Acharya Shri Vinaychandra Gyan Bhandar, Jaipur
Shri Pannvann Sutram
Front matter
पापण पार गमोगायधी या परलोकगयघी काम फुठ कर सक्ता है, इमी कारण नगयान् धीत पगा7 पुस्मा (यशायाठे ) गौतम ऐसा कहक शायुफो सय गुणों से या दिसताया है चोरनी म म यौर उनकमक उदय से धमकी रुचि, धर्म का उपदेश करने वाला गुस पौर 31 पापा मुनना मिरजाने पर भी देय गुरु धम रूप तत्यपर सच्ची श्रधा होना यज्ञात दुर्छन । RTI मन्यपर मग थक्षा होना यही मम्यक्त है, और सय तो मिथ्याष्टियो को ना होताहै , यह गए पाम एम जान थौर उनकर्म यवन न जाय को मिलते हैं, इस हेतु शयनकर्म का रूप शोर पाराम जपा में पद्य करना थाप है, शयनकर्मका क्षय और शुन को यढाने के लिये धर्म के संया पोरानी यव नही है , एम हेत धर्म करो २ धर्म ही का सेयन करो , जैसा के घरके कार्य सित पतघांतर न परिश्रम करत हा फुट काउ धर्म के वास्ते नी परिश्रम करते रहो, कारण के धी पा गया पान पाउं पुरुप ) की इन्द्र शादि देवता जी केवल प्रशमा , अनुमोदना शौर नक्ति करके थप मा म म परत है, इतनी हि पाझे नी उन को धर्म का सेवन करना दुर्छन है और नी धर्मा को प्रियान को एनी, कल्पक्ष, पितामणि शौर कामधेनु शापसे दास हो मिलते हैं, तो पुत्र मित्र फलन पर मगरीचौर राज्य मिउनाना क्या प्रती चीज है ? धर्म मेयन करने यारे का दो घी का जीना नी गा और कार्यार है, परन्तु घमहीन (थपांत् पेय, पेय , कृस्य, यकृत्य, गम्य, अगम्य , नदय BACKERALAIMEDAO धौर छनष्ट्य इत्यादि यिचार रहित ) का कोटाकोटि यर्ष जीना नी निष्फल शौर शुकिचित्कर है , पवित् छपना शायु पूर्ण कर मरता है , इद्रिय का निग्रह कराने वाला, सकल कल्याण शौर सुगति का कारण नवसागर तरन के लिये नौका रूप तीर्थंकरो का कहा जशा केवल धर्म ही है और धर्म का मूल दया "यि ना मतलय पराये दुख को दूर करने की इच्छा ,, है दया से धर्म की प्राप्ति चौर धर्म से जीव मुक्त होते हैं, इसलिए दया सर्वोत्कृष्ट पदार्थ है । जैनदर्शन मे दया के शनेक " स्वदया परदया द्रध्यदया नावदया नि श्चयदया व्यवहारदया स्वरूपदया अनुयघदया,,नंद विस्तार से वर्णन किये हैं सर्वदर्शनी दया का उपयोग रखत हैं परन्तु सर्वाशे दया का उपयोग तो जैनठर्शन ही मैं स्वीकार है इसवास्ते जैनमत श्रेष्ठ भी कहाता है , दयाके सर्वाश उपयोग होनेकी रीति यही है कि जैसे नोजन के वास्ते कोई एक पकान बनाया जाय तो घृत पिष्ट चीनी इत्यादि सामग्री शवश्य थपेदित होती है सामग्री होनेपर नी यथायिधि यथार्थ ए कछा होने से तथाविध स्वादिष्ट पक्काल तयार होता है परन्तु हीनाधिक वस्तु होजाने से कदापि वैसा पकान नहीं होता तैस ही यथाविधि दया पाठीजाय तो तथाविध धर्मोपलब्धि होय , यदापि सर्वदर्शनो मे दयाका मान है परतु उसके स्वरूप मे फेरफार करदेने से गतप्राय (थर्यात् किचित्कर यया) है, जब के उसका स्वरूपही शास्त्रानुसार यथार्थ नहीं जानसक्ते हैं तो पालन करना कैसे हो सके, फेरफार जैसा के कोई कहते हैं पशुप्राणघात थर्यात् पशुजन्म से बोझाना दया है , कोई जिस शरीर को धारण करके जीव EIDOENLAINEEQg गुग्गी होम प्रचुन दागित होय व्याधिग्रस्तादि दोप युक्त होय तो जैसे प्राणीको तादृश शरीर से मुक्तकर गानी पा. फोड मूदन थपया स्यूल प्राणी जो मनुष्यको दुस उते हैं उनका नाश करना दया है , पार पांग पागादिक में प्राणियधारने से नी पुण्य मानत हैं और कोई स्थल प्राणिरक्षामान को दया कहत ६.ग गरः दया का उपयोग धन्यदर्शनी रसते हैं लेकिन यह जम हैं, शौर एकरीत से-याचारधर्म भगशिपाधम चौर पस्नुधर्म यह चार प्रकार धर्म होता है, इन चारों धर्मों के दान शीठ तप धौर नाय पार शरत, पय पनयउ होय तो दान होय, मनयल होय तो शील पाला जाय , शरीरयल होय तो साप, और मम्यग्ज्ञान होय तो नाय होय, यष्ठ नावधर्म दान शील तप से श्रेष्ठ है किसवास्ते के ना पपन का पारन ज्ञानयार है “जित्से यस्तुका स्वरूप पयार्य जानाजाय उस्को ज्ञान कहते हैं ,, ज्ञानसे जैसी पापपन की पृषि और नरक्षण होता है उतना दान गीठ तपसे कदापि नहीं, क्योंकि नय, निक्षेप, प्रमा प, गराउनुपाग का विचार, सप्तनगी, पद्रव्यायचार, शादिक सर्व ज्ञानहीसे जीवको परिपूर्ण प्राप्त हो दागरिक में लिखा है के ज्ञानहीन पुरुप की क्रिया केवल केशरूप है अर्थात् क्रिया ज्ञानकी दा मो? और नगदेशी तथा जरत महाराज यैसी श्रयस्थामें जी रहके जो कर्म विमुक्त ऊए यह ज्ञानहीका ' माशाम्म है, शानरी नो तादाता मोड़ी श्यघचारित्र है जो निकाचित कर्म कोटियर्षपर्यत दानादि कर मिनी नट नहीं होता वा ज्ञानी के एक स्वासोस्स्वास में नष्ट होता है इसीलिए ज्ञानीगुरु को रत्नाकर Fulu बाADOLLAIN : और फियागुरु को पीपल के पान शैसा कहा है , ज्ञान विना सम्यक्त शहिसा शौर सिमान्तोक्त समस्तक्रिया का मूल श्रछा नही होते यह कारण ज्ञानोपार्जन के लिए शुषश्य यत्न करना चाहिए ज्ञानके पाच नेट-मी ति श्रुत शवधि मनपर्यव और केवल हैं परन्तु श्रुतज्ञान सयसे श्रधिकोपयोगी है क्यो कि यह पदार्थमान लोकालोक स्वमत परमत का प्रकाशक थज्ञानतिमिर को दूर करने के वास्ते सूर्य थौर दुस्समकालरूप रात्री में दीप सदृश है, उद्देश समुद्देश शाज्ञा इत्यादि व्यवहार का लाभ भी श्रुतज्ञान सेही होता है इस श्रुतज्ञान के सुनने से शुरु स्वरूप विशुछ प्रधान को प्राप्ति होती है इस्से शुझात्माका आचरण श्रासेवन अनुभयन होता है और हस्से परमपदप्राप्ति होती है, यही श्रुतज्ञान से पूर्वकाल मे श्रीगौतमादिक केवली हो ससार से मुक्त हुए वर्तमान मे महाविदेहक्षेत्र से विरहमान जिनेन्द्रो से सुनके जीव मुक्त होते हैं , आगामिकालमे पद्मनाभ आदि तीर्थकरोसे सुन अनेक जीय मुक्त होगे, इस श्रुतज्ञान की याचना पृच्छना परावर्तना अनु प्रेक्षा और धर्मकथा होती है , श्रीउवाई सूत्रमे धर्मकया चार प्रकार की कही है-आक्षेपिणी विक्षेपिणी निवेदिनी और सवेदिनी, जिस्से तत्यमार्ग में प्रवृप्ति होय उस्को आक्षेपिणी, जिस्से मिथ्यात्व की निवृत्ति होय उस्को विक्षेपिणी, जिस्से मोक्ष की अमिलापा होय उस्को निर्वेदिनी, जिस्से वैराग्य की भावना होय उस्को सवेदिनी कहते हैं वह श्रुतज्ञान रूप कथा श्री अरिहन्त देवाधिदेव तीर्थकर परमेश्वर समवसरणमे घेठ "उपन्नेइवा विगमेइवा धुवेइवा, त्रिपदी उच्चारण पूर्वक करते हैं और त्रिपदी से ही गणधर द्वादशाग TECEMBECEMRAHESARSHESTEHETICERE 1/ IEDEHANGE गुग्गी रोग म पुन दु गित होप प्याधिग्रस्तादि दोप युक्त होय तो जैसे प्राणीको तादृा शरीर से मुक्तकर शानी दया की है, कोई मदन ययया स्यूल प्राणी जो मनुष्यको दुख दत हैं उनका नाश करना दया है, पार पागादिक में प्राणियधारने से जी पुगय मानत हैं और कोई स्याउ प्राणिरदामात्र को दया कहत १. म सरह दशा फा उपपोग धन्यदर्शनी रसते हैं लेकिन यह जम हैं, और एफरीत से-शाचारधर्म दया धर्म क्रियापम थोर यन्नुधर्म यह पार प्रकार धर्म होता है, इन चारो धर्मो के दान शील तप और नाव पार पार, जय धनय होय तो दान होय, मनयल होय तो शील पाला जाय , शरीरबल होय तो रोप, चौर मम्यग्ज्ञान होय तो नाय होय , यह नायधर्म दान शील तप से श्रेष्ठ है फिसवास्ते के ना गपर्म का कारण झानयरल है "जिस्से यस्तुका स्यरूप यथार्थ जानाजाय उस्को ज्ञान कहते हैं , ज्ञानसे जैसी पालापम की पछि शोर मरक्षण होता है उतना दान शील तपसे कदापि नहीं, क्योंकि नय, निक्षेप, प्रमा 1, पारा थापाग का यिगार, सप्तनगी, पन्द्रव्यायपार, शादिक सर्व ज्ञानहीसे जीवको परिपूर्ण प्राप्त हो 1 दगाएक में लिखा है के ज्ञानहीन पुरुप की क्रिया केवल क्लेशरूप है शर्यात् क्रिया ज्ञानकी दा मी है, और ममयी तथा नरत महाराज यैसी अवस्थामें नी रहके जो कर्म विमुक्त ऊए यह ज्ञानहीका माहारा है, ज्ञानी जो तादलता सोही अयधचारित्र है, जो निकाधित कर्म फोटिषर्षपर्यत दानादि कर से भी नष्ट नहीं होता वा ज्ञानी के एक स्वासोत्स्वास में नष्ट होशक्ता है इसीलिए ज्ञामीगुरु को रवाकर भूमिका। पखवणा, इसकी प्रकृति प्रज्ञापना है, प्राकृत शब्द संस्कृत शब्दको आदेश निर्देश करने से सिछ होताहै । प्रज्ञापना शब्द का समुदायार्थ यह है कि (प्र) प्रर्पसे ( ज्ञा) जानिय (प) पदार्थ जिस्से सो मज्ञापना अर्थात्-समस्त दर्शनी जिसरीति से पदार्थ का निरूपण नही करसक्ते केवल तीर्थकर ही यथावस्थित स्वरूप से पदार्थ निरूपण करशक्ते हैं तो, यथायस्थितस्वरूप निरूपण कर्फे शिष्योकी बुद्धि मे आरोपण कियाजाय जीवाजीव आदिक पदार्थ जिस्से यह प्रज्ञापना कहाती है । यद्यपि अन्यदर्शनी भी जीवाजीवादि पदार्थीको शिष्य की बुद्धि मे आरोपण कर्ते हैं परन्तु यथाथ स्वरूप "जैसा २ जिस २ पदार्थ का स्वरूप है वैसाही ठीक ठीक स्वरूप ,, निरूपण तीर्थकर सर्वज्ञ ही करशक्ते हैं अन्यका सामर्थ्य नही और वह पढार्य का यथावस्थित स्वरूप इस ग्रन्थ के द्वारा शिष्यो की युछि के गोचर होता है इस्से इस का प्रज्ञापना यह नाम सार्थकहै। समवायाङ्ग मे कहे ऊए पदार्थो का निरूपण इस्मे है इस्से समनायाङ्ग चतुर्थ अङ्ग का उपाङ्ग है कहे का फिरसे कहना निरर्थक है जैसा नही , क्यो कि कहे पदार्थों को भी फिरसे विस्तार पूर्वक कहना NAGGERESEASESIRED -1-3RELESED पी रणा करते हैं (उको मून कहते हैं। इस फासमे जितने सूत्र हे सब श्रुतज्ञान के मेद हैं यह शुतज्ञान गपापकारी, इमलिए इस्फी एहि मोर सरक्षण के हेतु प्रयश्य यदा करना चाहिये वर्तमान काठमे जितने शामि के उपाय ? मप से उत्कृष्ट मुद्रापन्ल है इस कारण पुस्तक सुलमता ज्ञानदि की अति उत्कृष्ट गगम गति को स्वीकार फरना जो के पूर्याचार्योंने यडे परिश्रम से परोपकार के हेतु ग्रय धनाये हैं दाया प्रणिय फरना हर एफ यिदानों को देना इस्से अधिक और कोई श्रेष्ठ कार्य नहीं है , यही सब पारण गोल शीमुशिदायाद निवासी श्रीराय धनपतिसिंह यहादुर ने १५ आगम पयामे हरेक जगे भहार लापर म्पेि हैं आप लोग भी ययाक्ति इस्के करने को प्रशस्त होय के जिस्से पुन जनमत माप्त होप इति शम् ॥ BAHADEMघाड युवावस्या को n ॥ ॥ म ॥ पनारस जैनप्रमाकर नानक बन्द्र यती भूमिका। ALBDOHOROR पखवणा, इसकी प्रकृति प्रज्ञापना है, प्राकृत शब्द सस्कृत शब्दको आदेवा निर्देश करने से सिझ होताहै। प्रज्ञापना शब्द का समुदायार्थ यह है कि (प्र) प्रकर्पसे ( ज्ञा) जानिय (प) पदार्थ जिस्से सो प्रज्ञापना अर्थात्-समस्त दर्शनी जिसरीति से पदार्थ का निरूपण नहीं करसक्ते केवल तीर्थकर ही यथायस्थित स्वरूप से पदार्थ निरूपण करशक्त हैं तो, यथायस्थितस्वरूप निरूपण कर्फ शिष्योकी बुद्धि मे आरोपण कियाजाय जीवाजीय छादिक पदार्थ जिस्से वह प्रज्ञापना कहाती है । यद्यपि अन्यदर्शनी भी जीयाजीयादि पदार्थीको शिष्य को बुद्धि में भारोपण कहते हैं परन्तु यथार्थ स्वरूप "जैसा २ जिस २ पदार्थ का स्वरूप है वैसाही ठीक ठीक स्वरूप, निरूपण तीर्थकर सर्पज्ञ ही करशक्ते हैं अन्यका सामर्थ्य नही और वह पदार्य का यथास्थित स्वरूप इस ग्रत्य के द्वारा शिष्यो को युछि के गोचर होता है इस्से इस का प्रज्ञापना यह नाम सार्थकहे। समवाया मे कहे जए पदार्थो का निरूपण इस्मे है इस्से समवायाङ्ग चतुर्थ अङ्ग का उपाङ्ग है कहे का फिरसे कहना निरर्थक है थैसा नही , क्यो कि कहे पदार्थों को भी फिरसे विस्तार पूर्वक कहना बनाGEEEEEENaaDAINIRESI-3izan मानस्थलमBarris) ॥
फी रमा फरने है (उस्को मून कहते हैं) इस कालमें जितने सूत्र है सय श्रुतज्ञान के भेद हैं यह श्रुतज्ञान गयापारी है इसलिए इसकी एहि प्योर सरक्षण के हेतु अपचय यत्न करना चाहिये वर्तमान काठमें जितने मानधि के उपाप है मप से उत्कृष्ट मुद्रायन्य है इस कारण पुस्तक सुलभता ज्ञानवृद्धि की अति उत्कृष्ट सांग सुगम रीति को स्वीकार करना जो के पूर्याचार्योंने यदे परिश्रम से परोपकार के हेतु ग्रप बनाये हैं छाया के प्रगिर करना हर एक पिदानों को देना इस्से अधिक और कोई श्रेष्ठ कार्य नहीं है यही सय कारण शोप थीमुशिदायाद नियासी श्रीराय धनपतिसिह यहादुर ने ४५ आगम छपयाके हरेक जगे भदार पापा झिये है आप लोग भी यथाशक्ति इस्के करने को प्रवृप्त होंय के जिस्से पुन जनमत माप्त होप इति शम् । OMSETTE , युयायस्था को । h = ॥ बनारस जैनप्रमाकर नानक चन्द्र यती भूमिका। पणवणा, इसकी प्रकृति प्रज्ञापना है , प्राकृत बाद सस्कृत शब्दको आदेश निर्देश करने से सिद्ध होताहै । प्रज्ञापना गद का समुदायार्य यह है कि (प्र) प्रफर्पसे ( ज्ञा) जानिय (प) पदार्थ जिस्से सो प्रज्ञापना अर्थात्-समस्त दशनी जिसरीति से पदार्थ का निरूपण नहीं करसक्ते केवल तीर्यकर ही यथावस्थित स्वरूप से पदार्थ निरूपण करते हैं तो, यथायस्यितस्वरूप निरूपण कर्के शिष्योकी बुद्धि मे धारोपण कियाजाय जीवाजीन आदिक पदार्थ जिस्से यह प्रज्ञापना कहाती है। यधपि अन्यदर्शनी भी जीवाजीवादि पदार्थीको शिष्य की युद्धि मे शारोपण कते हैं परन्तु यथाध स्वरूप "जैसा २ जिस २ पदार्थ का स्वरूप है वैसा ही ठीक ठीक स्वरूप, निमपण तीर्थकर सर्वज्ञ ही करशक्ते हैं अन्यका सामर्थ्य नही और वह पढार्य का यथावस्थित स्याप इस ग्रन्य के द्वारा शिप्यो की युछि के गोचर होता है इस्से इस का प्रज्ञापना यह नाम सार्थकहै । समवायाङ्ग मे कहे ऊए पदार्थो का निरूपण इस्मे है इस्से समगायाङ्ग चतुर्थ अङ्ग का उपाङ्ग है. कहे का फिरसे कहना निरर्थक है जैसा नही , क्यो कि कहे पदार्थों को भी फिरसे विस्तार पूर्वक कहना RRED-SERIODR3SARITA TEMBEBRicial कि पर गिप्प रोगी के गया के पिये होता है इस्से सार्पक है निरर्थक नहीं। TAIT गामा उपाइ मी नय गीय सजीव आदिक पदार्थों के शासन (कहने) से शास्त्र है और गारादि म युधिमान् पुरुपा की प्रवृत्ति के लिये प्रयोजन आदि तीन और मङ्गठ अवश्य कहना पाहिपे या गा पृषा फटस्शायामर्दन की तरह कोई भी इसमें प्रवृत्त न होगा प्रासादो प्रसर है, येफ पर घोर दुसरा अपर है, पर मी दो प्रकार और अपर भी कप्तांगत यो गागोदा प्रगर है , तहा द्रश्यास्तिकनय के मत से देखिये तो मागम नित्य है और आगम के imnने में कप्ता का प्रभाय ही है "जैमा के कहा है-यह द्वादशागी कधी नही थी कधी नहीं है कधी मागी रोमा नही (स्न्नुि) धुय है नित्य है शास्थती है, पानिप के मत से दसिये तो भागम अनित्य है अनित्य का सदभाव अवश्य होगा , तत्यदृष्टिसे B देगिर गो बागम सूत्र और भर्य उभयरूप है इसलिए अथ की अपेक्षा से नित्य और सूत्र की अपेक्षा से सरपीगे कर्मा का अयश्य सदाय है । अम्परा फा जनन्तर प्रपोजन सत्यानुग्रह और परम्पर प्रयोजन अपयर्गप्राप्ति है “कहाहे-के जो दुखी गो को गज्ञ के कहे उपदेश का उपदेश देके कृपा करते हैं वो थोडेही काल में मुक्त हो जाते हैं, अर्थ गे कहने शरिहन्त को पपा प्रयोजन है क्यों के यह तो कृतकृत्य हैं और प्रयोजन विना मर्यरूप से कहने .ECEFECEREASEKISBTERTEE coasbadan SELECTRESSISeasang का परिश्रम भी घ्यर्थ है विनाप्रयोजन मूर्ख भी किसी कार्य में प्रवृप्त नहीं होता तो तीर्थकर कैसे प्रवृत्त हुए कोई प्रयोजन हनको भी कहना चाहिये जैसा न कहो , कारण के अर्थरूप से कहने का परिश्रम तीर्थकर नामकम क विपाक का उदय से होता है “ कहा है के-तीर्थकरनामकर्म अग्लान धर्मदशना के देने ही से भोगाजाता है,, अर्थात्-तीर्थकरनामकर्म आधीनता से धर्मदेशनाव्यापार होता है उसकर्म का यह भोगही कोई प्रयोजन अष्मदादिवत् उनको नही है । योता का अनन्तर प्रयोजन जो अध्ययन कहा जायगा उस्के अर्थ का ज्ञान है शौर परम्परप्रयोजन मोक्षप्राप्ति है, श्रोता वियदित अध्ययन को शर्थ से अच्छीतरह सुनकर ससार से विरक्त होते हैं, विरक्त होके ससार से निकलने की इच्छा से सयममार्ग में यथागम प्रसृत्त होते हैं , यथागम सयम मार्ग में प्ररप्त होने से सयम का प्रकर्प होता है उस्से सकल कर्मय शौर उस्से मोदप्राप्ति होती है , लिखा है के-सम्यक् पदार्थ ज्ञान से जीव विरक्त होते हैं, विरक्त हो क्रिया में शाशक्त शौर क्रिया मे शाक्त होने से परमगति को पऊचते हैं । इस ग्रन्थ मे थनिधेय जीव शुजीय पदार्थ का स्वरूप है । सम्बन्ध दो प्रकार है उपायोपेय जायलदण दूसरा गुरुपर्वक्रमलण , तहा पहिला नैयायिक के-जैसे कि यघनरूपापन्न प्रकरण उपाय शौर उम प्रकरण का परिज्ञान उपेय है । दूसरा गुरुपर्वक्रमण केबल श्रद्धानुसारि के जैसा के सूत्रकार आगे कहेंगे , जानना चाहिये SPERATORIESHINDINOD ॥
--- मम्मकिपाले शिप्य लोगो के आग्रह के लिये होता है इस्से सार्थक है निरर्थक नही । य: प्रताप नामक उपाङ्ग भी नय गीय अजीव आदिक पदार्थों के शासन (कहने) से शास्त्र है और भाग की यादि म युझिमान् पुरुपो की प्रवृप्ति के लिये प्रयोजन आदि तीन और मङ्गल अवश्य कहना पाहिये पता था कटकशासामर्दन की तरह कोई भी उस्में प्रवृत्त न होगा मा प्रयोगा दो प्रकार है, येक पर और दूसरा अपर है, पर भी दो प्रकार और अपर भी कांगत श्री माग होने गे वा प्रकार है , तहा द्रव्यास्तिकनय के मत से देखिये तो आगम नित्य है शीर बागम के रिप माशाने से कमा फा प्रभाय ही है "जैमा के कहा है-यह द्वादमागी फधी नही थी कधी नही है कधी हागी तमा नती (फिन्तु) ध्रुय है नित्य है गास्थती है, पापान्तिमनय के मत से देखिये तो आगम अनित्य है अनित्य का सद्भाव अवश्य होगा , तत्यदृष्टिसे गि तो मागम सृप्र और अर्थ उभयरूप है इसलिए अब फी अपेक्षा से नित्य और सूत्र की अपेक्षा से मनिरप होने से फलों का अयश्य सदाय है । यापासा फा अनन्तर प्रयोजन सत्यानुग्रह और परम्पर प्रयोजन अपयर्गप्राप्ति है “कहाह-के जो दुम्यो पीयों को गर्यज्ञ के कहे उपदेग का उपदेश देके कृपा करते हैं वो थोडेही काल में मुक्त हो जाते हैं,, अर्थ रो कहोगाणे थरिहन्त को क्या प्रयोजन है क्यों के यह तो कृतकृत्य हैं और प्रयोजन विना अर्यकप से कहने FRONICIABETERS ARRIASIS का परिश्रम भी व्यर्थ है विनाप्रयोजन मूर्ख भी किसी कार्य में प्रवृप्त नहीं होता तो तीर्थकर कैसे प्रवृत्त हुए कोई प्रयोजन इनको भी कहना चाहिये जैसा न कहो , कारण के अर्थरूप से कहने का परिश्रम तीर्थकर नामकर्म के विपाक का उदय से होता है " कहा है के-तीर्थकरनामकर्म अग्लान धर्मदशना के देने ही से भोगाजाता है,, अर्थात्-तीर्थकरनामकर्म आधीनता से धर्मदेशनाव्यापार होता है उसकर्म का यह भोगही है कोई प्रयोजन अष्मदादिवत् उनको नही है । श्रोता का अनन्तर प्रयोजन जो अध्ययन कहा जायगा उस्के अर्थ का ज्ञान है और परम्परप्रयोजन मोदप्राप्ति है, श्रोता वियदित अध्ययन को अर्थ से शच्छीतरह सुनकर ससार से विरक्त होते हैं, विरक्त होके ससार से निकलने की इच्छा से सयममार्ग में यथागम प्रवृत्त होते हैं , यथागम सयम मार्ग में प्ररत होने से सयम का प्रकर्प होता है उस्से सकल कर्मय शौर उस्से मोदप्राप्ति होती है , लिखा है के-सम्यक् पदार्थ ज्ञान से जीय विरक्त होते हैं, विरक्त हो क्रिया में शाशक्त शौर क्रिया मे शाशक्त होने से परमगति को पऊचते हैं । इस ग्रन्थ मे थनिधेय जीव राजीव पदार्थ का स्वरूप है । सम्यन्ध दो प्रकार है उपायोपेय नायलण दूसरा गुरुपर्वक्रमलण , तहा पहिला नैयायिक के-जैसे कि यचनरूपापन्ल प्रकरण उपाय और उस प्रकरण का परिज्ञान उपेय है । दूसरा गुरुपर्वक्रमण केबल श्रद्धानुसारि के जैसा के सूत्रकार थागे कहेंगे , जानना चाहिये BHIMANDARI ॥ JBERअपघ या प्रज्ञापना नामक उपार सम्यग्ज्ञान का कारण है, इसी हेतु परपरा से मुक्तिपद को देनेयाला है, इसीसे ग्यप पा सूत है तोनी चिन को शान्ति के लिये शादि मध्य छौर शन्त मे मगल कहाजाता है ग्रप की यादि में मङ्गल निर्विघ्न शाखपरिसमाप्ति के लिये है , मध्यमगठ श्यगृहीतशास्त्र की स्थितिके लिपे है, और एन्तमगठ शिष्य प्रशियों के शास्त्र शय्यवच्छेद हो इसलिये है उभीग पदारमा या प्रज्ञापना सूत्र है इस्मे जीय थजीय शाश्व यन्ध सवर निजरा और मोक्ष का प्रापण किया है तहा प्रज्ञापना यजयक्तध्यता थिोप चरमपरिणाम सज्ञक पाच पदमें जीव ध्यजीय की प्रज्ञा पगा, प्रपोगपद शौर फ्रियापद में शाश्रय (काय वचन मन कर्मयाग) की प्रज्ञापना, कर्मप्रकृतिपदमें बन्ध मज्ञापना, ममुरघातपद में सयर निजरा यन्ध शोर मोक्ष की प्ररूपणा , वाकी स्यान थादि पदोंमें कहीं किमी कीमी प्रज्ञापना की,॥ प्रपा एम्म द्रव्य क्षेत्र फाउ पोरभाय की प्रज्ञापना है क्योंके इन चारपदार्थों के सेयाय और कोई प्रज्ञाप Tीप पदार्थ नही है इही पदार्थो के जानने से तत्वज्ञानरूप परमपुरुपार्थ सिद्ध होता है इस कारण इस्के पउने पाने में अवश्य वन करना चाहिये, परन्तु पढने का अधिकार उस्को है जोके मोक्षमार्ग का अभि पापी पौर गुरुका माज्ञाकारी हो, और इस्क दने का प्रयार भी यही है। इतिशम् । घनारस जैनप्रमाकर प्रेस नानकचद यती ।
॥ विज्ञापनम् ॥ HARRELEONISDOREACTRESERS पाचोदगठगोत्रम पथुयशा नोवारदासाभिमाशेसियतर्णितयधारसमसदीयोगु । यातायीलप्रतापसिहविजया मापातुरीयासती तस्पनीमहतायनामविदिताकुक्षमतदीयादभूत् ॥ १॥ उत्पीर्तिमदारपम दृढधी संक्ष्मीपतेः सादर श्रीमदग्यबहादुरोधनपत्ति सिंहोगुणयामकी । श्रीनागमसरसमकरोसोकोपकस्यचिरम् टोचावात्तसयुतमुलिपिनिाममुद्रयित्वाशनम् ॥ २॥ स्वापयशतस्यसंपुषपुनस्तावस्यहोपुतका गा राक्येपुर पुस्तकामिसकलान्यस्यापपरसादरम् । कुवगवागमपाठनभपठनं सस्माधयानावकाः स्थित्यत्रीजिनशासनस्य चपुनषि चानधर्महये ॥३॥ मामापनदाशयतस्य गुरुकामघापमास्योपमा मानापुस्तकपाउनेदयपुतोसेसप्रमादादपि । दुवाध्यासनवृत्तिवाप्तवतपाठनपामातम श्रीमत्पूणित रामचन्द्रगचिनिशेतमयुधामया ॥ ४ ॥ सशोभ्यातिपरिग्रमेयमितरी चापंधरैर्मुरते स्पात्तत्रापि चविम्बिदीरागतोन्मादाद पदि शाध्यमुवारडिविभवेविरूपादृष्ठितो मिथ्यादुष्कतमस्तुमसवत्सासम्मार्थप सजानान् ॥ ५॥ घमारस जमानाकर मामाचन्द यता IANSERECal ॥ FALDECXRAJSHRAH या प्रज्ञापना नामक उपान सम्यग्ज्ञान का कारण है , इसी हेतु परपरा से मुक्तिपद को देने वाला है, इसीसे स्यप यया लत है तोनी विघ्न की शान्ति के लिये छादि मध्य चौर शन्त मे मगल कहाजाता है ग्रन्थ की शादि में मङ्गल निर्विघ्न शास्त्रपरिसमाप्ति के लिये है , मध्यमग श्यगृहीतशाख की स्थितिके लिये है, और शरतमगठ शिप्य प्रशियों के शाखा थव्यवच्छेद हो इसलिये है उत्तीस पदात्मक यह प्रज्ञापना सूप्र है इस्में जीव थजीव छात्रय धन्ध सयर निर्जरा शोर मोक्ष का मरूपण किया है तहा प्रज्ञापना यमायक्तव्यता विशेष चरमपरिणाम सज्ञक पाच पदमें जीव जीव की प्रज्ञा पना, प्रयोगपद छौर क्रियापद में शाश्रय (फाय वचन मन कर्मयाग) की प्रज्ञापना, कर्मप्रकृतिपदमें बन्ध मज्ञापना, समुदघातपद मे सयर निर्जरा यन्ध थोर मोक्ष की प्ररूपणा वाकी स्थान थादि पदोंमे कहीं किमी कीसी प्रज्ञापना की , ॥ अपया इस्म द्रध्य क्षेत्र फाउ और भाव की प्रज्ञापना है क्योंके इन चारपटार्थों सेयाय और कोई प्रज्ञाप नीय पदार्थ नहीं है यही पदार्थो के जानने से तत्वज्ञानरूप परमपुरुपार्थ सिद्ध होता है इस कारण इस्के पढने पढाने में अवश्य यत्न करना चाहिये, परन्तु पढने का अधिकार उस्को है जोके मोदामार्ग का अभि लापी और गुरुका आज्ञाकारी हो, और इस्के दने का अवशर भी यही है। इतिशम् ॥ यनारस जैनप्रभाकर प्रेस नानकचद यती h
पत्राक
विषय और प्रश्नादि
पत्राक
विषय और प्रश्नादि
पृथ्वीकाय के नेद
२३ (चतुरिन्द्रिय ससार समापन्न जीव पन्न०)
थकाय के नेद
पचेद्रिय ससार समापन्न जीय पत्नयणा चार
तेजस्काय के नेद
२८
गति के नेद से चार प्रकार ४६
वायुकाय के नेद
{ इत्यादि २९
नारकी सात नेद
वनस्पति काय के नेद गुच्छा गुल्म वल्ली/ २९
तिर्यग्योनिक त्रिविध जल पल खचर, इनकन्नी
(एकेन्द्रिय ससार समापन जीव पवयणा कही) नेद मच्छादिक, उनके नी नेद विस्तार से कहे| १७
(तिर्यग्योनिक पचेद्रिय ससार समापन्न०)
द्वीन्द्रिय ससार समापन्न जीव के थनेक नेद ४३ मनुष्य के नेद दो समूर्छिम गर्नज , कहा वह
(द्वीन्द्रिय ससार समापन्न जीय पत्रवणा)
पैदा होते है किस्तरह होते है इत्यादि एकोसक
प्रीन्द्रिय पनवणा के चनेक नेद उवाइया इत्यादि १५ शादि नेद , शक ययन थादि नेद , शार्य १
(जीन्द्रिय ससार समापन्न जीय पन्लयणा कही)
इत्यादि ४८
चौरिन्द्री पन्लवणा के थनेक नेद थधिय पोप्ति ब्राह्मी लिपि में १८ तरह का लेख्य विधान है | ६२
य इत्यादि १५ (मनुष्य पचेद्रिय ससार समापन्न जीव प०)
नफल पिठी १ ६ श्रीमस्जिनवरमसारसासशिप्रवाधिवधर्मरवधु भी ५ रायपन पविमिरपहादुरप सविनयमावेदनम् । पागे, ममे हमारे पाप की ऐसी रचाईबितासिनो मागम पोपुमा भूम टोग और पापाटी सहित पाच एचीवापी वर्षे और ना पावर्णपटन पाठन के लिये पाचसो खानमें पुस्तकास पखापित हो सो पर पति पानरची बावा परंतु विन महाशों बोदय र पुसबसनेमा हो उनलोगों के निमितपदि गायबोबासाहो वो बेचने वाले पाचसो पापी मनबुतुसादी मोररे की बपवा सो पार्वे यह पुरतों में बीममन से प्राप पहंगा पये मुमम् । सम्बत् । १८३ । मि० । ।०।११ २० चैन बुर सापटी पार मुरसीदाबाद पात्रोमांच नफल चिठी २ भीविषिविद्याविचारतत्परपु मनुसुमारटो पायसम्पादक महाक्षयेषु प्रतिनिवदमम् । वोदि पर पापणा द्रम देहरीदनवाले लोगों के लिये सुसाइटी पोरसे पैंतालिसों बनाममी पाचसी पुखद पवा सन 1 पाहा विषय में पाया तो में खोबार परता कि पाप जैन एसाइटी बी परप से पामम की प्रत्यक पांच र सो पुस्तकें बेचन गते बपदा से परतु पापमो अधिक कपनको प्राधा में नहीं देवा परि और कोई बपवाना बातो सचित विपास मुब सपा के स्पोरिन ग्रन्सीपर रजस्टरी पुति, भने मुनम् । सम्बत् । १३ । मि०।०० १० रायनपतितिर बहादुर भार मुरसीदाबार MPIRITE: पार्यसम्पादक ही पेट पत्राक पनाक विषय और प्रश्नादि विषय और प्रश्नादि प्रश्न, ८५ घूमप्रभा के नारकी का प्रश्न ९१ कहा द्वीन्द्रिय पर्याप्त अपर्याप्त के स्थान कहे ८५ तमापृथिवी के पर्याप्त अपर्याप्त नारकी का ९२ कहा श्रीन्द्रिय पर्याप्त पर्याप्त के स्थान कहा ८६ तमतमा नारकी प० अप० स्थान का प्रश्न ९२ कहा चौरिन्द्रिय पर्याप्त पर्याप्त के स्थान कहे ८६ पर्याप्त अपर्याप्त पञ्चन्द्रिय तिर्यञ्च के स्थान कहा नारकी पर्याप्त अपर्याप्त के स्थान कहे ८७ मनुष्य पयाप्त अपर्याप्त के स्थान प्रश्न, उपपात, कहा नारकी वसते हैं समुहघात, स्वस्थान ९४ कहा रत्नप्रमापृथिवी के पर्याप्त अपर्याप्त नारकी भवनवासि देव प० अप० स्थान का प्रश्न भवन घसें है और उनके स्थान कहे। ८८ यासि के रहने का स्थान और बहुतसा वर्णन कहा शर्कराप्रमापृथिवी के पर्याप्त अपर्याप्त नार किया है। ९१ की के स्थान कहे , कहा यह यसै है| ८९ असुरकुमार स्थान प्रश्न कहा रहते हैं इत्यादि यालुकाप्रमाके पजत अपात नारकी के स्थान असुरकुमारी का वर्णन लाकपाल अग्रमहिपी पर्पदा अनीक शादिका वर्णन है) ९९ पकममा के नारकी का प्रश्न ९१ दक्षिण दिशा के असुरकुमारो का अधिकार १०२ और धसन का, ८९
पिपय और प्रश्नादि
पनाक
विषय और प्रश्नादि
पन्नाक
देयता चारप्रकार कहे नवनपति जोतिथी दान 'कहा बादर पृथ्वीकाय अपर्याप्तक के स्थान कहे ७८
प्यन्तर वैमानिक' ७३ का सूक्ष्म पृथ्वी काय पर्याप्त अपर्याप्त के स्थान हैं ७९
नयनपत्ति प्रकार असुरकुमार दि
घाटर पकाय पर्याप्तक के स्थान का प्रश्न ८०
यानय्यन्तर ८ जर्दै किन्नर कि पुरुपादि ७५ वावर शुष्काय छपर्याप्तक के स्थान का प्र० ८१
जासिपी ५ प्रकार चन्द्र सादि
यावर तेजस्काय पर्याप्तक के स्थान का अधिक ८१
येमानिक २ जे सौधर्मावि ठेवलोक गत वादर तेजस्काय थपर्याप्तक के स्थान का नि०
८२
शोर कल्पातीत, फिर उनके ना कहे
सदन तजस्काय पर्याप्त थपर्याप्त के स्थान का प्र०
८२
(पद्रिय ससार समापन्न जीव पसरणा कही) यादर वायुकाय पर्याप्तक के स्थान का निर्णय | ८२
n जीय पत्नयाा कही।
वादर बायुकाय पर्याप्तक के स्य न का निर्णय ८३
॥ पन्लवणा नाम प्रथम पद जाया ॥
सूक्ष्म वायुकाय पर्याप्त अपर्याप्त केस्थान का प्र०
वादर यनस्पतिकाय पर्याप्त क स्थान का शुधि० ८१
२ स्यान नामक पद का प्रारम्न ॥
याटर बनस्पतिकाय थपर्याप्त के स्थान का प्र० ८१
कहा यादर पृष्यीकाय पर्याप्तक के स्यान कहे सूदन वनस्पति पर्याप्त अपर्याप्त के स्थान का
७५
.
पत्राक विपय और प्रनादि पन्नाक विपय और प्रस्तादि मल्लदेव स्थान का अधिकार १२४ यधिकार) १३० लान्तक देव लोकाधिकार १२५ सिझो के वर्णन विपय की गाथा कई एक १३२ महा शुक्रदय लोक स्थानाधिकार १२५ (स्यान नामक दूसरा पद पूर्ण) १३७ सहस्रार देवलोक का अधिकार १२६ मानत प्राणत देवलोक का प्रश्न १२६ ३ पद का प्रारम्भ ऊया है । थारण अच्युत देवलोकाधिकार १२६ दिसिगइइदियकाए यह द्वार निरूपण गाथा २ अधस्तन ग्रेधेयक विमान का प्रश्न १२८ प्रथम दिग्द्वार मध्यम ग्रेधेयक विमान के विपत्र का प्रश्न १२९ दिसाणुवाएण सहयोया जीवा पच्छिमेण उपरिम ग्रेवेयक विमान का निर्णय १२९ अनुप्तरोपपातिक प० थप० देवस्थान शोर यह सर्वस्तोक पूधित्रीकाय दक्षिण मैं इत्यादि १३८ कहा वसे है| १३० सर्यस्तोक थप्काय पश्चिम में १३८ कहा सिद्धों के स्थान और कहा सिझ रहते है, सर्वस्तोक तेजस्काय दक्षिण उत्सर मे १३८ इत्यादि इपत्माम्नाराधिकार तथा सिझी का सर्वस्तोक वायुकाच पूर्व मे १३८ इत्यादि पत्राक पत्राक विपय और प्रश्नादि उप्तर दिगा के असुरकुमारों का अधिकार नागफुमारी के स्थान रहने का स्थान १०१ दक्षिण के नागकुमारो का अधिकार उत्तर के नागकुमारों का अधिकार १०६ सुपर्णकुमारों के स्थान और रहना कहा है दक्षिणसुपणकुमाराधिकार उप्तरसुपर्णकुमाराधिकार पोयष्ठि असुराण इत्यादि गाया ७, काला असु एकुमारा इत्यादि गाथा १ कही है| १० पानव्यन्तर देयों के स्थान और वसने का प्र० पिसाघदेयाधिकार, रहना उनका ९०९ दक्षिणपिसाचाधिकार १२ ११३ उप्तर पिसापों में विशेष का विपय और प्रश्नादि १०३ / एव भूतों का भी अधिकार जाणना यायत् गधर्म, पर्यन्त कहना इत्यादि ११४ १०५ अणपनी पणपन्नी देवतों के स्थान, रहना इ- त्यादि अधिकार विस्तार से कहा है| ११४ १०७ जोतिषी देवताओं के स्थान , रहना इत्यादि नि० ११५ १०७ वेमानि को के स्थान, रहने का वर्णन विस्तार से | ११७ १०७ सोधर्मदेव स्यान, कहा है इत्यादि वर्णन ११९ 'शकेंद्र का वर्णन विस्तार से १२० ईशानदेवस्थान कहा है इत्यादि अधिकार १२१ ईशानेन्द्राधिकार विस्तार से १२२ सनत्कुमार देवताओं का अधिकार १२२ सनत्कुमारेन्द्र का अधिकार १२३ माद देवस्थानाधिकार १२३ पन्नाक पनाक विपय और प्रश्नादि विपय और प्रश्नादि यह सइद्रिय एकेद्रिय द्वीन्द्रिय त्रीन्द्रिय चतुरिन्द्रि ॥ तिसरा द्वार समाप्त हुआ। य पचेंद्रिय अनिद्रिय इन मे कौन किस्से अल्प ॥ चौथा कायद्वार कहते हैं । अधिक तुल्य और विशेपाधिक होय ११६ | सकाय पृथिवीकाय अप्काय तेजस्काय वायुकाय सइद्रिय एकेंद्रिय द्वींद्रिय त्रींद्रिय चतुरिन्द्रिय पचे बनस्पतिकाय त्रसकाय अकायिको मे घरपादि| ११८ द्रिय अपर्याप्त को मे कौन किस्से अल्पादि ११६ | सकाय पृथिवीकाय अप् तेज सकाय पृथिवीकाय अप् तेज यायु यनस्पति और एकन्द्रिय पर्याप्त अपर्याप्त का अस्पादि जसकाय अपर्याप्तक मे अल्पादि प्रश्न १४९ द्वींद्रिय पर्याप्त अपर्याप्तका अल्पयाहुत्वादि सकाय पृथियोकाय आदि यायत् पर्या०मेअल्पादि १४९ प्रीद्रिय पर्याप्त अपर्याप्तका भरपयहुत्यादि सकाय पजत अपजत मे अल्पादि चौरिन्द्रिय पर्याप्त अपर्याप्त का अरपादि पृथियीकाय पजत्त अपजप्त मे अरपादि पचेद्रिय पर्याप्ता अपर्याप्त का अरपादि अप्काय पजप्त अपजत्त मे अरपबहुत्वादि सइद्रिय एफेंद्रिय द्वाद्रिय त्रींद्रिय चतुरिन्द्रिय प तेजस्काय पक्षप्त अपडात मे अरपादि चेंद्रिय पर्याप्त अपर्याप्त मे कौन किस्से अल्पा वायुकाय पजात अपात में अरपादि दि प्रश्न १९८ वनस्पतिकाय पजात अपात्त मे अल्पादि ११७ १४० पत्राक १३९ द्वार चला है॥ गति विपय और प्रश्नादि सघस्तोक घनस्पतिकाय पश्चिम में सर्यस्तोक द्वीन्द्रिय पश्चिम दिशा में सर्यस्तोक प्रीद्रिय पश्चिम दिशि में सयस्तोक चौरिन्द्री पश्चिम दिशि में सब धोका नारकी पूर्व पश्चिम में एय सातो नरक के नारकी का प्रश्न सर्व पोका पर्चेद्रिय तिर्यच पश्चिम में सय घोका मनुष्य दक्षिण उत्तर में सर्य घोडा जवनवासी देय पूर्व पश्चिम सर्व थोझा यानव्यन्तर देव पूर्व पश्चिम सय योका जोतिपी देय पूर्व पश्चिम सष घोफा सौधर्म में देय पूर्व पश्चिम इशान में सौधर्म की तरह विपय और प्रश्नादि पत्राक १३८ सर्वस्तोक सनत्कुमार देय पूर्व पश्चिम १४३ एव माहेन्द्र में, एव सहस्रार थादि देवलोक प्र० १४३ १३९ सर्व थोझा सिझ दक्षिण उत्तर दिशा मे १४५ १३९ ॥ पहला दिशा द्वार जा ॥ १३९ ॥ दूसरा १३९ एह नारकी तिर्यंच मनुष्य देव चौर सिझी में की १११ न किस्से थोफा कौन किस्से बात कीन किस्से १४२ तुल्य और कौन किस्से विशेपाधिक है इत्यादि ११५ ११२ एह नारकी तिर्यच तिर्यचणी मनुष्य मनुष्यणी दे ११२ पता देवी और सिछ इन आठो गति में कौन कि स्से अल्प यहुत तुल्य और विशेपाधिक है| १४५ । दूसरा द्वार हुआ॥ ॥ विसरा द्वार प्रारम्म ११२ ११२ ११३
पत्राक
पत्राक
विपय और प्रनादि
विपय और प्रश्नादि
॥ पचम द्वार आरम्म ॥
॥ पाठया द्वार कहते है ।
जीघ सयोगी मनोयोगीधाग्योगी काययोगी शौर यह जीव सम्यग्दृष्टी मिथ्यादृष्टी सम्यमिथ्यावृष्टी
अयोगी इनमें कौन किस्से थोफा घणा इ० १६७ इनमे कौन किस्से थोडा घणा इत्यादि | १६९
(पचम द्वार पूर्ण)
(नवा द्वार हुमार
॥ ब्छा द्वार कहै है।
॥ दाम द्वार कहे है॥
जीव सवेद स्त्रीवेद पुरुपवेद नपुसकयेद और अये यह जीव भाभिनियोधिज्ञानी श्रुतज्ञानी अब
दक इनमें कौन किस्से थोझा घणा इत्यादि प्रश्न १६७ विज्ञानी मनपर्यनज्ञानी केवलज्ञानी इनमे कौन
(बहाद्वार पूर्ण हुआ)
किते थोडा इत्यादि | १६९
॥ सातमा द्वार कहें है ॥
एव ज्ञान प्रश्न निर्णय
१७०
यह जीव सलेश्य कृलेशी नीललेली कापोत एव ज्ञान ५ अज्ञान ४ प्रश्न समुदाय
से
१७०
खेशी तेजोलेशी पालेशी शनिलेशी और अलेशी
(१०द्वार जजया)
इनमे कौन किस्से थोडा और घणा इत्यादि १६८
॥ ११ द्वार कहे है।
(सातमा द्वार हुआ)
यह जीव चक्षुदर्शनी चक्षुदर्शनी शवधिदर्शनी
एव अपकाय प्रश्न निर्णय विपय और प्रश्नादि पत्राक विपय और प्रश्नादि पत्राक प्रसकाय पर्याप्ता पर्याप्त में कौन किस्से थोझा इ० १५१ यह सकाय पृषियीकाय काय तेजस्काय वा सूदन तेजस्काय प्रश्न निर्णय १५३ ३५३ युकाय यनस्पतिकाय और प्रसकाय पर्याय एवं वायु बनस्पति निगोद मन्न निर्णय १५३ पर्याप्त फोन फिस्से पोळा इत्यादि | १५१ १५१ | यह वादर पृयियी थप् तेज घायु वनस्पति प्र यह सूदन पृषिधीकाय थपू तेज वायु पनस्पति त्येक शरीर वाटर घनस्पति धादर निगोद शोर चौर निगोद इन में कौन किस्से पोहा इ० १५१ चादर प्रसकायिको मैं कौन क्स्सेि थोडा इ० १५१ सूदन थपर्याप्त पुषियी शुप्तेज वायु वनस्पत्ति यादर पृषियीकाय शादिशपर्याप्त प्रश्न निर्णय १५४ चौर निगोद कौन किस्से घोडा यकृत इत्यादि १५२ बादर पृथिवीकाय थादि पर्याप्त प्रश्न निर्णय १५५ सूक्ष्म पर्याप्त पृषियीकाय शादि का प्रश्न १५२ वादर पूषिधीकाय आदि पर शप० प्रश्न (तिसरा द्वार पूर्ण) सूक्ष्म पृथिवीकाय थादि यायत् वादर पृथियी ॥ चौथा द्वार कहे है। काय थादि में कौन किस्से थोडा इत्यादि प्रश्न सूदन पर्याप्ता पर्याप्त में कौन फिस्से घोफा सूदन पृषिधीकाय पर्याप्त थपर्याप्त कौन किस्से | १५३ (चौथा द्वार पूर्ण) निर्णय १६०
पत्राक
पत्राक
विषय और प्रचनादि
विपय और प्रश्नादि
॥ पचम द्वार आरम्म ।
॥ आठया द्वार कहते है।
जीय सयोगी मनोयोगीयाग्योगी काययोगी शौर यह जीव सम्यग्दृष्टी मिथ्यादृष्टी सम्यमिय्यादृष्टी
अयोगी इनमे कौन फिस्से 'घोसा घणा ६० १६७ इनमे कौन किस्से थोडा घणा इत्यादि १६९
(पचम द्वार पूर्ण)
(नवा द्वार हुप्रा)
॥ बघा द्वार कहै है ॥
॥ दशम द्वार कहे है।
जीव सवेद स्त्रीवेद पुरुषवेद नपुसकर्वेद और अय यह जीव भाभिनियोधिकज्ञानी श्रुतज्ञानी अन
दक इनमें कौन किस्से थोफा घणा इत्यादि प्रश्न १६७ विज्ञानी मनपर्ययज्ञानी केवलज्ञानी इनमे कौन
(छाद्वार पूर्ण हुमा)
कि थोढा इत्यादि १६९
॥ सातमा द्वार कहे है॥
एव शज्ञान प्रश्न निर्णय
१७०
यह जीव सलेश्य कृतलेशी नीललेशी कापोत
एव ज्ञान ५ अज्ञान ७ प्रश्न समुदाय
से
१७०
खेगी तेजोलेशी पदालेशी कलेशी और अलेशी
(१०द्वार उमा)
इनमे कौन किस्से घोडा और घणा इत्यादि १६८
॥११ द्वार कहे है ॥
(सातमा द्वार हुआ)
यह जीव चक्षुवर्थनी यचक्षुदर्शनी शवधिदर्शनी
पत्राक
विपय और प्रश्नादि
पत्राक
फेवदर्शनी इनमें कौन फिस्से घोहा घणा है| १७०
(११ हार पूर्ण कथा)
॥ १२ द्वार कहै है।
जीय सयत यसयत सयतासयत नो सयत नो|
असयत नो सयतासयत इनमें कौन फिस्से थो
का इत्यादि। १७०
(१२ या द्वार जथा)
॥ १३ या द्वार कहे है।
यह जीय साकारोपयोगी वनाफारोपयोगी में
कौन फिस्से घोफा घणा इत्यादि प्रश्न १७१
(१३ या द्वार पूर्ण था)
॥ १७ वा द्वार कहते हैं।
जीव शाहारक अनाहारक में कौन किस्से योगा
विपय और प्रश्नादि
इत्यादि| १७१
(१४ वां द्वार पूर्ण कथा)
॥ १५ वा द्वार कहै है।
जीय नासक अनासक में कौन फिस्से थोका १७१
(१५ वा द्वार कहा)
॥ १६ या द्वार कहते हैं।
जीव परिध थपरित नो परित्त नो थपरित में
कौन किस्से योफा घणा १७१
(१६ द्वार जथा)
॥ १७ वा द्वार कहते हैं।
जीव पर्याप्त थपर्याप्त नो पर्याप्त नो थपर्याप्त में
कौन किस्से घोफे घणे है| १७२
(१७ द्वार कथा)
पत्राक पत्राक विपय और प्रश्नादि विपय और प्रश्नादि ॥ १८ द्वार कहते हैं। काय जीवास्तिकाय पुद्गलास्तिकाय प्रक्षासमर मे यह सूक्ष्म यादर नोसूम नोचादरों में कौन थोमा १७२ कौन किस्से द्रव्यार्थता से योजा घणा इत्यादि १७३ (१८द्वार जाश) एव प्रदेशार्थतासे भी प्रश्न निर्णय १७३ ॥ १९ वा कहै है॥ धर्मास्तिकाय आदि द्रव्यार्थ प्रदेशार्थ से प्रश्न १७४ यह जीव सज्ञी सज्ञी नो सज्ञो नो असज्ञी में (२१ द्वार हुआ) कौन किस्से थोझा इत्यादि| १७३ ॥ २२ वा द्वार कहे है। (१९द्वार जाआ) जीय चरम अचरम में कौन किस्से धोडा घणा ॥ २० द्वार कहे हैं। इत्यादि | १७७ जीय भयसिद्धिक शमग्रसिझिक नो भवसिद्धिक (२२ या वार हुया) नो अभवसिछिको में कौन किस्से थोफा इ० १७३ ॥ २३ वा द्वार कहे है। (२० द्वार जमा) यह जीय पुद्गल अक्षासमय सर्वव्य सर्वप्रदेश ॥ २१ वा द्वार कहे हैं। सर्व पर्याय मे कौन किस्से थोडा इत्यादि नि० | १७८ यह धर्मास्तिकाय धर्मास्तिकाय आकाशास्ति (२३ द्वार पूर्ण हुआ)
पत्राक
विषय और प्रधनादि
पत्राक
फेवलदर्शनी इनमें कौन किस्से थोडा धणा है| १७०
(११ द्वार पूर्ण जथा)
॥ १२ द्वार कहे है॥
जीय सयत यसयत सयतासयत नो सयत नो
असयत नो सयवासयत इनमें कौन किस्से थो
का इत्यादि | १७०
(१२ बा द्वार जाथा)
॥ १३ या द्वार कहै है॥
यह जीय साकारोपयोगी शनाफारोपयोगी में
कौन किस्से घोफा घणा इत्यादि प्रश्न| १७१
(१३ या द्वार पूर्ण नाथा)
॥ १४ वा द्वार कहते हैं।
जीव थाहारक अनाहारक में कोन फिस्से योफा
विपय और प्रश्नादि
इत्यादि] १७१
(१७ वा द्वार पूर्ण जथा)
॥ १५ वा द्वार कहे है।
जीय नासक अन्नासक में कौन किस्से योगा १७१
(१५ वा द्वार कहा)
॥ १६ वा द्वार कहते हैं।
जीव परित थपरित नो परित्त नो थपरित मे
कौन किस्से थोफा घणा
(१६ द्वार छाया)
॥ १७ वा द्वार कहते हैं।
जीव पर्याप्त थपर्याप्त नो पर्याप्त नो पर्याप्त में
कौन किस्से घोफे घणे ह| १७२
(१७ द्वार जथा)
पत्राक पन्नाक ॥ विपय और प्रश्नादि विपय और प्रश्नादि चौथा पद शारम्म ॥ पर्या० पर्या० सूदन पूथिवीकाय की स्थिति २१२ नारकी की कितने काल की स्थिति २०५ | थप्काय स्थिति प्रश्न २१३ पर्याप्त तथा पर्याप्त नारकी की कितनी स्थिति २०५ पर्या० थपर्या० थप्काय की स्थिति २१३ रत्नप्रमादि सात नरक के पर्याप्त छपर्याप्त नार यादर शपकाय तथा पर्या० थपर्या० वादर य की की स्थिति का प्रश्न २०६ पूकाय की स्थिति २१७ देवता की कितने काल की स्थिति २०८ एव वायुकाय वनस्पतिकाय पर्या०पर्या की पर्याप्त अपर्याप्त देयता की कितनी स्थिति २०९ सूक्ष्म बादर थादि की स्थिति का प्रश्न | २१४ एय भयनवासी शादि देवता देवी पर्याप्त अप द्वीन्द्रिय तया पर्या० अपर्या० की स्थिति २१५ र्याप्त का की स्थिति का निर्णय २०९ एष त्रीन्द्रिय चतुरिन्द्रिय पर्या० थपर्या० स्थिति | २१६ पृथिवीकाय की कितने काल की स्थिति २१२ पचेन्द्रिय तिर्यञ्च योनिक की स्थिति एवं पर्याप्त थपर्याप्त पूधिवीकाय की स्थिति का एव पर्या० शपर्या० पञ्चेन्द्रिय तिर्यच की स्थिति २१७ प्रश्न २१२ समूर्छिम पर्चेद्रिय तिर्यच की तथा पर्या० शप सूक्ष्म पूधियीकाय की स्थिति का प्रश्न २१२ ० समूर्छिम पचेद्रिय तिर्यच की स्थिति | २१७ २१६ पत्राक पत्राक विपय और प्रश्नादि विपय और प्रश्नादि ॥ २० वा द्वार कहे है। शी अनन्तप्रदेशी स्कन्ध इनमें द्रव्यार्य प्रदेशार्य क्षेत्रानुपातले उठलोफ आदि में जीवों की संख्या १७८ | द्रव्यार्थ प्रदेशायसे कौन किस्से योझा इत्यादि | १९३ (२० चा द्वार हुभा) एक प्रदेशायगाढ सख्यात असख्यात प्रदेशाय ॥ २५ वा कहते हैं। गाठ पुगटों में द्रय्यार्य प्रदेशार्थ द्रश्यार्य प्रदेशा जीय थायुफर्म के धधक अयधक अपर्याप्त प से कौन किस्से योगा घणा | १९६ याप्त सप्त जागर समोहित समोहित सातावे एक समयस्थितिक सस्यात शसस्यात समय दक सातावेदक इद्रियोपयोगयुक्त नोइद्रियो स्थितिक पुद्गल में द्रव्यार्थ प्रदेशार्थ द्रव्यार्थ प्र पयोगयुक्त साकारोपयोगयुक्त अनाकारोपयोग देशार्थ से तय | १९७ युक्त में कौन किस्से थोझा घणा इत्यादि १९१ | एव एकगुण काटे का प्रश्न १९८ (२५ था द्वार कहा) (२६ द्वार पूर्ण ऊत्रा) २६ वा द्वार कहे है। सर्व जीव थप बहुत्व महा दक क्षेत्रानुपात से पुद्गल का त्रैलोक्य में अपादि ९३ ॥ तीसरा पद पूर्ण कथा । यह परमाणु पुद्रख सख्यातप्रदेशी शसख्यातप्रदे।
पत्राक पत्राक विपय और प्रश्नादि विपय और प्रश्नादि एव ईशान देव देवी प००प० शादि की स्थिति | २२७ असुरकुमार के अनन्त पवाय कहे २४२ सनत्कुमार देवी देय प० अप० आदि स्थिति | २२८ ] एक जैसे नारको तया प्रसुरकुमार के अनन्त ब्रह्मदय देवी से लेके अच्युत देवलोक के देव पर्याय कहे तैसे नागकुमार यावत् स्तनितकु- ताओ की स्थिति सविशेप २२९ मार को कहना। २११ नव ग्रेयेयक विमान देय प० अप० स्थिति २३२ | पृथिवीकाय के अनन्ता पर्याय कहे २४१ विजय वैजयन्त जयन्त अपराजित देव प० अप्काय के अनन्ता पर्याय कहे २४४ अप० स्थिति | २३५ तेजस्काय के अनन्त पर्याय २१५ सार्थसिह देव प० अप० स्थिति २३५ । वायुकाय के अनन्त पर्याय २१५ (चौधा स्थिति पद पूर्ण हुआ) वनस्पतिकाय के अनन्त पर्याय २१५ वैरिद्री के अनन्त पर्याय २४६ ॥ पाचमा पद प्रारम्म ॥ तरिद्री चौरिद्रो तया पञ्चेन्द्रिय तिर्यञ्च के कितने भेर्दै पर्यव है, जीव अजीवके पर्यय २३५ अनन्ता पर्याय २४७ नारकी के अनन्ता पर्याय कहे २३७ / मनुष्य के अनन्ता पर्याय २१७ पत्राक पत्राक विषय और प्रचनादि विपय और प्रइनादि गन्नप्युरक्रान्तिक पर्चेद्रिय तिर्यच तथा पर्या० छ। एव मनुष्य पङ्मत्त थपजत्त समूच्छिम गर्नेज | पर्या० गतष्युत्क्रान्तिक पचेंद्रिय की स्थिति २१७ मनुष्य त्यिति विपय | २२२ ॥6एवं जलचर पर्या० पर्या० पचेद्रिय तिर्यच यानय्यन्तर देयता देवी पर्या० पर्या रियति | २२२ स्थिति | २१७ | ज्योतिफ देयता ठेयी पर्या० पर्या० स्थिति २२३ एय समर्छिम पर्या० थपतथा गर्नय्युत्क्रा चन्द्रयिमान में देयता पा० शपया० स्थिति २२८ न्तिक पर्या० थपर्या० पचेंद्रिय जलचर स्थिति | २१७ | सूर्यविमान मे देवता तथा टेयी प००प० स्थिति | २२८ एच सन्नेद स्यालघर पचेंद्रिय तिय स्थिति २१८ ] ग्रहविमान में देता तथा दयी प००प० रियति | २२५ उरपरिसर्प स्थलचर पर्या० थपर्या० पर्वंद्रिय नक्षन विमान देन दयी प० शुप० स्थिति २२५ तारा विमान देय देयी प० थप० स्थिति २२६ समूच्छिम पर्या० अपर्या० स्पलचर उरपरिसर्प वैमानिक देव देवी प० प० की स्थिति २२६ पचेंद्रिय २२० सौधर्म देय देवी पया० थप० परिगृहीत शप एव मुजपरि सर्प की स्थिति २२० (रिग्रहीत पर्या० थप० एवं थाठाया १२ मे एवं सघर पपेंद्रिय तिर्यप स्थिति २२. स्थिति २१९ स्पिति | २२६ पनाक पत्राक विपय और प्रश्नादि विषय और प्रवनादि यक्तय्यताधिकार २५८ केवलज्ञानी मनुष्य के शनन्ता पर्यव कहे २६५ जघन्यगुण कालकादि पचेद्रिय तिर्यंच पर्यय २५९/शजीव पर्यव कितने भेदे २६६ जघन्यादि आमिनियोधिकज्ञानी पचे० तिर्य० शुरूपी अजीव पर्यय दशमेदे कहे हैं पर्यव २५९ रूपी थजीय पर्याय चार न कहे २६६ जघन्यायधिज्ञानी पचेद्रिय तिर्यच पर्यव २६० परमाणु पुद्गल पर्यय वक्तव्यताधिकार उत्कृष्टायधिज्ञानी इसीतरह से कहना २६१ द्विप्रदेशी शादि स्कन्ध पर्यव वक्तव्यताधिकार | २६७ वधिज्ञानी तथा विमगज्ञानी कहना २६१ / एक प्रदेशायगाढ पुद्गल पर्यव प्रश्न जघन्यायगाही मनुष्य के कितने पर्याय कहे २६१ | एक समयस्थितिक पुद्गल पर्यय प्रश्नोतर २७० जघन्यस्थितिक मनुष्य के फितने पर्याय कहे २६२ एकगुण कालक पुद्गल पर्यव प्रश्न २७१ जघन्यगुणकालक मनुष्य के पर्याय २६२ | जघन्यायगाह द्विप्रदेशी शादि स्कन्ध पर्यय २७२ जघन्यानिनिवोधिक ज्ञानी मनुष्य के पर्यय २६३ जघन्यस्थितिक परमाणुपुद्गल पर्यवाधिकार २७५ जयन्पावधिज्ञानी मनुष्य के पर्यय फितने है २६१ जघन्यगुणकाठ आदि परमाणुपुद्गल पर्ययाधि० २७५ जैसे अवधिज्ञानी तैसे मन पर्यव ज्ञानी २६१।८ स्पर्श की वक्तव्यता कहना २७६ विपय और प्रश्नादि पत्रांक विपय और प्रश्नादि पत्राक जघन्य उत्कृष्ट अजघन्यानुरकृष्ट अवगाहना के जघन्य उत्कृष्ट मध्यम प्रवगाहना क असुरकुमार नारकी के अनन्ता पर्याय २१८ को अनन्ता पर्याय कहे | २५२ .ए. जघन्य उत्कृष्ट मध्यम स्थिति के नारकी के अः एव स्तनितकुमार पर्यन्त कहना २५२ नन्त पर्याय कहे | २१९ | जघन्यायगाहना के पूपियीकाय पर्ययाधिकार २५२ जघन्य उत्कृष्ट मध्यम गुण काठक नारकी के एव उत्कृष्ट मध्यमावगाहना के पृथिवी पर्यय | २५३ पर्यव वक्तव्यता] २५० जघन्य मध्यम उत्कृष्ट स्थितिक पृथियी पर्यय | २५३ जघन्य उत्कृष्ट मध्यम मामिनियोधिक ज्ञानी जैसे पहले कहे तैसे सर्व आलावा यनस्पतिकाय नारकी की पर्यय वक्तव्यता २५१ पर्यन्त सर्व वक्तव्यता कहनी २५३ एव श्रुतज्ञानी तथा अवधिज्ञानी नारफी के प जघन्यायगाहनादि द्वीन्द्रिय पर्याय यक्तव्यता २५३ र्यव कहना अज्ञान भी कहना | २५१ एवं त्रीन्द्रिय चतुरिद्रिय पर्यव वक्तव्यता धिकार | २५६ जघन्य उत्कृष्ट मध्यम चक्षुदशनी नारकी के जघन्यायगाहनक पधेन्द्रिय तियच पर्यव व- अनन्ता पर्याय कहे | २५१ कम्यताधिकार २५७ एव मचक्षुदर्शनी अवधिदर्शनी को कहना जघन्य आदि स्थितिक पद्रिप सिर्यच पर्यष | २५८
पन्नाक
पत्राक
घिपय और प्रश्नादि
विषय और प्रश्नादि
सवार्थसिद्ध विमान देवीपपात विरहकालप्रमाण २९१
क्या सान्तर उपजे के निरन्तर २९२
सिझोपपात विरहकालप्रमाण
२९१ सौधर्म आदि देवलोक यावत् सिछ सान्तर उप
रत्नप्रभा आदि पृथियी के नारकी का च्यवन काल जे के निरन्तर, एव उद्वर्तनाभी सिद्धो को नोड
यिरहाधिकार एवं सिझो को छोड के अनुत्तर वि
कर कहनी २९३
मान तक च्यवन काल विरहाधिकार २९१
(३ द्वार हुआ पूर्ण)
(२ द्वार हुआ पूर्ण)
नारकी एक समय में कितने उपजे, एव ७ नरक
नारकी सान्तर उपजे के निरन्तर उपजे , मनुष्य के नारकी कहे, असुरकुमार एक समय में कित
सान्तर उपजे के निरन्तर उपजे २९१
ने उपजे, एव स्तनितकुमार पर्यत कहना २९३
देव सान्तर उपजे के निरन्तर, राप्रभा आदि ७ पृथिवीकाय यायद्वनस्पतिकाय एक समय मे कि
पूधिषी के नारकी सान्तर उपजे के निरन्तर ,
असुर कुमार सान्तर उपजे के निरन्तर , एय स्त वेरिद्रिय एक समय में कितने उपजे , एव चींद्रिय
नितकुमार पर्यन्त कहा , पूधिया काय यावद्वन चतुरिट्रिय समूच्छिम पचेद्रिय तिर्यच , गर्नय्यु
स्पतिकाय वीद्रिय यावत्पचेद्रिय तियेच मनुष्य रक्रातिक पचेद्रिय तिर्यच , सम्मूचिम मनुष्य
तने उपजे २९४
पत्राक विपय और प्रश्नादि (पायमा पद पूर्ण दुमा) ॥१०॥ ॥ छठा पद आरम्म ॥ नरक गति में कितने काल विरह है उपपातका | २८६ तिर्यच गति में कितना विरह उपपात मे २८६ मनुष्य गति, देवगति, और सिदिगति मे उप जने का कितना यिरह २८६ एव उद्वर्त्तना मी चारों गति में कहना रनममा भादि सात नरक पृथियो मे उपपात विरह काल २८७ असुरकुमार आदि यायत्स्तनितकुमार पर्यन्त उपपात विरह काल २८८ पृथिवी काय उपपात विरहकालाधिकार २८८ विपय और प्रश्नादि पत्राक एष अप् तेज वायु बनस्पतिकाय उपपात घि रहकाउ २८९ ट्ठीन्द्रिय उपपात विरहकाल, प्रोन्द्रिय चतुरि न्द्रिय उपपात विरह २८९ सम्मूर्छिम पचेट्रिय तिर्यच उपपात विरहकाल २८९ गर्भय्युत्क्रान्तिक पचेंद्रिय तियच उपपात विर हकाल| २८९ सम्मूच्छिम तथागर्भज मनुष्य उत्पति विरहाकार २८९ सौधर्म आदि १२ देवलोक देयोत्पत्ति विरह कालाधिकार २९० ग्रेयेयक चिमान देयोत्पत्ति विरह, तथा विजय वैजयन्त जयन्त अपराजित देवलोक देनोप पात विरहकालाधिकार २९१ २८७
पत्राक
पन्नाक
उपजे ३१२
उपजे ३१३
विषय और प्रश्नादि
विपय और प्रशनादि
सुरकुमार धनन्तर निकल के कहा जाय कहा पृथिवीकाय कितना थायु शेपरहे पर जत्र आयु
वाघे एव यावत् चौरिद्री, ३१५
पृथियीकाय थनन्तर निकल के कहा जाय कहा पचेद्रिय तिर्यच कितना शायु शेप रहने से पर
नव का शायु वाघे ३१५
एव थप् “तेज वायु, मनुष्य वर्ज, घनस्पति
एव मनुष्य वानव्यन्तर जोतिपी वैमानिक जैसे
बेरिद्री तेरिद्री चौरिद्री जाणना ३१३
नारकी कहा तैसे कहना ३१७
पचेंद्रिय तिर्यच योनिक थनन्तर निकल कहा कितने प्रकार थायुग्रन्ध कहा , ब प्रकार कहा । ३१७
जाय कहा उपजे ३१३ | नारकी के ब प्रकार वायु यन्ध कहा एय २४
एव जैसे जिनका उपपात कहा तैसे उद्दर्शना जी
दमक मे कहना ३१७
कहनी ३१३ जीव जातिनाम निहतायु को कितने शाकर्प से कर ३१७
(६ द्वार पूर्ण कथा)
नारकी जातिनाम निहप्तायुको कितने शाकर्प से
नारकी कितना थायु शेप रहे तय पर नव का
करै एव २४ दमक
में
३१८
यायु
बाधै एव २१ दफक ३१५ / एय गति स्थिति शवगाहन प्रदेश थनुनाव नाम
पत्राक
पत्राक
३०७
विपय और प्रश्नादि
विपय और प्रश्नादि
घानव्यन्तर जोतिषी सौधर्म शादि यावत् अनुप्तर पृषिवीकाय कहा से उपजे इत्यादि वक्तव्यता ३०१
विमान देव एक समय में कितने उपजै| २९१ | एव एप तेज वायु बनस्पति काय नी कहा
सिछ एक समय में कितने सीके
२९५ ) येरिद्री तेरिद्री चौरिद्री जैसे तेजो वायु कहे
नारकी एकसमय में कितने चर्व इत्यादि जैसे
तैसे देय वर्ज जानना ३०७
उपपास कहा से धन सिहों को बोझ के कहना पचेंद्रिय तिर्यंच योनिक कहा से उपजे इत्यादि
यावत् अनुप्तरोपपात के देव पर्यत कहा २९५
(१ द्वार पूर्ण जया)
मनुष्य कहा से उपजे,
३०८
नारको कहा से उपजे, क्या नारकी से उपजे ति यानय्यन्तर देवता कहा से उपजे
३०९
यंच से मनुष्य से देव से उपजे २९५ एव वैमानिफ देन यक्तय्यताधिकार
३०९
रवाना का नारकी कहा से उपजे इत्यादि सात ग्रेयेयक देव, थनुप्तर यिमान देव एक समय मे
नरक के नारकी का अधिकार ३०१
असुरकुमार कहा से उपजे इत्यादि यावत् स्त
(५ मा दार पूर्ण कथा)
नितकुमार पर्यंत ३०१ नारको धनन्तर मिकउ के कहा जाय कहा उपजै| ३१२
निर्णय ३०७
कितने उपजे ३११
पत्रक प्रत्राक विपय और प्रनादि निपया और प्रश्नादि नारको फी १० सज्ञा होती है ग्रह सज्ञोपयुक्त है|३२७ समुरकुमार को १० सज्ञा होती है एक स्त पाहारादि१० सज्ञोपयुक्त देयारपग्रहुत्व वक्तव्यता ३२८ नितकुमार सक पृथिवीकाय आदि वैमानिक (आठया पद समाप्त हुआ) पयन्त कहा। ३२५ नारफी या आहार सज्ञोपयुक्त के मयसज्ञोपयुक्त । नया पद कहते हैं । इत्यादि प्रश्न ३२६ कितने प्रकार योनि कही, तीन प्रकार योनि कही ३२८ माहारसज्ञोपयुक्त यावत्परिग्रहसज्ञोपयुक्त नारकी नारकी के क्या सीतयोनि उनपोनि शीतोजयोनि ३२८ का अल्प महत्त्व ३२६ असुरकुमार के कौन योनि कही एव स्तनित- तिरंच क्या आहार यावत्परिग्रह सज्ञोपयुक्त ३२६ कुमार तक ३२८ तिर्यच आहार शादि सज्ञोपयुक्त का अस्पादि ३२६ पुषिधीकाय के कौन योनि , एय अपे वायु वन मनुष्य क्या थाहार स० ३२.७ / स्पति द्वीन्द्रिय श्रीन्द्रिय चतुरिन्द्रिय को योनि माहारादि सज्ञोपयुक्त मनुष्याल्पयकुल ३२७ कहना| ३२९ देयता क्या आहार सुज्ञोपयुक्त है के यावत्परि तेजस्काय के शीत योनि.नही ३२९ पत्राक पन्नाक लेवे ३२१ ॥१२॥ विपय और प्रश्नादि विपय और प्रश्नादि निहप्तायु भी कहना ३१९ | पृथिवीकाय वेमात्रा से प्रानमाण सास्योत्स्यास जघन्य १।२।३ । उत्कृष्ट छ आफपसे जाति नामनिहत्तायु यादि को करनेवाले जीयों में कौन जोतिसी कितने काउसे एव सौधर्म आदि देय किस्से घोडा घणा इत्यादि अधिकार ३१९ कितने काल से लेथे| ३२१ ॥ व्युत्क्रान्ति पद छछा पूर्ण हुआ ॥ ग्रेयेयक देव यायत्पचानुप्तर देन फितने काठसे यानमाण सानोत्स्वार ३२३ सातवा पद का आरम्म हुमा ॥ सर्वार्थसिझ विमानवासी देव फितने काठ से स्वाम्योत्स्वासादि उन ३२४ नारकी कितने कालसे आनप्राण स्वासोत्स्वास ठेवै| ३२० (सातया उत्स्वास पद हुमा) असुरकुमार कितने काठसे आनप्राण स्वासोत्स्वा ॥ पाठवा पद कहते है। एव नागकुमार यावत्स्तनिसकुमार फितने काठ से आनप्राण सासोत्स्वास लेवे| ३२१ दश आहार आदि सज्ञा कही ३२१ -स ठेवे ३२०
पत्राक
विपय और प्रश्नादि
(नवा पद पूर्ण कथा)
पत्राक
विषय और प्रश्नादि
काय पर्यन्त वेइद्रिय को विवृतयोनि कही, चौ
रिद्री पर्यन्त, समझिम पचेद्रिय तिर्यच और
मनुष्य को विकृतयोनि कही, गर्भव्युत्क्रान्तिक
पचेंद्रिय तिर्यच और मनुष्य को सघृतषिपत यो
नि है| ३३३
॥ १० वा पद कहते हैं।
रत्नप्रमादि यावत् ईपटमाग्नारा पर्यन्त शाठ पू
पिवी कही| ३३४
यह रनपना पृथिवी नहीं चरमा नही शचरमा
नही घरमाइ नही थचरमाइ नही चरमान्त प्र
देशा नही चरमान्तप्रदेशा इत्यादि यावत् नी
चे सातमी पूथिधी, सौधर्म शादि यावत् चनुप्तर
विमान एव ईपत्माम्नारा पृथियी, एवं लोक,
एवं आलोक नी कहना ३३५
परमाणु पुगल क्या चरम थचरम वक्तव्य चर
माइ श्चरमाइ इत्यादि जगा २६' ३४०
वानभ्यन्तर जोतिषी मानिक को जैसे नारकी
को कहा ३३३
यह सप्त विवृत सघृतषिवृतयोनिक थयोनिक
जीवी में कौन किस्से थोफा घणा इत्यादि ३३३
कर्मोन्तत सखावत बशीपत्र नेद से तीन प्रकार
की योनि है कूर्मालता योनि उत्तम पुरुपोत्पत्ति
स्थान, खावा स्त्रीरत्न को, वशीपत्रा सामा
न्य मनुष्यों को है। ३३४
.
मिथयोनि ३३१
र्णय ३३१
निर्णय ३३२
विपय और मरनादि
पत्राक
विषय और प्रश्नादि
पत्राक
पद्रिय तियच योनि को कौनसी योनि ३२९ । पृषिधीकाय को क्या सचित्त योनि शचितयोनि
सम्मूर्छिम पद्रिय विर्यच, गर्मव्युत्क्रान्तिक प
चेंद्रिय सिर्यच योनि यक्तव्यताधिकार ३३० समूर्छिम पर्चेद्रिय तियच और मनुष्य योनि नि
मनुष्य को कितने प्रकार योनि कही
३३०
वानथ्यन्तर , जोतिषी , और वैमानिक योनि गर्नप्युटक्रान्तिक पचेद्रिय तिर्यच मनुष्य योनि
यक्तव्यता ३३०
यह जीव भीतयोनि उनयोनि शीतोषयोनि धानध्यन्तर जोतिपी थैमानिक को जैसे- सुर
योनियों में कौन फिस्से घोफा घणा इत्यादि
कुमार को कहा ३३२
निर्णय ३३१ | यह सषिप्त अचित्त मिश्रयोनिक योनिको में
सषिच शषित मित्र नेद से तीन प्रकार योनि
कौन किस्से योगा घणा इत्यादि ३३२
कही ३३१ सवृत विवृत सस्तविकृत नेदसे तीन प्रकार यो
मारकी के क्या सचिष्त अधिष्ठ चौर मित्र योनि है| ३३१
सुरकुमार योनि प्रश्न एव स्तनितकुमार पर्यन्त ३३, नारकी के सवृतयोनि कही, एव यावनस्पति
निकही ३३२
पत्राक विपय और प्रचनादि पत्राक विपस और प्रश्नादि म थोर शचरम है| ३५८ मुपा नही ३६२ एवं घर्ण गन्ध रस स्पर्श चरम से कदाचित् चर अह जाय इत्यी पत्नयणी इत्यादि मापा वक्त- म चरम है| ३५९ व्यताधिकार ३६३ (१० चरम पद समाप्त था) अह भते मन्दकुमारएवा मन्दकुमारियाया इत्या दि प्रश्न निर्णय ३६६ ॥ ११ पद कहते हैं। यह भते उहे गोणे खरे घोढए भए एलए इत्या थप नूनं मन्ये श्यधारिणीति नापा इत्यादि दि प्रश्न निर्णय ३६६ ६० अह मते मणुस्से महिसे आसे इत्यादि प्रश्न नि श्यधारिणी मापा क्या सत्य थसत्य सत्यमुपा र्णयाधिकार ३६७ सत्यम्पा ३६१ प्राह मते कस कसोय परिमडल इत्यादि प्रश्न नि० ३६९ गायो मृगा पशव पक्षिण प्रज्ञापनी यह मापा अह भते पुढवीति खीवाफ् इत्यादि प्रश्न निर्ण है मुपा नहीं| ३६२ याधिकार ३७० याच स्त्री पुरुप नपुसकवार प्रज्ञापनी यह मापा भापा किमादि कि प्रवह कि पर्ययसित है ३७१ प्रश्न निर्णय ३६०
पत्राक
पन्नाक
३५१
विपय और प्रश्नादि
विपय और प्रनादि
एष २॥ ३॥ १।५।६।
६। ७।६ प्रदेशी स्कन्धो
जीय गति परम से क्या परम के शुचरम एवं
की धकध्यता यावत् सख्यात असख्यात थ्नन्त
निरन्तर वैमानिक ३५६
प्रदेशी खध तक कहा ३५१ नारकी गति चरम से क्या घरमा के घरमा एष
७१७३
परमाणुम्मियता इत्यादि गाथा ६
वैमानिक पर्यन्त ३५६
परिमाल शादि पाच सस्थानो की वक्तव्यता नारकी स्थितिघरम से कदाचित् चरम कदाचित्
परिमाल संस्थान क्या सख्यात शूसख्यात्त अन|
श्चरम एय यायत् वैमानिक ३५७
न्त, एवं यावत् थायत कहना, परिमाल से नारकी नवघरम से कदाचित् चरम कदाचित्
ठाण क्या सख्यासंप्रदेशी असख्यातमदेशी अनन्त अचरम, एय वैमानिक पर्यन्त , नारकी नापा
प्रदजी एव यानदायत, परिमाल सठाण क्या घरम से चरम शुचरम नी एय वैमानिक पर्यन्त,
सख्यासप्रदेशावगाव असख्यात प्रदेशायगाठ एष एय एकेंद्रिय को बीफ के चैमानिक पर्यत कहना ३५७
शायत पर्यन्त , परिमाल० सख्यातमदेशी या नारकी थानप्राण धरम से चरम के थधरम, एव
सख्यासप्रदेशायगाट अनन्तप्रदेशावगाड एच
याव द्वैमानिक, ३५८
थायत पयन्त ३५२ एय थाहार परस, नाप परस से कदाचित्
पत्राक
विषय और प्रशनादि
विपय और प्रश्नादि
पत्राक
भापा द्रव्य की३७७ / नारकी जिन द्रव्यो को भापापणे ग्रह सो स्थित
पुठोगाढ अणतर यह उक्तार्थ सग्रह गाथा
३८२
के प्रस्थित ग्रहे| ६८६
जीय जिन द्रव्यो को मापापणे ग्रह सो क्या सा एव एकेन्द्रिय को बोडकर वैमानिक पर्यन्त द
न्तर ग्रह के निरन्तर ३८२
ढक कहना अल्पयत्व तक ३८६
जीव जिनको मापा पणे निकाले सो निरन्तर जीव जिन द्रव्यो को भापा पर्णे ग्रह सो स्थितके
निकल के सान्तर निकले इत्यादि ३८३ अस्थित ग्रह एवं पृथक से भी दढक कहना
जो द्रव्य मापापणे निकले गृहीत के अगृहीत,
वैमानिक पर्यन्त ३८७
मिनके अभिन्न निकले ३८१ जीव जिनद्रव्यो को सत्यमापापणे ग्रहै इत्यादि
इन भापा द्रव्यो का खड भेदादि पाचभेद कहे,
औधिक गमाके ऐसे सर्व कहना फकत वेरिद्री
खड भेदादि निढपण ३८५
तेरिद्री चौरिद्री छोढदेना| ३८८
खसभेद प्रतरभेद चूर्णिकाभेद अनुतठिकाभेद से कितने प्रकार वचन , सोलह भेदे एकवचनादि
उत्कटिका भद से भिन्न भाषा थ्यो मे कौन
भेद से ३८८
फिस्से थोडा घणा इत्यादि ३८६ कितने मापाजात , चार कहे , इन चारो को
पत्राक पन्नाक विषय और प्रश्नादि यिपय और प्रश्नादि भापा कठय पमयति इत्यादि गापा र ३७१ | नारको अपर्याप्त अमापफ पर्याप्त मापफ है ।६७५ कितने प्रकार मापा है, दो प्रकार मापा क ३७२ एव एकेंद्रिय को छोडकर सर्वदडक प्रश्नोतरकहना ३७६ पर्याप्तिकी भासा सत्या मृपा से दो भेद है ३७२ चार मापा की जाति कही ॥१५॥ सत्या पर्यामिकी मापा कितने प्रकार है १० प्रकारे ३७२ जीय क्या सत्य मापा योठे कि असत्या भापा मूपा मापा मो दश प्रकारे कही है क्रोधनिश्रि योले इत्यादि ३७६ तादि भेद से ३७३ नारकी सत्य मी योठे असत्य मी योले एव असु अपर्याप्तिको मापा सत्यामृपा असत्यामुपा मेद रकुमार यावत् स्तनितकुमार पर्यन्त , द्वीन्द्रिय से दो प्रकार ३ ३७३ श्रीन्द्रिय चतुरिन्द्रिय नही सत्य नही असत्य सत्याभूषा मापा उत्पन्न मिश्चितादि नेद से दश नहीं सत्यासत्य असत्यामुपा योले, पचेंद्रिय तिर्यंच असत्यामूपा मापा बोले, ३७६ असत्यामुपा अपर्याप्तिकी आमन्त्रणी आदिक जाय जिन द्रष्यों को भापा पणे ग्रह सो क्पा लेदसे १२ मेद है। ३७१ स्थित ग्रह के अस्थित ३७७ जीव मापक है ममापक है इत्यादि १७५ एवं दृष्य क्षेत्र काल और माय बक्तम्पता से मैदें है। ३७१
पत्राक
पत्राक
विषय और प्रश्नादि
विपय और प्रशनादि
भागौन, इत्यादि यक्तव्यता ३९५ रिक, एवं चतुरिन्द्रिय पर्यत कहा सर्व शरीर | ४००
एव कार्मण शरीर भी कहना
३९५ | पचेन्द्रिय तिर्यच मी इसी तरह कहना वैक्रिय
नारकी को दोनो औदारिक शरीर है वह मी
में विशेप है| १०१
मुक्त मी है | ३६९ | मनुष्य को दो शोदारिक शरीर है, इत्यादि १०७
एव वैक्रिय भी, आहारक शारीर मी कहना ३९७ (१२ वा शरीर पद पूर्ण जथा)
असुरकुमार शरीर वक्तव्यताधिकार, स्तनितकु-
मार पर्यत|३९८ कितने प्रकार परिणाम, दो नेद जीव परिणाम
पृथिवीफाय को दो प्रोदारिक शरीर, क्षेत्रकाल।
चौर राजीव परिणाम | १०७
से निरूपण ३९८ | जीव परिणाम, गति परिणाम थादि नेद से १०
पृथिवीकाय को दो यैक्रिय शरीर, एव शेप श
प्रकार है| १०७
रोर भी कहना , अप्काय तेजस्काय मी कहना, गति परिणाम चार प्रकार है ४ गति नेद से,
वायुको दो औदारिक शरीर, दो वैक्रिय, एव इद्रिय परिणाम ५ नेद है, कपायपरिणाम १
शेप बारीर भी कहना, वीन्द्रिय को दो औदा
नेद, लेश्या परिणाम ६ नेद | १०८
पत्राक ॥१६॥ विपय और प्रनादि पत्राक विपय और प्रश्नादि बोलता जीव याराधक है के पिराधक है। यही तीन शरीर है , वायु को ४ शरीर श्री सत्यमासी मुपामापी आदि मापक अमापकजी दारिक वैक्रिय तेजस फार्मण है, पचेंद्रिय ति वो मे कौन फिस्से घोडा घणा इत्यादि वक्त यंच को भी चारही शरीर है| ३९१ व्यवाधिकार ३०९ । मनुष्य को पाचो शरीर होते हैं, यानय्यन्तर (११ मापा पद पूर्ण हुआ) जोतिपी वैमानिक को जैसे नारकी को कहा ३ शरीर कहना, ३९१ । १२ वा पद कहते है। औदारिफ शरीर यम और मुक्त मेद से दो भेद पाच शरीर कहे औदारिक वैक्रिय आहारक है , इत्यादि निर्णय ३९५ तेजस कार्मण ३९० | वैक्रिय मी यछ मुक्त मेद से दो तरह है, खेत्र नारकी को वैक्रिय तेजस फार्मण यह सीन शरीर है| ३९० काल से निर्णय ३९२ एवं असुरकुमार याषट् स्तनितकुमार पर्यन्त कहा ३९० माद्वारक भी दो भेद है पृथिवीकाय को औदारिक तेजस कार्मण तीन तेजस भी दो मे है , क्षेत्र से भनत लोक द्रव्य शरीर, वायुको बोर धौरिन्द्री पर्यन्त सबको से सिहो स भनम्तगुण सर्व जीवों से अनन्त
विपय और प्रश्नादि
पत्राक
विपय और प्रश्नादि
पत्राक
॥ १४ पद कहते है॥
धिकार ११७
क्रोधादि चार कपाय कहे एय वैमानिक पर्यन्त
एव
वैमानिक पर्यन्त जीव से लगाय १८ दक
कहा| ११५
कहना ४१९
कतिप्रतिष्टित क्रोध है एय नैरयिक यायद्वैमानि
(१४ या कपाय पद पूर्ण जथा)
क पर्यन्त ११६
कितने तरह से क्रोध होता है १ तरह कहा वैमा
॥ १५ या पद कहते हैं ।
निक पर्यन्त ४१६ | सठाण वाहाल इत्यादि गाथा २
४१९
शनन्तानुबन्धी आदि १ प्रकार क्रोध कहा नार पाच इन्द्रिप कही
१२०
की यावद्वैमानिक पर्यन्त , एय मान माया लोन श्रोनेद्रिय करलम्युका सस्थान सस्थित है १२०
सेनी चारो दफक कहा ४१७ चक्षु मसूरचन्द्रसस्थानसस्थित है नासिका
याजोग नियर्तित शादि चार भर्दै क्रोध कहा अतिमुक्तक सस्थान सस्थित है , जिक्षा वर के
एय मानादिनी ११७ सस्थान है , स्पर्शनेद्रिय नानासस्थान सस्थित है| ७२०
जीव चार तरह मे शाठ कर्म चिणे इत्यादि छ। नोद्रिय वाहत्य यावत् स्पशनेद्रिय चाहत्य
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पत्राक पन्नाक जैसे पहले , विपय और प्रवनादि विषय और प्रश्नादि एव मृदुलघुगुण मी अनन्त है, और इनका अ अस्पृष्ट रूप देखें, स्पृष्ट गन्ध लेवे अस्पृष्ट गन्ध एपबहुत्वादि १२६ लेले इत्यादि रस स्पर्श भी कहना एव अप यावत् धनस्पतिकाय विशेप यह के कहा तैसे कहना ४२९ युदयुदे ऐसा है , तेजस्काय शूचीकलापसस्थान एव जैसे स्पृष्ट तैसे प्रविष्ट, श्रोत्रेद्रिय का विपय सस्थित है , वायु पताका सस्थान, वनस्पति अगुल के असख्यात भाग मे उत्कृष्ट यारह यो नानासस्थान सस्थित है। १२६ जनसे छिन्न पुद्गल स्पृष्ट शब्द सुणे ४३० वेरिद्रिय के दो इद्रिय सर्व अधिकार पूर्ववत् कहा| १२७ | चक्षु इद्रिय का विपय जघन्य गुल का सख्यात श्रीन्द्रिय के घ्राण स्तोक है, चतुरिन्द्रिय के चक्षु नाग उत्कृष्ट सातिरेक योजन सहस्त्र थच्छिन्न स्तोक| १२८ पुद्गल शस्पृष्ट प्रविष्ट रूप देखै| ४३० पर्चेद्रिय तिर्यच और मनुष्य के जैसे नारकी कहा| ४२८ | घ्राणेंद्रिय का जघन्य थगुल सख्यात नाग उ धानव्यन्तर जोतिपी वैमानिक जैसे असुरकु त्कृष्ट नव योजन से गन्ध ग्रहण करे, एव जि मार कहा| १२८ झानी कही, स्पर्शनेद्रिय नी इसीतरह है, ५३१ स्पृष्ट वाद सुणे अस्पृष्ट सुण , स्पृष्ट रूप देखे शनगार नायितात्मा मारणातिक समुहात से सम पत्राक विपय और प्रश्नादि विषय और प्रश्नादि पत्रांक थगुलासंख्यातनाम ४२५ कलयुकासस्थान है| १२४ श्रोत्रंद्रिय अगुल के असंख्यात माग पृयु है, चक्षु नारकीकास्पर्शनेन्द्रिय कौन सस्थात इत्यादि नि० १२१ प्राण मी ऐसे १२१ | असुरकुमार के कितने इद्रिय जैसे औदारिक कहा ॥१०॥ जिहाजगुलपयक्क,स्पर्शनेन्द्रियशरीरममाणमात्रहै| ४२१ अत्पबाहुत्य २ विज्ञोप १२५ नोत्रंद्रिय अनन्तप्रदेश, असख्यात प्रदेशाचगान एव स्तनितकुमार पर्यन्त कहना, पृथिवीकाय को एर्ष यायस्पर्श| १२१ | १ स्पर्शनेन्द्रिय है और यह मसूरचद्रसस्थान है , १२५ इन श्रोत्र चतु प्राण जिहा स्पानेन्द्रिय मे अ पृषिधीकाय का स्पर्धन अगुठ अंसख्यात भाग वगाहनार्यतासे प्रदेशार्थतासे अवगाहनप्रदेशा याहल्यपणे, पृथुपणे शरीरप्रमाण मात्र कहा, तासे कौन किस्से योमा घणा इत्यादि १२१ | और यह अनन्तप्रदेशिक है, पृथियीकाय स्पर्शन श्रोत्रेन्द्रिय में अनन्ता कर्कशगुरुगुण कहा, एवं असख्येयप्रदेशायगाढ है, १२५ माक्त्स्पर्ग, गोत्रंद्रिय में अनन्ता मृदुलघुगुण, यह पूपिर्थीकायस्पर्शनेन्द्रिय अवगाहनार्थ प्रदे कम एष पावरस्पणे १२२ शार्प से कौन किस्से मत्पादि १२५ मारकी को फाकी है, मारकी का श्रोत्रंद्रिय पृथिवीकायरपार्जन कितने बर्कशगुरुगुण,
पत्राका
विषय और प्रनादि
विषय और प्रश्नादि
पत्राक
उस्के देश प्रदेश से नही है थाकाशास्तिकाय देश प्रदेश से स्पृष्ट है, पृथियी से स्पृष्ट नही/
से स्पष्ट नही है इस्के देश थोर प्रदेश से स्प काल से स्पृष्ट एक थजीय प्रदेश अगुरुग्घु थ
र्श किये है, असफाय से कदाचित् स्पृष्ट चस्पु नन्त थगुरुलघुगुणसयुक्त सर्याकाश से शनन्त
प्ट है , काल के देव से स्पर्श किए है| १३७
नागो न है | ४१०
जम्यूद्वीप नही धर्मास्तिकाय सं इस्के देश प्रदेश
॥ १५ वा पद का १ उद्देशा पूर्ण ॥
से स्पृष्ट एवं अधर्म थोर थाफाशास्तिकाय से इद्रिय उपचय इत्यादि थर्य संग्रह गाथा २ ४१०
जी कहा, पृषियी से यायत् वनस्पति से स्प कितने प्रकार इद्रियोपचय कहा, ५ तरह का
र्श किये है, प्रस काय से कदाचित् है| १३८
इद्रिय नेद से| १४०
एव लयण समुद्र, धातफी सम थादिनी कहा नारकी को पाचो इद्रिय का उपचय कहा, एव
सो गाथा है| १३८
वैमानिक पर्यन्त सर्व दफक मे कहना नेद यही
लोक फिस्से व्याप्त है इत्यादि जैसे थाकाशथि के जिस्को जितनी इद्रिय उतनाही का उपचय
ग्गल कहा, थलोक नाही धर्म अधर्माचौर था
कहना , एव इद्रिय की निर्घर्तनानी पाच तर
फाशास्ति काय से किन्तु थाकाशास्तिकाय के ह की कही है , नारकी से वैमानिक पर्यन्त |
पत्राक
पत्राक
विषय और मजनादि
विपय और प्रश्नादि
यहत के जो घरम निर्जरा पुनल सो सूक्ष्म है।
इत्यादि १३५
इत्यादि निर्णय ५३१ ) आदर्श (सीसे) को देखता मनुष्य क्या आदर्श
॥ १९॥ उपास्य मनुष्य उन निर्जरा पुद्गलों को अन्यत्व को देख के चपने को देख प्रतिनाग (बाया)
नानात्य को जाणे देखे नही, देयता जी कोइ
को देखे इत्यादि निर्णय १३५
उन निर्जरा पुद्रों के अन्यत्व नानारव को न एव शसि मणी शादि का नीशाठावा कहा
देखे न जाणे
४३२
लपेटा जथा कम्मल जितने थाकाश
यह सूक्ष्म निर्जरा पुनल सर्वलोक को शवगाह के को रोक के रह फैलाया ऊभा जी उतने ही था
हते है, नारकी उन पुगों को न जाणे म देखे
काश को रोके ४३६
एव प.द्रिय तिथंच पर्यन्त कहना, मनुष्य उन एवं स्थूणा सूत्र भी कहा, थाकापिग्गल काहे।
निर्जरा पुदलो को कोई जाणे देखें कोई मजा से व्याप्त है कितने फाय से स्पृष्ट है, कृषियी
जैन देखे इत्यादि शधिकार ४३३
काय यावत् प्रसकाय काल से स्पष्ट है ? धर्मा
वानप्यन्तर जोतिषी जैसे मारकी को कहा, घेमा स्ति काय से स्पृष्ट है पर इसके देश और प्रदे
निक जैसे मनुष्य को कहा, वैमानिक दो नेर्दै शसे नही एक्सपर्मास्तिकाय से स्पष्ट है पर
पत्राक . विषय और प्रश्नादि पत्राक विषय और प्रश्नादि उस्के देश प्रदेश से नहीं है थाकाद्यास्तिकाय देश प्रदेश से स्पृष्ट है , पृथिवी से स्पृष्ट नही/ से स्पष्ट नहीं है इस्के देश छोर प्रदेश से स्प काल से स्पृष्ट एक राजीव प्रदेश अगुरुलघु थ किये है, प्रसकाय से कदाचित् स्पृष्ट शस्पू नन्त गुरुलघुगुणसयुक्त सर्याकाना से शनन्त ट है , काल के देवा से स्पर्श किए है| ५३७ नागो न है | १४० जम्बूद्वीप नही धर्मास्तिकाय से इस्के देश प्रदेश ॥ १५ वां पद का १ उद्देशा पूर्ण ॥ से स्पृष्ट एष धर्म थोर शाफाशास्तिकाय से इद्रिय उपचय इत्यादि थर्य सग्रह गाया २ ११० जी कहा, पूषियी से यायत् वनस्पति से स्प कितने प्रकार इद्रियोपचय कहा , ५ तरह का र्श किये है, अस काय से कदाचित् है| १३८ इद्रिय नेद से १४० समुद्र घातकी खफ थादिनी कहा नारकी को पाचो इद्रिय का उपचय कहा, एव सो गाथा है| ४३८ वैमानिक पर्यन्त सर्व दमक मे कहना नेद यही लोक किस्से व्याप्त है इत्यादि जैसे थाकाशथि के जिस्को जितनी इद्रिय उतनाही का उपचय ग्गल कहा, थलोक नही धर्म अधर्मः शोर था कहना , एव इद्रिय की निर्वर्त्तनानी पाच तर काशास्ति काय से किन्तु शाकाशास्तिकाय के. ह की कही है., नारकी से वैमानिक पर्यन्त | एवं लवण , पत्राक पत्राक विपय और प्रश्नादि विपय और प्रश्नादि यहत के जो घरम निर्जरा पुदल सो सूक्ष्म है। इत्यादि १३५ छुत्यादि निर्णय ४३१ | आदर्श (सीसे) को देखता मनुष्य क्या आदर्श ॥ १९॥ | उकास्य मनुष्य उन निर्जरा पुद्गलों को अन्यत्व को देखै के छपने को देख प्रतिनाग (वाया) नानात्य को जाणे देखे नही, देयतानी कोड को देखे इत्यादि निर्णय १३५ उन निर्जरा पुद्गलों के अन्यत्व नानास्य को न एष शसि मणी शादि का नी शालावा कहा १३६ देखे न जाणे ५३२ सय गाढा लपेटा जथा कम्पल जितने श्थाकाश यह सूक्ष्म निर्जरा पुगल सर्वलोक को शवगाह के को रोक के रहे फैलाया जा जी उतने ही था रहते हैं, नारकी उन पुजलों को न जाणे न देखें का को रोके| १३६ एवं पचेंद्रिय तिर्यंच पर्यन्त कहना, मनुष्य उन एव स्थूणा सूत्र भी कहा, थाकाशपिग्गल काहे निर्जरा पुढलो को कोई जाणे देखें कोई न जा से व्याप्त है फितने काय से स्पृष्ट है, पृथिवी जे न देखे इत्यादि घिकार ४३३ काय यावत् त्रसकाय काल से स्पृष्ट है ? धर्मा थानम्पम्तर जोतिषी जैसे मारकी को कहा, चैमा स्ति काय से स्पृष्ट है पर इस्के देश चौर प्रदे निक जैसे मनुष्य को कदा, वैमानिक दो जेदें। शसे नही है एवं धर्मास्तिकाय से स्पृष्ट है पर
पत्राक
पत्राक
विषय और प्रश्नादि
विषय और प्रश्नादि
ग्रह दो है, एव तेइदीय चौरिदीय में इद्रिय एकेक नारकी के अनता द्रष्योंद्रिय अतीत है।
बढाय के कहना, चौरिंदीय को व्यजनावग्रह यह आठ है। पुरस्कृत ८।१६।१७। सख्यात
तीन अर्थावग्रह धार है , शेप जैसे नारकी को
असख्यात और अनत भी होते हैं ११७
कहा तैसे वैमानिक तक ४४५ / एकेक असुरकुमार के कितने द्रव्येद्रिय अतीत
द्रव्य और माव मेद से दो तरह की इद्रिय है, अनत । य०८ । पुरस्कृत ८।९। सख्यात
आठ दय्य द्रिय २ कान २ नेत्र २ नाक जीम
असख्यात अनत । एव स्तनितकुमार तक ४१७
स्पर्श ८, नारकी को आठों है , एवं असुर
एव पृथिवीकाय अप्काय कहा , वनस्पतिकाय
यावत् वैमानिक स्तनितकुमार तक । पृथिवी को यह एक स्पर्श द्रव्येद्रिय है , तेजो वायु
काय द्रव्ये १ स्पर्श यावद्वनस्पति पर्यंत । द्वी भी ऐसे ही है मेद यह के पुरस्कृत ९ । १०
न्द्रिय को द्रध्ये स्पर्श १ जिहा २ दो है , ते है, एव द्वीन्द्रिय भी भेद यह के यह दो है
रिद्री को दो नाक जीम और स्पर्श ए ४ हैं
श्रीन्द्रिय को यह चार, चौरिन्द्री को बझ६
चौरिद्री को द्रष्ये दो नेत्र दो नाक जीम ५ है, पंचेन्द्रिय तिर्यच मनुष्य वानव्यन्तर जो
स्पर्श ए ६ हैं। शेष को जैसे नारकी को कहा| १४६
तिषी सौधर्म ईसान देव जैसे असुरकुमार, भेद
पत्राक
॥२०३
विषय और प्रश्नादि
पत्राक
विपय और प्रशनादि
जिस्को जितनी इद्रिय है उतने को निर्वर्तना घगाहना कहनी, पाच प्रकार का अपाय २४
नी कहना , श्रोद्रिय निर्व:ना का काल थ दळक में यथोचित कहा, ईहा पाच प्रकार की
सख्यात समय थन्तर्मुशर्त नी कहा, एव स्प
चौबीस दडक में यथोषित कहना, ११३
र्शन तक, एव नारकी स वैमानिक पर्यन्त नि
अपग्रह घ्यजन और अर्थ के भेद से दो प्रकार
वर्त्तना काल कहा, पाच ने इद्रिय लब्धिक है , ध्यजनावग्रह श्रोत्र घ्राण जिला स्पर्श से
ही, एव२१वाक में जिस्को जितनी हो कहना, चार मेद है, अर्यावग्रह पाच इद्रियों का पाच
इंद्रियोपयोग काल नी पाच प्रकार है नारकी
और मन से ब प्रकार होता है उनमे से नार
से वैमानिक पर्यन्त यथोचित कहना| १११ की को २ घ्यजन और अर्थ का अवग्रह है।
इन श्रोत्र शादि पायो इद्रियों के उपयोग ३
एव वैमानिक पर्यत कहा १११
जघन्य उत्कृष्ट यजघन्योस्कृष्ट में परस्पर कौन
पृथिवीकाय को दो प्रकार अवग्रह , व्यजनाव
किस्से थोफा घणा इत्यादि १५२ ग्रह स्पर्शनेंद्रिय का एक ही है, मर्यायग्रहमी
इद्रियावगाहना पाच प्रकार मारकी से वैमानिक
एक स्पर्शनही का है, एवं वनस्पति पर्यंत
पर्यंत जिस्को जितनी इद्रिय हो उट्टी की स कहा, एव वीन्द्रिय को, नेद यह के पजनाव
पत्राक
यिपय और प्रश्नादि
पत्राक
विपय और प्रश्नादि
यदु नही पुरस्कृत कदाचित् , एघ सर्वार्थसिद्ध
अतीतादि ४५४
देयत्व मे भी कहा, १५१ नारकी के नारकी पने में कितने द्रव्येद्रिय इत्यादि ४५४
एकेक मनुष्य के नारकीपनें में , यावत्पर्चेद्रिय
(द्वार पूर्ण हुआ)
तिर्यंच पने मे मनुष्यपन में, वानव्यन्तर जो नारकी को फितने मावेद्रिय, पाच है, एव ये
तिक यायत् अवेयक देपने में, विजययैजय मानिक पर्यन्त यथोचित कहना, एफेक नार
न्तादि देयपने मे, सर्वार्थसिद्धदेवपने कितने -की के कितने अतीत घटु पुरस्कृत इत्यादि
द्रव्येंद्रिय अतीत बद्ध पुरस्कृत इत्यादि १५२
धक्तव्यता १५७
यानव्यन्तर जोतिपी जैसे नारकी, सौधर्मदयभी एकेक नारकी के नारकीपने में कितने भाघेद्रिय
जैसे नारकी सौधर्म देव को पचानुत्तर देवपर्ने
अतीत १५८
में , सर्वार्थसिद्धदेवत्वमे अतीतादि कहा, अनु
(१५ पद समाप्त हुआ)
तरदेवको नारकीपने मे छातीतादि १५३
अनुप्तरदेय को सर्वार्थसिद्धदेवत्य मे। सर्वार्थसिद्ध
॥ १६ वा पद कहते है ।
देव को नारकीपने मे एव मनुष्यवर्ज सर्व में पनरह प्रकार प्रयोग कहा ।
१५९
,
.
पत्राक पत्राक विपय और प्रचनादि इतनाही के मनुष्य को पुरस्कृत है मी नही मी है, सनत्कुमार माहेन्द्र प्रल लान्तक शुक्र सहतार आनतप्राणत आरण अच्युत ग्रेधेयक देव को जैसे नारकी को, पचानुप्तर देव को अतीत अनन्त य८।१६ । २७ । संख्यात, सर्वापंसिझदेव को अतीत अनन्त बछ। पुरस्कृत ८, नारकी को द्रव्येन्द्रय अनन्त अतीत पछ मसख्यात पुरस्कृत अनन्त ११८ एव अवेयक देव पर्यत मनुष्य को पछ कदाचित् सख्यात असख्यात मी है , पंधानुतर देव को मतीत अनम्व बछ और पुरस्कृत मसख्य है, सर्षापसिहदेव को असीत मनन्स बछ पुरस्कृत सस्पात है , एकक मारकी के नारकी पणे में विषय और प्रचनादि कितने द्रव्येद्रिय मतीत, एव नारकी के अ- सुरपणे में अतीत यह पुरस्कृत द्रव्येद्रिय कहे ११९ एकेक नारकी को एकेन्द्रिय पने मे कितने अतीत घर पुरस्कृत है, द्वान्दियपने में कितने हैं जींदीय पने में कितने है इत्यादि निर्णय १५० एव चौरिन्दिय मी पर पुरस्कृत ६। १२ । १८ सख्यात असख्यात अनन्त है , पदीय तिर्य चपने में जैसे असुरकुमार पने में कहा, एय मनुष्यपर्ने में मी पर पुरस्कृत छ । १६ । २४ ।। सख्यात असख्यात अनन्त है यानष्यन्तर जोतिर्षी सौधर्म देव वेयकदेवपने मे प्रतीत अनन्त बटु नही पुरस्कृत कदाचित् , एकक मारकी को पचामुप्तर देवपने में मतीत नहीं ,
पत्राक
विपय और प्रश्नादि
विपय और प्रश्नादि
पत्राक
कहा। पाच प्रकारे गतिप्रपात कहा प्रयोगगति नारकी सर्व समाहार समशरीर समुत्स्वासनिवास
आदि के भेद से । प्रयोगगति १५ भदें जैसे
हैं इत्यादि १८५
प्रयोग कहा तैसे यह भी कहनी। जीयो को नारकी सर्व समकर्म हैं इति वक्तव्यता। नारकी
प्रयोगगति पनरह मंदे है । नारकी का ११
सर्व समोपपत्रक हैं| १८६
प्रकार है एव वैमानिक पर्यन्त १७४ नारकी सर्व समवर्णहै इत्यादि जैसे वर्णकहा तैसे
जीयो को क्या सत्यमनप्रयोगगति यावत् क्या
लेश्या, वेदना , समक्रिय है| ४८७
कार्मणशरीरकायप्रयोगगति है यावद्वैमानिक नारकी सर्व समायु समोपपनकहे इत्यादि निर्ण
पर्यन्त कहा । एष गति भेद वक्तव्यता ४७५
य थसुरकुमारतक १८८
(१६ वा प्रयोग पद कहा)
थसुरकुमार सर्व समकर्म इत्यादि एव स्तनित
कुमार पर्यन्त कहा १८९
॥ १७ वा पद कहते हैं ।
पृथिवीकाय थाहार वर्ण कर्म और लेश्यासे जैसे
नारकी कहा ४९१.
आहारसमसरीरा यह अर्थ सग्रह गाथा १८४ | एव. चौरिद्रिय , पचेंद्रिय तिर्यंच जैसे नारकी
पत्राक पत्राक ॥ २२॥ विपय और प्रशनादि विपय और प्रश्नादि जीवका पनरह प्रकार उपयोग है । नारकी को | थिवीकाय क्या औदारिकशरीरकायप्रयोगी- ग्यारह भेर्दे है। एवं असुरकुमार पर्यन्त कहना औदारिकमिश्राशरीरकायप्रयोगी के कार्मणश पृथियोकाय को तीन उपयोग। एव वनस्पति रीरकायप्रयोगी एव वनस्पतिकाय पर्यन्त प्रश्नो पर्यन्त कहा ४६१ त्तर कदा । वायुको वैक्रियमिवारीरकाय- वायुकाय को ५ उपयोग । वरिन्द्री को चार प्र प्रयोग है| १६१ कार एवं धौरिद्री पर्यन्त पर्वंद्रियतिर्यंच को द्वीन्द्रिय क्या औदारिफशरीरकायप्रयोगी यावत् तेरह प्रकार है| १६२ क्या कार्मणशरीरकायप्रयोगी है। एय चौरि मनुष्य को पनरह उपयोग। वानव्यन्तर जोति द्रिय पर्यन्त कहा| १६५ पीचैमानिक को जैसे नारकी को कहा । जीव पचेंद्रिय तिर्यच जैसे नारकी भेद यह के औदा क्या सत्यमनप्रयोगी यायत्क्या कार्मण शरीर रिकशरीरफायप्रयोग औदारिकमिशारीरकाय कायप्रयोगी इत्यादि भागे छ कहे| १६३ प्रयोग भी है । मनुप्य को कायप्रयोग निर्णय नारकी क्या सत्यमनप्रयोगी इत्यादि । एव असु मग २४त्रिकयोगें ३२चतु सयोगी १६ सर्व०/ १६५ रकुमार यावत्स्तनितकुमार पर्यन्त कहा । पू यानध्यन्तर जोतिपी वैमानिक जैसे असुरकुमार
पत्राक
पत्राक
विपय और प्रश्नादि
विपय और प्रशनावि
(२ उद्देशा पूर्ण जशा)
एवं शनिलाप नीलर्सच्या कापोतलेश्या को पाके
नारकी नारकी मे उपजे के शुनारकी नारकी में
कापीत तेजोलेज्या को पाके तेजोलेच्या पका
उपजै एव वैमानिक पर्यंत कहा, नारकी नारकी वेश्या को पाके पनलेश्या शुक्ललेवया को पाके
से निकले के शनारकी से , एव वैमानिक पर्यत
तद्रूपादिपणे परिणमें इत्यादि सदृष्टान्त ५२३
जोतिपी वैमानिक मे चयन्ति ऐसा कहना ५१३ / कृपालेश्या कैसी वर्ण से, जीमूत शृजन खजन
कृजलेशी नारकी कृपालेशी नारकी में उपजै इ
कजलादि सदृश है ५२५
त्यादि निर्णय यावत् शुक्ललेशी शुक्ललेनी मे नीललेच्या वर्ण निरूपण, कापोत लेश्यादि वर्ण
उपजै एव २१ दफक में यपोचित कहना ५१४
(३ उद्देशा पूर्ण था)
एव शास्वाद निरूपण ब लेश्या का
परिणाम गघ इत्यादि गाथा
५२१ तीन लेश्या दुरनिगन्ध और तीन सुरनि गन्ध
ब ठेक्या कही
५२२ है, एवं शुभाशुरु, एव प्रज्ञास्ता प्रशस्त , सक्लि
कृपालेश्या नीललेश्या की पाके तद्वर्ण तद्रूप तद प्टासक्तिष्ट, चौर स्पर्श, सुगति दुर्गतिगामी
न्धादि पणे परिणमे ५२२ कही है। कृजलेश्या ३।९।२७१८१६४२ ।।
निरूपण ५२६
पत्राक
पत्राक
१९८
२३॥
वानप्यन्तर
विपय और प्रश्नादि
विपय और प्रशनादि
फर्क क्रियामें है ४९२
श्या, तिर्यच योनिक को ब खेच्या , एकेंद्रिय
मनुष्य सर्व समाहार है इत्यादि जैसे नारकी
को चार लेश्या
नेद क्रिपासे तीन नेदहै| ४९३ | पृथिवीकाय को चार खेश्या , थप वनस्पति जी
जैसे
यसरकुमार
९
थेनही है, तेजो वायु दीद्रिय श्रीद्रिय चतुरि
एष जोतिपी वैमानिक नी नेद यह के वेदना से द्रिय जैसे नारकी, पचेद्रिय तिर्यंच को उ, समू
द्विविध है| ४९५
निम पर्चेद्रिय तिर्यच जैसे नारकी, गर्नज पचे
जैसे थौधिक गमा कहा तेसे सलेक्य का गमा द्रिय तिर्यच को न एवं वेश्या वक्तव्यताधिकार ४९९
कहना वैमानिक पर्यन्त १९६ | गनजमनुष्य की ब, देव को ब, देवियों को चार,
पृथिवी छपवनस्पति पचेंद्रिय तिर्यच मनुष्य जैसे एव नयननासि देव देवी यानव्यन्तर देव देवी
यौधिक गमा कहा नेद मनुष्य को क्रिया में
वैमानिक देय देवी लेख्याधिकार ५००
प्रमप्त छप्रमाप्त कहा| १९७ यह जीय सठेशी कृतलेशी यायत् शुक्ललेगी में
(१ उद्देशा पूर्ण जया)
कौन किस्से पोफा घणा इत्यादि शल्प बहुत्व
कितनी लेश्या बकरी, मारकी को कितनी ले|
वक्तप्यता रदेश समाप्ति तक ५०१
विषय और प्रश्नादि पत्राक विपय और प्रश्नादि नारकी पर्याप्त नारकी पणे कितने काल तक रहे एव मन बचनकाय योगी| ५५६ इत्यादि अधिकार ५१९ योगी योगीपणे, सवेदक सवेदकपणे इत्यादि सइद्रिय सइद्रियपणे काठसे कयतक होय इत्यादि ५४९ निर्णय| ५५७ एवं पर्याप्त थपर्याप्त का चालाया कहा ५५० | एव स्त्री पुरुपयेद नपुसकर्वेद प्रश्न, शयेद प्रश्न, ५५९ सकाय सकायपणे, पृथिवीकाय पूथियीकायपणे, सकपाई प्रश्न, एव क्रोध माया मान लोन कपायी एवं अप्तेजवायु ५५१ शुकपायी निर्णय ५६० धनस्पत्तिकाय प्रश्न, प्रसकाय प्रसकायपणे, थ सलेशो का प्रश्न एव बले० शेका आलावा क काय श्चकायपणे, एव प्रसकाय पर्याप्त थपर्याप्त हना शलेनी जी ५६१ तक कहा ५५२ सम्यग्दृष्टि सम्यग्दृष्टिपने इत्यादि निर्णय सूक्ष्म पृथिवी थप्तेज वायु बनस्पति , एव या ज्ञानी ज्ञानीपने कालसे कबतक इत्यादि प्रश्नोत्तर ५६३ दर ना ५५४ विनग ज्ञानी चक्षुदर्शनी श्चक्षुदर्शनी शवधिद चादर निगोद प्रश्न, ५५५ शनी का प्रश्न ५६५ सयोगी सयोगीपणे काल से फितने काल होय, सयत प्रसयत सयतासयत प्रश्न पत्राक पत्राक धिपय और प्रश्नादि विपय और प्रश्नादि ७ परिणार्मे परिणम ५३१ | छ लेश्या कही , मनुष्य को कितनी लेश्या इn २४ रुजलेश्या अनन्तप्रादेशिकी एव यावत् शुक्लले त्यादि निर्णयाधिकार ५४२ प्या , कृघ्नलेश्या असख्येयप्रदेशावगाठ एय (लेश्या पद १७ वा पूर्ण) यावत् युक्तठेश्या, कृघ्नलेश्या की कितनी अ वगाहना एव उक्तलेश्यावगाहना , स्थान अस ॥ १८ वा पद कहते हैं। ख्यात ५३५ हेश्यास्यानों का, भरुपयहुत्व द्रव्यार्थ प्रदेशार्थ जीवगइदिय काए यह सग्रह गाथा २ ५४५ द्रय्यार्थप्रदेशार्थ से ५३६ । जीव जीवपर्ने कालसे कयतक रहै , सर्यकाल ५४५ (चौथा उद्देशा पूर्ण हुमा) नारकी नारकीपने काल से कितने काल रहै छ रोच्या फही, कृजलेश्या नीललेच्या को पाके एष तिर्यंच क्षेत्र से काल से कहा, तिर्यधणी जैसे चौथे उद्देशे में कहा वैडूर्य मणि दृष्टान्त मनुष्य मनुष्यणी देव देवी इनका प्रश्नोतर ५१६ पर्यन्त कहना इत्यादि वक्तव्यता ५१० नारकी अपर्याप्त नारकी पणे काठसे कब तक (पाचया उद्देशा पूर्ण हुमा) एव याबद्देवी पर्यन्त ५१८ , पत्राक अनन्तरागत विपय और प्रश्नादि द्वैमानिक भेद मनुष्य अन्तक्रियाकरै एव अ सुरकुमार यावद्वैमानिक एव२४ दडक, नारकी अन्तक्रिया करे परम्परागत अन्तक्रिया करे ५७५ तेज वायु द्वीन्द्रिय त्रीन्द्रिय चतुरिन्द्रिय अन्त क्रिया प्रश्न अनन्तरागत नारकी एकसमय मै जघन्य एक दो तीन उत्कृष्ट दश अन्तकिया फरै रत्नप्रभा पूधियी का नारकी तथा अनतरा गत पकप्रभादि पृथिवी का नारकी अन्तक्रिया एय असुरकुमार कुमारी प्रश्न ५७५ अनन्तरागत पृथिवीकायिक जघन्य एफ दो तीन उत्कृष्ट चार एवं प्रकायिक भी वनस्पति का यिक छ पचेद्रिय तीर्यच दश तीर्यचणी दश विषय और प्रश्नादि पत्राक मनुष्य दश मनुष्यणी धीश यानव्यतर दा व्यतरी पाच जोतिपी वीस इत्यादि ५७६ नारकी नरक से निकल नरक में उपजे नही ना रकी नरक से निकल असुरकुमार में उपजे नहीं यावत् चउरांद्रिय ५७६ नारकी नरक से निकल पञ्चेद्रिय तिर्यञ्च में उपजै इत्यादि ५७७ नारको नरक से निकल ट्यतर जोतिपी वैमानि क मैं उपजे नही असुरकुमार असुरकुमार से निकल नारकी मे उपजे नही असुरकुमार मर के असुरकुमार मैं उपजै नही एव यावत् स्तनितकुमार ५७९ असुरकुमार मरके पृथिवीकाय मैं उपजे कदाचित्
पत्राक
पत्राक
विपय और प्रश्नादि
माफारोपयुक्त शनाकारोपयुक्त नी हसीतरह
५६७
उनस्य आहारक प्रश्न , केवलि थाहारफ तथा
अनाहारक काल ५६८
नाप शनापक प्रश्न, काय परित्त थपरिष्ठ काल
विपय और प्रश्नादि
एव नारकी श्वसुरकुमार याय स्तनितकुमार
पर्यन्त , पूधियीकाय मिथ्यावृष्टि ही है , एय वन
स्पत्तिफाय पर्यन्त कहना , द्वीन्द्रिय मियदृष्टि
नहीं है एव चौरिन्द्रिय पर्यन्त कहा , पचेन्द्रिय
सिर्यय जोतिषी मनुष्य वानव्यन्तर वैमानिक
तीनो है, सिझ सम्यग्दृष्टि है| ५७३
(१९ वा सम्यक्त पद कहा)
निर्णय ५६९
पर्याप्त अपर्याप्त मो पर्याप्त नी थपर्याप्त सूदन
बादर सज्ञो असनो ५७१
लवसिद्धिक जयसिझिक घरम धरम काल
निर्णय ५७२
(१८ वा पद समाप्त ऊमा)
॥ २० वा पद कहते हैं।
नेरदय शतकिरिया यह द्वार गाथा--जीव थत
क्रिया कर एव नारकी यावद्वैमानिक , नारकी
मारकी में यन्तक्रिया करे नही/ ५७५
नारकी अमरकुमार में अन्तक्रिया करे एव याय
॥ १९ कहते हैं।
जीय सम्पम्दृष्टि मिष्मादृष्टि सम्पमियादृष्टि है,
पत्राक
विषय और प्रश्नादि
पत्राक
विषय और प्रनादि
देय भी भेद यह दो पृथिवी से वैमानिक से
मे जाय उपजे एह निर्णय ५८८
होय शेप नही होय ५८६ | चार प्रकार असज्ञि आयु कहा , असज्ञी जीव
महलीफ सातमी से तेज वायु से नही, सेनापति क्या नैरयिकायु करे कि देवायु करे एव मनु
आदि मी एय ५८६ प्यायु देवायु जैसे नारकायु, एह नारकी प्रस
अश्वरत्न हस्तिरत्न रत्नप्रभा से निकल यावत् सह ज्ञिवायु यावत् देय असज्ञि आयु मे कौन
सारदेय हो, चक्ररत्न चर्म दढ बत्र मणि असि
किस्से थोडा घणा है एव अरपवऊत्व ५९०
काफिणिरत्न असुरकुमार से ईशान तक हो ,
(२० या अतक्रिया पद पूर्ण)
शेष नही , असयत भविकद्रय्य देव अविरा
धितसयम विराधित सयमा सयम मे पिराधि
॥ २१ वा कहते हैं।
त सयमा सयम असज्ञी तापस कादर्पिक चर विहिसठाणपमाण यह द्वार गाथा
५९१
णपरिव्राजक किल्विपिक तिरश्वीन आजीविक पाच औदारिकादि शरीर कहे
आभियौगिक सलिगी दर्शनय्यापनक यह देव एकेद्रियादि ५ नंदस शोदारिक पाच नेदेहै
५९२
लोक में उपजै तो कहा कौन किस देवलोक पृथिवीकायादि ५ नेदस एकेंद्रिय शौदारिफ ग
पत्राक पत्राक ॥२६॥ अप् वनस्पत्ति मी विषय और प्रश्नादि विषय और प्रश्नादि एव अप् बनस्पति में मी असुरकुमार मरके तेज असुरकुमारचवके तीर्थंकर पणा पाये नही, एव घायु द्वींद्रिय श्रींद्रिय चतुरींद्रिय मैं न उपजे यावत् अप् , तेजस्काय तेजस्काय से निकल शेप पाच में उपजे इत्यादि ५८० सीर्थकर हाय नही धर्मसुने एव थायु मी', व जैसे पृधियीकाय कहा सैसे नस्पतिकाय अतक्रिया करै तीर्थकर न हो, कहना , तेजसकाय से निकल तेजसकाय में पञ्चेंद्रिय तिर्यठच मनुष्य वानव्य॑तर जोतिपी उपजै यायत् स्तनितकुमार ५८१ अतक्रिया ही करे ५८५ जैसे तेज तेसे वायु , वेरीदी घरौंद्री से निकल सौधर्म देय चवके तीर्थकर होय कोई एक जैसे नारकी में उपजे इत्यादि पठचेंद्रिय तियच प रत्नप्रभा नारकी एव यायत्सर्वार्थसिह का देव| ५८५ चेंद्री तिमच से निकल नारकी में उपजे इहा तक ५८२ रनममा का नारकी चक्रवर्त्त होय शर्कराप्रमा रखममा पृथिवी का नारकी निकल सीर्थकर होय, का न होय एवं यावत्सातमी का नारकी, ति कोड एक , एव यावत् वालुफाममा पकप्रमा मेघ मनुष्य भी नही, भवनपति ध्यतर जोतिषी पृषियी का नारकी निकल तीर्थकर न होय वैमानिक से होय , एव यलदेव भेद यह के धूमप्रमा तमा यावत् सप्तमी ५८१ शर्फराषिवीका नारकी भी होय , एवं वासु
पत्राक
,
विपय और प्रश्नादि
विपय और प्रश्नादि
पन्नाक
सस्था० सम्मूर्छिम मे सर्वत्र ऊही है, ५९८ धारह योजन इत्यादि, प्रीन्द्रि तीन कोस ,
मनुष्य मे ६ सस्यान सम्मू० मे जोहो है, थौ चौरिंद्री चारकोस पंचेद्रिय १००० योजन
दारिक शरीर की कितनी की अवगाहना है |
इत्यादि ६०१
इत्यादि ५९९ जोयणसहस्सछगा यह सग्रहणि गाथा २ मनु
पृथिवीकाय एकेद्रिय शौदारिक शरीरावगाहना
प्योदारिफ शरीरावगाहनाधिकार ६०२
उत्कृष्ट जघन्य अगुल असंख्यात भाग एव अ वैक्रिय शरीर द्वि नेद व्यक्तव्यताधिकार ६०३
पर्याप्त पर्याप्त, एवं सुक्ष्म पर्याप्ता पर्याप्त, या
वैक्रिय शरीर सस्थान वक्तव्यताधिकार
६०८
दर पर्याप्ता पर्याप्त मी, एय अप्काय भी ६०० नारकी आदि दडक में बैंक्रियशरीर सस्थान ६०८
तजस्काय घायुकाय भी ऐसे ही कही, वनस्पति वैक्रिय शरीरायगाहना वक्तध्यताधिकार ६१०
मे जघन्य अगुल असंख्यात भाग उत्कृष्ट सा
आहारक शरीर वक्तव्यताधिकार
तिरेक हजार योजन एव पर्या० अंगुल अस आहारकशरीर सस्यान यक्तव्यताधिकार
६१९
ख्यात भाग , पर्याप्त पूर्व कहा तैसे है| ६०० तेजसशरीर वक्तव्यता
६२०
द्वीन्द्रिय जघन्य अगुल असख्यात भाग उत्कृष्ट तैजसवारीर सस्थान निर्णय २७ दढक मे ६२१
पत्राक पत्राफ . विपय और प्रनादि विषय और प्रचनादि रीर पाच प्रकार है। ५९२ काय मसूरचद् सस्यान सस्थित , एव सूदम पू/ ॥ २ | पृषियी काय एफेंद्रिय औदारिक शरीर सूक्ष्म या थिवीका यादर कानी कहा। ५९६ दर नेदसे दो भेद, सूदन तथा घादरनी पर्याप्त अप्काय स्तिषुकविदु सस्यान, सूदन यादरपर्या थपर्याप्त नेदसे प्रत्येक दो दो नेदहै। ५९२ प्ता पर्या० नी, तेज सूचीकलाप सस्थित एव एष वनस्पतिकाय एकेद्रिय औदारिकनी कहा सूदनयादर पर्या० पर्या० नी , वायु पताका द्विप्रिचतुरिद्रिय औदारिकशरीर पर्या० थपर्या० सस्थान सस्थित है, एष सूक्ष्मादि नीहै , वन नेदसे द्विषिष कहाहै ५९३ स्पति नानासस्थान सस्थितहै, एव सूदनादि पर्वंद्रिय थीदारिक शरीर तिर्यंच मनुष्यसे दो नाह, द्वाद्रियौदारिक शरीर ऊसस्थान है, नेद है, विर्यच औदारिक तीन नेदह एव जल एव तेरिद्री चउरिद्री नी, पर्चेद्रिय तिर्यचको स्यल स्नघरादि नेदनिर्णय ५९३ छ सस्थान है पर्या० थपर्या० कोनी| ५९६ मनुष्य पर्वंद्रियोदारिफ शरीर दो नेद इत्यादि ५९५ | पर्या० थपर्या० सम्मूर्छिम पर्चे तिर्यंच काह, शोदारिक शरीर नानासस्थान सस्थित है, एके प० २० गर्नज पर्चेद्रिय तिर्यच नाना है, द्रिय का चौदारिक नानासस्थानहै , पृथिवी एव तिर्यच के ९ चलाये हैं , जलपर में
पत्राक
पत्राक
विपय और प्रश्नादि
यिपय और प्रश्नादि
सस्था० सम्मूर्छिम मे सर्वत्र अमही है, ५९८ वारह योजन इत्यादि, त्रीन्द्रि तीन कोस
मनुष्य में ६ सस्थान सम्मू० मे ऊऊही है, छौ चौरिद्री चारकोस , पचेद्रिय १००० योजन
दारिक शरीर की कितनी यकी अवगाहना है।
इत्यादि ६०१
इत्यादि ५९९ / जोयणमहस्सछगा यह सग्रहणि गाथा २ मनु,
पृथिवीकाय एकेद्रिय थौदारिक शरीरावगाहना
प्यौदारिक शरीरावगाहनाधिकार ६०२
उस्कृष्ट जघन्य अगुल असख्यात माग एवं अ वैक्रिय शरीर द्वि जेद व्यक्तव्यताधिकार
पर्याप्त पर्याप्त , एवं सूक्ष्म पर्याप्ता पर्याप्त, वा वैफिय शरीर सस्यान वक्तव्यताधिकार
दर पर्याप्मा पर्याप्त मी, एव अप्काय भी ६०० नारकी आदि दडक में वैक्रियशरीर सस्थान ६०८
तजस्काय वायुकाय भी ऐसे ही कही, वनस्पति वैक्रिय शरीरावगाहना वक्तव्यताधिकार
६१०
मे जघन्य अगुल असंख्यात माग उत्कृष्ट सा आहारक शरीर वक्तध्यताधिकार
६१६
तिरेक हजार योजन एव पर्या० अगुल अस आहारकशरीर सस्थान वक्तव्यताधिकार
ख्यात भाग , पर्याप्त पूर्व कहा तैसे है ६०० तेजसशरीर यक्तव्यता
६२०
द्वीन्द्रिय जघन्य अगुल असख्यात भाग उत्कृष्ट तेजसशरीर सस्थान निर्णय २७ दडक मे ६२१
६०८
पत्राक पत्राक १. ५९३ , वायु पताका विपय और प्रश्नादि विषय और प्रचनादि रीर पाच प्रकार है। ५९२ काय मसूरचद्र सस्यान सस्थित , एष सूक्ष्म प/ २७ पृथिवीकाय एफेंद्रिय औदारिक शरीर सूक्ष्म था यित्रीका यादर कानी कहा ५९६ दर नेदसे दो नेद, सूक्ष्म तथा पादरजी पर्याप्त अप्काय स्तियुफविदु सस्यान, सूक्ष्म चादरपर्या थपर्याप्त नेदसे प्रत्येक दो दो नेदहै। ५९२ प्ता पर्या० नी, तेज सूचीकलाप सस्थित एव एष धनस्पतिकाय एकेद्रिय औदारिकनी कहा ५९३ सूदनयादर पर्या० पर्या० नी द्वित्रिचतुरिंद्रिय औदारिकशरीर पर्या० थपर्या० सस्थान सस्थित है, एव सूदनादि नाहै , वन नेवसे द्विविध कहाहै ५९३ स्पति नानासस्थान सस्थितहे, एघ सूदनादि प.द्रिय छौदारिक शरीर तिर्यच मनुष्यसे दो नोहै, द्वींद्रियौदारिक शरीर ऊफसस्यान है, नेद है, विर्यच यौदारिक तीन नेदहै एव जल एवं वेरिद्री चउरिंद्री जी, पचेद्रिय तिर्यचको स्थल वचरादि नेदनिर्णय ५९३ छ सस्थान है पर्या० थपर्या० कोनी ५९६ मनुष्य पचेद्रियौदारिक शरीर दो नेद इत्यादि ५९५ | पर्या० थपर्या० सम्मूर्छिम पर्चे० तिर्यच कहे, शीदारिफ शरीर नानासस्थान सस्थित है, एक प० २० गर्नज पद्रिय तिर्यच नाना है द्रिय का शौदारिक नानासस्थानहै , पृथिवी। एव तियच के ९ चलावे हैं, जलचर में ६ ,
पत्राक
पत्राक
विषय और प्रश्नादि
विपय और प्रश्नादि
सस्या० सम्मूछिम मे सर्वत्र जामही है, ५९८ वारह योजन इत्यादि , ब्रोन्द्रि तीन कोस ,
मनुप्य मे ६ संस्थान सम्मू० मे जोकही है, शो चौरिद्री चारकोस , पचेद्रिय १००० योजन
दारिक शरीर की कितनी यकी अवगाहना है।
इत्यादि ६०१
इत्यादि ५९९ जोयणसहस्सछगा यह सग्रहणि गाथा २ मनु
पृधियीकाय एकेद्रिय थीदारिक शरीरावगाहना
प्यौदारिक शरीरावगाहनाधिकार ६०२
उत्कृष्ट जघन्य अगुल असख्यात भाग एवं अ वैक्रिय शरीर द्वि नेद व्यक्तव्यताधिकार
पर्याप्त पर्याप्त , एवं सदन पर्याप्ता पर्याप्त, वा यक्रिय शरीर सस्थान वक्तव्यताधिकार
६०८
दर पर्याप्ता पर्याप्त मी, एव अप्काय भी ६०० नारकी आदि दडक मे वैक्रियशरीर सस्थान
६०८
तेजस्काय वायुकाय भी ऐसे ही कही, वनस्पति वैक्रिय शरीरायगाहना वक्तव्यताधिकार ६१०
में जघन्य अगुल असंख्यात माग उत्कृष्ट सा
आहारक शरीर वक्तव्यताधिकार
योजन
एव
पर्या० अंगुल अस
आहारकरारीर सस्थान वक्तव्यताधिकार
ख्यात भाग , पर्याप्त पूर्व कहा तैसे है| ६०० तैजसशरीर वक्तव्यता
६२०
वीन्द्रिय जघन्य अगुल असख्यात भाग उत्कृष्ट तेजमवारीर सस्यान निर्णय २७ दडक मे ६२१
तिरेक हजार
पत्राक पत्राक ॥ २ ॥ विपय और प्रश्नादि विपय और प्रश्नादि मारणातिक समुद्घात समग्रहत जीघ के सैजस पचिणे,जिस्को औदारिकशरीर तिरको क्रिय शरीर की फितनी अवगाहना भौधिक सत्र जिस्को बैंक्रिय तिस्को औदारिक शारीर इत्या एव एकेंद्रिय द्वीन्द्रियादि समयहत के तेजस दि यक्तव्यता| ६२९ की अवगाहना कह।। ६२३ | यह प्रौदारिक वैक्रिय आहारक तेजस फार्मण एवं मरणसमुदघात समयहत नारकी के तेजस शरीरों मे द्रव्यार्य से प्रदेशार्य से द्रय्यार्थ प्रदेशाथ की , पपेंद्रिय तिर्यच मनुष्य असुरकुमारादि से कौन फिस्से योहा घणा है इत्यादि निर्णय ६३० समघहत तैजसायगाहनाधिकार ६२१ | यह औदारिक बैंक्रिय आहारक तेजस कार्मण कार्मण गरीर पाच प्रकार एकेंद्रियादि मेद से, शरीरो में जघन्यावगाहना उत्कृष्टायगाहना म सेजस शरीर समान वक्तव्यता सर्व कहना ध्यमावगाहना में कौन किस्से अस्पयजत्व ६३, अनुत्तरोपपातिकदेय पर्यंत ६२७ (२१ वा पद कहा) औदारिक शरीर पुल कितनी दिशि से विणे इत्यादि निर्णय, वैक्रिय पुनलादि भी कहा| ६२८ ॥ २२ वा कहते हैं। एव यावत्कार्मण शरीर पुल भी, उपविणे भ कितनी क्रिया काही कायिकी थादि पाच क्रिया
पत्राक
.
विपय और प्रशनातिः
पत्रांक
विपय छोर प्रश्नादि
कही, कायिकी २ नदें, अधिकरणको २ नेदें, होय एव यायद्वैमानिक पर्यन्त कहना, एव ना
प्रावपिकी ३ नेदे, पारितापनिको ३ नेर्दे एवं
रकी यादि के वध का निर्णय ६३८
फ्रिया निरूपणाधिकार ६३१ | जीय ज्ञानावरणी कर्म वाघता जश्था कति क्रिय
जीव सक्रिय है के अफ्रिय है इत्यादि शौधिक | ७३५ है एकवचन वजयचनें वैमानिक तक ६३९
जीय प्राणातिपात क्रिया करै, काहे स करै, एव एव थाट कर्म के एकवचन बजायचन से १६ दफक
नारको शादि दमको मे नी कहा वैमानिक पर्यत ६३६
कहना ६४०
एव मृपावाद वदतादान मैथुन परिग्रह सूत्रनी जीव को जीवों से कितनी क्रिया, कदाचित् ३॥
१।५। और कदाचित याक्रिय, जीव को ना
एव क्रोध मान माया लोन प्रेम वेप कलह अभ्या रकिञ्चों से कितनी पूर्ववत्, स्तनितकुमार से
ख्यान पैसून्य परनिदा चरतिरति मायामुपा पृथियी से शुप् तेज वायु वनस्पति द्वित्रि चतु
मिय्यादर्शनशल्य जी सर्व नारकी शादि वैमा रिद्रिय पचेंद्रिय मनुष्य से जैसे जीवो से , थान
निक पर्यन्त मे जैसे पूर्व कहा कहना, ६३८
प्यन्तर जोतिपी वैमानिक से जैसे नारकी से
जीव प्राणातिपात से सप्तविध अष्टविध यधक
एकेक जीय पद मे चार २ दफक | ६४१
पत्राक ॥ २९॥ घिपय और प्रश्नादि पत्राक यिपय और प्रनादि कायिकी शाठि पाष क्रिया कही, नारकी को जीय जिस समय कायिकी प्राधिकरणको प्राद्वे| पाचो फ्रिया है, एव वैमानिक पर्यन्त , जिस पिकी क्रिया म स्टष्ट उस समय प्राणातिपात जीव को कायिकी क्रिया है उस्को अधिकरण से भी स्पृष्ट, इत्यादि पूर्ववत् १ वचन यहुय की है जिस्का अधिकरण की तिरको कायिकी चन से कहना| ६१८ है इत्यादि ६१५ | पाच क्रिया कही , आरमिकी पारिग्रही माया जिस समय मे जीव को कायिको क्रिया है उस प्रत्यया अप्रत्याख्यान मिथ्यादर्शनप्रत्यया समय मे अधिकरण की जिस समय थधिकरण भारम्भिकी आदि किस्को है, प्रमप्त सयत की सिस समय कायिकी एव पायो क्रिया के फो, सयतासयत अप्रमतसयत अप्रत्याख्यानी सूत्र कह ६५६ मिथ्यादृष्टी को क्रम से है| ६१९ जिस देश में जीव को कायिकी तिस देश में अधि नारकी को पाच क्रिया याववैमानिक पर्यन्त, करण की जिसमे शधिकरण की तिस्मे कायिकी जिस्को आरम्भिकी तिस्को पारिग्रहिकी- इत्यादि , प्रदेश में भी एक कहा स्यादि निर्णय ६५० आयोजिक कही २१ दरक में ए अधिकार ६१७ | है जीव को प्राणातिपात विरमण , काहे से जीय , ५ क्रिया
पत्राक
पत्राक
।
विपय और प्रश्नादि
विपय और प्रश्नादि
प्राणातिपात विरमण कर इत्यादि अधिकार ज्ञानायरणी आदि कर्मप्रकृति कही
प्रतिपादन ६५२ नारकी को कितनी कर्मप्रकृति , एय यावद्वैमानि
प्राणातिपातविरत जीव कितनी कर्म प्रकृति वाधे क, कैसे जीव आठ कर्मप्रकृति वाघे एव वै
इत्यादि २७ भग निरूपण ६५३
मानिक पर्यन्त ६६१
एव प्राणातिपातयिरत जीय के २७ भागे एव ज्ञानायरणी कर्म जीय कैसे याधै इत्यादि १६
भूपायादविरत यावत् मायामृपाविरत जीव
दहक अधिकार ६६२
मनुष्य को कहा , मिथ्यादर्शनशल्ययिरत का जोय ज्ञानायरणी कर्म वेदै, नारकी ज्ञानावरणी
निरूपण, २७ भागे कई एष क्रिया निर्णय ६५६ कर्म वेद एय वैमानिक पर्यन्त व शेप कर्म
पाचो क्रियाओ का अल्पयहुत्व निरूपण ६५९
प्रकृति दढक भी कहना ६६३
(२२ क्रिया पद समाप्त)
ज्ञानावरणी कर्म जीयने याधा स्पृष्ट वक्षस्पृष्ट
सच्या चिणा यावत् गति को पाक स्थिति को
॥ ३२ वा पद कहते हैं।
पाके पुद्गलपरिणाम को पाके कितने प्रकार थ
कतिपगढी कहि यघद इत्यादि द्वार गाथा ६६०
नुभाग कहा इत्यादि) ६६५
पत्राक
विषय और प्रश्नादि
विपय और प्रश्नादि
पत्रांक
एष सातवेदनी का अनुभाग कहा, असातका थगापाग ३, शरीरबधन ५, शरीरसघात ५,
मी ही कह्म ६६८
नाम उनेर्दे संस्थान नाम६, वर्ण ५, गघ २
मोहनीका अनुभाग १ तरह, आयुका १ एव
रस ५, स्पर्श ८, गुरुठघु १ उपघात १,
सर्य कर्मका ६६९
पराघात १, शानुपूर्वी ४, उत्स्यास १, शेप
(१ उद्देशा पूरा अशा)
सर्व , एक हैं यावष्तीर्थकर है, विहायोगति २
पाठ कर्म प्रकृति कही, ज्ञानावरणीप नेद, दर्श नेदें, गोत्र २ नेदें उच्चै ८, नीचे ८, थन्त
नावरणी निद्रा ५ दर्शन १ एव नव, वेदनी १६
राय ५ नेदें, ६७७
प्रकार साता ८ वरे असाता ८ तरह, मोहनी ज्ञामावरणी शादि८ कर्मस्थिति निरूपणाधिकार ६८२
दो ने दर्जनमोहनी तीन चारित्रमोहनी दो एकेंद्रिय जीव ज्ञानावरणी को क्या याचँ एव ८
नेदें, पाय वेदनी १६ ने । ६७५
कर्म कहना| ६९५
नो कषायवेदनी , प्रकार, थायु, नाम १२ एवं द्वित्रि चतुरिंद्रिय को नी कहना
ने १६७६ | एवं पचेंद्रिय ज्ञामावरणी का क्या वाफ इस्यादि
गति नाम १ नेदें, जाविनाम५, शरीर नाम ५,
निरूपण ...
पत्राक
विषय और प्रश्नादि
(२३ वा पद पूर्ण जाशा)
विषय और प्रइनादि
पत्रांक
ज्ञानावरणी कर्म का जघन्य स्थिति वन्धक कौन,
मोहनीय को जघन्यस्थिति बन्धक कौन, आयु
का जघन्य स्थिति बन्धक कौन इत्यादि
७०१
उत्कृष्टस्थितिक ज्ञानायरणी कर्म क्या नारकी याधै
फि तिर्यच इत्यादि, कैसा नारकी उत्कृष्ठ स्थि
तिक ज्ञानायरणी कर्म बाधै इत्यादि निरूपण ७०५
एवं थायु को बोझ सातो कर्म के थाळावे कहना,
उत्कृष्टस्थितिक थायुकर्म क्या नारकी बाधै इ
स्यादि कैसा तिर्यच उत्कृष्टस्थितिक शायु कर्म
॥ २४ वा पद कहते हैं।
थष्टं कर्म प्रकृति कही, नारकी को यायद्वैमानिक
को, जीव ज्ञानायरणी (शादि) कर्म बाधता
अशा कितनी कर्म प्रकृति याथै इत्यादि निर्णय ७०८
(२१ वा पद पूर्ण जथा)
बांधे| ७०६
। २५ कहते हैं।
थाठ कर्म प्रकृति कही, ज्ञानावरणी कर्म वाघतो
जीव कितनी प्रकृति वेदै, एव नारकी याव?
मानिक, एव पृथत सेनी, यायत् अतराय
तक कहना, जीव वदनी कर्म बाधता कितनी/
कैसा मनुष्य तथा मानुषी उत्कृष्टस्थितिफ थायु
बाघे/ ७०७
पत्राफ
विषय और प्रश्नादि
पनाक
फर्म प्रकृति वेदै, एव एकत्व पुधव से थाठी|
फर्म घेदै यावद्वैमानिक ७१२
(२५ था पद पूर्ण कहा)
धिपय और प्रचनादि
कर्मो के शालाये समाप्ति पर्यन्त| ७१७
(२७ वा पद कहा पूर्ण)
३१॥
२६ कहते हैं।
थाठ कर्म कहे नारफी को याववैमानिफ को,
जीव ज्ञानाधरणी कर्म वेदता कितनी कर्म प्र
कृति बाधे, इत्यादि निर्णय ७१३
(२६ वा पद कहा पूर्ण)
सच्चिन्नाहारठी यह द्वार गाया २,
७१८
नारकी सविताहार के शचिताहार मियाहार
एव शसुरकुमार यावद्वैमानिक, नारकी शाहार
काश्रयी है, कितने काठसे थाहार की इच्छा
होय इत्यादि ७१९
नारकी क्या शाहार करे इत्यादि निरूपणाधिकार ७२०
असुरकुमार आहार का अघी है , एव जैसे नार
की यायत् मपोभूय परिणमे ७२५
पृषियी काय आहार का अपी है, निरतर मा
हारेष्छा होती है,च्या माहारे है जैसे नारकी
थाठ कर्म प्रकृति कही, नारकी को यावद्वैमानिक
को, जीय ज्ञानावरणी कर्म वेदता किवनी कर्म
प्रकृति वेदै एव सर्व एकस्व पृषक्त से कहना ८
पत्राक
पत्राक
को कहा
विपय और प्रश्नादि
विपय और प्रश्नादि
तेस
है प्रक्षेपाहारी नही एय एकेद्रिय भी ७३४
मी कहना सर्व वनस्पति /
इहा
काय पर्यन्त एवमेय ७२६ सर्व देय भी पूर्ववत् वैमानिक पर्यन्त, द्वीन्द्रिय
वीन्द्रिय आहारा है , एवं पूर्ववत् सर्व कहना से मनुष्य तक दोनु है, नारकी ओजाहारी है
यावत् अल्पयऊत्व पर्यन्त ७२८ मनमदो नही , एव सर्य देय याबद्वैमानिक
एव त्रिचतुरिन्द्रियाहारार्थ, आहार कालादि नि
दोनू है इत्यादि निरूपणाधिकार ७३५
सपणाधिकार ७२९
(१ उद्देशा पूर्ण ऊमा)
मनुष्य आहारादि निर्णयाधिकार यावत् सर्वार्थ आहार मविय सन्नी यह गाया, जीव आहारक
सिद्ध देव तक कहा ७३०
मी है अनाहारक भी है ७३६
नारकी क्या एकेद्रियशरीर आहार के यावत्पर्धे एव नारकी यावत् असुरकुमार यायद्वैमानिक
द्रियशरीर आहार, एव स्तनितकुमारपयन्त सिद्ध अनाहारी है, एव यजयचन से भी आ
पृधियोकाय प्रश्न, द्वीन्द्रिय एव यायच्चतुरि-
लाया कहना ७३७
न्द्रिय इत्यादि जिस्के जितनी इद्रिय शरीर भवसिक्षिक आहारक अनाहारक मी है, एव वैमा
उस्को उतनही का माहार, नारको लोमाहार निक पर्यन्त एष अभवसिक्षिक नोभयसिक्षिक
पत्राक
पनाक
ने ७५१
विपय और प्रश्नादि
विपय और प्रश्नादि
नो अमवसिक्षिक आहार अनाहार निर्णय ७३८ | दी प्रकार उपयोग कहा,
| ७५०
(द्वार १)
साकारोपयोग शाठ नेद, शनाकारोपयोग चार
॥ ३२ ॥ सझी जीव आहारक अनाहारक मी है एव वैमा
निक पर्यन्त एफेंद्रिय विकलेंद्रिय न पूछना
नारकी को कितने प्रकार उपयोग, साकारोपयोग
एव प्रसन्नी मी कहना स्तनितकुमार तक ७३९ ६, शनाकारोपयोग तीन प्रकार एवं स्तनित
एष मनुष्य मी, सिझ मनाहारक, सप्लेशी जीय
कुमार पर्यन्त कहना ७५२
का प्रश्न एकत्यपृषक्त से ७५० पूपियाकाय उपयोग प्रश्न यायद्वनस्पतिकाय, द्वी
सम्यग्दृष्टि जीव आहारक प्रश्न, द्वित्रिचतुरिन्द्रिय
न्द्रिय प्रश्न ७५३
छ मगा ७१२ पपेंद्रिय तिर्यंच जैसे नारकी, मनुष्य जैसे शैघिक
सयत माहारकानाहारक निर्णय, एकत्व पृथक
उपयोग इत्यादि ७५३
से सकपायी प्रश्न ७११ (२९ वा पद समाप्त जथा)
(२८ वा थाहार पद कहा)
२९ या कहते है।
म ३० करते हैं।
पत्राक पत्राक विषय और प्रश्नादि विषय और प्रशनाटि कितने प्रकार पश्यता कदी२, साकार पश्यत्ता प्ररूपणाधिकार ७५८ ६ प्रकार, शनाकार पश्यता तीन प्रकार है केवठी इस रत्नप्रनापृथिवी को साकार हेतु उ एव जीव को कहना ७५६ पमा दृष्टान्त वर्ण सस्यान प्रमाण से जिससमय नारकी को २ पश्यष्ठा, साकार पश्यता १ श्वना जाणे उससमय देखे इत्यादि प्रश्न ७६० कार २ एव स्तनितकुमार पर्यन्त ७५७ (३० पद समाप्त जथा) पृथिवीकाय को १ साकारपश्यता एव वनस्प ति पर्यन्त ७५७ ॥ ३१ कहते हैं। द्वीन्द्रिय को १ साकार पश्यता सो २ तरहकी है। जीव सज्ञी शसज्ञी के नो सज्ञी नो श्सज्ञी इत्यादि एव त्रीन्द्रिय नो चक्षुरिन्द्रिय को २ साकार प्रश्न निर्णय ७६२ पश्यप्ता जैसे द्वीन्द्रिय को शनाकारपश्यत्ता पृथियी काय प्रश्न, एव यावच्चतुरिन्द्री मनुष्य जैसे १ कही , मनुष्य को जैसे जीवो को शेप जैसे जीव, पचेंद्रिय तिर्यच वानप्यन्तर जैसे नारकी नारकी यावद्वैमानिक ७५८ जोतिपी वैमानिक सज्ञी, ७६३ जीव साकारपश्यी है के थनाकार इत्यादि (३१ वा पद कहा) पत्राक विपय और प्रश्नादि पत्राक विषय और प्रश्नादि ॥३२ कहते हैं। उत्कृष्ट चार जाणे, शकरा का जघन्य तीन जीव सयत के श्यसयत के सयतासयत, एव ना उत्कृष्ट साई, वालुफा नारकी जघन्य देव- रकी प्रश्न, यायच्चतुरिन्द्रिय, पचेंद्रिय तिर्यच उत्कृष्ट तीन, पकाना नारशीजघन्य दो उत्कृष्ट मनुष्य प्रश्न एवं सिछतफ ७६१ थवाइ, धूमप्रना नारकी जघन्य मेट उ० दो ७६८ (३२ वा पद कहा) तमा का नारकी क्रोश जघन्य उस्कृष्ट फेट, नीचे सातमी का जघन्य शर्ट क्रोश उत्कृष्ट क्रोश। । ३३ कहते है। थसुरकुमार जघन्य २५ योजन उत्कृष्ट शस नेद विषय सठाणे यह गाथा ७६५ ख्यात द्वीपसमुद्र, नाग जघन्य २५ उत्कृष्टयही, दो प्रकार यघि कही नथप्रत्यय वायोपशामक एव स्तनितकुमार पर्यन्त , पर्चेद्रिय तिथंच ज नेद से, देव नारकी को जयप्रत्यय, मनुष्य पन्य थगुरु शसख्यात नाग उ० यसख्यात तिर्यप को छायोपशामिक ७६० द्वीपसमुद्र, मनुष्य अगुल असख्यातनाग जघन्य नारकी जघन्य शुई क्रोश उत्कृष्ट चार जाणे थ उत्कृष्ट शसख्यात शलोक में लोक प्रमाण खक षधि से, रत्नप्रना का मारकी पढाई अघन्य वानप्यन्तर जैसे नाग, जोतिषी जपन्य उस्कृष्ट .
विपय और प्रवनादि
पत्राक
विपय और प्रश्नादि
पत्राक
शसख्यात द्वीप ७६९
नीचे का परमान्त, तिरछा असख्य द्वीपसमुद्र
सौधर्म देय जघन्य अगुल असख्यातभाग उ०-
ऊपर स्ययिमान ७७०
नीचे रत्नप्रभा का नीचे का चरमान्त तिरछा अनुप्तरोपपातिक ठेव समित्नलोक नाडी जाणे,
असख्य द्वीपसमुद्र , ऊपर अपना विमान । नारकी का प्रयधि क्षुरप्राकार, असुरकुमार या
एय इशानदयभी , सनत्कुमार भी ऐसे नीचे वत् स्तनितकुमार का पल्यक के आकार , प
शर्करा का नीचला चरमान्त, एव माहेन्द्रदेव
चेद्रिय तिर्यंच का नानाकार है , मनुष्य का भी
मी, ब्रह्म लान्तकदेव सिर्फ नीच तीसरी का
एवं , यान व्यन्तर का पटहाकार, जातिपी का
नीचेका घरमान्त , महाचक्र सहस्रार चौथीके कालराकार । सौधर्म देव का ऊईमृदगाकार
नीचे का चरमान्त मानतमाात मारण अ
एष अच्युतदेव पर्यन्त है , ग्रेयकदर का पुष्प
च्युत देय नीचे पाचमी धूमप्रभा के नीचे का चगेरीसमान , अनुत्तरदंव का जयको नाली
चरमान्त, नीचे मध्यम ग्रेवेयकदेव नीचे नही
के आकार ७७१
के नीचे का चरमान्त , उपरिमग्रेवेयक देव नारकी यावत् स्तनितकुमार अवधि के भीतर
ज० अगुल असख्यात भाग उ० सातमी के
है के वाहिर, भीतर है, पचेद्रिय तिर्यच या
पप्राक पत्राक . ॥४॥ । घिपय यौर प्रश्नादि विपय और प्रश्नादि हिर, मनुष्य दोनू है , व्यन्तर जोतिपी पैमा मणतरागयाहारे इह गाया २ निफ जैसे नारकी, नारकी देशावधि है, एवं नारको अणतराहार है इत्यादि यक्तय्यता याव स्तनितकुमार पर्यन्त , पचेंद्रिय तिर्यच भी एव, त् २१ दडक मे ७७५ मनुष्य दानू । व्यन्तर जातिषी वैमानिक जैसे नारकी का आहार आमोगनिवर्तित है के अ- नारकी । नारफी का अयधि आनुगामिक म नाभोगनिवर्तित इत्यादि वक्तव्यता ७७५ प्रतिपाती अवस्थित है। एवं स्तनितकुमार नारकी जिन पुगलो को आहारपणे ले उनको जाणे देखे इत्यादि निर्णय ७७६ पचेंद्रिय तिर्यच का मानुगामी भी यावत् अय नारकी को प्रसख्यात अध्यवसान स्थित मी है , एष मनुष्य भी अप्रशस्त भी वैमानिक कोमीहै | ७७७ जोतिपी वैमानिक जैस नारकी| ७७३ | नारकी सम्यक्ताभिगमी मिथ्यात्वाभिगमी सम्य- (३३ वा पद पूर्ण हुमा) मिथ्यात्वामिगमी भी है, एवं वैमानिक पर्यन्त एकेद्रिय विफलेंद्रिय मिथ्यात्वाभिगमी ही है ॥३१ या पद कहते हैं। देवता सदेवीक सपरिचार है इस्यादि " मग पर्यन्त । ७७२ प्रशस्त भी वानप्यन्तर पत्राक पन्त्राक ७८६ विषय और प्रश्नादि विषय और प्रश्नादि प्रश्न निर्णय ७७८ | यह कायपरिचारक यावत् मनपरिचारक दमों भयनपति व्यन्तर जोतिषो सौधर्म ईशान के देव मे कौन किस्से अल्पयऊत्व है ७८१ सदेवीक सपरिचार , सनत्कुमार से अच्युत तक (३४ या पद पूर्ण जात्रा) अदेवीफ सपरिचार हैं , अवेयकानुप्तर देव अ देवीक अपरिचार हैं| ७७९ ॥ ३५ वा कहते हैं। परिचारणा पाच प्रकार है कायादि भेदसे उस्मे सीयायदवसारीर यह सग्रह गाथा भवनपति आदि ईशानान्त कल्प मे कायपरि शीत उघन मिश्र एव तीन प्रकार वेदना कही चारणा है, शनत्कुमार माहेद्र मे स्पर्शपरिचा नारकी को कौन वेदना ७८७ रणा है , ब्रह्मलातक मे रूपपरिचारणा है, वक्र द्रव्य क्षेत्र काल भाव से चारप्रकार वेदना , नार सहसार में शब्दपरिचारणा है, अच्युतान्त १ मे की कौन येढना वेदै एव वैमानिक पर्यन्त मनपरिचारणा है , ग्रेयेयकानुत्तर में परिचा- शारीर मानसी शारीरी मानसी शारीरमानसी रणा नही है ।| ७८० भेदसे तीनप्रकार वेदना, नारकी कौन वेदना इच्छामन समुत्पन्न होने का अधिकार वेद एव यावद्वैमानिक पर्यन्त ७८८ ७८० पत्राक ७९२ ॥ ३५॥ ॥३२ कहते है। विपय और प्रश्नादि प्रत्रात विपय और प्रश्नादि एकन्द्रिय द्वीन्द्रिय शारीरी वेदना वेदेशीर नही, र्यच मनुष्य व्यन्तर जैसे नारफी यहा| ७९१ साता असाता सातासात एव तीन प्रकार वेद ज्योतिपी का प्रश्न, नाहै , नारकी को कौन वेदना है एय सब जीव (३५ या पद कहा) यायद्वैमानिक पर्यन्त ७८९ दुख सुख मिश्य एव तीन प्रकार वेदता है , नारकी को कौन वदना यावद्वैमानिक पर्यन्त ७९० वेदन कपाय मरणे इह गाया उग्रही, तिने अभ्युपगमिकी शौपक्रमिकी एव २ प्रकार वेदना समुहात कहे | ७९३ है नारको से पौरिन्द्री तक छोपक्रमिकी है वेदना समुहात असख्य त सामयिक शान्तर्मुस विर्यच मनुष्य में दो, प्यन्तर जातिपी वैमानिक र्तिक , एष शाहारक तक, फेयलिनमहात को जैसे नारकी को कही तैसे कहा ७९० शाठ तामयिक, नारको को घार समहात, निदा शनिदा नेद न दो बेदना, जारकी को कौन सुरकुमार का पाच समुहात . एय स्तनित यदना है इत्यादि निर्णय, एव स्तनितकुमार कुमार तक , पृथियीकाय को तीन तमु०, एय पर्यन्त, पृथिवीकाय प्रश्न, एव चौरिन्द्री, ति| चौरिद्री पर्यत, थायुकाय को चार समु०॥ ७९. , , पत्राक पत्राम विपय और प्रश्नादि विपय और प्रश्नादि पर्वंद्रिय तिर्यच यावत् वैमानिक को पाच समु० है, एव वैमानिक नेद बनस्पतिकाय मनुष्य मे ८०० मनुष्य को सात, एकेक नारको को कितने स एफेक नारकी का नारकी पणे कितने वेदना स० मु० शतीत शुनत. पुरस्कृत इत्यादि ७९६ शतीत इत्यादि ८०१ एव शसुरकुमार को नी वैमानिक पर्यत, एव एव शतुरकुमार से वैमानिक पर्यन्त , एकेक शुतु चौवीस दमक कहा, ऐकेक नारकी को कितने रकुमार को नारकीपणे क्तिने वदनासमु० समु० छतीत इत्यादि वैमानिक पर्यत ७९७ शतीत इत्यादि, एकेक शतुरकुमार को शतर एफेक नारकी को कितने केलिनमु० श्तीत कुमार पणे कितने वेदना स० यतीत एव ये इत्यादि ७९८ एव वैमानिक यायन्मनुष्य पर्यन्त , नारकी को एव वैमानिक पर्यंत २४ चौबीस दफक होच, ना कितने वेदना समु० शुतीत इत्यादि , एव च रकी के नारकीपणे कितने कपायसमु० प्रतीत मानिक तक , एव तेजस जी एव पाच २१ द इत्यादि एव एकेक नारकी के सुरकुमार पणे झक नारकी को कितने आहारक समु० शतीत ७९९ कितना शतीत एव स्तनितकुमार तक ८०१ एव वैमानिक तक विशेष वनस्पतिकाय मनुष्य में मारणातिक समु० स्वस्थान मेग्कोतरिका से जहा मानिक ८०२
पत्राक
॥३६
विषय और प्रश्नादि
विपय और प्रश्नादि
पत्राक
तक वैमानिक को वैमानिकपणे में, एष २४ ।
यह यसरफुमार वेदन कपाय मरण वैफ्रिय तेज
२१ दमक, वैक्रिय जैसे कपाय, तेजस जैसे
स सम० निर्णय ८११
मारणातिक ८०७ | पृथिवीकायादि निरूपण द्वीन्द्रिय यावरपचेद्रिय
एकेक नारकी के नारकीपर्ने कितने आहारक वेदनादि यावत् यसमवहतो में कौन किस्से
शतीत इत्यादि ८०6
पोझा घणा इत्यादि शधिकार ८१६
एकेक नारकी के नारफीपणे कितने फेवलि स० मनुष्य वेदनादि यावत्केथलिममु० समवहता
थतीत इत्यादि वैमानिक पर्यन्त मनुष्य
में
समयहतो में कौन किस्से ८१७
नेद है, एव तेजससमु० पर्यन्त कहा ८०९ कपायसमु० चारप्रकार क्रोधादि के चार मेदसे,
यह वेदनादि समु० यावत्केवलि समु० समयहत नारकी को १ कषाय समु० एव यायद्वैमानिक
असमयहत जीयों में कौन किस्से योफा घणा एकेक नारको को कितने क्रोधसमु० एव याव
इत्यादि शधिकार ८१२
त् अतीत इत्यादि ८१८
यह नारकी वेदना कषाय मरण वैफ्रिय समवरत एव लोभसमु० पर्यन्त ४ दरक एकत्व पृषक से
इत्यादि निर्णय ८१३ १ दरफ, एकेक मारकी के नारकीपने फितने
पत्राक
पन्नाक
विपय और प्रश्नादि
विषय और प्रश्नादि
क्रोधस० अतीत इत्यादि अधिकार ८१९
फरस के रहैं इत्यादि अर्यनिरूपण ८३५
यह क्रोधसमु० यायल्लोभसमु० समवहतासमवहत छल्मस्य मनुष्य उन निर्जरा पुद्गलो के वर्ण गन्धा
में कौन किस्से ८२३
दि जाणे नही ८३६
कितने छानस्यिक समु०६ कहे वेदना याव फाहे से केयली समु० को करै ४ कर्म क्षीण न
दाहारक८२५
होने से कर ८३७
नारकी को १ बावास्थिक, असुर को ५, एके कोई केयली समुदघात करे कोई नही मी करै
द्रिय को तीन । वायुको चार । तिर्यंच पचे-
इहा २ गाया है,
८५०
द्रिय को पाच । मनुष्य को ६, ८२६ श्रावर्जन कितने समय मे होता है, केयलिसमु०
वेदनी समरहत जीव जिन पुद्गलोको छोडे उनसे
कितने समय में होता है ८ में इत्यादि ८११
कितना क्षेत्र पूर्ण, कितना स्टष्ट इत्यादि नि तथा समु० गत जीव मनोयोगादि तीन योगमे
रूपणाधिकार ८२७
से कौनसा योग कर ८१२
केयलिसमु० समवहत अनगार भावितात्मा जो तथा समु० गत जीव सीके यूझ मुक्त होय इत्यादि ८४३
चरम निर्जरापुद्गल सो सूदन है , सर्वलोक को समु० मतिनिर्वर्तित जीव कौनसा योग करें
८११
पत्राक
विपय यौर प्रश्नादि
पत्राक
विपय और प्रचनादि
योग निरोध समय निरूपणाधिकार
पोउशिकालनिरूपणाधिकार
८४६
चार कमप्रकृति युगपत् खपाय औदारिक तेजस
फार्मण त्यजे ऋजुधणि पाके अस्पृशद्गति हो
के मुक्त होय सिछ होय ८१७
अशरीर जीवधन इत्यादि सिद्ध उदाणनिरूपण ८१७
निच्छिमसचदुस्का सिदत्व निरूपण लक्षण गापा ८१८
(समुद्धात पद ३६ पूर्ण कहा)
। चतुर्य उपाग प्रज्ञापना सूत्रानुक्रमणिका ॥
n समाप्त जई॥
पचाप । पट। । मच OPERATOPARDwaar ववगयजरमरपामए सिष्ठेममिवदिऊणतिविहेण । वदामिजिणयरिद तेलोकगुरुमहावीरं ॥१॥ सुयरयणनिहाणजिण वरेणमवियजणणिझुडकरेण । उपदसियाभगवया पत्नयणासङ्भावाण ॥२॥ वायगवरवसा तेवीसइमेणघीरपुरिसेण । दुसरघरेणमुणिणा पुक्षसुयसमिध्वुशीण ॥ ३ ॥ सुयसागराविए ऊण जेणसुयरयणमुप्तमदिन । सीसगणस्समगवन तस्सणमोजसामस्स ॥ ४॥ यज्जयणमिणचित्त सुय रयणदिठिवायणीसद । जहवाणयमगयया शहमवितहवणइस्सामि ॥५॥ पणयणा १ ठाणाइ २, यजत्र तव ३ ठिई १ विसेसाय ५ । यक्वती ६ उस्सास,७ सणा ८ जोणीय ९ चरिमाइ१०॥१॥भासा ११ सरीर १२ परिणा, म १३ कसाय ११ इविय १५ प्पळगेय १६ । लेसा १७ कायठिइया १८, सम्मत्ते १९ शतकिरियाय २० ॥२॥ गाहणसठाणा २१, किरिया २२ कम्मेय २३ कम्मस्स । यधए २४ कम्मवेयए २५, येयस्सयघए २६ येयवेयए २७॥३॥ थाहारे २८ उवगे २९, पासणया ३० सणि ३१ सजमे ३२ चेय।ही ३३ चेय। ही ३३ पवियारण ३४ व्यपगतवरामरमनपाम् सिमामनिव त्रिविषेन । वन्देबिनबरेन्द्र प्रैलोक्यगुरुमहानगरम् ॥ १॥ श्रुतरननिघानमिन घरेणनव्यजननिर्वसिकरे प। आपदर्शितानगयता प्रापनासबमावानाम् ॥ २ ॥ वाचकवरवं क्षोत्र योविशतितमेनपारपुरुषेय। दुरपरेमुनिना पूषतसमृदयहिमा ३ ॥ श्रुतसागरराष्ट्रानयित्वा येनश्रुतरवमुत्तमदत्त । शिष्यगणायनगवते तस्मैममप्रायइयामाय ॥ ४ ॥ प्रप्यपनमिदविध गुप्तरवदृष्टिपादनिस्पन्द । यपा पवितधावता इमपितयावर्गमिप्यामि ॥ ५॥ प्रधापनास्थानानियतव्यस्पितिषिपच । व्युरशान्तिवावासः सवायोनिपपरमामि ॥६॥ मापाशरीरपरिणामः कयायेन्द्रियेप्रयोगय । लेश्याकास्थितिवा सम्यगामथान्तक्रियाधैव ॥ ७ ॥ प्रयगाहमास्थान शियापर्मायक्षमणः । बन्धको वेदवचैव वेदण्या nu वेदवेदवचाधार योपयोगीय दझंगमः। सवाघमप्रसवा मषियमविधारणा ए ॥ पवनाथ सुमहान पनि INECRETIROICIAS-RDHARE- ...
विषय थोर प्रश्नादि
पत्राक
२७
विपय और मचनादि
पत्राक
योग निरोध समय निरूपणाधिकार
८१५
शोलेशिकालनिरूपणाधिकार
८५६
चार कर्मप्रकृति युगपत् खपाय औदारिक सैजस
कार्मण त्यजे जुाण पाके अस्पञ्चद्गति हो
के मुक्त होय सिझ होय ८४७
अशरीर जीवधन इत्यादि सिद्ध क्षणनिरूपण ८१७
निच्छिमसदुरका सिद्धत्व निळपण उदाण गापा ८१८
(समुदघात पद ३६ पूर्ण कहा)
7
. चतुर्प उपाग प्रज्ञापना सूत्रानुक्रमणिका ।
॥ समाप्त जई।
पपवा ॥ पर। परिणया नीठयमपरिणया लोहियवणपरिणया हालिद्दवमपरिणवा सुक्किालवमापरिणया। जे गधपरिणया ते दुविहा पणता, तजहा-सुम्निगधपरिणया दुम्निगधपरिणया। जेरसपरिणया ते पचयिहा पणता तजहा तिप्तरसपरिणया कायरसपरिणया कसायरसपरिणया अघिलरसपरिणया मऊररसपरिणया । जेफासपरि णया ते शक्षविहा पणता, तजहा-करकफासपरिणया मउयफासपरिणया गरुयफासपरिणया उऊयफा सपरिणया सीयफासपरिणया उसिणफासपरिणया णिकफासपरिणया लुकफासपरिणया । जेसठाणपरि णया ते पचयिहा पमता, तजहा-परिमफलसठाणपरिणया वहसठाणपरिणया तससठाणपरिणया चउर ससठाणपरिणया शायतसठाणपरिणया॥जे यमन कालवणपरिणया ते गधन सुमिगधपरिणयावि दुम्नि गधपरिणयायि, रस तित्तरसपरिणतावि कायरत्तपरिणतावि कसायरसपरितावि यिलरसपरिणता नि मजररसपरिणतावि, फास करकफासपरिणतावि मउयफासपरिणतावि गरुयफासपरिणतावि लजा BHHODE-MEENERaaama MSORRORE BREMERCESSIREDESIResसभDELHMMME सत्यपा-मुरनिगरपरिणता दुरमिगन्पपरिणता । ये रसपरिणता स्ते पचविधा मयता तापा-तिक्तरसपरिणता फटुबरमपरिणताः कपा- परसपरिपता प्रानरसपरिणता मधुररसपारपता । य स्प परिणता से ऽष्टविधा प्रस्तास्तद्यथा-फफशस्पशपरिणता मदुस्पझपरिणता गुरु पस्पशपरिणता सघुवस्पर्सपरिक्सा ज्ञातस्पर्शपरिगता सामस्पक्ष पारपता: निग्घरपझा परिणता सदरपशपरियप्ता । ये सस्यानपारणता ते पविधा मप्तास्तद्यथा परिमाइलसस्थानपरियता एत्तसंस्थानपरिणता स्यनसत्यामपरिणता चतुरस्रमस्यामपरिणता पायतसस्थामप- रिपताः । य वपतः गतवर्ष परिणता ते गातः सरनिगन्पपरिणता अपि दुरनिगन्धपरिणता अपि, रसत तितरसपरिणता अपि फटुश्च रसपरिषता अपि वपापरसपरिवा अपि पासरसपरिणमा अपि मधुररसपारपता पपि, स्पातः पक स्पर्धापरिसता सुदुरपशपरिणमा मन। E- ॥ ३ वे, यणा ३५ यतप्तोसमुग्धाए ३६ ॥१॥से कि त पणवणा? पणवणा दुबिहा पणत्ता, तजहा-जीवपणय णाय राजीवपणवणाय । सकित शजीयपमषणा २ दुषिहा पणता, तजहा-रूविशजीयपमयणा शरुवि राजीयपणवणाय । सेकित शकविशजीवपसावणा? शरुविशजीवघणवणा दसविता पणता तजहा- घम्मत्यिकाए घम्मत्यिकायस्सदेसे धम्म स्थिकायस्सपएसा, धम्मत्यिकाए धम्मत्यिकायस्सदेसे शुधम्मत्यि कायस्सपएसा धागासत्यिकाए शागासत्यिकायस्सदेसे वागासत्यिकायस्सप्पदेसा शक्षासमए १० सेत्तशमवि यजीवपणवणा सेकित विश्वजीवपणवणा कवियजीवपणवणा चउठिहा पणता तजहा-खघा सघदे सा खघप्यएसा परमाणुपोग्गला। तेसमास पचयिहा पणता, तजहा-बसपरिणया गधपरिणया रस परिणया फासपरिणया सहाणपरिणया। जेवण परिणया त ममासन पचधिहा पणत्ता, तजहा-कालयण घरसमिसम्परम् । । पमप्रापमा बास्पात् विषामधापनामता ॥ १०॥ तपा जीपापना प्रमीयमतापमा घ । सा कतिविधा पनीमा पना शिविरा प्राप्ता । तपा कृप्यनीवप्रचापना सप्पनीबचापमा प अप बतिविपा प्रमप्यमीवमापना पराप्यजीवप्रधापना दशदि पा प्रचता । तपा पमोसिसवायः पमोनिकायस्य दया पोतिबायस्य प्रदशा अपमासिसयो अपमास्तिकापस्य देशो अपमास्तिकायस्प प्रदेगा। भावामासिवाय पाबाझातिवायस्प बस पावाशासितपापस्प प्रदशा: पहासमयः । समाता ऽप्यजीयनपापमा पहा मा खप्पणीवपचापना रणजीवप्रधापना तुबिधा प्रप्ता तद्यथा-कन्या रहदशा प्रदेशा। परमायुपुलनाः ते समासता पम्पविधा माता पा वरपरिषता गमपारयता रसपरिषता स्पपरियता संस्थामपरिखता। ये बपरिपता स ममामत पम्मविपा ममता सपमा बासस्परिकता नीबरपरिषता सोशियसपरिणवा पारिएपपरियारपरिषता । थे नरपरिणवा ने शिविता माता namESDRADEDParlsMARRRRRRomans Tyार्गपपरिणपा । मच ।। ॥ पद॥ परिणताषि ककुयरसपरिणतायि कसायरसपरिणतायि शम्बिलरसपरिणताघि मऊररसपरिणतावि, फास फरकफासपरिणतावि मउयफासपरिणयाघि गरुयफासपरिणतावि जायफासपरिणतावि सीतफासपरिण ताघि उसिणफासपरिणतावि णिझफासपरिणतायि सुरकफासपरिणतावि, संहाण परिमालसहाणपरिण तायि बहसष्ठाणपरिणतावि तससष्ठाणपरिणताधि चउरससठाणपरिणतावि शायतसठाणपरिणतावि । जपणन हालिवणपरिणता ते गधन सुलिगधपरिणतायि दुनिगधपरिणतापि, रस तितरसपारेणता यि कयरसपरिणतावि कसायरसपरिणयावि शयिलरसपरिणतावि मजररसपरिणतावि, फास करक: फासपरि० मउयफासपरि० गरुयफासपरि० लऊयफासपरि० सीयफासपरि० उसिणफासपरि० णिझफास परि० लुकफासपरिणतावि, सहाण परिमंझलसठाणपरि० वहसठाणपरि० तससठाणपरि० चउरसस ठाणपरि० थायतसहाणपरिणतावि । जेवण सक्किालवण परिणता ते गध मुस्निगधपरिणतावि दुनिगध अपरिगता पपि रसस्तित्तरसपारबता अपि बटुपरसपरिणता बाप कपापरसपरिवता पाप पसरसपरिणता भांप मपुररसपरिपता पपि, • स्पयता पसरपझपरिषता अपि मृदुबरपझपरिपता पपि गुतफरपपरिणता अपि लपुकस्पर्शपरिणता अपि शोवरपक्षापरिणता प्रपि उमरपधपरिणता प्रपि सिग्परपर्सपरिणता प्रपि दस्पर्शपरिणता पपि, सस्पानता परिमराहतसस्थानपरिणता पपि वृत्तसत्वानपरिखता पपि यस्रसत्यामपरियता अपि चतुरस्त्रसस्पामपरिणता अपि पायत संस्थानपरिणता प्रपि । ये वर्षतः मुलयसपरिणता स्ते गन्यत सुरनिगन्य परिश्ता अपि दुरभिमन्यपरिरता अपि रसतखि सरसपरिणता टुकरसपरिणताः पायरसपरिणता अन्नरसपरिषता मधुररसपरिकता पपि। पनवर बशनपशपरिषवा प्राप मदुरुपक्षपरिषदा अपि गुलतपशपारणता अपि लघुपर्शपरिणवा अपि शीतस्पोपरिणता अपि वप्न यफासपरिणताधि सीतफासपरिणतायि उसिणफासपरिणताघि णिझफासपरिणताविलुस्कफासपरिणतावि सठाण परिमालसहाणपरिणतावि बहसहाणपरिणतावि तससठाणपरिणतायि चउरससठाणपरिणताधि थायतसहाणपरिणताधि । जेवण नीलवणपरिणता ते गध सुम्निगधपरिणतायि दुनिगघपरिणतावि, रसत वित्तरसपरिणयावि ककुपरसपरिणतावि कसायरसपरिणवावि अघिउरसपरिणतायि मजररसपरिण तायि, फासन कस्कफासपरिणतावि मउयफासपरिणतावि गरुयफासपरिणतावि जायफासपरिणतावि सीतफासपरिणतावि उसिणफासपरिणतावि णिझफासपरिणतायि सुरकफासपरिणतायि, सठाणपरिमाल सहाणपरिणतायि बहसठाणपरिणतायि तससाणपरिणतावि चउरससठाणपरिणतावि व्यायतसठाणपरि पसायि। जे वा लोहियवणपरिणता ते गध सुस्निगधपरिणतावि दुनिगधपरिणतावि, रख तित्तरस HDERSHIRECE चपि मुतारपा परिवता प्रपि सपुवामा परिणता प्रपि पीतम्पस परिसता पपि डामस्पड़ापरिपता अपि सिभरपर्यापरिषता अपि रूपरपर्श परिपता पि, पत्यानता परिसराससलामपरिणता प्रापि पतसंस्थानपरिणता पाप स्पसमपातपरिणता अपि चतुरससस्थानपरिणता अपि प्रायत त्यामपरिग्वा पपि । ये वयता तोहितवपारखता से गन्धत हरनिगन्धपरियता अपि दुरनिगरपरिकता प्रपि, रसत मित घरपरिषता अपि पटवरसपरिषता अपि पायरसपरिवता अपि पापरसपारसता अपि मपुररसपरिपता पपि, स्पर्धता पसरपर्मपरि बवा अपि सरपमपरिगता अपि नस्सारपोपरिमता अपि सपुकरपा परिसता अपि मीतस्परपरिषता अपि उमरपथपरिषता अपि हि परपयरपता अपि नस्पक्षपरिषता प्रपि समानता परिमराहसमजानपरिबता पि रत्तलखानपरिचता चपि अपत्यमपरिचता प्रति अनुरसम्झामपरिवा पिपलालमरिसमा अमि । मामेभासिस परिवार भिमपरिया अपि पुरप्रिय पाला ॥ पट। मद। चउरससठाणपरिणताधि थायतसहाणपरिणतावि। जे गध दुनिगंधपरिणता ते वणन कालवणपरि० नीलवणपरिणताति लोहितवमपरिणताबि हालियापरिणताचि सुक्षिालवणपरिणतावि, रस तितरस परिणतावि कल्यरसपरिणताधि कसायरसपरिणतावि थविलरसपरिणसावि मऊररसपरिणतावि, फास फरकफासपरिणतावि मउयफासपरिणतावि गरुयफासपरिणतावि लजयफासपरिणतावि सीतफासपरि० उसिणफासपरिणतावि णिझफासपरिणतावि लुकफासपरिणतावि, सठाणन परिमझलसठाणपरिणतावि वसठाणपरिणतायि तससठाणपरिणतायि चउरससहाणपरिणतायि शायतसहाणपरिणतावि । जेरस तिष्तरसपरिणता ते वह कालवणपरिणतायि नीलवणपरिणतायि लोहियवसपरिणतावि हालिदवण परिणतावि सुक्कालवणपरिणतावि, गध सुम्निगधपरिणतावि दुम्निगधपरिणतावि, फासन करकफासप JAMIK अपि प्रायतमस्थानपरिषता अपि । ये गत्पतो दुरभिगन्धपरिणता ने वर्षतः फमवर्मपरिणता अपि नासवर्णपरिणता अपि सोहिसवर्णपरिणता अपि हारिद्रयसपरिणता पपि शुशवयपरिणवा अपि रसततिकरसपरिणता अपि बबरसपरिषता प्रपि वपापरसपरिणता प्राप प्रसरस परिषता अपि मपुररसपरिणता पपि स्पतिः कास्पर्धा परिणता अपि मृदुस्पक्षपरिणता पपि गुरुवारपापरिसता थपि लघुकस्पा परिणता पपि शीतस्पर्धापरिखता पपि समस्पशपरिणवा प्रमि निरपस्पो परिणता प्रपि समस्पर्शपरिण्ता प्रपि, सस्पानव परिमाइलसस्थानपरिणता अपि पासमानपरिषता अपि श्यनमस्थानपरिणवा अपि चतुरस्रसस्थामपरिणता अपि पापतसस्थानपरिषता अपि । ये रमतसित्तरसपरि पताल पर्पत कमवपरिसता अपि नासवर्षपरिणता प्रपि लोदितवपपरिणता प्रपि शरिद्रवपपरिषता अपि शुकरणपरिणता अपि, गन्ध पासुरनिगमपरिपका भपि दुरनिगग्यपरिणता पपि, स्पर्शत एव पक्षपरिणवा अपि सुदुरपशपरिणवा अपि गुसकरपदापरिणवा अपि ameraa परिणतायि , रस सित्तरसपरि० फायरसपरि० कसायरसपरि० थम्यिठरसपरि० मऊररसपरिणतायि, फास करक्राफासपरिणतावि मउयफासपरिणयावि गरुयफासपरिणयावि उजायफासपरिणताविसीयफा सपरिणतायि उसिणफासपरिणताधि णिशफासपरिणतावि लुरकफासपरिणताधि, सहाणन परिमालसठाण परिणतावि बहसाणपरिणतावि तससष्ठाणपरिणतायि चउरससठाणपरिणतायि थायतसठाणपरिणतावि। जे गधन सुम्निगधपरिणता ते वणन काठयणपरिणतावि नीयसपरिणतावि ठोहितयणपरिणतावि हाठि यमपरिणयायि मुक्तिप्लवणपरिणताथि, रस तित्तरसपरिणतापि कायरसपरिणतावि कसायरसपरिणता घि थयिलरसपरिणतायि मफररसपरिणसायि, फास करकफासपरिणतावि मउयफासपरिणतावि गरुय फासपरिणतायि लयफासपरिणताधि सीतफासपरिणतायि उसिण फासपरिणतायि णिहफासपरिणतानि लुरकफासपरिणतावि, सहाण परिमाउसठाणपरिणतावि वहसठाणपरिणतायि तससठाणपरिणतावि . स्पपिरिगता पपि विपरपर्धपरिणता अपि सहापर्शपरिणता अपि सत्यामतः परिमालसंस्मानपरिषता अपि बत्तसस्पानपरिणता पपि असमतानपरिखता अपि चतुरस्रमत्मानपरिषता अपि पापरतानपरिगता अपि । ये मन्यता सुरनिगमपारखता से वय कासवरपरि पता अपि नोसपरिवता अपि तोहितवपरिषता अपि गरिएपरिसता पपि गुवापरिकता प्रपि, रसनित्तरपरिषता अपि अदुपरसपरिकता पपि पावरपपरिषता प्रपि अनरसपरिवता अपि मपररमपरिषता अपि स्पमता बसमस्पमपरिसता अपि गदुत्पत्रपरि रवा अपि मुरुगरपोपरिषता अपि सपुबरपा परिता पपि भीतरपपरियता बपि उपत्यपरिपता चपि जिपरपपरिपता पि कप स्पर्षपरिपवा पपि, जाम परिमारतरत्रामपरिक्षा पिरचमलानपरिया अपि भगवानपरिषता अपि चतुरखापपरिषता मम । परवा 1 पर।। बयणपरि० मुक्किालवणपरिणावि, गध सुम्निगघपरिणतायि दुनिगघपरिणतावि, फास करकफास परि० मउयफासपरि० गरुयफासपरि० लजायफासपरि० सीतफासपरि० उसिणफासपरि०णिझफासपरि० लुरकफासपरिणतावि, सहाण परिमालसहाणपरि० वहसष्ठाणपरि० तससठाणप० चउरससष्ठाणप० शायतसठाणपरिणताधि । जे सर थपिलरसपरिणता ते वरण काठयणपरि० नीलवणपरि० लोहितव णपरि० हालिलवणपरि० सक्किालयसपरिणतावि, गधन सुनिगधपरिणताधि दुनिगधपरिणतावि, फास करकफासपरि० मउयफासपरि० गरुयफासपरि० सजायफासपरि० सीयफासपरि० उसिणफासपरि० णिकफासपरि० लुकफासपरिणतायि । सहाण परिमालसठाणपरि० यहसठाणपरि० तससठाणपरि० चउरससठाणपरि० थायतसठाणपरिणतावि। जे रस मझरपरिणता ते या कायमपरि० नीलवण० वर्षपरिग्ता अपि झुलवणपरिसता प्रपि, गन्धत सुरनिगम्पपरिणता प्रपि दुरनिगम्पपरिवता पपि, स्पर्शतः फसशस्पर्शपरिपता अपि मदु स्पर्शपरिणता अपि गुरुकरपदापरिबता पपि सपुरपशापरिषता अपि शीतरपदापरिणता अपि समस्पझपरिणता पपि सिग्धरपक्षपरिपताप पि सपस्पर्शपरिचता अपि, सस्थामतः परिमपालसत्यानपरिणता अपि यत्तसस्पामपरिणता पपि यससस्थानपरिणता अपि चतुरस्रसस्यान परिपता अपि भायतसस्पामपरिसता प्रपि। ये रसतोसरसपरिपता सो वपतः कामयपरिणता अपि नीलवर्णपरिणता अपि लोहितवपपरि बता पपि हारिद्ररपरिषता अपि झुलवरपरिषता अपि, गम्धत तरनिगमपरिणता पाप दुरनिगन्धपरिणता प्रपि, पात: ककरास्पशप रिक्ता अपि सदुस्पर्शपरिणता अपि गुरुबरपर्सपरिपता पाप लघुवरपसपरिणता पि शीतस्पर्शपरिसता प्राप उरमरपा परिणता भापति परप परिपवा प्रपि उपस्पर्शपरिगता पपि, संस्थानव परिमपहसमस्यामपरिणवा प्रपि वृक्षसस्थानपरिपता भपि यससंस्पानपरिणता INDIME!:
रिणतावि मउयफासपरिणतावि गरुयफासपरिणतावि उझयफासपरिणतावि सीतफासपरिणतायि उसिण फासपरिणतायि णिकफासरिणतावि लुरकफासपरिणतायि, सहाण परिमालसठाणपरिणतावि वहसठा णपरिणतावि तससठाणपरिणतावि चउरससठाणपरिणतावि थायतसठाणपरिणतावि। जेरस कदुयरस परिणसा ते वण कायमपरिणतावि नीलषमपरिणतायि लोहितषणपरिणतावि हालिद्दयणपरिणतावि सुक्लियसपरिणतावि, गघठ मुनिगघपरिणतायि दुनिगघपरिणतावि, फासट कस्ककफासप० मउयफा सपरि० गरुषफासपरि० लजयफासपरि० सीयफासपरि० उसिणफासपरि० णिशफासप० लुस्कफासपरिण तावि, सहाण परिमालसठाणपरि० यहसठाणपरि० तससहाणपरि० चउरससठाणप० थायतसहाणप रिणतायि । जे रस कसायरसपरिणता ते पण कालयणपरि० नोठयणपरि० ठोहितयसपरि० हाठि तपुबरपर्यपरिषता अपि चीतरपर्शपरिणता अपि उपपपरिषता अपि निग्पस्पपपरिवता पपि पर रिसता पि, सस्थामतः परि मगइससंस्थानपरिषता अपि पत्तास्थानपरिषता अपि सनात्मानपरिमता अपि चतुरस्त्रसपानपरिणता अपि भापतसरवामपरिसता अपि । ये रखता टुबरसपरिणताते वर्षता नवपरिणता अपि नासर्व परिपता अपि मोहितम्पपरिणता अपि गरिनुपर्षपरियता मि मुह परिषा अपि नसता सरमिमयपरिता अपि दुरनिगन्धपरिमता अपि स्पयतः मशरपा परिचता अपि परपर्मपरिषता पपि नुह बस्पर्षपरिखता अपि सपुषस्पपरिचता अपि शीतस्परपरिषता अपि उपरपशपरिणता अपि सिम्पपपपरिसता अपि मापनपरिषता भपि सलामत परिमाससस्मामपरिकता अपि पतसतानपरिपता अपि अक्षमखानपरिषता अपि चतुरनहत्थानपरिषता अपि वापत खानपरिषता अपि । म रहवा गापरसपरिपता पधा कणापरिणता पिनासपरिषता बपि सोशितबरपरिणवा विहार मद पना ॥ पद ॥ फासपरिणतावि, सहाण परिमालसठाणपरि० वहसंहाणपरि० तससष्ठाणपरि० चउरससठाणपरि० छायतसठाणपरिणतावि।जे फास मउयफासपरि० ते वण कालवणपरि० नीलयसपरि० लोहितवण परि० हालिद्दवणपरि० मुक्किालवण परिणतायि , गधन मुनिगधपरि० दुनिगधपरिणतावि, रस तित्त रसपरि० कायरसपरि० कसायरसपरि० एयिलरसपरि० मऊररसपरिणतावि, फास गरुयफासपरि० लजयफासपरि० सीतफासपरि० उसिणफासपरि० णिहफासपरि० लुकफासपरिणतावि, सठाणन परि मालसहाणपरि० वहसठाणपरि० तससठाणपरि० चउरससठाण० शायतसठाणपरिणतावि। जे फासन गरुयफासपरिणता ते वण कालवणपरि० नीलवणपरि० लोहितयण परि० हालिद्दयणपरि० सुकिल्लव णपरिणतायि, गधन सुप्लिगधपरि० दुम्निगधपरिणतायि , रस तित्तरसपरि० कायरसपरि० कसायरस BALURRORLSO पता अपि चतुरस्रमस्यामपरिणता अपि पायतसस्थानपरिषता अपि । य स्पशतो मृदुस्पशापरिणवासो वणता फप्नवर्णपरिणता अपि नीलवर्षे पारणता अपि लारितवय परिणता पपि शारिद्रषण परिणता अपि चालवर्णपरिणता प्रपि गन्यतः सुरनिगन्यपरिणता अपि दुरनिगन्यपरिणता भाप, रसता तिसरसपरिणता अपि पदुबरसपरिगता अपि पायरसपरिणता अपि अन्नरसपरिणता पपि मपररसपरिणता प्रपि, स्पशत गुरुवरपझपरिणता पपि लघुस्पर्शपरिपता अपि शीतस्पन परिणता प्रपि उमरपत्रपरिपता प्रपि स्निग्पस्पा परिणता अपि सतस्पशपरिण ता प्रपि, सस्पानत परिमगठलस स्पामपरिणता पपि पत्तसस्थामपरिणता णपि त्र्यम्रसस्थामपरिणता अपि चतुरस्रमस्थानपरिषता अपि पाप तसत्पानपरिगता अपि । ये स्पशवो गुरुकस्पशपरिणताले वपत फमयण परिणता अपि मालवएपरिणता पाप लोहितमण परियता अपि हा रिददर परिपवा भपि शासपरिपता भपि, गन्यतः सरनिगन्धपरिणता अपि दुरनिगरपरिषता प्रपि, रसवात घरसपरिषता भपिन्टु BFAIELVERB:10 MADI प.॥
लोहितषणपरि० हालिइनापरि० सुक्षिालयसपरिणताधि, गध सुम्निगघपरिणतापि दुनिगघपरिणता घि, फास करकफासपरि० मउयफासपरि० गरुयफासपरि० उजायफासपरि० सीतफासपरि० उसिण फासपरि० णिशफासपरि० छुरकफासपरिणतावि, संहाण परिमालसठाणपरि० यहसठाणपरि० सस ठाणपरि० चउरससाणपरि० थायतसहाणपरिणतायि । जे फास कस्ककफासपरि० ते वणन फालव परि० नीलवणपरि० ठोहितवणपरि० हालिदवसापरि० सुक्किालवणपरिणतावि, गध सुम्निगघपरि० दुनिगघपरिणतापि, रस तिप्तरसपरि० कायरसपरि० कसायरसपरि० थपिलरसपरि० मऊररसपरिण तावि, फास गरुयफासपरि० लवयफासपरि० सीतफासपरि उसिणफासपरि० णिशफासपरि० बपि तुरनसतामपरिग्ता पपि पायतमत्वानपरिषणा पाप । य रसवो मपुररसपरिवसा से वर्षत बासवर्णपरिणता अपि नीलवणपरिण वा प्रापि सोहितवर्षपरिकता पाप हारिद्ववर्षपरिरमा पपि पुनवर्षपरिणता पि, गन्यता सुरपिमयपरिषता अपि दुरभिगन्धपरिणता पपि, रपात पापमपरिश्ता अपि मदुरपर्भपरिणता अपि नुहबरपसपरिषवा अपि सपुबरपझपरिणता अपि चीतस्पर्धपरिणता पपि उमापय परियता बपि विपरपपरिश्ता अपि चस्पार्यपरिषता अपि संसान परिमगठसमस्यामपरिषता अपि वृत्तसंस्थानपरिवता पपि यत्र संस्थानपरिषता भपि चतुरसत्यानपरिषता अपि भापतसंसानपरिषता अपि । ये स्पर्धेत पसरपपरिस्ता परता कामवपरिता अपि नीसबर्षपरिषता अपि तोहितवपरिनता अपि हारिपरिषता पपि मुहापरिषता अपि, गन्यतः परनिमयपरिषता अपि पुर निमन्मपरिषता पपि, रसता विचारसपरिणता बपि बबरणपरिसता अपि वपापरणपरिषता बपि भारतपरिषता अपि माररपरिक वा बपि। नवपापीयोण भिवात्मपरिवानपि संभामा परिणतरजानपरिका बपि पचरंजामपरिक्सा अषि महाभानपरि पराग ॥ पट॥ । मत लवणपरि० ठोहितयणपरि० हालिद्दवणपरि० सुकिल्लवमपरिणातावि, गघ सुम्निगधपरि० दुनिगधप रिणतायि, रस तिप्तरसपार० कायरसपरि० कसायरसपरि० शयिलरसपरि० मऊररसपरिणतावि, फास करकफासपरि० मउयफासपरि० गरुयफासपरि० उजयफासपरि० णिशफासपरि० लुरकफासप रिणतावि, सहाण परिमफलसठाणपरि० वहसठाणपरि० तससठाणपरि० चउरससहाणपरि० थायत सठाणपरिणतावि । जेफास उसिणफासपरि० ते वण कालवणपरि० नीलवणपरि० लोहियवणप० हालिद्दवणपरि० चक्किलवणपरिणतावि, गधन सुनिगधपरि० दुनिगघपरिणतावि, रसन तित्तरसपरि० कायरसपरि० कसायरसपरि० थपिलरसपरि० माररसपरिणतावि , फास करकफासपरि० मउयफा IRDER-Dala-Pramom अपि शनसस्थामपरिणता अपि चतुरस्रसस्थानपरिचता अपि पायतसस्थानपरिणता प्रपि। ये स्पर्थता शीतस्पर्शपरिणवा घर्षत लमषण परिणता अपि मालवण परिषता अपि लोहितवर्षपरिणता प्रपिारिद्रवणपरिणता अपि शुलवपपरिणता प्रपि। गम्घता सुरभिगम्पपरिणता अपि दुरनिगरपपरियता पपि रसता विक्तरसपरिणता अपि बटुवरसपरिपता अपि वपापरसपरिषता अपि अन्नरसपरियता अपि मधुरर सपरिकता अपि स्पद्यत' सकारपशपरियता अपि मदुरपदो परिणता अपि गुरुकरपशापरिणता अपि लघुसपर्शपरिणता अपि स्निग्धस्पश परिपता अपि रूदरपद्यपरिषता मपि संस्थानतः परिमयससंस्थानपरिणता अपि वृत्तसस्थानपरिसता अपि श्यसमस्यामपरियता अपि प- तुरस्रसंत्यामपरिषता अपि पायतसस्थानपरिणता अपि । य स्पन्नता समस्पपरियतास्ते वपत कालवर्णपरिणता अपि भीलवणपरिणता धपि लोहितवर्षपरिणता अपि पारिद्रययपरिपता अपि शुतवर्षपरिणता भपि, गग्यता सरभिगम्घपरिवता भपि दुरमिगन्धपरिणता म पि. रसता वित्तरसपरिणता अपि कहकरसपरिणवा अपि फपायरसपरिणवा अपि सप्तरसपरिषता अपि मपुररसपरिणता अपि। पर्वातः JHEEMAILHall परि० थपिठरसपरि० मजररसपरिणतावि, फास कस्कफासपरिणतात्रि मउयफासपरिणतायि सीय फासपरिणतावि उसिणफासपरि० णिहफासपरि० लुस्कफासपरिणताघि, सहाण परिमझलसठाणपरि० वहसठाणपरि० तससहाणपरि० चउरससठाणप० यायतसहाणपरिणतावि । जे फासच लजायफासपरि णता ते वणन काउणपरि० नीलवणपरि० लोहितयसपरि० हालिदवणप० सुक्किलयसपरिणतावि गध सुम्निगधपरि० दुम्निगधपरिणतावि, रस तितरसपरि० कायरसपरि० कसायरसपरि० थयिष्ठर सपरि० सऊररसपरिणताधि, फास करकफासपरि० मउयफासपरि० सीतफासपरि० उसिणफासपरि० णिझफासपरि० लुस्कफासपरिणतायि , सहाण परिमालसहाणपरि० यदृसहाणपरि० तससहाणपरि० चउरससठाणपरि० शायवसहाणपरिणतावि। जे फास सीतफासपरिणता ते या कालवणपरि० नी . परसपरियता अपि पापरसपरिपता अपि पतरसपरिषता पपि मधुररसपरिश्ता भपि, स्पा कलशस्पशपरिषता अपि मदुस्पशपरि बता पपि भीतरपपरिपता पि समस्पर्मपरिपता पपि निग्पस्पशपरिसमा पि सदस्पर्शपरिपता पि, सत्यानतः परिमपमतसस्थान परिकता प्रपि पत्तसंस्थानपरिपता अपि प्रतसत्यानपरिपता अपि चतुरस्रयस्थानपरिषता भपि प्रापतयत्यामपरिसता पपि । ये स्पमतो मपुरपमपरिवतार दबाता हप्नवपरिणता पिनासबापरिषता पि लोहितापरिवता अपि हारिद्रयपरिषता अपि शुजरपरि पता अपि गायता मुनिमायपरिषता अपि दुरप्रिमायपरिश्ता अपि रमतस्तितरनपरिषता अपि बबरसपरिवता अपि बापायरसपरि पता चपि पसरतपरिणता पपि मपुररसपरिषता अपि पिता बनरपपपरिषता अपि दुस्पपरिसता अपि जीतरपपरिषता अपि समस्यापरिसता बपि विपरपएपरिषता अपि परपपरिसता बपिखामवा परिमहरजानपरिक्षा चपि चलाबपरिषवा 1मम ॥ पाग ॥ पर। दुनिगधपरिणतापि, रस तिप्तरसपरि० कायरसपरि० कसायरसपरि० विलरसपरि० मजररसपरिण ताधि, फासले कस्कफासपरि० मउयफासपरि० गरुयफासपरि० राऊयफासपरि० सीतफासपरि० उसिण फासपरिणतायि, सहाण परिमाठसठाणपरि० बहसहाणपरि० तससठाणपरि० चउरससष्ठाणपरि० थायतसहाणप० । जे सहाण परिमाउसठाणपरिणता ते वण काठयणपरि० नीलवणपरि० लोहित वणपरि० हालिदयणपरि० सुक्किालवणपरिणतायि, गध, सुम्निगधपरिणतावि दुनिगधपरिणतावि, र स तिप्तरसपरि० कम्यरसपरि० कसायरसपरि० श्रयिलरसपरि० मऊररसपरिणतायि , फास करका फासपरि० मउयफासपरि० गुरुयफासपरि० लजायफासपरि० सीतफासपरि० उसिणफासपरि० णिशफास परि० लुस्कफासपरिणताधि । जसठाण वहसठाणपरि० ते यण कालवणपरि० नीलयणपरि० लोहि DOCEROINDORLDomergoneORan: ॥प.॥ रूपस्पशपरिगतास्ते वर्णता कमवपपरिणताः अपि नीलवर्षपरियता अपि लोहितवपपरिणता पपि पारितवर्षपरियता अपि शुरुवणपरिसता अपि, मन्यता सरनिगन्धपरिपता अपि दुरभिगन्धपरिणता प्रपि, रसत तिक्तरसपरिसता अपि फबरसपरिणता अपि कपायरसपरिणता अपि अमरसपरिरता अपि मधुररसपरिबता पपि, स्पमत कास्पर्धापरिणता भपि मृदुस्पक्ष परिणता अपि गुरुकरपदापरिणता प्रपि लघुन स्प परियता अपि धीवस्पझपरियता अपि समरपसपरिणता प्रपि, संस्थानतः परिमपडसमस्यामपरिपता अपि पत्तसस्थानपरिणता अपि अनसंख्मानपरिषता अपि चतुरस्रसस्थानपरिषता अपि पायतमस्थानपरिषता अपि । ये सस्पानतः परिमरमतसंस्थानपरिणताते घमत रुपम बसपरिणता अपि मीलवर्षपरिणता अपि लोहितवपरियता अपि पारिद्रयसपरिणता अपि शुरूषणपरिस्ता अपि, गन्यता सरनिगन्धपरि पता भपि दुरनिगरपरिषवा अपि । रसवः वितरसपरिणवा अपि कटुवरसपरिग्वा अपि पायरसपरिणता अपि अन्नरसपरिषवा भपि म
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मन्द ॥ ॥ पह॥ MIUILDARMERRAORORSHun दुनिगधपरिणतावि, रस तितरसपरि० कायरसपरि० कसायरसपरि० थपिलरसपरि० मजररसपरिण तावि, फास कस्काफासपरि० मउयफासपरि० गरुयफासपरि० लायफासपरि० सीतफासपरि० उसिण फासपरिणतायि, सहाण परिमालसहाणपरि० यहसठाणपरि० तससठाणपरि० चउरससठाणपरि० थायतसष्ठाणप० । जे सहाण परिमलसठाणपरिणता ते वण कालवणपरि० नीलवणपरि० लोहित यमपरि० हालियरमपरि० सुक्किालवणपरिणतायि, गघ सुम्निगधपरिणतायि दुनिगधपरिणतावि, र सह तितरसपरि० ककुयरसपरि० कसायरसपरि० शयिलरसपरि० मऊररसपरिणतायि, फास करका फासपरि० मउयफासपरि० गुरुयफासपरि० लऊयफासपरि० सीतफासपरि० उसिणफासपरि० णिरुफास परि० लुस्कफासपरिणताधि । जेसठाण वहसठाणपरि० ते वा काठयणपरि० नीलयसपरि० लोहि JDDERROADCALCEASE ॥प.॥ द्वपस्पशपरिवतास्ते पर्यत समवपपरिणताः अपि नीलवर्षपरिणता प्रपि सोहितवपपरिषता अपि पारितवर्षपरिषता अपि शुक्रवपरिणसा अपि, गन्पत सुरनिगन्पपरिपता अपि दुरभिगन्धपरिणता प्रपि, रसत तिरस्परिकता पपि पटुबरसपरिणता अपि कपायरसपरिणता अपि पचरसपारखता अपि मधुररसपरिणता पि, पक्षप्त काशरपर्धापरिपता अपि मदुस्पर्शपरिस्ता अपि गुरुतरपदापरिणता अपि सघुम स्पर्धा परिकता प्रपि शीतस्पर्धपरिगता पपि उमस्पर्शपरिणता प्रपि, संस्थानतः परिमपातसस्थानपरिणता पपि पत्तसत्यानपरिणता अपि यस्रसस्मानपरिणवा भपि चतुरस्त्रसस्पानपरिषता अपि पायतमस्थानपरिशता अपि । ये सस्थामत परिमगळससंस्थानपरिगताते वणतः रुम घरपरिग्ता पपि नीलवर्षपरिणता अपि लोहितवर्षपरिषता अपि हारिद्रयापरिणता प्रपि शुक्लवर्णपरिणता प्रपि, गन्यतः सरनिगन्धपरि पवा अपि दुरचिगन्पपरिचवा अपि । रसवः विचरसपरिणवा भपि बटुवरसपरिरवा अपि पायरसपरिणता अपि अन्नरसपरिणवा अपि म तयणपरि० हालिदयणप० मुक्किालवणपरिणतावि, गधन सुम्निगंधप० दुस्निगधपरिणतावि, रसन ति तरसपरि० कयरसपरि० कसायरसपरि० थपिलरसपरि० मझाररसपरिणतावि, फास फरकफासप० मउयफासपरि० गुरुयफासपरि० लजायफासपरि० सीतफासपरि० उसिणफासपरि० णिछफासपरि० लुक फासपरिणतायि । जेसठाण तससठाणपरि० ते घण कालवशपरि० नीलयसपरि० खोहितवणपरि० हालिद्दषणपरि० मुक्किालषणपरिणतापि, गध सुम्निगघपरिणतावि दुम्निगघपरिणतावि रस तित्तर सपरि० फयरसपरि० कसायरसपरि० थपिठरसपरि० मऊररसपरिणतावि, फास करनाफासपरि० पुररसपरिवता अपि । पर्वतः पारपर्मपरिगता अपि सदुपपरिचता अपि गुलबरपाएपरिश्ता अपि सपुकरपा परिता अपि शीतपश परिबता पपि समस्पशपरिणवा अपि विनस्पमपरिणता अपि कायस्पर्धपरिषदा पपि। सत्यामतो दत्तसंस्थानपरिशतास्ते वयता रुजवणे परिणता मीसवर्षपरिवता सोहितवर्षपरिषता हारिवरपरिणवा पुलवर परिशता पपि, गन्यतः पुरनिगमपरिवता दुरनिनापपरिवता पपि, रसखितपरिवता अपि अदुबरसपरिश्ता अपि वपापरतपरिणता अपि अनरसपरिषता अपि मपुररसपरिपता पपि स्पर्सत कर पारपर्मपरिकता प्रपि मदुरुपयपरिषता अपि पुरुषापपरिबता पपि सपुबरपमपरिगता अपि भातस्पर्षपरिपता पपि समस्परपरिगता अपि सिम्पापर्धपरिश्ता पपि सरपक्षपरिता बपि। ये संस्थामतः अनसलामपरिवाने समयपरिचता पिनीलपपरिसता अपि सोहितवपरिषता अपि पारिपरिषता अपि नाबपरिषता पि. मन्यतः हरधिमणपरिषता अपि दुरभिवम्पपरिषता अपि) रसखित्तरसपरिक्वा बपि बबरपरिषता अपि पापरसपरिषता पि भारतपरिषता अपि मधुरररिस्ता बपि। स्पर्षता परम सपरिषवा बपि गुल्मपरिषमा अपि पुरणपरिसमा अपि नगरपपरिया चषि बीमारियापि पणत्या परिच्या बपि ॥ मम ॥ पापा । घट। मउयफासपरि० गुरुयफासपरि० लऊयफासपरि० सीतफासपरि० उसिणफासपरि० णिझफासपरि० लु रकफासपरिणतायि । जे सहाण चउरससठाणपरिणाता ते वणन कालवसपरि० नीलवणपरि० लोहि ययणपरि० हालियणपरि० सुक्किावयणपरिणतावि, गधन सुनिगधपरि० दुनिग परिणतायि, रमन तिप्तरसप० कायरसप० कसायरसपरि० शघिलरसपरि० मजाररसपरिणतायि, फासन करकफासपरि० मउयफासपरि० गुरुयफासपरि० राजयफासपरि० सीतफासपरि० उसिणफासपरि० णिशफासपरि० लुरक फासपरि० । जे सहाणन शायतसंहाणपरिणता ते यण कालवणपरि० नीलवणपरि० छोहितवणप० हालिद्दघणपरि० मुक्किालवणपरिणतावि, गध सुजिगधपरिणताथि दुप्लिगधपरिणतापि, रस तितरस परि० ककुयरसपरि० कसायरसपरि० थपिलरसपरि० मऊररसपरिणतायि , फासन करकफासपरि० -PUSTARDIDmananRRIAGEDER ।प.। निगपरपा परियता पपि परपक्षपारयता प्राप । ये सत्यानतरतरत्रसस्थामपरिणतात कर्पतः फालवण परिषता अपि नीलवणपारणता अपि लामितपरिणता अपि हारिद्रयपपरिणता अपि शहरमपरिणता पाप गन्यत सरनिगन्धपरिणता अपि दुरनिगन्धपरिणता पाप, रसततिकरसपरिणता प्रपिक्टुबरमपारपता चपि वपायरसपरिणता पाप नरमपरियता अपि मधुररसपरिणता पपि, स्पर्माता यश स्पन परिषता अपि मदुबस्पो परिणमा अपि गुरुमरपन पारणता पाप लघुकरपशपरिणता अपि शोतस्पा परियता भपि उमस्पर्शपरिणता अपि मिग्परुपा परिसता अपि सरपक्षपारसता पपि । य संस्थामत प्रायतसस्थानपरिचताते चपत समवणे परिणता पाप नीलवयापरिणता अपि खोधितवर्षपरिषता अपि हारिद्रयपरिणता अपि शुक्लार्यपारबता अपि, गन्धत सुरनिगन्धपरिणता प्राप दुरनिगन्धपरिणता अपि, रसत स्तित्तरसपरिषवा भपि कटु मरमपरिणा मपि क्यापरसपरिपता अपि अन्नरसपरिणवा भपि मपुररसपरिणवा प्रपि। स्पक्षता कर्फशरपना । तघणपरि० हालियाप० सक्तिस्वयमपरिणताधि, गध सुम्निगंधप० दुनिगधपरिणतायि , रस ति वरसपरि० कयरसपरि० कसायरसपरि० थपिठरसपरि० मऊररसपरिणतावि, फास करकफासप० मउयफासपरि० गुरुपफासपरि० लजायफासपरि० सीतफासपरि० उसिणफासपरि०णिझफासपरि० लुस्क फासपरिणतापि । जेसष्ठाण तससठाणपरि० ते धरण कालवणपरि० नाउयसपरि० लोहितवणपरि० हालिद्दयणपरि० मुक्किालयसपरिणतावि, गघ सुम्निगधपरिणतावि दुस्निगघपरिणतावि , रस तित्तर सपरि० कनुपरसपरि० कसायरसपरि० थयिठरसपरि० मचाररसपरिणतावि, फास करकफासपरि० . पुररसपरिवता अपि , स्पर्धतः परपर्शपरिणवा अपि सस्पर्शपरिषता अपि गुरुवस्पपपरिवता पपि लपुरापरिखता पपि शीतस्पश परिपता चपि उमरपद्यपरिश्ता पपि तिग्पस्पर्षपरिणता पपिचरपपरिगता पपि।ये सरसामवो पत्तरसामपरिता वयता कप्पवर्ष परिवता भासवर्षपरिवता मोहितवर्षपरिणवा शारिवारिसता शुलपरिकता पपि, गपवः सुरनिमम्पपरिवता दुरमिनग्यपरिगता पपि, रवखितपरिएता पपि बटुबरसपरिवता अपि वपापरसपरिग्ता अपि असरसपरिसता अपि मधुररसपरिणता प्रपि' स्पच पाई भरपर्भपरिषता अपि सदुरपर्धपरिचता पपि नुवरपमपरिवता पपि सपुरापापरिषता अपि शीतपपरिषवा पपि उमस्पर्धपरिषता भपि शिपापापरिषता पपि रुपरपः परिगता बपि। में समानता पनस स्पानपरिबतासे बता रुपवरपरिषता अपि नीसबरपरिषता भषि तोहितवपरिषता पपि हासिरपरिषता अपि मुख्यपरिषता पपि, पाया रविषयपरिषता अपि पुरमिनावपरिकता प्रापि रसतलिचरमपरिगता पपि बटुबरपरिषवा अपि पापरसपरिषता अपि भारतपरिणता मिनपुरसरिता पि पपपपल्प अपरिपता अपि पाषापरिसमा अपि मुरुमारिवा पिपुलपपरिया पिकावरिया पिणाप परिसवा बपि पमा ।। पर। Depaomanusoom DaasBEpisoRARE गिहिलिगसिझा १३ एगसिझा ११ शुणेगसिझा १५ । सेत्त शुणतरसिशससारसमायणजीवपणवणा । से त परपरसिशससारसमायणाजीवपणयणा? परपरसिशससारसमानणजीयपरायणा यागविहा प० तजहा-शपढमसमयसिझा दुसमयसिझा तिसमयसिझा चउसयमसिछा जाय सखेडासमयसिझा शसखंड समयसिमा शुणतसमयसिझा, सेत्त परपरसिशससारसमावणजीवपणायणा । सेप्त शससारसमायणजी यपणषणा । से कित ससारसमावरमजीयपणयणा समारममावणजीवपणवणा पचविहा पणत्ता, तजहा एगिदियससारसमायणजीयपणवणा घेइदियससारसमायणजीवपणवणा तेइदियससारसमावणजीवपणय णा घउरिदियससारसमावणजीवपणरणा पचिदियससारसमायणजीयपणवणा। से कित एगिदियससार समायणजीयपणवणा ? एगिदियससारसमायणजीवपणषणा पचयिहा पणत्ता , तजहा-पुढविकाइया MALLAHRAMundiEMENJeani भनेतिक सिहर १५ । सैपा ऽनन्तरमिदाससारसमापन्न त्रीपापना । पथ पतिविधा परपरसिंहाससारसमापा मोजमसापमा । परपर सितामसारममापनजीवप्रतापमा समविपा प्रखता । तद्यथा पमपमसमपसिहा, हिममपमिदा, त्रिसमपसिना चतु:समयसिता, यावत् सत्पमसममिया, प्रसस्पेससमपमिदा ममतसमयासदा, सपा परपरसिहासमारसमापनजीचापमा । सपा समारसमापजीयमचा पना । प्रपतिविधा समारसमापन्न जीवापना । ससारसमापबचीवमचापमा पन्चाया REPा । तद्यथा-सन्द्रिपसमारसमापन्न जीय मजामा हस्तियममारसमापन जीवाचापमा पीन्द्रियससारसमापनजीधापना चतुगिन्द्र यमसारसमापत्र जीवप्रघापना, पचन्द्रिपसमार समापनीमचापमा । अप प्रतिषिषा पझेन्द्रिपर्ससारसमापमजीवनापमा। पोन्द्रियससारसमापजीवजापना पपविधा प्राप्ता। तय पा-पपिपीमापिका अपमायिहा देश वापिका' वायुयायिका, वनस्पतियायिकाः। प्रपतिविपाः पृथिवीमायिकाः। पम्वोवापिकाः - मउयफासप० गुरुयफासपरि० उजायफासप० सीतफासप० उसिणफासप० णिशफासप० लुरकफासपरि णतावि ॥ सत्त कायश्चाजीवपरायणा ॥ सेस राजीवपमयणा ॥से फित जीयपणवणा? जीवपणवणा दुबिहा पणाप्ता , तजहा-ससारसमावणजीयपमरणाय यस सारसमाषणजीवपणवणाय । से कित यससारसमा घयाजीवपणवणा ? शससारसमायणाजीवपणवणा दुबिहा पणत्ता, तजहा-शणतरसिशससारसमाय गाजीवपणप्रणा परपरसिशससारसमावसजीवपणषणा। से कित आणतरसिझशससारसमावसजीयपण वणा? आणतरसिहश्चससारसमायणाजीवपमषणा पणारसविदा पणता, तजहा-तित्यसिझा १ थतित्य सिझा २ तित्यगरसिझा ३ अतित्यगरसिझा १ सययुझसिझा ५ पत्तेययुझसिझा ६ युष्योहियसिझा ७ इत्यीलिंगसिझा ८ पुरिसलिगसिक्षा ९ नपुसकलिगसिक्षा १० सलिगसिझा ११ शणलिगसिझा १२ परिवता अपि प्रदुधपा परिणता अपि गुरुवस्पधपरिषता अपि सपपरपक्षपरिणता पपि शोतस्पच परिणता पपि उप्पस्पशपरिषता अपि पापपरिपता थपि सारपसपरिसता अपि सेवा सुप्यतोव प्रधापना । मैपा नीव प्रापमा । आप अतिविपा जीपचापना ।। जीव प्रधापना हिविषा प्रचता । तपा-ससारसमापनोवमाापना, पसारसमापवयोवनापना। पथ कतिविधा प्रससारसमापन जीवप्रजापना । संसारसमापनजीवप्रधापना हिविषा प्राप्ता । बनारसिहासमारसमापनीवाशापना परंपरसिद्वासंसारसमापवत्री समापना पतिविषानन्तरससिमा ससारसमापनीयमापना ।। अमरसितासारसमापनाजीवप्रजापना पचरयिषा प्राप्ता । तया तासिकातीपसिहा २ तीचबरामरा तोपरलिग कपासिर ५ प्रत्येवानिपुरमोतिविना . जातिसितार८ पुरुषसितारनप्रशिक्षिा नाममा सन्मतिविदा १९ परिणितिर सपतिणि १४ पासा । पर। गिहिलिगसिछा १३ एगसिझा १४ शुणेगसिझा १५ । सेत्त शुणतरसिक्षशससारसमायणजीवपणवणा । से त परपरसिहश्चससारसमायणजीवपणवणा? परपरसिशससारसमायणजीवपणवणा शुर्णगयिहा प० तजहा-शपढमसमयसिहा दुसमयसिझा तिसमयसिझा चउसयमसिहा जाघ सखेजसमयसिझा सखेज समयसिझा शुणतसमयसिझा, सेत्त परपरसिशससारसमावसजीवपणावणा । सेप्त शससारसमायणजी यपणवणा । से कित ससारसमावरमजीयपसवणा? ससारसमावणजीयपणवणा पचविहा पणत्ता, तजहा एगिदियससारसमावणजीयपणवणा येइदियससारसमावणजीयपणवणा तेडदियससारसमावणजीवपणय णा चउरिदियससारसमाषणजीयपणयणा पचिदियससारसमावणजीवपणयणा।से कित एगिदियससार समावणजीयपणवणा ? एगिदियससारसमायजीवपणवणा पचविहा पणत्ता , तजहा-पुढविकाइया मित्रामा JHIRONIRDESERauticalip प्रमेमाला सिटा, १५ । सेपा मारसिससारसमापब मोवपापमा । अप पतिविधा परपरसिहाससारसमापनजीवनसापना ।। परंपर सिदामसारसमापनजीवनयापना समकविधा प्रचता । सपा प्रमयमसमपसिद्धा हिसमयसिद्धा, निममयसिमा चतु समयसिहा, यावत् सस्य पसमयमिक्षा, प्रसस्पसमपमिदा, पमन्तसमपासहा, सपा परपरमिताससारसमापनीमचापना । संपा ऽससारसमापनावमा पना । पथ अतिविपा संसारसमापत्र जीवनचापमा ससारसमापनखीवम्चापना पविधा प्रता। तयथा-एफोन्द्रपसमारसमापन्न जीय पापमा इन्द्रियससारसमापनजीवपापना गोन्द्रयससारसमापजीचापमा चसुरिन्द्रियमसारसमापनाची प्रचापमा, पम्बन्द्रिपससार समापनजीवनचापना । प्रयतिविघा एकेन्द्रिपसमारसमापमवीवरचापना । एकोन्द्रियसंसारसमापनीवमधापना पचविधा प्राप्ता। तय पा-पपिवावापिका अपमायिकामा पापिता' वायुवापिका, पनापविनायिकाः । अप कसिविधा। पषिवीवापिसा । परवीफायिकाः Madhuma HEPRINCBRAHLEE थाउकाहया तेउकाइया धाउकाडया वणस्सडकाइया। से फित पुढधिकाइया पुनविकाइया दुधिहा प०, तजहा-सुझमपुढयिकाइया घातरपुढधिकाइया । से कित सुऊमपुढधिकाइया सुजमपुढधिकाइया दुबिहा पणत्ता, तजहा-पजत्तसुझमपुताधिकाइयाय आपाप्तसऊमपुढधिकाइयाय, सेप्तसुजमपुढयिकाइया । से कित यादरपुढायिकाइया यादरपदधिकाइया दुयिहा पणता, तजहा-सण्यादरपुढधिकाइयाय खरयादर पुढधिकाहयाय । से कित सराहयादरपुढधिकाइया२ सप्तधिहा पणता, तनहा-फिराहमत्तिया नीलमप्तिया खोहियमत्तिया हालिद्दमप्तिया सुक्किलमष्तिया पामप्तिया पणगमप्तिया । सत्त सराहबादरपढयिकाढया। ते कित खरयादरपदयिकाइया ? खरयादरपुढविकाठ्या धणेगविहा पणता , तजहा-पुढयीयसकाराघा लुयायउयलेसिलायलोणस । यतघतउयसीस रुप्पसुवणेययइरेय ॥ १॥ हरियालेहिगलुए मणोसिलासा दिषिपा प्रमr । तपा नामपथिरीमापिकाः पावरपभितीजापिताः । पप गतिविषाः सूत्मपपिवाभापिबा । ममपपिचायिका लिपि ता! | रापा-पर्याप्तमूत्मपषियोवापिका अपर्याप्तसूरमपितोकायबाः । तदेता। मूलपधितोकापियाः । अप कतिविपा यादर है पपिपीकापियाः ।। पादरपनियोकायिका दिपाः प्रताः । तया सहावादरपधिधीवायिकाः सरवादरपपिवीकापिकाय । प्रपति पिपा सलवादरविवायिका । मलपारपधिगीवायिका। सप्तविघा REATE | तयथा हमपत्तिका नासमत्तिबार साहितमतिका पारिद्रमत्तिका गुस्पतिवाः पारनुपातमा पनवपाता। तदेता। मत्सव दरपाप गपिचाप कतिविधाः परमादरपधियिका ।। सरबाररपपिचायिका भने प्रत | तपा-पपिवीधरावानुमा उपता: शिसा सम्पम् । अपमाषपुोसादप्यमामि मतीतानि ॥ १॥ हरिवालवालिये मनायता नीसमन्वना-ब । पत्रपटतावानुमा। बापरपरिणामावली ॥ २॥ गोपाल मर। ॥ पर। गजणपयाले । शुनपालनयालुय यादरकाएमणियिहाणा ॥२॥ गोमेजाएयरुयए थकेफालिहेयलोहियरकेच। मरगयमसारगल्ले जुयमोयगइदनीलेय ॥ ३ ॥ चढणगेश्यहसे पुलएसोगधिएययोघहे। चदप्पत्नवेशलिए ज लकतेसूरकतय ॥ १ ॥ जेयायणेयतहप्पगारा ते समास दुयिहा पणत्ता , तजहा-पजाप्तगाय थपऊप्त गाय, तत्यण जेते शुपजाप्तगा तेण शसपत्ता तत्यण जेते पक्षप्तगा एतसि वणादेसण गधादसेण रसादे सेण फासादेसेण सहस्सग्गसाविहाणाइ सखिजाइ जोणिप्पमुहसयसहस्साह पजाप्तगणिस्साए शपजामगाव कामति , जत्य एगो तत्य णियमा शसखेडा। सेत्त खरबादरपुढयिकाइया । सेत्तनादरपुढविकाइया । सेतपु ढयिकाइया ॥ से फित शाउकाहया ? शाउकाइया दुविहा पणता, तजहा-सुऊमशाउकाइयाय धादर शाउकाइयाय । से कित सुजमछाउकाइया ? सुजमथाउकाडया दुयिहा पणता , तजहा-पातसुऊल AMEREMEDSLRICRUKHARA रुपमोडा साटिकलोहिताशाति ॥ मरवतमसारगी समोचफन्त मालो च ॥ ३ चन्दनगारकासा पुलमसौगन्धिकषयोदथ्ये चन्द्रप्रन यो बलवान्तामयसान्तथ ॥ ४ ॥ ये शाम्ये तथा प्रचारास्त समासतस्तथा चप्ताः । तद्यथा-पर्याप्तता, अपयायाय, तत्र ये रते ऽपयाप्तसाले भसमाप्त। । तत्र ये पते पर्याप्तका गत वादोन गन्धादशेम रसादेशम स्पशादशेन सास्रायशो विधामाति सस्पेयानि । योमिममुसानि शतस इस्राय पर्याप्रमिप्रपा प्रपतवारकामन्ति, यमस्त निपमा प्रसस्येयाः । त पत सरपादरामीकायिका। । त पते यादरपूपिशापि सात पत पृथिवीनायिकाः ॥ अथ प्रतिविधा पप्पायिवा ?। प्रवायिका हिविधा प्रसप्ता: तद्यथा-सूक्ष्मामायिकाः यादराप्फायिका । पथ गतिविधा सूमाप्यायिका ।। मूलाापिका द्विविधाः प्रनमा । तपा-पर्याप्त समाप्यापिका , अपर्याप्तसमाप्कापिकाः । मते समापवापिकाः । पप बातविपा बादराप्षायिकाः । यादरामायिका प्रमेकविधा प्राप्ताः । तद्यपा-मवश्याय , हिम महिप्स, परकी, थाउकाइयाय थपजाप्तसुजामशाउकाठयाय । सेप्त सुऊमछाउकाइया॥ से कित यावरशाउकाइया? यावर थाउफाइया चणगविष्ठा पणता, तजहा माहिमए महिया करए हरतणूए सुशोदए सीतोदए उसिणोदए खारोदए खंहोटए थयिलोदए लवणोदए पारुणोदए खीरोदए खोदोदए रसोदए जेयावसेतहप्पगारा तेसमा स दुधिहा पणता, तजहा पजप्तगा थपजप्तगाय, शत्यण जेतं शपआप्तगा तेण सपप्ता, तत्यण जेते पञप्ता एएसिणघणादेसेण गघादेसैण रसादसेण फासादेसेण सहस्सग्गसोविहाणाइ सखजाइ जोणिप्पमु हसयसहस्साइ पज्जतगणिस्साए शपज्जप्तगा धक्कामति , सत्य एगो तत्यनियमा आसखेडा । सेप्त यादर छाउकाइया । सेप्न याउकाइया ॥ से कित तेउकाइया ? तेउकाइया दुविहा पणत्ता, तजहा सुजामतेउ फाइयाय यादरतेउफाइयाय, से कित सुजमतेउफाइया सुजमतेउकाइया दुविहा पणता, तजहा पजात ARRIERIAEN. परतना मोर जावोदयम् समोरक पारोदयम् पदण्नोटबम् असोदन सवदर्भ, पारुलोवर्ष हीरोदय सोदोदक रसोदक, पेाऽम्मे व बाराले समासतो द्विविधा प्राप्ता तपा-पोतका अपर्यातबार पत्र पे पवे पर्याप्तबास्ते संप्राप्ता। । तर ये पते पर्याप्तास्त वदन गन्पादेन रमादेशेन स्पर्धादशेन सहस्रागलो विधानानि सम्मेपानि । योनिप्रमुखानि इतमामावि पर्याप्तनित्रया अप प्तिबा मुरसामन्ति । पोषखा नियमा संमेयर । तर मादरापायिवा।तएत पप्पायाभप कतिषिपातेमा वापिधा' ।। तेजा पारिवा दिविधा ममा तपमा अालतम वापिसा वापरतवापिकाव । पचतिविधाः पूनतम पापिया। मूलतेवपिना। द्विविधा प्राप्ता तयपा-पर्याप्तबा अपपातबारा पता लगानापियाः । जब पतिपिचा वापरतेचावापिचा।। बादरतमाचापिता मेरिका माहाः । वयना-गार पासो, मुगाचा जबाब मामिला . विद्युत् पनि मिपा मुखिया . . .
॥ मम।। परवा E- गाय अपजप्तगाय । सेत्त सुजमतेउफाइया । से किंत चादरतेउकाहया २ शणेगविहा पणता, तजहा इगाउँ जाला मुमुरे शची शलाए सुहागणी उक्का विज शसणी गिरछाए सघरिससमुछिए सूरकतमणिणि स्सिए, जेयावण तहप्पगारा ते समासन दुविहा पणत्ता, तजहा पजानगाय शपजत्तगाय, तत्यण जेते थपआप्तगा तेण शसपप्ता, तत्यण जेते पानगा एएसि वणादेसेण गधादसेण रसाएमण फासादेसण सह स्सग्गमोबिहाणाइ सखिजाइ जोणिप्पमुहसयसहस्साड पजत्तगणिस्साए शुपजातगा वक्कमति, जत्य एगो णियमा शुसखडा । सेत्त बादरतेउकाहया ॥ सेप्त तेउकाडया ॥ से कित बाउकाहया? वाउकाहया दुवि हा पणता, तजहा सुजमयाउकाह याय यादरवाउकाइयाय, से कित सऊमवाउझाइया? सुजामवाउकाइया दुषिहा पणता, तजहा पजाप्तगसुकामयाउकाइयाय शपजतगसुऊमयाउकाइयाय । सप्त सुऊमवाउका इया । से क्ति यादरयाउकाडया ? यादरया० शणेगविहा पणता, तजहा पाईणयाए पढीयाए दाहि तत्य FORG.IMIRamaaranaatman - पानतमखिममता। ये वाप्यम्प तथा प्रकारात समासतो द्विविधा मचता । तद्यथा-पयाप्तफा, पपयासका। तय य यत प्रपयाप्तफासे पस माया | ता ये पयामबास्ते वाद यम गन्धादशन रसादेशन स्पर्शादेशेन सहस्रायशो विधामानि मप्ये पानि । योनि प्रमुसासि हप्तमएनागिन पर्यासमिप्रिया अपर्याप्तका ध्युम्हामम्ति । यस्ता समयमा प्रसस्पेया । तपत यादरतेसाकापिका । समते तेन कापिका ॥ श्रथ फतिविधा पायमायिका । वायुमापिसा झिविधाः प्रहा। तपा-सूत्मायुकाापका यादरवायुसायिकाच । प्रथमतिविधा सूक्ष्मपायुकाायका ?। मूत्मवायुवापिका द्विविधाः प्रहप्ता । तद्यपा पोमभूमवायुवापिका । अपर्याप्त गरमायुवापिक्काच । तमते मूहमायुवापिका । अथ क्षात विषा पादरवायपायिका । पादरपायुवायिका भनेकविधाः मचताः । तद्यथा-प्राचीनवाया। प्रतीचीनवायु । दक्षिणवायु उदीचीमवायु , अ णवाए उदोणवाए उहवाए थहोयाए तिरियवाए विटिसीवाए वाउज्कामेवा उक्वालिया वायमालिया उ कठियायाए मगलियावाए गुजावाए ऊफावाए सयहयाए घणवाए तणुयाए सख्वाए, जेयावले तहप्पगा रा ते समास दुषिहा पणता, तजहा पजत्तगाय शपज्जतगाय , तत्यण जेते पाप्तगा तेण शसप ता, तत्यण जेते पजप्तगा एएसिण घणादेसेण गधादेसण रसादसेण फासादेसेण सहस्सग्गसोधिहाणाइ सखिजाइ जोणिप्पमुहसयसहस्साइ पजाप्तगणिस्साए छपजात्तगा यक्कामति, जत्य एगो तत्य नियमा शुस फेजा। सेत्त यादरवाउकाइया । सेप्त वाउकाइया॥से कित यणस्सहफाया वणस्सइकाइया दुपिहा प०, तजहा सनमवणस्सहकाउयाय यादरवणस्सइकाइयाय, से फित सुजमवणस्सहकाइया२ दुविहा पणता, त० पज्यत्तसुजामयणस्सइकाइयाय थपजाप्तसुहुमवणस्सइकाइयाय । सेत्त सुजामयणस्सइकाइया । से कित CHOOTRaccoococcoccasee . पाया पोवापुर तिर्यब्वायः विरिणवाया, वातोदामो, बातोत्वसिषा, वातमझती उपसिवावातो, माठसिवाबातो गुल्जावा तो समयावावो सपरिवातो पनवाततनुवातः पुरवाता ये वाम्ये तथा प्रचारासत हिविधा प्रामा । तद्यथा-पर्याप्तका' अपर्याप्तका प। ताप रखे अपर्याप्तबास भस प्राप्ताः । ता य पते पर्याप्तवाले पर्वादपेन गमादेशेन रसादेम स्पोदेशेन सरतापयो विधामानि संस्था तानि । पोनिममुगामि तसरसारि पर्याप्तबनि नया अपर्याप्तवा पुस्तामन्ति । यो सा निपमा परममा । तपत पाररवायुवापिकाः । तत वायुवापिका पथ पतिविधा वनस्पतिवायिका बनस्पतियापिका द्विविधा प्राप्ता । तपपा सूमवनस्पतिवापिया बापरवन एपतिवापिका सप पतिविषाः नवमरपतिवारिका । पलपनरपतिबामिया लिnि प्राप्ता । तपा पर्यातमूलबनस्पतिवापिचार अपर्याप्तबुलवनस्पतिशापिता पर पूनमस्पतिवासिए विपिना बादरमपविवापिका पापरवनस्पमिापिका सिविता पर" 1 मम E- प्रयाHIFIOFFROPMEaeindanmrpaRIL यादरवणस्सइकाइया २ दुयिहा पणता, तजहा पत्तेयसरीरवादरवणस्सइकाइयाय साहारणसरीरवादरव णस्सहकाइयाय, से कितं पप्लेयसरीरयादरयणस्सहकाइया २ दुयालसविहा पणता, तजहा रुकागुच्छा गुम्मा लतायवल्लीयपछगाचेव । तणयलयहरियसहि जलरुहकुहणाययोधला ॥ १ ॥ से कित रुरका२ दु यिहा पणता, तजहा एगठियाय यऊबीयगाय , से कित एगठिया२ शणेगविहा पणता, तजहा निय बजवुकोस वसालयकोलपेलुसेलूया । सल्लडमोयहमालुय यउलपलासेकरजेय ॥ १॥ पुत्तजीवरिठे विनेल एहरिफएयत्नल्लाए । उबेनरियाखीरिणि योधछेधायहपियाले ॥२॥ पूईयनिवकरए सराहातहसीसवायशस णेय । पुणागनागरुरके सिरिवणीतहचसोगेय ॥३॥जेयावन्ने तहप्पगारा एएसिण मूलाविशसखिजाजीवि या कदावि खधावि तयावि सालावि पवालाथि, पक्षापत्तेयजीविया, पुष्पा राणेगजीया, फला एगठिया॥ AREPARISHMORECIPE-PM प.॥ मता । तद्यथा प्रत्येबजारीरयादरवनस्पतियायिका सापारग्दारीरयादरवनस्पतिशापिकाः । अथ कतिविधा प्रत्येफशरीरयादरयनस्पति वापिका' ।। प्रत्यपशरीरवादरवनरपतिलापिचा हादविधा प्रचता । तद्यपा पक्षा गुण्या गुरुमालता बालरः पवगाष ॥ वणवलपपरिती पषिमतमाफरवाय पोटष्याः ॥१॥ अथ कतिविधा वृक्षः। वका विविधाः प्रताः । तद्यथा एकास्थिका यावीमकाय । अप फतिषिधाः मास्पिका ।। एकास्पिका अनेकविधाः प्रप्ता । मद्यपा निम्याम्य अभ्यमोशम्य शालाकोठपोसमास्याः । समकमोचकमालपयफुल पला सबरजनेदात् ॥ १॥ पुत्रजीवकारिठा। विनीतबारीतबमलाताः । उम्बे नरिकाहोरणी योग्थ्योघातकीमियालो ॥२॥ पूतिपनिम्यफरजाः सप्त सपानिशपासमनदात । पुमागमागदपी श्रीपर्वाचतथाशोबा ॥ ३ ॥ यपि चान्ये तयाप्रकारा एसेपा मलामि प्रसस्यपनीवफानि । पन्दा अपि सन्या अपि त्वचोपि शासा प्रपि प्रवाला पि। पत्राचि प्रत्येशनीववामि । पुप्यास्यनेवाओवचामि । फलाग्यवास्थिकानि । उत्तो एकास्थिका।
१ णयाए उदोणवाए उहवाए यहोयाए तिरियवाए विदिसीयाए बाउकामेधा उक्कलिया वायमालिया उ कालियायाए माठियावाए गुजावाए ऊफाषाए सयष्याए घणवाए तणुषाए सुरुवाए, जेयायले तहप्पगा रा ते समास दुधिहा पणता, तजहा पज्जत्तगाय आपाप्तगाय, तस्यण जेते थपजाप्तगा तेण शसप प्ता, तत्यण जेत पजप्तगा एएसिण वणादेसेण गधादेसण रसादेसेण फासादेसेण सहस्सग्गसोविहाणाइ सखिजाइ जोणिप्पमुहसयसहस्साइ पज्जतगणिस्साए शपजात्तगा यक्कमति, जत्य एगो तत्य नियमा यस स्केमा सेत्त यादरवाउकाइया । सेप्त याउकाइया से कित घणस्सहकाडया वणस्सङकाइया दुबिहा प०, तजहा सजमवणस्सहकाठयाय यादरवणस्सइकाइयाय, से फित सुजमवणस्सइकाइयार दुविष्ठा पणता, त० पद्धत्तमजमवणस्सइफाइयाय थपज्जतसहुमवणस्सइकाइयाय । सेत्त सुझमवणस्सइकाइया। से कित . anा पोवाया , तिर्थक्षामा विदिव्वापु पातोदामे, वातोत्सासिकार बातमरठसी उत्पसियावातो. मगठसिवावातो; गुल्जावा पो सम्मावावो संपष्टिबातो, पनवासतमुवातः पुरवातः ये वान्ये तपा प्रबारास्त शिविपाः माता । तपथा-पर्यावा' अपर्याप्तका प। ताप एवे अपर्याप्तबास्ते प्रमप्राप्ता । स य एवं पर्याप्तवाले पर्वादोन गम्पादेशन रसादेशेम स्पोदेशेन सहस्राग्रयो विधानानि सरसा तानि । पोनिप्रमुखामि तमासारि पर्याप्तवनि प्रपा प्रपोतका अस्बामन्ति । यो ससा निपमा प्रयम्सया । तएत बापरवापवापिकाः । मण्ठे वायुवापिका भय पतिविधा वमरपतिवापिवानस्पतिकापिया निविधा प्राप्ता । तपमा भूमवनस्पतिवापिया बाररबन स्पतिवादिषा । अप प्रतिविषाः सलवनस्पतिवापिका ।।जवनस्पतियापिका विविध प्रथमा । तपा-पर्याप्तसूलबनस्पतिवापिका अपर्याप्तसूलवनस्पविवापिका, परत पूमवनस्पविषापिया विविधा बादरममापविवापिका बारबरपतिवारिका विष ॥ पट॥ म का ।। ३ ॥ सणपाणकासमहग अग्धामगसामसिद्वारेय । करमदशहरूसग करीरएरावणमहत्ये ।। १ ।। जाउलतमालपिरिली गयमारिणिकलकारियानेही । जावडकेयइतहग जपाउलाढासिशकोल्ले ॥५॥ जेया चगो तहप्पगारा सेत्त गुच्छा ॥ से कित गुम्मा२ शुणेगविहा पणत्ता, तजहा सेरियएणोमालिय कोरिटय यत्युजीवगमणोझे। पीईयपाणकणहर कुडायतहसियारेय ॥१॥ जाईमोग्गरतहजू हियायतहमल्लियायवायु ती । यत्युठकच्छुलसेवा लगठिमगदतियाचेय ॥२॥ चपगजाहणवणी इयायकुदेतहामहाजाई । एवमणगागारा हवतिगुम्मामुणयहा ॥३॥ सेप्त गुम्मा ॥ से कितं लया लया शणगविहान पणतान, तजहा-पउमल यानागलया थासागचपयल यायचूतलता । यणलतयासतिठता मुत्तयकुदसामलता ॥१॥ जेयावणेत हप्पगारा सत्त ठया ॥ से कित वल्ली२ शुणगविहा पणता, तजहा-पूसफलीकालिगी तुयीतपुसीय mmaNavaapa-or.BARA mpinan NRGROngeno ल वाड्सास्या करवीररावसमहास्या' ॥४॥ बाउत्ततमापिरतीमा मारणसवारिफानियही । यायसकातविपक्षी गरमपालोप्यपालाल ॥ ५ ॥ ये वाम्य तपाप्रकाराने गुलाः । अथ कांतावपा गुरुमाः। गुस्मा अप्पनेकविधा प्रप्ता । तद्यथा सरिसनामामवमालिका फारपटपयाधुजीवफममी wr : प्रीतिवरमायतरी परवीरकुमभौमिगुपही ॥ १५ जातीमतरपूच्या मालाचतपावासती ॥ वर्तुलफछोलगुस्मी शेषालगागठमगदन्तिफगा ॥ २॥ पम्पसमातोमारा मान्यतापामहाबायः ॥ एवमनेबाबारा नवन्ति गुलमाधनेकविधाः ॥ ३ ॥ तमो गुस्मा ॥ अथ पाला सताः ता अमेवविधाः प्रचनातयण पटनलतामागसता प्रशोकचम्पबलातायनसता । चमवासनासतम्त अतिमुत्तमम्दयामलता ॥ साधाप्रबारास्ता सता । अथ वास्ता वसपा, धमनवविधा प्राप्तामाधा-पुंसाहालिङ्गी तुम्योपुसीतपेनवालकी । घोपातकीपटोली से पशाखासकारवाचीच ॥ १० गूलताचफटुकी काटकोकारिपालकीसुनगा । फुपवाचवल्गुलीस्या पापावासोचदेवदावोवा ॥ २ ॥ प्रास्फोटाचा १ याधान्या सेत्त एगठिया॥से कित यावीयगा२ शणेगविहा प०, त० थस्यियतेटुकवि श्यागमाउलिगयिल्लेय शामलगफणसदालिम शासोत्येउपरयोय ॥ १ ॥ णग्गोहणटिरुरके पिप्परिसयरीपिलुस्करुरकेय । काउबरि कुत्युनरि वोघहादेयदालीय॥२॥ तिलएठउएच्छतो हसिरीसेसन्तयणदहियने । लोधवचदणजुण णीमेक झण्कययेय ॥३॥ जेयावणे तहप्पगारा एएसिण मूलावि शसखिजाजीविया, कदाथि खधावि तयायि सालायि पत्रालावि, पप्ता पप्लेयजीविया, पुष्फायश्चणेगजीविया, फला यजयीया, सेत्त यजयीयगा। तेत्त रुरका॥ से कित गुच्छा२ शणेगविहा पणता, तजहा-वाइगिणिशल्लहपुणु हयतहकच्छीयजासुमणा। रवीशाढ इणीली तुलसीतहमाउलिगाय ॥१॥ कुत्युनरिपिप्पलिया शतसीबिल्लीयकायमाईय । चुणपोलारुदलि पाउछावत्युठेबदरे ॥२॥ पत्तउरसीयउरए हवइतहजवासएयबोधछे । णिग्गुनिष्पक्कातूथरि थाढईचेयतलन EMEDIERRADEmms IP ARE arti भय पतिविधा पहुबोजवाः ! । बोका अनेविपा। प्रहमा । तथा प्रविपतिन्दुरपित्या पाम्बाटकमातुसिङ्गविसवाय ॥ मामलापन सदाशीम मयत्योदुमारवटाप । १० म्यमापनन्दिपक्षी पिप्पली हारीमा कादम्बारकुसमरी बोहपादवदारुप ॥२॥ तिलकालायुहमा मोपशिरोपसप्तपदिपिपाः । साप्रपाम्नान भीपकुठमादम्वाध ॥ ३० पचाम्पे तपामकारा पत्तपा ममानि असरापपोवानि । कन्दा पाप मा अपि तोपि शामा पाप प्रवासा अपि पत्रास्पपि प्रत्येकामि, पुप्पास्यप्पनकमावान पलाम्पपि बावामामि । उता मापोवा । सत्ता ॥ अथ पतिविधा गुना । मुभा अप्पन कविशा प्राप्ताः । तद्यपा वृत्ताकसमीणा एवं नाचनारिताममम् रूपी पारिवनीती तुमसातपावित्रोरामा १॥ स्तनमरिपिप्पसिका। प्रतमीबिसीपमालामादिरपतीपदाममा बाधासाबदरपचों । २. पापोरनरमा प्रतिववापबार निहारतमारिका पाठवितोरा पानवासमा पाठविणुपारामा बाम u पापा PCOSORRCOACH १ ॥ म॥ रो हियसिसुयवेयखीरनुसे ॥ १॥ एरफेकुरुविदे करकरसुठेतहाविनगूय । मजरतणबुरयसिप्पिय योघहे सुकलितणय॥२॥जेयावणे तहप्पगारा सेप्त तणा॥ से कित वलया२ धणेगविहा पणता, तजहा-ताठे तमालतकालि, तेयालीसालिसारकालाणे । सरलेजायतिकेयह, कदलितहपउमरुस्केय ॥ १ ॥ नुयरुरफाह गुरुस्के, उवगरुस्केयहोइयोधछे । पूयफलीखजारी, योधहानालिएरीय ॥२॥ जेयावणे तहप्पगारा सेत्त घलया । से कित हरिया ? हरिया थणेगविहा पणता, तजहा-शोरुहवोदाणो, हरितगतहतदुलेज गतणेय । यत्युलपोरगमज्जा , रपोइवल्लीयपालक्का ॥ १ ॥ दगपिप्पलीयदही सोत्यियसाएतहेवममुक्की । मूलगसरिसवपिल, साएयजियतएव ॥ २॥ तुलसीकरहनराले फणजुएशमाएयनूयणए । चोरगदमण गमरुयग सतपुफिटीवरेयतहा ॥ ३ ॥ जेयायसे तहप्पगारा सेत्त हरिया। से कित उसदी ? सहीन थणेगविहाच पणता, तजहा-सालीवीहीगोजम जयकलमसूरतिलमुग्गा। मासणिप्फायकुलत्य थलिसि दसतीणएलिघा ॥ १ ॥ श्रयसीकुसुनकोदय कगूराठगवरहकोढूसा। सणसरिसमूलवीया जेयावणे तहप्प तियोगप्पा ॥ पुगफसरार योदयीमारिकेलय ॥ २ ॥ येषाम्पे तथाप्रकाराने वलया । अप गतिविधा भारतका । परितका पप्पमक विधाः । तथपा अध्यारोवोटा हरिततानुसोवलगताने वस्युनपारगमन्नार पोलीपाप्लक्षिका ॥ दहीपलिगादवी स्वस्तिवाशा पसावमयी ०१५ मूलकसरसवाम्बिल शापचयस्तव ॥ तुलसोकणोरासो प्रजनन चमे देन । चोरवसमनबरुष यतपुप्पीन्दीवरचतथा। याम्पे तयाप्रकाराने सरता अप माता चौपधप । प्रोपपयो ऽनकविधाः प्रधप्ता । झालोनी होगीपूमा यवलममसूरतिसमुदा ॥ मास | ! मिप्याकुलत्या अतसीदशीपालिका १० अपमानसम्मकोद्रव कइरालमासोद्रवकाः ॥ गणपरिसबमूलपीमा पेचाम्पे वयामधारास्ताभी Pomombo4AH - HAILEERIEDANESDONESIAGE एउयालुफी । घोसातईपझोला पयगुलिष्शायणालीय ॥१॥ कगूलयाकदुइया कक्कोफडकारियलई सुन्नगा । कुयवाययागलीपा याघल्लीतहदेवदालीय ॥२॥ शष्फोशाशइमुप्तय नागठयाकण्हसूरथलीय संघहसुमिण सायिय जासुमणकुविदवालीया ॥३॥ मुद्दियश्वायली वीरविरालीजियतिगोयाळी । पाणीसामावल्ली गुजा यालीपयत्याणी ॥ १॥ ससषिदुगोप्तफुसिया गिरिकमइमाणुयायचजणई । वहफुलयकोगलिमा गठीयतह थकार्योदीया ॥५॥ जेयायसे तहप्पगारा सेत्त यावी ॥ से फित पछगा २ शृणगविहा पमत्ता , तजहा इस्कूयाउस्फुयाये धीरुणातहडकायमासेय । सुठेसरेयवेत्ते तिमिरेसत पोरगणले ॥१॥ वसेलूकणए कका यसेययययसेय । उदएकुझएषिमए कावेलूयकल्लाणे ॥२॥ जेयावणे तहप्पगारा सेत पछगा ॥ से कित सणा? तणा छणगयिहा पणता , तजहा-सक्रियगतियहोतिय दनकुसेपछएयपोफउला । राजुणधसाढए (तिमुत्ता माममतेमसूरवम्स्पो च । पर्पसुमनसोपिच बातसुमनाविन्दम्लीमा मुद्रिवाम्बावमी पोरविरानीमपन्तीगीपासी । पारी अपामाशी मुनानीचमत्यावी । ४ शेपत्तीचहिमोत्रा पुरमीनिरिवरिमालुवामानको । टिपुष्यवागविमोगरो तथैवचाम्पाकुटीबाः ॥ ५॥ पा पापाखपा प्रबाराला बक्षया । अब नेते पर्वगा' पबमा अमेविया मतास्तद्यपा-मारवाटिका बोरीवधारणामासम गुम्ठी सोपवेवा तिमिरासवपोरनपासाय बंपोवनामा बगावातापवयवबजावावषिमुबार बाठालपरत्यासी ॥ २ ॥ पेषाये त पामवाले पर्वनाः पिच पानि वनानि दानि भनेपविषानि प्राप्तानि । उपचा-एरमहा विना परवाठोतवाविप्रा मारपण रमप्य मेदासबोचावनम् ॥१. पानिमामानि या प्रबारावि वालि वरामि पचतिविधा ? । बलवा बनेपविधा प्राप्ताः । तपा वासमासासी पलासितवारिकावारपसार परमवासिनी पवाफ्सपाय.पोशिलो बनव पचवा ॥ मद। PURPLALUMAMALIMAndrANE रो हियसिसुययेयखीरनुसे ॥ १ ॥ एरफेकुरुविदे करकरसुठेतहाविजगूय । मजरतणबुरयसिप्पिय योघछे सुकलितणय॥२॥जेयायो तहप्पगारा सेप्त तणा॥ से कित वलया२ थर्णगविहा पणता, तजहा-ताले तमालतकालि , तेयालीसालिसारकलाणे । सरले जायतिकेयह, कदलितहपउमरुरकेय ॥ १ ॥ नुयरुरकाहिं गुरुने, लवगरुरके यहोहयोधछे । पूयफलीखजूरी, बोधवानालिएरीय ॥ २॥ जेयावर तहप्पगारा सेत्त धलया । से कित हरिया ? हरिया थणेगविहा पणता, तजहा-शुजोरुहयोदाणो, हरितगतहत्तदुठेजा गतणेय । वत्युलपोरगमञ्जा, रपोइवल्लीयपालक्का ॥ १ ॥ दगपिप्पलीयदद्दी सोत्यियसाएतहेवममुक्की । मूलगसरिसवथघिल, साएयजियतएचेव ॥२॥ तुलसीकरहनराले फणजएशजाएयनूयणए । चोरगदमण गमस्यग सतपुष्फिीवरेयतहा ॥ ३ ॥ जेयायसे तहप्पगारा सेत्त हरिया । से कित सही ? सही। श्रणेगविहाच पणताच, तजहा-सालीवीहीगोजम जयकलमसूरतिलमुग्गा। मासणिप्फाबकुलत्य थलिसि दसतीणएखिघा ॥ १ ॥ श्रयसीकुसुनकोद्दब कगूरालगयरहकोढूसा । सणसरिसमूलयीया जेयावरणे तहप्प तिबोहव्या । पूगफसंसर्चर मोरव्योनारिकेलय ॥ २ ॥ येषाम्ये तयाप्रकारासी वलया पप पतिविधा परिव । हरितक्षा पप्पमेफ विषाः । तपपा प्रत्यारोपोडा परितताटुसोजलगताने । वत्युसपोरगमनार पौडमीपपातविया ॥ दपीपलिशाद स्वस्तिवाशा बायेवमहको ॥१० मूलबसरसवाम्बिल शाक्यम्तवाव । तुलसोतमोरालो धनुनभूमेदेन ॥ चोरदबमनकरुच गतपुप्पीन्दीवरचतथा ॥ मधारये ज्याप्रकाराने हारता । अप चाता पपप । भोपपपो ऽमसविधा प्राप्ताः । शालोनीहीगोधमा यवलममसूरतिलमुद्वार। मास निप्पावतत्याः अलसीदशवीणाति १० अपसीसम्मकोव कइगरालमाययोदयकार ॥ शणपरिसयमूलयीमा येषाम्ये वयामकाराखामो 4AM.
एखयालुकी । घोसातईपझोला पचंगुखियायणालीय ॥१॥ कगूलयाफदुइया फक्कोफडफारियाबईसुनगा । फुययाययागलीपा पायालीतहदेयदालीय ॥२॥ थप्फोणाशयमुप्तय नागडयाफराहगूरयातीय संघहसमिण साधिय जासुमणफुर्यिदयाहीया॥३॥ मुहियर्थयायाली धारयिरालीजियतिगोयाठी । पाणीमामायावी गुजा वालीयपत्याणी ॥ १॥ ससयिदुगोप्तफुसिया गिरिफाइमालुयायथजगई । वहफुल्जियकोगलिमा गठीयतह थक्कायोंदीया ॥५॥ जेयाययो तहप्पगारा सेत्तं यासीन से कित पागा २ यणगयिहा पणत्ता, तजहा हरयाउरफुयमये धीरुणातहटकायमासेय । सुठेसरेययेत्ते तिमिरेसतपोरगणले ॥१॥ यसेयेलूफगए फफा वसेययषधसे य । उदएफुएघिमए फमाघेलूयकालाणे ॥२॥ जेयायो तहप्पगारा सेप्त पछगा ॥ से फित तणा? तणावणेगयिहा पणता , तजहा-सझियगतियहोसिय दमकुरोपहएयपोकला थाणथमाए तिमुचा नामसतेहप्पभूरवरस्यो । सर्पमुमनमोपिच बातमुममा विना R॥ मुविधामा विरामी पानीपासा : पा श्यामागमा गुमानीववत्यागी । ४॥ पवतीचविगोश पुरमीगिरिपिमासुबानको । सिपुष्पवागविमोगरो तलाम्पासा.. मा पापाचपा प्रबारासा पलया । पपोते पवना पवगा पनेविषा प्रमालयपा-पारमाटिका बोरपानामा माटी परेपवेत्रा तिमिरामापोरनपाला ॥१॥ वंशोधनका कापपत्रमा उमटमिनु insaan पाप्रपाले पक्षमा पानि वानि पानिपानेसविधानि तानि । तपा-परपहा विकारपटौताविपुल रवाप्प दात्मोपचमझदनम् ॥१. पानिराम्बानि तथा प्रकारावि लामि नमामि । मतिnिa वा पनि ALI पया वासनमातवालो बत्तालिपारितासारपसागसवानिmat.रोगिणी - ।
पापा ।। पर। RANHEARNATDadawasawal साहारणसरीरघादरयणस्सइकाइया? २ शणेगविहा परमप्ता , तजहा-शवए पणए सेवाले लोहिणी नित त्यित्नगा शस्सकमी सिहफणी सिउठातप्तोमुसढीय ॥ १ ॥ रुरुकुण्हरियाजारु, बीरयिराठीतहेवकिहीया हलिहासिगवेरेय, थालुग्गमूलएड यकबूय कणकतूमजापोगलइतहेव मजसिगी विरुहा सप्पसुगधा डि नरुहा चेय यायरुहा पाढामिययालुको मऊररसा चेव रायवल्ली य पउमा य माढरी दति वझिकिहाति यावरा मासपणी मुम्गपछि जीवियरिसिके य रेणुया चेव काली खीरकानली तया नगीणहाईयाकिमिरा सिनष्वमुत्याणगलइपेलुगाईय किण्हे पउले य हवेहरतणुया चेय लोयाणी कराहकदेवजे सूरणक तहेन खालूम एए शणतजीवा जेयावरणे तहाबिहा ॥ तणमूलकदमूलो यसीमूलितियायरे । सखेडा मसखिजा वोध छायणतजीवाय ॥१॥ सिघामगरसुगुच्छो चणेगजीवोउ होति णायहो। पत्ता पत्तयजिया दोणियजीया फले ALOPARDHARMERMEROTEAMLILABLE पा-अनक्ष, पनक सेवास, लोही बीडू, तिनका । असिएको समरिठ ततो, ममता ॥ १॥ तसमन्दकुन्दरिविरुवारविराली त पापाता । हारिवावेर भासमनीकम्यु रुमबन्दमघुपोलेव ॥२॥ मपुङ्गीविरुठी सबसुमन्पित्रिमता । पश्मसभावाताली मपुररसाधराज मता ॥ ३ पटनागान्धारिदात्यो पयही विधातिवापरामासपर्वा । मुगप जोवरसिका रगुफावाप्यायोलोजीरवाफोलो ॥४५ माफमराशिमाया गु यामुसयदानशा पोमपीसावन्दी तपारतनुप्लोपाची ॥५॥ कमवादग्दो सूरणपग्दासलूकः । एवं अनन्त जीवा ये धाप्यन्यै सपा भूताः ॥ ६॥ परम्सबम्बमूसा पक्षीमसास्तयाचपरे । सम्मेया प्रसस्येया घोडयाचवपापरे ॥१॥ पाटकरसुगयोप्य नेवजीवोनयतिविशेय' । पना प्रत्येकानीवा दोहोनीयोपसवियो । २ ॥ यस्यमूल स्पनामस्य समोभतस्तदृश्यते ममतजीवास्तम्मसे येवाप्यम्येतथाविधा ॥१॥ पस्य कादस्प प्रमस्य समो मस्त दृश्यते ॥ अनन्य जीवात न्मूले यवाप्याये वपाविधाः ॥२॥ यस्य कन्यस्य मग्नस्य समो मस्त दृश्पते । मनन्त गोवा गारा सेत्त सही । से कित जलरुहा २ थणेगविहा पणता, तजहा-उदए थनए पणए सेवाठे कठ हढे कसेख्या कच्छन्नाणी उप्पले पउमे फुमुद्दे णठिणे सुनए सोगधिए पोकरीए महापोरीए नययत्ते नह स्सवत्ते करुहारे कोकणदे थपिदे तामरस निस निसमुणाले पोरफले पोरफलच्छिलए जेपावणे तहप्प गारा सेत्त जलरुहा । से फित कुहणा ? शणेगविहा पणता , तजहा-थाए काए फुहणे कुणको दवहलिया थफाए सज्जाए वप्तोए वसीणहिया कुरए १ जेयायणे तहप्पगारा सेप्त कुहगा । णाणाविहत ठाणा रुस्काणएगजीषियापप्ता। खघोयिएगजीयो ताउसरउनालिएरीण ॥१॥ जहमगठसरिसयाण सिलेस मिस्साणयष्ट्रियायहा । पत्तेयसरीराण तहतिसरीरसघाया ॥२॥ जहयातिउपप्पक्रिया यजगहितिलेहि सहतासती । पत्तेयसरीराण तह)तिसरीरसघाया ॥ ३ ॥ सेत्त पप्लेयसरीरयादरयणप्फडझाइया। से कित 10cceobaccooconococc - पपमा पप गतिविपा बतकहा।बातमहा प्रबविप प्रम | तापा-ठाने पापा ने सम्पुरे भाषा: उत्यसपध्वमुदानि ॥१.मसिममुपपसौगन्धिमपुरारीक शतपत्र सानपत्राद्वारगोमदारांबदमागरम रिमश्मिावान पुन पुनमाति मेवात् । चान्ये आपाप्रबाराते बताए । पप गतिपिपा कासा । पारा पनि प्रशता । तपा-बाय बाग पुष यासिका, • अपाच सप्रन सवाब कार बमोहित पारनेदात् । चामे ताराने । मामानिनामा रा एनीविधापनाः । स्वीपि कीबोत्पलमरतनारियेसीमान् ॥ १॥ यधारापाला अभिमातिम् । प्रतिभा निसरीमपाता। पावातिलपटिका पमिसितषहतारको । प्रशारीरा maintaरातार बादरलत्पतिवारिता विविध सवारवारोबार रकमसविविवारपरपावरलिक्विामेरा mem हीरोनगेपदीसई । परिप्तजीवेउसखधे जेयावणेतहाविहा॥३॥ जस्सतयाएनग्गाए हीरोनगेपदीसई। परि सजीवातयासाउ जेयायमातहाविहा ॥ ४ ॥ जस्ससालस्सनग्गस्स हीरोजगेपदीसई। परित्तजीयेउसेसाले जेयायलेतहाविद्वा ॥५॥जस्सपवालस्सन्नग्गस्स हीरोनगेपदीसई। परिप्तजीवेपवासंउ जेयायन्तेतहायिहा ६ ॥ जस्सपप्तरसन्नग्गस्स हीरोनगेपदीसई। परिप्तजीयेउसेपत्ते जेयावणेतहायिहा॥७॥ जस्सपुष्फरसन्नग्ग स्स हीरोनगेपदीसई । परिप्तजीवे उसेपुप्फे जेयावन्लेतहाविहा ॥८॥ जस्तफलस्सनग्गस्स हीरोनगेपदीत ई। परिप्तजीयेफलेसेउ जेयायक्षेतहाविहा ॥ ९ ॥ जस्सवीयस्सनग्गस्स हीरोनगेपदीसई । परितजीवेउसे वाए जयायन्नेतहायिहा ॥ १० ॥ जस्समूलस्सकठा बलीयहलतरीनवे । शणतजीवाउसानली जायाय स्य हीरो नमस्त दृश्यते । प्रत्यय जीवालामूले ये वाप्यम्ये पाविपाः ॥१॥ यस्य स्कन्दस्य मग्मस्प होरो भास्तु दश्यते ॥ प्रत्येकजीवा सत्वन्दे ये वाप्यम्पे तपाविपा। ॥ २ ॥ यस्य स्वपस्स नग्मस्य हीरो प्रशस्त दृश्पते ॥ प्ररपेशजीवासा रसग्ध पदाप्याय तथाविधाः ॥३५ यस्य स्वचस्तु न माया रो मान दृश्यते ॥ मत्पबमोवास्तु त्वपि ये वाप्यम्ये पाविधाः ॥ ४॥ यस्य शालस्य मग्मस्प घोरो मस्त दृश्यते । प्रत्येशनीवासस भासे येवाप्याप तथाविधाः ॥५॥ यत्प्रवासस्प नग्मस्प रो मस्तु वृक्षयते । प्रत्येक जीवात्र स्यु ये वाप्यग्ये तपाविधा ॥६॥ यस्प पत्रस्य म मस्य हीरो मम दृश्यत । प्रत्याभोवा तत्पर ये वाप्यग्य तथाविधाः ॥ ७॥ यस्य पुप्पस्य नमस्य होरो प्रशस्त दृश्यते । प्रत्यकभीवा तर प्य य वाप्यम्प सपाविधा En यत्पसस्य तु मग्मस्य हीरो प्रस्तु दृश्यत । प्रत्येबालीवास्तु परत य वाप्यम्य तयाविधा ॥६॥ यस्य धीमस्प न ग्मस्य हीरो मस्त दृश्यते ॥ प्रत्येकजीवास्तद्घोल ये वाप्याये तथाविधाः ॥ १०॥ यस्य कम्दस्य बाप्टेम्यातस्त्वर याला मवेत् ॥ ममतजीवास्त विधि या वाप्यम्पा खपाविधा यस सन्न्यस्य काठेन्यो स्वर याचा भवेत् ॥ मम्त जीवावधि मे वाप्यन्य वपाविधा ॥२॥ यस्य शा HESALSARORILAIMEANAIamur .प.॥
जणिया ॥२॥ जस्समूलरसन्नम्गस्स समोलंगोयदीसए। शुणतजीवे उसेमूळे जेयाषणेतहाविहा ॥१॥ जस्सकंठस्स नग्गस्स समोनगायदीसह । शणतजोयेउसेकदे जेयायन्लेतहायिहा ॥२॥ जस्सखघस्सन्नग्गस्स समोनगीय दोसई । श्वणसजीउमखघे जैयाणवतहायिहा ॥३॥ जस्सतयाएजग्गाए समोनगोयदीमड । शणतजोया तयासाउ जेयावन्नातहाविहा ॥ ४ ॥ जस्ससालस्सनग्गस्स समो.नंगोपटीसई शुणतजीये उसेसाठे जयावन्ने तहाविदा ॥ ५ ॥ जस्सपवालस्सनग्गस्स समानगोपटीसई । थणतजीयेपथावेसे जेयायन्नातहायिहा ६ ॥ जस्सपप्तस्सनग्गस्म समोत्नगोपदीसई। थणतजीवउसेपत्ते जेयायलेतहायिहा ॥७॥ जस्सपुष्फस्सजग्गस्स समोलगोपटीमई । शणतजीयेउस पप्फे जेयायलेतहायिहा ॥८॥ जस्सफउस्सन्नग्गस्स समोनगोपदीसई । थणतजीवफलेसे उ जेपावलेतहायिहा ॥ ९ जस्सीयस्सनग्गस्स समोजगोपदीसई। शणतीय उनमी जेयायनेतहाविहा॥१०॥ जस्समूठस्सनग्गस्स हीरोनगीपदीसई । परिप्त वेउसेमूछे जेयायमतहायिहा १ जस्सकदस्सनग्गस्स हीरोजगोपदीसई । परितजीवेउसेकदे जेयायन्नेतहायिहा ॥२॥ जस्सखधस्सनग्गस्स सम्मस पाप्याप तपाविपा.३यस शाखा प्रनमा समो पारिदृश्पते । समाजोपासवासा वाणापे तचापि ५ पम्प पर सुप्रमापा समो प्रगत दृश्पते । चमन्तीबा सावन मेवाप्पम्प तपापा १॥ परमवासस्म प्रग्नल समो भापत मासेमी स्प बाप्यन्ये पारित .. पल्म पाप प्रामास समो मङ्गन दृश्यते । पातीमा पाप्मामे तमाविषn पम्प पुष्पस्सन मस तमो पर दापते मलारपुप्पे पेशामाये तपाविषा पसलस प्रामसमो । मत जोगन कले मे बाप्यम्बे सानिमा बीमहनाममो मानसपट बनवधीवासी बवासम्म वापिका ॥ १०॥रसमस मम्म प्राप पा ॥ पद" हीरोजगेपदीसई । परिप्तजीधेउसेखधे जेयायणेतहाविहा॥ ३ ॥ जस्सतयाएनग्गाए हीरोनंगेपदीसई। परि तजीवातयासाउ जेयावसातहाविहा ॥ १ ॥ जस्ससालस्सनग्गस्स हीरोनगेपदीसई। परित्तजीवे उसेसाले जेयावन्लेतहाविहा॥५॥जस्सपवालस्सनग्गस्स हीरोनगेपदीसई। परिप्तजीवेपयालंउ जेयावन्नेतहाबिहा ६॥ जस्सपप्तस्सन्नग्गस्स हीरोजगेपदीसई । परिप्तजीवेउसे पते जेयायतहाविहा॥७॥ जस्सपुष्फस्सन्नग्ग स्स हीरोनगेपदीसई । परितजीवेउसेपुप्फे जेयावलेतहाविहा ॥ ८ ॥ जस्सफलस्सन्नग्गस्स हीरोनगेपदीस ई । परिप्तजीवेफलेसेउ जेयायवेतहायिहा ॥ ९ ॥ जस्सयीयस्सजग्गस्स हीरोनगेपदीसई । परितजीवेउसे वीए जयावन्लेतहापिहा ॥ १०॥ जस्समूलस्सकठा बलीवहतरीनवे । शणतजीवाउसाबल्ली जायाव : ULTIMILLERSHIROINE स्प हीरो मस्त वयते । प्रत्येक जीवास्तम्मूसे ये वाप्याये तपाविधाः ॥ १॥ यस्य स्वम्दस्य मनस्य हीरो मनस्तु दृश्यते ॥ प्रत्येकजीवा स्तरपन्दे ये वाप्यन्ये तथाविपशः ॥२॥ यस्य स्कन्पस्य मनस्य हीरो मन दरपते ॥ प्रत्येकालीदास्त रम्प य वाप्याप तपाविधाः ॥३॥ यस्य स्ववस्तु न ग्माया होरो मनस्तु दृश्यते । प्रत्यवत्रीवास्तु त्वपि ये वाप्यमये तपाविपाःn en यस्य शालस्य मग्मस्य होरो प्रसस्त दृश्यते ॥ प्ररपेजमोवास्त पासे येवाप्पग्य तपाविधा ॥५॥ यत्प्रवासस्य मग्नस्य हीरो नमस्तु वृदयते । प्रत्येक जोगात्र स्यु वाप्यम्पे तपाविधाः ॥६॥ यस्य पत्रस्य भ ग्मस्य हीरो प्रसस्त दृश्यत । प्रत्यावीवा तत्पन्न ये वाप्यग्य तपाविषाः ॥ ७॥ पस्य पुप्पस्य मनस्य होरो मङ्गत दृश्पते । प्रत्यकजीवा स्तर प्प ये वाप्यम्य तपाविघा ॥८॥ यस्पासस्य तु मम्मस्य होरो प्रास्त दृश्यत । प्रत्येकलीवास्तु पस य वाप्यग्य तयाविघा ॥६॥ यस्य धीजस्य न ग्मस्म हीरो मस्त दृश्यते । प्रत्येकलीवास्तबीच ये वाप्यन्ये पाविया ॥१०॥ यस्य फम्दस्य बाप्ठेच्या तस्त्वक यस्ता भवेत् ॥ धमन्तजीवास स्वपि या वाप्यम्या जपाविपाः ॥ १॥ यस्य सत्यस्य पाठेन्यो तस्त्वम् पहला मवेत् ॥ ममन्य जीवावधि ये वाप्यम्य वयाविधाः ॥२॥ यस्य झा 12SARSMganRIMARRREARRIAL हातहाविहा ॥ १॥ जस्सकदस्सकठा बलीयहरुतरीनवे। शणतजीयाउसाठवी जायायणातहायिहा २॥ अस्सखघस्सकठाउँ बलीवहतरीनवे । थणतजीयाउतावली जायायणातहायिहा ॥३॥ जस्ससाठाइक का बलीयहरुतरीनवे शणतजीवाउसानही जायायणातहायिहा ॥ १॥ जस्समूउस्मकता वलीतणु यरीनधे । परित्तजीवाउसानली जायायणातहाविहा॥१॥ जस्सकदस्सकठावलीतणुयरीजये । परित्त जीघाउसानली जायायणातहायिहा ॥२॥ जस्सघस्सफठा वलीतणुयरीनये । परिप्तजीयाउसावली जायावरणातहाविहा ॥ ३ ॥ जस्ससालाइकठा वलीतणुयरीनये। परितजीवाउसावली जायायणातहावि हा ॥ १ ॥ चक्कागजजामाणस्स गठीचुणघणोनये । पुढयीसरिसएणनेदेण थणतजीवधियाणाहि ॥ १ ॥ गूढसिरागपत्त सच्छीरजंघहोइनिच्छीरं । जपियपणठसधि एणतजीययियाणाणि ॥२॥ पुफाजठयायठया सस पाठेम्प मानीतु बहुला प्रवेत् पनन्नवी वातावपि पा वाप्यन्या तपाविधाः ॥ पस्स मुतस्प बाहेमो न्तरता तनुत्तरीमता । प्रस्पेक श्रीवास्त्वपितु पापाप्पया पाविधाः ॥ १. पप बन्दस्प बाप्ठेन्यो सरस्व तनुतरीमता । प्रत्येकजीमारत्वचित यामापापासाविया ॥२॥ पस्प सम्म गठन्यो तस्त्वत् वनुतरी मता । प्रत्यकत्रीवास्तु स्वपि या वाप्यन्या पाविधाः ॥ ३॥ पस्पसातवाहम्पो परततातरी , ता प्रत्येव जीवातु स्वपि पावाप्यन्या लपाविप ॥ ४ ॥ माध्यमानस्य ग्रन्मिाहताप्रवेत् । पषियी सदृस परेना मत बीब विना मोपात् । पूर शिराक पर वीर पत्र निचोरन् । यदपि प्रमहममि परमागोवं बिमानीपात् पुष्प प्रतवन नापमानामा गम मनाम बोहल्यममन्तीवर येविनासका पुष्पासम्पनीविषावस्थः । प्रपितासमतीमा चाप्यावेतवार्षिभाय ४ा पयम त्पतिवदो बारपान सकियो । एतेसमधीवा एपोचाबीविषाचाले । ५५ पतापमानवादी गुणानुम्योपयोगी। वेत्येक । ॥ मम॥ सपना यिठयहासणालियशाय । सखिामसखेडा योघाणतजीवाय ॥ ३॥ जेकेडनालियाग्छा पुष्फासखेाजी यिया । णियाशुणतजीया जयायणेतहाविहा ॥ ४ ॥ पउमप्पलि किट तरकटनहेवज्जिली य । एते शणतजीवा एगोजीवोनिसमुणाले ॥५॥ पलहसुणकदय कदलीय क्या । एएपरितजीवा जेयाचन्नेत हाविहा॥ ६॥ पउमुप्पलणलिणाण सुत्नगनोगधिया गय । पुरविकुक गाण सतयत्तनहस्सपताण ॥ ७ ॥ विटाहिरपत्ता यकणियाचेथए जीयत्न । छप्नितरग्गपाना पत्तयकसरमिजा ॥ ८ ॥ व गुनलडकुधाझिय समासहस्कूयडक्वारफे । करकरसु ठविहगु तगा गतहपगाणच ॥ ९ ॥ शुच्छिपपलिमा कन्यएग-सही तिजीयस्स । पत्तेयपप्ताइ पुष्पाइशगजायाइ ॥ १० ॥ पुस्मफलकालिंग तुनत उनलुभालुक । घोसाल्य पाल तिदूयचेवतिदूस ॥ ११ ॥ बटमसकााहण्याइहतिगजीवत्स । पत्तयपाताई सकसरमसरमिजा १२॥ सप्फाएसज्जाए उच्छेदलियायकुहणकुठहो । एण्णतजीचा कुटुक्कहोइनयणान ॥ १३ ॥ जोणिप्नू ग्याए । पद। EMEMORSmiaaaaaaamagranepalace जीवा येषाप्यम्पेतपाप्रबारायः ॥ ६॥ पक्षात्पलनालनामा नगसौगन्धि जाना प यादगम् । परविन्दोमपदामा तपश्चरनपत्रासाम् ॥७॥ पासपपिसा ऐसजीवामि । पान्य रचपत्र फमरपैगमभाष ॥ ८ ॥ वेगामापाटिमममाममुकरयमा । र सपिठविइग स्वामिपयगानिस्यः ॥ ए. पासपर्वप्लिमो एनसायानि । पत्राणि बजीयाम्प मेरुजी आनिपुप्पाणि ॥ १०॥ पुप्पफसफालितम्य पपममरिटय । पोपातकपटोस सम्पूर्फ बातम्सम् ॥ ११ ॥ न समानण्ट ए नामितिघे जीवस्य । प्रत्यसपशाय सकमर कसरा मिन्ना ॥ १२ ५ सप्फाएसमाए ज्येहालयामहमदछ । गतेसमन जीया फन्दुक नयातनपना च ॥ १३ १ योजथयामिजत नावाव्य स्मामतिरा 0 पाम्यो वा । यापचमूसजीवा मोपिरिपत्रमयमवयात ॥ १४ ॥ सपरिसरापारातु मोट्नम्पन्न मण्यवतमाम मत्येवममातमीवा U Saet जीयोयकामइसोवष्यणोया । जोयिश्चमूलेजीयो सोविज्ञापत्तेपठमाए ॥११॥ सहोविकिसउ खलु उग्गम माणोशणतनणि । सोधेषवियहुतो होइपरितोश्शणतोया ॥ १५॥ समयवक्ताताण समयतसिसरीरणि छत्ती। समयंशाणग्गहण समयउस्सासनीसासो ॥१६॥ एकरसउजगहण यरुणसाहारणाणतचेव । जयजा याणगहण समासतपिएगस्स ॥ १७ ॥ साहारणमाहारो साहारणमाणपाणगहणच । साहारणजीयाण सा हारणलरकणएय ॥ १८॥ जहश्चयगोलोधतो जानेंतप्ततयणिजसफासो । छोशगणिपरिण णियजीने तहाजाण ॥ १९॥ एगस्सदोण्हतिराहव सखेडाणघपासिउसका । टीसतिसरीराई णिनेयजीनाणणताण २० लोगागासपएस णियजीवठयेहिएको । एवमयिकामाणा हवतिलोयाशणता ॥२१॥ छोगागासपदेसे परित्तजीयठयितुएक्वेछ । एवमषिमाणा हवतिलोगाथसखेज्या ॥ २२ ॥ पप्तेयापजत्ता पयरस्सशसस नागमिप्ता । लोगाश्चसखायपज्जत्तयाणसाहारणमणता ॥ २३ ॥ एएहिसरीरेहि पञ्चकने पसरियाजीया । समवपुत्वान्तामा समस्येपाथरीरनिवृत्तिः । समक्षमाणापाम ग्रापपोवासनियासी ॥ १६० एकस्य चपतषणं पहनांसापारणा मात्र । पावनांगाव समासव सदपिकस्म ॥ १७ ॥ साधारपमादार मापापामादिभवेत् सवम् सापारीपाना साधारणसवपतित्॥१८॥ पपापोनोसोमावो बाततततपनीयसामः । सर्वोणिपरिपत रामु बानाचिनिगोदजीवागतम् ॥ १८॥ यस्यापोरापाणां संस्येपामांनवोपत म्यानि । गावासपायन्ते मन्नानानिमोदजीवानाम् ॥ २० ॥ मोकाबाशप्रदेशे निगोदशीवस्थापनम् । पवन मोपमामा प्रतिसोबासमता र ५२९ सोबावात्रप्रदेशे मस्पेकसीवस्थापनम् । एबग्तुमीयमाना प्रवन्निसाबापमस्याता ॥ २२ ॥ पर्याप्त प्रत्येकीका प्रतरस्यासमागमि वा । असमतोकापपयोप्ता सापारवासना ॥ २२ ॥ एमिावसुसरीरो प्रस्तावकापियानोवाः । मूलापाचापामा पशुपमतपान्ति ॥२४॥ - पपवा ॥ पद। सुचमाशाणागिज्जा चस्कुप्फासनतेइति ॥ २१ ॥ जेयावणे तहप्पगारा ते समास दुरिहा पणता, त० पजाप्तगा य थपजप्तगाय, तत्यण जे ते शपजतगा तेण शसपता, तत्यण जेते पहातगा तेसिण वन्ना देसण गधादेसेण रसादेसेण फासादे सेण सहस्सग्गसो विहाणाइ सखेजाइ जोणिप्पमुहसयसहस्साइ पन्जा गणिस्साए थपजातगा यक्कमति , जत्य एगो तत्य सिय सखिजा सिय शसखिजा सियशणता एएसिण हमा गाहा शुणुगतबा तजहा-कदायकदमूलाय रुरकमूलाडयायरे । गुच्छायगुम्मबल्लीय वेलुयाणितणा णिय ॥ १ ॥ पउमुप्पलसिघाने हढेयसवालकिण्हएपणए। शवएयकच्छनाणी कदुक्कोकूणवीसहमे ॥ २ ॥ तयबलिपयालेसुय पप्तपुष्फफलेसुय । मूलग्गमज्जवीएसु जोणीकस्सइकेतिया ॥३॥ सेत साहारणसरीर यादरयणस्सइकाइया । सेतयादरयणस्सइकाइया॥सेत्त एगिदिया ॥ से कित बेइदिया? बेइदिया थणेग विहा पणता, तजहा-पुलाकिमिया कुच्छिकिमिया गयलगा गोलोमा णेउरा सोमगलगा वसीमुहा सू EHEARTLECCRIMERADE EMODERMUSenureRAEMBERRIERGONDI) पेपिघाम्ये तपामधारास्ते समासतोनिविपाः प्रप्तास्तद्यथा-पर्याप्तवाद्यापर्याप्तवाय, तत्र यमपर्याप्तफासे ऽसम्प्राप्ताः, तर ये पर्याप्तफा स्पा वर्गदशन गन्धादम रमादेशेम स्पर्धादेखो सामाग्रशो विधानामि (नेदाः) सस्येपानि योनिप्रमुराग्रप्ससानाणि पर्याप्तकमिनया अपर्याप्तका प्यु रकमन्से यौवस्तात्र स्यात्सम्येयाः स्यादसम्मेपाः स्यादमन्ताः । एतेपामिमा गाथा अनुगम्तया सद्यथा-फदायकम्धमूनानि यक्षमलानिघाप रे । गुशागुम्माचवमग्य कामिदवानिच ॥ १० पटनोत्पलशनाटकान सवालफरमपनक्षाघ । अवनकायमच्यनाणिः पन्दुकपकोनयिशतिका ॥ २ ॥ त्यक्षभिप्राप्तेषु परपुप्पफलपुच । मूप्ताग्रमप्पोजयोनिःपस्यापिचापि ॥ ३ ॥ सत्ता साधारणगरीरयादरवनस्पतिकायिका' । उ ता यादरवनस्पविसायिका । समाप्सानि एफेन्द्रियाणि। अप के ते होम्प्रिया होरिया भनेकविधा। मचतासघया पूति छपिका। पुदिरुपि -RREARSHURNAME ईमहा गोजलोया जलोया जाताउया सखा मख गगा घुवा खुल्ला संघा वरामा सोत्तिया मोतिया कल्या वासा एगबना दुहन्यप्ता णदिवायता सयुमा माडवामा सिप्पि सपुझा चंदणा समुद्दलिरका , जयायणे तहप्पगारा सोते समुच्छिमा नपुमगा त समामन दुयिहा प०, त०-पजाप्तगाय पहात्तगाय निण एप्रमादियाण येइदियाण पज्जत्त पज्जताण सप्तजाप्टकुसकोमोजागिप्पमुहमयसहस्सा नयतीति मरकाय ॥ सेत्त यइति यससारसमायणजीयपणषणा ॥ से फित तहदियससारतमायनजीग्रपणनणा २१ शुगगयिहा परसप्ता, तजहा-उवाइया रोहिणिया कुय पिपीलिया उद्देमगा उहहिया उकलिया उप्पाया उप्पमा तण हारा कठहारा पप्तहारा मालुया तणायटिया पप्तबिटिया पप्फटिया फलघिठिया यायविटिया तेपुरु णमिजिया तउसिमिजिया कप्यासठिमिजिया हिल्लिया जिल्लिया फिगिरा फिगिरिफा बाजाया लऊया सु HEAVEGETREnar rCaman ri - पा। पहपणा मोसोमा तसा अमला वामसार सूचीमुसा गाजमोबा। चमोश प्रमामाः छोरा समना गमा समा रामा क गो । त्ति भौतिक तापवासा' परोपपता हिपोपत नम्या आयुमा माया Eml पमा ममामीनाः याप्पम्प तपासारा सर्व ते समाजमा नपुमचात समासता शिवपाः मम । तपा पर्यातका पपपापाय । पतप मम्मामा निपपाना पगलाया प्रबादीको सर्वशातिमकोटीमा पानिप्रमग्रारि यतमानाय भarन रातात्यातम् । तपत नियममापी पप सानिया तीन्द्रपसमा पानी प्रधापना ।बीनियममापधापमा प्रमावधातराचा प्रत्याति औरणमा पन्युम विपालिका पा सदेचा उत्थसिता पत्पत्ता सपना दमारारा BINA मनाहारा पाहारा ये पुश्वदी पुप्पो पत्रपटो सो गरगगम जिवा मामनिवाबपोश तिमिन्नी शशिका माहिग भिगारपा बिंगरिया मामा सपुगा धुनमा मोबासका परिट यति पशवपा ॥ पट॥ मह। Tar-OCOPIERREREURDAN नगा सोवत्यिया सुयोटा इदकाडया इंगोयया तुरतुबगा कोस्यलवाहगा जूया हालाहला पिसुया सत पाइया गोम्ही हत्यिसोका जैयारणे त० सछे ते समूच्छिमनपुसगा त समास दुधिहा पणना, तजहा- पात्तगाय थपजत्तगाय । एएसिण एचमाइयाण तहदियाण पजातापजामाण शुरुजाकुलको फिजाणि प्पमुहस यसहस्सा हवतीति मरकाय । सत्त तेइ दियससा० । से कित घउरिदियससारसमावणाजीवपणन णा२ ? शणेगविहा पणता, तजहा-शधिय पाप्तिय मेच्छिय, मगसिरकोक तहा पयग य । ढकग फु कुन कुक्कह , नदायप्तेय सिगिरिफे। किराहपत्ता नीलपता ठाहियपत्ता हालिहपता सुकिल पता चित्तपरका यिाचप्तपरका जलिया जलचारिया गनीरा णीणिया ततवा शत्यिरोमा शत्यिहा सारगा नेउरा दोला जमरा नरिली जरुला तोम्ना विच्चया पतविञ्चया छाणविञ्चुया जलविचया पिग्गला कागगा गोमयकाका जयावन्न तहप्पगारा सहे ते समुच्छिमा नपुनगा त समासन दुविहा पणता, तजहा-पातगाय शप RUC TE GAA1 haco Low bok Ron: का इन्द्र गोपाः तमतम्मगा। कुलत्यवाएगा यूवाहासालाः पिशुका साया कपाशसा स्तिप्रमठा ये वाप्याय तथाविधा सर्व मछि मा नपुसकीला त समाचतो द्विविधा प्रताः । तद्यथा पर्याप्ततापपर्यातमाय । पतपामवमादिशामा शान्द्रियाणा पर्यावापर्याप्तहानामष्ट जातिसमायोनिप्रमुसंगतसामाणि मम्ति रत्यास्पातम् ॥ तपते सन्द्रियग्राचा ॥ अथ प्रतिविषारतरिन्द्रियससारसमापन नावापना ।। चतुरिन्तिपसमारसमापनी वापमा मनाविधा प्रतातद्यथा पापपुतिकमासम्म मशमकीटातपातमाघ मस्फुणफनाक इनन्द्यावद्विारकाय ॥ १॥ रुप्मपता मासपहा लाषितपदा शारदपणा असलापता विपित्रपक्षा उपालिका जलधारणा मनीरा निपतातोपरा पायवेपाः सारा मासा दाला मरा नमो बसाहार वा पाया पत्रासका गामयधिकाः अलपरिक्षा DECEALL HLIBERSaasamPoad अत्तगाय । एएसिण एयमाझ्याण चउरिदियाण पजप्तापजत्ताण नयजाइकुउझोमि जोणिप्पमुहसयतह स्साइ नवतीति मरकाय । सेप्त चउरिदियससारसमावणजीवपणवणा । से कित पचिदियससारसमावण जीवपणवणा? पचिदियससारसमावणजीरपणवणा घउविहा परमत्ता, तजहा-नेरइयपचिदियससारस मावस्मजीवपमषणा तिरिरकजोणियपचिदियससारसमावणीवपणवणा मणुस्सपचिदियससारसमारण जीवपणषणा देवपचिदियससारसमावणजीयपणवणा । से फित नेरडया २ ? सप्तविहा पणता, तजहा रयणप्पना पुढवीनेरडया सक्करप्पन्नापुढविनेरहया वालुयप्पन्नापुढविणेरइया धूमप्पनापुढयिणेरडया तम प्पनापुढविणेरठया तमतमप्यत्नापुढयिणेरडया।ते समास दुविहा पणता, तजहा-पजतगा शपजाप्त गाय । सेत्त परइया । से कित पचिदियतिरिरफ़जोणिया २? तिथिहा पणता, तजहा-जठयरपचिदि मिपमसार बसमा नोमपबीटा ये वाणापे वधाप्रकारास्ते समधिमा नपुसबास्ते समामतो विविधाः प्रपता पर्याप्तका प्रपयाप्तबाध पते पामेवमादीना चतुरिन्द्रिपपासा पर्याप्तापर्याप्ताना मवलवासबोटिशतशास्राणि भविम्ति इति पास्यातम् तपते चतुरिन्द्रिपममापस जी पनापना । अथ पविविधाः पन्नोन्द्रियसंसारसमापवजीषप्रधापना? । पम्मेन्द्रियममारसमापनगीवप्रधापनापतुविधा प्रसप्ताः ॥ तयपारे रपिकपमान्द्रिपसमारसमापनजीवनयापना विम्ब्योमिपपवेन्द्रिपसमारसमापनमीवप्रधापमा मनुष्णपोनिपसनारसमापनोवप्रधापना दे पपमोन्द्रिपसंसारतमाफ्याचीचमचापनाः। तेतिविषा नैरपिका ? नेपिबा सतविपा. प्रसमा । तपा-रखममा पपिपी नरपिका र प्रमा पधियोनरायबा बानुबमनाएथियो नैरपिका धूमप्रमापापपीनेरपिबा तमामता पपिपीमरपिका तमसम प्रमा पपिपी नरपिशाते समा सोत हिविषा मासाः प्रपा पपासा पोसाय । वएवे नैरपिका।।मतिबिधा पोग्नुिपविमापानिबार । पगिपतिपयोगिता पापा ॥मत 1 CAUGHanumarnamaMONACHAR यतिरिक जोणिया घलयरपचिदियतिरिकजोणिया खहयरपचिठियतिरिस्कजोणिया। से कित जलयरप चिदियतिरिस्कजोणिया २? पचविहा पलता, तजहा मच्छा कच्छहा गाहा नगरा सुसुमारा । सेकि त मच्छा २ शणगविहा पणता, तजहा सण्हमच्छा खवलमच्छा जुगमच्छा विकिमियमच्छा हलिहमच्छा मग्गरिमच्छा रोहियमच्छा हलीसागरा गागरा वा यागरा तिमा तिमिगिला णका तदुलमच्छा क णिक्कामच्छा सालिसच्छियामच्छा लन्नणमच्छा पागा पळागाहपागा । जेयावन्ने तहप्पगारा । सेत्त मच्छा । से कित कच्छना २ दुयिहा पणता , तजहा शठकच्छन्ना य मसकच्छन्ना य । सेत्त कच्छन्ना । से कित गाहा २? पचविता परमप्ता , तजहा देलीवढगा मुद्दया पुलगा सीमागारा । सेत्त गाहा ॥ से फित मगरा २ . दुविहा पणता, तजहा-सोझमगरा मच्छमगराय । सत्त मगरा । से कित सुसुमारा २ ॥प. ॥ विविधाः प्रचताः तद्यथा पलचरपोन्द्रिपतियोमियाः त्वलपरपम्बन्द्रियतियक्योमिफाः सपरपश्चम्द्रिपतियफ्योनिकाः । अथ पतिविधा बसपरपमान्द्रियतियफ्योमिया ! । चलचरपन्थन्द्रिपतिययोमिका पम्पविधा प्रसप्ताः । तद्यथा-मरस्या पच्चपा ग्राभाः मकराः शिशुमा रा। पप अतिषिया मत्स्या ? । मतस्या पनवविधा प्रसता तद्यपा-सप्तमरस्या सवलमत्स्याः युगमत्स्याः चिनकमत्स्याहारिद्रमत्स्या मस रमरस्या रोपितमरस्पा लीमरस्या सागरमत्स्याः गगरमत्स्या धान्मत्स्या घठगरमस्स्पा तिमिमरस्याः तिमिसिलमतस्याः नकमस्याः तन्तु समरस्या हमम्मररपा शासिमस्पा मात्तिकमरस्याः सम्मनमारस्था पप्तासमरस्या पताकपताफमरस्या ये बाप्पाये तथामकारास्त मत्स्याः । प्रय फतिषिचा इष्प । कम्पा द्विविधाः प्रताः । ताया-प्रस्थिकपा मासमपाथ । तपते कन्यपा' । अप क्षतिविपाः ग्राहा। यादा पम्वविधा प्रभसा दिनुया घडगा मृदुला पुनकाः सीमावाराः तरते ग्राहः । भय पतिविधा मकरा । मगरहा विविधाः प्रताप disoROUGSpor एगागारा ५०, सेत मुहमारा । जेयाघन्ने तहप्पगारा ते समास दुविहा पणता, तजहा-समुच्छिमा य गप्नवलतिया य तत्यण ज ते सम्मुच्छिमा ते सधे नपुसका, तत्यण जे ते गनधक्कतिया ते तियिहा प०, तजहा इस्यी पुरिसा नपुसगा। एतसिण एवमाइयाण जलयरपचिदियतिरिस्कजोणियाण पळाप्तापात्ताण पछतरसजाउकुलफोमिजोणीप्यमुहसयसहस्सा नवतीति मरकाय । सेत्त जठयरपचिदिय० । से कित पठ यरपचिदियतिरिरकजाणिया २? दुयिठा पणता, तजहा चउप्पयध्ययरपचिदियतिरिस्कजोणिया परि सप्पपलपरपचिदियसिरिरकजोणिया य । से फित घउप्पयलयरपचिदियतिरिक्रजोणिया २ ? घउदिहा पणता , तजहा एगस्खुरा दुखुरा गमीपया सणप्फया। से कित एगखुरा २ ? शणेगविहा पसप्ता, त० यस्सा शस्सतरा घोफगा गद्दना गोरकरा कदलगा सिरिकदलगा शायत्ता। जेयावन्ने तहप्पगारा । सेस रहामबरा मरममबराय । पवे मबराः। भय पतिविधाः सिमारा। शिशमारा ग्वाहारा प्रतापते गिमारा। रेवाप्पम्पे त पापारात समामतो दिविपाः प्राप्ताः । समर्णिमाय गनभुमान्तिमाघ । तर यस्ते सनिमाले नमामत भई नपुंसडाः । तत्र पपत गर्ने परवान्तिबासो प्रविधा प्राप्ताः । सिप' पुरुपाः मपुमा । पताणामामवमादीमा नसरपौगिपतियोमियामा पर्याप्तापातामामा योदमशानिमुनमोतिपोनिप्रमुबशतमालागि प्रान्तीति पायातम् ॥ तपत पसरपोम्पित्तिमोमिला। पतित सतपरपञ्चांग पतिपकायोनिः । तसरपणाविपत्तिपोनिका सिविपरा प्रमा' | नपा तुष्पदवलारपमितिमयोनिमः । परिनतर पोष्ट्रिपतिपम्पोनिषा । अब पतिविधावतुष्मावत परवरिद्रमतिपकपोनिया । चनुभावापरणामपतिमदमोनिकायमा मात्र ताः । तपा-एभरा एरा मनोपरामपापा पिता रणराषि प्रताः । वय-बावरा पमा " पट।। SHREESDANDRDAMOHA-2900apnaarate एगखुरा । से कित दुखुरा २? शणेगयिहा पणता , तजहा-उवा गोणा गवया रोज्जा समया महिसा सघरा वराहा श्या एलगा रुरु सरल चमर कुरग गोकणमाई सेत दुखुरा। से कित गमीपया २? शणे गविहा पणता, तजहा हत्यी हत्यीयणा मकुणहत्यी खग्गा गमा। जेयावणे तहप्पगारा। सेत्त गीपया । से कित सणफया २१ शुणेगविहा पणता, तजहा सीहा वग्छा दीयिया चच्छा तरच्छा परस्परा सिया ला सुणगा कोठयणगा (ग्रथा ५००) कोकतिया ससगा चित्तगा विप्ललगा । जेयावणे तहप्पगारा । सेत्त सणफया । तसमास दुधिहा पणता तजहा समुच्छिमाय गप्नवतति याय । तस्यण जे ते समुच्छि मा ते सझे णपुसगा, तत्यण जे ते गम्नवक्कतिया ते तिथिहा पणता , तजहा हत्यी पुरिसा नपुसगा। एएसिण एवमादियाण यलयरपचिदियतिरिफ जोणियाण पञप्तापजत्ताण दसजाइकुलकोमिजोणिप्पमुह पोटमा गदना गौरपरा कम्दसमा भोकदलबाः पावर्ताय । ये वाप्यन्ये तपाप्रकारा । एते एकसुरा । पप गतिविधाः द्विसुरा। द्विसु रा पनेसविधाः प्रचता । तद्यथा-सष्ट्रा गो गवया रोहा अशा मपिया दाम्परा वराहा पत्रा यसपा सरव शरमायमरा पुरमा गोपर्या दिवा सपते सत्ता विसुराः । अथ पतिविधा गहरीपदा ।। गगहीपदा प्रप्यनेकविधाः प्रताः। तद्यपा-ती गयडल मुबमास्ता राजा गया। पचाप्यम्ये तपामधारा Bा गगरी पदा। पप बतिविघा सनरापदाः ।। समसपा पमेशविधा प्रसार तद्यपा सिहा व्याघ्रा द्वीपिनो श पा मरपका पर पाराः पाला विराप्ताः धाम कोला पोजतय सशा चित्रका यिाला येवाप्यन्ये तपापकारास्सर्वे समसाः। ते समासतो द्विविधा प्रसप्ताः । तपा-समर्विमाय गनपुरकान्तिकाप । तत्र ये समदिमाते सर्वे मर्दुमका। तत्र परते न मुरझान्तिकाने विविधा प्र घप्ताः । तद्यथा तिय पुरुषा नपुसकाः । एतेपामेवमादीनां स्वतपरपम्बोगपतिययोनिशाना पर्याप्तापर्याप्ताना रजातिकुलकोटिपोमिमम PRIMEHILA सयसहस्सा हवतीति मरकाय । सेत्त च उप्पयर्यलयरपचिदियतिरिरकजोणिया । से कित परिसप्पथठयर पचिदियतिरिस्कजोणिया २ ? दुविहा पणता, तजहा उरपरिसप्पयठयरपाचदियतिरिरफ़जोणिया नुय परिसप्पयलयरपचिदियतिरिस्कजोणिया य । से कित उरपरिसप्पयउयरपचिदियतिरिरफजोणिया २? च उधिहा पणत्ता , तजहा थही अयगरा यासाठिया महोरगा । से कित यही २ दुबिहा पणत्ता, तजहा दशीकरा य मउलिणो य । से कित दधीकरा २१ शणगविहा पणत्ता, तजहा शासीविसा दिठीयिसा उग्गयिसा जोगविसा तयाविसा लालायिसा उस्सासचिसा णिस्सासविसा कराहसप्या सेठसप्पा कउदरा दान पुप्फा कोलाहा मेलिमिदा ससिदा जेयापणे तहप्पगारा । सेत्त दठीकरा । से कित मउठिणो२? थणेग विहा पसप्ता, तजहा दिधागा गाणसा कसाहीया वउला चिप्तणिणो मालिणो थही शहिसिलागा वाय समतसहवाति मवira पास्यातमुत्तापतुप्पदस्पतघरपोरिद्रयतियम्पोनिका । यतिविपाः परिमपरस्पतपरपन्चेन्द्रिपतियोनि- का !। पारसपत्वात परपन्चायत्तिर्यायोमिया द्विविधाः प्रचता । तद्यथा उर परिसपरत्यतपरपम्पम्पितियोनिमा मुमपरिसपापल परपोधिपतिपक्षानिकाय । भय पतिविपातर परिसपरस्पतचरपणेन्द्रिपतिपम्पोनिशा ? । तर परिमपरत्यतपरपचन्द्रिपतिपकपोनि गायतविपा प्रभप्ताः । तपपा पाप' पत्रमराः पासानिमा महोरगा। पप बतिविप चाय । पायो द्विविधा प्राप्ता तयपारा प मुलिनय । पथ पतिविधा दी ! । दांवरा भनेविपाः प्रचता । तपपा माशीविपा' वनाविपाः उपर्यापर मोमविषा वाविपा मानाविपाः उपासबिपा मिग्रामविपाकमसा खासपोर हामारा। वानपुष्पा बोसाहा मेलिमा नरिमा से चाप्याप तपामबारा खएत दर्गदरा । बपतिविधा मुसिनः । । मुसिनो अनधि मनमा । वपपा दिया। मामला काही ना सिमाहिया मा FEURALLPEHARSHIPorn मागा । जेयावर तहप्पगारा। सेत्त यउलिया। सेत्त शाही । से कित शयगरा २? एगागारा पणता , सेत्त शयगरा । से कित शासालिया ? कहिण नते ! थासालिया समुच्छति ? गोयमा ! यतोमणुस्सखे से यहाडजोसु दीवेस णिवघाएण पसरससु कम्मनूमीसु वाघात पफुच्च पचसु महाविदेहेसु चक्कावहीखधावा रेसु वासुदेवखधावारेसु यलदेवखधायारेसु मालियखधावारेसु महामफलियखधावारेसु गामनिवेसेसु नगर निवेसेसु निगमनिवेसेसु खेनिवेसेसु कम्झनिवेसेसु मयनिवेसेस दोणमुहनिवेसेसु पहणनिवेसेसु शाग रनियेसेसु थासमनिवेसेसु सवाहनिवेसेसु रायहाणिनियेसेसु एएसिण चेय विणासेसु । एत्यण थासालिया समुच्छति । जहनेण शगुस्स शसखिजाइनागमित्तीए लंगाहणाए, उक्कोसेण वारसजोयणाइ। तहाणुरू व च ण विस्कनवाहालेण नूमिदालिताण समुछेति । सन्नी मिच्छदिठी शन्नाणी श्यतोमुजताउया LATEHRENDER1 सिना प्रायः परिवगासाः वायकुलागाः । येषाप्यन्ये तपाप्रबाराः । वएते मुफस्तिमः । उता प्रायः । पथ पतिविधा अजगरा। पवगरा रामारा। ममता तर अवगराः । पप बायासासिगा ? । कप भदन्त । पासालिगाः समूहन्ति । गौतम ! पन्तमध्ये ममुप्यतेप्रस्पाईवतीय पुदीपपु निर्मापात पम्मदास फम भूमियु पुनय पम्मसु महाविदेशेषु चक्रवत्तिस्कन्धावारेषु वासुदेवस्मन्यावारपु बलदेवस्कन्धाधारेपु मायझलि यस्कम्मापारेषु महामावसिफस्कन्धावारेयु ग्रामानवेद्या नगरनिषेशपु निगमनिवेझ सेटमिवेशपु फयटनिवापु महम्यमिव धोपु द्रोणमुरामि | वेशेषु पत्तममिवेशपु पापरमिवे शेपू भानमनिवेशेषु सवाघनिषमा राजधानीमिवेशोप पतेपामेव विनाशापु । पतेपु पाशाविला समूहम्ति । ज पायनामुलस्या सस्पेषनागमाप्रपा अवगाहमया । उस्वर्पयो द्वादशपोजमामि तपामुप च विफम्मघाम्या (विस्तारस्यूलस्वाभ्या) भूमि दलयित्वा समुविष्ठते । असतिमिप्यावृष्टिः प्रधामी अन्तापुरेव पालं करोति । वरते घासालियाः । अथ कतिविघा मदोरगा ? । महोरगा अनेक ISRANELHIROETD न झाल फरेछ । सेत्त थासाठिया। से फित महोरगा २ ? शुणेगविहा पलत्ता , तजहा थत्येगइया थंगुल पि शुगुठपहप्तिया वि विििय थियछिपात पि रपणी पि रयणीपुरप्तिया पि कुछपि कुछ पत्तिया घि घणु पि घणुपुहप्तिया यि गाउय पि गाउयपुहत्तिया यि जोयणं पि जीयणपुहप्तिया यि जोयणमय पि जायणसयपुहप्तिया यि जोयणसहस्स पि तग पठे जाता जठे विचरति पई पिचरति ते गत्यि इष्ठ बाहिरएसु दीपसमुद्देसु इयंति जेयायने तहप्पगारा सत्त महोरगा । ते समाम दुयिहा प०, २०–मम्मुच्छिमाय गप्नयकतिया य।तत्यण जेते समुच्छिमा ते म णपुमगा, तत्पणं जेते गनरकतिया देण तिमिहा प०, त०-इत्यी पुरिसा नपुसगा, एएसिण एयमाहयाण यम्प्ता २ ण उरपरिसप्पाणं दसजा इकुलकोफीजोणिप्पमुठसयसहस्सा हयती ति मरफाय । सेप्त उरपरिसप्पा। से कितं नुपपरिसप्पा २ वर्षग विपाः मचाता । तपा-सात्यले पचन असमपि नहुनपुपान्मपि विवस्तिमपि पितलिपलमपि परविमपि परमिपमा विधि कापपप धनरपि पनु पपई गतिमपि गष्यतिपात पोजनमपि योजनपथक बोजनमतमपि शेअमतपणा पोत्रमान मरितेन स्पसावा जसे विचरन्ति तमामापुरीपनमुद्रषु भवन्ति दे दावाये तवावा । तपते मोरनाः। ते मारतो ति ARAN पा-ममूर्णिमाप मनमुतकान्तिबास ता ये संमृईिमास्ते मां नपुंसकार । ता य न ममाणिवाने मिति तपास पुषमा मागपति । एतेपामवमादीना पर्याप्तापोहानामुरापरितवा ममातितबोटियोनिममुमतमतापि प्रतीहि भासातारपरिष पा। जब तिषिया मुबपरिषौ १ मुगपरितो बने विधा प्राता सा-मानात परत पारा परा परोसा विसम्ममा पापाबा सा पिराnिt मारिमाय बाप्पा पाश्मरमापि 4 , विहा पणता, तजहा-णउला सेहा सरफा सल्ला सरठा सारा खारा घरोहला विस्सनरा मूसा मगुसा पड लाहया त्यीरविरालिया जाहा चउप्पाहया जे यावने तहप्पगारा। ते समास दुषिहा प०, त०-समुच्छि मा य गनपततियाय, तत्यण जते समुच्छिमा ते सचे नपुसगा, तत्यण जेते गम्नवक्वतिय तेण तिविहा पणता, तजहा-हत्यी पुरिसा नपुसगा, एएसिण एवमाहयाण पजाप्ता २ण नुयपरिसप्पाण नवजाहकुल कोफिजोणिप्पमुहसयसहस्साह हवत्तीति मरकाय । सेत्त नुयपरिसप्पयलयरपचेंटियतिरिस्कजोणिया। सेत्त परिसप्पयलयरपचिदियतिरिरकजोणिया । से कित खहयरपचिढियतिरिकजोणिया २ चउयिहा पणत्ता तजहा-चम्मपरको लोमपरकी समुग्गपरको वियतपरकी । से कित चम्मपरकी २ चणेगविहा प०, त० वग्गुली जलोया मिल्ला नारळपरकी जीवजीया समुदवायसा करणप्तिया परिकवेराली जेयायणे तहप्पगा रा॥ सेप्त चम्मपरकी ॥ से कित लोमपरकी २ शणेगविहा प० , त० ढका कका कुरला वायसा चक्का माईमाव गर्नेव्यरसाम्तिमाय । a ये मूपिमास्ते सर्व मपुसका । तत्र ये गनप्युरशान्तिकारले विविधा प्राप्ताः । तथा खिय पुरुषा नपुस । एतेषामवमादीमा पर्याप्तापपर्याप्तामा मुअपरिसर्पामा मवजातिकुल काटियामिप्रमुरादातसहस्राणि भवतीति भास्यात । उता मुजपरिसर्प र त्यसबरपतिपत्तियक योनिका । सधा परिसपरस्यलपरपन्चम्तियतियफ्यामिकाः । अप पतिविधा सघरपन्द्रियतिपोनिका ? । स परपम्पन्द्रियतियोमिका पतुविधाः प्रप्ताः । तद्यथा चमपती लोमपक्षी समुद्वपक्षी विततपसी । अप पतिषिधाचमपतिका, पमपरिणा मेवावधा' प्रत वापा यसा बसीका परिकता मारहपली जीवजीवाः समुद्रधायमा वसतिया पतिविराली य वाप्यन्ये तथाप्रकाराः। तरत चमपलिया। अप पतिविषा सामपहिर। सोमपपिपोनेविधाः प्रप्तार तद्यथा उभा का पुरला वापसा पा सा फल चेष कालं करेइ । सेत्त यासालिया। से कित महोरगा २? अणेगविहा पलसा , तजहा श्रत्येगडया थगुल पि गुठपहप्तिया वि विच्छिवि यियच्छिपृहत्त पि रयणीं पि रयणीपुहप्तिया पि कुच्छपि कुच्छ पृष्ठत्तिया वि धणु पि धणुपुहप्तिया वि गाउय पि गाउयपुहत्तिया वि जोयण पि जोयणपुहप्तिया मि जोयणसय पि जायणसय पुतिया वि जोयणसहस्स पि तण घले जाता जले विचरति पले विचरति ते णत्यि इह वाहिरएस दीयसमुद्देस हवति जेयायने तहप्पगारा सेत्त महोरगा। ते समास दुविहा प०, त०-सम्मुच्छिमाय गम्नप्रक्वतिया या तत्यण जेते समुच्छिमा ते सहे णपुसगा, तत्यण जेते गन्नयलतिया तेम तिमिठा प०, त०-इत्या पुरिसा नपुसगा, एएसिण एयमाहयाण याप्ता २ ण उरपरिसप्पाण दसजा इकुलकोमोजोणिप्पमुहसयसहस्सा हयती ति मस्काय। सेप्त उरपरिसप्पा।से फित नुयपरिसप्पा २ चणेग विधा प्रसप्ताः । तद्यपा-मगत्ये के कोचन असमपि भासपूपाइन्मपि विततिमपि वितसिपषत मपि परविमपि भविपकमपि कृषिमपि जापपक पनरपि पनु पपई गमतिमपि गपतिपत योजनमपि योगमपणात गोखममतमपि पोरनवतपणा पोजमसात मपि तेम वसमावा असा विपरति तनामापुतीपत्ता प्राति पे वाणापे तपामबाराः । तपते मोरनाः । ते समारतोहिति NET Su पा-समृभिमान मनमुवाति ये समर्दिमा मानपुसवा । ता य नमुकान्तिवा मिति तपासी पुरुषा मधुपति "। एवेवामन्मादीनां पर्याप्तापर्णतानामुरापरिसमा रातिसबोटिपानिमनुगमतमातापि प्रीति बसाहात Imrरपरिक पा । विरा मुबपरितः १ मुबपरिपा पनेकविधा FIRL तपा-माला परवाना परता। बारा परोसा मिना भूषा मामा पापा दमाः परपिराविना चाहा तुमारिलायबामा स्वास vिme -- RDERDasasmTIRDERAGrm CATCHENREEME जाइकुलको जितिनशठतेरसाइच। दसदसयहोतिणबगा तहबारसचेनयोधला ॥१॥ सेत्त सहयरपचिदिय तिरिक जोणिया ॥ सेप्त पचिदियतिरिकजोणिया । सेत तिरिस्क जोणिया॥ से क्ति मणुस्सा २ दुविहा प०, त० समूच्छिममणुस्सा य गप्नवततियमणुस्सा य । स कित समुच्छिममणुस्सा , कहिण नन । समृच्छिम मणुस्सा ममुच्छति ? गोयमा। शतो मणुस्सखेत्त पणयालीसाए जोयणसयसहस्नेसु शह इडोस दीवसमुद्देसु पणरससु कम्मनमासु तीसाए शुकम्मनूमीसु बप्पन्नाए शतरदीचएस गप्लवक़तियमणुस्ताण चेव उच्चारसु था पासवणेसु या खलसु वा सिघाणएस या वत्तसुवा पितेस वा पूएसुवा सक्को सुगा सकपोग्गलपरिसासु वा विगयकलेबरेसु या इत्यीपूरिससजोएस वा नगरनिक्षमणसु वा सईस चेय शसुडएसु ठाणेसु एत्यण समु च्छिममणुस्सा समुच्छति , चंगुलस्स शसखिजानागमिप्तीए उगाहणाए शसन्नी मिच्छदिछी शन्नाणी सहाहि पाप्तीहि पाप्तगा थतोमुजाताउया घेर काल करति । से कित गप्नवकातियमणुस्सा २ RUREBELLHEAD- वध पेव पायथ्याः ॥ १॥ तपत रापरपघन्द्रियतियपालिकाः । तयते पपेन्द्रियत्तियस्यानिमः ॥ तपते सियक्योमियाः ॥ पच पतिविधा मम् प्याः ।। मनु प्पा अप्पन कार्यमा प्रससा । तद्यथा-समूर्विममनुप्पा गतष्युत्मास्तिकममुप्या । पथ पतिपिघाः समूछिममनुप्या । कस्मिन्नु प्रद मत ! समूहिममनु प्या' समूषन्ति । गौतमाम्तमनुप्यक्ष पञ्चचत्वारिंशत्तम योजमगतमपलेप साहीपेप होपसमुद्रप पम्पदशसु बमभूमिपु त पेयापर्मभूमिपु पपन्यादान्तरधीपेषु गजरमान्तिकमनुष्याया पेव उपतरेपु वा समीपप या अप्सस वा शिघाट केप (नासामलेप) या पान्त पित्तपु पा पपेप या भुपु वा माफपुदलपरिसाई वा विगतफसवर या योपुरूपसयागेषु पा मगरमिदमनपुथा सर्धेषु चैवाशधियु स्यामपु एतपु समहिमममुप्पा समूछन्ति । अतस्य भएण्ययनागमात्रया भयगाएनपा चसन्मिध्यादृष्टिरघानी सादि पयासमपातका मन्त गा हसा क्लहसा पायहसा रायहसा शुफा सेहीवगा वठागा पारिप्पवा कुचा सारसा मेसरा मसूरा मक रा सतयच्छा गहरा पोझरीया कागा कामियुगा वजुलगा तिप्तिरा बहमाररावगा कवोया कविजटा पारे घया चिफगा चासा कुकुफा सुगा वरहिणा मदणसला कोकिला सेरहा वरेलगमादी । सेत्त लोमपरकी। से फिस समुम्गपरकी २ एगागारा प०, तेण नत्यि डह याठिरएस दीयसमुद्देसु नयति । सेत्त समुग्गपरकी। से फित विततपस्की २ एगागारा प०, तण नत्यि इह बाहिरएस टीवसमुढेसु हवति। सेत्त पिततपस्की । तेस मास दुबिहा प०, स० समुच्छिमा य गनपक्कतिया य। तत्यण जेते समुच्छिमा तसच नपुसगा तत्यण ते गम्नवक्वतिया तण तिषिष्ठा प०, त० मुत्यो पुरिसा नपुसगा। एएसिण एयमाडयाण खहयरपचिदि यतिरिस्क जोणियाण पजाप्तापज्जप्ताण वारसजाइकुलकोणिजोणिप्पमूहसयसहम्सा हबतीतिमस्काय, चतठ , सा रागामा पा सेहोषगार बकुला। पारिमवाः मुना सारसा मसरा: मसूरा मयूरा दातवरमा गहरा पौफ्रीका मागा बामिय गा बन्नसा तितिरा मा साधना पाता पिजला परिषकाः पाशा छुट। शुका परिण मनालाः बाक्सिा सहा परगा एक्मात्य तरते सोमपाएमा प्रय पतिविधा समुद्गपादया। समुद्गपतिय पगाभारा प्रताः । तेमु पाप होपममुद्रेषु भवति । पते समुपक्षिा।पच अतिविषा वियतपहिया। वियतपहिल पवाबारा: प्रचता । तेन बाप हीपसमुद्रपु प्रतितपत विततपति । ते समासतो हिविषा प्राप्ताः समृद्धिमाप गर्भव्युतान्तिाय । तत्र यपते समदिमाते सर्व मर्पुमा । ता पपते गम मुरबालियान शिविता प्रचसो उपचा लिया पुरुषाः नपुसवाय । पतेषामबमादीनां सचरपोन्निपतियोमिकामापाप्तापर्याप्तामा बायपातिकतो- टिमीमममुसबसहचापि भवतावि पास्पातम् । तत्राति बुलबोटपो प्रान्ति समाजमारवानि । सायप्रति माहा फित मिलस्फू ? २ थणेगविहा पणता, तजहा सगा जवण चिलाय सयर यछर काय मुरुकोद्द नग णि णग पक्कल णीय कुलरक गोण्हा सोहळा पारस गोघश्यध दमिल चिल्लल पुलिद हारोस दोययोक्काण गध हारग वहलिय राजाल रोम पास बउसा मठयाय यधुयाय सूयलि कुकुणगमेश पण्हव मालय मग्गर शाजासिय कण वीरण रहासीस खसखासिय नेदूर मढ झोविलग लउस खउस कोकाया शयागा रुण रोमग नमरु विलाय वासीय एवमादी ॥ सेत्तमिलस्कू से कित शायरिया , शायरिया दुविहा पणत्ता, तजहा इहिपतारिया य यणहिपप्तारिया य । से कित इढिपत्तारिया ? २ बावहा पणत्ता , तजहा- थरहता चकवही यलदेवा यासुदेवा चारणा यिमाहरा ॥ सेप्त हम्हिपप्तारिया ॥ से कित शणिहिपप्तारि या ? २ नवविहा पणता, तजहा खेत्तारिया जानिधारिया कुलारिया कम्मारिया सिप्पारिया नासारिया णाणारिया दसणारिया चरितारिया । से कित खेतारिया ? २ शबन्चीसतिविहा पणता, तजहा राय पा। यवना। पिसापाः अपराः ववरा बायाः प्रकरणा नगा तीरगा। पझगामापा कुमणा गोरहा साल। पारसाः गोधमन्या। घमिलाः पि जगा पुसिम्बाहारोसा दीयवाणाः गन्याहारका वालिया। प्रायसा: रोमाः पासा वटसा मलवाया यम्घुवाया: लससा ससा फेडयाप रवापामा रोमना। प्रममा वितायाः वासीयाः एषमादय । तपते नेष्ठा । पप फतिविधा। पार्यका पापका द्विविधा प्राप्ता । यतिमन्तः भनदिमनाय । पप गतिविधा द्विमन्त यादमन्तः पदृविधा प्रचप्ता । तद्यथा पाईता चकावर्ता यसदेवा पासुदेवाः चारणा विद्यापराः तरते दिमन्ता। पथ कतिविपा पनदिमन्तः । पनष्ट्रिमन्तो नवविधाः प्रजमा तापा बायो वास्याः पुलाः बर्मार्ण शिल्पायो मा पायर्या मामार्या दद्यमाः परिवाः । पथ पतिविषा सेवा सधार्या साइपयितिविधाः प्रप्त तद्यथा-रावणमगरषम्पायजामवता - तिषिहा पसप्ता, तजदा-कम्मनूमिगा थकम्मनूमिगा छतरदीवगा। से कित शतरदीवया? श्चतरदीया थठावीसतिषिदा पसप्ता, तजहा एगोरुया शाहासिया वेसाणिया णगोली १ हयकन्ला गयकवा गोक ला सक्कलिकला २ थायसमुहा मेढमुहा यमुहा गोमुहा ३ समुहा हत्यिमुहा सोहमुहा वग्घमुढा ? शासकला सीहकन्ना थफन्ला करणपाउरणा ५ उक्कामुहा मेहमुहा बिमुहा यिजादता ६ घणदता लठ दता गूढदता सुध्दसा ७ । सेप्त थतरतीयगा । स कित थकम्मनूमिगा? २ तीसतियिहा पणता, त० पचहि हेमवएहि पाहि हेरणयएहि पयहि हरियासेहि पचहि रम्मगयासेहि पचहि देयकुरुएहि पचहि उत्तरकुरुएहि सेत्त थकम्मनूमिगा। से फित कम्मनमगा १२ पणरसयिहा पणता, तजहा पचहि नरहेहि पचहि एरवरहिं पचहि महाविदेहेहि । ते समास दुयिहा पणता, तजहा थायरिया य मिउरकू य । से मुहूर्ताव पास वन्ति । पप गतिविपाः नगपुस्खाम्तिमममुप्याः १ । गनपुरकानिबमनुष्या विविधा प्राप्ता । तपा-बम भूमिगा पक मभूमिमा पारीपनाय । अथ अतिविपा अन्दरतीपचा । अन्तरदीपचा भष्टावियतिविधा प्राप्ताः । तद्यमा-बोटापामासिमा वाषि बा तुनामिका स्पो पत्रवर्ग मोगा मत पमुखा गोमसा पचमुसा प्रतिमुहाः सिजमना माघ्रमुना पानी मिाणा संपावर स्वामा मघमुना विद्यम्मुसा विपुला पनदाता सोप्टना नवटमा मुस्दताः । तपते चारदीपना । पप गतिविपापा मभूमिमाः । परमभूमिनासिंजहियाः प्रत तपा-परिमति पारिसमय पारिवाने पराम्पबचाने परवानपु पाउत्तरगत इतपत पवमभूनिनाः ।तिविधा सममूर्णिमा पर्मभूमिमा पनाविधा माता मा पनभिप्ररती परामते पचमहानिदेह से समानतो सिविधा प्रा! | पचा भार्थमनुषा मेचमनुमा । पचतिविधा चमनुपानमनपा पHिI II - AALHARIRUDHARMA सेत्त कुलारिया ॥ से कित कॅम्मारियों ? २ शणैगविही पणता , तजहा-दीस्सिया सुर्तिया कप्पांसिया मुंतायी जाया वयालियो कोलालिया नरयाहणिया जेयायणे तहप्पगारा। सत्ते कम्मारिया ॥ स फित सिप्पारिया ? २ कणगविहा पणता, तंजहा-तुणागा तर्तुयाया पहागारा टेयका वरुझा कठपाउयारी मुजपाउयारा बतारा यत्नारा पम्नारा पोत्यारी लप्पारा चित्तारा सखरा दतारा नकारा जिप्नगारा सेल्ला रा कोझिगारा जेयावन्ले तहप्पगारा ॥ सेत्त सिष्यारिया ॥ से कित जासारिया २ जेण शुक्षमागहाए जा साए नासति, जत्यथिय म बत्नीलिवी पयतड बत्नीएण लिवीए थहारसायहे लेरकविहाण पणत्ते, तजहा थनीजयंणागिया दासीपरिसा खरुही पुरफरसारिया नोगवहया पहराइया शतकरिया शेरकरपुठिया वेण्ड या निरोहया कलिंबी गणियलिबी गलियो शायासलिवी महिसरी दोमिली पोलिदी ॥१८॥ सेत्त नासारिया । से फित नागोरिया २ पचविष्ठा पणता, तजहा-शानिणिवोहियनागारिया सुयना पा ये गप्यन्य तपामकाराः । अथ पतिविधा शिल्पार्याः । तुलागा। तन्तुपाया। पहकारा दधता वसमा काष्टपादुकापरा मनपायुहासराः वारा घनाबरा प्रभागरा पोत्यारा लपारा चित्ररो शराकरा दन्तकरारा गवारा निमफारा (मटकरा) सेल्लारा कोटिकरण । य वाप्यस्य वाप्रबारा । तपते शिरपापा । पंथ तिविधामापायो । मापाया ये अरमागधी नापो नापन्त यत्रेय मालगालिपिः प्रबंसते तस्यां नाझरपा लिप्पामष्टावधाविध लग्यविधीमे प्रस्तते । तद्यथा ब्रह्मी यवनानी दासपुरुपाया रासेवा पुंफरमारिका जोगवती अन्तरिक्षया भएरपतिका बीया मिक्षिा सिव गावतसिपि गन्धवलिपि पार्दशालिपिः मायरी दोमिलीलिपि पोलिन्दीलिपिः तगत भापायर्याः । प्रय कतिविधा पानापौर। मापी पन्धविपी: प्रतः । वयपा मभिर्नियापधामापा Uतामा अघिमामायाः मन पयत घामाया SUPEECHOTI गिहमगहचपा थगामहतामलिंत्तियंगा य । केचणपुरकलिंगा वाणारसिं चेय कासीय ॥ १॥ साएयकोस लागय पुरचकुरुसोरियकुसहा य । कपिल्ल पचाला शहिवत्ताजगलाचेय ॥२॥ दाररतीयत्तुरठा मिहिउधि देहायपच्छकोसी । नदिपुरसमिला नदिपुरमेवमया य॥३॥ यडराफरच्छचरणा च्छातहमप्तियार इदसमा । सौप्तियमहयाचेदी वीडनयसिधुसोयीरा ॥ १ ॥ मऊरायसूरसेणा पायानगीयमासपुरियहा । सावस्यीयकुलाणा कोळीपरिसचलाताय ॥ ५॥ सेयपियायियनगरी केयइशचशरियत्नणिय । एत्युप्प प्तिजिणाण चक्कीणरामफरहाण ॥ ६ ॥ सेत्तखेलारिया ॥ से कित जाइथापरिया ? २ उछिहा पणप्ता तजहा-थवठायकलिदा विदेहावेदगाइय । हरियाचुचुगाचेघ छएयाइप्लाजाहन ॥ ७ ॥ सेप्त जाउयारि याय ॥ से फित कुलारिया ? २ बधिहा पणत्ता, तजहा-उग्गा नोगा राइणा इस्कागा नाता कोरछा। BREHPCLICROTECTED अमिप्तिमाय । वामनपुरबसिप वाराणसीववाशी ॥१५ साकतावोसप्तापुरफुरुः सौरियायतः । साम्पिस्य पापाताः पहियात्रा साये ॥ २॥ धारावतीसुरामा मिपिताविदेशासकीशाम्यो । नन्दीपुरंगागिठस्य प्रदिसपुरमेवममपाए ३॥ पैराटमरस्पारणा पक्षा पामृत्तिबारमार्ग ॥ पौत्तिभवतीपती वीतयासि पुसौवीरा ॥४॥ मपुराचमुरसेमा पापामीचमामपुरवडी । विस्तीरफुमासा बोटोज पांचसाटाप ५ ॥ यताम्बिकापनगरी पयस्माईमायावतम् । परमादतपुतिमामा सासारामहणानाम् ॥ ६ ॥ ते एत क्षेत्रापा पति विधा भास्पायर्याः । भात्याग पद्विधा प्राप्ताः पद्यपा भामटार बासनादेश वेद हरितामा पठता यातयः । तमते मास्या पो । पप पतिविता पसार्या । सार्याः पविषा माता । सपा प्रोमा रामाला लाया जाता और । तपत युतायो । पप अतिथि चार बनाया गर्माया भविधा ANBI जया-दीपिका पौप्तिका सारिका अधिवालिया नाबानिया बोबालिका मरवाति दाणसहनावा सहपमाणेहि जस्सउयलहा । सवाणियविहीहि वित्याररुइतिनायहो॥९॥दसणनाणय रित्ते तवविणएसहसमिहगुप्तीसु जोकिरियाजावरुईसो खलुकिरियाईनामा ॥१०॥ शुणनिग्गहियकुदिष्ठी सखेयरुडत्तिहोडनायझोथिघिसारपययण शणनिग्गहिन्यसेसेसु ॥११॥ जोशत्यिकायकम्म सुयधम्मखलु चरितधम्मच सद्दहहर्जिणानिहियं सोधम्मरुदतिनायद्यो ॥१२॥ परमत्यसथयोया सुदिठपरमत्यसेवणावा वि। वायन्नकुदसणयजणाय सम्मप्तसद्दहणा ॥१३॥ निसकियनिवखिय णिहितिगिच्छाशमूढदिष्ठीय उवयू हथिरीकरण यच्छालपनावणेशठ ॥११॥ संह सरागदसणारिया। से कित बीयरागदसणारिया ? २ टु यिहा पणता , तजहा उसस्तकसापटीपरागदसणारिया वीणकसायवोतसगदसणारियाय । से कित उयसतकसाययीतरागदंसणास्यिा? २ टुविहा परमत्ता, तजहा पढमसमयउयसतकसायनीतरागदसणारि सपिरितिज्ञातम्या.. समवत्यनिगमततिः अवधानपतिपस्प । अपतोवृष्टमेवादशाकानि प्रकीर्णवादिदृष्ठियादय .c॥ प्यारा, सयानावाः सयममारपस्पतपसम्पा ॥ सर्वेधापनविधिनिः विस्ताररुचिरसविना ॥६॥ दशमधानपरिप्रे तपोधिनयमवर्ममितिप्तिपुर ॥ यापुर्या डाव हाचा सराद्विपातचिर्मामा ॥ मनिपातष्ठिा संपविनवतिघातष्या । अनिसारमय चने भनिगडीतपशेप ५ ११॥ योस्तिकायब म भुतपर्मपरिवमय ब्राहपातिविनामिक्षित सधर्मसिया ॥ १२॥ परमायसंसपोया सुदृष्टपरमायसवनोवापि व्यापाकुदर्शनवज मा। सम्पायनाप १३ तपते सरागदर्जनायोपच पतिविपा वीतरागदर्शगार्या वीरागदशनाया हिदिपा प्रताया-उपशान्त बपापीतरागदधानाचारबपायवीतरामदर्षमा । पर सिविधा उपशाम्तवपायवीतरामदछना । उपनान्तवावीतरागदर्श नापो द्विविधा प्रासापा-मममममयोपशानावरगदर्षमायां भापतमपोपशापापीसरापशनाप पा रमसम णारिया ठहिनाणारियो मणपङयनाणारिया केवलनाणारिया । सेत्त नाणारिया ॥ से कित दसणारिवा?२ दुविहा पणतो, तंजहाँ-सरागदसणारिया ये वोयरागर्दसंणा० । से फित सरागदसणारिया य? २ दस विष्ठा पणता, तजही-निस्सग्गुषदेसाई शोणाडे सुप्तयीयरुहचेव ( शनिगमवित्याररुई किरियाससेध म्मरुई ॥१॥ नूयत्येणाइधिगया जीवाजीयायपुर्णपावच । सहस्समुहुँयासवस यरोयवेयडएसणिस्सग्गौ २॥ जोजिणदिष्ठेनावे घउविहेसदहाइसयमेव । एमेषणणहप्तिय णिसग्गरुइप्तिणाइयो ॥३॥ एएचय उनाये उपविठंजोपरेणसइइइ । बउमत्येणजिणेणव उवएसरुदत्तिणायचो ॥n जोहे उमयाणतो शणाएरोयएपत्र वर्णतुं । एमेषणहतिय एसीयाणाईनामा ५॥ जोसुंतमहितो सुएउगाहईउसम्मत्त । शगंणया हिरण सौसष्ठरुहप्तिनार्यहो ॥ ६॥ एंगपएणगाई पदाइजोपसरईउसम्मत । उदहातिल्लयिद सोयीयरुइ त्तिनायछों ७ सोहोहचनिगमरुई सुयंनाणजस्साश्यत्यविष्ठ एकारसणाई पइसगादिठियाय .cn 12 सामायो । तेशानाय । पतिविरा दानार्या माय शिवपार Hr या मराणरमनार्या कीरामनार्यावाप पतिमा राममायो ? परामर्थनार्या रविधा प्रा । तद्यपा निवर्गापरेशावित्राषिपोमा अनिवनापि गि गरपि विपापपर्मतवया ॥ १. भूतानाधिनता indireपुत्पामिलारा एतनिसातिमा। २. बोखिमम् प्रायान पति बापाविसपने । एवमेनुबालोद निषिसितंबातम् पतामाता उपरिवायापरवरिपत्रले नामनेन परिस्मिामा रोपातु मुगमा परिवाराचा मुपपापा ममापि विरूपानिपनि सीब स दहाणसधनावा सहपमाणहि जस्सउयला । सवाहिणयविहीहि विस्याररुइतिनायछो॥९दसणनाणय रिते तवषिणएसहसमिडगुतीसु जोकिरियानावरुईसो खलुकिरियाईनामा tom शणनिग्गहियकुदिछी सखेवरुडत्तिहोहनायो। विसारतपययण शणनिग्गहिर्गयसेसेसु॥११॥ जौचत्यिकायकम्म सुयधम्मखलु चरितधम्मच सद्दहहर्जिणानिहियं सोधम्मरुइत्तिनायवो ॥१२॥ परमस्यसथयोया मुदिछपरमत्यसेवणावा वि।वावनकुदसणवजाणाय सम्मप्तसष्ट्रहणा ॥१३॥ निसकियनिक्कखिय णिहितिगिच्छाथमूढदिष्ठीय उववू हपिरोकरणे यच्छालपनावणेशठ ॥ ११॥ सेप्ठ सरागदसणारिया । से कित. बीयरागदसणारिया ? २ टु विहा पणता , तजहा उससतकसाम्ययीयरामदस्णारिया वीणकसायकोतरागदसणारियाय । से कित. उयसंतकसाययीतरागर्दसणारिया ? २ दुविहा पणत्ता, तजहा पढमसमयउवसतकसाययीतरागदसणारि पिरितिशतभ्या समवस्यनिगमसपि अवचानमवतिपस्य । बयतोदृष्टमेकादयामानि प्रवीर्यवादिदृष्टिवादय ॥८॥ व्यावा, सर्वनावा। सवप्रमायस्यउपसम्पाः ॥ सर्वथापनर्वािपनि विस्तारपिस्सविषय ॥ दानशामपरिक्षे तपोविनयसवममितिगाप्पुष ॥ यापुर्याडाव कापा ससहियाराषिर्मामा ॥ ९० प्रनिगहीतष्ठिः सहेपसचिनवतिपातयः ॥ अप्निसारमवच समनिगडीतपणे पपु ॥ ११॥ योस्तिकायका म मुतधर्मपरिवपमे । बद्दपातिनिनाभिहित सधर्मरूपिातिव्य' ॥१२॥ परमार्थसंतवोवा सुवृष्टपरमापसेवनोवापि ॥ व्यापककुदर्शनवर्ग मा। सम्पदमनार १३ तपते मरागदर्गनायो । पप गतिविषा वीतरागदर्शनार्या ? वीतरापदशनार्या द्विविधा प्राप्ता । वाया-उपशाच रुपाय तरागदपनापो चासवीतरामदर्शनार्या - विविधा उपशामाबपायातसमय नार्मा । • उपशान्तयामवीवरागदर्स नायो विविध मसापा-मपमसमपोग्यासावरगदर्घमाया ममपसम्पोपशासपायरीवरामपशनायाः । एता समसम . । या छपतमसमयउधसतफसायवीतरागदस मारिपा, छहधा घरिमसययउयसतकलायधीयरागदसणारिया य थरिमसमयउयसत्तकसायधीतरागठसणारिया य । से कित खोणकसायधीतरागदसणारिया ? २ टु विहा पणता, तजहा बउमस्यखीणकसायधीतरागदसणारिया केवठिखीणकसाययीतरागदसणारिया य। से कितं बरामत्यखीणफसापवीतरागढसणारिया? २ दुविहा पणता, तजहा सययुष्वउमत्यखीणफसाय वीतरागदसणारिया युध्योहियबउमत्यखीणकसाययीतरागदसणारिया । से फित सययुठउमत्यखीगक सायवीयरागदसणारिया सययुष्उउमत्यस्त्रीण. दुविहा पणता, तजहा पढमसमयसययुष्ठउमत्यखाणक सायधीतरागदसप्परियाय श्वपढमसमयसययुबउमत्यवीणकसायवीतरागदनणारिया, छहया चरिमसमय सयषुधबउमत्यवीणकसायवीतरागदसणा० चरिमसमयत्ययुशबउमत्यखोणकसायधीतरागदसणारिया पोपपातपायगीतरापरममा पपरमबमयोपमान्त पापवीतरागदशनार्या । पप पतिविपा जीप पाप रागदर्शनायो । चोररूपा पोतरामानार्या हिरिराा प्रचता । तपा-परमहोपापापवीतरागदर्शना देवसनीमापापीतरागदामापार । आप कतिविपा स्यात्तोषपायीतरामानापोः । बनायोपापहीतरागदशामायां द्विविधा प्रधाः सपबुदबटनावशोरवपापीतरागदशनायाः बुद्धबापितबटनलोकपापीतरानमाः । म पतिविषाः स्पषुववनात्यहोवपापपीतरागदोमाया प्रमाः । सपनाबरवतीय पापीतरामदबमार्ग विविधा प्राप्ताः । बवा-प्रपमतमपनयास्तववारपायीतरामदमनायो चमचमतमपनपपात्रत्वाचीचमा गीतरागदर्शनार्या । पमा परसपनाकालायीतरानमा परमपावनतीजापानीतरामानाचा त एते मबारसमोसमायरामानाने पर सिविधा प्रबोधितमयपीचार्य । पुरामोचित MIUITORGARH च । सेत्त स्ययुझबउमास्त्रीणकनायवीतसगढवणारिया । से कित युख्बोहियामत्याखी प्रकृतायवीत रागदसगारिया ? २ दुविहा प्रसन्ता, तजहा पढमसमन्युष्योहियबउमस्यखीयाकुसाययीतरागदसणारि या थपढमसमययुध्योहियबउमस्यखीणयसायवीतरागढसणारिया, थहया चरिमसमयबुध्योहियबउस त्यखीणकसायवीतरागदसणारिया श्चरिमसमयघुश्योहियनउमस्यखीणफसायवीतरागदसणारिया । सेत्त धुध्योहियबउमस्यखीणकसायवीतरागदसणारिया । सेत्त बउमत्यखीणकसायवीतरागदसणारिया। से कि त केवलिखीणकसायवीतरागदसणारिया ? २ दुविहा पणता, तजहा-सजोगिकेवलिखीणकसायवीतराग दसणारिया शुजोगिकेवलिखीगकसायवीतरागदसणारियाय । से कित सजोगिकेवलिखीणकसायचीतराग दसणारिया ९२ दुविहा ममता, तजहा प्रदससमयसजोगिकेयलिखीणकसायवीतरागदसणारिया 'शूप अपाप्रवीतरागद गार्या द्विविधा प्रता! ) तामा प्रथमसमयपीधिवटनस्थोषम्पायधोतरागदप्रनार्या पप्रथमसमपघदयोधितछटनस्थ चौपपापातराणदभमायाए । भूपधा परम समयषषीचितवटास्वतीयम्पायवीतरागदर्शनार्या पचरमसमयबुद्धयोचितपतस्यतीपरुपायका सरागदशनार्याय । तए वनस्पतीयापापीतरागद मायो । अथ पतिविधाः कवलवाणकपायवीतरागदशनाया । फेवतीयमपायवीतरा गदर्भमायर्या द्विविधाः ममा व्यथा-सपोनिवेदसतीपापवीतरागदमनाया प्रयोगिफेजलतीचवायवीतरागदशनार्याय । अय कतिविघार सपोनिवलपीमापातरानवामाः सपोनियलसीमापायगीतरामनझनायो हिविपाः प्रताः । तपा-प्रपमसमयसयोगिकवसतीसा पापवीतरामासमा बमबममममयपोमिसीजमातीवरायमार्या । प्रपत्र प्ररमसमयसप्रोगिवतातीप्रापतीतरागमनागप परमसमपसयोपिकासोपापाठीवरामदर्स मार्ग । अस कवियिता असोगिसडीपायवीरपक्षतामर । प्रयोगकेवलही सकपाप उमसमक्सजोगिकेचलिखीषकसायवीतरागदसवारियाया शब्या परिमसमयसजोगिकेयरिखीप्रकसायटी सरागदसणारियाय शचरिमसमपजोगिफेवसिखोपकसायीसरागदसणारियायासेत्त सजोगिकेयलिखीण कसायवीतरागदसणारिया । से किते थजोगिकेवलिखीणकसायवीतरागदसणारिया ? २ दुबिहा पखप्ता, सजदा पढमसमपश्चजोगिफेवलिखीणकसायवीतरागदसणारिया चपटमसमयथोगियलिखीणकसाययी सरागदसणारियाय, यहवा परिमसमयश्चजोगिकेयलिखोगफसायमीतरागदसणारिया शचरिमसमयश्चजो गिफेवलिखीणकसायधीतरागदसणारिया य । सेप्त जोगिकेवलिखीणफसायवीतरागदसणारिया। सेत्त केवलिखीणफसायधीतरागदसणारिया। सेत्त खीणकसाययीतरागदसणारिया । सेप्त चीतरागदसणारिया। सेत दसणारिया । से फिंत परिप्तारिया? २ दुविहा पखप्ता, तजहा-सरागचरित्तारिया वीतरागचरित्ता रिया । ने कित सरागचरितारिमा १२ दुविहा परसप्ता, तजहा-समसपरायसरागपरिप्तारियाय याय तरामनार्य द्विविधा प्रामा सयबा-प्रथमलनयागोविसावीसमापनीतरागरसेनापो समयसमपायोनिक्सलीपापीतरामा मानोरा चपरा परमहमपापोनिक्सासमारीतरामबाण चरमबमपापोनिवसीववावीबरामरममावतरते बोषित पीपापीतरामामा वसोतरापमा तरते समापवायो समबोतरापर्धनाया पतिविपरिभाषा परिपाको It w पवा- पपरामापरिधागो बापरपरापमापरिak निषा सुमारामारलारशावर प्रलपरालारामपरिकार Rme mm सपा-सपनसम्पमापरिमापाय पुनसंपरापारावपरितापूमापन दिविता ! मम्ममा भिम । म IL रसपरायसरागचरितारियाय । ते कित सुजमसपरायसरागचरित्रारिया ? २ दुविहा पर्णता, तंजहा- पढमसमय सृजमसपरायसरागचरितारिया थपढमसमयसुजमसपरायसरागचरितारिया य, शनवा चरिम समयसुहुमसपरायसरागचरित्तारिया शचरिमसमयसुऊमसपरायसरागचरितारियाय। छहया मुजमसपरा यसरागचरितारिया दुयिहा पणता, तजहा सकिलिस्समा गाय यिनुज्जमाणाय सेत्त सुऊमसपरायसरा गचरितारिया । से कित पायरसपरायसरागचरित्तारिया ? २ दुधिहा पणता, तजहा पढमसमयवायर सपरायसरागचरिप्तारिया चपटमसमयवायरसपरायसरागचरितारिया य शहया चरिमसमययायरसपरा यसरागचरित्तारिया शचरिमसमयवायरसपरायसरागचरितारिया यशहवा यायरस परायत्तरागचरितारि या दुविहा पणता, तजहा पहियाई य पक्रियाई य सेत बायरसपरायचरित्तारिया सेत सरागचरि तारिया । स कित वीतरागचरितारिया १२ दुधिहा पणता , तजहा उयसतकसायवीतरागचरितारिया खो गकसायवीतरागचरितारिया व से कित उवसतकसायीतरागचरितारिया १२ दुविहा प० , तजहा ममम परायसरागपरिवाया । पप निविधा घाटरसपरायसरागपरिमायोः यादरसंपरापमरामपरिगया द्विविधा प्रचता तथा प्रथमसमय पादरसपायसरागरिमायाः प्रमपमसमपधादरमपरापसरागपरित्राणाय । पथ परमसमययादरमपरायसरागपरिमाया भरमसमपयार सपरायसरागचरित्रयाय । अपवा बादरमपरायमरागचरिमायो तिविषा प्रयता तया-प्रतिगतिका प्रतिवासाय । तपते यादरमपरा पसरागारिवायी। तपते परागपरिर्प । अथ शतिविघा वीतरागपरिपाया । वातरागधरित्रापा द्विविधा प्रप्ता । तद्यया-उपशाम्तक पापalaरामचरिशः दीपपायवीतरागधारपा । पप अतिविधा उपशान्तकपायावरागपरिवाया है। ठपशान्त पायवीतरागपरिवार्या । --poisoner . पढमसमयउयसतकसायवीतरागचरितारिया शपढमसमयउवसतकसायवीतरागचरित्ताया य शहया चरिम समयउघसतकसायवीतरागचरितारिया चरिमसमयउयसतफसायीसरागचरितारिया य सेत्त उयसतक सायधीतरागचरितारिया।से कित वीणकसायवीतरागचरित्नारिया २ दुयिहा पणत्ता, तजहा उउमत्य वीणफसायीतरागचरितारिया केवलिखीणकसायधीतरागचरिनारिया य से फित्त उमत्यसोगकसायनी तरागचरितारिया ? २ दुविहा पणत्ता , तजहा सययुवउमत्यखीणकनायवीतरागचरितारिया युध्यो हियनउमत्यवीणकसायीतरागचरित्ताया य से कित सययुष्उउमत्यस्खीणझसायीतरागचरितारिया ? २ दुषिहा प०, तजहा पढमसमयसययुक्खीणकसायवीतरागचरितारिया थपढमसमयसययुष्ठउमत्यखी णकसायधीतरागचरिया य, थहया चरिमसमयसययुबउमन्यस्त्रीणकसायवीतरागचरित्तारिया शुचरिम समयसययुझडउमत्यखीणकसायवीतरागचरित्तारिया य। सेत्त सयनुरुवउमत्यखीणकसायवीतरागचरित्ता हिविचार प्राप्ता । उपा-प्रथमसमपोपहातापायीतरामचरित्रायो पापमलमयोपशानपायीतरामचरित्राव । अपवा परमसमपोप माप्तवपापोतरानपरिशा पधरमरमपीपातकापायीतरागरिजार्याध । तपत उपशामकपापवीतरागचरित्रापा । पप तिमिपाची कामवीतरागारेगारोपावीतरामचरिताप शिपिपा प्राता । तपा-बापतीपायवानरामपरिशयो बेगलीपायचीत रापरिचार्गबाबपति बनवदीपपापीरामचरित्रार्या बनवतावावा तरागारवायां दिविधा प्रसमा तपमा समापन सोमायबोतरामपरिक्षायाः मुबोषितइनखबीरबपायीतरामचारिसायों बम पतिविता भयबद्यालयबापापपीतरामपरिमार्ग विधा प्राप्ता सपा प्रपमतमपसमीपणाचीवनरामवारियाः समपनवानसमातीमारिवाया गया परमपमय - १. रिया । से क्ति यहयोहियउमस्यखीणकसायवीतरागचरितारिया ? २ दुयिहा पणता, तजहा पढम समययुश्योहियब उमत्यखोणकसायधीतरागचरित्तारिया शपढमसमययुगोहियबउमत्यखीणकसायवीतरा गधरित्तारिया य, शहया परिमसमययुटनोहियबउमत्यखीणकसायधीतरागचरितारिया शुचरिमसमययु रुयोहियबउमस्यखीगफसाययीतरागचरितारिया य। सेप्त युध्योहियछ उमत्यखीणकसायवीतरागचरित्ता रिया सत्त बउमत्यखीणकसायवीतरागचरितारिया। से कित केयलिखीणकमायवीतरागचरितारिया?२ दुयिष्ठा पणत्ता तजहा सजोगिकेवलिखीणकसायधीतरागचरिनारिया शुजोगिकेवलिखाणकसायवीतराग चरित्तारिया य । से कित सजोगिकेयलिखीणकसाययीतरागचरितारिया ? २ दुविहा पणत्ता, तजहा- - स्वयधावनस्पतीयापायवीतरागचरित्राणं परमसमपस्वपरदटनस्पक्षोपकयापीतधारवायांय । तपते साययटनस्पतीसकपायवीतरागरि भार्याः । अपतिविधा पुरोपितवनस्पहीवायापोतरामचरित्रा युवोचितवनस्पतीपायीतरामपरिवाया दिविधा प्रया प्रपमसमययुट्योधित वनस्पतीपापवीतरागचरित्राः समयमसमपवयोपितहतस्यकोसळपायवीतरागचरिणाप । अषया परमसमययुः पाधितश्रस्पी पायवीतरागपरिवार्य । परमसमययुयोचितपटनस्पतीपायीतरागचरित्रायो । तपत युदयोचितश्टनस्य पोयकपाप वीतरागरिकार्य । पप शतिविधा हसदीपबपायवातरामचरिमायो ? । सवलपीपायधीतरागारवाया द्विविधा । तपा- सपोनिकाल दीपबयापीतरागपरिचार्या प्रयोगिपवलक्षावापायीतरागरिपायांचा प्रय सिायघाः सपोगिकवलजोयसपायवीतरागचरित्रापर।सयोगि कासदीपकपापवीतरागपरिवायोहिरिपा ममा तपा--मपमसमयसयोगिकवसवीतापायीतरागपरित्रायः पाथमसमयसयोगिकेशततीस रमसमयसयोमिलीपापवीतरागपरिवायां भचरमसमपसयोगिफेपतक्षीणकपायीतरागधरिशयोष । RAIPSENSE पतमसमयसजोगिकेवष्ठिखीणकसायधीतरागचरित्तारिया सपढमसमयसजोगिकेवलिसीपकसायवीतराग चरित्तारिया य, अहया चरिमसमयसजोगिकेवलिखीणकप्तायवीतरागचरित्तारिया य शुचरिमसमयतजो गिकेयलिखाणकसायवीतरागचरितारिया य। सेत्त सजोगिकेयलिखोणकसायधीतरागचरितारिया। कित शजोगिकेवलिखोगकसाययीतरागचरित्तारिया ? २ दुबिहा पणता, तजहा-पढनसमय जोगिकेवठि वीणकसायधीतरागधरितारिया य शुपदमत्तमयचजोगिधालखी गकसायीतरागचरितारिया य, छाया परिमसमयश जोगिकेवलिखीणकसायधीतरागचरित्तारिया य शुचरिमसमयजोगिकेयलिखी गकसायवीत रागचरितारिया य सेत्त मोगियलिखीगकसायवीतरागचरित्तारिया । सेत्त केयलिखोगकसायवीतराग चरितारिया। सेस खी गफसायटीतरागचरितारिया संत वीतरागचरितारिया। शहवा चरितारिया पचयि हा पणता, तजहा-सामाइयचरित्तारिया बेनबठायणीयचरितारिया परिहारविसुश्चिरितारिया चकम सपरायचरितारिया छहस्कायरितारिया य । से कित सामाइयचरितारिया १२ दुयिता पणता, तजहा तपवे सपोनिक्सशेरबपाणीरामचरिधा । पप गतिविधा पौगिोवसतीपापोतरागारवा यागिसोमपायवीरागवार माया प्रिविधा प्राप्ताः । तापा- प्रपमसमपायोनिवासातीपापोतरापरार्या पायमसमपायोगितलीपापापीतरामचरितार्याचा पमा परमसमगपापिसीपायवीतरागरिमार्या शरमसमयायोगिकामहोपापापोतरामचरिणामतपते ऽपागस्पायी तरामपरिणाम तपते बासी पायवोतरामपरिवायांतपत वीरप्पारागारबापा। तपते रामरिया। पारितासाप मविपा ममता वा-सामापारिया बदीपनानीयरिता परिवाराबमुशिरिधावा पूलसंपरापचरिबायोः मालावारिसाव।
इप्तरियसामाइयचरित्तारिया शायकहियसामाइयचरितारिया य । तेत्त सामाइयचरित्तारिया । से कित उनबठाचणीयचरित्तारिया ०२ दुधिहा पणता, तजहा-साहयारा बेनुबठायणीयचरित्तारिया निरइयारा बनमहायगीयचरित्तारिया। सेत्त बेनग्रहायणीयचरित्तारिया। से कित परिहारपिसुझियचरित्तारिया १२ दुयिहा पणत्ता, तनहा-निधिस्तमाणपरिहारविसुझियचरित्तारिया निविठकाइयपरिहारविसुछियचरित्ता रियाय । सेप्त परिहारविसुछियचरित्तारिया । स फित जमसपरायचरितारिया , २ दुयिहा पणता , तजहा सकिलिस्समाणसुकामसपरायचरितारिया पिसुज्जमाण सुजमसपरायचरित्तारिचाय सत्त सुऊमसपग यचरित्तारिया। से क्ति शहरकायचरितारिया १२ दुयिहा पणत्ता, तजहा बउमत्य शहरकायचरित्तारिया केपलियहरकायचरितारियाय सेन शहस्कायचरित्तारिया सेप्त चरितारिया सेन्स एणहिपत्तारिया सेत्त RRRASRAM पतिविपा सामयिसपरिवायो सामापिणचरित्रायो हिविधा प्राप्ता तपा-तरसामपिपरिया प्रपितामपिपरियार । तप ते सामपिचारिसायो । भय पतिविधाबापस्थामायचरितार्या । पत्यानीपपरिवाया डावपाः प्रचना तद्यथा-सातिचाराधोपस्या पपरिपा मिरतिधाराबापस्थानीपारिशा । तपत सोपस्थानीय परिचार्या पप पतिविधा परिहारविशति उचारपाया । परिपारथि शुदसपरिवार्य विपा प्रता तथा नियमामपरिवारविहिपरिवाया निविष्टकायापरिहारविशतिचरिशपाए । तपत परिश विहिपरिवाया। अप कतिविधा मूत्मसपरायचरिवाया सूत्मसपरापपरिवायां दिविधा प्राप्ताः तथा उपनिश्यमामममसरापारवाया विरमामसूत्मसपरापपरित्रायाय । तपत मूलसपरायचरिमाया। पप गतिविधा यथास्पातपरित्रार्या ? ययारयातवारणार्या हिविघा प्रता वधपा-नत्यपचाप्यातपरिचार्या कवस चरिचार्या प। तरते यथास्थावधरियाः । वएत परिवाया। वरते अनधिमाप्ता तर पायो ।
HumurEMITRADEAREDEERaar शायरिया सेत्त कम्मनूमिगा सेप्त गम्नयकतिया सेप्त मणुस्सा से कित देवा २ चउछिहा प०, तजहा नय णवासीयाणमतरा जोइसिया वेमाणिया से कितं जयणवासी? जयणयासी दसयिहा पणता, तजहा सु रकुमारा नागकुमारा सुवमकुमारा विजकुमारा शुग्गिफुमारा दीयकुमारा उदहिकुमारा दिसाकुमारा वाउ कुमारा पणियकमारा तेसमासचदुनिहा पणत्ता, तनहा-पजप्तगाय छपजाप्तगाय सेप्त नषणयासी से किप्त घाणमतरा२ शुष्ठविहा प०, तजहा किलरा किपुरिसा महोरगा गधहा जरका ररकासा नया पिसा या ते समासतेंदुयिता पसत्ता, तजहा पात्तगाय अपजात्तगाय सेत्त याणमतरा।से फित जोहसिया २ पायहा पणता , तजहा पदासुरागहनरकत्तातारा तेसमास दुविहा पणता , तजहा पजत्तगाय शुप सप्तगाय । से कित जोइसिया से कित वेमाणियार दुविहा पणता, तजहा कप्पोवग्गाफप्पाईयाय से कित तपते बमभूमगा। तणत मनमुत्तानिका । तपते मनुष्याः । पथ पतिविधा देवा देवापतुविधा प्राप्ता द्यपा-प्रबनवामिनः मानसन्त रम न्याप्तिामा वैमानिका । पप तिरिया प्रबनवासिनः ! प्रवनवासिनो दशविधा प्रचता तपा-असुरकुमारा भागामारा सुमारा मिकमारा अम्निमारा होपामारा उदधिनमारा विद्यामारा वायुमाराः सनिमारा । त समासतो द्विविधा प्राप्ताः पर्याप्तगा चापातमाय । तरत नवनवासिनः । पच पतिावा नामष्यारा । वामध्यतरा पटविषा प्रत । तद्यथा--गिरा विपुषा महोरमा। मम्मको वमा रक्षाः पूताः पिशाचा तपते समावतो निnि: ताचा पोतनाव पपांतगाव । तपते बानबालरा । पर बतिथि पा मोतिपिश मोतिर्षिया परिवार प्रता: ता बनानूपपामतारा । मारतो हिविषा am पचा-पातमावापर्णात पाय । वरते मोतिषिता । विविधा पानिधानानिया विविध पचा लोपमा पानीमा धिनिया - MARREEDGEmanasoniemaRRE फप्पोयगा२ यारसविहा पणत्ता, तजहा सोहम्मा ईसाणा सणकुमारा माहिदा बनलोया ठंतया महासुक्का सहस्सारा घाणया पाणया शारणा शञ्चुया तसमास दुधिहा पणत्ता, तजहा पजाप्तगाय अपात्तगाय सन्त कप्पोयगा से कित कप्पाईया २ दुयिहा पसप्ता, तजहा गेयिजागाय शणुप्तरोयवाइयाय त कित गयिजगा २ नयविहा पणता, तजहा हिठिमहिष्ठिमगविजगा हिठिममज्जिमगेयिजगा हिठिमउयरिम गयिजगा मन्तिमहिहिमगेविजगा मजिम गेविनगा मज्जिम उयरिमगविजागा उवरिमहिठिमगेविजा गा उयरिममज्जिमगेयिजागा उयरिम२ गेविजागा तेसमास दुयिहा पणत्ता, तजहा पजातगाय शपजा तगाय सेत्त गेयिजगा । से कित आणुनरोयवाडया२ पचयिदा पणता , तजहा विजया वेजयता जयता थपराजिया सबसिछा तेसमास दुखिहा पणता, तजहा पजाप्तगाय थपज्जतगाय सेत्त शृणुत्तरोववा P पोपगाः परपोपगा द्वादशविधा प्राप्ताः । तद्यथा सोधर्मा शामा समस्फुमारा मारेन्द्रा प्रहलोका सातका महाकाः सासाराा मा मता प्रापता पारणा प्रध्युताः । ते समासतो द्विविधाः प्रनता तथा पर्यात गावापर्याप्त गाय । तपत सस्पोपगाः । भय पतिविधात कल्पा सीता ? परपातीता दिविधा प्रप्ता व्यपा--ग्रेवपकार अनुत्तरवैमानिकाच पप गतिविधा प्रेषेपमा ययमा नवविधा प्रशमा तद्यथा- पापा, पपीमध्यमवयकार, अघठपरितम वेयवार, मध्यमापा ग्रेवपक्षा • मध्यममध्यमवपमाः मध्यमोपरितमययका रितमाघोषयमा सपरितममप्यमवयसपरितमोपरितमप्रेक्यवार ते समासता द्विविधाः प्रचता पर्याप्ताधापर्याप्त च । तरत पेयपदाः । प्रिय बतिविधा पनत्तरवैमानिषा ! अनुत्तरवमामिबाट पम्मविपा प्रताः । तद्यपा-विजयाः वैवयम्ता जयमता अपराजिता सयापसिंहाः । ते समासको द्विविधा प्रसार वद्यपा--पर्याप्ताधापर्याप्ता छ । तरचे अनुत्तरवैमानिका । एते कमायो । तर वैमानिकाः । पए दधा ।
शायरिया सेन्स कम्मनूमिगा सेप्त गम्लधक्कतिया सेप्त मणुस्सा से कित देवा २ चउधिहा प०, तजहा नव णवासी याणमतरा जोइसिया वेमाणिया से कितं नयणघासी? जवणयासी दसथिहा पणता, तजहा शसु रकुमारा नागकुमारा सुवरणकुमारा विजकुमारा शग्गिकुमारा दीयकुमारा उदहिकुमारा ठिसाकुमारा याउ कुमारा पणियकुमारा तेसमासयिहा पणत्ता तमहा-पळाप्तगाय शपआप्तगाय सेप्त नघणवासी से कित वाणमतरा२ शठविहा प०, तजहा किलरा किपरिसा महोरगा गधहा जरका ररकासा नूया पिसा या ते समासयिता पणत्ता, तमहा पत्तगाय पत्तगाय सेत्त वाणमतरा।से फित जोहसिया २ पचविहा पणता , तजहा घटासूरागहनस्कत्तातारा तेसमास दुविहा पणता , तजहा पजात्तगाय शुप आप्तगाय । से कित जोहसिया से कित वेमाणियार दुषिहा पणता, तजहा कप्पोवग्गाकप्पाईयाय से कित " . तमते बमामपाः तपते पण भूतान्तिवा । तपते मनुष्या। ॥ अथ पतिविधा देवा । देवापनुविधाः प्रचता तपा-प्रधनवामिनः वानयत रमन्यातापा वैमानिका।। प्रपतिविषा प्रामवासिनः प्रामवासिमो दशविधा प्राप्त तद्यथा-परकुमारा मागकुमारा क्यामारा विपतमारा पनिमारा झोपामाराः उदपिकुमारा विणकुमारा वायुकुमारा लमिरकुमारा । ते समासतो हिदिपा ममा पर्याप्तगा पापातमा । तपत प्रथमवासिनः । पच वार्तावमा बामव्यतरावानमारा विधा RIAL | तपा--मिरा बिपुरुषाः मोरगा नमा पा रहा पूत पिशाचा तपते समासतो dि HEAL: तपा पर्याप्तनाव पर्याप्तगाल पते बागमतरा पप गतिवि पासोतिपिशाः मोतिपिका पापा HYPN तपधा चन्द्रम्यग्रहनसतारा । ते समायतो हिविषा प्रशासना-पाहमाबापर्याप्त माएते मौविविका विविध मानिया । मानिया विधा हा वधा स्पोपना। पाlar क्षिपिसा- . लोयस्स शसखेसाइनागे । कहिण जते । बादरपदधिकाइयाण थपत्तगाण ठाणा परमत्ता ? गोयमा। जत्येय यादरपुढविकाइयाण पजात्तगाण ठाणा पणत्ता, तत्येष याठरपुढायिकाइयाण शपसातगाण ठाणा पणत्ता, उययाएण सवलोए समुग्घाएण सहलीए सहाणेण लोयस्स शसखेजाइनागे। कहिण नते। सुजाम पुढधिकाइयाण पक्षप्तगाण थपजाप्तगाणयठाणा पणता ? गोयमा ! सुजामपुढविकाइया जेपआप्तगा जे थपजात्तगा ते सधे एगविता थपिसेसा चनाणप्ता सहलीयपरियायलगा पणता समणाउसो । कहिण जते । यादरशाउकाहयाण पत्तगाण ठाणा पणता ? गोयमा । सहाणेण सप्तस घणोदधीसु सप्तसु घ णोदधिवलएस थहोलोए पायालेसु नषणेसु नयणपत्यसु उहलोयकप्पेस विमाणेसु विमाणावलियासु विमाणपत्यसु तिरियलोए शगस तलाएर सरेसु नदीसु दहेसु वायीसु पुस्करिणीसु दीहियासु गुजालि यासु सरेसु सरपतियासु सरसरपतियासु घिलपतियासु उज्जरेसु णिज्जरेसु चिल्ललेसु पल्ललेसु वप्पिणेसु दी वेसु समुदसु ससु घेव जलासएस जलठाणेसु जलनूमिथासु एत्यण बादरशाउकाइयाण पजत्तगाण संस्पयामागे । कास्मम् मदत मूत्मपपियोवापिवाना पर्याप्तानामपोकाना स्थानानि सप्तानि गौतम सूत्म पपिवासायिकाये पर्याप्तगा य अपर्याप्तगाने सर्वे विधाः प्रविशेपा प्रमाता सर्वसीयपर्यापनगाः प्रचता ममपायुमन् पस्मिन् मदम्त यादरपणायिकाना पर्याप्तका मा स्थानानि प्रतानि । पौतम सत्वानेम सप्तस पनोदपिपु सप्तम पनोदधिवालपेप अधिसोने पातासपु नवमेषु भवनमस्तरेषु कर्वलोके परपे पु विमानेपु विमामावलिका विमानपतरपु तिर्यबलोचे पटप तहागपु सरस्स नदी प्रदेषु वापीप पुष्करपोपु दीपिकामु गुरुनासिकाम व रसु सरासरपंत्तिय विसपधिप निम्बर विश्वर परवलपु वनेप वीपपु समुदप सर्वेषु व वसागुपपु बलस्थानेषु एतेषु वादराप्थापिकाना SEROFMAIIMSUHILLIER इया सेत्त कप्याईया सेत येमाणिया सेत देधा सेत्त पचिदिया सेव ससारसमावणजायपत्लवणा सेत्त जीव पावणा सेत्त पन्नवणा ॥ पन्नवणाए पढम पय सम्मत ॥ १ ॥ कहिण नते ! यादरपुढयि काइयाण पात्तगाण ठाणा पणता ? गोयमा ! सष्ठाणण शठसु पुतवीसु तजहा-रयणप्पनाए सकरप्प नाए यालुयप्पनाए पकप्पनाए धूमप्पनाए तमप्पनाए तमतमप्पनाए शहेसत्तमाए ईसिप्पन्नाराए शहोलोए पायालेस नवणेसु नयणपत्यसु निरएस निरयापलियासु निरयपत्यसु उहलोए कप्पेसु विमाणसु यि माणायलियास विमाणपत्यसु तिरियलोए टकेसु सु सेलेसु सिहरीसु पज्जारेसु विजएसु वरकरसु वासेस घासहरपचएस या वेलासु वेडयासु दारेसु तोरणेसु दीवेसु समुदेसु एत्यण धादरपढयीकाहयाण पज्जात्तगाण घाणा पणता, उववाएण लोयस्स शसखेजाइनागे समुग्घाएण लोयस्स शसखेजा० सठाणेण n . n । प पपते परन्द्रिपाः । तपते संसारसमापसचीवमापनाः । तर जीवापना। एते प्रज्ञापमा: n पति भीमदुपाध्याय रामाद्र गरि पिप्प मानकर विरचिते बीवनापना स्पमपमपदानुवादः । पलिन् मदन्त । बारपपिबामिकामा पर्याप्ताना सानानि प्राप्तानि । मौतम पत्तानेमाहात पधिोनु तपा-बमभापा प्रदरममा पोवासमप्रमायां पाप्रमापा ममनापा तमाप्रमाणां तमनमा मनापानामत्तमायामोधरमालारापामगीतोष पातासमु प्रामधु प्रायमतरेषु परोप मरवातिगत निरपमतरेषु अपसोचमपषु विमानेषु विमानाबलियत विमानता तिवमोथेरपट प्रेम माधारण विषयेष वारपार पातारपर्यत बाबमा बेरिगाह पार तोररोप होपेषु समदु ा पाररपतिमारियाना हाना माना मि पीतानि । दोष पारस्पपिपिचानावपर्याप्तामा भानापि पोसानि । पपानामुएगोरखामेन योजना लोयस्स शसखेजाइलागे । कहिण नते । आदरपतयिकाइयाण शपजात्तगाण ठाणा परसत्ता ? गोयमा! जत्येष यादरपदविकाइयाण पऊत्तगाण ठाणा पणत्ता, तत्येव चादरपुढयिकाइयाण शपजतगाण ठाणा पसत्ता, उववाएण सछलोए समुग्घाएण सछलोए सहाणेण लोयस्स आसखेजाइनागे। कहिण नते। सुऊम पुढधिकाइयाण पजप्तगाण चपजप्तगाणयठाणा पणता ? गोयमा । सुजामपुढविकाहया जेपजतगा जे थपऊत्तगा ते सछे एगविहा विसेसा शनाणप्ता सझलोयपरियावन्नगा पणता समणाउसो । कहिण नते । यादरथाउकाइयाण पजत्तगाण ठाणा पणता ? गोयमा । सठाणेण सप्तसु घणोदधीसु सप्तम घ णोदधिवठएस थहोलोए पायालेसु नवणेसु नयणपत्यसु उहृलोयकप्पेसु विमाणेसू विमाणावलियासु विमाणपत्यसु तिरियलोए शगसु तलाएर सरेसु नदीसु दहेसु वायीस पुरस्करिणीसु दीडियासु गुजाठि यासु सरेसु सरपतियासु सरसरपतियासु घिलपतियासु उज्जरेसु णिज्जरेसु चिल्ललेसु पललेसु वैप्पिणसु दी वेसु समुद्दसु ससु चेव जलासएस जलठाणेसु जलतूमिशासु एत्यण यादरशाउकाहयाण पजत्तगाण सम्पपनागे । बास्मम् मदम्त सूत्मपथिवीपायिवाना पर्याप्तामामपर्याप्तकाना स्थानानि प्रसप्तानि , गौतम सूस्म पपिवीकायिकाय पर्याप्तगा य अपर्याप्रगातले सर्व एकविधाः पविशेपा भनाधावाः सर्वलोकपर्यापनगाः प्रप्ता समपायुप्मन् पस्मिन् भदन्त यादरावापिकामा पर्याप्तका मा स्यामामि प्रचामि । पौतम सस्पानेम सप्तस पनोदाचा सप्तसु पनोदपिवलयेप प्रापलो पातासपु नवनेषु भवनप्रसारेपु वर्वलोके कस्पे पु विमामेषु विमानावसिवासु विमानम्तरेप तिर्यलोके प्रपष्टपु तागपु सररस मी प्रदेष वापीप पुपरणीषु दीपिबासु गुम्जालिबाम स रस्सु सर सरपंचि विसपंक्ति निफरपु विश्वरेप पावलपु वमेघ दीपषु समुद्रपु सर्वेष व वसाधायपु जप्तस्थानेषु एतेषु पादराप्यापिकामा .GEIGDHERI ठाणा पमता, उयवाएण लोयस्स शसखेजाइनागे । कहिण नते। घायरशाउकाइयाणं थपजसगाण ठा णा पणता ? गोयमा ! जत्येव यादरशाउकाइयाण पडतगाण ठाणा तत्येष चादरशाउकाइयाण शुप जप्तगाण ठाणा पणता , उपधाएण सछलोए समुग्धारण सबलोए सहाणण लोयस्स शसखिमन्नागे। कहिण सजमशाउकाइयाण पजतापजाप्ताण ठाणा पणप्ता 2 गोयमा। सुजमशाउकाहया जेय पजातगा जे थपमप्तगा ते सधे एगविहा छविसेसा शनाणता सहलोए परियावन्नगा प०, समणाउसो ! कहिण जते ! थावरतेउफाहयाण पत्तगाण ठाणा पसत्ता ? गोयमा । सठाणेण यतीमगुस्सखेते शहाइजोसु दीवसमुद्देस निहाघाए पन्नरससु कम्मनूमीसु वाघाय पच पचसु महाधिदेहेसु एत्यण यादरतेउकाइयाण पञप्तगाण ठाणा पणता , उग्रयाएण ठोयस्स शसखेाहनागे समुग्धारण छोयस्स शसखेाहनागे सठाणेण लोयस्स शसखेजाइलागे । कहिण नते ! यादरते उकाइयाण शपजाप्तगाण ठाणा पणता ? गो यमा । जत्येव यादरतउकाइयाण पाप्तगाण ठाणा तत्येव याउरतेउकाइयाण शपजाप्तगाण ठाणा प०, पर्याप्त पाना स्थानानि प्रचतानि । उपपातन सोबस पम्पमाने । पस्मिन भवन्त बादराप्कापिबामामपर्याताना त्यानानि प्राप्तापि पातन सब सोचे समातम सवसाय सत्तानेन सावरलाल पनाग बसिन् ० मात्मामायिवानां पर्याप्तापर्याप्ताना लामानि महानि पौतम मलापशामिशा ये पर्याप्त ना ये पपपासपास में पविता प्रतिषाप्रमाचा समतोब पपापबामा प्रशस्त समसामन् कालम् प्रपना बादरतापियामा पर्याप्त माना जानानि प्रामामि । मौतम । मलानेन तमनुप्पो पहनुतापपु सपनो मियोपाते पचाप बम भूमि मापात प्रत्य पन्ना महावियेषु पतेषु बादरवबागायिकामा पासवामा सानानि प्रसानि । पावेन बोलनमा -CADIDWAR - . उवद्याएण लोयस्स दोसु उहकवासु सिरियलोयतहेसमुग्घाएण सबलोए सठाणेण लोयस्स आसखेडाइ नागे। कहिण नते ! सुजमतेउकाइयाण पाप्तगाण थपजातगाणय ठाणा पणता ? गोयमा। सुजमतेउ काइयाण जे पाप्तगा शपजाप्तगा ते सछे एगयिता शविससा शनाणप्ता नछलोयपरियायक्षगा पणता समणाउसो ! कहिण जते । वादरयाउकाइयाण पजाप्तगाण ठाणा पणता ? गोयमा । सहाणेण सप्तसु घगवाएसु सत्तसु घणयायवलएसु सत्तसु तणुवाएसु सप्तसु तगुयायवलएस शहोलोए पायालेसु नयणेसु नयनपत्यसु नवणबिहेसु नयणनिस्कुसु निरएसु निरयावलियासु निरयपत्यासु निरयबिद्देसु निरयनि रकुसु उहलोयकप्पेसु यिमाणसु विमाणायलियासु बिमाणपत्यसु विमाणबिहेसु विमाणनिरकुसु तिरि यलोएसु पाइपदाहिणउदीणसछेसु चेय ठोगागासबिहसु लोगनिस्कुसुय एत्यण यादरयाउकाडयाण प जात्तगाण ठाणा पणता , उपयाएण ठोयस्स शसखेझोसु नागेसु समुग्धारण लोयस्स थसखेडानागेसु समुहातेन लोबस्यासम्पपनाग स्वस्थानेम लोपस्यापम्पेयमाग । अस्मिन् भदन्त । यादरतेजासायिकानामपर्याप्तबामा स्थानानि प्राप्तामि । गो पम । पव यादरतमायबामा पर्याप्त धामा स्थामानि प्रतानि तर पादरतेम शापिञ्चामामपयांप्तमानां स्थामानि प्रतानि । सपपातेम सवमोको समनातन सवलोचे सस्थामेम लोकस्यासस्येप्नागे । पस्मिन् अदा । ममाप्कापिकामा पगारापर्याप्ताना स्पामानि प्राप्तानि ? गो० । मूरमाप्कायिका य च पर्याप्ता ये पापर्याप्तास सर्वे एकविधा प्रविसपा प्रमानाताः सर्पलाले पर्यापात्रा प्राप्ताः अमवायुप्मन् कस्मिा भदन्त । यादरतेजावापिबामा पर्याप्तमान स्थामामि प्रजातानि, गोतम । स्वस्थानन मतममुप्योघे भरततोय हीपसमद्वेष मिथ्यापाते प मदशम पमभूमिपु व्याघात मवीत्य पम्यम् मान्दिर पादरवेजकायिवानां पर्याप्ताना स्पामानि प्रमातामि । उपपातन बोकस्पासस्पपना MOTAARISESERENCHER सठाणेण लोयस्स असखेजेसु लागेसु । कहिण नते । शपजाप्तवादरवाउकाइयाण ठोणा पसत्ता? गोय मा । जत्येव यादरवाउकाइयाण पजाप्तगाण तत्येव यादरयाउफाइयाण थपडाचगाण ठाणा पणता । उवषाएण सहलोए समुग्घाएण सहछोए । सहाणेण लोयस्स यसखेओसु नागेसु । कहिण नते । सुऊम वाउफाइयाण पज्जप्तापज्जताण ठाणा पणता ? गोयमा । सुजामवाउकाहयाण जे पजातापाताण ते सझे एगविहा थविसेसा चनाणत्ता सहलोयपरियावन्लगा पणता समणाउसो ! कहिण नते यादरवण स्सइकाइयाण पञप्तगाण ठाणा प०? गोयमा ! सठाणेण सप्तसु घणोदहीसु सप्तसु घणोदहिवलएसु शहो लोए पायालेस नवणेसु नयणपत्यस उद्दलोए कप्पेसु विमाणेसु विमाणायलियासु विमाणपत्यसु तिरिय लोए थगसु तलागेसु नदीसु वावीसु पुस्करिणीसु दीहियासु गुजालियासु सरेसु सरसरपतियासु सरप तियासु घिलपतियासु उज्जरसु निकरसु चिल्ललेसु पललेसु वप्पिणसु दीयेसु समुद्देसु ससुचेव जलास एसु जलठाणेसु एत्यण यादरवणस्सइकाइयाण पजाप्तगाण ठाणा परमसा। उयधाएण सहछोए, समुग्धा ने समुद्रातेन सोषस्यासस्पेयनाने मत्तानेन तीवस्याम्पेपणाने । पस्मिन् मदन । बाररतेश पापिकामामपपाताना सानानि प्राप्तानि ! पौतम । पोष बागरम वापिकामा पर्याप्तानां खानानि तोमवाररवामिवानामपर्यायाना सानानि प्राप्तानि । पपातेनहोस पोरपातयो सिसोबतरेक्यतायेन सर्वसोचे मलामन सोबलायरमाने । लिन् परन्त । चुलतमा गाविधामा पर्याप्तवामान पर्याप्तबामा र सानानि प्राप्तानि मौतम पूलमायामिवावां वे पर्याप्त प्रपतवार परिषा परिवा चपासासो पर्याप्तमा प्राप्यार सामान्। निन् । बापरवाशापिकाका पोपणनामा प्रधानमनमायामा एण सछलीए सठाणेण लोगस्त थसखेजाइलागे । कहिण नते । यादरवणस्सइकाइयाण थपजाप्तगाण ठाणा पणता ? गोयमा । जत्येव धादरवणस्सइकाइयाण पजाप्तगाण ठाणा तत्येव यादरवणस्सइकाइ याण थपज्जप्तगाण ठाणा पमत्ता। उवायएण सछलोए समुग्धाएण सहलोए सहाणेण लोयस्स शसखेडा . वातयतपेषु सम्मसु पमवातेपु सप्तम् धनवाततप्तयेषु अपोलोच पातामेषु भवमप्रसादपु मवावा प्रमिफुटेप निरपषु निरयाप्तिबासु निरपप्रस्तपु मिरपामनेषु निरपनि फुटेषु अवसोवाल्पप विमानपु विमामावसिवामु विमामलटेयु विमानविद्रप विमाननिफुटेपु तियालो मेष प्राचीमतिमोदीचीनेप, सर्वेषु चैव सोबावासाबद्रेप सोनिटेषु च एतादृशधादरवायुवापिसानो पर्याप्तबामा स्थानानि मातात । सप माप्तम स्लीवास्यासस्पेयपु मागप समुहात्तन लावस्पायरपयपुप्रागपु स्वत्पानेन सोमस्यासस्यपेषु मागेपु । बास्मन्नु मवन्त । अपर्याप्तवावर वापुगापकाना मानानि प्रबहामि | मौतम । पौष वापरवाशपिकाना पर्याप्तगाना तव धादरवायुकायिकानामपर्याप्तगाना स्थानानि मसामि । उपपातेन सवसोस समहान सवलोले । स्वत्यानन लोबस्या सम्पेयपु नागपु । कस्मिन्न प्रदन्त । सूरमवायुवायिकामा पर्याप्तापयो माना स्पामानि प्रमानि । मौतम सूत्मायुवापिहार पर्यामा पर्याप्ता येण्ते सर्व एकविधा प्रविपा अनाजताः सवप्लोषपापका मन मा प्रमणापुस्मन् । कस्मिन मदत बावरवनस्पतिवायिकानो पर्याप्तगानां स्थानानि प्रचतानि । गोतम स्वस्थानन सप्तसु पनोदपिपु सप्तमुधमो दविषतयेपु पोसाक पातासपु मवम पवमास्तरप अध्यलोक करपेषु विमामपु विमानावलिबानु विमानप्रस्तरेषु तिमलो प्रक्टेप तपागेपु मवीषु प्रदेप वापी पुफरखी दीपिंथात गुण्मासिसासु मररनु सरा पतितकेषु सर' पत्रिकेषु विक्षपतिका तत्मरेप निर्मरेप चिस्वलेषु परव लेषु पणियप वीपेषु समुत्पु सर्वेष व जलाप्रयेप बसस्थानेषु पतप यादरवमरपतिकापियामा पर्याप्तकाना त्यानानि प्रस्तामि । उपयावेनस वसोससमुहातम सर्वसोने सस्थानेन सोपस्सासम्मेपनाग । पस्मिन्न प्रदान ! बादरवनस्पतिशायिकानामपर्याप्तकाना त्यानानि प्राप्तानि । HABHI इन्नागे । कहिण नते । सुजामयणस्सडकाउयाण पजत्तगाण शपजात्तगाणय ठाणा प० गो०। सुकामयण स्सइकाइया जे पजाप्तगा जे शपजप्तगा ते सई एगविष्ठा शविससा शनाणता सहसोयपरियायणगा पणप्ता, समाणाउसो । कहिण नत ! येईदियाण पजत्ता पजप्तगाण ठाणा पणता ? गोयमा! उहठोए तदेकटेसन्नाग, श्वहोलोक तदेकदेसनागे, तिरियलोए छगसु तलाएसु नदीसु वाधीसु पुस्करणीसु दीहियासु गुजालियासु सरेसु सरपतियासु सरसरपतियासु उज्करसु निज्जरंसु चिल्ललस पल्ललेस वप्पिणेसु दीयेसु स मुइसु ससुषेय जलासएसु जलठाणेसु एत्यण येइदियाण पजात्तापजनगाण ठाणा पणत्ता । उववाएणं खागस्स छसखेजडनींगे, समुग्घाएण लोयस्स शसखजाहलागे सहाणेण लोयस्स शसखंडाइनागे। कहिण जत । तेइ दियाण पञप्तापत्तगाण ठाणा पणता ? गोयमा । उहछोए तदेकदेसनाए थहोठोए तदेक - गौतम । बदरवमापतिबापिकामा पर्याप्तवानां त्वामानि तव बाबरवनस्पतिवापिवानामपर्यामा खानानि प्राप्तानि । उपपातम सवसोस महातन सनसोचे सत्यानेन सोमबासस्पेपमापे । बस्मि भवन्त । पर्याप्तवानामपर्याप्तवाना र स्थानानि प्रतानि । गौतम । मूलबनस्पति गापिका ये पर्याप्तमा ये अपर्याप्तमाते मा एनिमा पवित्रा घनाHIता नवसोकपर्यापनगा! प्रामा बममा समन् । बस्मिनु परमीनि पालो पोतापर्याप्तवाना सानानि मतानि । पौतम । अखतोष तदमेषनामे चोसोचे तरेन्दशाकाम तिमालोचे पाटपु तकाने नरोष पापीय पुपरीषु दीपिकामु पुत्रासिकातु सरस्त सर पायाब सराहरपतिमा उत्मरेनिफरेसिम्स पणन पप्पियनीपत मुग व बतायेषु तलामा एवेवानिमा पर्याप्तापर्याप्ताना सानानि प्राप्तानि । उपमातम लोकमावश्यमाने गातेन सोबमास्वमाये रखामेन सोमाया पनि प्रारदिवा पर्याप्वापोवान नामानि मातानि । गौतम पोष टेसन्नागे, तिरियलोए थगनेसु तलाएसु वात्रीसु पुस्करणीसु दीहियासु गुजालियासु सरेसु सरपतियासु सरसरपतियासु विलपतियासु उज्जरेसु निज्जरेसु चिललेसु पललेसु वप्पिणेसु दीयेसु समुहेसु ससुचेय जला सएसु जलठाणसु एत्यण तेइदियाण पजाप्तापाताण ठाणा पणता, उवयाएण लोयस्स शसखजाइनागे समुग्धाएण लोयस्स शसखिजाउन्नागे सहाणेण लोयस्स शसखेजाइनागे । कहिण नते । चउरिदियाण पञप्तापाताण ठाणा पमप्ता 2 गोयमा । उहलोए तदेकदेसनाए, शहोलोए तदेकदेसन्नागे, तिरियलोए शुगच तलासु याषीसु पुरकरिणीस दीहियासु गुजालियासु सरेसु सरपतियासु सरसरपतियासु णिज्ज रेसु उज्जरेसु चिललेसु पललेसु थप्पिणसु दीवसु समुदसु ससुचेव जलासएसु जलठाणेसु एत्यण चउरि दियाण, पजात्तापजत्ताण ठाणा पणता । उपवारण लोयरस सखेजाइनागे समुग्धारण लोयस्स शस खेजइनागे, सहाणण छोयस्स शसखेजाइलागे । कहिण नत ! पचिदियाण पडातापजाताण ठाणा प० Imanartra.adanLORDINAR तदेखदेमभाग प्रपोसोके तदवाना तियवसोने प्रवटपु तळागपु पापीप पुकरजीप दीपिकास गुम्जालिकामु सरस्सु सर पतिबासु सरस्सर पतिवासु पिसपत्तिवासु उत्मरेप मिम्मरपु पिकसम परणलेपु प्पिोप द्वीपपु समुद्रपु सर्वेप व वसाशयेपु जसस्थामय पतेपातीन्द्रियाणा पर्याप्तापर्याप्ताना स्थामामि प्राप्तामि । उपपातम सोवस्यासस्ययमाग समुहातेम लोकस्यासस्पेयभागे सत्यानेन लोगस्यासम्पयनाग । कस्मि सुत । चतुरिन्द्रियारा पर्यापतापर्याप्तामा स्थामामि प्राप्तानि । गौतम । उयलाच तदेवदवानागे पपोतोय तददेशनागे तिर्यलोके प्रवटप तळागेप वापोपु पुपरी दीवाम् गुजातिबासु सरम्स मर पत्तिवाम सरस्सर पतिकासु निम्मरपु सत्मरचिवलेप पवलपुर प्पिसेपु हापु समुदेषु सर्वेषु चैव चलाशयेषु बसस्थानेषु एतेपा पतुरिन्द्रियाणां पर्याप्तापपोप्तामा स्थानामि प्राप्तानि । उपयातम सोकस्पा इनागे । कहिण नते । समयणस्सहकाहयाण पजत्तगाण शपजत्तगाणय ठाणा प० गो०! सऊमयण स्सहकाहया जे पजतगा जे शपझप्तगा ते सह एगधिहा छविससा शनाणप्ता सवलोयपरियावसगा पणता, समाणाउसो । फहिण नत । बेड दियाण पजात्ता पजाप्तगाण ठाणा पणता ? गोयमा। उहलोए तदेकदेसन्नाग, थहोलोफ तदेकदेसन्नागे, तिरियलोए शुगसु तलाएसु नदी घाबीसु पुस्करणीसु दीहियासु गुजालियासु सरेसु सरपतियासु सरसरपतियासु उम्झरसु निज्जरसु चिल्ललस पल्ललेस पप्पिणेसु दीवेसु स मुद्दसु ससुचंय जलासएसु जलठाणेसु एत्यण बहदियाण पजात्तापजाप्तगाण ठाणा पणत्ता। उयवाएणं लागस्स असखेजडनोगे, समुग्धारण लोयरस सखजहन्नागे सहाणण लोयस्स शुसखजाइनागे। कहिण जत । तेइंदियाण पजतापमत्तगाण ठाणा पणता ? गोयमा । उहलोए तदेकदेसनाए थहोलोए तदेक Heamre-MIRLSORINCR : पौतम । बदरबपतियापिकामा पर्याप्तवाना सानानि तब बाटरवनस्पतिकापियामामपामा सामान प्रतानि । उपपातम सवतोडेर मातन सदसोचे सत्तामेन सोबत्यासंगपपनाने । बस्मिनु भास । पर्याप्तवानामपर्याप्तबाना स्वानानि प्रचतानि । गौतम । मलपनापति नामिना ये पर्याप्तमा य अपर्याप्तवास्ते सर्व पवित्रा विसपा मनात पोचपर्यापनमा प्रमाः समता गुमन् । पर्सिप्रमादि पानी पर्यामापर्याप्तवानां सामान प्राप्तानि । नौतम । वयसो तदमनाने पोसो तदेवदाकाम तिमलो चण्टा तहानेनरोप बाचीन पचरबीयुरीपिपासु मुम्मासिवान परल तर पहाताव सरासर-पतिमा उतारेधुनिकरेषित पाना पप्पिापुदीप मग सारे प्रतापये बसलामेषु एतेषां निगा पर्याप्तापर्याप्ताना बानानि तानि । उपपातन सोलारस्पेबनाने मुरातन सोसारमाये रखामेन बोममाया । बलि भाव निवारा पर्वावापोवानो जामानि मातानि । मौन दोष तमसा ययगयगहचदसूरनरकत्तजोहसपहा मेदवसापूयरुहिरमसचिस्कललिताणुलेवणतला असुईयीसा परम दुम्निगघा काजयगणियन्लाना करकफासा दुरहियासा थमुना नरगा यमुना नरएसु वेयणा एत्यण नरइयाण पज्जप्तापजत्ताण ठाणा पणता, उपयाएण लोयस्स शसखेजहनागे, समुग्धारण लोलस्स थ सखेजाइनागे, सठाणेण लोयरस शसखेजाइनागे , एत्यण यहवे नेरइया परिवसति काला कालानासा ग नीरठोमहरिसा नीमा उप्तासणगा परमकरहा यणेण पणता , तण तत्य णिच्च नीया णिच्च तत्या णिच तसिया णिच्च उधिग्गा णिच्च परममसुत्नसयछनरगनय पच्चणुनयमाणा विहरति । कहिण नते !रयणप्पना पुढधीनेरइयाण पजता पजाताण ठाणा प०? कहिण नत ! रयणप्पनापुढयिनेरइया परिवसति ? गो०! इमीस रयणप्पनाए पुढयाए इसीउत्तरजोयणसयसहस्सवाहल्लाए उपिरि एग जोयणसहस्समोगाहिता परमसत्यामसविता नित्यान्मबारतमसा व्यपगतप्राचन्द्र पनतत्रज्योतिपमाना मेदवसापूपसपिरमासबर्दमसिप्तानुसपनतला पशुमा विस्रा (सामनभिकार) परमदुरनिगन्धा पोताग्निवर्गामा (लोपम्पमान यादृशोग्नेः समोपदाप्रा यपामेव नूताः ) पाकरपणे दुर ध्यासा प्रशुना नरवा अमाय मरक वदना । एतेप नरपिसारा पर्याप्तापर्याप्तामा त्वामानि प्राप्तानि । उपपातेन सोसस्य असल्येय भामे समुपातम सोपस्यासस्येयप्राग सखामेम लोपस्यासरयेपनान, यतेप गहा मेरपिका। परिवम्ति बासा बालानासाः गम्मीरसामा पो उत्वासनमा परमलप्मा वम प्रमाः । तम तत्र नित्यमीता मित्यवस्ता नित्यासिता मित्यमुविमा नित्यपरमाणुमसपटुमरवनयं पयनु भूपमामा विहरति । पस्मिन् प्रवन्त रवानापिनीनरपिबार्ग पर्याप्तापर्याप्तामा स्थानानि प्राप्तानि । अस्मिनु भदन्त रवप्रतापपिवी मेरपिका परिवसन्ति ? । गौतम । एतस्या रवप्रमायां पपिण्यामशोत्युतरशवयोजनयवसाताबाहुस्पमोपर्यंत योजनसासमवमासापक योग - .C-A ? गोयमा । उहलोए तदेकडेसन्नागे छहोलोए तदेकदेसनागे तिरियलोए शुगसु तलाएसु नदीसु टहेसु घायीसु पुस्करिणीसु दीहियासु गुजाछियासु सरेसु सरपतियासु सरसरपतियासु विपतियासु उज्जरेसु णिज्जरसु विल्ललेसु पललेसु वप्पिणेसु दीवस समुद्देसु ससुचेय जलासएसु जलठाणेसु एत्यण पचिदियाण पजाप्तापज्जताण ठाणा पणता , उपवाएण लोयस्स शसखेजाइनागे, समुग्छाएण लोयस्स शसखंजइ नाग, सहामण लोयस्स शसखेजाइनाग । कहिण नत ! नेरहयाण पज्जतापजाप्ताण ठाणा पणता ? कहिण नत ! नेरडया परिवसति ? गोयमा। सहाणेण सप्तसु पुढयीसु तजहा-रयणप्पनाए सक्करप्पनाए वालुयप्पनाए पकप्पनाए घूमप्पनाए तमप्पनाए तमतमप्पनाए एयण नेरडयाण चउरासि निरयायास सपहस्साइ नवप्तीति श्वस्काय, सेण णरगा थतोवहा याहिघउरसा थहे खुरप्पसष्ठाणसठिया निधयार गरेपमाने समुपातेन सोबलासरूपयमा तत्यानेन सोबल्लारस्पेयनामें । पस्मिनु मदन्ता पोन्निपाणे पर्याप्नापर्याप्ताना लानानि प्रय सानि ।। मौतम सवालोमेदवासमाने बोसोक तदेवदेवमामे तिपक्लो पन्ट तान नदीपु परेप.बापीच पुपरी पिबा मुन्ना सिपातु सरपरस्पतिवातु सरासर पातमा विसपतिमा उस्मारप निकर पिस्सनेषु परामेट प्पिर पेच समुद्रा नपुर बताइपेष बलवानेच एता पोन्द्रियारा पर्याप्तापर्याप्ताना सानानि प्रापतानि । उपमान सारखापस्पषमान समुहातेम सोना गरसेपमा पत्रामेन सोलासम्पबमाने । यस्मिनुप्रान्त । नरपिचारा पर्याप्तापर्याप्ताना बानानि प्राप्तानिलिभरल। रपिका परिणति । पौतम सलामेन सप्तबु पणिोषु । तपा-चप्रमा प्रवरममावां बानुबाबायां पात्रा मनायो तना बाप मलममाया रवा मेरपिचारा चतुरविमरबाबारामारावीलालाबन्मा पन्चारमरजा र तमसा वयगयगहचदसूरनरकतजोइसपहा मेदवसापूयरुहिरमसचिरकललिताणुलेयणतला शुसुईयासा परम दुनिगंधा काऊयगणियन्लाना कस्कफासा दुरहियासा सुना नरगा थसुना नरएस वेयणाच एत्यण नरइयाण पाप्तापजत्ताण ठाणा पसप्ता, उघयाएण लोयस्स थसखेजाइनागे, समुग्धाएण छोलस्स श सखेजडनागे, सहाणेण लोयस्स शसखेाहनागे, एत्यण बहवे नेरइया परिवसति काला काठानासा ग नीरलोमहरिसा नीमा उतासणगा परमकराहा योण पणता , तेण तत्य णिच्च नीया णिञ्च तत्या णिच्च तसिया णिच्च उधिग्गा णिच्च परममसुनसयनरगनय पचणुम्नयमाणा यिहरति । कहिण नते। रयणप्पना पुढवीनेरइयाण पाता पजाताण ठाणा प० ? कहिण नत। रयणप्पनापुढयिनेरइया परिवसति ? गो०। इमीस रयणप्पनाए पुढवीए सीउप्तरजोयणसयसहस्सपाहल्लाए उयिरि एग जोयणसहस्समोगाहिता । पुरसत्वामहत्पिता नित्यान्यबारतमसा व्यपगतपाचन्द्रसूर्यनत्रज्योतिपमा मेदवसापूपतपिरमासकर्दमलिप्तानुलपमतमा पशुमा विना (पामगन्धिवाः) परमदुरजिगन्या. पोताम्निवर्याना (सोहेपम्पमान यादृशोम्मे कमोवस सहदामा यपामेव भूताः) बारपाः दुर प्यासा प्रभुना नरबा प्राभाय नरव पदमाः । एतेषु नरपिशाणा पर्याप्तापर्यापताना सामानि प्राप्तानि । उपपातेम तोकस्य पसरपेय भाग समुदपातम सोमस्यासमपेपपाग सस्थामेन लोडस्यासमपेयप्राग, यतेप. वो मैरपिका परिवसति बासा बालापासा: मम्मीरलामा पो हत्वासमगाः परमकामा वन प्राप्ताः । तम त नित्यप्रीता नित्यमा नित्यं प्रमिता मित्यमुहिग्मा नित्यपरमाधुभमबहुनरवनय पपमु नयमाना विहरति । पस्सिल प्रदन्त रवप्रभाषिणीनेरविवागे पर्णप्तापर्याप्तामा स्थानानि प्राप्तानि । अस्मिनु पदम्त रखमनापिकी मेरपिका परिवसन्ति । गौतम । एतस्मा रखममा पषिव्यामशीत्युत्तरशतयाजनवमासबास्थमोपर्य योजनसासमवगासाप योज ? गोयमा ! उहलोए तदेफडेसन्नागे शहोठोए तदेकदेसनागे तिरियलोए शगसु तलाएसु नदीसु व्हेसु वाधीसु पुस्करिणीसु दीहियासु गुजालियासु सरेसु सरपतियासु सरसरपतियासु विलपतियासु उज्जरसु णिकरसु विष्ललेसु पललेसु वप्पिणेसु दीयेसु समुढेसु ससुचेष जलासएसु जउठाणेसु एत्यण पचिदियाण पजाप्तापजाप्ताण ठाणा पणप्ता , उपवाएण लोयस्स शसखेडाहनागे उपवाएण लोयस्स शसखेाहनागे, समुग्घाएण लोयस्स शसखजाइ नाग, सठाणण लोयस्स शसखेवाहनाग । कहिण नत ! नेरहयाण पाप्तापाताण ठाणा पणता ? कष्ठिण नत ! नेरडया परिवसति ? गोयमा! सठाणेण सप्तसु पुढधीसु तजहा-रयणप्पनाए सक्करप्पनाए पाठ्यप्पनाए पकप्पनाए घूमप्पनाए समप्पनाए तमतमप्पनाए एत्यण नेरडयाण चउरासि निरयावास सपहस्साइ नयतीति शकाय, तेण णरगा तोघहा याहिचउरसा आहे खुरप्पसठाणसठिया निच्चधयार संस्पयमाने समुहपातेन मोबस्वासस्पपनाने सत्मानेन लोकस्वासस्पेपणाने । कस्मिन्म मदना । पोन्निपारा पर्याप्तापर्याप्ताना त्यानानि प्रा सानि ।। नौतम कप्यतो वदयधमाने पोतोक तदेवाने तिपक्लोथे प्रबट नागपुमटी पदेष बापीच पुपरीषु रीपिवान गन्ना सिवान सरस्नु सर पतिमातु सरासर पातमा विसपतिवार उस्मरण निकर पिस्ते परपसेप वप्यिोग पेप, समुद्रा, नरेश पतालयेप बलत्याने एसपा पोन्द्रियाला पर्याप्नापप्तानो खानानि प्रापतानि । उपमातेन मोबस्तावस्थपनाप बमुपातेन सोष उम्पेयप्राण पखानेन सोबलायरबबमा । बलिनुप्रास । नरपिचा पर्णप्नापर्याप्ताना सानानि प्राप्तानि ! बलि पर रांबवा परिवति । मौसम बजाने गप्ना पविणीषु । तपा-ममा प्रकरणमा बानुमाया माया मममाया तमाम पापा कमावाद एवेषा रविवादा चतुरोविनरवावापामानिमावीलालाबन् । भाषा बनता परिरमा तमसा धवगयगहचदसूरनस्कतजोडसपहा मेदवसापूयरुहिरमसचिस्कललिताणुलेषणतला वसुईधीसा परम दुनिगधा काऊयगणिवन्लाना करकफासा दुरहियासा सुना नरगा थसुना नरएस वेयणा एत्यण नरइयाण पाप्तापजत्ताण ठाणा पणता, उवयाएण लोयस्स थसखेजाइनागे, समुग्धाएण लोलस्स च सखेजाइनागे, सठाणेण लोयस्स शसखेजाइनागे , एत्यण बहवे नेरइया परिवसति काला कालानासा ग जीरलोमहरिसा नीमा उप्तासणगा परमकराहा यणेण पणता तण तत्य णिचनीया णिच्च तत्या णिच तसिया णिच्च उधिग्गा णिच्च परममसुनसयनरगनय पच्चणुम्नयमाणा यिहरति । कहिण नते ! रयणप्पना पुढधीनेरइयाण पज्जता पजाताण ठाणा प० ? कहिण नत। रयणप्पनापुढविनेरइया परिषसति ? गो०। इमीस रयणप्पनाए पुढधीए सीउत्तरजोयणसयसहस्सवाहलाए उपिरि एग जोयणसहस्समोगाहिता । पुरमसंवामसस्थिता नित्यायबारतममा व्यपगतपचन्द्रमयनयोतिषमता मेदवसापूपरुपिरमासब्दमसिप्तानुलपनतला अामा विस्ता (प्रामगन्धिाः) परमदुरजिगन्माः पोताग्निवर्गामा (लोहपम्पमाम यादृशोम्मे हमोवय सहदामा यपामेव जूता ) कसरपाः दुर थासा पशुमा गरका प्रमुमाय मरद वदनाः । एतेप मरायचाया पर्याप्तापर्याप्ताना त्यानानि प्राप्तानि । उपयातेम लोबस्य पसरपेय भाग समुपातेन सोबस्पासस्पेयनाग सत्यामेन लोबस्यासरपेपनाग, पतेप. बहवो नैरपिका परिवसन्ति वासापालापास. गम्मोरसोमा पा तत्वासनपाः परमकमा वन प्रचनाः । तेन तत्र नित्यप्रीता निस्पस्ता नियंत्रसिता नित्यमष्टिना नित्यपरमानुभसबमरवनय पपमु भूयमाना निगरन्ति । पस्मिन पदन्त रवप्रतापमितीने रयिबाण पर्याप्तापर्याप्तामा स्थानानि प्राप्तानि । पस्मिनु भदन्त रखमनापांपवी मेरपिका परिवसन्ति । । गौतम । एवस्था रखममाया पपियामशीत्युत्तरशतपोवनववसातबाईस्य नोपर्यवं मोजमसहसमवणासापर्यंत पोज हेछागं ओयणसहस्स पशिता मज्जे पठहप्तरिजोयणसयसहस्से एत्यण रयणप्यनापुढविनेरहयाण तीस निरयावाससयसहस्सा नवतीति मरकाय, तेण नरगा यतो बहा बाहि घउरसा शहे खुरुप्पसठाणसठिया निच्चधयारतमसा षषगयगहधंदसूरनस्कप्तमोहसपहा मेदयसापूजयपालरुहिरमसचिस्कालालित्ताणुलेयणतला थसईघीसा परमम्निगघा कामशगणिवरमाना करकफासा दुरहियासा यमुना णरगा शसुना नरगेसु वे दणा एत्यण रयणप्पनापुढविनेरहयाण पजत्ता पजत्ताण ठाणा परसप्ता, उवधाएण लोयस्स शसखेडा इनागे, समुग्घाएण लोयस्स असखाइनागे, सठाणण लोयस्स शसखजाहनागे। तस्यण बहये रयणप्प नापुढविनेरइया परिवसति। काला कालानासा गनीरलोमहरिसा नीमा उप्तासणगा परमकिरहा यन्लेण पसत्ता, समणाउसो ! सेण णिच्च न्नीया निच्च सत्या णिच तसिया णि उहिग्गा निच्च परममसुनसयर महासंबयित्वा मध्येऽष्ठसप्तति योजनयतसाले पतषु, रबपनापपिवीनरपिशाचा विशविरमावासझतसासारि प्रवन्तीत्यास्यातम् । तेन परवा पर्वत्ता बाने चतुरस्रा पप गुरुप्रसत्यानतसिवा निस्पामबारतमता अपनतळापनपनामोतिपममा भेदबसाप्पपटसल पिरामबामसिप्नानुसपमतमा मुमा विना परमदुरमिनायाः कपोतामिमांगा। परस्पर्धा दुरणासा पाप्रा परवा नरब बदमा च । एतेपा रखममापविलीनरपिणार्ग पर्याप्तापर्याप्ताना सानानि प्राप्तानि । उपपातेन तोषस्यास्पपमान नमुपातेन मोबमास्येप मारे सताने सोचस्पातरमेयमाग । तनु बहवो रखापापविमोमेरपिशाः परिवन्ति । बामा वासाप्रामा मम्मीरसामायो भीमा पत्मा सममा परमामा वन प्राप्ताः अमरा युजम् । तेन नित्य प्रोता नित्य पता नित्यं भरिता निस्पशिना मिल परनामुमपानरव पपमुगनाना विरचि । पलिनुपएच करमभापषियोरपिकाचा पर्याप्तापर्याप्तानां जानानि प्रामानि । लिनु पाप भरममा 1 . नरगजय पञ्चणुम्नयमाणा विहरति । कहिण जते ! सक्करप्पत्नापुढयिनेरइयाण पजाप्तापजाप्ताण ठाणा पणता ? कहिण नते , सक्करप्पन्नापुढविणेरडया परियसति ? गोयमा । सक्करप्पनापुढविए यही सुप्तर जोयणसयसहस्सयाहलाए , उपरि एग जोयणसहस्स उग्गाहित्ता हेठा धेग जोयणसहस्स घडिआप्ता मज्के तीसुप्तरजोयणसयसहस्से एत्यण सक्करप्पन्नापुढवीणेरडयाण पणवीस निरयायाससहस्सा हयतीतिमरकायम् तेण नरगा शतो यहा बाहि चउरसा आहे खुरप्पसठाणसठिया णिच्चधयारतमसा यवगयगहचदसूरणरक तजोइसपहा मेयवसापूयपालरुहिरमसचिस्किललिप्ताणुलेयणतला शसईवीसा परमदुम्निगधा काऊचगणि घणाना फरकफासा दुरहियासा सुन्ना नरगा चसन्ना नरगेसु वेयणा एत्यण सकरप्पन्नापुढविणेरड याण पजप्ता पजात्ताण ठाणा पणता। उववाएण लोयस्स शुसखेडाइनागे समुग्धारण लोयस्स शसखे साइनागे सहाणण लोयस्स शसखाइनागे । तत्यण बहने सकारप्पन्नापुढविनेरइया परिवसति । काला पपिता नरपिका परिवसन्ति । गौतम शहरमप्रापपियां दाविशदुत्तरयो धनशतसहस्रपलायामुपरिर्यका याजनसएसमग्रासाप एस योजन सास्र जयित्वा मम प्रिंशदुत्तरयोजमशतसाने एतेषु शफरमप्रापपिवीनरयिवाना पविशमित मिरयावासशतमात्राणि नवतात्यारयातम् । तम मरवा अन्तवृत्ता अधिपतुरस्रा अपगुरप्रसस्थानसास्थता नित्यान्यकारतमसा व्यपगतग्रश्चन्द्रसूपनक्षत्र ज्यातिपना मेदषमापूयपटलरुधिर मामादमतिमामुमपनतला भमुना विस्राः परमदुरमिगन्धा वापूपामिलामा काशरपशा दुरप्यासा पशुमा नरसा प्रशुभा मरकोप बदमा या पसेषु शकरणप्रथिवीनरपिचाया पर्याप्तापाताना त्यामााम प्रतानि । उपमतेम लोहस्यासस्येपानागे समुहातेन लोकस्यासस्येपानागे सस्थामन सोवस्याससपनागे । तस्सिव या शरमनपापी नरयिया पारवसन्ति । पासा पासनासा गम्मोरलोमा नीमा उचासनका b.DODRaamPROR HODINApa
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सखेजहन्नागे । सठाणेण लोयस्स आसखेजाइनागे। तत्यण यहवे बालुयप्पनापुढवीणेरडया परिवसति काला कालानासा गजीरलोमहरिसा नीमा उप्तासणगा परमकिराहा वणेण प० समणाउमा । तेण निच जीया निच्च तस्या निच तसिया निच्च उछिग्गा निच्च परममसुनसयद णरगनय पञ्चणुप्लवमाणा विहरति । कहिण नते । पकप्पनापुढविणरहयाण पजाप्तापजाप्ताण ठाणा पणता ? गोयमा । पकप्पन्नापुढवीए वी सप्तरजोयणसयसहस्सपाहलाए उपरि एग जोयणसहस्स उग्गाहिता हेठावेग जोयणससस्स वजिता मजे शहारसुप्तरे जोयणसयसहस्से एत्यण पकप्पन्नापढविनेरइयाण दस निरयावाससयसहस्सा नवतीति मस्काय । तण णरगा तो यहा याहि चउरसा शहे सुरुप्पसहाणसठिया निच्चयारतमसा वयगयगह चदसूरनस्फत्तजोइसपहा मेयवसापूयपालरहिरमसचिरिकललिप्ताणुलेयणतला शसुईयीसा परमलिगधा धमलन-02 ___ ना स्यानामि प्रमानि । उपवात्तन नोबस्यासस्येयभागे समुहातेम लोवस्यासस्येयमागे सस्थानेन सोफस्यासस्येपमागे । तस्मिण यादवः पाल पप्रमपपिवीनरयिका परिवसन्ति । वासाः कासाभासा मम्मीरतोमा नीमा उधासमकाः परमरुप्मा वर्णन प्राप्ताः प्रमणायमन् । तम मित्पनीता मित्याला मित्य सिता नित्यमहिमा मित्यं परमाशुनसबत नरवनयं पयननयमाना विपरन्ति । पस्मिन्न भदन्त । परमनपथि पोरपिकाया पर्याप्तापातामा स्थानामि प्राप्तानि ? । गौतम । पदमनषिष्या विशत्युत्तरयोजमसतसहस्रयमुलायामुपरि यक पोजनसहस्र मुगाझाप एक योधनसान पजयित्वा मधे अष्टादशोत्तरे पोजमशतसहस्ने एता पक्षप्रमपथिवीमरयिवाणी दशानिरयावास हातमासाविषय तास्यास्यातम् । तेन मरण पत्तता पक्षियतरमा प्रघा सुरमसस्थामसास्थता निस्यान्धकारसमसा ध्यपगतग्राचन्द्रसूयमदपन्योतिपणा शा मे दवसापूयपदप्तरूपिरमासकदमलिप्ता मुलपनतत्ता अगमा विज्ञाः परमदुरनिगन्धा' कापूयामिवर्णाना फकचस्पा दुरत्यया भमुना मरका पशु 8 B. -- , समुग्पारण लोयस्स DERMAHI.MEROEmp99- फाऊयगणियणाना करकफासा दुरहियासा थमना नरगा यमुना नरगेसुवेयणा एत्यण प्यफप्पनापुढायि रझ्याण पजाप्तापजाताण ठाणा पणता । उपधाएण लोयस्स सखेजहन्नागे यसखजाहन्नागे, सहाणण लोयस्स थसखेजहन्नागे तत्यण यह पक्रप्पनापुढविणेरइया परिवसति, काठा काठानासा गनीरलोमहरिसा नीमा उप्तासणगा परमाफरहा वणेण पणत्ता समणाउसो। तण निच्च नीया निश्च तत्या निच्च तसिया निच्च उधिग्गा निच्च परममसुनसयद नरगन्तय पञ्चणुषमाणा विहरति । कहि जेनत ! धूमप्पनापुढषिनेरइयाण पजप्तापजात्ताण ठाणा पणता ? गोयमा । धूमप्पनाए पुढवीए शहा रमुत्तरजोयणसयसहस्सथाहल्लाए उपरि एग जोयणसहस्स उग्गाहिता हेठा धेग जोयणसहस्स वडिप्ता मज्के सोठसप्तरे जोयणसयसहस्स एत्यण धूमप्पन्नापुढवीणेरडयाण तिणि निरयावाससयसहस्सा हवतीतिमरकाय तण नरगा तो वहा बाहि चउरसा थहे खुरुप्पसठाणसष्ठिया निच्चघयारतमसा यवगयगहचदसूरनरक भा मरबपु. पदना एवेप पकुममा पूषितोमरपिकाचा पर्याप्तापर्यातामा सामानि प्राप्तामि । तपमान सोवस्थासम्सेपमागे समातम सोबला सस्पेयमाने नखानन सोपस्पासंम्पयनामे । तानु वा पमनपिनेरपिका परिश्सन्ति । वासा वासानासा नमारतोमापो प्रोमा र रवासनका परमामा बबन प्राप्त प्रमवायुभम् । तेन नित्यं प्रीता मिरास्ता नित्य सिता निस्पतिमा निरप परमामुनबारकप प पनुपमाना। गिरन्ति । बस्मिल भदन्च । घूममप्रभिवानरपिशाबा पर्याप्तापर्याप्तानां जानामि प्रतानि ? । नौतम । पूमप्रमापो पृषि व्यामष्टाव मोत्तरयोजमातमालालापामुपरि पर्व योजनमासमुहातीला एक मोशनमा बपिता मधे बोरमुत्तरे योजनामाने ए तप, धूमप्रभचियोनरपिचारा बीकानरपानपानादि बच्चालासावम् । तम मरणाचा पश्यितुरता परमानापति PRETARIAment IANP ________ तजोहसपहा मेययसापूयपालरुहिरमसचिस्कल्ललिप्ताणुलेषणतला शसुईयीसा परमदुनिगधा काजशगणि यणना कस्कफासा दुरहियासा शसुना नरगा शसुना नरगसु वेयणा एत्यण घूमप्पन्नापुढविणेरड्याण पजाप्तापाताण ठाणा पणता । उववाएण लोयस्स शसखजाइनागे , समुग्धाएण लोयस्स यसखेडाह लागे, सहाणेण लोयस्स सखेडाहन्नागे तत्यण बहवे घूमप्पन्नापुढविणेरडया परिवसति काला काठानासा गजीरलीमहरिसा नीमा उत्तासणगा परमकिण्हा वणेण पणता समणाउसो। तेण णिच्च नीया निच तत्या निच्च तसिया निच्च उछिग्गा निच्च परममसुनसयनरगनय पञ्चणुप्लवमाणा विहरति । कहिण जते । तमा पुढयिनेरइयाण पाप्तापजात्ताण ठाणा पणता ? गोयमा । तमापुढयीए सोठमुत्तरजोयणसयसहस्सयाह वाए उपरि एग जोयणसहस्स उग्गाहिता हेठावेग जोयणसहस्स यजिता मज्जे चोदसुत्तरे जोयणसहस्से ता नित्याभकारतमसा व्यपगतग्रपन्द्रसूयमपन्योतिपमना मदवसापूपपटलरुधिरमांसकदलिप्तानुलेपनतला पशुमा विना परमनुरभिगन्याः कापूपाग्निवर्णमाः पशरपा पाना नरवा अशुना मरक्षेपु वेदनाय । रतप घूमप्रतापवानरयिवाणा पपासापयाप्ताना स्यामामि प्रचता नि । उपतन सोहस्पासस्पेयन्नागे समुहातेम सोकस्यासस्येयमागे सस्थामन लोबस्यासरयेयमागे । तपन यहयो धूमप्रनपि नरयिका परिष पम्ति । पासाः बाप्तानामा गंभीरलामा प्रोमा उरवासमबा परमहमा वयान प्रप्ता अमायमम् । तेन निस्पंजीता मिस्यंत्रता नित्य अमिता मित्यमुनिना नित्य परमानुभमवदनरवप्रय पपनुमयमामा विहरम्ति । पस्मिन्नु मदत । तमःमनधि नरयिवाणा पयाप्तापर्याप्तामा बानानि प्रतानि । गौतम ! तमापृषिष्या पोमुत्तरयोजनशतसम्रयकुलायामुपार एक योजनसामुदाशीवाय एफ योजनसत्र वयि वा मध्य चतुदद्योधर योजनमश्ने एतेपु तमाप्रश्नपूपिवीमरपिकासामे कस्सिन्पश्चान नरचावासयतमन्ने प्रवन्तीत्याल्यातम् । तेन नरमा पन्त Ann एत्यण तमप्पन्नापुढविणेरठयाण एग पचूणे नरगायाससयसहस्से हयतीति मरकाय, तेण नरगा थतो बहा पाहि घउरसा थहे खुरप्पसठाणसठिया निच्चधयारतमसा ययगयगहचदसूरनस्कप्तजोडसपहा मेदवसापूय पाठहिरमसचिस्किल्ललिताणुप्लेषणतष्ठा चमडवासा परमस्निगधा फरकफासा दुरहियासा सुना न रगा यमुना नरगेसु वेयणा एज्यण तमापुढविणेरहयाण पजाप्तापजताण ठाणा पणता , उवधाएण लोयस्स शसखेडाहन्नागे समुग्छाएण लोयस्स शसखेजाइनागे सहाणेण लोयस्स आसखेजाइनागे , तत्यण यहये तमप्पन्नापुढीणेरडया परिषसति काला काठानासा गनीरलोमहरिसा नीमा उत्तासणगा परमकिण्हा वर्णण पणत्ता समणाउसो । तेण निच्च नीया निच्च तस्या निच्च तसिया निच उधिग्गा निच्च परममसुनसबद्ध नरगनय पञ्चगुम्नयमाणा विहरति । कहिण नते ! तमतमापुढयिणेरइयाण पजात्तापात्ताण ठाणा प० ? गोयमा। तमतमापुढपीए थत्तरजोयणसयसहस्सयाहलाए उवरि थरतवणजोयणसहस्साइ उग्गाहित्ता . IROHIBERSOAPATGwasanARAJESHI , पत्ता परिपतुरना प्रम सुरमस स्पानसंस्थिता नित्यामबारतमसा अपगतपचन्द्रमयनपत्रमोतिपमाना मेहवसा पूपपटसरुधिरांसपदमसिप्ता नृप्तपमतमा प्रभुमा विघाः परमदुरभिमन्या वारपर्दा दुरस्यया अझुप्रा नरफा अशुना नरकपु वेदनाः एवेपु तमःप्रनधितीनेरपिकास पर्या सापर्याप्तामा त्वामानि प्रचतानि । उपपातम तापस्मासरपेयभाने समुहान लोबस्यासक्यपप्राणे सत्वानेन लोबस्पासंग्पपमागे तनु बरवस्त म मनषिीमरपि परिवसन्ति काला बानानासा। गम्मोरहोमाया प्रामा उत्सातमहा। परमामा वर्षम प्राप्ता। ममगाबुभन्। वेन नि रीता नियता नित्यनिता नित्यमुहिना निस्पं परमामुलसमा नरवनयं पपनुनपमाना विपरन्ति । अस्मिन् महन्त । तमतमा पविली मेरपिका पर्याप्तापर्याप्ताना सानानि मासानि ।। गौवम 1 मखना पधिनामधोतरपोबनपतमानासायामुपरि विपनामयोगम tonn.nooDoon हेछावि शश्तेवणजोयणसहस्स वझिप्ता मज्जे तिणिजोयाणसहस्सेसु एत्यण तमतमापुढवीणेरड्याण पजा त्तापजात्ताण पचदिसि पच थणुतरा महामहालगा महानिरया परमता, तजहा-काठे महाकाले रोरुए म हारोरुए थपडठाणे, तण नरगा थतो वहा याहि चउरसा शहे खुरप्पसहाणसठिया निच्च धयारतमसा ववगयगहचदसूरनस्कत्तजोडसपहा मेयपूयवसारुहिरमसपलयिस्कललिताणुलेवणतला असुईयीसा परमटु निगधा फरकफासा दुरहियासा सुन्ना नरगा शसुना नरगेस वेदना एत्यण तमतमापुढयिनेरइयाण ठाणा पन्नप्ता, उवयाएण लोयस्स शसखेडाहनाए समुग्धाएण लोयस्स शसखेजाइनाए सठाणेण लोयस्स शसखेडाइनाए तत्यण वहये तमतमापुढयिनेरडया परिवसति काला कालानासा गनीरलोमहरिसा नीमा उप्तासणया परमकिराहा बलेण पत्नत्ता समणाउसो। तण निच्च नीया णिच्च तत्या निच्च उधिग्गा निच्च परममसुनसबद्ध नगरलय पञ्चणुनवमाणा विहरति ॥श्शसीतवतीस थठावीसचहोइवीसच । थहारससो सरमायु दगडीवायोपि प्रदानपणायद्योबनसहस्राणि वजयित्वा मध्ये प्रियोजनमानेषु मतप तमतमा पथिवीनरयिकाग पर्याप्तापर्या साना पसदशपम्मामुत्तरा महामहालया महानिरयाः प्राप्ता तद्यथा-फाले महाकाले रोरवे महारोरखे पप्रतिष्ठाम सेम मरका मन्तवृत्ता व नियतरमा अघ हरममस्थानसस्थिता नित्यायकारतमसा व्यपगतग्राचम्नस्र्पनषत्रपोतिपमना मदपृयवसाझघिरमांसपलबमलिप्तानुलेपमत ला प्रधाना विना परमदुरनिगन्धाः बारपां दुरत्यया पगुना मरता प्रभुना मरकपु वदनाया एतपु तमस्तम पथिवीमेरपिकायां स्पामानि ममतामि । उपपातेन लावस्पासमयेयामागे समुहातेम लोहस्पासस्पेयमाग सस्थामन लोकस्यासंग्यपनाग तानु यहवसमस्तम पथिवीनरपिका परिवमम्ति काला वासानासा गम्भीरसोमपा नीमा पचासनपाः परमकपमा वर्षम् प्राप्ताः ममणायुभन् । तेन निस्य मीता मित्य प्रसता नि ABCDHEIREPORVAULHaasanRail एत्यण तमप्पनापुढविणेरउयाण एग पचूणे नरगायाससयसहस्मे हयतीति मस्काय , तेण नरगा तो यहा याहि चउरसा आहे खुरप्पसठाणसठिया निच्चधयारतमसा ययगयगहचंदसूरनरकप्तजोडसपहा मेदयसापूय पफलरुद्विरमसचिस्किल्लखिताणुलेयणतठा शसइवीसा परमलिगधा करकफासा दुरहियाना शसुना न रगा यमुना नरगेसु वेयणा एल्यण तमापुढविणेरडयाण पजाप्तापञप्ताण ठाणा पणप्ता , उयमाएण लोयस्स श्वसखेडाइनागे समुग्धारण छोयस्स सखेजाइलागे सहाणेण लोयस्स शससेजाइनागे, तत्यण घहये तमप्पन्नापुढीणेरड्या परिषसति काला कालानासा गतीरलोमहरिसा नीमा उन्नासणगा परमकिराहा घोण पगत्ता समणाउसो । तेण निचनीया निच तत्या निच्च तसिया निच उछिग्गा निच्च परममसुनसयड नरगनय पच्चणम्नयमाणा विहरति । कहिण नंते ! तमतमापुढयिणेरड़याण पजात्तापजात्ताण ठाणा प० ? गोयमा। तमतमापुढयोए थत्तरजोयणसयसहस्सयाहलाए उवरि शतरणजोयणसहस्साइ उग्गाहित्ता पत्ता पदियतुरना अप शुरमसत्यामतस्यिता नित्यायकारतममा व्यपगतपाषान्तमपनपन्योतिपममा भेटवसा पूपपटतरुधिरमासपदमसिप्ता नुसेपनतसा अमुमा विना परमदुरभिमन्याः बसवरपक्षां दुरस्यपा प्रभुमा मरका पमुना मरकपु वेदमाएप तमामममिनिरपिचारा पया सापर्याप्ताना त्वामानि प्रतानि । उपपात्तम सोपस्यासस्पेपमाने समुहात्तन लोबस्वासरुपयनागे सत्यामेन सोबस्यासम्पपमागे तान पारस म मनविधीमरपिका परिवन्ति वासा वामानामा नन्मीरमोमार्ग प्रामा रसासमा परमलमा गईन मासा प्रमानन्। तेन मि स्पाता नित्यस्ता नियंतिता निस्समुहमा नित्यं परमाणुप्रसुवा परप्रय पर्यननयमाना किरन्ति बलिा भाय। मतमः पचिली नरपिचा पर्याप्तापाप्तामा सानानि महानि नोम | ममा पधिमानतोदरपोषणयामसापाबुपरि पिपवावयोमन AGRO-Duapunomo.DoodgegodamaRaaz हेशावि थक्षतेवणजोयणसहस्स घजिप्ता म तिणिजोयणसहस्सेसु एत्यण तमतमापुढवीणेरडयाण पड़ा तापजात्ताण पचदिसि पच श्यणुप्तरा महइमहालगा महानिरया पणता, तजहा-काले महाकाले रोरुए म हारोरुए थपडठाणे, तण नरगा शंतो यहा याहि घउरसा शहे खुरप्पसठाणसठिया निच्च घयारतमसा यवगयगहचदसूरनरकत्तजोइसपहा मेयपूयवसारुहिरमसपलचिरकललिताणुलेयणतला असईयासा परमटु निगधा कस्कळफासा दुरहियासा शसुना नरगा शसुना नरगेसु वेदना एत्यण तमतमापुढविनेरइयाण ठाणा पलप्ता, उवयाएण लोयरस यसखेजाइनाए समुग्धारण लोयस्स आसखेडाइनाए सहाणेण लोयस्स शसखेजाहनाए तत्यण यहये तमतमापुढयिनेरडया परिवसति काला कालान्नासा गनीरलोमहरिसा नीमा उतासणया परमकिण्हा वलेण पनत्ता समणाउसो। तण निच्च नीया णिच्च तत्या निच्च उहिग्गा निच्च परममसुनसयद नगरत्नय पञ्चणुम्नवमाणा विहरति ॥ शसीतवतीस थठावीसचहोइवीसच । थठारससो सपनास्यु दरही वाघोपि प्रदाउपप्वाशयोधनसास्राणि वापिस्वा मध्ये प्रियोजनमानेषु एत' तमतमा प्रथिनेरपिका पर्याप्तापर्या सानां पन्दशपम्मानुतरा महामहासया महानिरयाः प्रताः तद्यपा-फाले महाकासे रोरवे महारौरव प्रतिष्ठामे । तेम मरका पम्तवता य शिवतरता अध सुरप्रसस्थानसस्थिता नित्यायकारतमसा व्यपगतप्रच्चन्द्रस्यमतबन्योतिषमना मदपुयवसासपिरमासपलबदमलिप्तानुलेपनत ला पाना विस्रा परमदुरधिगत्या प्रकारपो दुरत्यया पाना मरवा अनुमा भरणपु वदनाय एतपु तमतम पपिवोमेरपिकाया स्यामामि 9 प्रचप्तामि । उपपातेन साबस्यासस्येपामागे समुहातेम सोडल्यासस्येयभागे सस्पानन लोकस्यासंख्ययमाग तमु यवतमस्तम पथिवीनरविक्षाः परियमन्ति कासार शासानामा गम्भीरलोमायां नीमा उचासमकाः परमारमा वम प्रसप्ताः नमणायुप्मन् । तेन निस्य मीता मिल्य प्रखा नि उसग थत्तरमेवहेष्ठिमया ॥ ३॥ अछुत्तरचयप्तीस बधीसचेवसयसहस्सतु थठारससोउसग चोइससहिय तुबठाए । चश्तेषत्वसहस्सा उवरिमहोयजिजाऊतोन्नणिय । मज्जेउतिसुसहस्से सुहोतिनरगातमतमाए। तीसा यपन्लयीसा पत्नरसद सेवसयसहस्साइ । तिलियपचूणेग पर्चयश्चणुत्तरानरगा ॥ ४ ॥ फहिण जते । पचि दियतिरिस्कजोणियाण पञप्तापजाप्ताण ठाणा प०? गो०। उहृलोए तदेकदेसन्नाए थहोठोए तदेकदेस नाए तिरियलोएस अगसु तलाएस नदीसु दहेसु वाधीसु पुस्करिणीसु दीहियासु गुजालियासु सरेसु स रपतियासु सरसरपतियासु बिलपतियासु उज्जरेसु निज्जरेस चिल्ललेसु पल्ललेसु वप्पिणेसु दीवेसु समुद्देसु स सुचेय जलासएस जउठाणेसु एत्यण पचिदियतिरिस्कजोणियाण पाप्तापात्ताण ठाणा प० । उवा एण लोगस्स यसखेजाइनागे। समुग्धारण लोयस्स शसखेडाइनागे। सठाणेण लोयस्स शसखेजाइनागे। त्यमुरिमा नित्यं परमाबुप्रसंमत मरवमयं पपनुभूयमाना विहरन्ति । मजीविनाधित माहितिविधतीष । अष्टादश पोस्यबमप्टोत्तरमेवा बोषिमया ॥ १ बटोत्तरं द्वाभिमत् पविंशतियमतसहस्रतु । अष्टादश पोडश चतुर्दशसरित तु पद्धिमत् । पशिपचासत्ताल भुपरि महोपनि नतो मचितम् । मोतुमिपुताने पुनन्तिनरबास्समस्तमसा ॥ विशनपयिमत् पदवमततावारिधीविषपदोन पक्षा मुत्तरानरबार । अस्मिन् परन्थ । पचन्द्रियतिबमोमिवाना पर्याप्तापर्याप्ताना सानानि प्राप्तानि ! मौतम ! यसो तवरबागाने प्रचोसोके वरेनषाने वियवनोदपु पाटनमानेषु नदी रे वापीपु पुपरवाई पिधात गुनासिकात पर बरस्पतिवार गरपालिका विसपधिमा उत्सर निकरए चित्त माल दोपए समुद्रानांव बसाये बतलाम पतेषु पचनियतिन्पो मिवामा पर्याप्तापर्याप्तामा जानानि प्रमाणि, उपवावेन सोमासपमा सापावेन तोपनापपाने जाव तोतापवाये।
। कहिण नते ! मणुस्साण पजतापजाताण हाणा प०। शतो मणुस्सखित्ते पणयालीसाए जोयणसयसह स्से सु शहाईकोस दीयसमुद्देस पन्नरससु कम्मनूमीसुतीसाए शकम्मजूमीसु बप्पन्नाए शतरदीवेसु एत्यण मणुस्साण पातापाताण हणा प० । उववाएण लोयस्स शसखेजाइनागे समुग्धाएण सहलोए सहाणे ण लोयस्स शसखेखहन्नागे । कहिण नते ! जवणवासीण देवाण पजप्तापाताण हाणा प०? कहिण नवणयासीदेवा परिवसति ? गो० ! इमीत रयणप्पनाएपुढवीए शसीउप्तरजोयणसयसहस्सयाहवाए उ परि एग जोयणसहस्स उग्गादित्ता हेठाचेग जोयणसहस्स वजिता मज्जे थतरिजोयणसयसहस्स ए त्यण नवणयासीदेवाण पक्षात्तापजाताण सप्तनवणकोफी वायप्तरिंच जवणावाससयसहस्सा हवतीति मस्कायं, तेण नवणा याहि वहा थतो समचउरसा थहे पुस्करकनियासठाणसठिया उकिणतरविउलग बस्सिम् भदन्त । ममय्यामा पर्याप्तापर्याप्तामा स्थानानि प्रचप्तामि । अन्तर्मनुष्य पम्मतस्यारिंशतमेपु योजनशतसहस्पु गायेषु वीपसमुद्रपु पम्पदशम बमभूमिपु विधवमभूमिपु पदमावतरहीयेषु पतेय ममुयायां पासापोताना स्थानामि मतानि । उपवान लोकस्यासस्य माग समुहातेम सोवस्यासम्पग्रमामे सस्थानेम तोबस्यासस्येपमागे । पस्सिम नदन्त । नवनवासिनां देवाना पर्याप्तापयोप्सामा स्थानानि मतानि अस्मिन् मदन् । प्रामवासिमो देवा परिषसन्ति पौतम । एतस्या रमाप्रथिव्यामझोत्युत्तरयोजमशतमासपहुसायामुपर्यफ योजनसानमुद्ग सस्थायलादेक योजनसहस्र बजयित्वा मयेऽटसप्तति योवनशसमासमतेषु अपनयासिदेवानां पर्याप्तापयांसामा सप्तनवनकोट्या दिसप्ततिमय मवासशतसहस्रावि नवोत्याश्यातम् । तेन धवमानि पासतो पत्तानि पा समरमारि प्रपा पुफरायफासस्थामसस्थितानि उत्कीम्ति रविपुतगामीरातपरिणामि प्रावाराष्ट्रासापाटवोरणसिधारदेशमागानि यायशतमीनु यी परिवारिवानि चायोभ्यामि सदामामि पानि , AFirl नीरखासफलिहा पागारहालयकथामतोरणपमिदुवारदेसजागा जतसपग्धिमुसठिपरिवारिया थउज्जा सयाज या सया यजेया सदा गुप्ता यायाठकोठरइया शयालकवयणमाठा खेमा सिया फिकरा मरफोवररिक या लाउलोहयमहिया गोसीससरसरतचदनदद्दरदिन्नपचगुठितला उवचियचदणकठसा चदणघासुकयतो रणपमिनुधारदेसन्नागा शासत्तोसत्तयिउठयहयग्धारियमलदामकठायापचयन्लसरससुरनिमुक्कापुप्फपुजोयया रकलिया (य११००) कालागुरुपवरकुतुरुवातुरुक्कधूयमचमतगघुछुतानिरामा सुगधयरगधगधिया गघय हीनया यच्छरगणसघसकिन्ना दिचतुझियसहसपत्नादत्ता सछयणमया थच्छा सराहा खराहा पहा महा पीरया निम्मला निप्पका निक्कफाच्छाया सप्पन्ना ससिरिया सउडोया पासादीया दरिसणिजा थनिक था पफिकवा एत्यण लवणवासीण देवाण पजाप्तापज्जत्ताण ठाणा प० । उववाएण लोगस्स थसखेडाइ सदानेपानि परा नुप्तान अवस्वारिकोटबाषितानि पटचत्वारिंशासपमासानि मावि शिवानि पिरामरवठातोपरचितानि साठ होरप ( वेटिबायोमपादिमिर पनसमष्टीचर ) महितानि नोनीपसरसरतचन्दनदरिदत्तपत्रासितसानि उपस्तिदनसमानि पदमा टसहतवारविहारदेषनापानि चासत्तोसत्ताविपुसवत्तप्राचालिप (मनम्प्रित ) माल्पदामकालापानि पसायतरसहरधिमुक्तपुष्पपुस्मोपचार सितानि वातानुरुप्रवरणादायतुलनापमपमपापमानमयोभूतानिरामावि सुनसवरमन्धन्मितानि नन्पत्तिमतामि चप्परागवयंपोनि रिमदितमसम्प्रवादितानि सर्वरबमपानि मानि मलानि पृष्टानि महानि मीरजाति निपानि निबटनावरानि सममापि समराला मि सोपोतानि प्रसारीपानि पसे नोवानि अभिरूपापि प्रतिरूपापि यतेषु भवनबागिना रेबाना पाहापोताना सानानि सातानि । रूप पातन होवतारोपनाये समााम सोनाक्पपमाने जानेन सोषमारपमा वा पायो मानवाविरेबारा परिपाधि । ववषा- ॥ UTTAREERINARI नागे समुग्धाएण लोयस्स शसखेजाइलागे सहाणेण लोगस्स सखेडाइनागे तत्यण यहये नघणवासीदे था परिवसति त-वसुरानागसुवन्ना विजथग्गीयदीवउहीय । दिसिपयणथणियणामा दसहाएएनवण वासी। चामणिमउफरयणसणा फणिगरुलयइरपुणकलसकिउप्फेसा सीहमगरमयकश्यस्सवरवछमाणनि झुप्तचिप्तचिधगता सुरुवा महिडिया महसुतिया महायसा महावला महाणुनाया महासोरका हारविराइ यवत्या फगतुझियपनियनुया थगदकुलमठगतलकणपीढधारी विचितहत्यानरणा विचितमालामउ लिमउठा कल्लाणगपवरवत्यपरिहिया कल्लाणगपवरमलाणुलेवणघरा नासुरवोदी पख्यवणमालघरा दिशेण योण दिशेण गधेण दिवेण फासेण दिशेण सघयणेण दिशेण सहाणेण दिवाए हहीए दिशाए जुताए विधाए पनाए दिवाए छायाए दिवाए थच्चीए दिशेण तएण दिशाए लेस्साए दसदिसा उजोयेमाणा पसुरनागसुपर्ण विद्युदग्निहीपोदषयच । विशापवमस्तानदास्पा दर्शतेमवमवासिनोघेया ॥१॥ चूडामणिमुकुटरवभूषणा फणागरुश्यजपूर्ण फप्तशाक्तिमुकुटाः । सिहायणबवरमारिप बदमाननियुवाविषचघरा ॥ २॥ सुरपामाति महायुतिमा मायशा महायला महामुन्नावा मोधरा हारावराजितवतमा पटवटितसम्मितनुजा अजयकरहलमप्टगयडतलकपपीठधारिणो विचित्रमालामौलिमराठलाः कल्यायप्रवरपत्रपरि पिता स्थानकावरमात्यामुपमपरा नासुरयोन्द (शरीर) यो प्रलम्यममासापराः दिव्यन वम दिव्येन गन्धेन दिव्यन स्पर्शन दिध्यमसहमनेम दिव्येन सत्यानम दिव्यया दृष्ट्या दिव्यया मुक्तपा दिव्यया प्रमपा दिव्यया शापया दिव्यया युत्या दिव्येम तेजसा दिव्यया लेइपया (देश्यसमुन्दरत पा) दशदिवासूगोतमामाः प्रबासमाना न ता साप २ (वाफ्यासकारे) भवनवासिशसरमा सार्य २ सामानिकसहसाणा साणं २ प्रप वियता साप २ तोखपालामा सार्य २ भयमहिपीपा साण परिपदा साद अधिकारिता मषिक्षारिपतीना सावं यापरददेवसहस्रामा मन्ये नीरखातफलिहा पागारहालयकथामतोरणपमिदुवारदेसन्नागा जतसयग्पिमुसठिपरिवारिया एउज्जा सयाज या सया राजेया सदा गुप्ता थम्यालकोठरझ्या शुक्रयाउकवयणमाला खेमा सिधा किफरा मरफळोवरस्कि या लाउल्लोइयमहिया गोसीससरसरतचदनददरदिन्नपचगुलितला उयघियचदणकठसा चदणघासुकयतो रणपमिदुबारदेसन्नागा शासत्तोसत्तयिउलबहवग्धारियमल्लदामकछायापचपलसरससुरनिमुक्कपुष्फपुजोयया रकठिया (ग्र११००) फालागुरुपवरकुदुरुक्कातुरुक्कघूयमयमघंतगघुछुतानिरामा सुगधनरगधगधिया गय हीनया यच्छरगणसघसकिना विश्चतुझियसद्दसपन्नदित्ता सहरयणमया अच्छा सराहा उराहा घठा महा णीरया निम्मला निप्पका निक्काच्छाया सप्पन्ना ससिरिया सउझोया पासादीया दरिसणिजा शनिक घा पहिया एत्यण नयणवासीण देवाण पाप्तापझत्ताण ठाणा प० । उवयाएण लोगस्स थसखेज मानेयामि पर नुप्तानि भष्टचत्वारिंजस्योप्टकरषितानि पटचत्वारिशासपमातानि मारि शिवानि पिरामरदराठतोपरचितानि लास मोरप (टिबागोमपादिमिरुपनसमष्टीकरण ) महितानि मोचीपसरसरतचन्दन दर्दरदत्तपश्चागुमिततानि सपरिवानवतमानि पादन उनुलतवारप्रतिद्वारदेसनामानि बासमोत्सवाविपुलवृत्तमाचासिप (प्रसम्मित ) मास्पदामासापानि पन्चायतरसतरप्रिमुखपुष्पपुल्मोपचारक सितानि वासामुरुमवरदावतुरुनभूपमपमपायमानगन्योतानिरामावि सुनन्यवरगन्यन्मितानि गन्धपतिभूतानि पपरोगणपोयोनि रिमदितवमानप्रवादितानि सर्वरममपानि मानि भत्तानि पृधानि मष्टानि नीरजाति निपानि निस्तबमापानि ममापि समराला नि तोपोवानि मसारीपानि नोवानि अभिलपारि प्रतिरूपावि मतेषु प्रवनवारिमा रेबानो पर्याहापोहाना मानानि मातानि । पातेन होषलारपणाने समावेन बोनापमाने जाने सोपसारस्पेषणाचे पाणु बायो मदारिया परिकि । क्षा- PGRAMROMINDIAN मुसढिपरिधारिया शउज्जा सदा सया घलया सदा गुप्ता थायाला कोठगराया थायालकयवन्नमाला खेमा सिवा फिकरामरफकोवररिकया डाउलोइयमहिया गोसीससरसरतचंदणदहरदिन्नपचगुठितला उव चियचंदणकलसा चदणघासुकयतोरणपन्दुिवारदेसनागा थासप्तोसतविउलयहयग्धारियमल्लदामकलाया पचवमसरससुरनिमुक्कपुप्फपुजोययारकलिया कालागुरुपवरफुदुरुक्कातुरकरज्जतघूवमघमघंसगातानिरा मा सुगघवरगधिया गघवहिल्या इच्छरगणसघसफिया विधतुझियसहसपन्नदिया सवयणामया थ च्छा सराहा घठा मष्ठा नीरया निम्मला निप्पका निवाकच्छाया सप्पना ससिरिया सउऊोया पासाइया दरिसणिज्जा थनिरूवा पफिकवा एस्यण थसुरकुमाराण देवाण पजातापजाप्ताण ठाणा पणता । उयवा एण लोयस्स सखिाइलागे समुग्घाएण लोगस्स यसखेजाइनागे सठाणेण लोगस्स शसखेजाइनागे त मि उत्तान्तरविपुलगम्मीरसातपसिवानि माबारावालवणपाठतोरणमतिद्वारदेशनागानि यात्रभतमीमुससनुसुमित्रपरिवारितानि पायोधनानि सदानेपानि सदावतयामि सदागुप्तानि प्रष्टचत्वारिशत्कोटवरचितामि मानवारिपालयमाप्तानि शिवानि बिरामरदयटोपरतिवानि साप सोय महितानि गोचीपसरतचन्दनववरदत्तपष्वाकुलितलानि उपचितचन्दनकलशानि चन्दनपठसुरुततोरणमतिद्वारदशनागानि पास तोत्सवाविपुसवत्तमाया तिममास्पदाममतापानि पम्मवयसरसमुरनिमुत्तपुप्यपुमोपचारकसिवानि बालागुरुमवरकुन्दसफतुरुफधूपमघमपाय मानगयोदभूतानिरामारि सुगमवरणम्पपरिपवानि गन्पर्तिमूतानि अप्सरोगणसपसवीर्णामि दिव्यधुटिवशव्यसम्पादिवानि सपरसमया मि मच्चामि सत्तानि पानि सप्तानि मीरवासि मिप्पानि निफरटपखापानि समानापि समरीचीनि सोद्योवानि प्रसादमीयानि दयनीयानि पमिठपारि प्रवितपाति एतेषु प्रमुफमारापण देवामा पर्याप्तापर्याप्तामा स्थानानि मतानि । उपपातम लोकस्सासख्येपमागे समुहावन लोक पत्नासेमाणा सेणं तत्य साणं २ जगवाससयसहस्साण साण २ सामाणियसाहस्सीण साण २ तोयत्तीसाण साण २ डोगवाठाण साण २ थग्गमहीसीण साण २ परियाण साण २ थणीयाण साण २ थणियाहियईण साण २ थायरस्कदेवसाहस्सीण शवेसिच पक्षण नवणवासीण देवाणय देवीणय थाहेवच्च पोरेवच्च सा मिष्त नहित महप्तरगत शामाईसरसेणावच्च कारेमाणा पालेमाणा महयाहयनहगीयवाइयततीतलतालतुमि यघणमुइगपप्पयाइयरषेण विधाइ नोगनोगाइ नुजमाणा विहरति । कहिण नते ! थसुरकुमाराण दे षाण पजात्तापात्ताप ठाणा पणता ? कहिण नते ! यसरकुमारादेवा परिवसति ? गोयमा । इमीसे रयणप्पनाए पुढवीए वसीउप्तरजोयणसयसहस्सयाहल्लाए उपरि एग जोयणसहस्स उग्गाहिता हेठायेग जोयणसहस्स पजिया मज्जे शहापरे जोयणसयसहस्से याहलाए एत्यण शसुरकुमाराण देवाण घोषठि नयणावाससयसहस्सा नवतीति मस्काय, तेण नवणा याहि यहा तो चउरसा शहे पुस्करकणियासहा णसठिया किमतरविउठगनीरस्कायफलिहा पागारहालयफवाळतोरणपमिदुवारदेसन्नागा जतसयग्धिमुस पारबहना प्रवनमासिनो रेवानां देवनामाधिपत्य स्वामित्व मुर्वत महतराकृत्वमारसेनापत्य बारपमा पासपमानात मावाहनत मोतमाविश्वासमासबाटतपमपरस्पटुमारित रखेपरिमानि मोनानोमानि मुम्मनाना पिरन्ति । पस्मिन् प्रान्त । बरहमारा रेगना फ्पोप्तापर्याप्तामा खानानि मासानि पस्मिन् मरन्च हमारादवा परिवसन्ति गौतम । एतमा रखममाया पृषिप्यामधीमुत्तरपोजना पतालबातापामुपपोवनवाससवा लाख पोजना गमपिता मो ऽवततिपोवनातलालपसापान पता चरणमारा को देवानां दिविषबनाबावालागि अवतीलानावन् । मनानामि परिचानि पारमारियो पुरपितालामनिवा -AHORAM.ONaamRAPRIman सामाणियसाहस्सीण साण २ तावप्तीसाण साण २ लोगपालाण साण २ चग्गमहिसीण साण २ परिसाण साण २ थणियाण साण २ थणियाहिबईण साण २ शायररकदेवसाहस्सीण थनेसि च यण नवणवा सीण देवाणय देवीणय चाहेवञ्च पोरेयच्च सामित्त नाहित्त महप्तरगत्त थाणाईसरसेणावच्च कारेमाणा पा छमाणा महयाहयनहगीययाइयततीतलतालतुझियघणमुइगपमुप्पवाइयरवेण दिवाइ नोगनोगाइ नुजमा णा विहरति, चमरयलिणो इत्य दुये शसुरकुमारिदा शसुरकुमाररायाणो परियसति काठा महानीलस रिसा नीलगुलियगघालयसिकुसुमप्पगासा वियसियसयवप्तनिम्मलसीसियरप्ततयनयणा गरुलाययउझुत्तुग नासा उयचियसिलप्पवालवियफलसतिहाहरोठा परससिसगलविमलनिम्मलदहिघणसखगोखोरकुदद गरयमुणालिया धयलदतसेढी हुयवहणिदतधोयतततधणिजाराततलतालुजीहा थजणघणकसिणरुयगरमणि आनिछकेसा यामेयकुठघरा थद्दचदणाणुउित्तगता ईसीसिलिघपुष्फपगासाइ यसफिठिठाई सुजमाइ व स्थामम दिष्यया शया दिव्यपा युक्त्या दिव्यया मनया दिष्पया खायया दिव्येन पर्चिपा एतेन दिव्येन लेश्येन दशदिशासूद्योतमाना प्रनासी माना तेम व खेपा २ नवमावासावसासाला सामानिषसहस्राणा प्रपतिदावा तोकपालानां अग्रमधिपोर्ग परिपदामधिफारिणा अधिकारि पतीनामापरणबदवसहस्त्रावामध्येपा च याना देवाना दवीमामाधिपत्य पौरपत्य स्वामित्व प्रतत्व महत्तरकस्यमाघरसेनापायच फारयमाणा पालयमामा महतालतमस्यगाववादिवतगीतसतालसुडिपपनमदम्पदुमयादिवरवेव दिव्यामि प्रोगप्रोगानि मुजामा विरारम्ति । चमरयति मोपत्रोप्ने पसुरफुमारेन्प्रो असुरकुमारराजानी परिवस तः काला ममानीतशोपों मौलगुटिका गवतातसीकुसमप्रकाश विकसितशतपत्रमिर्मत शीतरचयायमपमा गरुळायवचनासा उपचिवधिताप्रपासपिम्वविनाघरोप्ठाः पारकुरसधिसकलविमलमिमसदापयनशारागोपीरन्दो AAPAARADEI JENDARI त्यण वहये थसुरकुमारादेवा परिवसत्ति काठा लोहितरका वियोठा घपलपुप्फदता शसियकेसा यामेयकु उधरा थचदणाणुलिप्तगत्ता ईसीसिलिघपुप्फपगासाइ शसकिलठाइ सुजमाइ वत्याइ पयरपरिहिया वय घ पढम समहकता विहय च सपष्ता नद्दे जोछणे बहमाणा तलनगयतुफियवरनूसणनिम्मलनिर यमणिरयणममियनुया दसमुष्ठामझियग्गहत्या चूफामणिविचितचिधगता सुरुवा महिडीया महसुइया म मायसा महक्षला महाणुनागा महासोका हारविराइयवत्या कवायतुझिययनियनुया शगयकुलमहगा यलकरणपीढघारी विषिष्तष्ठत्यालरणा विचितमालामउलिमा कलाणगपवरयत्यपरिहिया कल्लाणगपयर मालाणुठेघणधरा नासरोंदी पलयवनमालधरा दिशेण वणोण दिवेण गघेण दिशेण फासेण दिशेण सघय पेण दिवेण सहाणेण दिशाए इन्हीए विवाए जुइए दिशाए पनाए दिवाए लायाए थच्चीए दिशेण एएण दिवाए लेसाए दसदिसा उनोवेमाणा पन्नासेमाणा तेण तस्य साण २ नयणावाससयसस्साण साण २ पारम्पमान सत्ताने तोबस्पायसेपनाने । बानु बाबा असुरखुमारा देवाः परिवमन्ति । पासा तोहितामा बिम्बोष्ठा पासपुष्पदन्ता शिवोमा बामप (एबाविसबा) पासपरा भवनामुखिप्तमात्रा मिसपुष्पप्रवासानि सहिष्टानि मूलानिखापि प्रबरपरिपामा पर प्रपन पमतिबान्ता चीय पातमाता मध्ये यौबने वतमाना वसटिववरभूपया निमसमविरवमपितामा रमझानाताग्रहवा बामविविनिताः दुरण महरिका माइगुहा महापसा महावता महानुपाबा माता हारविराजिया बटटितमलित पारस्तमनस्कासपीठपारियो बिपिपासापरा विचित्रनामामोमिनमा लापवायरबसपारमिता पसारवारमा खानोपारा प्रापुरमोदपा (भापुरमरीता) प्रयम्बवनवासापर रिमेन ब दिनमान दिवसकरिव चयन रिक- । परिसाण सरण २ थणियाण साण २ थणियाहिवईण साण २ थायरस्कदेवसाहसीण थन्नेसि च वरूण नवणवासीण देवाणय देवीणय थाहेयचं पोरेवचं सामिप्तं नहित महत्तरंगत थाहाईसरसेणावच्च कारे माणे पालेमाणे महयाइयनहगीयवाइयततीतलतुझियघणमुइगपप्पयाइयरवेण दिवाइ भोगनोगाइ नु जेमाणा पिहरति । कहिण नते!दाहिणिलाण शसुरकुमारदेवाण पज्जप्तापजात्ताण ठाणा पणता ? कहिण नते ! दाहिणिलाण शसुरकुमारा देवा परिवसति ? गोयमा जवुद्दीवे२ मदरस्स पछयस्स दाहिणेण इमी सेरयणप्पनाए पुढयीए सीउत्तरजोयणसयसहस्सयाहलाए उवरि एग जोयणसहस्स उग्गाहिता हेठावेग जोयणसहस्स वजित्ता मज्के थठहचरजीयणसयसहस्से एस्यण दाहिणिल्लाण शसुरकुमाराण देयाण देवी णय चोत्तीस नवणावाससयसहस्सा हवतीति मस्काय तेण नवणा याहि वहा शतो चउरसा सोचेव वरण जाय पझिरुवा एत्यण दाहिणिलाण थसुरकुमारदेवाण पज्जतापत्रमाण ठाणा पणप्ता । तिमुवि लोगस्स सामानिसाना साधपवित्वामा सारसोबपासामा साई अग्रमहिषीचा सार्थक परिपदासापर अधिकारि सावर अधिकारि मवीमामात्मरक्षन्देवसासारामन्येपांच पडूना भवनवासिना देवाना देवीना च पारिपत्य पुरपवित्वं सामित्वं भाव महत्तरकस्वमायरसेनाप स्प बारपमानाः पासपमाना महवाहवमत्यगीतवादिवतन्त्रोतलतासतुधिपपनमदनपटुमवादिवरवेग दिव्यानि मोगमोमानि मुजामा विपर तिस्मिन् पदम्त । दधिर विद्यासुर माराम देवामा खानामि प्रतानि, कस्मिन् प्रदन्त । ददिवदिषासुरसुमारादवा परिवसन्ति । गौ तम । जम्हीपे मन्दरस्य पर्वत दतिखो रवमनापा पषिव्यामजीत्युत्तरयोजनवमासरालायामुपर्यफ योजनसानमुद्गहीत्वाघमा देवा मोजमसान वयित्वा मप्पे बरसतवियोवनमवसाने एतेषु दारिबात्यानामसुरखुमाराओं देवानां देवानां च चतुलिंगनवमापासयतमा स्थाई पवरपरिहिया वय च पदम समइक्वता विडयंच यसपती नढे जोवणे घहमाणा तलनगयतुझियप घरनूसणनिम्मलमणिरयमममियजुया दसमुहामक्रियग्गहत्या चूकामणिविचित्तचिघगता सुरुवा महिहीया महज्जया महायसा महला महाणुनागा महासोस्का हारविराइयवत्या फायतुझियथनियनुया अगदकुछ उमगतलफसपीढघारी विधिप्तहत्यानरणा विचिप्तमालामउलिमउका कालाणगपथरवत्यपरिहिया कला णगपवरमलापुलवणा नामुरयोंदी पलययणमालघरा दिशेण वरण दिवेण गघेण दिशेण फासेण दिशेण सठाणेण दिशाए इहीए विठाए जुईए दिवाए नासाए विछाए बायाए विद्याए पहाए दिवाए थचीए विशेष एएण विछाए लेसाए दसदिसा उनोवेमाणा पन्नासेमाणा तेण तत्य साण२ नवणावाससयसहस्सा ण साण२ सामाणियसाहस्सीण साण २ तायप्तीसाण साण २ ठोगपालाण साण २ वग्गमहिसीण साण २ परगतिवापसन्तोषपो इतनानिमोनीततप्ततपनीपरत्तातसतातुनिता पन्जनपनापाचपरममितियोगा। वामेपरवापराः गंदनलिममामा परीपञ्चासम्मपुप्पमकाबानि पशिष्टानि मुस्मारिपसार प्रबरपरिमिता बबब प्रधान समतिमाता रवीय संमाता प्रदेपोषने वर्तमाना तसापरिपपरपवनिर्मसमपिरवमरिकतानुबा दसमुद्रामसितापाला हाननिविरिमिता गुरपा महर्षिता मापुटा महापता महाबसा महानुमावा महाका हादिरावितवया यातुरिपचम्मितमा रामसरामसवर्षपीठचारियो विपिनारा विधिमातामौसिमुकुवा पसाबमरमपरिक्षिताः सासमारनासामुसपना बागुरपोरपा प्रबम्बमनासापरा पियन बन रम्पेन बाबन रिम्न बम विम्बेन वामन रिम्पदाथा दिनमा तया हिमपा बारिमा बारवा दिवा प्रया दिवमार्षिका दिमम पवेब दिया जामपा परिवापोवनामा प्रचारमामा नावामाने २) अलावापामारी जोयणसयसहस्सयाहलाए उवरि एग जोयणसहस्स उग्गाहित्ता हेठावेग जोयणसहस्स यजिता मज्जे थठहप्तरिजोयणसयसहस्से एत्यण उप्तरिल्लाण थसुरकुमाराण देवाण देवीणय तीस जयणायाससयसहस्सा नवतीति मरकाय तेण नवणा याहि वहा थतो चउरसा सेस जहा दाहिणिलाण जाय विहरति, यली इत्य पइरोयणिदे वइरोयणराया परियसइ, काले महानीलसरिसे जाय पन्नासेमाणे सेण तत्य तीसाए नयणा वाससयसहस्साण सहीए सामाणियसाहस्सीण तायत्तीसाए तावत्तीसगाण घउण्ह लोगपालाणं पचराह थग्गमद्विसीण सपरियाराण तिराह परिसाण सप्ताह थणियाण सत्तरह शणियाहिवईण चउराह सठीण शायररकदेवसाहस्सीण शणसि च यरुण उत्तरिल्लाण शसुरकुमाराण देवाणय देवीणय शाहेयञ्च पोरेवच्च जाय कुछमाणे विहरति । कहिण लते ! नागकुमाराण देवाण पजात्तापात्ताण ठाणा पणता, कहिणं पक्तस्प सहरण मतस्या रबमभापा पथिव्या पक्षात्युत्तरयोवनशतसहसवानल्या । उपर्येक योवनसासरावगासापरक योवनसरन पजपिस्वा मप्प ऽटसप्ततियोजनशतसहस्र अव पौत्तराणाममुरबुमाराणा रवाना देवीना प विशवनावासशतसहस्राणि प्रवन्तीति मयास्यातम् । तामि प्रवमानि मरिर्वत्तानि अन्तयतुरखापि तप या दाक्षिणात्यविहरन्ति । यलो पत्र वारोषनन्द्रो वारोचमराजा परिवसति कालो महानील सदृशो मावरायमान सत्र गित् भवनावासशवसहस्रावि पष्ठिसस्याकसामामिवसावाणा प्रतियत्या त्रायधिशरवाना चतुणा लोकपाला मां पचानामग्रमहिपापा सपरिवारा तिसखा परिपदा सप्तामामनीमाना सप्तामामनीबाधिपतोना चतु पठित्तास्मरचकदेवमासापामायेपा वामा मौसरिणापामसुरतुमारापा देवामा घ दीमा शधिपत्य पुरोशत्तल यावरणाचा विहरन्ति । म भदन्त । नाममुमाराणा देवाना पर्याप्तापयाताना त्यानानि प्राप्तानि, नदन्त । मागनमारा दवा परिषसन्ति । गौतम । एतस्या रवमनायाः पुषिष्या भगोत्युत्तरयोजनात SHREEN- सखेलइनागे, तत्यण यहवे दाहिणिला थसुरकुमारदेवा देवीन परियसति काला लोहितरका तहेव जाय नुजेमाणे विहरति , एव सध्य नाणियछ नवणवासीण , चमरे इत्य थसुरकुमारिदे शसुरकुमारराया प रियस काले महानीलसरिसे जाय पहासेमाणे सेण तत्य चउप्तीसाए नयणावाससयसहस्साण घउसष्ठीए सामाणियसाहस्सीण तायतीसाए तायप्तीसगाण घउण्ह लोगपालाण पचएह शग्गमहिसीण सपरिवाण तिरह परिसाण सप्ताह थणियाण सप्तरह थणियाहिबईण चउराह च चउसठीण शायरस्कदेवसाहस्सीण थन्लेसिं च यज्ञण दाहिणिलाण देवाण देवीणय थाहेवञ्च पोरेवञ्च जाय विहरति । कहिण नते । उप्तरि प्लाण शसुरकुमाराण देवाण पञप्तापज्जताण ठाणा पणता । कहिण नते ! उप्तरिला शसुरकुमारा देवा परिवसति ? गोयमा ! जयुद्दीवे दीये मदरस्स पछयस्स उतरेण इमीसे रयणप्पनाए पुढयाए थसीउत्तर प्रावि प्रवचीत्वासातम् । वानि प्रवनानि रिचानि अन्तचतुरतापि सोचेव बपवो यावत्प्रतिरपा पवेषु दाक्षिणात्यानामसुरकुमारदेवानां पर्याप्तापर्याप्ताना सानानि प्रतानि । विद्याप सोबरसातस्मयमागे तनु वावो दाधिस्या सुरकुमारदेवा देव्यय परिवसन्ति पासा सोहि गदा तव पाबनुमामाना विहरन्ति । एष सर्वत्र भावीय मानवासिनो धमरो आ परशुमारेन्द्रो अमरकुमाररावा परिवसति वाले महा नामसदृशो पावरमवापमानः सा चतुसिंधत्भवमानासमतसहलायां पापाप्ठतमे सामानिमामार्ग प्रयनिशे अपलिंगदामा चतुबा तोष पाताना पनामाममहिषीमा परिवाराचं विसर्ग परिपर्दा समानामनीबानां समानामनीवारिपामा तुतुबधिबामामात्मरकपदेष सामाधामन्येषा सपना दाक्षिणात्याना देवाना देगाना चापिपल्प पौरपत्वं पारिन्ति । अस्मिा मान्स । पोतरावामनुरखमाराण देवानां पोसाप साना सानानि ममामि । मिनु भएच । चौधरा पुरणमारा देव परिवचिनौतम | बागीपे होपे नगरका ION जिप्ता मज्के थठहत्तरिजोयणसयंसहस्से एत्यण दाहिणिलाण नागकुमाराण देवाण चोंयालीसं नवणावा ससयसहस्सा हवतीति मरकाय, तेण जयणा याहि वहा जाव पफिरूया एत्यण दाहिणिलाण नागकुमाराण पजाप्तापजताण ठाणा पणता, तिसुधि लोगस्स शसखेडाहन्नागे एत्यण बहवे दाहिणिलाण नागकुमारा देवा परियसति महिडिया जाव विहरति । धरणे एत्य नागकुमारिदे नागकुमारराया परिवसति महिहिए जाव पन्नासेमाणे सेण तत्य चोयालीसाए नवणावाससयसहस्साण बराह सामाणियसाहस्सीण तावतीसाए तायतीसगाण चउण्ड लोगपालाण बराह चग्गमहिसीण सपरियाराण तिरह परिसाण सप्ताह थणियाण सप्ताह शुणियाहियईण चउवीसाए शायररकदेवसाहस्सीण शन्नेसिं च यणं दाहिणिलाण नागकुमाराण देयाणय देवीणय शाहेवच्च पोरंयच्च जाय कुछमाणे विहरति । कहिण नंते ! उप्तरिल्लाण नागकुमाराण दे ANOARPAHL- IIMIREONI C पयित्वा मप्येप्टसप्ततियोवमशतसहस्र पत्र दापिपात्यानां नागकुमाराणो देवानां चतुषत्वारिंशजवावासेमतमात्राणि प्रवन्तीत्याश्यातम् । तामि प्रवनामि धरितामि यावरप्रतिपापि अव दाक्षिणात्याना मागकुमाराणा पर्याप्तापर्याप्ताना स्थानानि प्रतानि । विधपि लोकस्यासस्ये पमान पत्र पावो दापिणास्पा मागकुमारववापरिवसन्ति माचिका यावद्विपरन्ति । परण थाप नागकुमारेन्द्रो मागकुमारराणा परिवसति महर्दियो पावरप्रकाशमान का पतपस्वारिंशजवनावासपतसालापा पमा सामानिवसहस्रारा पखिंचात् धापत्रिकामा चतुणी लोकपालानां पसामग्रममिपीमा सपरिवाराचा तिसग परिपदा सप्तामामनोकामा सप्तामामनीकाधिपतीमा चतुषिशस्यास्मरदादेवसहस्राणा मम्पेषां च य मा दाक्षिणात्यामा मागमारावा देवामां देना च पापिपत्य पुरोवर्तिवं यावत्कुर्वाणा विहरम्ति । मदन्त । भौतरिवाणा मागमुमारामा दवाना पोसापांशाना स्थानानि प्रतानि । मदच । नागकुमारा भौचरिका दवा परिवसन्ति ! गौतम । बम्यूहीपे द्वीपे मन्दरस्य पर्वत नते । नागकुमारा देया परिवसति ? गोयमा ! इमीसे रयणप्पनाए पुनधींए वसीउत्तरजोयणसयसहस्स याहलाए उपरि एग जोयणसहस्सं वजिऊण मके शहप्तरिजोयणसयसहस्से एत्यण नागकुमाराण देवाण पजसापजताण चुलसीइनवणावाससयसहस्सा हवतीति मरक्राय सेण नवणा वाहि यहा तो चउर सा जाय पनिरुवा तत्यण नागकुमाराण पाप्तापात्ताण ठाणा पणत्ता । तिसुवि लोगस्स शसखेजाइ नागे सत्यण यहये नागकुमारा देवा परिवसति, महिड्डिया महजडया सेस जहा चहियाण जाय विहरति धरणग्याणदा एत्य दुवे नागकुमाररायाणो परिवसति महिडिया सेस जहा हियाण जाव विहरति। कहिण नते ! दाहिणिलाणनागकुमाराण देवाण पजाप्तापाठाण ठाणा पणता । कहिण नते ! दाहिणिला नागकुमारादेवा परिवसति ? गोयमा । जयूद्दीवे २ मदरस्स पछयस्स दाहिणेण तुमासे रयणप्पनाए पुढं वाए इसीउत्तरजोयणसयसहस्सयाहलाए उरि एग जोयणसहस्स उग्गाहिता हेठायेग जोयणसहस्स व SEEDLEMUIDAIA गत माहवाबाउपरि एक पोधनसाहस समित्या पुनमचे बसमतियोजनमतमातेचा नागनाराम देवामा पपामापर्याप्तामा चतुरमी तिभवनावापतकालागि प्रबन्नीत्यासातम्, तानि प्रवनानि रितानि सन्तातुरक्षादि पावत्प्रतिद्वपारिता नानकुमाराचा पर्याहापर्ण मामा खानानि ममानि । विपि सोपसारस्पेयमान तापावो नागकुमारदवार परिवति मारिन महातिमा परिवाना पागारति। परन्तामन्ना बाको मानकुमारराबानो पारवति माषिको पौषिवामा पारिति ।पर। रातिाल मानकुमारा देगाना पर्याप्तायोप्तामा सानामि मातानि पान । विगवनानमारमा परिवति । पौतम । बीपीप मनरल पदमा रणि एका रापचिमा पीपरीवनयापारलावा पोषणामामा पसार पजाप्ताण ठाणा पणता । तिमुवि लोगस्स शसखेजहनागे, तत्यण बहवे सुवन्नकुमारा देवा परिवसति महिडिया सेस जहा चहियाण जाव विहरति, वेणुदेय वेणुदालीय इत्य दुवे सुवरसकुमारिदा सुवन्नकुमार रायाणी परिषसति महिहिया जाय यिहरति । कहिण नते! दाहाणलाण सुवलकुमाराण पजस्तापाता ण ठाणा पणप्ता। कहिण नते! दाहिणिला सुबलकुमारा देवा परिवसति? गोयमा । इमीसे जाय मज्के थठहप्तरिजोयणसयसहस्से एत्यण दाहिणलाण सुवणकुमाराण थठतीस नवणायाससहस्सा हवतीति मस्काय, तेण जयणा याहि बहा जाव पफिरुवा, तत्यण दाहिणिलाण सुधमकुमाराण पजातापजाताण ठाणा पणता , तिमुधि लोगस्स शसखेजाइनागे, एत्यण यहवे सुवणकुमारा देवा परिवसति । येणुदेवे हत्य सुवनिदे सुवणकुमारराया परिषसति सेस जहा नागकुमाराण । कहिण नते ! उत्तरिल्लाण सुबन्नकु माराण देवाण पजाप्तापजाताण ठाणा पमप्ता । कहिण नते ! उत्तरिल्ला सुघणकुमारा परिवसति ? गोय अस्मासंपेपमागमा धावा मुपकुमारा देवाः परिवसन्ति माधिकार शेप योपिचानां पापविरन्ति येषुदेवो पदासीप प्रत्र ही मुपर्णकुमा रेन्द्री मुवनकुमाररामानी पावरपरिवसत मासिषी पावहिरति । प्रदन्न । दाक्षिणात्याना सुपर्वकुमाराणा देवाना पर्याप्तापर्याप्ताना स्या मानि प्रथमामि । प्रदन्त । वाणिवाया सुपरभुमारदेवाः परिषसम्ति ? गौतम । मतस्या यावन्मध्य सप्तवियोजनाममात्र मा दाक्षिणा त्यानी सुपर्णकुमाराचामटत्रिशवनावासशतमामाचि प्रवन्तीत्यास्यातम् । तानि प्रपनानि परिर्वतानि पावरप्रतिरूपापि तप दाक्षिणात्याना सु पर्पकुमाराला पर्याप्तापर्याप्तामा स्थानानि प्रतानि विपि सोस्पास होपनार्ग पत्र यावा सुपणनुमारादेवाः परिवसन्ति । वेणुदेवोत्र सुपर्णेन्द्रो सुपाबुमारराजा परिवमति । श्रेप पपा नाममारावाम् । व पदव ! मौतरिवावा सुपरमाराचा दवाना पर्याप्तापर्यासाला स्थानानि प्रय याण पज्जतापजताणं ठाणा पणता, कहिण नवे ! उत्तरिला नागकुमारा देवा परिवसति ? गोयमा ! जधूवीवेर मदरस्स पक्षमस्स उप्तरेण इमीसे रयणप्पनाए पुढवीए असीउप्तरजोयणसयसहस्सयाहल्लाए उ वरिश एग जोयणसहस्स उग्गाहिता हेकावेग जोयणसहस्स वजिप्ता मज्के श्यछहप्तरिजोयणसयसहस्से एत्यण उप्तरिलाण नागकुमाराण देवाण चप्तालीस नवणावाससयसहस्सा हवतीति मरकार्य , तेण जयणा याहि यहा सेस जहा दाहिणिलाण जाय विहरति, नूयाणढे उत्य नागकुमारिदे नागकुमारराया परियस महि हिए जाय पन्नासेमाणे सेण तत्य घत्तालीसाए नघणाघाससयसहस्साण थाहेवच जाव विहरह । कहिण जते ! सुयशकुमाराण देवाण पजप्तापाताण ठाणा पसत्ता । कहिण नते ! सुवरणकुमारा देवा परिवस सि ? गोपमा ! हमीसे रयणप्पनाए पुढवीए जाय एत्यण सुयमकुमाराण देवाण वायप्तरिजवणावाससय सहस्सा हवतीति मस्काय, तेण नयणा याहि घटा जाय पनिया तत्यण सुवणकुमाराण देवाण पळाप्ता म उतरेप एतमा राममाया पचिमा पीपुत्तरमोबनमतमामात्याया उपक योजनासमबपासा पसारेव योजना बमपिता महसप्ततियोत्रमयवसहने पर चौतरिवानानकुमारा देगा चमत्वारिंभावनाधतानाति भवतीत्यास्यातम् । तानि प्रबमा नि पहिणतानि से पचा वापिसात्मामा पाहिन्ति । पूवानन्दोत्र नागडमारनो मामबुमाररामा परिणपति बारिणे वागत् प्रवासमा रता पबवारिपबमावासमतवापानी पारिति। मदन । छपरामारा पर्याप्तापोहाना खानानि प्रमानि पाच । उपनारा देवाः परिषसन्ति ? नौतम । एतमा बनाया। पपिमा बाबा सपनाराबानो मिति नामावतार सोलासातम् । वानि पवनानि पितानि पावरतिपारितापपुनाराम रेवामा पीतापोहायो नाबावियामि । धि नेशमिययाहणे पत्नजणेयमहाघोसे ॥ ७॥ उत्तरिलाण जाव विहरति, कालाशसुरकुमारा नागाउदहीयप मुरादोवि । यरकणगणिहसगोरा होतिसुवमादिसाणिया ॥ १ ॥ उत्तत्तकणगवन्ना विधग्गीयहोति दीवाय । सामापियगुवया वाउकुमारामुणेयछा ॥२॥ श्वसुरेसुहोतिरत्ता सिलिछपुप्फप्पन्नातहाउदही। था सासययसणघरा होतिसुवणादिसायणिया ॥ ३ ॥ नीलाणुरागवसणा विभग्गीयहोतिदीवाय । सज्जाणु रागवसणा वाउकुमारामुणेयहा ॥ १ ॥ कहिण नते ! वाणमतराण देवाण पातापात्ताण ठाणा पणत्ता, कहिण जते ! याणमतरा देवा परिवसति ? गोयमा ! इमीसे रयणप्पनाए पुढवीए रयणमयस्स कस्स जोयणसहस्सवाहलस्स उपरि एग जोयणसय उग्गाहिता हिठायि एग जोयणसय वजिता मज्जे शठसु जीयणसएसु एत्यण वाणमतराण देवाण तिरियमसखेजा नोमेजा नगरावाससयसहस्सा हवतीति मस्काय तेण नोमेशा णगरा वाहि यहा तो चउरसा थहे पुस्करकनियासठाणसठिया उकिनतरपि HERSITERAREERa2 ! HdcoCICIREDEEMEERPRADE रिया यावद्विारन्ति । कासामसुरपुमारा: मामोदपीपारदरौदीस्ता । वरसममिक्सगौरा मन्तिसुपणदिसमानता ॥१॥ उसप्तफरसवर्णा यि युदग्मीचनमन्तिवापाच ॥ श्यामा मियनुवर्णाः वायुमारायचातव्याः ॥२॥ अमरामवम्तिरता सिलीग्ध्रपुष्यममात्योदधयः ॥ पाशाधवषसम पराः भवन्तिमुपयादिसनिवा' । ३ - नासानुरागवसना विपुदग्मी धनम्ति होपाय । सन्ध्यामुरागवसना पायुकुमाराभनुमातण्या ॥४॥ मदन्न । वामध्यतरापा देवाना स्थानामि प्राप्तानि व मदन्त । वामष्यातरा देवाः परिवसन्ति गौतम । एवस्या रबप्रमायाः पथिव्या रखमप स्प बाप पोवनशतसहसूधारस्पस्य उपर्यंत मोजमसहसूमवगामा ऽघतादेवं योबनसान वापिस्वा मध्ये अष्टपु योजनसाप पत्र यामष्य राब देशमा वियमसम्पपानि नौमेशनगरापाशवमामाचि नवचीत्यासावम् । ते नौमया मगरा परिर्वत्ता प्रवचतुरमा मध पुष्परार्णिका .
मा ! इमीसे रयणप्पनाए जावं एत्यण उष्तरिलाण सुषमाकुमाराणे यसध्या नणिया तहा सेसाणयि चौद सरह इदाणं नाणियहा नवरत्नवणनाणतं इदाणनाणप्तं पण नाणतं परिहाणनाणत्त च इमाहिगाहाहि शाणुगत;-धोवठीयमराण धुलसीतावहोइनागाण । यायप्तरिसुवरखे वाउकुमाराणनमउई ॥ १ ॥ दीपदिसाउदहीप विज्युकुमारिदपणियमग्गीण । बराहपिजुयलयाण बायप्तरिमोसयसहस्सा ॥२॥ घोप्ती साचोयाठा वतीसघहोइसयसहस्साइ । पसाचत्तालीसा दाहिणहोतिन्जयणाइ ॥३॥ तीसाचप्तालीसा घोप्तीसचेवसयसहस्साइ । बायालादप्तीसा उत्तरहोंविनवणाइ ॥ १॥ चउसहीसाठीखलु बच्चसहस्सा घरषजाण । सामाणियाउएए पउग्गुणाथायररका ॥५॥ चमरेधरणेतहवे णुदेवहरिकतथिग्गिसोहेय। पुखेजलकतेय शमिययेष्ठयेयधोसेय ॥ ६ ॥ बलिनूयाणदेशे णुदालीहरिस्सहेशग्गिमाणययिसि । जलप्प सामिपाचा चौतरिया नुपर्गबुमारा परिवन्ति मोतम । एतला बनाना पावत् पा गौतरिवावा भुपनाराव पता न बिता तथा वाममपि चतुरेबाना मिदानामपि प्रतिमा मबर प्रबननामावमिन्दारा भानावं मामाल परिपानमामा तानिर्माता निरनुमान बन् । पारितुराणां चतुरमीतिरेव प्रबतिमानानाम् । सप्ततिाप बाशुमारेषुपता ॥१॥ीपरिगुरतीना वित्युमारे नसनितमानमान् पक्षामपिमुपसवाना बद्तमतितमतमानम् ॥२॥ चतबिंबवारिवत् महमितिशतवान् । पंचायपतुबत्ता रिवत् पपिपतोप्रविमानानिमित्वारिंधत् चतुतिगालि पद्धत्वारिंगरपाय दुतरोननिभवनानि चतुः पाटपहियामुपद गावालपुरावान् । सामानिचालत चतुपाचालकान् । ५ वरपरीतका गरिमाला पूर्ण सवादोबा निवापूवानमाराविधिभिजामविMatsmanाची...
खेजाइनागे तत्यण यह वाणमतरा देवा परिवसति तजहा-पिसाया नया जरका रकसा फितरा किपुरि सा नुयगवतिणोय महाकाया गधगणा य निउणगधवगीतरडणी शणवणियपणवलियइसिवाइयतूपवा इय कदीय महाकदीय कोहरुपयगदेया ॥१॥ चवलचचलचिप्तकीलणदवप्पिया गहिरहसियपिया गीयणि धरती वणमालामेलमउलकुम्लसच्छदपिउहियारणचारुनसणधरा सहोयसुरनिकुसुमसुरइयपलबसोहत फतवियसितचितवनमालरत्यवच्छा कामकामा कामख्यदेवघरा नाणाधिहयनरागवरवत्याललतचिप्तचिल्ल गणिवसणा विविहदेसीणेयत्यगहियःसा समुइयकतप्पकलहकलिकोलाहलप्पिया हासयोलवजाला शसि मोग्गरसप्तिकुतहत्या शणेगमणिरयणयिविहनिजुप्तविचित्तचिधगयासुरया महिडिया महझुतिया महायसा महायला महाणुनागा महासोरका हारविराइययच्छा कागतुझिययनियनुया मगयकुऊउमगाजुयलक यापीठधारी विचितहत्यानरणा विचितमालामउलिकालाणगपवरवत्यपरिहिया कालाणगपवरमलाणुलेवणध रापमा सिमरा विम्पुम्पा मुबमपतयव महावापा भन्म पवाय मिपुषगन्धवगीतरतपा, प्रवपक्षी पयपत्री शपिकादीधभूतवादी च । फन्दीप महाबन्दी गोपीवपतवय १॥ यतेप्टो देवविक्षपा, पलपसचित्तकोठमद्रप्रियाः गम्भीरसिताप्रपाः गीतनत्परतयो बममासापानमा टाळलखपयिविताराचाहनूपपपरा सर्व सरनियमममुरचितप्रसम्वोतमामशास्तविमितचित्रयममाप्सरचितवसा फामफामा बामपदस्परा नामाविषारापवरवानिमिण (दवीप्यमाम इस्पा) मिक्समा विविघदेशीनेपथ्यगीतयेपाः समुदितणम्पपश्चतापलिको सारसप्रिपा पासवोसपाला घाममुदरचलिम्ताला अमयमखिरवावविधनियुक्तविपिचिगता मुरुपा मासिका भातिका मपयशी मादता मानुभावा मपशाम्पा पारविराजितवमा बटाटसम्मतमुमा मादकुराउसमष्टगठमसापीठपारिको विपित्रासापरणा उठगनीरखायफलिहा पागारहालयकवाफतोरणपमिदुवारदेसनागा जतसयग्धिमुसलनुसढिपरिवारिया थ उम्जा सया जया सया गुप्ता थन्यालकुठरडयशयालकयवसमाठा खेमा सिवा किकरामरदकोवरस्कि या लाउलोहयमहिया गोसीससरसरतचदणददरदिपचगुलितठा उवधियचदणकलसा चदणधासुफयतो रणपडियारदेसनागा शासप्तोसप्तषिउठवहयग्धारियमलदामकलाया पचवन्नसरससुरनिमुक्तपृष्फपुजोव यारकलिया कालागुरुपयरफकुरुक्कतुरुक्कधूवमघमघतगघुछुयानिरामा सुगधयरगाधया गधवाहिनूया अच्छ रगणसघविकिमा दिधतुझियसहसपन्नदिया पागमाठाउठानिरामा सहरयणमया शच्छा सण्हा उठा घठा मघा नीरया निम्मठा निप्पका निक्ककाच्छाया सप्पना ससिरीया सउजोया पासादीया दरिसणिज्जा थनिम्या पफिसवा एत्यण याणमवराण देयाण पजतापजष्ठाण ठाणा पत्ता । तिसुवि लोगस्स इस SITAMARI - स्वानरलिया वीर्यान्सरविपुसनम्मीरशात पालिका प्रावाराहासम्पाटतोरवमतिद्वारदेसभामाः यायभिमुससनुशागिपरिवारिता पायोया। सदाबया बागुमा भष्ट चत्वारिसस्पोटरपितामचत्वारिबकतमासा मा मिना गिरामरदरापराधता सामोश्यमपिता गोभी परसरकारबचपनामितता परिचालनबसथा। चन्दनपटनुमततोरखपतिद्वारहमागा भावतोत्मविपुलवत्तापारिपनास्पदा मनापा। पनायतरसहरनिभुतपुथपुगोपगारमिता बासागुरुप्रबरकमलापमपमपायनानगम्पमानिरामा दुमन्यवरमपिता बन प्रतिभूता प्रोमबवियन रिम्पुटितमिनारम्पनिता पतापमानामानिरामा परिवमया मला हा पहारा भीरमरो निमसा निम सिमापा सम्मान पत्री वीपोता। प्रागातीया समोया चापपापा नाममनरा बानो पर्वाता पपीतामा सानानि मावि चिपि (भाने) रोमनापामा वामा पानपरा रेवापरिवतिया-विाचा पूजापा खेजहनागे तस्यण यहवे वाणमतरा देवा परिवसति तजहा-पिसाया नया जरका रकसा किनरा किपुरि सा नुयगवतिणोच महाकाया गघवगणा य निउणगधवगीतरडणो शणवणियपणपन्नियइसियाइयज्यवा इय कढीय महाकदीय कोहरुपयगदेवा ॥१॥ चवलचचलचिप्तकीलणदवप्पिया गहिरहसियपिया गीयणि घरती वणमालामेलमउलकुलसच्छदपिउछियानरणचारुनूसणधरा सहोयसुरनिकुसुमसुरइयपलवसोहत कतवियसितचितवनमाउरइयवच्छा कामकामा कामख्वदेहधरा नाणाविहयन्नरागधरवत्यललतचित्तचिल्ल गणिवसणा वियिहदेसीणेयत्यगहियत्रेसा समुइयकाप्पकलहकलिकोलाहलप्पिया हासयोलबजाला थसि मोग्गरसतिफुतहत्या शणेगमणिरयणधिविहनिजुप्तविचित्तचिधगयासुरुवा महिहिया महमुतिया महायसा महायला महाणुनागा महासोका हारविराइययच्छा कागतुफियथलियनुया मगयकुलमगजुयटक सपीठधारी विचिप्तहत्याजरणा विचिप्तमालामउलिकालाणगपवरवत्यपरिहिया कलाणगपवरमल्लाणुलवणध रापसा विना विम्पुरुषा मुनगपतपय महावापा गन्यमणाय निपुणगन्धवगीतरतपः, अपक्षीपणपत्रो शपिवादावननवादी च । सन्दीप महामन्दी बोपवलीवपतवय १५ एवेष्टो देवविक्षपा, चप्पसचितकोठमद्रप्रिया। मम्मोहसितप्रिया' गीतनत्यरसयो वममासापीठम फु टपालसमाविकुर्वितानरपवाहपूपपपराः सर्व कसरमिकुमुभसुरचितमप्लम्बशो नमामकासविसितचित्रवनमाप्तचितवनमा कामकामा कामपदेशपरा नामाविधवपरागवरवतविग्लिन (दीप्यमाम इस्यपा) मिवसना विविपदेशीनेपप्पगडीतवेपाः समुदितपन्दपकससिको लाइसप्रिया रामोसमासा घसिमुद्वरशक्तिमुतामा पबमरिमतिविपनियुत्तविधिगिता मुदपा मालिका महाद्युतिका गपचासो माइसा माानुभावा माशाच्या सरपिराविषयमः बटटिवम्मितनुजा भारततमप्टगरम्मतवापीठपारियो विचित्रासामरणा AMGARGnshi O DIRAL उठगनीरखायफलिहा पागारहालयकाफसोरणपमिडवारदेसन्नागा जतसयग्धिमुसलनुसढिपरियारिया श उज्जा सया जया सया गुप्ता वस्यालकुठरडयश्चयालकयषणमाला खेमा सिवा किकरामरतकोवरस्कि या लाउलोष्ठयमहिया गोसीससरसरतपदणदद्दरदिपचगुलिप्तला उवधियचंदणकलसा चदणघकसुकयती रणपटियारदेसन्नागा शासष्ठोसप्तविउलयबग्घारियमलदामफलाया पचयससरससुरनिमुक्तपुप्फपुजोव यारफठिया कालागुरुपयरकदुरुक्कसुरुक्तधूवमघमघतगछुयानिरामा सुगघयरगघिया गधवहिनया अच्छ रगणसघषिकिसा विचतुझिपसहसपलदिया पफागमालाउलान्निरामा सहरयणमया शच्छा सराहा लठा घठा मा नीरया निम्मला निप्पका निक्कका छाया सप्पना ससिरीया सउडोया पासादीया दरिसणिजा थनिरूया परिवा एव्यण याणमतराण देयाण पजतापज्जताणं ठाणा पयत्ता । विसुवि लोगस्स शस EUMATEHELHI पत्वानपतिता सान्तिरविपुसगन्मीरवातपसिबा भावाराहावापाटवोरवप्रतिगारोपभाना यासभिमुसलनुपपिपरिपारिता पायोध्या सदाबपावापुमा अष्टपस्वारिंगस्पोटभरविवारत्वारिपत्यतामाता मा शिवा दिरामराहोपरांतता सामोपहिताः नोभी बसरसरतानमारबत्तपनाकुलितमा उपचितवनबतचाः चन्दन घटसुझततोरवप्रतिहारजमाना भावतोत्नत्ताविपुलवत्तवाचारिथमावदा मस्तापाः पापपरसपुरनिमुक्तपुष्यपुत्रोपगारनिता बालानुरुप्रारमनरन्तुरापमपमपापबामनयनाभिरामा सुगबबरमपिता बन प्रतिभूता पप्परोमबमाविका मितिवनिमारसम्मनितापतापमानामानिरामा बरबानमा चारता मारा पत्ता पारा बीरमको मिममा निमत नियमानाः समाः पत्रीचा बोपोता। माया मनीपा जिला प्रतिया मरा रेवान पोहा पोमानां नाबानि मानि। शिपि (जाये) बोनामा पपा बानमारा या परिधि पवा-पिता नाश BREAMMINGEMENT रयणामयस्स फस्स जोयणसहस्सयाहलस्स उधरि एग जोयणसय उग्गाहिता हिठाग जोयणसय वाज चा मज्के थठसु जोयणसएस एत्यण पिसायाण देयाण तिरियमसखेजा जोमेज्जा नगरावाससयसहस्सा भवतीति मस्काय तेण नोमेजा नगरा याहिं वहा जहा रहिट नयणवसाने तहा नाणियहो जाव पमिक वा, एत्यण पिसायाण देवाण पळाप्तापजाताण ठाणा पणता, तिसुवि लोगस्स शसखेजाइनागे तत्यण यहये पिसाया परिवसति महिहिया जहा उहिया जाय विहरति , काला महाकाला इत्य दुवे पिसाय इदा पिसायरामाणो परिवसति, महिडिया महादया जाव विहरति । कहिण नते ! दाहिणिलाण पि सायाण देवाण ठाणा पणता । कहिण नते ! दाहिणिला पिसाया देवा परिवसति ? गो० ! जयूद्दीये २ मदरस्स पवयस्स दाहिणेण हमीसे रयणप्पनाए पुढवीए रयणामयस्स कास्स जोयणसहस्सवाहलस्स उवरि एग जोयणसय उग्गाहिता हिठावेग जोयणसय घडिआप्ता मज्के असु जोयणसएसु एत्यण दाहिणिलाण घई योजनग धजयित्वा मध्येऽष्टम योजमशवेघर पिशाचामा देवाना तिर्यगसोयानि मौमेयपनगरायासमतसम्राणि प्रयन्तीत्यास्यातम् । ते प्रोमेपा नगरा यरियता पपोधिको भवनवर सपा प्रपितो यावत्प्रतिरूपाः, पत्र पिशाचामा दयाना पयोप्तापर्याप्ताना स्थानानि मध सानि विपि सोपस्यासस्पेयनामं, तत्र यश्वा पिसापा: परिवसति मपाईमा योषिक्षा यावद्विारम्ति। फालमहाकासी पानी पिशाधे प्रो पिसावराजानी परिवसतः , माkिी मातिची पावहिारतः । नदना । दाक्षिणात्यामा पिशाचानां देवानां स्थानामि प्रतानि म मवम्त । दापिपात्या पिशाधा देवाः परिवसन्ति ? गौतम । जम्यूदीपे २ मन्दरस्य पर्यतस्य दक्षिणतोस्था रवमनाया पषिष्या रवमयस्य साया स्थ पोजमसएसपाहस्पस्योपप्पैक योजनावमयगामा पोषा योशमशवं वापिस्या मध्येऽष्टमु योधनशवधर दाक्षिणात्याना पिशाचाना देवाना .
रा नासुरयोंदी पलयघणमालघरा दिशेण धनेण दिशेण गधेण दिशेण फासेण दिशेणसठाणेण दिछाए इ हीए विवाए जूईए दिधाए पनाए दिशाए एच्छायाए दिशाए शचीए दिशेण एएण दिखाए ठेस्साए दसदि सा उज्जोयेमाणा पन्नासेमाणा तेण तत्य साण२ नोमेजाणगरावाससयसहस्साण शसखिजाण साण २ सामाणियसाइस्सीण साण२ वग्गमहिसाणं साण२ सपरिवाराण साण२ थणियाण साण२ थणियाहिय ईण साण २ शायरस्कदेयसाहस्सीप थपसि च यण याणमतराण देवाणय देवीणय शाहेयच्च पोरेयच्च सामिप्त नहित्त महप्तरगत्त थाणाईसरसेणावञ्च कारेमाणा पाठेमाणा महयाहयनहगीयवाइयततीतलताल तुझियघणमुगपप्पयाइयरवेण विद्याइ नोगनोगाइ जुजमाणा विहरति। कहिण नते! पिसायाण देवाण पञप्तापजाप्ताण ठाणा प० । कहिण जते ! पिसायादेवा परिवसति ? गो० ! इमीसे रयणप्पनाए पुढवीए । M-INDICE विचित्रमानानटार बस्मारवापरबसपरिहिवा पस्पारणमवरमास्यानुलेपनघरा प्रासुरगोम्दया प्रलम्बवममासपरा विष्यम वर्णन दिव्येन गाये दिन पाच दिन संसानेम दिसपा शमा दिपा गुस्सा दिया प्रनया दिया मायया दिव्येनापिया दिव्योम दिया सेक्स या वध दिस ग्रोवपन्न प्रनासपनले वा पा २ मोमेपनमरावासातसाता बस्यानो टेषां २ सामामिवसातारा खेपा चपारि पी सपरिवाराव नपा २ बनीबाना नपा २ बानीवाधिपतीना नेषा २ भात्मरदेवमातासामन्येपान बहना बानमनरावा बानो दे जीमानाधिपत्यं पुरोपतित्व मामित्त प्रर्तृत्व माचरणत्वमापरत्व सेनापति बना पाहयन्तो मावापतनस्पनीबारितम्बीततासटित धनसरापतुमबारिवरयंका रिमानि प्रोषमोनानिमुन्नानो मितिापरतापिशाचाना गाना पर्याप्तापर्याप्ताना लामानिममतानि म एच। पिछाचारमा परिपसचिरौतम! पहा बचाव पषिमा बमपस बास बीमामबारसमोर बोचनबनमध्यामा 1 -- HNAARI रयणामयस्स फस्स जोयणसहस्सयाहलस्स उयरि एग जोयणसय उग्गाहिता हिठावेग जोयणसय बडि त्ता मज्जे थठसु जोयणसएस एत्यण पिसायाण देवाण तिरियमसखेजा नोमेजा नगरायाससयसहस्सा नघतीति मरकाय तेण नोमेशा नगरा याहि यहा जहा हि नवणवसाने तहा नाणियछो जाय पफिक घा, एत्यण पिसायाण देवाण पजाज्ञापडाताण ठाणा पणता, तिमुवि लोगस्स शसखेडाइनागे तत्यण यहये पिसाया परियसति महिहिया जहा उहिया जाव विहरति , फाला महाकाला इत्य दुवे पिसाय इदा पिसायरायाणो परिवसति, महिड्डिया महइया जाव विहरति । कहिण नते । दाहिणिल्लाण पि सायाण देवाण ठाणा पणता । कहिण जते ! दाहिणिला पिसाया देवा परिवसति ? गो० । जवूद्दीवे २ मदरस्स पश्चयस्स दाहिणण इमी से रयणप्पनाए पुढधीए रयणामयस्स कास्स जोयणसहस्सघाहलस्स उवरि एग जोयणसय उग्गाहिता हिठावेग जोयणसय बमिता मऊ थम जोयणसएम एत्यण दाहिणिल्लाण पपई योजमराव वयित्वा मध्येऽसस योजमशवेपत्र पिशाचाना देवामा वियगस पानि मोमेयषमगरायासातसास्राणि प्रयन्तीत्यास्यातम् । से शीमेपा मगरा यरिवृत्ता यथोपियो प्रवमवयव तथा प्रपिवण्यो यावत्प्रतिसपाः, पत्र पिझापामा दधामा पर्याप्तापर्याप्तामा स्थानानि मध सानि विपि सोमस्यासस्पेयनाम, तत्र यहवा पिशाचा परिवसन्ति महर्डिबा यथोपिया पाषद्विारम्ति, बासमहापाली पात्रको पिशाघे दो पिझाघराजामौ परिवसता, मालिको महायुविधी यावविहरतः । मदन । दाक्षिणात्याना पिशाचाना देयाना स्थानानि प्रशतानि भदन्त । दाक्षिणात्याः पिशापा देवाः परिवसन्ति ? गौतम । जम्यूद्वीपे २ मन्दरस्य पवातस्य दक्षिणतोस्था रवमनाया पषिथ्या रवमयस्य काय स योजनसहसपाहत्यस्योपर्येव योजनामवमवगासा धरण योजना बयित्वा मध्येऽष्टमु योवमशतेघव दाक्षिणात्यानां पिशाधामा देवाना - acaCODEn पिसायाण देवाण तिरियमसखिया नोमेजा नगराधाससयसहस्सा हवतीति मरकाय, तेण जयणा जहा नहित जयणवस तहेय नाणियछी आय पकिरुया एत्यण दाहिणिलाण पिसायाण देवाण पजाप्तापजा ताण ठाणा पसत्ता । सिमुवि लोगस्स चसखेजाइनागे तत्यण यहये दाहिणिला पिमाया देवा परिवसति महिष्ठिया जहा नहिया जाव विहरति काठे जत्य पिमायहर पिसायराया परिवसति महिहिए जाव पन्ना सेमाणे सणं तत्य तिरियमसखेड्याण नोमेजा गराधामसयसहस्साण चउराह सामाणियसाहस्सीण चउण्ड शम्गमहिसीण सपरिधाराण तिराह परिसाण सप्ताह शुणियाण सप्ताह शणियाहिबईण सोउसरह शायर स्क्रदेवसाहस्सीण धन्लेसिष यण दाहिणिलाण याणमतराण देवाणय देवीणय शाहेबच जाय यिहरति । उत्तरिप्लाणं पुच्छा गो० ! अहेय दाहिणिलाण यन्तछया तहेव उत्तरिवाणपि नबर मदरस्स पछयस्स उप्तरे ण महाकाले जत्य पिसायइदे पिसायराया परिवसति जाय विहरति एष जहा पिसायाण तहा नुयाणपि तियसपानि प्रोमपवनमरावासाहवतानावि प्रतीति मया सातम् । त मौनेपा (वार) पोंपिको प्रबनना प्रतिवमी या परमतिहपा परिणामानां पिशापाना देगाना पर्वासापर्याप्तामा तामानि सतानि शिपि सोबलासपमान बायो रानिया स्मा पियाचा रेवा परिवसन्ति माया मानाप्रप्राय तिगमयानां प्रौपनगराबापताना पतमा सामानिषसाद ती तुमयमारपीनां सपरिवाराचा तिसता व समानामनीलामो समानामनीचाधिपतीमा दोहपानामालरमबारेमामा बाम दाक्षिणात्याना बानमारा देवानी रेगेना गावपाल यानि।चौतरिया पमा नौतम । बरे वारिपालना बत मवा वबोधरिचारापि भवर मगरकोपको माया पिबारेमा मिरामा परिमारिणि जाव गघाण नयर इदेस नाणत्तं नाणियष्ठ इमेणपि बिहिणा नूयाण सुरुयपफिरूवा जरकाण पुणनद्द माणिनद्द रस्कसाण जीममहानोमा किन्नराण किलरकि पुरुसा किपरिसाण सप्युरिसमहापुरिसा महोर गाण थडकायमहाकाया गयधाण गीतरईगीतजसा जावगीयजसे विहरति-कालयमहाकाले सुरुवपकि रुवपणनद्देय । शमरघडमाणनद्दे जीमेयतहामहानीमे ॥ १ ॥ फिलरकिपुरिसेखलु सप्पुरिसेखलुतहामहा पुरिसे । शडकाएमहाकाए गीयरतिचेयगीयजसे ॥ २ ॥ विहरति कहिण नते। शणवलियाण देवाण ठा णा प०, कहिण नत ! थणयनिया देवा परियसति गो० ! इमीसे रयणप्पनाए पुढवीए रयणामयस्स फस्स,जोयणसहस्सबाहालस्स उवरि हिठायएग जोयणसय वजिाप्ता मज्ने शठसु जोयणसएस थत्य ण शणवलियाण देवाण तिरियमसखिजा जवणा घाससयसहस्सा हवतीतिमरकाय तेण जाव पहिलवा MBER ! ICBAGLALIGARHIHIROIREHENaEALEDGE . पामा तपा भूतानामपि पाण्गन्पर्वायां नवरमिन्द्रप मानात्व भवितव्यममेन विधिमा भूतामा सुम्पप्रतिरूपी, मलाणा पूर्णमद्रमाणिजद्रो रस सां नौममहानीमा, विकराया विवरबिम्पुरुपौ। किम्पुरुपायर्या सत्परुपमहापुरुपो मोरगायामतिकायमहामायौ, गन्धर्वायां गौप्तरतिगोतय शाथ, पावविरतः । बालधमापाता सुरापप्रतिरूपपूर्णनद्राय । अमरपतिमापिनद्रो प्रीमयतयामतानीमा १५ बिभरविम्पुरुपोगल सत्पुरुप रास्लुतपामापुरुषः । प्रतिवायमहाकायो गीतरतिषीतयशाः ॥ २॥ विहरति । नवम्त । प्रपत्रिकामा देवानां स्वामामि मतामि, स मदन । प्रविना दवा परिवसन्ति ? गौतम । चस्या रयमनाया पाचव्या रवमयस्य कायमस्य योजनसासवारस्पस्योपरि अपयन पोजमशत पजपिस्वा मध्येष्टमु पोजमशतधधारपक्षिसानां देवामा तियगमलेयान ममावासगतमासावि भवतीति मपास्पातम् । तेच याषरमतिरूपा पघापपरिवाना देगाना स्थानामि मसामि । विधपि सोकस्यासस्यय भागं क्यापपत्रिका दवा परिवसम्ति मार्मिका या पिक्षाचा यावहिप INGHREE पिसायाण देवाण सिरियमसखिजा नोमेजा नगरावाससयसहस्सा हवतीति मस्कार्य, तेण नवगा जहा तहि जयणवा तहेय नाणियछो जाय पफिरुवा एत्यण दाहिणिलाण पिसायाण देवाण पसप्तापजा ताण ठाणा पमत्ता । तिमुधि लोगस्स छसखेडाउन्नागे तत्यण घहये दाहिणिल्ला पिमाया देवा परिवसति महिहिया जहा नहिया जाय विहरति काले जत्य पिमायहर पिसायराया परिवसति महिहिए जाव पन्ना सेमाण सेण तस्य तिरियमसखेज्जाण नोमेजा णगरावामसयसहस्साण घउरह सामाणियसाहसीण चउराह धम्गमडिसीज सपरिवाराण तिरह परिसाण सप्ताह शुणियाण सप्तरह शणियाहिबईण सोउसरह शायर स्कदेशसाहस्सीम शुन्लेसिच बचण दाहिणिलाण याणमतराम देवाणय देवीणय शाहेबच जाय यिहरति । उत्तरिल्लाण पुच्छा गो०!जहेय दाहिणिलाण यन्नध्या तहेव उप्तरिल्लाणपि नबर मदरस्स पछयस्स उप्तरे प महाकाले जत्य पिसायइदे पिसायराया परिवसति जाव विहरति एष जहा पिसायाण तहा नूयाणपि तिमनपानि प्रोमपनगराबासमतमातापि प्रबन्तीति मयासातम् । त भोपा (इत्यादि) पोषिको प्रामास प्रावतको पा बहमतिरूपा तास्मिास्यानो पिशाचाना रेबामा पर्याप्तापर्याप्तामा सानानि प्राप्तानि पिपि सोपमासम्पपमान जाबाको क्षिा वा पियाचा रेवा परिवति, मावा पावरप्रमावत तिगासेमामा श्रीममममराबापमतमासाची पतषां सामानिमार ती तुर्मानपरिषीका परिवारा तिता पस समानाममा बाना बनानामनीचाधिपताना बोहपानामालरपरेमामा बयाना पिलानो नामसराज रेवाना रेगैनो शरिपाप मारिन। पौरिचार्ग मा पोन । बलिलावा च बवा पवाचरिताराबविमवर बारसोपारको पहावा किसान विधामा परिवार का या जाव गघवाण नयर इदेस नाणत नाणियच इमेणपि यिहिणा नूयाण सुरुयपफिक्या जरकाण पुणानद्द माणिनद रस्कसाण नीममहानोमा किल्लराण किन्नरकिपुरुसा किपरिसाण सप्पुरिसमहापुरिसा महोर गाण शहकायमहाकाया गहाण गीतरईगीतजसा जायगीयजसे विहरति-कालयमहाकाले सुरुयपनि व्यपणनदेय । यमरघडमाणनद्दे नीमेयतहामहानीमे ॥ १ ॥ किन्लरकिपुरिसेखलु सप्पुरिसेखलुतहामहा पुरिसे । शहकाएमहाफाए गीयरतिचेवगीयजसे ॥ २ ॥ विहरति कहिण नते। शणवलियाण देवाण ठा णा प०, कहिण जते । शणयन्त्रिया देवा परिवसति गो० ! इमीसे रयणप्पनाए पुढवीए रयणामयस्स कस्स,जोयणसहस्सबाहलस्स उवरि हिठायएग जोयणसय वजिाप्ता मज्जे शठस जोयणसएस शत्य ण शणवनियाण देवाण तिरियमसखिमा लवणा याससयसहस्सा हवतीतिमरकाय तेण जाव पकिवा ISISCELEBा PRODARASHREEBPGT पाना तथा मूतानामपि यावदापर्वा नवरमिन्द्रपु मानास्व प्रस्तिव्यमनेन विपिना पूताना सुरूपप्रतिरूपी, यहाणा पूर्ण नदमाणिनगी। रक्ष सां नीममहाप्रीमो, किनारामा बिवरबिम्पुरुपी, किम्पुरुपायां सस्परुपमहापुरुपो मोरगागामविकायमहाकापो, गन्धोग गीतरतिगातय शाव, पारस । पाप्लवमहाबाला पुरुपप्रतिरुपपनद्राय । अमरपतिमाणिनद्रो नीमयतयामहाप्नीमा ॥१॥ विमरबिम्पुरुपौसलु सत्पुरुष पलुप्तपामहापुरुपः । प्राप्तिकायमहाकापी नीतरतिषगीतपशा' ॥२॥ विरप्ति । मदम्त । अपमिकामा देवामा स्वामानि प्रचतानि छ प्रदम्य । पपपत्रिका दवाः परिवसन्ति । गौतम । अस्या रवपनायाः पाचव्या रवमयस्य मापठस्य योगमसहस्रयाइल्पस्योपरि प्रपन योजनशासं वमपित्वा मध्येष्टमु योजमझतेघशपपरिवाना देयामा तियगमलेगााम मवानावासशतमात्राणि भवन्तीति मयास्याप्तम् । तेच यापरमतिरपार प्रप्रापपरिवाना देवानां त्यानानि मनमानि । विपि सोक्सासस्यय भाग तयाणपत्रिका दवाः परिवसन्ति महर्दिया या पिशाचा यापक्षिा , NAMAIR-RHI एत्यण शुणवलिया देवाण ठाणा प०, उयवाएलो० समुग्धाएलो० सठाणेणलो० तत्यण धणयनिया देवा परिवसति महिहिया जहा पिसाया जाव विहरति सन्निहियसामाणा इत्य दुवे शणवलिदा श्रणयन्नि यकुमाररायाणो परिवसति महिहिया जहा कालमहाकाठा एव जहा कालमहाकालाण दोराहपि दाहिणि खाण उत्तरिलाणय नणिया तहा सनिहियसामाणाणपि नाणियष्ठा सगहणि गाहा-याणवलियपणवनिय इसियाहयनययाइएचेव । कदियमहाकदिय कुहळ्यपयगदेवाय हमे इदा-सनिहियासामाणा धाइविधाएय इसीयहसियाले ईस्सरमहेस्सरेविय हवसुनत्येविसालेय ॥१॥ हासेहासरईविय सेएयत्नयेतहामहासेए पयगेप यगपएषिय नेयहाशाणुपुछीए ॥२॥ कहिण नते। जोहसियाण देयाण पत्ताण२ ठाणा प०? कहिण नते। जोइसिया देवा परिवसति ? गो० इमीसे रयणप्पनाए पुढवीए यज्ञसमरमणिजामिनागा सक्षणउ इ जोयणसए उह उप्पहत्ता दसप्तरं जोयणसय याहल्ले तिरियमस खिो जोइसविसए एत्यण जोहसियाण रन्ति, समिहितसमानौ पाप दाबसविनावपनियराजानी परिवसतो मारिगे या बासमहाकासो एवं पथा बालमहापासपोडपो दो हिवात्ययो रोचारबाराय (व्यता) भाषता तपा सवितामानिवपोरपि भक्तिमा सङ्कविगाचा-प्रमाणिवपपालिका परिवारी पभूतबादी । पानीमाबन्दी बोसोवपरम सन्द्राः मविहित मामानो पावविधातपयवार्षिपालबरमहपरोसन प्राति अपलोविपासासोहामरतिवतु स्वेतालथा महास्वेता पतचा पतपदोपिच पातमा चाम्पूच ॥ २॥ भरन्थ । योनि बाबा देवानां पर्याप्तापपोतानां सामानि प्राप्तानि प्रान्त । प्योतिधारेगा: परिपतन्तिमौतम। चमा समाचार पधिमा समर मीया भूमिप्रापा समतियोवनयपूर मुत्पात रोचरं योबन बापत विर्षबमोविषिमनाविकाचा गाभा विषम देवाण तिरियमसखिया जोहसियविमाणावाससयसहस्सा हवतीतिमरकाय तेण विमाणा शक्षकयिठग सठाणसठिया सहफालियामया शडझगयमुसियपहसियाइय विविहमणिकणगरयणजत्तिचिप्ता बाउछुत विजयजयतीपागाच्छप्ताहच्छत्तकलिया तुगा गगनतलमहिलघमाणसिहरा जालतररयणपजरुम्मीलियछ मणिकणगथूनियागा वियसियसयपत्तपोझरीया तिलगरयणश्चदचित्ता नानामणिमयदामालकिया तो यहि च सराहा तवणिजरुइलयालु यापत्यका सुहफासा ससिरीयरुवा पासाईया टरिसणिज्जा थनिरुवा पभिरूया एत्यण जोइसियाण पजाप्ता२ ण ठाणा पणता, तिसुधि लोगस्स शससेजाइनागे तत्यण यहवे जोइसिया देया परिवसति तजहा-यहस्सईचदासूरामुक्कासणिच्छाराऊधूमकेतुबुधाश्शगारगा तत्ततवणि जाकणगया जेगहा जोइसमि चार चरति केत्तूयगतिरडया थठायीसइविहाय नस्कप्ता देययगणा ना णासठाणसठियाय पचवन्ना तारयान चयियलेस्साचारिणो थविस्साममालगई पत्तेय णामकपगफ़ि UNCEMENDOCAL-RRHOEAMNERARIOR सम्पयामि प्रपनायासतमानापि मवन्तीति मयास्यातम् । तानि विमानानि परपित्यबसस्थानसस्थितानि नयेस्पटिसमयामि चम्युदतोस्त तप्रसतप्रमासितामि विविधमविकमबरवनविचित्रागि तातोपतविनयवेदयतापतालसातिमलितामि तङ्गानि गगमवलानुलिसगिरा रापि वासातररवपारोन्मीसितमिय मचिकमका पिकानि विमितशतपत्रहरीतिलगरबाई चन्द्रपिशापि मानामपिमयदामालमृतानि मन्तवाहिय सवारि तपनीपसचिरवासुबाप्रतटानि सनरपाधि मन्त्रीस्वपारि प्रासादीयानि दर्शनीयानि पनिरूपाणि मतिरूपाणि पत्र ज्यो सिपापां पर्याप्तापांप्तामा स्थानामि प्रतानि विधपि लोशम्पासम्पेय माम तर पायो ज्योतिपदेयाः परिवसम्ति तपा-परस्पतय चन्द्राः सूर्या गुबा धर्मयरा राजवा कतवो बुधा भकारबास्तवपनीयक्षमवर्ग य ग्रह प्योतिष के धार परन्ति योतको गविरविता भ्रष्टाविविविधा यचिधमका महिहिया जाव प्पनासेमाणा तेण तत्य साण२ बिमाणायाससयसहस्साण साण२ सामाणि यसाहस्सीण साण २ थग्गमहिसीप सपरिवाराण साण २ परिसाण साण २ थणियाण साण २ थणि याहिपईण साण थायरकदेवसाहसीण थलेसि च यण जोहसियाण देवाणय देवीणय थाहेवच्च जाव विहरति घदिमसूरियाय एत्य दुवे जोइसिदा जोहसियरायाणो परिषसति महिष्टिया जाव पत्नासेमाणा ते ण तत्य साण २ जोइसियविमाणायाससयसहस्साण चउण्ह सामाणियसाहस्सीण घउएह शुग्गमहिसीण सपरिवाराण तिरह परिसाण सचराह थणियाण सत्तरह चणियाहिबईण सोउसयह थायरक्रदेवसाहस्सी ण जोइसियाण देवाणय देवीणय चाहेवच्च जाब विहरति । कहिण नते ! वेमाणियाण देवाण पत्तार ण ठाणा ५०? कहिण नते! वेमाणिया देवा परिवसत्ति ? गो०। इमीसे रयणप्पनाए पुढयीए बहुसमरम abc.. (अष्टावितिनम्मावा अधिविनाया सोशनिदा) नक्षत्रा देवनपा मानासत्यानसल्पिवाय पनवस्तारका (बाराएसपि) भवत्तिवतेश्या पारियो ऽविनाममासगतिका मस्येवं नामामपतिततिमबुटा मालिका पावरमनासयन्त तत्र वा २ बिमामामासहतवानामा से पो २ सामानिषसाना स्वेपो २ अपक्षपो सपरिवाराचा स्वेपा २ पपदा खेपा २ अनीतामा स्वेषा २ पनानाधिपताना स्वेषा २ बालर होतानाषा बन्धपान पाना पोतिपात रेवानां वीमामाधिपत्य पुराबत्तिल याति सूर्याचन्द्रमसौ पात्रोमोतिनो ज्योतिराबानो परिवाता मागे पासप्रापपोतो ना पो २ स्पातिकविमानावासातसावा तु नामानिमालामा बामपरिपोश सपरिवाराला मा पा समानामनोवामा समानाममोबापताना पोजमानामालरापाला मोतिचापानमा बमारेगाना पीनामाविषवं पाराभरका मानिवामी रेवामा पासापोहा मामा मार भगाया म णिजा नमिन्नागा उह चंदिमसूरियगहनस्कप्ततारामवाण याइ जोयणसयांइ यजइ जोयणसहस्सा इ यजगा जोयणकोही धजगा जोयणकामाकोशी उह दूर उप्पइसा एत्यण सोहम्मीसाणसणकु मारमाहिदयनलोगलतगमहामुक्तसहस्सारशाणयपाणयशारणथच्चुयगेविजाणुप्तरेसु तत्य एत्यण घेमाणि याण देवाण घउरासीइविमाणसयसहस्सा सत्ताणउईनयेसहस्सा तेवीस विमाणा हयतीतिमरकाय तेण विमाणा सहरयणामया थच्छा सराहा लठा घठा मठा नीरया निम्मला निप्पका निक्ककमच्छाया सप्पहा ससिरीया सउजोया पासादीया दरिसणिा शनिम्या पभिरुवा इत्यण वेमाणियाण देवाण पहाताप मसाण ठाणा प० तिमुवि लोगस्स शसखेजाइनागे तत्यण वहेवे वेमाणिया देवा परिवसति त०-सोह म्मीसाणसणकुमारमा िहदयनलोगलतगमहासुक्कासहस्सारवाणयपाणयथारणश्यच्चुयगेवेजागाणुप्तरोववाहया देया तेण मियमहिसवराहसीहबगलददुरहयगयवडनुयगखग्गउसनकविमिमपागठियचिधमउठा पसिढिल । AIMERFAILE देवाः परिवसन्ति । गौतम ! अस्या रवानाया पपिव्या बहुममरमपोपामिनागादू चन्द्रसूयग्रहमवतारादपाणा वमि पोवनशतानि य मि योजमसालाश वझो यो मनकोट्यो यमो योजनकोटीहोट्य अक्षु दूरमुत्पत्याष सौधर्मशानसनत्कुमारमाचन्द्रग्रजलाम्तमान सरस्रारानत मायतारवाष्पवषयवानुत्तरपु ततेपा पैमानिकाना देवानां चतुरशीतिषिमानयतसहस्राणि सप्तनवतिसहस्त्रापि त्रयोविशतिविमानामि नव नीति मयायातम , तानि मामानि सर्वरखमपानि प्रचामि अत्तानि लष्टानि पृष्ठामि मृष्टानि नीरवासि निमसानि मिप्यतामि मिफयटन स्वायानि सममापि सोद्योतामि प्रासादीयानि वशनीयामि प्रतिस्पागि प्रतिसपाणि पत्र वैमानिकामा देवामा पयोप्तापयातामा स्थानानि म सानि, विधपि खोबस्यालय मार्ग पर वायो मामिया देवा' परिवसन्धि तापा-सीधर्मशानसनरकुमारमात्रमासाम्यमुपसासाराम यविधमका महिहिया जाय प्पनासेमाणा तेण तत्य साण२ यिमाणायाससयसहस्साण साण२ सामाणि यसाहस्सीण साण २ चग्गमहिसीण सपरिवाराण साण २ परिसाण साण २ थणियाण साण २ थाण याहियइण साण२ थायरस्कदेवसाहस्सीण शासि च यरुण जोडसियाण देवाणय देवीणय शाहेवच्च जाय विहरति घदिमसूरियाय एत्य दुवे जोइसिदा जोहसियरायाणो परिवसति महिडिया जाय पनासेमाणा ते ण तत्य साण २ जोइसियविमाणाघाससयसहस्साण चउराह सामाणियसाहस्सीण चउरह शग्गमहिसीण सपरिधाराण तिराह परिसाण सत्तरह थणियाण सतरह थणियाहियईण सोलसरह थायरक्रदेवसाहस्सी ण जोइसियाण देवाणय देवीणय थाइवच्च जाय विहरति । कहिण नते ! वेमाणियाण देवाण पज्जत्तार ण ठाणा प०? कहिण नते! येमापिया देवा परियसति ? गो० ! इमीसे रयणप्पनाए पुढवीए बहुसमरम (पटाविपतिमप्साका प्रतिविमाद्या लोकमसिहा) मा देवगना नामासत्यामसरिखवाय परपसारमा (स्वारापोसीपि) प्रतिसेपया भारिणे ऽविधाममरासमतिका प्रस्पेर नामाप्राटितरिमटा मदिवा पावत्प्रनासपात से ता स्वेपा २ विमानावासपासावा से पा २ सामानिमामा स्वेवा पक्षिवीच सपरिवाराचा स्वेपा २ पपदा स्वेपा २ भनीबाना स्वेषा २ पनीवाधिपतीमा स्वेषा २ चात्मर होवसाम्रा अम्पानगो मोविशाल रेवामा वर्णमामाधिपत्य पुरोपत्तित्व पारमित पोचलममी पाप होमोसिनो न्योतिराशामा परिणतः, महाग बाबरमनासपनो तोता स्पो २ म्यातिविमानाबापतमालाको तुलनामानिमामाको तु पामग्रमापो सपरिवाराको पाप सप्तामामनीलामा सप्तामामनोवाचितामा पोहतानानातरमहावा नीतिवावगमम्मा एना देगाना रवीनानापिपल पारिभरच । मानिसाना साना पर्णतापोहानामानि बसालि मातिा DELHIRRIANDIDREममा. णिजामिनागा उह चंदिमसूरियगहनस्कप्ततारारुवाण वाइ जोयणसयाइ बऊइ जोयणसहस्सा इ यऊगा जोयणकाजी घजगान जोयणकामाकोशी उह दूर उप्पहत्ता एत्यण सोहम्मीसाणसण) मारमाहिदयनयोगलतगमहासुक्कसहस्सारशाणयपाणयशारणचन्नुयगेविजाणुतरेसु तत्य एत्यण वेमाणि याण देवाण चउरासीइविमाणसयसहस्सा सत्ताणउईनवेसहस्सा तेवीस यिमाणा हयतीतिमरकाय तेण विमाणा सधयणामया थच्छा सण्हा लठा घठा मठा नीरया निम्मला निप्पका निक्कककच्छाया सप्पहा ससिरीया सउलोया पासादीया दरिमणिका शुन्निनवा पलिया इत्यण वमाणियाण देवाण पहाताप जाताण ठाणा प० तिमुवि लोगस्स शसखेजइन्नागे तत्यण वह वेमाणिया देवा परिवसति त०-सोह मीसाणसणकुमारमा िहदयनछोगलतगमहासकामहस्सारवाणयपाणयथारणथम्यगेवेडागाणुप्तरोववाहया देवा तेण मियमहिसवराहसीबगलददुरहयगयवइनुयगखग्गउसनकयिभिमपागमियचिधमउमा पसिढिल RoRA देवा परिवसति । गौतम । अस्या रवानाया पषिष्या यासमरमगोपादमिमागावूलं चन्द्रम्पग्रहनक्षत्रतारामपाश यमि योजना तामिय मान पोजमसलाय ययो योजमकोट्यो पना योजनयोटीकोटय उसे दूरमुत्पपात्र सौधर्मशामसनत्कुमारमाइन्द्रमानसातपायामप्रसारानत मापतारणापतग्यपणामुप्तरय ततपा पैमानिकामा देवामा चतुरशीतिविमानगतसपस्राणि सप्तमयत्तिसहस्राणि प्रयोपिशतिविमानानि नय तीति मयाम्यातम, तानि विमामामि सर्परवमपानि प्रचामि अवानि लयानि पृष्टानि मष्टामि मीरणासि निर्मलामि निप्पयामि मिफरदन व्यापानि सम्मारि सोद्योतामि प्रासादीयामि दमानीपामि प्रजिम्पापि प्रतिरपाखि प्राय पैमामिफामा देवामा पर्याप्तापपासामा स्पामामि प्रय सामि रियपि तोवस्यामध्ये प्राग वर यायो मामिधा देवाः परिवसन्ति तद्यथा-मोधर्म थानसमस्कुमारमाश्त्रनामसान्तयमुपसासाराम ।
MDRIDHUSabaiCRI यरमउतिरीकधारिणो यरकुलुज्जोहयाणणा मउफदिप्तसिरया रताना पउमप्पहगोरा नासेया सुहाग घफासा उत्तमयेउक्षिणो पयरवस्थगधमल्लाणुलेवणधरा महिडिया महझुडया महायसा महला महाणुना गा महासोरका हारविराइययत्या फगतुझिययनियनुया गटकुलमठगातलकणपीढघारी विचित इत्यानरणा यिधिप्तमालामउठिकलाणपयरवस्यपरिहिया वाणगपयरमल्लाणुलेयणा नासुरयोदी पठयय णमाउघरा विशेष पनेणं दिशेण गघेण दिशेण फासेण दिशेण सघयणण दिछण सहाणेण दिवाए इहीए हिवाए जुईए दिशाए पनाए दिशाए छायाए दिखाए श्वञ्चीए दिक्षण तेएण दिवाए उसाए दसढिसा उ जोवेमाणा पनासेमाणा तेण तस्य साण २ त्रिमाणायाससयसहस्साण साण २ सामाणियसाहस्सीण सा ण २ तायवीसगाण साम २ लोगपाठाण साण २ श्रग्गमहिसीण सपरिवाराण साण २ परिसाण साण समावतारबाभुतपक्षेपकानुत्तरोपपातिचा बवा लेच मृगमहिपमराहसिबमलदरहपगजपत्तिनुजगारमाधिरिमरितमुकटाः प्रविषित रमाटावरीटपारिरी परपुगतापोतितामना मुकुटदीप्तहिरसा रतानाः परप्रगौरा प्रारमरा मुभव गमस्पर्शा उत्तमबुविधा प्रारमय स्वानुसपमारा मारिका महापुतिका महापझम महासा माानमा महेशासा हारविराजितापा बटाटित ललितनमा पर ग्रामसपाटनवातलायापीठचारियो मिषिमासागरा वितिमातामासिवस्वाचवायरवनपरिरात पसाबरमालानुसपना मासुबोन का प्रसाानमासपरा रिमेम बन रियो मापन रिमन प दिन संपपलम दिन खानन वियपा या विमपा पुत्व रिमा प्रमरा रिया चापमा रिमारिका रिमेनतेन रिपपापा शमि उपोतपन्तः प्रभारपात से ना को २ बिमानाबालबावाला जो स्पा २ सानानिसारवासारवाधिशबाना सांचोरपाबाना स्वेचा र प्रतिवाद परिवाराका रचा पाया।
थणियाण साण २ शणियादिवईण साण २ शायरस्कदेवसाहस्सीण शन्लेसिं च यक्षण वेमाणियाण देवाण देवीणय थाहेबच्च पोरेवच्च सामित्त नहित महतरगत्त शाणाहसरमणायच्च कारेमाणा पालंमाणा महयाइयनहगीयवाइयततीतलतालतुझियघणमुगपमुप्पयाइयरवेण दिवाइ नोगनोगाइ नुजमाण विह रति । कहिण नते । सोहम्मगदेवाण पजात्तापताण ठाणा प० कहिण नते! सोहम्मगदेवा परिवसति? गो० ! जयूद्दीवे २ मदरस्स पक्ष्यस्स दाहिणण इमीसे रयणप्पनाए पुढवीए बजसमरमणिजा नूमिना गाळ उह चदिमसूरियगहगणनस्कत्तताराण वज्ञणि जोयणसयाइ वणि जोयणसहस्साइ यज्ञणि जोयण सयसहस्साइ घजागा जोयणकोजी बजगान जोयणकोफाकोफी उह दूर उप्पहत्ता एत्यण सोहम्मे ना म कप्पे पत्नत्ते, पाचीणपकीणायते उदीणढाहिणविच्छिले शचदसठाणसठिए शच्चिमालिन्नासरासिघन्ना RIDARoooo AIADDHODHANSIDEasPEPPED पनोबाना स्वपा २ पनीमाधिपता स्वपा २ पास्मरणबदवसालापा पम्पा च पानां वैमामिहानां देवानां च कवीनां पापिपत्य पुरोवर्ति व मामित्वं मतृत्वं महत्तरबत्वमायरसेनापतित्व कुवता पासपतो विरम्ति महताहतनस्यनीतवावित्रतम्वीतलतासत्रुटित धनमवङ्गपदुमया वितरवेश दिव्यानि मागनागामि मुन्मानो विरान्त । नदन्त । मौषमबदेशमा पर्याप्तापर्कप्तामा स्वामानि मतानि, पदम्त । सोधम सदया परिवन्ति । मौतम । वम्याप २ मन्दरस्प पर्वतस्य दापयतो ऽस्या रखमनायाः पपिण्या यसमरमणीयामिभागास चन्द्रमयप पगमपत्रतारासपेन्या यमि पावनम्रतानि धमि योजनसहस्रापि यमि योजनशतसहस्राणि यझा पोजनकोट्या पझो योवनमाटीकोट्य नई दूरमुत्पत्यान सोधर्म माम फत्य प्राप्त प्राचीनतीचीमायतमढीचौनदासविस्ती पहचन्द्रसस्थानसस्थितमधिर्माताप्नासाराशिषाप्नं अस स्पया पोजनबोटयोऽसस्पेया योजनपोटीकोटप मापामविषम्मान्यामसरपया पासनकोटीकोट्या परिपण सर्वरबमय मच पावरमतिरूप पत्र P ने शसखेज्जा जोयणकोकीन सखेआ जोयणकोकाफोकी छायामविरकोण असखेमा जोयण कोकाकोशी परिरकेवेण सहरयाणामए अच्छे जाव परिये तस्यण सोहम्मगदेवाण यप्तीस विमाणायास सयसहस्सा हवतीतिमस्काय तेण यिमाणा सहरयणमया शछा जाव परिया तसिण विमाणाण यज मम्झदेसनाए पचवासएया पखप्ता, त०-चसोगवफसए सतयन्लयासए चपगवफसए घूयवफसए मज्जे तत्य सोहम्मवासए तेण कसया सवयणामया थत्या जाव पलिया, एत्यण सोहम्मगदेवाण पजाप्तार प ठाणा प०, सिमुबि लोगस्स शसस्त्रजन्नागे सत्यण यहवे सोहम्मगदेवा परिवसति मदिहिया जाय पत्ता सेमाणा तेण तस्य साण २ विमाणावासस यसहस्साण साण २ शुग्गमाहिसाण साण २ सामाणियसाहस्सी ण एवं जहेव उहियाण तहेय एतेसिपि नाणियच जाय थायररकदेवसाहस्सीण शोसि च यण सोह ममगकप्पयासीण येमाणियाण देवाण देवीणय थाहेवञ्च पोरेयश्च जाव विहरति । सके इस्य देविदे देव मौषमकोबा शानिनिमामागवतमालागि प्रवन्तीति मपायातम् तानि विमानानि सवरबमयामि मानि पावरप्रतिरूपाविसमा गि मामामा गुमपरेपमाम पंचायतता प्राप्तानापा-बसोबास्तमा पतपर्ण सम्पमतामतमको मधे का बोधर्मावतपयले गावसका सबरमनपा बा यावरप्रतिकृपा पत्र सौधर्मदेवानां पर्याप्तापपोताना सानानि प्रातानि, विपि सोमायस्पेयं माप ता बाबा कोषमवरमा परिवन्ति महरा पावरमप्रासपात ता व २ विमानाबासातवा वर्ग २ अपमानवी स्वाना निगवावासमोरबानो ततवानपि प्ररितम पावबालरकारेगावाबामायनांचा वापबामिना रेमनी रेबीना पानिपल पारिषि देवलो पिराब परिवति बच गवि परंपरा पानाडोमा पारको पwिeीमादि -- राया परिवसा वापाणी पुरदरे सयका सहस्सस्के मघष पागसासणे दाहिणद्गुलोगाहिबई पत्नीसविमा णावाससयसहस्साहिथई एरावणवाहण सुरिदे श्रयवरयत्यघरे शालजयमालमउके नवहेमयारुचिप्तघंमल कुलविलिहिलामाणग महिहिए जाय पन्नामेमाणे सेण तत्य यप्तीसाए विमाणावाससयसहस्साण चउरा सीए सामाणियसाहस्सीण तायप्तीसाए तावप्तीसगाण चउण्ह लोगपालाण थठण्ह शग्गमहिसीण सपरि वाराण तिराह परिसाण सप्ताह शणियाण सप्ताह शुणियाहिबईण चउराह चउरासीण छायररकदेवसाह स्सीण छन्लेसि च यत्रण सोहम्मकप्पवासीण येमाणियाण देवाणय देवीणय शाहेबच पोरेवच्च कुछमाणे जाव विहरति। कहिण नते। ईसाणगदेयाण पळासापजाताण ठाणा प०? कहिण नते। ईसाणगदेवा परिव सति ? गो० ! जयूद्दीधे २ मदरस्स पछयस्स उत्तरेण इमीसे रयणप्पनाए पुढयाए बऊसमरमणिजानू मिनागा उह चदिमसूरियगहगणनस्कत्ततारामवाण यइ जोयणसयाइ यतई जोयणसहस्साइ जाय पति होषिप्रहिमानावासयतमानाधिपति रैरावपयाइना मरेखोरबोम्परवतपर पातपितमाप्तमकुटो नामबासचित्तचनालकुपाठसविलिस्य मानगाठो मानियो यावत्मनासपास साहाधिशदिमानावासशतसहस्राणा चतुरशीत्या सामामिकसानापा परिशसस्याकानां प्रापत्रिका देवाना तु तोबपासाना पटानामपमणिपोगं सपरिवारा तिसग पर्षदा समानाममालाना सप्तामाममीबाधिपतीनां चतुणा चतुरशी स्यात्मरतनदेवसहसाणा परयेपो च यानां मोधर्मवल्पवासिदानां देवीमा चाधिपत्य वन्य लपन याहिरति । बमदन्त । झामदेवामां प पर्याप्तापर्याप्तामा स्यामानि प्रप्तामि समत शामदेवाः परिवसन्ति ! गौतम ! अम्मदीपीपे मदरस्प पपतस्योपरतोसा रखममाया प पिव्या गुसमरमायाभूमिमागावं चन्द्रस्यग्रहगवनववाराङपम्पो पनि योवनशतामि पनि पोजमशवमरसादि पावत्पत्यानेद्याम -- उप्पइता एपणं ईसाणे नाम कप्पे पत्नप्ते, पाईणपझीणायए उदीणदाहिणविच्छिन्ने एव जहा सोहम्मे जाय पफिसरुवे तत्यण ईसाणगदेवाण अठावीस त्रिमाणावाससयसहस्सा हयतीति मरकार्य तेण विमाणा सच रमणामया जाव पकिमया, तेसिण यजमकदेसन्नाए पच घफिसगा पणता , थकवफिसए फलिहवफिसए रयणयसिए जाप सम्यवमिसए मके हत्य ईसाणफिसए, सेण वसिया सदरयणामया जाव परिया एत्यण ईसाणाण देवाण पजाप्तापजाप्ताण ठाणा पणप्ता । तिमपि लोगस्स शसखेजहन्नागे सेस जहा सो हम्मगदेवाण जाव विहरति , ईसाण इत्य देविद देवराया परिवसति सूलपाणी उसनयाहणे उत्तरहलो गादिवई थठाधीसधिमाणावासत्तयसहस्साहियई थरययरयत्यधरे सेस जहा सक्कस्स जाय पत्तासमाणे तत्य थठावीसाए षिमाणावाससयसहस्साण थसीतीए सामाणियसाहस्साण तावत्तीसाए तायप्तीसगाण घउण्ह छोगपाठाण थठयह धग्गमहिसीण सपरिधाराण तिराह परिसाण सप्ताह शुणियाण सष्ठरह शणि नाम प प्रासं, मानमतीचीनापत मुत्तरदक्षितविलीवमेव पपा सौधर्मो पावरप्रतिरूप तोशामवाना रवाना पहाविंशति सिमानाबास पतसावारि प्रवन्नास्पास्मात तामि विमानाराम परमपानि पारमतिरपार तेषा पामचरणमाने पावसबार मतालयमा- पतस सटिशाबतो बाबरपुरपामो मधेशामावतसक तम्तममाः सर्वरबमपा पाबामतिरूपा सामानामा बाना पालापा सामा खानानि प्राप्तानि पिचाप साबाससे पनाग से पपा चोपमन्दगमा पारितिकामबाट पेन्द्रो परामा परिणत भूल पाविषप्रबाहम पहरासोबाधिपति रहाविपतिविमानाबासातवालाधिपति परमोम्बरमा समाज (सोचा पवारा पि) पायपाषाविधातिषिमानाबाजानीति सामानसाला पावन् नायिवानो दुधी बोचपानामा याहिवईण चउरह शुसीतीण शायरकदेव साहस्सीण शनेसि च यज्ञण इंसाणकप्पधासीण वेमाणियाणं देवाण य देवीण य शाहेयच्च पोरेयच्च कुछमाणे जाप विहरड , कहिण जते । सणकुमारदेयाण पजाप्ता पज्जताण ठाणा पणता । कहिण लत । सणकुमारा देवा परिवसति ? गोयमा । साहम्मस्स कप्पस्स उ प्पिं सपरिक सपफिदिसि यजइ जोयणाइ बाइ जोयणसयाह यहूइ जायणसयसहस्साइ यजागा जोय णकोफी यजगा जोयणफोफाकोझीन उह दूर उप्पहप्ता एत्यण सणकुमारे नाम कप्पे पणते । पाईण पळीणायए उदीणदाहिणविच्छिन्ने जहा सोहम्म कप्पे जाय परिवे, एत्यण सणकुमाराण देवाण वारस विमाणायाससयसहस्सा हयतीति मरकाय, तण घिमाणा सझरयणामया जाय पफिल्या तसिण विमाणाण घऊमज्देसन्नागे पच यझिसगा पणत्ता, तजहा-थसागयफिसए सप्तषणपफिसए चपगवफिसए चूयवति ? घामामप्रमादिपीका सपरिवारा तिसपा पपदा सप्तानामीकामां नमामाममीकाधिपतीमा पती पतुरीतिमामानिमसालाणा मन्येपा प पामा मीशामवत्पवासिदेवानां दवीना माधिपत्य पुरावत्तित्व सम्यावाहरति । बसन्त । समस्फुमाराम देवामा पोलापताना स्थामा नि प्रचतानि च प्रबन्त । सनत्कुमारदेगा पारवसम्ति ? गौतम । सौषमस्य कापस्यापरि सपर सप्रतिदिन यामि पाजमानि धनि योजमा तानि पनि यावमशतसहस्त्राणि पसा योजमवाट्यो पना योगनवाटोकाव्य ऊर्च दूरमुत्पत्यार सनरकुमार नाम फल्प FIR, प्राचीमप्रतीची मायतमुत्तरदक्षिणावस्ता पपा सौधर्म पाल्पो यावत्प्रतिरूपा तत्र समस्फुमाराम दवाना बादशविमानावासमतसहस्राणि भवतीति मयास्या तम्: तामि विमानानि सवरवमपानि पहामि पावरप्रतिरूपाणि ते विमामामा मध्ये पामध्यदेशपाग पावतमा ममतातपा-प्रशा पावसमा यसपर्यायवसायम्पशावसा यतावसको मध्य व समरकुमारावसब स्वचाववसमा सवरवमपा अश्या यावरप्रतिरूपा खषसम . उप्पइप्ता एत्मणं ईसाणे नाम कप्पे पक्षप्ते, पाईणपक्षीणायए उदीपदाहिणयिच्छिले एक जहा सोहम्मे जाय पहिलवे सत्यण ईसाणगदेवाण छठाधीस त्रिमाणापाससयसहस्सा हवतीति मरकाय तेण विमाणा सह रयणामया जाव पफिकवा, तेसि पनामज्देसनाए पच यफिसगा पणप्ता, थकवफिसए फलिहवफिसए रयणथमिसए जाव सरुयषफिसए मकै ठत्य इसाणफिसए, तेण वमिसया सहरयणामया जाव पफिरूया एत्यण ईसाणाण देवाण पाप्तापाताण ठाणा पणता । तिमुधि लोगस्स शसखेजहन्नागे सेस जहा सो हम्मगदेवाण जाय विहरति , ईसाण इत्य देविद देवराया परिवसति सूलपाणी उसनचाहणे उप्तरहृष्ठो गादिवइ थष्ठावीसषिमाणावाससयसहस्साहिबई शरयवरयत्यघरे सेस जहा सक्कास्स जाय पत्तासमाणे तत्य चहावीसाए घिमाणायाससयसहस्साण आसीतीए सामाणियसाहस्सीण तावत्तीसाए तायप्तीसगाण पाउण्ह लोगपाठाण थठयह थग्गमहितीण सपरिवाराण तिराह परिसाण सतरह थणियाण सप्ताह थणि माम गपं प्राप्त । माचीनप्रतीचीमापत भुचरसपिविताकमेव पपा सौधर्मो पावरप्रतिरूपं तत्रेपानबाना बाना महाविंशति सिमानादास सतसावारि भवनात्यामात हानि बिमामान सबरबमपानि पारप्रतिपाय वा बहुमपदमभाग पचासका माहाता-भर पतससटिबाबतको पावनपातमो मधेशनावतमा समानसमा सर्वरबमपा पावाप्रतिभा समानामा रिबाना पोतापर्या माना जामानि प्रातानि, निर्वाप मोबासपेपनाम पे पचा भौचमकदेशमा यागारतिमानमा यो रेषरामा परिणति भूस पारवाहन परसोबाधिपति रहावडतिविमानाबारामतमातापिता परमोधरममा पचास (तोता बाबा पि) पावापानnfiबिमामाबापावामनदीवित नामानिमसाला पाप वावरिंकामा परी बोकपम्मानों.
ARISLAMINENERARRIGENOBamanand दवासए एव सेस जहा सणकुमारदेवाण जाव विहरति माहिदे इत्य देविदे देयराया परियस श्रयवर यत्यधरे एव जहा सणकुमारे जाघ विहरइ नवर छठण्ह विमाणावाससयसहस्साण सत्तरीए सामाणिय साहस्सीण चउराह सप्तरीण शायररकदेवसाहस्सीण जाय विहरड । कहिण नते। यंनलोगदेवाण पज प्ता २ ण ठाणा पत्नत्ता । कहिण नत ! बनलोगा देवा परिवसति ? गो० ! सणकुमारमाहिदाण कप्पा ण उप्पि सपरिक सपफिदिसि बबइ जोयणाइ जाय उप्पडत्ता एल्यण बनलोए नाम कप्पे पाईणपाळीणा यते उदीणदाहिणविच्छिन्ने पझिपुलचदसठाणसठिए थच्चिमालीलासरासिप्पन्ने थ्यसेस जहा सणकुमा राण नवर चत्तारि विमाणावाससयसहस्सा बासगा जहा सोहम्मस्स यकसया नघर मक्के इत्य बनलोयव सए एत्यण बनलोगाण देवाण ठाणा प०, सेस तहेव जाप यिहरति । बने इत्य देविदे देवराया परियस इ शरयवरयत्यधरे एव जहा सणकुमारे जाव विहरति नवर चउराह विमाणावाससयसहस्साण सहीए माकुमारे वरपे गावाति मवरमष्ठामा तिमामानासशतसरसाणा सप्ततिः सामामिकसहस्राणा चतुणा (पतुर्गपामा) समस्यात्मरक्षबदेयसर नायो (प्रशीत्यधिकशतहयात्मरकफदेवसरमाणामित्यर्थः) पावहिरति । व मदन्त । प्रहमलोकदेवानां पर्याप्तापर्याप्ताना स्पानामि प्रप्रतामि, वनदम्त 1 वक्षसोका देवा परिवसन्ति ? गौसम । समस्फुमारमाहन्द्रसस्पयोस्परि सपक्ष समतिदिक यानि पोजमानि यावदुत्पत्या प्रलसोय माम बसपं प्रमत प्राचीनतारीमायतमुत्तरदातिपवितीर्य प्रतिपूर्णचन्द्रसंस्थामसस्थित प्रनिर्माताप्राराशिमन अवताप यथा सनत्कुमाराणां मग र चत्वारि विमानावासशवसहस्राति भवसमक्षा यपा सौधर्मस्थावतसक्षा नवरे मध्ये प्रललोपावतसको प्रललोकाना देवामा स्थानानि प्र पसामि शेष वष यावद्विारम्ति मलाच देवन्द्रो देवराम परिपसात भरबोम्परवरघर एव या सनाकुमारे यावधिपति नवर पतुपा वि P सए मजे तस्य सणकुमारवफिसए तेण घसिया सछयणामया थच्छा जाव पमिसवा तस्यण सणकुमारदे वाण पजाप्तापजताण ठाणा पणता । सिसुवि लोगस्स शसखेजहन्नागे सत्यणं यहवे सणकुमारा टेवा परिवसति महिडिया जाय पन्नासमाणा विहरति नवर घग्गमहिसी णत्यि , सणकुमार इत्य देविदे देवराया परियसा थरययरयस्यधरे सेस जहा सक्कस्स सेण तस्य बारसग्रह विमाणावाससयसहस्साण याय प्तरीय सामाणियसाहस्सीण सेस जहा सक्स्स चग्गमहिसीषा नवर चउराह यावप्तरीण थायररकदेवसाद स्सीण जाय यिहरइ । कहिण नते ! माहिवाण देवाण पजाप्तापाप्तण ठाणा पणसा । कहिण नते! माहिदगा देवा परिवसति? गोयमा। ईसाणस्स कप्पस्स उप्पि सपरिक सपहिदिसि घना जोयणाइ जाय बजगा जोयणकोकाकोशी उहंदूर उप्पइवा तत्यण माहिदे नाम कप्पे परमसे, पाईणपझीणायए आव एवं जहेव सणकुमारे, नघर शठ विमाणायाससयसहस्सा कसया जहा ईसाणे नवरं मज्जे तत्य माहि कुमारास रेवानां पर्याप्तापाताना सानानि प्राप्तानि बिपि सोपस्वासस्पेय माग तत्र बाबा बनमारा। एमाः परिवन्ति गीत पावहिरतिमारमयमाणो नसन्ति पनामारबाप रेवतो देवरावा पारम्पत्ति परबोम्बरवार पपा तारपानां विमानावालालामा नियमतिः सामानिताता भेष पपा चलायमारपीनारं तु सिमावालरपरेवासाची पात रविपन्न | माहेन्द्रामा रेवानां पोप्तापामामा सामान प्रामानि , मान । नारनवा र परिणन्ति गौतम याममा बपनोपरि तिरिए पनि योजनानि वागमा बोमनबोटीबोल वर र गुम्पाल का माननाच मापीनामा पर पाबरे यसमा मारमा बिमावावारिसराचा वापर मोम दयासए एव सेस जहा सणकुमारदेवाण जाव विहरति माहिद इत्य देविदे देवराया परिवसह शरयघर घत्यधरे एव जहा सणकुमारे जाय विहरइ नवर थठण्ह विमाणावाससयसहस्साण सत्तरीए सामाणिय साहस्सीण चउण्ह सन्तरीण शायरस्कदेवसाहस्सीण जाय विहरड । कहिण नते । बनलोगदेवाण पजा प्ता २ ण ठाणा पत्नत्ता । कहिण नत ! बनठोगा देवा परिवसत्ति ? गो० ! सणकुमारमाहिदाण कप्पा ण उप्पि सपरिक सपफिदिसि बलइ जोयणाइ जाय उप्पडत्ता एत्यण धनलोए नाम कप्पे पाईणपाळीणा यते उदीणदाहिणविच्छिन्ने पमिपुलचदसठाणसठिए शच्चिमालीनासरासिप्पन्ने शयसेस जहा सणकुमा राण नवर चत्तारि विमाणावाससयसहस्सा वसगा जहा सोहम्मस्स वफसया नवर मज्के इत्य वनलोयव कसए एत्यण बनलोगाण देवाण ठाणा प०, सेस तहेव जाय विहरति । यने इत्य देविदे देवराया परियस इ थरयवरयत्यधरे एव जहा सणकुमारे जाव विहरति नवर चउराह विमाणावाससयसहस्साण सहीए P मकुमारे वरपे पावहिरति नवरमठाना विमामावासयतमालायां सप्ततिः सामामिषसानामा चतुगां (चतुर्गणाना) सप्तत्यास्मरक्षकदेवसर सास (अशोत्यधिवतमात्मर एकदेवसहस्राणामित्ययः) यायहिरति । मदन्त । प्रललोबदेवानां पर्याप्तापर्याप्तानां स्थानानि प्रचप्लामि, ख मदन्त । अझसोया देवाः परिवसन्ति ? गौतम 1 समस्फुमारमाइन्द्रसस्पपोसपरि सपत सप्रतिदिक यनि योजनानि यावदुत्पत्यात प्रतीक नाम बस मत प्राचीमप्रतीचानापतमुप्तरततिविस्तीर्य प्रतिपूर पन्तसंस्थानसस्थित अधिमालामाराशिमान प्रवाशाप यथा सनत्कुमाराम ना बस्वारि विमानावासमवसरवादि प्रवर्तसबा यपा सौधमस्यावतसदा मवर मध्य प्रझलोकावतसबोत्र प्रललोबामा दवाना त्यामानि प्र पसानि शेप तव यावद्विारन्ति ब्रह्मान देवन्द्रो देवराब परिपसाव भरजोम्बरवलघर एव पपा समस्फुमारे यावद्विारत नवर चतु वि सामाणियसाहस्सीण चउण्हयसठीण थायररकदेशसाहस्सीण थन्लेसि च यत्रण जाप विहरइ । कहिण नते । उत्तगदेवाण पजाप्तापाताण ठाणा पसप्ता, कहिण नते ! लतगदेवा परियसति ? गोयमा ! घनडोगस्स कप्पस्स उप्पि सपस्किय सपफिदिसि यइ जोयणसयाइ जाय यहुईच जोयणकोकाकोठी उह दूर उप्पहप्ता एत्यण लतए नाम कप्पे पसत्ते, पाईणपोणायते जहा बनलोए नवर पन्नासाविमाणा याससहस्सा हपतीतिमरकाय , यासगा जहा ईसाणवासगा नवर मज्के इत्य लतगयासए देवा तहेव जाय विहरति , उतए उत्य देधिदे देवराया परिवसह जहा सणकुमारे नयर पवासाए बिमाणावाससह स्साण पन्नासाए सामाणियसाहस्सीण चउराह पसासाण थायररकदेयसाहस्सीण शोसिच यत्रण जाय बिहरइ । कहिण नते । महासकाण देवाण पञप्तापाताण ठाणा पमता । कहिण नते ! महामुकादे मामावासातसाता सप्ततिः सामानिवसाला तु (चतुर्युगामा) परमात्मरक्षपादेवसहसा (वारिशदपिकाचनमवसादाबा) चम्यपान बना पावहिरति । मदन्त । सान्तदेवानां पोतापपोप्ताना सानानि प्राप्तानि । भदन्च । सातदेवाः परिवसन्ति ? भो नम । ब्रमतोरस्म वापसोपरि सपई समावदिए पनि योवनयवानि मापदूरमुत्पत्या सात नाम परप प्राप्त प्राचीनप्रतीचीनारत का प्रझसोधे नवरं पचासहिमानावासमतमानापि भवतीति मपासातम् पातंरवा पारंबामाबतचा नवरं मा सातबापतको रेवा साप पारिन्ति नामोज एवेन्दो दवराव परिणति पचा समारं नवरं पचामानाबाबतपमा पचावयाबानिका Tagit (स्तुपामा) पनावरालरषदेमाला (ससवालरम्यापो) पाचगाना वाशरविमान । मुबाती रेवानां जानामि मानिसमा टेवा परिचि! मौसम ! सामान लोपरि तिरिए पाल्प या परिवसति ? गोयमा ! लतस्स कप्पस्स उप्पि सपरिक सपमिदिसि जाव उप्पइत्ता एत्यण महासुको नाम कप्पे पणते, पाईणपाहीणायते उदीणदाहिणविच्छिन्ने जहा यत्नलोए नवर चत्तालीस विमाणावा ससहस्सा हवतीति मरकाय, वासगा जहा सोहम्मवासगा नवर मज्जे तत्य महामुक्कायफसए जाव विह रइ महासक्के इत्य देविदे देवराया जहा सणकुमारे नयरं चन्तालीसाए विमाणायाससाहस्सीण चन्ताली साए सामाणियसाहस्सीण घउराह चप्तालीसाण थायरस्कदेयसाहस्सीण जाव विहरति । कहिण नते ! सहस्सारदेवाण पज्जप्ता २ ण ठाणा प० । कहिण नते। सहस्सारा देवा परियसति ? गो०! महामुक्कस्स कप्पस्स उप्पि सपरिक सपझिदिसि जाव उप्पडता एत्यण सहस्सारे नाम कप्पे प०, पाईणपकीणायवे जहा यत्नठोए नवर बविमाणावाससहस्सा हयतीति मरकाय देवा तहेव बासगा जहा ईसाणस्स वफसगा नवर मज्जे इत्य सहस्सारवासए जाव विहरति , सहस्सारे इत्य देविंदे देवराया परियसइ जहा सणकु त्याच मागुष्ठ माम परपं प्रप्तम् प्राचीमप्रतीचीमायतमुत्तरदषिर्णवस्ती यषा ग्रहलोको नवर चत्वारिशहिमानावासशवसाम्राणि प्रवन्ती ति मपास्यासमवयसका पपा सौधर्माववसका नवरं मध्ये तत्र महानुभावतसको यावद्विारवि, महाकोष देवेन्द्रो देवराजो यथा समस्कुमारो मवर पत्वारियलिमामावासशतसहस्रारा चत्वारिसरसामानिकसानाणा चातुणा पत्वारिंशदात्मरदेवमानापो यावहिरति । भदन्त । सहस्रारदेवामा पर्याप्तापर्याप्ताना त्यानानि प्रप्तानि बदन्त । सपनारदेवा परिवसान्त ? गौतम । महाशुकस्य बाल्पस्योपरि सप सप्रति दिन पाण्दुत्पत्यात्र सालार माम अपं प्राप्त प्राचीमप्रतीचीनायतमुत्तरदतियविस्तीर्य यपा ब्रह्मसोको नवर पविमानावासशवसहस्राणि न वन्तीति मयाम्मान देवासपेवावमा पपा इशामस्यावतसबा नवर मध्ये यत्र सासाराववसको यावद्विारन्ति समारोष देवेन्द्रो देवरा सामाणियसाहस्सीण चउरह यसठीणं थायररकदेवसाहस्सीण शन्नेसि च वरुण जाव विहरइ । कहिण मते ! उतगदेयाण पजाप्तापात्ताण ठाणा पणता, कठिण नते ! लतगदेवा परियसति ? गोयमा ! पनडोगस्स कप्मस्स उप्पि सपरिकय सपफिदिसि याइ जोयणसयाइ जाय यहुई जोयणकोफाकोको उह दूर उप्पडप्ता एत्यण उतए नाम कप्पे पणत्ते, पाईणपकोणायते जहा यनलोए नयर पन्नासाविमाणा वाससहस्सा हयतीतिमस्काय , वसगा जहा ईसाणयफसगा नवरं मज्जे इत्य लतगयफसए देवा तहेव जाय विहरति , उतए इस्य देयिदे देवराया परिवसह जहा सणकुमारे नयर पवासाए यिमाणायाससह स्साण पन्नासाए सामाणियसाहस्सीण चउराह पक्षासाण थायरस्कदेयसाहसीण शसिध यज्ञण जाय यिहरइ । कहिण नते ! महासकाण देवाण पमतापजाप्ताण ठाणा पणता । कहिण नते ! महामुक्कादे मामावासमतावान सप्ततिः सामानिवसासाचा पतु (तुगाना) पध्यात्मरक्षणदेवसाताप (चत्वारिमपिवयतापदेवतादादा) चम्पेपानापमा पारित ।मदन्त । सान्तबदेवानां पयोप्तापर्याप्तामा सानानि प्रतानि पाना सान्तबरेवा परिवन्तिको तम । ब्रमतोबस्य सत्यस्योपरि सपई सतिदिन बनि योबनवतानि पादूरमुत्पत्यास मान्तको भान पर प्रात प्राचीनप्रतीचीनापत पक्षा मझतोष मार पन्चामदिमानाबाबतमानावि भवतीति मपासातम् बताया गया पानावता मा मधेश सामावतारी सपैव पारिता तामात्र देवेन्द्रो परामः परिणति पचा पमतमारे नवरं पन्चामानाबापतनाव पवावस्थाबानिया वर्ग पतु (तुर्नुशाना) पचापरामरवबारेमावा (सामानरमाया) पाना चारविमरच। सुभाती गाना सानानि महाविपचममाचा रंबा परिणमिमीवन ! बाबालोपरि तिरिए पाप वा परिवसति ? गोयमा । लतस्स कप्पस्स उप्पि सपरिक सपफिदिसि जाय उप्पड़ता एत्यण महामुको नाम कप्पे पणते, पाईणपाीणायते उदीणदाहिणविच्छिन्ने जहा यत्नलोए नवर चत्तालीस विमाणावा ससहस्सा हवतीति मरकाय , वासगा जहा सोहम्मवफसगा नवर मज्जो तत्य महासुक्वायफसए जाव विह रइ महासक इत्य देविदे देवराया जहा सणकुमारे नयर चप्तालीसाए विमाणावाससाहस्सीण चन्ताली साए सामाणियसाहस्सीण चउराह चप्तालीसाण व्यायररकदेयसाहस्सीण जाय विहरति । कहिण नते ! सहस्सारदेवाण पजाप्ता २ ण ठाणा प० । कहिण नते। सहस्सारा देवा परिवसति ? गो० ! महामुक्कस्स कप्यस्स उप्पि सपरिक सपमिदिसि जाय उप्पडप्ता एत्यण सहस्सारे नाम कप्पे प० पाईणपफीणायवे जहा यनलोए नवर बषिमाणावाससहस्सा हवतीति मरकाय देवा तहेव घासगा जहा ईसाणस्स वासगा नवर मज्के इत्य सहस्सारयासए जाव विहरति , सहस्सारे इत्य देविदे देवराया परियसइ जहा सणकु स्यात्र मागुड नाम परप मचतम् प्राचीनमतोचीमायतमुत्तरदक्षिणविस्ती यथा ग्रासोको मषर पत्यारिशहिमामावासअवसरत्राणि प्रयन्ती वि मयास्यासमवसका पपा सौधमांवसका मवर मध्ये तत्र महाभुजावतमको याषद्विारवि. महाझुडोत्र देवेन्द्रो देवराजो पपा समस्कुमारो मपरं वारिसहिमामावासातमहमाया चस्वारिशस्सामानिमसाला चतुणा पत्यारिवादात्मरक्वेवसामाया यावहिरति । बदन्त । सासारदेवानां पर्यासापोप्तामा स्थानानि प्राप्तानिमदन ! सासारदेवा परिवन्ति ? गौतम । महामस्य कल्पस्सोपरि सपा सप्रति दिल् पावत्पत्यास सरखार नाम वापं मचत प्राचीमप्रतीचानायतमुत्तरदक्षिणविस्तीर्य पमा ग्रासोको नपर पविमानापासशतसहस्राणिन पम्वोति मपासात देवास्वथैवावत सबा या समस्यावतसका मवर मणे या सातारावतसको यावद्विारवि। सामारोत्र देवेन्द्रो देवरा मारे नवर बरह विमाणायाससहस्साण तीसाए सामाणियसाहस्सीण चउण्ड्य तीसाण थायररकदेयसाह स्सीण जाप शाहेयच्च फारेमाणे विहरति । कहिण नते ! थाणयपाणयदेवाण पजाप्ता २ ण ठाणा प० फहिण ते ! थाणयपाणयदेवा परिवसति ? गोयमा ! सहस्सारस्स कप्पस्स उप्पिं सपरिक सपफिदि सि जाय उप्पडमा एत्यण शाणयपाणयनामेण दुवे कप्या पत्नत्ता, पाईणपहीणायते उदीणदाहिणविच्छि ला थरुचदसठाणसठिया शश्चिमालीनासरासिप्पना सेस जहा सणकुमारे जाव पझिरुवा तत्यण थाण यपाणयदेवाण घप्तारि विमाणायाससया हवतीति मकाय जाय पफिरूया, वासगा जहा सोहम्मे नवर मझे पाणयवसए तेण वफसगा सधयणामया शच्छा जाव पफिकवा, एत्यण थाणयपाणयदेवाण पत्र तापजाप्ताण हाणा पलत्ता, तिमुधि लोगस्स सखेज्जइनागे तस्यण बहवे शाणयपाणयदेवा परिवसति का परिवति पा समस्तुमारो मवर पो विमामावासयतमासूाको पिस्मामानिसहसूमां पातु विसदात्मरदेवमालागी यावदाधिप स्पं विारात ।। पदमा पानतमारताना पर्याप्तापपर्याप्माना सानानि मतानि भवन । पामतमायतदेगा परिवसन्ति ! पौतम पारस पपस्यापरि सपाईसमतिदिए पावदुत्पत्याचानतमायतनामामी की परपो प्राप्ती प्राचीनप्रतीरोनापतो उत्तरपबिवली बरवामपंलियो निर्मातामाराधिसम्मो धप मचा समतलमारो पावरप्रतिस्पो वामतमायदेवानां पलारि विमानावारतानाविप नीति मपापातम् पावरमतिस्पो, पातसहा या सोधर्भ नबर मध्ये प्रावतायत्तस तवायत सबार सबरवमया या बाबरमतिबा बना मम्मावतरणानां पतापर्याप्तामा खानानि मनमानि शापि तोषलारस प्रान तबारामतमावतरमा परिम्पति मामा वाम रममावसच तो २ विमानाबापता याच मारमा रमेन्द्रोपपरामा परिचाविपचा नारो मारी महिहिया जाव पन्नासेमाणा तेण तत्य साण२ विमाणावाससयाण जाय विहरति पाणए इत्य देविदे देवरा या परिवसति जहा सणकुमारे णयर चउराह विमाणावाससयाण वीसाए सामाणियसाहस्सीण सीतीए थायरकदेवसाहस्सीण वसि प यरुण जाव विहरति । कहिण मते ! थारणच्चुयाण देवाण पाता २ ण ठाणा पणता । कहिण नते ! थारणच्चुया देवा परियसति ? गोयमा ! थाणयपाणयाण कप्पाण उप्पि सपरिक सपफिदिसि एत्यण शारणाच्यानाम दुवे कप्या पणता पाईणपीणायगा उदीणदाहिणवि च्छिन्ना थश्चदसठाणसठिया शच्चिमालीनासरासिवन्लाना शसखिजा जोयणकोफाकोशी थायामवि रकनेण शसखेमा जोयणकोकाकोफी परिस्कवेण सहरयणामया श्रच्छा सरहा लठा घठा मठा नीरया निम्मला णिप्पका निक्कफाच्छाया सप्पना ससिरीया सउडोया पासाईया दरिसणिजमा थनिरूवा पनि नया एत्यण थारणञ्चुयाण देयाण तिनि विमाणाधाससया हवतीति मस्काय , तेण विमाणा सम्परयणाम HALHABEILARLIMIRMIRMIL ॥ P मानावासमवानां विमति सामामिवसरमामा पोति पास्मरक्षकदेवमामाणामम्येपाच वाना यावद्विारति । मदन्त । भारपच्युताना दे पानो पर्याप्तापर्याप्तानां स्यामामि प्रतामिप प्रवन्ध । पारगायतका दवा परिवसन्ति गौतम । भामत्तमायसपोर करपपीरुपरि सपर सम्र तिदिन अचानकमायतनामानों को करपी प्रती प्राचीनताबीनायतायुत्तरपिवितीर्णे ईपन्न संस्थाममंत्विको पाँधमासानाराभिमानी असम्मेया योवनकोटीकोट्य मायामविपरमान्या असोया योजनकोटोवोत्या परिक्षेपण सर्वरवमयों पक्षी सप्लो सप्टो पुष्टो मप्टो नारपसी मिमली निप्पो निफरवटचायी समभी सनीकी सोद्योती प्रासादोपो दर्शनीयो मिरुपी प्रतिरूपी प्रभारयुतानां देवाना पीरि विमामा पापशवामि भवतीवि मयास्या । वानि पिमानामि सवरखमपानि प्रष्यामि सरवानि समानि पृष्टानि मृष्ठानि मारवासि मिर्मसानि नियंका या शच्छा सरहा उठा घठा मठा नीरया निम्मला निप्पका निक्काकाच्छाया सप्पन्ना ससिरीया सउजोया पासादीया दरिसणिजा थनिमया तेसिण विमाणाण यज्ञामदेसनाए पच वसया पणता, तजहा थफयफसए फलियम्सए रयणयम्सए जाव रुवयफसए मज्जे इत्य थञ्चयवफसए, तेण यासया सदरय णामया जाव परिवा, एत्यण थारणचुयाण देयाण पजाप्तापजाप्ताण ठाणा पणता । तिमुवि लोगस्स थसखेजइलागे वत्यण यहये शारणझुया देवा जाव यिहरति , थञ्चुए तत्य देविदे देवराया परियसह। जहा पाणए जाय विहरति नवर तिरह विमाणावाससयाणं दसराह सामाणियसाहस्सीण चत्तालीसाए थायरस्कदेबसाहस्सोणं थाइवच्च जाप कुठमाणे यिहरति , यतीसठावीसा वारसाठचउरोसयसहस्सा पलावतालीसा बच्चसहस्सासहस्सारे ॥ १॥ शाणयपाणयकप्ये चक्षारिसयारणचुएतिणि । सतविमाणस याइ चउसुविएएसुकप्पेस ॥ २ ॥ सामाणियसगहणीगाहा-घउरासीइयसीति यावतरिसप्तरीयसष्ठीए । निमिपाटयमापानिजमारि सभीवापि मोद्योवानि प्रासादीयानि दोनीयानि मिङपारि प्रतिरूपावि तेषां विमानामा बहुमणदेशमा में पचापमा मासा अपपा-अंधावतंस सदिकावासो रबावतमको मावदपावतसबो मध्ये वाताब से पारसबा बरक नमा पावरप्रतिदपा भारताच्युताना देवाना पर्याप्तापर्याप्तामा सानानि प्राप्तानि विधपि बोकासपमान व बाय चारपाचुत्ता देवा प रिवान्ति पावद्विारतिभुतबा देवेन्द्रो दवराम परिवसति या प्रापतो भावारिवि नवरं प्रवायां विमानाबासमतामा मार्मा पामा मितापाता बाचारिणरामरखदेबनावावा बाधिपत्य पुरोत्तिाव पाबावन् विहरति हारिहामितिमा चामवपासादि। पचासत्वारिंच वसरमापातार मानवमारकर बलारिषवाबाराधीवि।सविनालापाचगणवेमार्ग पन्नाचतालीसा तीसावीसादससहस्सा ॥ ३ ॥ एएचेव शायरस्का चउगुणा । कहिण नते ! हिठिमगेविजा गदेवाण पजाप्ता २ ण ठाणा पणता ? कहिण नते । हेठिमगेविड़ागा देवा परिवसति ? गोयमा ! था रणभुयाण कप्माण उप्पि जाव उह दूर उप्पइत्ता एत्यण हेठिमगेविजागाण देवाण ततो गेवेजाविमाण पत्यमा पत्नप्ता, पाईणपईणायगा उदीणदाहिणविच्छिन्ना पफिपुन्नचदसठाणसठिया शञ्चिमालीनासरासि बनाना सेस जहा यनलोगे जाव परिया, तत्यण हेठिमगेविजागाण देवाण एक्कारसुप्तरे विमाणायास सए हवतीति मस्काय तेण यिमाणा सहरयणामया जाय पझिकया , एत्यण हेठिमगेविजागाण देवाण पञप्ताण २ ठाणा पणता, तिमुधि लोगस्स शसखेडाइनागे तत्यण बहवे हेठिमगेविझगा देया परि घसति सछे सममहिहीया सझे समझुतीया सहे समजसा सह समयला सछे समाणुनावा महासोरका थ णिदा थपेस्सा थपुरोहिया थहमिदा नाम ते देवगणा पणता समणाउसो ! कहिण नते ! मज्जिमगाण २ ॥ सामानिसहविगापा-चतुरशीतिरशीति हिसप्ततिः सप्ततिषपष्टिष । पधारावारिशत् विदिशदशसहस्राणि ॥ १॥ एते चैव चतुरोग म्पास्मरवाः । मदन्त । अयस्तमवेपवादवाना पर्याप्तापर्याप्ताना स्वामानि प्रसप्तामिव मदन | घसामग्रेवयवदवा परिवसन्ति ? गौतम भारवाव्युतबरपयोरुपरि सपा सप्रतिदिक् पावर मुत्पत्यात्रा पस्तमवयवानां देवाना ग्रेवयमस्तटानि प्राप्तानि प्राचीमप्रतीधीनापतानि सत्त रदक्षिणावतोयानि प्रतिपूरा चन्द्रसंत्यामसस्थितामि पचिमासानाराशिवनानि चेप यथा ब्रह्माताके यावत्प्रतिरूपाणि, तापस्तमधेपकदेवा मा एकादशातर विमामावासशतं प्रवतीति मयास्यातम् । तानि विमानानि सर्वरवमयानि यावत्प्रतिपाणि प्रापमानवयबाना देवानां पर्याप्तापर्याप्तामा सानामि प्रचप्तामि प्रियपि सोबस्यासस्य माग पत्र पायो पसनग्नवेयया देवाः परिषसम्ति सर्व सममहिफा सर्व सम , गयिऊगदेवाण पज्जप्ता २ प ठाणा पणत्ता । कहिण नते ! मज्जिमगेविागदेवा परिवसति? गोयमा! हेठिमगेविनगाण उप्पि सपरिक सपफिदिसि जाव उप्पहप्ता एत्यण मज्जिमगेविनगदेवाण ततोगविजा गषिमाणपत्यका पसष्ठा पाईणपळीणायता जहा हेठिमगेयिजगाण नयर सत्तुतरे विमाणाधाससए हव तीति मरफाए, तेण यिमाणा जाव पलिया एत्यण मज्जिमगेयेाण देवाण जाय तिसुयि लोगस्स यस खेजाइनागे तत्यण घहवे मजिकमगेयेडागा देवा परिवसति जाव शहमिदा नाम देवगणा पणता । सम पाउसो ! कहिण मते ! उवरिमगेयेागा देवाण पजात्तापजाप्ताण ठाणा पणत्ता । कहिण नते । उयरिम गेविजागा देवा परिवसति ? गोयमा! मज्जिमगेयेऊागदेवाण उप्पिं जाय उप्पइप्ता तत्यण उयरिमगेबेजा गाण देवाणं स गेविनगषिमाणपत्यका पसाप्ता पाईणपाळीणा सेसं जहा हेठिमगेविनगाण नवर पुतिका सबै समबसा सर्व महानुपावा महमारसा प्रनिन्द्रा मेषा अपुरोहितागामिन्द्रा नामत से देवमाः प्राप्ताः बम चायुभन्। प्रवन । मध्यमवयवदेगला पर्याप्तापर्याप्तामा सानानि ममानि । प्रदच ! मममधेपबदेवा परिवम्तिा पीतम । म पसमयमदेवानामुपार सपर्व चारित्यावर्त्पत्पात्र मध्यमवयवदेवानां ग्रेपलटानि प्राप्तानि प्राचीनतीचीनापहाम्गुत्तरराषित पिनानि यथा समयकामा नबर सप्तोत्तरं विमानाबापत मवतीति मपासातम् । तानि विमानानि पावरप्रतिपादिममवये पबामा देवानां सामानि माचिपिसोसायसे प्रारबाबो नयमपका रेगा। परिवन्ति बावामिना नाम रेवा प्रसार बम बापमन् । पाच । सपरिननवरेवानां पर्वाहा० सानानि प्राप्तानिय पाच । परिमपैवयोवा परिबपचिपोवन । म अमर्यवेवरेवानामुपरि पाबदुत्पल बोपरिवेशाबा देवामा पानि महानि मामातीचानाववानिपचापचयपता HEDDNEL एगे विमाणायाससए हवतीति मस्काए, सेस तहेव नाणियह जाय थहमिदा नाम ते देवगणा पणता समणाउसो ! एक्कारसप्तरहे ठिमेसुसत्तुप्तरचमज्जिमए । सयमेगउवरिमए पचेवश्चणुप्तरविमाणा ॥ १ ॥ कहिण नते ! शृणुतरोववाइयाण देवाण पजता २ ण ठाणा पणता ? कहिण नते! शृणुप्तरोवयाइया देवा परिवसति ? गोयमा ! इमीसे रयणप्पनाए पुढवीए बजसमरमणिझा नूमिनागा उह चदिमसू रियगहगणनस्कत्ततारामवाण बद जोयणसयाइ बाइ जोयणसहस्साइ बाइ जोयणसयसहस्साइ यज गा जोयणकोजी यजगा जोयणकोकाकोको उह दूर उप्पहप्ता सोहम्मीसाणसणकुमारमाहिदयन लोगलतगसुक्कसहस्सारथाणयपाणयथारणशचुयकप्पा तिणियशठारसुप्तरे गेविजयिमाणावाससए विती यहता तेय पर दूर गता णारया निम्मला वितिमिरा विमुछा पचदिसि पच थणुतरा महतिमहालया महा विमाणा पणता, तजहा-विजये वेजयते जयते थपराजिए सहठसिद्ध । तेण विमाणा सहरयणामया ZIIEIRDU मां मवरं एवं विमानावासयत प्रवीति मयास्याप्तम् । यो वव मरितव्य यावदामिन्द्रा नाम ते देवगणा प्रताः अमर । प्रायुप्मन् । एका पयोत्तरमप-समेप सप्तोत्तरतुमा पमिके । शतमेकीपरिमियो पम्मेवानुतरविमाना। ॥१५ भदन्त । प्रमुत्तरोपपातिवामा देवामा पर्याप्ताप योताना स्थानानि प्र० भदन्त । अनुत्तरोपपातिका देवाः परिवसन्ति ! गौतम । अस्या रवानायाः पृथिव्याः यसमरमसीपाद्नूमिप्रागादूर्व चन्द्रसूपयागपमहातारासपाता यमि योजनानि यमि योजनशवामि यमि योजनसहस्राणि यावच दूरमुत्पत्यात्र सौधर्मशानसनत्कुमारमा ऐन्द्रग्रहातान्तवासससारानतमागवारमाध्युतकरपा alie पाटादशोहरावि वेयविमानावासमवानि ध्यतिवन्य (उमप्य ) तेभ्योपि पर दूर मता नीरवसो निर्मता वितिमिरा विमुदाः पचन दिनु पम्चानुवरा महाविमहासपा मशविमाना। प्रपसा खद्यपा-विषपावैजयन्तीजयन्तो गेथिज्जगदेवाण पजप्ता २ ण ठाणा पमत्ता । कहिण नते ! मन्तिमगेविनगदेवा परिवसति ? गोयमा! हेठिमगेविनगाण उप्पि सपरिक सपफिदिसि जाव उप्पइप्ता एत्यण मज्जिमगेविजगदेवाण ततोगेविका गविमाणपत्यका पसता पाईणपळीणायता जहा हेठिमगेबिजागाण नयरं सत्तुप्तरे विमाणावाससए हव तीति मस्काए, तेण घिमाणा जाव पकिरुया एत्यण मज्जिमगेयेडाण देवाण जाय तिसुयि लोगस्स शस खेजडलागे तत्यण यहये मझिमगेवेजागा देवा परिवसति जाय थहमिदा नाम देवगणा पणता । सम णाउसो ! कहिण नते ! उपरिमगेवेजगा देवाण पजत्तापज्जताण ठाणा पणत्ता । फहिण नंते ! उपरिम गेषिजगा देवा परिवसति ? गोयमा ! मज्जिमगेवेगदेवाण उप्पि जाय उप्पइता तत्यण उपरिमगेयेऊा गाण देवाणं त गेविजागधिमाणपत्यका पसता पाईणपफीणा सेस जहा हेठिमगेधिजागाण नवर पुतिकार गर्ने समपाक सर्व समवता सर्व महानुभाबा महमारसा पनिम्दा पमेबा अपुरोहिता पामिन्द्रा नामत से रेवनमा प्रताः बम चायुभन् । प्रदन्च । मष्यमयबरेवानां पर्याप्तापर्याप्तानां सामानि मतानि ।। मदन | मध्यमपरेवा परिवन्ति गौतम । प पसमयबरेवानामुपरि सपा तिरि बावात्पस्थान मच्चमबयपरेवानां ग्रेयेवमत्तटानि प्राप्तानि प्राचीनमतीचीलापतान्युत्तरराषित मिनीचानि पपा बसमवेपबामा नबर सतोचरं विमानापासपत मवतीति भयामातम् । तानि विमानानि बाबरप्रतिपाति बामसमपेये पवाना रेवानी सानानि याचिापि सोचमा प्रा कामको नचमवेया रेबार परिवरदिगारमिना नाम रेबार NAI अब बामपाच ! परिमबेपरवाना पोता जानामि प्रामानि प्राचापरिनवरदेवाः परिम्पति! मौतम । म समर्षवेरेवानामुपरिपालन वोपरिवेसावां माना पेरामानिमामि प्राचीनवीचीमावानियापनमा एगे विमाणावाससए हयतीति मस्काए, सेस तहेव नाणियच जाय शहमिदा नाम ते देवगणा पणता समणाउसो ! एक्कारसुप्तरहे ठिमेसुसत्तुप्तरचमज्जिमए । सयमेगउवरिमए पचेवश्चणुप्तरविमाणा ॥ १ ॥ कहिण नते ! थणुप्तरोववाइयाण देवाण पजप्ता २ ण ठाणा पणता ? कहिण नते ! चणुप्तरोवयाइया देवा परिवसति ? गोयमा ! इमीसे रयणप्पनाए पुढवीए यजसमरमणिजा नूमिनागा उह चदिमसू रियगहगणनस्कत्ततारामवाण याइ जोयणसयाइ बलद जोयणसहस्साइ बाइ जोयणसयसहस्साइ बजा गा जोयणकोही बजगा जोयणकोफाकोको उह दूर उप्पडप्ता सोहम्मीसाणसणकुमारमाहिदयन लोगलतगमुक्तसहस्सारथाणयपाणयधारणथच्चुयकप्पा तिणियथठारसुप्तरे गेविजविमाणावाससए विती घडचा तेय पर दूर गता णारया निम्मला वितिमिरा विमुछा पचदिसि पच थणुप्तरा महतिमहालया महा विमाणा पणता , तजहा-विजये वेजयते जयते छपराजिए सबसिद्ध । तेण विमाणा सधयणामया मा मवर एफ विमानावासमतं प्रतीति मयास्यातम् । छोपं वव मरितव्य यावदामिन्द्रा नाम ते देवगणाः प्रप्ताः श्रममा भायुप्मन् । एका योत्तरमप-सनेषु सप्तोत्तरंतुमाप्पामधे । शमेहमीपरिमिक पम्मेवानुत्तरविमानाः ॥ १० भदन्त । अनुत्तरोपपातिकामा देवाना पर्याप्ताप योप्सामा स्मामानि प्र० प्रदन्त । अनुत्तरोपपातिका देवाः परिवसम्ति ! गौतम । अस्या रवानाया पथिव्याः यसमरमपीपावभूमिमागापूर चन्द्रसूर्यग्रहगवमानतारारुपापा यहूनि योबनानि यहूनि योजनाभवानि मामि योजनसहस्रापि यावदूर्द्ध दूरमुत्पत्याध सौधर्मेधानमनत्कुमारमा हेम्ब्रममतान्तवमुखसम्रारामतमायवारणायुववारपा नीति पाटादशोहराणि प्रवेपकविमामावासभवामि व्यसिव्रज्य (रामध्य) तेयोपि पर दूर नवा नारवसी निर्मसा विविमिरा विमुदाः पचा विष्ठ पमानुप्रा महातिमहासपा मशविमानाः मघता स्वद्यपा-विजपावेवयन्तोषपन्नो गयिकागदेवाण पहप्ता २ ण ठाणा पमत्ता । कहिण नते ! मन्तिमगेषिजगदेवा परिवसति ? गोयमा! हेठिमगेविजागाण उप्पि सपस्कि सपफिदिसि जाव उप्पइन्ता एल्यण मज्जिमगेविजगदेवाण ततोगविजा गयिमाणपत्यका पसाता पाईणपाळीणायता जहा हेठिमगेयिजगाण नयरं सत्तुप्तरे विमाणावाससए हव तीति मस्काए, तेण घिमाणा जाय पनिरूया एत्यण मज्झिमगेवेसाण देवाण जाय तिमुयि लोगस्स यस खेजहानागे तत्यण यहवे मज्झिमगेवेगा देवा परिवसति जाय थामिदा नाम देवगणा पणता । सम णाउसो ! कहिण नते ! उवरिमगेयेमगा देवाण पत्तापजताण ठाणा पणत्ता । कहिण नते । उयरिम गेषिजागा देवा परिवसति ? गोयमा। ममिगेवेगदेवाण उप्पि जाय उप्पहप्ता तत्यण उवरिमगेवेडा गाण देयाणं स गेषिजगषिमाणपत्यका पणता पाईणपफीणा सेस जहा हेठिमगेविगाण नवर पुतिबा को चमपास सर्व समवता सर्व महानुप्रावा मामासा प्रनिन्दा पमेणा पुरोहिता अहमिन्ना नामत से देवगा प्राप्ताः मम वायुभन्प्रवचन मध्यमवेयवारंवाना पर्याप्तापर्याप्तामा सामानि प्रशतानि प्रदन्त । मथमोपदेवा परिवन्ति नौतम । प पसमवेपोवानामुपरि सपर्व पतिविद मागुत्पवान मन्यमवयरेबाना वेगवाजतानि प्राप्तामि प्राचीनप्रतीचीनाथतान्युत्तरराषित पितानि पचा पतनविपचाना नबर सप्तोत्तरं विमानाबासमत मवतीति मपासापम् । तानि विमानानि पावरप्रतिपाति पानसमये मवानां देवानां स्थानानि याचियपि सोचमापसे पाम बाबो मधमनदेयका रेगा परिवन्धि पावामिना नाम रेगा प्रसा। अमर वायुमा । परच। परिमदेवधरेबानो पर्याप्ता सामामि मातानि प्रान्चा परिनचेपबारेमा परिवन्तिमौतम । भनदेवमेवानामुपरि नागवत बोपरिनवेलामा रेवानां वेषणचनानि तानि मामीचीनामवानि च मनापानमा बहुमज्जदेसन्नाए शंजोयणिए खेप्ते थठजोयणाइ वाहलेण पनते , ततो धणंतर घण माताए २ पए सपरिहाणीए२ परिहायमाणी२ सछेस परिमतेसु मच्छियपत्तातो तणुयरी थगुलस्स सखेजाइनागे याहले ण पणत्ता, इसीपालाराएण पुढवीए दुवालसनामधेजा पणता , इसीतिवा इसापालाराइवा तणूतिया तणुयरीतिया सिहोतिया सिझालएतिया मुतोडघा मुसालएइवा ठोयग्गेतिया लोयग्गथूनियातिया लोय पम्युिज्जणाइथा सहपाणनूयजीवसप्तसहावहा यहवा । इसीपनाराण पुढवी सेता सखदलघिमलसोच्छिय मुणालदगरयतुसारगोरकीरहारयता उताणयबन्तसठाणसठिया सबजुणसुणमई थच्छा सरहा लरहा घठा मठा णीरया निम्मला निप्पका निक्कफाच्छाया सप्पत्ता ससिरीया सउज्जोया पासादीया दरिसगिजा व निम्या पहिल्या इसीपनाराएण नीसाए जोयणमि छोगतो तस्सण जोयणस्स जेसे उवरिल्ले गाउए तस्सण गाउयस्स जेसे उयरिल्ले बम्नागे एत्यण सिझा नगवतो सादिया थपजवसिया थणेगजातिजरामरणजो शमशाम्या परिशीयमाना सर्वपु परिमान्तेषु मदिवापरतोप्पतिवम्यो अगुलासस्पेयनाग यास्येम प्राप्ता. परमारनारायाः पपिव्या हावा ना मपेपानि भवतीति मद्यपा-इपदिति वाईपस्याग्नारेति वा तन्वीसि वा मुतरीति वा सिहिरिवि वा सिनालय रविवा मुकिरिति वा मुप्ता समावि या सोशाग्र वि वा सोयाग्रस्त पिकवि या लोकामप्रतिपाहिमोति का सवप्रायनूतोवसत्वसुराग्यहा इति वा साधेपतमाग्नारा पपिका घेता शङ्खदत्तविमलसीवस्तिकस्वात्तववरजस्तषारगोजीरहारपवता उच्चामकछत्रसस्थानसस्थिता सवाज्येनवर्यमयो अच्छा अश्या सष्टा पृष्टा मष्टा नीरजा निमप्ता निष्पक्ष निफम्टकम्बापा सममा समीप सोद्योता मासादीपा दशमोपा अनिरूपा प्रतिसपा पित्यानाराया पधिध्या निमे विगत्या योजन सोकान्त खस्य च योजनस्य यदुपरिवन गपूतं तस्य गव्यतस्प यदुपरितन पड्नान यत्र सिद्धा मगवम्त सादिका अपपसिधा अनेकजा थच्छा सरहा घठा मठा जीरया निम्मला निप्पका निकफाच्छाया सप्पनां सिसिया सउलोया पासा दीया दरिसणिज्जा शनिवा पहिल्या एत्यण शणुप्तरोववाइयाण देवाण पजस्तापाताण ठाणा प० । तिसुषि लोगस्स शसखेजाइनागे तत्यण यहये थणुत्तरोवधाइया देवा परिवसति सछे सममहहिया सछे समयठा सधे समाणुनावा महासोका थणिदा थप्पेस्सा थपुरोहिया शहमिदा ते देवगणा पणत्ता । स मणाउसो । कहिण नते ! सिहाण ठाणा पणता । कहिण नंते ! सिझा परिवसति ? गोयमा ! सहठस्स महाविमाणस्स उपरिहा पूजियग्गा दुबाउसजोयणे उहु थवाठाए एल्यण सीपनारा नाम पुढयी प० पणयालीसं जोयणसयसहस्ताइ थायामविरकनेण एगजोयणकोमी यायालीस च सयसहस्साइ तीस सह स्साइ दोन्लि य एउणापन्ने जोयणसए फिधिविसेसाहिए परिरकेषेण पणता । इसीपनाराएण पुढवीए - पराजिता सांपतिः । विमानाः तवरबमया मचा मला पृष्टा मटा नीरवसो निर्मला निप्पडा निकाटकमायाः सप्रमाः सभीवा सोयो am प्रातारीया दर्जनीया अनिरुपा प्रतिकपा मानुत्तरोपपातिबामा दवामा पर्याप्तापर्याप्तामा खानानि प्रचतानि चियपि (पासापो) मोबस्पासंसपं पान वा बहवोनुत्तरोपपाविका देवाः परिवसन्ति सर्व सममिवार सो समबसा सबै समानुपाबा मापासा बनिन्द्रा पुरोहि का प्रमप्या भामिना नाम त देवममा प्राप्त अमर | भायुप्मन् । मदच । सिदामा खानानि प्राप्तानि भरत ! हि परिवसन्धि ? गौतम । तापम महाविमानसोपारमापा पिधाया दादापोभमा पूर्व पवारया प्रपत्मा'मारा नाम पथिको प्राप्ता, पंचवारियोजन पतवावारिधापामविषन्मापा नेवायोजनबोटी विषवारिपाखावि जिलावाचि पोमपचाययोजना विधिविधाभिषा नि परिपत्र प्राप्ता परमानारापा पषिमा गुमम्मदेषमाने ऽहमोनियो चोचनानि बारला प्रवत वानर मादा मरे
J
॥
तानयरकययिमुक्का । धन्नोन्तसमोगाढा पुष्ठासविलोयते ॥ ९ ॥ फुसइयण तेसिद्ध सहपएसेहिनियमसो
सिझा । तेविशाखेजागुणा देसपदेसेहिजेपुठा ॥ १० ॥ यसरीराजीवघणा उवउप्तादसणेयनाणेय । सागा
रमणागारं उरकणमेयतुसिक्षाण ॥ ११ ॥ केयलणाणुयउप्ता जाणतीसछनावगुणनावे । पासतिसबाखलु
फेवलदिष्ठीहिणताहि ॥१२॥ नविश्वत्यिमानुसाण तसारकंनत्यिसहदेवाण । जसिझाणसुक थहावाहउवग
याण ॥ १३॥ सुरगणसुहसमत्त सशक्षापिमियशणतगुण । नविपायडमुप्तिसह णताहिवग्गवग्गूहि ॥१४॥
सिहस्ससहोरासी सम्पछापिझिएजहहघिडा । सोनतवग्गनइन सछागासणमाइजा ॥ १५ ॥ जहनामको
इमिच्छो नगरगुणयजविहविजाणतो । णवएडपरिकहेउ उवमाएतहिश्यसतीए ॥१६॥ इयसिझाणसोरक श
णोयमनत्यितस्सठवम्म । फिचिविसेसेणितो सारिरकमिणसुणहवोत्य ॥ १७ ॥ जहसवकामगुणिय पुरिसो
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अवगाहनपासिक्षा प्रतिमागेम भवन्तिपरिशीया । सरयानमामापस्य यज्ञरामरविप्रमुतानाम् ॥८॥ यावासिद सत्रामम्तानवक्षयविमुक्ताः ।
अम्योम्पसमवगाडा स्पष्ट (सग्माः) सर्वपिशोबाने neu पशत्यनम्तासिदान् सर्वप्रदर्शनिपमशासित । सेप्यसम्पगुणा देशप्रदोषपेरुप
हा ॥ ९॥ पधारीराभोवघना उपयुत्तादमम तयाधामे । सावारानाकार लक्ष्पमततुसिदामाम् ॥ ११ ॥ योबलधानापयुक्ता जामतिसर्यगावगु
पतावान्।
। पापन्तिसवत ससु केवसदृष्टिनिरमतानिः ॥ १२ ॥ मैयास्तिमनुप्पापा सरसौम्पनास्तिमय देवना । यरिसमामा सौप्यमव्यायापामुपग
तानाम् ॥ १३ ॥ सरगमुसंधमा सर्वाहापिपिछतमनन्त गुणम् । ममाप्नोतिमुक्तिसुरा प्रमभवगे गितसदपि ॥ १४ ॥ सिएस्पराराशिा सर्वा
शापिरिमतापदि प्रयत् । सोनन्तर्गमता सर्वा सानोमातितरसौप्यम् ॥ १५ ॥ लेख कचियाम यपाहिविजामन्यनगरगुपान् । परिकपयितुन
को त्यूपमापास्तवघामावात् ॥ १६ ॥ इविसिवानासौम्य मनुपर्मनास्थित स्पषौपम्यम् । किचिदिशपरतोस्स सादृश्यं श्वप्मुतवत्यमाचमिदम् ॥ १७ ॥
निससारकलकलीलावपुणनषगम्नवासवसही एषते समहक्कांता सासयमणागयद काठ चिठति, तस्यवियते अवेदा शयेयणाणिम्ममा यसगायससारविप्पमुक्का । पदेसनिप्तिसठाणा ॥१॥ कहिपहियासिझा कहि सिझापडठिया । कहियोंदीचइताण कहगतूणसिज्जइ ॥ १ ॥ चलोएपहियासिझा लोयग्गेयपइठिया । इहयोंदीचइत्ताण तत्यगतूणसिकइ ॥२॥ दीवाइस्सवा जचरिमनवेहविजसघाण । तत्तोतिनागहीणा सिझाणोगाहणानणिया ॥ ३॥ सठाणतुइह नषघयवस्सघरमसमयम्मि । थासीयपदेसघण तसठाणताह तस्स ॥१॥तिलिसयातेप्तीसा घणुष्ठिनागोयहोइनायो । एसाखलुसियाण उकोसोगाहणानणिया ॥५॥ चप्तारियरयणीच रयणितिलागूणियाययोषचा । एसाखलुसियाण मजिकमोगाहणानणिया ॥ ६॥ एगाय होइरयणी थठेवयश्चगुलाइसाहियाईया। एसाखलुसिझाण जहयोगाहणानणिया ॥७॥ गाहणाएसिझा नपतिनागेणहोइपरिहीणा । सठाणमणिस्पत्य जजरामरणविप्पमुक्काण ॥ ८॥ जस्ययएगोसिझो तत्यशण विबरामरपोनिवसारपसमावपुत्वमवसतिगमतिबाचा पाचवमनामवाद बासं तिततितापिपते पवेदा मेरमा निर्ममा या संसारविममुचा देवनिचरखामा नमनिवामिसिदा प्रतिष्ठिता बारितपात्याबा मस्थानियन्तिकायते। भत्तोबेमविवातिहा लोबानप्रतिक्षिता मोरित्रवाते मलारियचितवतु ॥२॥ दोबाइसमा पपरमप्रये प्रवेसारखा । ततमि बाबहीना गिमानवमानामपिता पतलामणित भपंचस्पनरमलमये । चाबीरपोवपन तत्वलाम यसैबपितानि अवि-पारमिलामो प्रतिक्षामा सामुनिशाना मुहसाबमानाबपिता सलीरममा रविधिमालोमाधोगमा । पारि बाबा ममवावबारमाणिता समिति रामवासिपिलानिया । एमाण विधान बचावावपासना ...
हिया दिसानुयाएण सछत्योषा छाउकाइया पच्छिमेण पुरच्छिमेण विसेसाहिया दाहिणेण यिसेमाहि या उत्तरेण विसेसाहिया , दिसानुघाएण सकृत्योवा तेउकाइया दाहिणुप्तरेण पुरच्छिमेण विसेसाहिया पञ्चच्छिमेण विससाहिया दिसानुपाएण सवयोवा याउकाइया पुरच्छिमेण पञ्चच्छिमेण विसे साहिया दा हिणेण विसेसाहिया उत्तरेण यिससाहिया । दिसानुवाएण सबत्योषा वणस्सइकाइया पच्छिमेण पुर छिमेण घिससादिया दाहिणेण विसेसाहिया उत्तरेण बिसेसाहिया । दिसाणुघाएण सहयोधा बेइदि या पच्चच्छिमेण पुरच्छिमेण बिसेसाहिया दाहिणेण विसेसाहिया उप्तरेण बिसेसाहिया , दिसानुयाएण सष्ठत्योबा तेइ दिया पञ्चच्छिमेण पुरच्छिमेण विसेसाहिया दाहिणेण विसेसाहिया उप्तरेण घिसेसाहिया, एष परिदियायि, दिसानुयाएण सहयोवा परडया पुरछिमपञ्चच्छिमेण उत्तरेण दाहिणेण शसखेड़ा गुणा, दिसानुबाएण सहयोवा रयणप्पनापुढयिणरइया पुरच्छिमपञ्चच्छिमेण उत्तरेण दाहिणेण शसखे विसपाyिat, दिगम्पातेम सबस्तीका बकायिकाः परिमेम पूर्व विद्योपापिका दरियम विशंपादिवा सप्तरेख पिपाधिमार, दिगनुपातेन सोबा भकापिका सिम पूर्वक विझपापिया पापमा विशेषाधिका' दिगमपातम सथतोका वायुकायिका पूर्व पापमम विशेपा घिका दतिम विपापिका ससरेख विशेषाधिका दिनमुपायेम सस्तोमा वनस्पतियापिका परिमन पूर्व विशेषाधिका दाधन विधेपा पिका पतरण विभपापिणा , दिपमुपातन होस्त्रिया पयिमेन पूर्व विपापिया दक्षियन विपाधिका कारण विपापिका , दिगमुपातेन सवतोवीन्द्रिपाः परिमेम पूर्व विकोपाधिका वषिषनोत्तरेण - विशेषाधिकार पर्व पतुरिन्द्रिया अपि । दिगनुपातम सर्वतोसा मेरपिसार पूष परिमेमोधरेय दविपनासमयगुणा।। दिमनुपातम सर्वतीका रवप्रथिवीमरपिका पवधिमेमोधरेव दखिनासम्मेपगुणा । दिगनुपा ॥ नोत्तणनीयणकोइ । तरहाबुहाविमुक्को शच्छिमाजहामियतित्तो ॥ १८ ॥ हयसबकालतिप्ता थउलनि घाणमुधगयासिझा । सासयमझायाह विष्ठतिसुहीसुहपप्ता ॥ १९ ॥ सिछप्तिययुवतिय पारगतत्तियपरपर गतप्ति । उम्मुक्तकम्मकयया शुजरायमरायसगाय ॥ २० ॥ णिच्छिन्नसचदुरस्का जातिजरामरणयधणवि मुक्का । शहावाहसुरफ शृणुहोतीसासयसिझा ॥ २० ॥ यितिय पद सम्मत्त २ दिसिगइइदियकाए जोएवेएकसायलेसाय । सम्मप्तणाणदसण सजयउबगशाहारे ॥ १ ॥ नासगपरित्तप जा सुऊमसणीयत्नवत्यिसेपरिमे । जीवयस्खेतयधे पुग्गलमहदफएचेय ॥ २ ॥ दिसानुमाएण सत्योया जीवा पञ्चच्छिमेण पुरच्छिमेण विसेसाहिया दाहिणण विसेसाहिया उप्तरण विसेसाहिया दिसानुवाएण सहयोया पुढयिकाइया दाहिणेण उष्ठरेण विसेसाहिया पुरच्छिमेण विसेसाहिया पञ्चच्छिमेण विसेसा . . . पपासवबामगार पुरुषोमुकामनोयन बोपि । वषपालभाविमुच लियतिमोपासमृतवतः ॥ १८॥ तिमालपता सतुलनिर्वाग्मुपगतानि घ। शावतमध्यावाचं तिष्ठन्तिमुधिन मुसमाप्त १ सिहातिनाति पारमताविपरम्परगता । जम्मुतवर्मवचा परामरापत माय ॥ २० ॥ निस्सीमवदुःसा बासिरामरपवन वमुत्ता पमानापतोस मनभनिनादतसिदा ॥ २१० पति श्री रामचन्द्रमार मिष्यमा नापि निषिते मापनानुवारे रिवीप पर समाप्तम् . २ दिमतीनियबापा पोमोबदायमापसाप । पम्पकवानरयन संपतोपपोमौतबाहार ॥१प्रापपरीतपो मिसूताम्बोप्रवासियरमा वि। श्री क्षेत्रबन्धः पुदस महादगावास्युः । १. रिमन पातेन (दिघोषिसेवा) सोना बीमा पधिनेन पूर्व विधाषिता दहिवन विवाधिवा परेर बिपापिका, रिमनपान बचोका पचिपीवामिषा पसिनोचकर विवापिका पूर्व विवापिका. पपिने उप्तरेण असंखेनगुणा, दाहिणेण शसखेजगुणा । दाहिणिल्लेहितो धूमप्पन्नापुढविणेरइएहितो चउत्याए पकप्पनाए पुढवीए रहया पुरच्छिमपञ्चच्छिमउत्तरेण शसखेजगुणा । दाहिणण शसखेजगुणा । दाहि णिप्लहितो पकप्पनापुढविनेरहएहितो तइयाए यालुयप्पन्नाए पुढविनेरडया पुरच्छिमपञ्चच्छिमउतरेण छ सखेजगुणा, दाहिणेण शसखेजगुणा । दाहिणिल्लेहितो यालुयप्पन्नापुढविणेरडएहितो वीयाए सकारप्प नाए पुढचीए रइया पुरछिमपञ्चच्छिमउत्तरेण यसखेडागुणा दाहिणेण शसखेडागुणा दाहिणिप्लेहितो सक्करप्पन्नापुढविणेरइएहितो इमीसे रयणप्पन्नाए पुढवीए औरइया पुरच्छिमपञ्चच्छिमउत्तरेण शसखेडागु णा । दाहिणिलेण शसखेजगुणा, दिसानुवाएण सछत्योया पचिदियतिरिकजोणिया पञ्चच्छिमेण पुरच्छि मेण विसेसाहिया, दाहिणेण विसेसाहिया, उत्तरेण विसेसाहिया, दिसानुवाएण सहयोवा मनुस्सा दाहि णउप्तरेण पुरच्छिमेण सखेजगुणा । पञ्चच्छिमेण विसेसाहिया । दिसानुवाएण सइत्योवा नवणयासी देवा पुरच्छिमपञ्चच्छिमेण उत्तरेण यसखेडागुणा । दाहिणेण यसखेडागुणा , दिसानुमाएण सछत्योवा मैरपिचा। पूर्वपधिमोत्तरवासस्पेपगुवा दपिवमारपेयनुपा। दापिचात्येभ्यो वासुबामभपिवीमरपिकेम्पोदितीयाया। शकरमभचिया नर पिका पूर्वपविमोतरणसम्पयनुका दपिवनातस्येपमुबार, दाक्षिणात्ययः अकराप्रपृथिवीनैरपिकन्योस्पा रयमनापाः पृथिव्या नैरपिकार पूर्वपश्चिमात्तरेषासस्पयमुपा दपिना सरयेपगुणाः, दिगनुपातेन सबसतोका पंचेंद्रिपतिमायोमिका पधिमेन पूर्व विपापिया। दरियम विशेषापितउत्तरे विशेषाधित। दिममुपातेन सवस्तोता मनुष्या दक्षिणोत्तरव सम्मेयगुका पूर्व पपिमेन विशेपापित । दिगनुपा सेन सवसोवा प्रवनवासिदेवा पूर्वपपिमेयोचरसासल्येयगुणा दहिनासमपयगुहार। दिगमुपायेन वानव्यारा देवा। पूर्वपधिक विशेपाधि जगुणा , दिसानुबाएण सहयोवा सकारप्पनापुढविणेरडया पुरच्छिमपञ्चच्छिमउतरेण दाहिणेण शस खेडागुणा । दिसानुषाएण सहयोया परइया वालुयप्पन्नापुढविपुरच्छिमपञ्चच्छिमउत्तरेण दाहिणेण इस खिजगुणा । दिसानुयाएण सम्वत्योवा पकप्पनापुढविणेरडया पुरच्छिमपञ्चच्छिमउप्तरेण दाहिणेण शसखे जागुणा । दिसानुवाएण सम्बत्योवा घूमप्पनापुढविनेरइया पुरच्छिमपञ्चच्छिमउप्तरण दाहिणेण यसखेज गुणा । दिसानुयाएण सत्योवा तमप्पन्नापुढयिनेया पुरच्छिमपच्छिमउत्तरेण दाहिणेण यसखेडागुणा दिसानुवाएण सत्योया आहे सन्तमापुढविनेरइया पुरच्छिमपञ्चच्छिमउप्तरेण दाहिणेहितो थहे सप्तमापुढ विनेरइएहितो ठीए तमाए पुठवीए नेरइया पुरच्छिमपञ्चच्छिमउप्तरेण शसखेजागुणा, दाहिणेण शस खेागुमा, दाहिणिल्लेहिती तमापुढषिनेरइएहितो पचमाघूमप्पनाए पुढधीए नेरइया पुरच्छिमपञ्चच्छिम हम सबसोबासरममपपिलीनरपिका पूर्वपविमोत्तरेर दिनारपणा, दिमनुपातन सर्वतोपानरविवा वामुबप्रमापपियोरपिका पूर्वपचिमात्तर हिना यमुना, निगनुपातेन सवसोवा पहुप्रतापवानरांपका पूरपरिमीत्तरेच दविनावस्यनुपाः, दिमनुपातेन गतोका भूमाप्रपत्रिीनरपिका पूर्वपदिनोत्तरेर दचिवमा सरपेपनु। विगनुपातन पलोमा सामाननपभियोरपिया पूर्वपश्चिमोत्तरे रपिबनावपेपनगा। रिननुपातम मतोका प्रषासनमापणीनरोपकाः पूर्वपविमोतरण गरिंगत्येभ्यो पसलमापांचवीनरामोध्या पल्या समामा पपिमा नैरपिका पूर्व पविनोतरणासंपेपामा दधिरनासस्पगुमाए । राहिवात्सम्मानमादिची नरपिओमा पचनामा भूमप्रमा का पधिमा नैरपिता पूर्वपदिनोत्तरवाषनु पक्षियमासस्पेयनुल रास्तितायो पूनावाधिवीर विषय बतुनी मामा प विमान मिशः पूषपविमोतरेपानुग रविनारसमा रातिालमा पूजनविरक्ति नलीबाबा बासुचापिषी उप्तरेण सखेडागुणा, दाहिण शसखेजगुणा । दाहिणिल्लेहितो घूमप्पनापुढविणेरइएहितो चउत्याए पकप्पनाए पुढवीए णेरडया पुरच्छिमपञ्चच्छिमउतरेण शसखेडागुणा । दाहिणेण यसखेडागुणा । दाहि णिप्लेहितो पकप्पन्नापुढविनेरइएहितो तइयाए घालुयप्पनाए पुढविनेरहया पुरच्छिमपञ्चच्छिमउत्तरेण थ सखेडागुणा, दाहिणेण शसखेझगुणा । दाहिणिले हितो वालुयप्पन्नापुढविणेरडएहितो वीयाए सक्करप्प नाए पुढघीए मेरझ्या पुरच्छिमपञ्चच्छिमउत्तरेण शसखेडागुणा दाहिणेण शसखेजगुणा दाहिणिल्लेहितो सक्कारप्पनापुढविणेरइएहिती इमीसे रयणप्पनाए पुढवीए गैरइया पुरच्छिमपञ्चच्छिमउत्तरेण शसखेडागु णा। दाहिणिल्लेण यसखेजगुणा, दिसानुवाएण सहयोया पचिदियतिरिकजोणिया पञ्चच्छिमेण पुरच्छि मेण विसेसाहिया, दाहिणेण विसेसाहिया, उत्तरेण विसेसाहिया, दिसानुवाएण सहत्योवा मनुस्सा दाहि णउतरेण पुरच्छिमेण सखेडागुणा । पञ्चच्छिमेण विसेसाहिया । दिसानुवाएण सछत्योवा नवणवासी देवा पुरच्छिमपञ्चच्छिमेण उत्तरेण शसखेागुणा । दाहिणेण सखेड्यगुणा , दिसानुवाएण सष्ठत्योवा मेरपिका पूर्वपविमोत्तरवारपेपगुश रतिमारपेयगुणा।। दाखिचात्ये म्यो वालुकामभपिवीमरपिकेभ्योदितीयाया। शबरमभषिष्या नैर पिका पृषपपिभोत्तरवासम्पेयगुवा दविनासस्पेपगुवार, दादिशात्पन्य अकरामनपिवीमेरपिकोन्पोसा रवमनाया धिम्या भैरपिकार पूर्वपधिमाप्तरेषासंस्पयगुण दपिवमा सस्पेपनुशाः। विगनुपातेम सधखोका पचेंद्रियतियग्पोनिका पधिमेन पूर्वेप विडोपापियाः। दतिम विशेषापिका चरेश विशेषाधिण । दिननुपातम मवतीका मनुष्या दपियोत्तरख सस्पेयगुणाः पूर्वर' पपिमेन विशेषाधिवाः । दिगनुपा देम सवसोका प्रवमवासिदवार पूर्वपधिमेबोचरवासस्पेयगुणा दषिसेनासम्पपगुणाः । दिगमुपातम वामध्यवरा देवाः पूर्वपधिमेव विज्ञोपाधि . याणमतरादेवा पुरच्छिमेण पञ्चच्छिमेण विसेसाहिया, उन्तरेण विसेसाहिया, दाहिणेण विससाहिया, दि सानुयाएण सछत्योवा जोइसिया देवा पुरच्छिमपञ्चच्छिमेणं दाहिणेण विसेसाहिया, उप्तरेण विसेसाहिया दिसानुवाएण सश्त्योवा देया सोहम्मे कप्पे पुरच्छिमपञ्चच्छिमेण उत्तरेण आसखेडागुणा, दाहिणेण विसे साहिया, दिसानुयाएम सहयोया देवा ईसापेकप्पे पुरच्छिमपञ्चच्छिमेण उत्तरेण शसखेडागुणा दाहिणे ण विसेसाहिया, दिसानुवाण सवयोवा देवा सणकुमारेकप्पे पुरच्छिमपञ्चच्छिमेण उत्तरेण यसखेडागु णा, दाहिणेण विसेसाहिया दिसानुवाएण सहयोवा देवा माहिदे कप्पे पुरच्छिमेण पञ्चच्छिमेण , उत्तरेण शसखेजगुणा, दाहिणण विसेसाहिया । दिसानुवाएण सध्स्योवा यनलोए कप्पे देवा पुरच्छिमपञ्चच्छि मउप्तरेण दाहिणेण शसखेजगुणा दिसानुयाएण सहयोषा यत्नलोए कप्पे देवा पुरच्छिमपञ्चच्छिमउत्त रेण दाहिणण शसखेडागुणा । दिसानुवाएण लतए कप्पे देवा पुरच्छिमपञ्चच्छिम उप्तरेण दाहिणण सखेजगुणा । दिसानुषाएण सहयोवा देवा महामुक्तो कप्पे पुरच्छिमपञ्चच्छिमउतरेण दाहिणेण यस पार उत्तरेर विशेषाधिका रसियन बिपापिया । विपनुपातम बलोचा न्योतिबा देवा पूर्वपरिमेन इपिसेन विशेषाभिषा सत्तरेस विधे बारिधाः, निनुपातेन सर्वतोमा रेवा। गौध वरपे पूर्वपधिमेनोत्तरेबापरपेषभुषा दिन विशेषाधिका, दिननुपातेन सर्वलोका रेगर जाने मप पामेनोत्तरेगा संस्पेपनुमा पनि विशेषाधिकार, विभनुपान नबनोबा देवा बनलमारे पाप पूबपदिनोत्तरेगावपयन सनि विशेषाधिणा दिननुपातेन सर्वतोपा देवा मारेगमपे पूर्वपरिमत परेशावरमेयमुना पनि विवाषिया रिमनुपातेन पासोमा प्रसस्तो रेवा पूर्वपपिनोपरेपकिनाचनेनुसार, दिननुपावन पर्वतोबा वा साचो पूर्व पविमोचरेप कितना .
खेजगुणा दिसाणुवाएण सहयोवा देवा सहस्सारे कप्पे पुरच्छिमपञ्चच्छिमउप्तरेण दाहिणेण शसखे० तेण पर यजसमोववन्नगा समणाउसो! दिसाणुवाएण सहयोवा सिझा दाहिणउत्तरेण पुरच्छिमेण सखेजगु णा, पञ्चच्छिमेण विसेसाहिया दार १ । एएसिण नते ! नेरइयाण तिरिरकजोणियाण मणुस्साण देवाण सिछाणय पचगइसमासेण कयरे कयरहितो थप्पाया यकायावा तुल्लावा विससाहिया वा ? गोयमा ! सछत्योवा मणुस्सा नेरइया आसखेडागुणा देवा शसखेडागुणा सिझा शण तगुणा तिरिरकजोणिया थन तगुणा । एएसिण नते । णेरडयाण तिरिरकजोणियाण तिरिरकजोणिणीण मणुस्साण मणुस्सीण देवाण सिहाणय थठगतिसमासेण कयरे कयरेहितो थप्पावा यजयावा तुल्लावा विसेसाहियाया ? गोयमा । सध्त्योया मणुस्सीच मणुस्सा शसखेडागुणा । णेरड्या आसखेडागुणा तिरिस्कजोणिणीच शसखेजगुणा स्पपमुका।। दिगनुपासन सवस्तोका देवा महामु पल्पे पूर्वपचिमोत्तरेण दक्षियमासस्येयगुवाः, दिगनुपातेम सवतोबा देवा सानारे फल्पे पूर्वपरिमारे दक्षिणमासरपेयगुणाः । तम परं महसमोपपवबा अमवायुप्मन । दिगम पातन सर्वतोमा सिहा दक्षिणोत्तरेण पूर्वेण सस्येया पार पधिमेम विशेषाधिकार द्वारम् । १। एतपा प्रदम्त । मेरपिशाखा तियग्यानिकामां मनुष्याणा देवाना सिहानाम पम्पगविसमासेन तरे चतरप्योरपा वा धावा वा तुस्यावा विधपाधिका वा ? गौतम | सबस्ताफा मनुप्या नैरपिपा पसरपेयगुग दवा पसरयेपगुणा सिहा समन्व गुणाः तिपरयोनिका अनन्त गुमा । एतेपा प्रदान । नैरपिका तियग्योनिकामा तियायोमिकामा ममुष्याचा मान पोका दवामा सिहामां पाप्ट गतिसमासन कातर पतरेन्योऽस्पा वा यमुवा वा तस्या वा विशेषाधिका वा ? गौतम । सवस्तीचा मामुष्यो मनुष्या प्रसस्पेपगुणाः मेरयिकाभ सरपपगुणा तिपरयोनिस्याऽसस्पेयगुपा देवा प्रसस्येपगुवा दम्य सायेपगुणा सिक्षा मनगुणा खियग्योनिका मनन्तगुणा । हारम् । २॥ ए -DHIRE हैं। देवा शसखेजगुणा । देवो सखेजगुणा सिझा शणतगुणा तिरिस्कजोणिया थणतगुणा दार २। एएसिण नते ! सइदियाण एगिदियाण बेइदियाण तेइदियाण घउरिदियाण पधिदियाण शणेदियाणय फयरे कयरेहितो थप्यावा यज्ञयाया तुल्लावा विसेसाहियावा ? गोयमा ! सहयोवा पचिदिया चउरि दिया यिसैसाहिया तइदिया विससाहिया बेइदिया विसेसाहिया श्रणिदिया गणतगुणा एगिदिया थ० सइदिया पि० । एएसिण नंते । सइदियाण एगिदियाण बेइदियाण तेइदियाण चउरिदियाण पचिदियाण छापजप्तगाण कयर कयरेहितो थप्यावा वझयावा तुलावा बिसेसाहियावा ? गोयमा ! सहत्योवा पचि दिया थपजाप्तगा घउरिदिया शपजष्ठगा विसेसाहिया, तेइदिया थपजनगा विसेसाहिया, येइदिया थपज्जतगा विसेसाहिया, एगिदिया श्वपाप्तगा शणतगुणा, सइदिया थपजत्तगा विसेसाहिया। एए सिण जते ! सइदियाण एगिदियाण बेइदियाण तेइदियाण घउरिदियाण पचिदियाण पजाप्तगाण कयरे तपा भरत । मेन्द्रियाणामधेन्द्रिपाल दिया या परिन्द्रियामा पम्बन्द्रियावामनिद्विपापबतरे बतरम्योऽश्याचा मला या तुस्पा वायपाधिका वा ! गौतम । सर्वतोबा पोलिपा बतुरिनिया विशेषापिता जीन्द्रिपा निमाविमा होदिपा विमेवारिया पनि ग्दिपा पनामुमा रोगिदपा पमतमुवा गिया बवाधिकाः । पोषा प्रदन्न । नियामवेनियाराहीन्द्रिमा कीनिया चतुरािंन्द्र पामा पद्रियावामपर्याप्तवाना तर बरेलोया बापाबा तुला पा विधाषिणामा नौतम | सोमा परनिगा पहला पतुरिन्द्रपा पपर्यावा वाषितालिश पर्यातवा विचारिता पिणा पाहवा विशेषारिता एनिमा पोता समता नापासपोहा मिचिएको सामागिमावापानमा निपानिया रिनिपाको परिवार पो 12 मAMAILOPM-PARTRONILEE कयरोहितो प्यावा वऊयाया तुल्लावा विसेसाहियाया ? गोयमा ! सझत्योवा पजप्तगा चउरिदिया पचिदिया पजप्तगा विसेसाहिया, तेइदिया पजाप्तगा यिसेसाहिया, येइदिया पजतगा विसेसाहिया, एगिदिया पज्जत्तगा गणतगुणा, सइ दिया पजप्तगा सखेजगुणा । एएसिण नते । सइदियाण पजप्ताप जातगाण कयरे कयरोहितो थप्पावा यजायाया तुलावा विसेसाहियाया? गोयमा । सवयोवा सइदिया थपजता पजात्तगा सइदिया सखेजगुणा । एएसिण नते ! एगिदियाण पजतापजत्ताण कयरे कयरे हितो छप्पाया ४ ? गोयमा । सवयोवा एगिदिया पजत्तगा एगिदिया थपजतगा एस०। एएसिण नते! येइदियाण पजाप्तापात्ताण कयरे कयरोहितो शप्पावा ?? गोयमा ! सष्ठत्योवा येइदिया पजाप्ता येहदिया थपजाप्ता शसखेजगुणा । एएसिण नवे ! तेइदियाण पजात्तापजाप्ताण कयरे कयरोहितो थ प्यावा ? गोयमा ! सहयोवा तेइदिया पजाप्तगा तेइदिया थपजतगा थसखेजगुणा। एएसिण नते ! सबानां कतरे कतरेभ्योऽस्पा वा मवावा तुस्या वा विशेषाधिवा या P पोतम । सर्वसोका पर्याप्तबायतुरिन्द्रिपा पद्रिया पर्याप्तमा घि संपापिका वीन्द्रिमा पर्याप्तबा विशेषापिता वीन्द्रिया। पर्याप्तका विशेपाधिका एपोन्द्रियाः पर्याप्तवा अनन्तगुणा सेन्द्रिया। पर्याप्तकाः सस्येय गुणा । एतपा प्रदन्त । सेरिद्रपाणा पर्याप्तापर्याप्तवाना बरे वातरेयोऽस्या वा बहुवा वा तुस्या वा विद्योपापिका वा ? गौतम ! सर्वतोमाः मेन्दिया अपर्याप्सबार पपोतका मेन्द्रियाः सस्पगुमाः । एवेपा प्रवन्ध ! एकेन्दियाणा पर्याप्तापयांसमाना कतरे कत्तरेन्योऽस्पा वा ४ गौतम । सर्वसोका एकोन्द्रियाः पर्याप्तमा अपर्यासमा प्रसस्पेयगुणाः । एतेपा भदन्त । हीन्द्रियाणा पर्याप्तवापासवाना कतरे बतरेन्योऽस्पा पापोत म ! सयस्तोका द्वन्द्रियाः पर्याप्तका अपर्यासका असम्पयगुना, एपां भदन्न । बौरिनुयाणा पर्याप्तकापर्या० बावरे सवरेन्योऽस्पा वा ४ सर्वखो है। देवा शसखेजगुणा । देवी सखेजगुणा सिझा शणतगुणा तिरिस्कजोणिया शणतगुणा दार २। एएसिण नते ! सइदियाण एगिदियाण येइदियाण तेइदियाण घउरिदियाण पचिदियाण थर्णेदियाणय कयरे फयरेहितो थप्पाया यजयाया तुल्लावा बिसेसाहियावा ? गोयमा ! सधन्योवा पचिंदिया चार दिया घिससाहिया तइदिया विसेसाहिया येइदिया विसेसाहिया श्रणिदिया शणतगुणा एगिदिया थ० सइ दिया पि०। एएसिण नंते ! सइदियाण एगिदियाण बेइदियाण तेइदियाण चउरिदियाण पचिदियाण छापज्जप्तगाण कयर कयरेहितो थप्पाषा पक्रयाया तुलावा बिसेसाहियावा ? गोयमा ! सवयोवा पचि दिया थपञप्तगा चउरिदिया अपजाप्तगा विससाहिया, तेइदिया थपजनगा विसेसाहिया, घेइदिया रुपजागा विसेसाहिया, एगिदिया थपज्जप्तगा शुणतगुणा, सइदिया थपज्जत्तगा विसेसाहिया । एए सिण जते ! सइदियाण एगिदियाण बेइदियाणं तेइदियाष चउरिदियाण पचिदियाण पजाप्तगाण कयरे तमा प्रवन्ध । मेन्द्रिमामेवेनियारी नादिपा दिया चतुरिद्रया पनन्द्रियावाममिंद्रिपानसरे पतरेयोपाचा एका बा तुला वा बिसपाधिका वा गौतम । सस्तोमा परोनिया पतुरिन्द्रिपा विशेषारिवानिया मिजाषिता हादिया विवाषिया बनि दिमा पमतमुवा रोगिमा बमन्तगुणाः दिपा विशेषाधिकाः । पाँबां परच। दिपावानेन्द्रिपा दिया जीन्दिवाचतुरिन्द्रि मार्ग पंचेंद्रिपाडामपर्याप्तवानी बतर तरेलाअस्पा बागवान तुस्सा वा विशेषाधिका बामौतम । पोषा पोनिमा पोमवा पारािष्ट्रमा पर्याप्तमा बिषापिताजीन्द्रिमपर्णतया जिसमातिा पिता पोहचा विचारिता एनिमा पोता तमु बाबपिया अपना एका मदिनानिमा दीनिवास शनिवालो युरिनिवासी परिवार पर्चा 1T याण पुढयिकाइयाण थाउकाइयाण तेउकाइयाण धाउकाइयाण वणस्सइकाइयाण तसकाइयाण थकाइ याण कयरे कयरोहितो थप्पाया ? गोयमा ! सहयोवा तसकाइया तेउकाइया आसखेजागुणा, पुढवि काइया विसेसाहिया , थाउकाइया विसेसाहिया, वाउकाइया विसेसाहिया एकाइया थणतगुणा , वणस्सइकाइया थणतगुणा , सकाइया विसेसाहियावा । एएसिण नते ! सकाइयाण पुढयिकाइयाण थाउकाइयाण तेउकाइयाण याउकाइयाण वणस्सइकाइयाण तसकाइयाणय थपजाप्तगाण कयरे कय रहितो थप्यावा ४ ? गोयमा ! सछत्योया तसकाइया थपजप्तगा , तेउकाइया थपजत्तगा शसखे जगुणा, पुढविकाइया थपजाप्तगा घिसेसाहिया, थाउकाइया थपजात्तगा विसेसाहिया , वाउकाइया थपजतगा विसेसाहिया, वणस्सइकाइया थपजनगा श्णतगुणा । सकाइया थपजागा विसेसाहिया पर्याप्तमा विधेपापियाः । हारम् । ३ । रत्तपा मदन । सहायिकाना पुषिधीकायिकामा प्रकायिकानां अस्वायिवाना वायुवापिबामा दम स्पतिवापिकामा प्रसवायिकामामकापिकामा परें वरन्यो अपा वा ? गौतम ! सवस्तोकालासचापिका स्वस्थापिका प्रसस्येपगुणाः पषि पोवापिणा विशेषापिका पप्कापिका विशेपापिका वायुवापिया विशेपाधिका पवापिका अमन्तगुणा वनस्पतिकायिका पनागुणाः सवायिका विध पापिकाः । एतेषा प्रदाय । समायिवाना पधिशापिकामा प्रकापियामा तेजस्वायिकामा वायुहायिकामा वनस्पतियायिकाना सकायि बानामपर्याप्तवानां पर पतरेभ्योऽस्पा वा ४ ? गौतम । सर्वलोकातसवायिका अपर्याप्तका लेवस्थायिका पप० असम्येषगुवा पथिवीवापिका प० विशपाधिका आप्कायिका प० विशेषापिका वायुवापिका प० विशपापिका धनरपतिबायिका प्रप० अनन्तगुणा' सफायिका अपर्याप्तण विशेषाषिक्षाः । एतेपा भदन्त । सवायिकामा पपिवीकायिखाना अवापिकाना वेवस्वायिवाना वायुशायिकामां बनस्पविनायिकामा प्रसकापि चउरिदियाण पजाप्तापजसाण कयरे कयरोहिंतो शप्पाषा ?? गोयमा ! सवत्योया परिदिया पज्जप्त गा चउरिदिया पानगा श्वसखेडागुणा । एएसिण प्नते! पर्चेदियाण पजप्तापजप्ताण कयरे कयरेहितो थप्पाया ? गोयमा ! सहयोवा पचिदिया पातगा पचिदिया थपजाप्तगा थसखेजागुणा । एएसिण नंते। सइदियाण एगिदियाण येइदियाण तेइदियाण परिदियाण पचिदियाण पजाप्तापाताण कयरे २ हितो छप्पाधा ? गोयमा ! सइत्योवा घउरिदिया पजात्तगा पधिदिया पजाप्तगा यिसेसाहिया, घेइ दिया पजात्तगा विसेसाहिया, तेइदिया पजप्तगा विसेसाहिया, पचिदिया थपजाप्तगा आसखेडागुणा घउरिदिया थपत्तगा विसेसाहिया, तेइदिया छपजप्तगा विसेसाहिया, घेइदिया थपज्जप्तगा यिसे सादिया, एगिदिया थपज्जत्तगा शणतगुणा, सइदिया थपज्जतगा विसेसाहिया, एगिदिया पात्तगा सखेजगुणा , सइदिया पजप्तगा बिसेसाहिया, सइदिया यिसेसाहिया दार ३ । एएसिण नते ! सकाइ मालीणिपा पर्याप्तबा प्रपोसवा सम्मेपगुमाए । यता भदन्त । तुरिणिपाना पर्या० बतरे गतरभ्योऽत्या बा नौतम । सवासाबाबत रिणिपाः पर्याप्तका अपर्याप्ता पसरपबगवाः । एवेषां परन्त । पद्रियामा पर्याप्त पापो० सारे० अपाबा ४ गौतम । सबनोबा परियाः पर्याप्तता चपर्याप्तका बारपेपगुचा । एतेषां परपावाने दिया पारादिपायां चतुरिदिवारी परेंद्विपारा पर्याप्तापोहा मां बतरे पापा बा गौतम । सबनोबा तुरिणिपा पर्याप्तबार पाँगा पर्यातका बिपापियामा पर्याप्तवा नियापिका in पार पर्याप्त मारिवाधिया परेडिया पर्यातवा परस्पयनमा परिमिमा पर्याप्तमा विवापिया दिया भएपहिला विवाधिका दिशा वपर्वाहवा विद्यापिका एदिपा लोहबा बनानुसा दिया भरोहका विवाषिचा दिमाः पहिया पापा याण पुढयिकाइयाण थाउकाइयाण तेउकाइयाण घाउकाइयाण वणस्सइकाइयाण तसकाइयाण थकाइ याण कयरे कयरोहितो शप्पाया ? गोयमा ! सछत्योवा तसकाइया तेउकाइया आसखेडागुणा, पुढवि काइया विसेसाहिया , थाउकाइया विसेसाहिया, वाउकाइया विसे साहिया थकाइया शृणतगुणा , वणस्सइकाइया थणतगुणा , सकाइया विसेसाहियावा । एएसिण नते ! सकाइयाण पुढयिकाइयाण छाउकाइयाण तेउकाइयाण याउकाइयाण यणस्सइकाइयाण तसकाइयाणय थपजातगाण कयरे कय रहितो थप्पाषा ४ ? गोयमा ! सइयोवा तसकाइया शपज्जतगा , तेउकाइया थपजात्तगा श्वसखे आगुणा, पुढविकाडया शपज्जतगा विसेसाहिया, थाउकाइया थपजत्तगा विसेसाहिया, वाउकाइया थपजाप्तगा विसेसाहिया, वणस्सइकाइया थपजप्तगा गणतगुणा । सफाइया थपजतगा विसेसाहिया पर्याप्तबा विशेषाधिकार । हारम् । । । एतपां भदन्त । समापिवाना पपिवीयापिकामा प्रकायिकानां तेजस्वायिकामा घायुवायिबामा वन स्पतिवापिकानां असमायिहानामवापिकामा परे बरेन्यो ऽरपा पा ? गौतम ! सर्वतोबाखसवापिका सोवस्कायिका प्रसस्येयगुगा। पाथ वोवापिया विशेषाधिका अप्यापिका विशेषापिका वायुगपिका विशेपापिसा प्रशापिका अमन्तगुणा वमस्पतिकायिका पनन्तगुणा सबापिका विशेपाधिकाः । एतेषां पदम् । सहायिकामा पधिवावायिकाना प्रकापियामा तेवस्थापिकामा वायुकायमाना वनस्पतिकायिकामा प्रसकापि बामामपयोतबामा पावर पातरेयोऽस्पा वा ४१ मौतम । सर्वतोबाखसमापिका अपर्याप्तका तेजस्कायिका प्रप० प्रसस्येपगुवाः पपिवीवारिक्षा प० विशेषाधिका प्रकायिका प्र० विशेषाधिका वायुगायिका अ५० विद्यपाधिका वनस्पतियापिका अप० भनवगुणाः सकायिका अपर्याप्तका विषापिका । एवेपा प्रवन्ध । सवानियामा पपिवीवापिकामा बप्पायिवानो वरपायिवाना वायुसायिकाना बमरपतितापिकामा समापि एएसिण नते ! सफाहयाण पुढविफाइयाण शाउकाइयाण सेउकाइयाणं घाउकाइयाण वणस्सइकाइयाण तसकाइयाणय पसाप्तगाण कयरे कपरोहितो शप्पावा?? गोयमा ! सक्षस्योवा तसफाइया पागा , तेउकाइया पडाप्तगा शसस्खेागुणा, पुढयिकाइया पाप्तगा विसेसाहिया थाउकाइया पजाप्तगा विसे साहिया, पातफाइया पजागा विसेसाहिया, वणस्सइकाइया पजता शणतगुणा, सकाइया पजलगा विसंसाडिया। एएसिण नते ! सकाठयाण पजाप्तापजाताण कयरे कयरोहितो थप्पावा यऊयाया तुल्लावा सिसेसाहियावा ? गोयमा ! सम्वत्योया सकाहया श्वपाप्तगा, सकाइया पात्तगा सखेडागुणा। एएसिण नते ! पुढविकाइयाण पजाप्तापजाप्ताण कयरे कयरोहितो थप्पावा यायाया तुल्लावा घिसेसाहियावा ? गोयमा ! सश्त्योया पुढयिकाइया चपजाप्तगा , पुढविकाइया पाप्तगा सखिजगुणा । एएसिण मते । शाउफाइयाण पजतापजताण कयरे कयरेहितो थप्पावा ? गोयमा । सदस्योवा थाउकाइया थप गाना र पाताना बरे पतरेयोअरपा पा ४१ पौतम । अवलोमा पसायिकाः पर्याप्तवा सेवसायिका। पर्या० प्रसंस्येयगुमा पभित्रीवा पिवा विगोपाधिश पवापिका वि पारिता बापुनापिका पर्याप्तवा विशेषाधिमा बस्पविषायिका पर्याप्तमा धनम्तनुवा वामिका पर्याप्त का विसपापियाः। एवे मदन । सबासिधामा पर्याप्तवापर्याप्तबामा पतरे बरेन्योपा 8 मौतम । खोबार बाविया पर्याप्त पा। पर्याप्तमा बरपेयनुवाः । एवेमा भदन्त । पृषिवापिधानां पर्याप्त पापर्याप्त पानां बापरे २ मी परतामा मौतम । ससोबा पत्रिी गापिका अपो० पर्या० स्पेपनुवाः । एता प्रपन्च । पा० चपर्वा पापियानो सतरे मोअपामार मौसम । सेतोबा याविना अपतिबा पर्वात मोनुवा स्वा प्रायवेवारिवाना पा० प्रा० रे रेमोअपामा नौवन । खोला गया - - BIRHEROINHERITERALDAREL जत्तगा, थाउकाइया पञप्तगा संखिजगुणा । एएसिण नंते ! तेउकाइयाण पजातापजाप्ताण कयरे कयरहितो थप्पावा? गोयमा । सश्त्योवा तेउकाइया थपजप्तगा, तेउकाइया पजाप्तगा सखेडागुणा एएसिण नते! वाउकाइयाण पञप्तापज्जताण कयरे कयरेहितो थप्पाया ४? गोयमा । सछत्योवा वाउ काइया शपजत्तगा, याउकाइया पज्जप्तगा सखेडागुणा । एएसिण नते ! वणस्सइकाइयाण पातारण कयरे कयरेहितो थप्पाया? गोयमा ! सष्ठत्योवा वणस्सइकाइया शपजातगा, वणस्सहकाइया पज्ज तगा सखेजागुणा । एएसिण नते । तसकाइयाण पजप्तापजत्ताण कयरे कयरहितो शप्पावा १ गोय मा ! सम्बत्योया तसकाइया पजप्तगा, तसकाइया थपजतगा शसखेडा० । एएसिण नते ! सकाइयाण पुढधिकाइयाण शाउकाइयाण तेउकाइयाण वाउकाइयाण वणस्सइकाइयाण तसकाइयाण पहाता २ ण कयरे कयरहितो थप्पावा ? गो० ! सछत्योवा तसकाइया पजात्तगा, तसकाइया थपत्तगा शसखे जागुणा, तेउकाइया थपजात्तगा आसखेझगुणा पुढयिकाइया थपजातगा विससाहिया, शाउकाइया थ उसका अपसका पर्याप्तबा सस्पेयगुणाः । एतपा पदम्त । वायुकापिकामां पर्याप्तापर्याप्तकामा परे पतरम्योऽसपा वा ४? गौतम | सर्वस्तो वा वायुवापिका अपर्याप्तकाः पर्याप्वका सरयेयगुणाः। एतपा प्रदन्त | वनस्पतियायिकाना पो०२ मा पतरे २ प्योऽस्पा वा ४१ गौतम । सवस्तीका पभरपतिबायिका अपर्याप्तबा पर्याप्तका सम्पपगुमाः । एतपा मदम्त । प्रसापिक्षामा पर्याप्ता २ ना कतरे २ भ्योऽस्पा वा ४? गौतम | सबसोबावसापिकाः पर्याप्तका अपर्याप्तबा प्रसस्ययगुणाः । एवेपो प्रदन्न । सकायिकाना पृथिवीकापियामामफायिकामा तेजस्का पिचामा वायुवापियानो वनस्पविवापिसाना वसायिकाना पर्याप्लपोप्तकामा बसरे करेन्योऽस्पा वा खाया तुल्या या विशेपाधिका वा ?
एएसिण नते ! सफाहयाण पुढविकाइयाण शाउकाहयाण सेउकाइयाणं घाउकाइयाण वणस्सइकाइयाण तसकाइयाणय पक्षाप्तगाण कयरे कयरहितो थप्पावा?? गोयमा । सहयोवा तसफाझ्या पसगा तेउकाडया पजाप्ठगा शसखेडागुणा, पुढयिकाइया पातगा विसेसाहिया थाउकाइया पजाप्तगा विसे साहिया, घाउकाठया पजप्तगा पिसेसाहिया, वणस्सइकाइया पजता शणतगुणा, सकाइया पजप्तगा बिससाहिया। एएसिण नते । सकाइयाण पञप्तापजताण कयरे कयरोहितो थप्पावा यजयाया तुल्लावा सिसेसाहियावा ? गोयमा! सहयोवा सफाया अपजागा, सकाइया पाचगा सखेडागुणा । एएसिण नते ! पुढविकाइयाण पजाप्तापाताण कयरे कयरेहितो थप्यावा बकयाथा तुलावा विसेसाहियावा ? गोयमा ! सत्योवा पुढविकाइया रुपजागा , पुढविकाइया पक्षप्तगा सखिजागुणा। एएसिण नते शाउकाइयाण पजपापमप्ताण कयरे फयरोहितो थप्पावा ? गोयमा ! सहयोवा थाउकाइया थप बामा र पाताना बरे बरेयोऽपामौतम । सर्वतोबा ससायिकाः पर्याप्तवा सवस्वामिकाः पर्या० प्रसंस्पेयगुणा पघिवीवा पिना विशेषाभिषा पप्पापिषा विधेपापिया वायुवापिका पर्याप्तबा विशेषापिता बमपविवायिका पर्याप्तवा पनन्नुषा भवामिवार पर्याप्त पारिपाधिका एसपा मदन । समापिवाना पर्याप्तवापासवाना पतरे बारेभ्योऽसपा वा पौतम । पर्वतोबार सवापिका अपर्याप्स पातमा गोपनुमा । एतेरा बदन । पियवापियामा पर्याप्तबापर्याप्तवाना बर २ श्री चस्पा! मौतम । पजोखा पूर्षिकी गापिका अपा० पर्या परसेपमुताः । एता प्रान्त । प० पो पायिवानां पतरे ९ योपा बामौतम । सोचा पवापिका अपर्वाहवा पर्याप्तबार पेपनुः । एवं नाच । वेवारिवाना पी० सपा कतरे परेमोअपामा मौन । वसोवा पाचा DELEPHEMISESIBEEBERREER] जत्तगा, थाउकाइया पजातगा संखिजागुणा । एएसिण नते । तेउकाइयाण पाप्तापज्जताण कयरे कयरहितो थप्पावा? गोयमा । सश्त्योवा तेउकाइया शपजतगा, तेउकाइया पजातगा सखेडागुणा एएसिण नते! वाउकाइयाण पञप्तापजाप्ताण कयरे कयरहितो शप्पाया ४ ? गोयमा । सइत्योया याउ काहया शपज्जत्तगा, याउकाइया पजाप्तगा सखेडागुणा । एएसिण नते ! वणस्सइकाइयाण पजाप्तारण कयरे कयरेहितो थप्पाया ? गोयमा ! सइत्योवा वणस्सहकाहया श्वपजतगा, वणस्सहकाइया पन्ज तगा सखेडागुणा । एएसिण नते । तसकाइयाण पातापजात्ताण कयरे कयरेहिंतो थप्पावा १ गोय मा ! सछत्योवा तसकाइया पजागा, तसकाइया शपजाप्तगा शसखेडा० । एएसिण नते ! सकाइयाण पुढविकाहयाण थाउकाइयाण तेउकाइयाण वाउकाइयाण वणस्सइकाइयाण तसफाइयाण पजाप्ता २ ण फयरे कयरेहितो चप्पावा?? गो० ! सवयोवा तसकाइया पजत्तगा, तसकाइया थपजात्तगा शसखे जागुणा, तेउकाइया अपमत्तगा शसखेजगुणा पुढयिकाइया चपातगा विसेसाहिया, थाउकाइया 0 यक्षा अपर्याप्तका पर्यातका सश्येयगुवाः । एतपा नदम्त ! वायुवापिकामा पोतापर्याप्तक्षामा कवरे कासरन्योऽस्पा वा ४ ? गौतम । सवसो का वायुवायिका अपर्याप्तचा पर्याप्तका सरयेपामाः । एतपा भदन्छ । वनस्पतिकापिकाना पो०२ मा कतरे २ योऽपापा ४? गौतम । सर्वसोया पनरपतिकायिका अपर्याप्तका पर्याप्तबार सम्पपगुवा । पतेपो मदन्त । असमायिफाना पर्याप्ता २ नां कतरे २ म्योऽल्पा वा ४ गौतम । सवस्तीशासकायिका पर्याप्तका अपर्याप्तका प्रसस्पेयगुणाः । रपा नदप्त ! सकापिकामा पृथिवीकापिकामामप्फायिहाना मस्का पिचाना वायचापिकाना वनस्पविकापियामा वसायिकामा पर्याप्तापर्यासकाना बारे कारेन्योऽस्पा वा वाचावा तुल्या या विशेपाधिक्षावा ? 6DDHINDIDE पमत्तगा यिसेसाहिया, वाउकाइया शपजतगा विसेसाहिया, तेउकाइया पजप्तगा सखेडागुणा, पुढवि फाइया पजाप्तगा विसेसाहिया, थप्पकाइया पनगा यिसेसाहिया, वाउकाहया पजत्तगा विसेसाहिया, शपजाप्तगा धण० शनन्त० पजतगा सखेजगुणा, सफाहया थपजनगा विसेसाहिया, सकाइया पजप्त गा सखेडागुणा सकाइया विसेसाहिया। एएसिण नते । सुजमाण सुजामपुढविकाइयाण सुजमशाउकाइ याण सुजमतेउकाइयाण सुजमवाउकाहयाण सुजामवणस्सहकाइयाण सुजमणियाणय कयरे कयरोहितो शुप्पाबा ? गोयमा! सछत्योया सुजमतेउकाइया, सऊमपुढविकाइया विसेसाहिया सुऊमशाउकाइया यिसेसाहिया, सुजामवाउकाइया विसेसाहिया, सुजमनिगोदा शसखेडागुणा, सुजमवणस्सइकाइया शणत गुणा, पज्ञमा विसेसाहिया। एएसिण जते ! मुझमथपजात्तगाण मुहुमपुढयिकाहयाण थपजाप्तगाण सुजा मशाउफाहयाण शपज्जतगाण सुशामतेउकाठयाण शपजाप्तगाण सुजमवाउफाइयाण थपजप्तगाण सुजम गौतम । सवतोबावसापिग पर्याप्तवा चपर्याप्तमा सेयश साजस्थापिका भपयोतका बससेयनुसार पधिवीचायिका प्रपोतका गि सपापिका पप्पापिका अपर्याप्तका विमेवाधिवा वायुवापिका अपर्याप्तका विषपाधिमा बस्थापिकाः पर्याप्तका संम्पगुणाः पपिपीवापि बार पर्याप्तमा पापिता पपापिया पर्याप्तबा बिपाधिका वायनामिका पर्याप्तबा विशेषाधिवा अपर्याप्तका बनस्पतिवापिका समय गुपा पर्याप्तका' स्पगुला सवापिका अपर्याप्तथा विशेषाधिका भवापिया। पर्याप्तता पपगुवाः । एतेषां प्रान्त । पूल्लाग चूमपषि बीमापिकानां मातापिताना मूलतेवस्थापिवाना पूलवायुवापिसाना सूक्ष्मवनरपतिबापिकाना नूमनिमोराना बतरे परेभ्योजापाचा ४. गौतम । सो पलवस्थापिका पूलपविधीपिका विशेषाधिका पूजापापिका विवाषिक्षा पूलवायुवापिका विशेषाषिता LIta PERMIREOpan SDESHEDARA वणस्सइकाइयाण थपञप्तगाण सहुमनिगोदाण शपजत्तयाणय कयरे कयरहितो शप्यावा ? गोयमा। सहत्योया सहुमतेउकाइया अपजप्तया, सुजमपुढविकाइया शपजप्तगा बिसेसाहिया, सुजमशाउका० शपजाप्तया विसेसाहिया, सुजमवाउकाइया थपजतया विसेसाहिया, सुजामनिगोदा थपजातगा श सखजागुणा, सुऊमयणस्सइकाइया थपजावगा शणतगुणा, सुऊमा थपजातगा विसंसाहिया। एएसिण जते ! मुजमपजप्तगाण सुजमपदविकाइयपाप्तगाण सुजमशाउकाइयपज्जतगाण सुजमतेउकाइयपडा प्तगाण सुजमयाउकाडयापात्तगाण सुजामयणस्सहकाइयापजात्ताण सुऊमनिगोदपजातगाणय कयरे कय रोहितो थप्पावा? ? गोयमा ! सश्त्योवा मुज्जमतेउकाइया पजप्तगा, सुऊमपुढविकाइयापजागा वि सेसाहिया, सुजमथाउकाहया पळाप्तगा विसेसाहिया, सुजमवाउकाइया पानगा विसेसाहिया, सुजा मनिगोदा पजाप्तगा सखेडागुणा , सुजमवस्सहकाहयापजत्तया एणतगुणा , सुहमापाता विससा हिया दार ३ । एएसिण नते ! सहुमाण पजाप्ता २ ण कवरे कयरेहितो शप्पाया? सइत्योया सुहुमा मूत्मनिगोदा असम्यगुणाः सूक्ष्मवनस्पतिकायिका प्रमसगुणा मूक्ष्मा विझोपापिकाः । एतेपा भदन्त । सूत्मापर्याप्तकामा सूक्ष्मपथिवीकापिका पाप्तबामा ममाप्कापिकापर्याप्तामा मूत्मतेवरवायापर्याप्तवानां मल्मापर्याप्तवायफापिकामा सूक्ष्मापर्याप्तवनस्पतिवापिकानां सूक्ष्मापयों प्तमिमोदामा पतरे २ योऽसपावा ? गौतम । सर्वतोबा सत्मापर्याप्ता ने बरकायिकाः सुक्ष्मपपिवीवायिका प० विशेषाधिया। सूत्माप्कायिका अपोप्तझा विशेषापिता मुम्मवायुवापिका प० विमपापिका मूलनिगोदा ५० प्रसस्यगुवा मृत्मवनस्पतिवायिका १० अनन्तगुणा सस्मा भपा विशेषाधिका । एकपा मदन्च ! पूरमपर्याप्तवाना नामपिवीकायपर्याप्तामा सूरमाप्यायिकपोकामा मूरमतेवस्थायिकपयाकानां सू पजत्तगा यिसेसाहिया, वाउकाइया अपजाप्तगा विसेसाहिया, तेउकाइया पजागा सखेजगुणा, पुढवि फाइया पाप्तगा विसेसाहिया, थप्पकाहया पजप्तगा यिसैसाहिया, वाउकाडया पजात्तगा विसेसाहिया, शपञप्तगा घण० अनन्त० पजष्ठगा सखेजगुणा, सकाहया थपजाप्तगा विसेसाहिया, सकाठया पजाप्त गा सखेजगुणा सकाहया विसेसाहिया। एएसिण नते । सुजमाण सुजमपुढविकाइयाण सुऊमथाउकाई याण सुजमतेउकाइयाण सज्जमवाउफाइयाण सुजामवणस्सहकाइयाण सुजामणिल्याणय कयरे कयरेहितो थप्पावार ? गोयमा ! सहयोया सुजमतेउकाइया, मजमपुटविकाइया विसेसाहिया सुजमथाउकाइया बिसेसाहिया, सुजमवाउकाइया विसेसाहिया, सुझमनिगोदा यसखेडागुणा, सुजामवणस्सइकाइया थणत गुणा, सजामा विसेसाहिया। एएसिण नते ! सुजमथपजसगाण सुहुमपुढविकाइयाण थपप्तगाण सुज मथाउकाष्ठयाण चपजप्तगाण सुझमतेउकाइयाण शपज्जतगाण सुझमवाउकाइयाण आपआप्तगाण सुजाम विम 1 सवस्तोलालसायिकाः पर्याप्तका अपर्याप्तवा पोपमुवा साबस्थापिका अपर्याप्तका सम्पनुवाः पचिनीमायिका अपर्याप्तका पापिका पापिका अपर्याप्तवा पिपाधिका वायुवापिका चपोप्तका विशेषाधिवा स्वस्थापिका पर्याप्तवा संपनुमाः पपिपीतापि । पर्याप्त विपापिता प्रमापिका पोतबा विसपाधिका युवापिका पर्याप्तवा विशेषारिका अपर्याप्त बमस्पतिवापिका पन्त । पर्याप्तबा पमुबा। सवापिका अपर्याप्तका विशेषाधिका सवापिका पर्याप्त यमुनाः । एषा प्रान्त । नाग पूमपषि नापिचाना पुस्मामापिथाना मूत्मतेजस्ायिकामा सूत्मवायुवापिवाना पूलबनस्पतिशापिकानां सम्मानिनोरामा पतरे सवरेबोअपापा गौतमलोपा पूलबस्तापिता। पूनपचिपीवापिका विशेषाधिका भाप्पापिया विषाधिकार पूलबापुवापिका विवादिता सखेडा० । एएसिण नते! सहुमवणस्सइकाइयाण पजाता २ ण कयरे कयरहितो शप्पावा ? गोयमा ! सकृत्योया सुजमघणस्सइकाइया थपजाप्तगा, सुज्जमवणस्सइकाइया पजप्तगा सखिज्जागुणा । एएसिण नते । सुहुमनिगोदाण पाता २ ण कयरे कयरहितो थप्यावा?? गोयमा ! सहत्योया सुऊमनिगोदा पजाप्ता, सुहुमनिगोदा पात्तगा सखेडागुणा । एएसिण नते ! सुजमाण सुजमपुढविकाइयाण सुहुम थाउकाइयाण सुऊमतेउकाइयाण सुहुमघाउकाइयाण सुहुमवणस्सइकाइयाण सुहुमनिगोदाणय पजतार ण कयरे कयरहितो छप्पाया ? गोयमा! सक्षत्योघा सुजमतेउकाइया थपजाप्तया, सुजमपुढयिकाइया थपजत्तया विसेसाहिया, सुहुमथाउकाइया थपज्जत्तया विसेसाहिया, सुजमवाउकाहया थपजात्तया विसेसाहिया, सुहुमतेउकाइया पजात्तया सखेडागुणा , सुहुमपुढयिकाइया पजातया विसेसाहिया, सुज मथाउकाइया पज्जत्तगा घिसेसाहिया, सुहुमयाउकाइया पजत्तगा विसेसाहिया, सुजमनिगोदा गणतगु REFERMER संम्येपणुमाः । पतपा सूत्मवनस्पतिमायिवानां पर्या०प०ना बारे कवरेभ्योऽरपा पा ४ ? गौतम । सर्वतोफा सूदमयमस्पविकापिफा प्रपया प्तका पर्यापार सस्पेयगुवा मतेपा मूक्ष्मनिगोदामा पर्या०पर्याना बारे कतरेभ्योऽस्पा पा ४ ? गौतम । सर्वस्तीका सूरमनिगोदा अपर्या० काा पर्या०का सत्यगुणा । एतेषां भदन्त । सूक्ष्माता सूक्ष्मपषिधीकायिकाना सूक्ष्माप्यापिकानां मूत्मतेजस्कापिकामा मूमवायुयायिकाना मुदम वमापतिकापिकाना मूत्ममिगोदानास पर्या०प०कानां कतरे कतरन्योऽस्पा या ४ ? गौतम । मयस्तोखा सूक्ष्मतेपस्थायिका अपपाप्ता मुदम पथिवीचायिका अपर्याप्ता विशेषाधिकार समाप्यायिका अप० विधेपाधिकाः ममवायुयायिका अप० विशेषाधिकार सूक्ष्मजस्थापिकाः पर्या० पाः संस्यगुणा ममपपिवीयायिकार पर्या० विशेषाधिकाः सूक्ष्माप्कापिका पर्या० विशेपापिका सूपमवायलापिया पर्या० विद्यपाधिका मसम थपजाप्तगा सुहुमा पञप्तगा सखेज्गुणा । एएसिण नते ! सहमपटविकाइयाण पजाप्ता २ ण कयरे २ हितो थप्पावा ? गोयमा । सदस्योधा मुहुमपुढविकाइया थपजप्तया , सुहुमपुटविकाइया पहात्तगा सखेगुणा । एएसिण नते ! सुहुमथाउकाइयाण पजता२ ण कयरे२ हितो थप्पावा? गोयमा ! सछ त्योया सुजमचाउकाइया थपत्तया, सुझमशाउकाइया पजाप्तगा सखेडागुणा । एएसिण नते ! सुज मतेवकाइयाण पजप्ता २ ण कयरे कयरहितो थप्पावा ? गोयमा ! सष्ठत्योवा सुऊमतेउकाइया थप जाप्तगा सुजमतेउकाइया पजाप्तगा सखिजगुणा। एएसिण नते! सुझमधाउकाइयाण पता २ ण कयरे२ हितो थप्पावा ? ? गोयमा ! सहयोवा मुक्रमवाउकाइया थपजश्वगा, मुझमवाउकाइया पजतगा रमणापुत्रापिवपोवाना सरमवनस्पतिवापपर्यायानां सूक्ष्मनिनोदप०वाना बरे पतरेन्योअपा वा ४ ? मौतम । सवस्तोबा ममतेजस्का पिका प० सूरमपियोवापियाः प० वि पारिवाः सूरमाप्कापिबार प० विझेपाापका सूक्ष्मवायुकापिकाः प० विशेषाधिकार सूरमनिगोदार पर असत्यगुवा रामवनस्पविवापिदार प० प्रमन्तमुबानमा पर्याचा विशेषाधिकाः । द्वारम् । ४ ० एतपो प्रदाच । दूधमाला पर्या०पर्याप्ताना पतरे गतरेभ्यो अपावा ४१ नौतम ! सर्वतोवाः सूरमा अपर्या०बा भूपमाः पर्याप्तबार सम्पनुवाः । एतेषा भदछ । धरमपपिपीवापिका मा पर्यापपांनो कतरे बातरमोअपाn४१ मोतम । सवतोबा नरमपपिवीकापिया पर्याचा मामपषिमीकारिकाः पर्याया। पार । एनेपा प्रदन्छ । सूरमापापानामपर्या०पर्याप्नां बतर बतरेभ्याअपापा, नौवन । पोका पूामा पापिका प० पर्योबा वं म्पपगुवा । पतेषा पामतेबसापपर्या०प०वानो कतरे बरमाअपापा ! मौतम ! चोका पामवेवस्थापिका चप० पदोoया! पन्यु गा। स्वेता नरमबाबुमापिकामा पर्याप्तापर्याप्याना बसरे परमाअपाबाबौन सोचा। पूजापाoया बापाविचा पर्याप्ता सखेडा० । एएसिण नते! सुहुमवणस्सइकाइयाण पजाता २ ण कयरे कयरेहितो शप्यावा ? गोयमा ! सहयोया सुजमवणस्सइकाइया थपजाप्तगा, सुजमवणस्सइकाइया पजाप्तगा सखिजगुणा । एएसिण नते ! सुहुमनिगोदाण पजाप्ता २ ण कयरे कयरेहितो थप्पावा? गोयमा ! सछत्योया सुजामनिगोदा थपजाप्ता, सुहुमनिगोदा पत्तगा सखेडागुणा । एएसिण मते ! सुजमाण सुजमपुढविकाइयाण सुहुम शाउकाइयाण सुजामतेउकाइयाण सुकुमवाउकाइयाण सुहुमयणस्सइकाइयाण सुहुमनिगोदाणय पजातार ण कयरे कयरहितो थप्पाया ? गोयमा! सहयोया सुज्जमतेउकाइया थपझप्तया, सुजामपुढयिकाइया थपत्तया विसेसाहिया, सुहुमथाउकाइया थपजत्तया विसेसाहिया, सुऊमयाउकाइया थपडात्तया विसेसाहिया, सुहुमतेउकाडया पजत्तया सखेडागुणा , सुहुमपुढविकाइया पजातया विसेसाहिया, सुजा मशाउकाइया पात्तगा यिसेसाहिया, सुहुमयाउकाइया पात्तगा विसेसाहिया, सुजमनिगोदा थणतगु ना सरपेपगुणाः । एतपा सूत्मवमरपतिकायिबामा पर्या०पर्याग्ना बतरे कतरेभ्योऽरपा या ४ १ गौतम । सर्वस्तीका सूक्ष्मवनस्पतिक्षायिका भपया प्तका पर्या०मा सरपेयगुणाः। एवेपा सूक्ष्मनिगोदानां पर्या०पर्याना फतरे कतरेन्योऽस्पा वा ४. गौतम । सर्वस्तोता सूक्ष्ममिगोदा प्रपो० जाः पोका सस्यमुखा । रतेपा प्रदम्त । सूक्ष्माशा सूधमाधवीकापिकानां सूदमाप्फापिकाना सूत्मतेजस्कायिकामा मृत्मवायुकायिकामा सूक्ष्म वनगपतियापिकामा सूक्ष्मनिगोदामाम्म पर्या०पर्यावाना बतरे कवरम्योऽस्पा वा ४ ? गौतम । सवस्तीक्षा सूत्मतेघरमापिका अपर्याप्ता पपियोकायिका अपर्याप्ता विशेपापियाः समाप्कापिणा अप० वि पापिया। ममवायुवापिसा अप० विद्योपाधिका सूत्मवेजस्वायिकाः पर्या० काः संस्यगुणाः मूक्ष्मपथिवीकायिका पर्या० विशेषापिका सूक्ष्माप्कापिश्चा। पयो विधेपापिका सूपमवायुकापिया पर्या० विशेषाधिकाः मधम सूक्ष्म अपजाप्तगा सुहुमा पजनगा सखेजगुणा । एएसिण जते ! सहुमपुढविकाइयाण पज्जाप्ता २ ण कयरे २ हितो थप्पावा ? गोयमा ! सहयोषा सुहुमपुढविकाइया थपजप्तया , सुहुमपुढविकाइया पजात्तगा सखेजगुणा । एएसिण नसे ! सुहुमशाउकाइयाण पजाप्ता२ ण कयरे२ हितो थप्यावा? गोयमा । सछ योषा सुजामशाउकाइया थपज्जत्तया, सुजमथाउकाइया पजातगा सखेडागुणा । एएसिण नते ! सुज मतेउकाइयाण पजाता २ ण कयरे कयरेहितो शप्पावा ? गोयमा ! सवत्योया सुजमतेउकाइया रुप जप्तगा सुजमतेउकाइया पज्जतगा सखिजगुणा। एएसिण नते! सऊमवाउकाइयाण पजप्ता २ ण कयरे२ हितो थप्पावा १? गोयमा ! सछत्योषा सुजमवाउकाइया थपज्जनगा, सुजमवाउकादया पज्जतगा एमवायुवापिषपोवाना नूरमवनस्पतिवापपर्यायाना सूचनिनोदपवाना चबतरे गतरेन्योरपा वा ४ गौतम । सवसोकाः मरमतेजावा पित्रा पा सूरमाधवीचापिका। प० विमपाधिपाः सूरमाप्कापिणाः प० विशेपाापका वृदमवायुवापिका प० विशेषाधिका भूरमनिगोदाः पर असं समुना सूहमवनस्पतिबापिका प० धमन्त मुबानमा पर्याचा विशेषाधिकार । बारम् ।। एतां प्रदान । दुइमा पर्यापर्याप्तानां पतरे गतरेयो अपावा ४१ पौतम | सर्वतोपाः सूरमा अपर्या०बा मुहमा पर्याप्तबार सम्पयगुणाः । एतेषां मरन्छ । पूरमपमितीवापिका मा पर्यापोग्ना बतरे सतरम्पोजपा वा ? गौतम । सवतोबा नहमपपिवीतपिता अपयांचा चूरमपपिपीवापिका पोका पम् मा । एनेपा प्रपन्च । सूरमाणापानामपा०पर्याना बातर बतरेम्यापाबा नौवन । बसोबा मा चपारिवा पप० पी०पा सं सपना । पतेपा पूरमतेबस्थापपर्याचपणानां पतरे परम्पोपा बा ४१ गौतम ! बसोबा मवेबसारिया चप० पर्याया। म ना। वे नएमवायुपापियामा पर्यावापोप्याना पर सरेयोपा बा ! पोम । परनोवा पूरलापोवा बाबुमावि पोवार सखेडा० । एएसिण नते! बहुमवणस्सइकाइयाण पजाता २ ण कयरे कयरेहितो थप्यावा ? गोयमा ! सइत्योवा सुजमवणस्सइकाइया थपजाप्तगा, सुजमवणस्सइकाइया पजातगा सखिसगुणा । एएसिण नते । सुहुमनिगोदाण पजाता २ ण कयरे कयरोहितो शप्पावा? गोयमा ! सश्त्योवा सुऊमनिगोदा थपजाप्ता, सुहुमनिगोदा पछत्तगा सखेजगुणा । एएसिण नते ! सुजमाण सुऊमपुढविकाइयाण सुहुम शाउकाझ्याण सुजमतेउकाइयाण सुहुमवाउकाइयाण सुहुमवणस्सइकाइयाण सुहुमनिगोदाणय पजाप्तार ण कयरे कयरहितो थप्पाया? ? गोयमा! सहयोया सुजमतेउकाइया थपजाप्तया, सुजामपुढयिकाइया शपजत्तया विसेसाहिया, सुहुमयाउकाइया थपजत्तया विसेसाहिया, सुऊमवाउकाइया थपजात्तया विसेसाहिया, सुहुमतेउकाइया पऊत्तया सखेडागुणा , सुहुमपुढविकाइया पजप्तया विसेसाहिया, सुजा मथाउकाझ्या पज्जत्तगा यिसेसाहिया, सुहुमयाउकाइया पज्जत्तगा विसेसाहिया, सुजमनिगोदा शणतगु सरयेपगुणाः । यता सूत्मवनस्पतिकापियामा पा०पर्याग्ना सतरे कमरेभ्योऽरपा पा ४ ? गौतम ! सर्वतोफा सूरमषमस्पतिकायिका प्रपया प्तका पर्या०का सरयेयगुणा, एवेपा सूक्ष्मनिमोदामा पो०पर्योना कातरे कतरेभ्योऽरपा पा ४ ? गौतम । सर्वसतोष्ठा' सूरममिगोदा अपर्या० का पर्याकार सत्यगुणा । एतेषां भदन्त । सूरमाता सूक्ष्मपाचवीचापिकामां सूक्ष्माप्फायिकाना सूत्मतेजस्वायिकामा सूत्मवायुकायिकामा सूदम पनापतिकायिकाना सूक्ष्ममिगोदामाच पर्यापी०कामा सतरे कतरन्योऽरपा या ४ ? गौतम । सवस्सोक्षा सूत्मतेघरकायिका अपर्याप्ताः पपिवीकायिका अपर्याप्ता विशेषाधिकार समाप्यायिका अप० विशेपाधिक्षाः मूलवायुगायिका प्रप० विधोपाधिका सूत्मवेनस्कापिकाः पर्या० हाः संस्यगुसा समपथिवीक्षायिका पो० विशेषाधिका सूत्माप्कायिक्षाः पो० विशेषाधिका सूएमवाय कायिका पर्या० विद्योपाधिका सूपम सदम णा, सुहुमा थपञ्जप्तगा विसेसाहिया, सुझमा यणस्सहकाया पडत्तगा सखेडागुणा, सुजमा पझप्तगा घिसेसाहिया । एएसिण नते ! यादरगाण यादरपुढयिकाइयाण वादरथाउकाहयाण वादरतेउकाइयाण यादरशाउकाइयाण धादरवणस्सहकाइयाण पसेयसरीरयादरवणस्सइकाइयाण यादरनिगोदाण यादरतसका इयाणय कयरे२ हितो थप्पावा यकृयावा तुलावा विसैसाहियावा ? गोयमा। सकृत्योया यादरतेउफाइया यादरतेउकाठया आसखेजगुणा, पप्तेयसरीर बादरवणस्सहकाइया थसखेजगुणा यायरनिगोया थसखेज गुणा , यादरपुढधिकाइया शसखिजगुणा , बादरश्चाउकाइया थसखेडागुणा यादरवाउकाइया शसखे ज्जगुणा वादरयणस्सइकाइया एणतगुणा यादरा विसेसाहिया, एएसिण नते ! यादरापज्जप्तगाण याद रपुढवीकाइया थपज्जप्तगाण यादरथाउकाइया थपठजप्तगाण यादरसेउकाइयाशपज्जत्तगाण यादरवाउ काइया थपज्जतणाण यादरवणस्सझ्या शपज्जप्तगाण पत्तेयसरीरवणस्सइकाइया थपज्जप्तगाण यादरनि मिनोदा अपस्नुका सम्मानपोदा पा० सोपणुका मूमबमस्पतिवापिका अप०का चनचनुवा भूपमा प्रपोग्बा विशेषाधिकार बनस्पतियापिका पा० संस्मनुवाः सूष्माः पर्याया विशेषाधिकार । एतपो भरन । बारा वारसपिपिचाना वापराप्यापिकामा वादरवस्थापिकामा बादरवायुवापिकामा बादरवनस्पतिवाविवानां प्रत्येकारोरवापरबनस्पतिवारिकामा भारनिगोहाना बारबानिया माप पातर बतरम्पोपा बा ४ ! गौतम । सोचा वापरमरणाविण वापरबत्तापिता मनुका प्रत्यारीरवापरणस्पतिवादिषा पस्सनुशरा माररनिनादरा परम्ममुवा पाररषिीमारिया जाममुना पारापारिवा मग नारावारिता बामना वापर रविवाविया बनपुरा बारा पिपाधिमा । पर पाबारपाण्याना बादरापी पुषिवीचाविधानां बाररापा• पारिवाना F 20AMERamn गोदा पहातगाण बादरतसकाइयाशपजात्तगाणय कयरे कयरेहितो शप्पावा यजयावा तुल्लावा यि संसाहियाया? गोयमा। सछत्योवा यादरतसफाइया शपजतगा, यादरतेउकाइया शपजतगा शसखेडा गुणा, पत्तेयसरीरबादरवणस्सहकाइया पङाप्तगा थसखेडागुणा, यादरनिगोदा शपजातगा थसखेज गुणा, बादरपुढयीकाइया पातगा शसखेजगुणा, यादरशाउकाडया शपजातगा शसखेडागुणा , वादरवाउकाइया थपझात्तगा शसखेडागुणा, वादरयणस्सहकाइया थपजत्तगा शणतगुणा, वादरशप जाप्तगा विससाहिया २ । एएसिण नते ! यादरपजत्तयाण यादरपुढविकाइयाण पजातयाण , यादरशाउ काहयाण पजातयाण यादरतउकाहयपतयाण यादरवाउकाहयापजाप्तयाण यादरवणस्सहकाइयाण पज तयाण पत्तेयसरीरयादरवणस्सइकाइयापजन्तयाण यादरनिगोद पातयाण यादरतसकाइयपळाप्तयाणय कयरे कयरेहितो शृप्यावा यजयावा तुल्लाया विसेसाहियावा ? गोयमा ! सछत्योया यादरतंउकाइया प पादराप० तेजस्वापिकामा वादरापर्या० गयुनायिकामा धादरापया०वनस्पतियापिकाना वादरापर्या० प्रत्यकारीरवनस्पतिफायिकानां यादरनि गोदामामपर्याचा धादरापर्या० प्रसकापियामां कतरे २ म्याऽस्पा वा ४ १ गौतम । सर्यतामा धादरसफायिका प्रपो०का पादरसेवस्थायि मा अप० प्रसस्यपगुणाः प्रत्याभरीरवादरवनस्पतिवायिका प५० प्रसरयेयगुणा वादरमिगोदा अपर्याप्तफा प्रसस्पेयांपा पादरपपिवीकायिका अपपातमा प्रसस्पगुया वादराप्कापिबा पप० प्रसंस्पगुणा वावरवायुवापिका अप० प्रसस्यगुण वादरवनस्पतिकायिका प्रपया प्रमन्तगणा या दरापयाका विमपाधिकार । २ । पतपा H० ! पादरपयकामा वादरधिकाथपपाप्तकामा पर्याप्तवादराफायाना पपा बादरतेजस्मापिका मी पपासवादरवायबापामा पर्याप्तवादरवनस्पातफापिकाना पपातमत्येकशरीरवादरवनस्पविफापिकाना पर्याप्तपादरनिगोदामा पर्याप्तवादरपस JADRDREALERROO णा, सुहुमा शपजान्नगा विसेसाहिया, सुझामा यणस्सहकाया पझत्तगा सखेडागुणा, सुजमा पाप्तगा बिसेसाहिया । एएसिण नते ! बादरगाण बादरपुढायिकाइयाण यादरचाउकाइयाण यादरतेउकाइयाण यादरवाउकाइयाण धादरयणस्सइकाइयाण पत्तैयसरीरयादरवणस्सइकाइयाण यादरनिगोदाण चादरतसका इयाणय कयरे२ हितो शप्पावा यज्ञायावा तुल्लाया बिसेसाहियावा ? गोयमा। सइत्योया बादरतेउकाइया यादरतेउकाइया शसखेज्गुणा, पप्तेयसरीर चादरवणस्सइकाइया आसखेडागुणा यायरनिगोया आसखेज गुणा , यादरपुढधिकाइया शसखिज्जगुणा , बादरछाउकाइया शसखेडागुणा धादरवाउकाइया थसखे उजगुणा वादरयणस्सइकाइया थणतगुणा यादरा विसेसाहिया, एएसिण नते ! घादरापज्जप्तगाण बाद रपुढयीकाइया थपण्जप्तगाण यादरशाउकाइया चपजप्तगाण चादरतेउकाडयाचपज्जत्तगाण वादरवाउ काझ्या थपउजष्ठणाण यादरवणस्सइया थपज्जतगाण पत्तेयसरीरवणस्सइकाइया थपज्जप्तगाण वादरनि मिगोदा बफ घसम्पनुवाः भूमनिमोदा पा० गोषणवाः भवानस्पतिकापिका सपना अनन्तगुगा सूक्ष्मा अपयोमा विपाधिका महम वनाविधायिका पो० संम्पगुवा सूपमा पोमा विशेषाधिका । एता भव बादरामा बाररपपिचापिकाना बादराफारिवाना पापरतेजस्वापियामां बापरवायुवापिकामा नापरवानस्पतिकापियामा प्रस्वासरोरवादरबनस्पतिवापियामा बादरनिमोदरानो बारपसवारिया बितर परम्पोऽरपा वा गौतम । सर्वधोका पाररबसवापिस गदरबस्वापिका रसगुना प्रस्पायरोरवापरबपतिवापिया पसंस्मनुमा वाररमिनोदात्मनुवा वारपृषि वापिका परमगुग पाररावापिका अपना बादरायुवापिना पबममुवा पाररसन स्पविषापिता बननुरापाररा विशेषाषिताः । एषां बरसादरपोशाना बारापा०पृथिवीकापियानो बापरापी० पारिवाना HIDDRRIDER.RJIORLDIPLETE यादरतेउकाइयाण पजप्ता २ण कयरे कयरेहिती शप्यावा यऊयावा तुलावा विसेसाहियावा ? गाय सहयोषा यादरतेउकाइया पजाप्तया बादरतेउकाइया चपळाप्तया शसखेडागुणा । एएसिण नते ! बाद रवाउकाइयाण पजाप्ता २ ण कयरे कयरोहितो थप्पावा १? गोयमा! सवयोवा घादरयाउकाइया पजा तगा। यादरवाउकाइया अपज्जप्तगा थसखेडागुणा । एएसिण नते। बादरवणस्सइकाइयाण पजाप्ता२ ण फयरे कयरोहितो थप्पावा १? गोयमा ! सइत्योवा यादरवणस्सहकाहया पातगा। बादरवणस्सहकाइ या शपजातगा शसखेडागुणा । एएसिण नते । पत्तेयसरीरवादरवणस्सइकाइयाण पजाप्ता २ ण कयरे कयरहितो थप्पावा ?? गोयमा ! सहयोवा पत्तेयसरीरयणस्सइकाइया पानगा। पप्तेयसरीरवादरव णस्सइकाइया थपत्तगा शुसखेडागुणा। एएसिण नते! यादरनिगोदाण पजात्ता२ ण कयरे कयरेहितो थप्यावा ? ? गोयमा ! सछत्योया वादरनिगोदा पात्तगा। यादरनिगोदा अपमत्तगा शसखिजागुणा। पिका पर्याप्तबा अपर्याप्तबा घसरूपगुणाः । एतेपा भदन्च । वावरतेवस्थायाना पर्याप्तापर्याप्तकाना बतर कतरेन्योऽल्पा वा ? गौतम । सर्वतो का वादरतेवस्थापिका पर्याप्तवा अपोसवादरवेलस्वायिका प्रसस्पेयगुणा । एतेपो मदन्न । पादरवायुवापिकामा पर्याप्तापर्याप्सामा परेक तरेयोऽस्पा वा मौतम । सवलोमा बादरायुवायिकाः पर्याप्तका अपर्याप्तवादरवायुनायिका प्रसंरपेयगुणाः । एतेपा प्रदम्त । वादरवमस्प तिवायिकामा पर्यासापर्याप्तकाना पतरे वरम्योपा वा ४? यौतम । सयलोका वापरवमस्पतिकापिया पर्यातमा अपर्यासवादरवमस्पति पापिदा प्रसस्पेपगुणाः । एवेषा प्रदा प्रत्येकापरीरवादरवनस्पतिवापिकामा पर्याप्तापर्याप्ताना पतरे परम्पोऽल्पा वा ४? गौतम ! सव सोका प्रत्यारोरवादरवनस्पविज्ञापिका पर्याप्तमाः अपर्याप्त प्रत्येकसरीरवादरवनस्पतिवापिका असरपेयगुवा। एवेषा मदद ! वादरनिगो जप्तया , चादरतसकाझ्या पजप्तगा शसखेजगुणा । पत्तेयसरीरयादरयणस्सइकाइया पात्तगा इस खेजगुणा । पादरनिगोदा पजप्तगा सखेजगुणा । यादरपुढयिकाहया पजातगा आसखेडागुणा । बादर थाउकाइया पाप्तया शसखेजागुणा । यादरयाउकाइया पात्तगा शसखेडागुणा । यादरवणस्सइफाइ या पाप्तगा आसखेडागुणा । यादरा पळाप्तगा घिसेसाहिया ३ । एएसिण नते! यादराण पजप्ता २ ण फयरे कयरेहितो थप्यावा बागावा तुल्लाया विसेसाहियावा ? गोयमा। सछत्योवा यादरा पजात्तगा। वा दरा थपञ्चत्तगा शसखेजगुणा । एएसिण नते ! यादरपदविकाइयाण पजाप्ता २ ण कयरे कयरहितो ष्यप्यावा ? ? गोयमा ! सहयोषा यादरपुढविकाइया पजप्तगा १ । यादरपुढषिकाइया छपजाप्तगा थ सखेसागुमा । एएसिप नते । बादरशाउकाइयाण पजाप्ता२ ण कयरे कयरोहितो शप्पावा १? गायमा ! सहयोषा यादरधाउकाइया पजप्तगा यादरशाउकाइया थपज्जतगा शसखेजगुणा । एएसिण नते ! गापिकान पर करेन्योरया मोदक । सर्वतोबा पोहबादरतेजस्वायिका पर्याप्तबाररणसवापिका पसंस्मगुवा पर्याप्तप्रत्येक परीरमादरवनस्पतियायिका उसमुा पर्याप्तबादरनिमोदा अषयगुणाः पर्याप्तवादविवामिषा पासपनुमा पर्याप्तवापरापापिका- मुगा पोसबाररावारिया बस्यमुमा पर्याप्तबापरवनस्पतिवारिता पम्पनुमा वापराः पर्याप्त पाणिः।। एवेषा मा नाबारराको पोतापर्याप्तामा सरे स्तरमोअपाना मौतम सोपा बादरा पाया अप० परस्सनुवा। एषां पारामा परषिवीपिकाना पापाचा रसऐलोपा वा मौतम । यसोचा बादरनिमाविका पोवार गदरपूपिनीला पिता अपर्यासापाया परचा पारावापानी पोहापाताना स्वरे वरेजोलामा पौषका मधोमबाररामा यादरतेउकाइयाण पजाप्ता २ण फयरे कयरोहितो थप्पावा यजयावा तुलावा विसेसाहियावा ? गोयमा! सहयोषा यादरतेउकाइया पज्जप्तया बादरतेउकाहया थपजाप्या शसखेडागुणा । एएसिण नते ! बाद रबाउकाइयाण पजाप्ता २ ण कयरे कयरोहितो शप्पावा १ ? गोयमा! सचत्योवा घादरयाउकाइया पजा तगा। यादरवाउकाइया शपजप्तगा शसखेजगुणा । एएसिण नते! यादरवणस्सइकाइयाण पजता२ ण कयरे कयरोहितो शप्पावा १? गोयमा ! सचत्योवा बादरवणस्सइकाइया पजाप्तगा। बादरवणस्सहकाइ या छपसप्तगा शसखेज्जगुणा । एएसिण नते । पत्तेयसरीरवादरवणस्सइकाइयाण पञप्ता २ ण कयरे कयरोहितो शप्पावा १ ? गोयमा ! सइत्योया पत्तेयसरीरयणस्सइकाइया पजन्नगा । पत्तेयसरीरयादरव णस्सइकाइया थपज्जतगा असखेजगुणा । एएसिण जते! बादरनिगोदाण पत्तार ण कयरे कयरेहिती थप्यावा १ ? गोयमा! सत्योया वादरनिगोदा पत्तगा। बादरनिगोदा थपझत्तगा शसखिजागुणा। पिबा पर्याप्तबा पपोतमा पसस्यगुणाः । एतपा प्रवन । वावरतेजस्वायाना पर्याप्तापर्याप्तकामा पतर कतरेभ्योऽस्पा वा गौतम | सपस्तो का वादरवेजस्वापिकाः पर्याप्तका प्रपोसवादरवेवस्वायिका प्रसस्येपगुणाः । एतेपो नदन्त | पादरवायुवापिकामा पर्याप्सापांसामा पतरे में वरेयाश्या पा! गौतम । सर्वलोमा बादरायुवापिकाः पर्याप्तका अपर्याप्तवादरवायुवापिका पसंरपेयगुणाः । एतेषां प्रदन्त । वादरवनस्प तिवायिकाना पर्याप्तापातपाना पत्तरे परयोजया या ४१ पौतम । सवस्सोका वादरवमस्पतिवायिका पर्याप्तका अपर्याप्तवादरवनस्पति कापिया पसस्पेयगुराः । एषा भदच । प्रत्येकशरीरवादरवनस्पतिवायिवानो पर्याप्तापर्याप्तामा पतरे पातरम्योऽपावा? गौतम । सव खोया प्रत्याभरीरवादरवमसपविधायिका पर्यातबार अपर्याप्त प्रत्येकापरीरवादरवनस्पविद्यायिका पसरपयमुनाः। एवेषा प्रदायवादरमिगो एएसिण नंते ! यादरतसकाइयाण पत्ता २ ण कयरे कयरोहितो थप्पाया ?? गोंयमा ! सहन्योया चादरतसकाइया पज्जप्तगा । यादरतसकाइया थपजप्तगा शसखेजगुणा । एएसिण नते! चादराण वादरपुढविकाइयाण पादरछाउकाइयाण वाटरते उकाइयाण वादरयाउकाइयाण वादरवणस्सइकाइयाण पत्तेयसरीरयादरवणस्सइकाइयाण वादरनिगोदाण यादरतसकाहयाण पजप्ता २ ण कयरे कयरोहितो थप्पाषा यजयावा तुलाया घिसेसाहियावा ? गोयमा ! सइत्योवा यादरतेउकाहया पजात्तया १ । बाद रतसकाइया पप्तया शसखेत्रगुणा २ । यादरतसकाइया छपाप्तया श्वसखिजगुणा ३ । यादरपत्तेय वणस्सहकाइया पजाप्तगा थसखेजगुणा १ । यादरनिगोदा पज्जप्तगा शसखेडा० ५। पादरपुढयिकाइ या पज्जतगा शसखेजगुणा ६ । वादरष्याउकाइया पागा आसखेडागुणा ७। यादरवाउकाइया पक्षा दाना पर्याप्तापर्याप्ताना बरे तरेयोऽस्पा पा ४: मोसम | सवसोबा वादरनिगोदाः पर्याप्तबा अपर्याप्तवादरनिगोदा पसरपगुणाः । एतपा परन्त । वावरणसवायानां पर्याप्तापातामा बतरे कचरेमोऽस्पा वा ४ मौतम । सर्वसोवा पावरसबापिका पर्याप्तका बादरावापिका अपर्याप्तमा प्रसस्पेपगुमाए । ४ । एतपा नवन्त । पारामा बादरपपिबोवापिकामा वादराप्कायाना वादरतेशरणापिबामा बादरायुवापिकाना वादरवनरपतिकापियामा प्रत्येकभरीरवाररवनस्पतिवायिवाना बादरनिगोहाना पावरपायिवाना पयोहापयोप्सामा पतर पातरम्पीपा वा ४ } मौतम । सर्वलोका पादरतेवस्थापिकात पतला। १ वाटरसमकापिका। पर्याप्तमा पतस्पगुबार २ । बारमनवापिका चपर्याप्तमा सप्सेमा ३ । पर्यातबाररमत्येकानस्पतियापिका बसस्पेयगुवा । पर्याप्त पादरनिमोदा बसण्यनुबm ५। पी०पारपषिदीवापिका पर्व स्पषमाः । पोबारापारिवा भानुभ. बोबारमानुपापिया बानु पर्यान्वायरबजारिया जमुना ।
EFININDIGERamnisaapvaram तगा सखिजगुणा ८ । वादरतेउकाइया थपजतगा यसखेडागुणा ९ । पत्तेयसरीरवादरवणस्सइका इया शपजप्तगा घसखेजागुणा १० । घादरनिगोदा थपजता शसखेडागुणा ११ । यादरपुढविकाइया थप वगा शसखेडागुणा १२ । बादरश्चाउकाइया थपजत्तगा आसखेऊगुणा १३ । बादरयाउकाइया ०प० श्वसखेडागुणा १४ । धादरवणस्सइकाइया पक्षप्तगा शणतगुणा १५ । वादरपजाप्तगा विसेसा हिया १६ । वादरवणस्सइकाइया थपजात्तगा असखेजागुणा १७। यादरा थपजतगा बिसेसाहिया १९ यादरा विसेसाहिया २० । एएसिण जते ! सुजमाण सुजमपुढविकाइयाण सुजामथाउकाइयाण सुजमतेउ काइयाण सुझमयाउकाइयाण सुजामषणस्सइकाइयाण सुजमनिगोदाण बादराण वादरपुढविकाइयाण चादरशाउकाइयाण यादरतेउकाइयाण घादरयाउकाइयाण यादरयणस्सइकाइयाण पत्तेयसरीरयादरवण - अपर्याप्त प्रत्येषशरीरवादरवनस्पतिक्षायिका प्रसस्पगुना १०। पपर्याप्तवादरनिगोदा असरपगुणाः १९ । अपर्यावादरपषिवीक्षायिका भसरपगु पाः १२ । अपर्यावादराप्यायिका असमयमुपाः १३ । अपर्या०वादरवायुधायिका असरयगुणाः १४ । पर्यावादरवनस्पतिकायिका पनम्तगुणाः १५॥ पर्याप्ता वादरा विक्षपाधिकाः १६ । अपर्याप्तवादवमस्पतिवायिका प्रसस्पगुमाः १७ । अपर्याप्ता वादरा विशेषाधिकार १८ । पादरा विशेपाधि का १६ । एनेपा मदम्त । सूत्माणा सूक्ष्मपृथियोसायिकामा समाप्कापिक्षामा सूपमतेजस्कायिकाना सूक्ष्मवायसायिबाना मूहमवनस्पतिका यिकामा मानगोदाना धादरा वादरपितोवापियामा बादराप्हायिकामा वादरतेजस्कायिकाना वादरयायुधायिकाना धादरवनस्पतिकायि फामा मस्पेशरीरवावरवमापतिमापिकाना वादरमिगोदामां पादरयसकायिकामा च कवरे पसरन्योऽपा वा ४? गौतम । सबसोका पादरत्र समायिका ।। वादरतेवस्कापिया अस्पगुवा २ । प्रत्येकवारीरवादरवनस्पसिकायिका असमयगुणा' ५। पादरनिगोदा पसरयगुणा ४ । वार । एएसिम नंते । धादरनसकाइयाण पत्ता २ म कयरे कयरहितो थप्पाया ? गोयमा ! सहन्योवा घादरतसकाइया पक्षप्तगा । यादरतसकाइया थपजाप्तगा शसखेजगुणा । एएसिंण नते। यादराण वादरपुढधिकाइयाण वादस्थाउकाइयाण वाढरतेउकाइयाण वाढरयाउकाइयाण वादरवणस्सहकाहयाण पत्तेयसरीरयादरवणस्सइकाइयाण वादरनिगोदाण यादरतसकाइयाण पजाप्ता २ ण कयरे कयरोहितो थप्पाषा यऊयावा तुलाषा यिसेसाहियावा ? गोयमा ! सछत्योवा यादरतेउकाडया पजत्तया १ । याद रतसकाइया पज्जप्तया शसखेजागुणा २ । यादरतसकाइया शपज्जातया शसखिजागुणा ३ । चादरपत्तेय घणस्सइकाइया पजप्तगा शसखेडागुणा १ । यादरनिगोदा पजतगा पसखेडा० ५। वादरपुढविकाइ या पसगा शसखेज्वगुणा ६ । वादरशाउकाइया पजाप्तगा सखेडागुणा ७ । यादरवाउकाइया पत्र पामा पर्याप्तापर्याप्तामा परे पतरेयोऽल्पा बा ४१ नौतम । सर्वेचोका वादरनिगोदा पर्याप्तमा पर्याप्तवादरमिमोदा पसंरपगुवा । एतयां प्रदान पाररसबापामा पर्याप्तापर्याप्तामा बतरे पतरेन्योऽस्पा वा ४, गौतम । सर्वसोबा वारसहायिका। पर्याप्तवा बाररसवापिका अपर्याप्तका बसम्पयनुवाः । ४ । एकपा प्रदम ! पारा बादरपपिपीवापिवाना धादरापायाना वादरतेप्रायिवाना बादरवायुवापिवाना पादरवनस्पतिवापबामा प्रत्येकारीरवादरबनरपतियापिकानां बादरनिमोगरामा चारापिकामा पर्याप्तापर्याप्तामा बातर बतरमोअपा वा 8 ! गौतम । सर्वखोबा बादरतेवस्थापिकाः पर्याप्तवा। १ वारसबायिका। पर्याप्त का प्रसस्पनुमा २। पाररसपबामिया पोसवा । सम्पपना। ३ । पर्याप्तवावरणस्पेशाबनरपत्तिवापिका प्रसस्पेपनुवाः । । पर्याप्तबारनिगोदा चरम्पगुम। ५ । पर्यापाररपरिवीवापिचाप रपयमुना पर्याबारराणार्षिया भयरमन पोबाररमानुपापिया मुला मारवेपत्वाविवाशा।
वगा शसखिजगुणा ८ । वादरतेउकाइया रुपातगा थसखेआगुणा ९ । पत्तेयसरीरवादरवणस्सइका इया अपजतगा एसखेडागुणा १० । यादरनिगोदा अपाता शसखेडागुणा ११ । यादरपुढयिकाइया थपजतगा शसखेडागुणा १२ । यादरश्चाउकाइया थपजात्तगा शसखेजगुणा १३ । यादरयाउकाइया थप० सखेडागुणा ११ । वादरवणस्सइकाइया पमतगा शणतगुणा १५ । वादरपजाप्तगा विसेसा हिया १६ । वादरयणस्सइकाइया पात्तगा असखेजगुणा १७। यादरा थपजतगा यिसेसाहिया १९ । यादरा विसे साहिया २० । एएसिण जते । सुजमाण सुजमपुढविकाइयाण सुजमथाउकाइयाण सुजमतेउ काइयाण सुजमवाउकाइयाण सुजमवणस्सइकाइयाण सुऊमनिगोदाण वादराण चादरपुढविकाइयाण यादरशाउकाइयाण चादरतेउकाइयाण बादरवाउकाइयाण यादरयणस्सइकाइयाण पत्तेयसरीरवादरवण MONDAMPARODTEMBER अपर्याप्त प्रत्येवशरीरवादरवमरपतिवापिया पसरपगुणाः २० । अपर्याप्त वापरमिगोदा असरपगुमा। १९ । पपर्याश्वादरपधिोयायिका प्रसस्यग बा १२ । अपर्यावादराप्तायिका असरपगुवाः १३ । पपर्यावादरवायुयायिका प्रसस्यगुणा १४ । पर्या०वादरवनस्पतिकायिका प्रनम्सगुणा। १५। पर्याप्ता वादरा विद्यपाधिका १६ । अपर्याप्तवादरवनस्पतिपापिता प्रसस्पगुणाः १७ । अपर्याप्ता दादरा विशेपाधिबार १८ । पादरा विधोपाधि बा १६ । एतेपा नदन्त । मूल्माण मूक्ष्मपितोसायिकामा सूक्ष्माप्कापिकानां मूषमतेजस्कायिकाना सूक्ष्मवायुवायिकाना सूक्ष्मवनस्पतिका पिकानो सूपमानगोदाना वादराबा बादरपृथिवीवापिश्चाना वादराकायिकाना वादरवेजस्कापिकाना वादरवायुच्चायिकामा वादरवनस्पतिकापि पामा प्रत्येकशरीरवादरवनस्पतिकापियामा वादरनिगादाना वादरवसकायिकामा च कवर कसरन्योऽस्पा पा ४? गौतम ! सबसोका वादरत्र समायिबा. । वादरतेवस्थापिका प्रसंस्पगुवाः २ । प्रत्येक्शरीरवादरवनस्पतिकापिका भरपगुला। पादरमिगोदा पसरयगुणा ४ । वाद १ स्तइकाइयाण यादरनिगोदाणं पादरतसकाइयाणय कयरे कयरोहितो थप्पांयार? गोयमा ! सछत्योवा यादरतसकाइया १। बादरतेउकाइया आसखेडागुणा पतेयसरीरयादरयणस्सइकाइया आसखेडागुणा । बादरनिगोदा असखिजागुणा । पादरपुढयिकाइया शसखजागुणा ५। यादरश्चाउकाइया आसखेडागुणा बादरवाउकाइया आसखेडागुणा । सुऊमतेउकाइया शसखेजगुणा । सऊमपुढविकाइया विसेसाहिया । सुज्ञमथाउकाइया यिसेसाहिया । मुझमघाउकाइया विसेसाहिया । सुऊमनिगोदा शसखेत्रगुणा । बादरवणस्सइकाइया थणतगुणा बादरा विसेसाहिया । सुजमवणस्सइकाइमा आसखेडागुणा १५ । सुजमायिसेसाहिया १ । एएसिण नते ! सजमशपज्जयाण सुजमपुढविकाइयाण थपज्जप्तगाण सुजम थाउफाइया थपज्जचयाण सुझमतेउकाइयाण शपज्जत्तयाण सुजमवाउकामा थपज्जतयाण सुऊमयण स्सइकाइयाण थपजप्तयाण राजमनिगोदा थपज्जप्तयाण यादरा थपजत्तयाण यादरपुढविकाइया थप रपिचापिया बसस्पनुषाबाररावाविका समानुगः पादरवायुवापिका बसम्मगुवा मतेमवापिका अनुसा। सूक्ष्मपिवीवापिका विशेषाधिकापूलापाता विधवाविवा। पुलवायुवापिसा सिपाधिमा । पूलाममोहरा बयपमुकाः १२ । बादरवनस्पतिवापिका समाप्तनुमा । बारा विचाविका १५ । सूक्ष्मबरपतिवापिका स्मनुमा १५ । पूजा विधि। एतेषां पाच । सूमापासवाना एमभिपीवारिवाना अपर्याप्तीनां पूजापारिवानामपर्याप्तामा तेबसारिवानामपर्णाताना नवा पुवापिवानामपर्याप्तानां पूलबनवविवापिसाबाबपोहाना मनिनोदानामपर्याप्तामा बारापोवानामपर्वाचाररविवापिसाबामपणे सवापरापापियानो बादरकासिामावपातनामावपातबारावाषिकानानप वापराविनाविधानामपोपचार बार MAIDAMISHunISITIOnline अत्तयाण यादरशाउकाइयशपज्जप्तयाण धादरतेउकाइयाशपजाप्तयाण यादरयाउकाइयशपातयाण यादरवणस्सइकाइयश्चपळाप्तयाण पत्तेयसरीरयादरयणस्सइकाइयशपजाप्तयाण यादरनिगोदा थपजा तयाण चादरतसकाहया शपजाप्तगाणय कयरे कयरोहितो शप्यावा? गोयमा ! सहयोया यादरत सकाइया शपजप्तगा । पादरतेउकाइया छपऊत्तगा थसखेडागुणा , पत्तेयसरीरबादरयणस्सइकाइया शुपान्तगा शसखेडागुणा ३। बादरनिगोदा पाप्तया शसखेडागुणा । यादरपुढधिकाइया थपजा तगा आसखेडागुणा । यादरश्चाउकाइया छपजाप्तगा सखे० ६ । यादरवाउकाइया थपळतगा शस खेडागुणा, सुजमतेउकाड्या शपजात्तगा थसखजागुणा। मुऊमपुढविकाइया थपजप्तगा विसेसाहिया ९ सुजामशाउकाडया पजागा विसेसाहिया १० । सुझमवाउकाइया शपजागा विसेसाहिया, सुजम निगोदा पागा शसस गुणा , घादरवणस्सइकाइया शपजाप्तगा शणतगुणा, यादरा थपजातगा वनस्पतिवापिकामामपासवादरनिगोदामा मपर्याप्त बादरसफापिसामान्य कप्तरे पतरेभ्योऽस्पा वा ४ . गौतम । सर्वतोबा अपर्याप्तवा टरससहायका १। अपर्याप्तवावरत परवायिका असम्येपणा २। अपर्याप्त प्रत्येकासरीरवादरवनस्पतिकापिका भात्यगुणा ३ । अपर्याप्तवा दरमिगादा पसंख्यगुस ७ । पर्याप्ततादरपपिवळचापिका प्रसस्सगुणा ५ । पर्याप्तवादराप्कापिका पसंख्यगुणाः ६ । वादरवायुकायिका अप पप्तिका प्रसस्यगया अपर्याप्त मतजस्कापिका प्रसस्य गुणाः अपर्याप्तसूत्मपपिवीकायिका विद्योपाधिकाः ए । अपर्याप्तसूक्ष्माप्कापिञ्चा विशेषा पिका १० । अपर्याप्तसूत्मवायुवापिका विशेषाधिकार ११ । अपर्याप्तसूत्मानगोदा प्रकल्पगुणा अपर्याप्तवाटरवमस्पतिकायिका अनम्तगुणा वा दरा प्रपो०का विशेषाधिका अपर्या०मलवनस्पतिवापिका प्रसंस्थगुणा अपर्या०का सूक्ष्मा विशेषापिका २ । एतेपा भदन्न । मुस्मपोशाना विसेसाहिया, मुझमयणस्सइकाइया थपज्जतगा इसखिजगुणा, सुजमा थपजाप्तगा यिसेसाहिया २। एएसिण नते । सुऊमपज्जप्तयाण सऊमपुटविकाइयपजतगाण सुजामथप्पकाहयपात्तगाण सुजमतेउका इयपज्जप्तयाण सुजमवाउकाइयपजाप्तयाण सकामयणस्सहकाठयपजप्तयाण सुजमनिगोयपजातयाण याटरपजासगाण चादरपुढाविकाइयपातयाण थादरशाउकाइयपज्जप्तयाण यादरतेउकाइयपजत्तयाण पादरवाउकाइयपातयाण पादरवणस्सहकाहयपज्जतयाण पत्तंयसरीरयादरयणस्सइकाइयपजात्तयाण वा दरनिगोदपजप्तयाण पादरतसकाइयपतष्ठयाणय कपरे कयरहितो शप्पाया?? गोयमा! सछत्योवा वा दरत उकाहया पञप्तगा । बादरससकाइया पजात्तया यसखिजगणा । पत्तयसरीरयादरयणस्सइकाइयां पऊत्तगा आसखेडागुणा । चादरनिगोदा पज्जप्तया शसखेडागुणा , घादरपुढषिकाइया पजाप्तया श्वस० यादरश्चाउकाइया पजप्तया शसखेडागुणा, बादरवाउकाइया पजागा आसखेडागुणा । सुऊमतेउकाड मुलपपिबीमाणिवपर्यायामा पर्याप्तमूल्मायापिकानां पर्या०मूहमतमस्थापिकानां पर्याभूलवायुवापियानो पोपुलमापतिमापिकामा प पोमृत्लनिगोदामा बादरपर्याजाना पवारपपिपीषिकामा पोबारापापियामा पभारतजस्थायिवानां पगारवायुवापि बानां पादरवनस्पत्तिबापचा पर्या०प्रत्येकारीरबाबरणमस्पतिवाभिधानां पर्यावादरनिगोहाना पांगाररसवापिसाना बरकत रन्पोपा बा ४ ! मोठम । पर्वताबा परमातापिता पोवारमाविका पनुमा पा०प्रत्येवारीरबारिमापतिवारिया बसस्पगुमा परनिमारा मनुवा पगारपीवायचा पम्ममुगः पोबारापापिया समुपा पोबाररावाषि पासमा पर्यापूलालाविया नगुमा पर्यापूनषिीमारिया finital लाचारिता विचारिता पोम्पूषण या पळाप्तया यसखेडागुणा, सुऊमपढयिकाइया पजात्तगा विसे साहिया, सुजमशाउकाहया पङाप्तगा घिसेसाहिया, सुजमघाउकाइया पजत्तगा विसेसाहिया । सुऊमनिगोदा पात्तया शसखेडागुणा, याद रवणस्सहकाहया पञप्तया थणतगुणा, यादरपजप्तया विससाहिया, सुजमयणस्सइकाइया पक्षप्तगा शसखगुणा । सुजमपजाप्तया घिससाहिया ३ । एएसिण नते ! सुजमाणवादराणय पजात्ता २ ण फयरे कयरोहितो थप्पाया ? गोयमा। सछत्योया बादरा पसाप्तया, यादरा थपजात्तगा शसखगुणा सजमा अपजाप्तगा सखगुणा, सुजमा पजाप्तगा सखगुणा । एएसिण नते ! सुजमपुढयिकाइयाण थादरपुढधिकाइयाणय पजाप्ता २ ण कयरे कयरहितो शप्यावा ४ ? गोयमा । सहयोवा चादरपुढवि काइया पाप्तया यादरपुढविकाहया थपजप्तया शसखेजगुणा, सुजमपुढविकाइया थपजाप्तगा शस खजगुणा , सुजमपुढविकाइया पजप्तगा सखेडागुणा । एएसिण नते । सुजामशाउकाइयाण यादरशाउ BCCOSHeal Eena-ME-me-EPA BITRAadilBPICHARIA पायुकापिका विशेपाधिका पर्यापूरममिगोदा पसरपगुवा पर्या०वादरवनस्पतिवापिका अनन्त गुमा पर्याप्ता दादरा विशेषाषिक्षा पर्या० मधमम्पतिवायिका भरपगुवा सूपमा। पर्या०ा विधोपापिक्षाः ३ । एतेपा प्रदन्त । मधमा घाबरापाच पपाप्तापर्याप्ताना कतरे बरे ज्योऽस्पा वा ४ १ गौतम । सवतोबा वारा पर्यावा अपर्या०का पादरा घसस्यगुडा सूक्ष्मा अप०का प्रयगुवा मामाः पर्यागः सम्प गुग । तपां भरत ! सूरमपषियोकायिकामा वादरपपिवीचापियामा पर्या०प०ना पतरे कतरन्योऽपा वा ४१ गोतम । सधस्तोका पर्चा सवादरपधिोकापिका अपर्यावादरपपियोवापिका पसरपगुमा अपयो०मरमपथिवीायिका प्रसस्पगणाः पर्षासूरमपपिवीक्षापिया सम्म गुणाः । पपा प्रदन्छ । मामाप्यापिकामा पादराप्सायिकानां पर्यापपाना वापर वातरम्योऽस्पा वा गोवम | सर्वखोसार पर्यावावराया --- काइयाण पाता २ ण कयरे कयरेहितो शप्पाया ? गोयमा ! सवत्योबा पादरशाउकाइया पजप्तया यादरचाउकाहय शपजत्तया शसखगुणा, सुकामयाउकाइया पजप्तया शसखगुणा , सुमथा उफाइया पज्जत्तगा सखगुणा । एएसिण नते । सुजामतेउफाइयाण यादरतेउफाइयाणय पजाप्ता २ ण फयर कयरेहितो शप्पावा ? गीयमा । सछत्योया यादरतेउफाहया पजातया , यादरतेउकाइया थप जात्तया शसखगुणा, सुऊमतेउकाइया चपाप्तया शसखगुणा, सुजामतेउकाइया पजप्तगा सखेडा गुणा । एएसिण नत ! सुजामयाउकाइयाण यादरवाउकाइयाणय पजाप्ता २ ण कयरे कयरोहितो शप्पा बा१? गोयमा ! सहयोया यादरवाउकाइया पजप्तया यादरपाउफाइया शपजत्तया शसखगुणा । सुजमवाउकाठया थपञप्तया आसखे० । सुऊमयाउकाइया पाप्तया शसखगुणा । एएसिण नते ! सुजमवणस्सड का इयाण बादरवणस्सइकाइयाणय पजप्ता २ ण कयर कयरोहिता शप्पाया। ? गोयमा पिका पाभादरापापिया सम्पनुमा अपोलामाप्यापिका भलम्पगुणा पर्या० मापापिका सम्माः । एतेषा पासा सूमोबस्ता पिका परतावापिसाता पर्या०प०ना तर बतरेभ्योऽल्पा बानोतम । सबनोसार पर्यागारतेप्रस्थापिबा पोवादरवस्था पिका प्रसगुना अपामतेवस्थापिका सम्मु पयागमतेमस्थापिवाः समपमुगः । एतेषा पासपूरमवायुवापियामी गारणा पचापियानां च पर्या०प० पतरे पतरेप्पोऽरपाबामौतम । जसलामा प०वापरणापुवामिना पाचाररबारिया परमुख पर्याभूमापापिया पारपेपनु पर्वामिनागरिमा बसस्पेयनुवाः । वेषां पास। नएलबनस्पतिगरिपाची पापरविवापि पाना पी०पीना र मरेमाअपा बारोटमा बसोवा पर्याबाररबनरविवादिता वापरत्यक्षिापिता मुला RIERREDMREHERONMara सश्त्योवा यादरवणस्सइकाइया पात्तया , यादरयणस्सइकाइया रुपातमा सखिजगुणा, सुजम वणस्सइकाइया थपजाप्तया शसखिजागुणा। सुजमवणस्सइकाइया पजतया सखिजागुणा । एएसिण नते! सहुमनिगोदाण यादरनिगोदाणय पजाप्ता २ ण कयरे कयरहितो शप्पावा? गोयमा ! सइत्योया याद रनिगोदा पाप्तया, यादरनिगोदा थपञप्तया शसखे०, मुजमनिगोदा अपशाप्तया शसखिज्जगुणा, सुचामनिगोदा पजाया सखेज्जगुणा १ । एएसिण नंते ! सुजामाण सुजमपुदयिकाहयाण सुजमश्चाउका इयाण सुजमतेउकाइयाण मुजमवाउकाइयाण सुजमवणस्सइकाइयाण सुजमनिगोदाण यादराण बादर पुढविकाइयाण यादरश्चाउकाइयाण बादरतेउकाइयाण वादरवाउकाइयाण धादरवणस्सइकाइयाण पत्ते यसरीरबादरयणस्सइकाइयाण यादरनिगोदाण यादरतस्सकाइयाण पज्जतारण कयरे कयरहितो थप्पा वा ? गोयमा ! सष्ठत्योषा यादरतेउकाइया पज्जत्तया १ । बादरतसकाइया पाप्तया सखगुणा २ अपर्या०मामवमस्पतिकायिका प्रसस्पगुण पा०सदमबमस्पतिवायिफार सहयगुणाः । एतपा भदन्त । सूक्ष्मनिगोदाना वादरनिगोदाना पर्या तापर्याप्तानां बतरे कतरेभ्योऽपा वा ४? गौतम | सवस्तोकाः पर्या०का वादरनिगोदा अपर्याप्तवादरानगोदा असरसगुला अपर्याप्तसूत्मनिगो दा पास्यमुना पर्याप्तमूत्मनिगोदा समगुण । रतया प्रदा । मूत्मा सूक्ष्मपथियोवापिकामा मृत्माप्कापामा सूत्मतवस्वायिकामा मूल वनस्पतिवापिकानां मूलवायुवापिवाना मूलनिमीदाना दादरामा वादरपथिवीकायिवाना पादराप्यायिकामां पादरतेवरवापिक्षामा वादरवा पुवायिवाना हादरवमतिकापिणमा प्रत्येकासरीरवादरवनस्पतिशायिवाना वादरमिगोदानो वादरमकापिकामा पर्याप्तापर्याप्तामा कतर बत रन्योऽत्या वा ४१ गोवम । सर्वसोका वादरतवस्कापिका' पर्याप्तवाः १८पर्याप्सवादरवसञ्चापिता प्रसस्सेयगुणा । अपर्याप्तवादरवसवापिका - यादरतसकाहया थपउप्रर्तया शसखिजगुणा ३ । पत्तयसरीवादरवणस्सएकाइया पज्जत्तया शसखिज्ज गुणा । वादरनिगोदा पज्जतया शसखिउजगुणा ५ । बायरपुढयिकाइया पत्तया सखेज्जगेणा ६ । यादरशाउकाझ्या पज्जत्तगा शसखिज्जगुणा ७। यादरवाउफाइया पज्जत्तगा शसखेज्जगुणा ८। यादरतेउ काइया थपज्जत्तया शसखिजगुणा ९ । पत्तयसरीवादरयणस्सइफाइया थपउजत्तया शसखेज्ज०१०। यादनिगोदा थपत्तया शससे० ११ । यादरयाउकाइया शपज्जप्ता आसखे० १२ । यादरशाउका इया अपजप्तया यसखे० १३ । यादरयाउकाइया थपत्ता शसखे० ११ । सुझमतेउकाहया शपज प्या शसखेडागुणा १५ । सुजमपढविकाइया थपत्तगा विसेसाहिया १६ । सुऊमछाउकाहया थप मत्तगा बिसेसाहिया १७। सुऊमबाउकाइया थपऊतया विसेसाहिया १८। सुऊमतेउकाइया पज्जप्तया सखि०१९ । सनमपुढषिकाहया पञ्जत्तया बिसेसाहिया २०। मुहुमशाउकांडया पज्जत्तगा विसेसाहिया २१ सुजमवाउफाइया पज्जत्तया बिसेसाहिया २२ । सुक्रमनिगोदा थपज्जत्तया आसखे० २३ । सहुमनिगो प्रसस्पेयमुना ।। पोसमस्पेसरीरबापरबनस्पतियाविना पसन्मनुमा । पर्याप्तवादरनिनोरा ग्यनुवाः ५ । पर्याप्तवापरपशिचीचापिता पतस्पेपगुवाः । पर्याप्तमारावाविया अमरपेयबुबा । पर्याप्तवापरबायपापिका अपमनुमा पर्याप्तबावरतेबसारिया या m६ अपर्याप्तमत्येवमरीरमादरवास्पतिवापिका पापा ।भपातबादरनिमोरा परपमुषा ११। अपर्वातावरपाबीचापिया भारपेयमुनाः १२ । अपर्यातबारराष्पानिया पनुकाबपोहबापरणानुपापिषा परस्पनुमा । अपोलपूनतमस्मारिका पत्र गुर। १५ । चपर्यासपूमपािपित विपाविमा पोतपूजामाविमा विवालियापापिया मिल दा पाप्तया सखि०२१ । यादरघणस्सहकाइया पजतया शणतगुणा २५ । वादरपजत्ता विसेसाहिया २६ यादरपणस्सहकाडया रुपात्तगा शसखिजागुणा २७ । वादरचपजाप्तया बिसेसाहिया २८ । यादरा विससाहिया २९ । सऊमयणस्सइकाहया थपमन्तगा शसखि०३० । सुऊमश्चपहातगा विसंसाहिया ३१ सुजमयणस्सहकाइया पजाप्तगा सखे० ३२ । सुजमपञप्तगा बिससाहिया ३३। सुजमा यिसेसाहिया ३४ दार ४ । एएसिण नते ! जीवाण सजोगीण मणजोगीण ययजोगीण कायजोगीण शजोगीणय कयरे २ हितो शप्पावा यजयावा तुम्माया विसेमाहियाया ? गोयमा । सधस्योवा जीवा मणजोगी ययजोगी थ सखेडागुणा जोनीचणतगुणा कायजोगी शुणतगुणा सजोगी बिसेसाहिया , दार ५ । एएसिण नते ! जीवाण सवेदगाण इत्यावेदगाण पुरिसंवेदगाण नपुसगवेदगाण श्वेदगाणय कयरे २ हितो थप्पाषा ४ PORAN वा: १८ । पर्याप्तमृरमतेजस्वामिषाः संस्पयगुवा। १५ । पर्याप्तसूक्ष्मपपिवीकायिका विशेषाधिका। २० । पर्यामसूरमाप्कायिका विशेषाधिकार २१ पर्याप्त मूरमवायुवापिका विनपामा २२ । पपपोतसूक्ष्मनिमादा असरपगुना। २३ । पर्याप्तमूममनिगावाः सस्पगुणा ए४ । पर्याप्तवादरवमरपति वापिका धनमागुणा २५ । पर्याप्ता वारा विशेषाधिकार २६ । अपर्याप्तवारयनस्पतियापिका पसरपगुणाः २७ । अपर्याप्ता यादरा विठोपाधि 1 २८ । वावरा विशेषाधिका । अपर्याप्तसूचमवनस्पतिपिका प्रसस्पगुणा ३० । मूपमा अपर्याप्सा विशेपापिसार ३९ । पर्याता सूक्ष्मवम पतिकायिका संस्पगगा। ३२ । पर्याप्ताः सूरमा विशापापिकाः ३३ । सूरमा विशेषाधिक्षा ३४ द्वारम् । ४ । यसपा प्रदन्त । जीवाना सयोगिना मनोयोगिनां धाग्यागिमा बायपोगिना प्रपोगिमा च कतर कतरेन्याऽल्पा या ४ ! गौतम । सवतोफा जीवा मनोयागिनो वाग्योगिमोऽसस्पेप गुणा भयोगिनीऽनन्तगुणाः पापयोगिमो मन्तगुवा योगिनो विपाधिका । बारम् । ५। एप्पा भदन्त । मोवामा सर्वदधाना खोदकामा यादरतसकाइया आपउजत्तया शसखिउजगुणा ३ । पत्तेयसरीयादरवणस्सइकाइया पज्जत्तया शसखिज्ज गुणा ।। यादरनिगोदा पज्जप्तया श्वसखिज्जगुणा ५ पायरपुढयिकाहया पत्तया शसखेज्जगेंणा ६ पादरछाउकाइया पज्जत्तगा यसखिज्जगुणा ७। यादरवाउकाइया पउजत्तगा आसखेज्जगुणा ८॥ यादरतेउ काइया थपज्जत्तया श्वखिउजगुणा ९ । पत्तैयसरीवादरयणस्सहकाइया थपज्जत्तया शसखेज्ज० १० । बादनिगोदा थपज्जत्तया शसखे० ११ । यादरयाउकाष्ठया थपज्जप्ता शसखे० १२ । यादरशाउका इया अपजाप्तया इसखे० १३ । यादरयाउकाइया थपजत्ता असले० ११ । सुझामतेउकाढया शपज तया यसखेजगुणा १५ । सुझमपुषिकाइया थपजात्तगा विसेसाहिया १६ । सुझमथाउकाहया थप आसगा विसेसाहिया १७॥ सुझमबाउकाइया थपऊप्तया विसेसाहिया १८। सुजमतेउकाइया पज्जप्तया सस्त्रि०१९ । संझमपुढविकाहया पजसया बिसेसांहिया २० । सहुमश्चाउकाडया पज्जत्तगा विसेसाहिया २१ मुजमवाउकाइया पज्जत्तया बिसेसाहिया २२ । सुक्रमनिगोदा थपज्जत्तया सखे० २३ । सहुमनिगो असपता ३ । पर्याप्तमत्वशरीरवादरवनस्पधिवापिया बसना ४ । पर्याप्तवादरमिपोरा पसरपणुकाः । पर्याप्तवाररपतिमापिका पस्पा पर्याप्तबादरापापिया प्रतिस्पेपनुमा । पर्याप्तवावरणानुपायिका प्रसंगानुबा । पर्याप्तबाररतेवस्वापिंधा मनु पाटा अपर्याप्तमत्येवशरीरबादरबनस्पतिविदा स्यनुवाः १० । अपर्याप्तवादरनिकोको परपमुलगा ११ । अपामारपाचीवापिका अवस्पेपमुपपोतमापरावारिका प्रमुगाभपोसवादरवाजापिता पनुमा पसलमारिया परम मुलास पर्याप्तमपपिबाधिमा बिमा अपातपूजामाविका विवाभिमानाचा आणि SongReasoPPOEREBRREE सम्मामिच्छदिष्ठीण च कयरे कयरोहितो शप्यावा?? गोयमा । सम्वत्योया जीवा सम्मामिच्छदिठी, सम्म दिठी शृणतगुणा मिच्छदिठीशणतगुणा, दार ९ । एएसिण नते । जीयाण शानिणिवोहियणाणीण सुयणाणीण वहिणाणीण मणपज्ञवनाणीण केवलनाणी णय कयरे कयरोहितो शप्यावा? गोयमा । सब त्योवा मणपजावनाणी महिनाणी अस० शानिणियोहियनाणी सुयनाणी दोवि तुल्ला विसेसाहिया केय उनाणी शण। एएसिण जते ! जीवाण महशणाणीण सुयशणाणीण घिनगनाणीणय कयरे कयरोहितो छप्पावास ? गोयमा ! सम्बत्योवा जीवा यिनगनाणी मडशन्नाणी सुयशनाणी दोवि तुला शणतगुणा । एएसिण नते ! जीयाण शानिणियोहियनाणीण सुयनाणीण हिनाणीण मणपजवनाणीण केवलनाणी ण मतिश्शनाणीण सुयशन्नाणीण विनगनाणीणय कयरे कयरेहितो शप्पाया? गोममा ! सत्योवा म्योऽस्पा वा ४, गौतम । सवस्तोफा बीवा सम्पग्मिभ्यावृष्टिमा सम्पग्दृष्टिनोनन्तगुणा मिथ्यादृष्टिनोनम्तगुणाः । द्वारम् । ई। मतेपा भदन्त । जीवामामामिमियोपियनानिमा भूतानिनामपिधानिमा ममापयवसानिना केवल शामिनां च सतरे कतरेभ्योऽस्पा पा , गौतम । सस्तोमा मन पर्यपचानिमो ऽषितानिनोऽसस्यगुणा प्राविनियोपिषचामिनः मुमचामिमय दापि तुस्यो विभेपाधिको वेवसानिमोऽनम्तगुणाः । एते पो मदन्न । मस्पचामिमा जीवामा मुतामानिमा विभरचानिमा च कतरे कतरेभ्योऽस्पा हा ४ ? गौतम ! सवस्ताबा या विप्रचामिनो मत्य पानिना मुतामानिमय वावपि तुपो मनमा गयो । एतेपा मदन्त । नोवाना पामिनियोपिकमानिनो तचानिनामवषिचानिना मन पर्ययात्रा मिना बोवसाचामिमा मत्य मानिमा मृत्ताचानिमा विप्नचामिमाचातर इतरेन्योऽल्या था ? गोतम । सवस्तोका वीवा ममापययनानिमोऽय पिघानिनोऽसस्यगुणाः पानिमियोपिकमानिनः मुखधानिमय को अपि तुस्यो विशपाधिफो। विजधानिमो ऽसय यगुणाः मेवलधानिमोऽमय ? गोयमा ! सहयोषा जीया पुरिसवेदगा इत्यावेदगा सखेडागुणा शवेटगा शणतगुणा नपुसगवेदगा एणतगुणा सवेयगा विससाहिया , दार ६ । एएसिण नते । जीवाण सकसाईण कोहकसाइण माणक साईण मायाकसाइण लोनकसाईण शकसाईणय कयरे कयरेहितो छप्पावा? गोयमा । सइत्योया जीया यकसाई माणकसाइ शपतगुणा, कोहकसाई यिसेसाहिया, मायाकसाई विसेसाहिया, लोजकसाई यिसेसा हिया, सकसाई घिसेसाहिया, दार ७ । एएसिण नते । जीवाण सलेसाण किरहलेसाण नीडलेसाण काउ लेसाण तउलेसाण पम्हछेसाण सक्कालेसाण थलसाणय कयरे कयरेहितो शप्पावा?? गोयमा! सहयोवा जीवा सक्कलेसा पम्हलेसा सखिजागुणा तेउलेसा सखिजा० शलेसा शणतगुणा काउलेसा थणतगुणा नील ठेसा घिस्साहिया करहलेसा यिसेसाहिया, दार ८। एएसिण नते ! जीवाण सम्मदिष्ठीण मिच्छादिष्ठीण पुरुपवदवाना नपुसच्चदवानामवेदवाना बरे कतरेभ्योऽस्पा वा ४! मौतम । पवतोपानीवा। पुरुपवा सीवेदबार समयगुवा भवेदना पान्तमुना नपुंसवपदका पननगुणाः सवेदना विशेगापिका द्वार ६ । एतवा प्रदात । वीवानो सबपायिना गोषबपापिना मामबपायिना मा पावपाापना सोमववापिना पबमापिमा कार परम्पोल्पा वा ४१ मौतम । सबलोपाजीबा प्रचापिनो मानकवापिनो नम्तगुवा को पापायिनो विशेषाधिका मापाबपायिनो सिपााचा सोमवाायनो विषाषिवा सामायिनो सिपाधिका पारम् ।। एता परन्त! जीवाना मसापानां जमश्याना नाममायामा पापोतमायामा बोसोयाना पसापानां माइयामा बसेपाना बतर बतरेयोऽस्या पा 8 ? गौतम । बसोवा बीमा सरपाः परसोइयाः सवपुरा समोरचा सपा पमेश्या प्रमन्तवा बापोतमेपा बसपा की ससपा विशेषाधिका मापा विवाधिकारोबारन् । ८। पवेरा प्रपन्च । सम्पहिना मियाना पश्चिमाहिना परे पर SMEsareratuRADDHPatil सम्मामिच्छदिष्ठीण च कयरे कयरोहितो थप्पाया४ ? गोयमा । सवयोवा जीवा सम्मामिच्छदिछी, सम्म दिष्ठी शणतगुणा मिच्छदिष्ठीश्णतगुणा, दार ९ । एएसिण नते ! जीयाण शानिणियोहियणाणीण सुयणाणीण नहिणाणीण मणपावनाणीण केवलनाणीणय कयरे कयरहितो शप्पावा ? गोयमा । सच त्योवा मणपडावनाणी महिनाणी शस० शानिणियोहियनाणी सुयनाणी दोयि तुला विसेसाहिया केव लनाणी पण । एएसिण जते ! जीवाण महशणाणीण सुयशयाणीण विनगनाणीणय कयरे कयरोहितो शुप्यावा ? गोयमा ! सन्चत्योवा जीवा यिनगनाणी महश्शनाणी सुयश्नाणी दोयि तुला शणतगुणा। एएसिण नते ! जीयाण शानिणिवोहियनाणीण सुयनाणीण चहिनाणीण मणपजावनाणीण केवलनाणी ण मतिश्चन्नाणीण सुयशन्नाणीण विनगनाणोणय कयरे कयरोहितो शप्पाया४ ? गोयमा ! सइत्योवा भ्योऽस्पा वा ४ ? गौतम । सवस्तोका जीवाः सम्पग्मियादृष्टिन सम्यग्दृष्टिनोमन्तगुवा मिथ्यावृष्टिमोमन्तगुणाः । द्वारम् ।। यतेपा नदन्त । जोवानामामिनियोपिवधानिमा तामिमामपिशानिमा मन पपवचामिना केवप्लवानिमा घ पतरे पतरेभ्योऽल्पा पा ? गौतम । सपस्तोला मन पर्पयामिनो ऽपिचामिनोऽसस्यगुणा पाणिनिमोषिकतानिमः श्रुतशानिमय हावपि तुस्यो विमपाधिको फेवसधानिमोऽनन्तगुणाः । एते पां प्रदम्त । मत्यचामिना बोवामा मुतानामिना विभङ्गधानिमा घ कतरे कतरेभ्योऽस्पा वा ४ ? गोतम । सपसोका जीवा विप्नमानिनो मत्स्य पानिना मुताशानिनच वावपि तुत्यो अनन्तगुगो । एतेपा प्रदन्त ! वोवानां पामिमियोपिकमानिनो तशामिनामवधिधानिमा ममापर्ययचा मिना पोवसमानिना मत्यमानिमा वृताचानिना विनमधामिमान्य पतरे इतरेभ्योऽस्या वा ४, गौतम । सवतोया जीवा मनापययघानिमोऽव पिमानिनोऽसस्यमुसा भाभिानयोघिषशामिनः पधानिमय ही प्रपि तुस्यो विछोपाधिको। विनचानिनो ऽसध्ययगुवा फेवातशामिनोमय जीया मणपंजावनाणी सहिनाणी वसखिजागुणा, शानिणियोहियनाणी संयनाणीय दोविं तुला विसेसाहि या बित्नगनाणी आसखेज० केवलनाणी थणतगुणा महश्चन्नाणी सुयश्चन्नाणीय दोषि तुला विससाहि या , विनगनाणी छसखेज०, केवलनाणी आणतगुणा मशवाणी सुयशनाणीय दोयि तुला शणतगु णा, दार १० । एएसिण नते ! जीवाण चरकुदसणीण वचस्कुदसणीण उहिदसणीण केवलदसणीणय क यरे कयरोहितो थप्पावा ? गोयमा ! सछस्योषा जीवा नहिदसणी घस्कुदसणी शसखेजगुणा, केवलदस णी आणतगुणा शुचरकुदसणी आणतगुणा, दार ११ । एएसिण नते ! जीवाण सजयाण शसजयाण सज यासजयाण नोसजयाण नोएसजयाण नोसजया२ णय कयरे२ हितो थप्पाया ? गोयमा ! सहयोया जीवा सजयासजया श्वसजया शसखेजगुणा, नोसजता नोचसजता नोसमतासजता थणतगुणा, शुसज ता श्रणतगुणा, दार १२ । एएसिण नते ! जीयाण सागारोयउत्ताण शणागारोवउप्ताणय कयरे २ हितो मुला मस्पानिमा बुतामानिनो दापि तुत्पावनगुमो । हारम् । १० । एतेषां भडन्त । बीमामा परेमनिमामरतुदशानिनामपिपलिना रे बसदामिनी बातर बरेन्योऽपा बा ४१ पौतम । सालाबा जीमा विनिमयदमिनोऽहम्पगुवा पसरनिनोऽनन्तनु बाह बनिनोऽमलनुका । हारम् । ११ । पता मदन । धीमाना जपताना मयतामा मतपतानो नोपताना नोपपताना मोरयतानता मा र पतरे बतरम्मोल्पा वा ४ ? गौतम । पमतीका बीमा यता पतासपता चयनुमा नो पता नो पपता मोपताना- मन्ना बनयता बमलमुला रम् । ५। पत्ता प्रान्त । नीबानो वाचारोपयोमपुज्ञानाननाबारोपयोगमुचाना चबारे तरेलोड स्पा बापोतम । तोपानीमा बनाबारोपयोधा बाबारांचपोनबुजा। पारम् । ५। पचा पर बचानामाहार श्रावा?? गोयमा ! सइत्योघा जीवा शणागारोवउप्ता सागारोषउप्ता सखिजागुणा, दारं १३ । एए सिण जते ! जीवाण शाहारगाण श्रणाहारगाणय कयरे२ हितो शप्यावा? गोयमा ! सछत्योवा जीवा शृणाहारगा शाहारगा शसखिजगुणा, दार ११ । एएसिण नते ! जीवाण नासगाण शनासगाणय क यरे कयरहितो थमाया यजयावा तुलाया विसेसाहियाया ? गोयमा ! सष्ठत्योषा जीवा नासगा थन्ना सगा गणतगुणा, दार १५ । एएसिण नते ! जीवाण परिप्ताण परिप्ताण नोपरिता नोशपरित्ताणय कयरे कयरेहितो थप्यावा ? गोयमा । सकृत्योवा जीया परिप्ता नोपरिक्षा नोथपरित्ता शणतगुणा थपरिप्ता शणतगुणा, दार १६ । एएसिण नते! जीयाण पजाप्ताण थपजाताण नोपजात्ता नोशपजात्ता णय कयरे कयरोहितो थप्पाया? गोयमा ! सहयोमा जीपा नोपडातगानोचपातगा शपजात्तगा शणतगुणा पजात्तगा सखेनगुणा । एएसिप नते ! सुजमाण यावराण नोसुजमाण नोवादराणय कयरे२ बामाममाचारवाना च सतरे सवरेन्योऽस्पा वा ४१ पौतम । सवस्तोबा वीवा पनाहारवा पाहारवा असस्पगुणाः । पारम् । १४ । पतेपा मद aalanां प्रापबामामानापवाना चपरे गतरेभ्योऽरपा वा तुल्या वा विशेपाधिका वा गौतम । सवतोका जोवा प्रापमा धमापबाम मम्तगुरा। हारम् । १५ । एतेपा प्रदान । बोवामा परीतानामपरीवाना मो परीतामा नो पपरीताना चपतरे कतरेन्योऽपा वा ? गौतम । समस्तोता श्रीवा परीता मोपरीवा नो पपरीता भनन्तगुवा पपरीता पमन्तगुणाद्वारम् । १६ । एतेपा मदन्त ! जीवाना पर्याप्तानामपर्याप्ता मो नोपर्याप्तामा मोअपर्याप्तामा च पतरे बरेभ्योऽपा वा ४ ? नौतम । सर्वतोफा जीवा नोपयोतका नो पपोतका अपर्याप्तका पनम्तगुणाः पर्यातका सस्यगुषार । रतेपा भदन्त । मत्मारा बादरामा मोसूरमाणा नोवादरायां च बरे वरम्पोअपापा ४ गौतम । पर्वखोका जीवा - हितो थप्याया?? मोयमा ! सहयोवा जीया नोसुजमा नोयादरा, बादरा शणतगुणा सुजामा शसखे जगुणा, दार १८ । एएसिण जते । जीवाण समीण श्वसन्नीण नोसन्नीणनोसन्नीणय कयरे कयरे हितो शप्पाषा ? गोयमा । सम्झत्योया सन्नी नोसन्नी नोसन्नी शुणतगुणा , असन्ती शणतगुणा । दार १९ । एएसिण नते ! जीवाण नबसिझियाण थनयसिझियाण नोनवसिझियनोचनवसिझियाणय फयरे कयरेहितो थप्पावा ? गोयमा ! सम्वत्योवा चनयसिझिया नोनवसिछिया, नोचनवसिरिया वणतगुणा जयसिझिया शणतगुणा , दार २० । एएसिण नते । धम्मत्यिकायश्चम्मित्यिकायश्चगास त्यिकाय जीवत्यिकाय पुग्गलत्यिफाय थक्षासमयाण दवघ्याए कयरे कयरेहितो शप्पावाट ? गोयमा! धम्मत्यिकाए थघम्मत्यिकाए भागासत्यिकाए एए तिमिवि तुल्ला दयाए सछत्योवा जीवत्यिकाए दछ मो मा नो बादरा, बादरा पमतमुवाः सूमा पाल्पगुवा । रम् । १८ । एतेषां प्रदन्त । बीमा समिना पसलिना मो बिना मो अधिनान करें तरेयोऽपामा मौतम । संसोमाः सलिनो मोसालानो नो पहिलो नम्बगुवाः, अमिनोऽनन्याहारम् ।। एतपा प्रदत्त । बीवाना प्रतिदिवानामप्रतिदिवाना नो भवतिनिबमोचनवासीवाना बवर पतरेयोपा बामौतम।तोषा धमामिदिरा नोनवसिरिमा नो अमरविधिमा आनन्दरा प्रविधिमा अनन्तगुवा । हारम् २० । एमां मरती पोसिवायारासिवाया पापास्तिवापागाविपापपुद्रसारिवायाहारमयानो मातपातरे पतरेयो अपापा, मौतम । पातिवापोषनातिवाच गावाबा खिवाय एवे अप तुला माया पोशा मासिबायो प्रभावपामतनु दलाशिवायोमाचतपावसानोभावमयी माता मन्चनु । एवो भूपच पोसिवावापानिपावाचावाशिवायचीवाणिवावाणिवावायलमवावा प्रदेशाचा स्वरे सवरेनो BSNA ठया शणन्तगुणेपम्गलत्यिकाए वष्ठध्याए शणतगुणे शक्षासमए दवयाए शणंतगुणे । एएसिण नते ! धम्मत्यिकायशधम्मत्यिकायथागासत्यिका यजीवत्यिकायपोग्गलत्यिकायशक्षासमयाण पदेसम्याए कयरे कयरहितो शप्पावा ? गोयमा । धम्मत्यिकाए धम्मत्यिकाए एएसिण दोवि तुम्ला पर्दसध्याए सछ त्योवा जीवत्यिकाए पदेसम्याए शणतगुणे पांग्गलत्यिकाए पदसध्याए थणतगुणे शक्षासमए पदेसह याए शणतगुणा शागासस्थिकाए पदेसठाए शणतगुणा । एएसिण लते ! धम्मत्यिकायस्स दवच्याए पदे सध्याए कयरे कयरहितो शप्पावा बजयावा तुल्लावा विमसाहियाया ? गोयमा ! सहयोया एगे धम्म त्यिकाए दवयाए सोचेय पदेसध्याए यसखिजागुणा । एएसिण नते । शुधम्मत्यिकायस्स दवठयपटे सध्याए कयरे कयरोहिती शप्पाषा ? गोयमा । सछत्योवे एगे श्रधम्मत्यिकाए दवष्याए सोचेय पदे सध्याए यसखिजगुण । एतस्सण नत ! शागासत्यिकायस्स दछठपर्दसध्याए कयरे कयरहितो शप्पाया? ? गोयमा । सम्बत्योष एगे छागासत्यिकाए दछयाए सोचेय पदेसध्याए शनतगुणा , एतस्सण नते ! Sरपा गौतम | धर्मासिकायापमोतिकायो वामप्येतो तुस्पो प्रदेशातया सर्व स्तोत्री नीवास्तिवाम प्रदेशयतयानन्तगुषा पुद्गलाति फायावसातयाऽनम्तगुणो समया प्रदेशातयामत गुय भवाशास्तिवापा प्रदशार्पतयामन्तगुवः । अस्य भवन्त । पास्तिवापस . गपतपा प्रदेशातया बतरे कातरम्पोजपावा, गौवम सनस्ताव एको पमोतिबायः मदखापतया स एवामगुका । अस्प प्रदन्त । अपमासिवायस यातया प्रदेशातपा बतर पतरन्योऽरपा वा४. गोवम । सवसोच एकोऽधमोसिवायो द्रव्यातपा सपव मदेवार्थतया यस्। एस्स नदबासामास्तिवापस्य द्रष्यापमदनापतया बापरे कावरेम्पोऽस्पा वा गौतम । सपनो एक भाषाशासिकायो जीवत्यिकायस्स दवष्ठपदेसध्याए कयरे कयरोहितो थप्पावा?? गोयमा । सइत्योये जीवत्यिकाए दछ ध्याए सोध पदेसच्याए यसखिज्वगुणा, एतस्सण जते । पुग्गलत्यिकायस्स दधष्ठपदेसम्याए कयर २ हितो प्यायाध १ गोयमा । सहयोथा पुग्गलत्यिकाएं दबयाए सोधेष पदेसध्याए शुसखिऊगुणा थ छासमए' ण पुच्छिाह पदसान्नावा । एएसिण नते । धम्मत्यिकाय घम्मत्यिकाय यागासत्यिकाय जीय त्यिकाय पोग्गलत्यिकाय झासमयाण दवठयाए पदेसष्ठयाए कयरे कयरोहितो शप्पाया? गोयमा ! धम्मत्यिकाए छधम्मत्यिकाए शागासत्यिकाएय एएणं तिनिधि तुल्ला , ववव्याए सवयोवा धम्मस्यिकाए धम्मत्यिकाएय एएण टोसिवितुल्ला पदेसच्याए यसखेडागुणा, जीवस्थिकाए दहठयाए शणतगुणे सो चय पदेसष्ठयाए शखिजगुणे पोग्गलत्यिकाए वधळ्याए शणतगुण सोचेय पएसष्ठयाए यसखेडागुणे माधापा सराव प्रदेशातयाऽमन्त नुर । एतम प्रदन्न । जीवाशिवापस प्रमामायापतया पातर बतरम्पोऽस्पा बा ११ सर्वतोबो जीवा स्तिबाप एको मातमा सपथ प्रदेवापतया ऽसम्पनुस । पतस भवन । पुतातिवापस पाचप्रवेमार्पता कातरे खतरेयोऽपामा " पौतम ! सर्वतोच पदसातिवायो दृष्मायतया सब परेशातपा ऽसस्पनुमा । बहालमपो नपभरते प्रधानावात् । गतबा परन्त ! पना तिचापापानिबायबालातिवायोलिपायपद्धतासिवायादासमयाना इमापतया प्रोपावतमा बर २ ज्योपा बा ४, मौतम ! . मासिवायो अमोतिचाप भाकापालिबाप पते प्रयत्स्या वातया बना पोसबायोपनासबाप पत्तो पापि तुलो प्रदेशाचे सपा सपको बाबालिगायो इस्यायेतपानमा र प्रदेशाधतयाममा । पुनासिवायो माघेतपाना पब मारे पंता सस्स मुकामासमपो मारेगावपालमुबारावाविवामा प्रदेशावानरन् । पवा पर - HalaiIAPHILOPassacresma यहासमए दबठपदेसध्याए शणतगुणे छागासत्यिकाए पदेसष्ठयाए शणतगुणा दार २१ । एएसिण नते। जीवाण चरिमाण शुचरिमाणय कयरे कयरोहितो शप्पाया ? गोयमा ! सछत्योवा जीवा शुचरिमा च रिमा शणतगुणा दार २२ । एएसिण नते । जीवाण पोग्गलाण थक्षासमयाण सचदहाण सहपएसाण सधपजामायण कयरे फयरोहितो शुप्यावा ? गोयमा ! सवत्योया जीवा पोग्गला शणतगुणा शहास मया शणतगुणा सझदक्षा विसेसाहिया सहपदेसा शणतगुणा सहपजया शणतगुणा दार २३ । खित्ता गएण सइत्योया जीवा उहृलोयतिरियलोए शहोलोय तिरियलोए बिसेसाहिया तिरियलोए शसखि जगुणा तेलुक्क शसखेडागुणा उहृलोए सखेागुणा शहोलोए बिसेसाहिया, खेप्ताणुयाएण सइत्योवा नेरहया तलुक्को शहोलोगतिरियलोगे शसखेडा० शहोलोए शसखेजगुणा । खेत्ताणुवाएण सहयोवा - मां परमाणामघरमाया च सार बतरेन्योऽरपा वा ४ ? गौतम । सवस्तोबा जीवा अपरमाघरमा धमालगुना । बारम् २२ । एतेपा भवन्त । जीवाना पुदनानामहासमयानां सवव्याया सवप्रदेशामा सर्वपयवाना चकतरे कतरेयोऽसपा वा ४? गौतम । सस्तोमा जीयाः पुनसा मन सगुणा अदासमया अनन्त गुणाः सवद्यापि विशेषाषितानि सप प्रदेगा अनन्तगुणाः सवपयवा प्रनम्तगुणा । हारम् २३ । क्षेत्रामपातन सस्तो जी अखसावतिर्यम्तो प्रयोलोतिर्यग्ला विधो पापियास्तियन्ताये ऽसस्यगुणा खेसोक्यऽसस्पगुणा असुलाकऽसर पगुणा अघालोक वि. प्रपाधिया क्षेत्रामुपातेन मवस्तीवा नैरपिकासोक्पे अपोलादतियग्लोक ऽसमयगुणा प्रघालोके पसंरपगुमा । क्षेत्रानुपातेन सबस्ताकारित यग्योनिशा बसोबतिग्लाको पपासावत्तियासोक विद्यपाचिकारतयम्सोधेऽसंस्थगुणा खसोय ऽसरपगुण अई लोके पसस्यगणा पोलोने विशेपापियाः । जानुपाम सवस्वोबास्तयापोनिका सुलोको कईसाबतियातोखे प्रसस्पगुणा खेलोपे उसस्पगुमा प्रयोलीपतियतोके संख्ये LIMILINDABLE तिरिस्कजोणिया उडलोयतिरियलोए छहोलोगतिरियलोए यिसेसाहिया तिरियलोए शसखेजगुणा, ते लुक्ने यसखे गुणा उहलोए यसखिजार शहोलोए विससाहिया, खेप्ताणुवाएंण सहयोवा तिरिरकजो णिणी उहलोए उप्लोयांतरियलोए शसखेजा०, तलुक्क आसखेज० थहोलोयतिरिलोए सखिजगुणा थहोलोए सखजगुणा तिरियलोए सखिजगुणा खेप्ताणुवाएण सकृत्योवा मणुस्सा तेलुको उहृलोयतिरि यलोए थसखेडागुणा शहोलोयतिरियलोए सखिजगुणा थहोलोए सखेआगुणा तिरियलोए सखेडागुणा। खेप्ताणुधाएण सहयोवा मणुस्सी तेलुक्को उहलोयतिरियलोए सखेडागुणा शहोलोयतिरियलोए ससे जगुणा उद्छोए सखेडागुणा छहोलोए सखज० तिरियखोए सखेडा०, खेसाणुवाएण सहयोवा देवा उट्सखोए उहुलोयतिरियलोए थसखंजगुणा तेलुक्ने यसखेजगुणा थहोलोए तिरियलोए आसखेड - पना पीताचे संन्यगुणा स्तियन्तो सरपमुणः । बानुपातेन सस्तोका मनुष्णा सोम बरसोबतिपम्तो संरपरा मोतीतिय म्सोक तरपेपनमा प्रयोसोचे संबपनमा सिमम्सीय संस्थामा जानुपातेन गबरतोस मानुष साक्ये रसोबत्तियन्तोक संपनुश परी मोतिषसोये सपना बाना संरयमुग पालो सपनुमा स्तियग्लोब सपनुवार जानुपातेन सर्वतोबा देवा बहुमो गोपति पन्तोष ऽसंगपगुरा सतोमे सम्पनुमा चोहोबतिवप्लोब अपना अपोलोरानुग स्तियनोचे समपनुमा ।मानुपातम यस्तो पदेश वामोरे जातोतियानोको सिमा सो पल्ममा मोसोतिमहोप समुरा भरोसाचे पपुवास्तिवाच सानुपातम पस्तो प्रबनबासमा हासो मोतियम्बोबस्नु लोपमु पोशोपतिरसोगपति पम्ताव नमुना तो समानुपामुपादेव पावोस समाविमोरेशमनीय विमनाये अलग सोचा शहोलोए सखिजागुणा तिरियलो सखिजागुणा खेप्ताणुवाएण सहयोवा देयो उहलोय उहलोए तिरियलोए शसखेजगुणा तेलुको सखेडागुणाने शहोलोयतिरियलोए सखेजगुणा शहोलोए सखे जगुणा तिरियलोए सखिजगुणा खेप्नाणुयाण्ण मछत्योवा नघणयासीदेवा उहलोए उहलोयतिरियलोए शसखेडागुणा तेलुक्के सखिजगुणा शहोलोयतिरियलाए आसखेडागुणा , तिरियलोए शसखिजागुणा थहोलोए शसखेडा०, खेप्ताणुयाएण सक्षत्योवा नवणवासिणोन देयो उहलोए तिरियलोए शसखि०, तेलुको सखेडागुणा शहोठोए तिरियलोए शसखेजा, तिरियलोए शसखिजा० शहोलोए यसखिजा० खेसाणुवाएण सत्योवा वाणमतरादेवा उहलोए उहलोयतिरियलोए शसखिजागुणा, तेलुक्के शसखिजा० थहोलोए तिरियलोए सखेडागुणा शहोलोए सखेडागुणा तिरियलोए सखिजा, खेताणुयाएण सक्षत्यो PHHHHHHHITRAPDEEPATI प्रपोसोबतियातो ऽसस्पगुणारतपग्लो ऽतरपगुणा प्रघोसो प्रसंस्यगुणाः । चानुपातेन सवस्तोबा वानप्यन्तरा देवा करतो करसोर विपातो ऽसंस्पगुणा तेलोपे ऽसवगुण पपोलोकतिपम्तोक सस्पगुणा अपोलो सस्यगुणा स्तियम्तो सस्पगुमा । गानुपातेन सवस्तो वाममार्यो दव्य उस्सोक असावतियन्तोस,पसरसगुण स्लोरपे सस्पगुणा पोसोबतिपग्लोके प्रसस्यगुणा अघालोठे सस्पगुवा स्तिय सोने सम्पगणाः । गानुपातेन सपनोबा म्योतिषशा दवा कासो कईसोपतिर्यम्तो ऽसस्पगुवारभैलोरपे सरपगुना प्रपोलोतिपासोक ऽसरपणा पोलास रस्येयगुणा खियलोके परस्पगुवा । नामुपातेन सवसोका न्यतिक्षरेम वदलो जहसाबतियग्लोब ऽसरपगुणा से साप सएपगृपा प्रासातिपरसोके सरपगुणा पोतोक सरपगुरा लिपस्तो भतरपगुवाः । इशानुपातेन सर्वसामा वैमानिका देवा ऊद लोववियरतोस तोप सम्पपगुमा प्रशोसोक्षतिपावो सस्पगुणा अपोलो सस्पगुणा खियातोले सस्पे पगुग करतो ऽस्यगुबार । वान ।
तिरिस्कजोणिया उडलोयतिरियलोए पहोलोगतिरियलोए यिसेसाहिया तिरियलोए शुसखेडागुणा, ते लुक्को यसखेचगुणा उहलोए यसखिजा० शहोलोए यिसमाहिया, खेताणुषाएण सहयोषा तिरिस्कजो णिणी उहलोए उहलोयतिरियलोए शसखेज०, तलुक्क शसखेज० थहोलोयतिरिखोए सखिजागुणा थहोलोए सखजगुणा सिरियलोए सखिजागुणा खेप्शाणुवाएण सम्पत्योवा मणुस्सा तलुक्को उहृलोयतिरि यलोए शमखेनगुणा पहोलोयतिरियलोए सखिजगुणा शहोलोए सखेडागुणा तिरियलोए सखेडागुणा। खेप्टाणुषाएप सहयोवा मणुस्सी तेलुको उद्गुलोयतिरियलोए सखेडागुणा शहोलोयतिरियलोए सखे जगुणाचं उद्दलोए सखेडागुणा छहोलोए सखडा० तिरियलोए सखेडा० , खेत्ताणुवाएण सहयोवा देवा उन्नुलोए उहुलोयतिरियलोए थसखंगुणा तेलुक्के सखेनगुणा थहोलोए तिरियलोए थसखेन० पनुमा पीताने संपगुवा स्तियन्तोषे सरपमुमारामानुपातेन सस्तोमा मनुमा सोक्प सीवतियम्सोधे संगपगुमा बोसोवतिय सोच हस्येपनमा अधोसोचे संवपाल लिमप्सोक परापमा जानुपातेन सर्वरतो मान तापे करसोबतियन्ता सम्पनुमा यो सोबतिसोचे सरपपा बरसाये संस्पमुग चासोक गपगुमा रितपप्पोक समपनुमा ।मानुपातेन सस्तोमा रेगा मानोगसोपति पालो सरपमुलासोपे सपना बोसोवतियन्तोष पनुका प्रमोसोवयनुमा स्तिवको सम्पनुवा । मानुपावन पर्यस्तो परेश वासोक वातावतियानो ऽसल्पगुवा सोसे मुग चीसोतिषप्तो समयनुबा चोसोये रमुवास्तिो पण गानुपातेन पतोल प्रामवामिरेका खाना पसोपतियोपगुवा बोक्ने माना पोहोतिब तो यशक्ति पम्सास्नु खोप सामानुपानातीचा बनवाशिमोरेसनबीच विषयाणे आमगुग सोणे मुषा सहयोया एगिदिया जीया उहलोए तिरियलोए, थहोलोयतिरियलोए विसेसाहिया, तिरियलोए शस खेजगुणा, तमुक्त शस०, उहलोए आसखेडागुणा, शहोलोग धिमेसाहिया । खेत्ताणुवाएण सइत्योवा एगिया जीया थपजात्तगा, उहखोयसिरियलोए छहोलोए तिरियलोए यिससाहिया, तिरियलोए शुस सजगुणा, तलुक्क शसखेड़ागुणा, उहलोए शुसखिजगुणा , थहोलोए विमसाहिया । खेत्ताणुयाएण सहत्याया एगिया जीया पात्तगा, उहठोयतिरियलोए छहोलोयतिरियलीए विमसाहिया, तिरियलोए थसखजागुणा, तेलुक्क यसखेडागुणा, उहलोए शसखेडागुणा, शहोलोए यिससाहिया । खेप्ताणुवाएण सछत्योया येइदिया उडलोए उहलोयतिरियलोए शसखेडागुणा, तेलुक्क शस० , अहोलोए तिरियलोए शसखजागुणा, थहोठोए सखेजगुणा, तिरियलोए सखेडागुणा । खेत्ताणुयाएण सइत्योया येइदिया श पजाप्तया उहलोए । उहलोयतिरियलोए सखजागुणा, तेलुक्क शुसखेडागुणा, शहोलोयतिरियलोए शस खसागुणा, शहोलोए सखे०, तिरियलोए सखे०। खेप्ताणुयाएण सत्योवा घेइदिया पजाप्तया उहलोए उ हलायतिरियलोए शुसखेजगुणा, तलुक्को शमखेजागुणा, शहोलोयतिरियलोए शुसखेडागुणा, शहोलो ए सखेजगुणा, तिरियलोए सखेजगुणा । स्वत्ताण्याएण सनत्योया तेइदिया उहलोए उहलोयतिरियलो गुणा अपामोतियाला संस्मगुमरा प्रपोलो समयमुवा स्तियम्माफ ममपमा । यानु पातेन सयेस्ता वीन्त्रिपा अपर्याप्तका बयेलापा छप्यतातियामा सम्पगुमासाम्प उमस्पगुग पासोतिपरसोफा ऽसमा गया प्रघोप्तोफ सपगगा स्तिग्लोफेसरूपगुणा । क्षेत्रानुपातम सबस्तीफा वीन्द्रिपा पपासवा अर्थतोफ कप्यसाबविपरसोफा संस्थगुमा त सोपऽसस्पामा प्रपोलोतिर्यम्सोपे उसस्पगुणा प्रपोलोक संग्य LIORDESHI CREDIOPHERDIDREAM LOGOO.
वा घाणमतरी देवी, उहुलोए उहलोयतिरियलोए शसखिजगुणा तेलुक्क सखिडागुणा शहोलोए तिरियलोए शसखिज्ज शहोलोए सखिजा० तिरियलोए सखिजगुणा खप्ताणुवाएण सहयोवा जोड सिया देशा उहलोए उहलोयतिरियलोएशसखिजा० तेलुक्क सखेजगुणा थहोलोएतिरियलोए शसखिजा गुणा छहोलाए सखेजगुणा तिरियलोए असंखजगुणा खेप्ताणुयाएण सहयोवा जोइंसिणी देवी उहलोए उद्दलोयप्तिरियलोए शसखजगुणान तेलुक्क सखेजागुणा शहोठोयतिरियलोए सखेज०, शहो लोए सखि० सिरियलोए शसखे० खेप्ताणुवाएण सहयोया बेमाणिया देवा २००० उहलोयतिरियलोए तेलक्के सखेज० थहोलोयतिरियलोए सखिडा० थबोलोए सखेडागुणा तिरियलोए सखेडा० उहलोए यसखिज० खेसाणुयाएण सत्योवान वेमाणिणी देवी उहलायतिरियलोए तेलुक्को सखेडागुणा थ होठोयतिरियलोए सखिजा० शहोठोयसखेज० तिरियलोए सखेज० उहलोए थसखि० खेप्ताणुयाएण पातन सर्वसामा मानियो देव्य बदमोतियन्तोके सापे समयमुवा समोसोबतियन्तो गरायपुरा पोसोये सरपनुशासियतोकप मुग परतोब सस्पगुमानुपातेन सवलोपा पन्निया जीजा जातोतियानो चोहोबतिपम्सोको विमेनापिका सिम्सोये se सपना चतोक्पे ऽसम्पगुणा करतोये ऽसम्पनुरा पोहोचे विशेषाधिपाः। चानुपातेन सर्वतोबा एन्द्रिया बीमा पोता पमोक तितो पोसोवियम्सोक विशेषाधिकातिर्यन्तोक सरपण सोपे यमुपा लामोष पनुश अमोलोर विशेषाधिकार का नुपावेन पासोका एबन्दिपाची पर्याप्तका पासोतिला चोलावियता पापित सियसोचे संरपरा सोपे संप मुषा बानो मनमा मोसोचे विषाषितामामुपावन पोलोनिपा बरसोमसोपविपन्नो मतो 80 सश्त्योधा एगिदिया जीया उद्दलोए तिरियलोए, यहोलोयतिरियलोए विसेसाहिया, तिरियलोए शुस खेजगुणा, संयुक्त शस०, उहलोए शसखेजगुणा, शुहोलो विमेसाहिया । खेत्ताणुवाएण सछत्योवा एगिया जीवा अपजनगा, उहलोयसिरियलोए शहोलोए तिरियलोए विससाहिया, तिरियलोए शुस खंजागुणा, तेलुक्के शसखेजगुणा, उहलोए शुसखिजागुणा , छहोलोए विससाहिया । खेत्ताणुयाएण सश्त्याया एगिया जीया पत्तगा, उहलोयतिरियलोए थहोलोयतिरियलोए विससाहिया, तिरियलोए शसखजागुणा, तेलुक्क शसखेजगुणा, उहलोए यसखेडागुणा, शहोलोए विससाहिया । खेप्ताणुवाएण सहयोया घेइदिया उद्गुलोए उहलोयतिरियलोए शसखेजगुणा, तेलुक्के एस०, अहोलोए तिरियलोए शसखेागुणा, शहोलोए सखेडागुणा, तिरियलोए सखेडागुणा। खेत्ताणुवाएण सइत्योया येडदिया थ पज्जप्तया उहलोए । उहृलोयतिरियलोए सखजागुणा, तेलुक्क शसखेजगुणा, शहोलोयतिरियलोए शस खजागुणा, शहोलोए सखे०, तिरियलोए सखे०। खेताणुयाएण सहयोवा घेइदिया पजाप्तया उहुलोए उ हुखोयतिरियलोए शुसंखेडागुणा, तेलुको शुसखेगुणा, शहोठोयतिरियलोए शुसखेडागुणा, शहोलो ए सखेजगुणा, तिरियलोए सखेझगुणा । खेत्ताणयाएण सहयोवा तेइदिया उहलोए उडलोयतिरियलो भय गुणा पासोबतिपासाले सम्म गुमा पोमोके सरपनुमा तिपम्नाफ मस्यगणाः । पेशानुपातेन सबस्तामा होन्द्रिया प्रपोतका कलाफ अवसावतिग्सोफे सस्पगुणाताप उसस्पगुणा भोसोवतियग्लोक संस्गणा प्रपोतोक सरपगणा सितयंगतोसरूपगुणाः । वानुपातम सवलोका दीन्द्रिया पयाप्तका कर्वसोके ऊचलोबतिपासोक संस्पगुमा संलोपेऽसरूपगुणा प्रपालोतिर्यरतो ऽसस्पगुणा अपोलोको सम्प LRAMPUROIDESHD ONEE Tourcom ARTIlon एस० । तेलुक्क शसखेजगुणा, राघोलीए सखेसगुणा , तिरियलोए सखेआगुणा । खेताणुधाएण स घस्योया तेइदिया अपजायगा उहलोए उडलोयतिरियलोए शसखेडागुणा, तेलुक्के शसखेजागुणा, थ होठोयतिरियलोए शसखेडागुणा, थहोलोए सखेजगुणा, तिरियलोए सखेजगुणा। खेत्ताणुवाएण सव त्योया तइदिया पज्जप्तगा उसलोए उहलोयतिरियलोए शसख जगणा , तेलुक्क सखिजगुणा, शहोलो ए सिरियलोए यसखिजगुणा , यहोठोए सखिजगुणा, तिरियलोए सखिजगुणा। खेताणुषाएण सह त्योया घउरिदिया जीया उहलोए उद्दलोयतिरियलोए शबखेजगुणा । तेलुक्क सखेडागुणा, थहोलो यतिरियलोए थसखेगुणा, थहोलोए सखेजगुणा, तिरियलोए सखेडागुणा । खप्ताणुवाएण सछत्योया घउरिदिया जीवा थपजाप्तगा उहुलोए, उहुलोयतिरियलोए यसखेडागुणा, तेलुक्को शसखजागुणा, थ होलोयतिरियलोए इससेजगुणा, थहोलोए सखेजगुणा, तिरियलोंए सखेजगुणा । खेताणुयाएण सह नमातिपन्तोके सरपगुम । शानुपावेन सर्वखोपबोदिया वासो बमोतियानोचे समपनुमा स्तोक्पे परोपनु परोसो त मेगनुमा विनोबे सस्पेपनुमा । सानुबान सस्तोमाचीन्द्रिमा प्रपोसना अपमोके वर्षोतिबताये अपमेयगुणाः । सोम सोयनुमा मोसोतिनोक पाबपुषा तिर्यनो संपनमा । मामातन सस्तोमाया पोतमा अयसोये अपनो तिमोरे जाममुगलोक्ये बानुबा पोलो निपलोचे मस्सगुण लिपवतो रोगमा । समानुपातेन सर्वनोना चतुरिनि पा बोबा अपसोचे समतोपतिमलादे पायमुमोये बसम्ममा पोलोबतिपंचसो सपना बोसोवे बनेपा सिपम् सोच रस्मेपनुका सानुबान सीमानारनिया बीमा सोना सबारे सोपविमोचे समुपाखोमे परमनुत- . त्योवा घउरिदिया जीया पजत्तगा उहलोए उडलोयतिरियलोए शुसंखेचगुणा , तेलुक्के आसखेडागुणा शहोलोयतिरियलोए शसखेडागुणा, शहोलोए सखेजगुणा, तिरियलोए सखे० । खेत्ताणुवाएण सबत्यो या पचिदिया तेलुक्क उद्दलोयतिरियलोए यसखेजगुणा, थहोलोए तिरियलोए सखेडागुणा , उढलोए सखेजागुणा, थहोलोए सखेडागुणा , तिरियलोए शसखेडागुणा । खेसाणुवाएण सवत्योवा पचिदिया पजातया, तेलोक्के उद्दलोयतिरियलोए शसखेडागुणा, शहोलोयतिरियलोए सखेडागुणा , उढलोए सखेडागुणा, थहोलोए सखेडागुणा सिरियलोए सखिजागुणा । खेप्ताणुवाएण सहयोवा पचिदिया पजता उठुलोए उहलोयसिरियलोए थस०, तेलुक्क शस०, पहोलोयतिरियलोए सखेडा० शहोलोए सखेडा० तिरियलोए थसखेडा० । खेत्ताणुयाएण सहयोया पुढविकाइया उडलोयतिरियलोए शहोलोयतिरियलोए घोसोबतिपक्लोक प्रसंस्पगुणा भपोसोचे सरपयगुणा सियनोको सम्पपगुणाः । पानुपातेन सस्तोमायतारन्द्रिया बीमा पर्याप्तगा अप्य लोके सध्यप्तोतिपतोके पसस्य गुणा तोक्पे पसंस्पगुणा प्रपोप्तोपत्तियक्लोक प्रसस्येपगुवा। अपोलोकसंसपेयगुणातियक्लोफेसरपगुणा । सामुवातम सव स्तोमा पन्चेन्द्रिया खेलोपे गईलोपतिपक्सोके असरयपगुणाः अघोलोतियानो सस्पेयगुणाः अनु लोके सरयेयगुणा ति यक्सोक प्रसस्येयमुना । क्षेत्रानुपातेन सस्तोमा पचन्द्रियाः पाप्तगा खेसोप असुलोवतियलोचे असरपेपगुणा प्रपोसाफतियफ्लाफ सम्पपगुणा ज्वलोके संस्यपगुणा प्रघोलोले सम्पपनुमाः विपसोश सम्पपगुणाः । क्षेत्रानुवासेन सर्वतोमाः पन्चेन्द्रियाः पर्याप्ता असुमोले अनुलातियवसाचे प्रसस्येपमुगः सोक्पे पसरपयगुबार परोसोबतियवलोक प्रसस्पेयगुणाः पपोलो सरपयगुणाः तियकलोचे प्रसस्पेयगु गा। पेशनुवावन सवस्खोमा: पथिवीकायिकाः खसोशवियम्साके भोसोकतिपब्लोफ विशेषापिका, वियतोके भसम्यगुणा सोक्में , विसेसाहिया, तिरियलोए शसखेजगुणा, तेलुको शसखिजगुणा उहलोए थसखेडागुणा , थहोलोए बिसेसाहिया । खेताणुवाएण सहयोया पतथिकाइया चपजप्तया उहलोयतिरियठोए शहोलोयतिरिय लोए विसेसाहिया, तिरियठोए यसखेजगुणा, तलुक्क शसखेडागुणा , उहलोए शसखिजागुणा, थहो छोए बिससाहिया। खप्ताणुयाएण सहयोवा पुढधिकाइया पजप्तया उहलोए तिरियलोए तिरियलोयश्च होलाए बिसेसाहिया, सिरियलोए यसखिजागुणा, प्लुक्को शसखिजागुणा, उहलोए शुसखिजागुणा, थहो लोए विससाहिया । खेत्तापुवाएप सञ्छत्योवा थाउकाइया उहलोयतिरियलोए शहोलोयतिरियलोए वि ससाहिया तिरियलोए शसखेजगुणा , तलुक्क थसखजागगा , उहलोए थसखेजगुणा, थहोलोए विसे साहिया । खेप्ताणुवाएण सहयोवा थाउकाइया थपजत्तया उहलोपसिरियलोए थहोलोयतिरियलोए यि पसरपेपमुगाः जसोक प्रसस्पेपनुवा अपोलो विशेषाधिकाः । चामुवातन हवलोमा पपिपिया अपर्याप्ता ज्दलोबतिपब्लोप घोसोबतिपक्तीचे विसपापित विपकताको पसरपयगुण सोप प्रसस्पयनग असाच प्रसंगपेपनुमा प्रपातोके विधाषिका क्षेत्रान पान सर्वसामा पपिवीकापिका पासतपा उनसोचे तिवसा नियोगायोलोक विधेपाधिमा तियवसाये पसरयेपनबा लोक्य प संरपेयगुणा वसोये पागबनुमा पासोक निवारिता मानतेन पलोमा अवापिका बलोपतिरंक्सोको चीसोबतिपल्लो विद्यापिका तिपेवतोय परपसार सोय भवापेपनुमा बसोये पसरवनुग चोलो विषार्षिा। जानुपातिन सतोमा भयापिका पर्याप्तता मनोतिर्मनाये जवानोतियवतोक विभाषिया तिमहतोये चबयेपणु सोको स्पगुगा सोने पासेपनुमा मोसो विद्यापिका रेवानुमावेन ब्रोमा समापिया पर्यावया सोबतियन्तोष विवापिका मोलोविरम् सेसाहिया तिरियलोए शसखेडागुणा, तेलोको सखेडागुणा, उहलोए शसखे जगुणा, शहोलोए विसे साहिया । खप्ताणुषाएण सइत्योवा थाइकाइया पक्षप्तया उद्दलोयतिरियलोए थहोलोयतिरियलोए वि सेसाहिया, तिरियलोए शसखेडागुणा, तेलुक्क शसख जगुणा, उहलोए शसख जागुणा, शहोलोए विसे साहिया । खताणुयाएण संवत्यावा तेउकाइया उद्लोयतिरियलोए थहोलोयतिरियलोए विसेसाहिया, तिरियलोए थसखे सगुणा, तेलुक्के शसख ज०, उहुलोए शसखिजा०, पहोलोए विसे साहिया। खताणु वाएण सहयोया तेउकाहया शपजाप्तया उद्दलोयतिरियलोए थहोलोयतिरियठाए विसेसाहिया , तिरि यलोए यसखे झगुणा, तेलुक्को शसखिज्जगुणा, उहलोए यसखे जागुणा, शहालोए बिसेसाहिया । खता जुवाएण सत्योषा तेउकाइया पञप्तया उइलोयतिरियलोए थहोलोयतिरियलोए विसेसाहिया , तिरि . सोक विपाधिमा तियकसोले असरपेयनुका सोको प्रसंगयेयगुवा प्रससोने पसंरपेयगणा प्रपोलोफे विद्योपापिहा । मानवातेम सवस्ता मालेमावायिका आईसोबठियक्नोव प्रयोगोपरिपफ्लाव विपापिकाः तिर्यक्नोले पसरपयगुण प्रेलापे असरपयगुणा असोके पस स्पपगुणा पासो विशपापिठाः । सेामवातेन सवलोमा सामायिका अपर्याप्ततया आईसोकतियक्ताके भघोसोबतियतामा विशेषापि काः तियक्सोक प्रसंस्यपगुणा सोपे असरपयगुणा उबलोहे पसरपेयगुणा अपोलो विशापापिहार । मानवातेन सवतोमास्तम वाय पm पर्याप्ततया उन्हलोवतियकलोयो पोसोवतियकनायो विसपाधिका तियानोक प्रसंस्पेयगुणाः प्रलोप असरपेयगुणा कमोफ पसरपेप युवा अधोलोक बिशपाधिका । इत्रामातेन सर्वसामा वायुवापिश्चाः ऊस नीतियकलोक पपासोपतिर्पक्लोके विशेषाधिकार तियफनाके भसस्पपापा सोक्पे यसपपपगुना जसोचे प्रवरपेयगुणा भाला विशपापक्षाः । देवानुवातन सर्वखामा वायुवापिका अपर्याप्तता HIMAPALI यठोए शसख जगुणा, तेलुको यसखे जगुणा, उहलोए थसखे जागुणा, शहोलोए विसेसाहिया । खता णुषाएण सहत्योधा बाउकाइया उद्दलोयतिरियलाए थहोलोयतिरियलोए विसेसाहिया । तिरियलोए थ सखेडागुणा, तेलुक्क शसखिजगुणा उहलोए थसखे गुणा , थहोलोए यिसेसाहिया । खशाणुयाएण सहयोया याउकाडया थपज्जतया उद्दठोयतिरियलोए थहोलोयतिरियलोए विसेसाहिया । तिरियलोए यसखे गुणा, तेलुक्के शसख जगुणा, उहछोए यसखिजगुणा, थहोलोए विसेसाहिया । सत्ताणवाएण सहयोवा घाउकाइया पजाप्तया उहछोयतिरियलोए थहोलोयतिरियलोए विसेसाहिया । तिरियष्ठोए थसखेडागुणा, तेलुको आसखेडागुणा, उहुलोए थसख गुणा, थहोलोए बिसेसाहिया । खप्ताणुषाएण सहत्योषा यणस्सइकाइया उद्दलोयतिरियलाए यहोठोयतिरियलोए यिसेसाहिया। तेलुक्क शसख जागुणा .. पदसोबतियक्ताचे पचीसोबतियवतोये विशेषापिका तियवसोने असरऐपगुना तोक्पे पर पेपनुमा अनसोचे पायेबगुवा पपोतोके विशेपापियामुवातेन सर्वप्तामा वायुवापिकाः पर्याप्ततया अरसोबतियनोचे मोमोतियवतो विशेषार्षिया तिपवनीचे पाप पगुमा तोक्पे परस्येपमुका अनुमोक अवयनुगमोतोक विवाधिकाः । क्षेत्रानुवातन सर्वतोमा बनरपतिकाविणा घरनोतियवतो से अपीसोपतिर्मसोक निवारिया सेतोय असंम्पपनुवा वदलो चसम्पयनुषा भवासीय विधवापिमाः । अमानुपातेन सबचोमा बनस्प विधारणा अपर्याप्तता मनोतिनोपयोलातिपक्माक विपापिया विषयाला प्रत्ययमुना तोक्पे पास पनुमा बरसोणे पससे पगुणा मोसोक विवार्षिमा । सानुनातन सस्तोमा समस्पतिवापिणा पोलतमा बसोपतिपतोय चोलोमतिपत्नीचे गिरे पारिता विपसोचबमुमा सोमपाता। नवाब बनुमा चासो विधवाविवाः । पानुमावेन वर्षसोचाय 2 ..usalamroman... उहलोए शुसखेडागुणा, शुहोलोए विसेसाहिया। खेताणुवाएण सइत्योया वणस्सइकाइया पातया उहलोयतिरियलोए शहोलोयतिरियलोए विमसाहिया, तिरियलोए शसखिजागुणा, तेलुक्क शुसखिजागु णा, उद्बुलाए आसखेडागुणा, थहोलाए घिनसाहिया । खेताणुयाएण सवयोवा वणस्सहकाहया पड़ा प्रया उद्दलोयतिरियलोए छहोलोयतिरियलोए विनसाहिया , तिरियलोए शुसखेजागुणा, तलुक्को शुसखे सागुणा, उहलाए यसखिजागुणा, शहोलोए विनसाहिया । खेत्ताणुवाएण सम्बत्योवा तस्सकाइया तलुक्को उद्दलोयतिरियलोए शसखिसागुणा, शहोलायतिरियलोए सखेडागुणा, उहलोए सखेडागुणा, शहोलोए सखेागुणा, तिरियलाए शसखिजागुणा । खेप्नाणुयारण सवयोवा तस्सकाइया छपजात्तया तेलुक्को उहु लोयतिरियलोए शसखेडागुणा, उद्लोए सखिजगुणा, शहोलोए सखिजागुणा , तिरियलोए शसखेजा गुणा । खेत्ताणुयाएण सहयोवा तसफाइया पजात्तया तलुक्कं उद्दलोयतिरियलोए शुसखिजगुणा, शहो लोयतिरियलोए सखेडागुणा , उद्दलोए सखिजागुणा, थहोलाए सखिजगुणा , तिरियलोए शुसखेडागु माया बसाय अनुमोतियमलोक सस्य पगण अपालाकातयफ्ना सम्य पगुमा उखुलायो सय्य यगुणा पघालोक सोपगुपातिपक्ला के सम्पगना । समानुपातन सस्तामाखमकायिका पपपामसपा प्रेमापन असुलामतियलोके पसायाला अनुलोरे सपगुणा प्रपोलोके साढे पगशास्तियोको समयगुणाः । इशानवातेम सव स्तोमातमयिका पर्याप्तका लोक्य का लोकातयक्नोया प्रसम्म पाणा प्रघोलोतिय ग्लफ सम्पगुगा ससमोस सस्पे पगुण पालाफे सम्म पगुमा स्तिपालाफ ऽसस्ययगुणाः । हारम् २४ । यतपा पदम्त ! जीवानामायुष्य समयम मायधपामामपाताना पोताना सुप्तामा जाग्रता समबहवानामसमासाना सावावेदचानामसातावदसानामिन्द्रियापयुधाना ना स्त्रियो - ARRORIEMOVEIVISDEOSAGES यछोए थसख गुणा, तेलुक्क शसख गुणा, उहुलोए थसख गुणा, शहोलोए विसेसाहिया । खप्ता णुयाएण सइत्योषा वाउकाइया उद्दलोयतिरियलाए थहोलोयतिरियलोए विसेसाहिया । तिरियलोए थ सखे आगुणा, तेलुक्के थसखिजगुणा उहलोए थसखे गुणा , थहोलोए बिसेसाहिया । खप्ताणुयाएण सहयोया याउकाडया अपजावया उहलोयतिरियलोए थहोलोयतिरियलोए विसेसाहिया । तिरियलोए यसखे जगुणा, तेलुळे शसख जगुणा, उन्हुलोए शसखिजगुणा, यहोठोए विसेसाहिया । खेत्ताणुयाएण सइत्योवा याउकाइया पजष्ठया उहलोयतिरियलोए थहोलोयतिरियलोए विसेसाहिया । तिरियलोए शसखेडागुणा, तेलुक्क शसख जगुणा, उहलोए शसख जागुणा, थहोलोए विसेसाहिया । खप्ताणुयाएणं सहत्योषा वणस्सइकाइया उहलोयतिरियलाए थहोलोयतिरियलोए यिसेसाहिया। तेलुक्को यसख जगुणा असोतिपयसोरे अपीतोपतिर्यवतोय बिपाधिमा तिर्यवतोये पसरपेयमुना सोपे प्रारपेपमा पदसोचे परमपेपगुवा पपोतोक विपापिया देशानुमतेम भवतामा बामुबापिकाः पर्याप्ततपा बनसोपविर्यबोको बोसोवतियवतीचे विमापिका तियोो भारप पगुवा खेतोक्मे बसस्पेपमुषा मनोक परम्परा अयोलोष निवाधिषा । देवानुवातन सबस्तोमा बनरपतियायिका अनुमोतिर्मनलो प्रमोसोतिर्मनोक विवार्षिका लेहोस असम्पपगुना असोफे पसरपयनुजा पातीय विवाधिका। वानुमातेन सब सोना बनस्प विवापिका अपर्याप्तता मनोतिर्षवलोष चोलायतिपलोक विवापिका तिवाला परमपनुवा तोप पसंत व पनुबा बरसोने पहले पनुका पोलोक विशेषाधिका । सानुबातम सातोमा बनस्पतिगापिका पोतमा बसोपविपन्नोव भयोलापतिपत्नो बिहे भाषिक विपदोबसगुणा मोम वापरा मनाचा सपना सोचे विधिमा । चानुमावेन सोनार लोयतिरियलोए विससाहिया, तिरियलोए शुसखेजगुणा उहलोए शुसखिजागुणा शहोलोए बिसेसाहिया दिसाणु वाण सछत्योवा पोग्गला उहदिसाए छहोदिसाए विससाहिया उप्तरपुरच्छिमेण दाहिणपञ्चच्छि मेणय दोनि तुल्ला शसखेजगुणा। दाहिणपुरच्छिमेण उत्तरपञ्चच्छिमेणय दोवि तुल्ला विसेसाहिया पुरच्छि मेण शुमखेनगुणा पञ्चच्छिमेण विसेसाहिया दाहिणेण विससाहिया उत्तरेण बिसेसाहिया खेताणुयाएण सहयोया वचाइ तलुक्के उम्सलोयतिरियलोए शुणतगुणाइ शहोलोयतिरियलोए विसेसाहियाइ उहलोए शसखजा। पहोलोए शणतगुणाइ तिरियलोए सखिजागुणाह दिसाणुवाएण सछत्योवा दवाइ शहेटि सारा उहृदिसाए शुणतगुणाइ उत्तरपुरच्छिमेण दाहिणपञ्चच्छिमेण दोघि तुलाइ शसखेडागुणाह दाहिण पुरच्छिमेण उत्तरपञ्चच्छिमेणय दोवि तुलाइ विसेसाहियाइ पुरच्छिमेण श्वसखेजगुणाइ पञ्चच्छिमेण वि सेसाहियाइ दाहिणेण विसेसाहियाड उत्तरेण विसे साहियाइ। एएसिण नते । परमाणुपोग्गलाण सखेजप RECEMBECTOBaepapRM विळपाषिताः उत्तर विशे पारिताः । देशानुदातेम सवसोमानि द्रव्यापि पैशाक्ये वसुनोतियक्सोमे चमत्तगुहामि प्रघोलोवतियकलाफे विश पारितानि उपसा असरपयगुणानि अधोलाक अनम्न गुणानि तियमोवे अमरपयगुणामि दिशानुवातेन सस्तोमामि द्रष्यामि प्रधादिशाया मूविझायाममन्तगुणानि पसरपूष स्पो दक्षिण पथिमाया दयाराप तुस्याम्यसम्पपगामि दतिक पूर्व स्याम तरपधिमाया पोरपि तुल्पानि वि पाहतामि । यतपा प्रसन्न | परमार पुनसामा सम्पपप्रादेशिवानामसस्पपमादाकामाममतप्रादेशिकाना च स्वत्याना द्रव्यापतया प्रदेशा पतथा प्याप प्रदेशापतया इतरे । मौतम । सस्तोमा अनन्त प्रदशिक्षा स्वन्या दृष्यार्यतया परमाणु पनला द्रव्याथतपा निम्तगुणाः सरय पप्रदशिक्षाः स्कन्धा द्रव्यायतमा सम्पपगुणा असल्पादेशिका बन्धाः द्रव्यापदया। सरपेयमुपा प्रदेशातया सर्वस्वोमा धनाचमदेसिवा व 4. 2008 दार २४ । एसिण नन । जीवाण थाउस्त कम्मस्स यचगाण शयधगाण अपात्ताण पडताण सनाण जागराण समाह याण शुसमाहयाण सातावदगाण शुमातावेदगाण इदियउपउत्ताण णोड दिय उप उन्माण सागारोवउमाण शुणागारोपउनाणय कयरे कयरोहितो प्यावा पक्रयाया तुल्लाबा विसेमाहिया या ) गोयमा । महत्यावा जीवा शाउस्स कम्मस्स यधगा शुपजाप्नया सखिसागुणा , सत्ता सखिजागु णा, समाहया सखिजागुणा, सातावदगा सखिसागुणा, इदिय उवउन्ना सखिजगुणा, चणागारांयउता सखजगणा, सागारोयउता सखिसागुणा, नाइदियउघउन्ना विनसाहिया, शसातायेदगा घिससाहिया, असमाहिया विसेसाहिया, जागरा विससाहिया पाप्तगा मिससाहिया, थाउस्स कम्मस्स शयधगा विससाहिया, दार २५ । खेसाणुयाएण सहयोधा पोग्गला तेलुक्क उडलोयतिरियलोए थणतगुणा थहो PARAN पातामा सामारोपप्चामाममाघारापयुत्तामा बरे २ पापाबा बाला वा तुल्वा वा विद्यपाहिवा । गौतम ! सबस्तोमा वीवा पायुपा क मो घरमा अपर्याप्तका सम्पयगुण सप्ताः सम्यगुणा बायता सम्पमा समबहता सस्पेपगुमा सातावेदशाः सम्पगुणा इन्द्रियोपय ता सम्पपणवा पनाबारोपपत्ताः सम्पपगुवाः साधारोपयुत्ताः सस्पेयगुणाः नो सन्द्रिपोपपुरता संख्ययगुणाः विपाहताः । असातवदया। विपारिता समाता पातापागतो विशपारिवा पर्याप्तवा विद्यपाहता भापप बमका प्रवन्धका विभपाहताः । द्वारम् २५ ॥ समानुपातन सघ लामा पुदमा तोक्पे अनुसावतियानो अनन्तगुवा प्रपातोप्रतिपक्नोको विपादिताः तिपतोके अतंरपपगुमा भयो माने विद्यपाहिता । दिवानुमातेन सर्वतोमा पुदमा प्रसुविधापामोदिक्षा विधेपाधिमा भारपूर्वमा दक्षिण पधिमा पोरपि तुल्या अक्षयपपमुपाः । दक्षिण पूवस्थामतरपपिमायां च हपोरपि तुया विषपाहिवा पूर्वमा नसरपपगुणाः पधिमापां विशेषापिता PatNDESOSE कयरे २ हितो शुप्पाघा?? गोयमा । सहयोया एगपदेसोवगाढा पुग्गला दबध्याए सखेापएसोवगा ढा पुग्गला दबध्याए सखिजागुणा शसखिळापदेसोगाढा पोग्गला दहठयाए शसखिजागुणा पदेसम्याए सष्ठत्योवा एगपदेसोगाढा पोग्गला पदेसठयाए सखिमापदेसोगाढा पोग्गला पदेसध्याए सखेजगुणा थ सखेळापदेसोगाढा पोग्गला पदेसध्याए श्वसखेडागुणा दछठपदेसध्याए सहयोवा एगपदसोगाढा पोग्ग ला दवव्यपदेसम्याए सखेजपदेसोगाढा पोग्गला दरम्याए सखेडागुणा तेचेय पएसध्याए सखेडागुणा शसखिजापएसोगाढो पोग्गला दछठयाए शुसखेडागुणा तचंय पएसध्याए सखिजागुणा । एएसिण जते ! एगसमयठितीयाण सखिजासमयठितीयाण शसखिजासमयठितीयाणय पोग्गलाण दवच्याए पदे सध्याए छठपदसध्याए कयरे २ हितो थप्पाघा? 2 गोयमा । सत्योवा एगसमयठिईया पोग्गला दवच्याए सखेजसमयठितीया पोग्गला दबयाए सखेडागुणा थसखिज्जासमयठिईया पोग्गठा दछळ्याए प्रदायतया सरपपमदशावगा पुनसा प्रदशार्यतया सम्यगा प्रसंस्पेय प्रदेशायगाढा पुतलाः प्रदशापतया प्रसस्पेयगुणा द्रव्यप्रदशा तया सवसोमा एकप्रदशावगाडा पुनला द्वयायप्रदगायतया सस्पेयप्रदशावगाढा पुतता द्रव्ययप्रदशातपा सस्पेयप्रदेशावगाढा पुद्गलाः द्र व्यापतपा सम्पयगणाः ते चैव प्रशापतया सस्पयगुणा पसंरपेयप्रदेशावगाहा पगला इशायतया प्रसस्पपगुणा चैव प्रदशायतमा प्रसस्प यगुस । पतपो पद । पसमपरित्यतिवामा सम्पपसमयास्पतिजामामसरपेयसमपस्थितिबामा पट्सलाना व्यापतपा प्रदेशार्थतया द्रव्यापन देशाचतया सतरे । गौतम । पर्यस्तोमा एबसमपस्थितिका पदासाः द्रव्यायतया सययय समयस्थितिका पहला द्रव्यार्थतया सरपेयगुपा प सरपयसमपस्थितिका पद्धता व्यायत्या घसम्पयगुपार प्रदशातपा सवस्तामा एकसमपस्थितिमा पुगता। प्रदेशाधवया सस्पेपसमपस्थिति duaaTISLANDHARAJ ERTrumpERSIMewaceouamunant देमियाण यसखिलापदेसियाण शणतपददियाणय खधाण दवठयाए पएसध्याए दछठ पदेसध्याए कयरे२ हितो शप्पाया? गो० । सहयोधा शुणतपदेसिया खधा दवठयाए परमाणुपोग्गला उठयाए श्व णतगुणा सखजपदेसिया खधा दरम्याए सखेजगुणा आसखेजपदसिया खधा दछठयाए शसखेजगणा पदेसध्याए सवत्योया छणतपदेसिया खधा पदसध्याए परमाणुपोग्गला आणतगुणा सखेजापदेसिया खधा पदेसध्याए सखेडागुणा आसखेजपएसिया खघा पदेसध्याए शसखेनगुणा दछठपदेसध्याए सछ त्योया थणतपदेसिया खघा ववष्याए तेचेष पदसध्याए थणतगुणा परमाणुपोग्गला दवठपदेसध्याए एणतगुणा सखिजापदेसिया खधा दवठ्याए सखिजागुणा तेचेयय पदेसष्ठयाए सखिजागुणा शसखिजा पएसिया खधा दरम्याए शसखिजगुणा तेचेष पदेमध्याए यसखेजगुणा । एएसिण नंते ! एगपदेसी गाढाण सखेजपदेसोगाढाण सखिमापदेसोगाढाणय पोग्गठाण दवव्याए पदसध्याए दवछपदसध्याए पार प्रदगापतपा परमानुपदला अनसनमा सस्पेयप्रदेशिका मा प्रदधाभतया मरपपगुवा पसरपेयपदेशिकाः सन्याः प्रदेशातपा अस स्पेयगुणाः दयापप्राधापतया सर्वतोमा मन्तप्रदेशिका सया द्रव्यापतया ते प्रदक्षायतया अमानगुमा परमायुपुदसा द्रव्यापप्रदशाम तपा गमतगुण सरपयमोशकार रममा इप्यायतमा संस्मेपनुमा तव वायतया सम्पपगुणा प्रतापपरदेसिया बन्या दमाता- सगपपगदा सबै प्रदचापतया सस्पेयगुवा । पतमा प्रदन्त । यकप्रदेशावनासाना सस्पयंप्रमागारानामगरमय प्रदेशाधयाराना र पत्र सामी यापतया देशाचतया दयदेमातपातर ।। गौतम । सस्तोमा ग्बामावमारा पत्रमा प्रभातपा चपेपरसामना सः पदता इमापता पपेपगमा परस्पपासाबमा पुदमा इमारवया अपरमुला भरपाया पवनोमा एकप्रपामा पुतला ॥ यह नंते । सधजीवप्पऊ महादस्य वत्तहस्सामि सचत्योषा गलयकतियमणुस्सा मणुस्सी सखेडागुणाच यादरतउफाडयापत्तया शसखिजागुणा थणुप्तरोषयाइया देवा शसखेजगुणा उयरिमगेवेझगा देवा सखेजगुणा मज्तिमगेवेजागा देवा सखेडागुणा हेठिमर्गवेडागा देवा सखेडागुणा थञ्चुएकप्पे देवा सखे गुणा शारणे कप्पे देवा सखेडागुणा पाणए कप्ये देवा सखेडागुणा शाणएकप्पे देवा सखिजागुणा छहे सत्तमाए पुढयोए रहया शसखेडागुणा बठीए वमाए पुढबीए नेरइया थस० सहस्सारे कप्पे देवा श सखिजगुणा महासुको कप्पे देवा सखिजागुणा पचमाए घूमप्पनाए पुढवीए णेरइया शस० लतए कप्पे देवा शसखेडागुणा, धउत्थीए पकप्पनाए पुढबीए नेरइया शसखेडागुणा बनलोंए कप्पे देवा शसखेजा गुणा तच्चाए यालुयप्पन्नाए पुढवीए णेरइया आसखेडागुणा माहिदे देवा शसखिजागुणा सणकुमारे कप्पे । पप मटन । सबलीवास्प यहत्त्व महादया वतयिष्यामि समतोमा गतष्यस्वास्तिवममुप्या मानुष्यः सत्यातगुना बादरसेजयायिका पर्याप्ततया प्रसस्पेप्पुषा अनुत्तरोपपातिनो देवा चसमपेयगुग उपरिवनवपमा टेवा पुरुपयगुणा मप्यमयेयका दवा सस्येयगुणाः अघसमवयमा देषा सस्पेयगुणा ज्यूत करपे देवा तस्येयगुणा भारस्पे वरुप दवा सस्ययगुणाः पानये कस्प देवाः सस्पेयगुणाः पामते करपे दar सस्येपगुणा। अध सप्तमाया पायध्या नैरपिका प्रसस्पेयगणा पतिमा पिव्या नैरायबा प्रस० सासार परप देवा प्रसस्येपगुपा महाशक्त करपे देवास सम्पपगपाः पन्चमाया ममनाया पायध्या नैरायफा प्रसस्य यगणा लात के करपे देवा प्रसस्य यगुणाः चतुझ्या पतप्रमाया पयिष्या मरयिका अससे पमना प्रक्षलोक कल्पे दवा प्रसस्प यगुणाः वतीपस्या वास्तु कामाया पयिष्या मेरयिया प्रसस्य यगुणा माग्ने देवा प्रसस्पे यगमा सन शुमार एप दवा प्रसन्ये पगबाः द्वितीपस्या अकरममाया पधिया नेरपिका प्रसख्ये यगुणाः समलिममप्या प्रसंस्प यगुणाः इशाने बरपे देवा JallaruaaaaaaaaaDOE - पससिजगुणा पदेसध्याए सकृत्योषा एगसमयठिईया पोग्गला पर्दसध्याए सखेडासमयठिईया पोग्गला पप्रसध्याए सखिजगुणा यसखिमसमयठिईया पोग्गला पदेसध्याए शसखिजागुणा दवव्यपदेसम्याए सधयावा एगसमयडिया पुग्गला दवठपएसध्याए सखेासमयठिईया पोग्गला दइयाए सखेजगुणा तचय पदसठयाए सखेनगुणा शसखिजसमयठिईया पोग्गला दछठयाए यसखिजागुणा तेचेष पदेस ध्याए असखिजगुगा । एएसिण नत ! एगगुणकालगाण सखिऊगुणकालगाण शसखंडगुणकाउगाण थणतगुणकालगाणय पोग्गलाण दवघ्याए पदसध्याए दवठपदेसष्ठयाए कयरे कयरहितो शप्पाया १ ? गोयमा । जहा परमाणुपोग्गला तहा नाणिया, एव सखेडागुणकालयाणवि , एव सेसाणवि वसरस गधा जाणियछा, फासाणं फरकामउयगरुयलचयाण जहा एगपदसोगाढाण नणिय तहा नाणियच श्व सेसा फासा जहा पणा नणिया तहा नाणियहा दार २६ ॥ ॥ ॥ तिबा ॥ i बार पुद्रसाः प्रदशापतया सम्पयमुना अत्तरपेयसमपत्पितिवारा प्रदाता प्रदेषाभतया प्रसस्पेपगुणा मापप्रदेशाधतया सवतोमा एकसमयरित्व तिका पुरमा दयापप्रदेशार्थ तथा सरपेयसमपस्थितिका पुषमा दयायतमा सरपेपनुवा वएव प्रदायतया सस्पेयगुवा भसश्पपसमपत्ति पुगता माघेतया भसरपेपगुमास्तएव प्रदेशातया पसरपयगा । एकपा मदन्च । पबगालवाना संपेपगुबमासमानामसंगपे पगुणासमामाममा गुमासामा च पुगसामां माता प्रसाधनपा द्रमा प्रदमापतया इतर ० ।। गौतम । पचा परमाए पुगसा सपा प्रावतया पर्व पपपगुवामा अपि एवं पा अपि सरतमाया मारतमा।। पर्व स्पाना बनाम मदुगुरुवातपुरा मपेत्राप्रपा वगारामा मपि मा जित वामटा स्पधी । पपायर्या प्रषिता mm अश्विमा बारम् । २६.
-- रिदिया पत्तया सखेडा० पदिया पाप्तायिसेसाहिया बेडदिया पमप्ता बिसेसा । पचिदिया अपना 'सया असखिजगुणा बउरिदिया थपजत्तया विसेसाहिया तेइदिया थपजतया विसेसाहिया येइदिया अपयतया विससाहिया पत्तेयसरीरयादरवणस्सइकाइया पजात्तगा आसखेडागुणा यादरनिगोदा पजा लगा शसखेझगुणा यादरपुढसिकाइया थपजाप्तगा आसखेडागुणा बादरशाउकाइया पजात्तया शसखिला गुणा यादरवाउकाइया पजप्तगा शसखिज्मगुणा यादरतेउकाहया शपजाप्तणा यसखेजगुणा पत्तेयसरी रघादरवणस्सइकाइया छपज्जप्तगा शसखियगुणा घादरनिगोदा थपजाप्तया सखिजागुणा यादरपुढयि काइया थपजवगा आसखेडागुणा यादरथाउकाइया थपआप्तगा थसखिजगुणा यादरताउकाइया थप जन्तया यसखेजगुणा सुजमतउकाइया छपज्जप्तगा आसखेडागुणा सुऊमपुढयिकाइया छपज्ज्ञप्तगा विसे विपारिता होम्नियाः पर्याप्ता विधेपा० । पन्द्रिपा पपर्यासगा प्रसस्येयगणाः चतुरिन्द्रिया अपर्याप्ततया विशेषारिता । खोन्द्रिया अप योप्ततया विषेपाशिवाहान्द्रिया अपर्याप्ततया विरोपारिता मत्येवमरीरवादरवमस्पतिवापिका पर्याप्तगा पसरपेयगुणा धादरनिगोदाः पर्याप्त मा सम्पपगा। मादरपपिवीकायिका अपर्याप्तमा पसंस्पे० बादराप्कायिकाः पर्यासगा प्रस० यादरवायपायिष्ठाः पर्याप्तगा पसं० यादररोज नायिका अपोहगा प्रसं० प्रत्यबाहरीरवादरवनस्पतिज्ञायिका पपर्याप्सगा प्रसयादरमिगोदर पर्याप्त समये यादरपपिवीकापिका अपर्यो । सगा पस० घाराप्तायिका अपर्याप्तगा अस० वादरवायुवायिका अपर्याप्तगा पसरये० सूक्ष्मतेववापिका अपर्याप्तगा पसं० सूक्ष्मपथिवीगायिका ! अपर्याप्तमा विधेपारिताः सूरमायापिका अपर्याप्तगा विशे० सूत्मवायुवापिदा पपर्याप्तगा पिापा० सूत्मतेला कायिका अपर्याप्तगा पस० सूक्ष्म । पपिवीमापिका। पोठगा विधे० सूत्माप्कापिया पर्याप्तगा विधेपा० मूक्ष्मवायुवापिका पर्याप्तगा विध० मूलभिगोदा अपर्याप्तमा मम० मूल देवा शसखेचगुणा दोच्चाए सकरप्पनाए पुढयीए णेरइया थस० समुच्छिममणुस्सा आसखेजा० ईसाणे कप्पे देया श्वस० ईसाणे कप्पे देवी सखे०, सोहम्मे कप्पे देवा सखडा० सोहम्मे कप्ये देवी सखेडा गुणा जवणयासीदेवा आसखेजगुणा नवणवासिणी देवी सखिजगुणा । इणीसे रयणप्पनाए पुढ बीए णरठया छसखिगुणा खहचरपचिदियतिरिराजोणिया पुरिसा शसखेजगुणा सहयरपचिदियति रिरकचोणिणीच सखिजगुणा घलयरपचिदियतिरिराजोणिया पुरिसा आसखेजगुणा घडयरपंचिदियति रिस्कजोगिणी सनिजगुणा जलयरपचिदियतिरिस्कजोणिया पुरिसा सखेजगुणा जलयरपचिदियतिरि रफणिणी सखिजगुणा वाणमतरा देवा सखेडागुणा याणमतरोत देयी सखेडा० जोइसिया देवा सखेनगुणा जोइसिणीच देवी। सखिजगुणा खहयरपचिदियसिरिरफजोणिया नपुसया सखिज्ज० पल यरपचिदियतिरिरकोणिया नपुसया सखेडा० जलयरपचिदियतिरिकजोणिया नपुसया सखेडा० चउ पाने करपे दमा ससे यमुना सौधर्म वरपे देग गगनुमा वोपर्न परपे रेप सेपमुवा प्रवनवासि रेवा वसंसेपाषा प्रबनमा लि देपासेपगुण । पतस्या रवप्रभार्या पार्षमा नरपिचा भोपभुषाः सवरपालिप विषयोनिबार पुरुमा पसंमेयमुनाः परपणे नितिन्पोनिका (विपा) नरपतिपतिर्मम्मोनिका पुष्पा पपरपयनुना सरपतिपतियोगिता (सिप) असारपन्निपातपम्पोनिका पुडमा सरसेपमुका पसरपोनिविषयोनिकाः (शिपा) मे० बानमन्तारादेवासेपनुवार भानमन्वों रमा गोयनुवा मोतिषण ऐका मोतिरिका मा परपोलियतिमीनिया नपुरमा २० मारपन्द्रियविर्ष प्पोषिका नपुरका स्वनुवारपनियविनोमिनपणापपरिन्द्रिका पतिका पाना पोनिबार बाहना . रिदिया पजत्तया सखेज० पदिया पजाप्तायिसेसाहिया वेडदिया पजाप्ता मिसेसा । पचिदिया थपड़ा तया शसखिजगुणा चउरिदिया थपजत्तया विसेसाहिया तेइदिया शपजातया विसेसाहिया येइदिया शपजाप्तया विसेसाहिया पत्तेयसरीरयादरवणस्सइकाइया पजात्तगा शसखेडागुणा वादरनिगोदा पजा प्लगा थसखेडागुणा बादरपुढसिकाइया थपजाप्तगा आसखेडागुणा यादरशाउकाइया पहात्तया शसखिजा गुणा धादरयाउकाइया पजाप्तगा थसखिजागुणा बादरतेउकाड्या थपजाप्तणा सखेडागुणा पत्तेयसरी रयादरवणस्सहकाइया पजाप्तगा शसखिजगुणा बादरनिगोदा थपजतया सखिजगुणा यादरपुढयि काइया शपजाप्तगा सखेजगुणा यादरथाउकाइया थपजातगा शसखिजगुणा वादरताउकाइया थप जप्तया आसखेजगुणा सुजामतउकाइया थपजाप्तगा थसखेजगुणा सुऊमपुढविकाइया पजातगा विसे विशेषाहिताः दीन्द्रियाः पर्याप्ता विनेपा । परन्द्रिया अपर्याप्तगा पसरपेपगुयाः पतुरिन्द्रिया अपर्याप्तवया विशेषारिता । खीन्द्रिया अप यतितपा विधेपाश्तिा हान्द्रिया अपर्याप्तवया विलोपादिवा प्रत्येकशरीरवादरवनस्पतिक्षायिका पर्याप्तगा असण्ययगुणा धादरनिगोदाः पर्याप्त भा असम्ययनुप।। पादरपपिचायिका अपर्याप्तगा पसंय० बादराप्कापिकाः पर्याप्तगा अस० यादरवायुवापिधाः पर्याप्तगा भसं० यादरतेज वापिका अपर्याप्तगा प्रसं० प्रत्याशरीरयादरवमस्पतिवायिका अपर्याप्तगा पस० यावरनिगोदा पपर्याप्ता। संस्य० थादरपथिवीकायिका प्रपों सगा पस० यादराप्तापिका अपर्याप्तगा प्रसं० पादरवायुपायका अपर्याप्तगा प्रसस्पे० सूत्मतेज कायिकाः पयोहगा पस० सूक्ष्मपथिवीक्षायिका अपर्याप्तमा विशेषाहिताः सूस्माप्यापिका अपर्याप्तगा विशे० सूक्ष्मवायुवायिका पर्याप्तमा विप्रपा० सूक्ष्मतेज शापिका अपर्याप्तगा प्रस० सूक्ष्म पपिवावापिया पर्यासगा वि० सूमाप्फापिकाः पर्यागा विशेषा० भस्मवायुवापिकाः पर्यागा विश० सममिगोदा अपर्याप्तगा भव० सूल देवा शसखेजगुणा दोच्चाए सक्करप्पनाए पुढयीए मेरइया शस० समुच्छिममणुस्सा शसखेडा० ईसाणे कप्ये देवा श्वस० ईसाणे कप्पे देवी सखे०, सोहम्मे कप्ये देवा सखडा० सोहम्मे कप्पे देयी सखेजा गुणा नवणयासीदेवा शसखेजगुणा नवणवासिणी देवी सखिजगुणा । हणीसे रयणप्पनाए पुढ वीए णरहया सखिजागुणा खहचरपचिदियतिरिक्रजोणिया पुरिसा सखेडागुणा खहचरपचिदियति रिस्कचोणिणीन सखिजगुणा घलयरपचिदियतिरिरकजोणिया पुरिसा सखेजगुणा यउयरपचिदियति रिरकजोगिणी सखिजागुणा जलयरपचिदियतिरिस्कजाणिया पुरिसा सखेमगुणा जयरपचिदियतिरि रकणिणो सखिजगुणा याणमतरा देवा सखेजगुणा याणमतरी देवीच सखेज जोहसिया देवा सखेजगुणा जोइसिणी देवी सखिजागुणा सहयरपपिदियतिरिफजोणिया नपुसया सखिजा० पठ यरपचिदियतिरिकजोणिया नपुसया सखेज जलयरपचिदियतिरिस्कजोणिया नपुसया सखेजा० घउ समाने पे दमासे पनुमा सौधर्म बरप देश पनुमा पौष पेदेमा पसेपनुवा प्रबनवानि रेगा यमुवा प्रबनवा सि देशपमुगर । मवस्था रमप्रमापा पषिमा नरापिता बनयामा पारपदप वियोनिमा पुरुषाः अस्यमा चरपो नितिमेमोनिका (विपा) TRO नरपनिपतिर्यम्बोनिका पुरवा भयनुका सचरपतिपतियोमिया (fare) et पसरपोनिमातरम्पोनिबार पुषमा सरसेपनुसार पसापरपणाविबानिया (जिया) 0 वामनपरादेगासलेपनुचा माननवणे पापमुगा मोतिविका रेपोतिरिवारमा सपोनितीविना नपुरधाः सरपनबिपिन योनिशाना नुता समितियोमिनमुना बनुरिनिदना मानुषा बनना नाम JI रिदिया पत्तया सखेडा० पदिया पजाप्तायिसेसाहिया वेहदिया पजाप्ता बिसेसा । पचिदिया थपड़ा त्तया शसखिजागुणा चउरिदिया चपात्तया विसेसाहिया तेइदिया पजातया विसेसाहिया बेइदिया शपज्जतया बिससाहिया पत्तेयसरीरयादरयणस्सइकाइया पडात्तगा आसखेडागुणा वादरनिगोदा पा लगा थसखेडागुणा यादरपुढसिकाइया चपाप्तगा आसखेडागुणा यादरशाउकाइया पत्तया शसखिा गुणा पादरवाउकाइया पजतगा सखिजागुणा यादरतेउकाहया थपजातणा सखेडागुणा पत्तेयसरी रयादरवणस्सइकाइया छपजाप्तगा शसखिजागुणा यादरनिगोदा थपजाप्तया सखिजागुणा यादरपुढयि काइया शपञप्तगा शसखेजगुणा यादरशाउकाइया थपजाप्तगा शसखिजागुणा यादरताउकाइया शप सप्तया शसखेजगुणा सुजामतेउकाइया शपजाप्तगा आसखेजगुणा सुजमपुढविकाइया शपजतगा विसे विपाहता दोन्द्रियाः पर्याप्सा विपा० । पम्मेन्द्रिपा अपर्याप्सना पसस्पेयगुगा। चतुरिन्द्रिया अपर्याप्ततया विशेपाहिवा । खीन्द्रिया पप पर्याप्ततया विधेपारिवान्द्रिया अपर्याप्तवया विशेपाशिवा। प्रत्येषगरीरवादरवमस्पतिवायिकाः पर्याप्तगा पसरपेपगुणा पादरमिगोदा। पर्याप्त पा असम्पपगुवा यादरपपिचायिका पपर्याप्तगा पसर० बादरावापिकाः पर्याप्तता पसं० यादरवायफायिका पर्याप्तगा पसं० यादरतेख बापिकाः अपर्याप्तगा प्रस० प्रत्यकशरीरयादरवनस्पतिवापिका अपर्याप्तमा पस० वापरमिमोदा अपर्याप्ता। सरप० चादरपपिवीकापिका पपर्या सगा पस० बादराप्कायिका अपर्याप्तगा प्रवं वादरवायुवापिका अपर्याप्तगा असरये० सूत्मतेजनायिकाः अपर्याप्तगा प्रस० सूत्मपथिवीधायिका अपर्याप्तगा विपारिवाः सूक्ष्माणायिका प्रपोसगा वि० सूत्मवापुवापिका पपयोगा विपा० मूस्मतेजः कायिका पपर्याप्तगा पस० सूक्ष्म पचिव कापिकाः पर्याप्ठगा विशे० सूत्माप्फापिचा पर्याप्तगा विशेषा० भूक्ष्मवायुवापिकाः पर्याप्तगा विश० मूलभिगोदा अपर्याप्तमा भस० मूल साहिया सुजमश्शाउकाडया शपजावया विसेसाहिया सऊमधाउकाडया शपजाप्तगा विसेसाहिया सुजम तेउमाइया पज्जनगा थसखि सुचामपुढषिकाइया पजप्तगा विसेसाहिया सुऊमशाउकाइया पजाप्त गा घिसे साहिया सुजमयाउकाइया पडत्तगा विसेसाहिया सुजमणिगोदा थपडावा आसखे० सुजमणि गोदा पक्षप्तया सखिजागुणा थनयसिहिया गणतगुणा पनिवष्टिय सम्मदिठी थणतगुणा सिछा थणत गुणा बादर घणस्सइकाइया पातगा थणतगुणा वादरपञप्ता विसेसाहिया यादरवणस्सइकाइया थप जाप्तया थसंखिजागुणा यादरपंजप्पया विसेसाहिया वादरा बिसेसाहिया सुजमवणस्सइकाइया थपजा तया शसखेडागुणा सजमा थपतया विसेसाहिया सुजमवणस्सइकाइया पाप्तया संखे० सुक्रम पड़ाप्तया बिसेसाहिया सज्जमा विसेसाहिया नवसिझिया विसेसाहिया निगोदा जीवा विसेसाहिया धण स्सइजीया पिसेसाहिया एगिदिया विससाहिया तिरिस्कजोणिया पिसेसाहिया मिच्छदिष्ठी पिसेसाहिया शविरया यिससाहिया उमत्या बिसेसाहिया सजोगी विसेसाहिया ससारत्या विसेसाहिया सहजीवा वि सेसाहिया । पणषणाए जगवईए ववतछयपद सम्मत्त । निमोदा। पोमना सरपे० धनबसिरिमा समता प्रतिपतितामष्टिग सिा प० बाररबमापातमापिका पर्याप्तगा बन० बार राप्त विद्यमारिता बारा विवाहिताः स्लवानरपतिबायिका पाना पल्मा अपाता शिप्रा नमानस्पतिशामिण पर्याप्ता स्पे मूत्मपर्यामा विपाहिता मुला मा० प्रतिदिन विवाहिता निनोटा बोबा कि नरपति श्रीवा गिज पोनिया विति पनपानिया निमिप्पादृष्टपणे पिपा० अविरतपा nि० बाला विचार सोनयो पिसारखा विनोबा सिपाहिवा. मापनापा भगवत्सां भीमापाचाप रामचन्द्र वि पिच बनाना विरविकोपारो बाबीत् । ॥
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BASINORMER साहिया सुशमशाउकाइया शपजाप्तया विसेसाहिया सुजमघाउकाइया शपजाप्तगा विसेसाहिया सुनम तेउकाइया पागा शसखि सुक्रमपुढषिकाइया पतंगा बिसेसाहिया सुजमशाउकाइया पाप्त गा यिसेसाहिया सुजमवाउकाइया पडत्तगा विसेसाहिया सुचामणिगोदा थपजाप्ता आसखे० सुजमणि गोदा पमप्ठया सखिडागुणा छत्तयसिधिया थणतगुणा पमिवतिय सम्मदिठी थणतगुणा सिझा शणत गुणा वादर घणस्सइकाइया पातगा गणतगुणा वांदरपता विसेसाहिया यादरवणस्सइकाइया आप सप्तया शसखिजगुणा यादरपञप्तया विसेसाहिया वादरा विसेसाहिया सुजमवणस्सइकाइया थप तया शसखेमगुणा सज्जमा थपजाप्ठया विसेसाहिया सुजमवणस्सइकाइया पाप्तया सखेडा० सुझम पाप्तया विमेसाहिया सुजामा घिसेसाहिया नवसिछिया विसेसाहिया निगोदा जीवा विसेसाहिया वण स्सइजीवा यिसेसाहिया एगिदिया विससाहिया तिरिरकजोणिया बिसेसाहिया मिच्छदिछी यिसेसाहिया शविरया विससाहिया उउमत्या बिसेसाहिया सजोगी विसेसाहिया ससारत्या विसेसाहिया सहजीवा वि सेसादिया । पणषणाए जगवईए धावतछ्यपद सम्मत्त । । मिमोदा पर्याप्तमा सरापे मासिरिमा अनन्तनुमा प्रतिपतिततमहिमा जनता मिरा भन० बासरवनस्पातबामिया पर्याप्तमा चमबार रपति गिलपारिता बादरा विमे पारिताः लामापतिमासिका मोमवा १० मा अपाता विद्या मानापतिवार्षिमा पर्याप्त भूमपर्णमा विशेषाहिता मूमा विशेष प्रसिरिया विवाहिता निमीरा भीगा बनस्पति जीया रिमे० पोलिपा जिवि पनपानि nिt मिप्यादृष्टयो या अविरतपा निवासियोनपो गित सारखा बिगबोबा विवाहिता . मापनापो भगवतां बोनापायाप रामचन्द्रवि पि पिरतिगमनकारी आपोत - सरपे
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