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हिन्दूस्तान का दंड संग्रह

मिश्रा, बलदेव प्रसाद · 2009/09

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॥ श्रीः॥
ऐक्ट नम्बर ४५ सन् १८६० देसवा
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kifilim 101010000 THIRUITMLINES
या
Library
मजमूआ ताजीरातहिन्द
अर्थात्
672
[ԱԼԱՆՍԱՄՈՍԱՐԱԿԱԱԱԱԱԱԱԱԱԱԱԱԱԱԱԱԱԱԱԱԱԱԱԱԱԱԱԱԱԱԱԱԱ
हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह
भी
जिसमे
चारो हाईकोर्टॉकी नजीरें तथा समस्त संशोधन
व स्पष्टीकरण सम्मिलित है.
मुरादावादनिवासी
पण्डित बलदेवप्रसाद मिश्रद्वारा सम्पादित.
जिसको
खेमराज श्रीकृष्णदासने
मुम्बई
खेतवाडी ७ वी गली खम्बाटा छैन,
निज "श्रीवेङ्कटेश्वर स्टीम्-मुद्रणयन्त्रालयम
मुद्रितकर प्रकाशितकिया.
सवत् १९७० सन् १९१३ ई
ALL KIGIIS KLSCRVED BY THC PUHLISICN,
licultulumilu
UITIUITII OLEMMAT
Inauniliutrarantinminition

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भूमिका। सर्वसाधारण महाशयगण इस बातको जानने है कि प्राचीन समयमे लेन देन, व्यापार व्यवहार, अगडे झझट, क्लेश आनन्द जो कुछ मी कार्य होता था वह समस्तही वचनद्वारा निर्वाह होता था। परन्तु जैसे २ नई सभ्यता और नई रोशनीका जमाना आता गया पैसेही पैसे बात २ में बेईमानी, विश्वासघातकता, कुटिलता, अनैक्यता, लढाई, अगडे, वध और क्रूरता इत्यादि कलियुगी बातोंका जोर होगया । वलवान लोग दुर्बलोपर अत्याचार करने लगे, महाजन लोग कर्जदारोंको वात २ मे सताने लगे, जिमींदार लोग अपनी पुत्रवत् प्रजाको बारम्बार दुःख देने लगे, बदमाशोका जोर होगया, योग्ह पुश्तोंका शोर होगया । टीन लोग दारिद्रसे सताये जाकर दुख पाने लगे, पतिव्रता स्त्रियोको अपने सतीत्वको रक्षा करना कठिन कार्य होगया, इन समस्त अत्याचारोंमे ऐसा कुलाहल हुआ कि ब्रिटिशगणोने भारतवर्षमें आकर अपने अपूर्व और अद्भुतगुणोसे शान्तिराज्यका प्रचार किया, इस राज्यका आगमन होतेही वाघ और बकरी एक घाटपर पानी पीने लगे । अनाथ, दीन, दुःखी, आर्त और पीडित लोगोंको आराम मिला, तयापि समयके प्रमावसे कहीं प्रगट और कहीं अप्रगट रीतिसे दुष्ट लोग अपने अन्याचारोंसे सर्वसाधारणको कष्ट पहुँचातेही रहे । दूरदर्शिनी ब्रिटिश सरकारने यह समाचार पातेही सम्पूर्ण मनुष्योके लाभार्थ दीवानी और ! फौजदारीके अनेक कानून बनाये। टीवानीके कानूनोंसे स्थावर और अनस्थावर धनका व्यवहार करनेवालोंको सुभीता हुआ और दुष्टोको दण्ड देने तया शतिका प्रचार करनेके लिये फौजदारी कानून प्रचलित हुए। समस्त फौजदारी कानूनोमे "ताजीरात हिन्द" मुल्य माना जाता है पहले २ अगरेजी भाषामें समस्त कानून लिखे गये, और छपाए गये जिनके द्वारा केवल अंगरेजी जाननेवालोंनेही लाम उठाया तत्पश्चात् प्रत्येक प्रान्तकी प्रत्येक माषामें कानूनोका अनुवाद होकर प्रकाश हुआ। बगालमें कोर्टेकी दूसरी भाषा वगाली हुई इस कारणसे कानून मी वगभाषामे छपे । महाराष्ट्रदेशमें महाराष्ट्री, गुजरातमें गुजराती और दश्चिमो- तर प्रदेशमें अमाग्यवश कचहरियोंमें उर्दूमाषा प्रचलित होनेके कारण उर्दूमें कानून छपे और- प्रकाशित हुए पश्चिमोत्तर प्रान्तमे जिसका नाम अब युक्तपदेश है बहुतायतसे हिन्दीभाषा बोली जाती है और अधिकाश मनुष्य नागरी अक्षरोंके जाननेवाले पाये जाते हैं ईसाई लोगोंकी पोर्टसे यह बात प्रमाणित होगई है* कि हिन्दीमापाके जाननेवाले समस्त प्रातोंमें अधिकतासे वर्तमान हैं ऐसा होनेपर भी हिन्दीमापामे कानूनोंका अनुवाद न होकर प्रकाशित न होना -- । - * वेंकटेश्वर समाचार ६ जून सन् १९०२ ई० तथा भारतमित्र और वमुन्धराने इस रिपोर्टको विस्तारमे प्रकाशित किया है।

(४) अत्यन्त लाजको वात थी जव कि सोते बैठते, खातं पीत, चलते फिरते, कार रोज़गार और लेन देन इत्यादि समस्त कार्योंमे ही कानून लागू हो जाता है तव प्रत्येक हिन्दीहितेपीको कानूनोका पढना लामकारी हो सकताहै, परन्तु बिचारे हिन्दी जाननेवालोके अभाग्यस सरकारने इस ओर किंचित् भी ध्यान नहीं दिया हॉ इतना तो अवश्य किया कि नागरी - अक्षरोमें फारसी भाषाके दो चार कानून प्रकाशित किये परन्तु समयमे न भनेक कारण हिन्दीमापाके जाननेवालोने उनसे किचित् भी लाभ नहीं उठाया। कुछ दिन पीछे स्वर्गवासी ! मुन्शी नवलकिशोरजी स्वत्वाधिकारी "नवलकिशोर प्रेस लखनऊ." का इस वातके ऊपर ध्यान पहुंचा और उन्होने ताजीरात हिन्दको हिन्दीमापामें अनुवाद करके अपने प्रेसमे छापा । तदुपरात आगरके शिलायंत्रमे और हरिद्वार से टाईपमे छपकर ताजीरात हिन्द प्रकाशित हुआ परन्तु हिन्दीवालों को पूरी अमिलापा किसीके द्वाराभी सिद्ध न हुई । थोडे दिन हुए हैं कि "ला-प्रेस छिन्दवाडे" के किसी वकीलसाहबने ताजीरात हिन्दकी एक सुन्दर आवृत्ति प्रकाशित की है। जिसमे उदाहरण साष्टीकरण नजायर इत्यादि अधिकतासे सम्मिलित है । इसके प्रकाशित होनेसे हिन्दीशलोंको अधिक लाभ पहुँचा परन्तु ॥, रु० मूल्य अधिक होनेके कारण साधारण लोग कानूनीलाभ उठानेसे वचित रह गये। इस वातका विचार करक मैन सोचा कि हिन्दीभाषामे सस्ता और समस्त आवश्यकीय लेखोसे संयुक्त एक ऐसा नाजीरात हिन्द (हिन्दुस्थानका दंडसग्रह) प्रकाशित किया जाये जिसको धनी निर्धन सबही अधिकताके साथ . मोलले और पढकर लाभ उठावे । ऐसा विचारने के कुछही दिन पीछे श्रीमान् सेठ खेमराज श्रीकृष्णदासजी त्वत्वाधिकारी श्रीवेकटेश्वर प्रेस व श्रीवेकटेश्वर समाचार बबईने एक ऐसे ता - रात हिन्दकी छापने की इच्छा प्रगटकी जैसा कि मै चाहता था। मैने तत्काल उक्त सेठजी साहबकी आज्ञाका पालन करके एक वर्षमे ताजीरात हिन्द ! हिन्दुस्थानक दडसग्रह ) का अनुवाद कर डाला। यह हिन्दुस्थानका दडसंग्रह ब्रिटिश इडियामे लगभग ४२ वर्पस प्रचलित है नबसे कई बार इसमें सशोधन मी हो चुका है। इसही न्यायप्रथके अनुसार एक छोटेसे मजिस्ट्रंटर लेकर हाईकोर्ट के जजतक अपना न्याय कार्य पूरा करके अपराधियोको दडित करते है । इसहाक मयसे आज कोई धनी पुरुष किसी तुच्छातितुच्छ दरिद्रपर भी अत्याचार नहीं कर सकता और जो करता है उसका सर्वनाश होजाता है। अतएव ऐसे कानूनका जानना और पढना प्रत्येक देशवासीका आवश्यकीय कार्य है। प्रस्तुत अनुवादमे इस बातका अधिक ध्यान रक्खा गया है कि कहींपर कठिन शब्द न आवे इसमे प्रायः उन्ही शब्दोका अधिक प्रयोग किया गया है जो आजकल पश्चिमोत्तर प्रान्तकी वोलचालमे प्रचलित हैं। बरन जो शब्द कठिन आभी गए है उनके आगे कोटमे उई शब्द लिख दिये हैं। न्यायालयोमे विशेषतः उर्दूका अधिक प्रचार होनेके कारण कहीं २ उर्दूक शब्दोंका मी प्रयोग किया गया है।

(५)
प्रस्तुत अनुवादमे जहातक समत्र हुआ नजीरे ( दृष्टात या उदाहरण) अधिक लिखी
है। चारों हाईकोर्ट यथा,-कलकत्ता, बम्बई, मदरास और इलाहाबाढकी नजीरोंके अतिरिक्त
चीफ कोर्ट पंजाव व जुडिशियल कमिश्नर मध्यप्रदेशकी भी नजीरोंको यथा म्यानमे सन्निवेशित
किया गया है। पाठकगण । हिन्दी और उर्दू भाषामे अबतक कोई हिन्दुस्थानका दडसग्रह इतने
दृष्टान्तोंके सहित प्रकाशित नहीं हुआ।
इन पुस्तकके सम्पादन करनेमें मुरादाबादके प्रसिद्ध वकील चौरी रामप्रसाद साहब
और लाला अम्बा प्रसादजी मुख्तार अदालतने अग्नी सम्मति देकर मुझको अन्यन्तही अनु-
प्रहीत किया है । अतएव उपरोक्त दोनो महाशयोको बारम्बार आशीर्वाद देकर भूमिकाकी
समाप्ति करताह ।
मुझको पूर्ण आशा है कि, हिन्दीभापासै अनुराग रखनेवालं दश हिलैपी महागयगण तथा
वकील मुख्नार, सुलिन कर्मचारी व मजिस्ट्रेट आदि इसकी एक २ प्रति अपने यहा रखकर
अत्रदयही लाभ उठायेगे।
मोहल्ला दीनदार पुरा
मुरादाबाद (युनप्रदेश)
-~-१५/६।१९०२ ई०
कृपाकाक्षी,
बलदेव प्रसाद मिश्र

हिन्दुस्थानके दण्डसंग्रहके अध्यायोंका- सूचीपत्र । अध्याय. आशय. दफा.. अध्याय. आशय. दफा. ... . . पहिला-इस ऐक्टका नाम और इसके प्रचारकी अवधि १ दूसरा-साधारण अर्थ प्रकाश... ६ तीसरा-दण्डोके विषयम ५३ चौथा-साधारण छूट ७६ पांचवां-सहायताके वर्णनमै ... १०७ छठा-राज्यविद्रोही अपराध करने तथा सहायता देनेके विषयमे १२१ सातवां-जगी अथवा जहाजी सेना सम्बन्धी अपराधोके विषयम... १३१ आठवां-सर्व सम्बन्धी कुशलतामे विघ्न डालनेवाले अपराधोके विषयमे १४१ नवां-उन अपराधोके वर्णनमे जो सरकारी नौकरोंसे हों या उनसे सम्बन्धित हो १६१ दशवां-सर्व सम्बन्धी नीकरोके नीति पूर्वक अधिकारके अपमान करनेके विपयम १७२ ग्यारहवां-झूठी गवाही और सर्वसम्बन्धी न्यायमें विघ्न डालनेवाले बाटो और पैमानोमे सम्बन्ध रखते हैं २६४ चौदहवां-उन अपराधोके वर्णनमे जो सर्व सम्बन्धी आरोग्यता, कुग. लता, सजनता और सुशीलताम विघ्न डालनेवाले है ... २६८ पन्द्रहवां-उन अपराधोके विपयम जो मतसे सम्बन्ध रखते हैं २९५ सोलहवां-उन अपराधोके विषयमे जो मनुष्योंके तन अथवा जीवसे सम्बन्ध रखते हैं। २१० सत्रहवां-उन अपराधोके विपयम जो मालसे सम्बन्ध रखते हैं ३७८. चोरीके वर्णनमे. अठारहवां-उन अपराधीक विषयमें जो दस्तावेजो और व्यापारके अथवा मालके चिह्नासे सम्बन्ध रखते हैं ४६३ उन्नीसवांदण्ड योग्य नौकरीका कौल. करार तोडनेके विषयम ४९० बीसवां-उन अपराधोके विषयमे जो विवाहसे सम्बन्ध रखते हैं ४९३ इकीसवां-अपयश लगानेके विपयमे ४९९ वाईसवां-दण्ड योग्य धमकी और अप. मान व रंज दिलानेके विषयमें ५०३ तेइसवां अपराध करनेके उद्योगके विषयमे ... ... . अपराधोके विषयमे ... ... बारहवां-उन अपराधोंके बयानमे जो सिक्के और गवर्नमेंट स्टाम्पस सम्बन्ध रखते है तेरहवां-उन अपराधोके वर्णनमे जो .

हिन्दुस्थानके दण्डसंग्रहका धारानुसार- सूचीपत्र। दफा. सक्षिप्त विवरण. |- दफा. सक्षिप्त विवरण. हो। अध्याय १. १५ ब्रिटिश इडिया। १ इस ऐक्टका नाम और इसके प्रचारकी १६ गवर्नमेट हिन्द। १७ गवर्नमेंट। अवधि। २ दंड अपराषीका जो उस अवधिक भीतर १८ प्रेजीडेसी। १९ जज। किये जाय। २. कोर्ट आफ जस्टिस। ३ दड अपराधोंका जो अवधिसे बाहर किये २१ सरकारी नौकर। जॉय परन्तु कानूनके अनुसार उनकी २२ स्थावर धन। तजवीज उसी अवधिके भीतर होसकती २३ अनीतिप्राप्त । "अनीति हानि। ४ दंड उन अपराधियोका जो श्रीमती महा- ? अनीतिसे किसी वस्तुका रखलेनामी अनी. रानीका कोई नौकर किसी हितकारी तिमे गिना जायगा। दरबारमे करै। २४ अधर्मसे। ५ विशेप कानून जिसपर इस सग्रहका प्रभाव २५ छल छिद्रसे। होगा। २६ निश्चय माननेका हेतु । २७ वस्तु जो स्त्री अथवा गुमाश्ते अथवा नौकर अध्याय २. के अधिकारमें हो। साधारण अर्थ प्रकाश २८ खोटा बनाना। ६ इस संग्रहमें लक्षण (तारीफान ) छूटाक २९ लेख। आधीन समझे जायगे।. ३० दस्तावेज। ७ जिस शब्दका सकेत एकवार कर दिया। ३१ वसीयतनामा । गया है वह इस संग्रह भरमै उसी अभि. ३२ कर्तव्यकार्य सम्बन्धी शब्द कानूनविरुद्ध प्रायसे वर्चा गया है। चूकोसमी सम्बन्ध रखेंगे। ८लिग। ३३ काम। ९ सख्या। -२० स्त्री पुरुष। ३४ कोई मनुष्योंमेसे प्रत्येक मनुष्य उस काम- ११ मनुष्य। के बदले जो सबने मिलकर किया हो १२ सर्व सम्बन्धी। उसी योग्य होगा मानो उसीने वह काम १३ श्रीमती महारानी। १४ श्रीमती महारानीका नौकर । ३५ जब ऐसा कोई काम इसी हेतुसे अपराध चूक। किया।

(८) दफा. सक्षिप्त विवरण, . हो कि कुजान अथवा कुप्रयोजनसे किया गया। ३६ परिणाम कुछ तो करनेसे और कुछ चूक- नेसे कराया जाय। ३७ अपराधके अनेक कर्मों से एक कर्मको करके सामी होना। ३८ अनेक मनुष्य जो किसी अपराधको करें अलग २ अपराधोके करता हो सकते हैं - ३९ जानबूझकर ।. ४० अपराध ४१ विशेप कानून । ४२ देश विशेषी कानन। ४३ कानून विरुद्ध । कानूनानुसार अवश्य । ४४ हानि । ४५ जीव । ४६ मृत्यु। ४७ पशु॥ ४८ जहाज। ४९ वर्ष। ५० दफा। ५१ शपथ । ५२ शुद्धभावसे । अध्याय ३० दण्डोंके वर्णनमे । ५३ दण्ड, ५४ वधके दंडका बदला। ५५ जन्मभरके लिये देशनिकालेकी कैदका बदला। ५६ यूरोपियो और अमेरिकाको देश निकालेके बदले कठिन कैदका दंड दिये जानेकी आजा। ५७ दाइकी अवधिक विभाग। दफा. सक्षिप्त विवरण. ५८. जिन अपराधियोंको देश निकालेकी दंडाशा हुई हो देश निकाला होनेतक वह किस भाति रक्खे जायेंगे 1 - ५९ कैदके पश्चात् देश निकाला कब_हो, सकेगा। ६० कैदका कोई भाग कठिन अथवा साधारण हो सकता। ६१ धनकी जन्तीका दंड। ६२ जब्जी ऐसे अपराधियोके धनकी जो वधके या देशनिकालेके या कैदके दंड योग्य हो। ६३ जुर्मानेकी तादाद । ६४ कैदका दड जब कि : जुर्माना न चुकाया जाय। ६५ जुर्माना न चुकाए जानेके बदले कैदकी अवधि जब कि अपराध जुर्माने और कैद टोनोके योग्य है। ६६ जुर्माना न चुकनेके बदले कैदका प्रकार । ६७ जुर्माना न चुकाए जानेके बदले कैदकी मीआद जब कि अपराध केवल जुर्मानेके दड योग्य हो। ६८ ऐसी कैदका जुर्माना चुकातेही भुगतजाना। ६९ बीतना इस कैदका जब कि जुर्मानेका भाग चुका दिया जाय। ७० जुमाना छः वर्षके भीतर अथवा कैदकी मीआदमे किसी समय वसूल हो सकेगा। "अपराधीके जुर्मानेसे-उसका माल मिलकियत छूट न जायगा । ७१ उस अपराधीके दडकी मीआद जो कई अपराध मिलकर बना हो। ७२ दड किसी मनुष्यको जो अपराधमिसे एकका अपराधी ठहरे और हाकिमकी तजवीजमे लिखा हो कि निश्चय नहीं है कि इन अपराधोमैंसे वह किस अपराधका, अपराधी है। ७३ एकान्त वास।

(९) दफा. सक्षिप्त विवरण, दफा, मक्षिप्त विवरण, ७४ एकान्त वासकी अवधि। ७५ दड उन मनुष्योको जो एक बेर अपराधी ठहरकर फिर किसी ऐसे अपराधके अप- राधी ठहरें जो अध्याय १२ व १७ के अनुसार प्रमाणित हों। ८६ जिस अपराधके लिये किसी विशेष अभिप्रा- यकी आश्यकता हो उतको कोई मनुष्य नगेकी अवस्थामें करे। ८७ काम जिससे मृत्यु अथवा भारी दुख का अभिप्राय न हो और न उमका होना सभव हो और प्रमन्नतामे किया गया हो। ८८ काम जो मृत्यु करनेके अभिप्राय विना शुद्धभावसे किसी मनुष्यकी प्रसन्नतासे उसके भलेके लिये कियाजाय । ८. काम जो शुद्धभावसे किसी बालक अथवा सिडी मनुष्यके भलेके लिये उसके रक्ष- ककी ओरसे अथवा प्रसन्नता किया जाय। ९. धोग्ये अथवा भयमे जो प्रसन्नता कराई गई। "किसी बालक अथवा सिडी मनुष्यको प्रसन्नता । ९१ काम नो इस बातको छोडकर भी कि प्र- सन्नता देनेवाले मनुग्यको उसने हानि पहुंची आपही अपराव हो दफा ८७ व ८८ व ८९ की गेम न गिने - अध्याय ४. साधारण छूट ७६ वह काम जिसको कोई ऐमा मनुष्य करे जिस पर उसका करना अवश्य हो अथवा जो वृत्तान्तको न समझकर अपने ऊपर उसका करना कानूनानुसार अवश्य जानता हो। ७७ जजका काम जब कि वह अदालतका काम कर रहा हो। ७८ काम जो किसी कोर्ट आफ जस्टिसकी तज- वीज या आजाके अनुसार किया जावे । ७९ काम जो कोई ऐमा मनुष्यकरे जो कानू- नानुसार उसके करनेका अधिकारी है या जो यथार्य वातकी गलत समझीसे अपनेको कानूनानुसार उसके करनेका अधिकारी समझ लिया हो। ८.रचित कामके क्रनेमें इत्तिकका आ- जाना। ८१ काम जिससे हानिका पहुंचना मम्भव है परनु क्सिी कुप्रयोजनके बिना और दूमरी हानि रोकने के लिये किया जावे ८२ सात वर्षसे कम अवस्थाके वालकका काम। ८३ मात वर्षसे-अधिक और बारह वर्षसे कम अवस्थाके बालकका काम जो यथोचित पछी बुद्धि न रखता हो। ८४ उस मनुष्यका काम जो सिडी हो। ८५ उस मनुष्यका काम जो अपनी इच्छा विरुद्ध दिये हुए नशेके कारण विचार करनेमे असमर्थ हो। जायेंगे। ९२ काम नो शुद्धभावसे किसी मनुपके भलेके लिये विना प्रसन्नताके किया जाय । , नियम। ९३ सुद्धभावमे कुछ प्रगट करना। ९४ काम जिमके करनेके लिये कोई मनुष्य घमक्रीद्वारा विद्या किया जाय । ९५ कोई काम, जिससे कुछ तुच्छ हानि हो । ९६ कोई काम जो निज रक्षाके लिये किया जाय अपराध न होगा। ९७ तन और वनकी रक्षाके अधिकार । ९८ निज रक्षाका अधिकार किसी मिडी मनुष्य आदिके कामसे। ९९ काम जिनके रोकनेके लिये निज रक्षाका अविकार न होगा।

(१०) - और अत। दफा. संक्षिप्त विवरण दफा. संक्षिप्त विवरण. "इस अधिकारके वर्तावकी सीमा। ११२ सहायक, कब इस योग्य होगा कि जिस १०. तनकी निजरक्षाका अधिकार मृत्यु करने. काममे उसने सहायता की और जो काम तक कब हो सकेगा। किया गया दोनोम दंड पावे। १०१ यह अधिकार मृत्युको छोडकर दूसरी ११३ उस परिणामके बंदले सहायकको दड कोई हानि पहुंचाने तक कब हो जो उसके किये हुए अभिप्रायसे बाहर हो । सकेगा। ११४ अपराध होनेके समय सहायकका होना। १०२ तनकी निज रक्षाके अधिकारका आदि | ११५ उस अपराध सहायता करना जिसका दड अन्ता वघ अथवा देश निकालेका है यदि १०३ धनकी निज रक्षाका अधिकार मृत्यु करने अपराध सहायताके कारण न हो। तक कब होसकेगा। " यदि काम निससे हानि पहुंचे सहायताके १०४ यह अधिकार मृत्युको छोडकर दूसरी कोई कारण कियाजाय। हानि कर देनेतक कब हो सकेगा। ११६ उस अपराधमें सहायता करना जिसका ११५ धनकी निज रक्षाके अधिकारका आदि दण्ड कैद है, यदि, अराध सहायता कारण न हो। .१०६ निन रक्षाके अधिकारमें मृत्युकारक " यदि सहायक या सहायकता पानेवाला आक्रमण रोकना उस अवस्थामें जब सरकारी नौकर हो जिसपर उस अपराधके किसी 'निरपराधी मनुष्यको हानिका होनेका रोकना अवश्य है। भय हो। [.११७ उस अपरायके होनेने सहायता करना जि- अध्याय ५. सको सर्वसाधारण अथग दशसे अधिक सहायताके विषयमे। मनुष्य १०७ किसी काममे सहायता करना । ११८.उस अपराधके होनेके यत्नको छुपाना १०८ सहायक। जिसका दण्ड वध अथवा देश निकाला है। १०९ सहायताका दण्ड जब कि वह काम जिसकी " यदि अराध हुआ हो। सहायता हुई उसी सहायता के कारण " यदि अपगध न हुआ हो । कियागया हो और उसके दंडका कोई | ११९ सरकारी नौकर जो किसी अपराध होनेके स्पष्ट लेख न हो। यत्नको छुपाए जिसपर उस अपराधका ११. सहायताका दंड, जब कि सहायता पाने- रोकना अवश्य है। वाला मनुष्य अपराधके कामको सहायता " यदि अपराध हुआ हो। करनेवालेके अभिप्रायसे सिवाय किसी " यदि अपराधका दण्ड बघ आदि हो। और अभिप्रायसे करे। " यदि अपराध न हुआ हो। १११ दण्ड सहायता करनेवालेको, जब एक " उस अपराधके होनेके यलको छुपाना काममे सहायता पहुँचाई जाय और जिसका दण्ड कैद है। उससे भिन्न दूसरा कोई काममै हो |१२० यदि अपराध हुआ हो । ॥ यदि अपराध न हुभा हो। . करें। AN - जाय।

(११) दफा. सक्षिप्त विवरण. दफा. सक्षिप्त विवरण. अध्याय ६. राजविद्रोही अपराधोफे करनेके विपयमे । १२१ श्रीमती महारानीके विरुद्ध युद्ध करना या उसका उद्योग या उसमें सहायता करना। १२१ (अ) उन अपराधोंके करनेमे सानिश करना जो दफा १२१ के अनुसार दड योग्य है। १२२ श्रीमती महारानीके विरुद्ध युद्ध करनेके अभिप्रायसे हथियार आदि इकट्ठा करना । १२३ युद्ध करनेके यत्नको उसके सहन करनेके अभिप्रायसे छुपाना । १२४ गवर्नर जनरल या गवर्नर आदिपर उचित अधिकारके प्रचलित करनेमें विवश करने या उसके रोक रखनेक अमिप्रायसे आक्रमण करना। १२४ (अ) बुरे विचारोंका उत्पन्न करना । १२५ किसी एगियाई रियासतके विरुद्ध युद्ध करना जो श्रीमती महारानीसे मेल जोल रखती हो। १२६ किसी ऐसे राजाके राज्यमें लूटमार करना जो श्रीमती महारानीसे सुधि रखता हो । १२७ ऐसे मालको अपने अधिकारमे रखना जो दफा १२५ व १२६ के अनुसार उपरोक्त युद्ध या लूटमारके द्वारा प्राप्त किया गया हो। १२८ सरकारी नौकर जो राज्य विद्रोही कैदी या युद्धके कैदीको अपनी चौकसीमसे जानबूहाफर माग जानेदे। १२९ सरकारी नौकर जो राज्य विद्रोही कैदी अथवा युद्धके कैदीको अपनी चौकसी- मेसे असावधानीसे माग जानेदे। १३. उपरोक कैदीक मागजाने में सहायता करना अथवा उसको छुडाना या शरण अध्याय ७. जंगी अथवा जहाजी सेना सम्ब. न्धी अपराधाक विषयमें। १३१ विद्रोहमें सहायता करना अथवा क्सिी सिपाही या जहाजके खलासीको उसके कामसे बहकानेका उद्योग करना। १३२ विद्रोहमें सहायता करना, यदि विद्रोह उसी सहायताके कारण की जाय । १३३ उस आक्रमणकी सहायता जो कोई सिपाही या जहाजका खलासी अपने ऊपरके अफसरपर करे जब कि वह अपने मोहदेवा काम कररहा हो। १३४ सहारता उपरोक्त आक्रमणमे जर कि आकाण होजाय। -१३५ किसी सिपाही अथवा जहाजके खलासीको भागनेमें सहायता देना। १३६ भागे हुए नौकरको आश्रय देना। १३७ भागे हुए नौकरका किसी सौटोगरी जहा. नमें जहाजतिकी असावधानीसे छुपा होना। १३८ किसी सिन्ही अथवा केवटको आगाम. गके काममें सहायता देना। १३९ जो मनुष्य जगी कानूनके आधीन है इस संग्रहके अनुसार दण्ड दिये जानेके योग्य न होंगे। १४० सिपाहियोंका पहिरावा पहिरना। , अध्याय ८. सर्वसम्बन्धी कुशलतामें विघ्न डालने वाल अपराधाके विषयमें। १४१ अनीति जमाव । १४२ किसी भनीति जमाव, सामी होना। १४३ दण्ड। • १४४ मृत्युकारक हथियार लेकर किसी अनाति नमावमे साझी होना। देना।

(१२) दफा. सक्षप्त विवरण, टफा. सक्षिप्त विवरण, - १४५ किसी अनीति जमावमे यह जानकर साझी " या हथियार लिये हुए फिरना । होना अथवा साझी रहना कि उसके | १५९ हगामा (खानेजगी) फैल फूट होजानेकी आजा होचुकी है। १६० हगामेका दण्ड । १४६ बल जो साझियोके अभिप्रायके लिये एक अध्याय ९. सामीकी ओरसे वर्ता जाय। अपराध जो सरकारी नौकरोंकी ओरसे १४७ बलबा करनेका दंड । किये जॉय अथवा जो उनसे १४८ मृत्युकारक हथियार लेकर वलबा करना । सम्बन्ध रक्ग्वे । १४९ अनीति जमावका प्रत्येक साझी उस अप- १६१ सरकारी नौकर जो अपने ओहदेके किसी राधका अपराधी गिना जायगा जो कामके मध्ये सिवाय कानूनानुसार चाक- सामियोंका अभिप्राय प्राप्त करनेके लिये रोके कुछ घूसकी भॉति ले। किया जाय। १६२ अनुचित उपायोंसे सरकारी नौकर पर १५. किसी अनीति जमावमे मिलनेके लिये दवाव डालनेके लिये घूस लेना । मनुष्योंका नौकर रखना अथवा नौकर १६३ सरकारी नौकरके साथ निज वर्ताव रखनेमे सलाह देना। कामम लानेके लिये घूम लेना । १५१ पांच अथवा अधिक मनुष्योके जमावम- १६४ उस सहायताको दण्ड जो मेरकारी नौकर यह जानबूझकर मिलना या रहना कि उसके फैल फूट होनेकी आजा होचुकी है। उन अपराघोम करे जिनका वर्णन ऊपर किया गया है। १५२ किसी सरकारी नौकर पर उस समय १६५ सरकारी नौकर किसी मनुष्यसे जो किसी आक्रमण करना अथवा उसको रोकना मामले या मुकद्दमेमे सम्बन्ध रखता जव कि वह बलवा आदिको दूरकर रहा हो। हो जिसको उस सरकारी नौकरने पूरा १५३ बलबा करानेके अभिप्रायसे बिना बात कोव करानेका काम करना । किया कोई मूल्यवान पदार्थ विना बदला प्राप्त करे। .. याद बलवा होजावे । । यदि बलवा न हो। १६६ सरकारी नौकर जो किसी मनुष्यको हानि १५४ उस धरतीका स्वामी या अधिकारी जिस- पहुचानेके अभिप्रायसे कानन विरुद्ध अनुरोध करे। पर कोई अनीति जमाव इकटाहो । १६७ मरकारी नौकर जो किसी मनुष्यको हानि १५५ उस मनुष्यका दण्ड योग्य होना जिसके लामके लिये बलवा किया जाय। पहुंचानके अभिप्रायसे झूठे दस्तावेज तैयार करे। १५६ उस स्वामी या अधिकारीके कारिन्देका १६८ मरकारी नौकर जो अनुचित रीतिर • दण्ड योग्य होना जिसके लाभके लिये व्यापारसे सम्बन्ध रक्खे । बलवा हो। १६५ सरकारी नौकर जो अनुचित रीतिर .१५७ उन मनुष्योको जो किसी अनीति जमाव- कोई माल ले अथवा उसके लिये बोली के लिये नौकर रखे गये हा छुपारखना। बोले। १५८ किसी अनीति जमावमे तरफदारीके लिये १७. सरकारी नौकर बनना । नाकर रक्खा जाना। १७१ छलके अभिप्रायसे वह लिवास पहि, (१३) होनमे चुकना दफा. सक्षिप्त विवरण. संक्षिप्त विवरण. दफा. रना या वह चिह्न लिये फिरना जिस आधिकार वत्तंकर किसी मनुष्यको हानि को सरकारी नौकर काममै राता हो । पहुँचगवे। १८३ किसी मालके लिये जानेमे जो किसी अध्याय १०. सरकारी नौकरके उचित अधिकारक सरकारी नौकराके उचित अधिकारांक अनुसार लिया जाता हो रोक रोक करना। अपमानके विषयम। १८४ किमी मालके नीलाममे जो किसी सरकारी १७२ सरकारी नौकरके जारी किये हुए सम्मन नौकरके उचित आधिकारके अनुसार अथवा इत्तिलाअनामेसे बचनेके लिये छिप नीलम पर चढाया गया हो, रोक टोक जाना। करना। १७३ सम्मन अथवा और इत्तिलाअनामेको १८५ कोई माल जो सरकारी नौकरके उचित अपने या औपके पास तक पहुँचनेको अधिकारके अनुसार नीलाम पर चढाय या उसके प्रगट किये जानेको रोकना। गया हो कानूनविरुद्ध लेना अथवा उसके १७४ सरकारी नौकरकी आजाके अनुसार हाजिर लिये बोली बोलना। १८६ सरकारी नौकरी के पूरा करनेमे सरकारी १७५ वह मनुष्य किसी सरकारी नौकरके सामने नौकरकी रोक टोक करनी। किसी दस्तावेजके पेश करनेमें चूक करे १८७ सरकारी नोकरको सहायता देनेमे चूक .जिसपर उस दस्तावेजका पेश करना कानू. नानुसार अवश्य है। करना जब कि कानूनानुसार सहयता देना १७६ वह मनुष्य सरकारी नौकरको इत्तिला या अवश्य हो। खबर देनेमे चूक करे जिस पर इत्ति-१८८ न मानना किसी आज्ञाको जो किसी सरकारी नौकरने कानूनानुसार प्रगट ला या खबर देनी कानूनानुसार अवश्य है। १७७ झूठी खबर देना। की हो। १७८ अपथ करनेसे नाही करना जब कोई | १८९ सरकारी नौकरको हानि पहुचानेकी धमकी देना। सरकारी नौकर कानूनानुसार शपथ करनेकी आज्ञा दे। १९. हानि पहुँचानेकी धमकी इसलिये कि कोई मनुष्य किसी सरकारी नौकरमे रक्षा १७९ किसी सरकारी नौकरको जो प्रश्न करनेका मागनेसे रुक जाय। अधिकार रखता है उत्तर देनेसे नाही करना। अध्याय ११. १८० बयान पर दस्तखत करनेसे नाहीं करना । झूठी गवाही और सर्व सम्बन्धी न्यारम १८१ सरकारी नौकर -या उस मनुष्यसे जो विन्न डालनेवाले अपराधोके शपथ करानेका अधिकार रखता है शपथ विपरम । करके झूठ बयान करना। १९१ झूठी गवाही देना। १८२ इस अभिप्रायसे झूठी खबर देना कि | १९२ झूठी गवाहीका यनाना । कोई सरकारी नोकर अपना उचित | १९३ झूठी गवाहीका दण्ड । .

(१४) दफा. सक्षिप्त विवरण. दफा. सक्षिप्त विवरण. . करना। . १९४ दण्डवके योग्य अपराध प्रमाणित करानेके | २०५ किसी मुकद्दमे में कुछ काम अथवा कार- अभिप्रायसे झूठी गवाही देना अथवा बनाना। बाई करनेके लिये दूसरे मनुष्यका " यदि निरपराधी मनुष्य उसके कारणसे रूपधरना। अपराधी प्रमाणित होजाए और दण्ड वध |२०६ किसी वस्तुका छल पूर्वक उठा लेजाना पानाए-1 - अथवा छुपा देना इस अभिप्रायसे कि २९५ देशनिकालेके दण्डका अपराध अथवा कैदका कुकी अथवा इजराय डिगरीमै उसका अपराध प्रमाणित करानेके अभिप्रायसे लिया जाना रुकजाय। झूठी गवाही देना -अथवा बनाना। २०७ किसी वस्तुपर छलपूर्वक दावा करना, इस १९६ काममे लाना ऐसे प्रमाणका, जो मान- अभिप्रायसे कि उसका लिया जाना कुर्कीमें लिया गया हो कि झूठा है। अथवा इजराय डिगरीमे रुक जाय । १९७ झूठा सार्टीफिकट जारी करना अथवा उस- २०८ अनुचित रुपयके लिये छलसे डिगरी जारी पर दस्तखत करना। होने देना। १९८ किसी सार्टीफिकटको जिसमें कोई आव., २०९ कोर्ट आफ जस्टिसमें भधर्मसे झूठा दाना श्यकीय बात झूठ जानी हुई हो सच्चे सार्टीफिकटकी रीतसे काममें लाना। २१. अनुचित रुपयेके लिये छलपूर्वक डिगरी ९९९ झूठा बयान किसी ऐसे इजहारमे जो कानू. प्राप्त करना। नानुसार प्रमाण (सबूत) की भौति २११ हानि पहुँचाने अभिप्रायसे अपराधका लिया जा सकता हो। झूठा दावा । २०० किसी ऐसे इजहारको सच्चेकी भांति २१२ अपराधीको आश्रय देना। काममे लाना, जो जान लिया गया हो यदि वधके दण्ड योग्य हो । कि झूठा है। ग यदि देशनिकालेके दंड अथवा कैदके दंड २०१ अपराधीको बचानेके लिये अपराधके प्रमा: योग्य हो। णको गुप्त कर देना अथवा उसके मव्ये- झठी खबर देना। २१३ अपराधीको दंडसे बचाने के लिये इनाम 'यदि अपराध बधक दण्ड योग्यहो । आदि लेना। । यदि अपराध देश निकालेके दण्ड योग्यहो। " यदि वधक दड योग्य हो। । यदि अपराध दश वर्षसे कमकी कैदके " यदि देश निकालेके दंड अथवा कैदकै योग्यहो। दंड योग्य हो। २०२ किसी अपराधका समाचार देनमें वह | २१४ अपराधीको दण्डसे बचानेके बदले मनुष्य जानबूझकर चूककरे जिसे समाचार इनाम देना अथवा कुछ वस्तु फेर देना । देना अवश्य हो। " यदि अपराध वधके दंड योग्य हो। २०३ होगये हुए अपराषके मध्ये झूठा समाचार " यदि अपराध देश निकालेके दंड योग्य अथवा कैदकें दंड योग्य हो। ०४ किसी दस्तावेजका नष्ट करदेना इसलिये कि|२१५ चोरी इत्यादिका माल निकालनेमे सहायता वह प्रमाणकी रीतिपर काममें न सके। देनेके बदले इनाम केना। । - देना।

(१५) दफा. सक्षिप्त विवरण. दफा, सक्षिप्त विवरण. । बनावे। २१६ ऐसे अपराधीको आभय देना जो हिरासत | २२५ किसी और मनुष्यकी उचित गिरफ्तारीमें (चौकसी ) से मागाहो अथवा रोक टोक। जिसके पकडे जानेकी आज्ञा होचुकी हो। " यदि अपराध वधके दण्ड योग्य हो। २२५ (म) ऐसी अवस्थाओंमें सरकारी नौक-. । यदि अपराध देशनिकालेके दंड योग्य रकी ओरसे गिरफ्तारीमें चूक अमवा भाग अथवा कैदके दह,योग्य हो । जाने देना जिनके मध्ये और प्रकारकी २१७ सरकारी नौकर जो किसी मनुष्यको देंडसे आज्ञा न हो। अथवा मालको जन्तीसे बचानेके भमि- २२५ (व) ऐसी अवस्थाओमें उचित रीति- प्रायसे कानूनी आजको न माने । पर गिरफ्तार किये जानेमे रोक टोक २१८ सरकारी नौकर जो किसी मनुष्यको इसे करना या भाग जाना या छुड़ा लेना अथवा मालको जन्तीसे बचानेके अभिप्रा- जिनके मध्ये और प्रकारसे आज्ञान यसे सरिश्तके झूठे कागज अथवा लेख हो। २१९ सरकारी नौकर जो अदालती कार्रवाई में | ३२६ अनीति रीतिपर देश निषालेसे लौट- आना। कुप्रयोजनसे ऐसी आज्ञा दे अथवा ऐसी |२२७ दंडकी माफीके नियमोको तोडना । रिपोर्ट इत्यादि करे जिसे वह कानून विरुद २२८ जानबूझकर किसी सरकारी नौकरका अप- जानत हो मान करना अथवा उसके किसी काममें २२० जो कोई मनुष्य अधिकार पाकर किती विन डालना, जब कि वह अदालतकी मनुष्यको अधन (कैद ) में रक्खे अथवा कारपाईको किसी अवस्थामै इजलास कर तनवीन के लिये अपरके हाकिमको सेपि रहा हो। यह जानबूझकर कि मैं कानूनके विरुद्ध २२९ ज्यूरी अथवा असेसर बनना ।. करता हूँ। २२१ जिस सरकारी नौकरपर किसीको पकडना अध्याय १२. कानूनानुसार अवश्य हो उसकी ओरसे सिफो अथवा गवर्नमेन्ट के स्टाम्प सम्बन्धी पकडनेमें जानबूझकर चूक है। अपराधोके विपयमें। "ड। २३० सिका। २२२ जिस सरकारी नौकरपर पकडना किसी "श्रीमती महारानीका सिक्का । मनुष्यका, जिसके मध्ये कोर्ट माफ-२३१ खोटा सिका बनाना। जस्टिसने दहकी आज्ञा की हो अपश्यहो २३२ श्रीमती महारानीका खोटा सिका बनाना । उसकी मोरसे पकडनेमें जानबूसकर चूक हो। २३३ खोटा सिक्का बनानेके लिये मौनार बनान अथवा बेचना। २२३ सरकारी नौकर अपनी असावधानीसे किसी.२३४ श्रीमती महारानीका खोटा सिका बनाने को बधनसे भाग जाने दे। लिये औजार बनाना अथवा वेचना.। २२४ जो कोई मनुष्य अपनी उचित गिरफ्तारी-/२३५ ओनार या सामानको खोटे सिक्के के लिये में कुछ रोक टोक करे। काममें लानेके अभिप्रायसे पास रखना ।

(१६) दफा. सक्षिप्त विवरणं. दफा. संक्षिप्त विवरण, लेजाना। है खोटा है। २३६ हिन्दुस्थानमें रहकर हिन्दुस्थानके बाहर अभिप्रायसे वदल्ना कि वह किसी और खोटे सिकेकी सहायता करना । प्रकारके सिकेकी भांति चलजावे । २३७ खोटे सिक्केको भीतर लाना या बाहर | २५० अधिकारम लेते समय जिस मिकेको जाना गया हो कि यह वदला हुआ है उमे किसी २३८ श्रीमती महारानीके खोटे सिकको भीतर औरको मिपुर्द करना । लाना या बाहर ले जाना। २५१ अधिकारमे लेते समय श्रीमती महारानी- २३९ लेते समय जिस सिक्केको जाना गया हो कि के जिस सिक्केको जाना गया हो कि यह खोटा है उसे किसी और के सिपुर्द यह बदला है उसे किमी और के सिपुर्द करना। करना। २४० लेते समय जिस सिकेको जाना गया हो कि २५२ उस मनु'यका बदला हुआ सिक्का पास यह श्रीमती महारानीका खोटा सिक्का रखना जिसने उमे अधिकारमे लेते समय उसे किसी और के सिपुर्द करना । जाना हो कि यह वढला हुआ २४१ ऐसे सिकेको सच्चे सिकेकी रीतिपर किसी २५३ उस मनुष्यका श्रीमती महारानीक सिक्के और को देना जिसको देनेवालेने पहिले को पास रखना जिसने उसे अधिकारमें अधिकारमे लेते समय न जाना हो कि यह लेते समय बदला हुआ जाना हो। ३४२ उस मनुग्यका खोटा सिक्का पास रखना | २५४ ऐसे मिक्केको असली मिककी भातिसे किसी जिसने उसे अधिकार में लेते समय खोटा औरके सिपुर्द करना जिसको सिपुर्द जाना हो। करनेवालेन पहिले आधिकारम लेते समय २४३ श्रीमती महारानीका खोटा सिक्का उस बदला हुआ न जाना हो। मनुष्यका पास रखना जिसने उसे अधि- २५५ गवर्नमेटका खोटा स्टाम्म बनाना । कारमे लेते समय खोया जाना हो । २५६ गवर्नमेंटका स्टाम्प खोटा बनाने के अभिप्रायसे २४४ वह मनुष्य किसी टकसालमे नियत हो कोई या सामान पास सिकेकी तौल अथवा धातुसे तो कानूनानु रखना। सार ठहराई गई हो सिकेको दूसरी नील २५७ गवर्नमेंटका स्टाम्प खाटा बनानेके अभि- अथवा धातुका बनावे। प्रायमे आजार बनाना या बेचना । २४५ अनुचित रीतिपर टकसालसे सिंका बनानेका २५८ गवर्नमेंटका खोटा स्टाम्प वेचना । ठप्पा लेजाना। २५९ गवर्नमटके खार स्टाम्पको पास रखना। २४६ छल या अधर्मसे किसी सिकेकी ताल या धातुका बदलना। २६० जाने हुए गवर्नमेटकं खोटे स्टाम्पको समझे २४७ छल या अधर्मसे श्रीमती महारानीके लाम्पकी रातिसे काममे लाना। सिकेकी तौल या धातु बदलना। २६१ गवर्नमेटको हानि पहुंचानक अभिप्रायसे २४८ किसी सिकेकी सरतको इस अभिप्रायसे किसी पदार्थसे जिसपर गवर्नमेंट स्टाम्प हो बदलना कि वह किसी और प्रकारके कोई लेख मिटाना या किसी दस्तावेजसे सिकेकी भाति चल जाये। वह स्टाम्प जो उसके लिये काममे लाया २४९ श्रीमती महारानीके सिकेकी सूरतको इस गया है दूर करना । आजार (१७) घानी करना। दफा. सक्षिप्त विवरण. दफा. सक्षिप्त विवरण, २६२ कामम लायहुए गवर्नमेंटस्टाम्पको जानबू- | २८१ झूठाप्रकाश या अँठा चिह या पानीपर झकर काममे लाना। तैरनेवाला चिह दिखाना। २६३ उस चिहको छीलना जिससे यह प्रगट | २८२ किसी मनुष्यको पानीकी राह भाडेपर होता है कि स्टाम्प काममें आचुका है। नावद्वारा लेजाना जिसमे बहुत अधिक बोझ लदाहो। अध्याय १३. नाप तोल सम्बन्धी अपराधोके विषयमे । २४३ जल या स्यलके संबंसबंधी मार्गपर जो. २६४ तौलनेके झूठे औजारको छलछिद्रसे काममे खिम या रोक पहुँचाना। २८४ किसी विषैले पदार्थक मध्ये असावधानी लाना। २६५ झूठे वाट या पैमानोंको छलसे काममै लाना। करना। २६६ झूठे वाटगे या पैमानाको पास रखना। २८५ आग या आगवाले पदार्थक मव्ये असाव- २६७ अँठे वाट या पैमाने बनाना या बेचना। घानी करना। अध्याय १४. २८६ भकसे उडजानेवाले पदार्थक मध्ये असाव- सर्व सम्बन्धी आरोग्यता या कुशलता और सज्जनता अथवा सुशीलता २८७ किसी कलके मध्ये जो अपराधीके पासही मे विघ्न डालने वाले अपराधी अथवा उसके प्रबन्धमही असावधानी करना। के विषयमे। २८८ किसी पर आदिक गिरान या उमकी २६८ सर्व सम्बन्धी बाधाका काम | मरम्मत करनेके मध्ये असावधानी करना । २६९ असावधानीसे वह काम करना जिससे | २८९ किसी पशुके मध्ये असावधानी करना। प्राणको भय पहुँचानेवाले किसी रोगके २९० सर्व दुःखदायी कामका दण्ड । फैलनेका सम्भवहो । २९१ सर्व दुःखदायी कामके न करते रहनेकी २७० दुर्भावका काम जिससे फैलना जीवजोखि. आज्ञापाकर उसे करते रहना। मके रोगका अति सम्भाहो । २९२ अश्लील पुस्तकका बेचना आदि । २७१ कारटाइनके कायदेको न मानना । २९३ अश्लील पुस्तकोंको बेचने या दिखानेके २७२ खाने या पीनेके पदार्थमें निसके बेचनेका लिये पास रखना। अभिप्राय हो मिलावट करना । २९४ अश्लील गीत। २७३ खाने या पीनेके हानिकारक पदार्थको बेचना | २९४ (अ)चिही डालनेके दफ्तरका रखना । २७४ दवाओंमे मिलावट करना। अध्याय १५. २७५ मिलावट की हुई दवा भोको बेचना । उन अपराधाके बयानेम नो मतसे २७६ किसी दवाको दूसरी दवाके नामसे बेचना। २७७ सर्व संबन्धी सोते या कुण्डके पानीको संवन्ध रखते है। विगाडना। २९५ किसी सम्प्रदायके मतकी निदा करनेके २७८ हवाको आरोग्यताके अयोग्य करना । अभिप्रायसे किसी पूजाके स्थानको २७९ किसी सर्वसंबंधी मार्गपर असावधानीसे हानि पहुंचाना या अपवित्र करना । गाडी चलाना या सवार होकर निकलना । २९६ किसी मत संबंधी समाजको कष्ट पहुंचाना। २८० असावधानीसे नावको चलाना । २९७ कयरस्तान आदिपर मदाखलतबजा करना।

(१८) दफा. सक्षिप्त विवरण, दफा संक्षिप्त विवरण. " . २९८ जानबूझकर मतके मध्ये किसी मनुष्यका देने अथवा उत्पन्न होनेसे पश्चात् उस. अन्तःकरण दुखानेके अभिप्रायसे बात की मृत्युका कारण होनेके, अभिप्रायस इत्यादि मुंहसे निकालना। किया गया हो। अध्याय १६, ३१६ ऐसे कामसे जो ज्ञातवत् घातकी सीमा तक मनुष्यके तन सम्बन्धी अपराधोंके विषयमें । पहुँचता है किसी जीव पडे हुए बालक की मृत्युका कारण होना। २९९ ज्ञातवत्यात( कतलइंसान मुस्तजिमसजा) ३१७ माँ बाप अथवा किसी रक्षकका बारह ३०० शातघात (कत्ल अम्द) वर्षसे कम अवस्थाके बच्चेको डाल देना जब कि ज्ञातवतधात ज्ञातपात नहीं है। और छोड देना. ३०१ जातवत्यात किसी ऐसे मनुष्यकी मृत्यु | ३१८ जने हुए बालककी लोथको छुपाना । करनेसे जो उस मनुष्यसे जिसके मार डालनेका अभिप्राय था भिन्नहो । दुःख (जरर) के घयानमें । ३०२ शातपातका-दण्ड । ३१९ दुःख (जर) ३०३ दण्ड उस ज्ञातघातका जो कोई देश निका- | ३२० मारी दुःख ( जरर शदीद) लेके दण्डवाला अपराधी करडाले। ३२१ जानबूझकर दुःख पहुँचाना । ३२२ जानबूझकर भारी दुःख पहुंचाना । ३०४ जातवत् पातका दण्ड जो ज्ञातघात तक न पहुँचे । । ३२३ जानबूझकर दुःख पहुँचानेका दण्ड । ३२४ जोखिमके हथियारो या यत्नोंसे जानबूध ३०४(अ)असावधानीसे.मृत्युका कारण होना। कर दुःख पहुँचाना। ३०५आत्मघातमे लडके अथवा पागलकी सहायता। | ३२५ जानबूझकर भारी दुःख पहुचानेका दड। ३०६ आत्मघातमे सहायता। ३२६ जोखिमके हथियारों या यत्नोसे जार- ३०७ नातघातका उद्योग । बूझकर भारी दुःख पहुँचाना। ३०८ जातवघातका उद्योग। ३२७ बलपूर्वक मालके प्राप्त करने अथवा ३०९ आत्मघात करनेका उद्योग । किसी अनुचित कामपर विवश करनेके ३१. ठग। लिये जानबूझकर दुःख पहुँचाना । ३११ दण्ड । ३२८ दुःख आदि पहुँचानके अभिप्रायसे अचेत गर्भ गिराने और विना जन्मे वालकोंको करनेवाली दवा खिलाना। 'हानि पहुंचाने और जन्मे हुए वाल- ३२९ बलपूर्वक मालके प्राप्त करने अथवा किसी कोको वाहर डाल आने और जन्म अनुचित कामपर विवश करनेके लिये छुपानेके विषयमे । जानबूझकर भारी दुःख पहुंचाना । ३३० दवाकर इकरार कराने या दवाकर मालके ३१२ गर्भ गिराना। वापिस करदेनेपर विवश करनेके लिये ३१३ स्त्रीकी बिना प्रसन्नता गर्भ गिराना । जानबूझकर दुःख पहुँचाना। २.१४ मृत्यु जिसका कारण वह काम हो जो ३३१ दबाकर इकरार कराने या दवाकर मालक गर्भ गिरानेके अभिप्रायसे किया गया है। वापिस कर देनेपर विवश करनेके लिये ".यदि वह काम-बीकी बिना प्रसन्नता जानबूझकर भारी दुःख पहुंचाना। किया गया है। ३३२ सरकारी नौकरको सरकारी कामसे डराकर ३१५ काम जो बचेको जीवित न उत्पन्न होने रोकरखनेकेलिये जानबूझकर दुःख पहुँचाना (१९) . हुए हो। दफा. सक्षिप्त विवरण, दफा. संक्षिप्त विवरण, ३३३ ,सरकारी नौकरको सरकारी कामके करनेसे | ३५२ भारी क्रोष दिलानेवाले कामके कारणके सि- डराकर रोक रखनेके लिये जानबूझकर वाय और प्रकारपर अनीति बलका दण्ड । भारी दुःख पहुँचाना। ३५३ किसी सरकारी नौकरको अपने कर्तव्य ३३४ क्रोष दिलानेवाले कामके कारण जानबूझ कर्मसे डराकर रोक रखनेके लिये अनी- कर दुःख पहुँचाना। तिवलको काममे लाना। ३३५ क्रोध दिलानेवाले कामके कारण जानबूझकर | ३५४ किसी स्त्रीकी लजा बिगाडनेके अभिप्रायसे भारी दुःख पहुँचाना। आक्रमण अथवा-अनीति बल । ३३६ उस कामका दड जो जीव था औरोंकी ३५५ भारी क्रोध दिलानेवाले कारणके अतिरिक्त शारीरिक कुशलतामें विघ्न डाले। और प्रकारपर किसी मनुष्यको वे इजत कर- ३३७ ऐसे कामसे दुःख पहुंचाना जो जीव अथवा नेक अभिप्रायसे आक्रमण या अनीतिवल। औरॉकी शारीरिक कुशलताको विघ्नमें डाले। ३३८ ऐसे कामसे भारी दुःख पहुँचाना जो जीव | ३५६ उस मालको चुरानेके उद्योगमै आक्रमण अथवा औराकी शारीरिफ कुशलताको या अनीतिबल जिसको कोई मनुष्य लिये विनमें डाले। अनीति रोक और अनीतिबंधनके ३५७ अनीतिवघनके उद्योगमै आक्रमण या अनीतिवल। विपयमें। ३५८ भारी क्रोध होनेकी अवस्थापर आक्रमण ३३९ अनीति रोक (मुजाहिमत बेजा) या अनीतिवल। ३४० अनीतियधन ( हसबेजा) ३४१ अनीतिरोकका दण्ड । मनुग्यको लेभागने और भगा ले जाने ३४२ अनीति बपनका दंड | और दास बनाने और वेगार करानेके विषयमे । ३४३ तीन अथवा अधिक दिनतक अनीतिबंधन। ३४४ दश अथवा अधिक दिनतक अनीतिवधन। ३५९ मनुष्यको ले भागना । ३४५ उस मनुष्यकी अनीतिवचन जिसके ३६. ब्रिटिश इडियासे मनुष्यको ले भागना छुट- काराके लिये आज्ञापत्र जारी होचुका है। ३६१ योग्यरक्षककी रक्षार्मेसे मनुष्यको ले भागना। ३४६ गुप्त अनीतिबधन मखफी (इन्स बेजा) | ३६२ मनुष्यको भगा ले जाना । ३४७ दवाकर माल लेने या किसी अनुचित कामपर | ३६३ मनुष्यको ले भागनेका दड। विवश करनेके अभिप्रायसे अनीतिवचन । | ३६४ ज्ञातघातके लिये मनुष्यको लेभागना या ३४८ दयाकर इकरार कराने या मालके वापि भगा लैजाना। स कर देनेपर विवश करनेके अभिप्रायसे | ३६५ किसी मनुष्यको गुप्त और अनीति बधन अनीतिबन्धन । करनेके अभिप्रायते ले भागना या भगा अनीतिवल (जत्रमुजरिमाना) और ले जाना। . आक्रमण (हमले) के विपयमे। ३६६ किसी स्त्रीको ब्याह आदिपर विवश कर- ३४९ बल (जन) नेके लिये ले भागना या भगा लेजाना । ३५० जनीतिबल (जनमुजरिमाना) ३६७ किसी मनुष्यको भारी दुःख पहुँचाने या दास ३५१ आक्रमण (हमला) बनाने के लिये ले भागना मा भगा ले जाना।

(२०) दफा. संक्षिप्त विवरण, दफा. सक्षिप्त विवरण. ३६८ ले भागे हुए मनुष्यको छुपाना या बधनमे | ३८६ किसी मनुष्यको मृत्यु अथवा भारी दुःख रखना। पहुँचानेका डर दिखानेके द्वारा दवाकर ३६९ दश वर्षसे न्यून अवस्थाके बालकको उसके कुछ प्राप्त करना। गरीरपरसे स्थावर धन चुरालेनेके अभि- ३८७ दबाकर लेनेके लिये किसी मनुष्यको प्रायसे ले भागना या भगा ले जाना। मृत्यु अथवा भारी दुःखका डर दिखाना । ३७. किसी मनुष्यको गुलामकी रीतिपर मोल | ३८८ किसी अपराधीकी तुहमत लगानेकी धमकी- लेना अथवा उसको अपने अधिकारसे से दबाकर प्राप्त करना जिसके बदलेमे अलग करना। मृत्यु अथवा देश निकाले आदिका दह ६७१ स्वभावसे ही दासोंका व्यापार करना। ठहराय गया है। ३७२ किसी नाबालिगको व्यभिचार आदिके ३८९ दबाकर लेनेके लिये किसी मनुष्यको अभिप्रायसे बेचना या भाडेपर चलाना । अपराध लगानेका डर दिखाना । ३७३ नाबालिगको व्यभिचार आदिके अभिप्रायसे मोललेना या अधिकारमे लाना। वलपूर्वक चोरी व डकैतीके वर्णनमें ३७४ अनुचित वेगारपर विवश करना। ३९. बलपूर्वक चोरी ( सरका बिलजन) बलपूर्वक व्यभिचारके विषयमे । " जिस अवस्थामं चोरी बलपूर्वक चोरी है । ३७५ बलपूर्वक व्यभिचार (जिना बिलजब ) जिम अवस्थामे दबाकर लेना बलपूर्वक ३७६ बलपूर्वक व्यभिचारका दड । चोरी ( जोरी) है। ३९१ डकैती। स्वभावके विरुद्ध अपराधोके विषय में । ३९२ बलपूर्वक चोरी ( जोरी) का दंड। ३७७ स्वभाव विरुद्ध अपराध । ३९३ जोरी करनेका उद्योग । अध्याय १७. ३९४ जोरी करनेके उद्योगमे जानबूझकर दुःख माल सबंधी अपराधोंके विपयमें । पहुंचाना। चोरीका वर्णन। ३९५ डकैतीका दड। ३७८ चोरी। ३९६ ज्ञातघातके साथ डकैती। ३७९ चोरीका दड। ३९७ जोरी अथवा डकैती मृत्यु करने या भारी ३८. घर या डेरा या नावमे चोरी। दुःख पहुँचानेके उद्योगके साथ । ३८१ जब कोई गुमाश्ता अथवा नौकर अपने | ३९८ घातक हथियार लेकर जोरी अथवा मुकेवी स्वामीके पाससे कोई वस्तु चुरावे । करनेका उद्योग। ३८२ चोरी करनेके अभिप्रायसे मृत्यु करने ३९९ डकैती करनेके लिये तैयारी करना । अथवा मारी दुःख पहुँचानेको तैयारी करनेके पश्चात् चोरी करना। ४०० डकैतोके झुडमे साझी होनेका दड। ४०१ चोरोंके इधर उधर घूमनेवाले झुडम साझी दबाकर लेनेके विषयमें होनेका दड। ३८३ दबाकर लेना (इस्तेहसाल बिलजब ) ३८४ दबाकर लेनेका दण्ड । ४०२ डकैती करनेके लिये इकट्ठा होना। ३८५ दबाकर लनेके लिये किसी मनुष्यको मालके अनीतिव्ययके वर्णनमें । हानिका भय दिखाना ४०३ अधर्ममे मालका अनीतिन्यय ।

(२१) सक्षिप्त विवरण, दफा. दफा. सक्षिप्त विवरण. रोकना। . ४.४ अधर्मसे उस मालका अनीतिपय जो मर ४२२ अपने किसी ऋण अंथवा तगादेको अपने नेक समय मृतक मनुष्यक अधिकारमें था। व्योहरोंको मिलनेसे अधर्मके द्वारा दंड योग्य विश्वासघातके वर्णनमे । ४०५ दडयोग्य विश्वासघात ( खयानत मुमरि-/४२३ अधर्मसे बैनामे आदि दस्तावेजका लिखना जिसमे मोलकी तादाद ड्ठ लिखी हो। माना) ४०६ दण्डयोग्य विश्वासघातका दड। ४२४ मालको अधर्मसे दूर करना या छुपाना । ४०७ माल पहुंचानेवाले या घटवाल आदिसे हानि पहुँचानेके विषयम। दड योग्य विश्वासघातका होना। ४२५ हानि पहुंचाना । ४०८ गुमाश्ते या नौकरसे दण्डयोग्य विश्वासघा-४२६ हानि पहुंचानेका दुड । तका होना। ४२७ हानि पहुँचानेके द्वारा पचास रुपये तकका ४०९ सरकारी नौकर या महाजन या सौदागर या नुकसान पहुंचाना । कारबारीसे दह योग्य विश्वासपातका होना। ४२८ दश रुपये तकका कोई पशु मार डालने चोरीका माल लेनेके बयानमे । आदिसे हानि पहुँचाना। ४१. चोरीका माल। ४२९ पचास रुपये तकका कोई पशु मार डालने ४११ अधर्मसे चोरीका माल लेना। आदिसे हानि पहुँचाना। ११२ अधर्मस डकैतीके मालको लेना। ४३. खेती आदिके लिये पानीको कमी करके ४१३ स्वाभाविक चोरीके मालका कारोबार हानि पहुचाना। ४३१ सर्वसाधारण मार्ग या पुल या नदीको हानि करना। ४१४ चोरीके मालको छिपाने में सहायता देना। पहुंचाकर हानि पहुंचाना। ४३२ अहलाकरके अथवा पानीका निकास रोक दगाके वयानमे ( विश्वासपात) कर जिससे हानि होती हो हानि पहुंचाना । ४१५ देगा। ४३३ लाइटहौस या समुद्री चिह्नको नष्ट करने ४१६ दूसरा मनुष्य बनकर दगा करना। या उसका स्थान बदलने या कुछ ४१७ दगाका दह। विगाड देने आदिसे हानि पहुंचाना । ४१८ दगा इस जानकारीसे कि उससे अनुचित |१३४ घरवीका चिब नो सरकारी आनासे वा हानि किसी मनुष्यको पहुँचे जिसके अधिकारकी रक्षा अपराधीपर अवश्य है। हो नष्ट करने अथवा उसके स्थानको बदलनेके द्वारा हानि पहुंचाना । ४१९ दूसरा मनुष्य बनकर दंगा करनेका दड। ४३५ आग या भकसे उडमानेवाले पदार्थके द्वारा ४२० दगा और अधर्मसे मालको सिपुर्द करनेके सौ रुपये तककी हानि पहुचानेके अभि- प्रायसे हानि पहुँचाना। छलछिद्रसे लिखतमो और छलछिद्रसे ४३६ आग या भकते उह जानेवाले पदार्यक माल अलग करनेके विषयमे । द्वारा घर आदि नष्ट करनेके अभिप्रायसे हा. ४२१ व्योहरों में बँट जानेसे बचानेके लिये माल नि पहुँचाना । को अलग कर देना या छुपाना । ४३७ पटी हुई नाव या ५६०. मनकी नावको लिये बहकाना।

(१२) दफा. सक्षिप्त विवरण. दफा. सक्षिप्त विवरण. . नष्ट करने अथवा उसकी निर्विनतामें ४५७ अपराध करनेके लिये जिसका दण्ड विश्नडालनेके अभिप्रायसे हानि पहुँचाना । कैद है रातके समय घरकी गुप्त मदा- ४३८ ऊपरकी पिछली दफामै कहे हुए कामका खलत वेजा या घर फोडना। दड जब कि वह हानि आग या भकसे ४५८ किसी मनुष्यको दुःख पहुंचानेकी तैया- उडजानेवाले पदार्थके द्वाराहो । रीके पश्चात् - रातके समय घरकी गुप्त ४३९ चोरी आदि करनेके अभिप्रायसे नावको मदाखलत बेजा या घर फोडना । किनारेपर टकराना। ४५९ घरकी -गुप्त मदाखलत बेजा या घर ४४० मृत्यु या दुःख (जरर) पहुँचानेकी तैया- फोडनेकी अवस्थामें भारी दुःख पहुँ. रीके पश्चात् हानि पहुंचाना। चाना। दण्ड योग्य मदाखलत बेजा ( अवधि. ४६० घर फोडने आदिमे सब सामी दण्ड कार प्रवेश). -योग्य हैं, मृत्यु या भारी दुःखके ४४१ दण्ड योग्य मदाखलत बेजा। वदलेमें जिसका उनमेसे कोई मनुष्य ,४४२ घरकी मदाखलत बेजा। कारण हो। ४४३ गुप्त ( मखफी) मदाखलत बेजा। ४६१ कोई चन्द किया हुआ वर्तन तोडकर ४४४ रातके समय घरकी गुप्त मदाखलत बेजा। खोलना जिसमें माल है अथवा जो ४४५ सेंध लगाना। माल भरे हुए के अनुसार है। ४४६ रातके समय सेष लगाना। ४६२ उसी अपराधका दण्ड जब कि रक्षकही करें। ४४७.दण्ड योग्य मदाखलत वेजाका दण्ड । ४४८ घरकी मदाखलत बेजाका दण्ड । अध्याय १८. ४४९ अपराध करनेके लिये जिसका देण्ड मृत्यु उन अपराधोके विपयमें जो लिखतमो है घरकी मदाखलत बेजा। और च्यापार अथवा मालके ४५. अपराध करनेके लिये जिसका दण्ड देश चिह्नोंसे सम्बन्ध रखते निकाला है घरकी मदाखलत बेजा। ४५१ अपराध करनेके लिये जिसका दण्ड कैद | ४६३ जालसाजी । है घरकी मदाखलत बेजा। ४६४ झूठी दस्तावेज बनाना। ४५२ किसी मनुष्यको दुःख पहुँचानेकी तैया. ४६५ जालसाजीका दण्ड । रीके पश्चात् घरकी मदाखलत बेजा। ४६६ कोर्टाफजस्टिसके सरिश्तेके कागज या ४५३ गुप्त मदाखलत बेजा या घर फोडनेका दंड। बालकोंका जन्म लिखा जानेवाला रजिष्टर ४५४ अपराध करनेके लिये जिसका दण्ड कैद या सर्व साधारण रजिस्टर आदिको . है घरकी गुप्त- मदाखलते बेज़ा या सेधे जाली बनाना। लगाना। ४५५ किसी मनुष्यको दुःख पहुंचानेकी तैयारी ४६७ किफालतुलमाल या वसीभत नामेको के पश्चात् घरकी मदाखलत बेजा या जाली बनाना। ४६८ दगाके लिये जालसाजी। ४५६ रात के समय परकी गुप्त मदाखलत बेजा / ४६९ किसी मनुष्यकी नेकनामी को हानि पहुँ- या सेन्ध लगानेका दड। चानेके लिये जालसाजी। हो। . . सेंध लगाना। .

(२३) दफा सक्षिप्त विवरण दफा सक्षिप्त विवरण, ४७. जाली दस्तावेज। सरकारी नौकर कामम लाता हो अथवा ४७१ जाली दस्तावेजको सच्ची दस्तावेजकी ऐसा चिह्न जिसको वह किसी मालका रीतिसे छलपूर्वक काममें लाना। तयार होना आदि प्रगट करनेके लिये ४७२ जालसाजी करनेके अभिप्रायसे जो दफा । काममें लाता हो झूठ बनाना। ४६७ के अनुसार दड योग्य है खोटी ४८५ कोई ठप्पा या चपरास या माल या व्यापा- मुहर आदि बनाना या पास रखना । रके किसी सर्व सम्बन्धी या विशेष चिहके ७७३ जालसाजी करनेके अभिप्रायसे जिसका खौटेपनका औजार छलपूर्वक बनाना या पास रखना। दूसरा दड नियत है खोटी मुहर आदि बनाना या पास रखना। ४८६ ऐसे असबाबको जानबूझकर वेचना जिसपर ४७४ जानी हुई जाली दस्तावेजको सच्चीकी रीति माल या व्यापारका झूठा चिह्न बना हो । पर काममे लानेके अभिप्रायसे पास रखना। ४८७ किसी गठरी या वर्तनपर जिसमें असबाब ४७५ चिह्न या निशानका खोटापन जो दफा हो झूठा चिह्न छलपूर्वक बनामा । ४६७ में कही हुई दस्तावेजकी तसदीकके ४८८ किसी ऐसे झूठे चिह्नको काममें लानेका लिये काममें आए अथवा खोय चिह्न दड। किये हुए पदार्थका पास रखना। ४८९ हानि पहुंचानके अभिप्रायसे कोई मालके ४५ चिह या निशानका खोटापन जो दफा चिह्नको बिगाडना। ४६७ की दस्तावेजोंके अतिरिक्त और । कारेसी नोट और वेक नोटोंके वर्णनमे । दस्तावेजोकी तसदीकके लिये काममे आवे झूठा कारेंसी या बैंकनोट बनाना जाली या खोटे बैंकनोट या कारेंसी नोटको अथवा खोटा चिहं किये हुए पदार्थका पास रखना। सच्चेकी रीतिपर काममें लाना । ४७७ वसीयत नामेको काटना अथवा उसका नाली या खोटे नोट या कारेसी नोटका नष्ट करना आदि। अपने अधिकारमें रखना। व्यापार और मालके चिह्नोंके विपयम । कारेंसी नोट या बैंक नोटको माली या ४७८ व्यापारका चिह्न। खोटा बनानेके अभिप्रायठे औजार या ४७९ गलका चिह्न। सामान बनाना या पास रखना । ४८. व्यापारका झूठा चिह्न काममे लाना। • अध्याय १९. ४८१ मालका झूठा चिह काममै लाना। दण्ड योग्य नौकरीका कौल करार तोडनेके ४८२ किसी मनुष्यको धोखा देने या हानि पहुँ- चानके अभिप्रायसे व्यापार या मालके झूठे |४९. जल अयत्रा यलके राफरमं नौकरीका कौल चिह्नको कामम लानेका दड। करार तोडना । १८३ हानि या नुकसान पहुंचानेके अभिप्रायसे |४९१ असमर्थ मनुष्यकी सेवा करने और उसे व्यापार या मालकं उस चिहका खोटापन आवश्यकीय पदार्थ पहुंचानेका कौल करार जिसको कोई और मनुष्य काममें लाता है। ४८४ मालका कोई ऐसा चिह्न जिसको कोई ४९२ किसी स्थानम सेवा करनेका कौल करार विपयमें। तोडना।

(२४) दफा. दफा. सक्षिप्त विवरण, संक्षिप्त विवरण. तोडना जहा नौकर स्वामीके खर्चसे पहुँ- ५०० अपयश लगानेका दड | चाया गया हो। ५०१ किसी वस्तुका छापना या खोदकर दिखानी यह जानकर कि वह अपयश लगाने- अध्याय २०. वाली है। उन अपराधोंके विषयमे जो व्याहसे सम्बन्ध | ५०२ पेचना किसी छपी हुई खुदी हुई वस्तुका रखते हैं। जिसमे अपयश लगानेवाली बात हो। ४९३ संभोग जो किसी पुरुषने उचित व्याह अध्याय २२ होजानेका धोखा देकर किया हो । दण्ड योग्य धमकी और अपमान व रंज ४९४ पति अथवा स्त्रीके जीतेजी दूसरा व्याह- दिलानेके विषयमे। करना। ४९५ वही अपराध पहिले ब्याहका उससे जिसके | ५०३ दण्ड योग्य धमकी (राखीफ मञ्जरिमाना) साथ पिछला व्याह हुआ छिपाकर करना, ५०४ सर्व साधारणकी कुशलतामे विघ्न डालनेके अभिप्रायसे जानबूझकर अपमान करना । ४५६ बिना करने उचित विवाहके छलके अभि- ५०५ वर्णन जो सर्वसाधारणकी हानिका कारण प्रायसे व्याइकी रीतिका पूरा करना । ४९७ व्यभिचार। ५०६ दण्ड योग्य धमकीका दण्ड, ४९८ बुरे अभिप्रायसे किसी व्याही स्त्रीको " -यदि मृत्यु अथवा भारी दुःख पहुचानेकी फुसला ले जाना या ले उटना या रोक धमकी हो। रखना। ५०७ विना नामकी मुखबिरीके करके दण्ड योग्य धमकी। अध्याय २१. ५०८ काम जो किसी मनुष्यको यह निश्चय करा. अपयश लगाने के विषयमे नेके अभिप्रायसे कि उसपर ईश्वरका कोर ४९९ अपयश लगाना । होगा या कराया जावेगा। ' "किसी सच्ची बातकी तुहमत जिसका करना या प्रगट करना सर्वसाधारणके लाभके | ५०९ किसी स्त्रीकी लनाका अपमान करनेके लिये अवश्य है। अभिप्रायसे वचन कहना या सैन देना । सरकारी नौकरका निजकर्तव्यकर्म करना। ५१० सर्वसाधारणके सामने किसी नशा पिये मनुप्यकी बदचलनी तुहमत जो कोई मनुष्य अपने स्वार्थकी रक्षाके लिये या सम्बन्धी सर्व दूसरों के अध्याय २३. लाभके लिये नेक नियतीसे लगावे। अपराध करनेके उद्योगके विषयमें। " सावधान करना जिसमें उस मनुष्यका लाभ | ५११ उन अपराधोके उद्योगका दण्ड जिनके हो कि जिसे सूचना दी गई हो अथवा लिये जन्म भरका देश निकाला या जिससे सर्व साधारणका कामहो । कैदका दण्ड ठहराया गया है। इति ।

ऐक्ट नम्बर ४५ सन् १८६० ईस्वी. अर्थात हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह. के (जिसको श्रीयुत नब्वाब गवर्नर जनरल बहादुरने ६ अक्टूबर सन् १८६०ई० को स्वीकार किया ) अध्याय पहिला १. et- जो कि यह बात उचित है कि, भारतवर्षमे समस्त अगरेजी राज्यके लिये एकही दण्ड साह बनाया जावे अतएव निम्नलिखित आज्ञा हुई कि:- (१) शुद्ध किया गया ऐक्ट ६ सन् १८६१ ई० व ऐक्ट १२ सन् १८९१ ई० इस ऐक्टका सिरनामा अनुसार इस ऐक्टका नाम हिन्दुस्थानका दण्डसग्रह होगा और और उसके प्रचारका यह १ जनवरी सन् १८६२ ई० के आरमसे उन देशोंमें प्रचलित फैलाव, होगा कि, जो श्रीमती महारानी विक्टोरियाको अपने सिंहासनपर बैठनेके २१ वे व २२ वें सालवाले कानूनके अध्याय १०६ के अनुसार जिसका प्रचार हिन्दुस्थानका राज्यप्रबध ठीक करनेके निमित्त हुआ था, अब प्राप्त हैं, अथवा आगे प्राप्तहों। नोट-ऐक्ट नं० ५ सन् १८६७ के अनुसार हिन्दुस्थानका दण्डसग्रह स्ट्रेट सेटलमटमे भी प्रच. लित किया गया है। (२) शुद्ध किया गया ऐक्ट ६ सन् १८६१ ई० व ऐक्ट १२ सन् १८९१ उन अपराधोका दण्ड ई० के अनुसार-प्रत्येक मनुष्य जो उक्त देशोमे पहली जनवरी सन् जो उपरोक्त देशों में किये । १८६२ ई० को या उसके पश्चात् किसी ऐसे अपराधका अपराधी जाय. हो जो इस संग्रहके विरुद्ध हो, वह इसी सग्रहके अनुसार दण्डके योग्य होगा किसी दूसरे कानूनके अनुसार नहीं । नोट-ऐक्ट नं. ५ सन् १८९८ ई० में यह आना है कि, जिन अपराधोंका दण्ड इस सग्रहके अनुसार हो सकता है उन सबकी तहकीकात तथा दूसरी कार्रवाई ऐक्ट फौजदारीके अनुसार की जावेगी।

. (२) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- (३)जो कोई मनुष्य किसी कानूनके अनुसार कि जिसको श्रीयुत गवर्नर जनरल उन अपराधाका दण्ड वहादुर हिद वइजलास कौंसलने चलाया हो किसी ऐसे अपराधमें जो उपरोक्त देशोके बाहर किये जाय परतु उनकी ! दण्डके योग्य हो कि, जो उपरोक्त देशोकी सीमाके बाहर हुआ है जाच कानूनके अनुसार तो उस मनुष्यके साथ किसी अपराधके सम्बन्धमे कि जो उपरोक्त उन देशोके भीतर होस कती है. देशोको सीमाके वाहर हुआ हो इस सग्रहके लेखोके अनुसार उसी प्रकार वर्ताव किया जावेगा कि मानो उसने वह अपराध उन देशोके भीतर ही किया है। ( ४ ) शुद्ध किये गये एक्ट ६ सन् १८६१ ई० व ऐक्ट १२ सन् १८९१ ई. उन अपराधीका के अनुसार श्रीमती महारानीका प्रत्येक नौकर इस सग्रहके अनुसार दण्ड कि जो श्रीमती महा- दण्डका भागी होगा कि जो कार्य अथवा चूक कि जिसको उसने रानीके किसी नौकरद्वारा अन्य हितकारी राज्योम | नौकरीके समयमे इस सप्रहके लेखोके विरुद्ध किसी ऐसे महाराजा होवे अथवा राजाके राज्यमे किया हो कि, जिसकी मित्रता श्रीमती महारानीके साथ किसी सधिपत्र अथवा करारनामेके द्वारा हो जो अबसे पहिले सर्कार ईस्टई- डिया कम्पनीके साथ होचुकी हो अथवा हिन्दुस्थानकी किसी सर्कारके साथ श्रीमतीके नामसे लिखी गई हो अथवा आगे लिखीजाय । (५) *यह अभिप्राय नहीं है कि, इस सग्रहका कोई लेख निम्नलिखित कानूनोंकी मुख्य कानून कि) किसी आज्ञाको पलटे अथवा न्यून करे या मिटावे अर्थात जिनमे इस ऐक्टका कुछ अध्याय ८५ ऐक्ट आफ पालीमेंट कि जो महाराजा चतुर्थ विलियम्के प्रभाव न होगा. सिहासन बैठनेपर ३ व ४ सालमे प्रचलित हुआ । अथवा कोई ऐक्ट आफ पालीमेंट जो उपरोक्तं ऐक्टके पश्चात् प्रचलित होकर सकार ईस्टइडिया कम्पनी या ऊपर कहे हुए देशो अथवा उपरोक्त देशोके निवासियोपर किसी प्रकारसे प्रचारित हुआ हो। अथवा कोई ऐक्ट जो महारानी विक्टोरियाके नौकर अफसरों और सिपाहियोकी बगा- बत और नौकरीपरसे भागजानेके दण्डसे सम्बन्ध रखता हो । अथवा कोई कानून किसी विशेष कार्यके लिये अथवा कोई कानून किसी विशेष स्थानके लिये। कि * देखो दफा १ऐक्ट नं० १४ सन् १८७० ई.।

पहिला १-२.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई० । (३) अध्याय दूसरा २. साधारणार्थ स्पष्टीकरणके विपयम । (६) इस समस्त सग्रहमें किसी अपराधका प्रत्येक लक्षण और प्रत्येक दण्डका नियम इस समहम लिखी हुई ) तथा उस लक्षण अथवा दण्डके नियमका प्रत्येक उदाहरण उन तारीफे (लक्षण) छुटो छूटोंके अधीन समझा जायगा जो साधारण छ्टोके अध्यायमें के अधीन समझी जायें लिखा हुआ है, चाहं प्रत्येक लक्षण या दण्डके नियम तथा उदा- हरणमें उन उपरोक्त छूटोंका दूसरी बार वर्णन न हुआ हो उदाहरण। (क) इस सग्रहकी उन दफोमे जहाँ अपराधोंके लक्षण लिखे हैं यह नहीं लिखा गया कि, सातवर्षसे न्यून अवस्थाका बालक इन अपराधोंका अपराधी नहीं हो सकता परंतु उन लक्षणोंको उस साधारण छूटके अधीन समझना चाहिये जिसमे यह नियत है कि, कोई काम जो सातवसे कम अवस्थाका बालक करे अपराध नहीं है। ख) यदि शिवाकर कि जो पुलीसका नौकर है बिना वारटके रमाशकरको कि जो अपराधी ज्ञातपात (कलभम्द) का है कैद करे तो इस अवस्था शिवशकर अनीतिवधन (हमबेजा ) का अपराधी न गिना जायगा, क्योकि रमाशकरका कैद करना कानूनके अनुसार उसका कर्तव्य कर्म था, अतएव ऐसी अवस्था उस साधारण छूटके अधीन समझी जायगी कि जिसमे यह नियत हुआ है कि कोई काम अपराध नहीं है जो ऐसा मनुष्य करे कि जिसका करना कानूनके अनुसार उसका कर्तव्य कर्म है। (७) प्रत्येक शब्द जिसका स्पष्टीकरण (तशरीह) इस समहमें किसी एक स्थानपर उन शब्दोका अभि-] हुआहे उसी स्पष्टीकरणके अनुसार इस सग्रहके प्रत्येक स्थानपर उसी प्राय कि जो एकवार ममझाये गये है. अर्थसे वर्ता गया है। ८) शब्द "वह " और उसके कारक प्रत्येक मनुष्यके लिये, चाहे वह पुरुष लिंग, अथवा स्त्री, वर्ते गये हैं। (९) यदि प्रसगमें कुछ विरुद्धता न प्रगट हो तो एक वचनके अर्थ देनेवाले एकवचन व बहुवचन ) शब्दोमे बहुवचन मी समझा जायगा और बहुवचनके अर्थ देनेवाले } शब्दोंमें एकवचन।

मनुष्य. (४) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- (१०) पुरुष शब्दसे किसी अवस्थावाले मनुष्य-जातिके पुलिङ्गसे अभिप्रायहै और पुरुष व स्त्री. } स्त्री शब्दसै किसी अवस्थावाली मनुष्य-जातिकी स्त्रीलिगसे । (११ ) मनुष्य शब्दसे प्रत्येक कम्पनी और समाज तथा झुंड मनुष्योंका समझा जायग चाहे उनको सर्कारसे सनइ मिली हो या नहीं। (१२) सर्वसाधारणका शब्द सब मनुष्योके प्रत्येक गिरोह और प्रत्येक मते ('मज- सर्वसाधारण. } हब ) से सम्मिलितहै। (१३) श्रीमती महारानीके शब्दसे समयके बादशाह ग्रेटबृटन और आयलडकी अधी- श्रीमतीमहारानी. } श्वरीसे अभिप्राय है। (१४) श्रीमती महारानीके नौकर इन शब्दोका सकेत सब अहलकारों अथवा नौक- रोसे है जो श्रीमती महारानीके राज्यके साल २१ व २२ की श्रीमती महारानीके नौकर, कानूनके अध्याय १०६ के अनुसार जिसका प्रचार हिन्दुस्थान- का राज्यप्रबध सुधारनेके लिये हुआ था नियत हुए हों अथवा गवर्नमेण्ट हिद या और किसी गवर्नमेण्टकी आज्ञासे हिन्दुस्थानमे नौकरीपर बने हों या नियत किये गये हों या कामपर लगाये गये हों। (१५) शुद्ध हुए-ऐक्ट १२ सन् १८९१ ई० के अनुसार-ब्रिटिश इन्डियाके शब्दसे उन देशोंका अभिप्राय है कि जो श्रीमती महारानी विक्टोरियाको ब्रिटिश इंडिया अपने राज्यके साल २१ व २२ की कानूनके अध्याय १०६ के अनुसार जिसका प्रचार हिन्दुस्थानका राज्यप्रबध सुधारनेके लिये हुआ था अब प्राप्त है या आगे प्राप्त हों। (१६) गवर्नमेट हिदके शब्दसे श्रीयुत नवाब गवर्नर जनरल बहादुर हिंद बइजलास कौंसल और यदि श्रीमान् अपनी कौंसलमे न हों तो प्रेजीडेंट गवर्नमेंट हिंद. बइजलास कौंसल या केवल नव्वाब गवर्नर जनरल बहादुर-हिदका अभिप्राय है जैसा जिसका अधिकार कानूनके अनुसार हो । (१७) गवर्नमेंट शब्दका अभिप्राय उस मनुष्य या उन,मनुष्योंसे है जो वृटिश गवर्नमेट, } इन्डियाके किसी भागमे कानूनके अनुसार प्रबंध करनेके लिये स्वाधीन हों। (१८) प्रेजीडेंसीके शब्दसे उन देशोका अभिप्राय है जो किसी एक प्रेजीडेसीकी प्रेजीडेसी. } गवर्नमेंट के अधीन हो। } जज, } दूसरा-२.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६०ई०। (१९) जजके शब्दसे उसी मनुष्यका अभिप्राय नहीं है कि जो सर्कारी तौरपर जज कहलाता हो किंतु उस प्रत्येक मनुष्यसे भी है कि जो कानूनके अनुसार किसी दीवानी या फौजदारीके अभियोगमें ऐसा फैसला करनेका अधिकार रखता हो कि जो कतई ( सम्पूर्णत: । हो या यदि उसकी अपील न हो तो कतई हो जावे या जो फैसला किसी दूसरे हाकिमकी जॉच ( तजबीज ) से बहाल रहे तो कतई हो या उन मनुष्योंके किसी ऐसे समूहमेंसे हो जिसको कानूनानुसार ऐसे फैसलेके करनेका अधिकार हो । उदाहरण। (क) कोई कलक्टर जब कि वह किसी अभियोग ( मुकदमा ) में एक्ट नबर १० सन् १८५९ ई० के अनुसार "अधिकार वर्तता हो" जन है। (ख) कोई मजिस्ट्रेट जब कि वह किसी ऐसे अपराधके सबन्धमे कार्रवाई कर रहा हो कि जिसमे उसको जुर्माना या कैदकी आजा देनेका अधिकार है अज है चाहे उसका फैसला अपीलके योग्य हो या न हो। (ग) पचायतका प्रत्येक मनुष्य कि जो मदरासके कानून ७ सन् १८१६* ई. के अनुसार अभियोगोंका फैसला व तजवीज करनेका अधिकार रखता हो जन है। (२०) कोर्ट ऑफ जस्टिसके शब्दसे उस जजका अभिप्राय है जिसको कानूनके कोर्ट ऑफ जस्टिस, } अनुसार स्वयही अकेले अदालतके काम करनेका अधिकार प्राप्त हो अथवा जजोंके उस समूहसे अभिप्राय है कि जिसको कानूनके अनुसार इकट्ठा होकर भदाल- तके काम करनेका अधिकार प्राप्त हो उस अवस्थामें जब कि वह जज अथवा जजोंका समूह मंदालतका काम कर रहाहो । M उदाहरण। 4 वह पचायत कि जो मदरासके कानून ७ सन् १८१६ ई. के अनुसार वर्त रही हो और जिसको अभियोगाके सबन्धमे तजवीज वा फैसला करनेका अधिकार प्राप्त है कोट ऑफ जस्टिम है। (२१) सरकारी नौकरके शब्दसे उस मनुष्यका अभिप्रायहै कि जो निन्नलिखित मरकारी नौकर, } प्रकारोंमेंसे किसी प्रकारमें हो अर्थात्-- पहिले-श्रीमती महारानीका प्रत्येक प्रतिज्ञा किया हुआ नौकर । दूसरे प्रत्येक कमीशनदार अफसर जो महारानी विक्टोरियाको जंगी अथवा जहाजी सेनामें हो उस अवस्या कि जब वह गवर्नमेंट हिन्द या और किसी गवर्नमेंट के अधीन किसी कामपर नियत हो। * ऐक्ट ३ सन् १८७३ ई. के अनुसार उपरोक्त कानून रद होगया है।

हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- तीसरे-प्रन्येक जज । चौथे-कोर्ट ऑफ जस्टिसका प्रत्येक ओहदेदार, जिसपर उस ओहदेकी योग्यतासे उचित है कि वह किसी कानून सम्बन्धी वात अथवा किसी घटनाको जाच करे या उसके सम्बन्धमे रिपोर्ट भेज या कोई लेख बनावे या तसदीक करे या अपनी चौकसीमे रक्खे, या किसी मालको अपनी सिपुर्दगीमे ले या उसको अपने निकटसे दूरकरे या अदालतके किसी आज्ञापत्र : हुक्मनामें ; की कार्रवाई करे या कोई शपथ ( हल्फ ) दे या अनुवादका काम करे या अढालतमे प्रवध रक्खे और प्रत्येक मनुष्य जिसको कोर्ट ऑफ जस्टिसकी ओरसे उपरोक्त कामोंमेसे किसी काम पूर्ण करनेका विशेष अधिकार प्राप्त हो । पांचव-प्रत्येक मनुष्य ब्यूरी या प्रत्येक असेसर या प्रत्येक पंचायतका पच; उस अवस्या कि जब वह कोर्ट ऑफ जस्टिस या किसी सरकारी नौकरकी सहायता करता हो। छठे-प्रत्येक पच या कोई दूसरा मनुष्य जिसको किसी कोर्ट ऑफ जस्टिस या किसी अधिकारी हाकिमने किसी अभियोग या झगडेको निवटानेके लिये नियत किया हो। सातवे-प्रत्येक मनुष्य जो ऐसा ओहदा रखताहो कि, जिसके अधिकारसे वह किसी मनुष्यके कैद करने या कैद रखनेका अधिकारी हो । आठवें-प्रत्येक सरकारी ओहदेदार, जिसको अधिकारहै कि वह अपराधोंको होना रोके और अपराधोकी घटनाओकी सूचना दे और अपराधियों को अपने अपराधका उत्तर देनेके लिये कैद करावे और सर्व साधारणकी आरोग्यता कुशलता तथा सुगमताकी रक्षा करे। नवें-प्रत्येक ओहदेदार जिसका काम उस ओहदेदारीके द्वारा यह हो कि कोई माल गवर्नमेटकी ओरसे अपने अधिकारमें लाये या अपनी सिपुर्दगीमें ले या अपनी चौकसीमे रखे या खर्च करे या वह गवर्नमेटको ओरसे धरतीके नापै या लगान लगावे या कौल करार करे या वह सरिस्तेमालके किसी हुक्मनामेको जारीकरे या किसी ऐसी बातकी जांचकरे कि जिससे गवर्नमेटका कुछ स्वार्थ रुपयेके मद्धे हो या उसके सम्बन्धमें कुल लिखा पढीकरे या कोई लेख कि जिसमे गवर्नमेटका कुछ स्वार्थ रुपयेके मद्धे हो लिखे. या तस्दीक करे, या उस लेखको अपनी चौकसीमें रक्खे, या रुपयेके मद्धे गवर्नमे- टके किसी स्वार्थको रक्षाके लिये किसी कानूनके उलंघनको रोके, और प्रत्येक ओहदेदार दूसरा २.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०। (७) जो सरकारका नौकर हो, या गवर्नमेंटसे अपनी नौकरी का हक पाता हो, या उसको किसी सरकारी कामके करनेके बदले फीस या कमीशन मिलती हो । दशवें-प्रत्येक ओहदेदार जिसका काम उस ओहदेदारीके द्वारा यह हो कि सर्व साधारणके लौकिक कामके लिये किसीगाव या कस्वा या शहर या जिलेके किसी मालको अपने अधिकारमे लाये या अपनी चौकसीमे ले या अपनी चौकसीमे रक्खे या खर्च करे या धरतीको नापै तथा लगान लगावे या किसी प्रकारकी रसूम प टैक्स उगाहे या किसी गाव अथवा कस्त्रे या जिलेके निवासियोका अधिकार निश्चय करनेके लिये किसी लेखको लिखे या तस्दीक करे या चौकसीमें रक्खे । उदाहरण। म्युनिसिपल कमिश्नर सरकारी नौकर है। पहिला स्पष्टीकरण-वे मनुष्य जो ऊपर लिखे हुए प्रकारौंमैसे किसी प्रकार में हो सरकारी नौकर है चाहे गवर्नमेटसे उन्होंने वह मोहदा पायाहो या नही । दूसरा स्पष्टीकरण---जहा "सरकारी नौकर" के शब्द आवे उनसे प्रत्येक ऐसा मनुष्य समझा जावेगा जो किसी सरकारी नौकरीपर यथार्थमें ही नियत हो चाहे उस ओहदे पर होनेके लिये उसके आधकारमे कैसी ही कानूनी खोई हो । १-"कनविक्ट वार' अर्थात् कैदी चौकीदार दफा २२३ दण्डसग्रह हिंदके अनुसार सर. कारी नौकरमे गिनाजायगा (वीली रिपोर्टर जिल्द ७ सफा ६३) २-जो चपरासी महकमा कलक्टरीसे नियमित वेतन न पावे बरन उसको उसके कामाकी कुछ फीस दीनावे वह इस २१ दफाके अनुसार सरकारी नौकर है (बंगाल लारिपोर्ट जिल्द ४ मा १४६ श्रीमती महारानी बनाम कृष्णदास.) ३--एक इजिनियर कि जिसका काम म्यूनिस्पिल फडका रुपया लेकर दूसरोंको देनका है इस दफाके अनुसार सरकारी नौकर कहा जावेगा यद्यपि उसको ऐसे रुपयेके व्ययकी मजूरी देनेका अधिकार नहीं है (बम्बई हाईकोर्ट रिपोर्ट जिल्द ६ सफा ६४ श्रीमती महारानी बनाम अनन्तराव आत्माराम) ४- ठेकेदार मौजा जो जङ्गलकी आमदनीका हिसाब रखे और उसमेसे एकभाग सरकारको दे और शेष आप ले वह इस २१ दफाके अनुसार सरकारी नोकर नहीं है (रिपोर्ट हाईकोर्ट बबई जिल्द १२ सफा १ श्रीमती महारानी बनाम रामाजी रावजी बाजीराव). ५- गाडीवाला या और कोई मजदूर जिसको गवर्नमेंटने नौकर रक्सा हो सरकारी नौकर नही है (इडियन लारिपोर्ट सिलसिला मदरास जिल्द ७ सफा १८ श्रीमती बनाम बच्ची मनी) स्थावर धन (८) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- ६-गायबनाजिर दण्डसंग्रा हिंदकी दफा ४०९ के अनुसार सरकारी नौकर है न कि नाजिरका ( रिपोर्ट हाई कोर्ट पश्चिमोतर देश जिल्द २ सफा २९८ श्रीमती बनाम महमूद- हुसेन) (२२) स्थावर धन (माल मनकूला ) इन शब्दोंका अभिप्राय सब प्रकारको मूर्तिमान् वस्तुसे है सिवाय धरती और उन पदार्थोके जो पृथ्वीसे बंधे हों भऔर ऐसे पदार्थोके जो पृथ्वीसे बंधे हुए किसी पदार्थके साथ सदैवको दृढ़तापूर्वक लगेहों। १--(क) बिना किसी अधिकार या आज्ञाके कई गाडी मिट्टी एक मौजाकी विना तशखीस हुई धरतीसे खोदकर ले गया तनवीज हुई कि (क) चौरीका अपराधी नहीं है । ( सिलसिला यबई जिल्द ११ हिस्सह ९ सितम्बर सन् १८८७ ई० सफा २५५ श्रीमती बनाम कोठा) २-धरती और धरतीके समस्त पदार्थ पत्थर और धातु इत्यादि जब धरतीसे पृथक् किये जाय कि जिसमें वे लगे हैं स्थावर धन है और चोरी होनेके योग्य है जो कोई बदनियतीसे ऐसी मिट्टीको पृथ्वीसे अलग करता है वह चोरीका अपराधी होगा। ( इंडियन लारिपोर्ट बंबई लिद १५ सफा ७०२ श्रीमती बनाम शिवराम) (२३) अनीतिप्राप्त( इस्तहसाल नाजायज )वह प्राप्त किसी वस्तुकी है जो अनुचित अनीतिप्राप्त. } रीतिसे कोई ऐसा मनुष्य प्राप्त करे कि जो कानूनके अनुसार उसका अधिकारी न हो। अनीतिहानि (जियान नाजायज)वह हानि किसी वस्तुकी है जो अनुचित रीतोसे की अनीति हानि. } जावे और हानि उठानेवाला मनुष्य कानूनके अनुसार उस वस्तुका अधिकारी हो। अनीति प्राप्त केवल उसी अवस्थामें न कहाजायगा जब कि वह मनुष्य उस घस्तुको किसी वस्तुको अनु- चित रीतिसे रख छोडना अनुचित रीतिसे प्राप्त करे वरन उस अवस्थामे भी कहा जायगा जब अनीति प्राप्तमे गिना- कि वह अनुचित रीतिसे अपने अधिकारमें रक्ख । जायगा. अनीतिहानि केवल उसी अवस्थामें न कही जायगी जब कि वह मनुष्य किसी वस्तुसे किसी वस्तुसे अनु- चित रीतिपर बैदखल | अनुचित रीतिपर वेदखल रखा जावै बरन उस अवस्थामे भी कही रखना अनीति हानिमे [ जायगी जब कि वह मनुष्य किसी वस्तुसे अनुचित रीतिपर वेद- गिना जायगा. खल किया जाय। १--जब कोई साहूकार अपने ऋणीका स्थावर धन उसके अधिकारसे जबरदस्ती (बल- पूर्वक) इस नियतसे ले लेवे कि उसका रुपया अदा करनेमें ऋणीको दवाव पहुंचे, तो इस - .

दूसरा २.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई० । (९) अवस्थामे यह कहा जावेगा कि उपरोक साहूकारने उस धनके सम्बधर्म चोरीका अपराध किया "जिसका वर्णन इस सग्रहको दफा ३७८ में कियागया है (इ. ला• रि० कलकत्ता जिल्द २२ सफा १०१७) (२४) जब कोई मनुष्य इस नियतसे कोई काम करें कि वह किसी मनुष्यको अनीति अधर्मपने ( बददि-} प्राप्त कराये या किसी मनुष्यको अनीतिहानि पहुँचाये तो कहा यानती) से. जायगा कि उसने वह काम बददियानतीसे किया । १--जब कोई मुहर्रिर सारी रुपयेको अपने व्ययमे लावे और फिर हिमावकी कितावमें झूठा रुपया इस नियतसे लिखे ताकि मेरा उपरोक्त अपराध छिपजावे तो तजवीज हुई कि झूठा रुपया जमा करना जालसाजीका अपराध नहीं है और इसलिये उसको इस सग्रहको दफा ४६५ के अनुसार दण्ड देना अनुचितहै (सिलसिला इलाहाबाद जिल्द ५ सफा २२१ इ० ला. रि० श्रीमती बनाम जीवानद) २-(क) अपनी जीवित अवस्थामें (ख) का ऋणी था (क) के मरने पश्चात् (ख) ने विना अदालतदीवानी कुछ बैल (क ) के उसकी स्त्री (ग) से लेलिये तजवीज हुई कि (ख) ने यह काम बदीदयानतीसे किया। (बीकी रिपोर्टर जिल्द ५ सफा ६८ श्रीमती बनाम परमात्मानाथ बनर्जी) ३-अपराधकी तजवीज जो इस संग्रहको दफा ४७१ के अनुसार बावत छल या बदनियती से बाली लेखको असली लेखके समान काममै लानेका था यह तजवीज हुई कि चार रसीदे जाली लगानेके अदा होनेकी अपराधीने उस अवस्थाम बनाई थी कि, जब उसकी चार रसीद असली खो गई थी-तजवीज हुई कि, अपराधीने इस सग्रहकी दफा २४ व २५ के अनुसार बदनियती से उपरोक्त अपराध नहीं किया इसलिये वह दफा ४७१, के अनुसार दण्डके योग्य भी नहीं हो सकता। (इ० ला. रि० इलाहाबाद जिल्द ७ हिस्सा ६ मफा ४५९ श्रीमती बनाम शिवदयाल)। ४--एक हिस्सेदार सामेके मालमें बददियाननी कर सकता है यदि वह उपरोक्त मालको साझेके अधिकारसे निकालकर अपने अलग अधिकारमें कर लेवे । (इ. ला. रि. मदरास जिल्द १० सफा १८६ श्रीमती वनाम नूरा)। ५--इन्ट्रेस इम्तिहानके उम्मेदवारने सार्टीफिकेट अच्छे चालचलन आदिके इम्तिहानमे गामिल क लिये हेडमास्टरके जाली दस्तखत बनाकर रजिष्ट्रारके यहा भेज दिये और रजिस्ट्रारने स्वीकार करके इम्तिहानकी आनाभी दे दी-तजवीज हुई कि, अभियोग दफा ४१५ व ४७१ व •५११ के अनुसार चलाया जाये कि, उम्मेदवारकी नियत केवल इम्तिहान में शामिल होनेके लिये थी कोई छल या वददियानती दफा २४ या २५ के अनुमार नहीं की इमलिये अपरावीने कोई मी अपराध नहीं किया। (इ० ला. रि० कलकत्ता जिल्द १९ सफा ३८० श्रीमती बनाम हरव्यान उर्फ राखलदाम घोप)। ६-जब हिन्दू लोगोने परस्पर मिलकर एक बल और दो गायोंको एक मुमलमानके अधि- कारसे अपने अनीतिप्राप्त या चापायोंकि स्वामीको अनीतिहानिके अभिप्रायमे नही वरन गायों (१०) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- } .. को वधसे बचानेके अभिप्रायसे दूर कर दिया तो तजवीज हुई कि, इनके सम्बंधमें डकैतीका अभियोग नहीं चल सकता वरन केवल बलवेका चल सकता है । ( इ. ला. रि. इलाहाबाद जिल्द १५ सफा २२ श्रीमती बनाम रघुनाथराय)। (२५) जब कोई मनुष्य कोई काम इस नियतसे करे कि वह किसीको किसी माल या अधिकारसे छलछिद्र द्वारा वेदखलकरे तो इस अवस्थामे कहा जायगा छलछिद्रसे, कि उस मनुष्यने वह काम छल छिद्रसेही किया। १-एक खेतका नम्बर यथार्थमे २७२ था और लेखमे जो अपराधियोने अदालतमे पेश किया वह नम्बर भूल से १० लिखा गया अपराधियोने नम्बर १० के स्थानपर २७२ बनादिया और इसी लिये सेशनजजने उन्हे दफा ४७१ के अनुसार जाली लेखको असलीलेखके स्थानपर कामम लानेके लिये दोपी प्रमाणित किया तजवीज हुई कि जो कि नम्बर बदनियतीसे इस सग्रहकी दफा २४ के अनु- "सारं व छलछिद्रसे इस संग्रहको दफा २५ के अनुसार नहीं पलटागया और न उससे किसीको अनीतिप्राप्त तथा अनीतिहानि हुई थी इस लिये उनपर दफा ४६५ के अनुसार जाली लेख बनानेका दोष नही होसकता था और न उपरोक्त लेख दफा ४७० के अनुसार जाली लेख कहा जा सकता था और न उसको अदालतमे पेश करनेसे अपराधी दफा ४७१ के अनुसार दोपी प्रमाणित होसकते थे इस लिये उनपर दफा ४७१ का अपराध नहीं होसकता और जो कि इस संग्रहको दफा १९२ के अनुसार लेखके किसी भूलको सही कर देना झूठे लेख या झूठे बयानमे नहीं प्रमाणित होसकता इस लिये वह अपराधी निर्दोपी है। ( वीकली नोटिस किताब माह नवम्बर सन् १८८२ ई० सफा २२८ श्रीमती. वनाम फतह आदि)। ( २६ ) यदि किसी वातका निश्चय करनेका पूरा कारण किसी मनुष्यके सामने निश्चय माननेका हेतु.वर्तमान हो तो इस अवस्थामे कहा जायगा कि वह मनुष्य उसबातका निश्चय करनका कारण रखता है न कि किसी दूसरी अवस्थामें । (२७) जब कोई वस्तु किसी मनुष्यकी ओरसे उसकी स्त्री या मुहरिर या नौकरके वस्तु जो स्त्री, मुह- अधिकारमे हो तो इस सग्रहके अर्थानुसार उपरोक्त वस्तु उपरोक्त ही रि या नौकरके आधि- मनुष्यके अधिकारमें समझी जायगी। स्पष्टीकरण-जो कोई मनुष्य थोडे दिनोके लिये या किसी मुख्य आवश्यकतापर मुहरि या नौकरके अधिकारपर रक्खा जाय तो वह मनुष्य इस दफांक अनुसार मुहरि या नौकर है। (२८) शुद्ध हुआ दफा ९ ऐक्ट १ सन् १८८९ ई० के अनुसार-जब कोई मनुष्य खोटा बनाना एक पदार्थको दूसरे पदार्थके समान इस अभिप्रायसे वनावे कि वह उस •समानताके द्वारा धोखा दे या इस अभिप्रायसे कि उसके द्वारा धोखा चलजाना सम्भव है तो' कहा जायगा कि उस मनुष्यने खोटा बनाया। . कारमे हो.

दूसरा २.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०॥ (११) सष्टीकरण १-खोय बनाने के लिये यह अवश्य नहीं,कि समानता ठीक ही ठीकहो। सष्टीकरण २-जब कोई मनुष्य किसी पदार्थको किसी पदार्थक समान बनाये और समानता ऐसी हो कि उससे किसी मनुष्यको घोखा होसकता हो तो उसमे जबतक इसके विरुद्ध प्रमाणित न हो निश्चय किया जायगा कि जो मनुष्य उन भातिर एक पदार्थको दूसरे पदार्थक समान बनाता है वह उस समानताके द्वारा धोखा देनकी इच्छा रखता है या यह जानता है कि उसके द्वारा घोखा होना सम्भव है। (२९) लेखके शब्दोंसे किसी ऐसी लिखावटका अभिप्राय है जो किसी पदार्थ पर अक्षरो या अको या चिहोके द्वारा या उनमें से दो या तीनोके द्वारा लेख (दस्तावेज). प्रगट या वाणत किया गया हो चाहे उन अक्षरो या अको या चिह्नोको प्रमाण ( सबूत ) के लिये काममे लानेकी नियत हो चाहे ऐसाहो कि वह सबूतमे काम आसकें। स्पष्टीकरण १-इस बातको कुछ विशेषता नहीं है कि किन वसीलोसे या किस वस्तुपर वै या अक या चिह्न बनाये जाय या यह कि, किसी कोर्ट ऑफ जस्टिसमे प्रमाणकी रीतिपर काममे लानेकी नियत हो या न हो या वह प्रमाणका कारण काममे आवे या न आवे । उदाहरण। वह लिखीट कि जिस किसी कोल करारके नियम लिखे हो और जो उस कौल करारके लिये प्रमाणकी भांति काम आसके, लेख (दस्तावेज ) है। चिक अर्थात् रुका किसी महाजनका लेख है। मुख्तारनामा लेख है। पृथ्वीका नक्शा या इमारतका नक्शा जो प्रमाण (मबूत ) की माति कीममे आनेके आम. प्रायसे या काममे आनेके योग्य बनाया जाय, लेख है। जिस लिखौटमे कोई हुक्म व हिदायते ही वह लेख है। स्पष्टीकरण २-जो अभिप्राय अक्षर या अों या चिह्नोसे सौदागरीके चलन अनुमार या किसी दूसरे व्यवहारमे प्रगट होता हो वही इन दफाके अर्थमे उन अक्षरो या अौं वा चिह्नोंमे प्रगट होना समझा जायगा चाहे वह अभिप्राय लेखमे न प्रगट किया गया हो। उदाहरण। यदि शिवभकर किसी हुडीकी पीठपर अपना नाम लिख दे और हुडीम लिखा हो कि निसको कहे उसे रुपया मिले तो सौदागरी व्यवहारके अनुसार इस लिखाटके यह अर्थ है कि जिस किसीके पास वह हुडी हो वहीं उसको पटा सकता है, इसलिये यह लिखाट लेख है और उससे वही अभिप्राय लेना चाहिये कि मानो दस्तखतके ऊपर यह लिखौट लिखा होता कि "अधिकारी हुडीको रुपये दो" या कोई और इसी मजमूनकी लिखी होती।

(१२) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- (३०) किफालतुलमालके शब्दसे उस दस्तावेजका अभिप्राय है जो ऐसी किफालतुलमाल दस्तावेज होय या ऐसी दस्तावेज समझी जानेको योग्यता रख- दस्तावेज तीहो जिसके द्वारा कोई कानूनी अधिकार प्राप्त किया जावे या बढाया जावे या एकसे दूसरेको दिया जावे या जिसकी अवधि नियत की जावे या नष्ट किया जावे या छोदिया जावे या जिसके द्वारा कोई मनुष्य स्वीकार करे कि मैं कानूनके अनुसार अमुक बातके अधीन हूँ या कहे कि अमुक कानूनी अधिकार } . मेरा नहीं हैं। उदाहरण । यदि शिवाकर किसी हुडीकी पीठपर अपना नाम लिख दे तो जब कि आशय इम लेखका यह है कि उस हुडीका अधिकार उसी ननुष्यको दिया गया जो नीतिपूर्वक उसका धनी बने अतएव वह लेख प्रमाणित (किफालतुलमाल) गिना जायगा । १-एक तिलाकनामा इस संग्रहकी दफा ३० के अनुसार किफालतुलमाल (प्रमाणितलेख)में गिना जायगा और इसप्रकारकी जाली दस्तावेजको रजिस्ट्री के लिये पेश करना और उसकी रजिस्ट्री करा लेना हिन्दुस्थानके दण्डसंग्रहको दफा ४७१ के अनुसार अपराध में गिना जायगा ( वीक्ली रिपोर्टर जिल्द ११ सफा १५ श्रीमती महारानी बनाम अजीमुद्दीन)। २-पट्टेकी नकल इस दफाके अनुसार किफालतुलमाल नहीं है ( रिपोर्ट हाईकोर्ट बम्बई जिल्द ४ सफा २८ सरकार बनाम हीरामन )। ३-वह सनद कि जिसके द्वारा किसी मनुष्यको प्रतिष्ठा व सन्मान प्राप्त होता है किफालतुल- माल नहीं है । ( इ. ला. रि० कलकत्ता जिल्द १० सफा ५८४) (३१) वसीयतनामके शब्दसे ऐसे लेखका अभिप्रायहे जो कोई मनुष्य मरनेसे पहिले वसीअतनामा... } अपने माल आदिके प्रवधके निमित्त लिखे । (३२) इस संग्रहके प्रत्येक भागमे सिवाय उन भागोंके जहां लेखसे विरुद्ध आशय करनेके कर्मो सम्बधी) निकलता हो, वे शब्द जो किये हुए कर्मोसे सम्बध रखते हैं कानून शब्द कानून विरुद्ध । विरुद्ध चूकों से भी सम्बध रक्खेंगे । चूकॉसे भी सम्बध रखेंगे. (३३) शब्द काम " से एक कामका और अनेक कामोका भी अभिप्राय है। काम चूक तर्क. } और "चूक!' के शब्दसे एक चूकका और अनेक चूकोका मी अमिप्राय है।

ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०। दूसरा २.] (१३) - (३४) जब कुछ मनुष्योने किसी अपराधका काम एक सम्मति होकर किया काम कि जो कई-] हो तो उन मनुष्योंमेंसे प्रत्येक मनुष्य उसकामके लिये उसी प्रकार एक मनुष्य एक सम्मनि । दण्डके योग्य होगा कि मानो वह काम उसीने अकेले होकर करे, किया है। १-(क) ने (ख) के सामने और (ख) की आजासे किसी मनुष्यके एक घुसा मारा इस अवस्थामें दोनों ही असली अपराधी गिने जॉयग-जब दो मनुष्य एक मनुष्यके मारनेमें सम्मिलित होवे और वह मनुष्य उनकी मारसे मरजावे तो इस बातके जांचनेकी कुछ आव. श्यकता नहीं कि, वह मनुष्य किसकी मारके प्रभावसे मरा (वीली रिपोर्टर जिल्द २३ सफा ११)। २-एक मनुष्यको कई मनुप्योने मिलकर मारा यहातक कि उसकी अठारह पसलियां टूट गई और वह मरगया ऐसी अवस्थामें उनमेका प्रत्येक मनुष्य मृत मनुष्य के मारनेका अप- राधी ठहराया जावेगा। (वीक्ली रिपोर्टर जिल्द २४ सफा ५ फौजदारी) ३-अपराधियोंपर जो सर्वे डिपार्टमेंट, नौकर थे हिन्दुस्थानके दण्डसंग्रहको दफा ६१ के अनुसार कुछ मौजोंसे घूस (रिश्वत) लेनेका अपराध लगाया गया-गवाही केवल उन्हीं मनु- व्योंकी थी कि जिन्होंने घूसमें चन्दा दिया था या चन्दा उगाहा था या रुपया नौकरोंको दिया था मजिस्ट्रेटने दफा ६१ के अनुसार कैदसख्त (कडीकैद) और जुर्मानेकी आजादी- तजवीज हुई कि फैसला ठीक २ नहीं हुआ क्योंकि कोई गवाही उन मनुष्योकी गवाहीको दृढ नहीं करती जो सब अपराधमे सयुक्त है इसलिये गवाह कि जिन्होंने अपने रुपयेकी या शरीरकी (जाती) हानिसे बचनेके लिये किसी सरकारी नौकरको घुस देनेका वचन दिया या चूंस दिलानेमें सहायता की उनकी गवाही स्वयही उनके अपराध करनेकी गवाही समझी जायगी (सिलसिला बबई इ. ला. रि० मिल्द १४ सफा ११५ श्रीमती महारानी बनाम मगनलाल व मोतीलाल)। (३५) जब कि एक ऐसा काम कुछ मनुष्योद्वारा हुमा हो जो केवल इस कारणसे जब ऐसा कोई काम अपराध है कि वह बुरी नियत अथवा बुरे अभिप्रायसे किया गया इसी हेतुसे अपराध हो है तो उनमेंसे प्रत्येक मनुष्य जिसने उसके करनेमें उसी प्रकारक कि बुरी नियत या बुरे आभिप्रायसे कियागया. ज्ञान या प्रयोजनसे साझा किया हो उस कामके सम्बंधमे उसी प्रका- से दण्डके योग्य होगा कि मानो अकेलेही उस मनुष्यने उसही ज्ञान अथवा अभिप्रायसे उस कार्यको किया। (३६) जब किसी परिणामका करना या करानेका उद्योग करना चाहे वह कुछ काम परिणाम जो कुछ कर- करनेसे हो चाहे चूकनेसे. अपराध गिनाजाय तो समझाजायगा कि नेसे और कुछ चूकनेसे - उस परिणामका उत्पन्न करना कुछ तो काम करनेसे और कुछ चूक उत्पन्न हुआ हो। करनेसे भी वही अपराध होगा।

(१४) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- - उदाहरण। यदि शिवशंकर जानबूझकर रमाशकरकी मृत्युका कारण इस प्रकारसे हो कि कुछ तो वह रमाशकरको आहारके देनेमे कानूनके विरुद्ध चूक करें और कुछ उसको मारे तो शिवशकर ज्ञातधा- तका अपराधी होगा। (३७) जब कि कई एक कामोके द्वारा कोई अपराध होवे तो जो कोई मनुष्य उन कई कामोमेस कि जिन ) कामोमेसे किसी कामको अकेलेही या किसी और मनुष्यके साझे मे अपराधबनता है. एक करके जान बूझकर उस अपराधमें सयुक्त हो तो वह मनुष्य उपरोक्त काम करके साझी होना अपराधका अपराधी होगा। उदाहरण । (क) यदि शिवशकर और रमाशकर इस बातकी सम्मति करें कि हम दोनो पृथक् २ सम. यपर थोडा २ विष.देकर उमाशंकरको मारडाले और इसी सम्मतिके अनुसार शिवशकर व रमाशंकर उमाशकरको मारनेकी नियतसे रिष दे और उस विपसे जो इसप्रकार दिया गया, उमार्गेकर मरजाये तो इस अवस्थामे शिवशंकर व रमाशंकर जानबूझकर जातघातमे संयुक्त हुए और जो कि इन दोनों- मेसे प्रत्येकने वह काम किया कि जो उमाशंकरको मृत्युका कारण हुआ इसलिये वे दोनों उपरोक्त अपराधके अपराधी हुए, यद्यपि उनके काम अलग २ थे ।' (ख) शिवशकर और रमाशंकर दोनो साझेमें जेलखानेके निरीक्षक हैं और उमाशकर कैदी उनकी चौकसीमे उस अधिकारके कारण बारी २ से छह २ घटे रहता है और शिवाकर व रमाशक- रने इस नियतसे कि उमाशंकर मरजावे अपनी २ नौकरीकी बारीमै उमाशकरको उस आहारके पहुं. चानेमे जो उसे देनेके लिये मिला था कानूनके विरुद्ध चूक की कि जिससे भूखके कारण उमाशंकर मरगया तो शिवशंकर और रमाशंकर दोनोंही उमाशंकरके अजातपातके अपराधी हुए। (ग)-शिवशंकर जेलखानेका निरीक्षक है और उमागकर कैदी उसकी • चौकसीम है-शिव- शकरने इस नियतसे कि उमाशंकर मरजावे उमाशंकरको आहारके देनेमे कानूनके विरुद्ध (चूक) की कि जिसके कारण उमाशंकर अत्यंतही निर्बल होगया परन्तु लघन ऐसे भी न हुए कि जिससे उमाशंकर मरंजाता-शिवशकर अपने ओहदेसे हटादिया गया और रमाशकर उसके स्थानपर नियत हुभा-रमाशंकरने भी विना शिवशंकरकी सहायता अथवा सम्मतिके उमाशंकरको आहारके देनेमें कानूनके विरुद्ध चूक की यह बात जानबूझकर कि इससे उमाशंकरका भरना सभव है-और उमाशं. कर भूखसे मरगया तो रमाशकर शातघातका अपराधी है परन्तु शिवशंकरने रमाशंकरको सहायता नहीं दी. इसलिये वह केवल ज्ञातघातके उद्योगका अपराधी हुआ। -( ३८) यदि कुछ मनुष्य किसी अनुचित कामके करनेमें तत्पर हों या उससे कुछ कुछ मनुष्य जो किसी सम्बन्ध रखते हो तो सम्भवहै कि वे मनुष्य उस कामके द्वारा अपराध को करे अलग २ अपराधोके अपराधी होगे. पृथक् २ अपराधोके अपराधी हों।

दूसरा २.] ऐक्ट नंबर ४५ मन् १८६० ई० । (१५) उदाहरण । यदि शिवशकरने किसी ऐसे भारी क्रोध करानेवाले कामको अवस्थामे जब कि उसका उमा- शकरको मारडालना केवल ज्ञातघात गिना जाता उमाशकरपर आक्रमण किया-रमाशंकर जिसकी ईर्षा उमाशंकरसे थी और उमाशकरके मारडालनेकी नियत रखता था विना इसके कि उस प्रकारके क्रोध दिलानेवाले कामकी अवस्थाने उसपर कुछ प्रभाव किया हो उमाशकरके मारनेमें शिवशंकरको -सहायता दे तो इस अवस्थामें यद्यपि गिवाकर और रमाशकर दोनोही उमाशकरकी मृत्युके कारण हुए हैं परंतु रमागकर शातघातके अपराधका अपराधी होगा और शिवशकर केवल जातवत् घातका अपराधी । (३९) जब कोई मनुष्य किसी परिणामको उन उपायोंसे उत्पन्न करे जिसके द्वारा उस जानबूझकर, } परिणामका उत्पन्न करना उसको नियतमे हो या उन उपायोंसे जिनके काममें लानेके समय वह मनुष्य जानता हो या जाननेका हेतु रखता हो कि उनसे वह परिणाम उत्पन्न होना सम्भव है तो कहा जायगा कि उपरोक्त मनुष्यने जान बूझकर उस परिणामको उत्पन्न किया। उदाहरण। यदि शिवशंकर रातके समय एक बडे नगरके किसी घरमे जिसमे मनुष्य रहते हो इस अभि- प्रायसे आग लगाये कि उसके द्वारा डॉका डालना सहज होजावे और इसप्रकार वह किसीमनुष्यके मारनेका कारण हो तो इस अवस्थामे यद्यपि शिवशंकरकी नियत मारनेकी न हुई हो वरन् उसको इस यातका रन हो कि मेरे कामके कारण इस मनुष्यकी मृत्यु हुई तौमी वह जानबूझकर मारनेवाला कह- लावेगा, कदाचित् उसने जानलिया हो कि मेरे इस कामसे किसीका मरना अतिसभव है। (४०) इस कानूनमें सिवाय उन अध्याय और उन दफोके जिनका वर्णन इस दफाके } जिमन २ व ३ में है “अपराध' शब्दका अभिप्राय उस वस्तुसे है जो इस संग्रहमें दण्डके योग्य ठहरा दीगई हो | अध्याय चौथा और नीचे लिखी दफाएँ अर्थात् टफा. ६४, १५, १६, १७, ७१, (ऐक्ट न० ८ सन् १८८२ ई० ) १०९, ११०, ११२, ११४, ११५, ११६, ११७, १८७, १९४, १९५, २०३, २११, २१३, २१४, २२१, २२२, २२३, २२४, २२५, ३२७, ३२८, ३२९, ३३०, ३३१, ३४७, ३४८, ३८८, ३८९, ४४५, (ऐक्ट न० २७ सन् १८७० ई० दफा २) अपराध शब्दका अभिप्राय प्रत्येक कामसे है जो इस सग्रहके अनुसार या किसी विशेष कानूनके अनुसार या किसी विशेष स्थानके कानूनके अनुसार वर्णन किये गये इस साहके दण्ड योग्य ठहरा दिया हो। अपराध.

. } (१६) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय-- और जिस अवस्थामै कि वह काम जो किसी विशेष कानून या किसी विशेष स्थानके कानूनानुसार दण्डके योग्य है, उसी कानूनके अनुसार दण्ड कैद जिसकी अवधि छह महीना अथवा अधिक जुर्माने सहित व जुर्मानेकी हो तो इन दफा १४१,-१७६, १७७, २०१, २०२, २१२, २१६ व ४४१ मे अपराध शब्दका वही अर्थ होगा जो ऊपर कह आये हैं। १-अफ्सर पुलीसको इस प्रकारको आश हुई कि वह (क) को दफा ५५ जाब्ता फौज दारीके अनुसार बदमाशी (बदचलनी) के अपराधमे कैद कर लावे-(क) दूसरे मनुष्योकी सहायता से कैद होकरभी भागगया यह तजबीज हुई कि (क) पर कोई अपराध हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहकी दफा ४० के अनुसार नही लगाया गया और इसलिये यदि वह कैदकी रोक टोक करके भागजावे तो वह किसी अपराधका हिन्दुस्थानके दण्डसंग्रहकी दफा २२४, २२५ के अनुसार अपरावी न होगा। (इ० ला• रि० इलाहाबाद जिल्द ७ सफा ६७ श्रीमती महारानी बनाम खदनिया) (४१) विशेष कानूनसे कानूनका अभिप्राय है जो किसी मुख्य विषयसै सम्बन्ध विशेष कानून. रखता हो। नोट-विशेप कानूनमें ऐक्ट जुआब इसी प्रकारके दूसरे ऐक्ट सयुक्त हैं। (४२) देश विशेषी कानूनसे उस कानूनका अभिप्राय है जो ब्रिटिश इडियाके किसी देश विशेषी कानून.} } मुख्य भागसे सम्बन्ध रखता हो। नोट-जैसे कानून म्यूनिसिपालटी पजाब जो केवल पजाबमें प्रचलित है व कानून म्युनिसिपालटी मध्यप्रदेश जो केवल मध्यप्रदेशहीमे प्रचलित है। (४३) कानून विरुद्धका शब्द प्रत्येक ऐसे कामसे सम्बन्ध रखता है जो अपराध } हो या जो कानूनानुसार वाजत हो या जिससे दीवानीको नालिशका कारण निकले। कानूनानुसार उचित और जब कि चूक करना किसी कामका किसी मनुष्यपर कानूनके 'विरुद्ध हो तो कहा जायगा कि इस कामका करना इस मनुष्यपर कानूनानुसार उचित है। १-यदि कोई मनुष्य कुंएके प्रबंधके अभिप्रायसे जो किसी मार्गसे आठ गजके अंतरपर उसकी निजधरतीमें है उसकी घेराबंदी न करे तो उसको दण्ड इस अपराधम न दिया जावेगा कि उसने सर्व साधारणको दुःख पहुंचाया (इ. ला. रि० मदरास जिल्द ६ सफा २८०)। ( ४४ ) हानिके शब्दसै हर प्रकारका हानिका अमिप्राय है जो कानूनके विरुद्ध किसी हानि. } मनुष्यके तन अथवा मन या यश अथवा धनको पहुंचाई जावे । कानून विरुद्ध, } दूसरा २ ] मृत्यु जहाज, ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई० । (१७) (४५) जीव शब्दसे केवल मनुष्यके जीवका अभिप्राय है सिवाय उसके जहा लेखस जीव } इसके प्रतिकूल अर्थ दिखाई दे। (४६) मृत्यु शब्दसे केवल मनुष्यको मृत्युका अभिप्राय है-सिवाय उसके जहा लेखसे } इसके प्रतिकूल अर्थ दिखाई दे। पशु, }(४७)पशुके शब्दसे सिवाय मनुष्यक प्रत्येक जीवधारीका अभिप्राय है । (४८) जहाजके शब्दसे उस पदार्थका अभिप्राय है जो मनुष्योको अथवा मालका } पानीपर लेजानेके लिये बनाया गया हो। (४९) जिस स्थानमें वर्ष या महीनका गन्द आया है वहा यह समझना चाहिये कि, वर्ष या महीना. } वह वर्ष या महीना अगरेजी पत्रे जत्री , के अनुसार गिना जायगा । (५०)दफाके शब्दसे इस सप्र के किसी अध्यायके उन टुकडोमेसे किसी टुकडेका अ. }भिप्राय है कि, जिनके आरममे पहिचानके लिये कोई अक लगा हो। (५१) शपथके शब्दमें सत्य बोलनेकी वह प्रतिज्ञा भी गिनी जायगी जो कानूनानुसार शपथके बदले ठहराई गईहो और और कोई प्रतिज्ञा मी गिनी जायगी. जिसका करना किसी सरकारी नौकरके सामने, या जिसका किया जाना प्रमाण । सबूत , की भाति, चाहे किसी कोर्ट आफ जस्टिसमे हो या न हो कानूना- नुसार उचित या अवश्य हो। (५२) जिस कामके करने या मानने में यथोचित सावधानी व विचार न किया जाय पाक इच्छा (नेक ] तो न कहाजायगा कि, उपरोक्त काम नेक नियतीस किया गया नियती.) या नेक नियतीसे मानागया । १-एक अफसर पुलीसने एक घोडा जो उसीके खोए हुए घोडेकी सूरतका था एक खेतमें यघा देखकर पकड लिया और उस खेतवालको चोरीके अपराधमें कैद किया-तजवीज हुई कि उप- रोक्त अफ्सरने यह काम नेक नियतीसे नहीं किया क्योंकि उसमे यथोचित सावधानी और विचार नहीं किया गया । ( वीली रिपोर्टर जिल्द १० सफा २० श्रीमती महागनी बनाम मुहम्मद फाजिलखा) दफा. शपथ, } --- (१८). [अध्याय- 'हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। अध्याय तीसरा ३.. (५३) इस सग्रहके लखोके अनुसार अपराधी जिन दंडोंके योग्य होंगे वे यह दड. } . हैं। 1* पहिला-मृत्युदण्ड ( सजाय मौत ) दूसरा-देश निकाला ( हन्स व अवूर दस्यायशोर) तीसरा-कैदकी अवस्थामे सेवा दण्ड (मशक्त ताजीरी वहालत कैद) चौथा-कैद जो दो प्रकारकी है- (१) कैद कठिन जो परिश्रमके साथ हो. २) साधारण कैद. पांचवां-धनको जन्ती. छठा-जुर्माना. - * बेंतके दण्डके बारेमे ऐक्ट नं० ६ सन् १८६४ ई० को देखो (क) (ख) (श्रीयुत नब्बाब गवर्नर जनरल बहादुरके यहाँसे १८ फरवरी सन् १८६४ ई० को स्वीकार हुआ) ऐक्ट जिसका यह अभिप्राय है कि, किसी २ अभियोगमे बतका दण्ड प्रचलित किया जावे। यह बात उचित है कि किसी अभियोगमै द्रण्ड सग्रह हिदके लेखो (दफों) के अनुसार अपराधी बेतके दण्डसे दण्डित कियजॉय इस लिये निम्नलिखित आजा होती है कि: दफा १-हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहको दफा ५३ के अतिरिक्त अपराधी इस सग्रहके अनुसार "वतके दण्डके योग्य हैं। (क) यह ऐक्ट फिहरिस्तमे लिखे हुए जिलोके अतिरिक्त समस्त ब्रिटिश इडियामै प्रचलित किया गया है । देखो एक्ट १५ सन् १८७४ ई० दफा ३. यह ऐक्ट दफा ६ के अतिरिक्त ब्रह्मामें भी प्रचलित किया गया है । (देखो भाग १ क क्रोडपत्र २ ऐक्ट २० सन् १८८६ ई०). यह ऐक्ट फिहरिस्तम लिखहुए जिलोके ऐक्ट के अनुसार जो सन् १८७४ ई० मे प्रचलित किया गया या निम्नलिखित जिलोमे प्रचलित किया गया है। ।

ठण्ड. तीसस ३.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई०॥ ( १९) (५४) प्रत्येक अवस्थामें जहा मृत्युदडकी आज्ञा हुई हो गवर्नमेट हिद या उस मृत्युदण्डके बदलेका गवर्नमेटको जहा अपराधीको दुडकी आज्ञा हुई हो अधिकार होगा कि, बिना अपराधीको प्रसन्नताके उस ढडको और किसी - दडके साथ जो इस सग्रहमें नियत की गई है वदलदे । दफा २-जो मनुष्य किसी अपराधका (कि जो नीचे लिखे हुए हैं) अपराधी हो तो उचित कि, उसको किसी टण्डके बदले जो दण्टसग्रह हिदके अनुसारहो बेतका दण्ड दिया जावे और वह अपराध यह है। १--चोरी जिसप्रकार कि उपरोक्त संग्रहकी दफा ३७८ मैं उसका वर्णन हुआ है। २-इमारत या डेरे या जहाज अथवा नावमे चोरी करना-जिसप्रकार कि उपरोक्त संग्रहको दफा ३८० मे उसका वर्णन हुआ है। ३-चौरी जो मुहार या नौकर करे कि जिसका वर्णन उपरोक सग्रहकी दफा ३८१ मे हुआ है। ४-किसी मनुष्य के मारने या हानि पहुचानेकी तैयारी करके चोरी करना कि जिसका वर्णन उपरोक्त संग्रहको दफा ३८२ में हुआ है। ५-धमकी देकर बलपूर्वक माल छीनना जिस प्रकार कि उपरोक्त मग्रहको दफा ३८८ मैं कहा है। ६-किसी पदार्थको बलपूर्वक प्राप्त करनेकी नियतसे किमी मनुष्यको बदनाम करनेकी धमकी देना जिस प्रकार उपरोक्त संग्रहको दफा ३८९ में वर्णित हुआ है। सिध देखो गजट १० अगस्त सन् १८७८ | कमायू व गढवाल देखोगजट नवम्बर सन् १८७६ आफ इंडिया ई. हिस्साए सफा ४८२ आफ इंडिया ई०हिस्सारसफा अदन २८ जन सन् १८७९ई० | फिहरिस्तमें लिखा ३१ मई सन्१८७९६० हिस्सा १ सफा ४३४ हिस्सा १ सफा ३८३ जोतसारबावर पश्चिमी जलपाई गोडी) देखो गजट आफ ३१मई सन्१८७९ई० वपश्चिमीडवारिसवपश्चि इडिया हिस्सा सफा ३८२ मी कोहिस्तानवदालिग १५मार्चसन् १८८१६. जिला हजारा पेगा- ५मार्चसन्१८८१ई. जिला हजारा पेगा-'" ३० जनवरी सन् १८८६ व तराई व डमसन सब ! हिस्सा १ सफा ७४ वरकोहाट बन्न ,डे ई० हिस्सा १ सफा ४८ डवीजन जिला दार्जीलिग, राईस्माईलखा, डे. जिला हजारीबाग व ) देखो गजट आफ इंडिया रागाजीखा लोहारडगावमानभूमि जिला लाहौर * मई सन् १८८६ ई० व पर्गना धालभूमि व (२२अक्टूबर सन् १८८१ कोलहान जिला सिंहभूमि ई०हिस्सा१ सफा ३७४ हिस्सा १ सफा ३०१ फिहरिस्तमे लिखे "१३दिसम्बर सन्१८७९ मुहाल अगल, १५ फरवरी सन् १८७९ हुए जिलेमध्यहिदके । ई०हिस्सा १ सफा ७५१ ई० हिस्सा १ सफा ६० कुर्ग २८ दिसम्बर सन्१८७८ कमिश्नरी मासी. .. २१अगस्त सन् १८७८ ई० हिस्ण सफा ७४७ ई०हिस्सा१ सका ५४६ एडमानव नीकोबारद्वीप' २५मार्च सन्१८८२६० फा १२८ होगा कि, (२०) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह । [अध्याय- (५५) प्रत्येक अवस्था में जहां जन्मभरके देशनिकालेके दडकी आज्ञा हुई हो गव- जन्मभरके देश निका-2 नेमेट हिंद या उस गवर्नमेटको जहां अपराधीको इस दडकी आज्ञा लेकी कैदकं बदलेका दण्ड, हुई हो अधिकार होगा कि, अपराधीको बिना प्रसन्नता उस दडको दोनो प्रकारमेसे किसी प्रकारके. दइके साथ जिसकी अवधि १४ वर्षसे अधिक न हो बदल दे। (५६ ) जब कभी किसी मनुष्य पर जो यूरुष या अमेरीकाका रहनेवाला हो कोई यूरूपियो और आमे- ऐसा अपराध प्रमाणित हो कि, जिसका दंड इस संग्रहके अनुसार रिकनोको देशनिकालेके । देश निकाला है तो अदालतको उचित है कि, रेक्ट २४ सन् बदले सेवादंडहो. १८५९ ई. के अनुसार अपराधीको देश निकालेके बदले कैदकी अवस्थामे सेवादडको माज्ञा दे । परन्तु शर्त यह है कि, जब कोई अपराधी यूरुप या अमेरिकाका रहनेवाला न प्रचलित हों तो उपरोक्त ऐक्टकी दंडाजाके योग्य या देश निकालेके योग्य कि, जिसकी अवधि १० वर्षसे अधिकको होनी होती परन्तु जन्मभरको न होती तो वह इसके योग्य अदालत उसको कठिन सेवादड करे कि, जिसकी अवधि छ वर्ष या इससे अधिक की हो- जन्मभरकी न हो। नोट-इस दफाकी शर्त ऐक्ट नं० २७ सन् १८७० ई. के अनुसार बढाई गई है। ७--चोरीके मालको जानबूझकर बदनियतीसे लेना जिस प्रकार कि उपरोक्त संग्रहकी दफा ४११ में कहा है। ८-चोरीके मालको यह जानकर कि वह डकैतीसे पायागया है ले, बददियानतीसे लेना- कि, जिसका वर्णन उपरोक्त संग्रहको दफा ४१२ में हुआ है ।.. ९--घर फोडकर या अनुचित रीतिसे घरमें घुसना कि जिसका वर्णन इस संग्रहको दफा ४४३ व ४४५ मे किया गया है-ऐसे अपराधके अभिप्रायसे कि जिसका दड वैत दड होस- कता है। : १०-रावके समय घरं फोडकर या अनुचित रीतिसे घरमें घुसना कि जिसका वर्णन इस संग्रहको दफा ४४४ व ४४६ मै किया गया है ऐसे अपराधके अभिप्रायसे कि जिसका दंड इस दफाके अनुसार बेत दंड होसकता है। जिला सिलहट, देखो गजट आफ इंडिया, २४ अक्टूबर सन् १८७९ ई० हिस्सा १सफा६३१ जिला कामरूप व नौ गागर व दारंग व शिवसागर व लखी- २४ अगस्त सन् १८७८ ई. हिस्सा १ सफा ५३३ मपुर व ग्वालपाडा व कछार यह ऐक्ट उपरोक्त ऐक्टके अनुसार पश्चिमोत्तर देश के जिला तराईसे भी सम्बंध रखता है-देखो गजट आफ इंडिया २३ सितम्बर सन १८८६ ई० हिस्सा १ सफा ५०५ तीसरा ३.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई० । (२१) (५७) दडकी अवधीके विभाग करनेमें जन्ममरका देशनिकाला बीस वर्षके देश ढङकी अवधैिक विभाग } निकालेके समान समझा जायगा । नोट-इस दफाके अनुमार जन्मभरके देश निकालाक दंडकी अववि केवल २० वर्षकी रक्खी गई है। (५१) प्रत्येक अवस्था जहा देश निकाले दडकी आजा हो जबतक देश निकाला जिन अपगधियोंको देश निकालेके दडकी न हो, अपराधीके साथ बैसाही वर्ताव किया जावेगा कि मानो आजा हो तो उनको देश उत्तको कठिन कैटकी आजा हुई है और जो मीआढ ( अवधि ) निकाला होते तक उनके इस प्रकारकी कदमें व्यतीत होजायगी वह इसी देश निकालेके दडमें साथ किस प्रकार वत्ताव कियाजावे। गिनी जावेगी। ( ५९ ) प्रत्येक अवस्थामं जहाँ अपराधी सात वर्ष या अधिक अवधिकी बैठक कैदक ढडके बदले योग्य हो वहा दण्ड देनेवाली अदालतको अधिकार होगा कि किस २ अवस्थामें देग कैदका दड देनेके वढले अपराधीको किसी एक अवधिके लिये निकालेकी आजा टीजा सकतीहै. जो सात वर्ष से कम और उस मीआद (अवधि ) से अधिक न हो जिस अवधि तक वह अपराधी इस सग्रहके अनुसार कैदके योग्य है देश निकालेके दडकी आना है। १-दस सग्रहकी दफा ५९ मे कोई ऐसा अधिकार नहीं है कि उस कैदके बदले जो अदा- लत अपराधीको वन दड न वरल होनेके दे सकती हो, देश निकालेका दड दिया जावे (इ. ला. रि. मदरास जिल्द ५ सफा २८ लक्साह बनाम श्रीमती महारानी) २-इस मग्रहको दफा ५९ के अनुसार अदालत केवल उसी अवस्थामै देश निकालेका दड दे सकती है कि जब अपगीको मात साल या अधिक कैदकी आना हो-अदालत अपराव के सम्बन्धमै दहकी आजा करते समय कैदके दडको देश निकालेके दडम बदल मकती है, परन्तु कैदके दडकी आजा मुनानेके पश्चात् ऐमी अदल बदल न होसकेगी । (वीठी रिपोर्टर जिल्द सपालीमेंट सफा ३५)- ३-वह अफ्सर जिसको टफा ' ऐक्ट ५ सन् १८६२ ई. के अधिकार प्राप्तहो-दड कैटके बदले देश निकालेका दड देमकता है। (वीक्ली रिपोर्टर जिल्द ५ सफा ६ श्रीमती महारानी बनाम बुधुआ) दफा ३-यदि कोई मनुष्य जिसपर उपरोक अपराधोर्मेसे कोई अपगव प्रमाणित होचुका हो और फिर दूसरी बारभी वह उसी अपराधका अपराधी हो तो उमे उस अपरावका दड अविक देनके सायही साथ घेतका भी दड दिया जासकता है। ख) ब्रह्माजेरवनमे किसी २ अपराधमे जिनका वर्णन ऐक्ट सिपुर्दगी गुजारिमान व जेहल- खाना ब्रह्माजेरबनम है बेतकाभी दंड दिया जा सकता है। देखो ऐक्ट १६ सन् १८८६ ई. टा ६ जिसकी मीआद ३० जून सन् १८८७ ई० को बीतजायगा देखो दफा ८ ऐक्ट उपरोक।

(२२) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- ४-जब अपराधी कई एक अपराधोको करे जिनमे प्रत्येक अपराध सात वर्षसे कमकी कैदके दंड योग्य हो परन्तु सब अपराधोका दड मिलकर सात वर्षसे अधिक हो-जाय तो ऐसी अवस्थामें इस संग्रहकी दफा ५९ के अनुसार सब दंड देश निकालेके दंडसे नही बदला जा सकता । ( वीली रिपो- टर जिल्द ३ सफा ४४ श्रीमती महारानी बनाम तानूराम माली) (६० ) प्रत्येक अवस्था में जहाँ अपराधी दोनो प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदके कैदकी मुख्य अव-). योग्य हो वहा दंड देनेवाली अदालतको अधिकार होगा कि दंडकी स्थाओमे दंडकी आज्ञा आत्रामे यहभी आदेश करे कि, समस्त कैद कठिन हो या साधा. कुछ या समस्त साधारण या कठिन हो सकेगी। रण हो या कि उस अवधिके कुछ समय तक कैद कठिन हो. और शेष समयमें कैद साधारण रहे। दफा ४–यदि कोई मनुष्य जिसपर कोई अपराध नीचे लिखे अपराधोमेसे पहिले प्रमाणित हुआहो और फिर उसी अपराधर्मे पकडा जाकर वही अपराध प्रमाणित होवे तो उर्चित है कि, सिवाय किसी और दंडके कि जिसका वह हिंदुस्थानके दंडसग्रहके अनुसार दंडित हो उसको बैतका भी दंड दियाजावे अर्थात्- १---झूठी साक्षी ( गवाही) देना या बनाना इसप्रकार पर कि जिसका वर्णन दडसंग्रह हिंदकी दफा १९३ मे है। २-ऐसे अपराधको प्रमाणित करनेके लिये कि जिससे मृत्युदण्ड हो झूठी साक्षी देना या बनाना जिसप्रकार उपरोक्त संग्रहकी दफा १९४ मे कहा है। ३-ऐसे अपराधको प्रमाणित करनेके लिये कि जिससे देश निकालेके दंड होने की नियत - हो अठी साक्षी देना या बानाना जिसप्रकार उपरोक्त संग्रहकी दफा १९५ मे कहा है। ४---किसीका झूठा दोप लगाना कि जिससे उसकी प्रतिष्ठामे हानि पहुचे या प्रकृति विरुद्ध कोई कार्य करे जिस प्रकार उपरोक्त संग्रहकी दका २२१ व ३७७ मे. वर्णन किया गया है । ५-किसी स्त्रीका सतीत्व भङ्ग करनेके नियतसे बलपूर्वक आंक्रमण करना जिस प्रकार उपरोक्त संग्रहको दफा ३५४ मे वर्णित है। ६-जलपूर्वक स्त्री प्रसङ्ग करना जिस प्रकार उपरोक्त सग्रहकी दफा ३७५ में कहा है। ७-प्रकृतिके विरुद्ध काम करना जिसप्रकार उपरोक्त सग्रहकी दफा ३७७ मे वर्णन किया. गया है। ८-बलपूर्वक चोरी करना या डाका डालना जिस प्रकार उपरोक्त संग्रहकी दफा ३९० व ३९१ में उसका वर्णन किया है ९-बलपूर्वक ( धमकाकर ) चोरी करनेका उद्योग करना जिसप्रकार उपरोक्त सग्रहकी दफा ३९३ मे उसका वर्णन किया है। १०-बलपूर्वक चोरी करनेकै अपराधमै जानबूझकर किसीको हानि पहुँचाना जिस प्रकार उपरोक्त संग्रहकी दफा ३९४ में, उसका वर्णन है ।

तीसरा ३.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई० । (२३) (६१) प्रत्येक अवस्थामे जहा कोई मनुष्य किसी ऐसे अपराधका अपराधी प्रमाणित हो जावे कि, जिसके सम्बन्धमें वह इस योग्य हो कि उसका समस्त धनकी जन्तीका टड. धन ( जायदाद आदि । जब्त किया जावे (राज्यमें लेलिया जावे तो ऐसी अवस्थामें अपराधी किसी मालकोमी नहीं पा सकेगा सिवाय इसके किं, वह माल गव- नमेंटके लाभके लिये प्राप्त किया जावे जबतक कि, वह उस दडके बदले दूसरे ठहराये हुए दडको न भुगतले या जबतक कि, उसका दड न माफ ( क्षमा ) किया जाय । - उदाहरण । शिवाकर जिसके ऊपर गवर्नमेंट हिन्दके विरुद्ध युद्ध करना प्रमाणित हुआ इस वातके योग्य है कि उसकी समस्त सम्पत्ति जब्त की जावे-दडकी आजा होनेसे पीछे और भुगतनेसे पहिले शिव- शकरका बाप मरा और यह जायदाद शिवाकरको उस अवस्थामें मिलती कि जब उसके सबन्धम जन्ती जायदादकी कुछ आना न होती तो ऐसी अवस्थामे सपूर्ण सपत्ति गवर्नमेटको मिल्कियत होगी। १-जायदाद जब्तीकी आजा केवल उसी अवस्थामें दी जासकती है कि जब अपराध देशनिकालेके दडके योग्य हो या सात सालकी कैदके योग्य हो ( वीही रिपोर्टर-जिल्द ८ सफा ३५ फौजदारी) . - ११--समझ बूझकर स्वभावसेही चोरीका माल लेना या व्यवहार करना जिस प्रकार उप- रोक्त सग्रहको दफा ४१३ में उसका वर्णन किया गया है.। १२-जालसाजी, जिसप्रकार उपरोक्त सग्रहकी दफा ४६३ मै उसका वर्णन हुआ है। १३-- लेख ( दस्तावेज ) की जालमानी कि जिसप्रकार उपरोक्त सग्रहकी दफा ४६२ में उसका वर्णन हुआ है। १४--लेखकी जालसाजी कि जिसप्रकार उपरोक सग्रहकी दफा ४६७ में उसका वर्णन हुआ है। १५-धोखा देनेके अभिप्रायसे जालसाजी करना जिमप्रकार उपरोक्त सग्रहकी दफा ४६८ में उसका वर्णन हुआ है। १६-किसी मनुष्यको नैकनामीमें बट्टा लगाने के अभिप्रायसे जाली दस्तावेज बनाना जिस प्रकार उपरोक सग्रहकी दफा ४६९ में उसका वर्णन हुआ है। १७----घर फोडकर या बलपूर्वक घरमे घुमना जिस प्रकार उपरोक्त संग्रहको दफा ४४३ व ४४५ में उसका वर्णन हुआ है ऐसा अपराध करनेके अभिप्रायसे कि जिसका दण्ड इस दफाके अनुसार बैत द्वारा हो सकता है। १८-रातके समय घर फोडकर या बलपूर्वक अनीतिसे घरमै घुसना जिस प्रकार उपरोक्त संग्रहकी दफा ४४४ व ४४६ मे उसका वर्णन हुआ है ऐसा अपराध करनेके अभिप्रायसै कि जिसका दंड इस दफाके अनुसार बैत द्वारा हो सकता है। - (२४) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- २--जायदादको जन्तीका एक ऐसा दड है जो बडे भारी अपराधके लिये चाहिये या उन अपराधोंमें कि जो बहुतही बुरी अवस्थामें किये गये ह क्योकि यह दंड ऐसा है कि जो केवल कैदीके लियेही नहीं है बरन उसके सपूर्ण कुटुबके लिये है। (वीक्ली रिपोर्टर जिल्द १२ सफा १७ फौजदारी) (३२ ) जब किसी मनुष्य पर ऐसा अपराध प्रमाणित हो कि, जिसके बदले दंड जन्ती ऐसे अपराधि वध हो सकता है तो अदालतको यह तजबीज करनेका अधिकार योके मालकी जो मृत्यु है कि, अपराधीका कुलं धन स्थावर व अस्थावर ( मनकूला व दंड (बध), देशनिकाले- वा कैदके दड योग्य हो ) गैर मनकूला ) गवर्नमेंटमे जब्त हो और जब कि, किसी मनुष्य पर कोई ऐसा अपराध प्रमाणित हो कि, जिसके बदले देश निकालेका दण्ड या सात वर्षसे अधिककी कैद होसकती है तो अदालतको यह तजबीज करनेका अधिकार है कि, देश निका- लेके दंडया कैदकी मीआदके भीतर अपराधीके कुल धन स्थावर व अस्थावरका लगान व किराया व मुनाफा इस शर्त के साथ गवर्नमेंटमें जब्त रहे कि, अपराधीके कुटुम्ब परिवार व स्त्री बच्चोंके लिये उपरोक्त दडकी अवधिमें जो आजीविका गवर्नमेंट उचित समझे उस जाय- दादसे दे। १-हिन्दुस्थानके दंडसग्रहको दफा ६२, कि जिसमे जायदादके जब्त करनेक सवधर्म आज्ञा है केवलं उसी अवस्थामै काम आसकेगी कि जब अपराधीको देश निकालेका दडे दिया गया हो या कमसे कम ७ वर्षके लिये कैदकी आज्ञा दी गई हो। ( वीक्लो रिपोर्टर जिल्द ८ सफा ३५ श्रीमती महारानी बनाम किरपा मनई आदि ) २ सेगनजजने एक जमीदारको इस अपराध देश निकालेका दंड दिया कि, उसने एक बहका लाये हुए मनुष्यको अनुचित रीतिपर बद रक्खा और उपरोक्त दड देनेके साथही साथ. यहभी आना दी कि उसकी जमीदारीका लगान व मुनाफा जन्त किया जावे तजवीज हुई कि, इस दंडकी आना बहुतही कडी थी। (वीक्ली रिपोर्टर जिल्द १२ सका १७ श्रीमती महारानी बनाम तोतामियां) (६३ ) जहाँपर कहीं जुर्माने की सीमा नियत की गई वहां -पर उस जुर्माने की जुर्माने की तादाद. तादाद की अपराधी जिसके योग्य होगा असीम है परतु चाहिये कि अटकलसे अधिक्त न हो। . - दफा ५-उचित है कि किसी कम आयुवाले अपराधीकों जो ऐसा अपराध करे कि जिसका ड, दडसग्रहहिदके अनुसार फांसी न हो चाहे वह अपराध उससे पहलीही बार हुआहो चाहे दूसरी- वार-उसे वेतका भी दंड देना चाहिये।

तासरा २.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई.। . (२५) (६४ ) प्रत्येक अभियोगमें जिसमें किसी अराधीपर जुर्मानेका ढढ किया जाय तो जुर्माना अदा न हो) दड करनेवाली अदालत दडके साथमें आज्ञा दे सकेगी कि, नेके बदले ढडकी आजा | जुर्माना न अदा करेगा तो अपराधी इतनी अवधितक कैदमें रहेगा और यह कैट उत्त कैसे सिवाय होगी जो उस अपरावीको ढडमे की गई हो या उस कैदसे सिवाय होगी जो किसी दूसरे दडके वदले ठहराई गई हो । -जुर्माना न अदा होनेकी अवस्थामै उतनेही अवधि तकके लिये दड कैट की आजा होगी कि जो अवधि अपराधके दण्ड कैदकी चौथाईते अधिक न हो (वीली रिपोर्टर निल्द ५ सफा २ फौजदारी) २-जिस अभियोगमें देश निकालेका दंड हो उममें जुर्माना न अदा होनेसे दड कैदकी आना नही हो मकती ( वीक्ली रिपोर्टर जिल्द ७ सफा ३१) । ६५ ) यदि किसी अपराधके बदले में कैद और जुर्माना दोनोंही दड नियत जुमांना अदा न हो-) हों तो जो के जुर्माना अढा न होनेकी अवस्थामे अदालतकी नकी अवस्थामें कैदके ! आज्ञासे निश्चय हो उसकी अवधि उस कैदकी वडीसे बडी अधिमी सीमा जब कि अवधिक एक चौथाईसे अधिक न होगी जो उपरोक्त अपरा- अपराधका ढड कैट और जुमांना दोना हो। धके दढमें नियत है। -- ६६ ) जो कैद जुर्माना न अदा होनेके बदले अदालतको आज्ञासे निश्चय हुई हो जुर्माना न चुकनेकं वह उसी भाति की हो सकती है जो उस अपराधके बदले में अप- बदले कैटका प्रकार, राधीके लिये निश्चय हो सकती हो । दफा ६-जब किसी लोकल गवर्नमेटने सकारी गजट द्वारा सूचना देकर इस दफाकी गर्ताको किसी सरहद्दी जिला या देशके चारों ओर जगलमे जो उपरोक्त गवर्नमेंटके अधिकारमें हो प्रचलित किया जाय तो जो मनुष्य सूचना दिये जानेके पश्चात् उपरोक्त जिलों आदिम दफा ४ के अपराधोमसे किसी अपराधको करे-वो उचित है कि किसी और दडके बदले जिसका वह दडमग्रह हिंदके अनुमार दडके योग्य हो उसे वैतका दइ दिया जावे । दफा ७-(ऐक्ट न० १० सन् १८८२ ई. के अनुसार मसूख हो गई) दफा ८-(ऐक्ट न० १० सेन् १८७२ ई. के अनुसार मसूख होगई) दका ९-१०-(ऐक्ट न० १६ सन् १८७४ ई. के अनुसार मसूख होगई ) दफा ११-१२ (ऐक्ट न० १० सन् १८७२ ई० के अनुसार मसूख होगई ) (२६) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- । . ६६७) यदि अपराधके बदलेमे केवल जुर्मानेहीका ‘दड नियत हो तो वह जब कि अपराधका] कैद जो अदालत जुर्माना न अदा होनेके बदले ठहरावेगी दंड केवल जुर्माना है उस साधारण कैद होवेगी और उस कैदकी अवधि जो जुर्माना अवस्थामें जुर्माना न अ. टा होनेसे कैटकी अवधि, न अदा होनेकी अवस्थामे अदालतकी आज्ञासे निश्चय हो नीचे लिखी हुई सीमासे अधिक न होगी, अर्थात् जब जुर्मानेकी नादाद ६०) रु० से अधिक न हो तो दड कैद दो महीनेसे अधिक न हो। जब जुर्माना १-०० ) ३० से अधिक न हो तो दह कैदकी अवधि ४ महीनेसे -अधिक न हो और शेप अवस्थामे कोई अवधि जो छः महीनेसे अधिक न हो। १--निस अपराध का दड कैद और जुर्माना दोनो या केवल जुर्माना का हो सकता है और मजिस्ट्रेट केवल जुर्माने के दडकी आज्ञा दे तो जुर्माना न चुकनेके बदले कैदकी अवधि दफा ६७ के अनुसार नियत की जावेगी न कि दफा ६५ के अनुसार (वीक्ली रिपोर्टर जिल्द १० सफा ३० फौजदारी) जो कैद जुर्माना अदा न होनेकी अवस्थामे ठहराई गई हो वह उसी जुर्माना अदा कर समय समाप्त हो जायगी जब कि जुर्माना अदा किया जाय देनेपर ऐसी कैद समाप्त या कानूनकी रीतिसे वसूल कर लिया जाय । होजायगी, (६९ ) यदि उस कैदकी अवधि व्यतीत होनेसे पहिले जो जुर्माना न चुकनेको अव- व्यतीत होना इस कंद- 1 स्थामे नियत हो कोई ऐसा भाग जुर्मानेका चुका दिया जाय या का जब कि जुर्मानेका कुछ वसूल कर लिया जाय कि जितनी अवधि फैदकी व्यतीत होगई भाग चुका दिया जाय. हो वह शेप, विना जुर्माना चुकेसे समीभूत हो तो वह कैद उसीसमय समाप्त होजायगी। (६८) उदाहरण। यदि शिवशकर पर सौ रुपये जुर्माने का दड और जुर्माना न चुकने की अवस्थामे चार मासके लिये कैदकी आजा हुई हो तो इस अवस्थामें यदि अवधि का एक महीना बीतनेसे पहिले ७५) रु. चुकाये,जावे या वसल कर लिये जावे तो पहिला महीना बीततेही शिवशकर छूट जायगा और यदि पहिला महीना बीत जानेके समय या उसके पश्चात् शिवशकरके कैद रहनेकी अवस्थामे ७५ ) रुपये चुकाये जाय तो शिवशंकर तुरत ही छूट जायगा और यदि अवधिक दो महीने बीतनेसे पहिले जुर्मा नेमें के ५०) रु. चुकाये जॉय या वसल कर लिये जाय तो दो महीने बीतते ही शिवशकर तत्कालही छूटजायगा और यदि इन दो महीनोके बीततेही या उसके पश्चात् शिवशंकरके कैद करनेको अवस्थामे ५०) रु. चुकाये जॉय या वसूल कर लिये जॉय तो शिवशंकर उसी समय छूट जायगा ।

तीसरा ३.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई०। (२७) ) जुर्माना या उसका कोई माग जो वसूल होनेसे शेप रहगया हो दडाजाकी 'जुमांना ६ वर्षक तारीखसे छ. वर्षके मीतर हर समय वसूल किया जा सकता है भीतर या कंदकी अवधि और यदि अपराधी छ वर्षसे अधिक दडके योग्य हो तो वह उस में किसी समय वसूल किया जा कसका है. दडकी अवविके व्यतीत होनेसे पहले प्रत्येक समय वमूल किया जा सकता है। और अपराधीके मरजानेसे कोई माल जो उसके मरनेके पश्चात् कानूनानुसार ऋणके अपराधीक मरजा झगडे फंस सकता है इस दायित्वसे नहीं छूट सकता। नेसे उसकीजायदाद नहीं छूटती १ हिन्दुस्तानके दडसग्रहकी दफा ७० के अनुसार जुर्मानका रुपया अपराधीके अनस्थावर (गैर मनकूला) धनमे उसको जीवित अवस्याम या उसके मरनेके पश्चात् किसी प्रकारसे भी नहीं वसूल हो सकता, केवल स्थावर धनसे वसूल हो सकता है। (रिपोर्ट हाईकोर्ट बबई जिल्द ५ सफा ६३) २- जुमांना प्रत्येक अवस्थामे वसूल कर लिया जावेगा चाहे अपराधीने जुर्माना न देनेके बदले दड कैदका भाग लिया हो, क्योकि यह एक दण्ड अदालतके सवधर्म है (वीली. रिपोर्टर जिल्द : सफा ६१) ७१ ) जिस अवस्थामें कोई काम, जो अपराध है, कुछ टुकडोसे बना हो और इन अपराधके ढडकी अवधि ] टुकडोंका प्रत्येक टुकडा जो स्वयही अपराध हो तो अपराधीको उन तो कई अपराधों युक्त है | अपराधोमेसे एकसे अधिक अपराधका दह न दिया जायगा सिवाय उस अवस्था में कि, जब ऐसे दडकी आज्ञामें स्पष्ट लेख हो- जब कोई काम ऐसा अपराध हो जो किसी ऐसे कानूनके जो उस समय प्रचलित हो दो या अधिक विरुद्ध लक्षणोमे सयुक्त हो जिसमे अपराधोका वर्णन या उनके दडोंका लेख हो या जव कुछ काम जिनमेसे एक या एक एकस -अधिकका सग्रह स्वय ही अपराध है, सबके सब इकट्ठा होकर कोई और अपराध होजावे, तो अपराधीको उस दडसे अधिक कडा दड न दिया जायगा जिसको अदालत, जो उसके सवधमें विचार करती है, ऊपर लिखे अपराधों से किसी एक अपराधके सवधमें ठहरा सकती है। उदाहरण। (क) शिवगकरने रमाशकरको पचास लकडिये मारी तो इस अवस्थाम सभव है कि, गिव- शंकरने जान बूझकर रमाशकरको दुःख पहुचानेका अपराध इस सब मारपीटके द्वारा किया हो और यह भी कि चाहे उन चोटोमेसे जिनको मिलाकर वह सब मारपीट गिनी गई प्रत्येकके द्वारा किया हो-इस अवस्थामे यदि शिवशकर प्रत्येक मारके बदले दडके योग्य होता तो वह पचास वर्षतक कैद (२८) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- - रह सकता था, अर्थात् प्रतिमारके लिये एक वर्ष परन्तु वह कुल मारपीटके बदले केवल एकही दडके योग्य होगा। ख) फिर जब कि शिवशकर रमाशकरको मार रहा है उमाशंकर हस्ताक्षेप करे और शिव- शकर उमाशकरको जान बूझकर मारे तब जो कि वह मार जो उमाशकर पर पडी है, उस कामका कोई भाग नहीं है जिससे शिवशकरने रमाशकरको जान बूझकर कष्ट पहुंचाया-इसलिये शिवशंकर रमाशंकरको जान बूझकर कष्ट पहुचानेके अपराधमे एक दडके योग्य होगा और उस मारके अपराधर्म- जो उमाशकर पर पड़ी दूसरे दडके योग्य होगा । १--जब कि एकसे अधिक अपराध प्रमाणित हो तो प्रत्येक अपराधके सबधमे विचार करना चाहिये चाहे दफा ७१ अभियोगसे संबंध रखती हो या नहीं और दफा ७१ के अनु- सार प्रत्येका अपराधका विचार होना चाहिये ( इलाहाबाद जिल्द १० सफा ५८) -२--जब किसी मनुष्यपर घर फोडने (सेंध लगाने) का अपराध दफा ४५७ व चोरीका अपराध जो उसी समय की गई दफा ३८० दड्सग्रह हिदके अनुसार लगाया जावे तो वह "इस दफाके अनुसार एकही अपराधका अपराधी ठहराया जावेगा (बबई हाईकोर्ट रिपोर्ट जिल्द १ सफा ८७) ३-~~चोरी और चोरीके मालको लेजाना और रख छोडना एकही अपराध है इसलिये उनका दंड पृथक् २ नहीं हो सकता । (वीक्ली रिपोर्टर जिल्द २ सफा ६३ ६३) ४~-अपराधीको मनुष्यवधके अपराधमे व कानूनके विरुद्ध इकट्ठा हुए मनुष्योके समूहमें जानेके अपराधमे पृथक् २ दडकी आना दी गई-परन्तु हाईकोर्टके विचारमें दोनो अपराध एक ही अपराध समझे गये (क्योकि पीछेका अपराध केवल पहले अपराधकी साभीकी मांति था) इस लिये इस पिछले अपराधमें अपराधी दडरहित किया गया ( वीक्ली रिपोर्टर जिल्द ७ सफा १३ फौजदारी) ५- एक मनुष्यने दूसरे मनुष्यपर झूठा दोप लगाया और अभियोग चलनेके समय उस दोषकी दृढतामे झूठी गवाही भी अदालतमे दी-हाईकोर्टकी यह राय हुई कि अपराधीको झूठा दोप स्थिर करने और झूठी गवाही देनेके अपराधमे अलग २ दड होना चाहिये । ( वीक्ली रिपोर्टर जिल्द ७ सफा ५९ फौजदारी) ६–एकही गवाहीमें चाहे कितने ही झूठे बयान, किये जावे परन्तु उनके सबधमै झूठी गवाही देनका एकही अभियोग चलेगा झूठी गवाही देनेके अपराधाकी तादाद (संख्या) झूठ बयानोसे जो एकही गवाहीमें हो नही बढ सक्ती (मदरास हाईकोर्ट रिपोर्ट जिल्द ६- अपील सफा २७) ७~-अपराध ले भागनेका दफा ४६३ के अनुसार और फिर बेचने अनसमझ (नाबा- लिग ) का दका ३७२ दडसग्रह हिदके अनुसार अलग २ अपराध हैं और अलग २ दडके याग्य हैं (वीली रिपोर्टर जिल्द ७ सफा १०४) तीसरा ३.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई०॥ (२९) ८-जब कुछ अपराध अपराधी पर प्रमाणित हो तो उसको एक अपरावका अपरावी ठहराना और दूसरे अपराधसे वरी करना उचित नहीं चाहे अपराध एक दूसरेसे सम्बध ही क्यो न रखते हाँ (रिपोर्ट हाईकोर्ट बम्बई जिल्द ५ सफा २) (७२) प्रत्येक अवस्थामें जहा यह सिद्धान्त होवे कि कई अपराधोमेंसे कि जिन उस मनुष्यका दड का वर्णन फैसलमें हो किसी एक अपराधका कोई मनुष्य अपराधी जो कई अपराधोमेसे एकका अपराधी पाया हुआ है परतु इसका सदेह रहजाचे कि वह मनुष्य उन अपराधोमेसे जावे जब कि आगासे कौनसे अपराधका अपराधी है तो अपराधीको उस अपराधके ब- लिखागया हो कि निश्चय दलेमे दह दिया जायगा जिसके लिये कमसे कम दढ निमत नही इन अपराधोंमेसे किसका अपराधी है। किया गया है इस नियमसे कि उन सब अपराधोंके लिये एकही दह नियत नहीं किया गया हो। ( ७३) जब किसी मनुष्यपर कोई ऐसा अपगर प्रमाणित हो जिसके वढले एकानवामका ढड (कैट) इस संग्रहके अनुसार अदालतको कढी कैदके दडकी आज्ञा देनेका तनहाई) अधिकार है तो अदालत अपने दडकी आजामें यह आज्ञा देसकती है कि अपराधी निश्चय की हुई कैदको अवधिमेंसे किसी एक अवधितक या कई अवधितक कि जिसका पूरा समय तीन महीनेसे अधिक न हो नीचे लिखे अनुसार एकात वासके दड ( केंदतनहाई ) में रहे. अर्थात्,- यदि कैदकी अववि छ. महीनेसे अधिक न हो तो कैंट तनहाई एक महीनेम अधिक न होगी, यदि कैदकी अवधि छ• महीनेसे अधिक और एक सालसे अधिक न हो तो कैट तनहाई की अववि दो महीनेसे अधिक न होगी और यदि कैठकी अवधि एक वर्षस अधिक हो तो कैद तनहाई तीन महीनेसे अधिक न होगी। १-कैद तनहाईका दड पुराने अपराधियोंके लिये बहुत ही लाभदायक है मुख्य करके उन अपराधियोंके लिये जो मालके अपराधोमें दडित किये जावे साधारण रीतिपर कैद तनहाईका दंड उन मनुष्योके योग्य नहीं है जो मनुष्यवधके दडके योग्य अपराधी ठहराये जावे ( सी. पी, ला, रि. जिल्द ५ सफा ४८ फौजदारी) (७४) एकातवासका दढ करनेमे यह अववि की एक बार चौदह दिनसे अधिक न होगी और दोबंरके एकातवासके वीचका अतर उपरोक्त अवधिक एकातवाम की अवधि समयसे कम न होगा और जब कि निश्चय की हुई कैठकी अवधि तीन महीनेसे अधिक हो तो कुल निश्चय की हुई कैदको अवधिमैसे किसी एक महीनेमें एकात- वास सात दिनसे अधिक न होगा और एकातवासकी दो भवधियोके वीचका अंतर उपरोक्त अवधिक समय (मुहत ) से कम न होगा। .

(३०) हिन्दुस्थानका दुण्डसंग्रह। [अध्याय- (७५ ) यदि किसी मनुष्यपर कोई. ऐसा अपराध प्रमाणित होचुकाहो जिसके उन मनुष्योंका दड बदलेमे इस सग्रहके अध्याय १२ या १७ के अनुसार दोनों प्रकार- जो पहले किसी ऐसे अप- राधके अपराधी प्रमाणित मेंसे किसी प्रकारकी तीन वर्ष या अधिकको कैद नियत है और वह होचुके हैं जिसके बदलेमें मनुष्य फिर किसी ऐसे अपराधका अपराधी हो, जिसके बदलेमें तीन वर्षकी कैद है और किसी उपरोक्त अध्यायके अनुसार दोनों प्रकारमेंसे किसी प्रकारको फिर वैसेही अपराधके अपराधी प्रमाणिन हुए हों तीन वर्ष या अधिकको कैद नियत है तो ऐसे प्रत्येक नये अपराधके बदले उस अपराधीको आजन्म देश निकालेका दंड या दोनों प्रकारमेसे किसीप्रकारकी कैदका दंड जिसकी अवधि दश वर्पतक हो सकती है होसकता है । १-यदि एकहीसे कई अपराध एकही समयपर हो तो दफा ७५ के अनुसार कार्रवाई नही की जा सकती । (वीली रिपोर्टर जिल्द ६ सफा ९०) २-हिन्दुस्थानके दडसग्रहकी दफा ७५ के अनुसार अधिक दंड उस समय दिया जावेगा कि जब अपराधी इस संग्रहके प्रचलित होने उपरात अध्याय १२ व १७ के अनुसार दहित हुआहो (वीकी रिपोर्टर जिल्द ३ सफा १७ फौजदारी) अध्याय चौथा ४. साधारण छूटके वर्णनमें। (७६ ) कोई काम अपराध नहीं है जिसको ऐसा मनुष्य करे जिसपर उसका करना काम जिसको कोई कानूनानुसार उचित है या जिसको वह मनुष्य करे कि जो ऐसा मनुष्य करें जिसपर उसका करना कानूनानु किसी वृत्तातकी यथार्थ दशाको न समझकर न कि कानू- सार उचित हो-या जिस वृत्तांतको यथार्थ न समझ नकी गलत समझीके कारण, ,नेक नियतीके साथ यह निश्चय लेनेसे अपने ऊपर उसका | करताहो- कि रस. कामका करना उसपर कानूनानुसार करना कानूनानुसार उ चित जानताहो, : उचितहै। उदाहरण। (क) यदि शिवाकर कि जो सिपाही है अपने अफ्सरकी कानूनानुसार आज्ञासे मनुष्यों के एक समूहपर बदूक चलाये तो वह किसी अपराधका अपराधी न होगा। (ख) यदि शिवशकरको कि जो किसी कोर्ट आफ जष्टिसका ओहदेदार है उस कोर्टसे रमा- शकरके कैद करनेकी-आजा मिले और ठीक २ जांचके पश्चात् उमाशंकरको रमागकर जानकर का करे तो शिवशकर किसी अराधका अपराधी न होगा। . - चौथा ४.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई० । (३१) - । (७७) कोई काम अपराध नहीं है जो कोई जज अदालतका काम करते हुए किसी जजका काम जब कि ऐसे अधिकारको काममें लाकर करे कि जो उसे कानूनानु. वहअदालतका काम कर सार प्राप्त है या जिसके सम्बन्धमे वह नेक नियतीके साय राहो. यह निश्चय करता हो कि उपरोक्त अधिकार उसे कानूनानु- सार प्राप्तहै। (७८) कोई काम अपराध नहीं है जो किसी कोर्टआफजस्टिसकी किसी काम जो किसी कोर्ट तजवीज या आज्ञाके अनुसार किया जावे या जिसके करनेकी आफजस्टिसकी तजवीज | आज्ञा उस तजवीज या हुक्मसे पाई जाती हो, इस दशा में (विचार) या आजा- कि उपरोक्त काम उस समयके भीतर कियाजाय जब कि नुसार किया जाव. वह तजवीज या आज्ञा प्रचलित रहे, चाहे उस कोर्टआफ- जस्टिसको ऐसी तजवीज या आज्ञा का अधिकार न हो परतु काम का करनेवाला मनुष्य नेक नियती । शुद्धभाव से निश्चय करता हो कि कोर्टआफजस्टिसको उस प्रकारका अधिकार प्राम। ७९ , कोई काम अपराध नहीं है जिसको कोई ऐसा मनुष्य करे जिसका काम जो किमी ऐस मनुष्यमे हो जो कानुना- उसका करना कानूनानुसार उचित है या वह मनुष्य करे नुमार उमके क्रनेका जो किसी वृत्तातका यथार्थ अभिप्राय न समझनेसे, न कि अधिकारी है या जो वृत्तान अशुद्ध समझने । कानूनकी गलत समझीके - कारण, नेक नियतीके साथ अपने अपने को कानूनानुमार को उस कामके करनेका कानूनानुसार अधिकारी निश्चय उमके करनेका अधिकारी समझताहो. करता है। उदाहरण । यदि शिवशकर रमाशकरको ऐसा काम करते देखे जो शिवशंकरके निकट जावधात जानपहे और शिवशकर अपनी बुद्धिको यथासम्भव शुद्ध भावसे कामम लाकर उस अधिकारको वर्तनमे जो कानूनानुसार सब मनुष्यों को प्राप्त है कि घात करते हुए घातकों को कैद करे रमाशंकर को इस लिये कैंदकरे कि उसको किसी यथोचित अधिकारी हाकिमके सन्मुख लाये तो इस अवस्थामे शिवाकर उस कामका अपराधी न हुआ, चाहे यह बात निश्चय, होजावे कि रमाशकर वह काम अपनी रक्षाके लिये कर रहा था। १-यदि कोई चौकीदार किसी मनुष्यको कैद करनेमें जिसको वह शुद्ध भावसे चोर जानताही कुछ सस्ती करे या हानिभी पहुचावे तो वह इस सग्रहको दफा ७९ के अनुसार किसी अपराधी का अपराधी नहीं ठहराया जा सकता (वीही रिपोर्टर जिल्द २ सफा ९ श्रीमती महारानी बनाम परताप चौकीदार) (३२) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- .(८०) कोई काम अपराध नहीं है जो देवात् या कुभाग्यसै बिना किसी अपराध नांतिपूर्वक काम कर- योग्य नियत या समझबूझकर किसी उचित कामके करनेमें होजाधे नेमे हठात् कुछका कुछ होजाना. . और वह काम उचित रीति व नीतिपूर्वक यथोचित सावधानी और चैतन्यताके साथ कियाजावे। उदाहरण। यदि शिवशकर कुल्हाडी से काम करता हो और फल निकल कर किसी मनुष्यके जालगे जो समीपही खडा हो, और वह मरजावें तो इस अवस्थाम शिवशकर का यह काम अपराध योग्य नहीं जब कि शिवशंकरकी औरसे यथोचित सावधानी में कुछ कमी न हुई हो। (८१) कोई काम केवल इस कारणसे अपराध न होगा कि की यह जानकर करे काम जिस से हानि कि उससे कोई हानि होनी सम्भव है बशर्ते कि उस कामके करने पहुँचना सम्भव है परंतु के प्रयोजनमें हानि पहुँचाने की नियत न हो और वह काम किसी कुप्रयोजनके विना और दूसरी हानि रोकने शुद्धभाव के साथ माल या जानको किसी दूसरी हानिसे बचाने या के लिये किया जावे. रोकनेके अभिप्रायसे किया जावे । स्पष्टीकरण-ऐसी अवस्थामें यह बात निश्चय करनी होगी कि वह हानि, जिसने रोकने या बचानेका अभिप्राय था इस प्रकारका और ऐसी सभावित थी कि ऐसे कामके । जानेसे जोखिमका उत्पन्न करना उचित या क्षमाके योग्य हो सकता है या जब कि अपराधी जानता था कि उस कामके करनेसे हानि उत्पन्न होना सम्भव है। उदाहरण । क) यदि शिवशंकर, कि जो एक धुऍवाले जहाजका कप्तान है, हठात् बिना किसी अप राध या, अचैतन्यताके एक ऐसे स्थान पर पहुंचा कि जब तक वह अपने जहाज को रोके तबतक राम- बाण नावको जिसमे २० अथवा ३० यात्री थे अवश्य टक्कर लगती जान पडी और टक्कर बचानेका केवल यही उपाय था कि शिवशंकर अपने जहाजका मुह दूसरी और फेर देता परतु मुंह फेरनेसे इस बातकी हानि यी कि और एक नाव रुद्रशरको कि जिसमे केवल दोही यात्री थे टक्कर लगती तथापि उस का वचनाभी संभव था, यहां यदि शिवशकर रुद्रारनावको टक्कर देनेके अभिप्राय बिना और राम- बाणके यात्रियो को टक्कर लगने की आपत्तिसे बचाने के निमित्त अपने जहाजका मुह शुद्ध भावसे फेर दे तो वह किसी अपराधका अपराधी न होगा, चाहे उसके इस कामसे जिसको वह जानता था कि इस से रुद्रशर नाव को टक्कर लगना अति सम्भव है रुद्रगर को टक्करभी लगजाती, जब कि यह बात प्रमाणित हो जाये कि वास्तवमें वह हानि, कि जिस्से बचाना उसकी नियतमे था ऐसी थी कि उसके कारणसे रुद्रारको टक्कर दिलाना क्षमा के योग्य था। (ख) यदि बडी भारी आग लगी हो और शिवशकर इस अभिप्रायसे घर गिरावे कि आग न फैलने पावे और वह यह काम शुद्धभावके साथ मनुष्योके प्राण व धन बचानके अभिप्रायसे करे इस अवस्थामे यदि यह बात प्रमाणित हो कि, वह हानि जिसकी रोकका अभिप्राय था.. 1 चौथा ४.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई०। इस प्रकारकी और ऐसी संभवित थी कि उससे शिवशकरका काम क्षमाके योग्य हुआ तो शिवशकर किसी अपराधका अपराधी न होगा। १-एक मनुष्यने अपने ताडीके बासनामे धतूरेका रस (अर्क) यह जानकर कि, यदि मनुष्य उसको पियेगा तो उसको हानि पहुचेगी, चोरको पकडने अभिप्रायसे जो उसकी ताडी चुरा- कर ले जाता था, भरदिया, उम अर्कको कुछ सिपाहियोने छिपाकर बेचनेवालेसे मोल लेकर पी लिया और उससे उनको हानि पहुंची-तजवीज हुई कि उपरोक्त मनुष्य हिदुस्थानके ढडसग्रहकी दफा ३३८ के अनुसार दडके योग्य या दफा ८१ म लिखेहुए हुक्मोसे वह दडसे नहीं बच सकता (रिपोर्ट हाई- कोर्ट बबई जिल्द ५ सफा ५९) सातवर्षकी अवस्थासे ( ८२ ; कोई काम जो सात वर्षसे नीचेको अवस्थाके नीचेके बालकका काम, बालकने किया हो अपराध न होगा। (८३) कोई काम अपराध नहीं है जो सात वर्षसे अधिक और वारह वर्षसे कम अव- सातवर्पसे ऊपर और बारहवसे नीचेकी अव- स्थाका बालक करे जव कि उसकी समझ इतनी पकायतीको स्थाके बालकका काम न पहुँची हो कि वह उस कामके गुण और उसके फलकी बुराई जिसे उचित बुद्धि न भलाईको समझसके। हुई हो. १-एक कम उमर लडकेने एक हार १॥) रु० मूल्यका चुराया और एक दूसरे मनुष्यके हाथ )-) मे वेवा ल्डका इस कारण छोडा गया कि दडसग्रह दिकी दफा ८३ के अभिप्रायसे उसकी धुद्धि पकायतीको नहीं पहुची थी, मोल लेनेवाला ठडसग्रह हिंढकी दफा ४४१ के अनुसार दोपी ठहराया गया क्योंकि उसने जान बूझकर चोरीका माल लिया। (६० ला. रि. मदरास जिल्द ६ सफा ३७३) (८४) कोई काम अपराध नहीं है जिसको ऐसा मनुष्य करे जो करते समय अपनी उस मनुष्यका काम | बुद्धिके बिगाडके कारण अपने कामका गुण या यह जाननेके जिसकी बुद्धि विगडी हो. [ योग्य न हो कि जो वह कर रहा है अनुचित या कानूनके विरुद्ध है। १-अपराधीने अपने दो लडकाका कुल्हाडीसे काट डाला, इस अपराधका कारण यह बयान किया गया है कि जब वह ज्वर (बुखार) मे पड़ा हुआ था उसे उसके बच्चोंके चिलानेका गब्द बुग जान पडा-यह भी बयान किया गया था कि ज्वरके कारण उसके स्वभावम अन्तर आगया था और उसको शब्द मला नहीं लगता था, परन्तु यह प्रगट नहीं हुआ कि अपराव करनेके समय अपराधी अचैतन्य (बेहोश ) था--अपराधीने मन्त्रा वृत्तान्त छिपानेकी कोई इच्छा नहीं प्रगट की-बरन प्रत्येक ३ हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- - अपराधको पूरा २ स्वीकार किया-हाईकोर्टने यह तजवीज की कि जिस अवस्थामें अपराधी अपने कामके गुणको जानता था तो उसके संबंधमे विचार लेना चाहिये कि वह अपने कामके दंडको भी जानता था इसलिये वही भातपातका अपराधी है । ( इ. ला. रि० बबई जिल्द १० सफा ५१२) २-कैदीने एक मनुष्यको लाठीसे मार डाला और जब वह पहली बार देखा गया तो लागके आसपास अपनी लाठी घुमाता फिरता था और जब दूसरी बार देखा गया वो एक पेडके नीचे जहां एक घोडा बंधा हुआ था "हुश हुश" करता था-थोडी देरके पश्चात् उसने कुछ मनुष्योपर आक्र- मण ( हमला) करके उनके संदूक तोड डाले और उनका असबाब गिरा दिया अफ्सर पुली. सने कि अपराधी जिसकी रक्षामे था बयान किया कि वह कभी तो सावधान हो जाता था और कभी असावधान (पागल ) विचारके समय वह सावधानीकी बाते करता था परन्तु आकृतिसे व्याकुल जान पडता था, इसलिये हाईकोर्टमे छूट गया ( वीक्ली रिपोर्टर जिल्ट ७ सफा ४२) ३-अपराधीने अपने लडकेको एक देवताके आगे मारडाला और स्वयं अपना गला काट- कर उस दैवता पर चढानेका उद्योग किया और एक दिनके पश्चात् पकडा गया, परन्तु वह बोल न सकता था इसलिये उसने यह (लिख दिया-मेरा लड़का मंगलके दिन जी उठेगा-मैन चढावा माना था कि यदि मेरे लड़का उत्पन्न होगा तो उसको गङ्गाकी भेट करदूंगा और पूजा करूगा-यद्यपि लडका तो उत्पन्न हुआ परन्तु उसके साथ धन नहीं आया, इसलिये मैने उसको मार डाला यह भी प्रमाणित हुआ कि उपरोक्त अपराधी नशेकी अवस्थामे बहुतही सावधान रहता था, परन्तु कमी उसकी बुद्धि न बिगड़ी थी और विचारके समय उसने कियेहुए अपराधसे इन्कार किया इसलिये अपराधी समझा जाकर दण्डित हुआ । (वीक्ली रिपोर्टर जिल्ट ७ सफा १००) (८५) कोई काम अपराध नहीं है जिसको ऐसा मनुष्य करे जो करते समय नशेमें उस मनुष्यका काम होनेके कारण अपने कामका गुण या यह जाननेके योग्य न को अपनी इच्छाके वि- रुद्ध दिये हुए नशेके , हो कि जो वह कररहा है अनुचित या कानूनके विरुद्ध है-उस, कारण विचार करनेको अवस्थामें कि जब वह पदार्थ जिससे उसको नशा हुआ उस मनु- असमर्थहो. ध्यके अनजानमे या इच्छाके विरुद्ध उसे दियागयाहो । यदि अपराधी स्वय ही अपनेको नशेकी अवस्थाम करले तो अपराधसे बचनेके लिये पूरा प्रमाण नहीं है । ( वीक्ली रिपोर्टर जिल्द ५ सफा ७९ फौजदारी) (८६ ) जिन अवस्थाओंमें कोई किया हुआ काम अपराध नहीं है, सिवाय उस अपराध जिसमे वि. अवस्थामें कि जब वह किसी विशेष ज्ञान या प्रयोजनसे किया गया शेप जान या प्रयोजन अवश्य हो और जिसको । हो, उन अवस्थाओंमें उप्त मनुष्य के साथ, जो नशेकी अवस्थामे इस वह मनुष्य करे जो कामको करे उसीप्रकार वर्ताव किया जायगा कि मानो उसको नशेमे हो. वही ज्ञान था जो उसको नशा न होनेको अवस्थामे होता, सिवाय इसके कि वह . जो काम चौथा ४.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई० । पदार्थ जिससे उसको नशा हुआ उस मनुण्यक अनजान या इन्छाक विन्द्ध उनको दियागया हो। ८७) जिस कामके करनेसे मृत्यु या अधिक हानिका अभिप्राय न हो और जिसके काम जिससे मृत्युया करनेवालेको यह जानकारी न हो कि उस कामसे मृत्यु वा अधिक अधिक हानि पहुँचनेकी नियत न हो और न हानि होना सम्भव है, नो वह काम किमी ऐमी हानिके कारण अप- उसका होना सम्भव जान राव न होगा जो उस कामसे अठारह वर्ष से अधिक उमरवाले किसी पडे और जो प्रमन्नता पूर्वक किया गया हो. मनुष्यको पहुँचजाय या जिसका ऐसी उमरकं किसी मनुष्यको पहुँ- चाना करनेवालेकी नियतमें होवे-जब कि, उस मनुष्यने हानि उठानेमे अपनी प्रसन्नता प्रगट की हो, और न ऐसी हानिके कारण वह काम अपराध होगा जिसके पहुंच जानेका सम्भव ऐसी उमरके किसी मनुष्यको करनेवालेकी जानकारीमें हो जब कि, वह मनुष्य ऐसी हानि उठाने पर सम्मत हुआ हो- उदाहरण। यदि शिवशकर और रमाशकर मन बहानेके लिये परस्परमें पटा खेलनेर समत हो तो इससे यह बात समझी गई कि पटा खेल्ने जो कुछ हानि विना पटके किसीको होजाय उसका सहना दोनोने स्वीकार किया-शिवशकरने जब कि यह बिना कपटके खेल्ता या रमाशकरको चोट पहुंचाई तो शिवशकरने कुछ अपराध नही किया । (८८) कोई काम, जिसके करनेसे मृत्युका अभिप्राय न हो किसी ऐसी हानिके कारण काम जिससे मृत्युका अपराध नहीं है जो उपरोक्त कामसे ऐसे मनुष्यको पहुँचे या ऐसे आभिप्राय न हो किसी मनुष्यको जिसका पहुंचाना करनेवालेकी नियतमें हो या ऐसे मनुष्य के लामके लिये उसकी प्रसन्नता पूर्वक मनुष्यको जिसके पहुंचनेका इहतिमाल ( सभव ) करनेवालेकी जान- शुद्धभावसे किया गया हो | कारीमे हो जिसके लामके लिये शुद्धभावसे उपरोक्त काम किया जावे और जिसने इस हानि या उपरोक्त हानिके ज्ञानआघातको उठानेके लिये अपनी प्रसन्नता प्रगट की हो। उदाहरण। शिवशकर एक डाक्टरने यह बात जान बूझकर कि अमुक चीर फाडते रमाशकरकी मृत्यु, जो एक बडे रोगमै फंसा हुआ है, होना संभव है परन्तु उसके मृत्युकी इच्छा न करके बरन शुद्ध भाक्से उसके लामकी इच्छासे उसी चीर फाडका वर्ताव रमाशकरकी प्रसन्नतासे किया तो शिवशंकर किसी अपराधका अपराधी नहीं है।

(३६) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- . (८९ ) जो काम शुद्ध-भावसे किसी मनुष्यके लाभके लिये, जिसकी आयु १२ व- काम जो नेक निय.] से कम हो अथवा जो सिडी हो उसका स्वामी या वह मनुष्य कि, तीसे किसी लडके या सिडी मनुष्यके लाभके ! जिसकी रक्षामें उपरोक्त मनुष्य है करे, या उस स्वामी या रक्षककी लिये स्वामीसे या स्वा- आज्ञासे वह काम किया जावे चाहे वह आज्ञा प्रगट रीतिसे दी मीकी प्रसन्नतासे किया गया हो, गई हो या अप्रगट रीतिसे-तो उस हानिके कारण जो उस कामसे उस मनुष्यको पहुँचे, या जिसका पहुँचना करनेवालेकी नियतमें हो या उसकी जानमें हो कि, इस कामके करनेसे हानि पहुँचना सम्मत्र है, वह काम नीचे लिखे नियमानुसार अपराध न गिनाजायगा। प्रथम-यह छूट अभिप्राय पूर्वक किसीकी मृत्यु करने या मृत्यु करानेके उद्योगसे सम्बन्ध न रक्खेगी। दूसरे-वह छूट किसी ऐसे कामके करनेसे सम्बध न रक्खेगी जिसको करनेवाला जानता हो कि, इससे मृत्युका होना अति समवित है और जो किसी दूसरे अभिप्रायसे किया जाय सिवाय इस अभिप्रायके कि, उससे मृत्यु या मारी दुःखकी रोक हो या उससे किसी भारी रोग या दुर्बलताकी औषधि हो। तीसरे--यह छूट जानबूझकर मारी.दुःख पहुँचाने अथवा पहुँचानेका उद्योग करनेसे सम्बन्ध न रक्खेगी सिवाय इसके कि वह काम मृत्यु या मारी दुःखकी रोक या किसी भारी रोग या दुर्बलताके मिटानेके अभिप्रायसे किया जाय । चौथे---यह छूट जिस अपराध करने पर लागू नहीं है, उसके करनेकी सहायता पर भी लागू न होगी। उदाहरण । यदि शिवशंकर शुद्धभावसे अपने लडकेके लाभके लिये उस..लडकेकी विना प्रसन्नता पथरी निकलवानेकै अर्थ-डाक्टरसे उस पर डाक्टरी वर्ताव कराये, यह जानकर कि उस डाक्टरीके वर्तावमे लडकेका प्राण जाना संभव है परंतु यह नियत न करके कि वह काम उस लडकेकी मृत्युका कारण हो तो शिवशंकरसे यह छूट सम्बंध रक्खेगी, क्योकि लडकेका आरोग्य होना शिवशंकरका अभिप्राय था। (९०) जो सम्मति किसी मनुष्यने हानिके भयसे या किसी वृत्तांतको यथार्थ न सम्मति जो डर या समझनेको अवस्थामे दी हो और उस कामका करनेवाला यह जान- अनसमझीकी अवस्थामें ता हो या जाननेका कारण रखता हो कि वह सम्मति उस डर या दी गईहो. अनसमझीके कारणसे दीगई थी तो वह सम्मति ऐसी सम्मति नहींहै जैसी कि इस समहकी किसी दफाका अभिप्राय है और- - चौथा ४.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई० । (३७) न उस मनुष्यकी रजामदी जो सिडी या नशेके कारण उस कामका गुण लडके या सिडीको और उसका फल नहीं समझ सकता, जिसके सबधमे वह अपनी सम्मति. रजामढी प्रगट करता है और न उस मनुष्यकी रजामदी जिसकी आयु बारह वर्षसे कम हो सिवाय इसके कि लेखमे इसके विरुद्ध आशय पाया जाय। हिदुस्थानके दडसंग्रहको दफा ९० के अनुसार रजामदी स्वाधीनतापूर्वक होनी चाहिये जो रजामदी किमी डर था हानि कारण प्रगट की नावे वह उचित नहीं है-इसीलिये जब एक कानि- स्टेबिलने एक चौकीदारको एक स्त्रीक घरके द्वारपर नियत कर दिया और आप भीतर जाकर उस स्त्रीसे सभोग किया, यद्यपि उस स्त्रीको पहिले इन्कार था परन्तु फिर राजी हो गई थी क्योकि यदि वह सामना करती तो चौकीदार उस कानिस्टेविलकी सहायताको पहुँचजाता और यदि वह भागनेकी इच्छा करती तो चाकीदार न जाने देता-विचार हुआ कि उपरोक्त कानिस्टेबिल बलपूर्वक स्त्रीसभोग करनेका अपराधी हुआ था । (बीही रिपोर्टर जिल्ट १ सफा २१) (९१ , जो छूटें दफा ८७, ८८ व १९ में लिखी हैं वे उन कामोसे सम्बन्ध न काम जो इस बातको] खगी जो स्वय आपही अपराध है-बिना किसी ऐसी हानिके छोडकर कि राजी देने जो उनसे रजामदी देनेवाली मनुष्यको या उस मनुष्यको जिसकी चाले मनुष्यको उसमे हानि पहुँची आपही अप- ओरसे रजामंदी दीजावे, पहुंचे या जिस हानिका उपरोक्त मनुष्यको राधीहो दफा ८७, ८८ पहुंचाना नियतमें हो या जिस हानिका उन कामोंस उपरोक्त मर्नु- व ८९ की छूटोमें गि- ज्यको पहुँचनेका सभव हो । नवीन होंगे -- उदाहरण । गर्भका गिरवाना सिवाय इसके कि शुद्धभावमै स्त्रीका प्राण बचानके लिय हो, स्वय आनही एक अपराध है, इस बानको छोडकर कि उससे कोई हानि उपरोक्त स्त्रीको पहुँचे अथवा पहुंचानेका अभिप्राय किया जाय-इसलिये यह काम उस हानि होनेके कारण अपराध नहीं है और ऐसे गर्भ गिरानेके सवधर्म स्त्री या उसके स्वामीकी प्रसन्नता उपरोक्त कामको उचित नहीं करती। (९२) कोई काम किसी ऐसी हानिके कारण अपराध नहीं है जो उस कामसे किसी काम जो शुद्धभावसे) ऐसे मनुष्यको पहुँच जिसके लाभके लिये शुद्धमावस बिना प्रसन्नता किसी मनुष्यके लाभके उस मनुष्यके किया जाय, उस अवस्थामे जब कि उस मनुष्यको लिये विना प्रसन्नता उसकी के कियागया हो. J अपनी रजामदी ( सम्मति ) देना असम्भव होव या जब कि उस मनुष्यको अपनी रजामदी प्रगट करनेका वल न हो और न उसका कोई स्वामी या कोई और (३८) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- रचित रक्षक वर्तमान ( मौजूद ) हो जिससे इतने समयमें रजामंदीका प्राप्त करना सम्भव हो जिससे उस कामके करनेमे लाम निकले...-परंतु नियम ये हैं कि:- पहले—यह छूट जानबूझकर वध करने या जानबूझकर वध करानेके उद्योग सम्बन्ध न रखेगी। दूसरे यह छूट किसी ऐसे कामके करनेसे सम्बन्ध न रखेगी कि, जिसे करने- वाला जानता हो कि इससे मृत्युका होना अतिसम्मवित है-सिवाय इसके कि वह काम मृत्यु अथवा मारी दुःखके रोकने, अथवा किसी भारी रोक या दुर्बलता मिटाने के निमित्त कियाजाय। तीसरे-यह छूट जानबूझकर हानि पहुंचाने या हानि पहुंचानेका उद्योग करनेसे सम्बन्ध न रक्खेगी सिवाय उस अवस्था कि जब वह मृत्यु या हानि ( जरर ) रोक करे। चौथे--यह छूट जिस अपराधके करनेपर नहीं है उसके करनेकी सहायता परभी लागू न होगी। उदाहरण। (क) यदि शिवशकर घोडेसे गिरकर अचैतन्य होजावे और रमाशंकरको जो डाक्टर है, शात हो कि, शिवशकरकी खोपडीमे छेद करना आवश्यकीय है, और उसको जानसे मार डालनेकी नियत न करके बरन शुद्धमावसे उसके लाभके लिये, इसके प्रथम कि जब शिवशंकरको अपनी भलाई बुराई समझनेका शान प्राप्त होजावे, शिवशकरकी खोपडीमे छेद करे तो ऐसी अवस्थामे रमाशंकर किसी अपराधका अपराधी न होगा। (ख) यदि शिवगकरको शेर उठा लेजाय और रमाशकर यह जानकर कि बंदूक चला- नेसे शिवशकरकी मृत्यु होना संभव है, परन्तु उसको जानसे मारडालनेकी नियत न करके वरन नेक नियतीसे उसके लाभके लिये उस शेर पर वदूक चलावे और रमाशंकरकी गोलीसे शिवशंकरको प्राणघातक घाव लगे तो ऐसी अवस्थामे रमागकर किसी अपराधका अपराधी न होगा। ग) यदि शिवशकर जो एक डाक्टर है किसी बच्चेको एक ऐसी चोटमें देखे कि जिससे उसका मरना संभव है सिवाय उस अवस्थामें कि जब उसपर तत्काल चीर फाडका वर्ताव किया जाय; और उसके स्वामीसे आज्ञा लेनेका 'समय नहीं है परन्तु यदि शिक्शकर जिसको शुद्धभावसे उस बच्चेका लाभ स्वीकार था, उसके रोने पीटने परभी उसपर चीर फाडका कुछ वर्ताव करे तो शिवशंकर किसी अपराषका अपराधी न होगा। (घ) यदि शिवशंकर एक लडके रमाशंकरके साथ किसी ऐसे घरमे हो जिसमे आग लगी है और कुछ मनुष्य नीचे कम्मल वाने खडे हो और शिवशकर यह जानकर कि बच्चेको नीचे फेंकनेने चौधा १.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०। (३९), उसका मरना सम्भव है, परन्तु उसके मृत्युकी इच्छा न करके बरन शुद्धभावसे उसके लाभकी इच्छा- से उसको छतसे नीचे डालदे तो यदि वह बच्चा गिरनेसे मरभी जावे तथापि शिकाकर किसी अपरा- घका अपराधी न होगा। स्पष्टीकरण ( तशरीह) केवल द्रव्यसम्बन्धी लाभ दफा ८८-८९ व ९२ के अर्थमें लाम न समझा जायगा। (९३) शुद्धभावसे किसी बातका बतला देना इसीकारण अपराध न समझा जायगा शुद्धभावसे किसी कि जिस मनुष्यको वह वात वतलाई गई उससे उसकी कुछ बातका बतला देना, हानि हुई जब कि वह बात उस मनुष्यके मलेके लिये बतलाई गई हो। उदाहरण। यदि शिवशकर कि जो एक डाक्टर है किसी रोगीको यह बात बतलाटे कि मेरी समझम तुम जी नही सकते हो और वह रोगी इस समाचारके दधकेसे मरजाय तो ऐसी अवस्थामे शिवशकर किसी अपराधका अपराधी न होगा। यद्यपि वह यह जानता था कि इसप्रकार पर बतला देनेसे रोगीका मरना सभव है। (९४) सिवाय ज्ञातघात और राजविरुद्ध अपराधोको छोडकर जिनके लिये वधक काम जिसके करंनको दड नियत है. कोई काम अपराध नहीं है जब कि उसको कोई लिये कोई मनुष्य धम- कियोंसे विका कियागया ) मनुष्य धमकीसे विवश होकर करे और उस धमकाये जाते मनुष्यको उससमय भलीप्रकारसे यह डर उत्पन्न हो कि उस कामके न करनेसे तत्कालही उसकी मृत्यु होजायगी, परतु शर्त है कि उस कामके करनेवाले मनुष्यने स्वय अपनीही प्रसन्नतासे या अपनी किसी हानिके डरस, जो तत्काल ही जानसे मारे जानेसे कमहो, अपनेको उस अवस्थामे न डाला हो जिसमे वह इस माति विवश कियागया। स्पष्टीकरण-१-यदि कोई मनुष्य स्वय अपनीही प्रसन्नतासे या मारपीटकी धमकीसे डाकुवोंके किसी झुडमें उनकी चालचलन जानबूझकर मिलजावे तो उपरोक्त मनुष्य इस कारणसे, कि उसके साथियोन उससे कोई ऐसा काम विश करके कराया जो कानूनानुसार अपराध है. इस छूटसै लाभ उठानेका अधिकारी न होगा। स्पष्टीकरण-२-यदि डॉकुवोंका कोई समूह किसी मनुष्यको पकड लेजाय और वह मनुष्य तत्काल जानसे मारे जानेकी धमकीके कारण किसी ऐसे कामके करनेपर विवश किया जावे जो कानूनानुसार अपराव है, जैसे कोई लोहार अपने औजार ले जाने और किसी घरका - (४०) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय द्वार तोडडालनेके लिये विवश कियाजाय जिससे डाक घरके भीतर घुसकर लूटे तो वह मनुष्य इस छूटके लाभ उठानेका अधिकारी होगा। १-यदि कोई मनुष्य विवश होकर जातपातमे सहायता करना स्वीकार करे तो ऐसा स्वीकार करना अपराध माननेकी सीमातक नहीं पहुँचता ( वीक्ली रिपार्टर जिल्ल ७ मफा ८ श्रीमती बनाम क्रस्टू मंडल आदि) २--दडसंग्रह हिन्दुस्थानकी दफा ९४ से लाय उठानेमे अपगधीको, यह प्रमाणिा करना चाहिये कि उसका काम तत्कालही मृत्युमयसे किया गया था इमलिय जो मनुष्य झूठी गवाही दे और बयान करे कि उसने वह गवाही धमकीके कारण दी थी-बह इस टफासे लाभ नहीं उठा सकता ( वीक्ली रिपोर्टर जिल्द १० सफा ४८) (९५) कोई काम इस कारणसे अपराध नहीं है, कि उससे कोई हानि पहुंचे कोई काम जिससे या उससे किसी हानिके पहुचानेका अभिप्राय है या जान- कुछ हानि पहुंचे. कारीमे है कि, उससे किसी हानिका पहुँचना सभव है - जब कि वह हानि ऐसी तुच्छ हो कि साधारण बुद्धिका मनुष्य भी उस हानिकी फारियाद न करे। १- अपराधीने एक छतरीसे किसी मनुष्यकी छातीमे चोट पहुंचाई, तो यह एक ऐसा तुच्छ काम नहीं है जो दडसग्रह हिदकी दफा ९५ के अनुसार वह धमाके योग्य होवे ( वीक्ली रिपोटर जिल्द २४ सफा ६७) २-अपराधी सांडनी सवार है-उसने अटके चारेके लिये एक बड़े पीपलकी झाडकी डालियां काटी इस कारण उसें चोरीका दंड दिया गया-परन्तु साहब जुडीशियल कमिश्नर मध्य प्रदेगके विचारमे अपराधीने दंडसग्रह- हिदकी टफा ९५ के अनुसार कोई अपराध दडके योग्य नहीं किया । सी. पी. ला, रि. जिल्ट ८ सका १५ फौजदारी) निजरक्षाके अधिकारके विषयम। ( ९६ ) कोई काम अपराध नहीं है. जो निजरक्षाका अधिकार वर्तनेमे कोई काम जो निज किया जाय । रक्षाके लिये किया जाय अपराध नहीं है. निज तन और ध-(९७ ) प्रत्येक मनुष्यको अधिकार है कि दफा ९९ के निय- नकी रक्षाका अधिकार. / मोंके आधीन रहकर अपने तन और धनको रक्षा करै । पहले-अपने या किसी और मनुष्यके तनकी, किसी ऐसे अपराधके दूर करनेमें जो मनुष्यके तनसे सम्बन्ध रखता हो ।

चौथा ४.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०। (४१) दूसरे-अपने या किसी और मनुष्यके धनकी चाहे वह स्थावर हो या अस्थावर किसी ऐसे कामके रोकनेके लिये जो ऐसा अपराध है कि चोरी या जोरी या हानि पहु- चाने या अनधिकारप्रवेशके लक्षणों में गिना जाय या चोरी या जोरी या हानि पहु- चाने या अनधिकारके लक्षणों के उद्योगमें गिना जाय । टीप दफा ९६ की १-किसी स्त्रीके स्वामीने एक मनुष्यको कि. निसने रातके समय "उसके घरमै उसकी स्त्रीके साथ बलात्कार (जिना) करनेके अभिप्रायसे प्रवेश किया था, मारा- तो दफा ९६ व १०४ के अभिप्रायसे उपरोक्त स्वामी किसी अपरावका अपराधी नहीं है क्योकि वह ऐसी हानिक पहुँचानेका अधिकारी था कि जो मौतसे कम होवे (वीही रिपोर्टर जिल्द २० सफा ३६) टीप दफा ९७ की १-अपराधी जिसका माल बहुधा चोरी जाता था लाठी लेकर उसकी रक्षाके लिये निकला और उस लाठीसे एक चोरको मारा जो उसकी चोटसे मरगया-चोट और अप- राधीके कामपर विचार करके हाईकोर्टकी यह तजवीज हुई कि अपरावी दंडसंग्रह हिन्दुस्थानकी टफा ९७ व १०४ के लेख ( अहकाम ) के अनुसार अपराधसे बरी है, क्योकि उसने उचित निजरमाके अधिकारका वर्ताव किया ( वीक्ली रिपोर्टर जिल्द १२ सफा १५) २-जमींदारको बिना अदालतको सहायतासे अपने असामीकी फसलको कुर्क करनेका अधि- कार है यदि उसने ऐक्ट १० सन् १८५९ ई० को दफा ११६ के अनुसार इत्तिलाअनामा (सूचना पत्र) असामीके नाम भिजवा दिया हो और ऐसी अवस्थामें यदि वह असामी जानबूझकर भी उस कुर्कीमें रोक टोक करे तो वह हिदुस्थानके दडमग्रहको दफा ९७ के अहकामसे लाभ नहीं उठा सकता, परन्तु यदि जमीदारके आदमी बिना उपरोक्त इत्तिलामनामाके जारी हुए फसलकी कुर्की करें तो असामी उनके कामको अनधिकारप्रवेश समझ सकता है। ३-अपराधीने एक चोरको अपने घरमे सेंध करते पकडा और जब गाववाले चोरको देखने आये तब उन लोगोंने उसको मरा हुआ पाया, अपराधीका वयान है कि उसने चोरको एक लाठी मारी-परन्तु सेशननजने उसके बयान पर कुछ मरोसा न कर उमे तीन साल कंदका दड दिया क्योंकि डाक्टरकी रिपोर्टस सेशनजजको मालूम हुआ कि चौरकी मौत फासी लगानेसे हुई । परन्तु यथार्थमें रिपोर्ट और बयानके देखनेसे यह बात पाई गई कि चोरकी मौत चास बट होजानेके कारण हुई और उसकी वास इस कारण बद हुई कि जब चोर घरके भीतर अपना मुंह नीचेकी ओर करके धुस रहा था उस समय अपराधीन उसको पकडा और पकडे रहा-ऐसी अवस्थामें उसने कानूनानुसार निजरक्षाके अधिकारका वर्ताव किया, इसलिये अपराधी छोडन योग्य है (वीसी रिपोर्टर जिल्द ३ सफा १२) (९८ ) जब कि कोई काम, करनेवालेकी कमउमरी या अनसमझी (बुद्धिको निजरक्षाका अधि-] पकायती न होना , या सिडीपन या नशेमे होनेके कारणसे या कारी सिडी इत्यादि म- नुष्यो कामसे. उसको गलत समझोसे, अपराध न हो नहीं तो और अवस्थामे - (४२) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- अपराध होता, तो प्रत्येक मनुष्यको उस कामके रोकनेमे वही अधिकार निजरक्षाके अधिका- रका प्राप्त है जो उस अवस्थामे होता जब कि वह काम अपराध होता । उदाहरण। क) यदि शिवशकर सिडीपनकी अवस्थामै रमाशंकरके वधका उद्योग करे तो शिवशकर किसी अपराधका अपराधी नहीं है परन्तु रमाशंकरको अपनी रक्षाका अधिकार उसी भांति प्राप्त है जो उस अवस्थामे होता, जब कि शिवशंकर सिडी न होता । (ख) यदि शिवशकर रातके समय किसी घरमे जावे जिसमें जानेका उसको कानूनानुसार अधिकार है और रमाशंकर नेक नियतीसे शिवशकरको चोर नानकर उसपर आक्रमण ( हमला करे तो रमाशंकर इस गलत समझीसे किसी अपराधका अपराधी नही है परन्तु शिवशकरको रमाशंक- रके रोकनेमे वही अधिकार निजरभाका प्राप्त है जो उस अवस्थाम होता जब कि रमाशकर ऐसी गलत समझीसे वर्ताव न करता। (९९पहिला-जिस कामसे मृत्यु या भारी दुःख पहुंचनेका भय उचित कारणसे वे काम जिनके रोक न हो तो उसके रोकनेके लिये कोई अधिकार निजरक्षाके अधि- नेमे जिन रक्षाका अधि कारका प्राप्त नहीं है उस अवस्थामें जब कि वह काम या उस कार न होगा। कामका उद्योग किसी सरकारी नोकरको ओरसे नेकनियतीके साथ और अपनी नौकरीके कारण किया जावे, चाहे उपरोक्त काम कानूनानुसार यथार्थमें उचित न हो। दूसरा-जिस कामसे मृत्यु या भारी दुःख पहुचानका भय उचित कारणसे न हो उस कामके रोकनेमे कोई अधिकार निजरक्षाके अधिकारका प्राप्त नहीं है, उस अवस्थामें जब कि वह काम या उस कामका उद्योग किसी ऐसे सरकारी नौकरी आज्ञासे किया जाय जो नेक नियतीके लाथ अपनी नौकरीके कर्तव्यको पूरा करता हो, चाहे वह आजा कानूना- नुसार यथार्थमें उचित न हो। तीसरा-ऐसी अवस्थाओंमे भी कोई अधिकार निजरक्षा अधिकारका प्राप्त नहीं है जव कि सर्व सबधी अधिकारियोसे रक्षा मिलनेका अवकाश हो। चौथा-निजरक्षाका अधिकार किसी अवस्था में ऐसा न होगा कि जितनी हानि पहुचना रक्षाके लिये अवश्य हो उससे अधिक हानि पहुचाई जाय । स्पष्टीकरण २-जो कोई काम या कामका उद्योग किसी सरकारी नौकरकी ओरसे किया जाय कि, जो अपनी नौकरीके कारण करता है, तो उस कामके रोकनेमें कोई मनुष्य निजरक्षाके अधिकारसे रहित न किया जायगा सिवाय उस अवस्थामें कि जब वह चौथा ४ ] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई० । (४३) मनुष्य यह जामताही या जाननेका कारण रखता हो कि करनेवाला उस कामका ऐसाही सरकारी नौकर है। स्पष्टीकरण- जव कोई काम या उसका उद्योग किसी सरकारी नौकरकी आज्ञासे किया जावे तो ऐसे कामके रोकनमें कोई मनुष्य निजरक्षाके अधिकारसे रहित न किया जायगा सिवाय उस अवस्थामे कि जब वह मनुष्य जानता हो या निश्चय करनेका कारण रखताहो कि उपरोक्त कामका करनेवाला ऐसी आज्ञासे वर्ताव करता है, या कि जब उपरोक्त मनुष्य ऐसी आज्ञा वतलादे जिसके अनुसार वह वर्ताव करता है, या यदि उसके पास लिखी हुई आज्ञा मौजूद होवं. तो जव वह ऐसी लिखी हुई आज्ञा मागनेके समय पेश करदे । १-इजराय डिगरीकी गिरफ्तारीके वारटमें अदालतके हाकिमके सक्षेप हस्ताक्षर (दस्त- खत ) थे-जिमकी तामील के समय कर्जदारने बलपूर्वक तामील करनेवालेके साथ रोकटोककी तजवीज हुई कि यद्यपि यह बात उचित है कि जो मनुष्य वारटपर अपना दस्तखत करे वह अपना नाम पूरा लिखे परन्तु यह बात नही कही जासकती कि सक्षेप हस्ताक्षर होनेके कारण उस वारटकी तामील नही हो मकती थी-दडसंग्रह हिंदकी दफा ९९ के अनुसार उसने जो निजरमा की वह अनुचित थी, इसलिये वह अपराधी दडके योग्य है (इ० ला. रि० इला- हाबाद जिल्द ८ सफा २९३) २-यद्यपि प्रत्येक मनुष्यको अधिकार नहीं है कि वह स्वय किसीको कैद करे परन्तु यदि कोई मनुष्य किसी दूसरे मनुष्यको रातके समय सेघ लगाते हुए या चोरी करते हुए पकडे तो पकडे हुए मनुष्यको निजरमाका अधिकार प्राप्त नहीं है (वीली रिपोर्टर जिल्द ४ सफा ८) ३--एक मनुष्यने एक दुर्यल और बूढी स्त्रीको अपने घरमे चोरी करते हुए पाकर मार- डाला तजवीज हुई कि अपराधी दडसग्रह हिंदके दफा ९९ के अहकामका अधिकारी न था (वीशी रिपोर्टर जिल्द ५ मफा ३३) ४- यदि कोई चोर घरसे खाली हाथ भागा जाता हो और घरसे अन्तर पर हो तो उसका मार डालना धनकी निजरमाके अधिकारसे सम्बन्ध न रक्खेगा ( बगाल लारिपोर्ट जिल्द १ सफा ८) (१००) तनकी रक्षाका अधिकार पिछली दफामें लिखे हुए नियमोके आधीन तनकी निजरक्षाका रहकर आक्रमणकारी (हमला करनेवाले ) को जानबूझ कर मृत्यु भधिकार मृत्यु करने तक कब हो सकेगा, अथवा भोर कुछ हानि पहुंचाने तक हो सकेगा जब कि वह अपराध जिससे निजरक्षाको अधिकार वर्तनी अवश्य हुआ नीचे लिखे प्रकारोंमेंसे किसी प्रकारका हो।

(४४) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- पहिला-आक्रमण ऐसा होवे कि उसमे इस वातका भय उचित कारणसे हो कि यदि उस आक्रमणसे रक्षा न कोजाय तो मृत्यु होना सम्भव है । दूसरा-आक्रमण ऐसा हो कि उसमे इस बातका भय उचित कारणसे हो कि यदि उस आक्रमणसे रक्षा न कीजाय तो उसका फल मारी दुःख होगा। तीसरा - वह आक्रमण जो बलात्कार ( बलपूर्वक व्यभिचार के अभिप्रायसे कियाजाय। चौथा-वह आक्रमण कि जो स्वभावविरुद्ध कामातुरता पूरी करनेके अभिप्रायसे किया जाय। पॉचवॉवह आक्रमण कि जो मनुष्यके ले भागने या भगा ले जानेके अभिप्रायसे किया जाय। छठा-वह आक्रमण कि किसी मनुष्यको अनीतिवटमें रखनके अभिप्रायसे ऐसी दशाओंमें किया जाय जिससे उपरोक्त मनुष्यको इस वातका भय उचित कारणोस उत्पन्न हो कि उसको अपने छुटकारेके विपयमे अधिकारियो ( हुक्कामो ) से सहायता माँगना असम्भव है। १-- एक मनुष्यने दूसरे मनुष्यपर मालेसे आक्रमण किया-दूसरे मनुष्यने पहले मनुष्यके लाठी भारी कि जिससे वह मरगया-तजवीज हुई कि-प्राण धनके बचावके लिये इस अभियोगमे निज- -रक्षाका अधिकार उचित रीतिसे वर्तागया-क्योंकि ऐसा अधिकार दंडसंग्रह हिदकी दफा १०० के अहकामात (अभिप्राय ) के अनुसार उस अवस्थामें किसी मनुष्यको जानसे मार डालने तक है कि जब उसे भारी दुःख पहुंचाने का भय उचित कारणसे उत्पन्न होचे (बीली रिपोर्टर जिल्द ११ सफा ४१) (१०१ ) यदि अपराध ऊपरको दफामे लिखे हुए प्रकारोमेसे किसीप्रकार का न हो यह अधिकार मृत्यु- तो तनकी रक्षाका अधिकार आक्रमणकारीको जानबूझकर मार- को छोडकर कोई दूसरी डालनेतक न होगा परतु दफा ९९ मे लिख हुए नियमोके आधीन हानि पहुँचाने में कयतक हो सकेगा, यहातक हो सकेगा कि आक्रमणकारीको मृत्यु छोडकर कोई दूसरी हानि पहुंचा दीजाय । ( १०२) तनकी निजरक्षाका अधिकार उसी समयस आरम होगा कि जब तनकी निजरक्षाका) अपराधके उद्योग या धमकीसे ननके लिये विपत्तिका भय उचित आरंभ होना और स्थिर कारणसे उत्पन्न हो, चाहे वह अपराध किया भी न गया हो. रहना. और यह अधिकार उस समयतक स्थिर रहेगा कि अबतक तनके लिये विपत्तिका वही भय बनारहे । .

. चौथा ४.]] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई०॥ (४५) (१०३१ धनकी निज रक्षाका अधिकार दफा ९९ में लिखे हुए नियमोके अधीन धनकी निजरभाका) अनीति करनेवालेको जानबूझकर मारदालने अथवा और कोई आधिकार मृत्यु के करनेत- हानि पहुंचानेतक होसकेगा- उस अवस्थामें कि जब वह अपराध क कब होसकेगा जिसके करनेसे या करनेके उद्योगसे उस अधिकारका वर्तना अवश्य हुआ आगे लिखे प्रकारो-- मेंसे किसी प्रकारका हो। (१) वलजोरि ( सरका बिलजब ) (२) रातके समय सेंध लगाना ( नकबजनी) (३) आगके द्वारा हानि पहुंचाना जो किसी ऐसे घरमें या डेरेमें या नावमें पहुँचाई जाय जो घर वा डेरा या नाव मनुष्योके रहनेके लिये या चीज वस्तुके धरनेके लिये काममें हो। ( ४ ) चोरी या हानि पहुँचाना, या घरमे बलपूर्वक अधिकार करना ( मदाखलत- वेजा ) ऐसी अवस्थामें कि इस बातका मय उचित कारण उत्पन्न हो कि यदि उस अपरा-- धके रोकनेमे निजरक्षाके अधिकारका वर्ताव न किया जाय तो उस अपराधका फल मृत्यु या भारी दुःख होगा। -- .१-कुछ मनुष्योने एकाएक अपरावियोंपर उनकी फसल काटनेके अभिप्रायसे आक्रमण किया अपराधियोंने रोका परन्तु पुलिसको सूचना देनेका उन्हें अवसर न मिला, इसलिये उन्होने आक्रमण कारियोमेसे एकपर बासकी लकडीसे एक ऐसी चोट मारी कि जिससे वह मरगया-सेशन्सजजने अपराधियोंको दण्डसग्रह हिदकी दफा ३०४ व १४८ के अनुसार दड दिया-परन्तु हाईकोर्टने यह तजवीज की कि जो चोट उमको पहुंचाई गई थी वह ऐसी नहीं थी कि जिससे यह पायाजावे कि अपराधियों ने अपनी रक्षाके लिये निजरक्षाके अधिकारसे अधिक वर्ताव किया इसलिये अपराधी छोडे गये । (बंगाल ला रिपोर्ट जिल्द ६ सफा ९ अपील विभाग) (१०४) यदि वह अपराध जिसके किये जानेसे या किये जानेके उद्योगसे निजरक्षाके यह अधिकार- मृत्यु- अधिकारका वर्त्तना अवश्य हुआ चोरी या हानि पहुँचाने या अन- को छोडकर दूसरी कोई हानि करनेपर कब धिकारप्रवेश पिछली दफामें लिखे हुए प्रकारोको छोडकर किसी होसकेगा. दूसरे प्रकारकी हो तो वह अधिकार जानबूझकर मृत्युको छोडकर दूसरी कोई हानि अनीति करने वालेको पहुँचानेतक हो सकेगा। (१०५) पहिला-धनको निजरक्षाका अधिकार उसी समय आरभ होगा, घनकी निजरक्षाके अधिकार का आरम जब कि धनकी विपत्तिका मय विशेष कारणसे उत्पन्नहो । और स्थिर रहना.

-- - (४६) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- दूसरा-धनकी निजरक्षाका अधिकार चोरी रोकनेमे उस समयतक स्थिर रहेगा जबतक अपराधी माल ( धन ) लेकर चलाजाय या अधिकारियों ( हाकिमों ) से सहायता प्राप्त होजावे या धन फेर लियाजावे । तीसरा-धनकी निजरक्षाका अधिकार जोरी ( सरकाविलजन ) के रोकनेमे उस समयतक रहेगा कि जबतक अपराधी किसी मनुष्यको मारता रहे या दुःख पहुँचाता रह या अनुचित रोकटोक ( अनीतिवद् अर्थात् मुजाहिमत बेजा ) करता रहे या इन कामोके करनेका उद्योग करता रहे या जबतक कि तत्काल मारडालने या तत्काल दुःख या तत्काल अनीतिवद मुजाहिमत जिस्मानी का भय बना रहे । चौथा--धनकी निजरक्षाका अधिकार मदाखलतवेजा ( अनधिकारप्रवेश.) या उत्पात रोकनेको उतने समयतक रहेगा कि जबतक अपराधी मदाखलतबेजा या · उत्पातका अपराध करता रहे। पॉचवॉ-धनको निज रक्षाका अधिकार रातके समय सेंध लगानेकी रोकके लिये उस समयतक रहेगा कि जबतक वह घरकी मदाखलतवेजा, कि जिसका आरभ उस सेध लगा- नेके साथ हुवा है, वनी रहे। १---दडसग्रह हिंदुस्थानकी दफा ९९ के नंबर ३ को दफा १०५ के नबर १ से मिलकर पढ़ चाहिये-धनकी निजरक्षाका अधिकार उस समयसै आरम्भ होता है जब धनकी विपत्तिका भय उत्पन्न हो, ऐसा भय उत्पन्न होनेके पहिले धनके स्वामीको आवश्यकता नहीं है कि वह अपने धनकी रक्षाके लिये किसी सरकारी नौकरसे सहायता मांगे-सरकारी नौकरसे उस भयका प्रगट कर देना अवश्य है परन्तु जब उसके मय होनेका यथार्थ कारण हो. तो उस समय व उस स्थानसे हाकि- मको सूचित करे जिससे कि उसका प्रबंध होसके । ( बम्बई. इ. ला. रि० जिल्द. १४ सफा ४४१). (१०६) यदि किसी ऐसे आक्रमणके रोकनेको जिससे मृत्युका भय विशेष कारणसे निजरक्षाका अधिकार ) उत्पन्न हो निजरक्षाके अधिकारका वर्ताव किया जाय और मृत्युकारक आक्रमणके रक्षा करनेवाला ऐसी अवस्थामें हो कि वह एक किसी निरपराधी रोकनेको उस अवस्था में जब कि किसी अनपराधी | मनुष्यको हानि पहुंचाये बिना अपने अधिकारका वर्ताव मली मनुष्यको हानिका भय हो.] प्रकारसे नहीं कर सकता तो वह निजरक्षाके अधिकारके वीवमें उस मनुष्यको भी हानि पहुँचा सकता है । उदाहरण । यदि शिवशंकर पर कुछ मनुष्योके समूहने उसे मारडालनेके अभिप्रायसे आक्रमण किया और शिवशंकर उस समूह पर बंदूक चलाए बिना निजरक्षाके अधिकारको भली प्रकारसे काम, नहीं पाँचवाँ ५.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई० ॥ (४७) ला सकता और उन लडकोको जो उस समूहमे हैं हानि पहुंचाने के बिना वह बदूक नहीं चला सकता तो यदि शिवशकरके इस प्रकार बदूक चलानेसे इन लंडकामैसे किसी लड़के को हानि पहुंचे तो वह किसी अपराधका अपराधी न होगा। अध्याय पाँचवाँ ५. सहायताके विषयमें। सहायता किसी कामकी } ( १०७ ) प्रत्येक वह मनुष्य किसी कामके करनेमे सहायता करता है जो,- पलिले-किसी मनुष्यको उस कामके करनेमें बहकावे या । दूसरे-एक अथवा अनेक मनुष्योके साथ जत्येमें मिलकर उस कामको करनेके लिये सम्मति करे जब कि उस जत्थेके मतके कारण और उस कामके होनेके निमित्त कोई काम या चूक कानूनविरुद्ध होजावे, या। तीसरे-किसी कानूनविरुद्ध चूक या कामके द्वारा उस कामके करनेमें जानबूझकर सहायता करे. स्पष्टीकरण १-किसी कामको करनेके लिये बहकाना, उस मनुष्यके सम्बत्रमें कहा जायगा जो जानबूझकर झूठ बोलनेके द्वारा या रेसी मुख्य वातको, जिसका प्रगट करना उसपर अवश्य है, छुपा रखकर अपनी इच्छासे उपरोक्त कामको करावे या उसके करानेका यत्न करे या करानेके यत्नमें उद्योग करे। उदाहरण। (क) कि जो एक सरकारी ओहदेदार है किसी कोर्ट आफ जस्टिसके बारटसे (ख) को पकडनेका अधिकारी है-(ग) जो यह बात जानता है और यहमी जानता है कि (घ) (ख) नहीं है जानबूझकर (क) से यह कहे कि (घ)(ख) है और इसप्रकार (क) से (घ को कैद करावे तो यहा कहा जायगा कि (ग) ने बहकाकर (घ) को पकडवाया । स्पष्टीकरण २-यदि कोई मनुष्य किसी कामके किये जानेके समय या उससे पहले कोई काम इस अभिप्रायसे करे कि वह उपरोक्त काम सुगमतासे होजावे और इस कामसे उसका * यह अध्याय उन अपराधों से सम्बंधित है जो बमुजिब दफा १२१ (अ) व १२४ (अ) व २२५ (अ) व २९४ (अ) व ३०४ (अ) के दडयोग हैं-देखो ऐक्ट २७ सन् १८७० दफा १३ किमी २ अपराधकी सहायता राजीनामाके योग्य ह-देखो ऐक्ट १० सन् १८८२ इ० दफा ३४५.

(४८) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- करना सरल होजावे, तो कहा जावेगा कि उपरोक्त मनुष्यने उस फामके करनेमे सहा- यता की। १-यदि कोई मनुष्य किसी दूसरे मनुष्यको डाकके द्वारा पत्र भेजकर किसी अपराधके करनेको बहकावे तो जिस समय उपरोक्त पत्रका वृत्तांत पत्र पानेवालेको ज्ञात होजावे उसी समय वह सहायताका अपराधी हो जायेगा और ऐसे अपराधकी जाच व तजवीज उस स्थान- पर हो सकेगी कि जहां वह पत्र पाया गया हो । (ई. ला. रि. इलाहाबाद जिल्द १६ सफा ३८९) २-दंडसग्रह हिंदुस्थानके अनुसार सहायताका अपराध एक असली अपराध समझा जाता है इसलिये सहायताके किसी अपराधीका दंड असली अपराधीके दडसे सम्बन्ध नहीं रखता ( ई० ला. रि० बम्बई जिल्द ? सफा १५) ३-किसी अपराधक होनेकी सूचना न देना उपरोक्त अपराधकी सहायतामे नही समझी जायगी सिवाय उस अवस्थामै कि जब उपरोक्त सूचना का न देना किसी उचित कर्तव्य या- कानूनके विरुद्ध होवे-देखो दफा ४४ व ४५ मजमूआ जाब्ता फौजदारी (बगाल ला. रिपोर्ट जिल्ट ४ सफा ७ ४-कोई मनुष्य अपने नौकरके अनुचित कामके लिये अदालत फौजदारीमै जिम्मेदार न होगा जब तक कि यह न प्रमाणित किया जावे कि उपरोक्त मनुष्यने उस कामके करनेकी भलीप्रकारसे आशा दी (वीक्ली रिपोर्टर जिस्ट ६ मफा ६०) (१०८) कोई मनुष्य किसी अपराधमे सहायता देनेवाला कहलायेगा जब कि वह या तो उसी अपराधके किये जानेमें या दूसरे किसी ऐसे कामके सहायता करनेवाला किये जानेमे सहायता दे जो उस अवस्थामें अपराध गिना जाता हो जब कि उसका करनेवाला कानूनानुसार अपराध समझताहो जब कि वह अपराध वैसेही अभिप्राय अथवा जानकारीसे करे जैसा कि उस सहायता करनेवालेका है। स्पष्टीकरण १--किसी काममें कानूनविरुद्ध चूक करानेका सहायक होना अपराध होसकेगा. चाहे उस कामका करना सहायकपर अवश्य भी न हो । स्पष्टीकरण २-सहायताके अपराधके लिये कुछ यह अवश्य नहीं है कि जिस काममें सहायता दीगई वह हो ही जाय अथवा जिस परिणामका होजाना उस कामको अप- राध बनानेके लिये अवश्य हो वह होही गयाहो । ) उदाहरण। क) शिवशकरने रमाशकरके वधके लिये उमाशंकरको बहकाया और उमाशकर उस कामके करनेसे 'नहीं' करगया तो शिवशंकर ज्ञातपात करनेके लिये उमाशकरको सहायता देनेका अपराधी होचुका।

पाँचवा ५.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई०॥ (४९) ख) यदि शिवगकर उमाशकरको रमाशकरका वध करने के लिये बहकावे और उमाशकर उस बहकानेके अनुसार रमाशंकरको घायल करे परन्तु इस घावसे रमाशकर बच जावे तो शिवगकर जातपात उमाशकरके करनेके लिये बहकानेका अपराधी होचुका । स्पष्टीकरण-३-यह अवश्य नहीं है कि सहायता पानेवाला मनुष्य कानूनानुसार अपराध करनेके योग्यही हो या कि उसकी नियत या जानकारीमें वही कुज्ञान हो जो सहायता करनेवालेकी नियत या जानकारीमें है या उसकी नियत या जानकारीमे कुछ कुज्ञान हो । उदाहरण । , क) शिवशकरने कुप्रयोजनसे किसी बच्चे या सिडीको एक ऐसे कामके करनेको बहकाया कि जिसका करना उस मनुष्यसे अपराव होता जो कानूनानुसार अपराध करनेको समर्थ होता आर जिसका अभिप्राय शिवशकरकासा होता तो इस अवस्थाम शिवशकर अपराधमे सहायता करनेका अप- राधी होगा, चाहे उपरोक्त काम हुआ हो या नहीं। ख) शिवाकरने, रमाशकरको मारडालनेके अभिप्रायसे उमाशकरको कि जो सात वर्षसे कमती अवस्थाका एक बालक है एक ऐसा काम करनेको बहकाया जिससे रमाशकरकी मृत्युहो उमाशंकरने इस बहकानेके कारण शिवशकरकी अनुपस्थित अवस्था (गैरहाजिरी ) में उस कामको "किया कि जिसके कारण रमाशकरकी मृत्यु होगई-यहापर यद्यपि उमाशकर कानूनानुसार किमी अपराध करने योग्य नहीं था तथापि शिवाकरको उसी प्रकारका दड मिलेगा कि मानों उमागकर कानूनानुसार अपराध करनेके योग्य था और उसने जातपातका अपराध किया-इसलिये शिवाकर मृत्युदण्डके योग्य होगा। (ग) शिवशकरने रमाशकरको किसी रहनेके घरमे आग लगानेके लिये बहकाया, और रमाशकर अपनी बुद्धिके बिगाडके कारण उस कामके गुणको न तानसका या यह न समझसका कि जो मै कररहा हू वह अनुचित या कानूनके विरुद्ध है-और रमाशकर शिवशकरके बहकानेकै कारण उस घरमें आग लगाए तो रमागकर किसी अपराधका अपराधी नहीं है परन्तु शिवाकर घरमै आग लगानेके अपराधमे सहायता करनेका अपराधी शेगा और उस दडके योग्य होगा जो उस अपरावके लिये ठहराया गया है। (घ) शिवाकर इस अभिप्रायसे कि चोरीका अपराध करावे, रमागकरको यह बहकावे कि उमागकरका माल उमाशकरके पाससे लेआवो और रमाशकरको यह निश्चय कराए कि वह माल मेरा है-और रमागकर शुद्धभावसे यह निश्चय करके कि वह माल शिवशकरका है उसे उमागकरके अधिकारसे निकाल लाए तो ऐसी अवस्थाम, जो कि रमागकर ऐसी गलत समझांके कारण यह वर्ताव करता है न कि कुप्रयोजन (बद दियानती ) से मालको लेता है, उस अपराधसे वह चोरीका अपराधी न होगा परन्तु शिवशकर चोरीमें सहायता करनेका अपराधी और उस दडके योग्य होगा जो उसको उस अवस्थामे होता जब कि रमागकर चोगेका अपराध करता । ४ (५०) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- स्पष्टीकरण-४-जो कि अपराधमें सहायता करना अपराध है तो ऐसी सहायतामें सहायता करना भी अपराध है। उदाहरण । शिवशकर रमाशकरको बहकावे कि तुम उमाशकरको हरणकरके मारडालनेके लिये बहकावी और रमागकर उसके अनुसार उमाशकरको हरशकरके मारनेके लिये बहकावे और उमागकर रमा- शकरके बहकानेसे उस अपराधको करे तो रमाशकर इस अपराधके बदले उस दंडके योग्य होगा जो शातघातके बदलेमे ठहराया गया है और जो कि शिवशकरने रमागकरको उस अपराधके करनेके लिये बहकाया है इसलिये शिवशंकरभी उसी दंडके योग्य होगा। स्पष्टीकरण-५--सम्मतिके द्वारा सहायताका अपराध करनेके लिये यह अवश्य नहीं है कि सहायता करनेवाला उस मनुष्यके साथ अपराध करनेके यत्नमें सम्मिलित हो जो उसे करता है बरन् यही वहुत है कि वह उस सम्मतिमें सम्मिलित हो जिसपर वर्ताव करनेसे वह अपराध हुआ। उदाहरण । शिवशकरने उमाशकरको विष देनेके लिये रमाशंकरके साथ परामर्श किया और यह ठहराव हुआ कि शिवाकर विप देवे, इसके पश्चात् ग्मागकरने इस सम्मतिके वृत्तान्तको हर- शंकरसे प्रगट किया और कहा कि एक तीसरा मनुष्य विष देगा परन्तु शिवशंकरका नाम न बत- लाया और हरशंकरने विष ला देना स्वीकार किया और लाकर इस अभिप्रायसे रमाशकरको दिया कि वह ऊपरके कहे हुए कामको करे-फिर शिवशकरने विप खिलाया कि जिसके कारण उमागकर मरगया तो ऐसी अवस्थामे यद्यपि शिवशकर और हरशंकरमें कुछ सम्मति नही हुई तथापि इरशकर इस सम्मतिमें सम्मिलित रहा जिसपर वर्ताव करनेसे उमागकरका वध हुआ-इसलिये हरणकरने वह अपराध किया जिसका लक्षण इम दफामे कहा है और वह उस दडके योग्य होगा जो वधके बदले ठहराई गई है। (१०८) यदि कोई मनुष्य ब्रिटिश इडियाके भीतर किसी ऐसे कामके होने ब्रिटिश इडियामे उन सहायता करे जो ब्रिटिश इंडियासे पृथक् या उससे बाहर हो अपराधोकी सहायता कर- ना नो उसके बाहर हो. और ब्रिटिश इंडियाके मीतर होनेमें जो एक अपराध गिना- जाता तो कहा जायगा कि उपरोक्त मनुष्यने दडसग्रह हिंदके कानूनानुसार उस अपराधमें 'सहायता उदाहरण । (क) ने ब्रिटिश इडियाम (ख) को जो अन्य देगका रहनेवाला है और गोवामे है, गोवाम मारनेको बहकाया तो ऐसी अवस्थामै (क) जातघातके अपराधमे सहायता करनेका अपराधी होगा। की।

पाँचवाँ ५.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई० । (५१) १-यह दफा ऐक्ट न. ४ सन् १८९८ ई. के अनुमार, जिसके अनुसार दण्डसमह हिंद शुद्ध हुआ है, वढाई गई है। २-एक मनुष्य दो मनुष्योंके आक्रमणसे भरगया, परंतु इस बातका निश्चय न हुआ कि किसने मारा तो वे दोनो मनुष्य असल अपराधियोके समान अपराधी होंगे न कि महायकोंके समान (चीकी रिपोर्टर जिल्द १ सफा ४९) ३--अपराधके तमाशा देखनेवालेके समान एक स्त्रीको मती होते हुए देखते थे परतु वे उनके किसी काममें सयुक्त नहीं हुए-खोज करनेसे जानागया कि उन्हें पहिलेहीसे जानकारी थी कि अमुक स्त्री सती होनेवाली है और उसी जानकारीके कारण वह अपराध (सती) होनेके समय उस स्थानपर तमाशा देखने गये थे इसलिये वह मनुष्य आत्महत्याकी सहायताके अपराधी ठहराये गये (चीली रिपो- टेर जिल्द १ सफा २४६) * (१०९) जो कोई मनुष्य किसी अपराधमें सहायता करे तो यदि उस सहा- सहायताका दड,यदि) यताके कारणसे वह काम हो जिसमें सहायता कीगई है उस कामका होना जिसमें सहायना कीगई है उस और इस सग्रहमें एसी सहायताके दडके विषयमे कोई स्पष्ट आज्ञा सहायताके कारण हुआ न हो तो उस मनुष्यको वही दष्ट दिया जावेगा जो उस अपराधके हो और जहाउसके दडके लिये कोई स्पष्ट आना लिये ठहरा हो। न हो। स्पष्टीकरण-जब कोई काम या अपराध उस व्हॅकानेके कारणसे या उस सम्मतिपर चोव करनेसे या उस सहारेसे हो जिसको सहायता ठहराया गया है तो कहा जावेगा कि उपरोक्त काम या उपरोक्त अपराध सहायताके कारणसे हुवा । उदाहरण । (क)-शिवगकरने रमाशंकरको कि जो एक सरकारी नौकर है इसलिये कुछ धूम दैना कही कि वह अपने ओहटेका काम करते समय शिवशंकरके साथ कुछ पक्षपात करे और रमाशकर उम घूमको स्वीकार करे तो शिवशकरने उस अपगधमे महायताकी जिसका वर्णन टफा १६१ मैं किया गया है। (ख)-शिकाकर रमाशकरको झूठी गवाही देनेके लिये बहकावे और रमाशकर उस बहकार नेके कारण उस अपराधको करे तो शिवशकर उपरोक्त अपरावमें सहायता करनेका अपराधी होगा और उसी दण्डके योग्य होगा जिसके योग्य रमागकर है। (ग) शिवशंकर और रमागकर उमाशकरके विष देनेकी सम्मति करें और दम सम्म- तिपर वर्ताव करके विष लावे और इम अभिप्रायमे रमागकरफो दे कि वह उमाशंकरको खिलवे और रमागकर इस सम्मतिके अनुसार शिवशकरके वहा न होनेपर उमाशकरको विप है और दफा ४० को देखो।

(५२) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- उस विपसे उमाशंकर मरजावे तो इस अवस्थामे रमाशंकर ज्ञातघातके अपराधका अपराधी होगा और शिवशंकर उस अपराधमें सम्मतिके द्वारा सहायता करनेका अपराधी होगा और ज्ञातघा- तके दड योग्य होगा। वह मनुष्य कि जिसकीस- हायता कीजावे कामको १-शिवशंकरले एक सतीकी चिता जलानेकी रमाशंकरको अज्ञाटी, रमाशकरने उस समय तो उसकी बात न स्वीकार की परंतु जब वह स्त्री उस चितासे भाग गई तब उसको फिर चितामे जानेके लिये बहकाया-इसलिये शिवशकर जातवत् घातकी सहायताका अपरावी और रमाशंकर आत्महत्याकी सहायताका अपराधी ठहराया गया । (बील्ली रिपोर्टर जिल्ट १ सफा १७४) २-यदि कोई मनुष्य कानूनविरुद्ध दूसरा व्याह करे तो पडित जो इस व्याहको करावे दडसंग्रह हिंदकी दफा १०९ के अनुसार दफा ४९४ के अपराधका सहायक है। (इ० ला. रि० बम्बई जिल्द ६ सका १२६) ११० ) जो कोई मनुष्य किसी अपराधके होनेमे सहायता करे तो यदि वह मनुष्य सहायताका दंड, यदि ! कि जिसकी सहायता कीजावे उस अपराधको किसी ऐसे अभिप्राय या जानकारीसे करे जो सहायता करनेवाले मनुष्यके अभिप्राय या जानकारीके विरुद्ध हो तो सहायता करनेवालेको किसी ऐसे अभिप्रायसे उस अपराधका दढ दिया जायगा कि जो अपराध इस करे जो सहायकके अभि. प्रायसे बिरुद्ध हो। अवस्थामे होना कि जब वह काम किसी और अभिप्राय या जानकारीसे नहीं बरन् सहायता करनेवालेकेही अभिप्राय या जानकारीसे किया जाना । ( दफा ४० मी देखो) ( १११) जब कि सहायता तो एक कामकी कोजावे और काम कोई दूसराही सहायता करनेवालेका] हो जाये तो सहायता करनेवाला उस कामके सम्बन्धमें कि जो दंड जब कि एक काममे हुआ है उसी प्रकारसे और उतनाही दडके योग्य होगा कि सहायता पहुंचाई जाय और उससे भिन्न दूसरा | मानों उसने भली प्रकारसे उस उपरोक्त कामकी सहायता की कोई काम होजाय । परन्तु नियम यह है कि, वह काम जो हुआ इस प्रकारका हो कि सहायतासे उसका होजाना अति समावित पाया जाय और यह कि वह काम वह- कानेसे या उस सहारे अथवा सम्मतिपर वर्ताव करनेसे जिसको सहायता ठहराया गया है हो । उदाहरण । क)-शिवगकर एक लडकेको रमाशंकरके भोजनमे विप डालनेके लिये बहकावे और इसी अभिप्रायसे उसको विप दे-उस बहकानेके कारण वह लड़का उमाशंकरके भोजनमे जो रमा पाचवा ५.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई० । (५३) शकरके भोजनके पास रक्खा हो भूलकर विषडालटे तो इस अवस्थामें यदि उपरोक्त लडकेने शिव- शकरके बहकानेसे वह वर्ताव किया हो और वह काम जो हुआ ऐसी अवस्थाओमे कदाचित् उस सहायताका परिणाम होतो शिवशकर उसी प्रकार और उतनाही अपराधी होगा कि मानों उसने लडकेको उमाशकरके भोजनमें विष डालनेके लिये बहकाया। (ख)-शिवशंकरने रमागकरको उमाशकरका घर जलादेनेके लिये बहकाया, रमाशकरने घरमें आग लगादी और उसी समय वहांका घनमी चुरालिया तो ऐसी अवस्थामें यद्यपि शिवशकर घर जला- देने में सहायता करनेका अपराधी होगा, परन्तु वह चोरीमे सहायता करनेका अपराधी नहीं है, क्योंकि वह चोरी एक पृथक्ही काम था और घर जलानेका परिणाम सम्मवित न था। (ग) शिवशकरने रमाशकर और उमाशकर दोनोको किसी बसे हुए घरमें जोरीसे चोरी करनेके लिये आधीरात के समय बलपूर्वक घुसनेको बहकाया और इस अभिप्रायके कारण शिवशकरने उन्हें हथि- यार लादिये यदि रमाशकर और उमागकर बलपूर्वक उस घरमें घुसजावे और घरवालोमेंसे एक मनुष्य हरशकरको जो उनका सामना करे मारडालें तो ऐसी अवस्थामे, यदि वह मारडालना सहायताका परि- 'णाम सम्भवित था तो शिवशकर उस दडके योग्य होगा जो जातघातके लिये ठहराया गया है। (११२) यदि वह काम, जिसका सहायक दफा १११ के अनुसार दडके योग्य जिस काममे सहायता कीगई हो और जो काम है उस कामके अतिरिक्त किया जावे जिसमें सहायता कीगई है और कियागया है उसके लिये वह वास्तवमें दूसराही अपराध हो तो सहायक उन अपराधोंमेसे प्रत्येक सहायक कर दोनो दड अपराधके लिये दंडके योग्य होगा। पादेगा उदाहरण । शिवशंकरने किसी सरकारी नौकरकी कीहुई कुर्कीमे बलपूर्वक सामना करनेके लिये रमागकरको बहकाया और रमाशकरने उसके अनुसार कुर्कीको रोका और रोकनेमें रमाशंकरने जान बूझकर कुर्की करनेवाले ओहदेदारको भारी दुःख पहुंचाया तो यहा उसने दोनों अपराध किये इसलिये वह दोनो अप राधोके दड योग्य हुआ और जब कि शिवशकरने यह बात जानली हो कि कुर्कीका सामना करने में भारी दुःख पहुँचना अति समवित है तो शिवशकर भी इन दोनों अपराधोंमें दड योग्य होगा। . टीप-१-(क) ने (ख) के घरमे विना उसकी प्रसन्नताके जाकर उसकी स्त्रीके साय समोग किया-तजवीज हाईकोर्टकी यह हुई कि (क) दोनों अपराधोंके लिये अर्थात् व्यभिचार (जिनाकारी) और बलपूर्वक घरमें घुसने (मदाखलत घेजा) का अपराधी है और वह दोनो अपराधोका दडपासकता है क्योंकि वे दोनों अपराध अलग २ है लेकिन ऊपर लिखे अभियोग ( हालात) मे (ख) की स्त्री कानूनानुसार मदाखलत बैनाके अपराधकी सहायता करनेके योग्य नहीं है । (पजाब रिकार्ड न० सन् १८७१ ई.)

. हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह । [अध्याय- (११३) जब किसी काममें सहायता कोजावे और सहायता करनेवालेका यह दड सहायकको उस) अभिप्राय हो कि उससे कोई विशेष परिणाम होवे और वह काम परिणामके बदले जो उस जिसका सहायक अपनी सहायताके कारण दंड योग्य है किसी ऐसे कामसे उत्पन्न हो जिसको परिणाम को उत्पन्न करे जो उस परिणामके विरुद्ध हो कि जो सहायता कीजावैऔरजो सहायककी नियत (इच्छा) में था तो सहायक उस. परिणामके परिणाम काम करनेवाले के अभिप्राय विरुद्ध हो. कारण जो उत्पन्न हुआ उसीप्रकार और उतनाही दड योग्य होगा कि मानो उसने उस परिणामके उत्पन्न करनेके अभिप्रायसे उस काममें सहायता की, परतु नियम यह है कि जब वह यह जानता हो कि उस कामसे (जिसमें सहायता कीगई है ) उस परिणामका उत्पन्न होना सम्भवहै । - शिवशकरने, उमाशंकरको भारी दुःख पहुंचाने के लिये रमाशकरको बहकाया और रमाशकरने उस वहकानेके कारण उमाशंकरको भारी दुःख (जररशरीदी) पहुँचाया और उमाशंकर इसी कारणसे मरगया-तो इस अवस्थामे यदि शिवशंकर यह जानता था कि उस भारी दुःखके कारण मृत्यु होनेका भय है तो शिवशकर उस दडके योग्य होगा जो वध अपराधके वदले ठहराया है। (देखो दफा ४.) (११४ ) जब कोई मनुष्य, जो अनुपस्थित (गैरहाजिरी ) अवस्थामे सहायता अपराध किये जानेके ) करनेके लिये दडके योग्य होता तो उस काम या अपराध होनेके समय सहायकका होना, समय उपस्थित रहे जिसके मध्ये वह सहायता करनेके कारण दंडके योग्य होता तो वह उस काम या अपराधका करनेवाला समझा जावेगा- १-इस अभियोगमे अपराधी वधके समय उपस्थित था और वह यह नही जानता था कि ऐसा काम होवेगा-हरके मारे उसने उपरोक्त अपराध रोकनेका कोई यल नही किया वरन उस मेरे हुए मनुष्यकी लाश छिपानेमें वधिकों (अपराधियो) के साथ मिलगया-तजवीज हाईकोर्ट की यह हुई कि अपराधी वध करनेकी सहायताका अपराधी नही था वरन् वह उपरोक्त अपराधकी गवाहीको मिटादेनेका अपराधी दंडसग्रह हिदकी दफा २०१ के अनुसार होगा (वीली रिपोर्टर जिल्द ६ सफा ८०) (११५) जो कोई मनुष्य किसी ऐसे अपराधके करनेमें सहायता करे जिसके बद. उस अपराधमे सहा लेमें मृत्युदर या देश निकालेका दड ठहराया गया है तो यदि वह यता करना कि जिसका अपराध उस सहायताके कारण न हो और ऐसी सहायताके मव्ये, दंड मृत्यु या देश निका- लेकाहै यदि अपराधसहा- इस सग्रहमें कोई दंड न ठहराया गया हो तो उपरोक्त मनुष्यको यताके कारण न हो। दोनो प्रकारोंमेसे किसी प्रकारको कैदका दड दिया जायेगा जिसकी अवधि सात वर्पतक हो सकती है और वह धन दडके भी योग्य होगा।

पाँचवाँ ५.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०॥ (५५) ४ और यदि कोई ऐसा काम किया जावे जिसके मध्ये सहायक सहायताके कारण यदि काम जिससे ) दडके योग्य है और जिस - कामसे किसी मनुष्यको हानि हानि पहुंचे सहायताके कारण कियाजावे. किसी प्रकारका कैदके पहुंचे तो सहायक दोनो प्रकारोंमेंसे योग्य होगा जिसकी अवधि १४ वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके मी योग्य होगा। उदाहरण । शिवशकरने रमाशकरको उमाशकरके मार डालनेके लिये बहकाया परन्तु रमागकरसे यह अपराध नही हुआ परन्तु यदि उमाशकरको मारडालता तो वह मृत्युदड या देश निकालेके दडका भागी होता तो इस अवस्थामें शिवशंकर किसी कैदके योग्य होगा जिसकी अवधि सात वर्षतक हो सकती है और जुर्मानेके भी योग्य होगा और यदि इस सहायताके कारणसे उमाशंकरको कुछ हानि पहुंचे तो शिवशकर किसी कैदके योग्य होगा जिसकी अवधि १४ वर्ष तक होसकती है और जुर्मानेके भी योग्य होगा। (११६) जो कोई मनुष्य किसी अपराधमें सहायता करे जिसके बदले में उस अपराधमे सहा-] कैदका दड ठहराया गया है तो यदि वह अपराध उस सहा. यता करना निसका दंड | यताके कारण न हो यताके कारण न हो और ऐसी. सहायताके मध्ये इस समहमे कैद है यदि अपराधका कोई विशेष दण्ड मी नहीं ठहराया गया तो उपरोक्त मनुष्यको होना सहायताके कारण न हो उस प्रकारकी कैदका दड दिया जायगा जो उस अप. राधके बदलेमें ठहराया गया है और उसकी अवधि ( मीआढ ) उस कैदकी वडीस वडी मीदकी एक चौथाई तक हो सकती है जो उस अपराधके लिये ठहराई गई है या उस जुर्मानेका दड दिया जायगा जो उपरोक्त अपराधके लिये ठहराया गया है या कैद और जुर्माना दोनों दड दिये जायेंगे। और यदि सहायक या सहायता पानेवाला सरकारी नौकर हो तो सहायकको यदि सहायक और उस प्रकारकी कैदका दड दिया जायगा जो उस अपराधके जिसकी सहायता कीजाय | बदलेमें ठहराया गया है और उसकी मीआद उस कैदकी दोनोंही सरकारी नौकरहो वडीसे बडी मीआदके एक आधे तक होसकती है जो उस जिसपर अपराधका रो- कना कर्तव्य है. अपराधके लिये ठहराई गई है या उस जुर्मानेका दड दिया जायगा जो उस अपराधके लिये ठहराया गया है या कैद और जुर्माना दोनोंही दढ दिये जावेंगे। उदाहरण। (क) शिवाकर रमाशकरको जो सरकारी नौकर है कुछ चूंस इनामकी तौरपर इसलिये देने कहे कि रमागकर अपने ओहदेके काममें कुछ पक्षपात करे और रमाशकर घूस लेनेसे नाही करे तो शिवाकर इस दफाके अनुसार दंडके योग्य होगा। .

(५६) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह । [ अध्याय- (ख) शिवशकरने रमाशकरको झूठी गवाही देनेके लिये बहकाया इस अवस्थामें यदि रमा- बाकर झूठी गवाही न दे तो भी शिवशंकर उस अपराधका करनेवाला होगा जिसका वर्णन इस दफामै किया गया है और उसीके अनुसार दडके योग्य होगा। ग) शिवशकर एक पुलीसके ओहदेदारने जिसका काम चोरीके रोकनेका है चोरी होनेमे सहायता की इस अवस्थामें यद्यपि चोरी न भी हुई तो भी शिवशंकर उस कैदकी बडीसे बड़ी मीआ- दके एक आधे भागके योग्य होगा जो उस अपराधके लिये ठहराई गई है और जुर्मानेके भी योग्य होगा। (घ) रमाशकर चोरीके होनेमे शिवशकरकी सहायता करे और शिवशकर पुलीसका एक ओहदेदार हो जिसपर ऐसे अपराधके होनेका रोकना उसका कर्त्तव्य कर्म है तो इस अवस्थामै चाहे चोरी न भी हो तो भी रमाशंकर उस कैदकी बडीसे बड़ी मोदके एक आधेके योग्य होगा जो जोरीकी चोरीके बदलेमे ठहराई गई है। ( ११७ ) जो कोई मनुष्य सर्व साधारण मनुष्योंको या मनुष्योंके किसी समूहको सहायता पहुँचाना किसी ) जो दश मनुष्योंसे अधिक हो किसी अपराधके करनेमे सहायता करे अपराधके करनेमें सबके | तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोंमेंसे किसी प्रकारके कैदका द्वारा अथवादशसे अधि- दड दिया जायगा जिसकी मीआद तीन वर्षतक होसकती है क मनुष्योंके द्वारा। या जुर्मानेका दड अथवा कैद और जुर्माना दोनोंही दड दिये जावेंगे। (दफा ४० को देखो ) उदाहरण । शिवशकर किसी सर्वसम्बन्धी स्थानमें एक विज्ञापन लगावे जिससे किसी सम्प्रदाय (फिी) को जिसकी संख्या दशसे अधिक हो यह बहकावे कि वह किसी मुख्य समय और स्थान पर इस अभिप्रायसे इकट्ठे हो कि प्रतिकूल सम्प्रदायके मनुष्यों पर जब कि वह समाज बांधे हुए जाते हों आक्रमण ( हमला) करें तो शिवशंकर उस अपराधका अपराधी होगा जिसका वर्णन इस दफामें किया गया है। ( ११८ ) जो कोई मनुष्य इस अभिप्रायसे, कि किसी अपराधका उद्योग किसी ऐसे अपराधके जिसका दंड मृत्यु या देश निकाला है सहज होजावे या यह जान उद्योगको गुप्त रखना जि सका दड मृत्यु या देश कर कि उसका सहज होना संभव है किसी काम अथवा निकाला है। कानूनविरुद्ध चूक ( तर्क ) के द्वारा उस उद्योगको छिपावे जो ऐसे अपराधके होनेको किया गया है या उस उद्योगके मध्ये कोई ऐसा बयान करे जिसको वह झूठा जानता है तो उस अपराधके हो जानेपर उपरोक्त मनुष्यको दोनों पाँचवॉ ५.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६००। (५७) प्रकारोमेंसे किसी प्रकारका दड दिया जायगा जिसकी मीआट सात वर्पतक होसकती है और यदि अपराध न हो तो दोनो प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जायगा जिसकी मीआद तीन वर्पतक होसकती है और प्रत्येक अवस्थामें वह जुर्मानके मी योग्य होगा। उदाहरण। शिवशकर यह जानकर कि रामनगरमे डाका पडनेवाला है साहब माजिस्ट्रेटको झूठी सूचना (खबर )दे कि चन्द्रनगरमें जो दूसरी ओर है शीघही डाका पडनेवाला है और इस प्रकार साहब मजिस्ट्रेटको धोखा दे इस अभिप्रायसे कि उस कामका होना सहन होजावे और इस उद्योगपर वर्चाव करनेसे रामनगरमे डाका पडजावे तो शिवशकर इस दफाके अनुसार दडके योग्य होगा। टीप १-मदरासमें चार अपराधियोंको वधके अपराधमें दड दियागया और पाँचवें अपराधी- की तजवीज (विचार) जो मारेगये मनुष्यकी ली थी, दडसग्रह हिदकी दफा ११८ के अनुसार की गई-हाईकोर्टने इस अपराधिनीको दड दिया, क्योकि जाचनेसे यह पायागया कि स्त्रीको उसके स्वामीके वधके उद्योगका वृत्तान्त जात था और उसने इस वृत्तान्तको अपने स्वामीसे छुपाया-(मदरास केस नं. ३० सन् १८६८ ई.) ( ११९ ) कोई मनुष्य जो सरकारी नौकर है इस अभिप्रायसे कि किसी अपराधका सरकारी नौकर जो) होना कि जिसका रोकना उसका कर्तव्य कर्म (फर्ज ) हे सहज किसी अपराध होनेके उ- होजावे या यह जानकर कि उसका सहज होजाना सभव है किसी द्योगको छिपावे जिसका काम या कानूनविरुद्ध चूकके द्वारा स्वय उस उद्योगको छिपावे जो रोकना उसका कर्तव्य है. होनेवाले अपराधके लिये किया गया हो या उस उद्योगके मध्ये . कोई ऐसा वयान करे जिसको वह झठा जानता हो तो उस अपरावके होजानेपर उपरोक्त मनुष्यको उस प्रकारको कैदका दड दिया जायेगा जो उस अपराधके बदलेमें ठहराई गई है और उसकी मीभाद उस कैदको बडीसे वडी मीआदके एक आधेतक होसकती है जो उस अप- राधके लिये ठहराई गई है या उस जुर्मानेका दढ जो उपरोक्त अपराधके लिये ठहराया है अथवा कैद और जुर्माना दोनो दह दिये जावेंगे-और- यदि उस अपराधके बदलेमें मृत्युदर या देश निकालेका दंड ठहराया गया तो यदि अपराधका दड) दोनो प्रकारमेंसे किसी प्रकारको कैद जिसकी मीद दश वर्षतक है होसकती है और यदि अपराध न हुआ हो तो उपरोक्त मनु- व्यको उस प्रकारकी कैदका दड दिया जावेगा जो उपरोक्त अपराधके लिये मुकर है और उसकी मीाद उस कैदकी बडीसे बडी मीादकी एक चौथाई तक होसकती है जो उस अपराधके लिये ठहराई गई है या उस जुर्मानेका ढढ जो उपरोक्त अपराधके लिये ठहराया गया है या कैद और जुर्माना दोनोही दड दिये जायगे । } --मृत्यु आदि हो.

हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [ अध्यायपाँचवाँ ५.] (५८) उदाहरण। शिवाकर पुलीसके ओहदेदारको कानूनानुसार उचित है कि जोरीकी चोरी ( सरका विल. जन) के उद्योगोकी जो उसको ज्ञात हो सूचना करे और शिवशंकर यह जानकर कि रमाशकर जोरीको चोरीका उद्योग कर रहा है ऐसी सूचना करनी इस अभिप्रायसे रहित करे कि उस अपरा. धका होना सहज होजावे तो इस अवस्थामै शिवशंकरने कानूनविरुद्ध चूक ( तर्क ) के द्वारा रमाशंकरके होते हुए उद्योगको छिपाया, इसलिये इस दफाकी आजानुसार वह दंडके योग्य हुवा। ( १२० ) जो कोई मनुष्य इस अभिप्रायसै कि किसी अपराधका होना, जिसके उस अपराधक होनेके ) बदलेमें कैदका दड ठहराया गया है सहज होजावे या यह जानकर उद्योगको छिपाना जिसका कि उसके सहज होजानेका संभव है किसी काम या कानूनविरुद्ध चूककेद्वारा अपनी इच्छासे उस होते हुए उद्योगको छिपावे जो उपरोक्त अपराधके होनेके लिये किया गया है या उस उद्योगके मध्ये कोई ऐसा वर्णन करे जिसको वह अठा जानता हो तो यदि उपरोक्त अपराध होवे तो उस मनुष्यको उस प्रकारको कैदका दड दिया जायगा जो उस अपराध के लिये ठहराई गई है और उसकी मीभाद उस कैदके बडीसे बडी मीआदकी एक चौथाईतक होसकती है और यदि अपराध न हुवाहो तो कैद एक आठवे हिस्सेतक होसकती है जो उपरोक्त अपराधके लिये ठहराई गई है अथवा उम जुर्मानेका दड जो उपरोक्त अपराधके लिये ठहराया गया है या दोनों दड दिये जावेगे। नोट--इस दफामें लिखे हुए दंड उन सरकारी नौकरोंके मध्ये अधिक कडे हैं जिनका काम अपराधोके रोकनेका है-इस दफाके साथ मजमूआ जाब्ता फौजदारी ऐक्ट नं० ५ सन् १८९८ ई. की दफा ४४ व ४५ देखी जाय। दंड कैद है.

[ अध्यायछठा ६.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई० । (५९) अध्याय छठा ६.* सहायता करना, राजविद्रोहके अपराधोके विषयमे । (१२१) जो कोई मनुष्य श्रीमती महारानीके विरुद्ध युद्ध करे या ऐसे युद्ध करनेका श्रीमती महारानांके ] उद्योग करे या ऐसे युद्ध करनेमें सहायता करे तो उपरोक्त विरुद्ध युद्ध करना या मनुष्यको मृत्यु या देश निकालेका दड दिया जावेगा और उसका उद्योग या उसमें उसका सब धन (जायदाद ) जप्त किया जायगा। उदाहरण। क) शिवशकर श्रीमती महारानीके विरुद्ध किसी विद्रोहमें साझी हो तो शिवाकर उस अप- राधका अपराधी होगा जिसका वर्णन इस दफामें किया गया है। (ख) शिवशकर, जो हिन्दुस्थानमे है विद्रोहियोको हथियार भेजकर एक विद्रोहमे सहायता करता है जो सीलोनटापूमे श्रीमती महारानीके विरुद्ध हुई हो, ऐसी अवस्थामें शिवशकर श्रीमती महारानीके विरुद्ध युद्ध करने में सहायताका अपराधी होगा। टीप-(१) मुकद्दमे का विचार अदालत सेशन करसकती है। २) पोलीस विना वारट अपराधीको नहीं पकडसकती। ३) पहिले वारट अपराधीके नाम जारी होना चाहिये। (४) अपराध जमानतके योग्य नही है । (५) राजीनामा (सधि ) नहीं हो सकता है । ६) मजूरी दरकार है। .( १२१) (अ) जो मनुष्य कि ब्रिटिश इंडियामे या उससे बाहर किसी उन अपराधोके कर-) अपराधको मरनेके लिये जो दफा १२१.के अनुसार दंडके नेम उद्योगजो दफा१२१ / योग्य हैं, या श्रीमती महारानीको ब्रिटिश इंडिया या उसके के अनुसार दडके योग्य है किसी मागके अधिकारसे अधिकार रहित (वै दखल) करनेके लिये उद्योग करे या अपराधयुक्त बलके द्वारा अथवा अपराधयुक्त वल दिखाकर गवर्नमेंट हिंद या किसी लोकल स्थानिक गवर्नमेंटकी न्यूनताके लिये उद्योग करे तो वह मनुष्य जन्म भरके लिये या इससे कम मीमादके लिये देश निकालेके दढ योग्य होगा या उसे दोनों प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी कैटका दह दिया जावेगा जिसकी मीभाद दश वर्षतक होसकती है। ऐक्ट २७ सन् १८७० को दफा १४ व ऐक्ट १० सन् १८८२ ई० की दफा १९६ को देखो। समस्त मनुष्योको उचित है कि दफा १२१ से १२६ ताव १३० दफाके अपराधोकी सूचना करें देखो ऐक्ट १० सन् १८४२ ई. की दफा २४ - हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- (६०) स्पष्टीकरण--इस दफाके अनुसार सहायता दिये जानेके लिये यह अवश्य नहीं है कि कोई काम अथवा कानून विरुद्ध चूक उसके उद्योगमें दिखाई दे । (दफा ४ ऐक्ट नं. २७ सन् १८७० ई० को देखो) टीप-(१) अदालत सेगन मुकद्दमेकी तजवीन करसकती है( २) पोलीस विना वारंट अप- राधीको नहीं पकड सकती (३) पहिले वारट अपराधीके नाम जारी होना चाहिये ( ४ ) अपराध जमानतके योग्य नहीं है (५) राजीनामा नही होसकता (६) मजूरी दरकार है। (१२२) जो कोई मनुष्य, सिपाही या हथियार या गोले वारूदकी किस्मसे श्रीमती महारानीके) कोई सामान इकट्ठा करे या किसी और प्रकारसे युद्धकी विरुद्ध युद्ध करनेके अभि- तैयारी करे इस अभिप्रायसे कि श्रीमती महारानीके विरुद्ध प्रायसे शस्त्र आदि इकट्ठा युद्ध करे या युद्ध करनेपर तैयार रहे तो उपरोक्त मनुष्यको करना. देश निकाला या दोनो प्रकारमेंसे किसी प्रकारकी कैदका दंड दिया जायगा जिसकी मीभाद दश वर्षसे अधिक न हो और उसका कुलधन (जायदाद ) जब्त होगा। टीप---(१) अदालत सेशन मुकद्दमेकी तजवीज करसकती है (२) विना वारंट मजिस्ट्रेटके पोलीस अपराधीको नही पकड सकती (३) अपराध जमानतके योग्य नहीं है (४) पहिले वारंट अपराधीके नाम जारी होगा (५) राजीनामा नहीं हो सकता (६) मजूरी दरकारहै । ( १२३ ) जो कोई मनुष्य किसी काम या कानूनविरुद्ध चूकद्वारा किसी होने हुए युद्ध करनेके यत्नको उद्योगको जो श्रीमती महारानीके विरुद्ध युद्ध करनेके लिये किया उसके सहल करनेके गया है, छिपावे इस अभिप्रायसे या यह जाननेके सभवसे कि ऐसे अभि प्रायसे छिपाना, छिपानेसे युद्धका करना सहज होजावे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जायगा जिसकी मीभाद दश वर्पतक हो सकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप--(१) अदालत सेशन, (२) पोलीस दस्तन्दाजी ( इस्ताक्षेप ) नहीं कर सकती, (३) वारंट अपराधीके नाम जारी होगा, (४) जमानत नहीं है, (५) राजीनामा नहीं हो सकता है, (६) मंजूरी दरकार है। (१२४ ) जो कोई मनुष्य गवर्नरजनरलहिद या किसी प्रेजीडेसीके गवर्नर नवर्नर जनरल या गव या लेफ्टिनेन्टगवर्नर या गवर्नरजनरल बहादुर हिदकी कौंस- नरआदिपर किसी उचित | लके मेंबर ( सभासद ) पर आक्रमण करे या उसे अनीति अधिकारके वर्तनपर वि. वश करना या वसे रीति ( मुजाहिमत बेजा ) से रोंके या अनीति रीतिसे रोक- रोकनेके अभिप्रायसे आ नेका उद्योग करे या किसी अपराध संयुक्त बल ( जब क्रमण करना. मुजरिमाना ) के द्वारा या अपराध संयुक्त बल दिखाकर डरावे या इस प्रकार डरानेका उद्योग करे इस अभिप्रायसे कि वह उस गवर्नर छठा ६.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६०ई० । (६१) जनरलबहादुर या गवर्नर या लेफ्टिनेन्टगवर्नर या कौसलके मेवरको दवाव या विवश करे कि वह गवर्नरजनरलवहादुर या गवर्नर या लेफ्टिनेन्टंगवर्नर या कौंसलके मेवर किसी प्रकार अपने उचित अपराधसे किसी अधिकारको वर्ते या किसी प्रकार वर्त- नेसे रुका (वाज ) रहे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारमेसे किसी प्रकारकी कैठका दंड दिया जावेगा जिसकी मीआद सात वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानके मी योग्य होगा। टीप-(१) अदालत सेशन (२) पुलीस दस्तन्दानी नहीं कर सकती, (३) वारट अप- राधीके नाम जारी होगा (४) जमानन नहीं है (५) राजीनामा नहीं हो सकता (६) मजूरी दरकार है। करना (१२४) * (अ) जो मनुष्य शब्दोद्वारा जो वोले गय या लिखे गये हो या बुरे विचारोका उत्पन्न ) चिह्नोद्वारा या आखसे देखने योग्य कोई नकल बनाकर या और किसी भातिपर घृणा ( नफरत ) उत्पन्न करे या उत्पन्न करनेका उद्योग करे या बुरे विचार श्रीमती महारानी या गवर्नमेटके मद्धे जो ब्रिटिश इडियामे स्थिर कीगई है, उत्पन्न करे या उत्पन्न करनेका उद्योग करे तो उपरोक्त मनुष्यको जन्मभर या कुछ कम मीआदके लिये देश निकालेका दड हो सकता है जिसपर जुर्माना भी वढाया जा सकेगा या कैदका दड जुर्माना समेत जिसकी मीआद तीन वर्षतक होसकती है, या जुर्मानेका दड दिया जावेगा। स्पष्टीकरण-१-"बुरे विचार के शब्दमे कृतन्त्रता (वेवकाई) और शत्रुताके समस्त विचार सयुक्त है। +स्पष्टीकरण-२-सरकारके-उद्योगोके मध्ये अप्रसन्नता प्रगट करनेके अभिप्रायसे नुक्का. चीनी (टीका ) करना इस अभिप्रायसे, कि उचित रीतोद्वारा उनमे अदल बदल कराया जावे विना इस वातके कि, घृणा या बदनामी उत्पन्न की जावे या उत्पन्न करनेका उद्योग किया जावे इस दफाके अनुसार कोई अपराध नहीं ठहरता । - * दफा ५-ऐक्ट २७ सन् १८७०ई० को देखो। इस संग्रहके अध्याय ४ व ५ उन अपराधोंसे सम्बन्ध रखते हैं.जो इस दफाके अनुसार दंडक योग्य है (ऐक्ट न० २७ सन् १८७० ई० की दफा १३ व १४ को देखो, + बुरे विचारों और अप्रसन्नताका स्पष्टीकरण कियागया देखो इ० ला. र. कलकत्ता जिल्द ६९ सफा ३५, [अध्याय (६२) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। स्पष्टीकरण ३-सरकारके प्रबध या किसी और कामके मध्ये अप्रसन्नता प्रगट करनेके अभिप्रायसे नुक्ताचीनी अर्थात् टीका करना विना इस बातके कि घृणा या वदनामी उत्पन्न की जावे या उत्पन्न करनेका उद्योग किया जावे इस दफाके अनुसार कोई अपराध नहीं ठहराता। (टीप)-(१) अदालत सेशन या चीफ गै० म० या मजिष्ट्रेट जिला या म० दर्जा अव्वल जिस्से लोकल गवर्नमेंटने इस वारेमे अधिकार दिया हो (२) पोलीस दस्तन्दाजी नही करसकती ३) वारन्ट अपराधीके नाम जारी होगा (४) जमानत नहीं है (५) राजीनामा नहीं होसकता (६) मंजूरी दरकार है। (१२५ ) जब कोई मनुष्य एशियाई देशकी किसी गवर्नमेटके विरुद्ध जो श्रीमती किसी एशियाई देश-) महारानीसे मित्रता रखती हो युद्ध करे या युद्ध करनेका उद्योग करे की गवर्नमेटके विरुद्ध जो या ऐसे युद्ध करनेमें सहायता करे तो उपरोक्त मनुष्यको जन्म श्रीमती महारानीसे मित्र- भरके लिये देश निकालेका दड दिया जायेगा और इसके सिवाय ता रखती हो युद्ध करना. जुर्माना भी होसकता है या दोनों प्रकारों से किसी प्रकारको कैदका दल दिया जावेगा जिसकी मीआद सात वर्षतक हो सकती है और अतिरिक्त इसके जुर्माना मी हो सकता है या केवल जुर्मानेका दड दिया जावेगा। टीप-(१) अदालत सेशन (२) पोलीस दस्तन्दाजी हस्ताक्षेप नहीं करसकती (३) वारन्ट अपराधीके नाम जारी होगा (४) जमानत नहीं है (५) राजीनामा नहीं होसकता (६) मंजूरी है (१२६) जो कोई मनुष्य किसी ऐसे देशमें लूट मारकरे या लूटमार करनेकी तैयारी क जिसका अधिपति श्रीमती महारानीसे मित्रता या संधि रखता हो तो ऐसे अधिपतिके रा. ज्यमै लूट मार करना जो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दण्ड श्रीमती महारानीसे सधि दिया जायगा जिसकी मीआद सात वर्षतक हो सकती है और वह रखता हो । मनुष्य जुर्मानेका तथा उस माल व असबाबकी जन्तीकै मी योग्य होगा जो उस लूटमारके काममें आया हो. था जिसका उसके काममे आना सभव हो जी उस लूटमारके द्वारा प्राप्त हुवा है । - टीप-(१) अदालत सेशन (२) पोलीस दस्तन्दाजी नहीं करसकती (३),वारन्ट अप राधीके नाम जारी होगा (४) जमानत नही है (५) राजीनामा नहीं होसकता (६) मजूरी दरकार है। 14 छठा ] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०॥ (६३) (१२७ ) जो कोई मनुष्य कोई माल या मसवाव यह जानकर ले कि वह उन अप- लेना उसमालका जो] राघों से किसी ऐसे अपराधके द्वारा प्राप्त किया गया है जिनका दफा १२५व१२६के अ- वर्णन दफा १२५ व १२६ मे हुआ है तो उपरोक्त मनुष्यको नुसार युद्ध व लूटमारके दोनों प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जायगा जिसकी द्वारा प्राप्त किया गयाहो । मीआद सात वर्षतक हो सकती है और यह मनुष्य जुर्मानेका और उस माल व असबावकी जन्तीके भी योग्य होगा जिसको वह इस प्रकार अपने अधिकारमे लाया हो। टीप-(१) अदालत सेशन (२) अदम दस्तन्दाजी पोलीस (३) वारट अपरावीके नाम जारी होगा (४) जमानत नहीं है (५) राजीनामा नहीं होसकता । ( १२८ ) जब कोई मनुष्य जो सरकारी नौकर है और जिसकी चौकसीमें कोई सरकारी नौकर को) राज्यविरोधी कैदी या युद्ध कैदी हो, उस कैदीके किसी स्थानसे अपनी चीकसीसे किसी जहा वह कैद है जानबूझकर भाग जाने दे तो उपरोक्त मनुष्यको राज विरोधी अपराध के कैदी अथवा युद्धके कैदी | जन्म मरके लिये देश निकाला या दोनों प्रकारोमेंसे किसी प्रकारकी को भाग जाने देना. कैटका दड दिया जावेगा जिसकी मीद दश वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेका भी देनदार होगा। टीप-(१) अदालत सेशन (२) अदम दस्तन्दाजी पोलीस (३) वारट अपराधीके नाम जारी होगा (४) जमानत नहीं है (५) रानीनामा नहीं होसकता (६) मजूरी दरकार है। ( १२९ ) जब कोई मनुष्य जो सरकारी नौकर है और जिसकी चौकसीमें कोई सरकारी नोकरका अप राज्यविरोधी कैदी या युद्धका कैदी हो असावधानी ( गफलत ) नी.चौकसीसे किसी राज्य से उस कैदीको उस स्थानसे कि जहा वह कैद है माग जानेदे तो विरोधी कैटी या युद्धके कैदी को भाग जाने देना. | उपरोक्त मनुष्यको साधारण कैदका दंड दिया जावेगा जिसकी मीभाट तीन वर्षतक हो सकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप-(१) अदालत सेगन या प्रेसीडेंसी मजिष्ट्रेट या म० अब्वल (२) अदम दस्तन्दानी पोलीस (३) वारंट अपराधीके नाम जारी होगा (४) जमानत हो सकती है (५) राजीनामा नहीं है (6) मजुरी दरकार है। ( १३० ) जो कोई मनुष्य जानबूझकर किसी राज्यविरोधी कैदी या युद्धके केटीकी उपरोक्त कैदीको भाग] उचित चौकसीसे भागे जानेमें सहायता करे अथवा सहारा दे या जाने में सहायता करना या किसी ऐसे कैदीको छुडा लेजाय या छुड़ा लेजानेका उद्योग करे या ऐसे उसको छुडाना या धरण | कैदीको जो उचित चौकसीसे माग गया हो शरण दे या छिपारक्खे देना, या किसी ऐसे कैदीके फिर पकडनमें किसी प्रकारकी रोकटोक को या (६४) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- रोकटोक करनेका उद्योग करे तो उपरोक्त मनुष्यको देश निकाला या दोनों प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जायगा जिसकी मीआद दश वर्षतक हो सकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। स्पष्टीकरण-कोई राज्यविरोधी कैदी अथवा युद्धका कैदी जिसको ब्रिटिश इडियाकी नियत सीमाके भीतर अपने न मागनेकी प्रतिज्ञाके अनुसार फिरनेकी आजा हुई हो कदाचित् वह उसी सीमासे जिसके भीतर फिरनेकी आज्ञा हुई है बाहर तो कहा जायगा कि वह उचित चौकसीसे भाग गया। निकल जाय टीप-(१) अदालत सेशन (२) अदम दस्तन्दाजी पोलीस (३) वारट अपराधीके नाम जारी होगा ( ४ ) जमानत नहीं हो सकती (५) राजीनामा नहीं है (६) मंजूरी दरकार है। अध्याय सातवाँ ७. जंगी अथवा जहाजी सेना सम्बंधी अपराधोंके विषयमें। ( १३१ ) जब कोई मनुष्य, विद्रोह करनेमे जो श्रीमती महारानीकी जगी या बगावतमे सहायता] जहाजी सेनाकी अफ्सर या सिपाही या जहाजी केवटकी ओरसे हो, करना या किसी सिपाही सहायता करे या ऐसे अफ्सर या सिपाही या केवटको नौकरी या नौक- जहाजी केवटको उ- सके कामसे बहकानेका | रीका काम न करनेके लिये बहकानेका उद्योग करे तो उपरोक्त मनु. व्यको जन्म भरके देश निकालेका या दोनों प्रकारोंमेसे किसी प्रका- रकी कैदका दड दिया जायगा जिसकी मीआद दश वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानका भी देनदार होगा। उद्योग करना. स्पष्टीकरण-इस दफामे शब्द "अफ्सर" और "सिपाही" के अर्थमे प्रत्येक मनुष्य गिना जायगा जो आरटिकल्स आफ वार धर्म प्रबन्धी सेना श्रीमती महारानीके अधीन है या जो आरटिकल्स आफ वार ऐक्ट ६ सन् १८७९ के ई० लेखानुसार हो । (दफा ६ ऐक्ट २७ सन् १८७० ई० को देखो) टीप-(१) अदालत सेशन (२) दस्तन्दाजी पोलीस ( ३ ) वारण्ट बनाम अपराधी (४) जमानत नहीं है (५) राजीनामा नहीं है।

सातवा ७.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०। (६५) होगा। ( १३२ ) जब कोई मनुष्य विद्रोह करनेमे, जो श्रीमती महारानीके जगी या जहाजी विद्रोहमे सहायता सेनाके किसी अफ्सर या सिपाही या जहाजी केवटकी ओरसे हो, करना जब कि वह वि- सहायता करे और यदि उसकीही सहायताके कारण विद्रोह होजात्रे द्रोह उसी सहायताके कारण होजाय तो उपरोक्त मनुष्यको मृत्युदंड या जन्मभरके लिये देश निकालेका दंड या दोनो प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जायगा जिसकी मीआद दा वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेका भी देनदार होगा। टीप-(१) अदालत सेशन (२) पुलीस हस्ताक्षेप करसकती है (३) वारंट अपराधीके नाम जारी होगा (४) जमानत नहीं है (५) राजीनामा नही होसकता। ( १३३ ) जब कोई मनुष्य किसी आक्रमण ( हमले ) मे सहायता करे जो श्रीमती किसी आक्रमणमैं ) महारानीकी जगी या जहाजी सेनाका कोई अफ्सर या सिपाही सहायता देना जो कोई जहाजी केवट अपने ऊपरके अपसरपर करे उस अवस्थामें कि जब सिपाही या नहाजी क्वट वह अपने ओहदेका काम कररहा हो तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों अपने ऊपरके अपसर पर प्रकारोमेंसे किसी प्रकारको कैदको दड दिया जायगा जिसकी मी- जब कि वह अपने मोह- देका काम कररहा हो | आंद तीन वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेका मी देनदार करे. टीप-(१) अदालत सेगन, प्रै० म० या म० अ० (२) काबिल दस्तन्दाजी पोलीस ३) वारट बनाम अपराधी (४) जमानत नहीं है (५) राजीनामा नहीं होसकता। (१३४ ) जब कोई मनुष्य किसी ऐसे आक्रमणमे सहायता करे जो श्रीमती महा. ऐसे आक्रमणकी सहा-7 रानीकी जगी या जहाजी सेनाका कोई अफ्सर या सिपाही या यता.कि जो होजावे. जहाजी केवट अपने किसी ऊपरके अपसर पर ऐसी अवस्थामें करे कि जब वह अपने ओहदेका काम कररहा है. तो यदि उस सहायताके कारण वह आक्रमण होवे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारोमेंसे किसी प्रकारकी कैदका दंड दिया जायगा जिस- की मीआद सात वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। - टीप-(१) अदालत सेशन (२) काविल दस्तन्दानी पोलीस (३) वारट बनाम अपरावी (४) जमानत नहीं है (५) राजीनामा नहीं होसकता।. (१३५) जो कोई मनुष्य श्रीमती महारानीको जगी या जहाजी सेनाके किसी अफसर किसी सिपाही या] या सिपाही या जहाजी केवटकी नौकरी परसे भाग जानेमें सहा. जहाजी केवटकी नौकरी यता करे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारों से किसी प्रकारको परसे भागजानेमे सहा- कैदका दंड दिया जायगा जिसकी मीद दो वर्पतक होसकती है या जुर्मानेका दट या दोनो दड दिये जायेंगे। यता करना. ५ अध्याय-- (६६) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। -टीप-(१) प्रेसीडसी मजिस्ट्रेट या म० भ० या. म. दोयम (१) काविल दस्तन्दाजी 'पोलीस (३) वारट बनाम अपराधी (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं होसकता। ( १३६ ) जो कोई मनुष्य सिवाय नीचे लिखी हुई छूटके श्रीमती महारानीकी जगी नौकरीसे मागे हुएको) अथवा जहाजी सेनाके किसी अफ्सर या सिपाही या जहाजी केव- भरण (पनाह) देना. टको यह जानबूझकर या जाननेका कारण रखकर कि यह अफ्सर या सिपाही या जहाजी केवट अपनी नौकरीसे माग आया है शरण दे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दंड दिया जावेगा जिसकी मीआद दो वर्षतक हो सकती है या जुर्मानेका दंड या दोनों दंड दिये जावेगे। छूट-यह नियम उस अवस्थामे सम्बन्ध न रखेगा जब कि कोई स्त्री अपने स्वामीको शरण दे। टीप-(१) म०. या म० अ० या म० दो० (२) काबिल दस्तन्दाजी पोलीसहै (३) चारंट अपराधीके नाम जारी होगा (४) जमानत है. (५) राजीनामा नही होसकता । .. ( १३७ ) उस सौदागरी जहाजका नावपति या अधिकारी जिसपर कोई ऐसा मनुष्य भागे हुएका सौदा- छुपा हो जो श्रीमती महारानीकी जंगी या जहाजी सैनाकी नौक- गरी जहाजमें नावपतीकी से माग गया है जुर्मानेके दंडके योग्य होगा जो पांचसो. रुपयेसे मसावधानीसे छुपाहोना. अधिक न हो चाहे उस छो होनेकी उसको जानकारी न हो; परन्तु शर्त यह है कि उस छुरे होनेका मालूमकर लेना उसके अधिकारमे था यदि वह अपने नावपति या अधिकारीपनेके काममे असावधानी न करता या जहाजके प्रबंधमे कुछ खोट न होता। टीप-(१) प्रे० म० या म० अ० या म० दो० ( २ ) अदम दस्तन्दाजी पोलीस है ( ३ ) समन अरांधी के नाम जारी होगा ( ४ ) जमानत होसकती है ( ५ ) रानी- नामा नहीं होसकता। (१३८, जो कोई मनुष्य किसी काममे सहायता करे जिसको वह श्रीमती किसी विनाही या महारानी जगी या जहाजी सैनाके किसी अफ्सर या सिपाही सहानी केवटको बोरसे | यो जहाजी केंटकी ओरसे आज्ञाभङ्गका अपराध जानता है, आजाभगकै काममे सहा-[ तो यदि वह आज्ञामंगका काम उस सहायताके कारण होवे यता देना. तो उपरोक्त मनुष्पको दोनों प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मी माद छ: महीनातक होतफती है या जुर्मानेका दंड दिया जावेगा या दोनों दड दिये जावेगे।

आठवा ..] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई० । (३७) - टीप-(१) में म. या० म० अ० या म० दो० (२) काबिल दस्तन्दाजी पोलीस है। (३) वारंट अपराधीके नाम जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं हो सन्ता। (१३८ (अ) इस अध्यायको ऊपर लिखी हुई दफाये इस प्रकारपर सम्बध ऊपरकी दफाँका हिंदु-) रक्खेंगी कि मानो हिन्दुस्थानी सरकारकी जहाजी नौकरी श्रीमती व्यानकी जहाजी नौकरी महारानीकी जहाजी सेनामे संयुक्त है- यह टफा ऐक्ट १४ सन् से सम्बध रखना. १८८७ ई० के अनुसार वढाई गई ( १३९) जब कोई मनुष्य किसी ऐसे कानूनके अधीन होवे जो आरटि- जो मनुष्य भारर्टि कल्स आफ वार कहलाता है और श्रीमती महारानीकी .जगी या कल्स आफ बारके अधि- जहाजी सेना या उपरोक्त सेनाके किसी टुकडेके लिये नियत (मुक- कारमें है वो-इस संग्रहके र) हैं तो वह मनुष्य उन अपराधोंमेसे किसी अपराधके वदलेमें कि जिनका वर्णन इस अध्यायमे किया गया है, इस सग्रहके अनुसार दंड योग्य न होगा। (१४) यदि कोईज्मनुष्य जो, श्रीमती महारानीकी जमी-या-जहाजी सेनाका सिपाहीक लिबास सिपाही न हो कोई ऐसा लिबास ( धर्दी ) पहिने या ऐसा (वी) का पहिनना.. चिह ( निशान ) धारण करे जिसको वह सिपाही वर्तता (इस्तेमाल ) है इस अमिनायसे कि वह ऐसा सिपाही समझा जावे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोंमेसे किसी प्रकारको कैदका दंड दिया जायेगा जिसकी मीाद तीन महीनेतक होसकती है या जुर्मानेका दड जिसकी तादाद ५००) पाचसौ रुपयातक होसकती है या दोनों दड दिये जायेंगे। टीप-(१) कोई मनिष्ट्रेट (२) काबिल देस्तन्दाजी पोलीस (३) समन अपराधीके नाम नारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नही होसकता । अनुसार दड योग्य नहींहै, अध्याय आठवाँ ८.. : सर्व सम्बन्धी कुशलतामें विनं डालनेवाले अपराधोंके विषयमें। (१४१) पांच या अधिक मनुष्योको प्रत्येक जमाव कानून विरुद्ध जमाव कहलावेगा जब कि उन मनुष्योंका, जिनसे वह जमाव बना है, यह कानूनविरुद्ध जमाव. अभिप्राय होवे- r. या- (६८) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- पहले-हिंदुस्थानकै लेजिस्लेटिव ( कानून बनानेवाली) या इक्जेकिटियू (कारव्यवहार करनेवाली ) गवर्नमेट या किसी प्रेसीडसीकी गवर्नमेंट या किसी लफ्टेन्ट गवर्नर या किसी सरकारी नौकरको जब कि वह अपनी नौकरीका अधिकार नीतिपूर्वक वर्त रहा हो, अपराध संयुक्त बलके द्वारा या अपराध संयुक्त बल (जनमुज- रिमाना ) दिखाकर डराना या- दूसरे-रोकना किसी कानूनके प्रचारका: या कानूनानुसार आज्ञापत्रका; तीसरे-हानि पहुँचाना या मदाखलत वेजा (अनीतिसे किसीपर अधिकार करना ) अथवा किसी और दूसरे अपराधका करना या- चौथे-अपराध संयुक्त बलके द्वारा या किसी और अपराध संयुक्त बलको दिखाकर किसी मनुष्यसे कोई माल लेना या उसपर अधिकार करना- या किसी मनुष्यको किसी मार्ग अथवा जलाशयका, अधिकार - भोगनेसे -रहित करना या और किसी अमूर्ति (गैरमाही ) अधिकारके लाभसे जिसको वह मोग रहा हो रहित करना या किसी अधिकार अथवा कल्पित अधिकार ( इस्तेहकाकख्याली ) को काममे लाना; या- पांचवें - अपराध सयुक्त बलके द्वारा या अपराध सयुक्त बल दिखाकर किसी -मनुष्यको विवश करना, उस कामके करनेमे जिसका करना उसपर कानूनानुसार उचित न हो या ऐसे काम करनेमे चुकानेके लिये जिसके करनेका वह कानूनानुसार अधिकारी है। स्पष्टीकरण-सम्मव है कि कोई जमाव जो जमा होनेके समय कानू- नके विरुद्ध न था जमाव होनेके पश्चात् कानूनके विरुद्ध हो जावे (-दफा ४० को देखो) १-किसी मनुष्यके-सम्बन्धमे, कानूनविरुद्ध जमावमें सयुक्त होना या रहना इस अवस्थाम नहीं कहा जासकता कि जब साक्षी (गवाही) से यह प्रमाणित हो कि वह उस स्थानपर जहां कानून- विरुद्ध जमावके मनुष्य इकहा ये अपने मालको हानिसे बचानेके लिये गया था (वील्ली रिपोर्टर जिल्द १९ सफा ६६) २-यदि कानूनविरुद्ध जमावका कोई मनुष्य किसी अन्याय ( जब ) को करे तो उसके उस कामसे बलवेका अपराध-उत्पन्न होगा, चाहे वह अन्याय कैसाही तुच्छ क्यो न हो-जब पांच या अधिक मनुष्योका अभिप्राय दफा १.१ मे कहे हुए किसी अभिप्रायसै अन्तर्गत हो तो उनका जमाव कानूनविरुद्ध जमाव कहलावेगा चाहे वह अभिप्राय उनके दिलमे जमा होनेके समय उत्पन्न हुआ हो चाहे पीछेसे ( पंजाब रिकार्ड नं. ३४ सन् १८६८ ई०) आठवा .] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०॥ (६९) ३-कानूनविरुद्ध जमावमे सयुक्त होना उस अवस्याम दड योन्य न होगा जहा दोनी ओर वालो (फरीकन) की इच्छा किसी अधिकार या कल्पित अधिकारको कामम लानेकी न हो बरन् किसी अधिकारको बिना रोक टोक स्थिर (कायम) रखनेकी हों जिसे वे समय बर्ग रहे थे। ( वीक्ली रिपोर्टर जिल्द २३ सफा २५ उस (१४२ ) जो कोई मनुष्य उन बातोंको जानकर जिनके कारणसे कोई जमावकानून- किसी अनीति जमा- विरुद्ध जमाव कहलाता है स्वय उस जमावमे साझी होजावे या उममें वमे साझी (भरीक) होना बनारहे तो कहा जायगा कि उपरोक्त मनुष्य कानूनविरुद्ध जमावका साझीदार है। (१४३) प्रत्येक मनुष्यको जो कानूनविरुद्ध जमावका साझी हो दोनो प्रकारों से किसी दड (सजा) } प्रकारकी कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीआद छ: महीनेतक होसकती है या जुर्मानेका दंड या दोनों दड दिये जायेंगे । टीप-(१) कोई मजिस्ट्रेट (२) काबिल दस्तन्दाजी पोलिस (३) समन अपराधीके नाम जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं होमकता । कुछ, मनुष्योकी तजवीज (विचार) के समय कि जिनपर कानूनविरुद्ध जमावका अपराध लगाया गया था, यह प्रमाणित किया गया कि कुछ धरतीके अधिकारके सम्बन्धमे अपराधी और कुछ दूसरे मनुष्योमें बहुत समयसे झगडा चला आता है-दोनों ओरके जमावोमसे किसी भी जमावका अधिकार विना रोक टोकके कभी भी नही रहा-अपराधी उस घरतीमे नील बोनेके लिये बहुतसे मनुष्योका झुड लेकर गये कि जिनके पास लाठियां थीं और वे आवश्यकताके कारण जबर्दस्ती करनेपर भी तैयार थे और लाठीवालोने जब कि वह धरती बोई जाती थी दूसरे जमाववालोको अपने हथियार घुमानेके द्वारा दूर रखा-हाईकोर्टकी यह तजवीज हुई कि, दफा १४३ दडसग्रह हिंदके अनुसार अपराधियोपर कानूनविरुद्ध जमावमे साझी होनेका अप- -राध मलीप्रकारसे प्रमाणित है । (इ० ला• रि० कलकत्ता जिल्द ९ सफा ६३९ ) किसी गावमे उत्पाती मनुष्योंके दो जमाव थे, उनमंस एक जमाववालेने दूसरेको. एक ऐसी खाली जगह परसें जलसेके साथ जानेको मना किया, जो उस गावकी आम (सर्व साधारण) सडक पर है पोलीसने उनको अलग होनेका हुक्म दिया-परन्तु वह आजा नही मानी गयी, इस लिये पोलीसने दूसरे उत्पाती जमावसे जलसा छोड़देनको कहा-तजवीज हुई कि वह मनुष्य बोअलग होजानेका हुक्म देनेपर अलग नहीं हुए कानूनविरुद्ध जमावमे साझी होनेके अपराधी थे । (इ. ला रि मदरास जिल्द १४ सफा १२६) (७०) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- (१४४ ) कोई मनुष्य जो किसी मृत्युकारक हथियार या किसी ऐसी वस्तुको जिसको. किसी कानूनविरुद्ध मारनेके हथियारकी मॉति वर्ते जानेसे मृत्युका होना अति सम्मवित जमावमै मृत्युकारक ह. हों, बांधकर किसी कानूनविरुद्ध जमावका साझी होगा तो थियारके साथ साझी उपरोक्त मनुष्योको दोनों प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका होना. दंठ-दिया-जायगा जिसकी मीआद दो वर्षतक होसकती है या जुर्मानेका दड या दोनों दड दिये जावेगे। टोप-(१) कोई मजिस्ट्रेट (२) काबिल दस्तन्दाजी पोलीस है (३.) वारण्ट अपराधीक नाम नारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है। यदि यह बात प्रमाणित हो कि अपराधी जमावमे साझी होनेके अतिरिक्त कानूनविरुद्ध एक बन्दूक या कोई और हथियार ऐसा रखता था जिसको यदि वर्ताजावे तो उससे मृत्यु होसके इस- लिये ऐसी अवस्थामै अपराधी दफा १४४ दंडसग्रह-हिन्दके अनुसार दंडके योग्य होगा । (१४५ ) जो कोई, मनुष्य किसी कानूनविरुद्ध जमावमे दाखिल होवे यह बात जानकर भी ( प्रवेश करे ) या दाखिल रहे, यह जानकर कि उस कि किसी अनीति जमाव | कानुनविरुद्ध जमावको कानूनके ठहराये हुए नियमोके अनुसार के अलग २ होनेकी आ- अलग २ ( मुतफरिक ) होनेकी आज्ञा हो चुकी है तो उपरोक्त ज्ञा होचुकी है उसमे मिलना या बनारहना. ) मनुष्यको दोनो, प्रकारोंमेसे किसी प्रकारको कैदका द६ दिया जावेगा जिसकी मीमादे दो वर्पतक होसकती है या जुर्मानेका दड या दोनोही दड दिये जावेगे। टीप--(१) कोई मजिस्ट्रेट (२) काबिल दस्तन्दाजी पोलीस (३ ) वारट बनाम अपरा- धीके जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नही है । ११४६) जब किसी कानूनविरुद्ध जमाव या उसके किसी साझीकी ओरसे उपरोक्त जमायके - साझियोंका अभिप्राय प्राप्त करनेमे अन्याय ( जन ) या कडाई ( सस्ती ) का वाव किया जावे तो उस जमावका प्रत्येक मनुष्य बलवा करनेका अपराधा होगा। १-एक जमीदारने अपने असामीको ऐक्ट वसूली लगान मदरासके अनुसार पट्टा दिया था, जमींदारने लगान न पटने पर पोलीसकी सहायतासे उसके चौपाये कुर्क कर लिये उपरोक्त असामीने य्यारह मनुष्योकी सहायतासे उस कुर्कीको रोका और इसलिये उनपर बलवेका अपराध लगाया गया हाईकोर्ट के विचारमे अपराधीका दड वलवेके अपराधमै सही पायागया-( इ. ला. रि. मदरास निल्द १३ सफा १४८) २-कानूनविरुद्ध जमावका, कि जिसके कुछ साशियोने किसी मनुष्यको भारी दुःख पहुचाया था, कोई साझी उचित रीतिपर वलवेके अपराध और भारी दुःख पहुचाने के अपराधका दंड नहीं पासकता। (इ. ला. रि• इलाहावाद जिल्द ७ सफा २९) बलवान आठवाँ..] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई० । (७१) (११७) जो कोई मनुष्य बलवा करनेका अपराधी हो उसे दोनो प्रकारों से किसी बलवेका दंड प्रकारकी कैदका दड दिया जायगा जिसकी मीआट दो वर्ष तक ... हो सकती है या जुर्मानेका दड या दोनो दण्ड दिये जावेगे । टीप-(१) कोई मजिस्ट्रेट (२) काबिल दस्तन्दाजी पोलीस है ( ३ ) वारट अपराधीके नामजारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है। १-कुछ मनुष्यों ने परस्परकी शत्रुताके कारण एकसाथ उपद्रव किया जिस्का फल यह हुवा कि एक मनुष्यको मारी चोट लगी और वह उसके- कारण मरगया-तजवीज हुई कि जो कि कोई जमाव कानूनविरुद्ध ने था इसलिये बलवेका अपराध प्रमाणित नहीं होसकता-अपराधी पर उपद्रष (हंगामे ) का अपराध ठहराना था और अदालतने इस बात पर कि इन अपराधियोमैसे कौन मनुष्य बातवत् घातका अपराधी हुवा था विचार नहीं किया। (वी. रि० जिल्द १४ सफा ७२-)- २-दो जमावोंको बलवाले अपराध दड हुवा, एक जमावमें पाच मनुष्योसे कम न थे और उनके सम्बन्धमै यह मालूम हुवा कि वे लडाईके समय इकट्ठा हुए थे और वह और उनके शत्रु लाठियां-बांधकर लडनेके लिये आये थे. तजवीज हुई कि उनको बलवेका दड़ देना उचित या-क्योंकि उन सबका-अभिप्राय अपने शत्रुओं पर आक्रमण करनेका था-दूसरे जमावमे केवल चार मनुष्य में और यर बात मालम नहीं कि वे सब पहिले जमावके मनुष्योके साथ क्या अभिप्राय रखते थे और लड़ाई भी किसी सर्व साधारण स्थानपर नहीं हुई थी इसलिये दूसरे जमावको बलवेक अपराधर्म दंड देना अनुचित है और तजवीज हुई कि लडाई किसी सर्व साधारण (नियत ) स्थानपर होती तो यह समझा जासकता था कि दोनों जमावोंका-यह अभिप्राय या परस्पर उपद्रव (हगामालडाई) किया.जावेगा (रिपोर्ट हाईकोर्ट पश्चिमोत्तर देश जिल्द.५ सफा २०८). (१४८ ) कोई मनुष्य जो मृत्युकारक हथियार या ऐसी वस्तुको लेकर कि यदि मृत्युकारक हथियारके उसको हथियारकी मॉति काममें लाए तो उससे मृत्यु होना साथ बलवा करना. J सम्भवित है वलवा करनेका अपराधी हो तो उस मनुष्यको दोनो प्रकारो से किसी प्रकारको कैदका दंडे दिया जावेगा जिसकी मीाद तीन वर्पतक होसकती है या जुर्मानेका दड या दोनों दद दिये जायेंगे। टीप:(१) अदालत सेशन या प्रेसीडसी मजिस्ट्रेट या म० अ० (२) काविल देस्तन्दाजी पोलीस (३ )-अपराधीके नाम वारट जारी होगा (४) जमानत होसकती है ( ५ ) राजीनामा नहीं है। यह बात आई कि " लाठी' दफा १४८ दसंग्रह हिंदके अभिप्रायसे मृत्युकारक हथियार है या नहीं यह एक बात है कि जिसका (निश्चय ) मुकद्दमेकी विशेष अवस्था पर होना चाहिये है. ला• रि• इलाहाबाद जिल्द १५ सफा १९) ) .

- (७२) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। -[अध्याय- कुछ मनुष्योने कैदियोपर इस अभिप्रायसे आक्रमण किया कि उनकी फसल ( खेत ) काटलेवे कैदियौने उनका सामना किया और पुलीसको सूचना देनेका अवसर न पाकर बांससे उन आक्रमण करने वालोके एक मनुष्यको चोट पहुचाई जिसके कारण वह मरगया, सेशन जजने कैदियोंको दफा १४८ व १४९ के अपराधमे दंड. किया और हाईकोर्टकी तजवीज हुई कि कैदियोंने जो उनका सामना किया था और जो चोट आक्रमण करने वालोको पहुंचाई थी वह उनके निज-रक्षाके अधिकारके वर्क्सवसे बाहर न था इसलिये कैदी छोडे गंय । ( बंगाल ला• रि० जिल्द ६ सफा ९) (१४९) यदि कानूनविरुद्ध जमावके किसी साझीकी ओरसे उस जमावका-अभिप्राय कानूनविरुद्ध जमाव प्राप्त करनेमे कोई अपराध हो या कोई ऐसा अपराध हो जिसको का प्रत्येक साझी उस उस जमाषके साझी जानते हों कि उस अभिप्रायके प्राप्त अपराधका अपराधी गिना करनेमें उसका ( अपराध ) होना सम्भवहै तो प्रत्येक मनुष्य जायगा जो सव माझियो. का अभिप्राय प्राप्त होनेके | जो उस अपराधके समय उस जमावका साझी है उपरोक्त अपराधका लिये किया जाय, अपराधी है। १-एके जमावके बहुतसे मनुष्योने दूसरे जमावके मनुष्योकी राह रोकी जिसका फल यह हुवा कि परस्पर लडाई होने लगी–पहिले जमावका एक मनुष्य घायल होकर सडकके एक किनारे पर होगया और फिर उस लडाई मे साझी न हुआ, उसके अलग हो जानेके पश्चात् दूसरे जमावका एक मनुष्य मारा गया तजवीज हुई कि उस घायल मनुष्यका उसके अलग होनेके पश्चात् कानुनविरुद्ध जमाव मे रहना और उसके ऊपर दफा १४९ के अनुसार वधका अपराध नहीं ठहर सकता (बंगाल ला रिपोर्ट जिल्द ३ सफा १ २-कुछ मनुष्य जो कानूनविरुद्ध जमावमे साझी थे (अ) को ले भागनके अभिप्रायसे निकले और उनमेंसे एक मनुष्यने उपरोक्त अपराधके उद्योगमे (व) को मारडाला, तजवीज हुई कि सब मनुष्य जो ले भागनेके समय उस अपराधके उद्योगमे सम्बन्ध रखते थे, (व) के मारे जानेक कारण दडसंग्रह हिदकी दफा १४९ के अनुसार अपराधी थे । ( वीक्ली रिपोर्टर जिल्द - १३ सफा ३३ ३--जब कुछ मनुष्योमेसे प्रत्येक मनुष्य दूसरे मनुष्यके मारनेम साझी हुआ, यहां तक कि उस मनुष्यकी आठपसलिया टूट गई और वह मरगया तो तजवीज हुई कि प्रत्येक मनुष्य ज्ञातवातका अपराधी हुआ था ( वीक्ली रिपोर्टर जिल्द २४ सफा ५) (१५०) जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यको किसी कानूनविरुद्ध जमावमें किसी कानूनविरुद्ध मिलने या - साझी होनेके अभिप्रायसे नौकरीपर या उजरत जमावमै मनुष्योको नौकर | (रोजनदारी ) पर रखेगा या कामपर लगावेगा या उसे रखना या उन्हे रखनेके उजरतपर या नौकरीपर रखने या कामपर लगानेमे सहायता या सम्मति देगा तो वह मनुष्य उस कानूनविरुद्ध जमायके साशियोंकी भाति, दड पाने योग्य है और किसी ऐसे अपराधके मध्ये जो उस नहीं ठहरता, लिये सलाह करना.

आठवॉi] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०। (७३) मनुष्यकी ओरसे उस कानूनविरुद्ध जमायके अनुसार उस नौकर रखे जाने या उजरत पाने या कामपर लगाये जानेके किया जावे तो उसका दड उसीप्रकार होगा कि मानो वह स्वय उस कानूनविरुद्ध जमावमे साझी था या कि स्वयं उसीने वैसा अपराध किया । टीप-(१) इस दफाके अनुसार अपराधका विचार वही अदालत करंगी जो किये हुए अपराधका विचार करसक्ती है। काविल दस्तन्दाजी पोलीस है। (२) अपराधके लक्षणों के अनुसार वारट या समन अपराधीके नाम जारी होगा। (३) अपराधके लक्षणों के अनुसार जमानतका होना न होना ठहराया है। (४)(५) राजीनामा नही होसकता है। (१५१) जो कोई मनुष्य जानबूझकर पाच या अधिक मनुष्योंके किसी ऐसे जमा- पाच या अधिक मनुष्यो- चमे, जिससे सर्वसाधारणकी कुशलतामे विघ्न पडना सभव है, पश्चात् को किसी जमात्रमे उस इसके कि उपरोक्त जमावको कानूनानुसार अलग २ होजानेकी आज्ञा के अलग होनानेकी आ- ज्ञा होने के पश्चात् साझी | होचुकी हो साझी हो या साझी रहे तो उस मनुष्यको दोनों प्रका होना या रहना. रोमेंसे किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीआद छ: महीनातक होसकती है या जुर्मानेका दड या दोनों दड दिये जावेगे । स्पष्टीकरण-यदि वह जमाव दफा १४१ के अभिप्रायानुसार (हस्वमशाय) कानूनविरुद्ध जमाव हो तो वह अपराधी दफा १४५ के अनुसार दड पावेगा। टीप-(१) कोई मजिस्ट्रेट (१) कात्रिल ढसन्दाजी पोलीस (३) समन अपराधीके नाम जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है । जब तीन मनुष्योका अभिप्राय केवल एक भीड इकहा करनेका था और उन्होंने ऐसे काम किये जिनके कारण पचास साठ मनुष्योका जमाव होगया और इस जमावसे सर्व साधारणकी कुश- लतामे विन्न पहुंचना सभव था-तजवीज हाईकोर्ट हुई कि उस जमावका इस प्रकारपर इकट्ठा होना दंडसमह हिदकी दफा १५१ के अभिप्रायसे पांच या अधिक मनुष्योंके जमावमे गिना जायगा - और जब कि उन मनुष्योंको अलग होनानेकी उचित आना दीगई और उन्होंने अलग होनेसे नाही की तो ऐसी अवस्थामे उन सबका दड इस दफाके अनुसार होसकता है । ( इ० ला.रि. चंबई जिल्द. ७ सफा ४२) . (७४), हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह ! ... - [अध्याय-- (१५२ ) जब कोई मनुष्य किसी सरकारी नौकर पर उस समय, आक्रमण करे या "किसी सरकारी नौकर आक्रमण करनेकी धमकी दे या उसके साथ रोक टोक करे या रोक पर उस समय आक्रमण टोक करनेका उद्योग करे जब कि वह किसी कानूनविरुद्ध जमावको करना या उसको रोकना जब कि वह बलवे आदि अलग करने या किसी बलवे या हंगामेको बंद करनेमें उस सरकारी को शातकर रहा हो, नौकरीके कारण अपनी नौकरीका काम कर रहा हो, या ऐसे नौकर- पर अपरोध सयुक्त बल करे या बलकरनेकी धमकी दे या अपराध सयुक्त वल करनेका उद्योग करें, तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीआद तीन वर्षतक हो सकती है या जुर्मानेका दड या दोनों दंड दिये जावेगे । टीप-(१) अदालत सेशन या प्रे० म० या० म० अ० (२) काबिल दस्तन्दाजी पोलीस ३) वारंट अपराधीके नाम जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है । - ( १९३) जब कोई मनुष्य दुर्भावसे या विना किसी बात, किसी ऐसे कामको करके "बलवा करानके अं जो कानूनविरुद्ध है, किसी मनुष्यके दिलको क्रोध दिलावे-इस अभि- भिप्रायसे किसीके दिलको प्रायसे या इस बातको समवित जानकर कि उस क्रोधके कारण-बल- विना-बात क्रोध करानेका काम करना। केका अपराध हो, तो यदि उस-क्रोधके कारण वलवेका अपराध ETE किया जावे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दढ दिया जावेगा जिसकी मीआद एक वर्षतक होसकती है या जुर्मानेका दड या दोनो दह दिये जावेगे और यदि बलवेका अपराध न किया जावे तो दोनों प्रकारोमेंसे किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीमाद छ: महीनेतक होसकती है या जुर्मानेका दड या दोनों दड दिये जावेगे । 'टीप-(१) कोई मनिस्ट्रेट (२) काबिल दस्तन्दाजी पोलीस है (३) यदि वलवेका अपराध होजावे तो वारट या बलवेका अपराध न होवे तो केवल समन अपराधीके नाम जारी होगत (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है । भाह अगस्त सन् १८९३ ई० में बबईमै हिदू और मुसलमानांके मध्य बलवा हुवा और उस समय कि-बलवेका आवेश ( जोश ) विल्कुल बंद नहीं होगया था, अपराधीने एक काव्य बनाकर छपवाया जिसमे बलवाका वर्णन लिखा था और हिन्दू लोगोकी किसी २ कौम अर्थात् घाटियों और कमाठियोकी, जिन्होंने मुसलमानोके साथ बलवा करते समय बहादुरी दिखाई थी, तारीफ लिखी, थी-उपरोक्त काव्यमै पहिले तो पाटियो और कमाठियोकी तारीफ थी फिर उसमे नीचे लिखे अनुसार शेर ये:- आठवॉ.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६०ई० । (७५) शेर-इलाही बल्यो तुसको इजती जाह, खुशी हासिल हो तुमको हस्त्र दिळवाह । लडो फिर मुल्ककी हालत हो बेहतर, कमाठी लोग हैं अजवस दिलवर । डरो मत मौतसे ऐ मेरे भाई, नही बचता कोई जब मौत आई। ऊपरके काव्य गुजराती भापामै लिखे ये जो घाटिये और कमाठी वरन् मुसलमान मी भैली प्रकारसे नहीं बोलते थे, यह प्रगट नही हुवा कि यह काव्य उन मनुष्योको बाय गया जो बलवेमें शामिल हुए थे और न उस क्तिावके छपने वाद कुछ नया बलवा हुआ-अपराधियोपर फौजदारीका अभियोग चलायागया और उनपर दडसग्रह हिढकी दफा ११५ व १५३ •इसकारणसे लगाई गई कि ऊपर लिखे पदसे विशेष कर " लडो फिर : के शब्दसे घाटियों और कमाठियोको बलवेक लिये, बहकाया गया है कि वे नया अगडा उत्पन्न करे तजवीज हाईकोर्ट यह हुई कि जिस इबारतके मध्ये एवरान ( तक) किया गया है उसका अभिप्राय कुल काव्यसे निकालना चाहिये, उपरोक्त काव्यका अभिप्राय यह है कि आपसमें मेल व सम्मति होवे और उसमे आदिसे अततक बलवा व हानि व प्राणोके नागहानेका रज प्रगट किया गया है और हिन्दू मुसलमान दोनोको मेल व सम्मति करनेकी सलाह ( परामर्थ) दीगई है, और कोई बात उसमे ऐसी नहीं है जिससे यह मालूम होता कि काव्य बनानेवालेका यह अभिप्राय था कि हिन्दू और मुसलमान फिरसे बलवा करें, इसमे संदेह नहीं कि " लडो फिर " का गन्द एतराजके लायक है परन्तु इस शब्दका यह. सही अर्थ नहीं है कि उसके अर्थको किताब कुल लेख (मजमून ) से बढादिया जावे (इ० ला• रि• बम्बई जिल्द १८ सफा ७५८) ( १५३ (अ , जो मनुष्य उन शब्दोंद्वारा कि जो बोले गये या लिखे गये हो जमावीमें शत्रुताका या चिहोद्वारा या ऑखसे दिखाने-योग्य बनाई हुई नकलके द्वारा बटाना.- या और प्रकार पर शत्रुता या घृणाके विचार श्रीमती महारानीकी प्रजाके अलग २ जमावोमे वढावे या वढानको उद्योग करे तो उपरोक्त मनुष्यकों कैदका दे दिया जावेगा जिसकी मीआट दो सालतक होसकती है या जुर्मानेका दड या दोनों दंड दिये जावेगे। स्पष्टीकरण-इस दफाके अभिप्रायके अनुसार विना शत्रुताकी इच्छाने बरन उनको दूर करनेके सच्चे अभिप्रायके साथ उन कामोंका, जो विचार शत्रुता या घृणाको श्रीमती महा- रानीके अलग २ जमावोमें उत्पन्न करते हैं या उनसे उत्पन्न होनेका अभिप्राय पाया जाता है, प्रगट करना किसी अपराधको सीमातक नहीं पहुँचता । टीप (१) प्रे० म० या० म० अ० (२) अदम दस्तन्दाजी पोलीस (३) वारट अपराधीके नाम जारी होगा (४) जमानत नहीं है (५) राजीनामा नही होसकता। -- (७६) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह । - [अध्याय- । १५४ , जब कभी कोई जमाव कानूनविरुद्ध इकट्ठा हो या बलवा होजाय मालिक या काविन तो उस धरतीका स्वामी या अधिकारी जहा वह जमाव बरतीका जिसपर कानून- कानूनविरुद्ध इकट्ठा हुआ है, या वह वलया हुवा है और मी विरुद्ध जमाव जुडे. ऐसा कोई मनुष्य जो वैसी धरतीमे अधिकार रखता हो या उस घरतीमें अधिकारका दावा रखता हो ऐसे जुर्मानेका देनदार होगा जिसकी तादाद एक हजार रुपयेसे अधिक न हो परन्तु शर्त (नियम ) यह है कि उपरोक्त मनुष्य या उसका कारिन्दा या प्रबंधकर्ता ( मुंतजिम ) यह जानकर कि उपरोक्त अपराध हो रहा है, या होचुका निश्चय करनेका कारण रखकर कि उपरोक्त अपराधका होना संभवित है उस अधिकारी (अफ्सर ) को जो सबसे निकटके थाना पोलीसमें है इस वातकी सूचना जहाँतक उसके वशमे हो शीघ्र न करे और जब वह या वे.निश्चय करनेका कारण रखता हो या रखते हों कि उपरोक्त अपराध शीघ्रही होनेवाला है वे संव उचित यत्न जो उसके या उनके वशमें हों उपरोक्त अपराधके रोकनेके लिये काममे न लाये या न लाये और अपराधके होजानेपर उस कानूनविरुद्ध जमावके अलग करने या उस बलवाको दवानेमे सब उचित यत्नोंका जो उसके या उनके वशमें हों वर्तावमें न लाये या न लाये। टीप-(१) प्रै० म० या म० भ० या म० दो० (२) अदम दस्तन्दाजी पोलीस (३) अपराधीके नाम समन जारी होगा ( ४ ) अपराध जमानती है ( ५ ) राजीनामा नहीं होसकता । . A किसी धरतीके स्वामीको, जहां पर कोई बलवा हुआ हो, फौजदारी अदालतमे अपराधी ठहर- नेके लिये यह आवश्यक नहीं है कि उसे ऐसी घटना ( वारदात ) के होनेका हाल पहिलेमे गालूम होना चाहिये । (इ. ला० रि० इलाहाबाद जिल्द १२ सफा ५५०) (१९५) जब, कभी कोई बलवा ( दंगा) किसी ऐसे मनुष्यके लाभके लिये या दड योग्य होना उस उसकी ओरसे किया जाय जो किसी ऐसी धरतीका स्वामी या मनुष्यका जिसके लाभ अधिकारी हो जिसके मध्ये वह बलवा हुवा या जो धनुष्य उस धर- लिये दंगा ( बलवा) किया जाय.. तीमें या झगडेके ऐसे काममे कि जिसके कारणसे बलवा हुवा है दावेका अधिकार रखता हो या जिसने उस धरती या उस कामसे कुछ लाम स्वीकार किया या प्राप्त किया हो तो उपरोक्त मनुष्यको जुर्मानेका दड दिया जायगा; परंतु नियम यह है कि वह या उसका कारिन्दा या प्रबधकर्ता ( मुन्तजिम ) इस बातके निश्चय करनेका कारण रखकर कि उस बलचेका होना सम्भव था या यह कि उस कानूनविरुद्ध जमावके इकट्ठा होनेका मय था जिससे वह बलवा हुआ, वे सब उचित यल जो उसके या उनके वशमे हों उस इकहा होते आठवा.] स्वामी या . ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६९ ३०॥ (७७) हुए जमावके रोकने और उसको अलग २ करनेके लिये या उस होते हुए बलवेको रोकनेके लिये और उसके दवानेके लिये काममें न लाये या न लायें। टीप-(१) प्रे० म० या म० अ० या म. दो० (२) अदम दस्तन्दाजी पोलीस है ३) समन अपराधीके नाम जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है। ताजीरात हिदकी दफा ५५ के अनुमार कोई जमीदार किसी ऐसे बलवेका जिम्मेदार न होगा जिसके होनेका पहिलेसे भय न हो ( वीली रिपोर्टर जिल्द ३ सफा ५४) (१५६) जब कभी कोई वलवा किसी ऐसे मनुष्यके लाभके लिये या उसकी स्वामीका याआधिका-] ओरसे किया जावे जो किसी ऐसी धरतीका रीकाकि जिसके लिये को- अधिकारी हो जिसके मध्ये वह बलवा (दगा) हुवा, या ईबलवा क्यिा जावे, का- रिदाका जिम्मेदार होना. जो मनुष्य.,उस घरतीमें या किसी अगडेके काममे जिसके कारण बटवा हुवा किसी अधिकारका दावा रखता हो या जिसने उस घरती या कामसे कुछ लाम सीकार किया या प्राप्त किया हो तो उपरोक्त मनुष्यके कारिन्दे या प्रवधकर्ताको जुर्मानेका ढड दिया जावेगा. परंतु नियम यह है कि ऐसा कारिन्दा या प्रवधकर्ता इस कामके निश्चय करनेका कारण रखकर, कि उस बलवेका होना सम्भवित था या उस कानूनविरुद्ध जमावके इकट्ठा होनेका मय था जिससे वह चलवा हुवा, वे सब उचित यल जो उसके क्शमे हों उस बलवके रोकने और उसको दबानेके लिये या उस इकट्ठा होते हुए जमावको रोकने और उसे अलग २ करनेके लिये काममे न लाये। टीप-(१) प्रे० म० या म० अ० या म. दो० (२) अदम दस्तन्दाजी पोलीस है (३) अपराधीक नाम समन जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है । कारखाना नीलके प्रबधकर्ता ( मुतजिम ) को दडसग्रह हिंदकी दफा १५६ के अनुसार दंड करनेके लिये योग्य साक्षियो (जायज शहादत) द्वारा यह प्रमाणित करना चाहिये कि:-(१) वलवा हुवा (२) यदि बलवा हुवा, तो वह अपराधीके लाभके लिये हुवा (३) अपराधीके यह जाननेका कारण था कि बलवा अवश्य होनेवाला है। ( ई० ० रि० कलकत्ता जिल्द १० सफा ३३८) ( १९७ ) जब कोई मनुष्य लोगोको किसी घर या धेरै ( अहाते ) मे जो उसके - उन मनुष्योको जो) अधिकार या सिपुर्दगीमे हो छुपारखे या - आने दे या किसी कानूनविरुद्ध ज- इकट्ठा करे या यह जानकर कि वे लोग किसी कानूनविरुद्ध भावके लिये उजरतपर रक्खे गये हो छिपा जमावमे. मरती या जमावमे. मरती या साझी होनेके लिये उजरत पर रक्खे गये है या उनसे कुछ प्रतिज्ञा या काम लिया गया है या शीघ्रही वे उजरतपर खखे जॉयगे या उनसे कुछ प्रतिज्ञा या काम लिया जायगा रखना.

: जाना. (७८) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। अध्याय-- तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दंड दिया जायगा जिसकी मीआट छः महीनेतक होसकती है या जुर्मानेका दड या दोनों दंड दिये जायेंगे। टीप-(१) प्रे० म० या म० अ० या म० दो० (२) काविल दस्सन्दाजी पोलीस है (३) अपराधीके नाम समन जारी होगा (४) जमानत होसकती हैं (५) राजीनामा नही है । ( १९८). जो मनुष्य , उन. कामोमेंसे जिनका वर्णन. दफा १४१ में हुआहै किसी कानूनविरुद्ध- किसी कामको करनेके लिये या उसके होनेमें सहायता कर- जमावमै सामी. होनेके नेके लिये प्रतिज्ञा करने या उजरतपर रक्खे जानेको स्वीकार लिये उजरतपर रक्खा कराये या प्रतिज्ञा करने या उजरतपर रक्खे जानेको कहे या उसका उद्योग करे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोमेंसे किसीप्रकारकी कैदका दंड दिया जावेगा जिसकी मीाद छः महीनेतक होसकती है या जुर्मानेका दंड या दोनोंही दंड दिये जावेगे और वह मनुष्य जिससे प्रतिज्ञा लीगई हो या जो उपरोक्त उजरतकी भाँति रक्खा गया हो किसी मृत्युकारक हथियार या किसी ऐसी वस्तुको जिसको यदि हथियारके समान वर्ते तो मृत्यु होना अति • सम्भवितहै लेकर फिरे या लेकर फिरनेकी प्रतिज्ञा करे या-लेकर-1 या हथियार बांधकर फिरनेको कहे तो-उस मनुष्यको दोनो प्रकारोंमेसे किसी प्रकारको फिरना. कैदका दंड दिया जावेगा जिसकी मौआद दो वर्ष तक होसकती है या जुर्मानेका दड या दोनोंही दंड दिये जावेगे । टीप-(१) प्रे० म० या म० अ० या -म० दो० (२) काबिल दस्तन्दाजी- पोलीस है (३) अपराधीके नाम समन जारी होगा परन्तु यादे हथियार लिये किरे तो वारण्ट जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं हैं। ---(१५९ ) जब वे या अधिक मनुष्य किसी सर्व सम्बन्धी.मार्गके स्थानपर लडकर इंगामा: ( लाई.) सर्व सम्बधी कुशलतामें विघ्नबालेगे तो कहा जायगा कि उन्होंने खानेजंगी) हगामा किया। (१६० ) जब कोई मनुष्य हंगामा करेगा तो उस मनुष्यको दोनों प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दंड दिया जायगा जिसकी मीआद एक महीनेतक होसकती है या जुर्मानेका दंड जिसकी तादाद . १०० ) एक सौ- रुपयेतक होसकती है या दोनों दंड दिये जावेंगे । टीप-(१) कोई मजिस्ट्रेट (२) अदम दस्तन्दाजी पोलीस है (३-) अपराधोके नाम समन जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है। . क हंगामेका दह.

'नवा ९.) ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई.। (७९) अध्याय नवाँ. . उन अपराधोंके सम्बन्धमें जो सरकारी नौकरोंकी ओरसे किये जावें या उनसे सम्बन्ध रक्खें। ( १६१ ) जब कोई मनुष्य जो सरकारी नौकर है या जो सरकारी नौकरीकी आशा मर्व सम्बन्धी नौकर रखता ( उम्मेदवार ) हो, किसी सरकारी कामके करने या उससे जो अपने ओहदेके किसी काम के मध्ये सिवाय | वाज ( पृथक् ) रहनेके लिये या अपने सरकारी कामकेवर्तनेमे किसी कानूनानुसार चाकरी मनुष्यका पक्षपात करने या उस मनुष्यके विरुद्ध होने या उससे (उनरत).के कुछ घू. -सकी-भाति ले. वाज रहनेके लिये या हिन्दुस्थानकी लेजिस्लेटिन ( कानूनकारक) यां इकजेक्यूटिव गवर्नमेंट (कानून प्रवर्तक ) या किसी प्रसीडेंसीको गवर्नमेट या किसी लेफ्ट- नेन्ट गवर्नर या किसी सरकारी नौकरके सामने, किसी मनुष्यके साथ मलाई बुराई करनेके लिये, या उसका उद्योग करनेके लिये, किसी मनुष्यसे, चाहे अपनेही लिये या किसी दूसरे मनुष्यके लिये उचित उजरतके सिवाय और कुछ घूस लालच या इनामकी मॉति स्वीकार करे या प्राप्त करनेकी इच्छा करे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारोमेंसे किसी प्रकारकी कैदका दंड दिया जावेगा जिसकी मीमाद तीन सालतक होसकती है. या जुर्मानेका दंड या दोनों दंड दिये जायेंगे। - स्पष्टीकरण-"सरकारी नौकर होनेकी आशा रखना' यदि कोई मनुष्य जिसको सर- कारी नौकरीकी आशा न हो, धोखा देकर औरोंको यह विश्वास दिलावे कि मैं सरकारी नौकर होनेवाला हू और तव तुम्हारे काम आऊगा और इस यत्नसे कुछ घूस लेवे तो ऐसी अवस्यामें वह मनुष्य ठगनेका अपराधी होसकेगा परंतु उस अपराधका अपराधी न होगा जिसका वर्णन इस दफामें किया गया है। "घूस "-घूसके शब्दसे केवल ऐसीही सका अभिप्राय नहीं है जो रुपयेसे सम्बन्ध रक्खे या जिसकी कूत ( अदाज ) रुपयेमें होसके । "कानूनानुसार उजरत" कानूनानुसार उजरतके, शब्दोंमें केवल उसी उजरतका अभिप्राय नहीं है जिसको कोई सरकारी नौकर उचित रीतिपर लेसके, वरन-उसमें कुछ ऐसी उजरत ( चाकरी ) शामिल है जिसके स्वीकार करनेकी. आज्ञा उसको गवर्नमेंटकी ओरसे मिलचुकी हो कि जिसकी वह नौकरी करताहो ।

[ अध्याय- (८०) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। "कुछ करनेके लिये लालच या इनाम"-इन शब्दोमे वह मनुष्य मी गिना जायगा जो कुछ घूस किसी ऐसे कामके करनेके लिये, जिसका करना उसकी इच्छा (नीयत ) में न हो लालचकी माँति या कोई काम करनेके लिये जो उसने न किया हो इनामकी मॉति स्वीकार करे । उदाहरण। क) शिवशकर एक मुसिफने एक साहूकार रमशिकरसे अपने भाईके लिये रमाशकरकी कोठीमे एक नौकरी रमागकरकी जीतमे एक मुकद्दमा फैसलकर देनेके बदले प्राप्त की तो शिवाकरने वह अपराध किया कि जिसका वर्णन इस दफामे किया गया (ख) शिवशकरने जो किसी आनाकारी गवर्नमेटके दरबार-रियासतमै रजीडेटका ओहदा रखता है उस दरवारके दीवानसे एक लाख रुपया लेना स्वीकार किया-यह प्रगट नहीं है कि शिवशं- करने यह रुपया, अपने ओहदेका कोई विशेष काम करनेके लिये या रोकनेके लिये या सरकार अग- रेजीमे उस-दरबारका कोई विशेष अभिप्राय निकालने या किसी विशेष अभिप्रायके निकालनेका उद्योग करनेके लिये इनाम या लालचकी भाँति स्वीकार किया, परन्तु यह प्रगट होता है कि यह रुपया शिवशंकरने अपने ओहदेका अधिकार वर्त्तनेमे साधारणतः उस दरवारका पक्षपान करनेके लिये लालच या इनामकी भाँति स्वीकार किया तो शिवशंकरने वह अपराध किया जिसका वर्णन इस दफामे किया गया है। (ग) एक सरकारी नौकर शिवशकरने रमाशंकरको इस झूठी बातके मान लेनेका धोखा- दिया कि शिवशकरकी सिफारिशके कारण रमाशंकरको सरकारसे एक खिताब मिला है, इस प्रकार पर फुसलानेके कारण रमाशंकरने शिवशंकरको कुछ रुपया इनामकी भाँति इस कामके बनादेनके बदलेमें दिया-तो शिवशकरने वह अपराध किया कि जिसका वर्णन इस दफामे किया गया है। टीप-(१) अदालत सेशन, प्रे० म० या० अ० (२) पोलीस विना वारंट अपराधको नहीं पकडसकती (३) समन अपराधीके नाम जारी होना चाहिये (४) काबिल जमानत है ( ५ ) राजीनामा नहीं होसकता। १-अपराधी मालके महकमेका एक मजकूरी था. उसको फीसमैसे तनख्वाह मिलती थी, ऐसे मजकूरी आवश्यकताकै समय रख लिये जाते हैं, परन्तु जब कोई सरकारी काम उसके सिपुर्द किया जावे और उसकी तनख्वाह फीसमैसे दीजाती हो तो उसको सरकारी नौकर कहा जावेगा, ऐसी अवस्थामे यदि वह घूस लेवे तो उसका दंड इस दफाके अनुसार होसकता है ( बंगाल ला रिपोर्ट जिल्द ७ सफा ४४६) २-एक डिप्टी इन्स्पेक्टर पोलीसने ३५) २० पेश किया जो उसे अपराधीने घूसकी भाँति दिया था-साहेब मजिस्ट्रेटने अपराधीपर अपराध प्रमाणित कर उनगेसे १० ) रु. इनामकी मांति डिप्टी इन्स्पेक्टरको दिया-तजवीज हाईकोर्ट यह हुई कि मजिस्ट्रेटका हुक्म मजमूआजाब्ता फौजदारीकी दफा ४१८ के अनुसार उचित है (पंजाब रिकार्ड नं. ९ सन् १८७३ ई० नवाँ ९.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई० । (८१) ३-कोर्ट आफ वार्डसका प्रबन्धकर्ता एक वक, जो सरकारी खजानेका काम करता था, सर- कारकी ओरसे रुपया दाखिल किया करता था उस वकके खजानचीने अपनी मिहनतके कारण कुछ इनाम लिया तजवीज हुई कि जिमन ९ दफा २१ व दफा १६१ इंडसग्रह. हिंदके अनुसार खजानची सरकारका नौकर नहीं है इसलिये वह कैदसे छोडागया ( इ. ला. रि० कलकत्ता जिल्द ४ सफा ३७६) ( १६२ ) जो कोई मनुष्य किसी सरकारी नौकरको बुरे या अनुचित उपायोंके द्वारा लेना घूसका किसी ) इस बातको फुसलानेके लिये कि वह सरकारी नौकर कोई सरकारी सरकारी नौकरको बुरे काम करे या उसको न करे या सरकारी नौकरीके कारण अपने अथवा अनुचित उपायसे फुसलानेके निमित्त. ओहदेके अनुसार किसी मनुष्यका पक्षपात करे या उसके विरुद्ध हो या हिंदुस्थानकी लेजिस्लेटिव या इक्जेक्यूटिव गवर्नमेंट या किसी प्रेसीडसीकी गवर्नमेंट या किसी लेफ्टनन्ट गवर्नर या इलाहाबाद यूनीवरसिटीकी सीनेटके किसी मेवर या किसी सरकारी नौकरके सामने किसी मनुष्यके साथ मलाई या बुराई करे या उसका उद्योग करे या किसी मनुष्यसे किसी प्रकारकी घूस इनामकी माति या फुसलानेके कारण अपने लिये या और किसी मनुष्यके लिये स्वीकार करे या प्राप्त करे या प्राप्त करनेपर राजी हो या प्राप्त करनेका उद्योग करे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारोमेंसे किसी प्रकारको कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीाद तीन वर्पतक हो सकती है या जुर्मानेका दड या दोनो दड दिये जावेगे। टीप-(१) अदालत सेशन या प्रे० म० या म० अ० (२) अदम दस्तन्दाजी पोलीस है ३) पहले अपराधीके नाम समन जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है। लिये कुछ घूस लेना. (१६३) जब कोई मनुष्य अपनी निजी अनुरोध ( जाती रुसूख ) के काममें लानेसे सरकारी नौकरके साथ किसी सरकारी नौकरको इस बातके फुसलानेके लिये कि वह कोई. जावी दबाव डालनेके , सरकारी काम करे या न करे या अपने ओहदेका काम करते समय सरकारी कामके वर्तनेमे किसी मनुष्यका पक्षपात करे या उसके विरुद्ध हो या हिंदुस्थानकी लेजिस्लेटिव या इक्जेक्यूटिव गवर्नमेंट या किसी प्रेसीडसीकी गव- नेमेंट या किसी लेफ्टनन्ट गवर्नर या सरकारी नौकरीके ओहदेसे किसी . सरकारी नौकरके सामने किसी मनुष्यके साथ मलाई या बुराई करनेके लिये- या उसका उद्योग करनेके लिये किसी मनुष्यसे कुछ घूस इनामकी माति या फुसलानेके कारण अपने लिये या किसी और (८२) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- मनुष्यके लिये स्वीकार करे या प्राप्त करे या स्वीकार करनेपर राजी हो या प्राप्त करनेमें उद्योग करे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी कैदका दह दिया जावेगा जिसकी मीभाद तीन वर्ष तक हो सकती है या जुर्मानेका दंड या दोनो दर दिये जावेगे। उदाहरण। कोई वकील जो किसी जजके इजलासमे किसी मुकद्दमेके सम्बन्धमे प्रश्नोत्तर करनेके लिये मेहनताना ले-कोई मनुष्य जो किसी ऐसी अरजीको जिसमे अरजी देनेवालेकी कारगुजारी या अधिकार लिखकर गवर्नमेटको दिया जायगा लिखे, या उसमे सम्मति दे-कोई अपराधी जिसको दंडकी आज्ञा होचुकीहो उसका कोई मुखत्यार जो मुखत्यारनामा लेकर काम करता है और जो गवर्न- मेटके सामने इस आशयके बयान करे कि दंडकी आजाम अन्याय हुवा है, ये सब लोग इस दफामें न गिने जायगे क्योकि वे न तो अपनी निजी सिफारिशको काममें लाते हैं और न उसे काममे लानेको कहते हैं। टीप-(१) प्रेसीडेसी मजिस्ट्रेट या मजिस्ट्रेट दर्जा अव्वल (२) अदम दस्तन्दाजी पोलीस (३) पहिले अपराधीके नाम समन जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है। (१६४ ) कोई मनुष्य जो सरकारी नौकर है, और उन अपराधोमेसे जिनका वर्णन उस सहायताका दंड) इसके पहिलेकी दो पिछली दफाओमे कियागया है, कोई अप- जो सरकारी नौकर उन राध किया जावे और वह उस अपराधमें सहायता करे, तो उस अपराधोमे करे जिनका वर्णन ऊपर कियागया है. मनुष्यको दोनों प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दढ दिया जायेगा जिसकी मीआद तीन वर्ष तक हो सकती है या जुर्मानेका दड या दोनो दह दिये जावेगे। उदाहरण। शिवशकर एक सरकारी नौकर है, उसकी स्त्री हरदेवीने शिवशकरसे किसी मनुष्यको नौकरी दिलवानेकी प्रार्थना करनेके लिये कहकर लालचकी भांति उस मनुष्यसे कुछ भेट लेली और यदि शिवशकर ऐसा करनेमे सहायता करे तो हरदेवी कैदका दड पावेगी जिसकी मीआद एक वर्षसे अधिक न हो या जुर्मानेका दड या दोनों दंड दिये जावेगे-और शिवशकर कैदका दह पावेगा जिसकी भीआद तीन वर्षतक होसकती है या जुर्मानका दड या दोनी दड पावेगा । टीप-(१) अदालत सेशन या प्रै० म० या म० अ० (२) अदम दस्तन्दाजी पोलीस (३) पहिले अपराधीके नाम समन जारी होगा (४), जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है।

नवा ९.] जो ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई० । (८३) ( १६५ ) कोई मनुष्य जो सरकारी नौकर है किसी ऐसे मनुष्यसै, जिसको उसकी सर्व सम्बन्धी नौकर) जानकारोंमें किसी ऐसे मुकद्दमे या मामलेसे सम्बन्ध था या सम्बन्ध है कुछ मोलदार वस्तु या सम्बन्धके होनेका सम्भव है जिसको उस सरकारी नौकरने विना बदला दिये किसी किया हो या जिसको वह करनेवाला है या जो उस सरकारी मनुष्यसे ले जिसका कुछ नौकर या किसी और सरकारी नौकरके ओहदेसे सम्बन्ध रखता स्वार्थ उस सरकारी नौ- है जिसके कि वह अधीन है या किसी ऐसे मनुष्यसे जिसको वह करके किये हुए किसी मुकद्दमे या काममे हो. सरकारी नौकर जानता है कि वह उस मनुष्यसे जिसको उप- रोक्त सम्बन्ध है कुछ लगाव या रिश्ता रखता है कोई मूल्यवान् वस्तु विना वदला दिये या ऐसा बदला देनेपर जिसको वह सरकारी नौकर अयोग्य जानता हो अपने लिये या किसी दूसरे मनुष्यके लिये स्वीकार करे या प्राप्त करे या स्वीकार करनेपर राजी हो या प्राप्त करनेका उद्योग करे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारोंमे किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीमाद दो वर्षतक होसकती है या जुर्मानका दह या दोनों दण्ड दिये जावेगे। उदाहरण । -(क)-शिवशकर किसी कलेक्टरने एक घर रमाशंकरका जिमका कोई मुकद्दमा बदोवस्ती उसके सामने दायर था, भाडेपर लिया और यह ठहराव हुवा कि शिवशकर पचास रुपया महीना दिया करेगा-यद्यपि वह घर ऐसा है कि यदि शुद्धभावसे उसका ठहराव किया जाता तो शिवशंकरको दोसौ रुपया महीना देना तो ऐसी अवस्थामे कहा जावेगा कि शिवशंकरने विना पूरा वदला दिये रमाशंकरसे एक मूल्यवान वस्तु प्राप्त की- ...(ख)-शिवशकरने, कि जो एक जज है रमाशकरसे जिसका कोई मुकद्दमा शिवशंकर के यहा दायर है गवर्नमेटका प्रामेसरी नोट जब कि वह उस समय बाजारमे बढतीपर बिकते थे बडेसे मोल लिया तो शिवकरने मूल्यवान् वस्तु विना यथार्य बदला दिये रमाशंकरसे प्राप्त की। (ग) शिवशकरका माई झूठी गवाही देनेके अपराधमे पकडा जाकर रमाशंकर नाम किसी मजिस्ट्रेट के सामने लायागया, रमाशकरने शिवशंकरको किसी बंकके हिस्से फिरतेपर बेचे जब कि बाजारमें उन हिस्सोपर बट्टा लगता था और शिवाकरने रमाशंकरको उसी अनुसार हिस्सोंका मूल्य. चुकादिया तो जो रुपया रमाशकरने इस भाति प्राप्त किया वह एक मूल्यवान वस्तु है जो उसने बिना देने यथार्थ वदलेके प्राप्त किया । टीप-(१) प्रे० म० या म० अ० या म० दो० (२) अदम दस्तन्दाजी पोलीस (३) आरंभमें अपराधीके नाम समन जारी होगा (४) जमानत होरुकती है (५) राजीनामा नहीं है। १-कामताप्रसाद एक अहलकार पोलीसने कुछ रुपया, एक मनुष्यसे जिसके चोरी होगई थी और चाराक अपराधमे अपराधीको दड हुआ था और रुपया उस मनुष्य (मुस्तगीय) को दिया पडता, - (८४) [अध्याय- हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। गया था प्राप्त किया-तजवीज हुई कि वह दफा १६१ के अनुसार दंडके योग्य न था, बरन् दंडसंग्रह हिंदकी दफा १६५ के अनुसार दंडके योग्य था (इ. ला. रि० इलाहाबाद निल्द १ सफा ५३० श्रीमती महारानी बनाम कामताप्रसाद) ( १६६) कोई मनुष्य जो सरकारी नौकर है कानूनकी किसी आज्ञाका, जिसमे उसके सरकारी नौकर लो, लिये सरकारी नौकरीके भुगतानेका कर्तव्य ( फर्ज) है जानबूझकर किसी मनुष्यको हानि उलंघन करे इस अभिप्रायसे अथवा यह वात जानकर कि उस पहुँचानेके अभिप्रायसे कानूनी आशाका लल्लंघन | उल्लंघनसे किसी मनुष्यको हानि पहुंचेगी तो उसको साधारण (इनहराफ) करे. कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीआद एक वर्पतक होसकती है या जुर्मानेका दड या दोनों दड दिये जावेगे । उदाहरण। शिवशकर एक ओहदेदार है जिसको कानूनानुसार किसी डिगरीका रुपया वसूल करनेके लिये जो किसी कोर्ट आफ जस्टिसने रमाशंकरके पक्षपातमे को है मालकुर्क करनेकी आना है वह कानूनकी इस आजाका जान बूझकर उल्लंघन करे इस बातको जानकर कि उस उलंघनसे रमागक- रको हानि पहुँचगी तो शिवशकर उस अपराधका अपराधी होगा जिसका वर्णन इम उफामे किया गया है। : टीप-(१) प्रै० म० या म० अ०- या म० दो० (२) अदम दस्तन्दाजी पोलीस है (३) पहिले अपराधीके नाम समन जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है। (१६७ ) कोई मनुष्य, जो सरकारी नौकर है और जिसको उस सरकारी नौकरी के सरकारी नौकर जो) कारण कोई लेख ( दस्तावेज ) बनाने या अनुवाद करनेका किसी मनुष्यको हानि पहुंचानेके अभिप्रायसे । अधिकार प्राप्त है, इस प्रकारसे किसी दस्तावेजको वनावे झूठा लेख (दस्तावेज) बनावे. या उसका अनुवाद करे जिसको वह झूठ जानता या झूठ निश्चय करताहो, इस अभिप्रायसे या इस बातका होना जानकर कि ऐसे वर्तावसे किसी मनुष्यको हानि पहुंचेगी तो उसको दोनों प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जायगा जिसकी मीभाद तीन वर्पतक होसकती है या जुर्मानेका दंड या दोनो दड दिये जावेगे। टीप-(१)अदालत सेशन या प्रे० म० या म० अ० (२) अदम दस्तन्दाजी पोलीस है (३) पहिले अपराधीके नाम समन जारी होगा (४) जमानत होसक्ती है (५) राजीनामा नहीं है।

नवा ९. . ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई० । (८५) अपराधीन जो एक गॉवका पटवारी है अपने रोजनामचेके इबारतका एक झूम उल्या तैयार करके एक दीवानी मुकद्दमे बादी ( मुद्दई) को दिया-इस इबारतका अभिप्राय वादी व दूसरे मनु- 'प्यके मध्यम कुछ सम्बंघरखता था, अपराधीपर दंडसंग्रह हिदकी दफा १६७ का अपराध कायम करके उसी दफाके अनुसार दंड दिया गया-हाईकोर्टकी तजवीज यह हुई कि अपराधीको बहुत उचित दड दिया गया है ( पजाव रिकार्ड न० ३२ सन् १८७२ ई.) (१६८ ) कोई ममुष्य, जो सरकारी नौकर है और जिसको उस सरकारी नौकरी सरकारी नौकर जो करनेके कारण व्यापारसे सम्बन्ध न रखना कानूनानुसार उचित है, कानूनकी आज्ञाके विरुद्ध । व्यापारसे सम्बन्ध रक्खे तो उपरोक्त मनुष्यको साधारण कैदका दड मापारसे सम्बन्ध रक्खे. दिया जागा जिसकी मीाद एक वर्षतक हो सकती है या जुर्मानेका दड या दोनो दडे दिये जावेगे । टीप-(१). म० या म० अ० (२) अदम दस्तन्दाजी पोलीस (३) पहिले अप- राधीक नाम समन जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है । ( १६९) कोई मनुष्य जो सरकारी नौकर है और जिसको उस सरकारी - सरकारी नौकर जो नौकरी करनेके कारण किसी विशेष वस्तुको मोल न लेना अनुचित. रीतिपर कोई या उसके लिये बोली न बोलना कानूनानुसार उचित है, उस माल लेवे या उसके लिये । वस्तुको अपने नामसे या किसी दूसरे मनुष्यके नामसे ग बोली बोले. दूसरोके सगमे या साझेमे मोल लेगा या उसके लिये बोली वोलेगा तो उस मनुष्यको साधारण कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीआद ढो वर्पतक होसकती है या जुर्मानेका दह या दोनों दड दिये जावेगे और यदि वह वस्तु लीगई हो तो जब्त की जायगी। टीप-(१)प्रेम. या म० अ० (२) अदम दस्तन्दाजी पोलीस (३) पहिले अपराधीके नाम समन जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) रानीनामा नहीं है। एक सब इन्स्पेक्टर पोलीसपर एक स्टूके मोललेनेका अपराध लगाया गया जो किसी काजी- होसमे कैद कियागया था तजवीज हाईकोर्ट यह हुई कि मजिस्ट्रेटको ऐक्ट न०१ सन् १८७१ ई. को दफा १९ व दडसग्रह हिदकी दफा १६९ के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिये थी, अपराधीको दंडसंग्रह हिदकी दफा ४०६ के अनुसार दंड नहीं होसकता (वगाल ला रिपोर्ट जिल्द ८ सफा १ भपाल) ( १७० ) जो कोई मनुष्य सरकारी नौकरकी मॉति पर किसी विशेष ओहदेपर सरकारी नौकर ) होनेका मिस करे यह जानकर कि उसे वह ओहदा प्राप्त बनना. नहीं है या झूठ मूठ कोई ऐसा मनुष्य बने जो उस ओहदेपर नियत ( कायम ) है और इस बनी हुई अवस्थामे उस ओहदेके मिससे कुछ काम करे या किसी (८६) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- कामका उद्योग करे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारोमेसे किसी प्रकारको कैदका दंड दिया जायेगा जिसकी मीआद दो वर्षतक होसकती है या जुर्मानेका ढहैं या दोनों दह दिये जावेगे। टीप-(१) कोई मजिस्ट्रेट (२) काबिल दस्तन्दाजी पोलीस है (३) अपराधीके नाम वारंट जारी होगा (४)जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है। (१७१) जो कोई किसी विशेष प्रकारका सरकारी नौकर न होकर काई वरदी छलछिद्रके अभिप्रा या चिह्न जो उसी प्रकारके सरकारी नौकरोंकी वरदी या चिह्नके यसे सरकारी नौकरकी सदृश हो पहने, इस अभिप्रायसे अथवा यह जानकर कि वह वरदी पहिरना या चिह्न मनुष्य सरकारी नौकरोके उस दर्जामे गिना जावे-तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोमेंसे किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीआढ तीन महीनेतक होसकती है या जुर्मानेका दड जो सौ रुपयेतक हो सकता है या दोनों दढ दिये रखना. जाको। टीप-(१) कोई मजिस्ट्रेट (२) काविल दस्तन्दाजी पोलीस है (३) पहिले अपराधीके नाम समन जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है। अध्याय दशवाँ १०. सरकारी नौकरोंके नीतिपूर्वक अधिकारका अपमान करनेके विपयम, (१७२ ) जो कोई मनुष्य इस लिये छिपजाय कि किसी ऐसे सरकारी नौकरके जारी सरकारी नौकरके जारी ] - किये हुए समन या सूचनापत्र ( इत्तिलाभनामा ) या आज्ञाका उस किये हुए समन अथवा और किसी आनापत्रके / तक पहुँचना टल जावे जो उस सरकारी नौकरीके कारणसे उस लेनेसे बचनेके लिये छिप समन या इत्तिलाअनामा या आज्ञाके जारी करनेका कानूनानुसार अधिकारी है, तो उस मनुष्यको साधारण कैदका दड दिया जायेगा जिसको मीआद एक महीनातक होसकती है, या जुर्मानेका दद जो पाचसौ रुपयेतक होसकता है या दोनों दंड दिये जावेंगे। या पदि वह समन या इत्तिलाअनामा या आज्ञा इस प्रकारकी हो कि कोई मनुष्य किसी कोर्टआफजस्टिस (न्यायालय ) में स्वय उपस्थित (हाजिर ) हो या अपने मुखत्यारको उपस्थि जाना.

दशवॉ. १०] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई० । (८७) करे या वहा कोई दस्तावेज पेश करे तो उस मनुष्यको साधारण कैदका दढ दिया जागा जिसकी मीआद छः महीना तक होसकती है या जुर्मानका दड जो एक हजार रुपयेतक हो सकता है या दोनो दह दिये जावेगे। टीए-(१) कोई मजिट्रेट (२),अदम दस्तन्दाजी पोलीस (३) सबके पहले अपरा- धोके नाम समन जारी होगा (४) जमानत हो सकती है (५) राजीनामा नहीं है (६) मजूरी दरकार है। किसी ऐसे हुक्मनामे (आनापत्र) की कार्रवाईसे वर्तनके अभिप्रायसे, कि जो सचमुचम जारी नहीं हुवा है, किसी मनुष्यका मागना दफा १७२ दडसग्रहके अनुसार अपराधको सीमातक नहीं पहुँचता, भागनेका अभिप्राय केवल स्थानही बदलनेसे नहीं है वरन उसमें छुप जानाभी सम्मिलित है जब कोई मनुष्य किसी आजापत्र (हुक्मनामा ) के जारी होनेसे पहिले छुपजावे और उसी आजा- पत्रके जारी होनेके पश्चात् भी वह छुपा रहे तो कहा जावेगा कि वह भागा रहा (ई. ला• रि० मदरास जिल्द ४ सफा ३९३) यदि कोई मनुष्य अपने विरुद्ध वारटकी कारवाईको रोकनेके अभिप्रायसे छुप जावे तो उसका दंड दडसंग्रह हिदकी दफा १७२ के अनुसार अयोग्य है क्योंकि वारट इत्तिलाअनामा या समन कुछ भी नहीं है बरन वह किसी मुख्य अफ्सरके यहां तामीलके लिये भेजा जाता है न कि उस मनुष्यके यहां कि निसकी हाजरीकी आवश्यकता है (पश्चिमोत्तर ठेग रिपोर्ट जिल्द ७ सफा ३०२) (१७३ ) जो कोई मनुष्य किसी ऐसी सरकारी नौकरीके कारणसे जो उस सरकारी किसी समन अथवा ] नौकरको कारणसे उस समन या इत्तिलाअनामा या हुक्मके जारी और प्रकारके हुक्मनाम- करनेका कानूनानुसार अधिकारी है, जारी किये हुए समन या का जारी होने अथवा प्र. गट किये जाने से रोकना.) इत्तिलाअनामा या हुक्मकी कार्रवाई अपनेपर या किसी दूसरे मनुष्य पर होनेसे किसी प्रकार जानबूझकर रोके, या- जानबूझकर उस समन या इत्तिलाअनामा हुक्मको किसी स्थानपर उचित प्रकारसे चिपकाए जानेको रोके, या- किसी ऐसे समन या इत्तिलाअनामा या हुक्मको किसी स्यानसे, जहा वह उचित प्रकार पर चिपकाया गया है, जानबूझकर छुटावे, या- किसी ऐसे उचित रीतिपर प्रगट किये जाते हुये इश्तिहारको जानबूझकर रोके जो किसी ऐसी सरकारी नौकरकी आज्ञानुसार हुवा जिसको अपनी सरकारी नौकरीके कारण उस इश्तिहारके प्रगट करनेका कानूनानुसार अधिकार हो, तो- उस मनुष्यको साधारण कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीआद एक महीने तक हो सकती है या जुर्मानेका दंड जो पांचसौ रुपये तक हो सकता है या दोनो दंड दिये जावेगे, या- - (८८) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- यदि वह समन या इत्तिलाअनामा या हुक्म या इश्तिहार इस प्रकारका हो कि कोई मनुष्य किसी कोर्ट आफ जस्टिसमे स्वयं उपस्थित हो या अपने मुखत्यारको उपस्थित करे या वहा कोई दस्तावेज पेश करे, तो- उस मनुष्यको साधारण कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीआद छ: महीनतक हो- सकती है या जुर्मानेका दंड जो एकहजार रुपयातक हो सकता है या दोनों दण्ड दिये जावेगे। टीप-१ किसी मनुष्यका समन पर दस्तखत करनेसे नाही करना दडसग्रह हिदकी दफा १७३क अपराधमे न गिना जायगा (बम्बई हाईकोर्ट रिपोर्ट जिल्द ५ सफा ३४) २-समन भरपानकी रसीद देनेसे भी नाहीं करना दफा १७३ के अपराधम न गिना नायगा (इ० ला• रि० कलकत्ता जिल्द ३ सफा ६२१) ३-समन लेनेसे नाही करना भी दफा १७३ के अपराधमे न गिना जायगा (इ० ला• रि० मदरास जिल्द ५ सफा १९९) ४-बहुत ही थोडा समय व्यतीत हुवा कि, एक मुकद्दमे मे कलकत्ता हाईकोर्टने यह तजवीज किया है कि समन पानेकी रसीद पर केवल दस्तखत करनेसे नाहीं करना दडसग्रह हिदकी दका १७३ के अनुसार अपराध न होगा । (इ० ला० रि० कलकसा जिल्द २० सफा ३५८) (१७४ ) जब किसी मनुष्पका जिसपर किसी मुख्यस्थान या समयपर ऐसे समन सरकारी नौकरकी ) इत्तिलाअनामा, या इश्तिहारके अनुसार जो किसी ऐसे सरकारी आजानुसार हाजिर हो- नौकरकी ओरसे जारी हुवा है कि जिसको अपनी सरकार्ग-नौक- रीके कारण जारी करनेका कानूनानुसार अधिकार हो स्वय या मुखत्यारके द्वारा उपस्थित होना कानूनानुसार उचित हो और वह मनुष्य उस स्थान या समयपर जानबूझकर उपस्थित होवे या उस स्थानसे जहां कि उसका उपस्थित रहना उचित है उस समयसे पहिले चलाजाय जब कि उसका वहासे चलाजाना उचित है, तो उस मनुष्यको साधारण कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीभाद एक महीना तक हो सकती है या जुर्मानेका दण्ड जो पाचसौ रुपया तक हो सकता है या दोनो दंड दिये जावेगे । या यदि वह समन या इत्तिलाभमामा या इश्तिहार इस प्रकारका हो कि कोई मनुष्य कोर्ट आफ जस्टिसमे स्वय उपस्थित हो या अपने मुखल्यारको उपस्थित करे, तो साधारण कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीआद छ: महीनातक हो सकती है या जुर्मानेका दण्ड जो एक हजार रुपये तक हो सकता है, या दोनो दड दिये जायेंगे। नेमें चूकना.

दशवा १०.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई०॥ (८९) उदाहरण । (क) शिवशकर जिस पर कानूनानुसार अवश्य है कि कलकत्तेम सुप्रीम कोर्टके सामने उमी कोर्टके जारी किये हुए सफीनेके अनुसार उपस्थित हो, परन्तु वह जानबूझकर वहां उपस्थित होनेसे तो कहा जायगा कि शिवणकरने वह अपराध किया जिसका वर्णन इस दफार्म किया गया है। (ख) शिवशकर जिसपर कानूनानुसार अवश्य है कि किसी जिलाजजके सामने उसी जिला जजके जारी किये हुएं समनके अनुसार गवाही देनेको उपस्थित हो, परन्तु वह जानबूझकर वहा उप- सित होनेसे चूका तो कहा जायगा कि शिवाकरने इस दफामें कहा हुआ अपराध किया । टीप-(१) एक कोई मजिस्ट्रेट (२)(अदम) दस्तन्दाजी पोलीस (३) समन (४) काबिल जमानत है (५) राजीनामा नहीं होसकता (६) मजूरीदरकार है। १-जो किसी तहसीलदारने समन किसीके नाम इस अभिप्रायसे जारी किया हो कि वह किसी मौजेकी मर्दुमशुमारी ( मनुष्यमणना ) का नकशा तैयार करे, यदि यह मनुष्य उसके अनुसार कार्रवाई न करे तो दडसग्रह हिदकी दफा १७४ में लिखे हुए अपराधका अपराधी नहीं है (इ. ला. रि. मदरास जिल्द ५ सफा ३७७) २-जो समन किसी मनुष्यके उपस्थित होनेको जारी किया उसमें उपस्थित होनेका समय तारीख व स्थान स्पष्ट स्पष्ट लिखा रहना चाहिये यदि इसमें किमी प्रकारकी भूल होगी तो वह मनुष्य उपस्थित न होनेपर उस अपराधका अपराधी नहीं गिना जायगा (इ० ला. रि० इलाहाबाद जिल्द ५ सफा ७) ३–एक मनुष्य समनके अनुसार वास्ते हाजिरी व जवाब देही मुकद्दमा फौजदारीके मजिस्ट्रे- टकी अदालतमें आया, लेकिन वह समनमें लिखे हुए समय पर मजिस्ट्रेटको हाजिर न पाकर, एक उचित समयतक उसको परखे विना चलागया तो ऐसी अवस्थामें वह टफा १७४ के अपराधका अपराधी होगा । (इ. ला०र० बबई जिल्द १० सफा ९३) ४-जब कोई ब्रिटिश मजिस्ट्रेट किसी मनुष्पके नाम इस प्रकारका समन जारी करे कि वह उसके सामने एक ऐसे स्थानपर उपस्थित होवे जो देश अगरेजी राज्यके बाहर हो और यदि वह मनुष्य उस समनकी आजाको न माने तो उसके सम्बन्धमे यह न कहा जायगा कि उसने दफा १७४ का अराध किया । ( इ० ला. रि. मदरास जिल्द १६ सफा ४६३) ५-जब दडसग्रह हिदकी दफा १७४ के अपराध दड होवे तो दड होनेके पहिले इस वातका प्रमाणित होना अवश्य है कि अपराधीने जानबूझकर गैरहाजिरीकी (रिपोर्ट हाईकोर्ट पश्चिमोत्तर देश जिल्द १ सफा २.३) ६---म्यूनिसिपल कमिश्नरान कि जो ऐक्ट २६ सन् १८५० के अनुसार नौकर है यद्यपि सर- -कारी नौकर हैं, परन्तु इस सरकारी नौकरीमे रहकर भी कानूनानुसार किसीकी हाजिरीके लिये आजा हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [ अध्याय- - नहीं जारी कर सकते, इस लिये उनकी आजाभग करनेवाला दंडसग्रह हिटको दफा १७४ के अपरा- घका अपराधी नही होसकता (रिपोर्ट हाईकोर्ट बंबई जिल्द ५ सफा ३३ श्रीमती महारानी वनाम पुरुपोत्तमलालजी) ( १७५ ) कोई मनुष्य, जिसको किसी सरकारी नौकरके सामने उसकी सरकारी किसी सरकारी नौक- नौकरीके ओहदेसे किसी दस्तावेजका पेश करना या उसका उस रके सामने कोई लेख नौकरको देदेना कानूनानुसार उचित है उपरोक्त दस्तावेजके पेश (दस्तावेज ) पेशकरनेसे चूकना, करने या दे देनेमें जानबूझकर चूक करे तो उस मनुष्यको साधारण ष्यका जिस पर उसका कैदका दड दिया जावेगा जिसको मीआद एक महीनेतक होसकती है पेश करना कानूनानुसार उचित है, या जुर्मानेका दंड जो पांच सौ रुपयेतक होसकता है या दोनो दड दिये जावेगे और यदि वह दस्तावेज किसी कोर्ट आफ जस्टिसमे पेश किये जाने या दे देनको हो तो साधारण कैदका दंड दिया जावेगा जिसकी मीआद छः महीनेतक होसकती है या जुर्मानेका दंड जो एक हजार रुपयेतक होसकता है या दोनों दंड दिये जावेगे । किसी ऐसे मनु- उदाहरण। शिवशंकर जिसको किसी जिला कोर्टके सामने किसी दस्तावेजका पेश करना कानूनानुसार उचित है, उपरोक्त दस्तावेजको जानबूझकर पेश करने में तो शिवशकर उस अपराधका अपराधी होगा जिसका वर्णन इस दफामें किया गया है। १----किसी दस्तावेजको पेश करनेके लिये गवाह बुलाया गया वह अदालतमे. उपस्थित हुवा परन्तु उसने दस्तावेज न पेश की और शपथके अनुसार (हलफिया) यह बयान किया कि वह मेरे अधिकारमे नही है परन्तु इस बयान पर विश्वास न करके अदालत उसपर दफा १७४ जाब्तादीवानीके अनुसार ७५) रुपया जुर्माना किया-तजवीज हुई कि जुर्माना अनुचित रीतिपर वसूल किया गया जाब्ता दीवानीकी दफा १७४ के अनुसार दड उस अवस्थामे दिया जायगा कि जब कोई गवाह जो समनपर न आवे गिरफ्तार करके अदालतके सामने पेश किया जावे, ऐसे गवाहके लिये जिसके यहा दस्तावेज हो परन्तु पेश न करे हिन्दुस्थानके दंडसंग्रहकी दफा १७५ व ऐक्ट १० सन् १८८२ ई० को दफा ४८० के अनुसार दंड देना चाहिये, परन्तु जब यह प्रमाणित होजावे कि उस अपराधीने झूठ कहा-(इ० ला• रि० बम्बई जिल्द १२ सफा ६३) २-अदालत हाईकोर्टके सिवाय प्रत्येक अदालत उन मनुष्योके अपराधोके मध्ये जो स्वयं उसके सामने किया गया हो केवल ऐसी अवस्थामें विचार कर सकती है जिनसे दफा ४७७ या ४८. या ४८५ जाब्ता फौजदारीका सम्बन्ध है और उन दफोमेंसे किसी दफाका सम्बध नहीं है जब कि अपराधी पर हिदुस्थानके दंडसंग्रहको दफा १७५ का अपराध लगाया जावे (इ. ला. रि• मदरास जिल्द १३ सफा ४२) दशवा १०.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई०। (९१ (१७६ ) कोई मनुष्य, जिसपर. किसी सरकारी नौकरको उसकी सरकारी नौकरी के वह मनुष्य सरकारी] ओहदेसे किसी कामके मध्ये कोई सूचना या समाचार देना कानू- नौकरको सूचना या समा- नानुसार अवश्य है, उस समय और उस भातिपर जो कानूनानुसार चार देनेमें चूक करे जिस- को सूचना या समाचार दे- नियत (मुकर ) है यह सूचना देने या समाचार पहुंचानेमे जान- नाकानूनानुसार उचित बूझकर चूकी करे तो उस मनुष्यको साधारण कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीआद एक महीनातक हो सकती है या जुर्मानेका दड जो पाचसौ रुपयेतक हो सकता है या दोनो दड दिये जावेगे और यदि वह सूचना या समाचार कि जिसके देनेको आज्ञा है किसी अपराधके होनेसे सम्बन्ध रखे या किसी होनेवाले अपराधकी रोकके लिये या किसी अपराधीको पकडनेके लिये अवश्य हो तो उस मनुष्यको साधारण कैदका उड दिया जावेगा या जुर्मानेका दंड जो एकहजार रुपयेतक हो सकता है या दोनों दड दिये जावेंगे। (दफा ४०को देखो) टीप-(१) प्रे० म., या म० अ० या म० दो० (२) अदम दस्तन्दाजी पोलीस(३)समन (४) जमानत है (५) राजीनामा नहीं (६) मजूरी दरकार है। (नया मजमूआ जाब्ता फौजदारी, ऐक्ट न ५ सन् १८९८ ई. की दफा ४४ व ४५ को देखों जिनमें स्पष्ट लिखा है कि किन २ मनुष्योको किन २ अपराधोंके मध्ये सुचना या समाचार देना उचित है) १(क) दहसग्रह हिन्दुस्थानकी दफा १७६ के अपराधमे इस कारण दडित हुवा कि उसने जान बूझकर पोलीसको इस बातकी सूचना नहीं दी कि एक इश्तिहारी अपराधी (ब) एक विशेष गॅवमे उपस्थित था-अदालतने (ब) को इश्तिहारी अपराधी मानलिया था क्योंकि यह प्रमाणित होचुका कि (ब) की सब जायदाद (धन ) मजमूआ जाब्ता फौजदारीकी दफा ८८ के अभिप्रायानुसार कुर्क की गई थी-तजवीज हाईकोर्ट यह हुई कि बादी (मुद्दई) को (ब) अपराधी सम्बन्धमे इश्तिहारका जारी होना प्रमाणित करना चाहिये था-जिस मनुष्यपर किसी इश्तिहारी अपराधीक किसी विशेष गॉवमे होनेकी सूचना पोलीसको देना कानूनानुसार अवश्य होवे, उसपर फौजदारीका अभियोग (मुकद्दमा) उपरोक्त दफाके अनुसार ऐसी सूचना या समाचार न देनेके मध्ये उस अवस्थामें नहीं चलाना चाहिये कि जब पोलीसको इस घटना (वाकिआ)का वृत्तात पहिलेहीसे जात होगया हो (इ. ला. रि. मदरास जिल्द ७ सफा ४३६) २-जब कई मनुष्योमसे कोई एक,जिनपर पोलीसको सूचना देना मजमूआ जान्ता फौजदारीकी दफा ४५ के अनुसार अवश्य होवे, अपराध वधके होनेकी सूचना देदेवे, जिसके कारण एक अहलकार पोलीस घटना ( वारदात) होजानेके थोडी देर पश्चात् गॉवमें पहुंचा तो ऐसी अवस्थामे शेष दूसरे मनुष्योंपर कि जिनको ऐसी सूचना देना अवश्य था, दंडसग्रह हिदकी दफा १७६ के अपराधका दर म दिया जावेगा (इ. ला• रि• कलकत्ता जिल्द २. सफा ३१६) .

.[अध्याय- (९२) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। (१७७ ) शुद्ध हुआ ऐक्ट ३ सन् १८९४ ई० की दफा ५ के अनुसार कोई मनुष्य जिसपर, किसी सरकारी नौकरको उसकी सरकारी नौकरी के झूठा समाचार देना. कारणसे किसी कामके मध्ये 'समाचार देना कानूनानुसार अवश्य हो, उस कामके मध्ये ऐसा समाचार सच की मांति दे जिसको वह झूठ जानता हो या झूठ जाननेका कारण रखता हो तो उपरोक्त मनुष्यको साधारण कैदको दंड दिया जावेगा जिसकी मीआद छः महीनेतक होसकती है या जुर्मानेका दंड जो एकहजार रुपयेतक हो- सकता है या दोनों दंड दिये जावेगे और यदि वह समाचार जिसका देना उस मनुष्यपर कानूनानुसार अवश्य है किसी अपराधसे सम्बन्ध रखता हो या किसी होनेवाले अपराधके रोकके लिये या किसी अपराधीके पकडनेके लिये अवश्य हो तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीआद दो वर्षकि हो सकती है या जुर्मानेका दड या दोनों दंड दिये जायेंगे । ( देखो दफा ४० . .. स्पष्टीकरण-दफा १७६ और इस दफ्रामें." अपराध " के. शब्दमे प्रत्येक ऐसा काम गिना जायगा जो ब्रिटिश इडियाके बाहर किसी स्थानमें हुवाहो यदि ब्रिटिश इंडियाके भीतर किया जाता तो नीचे लिखी हुई दफोंमेसे किसी दफाके अनुसार दंड योग्य होता अर्थात्-दफा ३०२, ३०४, ३८२, ३९२, ३९३, ३९४, ३९५, ३९६, ३९७, ३९८, ३९९, ४०२, ४३५, ४३६, ४४९, ४५०, ४५७, ४६८, व ४६० और "अपराधी " के शब्दमें प्रत्येक ऐसा मनुष्य गिना जायगा जिसके मध्ये किसी पैसे कामका अपराधी होना वर्णन कियागया हो । उदाहरण। क) शिवशकर जमीदार अपने गॉवकी सीमाके भीतर जातघातका अपराध होनेसे जानकार होकर मजिस्ट्रेट जिलाको जान बूझकर यह झूठा समाचार दे कि वह मृत्यु दैवात्- साँपके काटनेके कारण हुई--तो शिवशकर उस अपराधका अपराधी होगा जिसका वर्णन इस दफामें किया गया है। (ख)-रमाशकर किसी गॉवका चौकीदार यह जानकर कि अनजाने मनुष्योका एक बडा समूहू उसके गांव से होकर पासहीके स्थानपर रहनेवाले उमाशंकर नामक एक धनानं सौदागरके घरमें डाका डालने गये हैं और रमाशकर पर संग्रह बंगालके कानून नं०३ सन् १८२१ ई० को दफा ७ जिमन ५ के अनुसार सबसे निकट पोलीस स्टेशनके अफ्सरको शीघ्रता . पूर्वक और ठीक २ इस कामका समाचार देना अवश्य है तो फिर यदि रमाशकर उस अफ्सर पोलीसको जानबूझकर झूठा समाचार दे कि किसी और प्रकारके मनुष्योका एक समूह उसके गॉवमेसे होकर 'किसी दूसरी और किसी विशेष स्थानको जो कुछ अंतरसे है डाकाडालने गया है तो दशवाँ १०. ..] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई०॥ अवस्थामें शिवशकर उस अपराधका अपराधी होगा जिसका वर्णन इस दफाके पिछले भागमे किया है। टीप-(१) प्रे० म० म० अ० या म० दो० (२) अदम दस्तन्दाजी पोलीस (३) समन (४) जमानत (५) राजीनामा नही है (६) मजूरी दरकार है । (नोट-संग्रह बगालका कानून) न० ३ सन् १८२१ ई. ऐक्ट न० १७ सन् १८६२ ई. के द्वारा मिटा (ममूख ) दिया गया है। १-किसी इकरारनामे (प्रतिज्ञापत्र ) मे, जो किसी सरकारी नौकरके अधिकारमे रहता हो और उसके अपसरके यहा आजानुसार मेजा जाताहो, कोई झूठी लिखावट ( इवारत) बनाई जाय तो यह दडसग्रह हिंदकी दफा १७७ के अभिप्रायानुसार अपराधी है। (इ. ला. रि० मदरास जिल्द ४ सफा १४२) २-एक मनुष्यने पोलीस भरती होनेके अभिप्रायसे डिस्ट्रिक्ट सुपरिन्टेन्डेन्ट पोलीसको ऐसा समाचार दिया कि जिसको यह झूठ जानता था तजवीज हुई कि उपरोक्त मनुष्यने कोई अपराध दफा १७७ या १८८ या उद्योग दफा ४१५ दंडसग्रह हिन्दुस्थानके नहीं किया । (इ० ला. रि० इला. हाबाद जिल्द ६ सफा ९७) ३-जिस रोजनामचे (रोजनिशि) का लिखना और अफ्सरके यहा मैजना किसी सरकारी नौकर पर-सरकारी आज्ञानुसार अवश्यहो, उसमे उसको झूठ इबारतका लिखना अपराध दफा १७७ दण्ड- संग्रह हिन्दमे गिना जायगा । (इ० ला• रि• मदरास जिल्द ४ सफा १४४) ४-२२ नवम्बर सन् १८८० ई० को अपराधीने जो एक डिप्टी तहसीलदार था अपने अफ्सरको अपने अधिकारकी धरतीका झूठा नकशा मेजदिया और फिर ५ दिसम्बर सन् १८९० ई० को एक झूठाबयान उसी प्रकारका मालकी तहकीकात, प्रिन्सिल असिस्टेन्ट कलक्टरके सामने किया- अपराधीको दडसग्रह हिदकी दफा १७७ के अपराधका दड दिया गया-हाईकोर्टकी यह तजवीज हुई कि जब कि अपराधीपर दडसग्रह हिदकी दफा ४३ के अभिप्रायानुसार सूचना देना कानूनानुसार अवश्य न था तो उसका दंड अयोग्य है । (इ. ला. रि० मदरास जिल्द १४ सफा ४८४) (नोट-इस नजीरसे मदरास हाईकोर्टकी नमीर जिल्द ४ सफा १४४ की रह की गई) ५-ऐक्ट न० ५ सन् १८६१ ई. (ऐक्ट पोलीस ) के अनुसार प्रत्येक पोलीसके अहलकार- को उचित है कि वह अपने ऊपरके अफ्सरको ऐसे बलवाके होनेकी सूचना कि जो-सर्वसाधारणकी कुशलतासे सम्बन्ध रखता हो देवे और अपने रोजनामचेमे उसे लिखे जिसका रखना उसको उपरोक्त ऐक्टकी दफा ४४ के अनुसार उचित है-ऐसे समाचारके देनमें भूल करना दडसग्रह हिन्दुस्थानकी दफा १७७ के अपराधमें गिना जायगा । (चीकी रिपोर्टर जिल्द २१ सफा ३०) ६-अपीलकी याददाश्तमें झूठाबयान करना कोई अपराध, दडसग्रह हिन्दुस्थानको दफा १७ के अनुसार नहीं है, क्योंकि उपरोक्त याददाश्तपर कानूनानुसार तस्दीक का लिखा जाना अवश्य नहीं है। पूजा रिकार्ड न. १७ सन् १८७९ ई० फौजदारी) [अध्याय- (९४) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। (१७८ ) जो कोई मनुष्य सच सच वयान करनेके लिये शपथ करने या सच शपय करनेसे नाही) बोलनेकी प्रतिज्ञा करनेसे उस अवस्थामे नाहीं करे जब कि कोई करना जब कोई सरकारी | ऐसा सरकारी नौकर उसको शपथ या प्रतिज्ञा करनेकी आज्ञा दे नौकर शपथ करनेकी जो शपथ या प्रतिज्ञा करनेके लिये आज्ञा देनेका कानूनानुसार कानूनानुसार आशा दे. अधिकारी है तो उस मनुष्यको साधारण कैदका दंड दिया जायगा जिसकी मीआद छ: महीनेतक होसकती है या जुर्मानेका दड जो एक हजार रुपये तक हो सकता है या दोनो दड दिये जावेगे । टीप-(१) वह अदालत जिसमें अपराध कियागया या प्रे० म० या म० अ० या म. दो. २) अदम दस्तन्दाजी पोलीस (३) समन (४)जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है (६) मजूरी लेनी चाहिये। -( १७९ ) कोई मनुष्य जिसपर किसी कामके मध्ये किसी सरकारी नौकरसे सच किसी सरकारी नौ सच कहना उचित हो, किसी ऐसे प्रश्नका उत्तर देनेसे नाही करको, जो प्रश्न करने- करे जो वह सरकारी नौकर अपने कानूनानुसार अधिकारके का अधिकार रखता है | वर्त्तनेमें उस कामके मध्ये उससे पूछे, तो उस मनुष्यको सा- उत्तर देनेसे नाही करना, धारण कैदका दह दिया जावेगा जिसकी मीआद छः महीने- तक होसकती है या जुर्मानेका दड जो एक हजार रुपयेतक हो सकता है या दोनों दण्ड दिये जावेगे। - १-दफा १६५ कानून शहादत (गवाह ) ऐक्ट नं० १ सन् १८७२ ई. के अनुसार हाकिमको किसी गवाहसे मुकद्दमेके असम्बधी प्रश्नोके पूछनेका अधिकार है, जब कि यह घटना सम्बंधी गवाही प्राप्त करनेके अभिप्रायसे पूछे; परंतु यदि वह इस विचारसे प्रश्न पूछे कि गवाहके मध्ये फौज- दारीकी कार्रवाई की जावे, तो गवाह पर अवश्य नहीं है कि उसका उत्तर देवे और उपरोक्त गवाह ऐसे प्रश्नों का उत्तर न देनेकी अवस्थामे दफा १७९ दंडसंग्रह हिदके अपराधका अपराधी नहीं हो सकता । ( इ. ला. रि. बम्बई जिल्द १० सफा १८५) - बयान पर दस्तखत ( १८० ) जब कोई मनुष्य अपने किये हुए किसी वयान पर उस अवस्थामें दस्त- खत करनेसे नाहीं करे, जब कि कोई सरकारी नौकर, जो उस करनेसे नाही करना. - मनुष्यको उसके उस बयान पर दस्तखत करनेके लिये आज्ञा देनेका कानूनानुसार अधिकारी होवे, उसको उस बयानपर दस्तखत करनेकी आज्ञा दे तो उपरोक्त मनुष्यको साधारण कैदका दह दिया जायेगा जिसकी मीआद तीन महीनेतक होसकती है या जुर्मानेका दंड जो पांचसौ रुपयेतक होसकता है या दोनो दंड दिये जावेंगे) बयान करना. दशवा १०.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई० ॥ (९५) टोप-(१) वह अदालत जहां अपराध कियागया या प्रे० म० या म० अ० या म. दो. (२) पोलीम विना वारट न पकडेगी (३) समन (४) काबिल जमानत है (५) राजीनामा नहीं है(६) मजूरी दरकार है। मालकी तहकीकातके समय अपराधीने अपने बयान पर दस्तखत करनेमे नाही की तो वह उसे अपरावमें दण्डित न होगा जिसका दड हिन्दुस्थानके दडसग्रहकी दफा १९० के अनुसार होसकता है। (उ० ला. रि० बबई जिल्द १० सफा १५) २-समन पानेकी रसीदपर दस्तखत करनेसे नाही करना, कोई अपगध दइसत्रह हिदकी दफा १७३ व १८ मे लिखा हुआ नही हो सकता (इ. ला. रि• कलकत्ता जिल्द २० सफा ३५८) ( १८१ ) कोई मनुष्य, जिसको शपथ या सच कहनेकी प्रतिज्ञा करनेके अनुसार सरकारी नौकर या किसी ऐसे सरकारी नौकर या किसी ऐसे दूसरे मनुष्यके सामने उस मनुष्यसे, जो शपथ | जिसको कानूनानुसार ऐसा शपथ या प्रतिज्ञा करानेका अधिकार है करानेकाअधिकार रखता है, अपय करकेभी झूठ किसी काममें सच २ वयान करना कानूनानुसार अवश्य हो, उस सरकारी नौकर या उस दूसरे मनुष्यसे जिसका ऊपर वयान हुवा है, उस कामके मध्ये कुछ वयान करे जो झूठा हो या जिसको वह झूठा जानता हो या झूठा निश्चय करता हो या जिसको वह सचा निश्चय न करता हो, तो उसको दोनो प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दढ दिया जावेगा जिसकी मीआद तीन वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप-(१) अदालत सेशन या प्रै० म० या म० अ० (२) पोलीस विना वारट नही पकड उकती (३) वारट अपराधीके नाम (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है (६) मजूरी दरकार है। १-इस मुकद्दमेमे तीन मनुष्योंकी तजवीज जिनमेसे एक वकील था एक संग की गई और उन्हें दडसग्रह हिंदकी दफा १८१ के अनुसार इस जडपर दियागया कि उन लोगाने एक तहकीका- नमें जो वकीलकी चाल चलनेके मध्ये ऐक्ट कानून पेशाके अनुसार हुई थी, सच कहनेकी प्रतिभाकर झूठ कहा तजवीज हुई कि वकीलको दंड देना अयोग्य था क्योंकि उसका वयान सच कहनेकी प्रतिज्ञा कराकर नहीं लेना चाहिये था यह भी तनवीज हुई कि जो तहकीकात ऐक्ट कानून पेशाके अनुसार कीगई वह अदालती कार्रवाईमे गिनना चाहिये इसलिये गवाहोंने जो झूठे बयान किये उनके मध्ये उनपर दडसग्रह हिंदकी दफा १९३ के अनुसार अलग अलग अपराधका ठहराना चाहिये । ( इ. ला. रि० मदरास जिल्द ६ सफा २५२) २-इस मुकद्दममें अपराधीने दंडकी आशासै अप्रसन्न होकर अपील दायर की, और अपील- को याददाश्तमें उसने यह झूठा बनाय लिखाया कि दंड देनेवाले मजिस्ट्रेटने उसके गवाहांको बुलानेसे नाही की-जिस माजिस्ट्रटके सामने उसकी अपील पेश थी उसने अपीलांटको दरख्वास्तके उपरोक्त [अध्याय- (९६) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। बयान पर सच कहनेकी प्रतिज्ञानुसार तसदीक करनेको कहा, और अपीलांटने भी उसकी कार्रवाईकी तजवीज हुई कि अपीलांटने कोई अपराध हिन्दुस्थानके दंडसंग्रह की दफा १८१ या १८२ मे लिखे हुए अनुसार नहीं किया। (इ. ला रि० मदरास जिल्द १२ सफा ४५१.) ( १८२ ) जो कोई मनुष्य किसी सरकारी नौकरको कोई ऐसा समाचार दे जिसे वह झूठा समाचार- इस झूठी जानता या झूठ निश्चय करता हो, और उसका यह अमि- अभिप्रायसे देना कि कोई सरकारी नौकर अपना प्राय होने या इस कामके होनेका सम्मत्र उसकी जानकारीमें कानूनानुसार अधिकार [ हो कि वह उस उपरोक्त समाचारके द्वारा किसी सरकारी काममें लावेऔर उससेदू. नौरकसे,- सरे मनुष्यको हानि पहुंचे. (अ) कोई ऐसा काम करावे या काम करनेमे चूकी करावे जिसका करना या चूकी करना उस सरकारी नौकरको न चाहिये था, यदि उन घटनाओंका सच्चा वृत्तात, कि जिनके मध्ये वह समाचार दिया गया है, उसे ज्ञात होजाता, या- (ब) ऐसे सरकारी नौकरके उचित अधिकारोंका वर्ताव किसी मनुष्यको हानि या रंज पहुँचानेके अभिप्रायसे, कराये- तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी कैदका दढ दिया जावेगा जिसकी मीआद छः महीनेतक हो सकती है या जुर्मानेका दड जो एक हजार रुपयेतक हो सकता है या दोनों दड दिये जावेगे। , । उदाहरण। (क) शिवशकरने एक मजिस्ट्रेटको यह समाचार दिया कि रमाशकर, जो अहलकार पोलीस है और उस मजिस्ट्रेट के अधीन है, अपने काममै असावधानी और कुचालका अपराधी है यह जानकर कि वह समाचार झूठा है और यह जानकर कि उस समाचारके कारणसे संभव है कि उपरोक्त मजिस्ट्रेट रमाशंकरको नौकरीसे निकला देगा ऐसी अवस्थामे शिवशकर उस अपराधक अपराधी हुआ जिसका वर्णन इस दफामे कियागया है। (ख)-शिवशंकरने यह बात जानकर कि यह समाचार झूठा है और इससे रमागकरके घरकी तलाशी होना तथा उसे कष्ट पहुंचना अति सम्मविन है, किसी सरकारी नौकरको समाचार दिया कि रमाशंकरने एक गुप्त घरमे चोरीका नमक रक्खा है, तो शिवशंकर उस अपराधका अपराधी हुआ जिसका वर्णन इस दफाम किया गया है। (ग) यदि शिवशकर किसी पोलीसके अहलकारको यह झूठा समाचार दे कि एक विशेष गांवके पडोसमें उसपर आक्रमण और जोरी ( सरका बिलजन) हुई और आक्रमण करनेवालोमेसे किसीका नाम न ले, परतु वह जानता है कि इस समाचारके अनुसार सम्भव है कि पोलीस दशवा १०.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई० । (९७) तहकीकात करके गाँववालोंकी तलागी लेगी और उनमेंसे किसी २ को कष्ट पहुँचगा, तो ऐसी अवस्थामे शिवशंकर उस अपराधका करनेवाला ठहराया जावेगा जिसका वर्णन इस दफाम किया गया है। टीप-(१)म० अ० या म० दो० या प्रे० म० ( २ ) पोलीस बिना वारंट नहीं पकड सकती (३) समन जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नही है (६) मंजूरी दरकार है। १-अपराधी जो बयान अपनी सफाई (बचत) में लिखवावे कर हिन्दुस्थानके दंडसग्रहको दफा १८२ के अभिप्रायानुसार " समाचार कि जो सरकारी नोकरको दियागया " न समझा जावेग पश्चिमोत्तर देश रिपोर्ट जिल्ट २ सफा १२८) २-दडेसग्रह हिन्दुस्थानको दफा १८२ उस अवस्थामै लाग ( सम्बन्ध ) न होगी जब कि वह सरकारी नौकर कि जिसे झूठी ममाचार दियागया है, उपरोक्त समाचार किसी दूसरे अफ्सरके नाम केवल मैन देनका अधिकारी हो और जो उचित अधिकार उसको प्राप्त है उसके वर्तनसे किसी ऐसे मनुष्यको तत्कालही क्लैश या हानि नही पहुंच सकती है जिसके विरुद्ध वह सूचना दीगई हो ( इ०ला. रि. मदरास जिल्द ४ सफा २४१) ३-मुहतमिम जगल अर्थात् जगलका अफ्सर एक ऐसा सरकारी नौकर है जिसको झूठा समा. बार दैना इम दफाके अनुसार दड योग्य है चाहे वह समाचार स्वयही कोई मनुष्य देवे चाहे उन प्रश्नों के उत्तर द्वारा उस समाचारको प्रगट करे कि जो उस अफ्सरने उससे किये हों ( इ० ला• रि० बम्बई जिल्द १० सफा १२४) ४-महरिकी जातिका एक मनुष्य जिसको सरकारी नौकरी नहीं मिलसकती, अपने आपको जाट बनाकर सेनामें नौकर होगया, हाईकोर्टकी तजवीज यह हुई कि वह इसी दफाके अनुसार अप- रोधी है न कि हिन्दुस्थानके दडसग्रहको दफा ४१९ के अनुसार ( पजाब रिकार्ड. फौजदारी न० १४ सन् १८८० ई.) ५-जब कोई मनुष्य किसी विशेष रीति पर इस वातकी फरियाद मैश करे कि किसी दूसरे मनुष्यने अपराध किया है-और फरियाद ( इस्तगासा ) ( अभियोग ) दायर करनेवालेका अभिप्राय उस मनुष्यको हानि पहुंचानेका हो तो वह हिन्दुस्थानके दडसग्रहको दफा २११ के अपराधका अपराधी होगा न कि दफा १८२ के अपराधका (इ. ला. रि० बम्बई जिल्द ७ सफा १८४). ६-जिलेके कलक्टर महबको झूठी सूचना इस वातकी दीगई- कि कुछ जमीदारोंने बल- पूर्वक सरकारी धरतीमे अधिकार करलिया है इस अभिप्रायसे कि उन जमीदागेको कष्ट होवे और सरकारी नौकरोंका समय व्यर्थ व्यतीत होवै-तजवीज हुई कि हिन्दुस्थानके ढडसग्रहकी दफा १८२ का अपराध उस मनुष्यने नहीं किया । ( इ० ला• रि. इलाहाबाद जिल्द ४ सफा ४९८) ७-(क) ने दुख पहुंचाने के अभिप्रायसे पोलीसको यह सूचना दी कि (ख) ने उसके घरसे माल चुराया था, इसलिये पोलीसने (ख) के घरकी तलाशी ली,,और उपरोक्त सूचना मूठ. प्रमाणित ७ . [अध्याय- (९८) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। हुई-तजवीज हुई कि (क ) ने (ख) के विरुद्ध फौजदारीकी कार्रवाई की थी इसलिये वह दफा २११ के अपराधका अपराधी हुवा था न कि दफा १८२ के अपराधका । ( पजाब रिकार्ड नं.-१६ सन् १८७० ई.) ८-हिन्दुस्तानके दडसग्रहकी दफा २११ के अपराधमे दफा १८२ का अपराध गिना जायगा इसलिये मजिष्ट्रेटको अधिकार है कि उन दफॉमेंसे किसी दफाके अनुसार वर्ताव करे, यद्यपि उन अभियोगोमे जो बहुतही गुरुतर ( सगीन, भारी ) है दफा २११ का ही वर्ताव करना उचित है इ० ला. रि० कलकत्ता जिल्द ५ सफा १८४) ९-बलदेवने बस्तीपूर पोलीसमे प्रकृतिविरुद्ध काम करनेका अपराध लगाया और फिर वही फरियाद ( इस्तगासा ) मजिष्ट्रेट के सामने दायर की-जो तहकीकात होनेके उपरान्त झूठी प्रमा- णित हुई और अपराधी छोड दिया गया और बलदेवको दफा १८२ के अपराधमे दंड हुवा, तब- वीज हुई कि बलदेवके मध्ये दडकी आज्ञा जो दफा १८२ के अपराधमे हुई है अनुचित है क्योंकि उपरोक्त दफाका सम्बन्ध सरकारी नौकरके साथ सीमाबद्ध था बलदेवकी तजवीज दफा २११ के अपराधम होनी चाहिये थी। (वीक्ली नोटिस इलाहाबाद किताब माह अगस्त सन् १८८२ ई. सफा १७८) ( १८३ ) यदि कोई मनुष्य किसी मालके लिये जानेमें, जो किसी सरकारी नौकरके किसी सरकारी नौक. ) उचित अधिकारके अनुसार लिया जाता हो किसी प्रकारके रोक- रके उचित अधिकारके टोक करे यह जानकर या यह निश्चय करनेका कारण रखकर कि अनुसार भालके लिये वह-ऐसाही सरकारी नौकर है तो उस मनुष्यको दोनों प्रकारों से जानेमें सामना करना. किसी प्रकारकी कैदका दंड दिया जावेगा जिसकी मीआद-छ: महीना तक हो सकती है या जुर्मानेका दड जो एक हजार रुपये तक हो सकता है या दोनों दण्ड दिये जावेगे। टीप-(.१) प्रे० म० या० म० अ० या० म० दो० (२) पोलीस विना वारट नहीं गिर- पतार कर सकती (३) समन जारी होगा (४) काबिल जमानत (५) राजीनामा नहीं होसकता (६) मंजूरी दरकार है। १-एक मनुष्यको दफा १८३ के अनुसार इस बातपर दंड दिया गया कि उसने सरकारी नौकरको किसी मालकी कुर्की करनेमे रोका-यह अपराध ४ फरवरी सन् १८८३ ई० को किया गया, परन्तु वारटकै वापसी की तारीख, कि जिसके अधिकारसे सरकारी नौकर सब कार्रवाई की वही थी या उसके एक दिन पहिले की थी, तजवीज हाईकोर्ट यह हुई कि अपराधीका दंड अयोग्य क्योकि जिस तारीखको रोक टोक की गई उस तारीखको कुर्की करनेकी कानूनानुसार आज्ञा न थी और उस समय वारटकी अवधि बीत चुकी थी ( इ. ला. रि० कलकत्ता जिल्द १० सका १८.)

दशवा १०.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०। (९९) २-जब कोई विलिफ (अमीन ) कुर्की करनेवाला अफसर किसी डिगरीकै इजराम गई माल कुर्क करे भार वह मनुष्य कि जिसका माल है केवल यह कहे कि नबतक विलिफ उपरोक्त मालके मव्ये यह न लिखले कि वह उसका माल है तबतक वह (मालका स्वामी) विलिफको उप- रोक्त भालके ले जानेसे रोकेगा-हाईकोर्टकी यह तजवीज हुई कि इस प्रकार जबानी बयान दंड- सग्रहहिदको दफा १८३ के अपराधकी सीमा तक नहीं पहुँचता ( इ. ला. रि० बम्बई जिल्द १५ सफा ५६४) ( १८४ ) जो कोई मनुष्य, किसी मालके नीलाममे जो किसी सरकारी नौकरके किसी मालके नीला-] कानूनानुसार-अधिकारके अनुसार नीलामपर चढाया गया हो जा- मम जो किसी सरकारी | नबूझकर रोक टोक करे तो उस मनुष्यको ढोनो प्रकारोमेसे किसी नौकरके कानूनानुसार-प्रकारकी कैदका दंड दिया जावेगा जिसको मीआट एक महीनेतक अधिकारके अनुसार नी. लाम पर चढाया गया | होसकती है या जुर्मानका दह जो पाँचसौ रूपयातक होसकता है हो रोक टोक करना. या दोनो दड दिये जावेगे। टीप-(१) प्रेसीडसी मजिस्ट्रेट या मजिस्ट्रेट दर्जा अव्वल या दजी दोयम् (२) पोलीस विना वारट अपराधीको नहीं पकडसकती (३) समन (४) अपराध जमाननके योग्य है (५) राजीनामा नहीं होसकता (६) मजूरी दरकार है। --(.१८५ ) जो कोई मनुष्य किसी मालके नीलाममें जो किसी सरकारी नौकरके अ- कोई माल जो सरका-] धिकारानुसार आज्ञा से होताहो, किसी मनुष्यके लिये ( चाहे वह री नौकरके अधिकारानु- सार नीलाम पर चढाया। स्वयही हो या कोई दूसरा, ) कोई माल मोटले या उसके लिये गया हो कानूनविरुद्ध [ बोली वोले यह जानकर कि उस मनुष्यको उस उपरोक्त मालके मोल लेना या उसके लिये बोली बोलना. मोल लेनेका कानूनानुसार अधिकार नहीं है, या उस मालपर बोली बोले और उन नियमोंके पूरे करनेका अभिप्राय न हो जो उस बोली बोलनेसे उसपर ठहरेगे नो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारोमेंसे किसी प्रकारकी कैदका ढड दिया जावेगा जिसकी मीाद एक महीनेतक होसकती है या जुर्मानेका दड जो दोसौ रुपयेतक हो सकता है या दोनो दंड दिये जावेगे। टीप-(१) प्रे० म० या म० अ० या म० दो० (२) पोलीस विना वारंट अपराधीको नही पकडसकती (३) समन (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं होसकता (६ मजूरी दरकार है। जब कोई मजिस्ट्रेट किसी माल्को नीलाम कर रहा है और यदि कोई मनुष्प ऐसे नीलाममें चोली बोले और उसके नियमोंको पूरा न करसके तो उपरोक मनुष्य सरकारी नौकरके उचित अधिका- का अपमान करनेका अपराधी दसग्रहहिदको दफा १८५ के अनुसार होगा।

[अध्याय- (१००) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। *(१८६) जो कोई मनुष्य किसी सरकारी नौकरको अपनी नौकरीका काम भुगता- सरकारी नौकरीका ) नेमे जानबूझकर रोकेगा तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारोंमेसे काम करनेमे सरकारी किसी प्रकारकी कैदका दंड दिया जावेगा जिसकी मीआद तीन नौकरका रोक टोक करना महीनेतक हो सकती है या जुर्मानेका दड जो पांचसौ रुपयेतक हो सकता है या दोनों दड दिये जावेगे। टीप-(१) प्रे० म० या म० अ० या० म० दो० (२) पोलीस विना वारट नहीं पकड.सकती (३) अपराधीके नाम समन जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नही है (६) मंजूरी दरकार है। १) झूठा समाचार प्रसिद्ध करना और मनुष्योको अपने बच्चोको टीका लगाने वाले सरकारी नौकरके हाथ टीका लगवानेसे रोकना दडसग्रह हिन्दुस्थानकी दफा १८६ का कोई अपराध नही है (इ० ला. रि० मदरास जिल्द १५ सफा ९३) २) किसी सरकारी नौकरकी उचित चौकसीसे किसी मनुष्यका भागजाना ( बम्बई हाईकोर्ट रिपोर्ट जिल्द २ सफा १३४ ) व गडीके स्वामीका किसी सरकारी, नौकरको अपनी गाडी किरायापर देनेसे नाही करना (बम्बई हाईकोर्ट रिपोर्ट जिल्द ९ सफा १६५ ) व किसी- सरकारी क्लर्कसे विना रुपया दिये रसीद ले लेना ( पश्चिमोत्तर देश हाईकोर्ट रिपोर्ट सन् १८६३ ई० सफा ६३ ) और किसी सरकारी नौकरके साथ अपने खेतकी माप करानके लिये जानेसे नाही करना (बम्बई हाईकोर्ट रिपोर्ट जिल्ट ५ सफा ५१) दफा १८५ दंडसग्रहहिदके अनुसार अपरा. धमे नहीं है। -(३) साहब जज जिलाने किमी अभियोगमे जो उनके सामने पेश था, एक प्रतिवादी ( मुद्दआंअलेह ) का घर ढुंढवा करके कुछ माल अदालतमै लानेकी आजा दी, और इस आनाको पूरा करनेके लिये एक मनुष्यको नियत किया वह मनुष्य घर पर गया, परन्तु उपरोक्त प्रतिवादीने अपने घरके किवाड़ भीतरसे बद करलिये और स्वयभी भीतर होरहा-बहुतसे मनुष्य वहा इकठा होगये 'बलपूर्वक घरका ढूँढना भी असम्भव था-इस घटनापर प्रतिवादीपर दडसग्रह हिन्दुस्थानकी दफा १८६ का अपराध लगाया गया और इसी दफाके अनुसार उसे ढड दिया गया-हाईकोर्टकी रायमे इस घट- नाके अनुसार कोई अपराध दंडसंग्रहहिदके अनुसार नहीं उत्पन्न हो सकता (इ० ला.रि. मदरास जिल्द १५ सेफा २२१) (४) जिस मनुष्यको, कलक्टर दफा ६९ एक्ट कास्तकारी बगालके अनुसार जमीदार व काश्तकारकी फसलका बटवारा करनेके लिये नियतकरे वह टफा १८६ के अभिप्रायानुसार सरकारी नौकर नहीं है ( इ० ला. रि० कलकत्ता जिल्द १८ सफा ५१८) (५) नाजिरको अधिकार है कि वह गिरफ्तारीका वारंट उसकी कार्रवाई के लिये किसी चपरासीको दे दे-जिस चपरासीको समर्पित उपरोक्त वारट किया जाये वह दंडसंग्रह हिन्दुस्थानकी दफा २१ जिमन ४ के अभिप्रायानुसार सरकारी नौकर समझा जावेगा (इ० ला० कि० कलकत्ता जिल्द२२ सफा ७५९) , दशवा १०.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०॥ (१०१) ६) अपराधीका लडका घरसे निकल भागा और एक पोलीसकी चौकीपर जो थानेके निकट थी मिला और चौकीदारके साथ थानेपर भेजदिया गया-राहमें चौकीदारको अपराधी मिला और उसने अपना लडका चौकीदारसे मांगा परंतु चौकीदारने न दिया, और जब चौकीदार उसको थानेके भीतर लैजाने लगा तब अपराधी उसको छीन ले गया और चौकीदारको मी भला बुरा कहा-तजवीज हुई कि अपराधीने वास्तवमें ही दफा १८६ का अपराध किया (बीक्ली नोटिस इलाहाबाद किताब माह जुलाई सन् १८८३ ई० सफा १७०) ( १८७ ) जब कोई मनुष्य, जिसपर किसी सरकारी नौकरको उसके सरकारी किसी सरकारी नौक-) कामके करनेमें सहायता देना या पहुंचाना कानूनानुसार अवश्य रको सहायता देनेसे चू-/- हो, जानबूझकर ऐसी सहायता देने में चूक करे तो उसको साधा- कना, जब कि सहायता रण कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद एक महीनातक देंनी कानूनानुसार अव- होसकती है या जुर्मानेका ठण्ड जो दोसौ रुपयातक होसकता है श्य हो या दोनो दड दिये जावेंगे- और यदि ऐसी सहायता उस मनुष्यसे किसी सरकारी नौकरने मागी हो जो ऐसी सहायता मागनेका कानूनानुसार अधिकारी है; करने कार्रवाई किसी हुक्मनामेके जिसे किसी कोर्ट आफ जस्टिससे उचित रीतिपर जारी किया हो, या किसी अपराधके होनेको रोकने या किसी बलवा या लडाईको दवा देनेके लिये या किसी ऐसे मनुष्यको पकडनेके लिये जिसपर कोई अपराध लगाया गया हो, या जो किसी अपराधका या उचित चौकसीसे भाग जानेका अपराधी ठहराया गया हो तो उपरोक्त मनुष्यको साधारण कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीआद छः महीनेतक होसकती है या जुर्मानेका दण्ड जो पाचसौ रुपयेतक होसकता है या दोनो दण्ड दिये जायेंगे (दफा ४० को देखो ) टीप-(१)प्रै० म० या म० अ० या म० दो० (२) पोलीस बिना बारट गिरफ्तार नहीं कर सकती (३) समन (४) जमानत होसकती है (५ ) राजीनामा नहीं है ( ६ ) मजूरी दरकार है। १-मजिस्ट्रेटने जमींदारको यह आज्ञा दी कि पन्द्रह दिनके भीतर चोरीका पता लगावो और पोलीसको सहायता दो-तजवीज हुई कि उपरोक आजा अनुचित यी, इसलिये जमींदार दंडसम, हिन्दुस्थानकी दफा १८७ व १८८ के अपराधका अपराधी नही है ( इ. ला. रि• इलाहाबाद जिल्द ३ सफा-२०१) २-ऐसा कोई कानून नहीं है कि जिसके अनुसार किसी मालगुजार ( जिमींदार ) पर अहलकार पोलीसको मरे हुए मनुष्यकी लाश गडानेमें सहायता देना-उचित होवे ! (मध्यप्रदेश इ. ला. रि० जिल्द ६ सफा ५ फौजदारी) [ अध्याय- (१०२) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। + ( १८८ ) जो कोई मनुष्य यह बात जानबूझकर कि मुझको, किसी सरकारी नौकरकी न मानना किसी आ आज्ञानुसार जो कानूनानुसार उस आज्ञाके देने अथवा प्रसिद्ध कर- ज्ञाका जो किसी सरकारी । नेका अधिकारी है, कोई काम करना वर्जित है अथवा किसी वस्तु' नौकरने कानूनानुसार प्र के मध्य जो मेरे अधिकार अथवा प्रवन्धमे है कोई मुख्य प्रबन्ध गट की हो, करनेकी आज्ञा है उस आज्ञाको न मानेगा, तो- ---, यदि ऐसी आज्ञाभंगले उन मनुष्योको जो किसी नीतिपूर्वक ( जायज ) काममें लगे हुए है रोकटोक या क्लेश या हानि या रोकटोक, क्लेश या हानिका डर पहुचे या पहुंचाने- चाला हो तो उपरोक्त मनुष्यको साधारण कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीआद एक महीनातक होसकती है या जुर्मानेका द जो दोसौ रुपयातक होसकता है या दोनो दण्ड दिये जायेंगे. और, 5 " यदि ऐसी आज्ञामगसे मनुष्यके प्राण या आरोग्यता या कुशलताको हानि पहुंचे या पहुचानेकी ओर झुकती हो या बलवा या लडाई ( हंगामा ) उत्पन्न करे या उत्पन्न करनेकी ओर झुके तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीाद छः महीनातक होसकती है या जुर्मानेका दण्ड जो एक हजार रुपयेतक हो सक्ता है या दोनों दण्ड दिये जावेगे, स्पष्टीकरण-यह अवश्य नहीं है कि अपराधीका अभिप्राय हानि पहुंचानसेही हो या वह यह जानताही हो कि उस आज्ञामगसे हानि उत्पन्न होगी, वरन इतनाही बहुत है कि वह उस आज्ञाको जानता हो जिसको वह भग करता है और यह कि उसका न मानना हानि उत्पन्न करता है या उससे हानि उत्पन्न होनेका भय है. उदाहरण । . कोई आशा किसी सरकारी नौकरकी ओरसे जो कानूनानुसार ऐसी आज्ञाके प्रसिद्ध करानेका अधिकारी है इस प्रकारकी प्रसिद्ध कराई गई कि कोई मजहबी ( मतका ) जमाव किसी विशेष गलीसे होकर न निकले यदि शिवशंकर जान बूझकर इस आज्ञाको न माने और इसके कारणसे बलवेका भय उत्पन्न करे तो शिवशंकर उस अपराधका अपराधी होगा जिसका वर्णन इस दफाम किया गया है। " (टीप)-(१) प्रे० म० या म० अ० या म० दो० (२) पोलीस बिना वारट अपराधीको नहीं पकडसकती (३) समन (४) जमानत है (५) राजीनामा नहीं है । ( ६ ) मंजूरी दरकार है।

दशवा १०.] - ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०। ( इस दफा १८८ को मजमूआजाब्ता फौजदारीकी दफा १३३ से १४४ तकके साथ पटना चाहिये)। १-उमरा १ बछिया चुगनेके अपराधमै दडित हुवा, मूलाने चोरीकी बडिया अपराधी न. १ से मोल ली, परन्तु उसको डिप्टी कमिश्नरने यह आजा दी कि बछिया मोल लेनेकी सूचना थाने में दे दैना, परन्तु मूलाने ऐसी सूचना नहीं दी, इसलिये उसे दडसग्रह हिदकी दफा १८८ के अपराधर्मे दंड दिया गया हाईकोर्टकी यह तजवीज हुई कि मूलाने उपरोक्त दफामें लिखा हुवा अपराध नहीं किया, क्योंकि जो आजा डिप्टी कमिश्नरने दी उसके देनेका अधिकार कानूनानुसार उन्हें न था (पञ्जाव रिकार्ड न० १७ सन् १८६९ ई.) २-यदि ऐसी आजा दी है कि जिसके देनेका अधिकार उस सरकारी नौकरको नहीं है कि जिसने आशा दी है तो उसका न मानना इस दफा १८८ के अनुसार अपराध होगा जैसे- १) किसी मजिस्ट्रेटको अधिकार नहीं है कि किसी मनुष्यके माल नीलाम किये जानेकी आजादे। (२) किसी नम्बरदार वजमींदारको किसी मुकद्दमेका पता लगाने और पोलीसको सहायता देनेकी आगदे (इ० ला. रि• इलाहाबाद जिल्द ३ सफा २०१) (३) यह आज्ञा दे कि प्रत्येक मनुष्य जो माल मोललेवे थानेमे उसकी सूचना दे (पक्षाब रिकार्ड न. १. फौजदारी) या, (४) यह कि कोई मनुष्य अपने घरसे गावके नवरदार या पोलीसको बिना सूचना दिये न जावे ( पजाब रिकार्ड न० १२ सन् १८६८ ई० फौजदारी) या, (५) यह कि कमाई लोग गोश्तको बेचनेके लिये खुला न रक्खे ( पजाब रिकार्ड न. १३ सन् १८७२ ई.) (६) और न लफ्टनन्टगवर्नरको यह आजा देनेका अधिकार है कि किसी सह- कके किसी विशेष भागपर गाडिया न चलाई जावे ( पजाब रिकार्ड न. ८ सन् १८७३ ई.) ३-मजिस्ट्रेटने एक ऐसी आज्ञा प्रसिद्ध की कि-"चौपायोके स्वामी उनकी उचित रक्षा करें, यदि वह आनाभन करेंगे तो उन्हें कानूनानुसार दड दिया जावेगा-" और कुछ मनुष्योंको दइसंग्रह हिदकी दफा १८८ के अनुसार आजाभगके अपराधमे दड भी दिया-नजवीन हुई कि दफा ६२ जान्ता फौजदारीके अनुसार मजिस्ट्रेटको ऐमी सर्व साधारण आजाके देनेका अधिकार न था, इस लिये अपराधियोंको दफा १८८ के अनुसार दह देना कानूनविरुद्ध था ( वगाल ला रिपोर्ट जिल्द ३ सफा ४५) ४-मजिस्ट्रेटको दफा ६२ ऐक्ट २५ सन् १८६१६० वदफा १४४ ऐक्ट ११० सन् १८८२ ई. के अनुसार अधिकार है कि किसी विशेष मनुष्यको विशेष स्थानपर विशेप दिनके लिये जानेको वर्जित करदे यदि उसको दृढ विश्वास हो जावे कि ऐसी आजासे बलवे या हगामेका होना अवश्यही रुक जावेगा ( बगाल ला रिपोर्ट जिल्द १० सफा ४३४) [अध्याय- - (१०४) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। ( १८९) जो कोई मनुष्य किसी सरकारी नौकरको या उस मनुष्यको जिसके मध्ये सरकारी नौकरको वह निश्चय करता हो कि उस सरकारी नौकरको पैसे मनुष्यसे हानि पहुँचानेकी धमकी अभिप्रायहै, इसलिये हानि पहुंचानेको कि जिससे उस सरकारी देना, नौकरको किसी ऐसे कामके करने या न करने या देरीसे करनेके लिये कि जिसका सम्बन्ध उस सरकारी नौकरसे है धमकावे, तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दंड दिया जावेगा जिसकी मीआद दो साल तक होसकती है या जुर्मानेका दंड या दोनों दंड दिये जावेगे। टीप-(१) प्रे० म० या म० अ० या म० दो० (२) पोलीस बिना वारट नहीं गिर- फ्तार कर सकती (३) समन अपराधीके नाम जारी होना चाहिये (४) जमानत हो सकती है ५) राजीनामा नहीं हो सकता। -१-साहब जजकी तजवीज इस बातमें अयोग्य थी कि उन यथार्थ शब्दोके दरियाफ्त करनेकी आवश्यकता नहीं कि जिनको अपराधीने वास्तवमे कहा कि जिस समय उसने सरकारी नौकरको घम- की दी थी बरन इसके विरुद्ध इस बातकी आवश्यकता थी कि अपराधी के यथार्थ २ शब्द अदालतके सामने प्रगट किये जाते जिससे अदालतको उस बातकी खोजका अवसर मिलता कि यथार्थमेही अप- राधीने सरकारी नौकरको दुःख पहुँचानेकी धमकी दी या नहीं। (इ. ला• रि० इलाहाबाद जिल्द ८ सफा ३८०) ( १९० ) जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यको इस अभिप्रायसै हानि पहुंचानेकी धमकी -हानि पहुँचानेकी धम-)-दे- कि वह किसी हानिसे रक्षा किये जानेके लिये किसी ऐसे फी इसलिये कि कोई मनु सरकारी नौकरके यहां कानूनानुसार प्रार्थनापत्र (दरख्वास्त-) न देवे ध्य किसी सरकारी नौकर- से रक्षामांगनेसे रुकजाय. या देनेसे रुक रहै, जो उस सरकारी नौकरीके कारण ऐसी रक्षा करने या करानेका कानूनानुसार अधिकारी हो, तो उस मनुष्यको दोनों प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जावेगा, जिसकी मीआद एक वर्षतक होसकती है या जुर्मानेका दंड या.दोनों दंड दिये जायेंगे। - ग्यारहवाँ ११.] (१०५) ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई० ॥ अध्याय ग्यारहवाँ ११. -- झूठी गवाही और सर्व साधारण न्यायके विरुद्ध अपराधांके वयानमे । ( १९१ ) कोई मनुष्य जिसपर कानूनानुसार, शपथके अनुसार या कानूनकी किसी विशेष आशासे सच २ वयान करना या कानूनके अनुमार किसी झूठी गवाही देना. कामके मध्ये कुछ वयान करना अवश्य हो, कोई ऐसा वयान करे जो झूठा हो और जिसको वह झूठा जानता हो चाहै झूठा निश्चय करना हो या जिसको यह सच्चा न निश्चय करता हो तो कहा जायगा कि उसने ब्रूठी गवाही दी. स्पष्टीकरण-१ प्रत्येक वयान इस दफाके अभिप्रायमें गिना जायगा, चाहे वह जवानसे किया जाय या और प्रकार पर, स्पष्टीकरण-२ कोई झूठा वयान जो तसदीक (निश्चय ) करनेवाला मनुष्य अपनी जानकारी (दानिस्त ) के मध्ये करे, इस दफाके अभिप्रायमें गिना.जायगा और जैसे कि कोई मनुष्य यह बयान करनेसे कि में अमुक ( फलानी ) बात जानताहूँ, जिसको वह नहीं जानता है झूठी गवाही देनेका अपराधी है पैसेही वह मनुष्य मी झूठी गवाही देनेका अपराधी होस- कता है जो बयान करे कि मै अमुक बातको निश्चय करता हूँ जिसे वह निश्चय न करता हो। उदाहरण । (क)-यदि शिवशकर, एक उचित दावेके अनुमोदन (ताईद) मे जो रमाशकर एक हजार रुपयेके मध्ये उमाशकरपर रखता हो मुकद्दमेको पेशीके समय झूठी शपथ करे कि मेरे सामने उमाशकरने रमाशकरके दावेके उचित होनेको स्वीकार किया है तो ऐसी अवस्णमें शिवाकरने झूठी गवाही दी। (ख)-शिवशकर कि जिसपर एक अपथके अनुसार सच २ बयान करना अवश्य है यह बयान करे कि मैं निश्चय करता हूँ कि अमुक (फलाने ) दस्तखत रमाशकरके हाथकै लिखे हुए हैं जब कि वह उस दस्तखतको रमाशकरके हाथके लिखे हुए निश्चय नहीं करना है तो इम अवस्थाम शिवशकरने वह बयान किया जिसको वह झूठा जानता है और इस लिये उसने झूठी गवा- ही दी। (ग)-शिवशकर जो रमाशकरकी लिखावटको बनावट पहिचानता है यह बयान करे कि मैं जानता हूँ कि अमुक दस्तखत रमाशकरके हाथके लिखे हुए है शुद्धभावसे ऐमाही जानता है तो इस - [अध्याय- M (१०६) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। अवस्थामै शिवशकरका बयान केवल अपनी जानकारी ( दानिस्त) के मव्य है और वह उसकी जानकारीके मध्ये सच्चा है और इसलिये शिवशकरने झूठी गवाही नही दी, चाहे वह दस्तखत रमाशंकरके हाथके लिखे न हो। (घ)-शिवशकर जिसपर एक गपथके अनुसार सच २ बयान करना उचित है, यह बयान करे कि मैं जानता हूं कि रमाशकर अमुक दिन अमुक स्थानपर उपस्थित था, यद्यपि वह इस कामके मध्ये कुछ न जानता हो, तो शिवशंकरने झूठी गवाही दी, चाहे रमागकर उस दिन उस स्थानपर उपस्थित या या न था। च)-शिवगंकर उल्था करनेवाला या अनुवादक ( मुतरजिम ) है जिसपर गपथके अनुसार अवश्य है कि किसी बयान या लिखतम ( लेख दस्तावेज ) का जबानी या लिखा हुवा सचा अनु- वाद करे और वह यदि जवानी या लिखा हुवा झूठ अनुवाद ( तर्जुमा) करे या उसकी तसदीक करे जो सच्चा न हो और जिसका सच्चा होना वह निश्चय न करता हो तो शिवगकरने अठी गवाही दी। १-कैदीने एक पहिले मुकद्दमेमे जो क्यान मजिस्ट्रेटके सामने किया था उसके विन्द.दूसरा बयान सेशन जजके सामने किया, इसलिये उसपर मजिस्ट्रेट या सेठान जजके सामने जूटी गवाही देनेका अपराध प्रामाणिक हुवा-तजवीज हुई कि उपरोक्त आना सही थी और जो गवाही सेनान जजने लीथी मजिस्ट्रेट के सामने झूठी गगही देनेके अपराधका पूरा प्रमाण थी (यंगाल ला रिपोर्ट सफा ५२१) २-जो मनुष्य दफा ११८ व १७९ ऐक्ट १० सन् १८७२ ई. के अनुमार पुलीसके प्रश्नोका उत्तर देनेके लिये जो सूचनाके मव्ये हो बुलाये जावे उनपर झूठी गवाही देनका अग्गव प्रमाणित नही होसकता । (इ. ला. रि० कलकत्ता जिल्ट ७ सका १२१) ३-साहब मजिस्ट्रेट दजा तीसरे ( सोयम ) ने जो बयान दफा १०४ मजनूआजाला-फोड- दारीके अनुसार लिये हो, तो उपरोक्त मजिस्ट्रेटको ऐसे बयान लेनेका अविचार न होने के कारण उन बयान देनेवाले पर दडसग्रह हिंदुस्थानकी दफा १९१ व १९३ का अमराव प्रमाणित नही होसकता (इ० ला० रि० बवई जिल्ट ११ सफा ५०२) ४-जानबूझकर झूठी गवाही देना उस अवस्थाम भी अपराव होसकता है कि जब गयाइने शपथ या प्रतिज्ञा न कराई जाय ( इ. ला. रि० कलकत्ता जिल्द १९ सका ३५५) - (१९२ ) जो कोई मनुष्य कोई मूरत (अवस्था ) उत्पन्न करे या किसी किताब ना सरिश्तेके कागजमे कोई झूठी लिखावट बनावे या कोई दस्तावेज झूठी गवाही बनाना. जिसमे कोई झूठा वयान लिखा हो वनाय इस अभिप्रायसे कि वह - सूरत या झूठी लिखावट या झूठा वयान अदालतको किसी कार्रवाईमें या किसी कार्रवाई में जो कानूनानुसार किसी सरकारी नौकरके मापने या किसी सालस ( प्रतिद्वदी) के सामने होरही हो प्रमाण (सबूत ) की भाँति पेश होसके और इस अभिप्रायसै कि वह सूरत या भूठी लिखावट ग्यारहवाँ ११.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई० । (१०७) या झूठा वयान जो इस प्रकार प्रमाणके कारणनें पेश होसके किसी ऐसे मनुष्यको जो उम कार्रवाईमे प्रमाणके कारण ( वजह सबूत ) के मध्ये राय लगाएगा किसी कामके मध्ये जो उस कार्रवाई के फलके लिये आवश्यक झूठी रायके पहुँचानेका कारण होसके तो कहा जायगा कि उस मनुष्यने झूठी गवाही बनाई। उदाहरण। क) शिवाकर, रमाशंकरकी किसी सदूकमें इस अभिप्रायसे कुछ गहना रखदै कि वह गहना उस सदूकसे निकले, और यह सूरत रमाशकरको चोरीका अपराधी प्रमाणित कराये तो शिवशं- करने झूठी गवाही बनाई। ख) शिवाकर अपनी दूकानके बही खातेमें इस अभिप्रायस कोई झूठी लिखावट बनाये कि वह उसको किसी अदालतम प्रमाणको मॉति पक्षपातीमें काम लाए तो शिवगकरने झूठी गवाही बनाई। (ग)-शिवगकर इस अभिप्रायसे कि रमाशकरका विचार सयुक्त अपराधका अपराधी ठहराये इस प्रकार एक चिही लिखे कि उसमे रमाशकरके लिखनेमे अपना लिखना मिलवे और वह चिही उस-विचार सयुक्त अपराधके किसी साझीके नाम जानी जाय और उस चिट्ठीको ऐसे स्थान पर रक्खे जहां वह जानता हो कि पोलीसके ओहदेदार उसकी अवश्यही खोज करलेंगे । तो शिवयं- करने झूठी गवाही बनाई। १-जन तारीख दस्तावेज कि जो दूसरी प्रकारपर रजिष्टरी के लिये पेश नहीं होसकती यी रजिष्टरी करा पानेके अभिप्रायमे बदली गई तो वह जालका अपराध नहीं है जबतक कि कोई प्रमाण इस बातका न हो कि उपरोक्त काम वद दियानतीसे या छ छिद्रकी सहसे दडसग्रह हिन्दुस्थानकी दफा४६४जिमन २ के अभिप्रायानुसार किया गया, परन्तु गवाहीका अपगध दडसग्रह हिन्दुस्थानकी दफा १९२ के अभिप्रायानुसार है। (इ० ला• रि० कलकत्ता जिल्द ६ सफा ४९२) २-अपरावीने जो एक वकील था मुसिफ जिलाकी अदालतमें एक वकालतनामा पेश किया जिसपर एक दीवानीके मुकद्दमेम प्रतिवादी (मुद्दआअलेह) के दस्तखत थे और जिसके द्वारा अपरा- धीको प्रतिवादीकी ओरसे पैरवी करनेकी आजा दी गई-वकालतनामामें यह झूठ लिखा था कि वह उस गाँवके अधिकारी के सामने लिखा गया है और उस पर अधिकारीके दस्तखत भी पाये जाते थे- अपराधीको हिन्दुस्थानके दडसग्रहकी दफा १९३ के अपराधमै ढड दिया गया-हाईकोर्टकी यह तजवीज हुई कि ऐसा मुकद्दमा इस दफाके अभिप्रायमै नहीं आता है और इसलिये अपराधी दडके अयोग्य है (मदरास हाईकोर्ट रिपोर्ट जिल्ट ५ सफा ३५३) ३-किसी अपराधीका अपनी सफाई के लिये झूठी गवाही बनाना दंडसग्रह हिन्दुस्थानके दफा १९२ के अनुसार अपराधमें गिना जायगा (पजाव रिकार्ड न०,१० सन् १८८० ई.)

---- (१०८) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- ( १९३) जो कोई मनुष्य अदालती कार्रवाईकी किसी अवस्था ( हालत ) में झूठी गवाहीका दड. जानबूझकर झूठी गवाही दे या इस अभिप्रायसे झूठी गवाही बनाये कि वह अदालतको किसी कार्रवाईको किसी अव- स्थामें काममे लाई जाए तो उस मनुष्यको दोनों प्रकारों से किसी प्रकारको कैदका दंड दिया जावेगा जिसकी मीआद सात वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेकेमी योग्य होगा- और जो कोई मनुष्य जानबूझकर किसी और अवस्थामें झूठी गवाही दे या बनावे तो उसको दोनो प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दंड दिया जायेगा जिसकी मीआद तीनवर्पतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। स्पष्टीकरण-१ जो कोई अभियोग किसी कोर्ट मारशलमे उपस्थित हो उसकी जांच और तजवीज अदालतकी एक कार्रवाई है । स्पष्टीकरण-२ किसी कोर्ट आफ जस्टिसके हुजूरकी कार्रवाईसे पहले जिस जांच ( तहकीकात ) के मध्ये कानूनानुसार आज्ञा हो वह जांच अदालती कार्रवा की एक अवस्था है चाहे वह जाच किसी कोर्ट आफ जस्टिसके हुजूरमें न हुई हो । उदाहरण । शिवशकर किसी जांचमे जो मजिस्ट्रेट के सामने इस अभिप्रायसे होरही हो कि रमाशंकर विचार ( तजवीज ) के लिये सेशनमे सिपुर्द किया जाय या नहीं शपथसे कुछ बयान करे जिसको यह झूठा जानता हो तो जो कि यह जांच (तहकीकात) अदालतकी कार्रवाई की एक अवस्था है इसलिने शिवशकरने झूठी गवाही दी। स्पष्टीकरण-३ कोई जाच जिसके लिये कानूनके अनुसार किसी कोर्ट आफ जस्टि- सकी ओरसे अनुरोध हो और जो किसी कोर्ट आफ जस्टिसको आजाके अनुसार वर्तावमें आवं अदालतकी कार्रवाईकी एक अवस्था है चाहे वह जांच किसी कोर्ट आफ जन्टिसके हुजूरमें न हुई हो। . उदाहरण । शिवशकर एक जाचमे किसी अहलकारके सामने जो किसी कोर्ट आप जस्टिसकी ओररे किसी खेतकी सीमा दरियाफ्त करनेके लिये नियत हुआ हो शपथके अनुसार कुछ बयान करे जिसको वह झूठा-जानता हो तो जो कि यह जांच अदालतकी कार्रवाईकी एक अवस्था है, तो शिवशकरने झूठी गवाही दी। टीप-(१) अदालत सेशन या प्रै० म० या म० अ० (२) पोलीस दस्तन्दाजी नहीं कर- सकती ( ३) अपराधीके नाम वारट जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है (६) मजूरी दरकार है।

: ग्यारहवाँ ११.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०॥ (१०९) १-अपराधी दफा १९३ के अनुसार झूठी गवाही बनानेके अपराधमे व दफा ४१४ दडसग्रह हिदके अनुसार चोरीका माल छिपानके अपराध अर्थात् दोनों अपराधोंमें अलग २ दड पासकता है (इ. ला.रि. इलाहाबाद जिल्द २ सफा ३७९) २-(क) ने (ख) को बहकाया कि वह स्टाम्पका कागज (ग) के नामसे लेवे-इस लिये स्टाम्प-बेचनेवालेने स्टाम्पके कागज पर (ग) के नाम कागजका बेचना लिखा और यह कार- वाई (क) ने इस अभिप्रायसेकी कि उपरोक्त कागजको अदालत दीवानी में (ग) के विरुद्ध किसी मुकद्दमेमे काम लावे, तजवीज हुई कि अपराध झूठी गवाही बनानेका उमपर प्रमाणित हुआ (इ. ला. रि• इलाहाबाद जिल्द ४ सफा १०५) ३-दफा १६१ जाब्ता फौजदारीके अनुसार उस मनुष्यको जिसका वयान पोलीसकी तहकी. कातके समयमें अध्याय १४ जान्ता फौजदारी के अनुसार हुवा हो, अवश्य है कि सच २ उत्तर देवे, यदि वह जानबूझकर झूठा उत्तर देवे तो दडसग्रह हिदकी दफा १९३ के अनुसार झूठी- गवाही देनेका अपराधी है (इ. ला. वि. बबई जिल्द ८ सफा २१६) ४-दंडसग्रह हिदकी दफा १९३ के अपराधमे इस बातके बयान करनेकी आवश्यकता नहीं है कि शपथके अनुसार दिये हुए दो बयानोमसे कौन बयान झूठा है यही बात बहुत है कि अपराधीने शपथके अनुसार एक समयमै एक बयान और दुसरे समयमें दूसरा झूठा बयान किया (इ० ला. रि० इलाहाबाद जिल्द ७) ५-दडसग्रह हिढकी दफा १८१ व १९३ के अहकामोंका झूठी गवाहीसे सम्बन्ध नहीं है जो दफा १६१ जान्ता फौजदारीके अनुसार किये जाय, पोलीसके अहलकारको जो वयान दफा १६१ जान्ता फौजदारीके. अनुसार लिखे दस्तखत उन मनुष्योंक कराना कि जिनके सामने बयान लिखा गया हो कानूनविरुद्ध नहीं है परन्तु अनावश्यक है (इ. ला• रि. इलाहावाद जिल्द १५ सफा ११) ६-हाईकोर्टको ऐसे हुक्मकी सूरतमे दस्तन्दाजी करनेका आधिकार है जो किसी अदालतने दफा ४०६ जान्ता फौजदारीके अनुसार प्रचारित क्यिा हो और इस कामकी भी पूरी तजवीज करनेका अधिकार है कि उस अख्तियार तमीजीका निफाज (योग्य अधिकारोका वर्ताव) जो उस दफाके अनुसार किया गया है, उचित रीतिपर हुवा है या नहीं (इ० ला• रि० कलकत्ता जिल्द २० सफा ३२९) ७-झूठी गवाही देनके मुकद्दमोंमे ऐसे बयानके प्रमाणित करनेके लिये, कि जिसके मध्ये होना कहा गया है, एक गवाहकी गवाही बहुत है-दड देना अदालतकी इच्छापर है (वीली रिपोर्टर जिल्ट १४ सफा ५३) ८-जो गवाह दूसरेके नामसे न्यूटा नयान देवे उसपर हिदुस्थानके दडसग्रहकी दफा १९३ का अपराध ठहराया जावेगा न कि दडसग्रह हिंटकी दफा ४१५ व ४१९ के अनुसार (बबई हाईकोर्ट रिपोर्ट जिल्द १ सफा ५८९) ९-जब कोई मनुष्य किसी मुम्हमेंमें बयान लिखकर पेश करे और कानूनानुसार उक्त मनुष्यको सच २ बयान करना उचित हो और यदि वह उस लिखावटी वयानमें ऐसा लिखावे (११०) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- - जिसे वह झूठा जानता या झूठ निश्चय करता हो या सच न निश्चय करता हो तो वह दडसग्रह हिदकी दका १९१ के अनुसार अपराधी गिना जायगा । (इ० ला• रि० इलाहाबाद जिल्द ६ सफा ६२६) १०-सेशन जजको झूठी गवाही देनेके अपराधके मध्ये जो मजिस्ट्रेटके सामने हुवा हो अधिकार किसी मनुष्यको फौजदारी सिपुर्द करनेका नहीं है परन्तु वह उस मनुष्यको जो स्वयं उसीको अदालतमे झूठी गवाही दे सिपुर्द फौजदारी करसकता है ( वगाल ला. रिपोर्ट जिल्द ३ सफा ३५) ११-कैदीकी तजवीजमे जो ज्ञातघातका अपराधी था एक गवाहने शपथ पर सेशन जनके -सामने वयान किया कि उपरोक्त अपराधको एक दूसरे मनुष्यने किया है और उसी गवाहने मजिस्ट्रे- टके सामने कैदीको उस अपराधका अराधी ठहराया था तजवीज हुई कि गवाह दडसग्रह हिदकी दफा १९३ का अपराधी था न कि दफा १९४ का। १२-जिन सूरतोमे झूठी गवाही देनेका अपराव कायम करनेके लिये अदालती आनाकी आव- श्यकता है उनमै यदि मुकद्दमा विना उपरोक्त आशाके कायम किया जावे और अपराधीको दंड हो जावे तो दंडकी आशा रद होनी चाहिये । (बगाल ला रिपोर्ट जिल्द ७ सफा २६) १३-जब किसी मनुष्यका विचार ( तजवीज ) इस अपराध पर होवे कि उसने अपथ दिलाये जाने पर भी झूठी गवाही दी तो इस बातका प्रमाणित होना आवश्यक है कि अपराधीको शपथ दी गई ( वीक्ली रिपोर्ट जिल्द ६ सफा ९२) १४-दफा ३१८ जाव्ता फौजदारीके अनुसार जो तहकीकात की जावे यह हिंदुस्थान देडसग्रहकी दफा १९३ के लिये एक अदालती कार्रवाई है। ( वीक्ली रिपोर्ट जिल्द , सफा १०४) १५-जब कोई असिस्टेन्ट मजिस्ट्रेट किसी गुमनाम चिडीका पता लगानेके लिये कि जिसमें कुछ मनुष्योंपर वधका अपराध लगाया गया था, कोई तहकीकात करे तो वह कार्रवाई अदालती नहीं है ( वीक्ली रिपोर्टर जिल्द ५ सफा ७२) १६-अपराधीने समन तामीलकी कैफियत शपथके अनुसार झूठी लिखी तजवीज हुई कि, वह दफा १९३ के अनुसार झूठी गवाही देनेका अपराधी था न कि टफा १८१ के अनुसार (वीली रिपोर्टर जिल्द ८ सफा २७) १७-कुछ मनुष्योको एक ही अदालती कार्रवाईमे झूठी गवाही देनेके मध्ये एक साय तजवीज करना कानूनविरुद्ध है । ( वीक्ली रिपोर्टर जिल्द ११ सफा ४२) १८-इस आभप्रायसे झूठे हिसाबका बनाना कि वह अफ्सर जगल के सामने जिसकी तहकी- कात करनेका अविकार न था पेश किया जावे, दहसंग्रह हिदको दफा १९३ का अपराध न ठहराया गया । (रिपोर्ट हाईकोर्ट बबई जिल्द १२ सफा १) १९-झूठी गवाही देना उस अदालतके अपमानमे गिना जायगा कि जिसमें वह दी जावे इस लिये वह अदालत दफा ४७३ ऐक्ट १० सन् १८७२ ई० (जास्ता फौजदारी) के अनुसार स्वयं अपरावका विचार नहीं करसकती ( रिपोर्ट हाईकोर्ट बंबई जिल्द १० सफा ७३) ग्यारहवाँ ११-3 ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई० । (१११) २०-अपराधीने रेलकी चुराई हुई पटरिया अपने शत्रुके घरमे इस अभिप्रायसे छिपवा दी कि वह चोरीके अपराधमे दड पावे तजवीज हुई कि मजिस्ट्रेटका अपराधीको दो अपराधीमे अलग २ दांडत करना अर्थात् एक झूठी गवाहीका बनाना इस अभिप्रायसे कि वह अदालनी कार्रवाईमें काम आसके दफा १९३ दडसग्रहहिंदके अनुसार और दूसरे जानबूझकर चौरीका माल छिपा- नेमे सहायता करना दफा ४१४ दण्डसग्रहहिदके अनुमार बहुत उचित था (इ. ला रि. इलाहा- बाद जिल्द १ सफा ३७६) २१-अपराधी झूठी गवाही देनेपर इसलिये अपराधी ठहराया गया कि उसने एक प्रश्नमें जो दफा १९ ऐक्ट ९ सन् १८६९ ई० कानून इन-कमटैक्सके अनुसार तहसीलदारके सामने पेश हुवा था और जिसपर तस्दीककी इबारत लिखी हुई थी जानबूझकर झूठा क्यान किया था तजवीज हुई कि तहसीलदारको उपरोक्त प्रश्नके सुननेका अधिकार न था इसलिये उस मनुष्यसे कोई अपराध नहीं दुवा । (रिपोर्ट हाईकोर्ट मदरास जिल्द ५ सफा ३२६) ( १९४) जो कोई मनुष्य झूठी गवाही दे या बनाये, इस अभिप्रायसे या वध दडके योग्य अ- इस वातका होना सम्भवित जानकर कि उस झूठी गवाहीके कारण पराध प्रमाणित कराने किसी मनुष्यको ऐसे अपराधका अपरावी प्रमाणित कराये जिसके अभिप्रायसे झूठी गवाही देना या वनाना. वदलेमे ब्रिटिश इडियाके कानूनद्वारा (दफा ७.ऐक्ट २७ सन् १८७०ई० देखो ) या इग्लिस्तानके कानूनद्वारा वधका दण्ड ठहराया गया है तो उपरोक्त मनुष्यको देश निकाला या कठिन कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीआद दश वर्षतक होस- कती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा और- यदि कोई निरपराधी मनुष्य उस झूठी गवाहीके कारणसे अपराधी प्रमाणित हो जावे और यदि निरपराधी मनुष्य) वधका दट पा जावे तो उस मनुष्यको जिसने ऐसी झूठी गवाही दी उसके कारणसे अपराधी हो, वधका दड दिया जावेगा या वह दड जो इस दफामे ऊपर लिख प्रमाणित होजावे और वधका दुड पाजावे, आये हैं। (दफा ४० को देखो ) (१९५) शुद्ध किया गया दफा १२९ ऐक्ट ९ सन् १८९० ई. रेलवे कानूनके देश निकाले या दड अनुसार-जो कोई मनुष्य झूठी गवाही दे या बनाये इस अभिप्रा- कैदके योग्य अपराध प्र- माणित कराने के अभि- यसे या इस वातके होनेको सम्मवित जानकर कि उस झूठी प्रायम झूठी गवाही देना गवाहीके कारण किसी मनुष्यको ऐसे अपराधका अपराधी प्रमाणित कराये जिसके बदलेमे ब्रिटिश डियाके कानूनद्वारा (दफा ७ ऐक्ट २७ सन् १८७० ई. को ) या इग्लिस्तानके कानूनद्वारा वधका दड तो नहीं ठहराया गया परन्तु देश निकालेका दड या कैद जिसकी मीआद सात वर्ष या अधिक है ठहराया गया है तो उपरोक्त मनुष्यको या बनाना (११२) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- , वह दड दिया जायेगा जिसके योग्य वह ननुष्य है जो उस अपराधका अपराधी प्रमाणित होजावे । ( देखो दफा ४०) उदाहरण । शिवगकर किसी कोर्टआफ़जस्टिसमे इस अभिप्रायसे झूठी गवाही दे कि उसके द्वारा रमाशंकर रको डकैतीका अपराधी प्रमाणित कराये तो जो कि डकैतीके लिये देश निकाले या कठिन कैदका.दड नियत है जिसकी मीआद दश वर्षतक हो सकती है जुर्माने सहित या विना जुर्मानेके, इस लिये शिव शंकर उस देश निकाले या उस कठिन कैदका जुर्मानेसहित या विना जुर्मानेके, योग्य है। टीप-(१) अदालत सेशन (२) पोलीस दस्तंन्दाजी नहीं करसकती (३)अपराधीके नाम वारंट जारी होगा (४) जमानत हो सकती है (५) राजीनामा नहीं होसकता। १-जव कोई मनुष्य अपना घर स्वयही जला दे और दूसरे मनुष्यपर अपराध लगावे तो उसको अपराधमे दडसंग्रहहिन्दको दफा २११ के अनुसार दंड होना चाहिये न कि दफा १९५ के अनुसार । ( वीक्ली रिपोर्टर जिल्द ८ सफा २६५) २--एक मनुष्य दडसग्रह हिन्दकी सफा १९५ के अनुसार इस अपराधका अपराधी ठहराया गया कि उसने एक मनुष्यको अपराधी प्रमाणित करानेके लिये झूठी गवाही बनाई थी अपराधीने इस उक्त कामको एक अत्यतही प्रगटरीतिपर किया था और उससे उपरोक्त मनुष्यको दड होजानेका भय न था और न यह बात प्रमाणित हुई कि अपराधीने उस मनुष्यको अपराधी ठहरानेके लिये कोई यान किया था तजवीज हुई कि अपराधीको ऐसी अवस्थामे दड नहीं होसकता ( रिपोर्ट हाईकोर्ट-पश्चिमी- तर देश जिल्द.५ सफा -१८८) ( १९६ ) जो कोई मनुष्य किसी प्रमाणके कारणंकी जिसे वह जानता हो कि झूठी जानी हुई वजह ) झूठ या बनाया हुआ है सच्चे या यथार्थ प्रमाणके कारण ( वजह सबूत (प्रमाण )के कार-- सबूत ) के समान काममें लाने या काममें लानेका उद्योग करे णको काममे लाना. तो उसको उसी प्रकार दंड दिया जावेगा कि मानों उसने झूठी गवाही दी या बनाई। टीप-(१) अदालत सेगन या प्रे० म० या म० अ० (२) पोलीस दस्तन्दाजी नहीं कर सकती (३) अपराधीके नाम वारंट जारी होगा (४) मुकद्दमेको हैसियतसे जमानत हो सकती है (५) राजीनामा नहीं है। १-अपराधी एक दीवानी मुकद्दमे में ऐसी दस्तावेजको जिसे वह जाती जानता था सन्नी दस्तावेनके समान काममे लाया था तजवीज हुई कि यह अपराध दंडसग्रह हिद की दफा ४७१ के अनुसार है इसलिये अपराधी पर दफा ४७१ का ही अपराध ठहरना चाहिये था न कि दफा१९६ का (इ. ला.रि. कलकत्ता जिल्द ५ सफा ७१७) २-जब कोई मनुष्य अदालतमे झूठी गवाही वकील द्वारा पेश करे और आप गैरहाजिर रहे तो वह दंडसंग्रहाहंदकी दफा १९६ के अनुसार दहयोग्य है । रिसाला मोरली साहब जिल्द १ सफा १०४) ग्यारहवा ११.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०॥ (११३) झूठा सर्टीफिकट दस्तखत करना. ३-एक मनुष्य (ल) ने दस्तावेजके अनुसार नालिश दायर की और तहकीकातके समय एक चिट्टी अपना दावा प्रमाणित करनेके अभिप्रायसे पेश की, कि जो इस कामके अभिप्रायके लिये बनाई गई थी कि (ल) को दस्तावेजपर रजिष्टरी करानेका अवसर मिले-(ल) को दडसग्रहाहिदकी दफा १९६ के अनुसार दड दिया गया तजवीज हुई कि यदि चिट्ठी रजिष्टारके सामने पेश करने लिये बनाई गई थी तो कोई उन दडकी तजवीजके मध्ये नहीं है । (इ. ला.रि. मदरास जिल्द ७ सफा २८९) ( १९७) जो कोई मनुष्य कोई ऐसा सार्टीफिकट जारी करे या उसपर दस्तखत करे जिसका दिया जाना या जिसपर दस्तखत किया जारी करना या उसपर जाना कानूनानुसार अवश्य है या जो किसी ऐसे काम वाकई ( यथार्थ ) से सम्बन्धित हो जिसके प्रमाणके कारण की माति वह सार्टीफिकट कानूनानुसार ले लिये जानेके योग्य है और यह जानकर 'या निश्चय करनेका कारण रखकर कि उस सार्टीफिकटमें कोई आवश्यकताकी बात झूठ लिखी है, तो उस मनुष्यको उसीप्रकारका दड दिया जायगा कि मानों उसने झूठी गवाही दी। १-यदि कोई अदालत मालका चपरासी समनकी तामीलके मध्ये झूठी कैफियत बयान करे और इसप्रकार जानबूझकर नाजिरसे झूठी इवारत दफा ४६ ऐक्ट १० सन् १८५९ ई. के अनुसार एक झूठ बातके लिखवानेका कारण हो तो वह चपरासी दडसग्रहाहदकी दफा १९७ के अपराधी सहायता करनेका अपराधी होगा । ( वीक्ली रिपोर्टर जिल्द ३ सफा ३७) २- अपराधीने जो अदालत मतालवा खफीफा दफ्तरमै नकलनवीस था किसी एक दस्ता, वेजकी नकल जो किसी मिसलके साथ अदालतमें दाखिल हुई थी, इसप्रकार पर गलत बनाई कि उसमे एक ऐसा नाम बढादिया जो वास्तवमे न था और जब कानूनके अनुसार उस नकलकी तस्दीक होगई तब उसके सायल (जिसने उसके लेनेको दरख्वास्त दी थी) को दे दी गई जो कदाचित् अप- राधीते विरुद्धता रखता था, इसके पश्चात् वह नकल एक मुकद्दमेमें उस मनुष्यके मुकाबिले काममै लाई गई कि जिसका नाम छलसे उसमें बढ़ा दिया गया था और उस समय छल पकडा गया-मजिस्ट्रेटने अपराधीको दफा १६७ के अपराधका अपराधी ठहराकर सौ रुपया जुर्माना किया-चीफकोर्टसे तज- वीज हुई कि दफा १६७ का सम्बध मुकद्दमैसे न था क्योंकि यह बात प्रमाणित न थी कि अपराधी यह अभिप्राय रखता था या उसको इस बातके होनेकी जानकारी थी कि वह अपने उस कामसे किसी मनुष्यको हानि पहुँचायेगा वरन अपराधीने झूठा सार्टीफिकट जारी करने या उसपर दस्तखत करनेका अपराध दफा १९७ के अनुसार किया था और यह भी तजवीज हुई कि दस्तावेजकी नकल करना "दस्तावेज बनाने या अनुवाद करने " मै नहीं गिना जायगा । ( पजाब रिकार्ड नं० १५ सन् १८७९ ई.)

[अध्याय- (११४) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह । ( १९८ ) जो कोई मनुष्य झूठे तौरसे किसी ऐसे सार्टीफिकटको सच्चे सार्टीफिकटके किसी सार्टीफिकटको समान काममें लावे या काममे लानेका उद्योग करे यह जिसमें कोई झूठ वात जा. जानकर कि उस सार्टीफिकटमें कोई आवश्यकताकी बात झूठ नी हुई हो सच्चे सार्टीफिक-लिखी हुई है तो उसको उसीप्रकार दढ दिया जावेगा कि मानों टकेसमान काममें लाना. उसने झूठी गवाही दी। ( १९९ ) जो कोई मनुष्य किसी बयानमे जो उसने दिया या जिसपर उसने झूठा- बयान करना दस्तखत किये हों और जिस बयानको किसी घटना (वाकि किसी इजहारमें,जो का- आ) के प्रमाणके कारण ( वजह ) सबूत की भांति ले लेना भूनानुसार प्रमाणके का- रणकी भांति लिये जानेके किसी कोर्ट आफ जस्टिस या किसी सरकारी नौकर या किसी योग्यहो और मनुष्यपर कानूनानुसार उचित या उसके लिये कानूना- नुसार अवश्य हो उस अभिप्रायके किसी आवश्यकताके काम ( अन्न अहम ) के मध्ये जिसके लिये वह बयान दिया गया या काममें लाया गया है कुछ बयान करे जो झूठा हो या जिसका झूठा होना या तो वह जानता या निश्चय करता हो या जिसका सच्चा होना वह निश्चय न करता हो तो उस मनुष्यको उसीप्रकार दढदिया जायगा कि मानों उसने झूठी गवाही दी। १-ऐक्ट काश्तकारी बंगालमे अधिकार किसी कार्रवाईका नही है कि जिसके अनुसार कोई मनुष्य मूल कारण बताने के लिये बुलाया जाये कि वह दस्तावेजात व कागजात ऐसी बाय दादके सिपुर्द क्यों न करदे कि जिसका कोई सर्वसाधारण (आ) प्रवधकर्ता ( मुहतमिम ) नियत कियागया है, यदि ऐसी कार्रवाईमे जो कोई मनुष्य झूठी गवाही देवे उसपर दंडसंग्रहहिदकी दफा १९३ या १९९ के अनुसार अपराध न प्रमाणित होगा ( इ. ला• रि• कलकत्ता जिल्द २. सफा ७२४) (२०० ) जो कोई मनुष्य झूठ तौरसे किसी ऐसे बयानको सच्चे वयानकी मांति झूठ जाने हुए किसी ) काममें लावे या लानेका उद्योग करे यह जानकर कि उसमें कोई बानको सच्चेकी माँति आवश्यकताको बात झूठी है तो उसको उसीप्रकार दर दिया काममें लाना. जावेगा कि मानों उसने झूठी गवाही दी। स्पष्टीकरण-१ प्रत्येक ऐसा वयान जो केवल किसी कानूनको विरुद्ध- ताके कारण ले लिये जानेके योग्य न हो दफा १९९ और २०० के अभिप्रायमें गिनाजायगा। (नोट) (इस दफा तककी टीप अर्थात् अदालतसेगन आदि तथा जमानत आदिका ब्यौरा दफा १९६ के अनुसार समझना चाहिये) ग्यारहवा ११.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई० । (११५) ( २०१ ) जो कोई मनुष्य यह जानकर या इस बातके - निश्चय -करनेका कारण अपराधीको अपराध- रखकर कि कोई अपराध हुवा है उस अपराधके होनेके किसी से बचाने हेतु प्रमाणको प्रमाणको इस अभिप्रायसे छुपावे कि अपराधीको उचित "छुपाना अथवा झूठा स- माचार देना. दडसे वचावे या इसी अभिप्रायसे उस अपराधके मध्ये कुछ समाचार दे जिसका झूठा होना नह जानता या निश्चय करता हो तो यदि उस यदि वधके दड अपराधके बदलेमे जिसको वह जानता या निश्चय करता है योग्य हो. वधका दड ठहराया गया है तो उस मनुष्यको दोनों प्रकारोंमेस किसी प्रकारकी कैदका दह दिया जावेगा जिसकी मीमाद सात वर्ष तक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा, यदि देश निकालेके और यदि उस अपरावके बदलेमे देश निकालेका या ऐसी दडके योग्य हो. कैठका ढड ठहराया गया है जिसकी मीआठ दश वर्षतक होसकती तो उस मनुष्यको दोनों प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दह दिया जावेगा जिसकी -मीआद-तीन वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके मी योग्य होगा- और यदि उस अपराधके वढलेमें ऐसी कैठका दड ठहराया गया है जिसकी मीआदे यदि कैदका दड दश वर्षसे कम हो तो उस मनुष्यको उस प्रकारको केदका दश वर्षसे कम हो. ढड दिया जावेगा जो उस अपराधके लिये ठहराया गया है और जिसकी मीआद उस कैदकी वडीसे वडी मीभादकी एक चौथाईतक होसकती है जो उपरोक्त अपराध लिये ठहराई गई है या जुर्मानेका दड या दोनों दड दिये जावेगे । ( दफा ४० को देखो ) प ) - उदाहरण। शिवशकर यह जानकर कि रमागकरने उमाशकरको मारडाला है लाश छुपानेमे इस आम- प्रायसे रमाशंकरकी सहायता करे कि रमाशकरको दडसे बचाए तो शिवशकर सात वर्षके लिये दोनों प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदके योग्य है और जुर्मानेके भी योग्य है । टीप-(१) अदालत सेशन (२) पोलीस दस्तन्दाजी नही कर सकती (3) अपराधीके नाम वारट जारी होगा (४) जमानत नही (५) गजीनामा नहीं है । १-दडसंग्रह हिंदकी टफा २०१ उन प्रमाण छुपानेवाले मनुष्णोसे सम्बन्ध रखती है जो स्वयं अपराधी नहो । (इ० ला. रि. इलाहाबाद जिल्द २ सफा ७१४) २-दहसग्रहहिंदकी दफा २.१ के अनुसार अपराधीको दड देनेके लिये इस बातके प्रमाणकी आवश्यकता है कि प्रमाण छुरानेके जिस अपराधमे दड दिया गया वह वास्तवमें सचमुचही किया गया था (इ० ला• रि० इलाहाबाद जिल्द ३ सफा.२७९) (११६) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- ३-जो मनुष्य अपराध होनेमे असल मनुष्यके समान सम्बन्ध रखता हो वह उपरोक्त अपरा- धके प्रमाण छिपानेका अपराधी नहीं ठहराया जा सकता। (इ. ला. रि. इलाहाबाद जिल्द , सफा ७४९) ४-यदि कोई मनुष्य स्वयं अपने किये हुए अपराधके प्रमाणके कारणको छुपावे तो उसको दडसंग्रहहिन्दकी दफा २०१ के अनुसार दंड नही हो सकता ( रि० हाईकोर्ट बंबई जिल्द ८ सफा १२६) ५-पहिले इसके कि अपराधी दंडसंग्रहहिदकी दफा २०१ का अपखधी ठहराया जावे, प्रमाणित होना इस बातका आवश्यक है कि वह अपराध जिसके प्रमाणके कारणके छुपानेका दोष लगाया गया है वास्तवमे हुवा था और यह कि अपराधी उस वृत्तांतको जानता था या उसको ऐसी जानकारी हुई थी कि जो इस अपराधके होनेको निश्चय करनेके लिये बहुत थी (इ० ला• रि• कलकत्ता जिल्द ११ सफा ६१९) ६-कैदी ज्ञातघातके अपराधके समय उपस्थित था परन्तु उसको पहिलेसे यह जानकारी न थीं कि उपरोक्त अपराध होनेवाला था उसने डरके कारणसे केवल उस अपराधके होनेको रोकनेमे ही यत्न नही किया वरन लाशके छुपानेमे भी घातकोके साथ रहा। तजवीज हुई कि कैदी ज्ञातपातमें सहायता करनेका अपराधी न था बरन अपराधके प्रमाणके कारणको छुपानेका अपराधी था (वीक्ली रि० जि. ६ दफा १६०) ७-एक स्त्री अपने लडके समेत अपने स्वामीके घरसे निकल गई और फिर खोज करने के पश्चात् अपर्ने एक रिस्तेदारके घरमे मिली परन्तु उस लडकेका पता न लगा, इसलिये उस स्त्रीपर लडकेके मार डालनेका अपराध लगाया गया और उसने उस लडकेके मध्ये तीन अलग २ बयान किये, पहिले यह कि, वह उस लडकेको अपने स्वामीके यहा छोडगई थी, दूसरे यह कि एक मनुष्य रकील नामक उससे वह लडका उसके बापके यहां पहुंचानेको ले गया था तीसरे यह कि एक मनुष्ष हिदायतउल्लानामकने उस लडकेको नदीमे बहादिया था सेशन जजने इस तीसरे वयानको सही समझकर उस स्त्रीको हिन्दुस्थानके दंडसंग्रहकी दफा २०१ के अनुसार प्रमाणके कारणके छुपानेका अपराधी निश्चय किया तजवीज हुई कि हिंदुस्थानके दडसंग्रहकी दफा २०१ उस अवस्थासे सम्बन्धित नहीं है जब कोई मनुष्य जो अपराधी ठहराया गया हो अपनेको बचा के लिये दूसरेको अपराधी ठहराये (इ०ला. रि० कलकत्ता जिल्द ६ सफा १८९) (२०२) जो कोई मनुष्य यह जानकर या इस बातके निश्चय करनेका कारण किसी अपराधका अपराधका ) रखकर कि कोई अपराध हुवा, जानबूझकर उस अपराधके समाचार दैनमें वह मनु- } मध्ये किसी ऐसे समाचारके देनेमें चूककरे जिसका देना कानूना; व्य जान बूझकर चूक करे जिसपर समाचार नुसार उसपर अवश्य है तो उस मनुष्यको दोनों प्रकारों से देना अवश्य है, किसी प्रकारकी कैदका दंड दिया जायगा जिसकी मीआद छ। महीनेतक हो सकती है या जुर्मानेका दंड या दोनों दंड दिये जावेगे। (दफा १० देखो) ग्यारहवा ११.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई० । (११७) टीप-(१) गै० म० या म. म. या म० दो० (२) पोलीस दस्तन्दाजी नहीं कर सकती ३)समन (४) जमानत हो सकती है (५) राजीनामा नहीं है। १-किसी मनुष्यपर दडसग्रहहिदकी टफा २०२ के अनुसार अपराव लगानेके पहिले निम्नलिखित बातीका प्रमाण होना आवश्यक है ( १ ) यह कि अपराधीको अपराधके होनेकी जानकारी थी यां उसके होनेके निश्चय करनेका कारण रखता था (२) यह कि उसने जान बूझकर उपरोक अपराधकी सूचना नहीं की (३) यह कि अपराधीको उपरोक्त सूचनाका देना कानूनानुसार अवश्य था ।(बोली रिपोर्टर जिल्द १८ सफा ३१) (२०३) शुद्ध हुई दफा ६ ऐक्ट ३ सन् १८९३ ई. के अनुसार-जो कोई किसी अपराधके मध्ये ] मनुष्य यह जानकर या इस बातके निश्चय करनेका कारण ग्खकर झूठा समाचार देना. कि कोई अपराध हुवा है उस अपराधके मध्ये कोई समाचार दे जिसका झूठा होना वह जानता या निश्चय करता हो तो उस मनुष्यको दोनों प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीाद दो वर्षतक हो सकती है या जुर्मानेका दड या दोनो दड दिये जावेगे। (दफा ४० को देखो) स्पष्टीकरण-दफा २०१ और २०२ में और इस दफामे " अपराध " के शब्दों प्रत्येक काम गिना जायगा जो ब्रिटिश इडियाके किसी बाहरी स्थानमे हुवा हो और जो ब्रिटिश इडियाके भीतर होनेकी अवस्थामें निम्नलिखित दफाओं अर्थात् दफा ३०२, ३०१, ३८२, ३९२, ३९३, ३९४, ३९५, ३९९, ३९७, ३९८, ३९९, ४०२, ४३५, ४३६, ४४९, १५०, ४५५, ४५८, ४९९, ४६० मेंसे किसी दफाके अनुसार दंड योग्य हो। १) गै० म० या म० अ० या म० दो० (२) पोलीस दस्तन्दाजी नहीं कर सकती (३ वारंट जारी होगा (४) जमानत हो सकती है (५) राजीनामा नहीं है। १-दडसंग्रहहिंदकी दफा २०३ का अपराध प्रमाणित करनेमें केवल यही बात काफी नहीं है कि अपराधी अपराधके होनेका निश्चय करता था, बरन यह भी प्रमाणित होना चाहिये कि वास्तवमेही अपराध हुवा था और अपराधी उससे जानकार था या उसके होनेके निश्चय करनका कारण रखता था (वीक्ली रिपोर्टर जिल्द २० सफा ६६) (२०४ ) जो कोई मनुष्य किसी ऐसी दस्तावेजको छुपाए या नष्ट कर डाले जिसको प्रमाणके कारणकी ) वह किसी कोर्टआफजस्टिसके इजलासमे या किसी कार्रवाईमें जो भाति किसी दस्तावेजको कानूनानुसार किसी सरकारी नौकरके सामने उसकी सरकारी नौक- पेश किये जानेसे रोकनेके | रीके अधिकारसे होरही हो प्रमाणको माति पर पेश करनेके लिये लिये उसे नष्ट करना, कानूनानुसार विवश हो सके या उस सब दस्तावेज या उसके किसी भागको मिटाडाले या ऐसा कर दे कि पढी न जाय इस अभिप्रायसे कि उस कोर्ट या उस ट -- 3 [अध्याय- (११८) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। उक्त सरकारी नौकरके सामने उस दस्तावेजका प्रमाणके कारणको भांति पेश होना या काममें आना रुकजावे या इसके पश्चात ऊपर लिखे हुए अभिप्रायको दस्तावेजके पेश- करनेके लिये कानूनानुसार आज्ञा या हिदायत हो चुकी हो, उपरोक्त कामोंमेसे किसी कामका अपराधी हो तो उस. मनुष्यको दोनो प्रकारोमेसे किसी प्रकारको कैदका देह दिया जावेगा जिसकी मीआद दोवर्षतक हो सकती है या जुर्मानेका दंड या दोनों दड दिये जावेगे। : टीप-(१) प्रै० म० या०म० अ० (२) पोलीस, दस्तन्दाजी नहीं करसकती.(३) वारंट जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है। १-बादी ( मुद्दई) ने नालिशमे जो रजामदीसे पंचायतके सिपुर्द हुई थी दस्तावेजको जो पचके यहां थी छीन लिया और वह उसको लेकर चलागया और उसको पेश करनेसे इन्कार किया-तजवीज हुई कि वास्तवमे अपराध हुआ परंतु वह चोरीका अपराध न था बरन दडसंग्रहहिदकी दफा २०४ का अपराध व्या ॥ ( ई. ला• रि. मदरास जिल्द ३ सफा २६१) (२०५) जो कोई मनुष्य झूठमूठ कोई और मनुष्य बनकर उस बनी हुई सूरतमें किसी मुकद्दमेमें किसी ! कोई प्रतिज्ञा (इकरार ) या बयान करे या कोई इकबाल दावा काम या अमलदरामदके दाखिल करें या कोई आज्ञापत्र (हुक्मनामा ) जारी कराए या अभिप्रायसे झूठमूठ कोई मौर मनुष्य बनना. हाजिरजामिन या मालजामिन होजाए या दीवानी या फौजदारीके किसी मुकमदेमे कोई और काम करे तो उस मनुष्यको दोनों, प्रकारों से किसी प्रकारको कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीआद तीन वर्षतक होसकती है था जुर्मानेका दण्ड दोनों दण्ड दिये जावेगे। : टीप--(१),अदालत संशन या प्रै० म० या म० अ० (२). पोलीस दस्तन्दाजी नहीं कर सकती ( ३) अपराधीके नाम वारंट जारी होगा (४)-जमानत है ( ५ ) राजीनामा नहीं है। १---वडसग्रहहिदको दफा २०५ का अपराध हो सकता है जब कि कोई मनुष्य अपनी कल्पित सूरत बनावे । ( इडियन ज्यूरिष्ट सफा १२२) २ दडसग्रहहिंदकी दफा २.५ का अपराध उस अवस्थामे प्रमाणित होगा कि जब अपराधीने उस मनुष्यके नाम और वस्त्र आदिका धारण किया हो जिसके बननेका दोष उसपर लगाया गया हो, इसलिये दूसरे मनुष्यके नामसे कोई सवाल देना और जबतक उससे पूछा न जाये तब तक अपना नाम प्रगट न करना उपरोक्त अपराधक प्रगणित करनेके लिये काफी नहीं है। - ग्यारहवा ११.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई०॥ (११९) • (२०६) जो कोई मनुष्य उलछिद्रसे किसी मालको यो किसी अधिकारको जो उस छलछिद्रसे उठा ले ] मालमें हो इस अभिप्रायसे दूर करे या छिपाये या किसीके नाम कर जाना अथवा छुपादेना दे या किसी मनुष्यके सिपुर्द कर दे कि उस आज्ञाके अनुसार जो किसीवस्तुका इस अभि- किसी कोर्टआफजस्टिस या किसी अधिकारी हाकिमकी ओरसे हुई प्रायसे कि जन्ती अथवा इजरायडिगरीमे उसका हो या जिसको वह जानता है कि उस आज्ञाका होना समवित है कुर्क किया जाना रुक जाय वह माल या अधिकार जो उस मालमें है, जब्ती या जुर्मानेके वदलेमें या उस डिगरी या आज्ञाके पूरे होनेमें जो दीवानीके किसी मुकद्दमेमें किसी कार्टआ- फजस्टिसने जारी की हो या जिसको वह मनुष्य जानता हो कि उसका जारी होना सम्भव है लिया न जावे तो उस मनुष्यको दोनो प्रकारोंमेंसे किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जावे- गा जिसकी मीआद दो वर्षतक होसकती है या जुर्मानेका दड या दोनो दढ दिये जावेगे । टीप-(१) प्रे० म० या म० अ० या म० दो० (२) पोलीस दस्तन्दाजी नहीं करसकती (३) वारट (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है। १-जो मनुष्य छलसे किसी जायदादको दूसरेके नाम कर देवे, इस अभिप्रायसे कि वह इजराय डिगरीमें नीलाम न होसके तो डिप्टी मजिस्ट्रटको अधिकार है कि हिंदुस्थानके दडस- ग्रहकी दफा २०६ का अपराध उसे लगाकर उसे दण्डित करे, यद्यपि उस अपराधको फैसल दफा ४५ ऐक्ट १० सन् १८५९ ई. के अनुसार होसकता है । ( बगाल ला रिपोर्ट जिल्द २ सफा ४) २-दण्डसग्रह हिदकी दफा २०६ का अपराध प्रमाणित करनेके लिये इस बातके प्रमाणकी आवश्यकता है कि जायदाद छल छिद्र द्वारा इस अभिप्रायसे अलग करदी गई थी कि वह जन्त न होसके या डिगरी या जुर्मानेके बदले जन्त होनेसे बच जावे (वीक्ली रिपोर्टर जिल्द १८ सफा ६५). (२०७ ) जो कोई मनुष्य किसी मालको या किसी अधिकारको जो उस मालमें हो जब्तीकी मॉति या छलसे स्वीकार करे या अपनी सिपुर्दगीमें या उसका दावा करे किसी डिगरीक मध्ये कि- यह जानकर कि उस माल या अधिकारमे उसका कुछ अधिकार या सी मालका कुक किया जानारोकनेके लिये छलसे उचित दावा नहीं है या किसी माल या उस अधिकारके किसी उसका दावा करना सत्वके मध्य जो उस मालमें है कोई धोखा देवे इस अभिप्रायसे कि उसके कारण वह माल या अधिकार जो उस मालमें है ऐसी आज्ञाके अनुसार जो किसी कोर्ट आफजस्टिस या किसी और अधिकारी हाकिमकी ओरसे हुई हो या जिसको ग्ह मनुष्य जानता हो कि उस आज्ञाका होना सम्भव है जब्ती या जुर्मानाके बदलेमें या किसी ऐसी . (१२०) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- डिगरी या हुक्मको तामीलमें जो किसी कोर्टआफजस्टिसकी ओरसे दीवानीके' किसी मुकद्दमेमें जारी हुई हो या जिसको वह मनुष्य जानता हो कि उसका जारी होना सम्भवित है,लिया न जाय तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दंड दिया जावेगा जिसकी भीआद दो वर्षतक होसकती है या जुर्मानेका दंड या दोनों दड दिये जावेगे । टीप --(१) प्रे० म० या म० अ० या म० दौ० (२) पोलीस दस्तन्दाजी नहीं कर सकती (३) अपराधीके नाम वारंट जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) रोजीनामा नहीं है। ( २०८) जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यके दावामे ऐसे रुपयेके लिये जो पटाने अनुचित रुपयक ] योग्य न हो या उस रुपयेसे जो उस मनुष्यके पटाने योग्य है लिये छलसे डिगरी जारी - अधिक हो, या किसी माल या अधिकारके लिये जो उस मालमे हो होने देना. जिसका वह मनुष्य अधिकारी न हो छलसे अपने ऊपर डिगरी या हुक्मजारी कराए या जारी होनेसे या किसी डिगरी या हुक्मको उसकी कार्रवाई होचुकनेके पश्चात् अपने ऊपर या किसी ऐसी वस्तुके लिये जिसके मध्ये उसकी कार्रवाई हो चुकी हो छलसे जारी कराए या जारी होने दे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोंमेसे किसी प्रकारको कैदका दंड दिया जायगा जिसकी मीआद दो वर्षतक होसकती है या जुर्मानेका दंड या दोनों दड दिये जावेगे । . उदाहरण। शिवशंकर, रमाशंकरपर दावा करे और रमाशंकर यह जानकर कि मुझपर शिवशंकरका डिगरी पाना अति संभवित है उमाशंकरके दावेमै जिसका उसपर कुछ उचित दावा नहीं है इस अभिप्रायसे अपने ऊपर छल द्वारा अधिक तादादके मध्य फैसला होने दे कि उमाशकर अपने लिये चाहे उसीके लिये रमाशंकरके भालके जरनीलाममसे जो शिवशंकरकी डिगरीके अनुसार नीलाम हो हिस्सा पावे तो रमाशंकरने इस दफाके अनुसार अपराध किया टीप-(१) प्रै० म० या म० अ० (२) पोलीस दस्तन्दाजी. नही कर सकती (३) अपराधीके नाम वारंट जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है । (२०९) जो कोई मनुष्य छलसे या बद दियानतीसे या किसी मनुष्यको हानि कोर्ट आफ जस्टिसमे | पहुंचाने या कष्ट देनेके अभिप्रायसे किसी कोर्टआफजस्टिसमें कुछ वददियानतीसे झूठा दावा दावा करे जिसका झूठा होना वह जानता हो तो उसको दोनो प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीआद दो वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा । करना.

ग्यारहवा ११.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई० । (१२१) टीप-(१) प्रे० म० या म० अ० (२) पोलीस दस्तन्दाजी नहीं करसकती (३ पारंट (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है। १-जब कोई मनुष्य ऐसी डिगरीको जारी करानेके लिये दरख्वास्त देव कि जिमका रुपया पट चुका है तो उसके कामसे दडसग्रह हिंदकी दफा २१० का सम्बन्ध है न कि दफा २०९ का- दफा २०९ उन झूठे और छली दावियोंसे सम्बन्ध रखती है जो कोर्ट आफ जस्टिममें किये जाय और उस अदालत दीवानी के साथ सम्बन्ध रखती है जिसमे आरम्भकाही नालिग दायर की गई हो (वीली रिपोर्टर जिल्द १२ सफा ३७) करना. ( २१० ) जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यपर ऐसे रुपयेक मध्ये जो उचित नहीं है या अनुचित रुपयेके | जो उचितसे अधिक है या किसी ऐसे माल या अधिकारके मध्ये लिये छलसे डिगरी प्राप्त जो उस मालमें हो और जिसका वह अधिकारी नहीं है कोई डिगरी या हुक्म छलसे प्राप्त करे या कोई डिगरी या हुक्म उसकी कार्रवाई हो चुकनेके पश्चात् किसी मनुष्य पर जारी कराए या किसी ऐसी वस्तुके लिये जारी कराए जिसके मध्ये उसकी कार्रवाई होचुकी हो या छलसे इस प्रकारका कोई काम अपने नामसे होने टे या उसके करनेकी आज्ञा दे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोमेंसे किसी प्रकारकी कैटका ढह दिया जायेगा जिसकी मीआद दो वर्ष हो सकती है या जुर्मानेका ढड या दोनो दड दिये जावेगे । - टीप-(१) मे० म० या म० अ० (२) पोलीस दस्तन्दाजी नहीं करसकती (३) अप- राधीके नाम वारट जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है । १-फरियाद करनेवाले (मुस्तगीस) ने कहा कि तीन मनुष्योने मेरे हाय और टॉग पकड: कर धरतीपर गिरा दिया और घुसा, पत्थर और जूते मेरे छातीपर मारे उनमेसे एकने दूसरेको चाकू देकर कहा कि वह चाकू मेरे (फरियादी) चुमोदे तजवीन हुई कि ऐमे मुकद्दमेमे दस्तबरदारीकी इजाजत देना न चाहिये थी। (इ० ला० रि० मदरास जिल्द ५ सफा ३७८) २-यदि कोई मनुष्य ऐसी डिगरीके जारी करानेकी दरख्वास्त करे जिसका रुपया पट चुका हो तो दण्ड-सग्रहहिन्दकी दफा २१० के अपराधका वह मनुष्य अपराधी होगा । (वीली रिपोर्टर निल्द १२ सफा ३७) ३-एक डिगरीदारने अपनी डिगरी इजराय की एक दरख्वास्त दी यह दरख्वास्त इस लिये खारिज की गई कि डिगरीका रुपया पट गया था-मदयूनको दफा २१० के अनुमार डिगरीदारपर मुकदमा चलानेकी आना हुई-तजवीज हुई कि डिगरी इजरा नहीं होने पाई थी इसलिये दफा२१० के अनुसार कोई अपराव नहीं ठहर सकता । (इ. ला• रि० कलकत्ता जिल्द २३ सफा ९७१) [अध्याय- ध लगाना. : (१२२) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। । (२११ ) जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यको हानि पहुँचानेके अभिप्रायसे उसपर हानि पहुँचानेके अ- फौजदारीमे नालिश दायर करे या कराये या किसी मनुष्य पर मिप्रायसे झूठ मूठ अपरा- किसी अपराध होनेके मध्ये झूठ मूठ दोष लगाए यह जानकर कि न्यायानुसार या कानूनानुसार उस मनुष्यपर उस नालिश या दा- की कुछ जड नहीं है तो उस मनुष्यको दोनों प्रकारोंमे से किसी प्रकारकी कैदका दंड दिया जावेगा जिसकी भीमाद दो वर्षतक हो सकती है या जुर्मानेका दड या दोनो दड दिये जायेगे और यदि वह फौजदारीकी नालिश किसी ऐसे अपराधके झूठे दावेसे दायर कोजाए जिसके बदलेमे दड वध या देश निकाला या सात वर्ष या अधिक मीआदकी कैद ठहराई गई है तो उस मनुष्यको दोनों प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीआद सात वर्षतक हो सकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप-(१) अदालत सेगन या प्रे० म० या म० अ० (२) पोलीस दस्तन्दाजी नहीं कर सकती (३) अपराधीके नाम वारट जारी होगा (४) जमानत हो सकती है (५) राजीनामा नहीं है। भूठा दोष १-हिदुस्थानके दडसग्रहकी दफा २११ का अपराध कायम करनेके लिये केवल ही लगाना बहुत है, चाहे नालिश न की जाय (इ. ला. रि. इलाहाबाद जिल्द ३ सफा ४९७) २-डिटी मजिस्ट्रेटको ऐसी आजाके मध्ये दलील करनेका अधिकार नहीं है जो उसके अफ्सरने दंडसग्रह हिंदुस्थानकी दफा १८२ व २११ के अभिप्रायानुसार फौजदारीकी नालिश कर- नेकी मजूरी दी हो वह मजूरी चाहे सही दी गई हो चाहे गलत, परन्तु अपराधी दलील कर सकता है (इ. ला.रि. कलकत्ता जिल्द सफा ८६९) ३.-पहिले इसके कि तजवीज किसी मनुष्यको दफा २११ दडसग्रह हिदके अपराधकी होवे उसको मुकद्दमेकी असलियत ( यथार्थता) को प्रमाणित करनेका अवसर दिया जावेगा जब कि वह मनुष्य उससे लाभ उठानेकी प्रार्थना करे,, और यह अवसर न पोलीसके सामने बरन मजिस्ट्रेट के सामने मिलना चाहिये । ( इ० ला० रि• कलकत्ता जिल्द ६ सफा ४९७) ४-विना गवाहोका बयान सुने कि जिनको अपराधी पेश किया चाहता है दंडसग्रह हिदकी दफा २११ के अभिप्रायानुसार फौजदारीकी नालिशकी आज्ञा देना अनुचित है (इ० ला. रि० कलकत्ता जिल्द ६ सफा ५८४) ५-अपराधके विचारके लिये यह बात अवश्य है कि झूठका अपराध उस अदालत या हाकिमके सामने जिसको जाच करने नथा दौरा सिपुर्द करनेका अधिकार प्राप्त है कायम किया जावे इ० ला.रि. कलकत्ता जिल्द ६ सफा ६६२) ६--अकस्टस आसस्टन्ट कमिश्नरको पोलीसकी रिपोर्टके आनेपर रिपोर्टरके मनमूनसे अपराधीको सूचना कर देनी थी और उसको अपने मुकद्दमेके प्रमाण ( सबूत ) के लिये अवसर ग्यारहवा ११.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०॥ ( १२३) देना चाहिये था नब मुकद्दमेको फैसल करना उचित था । (१० ला रि. कलकत्ता जिस्ट १७ सफी ८७) ७-जब कोई मनुष्य विशेप करके इस बातकी नालिग करे कि दूमरे मनुष्यने कोई अप- राध किया है और उपरोक्त मनुष्य ऐसा काम ऐसे दूसरे मनुष्यको हानि पहुँचानेके अभिप्रायसे करे तो वह दफा २११ दडसग्रहहिदके अपराधका अपराधी होगा । (इ. ला. रि• बम्बई जिल्द ७ सफा १८४) ८-यदि दोष कुमावसे न लगायाजावे बरन केवल बेपरवाहीसे लगाया जावे तो दोप लगाने वाला दहके योग्य नहीं है चाहे उसका वर्चाव ऐमा समाचार पानेपर हुवा हो जो किसी बुद्धिमान मनुष्यके माननेके लिये पूरी न था (वीही रिपोर्टर जिल्द २ मफा १० ९-एक पोलीसके अहलकारने यह रिपोर्ट की कि अमुक मनुष्यने अमुक अपराधं किया था और फिर अपने अफ्सरकी आजानुसार जो उसकी रिपोर्टसे हुई उस मनुष्यपर झुठा अपराध लगाया तजवीज हुई कि उपरोक्त अफ्सर दडसग्रहहिन्दकी दफा २११ के अपराधका अपराधी हुआ था और उसका यह कहना कि उसने अपने अफ्सरकी आजानुसार वत्तांच किया था उसको कुछ लाभ नहीं पहुंचा सकता था ( वीकी रिपोर्टर जिल्द २ सफा ४५) १०-यदि कोई मनुष्य अपना घर स्वयही जलादे और दूसरेपर उसका दोष लगावे तो वह देंडसग्रहहिदकी दफा २११ के अपराधका अपराधी व उसी दफाके अनुसार दडके योग्य है दफा १९५ के अनुसार नही । (वीसी रिपोर्टर जिल्द ८ सफा ६५) ११-एक मनुष्यने पोलीसमे यह झूठी फरियाद की कि अमुक मनुष्य उसके लडकेके मार अल्नेका कारण हुवा था तजवीज हुई कि फरियादीके कामसे टफा २११ का सम्बव या न कि दफा १८२ का ( वीक्लो रिपोर्टर जिल्द ८ सफा ६७) १२-हिन्दुस्थानके दहसग्रहकी दफा २११ केवल उन्ही लोगोसे सम्बध नहीं रखती जो सरकारी नौकर नहीं है बरन पोलीसके अफ्सरसे भी सम्बध रखती है जो किसीको हानि पहुंचानेके .अभिप्रायसे उसपर झूठा अपराध ल्गावे । (वीही रिपोर्टर ११ सफा २ १३--हिन्दुस्थानके दडसग्रहकी दफा २११ का अपराव दफा १८२ के अपराधमे गिना जायगा इसलिये मजिस्ट्रेटको अधिकार है कि चाहे जिस दफाके अनुसार वर्ताव करे परतु भारी मुकद्द- मोमे दफा २११ का ही बर्ताव करना उचित है । (१० लारि० कलकत्ता जिल्द ३ सफा १३४) १४- हिन्दुस्थानकी दडसग्रहकी दफा २११ के अपराधके अपराधीने सेगननजके सामने ययान किया कि जो नालिया उसने की थी वह झूठी थी और विना सोचे समझे उसने कर दी थी, सेशनजजने उस बयानको अपरायकी स्वीकारता समझकर अपराधीको ८ महीनेकी कठिन कैदके दडकी भाज्ञा दी परतु उसका उन्न दफा २३७ जान्ता फौजदारी ( ऐक्ट १० सन् १८७२ ई.) के अनुसार नही लिखा गया था और न उसको फर्द करारदादजुर्म ( अपराधके मान लेनकी स्वीकारता) सुनाई और समझाई गई-तजवीज हुई कि दडकी आंना अनुचित थी क्योंकि मिस्लसे यह बात प्रमाणित नहीं होती थी कि अपराधीने एक काम जो दफा २११ दंडसग्रह हिदकी अपराधमें अत्यत आवश्यक 7. (१२४) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- है मान लिया था अर्थात् दूसरेको हानि पहुँचानेका अभिप्राय और यह बयान उसका कि उसने विना सोचे समझे नालिश कर दी थी अपराध स्वीकार करनेकी सीमातक नहीं पहुंचता था। (इ० ला. रि. कलकत्ता जिल्द ७ सफा ९६) १५---ज्वाइंट मजिस्ट्रेटके सामने एक सवाल इस प्रकारका दिया गया कि पोलीसने इस तहकीकातके मध्ये जिसकी हिदायत उसको सायलकी दरख्वास्तपर हुई थी झूठी रिपोर्ट की थी और ज्वाइंट मजिस्ट्रेटने पोलीसकी रिपोर्ट सुननेके पश्चात् वह सवाल अस्वीकार कर दिया. और यह आजाकी कि सायलपर झूठा दोष लगानेके अपराधमे दंडसंग्रहकी दफा २११ के अनुसार मुकद्दमा कायम किया जावे तजवीज हुई कि मजिस्ट्रेटको अपराधकी तहकीकातकी जाच करनेके पहिले दफा ४७६ जान्ता फौजदारीके अनुसार उपरोक्त आज्ञा न करनी चाहिये थी । (इ. ला. रि. कलकत्ता जिल्द २ सफा ३१५) १६--जब कोई मनुष्य कुछ फरियाद करे और वह पोलीसकी रायमे झूठी ठहरे तो मजि स्ट्रेटको उचित नहीं है कि केवल पोलीसकीही रिपोर्टपर निश्चयकर एक साधारण तौरपर डीनतासे कार्रवाई करे वरन् उसको दफा २११ के अनुसार वर्ताव करना चाहिये । ( इ० ला. रि० कलकत्ता जिल्द ७ सफा ५७५) कैदीको जिसके मध्ये झूठी नालिा करनेके अपराधर्मे जिमन २ दफा २११ दंडसंग्रह हिदके अनुसार दडकी आज्ञा हुई उसे कैदका दंड जुर्माने समेत होना चाहिये न कि केवल जुर्मानेहीका दंड हो । ( रिपोर्ट हाईकोर्ट बंबई जिल्द १ सफा ३४) १८--वसूल हुए रुपयोंके मध्ये स्टाम्पपर रसीद देनेसे नाही करना कानूनानुसार कोई अपराध नहीं है इसलिये नाही करनेवालेपर स्टाम्पपर रसीद देनेसे नाही करनेके मध्ये झूठी नालिश करना भी कोई अपराध दड योग्य नहीं है । ( रिपोर्ट हाईकोर्ट बम्बई जिल्द १ सफा ९२) १९---यदि मजिस्ट्रेट किसी नालिशको झूठी या वेजड ( अमूलक ) समझे तो उसे समर्न या वारंट जारी करनेकी आवश्यकता नहीं है, प्रत्येक नालिग करनेवालेका बयान लेना उसे अवश्यही उचित है । (रिपोर्ट हाईकोर्ट पश्चिमोत्तर देश जिल्द ३ सफा २७२) २०--अपराधीने एक मनुष्यपर झूठी नालिश दफा ३२४ दडसग्रहहिदके अनुसार दायर की और इसी अदालतसे उसको दफा २११ दंडसंग्रहहिंदके अपराधमे दंड हुआ तजवीज हुई कि उपरोक्त अदालतको अपराधीकी तजवीज करनेका अधिकार न था । ( पंजाब रिकार्ड नं. ३ सन् १८७७ ई.) २१-अपराधीने केवल सहायपर यह अपराध लगाया कि उसने अपराधीपर आक्रमण करके उसका दांत तोडडाला था और केवल सहायने उस अपराधसे छूटकर अपराधीपर दफा २११ के अपराध की नालिश की और अपराधीको अदालत सेगनसे दंड मिला हाईकोर्टसे सेशन जजकी इस इबारतसे कि " यद्यपि केवल सहायने स्वयं अपराधीपर आक्रमण करके उसका दाँत नहीं तोडा था उसने उपरोक्त कामके मध्ये अपने नौकरोको बहकाया था और उन्होंने वह काम किया था " तजवीज हुई कि केवल सहायक उपरोक्त आक्रमणके होनेके समय वहाँ- ग्यारहवाँ ११.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई० । (१२५) पर उपस्थित था इस कारण कानूनानुसार इस अपराधका करनेवाला हुवा इसलिये अपराधीने जो उसपर नालिश की थी, वह दफा २११ के अभिप्रायसे झूठी न थी इसलिये अपराधीके दंडकी आना रद्द कीगई। बीकी नोटिस इलाहाबाट किताव माह फरवरी सन् १८८३ ई. सफा ३९) (२१२) शुद्ध हुआ दफा ७ ऐक्ट ३ सन् १८९४ ई. के अनुसार-जिस अपराधीको आश्रय ! अवस्था में कि कोई अपराव हुवा हो तो जो कोई मनुष्य इस देना. अभिप्रायसे किसी मनुष्यको आश्रय टे या छिपाये जिसका अपराधी होना वह जानता या निश्चय करनेका कारण रखता हो कि उस अपराधीको उचित दइसे बचाए, द (तो यदि उस अपराधके बदलेमे वधका दढ ठहराया गया हो तो उस मनुष्यको यदि ध दडके दोनो प्रकारों से किसी प्रकारको कैदका दड दिया जावेगा योग्य हो जिसकी मीआद पाच वर्षतक होसकती है और यह जुर्मानेके मी योग्य होगा, और- यदि उस अपराधके वदलेमे देश निकाले या ऐसी कैदका दड ठहराया गया याद देश निकाला हो जिसकी मीमाद दश वर्पतक होसकती है तो उस मनुष्यको या कैदके दड योग्य हो. [ दोनो प्रकारों से किसी प्रकारका कैदका दढ दिया जायेगा जिसकी मीभाद तीन वर्पतक हो सकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा और यदि उस अपरा- धके बदलेमें ऐसी कैदका दर ठहराया गया हो जिसकी मीआद एक वर्षसे अधिक और दश वर्षसे कम हो तो उस मनुष्यको दोनो प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जावेगा जो उपरोक्त अपराधके लिये ठहराई गई है और उसकी मीआद उस कैदकी वडीसे वढी मीआदकी एक चौथाईतक होसकती है जो उस अपराधके लिये ठहराई गई है या जुर्मानेका दंड या दोनों दड दिये जायेंगे। अपराध में (१) शब्द इस दफामे प्रत्येक ऐसा काम गिना जायगा जो ब्रिटिश इडियाके बाहर किसी स्थानमें हुवा हो और जो ब्रिटिश इडियाके मीतर होनेकी अव- स्थानमें निम्नलिखित दफो अर्थात् दफा ३०२, ३०४, ३८२, ३९२, ३९३, ३९४, ३९५, ३९६, ३९७, ३९८, ३९९, ४०२, ४३५, ४३६, ४४९, ४५०, ४१७, ४१८, ४९९, व ४६० मेंसे किसी दफाके अनुसार दड योग्य होवे और ऐसा प्रत्येक काम इस दफाके अभिप्रायोंके लिये दड योग्य समझा जायगा इसप्रकारपर कि मानों अपराधी मनु- ष्य ब्रिटिश इडियाके मीतर उपरोक्त कामका अपराधी हुवा था ।

(१२६) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [ अध्याय- इस दफाकी आज्ञा उस अवस्थामे सम्बन्ध न रक्खेगी कि जब आश्रय देना छुपाना अपराधीके शौहर (स्वामी ) या उसकी स्त्रीसे हुवा हो । उदाहरण । शिवशकर यह जानकर कि रमाशंकरने डाका डाला है, जानबूझकर रमाशंकरको उचित दंडसे बचानेके लिये छिपाए तो इस अवस्थामे जो कि रमानकर देश निकालेके दंड योग्य है इसलिये शिव- शंकर दोनो प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी कैदके योग्य होगा जिसकी मीआद तीन वर्षसे अधिक न हो और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप-(१) अदालत सेशन, या प्रे० म० या० अ० (२) पोलीस दस्तन्दाजी करसकती (३) अपराधीके नाम वारंट जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है, १-हिंदुस्थानके दडसंग्रहकी दफा २१२ के अपराधकी तजवीजको कायम रखनेके अभि- प्रायसे इस बातकी आवश्यकता है कि गवाही इन बातोकी होनी चाहिये । (१) कोई अपराध किया गया । (२) उस अपराधके अपराधीको आश्रय दिया गया या वह छिपाया गया । (इ० ला• रि. जिल्ट १२ सफा ४३२) ( २१३) जो कोई मनुष्य किसी अपराधको छिपावे या किसी मनुष्यको किसी अपराधीको दडसे अपराधके उचित दडसे वचावे या किसी मनुष्यको उचित दंड बचानेके लिये इनाम आदि लेना. दिलानेका उपाय न करनेके बदले अपने लिये या किसी और मनुष्यके लिये कुछ इनाम या कोई वस्तु प्राप्त या स्वीकार करे या प्राप्त करनेका उद्योग करे या स्वीकार करनेपर राजी हो तो,- यदि उस अपराधके बदलेमे वधका दड ठहराया गया है तो उपरोक्त मनुष्यको यदि वध दडके ) दोनों प्रकारोमेसे किसी प्रकारको कैदका दड दिया जायेगा योग्य हो. जिसकी मीआद सात वर्षतक हो सकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा, और- यदि उस अपराधके बदलेमे देश निकालेका दड या ऐसी कैद ठहराई गई है जिसकी अदि देश निकाले ) मीआद दश वर्पतक होसकती है तो उस मनुष्यको दोनों अथवा कैदके दड योग्य प्रकारोंमेंसे किसी प्रकारको कैदका दड दिया जायगा जिसकी हो. भीआद तीन वर्षतक हो सकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा और यदि -- ग्यारहवाँ ११.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई० । (१२७) उस अपराधके बदलेमे ऐसी कैदका दह ठहराया गया है जो दश वर्षसे कम हो तो उम मनु- ध्यको उस प्रकारकी कैदका दह दिया जायगा जो उस अपराधके लिये ठहराई गई है और उसकी मीआद उस कैदकी बडीसे बडी मीआदकी एक चौथाईतक होसकेगी उपरोक्त अपराधके लिये ठहराई गई है या जुर्मानका दड या दोनो ढड दिये जावेगे (देखो दफा४०) टीप-(१) अदालत सेगन, या गै० म० या म० अ० (२) पोलीस दस्तन्दाजी नहीं कर सकती (३) अराधीके नाम वारट जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५)राजीनामा नहीं है। ( २१४ ) चा कोई मनुष्य कोई अपराध छिपाने या किसी मनुष्यको किसी अपरा- अपराधीको दडसे) धके उचित दडसे बचाने या किसी मनुष्यको उचित दह करानेसे बचानेके बदले इनाम । रुके रहनेके बदलेमें किसी मनुष्यको कुछ इनाम दे या पहुँचाये या देना या कुछ वस्तु फेर | देने या पहुंचानेको कहे या देने या पहुचानेपर राजी होवे या देनी. किसी मनुष्यको कोई माल फेरे या फिराये, या फेरने या फिरानेको कहे या फिराने पर राजी हो, तो:- यदि उस अपराधके लिये वधका दर ठहराया गया है तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों यदि अपराध बधक ) प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दह दिया जावेगा जिसकी दण्ड योग्य होवे, मीभाद सात वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके मी योग्य होगा, और.- } - यदि उस अपराधके लिये देश निकाले या ऐसी कैदका दड ठहराया गया है जो दश यदि अपराधका दड) वर्षतक होसकती है, तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारों से किसी देश निकाला या कैदका प्रकारकी कैदका दड दिया जायगा जिसकी मीआद तीन वर्षतक होवे. होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। और यदि उस अपराधके लिये ऐसी कैदका दड ठहराया गया है जो दश वर्षसे कम हो तो उपरोक्त मनु- ज्यको उस प्रकारका दड दिया जावेगा जो उस अपराधके लिये ठहरा है और उसकी मीभाद उस कैदकी बडीसे बडी मीभादकी एक चौथाईतक होसकती है उस अपराध के लिये निश्चित की गई है या जुर्मानेका दंड या दोनों दड दिये जायेंगे । ( दफा ४० को देखो) छूट। दफा २१३ व २१४ की आज्ञाएँ ( अहकाम ) किसी ऐसी अवस्या ( सूरत ) से [अध्याय- ( - । इस संग्रहके अनुसार दंड दिये जानेके योग्य किसी अप- (१२८) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह । सम्बन्ध नहीं रखतीं, जिसमें अपराधके मध्ये कानूनानुसार राजीनामा होसकता हो (दफा १ ऐक्ट ८ सन् १८८२ ई० को देखो ) (नोट) टीप दफा २१३ के अनुसार समझना चाहिये । १-हिदुस्थानके दंडसंग्रहको दफा २१४ के अनुसार जो मुकद्दमा तसफियाके लायक न हो वह तसफियाकी रूसे खारिज होजाय तो वह तसफिया नई नालिश करनेको नहीं रोक सकता (इ. ला.रि. बम्बई जिल्द १ सफा ६४) २-जानबूझकर मारी दुःख पहुंचानेके मुकद्दमेमे दडसंग्रहहिंदकी दफा २१४ के अभिप्राया- नुसार राजीनामा नहीं हो सकता, राजीनामा उन फौजदारीके मुकदमोंमे होसकता है जिनमें नियतका लिहाज ( अभिप्रायका विचार) न हो और जिनके मध्ये नालिश फौजदारीके स्थानपर नालिश दीवानी होसके ( इ. ला. रि० बंबई जिल्द १ सफा १४७) ३-अपराधीने सामीनाथ पिल्लेको इसलिये दश रुपये देने कहे कि वह कोलन्डावलूके विरुद्ध जिसपर रातके समय सेंध लगानेका अपराध लगाया गया या गवाही न देवे-परन्तु सामीनाथ पिल्लंने कोलण्डावेलके विरुद्ध गवाही दी लेकिन वह अपराधसे छोड दियागया । अपराधीपर दंडसंग्रह हिदकी दफा २१४ का अपराध लगाया गया परन्तु छोड दियागया, तजवीज हुई कि, अपराधीको छोडदेना उचित था । (इ० ला• रि० मदरास जिल्द १४ सफा ४००) ४-आक्रमण ( हमले ) के अभियोगमें राजीनामा होसकता है। (वीक्ली रिपोर्टर जिल्द ५ सफा १६) ५-उस स्त्रीके स्वामीने जिसके साथ व्यभिचार (जिना) हुवा था मुकद्दमेकी पैरवीसे नाही की इस कारण अपराधी छोड दिया गया, इसलिये हाईकोर्टने भी दस्तन्दाजी करनेसे इन्कार किया। (रि. हाईकोर्ट बंबई जिल्द ५ सफा २७) (२१५) जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यको किसी ऐसे स्थावरधन (मालमनकूला ) फिरसे पानेमे सहायता राधके द्वारा उसके पाससे जाता रहा हो फिरसे पानेमें सहायता करनेके लिये कुछ इनाम लेना. करनेके मिस या कारणसे कुछ इनाम ले या लेनेपर राजी हो या लेना स्वीकार करे तो फिर सिवाय इसके कि उपरोक्त मनुष्य अपराधीके पकडवाने और उसको उस अपराधका अपराधी प्रमाणित करानेके लिये अपनी सामर्थ्य भर सब. यत्नोंको काममें लाये, उसको दोनों प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीआद दो वर्षतक होसकती है जुर्मानेका दंड या दोनों दंड दिये जावेगे। टीप-(१) प्रे० म० या म० अ० (२) पोलीस दस्तन्दाजी नही करसकती (३) वारट अपराधीके नाम जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है।

ग्यारहवा ११.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०॥ (१२९) ( २१६ ) जव कभी कोई मनुष्य जो किसी अपराधका अपराधी प्रमाणित हुवा ऐसे अपराधीको आश्रय ) हो या जिसपर उस अपराधका दोप लगाया गया हो उस अपरा- देना जो चौकसीसे भागा हो या जिसके पकडनेकी | धके लिये उचित चौकसी ( हिरासत ) मे होकर उस चौकसीसे आजा हो चुकी हो. J माग जाए, या जब कभी कोई सरकारी नौकर अपने ओहदेका नीतिपूर्वक अधिकार वर्तनेमे किसी अपराधके लिये किसी विशेप मनुष्यको पकडे जानेका आज्ञा देतो जो कोई मनुष्य उस भाग जाने या उस पकडने : गिरफ्तारी की आज्ञाको जानकर उस मनुष्यको न पकडे जानेके अभिप्रायस आश्रय दे या छुपावे तो उपरोक्त मनु- ध्यको नीचे लिखे हुए नियमके अनुसार दह दिया जावेगा, अर्थात्,- यदि उस अपराधके वढलेमें जिसके लिये वह मनुष्य चौकसीमे था या जिसके लिये यदि अपराध वधक ] उसके पकडे जानकी आज्ञा ढीगई है ववका दह नियत (मुकर ) दंड योग्य हो. है तो उपरोक्त मनुष्यको ढोनो प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दंड दिया जावेगा जिसकी मीाद सात वर्पतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा, और:- -- यदि उस अपराधके बदलेमे देश निकालेका ढह या दश वर्षकी कैद नियत यदि देश निकालेके ) हो तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारोमेंसे किसी प्रकारकी कैदका दंड या कंदके योग्य हो दण्ड दिया जावेगा जिसको मीआद तीन वर्ष तक हो सकती है जुर्मानेसहित या विना जुर्मानेके दी जायेगी और यदि उस अपराधके बदलेमें ऐसी कैदका दड नियत है जो एक वर्षसे अधिक और दश वर्षसे कम हो तो उपरोक्त मनुष्यको उस प्रकारको कैदका दर दिया जावेगा जो उपरोक्त अपराधके लिये ठहराया गया है और उसकी मीआद उस कैदकी वडीसे वडी मीआदकी एक चौथाईतक होसकेगी जो उस अपराधके लिये ठह- । राई गई है, या जुर्मानेका दड या दोनो दड दिये जावेगे । (देखो दफा ४०) "अपराध के शब्दमें इस दफामें प्रत्येक ऐसा काम या चूक कामभी शामिल है, जिसके अपराधी होनेका ब्रिटिश इण्डियाके बाहर किसी ऐसे मनुष्यके मध्ये बयान किया गया है जो ब्रिटिश इण्डियाके भीतर उसके अपराधी होनेकी अवस्थामें अपराध करनेकी भाति दण्ड योग्य होता और जिसके लिये उपरोक्त मनुष्यको अन्य रियासतोंके अपराधियोंके पकड- नेके कानूनानुसार या मागे हुए अपरावियोके ऐक्ट सन् १८८१ ई. के अनुसार या और प्रकार पर ब्रिटिश इण्डियाके भीतर पकडा जाना या चौक में खखा जाना उचित ९ [अध्याय- - (१३०) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह । है और ऐसा हर काम या चूक काम इस दफाके अभिप्रायोके लिये इस प्रकार पर दड योग्य समझा जावेगा कि मानो वह अपराधी मनुष्य ब्रिटिश इण्डियाके भीतर उपरोक्त काम या चूक कामका अपराधी हुआ । (दफा २३ ऐक्ट नं० १० सन् १८८६ ई० को देखो ) छुपाना ३ इस दफाकी आज्ञा उस अवस्थासे सम्बन्ध न रक्खेगी जहा आश्रय देना या उस मनुष्यके शौहर (पति ) या स्त्रीसे हो, जिसके पकडे जानेका अभिप्राय है। टीप-(१) अदालत सेशन या प्रे० म० या म० अ० (२) पोलीस दस्तन्दाजी कर सकती है (३) अपराधीके नाम वारंट जारी होगा (४) जमानत हो सकती है (५) राजीनामा नहीं है। ( २१६ ) (अ) बढाया गया दफा ८ ऐक्ट ३ सन् १८९४ ई. के अनुसार जो डाकुओंको आश्रय) कोई मनुष्य यह जानकर या इस बातके जाननेको कारण देनेके बदलेमें दड. रखकर कि कोई मनुष्य बलपूर्वक चोरी या डकैती करनेवाले है या हालमे उन्होने बलपूर्वक चोरी या डकैती की है, उन सबको या उनमेसे किसी मनुष्यको इस अभिप्रायसे आश्रय दे कि वैसी बलपूर्वक चोरी या डकैतीका होना सहज हो जावे या वह मनुष्य या उनमेंसे कोई मनुष्य दण्डसे बचजाये, तो उसको कठिन कैदका दण्ड जिसकी मीाद सात वर्षतक होसकती है दिया जायगा और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। स्पष्टीकरण-इस दफाके अभिप्रायोंके लिये यह बात विचारके योग्य नहीं है कि ब्रिटिश इडियाके भीतर या बाहर बलपूर्वक चोरी या डकैतीके करनेकी इच्छा की गई है या नहीं, या इस प्रकारको घटना हुई है या नहीं। छूट। यह आज्ञा उस अपराधसे सम्बंध न रक्खेगी कि जिसमे अपराधीके स्वामी (पति) या स्त्रीकी ओरसे आश्रय दिया जावे। ( २१६ ) (ब) बढाया गया दफाऐक्ट ३ सन् १८९४ ई० के अनुसार दफा२१२ दफा ११२ व २१६) व २१६ व २१६ (अ) में शब्द "आश्रय में किसी मनुष्यका व २१६ (अ) मे आश्र- आश्रय देना या उसको खानेपीनेकी वस्तु या रुपया या वस्त्र या युद्धका सामान पहुचाना या बोझा ढोनेका यत्न कर देना या किसी मनुष्यको किसी प्रकारकी गिरफ्तारीसे निकल मागनेमे सहायता देना गिना जायगा। यका लक्षण, ग्यारहवाँ ११.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६०ई०। (१३१) टीप-(१) अदालत सेगन या प्रे० म० या म० अ० (२) पोलीस दस्तन्दाजी करसकती (३) अपराधीके नाम वारट जारी होगा (४) जमानत हो मकती है (५) राजीनामा नहीं है। (२१७) यदि कोई मनुष्य जो सरकारी नौकर हो, कानूनकी किसी आज्ञा सरकारी नौकर जो) को जो उम ओहढेके कामसे सम्बन्ध रखती है जिसपर उसको 'किसी मनुष्यको दडसे उस सरकारी नौकरीके कारणसे चलना चाहिये जानबूझकर मंग या मालको जन्तीसे ब- करे इस अभिप्रायसे या इस कामके होनेको सम्भवित जानकर कि चानेके अभिप्रायसे नी- तिपूर्वक आजाको न उसके कारण किसी मनुष्यको नीतिपूर्वकके दण्डसे वचाए या मानना. वह मनुष्य जितने टंडके योग्य है उससे कम दह दिलाए या किसी मालकी जब्ती या किसी खर्चस जिसका वह कानूनानुसार अधिकारी है, वचाए तो उसको दोनों प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका ढड दिया जायगा जिमकी मीआद दो वर्षतक हो सकती है या जुर्मानेका दण्ड या दोनों दण्ड दिये जावेगे । टीप-(१) प्रै० म० या म० अ० या म. दो (२) पोलीस दस्तन्दाजी नहीं कर सकती (३) अपराधीके नाम समन जारी होगा (6) जमानत हो' सक्ती है (५) राजी- नामा नहीं है। १-दडसंग्रह हिंदुस्थानकी दफा २१७ काअराध प्रमाणित होनेके लिये केवल इतनाही बहुत है कि अपराधी मनुष्य अर्थात् भरकारी नौकरने किसी कानूनी आजाको अगधीके बचानेके लिये भग • किया यह आवश्यकता नहीं कि यह प्रमाणित कियाजावे कि वह मनुष्य जिसके बचाने के लिये आजमग की गई वास्तवमे कानूनानुसार दड पानेके योग्य था या नहीं-(इ० ला. रि• कन्दकत्ता । जिल्ट ३ सफा ४१२) २-अपराधी पर दडसग्रह हिंदुस्थानकी दफा २१७ का अपराध लगाया गया परन्तु स्पष्ट २ यह नही टारियाफ्त किया गया कि यह कौनमी कानूनी आजा थी जिसको अपराधीने भग किया था और किस प्रकार भग की थी तजवीज हुई कि जब किसी अपराधीको ऐमे अपरावके मध्ये दडकी आजा हुई हो नो स्पष्ट लेख (गैरमुईन इबारत) मे बयान की गई हो तो मुकद्दमेकी पैरवी मुद्दईकी औरसे अपीलमै उसी अर्यक मीमावड (महदूद) रहना चाहिये जिसमे उपरोक्त अपराध तजवीजके ममय समझा गया हो (इ० ला. रि० बबई जिल्द २ सफा १४२) (२१८) यदि कोई मनुष्य जो सरकारी नौकर हो और सरकारी नौकरी सरकारी नौकर जो) होनेके कारणसे किसी सरिश्तेके कागज या किसी और लिख- किसी मनुष्यको दहसे तमका वनाना उसका कर्तव्य तमका बनाना उसका कर्तव्य कर्म हो और वह उस सरिश्तेके या मालको जन्नीसे ब- कागज या लिखतमको इस ढंगसे बनावे जिसको वह झूठ चानके अभिप्रायसे गलत जानता हो इस अभिप्रायसे इस बातके होनेको सम्भक्ति जान लिखतम या मिसल बनाव. कर कि उसके कारण सर्वसाधारणको या किसी मनुष्यको हानि - -- - (१३२) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- पहुंचावे या इस अभिप्रायसे या इस बातके होनेको सम्मवित जानकर कि उसके कारण किसी मनुष्यको उचित दडसे वचावे या इस अभिप्रायसे या इस बातके होनेको सम्भवित जानकर कि उसके कारण किसी मालको जब्ती या किसी और खर्चसे जिसका- वह माल कानूनानुसार उचित है बचाए तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैद- का दड दिया जावेगा जिसकी मीआद तीन वर्षतक होसकती है या जुर्मानेका-दंड या दोनों दण्ड दिये जावेगे। टीप-(१) अदालत सेशन (२) पोलीस दस्तन्दाजी नही करसकती (३) अपराधीके नाम वारंट जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नही है । १-सरकारी नौकरको जिसकी सिपुर्दगीमे कुछ दस्तावेजें थी, उपरोक्त दस्तावेजोंके पेश करनेको कहा गया परन्तु उसने पेश नहीं किया, वरन् उसी प्रकारकी दस्तावेजे इस अभिप्रायसे बनाकर पेश की कि जिससे वह दडसे बचजावे-तजवीज हुई कि इस प्रकारकी बनाई हुई दस्ता- वेजे सरिश्तेके कागज या लिखतम न थी जिनके तैयार करनेका अपराध लगाया था इसलिये अपरावी. को दफा २१८ के अभिप्रायानुसार दड नही होसकता और न उपरोक्त दस्तावेने जाली (काल्पत ) प्रमाणित होती हैं, क्योंकि वे उस अभिप्रायसे न बनाई गई थी जिनका वर्णन दफा ४६३ में है इसलिये अपराधीको दफा ४७१ के भी अभिप्रायानुसार दड नही होसकता । ( इ. ला. रि- इलाहाबाद जिल्द ५ दफा ५५३) २-~-जब कोई पोलीसका अफ्सर असावधानीसे या अनुचित रीतिपर किसी तहकीकात मांक मध्ये झूठी रिपोर्ट करे तो उसको दफा २९ ऐक्ट ५ सन् १८६१ ई. के अनुसार दड होसकता है यदि उसके कामको दडसग्रह हिन्दुस्थानकी दफा २१८ के अपराधमे लानेके लिये यथोचित प्रमाण न हो (वीक्ली रिपोर्टर जिल्द ५ सफा १७) (२१९ ) यदि कोई मनुष्य जो सरकारी नौकर है अदालतको कार्रवाईको किसी सरकारी नौकर जो) अवस्थामे कुप्रयोजनसे या ईर्षासे कोई कैफियत तय्यार करे या अदालतकी कार्रवाईमे कोई आज्ञा दे या कोई तजवीज या फैसला करे जिसका कानून; झूठी तौरसे ऐसी आज्ञा विरुद्ध होना वह जानता हो तो विरुद्ध होना वह जानता हो तो उसको दोनों प्रकारोमेसे किसी दें, या ऐसी कैफियत प्रकारकी कैदका दंड दिया जायगा जिसकी मीआद सात वर्पतक आदि बनावे जिसे वह कानूनविरुद्ध जानता हो.J हो सकती है या जुर्मानेका दंड या दोनो दिये जावेगे । टीप--(१.) अदालत सेशन (२) पोलीस, दस्तन्दाजी नही करसकती (३) वारट (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नही है ।

ग्यारहवा ११.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई०॥ (१३३) (२२० ) यदि कोई मनुष्य जो किसी ऐसे ओहदेपर है जिसके आज्ञानुसार उसको उस अधिकारी मनु कानूनानुसार मनुष्योको तजवीज या कैदके लिये सिपुर्द करने ध्यकी तजवीज मुकद्दमा या कैद करनेका अधिकार प्राप्त है उस अधिकारके वत्रिमे किसी या कैदके लिये सिपुर्रकर- ना यह जान बूझकर कि मनुष्यको कुप्रयोजन या ईर्षासे तजवीज या कैढके लिये मिपुर्द मैं कानूनविरुद्ध करता हू करे या कैद रक्खे यह जानकर कि ऐसा करनेमे में कानूनविरुद्ध बर्ताव करता हूं तो उसको दोनो प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैठका टड दिया जावेगा जिसकी मीमाद सात वर्षतक होसकती है या जुर्मानेका ढड या दोनों दृढ लिये जावेगे। टीप- (१) अदालत सेशन (२) पोलीम दस्तन्दाजी नहीं करसकती (३) अपरावीक नाम वारट जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है। १-एक कैदीको जो तजवीजके लिये भेज दिया गया था दिग्टी मजिस्ट्रेटने छोडदिया और सब इन्सपेक्टरने उसको उसी अपगवके मव्यै फिर गिरफ्तार करके चालान करदिया । डिवी मजिस्ट्रेट ने दूसरी गिरफ्तारीको कानूनविरुद्ध समझा और इसलिये उपरोक्त सब इन्सपेक्टर पर अनुचिन कैद (हन्स वेजा ) में रखनेका दड प्रमाणित करके उसपर जुर्माना किया तजवीज हुई कि डिप्टी मजिस्टेटकी आजा बहुत ठीक थी। (बीकी रिपोर्टर जिल्ट १९ सफा २६) (२२१ ).यदि कोई मनुष्य जो सरकारी नौकर है और जिसपर अपनी सरकारी निस सरकारी नौकरी नौकरी करनेके कारणसे किसी ऐसे मनुष्यका गिरफ्तार पर किसीका पकडनाका- करना या कैदमे रखना कानूनानुसार अवश्य है जिसपर किसी नूनानुसार अवश्य होउ- अपराधका दोप लगाया गया है या जो, किसी अपरावके मध्ये सकी ओरसे पकडनेमें जानबूझकर चूक करना.) गिरफ्तार किये जानेके योग्य है उस मनुष्यके गिरफ्तार करनेमे जानबूझकर चूक करे या जानबूझकर उस मनुष्यको उस कैटसे भाग जाने दे या भाग जानेके उद्योगमें जानबूझकर सहायता करे तो उसे नीचे लिखे अनुमार ढड दिया जायेगा अर्थात्,- दोनो प्रकारोमेंसे किमीप्रकारकी कैद जिसकी मीआद सान वर्पतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा, यदि उस मनुष्यपर जो कैटमे याँ या जिसका गिरफ्तार किया जाना उचित था ऐसे अपराधका दोष लगाया गया हो या ऐसे अपराधके लिये वह गिरफ्तार किये जानेके योग्य था जिसके बदलेमे षधका दड ठहराया गया है या,- दोनो प्रकारों से किसी प्रकारका कैद जिसकी मीआद तीन वर्षतक होसकती है जुर्मा- नेके सहित या बिना जुर्माने, यदि उस मनुष्यपर जो कैढमें था या जिसका गिरफ्तार किया } [अध्याय- (१३४) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। जाना उचित था ऐसे अपराधका दोष लगाया गया हो या ऐसे अपराधके लिये वह गिरफ्तार किये जानेके योग्य हो जिसके बेदलेमे देश निकालेका दड या ऐसी कैदका दड ठहराया गया है जिसकी मीआद दश वर्पतक हो सकती है, या- दोनों प्रकारों में से किसी प्रकारका कैदका दड जिसकी मीभाद दो वर्षतकं होसकती जुर्माने सहित या विना जुर्मानेके, यदि उस मनुष्यपर जो कैदमें था या जिसका गिरफ्तार किया जाना उचित था ऐसे अपराध का दोष लगाया गया हो या ऐसे अपराधके मध्ये वह गिरफ्तार किये जानेके योग्य हो जिसके बदलेमें दश वर्षसे कम मीआदके कैदका दंड ठहराया गया है। (देखो दफा ४०) (१) अदालत सेशन या प्रे० म० या म० अ० या म० दो० (२ ) पोलीस दस्तन्दाजी नही करसकती (३) अपराधीके नाम वारट जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नही होसकता। १-यदि कोई चौकीदार किसी ज्ञातघातके अपराधीको अपने मोजके बाहर किसी विशेष मनु- ध्यके कहनेपर गिरफ्तार करनेसे नाही करे तो वह हिन्दुस्थानके दंडसंग्रहको दफा २२१ के अभिप्रायानुसार ( हस्वमयाय ) दड योग्य नहीं है । (इ० ला. रि• इलाहाबाद जिल्द३ सफा ६०) ( २२२ ) यदि कोई मनुष्य जो सरकारी नौकर है और जिसपर अपनी सरकारी नौ, -किसी सरकारी नौक- करी करनेके कारणसे किसी ऐसे मनुष्यका पकडना या कैदमें रखना रकी ओरसे जानबूझकर किसी ऐसे मनुष्यकी गि- कानूनानुसार उचित है, जिसको किसी कोर्ट आफ जस्टिसने दडकी रफ्तारीमें चूक करना कि आज्ञा दी हो या जो कानूनानुसार चौकसीमें रक्खा गया हो उस मनु- जिसके मध्ये कोर्टआफन- व्यके पकडनमें जान बूझकर चूक करे या उस मनुष्यको जानबूझकर स्टिसने दंडकी आज्ञा की हो और उस सरकारी : कैदसे माग जाने दे या उस कैदसे माग जाने या भाग जानेके उद्यो- नौकरको भी जिसका गमे जानबूझकर उस मनुष्यकी सहायता करे तो उसे नीचे लिखे गिरफ्तार करना कानूना- नुसार अवश्य हो, अनुसार दड दिया जावेगा, अर्थात्,- देश निकालेका दड या दोनों प्रकारोंमेंसे किसी प्रकारको कैद जिसकी मीआद चौदह वर्षतक हो सकती है जुर्माने सहित या बिना जुर्मानेके, यदि उस मनुष्यके मध्ये जो कैदमे था या जिसका पकडा जाना उचित था बधक दडकी आज्ञा होचुकी हो, या; या- दोनों प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैद जिसकी मीआद सात वर्षतक होसकती है जुर्मानेसहित या विना जुर्मानेके, यदि वह मनुष्य जो कैदमें था . - या. जिसका ग्यारहवा ११.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६०ई०। पकडा जाना उचित था किसी कोर्ट आफ जस्टिसके दंडकी आज्ञा या उस दचकी आजाके तवादिलेके अनुसार जन्म मरके देश निकाले या कैदकी अवस्थामे जन्ममरकी दड सेवा या दशवर्ष अथवा अधिक मीआदके देश निकालेका दड या कैदकी अवस्थामे दंड सेवा या कैटके योग्य हो, या, A दोनो प्रकारोमैसे किसी प्रकारको कैद जिसकी मीआद तीन वर्षतक होसकती है जुर्मानेसहित या विना जुर्माने या दोनो दड, यदि वह मनुष्य जो कैदमें था या जिसका पकडा जाना उचित था किसी कोर्ट आफ जस्टिसकी दड आज्ञाके अनुसार ऐसी फैदके योग्य हो जिसकी मीआद दश वर्षसे कम हो यदि वह मनुष्य कानूनानुसार चौकसीमे रक्खा गया हो। (दफा ४० को देखो ) (दफा ८ ऐक्ट न० २७ सन् १८७० ई० को भी देखो) जाने दे. टीप-(१) अदालत सेशन या प्रै० म० या म० अ० (२) पोलीस दस्तन्दाजी नहीं कर सकती (३) अपराधीके नाम वारट जारी होगा (४) मुकद्दमेकी छोयाई बडाईके अनुसार जमानत होसकती है और नहीं भी होसकती (५) राजीनामा नहीं होसकता। ( २२३ ) कोई मनुष्य जो सरकारी नौकर है और जिसपर उसकी सरकारी नौकरी सरकारी नौकर असा-} करनेके कारणसे किसी ऐसे मनुष्यका कैदमे रखना कानूनानुसार वधानीसे कैदसे भाग उचित है उसपर किसी अपराधका दोष लगाया गया हो या जो किसी अपराधका अपराधी प्रमाणित हुआ हो या जो कानूना. नुसार चौकसीमे रखा गया हो असावधानीसे उस मनुष्यको कैदसे भाग जाने दे तो उसको साधारण कैदका दर्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद दो वर्षतक होसकती है या जुर्मानेका दड या दोनों दद दिये जायेंगे। टीप-(१)प्रै० म० या म० अ० या म. दो० (२) पोलीस दस्तन्दाजी नहीं करसकती ३) अपराधीके नाम समन जारी होगा (४ ) जमानत होसकती है ( ५ ) राजीनामा नहीं है। वाजिदहुसेन कानूनानुसार पोलीसके सिपुर्द चौकसीमे किया गया अशरफ अली को उचित था कि वह उस समयतफ वाजिदहुसेनको चौकसीमे रखता जबतक कि वह कानूनानुसार छूट न जाता-इसलिये अगरफ अलीको जिसने वाजिदहुसेन को चौकसीमें रखनेको असावधानीकी दफा २२३ के अपराधमे नीतिपूर्वक दडदिया गया । ( इ. ला. रि• इलाहाबाद जिल्द ६ सफा १२९) २--दडसग्रह हिन्दुस्थानकी दफा २२३ का केवल ऐसे मुकदमोसे सम्बन्ध है जिनमें कि वह मनुष्य जिसको भाग जाने दिया हो चौकसी ( हिरासत ) में किसी अपराधके मध्ये हो या सिपुर्द किया गया हो न कि उन मुकद्दमोंसे सम्बध है जिनम कि ऐसे मनुष्यकी केवल गिरफ्तारी दीवानीके हुक्मनामेके अनुसार कीगई हो ।(इ. ला. रि० कलकत्ता जिल्द १२ सफा १९०) . (१३६) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- ( २२४ ) जो कोई मनुष्य किसी ऐसे अपराधके मध्ये जिसका दोप उस पर लगाया कोई मनुष्य जो अपनी) गया हो या जिसका वह अपराधी प्रमाणित हो चुका हो अपने उचित गिरफ्तारीमें सा / नीतिपूर्वक पकडे जानेमे जानबूझकर किसी प्रकारका सामना करे मना या रोक टोक करे. या कानूनविरुद्ध रोक टोक करे या किसी चौकसीसे जिसमें उपरोक्त अपराधके कारण वह कानूनानुसार बंदी है भाग जाए या भाग जानेका उद्योग करे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जायगा जिसकी मीआद दो वर्पतक हो सकती है या जुर्मानेका दंड या दोनों दण्ड दिये जावेगे। ( देखो दफा ४०) स्पष्टीकरण-इस दफाका दड उस दण्डके अतिरिक्त है जिसका वह मनुष्य जो गिरफ्तार किये जानेको हो या जो चौकसीमें बन्दी हो, उस अपराधके बदलेमे दण्ड योग्य हो, जिसका दोष उसपर लगाया गया या जिसका वह अपराधी प्रमाणित हो । सैप-(१)प्रे० म० या म० अ० या म. दो. (२) पोलीस दस्तन्दाजी कर सकती है ( ३) अपराधीके नाम वारट जारी होगा (४) जमानत होमकती है ( ५ ) रानीनामा नहीं है। १-एक मनुष्य जब कि उसको मजिस्ट्रेट के सामने इस अभिप्रायस लिये जाते थे कि उससे नेक चाल चलनकी जमानत ली जावे, चौकसीसे भाग गया तजवीज हुई कि वह दडसग्रह हिन्दुस्था- नकी दफा २२४ या २२५ के अपराधका अपराधी न था, क्योकि वह किसी अपराधके मध्ये चौकसीमें न रक्खा गया था। (इ. ला.रि कलकत्ता जिल्द ८ सफा ३३१) २--अपराधी चरीमें पकडा जाकर देहाती मजिस्ट्रेट के सिपुर्द हुआ जिसन उसको देहाती नौकरोंकी चौकसीमे थाने पुलीसको भेज दिया, अपराधी रातेम भाग गया, उसकी तजवीज दडसग्रह हिन्दुस्थानकी दफा २२४ के अपराधमें हुई। ( इ. ला० रि० मदराम जिल्ल १० सफा ४८०) ३-जिस मनुष्यको गांवके चौकीदारने चोर समझकर पकडा हो और उसकी हाजिरीकी पोलीसमै आवश्यकता हो और वह उस चौकीदारकी चौकसीम माग जावे तो हिन्दुस्थानके दंड सग्रहको दफा २२४ के अपराधका अपराधी नहीं है । ( इ० ला० रि० मदरास जिल्द ५ सफा २२) ( २२५ ) जो कोई मनुष्य, किसी अपराधके मध्ये किसी दूसरे मनुष्यके नीति किसी दूसरे मनुष्य-) पूर्वक पकडे जानेमें जानबूझकर किसी प्रकारका सामना करे की उचित गिरफ्तारीमे या कानूनविरुद्ध रोक टोक करे या किसी चौकसीसे जिसमें सामना या रोक टोक उपरोक्त अपराधके कारण वह मनुष्य कानूनानुसार बंदी करना. छुडाले जाए या छुडा लेजानेका उद्योग करे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारों - ग्यारहवा ११.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०। (१३७) मैसे किसी प्रकारके अपराधका दह दिया जावेगा जिसकी मीआद दोवर्पतक हो सकती है या जुर्मानेका दड या दोनो दड दिये जावेगे, या, यदि वह मनुष्य जो पकडे जानेको हो या जो छुडाया गया या जिसके छुडानेका उद्योग किया गया हो, उसर ऐसे अपराधका दोप लगाया गया हो या ऐसे अपराधके मध्ये वह पकडे जानेके योग्य हो जिसके बदलेमें देश निकाले, या केदका ढड ठहरा हुआ है जिसकी मीभाद दश वर्पतक होसकती है तो उसको दोनों प्रकारोंमेंसे किसी प्रकारकी कैठका दण्ड दिया जायगा जिसकी मीाद तीन वर्पतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा, या- यदि उस मनुष्यपर जो पकडे जानेको हो या छुडाया गया या जिसके छुडानेका उद्योग किया गया हो, उसपर ऐसे अपराधका दोप लगाया गया हो या एस अपराधके मध्ये वह पकडे जानेके योग्य हो जिसके बदलेमे वधका दण्ड ठहरा हुभा है तो उसको दोनों प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावंगा जिसकी मीआद मातबर्पतक होसकती है और वह जुर्माने के भी योग्य होगा, या,- यदि वह मनुष्य, जो पकडे जानेको हो या जो छुड़ाया गया या जिसके छुडानेका उद्योग किया गया हो, किसी कोर्ट आफ जस्टिसकी दडाना या उस दडाज्ञा : सजाका हुक्म ) के तबादिलेके अनुसार देश निकाले या दशवर्ष अथवा इससे अधिक मीआदके देश निकाले या कैदकी अवस्था में संवादड या कटके योग्य हो तो उसको दोनो प्रकारों से किसी प्रकारको कंदका दण्ड दिया जायगा जिसकी मीआढ सातवर्पतक होसकती है और वह जुर्मानेके मी योग्य होगा, या,- यदि वह मनुष्य, जो पकडे जानेको हो या छुडाया गया या जिसके छुडानेका उद्योग किया गया हो उसके मध्ये वधदडको आना होचुकी हो तो उसको देश निकालेका दड या दोनों प्रकारोमेंसे किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जायगा जिसका मीआद दश वर्षसे अधिक न हो और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा (दफा ४० को देवो ) टीप-(१) अदालत सेशन या गै० म० या म० अ० या म० दो० मुकदमैके अनुसार (२) पोलीस दस्तन्दाजी कर सकती है (३) अपराधीके नाम बारट जारी होगा (४) जमानत होसकनी है और नहीं भी होसकती, इसका रोना न होना मुकद्दमेकी छोटाई बडाई पर निर्भर है (५) राजी- नामा नहीं है।

(१३८) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [ अध्याय- १--हिन्दुस्थानके दंडसंग्रहकी दफा २२५ का अपराध प्रमाणित करनेके लिये यह अवश्य नहीं है कि चौफसी जिससे अपराधी छुड़ा लिया जावे पोलीसकीही चौकसी हो, इतनाही प्रमाण बहुत है कि ऐसी चौकसी हो जो 'कानूनानुसार उचित हो इसलिये किसी मनुष्यकी साधारण चौकसीसे छुडा लेजाना जिसने चोरको चोरी करनेमे पकडा है एक अपराध है । इडियन ला रिपोर्ट मदरास जिल्द ११ सफा ४४१.) २--इसके पहिले कि जब किसी मनुष्यपर हिन्दुस्थानके दंडसग्रहको दफा २२५ का अपराध प्रमाणित किया जावे इस वातके प्रमाणित होनेकी आवश्यकता है कि वह मनुष्य, जिसके वचानेका अपराध अपराधीपर लगाया गया था, वचाए जानेके समय उचित चौकसीमें था। वीक्ली रिपोर्टर जिल्द २१ दफा २२) ( २२५ * ) (अ+ ) जो कोई मनुष्य सरकारी नौकर होकर अपनी सरकारी- ऐसी अवस्थामे सरका- 7 नौकरीके ओहदेसे कानूनानुसार किसी मनुष्यको किसी ऐसी अवस्थामें री नौकरकी ओरसे पकडे पकडने या कैदमे रखनेका अधिकारी है, जिसके मध्ये दफा २२१ जाने की चूक या भाग जाने देना जिसके मध्ये या दफा २२२ या दफा २२३ या किसी और समयके प्रचलित. और प्रकारकीआजा नही.] कानूनमें कोई आज्ञा नहीं लिखी तो ऐसे मनुष्यको गिरफ्तार करनेमें चूककरे या उसको कैदसे माग जानेदे तो उसको निम्न लिखित दड दिया जायगा । (क) यदि उपरोक्त नौकर जानबूझकर उस कामको करे तो उसको दोनों प्रकारों- मेसे किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जायगा जिसकी मीआद तीन वर्षतक होसकती है या जुर्मानेका दह या दोनों दड दिये जावेगे । टीप--(१) अदालत सेगन या गै० म० या म० अ० (२) पोलीस दस्तन्दाजी नहीं करसकती (३) अपराधीके नाम वारट जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नही है। - (ख ) यदि उससे वह काम असावधानीसे होजाए तो उसको साधारण कैदका दंड दिया जायेगा जिसकी मीआद दोवर्पतक होसकती है या जुर्मानेका दंड या दोनों दड दिये जावेगे। (१) ० म० या म० अ० या म० दो० (२) पोलीस दस्तन्दाजी नहीं करसकती अपराधीके नाम समन जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है । * दफा २ (१४) ऐक्ट १० सन् १८८६ ई. को देखो। + इस संग्रहके अध्याय ४ व ५ उन अपराधोसे सम्बंध रखते है जो इस दफाके अनुसार दण्ड योग्य है ( दफा १३ ऐक्ट २७ सन् १८७० ई० को देखो) - ग्यारहवाँ ११. ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई०। (१३९) ना या भागनाना या - ( २२५ ) - (व)जो कोई मनुष्य जानबूझकर किसी ऐसी अवस्थामे जिसके ऐसी अवस्थामें नीति-) मध्ये दफा २२४ या दफा २२९ मे या किसी और समयके प्रच- पूर्वक पकडे जानेम सा- लित कानूनमें कुछ आज्ञा नहीं लिखी अपने या किसी और मनु- मना या रोक टोक कर- व्यके नीतिपूर्वक पकडे जानेमें सामना या कानून विरुद्ध रोक टोक करे या उस चौकसीसे भाग जावे या भाग जानेका उद्योग करें छुडा लेना जिमके मध्ये और प्रकारकी आजा न जिसमे वह नीतिपूर्वक बदी हो या किसी और मनुष्यको छुडा ले हो. या छडा लेनेका उद्योग करे जिसमें वह मनुष्य नीतिपूर्वक बदी हो तो उस्को दोनो प्रकारोमेंसे किसी प्रकारकी कैदका दंड दिया जायगा जिसकी मीआद छः महीनेतक हो सकती है या जुर्मानका दढ या दोनो दण्ड दिये जावेगे। टीप-(१) प्रे० म० या म० अ० या म० दो० (२) पोलीस दस्तन्दाजी करसकती है ३) अपराषीके नाम वारट जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है। ( २२६ ) यदि कोई मनुष्य जिसको कानूनानुसार देश निकालेका दण्ड होचुका- अनुचित रीतिसे देश ) हो वह जव कि अपनी ठहराई हुई मीआद भुगत जानेसे पहिले निकालनेसे लौट आना, या अपना दण्ड माफ किये जानेके बिना लौट आवेगा तो उसको जन्मभरके लिये देश निकालेका ठण्ड दिया जायगा और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा और इस देश निकालेके दण्डको वर्तावमें लानेसे पहिले कठिन कैदके योग्य होगा जिसकी मीाद तीन वर्षसे अधिक न हो। टीप-(१) अदालत सेशन ( २) पोलीस दस्तन्दाजी कर सकती है (३) अपराधीके नाम बारट जारी होगा (४) जमानत नहीं होसकती (५) राजीनामा नहीं है । ( २२७ ) कोई मनुष्य, जिसने दण्ड माफ होनेके लिये कोई नियम स्वीकार किये दडकी माफीके नि.) हो जानबूझकर किसी नियमके विरुद्ध करे जिसपर वह माफी बमोका तोडना. स्वीकार कीगई है तो उसको वही दण्ड दिया जावेगा जिसकी भाज्ञा उसके मध्ये पहले हो चुकी हो यदि उसने उस दण्डका कोई भाग भुगता न हो और यदि वह उस दण्डका कोई भाग ( जुज ) भुगतचुका हो तो उपरोक्त दण्डके उतनेही माग- का दण्ड दिया जायेगा जो उसने नहीं भुगता । टीप-(१) वह अदालत जिसने असली अपराधकी तजवीज की हो (२) पोलीम दस्त- न्दाजी नही करसकती (३) अपराधीके नाम समन जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नही है। * दफा २४ (१) ऐक्ट १० सन् १८८६ ई० को देखो।

(१४०) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- ( २२८ ) जो कोई मनुष्य जानबूझकर किसी सरकारी नौकरका अपमान करे या जानबूझकर किसी किसी प्रकारसे किसी नौकर सरकारीका विघ्नकारक ( हारिज ) सरकारी नौकरका अप हो जब कि वह सरकारी नौकर अदालतकी कार्रवाईकी किसी मान करना या विघ्न डा- लना जब कि वह अदा- / अवस्थामें इजलास कर रहा हो तो उसको साधारण कैदका लतकी किसी कार्रवाई दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद छः महीने तक होसकती की किसी अवस्थामे इ. जलास कर रहा हो. है या जुर्मानेका दण्ड जो १०००) रु. तक होसकता है या दोनों दड दिये जावेगे। टी-(१) वह अदालत जिसमे अपराध किया गया (२) पोलीस दस्तन्दाजी नही कर सकती (३) अपराधीकै नाम समन जारी होगा (४) जमानत हो सकती है (५) राजीनामा नहीं है। १-अपराधीने जानबूझकर मुसिफ देहीको मजिस्ट्रेटी अधिकारकी कार्रवाई करनेमे भला बुरा कहा, मजिष्ट्रेट दर्जा दोयम ने अपराधी पर दफा २२८ का अपराध पोलीसकी रिपोर्टपर कायम करके उसपर अपराध प्रमाणित किया-तजवीज हुई कि अपराधकी तजवीज ठीक थी और दफा ४४० व ४८४ मजमूआ जाब्ता फौजदारीका देही मुसिफोसे सम्बन्ध नहीं है ( इ. ला. रि० मदरास जिल्द १५ सफा १३१) २-पहिले इसके कि अपराधीपर दफा २२८ का अपराध प्रमाणित कियाजाय. इस बातका प्रमाणित होना आवश्यक है कि अपराधी रज पहुँचानका अभिप्राय रखता था । ( चीकी रिपोर्टर जिन्द १५ सफा ६२) ३-प्रश्नोंका स्पष्ट उत्तर देनेसे नाहीं करना दडसग्रह हिन्दुस्थानकी दफा २२८ के अपराधम - न गिना जायगा । (रिपोर्ट हाईकोर्ट बबई जिल्द ४ सफा ७) ( २२९ ) जो कोई मनुष्य दूसरा मनुष्य बन जानेसे या किसी और प्रकारसे जान ज्यूरी या असेसर बूझकर यह बात कराये या जानबूझकर यह बात होने है कि उसका नाम उन लोगोंकी फिहारस्तमें लिखा हो जो ज्यूरी वना- नेकी योग्यता रखते है या वह ज्यूरी हो या उससे ज्यूरी या असेसरको भांति पर शपथ लिया जावे किसी ऐसे मुकढमेमें जिसमे वह जानता है कि वह कानूनानुसार ऐसी ज्यूरीकी फिहरिस्तमे लिखे जाने या ज्यूरी बनाये जाने या शपथ लिये जानेका अधि- कारी नहीं है या यह जानकर कि वह कानूनविरुद्ध ऐसी ज्यूरीकी फिहरिस्तमे लिखा गया या ज्यूरी बनाया गया है या उससे शपथ लीगई है, जानबूझकर ऐसे ज्यूरीमें या ऐसे असेसरका काम दे तो उस मनुष्यको दोनो प्रकारोमेसे किसी प्रकारको कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद दो वर्षतक होसकती है या जुर्मानेका दण्ड या दोनो दण्ड दिये जावेगे | (१) प्रे० म० या म० अ० । और सब कार्रवाई टफा २२८ के अनुसार होसकती है। -- बनाना. ।

'वारहवा १२.] (१४१) ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई० । अध्याय बारहवाँ १२. सिक्को और गवर्नमेटके स्टाम्प सम्बन्धी अपराधांके विषयमें। (२३०) * शुद्ध हुआ दफा १ ऐक्ट ६ सन् १८९६ ई. | सिका वह वातु है जो कि मौजूद होनेके समय द्रव्यकी भॉति काममे आवे और किसी सिक्का सरकार अथवा उस समयके राजाकी आज्ञासे इस प्रकार प्रचलित होनेके अभिप्रायसे मुहर किया गया और जारी किया गया हो । श्रीमती महारानीका सिक्का वह धातु है जो श्रीमती महारानी या गवर्नमेंट हिह या किसी प्रेजीडसीकी गवर्नमेट या किमी और गवर्नमेटकी जो श्रीमती महारानीकी राज्यमे हो, आज्ञानुसार द्रव्यकी मॉति प्रचलित होनेके लिये टप्पा किया और जारी किया गया हो और वह धातु जो इस प्रकारपर ठप्पा किया और जारी किया गया हो इस अध्यायके अभिप्रायक लिये श्रीमती महारानीका सिक्का ठहरेगा यह समवित मानकर कि इस कामके लिये उसका प्रचलित होना बढ होगया हो। उदाहरण। क) कौडियां सिक्का नहीं हैं। (ख) बिना ठप्पा किये हुए तावेके टुकडे सिक्का नही है चाहे वह द्रव्यकी भाँति कामम आते हो। ग) तमगे सिक्का नहीं है क्योंकि वे व्यकी भाँति काम आनेके अभिप्रायसे नहीं बनाये जाते। घ) सिका जो कम्पनीका रुपया कहलाता है श्रीमती महारानीका सिक्का है। (च) फर्रुखावादी रुपया जो गवर्नमेंट हिन्दकी आगानुसार पहले रुपयाकी भाति प्रचलित या श्रीमती महारानीका सिक्का है परंतु अव अपर लिखे अनुमार उनका चल्न नही रहा है। (२३१) जो कोई मनुष्य खोटा सिक्का वनावेगा, अथवा खोटा सिक्का बनानेके कामोंमेसे जानबूझकर कोई काम करेगा तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों खोय सिक्का बनाना. प्रकारोमेंसे किसी प्रकारको कैदका दड दिया जायगा जिसकी मीआद सात वर्पतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। * एक्टे न. १९ सन् १८७२ ई० को देखो।

[अध्याय- (१४२) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। स्पष्टीकरण-वह मनुष्य इस अपराधका अपराधी होगा जो धोखा देनेके अभिप्रायसे या इस जानकारीसे कि उसके द्वारा धोखेका चल जाना सम्भव है किसी असली सिक्केको ऐसा कर दे कि वह किसी और सिकेके समान जानपडे । टीप-(१) अदालतसेशन (२) पोलीस दस्तन्दाजी करसकती है ( ३ ) अपराधीकै नाम चारट जारी होगा (४) जमानत नहीं होसकती (५) राजीनामा नहीं है। १-यदि कोई सिक्के बदले बाजारमें मालमिलना मम्भव हो तो कहाजायगा कि वह सिक्का नकद है, अकबर बादशाहके समयका सिक्का बनाना टफा २३० व २३१ के अपराधम न गिना जायगा क्योकि वह सिक्का सर्व साधारणके काममें नहीं आता । (रिपोर्ट हाईकोर्ट बम्बई जिल्द ११ सफा १७२) ( २३२ ) जो कोई मनुष्य श्रीमती महारानीका सिक्का खोटा वनावेगा अथवा खोटा श्रीमती महारानीका ) बनानेके कामोंमेसे कोई काम जानबूझकर करेगा तो उपरोक्त खोय सिका बनाना. मनुष्यको देश निकालेका दण्ड या दोनो प्रकारोमेंसे किसी प्रकारको कैदका दण्ड दिया जायगा जिसकी मीआद दश वर्पतक होसकती है और वह जुर्मानेकेमी योग्य होगा। . टीप-दफा २३१ के अनुसार है। १----इस दफाके अनुसार अपराध प्रमाणित करने के लिये इस अभिप्रायका होना कि जो सिक्का खोटा बनाया गया वह श्रीमती महारानीके सिक्केके समान काममे आवेगा या यह जानकर कि उस सिक्केका श्रीमती महारानीके सिक्के के समान काममे आनेका सम्भव है,। अवश्य है जानकारी या अमि- प्राय उपरोक्त सिक्केके खोटेपन परही निर्भर है, सिवाय उन अवस्थाओंके कि जो भली भांतिसे उसको रद करती हो-परंतु जब कि ऐसी धोखेबाजी केवल नुमायश ( शोमा) के लिये ही की गई हो और जब कि ऐसा धोखा अनुचित लाभ या हानिके लिये किया गया हो, तो इन दोनों अव- स्थाओंका अतर देखना चाहिये जो धोखा केवल नुमायके लिये किया गया हो उममे अपराध नहीं होसकता । (पंजाब रिकार्ड न० २६ सन् १८६८ ई.) . ( २३३) जो कोई मनुष्य कोई ठप्पा या औजार वनाए या उसकी मरम्मत करे खोटा सिका बनाने या उसके बनाने या मरम्मत करनेके कामों से कोई काम करे लिये औजार बनाना या या उसको मोलले या बेचे या अपने अधिकारसे अलग करे इस अभिप्रायसे कि वह खोटा सिक्का बनाने के काममें आए या यह जावकर या निश्चय करनेका कारण रखकर कि उसका खोटा सिक्का बनानेके काममें लाया जाना अति सम्भवित है तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारों से किसी प्रकारको वेचना.

. थवा बेचना बारहवाँ १२.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई० । (१४३) कैदका दण्ड दिया जायगा जिसकी मौआद तीन वर्षतक होसकती है और वह जुमानेके भी योग्य होगा। टीप-(१)अदालतसेशन या म० अ०-और सब शेष आत टफा २३१ के अनुसार है। ( २३४ ) जो कोई मनुष्य कोई ठप्पा या औजार बनाए या उसकी मरम्मत करे या श्रीमती महारानीका । उसके बनाने या मरम्मत करनेके कामोमेंसे कोई काम करे या उसको खोय सिक्का बनानेके | मोलले या बेचे या अपने अधिकारसे अलग करे, इस अभिप्रा- "लिये औजार बनाना अ- यसे कि वह श्रीमती महारानीका खोटा सिक्का बनाने के लिये काममे गया जावे या यह जानकर या निश्चय करनेका कारण रखकर कि यह श्रीमती महारानीका खोटा सिक्का बनानेके निमित्त काममे आनेके अभिप्रायसे है तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जायेगा जिसकी मीआद सात वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानके मी योग्य होगा। टीप-दफा २३१ के अनुसार समझो। ( २३५ ) जो कोई मनुष्य कोई औजार या सामान अपने पास रखता हो, इस अमि. औजार या सामानको) पायसे कि वह खोटा सिक्का बनानेके काममे लाया जावे. या यह खोटा सिक्का बनाने जानकर या निश्चय करनेका कारण रखकर कि उसका उस प्रयोजन अभिप्रायसे अपने पास के लिये काममें लाए जानेका अभिप्राय है तो उपरोक मनुष्यको दोनों प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीमाद तीन वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा और यदि सिक्का जो खोटा बनाए जानेको है श्रीमती महारानीका सिक्का है तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोंमेसे किसी प्रकारको कैदका दा दिया जावेगा जिसकी मीआद दशवर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके पी योग्य होगा। मा खना. . टी०-(१) अदालतसेशन या प्रे० स० या म० अ० यदि सिका महारानीका है तो अदा- तसेशन (२) पोलीस दस्तन्दाजी करसकती है (३) अपराधीके नाम वारट जारी होगा (४) अमानत नहीं है (५) राजीनामा नहीं है। ( २३६) कोई मनुष्य जो ब्रिटिश इंडियाको सीमाके भीतर हो ब्रिटिश इण्डियाको हिन्दुस्थानमें रहकर ) सीमोसे बाहर खोटा सिक्का बनानेमे सहायता करे तो उपरोक्त मनु- हिन्दुस्थान के बाहर खोया व्यको उसी प्रकार दंड दिया जावेगा कि मानों उसने ब्रिटिश सिक्का बनानेके लिये स- हायता देना. इण्डियाको सीमाके भीतर उस खोटे सिकेके बनानेमें सहायता की। टीप-दफा २३१ के अनुसार समझते ।

(१४४) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह । [अध्याय- ( २३७ ) जो कोई मनुष्य कोई खोटा सिका ब्रिटिश इण्डियाके भीतर लाए या खोटे सिक्कको भीतर उससे बाहर लेजाये यह जानकर या निश्चय करनेका कारण रख- लाना या बाहर लेजाना. कर कि वह खोटा तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जायगा जिसकी मीआद तीन वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीपं--(-१) अदालत सेशन या प्रे० म० वा म० अ० (२) पोलीस दस्तन्दाजी कर सकती है (३) अपराधीके नाम वारट जारी होगा (४) जमानत नहीं होसकती (५) राजीनामा नहीं है। (२३८) जो कोई मनुये कोई खोटा सिक्का जिसको जानता या निश्चय करनेका श्रीमती महारानीके कारण रखता हो कि वह श्रीमती महारानीका खोटा सिक्का है खोटे सिक्केको भीतर ब्रिटिश इण्डियाके भीतर लाये या उससे बाहर ले जाये, तो उप- लाना या बाहर लेजाना. रोक्त मनुष्यको देश निकालेका दण्ड या दोनो प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीआद दश वर्षतक होसकती है और वह जुर्मा- नेके भी योग्य होगा। टीप-दफा २३१ के अनुसार समझो। ( २३९ ) कोई मनुष्य जिसके पास कोई खोटा सिक्का हो और जिसको उसने अपने अधिकारमे लेते समय अधिकारमें लेते समय खोटा जाना हो उस सिकेको छलसे या उल जिस सिक्केको जानागया किये जानेके अभिप्रायसे किसी मनुष्यके सिपुर्द करे या किसी हो कि यह खोटाहै उसे मनुष्यको उसके लेनेके लिये फुसलानेका उद्योग करे तो उपरोक्त किसी दूसरेके मिपुर्द मनुष्यको दोनों प्रकारो से किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जा- यगा जिसकी मीआद पाच वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप---दफा २३७ के अनुसार जानो । १--(क) और (ख) दोनो मनुष्योंको साथही दफा २३९ के अपराधमे दण्ड हुवा, (क) ने कहा कि मैने सिक्का (ख) से पाया है और उपरोक्त सिका कुछ मनुष्योंको (ख) के ही कह से दिया-तजवीज हुई कि (क) के बयानोका (ख) से सम्बन्ध है जब वह अपराधी, मनुष्य किसी एकही अपराधको जो एकही मामलेसे हो करे तो एक मनुष्यका बयान दूसरे मनुष्यके मुकाबिले काममे आसकता है चाहे उससे वह स्वयंही फँसता हो और उसने उसके मध्ये दूसरा अपराध कायम होता हो । ( इ० ला• रि० बम्बई जिल्द ८ सफा २३३) २-दफा २३९ का सिक्का बनाने वालेसे सम्बध नहीं है बरन दूसरे मनुष्यसे सम्बव है, जो कोई खोय सिका लेकर या प्राप्त करके किसीको सिपुर्द करे । (रिपोर्ट पश्चिमोत्तर देश जिल्द ३ करना. सफा १५०) वारहवा १२.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई० । (१४५) ( २४० ) कोई मनुष्य जिसके पास कोई ऐसा खोटा सिक्का हो जो श्रीमती महारा- अधिकारमे लेते समय ) नीका खोटा सिका है और जिसको उसने अधिकारमे लेते समय जिस सिकेको जाना गया श्रीमती महारानीका खोटा सिक्का जाना हो उस सिक्केको छलसे हो कि यह श्रीमती महा या छलके लिये जानेके अभिप्रायसे किसी मनुष्यको देवे या किसी रानीका खोटा सिका है उसे किसी औरके मिपुर्द मनुष्यको उसके लेनेके लिये फुसलानेका उद्योग करे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोमेंसे वि.सी प्रकारकी कैदका दड दिया जायगा जिसकी मीआद दश वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। करना. टीप-दफा २३७ के अनुसार जानो। ( २४१) जो कोई मनुष्य कोई खोटा सिक्का जिसको वह खोटा जानता हो, खरे सिक्केकी भाति ) परन्तु उसको अधिकारमें लेते समय खोटा न जाना हो, देना किसी मनुष्यको | खरे सिक्केके समान किसी दूसरे मनुष्यको देवे या उसके टेनेका कोई ऐसा सिका जिस उद्योग करे या उसको उसके लेनेके लिये फुसलावे को देनेवालेने अपने पास उसको दोनो प्रकारोमेंसे किसी प्रकारको कैदका दद दिया आनेके समय खोटा न जायगा या उस जुर्मानेका दड जो उस खोटे सिक्केमे दश गुणेतक हो दिया जायगा या दोनो दड दिये जावेंगे। तो जाना हो उदाहरण। शिवशकर किसी सराफने कम्पनीके खोटे रुपये अपने साथी रमाशकरको चलानेके लिये दिये और रमाशकरने वे रुपये उमाशकरको वैचे और उमागकरने यह जानबूझकर कि ये खोटे हैं मोल ले लिये फिरउमाशकरनेवे रुपये हरणकरको जिन्सके बदले दिये और हरशकरने खोटे न जानकर ले लिये और लेलेने से पीछे हरशंकरने जान लिया कि ये रुपये खौटे है परतु फिर भी खरेकी भाति कहीं चला दिये तो यहां हरशकर इसी दफाके अनुसार दण्ड योग्य होगा परतु रमाशकर और उमाशकर दफा २६९ या २४० के अनुसार जैसी अवस्था होगी दड पायेंगे। टीप-(१) प्रे० म० या म० अ० या म० दो० (२) पोलीस दस्तन्दाजी करसकती है (३) अपराधीके नाम वारट जारी होगा (४) जमानत नहीं है (५) राजीनामा नहीं है। १-अपराधीके पास एक खोटा सिक्का था उसने वह सिक्का अपने दोस्तको इस अभिप्रायसे दिया कि पोलीसको वह सिका अपराधीके अधिकारमे न मिलसके-तजवीज हुई कि कैंटीने कोई अपराध नहीं किया था क्योंकि उसने वह सिका खरे सिकेके समान नहीं दिया था और हिन्दुस्थानके दडसग्रहको दफा २४१ का अपराध केवल उसी अवस्थामे उत्पन्न होता है कि जब कोई खोटा सिक्का खरे सिवाके समान दिया जावे । (रिपोर्ट हाईकोर्ट पश्चिमोत्तर देश जिन्द ४ सफा ६२) १० - (१४६) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- ( २४२ ) जो कोई मनुष्य छलसे या इस अभिप्रायसे कि छल किया जावे खोटा उस मनुष्यका खोटे सिका अपने पास रखता हो और उसको उस सिक्के लेते सिक्के को अपने पास रख- समय यह जानकारी थी कि वह खोटा सिक्का है तो उपरोक्त मनु- ना जिसने उसको लेते समय खोय जाना हो. ज्यको दोनो प्रकारोमेंसे किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद तीन वर्पतक हो सकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप-दफा २३७ के अनुसार है। ( २४३ ) जो कोई मनुष्य छलसे या इस अभिप्रायसे कि छल किया जावे कोई उस मनुष्यका श्रीमती) खोटा सिक्का अपने पास रखता हो जो श्रीमती महारानीका खोटा महारानीके खोटे सिकेको | सिक्का हो और उसको लेते समय यह जानकारी थी कि वह सिक्का अपने पास रखना जिसने उसको लेते समय खोटा खोटाहै तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारोंमेसे किसी प्रकारको कैदका जाना हो. दड दिया जावेगा जिसकी मीआद सातवर्षतक होसकती है और नह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप-दफा २३७ के अनुसार है। ( २४४ ) जो कोई मनुष्य किसी टकसालमें जो ब्रिटिश इडियामें उचित रीतिपर जो मनुष्य टकसालमे) नियत कीगई है नौकर हो, और वह मनुष्य कोई काम करे या नौकर होकर कोई सिक्का किसी ऐसे काममें चूक करे जिसका करना उसपर कानूनानुसार कानूनानुसार ठहराई अवश्य है इस अभिप्रायसे कि कोई सिक्का जो उस टकसालसे तौल या धातुसे दूसरी निकले उस तोल या ढगसे जो कानूनानुसार ठहरा हुआ है दूसरी तौल या ढगका बनावे. तौल या ढगका हो जावे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोमेंसे किसी प्रकारकी कैदका दंड दिया जावेगा जिसकी मीआद सात वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके मी योग्य होगा। टीप-दफा.२३१ के अनुसार समझना चाहिये । ( २४६ ) जो कोई मनुष्य किसी टकसालसे जो ब्रिटिश इण्डियामे उचित रीतिपर अनुचित रीतिसे किसी ) नियत की गई हो, सिक्का बनानेका कोई औजार या सामान बिना टकसालसे सिक्का बनाने / उचित अधिकारके निकाल लेजावे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों का कोईऔजार लैजाना.5 प्रकारो से किसी प्रकारकी कैदका दंड दिया जावेगा जिसकी मीआद सात वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके मी योग्य होगा। टीर--दफा २३१ के अनुसार समझना चाहिये ।

बदलना बारहवा १२.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई० । (१४७) (२४६) जो कोई मनुष्य किसी सिक्केपर छल या वददियाननीसे कोई ऐसा बर्ताव छल या बददियान-) करे जिससे उस सिक्केको तौल कम होजावे, या उस सिकका ढग तीमे किसी सिकेकी तौल बदलजावे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोंमेंस किसी प्रकारको घटाना या उसका ढंग कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआट तीन वर्पतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। स्पष्टीकरण-जो मनुष्य किसी सिक्कमेंम ग्वोद कोई भाग निकाल ले और गटेमे कोई और वस्तु रख दे तो उसने उस सिक्के टगको बदल दिया । टीप-दफा २३७ के अनुमार जानो। ( २४७ ) जो कोई मनुष्य श्रीमती महारानीके किसी सिक्कपर छल या बददियान- छल या बददियान-1 तीसे कोई ऐसा वर्ताव करे जिससे उस सिक्केकी तोल कम होजावे तीसे श्रीमती महारानीके या उसका ढग बदल जावे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारों- सिकेकी तौल घटाना या । मेंसे किसी प्रकारकी कैठका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीद सात वर्पतक होसकती है और वह जुर्मानेके मी योग्य होगा। टीप-दफा २३७ के अनुसार जानो । (२४८) जो कोई मनुष्य किसी सिकपर कोई ऐसा वर्ताव को जिमसे उम सिकेकी सूरत बदल जाय, इस अभिप्रायसै कि उपरोक्त सिक्का किसी और को इस अभिप्रायसे बद. प्रकारके सिकेकी भातिसे चलजाय तो उपरोक मनुष्यको दोनों लना कि वह किसी और प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी कैदका टड दिया जावेगा जिसकी प्रकारके मिकेकी भाति मीआद तीन अर्पतक हो सकती है और वह जुर्मानेके मी उसका ढग बदलना. किसी सिकेकी सूरत- चलाजाय. योग्य होगा। टीप-दफा २३७ के अनुसार समझना चाहिये । (२४९ ) जो कोई मनुष्य श्रीमती महारानीके किसी सिक्केपर कोई ऐसा बर्ताव करे श्रीमती महारानीके) जिससे उस सिकेकी सूरत बदल जाय, इस अभिप्रायसे कि उपरोक्त सिक्केकी सूरतको इस सिका किसी और प्रकारके सिक्केको मातिसे चलजाय तो उपरोक्त अभिप्रायसे बदलना कि वह किसी और प्रकारका मनुष्यको दोनो प्रकारोमेसे किसी प्रकारको कैदका दण्ड दिया सिकेको भाति बननाय. जायगा जिसकी मीआद सात वर्पतक हो सकती है और वह जुर्मानेके मी योग्य होगा। टीर--दफा २३७ के अनुसार जानो।

- (१४८) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अव्याय- ( २५० ) कोई मनुष्य जिसके पास ऐसा सिक्का हो जिसके मध्ये दफा २४६ या आधिकारमे लेते समय २४८ में बयान किया हुआ अपराध होचुका है और जिस समय जिस सिक्केके मव्ये जाना यह वह सिक्का उसके पास आया उस समय यह जानबूझकर कि गया हो कि यह बदला, हुवा है. उसे किसी और / वही अपराध उसके मध्ये होचुका है उस सिक्केको छलसे या इस के सिपुर्दकरना. अभिप्रायसे कि छल किया जाए किसी दूसरे मनुष्यके सिपुर्द करे या किसी दूसरे मनुष्यको उसके ले लेनेके लिये फुसलानेका उद्योग करे तो उपरोक्त मनुष्य- को दोनों प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जायगा जिसकी मीाद पाच वर्ष. तक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा । टीप-दफा २३७.के अनुसार जानी । - 1 ( २५१ । कोई मनुष्य जिसके पास ऐसा सिक्का हो जिसके मध्ये वह अपराध अधिकारमै लेते समय) होचुका है जिसका बयान दफा २४७ या २४९ मे किया गया श्रीमती महारानीके जिस | है और जिसने उस सिक्कको अधिकारमे लेते समय जान लिया हो सिक्केको जाना गया हो, कि उस सिकके मध्ये उपरोक्त अपराध होचुका है उस सिकेको कि यह बदला हुवा छलसे या इस अभिप्रायसे कि छलका काम किया जाय किसी उसे किसी और के सिपुर्द करनो. दूसरे मनुष्यको दे देवे या किसी दूसरे मनुष्यको उसके ले लेनेके लिये फुसलानेका उद्योग करे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दंड दिया जायगा जिसकी 'मीआद दश वर्पतक होसकती है और वह जुर्मानके भी योग्य होगा। टीप---दफा २३७ के अनुसार समझो। ( २५२ ) जो कोई मनुष्य छलसे या इस अभिप्रायसै कि छल किया जाचे, कोई उस मनुष्यका बदले) ऐसा सिक्का अपने पास रखता हो जिसके मध्ये वह अपराध हो हुए सिक्केको पास रखना चुका है जिसका वयान दफा २४६ या २४८ मे किया गया है जिसने उस अधिकारमै और उसने उपरोक्त सिक्केको अधिकारमे लेते समय जान लिया हो लेते समय जाना हो कि कि उसके मध्ये उपरोक्त अपराध होचुका है तो उपरोक्त मनुष्यको यह बदला हुवा है, दोनों प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जायेगा जिसकी मीमाद तीन वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। . टीप-दफा २३७ के अनुसार जानो। , जानो। बारहवाँ १२.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई० । (१४९) (२५३ ) जो कोई मनुष्य छलसे या इस अभिप्रायसे कि छल किया जाए, उस मनुष्यका श्रीम-] कोई सिका अपने पास रखता हो जिसके मध्ये वह अपराध होचुका ती महारानीके सिक्केको है जिसका बयान दफा २४७ या २४९ में किया गया है और पास रखना जिसने उस- उसने उपरोक्त सिकको अधिकारमें लेते समय जान लिया हो कि को अधिकारमे लेते समय उसके मध्ये उपरोक्त अपराध होचुका है तो उस मनुष्यको दोनों बदला हुआ जाना हो. प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद पाच वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप-दफा २३७ के अनुसार ( २५४ ) जो कोई मनुष्य कोई सिक्का जिसके मध्ये .वह जानता है कि कोई ऐसे सिक्केको खरे) ऐसा वर्ताव, जिसका बयान दफा २४६ या २४७ या २४८ सिकेकी भाति किसी और या २४९ में हुवा है हो चुका है, परतु जिसके मव्ये अपने को देना जिसको देनेवा- लेने पहिले अधिकारमें । अधिकारमें लाते समय वह नहीं जानता था कि वह वर्ताव हो लेते समय बदला हुवा न | चुका है खरे सिक्केकी भातिसे या जिसप्रकारका वह है उससे दूसरे नानाहो. प्रकारके सिक्केकी माति किसी मनुष्यको देवे या किसी मनुष्यको इस वातके फुसलानेका उद्योग करे कि वह मनुष्य इस सिक्केको ग्वरे सिक्केको मातिसे या जिसप्रकारका वह है उससे दूसरे प्रकारके सिक्की भातिसे अपने अधिकारमे ले तो उस मनुष्य को दोनो प्रकारोमेंसे किसी प्रकारकी कैदका दंड दिया जायगा जिसकी मीट दो वर्षतक होसकती है या जुर्मानेका दण्ड जो उस बदले हुए अथवा बदलनेका उद्योग किये हुए सिक्केके मोलके दशगुनेतकहो सकेगा किया जायगा । टीप-दफा २४१ के अनुसार जानो। ( २५५ ) जो कोई मनुष्य किमी ऐसे स्टाम्पको जिसको गवर्नमेटने अपनी आमदनीके गवर्नमेंटका खोटा-1 निमित्त चलाया हो खोटा वनावेगा या जानबूझकर खोटा बनानेके स्टाम्प बनाना. कामों से कोई काम करेगा तो उसको जन्मभरके देश निकालेका दक्ष या दोनों प्रकारोमेंसे किसी प्रकारको कैदका दण्ड दिया जायगा जिसकी मीआद दश पर्वतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। स्पष्टीकरण-वह मनुष्य इस अपराधका करनेवाला कहलावेगा जो एक प्रकारके सच्चे स्टाम्पको और प्रकारके सन्चे स्टाम्पको सूरतका कर देनेसे खोटा करे। . टीप-(१) अदालत सेशन (२) पोलीस दस्तन्दाजी करसकती है (३) अपराधीके नाम बारट जारी होगा (४) जमानत हो सकती है (५) राजीनामा नहीं है.।

मान पास रखना, (१५०) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- (२५६ , जो कोई मनुष्य कोई औजार या सामान इस अभिप्रायसे अपने गवर्नमेटका खोटा) अधिकारमें रखता हो कि वह किसी ऐसे खोटे स्टाम्पके स्टाम्प बनाने के अभिप्राय । काममें आवे या वह जानता या निश्चय करनेका कारण रखता से कोई आजार या सौ-हो कि यह किसी ऐसे खोटे स्टाम्प बनानेके काम आनेके अभिप्रायसे है, जो गवर्नमेटकी ओरसे सरकारी आमदनीके लिये जारी किया गया हो तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद सात वर्षतक हो सकती है और वह जुर्मानेके मी योग्य होगा। टीप-दफा २५५ के अनुसार है। ( २५७) जो कोई मनुष्य कोई औजार बनाए या उसके बनानेके कामोंमेसे कोई गवर्नमेंट स्टाम्पको) काम करे या उस औजारको मोलले या बेचं या अपने अधिकारसे खोग करनेके अभिप्राय अलग करे इस अभिप्रायसे कि वह किसी खोटे स्टाम्पके बनानेमें से औजारका बनाना या काम आवे या यह जानकर या निश्चय करनेका कारण रख कर बेचना. कि यह ऐसा खोटा स्टाम्प बनानेमें काम आनेके अभिप्रायसे है जो गवर्नमेटकी ओरसे सरकारी आमदनीके लिये जारी किया गया है तो उस मनुष्यको दोनों प्रकारोंमेसे किसी प्रकारको कैदका दण्ड दिया जायगा जिसकी मीआद सात वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप-~-दफा २५५ के अनुसार है । ( २५८ ) जो कोई मनुष्य कोई स्टाम्प बेचे या वेचनेके वास्ते रक्खे-यह गवर्नमेटका खोय। जानकर या निश्चय करनेका कारण रखकर कि वह किसी स्टाम्प वेचना. ऐसे स्टाम्पसे झूठ बनाया गया है जो गवर्नमेंटकी ओरसे सरकारी आमद के लिये जारी किया गया है तो उस मनुष्यको दोनों प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीभाद सात वर्षतक होसकती है और वह जुर्मा- नेके भी योग्य होगा। टीप-दफा २५५ के अनुसार है । ( २५९) जो कोई मनुष्य कोई स्टाम्प जिसको वह जानता हो कि किसी गवर्नमेटके खोटे स्टा-] ऐसे स्टाम्पसे झूठ बनाया गया है जो गवर्नमेंटकी ओरसे स को पास रखना. सरकारी आमदनीके लिये जारी जारी किया है. अपने पास रखता हो इस अभिप्रायसे कि उस स्टाम्पको सच्चे स्टाम्पकी भाँतिसे काममें बारहवाँ १२.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई० । (१५१) लाए या अपने अधिकारसे अलग करे या इस अभिप्रायसै कि वह असली स्टापकी मानिम काममें लाया जाए तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जायगा जिसकी मीआद सात वर्षतक हो सकती है और वह जुर्मानक मी योग्य होगा। टीप-(१) अदालत सेनन या प्रे० म० या म० अ० (२) पोलीस दस्तन्दाजी कर सकती है (३) अपराबीके नाम बारट जारी होगा (४) जमानत हो सकती है (५) राजीनामा नही है। ( २६० ) जो कोई मनुष्य सच्चे स्टापकी मातिसे कोई स्टाप काममें लाए यह जान सच्चे स्टापकी भांति ] कर कि वह स्टाप किसी ऐसे स्टापसे झूठा बनाया गया है जो काममै लाना गवर्नमेटके । गवर्नमेटकी ओरसे सरकारी आमदनीके लिये जारी किया गया है किसी स्टापका जो जान तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोंमेसे किसी प्रकारका कैदका दद लिया हो कि झूठा है. दिया जायगा जिसकी मीआद सात वर्पतक हो सकती है या जुर्मा- नेका दड या दोनो दड दिये जायेंगे । टीप-दफा २५९ के अनुसार है। ( २६१ ) जो कोई मनुष्य छलस या इस अभिप्रायसे कि गवर्नमेटकी हानि कराए, गवर्नमेटको हानिप. किसी वस्तुसे जिसपर कोई ऐसा स्टाप लगा हो जो गवर्नमेंटकी हुंचानेके अभिप्रायसे कि ओरसे सरकारी आमदनीके लिये जारी किया गया है कोई लेख सी वस्तुसे किसी लेखका या दस्तावेज दूर करे या मिटा डाले जिसके लिये वह स्टाप काममें मिटाना जिसपर गवर्न- लाया गया था या किसी लेख या दस्तावेजसे कोई स्टाप जो इस मैंटका कोई स्टाप लगा लेख या दस्तावेजके लिये काममें लाया गया हो इस अभिप्रायसे हो या दूर करना किसी दस्तावेजसे वह स्टांप जो र करे कि वह स्टाप किसी और लेख या दस्तावेजके लिये काममे उसके लिये काममें लाया लाया जाए तो उस मनुष्यको दोनो प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीभाद तीन वर्पतक होसकती है या जुर्मानेका दड या दोनो दड दिये जावेगे। टीप--२५९ के अनुसार है। ( २६२ ) जो कोई मनुष्य छलसे या इस अभिप्रायसै कि गवर्नमेंटकी हानि कराए, काममे लाए हुए ग-] कोई स्टाप जो गवर्नमेंटसे सरकारी आमदनीके लिये जारी किया वर्नमेट स्टापको जानबू- गया हो किसी, प्रयोजनसे काममे लाए यह जानकर कि वह पहले झकर काममे लाना. काममे माचुका है तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दर दिया जावेगा जिसकी मीाद दो वर्पतक होसकती है या जुर्मानेका दण्ड या दोनों दण्ड दिये जावेगे। गया है.

- चुका है, (१५२) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- टीप १)प्र. म. या म० अ० या म० दो० (२) पोलीस दस्तन्दाजी कर सकती (३) अपराधीके नाम वारट जारी होगा (४) बमानत हो सकती है (५) राजीनामा नहीं है। ( २६३) जो कोई मनुष्य छलसे या इस अभिप्रायसे कि गवर्नमेटकी हानि कराए उस चिह्नको छीलना) किसी स्टांपपरसे जो गवर्नमेटकी ओरसे सरकारी आमदनीके लिये जिससे यह प्रगट होता। जारी किया गया है कोई ऐसा चिह्न छील डाले या दूर करे जो है कि स्टांप काममें आ इस बातके प्रगट करनेके लिये उस स्टांपपर लगाया गया या छापा गया हो कि वह स्टांप काममे आचुका है या ऐसा स्टांप कि जिसको वह जानता हो कि काममें आचुका है और जिसपरसे वह चिह्न छीला गया या दूर किया गया हो जानबूझकर अपने पास रक्खे. या बेचे या अपने अधिकारसे भलग करे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दंड दिया जावेगा जिसकी मीमाद तीन वर्षतक होसकनी है या जुर्मानेका दंच या दोनों दंड दिये जायेंगे। टीप--दफा २५९ के अनुसार समझना चाहिये। ( २६३ ) ( अ ) बढाया गया दफा २ ऐक्ट ३ सन् १८९६ ई० के अनुसार (१) जो कोई मनुष्य (अ) कोई जाली स्टांप वनाए या जानबूझकर जाली स्टांपकी मनाही. चलाए या उसका कारवार करे या वेचे या जानबूझकर कोई जाली स्टांप किसी डाक सवन्धी अमिप्रायसे काममें लाए या- (ब) विना उचित उनके कोई जाली स्टाप अपने अधिकारमें रखे या,- (ज) कोई ठप्पा या धातुकी खोदी हुई तख्ती या औजार या सामान जाली स्टांप तैयार करनेके लिये बनाए, या विना उचित उनके अपने अधिकारमे रक्खे उसको जुर्मानका दड दिया जायगा जो दोसौ रुपयेतक होसकता है। (२) उचित है कि ऐसा स्टांप-या ठप्पा या धातुकी खोदी हुई तख्ती या औजार या सामान जो किसी मनुष्यके अधिकारमे किसी जाली स्टांपकी तैयारीके अभिप्रायसे पाया जावे वह गिरफ्तार कर लिया जाए और वह सामान आदि जन्त कर लिया जाए। (३) इस दफामे शब्द "जालीस्टांप " से प्रत्येक ऐसे स्टापका अभिप्राय जिससे यह गलत बात प्रगट होती हो कि उसको गवर्नमेंटने महसूल डाकके कोई नियम प्रगट करनेके अभिप्रायसे जारी किया है या ऐसे स्टापकी कोई नकल या सूरत शकलसे, अभिप्राय है जिसे गवर्नमेटके ऊपरके अभिप्रायसे जारी किया हो चाहे वह कागजपर हो चाहे और भांति पर- } तेरहवा १३.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई०॥ (१५३) (४) "गवर्नमेंट " के शब्दमें इस दफा में और इसके अतिरिक दफा २२६ से लेकर दफा २६३ मे दोनों दफा मिलाकर, जब कि उसे किसी ऐसे सवधी स्टाम्पके साथ काममे लाया जावे जो किसी डाक सवधी नियमके प्रगट करनेके लिये जारी किया गया हो, विना लिहाज किसी मजमून दफा ७ में लिखे हुएक वह मनुष्य या वे मनुष्य दाखिल समझे जावेगे जो कानूनकारक गवर्नमेंटका प्रवध करनेके लिये हिन्दुस्थानके किसी भागमे और श्रीमती महारानीके राज्यके किसी भागमें या किसी दूसरे देशमे नीतिपूर्वक अधिकारी हो । टीप----दफा २६२ के अनुसार है। अध्याय तेरहवाँ १३. में लाना. नाप तोल सम्बंधी, अपराधांके विषयमे ( २६४ ) जो कोई मनुष्य तौलनेके किसी औजारको जिसे वह झूठा जानता हो तौलनेके झूठे औ-] छलसे काममे लाए तो उस मनुष्यको दोनो प्रकारोंमे किसी जारको छलछिद्रस काम- प्रकारकी कैदका दर दिया जायगा जिसकी मीआद एक वर्पतक होसकती है या जुर्मानेका दण्ड या दोनो दण्ड दिये जावेगे। टीप-(१) प्रे० म० या म० अ० या म. दो० (२) पोलीस दस्तन्दाजी नहीं करसकती ३) अपराधीके नाम समन जारी होगा ( ४ ) जमानत होसकती है ( ५ ) राजीनामा नहीं है। (१) वोलके झूठे औजारोको छलसे काममे लानेका अपराध अपराधीकी वदनियतीपर निर्भर इसलिये जब मुकद्दमेमे ऐसी नियतके मध्ये कोई गवाही न थी तो हाईकोर्टसे जुर्मानेकी वापसीकी आना हुई। (वीक्ली रिपोर्टर जिल्द १८ सफा ६० ३०) ( २६५ ) जो कोई मनुष्य किसी झूठे बॉटको या तौल या लम्बाई नापनेके झूठे पैमा- झूठे वाट या पैमा-7 नेको छलसे काममें लाए या किसी बॉट या तौल या लम्बाई नेको छलसे काममें लाना. नापनेके किसी पैमानेको किसी और वाँट या पैमानेकी भॉति से,जो उससे दूसरा हो छलसे काममे लाए तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद एक वर्पतक होसकती है या जुर्मानेका दड या दोनों दद दिये जावेगे। टीप-दफा २६४ के अनुसार जानो।

(१५४) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- ( २६६) जो कोई मनुष्य तौलनेका कोई औजार या कोई बॉट या तौल या लम्बाई झूठे वाटों या पैमानो- जॉचनेका कोई पैमाना जिसे वह झूठा जानता हो अपने पास रखता का अपने पास रखना । । हो और उसका यह अभिप्राय हो कि वह छलसे काममें लाया जावे तो उस मनुष्यको दोनो प्रकारो से किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जायगा जिसकी मीआद एक वर्षतक होसकती है या जुर्मानेका दह या दोनों दंड दिये जायेंगे। टीप-दफा २६४ के अनुसार समझो। १--नियत किये हुए नाप तौलसे बढकर नाप तौलको अपने पास रखनाही कोई अपराध नहीं है, अपराधीके छल छिद्रके अभिप्रायको प्रमाणित करना चाहिये । (रिपोर्ट हाईकोर्ट बम्बई जिल्द १ सफा १८१) ( २६७ ) जो कोई मनुष्य तौलनेका कोई औजार या कोई वाँट या तौल या लम्बाई झूठे बाँट या पैमाने नापनेका कोई पैमाना जिसे वह झूठा जानता हो इस अभिप्रायसे बनाना बेचना। बनाए या बेचे या अपने अधिकारसे अलग करे कि वह सच्चके मॉतिसे काममें लाया जावे या यह जानकर कि सच्चकी माँतिसे उसका काममे लाया जाना अति सम्मवित है तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद एक वर्पतक होसकती है या जुर्मानेका दण्ड या दोनों दण्ड दिये जावेंगे। टीप, दफा २६४ के अनुसार समझो। अध्याय चौदहवाँ १४. सब सम्बन्धी आरोग्यता और कुशलता और सुगमता और सुलज्जिता और सज्जनता और सुशीलतामें विघ्न डालनेवाले अपराधोंके विषयमें । (२६८) वह मनुष्य सब साधारण मनुष्यको कष्ट देनेका अपराधी होगा । जो कोई सब संवन्धी कष्टके ) ऐसा काम करे या किसी ऐसी अनुचित चूकका अपराधी हो जो सर्व साधारणको या मुख्यकर उन मनुष्योंको जो उसके आस पास समीप में रहते या किसी धरती अथवा घरपर अधिकार रखते हो कोई हानि या विपत्ति या कारणका काम.

चौदहवा १४.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई० ॥ (१५०) केश पहुचाए या जो उन मनुष्योको जिन्हें किसी सर्व साधारण अधिकारके कामम लानकी आ- वश्यकता हो अवश्य करके कोई हानि या विपत्ति या इंश पहुचाए या रोक टांक करें। कोई काम सर्व साधारणके कष्टका कारण इससे क्षमाके योग्य न होगा कि, उममे कुछ आराम या लाम देख पडता हो । १--कुछ मनुष्य कि जिन्होंने बासका बाच एक घटने बटनेवाली नदीके आरपार बावा था उस नदीसे नावें भी जाती थी, यद्यपि उन्होंने ऐम बाधमे एक तग गस्ता नावाके आने जानेके लिये डोह दिया था जो नावके आनेक समयके सिवाय बद रहता था-सब डवीजनल अफ्सरकी दरख्वास्तसे उस- पर दफा २८३ दंडसंग्रह हिन्दुम्यानका अपराध लगाया गया तजवीज हुई कि-यह बात सदेहकी है कि दफा २८३ का मुकदमेमे मम्बब है परतु उन्होंने दफा २६८ हिन्दुस्थानके दटसंग्रहका अपराध किया और वह दपा २९० के अनुसार दण्ड योग्य है । (३० ला. रि. कलकत्ता जिन्द १४ सफा ६५६) २-एक गावके कुछ मुसलमानोंने मुहर्रमके दिनोमें उस धरतीपर जो गावके समीप थी एक पिडल कायम की और भी वहापर मजहबी चिह्न अर्थात् एक बट रक्खी, साहब मजिस्ट्रेटने हिन्दु- स्थानके दंडसग्रहकी दफा २९० का अपराध उनपर लगाकर यह बात प्रमाणित की कि उनका यह कास उस गावके सर्व साधारण हिन्दुओके दु.ख पहुंचानेके अभिप्रायमे कि जिनके मदिर उस धरती- के निकटही ये किया गया है तजवीज हुई कि अपराबकी तजवीज अयोग्य थी (इ. ला.रि. मदराम जिल्द ७ मफा ५९०) ३--जो मनुष्य जानबूझकर चौपायेको किमी सर्व साधारण मार्गमै इस प्रकारसे काटे कि मार्ग चलनेवालों को काटना सुनाई और दिखाई दे वह मनुष्य दफा २९. हिन्दुस्थानके दइसत्रहका अपराधी होगा परतु जब कि कुछ मुसलमानोंन मजहवी वत्तविके अभिप्रायमे दो गायोंको सूर्योदयसे पहिले किसी विशेष घरमे जो सर्व साधारण मार्गसे कुछ २ दिखाई देता था, काटा और दो गायोममे एकका काटा जाना केवल एक हिंदूने देखा तजवीज हुई कि ऐमा काम किया जाना सर्व साधारणको कष्ट पहुँचानेकी मीमातक नहीं पहुंचना जैसा कि हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहको दफा २६८ में कहा गया । (इ० ला० रि० इलाहाबाद जिल्ट १० मफा ४४) ४---एक अपराधीने अपने बरामदेमे गोश्त जो महमानोके लिये पकनेवाला था उसको उन मनुष्योकी दिखावटमे जो सडकके ऊपरसे जा रहे थे जिनमे कुछ जैनी थे जिनका मंदिर सीपही था' कटवाया-तजवीज हुई कि कोई अपराब उस मनुष्पपर प्रमाणित नहीं होता । ( इ. ला. रि० बम्बई जिल्द १२ सफा ४३७) ५-जब किसी नदी या खाडीम कि जहासे नाव या जहाजका आना जाना होता है किसी रोक टोकके मध्ये किसीपर कोई अपराध लगाया जावे तो उसमे ऐसी गवाहीके होनेकी आवश्यकता (१५६) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- । है कि जिससे यह प्रमाणित हो कि वहांसे नाव या जहाजके आने जानेमे कोई रोक या किसी मनुष्यके आने जानेमे किसी प्रकारकी हानि या क्लेश पहुंचता है । विना इस बातके प्रमाणित हुए दफा २६८ का अपराध किसीपर कायम नही होसकता । ( इ० ला. रिकलकत्ता जिल्द २० -सफा ६६५) (२६९) जो कोई मनुष्य कानूनविरुद्ध या असावधानीसे कोई ऐसा काम करे असावधानीसे वह ] कि जिसको वह जानता है अथवा जिसके मध्ये वह निश्चय- करनेका काम करना जिससे कारण रखता है कि उससे किसी ऐसे रोगका फैलना संमवित है कि किसी घातक रोगका फैलना अति संमवित हो.) जिससे प्राणोंको हानि पहुंच सकती है तो उपरोक्तं मनुष्यको दोनों प्रकारोमेंसे किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जावेगा जिसकी अवधि छः महीनेतक होसकती है, या जुर्मानेका दण्ड या दोनों दण्ड दिये जावेगे। 4 टीप--(१) प्रे० म० या म० अ० या म० दो० (२) पोलीस दस्तन्दाजी करसकती है (३) अपराधीके नाम समन जारी होगा (४) जमानत होसकती है ( ५ ) राजीनामा नहीं है। १-(क) यह जानकर कि मुझे हैजा हुआ है एक रेलगाडीके दर्जेमे बैठ गया और अपनी बीमारीकी दशाकी सूचना रेलवे कम्पनीके नौकरोसे न की-( म ) ने ( क ) की दशा जानकर (क) का टिकट मोल लिया और वह (क) के साथ रवाना हुआ-तजवीज हुई कि (क) को दफा २६९ दण्डसंग्रह हिन्दुस्थानके अनुसार दण्ड दिया जाना उचित हुवा क्योंकि यह जानता था कि इस बीमारीसे घातक बीमारीके फैलनेका भय है और ( म ) को अपराधर्म सहायता करनेके अपराधमे दण्ड दिया जाना उचित हुवा ( इ. ला. रि० मदरोस जिल्द ७ सफा २७६) २--कोई रडी, जब कि उसे गर्मीका रोग हो गया हो और उसीके द्वारा उपरोक्त रोग उस मनुष्यको हो जावे जिसने उसके साथ प्रसग किया है, दफा २६९ दण्डसग्रह हिन्दुस्थानके अनुसार दण्डके योग्य नहीं हो सकती परतु उसपर धोखा देनेकी नालिग दफा ४१७ हिन्दुस्थानके दंडसग्रहके अनुसार होसकती है । ( इ. ला• रि० बम्बई जिल्द ११ मफा ६९) ( २७० ) जो कोई मनुष्य दुर्भावसे ऐसा काम करे जा ऐसा है और जिसको दुर्भावसे उस कामका वह जानता है या जिसके मध्ये वह निश्चय करनेका कारण रखता है करना कि जिससे किसी कि उससे किसी ऐसे रोगको फैलना समवित है जिससे प्राणोको घातक रोगका फैलना अति सभवित हो. हानि पहुचे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी -कैदका दंड दिया जावेगा जिसकी अवधि दो वर्षतक होसकती है या जुर्मानेका दंड या दोनों दंड दिये जावेंगे।

चौदहवाँ १४.3 ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई० । (१५७) (२७१ ) जो कोई मनुष्य जानबूझकर किसी ऐसे कायदेकी आज्ञाको मंग करे किसी कारन्टाटनकी) जो हिन्दुस्थानकी गवर्नमेंट या किसी और गवर्नमेंटने किसी भागाको न मानना. जहाजको कारन्टाइनको अवस्थामे रखनेके लिये या उन जहा- जोंके वीचमें आने जानेके प्रबधके लिये कि जो कारन्टाइनको अवस्थामें है और नदी अथवा समुद्रके किनारे अथवा और जहाजोके या ऐसे स्थानमें आनेजानेके प्रबधके लिये कि जहाँ कोई छुनेसे फैलनेवाला रोग फैला हुआ है और २ स्थानोमे जारी और प्रसिद्ध किया हो तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारोमेंसे किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी अवधि छ: महीनेतक होसकती है या जुर्मानेका दण्ड या दोनों दण्ड दिये जायेंगे। ( ऐक्ट न० १ सन् १८७० ई० को देखो ) टीप--(१) प्रेम. या म. म. या दो० ( २ ) पोलीस दस्तन्दाजी नही कर- सकती (३) अपराधीके नाम समन जारी होगा (४) जमानत हो सकती है (५) राजीनामा नहीं है। लावट करना, ( २७२) जो कोई मनुष्य खाने या पीनेके किसी पदार्थमें इस प्रकारसे मिलावट किसी बेचनेवाले) करे कि वह पदार्थ खाने या पीनेमे हानिकारक होजाए, इस अभि- खाने पीनेक पदार्थमे मि प्रायसे कि उस पदार्थको खाने या पीनके पदार्थकी भॉति वेच या इस जानकारीसे कि खाने या पीनेके पदार्थकी मॉतिसे उस पदार्थका विकजाना सम्मवित है, तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारो से किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी अवधि छः महीनेतक होसकती है या जुर्मानेका दण्ड जिसकी तादाद १००० ) एक हजार रुपयेतक होसकती है या दोनो दण्ड दिये जावेगे। टीप---दफा २७१ के अनुसार है। (अदालतको आधिकार है कि अपराध करनेका प्रमाण पातेही दफा २७२ या २७३ या २७४ या २७५ के अनुसार यह आजा दे कि वह पदार्थ या दूसरा पदार्थ जिसके मध्ये अपराध हुवा है नष्ट कर दिया जावे) (ऐक्ट न. १. सन् १८८२ ई० को दफा ५२१ को देखो।) ( २७३ ) जो कोई मनुष्य खाने या पीनेके पदार्थकी मॉतिसे किसी ऐसे पदार्थको खाने या पीनेकै हानि-) बचे या वेचनेके निमित्त बाहर रखे या वेचनेके लिये निकाले जो कारक पदार्थको वेचना. हानिकारक बना दिया गया हो या ऐसी अवस्थामें हो कि खाने या पीनेके योग्य न हो, यह जानकर या इस कामके निश्चय करनेका कारण रखकर कि उपरोक्त (१५८) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- पदार्थ खाने या पीनेके लिये हानिकारक है तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोंमेंसे किसी प्रकारकी कैदका ठण्ड दिया जावेगा जिसकी अवधि छ: महीनेतफ होसकती है या जुर्मानेका दण्ड जिसकी नादाट एक हजार रुपयेतक होसकती है या दोनो दण्ड दिये जावेगे। टीप-दफा २७१ के अनुसार जाननी । १- अपराधीने कुछ आटा फी रुपया सत्रह सेरके भावसे बेचा, यद्यपि अच्छे आटेका भाव पन्द्रह सेर था-डाक्टरने बयान किया कि वह आटा पुराना और रोग मिला हुवा था और यदि खाया जाता तो रोग होनेका भय था-अपराधीने आटा लेनेवालेसे आय बेचनेके समय कह दिया था कि वह आटा बुरा होनेके कारण सस्ता बेचा गया था तजवीज हुई कि इस अप- राधमे दफा २७३ दडसंग्रहहिन्दके अनुसार दण्ड देना अनुचित हुआ । ( पजाब रिकार्ड नं. १५ सन् १८७३ ई.) 'करना. ( २७४ ) जो कोई मनुष्य किसी बनी हुई या बिना बनी हुई औषधिमे इस प्रकारसे औपधियोमै मिलावट) मिलावट करे कि उसके द्वारा उस बनी हुई या बिना बनी हुई औपधिका गुण कम करदे या उसका अमल बदल दे या उसको हानिकारक बना दे, इस अभिप्रायसे या इस बातके होनेका सम्भव जानकर कि वह किसी रोगमे देनेके लिये इस प्रकारसे बिक जावे या काममें आवे कि मानों उसमें मिलावट नहीं हुई तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारोंमेसे किसी प्रकारको कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी अवधि छः महीने तक होसकती है या जुर्मानेका दण्ड जिसकी तादाद एक हजार रुपये तक होसकती है, या दोनो दण्ड दिये जायेंगे । टीप-दफा २७१ के अनुसार है । ( २७५ ) जो कोई मनुष्य यह जानकर कि किसी बनी हुई या विना बनी औषधिमें मिलावट कीहुई औ-] इस प्रकारपर मिलावट कीगई है कि उसके कारणसे उसका गुण पधियोको बेचना. J कम होगया या अमल बदल गया या वह हानिकारक बना दीगई है, उसको बेचे या वेचनेके लिये सामने रखे या बेचनेके लिये निकाले या औषधालय ( दवा- खाना ) से रोगके ऊपर देनेके लिये ऐसी औपधिकी माँतिसे जिसमें मिलावट नहीं कांगई, बांटे या किसी मनुष्यसे जो उस मिलावटसे जानकार न हो रोगके ऊपर उसका वर्ताव करावे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी अवधि छः महीनेतक होसकती है या जुर्मानेका दण्ड जो एक हजार रुपयेतक होसकता है या दोनों दण्ड दिये जावेगे। रीप-दफा २७१ के अनुसार है । } चौदहवाँ १४.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई० । (१५९) (अदालतोंको अधिकार है कि दफा २७२. २७३. २७४. २७५. के अपराधका प्रमाण पाते ही यह आजा दे कि वह सामान या दूसरा पदार्थ जिसके मध्ये वह अपराव हुआ नष्टकर दिया जावे । (ऐक्ट न० १० सन् १८८२ ई० की दफा ५२१ को देखो) ( २७६ ) जो कोई मनुष्य किसी बनी हुई या विना बनी हुई औषधिको किसी किसी औषधिको और बनी हुई या बिना बनी हुई औषधिकी भातिसे जानबूझकर किसी बनी हुई या विना बेचे या बेचनेके लिये सामने रक्ख या वेचनेके लिये निकाले या बनी औषधिकी भांतिसे बेचना. औपधालयसे रोगके ऊपर देनेके लिये बाटे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारोमेंसे किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जायगा जिसकी अवधि छ.. महीनतक होसकती है या जुर्मानेका दण्ड जो एक हजार रुपयेतक होसकता है या दोनों दण्ड दिये जावेगे। टीप-दफा २७१ के अनुसार है। (२७७ ) जो कोई मनुष्य किसी सर्व सम्बन्धी कुऑ, नदी अथवा कुडके पानीको किसी सर्वमाधी कुऑ) जानबूझकर खराव या गदला करे इस प्रकारपर कि उसको ऐसा या कुड इत्यादिके पानी- कर दे कि जिस अभिप्रायके लिये वह काममें आता है जैसा था को विगाडना. धेसा उसके योग्य न रहै तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआढ तीन महीनेतक होसकती है या जुर्मानेका दह जो पाचसौ रुपयेतक होसकता है या दोनों दट दिये जावेगे । टीप-(१) कोई मजिस्ट्रेट (२) पोलीस दस्तन्दाजी नही कर सकती (३) अपराधीके नाम समन जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है। १-शब्द कुआ नदी अथवा कुण्ड दफा २७७ दडसग्रह हिन्दुस्थानमे सर्व सम्बन्धी नदी न गिनी जायगी, इसलिये मछलिये पकडनेके अभिप्रायसे डालियाँका नदीमें डालना इस टफाके अनुसार अपराध नहीं है। (इ० ला० रि० कलकत्ता जिल्ट २ सफा ३८३) २-शब्द "सर्व सवधी कुड" में सदैव बहनेवाली पानीकी धार जो किसी नदी में बहती हो व गिनी जायगी (इ. ला.रि. मदरास जिल्द ४ सफा २२९) ( २७८ ) जो कोई मनुष्य किसी स्थानकी हवाको जानबूझकर विगाढ दे इस हवाको आरोग्यताके ) प्रकारपर कि वह उन मनुष्योकी आरोग्यताके लिये हानिकारक हो लिये हानिकारक कर- जो विशेषकर उस स्थानके आसपास रहते या कारोबार करते हों देना. या किसी सर्वसम्बन्धी मार्गसे होकर आवाजाही रखते हों तो उस मनुष्यको जुर्मानेका दड दिया जायगा जो पाचसौ रुपयेतक होसकता है। टीप-दफा २७७ के अनुसार है।

- (१६०) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- ( २७९) जो कोई मनुष्य किसी सर्व सम्बन्धी मार्गमे ऐसी लापरवाही अथवा असा- किसी सर्व सम्वन्धी )- वधानीसे कोई गाडी चलावे या सवार होकर निकले कि उससे मार्गमे लापरवाहीसे गाडी चलाना या सवार होकर मनुष्यके प्राणकी हानि हो अथवा किसी दूसरे मनुष्यको चोट या निकलना. हानि पहुंचना अति संभवित हो तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रका- रोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी अवधि छः महीने तक हो सकती है या जुर्मानेका दण्ड जो एक हजार रुपयेतक हो सकता है या दोनों दण्ड दिये जावेगे। टीप-(१) कोई मजिस्ट्रेट (२) पोलीस दस्तन्दाजी कर सकती है (३) अपराधीके नाम समन जारी होगा (४) जमानत हो सकती है (५) राजीनामा नहीं है। १- यदि लापरवाहीसे गाडी हांकनेमे वह गाडी किसी दूसरी गाडीसे भिड जावे और उस दूसरी गाडीको हानि पहुंचे तो गाडी हांकनेवाला न कि उसका मालिक दफा २७९ दंडसंग्रह हिन्दुस्था- नके अनुसार अपराधी ठहराया जावेगा । ( वीक्लीरिपोर्टर जिल्द १४ सफा ३२) ( २८०) जो कोई मनुष्य किसी नाव या जहाजको इस प्रकार पर लापरवाही या लापरवाहीसे नाव या असावधानीसे चलाए कि उससे मनुष्यके प्राणकी हानि हो या किसी और मनुष्यको चोट या हानि पहुचना अति समवित हो तो उस मनुष्यको दोनों प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीआद छः महीनेतक होसकती है अथवा जुर्मानेका दंड जो एक हजार रुपयेतक होसकता है या दोनों दण्ड दिये जावेगे। जहाज चलाना. टीप--(१) प्रे० म० या म० अ० या दो० (२) पोलीस दस्तन्दाजी कर सकती है (३) अपराधीके नाम समन जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है। (२८१ ) जो कोई मनुष्य कोई झूठा प्रकाश (रोशनी ) या झूठा चिह्न या पानी झूठी रोशनी या झूठा] पर तैरनेवाला चिह्न दिखलाए, इस अभिप्रायसे या इस बातका चिह्न या पानी पर तैरने वाला चिह्न दिखाना. होना सभवित जानकर कि उस दिखानेके कारणसे किसी चलाने थालेको मार्ग भुला दे तो उस मनुष्यको दोनों प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीमाद सात वर्पतक होसकती है जुर्मानेका दढ अथवा दोनों दंड दिये जावेंगे। . टीप-(१) सैशन (२) पोलीस दस्तन्दाजी कर सकती है (३) अपराधीक नाम वारंट जारी होगा (४) जमानत हो सकती है (५) राजीनामा नही है ।

चौदहवा १४. एक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई०॥ ( २८२ ) जो कोई मनुष्य पानीके मार्गसे किसी मनुष्यको किसी नावमे जव कि पानीके मार्ग पहुँचाना वह नाव ऐसी अवस्थामे हो या इतनी लदी हो कि उसमें उस मनु- किसी मनुष्यका भाडेके प्यके प्राणोका भय हो, जानबूझकर या असावधानी करके माडेपर लिये किसी ऐसी नावसे लेजावे या लिवा लेजावे तो उस मनुष्यको दोनों प्रकारोमेंसे किसी जो अति बोझित या जोखिम की हो प्रकारको कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद छः महीनेतक होसकती है या जुर्मानेका दण्ड जो एक हजार रुपयेतक होसकता है या दोनो दण्ड दिये जायेंगे। टीप--दफा २८० के अनुसार है। १-कुंछ मनुष्योको अपराधी एक नदीसे नावपर पार उतारता था नाव बोझिल होने के कारण बैठ गई कि जिससे वह मनुष्य डूब गये-तजवीज हुई कि अपराधीक मध्ये जातवत् घातके अपरावका प्रमाण जो जातघातकी सीमातक न पहुंचे नही होसकता था, क्योंकि यह बात प्रगट नहीं होती थी कि उसने कोई काम यह जानकर किया था कि इस कामसे दफा २९९ हिन्दुस्थानके दडसग्रहका अभि. प्राय उसका था अतएव अपराधी असावधानीसे नावको माडपर ले जानेके लिये दफा २८२ के अनुसार दण्डके योग्य होसकता है । ( वीक्ली रिपोर्टर जिल्द ११ सफा ३) २-जो मल्लाह टूटी नाव किरायेपर चलावे और उससे मुसाफिरोंको अपने प्राणोका अदेगा हो तो उस मल्लाहपर दफा २८२ का अपराध प्रमाणित करना चाहिये न कि अपराध दफा २३६ का। (रिपोर्ट हाईकोर्ट बम्बई जिल्द १ सफा १३७) ( २८३ ) जो कार्ड मनुष्य किसी काम करनेसे या किसी मालके मध्ये जो उसके जोखिम अथवा रोक) अधिकार या प्रवन्धमें हो, चौकसीमें चूक करनेसे किसी सर्व सम्बन्धी डालना किसी सर्व सम्ब- मार्ग अथवा नावके मार्गपर किसी मनुष्यको हानि या रोकटोक न्धी मार्ग अथवा नावके पहुंचाए तो उस मनुष्यको जुर्मानेका दड दिया जावेगा जिसकी मार्गम. तादाद दोसौ रुपयेतक होसकती है। टीप-दफा २८० के अनुसार है। १-किसी शहरके मार्गके निकट मछलीका जाल फैलाना दफा २८३ दडसग्रह हिन्दु- स्थानके अभिप्रायानुसार अपराध नहीं है जबतक कि यह न प्रमाणित किया जावे कि इस कामसे किसी विशेप मनुष्य या समूहको रोक पहुंचाई गई । ( इ. ला. रि• मदरास जिल्द ४ सफा २३५) ( २८४ ) जो कोई मनुष्य किसी विषैले पदार्थ से कोई काम ऐसी लापरवाही या किसी विपले पदार्थक) असावधानी के साथ करे जिससे मनुष्यके प्राणको हानि हो या मध्ये असाववानी करना. किसी और मनुष्यको चोट पहुँचनेका सम्भव हो या किसी वियेले (१६२) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- पदार्यके मध्ये जो उसके पास हो जानबूझकर या असावधानीसे ऐसी चौकसीमें चूककरे जो उस अंदेशेके मिटानेके लिये जिसके पहुंचनेका सम्भव मनुष्यके प्राणको उस विषैले पदार्थसे है काफी हो तो उस मनुष्यको दोनों प्रकारोंमेंसे किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जायगा जिसकी मीआद छः महीने तक होसकती है या जुर्मानेका दडं जो एक हजार रुपयेतक होस.. कता है या दोनों दढ दिये जावेगे । टीप----दफा २७५ के अनुसार है। ( २८५ ) जो कोई मनुष्य आग या किसी जलनेवाले पदार्थसे कोई काम, ऐसी अमि अथवा जलने लापरवाही या असावधानी के साथ करे जिससे मनुष्यके प्राणका वाली वस्तुके मध्ये असा- भय हो अथवा जिससे किसी और मनुष्यको दुःख पहुँचना वधानी करना, सम्मवित हो या किसी आग या किसी जलनेवाले पदार्थके मध्ये जो उसके निकट हो जानबूझकर या असावधानी करके ऐसी चौकसी करनेमें चूककरे जो उस दुःखके दूर करनेके लिये जिसके पहुंचनेका सम्भव मनुष्यके प्राणको उस आग या जलनेवाले पदार्थसे है काफी हो तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दंड दिया जायगा जिसकी मीआद छः महीनेतक होसकती है या जुर्मानेका दंड जो एक हजार रुपयेतक होसकता है या दोनों दण्ड दिये जावेंगे । सीप-दफा २७९ के अनुसार है। १--हिन्दुस्थानके दंडसंग्रहको दफा २८५ मे आये हुए शब्द "दुःख" का सम्बंध केवल मनुष्यके शरीरसेही नहीं वरन् मालसे भी है ( रिपोर्ट हाईकोर्ट बम्बई जिल्द ५ सफा ६७) (२८६ ) जो कोई मनुष्य भकसे उडजानेवाले किसी पदार्थसे कोई काम ऐसी लापर- मकसे उडजानेवाले) वाही या असावधानीके साथ करे जिससे मनुष्यके प्राणका भय हो पदार्थक मध्ये असावधा- नी करना. या जिससे किसी दूसरे मनुष्यको दुःख या हानि पहुँचनेका सम्भव हो या मकसे उडनेवाले किसी पदार्थके मध्ये जो उसके पास हो जान बूझकर या असावधानी करके ऐसी चौकसी करनेमें चूककरे जो उस भयको दूर करनेके लिये जिसके पहुंचनेका सम्मव मनुष्यके प्राणको उस मकसे उडजानेवाले पदार्थसे है काफी हो तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद छः महीनेतक होसकती है या जुर्मानेका दण्ड जो एक हजार रुपयेतक होसकता है या दोनों दण्ड दिये जावेगे । टीप-दफा २७९ के अनुसार है । १-अपराधी अपने खेतकी फसल रातके समय देखने भालनेको गया था सबेरे एक भरी हुई बंदूक लिये हुए अपने घरको लौटा और उसने अपने घरके द्वारपर ताला लगा हुआ देखकर वह भरी हुई बंदूक जिसका घोडा टोपीपर गिरा हुआ था एक चारपाई पर रख दी जो द्वारपर पड़ी चौदहवा १४.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई० । (१६३) हुई थी, और आप थोडी देर के लिये अपने पडोसीके घर चला गया यकायक वह बदूक छूट गई और अपराधीक एक पडोसीका लडका जो चार वर्षका था इससे मरगया, इस कारण अपराधीपर दफा २८६ का अपराध ठहराया गया और हाईकोर्टसे दडकी आजा कानूनविरुद्ध ठहराई गई। (इ० ला. रि० मदरास जिल्द ८ सफा ४२१) । २८७ ) जो कोई मनुष्य किसी कलसे कोई काम ऐसी लापरवाही या असावधानी किसी कलके मन्ये) के साथ करे कि जिससे मनुष्यके प्राणका भय हो अथवा जिससे जो अपराधीके पास हो- किसी दूसरे मनुष्यको दुःख या हानि पहुचना समवित हो अथवा या उसकी सिपुर्दमें हो असावधानी करना. किसी कलके मध्ये जो उसके पास हो अथवा उसकी सिपुर्दगीमें हो जानबूझकर अथवा असावधानी करके ऐसी चौकसी करनेमे चूक करे जो उस भयके दूर करनेमे जिसके पहुचनेका समव मनुष्यके प्राणको उस कलसे है काफी हो तो उपरोक्त मनु- ज्यको दोनो प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जावंगा जिसकी मीआट छ. महीने तक होमकती है या जुर्मानेका दह अथवा दोनोही दड दिये जावेगे । टीप-दफा २७१ के अनुसार है । ( २८८) जो कोई मनुष्य किसी घरके गिरा देने या उसके वनाने जानबूझकर किसी मकान गिराने या असावधानीके साथ उन मकानकी चौकसी करनेमें चूक करे अथवा उसके बनानेके जो उस दरसे कि जिसके पहुचनेका समव मनुष्यके प्राणको उस मध्ये अमावधानी करना, मकान या उसके किसी मागके गिरनेसे है, काफी हो, तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारोमेसे किसी प्रकारको कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीआद छ: महीनेतक होसकती है या जुर्मानेका दण्ड जो एक हजार रुपयेतक होसकता है अथवा दोनों ही दण्ड दिये जावेगे। टीप-दफा २७१ के अनुसार जानो। (२८९) जो कोई मनुष्य किसी पशुके मध्ये जो उसके पास हो जानबूझकर या किसी पशुके मध्ये ) असावधानी करके ऐसी चौकसी करनेमे चूक करे जो मनुष्यके प्राण- असावधानी करना.) के मय अथवा भारी दुःखके डरको रोकनेके लिये जिसके पहुचानेका संभव उस पशुसे है काफी हो, तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जायेगा जिसकी मौआद छः महीनेतक होसकती है अथवा जुर्मानेका दण्ड जो एक हजार रुपयातक होसकता है अथवा दोनों दंड दिये जायेंगे। टीप-दफा २७९ के अनुसार है।

(१६४) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [ अध्याय- १- यदि जानवरका चचल तथा बदलगाम होना प्रमाणित न हो तो उसका स्वामी असाव. धानीके अपराधका अपराधी होगा । ( वीक्ली रिपोर्टर जिल्द २ सफा ५१ २-जब किसी घोडे, टट्ट, वैल अथवा कुत्तेसे कोई हानि पहुंचे और यह प्रमाणित न हो कि वह जानवर चचल था या यह कि उसकी चञ्चलतासे उसका स्वामी जानकार था तो उसके स्वामीपर कोई अपराध प्रमाणित नही होसकता अतिरिक्त उस अवस्थामे कि उसने यथोचित चौकसी जो प्रत्येक मनुष्य ऐसे जानवरसे रखते है न रक्खी हो ।-(वीक्ली रिपोर्टर जिल्द १९ सफा.१) (२९० ) जो कोई मनुष्य कोई ऐसा सर्व दुःखदायी काम जो इस सग्रहके अनुसारा सर्व दु:खदायी काम ) और किसी भाति दण्डके योग्य नहीं है करेगा उसको दण्ड जुर्मानेक, का दंड, जो दोसौ रुपयेतक होसकेगा किया जायगा। टीप-(१) कोई मजिस्ट्रेट (२) पोलीस दस्तन्दाजी नही करसकती (३) अपराधीकै नाम समन जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नही है । १-तजवीज चौदह मनुष्योकी जिनपर पृथक् २ अपराध हिन्दुस्थानके दण्डसंग्रहको दफार९० व २९१ के अभिप्रायानुसार ठहराये गये थे वर्तावमे आये । तजवीज हुई कि उपरोक्त कानूनविरुद्धता अपराधियोकी हकतलफीका कारण है, इसलिये तजवीज सजा मसूख हुई। (इ. ला. रि. मदरास जिल्द ५ सफा २० २--सर्व दुःखदायी कामके दण्डमे जुर्माना किया गया हो और यदि वह जुर्माना न अदा किया जावे तो उसके वदलेमे कठिन कैदके टण्डकी आज्ञा नही होसकती । ( इ. ला. रि. मदरास जिल्द ५ सफा ५७) ३-किसी कुँएका, जो सरकारी धरतीमे हो और सर्व सम्बधी मार्गसे आठ गजके अंतरपर बना हो घेरा न बनाना हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहकी दफा २९० का अपराध नहीं है । ( इ० ला. रे. मदरास जिल्द ६ सफा २८०) ४---कुछ मनुष्योने बांसका बाध एक घटने बढनेवाली नदीके आरपार नाव अथवा जहाजके निकल जाने योग्य बनाया था यद्यपि उन्होने ऐसे बावमे एक छोटा रास्ता नावोके निकल जानेके योग्य छोड दिया था जो रास्ता नाव निकलनेके समयके अतिरिक्त बद रहता था सब डिवीजनल अफ्सरकी दरख्वास्तके अनुसार उन मनुष्योपर हिन्दुस्थानके दडसग्रहकी दफा २८३-का अपराव रोके ( मुजाहिमत) करनेका लगाया गया तजवीज हुई कि इस बातमें सदेह है कि दफा २८३ का मुकद्दमेसे सम्बंध है परंतु उन्होंने हिन्दुस्थानके दण्डसंग्रहको दफा २६८ का अराध किया है और वह दफा २९० के अनुसार दण्डके योग्य है । ( इ० ला. रि० कलकत्ता जिल्द १४ सफा ६५६) ५--एक किरायेदार मनुष्यने अपना घर कायदेके विरुद्ध जुवा खेलनेके लिये जुवारियोको दिया था और उसके कारणसे सर्व सम्बधिोंको हानि पहुँचती थी उसपर हिन्दुस्थानके दण्डसं- चौढहवा १४.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई० । (१६५) । ग्रहकी दफा २९० का अपराव प्रमाणित किया गया-यह बान मालम होती है कि अपगवीने उम घरको जुवा खेलने के लिये नहीं ठहराया था-तजबीज हुई कि अपराधका दण्ड ठीक २ या । (.. ला. रि० मदरास जिल्द १४ सफा ३६४) ६--किमी नदी या खाटीसे नहाज या नावका आना जाना सर्व मन्त्रवी दुवढायी कामम नहीं गिना जायगा परतु यह वात अवश्य है कि जहाज या नावके चलनेम अथवा कोई भय या दाप किसी मनुष्यक किसी सर्व सम्बधी मार्गमे नाव या जहाजके चलनेके ममय न पहुंचाया जावे । (इ. ला. रि० कलकत्ता जिल्द २० सफा ६६५) ७-वे मनुष्य जो सर्व सम्बधी मार्गमे बैठकर गावमे आने जानेवालाको पत्ता खेलनेके लिये चर: कावे और उनसे रुपया जीते वह इस दफा २९० हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहके अनुसार अपराधी है । (कार्रवाई मदरास हाईकोर्ट २८ जनवरी सन् १८८७ ई.) (२९१) यदि कोई मनुप्य किसी सर्व दुःखदायी कामको कर अथवा उस - किसी सर्व दुःखदायी) करता रहे जिसको किसी ऐसे सरकारी नौकरकी आरसे उस कामके न करते रहनेकी , सर्व दुःखदायी कामके न करने अथवा उसे न करते रहनेकी आज्ञा पाकर उसे करते आज्ञा होचुकी हो जो ऐसी आज्ञाके देनेका उचित अधिकार रहना, रखता हो, तो उस मनुष्यको साधारण कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद छः महीनेतक होसकती है अथवा जुर्मानेका ढण्ट या दोनो दण्ड दिये जावेगे। टीप-दफा २८० के अनुसार है। १-हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहकी दफा २९१ का अपराव प्रमाणित करनेके लिये यह अवश्य है कि अपराधीके नाम असालतन एक ऐसा हुक्मनामा जारी हुवा था कि जिसके द्वारा उमको उसी सर्व दुःखदायी कामके न करने अथवा न करते रहनेकी आजा दीगई थी । (इ. ला.रि. इलाहाबाद जिल्द ७ सफा ९९) ( २९२) जो कोई मनुष्य अश्लील पुस्तक अथवा सग्रह [रिसाला ] अथवा अश्लील (फहश)। लिखावट ( तहरीर ) अथवा सादा चित्र अथवा रगदार अथवा पुस्तकोका बेचना आदि. मूर्ति अथवा प्रतिमा वेचे या वाटे या बेचने या माडेपर चलानेके लिये दूसरे देशसे लाए या छापे या जानबूझकर सर्वसाधारणको दिखलाए या ऐसा करनेका उद्योग करे या ऐसा करनेको स्वय कहे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रका- रोमेंसे किसी प्रकारकी कैदका- दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीभाट तीन महीनेतक हो सकती है अथवा जुर्मानेका दण्ड अथवा दोनो दण्ड दिये जायेंगे। छूट । -- यह दफा किसी ऐसे चित्रसे सबन्ध न रक्खेगी जो किसी मदिरके ऊपर या भीतर या प्रतिमा निकालनेके रथपर हो अथवा किसी मजहब या मत सबन्धी-कामके लिये रक्खी गई हो (१६६) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- या काममे आती हो चाहे वह मूर्ति कटकर वनी हो चाहे खुदकर और चाह रंग- दार हो चाहे और प्रकारकी । टीप--(.)प्रे० म० या म० अ० या म० दो० (२) पोलीस दस्तन्दाजी करसकती (३) अपराधीके नाम वारट जारी होगा ( ४ ) जमानत होसकती है (५ ) राजीनामा. नहीं है। १-हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहकी दफा २९२ व दफा २९४ का अपराध प्रमाणित करनेके लिये वह अवश्य है कि उन चित्रो और शब्दोका स्पष्टीकरण होना अवश्य है जिनका अश्लील होना वर्णन किया जावे । (इ० ला• रि० कलकत्ता जिल्द १ सफा ३५६) २-हिन्दुस्थानके दण्डसंग्रहके अभिप्रायानुसार जिस पुस्तकमे थोडी भी अन्लील इबारत हो वह अश्लील है । ( इ. ला. रि. इलाहाबाद जिल्द ३ सफा ८३७) (नोट) अदालतोंको अधिकार है कि दफा २९२ व २९३ का अपराध प्रमाणित होनेपर वह यह आज्ञा दें कि वह पदार्थ जिसके मध्ये अपराध हुआ है नष्ट कर दिये जावे । ऐक्ट न १० सन् १८८२ ई. की दफा ५२१) ( २९३ ) जो कोई मनुष्य कोई ऐसी अश्लील पुस्तक या कोई और पदार्थ अश्लील पुस्तकको ) जैसा कि पिछली दफामे वर्णन किया गया है बेचने या बा- वेचने या दिखाने के लिये 1 टने से सर्व साधारणको. दिखलानेके लिये अपने पास रखता. पास रखना. हो तो उस मनुष्यको दोनों प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद तीन महीनेतक हो सकती है अथवा जुर्मानेका दण्ड अथवा दोनों दण्ड दिये जायेंगे। टीप-दफा २९२ के अनुसार समझो। ( २९४) तबदील हवा दफा ३ ऐक्ट ३ सन् १८९५ ई० के अनुसार जो कोई अलीक काम और गीत. मनुष्य इस प्रकारसे कि औरोंको रख पहुंचे- - (म) सर्व साधारणके आने जानेके किसी स्थानमें कोई अश्लील काम करे । (व) सर्व साधारणके आने जानेके किसी स्थानमें या उसके निकट कोई अश्लील गीत गावे अथवा कोई अश्लील शेर (छन्द चौपाई ) पढे अथवा अश्लील बाते बके तो उस मनुष्यको दोनों प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दंड दिया जायेगा जिसकी मौआद तीन महीने तक होसकती है अथवा जुर्मानेका दण्ड अथवा दोनों दण्ड दिये जायेंगे। टीप-दफा २९२ के अनुसार समझो।

चौदहवा १४.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई० । (१६७) १.-अपराधीके ऊपर लावनी गानेका अपराध जो सदैव अश्लील नहीं हुआ करती परतु बहुधा हुवा करती है लगायागया और मजिस्ट्रेटने उसे हिन्दुस्थानके दण्डसमहकी दफा २९४ के अनुसार अश्लील गीत गानका अपराधी ठहराया परतु जो कि गवाही इस बातकी कि जो लावनी अपराधीने गाई थी वह अश्लील थी मौजूद न थी इस कारण वह दण्डकी आजा से बरी किया गया । (रिपोर्ट बम्बई हाईकोर्ट जिल्द ४ सफा २५) (२९४ ) * ( अ ) जो मनुष्य कोई दफ्तर या घर ऐसी चिट्ठी डालनेके अभिप्रायस चिहीदालनेका दफ्तर) रक्खे जिसकी आज्ञा सरकारसे नहीं है उसको दोनो प्रकारों से रखना, किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जायेगा जिसकी मीआद छ. महीने तक होसकती है अथवा जुर्मानेका दण्ड या दोनों दण्ड दिये जॉयगे। जो मनुष्य किसी घटना या इत्तिफाकके होनेपर जो निस्वत या ताल्लुक किसी टिकट अथवा कुरम अथवा नम्बर या हिन्दसा ( अक) आदिसे ऐसी चिही डालनेमें रखता हो किसी मनुष्यके लाभके लिये कुछ रुपया चुकाने या कोई सामान सिपुर्द करने अथवा किसी कामके वत्तावमें छाने अथवा किसी काम करने देनेके लिये कोई यन प्रगट करे उसको जुर्मानेका दण्ड जो एक हजार रुपया तक हो सकेगा दिया जायगा । टीप-(१) दफा २९० के अनुसार है। १-जुवा खेलना कानूनानुसार मुफस्सिलातम मना नहीं है जो रुपया इस प्रकारका जुवा खल- नके लिये उधार दिया नावे वह नालिशसे वसूल होसकता है । (इ० ला.रि. मदरास जिल्द ७ सफा ३.१) २-शब्द "चिही डालने " मुन्दफिकरा (टुकडा) २ दफा २७४ (अ) हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहसे अभिप्राय प्रत्येक चिही डालनेका है जिसकी आजा गवर्नमेंटने न दी हो और उसमें चिट्ठी अन्ये दशकी मौ सयुक्त हैं और शब्द " प्रगट करनेवाले " मुन्दर्जे फिकर मजकूरमे दोनो वह मनुष्य जो दरख्वास्त करता है और मालिक अखवार भी जो दरख्वास्त इस्तिहारको छापता है मामल । मालिक अखबार बबई जिसने एक इश्तिहार अपने अखबारमें माल सम्बन्धी व वजन चिठी डालनेका मुश्तहर ( प्रगट ) किया था वह हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहको दफा २९४ को मशासे दण्ड योग्य ठहराया गया । (अगरेजो इडियन गरिपोर्ट सिलसिला बम्बई जिल्द १० सफा ९७) * ऐक्ट २७ सन् १८७० ई० की दफा १४ व ऐक्ट १० सन् १८८२ ई. की दफा १९६ को देखो। (इस सग्रहके अन्याय ४२५ व २३ उन अपराधोंसे सम्बध रखते हैं जो इस दफाक अनु- सार दड योग्य हैं ऐक्ट १७ सन् १८७० ई० दफा १३ को देखो) (१६८) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह । [ अध्याय- अध्याय पन्द्रहवाँ १५. उन अपराधोंके विषयमें जो मतसे सम्बन्ध रखते हैं । . (२९५ ) जो कोई मनुष्य किसी पूजाके स्थानको अथवा किसी पदार्थको जिसको किसी सम्प्रदायके मतकी) किसी सम्प्रदायके मनुष्य पूज्य मानते हो तोडे फोडे अथवा निन्दाके अभिप्रायसे पूजा- हानि पहुँचाए अथवा अपवित्र करे जिसके द्वारा मनुष्यों के के किसी स्थानको हानि किसी सम्प्रदायके मतको निन्दा करनेके अभिप्रायसे अथवा उस पहुंचाना अथवा अपवित्र कामके होनेको सम्भवित जानकर कि मनुष्योंका कोई सम्प्रदाय करना. उस तोड फोड या हानि पहुँचाने अथवा अपवित्र करनेको अपने मतकी - एक प्रकारसे निन्दा समझेगा तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा । जिसकी मीआद दो वर्षतक होसकती है अथवा जुर्मानेका दण्ड अथवा दोनोंही दण्ड दिये जावेगे। टीप-(१) प्रै० म० या म० अ० या म० दो० (२) पोलीस दस्तन्दाजी करसकती है ३) अपराधीके नाम सम्मन जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नही है। १-एक हिन्दूने एक स्त्रीके साथ एक मुसलमान फकीरकी कबरके. हातेके भीतर व्यभिचार किया हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहको दफा २९५ के अनुसार वह अपराधी प्रमाणित हुआ तज. वीज हुई कि इस बातका प्रनाण न होनेकी अवस्थामे कि उपरोक्त स्थान पूजाके लिये काममे लाया जाता था अथवा किसी और दूसरी रीतिपर पाक था अपराधीकी तजवीज अनुचित्त है वरन उसका दण्ड हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहकी दफा २९७ के अनुमार होना ठीक है । ( इ. ला. रि. मदरास जिल्द १० सका १२६) २-हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहकी दफा २९५ मै लिखे हुए गन्द "पदार्थ से जानदार पदार्थका अभिप्राय नहीं है। (इं० ला. रि० इलाहाबाद जिल्द १० सफा १५०) ३-हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहको दफा २९५ मे लिखे हुए शब्द " पदार्थ " मे जानकर पदार्य न गिने जायेंगे, कोई सांड जो किसी हिन्दूकी श्राद्धमे स्वाधीन कर दिया जावे, इम दफामै लिखे शब्द पदार्थसे सम्बन्ध न रक्खेगा-और जब कि ऐसे जानवरको मुसलमान छिपाकर गोश्त और चमडेके लालचसे मार डाले तो उन्होने दफा २९५ का कोई अपराध नहीं किया और सांड' स्थावर- धन ( जायदाद मनकूला ) दफा ३७८ या ४०३या ४२५ हिन्दुस्थानके दण्डसंग्रहके अभिप्रायमे नहीं । (इ. ला. रिपोर्ट कलकत्ता जिल्द ७ सफा ७५२ मवरुखै २७ मार्च व १५ अप्रैल सन् १८९० ई०). .

( २९६) पन्द्रहवा १५.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०॥ (१६९) जो कोई मनुष्य जानबूझकर अपनी इच्छापूर्वक किसी समाजको दुःख पहु- किसी मत सम्बन्धी ] चाए, जो अपने मतको पूजा अथवा मतकी रीतोको पूरा करनेमें समाजको छेडना. उचित रीतिसे तत्पर हो तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीभाद एक वर्षतक होसकती है या जुर्मानेका दह अथवा दोनो दण्ड दिये जावेगे। टीप-दफा २९५ के अनुसार है । १---मुसलमानोकी एक सर्व सवधी मसजिदमे कुछ खेफी मतके मुसलमान जिनकी रीति- के अनुसार शब्द " आमीन " धीरेसे बोलना चाहिये, नमाज पढते थे, वहा पर एक और मुसल- मान दूसरे मतका मसजिदमे आया और नमाज पढतेमें अपनी रीतिके अनुसार गन्द " आमीन " बडी जोरसे कहा । इस कामके मव्ये वह हिन्दुस्थानकें दडसग्रहकी दफा २९६ के अनुसार अपराधी प्रमाणित हुआ । इजलास कामिलसे हुक्म हुआ कि मुकद्दमेकी तजवीज दुबारा कीजावे और नीचे लिखी हुई बातोपर विचार किया जावे, कि कोई गिरोह ( समाज ) मतकी पूजाके लिये उचित रोतिपर इकट्ठा हुआ था या नही और वास्तवमे ऐसे गिरोहको अपराधीन हानि पहुंचाई या नहीं और अपराधीका अभिप्राय हानि पहुंचानेका था या नहीं । (इ० ला. रि. इलाहाबाद जिल्द ७ सफा ४६१) ( २९७ ) जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यका दिल दुखाए अथवा किसी मनुष्यके कवरस्थान आदिम मतको निदा करनेके अभिप्रायसे अथवा इस कामके होनेको मदखल्त वेजा करना, सम्भावित जानकर कि उसके द्वारा किसी मनुष्यका दिल दुखेगा अथवा किसी मनुष्यके मतकी निंदा होगी किसी पूजाके, स्थान अथवा कवर- स्थान अथवा ऐसे स्थानमे जो मृतक क्रियाओको करनेके लिये अथवा मरे हुमोको गाडनेके लिये ठहराया गया हो, मदाखलत वेजा करे अथवा किसी मृत मनुष्यके शव (लाश ) की अप्रतिष्टा करे अयवा उन मनुष्योको हानि पहुंचाने जो मृतक क्रिया करनेको इकट्ठा हुए हो तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारों से किसी प्रकारको कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआढ एक वर्पतक होसकती है अथवा जुर्मानेका दण्ड अथवा दोनोही दड दिये जावेगे । टीप-दफा २९५ के अनुसार है। १-धरतीके एक टुकडेमें (क) (ख) (ग) (घ) आपसमै सामी थे जिसमे वे अपने मृतकोंको गाडा करते थे । (क) और (ख) ने (घ) के नातेदारोकी कवरोके निकट एक गटा खोदा परन्तु किसी कबरको कुछ हानि-न पहुँचाई-तजवीज हुई कि (क) और (ख) के मन्ये हिन्दुस्थानके दडसग्रहको दफा २९७ के अनुसार दह देना अनुचित था । (३० ला.रि. मदरास जिल्द ३ सफा १७८) malam (१७०) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- ( २९८ ) जो कोई मनुष्य सोच विचारकर मतके विषयमे किसी - मनुष्यका अन्तः- किसी मनुष्यके अन्त.. करण दुखानेके अभिप्रायसे कोई बात कहे अथवा कोई शब्द करणको मतके विषयमे | निकाले जिसको वह मनुष्य सुनसके अथवा उस मनुष्यके सामने जानबूझकर दुःख देनेके कोई काम करे अथवा उसकी दृष्टिके सामने कोई पदार्थ रक्खे तो अभिप्रायसे कुछ कहना उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दण्ड इत्यादि. दिया जावेगा जिसकी मीआद एक वर्षतक हासकती है अथवा जुर्मानेका दण्ड अथवा दोनों दंड दिये जायेंगे। टीप-(१)प्रे. म. या म० अ० या म. दो०(२) पोलीस दस्तन्दाजी नहीं कर सकती (३) अपराधीके नाम समन जारी होगा (४) जमानत हो सकती है (५) राजीनामा नहीं है । अध्याय सोलहवाँ १६. I उन अपराधोंके विषयमें जो मनुष्यके शरीरमें प्रभाव (असर ) रखते हैं। उन अपराधोंके विषयमें जो मनुष्यके प्राणों में प्रभात (असर) रखते हैं। ( २९९ ) जो कोई मनुष्य मृत्यु उत्पन्न करनेके अभिप्रायले अथवा शरीरको ऐसा शातक्त्यात (कतल)) दुःख पहुचानेके अभिप्रायसे जिससे मृत्युका होना अति संमवित है इसान मुस्तलजिम सजा, अथवा यह जानकर कि कदाचित् उस कामके करनेसे वह मृत्युका कारण होगा, कुछ काम करके मृत्युको उत्पन्न करे तो वह ज्ञातवत वतका अपराध करने. बाला कहलावेगा। उदाहरण। क) शिवशकर किसी गढेके ऊपर कुछ लकडिमां और पास इस इस अभिप्रायसे पाट दे कि उसके द्वारा मृत्युका कारण हो अथवा इस जानकारी कि उसके द्वारा मृतु हाना सम्भवित है और रमाशकर उसको ठोसधरती जानकर उसपर चले और उसमे गिरकर नर जाये तो, शिवशकर ज्ञातवतूघातके अपराधका अपराधी होगा। (ख) शिवशंकर यह जानता हो कि रमाशकर किसी झाडीके पीछे है और उमाशकर यह न जानता हो और शिवशकर रमाशंकरको उस झाडीपर वन्दूक चलानेके लिये बहकावे इस अभिप्रायसे अथवा इस बातके होनेको सम्भव जानकर कि वह बहकाना रमाशकरकी मृत्युका सोलहवा १६.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई०॥ ( १७१) कारण होगा-उमाशकर बदक चलावे और रमागकरको मार डाले तो इस अवस्थामे सम्भव है कि उमागकर किमी अपराधका अपराधी न हो परन्तु शिवशकर जातवत्घातके अपराधका अप- राधी हुआ। ग) शिवशकर किसी चिढियाको मारन अथवा चुराने अभिप्रायसे चिडियापर बंदूक चावे और रमाशकरको जो किसी झाडीके पीछे हो मारे और शिवशकरको यह न गात हो कि रमाशकर वहा है तो इस अवस्थामे शिक्शकर जातवघातके अपराधका अपराधी न होगा यद्यपि बह एक अनुचित काम करता था । क्योंकि उसने रमाशकरको मार डालनेके अभिप्रायसे बदूक नहीं छोडी थी और न उसका यह अभिप्राय था कि ऐसे काम करनेसे मृत्यु कोजावे जिससे वह जानब था कि मृत्यु होनेका भय है। स्पष्टीकरण-१ जब कोई मनुष्य किसी और मनुष्यको जो किसी रोग अथवा शारीरिक ( जिस्मानी ) निर्बलतामे फँसा हो, शारीरिक दुख पहुचाए और उसके द्वारा उसकी मृत्यु शीघ्रही हो जावे तो उपरोक्त मनुष्य उसकी मृत्युका कारण समझा जायगा। स्पष्टीकरण-२ जब मृत्यु शारीरिक दुःखके कारण हुई हो तो जो मनुष्य उस दुःखको पहुचानेवाला हो मृत्यु उत्पन्न करनेवाला गिना जायगा जब कि उचित यत्नो और सावधानीके साथ औपधि करनेसे उसकी मृत्यु रुकसकती हो । स्पष्टीकरण-३ किसी वालकका मारना उसकी माताके गर्भ में ज्ञातवत् घात न गिना जायगा परन्तु किसी ऐसे जीवित बालकका मारना कि जिसका कोई अग बाहर निकल आया हो ज्ञातवत् घात हो सकेगा चाहे उस बालकने श्वास मी न ली हो और उमका जन्म भी न होचुका हो। १-अपराधी एक मनुष्यकै मारनेका कारण इस प्रकार पर हुआ कि उसने उसके पहलमें एक पतला बांस मारा जो मोटाईमें एक इश्चसे अधिक न था और उसकी चोटसे उस मनुष्यकी तिली फट गई जिसमें कोई रोग था, अपराधी भारीचोट (जररशदीद ) पहुँचानेका अपराधी प्रमा- णित हुआ (वीली रिपोर्टर मिल्द २ सफा ३८) २-अपरावियोंने एक चौरपर उसके पकडे जाने के पश्चात् आक्रमण ( हमला ) किया और किसी २ ने उसे लात और घूसोंसे मारा और दो मनुष्याने एक छोटे पीसे उसको दो एक चोर्ट लगाई और उसकी नाक तोड टाली । वह चोर दो घटेके पश्चात् मरगया-सेशन जजने अपनी तम- वीजमे लिखा कि वह पाढा भारी न था और डाक्टरकी गवाहीसे जान पड़ा कि उस चोरकी मृत्यु फिसी चोटके कारण न हुई थी बरन बराबर कई एक चोटीके लगनेसे हुई थी जो इस योग्य न थी कि मृत्युका कारण हो । तजवीज हुई कि प्रतिबादी ( मुद्दआअलेहुम ) केवल मारी चोट पहुंचानेके अपराधी होगये थे क्योंकि उनके कामोसे यह न प्रगट होता था कि उनका अमि- पाय ऐसी चोटके पहुँचानेका था कि जिससे मृत्युका होना सम्भव हो और न यह प्रगट होता (१७२) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- था कि उनको यह जानकारी थी कि वे अपने कामोसे कदाचित् मृत्युके कारण होगे । ( वीक्ली रिपोर्टर जिल्द ५ सफा ४१) ३- एक सपेरेने इस बातको जानकरभी कि उसने अपने सापका दॉत न तोडा था उस सापको एक तमाशा देखनेवालेके शिरपर रखदिया जिसको उसने काट खाया और वह वमाशा देखनेवाला मरगया । इसलिये वह सपेरा जातपातके अपराधका अपराधी हुआ और उसके मध्ये- दफा ३०४ व.३०४ (अ) के अनुसार इस बातपर दण्डकी आजा हुई कि उसने उपरोक्त काम इस जानकारीसे किया था कि उस कामसे मृत्युके होनेका सम्भव था । ( इ. ला. रि० कलकत्ता जिल्द ५ सफा ३५१) ४.- अपराधीने अपनी स्त्रीको धरतीपर गिराकर अपना घुटना उसकी छातीपर रख दिया और दो तीन घुसे ऐसे जोरसे उसके शिरपर मारे कि उसके दिमागसे रक्त बहने लगा और वह तत्कालही अथवा योडी देरके पश्चात् मरगई-तजवीज हुई कि अपराधी की इच्छा उसे मार बालनेकी न थी और जो शारीरिक चोटं उसको पहुँचाई-गई थी वह साधारण रीतिपर मृत्यु होनेके योग्य थी इसलिये अपराधी जातघातकी मृत्यु ( कतल अल्द ) का अपराधी न हुवा था वरन् जातवत् घातका अपराधी हुवा था जो जातघातकी सीमातक न पहुंचता था । (इ. ला. रि० बम्बई जिल्द? सफा ३४२) ( ३०० ) उन अवस्थाओके अतिरिक्त जो नीचे मुस्तसना (छूट ) की जाती हैं } ज्ञातवत्यात ज्ञातघात होगा। 'पहिले-यदि वह काम जिसके कारणसे मृत्यु हुई हो इस अभिप्रायसे किया गया कि मृत्युका कारण हो, अथवा- दूसरे-पदि काम ऐसी शारीरिक चोटके पहुचानेके अभिप्रायसे किया गया हो जिससे आराधीकी जानकारीमे उस चोट पाए हुए मनुष्यका मरजाना सम्भवित है - ज्ञातघात. अथवा- तीसरे-यदि काम किसी मनुष्यको कोई शारीरिक दुःखके पहुचानेके अभिप्रायसे किया गया हो और वह शारीरिक दुःख जिसके पहुचानेका अभिप्राय किया गया हो ऐसा हो कि प्रकृतिकी साधारण रीतिके अनुसार मृत्यु उत्पन्न करनेके लिये काफी हो, अथवा- . होना चौथे-यदि वह मनुष्य जिसने उस कामको किया है यह जानता हो कि वह काम ऐसा भारी जोखिमका है कि उससे मृत्यु अथवा शरीरका ऐसा दुःख अति सम्भवित है कि जिससे मृत्युके होनेका भय है और उस कामके करनेमें मृत्युका भय अथवा उपरोक्त दुःख (जरर) का भय उत्पन्न करना बिल्कुल विना कारण हो। .

सोलहवा १६.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०॥ (१७३) उदाहरण। क) शिवशकरने रमाशकरको मारडालनेके अभिप्रायसे उसपर बन्दुक चलाई और रमागक- रकी उससे मृत्यु हुई तो शिवशकरने जातघातका अपराध किया । ख) शिवशकर यह बात जानबूझकर कि रमाशकर किसी ऐसे रोगमें फंसा है जिसके कारण और एकही घूससे उसकी मृत्युका होजाना सम्भव है, उसको शारीरिक चोट पहुंचानेके अभिप्रायसे मारे और रमाशकर उस घूसके कारण मर जावे तो ऐसी अवस्थामे शिवगकर जातघातका अपराधी होगा, चाहे ऐमा धूसा प्रकृतिको साधारण रीतिके अनुसार किसी निरोगी मनुष्यकी मृत्यु लिये काफी न होता परन्तु यदि शिवशकर यह न जानकर कि रमागकर किसी बीमारीमें फंसा हुआहै उसको एक ऐसा घुसा मारे जो प्रकृतिकी साधारण रौतिके अनुसार किसी निरोगी मनुष्यको मार डालनेके लिये काफी नहीं है तो इस अवस्थामे शिवशकर, चाहे उसका अभिप्राय शारीरिक चोटके पहुंचानेका हो, जातघातका अपराधी नहीं परन्तु नियम (गर्त ) यह है कि जब उसका अभिप्राय मृत्यु करने अथवा ऐसी शारीरिक चोटके पहुँचानेका न था जो प्रकृतिकी साधारण रीतिके अनुसार मृत्युका कारण होती। (ग) शिवशकर तलवार या लहसे रमाशकरको जानबूझकर ऐसी चोट पहुंचाकर जो प्रकृतिको साधारण रीतिके अनुसार किसी मनुष्यको मार डालनेके लिये काफी हो और रमागकर उस चोटके कारणसे मर जावे तो इस अवस्थामे शिवशकर जातघातका अपराधी होगा चाहे रमागकरको मार डालना उसके अभिप्रायमे न हो। (घ) शिवशकरने विना कारण मनुष्योंकी भीडमें भरी हुई तोप चलादी और उसमें से एक मनुष्य मरगया तो इस अवस्थामै शिवशकर जातघातका अपराधी हुआ यद्यपि उसने पहिले किसी विशेष मनुष्यको मारडालनेका मनोरथ न किया हो। छूट १. ज्ञातवत् घात उस अवस्थामे ज्ञातघात न होगा जब कि अपराधीने किसी वडे ज्ञातवत् घात किसी और तत्काल क्रोध दिलानेवाले कामके कारण अपने आपेमें न रह- अवस्थामै जातपात न कर उस मनुष्यको, जिसने वह क्रोध दिलानेका कारण उत्पन्न होगा. किया हो, मारडाला हो अथवा भूलसे या अकस्मात्से किसी दूसरे मनुप्यकी मृत्युका कारण हुआ हो- परन्तु ऊपर लिखी हुई छूट नीचे लिखे नियमोके आधीन रहेगी- पहिले -यह कि, अपराधीने स्मय उस तत्काल क्रोव दिलानेवाले कामको न चाहा हो अथवा जाननूझकर इस अभिप्रायसे उस क्रोध दिलानेवाले कारणको न दृढा हो कि उसे किसी मनुष्यके अयवा उसको हानि पहुँचानेका कारण होजावे। - मार डालने (१७४) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- दूसरे-यह कि, वह तत्काल क्रोध दिलानेका कारण किसी ऐसे कामसे न हुआ हो जो कानूनके वर्ताव करनेमे किया गया है अथवा जिसको किसी सरकारी नौकरने अपनी नौक- रोके अधिकारके उचित वर्तावमें किया हो । तीसरे-यह कि, वह क्रोध दिलानेका कारण किसी ऐसे कामके कारणसे न दिलाया गया हो जो निज रक्षाका अधिकार कानूनानुसार वर्त्तनेमे किया गया हो । स्पष्टीकरण-यह बात कि उस क्रोध दिलानेका कारण ऐसा वडा और एकाएकी { तात्कालिक ) था या नहीं कि जिससे अपराधका ज्ञातघातकी सीमातक पहुचना रुकजावे, एक अम्र ( काम ) जांच करनेके योग्य है। उदाहरण । क) शिवशकरने क्रोधकी अवस्थामे, जिसके दिलानेका कारण रमाशकरने उत्पन्न किया जानबूझकर रमाशंकरके बालक हरशकरको मारडाला-तो यह जातघातका अपराध हुआ; कने क्रोध नहीं दिलाया था और न उम बालकको मृत्यु उस क्रोधकी अवस्थामे किसी काम करनेसे अकस्मात् अथवा दैवगतिसे हुई। क्योंकि बाल- (ख) शिवशकरने रमाशकरको अचानक और भारी क्रोध दिलानेका कारण उत्पन्न किया रमाशंकरने उस क्रोधके होतेही शिवशंकरपर पिस्तौल चलाया परन्तु उसकी इच्छा उमा- शंकरके मारडालनेकी, जो उसके समीपही खडा था परन्तु दिखाई नहीं देता था, न थी और न बह यह जानता था कि उमाशंकरका माराजाना सम्भव है-रमाशंकरने उमाशकरको मार डाला तो इस अवस्थामे रमाशंकरने जातघातका अपराध नहीं किया बरन् केवल जातवत् घातका किया। (ग) शिवशकर कि जो नाजिरका पियादा है कानूनानुसार रमाशकरको पकडे और रमाशकर पकडने के कारण यकायक क्रोधमें आकर शिवशकरको मारडाले तो यह ज्ञातघात है क्योकि वह कोष एक ऐसे कामके द्वारा दिलाया गया जो एक सरकारी नौकरकी ओरसे उसके अधिकारके वर्तनेमे किया यया था। घ) शिवशकर, रमाशकरके सामने जो मजिस्ट्रेट है गवाहकी गति ( तौर ) पर उपस्थित (हाजिर ) हो और रमाशकर यह कहे कि मैं शिवशकरकी गवाहीके एक शब्टपर भी विश्वास नहीं करता और शिवशकरने झूठी शपथ (हलफ दरोगी) की है-और शिवशकर इन बातोंसे यकायक क्रोध आजावे और रमाशकरको मार डाले तो यह जातघात है । (च) शिवशकर रमाशकरकी नाक मरोडनेका उद्योग करे और रमाशंकर निज रक्षाका अधिकार वर्तनेमे शिवशकरको इसलिये पकडले कि उसको इस कामके करनेसे रोके और शिव- शंकर इस कारणसे यकायक मारी क्रोधमें आकर रमाशकरको मारडाले तो यह ज्ञातघात है।

सोलहवा १६.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई० । (१७५) क्योंकि वह क्रोध ऐसे कामके द्वारा दिलाया गया जो निज रक्षाके अधिकारके वर्तनम किया गयाथा। छ) शिवाकर रमाशकरको मारे और रमाशकर उस काध दिलानेके कारणसे अचानक क्रोधमै भर जाये और उमाशकर जो समीपही खडा हो इम इच्छासे कि इस क्रोधम शिवशंकरको रमाशकरसे मरवा डालनेका सुयोग मिल जाने रमाशकरके हायमै एक छुरी देदे और रमाशकर उस छुरीसे शिवशकरको मारडाले तो इस अवस्थामें सम्भव है कि रमाशकर केवल ज्ञातवघातका अपराधी हो परन्तु उमाशकर शातपातका अपराधी होगा। छूट २. जातवत् घात ज्ञातघात न होगा, यदि अपराधी शुद्धभावसे अपने तन अथाा धनके मध्ये निज रक्षाके अधिकारको वर्तनेमे उस अधिकारसे बढनाव जो उसको कानूनानुसार प्राप्त है । और उस हानिसे, जो उस रक्षाके लिये अवश्य है, अधिक हानि पहुंचानेका पहि- लेसे कोई शोच या विचार न करके उस मनुष्यको मारहाले जिसके रोकमें वह उस निज रक्षाके अधिकारको वर्त्तताहै । उदाहरण । शिवशकर रमाशकरको कोडे मारनेका उद्योग कर इस प्रकारपर कि, रमाशकरको भारी दुःख (जररबादीद) पहुंचे, और रमाशकर तमचा निकालले और शिवशकर उस उद्योगसे न रुकै तब रमाशकर शुद्धभावसे यह समझ कर कि वह अपनेको किसी और यलसे कोडे खानेसे नही बचा सकता शिवशकरको तमचा मारकर मारडाले तो रमाशकर ज्ञातपातका अपराधी नहीं हुआ बरन् केवल जातवत्घातका हुआ। छूट ३. ज्ञातवत्धात ज्ञातपात न होगा यदि अपराधी जो सरकारी नौकर हो अथवा किसी ऐसी सरकारी नौकरकी सहायता कर रहा हो, जो सर्व सबधी न्यायके प्रचलित करनेका बर्ताव कर रहाहो उन अधिकारोंसे जो उसको कानूनानुसार प्राप्त है वढजाए और किसी ऐसे कामके करनेसे मृत्युका कारण हो जिसको वह शुद्धमावसे उचित और अपनी सरकारी नौकरीका काम यथोचितके भुगतानेके लिये अवश्य समझता हो और उस मनुष्यसे जो मरा है कुछ शत्रुता न रखताहो। छूट ४. ज्ञातवत्घात उस अवस्थामे ज्ञातघात न गिना जायगा जब कि वह एकाएकी झगडा होकर लडाईमें क्रोवकी अधिकताके कारण विना पहिलेसे विचार किये होजाय और अपराधीने कोई अनुचित लाभ न उठाया हो, अथवा निर्दयीपनसे अयवा असाधारण रीतसे कुछ काम न किया हो।

. हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। (१७६) [अध्याय- स्पष्टीकरण-ऐसी अवस्थाओंमें इस बातके विचारनेको आवश्यकता नहीं है कि वह क्रोध किस ओरखालेने दिलाया अथवा पहिले किसने आक्रमण ( हमला ) किया। छूट ५. ज्ञातवत्धात उस अवस्थामे ज्ञातघात न होगा जब कि यह मनुष्य जो मारा गया है अठारह वर्षसे अधिक अवस्थाका हो और वह अपनी प्रसन्नतासेही माराजाए अथवा मारे जानेकी जोखिम उठाए । उदाहरण । शिवशकर रमाशकरको जिसकी अवस्था अठारह वर्षसे कम है, बहकाकर उसके हाथ जानबू- शकर आत्महत्या (खुदकुगी) करावे, तो इस अवस्थामै रमाकर न्यून अवस्था होनेके कारण अपनी मृत्युके राव्ये प्रसन्नता करनेके प्रकट योग्य न था. इस कारण शिवगकरने जातघातमें सहायता की। १--हिन्दुस्थानके दंडसग्रहकी दफा ३०० की छूट ५ का, ऐसे झगडेके मुकद्दमेसे सम्बन्ध नहीं है जो कि मुकद्दमा दूसरी किस्मका सतीके मध्ये सम्बन्ध रखता हो। (इ. लारि• कलकत्ता जिल्द ५ सफा ३१) २- हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहकी दफा ३०० का " क्रोधदिलाना " उस प्रकारका होना चाहिये किं जिसमें अपराधी अपने अधिकारसे बाहर होजावे और इस बातकी जाच करनेमे कि वह क्रोध उपरोक्त प्रकारका था या नही अपराधीकी उस दिली हालत (अन्तःकरणकी अवस्था) पर विचार करना उचित है जो उपरोक्त क्रोध दिलानक समयमे हो । (इ. ला. रि. मदरास जिल्द २ सफा १२२) ३--झगडेके समयका बयान किसी -मनुष्यका, अपराधीके सामने होना चाहिये नही तो प्रमाण ( सबूत ) मे वह बयान सुननेके योग्य न होगा । (इ. ला. रि० कलकत्ता जिल्द ८ सफा २११) ४-अपराधी पर उसकी स्त्रीके वधका अपराध लगाया-वाहीसे यह प्रमाणित हुआ कि अपराधीके जीमे इस बातका पूरा सन्देह उत्पन्न होगया था कि उसकी स्त्री किसी दूसरे मनुष्यसे फंसी हुई है-एक रातको उसकी स्त्री यह जानकर कि उसका स्वामी सोगा हुआ है चौरीसे उसके पाससे उठकर चली गई, अपराधीभी एक कुल्हाडी लेकर उसके पीछे २ गया । उसने अपनी नीको उसके आशनाके साथ सर्वसाधारण मार्गपर बातचीत करते पाया यह देखकर तत्काल उसने उस लीको जानसे मारदाला-तजवीज हाईकोर्ट की यह हुई कि अराधीने जातपातका अपराध किया है क्योंकि इस घटनासे "भारी और एकाएक क्रोध" का पहुंचा हस्वमशाय दफा ३०० छूट न. १ से प्रगट नही होता है कि जिससे ज्ञातपातका अपराध बदल कर ज्ञातवत्धानका होजावे । ( इ. मा. रि० जिल्द८ इलाहाबाद सफा ६२२) सोलहवा १६.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०॥ (१७७) ५.--दो दियोन स्वीकार किया कि उन्होंने अपनी एक बीके साथ उस मारे गए हुए मनु- ध्यको व्यभिचार करते देखकर उसको उसी समय और उमी स्थान पर मारडाला था-तजवीज हुई कि एकाएक क्रोध हो आनेके कारण जातघात कम होकर जातवत्घात होगया था जो जातवातकरी सीमातक नहीं पहुँचता था । (वीकी रिपोर्टर जिल्द १ सफा ७) ६--जब अपराधीने यह समझकर कि अमुक (फला ) मनुष्य उसकी बांके साथ आगनाई रखता था उस मनुष्यको मार डालनेका भय दिलाया और फिर उसको मारहाला तो तजवीज हुई कि अपराधीने जातघातका अराव किया था और उसका काम दफा ३०० की दूट १ मै नहीं गिना जासकता । ( वीक्ली रिपोर्टर नन्द ' सफा ४६) ७-तीन भागोंने एक मनुष्यको अपनी बहिनके साथ लेटा हुआ देखकर उससे मारडाल तजवीज हुई कि उनका काम दफा ३९० की छूट १ मे गिना जायगा । (वीली रिपोर्टर जिस्ट ४ सफा ३८) ८- यदि कोई अगरह वर्षसे अधिक आयुका मनुष्य अपनेको नपुसक (नामर्द ) कर, और नपुसक किये जानेमे वह मरजावे तो नपुसक करनेवाला भातघातका अपराधी नहीं वरन् जातवत् घातका है ( वीली रिपोर्टर जिल्द ५ सफा ७) ९-यदि कुछ मनुष्य लठबद इकडे होवे और उनका अगुवा एक ऐमा मनुष्य हो कि जिसके यहा बदूक हो और यह वृत्तान्त वह सब मनुष्य जानते हो और उनका अभिप्राय किसी मनुष्यका धन वलपूर्वक ले जानेका हो। तो यदि उन मनुष्योमेसे कोई मनुष्य बंदूक उठाकर उस मनुष्यको मारडाले जो उचित रीतिपर अपने मालके ले जानेमे रोक टोक कर रहा हो तो ऐमी अवस्थामें कुल मनुष्य -हिन्दुस्थानके दण्डस्ग्रहकी दफा १४९ के अनुसार जातघातके अपराधी गिने जासकते है। (कलकत्ता ला. रिपोट जिल्द ३ सफा ४९) १०-वधक अभियोगीम जजोको फाँसीका दण्ड देनमे कुछ आगापीछा न करना चाहिये जब कि साक्षी (शहादत) पर विश्वास कर लिया जावे और उससे अपराध प्रमाणित समझा जावे। (वीही रिपोर्टर जिल्द ७ सफा ६४ ( ३०१) यदि कोई मनुष्य कोई ऐसा काम करनेसे जिससे उसकी यह इच्छा हो जिस मनुष्पके मारने- अथवा जिससे इस कामका समव उसकी जानकारीमै हो कि का अभिप्राय था उसके वह मृत्युका कारण होगा किसी ऐसे मनुष्यकी मृत्युका कारण हो अतिरिक्त किसी औरको कर ज्ञातवत्घातका अपराध करे जिसकी मृत्युके कारण होनेकी न मारनेसे जातवत्घातका को न उस कामका समत्र उसकी जानकारी में था अपराध होना. कि वह उसकी मृत्युका कारण हो तो यह ज्ञातवत्घातका अप. राध जिसका वह अपराधी हुआ है उत्ती प्रकारका है जो उस अवस्थाने होता जब कि अपरावी उस मनुष्यकी मृत्युका कारण हुवा होता जिसकी मृत्यु उसकी इच्छामे थी अयवा उत्त कामका संभव उसकी जानकारीमे था कि वह उनकी मृत्युका कारण होगा । तो उसने इच्छा १३ (१७४ हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- १--किसी मनुष्यने अपनी आशनाके स्वामीको मारनेके अभिप्रायसे अंधेरी रातमे घात लगाई और भूलसे किसी राहगीरको मार दिया तो ऐसी अवस्थामै उसे जातपातके अपराधमें फाँसीका दण्ड दिया गया । (देखो मोरले साहबकी डायजेस्ट जिल्द ३ सफा १२५) ( ३०२ ) जो कोई मनुष्य ज्ञातघातका अपराधी हो • उसको वधका दण्ड अथवा देश निकालेका दण्ड दिया जायगा और वह जुर्मानेके दण्ड ज्ञातपात, भी योग्य होगा। टीप-(१) अदालत सेशन (२) पोलीस दस्तन्दाजी करसकती है (३) अपराधीके नाम बारट जारी होगा (४) बिला जमानत (५) राजीनामा नही है । १-यदि कोई मनुष्य जो किसी दूसरे देशमे रहता हो ब्रिटिश इडियामेसे किसी मनुष्यको भगा ले जाए और दूसरे देशमै उसको मारडाले तो ब्रिटिश इडियामे उसकी तजवीज केवल भगा ले जाने के अपराधके मध्ये होसकती है । ( वीक्ली रिपोटर जिल्द १ सफा ३९) २- जब कभी कोई गर्भिणी स्त्री ज्ञातघातका अपराध करे तो उसको वधका दण्ड न देना चाहिये । ( वीक्ली रिपोर्टर जिल्द ३ सफा १५) ३- केवल इस बातसे कि वध किये मनुष्यकी लाश नहीं मिली कोई कारण अपराधीको जातपातका अपराधी प्रमाणित करनेका नहीं है। ( इ. ला. रि० इलाहाबाद जिल्द ३ सफा ३८३) ४- अपराधीपर जो गांजाका पीनेवाला था ज्ञातयातका अपराध अपनी स्त्री व छोटे बच्चे के मध्ये ठहराया गया उसने स्वीकार किया कि मैंने अपनी स्त्रीको मारडाला है इस कारण कि वह मुझसे झगडा करती थी और दूसरे गांवमें चलनेके लिये मना करती थी जहां मैंने अपनी दरिद्रता (गरीबी) के कारण जानेका निश्चय किया था साहब जजने इस बयानसे अपराधीपर ज्ञातघातका अपराध निश्चय किया और उसे फाँसीको सजाकी आजा बमजूरी हाईकोर्टके दी तजवीज हुई कि अपराधीका बयान ज्ञातघातके अपराधीकी सीमातक नहीं है उसने एकाएकी क्रोधके आजानेका बयान किया-इस बातकी जांच करनी चाहिये और यह भी तजवीज हुई कि गांजापीनेके कारण अपराधीकी दशा एक रोगी- कीसी होगई थी जिससे वह अपने काम अथवा कामके अपराधका फल जानने योग्य न रहा था- हिन्दुस्थानके दण्डसंग्रहको दफा ८४ उससे सम्बन्ध नहीं है । ( इ. ला• रि० बम्बई जिल्द १४ सपा ५६४) (३०३ ) जो कोई मनुष्य जिसके मध्ये जन्मभरके लिये देश निकालेके दण्डकी दण्ड उस जातघातका आज्ञा होचुकी हो ज्ञातघातका अपराध करे तो उसको बध का नो पोई जन्म मीआदी बंधुआ कर डाले. दण्ड दिया जावेगा। टीप-दफा ३०२ के अनुसार है।

सोलहवा ११.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई० । (१७९) नोट-प्रत्येक मनुष्यको, चाहे वह प्रेसीडसी शहरके भीतर रहता हो अथवा बाहर, जो अपराध हिन्दुस्थानके दण्डसंग्रहकी दफा ३०२ व ३०३ व ३०८ के अनुसार किमी मनुष्य द्वारा होनेका वृत्तान्त उसे ज्ञात होजावे, उचित है कि ऐसे अपराध अथवा अपराध करनेकी इच्छाकी सूचना सबसे निकटके मजिस्ट्रेट अथवा अफ्सर पोलीसको दे दे । ( दफा ४४ मजमूआ जाया फौजदारीको देखो) ( ३०४ ) जो कोई मनुष्य ऐसे ज्ञातवत्घातका अपराधी हो जो ज्ञातधातको सीमा- दंड गातवघातका जो तक न पहुचता हो तो उस मनुष्यको जन्ममरक देश निकालेका जातपाततक न पहुंचे. दड दिया जायगा अथवा दोनो प्रकारोमेंसे किसी प्रकारको केटका दड दिया जावेगा जिसकी मीाद दश वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा परन्तु नियम यह है कि वह काम जिससे मृत्यु हुई मृत्युका कारण होनेकी इच्छासे या ऐसी शारीरिक चोटका कारण होनेकी इच्छासे किया गया हो कि जिससे मृत्युके होनेका समव है अथवा दोनो प्रकारोमेंसे किसी प्रकारकी कैदका दट दिया जावेगा जिसकी मीआढ दश वर्ष- तक हो सकती है अथवा जुर्मानेका दण्ड या दोनों दंड दिये जायेंगे परन्तु नियम यह है कि उपरोक्त काम इस जानकारीसे किया गया हो कि उससे मृत्युका होना समव है परन्तु कुछ यह इच्छा न हो कि उससे मृत्यु हो अथवा ऐसी शारीरिक चोट पहुचे कि जिससे मृत्युका होना सभव है। टीप-दफा ३०२ के अनुसार है। -एक छोटेसे झगडेमे अपराधीने मारे गए हुए मनुष्यकी पीठमे ऐसे जोरसे धक्का मारा कि वह मंडकपर जो ढाई हाथ नीचे थी गिरपडा और उससे ऐसी चोट पहुंची कि वह पाचं दिन मरगया तजवीन हुई कि अपराध जातवघातका है जातघातकी सीमातक नहीं पहुंचता (इ. ला. रि. मदरास जिल्द २ सफा २२४) २--हिन्दुस्थानकी दण्डसंग्रहको दका ३०४ शब्द (अ) ऐसे मुकद्दमसे सम्बन्धित नहीं है जिसमें जानबूझकर किसी मनुष्यकी ओरसे कोई अपराध किया जावे (इ. ला. रि० कलकत्ता जिल्द सफा ७६४) ३-हाकिम अदालतको जातवत्घावके अपराधमें केवल इसहीवातपर भरोसा न करना चाहिये कि मारा गया हुआ मनुष्य तिल्लीकी बीमारीमें फंसा था, वरन् उसको इस बातपरभी विचार करना चाहिये कि अपराधी इस वातसे जानकार था या नहीं कि उस मारे गए हुए मनुष्यको उपरोक्त रोग है- और उसको चोट पहुंचानेसे बीमारीके कारण उसके प्राण निकल जानेका भय है अथवा नहीं । (इ. ला.रि० कलकत्ता जिल्द ४ सफा ८१५) ४- जब किसीकी मॉने जानबूझकर अपने लडकेको इस अभिप्रायसे छोड दिया कि वह छोड- नेके कारण मृत्युको प्राप्त हो और वह लडका छोड़ने के कारण मरजावे तो उसको केवल दफा ३०४ (१८०) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- अनुसार दण्ड दिया जासकता है न कि दफा ३१७ व ३०४ दोनोकेही अनुसार । (इ. ला. रि० इलाहाबाद जिल्द २ सफा ३३९) .. ५---एक सपेरेने सर्व साधारणके सामने एक विषल साँपका तमाशा किया जिसके विषैले दाँत उसकी जानकारीमे नही निकाले गये थे परन्तु किसी मनुष्यको हानि पहुंचानेकी इच्छा विना उसने साँपको तमाशा देखनेवाले एक मनुष्यके शिरपर बिठा दिया उस मनुष्यने सॉपके हटानेका यत्ल किया सॉपने उसको काट खाया और वह मरगया-तजवीज हुई कि सपेरेके जातवघातका अपराध जातघावकी सीमातक नहीं पहुंचता। (इ० ला रि० कलकत्ता जिल्द ५ सफा ३५१) ६-शामको ( म ) ने एक कारीगर (न) को अपनी स्त्रीके साथ व्यभिचार करते हुए देखा और सुबहको जब बदचलनीके कारण उसके हृदयमे क्रोध आया तब वह ( नं ) के निकट आया और एक हथियारस उसको उसी स्थानपर मारडाला तजवीज हुई कि वह क्रोध उचित रीतिपर था जिसके कारण वह अपने आपेसे वाहर होगया और बातघातका अपराध घटकर जातवत् घातका हो गया । (इ० ला. रि. मंदरास जिल्ट 3 सफा ३३) न)रेलवे कम्पनीका नौकर ग उसके सिपुर्द चक्करीक चलानेका काम कुलियोंके द्वारा था, उसने उपरोक्त कामको असावधानी के साथ किया और इस कारण चक्कर उससे छूट गया। उसके आजा देनेके अनुसार कुलियोमैस एक कुलीने चक्करके ठहरा देनेका यत्न किया और वह उसकामके करनेमे मरगया-तजवीज हुई कि (न) का काम असावधानीके कारण दफा ३०४ (अ) के अभिप्रायानुसार हुआ जिससे उस कुलीकी मृत्यु हुई। ( इ० ला. रि० इलाहाबाद जिल्द ६ सफा २४८) ८-एक कविराजने बवासीरके मस्से काटनेमे साधारण चासे एक मनुष्यपर डाक्टरी वर्ताव किया परन्तु वह मनुष्य मरगया-तजवीज हुई कि अपराधी चीड फाडके माममे अशिक्षित था.और उसको इस काममे भली प्रकारसे जानकारी न थी इस लिये हिन्दुस्थानके दडसग्रहकी दफा ३०४ (अ) के अनुसार यथोचित दण्डकी आजा हुई थी । (इ. ला. रि०. कलकत्ता जिल्द १४ सफा ५६६) ९--एक बुड्ढी स्त्रीने जिसकी अवस्था ७० वर्ष की थी अठारह वर्षके लडकेको इस प्रकार मारा कि उस मारसे वह मरगया-असिस्टन्ट कमिश्नरकी यह राय थी कि उस स्त्रीने लडकेको शिक्षा देनेके अभिप्रायसे मारा था जैसा कि बहुधा माँ बाप अपने नालायक लडकोके साथ किया करते हैं तजवीज हाईकोर्ट यह हुई कि असिस्टन्ट कमिश्नरको मुकद्दमेके निवटानेका अधिकार न था उसका काम अदालत सेशनमे अपराधीको दफा ३०४ हिन्दुस्थानके दण्डसंग्रहके अनुसार सिपुर्द करनेका है (वीक्ली रिपोर्टर जिल्ट १८ सफा २३) :(३०४ ) (अ) यदि कोई मनुष्य किसी असावधानी अथवा गफलतके कामसे असावधानी करनेसे किसी मनुष्यकी ऐसी मृत्युका कारण हो जो ज्ञातवत् घातकी मृत्युका कारण होना, सीमातक न पहुंचे तो. उसको दोनो प्रकारोमेसे किसी प्रकारको कैदका दड उस मीआदतक होगा जो दो वर्पतक होसकती है अथवा जुर्मानेका दंड या दोनो दंड दिये जावेगे।

सोलहवाँ १६.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई० । (१८१) टीप-(१) अदालत सेशन या प्रेम या म० अ० (२) पोलीन दत्तन्दाजी करमकती है ( ३ ) अपराधीक नाम पारट जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है। (इम सग्रहके अध्याय ४ व ५ व २३ उन अपराधोसे नम्बन्ध रखने है जा इस उपरोक्त दफाके अनुसार दण्डके योग्य हैं) १-अपराधियोने एक चोरको इतना मारा कि वह मर गया-उसकी लाश पर मारके १४१ चिह्न थे-उसकी कई पसलियाभी टूट गई थीं-तजबीज हाईकोर्टकी यह हुई कि ऐमे मुकद्दमेमें दफा ३०४(अ) का सम्बन्ध नहीं है बरन् अपराधीको दफा ३०४ के अनुसार दण्ड होना चाहिये (रिपोर्ट पश्चिमोत्तर प्रदेश जिल्द ५ सफा २३५) २-सरकारी घाटका एक ठेकेदार जिसका काम मुसाफिरोको नटीमे आरपार करनेका था एक टूटी फूटी नावसे काम निकालता था नाव टूटी फूटी होनेके कारण, जब रि वह नदी पार होरही यो डूब गई और कुछ मनुष्य जो उसमे सवार ये डूबकर मर गये । तजवीज हुई कि टकेदार घाट दुफा ३०४ (म) के अपराधका अपराधी है। (इ. ला. रिपोर्ट इलाहाबाद जिल्ट १६ सफा४७२) ३-अपराधीको दफा ३०४ (अ) के अनुसार कैदका दण्ड दिया जाकर जुर्मानेकाभी दण्ड दिया गया और वह जुर्मानेका रुपया मारे गएं हुए मनुष्यकी विधवा स्त्रीको दिलाया गया, तजगंज हुई कि वह रुपया विश्वाको दिया जाना अनुचित है। (इ० ला. रे. मदरास जिल्द १२ मका३५२) ( ३०५ ) यदि कोई मनुष्य जिसकी अवस्था अठारह वर्षसे कम हो अथवा कोई रा अवा सिडीका) सिद्धी अयवा बेहोश, अथवा जन्ममूर्ख अथवा ऐसा मनुष्य जो आत्महत्यामे सहायता नशा पिये हो आत्मवातका अपराध करे और जो कोई मनुष्य उसे. आत्मघातके अपराधमें सहायता करे तो उसको वधमा दड अथवा जन्मारके देश निकालका दंड अथवा ऐसी कैदका दण्ड दिया जायेगा जिसकी मीआद दश वर्षसे अधिक न हो और वह जुर्मानेके मी योग्य होगा। हीर-दफा ३०२ के अनुसार है। करना. . : ३०६.) यदि कोई मनुष्य आत्मघातका अपराध करे और जो कोई मनुष्य इस आत्महन्छ।मे सहायता ] आत्मघातक अपराधमें सहायता करे तो उनको दोनो प्रकारोमेसे किसी प्रकारको कैदका दड दिया जावेगा जिसको भीभाद टशे वर्षतक हो सकती है और वह जुर्मानेके मी योग्य होगा। वीर-दुका ३०२ के अनुसार है। करना.

(१८२) हिन्दुस्थानका. दण्डसंग्रह। -- [अध्याय- १-कुछ अपराधियोमैसे एक अपराधीने सतीकी चिता जलानेमे सहायता की और दूसरे अप- राधीने उस स्त्रीको जो चितासे आग जलनेके पश्चात् उठ गई थी फिर चिता पर विठलानेका यत्न किया इसलिये पहिला मनुष्य ज्ञातवघातक अपराधका अपराधी समझा गया और दूसरा मनुष्य आत्म- घात करनेमे सहायक प्रमाणित हुआ ( वील्ली रिपोर्टर जिल्द १ सफा १७४) (३०७ ) जो कोई मनुष्य कोई काम ऐसी इच्छा अथवा ऐसी जानकारी और ऐसी , अवस्थामे करे कि यदि वह उस कामके द्वारा मृत्युका कारण ज्ञातघातका उद्योग, होता तो ज्ञातघातका अपराधी होता, उसको दोनों प्रकारोमेसे किसी प्रकारका कैदका दंड दिया जावेगा जिसकी मीआद दश वर्पतक हो सकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा और यदि उस कामके कारणसे किसी मनुष्यको चोट पहुचे तो अपराधी जन्ममरके देश निकालेके दडके अथवा उस दडके योग्य होगा जिसका वर्णन इस दफा पहिले किया गया है। जिस अवस्थामै कि कोई मनुष्य जो उपरोक्त दफाके अनुसार जन्मभरके देश निका- लेके दंडको भुगत रहा हो उस अवस्थामे यदि किसी मनुष्यको चोट पहुंचा तो उसको बधका दर हो सकता है। (यह नीचेका टुकडा दफा ११ ऐक्ट न० २७ सन् १८७० ई० के अनुसार बढाया गया है) टीप-दफा ३०२ के अनुसार है। उदाहरण। (क) शिवशकर उमाशकरको मारडालनेकी इच्छासे एसी अवस्थामें उसपर बदूक चलाए कि यदि उससे मृत्यु होती. तो शिवशंकर शातघातका अपराधी होता तो शिवशकर इस दफाके अनुसार दण्डके योग्य है। (ख) शिवशकर किसी छोटे बच्चेको मारडालनेके अभिप्रायसे उसको किसी उजाड स्थानम डाल दे तो शिवशकर उस अपराधका अपराधी होगा जिसका वर्णन इस दफामे किया गया है । चाहे उस लडकेकी मृत्यु न हुई हो । (ग) शिवशकर रमाशकरको मारडालनेके अभिप्रायसे एक बदूक मोल ले और उसको मेरे तो अभी शिवशंकर किसी अपराधका अपराधी नही है फिर शिवशंकर रमाशकरपर बदूक चलाए तो शिवशकर उस अपराधका अपराधी होगा जिसका वर्णन इस दफामे किया गया है और यदि उस' बंदूक के चलानेस रमाशंकर घायल होजावे तो शिवशंकर उस दण्डके योग्य होगा जो इस दफाके निचले. टुकडेमे ठहराया गया है। (घ) शिवशकर रमाशकरको विषसे मार डालनेकी इच्छा करके विष मोल ले और उसको उस खानेमे मिला दे जो शिवाकरकी सिपुर्दगीमे रहता हो तो अभी शिवशकरने उस अपराधको नहीं किया जिसका वर्णन इस दफामें किया गया है फिर गिवणकर उस खानेको रमाशकरके पास .

सोलहवा १६.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०॥ (१८३) घरे अथवा रमाशकरके नौकरोंको देदे कि वह उसको रमाशकरके आगे रख दें तो शिवाकर उस अप- राधका अपराधी हुआ जिसका वर्णन इम दफार्म किया गया है। १-अपराधीने एक मनुष्यके गिरमे तीन लाठियाँ उसके मारडालनके अभिप्रायसै मारी, वह मनुष्य बेहोश होकर धरतीमें गिरपडा, अपरावीने यह निश्चय करके कि वह मरगया, उस- ओपहेमें मिसमें वह पड़ा हुआ था, इस अभिप्रायसे आग लगादी कि जिससे अपराध होनेका प्रमाण न मिल सके । डाक्टरकी गवाहीसे प्रमाणित हुआ कि अपराधीने जो चौटे मारी थी वह मृत्युका कारण न थी और न वह मृत्युका कारण हुई यथार्यमें मृत्यु जलादेनेके कारण ही हुई । तजवीज हाईकोर्ट यह हुई कि अपराधी दफा ३०७ के अनुसार जातपातका अपराधी है पारसन्स साहब जस्टिसकी यह राय थी कि अपराधी दफा ३०२ के अनुसार जातघातके अपराधका अपराधी हैं। इ० ला. रि० बम्बई जिल्द १५ सफा १९४) (३०८) जो कोई मनुष्य कोई काम ऐसी इच्छा अथवा ऐसी जानकारीसे अथवा ज्ञातवत् घातके अप-7 ऐसी अवस्थामें करे कि यदि वह उस कामके द्वारा मृत्युका कारण घका उद्योग. हो तो वह उस ज्ञातवघातके अपराधका अपराधी हो जो ज्ञात- घातकी सीमाको नहीं पहुचता है तो उपरोक मनुष्यको दोनो प्रकारोंमेसे किसी प्रकारको कैदका दह दिया जायगा जिसकी मीआद तीन वर्पतक हो सकती है अथवा जुर्मानेका दड अथवा दोनों दड दिये जावेगे। और यदि उस कामके कारणसे किसी मनुष्यको चोट पहुंचे तो उसको दोनो प्रकारों- मेंसे किसी प्रकारकी कैदका दढ दिया जायेगा जिसकी मीआद सात वर्षतक हो सकती है अथवा जुर्मानेका दड या दोनों दड दिये जावेंगे । उदाहरण। शिवशकरने एकाएकी किसी भारी कोष दिलानेवाले कामके कारण रमाशकरके ऊपर ऐसी पिस्तौल चलाई जब कि कदाचित् रमाशकरकी मृत्यु होजाती तो शिवशंकर उस भाववतघातक अपरा- धका अपराधी गिना जाता जो कि जातघातके तुल्य नहीं है तो शिवशकर उस अपराधका अपगधी हुआ जिसका वर्णन इस दफामें किया गया है। टीप-(१) अदालत सेशन (२) पोलीस दस्तदाजी करसकती है (३) वारंट अपराधीक नाम जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है। ( ३०९ ) जो कोई मनुष्य आत्मघातके अपराधका उद्योग करे और कोई ऐसा आत्मघात करनेका ) काम करे जो उपरोक्त अपराधके किये जानेकी ओर झुकता हो तो उपरोक्त मनुष्यको सावारण कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद एक वर्षतक हो सकती है अथवा जुर्मानका लंड या दोनो दंड दिये -- उद्योग, जावेंगे।

(१८४) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [ अध्याय- . . टीप-(१) प्रै० म० या मः अ० या म० दो० (२.) पोलीस दस्तन्दाजी करसकती है. (३) अपराधीके नाम वारंट जारी होगा ( ४ ) जमानत हो सकती है ( ५ ) राजीनामा नहीं है। १-- एक स्त्री कुएमे गिरकर आत्मघात करनेकै- अभिप्रायसे एके समीपतक दौडी गई और वहां वह पकडली गई उसको आत्मघात करनेके उद्योगमे दफा ३०९ के अनुसार दण्ड दिया गया तजवीज हुई कि अपराधिनीका दडं अनुचित है । (इ० ला० रि• मदरास- जिल्द ८ सफा ५०) (३१० ) जिस मनुष्यने इस ऐक्टके जारी होनेके पीछे किसी समय, किसी और, मनुष्य अथवा और मनुष्योके साथ स्वामाविक (आदतन ) इस ठग. अभिप्रायसे मिलाप रक्खा हो कि ज्ञातपातके द्वारा अथवा ज्ञातघात समेत बलपूर्वक चोरी ( सरका बिलजब ) अंग्रवा बालकोकी चोरीका अपराध करे वह ठग कहलाया जावेगा। نه ३११ ) जो कोई मनुष्य ठग हो उसको जन्मभरके देश निकालेका दंड दिया - } जावेगा और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप-दफा ३०२ के अनुसार है। दड. गर्भ गिराना. --- गर्भ गिराने, बिना उत्पन्न हुए बच्चोंको हानि पहुंचान; वहांको बाहर डाल देने और पैदायश छुपानेके विपयमें । ( ३१२ ) जो कोई मनुष्य जानबूझकर किसी स्त्रीके गर्भ गिरानेका कारण हो तो यदि वह गर्भपात शुद्धभावसे उस स्त्रीका जीव बचानेके लिये न किया गया हो तो उपरोक मनुष्यको दोनो प्रकारोमैसे किसी प्रका- रकी कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीआद तीन वर्पतक हो सकती है अथवा जुर्मानेका दंड या दोनोंही दड दिये जावगे और यदि उस वीके पेटके वचमें जान पडगई हो तो उप- रोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी कैदका दंड दिया जावेगा जिसकी मीआद सात वर्पतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। स्पष्टीकरण-वह स्त्री जो स्वयंही अपने गर्भके गिरानेका कारण हो इस दफाके अभि- प्रायमें गिनी जायगी। टीप-(१) अदालत सेगन (२ पोलीस दस्तन्दाजी नहीं कर सकती (३) अपराधीके नाम वारट जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५)राजीनामा नहीं है।

सोलहवाँ १६.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई० । ( १८५) १- प्रत्येक स्त्री हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहको दफा ३१२ के अभिप्रायानुसार तत्वाम्ही जब कि यह गर्भिणी हो जावे बच्चा उत्पन्न करनेवाली समझी जायगी । (६० ला. दि. मदरास जिल्ट ९ सफा ३६९) ( ३१३ ) जो कोई मनुष्य स्त्रीको प्रसन्नता विना उस अपगधका अपराधी हो बिना स्त्रीको प्रसन्नताके ] जिसका वर्णन इसके पहिलेकी पिछली दफामें किया गया है, चाहे गर्भ गिराना. उस स्त्रीके पेटके बच्चेमे जीव पडगया हो अथवा नहीं, तो उपरोक्त मनुष्यको जन्मभरके देश निकालेका दह दिया जावेगा अथवा दोनो प्रकारोमेंसे किसी प्रका- रकी कैदका दड दिया जायगा जिसकी मीआद दश वर्पतक होमकती है और वह जुर्मानके मी योग्य होगा। टीप १) अदालत सेशन (२) पोलीस दस्तन्दाजी नहीं कर मकनी ( ३ ) अपरावीके नाम वारट जारी होगा (४) जमाना नहीं हो सकना ( 0 ) राजीनामा नहीं है। १३१४ जो कोई मनुष्य किसी स्त्रीका गर्भ गिरानेके अभिप्रायसे कोई ऐसा काम मृत्यु जो किसी ऐसे) करे जो उस स्त्रीको मृत्युका कारण हो तो उपगेक मनुष्यको कामके कारण हो जो दोनो प्रकारोमेंस किसी प्रकारकां कैदका दढ दिया जावेगा जिसकी गर्भ गिराने अभिप्रायसे मीआद दश वर्पतक हो सकती है और चट जुमानक भी योग्य होगा। और यदि वह काम बिना प्रसन्नता उस स्त्रीक किया जाय तो या तो उस जन्नभरक यदि काम विना प्रम- देश निकालेका दड दिया जावंगा अथवा यह दन दिया जायेगा नता उस स्त्रीके किया जिसका वर्णन पहिले किया गया है। गयाहो. किया जाय स्पष्टीकरण-इस अपराध के लिये अपराधीको यह जाननेकी आवश्यकता नहीं है कि उस कामसे मृत्युके होनेफी समावना है। टीप-दफा ३१३ के अनुसार है। १-अपराधीने एक स्त्रीका गर्भ गिरानेक अभिप्रायसे उनको दवा दी और वह स्त्री उसके खानेसे मर गई परन्तु यह बात न प्रमाणित हुई कि अपराधी इस बातको जानता था कि इस दवासे मृत्युके हो जानका भय है । हाईकोर्टने अपगधीमे जातघातके. अपराधसे बरी क्यिा परतु हिन्दुस्थानके दडसग्रहको दफा ३१४ के अपराध, उसको ढड दिया । (वीसी रिपोर्टर जिन्द १० मफा ५९) ( १८६) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। .. .. [ अध्याय- -(३१५) जो कोई मनुष्य किसी बच्चे के उत्पन्न होनेसे पहिले कोई काम इस अभिप्रायसे करें कोई काम जो इस अ] कि वह उसके कारणसे उस बच्चेको जीवित उत्पन्न होनेसे रोके अथवा भिप्रायसे किया जाय कि | उसके उत्पन्न होनेके पीछे उसकी मृत्युका कारण हो और यथार्थमे ही. बालक जीवित न उत्पन्न । उसके ऐसे कामके द्वारा वह बच्चा जीवित उत्पन्न होनेसे रुक जावे होने पावे अथवा उत्पन्न अथवा उत्पन्न होनेके पीछे मरजावे तो यदि वह काम माँका प्राण होनेसे पीछे मर जाय. बचानेकी इच्छासे न किया गया हो तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दंड दिया जावेगा जिसकी मीआद दश वर्पतक हो सकती है अथवा जुर्मानेका दण्ड या दोनों दण्ड दिये जावेगे । टीप--दफा ३१३ के अनुसार है । (३१६) जो कोई मनुष्य ऐसी अवस्थामे कोई काम करे कि यदि उसके द्वारा मृत्यु हो मृत्यु करनी किमी ऐसे जाती तो वह ज्ञातवत्घातका अपराधी होता और उस कामके द्वारा बच्चेकी जो उत्पन्न न हुवा | किसी जीवित बच्चेकी मृत्यु करे जो अभीतक उत्पन्न नहीं हुआ है तो हो परन्तु पेटमै जीव पड-1 उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी कैदका दढ दिया गयाहो कोई ऐसा काम | जावेगा जिसकी मीआद दश वर्पतक होसकती है और वह जुर्मानेका करके जो ज्ञातवघातकी भी देनदार होगा। सीमातक पहुंचताहो. उदाहरण । शिवशकर यह जानकर कि इस काम करनेसे किसी गर्भवती स्त्रीकी मृत्यु होनी अति सम्भ- वित है कोई ऐसा काम करे कि कदाचित् उससे उस स्त्रीकी मृत्यु हो जाती तो वह काम नातवत्या- तके समान गिना जाता, उस कामसे उस स्त्रीको दुःख तो हुआ परंतु मरी नही हा उसके गर्भ जो बालक था और उसमें जीव पड गया था वह उस दुःखके कारण मर गया तो गिवाकर उस अपरा. धका अपराधी हुभा जिसका वर्णन इस दफामे किया गया है। टीप-दफा ३१३ के अनुसार है । ( ३१७ ) जो कोई मनुष्य किसी वारह वर्षसे न्यून आयुवाले लड़के का बाप अथवा मां बाप अथवा किसी मां अथवा रक्षक होकर उस लडकेको किसी स्थानमे इस अभिप्राय रभक मनुष्यका बारह | से डाल दे अथवा छोड दे कि उसका सबन्ध छूट जाय तो उपरोक्त वर्षसे न्यून आयुके बच्चे. मनुष्यको दोनों प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया को डालदेना अथवा जावेगा जिसकी मीआद सात वर्षतक हो सकती है अथवा छोड देना. जुर्मानेका दट अथवा दोनों दण्ड दिये जायेंगे। स्पष्टीकरण-इस दफास यह अभिप्राय नहीं है कि यदि इस प्रकारपर डाल देनेसे वह - सोलहवा १६.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०। (१८७) लडका मर जावे तो अपराधीका विचार ज्ञातघात अथवा ज्ञातवघातके अपराक्मे जैसी कि अवस्था होवे न किया जावे। टीप-~-दफा ३१३ के अनुसार है । १--अपराधिनीने अपने बच्चेको इस अभिप्रायसे छोड दिया कि उसका इस प्रकारसे छोडा जाना मृत्युका कारण होगा और बच्चा भी उसी प्रकारसे छोडे जानेके कारण मर गया तजवीन हुई कि उस स्त्रीको हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहकी दफा ३०४ के अनुसार अपराधी प्रमाणित करना चाहिये था न कि दफा ३०४ व ३१७ के अनुसार । ( इ० ला. रि• इलाहाबाद जिल्द २ सफा ३४९) २--एक स्त्रीके उस समय बच्चा उत्पन्न हुआ जब वह अपने मायकमें रहती थी और उस समय उसका पनि कश्मीरमें था-उपरोक्त स्त्रीकी मां उस बच्चेको उस स्त्रीके पतिकी बहिनके यहॉ ले गई और बह बच्चा नगा उसकी गोदमें रख दिया और कहा कि यह तेरे भाईका लडका है उस स्त्रीकी मा चली आई और वह बच्चा कुछ घटोके पीछे मर गया तजवीज हुई कि उस स्त्रीकी माने कोई अपराध दफा ३१७ हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहके अनुसार नहीं किया और न उस स्त्रीने ही उस अपराध करनेमे सहायता की । ( पजाब रिकार्ड न० ३३ सन् १८७२ ई.) ( ३१८) जो कोई मनुष्य किसी बच्चेकी लाशको गुपचुप गाड करके अथवा और किसी बालककी लाश किसी माति अलग करके उसका उत्पन्न होना जानबूझकर छुपा- को चुपकेसे अलग करके वेगा अथवा छुपानेका उद्योग करेगा चाहे वह बालक उत्पन्न उसकी पैदायशको छुपाना ) होनेसे पहिले मरा हो चाहे पीछे उसको दोनो प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दह दिया जावेगा जिसकी मीनाद दो घर्षतक हो सकेगी अथवा जुर्मानेका दर अथवा दोनो दण्ड दिये जावेगे। टीप-(१) अदालत सेशन या प्रे० म० या म० अ० या म० दो० (२) पोलीस दस्तन्दानी कर सकती है (३) अपराधीके नाम वारट जारी होगा (४) जमानत हो सकती है (५) राजी. नामा नहीं है। १-किसी मनुष्यपर हिन्दुस्थानके दण्डसमहकी दफा ३१८ के अनुसार उस अवस्थामै अप- राध नहीं ठहराया जा सकता जब कि उसने चार महीनेके पुतलेको छिपाया हो (रिपोर्ट हाईकोर्ट मदरास एडकस जिल्द ४ सफा ६३) ६ १८८) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- दुःख (जररके) वयानमें । ( ३१९ , जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यको शारीरिक पीडा अथवा शारीरिक रो.. } अथवा शारीरिक निर्वलता पहचावे तो, कहा जायगा ...कि उसने दुख. दुःख पहुंचाया। भारी दुःख. } १३२० , नीचे लिखे प्रकारोंका दुःख भारी दुःख कहलायेगा पहिले-किसीको हिजडा बना देना- दूसरे-किसी एक आंखको सदैवके लिये फोड देना- तीसरे-किसी एक कानकी श्रवणशक्तिको सदैवके लिये रहित कर देना- चौथे-किसी अङ्ग अथवा जोडको नष्ट कर देना- पांचवें-किसी अग अथवा जोडको सदेवके लिये . तोड डालना अथवा निर्बल कर देना- छठव-शिर अथवा चेहरेको सदैवके लिये कुरूप कर देना- सातवें-किसी हड्डी अथवा दातका तोड डाला जाना अथवा उखाड़ - . डाला जाना- चाना. आठवें कोई दुःख जो जीवको जोखिममे डाले अथवा उस मनुष्यको जिसको. दुःख. दिया जाय बीस दिनतक कठिन शारीरिक पीडा सहावे अथवा उसको अपने साधारण रंध- मके करनेके अयोग्य कर दे। ( ३२१ ) जो कोई मनुष्य इस अभिप्रायसे कोई काम करे कि उसके द्वारा किसी जानबूझकर दुःख पहु ! मनुष्यको दुःख पहुचाए अथवश इस. 'कामके होनेको सम्भावित जानकर कि उस कामके द्वारा वह किसी मनुष्यको चोट पहुंचा- वेगा और उसके द्वारा वह किसी मनुष्यको . दुःख ( जरर) पहुचावे तो कहा. जायग्न कि उसने जानबूझकर दुःख पहुचाया । • ( ३२२ ) जो कोई मनुष्य जानबूझकर दुःख ( जरर ) पहुंचावे तो यदि वह दुखि जिसका पहुचाना उसकी इच्छामे हो अथवा जिसको वह दुख पहुचाना. जानता हो कि उससे उसके पहुचानेका सभव है भारी दुःख? ( जरर शरीद ) हो और जो दुःख ( जरर ) उसने पहुचाया है वह भारी दुःख है तो कहा जायगा कि उसने जानबूझकर मार्ग दुःख पहुंचाया । स्पष्टीकरण-यह बात कि एक मनुष्यने जानबूझकर भारी दुःख पहुंचाचाया, न कही जायगी सिवाय इसके कि वह मारी दुःख पहुंचाये और उसकी यह भी इच्छा हो अथवा इस कामके होनेका सभव उसकी जानकारीमे हो कि उस कामके द्वारा भारी दुःख (जर- जानबूझकर भारी सोलहवा १६ ] एक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई० । (१८९) रशदीद ) पहुचंगा परन्तु यदि वह यह इन्ठा करके अथग इस कामके होनेका सम्भव जानक कि यह एक प्रकारका भारी दु.ख पहचावेगा वास्तवमे किसी और प्रकारका भारी दु.ख पहु- चाए तो कहा जायगा कि उस मनुष्यने जानबूझकर मारी दु ख पहचाना । उदाहरण । शिवाकर इस अभिप्रायसे अथवा इस कामके होनेको सम्भवित जनक्र कि रमाशकरक चेह- रेको सर्देवके लिये कुस्प करदे ग्माशकरके एक चोट लगाए जो रमागकरके चेहरेको सदैवके लिये तो कुरूप न करे परतु उसके कारणसें बीग दिन तक रमाशकरको कठिन मारीरिक पीडाम फैलाया रक्ते तो शिवगंकरने जानबूझकर भारी दुख पहुंचाया। १-(क) ने (ख) और (ग) को आजादी कि तुम (घ) को बलपूर्वक पकड ले जाकर उसपर आक्रमण करो-इसपर (घ) इतना मारा गया और उसे दु ख पहुंचाया गया कि निसके कारण वह मर गया-हाईकोर्टकी यह तजवीज हुई कि (क) जान बूझकर भारी दु ख पहुँचानेकै अपराधी सहायताका अपराधी है । (वीसी रिपोर्टर जिन्द ७ सफा ६१) ( ३२३ ) जो कोई मनुष्य उस अवस्थाके अतिरिक्त जिसके - मध्ये दफा ३३४ में जानबूझकर दुःख पहुः आज्ञा है जानबूझकर दु ख पहुचाए तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोमेसे किसी प्रकारको कैदका ढड दिया जावेगा जिसकी मीआद एक वर्पतक हो सकती है अथवा जुर्मानका ढह या दोनों दंड दिये चानेका दह. जावेगे। - टीप-(१) कोई मजिस्ट्रेट (२) पोलीस दस्तन्दाजी नहीं करसकती (३) अपराधी के नाम समन जारी होगा (४) जमानत होसक्ती है (५) राजीनामा हो मकता है | १-अपराधीने, कि जिसे उसकी स्त्रीने भारी क्रोघ दिलाया, दोनो हाथोंसे बल पूर्वक पृथ्वीपर उस स्त्रीको गिरा दिया, और जब वह नीचे गिरगई तब उसको कई एक थप्पड मारे इम दुःखसे स्त्री मर गई-डाक्टरके बयानसे जाना गया कि उसकी लाशपर कोई भारी मारके चिह्न न थे, परतु उसकी तिल्ली बढी हुई थी और उसकी मृत्यु तिल्ली फटनेके कारण हुई ऐसी अवस्थामें अपराधी विट दुःख पहुंचानेका अपराधी ठहराया गया न कि जातवत्घातका । (बीसी रिपोर्टर जिल्द ६ सफा ९७) २-जब पिसी मनुष्यको तजवीज जब मुजरिमानाके मवे की जाये और वह उस अपराक्से जावे तो फिर उसपर उसी कानके मध्ये दुःख ( जरर खफीक ) पहुँचानेका अपराव नहीं ठहराया जा सकता । (वीली रिपोर्टर जिल्द १६ सफा ३) ( १९०) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- ३-अपराधीके पखा झलनेवाले मनुष्यकी तिहाल (तिल्ली ) मे कोई रोग था और अपराधी इस वातको न जानता था अपराधीने उस मनुष्यको उसकी सुस्तीके कारण दो एक बार मारा और जो चौट कि उसको पहुँची वह उसकी मृत्युका कारण हुई-यद्यपि अपराधीकी इच्छा उसके मार डालनेकी नयी तजवीज हुई कि अपराधी हिन्दुस्थानके दडसमहकी दफा ३२३ के अनुसार दुःख (नरर) पहुँचा- नेका अपराधी है (इ. ला. रि• इलाहाबाद जिल्द २ सफा ५२२) ४-एक ओर चिरजी और दूसरी ओर इन्दर और बच्चामे लडाई हुई चिरंजीने इन्दरको गाली दी इसलिये इन्दरने उसको एक छडी मारी और बच्चाने चिरंजीके शिरमे कुल्हाडी मार कर उसको गिरा दिया इसके अतिरिक्त चिरजीके शरीरमे औरभी दो चोटें कुल्हाडीकी थीं-चिरंजी शिरकी चोटके कारण मरगया-सेशन जजने इन्दर और बच्चाको दफा ३०४ का अपराधी ठहराया और फिर उन्हें दश वर्षकी कठिन कैदका दइ दिया गया-तनवीज हाईकोर्ट यह हुई कि इन्दरका काम बच्चाके कामसे अलग था इसलिये मुकहमा हिन्दुस्थानके दंडसंग्रहकी दफा ३८ में दाखिल था-इसलिये इन्द- रको दफा ३२३ के अनुसार छः महीनेके कठिन कैदका दंड देना चाहिये । ( वीक्ली नोटिस इलाहा- "चाद किताब माह फरवरी सन् १८८२ ई. सफा २३) - ( ३२४ ) जो कोई मनुष्य उस अवस्थाके अतिरिक्त जिसके मध्ये दफा ३३४ में जोखिम हथियारों ) आज्ञा है तीर अथवा गोली लादि छोडने अथवा भोंकने अथवा अथवा उपायो द्वारा जा काटनेके किसी हथियार अथवा किसी ऐसे हथियारके द्वारा जिसको नबूझकर दुःख पहुंचाना.) हथियारकी भांति काममे लाए तो उसके कारणसे मृत्युका होना अति समवित है अथवा आग अथवा किसी गर्म किये हुए पदार्थके द्वारा अथवा विप अथवा शरीरको गलित करनेवाले पदार्थ द्वारा, अथवा भकसे उजानेवाले किसी पदार्थके द्वारा अथवा किसी ऐसे पदार्थके द्वारा, जिसको श्वासके द्वारा लेने अथवा निकालने अथवा रुधिरमें पहुंचानेसे मनुष्यके शरीरको अचेतना होती हो, अथवा किसी पशुके द्वारा जानबूझकर दुःख पहुंचाये तो उस मनुष्यको दोनों प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद तीन वर्षतक होसकती है अथवा जुर्मानेका दह अथवा दोनों दंड दिये जावेंगे। टीप--(१) अदालत सेशन, अथवा प्रेसीडसी मजिस्ट्रेट अथवा मनिस्ट्रेट दर्जा अव्वल अथवा मजिस्ट्रेट दर्जा दोयम (२) पोलीस दस्तन्दाजी कर सकती है (३) अपराधीके नाम समन जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा हो सकता है जब कि उस अदालतसे आज्ञा लीजाय कि जिसके सामने मुकद्दमा पेश है । १-जब कुछ मनुष्य मिलकर किसी मनुष्य पर आक्रमण (इमला) करे और फल यह हो कि उस मनुष्यका हाथ टूट जाए तो भारी दुःख (जररशदीद ) के पहुँचानेका अपराध समझा जायगा न कि आक्रमणका । ( वीक्ली रिपोर्टर जिल्द ५ सफा १२) सोलहवा १६.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १९६०ई० । (१९१) २-किसी कानूनविरुद्ध जमावको जिसके दूसरी साशी भारी दुःख (जररशदीद) के अपराधी हुए हो बलवा के अपराध और जरशदीदके अपराधमें अलग २ दड नहीं दिया जा सकता (इ. ला. रि• इलाहाबाद जिल्द ६ सफा १२१) ३-मारी दु.ख (जररशदीद) अपराधमें केवल जुर्मानेकाही दड न होना चाहिये बरन् कैद जुर्माना दोनो होना चाहिये। ४-जिस मनुष्यपर जररशदीदका अपराध ठहराया जावे वह तजवीजके लिये सेशनमें सिपुर्द होना चाहिये । (रिपोर्ट हाईकोर्ट बबई जिल्द १ सफा १०१) ( ३२५ ) जो कोई मनुष्य उस अवस्थाके अतिरिक्त जिसके मध्ये दफा ३३५ मे जानबूझकर मारी) आज्ञा है जानबूझकर भारी दुःख (जरस्शदीद) पहुचावे तो उस मनु- दुःख ( जररशदीद ) को दोनों प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जायगा पहुंचानेका दंड. जिसकी मीआद सात वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप-(१) अदालत सेशन या प्रे० म० या म० अ० या म० दो० (२) पोलीस दस्तन्दाजी करसकती है (३) अपराधीके नाम समन जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है। १-अपराधीने एक स्त्रीके शिर और कन्धेको जिसकी गोदमें बच्चा था दुाब पहुँचाया जिसकी चोटसे बच्चा मरगया-तजवीज हुई कि वह मनुष्य भारी दुःख ( अरशदीद ) के पहुँचानेका अपराधी है ( इ. ला. रि० कलकत्ता जिल्द ३ सफा ६२३) २-(ब) ने जानबूझकर (न) को जो तिल्लीकी बीमारी में फंसा था इस निश्चयसे कि उसको अरशदीद पहुंचे दुःख (जर) पहुँचाया परतु उसका अभिप्राय मृत्यु करने अथवा शारीरिक चोटके पहुँचानेका न था-(न) उस दुःखके कारण मरगया-तजवीज हुई कि विचार अपराधीका जानबूझकर मारी दुःख पहुँचानेके अपराधमे होना चाहिये । (इ० ला• रि० इलाहाबाद जिल्द २ सफा ७६६) ३-एक मनुष्यने एक टुकडा ईटका एक मनुष्यको मारा जो उसकी तिल्लीपर लगा और जिसके कारण वह मरगया-यद्यपि अपराधीकी इच्छा उसके मार डालनेकी न थी तजवीन हुई कि अपराध जानबूझकर दुःख पहुँचानेका है । ( इ. ला• रि• इलाहाबाद जिल्द ३ सफा ५९७) ४-जब कोई मनुष्प दूसरेको एक ऐसा.सा जो मृत्युका कारण हो विना इच्छा मृत्युकै मारे वह जान बूझकर भारी दुःख (जररशदीद ) के पहुँचानेका अपराधी है । (इ. ला. रि० इलाहा- बाट जिल्द २ सफा ७७६) ( १९२) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अव्याय- ५-किसी कानूनविरुद्ध जमावको जिसके कुछ साझियोने भारी दुःख ( जररशदीद ) पहुँचाया हो-कानूनानुसार बलवेके अपराध और जररगदीढके अपरावमै दंड नहीं होसकता । (इ. ला.रि. इलाहाबाद जिल्द ६ सफा १२१) ६-जीन मनुष्योको, जो अपराधी बलवा करनेके थे हिन्दुस्थानके दडसंग्रहकी ठफा १४७ के अनुसार और उपरोक्त बलवाके समय भारी दुःख ( जररशदीद पहुंचानेके हिन्दुस्थानके दंडसंग्रहकी दफा ३९५ के अनुसार ठहराए गए ये-छः,२ महीनेका दण्ड दफा १४५ मे और तीन तीन मही- नेका दण्ड दफा ३२५ के अपराधमे हुआ पिथरम साहब चीफ जस्टिस और स्ट्रेट साहब व टरल साहबने तजवीज की कि मिसलकी गवाहियोंसे जान पडता था कि तीनो अपराधियोने अलग २ कामोका अपराध किया था जिनसे अलग २ भारी दुःख ( जररगदीद) पहुँचानेका अपराध बिना सम्बध बलवके अपराधके उत्पन्न हुआ था इसलिये दफा १४७ व ३२० के अपराधमै अलग २ दण्ड दिया जाना अनुचित न था । (इ० ला• रि० इलाहाबाद जिल्द ७ सफा ७५७) . (३२६ । जो कोई मनुष्य उस अवस्थाके अतिरिक्त जिसके मध्ये दफा ३३५ मे जोखिम हथियारो अ. आज्ञा है तीर अथवा गोली आदि छोडने अथवा भोकने या थवा उपायोके द्वारा जान काटनेके हथियार अथवा किसी ऐसे हथियारके द्वारा, जिसको बूझकर भारी दुःख (ज- ररशदीद) पहुचाना. हथियारकी माति काममे लाए तो उसके कारणसे मृत्युके होनेकी सम्भावना हो अथवा आग या किसी गर्म किये हुये पदार्थके द्वारा अथवा विष या शरीरको गलित करनेवाले पदार्थके द्वारा अथवा भकसे उड जानेवाले पदार्थके द्वारा अथवा किसी ऐसे पदार्थके द्वारा, जिसको श्वासके द्वारा लेने या रुधिरमें पहुंचाने या निगलनेसे मनुष्यके शरी- रको अचेतना होती हो अथवा किसी पशुके द्वारा जानबूझकर मारी दुःख ( जरर शदीद ) पहुंचाए तो उस मनुष्यको जन्म भरके देश- निकालेका दण्ड दिया जायगा अथवा दोनों प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दह दिया जावेगा जिसकी मीआंद दश वर्पतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा । टीप-(१) अदालत सेशन या म० अ० (२) पोलीस दस्तन्दाजी नहीं करसकती (३) अपराधीके नाम समन जारी होगा (४) जमानत नहीं है (५) राजीनामा नहीं है । १ -प्रेसीडसी मजिस्ट्रेटने दफा ३२६ के अपराधमै अपराधीको दो वर्षकी कठिन कैदका दण्ड दिया-लोकल गवर्नमेटने दण्डको मुनासिब न समझकर हाईकोर्टसे दुबारा तजवीज होनेका विचार किया तजवीज हुई कि दफा ३२६ के अपराधमे जन्म भरके देश निकालेका- दण्ड अथवा १० वर्षकी कठिन कैद या जुर्मानेका दण्ड नियत है-प्रेसीडसी मजिस्ट्रेटको चाहिये था कि अपराधीको तजवीजके, लिये हाईकोर्टके सियुद करते । (इ० ला. रि० बम्बई जिल्द १६ सफा ५८) सोलहवा १६.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई०० (१९३) अथवा ( ३२७ ) जो कोई मनुष्य, जानवूशकर इस अभिप्रायसे दुःख पहुंचाए कि उस दबाकर कोई माल) दुःख सहनेवाले मनुष्यसै अथवा किसी और मनुष्यसै, जो लेनेके लिये (मालका उस दुःख सहनेवालेसे स्वार्थ रखताहो, किसी माल इस्तेहसाल बिलजन) किफालतुलमाल को दवाकर प्राप्त करे अथवा इसलिये कि अथवा किसी अनुचित दुःख सहनेवाले मनुष्यको अथवा किसी और मनुष्यको, जो उस काम पर विवश करनेके लिये जानबूझकर दुख दुःख सहनेवालेसे स्वार्य रखता हो, कोई ऐसा काम करनेपर विश (नर) पहुंचाना. फरे जो कानूनविरुद्ध है अथवा जिससे किसी अपरावका होजाना सहल होजावे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद दश वर्पतक होसकती है और वह -जुर्मानके मी योग्य होगा। (दफा १० को देखो) टीप-(१) अदालत सेशन (२) पोलीस दस्तन्दाी दर सकती है (३) अपराधोंके नाम - वारंट नारी होगा (४) विला जमानत है (५) राजीनामा नहीं है। १-एक मनुष्यने दूसरे मनुष्यको एक काटेदार पेडकी डालीसे इस इच्छासे कोडे मारे कि उससे कोई धन बलपूर्वक ले-मजिस्ट्रेटने दफा ३२३ के दुःख ( जरर खफीफ) का अपराध और दफा ३८४ के अन्यायपूर्वक धन लेन ( इसेहसालबिलजन) का अपराध उसपर प्रमाणित किया, अद्यपि उस पर हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहको दफा ३२७ के अनुसार अभियोगका विचार करना चाहिये भा। (बीकी रि• जिल्द १८ सफा ८) (३२८ ) जो कोई मनुष्य किसी प्रकारका विष अथवा कोई अचेत करनेवाली दुःख ( जरर) आदि) अथवा नश लानेवाली अथवा आरोग्यतामें हानि पहुंचानेवाली मुहुंचानेके अभिप्रायसे औषधि अथवा दूसरा पदार्थ इम अभिप्रायसे, किसी मनुष्यको अचेत करनेवाली और पधि खिलाना. खिलाए अथवा खिलवाए कि, उस मनुष्यको दुःख (जर) पहुचे अथवा इस अभिप्रायसे कि, किसी अपराधको करे अथवा इस अभिप्रायसे कि, निसी अपराधका होना उससे सहल होजावे अथवा यह जानकर कि उससे दुख पहुचनेका समव है तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारों से किसी प्रकारको कैदका दंड किया जावेगा जिसकी मीआद दश वर्पतक होसकती है और वह जुर्मानके भी योग्य होगा। (दफा ४० को - देखो) टीप-(१) अदालत सैशन (२) पोलीस दस्तन्दाजी करसकती है (३) अपराधीक नान वारट जारी होगा (४) विला जमानन (५) राजीनामा नहीं है। १--अपराधीन अग्ने ताडौंक वर शूहडका दूध यह जानकर स्खदिया कि यदि उसको कोई मनुष्य पीजावेगा तो उसको दुःख पहुचेगा-और अभिप्राय उसका यह था कि उसके द्वारा वह - (१९४) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्यय- उस चोरको एक पात्र जो चुराकर उन वर्तनास वाडी लेजाया करता था कुछ निगहियोंने यह दूध मिली ताही एक मनुष्यते मोल लेकर पीली और उससे उनको हानि पहुँची. हाईकोटकी तबीज हुई कि अपराधीको हिन्दुसानके दण्डसंग्रहको दफा ३२८ के अनुसार उत्रित रौति पर दन्ड दिया गया है और दफा ८१ का ऐसे अभियोगसे सन्बन्ध नहीं है । रिगोट हाईकोर्ट बम्बई निल्द ५ सफा ५९) ( ३२९ ) जो कोई मनुष्य जानबूझकर इस अभिप्रायले भगरी दुःख : जररशदीद ) धनको दवाकर लेने पहुंचाए कि दुःख सहनेवालेले अयता किसी मनुष्यले जो दुःख अयवा किसी अनुचित सहनेवालेसे संबन्ध रखता है किसी माल अथवा किफालनुलमालको काम पर विवश करनेके दवाकर प्राप्त करे अथवा इस अभिप्रायसे कि दुःख सहनेवाले लिये जानबूझकर भारी दुःख (जगदीद)/ मनुष्यको अयवा किती और मनुष्यको जो दुःख सहनेवाले मनु- पहुंचाना, ध्यसे स्वार्थ रखता है कोई ऐसा काम करनेपर विवश करे जो कानूनके विरुद्ध है अथवा जिससे किसी अपराधका होना सहल होजाये तो उपरोक्त मनुष्यको जन्मभरके लिये काले पानीका दण्ड अथवा दोनो प्रकारों से किसी प्रकारकी केदका दण्ड दिया जावेगा जिसका मीआद दश वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके मी योग्य होगा। (दफा ४० को देखो। टीप-(१) अदालत सेनन (२) पोलीस दलन्दाजी करनक्त्ती है (३) अपराधीक नाम वारंट जारी होगा (४) जमानत नहीं हो सकती (५) राजीनाम्ग नहीं है। ( ३३० ) जो काई मनुष्य जानबूझकर इसलिये दुःख पहचाव कि, दुख सहने दवाकर इकरार है. वालं अथवा किसी और मनुष्यते जो उस दुग्न सहनेवालेसे राने अथवा दबाकर अमित्राय रखता हो दवाकर कोई ऐसा इकरार अयवा, मुखबिरी किसी धनके लाडाने र । समाचारका देना) कराए जिससे किसी अपराधका अयया विवा करने के लिय जन चाललन संबन्धी अपराधका पता लगसके अथवा इस लिये कि, बूझकर दुःख पहुँच ग. दुःख हुनेवालसै अथवा किती और मनुष्यते जो दुःख सहनेवालेले स्वार्थ रखता हो दवाझर लोई माल अथवा किफालतुलमाल फेरे अयग फिरावे या कोई दाग अथवा तगाना त्रानी मुखबिरी जिससे किसी माल अयबा किकालनुलमालका - बन्नी दोनों प्रकारों से किसी प्रकारको कैदका दंड दिया जावेगा जिनको दान तक होसकती है और वह जुर्मानेके मी योग्य होगा। (दफा १० का फेर पाना सुगम (क शि गंकर)यह -- अपराधका श्रा उदाहरण । में अदर पोलीस है, रमाशंकरको इसलिये दुःख देवे कि वह (मा- , उन लोई अपराध किया है-जो शिवगंकर इस दफाके अनुसार एक -सोलहवाँ १६. एक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०। (१९५) (स) शिवगकर कि, जो एक ओहदेदार पोलीस है, रमागकरको यह बात दबाकर पूछनके लिये दुःख दे कि, चोरीका अमुक माल कहा रक्सा है तो शिवशकर इस दफाके अनुसार एक अपराध का अपराधी है। (ग) शिवाकर, कि जो एक ओहदेदार माल है, रमाशकरको इस कारण दुम्ब दे कि उससे दवाकर मालगुजारीकी वाकीका वाजिबी रुपया वसूल करे तो शिंगकर इस दफाके अनुसार एक अप- राधका अपराधी है। (घ) शिवशकर, कि जो एक जमीदार है किसी कान्तकारको लगानका रुपया देनेपर विवसकरनेके लिये दुःख पहुंचावे, तो शिवशकर इस दफाके अनुसार एक अपराधका अपराधी है। टीप--(१) अदालत सेनन (२) पोलीस दस्तन्दाजी करसकती है (३) अपराधीके नाम वारट जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नही है । १-अपराधीने अपनी स्त्रीको इस वातपर दबाकर विवशकरनेके लिये जानवूमकर दुख पहुँचाया कि वह उसके घर चले-वह हिन्दुस्थानके दडसग्रहको दफा ३३० के अनुसार दोपी प्रमाणित हुआ तजवीज हाईकोर्ट हुई कि तजवीन अनुचित थी । (इ० ला० रि० मदरास जिल्द११ सफा २५७) E फेर लेने के लिये जानबूम- (३३१ ) जो कोई मनुष्य जानबूझकर इसलिये भारी दुःख ( जररगदीद ) पहुंचाए दबाकर इकरार क कि दुःख सहनेवासे अथवा किसी और मनुष्यसे जो दुःख सह- राने अथवा कुछ माल | नेवालेसे अभिप्राय रखता हो, दबाकर कोई ऐसा इकरार अथवा कर भारी दुःख (जर- मुखबिरी कराए जिससे किसी अपराधका अथवा चालचलन रशदीद ) पहुँचाना. सम्बन्धी अपराधका पता लगसके अथवा इसलिये कि दुःख सहनेवालेसे अपवा जो मनुष्य उससे अभिप्राय रखता हो उससे दवा कर कोई माल अथवा किफालतुलमाल फेरे अथवा फिरावे या कोई तगादा चुकावे अथवा दबाकर ऐसी मुखबिरी करानेमे जिससे किसी माल अथवा किफालतुलमालका फेर पाना सुगम हो, विवश करे, तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारोमेंसे किसी प्रकारको कैदका दण्ड दिया जायगा जिसकी मीद दशवर्पतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा । (दफा ४० को देखो) टीप-(१) अदालत सेशन (२) पोलीस दस्तंन्दाजी करसकती है (३) अपराधीके नाम वारंट जारी होगा (४) जमानत नहीं होसकती (५) राजीनामा नहीं हो सकत !

. हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- ( ३३२ जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यका नो सरकारी नौकर है और जब कि वह सरकारी नौकरको, उ. अपनी नौकरीके कारण अपने ओहदेके कामको भुगता रहा हो, सके काम करनेमें डराकर न करनेके अभिप्रायसे जा- जानबूझकर दुःख पहुँचाए या इस अभिप्रायसे कि वह उस नबूझकर दुःखपहुँचाना. | मनुष्यको अथवा किसी दूसरे सरकारी नौकरको, उसकी सर- कारी नौकरी के कारण उसके ओहदेका काम करनेसे रोके अथवा डराए जानबूझकर दुःख पहुँचाए या किसी कामके कारण, जो उस मनुष्यने अपनी सरकारी नौकरीके कारण अपने ओहदेके उचित काममें किया हो अथवा करनेका यत्न किया हो, जानबूझकर दुःख पहुँचाए तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारों से किसी प्रकारको कैदका दड दिया जायगा जिसकी मीआद तीन वर्षतक होसकती है अथवा जुर्मानेका दण्ड या दोनों दण्ड दिये जायेंगे। *प-(१) अदालत सेशन, या प्रै० म० या म० अ० (२) पोलीस दस्तन्दाजी करसकती ३) अपराध के नाम बारट जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है । (३३३) जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यको जो सरकारी नौकर हो और वह अपनी सरकारी नौकरको, सरकारी नौकरीको रीतिपर अपने ओहदेका काम कररहा हो अपने ओहदेका काम जान बूझकर भारी दुःख ( जरशदीद ) पहुँचाए अथवा इस मुगतानम उराकर न क अमिप्रायसे कि वह उस मनुष्यको अथवा किसी दूसरे सरकारी रनेके लिये जानबूझकर नौकरको, उसके ओहदेका काम करनेसे रोके अथवा डराए वा भारी दुःख (जररश- दीद) पहुँचाना. जानबूझकर भारी दुःख पहुँचाए, अथवा किसी कामके कारण जो उस मनुष्यने अपनी सरकारी नौकरीकी रीतिपर अपने ओहदे के उचित काममे किया हो अथवा करनेका यत्न किया हो, जान बूझकर भारी दुःख पहुँचाए तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोंमेसे किसी प्रकारको कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद दशवर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप-दफा ३३१ के अनुसार है। (३३४ ) जो कोई मनुष्य भारी और एकाएकी क्रोध दिलानेके कारण जान- कोष दिलानेपर जान- बूझकर किसीको दुख पहुँचावे तो यदि उस मनुष्यके अतिरिक्त, झंकर दुःख पहुंचाना. J कि जिसके कारण वह क्रोध उत्पन्न हुआ, किसी दूसरे मनुष्यको ख पहुँचाना उसकी इच्छामे न हो अथवा ऐसे दुःख पहुँचानेकी होनहारीको वह न जानता सोलहवा १६.] - -- ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०॥ ( १९७) हो, तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारोमेरो किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जायेगा जिसकी पीआद एक महीनातक होसकती है अथवा जुर्मानेमा दइ जो पाचसौ रुपयेतक होसकता है अथवा दोनो दह दिये जायेंगे । टीप-(१) काई मजिस्ट्रेट (२) पोलीस ठस्तन्दाजी नहीं करसकती (३) अपराधीके नाम समन जारी होगा (४) जमानत है (५) राजीनामा होसकता है। १-क्रोध दिलाने के कारण, उस मनुष्यको दु.ख पहुंचाना जिसने क्रोध उत्पन्न कराया दफा ३३४ के अनुसार दड योग्य है न कि दफा ३२४ के अनुसार । (रिपोर्ट हाईकोर्ट बम्बई जिल्द १ सफा १७) ( १३५ , जो कोई मनुष्य किसी मारी और एकाएको क्रोध दिलानेवाले कामक कोव दिलानेनर जा ] करण जानबूमकर किसीको मारी दु ख (जरशदीद ) पहुचाये नयूगकर भारी दु.स तो यदि उस मनुष्यके अतिरिक्त कि जिससे वह क्रोध पहुँचा, (जररशदीद) पहुचाना. ) किसी दूसरे मनुष्यको भारी दु ख पहुँचाना उसको इन्छामें न हो अगवा ऐसे भारी दु.ख (जरस्शदीद ) के पहुचानेकी होनहारीको वह न जानता हो तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीआढ चार वर्पतक होसकती है अथवा जुर्मानेका दण्ड जो एक हजार रुपयेत होसकता है अथवा दोनो दण्ड दिये जावेगे। स्पष्टीकरण-पिछली टोनों दफाये उन्हीं नियमोके आधीन है, जिनके आधीन ३०० की पहिली छूट है। टीप-(१) अदालत शगन या गै० म० या म. दो० (२) पोलीत दस्तन्दाजी करसकती ३) अपराधीके नाम समन जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा, अदालतको आगा लिये जाने पर होसकता है। १-अपराधीने एक मनुष्यका जबकि बह रातके समय अपराधीके कमरेमे उसकी स्त्रीके साथ व्यभिचार करनेके अभिप्रायसे घुसता था, एक घातक हथियारकी चोटसे मार डाला तजवीज हुई कि अपराधीने भारी दुःख ( जररगदीद) पहुंचानेका अपराध किया कि जो एकाएकी और भारी मोवक कारण किया गया था। (वीली रिपोर्टर जिल्द ३ सफा ५५) ( ३३६ ) जो कोई मनुष्य कोई काम ऐसे निधडकपने अथवा असावधानीसे करे कि उस कामका दण्ड) उससे मनुष्यके प्राणको अथवा औरोंको शारीरिक कुशलताको जो प्राण अथवा और- जोखिम पहुंचे तो उस मनुष्यको दोनो प्रकारों से किसी प्रकारको की शारीरिक कुशलतामे वित्र दाले. कैदका ढह दिया जावेगा जिसकी मीआठ तीन महीनेतक होसकती है अथवा जुर्मानेका दह जो अटाई सौ रुपयेतक होसकता है अथवा दोनों दड दिये जायेंगे। S (१९८) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह । [अध्याय- टीप-(१) कोई मजिस्ट्रेट (२) पोलीस दस्तन्दाजी करसंकती है (३) अपराधीक नाम समन जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है। १-जो मल्लाह ऐसी नाव चलावे जो नदीमे चलने योग्य न हो और उसके कारण मुसाफिरोंके प्राणोकी जोखिम हो तो उसपर दफा २८२ हि. दं. के अपराधको ठहराना चाहिये न कि दफा३३६ के अपराधको । (रिपोर्ट हाईकोर्ट बम्बई १ सफा १३७) ( ३३७ ) जो-कोई मनुष्य काम ऐसे निधडकपने अथवा असावधानीके साथ ऐसे कामसे भारी ) करनेसे, कि उससे मनुष्य के प्राणको अथवा औरोंकी शारीरिक दुःख ( जररशदीद ) 4- [ कुशलताको जोखिम हो, किसी मनुष्यको दुःख ( जरर ) पहुंचाए हुंचाना जो जान अथवा औरोंकी गारीरिक कुश- तो उस मनुष्यको, दोनो प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी कैढका ढड लतामे जोखिम डाले. दिया जावेगा जिसकी मीआद छः महीनेतक होसकती है अथवा जुर्मानेका दड जो. पांच सौ रुपयेतक होसकता है अथवा दोनों दड दिये जावेगे । टीप---दफा २५५ के अनुसार है। ( ३३८ ) जो कोई मनुष्य कोई काम ऐसे निघडकपन अथवा असावधानीके साथ ऐसे कामसे दुःख पहुं-) करनेसे कि उससे मनुष्यके प्राणको अथवा औरोंकी शारीरिक चाना जो जान अथवा कुशलताको जोखिम हो किसी मनुष्यको भारी दुःख जिररशदीद) औरोकी शारीरिक कुश- लतामे जोखिम डाले. पहुचाए तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारोमेस किसी प्रकारको कैदकां दड दिया जावेगा जिसकी मीआद दो वर्षतक होसकती है अथवा जुर्मानेका दण्ड जो एक हजार रुपयेतक होसकता है अथवा दोनो दण्ड दिये जावेगे।. टीप---दफा ३३५ के अनुसार १--अपराधीको भारी दुःख (जररगटीद) पहुँचानक अपराधमे दफा ३३८ हि० द. के अनुसार दण्ड दिया गया-गवाहीसे यह . जान ' पडा कि अपराधी गाडीमे सवार होकर अपने घरको शहरकी सडकोमे होकर रातके ७ आठ बजे जारहा था गाडी साधारण चालसे सडकके बीचो बीचं जाती थी, रात अबेरी, यी और गाडीमे लेम्प न थी परन्तु कोचवान और साईस सडक पर आने जाने- वाले मनुष्योको सावधान करनेके अभिप्रायसे चिल्लाते थे, इतनेमै अपराधीकी गाडीने एक मनायस टक्कर खाई जो एक बुड्ढा और बहरा आदमी था, वह मनुष्य गिरपडा और उसके ऊपरसे गाडी चली गई और इस कारण उसके प्राण निकल.गए-तजवीज हाईकोर्ट यह हुई कि अदालतको इस बातका फैसला करना था कि गवाही इस -प्रकारकी है अथवा नही कि जिससे उस मनुष्यका मरना ऐसे कामसे पाया जावे कि जो अपराधीके निधडकपने अथवां असावधानीसे हुवा हो, परन्तु इस मुकदमेमे ऐसी गवाही नहीं है इसलिये अपराधी छोडा गया ( मढराम हाईकोर्ट रिपोर्ट जिल्द ६ सफा ३१ अपील) सोलहवा १६.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०। ( १९९) अनीति रोक (मुजाहिमनवेजा ) और अनीतिवन्धन (इन्सवेजा) के विषयमं । ( ३३९).जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यको जानबूझकर इसप्रकार रोकेगा कि अनीतिरोक ( मुजा- जिससे वह मनुष्य ऐसी दिशाकी ओर जानेसे रुकारहे कि जिसमें हिमतबेजा.) वह जानेका अधिकार रखता हो, तो कहा जायगा कि उसने उस मनुष्यको अनीति रोक (मुजाहिमतवेजा ) की । - छूट। रोकना किसी ऐसे निजके रास्तका, चाहे थलका हो चाहे जलका, जिसके मध्ये कोई मनुष्य शुद्धभावके साथ निश्चय करता हो कि वह उसके रोकनेका उचित अधिकार रखता है, इस दफाके अभिप्रायके अनुसार अपराव नहीं है। उदाहरण। शिवगकरने एक रास्तेको, जिममे रमाशकरके चल्नेका अधिकार है रोका, और शिवार शुद्धभावके साथ यह निश्चय नही करता था कि वह उसे रास्तेके रोकनेका अधिकारी है इस कारण रमाशंकर उस रास्तेमे चलने फिरनेसे रोकानावे--तो ऐसी अवस्थामें भिगकरने रमाशकरकी अनीति रोक.की। १-जब कोई पोलीसका ओहदेदार किसी एक मनुष्यको उसके घर न जाने दे जवतक कि वह जमानत न दाखिल करे तो यदि वह ओहदेदार शुद्धभावसे इस कार्रवाईको न करे तो कहा जायगा कि उसने इस दफाके अनुमार अनीति रोकश अपराध किया ( वीही रिपोर्टर जिल्द १० सफा २०) (३४० ) जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यको इस प्रकार पर अनीतिरोक कर कि उस अनीतिबधन (हस-) मनुष्यको किसी मुख्य नियन की हुई सीमाके बाहर जानेस रोके तो कहा जावेगा कि उपरोक्त मनुष्यने उसके मध्ये अनीति वधन ( इन्सवेजा ) किया । बेजा.) उदाहरण। क) शिवशकर रमाशकरको दीवार खिचे हुए किसी घग्के भीतर करके ताला लगा दे इसस रमागकर उन घरकी दीवारके बाहर किमी और जानेमे स्क जाए तो कहा जायगा कि शिवशकरने रमागकरको अनीतिववन मे रक्खा । (ब) यदि शिवाकर किमी घरके द्वारपर गोली मारनेके हथियार लिये हुए मनुष्याको विठा देवे और शिवगकरसे कहे कि जो तू घरके बाहर निकल्नका यत्न, करेगा तो मनुष्य तुझे गोली मारेगे-तो इस अवस्थामे शिवगकरने रमागरको अनीतिबधनमे रखा।

(२००) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। { अध्याय- }: दण्ड दिया २-किसी मुकद्दगेने अफ्तर पोलीसको दपा १५२ ऐक्ट २५ सन् १८६१ ई० जान्ता फौजदारीके अनुसार किसी मनुष्यको एक घटा भी रोक रखनेका अविकार नहीं है, सिवाय उस अव- स्थामै कि जब मुकद्दमेमे कोई उचित कारण हो । (वीक्ली रिपोर्टर जिल्द ६ सपा ८८) २-किमी मनुष्यको बलपूर्वक उसकी इच्छाकै विरुद्ध किसी मुख्य स्थानपर रोक रखना अथवा किसी मुख्य रास्तेसे जानेपर विवश करना अनौतिवनमे गिना जायगा । (रिपोर्ट हाईकोर्ट मदरास जिल्द २ सफा ३९६) ३-कीना अर्थात् डाह अपराव "अनीतिबन्धन" के लिये जिसका लक्षण दफा ३४० हि० द. में कहा गया है, आवश्यकीय जुज (टुकडा) नहीं है-अपरावका होना उस समय कहा जावेगा कि जब कोई मनुष्य इस प्रकारपर अनुचित रीतिसे रोका जावे कि जिससे वह एक नियत की हुई सीमाके बाहर न जास-और किसी मनुष्यका अनुचित सतिपर रोकाजाना उस अवस्थामें कहा जावेगा कि जब यह जानबूझकर इस प्रकारसे रोका जाये कि जिससे वह किसी ऐसी और जानेसे रुका रहै कि जिधर जानेका वह अधिकार रखता है। (इ० ला. रि० बम्पई जिल्द १३ सफा २७७) ( ३४१) जो कोई मनुन्य किसी मनुष्पको अनीति रोक फरे तो उसको साधा- अनीतिरोकका दण्ड, रण कैदका जावेगा जिसकी मीभाद एक महीनातक होसकती है अथवा जुर्मानेका दण्ड जो ५०० ) रुपयेतक होसकता है अथवा दोनो दण्ड दिये जावेगे। टीप-(१) कोई मजिस्ट्रेट (२) पोलीस दस्तन्दाजी कर सकती है (३) अपराधीके नाम सेंमन जारी होगा (४.) जमानत हो सकती है (५) राजीनामा है । १--एक मनुष्यने ले जानेके लिये कुछ माल गाटीपर रक्खा-अपराधीने बैलों को नुएसे खोल- कर भालको गाडीसे सडकपर गिरा दिया तब वह मनुष्य मालको छोड़कर चलागया तजवीज हुई कि अपराध दफा ३४१ का नहीं होसकता परंतु उपरोक्त अपराध दफा ११५ हि. दं. गिना जायगा । (इ. ला. रि• कलकत्ता जिल्द १२ सफा ५५) २-अपराधीने एक मनुष्यको उसकी गाडी समेत एक मुख्य दिशाकी ओर जानेसे रोका और उसपर एक झूठा दोप लगाकर उससे कुछ रुपया अनुचित गीतपर लिया-तजवीज हाईकोर्ट यह हुई कि अपराधीने अनीतिरोकका अपराध किया न कि चोरीका । (वीक्ली रिपोर्टर जिल्द १० सफा ३५) जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यको. अनीतिबंधनमें रक्खे तो उसको दोनों . .३४२) अनीतिबधनका दण्ड, } प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मौ भाद एक वर्षतक होसकती है अथवा जुर्मानेका दण्ड जो १०० ) रुपयेतक होसकता है अथवा दोनों दण्ड दिये जायेंगे।

सोलहवा १६.] एवर नंवर ४५ सन् १८६० ई० । (२०१) टीप--(१) मा या न० म० या० म० दो० (१) पोलीस दस्तन्दाजी करसकती (३) अपराधीके नाम उमन जारी होगा (४) जमानत है (५) राजीनामा है ।- १-यदि कोई अफ्तर पोलीस किसी मनुष्यको स्वय पकडनेके बदले किसी विना नौकर- सरकारको उतको पहने और अपनी चौकमान रखनको आना द दे तो वह अस्तरही उस वातका- जिम्मेदार है क्योंकि जो मनुष्य उसको आगनुसार पकडा जावे वह कानूनानुसार उसीकी चौकसीम. समझा जावेगा । ( वीको रिपोर्टर जिल्द ७ सना) २-करियादी (मुलगीस) ने अरावीपर उनीतिरोक और अनातिववनके मध्य अदालतमे नालिश की-जबात यह था कि फरियादीने अपराधीर आक्रमण ( हनला ) किया और उस कारणसे वह पकडा गम-और जानक- पलेस स्पेक्टरने नहीं छोड़ा तबतक अनीतिवचनम रहा, साहब मजिस्ट्रेटने ४ महीनका व दिया-गजवीज हुई कि अपराधका विचार अनुचिन था, जो कि अपरा- पीको मुकद्दमेकी दना देसकर इस पाका दृढ संदेह होगया था कि जो कपडा फारवादीक यहा है वह चोरीका मान, साल्ये उस्के नये फरियादीसे पूछना उसका उचित काम था जिनके उत्तरोसे उसका सदेह दूर होता-और उसने ऐले उत्तर पाय कि जो माननेके योग्य न थे । (इ० ला• रिक बंबई निल्द १२ सफा ३७७) ( ३४३ ) पो कोई मनुष्य किसी मनुष्यको तीन दिन अयवा अधिक दिनतक तीन या अधिक दिन अनीतिबन्धनमें रक्खे तो उस मनुष्यको दोनो प्रकारोमेंसे किसी तक अनीतिवधन, प्रकारको कैदका दइ दिश जावेगा, जिसकी मीआद दो वर्पतक होसकती है अथवा जुर्मानेगा दड ग दोनों दढ दिये जायेंगे। टीर-(१) ० म० या म० अ० या म० दो० (२) पोलीस दस्तन्दाजी करसकती है ३) अपराधीके नाम समन जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है। (३४४ ) जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यको दश दिन अथवा अधिक दिनतक अनी- दश अथवा अधिक) तिवधनमे रखे तो उस मनुष्यको दोनो प्रकारों से किसी दिन तक अनीतिवधन प्रकारकी कैठका दंड दिया जावेगा, जिसकी मीआद तीन वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप-(१) अदालत सेशन या प्रे० म० या म०म० या म०दो० (२) पोलीस दस्तन्दानी करसकती है (३) अपराधी के नाम समन जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है। १-जो मनुष्य अनीतिबन्धनका अपराधी दफा ३४४ के अनुसार ठहराया जावे उसको केवल जुर्मानेकाही दह न होना चाहिये, परन् कैद भी होना चाहिये । ( रिपोर्ट हाईकोर्ट बम्बई निल्द १ सफा ३९) - (२०२) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अन्याय- (३४५) जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यको अनीतिवधनमे रक्खे यह जानकर उस मनुष्यको अनी-] कि उस मनुष्यको छोड देनके लिये कानूनानुसार आज्ञापत्र तिबंधन में रखना जिसके ( हुक्मनामा ) जारी होचुका है, तो उस मनुष्यको दोनों छुटकारेकी आजा हो चुकी है. प्रकारोमेसे किसी प्रकारको कैदका दंड दिया जावेगा जिसकी मीआद दो वर्षतक होसकती है और यह उस कैदकी मीआदके अतिरिक्त होगी जिसका वह इस संग्रहकी किसी और दफाके अनुसार योग्य होगा। टीप-(१) अदालत सेगन या प्रे० म० या म० अ० या म० दो० (२) पोलीस दस्त न्दाजी नहीं करसकती (३) अपराधीके नाम समन जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है। ( ३४६ ) जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यका इस प्रकारसे अनीतिवन्धनमे रक्खे कि गुप्त अनीतिबधन. } जिस से यह इच्छा प्रगट हो कि उस मनुष्यका अनीतिबंधनमें रक्खा जाना किसी मनुष्यको जो अनीतिवधनमे रक्खे गए मनुष्यसे अभिप्राय रखता हो अथवा किसी सरकारी नौकरको न मालूम होसके अथवा वह कि उस अनीति- बंधनका स्थान ऐसे मनुष्य या सरकारी नौकरको जिसका वर्णन इस दफामे पहिले किया गया ज्ञात या सूचित न हो जावे तो उपरोक्त मनुष्यको किसी और दण्डके सिवाय जिसका वह उस अनीतिबधन के वढलेमे योग्य हो दोनों प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैका दड दिया जावेगा जिसकी मीआद दो वर्पतक हो सकती है। टीप-दफा ३४४ के अनुसार है। १-किसी मनुष्यको दफा ३४६ के अपराधका अपराधी प्रमाणित करनेम इस बातका जानना आवश्यकीय है कि अनीतिबन्धन उस प्रकारका था जिससे यह इन्छा प्रगट होती है कि अनीतिबन्ध- नमे रक्खा हुआ मनुष्य प्रगट न किया जावे । (इ. ला. रि० कलकत्ता जिल्द ९ सफा २२१) .( ३४७-) जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यको इसलिये अनीतिवंधनमे रक्खे कि अनीति- दबाकर माल ले लेने वधनमे रखे हुए मनुष्यसे अथवा किसी और मनुष्यसे जो उस अनी- अथवा किसी अनुचित तिवधनमे रक्खे हुए मनुष्यसे स्वार्थ रखता है किसी माल अथवा कामपर विवश करने अभिप्रायसे अनीति बंधन) किफालतुलमालको दवाकर लेवे अथवा अनीतिबंधनमे रखे हुए मनुष्यको या किसी और मनुष्यको जो अनीतिवधनमे रक्खे गए मनुष्यसे स्वार्थ रखता है, कोई ऐसा काम करनेपर जो कानूनविरुद्ध है अथवा ऐसी मुखबिरी करनेपर जिससे किसी अप. राधका होना सहल हो जावे, विवश करे तो उस मनुष्यको दोनो प्रकारोंमेसे किसी प्रकारको .

Ju सोलहवा १६.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई० । (२०३) कैदका दड दिया जायेगा जिसकी मीभाद तीन वर्पतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। (दफा ६० को देखो) टीप--दफा ३४४ के अनुसर है। १-जब किसी मनुष्यपर हि. द. की दफा ३१७ का अपराध लगाया जावे और फरियादी (मुस्तगीस) तथा उसके गवाहोंका बयान अपराधीके सामने लिखा जाकर मुकद्दमा गवाहोके बयानो- की सफाईके लिये रुकजाय और उस दूसरी तारीखपर फरियादी न आवे तो मुकद्दमा उसके न आनेपर डिसमिस नहीं होसकता । ( वीक्ली रिपोर्टर जिल्द १२ सफा २७) (३४८) जो कोई मनुष्य किसी. मनुष्यको इसलिये अनीतिवन्वनमे रक्खे कि टाकर इकरार कराने) उस अनीतिवन्धनमे रखे हुए मनुष्यसै अथवा किसी और मनु- अयवा मालके फेर देनेपर विवश करने के अभिप्रायसे । प्यस जो उस अनीतिववनमे रखे हुए मनुष्यसै स्वार्य रखता है अनीतिबन्धन, वलपूर्वक दवाकर कोई ऐसा स्वीकार या मुखबिरी कराए जो किसी अपराव अथवा चालचलन सम्बन्धी अपरावक पता लगानेकी ओर झुकता हो अथवा इसलिये कि अनीतिवन्धनमे रक्खे हुए मनुष्यको अथवा किसी और मनुष्यको जो अनीतिबन्धनमे रखे गए मनुष्यसे स्वार्थ रखता है किसी माल अयवा किफा- यतुलमालके लौटाने या लौटवानेके लिये या किसी दावं या तगादेक चुकाने अथवा ऐसी मुखविर्ग करनेके लिये जो किसी माल अथवा किफायतुलमालके लौटाये जानेकी ओर झुकती हो, विवश करे तो उपरोक्त मनुष्यको दानो प्रकारों से किसी प्रकारको कैढका टण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद तीन वर्पतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा (दफा ४० को देखो) टीप-(१) अदालत सेगन, या प्रे० म. या म० अ० ( २ ) पोलीस दस्तन्दाजी केर सस्ती है (३) अपराधीके नाम समन जारी होगा (४ ) जमानत है ( ५ ) राजीनामा नहीं है। : १-चोरने जब बह पोलीसकी चौकसीम था कुछ माल चोरीका फरियादी ( मुस्तगीस) को लाटा दिया-इसलिये उपरोक्त फरियादीका विचार दफा ३४८ के अनुसार हुआ परन्तु वह इस बात पर छोड़ दियागया कि उपरोक्त चोर कानूनानुम्गर पकडा गया था इसलिये उसका चोकीम रहना अनुचित न था।

polona २०४) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- अनीतिवल (जब मुजरिमाना) और आक्रमण ( हमले के विषयमें। (३४९) जब कोई मनुष्य किसी दूसरे मनुष्यको चलायमान करे अथवा उसकी चलायमानता ( हरकत ) को वदले अथवा उत्तकी चलायमानताका बल (जन) ठहरावे अथवा - किसी पदार्थको ऐसा चलायमान करे या उसकी चलायमानताको वदले या उसकी चलायमानताको ठहरावे कि जिससे वह पदार्य उस दूसरे मनुष्य के शरीरके किसी भागसे छू जाय अथवा कित्ती ऐसे पदार्थ से छू जाय जिसको वह दूसरा मनुष्य पहिने हुए अथवा लिये हुए हो अथवा किसी ऐसे पदार्थसे छु जाय जो ऐसे स्थानमे हो कि जिसके कारण उस छूनेसे उस दूसरे मनुष्यको त्वचा इन्द्रियको खेद पहुँचे तो कहा जायगा कि उपरोक्त मनुष्यने दूसरे मनुष्यपर वल किया परन्तु नियम यह है कि वर मनुष्य जो चलायमानता करने या चलायमानताको बदलने में चलायमानताके ठहरा- नेका कारण हो नीचे लिखे हुए तीन प्रकारोंमेरो किती प्रकार पर स्स चलायमानताके करने या बदलने या ठहरनेका कारण हो । पहिले-स्वय अपनेही शारीरिक बलसे, दूसरे-किसी पदार्थको इस प्रकारपर रणनेते कि वह चाल अथवा चालका बदलाव अथवा चालकी रुकावट किसी और कागके चिना हुए उस ननुभकी ओरने अथवा किसी दूसरे मनुष्की ओरसे होवे । तीसरे-किती पशुको चलायमान करके अथवा उसकी चलायमानताको बदलकर अथवा उसकी चलायमानताको ठहराकर । (३६० ) जो कोई मनुष्य किसी अपराधको करनेके लिये किसी मनुष्यपर उसो अनीतिबल (जनमुज-1 प्रसनताके बिना जानबूझकर वल (जन ) करे अथवा इस रिमाना) इच्छासे या यह काम अति सम्भवित जान कर कि ऐसा बल (जत्र ) करनेसे वह उस मनुष्यको जिस पर वल किया गया है हानि या इर या दुःख पहुंचाएगा तो कहा जायगा कि उस मनुष्यने दूसरे मनुष्यपर अर्नाति बन ( जनमुजरिमाना ) किया । उदाहरण। (क) शिवशंकर किसी नावपर जो नदीमे रस्सीसे बँधी है बैठा है, यदि रमाशंकर रस्सोको खोल दे और इस प्रकार जानबूझकर नावको धारमै बहावे तो इस अवस्थामे रमाशंकर जान. बूझकर शिक्करकी चलायमानताका कारण हुआ और उसने यह काम पदार्थको इस प्रकार सोलहवाँ १६.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६०ई०॥ (२०५) रखनेसे किया कि बिना किये किसी और कामके किसी मनुष्यकी ओरसे चाल उत्पन्न होगई तो इसलिये रमाशंकरने, शिवशकरपर जानबूझकर बल किया और यदि उसने किसी अपराधके करनेके लिये या इस इच्छासे या यह काम अति सम्भवित जानकर कि वह वलकरके शिवशकरको हानि या डर या क्लैश पहुँचाये, शिवशंकरकी बिना प्रसन्नताके ऐसा किया तो कहा जायगा कि रमाशकरने शिवशकर पर अनीतिबल (जबमुजरिमाना ) किया । (ख) रमाशंकर चरट गाडीर सवार है, शिवशकरने रमाशकरके घोडौंको चायुकमारकर भगाया तो यहा शिवशकरने घोडासे उनकी चाल बदलकर रमाशंकरको चालको बदला और इसलिये शिवशकरने रमाशकरपर बल किया, यदि शिवशंकरने यह काम रमाशकरकी बिना प्रसन्नताके इस भाभप्रायसे अथवा यह बात आते सम्भवितजानकर किया हो कि उसके द्वारा रमाशकरको हानि या डर या क्लेग पहुंचे, तो कहा जावेगा कि शिवशकरने रमाशकरपर अनीति बल (जब मुज- रिमाना) किया। (ग) ई-धरीप्रसाद पालकीमें चढा जाता है, रामप्रसादने ईश्वरीप्रसादको लूटनके अभिमायसे पालकीका बडा पकडकर पालकीको रोक लिया, तो इस अवस्थामें रामप्रसाद, ईश्वरीप्रसादकी चाल रोकनेका कारण हुआ और यह उसने स्वय अपने शारीरिक बलसे किया, इसलिये रामप्रसादने ईश्वरी प्रसादपर बल किया और जो कि रामप्रसादने अपराध करनेके अभिप्रायसे विना प्रसन्नता ई-बरीप्रसाद के जानबूझकर ऐसा किया तो रामप्रसादने ईश्वरीप्रसाद पर अनीतिबल किया। (घ) यदि- शिवशकर गलीमै रमाशकरको जानबूझकर धक्का लगाए तो इस अवस्थामें शवशकरने अपने शरीरको अपनेही पलसे ऐसा चलायमान किया कि वह रमाशकरसे छूगया इसलिये शिवशकरने जानबूझकर रमाशकरपर बल किया और यदि शिवशकरने विना प्रसन्नता रमाशंकरके इस अभिप्रायसे अथवा यह बात अतिसम्भावित जानकर कि उसके द्वारा रमाशकरको हानि या डर या क्लेश पहुंचेगा, ऐसा किया तो कहा जायगा कि शिवशंकरने रमाशंकरपर अनीतिवल किया। (च) शिवशकर एक पत्थर इस अभिप्रायसे अथवा यह बात अतिसम्भवित जानकर फेके कि वह रमाशकरके शरीरसे अथवा रमाशंकरके कपडेसे अथवा किसी वस्तुसे जो रमाशकर लिये हुए है, लगजावे अथवा यह कि वह पत्थर पानीमें लगकर रमाशकरके कपडोर अथवा किसी वस्तुपर जो रमाशंकरपर लिये हुए हैं ठीटे डाले तो इस अवस्थामें याद उस पत्यरका फेंकना ऐसा फल उत्पन्न करे जिसके कारण कोई पदार्य रमाशकरसे अथवा रमाशकरके कपडोंसे लगजाने, तो शिवशकरने रमाशारर बल किया और यदि उसने रमाशकरकी विना प्रसन्नताके ऐसा किया इस अभिप्रायसे कि वह उसके द्वारा रमाशंकरको हानि या डर या क्लेश पहुंचाए तो शिवशंकरने रमाशंकरपर अनीतिबल किया। छ) शिशकर जानबूझकर किसी स्त्रीका घूघट खोले तो इस अवस्याने शिवशकरने जान- बूझकर उस स्त्रीपर बल किया और यदि उसने उस स्त्रीको बिना प्रसन्नता, इस अभिवायसे अथवा यह बात अति मम्मति जानका, ऐमा किया, कि उसके द्वारा वह उस स्त्रीको हानि या डर या क्लेश पहुँचाए तो कहा जायगा कि शिवमरने उस स्त्रीपर अतिबल किया।

(२०६) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- ज) रमाशकर नहीं रहा हो और शिवशकर हौजमे ऐसा पानी जिसको वह खौलता हुआ जानता हो डाल दे तो इस अवस्थामें शिवशकरने स्वय अपने गारीरिक बलसे खौलते पानीको इस प्रकारसे जानबूझकर चालदी कि वह पानी रमागकरके शरीरसे छू गया अथवा दूसरे पानीसे छूगया जो पानी ऐसे स्थानपर है कि उसका छूना रमाशकरकी त्वचा इन्द्रियको खेद पहुंचावेगा इसलिये शिवशकरने रमाशंकर पर जानबूझकर बल किया और यदि उसने रमाशंकरकी बिना प्रसन्नता इस अभिप्रायसे अथवा यह बात अंति सम्भवित जानकर, ऐसा किया कि वह उसके द्वारा रमाशंकरको हानि या डर या क्लेग पहुँचाए तो शिवगकरने रमाशंकरपर अनीति बल किया । (अ) शिवाकर रमाशंकरकी विना प्रसन्नताके रमाशंकरपर एक कुत्ता ललकार दे तो इस अवस्थामे यदि शिवशकरका यह अभिप्राय हो कि रमाशंकरको हानि या डर या क्लेश पहुंचाए, तो शिवशकरने रमाशंकरपर अनीतिबल किया। नीचे लिखी हुई बातें जो कानून इगलिस्तानके अनुसार आक्रमण ( हमला) के अपराधर्म गिनी जाती हैं वह हिन्दुस्थानके दण्डसंग्रहके अनुसार अनीतिवलमे गिनी जाती है। "गुरुको अपनी शिष्या लडकी की अनुचित स्वतंत्रताको लेना, बिना उसकी प्रसन्नताके चाहे वह नाही न करती हो, किसी डाक्टरका बिना आवश्यकता रोगी स्त्रीका वस्त्र हटाकर उसे नंगा कराना. इस मिषसे कि बिना वस्त्र खोले उसके रोगेका बर्ताव नहीं जाना जा सकता; किसी अफ्सरका कगाल खानेमे किसी कंगालके बाल बलपूर्वक तथा विना प्रसन्नता उसके कटवाना, किसी मनुष्यके मुंहपर थूकना, किसी घोडेको जिसपर कोई मनुष्य सवार है मारकर उस मनुष्यको नीचे गिरा देना, क्रोधकी अवस्थामे बदला लेनेके अभिप्रायसे अथवा शत्रुतासे किसी मनुष्यके शरीर अथवा वस्त्रको छूना अथवा पकड लेना," परन्तु छोटे आक्रमणोमे दफा ९५ हि० दं० का सम्बन्ध रहेगा। } ( ३९१ ) जो कोई मनुष्य कोई सूरतवनाए अथवा कोई तैयारी करे इस अभिप्रायसे अथषा यह वात अति सम्भवित जानकर कि उस सूरत आक्रमण (हमला बनाने अथवा तैयारी करनेसे कोई मनुष्य जो उस स्थानपर उपस्थितहो यह समझ कि सूरत बनानेवाला अथवा तैयारी करनेवाला मनुष्य मेरे साथ अनीतिबल करनेको हो-तो कहा जायगा कि उसने आक्रमण ( हमला । किया। स्पष्टीकरण केवल शब्दोंका कहनाही आक्रमण ( हमला ) की सीमा तक नहीं पहुँचता परन्तु सम्भव है कि उन शब्दोंसे, जिनका कोई मनुष्य वर्ताव करे, उस मनुष्यकी सूरत बनानेका अथवा तैयारी करनेके मध्ये ऐसा अभिप्राय प्रगट हो कि वह सूरत बनाना. अयवा तैयारी करना आक्रमण ( हमला ) की सीमाको पहुँच जावे।

सोलहवाँ १६.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई० । (२०७) उदाहरण । (क) शिवशकर, इस अभिप्रायस अथवा यह बात अतिसम्भवित जानकर रमाशंकरपर सा उठाये कि वह उसके द्वारा रमाशकरको यह निश्चय कराए कि वह उसको मारने वाला है तो कहा जायगा कि शिवशकरने रमागकरपर आक्रमण ( हमला) किया । ख) शिवाकर किसी कटहे कुत्तेकी मॅवरकली खोलना भारभ करे इस अभिप्रायसे अयत्रा यह बात सभवित जानकर कि उसके द्वारा रमाशंकरको यह निश्चय कराये कि वह रमाशंकर पर शीघ्रही उस कुत्तेको दौडाने वाला है-तो शिवशकरने रमाशंकरपर आक्रमण ( हमला) किया । ग) शिवशकर एक लकडी उँठाकर रमाशकरसे कहे किम तुझको मारुगा, इस सूरतमे यद्यपि यह गढ जिनका उच्चारण शिवाकरने किया किसी दयाम आक्रमण (हमला) की सीमाको नहीं पहुंच सकते-और भी केवल यह सूरत बनाना बिना किसी और बातके हुए आक्रमण (हमला) की सीमाको न पहुँचगा, तथापि वह सूरतका बनाना जिसका अभिप्राय शळासे प्रगट किया गया, आक्र- मण ( हमला ) की सीमाको पहुँच सकता है। (३६२ ) जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यपर आक्रमण ( हमला ) अथवा अनीतिबल दद अनीति बलका) (जब मुजरिमाना) करे, (जब मुजरिमाना ) करे, सिवाय इसके कि जब उस मनुष्यकी सिवाय इसके कि जो ओरसे कोई भारी और एकाएको कोष दिलाए जानेका कारण भारी कोष दिलाए जा- नेके कारण किया जाय उत्पन्न किया जावं, तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दण्ड.दिया जावेगा जिसकी मीआद तीन महीनेतक होसकती है अथवा जुर्मानेका दण्ड जो ५०० ) रु. तक होसकता है अथवा दोनों टण्ड दिये जावेगे । स्पष्टीकरण-भारी और एकाएकी क्रोधका कारण होनेसे, इस दफाके अनुसार अप- राधके दण्डमे कमी न होगी, कदाचित् ऐसे क्रोधको अपराधीने कोई अपराध करनेके बहानेस स्वय आपही ढूंढा हो अथवा जानबूझकर कराया हो, या-- यदि वह कोव किसी ऐसे कामसे हुआ जो कानूनानुसार किया गया हो अथवा जो किसी सरकारी नौकरने अपनी सरकारी नौकरीके अविकारोके उचित वर्णनमें किया हो, या- पदि उपरोक्त क्रोध किसी ऐसे कामसे दिलाया गया हो जो निजरक्षाके अधिकारको कानूनानुसार वर्तनमें किया गया हो यह बात देखना कि क्रोध ऐसा मारी और एकाएकी था, जो दंड घटानेके लिये काफी हो विचारके आधीन होगा।

(२०८) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह । - [अध्याय- टीप-(१) कोई मजिस्ट्रेट (२) पोलीस दस्तन्दाजी करसकती है (३) अपराधीके नाम वारंट जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा है । १-जो मनुष्य, आश्मण ( हमला ) दफा ३५२ हिन्दुस्थानक दण्डसंग्रहके अपराधसे जाच होनेके पश्चात् छोड दिया जावे तो फिर उसका विचार उसी कामके मध्ये दफा ३२३ के अपराधर्मे नहीं होसकता । (बंगाल ला रिपोर्ट जिल्द ७ सफा २५) २-जो आक्रमण (हमला) का अपराध भारी दुःख पहुँचाने के अभिप्रायसे किया जाये उसमें राजीनामा नहीं होसकता । (रिपोर्ट हाईकोर्ट पश्चिमोत्तर देश जित्द ६ सफा ३०२) ( ३९३ ) जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यपर जो सरकारी नौकर है, जब कि वह किसी सरकारी नौकर.] अपने ओहदेके कामको भुगता रहा हो, आक्रमण ( हमला ) को अपने ओहदेका काम अथवा अनीतिबल (एबमुजरिमाना ) करे अथवा इस अभि- करनेसेडराकर रोक रख- नके लिये अनीतिबलको प्रायसे कि उस सरकारी नौकरको अपनी नौकरीका काम काममे लाना. मुगतानेसे रोके या डराए, आक्रमण अथवा अनीतिवल करे; अथवा किसी कामके कारण जो उस सरकारी नौकरने अपने ओहदेका काम भुगतानेमे उचित रीतिपर किया हो या करनेका उद्योग किया हो आक्रमण अथवा अनीतिवल करे, तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दंड दिया जावेगा जिसको मीआद दो वर्षतक होसकती है अथवा जुर्मानेका दण्ड या दोनों दंड दिये जावेगे । टीप-(१) मै० म० या०म० अ० या म० दो० (२) पोलीस दस्तन्दाजी कर सकती (३) अपराधीके नाम वारण्ट जारी होगा ( ४ ) जमानत होसकतो है ( ५ ) राजी- नामा नहीं है। १-म्यूनिसिपल इन्स्परेटर दफा ४१ म्यूनिसिपलिटी जिलेके अनुसार सरकारी नौकर है। (इ. ला.रि. मदरास जिल्द १३ सफा १३१) २-एक पोलीस स्टेशनके अफ्सरने दूसरे पोलीस स्टेशनके अफ्सरको लिखा कि वह अपनी सीमामे एक घरकी तलाशी कराए-दूसरे अपसरने उस लिखनेके अनुसार घरका तलाशोके लिये अपने दो सिपाही नियत कर दिये--परंतु उनको दफा ३७९ जाब्ता फौजदारीके अनुसार कोई आज्ञापत्र लिखकर न दिया-अपराधियोने उस तलाशीमे रोकटोकनी-तजवीज हुई कि अपराधियोंपर दफा १४३ ३५३ हि० दं० का अपराध नही ठहराया जासकता । (रिपोर्ट हाईकोर्ट पश्चिमोत्तर देश 'जल्द सफा २०९) सोलहवा १६.] एक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई०। .०९) (३९४) जो कोई मनुष्य किसी स्त्रीपर आक्रमग ( हमला ) या अनीतिबल (जन- किसी त्रो की लबा) मुजरिमाना ) करे, इस अभिप्रायसे अथवा यह बात सम्मवित बिगाडनेके अभिप्रायसे जानकर कि उसके द्वारा उसकी लजा विगगी तो उपरोक्त आक्रमण (हमला) अ- यवा अनीवियल करना. मनुष्यको दोनो प्रकारों से किसी प्रकारको फेदका दण्ड दिया जावेगा जितकी मौआद दो वर्पतक होसकती है अथवा जुर्मानेका दण्ड या दोनों दण्ड दिये जायेंगे। टीप-दफा ३५३ के अनुमार है। ( ३५५ ) जो कोई मनुष्य किसी मनुष्य पर आकाग अया अनीतिबल भारी क्रोधके अति- करे यह इच्छा करके कि उसके द्वारा उस मनुष्यको अप्रतिष्ठा रिक्त और प्रकार पर करे, सिवाय इसके कि उत्त मनुष्पकी ओरसे कोई मारी और किसी मनुष्यको बइजत एकाएको क्रोध दिलानेका कारण प्रगट हुआ हो, तो उपरोक्त करनके अभिनयते उस- मनुष्पको दोनों प्रकारोंमेले किसी प्रकारको कैदका दण्ड दिया पर आक्रनग (हम) अथवा अनीतिल करना जायेगा जिराकी मीआद दो वर्षतक होती है अथवा जुर्मानेका दण्ड या दोनों दण्ड दिये जायेंगे। ----(१) प्रै० म० या न० अ० या म० दो० (२) पेलीस दस्तन्दाजी नहीं करसक्ती ) अपरावीके नाम समन जारी होगा (४) जमानत है (५) राजानाना है । ( ३१६) जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यपर किजी ऐसी वस्तुके छीन लेनेके उद्यो- कुछ वस्तु जिो कोई गमें आक्रमग अथवा अनीतिबल करे जिसको वह मनुष्य रस मनुष्य लिये ज.ता हो. समय पहिने या लिये हो तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारोमैसे उसकेछीन लेनेमा उद्य. कित्ती प्रकारको कैदका दण्ड दिया जायेगा जिसकी मीआद ग करनेमें आक्रनगम दो व तक होसकती जुर्मानका दण्ड या दोनो थवा अनीतिवल (जनमु- जरिमाना ) करना. टीर-(१) कोई मजिस्ट्रेट (२) पोलीस दस्तन्दानी करसकती है (३) अराधीके नाम पारंट जारी होगा (४) जमानत नहीं होसकती (५) राजीनामा नहीं है । ( ३९७ ) जो कोई मनुन्य किसी मनुष्यको अनीतिबन्धनमें रखनेके उद्योगमे उस अनीतिबंधन उद्यो ] पर आक्रमग अथवा अनिवल करे तो उस मनुष्यको गमे आकनग अथवा दोनो प्रकारोम्से रिसी प्रारको कंदका दण्ड दिया जायेगा अनीति बल ( मुज जिन मीआद एक वर्षा हो सकती है अथवा जुर्मानेका रिमाना)नता. दण्ड जो एक हजार तक हो हो सकता है अथवा दोनो दण्ड दिये जायेंगे। १५ अथवा दण्ड दिये जावेगे।

(२१०) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- करना टीप-(१) कोई मजिस्ट्रेट (२) पोलीस दस्तन्दाजी करसकती है (३) असीके नाम वारट जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है। ( ३५८ ) जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यपर ऐसे मारी और एकाएकी को पके भारी क्रोधपर आक्र- कारण, कि जो उस मनुष्यने दिलाया हो, . आक्रमण अथवा मण अथवा अनीतिबल अनीतिबल करे, तो उपरोक्त मनुष्यर्को साधारण कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद एक महीनातक होसकती है अथवा जुर्मानेका दण्ड जो दोसौ रुपयातक हो हो सकता है या दोनों दण्ड दिये जावेगे । स्पष्टीकरण-यह पिछली दफा- उसी स्पष्टीकरणके आधीन है जिसके आधीन दफा ३५२ है। टीप-दफा ३५२ के अनुसार है। } ष्यको ले भागना. मनुष्यको ले भागने, भगा ले जाने गुलाम बनाने और बेगार करानेके विषयमें। ( ३५९ ) मनुष्यको ले भागना दो प्रकारका है-ब्रिटिश इडियामेसे मनुष्यको ले मनुष्यको ले भागना.) भागना और किसी रक्षकको उचित रक्षामेसे ले भागना- (३६० ) जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यको विना प्रसन्नता उस मनुष्यके अथवा ब्रिटिश इडियासे मनु- किसी और मनुष्यके जो उस मनुष्यकी ओरसे प्रसन्नता प्रगट करनेका कानूनानुसार अधिकारी है, ब्रिटिश इन्डियाकी सीमाके बाहर जाए, तो कहा जायगा कि उपरोक्त मनुष्य उस मनुष्यको ब्रिटिश इडियामेंसे ले भागा। ( ३६१) जो कोई मनुष्य किसी बालक लडकेको, जिसकी अवस्था १४ रक्षककी उचित रक्षा-] वर्षसे नीची और छडकीको, जिसकी अवस्था १६ वर्षसे नीची मैसे मनुष्यको ले भागना. हो अथवा किसी मनुष्यको, जिसकी बुद्धि विगड गई हो ( अर्थात् जो सिडी हो, ) ऐसे न्यून अवस्थाके बालकके या उस मनुष्यके, कि जो सिडी हो, उचित रक्षकको रक्षासे बिना प्रसन्नता उस रक्षकके. ले जाए अथवा फुसला ले जाए तो कहा जावेगा कि उपरोक मनुष्य उस बालक अथवा उस मनुष्यको उचित रक्षामेंसे ले भागा। ले - सोलहवा १६.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६०ई० । (२११) स्पष्टीकरण--इस दफामें "उचित रक्षक' का शब्द प्रत्येक किसी मनुष्यको शामिल है जिसके सिपुर्द उचित रीतिपर ऐसे वालक या दूसरे मनुष्यकी चौकसी या रक्षाका भार हो। छूट । यह दफा किसी ऐसे मनुष्पके कामसे सम्बन्ध न रखेगी जो अपनेको शुद्धभावसे किसी कमअसल (हराम ) वालकका वाप निश्चय करता हो अथवा जो शुद्धमावसे अपनेको ऐसे बच्चेकी उचित रक्षाका रक्षक निश्चय करता हो, सिवाय उस मरतके कि जब ऐसा काम लुचपन अथवा अनुचित अभिप्रायके लिये किया जावे । १--दावर्षमै नीची अवस्थाका बच्चा रक्षकके आधीन रहता है-जो मनुष्य ऐमे बनेको बिना प्रमन्नता उमके रक्षकके ले जाए वह अपने कामके फलका उत्तरदाता है-टफा ३६१ (हि. ८०) के अपरायमे यह उत्तर माननेके योग्य न होगा कि अपराधीने इस बातकी खोज नही की कि उपरोक पञ्चका कोई रक्षक है अथवा नहीं। (इ. ला. रि० बम्बई जिल्ट ३ सका १७८) २-क्रमअमल पच्चैकी मा उसके लडकपनके समय तक उसका रक्षक है-दसलिये यदि ऐसी मा मन्ते समय अपना बच्चा किसी मनुष्यको सौंप जाय और यदि ऐसा मनुप्प उपरोक्त बच्चेकी रक्षाका भार स्वीकार करले तो कहा जावेगा कि उस मनुष्यकी "उचित रक्षा में वह बच्चा है। (इ. ला.रि. कलकत्ता जिल्ट ८ सफा ९७१) ३-१५ वर्षको अवस्थावाली किसी हिन्दू लडकीका पति अपनी स्त्रीका उचित रक्षक होगा; यदि नाबालिगका बाप उम लडकीको विना प्रसन्नता उसके स्वामीके यहासे लेजावे तो ऐसा लेजाना भगा लेजानेके अपराधमें गिना जायगा, चाहे चापकी कोई अनुचित इच्छा ऐसे काममे न हो । (इ० ला. रि० कलकत्ता जिल्ट १७ सफा २९८) { ३९२) जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यको किसी स्थानस जानेके लिये वलपूर्वक मनु'को भगा ले जाना. कि उपरोक्त मनुष्यको भगा ले गया । (३६३) जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यको ब्रिटिश इडियामेसे अथवा किसी रक्षक- मनुष्यको ले भागने-] की उचित रक्षासे ले मागे तो उस मनुष्यको दोनो प्रकारोंमेसे का दण्ड, किमी प्रकारकी कैदका टण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद सात वर्पतक हो सकती है और वह जुर्मानेकेमी योग्य होगा। टीप-(१) अदालत सेगन या प्र० म० या म० अ० या म० दो० (२ ) पोलीस दस्त- न्दाजी करसकती है (३) अपराधीके नाम वारट जारी होगा (४) जमानत नहीं है (५) राजीनामा नहीं है। } विवश करे अथवा धोका देनेके यत्नोद्वारा बकावे तो कहा जावेगा ।

4 (२१२) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह । [अध्याय- १- यदि कोई नाबालिग बच्चा अपने पडोसीके घर जाता हो और उस समय उसको कोई मनुष्य भगा ले जाए तो कहा जायगा कि वह मनुष्य उस बच्चेको उसके उचित रक्षककी चौकसीसे. भगाले गया था। (वीक्ली रिपोर्टर जिल्द ४ सफा ७) २-नाबालिगकी गवाही यदि मानने योग्य हो तो वह दफा ३६३ के अपराधक प्रमाणके लिये काफी है। (वीक्ली रिपोर्टर जिल्द ७ सफा ९८) ३--उचित रक्षाका अभिप्राय उस मनुष्यको रक्षासे भी है जिसकी सिपुर्दगीमे नाबालिग उचित रीतिर छोड दिया गया हो । ( रिपोर्ट पश्चिमोत्तर देश जिल्द २ सफा २८६) ४---अपराधीको एक नौ वर्षकी लडकी और एक बकरी उसके बच्चे समेत और कुछ आय इस अभिप्रायसे मिला कि वह उनको उस लडकी के वापके यहां जो छः मीलकी दूरी पर था पहुंचादे, परंतु वह उनको अपने घर ले गया जो चालीस मीलकी दूरीपर था, और वहीं पर पकडा गया, दफा ३६३ के अपराधमे अदालत सेशनने उसको ४ वर्ष की कठिन कैदका दण्ड दिया-हाईकोर्ट तज- वीज हुई कि-जो कि अपराधी उस लडकीको उसके रक्षकोको इच्छाके विरुद्ध उनकी उचित चौकसीसे बाहर ले गया था इसलिये वह दफा ३६३ के अपराधका अपरावी अवश्यही हुवा परंतु जो कि अपराधीक काममैं कोई अधिकता नहीं माई जाती इसलिये दण्डकी आज्ञा बहुत कठिन है-आज्ञा हुई कि अपराधी अठारह महीन कटिन कंदमें रहे । (पीली नोटिस इलाहाबाद किताव माह मई सन् । १८८४ ईस्वी सफा १०६) ५-एक हिन्दू स्त्रीने अपने स्वामीके घरको छोड दिया, वह अपने साथ अपनी छोटी लड. कीको लेकर (अ) के घरमे गई और उसी दिन उस लडकीका व्याह (ब) के साथ जो (अ) का भाई था, बिना प्रसन्नता उसके आपके कर दिया-तजवीज हुई कि (अ) का दण्ड भगा ले जानेमें सहायता करनेके अपराधमे दफा ३६३ व १०९ हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहके अनुसार उचित रीतिपर किया गया । (इ० ला. रि० कलकत्ता जिल्द ८ सफा ९६९) ( ३६४ ) जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यको इसलिये ले मागे अथवा भगा ले वध (फतल) करने के | जावे कि वह मनुष्य मार डाला जावे अथवा ऐसी अवस्थामें रक्खा अभिप्रायसे मनुष्यको ले जावे कि वह मारे जानेकी जोखिममें पडे तो उपरोक्त मनुष्यको भागना या भगा ले जाना जन्मभरके देश निकालेका दण्ड दिया जावेगा अथवा कठिन कैदका दण्ड जिसकी मीआद दश वर्पतक होसकती है दिया जायगा और वह जुर्मा- नेहमी योग्य होगा। उदाहरण । (क) शिवाकर रमाशकरको ब्रिटिश इडियामैसे ले भागे, और उसकी यह इच्छा हो अथवा इस कामका होना उसकी जानकारी में हो कि रमाशकर किसी देवताके सामने बलिदानमै चढाया जाये-सी शिवशकरने उस अपराधको किया जिसका लक्षण इस दफामे वर्णन किया . या है।

सोलहवा १९.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई०॥ (२१३) ख) शिवशकर रमाशकरको उसके घरसे इसलिये बलपूर्वक ले जाए अथवा फुसला ले जाए कि रमाशकर मार डाला जावे-तो शिवशकरने वह अपराध किया जिसका लक्षण इस दफाम वर्णन किया है। टीप-(१) अदालत सेशन (२)पोलीस दस्तन्दाजी कर सकती है (३) अपराधीके नाम वारट जारी होगा (४) जमानत नहीं है (५) राजीनामा नहीं है । ( ३६५) जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यको ले मागे अयवा भगा ले जाए इस अभि- किसी मनुष्यको छुपा) प्रायसे कि वह मनुष्य छुपा छुपी और अनीति रीतिपर रोकमें रक्खा छुपी और अनीतिरीतिसे | जाए, तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारोंमेसे किसी प्रकारको बघनमे रखनेके अभिप्रा- कैटका दढ दिया जावेगा जिसकी मीआद सात वर्पतक हो सकती यस ले भागना या भगा लेजाना है और वह जुर्मानेके मी योग्य होगा। टीप-दफा ३६३ के अनुसार है। ३६६) जो कोई मनुष्य किसी स्त्रीको ले मागे अथवा भगाले जाए इस अभिप्राय- किसी म्बीको व्याह से अथवा यह बात अति सम्भवित जानकर कि वह अपनी इच्छाके आदिपर विवश करने विरुद्ध किसी मनुष्यसे विवाह करनेके लिये विवश कीजावे अथवा लिये ले मागना या भगा उसकी यह इच्छा हो कि वह व्यभिचार करनेके लिये विवश कीजावे या फुसलाई जावे अथवा इस वातका होना उसकी जानकारीमें हो कि वह व्यभिचारके लिये विवश की जावेगीअथवा फुसलाई जावेगी, तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोंमेंसे किसी प्रका- रकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआट दश वर्पतक हो सकती है और वह जुर्मानके मी योग्य होगा। टीप-दफा ३६४ के अनुसार है। ले जाना. - १-धीरसिहकी दो लिये (न) और (म) थी, (न) के गर्मसे उसकी दो लडकिया हुई- धारसिह अपनी स्त्री (म) को साथ लेकर किसी च्याईमे एक गावपर चला गया और अपनी दूसरी- स्त्री (न) को अपनी दोनी लडकियो समेत घरमै छोड गया-धीरसिहके चले जानेपर (न) ने उन. दोना लडकियोंको अपने बहनोई (क) के घर भेज दिया और तीन मनुष्योकी सहायतासे बड़ी लडकीका व्याह (ख) के साथ कर दिया-उजवीज हुई कि शब्द "श्री" मुन्दरना दफा ३६६ में कोई नाबालिग लहकी भी शामिल है यह भी तजवीज हुई कि (न) की प्रसन्नता होनेपर भी भगा ले जानेका अपराध दफा ३६१ व ३६६ के अनुसार हुआ, क्योकि धीरसिहकी कुछ दिनाकी गैर- हानिरीमें भी वह उसके ही अधिकारमै बनी रही और वही उसका उचित रक्षक था और (न) उसकी रक्षक न थी। (पजाब रिकार्ड न० ८ सन् १८७८ ई०) (२१४) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- 1 २--वादीने अपराधी पर हिन्दुस्थानके दण्डसंग्रहको दफा ३६६ के अनुसार अपनी स्त्रीके मध्ये अपराध ठहराया-डिप्टी मस्जिट्रेटने दफा ४९८ के अनुसार तजवीज करके अपराधीको एक महीनेकी कठिन कैदका दड दिया-तजवीज हुई कि डिप्टी मजिस्ट्रेटको दफा ४९८ के अनुसार दण्ड देनेका अधिकार न था क्योकि मजमूआजाब्ता फौजदारीकी दफा १९९ के अनुसार पतिकी ओरसे कोई नालिश नहीं हुई तजवीज हाईकोर्ट यह हुई कि, कानूनका यह अभिप्राय है कि कोई मजिस्ट्रेट अपनीही ओरसे ऐसे अपराधोकी जांच न करे जो व्याहसे सम्बन्ध रखते हो जब तक कि पति अथवा कोई दूसरा मनुष्य ऐसे अपराधोंकी जांचकी इच्छा न प्रगट करै परन्तु जब पति स्वयही फरियादी हो और वह फरियाद दफा ३६६ के अनुसार पेश करता है तो अपराधीका दण्ड ४९८ के अनुसार उचित है, यदि गवाही छोटे अपराधके लिये पूर्ण और बड़े अपराधके लिये अपूर्ण हो । .( इ. लो रि. कलकत्ता जिल्द २० सफा ३८३) ( ३६७ ) जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यको इसलिये ले भागे अथवा भगा लेजावं कि किसी मनुष्यको भारी] वह भारी दुःख वह भारी दुःख ( जररशदीद ) उठाए, अथवा वह गुलाम दुःख(जररशदीद)पहुंचा. वनाया जावे अथवा उससे कोई मनुष्य स्वभाव विरुद्ध प्रसंग करके नेअथवा गुलाम बनाने लिये ले भागना अथवा आनद उठाए, अथवा इसलिये कि वह मनुष्य ऐसी अवस्थामें रखा भगा ले जाना. जावे कि वह भारी दुःख (जररशदीद ) उठाने, या गुलाम बनाए जाने या किसी मनुष्यकी स्वभावविरुद्ध कामातुरता सहनेकी जोखिममे पड़े या इस बातका होना उसकी जानकारीमें हो कि वह वर्ताव उस मनुष्यको सहने पडेंगे अथवा वह ऐसी अवस्यामे रखा जावेगा, तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीद दशवर्पतक हो सकती है और वह जुर्मानेके मी योग्य होगा। . टीप--दफा ३६४ के अनुसार है । ( ३६८ ) जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यको यह जानकर कि उसको कोई ले भागा है ले भागे हुए मनुष्यको | अनुचित रीतिपर छिपाए अथवा अनीतिवधनमे रक्खे, तो उपरोक्त छिपाना या बंधनमै रखना। मनुष्यको उसी प्रकार पर दण्ड दिया जावेगा कि मानों वह स्वयही उस मनुष्यको उसी इच्छा या जानकारी या उसी अभिप्रायसे जिससे उसने उस मनुष्यको छुपाया या अनीतिबधनमे रक्खा है ले भागा अथवा भगा लेगया । 'टीप--दफा ३६४ के अनुसार है १- हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहको दफा ३६८ उस मनुष्यसे सम्बन्ध रखती है .जो किसी ऐसे मनुष्य के छुपानेमे सहायता करे. जिसको कोई लेभागा हो या भगा लाया हो इसका सम्बन्ध स्वय-ले भागनेवाले या भगा लेजानेवाले मनुष्योसे नहीं है । (वी० रि० जि० ६ स १७) .

सोलहवा १६.] ऐक्ट नंबर ४५ सन्-१८६० ई०। (२१५) २---दफा ३६८ का अपराध ठहराने के लिये यह आवश्यक है कि वह मनुष्य जिसको कोई लेभागा या भगा ले गया हो, इस अभिप्रायसे छुपा रक्खा जावे कि उसको कोई देख न ले और उपरोक्त मनुष्यके मध्ये केवल झूठाही समाचार देना काफी नहीं है । ( पजाब रिकार्ड न. १० सन् १८७४ ई.) ( ३६९) जो कोई मनुष्य किसी बच्चेको, जिसकी अवस्था दशवर्षसे कम हो इस दशवर्षते कम अव- अभिप्रायसे ले भागे अथवा मगा लेजाए कि अधर्मसे उसके स्थाके बच्चेको उसके शरी- शरीरपरसे कुछ वस्तु उतार ले तो उस मनुष्यको दोनों रपरसे कुछ माल चुरा प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया. जावेगा जिसकी लेनेके अभिप्रायसे ले | मीद सात वर्पतक होसकती है और वह जुर्मानेके मी योग्य भागना या भगा लेजाना. J होगा। टीप-दफा ३६३के अनुसार है। जिस मनुष्यको, गहना आदि आमिमायसे चुरानेके बच्चा ले भागनेके अपराधर्मे दण्डकी आमा होचुकी हो, उसको चोरीके अपराधमे अलग दण्ड नहीं होसकता । ( रिपोर्ट हाईकोट मदरास जिल्द ७ सफा ३७५) (३७० ) जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यको अन्य देशसे गुलामकी रीतिपर लाए किसी मनुष्यको गुला-) अथवा अन्य देशमें ले जाए अथवा दूसरे स्थानमे पहुँचाए अथवा मकी रीतिपर मोल लेना मोल ले अथवा वेचे अथवा अपने अधिकारसे अलग करे अथवा अथवा उसको अपने किसी मनुष्यको, उसकी इच्छाके विरुद्ध गुलामकी रीतिपर स्वीकार अधिकारसे अलग करना. jकरे अथवा अधिकारमें ले अथवा रोक रक्खे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारोमेंसे किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद सात वर्पतक होसकती है और वह जुर्मानेक्रमी योग्य होगा। टीप-(१) अदालत सेगन (२) पोलीस दस्तन्दाजी नहीं करसकती (३) नाम वारट जारी होगा (४) जमानत है (५) राजीनामा नहीं है। १-शिवशकरने एक लडकीको जिसकी अवस्था ११ वर्षकी थी अपने अधिकारमें लाकर एक मनुष्यके हाथ, कीमत लेकर इस अभिप्रायसे बेच डाला कि वह उससे अपना ब्याह करे तजवीज हुई कि शिवाकरने जो लडकी वेची वह हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहकी दफा ३७० के अनुसार गुलाम बनाकर बेचनेमें नहीं गिनी जासकती । (इ. ला. रिपोर्ट इलाहाबाद निल्द २ सफा ७२४) २--(स) ने (अ) के हाथ एक लडकी (ब) को जो तेरह वर्षकी थी बेचकर उससे अपना अधिकार अलग कर लिया-दस्तावेजमै जिसमें उपरोक्त मामला लिखा गया था (ब) लडकी गुलामी लिखी गयी जिसको (8)ने (प) से भोल लिया था, तनवीन हुई कि (अ)(च) को गुलामको रीति पर मोल लेनका अपराधी हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहकी दफा ३७० के अनुसार है । (इ. ला. रि० मदरास जिल्द ७ सफा १७०) अपराधी (२१६) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- (३७१ ) जो कोई मनुष्प गुलामोंको व्यवहारके लिये उन्य देशसे इस देशमें लावे स्वभावने ही गुला- अथवा अन्य देशमे ले जावे अथवा दूसरे स्थानमें पहुँचावे अथवा मीका व्यवहार करना, मोल ले अथवा बेचे अथवा उनका व्यवहार या व्यवसाय करे नो उस मनुष्यको जन्ममरके देश निकालेका दण्ड अथवा दोनों प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद दश वर्षतक हो सकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टी-(१) अदालत सेगन (२) गेलीस दस्तन्दाजी कर सकती है (३) अपराधीके नाम वारण्ट जारी होगा (४) जमानत नहीं है (५) राजीनामा नहीं है । (३७२ ) जो कोई मनुष्य किसी नाबालिग । वालक ) को, जिसकी अवस्था सोलह येण्यापन इत्यादि कामों वर्षसे कम हो वेचे अथवा किराये पर भजे अथवा किसी और के लिये किसी नाबालिग ! रीतिपर अपने अधिकारसे अलग करे, इस अभिप्रायसे कि वह को बेचना या किराये पर नाबालिग बेश्यापन या किसी अनुचित काम या लुचपनके लिये दना, काममें लाया जाए अथवा यह जानकर कि उस नावालिगके ऐसे काममें लगाए जाने या उससे ऐसा काम लिये जानेका सम्भव है, तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद दशवर्षतक हो सकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप-(१) अदालत सेशन या प्रै० म० या म० अ० (२) पालीस दतन्दाजी करसकती है अपराधीके नाम वारंट जारी होगा (४) जमानत नहीं है (५) राजीनामा नहीं है। १-हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहको दफा ३७२ का अपराध ठहरानेके लिये यह अवश्य नहीं है कि लडकी इस प्रकार पर अलग की जावे कि जिससे लडकीपरके कुल अधिकार किसी मनुष्यके नाम कर दिये जावे । (इ. ला. रि. मदरास जिल्द २ सफा २१४) २---कुछ मनुष्योंने एक नीच जातकी लडकीको ऊची जातके एक मनुष्यको दिखाकर झूठ- मूठ निश्चय कराया कि वह लडकी भी ऊंची जातकी है वह उसको मोल लेकर उसे अपना व्याह करे-उजवीज हुई कि अब उपरोक्त लडकी व्याह करने के लिये बेची गई तो यद्याप उसका व्याह शास्त्र के अनुसार ठीक नहीं है तथापि अपराधी हिन्दुस्थानके दण्डसंग्रहको दफा ३७२ व ३७३ के अनुसार दण्ड नहीं पा सकते । (इ. ला. रि• इलाहाबाद जिल्द २ सफा ६९५) ३-अपराधीने अपनी लडकीको जिसको अवस्था पांच छः वर्षकी थी, मन्दिरको नौकरी में बतौर नाचनेवाली लडकांके मेट की-वाहोसे पाया गया कि, नाचनेवाली लडकियां जो मन्दिरसे सम्बन्ध रखती हैं वे सब वेश्यापनके कामोको करती हैं, तजवीज हुई कि यह सम आते, हिन्दुत्थानके दण्ड संग्रहको दफा ३७२ के अपराधमें दड देनेके लिये काफी हैं । (३० ला रि० बम्बई जिल्द १६ सफा ७३७) .

सोलहवा १६.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०॥ (२१७) ४-एक मन्दिरकी नाचनेवाली स्त्रीने उपरोक्त मन्दिरके अधिकारीसे यह बात कही कि एक छोटी लडकी, जिसको उसने झूठ मूठ अपनी बेटी प्रसिद्ध की उसकी "कोद" मीरास पर नियत की जावे-अधिकारीने आशा दी कि वह लडकी दूसरी नाचनेवाली लडकियों के समान तनख्वाह पर नियत कीमावे-वह मन्दिरके लिये नियत कीगई, यद्यपि "वुट' बांधनेका रीति नही कीगई ( इस रीतिक पश्चात् लडकीका व्याह किसीके साथ नहीं होसकता ) तजवीज हुई कि गवाहीसे पाया जाता है कि दफा ३७२ का अपराध नाचनेवाली स्त्री, अधिकारी और लडकीके माँ बापकी ओरसे हुआ । (इ. ला. रि० मदरास जिल्द १५ सफा ४१) ५-अपराधीने अपनी एक नाबालिग लडकीका व्याह मन्दिरके देवतासे करदिया-चलनके अनु- सार उस व्याहका यह फल होता है कि ऐसी लडकी किसी दूसरे मनुष्यसे उचित ब्याह नहीं करसक्की परन्तु जिस मनुष्यसे चाहे उससे प्रसग करा सकती है और उसके लडके उस लडकीके वापके धनके अधिकारी होते हैं तजवीज हुई कि अपराधीने हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहकी दफा ३७२ के अनुसार अप- राध किया । (इ० ला• रि० मदरास जिल्द १५ सफा ७५) (३७३ ) जो कोई मनुष्य किसी बालकको जिसको अवस्था १६ वर्षसे कम हो वैश्यापन इत्यादि कामों ] मोल ले अथवा किराए पर ले अथवा किसी और प्रकारपर अपने के लिये किसी बालकको अधिकारमें लाए इस अभिप्रायसे कि, वह बालक वेश्यापनक मोल लेना या अधिकारी लाना, काम अथवा किसी अनुचित काम अथवा लुचपने काममें लाया जावे अयवा काममे लाया जावे अथवा यह जानकर कि, उस बालकके ऐसे काममें लगाए जान अथवा ऐसा काम लिया जानेका सम्भव है तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद दश वर्षतक होसकती है और वह जुर्मनके मी योग्य होगा। टीप-दफा ३७२ के अनुसार है । ( ३७४ ) जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यको उसकी इच्छाके विरुद्ध अनीति रीतिसे दवाकर काम करानेपर विवश करे तो उस मनुष्यको अनीति बिगार दोनो प्रकारोमेसे किसी प्रकारको कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीाद एक वर्पतक हो सकती है, अथवा जुर्मानेका दंड या दोनों दड दिये } जावेंगे। टीप-(१) कोई मजिस्ट्रेट (२) पोलीस दस्तन्दाजी कर सकती है (३) अपराधीके नाम वारट जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा है ।

(२१८) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- ) पाच प्रकारों के किसी प्रकार भोग करेगा } बलपूर्वक व्यभिचारके विषयमें। । ३७५) जो कोई मनुष्य सिवाय आगे लिखी छूटके. किसी स्त्रीके साथ नीचे लिखे पांच प्रकारोंमेंके किसी प्रकार भोग करेगा तो कहा जायगा कि उस बलपूर्वक व्यभिचार. मनुष्यने "बलपूर्वक व्यभिचार" किया । पहिले- -स्त्रीको इन्छाके विरुद्ध, दूसरे-स्त्रीकी बिना सम्मति, तीसरे-स्त्रीको सम्मतिके साथ, जब कि वह सम्मति मृत्यु अथवा दुःखका डर दिखा- कर प्राप्त कीगई हो, चौथे-स्त्रीकी सम्मतिके साथ, जब कि पुरुप यह जानता हो कि वह उस स्त्रीका पति नहीं है और यह कि स्त्रीको ओरसे वह सम्मति इस कारण प्रगट कीगई हो कि वह निश्चय करती थी कि यह पुरुप वही पुरुष है कि जिसके साथ उसका व्याह उचित रीतिपर हुआ अथवा जिसके साथ वह अपना उचित व्याह होना निश्चय करती है। पॉचवें--स्त्रीको सम्मतिके साथ अथवा उसकी बिना सम्मति, जब कि उसकी अव- स्था वारहवर्ष से कम हो। स्पष्टीकरण-उस सम्भोगमें जो बलपूर्वक व्यभिचारके अपराधके लिये अवश्य है। प्रवेशका होजानाही काफी समझा जायगा । - छूट। किसी पुरुषका अपनीही स्त्रीके साथ भोग करना, जब कि उस स्त्रीको अवस्था बारह वर्षसे कम न हो, वलपूर्वक व्यभिचार नहीं है। ( ३७६ ) जो कोई मनुष्य बलपूर्वक व्यभिचार करनेका अपराधी हो, उसको जन्म बलपूर्वक व्यमिचारका ) भरके लिये देश निकालेका अथवा दोनों प्रकारोंमेसे किसी 'प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद दश वर्षतक हो सकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। दण्ड, यदि किसी पुरुषपर उसीकी स्त्रीके साथ बलपूर्वक व्यभिचारका अपराध लगाया जावे तो नीचे लिखी कार्रवाई होगी.

सोलहवा १६.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई० । (२१९) टीप-(१) अदालत सेशन (२) पोलीस विना वारण्ट अपराधीको न पकड सकेगी (३) अपराधीक नाम समन जारी होगा (४) अमानत है (५) राजीनामा नहीं है। यदि कोई दूसरी स्त्री हो तो नीचे लिखी कार्रवाई रोगी । (१) अदालत सैशन (२) पोलीस दस्तन्दाजी करसकती है (३) अपराधोंके नाम बारट जारी होगा (४) जमानत नहीं है (५) राजीनामा नहीं है। १ बलपूर्वक व्यभिचारके अपराधमे कानूनानुसार पाचवर्षका दण्ड नियत है इसलिये वह सात वर्षका दण्ड कालेपानीके साय दफा ५.हि. द. के अनुसार नहीं बदला जासक्ता । (गाल ला- रिपोर्ट जिल्द १ सफा ५) स्वभावविरुद्ध अपराधोके वयानमे । (३७७ ) जो कोई मनुष्य किसी पुरुष अथवा स्त्री अथवा पशुसे जानबूझकर स्वभावविरुद्ध अपराय, प्रकृतिको रचनाके विरुद्ध सम्भोग करेगा, उस मनुष्यको जन्म- मरके लिये देशनिकालेका- दण्ड अथवा दोनो प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जायेगा जिसकी मीआद दश वर्षतक होसकती है. और वह जुर्मानक मी योग्य होगा। स्पष्टीकरण-जो सम्भोग कि इस दफामे वर्णन किये हुए अपराधक लिये अत्रव्य है, उसमे प्रवेशका होना काफी समझा जायगा । टीप-(१) अदालत सेशन या प्रेम० या म० अ० (२) पोलीस दस्तन्दाजी कर सकती ( ३ ) अपराधीके नाम पारट जारी होगा ( ४ ) जमानत नहीं है (५) राजीनामा नही है। १-अपराधीको स्वभावविरुख अपराध करनेके चिपयमें दण्ड दियागया परन्तु मुकदमेकी मिसलमें इन बातीका बयान न था कि उसने उपरोक अपराव किस समय किस स्थान और किस मनुष्य के साथ किया था और न यह बात सावितही हुई थी, अपराधीके विरुद्ध जो सावित हुआ, उससे केवल इतना जाना गया कि वह त्रियोंके कपडे पहिना करता था और उसके धारीर पर ऐसे चिह थे, जिनसे उसके मध्ये उपरोक्त अपगधका करना पाया जाता था-तजवीज हुई कि ऐसे सबूत पर अपराधीको दण्ड नही दिया जा सकता । (इ० ला. रि. इलाहाबाद जिल्द ६ तफा १०४) (२२०) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। अिध्याय- अध्याय सत्रहवाँ १७ चोरी. } (धन सम्बन्धी अपराधोंके विषयमें), सरका अर्थात् चोरीका बयान * | ( ३७८ ) जो कोई मनुष्य अधर्मसे कोई स्थावर धन किसी मनुष्यके अधिकार- मेंसे उसकी बिना प्रसन्नताके लेनेकी इच्छासे. ऐसे लेनेके लिये उस धनको हटावे तो कहा जायगा कि उपरोक्त मनुष्यने चोरीका चोरीका अप- राध किया। स्पष्टीकरण-१ कोई वातु जबतक कि वह धरतीसे लगी हुई हो स्थावर धन नहीं है, इसलिये उसके मध्ये चोरी न होसकेगी, परन्तु जिस समय वह धरतीसे अलग कर दीजावे उस समय वह वस्तु चुराने योग्य होजावेगी । स्पष्टीकरण-२ जिस कामके द्वारा कोई वस्तु जुदा की जाए, यदि उसी कामसे वह वस्तु हटाई जाए तो वह चोरी गिनी जासकेगी। स्पष्टीकरण-३ जिस प्रकार किसी मनुष्यके मध्ये कहा जाता है कि वह किसी वस्तुके हटानेका कारण हुआ जब कि वह वास्तवमें उस वस्तुको हटाता है; उसी प्रकार उस अवस्था में भी ऐसाही कहा जावेगा, जब कि वह किसी रोकको जिसके द्वारा वह वस्तु हटनेसे रुक जाय, हटावे अथवा उपरोक्त वस्तुको किसी और वस्तुसे अलग करदे। स्पष्टीकरण--४ जो कोई मनुष्य किसी यत्नसे किसी पशुके हटाए जानेका कारण हो, उसके मध्ये कहा जावेगा कि उसने उस पशुको हटा दिया, और मी उस वस्तुको हटाया, जिसे उस पशुने ऐसे हटाए जाने के कारगसे हटाया । स्पष्टीकरण--५ वह प्रसन्नता कि जिसका वर्णन इस दफा किया गया है. शब्दोंके द्वारा होसकती है अथवा अर्थोके द्वारा-और वह चाहे अधिकारी मनुष्यको ओरसे दी गई हो, अथवा ऐसे मनुष्यकी ओरसे जिसको प्रगट अथवा अप्रगट रीतिसे इसके मध्ये आज्ञा प्राप्त हो । * सब मनुष्योको उचित है कि वे उन अपराधोका समाचार दे जो तहत दफा १८२ के दण्ड योग्य हैं । ( देखो दफा ४४ ऐक्ट १० सन् १८८२ ई.)

सत्रहवा १७.] ऐक्ट नंवर ४५ सन्-१८६० १०॥ (२२१) . उदाहरण। क) शिवशकर रमाशंकरको पृथ्वीमेंसे एक पेड इस अभिप्रायस काटे कि उसको रमागकर के अधिकारमेंसे रमागकरकी विना प्रसन्नता अधर्मसे लेले तो इस अवस्याम गिगंकरने निस समय पेडको इस अभिप्रायसे ले जानेके लिये जुदा क्यिा उसही समय यह चोरीका अपराधी हुआ। (ख ) शिवगकर कुत्तोंके फुसलानेसरी वस्तु अपने बेरम रक्खै और इस प्रकारसे रमाकर के कुत्तेको अपने पीछे लगा लेवे तो इस अवस्थामे यदि शिवशंकर यह अभिशन हो कि वह अधर्म- से रमाशकरके अधिकारमसे रमागकरकी बिना प्रसन्नताके उसका कुत्ता टेले नो जितही समय कि रमाशकरके कुत्तेने शिवशंकरके पीछे चलना आरम्भ किया उमही समय शिवगर चोरी का अपराधी हुआ। ग) भिवावरको एक बैल जिसपर खजानेका सन्दूक लदा हुआ हो मिलजाए और वह उस बैलको इस अभिप्रायले एक मुख्य दिशाको घॉक लेजाए कि अवर्मस सजाना ले तो जिम्ही समय [क बैल हटाया गया उसही समय शिवशंकर खजानेवी चौरीका अपराधी हुआ। (घ) शिवाकर जो रमागकरका नौकर है और जिसकी सिपुर्दगीने रमाशकरके चादी या मुलम्मफे वर्तन रमाकरकी भारसे रक्खे गय है विना प्रसन्नता ग्मागकरके उन वर्ननोंको अवमे लेकर भाग जाए तो शिवशंकर चोरीका अपराधी हुआ। च) हरिशकर देगाटनके लिये तैयार होकर अपने चादी व मुलम्मेकं वर्तनोंको अपने डोट आने तक उमाशकरको कि वह गोदामका मालिक है, सौंप दे और उमाशंकर उन वर्तनों को सुनारके पास ले जाकर बेच डाले तो इस अवस्थामें जो कि वे वर्तन हरिशंकरके अधिकारमें न थे इस लिये वे हरिशंकरके अधिकारमसे नहीं लिये जासक्ते ये और उमाशकर चरीका अपराधी नहीं हुआ, परन्तु सम्भव है कि वह घरोहरके अनीति व्यय (स्खयानत मुनरिमाना ) का अपराधी ठह- राया जावे। (छ) लक्ष्मीशकर गिरिजाशकरकी अगूठी किसी मेवपर रक्खी हुई उस घरमै पावे जहा गिरि- जाशकर रहता हो, तो इस अवस्थाम अगूठी गिरिजाशकरके अधिकारम है और यदि लक्ष्मीशकर उससे अधर्मसे उठा ले बाए तो लक्ष्मीगकर चोरीका अपराधी होगा। (ज) शिवशकर एक अगूठी जो किसी के अधिकारम न ही सर्व सम्बन्धी गर्गमें पनी पावे तो उसके लैनसे शिवशकर चारीका अपराधी न होगा यद्यपि मम्भव है कि वह धनके अनीति व्यय ( तसरफ मुजरिमाना) का अपराधी ठहराया जाये। (झ) शिवाकर उमाशकरकी अगुठी उसके घरमें मेनपर पड़ी हुई देखे और शिवशकर तलागी होने तथा पास निकल आनके डरसे उसी समय उस अगूठी के मनीति व्यय करनेका साहस न पाकर उसको ऐसे स्थानमै छिपाए जहासे मिलनाना उसका उमाशंकरके ध्यानमें बिलकुल न आनके इस अभिप्रायसे कि नब अंगुठीका खोजाना उमाधवरकी यादसे जाता है तब विशंका उस अंगूठी को उस छुपे हुए स्थानसे निकालकर वैच डाले तो इस अवस्थाने शिवशंकर पहिली बार अंगूठीक इटातेही चोरीका अपराधी हुआ।

( २२२) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- ट) शिवशकर अपनी घडीकी चाल ठीक कर देनेके लिये उसको रमाशकर घडीसाजको दे और रमाशंकर उसको अपनी दूकानपर ले जाए, और शिवशकर, जिसको रमाशकर घडी साजका कोई ऋण देना नहीं है जिसके बदलेमे षडीसाज उस घडीको जमानतकी रीतिपर उचित तौरसे रोक रख सकता हो, रमाशंकरकी दुकानमें खुलाखुली चला जाए और रमाशकरके हाथसे वह घडी छीन लेकर चल दे तो इस अवस्थामे यद्यपि सम्भव है कि शिवशकर मदाखलतबेजा मुजरिमाना आर हमलका अपराधी हो परन्तु चोरीका अपराधी नहीं है, क्योकि जो कुछ उसने किया अधमई नहीं किया। ठ) यदि शिवशकरको घडीकी मरम्मत करनेके मध्ये रमाशकरका कुछ रुपया देना हो और रमाशकर उस ऋणकी जमानतके तौर पर घडीको उचित रीतिसे रोक रक्खे और शिवशंकर रमा- शंकरके आधिकारमेसे उस घडीको इस अभिप्रायसे ले ले कि वह शिवशकरसे उस मालको छीनकर ऋणकी जमानतको मेट दे तो शिवशकर चोरीका अपराधी होगा क्योकि वह उम घडीको अधर्मसे लेता है। (ड) फिर, यदि शिवशकर अपनी घडी रमाशकरके यहां रेहन करे और विना उस रुपयेके अदा किये जो उसने रमाशंकरसे घडी पर ऋण लिया है, घडीको रमाशकरके अधिकारमेसे उसकी विना प्रसन्नता तो यद्यपि षडी शिवशंकरका माल है परन्तु तो भी शिवशकर चोरीका अपराधी होगा क्योंकि वह उसको अधर्मसे लेता है। ढ) शिवशकर इस अभिप्रायसे रमाशंकरकी कोई वस्तु उसके अधिकारमेस उसकी चिना- प्रसन्नता लेले कि जबतक रमाशंकरसे, उसके वापिस करनेके इनामके तौरपरं कुछ रुपया न प्राप्त करे उपरोक्तं वस्तुको वह अपने पास रखे तो इस अवस्थामे जो कि शिवशकर अधर्मसे लेता है; इसलिये शिवशकर चोरीका अपराधी हुआ। (ण) शिवशकर जो रमाशंकरके साथ मित्रताका व्यवहार रखता है रमाशकरकी गैरहाजिरीमें उसके पुस्तकालयमे जाए और उसकी बिना प्रसन्नता प्रगट रीति पर कोई पुस्तक केवल पढ़नेके लिये ले जाए और उसका लौटाना शिवशकरकी इच्छामे हो तो इस अवस्थामे सम्भव है कि शिवशंकरने यह समझा हो कि उसको रमाशंकरकी औरसे रमाशंकरको पुस्तक पढनेकी अप्रगट आमा है, परन्तु यदि शिवशकरकी यह इच्छा थी तो शिवशकर चोरीका अपराधी नहीं हुआ। (त) शिवशंकर रमाशंकरको स्त्रीसे खैरात मांगे और वह शिवशंकरको रुपया खाना और वन दे जिसको शिवशंकर जानता हो कि वह उसके पतिका धन है तो इस अवस्थाम सम्भव है कि शिव- शंकर यह समझता हो कि रमाशकरकी स्त्री ऐसी खैरात देनेकी अधिकारिणी है-अतएव यदि शिवशं- करका यही विचार था तो शिवशंकर चौरीका अपराधी नहीं हुआ । थ) शिंक्शकर रमाशकरकी स्त्रीका यार है यह शिवशकरको मूल्यवान् पदार्थ दे, जिसको शिवशंकर जानता हो कि उसके पति रमाशंकरका है और वह ऐसा पदार्थ है कि रमाशंकरकी ओरसे वह उसके देनेकी अधिकारिणी नहीं है वस यदि शिवशकर अधर्मसे यह पदार्थ ले ले तो चोरीका अपराधी हुआ।

सत्रहवाँ १७.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०। (२२३) ६) शिवशकर रमागकरके मालको अपना माल समझकर शुद्धभावसे उसके अविकारमसे लेले तो इस अवस्थामें जो कि शिवशकर अधर्मसे नहीं लेता है इसलिये शिवशंकर चोरीका अारावी नहीं है। १-कडीपर इन्स्पेक्टर जनरलका अधिकार सरकारी अधिकारके तौरपर है और उनके विकारसे लकडीका अलग होना, चाहे उसकी प्रसन्नतासे अलग की जाय हिन्दुस्थानके दडसंग्रहकी दफा३७८ के अनुसार चोरीमे दाखिल है यदि उसकी उपरोक्त प्रमन्नता विना अधिकार व कल्पित हो। (३० ला. रि० बम्बई जिल्द २ सफा ६१०) २-यदि किसी मनुष्यकी सिपुर्दगीसे कोई धन उसकी इच्छाके विरुद्ध जिसको प्रगट अधिकार अथवा कुछ अधिकार उपरोक्त धनके मध्ये प्राप्त हो, दूर कर दिया जाए, तो चोरीका अपराध ठहराना काफी है। ( इ० ला. २० वबई जिल्द ९ सफा १३५) ३-हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहकी दफा २९५ में लिखे हुए "वस्तु" शब्दमें जानदार पदार्थ नहीं गिने जायगे। कोई साड जो किसी हिन्दूके श्राद्ध में छोड़ दिया जावे, उद दफाके अभिप्रायानुसार "वस्तु नहीं है और जब कि ऐसे जानवरको मुसलमान छुनाकर गोश्त और चमडेके लालचसे मारडाले वो कोई अपराध दफा १९५ का नहीं कियागया और साड स्थावर धन दका ३७८ या ४०३ या ४२५ की मुरादके भीतर नहीं है । (इ० ला. रि० कलकत्ता जिल्द १७ सका ८५२) ४-अपराधीने जो महकमे डाकखानेमें सरकारी नौकर था, जब कि चिड़ियों के बाटनमें सहाय- वा.दे रहा था दो चिठियोंको इस अभिप्रायसे छुपादिया कि उनको डिलेवरीवाले चपरासीको दे देगा और उसके साथ कुछ रुपयों में हिस्सा लगागा जो उनके मव्ये चुकाने योग्य है, उसपर ऐक्ट डाक- खाना हिन्दकी दफा ४८ के अनुसार अपराध लगाया गया-तजवीज हुई कि जो कि अपरा- धीकी इच्छा उस चिहीपानेवालेकी चहियोंके रोकनेकी न थी, इसलिये वह इस दफा ४८ के अनुसार चिठी छुपानेका अपराधी नही था वह चिहियोंके चुराने और अनीतिव्यय (तस- कफवेना) करनेका अपराधी हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहके अनुसार था । ( इ० ला० रि• मदरास जिल्द १४ सफा २२९) ५-अपराधी अपने बापसे लडाईकर, अपने घरानेकी जायदादका एक भाग लेकर, बिना अपने बापकी आमाके जो उस जायदादका प्रवधक था, चला गया तो ऐसी अवस्थामे अपरावीने चोरीका अपगप किया । (सी. पी. ला.रि. जिल्द ४ सफा १७४ ( ३७९) जो कोई मनुष्य चोरीका अपरावी हो, उस मनुष्यको दोनो प्रका- } रोमेसे किसी प्रकारको कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीभाद तीन वर्पतक होसकती है अथवा जुर्मानेका दड या दोनों दंड दिये जायेंगे। टीप-(१) कोई मजिस्ट्रेट (२) पोलीस दस्तन्दानी करसकती है (३) अपराधी के नाम गरंट जारी होगा (४) जमानत नहीं है (५) राजीनामा नहीं है । चोरीका दड (२२४) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- था १-बिना गवर्नमेंटकी आशाके ऐसे स्थानसे नमकका लेना जहाँसे मनाही हो चोरीका अपराध है ( इ. ला. रि० मदरास जिल्द ४ सफा २२८) २-किसी गढेसे अनुचित रीतिपर मछलीका लेना चोरी नहीं है । (इ० ला• रि० मदरास जिल्द ५ सफा ३९.) ३-जब कि अपराधी एक तालाबमै, जो कि शहरके भीतर था और जिसके आसपास घेरा खिचा हुभा और जिसमे शहरकी म्यूनिसिपल कमेटीका अधिकार था, बिना आज्ञा म्यूनिसिपल कमेटीके मछली मारते हुए पकडा गया तो अपराधीपर चोरीका अपराध ठहराया जा सकताहै। (इ० ला. रि० बम्बई १० सफा १९३) ४-अपराधियोपर. मछली मारनेका अपगव एक तालाबसे जो वादीके अधिकारमे था लगाया गया । वह दफा ३७९ व ४४७ के अपाची ठहराए गए-तजवीज की गई कि वह तालाव चारों ओरसे बिना घेरेका था और एक नहरके पानी भरा रहता था जो एक बहती हुई नदीसे मिली हुई थी कि जिससे मछलियां उसमें आजाती थी और तालाब में मछलियां पाली और रक्खी नहीं जाती थीं और यह मछलियां उस समय मारी गई थी कि जब पानी बढा और तालाब नदीसे मिला हुआ था इसलिये मछलियां उससे अपने आपही निकल पडी-तजवीज हुई कि मछलियां स्वयं स्वाधीन थीं और उनपर वादीका अधिकार मी न था, इसलिये अपराधियोने कोई अपराध नहीं किया । यदि मछलियां अपनी स्वाधीनतासे रहित वीजाती और स्वामोकी आज्ञासे मारे जाने के योग्य होती और ऐसी अवस्थामें वह मारी जातीं तो अपराधी दंड योग्य होते । ( इ० ला. रि०.कल. कत्ता जिल्द ५ सफा ४०२) ५- यदि हिन्दूजातकी स्त्री अपना स्त्रीधन अपने पतिके अधिकारसे विना उसकी प्रसन्नताके अलग करे तो वह चोरीको अपराधिनी नहीं ठहराई जा सकती और जो मनुष्य ऐसे घनके हटानेमे उस स्त्रीका साझी हो वह चोरीमे सहायता करनेका अपराधी नहीं ठहराया जा सकता (रिपोर्ट हाईकोई बम्बई जित्द ८ सफा ११) ६-चोरीके अपराधमें इस बातका प्रमाणित होना आवश्यकीय है कि उपरोक्त माल, लेने के समय वादीकेही अधिकारमै था] ( वीली रिपोर्टर जिल्द २० सफा ८०) ७--मुसलमान जातकी व्याही हुई स्त्री उम धनके मध्ये जो मुहम्मदी (मुसलमानी ) शरह (शास्त्र) के अनुसार उसके हो पतिका धन समझा जाता है, चोरी अथवा चोरीमे सहायता करनेक अपराधिनो ठहराई जा सकती है । (रि. हाईकोर्ट बम्बई जिल्द ६ सफा ९) ८-अपराधियोने सरकारी पेड काटकर बेच डाल-तजवीज हुई कि उनको चोरी और दुःख पहुँचा ( जररसानी ) का अपराधी ठहराकर दण्ड दिया बना कानूनविरुद्ध न था । ( रिपार्ट हाई- कोर्ट बम्बई-जिल्द २ सफा ३९२) सत्रहवाँ १७.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०। (२२५) ( ३८०) जो कोई मनुष्य किसी घर अथवा तम्बू अथवा नाबमें, जो मनुष्यके चोरी किसी घर अथवा ) रहनेके स्थानकी मॉति अथवा माल 'असवाब रखनेके लिये वम्धू अथवा नावम, काममें आता हो चोरो करेगा, तो उस मनुष्यको दोनो प्रकारोमेंस किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीआद सात वर्पतक हो सकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप-(१) कोई मजिस्ट्रेट (२) पोलीस दस्तन्दाजी करसकती है (३) अपरावीके नाम वारण्ट जारी होगा (४) जमानत नहीं है (५) राजीनामा नहीं है । ( ३८१) कोई मनुष्य जो गुमाश्ता अथवा नौकर हो या गुमाश्ता अथवा नौकर जब कोई गुमाश्ता अ-] के कामपर तैनात हो किसी मालके मध्ये, जो उसके स्वामी अथवा थवा नौकर अपने स्वामीके कामपर लगाने वाले अधिकारमें हो चोरीका अपराव करे तो पाससे कोई वस्तु चुरावे | उस मनुष्यको दोनो -उस मनुष्यको दोनो प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद सात वर्पतक हो सकती है और वह जुर्मानेके मी योग्य होगा। वेतके दण्डके लिये ऐक्ट नं० ६ सन् १८६४ ई० को दफा २ व ३ को देखो ) टीप-(१) अदालत सेगन या प्रे० म० या म० अ० या म० दो० (२) पोलीस दस्त- न्दाजी करसकती है (३) अपराधीके नाम वारट जारी होगा (४) जमानत नहीं है (५) राजी- नामा नहीं है। १-जो मलाह कि नौकरीपर रखा जावे यह हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहको दफा ३८१ मे लिखे हुए गुमाश्ते अथवा नाकर शब्दमें न गिना जावेगा और यदि वह नावपर चोरी करे तो उसको दफा ३८० के अनुसार दंड दिया जावेगा । (वी. रि० जिल्द ८ सफा ३२७) २--सिविल स्टेशन राजकोटका इलाका ब्रिटिश इडियाका हिस्सा नहीं है, इसलिये चोरीका अपराध ब्रिटिश इडियामे नहीं हुवा-पस अदालत सेशन थानाको अधिकार नहीं था कि वह अपराधी- का विचार हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहको दफा ३८१ के अनुसार करे-परन्तु हिन्दुस्थानके दडसंग्रहकी दफा ४१० के अनुसार चोरीका माल वददियानतीसे रखनेके अपरावमें एक्ट ८ सन् १८८२ ई. के अनुसार वह विचार कर सकता था। (इ० ला. रि० बम्बई जिल्द १० सफा ८६ ) (३८२) जो कोई मनुष्य चोरीके अपराधके लिये अथवा उस चोरीके पश्चात् अपने चोरीका अपराध कर. माग जानेके लिये अथवा उस मालके वचा रखनेके लिये जो नके अभिप्रायसे वध करने चोरीके द्वारा लिया जावे, यु अथवा दु ख अयवा रोक कर. अथवाभारीदुःख हुचा नेकी तैयारी करनेक प- नेको, अथवा छु अथवा दुग्स अथवा संकरा डर दिखा- वात् चोरी करना. नेका तारी करके का अपराध करे तो उस मनुष्यको कठिन कैदका दड दिया जायेगा जिसको भीआद दशवर्पतक हो सकती है और वह जुर्मानके मी योग्य होगा।

(२२६) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- उदाहरण । (क) शिवशंकर उस मालके मव्ये, जो रमागकरके अधिकारमे हो चोरीका अपराव करे और जिस समय कि वह चोरीका अपराध कर रहा हो, उसके वस्त्रके नीचे एक - मरा हुआ तमचा हो, जो उसने इसलिये ले रक्खा हो कि, यदि रमाशकर रोक टोक करे तो उसको दुःख ( जरर ) पहुँचाए, तो शिवशकर उस अपराधका अपराधी हुवा जिसका वर्णन इस दफाम किया गया है। (ख) शिवशंकर अपने कुछ सालियोको अपने आसपास इसलिये खडा करके रमाशंकरकी जेब काटे कि यदि रमाशकर इस वृत्तान्तको जानकर कुछ रोकटोक करे अथवा शिवशंकरके पकड नेका उद्योग करे तो वे रमागकरको रोके तो शिवशकर उस अपराधका अपराधी हुआ जिसका वर्णन इस दफामे किया गया है। टीप--(१) अदालत सेशन, प्रे० म० या म० अ० ( २ ) पोलीस दस्तन्दाजी कर शकती है (३) अपराधीके नाम वारंट जारी होगा (४) जमानत नहीं है (५) राजीनामा नहीं है। १-यदि चोरीका अपराध करते समय वास्तवम किसीको दुःख (जरर) पहुंचाया जाय तो उपरोक्त अपराधका दड बल सहित चोरीके अपराधम दिया जायगा । ( वीक्ली रिपोर्टर जिल्द ६ सफा ८५) दवाकर लेनेक विषयमें। (३८३ ) जो कोई मनुष्य जानबूझकर किसी मनुष्यको स्वय उस मनुष्यकी दवाकर लेना(इस्तेह अथवा किसी दूसरे मनुष्यकी हानिका डर दिखाए और उसके पाल बिलनत्र.) द्वारा उस मनुष्यको जिसको इसप्रकार डर दिया गया है, इस वातके लिये धमकी दे कि वह कोई माल अथवा किफालतुलमाल अथवा कोई दस्तखत की हुई या मुहर कीहुई वस्तु जो किफालतुलमाल वनसकती है, किसी मनुष्यको देदे-तो उपरोक्त मनुष्य दव- कर लेनेवाला कहलावेगा। उदाहरण । (क) शिवशकर रमाशंकरको यह धमकी दे कि तू मुझको रुपया दे नहीं तो मैं एक बात जो तेरी पानेष्ठामें वट्टा लगाएगी प्रसिद्ध कर दूगा और इसप्रकारसे रमाशंकरको रुपया देनेके लिये धमकी दे तो शिवशंकर दवाकर लेनेका अपराधी होगा । ख) शिवशकर रमाशंकरको यह धमकी दे कि मैं तेरे बच्चेको अनीतिबन्धनमै रचूंगा नहीं तो एक रुक्केर दस्तखत करके उसको मेरे सिपुर्द कर जिसमे तेरी ओरसे मुझको रुपयेकी अमुक तादाद देनेका वादा हो, और रमाशंकर दस्तखत करके वह रक्का शिवशंकरको दे दे तो शिवशंकर दवाकर लेनेका अपराधी हुआ।

सत्रहवा १७.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई० । (२२७) (ग) शिवशकर रमाशकरको यह धमकी दे कि मैं लहबंद-आदमी मेजकर तेरा खेत जुतवा लूंगा नही दू एक तमलुक दस्तखत करके हरशकरको दे जिसके अनुसार रशकरको किसी विशेष पैदावारका देना और पैदावार न देने पर जुर्मानेका देना रमाशकर पर उचित हो और उसके द्वारा शिवशकर रमाशकरसे उस तमसुक पर दत्तखत कराकर ले ले, बो शिवशंकर दवाकर लेनका - अपराधी हुआ। घ) शिवशकरने रमाशकरको भारी दुःख (जरदाटीद) पहुँचानेका डर बताकर उसको कोरे कागजपर दस्तखत या मोहर करने और निवशकरको दैदेनेके लिये अधुमसे वमकावा-रमारकरने उस कागजपर दस्तखत करके शिवशकरको दे दिया तो, जो कि इस अवस्थामै वह कागज कि, जिसपर इस प्रकार-दलखत किया गया किफालतुलमाल बन सकता है इसलिये निवाकर देवाकर लेनेका अपराधी हुवा। -- (३८४ ) जो कोई मनुष्य दबाकर लेनेका अपराध करे उस मनुष्यको दोनों प्रका- रों से किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीद दबाकर लेनेकादड तीन वर्षतक हो सकती है अयवा जुर्मानेका दण्ड या दोनों दण्ड दिये जावेगे। - श्रीप-(१) अदालत सेमन प्रे० म० या म० अ० या म० दो० (२) पोलीम दस्तन्दाजी नहीं करसमती (३) अपराधीके नाम वारट जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा - नही है अनुसार, १- केवल यह बात कि, दवाकर लेनेका अपराध हिन्दुस्थानके इण्डसमहकी दुफा ३८४ के गावके चौकीदारके मामने हुआ, जैकीदारको उपरोक अपरायम सहायता करनेका दोषी नहीं उहरा सकती। (इ० लारि० कलकत्ता जिल्द ८ सफा ७२८) २-इस मुकद्दमें अपराधीने मुकद्दमा फौजदारी टायर करनेकी धमकी देकर कुछ रुपया दवा- कर लिया तजवीज हुई फि अपराधीने दबाकर लेनेका अपराध किया है, चाहे वह मुकद्दमा जिसके चलानेकी उसने धमकी दी सच हो अथवा झूठ । (वी. रि० जिल्ल ७ सफा २८) (३८३) जो कोई मनुष्य दवाकर लेने के लिये किसी मनुष्यको हानि पहुँचानेका दबाकर लेने के लिये) र दिखाए अयया ऐसा हर दिखानेका उद्योग करे, उस मनुष्यको किसी मनुष्यको हानि पहु- दोनो अकारो से किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जायगा चानेका डर दिसाना. जिसकी-मीद दो वर्षतक हो सकती है अथवा जुर्मानेका दण्ड या दोनों दण्ड दिये जायेंगे। टीप-दफा ३८४ के अनुसार है। .

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(२२८) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- ( ३८६ ) जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यको स्वयं उस मनुष्यके अथवा किसी दूसरे किसी मनुष्यको मृत्यु मनुष्यके मृत्यु अथवा भारी दुःखका र वताकर दवाकर लेनेका- अथवा भारी दुःखका डर / अपराधी होगा तो उस मनुष्यको दोनों प्रकारोमेंसे किसी प्रकारको बताकर दवाकर लेना. कैका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद दशवर्पतक होसकती है और वह जुर्मानेके मी योग्य होगा। टीप--(१) अदालत सेशन (२) पोलीस दस्तन्दाजी नहीं कर सकती ( ३) अपराधीके नाम वारंट जारी होगा (४) जमानत नहीं है (५) राजीनामा नही है । ( ३८७ ) जो कोई मनुष्य दवाकर लेनेके लिये किसी मनुष्यको मृत्यु अथवा मारी दवाकर लेनेके लिये ) दुःख ( जररशदीद ) का डर दिखावेगा अथवा दिखानेका उद्योग किसी मनुष्यको मृत्यु अ करेगा-चाहे वह डर उसी मनुष्यको मृत्यु अथवा भारी दु.खका थवा भारी दुःखका डर- हो चाहे किसी दूसरे की, तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारोमेंस किसी प्रकारको कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद सात वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। दिखाना. टीप-दफा ३८५ के अनुसार है। -किसी मनुष्यसे बलपूर्वक रुपया लेनेके लिये आत्महत्या ( खुदकुशी ) के उद्योगको इच्छा प्रगट करना एक अपराध दफा ३८७ के अनुसार है । ( इंडियन जूरिस्ट न्यूसेरीन सफा ४२३) 2. (३८८ । जो कोई मनुष्य दबाकर लेनेका अपराध किसी मनुष्यको इस बातका ऐसे अपराधमे फंसाने. ] डर दिखाकर करे कि मै तुझको अथवा और किसी दूसरे की धमकी देकर कि मनुष्यको, किसी ऐसे अपराधके करनेकी अथवा करनेका जिसके लिये मृत्यु अथवा उद्योग करनेकी तुहमत लगाऊंगा, कि जिसका दण्ड वध देशनिकाले आदिका दंड :अथवा जन्मभरका देश निकाला अथवा दश वर्षतककी कैद नियत है दवाकर लेना.) :है, अथवा इस वातको तुहमत लगानेका डर दिखाए कि उस मनुष्यने अथवा दूसरे मनुष्यने किसी दूसरे मनुष्यको ऐसा अपराध करनेके लिये बहकाया है, तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीद दशवर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा और यदि वह अपराध ऐसा हो जिसका दण्ड दफा ३७७ के अनुसार होसकता है तो उपरोक्त मनुष्यको देश निकालेका दण्ड दिया जासकता है । ( दफा४० को देखो) टी--- दफा ३८६ के अनुसार है। (छके दाबके लिये ऐक्ट नं० ६ सन् १८६४ ई० को दफा २ व ३ वो देश) सत्रहवाँ १७.] ऐक्ट नंबर ४५.सन् १८६० ई० । (२२९) (३८९ ) जो कोई मनुष्य दबाकर लेनेका अपराध करनेके लिये किसी मनुष्यको दवाकर लेनेके अभिप्रा.) इस बातका हर दिखावे अथवा दिखानेका उद्योग करे कि यसे किसी मनुष्यको अप मैं तुझको अथवा और किसी दूसरे मनुष्यको, किसी ऐसे अपराधके -राध लगानकी तुहमतका [ करनेकी अथवा करनेका उद्योग करनेकी तुहमत लगाऊगा, कि डर दिखाना. जिसका टण्ड वध अथवा जन्मभरका देश निकाला अथवा दशवर्पत- ककी कैद है-तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारों से किसी प्रकारको कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीमाद दशवर्षतक हो सकता है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा । और यदि वह अपराध ऐसा हो कि उसका दह दफा ३७७ के अनुसार होसकता है, उपरोक्त मनुष्यको देश निकालेका दड दिया जावेगा । ( दफा ४० को देखो) टीप-दफा ३८६ के अनुसार है। जोरी अर्थात् वलसहित चोरी ( सरका बिलजब ) व डकैतोके बयानमें । * ( ३९० ) प्रत्येक बलसहित चोरीमें या तो चोरी होती है या दवाकर लेना बलसहित चौरी. } होता है। -जोरी; उस अवस्थामे जोरी ( सरका बिलजब ) होगी कि जब चोरी करनेके लिये किस अवस्थामे चोरी अथवा चोरी करनेमे, अथवा उस मालके लेजाने या लेजानेका बलसहित चौरी (जोरी)/ यत्न करनेमे जो चोरीसे प्राप्त कियागया हो, अपराधी उस कही जावेगी. अभिप्रायसे जानबूझकर, किसी मनुष्यकी मृत्यु अथवा दुःख अथवा अनीति रोक (मुजाहिमतबेजा ) का कारण हो, अथवा उसके कारण होनेका उद्योग करे अथवा तत्कालही मृत्यु होने अथवा तत्काल दुःख (जर) पहुँचाने अथवा तत्काल अनीति रोफ करनेका डर दिखाये अथवा डर दिखानेका उद्योग करें। दवाकर लेना, उन अवस्थामें जोरी कहलावेगा कि जब अपराधी दबाकर लेते किस अवस्थामे, दबाकर समय उस मनुष्यके सामने उपस्थित हो कि जिसे डर बताया लेना(इस्तेहसाल बिलनत्र) [ गया और उस मनुष्यको, स्वयं उसी मनुष्यको या किसी दूसरे चलसहित चोरी (जोरी) | मनुष्यकी, तत्काल मृत्यु करने अथवा तत्काल दुःख ( जरर') कहलावेंगा. पहुँचाने अथवा तत्काल अनीति रोक करनेका डर दिखाकर - • सब लोगोको उचित है कि वे दफा ३९३ से लगाकर दफा ३९९ तकके अपराधोंकी सूचना 'दवे । ऐक्ट नं० १. सन् १८८४ ई० को दफा ४ को [अध्याय- (२२०) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। दवाकर ले और इस प्रकार हर दिखानेसे उस मनुष्यको कि जिसे डर दिखाया गया, बलपूर्वक प्राप्त कीहुई वस्तु उसी समय और उसी स्थानपर दे देनेकी धमकी दे- स्पष्टीकरण-यदि अपराधी इतना निकट हो कि जिससे वह उस दूसरे मनुष्यको तत्काल मृत्यु करने अथवा तत्काल दुःख पहुंचाने अथवा तत्काल अनीति. रोक करनेका डर काफी तौरसे दिखासके, तो कहा जावेगा कि अपराधी उपस्थित है । . उदाहरण। (क) रैनाशंकर शिवशकरको दवा बैठे और शिवभकरके कपडोसेसे उसका रण्या और गहना बिना प्रसन्नता उसके बलपूर्वक ले ले, तो इस अवस्थामे रमाशंकरने चोरी की है और जो कि उस चोरीके लिये रमाशंकरने शिवशकरके मव्ये जानबूधकर अनीति रोक (मुजाहिमत वेजा ) की, इस लिये वह बल सहित चोरी अर्थात् जोरीका अपराधी हुवा । (ख) शिवशंकर सर्व संबंधी मार्गपर रमाशंकरसे मिला और रमागकरको तमंचा दिखाकर उसकी-वसनी माँगी और रमाशंकरने उसके कारण अपनी वसनी विवश होकर छोड दी, इस अवस्थाम जो कि शिवशंकरने रमाशकरको तत्काल दुःख ( जरर) पहुँचाने का डर दिखाकर उससे वसनी दवाकर लेली, और दबाकर लेनेके समय रमागकरके निकट उपस्थित था, इसलिये शिवशंकर जोरीका अपराधी हुमा ! (ग) शिवाकर सर्वसाधारण सडकपर रमागकर तथा उसके बालकने मिला, और शिवकन्न लडकेको पकडकर स्माशंकरको धमकाया कि यदि-न अपनी वसनी मुझे न दे देगा तो मैं नरे लडकेको उँचाई परसे गिरा दूंगा, और रमाशकरने उस कारणसे अपनी वसनी छोड दी-तो इस अवस्थामे शिवशंकरने रमागकरको इस बातका डर दिखाकर कि बच्चेको जो वहा उपस्थित है तत्काल दुःख पहुँचाएगा, रमाशरमे दबाकर बसनी लली, इसलिये शिवाकर रमागकरके मध्ये जोरीका अप- राधी हुआ। (घ) शिवशकर रमाशकरसे कुछ माल यह कहकर लेवे कि तेरा लडका हमारे गिरोहके वशम यदि तू हमको दशहजार रुपया न.भेज देगा तो वह मारडाला जायेगा, तो यह दबाकर लेना (इस्तेहसालविलक्षव ) है, और उसके बदलेमे दबाकर लेनेकाही दंड दिया जायगा परंतु व्ह बल सहित चोरी नहीं है, सिवाय इसके कि रमाशंकरको लडके तत्काल मारडालनेका डर बतलाया जावे। १-यदि गहनके छीन लेनेमे किसीको दुःख पहुंचे तो उस घटनाका अराध बलसहिन चोरी (जोरी ) का अपराव -गिना नायगा-इसलिये जा एक मनुष्यने नय निकालनेमें लीके नयनोको घायल किया, यहा सक-कि- उनसे खून बहने लगा तो वह बल सहित चोरीका अपराधी हुआ । ( वीक्ली रिपोर्टर जिल्द ५ सफा ९५) २-कुछ मनुष्योन. एक नावको यह कहकर रोक लिया कि मजिस्ट्रेट रामपुर बलियाको उसको आवश्यकता थी और फिर उसको लूट लिया और मल्लाहोंने कुछ सामना न किया, .

डकैती. सत्रहवा १७.] ऐक्ट नंवर ४५ सन १८६० ई० । (२३१) तजवीज़ हुई कि वे वल सहित चोरी ( सरका बिलजब ) के अपराधी हुए थे क्योंकि चोरीका अपराध उस समय हुआ था कि जब मल्लाहोको अनीतिरोकक्का भय था । ( वीक्ली रिपोर्टर जिल्ट ५ सफा१७). ( ३९१) जब पाच अथवा अधिक मनुष्य मिलकर जोरी करें अथवा करनेका उद्योग करे अथवा जब कि उन मनुष्योकी कुलसख्या जो जोरी अथवा जोरी का उद्योग मिलकर करते हो उन मनुष्योंकी सख्यासमेत जो वहां उपस्थित हो और उसके करने अथवा उद्योगमे सहायता करते हो, पाच अथवा पांचसे अधिक हों तो प्रत्येक मनुष्य जोरी करनेवाला अथवा उद्योग करनेवाला अथवा उसमें सहायता करनेवाला,"डकैती करनेका अपराधी कहलावेगा। १-जब हिन्दूलोगाने मिलकर एक वैल और दो गायाँको एक मुसलमानके अधिकारसे दूर कर दिया-उनका अभिप्राय यह न था कि वे अपना अनीतिलाम (नाजायज फायदा) अथवा पशुओंके स्वामीको अनीतिहानि (नुकसान नाजायज) पहुंचाएँ, वरन् उनकी यह इच्छा थी कि वे पशुवध करनेसे बचजाएँ-तो तनवीन हुई कि उनके मध्ये डकैतीके अपराधमे विचार नही होसकता वरन् केवल बलवाका होसकता है । (इ. ला• रि• इलाहाबाद जिल्द १५ सफा २२) ( ३९२ ) जो कोई मनुष्य जोरीका अपराव कर, उसको कठिन कैदका दण्ड दिया जोरीका दण्ड. जावेगा, जिसकी मीआद दश वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके मी योग्य होगा और यदि वह जोरी सर्वसाधारण मार्गपर सूर्योदय अथवा सूर्यास्तके मध्यमे कोजावे तो कैदकी मीआट चौदह वर्पतक होसकती है। . . टीप--(१) अदालत सेशन या प्रे० म० या म० अ० (२) पोलीस दस्तन्दाजी करसकती (३) अपराधीके नाम वारट जारी होगा (४) जमानत नहीं है (५) राजीनामा नहीं है। वेतके ढण्टके लिये (ऐक्टर १८६४ ई. को दफा २ व ३ को देखो।) १--जिस मनुष्यपर जोरीका अपराध प्रमाणित किया जावे वह चोट पहुंचाने (जरररसानी) का अपराधी नही ठहराया जासकता क्योंकि चोट पहुचाना जोरीका एक भाग है । (वीको रिपोर्टर जिल्द १ सफा ६५) ( ३९३) जो कोई मनुष्य जोरीके अपराधका उद्योग करे उस मनुष्यको कठिन कैदका जोरीके उद्योगका दड } दर दिया जावेगा जिसकी मीआढ सातवर्पतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप-दफा ३९२ के अनुसार हैं। (ऐक्ट ६ सन् १८६४ ई. की दफा २ व ३ को देखो।) - चाना. (२३२) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- (३९४ ) यदि कोई मनुष्य जोरी करे अथवा जोरीके उद्योगमे किसी मनुष्यको जोरी करनेमे जानबूझ- जानबूझकर दुःख पहुँचाए तो उपरोक्त मनुष्यको तथा किसी कर दुःख ( जरर) पहुँ-१ दूसरे मनुष्यको जो उस जोरी करने अथवा जोरीके उद्योगमें साझी हो जन्ममरके देशनिकालेका दंड अयवा कठिन कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीद दश वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप-दफा ३९२ के अनुसार है। (ऐक्ट ६ सन् १८६४ ई० को दफा २ व ३ को देखो।) १-~-दफा ३०७ व ३९४ के दण्डोमै जन्मभरके देशनिकालेका दंड अथवा दशवर्षकी कठिन कैदका दंड दिया जावेगा १४ वर्षके लिये कालेपानीका दंड नही होसकता । ( वीली रिपोर्टर जिल्द ७ सफा ४१) ( ३९५ ) जो कोई मनुष्य डकैती करेगा, उसको जन्मभरके लिये देशनिकालेका दण्ड अथवा कठिन कैदका दड दिया जावेगा जिसकी डकैती करनेका दण्ड, मीाद ढश वर्पतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य . होगा। टीप--(१) अदालत सेशन (२) पोलीस दस्तन्दाजी करसकती है (३) अपराधीके नाम वारट जारी होगा (४) जमानत नहीं है (५) राजीनामा नहीं है । (ऐक्ट ६ सन् १८६४ ई. की दफा २ व ३ को देखो) १--जब बहुतसे हिन्दुओने मिलकर मजहबी जोशके कारण कुछ मुसलमानोपर आक्रमण कर के सर्व साधारण सडकपर उनसे पशुओको छीन लिया तो तजवीज हुई कि हिन्दूलोग हिन्दुस्थानके दंड- संग्रहकी दफा ३९५ के अनुसार डकैतीके,अपराधी है न कि केवल बलवाके । (इ० ला. रि० इला. हाबाद जिल्द १५ सफा २९९) . (३९६ ) उन पाच अथवा अधिक मनुष्योमेंसे जो मिलकर ढकेती करे, कोई एक डकैतीके साथ ज्ञात मनुष्य उस डकैतीके करनेमें ज्ञातघातको करे, तो उनमेंसे प्रत्येक मनुष्यको वधका दंड अथवा जन्मभरके देशनिकालेका या कठिन कैदका दह दिया जावेगा, जिसकी मीआद दश वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप--दफा ३९५ के अनुसार है। १-जब डकैती करते समय कोई मनुष्य जानसे मारामाचे, तो यह बात विचारने योग्य न होगी कि वह डकैत, कि जिसपर इस दफाके अनुसार अपराध लगाया गया उस घरके भीतर था • अथवा बाहर, जहां डकैती हुई थी अथवा यह कि उस वका किया जाना घरके भीतर या बाहर , घात.

साथ सत्रहवाँ १७.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६०ई० । (२३३) केवल उस सीमातक था कि जहांतक डाका डाला गया। (इ. ला.रि. इलाहाबाद जिल्द १७ सफा ८६) ( ३९७ ) यदि जोरी अथवा डकैती करनेके समय अपराधी किसी मृत्युकारक हथि. जोरी अथवा डकैती) यारको काममें लाए अथवा किसी मनुष्यको भारी दुःख (जर- मृत्यु करने अथवा भारी । शदीद ) पहुँचाए अथवा किसी मनुष्यके वध करने या मारी दुख दुःख पहुंचानेके उद्योगके पहुंचानेका उद्योग करे तो वह कैद जिसका दड उस अपराधीको दिया जायगा सात वर्ष कम न होगा । टीप-दफा ३९५ के अनुसार है। चोरी करते समय मृत्युकारी हथियारको काममे लानेसे चोरी जोरी होजाती है और वह अपरा- धी हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहको दफा ३९७ के अनुसार दड योग्य होगा चाहे उन चोरोंकी सख्या ५ हो अथवा कम । (वीली रिपोर्टर जिल्द २ सफा ४९) (३९८) यदि जोरी अथवा डकैती करनेके उद्योगके समय अपराधी किसी मृत्युकारक मृत्युकारी हथियार बाध) हथियारको लिये हो तो वह कैद जिसका दध उस अपराधीको दिया -कर जोरी अथवा डकैती-जायगा सात वर्षसे कम न होगी। का उद्योग, टीप-दफा ३९५ के अनुसार है। (३९९) जो कोई मनुष्य डकैती करनेके लिये कोई तैयारी करे उसको कठिन कैदका डकैती करनेके लिये दड दिया जावेगा जिसकी मीआद दश वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप-दफा ३९५ के अनुसार है। (४०० ) जो कोई मनुष्य किसी समय इस ऐक्टके प्रचलित होनेके उपरात ऐसे डकैतोंके झुण्डमै साझी ) मनुष्योके झुण्डमें साझी होगा जो परस्पर डकैती करनेके लिये मेल होनका दड, रखते हों तो,उस मनुष्यको जन्मभरके देश निकाले अथवा कठिन कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीभाद दश वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप-दफा ३९५ के अनुसार है। १-इस दफा ४०० के अनुसार अपराध ठहरानेके लिये इस बातके प्रमाणित होनेकी आवश्य- -कता है कि अमुक समयपर डाकुवाका झुड कि जिन्होंने डकैती करनेके अभिप्रायसे परस्पर मेल कर लिया था, उपस्थित था और अपराधी उस झुडमें पानी था । बीली रिपोर्टर जिल्ल १८ सफर २३) तैयारी करना.

- (२३४) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- (-४०१ ) जो कोई मनुष्य किसी समय इस ऐक्टके प्रचलित होनेके उपरांत इधर उधर इधर उधर फिरनेवाले / फिरनेवाले मनुप्योके झुण्डमें अथवा किसी और झुण्डमे-साझी होगा चोरोके झुण्डमे साझी - जो चोरी अथवा जोरीके लिये परस्पर मेल रखते हों,परन्तु जो ठगों अथवा डाकुओंका झुण्ड न हो, तो उपरोक्त मनुष्यको कठिन कैदका दण्ड दिया जायेगा जिसकी मीआद सात वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके मी योग्य होनेका दड. होगा। टीप-दफा ३९२ के अनुसार है। (४०२) जो कोई मनुष्य किसी समय इस ऐक्टके प्रचलित होनेके पश्चात् उन पाच डकैती करने के लिये अथवा अधिक मनुष्योमेंसे होगा, जो डकैती करनेके लिये इकट्ठा हुए इकडा होना. हों,-तो उस मनुष्यको कठिन कैदका दंड दिया जावेगा, जिसकी मीआद सात वर्पतक होसकती है, और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप-दफा ३९५ के अनुसार है। १-इस बातका प्रमाणित होजाना, कि अपराधी डाकुओके गिरोहमेसे एक मनुष्य था और उस गिरोहके अभिप्रायसे जानकार रहकर भी उसके साथ रहा करता था, टफा ४०२ का अपराध ठहराने के लिये काफी है । वी. रि० जिल्द ७ सफा ९७) मालके तसढूफ बेजा मुजरिमाना ( अधर्मसे धनके अनीति व्यय करने ) के वर्णनमें। (४०३ ) जो कोई मनुष्य अधर्मसे, किसी स्थावर धनको अपने अनीति व्यय अधर्मसे धनकाअनीति) (तसरी फवेजा ) मे अथवा अपने कामने लेआये, उसको टोनी व्यय (बद दियानतीस प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीभाद मालकी तसरीफ वेजा) दो वर्षतक होसकती है अथवा जुर्मानेका दडं या दोनो दड दिये जावेगे। उदाहरण । क) शिवगार, रमागकरके आधिकारमैसे रमाशकरका माल ले और शुदभावसे उसके लेते समय यह निश्चय करता हो कि वह माल मेरा है तो इस अवस्थामै शिवशकरने चौरी नहीं की, परंत यदि शिक्शकर अपनी भूल जान लेने के पश्चात् उस मालको अधर्मसे व्ययकर डाले तो वह उस अपरा. धका अपराधी है, जिसका वर्णन इस दफाम किया गया है ।

सत्रहवा १७ ] एक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई० । (२३५) (ख) शिवाकर जो-रमात्मकरसे मित्रताका व्यवहार रखता है, रमाशंकरके पुस्तकालयमे उसकी गैरहाजिरीमें जाए और बिना स्पष्ट आजा रमाशकरके एक पुस्तक लेजाए, तो इस अवस्थामै यदि शिव- शकरको यह निश्चय या कि पटनके लिये पुस्तक लेनेकी मुझको रमाशकरकी स्पष्ट आजा प्राप्त है तो शिवशकर चोरीका अपराधी नहीं है परतु यदि शिवाकर इसके पश्चात् अपने लामके रिये उस पुस्तकको बेच डाले तो शिवशकर उस अपराधका अपरावी है जिसका वर्णन इस दफार्म क्यिा गया है। (ग) यदि शिवशंकर व रमाशकर साझे किसी घोडेके मालिक हो और शिवशकर घोडेको रमाशकरके पाससे अपने कामम लानेके लिये ले जावे तो इस अवस्थाम जो कि शिवशकर उस घोडको काममें लानेका अधिकारी है, इसलिये वह अधर्मसे उसको अनीतिव्ययमें नहीं लाता, परतु यदि शिव. भकर घोडेको बेच डाले और उसकी कीमतका सब-रुपया अपने कामम ले आये, तो वह उस अपग धको अपराधी है जिसका वर्णन इस दफामै कियागया है। स्पष्टीकरण-१ अनीतिव्यय ( तसर्लफ वेजा ) जो केवल कुछ समयके लिये अधर्मस किया जाय, वह भी इस दफाके अनुसार अनीतिव्यय गिना जायगा । उदाहरण । - शिशकरने एक गवर्नमेट प्रामेसरी नोट जो रमागकरका माल था और जिसकी पीठपर विक्रीकी इबारत बिना नामके लिखी थी, पाया, शिवशकरने यह बात जानबूझकर कि यह नोट रमाग- करका है, उसको किसी साहूकारके यहां इस अभिप्रायसै गहने रखदिया कि आगे किसी समय इसको रमागकरको फेर दूगा, तो शिवशकरने इस दफाके अनुसार अपराध किया। स्पष्टीकरण-२ जो मनुष्य कोई माल जो किसी मनुष्यके अधिकारमे न हो पाये और उस मालको उसके मालिककी ओरस प्रबन्ध करने अथवा उसके मालिकको लौटा देनके लिये अपनी सिपुर्दगीम लाए तो उपरोक्त मनुष्य उस मालको अर्मसे अपनी तिपुदगी अथवा अनीतिव्यय (तसमवेजा ) मे नहीं लाता, और न अपराधका अपराधी है-परन्तु वह मनुष्य उस अपराधका. जिसका लक्षण ऊरर कहा गया है अपराधी होगा - यदि वह उस मालको अपने कामके लिये अनीतिव्यय (तसर्राफवेजा ) मे लाए जव कि वह उसके मालिकको जानता हो अथवा उसके जान लेनेके उपाय रखता हो अथवा इससे पहिले कि, वह मालिकके दूढने और उसको सूचित करनेके उचित उपाय काममें ला चुका हो और एक उचित समय तक उस मालको अपनी सिपुर्दगीम रक्खा हो जिससे कि मालिकको उसके दावा करनेका 'अवसर मिलता। यह बात कि ऐसी अवस्थामे कौनसे उपाय वास्तवमे उचित हैं और कौनसा समय वास्तवमे उचित है, निर्णय करनेके योग्य होगी । यह अवश्य नहीं है कि पानेवाला यह जाने कि-उस मालका कौन मालिक है अथवा यह कि अमुक मनुष्य उसका मालिक है-बरन् इतनाही बहुत है कि मालको अपने व्ययमें (२३६) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह । [अध्याय- लाते समय वह यह निश्चय न करता हो कि यह उसका. अपना माल है अथवा शुद्धभावसे यह निश्चय न करे कि उसका असल मालिक नहीं मिल सकता। उदाहरण। - क) शिवशकर सडकपर एक रुपया पाये और उसको यह जानकारी न हो कि यह किसका -माल है, और शिवशंकर उस रुपयेको उठाले तो इस अवस्थामे शिवशंकर उस अपराधका करनेवाला -नही हुआ, जिसका वर्णन इस दफामें कियागया है । (ख) शिवशकर सडकपर एक चिही पाए और उसमें एक महाजनी हुडी हो और लिफाफे -तथा चिट्टीकी लिखावटसे शिवाकर जानले कि वह हुडी अमुक मनुष्यकी है फिर शिवशंकर उसको अपने व्ययमे लाए, तो शिवशकर एक अपराधका अपराधी है जिसका वर्णन इस दफामें किया गया है। (ग) शिवशंकर एक रुक्का पाए, जिसका रुपया धनीको मिल सकता हो, परन्तु उसे यह 'निश्चय न होवे कि इसका खोनेवाला कौन है-तथापि जिस मनुष्यने रुक्का लिखा हो उसका नाम निकल आव और शिवशंकर यह जानले कि इसका लिखनेवाला इसके मालिकका पता बतला सकेगा परन्तु फिरभी उसके ढूंढनेका कुछ उपाय किये बिना उस रुकेको अपने काममे ले आवे तो वह इस दफाके अनुसार अपराधका अपराधी है। (घ) शिवशकर रमाशकरके पाससे उसकी वसनी जिसमे रुपये हो गिरते देखें और शिवश्वकर रमाशंकरको फेर देनेके अभिप्रायसे बसनीको उठा ले और उस बसनीको अपने कामके लिये व्ययमें लावे तो शिवशंकरने उस अपराधको किया जिसका वर्णन इस दफामे किया गया है। (च) शिवशंकर एक बसनी जिसमें रुपये हो पाये, यह न जानकरके कि वह किसका धन -है, परन्तु पीछेसे जान लेवे कि वह रमाशंकरका धन है, और फिर उस बसनीको अपने काममै व्यय कर डाले तो इस अवस्थामें शिवशंकर उस अपराधका अपराधी है जिसका वर्णन इस दफामे किया गया है। . (छ) शिवशंकर एक बडे मोलकी अगूठी पाए, यह न जान करके कि वह किसका धन है और फिर उसके मालिकके ढढनेका कोई यत्नकरके उसको तत्काल बेच डाले तो शिवशकर एक अपराधका करनेवाला हुवा जिसका वर्णन इस दफामे कियागया है । टीप-(१) कोई मजिस्ट्रेट (२) पोलीस दस्तन्दाजी नहीं करसकती है ( ३ ) अपराधीके नाम वारंट जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नही है । १-जो साड किसी मूर्ति या देवताके लिये छोडा जावे और स्वाधीनतापूर्वक फिरने दिया जावे वह इसलिये मिलकियत ( धन ) से खारिज नहीं है कि उस मन्दिरको जहां कि देवता अथवा मूर्तिकी पूजा होती है कुल अधिकार और जिम्मेदारियां उसके सम्बन्धी प्राप्त हैं । ( इंडियन ल रिपोर्ट मदरास जिल्द ११ सफा १४५) सत्रहवा १७.) ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई० । (२३७) २-एक मनुष्यको इस अपराधके मध्ये विचार होकर दण्डकी आजा हुई कि उसने हिंदु. स्थानके दण्डसग्रहको दफा ४११ के अनुसार यह अपराध किया था कि उसने अधर्मसे एक गड- को यह जानबूझकर लिया कि उसके मध्ये तसईफवेना मुजरिमाना ( अनीति व्यय) किया गया है। तजबीज हुई कि तसरफरेजा (अनीति व्यय ) करते समय वह साड हिन्दुस्थानके दण्डसंग्रहके अभि- प्रायानुसार "वस्तु (माल)' में नहीं गिना जा सकता था, क्योंकि पहले तो उसका काई मालिकही नहीं रहा और दूसरे यह कि असली मालिकने अपने कुल अधिकार मिलकियतके छोड दिय इसलिये ऐसे साडकी चोरी नहीं की जासकती है, और इसलिये अपराधी छोडा गया। ( इ. ला. रि० इलाहाबाद जिल्द ८ सफा ५१) ३-एक सरकारी नौकर था, जिसका यह काम था कि रुपया लेकर उसको खजाने में रसीद लेनेके बाद जमाकरदे-उसने स्वीकार किया कि मैने कई महीने तक रुपयेकी दो रकम अपने यहां रक्खी, जब मुझे पकड जानेका भय हुवा तंब मैने उनको खजानेमे दाखिल कर दिया और सदेह दूर करनेके लिये अपने रजिष्टरम झूठमूठ इबारत लिखली-उसने अपने यहा रुपया रखनेका जो कारण बतलाया, उसपर साहब मजिस्ट्रेटने निश्चय नही किया और जिन्होंने हिन्दुस्थानके दडसग्रहको दफा ४०३ के अनुसार अनीति व्यय ( तसरफ बेजा ) के अपराध, उसका विचार किया-तजवीज हुई कि अपराधका विचार ठीक था । (इ० ला. रि. मदरास जिल्द १२ सफा ४९) ४-~-हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहको दफा २९५ के अनुसार शब्द "वस्तु" मे जानदार वस्तुएँ नही गिनी जासकती-कोई साड जो किसी हिन्दूके श्राद्धमे छोडा जावे, इस दफाके अभिप्राय के भीतर नहीं है और जब कि ऐसे जानवरको मुसलमान छुपाकर गोश्त और चमडेके लोभसे मार डाले तो दफा २९५ के अनुसार कोई अपराध उन्होंने नही किया और साड हिन्दुस्थानके दण्डसंग्रह को दफा ३७८ या ४०३ या ४२५ के अभिप्रायके भीतर स्थावर धन नहीं है । (इ० ला. रि० कलकत्ता जिल्द १७ सफा ८५२) ५-अपराधीने सडकपर एक सोनकी मुहर पाई-दूसरे दिन उसने उस मुहरको किसी सराफ के हाथ पूरे दामोपर बेचडाला और वह उसका रुपया अपने खर्चमें लाया-तनबीन हाईकोर्ट यह हुई कि, उन बातोके न मालूम होनेकी अवस्यामे, कि जिनमे उपरोक्त मुहर खोगई, और जो कि यह कदाचित् सम्भव हो कि उस मुहरका अधिकार असली मालिकने बिल्कुल छोड दिया हो, अपराधीको हिंदुस्थानके दडसग्रहकी दफा ४०३ के अनुसार अनीतिव्ययके अपराधमें दंड नहीं दिया जा सकता। इ. ला. रि० बम्बई जिल्द १८ सफा २१२), (१०४) जो कोई मनुष्य कोई माल अधर्मसे अपने अनीति व्यय अथवा अधर्मसे किसीऐसे धन काममें यह जानकर लाए कि वह माल किसी मनुष्यके मरते (माल)को व्यय (तसरफ) / समय उस मरे हुएके अधिकारमे था और यह कि वह माल कर डालना कि जो मर- उस समयसे किसी ऐसे मनुष्यके अधिकारमें नहीं रहा है। जो उस नकै समय किसी मरे हुए अधिकारका कानूनानुसार अधिकारी हो, तो उपरोक्त मनुष्यको मनुष्यके आधकारमें था. दोनों प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी (२३८) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- भीआद तीनवर्षतक हो सकती है और वह जुर्मानेकेमी योग्य होगा और यदि अपराधी उस मरे हुए मनुष्यकी ओरसे उसके मरनेके समय गुमाश्ता अथवा नौकर हो-तो कैदकी मीआद सात चर्पनक हो सकती है। उदाहरण। - यदि शिवशकर कुछ माल और रुपयेपर आधिकारी होनेको अवस्थामें करजाए और रमाशं- कर उसका नौकर, इसके पहिले कि वह रुपया किसी ऐसे मनुष्यके आधिकारमे आजाए जो उस अधिकारका अधिकारी है, उपरोक रुपयेको अधर्मसे अपने अनीतिव्यय (तसम्फ बेजा) मे लाए तो इस अवस्थामे रमाशंकरने वह अपराध किया, जिमका वर्णन इस दफाम किया गया है। टीप-(१) अदालत सेगन या प्रै० म० या म० अ० या म० दो० (१) पोलीस दस्त- न्दाजी नहीं करसकती (३) अपराधीके नाम वारट जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५ राजीनामा नहीं है। १-हिस्थानके दडसग्रहको दफा ४०४ अस्थावर धन (गैर मनकूला माल) से सम्बन्ध नही रखेगी। (रिपोर्ट हाईकोर्ट बम्बई जिल्द ६ सफा ३३) २--कोई मनुष्य उस रुपयके अनीतिव्यय करडालनेमे दफा ४०४ के अपराधका अपराधी होगा, जिसको भरे हुए मनुष्यने उसकी सिपुर्दगीमें रक्खा हो चाहे उस रुपयेको वह अपने काममें न लाया हो । ( वीली रिपोर्टर जिल्द ११ सफा १) दण्ड योग्य विश्वासघात (खयानत मुजरिमाना ) के वयानमें । (४०६) कोई मनुष्य जिसको किसी प्रकारसे कोई माल अथवा किसी मालका प्रबंध दण्ड योग्य विश्वास-] धरोहरकी रीतिपर (अमानतन) सिपुर्द हो, कानूनको किसी आज्ञा थात (खयानत मुनार-2 को जिसमें ऐसी सिपुर्ददारीके वर्तनेकी रीति उहराई गई हो अथवा माना.) किती गट या अप्रगट उचित कौल करारको,जो उस सिपुर्ददारीके मध्ये वह करचुका हो तोडकर उस मालको अधर्मसे व्यय करेगा अथवा अपने काममे लायेगा अथवा अधर्मसे उससे काम निकालेगा अथवा अलग करेगा अथवा जानबूझकर किसी दूसरे मनुष्यको ऐसा करने देगा तो वह दड योग्य विश्वासघात (खयानत मुजरिमाना) का अपराधी कहलावेगा।

सत्रहवा १७.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०॥ (२३९) - उदाहरण-1 (क) शिवशंकरने जो किसी मरेहुए मनुष्यके मालका अधिकारी था, उस कानूनका उल्लंघन करके जिसमें उसको आना थी कि वसीयतनामैके अनुसार माल असबाबको वाट दे, अधर्मसे उस माल असबाबको अपने काममै व्यय किया, तो शिवशकरने दण्ड योग्य विश्वासघात किया । (ख) शिवशकर गोदामका मालिक हो और रमाशंकर, जो देशाटनको जाता हो शिवशंकरको अपना असवाब इस नियमपर - सौंपनाय कि जिस समय गोदाम परके मध्ये भाडेका इतना स्पया दे दियाजाय उसे कुल असवाद- लौटा दिया जायगा और शिवशकर उस असबाबको अधर्मसे बेच डाले तो शिवभकरने दण्ड योग्य विश्वासघात (खयानत मुजरिमाना.) किया। ग) यदि कलकत्तेका रहनेवाला शिवशकर देहली के रहनेवाले रमाशकरका गुमाश्ता न हो और उन दोनोंमें प्रगट अथवा अप्रगटें रीतिसें यह कौल करार हो कि रमाशंकर जो रुपया शिवशंकरको हुंडी करे उसको शिवशंकर रमाशंकरकी आज्ञाके अनुसार लामके लिये लगाले रमाशकर एक लाख रुपया इस आज्ञासे शिवशकरके पास हुडी करे कि शिवशकर उसको कम्पनी प्रामेसरी नोटके मोल लेनेमें लगावे परतु शिवशकर अधर्मसे उस आजाके विरुद्ध अपने काममे व्ययकरे तो शिवशकर दण्ड योग्य विश्वासघात (खयानतमुजरिमाना) का अपराधी होगा। (घ) परतु उपरके पिछले उदाहरणमें यदि शिक्कर् अधर्मसे नही वरन् शुद्धभावसे यह निश्चय करके कि वेक बंगालके हिस्से मोललेनो रमाशंकरके लिये अधिकतर लाभदायक होगा-रमाशं- करकी आनाके विरुद्ध करे और वैकके प्रामसरी नोट मोल लेनेके बदले बैंक बंगालके हिस्से रमागकरके नाम मोल ले तो इस अवस्थामे यद्यपि रमाशंकर हानि उठाये और उस हानिके मध्ये शिवशंकर पर दीवानीमे नालिश करनेका अधिकारी हो तथापि जो कि शिवशंकरने अधर्मसे वर्ताव. नही किया इसलिये शिवशकर दण्ड योग्य विश्वासघातका अपराधी नहीं है। (च) यदि शिवशकर जो सरिश्ते मालका ओहदेदार है सरकारी रुपयेका सिपुर्ददार हो आर उस पर चाहे कानूनकी आजाके अनुसार चाहे किसी कौलकरारके अनुसार जो गवर्नमेंटके सायप्रगट अथवा अप्रगट रीति पर हुआ हो, उचित हो कि वह कुल रुपया सरकारी जो उसके अधिकारमे है किसी मुख्य खजानेमें दाखिल करे-परन्तु शिवशंकर उस रुपयको अधर्मसे अपने व्ययमें लाए तो शिवशं- कर दण्ड योग्य विश्वासघात (खयानत मुजरिमानाका ) अपराधी है। (छ) रमाशकरकी ओरसे, शिवशंकरको जो माल व असबाब पहुंचाने का पेशा रखता है, कोई माल धरोहरकी रीतिपर सिपुर्द किया गया कि वह उसे थल अथवा जलके मार्गसे पहुंचा दे और शिव- अकर उस मालको अधर्मसे अपने काममें व्यय कर डाले तो शिवशकर दंड योग्य विश्वासमत (खया- नत मुजरिमाना) का अपराधी होगा । १-यदि कोई मनुष्य किसी रुपयाको जो उसने किसी विशेष काममै व्यय करने के लिये पाया हो उस काममें व्यय न करे और उसका हिसाव मॉगेजानेपर- हिसाब देनेसे नाही करे अथवा झूठ हिसाब दे तो वह दण्ड योग्य विश्वासघातका अपरावी होगा । ( वीक्ली रिपोर्टर बिन्दु १० सफो २६) (२४०) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- २-नाजिर एक बड़े सरिश्तका अफ्सर है और जिस कामके मध्ये वह रिपोर्ट करे अथवा उसको स्वीकार कर उसकी सच्चाईका जिम्मेदार है और वह अपनी जिम्मेदारीसे इस बात पर नहीं बच सकता कि उसके मुहरिने उसको धोखा दिया था । ( वीक्ली रिपोर्टर जिल्द ७ सफा १०९) (४०६ ) जो कोई मनुष्य दंड योग्य विश्वासघातको करे, उसको दोनो प्रकारोंमेसे दंड योग्य विश्वास ] किसी प्रकारकी कैदका दर दिया जावेगा जिसकी मीआद घात(खयानत मुजरिमाना । तीन वर्षतक हो सकती है अथवा जुर्मानेका दड या दोनों का दंड.) दंड दिये जावेगे। - टीप-(१) अदालत सेशन, या प्रे० मजिस्ट्रेट या म० अ० या म. दो० (२) गेलीस दस्तन्दाजी करसकती है (३) अपराधीके नाम वारट जारी होगा (४) जमानत नहीं है (५ राजीनामा नहीं है। १-अपराधीपर जो सब इन्स्पेक्टर पोलीस था, इसबातका अपराध लगाया गया कि उसने एक घोडा कांजीहौसमेसे मोल लिया था-तजवीज हुई कि मजिस्ट्रेटको ऐक्ट १ सन् १८७१ ई. की दफा १९ व हिन्दुस्थानके दंडसंग्रहकी दफा १६९ के अनुसार वर्ताव करना चाहिये था, उसपर हिन्दुस्थानके दंडसंग्रहको दफा ४०६ के अपराधर्म दड होना चाहिये था । (वी. रि० जिल्द १६ सफा ५२) (४०७) यदि कोई मनुष्य, जिसको ढोईदार या घटवार या गोदामके मालिककी 'मालपहुँचानेवाले (ढोई) रीतिसे कोई माल सिपुर्द हो, उस मालके मध्ये दड योग्य विश्वास दार) और घटवार इत्या घान ( खयानत मुजरिमाना ) का अपराध करे तो उपरोक्त दिकी ओरसे दण्डयोग्य [ मनुष्यको दोनों प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जायेगा विश्वासघात. जिसकी मीआद सात वर्षतक हो सकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप(१) अदालत सेशन, प्रे० म० या म० अ० (२) पोलीस दस्तन्दाजी कर सकती है ( ३ ) अपराधीके नाम वारंट जारी होगा (४) जमानत नहीं है (५) राजीनामा नही है। (४०८) कोई मनुष्य जो गुमाश्ता अथवा नौकर हो या जो गुमाश्ता अथवा गुमाश्ते अथवा नौकर ) नौकरके कामपर तैनात हो और जिराको किसी प्रकार गुमा- की ओरसे विश्वासघात. दता अथवा नौकरके काके का ण कोई माल किसी मालका प्रवन्ध धरोहरको रोतिर ( अमानतन ) शिपुर्द हो, उपरोक्त मालके मध्ये दंड योग्य विश्वासघात (खयानत मुजरिमाना ) का अपराधी हो, तो उपरोक्त अथवा सत्रहवा १७.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०। (२४१) मनुष्यको दोनो प्रकारोमेसे किसी प्रकारको कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीआद सात वर्षतक हो सकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप-दफा ४०६ के अनुसार है । १-जब एक सब इन्स्पेक्टरने जिसकी चौकसीमे कुछ सरकारी रुपया था वह रुपया अनुचित रीतिपर एक कानिस्टेबिलकी सिपुर्दगीमे रख दिया और अपनेको हानिसे बचानके अभिप्रायसे निनकी तौर पर उस कानिस्टेबिलसे जमानत लेली और उपरोक्त कानिस्टेबिल अधर्मसे उस रुके को अपने काममे ले आया, यद्यपि फिर उसने पीछेसे उस रुपयको लौटा दिया-हाईकोर्टने मुकद्दमेको दफा ४०८ (न कि दफा ४०९ के अनुसार समझा और अपराधीको १० वर्षके काले पानी और ५००) रु. जुर्मानेके दडके स्थानपर बिनाजुर्माना एकवर्षकी कठिन कैदका दड दिया। (वी० रि० जिल्द ८ सफा १) २--जब कोई नौकर किसी विशेप कामके लिये कुछ रुपया पावे और वह उसी काममै वह रुपया न लगावे और जब उसले उपरोक्त रुपयका हिसाब मांगाजावें तो वह झूठ मूठ यह कहे कि उसने उस रुपयाको उसी काममें लगाया है तो ऐसी अवस्थामे उपरोक्त मनुष्य दफा ४०८ के अनु. सार अपराधका अपराधी होगा (ब० ला. रि० जिल्द १ सफा २१) (४०९) जो कोई मनुष्य किसी भाति सिपुर्ददार किसी मालका अथवा मालके सरकारी नौकर या) प्रबन्धका सरकारी नौकरीके कारण अथवा महाजन या सौंदा- गर या आढतिये या दलाली या कारिन्दगरीके कारण हो या आढतिये की ओरसे कर उस मालके मध्ये दण्ड योग्य विश्वासघात करेगा उसको विश्वासघात, दोनो प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका ढड-दिया जायगा जिसकी मीआद दशवर्षतक हो सकती है और वह जुर्मानेके मी योग्य. होगा- टीप-दफा ४०७ के अनुसार है । १--अपराधीने उस निश्चयको जो सरकार उसके मध्ये रखती थी पूरा कर दिया, और उस का कुछ समय तक रुपयका रोकना, दफा ४०९ के अनुसार अपराधमें न गिना जायगा जबतक कि अधर्मकी गवाही न पाई जावे । (इ. ला. रि० बम्बई जिल्द १० सफा २५६) २-एक कानिस्टेबिल एक घरकी चौकसी करता था, जिसमें सरकारी माल रक्खा था उसने उस घरसे वह माल चुरा लिया-तजवीज हुई कि अपराधीको हिन्दुस्थानके दडसग्रहकी दफा ३८० के अनुसार दड देना चाहिये था नकि दफा १०९ के अनुसार । (वी. रि० जित्द ३ सफा ३०) महाजन या बौदागर । १६ ?

(२४२) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- - चोरीका माल लेनेके बयानमें। (४१० ) वह माल कि जिसपर चोरी अथवा दवाकर लेने अथवा जोरीसे, अधिकार चोरीका माल (मा म किया गया हो और वह माल, कि जो दह योग्य अनीति- सरूका.) व्यय ( तसर्राफ बजा मुजरिमाना ) मे लाया गया हो अथवा जिसके मध्ये दडयोग्य विश्वासघात ( खयानत मुजरिमाना ) का अपराध किया गयाहो "चोरीका माल" कहा जायगा-चाहे वह चोरी अथवा जोरी या अनीतिव्यय या दंड योग्य विश्वासघात ब्रिटिश इंडियाके मीतर हुवा हो अथवा बाहर, परन्तु वह माल यदि पीछेसे उस मनुष्यके अधिकारमें आजाए कि जो उसके आधिकारका उचित रीतिपर अधिकारी है तब फिर वह माल "चोरीका माल' न कहा जावेगा। १--जो रुपया जाली मनीआर्डरोंके द्वारा प्राप्त किया जावे वह दफा . ४१० मे लिखे चोरीके मालमे न गिना जायगा । (वी. रि० जिल्द २४ सफा ३३) २-जब कोई हिन्दू किसी रिश्तेदारके मरनेके उपरांत कोई सांड पाने हिन्दूधर्म शास्त्रके अनुसार मृतककी आत्माके सुखके लिये स्वाधीन करदेता है, तब उसके पश्चात् वह उसका धन नहीं रहता-जो कोई अधर्मसे उसको अपने अधिकारमे लाए उसपर हिन्दुस्थानके दडसंग्रहकी दफा ४१० व ४११ का अपराध नहीं ठहर सकता । इ. ला. रि० इलाहाबाद जिल्द ९ सफा ३४८) (४११ ) जो कोई मनुष्य कोई चोरीका माल यह जानकर अथवा निश्चय करनेका अधर्मसे चोरीके माल- कारण रखकर कि वह माल चोरीका माल है अधर्मसे ले अथवा को लेना. ले रक्ख उस मनुष्यको दोनो प्रकरोंमेसे किसी प्रकारको कैदका दंड दिया जावेगा, जिसकी मीआद तीन वर्षतक होसकती है अथवा जुर्मानेका दण्ड या दोनों दड दिये जावेगे। टीप-(१) अदालत सेशन या प्रे० म० या म० अ० या म० दो० (२) पोलीस दस्त- न्दाजी करसकती. है (३) अपराधीक नाम वारंट जारी होगा (४) जमानत नहीं है (५) राजी- नहीं है। १---अधर्मसे चोरीका माल लेना चोरीके अपराधके समान नहीं है, इसलिये दफा ४११ के अपराधमें बेतका दण्ड देना अनुचित है। (इ० ला. रि. इलाहाबाद जिल्द ३ सफा ६२६) २- यह बात कानूनके विरुद्ध है कि किसी मनुष्यपर चोरोंमें सहायता करनेका अपराप प्रमाणित किया जावे और साथही उसके उसपर चोरीका माल लेनेका अपराध ठहरागा जावे । (इ. ला. रि• इलाहाबाद जिल्द ३ सफा ३७९) .

मत्रहवा १७.] एक्ट नंबर ४५ सन् १८६०ई० । (२४३) ३---किसी अपराधीको एकही तजवीज दफा ११ के अपराधके मध्ये (चोगेका माल ने) व दफा ४१३ (आदतन चोरीकी जायदाद लेने) के मध्ये नहीं हो सकती । (इ. स.रि. कलकत्ता जिल्द ८ सफा ६३४) ४-जब कोई मनुष्य दफा ४११ के अपराधका अपराधी ठहराया जावे तो इस बातके प्रमाणकी आवश्यकता है कि उस मनुष्यने उस मालको चोरीका माल समझकर अधर्मसे लिया, विना इस बातके प्रमाणित हुए, केवल इसही बातपर कि वह उपरोक्त माल अपराधीके अविकारमै है, अपराधी पर दफा ४११का अपराध नहीं ठहराया जा सकता । (इ. ला.रि. इलाहाबाद जिल्द ६ सफा २२४) ५-एक पानी पीनेका गिलास अक्टूबर सन् १८८३ ई. में चुराया गया और सितम्बर सन् १८८४ ई० में अपराधीके यहा निकला-अर्थात् उसके अधिकारमें ग्यारह महीनेतक चोरी हो जानेके उपरान्त रहा-इसलिये यह कयास अपराधीके विरुद्ध इतना कम होजावा है कि केवल इसी चातपर उससे यह भी नहीं पूछा जाना चाहिये कि, वह चोरीका माल उसके अधिकारमें कैसे आया-यह बात कि किन २ अवस्थाओं में वर्तमानका अधिकार विचारा जाना चाहिये । एक ऐसी बात है.जिसका फैसला चोरीके मालके ऊपर होना आवश्यकीय काम है। (इ० ला. रि• कलकत्ता जिल्द ११ सफा १६०) ६--पोलीसको, बिना कानूनी सूचनाके, ऐसे मनुष्यको पकडने ( गिरफ्तार ) का आधिकार है कि जिसके यहा चोरीका माल पाया जावे-योलीसको किसी ऐसे घरकी तलाशी करनका भी अधिकार है कि जिसमे चोरीका माल होनेका सदेह होवे । (वी. रि• जिल्द ८ मफा २८) ७-जव मिसल में इस बात की गवाही न हो कि वह माल, कि जिसके लेनेके मध्ये अपराधीपर दफा ४११ का अपराध ठहराया गया है, वास्तवमें चोरीका माल है-तब अपराधी- को इस दफाके अपराध दड नहीं दिया जाना चाहिये । (रिपोर्ट पश्चिमोचर देश जिल्द २ सफा १८७) ८-एक मनुष्यको विरुद्ध, कि जिसपर हिन्दुस्थानके दडसग्रहको दफा ४११ का अपराध लगाया गया था, केवल इस बातकी गवाही थी कि अपराधीने स्वयं वह स्थान बतला दिया कि जहा कुछ चोरीका माल किसी दूसरे मनुष्यके खेतमें छुपा रखा था-तनवीन हाईकोर्ट यह हुई कि ऊपर लिखी हुई दफाके अपराधमें दड देनेके लिये केवल इतनीही गवाही काफी न समझी जावेगी इ० ला. रि० इलाहाबाद जिल्द १७ सफा ५७६) ९-दफा ४११ का अपराध प्रमाणित करनेमें यह बात स्पष्ट २ मालूम होना चाहिये कि जो माल अपराधीके यहा था उसका स्वामी (मालिक) अमुक मनुष्य था। (रिपोर्ट हाईकोर्ट बंबई जिल्द १ सफा ९५) १.--जिस मनुष्यको किसी मालके मध्ये दड योग्य विश्वासघात (खयानव मुजरिमाना) के अपराधमे हिन्दुस्थानके दण्डसमहकी दफा ४०९ के अपराध दंड हो चुका हो उसको उसी (२४४). हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह । [अध्याय- मालके मध्ये दफा ४११ के अपराधमे दूसरा दण्ड नहीं दिया जा सकता । रिपोर्टर हाईकोर्ट पश्चि. मोत्तर देश जिन्द ३ सफा ३१२) ११-जो मनुष्य डकैतीके अपराध, दण्ड पा चुका हो वह उसी मालके मध्ये चोरीका माल लेनेका अपराधी नहीं ठहराया जा सकता । ( वीक्ली रिपोर्टर सन् १८६४ ई. सफा २७) १२-चोरने (अ) का माल चुराकर (ब) के यहां रेहन रख दिया जिसने वह माल बिना किसी अधर्मसे रख छोडा-चीफकोर्टने वह माल ऐक्ट ८ सन् १८६९ ई० को दफा १३२ के अनुसार (अ) को लौटवा दिया । ( पजाब रिकार्ड न ३७ सन् १८७० ई.) १३-जाब्ता फौजदारी ऐक्ट २५ सन् १८६१ को दफा ३२ के अनुसार मजिस्ट्रेटको किसी ऐसे दफा ४११ के अपराधीका विचार करनेका अधिकार नहीं है जो दूसरी रियासतका रहने- वाला है । परन्तु जब कि चोरीका माल लेनेका अपराध सरकारी राज्यसे बाहर हुआ हो । (रिपोर्ट हाईकोर्दै बम्बई जिल्द ४ सफा ३८ १४-यदि कोई कम अवस्थाका मनुष्य अपनी कम अवस्थाके कारण हिन्दुस्थानके दण्डसंग्रह- की दफा ८५ के अनुसार कैदसे छूट जावे तो इस बातपर वह मनुष्य जो उस चोरीके मालको उस कम अवस्थावाले चौरसें लेवे, दफा ४११ के अपराधर्मे दण्ड पानसे नही छूट सकता। (इ० ला. र मदरास जिल्द ६ सफा ३७३) (४१२ ) जो कोई मनुष्य कोई चोरीका माल अधर्मसे ले अथवा ले रक्ख. जिसके जो माल डकैतीमे चु- मध्ये वह जानता अथवा निश्चय करनेका कारण रखता हो कि वह राया गया हो, उसे अध- । डकैतीके द्वारा प्राप्त किया गया है अथवा किसी मनुष्यसे जिसके मसे लेना. मध्ये वह जानता अथवा निश्चय करनेका कारण रखता हो कि वह डाकुत्रोके समूहमे साझी है अथवा साझी रहा है, कोई माल अधर्मसे ले जिसके मध्ये वह जानता अथवा निश्चय करनेका कारण रखता हो कि वह माल चोरीका माल है, उपरोक्त मनुष्यको जन्ममरके लिये देश निकालेका दण्ड अथवा कठिन कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद दश वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप-(१) अदालत सेशन (२) पोलीस दस्तन्दाजी नहीं करसकती है (३) अपराधीके नाम वारट जारी होगा (४) जमानत नहीं है (५) राजीनामा नहीं है। (बेतके दडके लिये ऐक्ट न० ६ सन् १८६४ ई० को दफा २ व ३ को देखो) कुछ मनुप्योके यहां, जो अगरेजी राज्यके रहनेवाले नही प्रमाणित किये गए थे, रियासत हिन्दुस्थानमे डकैतीका माल पाया गया कि जो डकैती अंगरेजी राज्यमै की गई थी, उनका डकैतीमें साझी होना नही प्रमाणित किया गया और कोई गवाही इस बातकी नही पाई गई कि उन्होंने कोई चोरीका माल ब्रिटिग इडियामें प्राप्त किया अथवा रक्खा उन्हे ५१२ के अपराधम दड दिया गया- तजवीज हुई कि अगरेजी राज्यके भीतर किसी अपराधका किया जाना प्रमाणित नहीं है। (इ. ला. २० इलाहाबाद जिल्द ९ सफा ५२३) M सत्रहवा १७ ऐक्ट नंबर ४५.सन् १८६० ई०॥ (२४५) . (४१३ , जो कोई मनुष्य कोई ऐसा माल जिसको वह जानता अथवा निश्चय कर- स्वाभाविक (भादतन) नेका कारण रखता हो कि वह माल चोरीका माल है. स्वाभाविक चोरीके मालका.व्यवहार (आदतन ) लिया करता हो, उस मनुष्यको जन्मभरके देशनिकाले- करना, का ढड अथवा दोनों प्रकारोमेंसे किसी प्रकारकी कैढका दह दिया जावेगी जिसकी मीआद दश वर्षतक होसकती है, और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप-दफा ४१२ के अनुसार है। (बेतके दडके लिये ऐक्ट ६ सन् १८६४ ई. की दफा २ व ३ को देखो) १-कोई मनुष्य स्वभावसेही चोरीका माल लेनेवाला नहीं कहलाया जासकता.जब कि उसने कुछ चोरियोका माल कुछ चोरोंसे एकही दिनमें लिया हो दफा ४१३ का अपराध ठहरानेमें यह प्रमाणित करना चाहिये कि अलग २ की चोरियोंका माल अलग २ समयोंपर लिया गया। इ० ला. रि० कलकत्ता जिल्द १९ सफा १९० सहायता देना (४१४) जो कोई मनुष्य किसी ऐसे मालको छुपाने अथषा अलग करने अथवा नष्ट चोरीकामाल छुपानेमें ) करनेमे जानबूझकर सहायता करे, जिसके मध्ये वह जानता अथवा निश्चय करनेका कारण रखता हो कि वह माल चोरीका माल है तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका ढह दिया जावेगा, जिसकी मीद तीन वर्षतक होसकती है अथवा जुर्मानेका टंड या दोनों दंड दिये जावेगे । टीप-दफा ४११ के अनुसार है। १-अपराधी हि० द०.की दफा १९३ (झूठी गवाहीके बनाने ) के अपराधमै व दफा१४ (चोरीका माल छुपाने ) के अपराध अर्थात् दोनो अपराधोंमें अलग अलग दड पा सकता है। (इ० ला. रि• इलाहाबाद जिल्द २-सफा ३७९) छल (दगा) के विषयमे । (४१५) जो कोई मनुष्य किसी मनुष्पको धोका देकर उस धोखा खानेवाले मनुष्यको छलसे अथवा अधर्मसे ऐसा फुसावे कि वह कोई माल किसी मनुष्यको देदे अथवा इस पर प्रसन्नता प्रगट करें कि कोई मनुष्य कोई माल ले रक्खे अथवा धोखा खानेवाले मनुष्यको किसी ऐसे कामके करने अथवा न करनेके लिय जानबूझकर--फुसलावे, जिसको वह कमी न करता छलना. } (२४६) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- अथवा करनेमे न चूकता, जेब कि उसको इस प्रकार धोखा न दिया जाता और जो काम अथवा चूक उस मनुष्यके शरीर या चित्त या नेकनामी या मालको हानि पहुँ- चाए अथवा उसका पहुँचना अति सम्भवित हो, तो कहा जायगा कि उपरोक्त मनु- ध्यमे छल किया। स्पष्टीकरण-अधर्मसे किसी वातको छुपाना एक धोखा देना है जो इस दफाके अर्थमे गिना जासकता है। . उदाहरण। (क) देवदत्त झूठ प्रतिनी किया हुआ मुल्की नौकर बना और यजटत्तको जानबूझकर धोखा दिया और उस धोखेके कारण अधर्मसे कुछ माल जिसके लौटानेकी इच्छा न थी यनदत्तसे उधार लिया तो देवदत्तने छल किया । ख) शिवशकर किसी वस्तुपर कोई झूठा चिह्न लगाकर जानबूझकर धोखा देके रमाशंकरको यह निश्चय कराए कि वह वस्तु अमुक नामवर कारीगरकी बनाई हुई है और इस प्रकार पर धर्मसे रमाशकरको उपरोक्त वस्तुके मोल लेने और दाम देनेके लिय फुसलावे, तो शिवशंकरने छल किया। ग) शिवशकर रमाशंकरको किसी वस्तुका झूठा नमूना दिखाकर जानबूझकर धोखा देके रमाशंकरको यह निश्रय कराये कि वह वस्तु नमूनाके अनुसार है और इस प्रकार रमाशंकरको उसके मोल लेने और दाम देनेके लिये फुसलावे, तो शिवशंकरने छल किया । (घ) यदि शिकाकर किसी वस्तु के मोलमे किसी कोठीपर जिसमे शिवशकरका रुपया जमा नही है, एक विल पेश करे, और उसको यह निश्चय हो कि उस कोठीमे यह बिल न पटेगा, और इस प्रकार रमाशकरको जानबूझकर धोखा दे और इस प्रकारसे उसको, उपरोक्त वस्तुके देनेके अधर्मसे फुसलावे और उसका मोल न देना शिवशंकरकी इच्छामे हो तो शिवशकरने छल किया । (च) यदि शिवशकर ऐसी वस्तुओको हीरोके समान गिरोरखकर. जिनको वह जानता है कि हीरा नहीं है, जानबूझकर रमाशंकरको धोखा दे और इस प्रकार रमाशंकरको रुपया ऋण देनेके लिये फुसलाये, तो शिवशंकरने छल किया । (छ) शिवशंकर रमाशकरको जानबूझकर धोखा देके यह निश्चय कराए कि जो रुपया तू मुझको ऋण देगा उसके चुकानेकी मैं इच्छा रखता हूँ और इस प्रकारसे रमाशंकरको अधर्मसे रुपया ऋण देनेके लिये फुसलावे, और शिवशकरकी रुपया चुकानेकी इच्छा न हो, तो शिवशंकरने छल किया । ज) शिवशंकर रमाशंकरको जानबूझकर धोखा देके यह निश्चय कराए कि मैं तुझको इतनी नीलकी लांक दूंगा जिसका देना उसकी इच्छामें न हो और उसके द्वारा इस देनेके निश्चय पर रमाशंकरको कुछ रुपया पेशगी देनेके लिये अपईसे फुसलावे तो शिवशकरने छल किया ।

, सत्रहवाँ १७.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०। (२४७) परन्तु यदि रुपया लेते समय नीलकी लांकका देना शिवशकरकी इच्छामें हो और इसके पीछे वह अपना करार बोड डाले और नीलकी लाक न दे तो वह छल नहीं करता है परन्तु करार तोडनेक मध्ये उसपर केवल दीवानीमें नालिश होसकती है। (इ) शिवशकर रमाशकरको जानबूझकर धोखा देकै यह निश्रय कराए कि मेरे और तेरे बीचमे जो बचन हुआ था उसके मध्ये मैंने अपना इकरार पूरा किया, जिसको उसने पूरा न किया हो और इस प्रकार अधर्मसे रमाशकरको रुपया देनके लिये फुसलावे, तो शिक्शकरने छल किया। (2) शिवशकर कोई जायदाद रमाशकरके हाथ वेचे और उसके नाम लिखा पढी करदे और फिर यह जानकर कि बेचनके कारण उस मालमै मैरा कुछ अधिकार नही रहा, विना इस बातके प्रगट किये कि रमाशंकरके हाथ पहिले यह नायदाद बिक चुकी है उमाशकरके हाथ उसको बेच दे अथवा रेहन कर दे और उमाशकरसे वेच अथवा रेहनका रुपया ले ले, तो शिवशंकरने छल किया। १--(अ) ने अपनेको झूठ मूठ (ब) बनाकर एक यूनिवर्सिटी इम्तिहानका (ब) के नामसे टिकट लिया और प्रश्नोत्तरके पर्चीके सिरनामपर (व) के नामके हस्ताक्षर किये तजवीज हुई कि (अ) ने जाल तथा छलका अपराध किया (६० ला.रि. मदरास जिल्द १२ सफा १५१) २-एक मनुपने किसी जिलेकी पोलीसमें, डिस्ट्रिक्ट सुप्रिन्टेन्डेन्ट पोलीसको ऐसी बाते बतलाकर जिन्हे वह झूठ जानता था, भरती होनेका यत्न किया--तजवीज हुई कि उपरोक्त मनुष्यने कोई अपराध हिंदुस्थानके दडसग्रहको दफा १७७ या १७८ अयवा छलके अप- रात्रका उद्योग दफा ४१५ के अनुसार नही किया। (इ० ला. रि० इलाहाबाद जिल्द ६ सफा ६७) ३-जब अपराधी दो लडकियोंको मोल लेकर एक दूसरे जिलेको लाये और यह कर कि वे अची जातकी लडकिया थी उनका व्याह दो- राजपूतोके साथ कर दिया और उनसे कुछ रुपया ले लिया, तब तजवीज हुई कि उनके ऊपर दफा ३७३ का अपराध नहीं ठहराया जा सकता था वरन् वे दफा ४१५ व ४१६ के अपराधके अपराधी थे । ( वीक्ली रिपोर्टर जिल्द सफा ५५) (४१६) जब कि कोई मनुष्य किसी दूसरे मनुष्यका मिस करके कि वह कोई और मनुष्य है, अथवा जानबूझकर एक मनुप्यको कोई दूसरा मनुष्य बना दुसरा मनुष्य बनकर छल करना. करके अथवा अपने आपको या किसी दूसरे मनुष्यको ऐसा मनुष्य प्रगट करके कि जो वह स्वय अथवा दूसरा मनुष्य न हो छल करे तो कहा जावेगा कि उपरोक्त मनुष्पने दूसरा मनुष्य बनाकर छल किया। स्पष्टीकरण-जिस मनुष्यका मिस कियागया वह चाहे सचमुच हो चाहे मनसे बना लिया गया हो, तो भी यह अपराध हो सकेगा। उदाहरण। (अ) शिवशकरने अपनेको अपने नामवाले किसी धनवान कोठीवालेका मिस करके छल किया तो कहा जायगा कि शिवगकरने दूसरा मनुष्य बनकर छल किया ।

AR (२४८) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। •[अध्याय- 6) रमाशंकर यह बनकर छल करे कि मैं शिवशंकर हू और शिवशंकर एक सराहुआ मनुष्य हो तो रमाशकरने दूसरा मनुष्य बन कर छल.किया । १--अपराधीने एक दूसरे मनुष्यसे कहा कि, अमुक लहकी ब्राह्मणकी बेटी है, यद्यपि वास्तव में वह शुश्री श्री, और वह कहकर उस मनुष्यको बहकाया कि वह अपराधीको कुछ रुपया देकर उस लडकीका ब्याह अपने भाईके साथ करले तजवीज हुई कि अपराधीने दफा ४१६ के अनुसार छल करनेका अपराध किया था (चीली रिपोर्टर जिल्द १६ सफा ४२) (४१७ ) जो कोई मनुष्य छल करे उस मनुष्यको दोनों प्रकारो से किसी प्रकारको कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीआद एक वर्पतक हो सकती छल करनेका दंड, अथवा जुर्मानेका दड या दोनो दड दिये नावेंगे। टीप-(१) प्रे० म. या म० अ० या० भ० दो० (२) पोलीस दस्तन्दाजी नहीं कर- सकती है (३) अपराधीके नाम वारट जारी होगा (४) जमानत नहीं होसकसी है (५) राजी- नामा नहीं है। - १-अपराधीने अपनेको अफ्सर पोलीस कहकर गांवके लोगोसे कुछ रुपया ले लिया-तजवीज हुई कि अपराधीने छल करनेका और झूठे तौरपर अफ्सर पोलीस बननेका अपराध किया था ( वोक्ली रिपोर्टर जिल्द २ सफा २९) २-जो मनुष्य रेल गाडीके छोटे लासका किराया देकर बडे क्लासको गाडीमें बैठ जावे वह हिन्दुस्थानके दण्डसंग्रहकी दफा ४१७ का अपराधी नही हो सकता वरन् वह रेलवे ऐक्टके अनुसार अपराधी ठहराया जावेगा। (रिपोर्ट हाईकोर्ट बबई जिल्द १ सफा १४ ३-यदि कोई चौकीदार किसी मनुष्यसे, छल की रीतिपर बहकाकर अथवा अधर्मसे अथवा उस मनुष्यको दुःख पहुँचानका डर दिखाकर, कुछ रुपया लेवे तो वह छल करनेके अपराधमें, दफा ४१७ अथवा दवाकर लेनेके अपराधमै दफा ३८३ व ३८४ के अनुसार टड योग्य होगा । ( वीक्ली रिपोर्टर जिल्ट ३ सफा ३२) (४१८ ) जो कोई मनुष्य यह जामवृझकर छल करेगा कि इससे अनीति हानि उस • छल करना यह, जान मनुष्यको होनी अति सम्भवित है जिसके स्वार्थकी रक्षा करनी कर कि उससे किसी मनु ज्यको अनीतिहानि पहुँचे! उस पर उसी विषयमें जिससे वह छल सम्बन्ध रखता हो जिसकी स्वार्थकी रक्षा कानूनकी आज्ञानुसार अथवा किसी कानूनी कौल करारके करना उस अपराधी पर अवश्य है. अनुसार अवश्य है-तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारोमेंसे किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जायेगा जिसकी मीआद तीन वर्पतक होसकती है, अथवा जुर्मा- नेका दण्ड या दोनों दण्ड दिये जायेगे। टीप--दफा४१७ के अनुसार है ।...

सत्रहवा १७.] ऐक्ट नंवर ४५ सन १८६०ई० । (२४९) (४१९) जो कोई मनुष्य दूसरा मनुष्य बनकर छल करेगा, उसको दोनों प्रकारोंमेसे दूसरा मनुष्य वनकर ) किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीआद तीन वर्षातक हो सकती है, अथवा जुर्मानेका दह या दोनों दंड दिये कलना जावेगे। टीप-(१) अदालत सेगन या गै० म० या म० अ० या म० दौ० (२) पोलीस दस्त- न्दाजी कर सकती है (३) अपराधीके नाम वारट जारी होगा (४) अमानत होसकती है (५ राजीनामा नहीं है। १-यदि कोई मनुष्य अपनेको दूसरा मनुष्य प्रगट करके गवाही दे, तो उसपर झूठी गवाही देनका अपराध दफा १९३ के अनुसार ठहराना चाहिये, न कि हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहको दफा ४१९ के अनुसार । (रि. हाईकोर्ट बबई जिल्द १ सफा ८९). २-एक मनुप्यने जिसका नाम ऐसू था अपराधीको चार आने इस अभिप्रायसे दिये कि वह उसके लिये एक स्टाम्पका कागज मोललावे-जब स्टाम्प कलक्टरने अपराधीसे उसका नाम पूछा तो उसने अपना नाम बतानेके बदले ऐसूका नाम बताया-तनवीन हुई कि यह अपराध हिन्दुस्थानकी देण्ड- सग्रहकी दफा १९७ के अनुसार झूठी खबर देनेका हुआ न कि दफा ४१९ के अनुसार छलनेका । (वी. रि. जिल्द ३ मदरास ४२) ३-अपराधीने इश्तिहार दिया कि अग्रेनी शब्दोंका कोप बनाया हुआ राबर्ट एस विल्सन एम, ए का तैयार है जिसका मूल्य २॥) है तलागसे जाना गया कि अपराधीके पास कोई ऐठी पुस्तक- बेचनेके लिये नहीं थी-तजवीज हुई कि अपराधीने जाल व छलका अपराध किया था । इ० ला. रि मदरास जिल्द १३ सफा २७) . (४२०) जो कोई मनुष्य छलकरे और उसके द्वारा धोखा खानेवाले मनुष्य -छल और अधमर्मसे) को अधर्मसे फुसलावे कि वह कोई माल किसी मनुष्यको दे दे माल दिला देना. अथवा किसी किफालतुलमालके कुल या किसी मागको अथवा किसी वस्तुको जिसमे कोई दस्तखत अथवा मुहर हो अथवा जो किफालतुलमाल बन सकती हो, बनाए या बदले या नष्ट करे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी कैदका दम दिया जावेगा जिसकी मीभाट सातवर्षतक हो सकती है और वह 'जुर्मानकेमी योग्य होगा। टीप-(१) अदालत शैशन या प्रे० म० या म० अ० (२) पोलीस दस्तन्दाजी नहीं कर .सकती (३) अपराधीके नाम वारण्ट जारी होगा (-४ ) जमानत होसकती है (५) राजीनामा. नहीं है। १-अपराधीने मुहकमे अकालके अफ्सरसे कुछ चावल सोलह सेर फी रुपयाके मावसे मोल लिये और उसने प्रतिमा की कि वह उसको पन्द्रह सेरके मावसे वेचेगा, परतु उसने वह चावल बारह (२५०) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। .[अध्याय- सरकै भावसे बेच डाले, इसलिये वह दफा ४२० हि० द० का अपराधी ठहराया गया तजवीज हुई कि हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहकी दफा २४ व २४ के अनुसार किसी मनुष्यको अनुचित हानि अथवा लाभ नही हुआ इसलिये कोई अपराध हिन्दुस्थानके दंडसग्रहकी दफा ४१५ के अनुसार नही किया गया (वीक्ली रिपोर्टर जिल्द २२ सफा ८२) , -- छल छिद्र दस्तावेजों और छलछिद्रसे माल अलग करनेक विषयमें। (४२१) जो कोई मनुष्य विना लेने उचित एवज ( बदला ) के कोई माल साहूकारीमें बॅटजानेसे) अधर्मसे अथवा छलसे दूर करे अथवा छिपाए अथवा किसी मनुष्यको बचानेके लिये मालको सिपुर्द करे या देवे या दिलावे इस अभिप्रायसे अथवा यह बात अलग कर देना अथवा अतिसभवित जानकर कि उसके द्वारा उपरोक्त माल उसके साहू- छुपाना... कारो अथवा किसी दूसरे मनुष्यके साहूकारोमेंसे बीचमे कानूनके अनुसार बँटजानेके लिये रुकजावे, तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी कैदका दंड दिया जावेगा जिसकी मीआद दो वर्पतक हो सकती है, अथवा जुर्मानेका दढ या दोनों दड दिये जायेंगे। टीप-(१) प्रे० म० या म० अ० थी म० दो० (२) पोलीस दस्तन्दाजी नही करसकती ३) अपराधीके नाम वारट जारी होगा (४) जमानत है (५) राजीनामा नही है । .(४२२ ) जो कोई मनुष्य किसी ऋण अथवा तगादेको, जो उसका अपना किसी ऋण अथवा त- अथवा किसी दूसरे मनुष्यका पाना हो अपने ऋण अथवा उस गादेको अपने साहूका- | दूसरे मनुष्यके ऋणके अदा होनेके लिये कानूनके अनुसार रोको मिलनेसे अधर्म | लिये जानेमे छल अथवा अधर्मके साथ रोके तो उपरोक्त करके रोकना. मनुष्यको दोनो प्रकारोमेसे किसी प्रकारको कैदका दड दिया जावोग, जिसकी मीनाद दो वर्षतक हो सकती है, अथवा जुर्मानेका दढ या ढोनो दण्ड दिये जावेगे। टीप-दफा ४२१ के अनुसार है। ( ४२३) जो कोई मनुष्य अधर्म अथवा छलसे किसी ऐसे दस्तावेज या अधर्मसे किसी दस्तावे- 1 लेख पर दस्तखत करे अथवा उसको लिखे अथवा लिखाने- जआदिका लिखना जिस वालों से एक बने जिस दस्तावेज या लेखमे यह लिखावट 'म मोलकी तादाद झूठी [ हो कि कोई माल अथवा उपरोक्त मालका अधिकार लिखी हो. उसके द्वारा बदल जावे अथवा उसपर कोई खर्च पडे और जिसमें कोई झूठ बयान उस उपरोक्त बदलने अथवा खर्चके मोलके मध्ये लिखा .

सत्रहवा १७.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई० । (२५१) हो अथवा वह झूठ बयान उस मनुष्य अथवा उन मनुष्योंसे सम्बन्ध रखता हो जिसके अथवा जिनके वर्ताव या लाभके लिये उसका काममे आना आवश्यकीय है तो उपरोक्त मनुष्यको 'दोनो प्रकारोमैसे किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीाद दो वर्षतक हो सकती है अथवा जुर्मानेका दण्ड या दोनों दड दिये जायेंगे। टीप-दफा १२१ के अनुसार है। (४२४ ) जो कोई मनुष्य अपना अथवा किसी दूसरे मनुष्यका कोई माल अवर्म मालको अधर्मसे दूर अथवा छलस छुपाये या दूरकरे या उसके छुपाने अथवा दूर करनेमें अथवा छुपाना. अधर्म या छलस सहायता करे, अथवा अपना कुछ उचित तगादा या दावा अधर्मसे छोड दे, तो उपरोक्त मनुष्यको ढोनो प्रकारोमैसे किसी प्रकारको कैठका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीभाद दो वर्पतक हो सकती है, अथवा जुर्मानेका दह या दोनों दढ दिये जावेगे। टीप-दफा ४२१ के अनुसार है। हानि पहुँचाने ( नुकसानरसानी) के बयानमें। (४२५ ) जो कोई मनुष्य इस अमिप्रायसे अथवा इस वातका होना अति सम्मवित जानकर कि सर्व सावारणको अथवा किसी मनुष्य- हानि पहुँचाना को अनुचित हानि अथवा हरजा पहुंचाए, किसी वस्तुके नष्टका अथवा किसी वस्तु के ऐसे बदलने अथवा उसके स्थानके ऐसे बदलनेका कारण हो जिससे उसकी वस्तु अथवा काममें आनेको योग्यता नष्ट हो जाए अथवा कम हो जाये अथवा - जिससे उसपर हानि पहुँचती हो तो कहा जायगा कि उपरोक्त मनुष्यने हानि पहुंचानेका अपराध किया। स्पष्टीकरण-१-हानि पहुंचानेके अपराधमें यह कुछ अवश्य नहीं है कि उस वस्तुके मालिकको, जिसे हानि पहुंचाई गई अथवा जो नष्ट हो चुकी, हानि अथवा हरजा पहुँ- चाना अपराधी की इच्छामें हो, वरन इतनाही बहुत है कि उसका यह अभिप्राय हो अथवा इस कामका होना उसकी जानकारीमें हो कि किसी वस्तुको हानि पहुँचानेके द्वारा किसी मनुष्यको अनुचित हानि अथवा हर्जा पहुँचाए, चाहे वह वस्तु उसी मनुष्यको हो अथवा न हो। स्पष्टीकरण-२-हानि पहुंचानेका अपराध किसी ऐसे कामके द्वारा हो सकता- है. जो किसी वस्तुपर प्रभाव करे चाहे वह वस्तु , उस मनुष्यको मिलकियत हो जो हानि पहुँचानेका अपराध करता है चाहे उस मनुष्य और दूसरे मनुष्योके साझे की हो । .

-- (२५२) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- (क) शिवशकर रमाशकरको अनीतिहानि पहुँचाने के अभिप्रायसै रमाशंकरकी किसी दस्ताव जको जानबूझकर जलादे तो शिवशकर हानि पहुँचानेका अपराधी हुआ। ख) शिवशकर रमाशकरको अनुचित हानि पहुंचाने अभिप्रायसे उसके बर्फखानेमे पहुँचाए और इस प्रकारसे बर्फ पिघलनेका कारण हो तो शिवशंकर हानि पहुंचानेका कारण हुआ । ग) शिवशंकर, रमाशंकरको हानि-पहुँचानेके अभिप्रायसे रमाशकरकी अंगूठी जानबूझकर नदीमे फेकदे, तो शिवशंकर हानि पहुंचानेका अपराधी हुआ। (घ) शिवशंकर यह जानकर कि रमाशकरका जो ऋण मुझपर आता है उसको चुकानेके लिये मेरा असंवाब कुर्क होनेवाला है, उस असबायको नष्ट कर डाले, इस अभिप्रायसे कि वह उसके द्वारा रमाशंकरको अपना ऋण पानेसे रोके और इसप्रकारसे रमाशकरको हरजा पहुंचा तो शिवशंकर हानि पहुँचानेका अपराधी हुआ। - - (च) शिवशंकर किसी जहाजका बीमाकराके जानबूझकर उस जहाजके नष्ट कर डालनेका कारण हो, इस अभिप्रायसे कि वह बीमेवालोको हानि पहुँचाए तो शिवशकर हानि पहुँचानेका अपराधी हुआ। छ) शिवशकर किसी जहाजके नष्ट कर डालनेका कारण हो, इस अभिप्रायसे कि रमाशं. करको जिसने उस जहाजपर रुपया ऋण दिया हो हानि पहुँचाए, तो शिवगंगर हानि पहुँचानेका अपराधी हुआ। (ज) शिवशकर जो रमाशंकरके साझमे किसी घोडेका मालिक हो, उस घोडेको गोली मारे इस अभिप्रायसे कि वह उसके द्वारा रमागकरको अनुचित हानि पहुंचाए, तो शिवशंकर हानि पहुँचा- नेका अपराधी हुआ। (अ) शिवशकर रमाशकरके खेतमे चौपायोके घुसजानेका कारण हो इस अभिप्रायसे अथवा यह बात अति सम्मवित जानकर कि रमाशकरके स्खेतकी उपजको हानि पहुँचाए तो शिवशंकर हानि पहुँचानेका अपराधी हुआ। १-गुलजारीलालाको एक गढेमसे कुछ मिट्टी ले लेनेके अपराधमे दफा ४२५ के अनुसार दण्ड हुआ-तजवीज हाईकोर्ट हुई कि अपराधीकै कामसे ऐसी तुच्छ हानि पहुंची थी कि जिससे हिन्दु- स्थानके दण्डसग्रहकी दफा ९५ सम्बन्ध रखती थी, इसलिये अपराधी छोड दिया गया । ( वीक्ली नोटिस इलाहाबाद किताब माह नवम्बर सन् १८६२ ई. सफा २२९) २--हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहकी दफा २९५ में लिखेहुए शब्द "वस्तु'" से किसी जानदार वस्तुका अभिप्राय नहीं है । कोई साड जो किसी हिन्दूके श्राद्धमें छोड दिया जावे एक वस्तु इस दफाके अभिप्रायसे भीतर नहीं है, और जब कि ऐसे जानवरको मुसलमान चुराकर गोश्त और चमडेके लालचसे मारडालें तो कोई अपराध दफा २९५ के अनुसार नही किया गया और साड हिन्दुस्थानके -दण्डसंग्रहकी दफा ३७८ या ४०३ या ४२५ के-अभिप्रायके भीतर स्थावर घनमे नहीं है । ( इ. ला. रि• कलकत्ता जिल्द ७ सफा २५२) सत्रहवा १७.] एक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई०। (४२६ ) जो कोई मनुष्य हानि पहुँचाये, उसको दोनों प्रकारों से किसी प्रकारको कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद तीन महीनतक हानि पहुंचानका दड हो सकती हैं अथवा जुर्मानका दण्ड या दोनो दण्ड दिये जावेंगे। टीप-(१) कोई माजस्ट्रेट (२) पोलीस दस्तन्दाजी नहीं करसकती है ( ३ ) अपरावीके नाम वारट जारी होगा (४) जमानत है (५) राजीनामा होसकती है जब कि हानि अयबा हरजा किसी अपनेही मनुष्यका क्यिा गया हो। १-किसी ऐसे दस्तावेजका नष्ट कर डालना जिसमे ऐसे इकरारका नियम लिखा है, कि जो सभ्यताविरुद्ध होनेके कारण नानासन (न मानने योग्य ) ई हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहको दफा ४२६ के हानि पहुंचानक अपराधमें गिना जायगा । (३० ला रि• मदरास जिल्द ९ सफा ४०१) २-उस जानवरका मालिक, जो किसी दूसरे मनुष्यके खेतपर जाकर उसके खेतोंको हानि पहुंचावे हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहकी दफा ४२६ के अनुसार में लिखे हुए हानि पहुँचानेके अपराधका अपरावी नहीं ठहर सक्ता, सिवाय उस अवम्या कि जब उसने उस जानवरको जानबूझकर उस खेतमे इंका दिया हो। (इ० ला रि बम्बई जिल्द ९ सफा १७३) ३-एक मनुष्य (अ) को किसी मजिस्ट्रेटने हानि पहुँचाने अपराध दण्ड दिया, इस बात पर कि उसने २०) का एक प्रामीसरी नौट फाड डाला तजवीज हुई कि जो अपराध अपराधीन किया है वह हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहकी दफा ४७७ में गिना जायगा । (४२७) जो कोई मनुष्य हानि पहुँचानेका अपराधी हो और उसके द्वारा पचास हानि पहुंचानेके द्वारा) रुपये अयवा अधिकको हानि या हरजा का कारण हो उसको दोनों पचासरुपया तकका हरजा प्रकारों में किसी प्रकारका कैदका प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका टण्डं दिया जावेगा जिसकी पहुचना. मीआद दो वर्पतक हो सकती है. अथवा जुर्मानका दण्ड या दोनों दण्ड दिये जावेगे। टीप--(१) प्रे०म० या म० अ० या म० दो-(२) पोलीस दस्तन्दाजी नहीं कर सकती ३) अपराधीकै नाम वारट जारी होगा (४) जमानत है (५) राजीनामा नहीं है । सिवाय उस अवस्था कि जब हानि अपनेही मनुष्यकी की गई हो। (४२८) जो कोई मनुष्य दश रुपयेक मोलके किसी पशु अथवा पशुओंके मार डालने दश रुपयावाले किमी) या विप देने या उसके किसी अगको वेकाम करने अथवा उसको पशुको मारकर हानि पहुँ- काम करनेकेद्वारा, हानि पहुंचानेका अपराधी हो उस मनुष्यको चाना. दोनो प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जायेगा, जिसकी मीआद दो वर्पतक होसकती है अथवा जुर्मानका दण्ड या दोनो दड दिये जायेंगे। टीप-(१)प्रै० म० या म० अ० या म. दोयम ( २ ) पोलीस दस्तन्दाजी करसकती है (३) वारण्ट जारी होगा (४) जमानत है (५) राजीनामा नहीं है। .

-- . (२५४). हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [ अध्याय- (४२९) जो कोई मनुष्य किसी हाथी या ऊंट या घोडे या खच्चर या भैस या बैल पशुआदि अथवा पत्रास] या गाय या बधियाको जिसका मोल चाहे जितना हो अथवा पचास रुपयेके मोलका कोई पशु } रुपये या अधिक मोलके किसी दूसरे पशुको मार डालने या विष मार डालने आदिस | देने या उसके अगको काम अथवा उसको वेकाम करनेकेद्वारा हानि पहुंचाना. हानि पहुंचावेगा तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी कैदका दण्द दिया जावेगा, जिसकी मीआद पांच वर्पतक हो सकती है अथवा जुर्मा- नेका दड या दोनो दड दिया जावेगे । टीप-दफा ४२८ के अनुसार है । परन्तु इसकी तजवीज सेगनमें भी हो सक्ती है। १-अपराधीने एक सांडको, जो एक मनुष्य चुन्नीलालने हिन्दू धर्मशास्त्रके अनुसार अपने चचेरे भाईके मरने पर छोड रक्खा था, इस कारण गोलोसे मारडाला कि उसने अपराधीके खेत को कुछ हानि पहुँचाई थी मजिस्ट्रेट उसको टका ४२९ का अपराधी ठहराया-तजवीज हुई कि उपरोक्त सांड पर किसीका अधिकार न था, इसलिये दफा ४२९ का अपराध उसपर नहीं प्रमाणित होसकता (वीली नोटिस इलाहाबाद किताव माह अप्रेल सन् १८८४ ई०सफा ७८) ( ४३० ) जो कोई मनुष्य किसी ऐसे कामके द्वास हानि पहुँचावे जिससे खेतीके खेती आदिके लिये) कामों या मनुष्योके खानेपीनेके कामो या ऐसे पशुओंके कि जो माल पानी की कमी करकें है खानेपीनेके कामों अथवा स्वच्छताके कामो अथवा कोई कारखाना हानि पहुंचाना. चलनेके कामोके लिये पानी का पहुँचना घटे अथवा घटना अति सम्भवित हो-तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दंड दियों जावेगा जिसकी मीआद पाचवर्पतक हो सकती है अथवा जुर्मानेका ठण्ड या दोनों दंड दिये जावेंगे। टीप-दफा ४२९ के अनुसार है । १--जब गवाहीसे यह बात पाई गई कि अकेला मुद्दई एक पानीकी नहरका मालिक है, और अपराधीको किसी प्रकारका अधिकार नहीं है, तो अपराधीकी ओरसे पानीका कमकर देना दफा ४३० के अनुसार हानि पहुँचाने के अपराधमे गिना जायगा, चाहे वह उपरोक्त नहरका पानी कम करनेके मध्ये अपना आधिकार बयान करता हो । ( ४३१ ) जो कोई मनुष्य कुछ ऐसा काम करके, जिससे कोई सर्व सम्बन्धी मार्ग या सर्वसम्बन्धी मार्ग या, पुल, अथवा नाव चलने योग्य नदी या नहर या नाला दुर्घट हो नदी या पुलको हानि पहु- जाय अथवा चलने या माल पहुंचानेके लिये आने जाने योग्य न बानेकेद्वारा हानि पहुचाना रहे अथवा उसकी निर्विघ्नतामें विघ्न पडजावे अथवा ऐसा हो जाना वह अति सम्भवित जानता हो-हानि पहुंचाव-तो उसको दोनो प्रकारोमेंसे किसी प्रकारको कैदका दड दिया जायेगा जिसकी मीआद पांचवर्षतक हो सकती है अथवा जुर्मानेका दंड या दोनों दंड दिये जावेगे। टीप---दफा ४२९ के अनुसार है। , - सत्रहवाँ १७.] ऐक्ट नवरं ४५ सन् १८६० ई०। (२५५) (४३२ ) जो कोई मनुष्य किसी ऐसे कामके द्वारा हानि पहुंचानेका अपराधी हो-जो अहलाकार अथवा पा किसी ऐसे सैलाव फैलानेका अथवा किसी नावदानकी ऐसी रोकका नीका निकास रोककर हानि पहुँचाना कारण हो, अथवा जिसकों अपराधी जानता है कि उस कामके कारणसे ऐसे सैलाव फैलने अथवा ऐसी रोकका होना सम्भव है जिससे हानि या हरना हो सकता है, तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारों से किसी प्रकारको कैदका दड दिया जावेगा, जिसकी मीआट पाचवर्ष तक हो सकती है, अथवा जुर्मानेका टड या दोनो दड दिये जावेगे। टीप-दफा ४२९के अनुसार है । (४३३ ) जो कोई मनुष्य किसी लायट हौस (प्रकाशगृह) अथवा किसी प्रका- लायट हौस (प्रका-) शको जो समुद्री चिह्नकी माति काममें आता हो; अथवा किसी शगृह) अथवा समुद्रके समुद्री चिह्न या पानीपर तैरनेवाले किसी चिह, अथवा किसी चिहको मिटाकर अथवा और पदर्थको जो जहाज चलानेवालोंका मार्ग बतानेके लिये हटाकर अथवा कुछ एक निकम्मा कर देकर हानि बनाया गया हो मिटाने अथवा हटानेके द्वारा या किसी ऐसे पहुचाना कामकेद्वारा, जो ऐसे लायट हौस या समुद्री चिह या पानीपर तैरनेवाले किसी चिह्न या उस प्रकारके किसी और पदार्थको जिसका वर्णन ऊपर हुआ, जहाजके चलानेवालोंको मार्ग बतानेके लिये कुछ एक वकाम कर दे, हानि पहुंचानेका अप- राधी हो तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोमेंसे किसी प्रकारकी कैदका दढ दिया जावेगा जिसकी मीमाद सातवर्षतक हो सकती है अथवा जुर्मानेका दह या दोनों दह दिये जावेगे। टीप-(१) अदालत सैशन (२) पोलीस दस्सन्दाजी करसकती है (३) वारट जारी होगा (४) जमानत है (५) राजीनामा नहीं है । ( ४३४ ) जो कोई मनुष्य किसी ऐसे धरतीके ठीहेको जो सरकारी आज्ञानुसार बनाया गया हो, मिटाने अयत्रा हटानेके द्वारा, अथवा किसी धरतीके ठीहे (चिन्ह ऐसे कामके द्वारा जिससे वह धरतीका ठीहा कुछ वेकाम हो जाय को जो सरकारकी आज्ञा- नुसार बनाया गयाहो , हानि पहुंचानेका अपराधी हो, तो उपरोक मनुष्यको दोनों मिटा कर अथवा हटाकर | प्रकारों से किसी प्रकारको कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी हानि पहुचाना. मीमाद एक वर्षतक हो सकती है, अथवा जुर्मानेका दढ या दोनों दण्ड दिये जायेंगे। टीप-(१) प्रे० म० या म० अ० या म० दो० (२) पोलीस दस्तन्दानी नही करसकती (३) अपराधीके नाम वारट जारी होगा (४) जमानत हो सकती है (५) राजीनामा नहीं है।

(२५६) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह । [अध्याय- ( ४३५ ) जो कोई मनुष्य आग अथवा किसी भकसे उडजानेवाले पदार्थके द्वारा हानि पहुचानेका अपराधी हो, इस अभिप्रायसे अथवा यह आग या भकसे उड- नेवाले पदार्थके द्वारा सौ बात अतिसम्भवित जानकर कि किसी सौ रुपया अथवा अधिकके रुपयातक हरजा पहुचा- मालमें या जब कि जायदाद खेतीकी उपज हो तो दश रुपया नेके अभिप्रायसे हानि या अधिकके मालमें हरजा पहुंचाए तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो पहुचाना. प्रकारोमेंसे किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद सातवर्पतक हो सकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप-(१) अदालत मेगन या प्रे० म० या म० अ० (२) पोलीस दस्तन्दाजी करसकती (३) अपराधीके नाम वारण्ट जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है। (सब लोगोको उचित है कि वे दफा ४३५ व ४३६ के अपराधांकी सूचना दे) ऐक्ट न१० सन् १८८२ ई० को दफा ४४ को देखो। { ४३६.) जो कोई मनुष्य आग अथवा किसी भकसे उडजाने वाले पदार्यके • “आग या मकसे उड. द्वारा हानि पहुँचानेका अपराधी हो, इस अभिप्रायसे अथवा यह जानेवाले पदार्थके द्वारा वात अति सम्मवित जानकर कि उसके द्वारा किसी घरको घर आदि नष्ट करनेक अभिप्रायसे हानि पहु. वरवादीका कारण हो पूजाके स्थानको भाति अथवा मनुष्योके चाना. रहनेके स्थानकी माति या माल असबाबके रखनेके स्थानकी भांति काममे आता हो, तो उपरोक्त मनुष्यको जन्मभरके लिये देश निकालेका दंड या दोनो प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीआद दशवर्पतक होसकती है, और वह जुर्मानेकेभी योग्य होगा । टीप-(१) अदालत सेगन (२) पोलीस दस्तन्दाजी कर सकती है (३) अपराधीके नाम वारंट जारी होगा (४) अमानत नहीं है (५) राजीनामा है। १-आगके द्वारा हानि पहुँचानेके अपरध (दफा ४३६) में यह वात अवश्य होना चाहिये कि आगं ऐसे घरमें लगाई गई हो जो मनुष्योके रहनेके लिये काममें आता हो (वील्ली रिपोर्टर जिल्द ८ सफा ३० (४३७ ) जो कोई मनुष्य किसी पटी हुई नाव ( जहाज ) अथवा किसी नाके पटी हुई नाव या) मध्ये जिसमे ५६० मन अथवा अधिक बोझ लद सकता हो ५६० मन बोझ ले हानि पहुम्चनेका अपराधी हो इस अभिप्रायसे अथवा यह वात अति जानेवाले नावको नष्ट सम्मवित जानकर कि उसको नष्ट करे अथवा उसको निर्विघ्नतामें करना अथवा उसको जोखिममे डालनेके अ- विघ्न डाले, तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारोंमेसे किसी प्रकारको भिप्रायसे हानि पहुचाना. कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद दश वर्ष तक हो सकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप-दफा ४३६ के अनुसार है । ) सत्रहवा १७.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०। (२५७) ६४३८ ) जो कोई मनुष्य आग अथवा किसी मकसे उड जानेवाल पदार्थके द्वारा उस पिछली दफामे कही) हानिको पहुंचावे अथवा पहुँचानेका उद्योग करे. जो इससे हुई हानि पहुंचानेका दण्ड | पहिलेकी पिछली दफामें कही गई है, तो उस मनुष्यको देश -जव कि वह हानि आगके निकालेका दण्ड या दोनो प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका द्वारा अथवा किसी भकसे दण्ड दिया जायगा जिसकी मीआद दश वर्मतक हो सकती उडनेवाले पदार्थक द्वारा है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। पहुंचाई जाय टीप-दफा ४३६ के अनुसार है। ( ४३९) जो कोई मनुष्य किसी नावको जानबूझकर कम गहरे पानीकी धरती पर चौरी आदि करनेके टकराए, अथवा किनारेपर टकराए, इस अभिप्रायसे कि कोई अभिप्रायसे नावको कि माल जो उस नाबमे हो चुराए या अधर्मसे उस मालको नारे पर टकराना, अनीतिव्यय (तसर्लफ वेजा) मे लाए अथवा इस अभिप्रायसे कि वह माल चुराया अथवा अनीतिव्ययमें लाया जावे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारो से किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीभाद दश वर्षतक हो सकती है और वह जुर्मानेके मी योग्य होगा। टीप-दफा ४३६ के अनुसार है। (४४)जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यकी मृत्यु या दु ख (जर, या अनीति रोक मृत्यु अथवा दु.ख (मुजाहिमतवेजा ) की, या मृत्यु या दुःख या अनीति रोकके (बरर) पहुंचानेकी तै- डर बतानेकी तैयारी करके हानि पहुंचावे, तो उस मनुष्यको यारीके उपरात हानि पहुँ- दोनो प्रकारोमेंसे किसी प्रकार की कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीद पाच वर्षतक हो सकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप-(१) अ० से० या गै० म० या म० अ० (२) पोलीस दस्तन्दाजी कर सकती है (३) अपराधीके नाम वारट जारी होगा (४) जमानत नहीं है (५) राजीनामा नहीं है । - चाना. दण्ड योग्य अनीति प्रवेश ( अनधिकार प्रवेश) (मुदाखलत बेजा मुजरिमाना) के वर्णनमें। (१४१) जो कोई मनुष्य किसी ऐसे माल मिलकियतपर जिस पर दूसरेका दण्ड योग्य अनीति] अधिकार हो, कुछ अपराध करने अथवा जिस मनुष्यका प्रवेश ( मदाखलतबेजा उस माल मिलकियत पर अधिकार हो उसको डराने अथवा मुनरिमाना). उसका अपमान करने अथवा उसको खेद पहुंचानेके अभिप्रा- यसे दखल करेगा अथवा कानूनानुसार उस माल मिलकियतपर दखल करके उस (२५८.) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- मनुष्यको डराने अथवा अपमान करने अथवा खेद पहुँचानेके अभिप्रायसे वहां -अनीति रीति पर ठहरेगा तो कहा जावेगा कि उसने दंड योग्य मदाखलत बेजा" की-1 (देखो दफा ४०) १---जो मनुष्य सर्व सम्बधी मार्गसे तीन मीलकी दूरीपर किरायेपर नाव चलावे, उसके मध्ये दफा ४४१ का अपराध होना नही ठहराया जा सकता । ( इ. ला. रि. इलाहाबाद जिल्द । सफा ५२७) २- लोकल फडके किसी बाजारके भीतर केवल इस अभिप्रायसे जाना कि उसको महसूल 'न देना पडे, मदाखलतबेजाके अपराधमे नहीं आता है । ( इ० ला• रि• मदरास जिल्द ५ सफा ३८२) ३-जब कोई अजनबी मनुष्य विना धुलाए और बिना किसी अधिकारके आधीरातको किसी प्रतिष्ठित स्त्रीके सोनेवाले कमरेमें घुसे, और जब उसके पकडनेकी इच्छा की जावे तो वह वहांसे भागनेके लिये बहुतसा यल व श्रमकरे-ऐसी अवस्थामे अदालतको जान लेना चाहिये कि उसका कमरेमे घुसना इस अभिप्रायसे था जिसका वर्णन हिन्दुस्थानके दण्डसंग्रहको दफा ४४१ मे हुवा है । इ. ला. रि० कलकत्ता जिल्द १६ दफा ६५७) ( ४४२ ) जो कोई मनुष्य किसी ऐसे घर या डेरे या नावमे जो मनुष्योके रहनेकी घरकी मदाखखलत ) भाति काममे आती हो अथवा किसी ऐसे घरमें जो पूजाके लिये यजा (अनधिकार प्रवेश) अथवा मालकी चौकसीके लिये काममे आता हो घुसने अथवा ठहरे रहने के द्वारा दण्ड योग्य मदाखलत वैजा करे तो कहा जावेगा कि उपरोक्त मनुष्यने "घरको मदाखलत वेजा" की। स्पष्टीकरण-दण्ड योग्य मदाखलतवेजा करनेवाले मनुष्यका कोई अग घरमें पहुंच जाना घरकी मदाखलतबेजाके लिये काफी समझा जायगा । ( देखो दफा ४० १--जब कोई मनुष्य हवालातमे इस अभिप्रायसे दाखिल हो कि वह एक कैदीके पास कि जिसकी तजवीज होनेको है, खाना ले जाए अथवा ले जानेका यत्न करे तो उसका काम हिन्दुस्थानके दण्डसंग्रहको दफा ४४२ में कहे हुए मदाखलतवेजाके अपराधमे न गिना जायगा । (इ० ला• रि० इलाहाबाद जिल्द २ सफा ३०१) (४४३) जो कोई मनुष्य पहिलेसे यह यत्न करके घरको मदाखलंतबेजा करे, छुपाकर घरकी मदा- कि जो मनुष्य उसको उस घर या डेरा या नावसे, कि जिसमें मदा- खलत बेजा. खलत बेजा की जाय, निकाल देने अथवा रोकनेका अधिकार रखता हो उससे वह मदाखलत बेजा छुपी रहे, तो कहा जायगा कि उसने "छुपाकर घरकी 'मदाखलत बेजा" की।

-सत्रहवा १७.J एक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई० । (२५९) ("छुपाकर घरकी मदाखलतबेजार से अभिप्राय "घरमै मदाखलतरेजा करने के लिये बात लगाना है) . (४४४ ) जो कोई मनुष्य सूर्यास्तके उपरान और सूर्योदयसे पहिले छुपाकर उरको छुपाकर रातके समय) मदाखलतवेजा करे तो कहाजावेगा कि उपरोक्त मनुष्यने "छुपाकर घरकी मदाखलतवेना. रातके समय घरकी मदाखलतवेजा' की । (४४५) वह मनुष्य जो “ घरकी मदाखलतवेजा" का अराधी हो "वर फोडने घर फोडना( नकबजनी)} वाला कहलावेगा, यदि वह घर अथवा घरके किसी भागमे नीचे लिखे हुए छ: प्रकारो से किसीप्रकारपर मदाखलत कर, अयवा, यदि कोई अपराध करनेके लिये घरमे या उसके किसी मागम उपस्थित हो अथवा वहाँ किसी अपराधको करके, बतलाये हुए छः प्रकारोमसे किसी एक प्रकारपर उस घरस अयवा उस घरके किसी मागसे बाहर निकल आये-अर्थात्- पहिले-यदि वह ऐसे मार्गसे होकर भीतर जाए अथवा बाहर निकले जो स्वय उसने ही अथवा घरको मदाखलतबेजाके किसी सहायकने घरकी महाखात बेजा करनेके लिये बना लिया हो। दूसरे -यदि वह ऐसे मार्गसे होकर भीतर घुसजाए अथवा बाहर निकल आए, जो सिवाय उसके अथवा उस अपराधके किसी सहायकके और किसी मनुष्यके आनेजानेके अमि- प्रायसे न बना हो अथवा किसी ऐसे मार्ग होकर जहा वह नितेनी लगाकर अयबा दीवारपर या घरपर चढकर पहुंचा हो। तीसरे-यदि वह किसी ऐसे मार्ग होकर भीतर घुसे या वाहर निकसे जिसको उसने स्वय अथवा घरकी मदाखलतंबजाके किसी सहायकने घरको मदाखलतवेजा करनेके लिये ऐसे यत्नोसे खोल लिया हो जिनसे उस मार्गका खोला जाना घरके रहनेवालेके विचारमं न हो। चौथे-- यदि वह घरकी मढाखलतवेजा करनेके लिये, अथवा घरको मदाखलत वेजा करनेके पश्चात् घरसे बाहर निकलनेके लिये कोई ताला खोलकर सजाए अथवा गहर निकल आए। पॉचंब--यदि वह भनीतिवल ( जबमुजरिमाना ) को काममें लाकर अथवा आक्रमण (हमला ) करके अपवा किसी मनुष्पको आक्रमणको धमकी देकर भीतर घुसजाए अथवा बाहर निकल जाए (२६०) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- RA छठवें -यदि वह किसी ऐसे मार्गसे होकर भीतर घुसे या बाहर निकले जिसको वह जानता हो कि वह ऐसे घुसने अथवा निकलनेकी रोकके लिये बन्द किया गया है, और वह स्वयं उसहीने अथवा घरकी मदाखलतबेजाके किसी सहायकने खोल लिया हो। स्पष्टीकरण-कोई शागिर्द पेशेका घर अथवा और घर जिसमें, घरमें रह- नेवालेका अधिकार हो और जिसके तथा उस घरके बीचमें कोई जानेके लिये भीतरी मार्ग ( पैवस्त अन्दरूनी आमदरफ्त ) हो, इस दफाके अर्थ अनुसार उसी घरका भाग है। 2 उदाहरण। (क) शिवशंकरने रमाशकरके घरकी दीवारमे छिद्र करके और उस छिद्रमें हाथ डालके घरकी मदाखलत बेजा की तो यह घर फोडना हुवा- (ख) शिवशंकर किसी जहाजके भीतर एक धुंधुवेकी राहसे, जो पटावके बीचमे हो घुसकर घरकी मदाखलतबेजा करे, तो यह घर फोडना है । (ग) शिवशंकर एक खिडकी की राहसे रमाशकरके घरमें घुसकर घरकी मदाखलतबेजा करे तो यह घर फोडना है। (घ) शिवशकर एक बद द्वार खोलकर उसकी सहमे रमाशकरके घरके भीतर पहुंचकर घरकी मदाखलतबेजा करे, तो यह घर फोडना है (च) शिवशंकरने रमाशकरके द्वारके किवाडकी बिल्ली एक छिद्रमें तार डालकर उठा दी और घरमें घुसकर घरकी मदाखलतवेजा की, तो यह घर फोडना हुआ । (छ) शिवशंकर रमाशकरके घरके द्वारकी कुंजी जो रमाशकरके पाससे खोगई हो पाए और उस कुंजीसे द्वारका ताला खोल रमाशकरके घरमें घुसकर घरकी मदाखलतबेजा करे तो यह घर फोडना है। (ज) शिवशंकर अपने द्वारमे खडा हो और रमाशकर उसको मारकर तथा गिराकर बलपूर्वक घरमे घुसे और घरको मदाखलतबेजा करे, तो यह घर फोडना है । झ) शिवशकर रमाशंकरका पौरिया रमागकरके द्वारमे खडा होता और उमाशंकर शिवशं- करको इस बातकी धमकी देकर कि जो तू मुझको जानेसे रोकेगा पीयजायगा, घरमै घुसजावे, और धरकी मदाखलतबेजा करे, तो यह घर फोडना है। ( ४४६ ) जो कोई मनुष्य सूर्यास्तके पश्चात् और सूर्योदयसे पहिले घर फोडे तो कहा रात के समय घर फोडना.} जायगा कि उसने रातके समय घर फोडा । १----दीवारपर कमदके द्वारा चढकर घरमे पहुँचना दफा ४४६ के अपराधमे गिनाजायगा (वीक्ली रिपोर्टर जिल्द २ सफा २५) सत्रहवाँ १७.] ऐक्ट नवरं ४५ सन् १८६० ई०। (२६१) बजाका दण्ड, २-दूकानका द्वार तोडकर भीतर घुसना, रातके समय घरका फोडना है न कि केवल रातके -समय घरकी मदाखलत बेजा (वी. रि० जिल्द ४ स० १९) • ( ४ ४७ ) जो कोई मनुष्य दण्ड योग्य मदाखलतबेजाका अपराधी हो उसको दोनों दण्ड योग्य मदाखलत] प्रकारोमेंसे किसी प्रकारको केटका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद तीन महीनेतक हो सकती है अथवा जुर्मानेका दण्ड जो पाचसौ रुपया तक हो सकता है अथवा दोनों दण्ड दिये जावेगे। टीप-(१) कोई मजिस्ट्रेट (२) पोलीस दत्तन्दाजी करसकती है (३) अराधोके नाम समन जारी होगा (४)जमानत होसकती है (५) राजीनामा है। १-(म) का (ब) के खेतसे कुछ सम्बन्ध न था, उसने एक हिरन पर जो (ब) के खेतके पास था गोली चलाई, हिरन (ब) के खेतकी और चला गया (अ) हिरनके पीछे (ब) के खेत में घुसा तजवीज हुई कि (अ) का यह काम मदाखलत बेजाकी सीमातक नहीं पहुँचसकता -(इ० ला. रि० कलकत्ता जिल्द ४ सफा ८३७) २-सर्व साधारण नदीके किसी भागमे अकेले एकही मनुष्यको मछली मारनेका अधिकार था यदि कोई दूसरा मनुष्य अनुचित रीतिपर उस अधिकारको तोड डालें तो वह हिन्दुस्थानके दडसमहमे लिखे हुए मदाखलत बेजाके अपराधका अपराधी न होगा । (इ. ला. रि० कलकत्ता जिल्द २ ...सफा ३५४) ३-~-एक कानिस्टेविल व दूसरे मनुष्योने किसी घरसे भीतर घुसकर कुछ मनुष्यों को जुवा खेलते हुए पकडा परन्तु कानिस्टेबिलने उन जुवारियोंसे कुछ रुपया लेकर उन्हें छोड दिया-ऐसी अवस्थाम अपराधीने मदाखलत बेजा व दबाकर लेनेका अपराध नहीं किया बरन् कानिस्टेबिलके मध्ये घूस- लेनेका अपराध हुवा और दूसरे मनुष्योंके मध्ये अपराधमें सहायता करनेनेका । (वी० रि० जिल्द५ सफा ४९) (१४८) जो कोई मनुष्य घरकी मदाखलत वैजाका अपराधी हो, उसको दोनों प्रकारों. घरकी मदाखलतबेजा-) मेंसे किसी प्रकारकी केटका दण्ड दिया जायेगा, जिसकी मीभाद एक वर्पतक होसकती है, अथवा जुर्मानेका दण्ड जो एक हजार रुपयेतक होसकता है, अथवा दोनों दण्ड दिये जावेगे। टीप १) कोई मजिस्ट्रेट (२)पोलीस दस्तन्दाजी करसकती है (३) अपराधोके नाम वारट जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा है। -(अ)ने (ब) की विना आगा उसके घरमै घुसकर उसकी स्त्रीके साथ व्यभिचार किया तजवीज हुई कि (अ) को व्यभिचार और घरकी मदाखलतवेजाके अपराधमे अलग २ दण्ड दिया जासकता था क्योकि वे अलग २ अपराध थे । ( पजाब रिकार्ड न० ५ सन् १८७१ ई का दण्ड, . (२६२) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- (४१९ जो कोई मनुष्य किसी ऐसे अपराधको करनेके लिये जिसके बदले वधका कोई ऐसा अपराध कर दड ठहराया गया है, घरकी मदाखलत वेजा करे तो उस मनुष्यको नेके लिये जिसका दड, जन्ममरके लिये देश निकालेका दड अथवा कठिन कैदका दड दिया वध हो घरकी मदाखलत जावेगा, जिसकी मीआद दश वर्षसे अधिक न हो और यह जुर्मा- बेजा करनी. नेके भी योग्य होगा। टीप- (१) अदालत सेशन (२) पोलीस.दस्तन्दाजी करसकती है (३) अपराधीके नाम वारंट जारी होगा (४) जमानत नही है (५) राजीनामा नही है । (४५०) जो कोई मनुष्य किसी ऐसे अपराधको मरनेके लिये, जिसके बदलेमे जन्म मरके देश निकाले जन्ममरके देश निकालेका दण्ड ठहराया गया है, घरकी मदाखलत टण्ड योग्य कोई अपराध | वेजा करे उस मनुष्यको दोनों प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी कैढका करनेके लिये घरकी मदा. दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद दश वर्षसे अधिक न हो और वह खलत वेजा करनी. जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप-(१) अदालत सेशन (२) पोलीस दस्तन्दाजी करसकती है (३) अपराधीके नाम वारंट जारी होगा (४) जमानत नहीं है (५) राजीनामा नहीं है । (४९१) जो कोई मनुष्य किसी ऐसे अपराधको करनेके लिये जिसके बदलेमे कैदका कैदके दण्ड योग्य अप- दण्ड ठहराया गया है, घरको मदाखलत बेजा करे, उस मनुष्यको राध करनेके लिये घरकी / दोनों प्रकारोंमेसे किसी प्रकारको केदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मदाखलत बेजा करनी. | मीआद दो वर्पतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा और यदि वह अपराध जिसके करनेकी इच्छा चोरी हो तो कैदको मीआद सात वर्पतक है होसकती है। टीप-(१) कोई मजिस्ट्रेट (२) पोलीस दस्तन्दाजी कर सकती है (३).अपराधीके नाम बारट जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है। और जब कि चोरी करनेकी इच्छा हो तव,-- टीप--(१) अदालत सेशन या प्र० म. या म० अ० या म० दो० (२) पोलीस दुस्तन्दाजी कर सकती है ( ३ ) अपराधीके नाम वारण्ट जारी होगा (४) जमानत नहीं है (५) राजीनामा नहीं है। (४९२ ) जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यको दुःख ( जरर) पहुंचाने अथवा किसी मनुष्यको दुःख) किसी मनुष्यपर आक्रमण ( हमला करने या किसी मनु- (जरर पहुचाने की तैया. ध्यकी अनीतिरोक ( मुजाहिमत वेजा ) करनेके लिये, राके उपरांत घरकी मदा- खलत वेजा करना. अथवा किसी मनुष्यको दुःख या आक्रमण या अनीतिरोक- का डर दिखानेके लिये तैयारी करके घरकी मदाखलतबेजा करे उस मनुष्यको सत्रहवा १७.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०। (२६३) दोनो प्रकारो से किसी प्रकारको कैदका दण्ड दिया जावेगा- जिसकी मीआद सान वर्पतक हो सकती है और वह जुर्मानेके मी योग्य होगा। टीप-दफा ४५१ के नं. २ के अनुसार है। १--जब कोई मनुष्य गिरफ्तारीके एक आली वारट द्वारा किसीके घरमें जाकर किसी मनुष्य को उसकी इच्छाविरुद्ध उस वारटके जोरसे पकड लावे तो वह घरकी मदाखलतबेजाका अपराधी दफा ४५२ के अनुसार समझा जायगा । (वी० रि० जिल्द १२ सफा ३३) ( १९३) जो कोई मनुष्य छुपकर घरकी मदाखलतवेजाअथवा घर फोडनेका अपराधी छुपकर घरकी मदाख-) हो उसको दोनों प्रकारोमेंसे किसी प्रकारकी कैदका दह दिया लत बेजा अथवा घर जावेगा जिसकी मीआद दो वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके फोडनेका दण्ड, मी योग्य होगा। टीप-(१) ० म० या म० अ० या म. टो०. (२) पोलीस दस्तन्दाजी करसकती है (३) अपराधीके नाम वारट जारी होगा (४) जमानत नहीं है (५) राजीनामा नही है । (बेतके दडके लिये ऐक्ट न०६ सन् १८६४ ई० दफा २ व ३ व ४ को देखो) १-जब अपराधी एफ दूकानके बाहर पकडा गया और उस दुकानका द्वार टूटा हुआ मिला, तो अपराधीपर घर फोडनेका अपराध ठहराया गया । (वी. रि० जिल्द ४ सफा १४ (१५४ ) जो कोई मनुष्य किसी अपराधको करनेके लिये जिसके बदलेमें कैदका कैदके दण्ड योग्य कि दड ठहराया गया है छुपकर घरकी मदाखलतबेजा करे अथवा सी अपराधको करनेके घर फोडे, उस मनुष्यको दोनो प्रकारोमेंसे किसी प्रकारकी कैदका लिये छुपकर घरकी महा- खलत बेजा अथवा घर दड दिया जायेगा, जिसकी मीआद तीन वर्पतक हो सकती है फोडना. और वह जुर्मानेकेभी योग्य होगा और यदि वह अपराध जिसके करनेकी इच्छा हो चोरी हो तो कैदकी मीाद दशवर्षतक हो सकती है। टीप-दफा ४५२ के अनुसार है। ( १५५ ) जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यको दुःख पहुंचाने अथवा किसी मनुष्यपर किसी मनुष्यको दुःख) आक्रमण करने अथवा किसी मनुष्यके अनीति रोक करनेकी या पहुंचाने की तैयारी करनेके किमी मनुष्यको दुख या आक्रमण या अनीति रोकका डर उपरांत घरकामदाखलत दिखानेकी तैयारी करके छुपकर घरकी मदाखलतवेजा करे अथवा वेजा अथवा घर फोडना घर फोडे, उस मनुष्यको दोनों प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दडे दिया जायेगा जिसकी मीआद १० वर्पतक हो सकती है और वह जुर्मानेके मी योग्य होगा। टीप-दफा ४५२ के अनुसार है।

(२६४) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- (४१६ ) जो कोई मनुष्य, रातके समय छुपकर घरकी भदाखलतबेजा करे रातकै समय छुपकर ] अथवा रातके समय घर फोडे, उसको दोनों प्रकारों से किसी घरकी मदाखलत बेजा प्रकारकी कैदका दंड दिया जावेगा जिसकी मीभाद तीन वर्पतक- करने अथवा घर फोडने का दंड, हो सकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप--(१) अदालत सेशन या गै० म० या म० अ० या म० दो० (२) दस्तन्दाजी पोलीस (३) अपराधीके नाम वारंट जारी होगा (४) बिना अमानत (५) राजीनामा- नहीं है । १-रातके समय घर फोडने और चोरी करनेका अपराध एकही है और उनके मध्ये अलग २ दड नहीं होसकता । (वी. रि० जिल्द २ सफा ६३) २--हथियारोसे सजे पांच मनुष्य, रातके समय छुपकर घरकी मदाखलतबेजाका अपराध करते हुए पाए गए-एक मनुष्य घरमे छेद कर रहा था और बाकी चार मनुष्य पहरेपर खडे थे-जब हल्ला हुमा तब पडोसी लोग दौडे आये और उन चोरों से एक मनुष्यने एक गांववालेको काट डाला- तजवीज हुई कि जो अपराध उन्होंने किया था वह रातके समय घर फोडनेका था न कि डकैतीका । (वी. रि० सन् १८६४ ई० सफा ३९) (४१७ ) जो कोई मनुष्य किसी अपराधको करनेके लिये जिसके बदलेमे कैदका दंड कहके दंड योग्य कोई ) ठहराया गया है रातके समय छुपकर घरकी मदाखलत वेगा- अपराध करनेके लिये रात करे अथवा रातके समय घर फोडे उसको दोनों प्रकारोंमेसे किसी के.समय छुपकर घरको प्रकारकी कैदका दड दिया मदाखलतबेजा जावेगा जिसकी मीआद पांच वर्पतक- करना अथवा रातके समय घर हो सकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा और यदि वह, फोडना. अपराध जिसके करनेकी इच्छा है चोरी हो तो कैदकी मीआद चौदह वर्षतक हो सकती है। टीप-दफा ४५६ के अनुसार है। १---तसद्दक हुसेनने जो अपने चचाके साथ एकही घरमे रहा करता था एक सन्दूक तोडकर उसमेसे माल निकाल लिया-तजवीज हुई कि वह रातके समय छुपकर घरकी मदाखलतबेजाका अपराधी ठीक २ नहीं ठहर सकता ( रिपोर्ट हाईकोर्ट पश्चिमोत्तर देश जिल्द ६ सका ३०१) २-जब किसी मनुष्य पर, चोरीके अभिप्रायसे रातके समय घर फोडनेका अपराध दफा ४५७ के अनुसार और चोरीका अपराध दफा ३८० के अनुसार प्रमाणित होवे तो उसको एक दण्ड दोनो अपराधोके मध्ये अथवा अलग २ दड प्रत्येक भराध मध्ये दिया जासकता है, परन्तु नियम यह है कि कुल दडकी मीयाद उस दंडसे अधिक न हो जो बड़े आराध के मध्ये दिया जासकता हो । (६० ला. रि० बम्बई जिल्द १ सफा २१४) तैयारीके उप- सत्रहवा १७.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६०ई०॥ (२६५) (३९८ ) जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यको दुःख पहुँचाने अथवा किसी मनुष्यपर किसी मनुष्यको दुःख) आक्रमण करने अथवा किसी मनुष्यको अनीतिरोक ( मुजाहिमत पहुंचानेकी तैय वेना) करनेकी तैयारी करके अथवा किसी मनुष्य को दुःख रात रातके समय छुप- कर घरकी मदाखलत या आक्रमण या अनीतिरोकके डर दिखानेकी तैयारी करके बजा करनी अथवा रातके | रातके समय छुपकर घरकी मदाखलतवेजा करे अथवा रातके समय घर फोडना समय घर फोडे उसको दोनों प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीआद चौदह वर्षतक हो सकती है, और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप--(१) अदालत सेशन या प्रे० मा या म० अ० (२) दस्तन्दाजी पोलीस (३ अपराधीके नाम बारट नारी होगा (४) बिना जमानत (५) राजीनामा नहीं है । ( १९९) जो कोई मनुष्य छुपकर घरकी मदाखलतवेजा करने अथवा घर फोड- छुपकर घरकी मदा-] नेकी अवस्थामें किसी मनुष्यको भारी दुःख (जरस्शदीद) पहु- खलत बेजा करने अथ- चाए, अथवा किसी मनुष्यके वध या मारी दुःख पहुंचानेका उद्योग वाघरफोडनेकी अवस्था- में मारी दुःख (जरर/ करे, तो उसको जन्मभरके लिये देश निकाले का दण्ड या दोनों शदीद) पहुचाना. प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दंड दिया जावेगा जिसकी मीआद दशवर्पतक हो सकती है और वह जुर्मानेके मी योग्य होगा । टीप-(१) अ० से. (२) टस्तन्दाजी पोलीस (३) अपराधीके नाम वारट जारी होगा ४) विना जमानत (५) राजीनोमा नहीं है। १-दफा ४५९ व ४६० का अपराध प्रमाणित करनेमे इस बातकी आवश्यकता है कि वह भारी दुःख (जररशदीद) घर फोडनेके समयमें पहुंचाया गया हो न कि घर फोडे जाने तथा अपरा. वीके घरसे चले जानेके उपरांत । (५० रि० न० १७ सन् १८७६ ई.) (४६०) यदि रातको छुपकर घरकी मदाखलत वेजा करते समय अथवा रातको सब मनुष्य जो घर घर फोडते समय कोई मनुष्य जो उपरोक्त अपराधका अपराधी फोडने आदिमे साझीहों. है जानबूझकर किसी मनुष्यको मृत्यु अथवा मारी दुःख पहु- किसी मृत्यु अथवा भारी, चावे अथवा पहुचानेका उद्योग करे तो प्रत्येक मनुष्यको, जो ख के बदले जो उपरोक्त मदाखलतवेजा अथवा घर फोडनेमें साझी हो, जन्म- किसी एकने किया हो दण्ड के योग्य होंगे. मरके देश निकालेका दण्ड अथवा दोनो प्रकारोमेसे किसी प्रका. रकी कैदका दड-दिया -जावेगा जिसकी मीभाद दश वर्पतक होसकती है और वह जुर्मा- नेके भी योग्य होगा। टीप-दफा ४५९ के अनुसार है । १-जो मनुष्य, रातके समय छुपकर घरकी मदाखलत बेजा करनेमे घरके स्वामीको जो उसके पकडनेका यल करे या जानबूझकर भारी दुःख पहुंचानेका उद्योग करे वह दफा ४६० के - (२६६) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- ही अनुसार दंड योग्य होगा न कि दफा ४५७ व ३२४ के अनुसार 1 (वीली रिपोर्टर जिल्द २ सफा ५२) ( ४६१ , जो कोई मनुष्य बददियानती (कुमाव ) से अथवा हानि पहुंचाने के वददियानती (कु) अभिप्रायसे किसी बंद किये हुए घर अथवा “संन्दूक आदिको माव ) से किसी बन्द , जिसमें माल हो अथवा जिसमें मालका होना यह निश्चय करता घरको जिसमे माल भरा हो तोडकर खोलना. हो तोडकर खोले अथवा उसका बद (जोड ) खोले, तो उस मनुष्यको दोनों प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीआद दो.वर्षतक होसकती है अथवा जुर्मानेका दड या दोनों दई दिये जावेगे। टीप-(१) प्रे० म० या म० अ० या म० दो० (२) दस्तन्दाजी पोलीस (३) अपराधीके नाम वारट जारी होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नही है । ( ४६२) जो कोई मनुष्य जिसको कोई बन्द किया हुआ- घर आदि धरोहरकी उसी अपराधका दंड रीतिपर सिपुर्द हो जिसमें कुछ माल हो .अथवा जिसमे मालका जब कि रक्षकही अपराध होना वह निश्चय करता हो बददियानतीसे अथवा हानि करे, पहुचानेके अभिप्रायसे विना इसके कि उसके खोलनेकी उसे आज्ञा हो उस घर आदिको तोडकर खोले अथवा उसका बद खोले तो उस मनुष्यको दोनों प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसको मीआद तीन वर्पतक होसकती है अथवा जुर्मानेका दण्ड या दोनों दण्ड दिये जावेंगे । टीप-(१) अदालत सेशन, या प्रे० म० या म० अ० या म० दो० (२) दत्तन्दानी पोलीस (३) अपराधीके नाम वारट जारी होगा ( ४ ) जमानत होसकती है ( ५.) राजीनामा नहीं है। अध्याय अठारहवाँ १८ उन अपराधोंके वर्णनमें जो दस्तावेजोंसे और व्यापार अथवा मालके चिह्नोंसे सम्बन्ध रखते हैं। { ४३३) जो कोई मनुष्य कोई झूठ दस्ताबेज अथवा उसका कोई भाग इस जालसाजी. } अभिप्रायसे बनाए कि वह सर्वसाधारणको अथवा किसी मनु- ध्यको हरजा या हानि पहुचाए अथवा किसी दावे या अधिकारको प्रमाणित करे, अथवा किसी मनुष्यसे कोई माल अलग कराए, अथवा किसी प्रगट या अप्रगट करार करानेका अठरहवाँ १८.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६०ई०॥ (२६७) कारण हो, अथवा इस अभिप्रायसै कि छठ किया जाये या छठ करे, तो उपरोक्त मनुष्य जालसाजीका करनेवाला कहलावेगा। १- कैदीने स्वय अपनी असावधानी छिपानेके अभिप्रायसे मरिस्तकी एक कैफियतको बदल-दिया-तजवीज हुई कि अपराधीका काम, हिन्दुस्थानके दडसंग्रहकी दफा ४६३ में लिसे हुए जालसाजीके अपराधमे नहीं गिना जा सकता। (रिपोर्ट हाईकोर्ट पश्चिमोत्तर देश जिल्द २ सफा ११) २-किसी पिछली असावधानीको छिपानेके अभिप्रायसे मिसलमे कोई झूठी इबारत लिख देना जो छलकी सीमातक न पहुंचती हो जाल्सानी नहीं है । (इ०.ला. रि० बम्बई जिल्द । सफा ६५७) ३-~दस्तावेजकी नकलमे जाल बनाना दफा ४६३ मे लिखा हुआ जाल्सानीका अपराध ह। (बोली रिपोर्टर इजलास कामिल सफा ७१) ४--किसी नियत की हुई झूठी दस्तावेनकी नकल तैयार करने और उस झूठी दस्तावेजके लिखे जानेके लिये कागज स्टाम्प मोल लेने और यह दरियाफ्त करनेसे कि उस दस्तावेजमें क्या लिखो जायगा-जालसाजी अथवा जालसाजीके उद्योगमं अपराध नही ठहर सकता, बरन् यह बात ऐसी है जिनसे जालसाजीकी सहायताका अपराध प्रमाणित हो सकता है क्योंकि इन कामोसे अपराक्के करनेमे सहलता होती है। (३० ला. रि० मदरास जिल्ट ३ सफा ५) ५-- अपराधी एक सरकारी नौकर है जिसके पास कुछ दस्तावेज रहा करनी थी, उसको उपरोक्त दस्तावेजोंके पेश करनेके लिये आशा हुई और अपराधी उनको पेश न करसका, तब उसने अपनेको दण्डसे बचानेके अभिप्रायसे उसी प्रकारको दस्तावेजे बनाकर पेश करदी-तज वीज हुई कि इस प्रकारकी बनाई हुई दस्तावेजे ऐसे कागज अथवा लेख नहीं हैं कि जिसकी तैयारीका अपराध अपराधीपर लगाया गया था, इसलिये अपराधीको हिन्दुस्थानके दण्डसंग्रहकी दफा २१८ के अनुसार दण्ड नही हो सकता था, और न उपरोक दस्तावेजें जाली प्रमाणित हुई थी, क्योंकि वे उस अभिप्रायसे न बनाई गई थी जिनका वर्णन टफा ४६३ मे है इसलिये अपराधीको दफा ४७१ के अनुसार भी दण्ड नहीं हो सकता था । (१० ला० रि० इलाहाबाद जिल्द ५ सफा ३५३) ६-एक खेतके मोल लेनेवालोने, कि जिस खेतका नम्बर ठीक ठीक २७२ था और जो बैनामेकी दस्तावेनमें भूलसे २१० लिख दिया गया था उसे नम्बरको ठीक कर दिया अर्थात् २१०के स्थानपर २७२ बना दिया-तजवीज हुई कि उपरोक्त नम्बरका बदलना दफा ४६३ मे लिखे हुए ‘जालसाजीके अपराधी सीमातक नहीं पहुंचता था क्योकि वह छल्से अथवा अधर्मसे नहीं बनाया गया था। (इ० लारि० इलाहाबाद जिल्द ५ सफा २१७) झूठी दस्तावेज बनाना } (४६४) उस मनुष्यके मध्ये कहा जायगा कि उसने झूठी दस्तावेज बनाई- (२६८) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- पहिले जो कोई दस्तावेज अथवा दस्तावेजका कोई माग अधर्मसे अथवा छलसे बनाए, अथवा उसपर दस्तखत या मुहर करे, अथवा उसको लिखे, या कोई ऐसा चिहकरे जिससे किसी दस्तावेजका लिखा जाना प्रगट हो, और उसका अभिप्राय इस बात के निश्चय करादेनेका हो कि वह दस्तावेज अथवा दस्तावेजका वह भाग उस मनुष्यने बनाया, अथवा उसपर दस्तखत या मुहर की अथवा उसने लिखा, या ऐसे मनुष्यको आज्ञासै बनाया गया, अथवा उसपर दस्तखत या मुहर की गई, अथवा वह लिखी गई है जिसको वह जानता है कि उस मनुष्यने न तो उसे बनाया न उसपर दस्तखत या मुहर की न उसने लिखा या न उसकी आज्ञासे वह बनाई गई, न उसपर दस्तखत या मुहर की गई, न बह लिखीगई अथवा ऐसे समयपर जिसमे वह जानता है कि वह न बनाई गई, न उसपर दस्तखत या मुहर की गई न वह लिखीगई, अथवा- दूसरे—जो बिना उचित अधिकारके अधर्मसे अथवा छलसे काटकर अथवा किसी और प्रकार - किसी दस्तावेजको, उसके किसी मुख्य भागमें बदले, इसके पश्चात् कि उस दस्तावेजको स्वय उसीने अथवा किसी दूसरे मनुष्यने बनाया हो अथवा लिखा हो, चाहे वह दूसरा मनुष्य उस बदलनेके समय जीता हो अथवा मरगया हो, अथवा- तीसरे-जो अधर्मसे अथवा छलसे किसी दस्तावेजपर किसी मनुष्यसे दात. खत- या मुहर कराए अथवा उस्को लिखवावे या बदलावे यह जानकर कि वह मनुष्ष दस्तावेजके मजमून अथवा बदलनेके आशयको सिडीपने अथवा नशेमे होनेके कारण नहीं जान सकता अथवा किसी धोखेसे जो उसको दिया गया है नहीं जानता है। उदाहरण। क) शिवशकरके पास १०००० रुपयेतकका रुका रमाशंकरके नामपर उमाशकरका लिखा हुआ हो और शिवशकर रमाशकरको ठग लेनेके अभिप्रायसे दश हजारको संख्यापर एक शून्य बढाकर एक लाख बनाए, इस अभिप्रायसे कि रमाशकर निश्चय करे कि उमाशकरने वह रुका ऐसाही लिखा है तो शिवशकरने जालसाजी की- (ख) शिवशंकर बिना आशा रमाशंकरके रमाशंकरकी मुहर एक दस्ताबेजपर लगावे जिसका आशय इस प्रकारका जानपडे कि उसके अनुसार कोई मिलकियत रमाशकरकी ओरसे शिवशकरके अधिकारमें आवे, इस अभिप्रायसे कि शिवशंकर उस मिलकियतको उमाशंकरके हाथ बेचे और उसके द्वारा विक्रीका रुपया उमाशकरसे प्राप्त करे-तो शिवशंकरने जालसाजी की। (ग) शिवशकर रमाशंकरका कोई पडा हुवा दस्तखती रुका जो किसी साहूकारके नाम हो उठाले, जिसका रुपया सकेके आधिकारीको मिलता हो परन्तु उपरोक्त रुकेमे रुपयेकी तादा- .

' । अठरहवाँ १८. ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई० ॥ (२६९) द न लिखी हो, शिवशकर उस रक्कमे दश हजार रुपया लिखकर उस रक्को डल्स काममे लावे-नो शिवशकरने जालसाजी की। (घ) शिवशकर अपने गुमाश्ते रमाशकरको अपना दस्तखती एक सका किसी साहूकारके नामका देवे, जिसमें रुपयेकी तादाद न लिखी हो-परन्तु वह रमाशकरको यह आजादे कि अमुक २ मनुष्योंका रुपया देनेके लिये उस रुक्केमे कोई तादाद जो दा हजार रुपयेसे अधिक न हो, लिखकर उसको पूराकरे-और रमाशकर छलसे रुकेमे बीसहजार रुपया लिखलेवे-तो रमागकरने जाल- साजी की। (च) शिवशकर कोई हुडी अपने ऊपर रमाशकरके नामसे विना आशा रमाशकरके लिख, इस अभिप्रायसे कि उसको सही हुडीकी रीतिपर किसी साहूकारसे मिती कटवाकर पटाले और उसका यही अभिप्राय हो कि अवधि पूरी होजानेपर उस हुडीका रुपया अदा करे तो इस अवस्थामै जो कि शिवशकर साहूकारको यह धोखा देनेके अभिप्रायसे हुडी लिखता है कि उसको यह निश्चय कराए कि' वह रमाशकरकी जमानत रखता है और उसके द्वारा हुडीको मितीकाटकर पटाले, इसलिये शिवाकर जालसाजीका अपराधी है। (छ) रमाशकरके वसीयतनामेमे यह लिखा हो कि "मैं आना देताहू कि मेरा बचा हुआ सब धन शिवशकर व उमाशकर व गिरिजाशकरमें बरार २ बागजाय ' शिवशकर अधर्मसे उमाशकरका नाम छील डाले, इस अभिप्रायमे कि यह निश्चय कर लिया जाय कि वह सब बचा हुआ धन उसके और गिरिजाशकरके लिये है तो शिवशकरने जालसाजी की। (ज) शिवाकर किसी गवर्नमेट प्रामेसरी नोटपर नीचेकी इबारत लिखकर कि, "रमाश करको अथवा उसे जिसको वह आज्ञा दे इसका रुपया दियाजाय' और उस लिखी हुई इबारतपर दस्तखत करके रमाशकरको अथवा उसे जिसको वह आना दे नोटका रुपया पाने योग्य कर दे, और उमाशकर यह इबारत कि, "रमाशकरको अथवा उसे निसको वह आजा दे रुपया दिया जार" अधर्मसे छील डाले और उस इबारतको विना नामकी इबारत कर दे तो उमाशंकरने जाल. साजी की। (स) शिवशकर कोई मिलकियत रमाशकरके हाथ बेचे और उस पर उसका अधिकार करवा दे और फिर इसके पश्चात् इस अभिप्रायमे कि रमाशकरको उस मिलकियतसे छल करके दूर कर शिवशकर दे, उस मिलकियतका बैनामा उमाशकरके नाम लिख दे जिसके लिखनेकी तारीम्ब रमार्ग- करके बैनामकी तारीखसे छः महीने पहिलेकी हो, इस अभिप्रायसे कि यह वात निश्चय कर लीजावे कि शिवशकर उस मिलकियतको रमाशंकरके हॉय वेचनेसे पहिले उमाशकरको बेच चुका था तो शिवशकरने जालसाजी की। ट) रमाशकर शिवशकरको अपना वसीयतनामा लिखनेके लिये जबानी इबारत बताता जाय और शिवशकर उस अधिकारकि नामके बदले जो रमाशकरने बताया है किसी दूसरे अविकारीका नाम लिख दे और रमाशकरसे यह कहकर कि तुम्हारी बाजानुसार मैने इसीयतनामा तैयार किया है, रमाशकरको उस वसीयतनामेपर दस्तखत करनेके लिये बहकावे तो शिवशकरने जालसाजी की।

(२७०) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- - (3) शिवशकर एक चिही लिखकर, विना आना रमाशकरके, उसपर रमागकरके दस्तखत करले और उसमे यह लिखा हो कि शिवशकर नेकचलन है और दैवी आपदाओके कारण दु:खित है, इस अभिप्रायसे कि उस चिहीके द्वारा उमाशकर और दूसरे मनुष्योंसे भिक्षा पाये वो इस अव. स्थामै जो कि शिवाकरने इस अभिप्रायसे एक झूठा दस्तावेज बनाया कि जिससे उमाशकरका माल अलग किया जाये, इसलिये शिवगकरने जालसाजी की। ड) शिवशंकर कोई चिही विना आना रमाशकरके लिखकर उसमे रमाशकरके दस्तखत करले, उसमें शिवशकरकी नेक चाल चलनके मध्ये लिखा हो, इस अभिप्रायसे कि उसके द्वारा उमा- शंकरके नीचे कोई नौकरी पावे, तो शिवशकरने जालसाजी की-क्योकि उसने उमाशंकरको जाली सार्टीफिकटके द्वारा धोखा देनेके अभिप्रायसे और उसके द्वारा उमागकरको नौकरीके मध्ये एक प्रगट अथवा अप्रगट इकरार करनेके लिये फुसलाया । स्पष्टीकरण-१-किसी मनुष्यका स्वय अपनेही नामका दस्तखत करना जालसाझी की सीमातक पहुंच सकता है। उदाहरण । (क) शिवशंकर किसी हुंडीपर अपने नामके दस्तखत इस अभिप्रायसे करे कि यह बात निश्चय कर लीजावे कि उस हुडीको उसके नामवाले किसी दूसरे मनुष्यने लिखा है-तो शिवशंकरने जालसाजी की। (ख) शिवशकर शब्द "सकारी" किसी कागजपर लिखै और उसपर रमाशकरका नाम दस्तखत कर दे इसलिये कि उमाशंकर अंतको उसी कागजपर एक हुंडी अपनी ओरसे रमाशंकरके अपर लिखे और उसको रमाशंकरकी सकारी हुई हुडीकी रीतिपर बेचडाले नो शिवशकर जालसाजीका अपराधी है और यदि उमाशंकर इस यथार्थ वातको जानकर शिवशकरकी इच्छाके अनुसार हुंडी उस कागजपर लिखे तो उमाशंकरभी जालसाजीका अपराधी है। (ग) शिवशकर कोई पड़ी हुई हुंडी जिसका रुपया उसी नामके किसी दूसरे मनुष्यकी आज्ञासे अदाके योग्य हो उठाले और उसकी पीठपर अपने नामसे बेचकी इबारत लिख दे, इस आभिप्रायके कि उसके द्वारा यह निश्चय कर लिया जावे कि यह बेचकी इबारत उस मनुष्यने लिखा है जिसकी आज्ञानुसार रुपया भुगतान के योग्य है तो इस अवस्थामे शिवशंकर जालसाजीका अपराधी है। (घ) शिवशकर कोई मिलकियत मोलले, जो रमाशंकरके ऊपर किसी डिंगरी के मध्येमें नीलाम हुई हो-रमाशकर उस मिलकियतकी कुर्की होजानेसे पीछे उमाशंकरके साथ मेल करके उसी मिलकियतका ठेका उमाशंकरको थोडीसी जमापर एक बडी मीआदके लिये लिख दे, और लिखनेकी मिती कुर्काकी मितीसे छः महीना पहिलेकी हो, इस अभिप्रायसे कि शिकणकर छल द्वारा मिलकियतसे दूर कियाजाय, और यह निश्चय कराए कि ठेका कुर्कीस पहिले दिया गया है उस अवस्थामें यद्यपि रमाशंकरने वह ठेका आने नामसे लिखा है, तथापि उसमे पीछेकी तारीख लिखनेके कारण वह लसाजीका अपराधी है।

'अठारहवा १८.] ऐक्ट नंवर ४५ सन १८६०ई० । (२७१) च) शिवशकर एक व्यापारीने अपना दिवाला निकालनेके पहिले अपने लाभके लिये कोई माल असबाब रमाशकरके पास रख दिया और अपने व्योहरोंको ठगनेके अभिप्रायसे तथा मामलेकी बड नमानेके प्रयोजनसे एक तमसुक इस आशयका लिख दिया कि मुमको रमाशंकरका इतना रुपया उस मालियतके मध्ये देना उचित है कि, जो मैं पा गया हूं और उस तमसुकमें कोई पिछली मिती लिखदी, इस अभिप्रायसे कि यह निश्चय किया जाय कि वह उसप्ते पहिले लिखा गया है कि जत्र शिवशकर दिवाला निकालनेको था-तो शिवशकर पहिले वर्णन की हुई जालसाजीके अपराधका अपराधी है। स्पष्टीकरण-२ किसी झूठे दस्तावेजका किसी कल्पित मनुष्यके नामसे बनाना, इस अभिप्रायसे कि यह बात निश्चय की जाय कि वह दस्तावेज किसी सच्च मनुष्यने लिखा है अथवा उसका किसी मरेहुए मनुष्यके नामसे बनाना इस अभिप्रायसे कि यह निश्चय किया जाय कि वह दस्तावेज उस मनुष्यने अपने जीतेजी लिखा है, जालसाजीकी सीमातक पहुँच सकता है। उदाहरण । शिवशकर कोई हुडी किसी कल्पित मनुष्यके ऊपर लिखे और छल पूर्वक उस कत्सित मनुष्य के नामसे उस हुडीको सकारे, इस अभिप्रायले कि उसको बेच डाले, तो शिवगकर जालसाजीका अपराधी हुआ है। १-जब दस्तावेजकी तारीख कि जो और दूसरे प्रकारपर रजिस्टरीके लिये न पेश होसकती थी रजिस्टरी करा पानेके अभिप्रायसे बदली गई, तो यह जालसाजीका अपराध नहीं है । (इ. ला. रि० कलकत्ता जिल्द ६ सफा ४८२) २-अपराधीने बदोबस्तके हाकिमसे इस बातका प्रमाण पानेके लिये कि अपराधी लास करके, उबएका अधिकारी है, एक सनद उपरोक्त हाकिमके सामने जिससे उपरोक्त लकबका पाया जाना प्रगट होता था पेश की, यह सनद असली नहीं है । तजवीज हुई कि हिन्दुस्थानके दडसंग्रहकी दफा ४६४ व ४७१ के अनुसार दड देना अनुचित है। (इ० ला• रि• कलकत्ता जिल्द १० सफा ५८४) ३-अपराधी दफ्तर व डिवीजनलमें नकलनवीस था उसने कर्कीकी नौकरी पानेके लिये दरखास्त दी जो उस वक्त एक दफ्तरमे खाली थी-नावाहीसे पाया गया कि जो सिफारगको चिही सब डिवीजनल अफ्सरकी ओरसे लिखी जानपडती थी वह अपराधीने झूठी लिखी थी-इस दरख्वास्त के साथ एक दूसरी चिही भी शामिल थी जो महब कलक्टरकी भोरसे सब डिवीजनल अफ्सरके नाम जान पड़ती थी-परन्तु जब हाकिम सब डिवीजनने कलक्टर साहबकी चिट्ठीपर सदेह कर एक निजी चिट्ठी साहब कलक्टरको उसकी असलियत जानने के लिये डाकखानेमे मेनी तब अपराधीने एक (२७२) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय, तीसरी चिही झूठी लिखकर हाकिम सब डिवीजनकी ओरसे पोष्टमास्टरके नाम. इस अभिप्रायसे भेजी कि निजी चिट्ठी साहब कलक्टरके नामकी रवानेन की जावे-तजवीज हुई कि यह पहिली दो चिहियोके मध्ये हिन्दुस्थानके दण्डसंग्रहकी दफा ४६४ का अपराध ठहर सकता है परन्तु तीसरीके मध्ये यह नहीं कहा जासकता कि उसने उसको अधर्म अथवा छलसे उपरोक्त दफाके अर्थ अनुसार झूठी बनाया। इ० ला. रि० कलकत्ता जिल्द १२ सफा ३३९) ४-हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहकी दफा ४६३ मे लिखे हुए शन्द दावेका सम्बन्ध दावा जायदा- दके साथ नहीं कहा जासकर्ती-उपरोक्त दफामै लिखे हुए शब्द जायदादमै सार्टीफिकट तहरीरी शामिले होगा और दफा ४६३ का अपराध प्रमाणित करनेके लिये यह अवश्य नहीं है, कि वह जायदाद जिससे यह अभिप्राय हो कि झूठी लिखावट किसी मनुष्यको अलग कर देगी उस समय मौजूद हो जब झूठी लिखावट बनाई गई। एक मनुष्यने प्रिंसपिल क्वीन्स कालेज बनारसके सामने एक सार्टीफिकेट झूठा, जिसका दिया जाना प्रिसेंपिल केनिग कालेज लखनऊकी ओरसे जान पडता था, कानूनी लेकचरोको देनेके अभिप्रायसे और फिर उसके पश्चात् कुछ सार्टीफिकट उम्मेदवार इम्तिहान अदालत जनी कलकत्त,मे करार पाने के प्रयोजनसे पेश किया-तजवीज हुई कि उसपर दफा २७१ हिन्दुस्थानके दण्डसंग्रहका अपराध ठहराया जा सकता है। (इ० ला० रि• इलाहाबाद जिल्द १५ सफा २१० (४६५) जो जालसाजी करेगा उसको दोनो प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जायगा, जिसकी मीआद दो वर्ष जालसाजीका दड. तक होसकती है, अथवा जुर्मानेका दण्ड या दोनों दड दिये जावेगे। कोई मनुष्य . } - . टीप--(१) अदालत सेशन, या प्रे० म० या म० अ० (२) पोलीस दस्तन्दाजी नहीं कर सकती है (३) अपराधीके नाम वारंट जारी होगा (४) जमानत हो सकती है (५) राजीनामा नहीं है। (बेतके दंडके लिये ऐक्ट न ६ सन् १८६४ ई० को दफा ४ को देखो।) १-जब कोई मुहरि जो दड योग्य विश्वासघात ( खयानत मुजरिमाना) का अपराध करे और फिर हिसाबकी किताबमे अपराध छिपानेके अभिप्रायसे झूठी इबारत लिख दे तो वह दफा ४६५ के अपराध जालसाजीका अपराधी नही होसकता । (इ. ला. रि• इलाहाबाद जिल्द ५ सफा२२१ (४६६ ) जो कोई मनुष्य कोई जाली दस्तावेज बनाए जिसकी - लिखाव- कोर्टआफ जस्टिसके टसे जान पड़ता हो कि वह किसी कोर्ट आफ जस्टिसके सरिश्तेके कागज अथवा मैदायशके रजिस्टर आदि- सरिश्तेका कागज अथवा कागज मिसल अथवा पैदायश को जाली बनाना. जन्म,) या संस्कार या विवाह या मरणका रजिस्टर है जिसको कोई सरकारी नौकर अपनी नौकरीके कारण बनाता है अथवा कोई सर्टी- आठरहवा १८.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०॥ (२७३) फिकट या दस्तावेज बनाए जिसकी लिखावटसे जान पडता हो कि उसे किसी सर- कारी नौकरने अपनी नौकरीके कर्त्तव्यपालनकी रीतिपर तैयार किया है अथवा किंसी मुकदमेके दायर करने अथवा उसकी जबाबदिही करने अथवा उसमे किसी प्रकारको पैरवी करने अथवा इकबाल दावा दाखिल करनेके लिये आज्ञापत्र • इजाजतनामा) है अथवा वह मुरूयारनामा है, तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद सात वर्पतक होसकती है और वह जुर्मानेके मी योग्य होगा। टीप--(१) अदालत सेगन (२) पोलिस दस्तन्दाजी नही करसकती (३ अपरानाक नाम बारट जारी होगा (४) बिना जमानत (५) राजीनामा नहीं है। १-जब कोई दस्तावेज इस अभिप्रायसे बनाया जावे कि उससे किसी अदालत जस्टिसको धोखा दिया जाय-तो कहा जावेगा कि वह दस्तावेज उस अभिप्रायके लिये कामम लाए जानेकी इच्छासे बनाया गया । (इ. ला. रि० कलकत्ता जिल्द १४ सफा ५१३) (४६७ ) जो कोई मनुष्य कोई जाली दस्तावेज बनाए जिसकी लिखावटसे फिफालतुलमाल अ-) यह पाया जावे कि वह किफालतुलमाल या. वसीअतनामा अथवा थवा वसीमतनामेका जा- गोद लेनेका आज्ञापत्र ( इजाजतनामा ) हे-अथवा उसके ली बनाना. आशयसे यह पाया जावे कि वह किसी मनुष्यको किसी किफा. तुलमालके बनाने या बेंचने अथवा मूल या व्याज या व्याजके. मागोंको सिपुर्दगीमे जाने या सिपुर्दगीमे करनेका आज्ञापत्र है, अयत्रा कोई ऐसा जाली दस्तावेज बनाए कि जिसकी इबारतसे यह पाया जावे कि वह फारगखती या रसीद है कि जिसमें रुपयाके वसूल होनेका इकरार है, अथवा किसी स्थावरधन या किफालतुलमालके दिये जानेकी फार- गखती या रसीद है तो उपरोक्त मनुष्यको जन्मभरके लिये देशनिकालेका दण्ड अथवा दोनो प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद दश वर्पतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप-(१) अदालत सेशन (२) सिवाय उस अवस्थाके कि जब किफालतुलमाल गवर्नमेट हिदका प्रामिसरी नोट होवे, पोलीस दस्तन्दाजी नहीं करसकती ( ३) अपराधीके नाम वारट जारी होगा (४) बिना जमानत (५) राजीनामा नहीं है। १-अपराधीने यह इस्तिहार दिया कि एक अगरेजी कोष राबर्ट एस, बिल्सन, एम, ए. का बनाया हुआ कीमती २) का तैयार है-परतु उसके यहा कोई भी ऐसी किताब बेचने योग्य नहीं थी-तजवीज हुई कि अपराधीने दगा व जालका अपराध किया था। (इ० ला०र० मदरास जिल्द १३ सफा २७) १८ (२७४) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। - [अन्याय- - (४६८ ) जो कोई मनुष्य जालसाजी करे इस अभिप्रायसे कि वह जाली-दस्तावेज... दगाके लिये जाल-1 दगा देनेके लिये काममे लाई जायगी उसको दोनों प्रकारों से किसी साजी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जायगा जिसकी मीभाद सात वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। . टीप--(१) अदालत सेशन या मै० म० या म० अ० (२) पोलीस दस्तन्दाजी नहीं करसकती (३) अपराधीके नाम वारंट जारी होगा (४) जमानत नही है (५) राजीनामा नहीं है। १-उजवीज हुई कि जब अपराधीका यह अभिप्राय था कि झूठा हिसाब बनाकर अपने मालिकको धोखा दे और उस घोखा देनेके द्वारा मालिकको हानि पहुँचना सम्भव हो तो अपराधी पर दफा ४६८ का अपराध दगा करनेका ठहराया जा सकता है । (वी. रि. जिल्द १८ सफा ४६) - ( ४६९) जो कोई मनुष्य जालसाजी करे इस अभिप्रायसे कि वह जोली किसी मनुष्यकी नेक दस्तावेज किसी मनुष्यको नेकनामीको हानि पहुंचाए, • अथवा. लामीको हानि पहुचानेके । यह जानकर कि उसका इस काममें लाया जाना सम्भव है, लिये जालसाजी, तो उस मनुष्यको दोनों प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीद तीनवर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके मीः योग्य होगा। टीप-~-दफा ४६८ के अनुसार है । (४७० ) जो झूठी दस्तावेज सब या कुछ जालसाजीसे बनाई गई हो वह " जाली' जाली दस्तावेज. } दस्तावेज ' की रीतिपर कहलाई जावेगी । १-खेतके मालियोंने नम्बरको बदल डाला जिनकी सराहत बैनामेमें थी ऐसी कार्रवाईक: कारण उपरोक्त नम्बर सही नहीं रहे-तजवीज हुई कि दस्तावेजमे नम्बरका बदलना दफा ४६३ मैं लिखे हुए बालक अपराधर्म नहीं है, और न उपरोक्त दस्तावेज तबदील होनेके उपरांत जालीदस्तावेज दफा ४७. के अनुसार ठहर सकती है। (इ. ला. रि. इलाहाबाद जिल्द ५ सफा २७१) (१७१) जो कोई मनुष्य किसी दस्तावेजको, जिसको वह जानता अथवा निश्चय माली दस्ताबेजको ] करनेका कारण रखता हो कि वह जाली दस्तावेज है सही सही दस्ताबेजकी गीतिपर दस्तावेज की रीतिपर छलसे अथवा अधर्मसे काममें लाए तो उस छलसे कामसे लाना. मनुष्यको उसी प्रकारका दण्ड दिया जावेगा कि मानो उसने दस्तावेजको जाली बनाया । - A आठरहवाँ १८.] ऐक्ट नबरं ४५ सन् १८६० ई०। (२७५) - १-अपराधी पर यह अपराध लगाया गया कि वह एक मुकद्दमा दीवानीमें एक दस्तावेजको जिसको वह आली जाना था, सही दस्तावेजकी रीतिपर काममें लाया तजवीज हुई कि अपराधीने -दफा ४७१ का अपराध किया था । (३० ला रि० कलकत्ता जिल्द ६ सफा ११८) २-अपराधीके व्योहरने, जो पोलीस कान्स्टेबिल था सुप्रिन्टेन्डेन्ट पोलीस जिलाको दरख्वास्त की कि ऋण चुक जानतक अपराधी ( कान्स्टेविल ) की तनख्वाहसे दो माया मासिक कट जायाकरें-इसलिये सुप्रिन्टेन्डेन्टने रुपया काटे जानेकी आज्ञा दे दी तब अपराधीने एक रसीद पेश की जिससे १८) का अदा होजाना पाया जाता था, पीछेसे जानपडा कि वास्तवमे वह रसीद ८) की थी और अपराधीने उसपर १ का अक बढ़ा दिया था-तजवीज हुई कि जो कि अपराधीकी यह इच्छा थी कि सुप्रिन्टेन्डेन्ट उसकी तनख्वाह कानूनविरुद्ध न काट, इसलिये इस रसीदसे यह बात नहीं पाई जाती कि अपराधीकी यह इच्छा थी कि योहरोंका रुपया माराजावे, इसलिये उसे दफा ४७१ के अपराधमे दण्ड नहीं होना चाहिये । ( इ. ला. रि• इलाहाबाद जिल्द ७ सफा ४०३) ३-पोष्टमास्टरने कुछ रुपया मारा, और उसी समय एक झूठी दस्तावेन बनाई जो दस्तखती रसीद उस मनुष्यकी होना जान पड़ती है, जिसे रुपया मिलने योग्य था-उसके मध्ये जाली दस्तावेज बनानेकै अपराध दफा ४७१ के अनुसार विचार किया गया-यह उन किया गया कि कोई जाल नहीं किया गया क्योंकि रसीद अपराध छिपानेके लिये बनाई गई थी तजवीज हुई कि अपराधका विचार -ठीक था-(इ. ला.रि. मदरास जिल्द ११ सफा ४११) ४-इन्ट्रेसकी परीक्षाके, प्रार्थीने अच्छे चाल चलनका सार्टीफिकट हेडमास्टरका दस्तखत बनाकर रजिस्ट्ररके यहा भेज दिया-उम्मेदवारपर जाली दस्तावेजको असलीकी रीतिपर काममें लानेके अपराधमे दफा ४७१ और दगाके उद्योगमें दफा ४१५ व ५१९ का अपराध ठहरायो गया तजवीज हुई कि उसकी यथार्थ इच्छा या प्रयोजन छल अथवा अधर्मको दफा २४ व २५ के अनुसार न था, इसलिये उसने कोई भी अपराध नहीं किया । ( इ० ला• R• कलकत्ता निल्द १९ सफा ३८७) ५-अपराधीपर हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहकी दफा ४७१ का अपराध इस बातपर लगाया गया कि वह कुछ दस्तावेजोको जिन्हें जाली जानता था अधर्म और छलसे काममें लाया था और विचार (तजवीज ) के समय जाना गया कि लगानकी चार रसीद जिन्हें अपराधी काममै लाया था, अपराधीने असली. रसीदोंके बदले जो खो गई थी बनाई थी । तनवीज हुई कि रफा २४ व २५ हि० द. मे लिखे हुए शब्द अधर्म व छलसे अपराधीने रसीदे नहीं बनाई थी, इसलिये वह दफा ४७१ का अपराधी नहीं हो सकता । (इ. लो. रि० इलाहाबाद जिल्द ७ सफा ४५९) (२७६) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह । , [भण्याय-- . (४७२ ) जो कोई मनुष्य कोई झूठी मुहर या चपरास या छापनेका- और कोई दफा ४६७ के अनु- औजार इस अभिप्रायसे बनाये कि वह इस संग्रहको दफा ४६७ के सार दण्ड किये जाने अनुसार दड किये जाने योग्य किसी जालसाजीके करनेमें योग्य कोई जालसाजी काम आवे अथवा इस अभिप्रायसे. कोई ऐसी मुहर या चप- करनेके आभिप्रायसे झूठी मुहर आदि बनानीअथवा रास या और कोई औजार अपने यहां रक्खे यह जानकर कि वह पास रखनी. झूठा है, तो उस मनुष्यको जन्मभरके लिये,देशनिकालेका दण्ड अथवा दोनो प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद सात वर्ष तक होसकती है, और वह-जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप--दफा ४६६ के अनुसार है। १-जब यूंठी मुहरे और उनके बनानेके औजार अपराधीके यहां निकले. और वह मानने योग्य उसका कारण न बतला सके कि वह क्योकर उसके अधिकारमे आये थे, तो यह बात मानी गई कि वह उनको छल पूर्वक काममे लानेकै अभिप्रायसे अपने अधिकारमें रखता था। (वीही रिपोर्टर जिल्द २ सफा ५) (४७३) जो कोई मनुष्य कोई झूठी मुहर अथवा चपरास अथवा और कोई जालसाजी करनेके अ छापनेका औजार बनाए इस अभिप्रायसे, कि वह किसी ऐसी.. भिप्रायसे जिसका दूसरा जालसाजी करनेके लिये काममें आए, जिसके बदलेमें इस दण्ड ठहराया गया है अव्यायको दफा ४६७ के अतिरिक्त किसी और दफाके अनुसार झूठी मुहर आदि बनाना दश दिया जा सकता है, अथवा उसी अभिप्रायसे कोई ऐसी अथवा पास रखना. मुहर अथवा : चपरास अथवा कोई और औजार जिसको वह झूठा जानता है अपने पास रक्खे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी कैदका दंड दिया जावेगा जिसकी मीआद सात वर्पतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप-(१) अदालत सेशन (२) गैर दस्तन्दाजी पोलीस ( ३ ) अपराधीके नाम वारण्ट जारी होगा (४) जमानत नहीं है (५) राजीनामा नहीं है । १-जब कुछ मुहरै पृथक् २ मांतिकी, जालसाजी करनेके अभिप्रायसे अपराधीके अधिकारमे निकली तो तजवीज हुई कि हिन्दुस्थानके दण्डसंग्रहकी दफा ४७३ के अनुसार प्रत्येक मुहरके मध्ये एक अलग और पूरे अपराधका किया जाना प्रमाणित था और अपराधी प्रत्येक मुहरके मध्ये अलग २ दोषी ठहराया जासकता था सिवाय उस अवस्थामे कि वे पृथक् २ गृहरे एक विशेष जालसाजीके आभिप्रायसे रक्खी गई हो। (वीक्ली रिपोर्टर जिल्द १३ सफा १६) लाई नाय. अठरहवा १८.] ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई०॥ (२७७) (४७४ ) जो कोई मनुष्य कोई दस्तावेज अपने यहा रक्खे, यह जानकर कि वह कोई दस्तावेज यह) जाली है और इस- अभिप्रायसे कि वह सची दस्तावेजकी जानबूझकर कियह जाल- [ भाति छल अथवा अधर्मसे काममें लाई जाय, तो यदि वह वाजीसे बनी है अपने यहा इस अभिप्रायसे रखनी दस्तावेज उस प्रकारकी दस्तावेज है जिसका वर्णन - दफा कि सच्चीकी भाति काममे ४६६ में है तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जायेगा, जिसकी मीभाट सात वर्षतक हो सकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा और यदि वह दस्तावेज उस प्रकारकी दस्तावेज है जिसका वर्णन दफा ४६७ में है तो जन्ममरके देशनिकालेका अथवा दोनों प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जायेगा जिसकी मीभाद सात वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा । टीप--(१) अदालत सेशन (२) गैर दस्तन्दाजी पोलीस ( ३ ) अपरावीके नाम बारट जारी होगा (४) जमानत नहीं है (५) राजीनामा नहीं है। १- हिन्दुस्थानके दंडसमहकी दफा ४७४ के अपराधके - प्रमाणके लिये इन बातोंके प्रम -णित करनेकी आवश्यकता है, कि दस्तावेज जिनके मध्ये अपराध लगाया गया जाली है, और अपराधी उनका जाली होना जानता था और वह उनको अपने अधिकारमे रखता था, और उसका यह अभिप्राय था, कि छल और अधर्मके द्वारा वह सच्ची दम्तावेजकी भाति काममे लाई जावे, और प्रत्येक दस्तावेज उसप्रकारकी है जिसका वर्णन हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहको दफा ४६६ व ४६७ में किया गया है । (इ० ला. रि० बम्बई जिल्द १६-सफा १६५) २--अपराधी एक जाली दस्तावेज अदालतम ले गया परन्तु उसको काममें न लाया तनवीन हुई कि वह उस दस्तावेजको आवश्यकताके समय काममें लानेकी इच्छा रमता था । (बील्ली रिपोर्ट जिल्द ८ सफा ११) (४७५ ) जो कोई मनुष्य किसी वस्तुपर अथवा किसी वस्तुमें कोई चिह अथवा किसी चिह्न अथवा नि निशान, जो इस.सग्रहको दफा ४६७ मे कही हुई किसी दस्ता- शानको जालसाजीसे बना---वेजको सच्चाई के लिये काममें आता हो इस अभिप्रायसे-झूठा -ना जो दफा४६७मे कही। बनावेगा कि इस चिह्न अथवा निशानके होनेसे कोई दस्तावेज-जो हुईदस्तावेजकी सच्चाईके लिये काममै आवे अथवा उसी समय उस वस्तुपर जालसाजीसे बनी हो अथवा पीछेसे किसी वस्तुको पास रखना | वनाई जानेको हो प्रमाणिक दिखाई दे, अथवा उसी अमिप्रायसे जिसपर हठा चिह्न लगाहो। कोई ऐसी वस्तु अपने पास रखे, जिसपर अथवा जिसमें उसे 'चिह या निशानकी जालसाजी कीगई है, तो उस मनुष्यको जन्ममरके देशनिकालेकी अथवा दोनों प्रकारों में से किसी प्रकारको कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीआठ सात वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके मी योग्य होगा। R (२७८) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अन्याय- टीप-( १ ) अदालत सेशन (२) गैरदस्तन्दाजी पोलीस (३.) अपराधीके नाम वारण्ट (४) जमानत नही होसकती (५१) राजीनामा नहीं है (६) मंजूरी दरकार है। १-दफा ४७५ का अपराध प्रमाणित करनेमे इस बातके प्रमाणकी आवश्यकता है, कि अप- राधीके अधिकारमें जो दस्तावेज है उसपर कोई झूठा चिह्न या निशान हो और यह भी प्रमाणित होना चाहिये कि अपराधी उस दस्तावेजको अपने अधिकारमैं इस अभिप्रायसे रखता था कि वह झूठा चिह्न या निशान उस दस्तावेजकी सच्चाई के लिये काममें आवेगा और इस बातके भी होनेकी आवश्यकता है कि वह दस्तावेज इस संग्रहको दफा ४६७ मे लिखी हुई दस्तावेजके अनुसार होवे । ( वीक्ली रिपोर्टर जिल्द १५ सफा १९) (-४७६ ) जो कोई मनुष्य किसी वस्तुपर - अथवा किसी वस्तुमे कोई चिह्न जालसाजीसे बनाना अथवा निशान जो इस सग्रहको दफा ४६७ मे कही हुई किसी चिह्न अथवा निशा दस्तावेजोंको छोडकर और प्रकारकी किसी दस्तावेजको प्रामाणिक नको जो दफा ४६५ मे कही हुई दस्तावेजोको | करनेके लिये काममे आता हो, इस अमिप्रायसे झूठा छोडकर और प्रकराकी कि उस चिह्न अथवा निशानके होनेसे कोई दस्तावेज जो उसी दस्तावेजोकी सच्चाईके समय उस वस्तुपर जालसाजीसे बनी हो अथवा पीछेसे जाली लिये काममे आता हो,अ. बनाई जानेको हो, प्रामाणिक दिखाई दे, अथवा जो कोई मनुष्य थवा पास रखना किसी वस्तुका जिसपर झूठा ऐसे अभिप्रायसे कोई वस्तु अपने पास रखता हो जिसके ऊपर चिह्न लगाहो. j अथवा जिसमें इसीप्रकारका चिह्न अथवा निशान जालसाजीसे लगाया गया हो, तो उस मर्नुष्यको दोनों प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया, जावेगा जिसकी मीआद सातवर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके मी योग्य होगा। टीप-दफा ४७५ के अनुसार है। ( ४७७ ) जो कोई मनुष्य छल अथवा अधर्मसे अथवा इस अभिप्रायसे. कि छल छिद्रसे किसी व-)- वह सर्वसाधारणको अथवा किसी मनुष्यको नुकसान अथवा बीअतनामेको, बिगाडना , हानि पहुँचाए किसी ऐसी दस्तावेजको बिगाडे अथवा उसको अथवा नष्ट करना आदि. नष्ट करे अथवा उसकी लिखावटको काट दे अथवा उसके नष्ट करने या बिगाड देने अथवा काट देनेका उद्योग करे जो वसीयतनामा अथवा. लडका गोद लेनेका इजाजतनामा ( आज्ञापत्र ) अथवा कोई किफालतुलमाल हो अथवा होनेके योग्य हो अथवा ऐसी दस्तावेजके मध्ये कुछ हानिट पहुंचावे तो उस मनुन ज्यको जन्मभरके देश निकालेका अथवा दोनों प्रकारोंमेंसे किसी प्रकारकी कैदकाः दण्ड दिया जावेगा-जिसकी मीआद सात. वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेके मी योग्य होगा। टीप १) अदालत सेशन (२) गैर दस्तन्दोजी पोलीस . (३) अपराधाक नाम वारंट (४) बिला जमानत (५) राजीनामा नही है। ।

} मठरहवा १८.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०। (२७९) १.-पट्टेका फाड.डालना दफा ४७७ के अनुसार किफालतुलमालका नष्ट कर देना है। (बीक्ली रिपोर्टर जिल्द , सफा ३८) (४७७ ) (अ) बढाया गया दफा ४ ऐक्ट ३ सन् १८९५ ई० के अनुसार जो कोई मनुष्य मुत्सद्दी या महलकार या नौकर हो अथवा मुत्सदी झूठा हिसाब बनाना. या अहलकार या नौकरकी रीतिसे काम करता हो अथवा नियत किया गया हो, जानबूझकर छलनेके अभिप्रायसे कोई बही या किताब या कागज या लिखावट या किफालतुलमाल या हिसाब जो उसके स्वामीका है अथवा उसके स्वामीके पास है अयवा, जो उसने अपने स्वामीके लिये अथवा अपने स्वामीके अधिकार (हक ) में पाया हो नष्ट करे या वदले या उसमें काटकूट करे अथवा उसको झूठा बनाए, अथवा जानबूझकर और छलनेके अभिप्रायसे किसी ऐसी बही या किताब या कागज या लेख या किफालतुलमाल या हिसावमें कुछ झूठ मूठ लिखे अथवा उसके लिखनेमे सहायता करे या उपरोक्त बही या किताव या कागज या लिखावट या किफालतुलमाल या हिसावसे किसी आवश्यकीय वातको निकाल दे अथवा उसमें किसी आवश्यकीय वातको बदल दे अथवा निकाल देने या बदल देनेमे सहायता करे तो उसको दोनो प्रकारो से किसी प्रकारको कैदका दश दिया जावेगा जिसकी मीमाद सात वर्पतक हो सकती है अथवा जुर्मानका दण्ड या दोनो दड दिये जायेंगे। स्पष्टीकरण-जो अपराध इस दफाके अनुसार लगाया जाय उसमे यह काफी होगा कि यह वयान किया जाए कि विशेषरीतिसे छलनेकी इच्छा थी और किसी विशेष मनुष्यका नाम इस अभिप्रायसे न कियाजाए कि उसके छलनेकी इच्छा थी अथवा किसी विशेष रुपयेकी तादादका वर्णन न किया जाए जिसके मध्ये छल करनेका अभिप्राय था अथवा किसी ऐसे विशेष दिन या तारीखका वर्णन न किया जाए जिसमें वह अपराध हुआ। टीप-(१) अदालत सेशन (२) गैर दस्तन्दाजी पोलीस ( ३ ) अपराधीके नाम वारट (४) बिला जमानत (५) राजीनामा नहीं है। व्यापार और मालके चिह्नोंके विषयमें। (१७८ ) जो चिह इस वातके प्रगट करनेके लिये काममे लाया जावे कि कोई अस- वाव किसी विशेष मनुष्यका बनाया अथवा तैयार किया हुआ है व्यापारका चिह अथवा किसी विशेप समय या स्थानमें बनाया अथवा तैयार किया गया है अथवा किसी विशेष प्रकारका है वह व्यापारका चिह कहलाया जावेगा। } (२८) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह । [अध्याय- ( १७९ ) जो चिह्न इस बातके प्रगट करनेके लिये काममें लाया जावे कि कोई स्थावर धन ( मालमनकूला ) किसी विशेष मनुष्यकों है, वह मालका चिह मालका चिह्न, कहलायेगा। - (१८०) जो कोई मनुष्य किसी असबाबपर या सदूक या गठरी या किसी भौर व्यापारके झूठे चिह्नः बस्तुपर जिसमे असबाब हो चित्र बनाये 'अथवा कोई सदूक या को काममें लाना. गठरी या कोई और वस्तु जिसपर चिह्न हो काममें लाए यह निश्चय करानेके अभिप्रायसे, कि वह असबाब जिसपर चिह्न है अथवा कोई असबाब जो ऐसे सदूक अथवा गठरी अथवा वस्तुमे है जिसपर चिह है, अमुक मनुष्यने बनाया अथवा तैयार किया है जिसने उसको न बनाया.अथवा न तैयार किया हो अथवा यह निश्चय करानेके अभिप्रायसे कि वह असबाब अमुक समय या अमुक स्थानपर बनाया गया या तैयार किया गया है जिसमें वह न बनाया गया अथवा न तैयारही कियागया हो अथवा यह कि वह असबाब विशेष प्रकारका है जिस प्रकारका वह न हो तो कहा जावेगा-कि उपरोक्त मनुष्यने व्यापारका झूठा चिह्न काममें लाया । (४८१) जो कोई मनुष्य किसी स्थावरंधन (माल मनकूला ) या असवाब पर या मालके झूठे चिह्नको ! किसी सन्दुक या गठरी या किसी और वस्तुपर जिसमें स्थावरधन काममे लाना. अथवा असबाब हो चिह्न बनाए अथवा कोई. सन्दुक ,या गठरी या कोई और बस्तु जिसपर चिह्न हो काममे लाए, यह निश्चय करानेके अभिप्रायसे कि माल या असबाब जिसपर वह चिह्न है अथवा कोई माल या असवाब जो किसी सन्दूक या गठरी या दूसरी वस्तुमे है जिसपर वह चिह्न हो अमुक मनुष्यका माल है जिसका वह माळ न हो, तो कहा जावेगा कि उपरोक्त मनुष्य मालके झूठे चिह्नको काममे लायो । ( १८२ ) जो कोई मनुष्य कोई व्यापारका झूठा चिह्न अथवा मालका झूठा चिह्न किसी किसी मनुष्यको धोखा ) मनुष्यको धोखा देने अथवा हानि पहुंचानेके- अभिप्रायसे काममें देने या हानि पहुचानेके लाए, उस मनुष्यको दोनों प्रकारों से किसी प्रकारको कैदका दण्ड अभिप्रायसे व्यापार अ- थवा मालके झूठे चिहको दिया जावेगा जिसकी मीआद एक वर्षतक हो सकती है, अथवा काममे लानेका दण्ड. जुर्मानेका दंड या दोनों दड दिये जावेंगे। 'टीप-(१) प्रे०म० या म अ० या म० दोयम ( २ ) गैर दस्तन्दाजी पोलीस (३) अपराधीके नाम वारण्ट (४) जमानत है (५) राजीनामा नहीं है।

- अठारहबा १८.] ऐक्ट नंबर ४५ सन १८६०ई० । (२८१) ( १८३) जो कोई मनुष्य सर्व साधारणको अथवा किसी मनुष्यको हानि या हानि अथवा नुकसा- नुकसान पहुचानेके अभिप्रायसे जानबूझकर किसी ऐसे व्यापारके न पहुंचानेके अभिप्राय- चिह्न अथवा ऐसे मालके चिहकी जालसाजी करे, जिसको से व्यापार अपवा मारके कोई और मनुष्य काममें लाता हो तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों किसी ऐसे चिहकी जालसानी जिसको और प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जायेगा जिसकी कोई काममें लगता हो. मीआद दो वर्षतक हो सकती है अथवा जुर्मानेका दड या दोनो दड दिये जावेंगे। टीप--दफा ४८२ के अनुसार है। (४८१) जो कोई मनुष्य सर्वसाधारणको अथवा किसी मनुष्यको हानि या तुक- झूठ बनाना, किसी सान पहुंचानेके -अभिप्रायसे जानबूझकर किसी ऐसे मालके ऐसे मालके चिह्नका जो चिह्नको झूठ बनावे जिसको कोई सरकारी नौकर काममें लाता सरकारी नौकर काममें हो अथवा ऐसे चिहको झूठ बनावे जिसका कोई सरकारी नौकर लाता हो अथवा किसी ऐसे. चिहका जो वह यह प्रगट करनेके लिये काममे लाता हो कि कोई माल किसी किसीमालके तैयार किये । विशेष मनुष्यने तैयार किया है अथवा किसी विशेष समय या जाने आदिको प्रगट कर किसी विशेष स्थानमे तैयार किया गया है या यह कि वह नेके लिये कामम लाताहो माल किसी विशेष प्रकारका है अथवा किसी विशेष कचहरीमें होकर आया है या किसी माफीके योग्य है अथवा कोई ऐसा चिह्न जिसको वह झूठ जानता हो सच्चे चिह्नकी रीतिसे काममें लाए तो उस मनुष्यको दोनों प्रकारोंमेसे किसी प्रकारको कैदका दह दिया जावेगा जिसकी मीाद तीन वर्पतक होसकती है और जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप-(१) अदालत सेगन प्रे० म० या म. म. या म० अ० (२) दस्सन्दानी पोलीस नही है (३) अपराधीके नाम बारट जारी होगा (४) जमानत है (५) राजीनामा नहीं है। (४८५) जो कोई मनुष्य ठप्पा या चपरास या कोई और औजार जो सर्वसबधी छल छिद्रसे बनाना अथवा विशेष मनुष्यके, मालका चिह्न अथवा व्यापारका चिह अथवा पास रखना किसी बनाने या झूठ करनेके लिये हो बनाए अथवा अपने पास ठग्ये या-चपरास या भो रक्खे, इस अभिप्रायस कि उसको उस चिड्के झूठ के लिये कामेमे मारका, इसलिये कि कोई लाए अथवा कोई ऐसा मालका चिद या व्यापारका चिह्न इसे चिह मालका अथवाव्या- अमिप्रायसे अपने पास रखे कि वह इस बातको प्रगट करनेके पारका.चाहे सर्व संबंधी चाहे निनका झूठ बनाया लिये काममे लाया जावे कि अमुक माल अथवा सौदागरीकी वस्तु अमुक मनुष्य अथवा अमुक कारखानेकी बनाई अयया तैयार की हुई ३ जाय.

[अध्याय- (२८२) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। है जिसको उसने न बनाया अथवा न तैयार किया हो, अथवा यह कि वह, किसी समय या किसी स्थानमे बनाई अथवा तैयार की गई है जिसमे वह न बनाई अथवा न तैयार की गई हो, अथवा यह कि वह किसी विशेष प्रकारकी है कि जिस प्रकारकी वह न हो, अथवा- यह कि वह किसी मनुष्यका माल है जिसका माल न हो तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों दोनों प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा। जिसकी मीआद तीन वर्षतक होसकती है अथवा जुर्मानेका दण्ड या दोनों दण्ड दिये जावेगे टीप-दफा ४८४ के अनुसार है । ( ४८६ ) जो कोई मनुष्य किसी ऐसे मालको, जिसपर अथवा जिस सन्दूक या जानबूझकर किसी ऐसे ) बेठन या वस्तुमें वह माल हो उसपर माल या व्यापारका कोई मालका बेचना जिसपर झूठा चिह्न लगा अथवा छपा हो चाहे वह सर्वसबंधी हो चाहें व्यापार अथवा मालका झूठा चिह्न लगा हो. निजका किसीको धोखा देने अथवा हानि पहुँचानेके अभिप्रा- यसे यह बात जानबूझकर बेचेगा कि यह चिह्न झूठा है अथवा जालसाजीसे लगाया गया है अथवा छापा गया है जो उस मनुष्यकी अथवा उस समयकी अथवा उस स्थानकी जो कि उस चिह्नसे जान पडता है बनी हुई नहीं है अथवा यह जानबूझकर कि 'जो प्रकार उस चिहसे प्रगट होता है व उस प्रकारकी नहीं है तो उसको दण्ड दोनोंमेसे- किसी प्रकारकी कैदका जिसकी मीआद एक वर्पतक होसकेगी दिया जावेगा अथवा जुर्मानेका दड या दोनो दड दिये जावेगे । टीप-(१) प्रे० म० अ० या म. दो० (२) गैर दस्तन्दाजी पोलीस (३) अपराधीके नाम समन (४) जमानत है (५) राजीनामा नहीं है । (४८७ ) जो कोई मनुष्य किसी गठरी अथवा वस्तुपर जिसमे ‘माल रक्खा हो छल छिद्रसे किसी ग- छलसे कोई झूठा चिह्न बनाए. इस अभिप्रायसे कि किसी सरकारी ठरी अथवा वस्तुपर जि- समें असबाब हो झूठा नौकरको अथवा किसी और मनुष्यको यह निश्चय कराए कि चिह्न बनाना. उस गठरी अथवा वस्तुमें अमुक माल है जो उसमे नहीं है अथवा यह कि उसमें अमुक असबाब नहीं है जो उसमे है अथवा यह निश्चय कराए कि वह असबाब जो उस गठरी अथवा वस्तुमें है किसी भाति या प्रकारका है, जो वास्तवमें उस माति अथवा प्रकारसे भिन्न हो, तो उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दंड दिया जावेगा जिसकी मीभाद तीन वर्षतक हो सकती है अथवा जुर्मानेका दड या दोनों दड दिये जाबेगे।

भाठरहवा १८.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई० ॥ (२८३) टीप-(१) असे. या ० म० याम० अ० या म० दो० (२) गैर दस्तन्दानी पोलीस (३) समन अपराधीके नाम (४) जमानत हो सकती है (५) राजीनामा नहीं है। (४८८ ) जो कोई मनुष्य अपर लिखी हुई पिछली दफाके अभिप्रायसे कोई किसी ऐसे झूठे चिहको] ऐसा झूठा चिह छलपूर्वक काममे लाए यह जानकर कि वह चिह्न काममे लानेका दण्ड झूठा है, तो उसको उसी प्रकारका दण्ड दिया जायगा कि जो पिछली कही हुई दफामे कहा गया है । (४८९) जो कोई मनुष्य किसी मालके चिह्नको दूरकरे अथवा मिटाए या हानि पहुंचानक अभि-] बिगाडे इस अभिप्रायसे अथवा यह जानकर कि उसके द्वारा 'प्रायसे मालके किसी चिह किसी मनुष्यको हानि पहुंचाए तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों को बिगाडना. प्रकारोंमेसे किसी प्रकारको केटका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद एक वर्षतक हो सकती है अथवा जुर्मानेका दह या दोनो दण्ड दिये जावेगे । टीप-दफा ४८६ के अनुसार है। . कारेसी नोट और वेकनोटोंके विषयमे । (१८९)(अ)जो कोई मनुष्य कोरेंसी नोट अथवा वेकनोटको खोटा वनावेगा अथवा कारेसी या वेकनोटका ) जानबूझकर खोटा बनाने के यत्नका कोई काम करेगा तो उसे खोटा बनाना. जन्ममरके लिये देश निकालेका अथवा दोनो प्रकारोमेंसे किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जायगा जिसकी मीआद दश वर्ष तक हो सकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। स्पष्टीकरण-इस दफा और दफा ४८९व, क ड के अभिप्रायके लिये शब्द "बैंकनोट" से प्रत्येक ऐसे प्रामिसरी नोट अथवा रुपया चुकानेके इकरारनामेका अभिप्रायहै जो ससारके किसी भागमे बेक अर्थात् महाजनी कारोबार करनेवाले ने जारी किया हो अथवा जो किसी रियासत या उस समयके बादशाहकी ओरसे अथवा आज्ञासे प्रचलितं किया गया हो और जिसके मध्ये यह अभिप्राय होवे कि वह रुपयेके समान अथवा रुपयेके बदले काममें लाया जावे। टीप-(१) अदालत सेशन (२) दस्तन्दाजी पोलीस (३) अपराधीके नाम वारंट (४) जमानत नही है (५) राजीनामा नहीं है।

रखना. (२८४) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- .(४८९)-(ब) जो कोई मनुष्य किसी जाली अथवा खोटे बनाए हुए करेसी जाली अथवा खोटे बैंक) नोट या प्रामसरी नोटको यह जानकर अथवा निश्चय करनेके लिये नोट या कारेंसी नोटको कारण रखकर कि वह जाली अथवा खोटा है, किसी दूसरे मनुष्यके सच्चेकोभांति काममे लाना हाथ बेंचे अथवा उससे प्राप्त करे या मोल लेवे तो उपरोक्त मनुष्यको जन्ममरके लिये देश निकालेका दंड या दोनों प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी कैदका दंड दिया जावेगा जिसकी मीआद दश वर्षतक हो सकती है और वह जुर्मानका भी देनदार होगा। टीप--दफा ४८९ (अ) के अनुसार है। (४८९)-क)-जो कोई मनुष्य अपने पास कोई जाली अथवा खोटा कारेंसी- जाली अथवा खोटे नोट या वैकनोट रक्खेगा यह जानकर अथवा निश्चय करनेका बेकनोटा या कारसीनोटो- को अपने अधिकारमे कारण रखकर कि वह जाली अथवा खोटा है और उसे सबकी मांति काममें लानेकी इच्छा करे अथवा - यह इच्छा करे कि वह सच्चेकी भाति काममे लाया जावे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारों से किसी प्रका- रकी कैदका दंड दिया जावेगा जिसकी भीआट सात वर्पतक होसकती है अथवा जुर्मानेका दह या दोनों दड दिये जावेगे। टीप-(१) अदालत सेशन (२) दस्तन्दाजी पोलीस (३) अपरावीके नाम वारंट (४ जमानत है (५) राजीनामा नहीं है । (४८९) (ड) जो कोई मनुष्य कोई कल, औजार या सामान बनाये कारेसी नौट या बेक) अथवा बनानेके यत्न सम्बन्धी कोई कामको करे या बेचे या मोल नोटको जाली या खोटा ले या अपने अधिकारसे अलग करदे या अपने अधिकारमें रक्खे बनानेके अभिप्रायसे औ- जार या सामान बनाना | इस अभिप्रायसे अथवा यह निश्चय करनेके लिये कारण रखकर अथवा अधिकारमे रखना, कि वह किसी कारेसी नोट या बेकनोटके जाली बनाने अथवा खोटा करनेके काममें लाया जावेगा तो उपरोक्त मनुष्यको जन्मभरके लिये देश निकालेका अथवा दोनों प्रकारों से किसी प्रकारको कैदका दद दिया जावेगा जिसकी मीआद दशवर्षसक होसकती है और वह जुर्मानेके भी योग्य होगा। टीप-दफा ४८९ (अ) के अनुसार है ।

- उन्नीसवा १९.] - ऐक्ट नंवर ४५ सन् १८६० ई० । (२८५) - अध्याय उन्नीसवाँ १९. नौकरीका कौल करार दंड योग्य रीतिसे तोडनेके विषयमे । ( ४९० ) जो कोई मनुष्य, जिसपर किसी नीतिपूर्वक कौल करारके अनुसार किसी जल अथवा थलके मनुष्यको अथवा मालको एक स्थानसे दूसरे स्थानको लेजाने सफरमें नौकरीके कोल करारको तोडना. अथवा पहुँचानेमे अपने शरीरसे काम करना अथवा जल या थलके मार्गमें किसी मनुष्यको नौकरी करना अथवा जल या यलके मार्गमे किसी मनुष्य अथवा मालकी चौकसी करना अवश्य हो जानबूझकर ऐसा करनेसे चूकेगा, सिवाय बीमारी अथवा बदसलूकीकी अवस्थाके, तो उसे दोनो प्रकारों से किसी प्रकारको केदका दद दिया जावेगा जिसकी मीआद एक महीने तक होसकती है अथवा जुर्मानेका दट जो सौ रुपये तक होसकता है अथवा दोनों दड दिये जावेगे। उदाहरण। (क) शिवशकर पालकीका एक कहार जिसपर नीतिपूर्वक किये हुए कौल करारके अनुसार रमाशंकरको एक स्थानपर दूसरे स्थानसे ले जाना अवश्य था, राहपरसे भाग गया तो शिवशकरने इस दफामे कहा हुआ अपराध किया। (ख) शिवशकर एक कुली निसपर नीतिपूर्वक किये हुए कौल करारके अनुसार रमाशकरका असवाब एक स्थानसे दूसरे स्थानपर ले जाना अवश्य था, असवायको फेककर चल दे तो शिवशकरने वह अपराध किया जिसका वर्णन इस दफाम किया गया (ग) शिवशंकर वैलोंके एक मालिकने जिसपर अनीतिपूर्वक किये हुए कौल कारारके अनुसार कुछ माल अपने बेलपर लादकर एक स्थानसे दूसरे स्थानपर पहुँचाना अवश्य था, ऐसा करनेमें कानून विरुद्ध चूक की तो शिवशकर उस अपराधका अपराधी हुमा जिसका वर्णन इस दफामें किया गया है । घ) शिवशकरने रमाशकरको नो एक कुली है अनीति पूर्वक अपना असबाब ले चलनेके लिये दबाया, रमाशकर राहमै असबाब रखकर भाग गया तो यहा जो कि असबाबका पहुंचाना रमागकरपर कानूनानुसार उचित न था, इसलिये रमाशकर किसी अपराधका अपराधी नहीं हुआ। स्पष्टीकरण-इस अपराधके प्रमाणित होनेके लिये कुछ यह अवश्य नहीं है कि कौल करार उस मनुष्यके साथ किया जाय जिसकी नौकरी करनी हो वरन यही काफी है कि उस मनुष्यने जिसको वह नौकरी करनी पडेगी किसी मनुष्यके साथ वह कौलकरार कानूनक अनुसार किया हो, चाहे वह प्रगट रीतिपर किया हो अथवा अप्रगट रीतिपर ।

(२८६) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- - उदाहरण । शिवशकरने किसी डाक कम्पनी के साथ उसकी गाडी एक महीनेतक हांकनेका कौल करार किया, रमागकरने सफरमे जाने के लिये उस डाक कम्पनीको गाडी भाडेकी और उस कम्मनीने रमा. शंकरको उस महीने के भीतर वही गाडी दी जिसको शिवशंकर हांकता था, शिवशकरने जानबूझकर सफरमें गाडी छोडदी तो यहां. यद्यपि शिवशंकरने रमाशकरके साथ कोलकरार नहीं किया था तथापि वह इस दफामै कहे हुए अपराधका अपराधी हुआ । टीप--(१) प्रे० म० म० अ० या म० दो० (२) पोलीस हस्तक्षेप नहीं कर सकती, (३) अपराधी के नाम समन (४) जमानत है (५) राजीनामा है। ---अपराधीने एक मनुष्यके साथ वह इकरार किया कि वह मनुष्य अपराधीकी गाडीपर अपना माल एक नियत समयतक जहां चाहे वहा लेजाय, और फिर अपराधीने अपनी गाडी न दी तजवीज हुई कि अपराधीके अपराधका दफा ४९० से सम्बन्ध न था। (वीक्ली रिपोर्टर जिल्द ९ सफा १२) ( ४९१ ) जो कोई मनुष्य, जिसपर नीतिपूर्वक कौल करारके अनुसार किसी असमर्थमनुष्यकी ट-) ऐसे मनुष्यकी सेवा करना अथवा आवश्यकीय वस्तुओंका पहुं- हल करने, और जो चाना उचित है जो कम अवस्थाके कारण अथवा सिडी वस्तु उसके लिये अवश्य चाहिये उसके पहुचानक [ होजानेके कारण अथवा रोग या शरीरकी दुर्बलताके कारण कौल करारको तोडना || असमर्थ है-अथवा जो अपनी रक्षाका यत्न करने वस्तु उसे चाहिये उसके प्राप्त करनेके अयोग्य है जानबूझकर ऐसा करनेमें चूक करे, तो उस मनुष्यको दोनो प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दंड दिया जावेगा, जिसकी मीआद तीन महीनेतक होसकती है अथवा जुर्मानेका दण्ड जो दो सौ रुपये तक होसकता है अथवा दोनों दण्ड दिये जावेगे। टीप-दफा ४९० के अनुसार है । ( १९२ ) जो कोई मनुष्य, जिसपर किसी नीतिपूर्वक लिखे हुए कौल करारके किसी दूर देशमें ) अनुसार किसी और मनुष्यके लिये दस्तकार या कारीगर या नौकरी, करनेके कौल- मजदूरकी रीतिसे किसी समय तक, जो तीन वर्षसे अधिक करारको तोडना, जहां न हो, ब्रिटिश इडियाके भीतर किसी ऐसे स्थानमे काम करना नौकर मालिकके खर्चसे पहुंचाया गया हो. उचित है, जहा यह उस कौलकरारके अनुसार उस मनुष्यके खर्चसे पहुँचाया गया हो अथवा पहुंचाए जानेको हो, उस मनुष्यकी नौकरी परसे उस कौलकरारकी मीादके भीतर जानबूझकर माग जाए अथवा विना किसी उचित कारणसे उस नौकरीके करनेसे नाहीं करे जिसके करनेका उसने कौल करार किया हो और वह नौकरी उचित अथवा योग्य हो, तो उस को दोनों प्रकारोमेंसे किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जायेगा जिसकी मीआद चीसवा २०.] ऐक्ट नंबर ४५ सन १८६० ई०॥ (२८७) एक महीनेसे अधिक न हो अथवा जुर्मानेका दण्ड जिसकी तादाद उस खर्चको दुगुनी तादादसे अधिक न हो या दोनों दड दिये जावेगे सिवाय उस अवस्थामे कि जब यह बात पाई जावे कि नौकर रखनेवालेने उसके साथ बदसलूकी की हो अथवा अपनी ओरसे कोल करारका दावा पूरा करनेमे भूल की हो। टीप-(१) प्रे० म० या म० अ० या म० दौ० (२) गैर दस्तन्दाजी पोलीस (३ अपराधीके नाम समन (४) जमानत है (५) राजीनामा नहीं है। १-इफा ४९२ का जिसके अनुसार दस्तकार, कारीगर या मजदूरको नौकरीके कौल करा- रका बोडना अपराध है, घरऊ नौकरोसे सम्बन्ध नहीं है । (पजाब रिकार्ड न० २० सन् १८७६ ई.) अध्याय बीसवाँ २०. उन अपराधोके वर्णनमे जो विवाहसे सम्बन्ध रखते हैं। (१९३) प्रत्येक ऐसे पुरुषको, जो किसी स्त्रीको जिसका नीतिपूर्वक विवाह उस संभोग,जो किसी पुरु- पुरुषके साथ न हुआ हो, धोखा देकर यह निश्चय कराए पन नीतिपूर्वक विवाहका कि उस स्त्रीका नीतिपूर्वक विवाह उसके साथ हुवा है, और चोखा देकर कियाहो उस निश्चयके द्वारा वह अपने साय उस स्त्रीका सभोग करनेका कारण होवे उसको दोनों प्रकारोमेंसे किसी प्रकारको कैदका दंड दिया जावेगा जिसकी मीाद दश वर्षतक हो सकती है और. वह जुर्मानेके मी योग्य होगा। टीप-(१) अदालत सेशन (२) गैर दस्तन्दाजी पोलीस (३) अपराधीके नाम वारण्ट (४) बमानत नहीं है (५) राजीनामा नहीं है। (१९४) जिस किसीकी स्त्री या पति जीवित हो और वह उस अवस्थामें विवाह खी अथवा पतिके जीते करे कि जिसमें ऐसा विवाह उस स्त्री- या पतिके. जीवित रह- स्त्री दुबारा विवाह करना नेके कारण रह हो जावे तो उस मनुष्यको दोनों प्रकारोंमेंस किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीाद सात वर्ष तक हो सकती है। और वह जुर्मावका मी देनदार होगा। छूट। यह दफा ऐसे मनुष्यसे.सम्बन्ध न रखेंगी जिसका विवाह ऐसी स्त्री या पतिके साथ किसी अदालत मजाज ( समर्थ न्यायालय ) के न्यायसे रद्द कर दिया गया हो, h . (२८८) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- और न ऐसे मनुष्यसे यह दफा सम्बन्ध रक्खेगी जो अपने पहिले पति या स्त्रीके जीतेजी विवाह करे यदि वह पति या स्त्री उस पिछले विवाहके समय सात वर्षकी मीआद तक बराबर उसके पाससे बिछुटा रहा हो या रही हो और न उसने उस समयके बीचमें कभी सुना हो कि वह जीवित है-परतु नियम यह है कि पिछला विवाह करनेवाला या करनेवाली विवाह होनेस पहिले उससे जिसके साथ विवाह करे सब वृत्तात सत्य २ जहातक जानता या जानती हो कह दे। टीप-(१) अदालत सेशन (२) अपराधीके नाम वारण्ट (३) गैर दस्तन्दाजी पोलीस (४) जमानत है (५) राजीनामा नहीं है। १- कैदीने अपनी स्त्रीके जीतेजी एक दुसरी स्त्रीके साथ ब्याह करनेके मध्ये इश्तिहारात (विज्ञापन ) जारी किये और मजिस्ट्रेट दर्जा अब्बलने उसको दूसरे विवाहके उद्योगमें अपराधी ठहराकर दफा ४९४ व ५११ के अनुसार सेशन सिपुर्द किया और सेशन जज.आगरेने उसको तीन वर्षकी कडी कैदका दण्ड दिया-हाईकोर्टने तजवीज की कि विज्ञापनका देना विवाह करनेकी तैयारीमे दाखिल था परन्तु उद्योगकी सीमातक न पहुँचता था । (इ० ला रि• इलाहाबाद जिल्द २ सफा ३१६) २-यदि किसी कम अवस्थावाली (नाबालिग) मुसलमान स्त्रीका दूसरा विवाह उसके अव्वल पतिकें जीतेजी उस स्त्रीका रक्षक किसी मनुष्य के साथ करदे तो उसपर दफा ४९४ व दफा १०९ का अपराध नही ठहराया जा सकता । ( इ० ला. रि० कलकत्ता जिल्द ४ हिस्सा १. नं० ३७९) ३-खानदेशके रहनेवाले एक राजपूतने अपनी स्त्रीको तलाकनामा (दस्तावेज छोड छुट्टी) लिख दिया परन्तु उसमें कोई उचित कारण न लिखा, इसलिये वह दूसरा विवाह करनेवाला राजपूत दफा ४९४ का और विवाह करानेवाला पुरोहित दफा १०९ व ४९४ के अपराध सहायता करनेका अपराधी हुआ। (इ. ला. रि० बम्बई जिल्द ६ सफा १२९ नं १७८) ४- यदि कोई हिन्दू स्त्री मुसलमानीमत स्वीकार करले, तो उसके मुसलमान हो जानेसे उस- का विवाह उसके पतिसे रद्द न होजावेगा इसलिये वह अपने पतिके जीतेजी कोई दूसरा नीतिपूर्वक विवाह नहीं कर सकती अतएव किसी मुसलमानके साथ निकाह करना हिंदुस्थानके दंडसंग्रहको दफा ४९४ के अपराधमे गिना जायगा (इ. ला. रि० बम्बई जिल्द ४ सफा ३३०) ५--एक कम अवस्थावाली (नाबालिग ) मुसलमान लहकीका विवाह उसकी माने (क) के साथ कर दिया, लडकीके युवा (बालिग ) होनेसे पहिले (क) जेलखाने चलागया, इस समयके बचिमे लडकी युवा हुई तब उसने (ख) के साथ विवाह कर लिया-इतनेमें (क जेलखानेसे छूट आकर लड़की और (ख) के नाम दूसरा विवाह करनेके अपराधमै नालिग की-तजवीज हुई कि शिया व सुन्नी दोनो मतोमे लडकीको यह अधिकार है कि वह युवा होनेपर अपने निकाहको कायम रक्खे अथवा न रक्खे-इसलिये लडकीने युवा होनेपर अपने पहिले निकाह को स्वीकार नहीं किया अतएव कोई अपराध नहीं है। (इ ला. रि० कलकत्ता जिल्द १९ सफा ७९) .

वीसवा २०.] ऐक्ट नंबर ४५ सन १८६० ई० । (२८९) ६--ताजीरात हिन्दकी दफा ४९४ के अनुसार अपराधीका दण्ड नही ठहर सकता, उस अवस्थामे कि जब गवाहीसे यह प्रमाणित हो जावे कि उस कौमके चलनेके अनुसार सगाई या निकाहका विवाह उचित होता है, जब कि पति अपनी स्त्रीको छोड देवे । (इ० ला. रि० कलकत्ता जिल्द १९ सफा ६२७) (४९५ ) जो कोई मनुष्य पहिले विवाहका वृत्तात उससे छिपा रखकर जिसके साथ यही अपराध पहिले वह पिछला विवाह करता है उस अपराधका अपराधी हो जिसका विवाहका उससे जिसके । वर्णन इसके ऊपरका पिछली दफामे किया गया है, उसको साथ पिछला विवाह हुआ। दोनों प्रकारोमेंसे किसी प्रकारको कैदका दण्ड दिया जावेगा छिपाकर करना जिसकी मीआर दश वर्षतक होसकती है और वह जुर्मानेका मी देनदार होगा। टीप-(१) अदालत सेशन (२) दस्तन्दाजी पोलीस नहीं है (३) अपराधीके नाम वारंट जारी होगा (४) जमानत नहीं है (५) राजीनामा नहीं है । १ करना. ( १९६ ) जो कोई मनुष्य अधर्मसे अयवा छलके अभिप्रायसे विवाहको रीति भाति नीतिपूर्वक विवाह कर-] को पूरा करे, यह जानकर कि उसके द्वारा उसका विवाह नीति. नेके विना छलके साथ पूर्वक नहीं ठहर सकता, उस मनुष्यको दोनो प्रकारोमेसे किसी प्रका- विवाहकी रीतिको पूरा रकी कैका दड दिया जावेगा जिसकी मीआद सात वर्पतक होस- कती है और वह जुर्मानका भी देनदार होगा। टीप-(१) अदालत सेशन (२) गैर दस्तन्दाजी पोलीस (३) अपराधीके नाम वारण्ट १४) जमानत नही है (५) राजीनामा नही है। १-दफा ४९६ के अपराधमें इस बातका प्रमाणित होना अवश्य है कि अपराधीकी इच्छा छल करनेकी थी केवल अपने घरमें ही विवाहकी रीति भॉतिका पूरा करना-अनुचित विवाहमें सहा- यता करनेके अपराधकी सीमातक नहीं पहुंचता । ( वीकी रिपोर्टर इस्पेशल सीजर सफा १३) (४९७ ) जो कोई मनुष्य किसी ऐसी खीसे जो किसी दूसरे पुरुषकी स्त्री है या जिसको वह जानता अथवा जाननेका कारण रखता है कि व्यभिचार. वह किसी दूसरे पुरुषकी स्त्री है, विना प्रसन्नता अथवा सम्मति उस पुरुषके सम्भोग करे और वह सम्भोग बलपूर्वक व्यभिचारके अपराधकी सामातक न पहुंचे तो वह मनुष्य व्यभिचारके अपराधका अपराधी होगा और उसको दोनों प्रकारों से किसी प्रकारकी कैदका दढ दिया जायेगा, जिसक मीआद ( २९०) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- पांच वर्षतक हो सकती है अथवा जुर्मानेका दड या दोनो दण्ड दिये जायेंगे-ऐसी अवस्थामें स्त्री सहायककी रीतिपर दंड दिये जानेके योग्य न होगी। टीप-(१) अदालत सेशन या प्र० म. या म० अ० (२) गैर दस्तन्दाजी पोसीस (३) भराधीके नाम वारट (४) जमानत है (५) राजीनामा है । १-मुकद्दमेकी अपील किये जानेके पश्चात् व्यभिचारके मुकहमेमे दस्तबरदारीकी इजाजत ( मुकद्दमेको उठा लेना) नहीं दी जा सकती । ( इ० ला• रि• इलाहाबाद जिल्द २ सफा ३३९) २-(क) पर (द) और (च) ने जो (द) की स्त्री बयान की गई है (च).से व्यभिचार करनेका अपराध लगाया और व्यभिचारका अपराध, तजवीजके अभिप्रायसे ठहराया गया विवाहकी गवाही उनके बयानाम न थी कि उनका विवाह आपसम हुआ और (क) का यह बयान था कि (च) द की स्त्री नहीं है, (क) पर व्यभिचारका अपराध प्रमाणिन हुआ-तजवीज हुई कि मुद्दइयोफी गवाह व्यभिचारका अपराव प्रमाणित होनेके लिये काफी नहीं है । ( इ. ला. रि० इला- हाबाद जिल्द ५ सफा २३३) ३-एक स्त्रीके पतिने कि जिसके साथ अपराधीका व्यभिचार करना कहा गया था, मुक. इमेकी पैरवी न की, तो अदालतने अपराधीको छोड दिया । (रिपोर्ट हाईकोर्ट बम्बई जिल्द ५ सफा २७) - ) ४-जिस मनुष्य के साथ कोई स्त्री अपने पतिके जीते जी और उसकी इच्छाके विरुद्ध दूसरा विवाह करले तो वह मनुष्य उस स्त्रीके साथ सम्भोग करने से दफा ४९७ के अनुमार व्यभिचारका अपराधी गिना जायगा । (रिपोर्ट हाईकोर्ट बम्बई जिल्द २ मफा ११७) ५-(क) ने (ख) के घरमे बिना आना (ख) के घुसकर उसकी स्त्रांके साथ व्यभिचार किया तजवीज हुई कि (क) को व्यभिचार और घरको मदाखलत वेजाके अपराधमे अलग २ दंड दिया जा सकता था क्योकि वे अलग अपराध थे । ( पजाब रिकार्ड नं ५ सन् १८७१ ई.) (४९८ ) जो कोई मनुष्य किसी स्त्रीको जो किसी दूसरे पुरुषको स्त्री है अथवा बुरी इच्छासे किसी ] जिसको वह जानता या निश्चय करनेका कारण रखता है कि वह व्याही हुई स्त्रीका फुसला किसी दूसरे पुरुषकी स्त्री है, उस पुरुषके पाससे अथवा किसी और ले जाना या ले उडना मनुष्यके पाससे जो उपरोक्त पुरुषकी ओरसे उपरोक्त स्त्रीका रक्षक अथवा रोक रखना. हो,ले उडे अथवा फुसला लेजाय इस अभिप्रायसे कि उपरोक्त स्त्री किसी मनुष्यसे अनुचित सम्भोग कराए अथवा उस अभिप्रायसे किसी एसी स्त्रीको छिपाए अथवा रोक रक्खे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी कैदका दंड दिया जावेगा जिसकी मीआद दो वर्षतक हो सकती है अथवा जुर्मानेका दण्ड या दोनो दण्ड दिये जावेगे।

--- इक्कीसवा २१.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६०ई० । (२९१) टीप-(१)प्रै० म० या म० अ० या म० दो. (२) गैर दत्तन्दाजी पोलीस (३ अपराधीके नाम वारंट (४) जमानत है (५) राजीनामा है। १--जब एक स्त्री जिसको उसके पतिने छोड दिया था अपनी प्रसन्नताले अपरावीक नाय चली गई तो अपराधीपर दफा ४९८ का अपराध नहीं ठहर सकता, क्योंकि अराधीने उसको किसी प्रकाग्मे नही बहकाया । (वीकी रिपोर्टर जिल्द २ सफा ३५) २- स्त्री भगा ले जानेके अपराधमें फरियादी (मुस्तगीत) वली व बीकी मॉका बयान विवाहके हो जानेका पूरा प्रमाण है । (६० लारि०मदराम जिल्द ९ मना) ३-अपरावीपर दफा ४९८ के अनुसार यह अपराध लगाया गया कि वह एक बी (अ) को जो उस समय (म) की स्त्री थी और अपरावी उमको (म) की स्त्री जानना था, उनके साथ सम्भोग करनेकी इच्छासे ले भागा-तजवीज हुई कि अपराधीने अमराव किया था, यद्यपि त्वयं उस लीने अपने ले भागनेके लिये अपराचीसे कहा था और अपरावी बहुत दिनों तक उसका कहना माननेसे नाही करता रहा था । (रिपोर्ट हाईकोर्ट मदराम जिल्ट २ सफा ३३१) ४-अपरावीको टका ४९८ के अपराधमे इसलिये दण्ड न दिया गया कि फरियादीने नालिश करनेके पहिले अपनी स्त्रीको तलाक दे दी थी-(पजाब रिकार्ड न. २७ सन् १८७९ ई.) अध्याय इक्रीसवाँ २१. अपयश लगाने के विषयम। ( ४९९ ) जो कोई मनुष्य शब्दोसे जो उच्चारण किये गये हों अथवा जो पढे जानेके अभिप्रायसे हों अथवा चिह्नोंसे या प्रत्यक्ष चित्र इत्यादिसे अश्या गाना किसी मनुष्यके मध्ये कोई जाल (तुहमत ) लगावेगा या छापकर प्रगट करेगा इस अभिप्रायसे कि उस मनुष्पकी नेकनामीको हानि पहुंचे अयवा यह जानकर या निश्चय करनेका कारण रखकर कि, वह जाल उस मनुष्यकी नेकनामीको हानि पहुंचाएगा तो सिवाय आगे लिखी हुई छूटोंके कहा जायगा कि उसने उस मनुष्यको अपयश लगाया। स्पष्टीकरण-१- किसी मरे हुए मनुष्यको कोई तुहमत लगानेसे मी अपयश लगाना हो सकेगा जब कि उस अपयशके लगानेसे उस मनुष्यके यशको जव कि वह कोई दण्ड अध्याय २१ सम्बन्धीका न्याय सताये ( मजलम) मनुप्यकी नालिग होनेपर होसकता है (देखो ऐक्ट १० सन् १८८२ ई० की दफा १९८) अदालतको अधिकार है कि दफा ५०२ का अपराध प्रमाणित होनेपर किताबों अथवा और वस्तुओंके जिनके कारण अपरावे हुआ नष्टकर देनेकी आजा दे-(ऐक्ट १०. सन् १८८२ ई० की दका ५२१) ' (२९२) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- जीवित होता हानि पहुंचती और उससे यह अभिप्राय हो कि उस मनुष्यके लडके वालों अथवा नगीचके नातेदारोंके मनको दुःख पहुँचे । स्पष्टीकरण-२-किसी कम्पनी या समाजको अथवा मनुष्यों के समूहको, जो कम्पनी या समाजकी रीतिसे इकट्ठा हुए हों, किसी बातको तुहमत लगाना मी अपयशको लगाना हो सकेगा। स्पष्टीकरण-३-दो अर्थवाले अर्थ शब्द कहकर अथवा व्याजस्तुति करके कुछ- बातका कहना भी अपयशका लगाना हो सकेगा। स्पष्टीकरण-४-किसी तुहमतके मध्ये न कहा जावेगा कि वह किसी मनुष्यको नेकनामीको हानि पहुंचाता है, सिवाय उस अवस्थामें कि, जब वह तुहमत स्पष्टरीतिपर या लौट फेरकर और लोगोंकी दृष्टिमे उस मनुष्यके सुचाल या बुद्धिमानीके कम होजानेका कारण हो, अथवा उसको जात पात या व्यवहारमे बट्टा लगे अथवा उसकी साख बिगडे अथवा इस बातके निश्चय किये जानेका कारण होवे कि उस मनुष्यका शरीर घृणित अवस्थामें या एक ऐसी अवस्थामें है जो बहुधा कलकित गिने जानेका कारण है। उदाहरण। (क) शिवशंकरने कहा कि-रमाशकर ईमानदार मनुष्य है, उसने गिरिजाशंकरकी घडी कमी नहीं चुराई-यह निश्चय करानेके अभिप्रायसे कि रमाशंकरने 'गिरिजाशंकरकी घडी चुराई है तो यह अपयशलगाना कहलावेगा सिवाय इसके कि छूटोमेंसे किसी छूटमे आजाए । (ख) शिवशकरसे पूछा गया कि, गिरिजाशंकरकी घडी किसने चुराई-शिवशंकरने रमाशं- करकी ओर इशारा किया, यह निश्चय करानेके अभिप्रायसे कि, रमाशंकरने गिरिजाशंकरकी घडी चुराई, तो यह अपयश लगाना कहलावेगा-सिवाय उस अवस्थामे कि, जब वह किसी छूटमे आजाए। (ग) शिवनन्दनने यगोदानन्दनका एक ऐसा चित्र (तस्वीर) खींचा कि वह रामस्वरूपकी घडी लिये भागा जाता है, यह "निश्चय करानेके अभिप्रायसे कि-यशोदानन्दनने राम- स्वरूपकी घडी चुराई है तो यह अपयगका लगाना है-सिवाय उस अवस्थामे कि, जब वह किसी छूटमें आजाय। १-छूट-किसी मनुष्यके मध्ये किसी सच्ची बातको तुहमत लगानी अपयशका लगाना किसी सच्ची बातकी न कहलावेगा जब कि उसका लगाना अथवा प्रगट करना तुहमत लगाना, जिस- को लगाना, अथवा सर्वसाधारणके लाभके लिये उचित हो-यह बात जांचना, प्रगट करना सर्वसाधा- [ कि इससे वास्तवमे सर्व साधारणका लाभ है या नहीं, दणके लाभके लिये उ- समयकी जांच के आधीन होगी। चित हो, ईकीसवा २१.] . कार्रवाईका ढग, ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०॥ (२९३) २-छूट-शुद्धस्वमावसे कुछ विचाराश ( राय ) किसी सर्वसम्बन्धी नौकरकी कार्रवाई के ; सरकारी नौकरकाब-] मध्ये अथवा उसके बर्ताव व चलनके मध्ये, वहीं तक जहा तक वि उसकी नौकरीकी कि वह चलन उस कार्रवाईसे सम्बन्ध रखता हो प्रगट करदेना रीतिपर, अपयश लगाना न कहलावेगा। ३-छूट-किसी रायका शुद्धभावसे प्रगट करना किसी मनुष्पकी कार्रवाई के ढगके मध्ये, सर्वसम्बधी कामके) जो सर्वसाधारणके किसी कामसे सम्बन्धित हो, और उस मनुष्यके मध्ये किसी मनुष्यको चलन अथवा गुणके मध्ये, जहातक कि वह चलन अथवा गुण उस कारवाईके ढगसे प्रगट होता हो और न उससे अधिक, अपयश- लगाना नहीं है। उदाहरण। शिवशकरका नीचे लिखी बातों में रमागकरके ववके मध्ये कोई राय शुद्धभावसे प्रगट करना अपयश लगाना नहीं है, अर्थात्, सर्व सम्बन्धी किसी कामके मध्ये गवर्नमेंटको अर्जी देनमें, अथवा किसी सर्व सम्बधी मामलेकी सभा होनेके लिये धुलावेके कागजपर दस्तखत करने अथवा उस प्रकारको सभाका मुखिया या गझी होने में अथवा सबसे सहायता मांगनेके लिये किसी सभाके जोडने या उसका साथी होनेमें, अथवा किसी ऐसे ओहदेके लिये, जिसका काम भली प्रकारपर करने में सर्वसाधारण मनभ्योके अभिप्रायका. सम्वन्ध हो, किसी उम्मेदवारके चुननेके मध्ये राय देने अथवा उसके लिये औरोंसे राय प्राप्त करनेके मध्येमें,- ४-छूट-कोर्टआफनस्टिसकी किसी कार्रवाई अथवा उसकी कारवाईके फलके मध्ये कोर्टाफजस्टिसकी पक्की रीतिपर सची कैफियतका प्रगट करना अपयश लगाना कार्रवाईकी कैफियतका नहीं है। प्रगट करना स्पष्टीकरण-कोई जस्टिस आफ दी पीस या दूसरा अपसर जो खुली कचहरीमें तहकीकात कर रहा है, पहिले इसके कि वह मुकदमा किसी कोर्टाफजस्टिसमे पेश हो, एक ऐसी अदालत है जो ऊपर लिखी दफाके अभिप्रायमें गिनीजाती है । ६-छूट-दीवानी या फौजदारीके किसी मुकद्दमेकी व्यवस्थाके मध्ये, जो किसी किसी मुकद्दमेकी कैफि-) कोर्टआफजस्टिसने निवटाया हो अथना किसी मनुष्यकी कार्रवा- यत. जिसका निबटेरा ईके ढगके मध्ये, उसके किसी ऐसे मुकदमेमें पक्षपाती या गवाह कोर्टआफजास्टिसमें हुआ- या कारिन्दा होनेकी रीतिसे या ऐसे मनुष्यके चलन अथवा गुणके अथवा गवाही और और मनुष्योंकी कारवाईका मध्ये जहातक कि, उसको कार्रईके ढंगसे वचलन अथवा वेग जो उससे सम्बन्ध गुण प्रगट होते हों, और न इससे अधिक, किसी रायका शुद्ध- भावसे प्रगट करना, अपयश लगाना नहीं है . रखते हो.

(२९४) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। - अध्याय- उदाहरण। क) शिवशकर कहै कि मेरी समझमे रमाशकरकी गवाही अमुक मुकद्दमेमें ऐसी बुरी है कि वह अवश्य मूर्ख अथवा अधर्मा है-तो शिवशंकर इस छूटमे गिना जायगा यदि वह शुद्धभावसे यह बात कहता है, क्योंकि वह राय जो शिवशकर प्रगट करता है रमाशंकरके चलन व गुणसे सम्बध रखती है जैसा उसकी कार्रवाईके ढगसे गवाही होनेपर प्रगट होता है और न इससे अधिक- (ख) परतु यदि शिवशकर यह कहै कि रमाशकरने अमुक मुकद्दमेमे, जो बयान किया है उसको मैं सत्य नहीं मानता, क्योंकि रमाशकरका स्वभाव झूठ बोलनेका है तो शिवशंकर इस छूटमें नही गिना जायगा क्योंकि वह राय जी शिवशकर रमाशंकरके चलन व-गुणके मव्ये बयान करता है ऐसी राय है जो रमाशकरकी गवाहीसे सम्बन्ध नही रखती। ६-छूट-शुद्धभावसे किसी सम्मतिका प्रगट करना किसी कामकी व्यवस्थाके मध्य किसी सर्व सम्बन्धी जिसको किसी काम करनेवालेसे सर्व साधारणकी रायपर छोडा कामकी व्यवस्था. हो अथवा काम करनेवालेके चलन व गुणके मध्ये, जहातक कि वे चलन व गुण उस कामसे प्रगट होते हों और न उससे अधिक, अपयश लगाना नहीं है। स्पष्टीकरण-कोई काम सव लोगोंकी रायपर या तो स्पष्ट रीतिसे छोडा जास- कता है अथवा काम करनेवालेके ऐसे कामोसे जिनसे सब लोगोंकी रायपर उस कामका छोडा जाना पाया जाता हो । उदाहरण। (क) वह मनुष्य जो किसी पुस्तकको छपवाए, उस पुस्तकको सर्व साधारणकी राय पर छोडता है। ख) वह मनुष्य जो मव लोगो के सामने कुछ बात कहता है, उस बातको सर्व साधारणकी रायपर छोडता है। ग) कोई भाड या गवइया जो सर्वसाधारण जलसेमे अपना गुण प्रगट करे वह अपने खेल अथवा गानको सर्व साधारण की रायपर छोड़ता है। घ) शिवशकर किसी पुस्तकके मध्ये जो रमाशंकरने छपवाई है कहै कि रमाशकरकी पुस्तक मूर्खताकी है और इसलिये रमागकर अवश्य मूर्ख है अथवा रमाशकरकी पुस्तक अश्लील (फहा )है और इसलिये अवश्य रमागकर निर्लज ( फाहिशुल अक्ल) मनुष्य है तो शिवशंकर इस छूटमे गिना जावा यदि वह यह बात शुद्धभावसे कहता है, क्योकि वह राय जो शिवशंकर रमाशंकरके मध्ये प्रगट करता है केवल रमाशकरके चलन व गुणसे सम्बन्ध रखती है जहांतक कि वे रमाशंकरकी पुस्तकसे.प्रगट होते हैं न कि उससे अधिका- -- इक्कीसवाँ २१ ] ऐक्ट नवरं ४५ सन् १८६० ई०। (२०.५) ड) परतु यदि शिवाकर यह कह कि रमागकरकी पुस्तक मग्नता और निरन्ना की होनेका मुझे कुछ आश्चर्य नहीं है क्योंकि वह मूर्स और कामी मनुष्य है नो निवाकर इम इटम नही गिना जायगा, कोंकि वह राय जो शिवाकर रमाशकरके चरन व गुणके मन्ये प्रगट उरता है ऐनी राय है जो रमाशकरकी पुस्तकसे सम्बन्ध नहीं रगती। ७-छूट-जिस मनुष्यको दूसरेपर कानूनकी रीतिसे अथवा किसी कौल करारक द्वारा शिक्षादोष ( लानत ) जो उस दूसरेके साथ कानूनानुसार हुआ हा कुछ अधिकार प्राप्त मलामत) जो शुद्धभावसे हो उसकी ओरसे उस दूसरे मनुष्यकी कार्रवाडक मय किमी बानमे कोई ऐसा मनुष्य दे जिस जिसमें उसका नीतिपूर्वक अधिकार सम्बन्ध रखता हो शुद्धमावसे को कानूनकीरीसिसे दूसरे पर अधिकार प्राप्त हो कुछ दोष लगाया जाय तो वह अपयशका लगाना न कहलावंगा। उदाहरण। नीचे लिखे हुए मनुष्य इस छूटमें गिने जायगे, अर्थात् कोई जन जो किसी गवाहको अथवा अपनी अदालतके अहलकारको उसकी कार्रवाई पर शुद्धभावसे गिक्षादीप (लानत मनामत) लगाता हो-अथवा किसी सरिश्तेका हाकिम जो शुद्धभावसे अपने आजाकारियों (मातहतो ) को शिक्षादोष लगाता हो अथवा कोई मा या याप जो अपने बाल्कको और बाल्कोंके सामने मुहमालमे शिक्षादोप लगावे अथवा कोई मास्टर (अव्यापक) जिस्को किमी विद्यार्थीके मा बापकी ओन्मे अधिकार प्राप्त हो, उस विद्यार्थीपर और विद्यार्थियोंके सामने शुद्धभावसे शिक्षादीप लगाना हो भयान कोई स्वामी जो अपने नौकरको सेवा करनेमें सुस्त होनेके मध्ये शुद्धभावसे फटकारता हो अथवा कोई महाजन जो अपनी कोठीके खजानची (गेकडिया) को उसके चरनके ढगके मन्ये उसके रोकादये- पनके काममें गुद्धभावसे शिक्षादोप लगाता हो । -छूट-शुद्धमावसे किसी मनुष्पकी शिकायत करनी किसी मनुष्य के सामने उन शिकायत जो आधि-] मनुष्योमेसे, कि जो उस मनुष्यपर शिकायतके विषय के मध्ये उचिन कारी मनुष्य के सामने पेश अधिकार रखते हैं अपयशका लगाना नहीं है। की जाये. उदाहरण । यदि शिवाकर किसी मजिस्ट्रेटकं सामने शुद्धभावसे रमाशकरकी शिकायत करे अपना यदि शिवशकर शुद्धभावसे रमाशकरके चलनके मव्यै जो नीकर है उसके स्वामीसे शिकायत करे-अथग यदि शिवशकर शुद्धभावमे रमाशकरका जो एक बालक है उसके चल्नके मध्ये उसक बापसे मिका. बत करे-तो शिवाकर इस लूटमे गिना जायगा ।

(२९६) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- ९-छूट -किसी मनुष्यके चाल चलनके मध्ये तुहमत लगाना अपयश लगाना नहीं अपने स्वार्थकी रक्षाके है जब कि वह तुहमत शुद्धभावसे तुहमत लगानेवालेकी या किसी लिये अथवा सर्व साधारण के मलेके लिये किसी मनु- और मनुष्यकी खार्थरक्षाके लिये या सर्व साधारणके लाभके लिये ध्यको शुद्धभावसे कुछ लगाई जावे। बात लगानी. उदाहरण। (क) शिवशकर एक दूकानदार रमाशकरसे जो उसका कामकाज करता है कहे कि तुम गिरिजाशंकरके हाथ कोई वस्तु न बेचो सिवाय इसके कि तुमको वह रोक दाम दे क्योकि मैं उसकी कुछ साखी नही मानता हूं-तो शिवशंकर इस छूटमे गिना जायगा यदि उसने यह तुहमत अपनी स्वार्थरक्षाके लिये शुद्ध भावसे गिरिजागकर पर लगाई हो । ख) शिवशंकर एक मजिस्ट्रेट ने अपने ऊपरके अफ्सरके यहा रिपोर्ट करके रमाशंकरके चलनकी बुराई लगाई तो यहां शिवशंकर इस छूटमे गिना जायगा जब कि वह बुराई शुद्ध भावसे और सबके भलेके लिये लगाई गई हो। १०-छूट-एक मनुष्यको दूसरे मनुष्यके मध्ये शुद्धभावसे सावधान कर देना अपयश सावधान करना जिसमे लगाना न होगा जब कि वह सावधानीकी बात उस मनुष्यके भलेके उस मनुष्यका लाभ हो| लिये, हो जिससे वह कही गई हो अथवा और किसी मनुष्यके भलेके कि जिसे सूचना दी गई लिये जिसमे उसका कुछ स्वार्थ हो अथवा सबके लिये हो। हो 'अथवा जिससे सर्व साधारणके लोभका अभि- प्राय हो . १-(म) को उसकी जाववालोने इस जातपर जातबाहर कर दिया कि वह उसी जातकी एक स्त्रोके साथ पकडागया-उसी जातिके कुछ पंचोने अपनी जाति बिरादरी वालोके यहां एक चिट्ठी भेजी निसमें यह लिखा था कि (म) और उपरोक्त स्त्री जात बाहर कर दीगई बिरादरीवाले उन्हे अपने घरमे न रखें और न उनके साथ खावें यह बयान दका ४९९ हिन्दुस्थानके दंडसंग्रह अनुसार अपयश लगाना था, इसलिये तजवीज हुई कि यदि उपरोक्त मनुष्य असावधानीके साथ ऐसे गन्द काममे लाए कि जो (म) से सम्बन्ध रखते थे तो उन मनुष्योने अपनी दायित्वसे ऐसा किया और वह (म) को अपयश लगानेके कारण किसी उपरोक्त गन्दके द्वारा नहीं बचसकते । (इ०ला.. रि० इलाहाबाद जिल्द ३ सका ६६४). २---हिंदुस्थानमे किसी एडवोकेट (वकील आदि) के विरुद्ध, किसी ऐसे शब्दके मध्ये जो उसने अपने मोहदेके अधिकारसे कहा हो दीवानी या फौजदारी मुकद्दमा नही चलसकता । । इ०ला. रि. मदरास जिल्द १० सफा २८) ३---किसी समाचार पत्रका मेनेजर और एडीटर जो अपने समाचार पत्रमे अपयशसे भरा हुआ एक लेख एक शहरमे छापकर किसी दूसरे शहरमें अपने समाचार पत्रको भेजे, तो वह जबतक कि इसके विरुद्ध कोई दूसरा प्रमाण न होवे उस दूसरे शहरमे अपयशसे भरे हुए लेखके प्रगट करनेका जिम्मेदार होगा । (इ० ला० रि० बम्बई मिल्द १५ सफा २८६) इक्कीसवा २१.] ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०। (२९७) ४-अपराधी जो इन्स्पेक्टर पोलीस था इस बातकी जांच के लिये भेजागया कि ब्रजनाथ डाकुओं- का मुखिया है या नहीं-उसने रिपोर्ट की कि वह बात झूठी है और गांवके बनिये ब्रजनाथको फंसाया चाहते हैं उसने यहभी लिखा कि मुझे गुप्त रीतिसे प्रगट हुवा है कि गांवमे ऐसी कोई बनियेकी स्त्री नही है जो एक या दो रात ब्रजनाथके पास न रही हो-हाईकोर्टकी यह तजवीज हुई कि जो कि अ. पसर पोलीसने यह रिपोर्ट उस अवस्थामें की थी जब वह अपना सरकारी काम कर रहाथा और उसमें ऐसे बयान ये कि जो असावधानी अथवा अनुचित गति पर नहीं लिखे गये, इसलिये इन्स्पेक्टर पोली- सकी रिपोर्ट अपयश लगानेकी सीमातक नहीं पहुँचसकती वरन् वह दफा ४९९ की छूट ९ का लाम उठासकता है । (बगाल ला रिपोर्ट जिल्द ६ सफा ४२) ५-किसी गवाहपर अपयश लगानेका अपराध उन बयानासे नहीं ठहराया जा सकता जो उसने गवाही देते समय गवाहीके कठहरेमे किये हो। (इ. ला. रि०बम्बई जिल्द १७ सफा ५७३) ६-जब किसी व्याही स्त्रीपर कुचालकी तुहमत लगाई आय तो ऐसा कहा जावेगा कि उसका पति दुःख पाया हुआ मनुष्य है और मजिस्ट्रेट ऐसे पतिकी नालिशपर अपराधका विचार कर सकता है । ( इ. ला. रि० मदरास जिल्द १४ सफा ३७९) ७-हिन्दुस्थानके दण्डसमहमें कहकर ( वाक्य द्वारा ) और लिखकर ( लेख द्वारा ) अपयश लगाने कोई अन्तर नहीं रखा गया । (वीली रिपोर्टर जिल्द २ सफा ३६) ८-अपराधीने एक मनुष्यको बहिन बेटीकी गाली दी, इसलिये मजिस्ट्रेटने अपराधीको अप. या लगानेका दोपी ठहराया, हाईकोर्टसे तजवीज हुई कि प्रायः ऐसी गालिया लोग आपसके झगडेम दिया करते हैं, इसलिये अपराधीपर दफा ४९९ का अपराध नहीं ठहर सकता । (पीली नोटिस इला. हावाद किताब माह फर्वरी सन् १८८३ ईस्वी सफा ३६) ९-किसी मनुष्यका चित्र बनाकर ऐसे स्थानम रखना कि जहा उसे सब कोई देखसके और उसको उस मनुष्यके नामसे पुकारकर जूते मारना अपयश लगानेकी सीमातक पहुंचता है। (रिपोर्ट हाईकोर्ट पश्रिमोत्तर प्रदेश जिल्द २ सफा ४३५) १०-अमीरहुसेन वकीलने अदालतमें यह कहा कि, रामगुलाम (विपक्षी, फरीकसानी) का वाप पास छोलते २ मर गया था उसपर रामगुलाम बोला कि अमीरहुसेन वकालत करना क्या जाने कलतक वह और उसका बाप बिसाती रहे हैं और गलियामें टके २ का सौदा बेचते फिरा किये हैं- इस बात पर अमीरहुसेनने रामगुलामके ऊपर और रामगुलामने अमीरहुसेनके अपर फौजदारीमै अपयश लगानेके अपराधमे नालिग की और वहासे दोनोपर जुर्माना हुआ-तजवीज हुई कि, ऐसी सूरोंमे मजिस्ट्रेटोको मुकद्दमा कायम करनेसे इनकार करना चाहिये, नही तो सरकारी काममें बडी हानि होगी जो कि दोनों ही मनुष्योंने अनुचित काम किया था, इसलिये जुर्मानका रुपया वापिस होना चाहिये । (वीली नोटिस इलाहाबाद किताब माह जुलाई सन् १८८३ ई. सफा १६७) ११-अपराधी अपने साझीकी ओरसे एक मुकद्दमा दीवानीमें निगरा हाल ( तजवीजकी जाचं किया जाना) था, उपरोक्त मुकद्दमाके विचारके समय उसने जजमावहतको यह सूचना दी कि,फरिया- (२९८) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। . [ अध्याय- -- दी उसके साझीके गवाहोको उभारता है इसलिये उसको आज्ञा हो कि , वह अदालतमे बैठा रहे इसलिये जजमातहतने फरियादी ,( मुस्तगीस ) को आशा दी कि अदालतसे बाहर न जाय इसपर फरियादीने अपराधीपर मजिस्ट्रेट दर्जा अन्चलके सामने अपयश लगानेका अपराधलगाया और मजिस्ट्रे. टने भी उसपर अपराध ठहराकर २५ ) जुर्माना किया और यदि जुर्माना न चुवाया जावे तो एक महीनेकी साधारण कैदका दड होनेकी आज्ञा दी, इसपर अपराधीने सेशन जज जिला थानाको यह अर्जी दी कि, उसके मुकद्दमेकी मिसल मॅगाई जाय और फिर मुनासिवहाल मालूम होनेपर फैसला किया जाय-इसलिये सेशनजजने वह मिसल मॅगाई मिसल देग्वनेके बाद जजकी राय हुई कि अपराधीने तुइमत शत्रुता या अधर्मसे नहीं लगाई इसलिये इसका काम ठफा ४९९ की छूट नवीमें गिना जायगा अतएव उसने कोई भी अपराध नहीं किया--तजवीज हाईकोर्ट हुई कि, सेशन जजकी राय सही थी। (इ० ला• रि० बम्बई जिल्द ९ सफा २६९) ( ५००. जो कोई मनुष्य किसी मनुष्यका अपमान कग्गा अर्थात् अपयश लगा- वेगा उसको साधारण कैदका दण्ड दिया जावेगा, जिसकी मीआद अपयश लगानेका दंड. दो वर्ष तक हो सकती है अथवा जुर्मानेका दड या दोनों दंड दिये Cry जावेगे। टीप---(१) अदालत सेशन या प्रे० म० या म० अ० (२) गैर दस्तन्दाजी पोलीस (३) • अपराधीक नाम वारंट (४) जमानत है (५) राजीनामा है। किसी मनुष्यको एक ऐसा नोटिस भेजना, कि जिसमे अपयश भराहुआ लेख लिखा हो, ऐसी बुहमत लगाने व प्रगट करनेके बराबर नहीं है, इस अभिप्रायसे कि जिस मनुष्यके मध्ये वह तुहमत लगाई जाये उसकी इजत घट जावेगी-इन मुकामोंमे अपराधीने डाकके द्वारा फरियादीको एक नोटिस भेजा जिसमे कुछ झूठी तुहमत लिखी थी-टस पर फरियादीन अपराधीपर दफा ५०० के अनुमार 'फौजदारीमै नालिग की-तजवीज हाईकोर्ट हुई कि अपराधीपर दफा ५०० हाईकोर्ट हुई कि अपराधीपर दफा ५०० का अपराध नही टहर सकता (इ० ला• रि० बम्बई जिल्द १८ सफा २०५) (६०१ ) जो कोई मनुष्य किसी वातको छापे अथवा खोढकर लिखे, यह जानकर • छापना अथवा खोद. अथवा निश्चय करनेका उचित कारण रखकर कि वह बात कर दिखाना किसी बात- अपमान करनेवाली है, तो उस मनुष्यको का, यह जानकर कि वह अपमान करनेवाली है. ) साधारण कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद दो वर्पतक हो सकती है अथवा जुर्मानेका ढड या दोनों ढह दिये जावेगे । किसी मनुष्यका टीप-(१) अदालत सेगन या ० म० या म० अ० (२) गैर दस्तन्दाजी पोलीस (३ अपराधीके नाम वारंट ( ४) जमानत है (५) राजीनामा है ।

बाईसवाँ २२.] ऐक्ट नंबर ४५ सन १८६० ई० । . (६०२) जो कोई मनुष्य किसी छपीहुई अथवा खुढीहुई प्रग्नुको जिन् बेचना किसी छपी हुई) कोई अपयश लगनेवाली वान हो, यह जानबूझकर कि इन अथवा खुदी हुई वस्तुका में एसी बात लिखी है वेचेगा अथवा वेचनेझ लिये सामने जिसमे अपयश लगानवा- रखेगा तो उसको साधारण दिया जागा जिसकी मीमाट दो वर्षतक हो सकती है अथवा जुर्मानका दण्ड या दोनो नद ली बात हो. केहका दण्ड दिये जायेंगे। टीप-(१) अ० से. या प्रे० म० या म० अ० (२) गैर दस्तन्दाजी पार अपराधीके नाम वारट (४) जमानत है ( ५) राजीनामा है। अध्याय वाईसवाँ २२. दण्ड योग्य धमकी और अपमान तथा छेडनेक विषयमे । (५०३) जो कोई मनुष्य किसी और मनुष्यको उसके तन या यश या बनना अथवा किसी मनुष्यके तन या यशको, जिसमें वह मनु दण्ड योग्य धमकी स्वार्थ रखना है, हानि पहुंचानको धमकी देव, इम अभिप्रायने कि उसको डरमे डाले अथवा उससे कोई ऐसा काम करावे जिसका करना कानूनके अनुसार उस पर उचित नहीं है अथवा उसे कोई ऐसा कान करनेसे चुकावे. जिसके करनेका उस कानूनके अनुसार अधिकार है, जिनसे कि ऐसे कामका करना या करनेमे चूकना उस धमकी की तकमील ( पूरापन ) के रुकावटके द्वारा हो तो कहा जावेगा कि, उपरोक्त मनुष्यने दण्ड योग्य धमकी दी । स्पष्टीकरण-किसी ऐसे मरेहुए मनुष्यके कि जिससे धमकाया हुवा मनुष्य स्वार्थ रखता है, यशको हानि पहुँचानेकी धमकी, इस दफामें गिनी जायगी। उदाहरण । शिवशकरने रमाशकरको किसी मुकद्दमा दीवानीकी परवीसे रोकनके अभिप्रायसे उमका पर मलानेका धमकी दी, तो शिवभकर दइयोग्य धमकी देनेका अपरावी हुवा। १-अपराधीने एक नकली अर्जी एक साहब कमिश्नरकी सेवामे भेजा जिसमे यह वमकी लिखी थी कि यदि जगलका हाकिम दूसरे स्थानपर न बदला जायगा तो वह मारडाला जावेगा. तजवीज हुई कि, जो कि उस मनुष्यको जिसकी सेगमे अर्जी भेजीगई थी कोई सम्बन्ध धमकाये अपमान करना. (३००) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अन्याय- हुए मनुष्यसे न था इसलिये उसपर हिन्दुस्थानके दण्डसंग्रहको दफा ५०३ का अपराध नहीं ठहर -सकता । ( इ० ला० रि० बम्बई जिल्द ११ सफा ३७६) २-हिन्दुस्थानके दण्डसंग्रहकी दफा ५.३ मे कही हुई धमकी ऐसी धमकी होना चाहिये कि उसकी सूचना उस मनुष्यको होजावे जिसको धमकी दी जावे अथवा इस अभिप्रायसे धमकीका देना प्रगट किया जावे कि उसकी सूचना उपरोक्त मनुष्यको होनावे जिससे कि उस मनुष्यके मनमें प्रभाव उत्पन्न होजाव । ( इ. ला. रि० कलकत्ता जिल्द १५ सफा ६७१) (५०४ ) जो कोई मनुष्य जानबूझकर किसी , मनुष्यका अपमान करे और सर्व साधारणकी कुश-) उसके द्वारा उस मनुष्यको उभारे, इस अभिप्रायसे अथवा लतामे विघ्न डालनेके अ- इस बातका होना सम्मवित जानकर कि उस उभारनेके कारण भिप्रायसे जानबूझकर वह मनुष्य सर्व साधारणकी कुशलतामे विन डाले अथवा किसी और अपराधको करे तो, उपरोक्त मनुष्यको दोनो प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी कैदका दड दिया जावेगा जिसकी मीआद दो वर्षतक होसकती है अथवा जुर्मानेका दंड या दोनों दड दिये जावेंगे। टीप-(१) कोई मजिस्ट्रेट (२) गैर दस्तन्दाजी पोलीस (३) वारट जारी होगा (४) जमानत है (५) राजीनामा है। (अ) ने (ब) को यहांतक गालिये दी कि (4) भयभीत होगया-तजवीज हुई कि जो कि (अ) ने (व) को इतना उभारा कि उससे सर्व सम्बन्धी कुशलतामे विघ्न पडनेका भय था, इसलिये वह हिन्दुस्थानके दण्डसंग्रहको दफा ५०४ का अपराधी था । ( ८० ला. रि• बम्बई जिल्द ११ सफा ३५४) (५०५) जो कोई - मनुष्य कोई वर्णन या अफवाह या खबर जिसको वह विद्रोह कराने अथवा झूठा जानता हो फैलाए अथवा प्रगट करे इस अभिप्रायसे सर्व सम्बन्धी कुशलताके कि श्रीमती महाराणीकी स्थल अथवा जलकी सेनाके किसी विरुद्ध कोई अपराध करा- नेके अभिप्रायसे झूठी अ- अफ्सर या सिपाही या जहाजके खालसीसे विद्रोह करावे फवाह आदिका उडाना. अथवा इस अभिप्रायसे कि सर्व साधारण मनुष्योंको भय अथवा घबराहटमें डाले और उसके द्वारा किसी मनुष्यको कुछ राज्य सम्वन्धी अपराध या सर्व साधारणको कुशलतामे विघ्न डालनेका अपराध करनेके लिये बहकावे तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दंड दिया जावेगा जिसकी मीआद दो वर्पतक हो राकती है अथवा जुर्मानेका दण्ड या दोनो दड दिये जावेगे । टीप- (१) प्रे० म० या म० अ० (२) गैर दस्तन्दाजी पोलीस (३) वारण्ट जारी होगा (४) जमानत नहीं है (५) राजीनामा नहीं है ।

देनेका दण्ड. बाईसवा २२.] ऐक्ट नबर ४५ सन् १८६० ई० । (३०१ (५०६ ) जो कोई मनुष्य दण्ड योग्य धमकी देनेका अपराध करे उसको दोनों दण्ड योग्य धमकी) प्रकारोंमेसे किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद दो वर्पतक हो सकती है अथवा जुर्मानेका दण्ड या दोनों दण्ड दिये जावेगे। और यदि मृत्यु अथवा मारी दुःख पहुंचानेको अथवा अमिसे किसी असवावके नष्ट यदि वह धमकी मृत्यु) करनेकी अथवा किसी ऐसे अपराधके किये जानेकी जिसके बदलेमें अथवा भारी दु.ख (ज- दण्ड वध या देश निकालेका दण्ड या ऐसी कैद ठहराई गई है ररशदीद ( पहुचानेके लियेहो. जिसकी मीआद सात वर्षतक होसकती है अथवा किसी स्त्रीके मध्ये कुचालीकी तुहमत लगानेकी धमकी हो तो दोनो प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दियाजावेगा जिसकी मीआद सात वर्पतक होसकती है अथवा जुर्मानेका दण्ड या दोनों दण्ड दिये जावेगे। टीप-(१) अदालत सेमन या प्रे० म० या म० अ० (२)गैर दस्तन्दाजी पोलीस (३ वारट जारी होगा (४) जमानत है (५) राजीनामा है तथा नहीं है । (५०७ ) जो कोई मनुष्य किसी वनामकी मुखबिरी करके या धमकी देने विना नामकी मुखब } वाले का नाम या रहनेका स्थान गुप्त रखनेका यत्न करके रीके द्वारा दण्ड योग्य दण्डयोग्य धमकी देनेका अपराध करे, तो उस मनुष्यको धमकी देना. सिवाय उस दण्डके जो उपरोक्त अपराधके लिये ऊपर लिखी हुई पिछली दफामे नियत है दोनों प्रकारोंमेस किसी प्रकराको कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीद दो वर्षतक हो सकती है। टीप-( १ ) अदालत सेशन या प्रेसीडेन्सी मजिस्ट्रेट या मजिस्ट्रेट दर्जा अव्वल (२) गैर दस्तन्दाजी पोलीस (३) वारट होगा ( ४ ) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नही है । (५०८ ) जो कोई मनुष्य जानबूझकर किसी मनुष्यसै कोई ऐसा काम कराए अथवा उसके कराने का उद्योग करे जिसका करना उसपर कामजी किसीको बह- काकर देवीकोपका निश्चय कानूनानुसार उचित न हो अथवा किसी ऐसे कामके करनेमे करानेसे कियाजाय. चूक कराए अथवा उसके चूक करानेका उद्योग करे जिसके करनेका वह कानूनानुसार अधिकारी है उस मनुष्यको, यह निश्चय करनेके लिये बहकाने या बहकानेका उद्योग करनेके द्वारा, कि यदि वह मनुष्य उस कामको न करेगा जिसका कराना उस मनुष्यसे अपराधीको स्वीकार है अथवा यदि उसकाममे चूक न करेगा जिसका चूक कराना उस मनुष्यसै अपराधीको स्वीकार है तो अपराधीके किसी कामके द्वारा वह मनुष्य या कोई और मनुष्य जिससे वह स्वार्थ रखता है ईश्वरका (३०२) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [अध्याय- कोप होगा या कराया जायगा तो उपरोक्त मनुष्यको दोनों प्रकारोमेसे किसी प्रकारकी कैदका दण्ड दिया जावेगा, जिसकी मी आद एक वर्पतक होसकती है, या जुर्मानेका दड अथवा दोनों दड दियं जावेगे। उदाहरण। (क) शिवशकर रमाशकरके द्वार पर धरना देकर बैठे, यह बात निश्चय करानेके अभिप्रायसे कि ऐसे बैठनेसे रमाशंकरको ईश्वरका कोप होगा, तो शिवशकरने वह अपराध किया जिसका वर्णन इस दफामे किया गया । (ख) रमागकग्ने शिवशकरको इसबातकी धमकी दी कि यदि शिवशकर अमुक काम न करेगा तो रमागकर अपने बच्चोमेसे किसी एकको ऐसी अवस्थाओंम मार डालेगा कि जिससे यह बात निश्चय की जावे कि उस मारडालनेसे शिवशकर पर ईश्वरका कोप होजावेगा तो रमाशकरने वह अप- राध किया जिसका वर्णन इस दफामे किया गया है । टीप-(१) प्रे० म० या म० अ० या म. दो० (२) गैर दस्तन्दाजी पोलीस (३) बारट होगा (४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नही है । (६०९ जो कोई मनुष्य किसी स्त्रीको लजाका अपमान करनेके अभिप्रायसे किसी स्त्रीकी लजाका ) कोई वात मुहसे निकाले अथवा सैन दे या कुछ शब्द करै या अपमान करनेके अभि- वस्तु दिखलाए इस अभिप्रायसे कि वह स्त्री उस बात या प्रायसे वचन कहना या शब्दको सुने अथवा उस सैन या वस्तुको देखे अथवा उस सैन-देना. स्त्रीके परदेमे घुसजाय, तो उस मनुष्यको साधारण कैदका ढड दिया जावेगा जिसकी मीआढ एक वर्पतक हो सकती है अथवा जुर्मानेका दंड या दोनो दण्ड दिये जावेगे । टीप-(१) प्रे० म० या म० अ० (२)गैर दस्तन्दाजी पोलीस ( ३ ) वारंट होगा ४) जमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है । (५१०) जो कोई मनुष्य नशेकी अवस्थामे सर्व साधारणके आने जानेके किसी सर्वसाधारणके सामने स्थानमे अथवा किसी ऐसे स्थानमे आ निकले जा उसका किसी मतवाले मनुष्यकी पहुँचना मदाखलतबेजा ( अनधिकार प्रवेश ) है और वहां कुचाल. वह ऐसी रीतिपर वर्ताव करे कि उससे किसी मनुष्यको क्लेश पहुचे तो उसको साधारण कैदका दण्ड दिया जावेगा जिसकी मीआद चौबीस बटेनक होसकती है, अथवा जुर्मानेका दण्ड जो दश रुपयेतक हो सकता है अथवा दोनों दंड दिये जावेगे। टीप-(१) कोई मजिस्ट्रेट (२) वारट होगा ( ३ ) गैर दस्तन्दाजी पोलीस (४) वमानत होसकती है (५) राजीनामा नहीं है।

तेईसवा २३.] (३०३) ऐक्ट नंबर ४५ सन् १८६० ई०॥ अध्याय तेईसवा २३. अपराध करनेके उद्योग विषयः । (५११) जो कोई मनुष्य किसी ऐसे अपराधके करनेका उद्योग करें जिसक वदलेम उन अपराधाके उद्यो-) इस संग्रहके अनुसार जन्म भरके देश निकालेका दड अथवा गका दण्ड जिनके लिये कैठका दड ठहराया गया है अथवा जो ऐसे अपराधके जन्म भरके देश निकाले । जाननेके कारण का उद्योग करे और एमे उद्योगमे कोई ऐसा या कैदका दह ठहराया गया है. कामकरे जो उपरोक्त अपराधके होनेकी ओर अकता हो तो उस अवस्थामें कि इस सग्रहमे ऐसे उद्योगका कोई विशेष दड न ठहराया गया हो- उस मनुष्यको जन्मभरके देश निकालेका दंड या किसी प्रकारका कैदका दह दिया जावेगा जो उपरोक्त अपराधके लिये ठहरायागया हो और उस जन्मभरके देश निकाले या कैदकी मीट उस मीआदकी आधीतक हो सकती है जो उपरोक्त अपराधके लिये वडीसे बडी मीआद ठहराई गई है या उस जुर्मानेके दह जो उपरोक्त अपराधके बदलेमें ठह- राया गया है या दोनों दड दिये जावेगे। उदाहरण। (क) रमाशकरने एक सदक तोडकर कुछ गहना चोरानेका उद्योग किया और इस प्रकार उस सटूकके खोलने पर उसको जानपडा कि उसम कुछ गहना नहीं है तो यहा उसने एक ऐसा काम किया जो चोरीके अपराध की ओर झुकता है और इसलिये रमाशकर इस दफाके अनुसार अपराधी है। (ख) रमाशकरने शिवशकरकी जेबमें हाथ डालकर उसकी जेबमेंसे कुछ निकालनेका उद्योग किया-परन्तु शिवशकरकी ज़बमें कुछ न होने के कारण रमाशकर इस उद्योगमें सफल न हुवा, तो रमाशंकर इस दफाके अनुसार अपराधी है। टीप-(१) इस अपराधकी तजवीज वही अदालत करेगी कि जो उद्योग किये हुए अपराधकी तजवीज कर सकती है (२) यदि उद्योग किया हुआ अपराध दस्तन्दाजी पोलीसके योग्य हो तो इस अपराधमें दस्सन्दाजी पोलीस हो सकती है (३) वारण्ट या समन सबके पाहिले नारी होता जैसा कि उस अपराध के लिये कि जिसका उद्योग किया गया, वारण्ट या समन नारी होगा (४) जमानत है, यदि यह अपराध कि जिसका उद्योग किया गया, जमानतके योग्य हो (५) राजीनामा है यदि वह अपराध कि जिसका उद्योग किया गया राजीनामेके योग्य होवे । १ हिन्दुस्थानके दण्डसग्रहकी दफा ५११ ज्ञातघातके उद्योगके अपरावमें सम्बन्ध नहीं रखती जिसका दण्ड दफा ३०७ मे सष्ट रीतिपर लिखा है। (१० ला• रि० इलाहाबाद जिल्द १४ सफा ३८) (३०४) हिन्दुस्थानका दण्डसंग्रह। [ अध्याय-तेईसवॉ२३] २- हिन्दुस्थानक दण्डसंग्रहको दफा ७५ ऐसी सूरतोमै सम्बन्ध न रक्खेगी कि जो दफा ५११ मे आसकते है-जो अपराध दफा ५११ मे दाखिल होवे उनका दंड विना सम्बन्ध दफा ७५ के होना चाहिये । (इ० ला० रि० इलाहाबाद जिल्द १७ सफा १२३) ३-जो बयान प्रश्नोत्तरकी भांति पुलीसके कर्मचारीके द्वारा दफा १६१ जाब्ता फौजदारीके अनुसार तहकीकात पोलीसके समयमें किया जावे इस्तहकाकी है और वह जड किसी अपयश लगानेके अपराधकी सीमातक नहीं पहुंच सकती । ( ई० ला. रि० मदरास जिल्द १६ सफा २३५) ४-किसी स्त्री पर यदि अनुचित आक्रमण किया जाये तो वह बलपूर्वक व्यभिचारके अपराध- का उद्योग न होगा, जब तक कि अदालतको निश्चय न होजावे कि अपराधीने अपने दिलमें यह बात जान ली थी कि चाहे कुछ भी होजावे और चाहे कोई कैसी भी रोक करे, परन्तु वह उस स्त्रीके साथ व्यभिचार करेगा (इ० ला• रि० बबई जिल्द ५ सफा ४०३) ५-जो मनुष्य चोरीके अपराधर्मे दण्डित हुआ हो और यदि वह अपराधी चोरीके उद्योगमें -फिरसे दंड पावे तो उसे बढा हुआ दण्ड दफा ७५ के अनुसार न मिलेगा। (इ० ला रि० कलकत्ता जिल्द १४ सफा ३५७) पुस्तक मिलनेका ठिकाना- खेमराज श्रीकृष्णदास, "श्रीवेङ्कटेश्वर" स्टीम् प्रेस-बम्बई.

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हिन्दूस्तान का दंड संग्रह

Author
मिश्रा, बलदेव प्रसाद
Title
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File name
हिन्दूस्तान का दंड संग्रह
Text
OCR done
Citation
1860
Published
2009/09
Publisher
श्रीवेंकटेश्वर स्टीम मुद्रणालय, बॉम्बे
Language
Sanskrit
Pages
332
Library
Central Library, Jain Vishva Bharti University, Ladnun
Keywords
इतिहास
DLI number
322510
Barcode
99999990253060.00
Scanning centre
Banasthali University
Digital publisher
Digital Library Of India
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OZ7irhzHjeP
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