । १६) E१ शब्द । २छंद। ३ अलंकार। ४काव्य । ५काथा। ६ नाट्य। ७नाटका दनिघंट। ९ निर्णय । १० धर्म । ११ अर्थ । १२ काम। १३ मोक्ष । १४ तर्क । १५ गणित । १६ गांधर्व । १७ मंत्र । १८ विद्या । १९ वास्तु । २० विज्ञान। २१ विनोद। २२ नृत्य । १६) F १शब्दशास्त्र । २ छंदशास्त्र । ३ अलंकारशास्त्र। ४ काव्यशास्त्र। ५कया। ६ नाटकशास्त्र । ७ निघण्टु । ८ धर्मशास्त्र । ९ अर्थशास्त्र १० कामशास्त्र। ११ मोक्षशाला १२ तर्कशास्त्र । १३ वाद । १४ चैद्य क । १५ वास्तु। १६ व्याख्यान । १७ गणित । १८ गान्धये । १९ मंत्र । २० विनोद । २१ कला। २२ कल्प। २३ शिक्षा। २४ पुराण। २५ सिद्धान्त । २६ नीतिशास्त्र । २७ वेद । इति शाराणि । १६) G१ शब्दशास्त्र। २ छन्दशास्त्र। ३ अलङ्कारशास्त्र । ४ काव्यशाला ५कथाशाख। नाट्यशास्त्र । ७नाटकशास्त्र। ८निघण्ट। ९धर्म । १० अर्थ। ११ फाम । १२ मोक्ष । १३ तर्क । १४ गणित । १५ गान्धर्य । १६ मंत्र। १७ वैद्यक । १८ वास्तु । १९ विज्ञान २० चिनोद । २१ कृत्य। २२ कला । २३ कल्प। २४ शिक्षा। २५ लक्षण । २६ पुराण । २७ सिद्धान्तशास्त्राणि । 1C gires no Virarans.

२० d सविवरण-वस्तुरत्नकोशः। १७. 'द्विपञ्चाशत् तत्त्वानि । १ पृथ्वी । २ अप । ३ तेज । ४ वायु । ५ आकाश । ६ शब्द । ७ रूप । ८ रस । ९ गंध । १० स्पर्श । ११ रसन । । १२ स्पर्शन । १३ प्राण । १४ चक्षुः । १५ श्रोत्र ।,१६ वाक् । १७ पाणि । १८ पाद । १९ गुद । २० उपस्थ । २१ मन । २२ बुद्धि । २३ अहंकार । २४ प्रकृति । २५ पुरुष । २६ रक्त । २७ मांस । २८ मेद। २९ मज्जा । ३० अस्थि । ३१ शुक्र । ३२ वात ।। ३३ पित्त । ३४ कफ । ३५ मल। ३६ काम । ३७ क्रोध । ३८ लोह । ३९ मात्सर्य । ४० राग । ४१ नियति । ४२ कालविद्या । ४३ शुद्धविद्या । ४४ माया । ४५ शक्ति । ४६ नाद । ४७ बिंदु। ४८ कला। ४९ ज्योतिः । ५. ईश्वर । ५१ श्लेष्म । ५२ सदाशिव । इति । १७) AB १ पृथ्वीतत्त्व । २ अपतत्त्व । ३ तेजस्तत्त्व 1 ४ वायुतत्त्व । ५ आकाशतत्त्वं । ७ स्पर्श । ८ रस । ९रूप । १० गंध। ११ रसन । १२ स्पर्शन। १३ घ्राण। १४ चक्षु । १५श्रोत्र । १६ त्व। १७ पाणि । १८पाद । १९ गुद । २० उपस्थ । २१ मन । २२ बुद्धि । २३ अहंकार । २४ प्रति । २५ पुरुष । २६ विंदु । २७ रक्ता २८ मांस । २९ मेद । ३० अस्थि । ३१ मजा। ३२ शुक्र । ३३ यात 1 ३४ पित्त । ३५ कफ । ३६ मल। ३७ काम । ३८ कोध। ३९ लोभ । ४० मोह। ४१ भय। ४२ मात्सर्य। ४३ राग। ४४ नियति। ४५ कला। ४६ काल- विद्या। ४७ शुद्धविद्या । ४८ माया । ४९ ज्योति । ५० नाद । ५१ शक्ति। ५२ ईश्वर । १७) C १ पृथिवी । २ अप। ३ तेज ! ४ वायु। ५आकाश। ६शब्द। ७ स्पर्श १०गंध । ११ थोत्र। १२ त्वक् । १३ चक्षु । १४ जिता । १५माण । १६ वाक् । १७हस्त । १८ उपस्थ । १९ वायु । २० पाद । २१ मनांसि । २२ बुद्धि । २३ अहंकार। २४ प्रकृति। २५ पुरुप । २६ रक्त । '२७ मांस । २८ मेद । २९ मजा। ३० शुक्र। ३१ अस्थि। ३२ यात। ३३ पित्त । ३४ कफ । ३५ मल । ३६ काम । ३७ शोध । ३८ लोभ । ३९ मोह । ४० मान! ४१ भय । ४२ आश्चर्य। ४३ राग । ४४ नियति। ४५कालविद्या । ४६माया। ४७शक्ति ४८ नाद। ४९ विंदु। ५० फला। ५१ ज्योतिरिति । १७) E १ पृथिवी । २ अप। ३ तेज । ४ यायु। ५आकाश । ६ शब्द । ७ स्पर्श । ८रस । ९ रूप। १० गंध । ११ रसन । १२ स्पर्शन। १३ प्राण । १४ चक्षु । १५धोत्र। १६ त्वा । १७ बुद्धि । १८ अहंकार । १९पाणि । २० गुद। २१पाद । 1A B अय द्विप। . ८रूप । ९रस ।

७१)F पृथ्वी। सचिवरण-वस्तुरतकोशः। २२ प्रकृति। २३ पुरुप । २४ विंदु । २५रक्त । २६ मांस । २७ मेद.। २८ अस्थि । २९ मजा । ३० शुक्र । ३१ वात । ३२ पित्त । ३३ कफ। ३४ मल । ३५ काम । ३६क्रोध । ३७ लोभ। ३८ मोह । - ३९भय । ४०मात्सर्य। ४१ राग ।। ४२ कला। ४३ कालविद्या । ४४ बुद्धि । ४५ शक्ति। ४६ ऐश्वर्य । ४७ माया। ४८.ज्योति । ४९ नाद । ५० शक्ति। ५१ नियति । २ अप् । ३ तेजस्। ४ वायु। ५आकाश । ६शब्द। ७रूप । ८रस । ९स्पर्श १० गन्ध । ११ दर्शन । १२ श्रोत्र । १३ वाक् । १४ पाणि । '१५ पाद । १६ गुद। १७ उपस्थ । १८ मनस् । १९ बुद्धि। २० अहं. कार । २१ प्रकृति । २२ पुरुष । २३ रक्त । २४ मांस । २५ मेद .। २६ मजा । २७ शुक्र । २८ अस्थि २९ बात। ३० पित्त । ३१ कफ। ३२ मल1.३३ काम। ३४ क्रोध। ३५ लोभ। ३६ मोह। ३७ भय । ३८ मात्सर्य। ३९ राग। ४० नियति । ४१ कालविद्या । ४२ युद्ध । ४३ माया । ४४, शक्ति । ४५ नाद । ४६ विन्दु । ४७ ईश्वर । ४८ शिव। ४९ सदाशिवश्चेति । १७) १ पृथ्वीतत्त्व । २ अपतत्त्व । ३ तेजस्तत्त्व । ४ वायुतत्त्व । ५आकाशतत्त्व । ७ स्पर्श । १० गंध। ११ रसन। १२ स्पर्शन। १३ घाण । १४ चक्षुः। १५ श्रोत्र । १६ त्यक्। १७ पाणि। १८ पादं । १९ गुद । २० उपस्थ । २१ मन । २२ बुद्धि । २३ अहङ्कार । २४ प्रकृति । २५ पुरुष । २६ विन्दु । २७ रक्क। २८ मांस । २९ मेद। ३० अस्थि । ३१ मजा। ३२ शुक्रा ३३ वात ३४ पित्त। ३५ कफ। ३६ मल । ३७ काम । ३८ क्रोध। ३९ लोम। ४० मोह । ४१ भय । ४२ मात्सर्य। ४३ राग। ४४ नय । ४५ कला। विद्या । ४७ शुद्धविद्या । ४८ माया । ४९ ज्योतिः । ५० नाद । ५१ शक्ति ५२ ईश्वर। ८रसा ४६ काल- १८. "द्विसप्ततिः कलाः। १ गीतकला। २ वाद्यकला। ३ नृत्यकला । ४ गणितकला। ५ पठितकला । ६ लिखितकला । ७ वक्तृत्वकला । ८ कवित्वकला.। ९ कथाकला । १० वचनकला। ११ नाटककला । १२ व्याकरणकला । १३ छंदःकला । १४ अलंकारकला। १५ दर्शनकला । १६ अभिधान- कला । १७ धातुवादकला । १८ धर्मकला । १९ अर्थकला । २० काम- कला। २१ वादकला। २२ वुद्धिकला। २३ शौचकला। २४ विचारकला। २५ नेपथ्यकला । २६ विलासकला। २७ नीति- कला। २८ शकुनकला। २९ क्रीतकला। ३० विचकला। ३१ संयोगकला। ३२ हस्तलाघवकला। ३३ सूत्रकला। ३४ कुसुम- 1 A B C अध द्वि ।

सविवरण-वस्तुरतकोशः। कला। ३५ इंद्रजालकला। ३६ सूचीकर्मकला। ३७ स्नेहकला। ३८ पानककला। ३९ आहारककला । ४० सौभाग्यकला । ४१ प्रयोग- कला। ४२ मंत्रकला। ४३ वास्तुकला। ४४ वाणिज्यकला। ४५ रनकला। ४६ पात्रकला। ४७ वैद्यकला। ४८ देशकला। ४९ देशभापितकला। ५० विजयकला। ५१ आयुधकला। ५२ युद्ध- कला । ५३ समयकला । ५४ वर्जनकला। ५५ हस्तिकला। ५६ तुरग- कला । ५७ नारीकला । ५८ पक्षिकला। ५९ भूमिकला। ६० लेप- कला । ६१ काष्ठकला । ६२ पुरुपकला । ६३ सैन्यकला । ६४ वृक्ष- कला । ६५ छद्मकला । ६६ हस्तकला । ६७ उत्तरकला । ६८ प्रत्युत्तर- कला । ६९ शरीरकला । ७० सत्त्वकला । ७१ शास्त्रकला । ७२ लक्षण- कला । इति । ५ शौच । १८) A B १ गीतकला । २ नृत्यकला । ३ वाद्यकला। ४ वुद्धिकला। ६ मंत्रकला। ७विचार। ८ वाद। ९ वास्तु। १० नेपथ्य । ११ विनोद। १२ वि- लास । १३ नीति । १४ शकुन । १५ चित्र। १६ संयोग । १७ हस्तलाघव । १८ कुलुम । १९ इंद्रजाल। २० सूचीकर्म । २१ स्नेहपात्र । २२ आहार। २३ सौभाग्य । २४ प्रयोग। २५ गंध । २६ वस्तु । २७ पान । २८ रन । २९ चैद्य । ३० देश- भापित । ३१ विजय । ३२ वाणिज्य । ३३ आयुध । ३४ युद्ध । ३५ नियुद्ध । ३६ समय । ३७ वर्तन । ३८ हस्ति । ३९ तुरग। ४० पक्षि। ४१ पुरुष । ४२ नारी। ४३ भूमिलेप। ४४ काष्ठ। ४५ सैन्य। ४६ वृक्ष । ४७छद्म। '४८प्रस्थ। ४९ उत्तर। ५० शस्त्र । ५१ शास्त्र । ५२ गणित । ५३ पठित । ५४ लिखित ५५ वक्तृत्व । ५६ कथा । ५७ व्यवन । ५८ व्याकरण । ५९ नाटक । ६० छंद । ६१ अलंकार । ६२ दर्शन । ६३ अध्यात्म। ६४ धातु। ६५ धर्म । ६६ अर्थ । ६७ काम । ६८ धूत। ६९ शरीरकलाश्चेति । १८१८१ वाधकला। २ नृत्यकला ! ३गति । ४ पठित । ५ लिखित । लेख्य। ७ वक्तुत्य । ८ वचन । ९ कथा । १० नाटक । ११ व्याकरण । १२ छंद । १३ अलंकार । १४ दर्शन । १५ अभिधान । १६ धातुकर्म । १७ धर्म । २८ अर्थ। १९ काम। २० वाद । २१ वृद्धि। २२ पाचक । २३ मंत्र। २४ विनोद । २५ विचार। २६ नेपथ्य । २७ विलास । २८ नीति । २९ शकुन । ३० क्रीडन । ३१ तंत्र । ३२ संयोग । ३३ हस्तलाघव । ३४ सूत्र । ३५ कुसुम । ३६ चंद्र । ३७ जीव । ३८ स्नेह । ३९ पान । ४० आहार । ४१ विहार । ४२ सौभाग्य । ४३ प्रयोग। ४४ गंध। ४५ वाद। ४६ वस्तु । ४७रना ४८ पात्र । ४९ विद्या । ५०च्यास- कला। ५१ दशा। ५२ विजय । ५३ वणिज । ५४ आयुध । ५५ युद्ध । ५६ सम- यनियुद्ध । ५७ वृद्धन । ५८ वर्तन । ५९ हस्ति । ६० तुरग। ६१ पक्षि। नारि।

सविवरण-यस्तुरत्नकोशः। २३ ६३ भूमि। ६४ लेपन। ६५ दंत । ६६ काष्ठ। ६७ इष्टिका। ६८ पाषाण । ६९ उत्तर। ७० प्रत्युत्तर। ७१ सूचीकर्म। ७२ शरीरशस्त्रकलाश्चेति । १८)- १ गीत । २ नृत्य । ३ वाद्य । ४ गणित । ५ पठित । ६ लिखित । ७ वक्तृत्व । ८ कवित्व। ९ काव्य ।. १० वाचकत्व । ११ नाद । १२ व्याकरण । १३ छंद । १४ अलंकार। १५ दर्शन । १६ अभिधान । १७ धातुवाद । १८ बुद्धि । १९ शौच । २० विचार। २१ नेपथ्य। २२ विलास। २३ नीति। २४ शकुन । २५ फीतविक्रय । २६ संयोग। २७ हस्तलाधव । २८ सूच। २९ कुसुम। ३० इंद्रजाल । ३१ सूचिकर्म । ३२ स्नेहपान । ३३ आहार। ३४ सौभाग्य । ३५ प्रयोग। ३६ गंध। ३७ वस्तु ।। ३८ रत्न । ३९ पात्र । ४० वैद्य । ४१ देशभापित। ४२ देशविजय ।। ४३ वाणिज्य । ४४ आयुध । ४५ युद्ध । ४६ समय । ४७ वर्तन । ४८ हस्ती । ४१ तुरग।' ५० पुरुष। ५१ नारी। ५२ पक्षी। ५३ भूमि। ५४ लेप। ५५ काष्ठ। ५६ सैन्य । ५७ वृक्ष । ५८ छद्म । ५९ हस्त। ६० उत्तर। ६१ प्रत्युत्तर। ६२ शैल। ६३ शारीर। ६४ शास्त्रकला चेति । १८) F१ लिखित । २ गणित । ३ गीत। ४ वाद्य । ५ नृत्य । ६ पटित। ७ वक्तृत्व । ८ कवित्व । १ कथा। १० विनोद। ११ वचन । १२ नाटक। १३ व्याकरण | १४ छन्दस् । १५ अलंकार। १६ दर्शन। १७ अभिधान। १८ धातुबाद। १९धर्मवाद । २० अर्थवाद । २१ कामवाद । २२ वुद्धि। २३ शौच । २४ मन्त्रा २५ विचार। २६ नेपथ्य। २७ विलास । २८ स्वस्थकर्म। २९ नीति । ३० शकुन । ३१ क्रीडन । ३२. चिन। ३३ लोहकर्म। ३४ काष्ठकम। ३५ दन्तकर्म। ३६ चर्मकर्म। ३७ संयोग। ३८ हस्तलाघव । ३९ कुसुम । ४० इन्द्रजाल। ४१ स्नेहपान | ४२ आहार । ४३ विहार । ४४ सौभाग्य । ४५ प्रयोग। ४६ गंध। ४७ वाद। ४९ रन । ५० पाना ५१ चैद्य । ५२ देशभापा। ५३ विजय। ५४ वाणिज्य । ५५ आयुध । ५६ युद्धसमय । ५७ हस्तिपरीक्षा। ५८ अश्वपरीक्षा। ५९ नरपरीक्षा। ६० नारीपरीक्षा। ६१ रत्नपरीक्षा। ६२ पक्षिपरीक्षा। ६३ भूमिपरीक्षा । ६४ इएकम। ६५ पापाणकर्म । ६६ उत्तर । ६७ प्रत्युत्तर। ६८ वृक्ष । ६९ छन । ७०शास्त्र। ७१ चोरग्रहण । ७२ कागडाजय। १८)G १ गीतकला। २नृत्यकला। ३चाधकला। ४बुद्धिकला। ५शौचकला। ६मंत्रकला । ७ विचारकला। ८ वाद। ९यास्तु। १० नेपथ्य । ११ विनोद १२ विलास। १३ नीति। १४ शकुन । १५ चित्र। १६ संयोग। १७ हस्त । १८ लाघव । १९ कुमुम। २० इन्द्रजाल । २१. सूचीकर्म । २२ स्नेह । २३ पान। २४ आहार। २५ सौभाग्य। २६ प्रयोग। २७ गंध। २८ वस्तु । २९ पान। ३० रन। ३१ वैद्य। ३२ देश। ३३ विजय। ३४वाणिज्य। ३५ आयुध। ३६ युद्ध । ३७ नियुद्ध । ३८ समय। ३९ वर्तन । ४० हस्ति । ४१ तुरग। ४२ पक्षि। ४३ पुरुष। ४४ नारी। ४५ भूमि। ४६ लेप । १७ काठ। ४८ सन्य। ४९ वृक्ष । ५१ प्रस्थ । ५२ उत्तर । ५३ शस्त्र । ५४ शास्त्र । ५५ गणित । ५६ पठित। ५७ लिखित । ५८ वक्तृत्व । ५१ फया। ६० व्यवन । ६१ ध्याकरण । ६२ नाटक। ६३ छन्द। ६४ अलंकार। ६५ दर्शन । ६६ अध्यात्मा ६७ घातु। ६८ धर्म। ६१ अर्थ । ७० काम। ७१ धून । ७२ शरीरकलाश्चेति । . ४८ वास्तु।

-- " - - २४ सविवरण-वस्तुरनकोशः। । १९. चतुरशीतिर्विज्ञानानि । १ हेतुविज्ञानं । २ तत्त्वविज्ञानं । ३ मोहविज्ञानं । ४ कर्मविज्ञानं । ५ धर्मविज्ञानं । । ६ लक्ष्मीविज्ञानं ।, ७ योगविज्ञानं । ८ देवविज्ञानं । ९ शंखविज्ञानं ।' १० दंतविज्ञानं । ११ काचविज्ञानं। १२ गुटिका- विज्ञानं । १३ रसायन विज्ञानं ।। १४ वचनविज्ञानं । १५ कवित्व- विज्ञानं । १६ गुरुत्वविज्ञानं ।। १७ पारंपर्यविज्ञानं । १८ ज्योतिष्क- विज्ञानं । १९ वैद्यकविज्ञानं । २० मेघविज्ञान । २१ यंत्रविज्ञानं । २२ मंत्रविज्ञानं । २३ मर्दनविज्ञानं । २४ नेपथ्यविज्ञानं । २५ मस्तक- विज्ञानं । २६ इष्टिविज्ञानं । २७ लेपविज्ञानं । २८ सूत्रविज्ञानं । २९ चित्रकर्मविज्ञानं । ३० रंगविज्ञानं । ३१ शूचिकर्मविज्ञानं । ३२ शकुन विज्ञानं । ३३ छद्मविज्ञानं । ३४ गंधयुक्तिविज्ञानं । ३५ आराम- विज्ञानं । ३६ शैलविज्ञानं । ३७ काव्यविज्ञानं । ३८ कांस्यविज्ञानं । ३९ काष्ठविज्ञानं । ४० कुंभविज्ञानं। ४१ लोहविज्ञानं । ४२ पत्रविज्ञानं । ४३ वंशविज्ञानं । ४४ नखविज्ञानं । ४५ तृणविज्ञानं । ४६ प्रासाद- विज्ञानं । ४७ धातुविज्ञानं । ४८ विभूषणविज्ञानं । ४९ स्वरोदय- विज्ञानं । ५० द्यूतविज्ञानं । ५१ अध्यात्मविज्ञानं । ५२ अग्निविज्ञानं । ५३ विद्वेपणविज्ञानं । ५४ उच्चाटनविज्ञानं । ५५ स्तंभनविज्ञानं । ५६ वशीकरणविज्ञानं। ५७ वस्तुविज्ञानं । ५८ स्वयंभूविज्ञानं । ५९ हस्ति- शिक्षाविज्ञानं । ६० अश्वविज्ञानं । ६१ पक्षिविज्ञानं । ६२ स्त्रीकाम- विज्ञानं । ६३ चक्रविज्ञानं । ६४ वस्त्राकारविज्ञानं । ६५ पशुपाल- विज्ञानं । ६६ कृषिविज्ञानं । ६७ वाणिज्यविज्ञानं । ६८ लक्षण- ६९ कालविज्ञानं । ७. शस्त्रबंधविज्ञानं । ७१ शुद्धकर- विज्ञानं । ७२ विशुद्धकरविज्ञानं । ७३ आखेटकविज्ञानं । ७४ कौतूहल- विज्ञानं । ७५ कोशविज्ञानं । ७६ पुष्पविज्ञानं । ७७ इंद्रजालविज्ञानं । विज्ञानं । 1A B F G अथ चतु।

२५ सविवरण-वस्तुरतकोशः। ७८ पानविधिविज्ञानं । ७९ अशनविधिविज्ञानं । ८. विनोदविज्ञानं । ८१ सौभाग्य-विज्ञानं । ८२ शौचविज्ञानं । ८३ विनयविज्ञानं । ८४ नीतिविज्ञानं । इति । १९) A१ हेतुविज्ञान। २ तत्त्वविज्ञान ! ३ मोहनविभान । ४ कर्मविज्ञान । ५धर्मविज्ञान । ६मर्मविज्ञान। शंखविधान । ८ दंतविज्ञान । ९ काच। १० गुटिका । ११ योग । १२ रसायन। १३ वचन। १४ कवित्व। १५ नेपथ्य । १६ मंत्र। १७ तंत्र। १८ मर्दन । १९ पत्रका २० वृष्टिक । २१ लेपकर्म। २२ सूत्र। २३ चित्र। २४ रंग। २५ सूचीकर्म । २६ शकुन । २७ छद्म । २८ निर्माल्य । २९ गंधयुक्ति । ३० आसन। ३१ शील। ३२ काष्ठकर्म। ३३ कुंभ। ३४ लोह। ३५ यंत्र । ३६ वंश । ३७ नत्र। ३८ तुण। ३९ प्रसाद। ४० धातु। ४१ विभूपण। ४२ स्वरोदय । ४३ चूत। १४ अध्यात्म। ४५ अग्नि । ४६जल । ४७ विद्वेषण । ४८ उच्चाटन। ४९ स्तंभन । ५० वशीकरण। ५१ हस्तिशिक्षा। ५२ अश्व। ५३ पक्षि। ५४ स्त्रीकाम। ५५ रत्न । ५६ वस्त्राकार । ५७ पाशुपाल्य । ५८ कपि । ५९ वाणिज्य। ६० लक्षण | ६१ काल। ६३ शस्त्रबंध । ६४ आयुधकार । ६५ नियुद्धकार । ६६ आसेटक। ६७ कुतूहल । ६८ कोश। ६९ पुष्प। ७० इंद्रजाल ! ७१ पान विधि । ७२ अशन । ७३ विनोद। ७४ सौजन्य। ७५ सौभाग्य । ७६शौच । ७७ विनय। ७८ नीति । ७२ आयु। ८० बाद । ८१ व्यापार। ८२ धारण । इति विज्ञानानि । १९) B १ हेतुविज्ञान। २ तत्त्वविज्ञान । ३ मोहन। ४ कर्म। ५धर्म। दमर्म । ७ शंख। ८ दंत । ९काच । १० गुटिका । ११ योग। १२ रसायन। १३ वचन । १४ कवित्व। १५ नेपथ्य। १६ मंत्र। १७ मर्दन । १८ पत्रक। १९ वृष्टिक। २० लेपकर्म। २१ सूत्र । २२ चित्र। २३ रंग। २४ सूचीकर्म। २५ शकुन । २६ छन। २७ नैर्मल्य । २८ गंधयुक्ति। २९ आसन। ३० शील। ३१ काष्टकर्म । ३२ कुंभ। ३३ लोह। ३४ यंत्र। ३५ चंश। ३६ नख। ३७ तृण । ३८ प्रसाद । ३९ धातु। ४० विभूपण। ४१ स्वरोदय । ४२ धूत । ४३ अध्यात्म । ४४ अग्नि। ४५ जल। ४६ विद्वेषण । ४७ उचाटन। १८ स्तंभन । ४९ वशीकरण । ५० हस्ति- शिक्षा। ५१ अश्वा ५२ पक्षि। ५३ स्त्रीकाम। ५५ यत्राकार। ५६ पाशुपाल्य। ५७ कृपि। ५८ वाणिज्य । ५९ लक्षण । ६० काल। ६१ शास्त्र। ६२शत्रबंध। ६३ आयुधकार। ६४ नियुद्धकार । ६५ आरोटक। ६६ कुतूहल ६७ कोश। ६८ पुष्प । ६९ इंद्रजाल। ७० पानविधि। ७१ अशन । ७२ विनोद ७३ सौजन्य। ७४ सौभाग्य । ७५ शौच। ७६ विनय । ७७ नीति । ७८ आयुर्वेद ७२ व्यापार। ८० धारण । इति विज्ञानानि । १९) ८१ हेतुविशान । २तत्वविज्ञान । ३ मोहविज्ञान । ४ कर्मविनान। ५शंसविधान । ६ काचविज्ञान । ७ गुटिकाविज्ञान । ८ योगविज्ञान । ९रसायनविज्ञान । १०वचन- विज्ञान। ११ कवित्वविज्ञान ! १२ नेपथ्यविज्ञान। १३ मंत्रविमान। १४ तंमा १५मर्दन। १६ क्षेत्रका १७ इष्टिका। १८ लेपन। १९ मूत्र। २० मांति। २२ सूचि । * after नीतिविज्ञानं we and आयुर्विज्ञानं । चादविमानं । व्यापारविज्ञानं । and धारणविज्ञानं चेति । ४ २६ सविवरण-वस्तुरनकोशः। २२ शकुन । २३ छन। २४ नैर्मल्य। २५ गंधयुक्ति। २६ आराम। २७ शैल। २८ काव्य। २९ कांस्य। ३० रौप्य। ३१ कांचन। ३२ काष्ट । ३३ लोह। ३४ पत्र । ३५घंश। ३६ नख। ३७ दशन । ३८ तृण। ३९ प्रसाद। ४० धातु। ४१ भूपण । ४२ स्वरोदय। ४३ द्यूत । ४४ अध्यात्म। ४५ अग्नि । ४६जल। ४७ विद्वेपण। ४८ उच्चाटन। ४९ स्तंभन । ५० मोहन । ५१ वशीकरण। ५२ संदीपन। ५३ स्वयंभू। ५४ हस्तिशिक्षा। ५५ अश्वशिक्षा। ५६ पक्षि। ५७ स्त्रीकाम । ५८ चरित्र। ५९ वज्र- कर। ६० पशुपालन । ६१ कृपि। ६२ वाणिज्य । ६३ लक्षण। ६४काल। ६५ पान। ६६शस्त्रबंध। ६७ नियुधकरण। ६८ आखेटक। ६९ कुतूहला ७० कोश। ७१ पुप्प। ७२ इंद्रजाल । ७३ विनोद । ७४ सोभाग्य । ७५ वस्त्र। ७६ शौच । ७७ आयुरिति । १९) E१ हेतुविज्ञानं । २तत्त्या ३ मोहन। ४ धर्मविज्ञान। ५ कर्मविज्ञान। ६मर्म। ७ लक्ष्मी। ८संयोग। ९ शंख । १० दंत । ११ काक । १२ गुटिका ! १३ योग। १४ रसायन। १५ वचन। १६ कवित्व। १७ यंत्र। १८ मंत्र। १९ मर्दन। २० तंत्र। २१ नेपथ्य। २२ खचित । २३ इष्टिका। २४ लेख्य। २५ सूत्र । २६ चित्रकर्म । २७ शकुन । २८ रंगकर्म । २९ सूचीकर्म । ३० छन्न । ३१ कर्मकार। ३२ नेर्माल्य। ३३ गंधयुक्ति। ३४ आराम। ३५शील। ३६ कांस्य। ३७ काष्ठ। ३८ कुंभ। ३९ लोहपात्र । ४० विश। ४१ नख । ४२ दशन। ४३ तृण । ४४ वशी. करण। ४५ भूतकर्पणं । ४६ वस्तु। ४७ स्वयंभू । ४८ हस्ती। ४९ शिक्षा। ५० पक्षी। ५१ हस्तीकाम । ५२ अश्वशिक्षा । ५३ रन। ५४ वस्त्रकार। ५५चक। ५६ वज्राकार । ५७ पशुपाल । ५८ कृपि । ५९ वाणिज्य। ६० लक्षण । ६१ काल । ६२ पानविधि। ६३ अशनविधि। ६४ प्रसाद । ६५ धातु।। ६६ विभूषण । ६७ स्वरोदय। ६८ धृत। ६९ अध्यात्म | ७० अग्निविशेषणं । ७१. उच्चाटनं। ७२ स्तंभन । ७३ मोहनं। ७४ वंश। ७५ बंध। ७६ नियुद्धकार । ७७ आखेट। ७८ काकु। ८० कोश। ८१ पुष्पा ८२ इंद्रजाल। ८३ विनोद । सौभाग्य। ८५प्रयोग। ८६ शौच। ८७शाननय । ८८ प्रीति। ८९ आयुः। ९० याद। ९१ व्यापार ९२ धारणं । ९३ आयुर्वेदाश्चेति ।, १९) F१हेतुविशान । २धर्मविज्ञान । ३ चर्मविज्ञान। ४ कर्मविज्ञान । ५ लक्ष्मीयोग। ६शहकर्म । ७ दन्तमं । ८ काप्टकम । ९गुटिका। १० रसायन। ११ वचन। १२ कवित्व। १३ यम। १४मंत्र। १५तंत्र । १६मर्दन। १७ नैपथ्य। १८ सूतिका । १९इष्ट। २० लेश्य । २१ सूत्र। २२चित्रकर्म । २३ रंगकर्म। २४ सूचीकर्म । २५शाकुनि। २६ छमकर। २७ कर्मकर। २८ नेमल्य। २९ गंधयुक्ति। ३० आराम । ३१ शैल। ३२ कान्य । ३३ कांस्य । ३४ काष्ठ। ३५ कुंभकर्म । ३६ लोहकर्म। ३७ उपदंश। ३८ पर। ३९ अंश। ४० नस। ४१ दशन । ४२ सृण। ४३प्रासाद । ४४ धातु। ४५विभूषण। ४६ स्वरोदय। ४७धूत । ४८ अध्यात्म । ४९ अस्थिस्तम्भ।, ५० जलस्लम्म। ५१ विद्वेषण। ५२ उच्चाटन । ५३ स्तम्भन । ५४ मोहन । ५५ यशीकरण । ५६ यस्तु । ५७ गजशिक्षा। ५८ अभ्यशिक्षा। ५९ पक्षिशिक्षा । ६० रक्षाकर्म । ६१ पसफर्म। ६२ यन्त्रकर्म। ६३ पशुपाल्य । ६४ एपि। ६५ धाणिज्य । ६६ लक्षण । ६७कला। ६८ पानविधि। ६९ अदानविधि। ७० अरबंध। १ नियुद्धफरण। ७२ आरोटका ७३ पुतूहल । ७४ पुष्पा ५न्दजाल। ७६ विनोद। ७ सीमाम्य. ७९ कुतूहल ।

! सविवरण-पस्तुरत्नकोशः। कारण। ७८ प्रयोग। ७२ शौच । ८०मान। ८१ विनय । ८२ नीति। ८३ आयु । ८४ प्रीति। ८५ व्यापार। ८६ धारणविज्ञान । १९) G१ हेतुविज्ञान। २ तत्वविज्ञान। ३ मोहन । ४ कर्म। ५धर्म। ६मर्म । ७शङ्ख । ८ दंत। ९काच । १० गुटिका। ११ योग। १२ रसायन । १३ वचन । १४ कवित्व । १५ नेपथ्य। १६मंत्र। १७ तंत्र। १८ मर्दन। १९ पत्रक। २० वृष्टिक । २१ लेपकर्म । २२ सूत्र ।। २३ चित्र । २४ रङ्ग । २५ सूचीकर्म । २६ शकुन। २७ छद्म। २८ नैर्मल्य। २९ गंध। ३० युक्ति। ३१ आसन। ३२ शील। ३३ काष्ठ- फर्म। ३४ कुंम। ३५ लोह। ३६यंत्र। ३७ पंश। ३८ नख । ३९ तृण। ४० प्रसाद । ४१ धातु । ४२ विभूषण । ४३ स्वरोदय । ४४ चूत। ४५ अध्यात्म। ४६ अग्नि १७जल। ४८ विद्वेषण। ४९ उचाटन। ५० वशीकरण। ५१ हस्तिशिक्षा। ५२ अश्व । ५३ पक्षि। ५४ स्त्री। ५५ काम। ५६ रन । ५७ वस्त्रकार। ५८ पाशु- पाल्य 1 ५९ कृपि। ६० वाणिज्य । ६१ लक्षण। ६२ काला ६३ शास्त्री ६४ शस्त्रवन्ध। ६५ आयुधकार । ६६ नियुद्धकार। ६७ आखेटक। ६८ कुतूहल । ६९ केश। ७० पुप्प। ७१ इन्द्रजाल । ७२ पानविधि। ७३ अशन। ७४ विनोद। ७५ सौजन्य। ७६ सौभाग्य । ७७ शौच। ७८ विनय । ७९ नीति। ८० आयु। ८१ वाद। ८२ व्यापार। ८३ धारणा। इति विज्ञानानि । २०. चतुरशीतिर्देशाः। पूर्वदेशाः-१ अंजनदेशः। २ गौडदेशः। ३ कान्यकुब्जदेशः। कलिंगदेशः। ५ अंगदेशः। ६ बंगदेशः। ७ कुरंगदेशः। ८ गोलादेशः। ९ राढ्यदेशः। १० बरेन्द्रदेशः। ११ यामुनदेशः । १२ गंगापारदेशः। १३ अंतर्वेदिदेशः। १४ मागधदेशः । मध्यदेशाः-१ कुरुदेशः। २ डालदेशः। ३ कामरूपदेशः। ४ कामाक्षदेशः। ५ उंड्रदेशः। ६ पुंड्रदेशः। ७ उड्डीसदेशः। ८ अग्निमुखदेशः। ९पंचालदेशः। १० सूरसेनदेशः। ११ जालंघरदेशः। १२ लोहितपाददेशः। पश्चिमस्थलदेशाः-१ कच्छदेशः। २ वालंभदेशः । ३ सौराष्ट्रदेशः । ४ कोंकणदेशः। ५ लाटदेशः । ६ मालवदेशः । ७ अवंतीदेशः। ८ श्रीमालदेशः। ९ अर्बुददेशः। १० मेदपाटदेशः । ११ मरुदेशः। १२ कंबोजदेशः । १३ पारियात्रदेशः । १४ लोहपुरदेशः। 1 Bइति चतुराशीति, C अथ चतुराशीति देशा, D चतुर्देशाः ।

२८ संविवरण-वस्तुरतकोशः। १५ सेरटकदेशः । १६ तामलिप्तदेशः । १७ किरातदेशः । १८ सौवीरदेशः। १९ वोकाणदेशः। उत्तरापथदेशाः-१ गूर्जरदेशः। २ सिंधुदेशः। ३ केकाणदेशः। ४ नेपालदेशः। ५ टाकदेशः । ६ तुरुप्कदेशः। ७ ताईकारदेशः। ८ बर्बरदेशः। ९ कीरदेशः। १० खसदेशः। ११ काश्मीरदेशः। १२ हिमालयदेशः। १३ श्रीराष्ट्रदेशः। १४ वज्रलदेशः। दक्षिणापथदेशाः-१ सिंहलदेशः। २ चउडदेशः। ३ कोरलदेशः । ४ पांडुदेशः। ५ आन्ध्रदेशः। ६ विध्यदेशः। ७ कर्णाटदेशः। ८ द्रविडदेशः। ९ श्रीपर्वतदेशः। १० विदर्भदेशः। ११ धाराधरदेशः। १२ कांजीदेशः । १३ तापीतटदेशः । १४ महाराष्ट्रदेशः। १५ आभीरदेशः । १६ नर्मदातटदेशः । १७ मलयदेशः। १८ वराटदेशः। १९ उरलदेशः। २०) A पूर्वदेशाः-१ अंगदेश। २वंगदेश। ३ गौडदेश। ४ कन्यकुज। ५फलिङ्ग । ६ गोष्ठ। ७ अंग। ८ बंगाल। ९ कुरंग। १० राठ। ११ वारंध्री। .१२ यामुन । १३ सरयूपार । १४ अंतर्वेद ! १५ मगध । मध्यदेशाः- १ पुरु। २ डाहल ! ३ कामरू । ४ उड़। ५पंचाल । ६ सौरसेन ! ७ जालंधर। ८लोहपाद । पश्चिमस्थल-- १ वालंभ। २ सौराष्ट्र। ३ कुंकुण । ४ लाट । ५श्रीमाल । ६ अर्बुद । ७ मेदपाट । ८ कच्छ । ९मालय। १० अयंती। ११ पारियान । १२ संयोज। १३ तामलित। १४ किरात। १५सेरटक। १६ सौवीर। १७मीकाण। उत्तरापथ-१ गूर्जर । . २ सिंधु । ३ केकाण। ४ नेपाल। ५ तुरका ६ ताजिक। ७ वर्वर। ८ खसकीर। ९ काश्मीर। १० यजला ११ हिमालय। १२ लोहपुर। १३ श्रीराष्ट्र! दक्षिणापथ-१मलय। २.सीघल। ३ पांड। ४कोरला ५अंध्र। ६विंध्य । ७ कर्णाट । ८ द्रविड । ९ श्रीपर्वत । १० चैदर्भ। ११ विराट। १२ उरल । १३ तापीतट । १४ महाराष्ट्र १५ आभीर। १६ नार्मद । १७ कामाक्ष । १८ कंड। १९ पापांतिका। २० चौड । २१ आरादर। २२ घरेंद्र । २३ गंगापार। २४ सोसप । २५ कांती। २६ नागणिक। २७ दीपदेशाधेति । २०) B पूर्षदिशि देशा:- १ अंगदेशः। २घंगदेशः। ३गोडदेशः। ४ कन्यकुब्ज । ५ फलिका गोए। ७ यहाल। ८ फुरंग। ९ सरठ। १०पारंदी। ११ यामुन । १२ मरयपार । १३ अंतर्वेद । १४ मगध। मध्यदेशाः-१ फुरु। २ दादला ५ पंचाल। ६ सीरसेन। ७ जालंधर। ८ लोदपाद। पधिमस्पल-१ पालम। २ सौराष्ट्र। ३ फुफुण । ५ धीमाल। ६ अयुद। ७ मेवपाट । ९ फच्छा १०मालय। ११ अयंती। ३ फामरू। ४ उड। ४ लाट। ८मय।

सविवरण-वस्तुरनकोशः। १२ पारियान । १३ कंवोज । १४ तामलिप्त । १५ किरात । १६ सेरटक । “१७ सौवीर। १८ वोकाण। उत्तरापथ-१ गुर्जर। २ सिंधु। ३ केकाण। ४, नेपाल। ५ तुरक। ६ ताजिक। ७ वर्वर। ८ खसकीर। ९ काश्मीर। १० वज्रल। ११ हिमालय । १२ लोहपुर। १३ श्रीराक्ष। दक्षिणापथ-मलय । २ सीधल । ३ पांड। ४ कोरल। ५ अंध्र। ६विध्य। ७ कर्णाट। ८ द्रविड । ९श्रीपर्वत। १० चैदर्भ। १. विराट। १२ उरला १३ कांजी। १४ तापीतट। १५ महाराष्ट्र १६ आभीर। १७ नामर्द। १८ कामाक्ष । १९ कंडु । २० पापांतिका। २१ चौड़। २२ आराढ्य । २३ वरेंद्र । २४ गंगापार। २५ सौसप। २६ कांती। २७ नागणिक । २८ द्वीपदेशाश्चेति। २०) १ कुरंग। २ बंगाल । ३ आराध्य । ४ वरणेंद्र । ५ यामन । ६गंगापार । ७ अंतर्वेध। ८मागधा मध्य-१ कुरू। २ डाहल । ३कामरू। ४ पुंद्रका ५पंचाल। ६ अग्नि। ७ कास। ८ सूरसेन । ९जालंधर। १० लोहितपाद। अथ पश्चिमायां दिशि-१ काछल । २ वालंभ। ३ सौराष्ट्र। ४ कुंकण । ५ लाड । ६ श्रीमाल। ७ अर्बुद । ८ मेदपाट । १० मावल। ११ अवंति। १२ नागणित । १३ किरात । १४ शकट । १५ सौवीर । १६ वोकाण। उत्तरपंथे- १ गुर्जर। २ सिंधु। ३ केकाण | ४ नेपाल। ५ तुरुष्क। ६ तायक । ७वध्यर। ८यजूर। ९कीर। कश्मीर। ११ हिमालय । १२ लोहपुर । १३ श्रीराज्य। दक्षिणदिशि-१ पांडु। २ कौरल। ३पाडल। ४ अद्रा ५ वंध्य । ६ कर्कट। ७ द्राविड। ८ श्रीपर्वत । ९तंद्रभद्र । १० धरानंग। ११ उरल। १२ जीमूत। १३ मुलतान । १४ तापीतट। १५ महातट। १६ महाराष्ट्र १७ आभीर। १८ नर्मदातट। १९ कामाक्षा| २० हूणदेश। २१ कलिंग। २२ मद्र। २३ सुमंत- देश। २४ द्वीपश्चेति। २०) पूर्वदिशि-१ गौड । २ कन्यकुब्जा ३ कलिंग। ४ गोल। ५चंग। ६ कुरंग। ७ बंगाल। ८आरार। ९ वरेंद्र। १० यामन। ११ गंगापार। १२ अंतर्वेध। १३ मगध। मध्य देश-१ कुरुदेश । २धाहला ३ कामरूप। ४ यंत् । ५ पुंढ। ६चोड। ७मालवा ८ आग्नि। ९पंन्त्राला १० सूरसेन । ११ जालंधर। १२ लोहितपाद। पश्चिम-१काच्छल । २चालंभ। ३ सौराष्ट्र। ४ कुंकण । ५श्रीमाल। ६ अर्बुद । ७ मेदपाट । ८मारु। ९मच्छ। १०मालयु । ११ पारियात्र। १२ कंबोज । १३ तामलित । १४ अयंती। १५ नागाणित । १६ किरात। १७ शकुंत। १८ सौवीर। १९ कुंकण। २० योकाण। उत्तर-१ गूजराति । २ सिंधु। ३ नेपाल। ४ गुर्जर । ५ भोट । ६ टाक। ७ तुरष्क। ८ तायक। ९यवर। १० वूसर। ११ कास्मीर। १२ वजुर। १३ हिमालय । १४ लोहपुर । १५श्रीकाष्ठ। १६ स्त्रीराज्य । दक्षिण-१मालय। २ शिधल। ३ फौरिल। ४पाडल। ५ अंध्र। ६ विच्य। ७ कर्णाद। ८ द्राविड । ९धीपर्वत । १० वैदर्भ। ११ चैराट । १२ धारउर। १३ लाना १४ तापीतट। १६ आभीरदेश। १७ नर्मदातट। १८ कामाक्षा। १९ कच। २० पापांतिक। २१ चोट । द्वीपांतर देश यहु छि। २०) F१ गौड । २ चौड। ३ कान्यकुब्ज । ४ भङ्ग। ५ यग। ६ कलित। ७तिलगा गोल । ९यद्गाल । १० भाराध्य । ११ बरेन्द्र । १२ यामन । १३ गंगापार। १५ महाराष्ट्र ।

1 ३० ; सविवरण-वस्तुरत्नकोशः। १४ अंतर्वेद। १५ मागधा मध्य-१ फुरुक्षेत्र। १२ डाहला ३कामरूप। ४उन्द्र। ५ पोन्द्र। ६ पञ्चाल। ७ शौरसेन । ८ अग्निमुख। ९ मालव। १० जालन्धर। ११ लोहितपाद । पश्चिमायां दिशि-१ काछेल। २ वालंभ। ३ सौराष्ट्र! ४ कुंकण। ५ लाटदेश। ६ स्थलदेश। ७ दमगान। ८ अर्बुद । ९ मेदपाट । १० अवंती। ११ किरात। १२ शकट। १३ सौवीर। १४ कुंकुम । उत्तरापथा:- १ गूजर। २ सिंधु । ३ केकाण। ४ नेपाल। ५टाक। ६ तुरका ७तायक। ८ वर्वर। ९ वर्जर। १० फीर। ११ कास्मीर । १२ हिमालय। १३ लोहपुर। १४ श्रीकाष्ठ। दक्षिणस्यां दिशि- १मलय । २ सिंहल। ३ कोरल। ४पाडला ५अंध्र। ६वंध्य । ७ कर्कट । ८ द्रविड। ९ श्रीपथ। १० वैदर्भ। ११धारउर। १२ लाजी। १३ तापीतट। १४ तोमल। १५ पण्ड । १६स्त्रीराज्य । दक्षणपथ-~१ फर्णाट। २ महाराष्ट्र ३ आभीर। ४ नर्मदातट । ५ कामाक्षा। ६ कंचण। ७ कुंतल। ८ पापीतिक। ९ चौदही । एते देशा द्वात्रिंशत्सहस्राः। २०)G पूर्वदेशः-१ अंगदेशः। २ बंगदेश । ३ गौडदेश। ४ कन्यकुब्ज । ५ कलिंग। ६ गोष्ट। ७ अंग। ८ बंगाल । ९कुरंग। १० सरठ। ११ वारंधी। १२ यामुन । १३ सरयूपार । १४ अंतर्वेद । १५ मगध । मध्य-१कुरु। २ डाल । ३कामरू। ४ मोड। ५ पंचाला ६ सौरसेन । ७ जालंधर। ८ लोहपाद । पश्चिमस्थल- १ वालंभ । २ सौराष्ट्र। ३ कुंकुण । ४ लाट । ५ श्रीमाल । ६ अर्बुद । ७ मेदपाट । ८कच्छ। ९मालव । १० अवंती। ११ पारियान । १२. कंयोज । १३ तामलित। १४ किरात। १५ सेरटक। १६ सौवीर। १७ घोकाण। उत्तरापथ-१ गूर्जर २.सिंधु। ३ केकाण। ४ नेपाल । ५ तुरष्क। ६ ताजिक । ७पर्वर। ८खस। ९ कीर। १० काश्मीर। ११ वनला। १२ हिमालय। १३ लोहपुर। १४ श्रीराज। दक्षिणापथ-१ मलय । २ सीधल। ३ पांड। ४ कोरल। ५ अंधा ६ विध्य । ७ कर्णाट। ८ द्रविड। ९ श्रीपर्वत । १० पैदर्भ। ११ विराट । १२ ओरल । १३ तापीतट । १४ महाराष्ट्र। १५ आभीर। १६ नार्मद। १७ कामाक्ष। १८ कंदु। १९ पापांतिका। २० चौड़। २१ आराध्य । २२ घरेंद्र। २३ गद्गापार। २४ सांसप। २५, कांती। , २६ नागणिक । २७ द्वीपदेशाश्चेति। . * २१. द्वात्रिंशल्लक्षणस्थानानि । १ स्वर्गलक्षणं । २ मर्त्यलक्षणं । ३ पाताललक्षणं । ४ तनुलक्षणं ! ५ विद्यालक्षणं । ६ विज्ञानलक्षणं । ७ वास्तुलक्षणं । ८ विनोदलक्षणं । ९ वादलक्षणं । १० कलालक्षणं । ११ गीतलक्षणं । १२ वाद्यलक्षणं । १३ नृत्यलक्षणं । १४ रूपलक्षणं । १५ धर्मलक्षणं । १६ अर्थलक्षणं । १७ कामलक्षणं । १८ मोक्षलक्षणं । १९ देशलक्षणं । २० पावलक्षणं । 1CEF लक्षणानि ।

सविवरण-वस्तुरत्नकोशः। २१ समयलक्षणं । २२ पुरुषलक्षण । २३ ज्योतिप्कलक्षण। २४ चित्रलक्षणं । २५ स्त्रीलक्षणं! २६ गजलक्षणं । २७ तुरगलक्षणं । २८ पक्षिलक्षणं । २९ सत्त्वलक्षणं । ३० व्यापारलक्षणं । ३१ वस्तुलक्षणं । ३२ विवेकलक्षणं । इति । २१) A B १ स्वर्गलक्षणं । २ मृत्यु । ३ पाताल । ४ तत्व । ५ विद्या। ६विज्ञान। ७शान। ८वास्तु । ९ विनोद । १० वाद। ११ कला। १२ कल्प। १३ गीत । १४ वाद्य । १५ नृत्य । १६ कृत्य । १७ धर्म। १८ अर्थ। १९ काम। २० मोक्ष। २१ देश २२ काल! २३ पात्र। २४ पुरुप। २५ स्त्री। २६ गज। २७ तुरग। २८ पक्षि। २९ रन । ३० सद्यापार। ३१ सत्त्व । ३२ वस्तु । इति लक्षणानि । २१) 0 १ स्वर्ग। २ पाताल । ३ मृत्यु । ४ तत्त्व। ५ रूप। ६ विद्या। ७ मनु । ८ विज्ञान । ९ वस्तु। १० विनोद । ११ वार्ता । १२ गीत । १३ वाद्य। १४ नृत्य । १५ रूपक। १६ धर्म। १७ अर्थ। १८ काम । १९ मोक्ष। २० काल। २१ देशा २२ पान। २३ च्य। २४ समय । २५ पुरुप। २६ स्त्री। २७ गजा २८ पक्षी। २९ तुरग। ३० धर्म। ३१ रन। ३२ मितहारः। ३३ सद्यवस्तु ज्ञानमिति । २१) E १ स्वर्ग । २ मृत्यु । ३ पाताल । ४ तनु । ५ विद्या । ६ विज्ञान । ७ वास्तु । ८विनोद। ९ वाद्य । १० गीत। ११ नान्य। १२ वार्ता। १३ नृत्य। १५धर्म। १६ अर्थ । २७ फाम । १८ मोक्ष। १९ देशकाल । २० पात्र । २१ सम्यक । २२ समय । २३ पुरुष । २४ स्त्री। २५ गज २६ तुरग। २७ पक्षी। २८रत २९ पान । ३० आहार! ३१ सद्व्यापार। ३२ वस्तुलक्षणं चेति । २१) F १ स्वर्गलक्षण। २ मृत्युलक्षण । ३ पाताललक्षण । ४ तत्वलक्षण। ५ विद्यालक्षण । ६ विज्ञानलक्षण। ७ चास्तु। ८ विनोद ९ वाद । १० कला। ११कल्प। १२ गीतलक्षण। १३ वाद्यलक्षण । १४ नृत्यलक्षण। १५ कृत्य। १६ धर्म। १७ अर्थ। १८ काम । १९ मोक्ष । २०काल। २१ पात्र। २३ स्त्रीलक्षण। २४ गज। २५ तुरग। २६ पक्षि। २७ रन। २८ पान। २९ सत्त्व। ३० वस्तु । ३२ आहार । एतानि शुभलक्षणानि । २१)G १ स्वर्गलक्षण । २ मृत्यु । ३ पाताल । ४ तत्त्व। ५ विद्या। ६ विज्ञान। ७ज्ञान। ८ वास्तु । ९ विनोद। १० वाद । ११ कला। १२ कल्प] १३ गीत। १४ चाय। १५ नृत्य । १६ शत्यु। १७ धर्म । १८ अर्थ। १९ काम। २० मोक्ष। २१ देश। २२ फाल। २३ पात्र । २४ पुरुष । २५ स्त्री। २६ तुरग। २७ पक्षि। २८ रत। २९ सयापार। ३० सत्त्व। ३१ आहार। ३२ वस्तुलक्षणानि । २२ पुरुष । २२. चतुर्विंशतिविधं गृहम् । १प्रासाद। २ आयतनं। ३ हम्यं । ४ गृहं । ५ कोश। 1 A Bअथ चतु ३२ + सविवरण-चस्तुरनकोशः। ६ कोष्ठागारं । ७ पानीयगृहं । ८ शौचगृहं । ९ शालागृहं । १० मठस्थानं । ११ सत्रागारं। १२ शृङ्गारगृहं । १३ धर्मस्थानं । १४ विनोदस्थानं। १५ अश्वशाला। १६ गजशाला। १७ वास्तुभुवनं । १८ मंडपं । १९ भोजनशाला। २० तापसशाला। २१ अग्रासनं। २२ आवेशनं । २३ अर्घस्थानं । २४ राजांगणम् । इति । २२) A १ प्रासाद । २ हर्म्य । ३ यायतन । ४ गृह । ५ कोश । ६ कोष्ठागार ७ पानीयस्थान । ८ शौचगृह। ९ माल्यगृह। १० मठस्थान। ११ सत्रागार। १२ शगारगृह । १३ धर्मस्थान। १४ विनोदस्यान। १५ मंडुरा। १६ हस्तिशाला। १७वासमवन । १८ मंडप। १९ महानस। २० भोजनशाला। २१ अग्रासन। २२ आवेशन। २३ अर्घस्थान । २४ राजांगणं च । २२) B १ प्रासाद्। २ हर्म्य। ३ आयतन । ४ गृह । ५कोश। ६ कोष्टागार। ७ पानीयस्थान। ८ शौचगृह । ९.माल्यगृह । १० मठस्थान। ११ सत्रागार। १२ गृङ्गारगृह । १३ धर्मस्यान । १४ विनोदस्थान। १५ मंदिर। १६ हस्तिशाला। १७ यासमवन। १८ मंडप। १९महानस। २० भोजनशाला। २१ अग्रासन। २२ अर्घस्थान । २३ राजांगणं च । २२) १ प्रासाद । २ हयं । ३ आयतन। ४ गृह। ५कोश। दकोष्ठागार। ७ पानीयगृह । ८ शौचगृह ! ९ शालाग्रह ! १० माल्यगृह । ११ मठगृह । १२ सत्रागार। १३ शंगारगृह । १४ धर्मस्थान । १५ विनोदस्यान । । १६ मंदिर। १७ हस्तिशाला। १८ मंडपशाला। १९ अन्नशाला। २०भोजनशाला। २१ शयनशाला । २२ गर्भागार । २३ सत्रास्थान । २४ राज्यांगणं चेति । २२) E१ प्रासाद । २ आयतन । ३ हर्म्य । ४ गृह। ५कोश। ६ कोष्ठागार। ७ पानीगृह । ८ धौतगृह । ९ शालागृह । १० माल्यगृह । ११ मठस्थान। १२समागार। १३ शंगारगृह । १४ धर्मस्थान । १५ विनोदस्थान । १६ मंदुर। १७ हस्निशाला। १८ घासमंडप। १९ महानसं। २० भोजनशाला। २१ अग्रासन २२ भावेशानं। २३ अर्थस्थानं । २४ राजांगणं इति । २२) F १ प्रासाद । २ हर्म्य। ३ आयतन । ४ गृह । ५कोश। ६ कोठागार। ७ पानीयगृह। ८ शौचगृह । ९शालागृह । १० मालागृह । ११ मठस्थाना १२ सप्रागार। १३ शृंगारस्थान। १४ धर्मस्थान । १५ विनोदस्थान । १६ वाजिशाला। १७ हस्लिशाला। १८ वासमंडप । १९ महानस। २० भोजनशाला। २१ अग्रासन । २२ आवेशन | २३ अर्थस्थान | २४ राजांगणं चेति । २२)G १ प्रासाद । २ हय । ३ आयतन | ४ गृह । ५कोश। ६ कोष्ठागार ७ पानीयस्थान। ८ शौचगृह । ९ माल्यगृह। १० मठस्थान। ११ सपागार। १२ शृंगारगृह । १३ धर्मस्थान । १४ बिनोदस्थान। १५मंदुरा। १६ हस्तिशाला। १७पासमयन। १८मंडप। १९ महानस। २० भोजनशाला। २१ अग्रासन। २२ आवेशन। २३ अचांस्थान। २४ राजांगणं च । * ३३ २ . सविवरण-वस्तुरनकोशः। २३. अष्टोत्तरशतं मङ्गलम् । १ ब्रह्मा । २ विष्णु। ३ महेश्वर । ४ आदित्य । ५ लोकपाल । ६ अनि । ७ अमर । ८ सागर । ९ नदी। १० पर्वत । ११ गगन । १२ अहर्गण । १३ गंधर्व । १४ स्कन्द । १५ विनायक । १६ ज्योतिष्क । १७ तीर्थ। १८ द्विज। १९ वर। २. धर्मशास्त्र। २१ वेद। २२ पद्म । २३ पाश । २४ कौस्तुभ । २५ काञ्चन । २६ रूप्य । २७ ताम्र । २८ घृत । २९ मधु। ३० मद्य। ३१ सिद्धान्त । ३२ चंदन । ३३ श्वेतवस्त्र । ३४ वेश्या । ३५ रोचना। ३६ मृत्तिका । ३७ गोमय । ३८ शस्त्र । ३९ अंजन । ४० ओपध । ४१ मणिमय । ४२ शिला। ४३ मोदक । ४४ शंख । ४५ प्रियङ्गु । ४६ वाच । १७ पुष्प । ४८ श्रुत । ४९ सर्पप । ५० दधि । ५१ दूर्वा । ५२ अक्षत । ५३ उदंवर । ५४ आम्र। ५५ छन । ५६ वादिन। . ५७ हस्ति । ५८ मुक्ताफल । ५९ खंजरीट । ६० वृप । ६१ ध्वज । ६२ हंस । ६३ कन्या । ६४ दर्पण । ६५ पीठ । ६६ कुश । ६७ तुरंग । ६८ वेणु । ६९ वीणा। ७० ध्वनि। ७१ सिंघ। ७२ मेघ। ७३ स्वस्तिक। ७४ तोरण । ७५ कुंभ। ७६ चामर । ७७ गौ सवत्सा । ७८ आई- ७९ स्त्री सवत्सा। ८० वाहन । ८१ प्रदान । ८२ विद्या। ८३ पानीय। ८४ तुष्टि । ८५ पुष्टि। ८६ प्रसाद । ८७ उल्लोच । ८८ सत्य । ८९ पूर्णपात्र । ९० आईशाक । ९१ आमिप । ९२ पिप्पल- पत्र । ९३ श्रीवृक्ष । ९४ तालवृक्ष । ९५ पूजा । ९६ निधि । ९७ नर । ९८ सहया । ९९ गौरी । १०० गङ्गा । १०१ सरस्वती । १०२ नर्मदा । १०३ यमुना । १०४ कमला । १०५ सिद्धि । १०६ प्रीति । १०७ कीर्ति । १०८ वीज । इति । मांस। 1AG drop भष्टो... लम् । BC अष्टोत्तरशतमंगलानि । E अष्टोत्तरशतमंगलानां स्थानानि | Fअपोत्तरशतं मंगलानि ।

सविवरण यस्तुरनकोशः। २३) १ ब्रह्मा । २ विष्णु । ३ महेश्वर । ४ स्कन्द । ५आदित्य । ६ लोकपाल । ७ अग्नि। ८ अमर । ९ सागर । १० नदी। १९ पर्यत । १२ गगन । १३ ग्रह । १४ गण । १५ गंधर्य। १६ चन्द्र । १७ विनायक । १८ ज्योतिष । १९ धर्मशास्त्र। २० द्विजवर । २१ चेद । २२ पद्म । २३ प्रदीप । २४ फास्तुम। २५ कांचन । '२६ सप्य । २७ ताम्र । २८ घृत । २९ मधु । ३० मद्य । ३१ सिद्धान्त । ३२ चंदन। ३३ सितवन । ३४ वेदया। ३५ रोचना। ३६ मृत्तिका। ३७ गोमय। ३८ शस्त्रा ३९ अंजन। ४० ओपी ४१ अक्षत। ४२ रनमणि। ४३ मोदक। ४४ राह ।। ४५ प्रिया। ४६ जना ४७ श्वेतपुष्प । ४८ सर्पप । ४१ दधि। ५० आम्र । ५१ उदुंबर । ५२ छन । ५३ वादिन । ५४ हस्ति । ५५ वीजपूरक । ५६मुक्ताफल । ५७ दूर्वा । ५४ संजरीट । ५१ वृषभ । ६० ध्वज । ६१ हंस । ६२ कन्या। ६३ दर्पण । ६४ मत्स्य । ६५ तुरंगम ।, ६६ गीत । ६७ वीणा। ६८ ध्वनि । ६९ सिंह । ७० मेघ । ७१ स्वस्ति । ७२ तोरण। ७३ कुंभ। ७४ चामर । ७५ गौ सघरसा । ७६ आईमांस । ७७ स्त्री सपुत्रा । ७८ वाहन । ७९ प्रदान ८० विद्या । ८१ पानीय । ८२ पुष्टि । ८३ तुष्टि । ८४ प्रसाद । ८५ उल्लोच ।' ८६ पूर्णपात्र। ८७ आईशाखा । ८८ प्रिययास्य । ८९ श्रीवृक्ष । २० तालव्रत । ९१ पूजा। ९२ निधि । ९३ नरसहस्र । ९४ गौरी। ९५ गंगा। ९६ सरस्वती। ९७ नर्मदा। ९८ यमुना। ९९ सिद्धपीठ । १०० कीर्ति । इति मंगलानि । - + २३) B १ ब्रह्मा । २ विष्णु । ३ महेश्वर । ४ सन्द । ५ आदित्य । ६ लोकपाल । ७ अग्नि । ८ अमर । ९ सागर । १० नदी । ११ पर्वत । १२ गगन । १३ ग्रह । १४ गण | १५ गंधर्व । १६ चन्द्र । १७ विनायक । १८ जोतिप। १९ धर्मशास्त्र । २० द्विजवर) २१ वेद । २२ पद्मा। २३ प्रदीप । २४ कौस्तुभ ।। २५ कांचन । २६ रूंप्य । '२७ तान । २८ घृत । २९ मधु । ३० मद्य । ३१ सिद्धान्त । ३२ चंदन। ३३ सितवस्त्र । ३४ वेश्या । ३५ रोचना। ३६ मृत्तिका। ३७ गोमय। ३८ शेख। ३९ अंजन। ४० ओपंचा ४१ अक्षत। ४२ रत्नमणि । ४३ मोदक । ४४ शंख। ४५ प्रियंगु । । ४६ जव। ४७ श्वेतपुष्प। ४८ सर्पप। ४९ दधि। ५० आन।। ५१ उदंबर। ५२ छत्र। ५३ हस्ति। ५४ वीजपूरक। ५५ मुक्ताफल । ५६ दूर्वा । ५७ खंजरीट। ५८ वृप । ५२ ध्वज । ६० हंस । ६१ कन्या। ६२ दर्पण। ६३ मत्स्य । ६४ तुरंगम । ६५ गीत। ६६ वीणा । ६७ ध्वनि । ६८ सिंह । ६९ मेघ । ७० स्वस्ति । ७१ तोरण । ७२ कुंभ। ७३ चामर । ७४ गौ सवत्सा । ७५ आईमांस । ७६ स्त्री सपुत्रा । ७७ वाहन । ७८ प्रदान । ७९. विद्या) ८० पानीय। ८१ पुष्टि। ८२ तुष्टि। ८३ प्रसाद ।. ८४ उल्लोच। ८५ पूर्णपान । ८६ आईशाखा। ८७ प्रियवाक्य। ८८ श्रीवृक्ष। ८९ तालवृंत। ९० पूजा। ९१ निधि। ९२ नरसहस्र । ९३ गौरी। ९४ गंगा। ९५ सरस्वती। ९६ नर्मदा । ९७ यमुना । ९८ कमला। ९९ सिद्धपीठ । १०० कीर्ति । इति मंगलानि । २३) C १ ब्रह्मा । २ विष्णु। ३ महेश । ४ स्कन्द । ५आदित्य । ६ लोकपाल । ७ अग्नि- पाल । ८ अमर । ९ सागर । १० नदी । ११ पर्वत । १२ गगन ! १३ ग्रहण । १४ गांधर्व । १५ चंद्र। १६ विनायक। १७ ज्योति । १८ तीर्थाधि। १९ धर्मशास्त्र। २० वेद । २१ पद्म। २२ पर्यंत । २३ कौस्तुभ । २४ कांचन । २५ भूमि। २६ रूप्य । २७ ताम्र । २८ घृत । २९ मद्य । ३० मधु । ३१ सिद्धान्त । ३२ चंदन। ३३ श्वेतवस्त्र। ३४ धेश्या । ३५ गोरोचन । ३६ मृत्तिका। ३७ गोमय । ३८यस्त्रा ३९ अजन। ४० थोपध।

सविवरण-वस्तुरनकोश ४१ रन । ४२ अन्न । ४३ मोदक । ४४ शङ्ख। ४५ प्रियङ्गु । ४६ वाक। ४७ श्वेतपुष्प। ४८ सर्पप। ४९ दधि । ५० दूर्वा । ५१ अक्षत। ५२ उदंवर । ५३ आन। ५४ छन । ५५वाद्या ५६ दर्भ। ५७ हस्ति। ५८ वाजि। ५९ मुक्ताफल । ६० खंजरीट। ६१ वृपभ। ६२ राजहंस। ६३ कन्या। ६४ दर्पण। ६५ दीप। ६६ अंकुश। ६७ गो सवत्सा। ६८ आईमांस । ६९ रेणु । ७० वीणा। ७१ ध्वनि। ७२ सिंह। ७३ मेघ। ७४ स्वस्तिका ७५ तोरण । ७६ कुंभ। ७७चामरा ७८ विद्युत् । ७२ गीत । ८० मत्स्य । ८१ स्त्रीपुरुष । ८२ सपुत्रा स्त्री। ८३ चाहन। ८४ विद्या। ८५ पानीय। ८६ पुष्टि। ८७ तुष्टि । ८८ पूर्णकलश। ८९ प्रसाद । ९० उल्लोच । ९१ मंदिर। ९२ शय्या। ९३ पूर्णपात्र । ९४ आईशाक । ९५ पिप्पलपत्र । ९६ गंगा। ९७ यमुना । ९८ श्रीवृक्ष । ९९ पूजाविधि । १०० निधि। १०१ सिद्धि । १०२ जीति । १०३ कीर्ति। १०४ गौरी। १०५ यशश्चेति । २३)E १ ब्रह्मा। २ विष्णु ३ महेश्वर। ४ चंद्र। ५ सूर्य। ६ लोकपाल । ७ अग्निपाल। ८ अमर । ९सागर। १० नदी। ११ पर्वत । १२ गगन। १३ ग्रहण । १४ गंधर्व । १५ नायक । १६ स्यज्योतिष । १७ तीर्थ । १८ द्विजवर । १९ धर्मशास्त्रविद् । २० समपथ। २१ कौस्तुभ । २२ कांचन । २३ रूप्य। २४ ताम्रा २५ मधु। २६ मद्य। २७ सिद्धान्त । २८ चंदन । २९ श्वेतवस्त्र । ३० वेश्या। ३१ गोरोचन । ३२ मृत्तिका । ३३ गोमय । ३४शास्त्रा ३५ भाजन। ३६ ओपधी। ३७ कमल। ३८ मध । ३९ शय्या। ४० पोत । ४१ प्रियवाक्य । ४२ प्रीति । ४३ रन । ४४ मणिशाला। ४५ मोदक । ४६शंख । ४७ प्रियंगु । ४८ वचा। ४१ श्वेतपुष्प । ५० सर्पप । ५१ दधि। ५२ दूर्वा । ५३ अक्षत। ५४ चंदन। ५५ चंदन । ५६ माला। ५७ उदंवर। ५८ आम्ल। ५९ छन। ६० वादिन। ६१ हस्ति। ६२ वीजपूर। ६३ मुकाफल । ६४ खंजरीट। ६५ वृषभ। ६६ हंस । ६७ कन्या। ६८ दर्पण । ६९ पीठ । ७० कुश। ७१ तुरंगम । ७२ गीत । ७३ वेणु । ७४ सिंह । ७१ मेप । ७६ मेघ । ७७ स्वस्तिक । ७८ तोरण । ७९ कुंभ । ८० चामर । ८१ सवत्सा गौ। ८२ आर्द्रमांस । ८३ स्त्रीपुत्र । ८४ वाहन । ८५ विप्रदान । ८६ विद्या। ८७ आमलक । ८८ आमिप। ८९ पिप्पल । ९० श्रीवृक्ष। ९१ तालवृक्ष। ९२ पूजा। ९३ निधि । ९४ नगरनायक। ९५ गौरी। ९६ गंगा। ९७ सरस्वती। ९८ यमुना। ९९ नर्मदा १०० प्रसिद्धा। १०१ कीर्तय- श्वेति मंगलम् । । २३) F१ ब्रह्मा। २ विष्णु । ३ माहेश्वर । ४ वीतराग। ५ स्कन्द । ६ आदित्य । ७लोकपाल । ८गान्धये। ९चंच। १०विनायक। ११ज्योतिफ। १२ तीर्थ। १३ द्विज। १४ धर्मशास्त्र। १५ वेदशास्त्र। १६ पुराण १७ पद्म। १८ पर्यंक। १९ कौस्तुम। २० कांचन । २१ रुप्य । २२ तान । २३ घृत । २४ मद्य । २५मधु । २६ सिद्धांत। २७ श्वेतांयर। २८ गोरोचन। २९ मृत्तिका । ३० अग्नि । ३१ अमर। ३२सागर। ३३ नदी। ३४ पर्वत। ३५ गगन। ३६ ग्रहण। ३७ गोमय। ३८ सशस्त्र । ३९ अंजन । ४० मोषधीरन । ४१ मनशाला। ४२ मोदक । ४३ संरक। ४४ याजिना ४५ प्रियंगु। ४६ श्वेतपुप्प। ४७ सर्पप। ४८ दधि। ४२ दूर्वा । ५० अक्षता ५१ आम्न। ५२ उदुम्बर। ५३ छत्र। ५४ वाजिन। ५५ दर्म। ५६ हस्ति । ५७ धीजपूर । ५८ मुक्ताफल । ५९ सबरीट । ६० घृषम । ६१ राजहंस ।

३६ . सविवरण-चस्तुरनकोशः। ६२ कन्या। ६३ दर्पण। ६४ प्रदीप। ६५ अंकुशा ६६ तुरंग। ६७ गीत। ६८ वेणु। ६९ वीणा। ७० ध्वनि । ७१ भूमि । ७२ सह । ७३ मेघ । ७४ स्वस्तिक । ७५ तोरण। ७६ कुंभ। ७७चमर। ७८ सर्वत्थ। ७९ गौ। ८० आर्द्रमांस। ८१ स्त्रीपुरुषजुग्म । ८२ वाहन । ८३ प्रदान । ८४ विद्या। ८५पानीय । ८६ तुष्टि। ८७ पुष्टि। ८८प्रसाद। ८९ उल्लास। ९० मदिरा। ९१ सैन्य । ९२ घोर्णपात्र। ९३ आईशाक। ९४ पिप्पलपत्र । ९५ श्रीवृक्ष फल। ९६ तालवृक्ष। ९७ पूजा। ९८ निधि । ९९ गौरी। १०० गंगा। १०१ सरस्वती। १०२ नर्मदा। १०३ यमुना। १०४ तप्ती। १०५ गोदावरी। १०६ सिद्धि। १०७ प्रीति । १०८ कीर्तयथेति । २३) G १ ब्रह्मा । २ विष्णु । ३ महेश्वर । ४ स्कन्द । ५आदित्य । ६ लोकपाल । ७ अग्नि। ८अमर। ९सागर। १० नदी। ११ पर्वत । १२ गगन। १३ ग्रह। १४ गण । १५ गंधर्य। १६ चंद्र। १७ विनायक। १८ ज्योतिष १९ धर्म। २०शान। २१ द्विजयर। २२ वेद। २३ पद्म। २४ प्रदीप । २५ कौस्तुभ। २६ कांचन । २७ रुप्य । २८ ताम्र। २९ घृत। ३० मधु । ३१ मध । ३२ सिद्धांत । ३३ चंदन। ३४ सितवन। ३५ घेश्या। ३६ रोचना। ३७ मृत्तिका। ३८ गोमय । ३९ शस्त्रा ४० अंजन। ४१ औपध। ४२ अक्षत। ४३ रतमणि। ४४ मोदक। ४५शंस। ४६ प्रियंगु। ४७ जय। ४८ श्वेतपुप्प। ४९ सर्पप। ५० दधि। ५.आन। ५२ उदुम्बर। ५३ छत्र। ५४ वादिन। ५५ हस्ति। ५६ वीजपूरक । ५७ मुक्ताफल। ५८ दुर्या। ५९ संजरीट। ६० वृषभ। ६१ ध्वजा ६२ हंस। ६३ कन्या। ६४ दर्पण। ६५ मत्स्य। ६६ तुरंगम। ६७ गीत। ६८ वीणा। ६९ ध्यान । ७. सिंह । ७१ मेघ । ७२ स्वस्ति । ७३ तोरण । ७४ कुंभ । ७५ चामर । ७६गी। ७७सवत्सा। ७८ आई। ७९ मांस। ८० स्त्री सपुत्रा। ८१ चाहन। ८२ प्रदान। ८३ विद्या। ८४ पानीय । ८५ पुष्टि। ८६ तुधि। ८७ प्रसाद। ८८ उल्होच। ८९ पूर्णपात्र । ९० आईशासा। ९१ प्रियवाश्य। ९२ धीवृक्ष। ९३ तालभुत । ९४ पूजानिधि । ९५ नरसहन्न । ९६ गारी। ९७ गंगा । ९८ सरस्वती । ९९ नर्मदा। १०० यमुना । १०१ फमला। १०२ सिद्धपीठकीर्ति। इति मंगलानि । । . २१. त्रिविधं दानम् । १ अभयदान। २ उपकारदान । ३ द्रव्यदान । इति दानानि । २५) Cadds घेति after दानानि । D उमयदान । पूर्णदान। उपायकरदान । । म्यायिधादिदानं। L अमय उपकारदव्य । २५. पचविघं यशः। १ज्ञानकृत। २ प्रतापकृत । ३ पराकमकृत ! सदाचारकृत। ५ रूपकृत । इति ।

सविवरण-वस्तुरनकोशः। २५) A १ ज्ञानकृतयश। २प्रतापयश। ३ पराक्रमयश। ४ सदाचारयश । ५वर्णन । B १ ज्ञानरुतयश । २प्रतापयश । ३ सदाचारयश। ४पराक्रमयश। ५वर्णन। C१ ज्ञानरुतं। २ प्रतापकृतं । ३ पराजयकृतं । ४ जन्मकृतं । ५सदाचार- चर्तितमिति। D१ जनतन्वतां यशः। २प्रतापः। ३ कीर्ति । ४ पराक्रमः। ५रूपसदाचार- वर्णकृतश्चेति। E१ जन्मरूपं । २ वालकृतं। ३ प्रतापरतं । ४ कीर्तिरूपं । ५पराक्रमरूपं । G१ ज्ञानकृतयश । २प्रतापयश। ३पराकमयश। ४सदाचारयश । वर्णन । २६. सप्तविधा कीर्तिः। १ दानकीर्ति । २ पुण्यकीर्ति । ३ काव्यकीर्ति । ४ वक्तृत्वकीर्ति । ५ वर्तनकीर्ति । ६ शौर्यकीर्ति । ७ विद्वज्जनकीर्ति । इति । २६) AB १ दानकीर्ति । २ पुण्य । ३ वर्तन । ४ विनान । ५ काव्य । ६ वकृत्य D१ दानकीर्तिः। २ पुण्यकीर्ति । ३ विद्वजनकीर्ति। ४ वक्तृत्वकीर्ति । ५ कान्यकीर्ति । ६वर्तनकीर्ति । ७ सूर्यकीर्ति । E १ दानफीति । २ पुण्यकीर्ति । ३ विद्वजनसंगतिकीर्ति। ४ वकृत्वकीर्ति । ५ काव्यवर्तन। ६ शौर्य । ७ गीतिकीर्तिश्चेति । F१ दानकीर्ति। २ पुण्यफीति । ३ द्विविधजनकीर्ति । ४ वक्रोक्तिकीर्ति । ५कान्यकीर्ति । ६आवर्तनकीर्ति । ७ शौयकीर्तिः। G १ दानकीर्ति । २ पुण्य । ३ वर्तन । ४ विज्ञान | ५ काव्य । ६ वकृत्य । * २७. नव रसाः। १ शृङ्गार । २ हास्य । ३ करुण । ४ रौद्र । ५ वीर । ६ भयानक । ७ बीभत्स । ८ अद्भुत । ९ शान्त.इति रसाः । 1A BD G अष्टौ रसाः। E नव नाट्यरसाः। Comits this Sutra and Vivarana. 2ABशान्तरसा D शान्ताधा E शांत इति । F शांत नवधा रसा।

३८ भ १४ विवर्ण सविवरण-घस्तुरत्नकोशः। २८. एकोनपञ्चाशद् भावाः । १ रति । २ हास्य । ३ उत्साह । ४ विस्मय । ५ क्रोध । ६ शोक । ७ जुगुप्सा। ८ भय। ९ स्तंभ। १० स्वरभेद।,११ स्वेद । १२ रोमांच । १३ वेपथु। १५ अश्रु। १६ प्रलय । १७ निर्वेद। '१८ ग्लानि । १९ शंका। २० असूया। २१ मूढ । २२ श्रम । २३ आलस्य । २४ दैन्य। २५ चिंता। २६ मोह। २७ स्मृति। २८ धृति । २९ क्रीडा । ३० चपलता। ३१ जडता । ३२ आवेश । ३३ हर्प। ३४ विवाद। ३५ असुख । ३६ गर्व । ३७ अपस्मार । ३८ निद्रा। ३९ सुप्ता। ४० विबोध। ४१ अवभिपा(?हित्य) ४२ उग्रता । ४३ उन्माद। ४४ मति। ४५ व्याधि । ४६ विरक्त। ४७ वितर्क । ४८ त्रास । ४९ मरण । इति । २८) AB १ रति । २ हास। ३ उत्साह । ४ विस्मय। ५ोध । ६शोक। ७ जुगुप्सा । ८ भय । ९स्तंभ। १० स्वेद । ११ स्ववृत्ति। १२ वीडा। १३ चपलता। १४ हर्पता। १५ जडता। १६ मति। १७ गूढ १८ आवेग। १९ विषाद । २० औत्सुक्य । २१ गई। २२ अपस्मार। २३ निद्रा।' २४ सुप्त। २५ वियोधा २६ अमर्प। २७ उन्माद। २८ उग्रता। २९ व्याधि। ३०वितर्की ३१पास। ३२ स्वरमेद। ३३ रोमांच। ३४ वेपथु। ३५ चैवर्ण्य । ३६ अश्रु। ३७ निर्वेद । ३८ ग्लानि । ३९शंका। ४०श्रमा ४१ आलस्या ४२ दैन्य। ४३ चिंता। ४४ मोह । ४५ स्मृति । ४६ अवहित्य। ४७ विदाघ। ४८प्रलाप। ४९ गांत। इति माया। २८) C१ रति। २हासा ३-उत्साह । ४विस्मय। ५शोक। ६क्रोध। ७ ग्लानि । ८ शंका । ९श्रम। १० आलस्य । ११चिता। १२ मोह। १३ स्मृति । १४ धृति। १५ फ्रीडा। १६चपलता। १७ जडता। १८ हप। १९ मावेश २० विपाद । २१ असुस। २२ गये। २३ अपस्मार। २४ निद्रा। २५ स्वपन। २६ योधा २७ अम। २८ उप्रता। २९ उन्माद। ३० मति। ३१ च्याधि। ३२चिरनिः। ३३ यितर्क। ३४ संतोष । ३५ विचार। ३६ विध्वंस । ३७ विश्लेप। ३८ विपत्ति। ३९ व्यावृत्ति । ४० प्रशंसा। ४१कारण्य। ४२ दंम । ४३ मान। ४. उद्योत । ४५नीरसता। ४६ तितिक्षा। ४७ पास । ४८ मरण । चेति। २८) E! रति । २हास । ३शोक। ४ोध । ५ उत्साह । ६भय ! ७ जुगुप्सा । ८पिम्मय। १० स्तंभ। १५ स्येद । १२ स्वरभेद । १३ रोमांच । १४ पेपथु । १५ विपर्ण । १६ अश्रु । १७ प्रलाप । १८ निद । १९ ग्लानि । २०शंका । २१ अध्या।

। सविवरण-चस्तुरत्नकोशः। २२ मद । २३ प्रमोद । २४ आश्रम । २५ आलस । २६ दैन्य । २७ चिंता। २८ मोह । २९ स्मृति । ३० धृति । ३१ क्रीडा । ३२ चपलता । ३३ जडता । ३४ हर्प । ३५मति । ३६ मूढ । ३७ आवेश। ३८ विषाद। ३९ आसुख। , ४० औत्सुक्य ।, ४१ गये । ४२ अपस्मार । ४३ निद्रा। ४४ स्यमा ४५ बियोध। ४६ अमर्प । ४७ उत्सर्गः। २८) १ रति 1 २. हास । ३ शोक । ४ क्रोध । ५ उत्साह । ६ भय । ७ जुगुप्सा । ८विस्मय। ९स्तम्भ। १० स्वेद। ११ स्वरमेदाः। १२ रोमाञ्चाः। १३ वेपथु। १४ विवर्णता । १५ अश्रु । १६ प्रलाप । १७ निवेद । १८ ग्लानि । १९ शंका । २० असूया। २१ आश्चर्य । २२ आलस्य । २३ देश्य । २४ चिंता। २५ दैन्य । २६ अशौच । २७ मद । २८ श्रम । २९ मोह । ३० स्मृति । ३१ धृति । ३२ ग्रीडा । ३३ च [प]लता। ३४ जड़ता। ३५ हर्ष । ३६ आवश्य । ३७ विपाद । ३८ असुख । ३९ गर्व । ४० उत्सुक्य । ४१ अपस्मार । ४२ निद्रा । ४३ स्वत । ४४ विवोध । ४५ अमर्प। ४६ उग्रता। ४७ उन्मद। ४८ मति । ४९ व्याधि । ५० रक्त। ५१ वितर्क । ५२ त्रास । ५३ मरणं । चेति । २८)G१ रति। २हास। ३ उत्साह। ४ विस्मय। ५फ्रोध। ६शोक। ७ जुगुप्सा। ८ भय । ९ स्तंभ । १५ स्वेद । ११ स्ववृत्ति । १२ बीडा 1 १३ चपलता। १४ हर्पता। १५ जडता। १६ मतिमूढ । १७ आवेग । १८ विपाद । १९ औत्सुक्य । २० गये । २१ अपस्मार । २२ निद्रा । २३ सुत । २४ विवोध । २५ अमर्ष । २६ उन्माद । २७ उग्रता । २८ व्याधि । २९ रच । ३० तर्क। ३१ भास । ३२ स्थरमेद । ३३ रोमांच । ३४ वेपथु । ३५ वैवर्य । ३६ अनु। ३७ प्रलाप । ३८ निर्वेद । ३९ ग्लानि । ४० शंका। ४१ श्रम । ४२ आलस्य । ४३ दैन्य । २४ चिंता । ४५ मोह । ४६ स्मृति । ४७ अवहित्थ । ४८ विदाघ। ४९ मरणांत | इति भावाः। । * २९. *चत्वारोऽभिनयाः। ३०. चतस्रो वृत्तयः। १ सात्त्वती। २ भारती। ३ कैशिकी। ४ आरभटी । इति । .३०) A १ सात्त्यती। २भारती। ३ कैशकी। ४ आरमटी। B१ सात्वती। २.भारती । ३कौशकी। ४भारमटी। G १ भारती। २ शाश्वती। ३ कौशिकी। ४ आरभटी चेति । D१ साविकी। २ भारती। ३ कैशिकी। ४ आरमटी चेति। E १ भारती। २सारस्वती। ३ कौशिकी। आभटी। F १ भारती। २सायिकी। ३कोशिकी। आरमटी । G १ सावत्ती। २ भारती। ३ पौशकी। ४ आभरटी । * There is no Vivarans of this sütra giren in the VIss. though the sūtra is mentioned in the contents. 1 Edros चतस्रो वृत्तयः । :

४० सविवरण पस्तुरत्नकोशः। .३१. चत्वारो महानायकाः । १ धीरोद्धत । २ धीरोदात्त । ३ धीरललित । ४ धीरशान्त । इति । ३१) A १ धीर। २ वीरोदात्त । ३ धीरललित। ४ उद्धत । B१ धीर। २ उद्धत । ३वीरोदात्त । ४ वीरललित। C1 gives no Vivarana. DER १ धीरोद्धत । २धीरोदात्त। ३ धीरललित । ४ धीरोपशांत । G१ धीर। २ उद्धत। ३ वीरोदात्त । ४ वीरललित। -- ३२. चत्वारो नायकाः। १ अनुकूल। २ दक्षिण । ३ शठ। ४ धृष्ट । इति । ४पडश्च । ३२) ० १ अनुकूल। २ दक्षिण । ३ धृष्ट। D१ दक्षिणः । २ अनुकूल। ३ शिव । E१ दक्ष । २ अनुकूल। ३ शठ। F१ अनुकूल। २दक्ष । ३शत। ४ धृष्टश्चेति । ४ धृष्टश्चेति । ४ धृष्टश्चेति। ३३. द्वात्रिंशद्' नायकगुणाः । १ कुलीन । २ शीलवान् । ३ वयस्थ । ४ शूरवान् । ५ संततव्यय । ६ प्रीतिवान् । ७ सुराग। ८ सावयववान् । ९ प्रियंवद । १० कीर्ति. वान् । ११ त्यागी। १२ विवेकी । १३ शृङ्गारवान् । १४ अभिमानी । १५लाध्यवान् । १६ समुज्वलवेपः। १७ सकलकलाकुशल। १८ सत्यवंत । १९ प्रिय । २० अवदान । २१ सुजन । २२ सुगंध । २३ सुवृत्तमंत्र । २४ क्लेशसह । २५ प्रदश्चपध्यः। २७ उत्तमसत्य । २८ धर्मिष्ठमहोत्साही । २९ गुणग्राही। ३. सुपात्र- ग्राही । ३१ क्षमी । ३२ परिभावक । इति । २६ पंडित । 1AG नायक। B'नायिक। AGनायिका 3 A द्वाविंशहणनायक।। द्वारिंशहुणो नायकः ।। F द्वानिराहणो नायकः।

१७ समु. सविवरण-चस्तुरनकोशः। ३३)A १ कुलीन । २ शीलवान् । ३ वयस्था ४ शौचवान् । ५स्वतंत्र। ६सावयव । ७ प्रीतिमान । ८ प्रियंवद । ९ सुभग। १० सत्यवान् । ११ कीर्तिवान् । १२ त्यागी। १३ विवेकी। १४ शृङ्गारी। १५ अभिमानी। १६ श्लाघावान् । १७ समु- जबलवेष । ' १८ शयाशी। १९ सकलकलाकुशल । २० सत्यासवह । २१ श्रद्दधान । २२ सुगंध । ' २३ मुवृत्त । २४ मंत्र । २५ क्लेशसह। २६ भाषापंडित। २७ उत्तम सत्य । २८ धर्मिष्ठ । २९ महोत्साह । ३० गुणग्राही । ३१ क(?क्ष)मी । ३२ परिभावुक । ३३) B१ कुलीन। २ शीलवान् । ३ ययस्थ। ४ शौचवान् । ५स्वतंत्र। ६सावयव। ७प्रीतिमान् । ८ प्रियंवद ९ मुभग । १० सत्यवान् । ११ कीर्तिमान् । १२ त्यागी। १३ विवेकी। १४ शृङ्गारी। १५ अभिमानी। १६ श्लाघ्यवान् । ज्वलचेयः। १८ शयाश । १९ सकलकलाकुशल। २० सत्यावसह । २१ श्रद्धावान् । २२ सुगंध । २३ सुवृत्त । २४ मंत्र ।। २५ केशसह । २६ भाषापंडित । २७ उत्तमसत्य । २८ धर्मिष्ठ। २९ महोत्साह। ३० गुणग्राही। ३१ क्षमी। ३२ परिभावुकः। ३३)E १ कुलीन । २ शीलवान् । ३वयस्य। ४ शौचवान् । ५प्रियंवद । ६संततन्यय। ७प्रीतमना। ८ सुभग । ९विनयवान् । १० त्यागी। ११ विवेकी। १२ शृङ्गारवान् । १३ अभिमान । १४ श्लाध्य । १५ समुज्वलवेप। १६ सकलकला- कुशल। १७ सत्यवान् । १८ प्रियः। १९ सुवृत्तः। २० अवदात। २१ स्वजन। २२ सुहृद ! २३ [भ]धान । २४ सुगंधप्रिय । २५ मंत्रवान् । २६ केशसह । २७ प्रदत्ता। २८ प्रकाशकः। २९ पंडित । ३० उत्तम । ३१ ससत्त्व । ३२ धार्मिक । ३३ महोत्साही। ३४ गुणग्राही। ३५ क्षमा वान्] । ३६ परिभाषिकश्चेति । ३३) F१ कुलीन। २शीलवान् । ३ वयस्थ। ४ शौचवान् । ५संततव्ययी । ६ प्रतिभावान् । ७ शुभग । ८ विनयवान् । ९ कीर्तिमान् । १० त्यागी। ११ विवेकी। १२शहारी। १३ अभिमानी। १४ श्लाघावान् । १५ समुज्चलवेष। १६ सकलकला- फुशल। १७ सत्यवान् । १८ प्रिय । १९ अबदान । २० स्वजनप्रियः । २१ सुगंधप्रियः । २२ सुवृत्त। २३ मंत्रवान् । २५ क्शापहारी। २५ प्रदत्ताप्रकाशकः। २६ पंडितसत्तम । २७ उत्तमसत्तम। २८ धार्मिक। २९ महोत्साही। ३० गुणग्राही। ३१ क्षमी। ३२ परिभावकश्चेति । ३३)G १ कुलीन । २ शीलवान् ३ वयस्थ । ४ शौचयान् | ५ स्वतंत्र । ६सावयव ७ प्रीतिमान् । ८ प्रियंवद । ९सुभग । १०सत्यवान् । ११ त्यागी। १२ विवेकी। १३ शृंगारी। १४ अमिमानी। १५ श्लाघावान् । १६ समुञ्चलप। १७ शयाशी। १८ सकलकलाकुशल। १९ सत्यासयह । २० श्रद्धान! २१ सुगंध । २२ मुवृत्त। २३ मंत्र । २४ क्लेशसह । २५ भाषापंडित । २६ उत्तमसत्य । २७ धर्मिठ । २८ महोत्साह । २९ गुणग्राही। ३० क्षमी। ३१ परिभावुक । ३४. त्रिविधा महानायिकाः । १ स्वकीया । २ परकीया । ३ पण्याङ्गना । इति । * I CE चेति । F पण्यागनाश्चेति ।

४२ सविवरण-वस्तुरनकोशः। ३५ अष्टौ नायिकाः। १ वासकसज्जा । २ विरहोत्कण्ठिता। ३ खण्डिता । ४ विप्रलब्धा । ५ प्रोपितभर्तृका। ६ कलहांतरिता। ७ अभिसारिका । ८ स्वाधीन- भर्तका । इति । ३५) A B १ विरहोत्कंठिता । २खण्डिता। ३ कलहांतरिता। ४ विप्रलुन्ध(?ब्धा)। ५प्रोपितभर्तका। ६अभिसारिका । ७ स्वाधीनपतिका। ३५) C१वासकसजा। २खंडिता। ३ उत्कंठिता। ४ कलहांतरिता। ५ विप्रलब्धा । ६प्रोपितमत्का। ७ अभिसारिका । ८ स्वाधीनपतिका चेति । ३५) D१ वासकसजा। २ विरहोत्कण्ठिता। ३ खंडिता। ४ विप्रलंभा। ५प्रोपितभर्तृका। ६ कलहांतरिता । ७ अभिसारका। ८ स्वाधीनभर्तृका चेति । * ३६. द्वात्रिंशद् नायिकानां गुणाः । १ सुरूपा । २ सुभगा। ३ सुवेपा । ४ सुरतप्रवीणा । ५ सुनेत्रा । ६ सुखाश्रया । ७ विभोगिनी। ८ विचक्षणा ।। ९ प्रियभापिणी । १. प्रसन्नमुखी। ११ पीनस्तनी। १२ चारुलोचना। १३ रसिका । १४ लज्जान्विता । १५ लक्षणयुता । १६ पठितज्ञा। १७ गीतज्ञा । १८ वाद्यज्ञा। १९ नृत्यज्ञा। २० सुप्रमाणशरीरा । २१ सुगंधप्रिया । २२ नातिमानिनी। २३ चतुरा । २४ मधुरा । २५ स्नेहमती । २६ विमर्पमती । २७ गूढमंत्रा। २८ सत्यवती । २९ कलावती। ३० शीलवती। ३१ प्रज्ञावती। ३२ गुणान्विता । इति । ३६) AB १ सुरूपा । २ सुवेपा । ३ सुभगा । ४ सुरतप्रवीणा । ५मुसत्त्वा । ६ विप(?सुसोथिता। ७ विनीता। ८ भोगिनी। ९विचक्षणा। १०प्रियभापिणी । ११ प्रसनमुसी। १२ पीनस्तनी। १३ चारुलोचना। १४ रसिका। १५ लजान्विता। १६ लक्षणयुता । १७ वाक्यमा। १८ गीतमा । १९ नृत्यशा ।। २० चाचशा । I A BG नायिका !; C D E नायकाः। F स्वाधीनपतिका। 3 A B द्वात्रिंशहणनायिकाः ।, CD द्वात्रिंशहुणानायकाः। । द्वाशिनायकानां गुणा । G द्वात्रिंशणनायिका ।

सविवरण-वस्तुरतकोशः। ४३ २१ सुप्रमाणशरीरा। २२ सुगंधप्रिया । २३ नातिमानिनी। २४ चतुरा। २५ मधुरा। २६ स्नेहवती। २७ विमर्शवती। २८ सुवृतमंत्रा। २९ सत्यवती । ३० प्रज्ञावती। ३१ चैतन्या। ३२ शीलवती । ३३ गुणान्विता। ३६) १ फुलिना । २ शीलवती । ३ चयस्विनी । ४ प्रियंवदा । ५शामितव्यया । ६प्रीतिमति। ७ सुभगा। ८ सुसत्त्वा। ९ सुवेपा। १० मुविनीता। ११ सुरतप्रवीणा । १२ चारनेत्रा। १३ सुखप्रिया । १४ विभोगिनी। १५ विचक्षणा। १६ मियमापिणी। १७ प्रसन्नमुखी। १८ पीनस्तनी। १९ रसिका। २० लजान्विता । २१ लक्षणयुक्ता । २२ पठितमा। २३ गीतमा। २४ नृत्यना। २५ विचा)द्यज्ञा। २६ सुकुमारशरीरा। २७ मुगंधप्रिया। २८ नातिमानिनी। २९ स्नेहवती। ३० गुणान्विता। चेति । ३६) '१ कुष्टि(लि)नी। २ सुरूपा। ३ सुभगा। ४ समर्था। ५ सुवेपा। ६ सुधिनीता। ७ सुरतप्रवीणा। ८चारनेत्रा । ९ सुखप्रिया । १०विभोगिनी। ११ विचक्षणा। १२ प्रियभापिणी । १३ प्रसन्नमुखी। १५ पीनस्तनी । १५ रसिका। १६ लजान्विता। १७ लक्षणयुक्ता। १८ पठितझा। १९ तशा । २० वाद्यज्ञा। २१ नृत्यशा। २२ सुकुमारशरीरा। २३ सुगंधप्रिया । २४ नातिमानिनी। २५ मधुरवास्या। २६ स्नेहयती। २७ आचारवती। २८ रूपवती। २९ संभोगवती। ३० गुणवती। ३१ मुशीला। ३२ धर्मशा। चेति । ३६) F१ कुलीना । २ सुभगा । ३ स्वरूपा । ४ मुसत्या । ५ सुवेषा। ६सुविनीता। ७ सुरत्न(त)प्रवीणा। ८ चारुनेत्रा । ९ मुखप्रिया । १० विमोगिनी। ११ विचक्षणा। १२ प्रियभापिणी । १३ प्रसन्नमुखी । १४ पीनस्तनी। १५ रसिका। १६ टलान्विता। १७ लक्षणयुता। १८ गीतज्ञा। १९ वाद्यना। २० नृत्तशा। २१ सुकुमारशरीरा। २२ सुगन्धप्रिया। २३ नातिमानिनी। २४ मधुरवाक्या। २५ नेहयती। २६ईर्ष्यारहिता। २७ सत्यवती । २८ शीलवती। २९ प्रशावती। ३० सुसंवृत्तशरीरा। ३१ गुणान्विता । चेति । ३६) G १ सुरूपा। २ सुवेपा। ३ सुभगा। ४ मुरतप्रवीणा। ५ सुसत्त्वा । ६ विप(?सुख)श्रता। ७चिनीता। ८ भोगिनी। ९विचक्षणा। १०प्रियभापिणी। ११ प्रसन्नमुखी। १२ पीनस्तनी। १३ चारुलोचना। १४ रसिका। १५ लज्जान्यिता लक्षणयुता। १६वाक्यहा। १७ गीतज्ञा। १८ नृत्यना। १९ याद्यना । २० मुप्रमाणशरीरा । २१ सुगंधप्रिया। २२ नातिमानिनी। २३ चतुरा। २४ मधुरा। २५ नेहवती। २६ विमर्शवती। २७ संवृतमंत्रा। २८ सत्यवती। २९ प्रशावती। ३० चैतन्या। ३१ शीलवती। ३२ गुणान्विता । ३७. 'त्रिविधं सौख्यम् । १ आङ्गिक । २ वाचिक । ३ मानसिक । इति । ३७) F शारीरं। मानसिकं चेति । * 1 ABG add अथ विविधं |, F द्विविध।. drop इति । CDE मानसिक चेति । 2 ABG शारीरिकं; E कायि।. 3 संविवरण-वस्तुरनकोशः। ३८. चत्वारि सौख्यकारणानि । १ योगाभ्यासकारणम् । २ अभिमानकारणम् । ३ सम्प्रत्ययकारणम् । ४ विपयकारणम् । इति । ३९. नवविधो गंधोपयोगः । १ तैलाधिवासः। २ जलाधिवासः। ३ वस्त्राधिवासः । ४ मुखाधि- वासः । ५ उद्वर्त्तनाधिवासः। ६ विलेपनाधिवासः । ७ स्नानाधिवासः। ८ धूपनाधिवासः। ९ भोजनाधिवासः । इति । - । . ३९) ० १ तैलाधिवास । २ पुष्पवास। ३ मुखवास । ४जलवास। ५ सानवास । ६ उद्वर्तनवास । ७धूपनवास । ८ तांबोलवास। ९ भोजनवास । 1 ३९) D१ तैलाधिवासे। २जलाधिवासे। ३ मुखाधिवासे । ४ स्थाने । ५ उद्वर्तने । ६ उदके। ७ विलेपने ।। ८ धूपने । ९भोजने । चेति । ३९) E १ तैलाधिवासः। २ जलाधिवासः। ३सुरभिजलं। ४ उद्वर्त्तता। ५धूप। ६ तांबूल। ७ भोजनाधिवासः। ८ वस्त्राधिवासः। ९ मुखाधिवासः। ३९) F १ तैलाधिवासे । २जलाधिवासे। ३ वस्त्राधिवासे । ४ मुखे । ५ उद्वर्त्तने । ७ विलेपने। ८ धूपने । ९ भोजने । चेति । ६स्ताने। ४०. देशविधं शौचम् । १ भावशौचं । २ स्वानशौचं । - ३ जलशौचं । . ४ मृत्तिकाशौचं । ५ श्मश्रुशौचं । ६ संस्कारशौचं । ७ पवित्रवाक्यं । ८ प्राणिदयाशौचं। ९ अर्थशौचं । १० आचारशौचं । इति । । ४०) । १ जलशौचं। २ मृत्तिकाशीचं। ३गंय. ४ श्मश्रु। ५संस्कार। ६ पविश्वास्य । ७ प्राणिदयाशीचं। ८ अर्थशीचं । ९ आचारशाचं । ४०) १ भावशीचं । २ मुसशीचं । ३ मृत्तिकाशीचं ।'४ गंधशीचं । ५ कक्षाशीच । ६श्मश्रुशीच। ७सानशौच । ८ नसशीच । ९ आनल चेति । 1 ABCDEF omit the Sūtra and its Vivarana. 2 ABG अथ नव। ।। 3ABG अथ दश ।

८मला सविवरण-यस्तुरत्नकोशः। ४५ ४०) D १ मुखशौच। २ कक्षा। ३ कर । ४ श्मश्रु। ५जल। ६ मृत्तिका । ७नख। ९वृत्ति। १० भावशौच । ४०) E १ मुखशौच । २ नानशौच । ३ मृत्तिकाशौच । ४ गंधशौच । ५ कक्षा! ६ श्मश्रु । ७जल । ८ नख । ९ अनिल । १० सर्वशौच । इति दश विधं शौचम् । ४०) F१ मुखशौच । २मानशौच । ३ मृत्तिका । ४ कक्षा । ५गंध । ६म(?श्म)श्रु । ७ जल। ८पवित्रभाषण । ९ नख । १० आचारशौच चेति । ४०) G१ भावशौचं । २ नानशौचं । ३ जलशौचं । ४ मृत्तिकाशीचं । ५गंधदमथु ! ६ संस्कार । ७ पवित्रवाक्य । ८ प्राणियाशौचम् । ९ अर्थशौचम् । १० आचारशौचम् । दें ४१. 'द्विविधः कामः। १ स्वाभाविक । २ कृत्रिम । इति । ४२. दश कामावस्थाः । १ अभिलाषा । २ चिंता । ३ स्मृति । ४ गुणकीर्तन । ५ उद्वेग । ६ प्रलाप । ७ उन्माद । ८ व्याधि । ९ जडता। १० मरण । इति । ४२)C१ अभिलापा । २चिंता। ३ स्मृति । ४ गुणकीर्तन। ५ उद्वेग । ६ उन्माद । ७ व्याधि । ८ जडता। ९मरणं चेति । ४२) D१ अमिलापा। २चिंता। ३ रस। ४ गुणकीर्तन। ५उद्वेग। प्रलाप । ७ उन्माद । ८ व्याधि। ९ जडता। १० मरणं चेति । ४३. विंशती रक्तस्त्रीणां लक्षणानि । १ पूर्व भाषते । २ दर्शनात्प्रसन्ना भवति । ३ समागमे तुष्यति । ४ संभापिता हृप्यति । ५ गुणान् सखीजने कथयति । ६ दोपान् प्रच्छा- दयति । ७ सन्मुखी शेते। ८ पश्चात् स्वपिति। ९ पूर्वमुत्तिष्ठति । १. मित्राणि पूजयति । ११ अमित्राणि द्वेष्टि। १२ प्रोपिते दुर्मना 1A BG अथ द्वि। AAG कृत्रिमश्च । 3 F दशविधा कामावस्था । 4 D लक्षणस्थानानि ।

सविवरण-वस्तुरनकोशः। भवति । १३ स्वधनं ददाति । १४ प्रथममालिङ्गनं करोति । १५ पूर्वमेव चुम्बनं करोति । १६ समदुःखसुखा । १७ स्नेहवती । १८ संभोगार्थिनी । १९ सन्मुखावलोकिनी। २० सदा विनीता । करोति । ४३) A B १ पूर्व भापते । २ दर्शनात्प्रसन्ना भवति । ३ समागमे तुप्यति। ४ संभापिता हृप्यति । ५ गुणान् सखीजने कथयति । ६ दोषान् छादयति । ७ सन्मुखी शेते। ८ पश्चात् स्वपिति। ९ पूर्वमुत्तिष्ठति। १० मित्राणि पूजयति । ११ अमित्राणि द्वेष्टि। १२ प्रोपिते दुर्मना भवति । १३ स्वधनं ददाति । १४ प्रथममा- लिंगयति । १५ पूर्वचुंबनं करोति। १६ समदुःखसुखावलोकिनी । १७ सदा विनीता। १८ नेहवती । १९ संभोगार्थिनी । ४३) १ पूर्व भापितं । २ दर्शनात्प्रसन्ना भवति । ३ समागमे पुप्यति । ४ संभापिता हृष्टा भवति । ५ सखिजने गुणान् कथयति ।' ६ दोषान् प्रच्छादयति। ७ सन्मुखी शेते। ८ पश्चाद् स्वपिति । ९पूर्वमुत्तिष्ठते! १० मित्राणि पूजयति । ११ अमित्राणि द्वेषयति । १२ प्रोपिते दुर्मना। १३ स्वधनं ददाति । १४ प्रथममालिंगनं १५ चुंबनं ददाति। १६ समदुःखा। १७ स्नेहवती। १८ मिष्टान्नं दात्री। १९ सुवेपा। २० सुमोगार्थिनी चेति । ४३) D १ अर्थानुभाविनी । २ दर्शने प्रसन्ना भवति । ३ समं तुप्यति। ४संभाविता हृष्यति । ५ गुणान् सखीजने कथयति । ६ दोपान् प्रच्छादयति। ७ सन्मुखी शेते। ८ पश्चात् सुपति। ९ पूर्वमुत्तिष्ठति । १०मित्राणि पूजयति। ११ अमित्राणि द्वेषयति। १२ प्रोपिते दुर्मना भवति। १३ स्वधनं ददाति। १४ प्रथम- मालिंगनं करोति। १५ पूर्वमेव चुंबन करोति। १६ समदुःखसुखा। १७ सन्मुखावा लोकिनी। १८ स्नेहवती। १९ संभोगार्थिनी चेति । ४३) E १ अर्थानुभाविनी । २दर्शनात् प्रशांता भवति । '३ संतुष्टा इतुष्यति । ४ संभाषणेन हृष्यति । ५ गुणान् प्रकाशयति । ६ स्तनयोः पीडन। ७ भूषणोद्धाटनं। ८ हसनं। ९ नूपुरोत्कर्षणं । १० कर्णफंडूयनं। ११ केशकीर्ण । १२ प्रचारणसंयमनं । १३ सखोजने दोपान् प्रच्छादयति । १४ सन्मुखी शेते। १५ पश्चात् स्वपति। १६ पूर्वमुत्तिष्ठति। १७ मित्राणि पूजयति । १८ अमित्राणि द्वेपयति ।' १९ प्रोपिते दुर्मना भवति। २० स्वधनं ददाति २१ प्रथमं आलिंगनं करोति । .२२ पूर्वमेय स्ववचनात् भापयति। २३ चुंबनं करोति । २४ समदुःसे सदा विनीता। २५ सन्मुखविलोकिनी। २६ स्नेहयती। २७ संभोगार्थिनी। ४३) F१ पूमायात? भाषते)।२दर्शनात् प्रसन्ना भवति । ३ संतुष्ण।४संभापिताद् हप्यति । ५ गुणान् ससीजनं वदति । ६ दोपान् प्रच्छादयति। ७ सन्मुसी शेते। ८ पश्चात्स्वपिति । ९ पूर्वमुत्तिष्ठति । १० मित्राणि पूजयति । ११ अमित्राणि देटि । १२ प्रोपिते दुर्मना। १३ स्वघनं ददाति । १४ प्रथमालिगनं करोति । १५ पूर्वमेव चुंयनं ददाति । १६ समानदुम्सा। १७ विनीता। १८ सम्मुसावलोकनी। १९ रोहवती । २० संमोगार्थिनी चेति । ।

सविवरण-स्तुरनकोशः। ४३) G १ पूर्व भापते । २ दर्शनात्प्रसन्ना भवति । ३ समागमे तुष्यति । ४ सम्भापिता हप्यति।. ५गुणान् सखिजने कथयति । ६दोपान छादयति। ७ सन्मुखी शेते। ८ पश्चात् स्वपिति । ९ पूर्वमुत्तिष्ठति । १० मित्राणि पूजयति । ११ अमित्राणि द्वेष्टि । १२प्रोपिते दुर्मना भवति । १३ स्वधनं ददाति। १४ प्रथममालिंगयति । १५ पूर्वचुंबनं करोति । १६ समदुःखसुखावलोकिनी। १७ सदा विनीता। १८ स्नेहवती। १९ सम्भोगार्थिनी। * ४४. एकविंशतिर्विरक्तस्त्रीणां लक्षणानि । १ चुंविता विमुखं करोति । २ मुखं परिमार्जयति । '३ निष्ठीवति । ४ प्रथमं शेते। ५ पश्चादुत्तिष्ठति । ६ पराङ्मुखी शेते। ७ वाक्यं नावमन्यते। ८ मित्राणि द्वेष्टि । ९ अमित्राणि पूजयति । १० सदा गर्विता भवति । ११ उक्ता कुप्यति । १२ गमने तुष्यति । १३ दुष्कृतं स्मरति । १४ सुकृतं विस्मारयति । १५ दत्तं न मन्यते । १६ दोषान् प्रकटीकरोति । १७ गुणान् प्रच्छादयति । १८ सन्मुखं न पश्यति । १९ दुःखिते सुखिता भवति । २० विप्रियं वदति । २१ संभोगे सुखं नं वाञ्छति । ४पश्चा- दुत्तिष्ठति । ४४) ० १ चुंबने मुखं परिमार्जयति । २ निष्ठीवति । ३ प्रथम शेते। ५ सन्मुखी न शेते। ६ मित्राणि द्वेपयति । ७ अमित्राणि पूजयति । ८ गर्विता उत्कथयति । ९गमने हृया। १० दुष्कृतं स्मरति । ११ सुकृतं विस्मारयति । १२ उकं न मन्यते । १३ दोपान् प्रगटीकरोति । १४ गुणानाच्छादयति । १५ सन्मुख न पश्यति । १६ दुःखिते सानंदा। १७ अप्रियंवदा । १८ संभोगे सुखं नायगच्छति । १९ कोपमुत्पादयति । ४४) D१ चुम्बिता विमुखं करोति । २ मुखं च परिमार्जयति । ३ निष्ठीवति । ४प्रथम शेते। ५ पश्चादुत्तिष्ठति । ६ परान्मुखी शेते । ७चाचं न मन्यते। मित्राणि द्वेषयति । ९ कुमित्राणि पूजयति । १० गर्विता भवति । ११ उक्ता फुप्यते । १२ गमने तुप्यति । १३ दुष्कृतं सरयति । १४ सुरुतं विस्मरयति । १५ दत्तं न मन्यते । १६ दोषान प्रकटीकरोति । १७ गुणान् प्रच्छादयति । २८ सन्मुख न पश्यति । २० दुःखिते सुखिता भवति । २१ संभोगेषु सुखं न वान्छति । ४४) E १ मुखं परिमार्जयति। २ निष्ठीवती। ३ प्रथमं शेते। ४ पश्चादुत्तिष्ठति । ५परामुखी शेते। ६ मिवाणि द्वेष्टि। ७ अमित्राणि पूजयति। ८ गर्विता भवति । ९ उक्ता कुप्यति । १० गमने तुप्यति । ११ दुःसिते दुसिता [न] भवति । १२ विप्रियं 1 A B C D विंशति विरक्त', 'विशति भरक्त ।। १९ विप्रियं वदति ।

४६ सविवरण-वस्तुरत्नकोशः। भवति । १३ स्वधनं ददाति । १४ प्रथममालिङ्गनं करोति । १५ पूर्वमेव चुम्बनं करोति । १६ समदुःखसुखा । १७ स्नेहवती । १८ संभोगार्थिनी । १९ सन्मुखावलोकिनी । २० सदा विनीता । - करोति। । ४३) A B १ पूर्व भापते । २ दर्शनात्प्रसन्ना भवति । ३ समागमे तुष्यति । ४ संभापिता हृष्यति । ५ गुणान् सखीजने कथयति । ६ दोपान् छादयति। ७ सन्मुखी शेते। ८ पश्चात् स्वपिति। ९ पूर्वमुत्तिष्ठति। १० मित्राणि पूजयति। ११ अमित्राणि द्वेष्टि। १२ प्रोपिते दुर्मना भवति । १३ स्वधनं ददाति। १४ प्रथममा- लिंगयति। १५ पूर्वचुंबनं करोति । १६ समदुःखसुखावलोकिनी। १७ सदा विनीता। १८ नेहवती । १९ संभोगार्थिनी । ४३) १ पूर्व भापितं । २ दर्शनात्प्रसन्ना भवति । ३ समागमे पुष्यति । ४ संभापिता हया भवति । ५ सखिजने गुणान् कथयति । ६ दोपान् प्रच्छादयति। ७ सन्मुखी शेते। ८ पश्चाद् स्वपिति । ९ पूर्वमुत्तिष्ठते । १० मित्राणि पूजयति । ११ अमित्राणि द्वेषयति। १२ प्रोपिते दुर्मना। १३ स्वधनं ददाति । १४ प्रथममालिंगनं १५ चुंबनं ददाति। १६ समदुःखा। १७ स्नेहवती। १८ मिष्टान्नं दात्री। १९ सुवेपा। २० सुभोगार्थिनी चेति । ४३) D १ अर्थानुभाविनी । २ दर्शने प्रसन्ना भवति । ३ समं तुष्यति । ४संभाविता हृष्यति । ५गुणान् सखीजने कथयति । ६ दोषान् प्रच्छादयति । ७ सन्मुखी शेते। ८ पश्चात् सुपति। ९पूर्वमुत्तिष्ठति । १० मित्राणि पूजयति ११ अमित्राणि द्वेषयति । १२ प्रोपिते दुर्मना भवति। १३ स्वधनं ददाति । १४ प्रथम- मालिंगनं करोति । १५ पूर्वमेव चुंबनं करोति । १६ समदुःखसुखा। १७ सन्मुखावा लोकिनी। १८ स्नेहवती। १९ संभोगार्थिनी चेति । ४३) E १ अर्थानुभाषिनी । २ दर्शनात् प्रशांता भवति । ३ संतुष्टा इ(?तुष्योति। ४संभापणेन हप्यति। ५ गुणान् प्रकाशयति । ६स्तनयोः पीडनं। ७ भूषणोद्धाटनं । ८ हसनं। ९नूपुरोत्कर्षणं । १० कर्णकंडूयनं । ',११ केशकीर्ण। १२ प्रचारणसंयमनं । १३ सखीजने दोपान् प्रच्छादयति । १४ सन्मुखी शेते। १६ पूर्वमुत्तिष्ठति। १७ मित्राणि पूजयति। १८ अमित्राणि द्वेषयति ।' १९ प्रोपिते दुर्मना भवति । २० स्वधनं ददाति २१ प्रथमं आलिंगनं करोति । .२२ पूर्वमेव स्ववचनात् भापयति । २३ चुंबनं करोति। २४ समदुःखे सदा विनीता । २५ सन्मुखविलोकिनी । २६ स्नेहयती। २७ संभोगार्थिनी । ४३) F१ पूमायात(१ भापते)। २ दर्शनात् प्रसन्ना भवति । ३ संतुष्टा । ४संभाषिताद् हप्यति । ५ गुणान् ससीजनं वदति। ६ दोपान् प्रच्छादयति। ७ सन्मुखी शेते। ८ पश्चात्स्वपिति। ९पूर्वमुत्तिष्ठति। १० मित्राणि पूजयति । ११ अमित्राणि द्वेष्टि । १२ प्रोपिते दुर्मना। १३ स्वधनं ददाति । १४ प्रथमालिगनं करोति । १५पूर्वमेव चुंबन ददाति । १६ समानदुम्सा। १७ विनीता। १८ सम्मुसावलोकनी। १९ स्नेहयती । २० संमोगार्थिनी चेति । १५ पश्चात् स्वपति ।

सबिघरण-घस्तुरलाकोशः। ४३) G १ पूर्व भाषते । २ दर्शनात्प्रसन्ना भवति । ३ समागमे तुष्यति । ४ सम्भापिता हृप्यति। ५गुणान् सखिजने कथयति । ६ दोपान छाद्यति । ७ सन्मुखी शेते। ८ पश्चात् स्वपिति । ९ पूर्वमुत्तिष्ठति । १० मित्राणि पूजयति । ११ अमित्राणि देष्टि । १२प्रोपिते दुर्मना भवति । १३ स्वधनं ददाति। १४ प्रथममालिंगयति। १५ पूर्वचुंबनं करोति । १६ समदुःखसुखावलोकिनी। १७ सदा विनीता। १८ स्नेहवती। १९ सम्भोगार्थिनी। ४४. एकविंशतिर्विरक्तस्त्रीणां लक्षणानि । १ चुंबिता विमुखं करोति । २ मुखं परिमार्जयति । ३ निष्ठीवति । ४ प्रथमं शेते । ५ पश्चादुत्तिष्ठति । ६ पराङ्मुखी शेते । ७ वाक्यं नावमन्यते । ८ मित्राणि द्वेष्टि । ९ अमित्राणि पूजयति । गर्विता भवति । ११ उक्ता कुप्यति । १२ गमने तुप्यति । १३ दुष्कृतं स्मरति । १४ सुकृतं विस्मारयति । १५ दत्तं न मन्यते । १६ दोषान् प्रकटीकरोति । १७ गुणान् प्रच्छादयति । १८ सन्मुखं न पश्यति । १९ दुःखिते सुखिता भवति । २० विप्रियं वदति । २१ संभोगे सुख-नं १० सदा वाञ्छति । ७ अमित्राणि पूजयति। ४४)१ चुंबने मुखं परिमार्जयति । २ निष्ठीवति । ३ प्रथमं शेते। ४ पश्चा- दुत्तिष्ठति । ५ सन्मुखी न शेते। ६ मित्राणि द्वेषयति । ८ गर्विता उत्कथयति । ९गमने हटा। १० दुप्कृतं स्मरति । ११ सुरतं विस्मारयति । १२ उक्तं न मन्यते। १३ दोषान् प्रगटीकरोति । १४ गुणानाच्छादयति । १५ सन्मुख न पश्यति । १६ दुःखिते सानंदा । १७ अप्रियंवदा। १८ संभोगे मुखं नायगच्छति । १९ कोपमुत्पादयति। ४४) D१ चुम्धिता विमुखं करोति । २ मुखं च परिमार्जयति । ३ निष्ठीवति। ४प्रथमं शेते। ५ पश्चादुत्तिष्ठति । ६ परान्मुसी शेते । ७ याचं न मन्यते। ८ मित्राणि द्वेपयति । ९ कुमित्राणि पूजयति । १० गर्विता भवति । ११ उक्ता कुप्यते। १२ गमने तुप्यति । १३ दुष्कृतं स्मरयति । १४ सुरतं विस्मरयति । १५ दत्तं न मन्यते। १६ दोपान् प्रकटीकरोति । १७ गुणान् प्रच्छादयति । २८ सन्मुखं न पश्यति। १९ विनियं चदति। २० दुःखिते मुखिता भवति । २१ संभोगेपु सुखं न याञ्छति । ४४) E १ मुखं परिमार्जयति। २ निष्ठीवती। ३ प्रथम शेते। ४ पवादुत्तिष्ठति । ५परानुसी शेते। ६ मियाणि द्वेष्टि। ७ अमित्राणि पूजयति । ८ गर्विता भवति । ९ उक्ता कुप्यति । १० गमने तुष्यति । ११ दुसिते दुःसिता [न] भवति । १२ विप्रियं 1 A B C D विंशति विरक्त "विशति भरत..

४८ सविवरण-वस्तुरलकोशः। चदति । १३ संभोगसुखं न वांछति। १४ स्वेच्छया विचरति। १५ दुष्यतं स्मरति। १६ सुकृतं विस्तारयति । १७ दत्तं न मन्यते । १८ दोषान् प्रकटीकरोति । १९ गुणान प्रच्छादयति । २० सन्मुखं न पश्यति । ४४) F १ चुम्विता परान्मुखी भवति । २ चुम्बितानन्तरं निष्ठीवति । ३ मुखं च परिमार्जयति । ४ प्रथम शेते। ५ पश्चादुत्तिष्ठति। ६ पराङ्मुखी शेते। ७ वचनं नावमन्यते। ८ मित्राणि द्वेष्टि । ९ अमित्राणि पूजयति । १० सदैव गर्विता। ११ उक्ता फुप्यति । १२ प्रोपिते तुप्यति । १३ दुष्टतं स्मारयति । १४ सुरुतं विस्मारयति । १५ दत्तमवमन्यते । १६ दोपान प्रकटयते । १७ गुणानाच्छादयति । १८ सम्मुखं न पश्यति । १९ दुःखेन दुःखिता न भवति । २० विप्रियं वदति। २१ संभोग न वदवाञ्छ)ति । * । ४५. द्वाविंशतिः कामिनीनां विकारेङ्गितानि । १ सानुरागनिरीक्षणं । २ श्रवणसंयमनं । ३ अङ्गुलीमोटनं । ४ मुद्रिकाकर्षणं । ५ नूपुरोत्कर्षणं । ६ गुप्ताङ्गदर्शनं । ७ सख्या सह हसनं । ८ भूपणोद्घाटनं । ९ कर्णमोटनं । १. कर्णकंड्रयनं । ११ 'केशप्रकीर्णनं । १२ पुष्पसंयमनं । १३ नखविलेखनम् । १४ परि- धानसंयमनं । १५ निश्वासोच्छुसनं । १६ प्राग् विजृम्भणं । १७ बाला- लिङ्गनं। १८ बालमुखचुम्वनं । १९ प्रियभाषणं । २० परोक्षे नाम- कीर्तनम् । २१ अतिक्रान्तप्रेक्षणम् । २२ गुणव्यावर्णनं । इति । ४५) C १ उच्चैर्निष्ठीवती । २ सानुरागा संयमनं । ३ अङ्गुलीस्फोटनं । ४ मुद्रिका कर्षणं । ५ गुप्तांगदर्शनं। ६ सख्या सह हसनं । ७ नूपुरोत्कर्पणं । ८ स्तनोपपीडनं । ९ भूपणोद्घाटनं । १० कर्णकंड्यनं । ११ केशप्रकीर्णनं । १२ परिधानसंयमन। १३ निश्यासोच्छ्वासनं। १४ वागविजृभणं । १५ वालालिंगनं। १६ यालमुखचुंबन । १७ प्रियभापर्ण। १८ अतिक्रांतमेक्षणं । १९ परोक्षनामस्मरणं। २० गुणवर्णनं । २१ विरहवेदना। ४५) D१ सानुगगनिरीक्षणं । २ श्रवणसंयमनं । ३ अंगुलीस्फोटनं। ४ सदा प्रसन्न। ५ मुद्रिकाकर्षणं । ६ गुप्तांगदर्शनं । ७ सरया सह हसनं । ८ भूपणोद्धाटनं । ९ कर्णोत्कर्षण। १० कर्णकंड्यनं । ११ फेशप्रकीर्णनं । १२ पुष्पसंयमनं । १३ नखविलेखनं । १४ परिधानसंयमन। १५ यिश्यासोलसनं। १६ मार विनँभनं। १७ यालालिंगनं । १८ पालमुसर्चुयनं । १९ प्रियभापणं । २० परोक्षे नामकीर्तनं । 1AG द्वाविंशकामिनीनां; B D E द्वाविंशतिकामिनीना; C अथ द्वाविंशति कामिनीनां । 2 ABG मुद्रिका अर्पणं 1. 3 ARG केशप्रक्षरणम् । 4 ABG omiit प्राग। 5 ABG यालचुम्यनं 1; GAB परोक्षे नामग्रहणं !; G omits परोक्षे नामकीर्तनम् । ।

७ पतिद्वेपिणी । । सवियरण-पस्तुरनकोशः। । ४५) E१ उच्चैर्निष्ठीवती। २ सानुरागनिरीक्षणं । ३श्रवणसंयमनं। ४ अंगुलीस्फोटनं । ५ मुद्रिकाकर्षणं । ६ गुप्तांगदर्शनं । ७ परिधानसंयमन । ८ निश्वासोश्या(?च्छा)सनं । ९प्राक(?)विजृभणं । १० बालमुखचुंबने । ११ प्रियलक्षणे(?श्लेपणं)। १२ अतिकांतप्रेक्षणं । १३ पश्चान्नामस्मरणं। ४५) F १ सानुरागनिरीक्षणं । २श्रवणसंयमनं ३ अगुल्या मोटनं। ४ मुद्रिका- कर्पणं । ५ गुप्ताङ्गदर्शनं। ६ सस्या सह हसनं । ७ स्तनोपपीडनं। ८ भूषणोद्घाटनं । ९नूपुरोत्कर्पणं । १० कर्णकण्डूयनं । २१ केशप्रकीर्णनं । १२ प्रावरणसंयमतं । १३ नखविलेखनं । १४ विनि)भ्यासोच्छ्वासनं । १५ प्राग विजृम्भणं । १६ वालालिङ्गन । १७ वालकमुखचुम्बनं। १८ प्रियश्लेपणं। १९ अतिक्रान्तप्रेक्षणं । २० परोक्षे नामस्मरण २१ गुणव्यावर्णनं । २२ संभोगवान्छा चेति । ४६. चतुर्विंशतिरसतीनां लक्षणानि । १ द्वारदेशे शायिनी। २ पश्चादवलोकिनी। ३ पुंश्चली सखी। ४ भोगार्थिनी । ५ गोष्ठिप्रिया । ६ राजमार्गाश्रिता । ७ ८ पतिरहिता । ९ हीनाङ्गभार्या । १० मृतापत्या । ११ बहुदेवरालापिनी । १२ बहुदेवतापूजिनी। १३ विनोदप्रिया । १४ भोगिनी [ सखी 11 १५ अतिमानिनी । १६ कृत्रिमलज्जान्विता । १७ परप्रीतिरता । १८ वृद्ध- १९ सततहास्या । २० प्रोपितभर्तृका। २१ लोभान्विता। २२ बहुभापिणी । २३ कीडनप्रिया । २४ वंध्या । इति । ४६) A B द्वारदेशे शायिनी । २ पाश्चात्यावलोकिनी । ३ पुंश्चली सखी। ४ भोगिनी। ५ गोष्टिमिया । दराजमार्गाश्रिता। ७पतिद्वेषिणी। ८पतिरहिता। ९हीनांगभार्या । १० मृतापत्या। ११ वहुदेवरालापिनी । १२ वहुदेवतापूजनी। १३ विनोदकारिणी। २४ भोगार्थिनी। १५ अतिमानिनी। १६ विमलजान्यिता। १७ परप्रीतिरता । १८ वृद्धभार्या। १९ सततहास्या । २० प्रोपितमत्का। २१ लोभान्विता। २२ यहुभापिणी। २३ क्रीडनमिया । २४ वंध्या । ४६) द्वारदेशशायिनी । २ पश्चादवलोकिनी । ३ पुंश्चली। ४ भोगिनी। ५ गोष्ठिमिया। ६ राजमार्गमाश्रिता। ७ पतिदेषिणी! ८पतिरहिता । ९दा(?ही)नयुपतीनां संगिनी । १० जलवाहनीनां संगिनी । ११ विनोदप्रिया । १२. अतिमानिनी। १३ दूरं जलानयने गच्छति । १४ कुंभकाररजकानां संगिनी । १५ फुहिनी । १६ मातविमलज्ञान्विता(कृत्रिमलज्ञान्विता)। १७ अग्रणीता। १८ संत?सतत)हास्या। १९ लोभान्विता । २० बहुभापिणी । २१. कीडनप्रिया। २२ केशसंवाहनप्रियां २३ आत्मगृहं परित्यज्य परगृहे याती करोति। २४ स्वपति परित्यज्य अन्यमाकांक्षति। 1A BG अध चतु०1, E चतुर्विज्ञात्यसतीलक्षणानि ।। C D चतुर्विंशति असतीनां लक्षणानि । B पयादवलोकनी । भार्या ।

. ५० सविवरण-चस्तुरतकोशः। ४६) D१ द्वारदेशशायिनी । २ पश्चात् पश्चादवलोकिनी । ३ पुंश्चली। ४ भोगिनी । ५ गोष्ठिप्रिया। ६ राजमार्ग(?)थिता। ७ पतिदेपिणी । ८ पतिरहिता। ९हीनांगमायां । १० मृतवत्सा। ११ देवरजन(रालापिनी)। १२ गोष्टिप्रिया। १३ वहुदेवतापूजनं । १४ वि(संभोगार्थिनी । १५ अतिमानिनी । १६ कृत्रिमलजान्यिता । १७ परमीतिरता । १८ वृद्धभार्या । १९ सततहास्या । २० प्रोपितभरीका । २१ लोभान्विता । २२ यहभापिणी । २३ फ्रीडापरा चेति। ४६)E १ द्वारदेशशायिनी। २ पश्चादवलोकिनी । पुंश्चली। ४ भोगिनी। ५ गोष्ठिप्रिया । ६ राजमार्ग(?)टिनी। ७ पतिमन्वेपणी(?पतिढे पिणी)। ८ पतिरहिता । ९ हीनयुवतीसंगिनी। १० जलवाहिकीनां संगिनी। ११ विनोदप्रिया । १२ प्र(अ)ति- मानिनी । १३ दूराजलानयनाय गच्छति। १४ कुंभकाररजकसंगति फरोति । १५ कृत्रिम- लज्जान्विता । १६ परप्रीतिरता । १७ सततं हास्या। १८ विनोदं पहिामति । १९ लोभा. न्विता । २० बहुभापिणी । २१ फ्रीडणप्रिया । २२ केशसंयाहनमिया। २३ आत्मगृहे वार्ता परित्यज्य परगृहे यातःकरणाय रसिका। २४ स्वपति परित्यज्य परपुरुषान्वेपणं करोतीति । ४६)F१ द्वारदेशार्द्धस्थायनी । २ पश्चात्पविलोकनी। ३ पुंश्चलीसखी। ४भा(भो)गिनी। ५ गोष्ठिप्रिया। ६ राजमार्गाधिता। ७ पतिद्वेपिणी। ८ पतिवर्जिता। ९ हीनयुक्तीनां. सगिनी। १० गजवाहकानां प्रिया। ११ विनोदप्रिया । १२ अभिमानिनी । १३ दूरे पानीयानयनाय नजति। १४कुम्भकाररजकसंगतिं करोति। १५ कन्दुकासंगति करोति। १६ कृत्तित्रि)मलजान्विता । १७ परप्रीतिरता। १८ संततहास्या । १९ निर्जने यहिगामिनी । २० लोभान्विता। २१ बहुभाषिणी। २२ क्रीडनप्रिया । २३ केशसंवाहनप्रिया। २४ स्वगृहं मुच्चान्यगृहे चार्वाकरणाय गच्छति । २५ रसिका।। २६ स्वपति परित्यज्य परपुरुषान्वेषणं करोति। ४६) Gk द्वारदेशे शायिनी । २ पाश्चात्यावलोफिनी। ३ पुंश्चलीसखी | ४ भोगिनी । ५ गोष्ठिप्रिया। राजमार्गाश्रिता। ७ पतिद्वेपिणी। ८पतिरहिता। ९ हीनागभार्या । १० घंध्या। ११ मृतापत्या । १२ बहुदेवरालापिनी। १३ बहुदेवतापूजनी । १४ विनोद कारिणी । १५ भोगार्थिनी। १६ अतिमानिनी। १७ कृत्रिमलजान्विता। १८ परप्रीतिरता। १९ वृद्धभार्या । २० सततहास्या । २१ प्रोपितभर्टका । २२ लोभान्विता । २३ यहुभापिणी । २४ क्रीडनप्रिया। ४७. पोडश दुष्टस्त्रीणां लक्षणानि । १ पिङ्गाक्षी । २ कूपगल्ला । ३ लम्बोष्ठी । ४ खरालापा । ५ ऊर्ध्व- केशी । ६ लम्बोदरी। ७ दीर्घललाटी । ८ संहितभ्रूः । ९ पुष्पित- १० प्रविरलदशना । ११ अतिदीर्घा । १२ अतिवामना । १३ अतिस्थूला । १४ अतिकृशा। १५ अतिगौरा। कृष्णा । इति । 1 AG अथ पोडशस्त्रीणामपलक्षणानि । Bअथ पोडशदुष्टस्त्रीणामपलक्षणानि । C पोडशस्त्रीणां अपलक्षणानि ; E दुष्टस्त्रीणां पोडशापलक्षणानि । नखी। १६ अति सविवरण-वस्तुरनकोशः। ४७) A B G१ पिङ्गाक्षी। २ कृपगल्ला । ३ लंगोष्ठी। ४ खरालापा ! ५ अर्द्धकेशी । ६ दीर्घललाटी। ७ संहितभ्रूः। ८ पुप्पितनखी। ९ प्रचिरलदशना । १० अतिदीर्घा । ११ अतीववामनी। १२ अतीवस्थूला। १३ अतीयगौरा। १४ अतीवकृष्णा। १५ अतीवकृशा। १६ प्रलंयोदरी । ४७) १ पिंगाक्षी। २ कृपगल्ला। ३लंबोष्टी। ४ ऊर्ध्वकेशा। ५लंबोदरी। ६दीर्घललाटा। ७ मिलित(भूः)। ८पुंपितनखी। ९ अतिवश्ल(?विरल)दशना । १० अतिदीर्घा । ११ अतिवामना। १२ अतिस्थूला ! १३ अतिकशांगि। १४ अतिगौरा। १५ अतिकृष्णा। १६ अती[व] रोमवतीति । ४७) D१ पिंगाक्षी। २ कृपगल्ला । ३लंयोष्टी। ४ खालापी। ५ऊ केशी। ६ लंबोदरी। ७दीर्घललाटा। ८ संगतभ्रू[:]. ९ पुष्फितमुखी(?पुप्पितनखी)। १० प्रविरलदशना। ११ अतिदीर्घा । १२ मतियामना । १३ अतिस्थूला । १४ अतिकशा । १५ अतिगौरा । १६ अतिकृष्णा । चेति । ४७) F१ पिंगाक्षी। २ कृपगंडा। ३लंबोष्ठी। ४ उर्दूकेशी। ५प्रलंबोदरी। ६ दीर्घललाटा । ७ मिलितभ्र(?भ्रूः)। ८ पुष्पितनखी। ९ अतिविरलकेशा। १० विरल- दशना। ११ अतिदीर्घा १२ अतिवामना। १३ अतिस्थूला। १४ अतिकशा। १५ अतिगौरा। १६ अतिरोमवती। १७ भूमिपर्यंतांगुलका। १८ मुक्तफेशा। १९ दीर्घदंता। २० वरदेहा । ४७) F १ पिंगाझी ! २ कूपगल्ला । ३ लंबोदरी । ४ लिम्बोष्टी (लम्बोष्टी)१५खरालापा। ६ ऊपके शी। दीर्घललाटा। ८ संहितचूचुका ! ९ पुस्पितनखी । १० प्रवी(वि)रल- दशना । ११ अतिदीर्घा । १२ दीर्घजहा। १३ भतिस्थूला। १४ अतिशा । १५यतिगौरा। १६ अतिकृष्णा। १७ अतिरोमवती। १८ दीर्घदंता। १९ खरदेहा । २० मुखे(१) किला। २१ भूमिलगितपादपूर्वाङ्गुलिकाश्चेति । ४८. अष्टौ स्त्रीणामविश्वासकारणानि । १ भर्तुः स्वैरिता । २ पुरुषार्थिनी । ३ प्रण(?णी)तगोष्ठी । ४ निरङ्कुशा । ५ विदेशवासा । ६ अन्यपुरुपं सन्मुखं विलोकयति । ७ यस्य तस्य सन्मुख हसति। ८ उक्ता सती शपथं करोति । इति । ४८) ABG १ मर्तुः स्वरिता । २ पुरुषार्थिनी। ३ प्रण(?णी)तगोष्ठी। ४ निरंकुशा । ५ विदेशवासा।६ पुंश्चली। ७ पति(?त्युरीयादोषाः। ४८) १ भर्तुः स्वैरं विचरति । २ अन्यपुरुपसन्मुखं विलोकयति । ३ गोष्टी करोति। ४ निरंकुशा। ५यं यं पश्यति तम्य तस्य सन्मुसं विलोकयति । ६ गोष्ठी करोति(१)। ७ संसर्ग करोति। ८ ईप करोति । ४८) D १ भर्नुस्वैरिता। २ पुरुषार्थिनी। ३ प्रण(?णी)नगोष्ठी । ४ निरंकुशा। ५ विदेशवासा । ६ सध्यानी समृत्युपधात:()७ पुंश्चलीसंसर्गजा। ८ क्रिदोषा (ईयादीपाश्चेति। 1 ABG अशी स्त्रीणां अभिसारिकाणि C अष्टोअरलानां अविश्वासकारणानि; मस्त्रीणां अशी अविश्वासकरणानि ।

। सविवरण-वस्तुरनकोशः। ४८) १ भर्तुः खैरं विचरति । २ अन्यपुरुपं सन्मुखं विलोकयति । ३ गोष्ठी करोति । ४ निरंकुशं करोति । ५ यस्य तस्य सन्मुखं हसति । ६ उक्ता सती यथाचिमनुकरोति । ७ अन्यं जल्पति। ८ स्वैरिणीसंसर्ग करोति । ९पति वश्चयित्या रात्री परपुरुपगृहे गच्छति । ४८) F१ खैरगमा । २ परपुरुषसंमुखं विलोकयति । ३ उक्ता सती शपथान् करोति। ४ अलीकं जल्पति। ५ खैरिणीसंसर्ग विदधाति । ६ पतौ ईप्यों करोति । ४९. अष्टौ नार्योऽगम्याः। १ स्वगोत्रजा। २ गुरुपत्नी। ३ राजपत्नी। ४ मित्रपत्नी। ५ वर्णाधिका । ६ अस्पर्शा । ७ प्रव्रजिता ।। ८ कुमारी । इति । - -- ४९) A १ स्वगोत्रजा। २राजपत्नी। ३ मित्रपत्नी। ४ वर्णाधिका। .५ पूजिता। ६ कुमारी। ७ राजपत्नी। ४९) B १ स्वगोत्रजा । २ राजपत्नी । ३ मित्रपत्नी। ४ वर्णाधिका। ५अस्पृशा । ६ पूजिता। ७ कुमारी। ८ गुरु[पत्नी। ४९) C१ स्वगोत्रजा । २ गुरुपत्नी । ३ मित्रपत्नी । ४ वयोधिका । '५ राजपत्नी। ६ अस्पर्शा। ७ दोपसंयुक्ता। ८ कुमारी चेति । ४९) D१ खगोवजा । २गुरुपत्नी। ३राजपत्नी । ४ मित्रपत्नी। ५वर्णाधिका ६अस्पृशा। ७ प्रवजिता। ८ फुमारी चेति। ४९) F १ खगोवजा । २ गुरुपत्नी। ३ मित्रपत्नी। ४ राजपत्नी। ५ वर्णाधिकी. (?का)। अस्पर्शा। ७ प्रवज्या । ८ कुमारी चेति। ४९) E१ स्वगोत्रजा। २[पर]पुरुषपत्नी। ३राजपत्नी। ४ मित्रपत्नी। ५ वर्णाधिका। ६ अस्पर्शा। ७ दोपसंयुक्ता । ८ कुमारिका। ४९) G १ स्वगोत्रज्ञा। २ राजपत्नी । ३ मित्रपत्नी। ४ वर्णाधिका । ५ पूजिता । ६ कुमारी। ७ राजपत्नी। । +1 - 1 * ५०. अष्टविधो मूर्खः। १ निर्लज्जः। २ शठः । ३ क्लीवः । ४ निपुणः । ५ व्यसनी । ६ अतिलोभी। ७ गर्वितः । ८ निष्ठुरः इति । ५०) १ अप्रस्तावश । २ कुपंडित । ३ कुबुद्धि। ४ कुव्यसन । ५स्वभुंशी ६ स्वमर्मप्रकाशी। ७गर्वित । विष्टर(? निष्ठुर)श्चेति। ५०) E १ निर्लजः । २ शठः । ३ क्लीवः । ४ निर्गुणः। ५ व्यसनी। ६ अतिभोगी। ७ गर्वितः। ८ निष्ठुरः। इति । ५०) F १ अप्रश्नावी(१)। २ फुपठितः । ३ कुबुद्धिः। ४ कुव्यसनी। ५ निष्ठुरः। ६ स्वमर्मप्रकाशकः। ७ अभिमानी। ८ असंयद्धप्रलापी चेति । ८ भवनं । सविवरण-चस्तुरनकोशः। ' ' ५१. चतुर्विंशतिविधं नागरिकवर्णनम् । १ नगरे संस्थानं । २ आसन्नोदकभवनं । ३ प्रच्छन्नमहानसं । ४ गुप्तकार्यचिकित्सास्थानं । ५ निकटे नेपथ्यमंडपः। ६ विभक्तं वास- ७ नेपथ्योपकारप्राचुर्य । ८ गृहोपकरणबाहुल्यं । ९ शयना- सनरम्यत्वं । १० वाञ्छितपरिजनः । ११ पार्श्वे प्रविशा(? वेश)- नस्थानं । १२ मध्ये स्नानपीठं। १३ प्रभाते व्यायामविधानं । १४ मध्याह्न भोजनविघानं । १५ नित्यमेव विद्याभ्यसनं । १६ कुलोचि- तविधिना वर्तनं । १७ प्रदोषे गीतादिविनोदविधानं । १८ निशायां खदारासुरतं । १९ कदाचिगोष्टीरम्यत्वं । २. कदाचित् पात्रप्रेक्षणं । २१ कदाचिदुद्यानगमनं । २२ माल्यादिभोगकथनं । २३ सदैव ऋतुसमुचितोपभोगः। २४ विद्वज्जनसंसर्गः। ५१) A १ नगरे संस्थान । २आसन्नोदकमवनं। ३प्रच्छ नमहानसं । ४गुप्तकार्य- चिकित्सास्थानं । ५ निरुटे नेपथ्यमंडपः । ६ विभक्तं घासभवनं । ७ नेपथ्योपकारप्राचुर्य । ८ गृहोपकरणबाहुल्यं । ९शयनासनरम्यत्वं । १० वान्छितपरिजनः पायें प्रविशावेश)न- स्थानं । ११ मध्ये स्नानपीठं। १२ प्रभाते व्यायामनिधानं । १३ मध्याह्न भोजन विधान । १४ नित्यमेव विद्याभ्यसनं । १५ कुलोचितविधिना वर्तनं । १६ प्रदोषे गीतादिविनोद- विधान। १७ निशायां स्वदारापुरतं । १८ कदाचिद्गोष्ठीरम्यत्वं । १९ कदाचित्पाचप्रेक्षणं । २० कदाचिद्वि(दु)द्यानवाव(धन)गमनं । ५१)B १ नगरे संस्थानं। २आसन्नो द] कभवनं। ३प्रच्छन्नमहानसं। ४ गुतकार्य- चिकित्सास्थानं । ५ निकटे नेपथ्यमंडपः । ६ विभकं वासभवनं । ७ नेपथ्योपकारपाचुये। ८ गृहोपकरणवाहुल्यं । ९शय्यासनरम्यत्वं । १० वाञ्छितपरिजनपाचे प्रविशा(वेश)नस्थान। ११ मध्ये नानपीठं। १२ प्रमात व्यायामविधानं । १३ मध्याझे मोजनविधान । १४ नित्यमेव विद्याभ्यसनं। १५ फुलोचितविधिना वर्त्तनं । १६ प्रदोपे गीतादिविनोद- विधानं । १७ निशायां स्वदारासुरतं । १८ कदाचित् गोष्ठीरम्यत्वं । १९ कदाचित् पानप्रेक्षणं । २० कदाचित् वि(?उद्यानवन(?ना)वगमनं। २१ सदैव ऋतुसमुचितोपमोगः। ५१) C१ नगरे संस्थानं । २ आसनो(?नो)दकमयनं । ३ गुप्तकार्यचिंता। ४ स्थापनीय पार्श्वपानीयं । ५ सुप्तावेदकं । ६ पृथक् रंधनकं । ७ नेपथ्याग्रहणं । ८ नेपथ्योपप्रकरणं । ९प्राचुर्यगृहोपकरणं । १० बाहुल्यं रम्यक्त्वं । ११ माल्यादि भोगभव्यत्वं । १२ गुतस्यान । १३ प्रभाते व्यायामविधान । १४ मध्याह्ने भोजन विधान । १५ डाछनत्रकारस्थान(3)। १६ नित्यविद्याभ्यसनं । १७ कुलोचिते मार्गे वर्चनीयं । १८ प्रदोपे गीतविनोद । 1 ABC वर्चन।

सविवरण-चस्तुरनकोशः। १९ निशायां सुरतोपचारः। २० कदाचिदुद्यानगमनं । २१ कदाचित् क्षेत्रनिरीक्षणं । २२ सदैव कर्मसूचितो विभाग । २३ पुत्रपौधेपु हेतुकरणं । ५१) D १ यथा नगरे स्थान । २ आसनोदिकभवनं । ३ सपना(१)प्रच्छादनं । ४ महासनं । ५ परसेव्या गृहमुत्पत्तिच्छाया मित्राणां स्थानस्फोट(?) । ६ नव विश्वमंडपं । ७ विरक्तरक्तचासभवः । ८ नेपथ्यैवकरणं । ९ प्रासार्यगृहे (?) उपकरणयाहुल्यं । १०शय्यासनरम्यत्वं । ११ माल्यादिभोगकथनं । १२ वांछितमिनजनपाय आचमन- स्थानं । १३ अंतरे स्थानस्थानं । १४ प्रभाते व्यायामविधानं । १५ मध्ये भोजनं विधानं । १६ नित्यमेव विद्याभ्यसनं । १७ फुलोचितव्यवहरणं । १८ प्रदोषांते गीतविधान । १९ निशायां सुरतोपचरणं । २० कदाचिद्गोष्ठीरम्य[त्वं । २१ न(१) कदाचित्पात्रप्रेक्षणं । २२ कदाचिदुद्याने गमनं चेति । ५१) १ आसन्नोदकाभुवनांतसुप्त । २ कार्यचिंतास्थापनं । ३पाचे पानीयरंधनं । ४ विभक्त नेपथ्यगृहं। ५ नेपथ्योपकरणं । ६ प्राचुर्य गृहोपकरणं । ७ प्राचुर्य गृहप्रकरण- वाहुल्यं । ८ शास्त्रबाहुल्यं । ९ आसनबाहुल्यं । १० रम्यत्यमौल्यादिभागभव्यत्वं । ११ गुप्तं स्थानं स्यात् । १२ प्रभाते नियमविधानं । १३ मध्याह्न भोजनविधानं । १४ प्रच्छन्नभंडारस्थान। १५ नित्यं विद्याभ्यसनं । १६ कुलोचितेन मार्गेण वर्तनीयं । १७ प्रदोपे गीतविनोदः। १८ निशायां सुरतोपचारः। १९ कदाचिदुद्यानगमनं । २० कदाचित् क्षेननिरीक्षणं । २१ सदैव देवगुरुभक्तिः कार्या । २२ स्वजनपालनं । २३ सदैव समुचितवित्तविभागः । ५१) आसन्नोदुःक(१दक)भवनं । २ गुप्तकार्यचिन्तास्थापनं । ३ पायें पानीयस्य स्थाने न्धनकं । ४ विमुक्तने मध्यगृहं । ५ नेपथ्योपकरणप्राचुर्य। ६ गृहोपकरणवाहुल्यं । ७ रम्यत्वं ८ माल्यादिभोगभावितत्वं । ९मालादिमोमभव्यत्वं ।' १० गुप्तस्थानं स्थानस्य। ११ प्रभाते आयामविधानं । १२ मध्याह्ने भोजन विधानं । १३ प्रच्छन्न भण्डारस्थानं। १४ नित्यं विद्याभ्यसनं। १५कुलोचितेन मार्गेण प्रवर्तनीयं । १६प्रदोपे गीतविनोदाः। १७ निशान्ते सुरतोपचारः। १८ कदाचिदुद्यानगमनं । १९ कदाचित्क्षेत्र निरीक्षणं । २० विद्वजनसंसर्गः। २१ कुसंगपरित्यागः । २२ धर्मश्रद्धा। २३ जीवरक्षा । २४ सदैव समुचितोपक्रिया। ५१)G१ नगरे संस्थान । २ आसन्नोदकभवनं । ३प्रच्छन्नमहानसं । ४ गुप्तकार्य- चिकित्सास्थानं । ५ निकटे नेपथ्यमंडप । ६ विभक्तं वासमयनं । ७ नेपथ्योपकारप्राचुर्य । ८गृहोपकरणबाहुल्यं । ९शयनासनरम्यत्वं । १० वाञ्छितपरिजनः। ११ पार्श्व प्रविशा(वेश)नस्थानं । १२ मध्ये नानपीठं । १३ प्रभाते व्यायामविधानं । १४ मध्याह्ने भोजनविधान । १५ नित्यमेव विद्याभ्यसनं । १६ कुलोचितविधिना वर्त्तनं। १७ प्रदोषे गीतादिविनोद विधान । १८ निशायां स्वदारासुरतं । १९ कदाचिद्गोष्ठीरम्यत्वं । २० कदा. चित्पात्रप्रेक्षणं । २१ कदाचिद्वि(?दु)द्यानयाव(?वन)गमनं । २२ असम्पूर्णलक्षणावयव ।। २३ निर्लक्षण । ५२. 'त्रिविधं रूपम् । १असंपूर्णलक्षणावयवं। २संपूर्णलक्षणावयवं। ३ निर्लक्षणावयवं । इति। 1A omits विविध रूपं । † These ought to be in the following section, सविवरण-चस्तुरतकोशः। ५२)A १ असंपूर्णलक्षणावयवं। २ निलक्षण । ५२) B १ संपूर्णलक्षणावयवं । २ असंपूर्णलक्षणावयवं। ३ निर्लक्षण । ५२) C१ संपूर्णावययं । २ निर्लक्षणाचयवं। ३ असंपूर्णलक्षणावयवं । ५२) D१ संपूर्णलक्षणावयवं चेति । ५२) E१ संपूर्णलक्षणावययं । २ लक्षणावयवं। ३ असंपूर्णलक्षणावयवं । 4) G has given no Vivarana ( see foot note p. 54) ** ५३. त्रिविधं खरूपम् । १ मुग्धस्वभावं । २ चतुरस्वभावं । मुग्धचतुरस्वभावं । इति । ५३) AB १ मुग्धस्वभाव। २ मुखर । ३ चतुर । ५३) C१ मुग्धस्वभावं। २ मुग्धचतुरस्वभावं । ३ चतुरस्वभायें । D१ मुग्धस्वभावं। २ सुसद्भावं। ३ वतुरस्वभावश्चेति । E १ मुग्धस्वभाव । २ मुग्धस्वभावं। ३ मुग्धचतुरस्वभावं चेति । ५३) F१ मुग्धस्वभावं। २ मुग्धचतुरस्यभावं। ३ चतुरस्वभावं । G१ मुग्धस्वभाव। २ मुरख। ३ चतुर ५४. द्वादशविधः प्रमदोपचारः। १ रूपस्विनीनां रम्योपचारेण । २ भीरूणामाश्वासनेन । ३ चपलानां गांभीर्येण । ४ पंडितानां सत्येन। ५ प्रज्ञावता(?तीनां) कलाभिः । ६ शृङ्गारिणीनां सुवेपतया । ७ विनोदशिलानां क्रीडनेन । ८ हीनसत्त्वानां कारुण्येन । ९ शठस्वभावानां शाठ्येन । १. निर्विकल्पानां सरलस्वभावेन । ११ बालानां भक्षप्रदानेन । १२ विदग्धानां कुकुमो( ? कुकभो )पचारेण । इति । ५४) A १ रूपस्विनी रम्योपचारेण । २भीरूमाश्यानयेन। ३ चपलां गांभीर्येण । ४ पंडितानां सत्येन । ५प्रसायतां कलाभिः। ६ शृङ्गारिणां सुवेपतया । ७ विनोदशीलां क्रीडनेन। ८हीनसत्यां कारुण्येन । ९शठस्वमायानां शाट्येन । १० निर्विकल्प सुकुमारप्रयोगेन। ११ घालाना भक्षप्रदानेन । १२ धूतानां शाट्येन । 1 AB अथ द्वादशविधप्रमोदोपचारः। Cद्वादश प्रमोदोपचाप; D द्वारा विधः प्रमोदोपचारः| Eभय द्वादशविधः प्रमोदोपचारः। Fमाश विधः प्रमदानामुपवारः ।, G अथ द्वादशविघामादोपचारः।

सविवरण-वस्तुरतकोशः। ५४) B १ रूपस्विनां रम्योपचारेण । २ भीरूणामाश्वासनेन । ३चपलानां गांभीर्येण । ४ पंडि[तानां सत्येन । ५प्रशावतां कलाभिः। ६शृङ्गारिणां सुवेपतया। ७ विनोद- शीलानां फ्रीडनेन। ८ हीनसत्वानां कारुण्येन । ९ शठस्वभावानां शाट्येन । १० निर्विकल्पना सुकुमारप्रयोगेन । ११ बालानां भक्षप्रदानेन । १२ धूर्तानां शाट्येन। ५४) १ रूपवती रम्योपचारेण । २ भीरूणामविश्वासनेन । ३ चपलानां गांभीर्यण । ४ पंडितानां सखीत्वेन । ५ बालानां भक्षप्रदानेन ।। ६ प्रज्ञावतीनां फलाभिः । ७ शृङ्गारिणीनां सुवेपेण । ८ विनोदिनीनां सुकीडनेन । ९ हीनसत्त्वानां कारुण्येन । १० शठस्वभावानां घातेन। ११ निर्विकल्पानां सरलस्वभावेन । १२क्षुधितानां भोजनदानेन । ५४) D१ सुरूपिणी । २ राजोपचारेण । ३ मीसमा(भीरूणामा)श्वासनेन। ४चपलां गांभीर्येण । -५पंडितां भोजन्येन । ६ धर्माण्यं कारुण्येन । ७ प्रशावती । ८ कलाभिः शृङ्गारिणी ।९ सुवेपतया विनोदिनी । १० क्रीडनेन । ११ विदग्धानां कुकुमोपचारेण चेति । ५४) : १ रूपवती रम्योपचारेण । २ भारोः आश्वासनेन । ३ चपला गांभीर्येण । ४ पंडिता सत्येन । ५वाला भक्षप्रदानेन । ६ प्रज्ञावती कलाभिः । ७ शृङ्गारिणी सुवेपतया । ८ विनोदशीला क्रीडनेन । ९ दीनसत्या कारुण्येन। १० शत(१०)स्वभावशाट्येन । ११ निर्विकल्पा सरलस्वभावेन । १२ सुकुमारा सुकुमारोपचारेण । ५४) F १ रूपवती रम्योपचारेण । २ भीरोः आश्वासनेन । ३ चपलानां गांभीर्येण । ४ पंडितानां ना (?)सत्येन । ५ वाला भक्ष्यप्रदानेन । ६ प्रशावती कलनैः । ७ङ्गारिणी. रन्यवेपतया। ८ विनोदशीला क्रीडनेन । ९ दीनसत्त्वां कीडनेन । १० कारुण्येन वा। ११ शठभावा घातेन । १२ निर्विकल्पां सरलस्वभावेन। १३ मुघामां(?)आरोपचारेण । ५४)G १ रूपस्विनी रम्योपचारेण । २ भीरुमाश्वानयनेन । ३ चपलां गांभीर्येण । ४ पंडितानां सत्येन । ५ प्रशावतां कलाभिः। ६ शृङ्गारिणां सुवेपतया। ७ विनोदशीलं फ्रीडनेन । ८ हीनसत्यां कारुण्येन । ९ शठस्वभावानां शाट्येन। १० निर्विकल्पां सुकुमार- प्रयोगेन । ११ वालानां भक्षप्रदानेन । १२ धूर्तानां शाट्येन । ५५. पञ्चविधः परिचयः। १ प्रसिद्धिख्यापनं। २ दर्शनेनावर्जनं । । ३ संभाषणमाधुर्य । ४ वाञ्छितोपचारप्रयोजनं । ५ विकारसूचनं । इति । ५५)C१ प्रसिद्धस्थापनं । २ दर्शनेनावर्जनं । ३ संभाषणमाधुर्यं ।' ४ विकारशोधनं । ५ चाञ्छितोपचारप्रयोजनं। ५५) D १ सीक्षापनः । २ दर्शनावर्जनः। ३ संभाषणमाधुर्यया । ४ सविकारसुवचने । ५ कथितापचारप्रयोजनं चेति । ५५) E१ प्रसिद्धख्यापनं। २ दर्शनेनावन। ३मधुरवचःसंभाषणं । ४ आतिथ्यकरणं । ५वान्छितोपचारप्रयु(?यो)जनं चेति । ५५) F१ प्रसिद्धरयापनं। २ दर्शनेनावर्जनं। ३ मधुरवचनसंभाषणं । ४ आतिथ्यकरणं । ५ वाञ्छितोपचारपूजनं । । -- 1 ABEG अथ पंच, पंचविधपरिचय ।

(सविवरण-बस्तुरनकोशः। ५६. देश पुरुषाः स्त्रीणामनिष्टा भवन्ति । १ कुरूपः । :२ निर्लजः। ३ अभिमानी ।, ४ असंबद्धप्रलापी । ५ सङ्कुचितशायी । ६ निष्ठुरः । ७ कृपणः । ८ शौचहीनः । ९ मूर्खः । १० क्रोधनः । इति । ५६) ० १ फुरूपा। २ निर्लजा । ३ अभिमानयुक्ता । ४ अनंतभापिण। ५ निरंकुशा। ६निष्ठुरा। ८ अशौचरता। ९ हीना। १० मूर्खा । ५६) D१ कुरूपः । २ निर्लजः। ३ अभिमानी। ४ असंवद्धप्रलापी। ५संकुचितशायी। ६ निठुरः। ७ कृपणः॥ ८ शौचहीनः। ९मूखश्चेति । ५६) E १ कुरूपः। २ निर्लजः। ३ नित्यरोगी। ४ अभिमानी! असंबद्धप्रलापी। ६संकुचितशायी। ७ निष्ठुरः। ८ रुपणः। ९शौचहीनः । १० क्रोधी। ११ रूपमागी। २२ कर्णदुर्यलः। १३ मूर्खश्चेति । ५६) F१ कुरूप। २ निर्लज । ३ नित्ययोगी । ४ अमिमानी। ५ असंबद्धप्रलापीः । ६ संकुचितशायी। ७ निष्ठुर। ८ कृपण । ९शौचहीन । १० कोधी । ११ विरूपमापी । १२ कर्णदुर्बल । मूर्ख। चेति। ७कृपणा। ५७. देशभिः कारणैः स्त्रियो विरज्यन्ते । :. १.अज्ञानता। २ अभिमानावलेपता । ३ निष्ठुरता । ४ दरिद्रता । ५ अंतिप्रवासता । क्रूरव्यसनता ७ भोगहीनता ८ अतिप्रसंगता। ९ सौभाग्यहीनता। १. अनुचितता । इति । ५७) C१ अमानता । २ अभिमानता । ३ प्रतापिता! निष्ठुरता। ५ अतिप्रवा- सता। ६ अतिमसंगता। ७ सौभाग्यहीनता। ८ अनौचितं । ९ निर्दयत्यं। १० अप्रीतिता। ५७) D १ अक्षमता। २ अभिमानता। ३ अयलेपता । ४ निष्ठुरता। ५दरिद्रता। सौभाग्यहीनता। ७ अतिअसंगता। ८ अतिअनौचित्यता। ९ अतिकता। ११ भावुका चेति । ५७) E १ अज्ञानता । २ अभिमानता । ३ निष्ठुरता। ४ दरिदिता। ५ सौभाग्य- हीनता । ६ अरूपता । *७ अनौचित्यता । ८ दीनहीनता । ९ निर्दिनी(?)। १० वाधुक्यता। ११ विरूपमापिता। १२ अभावश्चेति । ५७) F १ अज्ञानता। २ अभिमानता। ३ निष्ठुरता। ४ दरिद्रता। ५ सौभाग्य- हीनता । ६ अरूपता। ७ अनौचित्यता। ८ दानहीनता। ९ निवार्यता। '१० काठयानता(१)। ११ विरूपभापिता । १२ अभावश्चेति । द्वादशपुरपाः स्त्रीणां अनिशाः। 20 यन्ति। 3 C दशभित्रियो मिरज्यते। F दशभिःप्रकारः स्त्रियो विरज्यन्ते । 4 A BG अतिमयसता। 5A BG अनाचित्यता। ८ सविवरण-घस्तुरनकोशः। ५८. 'त्रिभिः कारणैः कामिन्यः संबध्यन्ते । १ अर्थतः। २कामतः। ३ सुकुमारोपचारतः । इति । ५८) A BG १ अर्थतः। २ कामतः । ३ फुमारोपचारतः।' ५८) १ अर्थकामतः। २ मुकुमारोपचारतः। संभोगकामतः। ५८)D १ अर्थतः कामरतः। २ मुकुमारः। ३ उपचारश्चेति । ५८) E? अदानतः। २कामत:। ३ मुकुमालपचनायुपचारतः। ५८) F १ अर्थदानत । २ कामत । ३ वचनायप्रचारत । चेति । ५९. सप्तविधाः कामुकानां सुरतारम्भाः । १ क्रीडापात्राणि । २ भोजनादि । ४ धूपनानि । ५ ताम्बूलादीनि । ७ हास्यादि(नि) मर्माणि । इति । ३ उपचारविलेपनानि । ६ पुष्पादिमाल्यानि । । ५९) C१ पुष्पमालादिदानं। २ यरमालंकारदानं। ३ आश्वासनं। ४ सुस्वादमक्ष मोज्यं । ५आलिङ्गनादिदानं। ६ अरोपकथा प्रस्ताव । यिनोदहास्यकरण । ५९) D१ फ्रीडापत्राणि। २ भोजनाधुपचारेण मिलेपनानि । ३ धूपनानि । ४ तांबूलकानि। ५ पुष्पमाल्यादि। ६ दारादि। ७रम्यादि। चेति ५२) E१ क्रीडापात्राणि । २ भोगनायुपधारपिलेपनानि । ३ ताबूलदा(लादी)नि । ४ पुष्णादिमास्यानि। ५ यत्रालंकारदानानि । ६दास्याणिमरतानि(दि मर्माणि)। ५९) F५ मीटनेन। २ नाट्यनाएपचारेण । ३ यिलेपनेन । '४ तांबूलदानेन । ५पुणादिमोगेन । ६ पलालंकरणेन! ७ अर्थप्रदानेन । ५२.)G फ्रीडापावरानि । २ मोतनाथपचार। ३ पिलेपनानि । ४ धूपनानि। ५ ताम्यूलादिना। ६ पुणादिमान्यानि । दास्यादिमर्माणि । . ६० अष्टविघं विदग्धानां सुरतम् । १ आलिङ्गनं । २ चुम्बनं । ३ धावनं । ४ केशधारणं। ५ वराङ्गशोधनं । ६ सीत्कारादिमोचनं । ७ नखस्पर्शनं। ८ मृदुकुट्टनं । इति । 1.ABGनिमिपामिम्पःसंपाते। Cनिभिः संपम्पते। रिमिः पारनेर पमिनीनां पते त्रिमिःमः पामिम्मा पायो। ABG ससपिपा. गुस्सा गुरनामा 3. अपारपि विग्याना गुज। 0 भरपि पुणे, Dमपि विधानां गुरतापरपान ।

. सविवरण-चस्तुरत्नकोशः। .६०) AB १ आलिङ्गनं । २ चुंबनं। ३धाचनं । ४ केशाधारणं । ५रंग(१वरांग) संवेशनं । ६शरीरादिकूजनं । ७ नखस्पर्शनं । ८ कुट्टनं। ६०) १ आलिंगनं। २ चुंबनं । ३ धायनं । ४ कंचप्रधारणं । ५ वर(१)गशोधनं । ६ सीत्कृतादिमोचनं। ७ नखस्पर्शनं । ८ मृदुफुटनं । ६०) D १ आलिंगनं । २चुंबनं । ३ धावनं। ४ केशोभा(?द्धा)रणं । ५ रागादिव्यसन। ६ सीत्कारादिमुंचनं। ७ नखस्पर्शनं। ८ मृदुकुट्टनं। चेति । ६०) E१ आलिंगनं। २ चुंबनं। ३ शयनं । ४ केशधारणं। ५ वरांगशोधन । ६ सीत्कृतादिमोचनं। ७ नखस्पर्शनं । ८ मृदुकुट्टनं । ६०) F १ आलिङ्गनं। २चुंबनं। ३ धायनं । ४ केशग्रहणं। ५यराङ्गशोधनं । ६ शीत्कृतकरणं । ७ नखस्पर्शनं। ८मूठकुट्टनं । चेति । ६०)G १ आलिंगनं । २ चुंबनं । ३ धावनं। ४ कन्ता(?कुन्तला)धारणं। ५ रज(?वराङ्गोसंवेशनं। ६शरीरादिकूजनं । ७ नखस्पर्शनं । ८ कुट्टनं । ६१. नवविधं सुरतावसानम् । १ वस्त्रादिसंयमन । २ पार्श्व आचमनं। ३ ताम्बूलादिग्रहणं । ४ फलादिभक्षणं । ५ पानभोज्यादिविधानं । ६ क्रीडापात्रप्रवेशनं । ७ सुभाषितजल्पनं । ८ सानुरागप्रेक्षणं । ९ मनोवाञ्छितविनोदः। इति । ६१) १ वस्त्रादिसंयमनं। २ पार्थचालनं । ३ तांबूलादिग्रहणं । ४ अनुरागपोषणं । ५ घांछितविनोद । ६१) D१ पार्थे आचमनं । २ तांबूलादिग्रहणं । ३ इक्षुरसादिभक्षणं । ४ पानभोज्यादिविधानं। ५क्रीडापानप्रवेशनं । ६सुभापितजल्पनं। ७ अनुरागपोषण । ८ संतोपवांछितं । ९विनोदा श्चेति । ६१) E १ वस्त्रादिसंयमनं । २ पार्श्वविवर्तने । ३ तांबूलादिग्रहणं । ४ फलादिमक्षणं । ५पानभोजनविधानं । ६ क्रीडापात्रप्रवेशनं । ७ सुभापितमापणं । ८ अनुगोपणं(?अनुराग- पोपण)। ९ मनोवांछितविनोदाश्चेति । ६१) F १ वस्त्रादिसंयमनं । २ पाय वाऽऽचमनं । ३ तांबूलादिमक्षणं । ४ फलादिभक्षणं । ५ पानभोजनादिविधानं। ६ फ्रीडापायप्रवेशनं । ७ सुभापितजननं । ८ अनुरागपोपण। ९मनोवान्छितविनोदः । चेति । . ६२. नव शयनगुणाः । १ अनमशायी। २ प्रसारितगात्रशायी। ३ मृदुगात्रशायी। A BG अथ नवविधं मुरतायसानं D नवनिधं मुरनायस्थानं ।

सविवरण-चस्तुरतकोशः। ४ सौम्यावयवशायी । ५ अनुशयनं । ६ अभूमिशायी.। ७ अशब्दशायी। ८ सन्मुखशायी। ९ वामपार्श्वशायी । इति । । .. १. १२) A B १ अनग्नशायी । २ मृद्गात्रशायी । १३ प्रसारितगात्रशायी । ४ सौम्यावयव । ५ अनुशयन । ६ नात्यर्थानप्रात(?)। ७ अशब्द । ८ सन्मुख । ६२) १ अनन्न । २ प्रसादितगात्र । ३ सौम्यावयव । ४ सन्मुखशायी। ५ अशब्दशायी। ६ अभूमिशायी । ७ संबद्धशायी। ८ मृदुपत्रशायी .९ नात्यर्थशायी। ६२) D १ अनग्नशायी। २ प्रसारिगात्रशायी। ३ अन्योन्यशायी। ४ सौम्यशायी। ५ असन्मुखशायी। ६ असंवद्धशायी। ७ सन्मुखशायी । चेति । ६२) १ अनग्नशायी । २ प्रसारितगात्रशायी। .३ सौम्याक्यवशायी ४ संबंधशायी। ५ सन्मुखशायी। ६ अनुशयनाद्यर्थः । ७ अशब्दशायी। ८ वामपार्श्वशायी। ९ उक्तानित्तान)शायी। ६२) F १ अनुशायी। २ संमुखशायी। ३ प्रसारितगात्रशायी। ४ सौम्याययव- शायी। ५संवन्धशायी। ६ वामपार्श्वशायी। ७ अवि(१)स्तनशायी। ८ निश्चलाङ्ग- शायी। चेति। ६२) G १ अनग्नशायी । २ मृदुगात्रशायी। ३ प्रसारितगात्रशायी । ४ सौम्यावयव । ५ अनुशयन । ६नात्यर्थ(१)। ७ नपात()। ८ अशब्द । ९ सन्मुख । . : ६३. देशविधः पार्थिवानां प्रमोदः । १ ज्ञाने। २ दाने । ३ वले। ४ राज्ये। ५ विनोदे। ६ वैरिनिग्रहे। ७ शौर्ये । ८ धर्मे। ९ सुखे । प्रमोदो दशधा मतः॥ ६३) 0 ज्ञाने दाने जये रावे(? ज्ये) विनोदे वैरिविग्रहे । शौर्ये धर्मे च सीरयेच प्रमोदो दशधा मत(6) ६३) D शाने दाने यले राज्ये विनोदे वैरविग्रहे । सूर्य धर्म तपे सौख्ये प्रमोदो दशधा ६३) E ानेन । दानेन ।चलेन । सुराज्येन । विनोदेन । वैरिनिग्रहेण । शौर्येणें । धर्मेण । तपसा । सौख्येण । प्रमोदो दराधा मत । ६३) F १झाने। २दाने । ३ वले। ४राज्ये। ५विनोदे।',६ धैरनिग्रहे। ७शायें। ८ धर्म। ९ जये। १० मौप्ये(?सौख्ये)। प्रमोदो दशधा मतः । 1A B अथ दशवियः ; Cशयिधपार्थियानां प्रमोद !; D दायिधः प्रमोद F दशविधप्रमोदविचारः। 2 B येरनिप्रहे। १० शौचे + मतः ॥

सविवरण-वस्तुरनकोशः। ६४. चतुर्विधः प्रबोधः। १ बालसंस्कारप्रबोधः। २ शास्त्रप्रबोधः। तत्त्वनिश्चयप्रबोधः । इति । ३ प्रज्ञाप्रबोधः। ६४) B१ शास्त्रप्रबोधः। २प्रज्ञाप्रबोधः। ३तत्त्वनिश्चयप्रबोधः। ६) १ शास्त्र अयोध्य । २प्रज्ञानप्रबोध। ३ तत्त्वमस्वप्नप्रवोधश्चेति । ६४) D१ वालानां संस्कारप्रबोधः । २ काव्यप्रबोधः। ३ शानप्रबोधः। ४ ग्वनिर्णयप्रबोधः। ६४) E १ वालसंयमनं । २बालसंस्कारप्रबोधः। ३ शास्त्रप्रबोधः। ४ प्रशाप्रबोधः। ५ तत्वनिश्चयमयोधः। ६४) F १ तालसंस्कारप्रयोध । २ शास्त्रप्रयोध। ३ प्रज्ञाप्रयोध। ४ वचननिश्चय. प्रबोध। ६५. चतुर्विधा बुद्धिः । १ खभावजाता २ श्रुतोत्पादिता । ३ कर्मजाता। .४ पारिणामिकी । इति । ६५) C१ स्वभावजा । २ उत्पादिता। ३ परिणामकी। ४ कर्मजाश्चेति । ६५) D १ उत्पत्तिकी। २ चैनयिकी। ३ कार्मजा। ४ पारिणामिकी चेति। ६५) E१ स्वभावज्ञा। २ उत्पादिका। ३ परिणामिका । ४ कर्मजा चेति ६५) F १ स्वभावजा । २ श्रुतोत्पन्ना। ३ उत्पातिकी। ४ परिणामकी चेति । ww ६६. अष्टौ बुद्धिगुणाः । शुश्रूपा श्रवणं चैव ग्रहणं धारणं तथा । ऊहापोहोऽर्थविज्ञानं तत्त्वज्ञानं च धीगुणाः । ६६) १ सुश्रूपा । २श्रवणं। ३ ग्रहण। ४ दर्शनं। ५धारणं। ६अर्थविज्ञान। ७ धर्मविज्ञानं । तत्त्वविज्ञानं । ६६) D१स्वरूपग्रहणं । २ग्रहणं। ३धारणं। ४ विज्ञानं । ५ऊहनं । ६अपोहनं। ७ तत्त्वज्ञानं चेति । ६६) E १ शुभूपा। २थयणे। ३ ग्रहणं । ४ धारणं । ६ अपोह। ७ विज्ञानं । ८ तत्वनानं चेति । ६६) F१ शुश्रूग। २श्रयणं । ३ ग्रहणं । ४धारणं। ५ऊद। अपोह। ७ अर्थनिशानं । ८ यचनमानं चेति । 1C चतुर्विध आयोध्य; चतुर्विधः योधः। 2G तत्वधानं ।

દર सविवरण-वस्तुरत्नकोशः ६७. चतुर्विधं गान्धर्वम् । १ अवधानगतं(?) । २ स्वरगतं । ३ पदगतं। ४ तालगतं । इति । ६७) C E F १ स्वरगतं। २ पदगतं । ३ तालगतं ।' अवधानगतं । ६७) D १ स्वरगतं । २ पदगतं । ३ अवधानं चेति । . * ६८. त्रिविधं गीतम् । १ महागीतं । २ अनुगीतं । ३ उपगीतं । इति । ६८) A B G १ महागीतं । २ अनुगीतं । ३ अपगीतं । ६८) D१ उपांगगीतं । २ महागीतं। ३ अनुगीतं चेति । ६८) Egives only त्रिविधं गीतं but does not mention the names. ६८) F १ महागीतं । २ उपगीतं । ३ अनुगीतं । * - है ६९. पत्रिंशद्गीतगुणाः । १ सुवरं । २ सुतालं। ३ सुपदं । ४, शुद्ध ।। ५ ललितं । ६ सुबन्धं । ७ सुप्रमेयं । ८ सुरागं। ९ सुरसं। १० समं । ११ सदर्थं । १२ सुग्रहं । १३ सुश्लिष्टं । १४' क्रमस्थं । १५ सुसमयकं (सुयमक)। १६ सुवर्ण । १७ संपूर्ण । १८ सालंकारं । १९ सुभापाढ्यं । २० सुगन्धस्थं ( ? सुगंभीरं)। २१ व्युत्पन्नं । २२ मधुरं । २३ स्फुटं । २४ सुप्रभ । २५ प्रसन्नं । २६ कंपितं । २७ समजातं । २८ रौद्रगीतं । २९ ओजःसगतं (१ ओजःसंगतं)। ३० द्रुतं । ३१ मुखस्थापकं । ३२ हताशं । ३३ विलम्बितं । ३४ अग्राम्यं । ३५ मध्यं । ३६ सुप्रमाणं । इति । ६९) A १ सुस्वरं। २ सुतालं। ३ सुपदं । ४ शुद्ध । ५ललितं । ६ सुर्यधं । ७ सुप्रमेयं । ८ मुरागं । ९ सुरसं। १० समं। ११ सधैं(?)। १२ सुग्रह । १३ श्लिष्टं । १४ फमस्थं । १५ मुसमयक(?सुयमक)। १६ सुवर्ण। १७ सुरतं। १८ सुसंपूर्ण। १९सालंकारं। २० सुभापाचं। २१ सुगंधस्य । २२ व्युत्पन्न। २३ मधुरं। 1 F पत्रिंशद् गुणाः । .

२९ ओजः संगतं । ! 'सविवरण-वस्तुरनकोशः। २४ स्फुटं । २५ सुप्रभ। २६ प्रसन्न । २७ समजातं। २८ रौद्गीतं । ३० दर्शनस्थितं। ३१ सुखस्थापकं । ३२ हताशं। ३३ विभ(भा)पितं । ३४ मध्य प्रमाणं। ३५ कवित्कंपितं । ६९) B १ सुस्वरं । २मुतालं । ३ सुपदं। ४ शुद्धं । ५ ललितं । ६ मुबंध । ७ सुप्रमेये। ८मुरागं। ९ सुरसं। १० समं । ११ सदाघ(?सद)। १२ सुग्रहं । १३ क्लिष्टं। १४ क्रमस्थं । १५ सुमय(?यम)कं । १६ सुवर्ण। १७ सुरक्तं। १८ संपूर्ण । १९ सालंकारं। २० सुभापाढ्यं । २१ सुगंधस्थे । २२ व्युत्पन्नं । २३ मधुरं। २४ स्फुटं। २५ सुप्रभं । २६ प्रसन्नं। २७ अग्राम्यं । २८ कवित्कंपितं । २९ समजातं । ३० रौद्गीतं । ३१ ओजासंगतं । ३२ दर्शनस्थितं । ३३ सुखस्थापकं । ३४ हतंसं(?हतांशं)। ३५ विल(?भा)पितं । ३६ मध्यं प्रमाण । ६९) ० १ सुस्वरं । २ सुपदं । ३ शुद्धं । ४ ललितं। ५ सुसंबंध। ६सुजिय(१)। ७सुरागं। ८ सुरसं। ९समं। १०विधर्म। ११ सदर्प()। १२ सुग्रह । १३ सुश्लिष्टं। १४ क्रमस्थं। १५ यमकं । १६ सुवर्ण। १७ सुरक्तं । १८ सालंकारं। १९ सुभाषाप्पंढ्य)। २० सुसंधिस्थं । २१ सु(न्यु)त्पत्तिक। २२ मधुरं । २३ स्फुटं । २४ प्रसन्नं। २५ अग्रण्य(ग्राम्य)। २६ सुकवित्वं । २७ विचारवता(?)। २८ सुखस्थितं । २९ विलंबितं । ३० द्रुतं । ३१ मध्यं । ३२ उत्कीयमाणं। ३३ सुवाय। ३४ सुकलं । ३५ सुनृत्यं । ६९) D१ सुस्वरं। २ सुतालं । ३ सुपदं। ४शुद्धं । ५ ललितं। ६ सुप्रवद्धं । ७ सुराग। ८ सुरम्य । ९ समं । १० सदध(?)। ११ सुग्रहं । १२ दृष्टं। १३ सुकाव्यं । १४ सुयमकं । १५ सुरक। १६ संपूर्ण । १७ सालंकारं। १८ मुपामव्यं(?सुभापाढ्य) १९ सुसंधिस्थं । २० व्युत्पन्नं। २१ गंभीरं। २२ स्फुटं। २३ सुप्रभ। २४ अग्राम्यं । २५ कुंचितं । २६ क(१क)पितं । २७ समायातं । २८ रौद्गीतं । २९ प्रसन्नं। ३० स्थितं । ३१ मुखस्था(?सुखस्थापक)। ३२ द्रुतं । ३३ मध्यं । ३४ विलम्वितं । ३५ गुरुत्वं । प्राञ्जलत्वं । ३७ उक्तप्रमाणं चेति । ६९) E१ सुस्वरं । २ सुतालं। ३ सुपदं । ४शुद्धं । ५ ललितं । ६ सुसंबंधं । ७ सुप्रमेयं । ८ सुरागं । ९ सुरसं। १० सुसंगीतं । ११ सुह। १२ सुग्रहं । १३ क्लिष्टं। १४ क्रमस्थं। १५ सुवर्ण। १६ सुगम। १७ सुरकं। १८ संपूर्ण। १९ सालंकारं। २० सुभापाय(ट्य)। २१ सुधिप्प(१cण्यं)। २२ मधुरं। २३ स्फुटं। २४ प्रसन्नं । २५ अग्राम्यं । २६ कुंचितं । २७ कंपितं । २८ समायातं । २९ विद्यासंगतं ३० प्रथमस्थितं । ३१ मुखस्थं । ३२ द्रुतं । ३३ विलंयन(?वितं)। ३४ मध्य । ३५ उत्कं। ३६ प्रमाणं चेति। ६९) F १ स्वरगतं । २ सुस्वरं । ३ सुपदं । ४ शुद्धं । ५ ललितं । ६ सुसंबद्धं । ७ सुप्रमेये । ८ सुराग। ९ सुरसं। १० सुसंगीत] । ११ सही (११)। १२ मुग्रहं । १३ मुश्लिष्टं । १४ क्रमस्य । १५ सुवर्ण। १६ सुगर्म । १७ सुरतं । १८ संपूर्ण । १९ सालं. कारं। २० मुमापाय(?)। २१ । सुसंधिष्ठं । २२ सुद्यतनं(१)। २३ सुयु(?व्युत्पर्श । २४ मधुरे । २५ स्फुटं । २६ प्रसन्नं । २७ संग्राम्य । २८ विकम्पितं । २९ समूज(जिन । ३० विद्यासंगत। ३१ प्रथमस्थं। ३२ मुखस्य । ३३ द्रुतविलंयितं । ३४ मध्यं । ३५ मुप्रमाणं । ति। ।

। सविवरण-वस्तुरत्नकोशः। ६९)G १ सुस्वरं । . २ सुतालं। ३ सुपदं ४ शुद्धं । ५ ललितं । ६ सुबंधं । ७ सुग्रमेयं । ८ सुरागं। ९ सुरसं। १० समं । ११ सदर्थे । १२ सुग्रहं । १३ श्लिष्ट, १४ क्रमस्थ । १५ सुसमयक। १६ सुवर्ण । १७ सुरक्त । १८ संपूर्ण। , १९ सालङ्कारं । २० सुभापाद्यं(?ढ्यं)। २१ सुगन्धस्थं । २२ व्युत्पन्न। २३ मधुरं । . २४ स्फुटं। २५ सुप्रभ। २६ प्रसन्नं। २७ [क]पितं । .२८ समजातं । २९ रौद्रगीत। ३० ओजः संगतं । ३१ दर्शनस्थितं । ३२ सुखस्थापकं । ३३ हतांशं। ३४ विल(भा)पितं । ३५ मध्यं प्रमाणं । ७०. चतुर्विधं वाद्यम् । १ ततं । २ विततं । ३ धनं। ४ सुपिरं । इति। ७०) १ ततं। २ विततं। ३ घनं। ४ सुखिरं(?पिरं)। ७०) D१ ततं। २विततं । ३ घन। ४ शिखरं (सुपिर) चेति । ७०) F १ स्फुटं। २ विततं । ३ घनं। ४ सुपिरं । * ७१. 'द्विप्रकारं नृत्यम् । १ ताण्डवं । २ लास्यं । इति । ७१) DE ? लास्यं तांडव च। ७१) F१ लास्यं तांडवं चेति । .. ७२. पोडशविधं काव्यम् । १ समयः। २ प्रतिभा। ३ अभ्यासः। विद्या। ५ जातिः। गीतिः । ७ रीतिः। .. ८ वृत्तिः ।। ९.वाच्यं । १० वाचकं । ११ छन्दः। १२ अलङ्कारः। १३ गुणः १४ रसः। १५ भावः। १६ अभिनयः । इति । ७२) A B १समयप्रतिभा। २ अभ्यास। ३ विद्या। ४ जाति । . ५ गीति । ६रीति। ७ वृत्ति। ८यात्मल्य। ९वाचक। १० छंद। *११ अलंकार। १२ गुण । १३ दोप। १४ रस । १५ भाव । १६ अभिनयं । ७२) C१ ममपति। २ अभ्यास। ३ विद्या। ४ जाति । ५गीति। ६वृत्ति। ७ याच्य। ८धारक। ९छंद। १० अलंकार। ११ गुण । १२ दोप। १३ रस। १४ भाव । १५हाय । १६ अभिमानश्चेति । 16 द्विविध नृत्यं । E पोडशविघं भाषालक्षणं 1.

. । सचिचरण-वस्तुरतकोशः। ७२.) D. १ अभ्यासः1, २ विद्या । ३ रीति । ४ गीति। ५ वृत्तिः। ६काव्यं । ७ अलंकार। ८वाचना। ९ प्रबोधः। १० गुणः। ११ दोपः। १२ रसः। १३ भावः। १४ अभिधानं । १५ जातिः। चेति । ७२) E १ समय। २ प्रतिभोपा। ३ अभ्यास। ४ जाति। ५ गीत(?ति)। ६रीति। ७ वृत्तवाच्य। ८वाचका ९छन् । १० अलंकार। ११ गुण। १२ दोप। १३ रस। १४ भाव । १५ अभिनय । १६ विद्या। ७२) F १ समय । २ प्रतिमा। अभ्यास । विद्या। ५जाति। ६गीति। ७रीति। ८ वृत्ति । ९याच्य। १० पाचका ११ छंदस्। १२ अलंकार। १३ गुण । १४ दोप। १५ रस। १६ अभिनयश्चेति । ७२) G समय । २ प्रतिभा। ३ अभ्यास । ४ विद्या। ५ जाति। ६ गीति । रीति। ८ वृत्ति। ९ वात्सल्य १० वाचक। ११ छन्द। १२ अलंकार। १३ गुणदोप। १४ रस। १५ भाव । १६ अभिनय । 1 . ७३. 'दशविधं वक्तृत्वम् । १ परिभावितं । २ सत्यं । ५. परिस्फुटं। ६ परिमितं । ९ प्रसन्नं । १. भावानुगतं । इति । ३ मधुरं । ७ मनोहरं । ४ सार्थकं । ८. विचित्रं। it.C E F give no vivarana. ७३) P. १ मधुरं । २ सार्ध)क । ३ परिस्फुटं । ४ सुमनोहरं । ५ परिमि(त) ! * पद्धिधं भापालक्षणम् । १ संस्कृतं । २ प्राकृतं । ५ मागधं। ३ अपभ्रंशं। २ पैशाचं। सौरसेनं । इति । ४ पैशाचिक। ५मागधं। ४ पैशाचिक। ५मागधं। . ज) A BG१संस्कृतं । २ मारतं । ३ अपभ्रंशं । ६सौरसेनं । ७४) १संस्स्तं । । २प्राटतं । ३ अपभ्रंशं। ६[सौरसेनं। ७४) D१ संस्थत। २प्रास्तं] ३ अपभ्रंश । ६ सौरसेनं । ७)-E १ संस्एन। २मारत। ३ अपशा ६सूरसेन। AB साधक। ४ पैशाच ५मागधं। ४पैशाच। ५मागधा ६६ सविपरण-वस्तुरनकोशः। २प्राकृतं । ३ अपभ्रंशं। ४ पैशाचिक। ५सूरसेनं। ७४) F १संस्कृतं । ६ मागधं चेति। . ७५, पञ्चविधं पाण्डित्यम् । १ वक्तृत्वं । २ कवित्वं । ३ वादित्वं । ४ आगमिकत्वं । ५ सारस्वतप्रमाणं । इति । ७५) १ वक्तव्यं । २ वशित्वं । ३ आगम । ४ सारस्वत । ५प्रमाणं । चेति । ७५) D१ वक्तृत्वं । २ आगमित्व। ३ शास्त्रसंस्कार। ४ प्रौठित । ५सारस्वतप्रमाणं। ७५) E१ वक्तत्वं । २ वादिकत्वं । ३ कवित्वं । ४आगमत्वं । ५ गमत् । ७५) F १ वत्कृत्वं । २ वादस्क(१दित्व)। ३ कयित्वं । ४ आगमत्वं । ५गमत्वं चेति । * ७६. चतुर्विशतिविधं वादलक्षणम् । १ उत्पत्तिः। २ समाप्तिः। ३ सत्यवादः। ४ प्रतिवादः। ५ पक्षः। ६ प्रतिपक्षः। ७ प्रमाणं। ८ प्रमेयं ।' ९ प्रभेदः। १० प्रश्नः। ११ प्रत्युत्तरः । १२ दूषणं । १३ अर्थान्तरं । १४ उपन्यासः। १५ अनुवादः। १६ आदेशः। १७ निर्वाहः। १८ निर्णयः। १९ विग्रहस्थानं । २० अर्थान्तरसमता । २१ सुखरत्वं । २२ उच्चारणं २३ जयः। २४ पराजयः । इति । ७६) AB १ उत्पत्ति। २सभापति। ३ सत्यवादि। ४ प्रतिपादि।. ५ पक्ष- प्रमाण। ६प्रमेय। ७प्रमोद । ८ प्रश्न। ९प्रत्युत्तर। १० दूषण । । ११ भूषण। १२ अर्थातर। १३ उपन्यास। १४ अनुवाद। १५आदेश। १६ निर्वाह । १७ निर्णय। १८ निश्चय । १९ स्थान । २० समता। २१ निग्रह । २२ जय । २३ अजय । ७६) १ उत्पत्ति । २ सभापति। ३ सत्यवाद । ५प्रतिपक्ष। ६प्रमाण । ७प्रमेय। ८प्रमेद । ९प्रसन्न। १० प्रत्युत्तर। ११ दूषण। १२ उप- १३ आदेश। १४ निर्णय। १५ निश्चय। १७ अर्थ । १८समता। १९ वर्णन । २० माधुर्य । २१ सुस्थरत्व। २२उच्चारण। २३ जय। २४पराजय। ७६) D१ उत्पत्तिः। २ सभापति। ३ सत्ययादी। पक्षि। ५प्रतिपक्षि। ६प्रमाण। ७प्रमेय । ८प्रसन्न। ९प्रमेद। १० उत्तरप्रत्युत्तर। ११दूपण । 12 पंचपांडित्यं। 2 C चतुर्विशतिविघं नादलक्षणं । ४पक्ष। म्यास। १६ नियम।

सविवरण-पस्तुरतकोशः। १२ भूपण। १३ अभ्यंतर। १४ अनुवाद । १५ भमेद् । १६ निर्वाह । १७ निर्णय। २८ विग्रहस्थान। १९ समता। २० जय । २१ अजयश्चेति । ७६) E १ उत्पत्तिः। २सभापतिः। ३ सत्यवादी। ४ सभावाद । ५पक्ष । ६ प्रतिपक्षमाण। ७प्रमेय । ८ शस्त्रप्रमेद। ९प्रसन्न । १० प्रत्युत्तर । ११ दूषण । १२ भूपण। १३ उपन्यास । १४ अनुवाद । १५ दशसमिता। १६ निर्णयस्थान । १७ अर्थातर। १८ समता। १९ जय । २० पराजयश्चेति। ७६) F १ उत्पत्ति। २ समाप्ति। ३सभावादपक्ष। ४प्रमाण। ५प्रमेय । ६ प्रतिपक्ष। ७ प्रमेद। ८प्रसन्न। ९प्रत्युत्तर। ११ भूपण। १२ उपन्यास। १३ अनुवाद। १४ आदेश। १५ निर्णय। १६ निश्चय। १७ प्रतिपक्ष। १८ निश्चयस्थान । १९ अर्थान्तरसमता । २० जय । २१ पराजयश्चेति । ७६) G१ उत्पत्ति। २ सभापति। ३ सत्यवादि। ४ प्रतिवादि। ५पक्ष। ६प्रमाण। ७प्रमेय। ८प्रमोद । १० प्रत्युत्तर। ११ दूपण। १२ भूपण। १३ अर्थान्तर। १४ उपन्यास। १५ अनुवाद । १६ आदेश। १७ निर्वाह । १८ निर्णय । १९ निश्चय । २० स्थान। २१ समता। २२ निग्रह। २३ जय। २४ अजय । १० दूषण । ७७. पड्विधं दर्शनम् । १ माहेश्वरं । २ ब्राझं । ३ साङ्ख्यं । ४ बौद्धं। ५ जैन । ६ चार्वाकं । इति । ७७) D १ माहेश्वरं । २ ब्राझं । ३ सांख्य। ४ जैनं । ५ बौद्ध । ६ चार्वाकं चेति। ७७) E१माहेश्वरं। २ ब्राह्म। ३ सांख्यं । ४ जैन्यं । ५,बौद्धं । ६ चार्वाकं । ७७) F १ माहेशं। २ ब्राह्म। ३ सांस्यं । ४ बौद्धं । ५ जैने । ६ चार्वाक चेति । ७७)G माहेश्वरं। २ ग्राहये। ३ सांख्यं । ४ वौद्धं । ५ जैनं। ६ चा । * ७८. अष्टविधं माहेश्वरम् । १ नैयायिकं । २ वैशेपिकं । ३ शैवं । ४ पाशुपतं । ५ महाव्रतं । ६ कालमुखं । ७ शांभवं । ८ मुक्तिपर्यंतं । इति । ७८) ABG १ नैयायिक। २ वैशेपिक। ३ शिवधर्म। ४ शेय। ५कलामुख । ६ पाशुपत। ७ महायत। ८भुतिपर्यंत । ७८) C१ पाशुपत । २ कालमुख । ३महायत।४ शांभवपर्येक । ५शिवधर्म। ६ दीव । ७८) D१ न्याय। २विशेषक। ३ शिवधर्म। ४ शौच। ५पाशुपत । ६ काल. मुख। ७महायतिकः। ७८) E १ न्याय । २ पैशेपिक। ३ शैय । ४पाशुपत्य । ५कालमुस। ६ महा. प्रतिक। ७शियधर्म। ८पर्यतधेति। 1A BE F G पटु दर्शनानि । पटूविध दर्शनलक्षण। 2 Cष्टषिधं माहेश्वरं । ।

सविवरण-वस्तुरनकोश ७८) F gives no Vivarana ७९. दशविधं ब्राह्यम् । १ प्रमाणं । २ संस्कारः । ३ कर्मवर्तनं । ४ होमः । ५ जापः ।।६ श्रुता- ध्ययनं । ७ गार्हस्थ्यं । ८ वानप्रस्थ । ९ यतिः। १० ब्रह्मचर्य । इति । ७९) A १ लक्षण। २प्रमाण। ३संस्कार। ४ कर्म । ५ ब्रह्मचारि।'६ गृहस्थ। ७ वानप्रस्थ । ८ यति । ९ ब्रह्मपर्यंत । १०वर्तन । ७२) B १ लक्षण। २प्रमाण। ३ संस्कार। ४ कर्म । ५ वर्तन। ६ ब्रह्मचारी। ७ गृहस्थ । ८ वानप्रस्थ । ९ यति । १० ब्रह्मपर्यंत । ७९)C १ तत्व। २ प्रमाण । ३ संस्कार। ४ फर्म। ५ वर्तन। ६ ब्रह्मचारी । ७गृहस्था ८ वानप्रस्थ । ९ यति । १० ब्रह्मपर्यकश्चेति । ७२) D१ प्रमाण। २संस्कार। ३ कर्मवर्तन । • ४ होम ।, ५ जाप। ६ श्रुता. ध्ययन। ७चानप्रस्थ । ८गृहस्थ। ९यति । १० ब्रह्मपर्य[] चेति । ७१) E१प्रमाण। २ संस्कार। ३कर्म। ४ वर्तन। ५ ब्रह्मचारी । ६ गृहस्य। ७चानप्रस्थ । ८यती। ७९) F१ लक्षण । २प्रमाण । ३ संस्कार। ४ कर्म। ५ वर्तन। ब्रह्मचारी। ७गृहस्थ। ८ वानप्रस्थ। ९ यति। १० ब्रह्मचर्य। चेति । ७२) G १ प्रमाण। २संस्कार। ३ कर्म। ४ वर्तन। ५ब्रह्मचारी। ६ गृहस्थ । ७ वानप्रस्था ८ यति। ९ ब्रह्म । १० पर्यंत । A ८०. चतुर्विधं साङ्ख्यम् । १ तत्त्वं । २ प्रमाणं । ३ प्रकारः। ४ सर्वात्म । इति । ८०) AG १ तत्त। २प्रमाण। ३ प्रकार । ४ सर्वात्मपर्यंत ८०) B१ तन। २प्रमाण। ३प्रकार।। ४प्रमेद । . ५ प्रमोदपर्यंत। ६सर्यात्मपर्यंत। ८०)C१ तवांग। २सर्वात्मता। ३प्रमाणं । ४ प्रकार। ८०) सत्यप्रमाणं । २ सर्यात्मा । ३ प्रकार। ४ कार्य। चेति । । ८०) १ तत्व। २प्रमाण । ३ सर्वात्मा। ४प्रकारपर्यतचेति । ८०) F१तत्य । २प्रमाण । ३ संस्कार । ४ सर्वात्म। चेति । ४ प्रमाणं । ५ प्रतिमा । ८१. सप्तविधं जैनम् । १ सर्वज्ञः । २ धर्मः। ३ तत्त्वार्थः। ६ प्रभेदः। ७ सिद्धिः । इति । I DE प्रामण्य; G ग्राहय लक्षण ।

सविवरण-वस्तुरनकोशः। ६ प्रमेद। ८१) A B D F G १ सर्वश। २धर्म । ३ तस्वार्थ। ४प्रमाण। ५प्रतिमा। ७ सिद्धिपर्यंत । ८१) १ सर्वज्ञ। २धर्म। ३ तत्वं । ४प्रमाणं। ५अर्थ। ६प्रतिमा ७ प्रतिमेद । ८ सिद्धिश्चेति । ८१) E१ सर्वज्ञ। २ तत्वार्थ । ३ प्रमाण । ४प्रतिमा। ५ प्रमेदसिद्धि । ६ पर्यंत । ७धर्मश्चेति। ८२. देशविधं बौद्धम् । १ सौगतं . २ पारमिता । ३ विहारः। ४ प्रमाणं । ५ सौत्रान्तिकं । ६ वैभापिकं । ७ योगाचारं । ८ माध्यमिकं । ९ मोक्षः। १० सर्व- दशारिगतं । इति । ८२) A १ स्वसंबद्ध । २ पर्वत । ३ पारिगत । ४ विहार । ५ प्रमाण । ६ सूत्रांतिका ७ भाविक । ८ योगाचार । ९माध्यमिक । १० मोक्षपर्यंत । ८२) BG १ स्वसंवद्ध । २ पवंद । ३ पारिगत । ४ विहारः । ५प्रमाण । ६ सूनांतिक । ७ नैभाविक । ८ योगाचार । ९माध्यमिक । १० मोक्षपर्यन्त । ८२ . C१ सौगतं । २ परिपद । ३ परिमितं । ४ विहार । ५ प्रमाणं । ६ शेवातिक। ७ वैभापिक। ८ योगाचारं । ९ माध्यमिकं । १० मोक्षश्चेति । ८२) D१ सगता । २ परिमिता । ३ पारमिता। बिहार | ५ प्रमाण | ६ सौत्रांतिक। ७ नैराशम(?)। ८ योगोपचार । ९ मोक्षपर्यंत । ८२) E १ सुगत । २ परिगत । ३ पारमित । ४ विहार । ५ प्रमाण । ६ सौत्रान्तिक । ७ योगांत । ८ माध्यमिक । ९ मोक्ष । १० माध्यमपर्यंतश्चेति । ८२)E १ स्वागतं । २ सर्वदशारिगतविहार । ३ प्रमाण । ४ प्रमेद । ५शौचान्तिक । ६ विभापिका । ७ योगाचार । ८ मध्यमिका । ९ परमित । १० मोक्षपर्यन्तं । ८३. चितुर्विधं चार्वाकम् । १ तत्त्वं । २ प्रमाणं । ३ प्रभेदः । ४ प्रमोदः । इति ।. ८३) A B G १ तत्त्वार्थ । २ प्रमाण । ३ प्रमेद । ४ प्रमोदपर्यन्त । ८३)C१ तत्वं । २ प्रमाण । ३ भेद । ४पयक। ८३) E१ तत्त्वप्रमाणं। २ प्रभेद। ३ प्रमोद । ४ पर्यंतश्चेति । ८३) १ तत्वार्थ। २ प्रमाण । ३ममेद । ४ प्रमोदपर्यन्तं । घेति । । 1 A BG भय दशविधं । । D extends thus far.

७० . नृत्य। सविवरण-वस्तुरनकोशः। ८४. चतुर्विंशतिविधं विचारकत्वम् । १ विद्या। २ विज्ञानं। ३ विनोदः। ४कला। ५ कवित्वं । ६ वक्तृत्वं । ७ गीतं । ८ वाधं । ९ नत्यं । १० देशः। ११ कालः । १२ पात्रं । १३ प्रमेयं । १४ बादः । १५ जयः । १६ रसः । १७ भावः । १८ अभिनयः। १९ धर्मः। २० अर्थः। २१ कामः। २२ मोक्षः । २३ लोकवादः । २४ विचारः । इति । ८४) A BG १ विया । २ विनोद । ३ विज्ञान। ४कला। ५कवित्व। ६ वकृत्व। ७ गीत। ८वाया १० देश। ११ काल। १२पात्र। १३ प्रमेय। १४ पर्याय । १५जय। १६ रस। १७भाव। १८ अभिनय। १९धर्म। २० अर्थ । २१ काम। २२ मोक्ष। २३ लोकवाद । २४ विचारपर्यंत । ८४) C१ विद्या । २ विज्ञान । ३ विनोद। ४ फला। ५ कवित्व । ६ वकृत्व । ७ गीत। ८ नृत्य। ९ देश। १० काल। ११ पात्र। १२ प्रमेय । १३ पर्याय । १४ संवाद । १५ अभिनय। १६ धर्म। १७ अर्थ। १८काम। १९ मोस। २० लोकपर्यकश्चेति। ८४) १ विद्या। २ विज्ञान। ३ विनोद । ४ कला । ५ कवित्व । ६ वक्तृत्व । ७ गीत। ८नृत्य। ९वाधा १० देश। ११ पात्र। १२ प्रमेय । १३ रस। १४ बाद । . १५ अभिनय। १६ धर्म। १७ अर्थ। १८काम। १९ मोक्ष। २० लोकवादपर्यंतथेति । ८४) F १ विद्या। २ विज्ञान । ३ विनोद । ४ कला । ५ कवित्व। ६ वक्तृत्व । ७ गीत । ८नृत्य। ९वाद्या १० देश। ११ काल । १२ पात्र । १३ प्रमेय । १४ पर्याय। १५ जय। १६ रसवाद । १७ अभिनय । १८ धर्म। १९ अर्थ। २० काम। २१ मोक्ष। २२ लोक। २३ घाद । २४ विचारपर्यंतश्चेति । * ८५. दशविधं गुरुत्वम् । १ वंशे २ ज्ञाने ३ पदे ४ सत्त्वे ५ शौर्ये ६ दाने ७ बले ८ जये। ९ संताने १० स्वगुणे चेति गुरुत्वं दशधा मतम् ॥ ८५) E १ वि(१)शे धाने पदे शौर्य सत्ये दाने यले जये। संताने स्वगुणे चेति । ८५) F १शे। २दाने। ३ पदे। ४ सोयें। ५ देवे । ६ दाने । ७धले। ८जये। ८ विजये। ९ विक्षाने। १० स्वगुणे गुरुत्वं दराधा मतम् । में 1 A BG अय चतुर्विशति । 4AG सगुणे | B सुगुणे। PC चा 1, F पादलक्षणं । 3 चायव ।

सविवरण यस्तुरनकोश। ८६, पश्चविधं चरितम् । १ ज्ञानचरितं । २ भानचरितं । ३ दानचरितं । वीरविलासचरितं । ५ धर्मारंभचरितं । इति । ८६)C१ विलासचरित्रा२धर्मचरित्र । ३ धीरचरित्रं । ४ गुण प्रक्षेपणं । ८६) E१ दानं। २ मानं । ३शानं । ४ विचार । ५ विलास । ८६) F१ वीरचरितं । २विलासचरितं । ३ज्ञानचरित्रं । ४ कलाचरिनं। ५गुण- प्रक्षामचरितं वेति। * ८७. पञ्चविधं पार्थिवानां पालनम् । १ राज्यपालनं । २ प्रजापालनं। ३ भूमिपालनं । ४ धर्मपालनं । ५ शरीरपालनं । इति । ८७) १फर्मपालनं २ धर्मपालन । ३ प्रजापालनं । ४ भूमिपालने । ५शरीरपालनं । E१ धर्मपालनं । २ राज्यपालनं। ३ भूमिपालनं। ४शरीरपालने । ५ प्रजापालनं । ८७) F१ साधुपालनं । २ राज्यपालन। ३ प्रजापालन । ४ भूमिपालनं। ५ सत्यपालन । चेति। ८७ सप्तविधा प्राप्तिः। १ ज्ञाने २ धर्म ३ बले ४ कामे ५ विज्ञाने ६ पात्रसंग्रहे। ७ महार्थे भूभुजां नित्यं प्राप्तिः सप्तविधा मता ॥ ८८)Cशाने धर्मे यले कामे निशाने पात्रसंग्रहे। सर्वार्थभूत(भोजां चैव प्रातिः सप्तविधा ८८) Eक्षाने धर्म घले कामे विज्ञाने पानसंग्रहे । सर्वार्धभूभुजां नित्यं प्राप्तिः सातविधा मता ॥ ८८) F क्षाने धर्मे फ(१योले कामे विज्ञाने पाप्रसंग्रहे । सर्वार्थ भूभुजानां नित्यमाप्तिः । मता॥ ८९, चतुर्विशतिविधं शौर्यम् । १ शब्दशौर्य । २ प्रतापशौर्य । ३ दानशौर्य । ४ स्थानशौर्य । ५ उदयशौर्य । ६ तेजशौर्य । ७ संग्रामशौर्य । ८ प्रतिपत्तिशौर्य । ९ जय- 10 चरित्र। F पार्थिवामां प्रजापालन । s F drops मासिः।

७२ । सविवरण-वस्तुरनकोशः शौर्य । १० मानशौर्य । ११ ज्ञानशौर्य । १२ साहसंशौर्य । १३ शरणा- १४ प्रमोदशौर्य । १५ उद्यमशौर्य । । १६,अर्थशौर्य । १७ आचारशौर्य । १८ बलशौर्य । १९ कीर्तिशौर्य ।। २. धर्मशौर्य । २१ रक्षणशौर्य । २२ गुणशौर्य । २३ परिवोधशौर्य । २४ प्रबोधशौर्य । गतशौर्य । इति। ८९) A B G १ शब्दशौर्य । २ प्रतापशौर्य । ३ दान । ४ स्थान । ५ उदय । ६ तेज । ७ संग्राम । ८ प्रतिपन । ९जय । १० मान। ११ ज्ञान । १२ साहस । १३ शरणागत । १४ परिवोध। १५ प्रमोद । १६ उद्यम । १७ अर्थ । १८ आचार । १९ बल । २० कीर्ति। २१ लक्षण । २२ गुण । २३ ज्ञान । २४ मान ।- ८९) नाम। शब्द । ३ प्रताप दान । ५ स्थान । ६ उत्तम । तेज । ८ संग्राम । ९प्रतिपत्ति। १० जयमान । ११ ज्ञान । १२ साहस :१३ शरणागत! १४ रक्षण | १५ प्रबोध । १६ प्रमोद । १७ आना। १८ उद्यमी १९ यथाचार । २० बल । २१ कीर्ति । २२ शौर्य । २३ धर्म । २४ रक्षण चेति । ८९) E १ मान। २ मान । ३ शब्द । ४ प्रताप । ५ ज्ञान। ६ उदय । ७ तेज । ८ संग्राम । ९ जय । १० साहस । ११ प्रतिपन्न । १२ शरणागत । १३ प्रगोधी १४ प्रमोद । १५ आना। १६ उद्यम। १७ अर्थ। १८'आचार। १९ बल । २० कीर्ति। २२ शौर्य चेति । ८९) F १ तनु। २ शब्द । ३ प्रताप । ४ दान । ५स्थान। ६ उदय। ७ तेज । ८ संग्राम । ९प्रतिपन्न । १० जय । ११ मान । १२ ज्ञान | १३साहस। शरणागत । १५ प्रमोय । १६ प्रमोद । १७ आज्ञा ! १८ उद्यम । १९ अर्थ । :२० आचार । २१ बल। २२ कीर्ति । २३ लक्षग । २४ गुणशौर्य चेति । २१. लक्षण। । म .. ९० देशविधं बलम् । वाकायबुद्धिमन्त्रैश्च स्थानसैन्यसुहज्जनैः । शकुनैर्देवतैश्चेति राज्ञां दशविधं बलम् ॥ ९०) वाक्पलं। २कायवलं। ३ धुद्धियलं । ४ मंत्रयल। ५ स्थानयल। ६ संन्यबल । ७ मुहर्तरले । ८ शकुनवलं । ९ राजवलं । ९०)E १ वाका २ फाय । ३ वुद्धि। ४ मंत्र। ५मन। ६ शकुन ८ संन्य । ९ घने । १० श्रुति । ११ देवता चेति । रक्तायुः शुद्धिमत्रैश्च स्थान सैन्यं सुहृजनः । राउनदेयतश्चेति राशा दशविध यलम् । । 1 चतुर्दशविध पलं; F राशदशाविधं पलं। 2A B G देवतैथे-- ७३ - सविवरण-वस्तुरत्नकोशः। ९१. दशविधः सङ्ग्रहः । ज्ञाने पात्रे गुणे शौर्ये पत्नीयोगे वले जये,। धर्मे मित्रे श्रुते यज्ञे दशधा गुणसङ्ग्रहः ॥ ९१) A शाने पाने गुणे शौरे पत्नीयोगे वले धर्मे जये गुणेषु श्रुतसंग्रहः ॥ ९१) Bाने पात्रे गुणे सौरे पत्नीयोगे वाल धर्मे जये गुणेपु श्रुतसंग्रहः ॥ ९१) Cशाने पात्रे च विक्रे च पक्ष्यायोगे वले जये लक्षित । ९१) E१ ज्ञानपात्र। २ मित्रपात्र। ३ शौर्यपान । ४ नियोग। ५ बल। ६प्रवीण। ७ यश। ८धर्म । गुणसंग्रहः। ९१) F ज्ञाने पात्रे च मित्रे च पत्नीयोगे वले जये। धर्मे गुणे श्रुते चैव संग्रहः सप्तधा ९१) Gशाने पाने गुणे शौरे पत्नीयोगे चले धर्मे जये गुणेषु श्रुतसंग्रहः॥ क मतः॥ * - ९२. दशविधो जयः। 1 ज्ञानासनप्रतापैश्च सङ्कामैश्च सुहजनैः । निद्राहारोदयैश्चेति राज्ञां दश- विधो जयः॥ ९२) AG बानासनं प्रतापैर्वा संग्रामैश्च सुहननः । निद्राहारोदयाचेति राक्षां दशविधो जयः ॥ ९२) B ज्ञानासनं प्रतापै; संग्रामै स्यसुहननः । निद्राहारै दयाधेति राजा दशयिधो जयः ।। ९२) 0 १ शान । २ सैन्य । ३ प्रताप । ४ काम । ५ संग्राम । ६ऐश्वर्य । ७ सुस्त । ८मित्र । ९सत्व। ९२) E १ मित्र । ३ नियोग। ७ ऐश्वर्य । ८ संग्राम । ९याक । १० परिश्रमी । ११ निद्रा । १२ माहार । १३ इंद्रिय । ९२) F शानाशनप्रतापेऽर्वाक् संग्रामामुटुजनैः । निद्राहारेन्द्रिये घेति राज्ञां दशवितो जयः॥ २पाभ। ४वासना। प्रताप * ९३. पञ्चविधः परिच्छेदः। १ अलक्षितं । २ लक्षितं । ३ मानसिकं । ४ वाचिकं । ५ कार्मिकं । चेति । ९३) A B C DGgive no Vivarana ९३) E १ अलक्षित । २ लक्षित । ३ मानसिक । ४ वाचिक । ५ कर्मण। ९३) F१ अलिपित । २लिसित । ३ भानसिकः। ४ याचिका ५ कर्मणाचेति । IF सप्तविधः संप्रदः। १.

७४ +- सविवरण-पस्तुरनकोशः। ९४. पश्चविधं प्रभुत्वम् । १ कुलप्रभुत्वं । २ ज्ञानप्रभुत्वं । ३ दानप्रभुत्वं । ४ स्थानप्रभुत्वं । ५ अभयप्रभुत्वं । इति । ९४) AG१ फुलप्रभुत्वं । २ शानमभुत्वं । ३ दानप्रभुत्वं । ४ स्थानप्रभुत्वं । ५ उभयप्रभुत्वं । ९४) B १ कुलप्रभुत्वं । २ दानप्रभुत्वं । ३ स्थानप्रभुत्वं । ४ उभयप्रभुत्वं । ९४)C१ कुल । २ शौर्य । ३ दान । ४ स्थापन । ५गुण । ९४) E १ शानप्रभुत्व । २ अक्षय । ३ शौर्य । ४ स्थापना। ५प्रदान । ६ अभय । ९४) F १ज्ञानप्रभुत्य । २ आय(?)प्रभुत्व । ३ शौर्यप्रभुत्व। ४ स्थानप्रभुत्व। ५दानप्रभुत्व चेति। ९५. सप्तविधमुत्तमत्वम् । १ वयः। २ कुलं । ३ रूपं । ४ शीलं । ५ पदं। ६ ज्ञानं । ७ प्रयोगः । इति । ९५) A BG १ वयः। २ कुल। ३ रूप। ४ शील। ५पद। ६शान। ७ प्रयोगपर्यंतं चेति ९५)Cgives no Vivarana ९५) E१धयः । २ कुलं । ३ शीलं । ४ रूपं । ५ पदं । ६ ज्ञानं । ७ प्रयोग । ९५) F १ वयस् । २ फुल। ३ शील । ४रूप। ५पद । ६शान । ७ योग। ८ प्रयोगश्चेति। -- . * ९६. नवविधा शक्तिः। १ धर्मशक्तिः । २ दानशक्तिः। ३ मन्त्रशक्तिः । ४ ज्ञानशक्तिः । ५ अर्थशक्तिः। ६ कामशक्तिः । ७ युद्धशक्तिः । ८ व्यायामशक्तिः । ९ भोजनशक्तिः। इति । ९६) १ व्यायामशक्ति । २ शानशक्ति। ३ दानशक्ति। ४ धर्मशक्ति। ५ अर्थशक्ति । ६ युद्धशक्ति । ७ भोजनशक्ति । ८ विद्याशक्ति । ९६) E १ धर्मशक्तिः। २ मंत्रशक्तिः । ३ कामशक्तिः। ४ भोजनशक्तिः। ५ युद्ध । ६ व्यायाम । ७ देश । ८ उपार्जन । ९ वाद । ९६) F१दानशक्ति । २धर्मशक्ति। ३ मंत्रशक्ति। ४ज्ञानशक्ति। ५ कामशक्ति । ६ अर्थशक्ति । ७ युद्धशक्ति । ८ भोजनशक्ति । ९ व्यायामशक्तिश्चेति । * -- ७५ . सविवरण-वस्तुरनकोशः। ९७. सप्तविधा भुक्तिः। १ शन्दः । २ पर्शः । ३ रूपं । ४ रसः। ५ गन्धः । ६ अभिमानः । ७ देशः। इति । C gives no Vivarana ९७) E १ प्रतिमान । २ द्रव्य । ३ शब्द । ४ स्पर्श। ५ रूप। ६ रस। ७ गंध । ८ देशभुक्ति। ९७) F १ अभिमान। २शब्द। ३ रस। ५गंध। ६ देश। ७ स्पर्शमुकिश्चेति । ४रूप। * १८ अष्टविधमभिमानलक्षणम् । ज्ञाने दाने बले धर्मे धर्मार्थे शत्रुमारणे । समारंभे च युद्धे च अभिमानं प्रचक्षते ॥ ७शत्रु। ९८) Aझाने दाने धर्मे अर्थे कामे वले शत्रुधाते । समारंभोदितं च । ९८) B ज्ञाने धर्म अर्थ कामे वले शत्रुधाते समारंमे स्थितं च । ९८) E१ ज्ञान । २दान। ३बल। ४ धर्म । ५ अर्थ। ६काम। ८घात। ९समारंभ। १० उद्धतं चेति । ९८) F१ज्ञाने। २दाने। ३चले। ४ करें। ५कामे। मारणे। ८समारंमे चेति। २८)G१क्षाने। २ दाने । ३धौ। ४अर्थे । ५ कामे। ६चले। घाते। ८समारम्भो स्थितं च । ६ अथें। ७शत्रु- ९९. चतुर्विधं वात्सल्यम् । देवानां सद्गुरूणां च मन्त्राणां वल्लभे जने । स्नेहेन मानसं यच्च तद्वात्सल्यं चतुर्विधम् ॥ ९९) A B G देवानां सहरूणां च मंत्राणां यल्लमे जने । मेहेन मानसं यद्य तदात्सल्यं चतुर्विधम् ॥ ९९) देवानां सहरूणां च धियां चलयमोजने । मेहेन मानसं यश तद्वासे। ९९) E वेदानां गुरूणां च मित्राणां वर्णमोजने । मेहेन मनसा यश्च तद्वात्सल्यं चतुर्विधम् ।। ९९) F देवानां सहरूणां मित्राणां यल्लमे जने । मेहेन संत[तो] वात्सल्यं चतुर्विधम् ।। 1 Eमुक्तिः, Fभक्तिः।

+ ७६ सविवरण-चस्तुरत्नकोशः। १००. पञ्चविधो महोत्सवः। १ ज्ञानमहोत्सवः । २ धर्ममहोत्सवः । ३ अर्थमहोत्सवः । ४ काम- महोत्सवः । ५ मोक्षमहोत्सवः । इति । : {" १००) AG १ शानमहोत्सवः । २ धर्ममहोत्सवः । ३ काममहोत्सवः । १००) B १ ज्ञानमहोत्सव । २ अर्थमहोत्सव । ३ काममहोत्सव । १००) १ काममहोत्सव । २ द्रव्यमहोत्सय । ३ मोक्षमहोत्सव । १००) E१ शान । २ धर्म । ३ अर्थ । ४ काम । ५ मोक्षमहोत्सवश्वेति । १००) F१ धर्ममहोत्सव । २ द्रध्यमहोत्सव । ३ काममहोत्सव । ४ ज्ञानमहोत्सव । ५ मोक्षमहोत्सव। --- १०१. अष्टौ लब्धियोगः। १ अणिमा। २ महिमा । ३ लधिमा । ४ गरिमा । ५ ईपत्वं । ६ वशित्वं । ७ प्राप्तिः । ८ प्राकाम्यं । चेति । १०१) ABG give no Vivarana. १०१) १ अणिमा। २ महिमा । ३ लघिमा। ४गरिमा । ५प्राप्ति । ६प्रकाम्य । ७ ईशत्वं । ८ वशित्वं । १०१) E१ अणिमा । २ महिमा । ३ गरिमा । ४ लघिमा।.५ ईशत्व । ६ वशित्व । ७ प्राप्ति। ८प्रकाम्यमेव । १०१) F१ अणिमा। २ महिमा । ३गरिमा। ४लधिमा। ५ ईशत्व। ६ विसत्य (?)। ७ वशित्व । ८ प्राकाम्य चेति । -- । * 1 C drops the Sūtra but gives the Vivarang.

. । Appendix A. Ms. E. Additional sutras:--- पट्त्रिंशत् वादित्राणि । मेरी २मृदंग ३ पटह ४मरुज ५कसाल ६ताल ७ लघुताल ८ शंख ९ सूर्य १० भुंगल ११ घर्घरी १२ तुलूरी १३ वंश १४ वीणा १५ पणय १६ दंड १७ डमरु १८ काहल १९ गर्गरी २० दुहिलि २१ भरह २२ कुंडलिका २३ ककच २४ रावण २५ कर २६ कित्ररिक २७ त्रिवल २८ भ्रातृणी २९ हंडक ३० तंत्यं ३१ करड ३२ नागक ३३ ददकुंड ३४ नवसरली ३५ वीणात्रयं ३६ लघुमली मुख वाजित्रा अपदन विनोदी ।। १०० ॥ * पंचविंशति गुणोमात्यः। जनपदोभिजातः स्वबह । कृत स्वल्प । चक्षुपन् । प्राश धारयिष्णु । दक्ष । वाग्मी। प्रगल्भ । प्रतिपत्तिमान् ।सोत्साह । प्रभायुक्ता। क्लेशसह । शुचि । मित्रदृढभक्ति । शीलवान् । चली। आरोग्यवान् । शक्तियुक्त । स्तंभ । चापलहर संयोगो चैरिणः । अकर्ता ।। १०१ ॥ * । राज्ञां अष्टादशतीर्थानि । मंत्री। पुरोहित । सेनापति । युवराज । दौवारिक । अंतर्वशिक । प्रशास । महात् । संनिधार । प्रदेष्ट । नायक। पौरव्यवहारिक । परिवादाध्यक्ष। दंड। दुर्गतिपाल । आटविका ॥२॥ अष्टौ स्वर्गगुणाः। विषघात । रसायण । मंगलार्थ । विनीत । प्रदक्षणावर्त । गुरु अदग्ध ॥ ३॥ अष्ट गुणं पयः। सुगंधि सुव्यक्तरसं । तृष्णानं । शीतलं । लघु । हवं । स्वच्छं ॥४॥ Explanation in Old Gajarati :- श्रीगुरुभ्यो नमः । अथातो रत्नकोश व्याख्यास्यामः । यस्तुविज्ञानं । सर्यशास्त्रमयं रम्यं । सर्वज्ञानप्रकाशकं । स्वल्पग्रंथ सुबोधार्थ । रत्नकोशं समभ्यसेत् । १ । तत्र शतेन सुधाणां । कर्तव्यः संग्रहो यथा ॥ २॥ अय इति मंगलार्थे । ग्रंथनकर्ता श्रीवेदव्यास कहि छि। ये मि चौदविद्या सर्व प्रगट कीधी । हवि रलकोश पह बिनामि ग्रंथ कहिछि । ते ग्रंथ फेबुछि। सर्पवस्तुनु भान येह थिकी जणार । वीरेहबुछिते अंथ ! सर्व शास्त्र मयछि। मनोरम छि। रत्ननु भंडार छि। सर्पज्ञान प्रकाश थाइ । स्वल्पयोर्दु ग्रंथ मनियोधये प्रतिवोधते घणु । पहथुये रत्नकोश ते निरूपी इछि। ते ग्रंथमादिमु एक १०० सूत्र फरी संग्रह करी इछि । ते सूधकी हो । ते कही पछि । तत्रादी त्रिभुवनानि । ते सूत्रमाहिं प्रथम घण्य भुवन कही इछि । निविध लोकसंस्थान......।

७८ सविवरण-वस्तुरत्नकोशः। Appendix B. Similar topics from some other works:- राजवंशाः। Kumārapala Prabandha gives the following list of the राजवंशs. They are as follows तत्र वंशः पत्रिंशत्, पयम् इक्ष्वाकुवंश १, सूर्यघंश २, सोम ३, यादव ४, परमार ५, चाहमान ६, चौलुक्य ७, छिन्दक ८, सिलार ९, सैन्धव १०, चापोत्कट ११, प्रतीहार १२, चन्दुक १३, राट १४, फूपट १५ शक १६, करट १७, पाल १८, करंक १९, वाउल २०, चन्देल २१, उहिल्ल पुत्र २२, पौलिक २३, मौरिक २४, मंकुयाणक २५, धान्यपालक २६, राजपालक २७, अम(न)ग २८, निकुम्भ २९, दधिलक्ष ३०, तुरुदलियक ३१, हूण ३२, हरियड ३३, नट ३४, माप ३५, पोपर ३६, नामानः । [-नि तकुमारपालप्रवन्धः, पृ.१] . - आयुधानि । चक्र । धनु । वज्र । खड्ग । क्षुरिका । तोमर । कुन्त । त्रिशूल । शक्ति । परशु । मक्षिका । भल्लि । भिण्डिपाल । मुष्टि । लुण्ठि । शङ्ख । पाश । पदिश । यष्टि । कणय । कम्पन । हल । मुशल । गुलिका । कर्तरी । करपत्र । तरवार । कुद्दाल । कुस्कोट । कोफणि । डाह । डथ्थूस । मुद्गर । गदा । घन । करवालिका। [श्रीद्याश्रयमहाकाव्य (पृ. २२) अनु. म. न. द्विवेदी] (see p. 17 of the text.) ܝ कलाः। गीतम्, वाद्यम्, नृत्यम्, आलेख्यम्, विशेषकच्छेद्यम्, तण्डुलकुसुमयलिविकारा, पुष्पास्तरणम्, दशनवसनाङ्गरागः, मणिभूमिकाकर्म, शयनरचनम् , उदकवाद्यम्, उदका- घाता, चित्राश्च योगा, माल्यग्रथनविकल्पाः, शेखरकापीड़योजनम्, नेपथ्यप्रयोगाः, कर्ण- पत्रभङ्गाः, गन्धयुक्तिः, भूपणयोजनम् , पेन्द्रजालाः, कौचुमाराश्च योगा, हस्तलाघवम् , विचित्रशाकयूंषमक्ष्यविकारक्रिया, पानकरसरागासषयोजन, सूचीवानकर्माणि, सूत्रक्रीडा, वीणाडमरुकवाद्यानि, प्रहेलिका, प्रतिमाला, दुर्वाचकयोगा, पुस्तकवाचनम् , नाटकाख्या- यिकादर्शनम्, काव्यसमस्यापूरणम्, पट्टिकावेत्रवानविकल्पाः, तक्षकर्माणि, तक्षणम्, वास्तुविद्या, रुप्यरत्नपरीक्षा, धातुवादः मणिरागाकरक्षानम्, वृक्षायुर्वेदयोगाः, मेष- कुकुटलावकयुद्धविधिः, शुकसारिकाप्रलापनम् , उन्सादने संवाहने केशमर्दने कौशलम् , अक्षरमुष्टिकाकथनम्, म्लेच्छितविकल्पाः, देशभाषाविज्ञानम्, पुष्पशकटिका, निमित्त- ज्ञानम्, यन्त्रमातृका, धारणमातृका संपाट्यम्, मानसी काव्यक्रिया, अभिधानकोषः, छन्दोज्ञानम् , क्रियाकल्पः, छलितकयोगाः, वस्त्रगोपनानि, द्यूतविशेषाः, आकर्षक्रीडा, बालक्रीडनकानि, चैनयिकीनां, वैजयिकीनां, व्यायामिकीनां च विद्यानां ज्ञानम् (इति चतुःषष्टिरङ्गविद्या कामसूत्रस्यावयविन्यः)॥ कामसूत्रे १ साधारणेऽधिकरणे, ३ विद्यासमुद्देशप्रकरणम् । पृ. ३२-३३ (C.S.S.) (see p. 21) ' सविवरण-यस्तुरत्नकोशः। जयमंगला on सूत्र १५ अ. ३ अधिकरण १. शास्त्रान्तरे चतुःषष्टिर्मूलकला उक्ताः । तत्र कर्माश्रया चतुर्विंशतिः। तद्यथा-गीतं, नृत्यं, चाय, कौशललिपिज्ञानं, वचनं, चोदारं, चित्रविधिः, पुस्तकर्म, पत्रच्छेद्यम्, माल्य- विधिः, गन्धयुक्त्यास्वाद्यविधान, रत्नपरीक्षा, सीवनं, रङ्गपरिशानम्, उपकरणक्रिया, मान- विधिः, आजीवज्ञानम् , तिर्यग्योनिचिकित्सितम् , मायाकृतपापण्डसमयशानं, क्रीडाकौशलं, लोकशानं, वैचक्षण्य, संवाहन, शरीरसंस्कार विशेषकौशलं चेति । द्यूताश्रया विंशतिः । तत्र निर्जीवाः पञ्चदश । तद्यथा-. आयुःप्राप्ति, अक्षविधान, रूपसंरया, क्रियामार्गणम्, वीजग्रहणम्, नयनानं, करणा- दानं चित्राचित्रविधिः, गूढराशिः, तुल्याभिहारः, क्षिप्रग्रहणम्, अनुप्राप्तिलेखस्मृत्तिः, अग्नि- क्रमः, छलव्यामोहनम् , ग्रहदानं चेति । सजीवाः पञ्च । तद्यथा- उपस्थानविधिः, युद्धं, रुतं, गतं, नृत्तं चेति । शयनोपचारिकाः पोडश । तद्यथा- पुरुषस्य भावग्रहणं स्वरागप्रकाशनम्, प्रत्यङ्गदानं, नखदन्तयोर्विचारी, नीवीसनं, गुह्यस्य संस्पर्शनानुलोम्यम्, परमार्थकौशलं, हर्पणं, समानार्थता कृतार्थता, असंप्रोत्साह- नम्, मृदुभोधप्रवर्तन, सम्यक् क्रोधनिवर्तनं, क्रुद्धप्रसादनं, सुप्तपरित्यागः, चरमस्यापविधिः, गुह्यगृहनमिति। चतन उत्तरकला:- साश्रुपात रमणाय शापदानम्, स्वशपथक्रिया, प्रस्थितानुगम- नम्, पुनः पुनर्निरीक्षणं च । इति चतुम्पष्टिर्मूलकलाः । जयमंगला टीका कामसूत्रे १ साधारणेऽधिकरणे ३ अध्याये, विद्यासमुद्देशप्रकरणम् । पृ. ३१ (C.S.S.) भाषा:। रतिः।हासः शोकाकोधः। उत्साहः। भयम्। जुगुप्सा। विस्मयः। निवेदग्लिानिः। राका । असूया । मदः । श्रमः । आलस्यम् । दैन्यम् । चिन्ता । मोहः । स्मृतिः । धृतिः। प्रीडा । चपलता । हर्पः । आवेगः । जडता। गर्षः। विषादः ! औत्सुक्यम् । निद्रा । अप- सारः। सुप्तम् । वियोधः । अमर्पः । भवाहित्यम् । उग्रता । मतिः । च्याधिः । उन्मादः । मर- णम् ।यासः । वितर्कः । स्वेदः । स्तम्भः । कम्पः । अनम् । पयर्यम् । रोमाः । स्वरसादः । - (ना. शा. म.७. काशी. सं. सिरहा) रति । हास । शोक । क्रोध । विस्मय । उत्साह । भय । जुगुप्सा । निर्वेद । ग्लानि । राका । असूया । मद । श्रम । आलस्य । दैन्य । चिन्ता । मोह । स्मृति । धृति । कीदा। ।

८०
सयियरण-यस्तुरखकोराः।
पीडा । चपलता । हर्ष । आवेग । जहता । गर्य । यिाद । औरमुक्य । निद्रा अपस्मार ।
मुप्त । (योघ )वियोघ । अमर्ष । अहिरय। उग्रता मिति। प्याधि । उन्माद । मरण । प्रास ।
संदेह । रोमाञ्च । स्वरमेद । अथुपियर्य।
(see p. 38)
(विष्णुधर्मोत्तर, एनीयखण्ड अ.३०)
अभिनयाः।
आङ्गिको घाचिकश्चैय माहार्यः सात्विकस्तथा ।
झयस्त्यमिनयो विमाश्चतुर्धा परिकल्पितः ।
(नाट्यशास-प्र.८.लो.९)
(sce p. 39)

अकारादिशब्दानुक्रमणिका । पृष्ठ पंक्ति पृष्ठ पंक्ति शब्द अगीतसंगता अगीतिता अग्नि अदानत २१ ६ २० ११,२४ १८ अद्भुत अद अधम अधिकांक्षा अधीक्ष अध्यक्ष २७ १३ १० १२ १ " २,१८ " १८ ३५ " १० १४ अमिपाल अध्यक्षपात्र १४ ३,१०,१७,२५ ११ " १३ १५ अध्यात्म अभिमुख अग्निमुखदेश अमिविशेषगम् अग्निविज्ञानं अभ्य अप्राम्य २२ २३ २५ २६ २२ २४ ११,२४ ४,२२,३८ " २७ १५ २० १६ " ૧૨ अध्यात्मविज्ञान अनग्न अनमशायी ८,२१,२९ ८,२१,२९ ,१४,२५,२४ " ५९ ६० " अप्रासन अग्रासन ३,८,१०,१५ ६,१२,२६,३५ २८ " ४ अनंग अमंगवंश अनिल अनिष्ट भनुकूल अनुक्रम ४ भजय ४ ४. २१ २,१५ ११ ८,९,१०,११,१२ अणिमा ११ " ५,२१,३८ १४,३१ " अति अनौचित्यता अति मसगतता भतिकान्त प्रेक्षणाम् भति प्रदासता २३ २०,२३ १५,२२ १५,११ ४८ अनुकनगुण अनुगीत अनुगोपणं अनुग्रह ५,७,41. U १५,२४ " अति प्रसंगता अतिशता १८,२. २३ भनुपहाग अनुचितता .

२ मस्तुरनकोषः। पंकि पृत - अनुराग शब्द अभिधानकला अभिधानं अभिनय १३ ५,२१,३८ १५ १५,२०,२७ " अनुरागपोषणं अनुवरा अनुवाद १३ ६५ २१,२४ ६,९,१२ ५,३,१३,२१ ३० " १५,२० १,५,९,१३ ३८ अभिनव १४ १२ अभिमान ११ १२ ५,२१,३८ " १३ ४१ " १५ अनुवास अनुशयन अनुशयनाद्यर्थ (2) अनुशयनं अनुशायन भनुशायी अनौचित अनौचित्यता अनंतभाषिन् अजशाला अन्योन्यशायी अप ४४ २ ນາ १९ " अभिमानकारण अभिमानगुण अभिमानता अभिमानयुका अभिमानलक्षण अभिमानावलेपता अभिमानी १५,२२,२५,२८ ८ २,२१,२९ ५ २३ "" ६ ४० अपगीत अपतत्व १२ , " " २१ ६५ २०,२२,२३,२४,२५ ३,५,२२,२९ २,५,७,१२ १२,१४,१६ अपघ्रश अपभ्रंश अपस्मार अभिलाषा अभिसारिका १ १४ " ४२ ४,१०,१६ ८१५,२३ " . ६७ अभूमिशासी अभेद अभ्यंतर अभ्यास १८ ३४ अमर अपोहन अप्रियंवदा अप्रीतिता अभय अभयउपकाद्रव्य भभयदान अभयप्रभुत्वं अभयमुख (1) भमागी अभाव अभिवारिकापात्र अभियान १८,२२,२५ १,४,७,१. ३ २,१८१४ १३,२२,१२ ३४ ३ १७ " अमर्ष " १६,२४ २३,२७,३० अमात्य 1 ३२ २५ " २२ २३ " " पृष्ठ अकारादिशब्दानुक्रमणिका । पंक्ति शब्द. १०,१७ अर्थशौन पृष्ठ पंक्ति अमात्यपात्र १९,२१ १५ ८ २ १४ २ अमात्यपात्र अमित्राणि द्वेषयति अमित्राणि देष्टि १३,१८,२६ २२ अर्थशौर्य अर्थस्थान अर्थस्थानं अर्थानुभाविनी अर्थान्तर " ४६ ४७ २५ १६,२२ १४,२० अमित्राणि पूजयति ३ ९,१५,२७ ४८ " ६ ६ अर्थान्तरसमता २४,२६ २३ १६ १० ६१ अमोह अमोहन अयुक्तिगुण अरूपता अास्थान अर्थ ११ २६,२९ अर्यान्तरसमता अर्धशक्ति अर्धस्थान अर्बुद ३२ ८ १२,१३,१४,१५ १९ " २२ " ५,१०,१५ १५,३२ १४,२८ ४,१७ २८ २१,२४ २२ " २३ ३१ २७ २१,२५ ३८ ७,१२,१७,२३,२८ २४ ૨ ५,१०,१३,१७,२१ ७,१५,१९ ११,१५ " अर्बुददेश अलक्षित अलिषित अलंकार " " २२ २३ " " २८ " ६५ २१ अर्थकला अर्थकामत अर्थत अर्यतः कामरत अर्थदानत अर्थपात्र ४ २०,२५ ५,१६,३७ २०,२३,२६ २,५,८,११ २७ २,८,१७,२२ १८ १९,२३ अलंकारकला अलंकारशास्त्र अवदान २,३ ४० १३ ७,१४,२२,२८ 1,6 अवधान अवघानगत भवन्ती " १५ अयपुरुष अर्थमहोत्सव भर्यलक्षण अपवाद अर्षविज्ञान १८,३२ १४.२५ ५,14 २७ " ३२ २३ ३,२७ २०,२७ अवन्तीदेश अवभिषा(! हित्या) भरलेषता भवसान अवहित्य " ४ अशकि अर्थशाम ९ " ४ वस्तुरतकोषः। पृष्ठ पंक्ति पंक्ति २२ अवि(ध)स्तनशायी अविश्वास अशक्ति अशक्तिगुण १५ ३ १३ १४ अक्षमता अक्षरपात्र अक्षरविनोद अज्ञानता आकाश ४ ११ १८ ។ १९ ५७ १६,१९,२४,२५,२८ ६,१२,२२,२४ २६,२९ अशन २५ " ६ आकाशतत्त्व २१ २० २१,३८ १ २१ आखेट 'आखेटक १५ अशनविधि अगनविधिविज्ञान अशब्द अशब्दशायी अशेषस्थाप्रस्ताव अशौच अशौचरता अश्रु २,६,११ १३ " ३,७,१३,१८,२४ " " २७ १३ १५ ६ ४,१५,३० ७,१८ २४ १७ १०,२६ २५ २७ आखेटकविनोद आखेटकविज्ञानं आख्यान आगम आगमिकत्व आगमित्व आगलिका आग्रह ६६ ११ ६,९,१० ४ " ११ २३ १८ अश्वपरीक्षा अश्वविज्ञान अश्वशाला अश्वशिक्षा अमन्मुखशायी अमुख ३ १२ ७ ३८ " ८,२३ १० ५,३० आशिक आचार आचारवती आचारशौच अमूया ५,१५,११ ४३ १९,२१ ४४ २,७,९,१२ असबद्धप्रलापी असरशायी अस्थि आचारशौर्य ७२ ३ आत्मस्थान २१ १,१०,१८, अस्थिस्तम्भ अन्नबंध " आदरगुण आदित्य २६ १,१५,11 महगंग ४ भहंकार . " " भन " ७,२३ ११ १,२०,३६ भादेश २ " " १५,२०,२४ P " ६७ अकारादिशब्दानुक्रमणिका । पंक्ति शब्द पंकि २३ आराध्य २८ ८ ३० मानल आन्ध्रदेश आन्वीक्षिकी आन्वेषिकी आप्त १९,३९ २५ १,१६,३१ ११ १८,२० आराम आरामविज्ञान आरामिक २४ " १७ १५ १४ १७ २१ आप्ताहित आमीर आई आर्द्रमास २५ २८ २९ १८ " " २४ ११ १२,२८ " आमीरदेश २८ २९ ३ " ११ आईशाक आमेर आमप्रभुत्व आमिष १९ ६ ७४ " आईशाखा १४,३० * * " " आनायिक थाम्र १६ ३०,३५ " २३ २५ ३५ " आर्दामलक आलस आलस्य २,३६ " ६,१८,२१ " ८,२४ ३५ आलिङ्गन आम्ल आयतन १३,२३ १,३,५,७,९,११ ६,११,१६,२१,२६ " आयु आवर्तनकीर्ति आवश्य आवेग ३९ १४ " १०,२५ १,१५ १५ " आयुध २ आवेश १ ३८ " " आवेशन " २३ २२ २५ आयुधरला भायुधकार १६,३१ १०,२३,३२ ५ १४,२८ १.,३०,३५ ५,२५ आश्चर्य " भायुर्वेद २५ ३. 1 आश्रम आश्वासन आमक्ति ५८ भारमटी २३,२४,२५,२६, १२ २३ ५ १२ १३ १४ " माराट आराय आसन " २९ ८ " Y , ۱۰۱، أم عن استعاستها • 4 عیدتون * ا t عددها شود t شه ۱۱۱۱۱,۱۱ باغها لمجلس f نشانهه لها والحمد kamat ة إلا 11 }. زم + i : \ هی رجلها ما به مندلنعنا و भकारादिशब्दानुक्रमणिका। ७ बाद पृष्ठ पंक्ति पंक्ति ८ २१ ८ उत्साहगुण उत्सुक्य उत्तर गुजराती उसरापथदेशा उदके उदय ३० ३ २८ उपन्थ उपागगीत उपायकरदान उपार्जन उभयदान उभयप्रभुत्व उभयमुख ७४ " १२ ७,२३,४० " " उरल २८ २९ २४ ६,१९ उदयमुख उदयशौर्य उदंवर उरलदेश २८ ३३ ५,१३,१७ १० २२ १२ २,२०,३६ ५,११,१५,१९ २ उलास " उल्लेच उद्यम उद्यमशौर्य उद्धत ४० उद्धततम उदात्त १२ २४,२६ २२ उह उद्दन उहापोह ऐश्वर्य " १३ २५ ८ " १२ ३. १६ ओड ओजः ओजः संगत ४४ उदाता उदारगुण उदारता उपयोत उद्वर्तता उद्वर्तनवास उद्वर्तनाधिवास सद्वर्तने टन्द्र उन्नतप्रदेश उन्मद उन्माद १२ ९ ४४ " ४ ६ " ओरल भोपध २ ૨૨ १५,२० " ३८ भोषधी ओषधीरल औत्सुक्य १०,१६,२४ १६ ३५ ३५ ३८ ३४ , " ३६ २७ भोपप मंग ४ उपकारदान उपकृति उपगीत उपचार उपचारविलेपन उपदेश उपन्यास ५८ " अग २८ १५,२०,२३ " ३८ १४ (७ 2 यस्तुरनकोपः। पृष्ठ पति पंक्ति अंगदेश क्थाकला कयाविनोद " १९ १३ ११ १८,२४ १५ १९ मंगुलीमोटन अगुलीरफोटन संजन ४८ ३,८,२३ १५,२१ ४८ कदम्ब कदम्बवंश ८ ६,२२,२८ " " ८,२२ ११ ३५ १५ १८ कन्ताकुन्तला)धारण ५९ कन्यकुब्ज कन्या १४ अंजनदेश अंतर्विदेश अंतर्वेद " २१ ११,२९ १,१५ १०,२६ ४,२२ " " अंतर्वेध मंत्र कफ ६,१७,२५ २८ ५,२८,२२,२४ कमल कमला २२ " कच कृचप्रधारण ३ " १ करटपाल १८ कप्रदेश १. " ८ २१ कणय ३,१४,२. १८ कगाय कर्कट करटपालवंश करटवाल करटवंश करणक ८ २९ कांकडून १८. १८ १८ १५ ९ १४,२१,२८ २२ १३,२०,२६ करविनोद कराट करण कमोटन कोट २१ ५,१४ " १४ २५ ८ " देश उनी जरि ३ ४,६,११,१४,१ ४८ " , ३,५,२० " ४.९,१४,२०,२६ कर्मकर धर्मधार कर्मा मंगाना १४१ " १३ .

अकारादिशब्दानुक्रमणिका। शम्द पंक्ति कर्मण: कर्मपात्र २२ १३,२९ १४ शब्द कवित्व २६ २७ कवित्वकला २१ कवित्ल (त्वक)पित ६३ कवित्व " १५ ७१ ४,१० १० कर्मपालन कर्मवर्तन कर्मविज्ञान २५ । ४,३२ ११,२७ २ " ४,९,१० २,५,११,१५,१९ २८ १८ कविलवाद कवित्वविनोद कवित्वविज्ञान २४ १५ ។ २५ " कल कलचुरवंश कलहांतरिता कला ८ २५ २४ " ४ ३ १५ १६ १९ करमीर कक्षा कक्षाशीच काकु कागडाजय(।) काच १,३,५ २२ ४४ ४,१४,२०,२६ ११,२०,२५ १०,१९,२० ३,२०,२३ २३ २५ २७ २१ " २४ ४ " काचविज्ञान काचविज्ञान काठवाकता(1) कान्ति ६,२१ २,७,११,१५,१९ ६ १९ २६,२९ ७१ " " कलाचरित्र कलानुर कलामुख कलालक्षणं कलावती कलाविनोद कलाशास्त्र कलिछुर ३. कान्तिगुण कान्यकुब्ज २० २,१८,३५ ११,२८ १ २७ २३,३८ १८ ६ १२,१३,१४,१५ २४ १५ १९ कान्यकुब्जदेश २७ कलिच्छुर कालिंग २८ १३,२८ २१,२३ " ७ २९ " " " २९ ३८ कलिंगदेश " ....१४ ८,१७,२६ ३,१०,१९ २१,२६ ३८ २७ २२ " ६२३,१७ ११,२०,२६ M २७ कल्पशास्त्र कवित्व " १.९.१,१७,२३ ३१ ५,१२,१५,२३,२८ ५,१०,११,१७,२३ २३॥ " विन २. " पस्तुरखकोषः । पट पंकि श काम १,१३,१५ २६ । " २१ कारण्यगुण ६ कामकला कामत कामपात्र ܫܫ २३ १४,१७ २५ २,३,१७ ३५ १४,२२,२८ १,८ " २७ " कामपुरुष १२ ८,१२,२३,२९ २५,२८ ३८,१२,२७ १७ " काममहोत्सव कामरु ११,१५ २,३,४,५,७ १५,. " कालविद्या २. " कामरूप कालविज्ञान काव्य ४,१२,२. २२ १८ १ " ४ २७ २२ १९. " . । २३. कामस्पदेश कामलक्षणं कामवाद कामशकि कामशास्त्र कामाक्ष १८,२२,२४ १८ काव्य १०७ १ १९ २८ ७ २५ " कान्यकीर्ति काध्यप्रबोध काव्यवर्तन काव्यविज्ञान काव्यशास्त्र काश्मीर कामाक्षदेश कामाक्षा २७ २१,२६ २१,३६ ८,१५,२२ २८ " " कामावस्था कामिक कामिनी ३ " "2" " काश्मीरवेश काष्ठ ४ " ४ ३२ " काछ ११,३४ " कामुक काम्यपुरुष कार्मजा कार्मिक काय कायबल कार्य कारण कारुण्य २५ काष्ठकम २६ + ८ १ 8 काष्ठकला कास काष्टकम १२ - २३ २४ ५,२२ १२ २२ " अकारादिशब्दानुक्रमणिका । पृष्ठ शब्द पृष्ठ पंकि शब्द काष्टविज्ञान किरात दुरंग २८ २८ १३ १,१८ १,१५,२९ २४ " " पुरंगदेश किर्तयः ७४ ६,११,१३,१४, १५,१६ १८ ૨૪ क्रीडा कीर १४ २३,२९ १८ " १४ १४ ७,२१ " ४ कीरदेश कीर्ति ३० २८ २,४,५ कुलपुत्रिका कुलपुत्रिकापात्र कुलप्रभुत्वं कुलिका कुलिना कुलिश कुलीन ११ १२ १८ २२ ३,१९,३६ १२,१८ २२ १६,३२ १६ १४ १,७,१३,२०,२७ " ३४ રૂ૫ " । २२ १४,२८ कुसुम २२ २३ ५,१२,१५,२० २१ २१ कीर्तिमान कीर्तिरूप कीर्तिवान् कुसुमकला इष्टि(लि.)नी कृत्य ४० १५ २१ ११ ५,२२,२८ " १९ ३१ १९ ४१ " ३ कीर्तिशौर्य कुडुवंश कुटुंबवंश १ १ १५ कृत्यशास्त्र कृत्रिम कृत्रिमविनोद कृपण कृपणा कृषि मुठार कुतूहल १५,२९ ८,२४,२९ १३ २५ ३,८,१०,१३ ६ १३,२७ ५,२०,३७ १२ २१ " " कुतूहलपात्र " १८ २५,३० १८ ३ पुपित कुमारोपचारतः कुमित्राणि कृषिविज्ञान कृष्टि केकाण (देश) १८ ५८ ३,२० ४७ २२ २८ केश " पुरदेश १४ २४ २२ केकी केशमहणं धारण पुरूपा १२ वस्तुरत्नकोपः। . पृष्ठ पंक्ति शब्द पूड पंकि १ कंकण २९ १४,२०,२६ २८ १७ १२ २४ कंचा २९ शब्द केशधारण फेशप्रकीर्णनं केशोभारीद्धारण केशविनोद कैशकी कैशिकी कोंकणदेश कोदाल कोकिल कोदाल कोटपाल २३,२७ २७ १८ २५ ८,२०,३३ १८ १८ कंपन कैपित (क)पितं १५ १८ ९ . ६४ ४,११ ४ कंबोज ६२ २८ १८ " १८ " २८ ७,२२ ३. १८ कोपूल) कोरल कोरल कोल कोलानुर कोवोलिक कंबोजदेश कांचन 24 ९ २७,३०,३७ " १ १९ " ६ ४,२०,२६ १५,३१ कोश १० " २५ ३५ ३६ २९ १५,२९ ९,२४ " . " कोजी कांजीदेश कांती ६ १० ३० २६ ६,११,१६,२१, २६,३१ २४ कोशविज्ञान कोष्ठागार " कास्य कास्य विज्ञान २,१६,३२ १२ ३२ ३२ ६,११,१६,२१, २६,३१ कुण F कोपमुत्पादयति कौतूहलविज्ञान २४ ३० कौरल १८ ८,२३ कुंकुम कुंचितं कुंत ५ २२,२९ २९ कौरल कौरिल कौशकी कोशिकी कौस्तुभ १८ . कुंतल १८ । २५,३० २६,२०,२९ ६ ४,२०,३६ १५,३१ १२ १४ १२ १२ १,२३ ३४ " " - २७ ८ " बैंकण १८ शन्द पृष्ठ पृष्ठ पंकि ३५ कुंभविज्ञान कुरंग अकारादिशब्दानुक्रमणिका। पंक्ति शब्द ११,२७ खंजरीट ६,२४ ३,२० खेटक खेलन १० गगनं १२,१९ १३ १४,२४ ६,१३,२७,३४ गज ३ १५.. १,२५ ३,२२,३७ १८ १५ २१ ३ २,१८,३४ १२,३३ २८ २९ १४ १६. कुलपुत्रिकापात्र क्रमस्थ ६२ १५ " क्रीडन २३ २९ १२,१८,२४,२७ २,८,१३,१८,२४ ३ " क्रीडनेन क्रीडा " गजशाला गजशिक्षा गण ३२ २६ ७,२२ २ २,१२ ३९ " गणित १५ ८,१५,२३ १२,१८,२४ ७,१०,१५,२०,२४ १९ " क्रीडापात्र क्रीडापात्र क्रीडापात्रं नीडापात्रप्रवेशनम् कीडापात्राणि क्रीतविक्रय ऋरव्यसनता कोष १५,२०,२३,२६ १,१४,१६,२० २२ " ३,१४,३५ २३ गणितकला गणितविनोद गदा २१ १५ " ८,१७,२६ ३,११,१९ २,१२,२०,२८ ५,१३ २०,२३ १,७,१३,१९, २७,३२ ३ ५,१५ " ३८ गन्ध ४ " " ११ क्रोधगुण ऋोधन क्रोधी लेशसह गन्ध गमत्वं गरिमा गर्भागार गर्व " ३८ लेखापहारी १०,१३ १९ ५,११,१५,३१ २४ २८ ५,११,२४,३. ११,१४,१६,१८ ११ ८,१३,१५ ३,१.१६ १६,२२,२७ ५,१८,२१,३. गर्विता ग्लानि १९ खण्डिता सस ससर २१ महिला प्रहण गांभीर्य २४ २०,२२,२४,२६ " २९ ११ सेरीट ३ १३ ११४ १४ 11 वस्तुरनकोपः । पृष्ठ पंक्ति शब्द गौमीर्य गीत ४८ १३ ४ १०,२७ १४ शब्द गुणव्यावर्णन गुणशौर्य गुणः प्रक्षेपण गुणान् प्रकाशयति गुणान् प्रच्छादयति १५ " १२ " २१ २३ ३१ १,६,१: ६,११ ३,१४ ६,११,१६,२७ "" " १७,२४ गुणान् सखीजन कथयति ११ " है ५,२३ " " " १७ गीत गीतकला १९,२२,२५ २४ ११ गुणान सखीजने वदति ४६ गुणान्विता ४३ १८ " " २३ ४ " ५,१४,३१ गीतगुणा गीतलक्षण गीतविनोद ३. ११ १५ ३१ १६ १६,२२ १४,२२ ८,१३,२०,२७ १९,२२,२५ १,४,७,१० १४ गुप्तांगदर्शन गुरुत्व गीतज्ञा ३३ १२,१८,२५ ४,२०,३७ १३,३० " गीति ११ " ६५ ३७ ३ १० " गुर्जर गुर्जरदेश गुटिका गुरुत्वगुण गुरुत्वम् गुरुत्वविज्ञान गुहिल ३ ५,११,३४ २८ २५ १० " १८ १२,२८ २८ " गुहिलका गुहिलपुत्र ९ ४,११ " २४ ४ ४ गुटिकाविज्ञान गुण ८ २०,२४,२६ ६ १२,१४,१६ २२ ४५ गुहिलपुत्रवंश गुहिलवंश गोदावरी गोफण गोमय गुणकीर्तन गुणग्राही ८ ४० ४६,२२,३४ १२,१९,२५,३२ १८ २२ १ गुणदोष गुणपात्र "" १४ १५ " ३५ १४ १३,२१,३५ गुणपानाणि गुणवर्णन गुणवती १७,३३ १४ ३८ ४८ गोरोवन ३४ १६ अकारादिशब्दानुक्रमणिका। पृष्ठ पंकि शब्द गोल गोलादेश गोष्ट शब्द गांधर्व पंकि ५,१०,१४,१५,२० २३,३९ १९ " २४ १२ १ १४,२० १४ गांभीर्य चउडदेश " ५ चक्र २६ गोसवत्सा गोहिल गोहिलपुत्र गो १६ " २८ ५,११,१७,२४,३० १८ २४ ३,२१ चक्रविज्ञान चक्षु ४,१४,२२,३० पौडदेश २१ " " २८ १८ १३,२७ १३ ८ २२ चन्दिलवंश चण्डिल चनुरा गोसवत्सा ४२ । "" १२,२८ गंगा चपलता १६ २८ ५,१३,२२ २,९,१४ ३ " " " १,२७ चमर गंगापार ३५ २८. १८ ૨૬ ८९२४,३९ १९ २३ " गंध २२ १३,२२,३० १५,२२ ८,२१,३१ चर्म चर्मकर्म चर्मविज्ञान चरितम् चरित्र चलचिनविनोद चहुआण चाउहा चातुर्य ६ १५ " २७ ७ १६,३२ " " धपात्र " १४ " गंधयुक्ति १३ १० २५ १,१६,३१ ८.१२ ११ १९ १,१६,३३ १०,२६ २६ ११ ३,१०,२२ ३ चातुर्यगुण चाप चापोत्कट १८ गंधयुक्तिविज्ञान गंधर्व २४ ३३ ४ " " ८ ३५ १४ चापोरफटवंश चास्नेत्रा चालोचना ६,11,14 " गंधर्वस्थान गंपशाचं ४२ ४३ " ४४ १३ ३. ३ चार्वाक ८ " पंघरमा गांधर्व ६५ १८,१९,२०,२१,२२ २२ १८ " আগৰয় १६ 11. धस्तुरनकोपः। पंक्ति शब्द चित्र शब्द चंदन A १५ ३४ ३५ ५,२१,३७ १२,१६ १४ २२ " " चंद्र २२ २८ १३ १९,२९ ५२१ ६ २५ " " छत्र चित्रकर्म चित्रकर्मविज्ञान १२ ११ १२ ८,२४ २,२१,३६ १५,३० १० २० २८ ૨૪ ३५ " १६ ९ " चित्रगुण चित्रलक्षण चित्रविनोद २ १२,२५,३५ २२ २३ २५ १५ १६ " २५ २१ ८,२२ " " चिन्दिलु चुम्बन ७ ५८ ३० २७ २६ २२ ३१ छभकर छभकला छमाविज्ञान छन्दशास्त्र ४६ ८,२२ १४ २३ छन्दिक ४८ १. चुम्बन (ध्वनि) चुम्बन( करोति) चुम्बने (मुखं परिमार्जयति) चुम्बिता (परान्मुखि भवति) चुम्बिता (विमुखं करोति) चैतन्या चोड चोद चोरग्रहण चौड २ १३ २०,२४ २२ ३,२८ " २९ " २०,२३,२६ ५,८,११ २३ २७ २,१७ २८ ९ २२ " छंदकला छंदःशास्त्र छिंदक छिन्दकवंश छुरिका जडता ३० २५ १८ १० २ १८ चौलिक्य चौलुक्य चौलुक्यवंश चौदही चौहाण चंच चडेल चंदन 1,1५२४ ५,१४,२२ २,९,१५ १६,१५,१७ ८ ३० " १२ २२ जनपद २४ जनतन्वता जन्मकृतं जन्मरूप ३७ ८ अकारादिशब्दानुक्रमणिका। शब्द पृष्ठ पंक्ति पृष्ठ पंक्ति ज्योति २१ ४,२१ ३५ ज्योतिष " . २५ १७,२१,२५ १,२,६,१०,१५ ४ २२ " ११ ज्योतिष्क ४ " जयमान जल ७२ १५ ३१ १ ज्योतिष्कलक्षण ज्योतिष्कविज्ञान टाक ६ " ३,८,१३,२५ ११,२५ २५ " " ६ २८ १,४,६ १९ १६ टाकदेश डबूस डमरू डाब डाभी ४,१०,१५,२५ २२ १८ जलक्रीडा जलदास जलविनोद जलशौच ८ १८ २१ १५,२० ३,१०,३६ ३ १० १८ २८ डाह डाहल २६ जलस्तंभ जलाधिवास जलाधिवासः जागरी जाति १०,१४ ५,१२ डाइलदेश डोड २७ १५,२९ १,१५ २२ ७,१४,२८ १४ १९,२२,२५ ३,४,७,१० १० २,२८,३७ जाप जालंधर ६८ २८ होडीआ डोटीवंश. डोह तर्क ११.३० १२,२७ ॥ : २४ सशास्त्र १९ जालंधरदेश जीति जीमूत जीव जीवपदार्थ जुगुणा १०,२४ ५,१९ १,१०," २२ २८ तत तत्त्वनिर्णय तत्त्वनिश्चय तत्वप्रमाणं २४ जैनम् तत्त्वम् २ ५ ५,१४ ६ १५,१९,२१,२२ " . ५,१५,२०,२१ जैन्यम् जोधिम ज्योति १९,२८ ६८ १९,२०,२१,२५,२६ १८ वस्तुरनकोषः। पंक्ति शब्द तत्त्वम् तत्वलक्षणम् तत्त्वविज्ञानम् ३,२३,२५ २० २ ४,१८,३२ ३ २४ शब्द तोवूलादिग्रहणं तापूलादिना तांदूलादिभक्षणम् तांघोलवास तितिक्षा तिलंग तीर्थ पृष्ठ पंक्ति ५९ १४,१५,१८,२२,२९ ५८ १०,२१ २५ ४४ ३८ " " २३,२५ ३३ तत्त्वज्ञानम् तत्त्वार्थ ६८ १४,२९ " १,५,२४,२. " तत्वांग ६८ तीर्थाधि तुडक तुरक तुरंग ९ ३० १५ २२ २३ २३ " ८ ३६ १८ २९ १५,३२ १०,३३ ८,१४,१८,२४,२९ ६ ३,५,२१,२८,३४ " ९ २२ १५ २८ तुरगफला तुरगविनोद तुरष्क ४ २० तपसा तप्ती तरवारि तरष्क ताईकारदेश ताजिक ताण्डव तापीतट तापीतरप्रदेश तामलिस सामलिप्सदेश ताम २९ २० ३ १४ ६,२०,३५ १० १,२९ १ " २८ ४ तुरुष्कदेश तुरंग २८ " ३,७,१२,१८,२४ १४ १०,२६ २३ १,११ ३४ " ४,२०,३६ १५,३१ १३ ३६ " " " तुरंगलक्षण तुष्टि ताम्रलिप्त तायक १५,३२ १२ १३ ७ ८,२५ " तालगत तालांत ३० ६२ ३४ १४,३० २४६५ २० १८ १३,२९ ८ 7 तालाम " ३५ ३१ १० " तुष्टिगुण सेज २,२१,२९ सासरचारप्रबोध साल तोयूलानि तांदूलारीन ताबूलदानेन २१ " " तेजशौर्य ७१ अकारादिशब्दानुक्रमणिका। पृष्ठ शब्द तेजस्तत्त्व पंक्ति शब्द दर्पण २० ४,२२ १,१९ " ४४ म तैलाधिवास तैलाधिवासे तोमर तोमल तोरण १४ १२,५८ १०,१४ २८ दरिद्रता दशन १६,२२,२५,२८ ३,१५,३३ ३१ २ १० दशा २२ दर्शन १६ ११,२७ " " " १२ " ३,२० -- ६,२२,२९ १५,३२ १ तंत्र २२ २५ ७ " १६ २१ २२ २३ १४,२९ ५ १९ " २१,२५ ५,१६,३७ " तभद्र त्रयी दर्शनकला त्रास ६ ११,१६,२७ १२,१७ दर्शनगुण दर्शनपान दर्शनविनोद २१ ११ १३ १० १५ त्रिशूल १८ " १६,२२ १६ २,१,२९ ५,२५ १०,२३ ३,१५,३३ तृण दर्शनस्थित " २६ " ६ " ४६ दर्शनात् (प्रशांता भवति) दर्शनात् (प्रसन्नता भवति) ख तृणविज्ञान दत्तम् (न मन्यते) ४७ २२ १४,२२,३१ १४ २४ " ४८ ४६ १९ ४,१०,३. " " २, ११ दधि " ४७ " " दर्शने (प्रमन्न भवति) ४६ दक्ष " ३५ २,१९,३५ ४० " २९ १८,२६ दक्षिण दक्षिणदिशि दक्षिणा दक्षिणापथ १८ दधिकर दधिकरवंश दधिपाक दधिमा दधिमुख ४० १८,२७,३७ ८,९,१. ११,२२ २२ ७६ ३. २८ ९ १५ " दहीया दाडिम दमगान ६ " दर्पण " १. १३ २ ३४ १०,२१ २० वस्तुरनकोपः। पृष्ठ पंक्ति पृष्ठ दान २४ ५,२२,२९ शब्द दीनहीनता दुर्ग दुष्फोट दूर्वा ५७ १० १२ १३ " २६ ९,११,१२ ३,९,१६,२६ ११ १८ २२ - " ३५ " " ७२ " " दूपण २,२०,३५ १८ १४,१५,२३,२८ ४,८,१२ १७ " ५,९,१७ ६ ११ ८,१०,११,१३, १५,१५ ५ " दानकीर्ति ३७ ९ १४ ११ ७२ देवता देवपात्र १,९,१६ १४ १५ दानगुण दानचरितम् दानप्रभुत्वम् दानव दानवपात्र ७४ ७ १४ ३० ८,१२ १४ १४ १५ ! . देवलोकसंस्थान देवविज्ञानं देवी देवीपात्र देवसंस्थान देवस्थान ८,१२ १०,११,१३ १४,१५ ७ दानवलोक्संस्थान दानवसंस्थान दानवस्थान दानहीनता दानशक्ति दानशौर्य दानानि दाने ११,१९ १०" १४,१५ १२ ३५ " ७४ १७,२०,२४ १४ २३.. " ७१ M ७. ८,१२,२९ ३,८,१२,१९,२० २३ N ". " " ४ १८,२४ २४,२५ १३,२५ २२ २८ २५ ३५ देशकला देशकाल देशपात्र २२ ३१ १४ १५ २३ दानेन दापिक दायिवंश दास दासी दासीरान १३,२. १४ ८ " १४ १४ ६,१३,२० २३ १५ देशभाषा देशभाषितम्ला देशभाषित देशभुफि देशलक्षणम् देशविनय देचीरात्र देसीपुर 14 २२ दाक्षिम्य ९ १२ १ १५ दाधिभ्यगुण १४ १५ ४ अकारादिशब्दानुक्रमणिका। पृष्ठ पंक्ति पृष्ठ पंक्ति शब्द देशीय ३ द्वत देशीय पुरुष ११ १९ १६,२३,३० U ८ देश्य दैन्य द्रुतविलम्बित द्वारपदस्थ द्विज १४ दोष ६,१८ १,८,१९ २४,२६ २,१९ " द्विजवर दोषगुण १० " दंड ३,१९,३५ १४ १२ .२२ १७ १८ " १५,१९,२९ कोप द्वीपदेश दंडनीतिविद्या दंडशास्त्र दंत १८ १०,३५ " " १ २५ १९ द्वीपान्तरदेश धनपालक घनपुरुष धनु " २६ ७,१५ २८ दंतकर्म १९ २८ १८ " २४ दंतविज्ञान २४ ४ १८ घनुष्य घन " ६४ दंभ ३८ ८ १,१०,११,१२ १२,१३,१४,१६ १,१४,२३ २१,२५ ३,८,१३,१९,२५ १९ ९ २३ " " २२ २३ २५ " ११,१४ ७,१२,१४,१७ ११ " २४ 2 घुतविज्ञान द्रव्य " २८ " ३ २७ १.,१३,१७ द्रव्यदान द्रव्यमहोत्सव द्रष्यविद्यादिदान द्रविड ६ २८ धर्मकला धर्मगुणसंग्रह धर्मचर धर्मचरितं धर्मपात्र ९ विदेश एम् दृष्टि दावित ६३ ४ ५,१४,२२,२८ " धर्मपालन :

થર घस्तुरनकोपः। पृष्ठ पति शद पृष्ठ २५ १७७ २,३,५ ३२ धारण धारण ३० धर्ममहोत्सव धर्मलक्षण धर्मवाद धर्मविज्ञान १०,२२,२४,२६ " २४ ३ २७ ४ २५ २५ २६ ११,२७ धारणा धाहल धाराधरदेश धारणविज्ञान धार्मिक ९ "" ७४ १८ धर्मशक्ति धर्मशास्त्र २०,२२,२४, ३ २ २५ २५ ११ " भावन " " ३. ३,१५,३५ २३ 1,३,५,९,१ ८,९,१०,११,१२ " धूट धृत ३ " धर्मशास्त्रविद् धर्मशौर्य धर्मस्थान धर्मस्थान धर्मज्ञा धारंभरचित ३२८ ३२ २ ३१ १३ ३ ६,१२,३१ ३६ ३८ धर्मिष्ठ धृति ४० " धर्मिष्ठमहोत्साही धर्मे १९,२०,२१,२५ ४० H ४० " १०,१२,१३,१९ २३ धिंधिम धीर धीरललित धीरशांत धीरोदात्त धीरोद्धत धीरोपशांत धर्मेण धरानंग धातु ४० ४० २३ २५ १०,२४ ३,२१, ३४ २५ १२ " २२ ४४ ९ ७ ८ धूपनवास धूपनाधिवासः धूपनानि धूपने धये धातुकर्म धानुगतपदार्थ धातुपदार्थ धातुबाद धानुवादकला धातुविज्ञान घान धान्यपाल धान्यपालवंश धान्यपुरुष धारउर १०,१४,२० ११,१५ १८,३५ १६,२३ ११ २४ २८ १५ १२ १३ धैर्य धैर्यगुण धौतगृह ध्राण ८ १६ २९ ३१ ३५ १० ३२ ११ १२ २५ ६,२३,४० ३२ " " अकारादिशभ्यानुक्रमणिका । २६ शब्द पंक्ति पृष्ठ पंक्ति ध्राण शब्द नागणिक १४,२३,३० २८ २०- २१ ११ ध्राणगुण ध्वज १३ नागणित नागाणित नागभुवन नागरपात्र १०,२६ १८ ध्वनि २९ ६ ३,१०,२६ ६,११ " ३४ ११,२७ " नागरिक नाटक १९ १४ २२ नर २५ २,२० ५ १०,२३ ३,१५,३३ " नाटककला नाटकशास्त्र नाट्य २०,२४ २६ ३,५,१८,२३ " " २७ " १३,१४ " ४८ १८ १४,२६ नखविलेखन नखविज्ञानं नखशौच नसस्पर्शनं नाट्यनाथुपचारेण नाट्यशान नातिमानिनी १९ ९,२३ ५,१४,२१,२८ २४ २,४,६,८,१०,१२ नात्यर्थ (1) नात्यर्थशायी नालथानप्राप्त नाद नगर नगरनायक नही १४ ६० २० २१ " ५,१९,२८ ५,१२,२१ ४ "" ३४ ३ २,१८,३४ १३,३३ १० " " ७२ नाम नार्मद नामर्द २८ नप्रात (1) नर्मदा २४ " २५ १४ १८,२१ N ३५ २ " नर्मदातट २१ १५,३२ २७ ५,२५ २१,३६ ११ १ १ २९ ३. २८ ५,१५ नर्मदातरदेश नय नर नरपरीक्षा नरभुवन नरसहर नायक नायकाः नायिका नार्याः नाराच नार नारी नारीला नारीपरीक्षा निकुन्दम निकुम्म ३ ३ १८ २२ २३ १२ २३ ३३ ११,३४ ६ ९ " २४ वस्तुरत्नकोषः। पंक्ति पृष्ठ पंक्ति पृष्ठ शब्द निकुम्भवंश निग्रह ८ ११ २४ १६,३३ १४,३१ शब्द नियुद्धकार नियोग निरसता निरोध १२ ३८ १२ २७ १०,३४ १० निप्रह २१ " निरंकुशा १० १९ निग्रहगुण निघंट निघण्टु निर्णय १९ २,५,६,१२ ५ १५,२० १,१४ ३,९,१४ १८ १४ १६,२०,२१,२४ १,९,१४ १९ " निर्लन निर्लजा निर्वाह निर्वाह निवार्यता निर्वेद निर्वेद निश्चय निश्चयस्थान ३० ४,१७,३० ७.१८ ५७ निर्णयस्थान नित्ययोगी नित्यरोगी निद्रा १२ ९ ८,१५,२३ ४,११,१६ १४ ३८ " " निर्दयत्वं 4 निर्दिनी (8) निधि निश्चलाशायी निश्वासोच्छ्वसन निष्ठीवति निष्ठुर निघुर निष्ठुरता ६७ ६० ४८ १५,२१ ५,१४,२०,२६ ५७ ३,८,१०,१३ १३ ५७ ११,१९,२२,२४,२५, २८ २० १४,३१ १०,२६ " " निघण्ट निर्माल्य नेमल्य निठुरा नीचप्रदेश नीति २५ ८ २ २२ १९,२० १३,२७ ६,१८,२९ १५,३. " निम्रप्रदेश नियति १७,१८ ८,१९,२७ २९ २१ " ३ ८ नीतिकला नीतिमानिनी नीतिविज्ञान नीतिशाम नूपुरोपण नियम नियुधकरण नियुद्ध १८ १९ २४ १२,१८ U १५ २४ २२ २३ २६ " ३३ नेपध्य " नियुद्धकरण नियुद्धकार ४८ २२ २३ २५ २६ २७ ६,१८,२८ ६२. नेपथ्य १४,२९ " " १४,२८ २३ .

अकारादिशब्दानुक्रमणिका । २५ पृष्ठ पंक्ति शब्द पृष्ठ पंक्ति पत्र शब्द नेपथ्यक्ला नेपथ्यविज्ञान नेपथ्यविज्ञानं नेपाल ४,१४,२५ २१ २५ २४ २६ पत्रक ७,२० २८ " २,१६,३१ ६,२० १५ २३ " २४ । २८ ४ पत्रविनोद पत्रविज्ञानं पद पदगतं पदस्थपात्र ७४ ७ नेपालदेश नैर्मल्य नैर्माल्य नैयायिक नैयायिक नृत्तज्ञा नृतपाठ २६ १३,१५ २,३,४ ११,१९,२६ ६२ १४ " १४ २० पदस्थपात्रं पदार्थ ८ ६ १५ " १५ नृत्य १५ पदार्थकरण १५ ५,२६ २४,२७ ४,२०,३६ " १,१०,२२ ७,११,१६,२८ ३,८,१२,१६,२० ३१ " ७. नृत्यकला २३ २२ २१ ११,२३ पद्म पर्याय पर्यक ७० १२ ५,१२,२१ ३. " नृत्यलक्षण नृत्यलक्षणं नृत्यविनोद २२ " पयेत ३४ ६८ १७ नृत्यज्ञा ४२ १५,२२ ८,१४,२७ ६८ २ " " १५ ६ " १ परकीया पदच्छेदिपात्र परपन परमार परमारवंश प्रकृति पट्टिमु पठिन १८ ३३ ५,१४,१५,२१ १८ ८ २२ २३ २ " " १० पठितकला पठितविनोद पठिनशा ५,१५ ७.३२ १९,२३ ३,१४,३६ २५ २३ ८,१३,१४ ३,१०,३३ ३ २१ ४२ पढीहार परमित पराकम पराकमकृत पराक्रमयश परामुखी " १. पण्याइना 4,२७ ४८ पत्र ४१ १५ " पराजय ४ १३,२६ २६ वस्तुरलकोपः। पंक्ति पंक्ति शब्द पृष्ठ ६७ ३ पशुपालन पशुपालविज्ञान पशुपाल्य २४ २६ पराजय पराजयकृतं परान्मुखी परिगत परिचारिका परिछद परिच्छेद ६७ १८ पक्ष. १४ पक्ष १३,२२ ३,११ १८ १७,३२ ११ पक्षप्रमाण पक्षि २२ १४,३१ " ७ २२,२६ २५ ६ २४ " १३ १३ १० ६१ ६१ पक्षि २३ १४,१७ २७ ३१ ११ ९,१३,१८,२४,२९ " परिच्छन्द परिच्छेद्गुण परिणामकी परिणामिका परिष परिधानसंयमनं परिवोध परिवोघशौर्य परिभावक पक्षिकला १८ .४८ १४,२०,२७ ३१ ७ ३ १९ ७२ ४ पक्षिलक्षणं पक्षिविज्ञानं पक्षिशिक्षा पक्षी Yo ११ १५ १६ " " १२,३२ " परिभावित परिमावुक परिभाषिक परिमारवंशा परिमिता परिमितं ३८ पक्षीविनोद पाचक २६ १५ २२ १६ ३,८,१३,१८,२४ ११,१३ १९ १५ २६ १,२३ ११ १८,३४ ६५ १५,१७ पाठ पाव्य पाडल " २९ ३० पाणि ४,१४,३१ परिषद परिश्रमी परिरपुटं परोक्षनामस्मरण पवित्रभाषण पविग्रवाक्य ८,१६ ४८ १५,१७ २२ ६ पाण्डित्य ११ १२ " ४४ ४५ ८ ६,२२ ५,१०,१५,२१ पर्वत पर्वत पाताल पाताललक्षणे ३. ३५ १३,३३ " २९ २९ पातिकर U १२ पात्र पवंद पर्वाश पशुपास २२ २३ " ५,२२,२१ १,१५,२५,२७ २. .

अकारादिशब्दानुक्रमणिका। २७ शब्द पृष्ठ पंक्ति হার पृष्ठ पंक्ति १ पाल पालकत्व २२ ११ पात्र पात्रकला पात्र पावलक्षण पात्रसंग्रह पार्थिव ४,८,१२,१६,२० " २३ १४,३१ १२,२९ ५,२२ १३ १३ १० ४ पावकन्व पावकत्वगुण पाश ९ ४,१४,२३,३१ ८,१६ २१ " १८ " पाशुपतं पाशुपत पाशुपाल्य ६,१६,१८,२५,३१ २४ २७,२८,३० १३,२७ " " ८ २५ २७ " " ११ १९,२४ २ १५,२०,२६ २३ ३१ १,२५ पानककला २२ पानभोज्यादिविज्ञानं ५९ पानभोजन विधान पानविधि २५ २६ पाशुपत्य पापाण पार्श्वचालन पार्श्वविवर्तनं पार्श्व भाचमनं पाश्च वाचमनं पित्त पित १५,२७ २१,३८ १४ " " २५ १ २० पानविधिविज्ञान पानीगृह पानीय १४,१९ २५ ५,१७,२५ २,१०,१९ २५ २१ २२ १८ पिप्पलपन १३,२९ ८ " " पिप्पलपत्र पीठ ३२ १४ पानीयगृह पानीयस्थान पापातिक पापांतिका ४,२२ १,२७ ५,१२,१५,३२ ३६ " २९ पीनस्तनी ४२ २२ १३,२१ ७,१२,१९,२६ ८,११,१३,१५ २८ २५ ७ पुण्यकीर्ति पुनर्भ पुनर्भूपात्र १४ १२ ५,१२,१९ पापीतिक पारमित पारमिता पारिगत पारिगामिकी पारियार १४ १५ ३५ पुराण ८१६ १.१२ १३,१५ १८ ६,१२,२६,२९ पुरुप १ " ६,१५,२४ " " परियात्रदेश पारेपर्य विज्ञानं २२ ६ " ८,१८,२३,२९ २८ वस्तुरत्नकोपः।। शब्द पृष्ठ पंक्ति पृष्ठ पंकि ८ पुरुषकला पुरुपलक्षणं पुरुषार्थ शब्द पूर्णदान पूर्णपात्र ३१ १ १ १९ १३,३० ९ " । ८ " " " पुलिका पुष्टि १८ ११ १२- १३ ३३ " ११ ११ २ १५,३४ १५,३२ ८,२५ १८ ८ ५,२२ २४ है " " पूमायात् (भापते) ४६ पूर्वदिशि २९ पूर्वदिशि देशाः २८ पूर्वदेश ३० पूर्वदेशाः २७ २८ पूर्व भाषते पूर्व भाषते २७ १३ १८ १३ " " १ पुष्टिगुण पुष्प पुष्प १५ १६ २५ ४ १० ४,८,१४,१९,२६ १५,२९ ९,२४,३९ १४ भाषित पूर्वमुत्तिष्ठति २१ " ३३ ११ ६,१८,२६,३२ ३ " पुष्पपात्र " .१,८,२० १५ १२ ४८ ८ २४ पुष्पमाल्यादि पुष्पनालादिदानं पुष्पवास पुष्पविज्ञानं पुष्पसंयमनं पुष्पादिभोगेन पुष्पादिमाल्यानि पुष्टि पूर्वचुंबनं करोति ४८ पूर्वमुत्तिष्ठते पूर्वमेव चुंबन करोति ४६ पूर्वमेव चुंबनं ददाति ४६ पूर्वमेव खवचनात् भाषयति पृथ्वी २० २१ पृथ्वीतत्त्व २१ पैशाचर्क पैशाचं पैशाच ६५ पैशाचिक २७ २,२१,२९ ६ १२ १४ १८,२६ १९ १०,१५,२१ १३,२९ " ५८ ८ ४७ ४ २० २० २८ २२,२४ १ १८ २५ २६ पूजा पूजानिधि पूजाविधि २८ पोत पोतिक पोतिकपुत्रवंश ९ ८ १७ ३० १४ २ ७ पौतिक ९ पूज्यपान पूज्यपात्रं १५ १४ १० " ३ १०,१७ ८ ५ ३५ पौमिक पौलक .:.. पूर्णकलश अकारादिशब्दानुक्रमणिका। पृष्ठ पंक्ति शब्द पंक्ति प्रताप पण्ड पंडित ',१३,१७ १४,१६ " " १८ पंडितसत्तम पंचाल २८ १० १६,३० १२,२६ प्रतापकृत प्रतापकृतं प्रतापगुग प्रतापयश प्रतापः प्रतापशौर्य २९ " ४ पीड ५ ७२ ७१ २२ २१ F १० पाहित्य पांडित्यगुण पाडिसम् पांडदेश 3 ७२ २८ २९ १२ ५ १० २२ ६,१४,१८ ११ प्रतापिता प्रतापः प्रतिचारिकापात्र प्रतिपत्ति प्रतिपत्तिशोय प्रतिपात्र प्रतिपक्ष प्रतिपक्षमाण प्रतिपक्षः प्रतिपक्षि प्रतिमा पुडूंदेशः ७२ ४ १३,२२ २७ प्रकाम्यमेव प्राकाम्य प्रकाम्य प्रकार प्रकार: 'प्रकारपर्यंत प्रकाशक: प्रकृति १४ २०,२१,२३,२४ १९ ६८ " ४ १८ प्रतिमापा प्रतिभावान् प्रतिमेद प्रतिमा ४ " २१ ४६ " ६९ १,३,५ प्रचारणसंयमनं प्रजापालन प्रणयित्व ८,१०,११,१२ प्रतिमान प्रतिवादः प्रतिवादि " १३,३० १२ १३ १८ ६७ " प्रतिमारकापात्र १४ प्रगयिमानत्वगुण प्रणाम प्रत्युत्तर १३ " २,१२,१५ प्रतिष्ठा १२,२. १३ १८,३५ १५,३३ ११ १२ " " ६७ " " ४,८,१२ १४,१९ प्रतियगुण प्रतिमा २२ प्रत्युत्तरकला प्रताप १८,३५ " १२ १५,३२ १२.३. ६,२३ " प्रतीहार २३ पस्तुरतशोरः। TE काम पठ पनि प्रमाण प्रहार प्रथमम्म अपमलित प्रपत्र ६९ १,५,1,1,1,16 १.२४,२७ १२ क.४,२१,२९ प्रमाना প্রমাণ प्रमार्ग السيط १३ १४,१५,११,३ १,६४,१५,१५ " १२,२८ " प्रमेय १९.११॥ " " प्रपत्र " १५,० ५ ३ AL . १ " AGE " : .. . .+ . . - . . भ.

अकारादिशब्दानुक्रमणिका। ३१ पृष्ठ पनि पृष्ठ पंक्ति प्रशंसा ९,२५ " १७ शब्द प्रज्ञावती प्राकाम्य प्राकृत प्राकृतं प्रशंसागुण प्रसन्न १० २,२२,२९ १७ २८ ६५ २०,२२,२४,२६,२८ १ ४८ १५,२७ ५ प्रसन्नत्व " २३,२८ ४,८ १४,३१ १२ १२,२९ ५,२१ १८ ६३ १,८,१५,२२,२९,३६ ६४ प्राग्विजृम्मणं प्रागल्भ्य प्राजलत्व प्राण प्राणिदयाशाचं १४ " प्रसन्न २० ४ ४४ १८,२१ " ८ " प्राधान्य प्राजलत्व २ " प्रसन्नमुखी १२ १२,२९ ५,२२ २० " प्रमरण १० १६,१८ १३,२१ ५,१२,१९,२६ १३ ६ १८ ३५ १५,३२ " प्राजलत्वगुण प्राञ्जलत्वं प्राञ्जलित्व प्राप्ति " प्रस्थ ११ २२ प्रसाद ११ ११ १२ " १३ १७,३४ १५,३२ ८,२५ १०,११,१४ " " " " " प्रामाणिकत्वगुण प्रारंभ प्रारम ११ " ३४ १०,२३ ३,२१ ८ १८ १३,२९ ५ ५,२२ ५ प्रमाद प्रसादितगान प्रसारितगात्रशायी प्रारंभगुण प्रासाद १३,२१ १३ ७.२३ २२ ३१ ३२६,११,१६,२१,२६,३१ २४ १४ प्रासादविज्ञान प्रिय " ३,८,१०,१३,१५ प्रसिद्धा २३ प्रिय U प्रहेलिका ३४ १५ ७.२३ 1,15,३५ " ३५ ४,९,१४,२०१६ " प्रहेलिविनोद प्रहानप्रबोध प्रशाप्रबोध प्रज्ञावती प्रियभारण प्रियमापिणी १६,२२,२८ १२,२० १,१२,१९,२५ १४,३. ४२ पियवाक्य पागुग्याको प १५,११,१. " " . 1,16 . " ४ " निर्मा समना १२ बलम 1.1,२६ " ११ १५ 1 . ३३ 14 ७२ . ३ २२ ६ . श्रीमत ४१ १,८१८ ११,२१,२८ प्रीती प्रेसिप प्रेरिते तुभ्यति प्रोपित दुर्मना मानमुपपन यानयमन पानमरमरपोप पास नि बालाना रिकारप्रयोग " बाहीक ४८ ४८ १५.२१,२७ प्रोपित दुर्मना माति ४७ ३ " १.,१६,२८ १,१२,१८ प्रीति " पीन पराट १ २५ भीगर पीजएक " ४,८,१४,२०,२५ २१,३५ ५,२५ १७ १५,२२,२५,२६ २२ ૧૧ फलारिमाण पलविनोद यनूर बयर बन्चर यावर चुस्न बुद्धि ३२ २९ २८ १२ १३ १६ १,१७,३४ १.,२७ " " ७.२१ धर्वरदेश २० ५,१५,२४,३१ अकारादिशब्दानुक्रमणिका । पृष्ठ पंक्ति ! शब्द पृष्ठ पंकि बुद्धि ४,८,१७ ५,१४ " भय भाजन भाण्डागार भारती " २५ बुद्धिकला ८ २७ भाव १० ३९ २३,२४,२५,२६,२५, २८,२९,३० १४ २१,२४,२७ ३,६,१२ २ १२ ७२ बुद्धिगुण बुद्धिगुणाः। बुद्धिवलं बुद्धिमुख खुद्धिसख बुद्धिसुख वूसर " १७ १४ भावकत्व १२ ४,२० " बोकाण बोकाणा बोकाणदेश ३ २,१७ १६,१८ २८ १२ बौद्ध चौद्ध बंगदेश बंगाल ६७ भावकत्वगुण १५,३० भावशीचं भावानुगतं २,१७,१९,२० भावुरुत्व मायुकाः २१,२२ भाषापंडित भापालक्षण मिहपाल १४,२८ १०,२४,३९ भिटमाल १४ मिडिमाला २३ । भुक्ति ५,११,३१ २० २८ १८ " " १८ बंदिल्ल ६,१२ ९ १८ २९ " ४,६,८,१२,१४,१६ " बंध यंदु ब्रह्मचारि प्रलपर्यक प्रापर्यंत प्राश ममा १२ २५,२७ ५,७,१०,१२ १८ भुक्तिपर्यत भूतकर्षण भूमि १ १ " ३३ " १६ १,१,२४ " २ १,१५,३३ १२,२० ९ " " ૨ माझं भक्ति २२ २३ भूमिकला भूमिपरीक्षा भूमिपालन भूमिटेप भूषण २४ ८१.१,१२ २२ मय १२ ३ २१ . । भूगोदाटन ४८ १,५८ ११,२०,२५ ३४ वस्तुरनकोषः। पृष्ठ शब्द १७ शब्द भेद भोगहीनता भोगिनी २२ मद्य मर्दन २५ ७,२०,३५ ४२ २७ 17 ८ भोजनवास भोजनशक्ति भोजनशाला मर्दनविज्ञानं मधु ७४ ५ ९ १९,२१,२२,२५ ४,९,१४,१९,२४ ३२ " ५,२१,३५ १५,३१ " - १५,२१ मधुरवाक्या मधुरा " भोजनादि भोजनाधिवास भोजनाधुपचार भोजने भंडार मकुआण मकूआणा १४,१६,२० ११,१५ १२ मधुरं २८ १७,२५ ५,१४,२८,३६ ६३ " १७ ४ " ९ " १४,१७ ११ मगध मध्य. २८ २९ ३० । १५,२९ २५ १५ " २५ २२ २७ २९ ३२ मच्छ मठगृह मठस्थान मठस्थान मध्य मध्यदेश मध्यदेशाः मध्यदेशाः मध्यम मध्यमपर्यंत मध्यमिका मध्य ५,१३,२२,२५,३२ ८ ३२ ६९ २१ " ३३ मणिमय मणिशाला मति मध्य प्रमाण १८ १०,१४,२४ मन १५ ७२ " मतिमूह मर्यलक्षणं १३,२५ ३४ १०१६ ८१७ " १७,२४,१२ " मनशाला ३५ मनस् मनु मनुष्यलोकस्थान मनोवाञ्छितविनोदः ५. मनोहर मनासि मण्डन १३ ८ मदनगुण मदिरा मय २३ ७.२३ " " ११,१०० अकारादिशयानुक्रमणिका । पृष्ठ ধা पृष्ठ मर्म १२ રે. मर्मविज्ञान मर्यादा महाराष्ट्र महाराष्ट्रदेश महावत महानतिक ११,२४ १० २७,२८ ३०,३१ १ १२ ६,२३,४० १६ २५ ६८ . मर्यादा मर्यादागुण मरण मरण २२ ११ ७ महाव्रतं " महिमा महेश महेश्वर ५,११,१३,१५ ३८ " ११,२७ १३,१५ १५,१७ १९ मरणं मरणात " ४५ ३८ १,३,१७ १२,२८ "" " महोत्सव मरु २८ " २० ३५ ३८ ६ ११ १२ १३ १५ १६ ११ १७,२६ २,१०,११ २ २२ " ३,१९,२६ १२,२९ " " मलय मलयदेश मल्ल ३,८,१३,१९,२५ २८ १६ १,५,९,३० महोत्सवगुण महोत्सवविनोद महोत्साह महोत्साही मक्षिका १८ २२ १२,३१ १८,२५ १८ मरस्थान मस्थानं म(दम) मठि मस्तकविज्ञानं महत्तम मागध १८ " १ ૨૮ १६ २८ २९,३४ १,५,९,१४ मागधदेशा मागधं महामपान १४ १५ १४ ६२ " ६५ २१,२२,२४,२६,२८ ૨ २. ८१९ ३,११,२. मात्सर्य २ " महत्तमपात्रं महागीत महातट महानस महानायकाः महापात्र महामाल महाराष्ट्र माधुर्य माध्यमिक माध्यमिक मान ११,१३,१७ ३२ ५,४,२४,२७,३४ २ १४ " ૧૦ ६,८,10 मानं मानगुण " ६,२०,२५ ३६६ पस्तुरनकोपः। E पृष्ठ पंकि १ १४ ४ मानवरित मानमात्र মাসাঃ माना मानामग्यान মানান मानसम्मान सम्म निवहार मित्र मियपान मित्रम् निपात निशदात्री मुक्तारल U ७ ,१३,१४,१५ ७ १ ५,२५ २,२१,२७ मानगि २१,२२ " ३१ मानत मुधि ४३ " १४,३१ ८ . १२ " " ३ मुराराम मुगगीय मुरारं गुरम्य (गयस्थापन) मुराया मुपस्य সুখিয়া गुगशिगे. पुणे गुड १४ मान्यात १४ ११,१०,२१ YY १४ . . १८ मपणे Y गुEH मुन TITATI) . 10 E x E FEE मा ' पुणे N १५ 10 (. Firent अकारादिशब्दानुक्रमणिका । पृष्ट पंक्ति शब्द पृष्ट पंकि शब्द मूलपदार्थ मृत्तिका ८ मोहन ८ " ३ ६,२२,२८ १५,३२ " " मोहविज्ञान मोहविज्ञानं मोक्ष २४ ८ १,५ ३ १५,२०,२२ मृत्तिकाशीच मृत्तिकाशीवं २ १२,१३,१४,१५ १०,१४,२४ ५,१२,१७,२३,२० " " " " १०,१५,२६ " मृत्यु मृत्युलक्षणं मृदुकुहने ५,१०,१३,१७,२० ११,१३,१७,२१ २,५,६,७ ५९ ५८ ५९ ४,६,८ २५ " मृदुगाशायी १९ मोक्षपयंत मोक्षमहोत्सव मोक्षलक्षणं मोक्षशास्त्र मौदिक मौरिकवंश मौप्ये(सौख्ये) मंत्र ४,१८ १२ ३,१५ " ६० ८ मृदुपनशासी मेघ मेघ ६० २५ ૨૨ १५ ११ ३,२०,२६ ६५ ६,२३ २,२० १२ १३ १५ मंत्र " मेघविज्ञान ७ " ८,१३,१५,२५ मंडरा ८ २३ मेद २० १०,२०,२४ पा भेदपाट १,९,१८ १७,३२ २५ २८ १३,२९ " U ५,१८ " U " मेदपाटदेश मोदक २७ ३३ ५,११,१. २५ " मंत्रकला " ३,१२ २८ " १,१९,३४ २३ ९ ५,१२,२२,३५ मोरी मोरी मोह १५ ७२ ४१ १८,२६ मंत्रगुण मंत्रपान मंत्रवत मत्रवान् मंघविनोद मैनविज्ञान मंत्र विज्ञान मंत्रशक्तिः १७,२४ २२ " ३८ ८ २५ मोहनविज्ञान २५ १७,२२,२४ ३८ घस्तुरत्नकोषः। पृष्ठ पंक्ति पृष्ठ पंकि १९ ८ मंत्रशास्त्र मंत्रि २९,३३ शब्द यादवत्रंश यादववंश यामन यामुन १. १ १७ - २८ १०,२४,३९ १४,२८ १५ २० १४ मंत्रिपान मंत्री मंत्रीपान मंकाणकवंश. मंग्याण " १५ यामुनदेश युक्ति ८ २३ ११ २७ ९ " " १२ १३ :- १४,२१,३८ १४,११ " १२ ११ ३२ युक्तिगुण मंडण मंडन मंडप मंडपशाला मंदिर . १,१४,३४ ३२ १३,१८ २२ २१ १५ U १२ २८ २२ ३२ मंदुर मंदुरा मास २२ २२ १६ २. २८ ६,१६,२४ १,९,१८ युद्धकला युद्धकार युद्धविनोद युद्धशकि युद्धरामय योग २१ २९ १८,२१,२५ २३ २३ २५ ४ यति ६८ ५,५,११,१३, " १२ ७४ यथाचार यत्रगोलिया योगविज्ञान २४ १८ २५ " यमुना १,१३,१५,२१ २ ४४ योगाचार योगाभ्यासकारणम् योगात योगोपचार योगाचार १.,२७ ३६ यन पसोरेन . " . २,१८,1,10 १५,२५ २,१३,३.२० N रनोर विहान . ३५ " सारंग १८.११ अकारादिशब्दानुक्रमणिका। शब्द पृष्ठ पंक्ति पृष्ठ पंक्ति शरद रागादिव्यसन राजगुण १ ११ १,१४,१८,२४,३० १,२२,३२ १,१८ । १४ १३ " " राजनीति - २१,२३ रनकर्म रत्रकला रनपरीक्षा रनमणि २२ रापात्र राजपात्र १ १३ १४ ३४ ३४ " ७,२३ १५ " 0 राजपाल १ रम्यादि १५ १७ ९ रवि ९ राजपालक राजपालवंश राजपुरुष ८ २ १३ १३,२२,३० ३२,३६ " २० " १२,१६ " " राजमान्य २१,२४,२६ १४ १५ " १२ " ८ " रसः राजमान्यपात्र राजविद्या १८,१९,२४ १८ रसन 2 २,६,७,१२ २४ ६,२३,३९ १६,३२ राजविनोद " १३ १५ १६ १५ १२ राजवंश १ १५ ८ रसनगुण रसायन राजहंस राजांगण " १३ ५,१०,१५,२. २५,३०,३५ " २८ ७१ रसिव राज्य राज्यपालन राज्ये राज्य ६. ८,११,१२ १०,१४ १२ ४,२०,३७ रसिकत्वगुण रसिम ९ राठ राठोकर राध्यदेश १२ रक्षणार्य राग ८ ८,१९,२७ ३,१,२. " वस्तुरत्नकोषः। पंक्ति पृष्ठ पंकि शब्द पृष्ठ शब्द राज्ञी राज्ञीपात्र १४ लकुट ४,१२,१९ लघिमा लजान्विता २३ ९,११,१३ १४,२१ ५,१३,१९,२६ १८ रिष्टि रीती ४३ ९ १,२७ १९,२३ १,५,८,११ लडुक १० " ६५ ३ ११ १२ लब्धियोग ललितं " " २९ १०,२८ ३ ३,१३,२२,३० " लक्षण " १९ २५ २२ " १२,२२ ४,११,१८,२५,३२ १ १२,२१ १३,२७ १० २७ १४,२२ ५,१३,२० २१ " " NT :: :: :: :: ५ . लक्षणकला लक्षणयुता ६ ११,१३,१४,१५ " ४२ २४ १२ लक्षणयुक्ता लक्षणविज्ञानं लक्षणशान लक्षणस्थान लक्षणं रूपक रूपकृत रूपगुण ६ २ ७ १० ११ १७ १२ २० " १२ ७,२०,२७ " " ६८ ७२ रूपमागी रूपलक्षण रूपवती " ८,१५,२० १२ ४,२०,२६ १५,३१ लक्ष्मी लक्ष्मीयोग लक्ष्मीविज्ञान लक्षितम् लाघव २४ ३५ ३ २०२१ २३ २९ रोचना ८ लाजी लाट रोमोच ३,१५,२९ १५,३३ * :: :: :: २८ ३९ ३९ लाटदेश " * रोमांचा रोरीच रोरगीत लास्य लिखित १८ १,१,२२ ५ २ " " १९,२३ ३,१४,३१ 1 ७३ "" अकारादिशब्दानुक्रमणिका। ४१ वन्द पृष्टा पंक्ति पृष्ठ पंक्ति लिखितकला लुइक टुंठि ८,२२ शब्द लोहपुर वक्तव्य वक्तव्य वकृत १८ १९ १,१०,१८,२६,३५ २८ १,६,११,१७,२३ २४ १४,३० ११,३४ २२ " टेपकर्म २५ ३७ १७,२३ १९,२४ ३,१४,३६ १०,१७ ४,७,९,१० ३,८,११,१५,१९ ६ वकृत्वं लेपकला लेपन " २२ २३ ។ वपृत्वकला वकृत्वकीर्ति वकृत्वविनोद कोतिकीर्ति २१ ३७ १५ २४ लेपविज्ञान लोक लोकार्यक लोकपाल ८,११,१३ १८ ७० १५ ७० २९ वचन २ " ५ ३४ ३५ १,१५,३३ १२,२९ २५ " ६,१९ १३,२८ ७. " लोकवाद लोकवादपर्यंत लोकसंस्थान ७० १८ २६ १ ७ २५ वचनकला पचननिधयप्रबोध वचनविज्ञान वचनज्ञानं वचना/प्रचारत पंचा २० ७ लोभगुण लोह ។ ។ २५ १७ ३,११,११ ९ १,२३ वन १८ ३५ ११,१७,२४ लोहकर्म २३ वनकर वघ्नकर्म वनल " ३२ २८ मोहपात्र लोहपाद " वनलदेशः २१ ३ ६ ३२ " ३. रोहार रोहपुर रोहविज्ञान हितपाद २१ ४,१५,३२ घनकार वर वनिज वर्गन २२ २४ २१ ३ १,२,६ २५ দাবিবা वर्नन यस्तुरनकोपर। ५४ पंक्ति शब्द वान वर्नन १०,३३ १०,१७ २५ २४ १५,२९ " १४,१५२२,२५ १२,१४,१६ ४४ २२ १३ वर्तनम्ला वदान्य वय बयस्थ १५ ११,१३,१४ वनाकार चनाकारविज्ञान वत्रादिसंयमन वनाधिवासे वनाधिवासः वन्नालंकरणेन वस्त्रालंकारदानानि वन्नालंकारदानं चाक वाक् १७ ४० १,७,१३,२०,२७ . , " २१ " " वयसिनी ४३ वर वरनंद वराहसोधन घर()गोपनं ५९ घरांगशोधन पर (वरात्र) समान धराटदेश चरें ३ " वाक्यल वाक्यज्ञा वाक्यशा यागरिमण ४२ ४३ १७ ४८ वाचक ८,२४,२५ " " परेन्द्रदेश बापत्य बायक " परिम बछियम् पनीरण वायन विज्ञान वामना बाधिक वाधिक १.,१२,१५ १२,२५ ५,१५,३५ २५ १३ १ " ७५ . पनीररिहान २४ वाधिषम् १८ १५,२. ८ पाय " २१ 14 ३ . १५ १५ गुना १ पाजित पातिविनोर नियामा पनि ९ A :

अकारादिशब्दानुक्रमणिका । पृष्ठ पंक्ति पृष्ठ पति सन्द राणिज्यकला वाणिज्यविज्ञान वात वायकला २१ २४ " " ११,२३ २७ ३,८,१६,२० " घायम् ७० ५,१५,२५ २,१०,१९ १८ ११,१६ वार्ता १७ . वाद्यलक्षणं वात्सल्य १ ។ वाद्यविनोद वायशास्त्र १६ " २१ ३,१९,३६ १२,२९ १९ १२ १३ " " वाद्यज्ञा वानप्रस्थ . ६८ ३ १५,२२ ५,५,९,११,१३, १५,१७ २,१२,१४ २,२१,२३,२९ " ११ वात्सत्यगुण ११ बाद वामपार्थशायी वायु वायुतत्त्व २० २० १९ २२ २३ ४,१९ १२,२६,३० २१,२८ १४ " वारंद्री वारंध्री २१ २८ २८ बाद २८ १४ १४ २६ वालम २८ " ६,२१,२७ ४,१७,२२ ३ " २६ वादकता वादरक्षण बादलक्षणं वादिकत्वं मादित्र १ ३१ वालंमदेश वासकसजा वासना वासभवन वासमंडप वास्तु ३० १२ " २२ ५,१४,३४ २४,२९ ११,१५,१९ १२ २१,२८ ६,१५,२१,२७ ३ ३५ ३६ १७ ३१ " पादिवं वादिशात धाधुरता ३२ वास्तुकला वास्तुभुवनं वास्तुलक्षणं वास्तुशास्त्र वाहन २७ २३ ३५ " " ५.२५ ४२१ ५,११,११,२० ३ " M विकम्पितं धम्तुरनकोपः। पृष्ठ पंकि पृष्ठ विप्रह ११ १२ ५, १४,३२ मिनकीनि विजनमगनिधीनि ३० निपग विपण २९ ८.२४ " १,१५ २ विप्रहाण विप्रहस्थान विप्रहस्थान विमक्षणा विरगविज्ञान वि(ला)परा विधा २४, ४३ ८,१३,२०,२७ १.,२७ "M विचार ४३ १२ १३ ६,१३,१८,२५ ८,२५ १२ १ " १२,२६ १९ ४ " २३ " ५,१०,१५,२६ " ७. " " ३५ विचारकत्वम् विचारकला १३,२९ ५,२५ ४,२२ १८,२२,२५ २८ " १. विद्या ६५. ७०, २,५,१५,१९,२१ विचारगुण विचारपर्यंत विचारपा विचारवता (2) विचितं विजय विद्यागुण विद्यापार १५,२२ १ १५ M . १३॥ विद्यापा विद्यालक्षण " १२ २१ ។ " " ३१. VY २२ २३ २२ २२,३२ २९,२५ विद्याशक्ति विद्यासगतं विद्युत विध्वंस विनय ३५ ७. २८ ११ १२ २५ १०,२७ ८,२५ " २१ ३८ ३१ ११,१६,२५ १२ . विजयकला विजयगुण विजये वित्तस्ला वितर्क वितर्क वितराग वितत वित्त विदर्भदेश विदाघ " " २७३ ४१.. ६४ ९,१०,११,१२ २१ विनयवान् विनायक १,१५ १४१२१ ४ " ३८ २९ " " अकारादिशब्दानुक्रमणिका। पृष्ठ पंक्ति पृष्ठ पंक्ति शब्द विनीता विनीता G, विनोद शब्द विभ(१मा)पित विभाग १३,३० . २८ ११ १२ १३ १० २० १,१८,३५ ११,२८ " विभागगुण विभाषिका विभूषण १०,१४ २१,३४ " " १९ २२ २३ ११,१६,२०,२५ १२,२६ १५ १६,२९ विभूषणविज्ञान विभोगिनी . " १५ ६,११,१८ १२ " " विमर्शवती विमर्पमती वियोग ४२ २८ ។ १२,२९ " २३ ६,११,१६,२१,२७ २,५,१५,१९ १२ १३ ७. २० " विनोदः विनोदगुण विनोदपात्र १० १८ १० ५,१४,२२,२८ १८ वियोगगुण विरक विरक्ति विरहवेदना विरहोत्कण्ठिता विराट ३८ २५ विनोदपात्रं विनोदलक्षणं विनोदविज्ञानं विनोदस्थान ३१ ४२ १३ ३० २५ ३२ १ २,४,८ २३ ६ २९ " ८,१३,१८,२३, 1२८,३२ . १३ विस्पभाषी विहपभापिता विरोध १३ २७,३० ११ विनोदस्थान विनोदहास्यकरण विनोदा:- विनोदे विनोदेन विपत्ति विप्रदान विपलब्धा विप्रलमा रिप्रियं वदति १८,२४ २२ ३८ विरोधगुण विलम्बित २,४७ २. २३ " ૪૨ विर(भा)पितं १३,२५ १८ " विलास " विध्यविनोद विशेष २३ १२,२० ६१८,२९ ११ १४ घिलासाला बिलासचरित्रं २९ घस्तुरनकोषः। पंक्ति पृष्ठ पंक्ति शब्द विलासपात्र शब्द विषय ५,१४,२३,२८ १२ १३ ८ " " ४४ २ "२५ विषयकारणम् विष(सुख)धता विष(१सुख)त्रिता विषाद ४२ विलासपात्रं विलेपनाधिवास विलेपनानि विलेपने विलेपनेन विलंबन (वितं) विवर्ण विवर्णता विवाद २० ११,१५ १८ १६,२३,३० ५८ विष्णु १४,४३ ३,१०,१५ १ १,१५,१३ १२.३० १ २५ " " ३८ " विवेक विश्वासोल्लसने १०,२७ ८,२५ १२ २९ विहार २३ " १० १४ विवेकगुण विवेकलक्षण विवेकी 4१०,१२,१४, १६१८ ४ ४० विज्ञान २ ४१ ३,९,१४,२१,२९ १७ ५,११,१६,२५ " " २६ २ ५,11,1५,२१ विश विशालपात्र विशुद्धकरविज्ञानं विशेष " विज्ञानपात्र ८,१५,११,१९ ११ १२ १३ " -- २ ११,२८ विज्ञानपात्रं विज्ञानपुरुष १६ १. " विशेषक विशेषगुण विशेष्य विमत्वम् विम्वार १२ विज्ञान २,७,11,१५,18 " १.,२७ विशानलक्षणं २१ " विज्ञान विनोद विज्ञान विनोदपात्र विशाने विनारगुण विरकृति १६ १२ २८ " पिनिगुण विस्मय विम्मय १२,२९ १ २,१२,२०,२९ विचारपता (1) वीणा ३८ " १५ " माय अकारादिशब्दानुक्रमणिका। पृष्ठ पंक्ति पृष्ठ पंक्ति शब्द वीर १४ वेष वेश्या ११ " १४ " ८ वीरचरितं वीरचरित्रं वीरपात्र ४ U ५,२१,३७ १६ ८,१६,२४ " ३५ १४ १५ वेश्यापान १४ २. ५,१३ " १५ वीरपात्रं वीरविलासचरितं वीरललित धीरोदात्त विशालपात्र विप्रिय YO वेश्यापात्रं वैदर्भ १४ " १,२४ २८ १,४,२३ २२ १ वृत्तय( वृत्ति) हतवाच्य वृत्ति १,२२,३२ १०,१९,२५ ४ " २४ " २ १९,२३,२५ 1,८,११ २० २,१८,३५ वैद्य वैद्य वैद्यक वैद्यकला वैद्यकविज्ञानं वैनयिकी वैभाषिक वैरनिप्रहे वैराट वैरिनिरहे वैरिनिप्रहेण वैवर्य ११ . १३ २२ १८ १२,२५,३४ १८,१९,२४ २२ ६. क्षकला ८ " वैशेषिक (७ " १,२५ ४,२२,३७ १८ - ष्टिक २५ . वैशेषिक दोर्णपात्र योकाण बंग धंगदेश वंदन पंय ३५ . ४,१,२९ १८ वंत १२ " : :: : * : * ८,२५ १ २५ ४,२०,३५ १२ " ३,१३,१३ ४८ पृष्ठ पृष्ठ 13 वस्तुरनकोपः।::: पंक्ति शब्द शकटवंश शकुन २४,२७ २४ १४ २२ वंशगुण वंशविज्ञानं वैशे विंध्य - प्रति २१ १३,२७ ६१८,२९ ८,२१ -१,१५ Uo २३ २५ . " ६ २२ " M विध्यदेश व्याकरणकला व्याकरण . शकुनकला २१ ३१ २४ २१ ૧૧ २३ शकुनबल २०,२४ ४,१५,२६ ८ २४ शकुन विज्ञान शकुन्त " व्याख्यान ध्याधि २९ १८ ३९ शक्ति .५ १०,१६,२४ १२,१७ १३,१५,१४ १५,३१ " (१२३ २१२१ ध्यापार १३ " २५ २६ १२ " " " "" ३१ " १८,२. १८५,१२,१८,२५,३१,३२ १,१७,२५ २१ ४,५,१२,२१ ७४ " म्यापारलक्षणं व्यायामशकि व्यायाम ध्यायामशक्ति ध्याति ध्यासकला व्युत्पत्ति ७४ ११ शक्गुिण शत (! मितव्यया शा शत्रुयाते ४३ १,३ ११ १२ " पाठ ३,18 १२,२१ २ १७,२५ ७२१ ६२ युत्पत्तिगुण ध्युत्प प पण २,१२,२१,२९ (४ ४ कमला दिसाय पानसी २,२,५ २,१५२२ ११ ५ मीना मी मायाग 7 १.१४ १९ 2 रायनपुण सापनशाना पायन पायास शयाही सपट . .

अकारादिशब्दानुक्रमणिका। पंक्ति शब्द पृष्ठ - पंक्ति शरण ३० १२ १३ ". २,४,८,१० "४ १८ १५ शरणप्रदत्वगुण शरणागत शरणागतशौर्य शरीरकला २२ ६,१२,१४,१८ ७२ . शनिकला शास्त्रप्रबोधः शास्त्रप्रमेद शास्त्रविनोद शास्त्रसंस्कार शाश्वती शिखरं (सुपिरं) शिधल शिला शिलारवंश शिव २६ २२ १०,१२ " शरीर पालन २३ ८ शरीरशाखकला शरीराविजन शस्त्र १,१०,११ २ २,१२ १९ २१ शिवधर्म ६७ २६.२८,३. " " " 5. ६,१२,२१,२६ १८ शिक्षा शिक्षा शीत्कृतकरण शील शरबंध २५. १५ १४,२८ ८ . २५ २२ " २२ २४ १५ शीलं शीलवती ४२ ११,१३,१४,१५ १८ २,१,२२,३. १२ . शीलवान् " शनबन्ध शनबंधविज्ञानं शस्त्रविनोद शकतात शाकुनि शान्ता शान्ति शारीर शारीर बालाराह मात्र १,५,११,२०,२७ शीला २५ ३५ . ५,१९,२५ २,१.10 १४ शुद्धकरविज्ञान शुद्धलिखितविनोद शुद्धविद्या 1,१७,२२,२७ २ २८ २ " " " २१ ६२ " - २५,३५ १४,२७ २१ १२,२२ ४,11,1८,२५,२२ १ 7 २४,२९ " २५. २७. ४1 . गुमग शुश्रूषा शरवान् १२ काख परोप १७ १२,१८,१९,२५ २९ १० ७ ५० ! "वस्तुरनकोष शब्द पृष्ठ 'पंक्ति शब्द शौर्य रवार शशारगृह शहारपान १४ " १९ ३२ . २,८,१३,१८,२३,३२ १४; ८,१५,२४ १५. ३॥ १० TOS शृङ्गारपात्रं शृङ्गारवान् शौर्यकीर्ति शौर्यगुणं शौर्यप्रभुत्व शौर्यपात्र शौर्यम् शौर्य शौर्ये । '. १५ १६ २८ ३,५,२२,२९ .२२,३० १,३२ ४१. सारस्थान शुजारी शेलार शैल १९,२५ २२ शौर्येण शौरसेन २३ १२ शोलंक शंका ५,१८,२१,३० १ शैलविज्ञान: शैव in शेव शैवातिक शोक शंख १४ २,१२,२०,२८ " १२ शौच ३. ११ ११,२८ ३३. " " १२. ",८२५ " २२ ३५? 7 २,१९ " " २३३ २७ १०,२४,२६ " २५ " शंखकर्म शंखविज्ञान शंखविज्ञानं शांभवपर्यक शांभव श्मश्रु २७ १,१५ " शौचकला २१ H १० ४४॥ १२,१७,३२ दमधुशौच श्मश्रुशौचं भ्रधान १८ शौचगुण शौचगृह शौचराई शौचवान् शौचविज्ञानं शौचहीनः शौचान्तिक ४१ १,७,१३,१०,२७ ५,१८१ २५ ध्रवण ३,८,१०,१३ २० १८,३५ २४ ६,२२,४० " १ " " t अकारादिशब्दानुक्रमणिका। शब्द पृष्ठ पंकि पृष्ठ पंक्ति श्रवण १५ टिष्टं ६४:- ६३ T श्वेतपुष्प ३४, श्रवणगुण ११४ धवणविनोद १५. १६. ध्रवणसंयमनं १ ४८ . धवणं धीकाण्ठ १० ८,२४ १,१९,३५ " १६ १६,२२ ११,२४ २०,२४,२६ " ६१ वेतवस्त्र ३३.. २९ " श्वेतांवर सकलकलाकुशलं श्रीपथ श्रीपर्वत ३३२ १७ ४,१०,१५,२२,३० २८ ४१ सकलत्व ५,१९,३४ २२ १७,३१ श्रीमाल १२ १३ २८ U ५,२१ ५ १७ २८ २२ ५८ १५ सकलत्वगुण सकुमार सख्यविनोद सख्यासहनं सगता संग्राम श्रीमाल देश श्रीराज श्रीराज्य श्रीराष्ट्र औराष्ट्रदेश ४८ २८ २८ १२,२५ १६ ६२ १६ ३,७,१०,१३ ६ ५ है श्रीराक्ष श्रीवृक्ष ४ २० सङ्कुचितशायी सती सत्पात्रं सत्य ३ श्रीरस ३५ १०,२८ " १४.३० १०,२६ २३ ६ ११ " १,२६ ३३ ३३ " श्रीवृक्षफल श्रुत श्रुताध्ययन श्रुति श्रुतोत्पश्चा श्रुतोत्पादिना सत्यगुण सत्यपालन सत्य सत्यवती १२ १४ ६५ श्रेष्टपात्र - १४ भोत्र २. ४,१४,२२,३१ २,२२,२९ १२,२२ १८,२७ ३,१,२२,२८ साधावान् बाध्य भाग्यवान् सत्यवाद सत्यवादी सत्यवादी सत्यवन्त सत्स्वान् सत्यासह सत्रापार टि २,८,१९,२३,२८ ६.२७ २२७,२,१७,२३,२८,२२ पस्तुरबकोपा: मि पृश कि २८ ३२ शाम पत्रागारे सत्रास्थान सस सत्यम्ला सत्वं रात्यलपण सत्ये संघापार रादप पन्मुगविलोकिनी सन्मुखगाली समुहारहोरिनी सन्पुरा म परपति सन्मुती घेते २२ ४५ ४१ १,१५,१४ २१ ६,१२,१८,२५.३१ १ ३ + " १५.. पन्मुतीमावे सभापति ६२ १८२७ । " १ ३ सदामह रामावाद समावारपत्र समजात J" १२ १८ १८ " समता " सदाबहाण सदर्य (14) सदा ( सदर्य) 1 सदाचार २१,२५ ६७ १०,२७ १,२६ ३,२. १३ रामप्या समासमुखा समदुखा समप्रदेश समय ३३ १५,१८,१९,२० सदाचारकृत सदाचारगुण सदाचारयश सदाचारवर्तित १,२, ૨૨ " १.१५ १३,८ सदा प्रसन्न "" सदाविनीता ४७ २२ १ सदाशिव २. ११ समयला समयप्रतिमा समयलक्षणं समय: समवर्ति समाल्यात समागमे तुभ्यवि "" ६४ ६४ ६ २५ +- १९ सदेव गर्विता सदोदित सापथ सधापार सत्यवस्तुज्ञान सन्मान ४६ " ३१ " १४ ११,२८ समागमे पुष्यति समानदुःखा समाधान " १२ १३ ११ १२ १,२८ १,२७ " १६ सन्मानगुण सन्मुख समाधानगुण अकारादिशब्दानुक्रमणिका। कि पृष्ठ समाप्ति ६७ पंक्ति २०,२२ २४,२५ १९,२६ ६८ शब्द सर्वात्मपर्यंत सर्वात्मा सर्वात्म सर्वसह । ससत्व सर्पप १२ २२,२९ १२ १४,१५ ९ १९ १२ ४१ ३३ समायातं समारंभ समारमे समारंभोदितं समारंभोस्थित समुज्वलवेष समुज्वलवेष समूजतं (!णि) सम १८ ११ ૮,૨૪ २,१९,३५ १६ i ३.१,१५,२२,२९ ६३ २ २१ १३,२३ ५,१२,१८,१९ २ " सह सहया सहर्षी साह्वयम् साह्वयं सागर " ५ ६७ १७,१९,२०,२१,२२ २ १ ४७ समं तुष्यति सम्प्रत्ययकारणम् सम्भाषिता हृष्यति सम्भोगार्थिनी सम्मुखावलोकनी सम्मुखं न पश्यति सम्यक सरठ ४७ ३५ " ३४ २,१८,३४ १३.३३ १८ २३,२४,२५ २७,२९ ४८ ८ २८ सरयूपार १५,२९ १२ १७,२४ २८ ३० ४८ " सरस्वती सानत्यगुण सात्वती सविकी सार्थक साधुपालन सानुरागनिरीक्षण सानुरागप्रेक्षणं सानुरागसंयमन साम सामर्थ्यगुण सारस्वत सारस्वतप्रमाणे सारिकापात्र सालंकार ४८ १७ १८ २२ ३४ ३५ २१ १५,३१ २७ ७,२४ " " ६ सलबत्त ११ १३ । ४,२१ २१ १६,२५ १७,२०,२८,३४ ३ " ३६ सलबत्वगुण सवत्सा सवत्सा गो सर्वत्य सर्वदशारिगतविहार सर्वस्वारिंगत सर्वचोच सर्वश सर्वशः सर्वात्मता ३ २० १२ २,८,२७ सावत्ती सावधान सावयव सावयववान् साहस साहसशौर्य चितवन Yo १,३,५ ६,१०,१४,१८ ७२ ७२ ८ ५४ - घस्तुरतको पृष्ठ पंक्ति पृष्ठ सिद्धपीठ सिद्धांत: १६,३२ सुखस्थ सुखस्थापक ६३. ६४ " ३४ ३५ ५.२१,३७ १६,३२ सुखस्थित सुखाश्रया सुखिर (2 पिर) सुखे सुगत " सिद्धांतशास्त्र : १२ 1.१० १८,१९,२५ १८ सिद्धि १९. ११ .. ७,१२,२६ २० २,१८,३५ ११,२८ २२ सुगन्धस्थ.. ६४ ४ " १३ सुगन्धस्थं. ( मुगमीर) " सुगम .. ६३ १० ८ " सुगंध २७,३४ १८ ५,११,३० १७,२३ " २९ ६८ ११ মুঘদিয় सुगंधप्रिया सिद्धिगुण सिद्धिपर्यंत सिद्धिस्थान " १,९,२२,२४,२८ २५ सुगंधस्थं ६२ . सिलर सिलार - " ९ सुप्रई १० १४,२३ २,५,१९,२६,३३ २ " २,९,३३ २ १४ ६ २४ ४,६८ २२ सीतवन सीत्कारादिमुवन सीत्कारादिमोचन सीत्कृतादिमोचनं सीधल " २८ २९ २८ सुजन सुजियं (?) सु(? म्यु)त्पत्तिकं सुद्यु( ? व्युत्पन्न सुतालं १८ ११ १४ ३० २२ ६२ " १२,२२ ४,१८,२५ ។ २८ सुक्तम् सुफलं सुकवित्वं सुकाव्य सुकुमार सुकुमारशरीर मुकुमारोपचारात् सुकृतं विस्मारयति ५ ८,१४,२०,२७ मुधिष्पं (?ण्यं) मुद्यतन (1) सुनृत्यं सुनेना सुपदं .१२,२२ ४,११,१८,२५,३२ ११,१६,२३ ६४ " सुख J" मुप्त सुप्ता. मुपात्रग्राही ८ सुसप्रिया ४३ ६,११,१० अकारादिशब्दानुफमणिका। पंक्ति शब्द सुपुत्रांनी सुप्रबद्ध सुप्रभं .पृष्ठ मुरयं ... PF६३ मुरसं १८ पंक्ति १९ १३:२३ ५,१२,२५,३३ २ १७ " " " १,८,१ ४. मुराग सुराग सुप्रमाणशरीरा १३,२३ ६३ ५,१२,१८,२५,२६, ३३ " सुप्रमाणं " " सुरूपा ४२ मुप्रमेयं " १३,२३ २६,३३ २ मुराज्येन ६. १० ११,18 १०,२४ २२ ११ १५,२४ १३,३४ ३ सुवर्ण सुबन्ध " " " मुमग सुभगा ५,११,२४,३. १९ सुवाय मुविनीता सुवृत्त मुवृत्तमंत्र मुवृत्तमंत्रा मुत्तः सुवेश मुभाषाव्यं भाषा १ २,८,१४,२८ ११,१९ ५,१०,१७,२४ ६२ ६३ ५,१४,२०,२८,३५ २५ १४,२८,३५ Y ११२४ ११,९ ५,१७,२४ " मुशीला सुमत्त्वा सुभाषाद्य सुभापाय() मुभाषितजनन सुमापितझल्पन मुमापितभाषण मुमोगार्थिनी मुमनोहरे मुमंतदेश मुर १६,२. ४३ " २३ ४६ मुममयक ५,१७,२४ १५,२४ १५ (मुयमक) मुममयक ६,२६,२. २२६,३३ " पुरत मुरवप्रवीणा १४,२१ ६ २४ ६३ १,१३,२०,२७,३४ ४२ ११,१९ ५,१,२४ ४३ १८ ४४ १२ सुसंगी(त) मुसंधिष्ठ स्मंधिस्थं मुसंपूर्ण मुसंवर्द मर्मबन्ध मुत्तशरीरा मुखर " मुरल(तोप्रवीगा मुरमिजले भरभुवनम् ३२ ",२५,३२ ૧૧ १२,२२ ४३ i. पस्तुरसकोपः। . कि वाट मुखर पृष्ठ पंक्ति ( ३,१८,२५,२३ सूरसेन २९ "१२,२६ " । २५ २४ सुखरख मुखरत्वं सुस्वादमझमोग्य सुपामध्य(मुभाषार्थ) सुपिर मुभूषा मुश्लिट सूरसेनदेशः सूरसेने रिमा । सेना सेनापान २० १४ ३२ १७,२५ २. " ६२ सेनापालपात्र १५ १३,३४ " मुहर्ष सेनापात्रं १४ - सेभट , ९ ३ १९ १९ २५ मेरटक " २८ " ૨૨ मुहपा(4) सूचि सूचिकर्म १ २५ ૨૨ २५ २२ सेरटकदेश सेवकपात्र सैन्धव २८ १४ " सूचीकर्म ३,१,२२,३३ ३ ८,२१ १४ २ १५,३० " १० ८ सैन्धववंश सैन्य सेन्य १० " १२ १८ २७ २२ सूचिकर्मकला मतिका " " १५ ३२ " २२ द " २३ ७ १५ सैन्यकला सैन्यबल सोम सोमत्व १५ " ७,२१,३५ १४,३० ६ २६ २७ २१ " ११ १२ 3. " त सोमवंश २४ ९ सूत्रकला सूत्रविनोद सूत्रविज्ञान सूत्रांतिक सूर्य सूर्यकीर्ति सूर्यवंश १७ १,८,२१,३२ 1 १० ३५ १०,१२ १२ १२ सौम्यशायी ८ सोलंकी ८ सौख्य Bf-११,२८ १०,२७ ९ १८,२१,३२ ." १२ १० १ " भकारादिशब्दानुक्रमणिका। • पृष्ठ पति पंक्ति शब्द सौसम ३ ३ २५ ८ शब्द सौख्यकारण सौख्यगुण सौख्यम् सौख्ये सौगत सौजन्य ३ २ ३,७,१०,१३ . संकुचितशायी संगतं संगति संग्रह ४ ११ ११,२९ १०,२७ १६,३३ १४३१ " ११ १२ १३ १० १३ २५ संग्रहगुण " संग्राम ७२ २३ ६,१०,१४,१८ १४,१७ २२ सौजन्यगुण सौत्रान्तिक सौभाग्य १० संग्रामशौर्य संग्रामिक ११ १२ # १७ २,६,१०,१४ १७ ८,१६,१८ १२,२९ १०,२७ ३,२० १४,२९ ८,२१,३१ १६,३० ५,२५,३९ संग्राम्य संततव्यय १४ २२ २३ ४१ " संततव्ययी संताने संतुष्टा (1तुष्य)ति संतुष्टा संतोष २५,२६ २२ २२ २ " २ ५७ १८,२०,२३,२५,२८ सौभाग्यकला सौभाग्यगुण सौभाग्यविज्ञान सौभाग्यहीनता सोमत्स सौम्यत्वगुण सौम्यशायी सौम्यावयव सौम्यावयवशायी सौरसेन २५ २१ १२ . १० १९ संतोपारित संदर्य(4) संदीपन संधि संधिपात्र २६ ८ ६. १४ २७,२४ ४ १,१०,१३ १६,३. २८ १४ १८ सौरसेन संधिपात्रं संपन्न संपूर्ण सर्पल ६५ सौराष्ट्र २१,२१,२५,२७ १५,३१ १३,२१ ११ १२ १,२८ " सौराष्ट्रदेश सौवीर २७ संपूर्णत्वगुण संपूर्ण " १५ ६,२०,२७,२४ ३ 1,१४ सौवीरदेश .२८ संपवायी ८ 18 वस्तुरेनकोपः ।, ... शब्द पृह सुखरं पृष्ठ पंक्ति ६३४,११,१८,२५,३२ १ २५ शब्द सूरसेन '१२,२६ २९ " २७ ६ १ ३८ १२ सूरसेनदेशः सूरसेनं सूरिमा सेना सेनापात्र r मुखरख मुखरत्वं सुखादनक्षमोज्य सुपाभन्य(सुभाषाव्य) सुपिर सुश्रूषा सुश्लिष्ट ९ १४ ६४ १७,२५ -- १५ ५,१२ २० १४ १३,३४ " सेनापालपात्र ११ ६३ " " १०.१८ मुहर्ष ३ १७ सेनापात्र सेमट सेरटक ९ ७२ २८ २५ १६ १९ १ " " " सुहर्षी (24) सूचि सूचिकर्म २५ ३० २८ १४ ३५ ७,३० ८,२१ १४ सेरटकदेश सेवकपात्र सैन्धव २५ सूचीकर्म ३,१,२२,१३ ३ २२ १० २ ८ .१५,३० सन्धवबंश सैन्य सैन्य १२ १८ " २७ २२ २६ १ सूचिकर्मकला सविका " " ३२ '- " " २८ २२ ८ "" सैन्यकला सैन्यबल सोम २५ ७,२१,३५ १४.३. सोमत्व 68 ११ *१२ १३,३. १ ६ २१ ३२ सोमवंश ८ 1,6,२१,२२ " सधरला स्त्रविनोद स्त्रविज्ञान सूत्राविक सूर्य धर्मकीर्ति सूर्यवंश २४ ६९ " सौम्यशायी ३७ सोलंकी २८ ११,२८ ८ सौख्य १२ १७ 1८,२१,२२ १ " .1.,२७ १२ १३ " अकारादिशब्दानुक्रमणिका। पंक्ति पृष्ठ पंक्ति • पृष्ठ ३ ३ सौसम ८ " शब्द सौख्यकारण सौख्यगुण सौख्यम् सौख्ये सौगत सौजन्य ३ २ ३,७,१०,१३ : संकुचितशायी संगत संगति संग्रह ११,२९ १०,२७ ११ १२ .१६,३३ १४,३१ " " ११ १२ १३ २५ " १० " संग्रहगुण संग्राम १५ ७२ २३ ६,१०,१४,१८ १४,१७ २२ सौजन्यगुण सौत्रान्तिक सौभाग्य " संग्रामशीय संग्रामिक १६ ११ १२ २,६,१०,१४ " " संग्राम्यं संततव्यय २२ १४ १२,२९ १०,२७ ३,२० १४.२५ ८,२१,३१ १६,३० १,२५,३७ १५ २ " २५ संततव्ययी संताने २५,२६ संतुष्टा (तुष्योति संतुष्टा संतोष ५७ १८,२०,२३,२५,२८ सौभाग्यकला सौभाग्यगुण सौभाग्यविज्ञानं सौभाग्यहीनता सौमत्य सौम्यत्वगुण सौम्यशायी सौम्यावयव सौम्यावयवशायी सौरसेन ४ संतोपवाछित संदर्य() संदीपन संधि संधिपान १२ ५ १० ८ १४ १४ १५ २५,२४ ४ १ २ २८ १८ सौरसेनं सधिपात्र संपन संपूर्ण संपूर्णत्व सौराष्ट्र २१,२३,२५,२७ १५,१ १३,२१ " २९ ११ १२ १३ ११,२८ " सौराष्ट्रदेश सौवीर सपूर्णत्वगुण सपूर्ण २८ " " ६,२०,२५,३४ ३ in सौवीरदेश " संपशादी (. ८ पृह २८ २,१६,३॥ " सिंधुदेश २८ ३ ११,२७ " २० " ७ २८ २७ २६ " १,१७,३३ २८ .३५ ३८ U वस्तुरत्नकोष शम्द पंक्ति शब्द संभाविता इष्यति १७ सोगस संभाषणेन हृष्यति १४६ सिंध संभाषिता हष्टा भवति सिंधु संभाषिता दृष्यति २० संभाषिताद् हष्यति संभोगकामतः सिंह संभोगवती ४३ १५ संभोगसुखं न वांछति ४८ संभोगं न वदवाञ्छ)ति ४८ सिंहल संभोगार्थिनी ४६ २,९,२१,२९,३५ सिंहलदेश संभोगे सुखं न वाञ्छति ४७ ૧૨ सिंहिलंक संभोगेषु सुखं म वाञ्छति ४४ सींदा संभोगे सुखं नावगच्छति ४७ संमुखशायी ६० १३ संयोग १२ ११,२८ १३ २० स्तनयोः पीडन स्तनोपपीडनं २२ १३,२८ १९,२९ स्तम्भन १२ स्तवविनोद सयोगकला स्तंभ संयोगगुण संरक संवाद संवृत्तमंत्रा स्तंभन विज्ञान संवेशन स्तंभनं सस्कार स्त्री संस्कार ४,६,१०,१२, स्त्रीकाम १४,१६,२६ संस्कारशौचं १८ स्त्रीकामविज्ञान संस्कृतं ६५२०,२२,२४,२६,२८ स्त्रीपुत्र १ स्त्रीपुरुष संस्थान ११,२८ स्त्रीपुरुषपुत्र १२ १०,२६ स्त्रीपुत्र १३ स्त्रीराज्य सांगत १४ सांगत्य ११ १३,३० श्रीलक्षणं ११,२८ स्त्रीसपुत्रा 7"४८ ३५ " " " स्तंभन १२२५ ७. १७ २३ ११ ८,१३,१८,२९ ८ " " २५ ४ से ३५ २४ " " २,२४ १२,२८ " अकारादिशब्दानुक्रमणिका। पृष्ठ पंक्ति शम्द स्त्रीसपुत्रा स्त्रीसवत्सा स्थलदेशा शब्द हवती २१ १७ पृष्ठ पंक्ति ४६ २,९,१४,२१,२९, '४७ स्थान स्पर्श " ६७ " " ७४ पर्शन ११ १२ १३ ५ ३,१३,२१,२९ ७.१५ ३ २४ ६,२२,२९ १६,१२ ३,१३,३० २१ स्थानप्रभुत्व स्थानबल स्थानशौर्य स्थाने स्थापन स्थापना स्थित स्थैर्य " " ७४ ६ " ७ स्पर्श १३ स्पर्शः ૬ २ .१७ १८,३५ १६,३३ " ११ १२ १३ १० " १,८,१४,२१, २८,३६ 1४,१२ २५ سعی स्मृति स्थैर्यगुण सन्मुखं न पश्यति नान मानवास नानशौच ११ १२ १३ ८ " ४,२०,३७ १३,३० ६,१९,२१ " नानशौचं १७ " ४५ १२,१४ ७ ११ ४ ४४ ६ सानाधिवासः खाने निध १०,१५ १,५, स्मृतिगुण म्बकीया स्वर्ग खर्गलक्षणं स्वर्गलक्षण स्वजन खजनत्व स्वजनप्रियः स्वतंत्र स्वधनं ददाति ५,२०,२६ निग्धस्थान ४१ १२ मेह १७ २२ २३ १९ ४६ मेहकला सेहपान २२ " ७,९,१४,३३ " ૨ १४ २२ बेहपान घेहमठी घेहपसी 1,10 खभावजा समावजाता सयंभू. २,५,१५,२१.२८ . ६० घस्तुरतकोषः। पंक्ति पृष्ठ २४ २६ स्वयंभूविज्ञानं खरगतं १८ २,३,४ हरिणवंश हरित हरितट हरितह खरीद ३,१५,२९ " २२ " खरमेदाः खज्योतिष खरूप १४ १८ हरियडा ३१ " " " १०,२८ " ३ ११ १२ १३ १० ११ १३ ६१ खरूपगुण १८ हल हसनं २१,२६,३१ २,८,१४,२८,३३ २४ " १२ " २२ १२,२९ " खरूपप्रहर्ण स्वरूपा खरोदय '२२ २५ हस्तकला हस्तलाघव १३,२८ " २४ खरोदयविज्ञानं खवृत्ति हस्तलाघवकला हस्ति २१ २२ १५ . १८ ३,२१,३७ १४ " स्वसंबद्ध खस्थकर्म स्वस्ति १०,१२ १८ ११,२७ २६ हस्तिकला इस्तिकाम हस्विपरीक्षा हस्तिशाला " खस्तिक १५ ३२ २३ ८,१३,१८,२४, २९,३३ १८ ३५ . ।' M हस्तिशिक्षाविज्ञान हर्ष २४ ३८ ६२२ ४२ १० स्वागतं खाधीनपतिका स्वाभाविक खाधीनभर्तृका खामी खेद हर्षगुण हर्षता ८ १४ ४२ ។។ " " १०,२६ हताशं " हाथ हास ६२ ६३ ६४ " " ६ १२,२०,२८ " इमिड १८,१८ " अकारादिशन्दानुक्रमणिका। शन्द पृष्ठ पक्ति पंक्ति हास्य -- २८ १९ २. ८,१५,२३ क्षुरिका क्षेत्रक ३८ हास्यपात्र २७ 1 " ३१ हास्यपात्र हास्यादि हित ६,२७ १८,२४ १५,२१ vo " ७२ ६,१०,१३,१० १,५ " हितस्थान हितस्थान १६ ३३ " ११,१३,१५,१८ १३,१५ हिमालय " २१ २९ ४,१३,३२ ५,२१ ३ १,२,६ २ , हिमालयदेश होना ज्ञानकृत ज्ञानकृतं ज्ञानकृतयश ज्ञानचरित ज्ञानचरित्रं ज्ञाननय ज्ञानपान २८ ५७ १८ ६ ६ हुलिका २५ दूण ६,१३,१८,३७ १४ " ६ " हुपदेश हूणवेश हेतुविज्ञान ८ ६ ज्ञानप्रबोधः ज्ञानप्रभुत्व ज्ञानशक्ति ज्ञानशौर्य ज्ञानसत्त्वम् शानं ४,८,१२ ३ १५,२०,२४ होम क्षमावान् १२ १९ क्षमी १२,२५,३२ ज्ञानं ११ राजस्थान राज्य द्वारा प्रतिष्ठित राजस्थान प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान, जोधपुर सम्मान्य संचालक मुनि जिनविजयजी द्वारा संपादित राजस्थान पुरातन ग्रन्थमाला - राजस्थान सरकार द्वारा पुरातत्वाचार्य मुनि श्री जिनविजयजी के संचालन में पहले जयपुर अवस्थित राजस्थान पुरातत्त्व मन्दिर को "राजस्थान ओरिएन्टल रीसर्च इंस्टीट्यूट" अर्थात् 'राजस्थान प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान' के नूतन नाम से, एक पूर्ण शोध संस्थान के रूप में जनवरी, सन् १६५६ ई. से पुनः संगठित किया गया है और अब इसका भव्य भवन जोधपुर में बनाया जाकर इसकी प्रतिष्ठा वहाँ की गई है। राजस्थान बहुत प्राचीन कालसे ही भारतीय संस्कृति का एक प्रधान केन्द्र रहा है, जिसके परिणाम स्वरूप यहाँ संस्कृत, प्राकृत, अपभ्रंश, राजस्थानी गुजराती और हिन्दी आदि भाषाओं में अपार साहित्य की रचना हुई है। खेद है कि हमारी उपेक्षा के कारण बहुत सा साहित्य नष्ट हो गया है । विदेशों में भी हमारा बहुत साहित्य जाता रहा है और वहां के विद्वानों ने उसका विशेष अध्ययन और प्रकाशन भी किया है । कलकत्ता, पूना, बम्बई, बड़ौदा, पाटण, अहमदाबाद, काशी आदि के ग्रन्थ भण्डारों में भी राजस्थान का साहित्य प्रचुर मात्रा में मुरक्षित है और एशियाटिक सोसाइटी, कलकत्ता; भण्डारकर ओरिएन्टल रीसर्च इंस्टीट्यूट, पूना; भारतीय विद्या भवन, बम्बई; गायकवाड़ ओरिएन्टल इन्स्टीट्यूट, बड़ौदा गुजरात विद्या सभा, अहमदाबाद; नागरी प्रचारिणी सभा, काशी, आदि सुप्रसिद्ध शोध-सस्थाओं द्वारा राजस्थान के साहित्य को आंशिक रूप में प्रकाशित भी किया गया है। राजस्थान में आज भी अपरिमित मात्रा में साहित्य-सामग्री, लिखित और मौखिक दोनों रूपों में, प्राप्त होती है। इसके संग्रह, संरक्षण, सम्पादन और प्रकाशन का प्रबन्ध करना हमारा प्रधान कर्तव्य है। राजस्थान प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान में अब तक कोई १४-१५ हजार से अपर प्राचीन हस्तलिखित मन्यों का संग्रह किया जा चुका है । बीकानेर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, अलार, जयपुर आदि के व्यक्तिगत ग्रन्थ-भण्डारों में भी हजारों हस्तलिखित ग्रन्थ प्राप्त होते हैं। इन ग्रन्थों में से अधिकांश अप्रकाशित हैं । विद्वत् जगत में राजस्थान के महत्त्वपूर्ण अन्यों के प्रकाशन की बड़ी उत्सुक्ता से प्रतीक्षा की जा रही है राजस्थान प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान द्वारा "राजस्थान पुरातन ग्रन्थमाला" का प्रकाशन, राजस्थान में सग्रहीत, सुरक्षित एवं प्राप्त संस्कृत, प्राकृत, अपभ्रंश, राजस्थानी, हिन्दी आदि भाषा निबद्ध ग्रन्थ-रत्नों को, साहित्य-संसार के सामने सुसम्पादित रूप में, प्रस्तुत करने के उद्देश्य से किया जाता है । प्रस्तुत ग्रन्थमाला के अन्तर्गत अब तक ४०-४५ ग्रन्थ प्रकाशित किये जा चुके हैं और अनेक अन्य विभिन्न प्रेसों में छप रहे हैं जिनका प्रकाशन यथा समय होता रहता है। इस ग्रन्थमाला में इतःपूर्व प्रकाशित कुछ संस्कृत ग्रन्थ १. प्रमाण मंजरी-तार्किक चूडामणि सर्वदेवाचार्य विरचित वैशेषिक दर्शन ग्रन्थ, अनेक व्याख्याओं से समलंकृत; संपादक-श्री पट्टाभिराम शास्त्री, भू. पू. प्रिंसिपल महाराजा संस्कृत कालेज, जयपुर। २. यन्त्रराजरचना-महाराजा सवाई जयसिंहकारिता । वेधशालाओं में प्रयुक्त यन्त्रनिर्माण विषयक प्रामाणिक प्रन्थ । संपादक-स्व. पंडित श्री केदारनाथजी, भू. पू. अध्यक्ष वेधशाला, जयपुर । ३. महर्षि कुलवैभवम्-विद्यावाचस्पति स्वर्गीय मधुसूदन ओझा, जयपुर द्वारा रचित । ऋपितश्व- निरूपणात्मक ब्रह्मविज्ञान विषयक अनुपम ग्रन्थ । संपादक-महामहोपाध्याय पं. श्रीगिरिधर शर्मा चतुर्वेदी, जयपुर।

. . ६३ ४. तर्कसंग्रह-पण्डित अन्नम विरचित न्यायशान का प्रसिद्ध ग्रंय; पं. क्षमारल्याग रचिनु पविका से समन्वित । संपादक-डॉ. जितेन्द्र जैटटी एम. ए., पी-एच्. दी, प्राध्यापक, रामानन्द आई कॉटेज, अहमदाबाद ५. कारकसंबंधोद्योत-पं. रभसनन्दी रचित । संस्कृत व्याकरण का कारकविषयक अपूर्व मुबोध प्रय। संपादक-डॉ. हरिप्रसाद शास्त्री एम्. ए. पी-एच्. दी. उपाध्यक्ष मो. जे. अध्ययन संशोधन विद्यामवन, गुजरात विद्यासमा, अहमदाबाद । ६. वृत्तिदीपिका-पं. मौलिकृष्ण भट्ट विरचित । व्याकरण, न्याय व साहिल विषयक वृत्तिविचारका विशिष्ट प्रन्या संपादक पं. श्री पुरुषोत्तम शर्मा चतुर्वेदी, साहिलाचार्य । ७. शब्दरत्नप्रदीप-अज्ञात कक। संस्कृत भाषा का संक्षिप्त सन्दकोश । संपादक हॉ० श्री हरिप्रसाद शास्त्री एम्. ए. पी-एच. टी. (बम्बई)। उपाध्यक्ष मो. जे. अध्ययन-संशोधन विद्यामबन, गुजरात विद्या सभा, अहमदाबाद। कृप्पागीति-कवि सोमनाथ विरचित । गीतगोविंद के ढंग का एक मुन्दर संस्कृत गत्रिकाम्या संपादक डॉ. प्रियवाला साह एम्. ए. पी-एच्. डी. (बम्बई) ही. लिट् (पेरिस); प्राध्यापिका रामानन्द आर्टस् कॉलेज, अहमदाबाद । ९. नृत्तसंग्रह-अजातकर्तृक । नृखनाट्य विषयक कलाभ्यासियों के लिए गर्व रोचक प्रय। संसदक-डॉ. मित्राला ग्राह एम्. ए, पी-एच्. ही. (बम्बई) डी. लिद (पति)। १०. चक्रपाणिविजयमहाकाव्यम्-भट्ट लक्ष्मीपर विरचित । व्या और अनिल विषयक प्रेमच्या सम्वन्धी अति मनोहर महाकाव्य 1 संपादक-पं. केशवराम काशीरान शास्त्री, क्यूरेटर एवं गुजराती भाषा और साहित्य के प्राध्यापक, भो. जे. अयन-संशोवन विद्या भवन, गुजरात विद्याममा, अमदाबाद । ११. राजविनोदमहाकाव्यम्-महाकवे उदयराज विरचित । मध्यकालीन भारतीय इतिहास सम्बन्धी एक महत्त्वपूर्ण काव्य । अहमदाबाद के मुलखान महमूद वेगहा के जीवनचरित्र का वर्णन । संसदक थी गोपालनारायण बहुरा, एम्. ए., प्रवर शोध सहायक, रामस्थान पुरातत्त्वान्वेषण मदिर, उयपुर । १२. शृंगारहारावली-श्रीहर्ष कवि विरचित श्रृंगाररस का अर्व गीतिकाव्य । संादक-डॉ.प्रियगला शाह एम्. ए, पी-एच्. टी. (बम्बई), डी. लिट् (पेरिस)। १३. नृत्यरत्नकोश (प्रथम माग) मेवाड के सुप्रसिद्ध महाराणा कुम्मदेव (ईमा) प्रभात नृत्ल-विषयक महावारी अन्य । सम्पादक-प्रो. रमिकलाल छैटाटाल परीख, अध्यक्ष-मो. जे. उच्चाप्यय संशोधन विद्या मन्दिर, गुजरात विद्यासमा, अहमदाबाद सपा डॉ. प्रियवाला ग्राह, एन्. ए., पी-एच्. सी., डी. लिद , प्राध्यापिका-रामानन्द यादम कॉलेज, अहमदाबाद । १४. उकिरत्नाकर-साधुन्दर-गनी-विरचित । रसियतिषियक महलपूर्ण प्रत्य । संस्कृत और देशीय मापा आन्दों के तुलनात्मक अस्पन में अनुपयनी । वहात कडक उदीया और औचिपदसंग्रह समन्वित । सम्पादक-पुरातत्ताचार्य श्री जिनविजय मुनि, सम्मान्य मंचलक, राजस्थान प्राच्यविद्या प्रतिटान, जोधपुर। १५. दुर्गापुप्पासलि-ख• महामहोपाध्याय पं. दुर्गामादहिवेत । मधि-विया मुन्दर मुश्क काय । सम्पादक-. गाधर द्विवेश, साहिवाचार्य, पारयादा-महाराजा-मस्त-कॉटेज, जयपुर । १६. कर्णकुतूहल-महारचे मोलानाथ विरचित । पुरस पुन्दर नाटक । सम्पादक-•धी गोगल- नारामा बदुरा, एम्. ए., प्रवर पोष मुद्दायक, राजस्थान प्राच्य लिया निशान, डोरपुर । इसी पर छी श्रीमद्भागवत में वनंत भावान् न की टीटों के आधार पर निर्मित पचनी रचना भाग- टोलान्त महिला १७. वरचिलाम महाकाव्य-विकलानिधि देवर्षि न विरचित । उपपुर के महारास इंपरीमह माहा से निर्मित ऐतिहानिक महा-कम्य । सन्माद-निर्मित "विटामिनी' मरतीय सहित । सादर-निरोननि देश म मनुरानाय शत्र, मादिर चार्म, अपार ।

६४ -t - १८. रसदीर्घिका कवि विद्याराम प्रणीत । रस अलंकार आदि विवेचनपरक सुबोध रचना। सम्पादक-गोपाल नारायग बहुरा, प्रवर शोध सहायक, राजस्थान प्रा. वि. प्रतिष्ठान, जोधपुर । २. राजस्थानी साहित्य १९. कान्हड़दे प्रवन्ध-महाकवि पद्मनाभ रचित । स्वधर्म और खदेश रक्षा निमित्त जालोर के चौहाण-कुलशिरोमणि महावीर कान्हदेव (कान्हड़दे) के बलिदान की गौरव-गाथा । राजस्थान के प्राचीन इतिहास सम्बन्धी साहित्य की महत्वपूर्ण प्रबन्ध रचना । सम्पादक-प्रो. के. पी. व्यास, एम्. ए., प्राध्यापक- एल्फिन्स्टन कॉलेज, बम्बई। २०. क्यामखाँ रासा-फतहपुर ( शेखावाटी) के नयाव अलफखाँ (कविवर जान ) रचित ऐतिहा. सिक काव्य । सम्पादक-डॉ. दशरथ शर्मा और श्री अमरचन्द नाहा। २१. लायारासा अपर नाम कूर्मवंशयशप्रकास–चारण कविया गोपालदास विरचित ऐतिहा- सिक राजस्थानी काव्य । सम्पादक-राजस्थानी के सुपरिचित विद्वान् श्री महताबचन्द्र खारड़ । २२. बाँकीदासरी ख्यात-जोधपुर के कविवर वॉकीदास रचित राजस्थानी साहित्य की सुप्रसिद्ध रचना । सम्पादक-श्री नरोत्तमदास स्वामी, एम्. ए., वाइस प्रिंसिपल एवं प्राध्यापक-महाराणा भूपाल कॉलेज, उदयपुर। २३. राजस्थानी साहित्यसंग्रह- खींची गगेव नीवावतरो दो-पहरो' 'रामदास वेरावतरी आखडी री वात' तथा 'राजान राउतरो वात-वणाव' नामक तीन राजस्थानी वार्ताओं का संग्रह । सम्मा- दक-श्री नरोत्तमदास स्वामी, एम्. ए., प्राध्यापक, महाराणा भूपाल कॉलेज, उदयपुर । २४. कवीन्द्रकल्पलता-मुगल सम्राटू शाहजहाँ के समकालीक काशी के सुप्रसिद्ध विद्वान् कवीन्द्रा- चार्य सरखती विरचित मनोहर काव्य ग्रन्थ । सम्पादिका-श्रीमती रानी लक्ष्मीकुमारी चूहावत, जयपुर। २५. जुगलविलास-कुशलगढ (राजस्थान) के भक्त महाराजा पृथ्वीसिंह अपरनाम कवि पीथल विनिर्मित ब्रजभाषा में भगवान् कृष्ण और राधा की ललित-लीला-वर्णन-परक मन्दर रचना । सम्पादिका- श्रीमती रानी लक्ष्मीकुमारी चूंडावत, जयपुर। प्रेसों में छप रहे संस्कृत ग्रंथ १. शकुनप्रदीप- -लावण्य शर्मा रचित शकुनशास्त्र का भत्युपयोगी महत्वपूर्ण प्रय । २. लघुस्तव-लवाचार्य प्रणीत, सोमतिलक सूरि कृत टीका सहित । ३. करणामृतप्रपा-ठकर • विनिर्मित, संस्कृत सुभापितों का सुन्दर संग्रह । ४. बालशिक्षाव्याकरण-ठकुर संग्रामसिंह विरचित, संस्कृत व्याकरण का पालोपयोगी मुबोध प्रन्य। ५. पदार्थरतमंजूषा-पं. कृष्ण मिश्र रचित, न्याय शास्त्र का महत्वपूर्ण प्राचीन प्रन्य । ६. फायप्रकाशसंकेत-अलङ्कार शास्त्र का सुप्रसिद्ध मूर्धन्य प्रन्य, सोमेश्वर भकृत-'संकेन' सहित । ७. वसन्तविलास फागु-अज्ञान कर्तृक-फागु काव्य रूप में सरस सुन्दर रचना। ८ नन्दोपाख्यान-अज्ञात कर्तृक-उपाख्यान रूप में सरल संस्कृत रचना। २. चांद्रव्याकरण-आचार्य चन्द्रगोमि विरचित-संस्कृतका प्राचीन व्याकरण अन्य । १०. वृत्तजाति समुच्चय-कवि विरहाइ विनिर्मित छन्दःशास्त्र का महत्वपूर्ण प्रन्य । ११. कवि दर्पण-अज्ञातस्तक छन्दोरचना विवेचनपरक प्राचीन ग्रंथ। १२. स्वयम्भून्छन्द कवि स्वयम्भू विनिर्मित अपभ्रंश छन्दमान का प्राचीन ग्रंथ । १३. प्राशतानन्द-पुनाय कवि रचित, प्राकृत भाषा का अत्युपयोगी व्याकरण प्रय। १४. कविकौस्तुम-4. रघुनाथ विरचित, कान्य शास्त्र विवेचनपरक प्रय। १५. दशकण्टयधम्-महामहोपाध्याय ख. पं. दुर्गाप्रसाद निवेरी रचित रामचरित्र विषयक चम्पू काम्या १६. पचमुक्तायली-कविष्लानिधि धारणमा विरचित मलित मुजर राम्य ।

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Vasturatnakosa

Author
Muni, Jinvijay
Title
Vasturatnakosa
File name
Vasturatnakosa
Text
OCR done
Citation
1959
Published
2011/08
Publisher
Bambai, Laxmibai Narayan Choudhary, Nirnyasagar Press
Language
Sanskrit
Pages
166
Library
Acharya Shri Vinaychandra Gyan Bhandar, Jaipur
DLI number
314053
Barcode
99999990312205.00
Scanning centre
Banasthali University
Digital publisher
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